MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण अव्यय-प्रकरण

MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण अव्यय-प्रकरण

अव्यय (अविकारी शब्द) की परिभाषा संस्कृत में निम्न प्रकार से दी गयी है

सदृशं त्रिषु लिङ्गेषु सर्वासु व विभक्तिषु।
वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तदव्ययम्॥

अर्थात् जिन शब्दों में लिंग, कारक और वचन के कारण किसी प्रकार का परिवर्तन (विकार) नहीं होता और जो प्रत्येक दशा में एक समान रहते हैं, उन्हें अव्यय शब्द कहते हैं।

अव्ययों के भेद-
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण अव्यय-प्रकरण img 1

१. उपसर्ग
प्र, परा, अप इत्यादि २२ शब्दांशों को उपसर्ग कहते हैं। इनका वर्णन आगे के प्रकरण में किया जायेगा।

२. क्रिया विशेषण
जिन शब्दों से क्रिया के काल, स्थान आदि विशेषताओं का बोध होता है, उन्हें क्रिया विशेषण कहते हैं।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण अव्यय-प्रकरण img 2

३. चादि
च, वा, भूयः, खलु, तु, वै, मा, न इत्यादि।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण अव्यय-प्रकरण img 3

MP Board Solutions

४. समुच्चय बोधक
अथ, उत, चेत्, नोचेत् इत्यादि।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण अव्यय-प्रकरण img 4

५. विस्मयादि बोधक
अहह, अहो, बत, हा, अरे, रे इत्यादि।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण अव्यय-प्रकरण img 5

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय

प्रश्न १.
‘अहम् अपि आपणं गच्छामि’ में अव्यय है
(अ) अहम्,
(ब) अपि,
(स) आपणं,
(द) गच्छामि।

२. ‘इव’ अव्यय का उचित वाक्य-प्रयोग होगा
(अ) अहम् इव करोमि,
(ब) बालक: व्याघ्र इव अस्ति,
(स) सः विद्यालयः इव धावति,
(द) रामेशः कन्दुकेन इव क्रीडति।

३. ‘त्वं कदा गृहम् आगमिष्यसि?’ में अव्यय पद है
(अ) त्वं,
(ब) कदा,
(स) गृहम्,
(द) आगमिष्यसि।

४. ‘अद्य’ अव्यय का हिन्दी अर्थ होता है
(अ) आज,
(ब) कल,
(स) परसों,
(द) तरसों।

५. ‘कुतः’ अव्यय का उचित वाक्य प्रयोग होगा
(अ) तत् पुस्तकं कुतः अस्ति,
(ब) यथा कुतः राजा तथा प्रजा,
(स) त्वं कुतः आगच्छसि?
(द) रामः कुतः पुरुषोत्तमः आसीत्।
उत्तर-
१. (ब),
२. (ब),
३. (ब),
४. (अ),
५. (स)

MP Board Solutions

रिक्त स्थान पूर्ति
१. यथा राजा ………………. प्रजा।
२. रामेण सह सीता ……………..”” अगच्छत्।
३. विद्यालये………………” उत्सवः भविष्यति।
४ सदाचारः ……………….. परमोधर्म।
५. कच्छपः …. चलति।
उत्तर-
१. तथा,
२. अपि,
३. श्वः,
४. एव,
५. शनैः

सत्य/असत्य
१. अपि का अर्थ कहाँ।
२. च का अर्थ है और।
३. कुतः का अर्थ है कहाँ से।
४. इव का अर्थ है कौन।
५. एव का अर्थ है ही।
उत्तर-
१. असत्य,
२. सत्य,
३. सत्य,
४. असत्य,
५. सत्य

MP Board Solutions

जोड़ी मिलाइए ‘क’
उत्तर-
१. → (iii)
२. → (i)
३. → (v)
४. → (ii)
५. → (iv)

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण कारक एवं उपपद विभक्ति प्रकरण

MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण कारक एवं उपपद विभक्ति प्रकरण

कारक-“साक्षात् क्रियान्वयित्वं कारकम्” अर्थात् जिस शब्द का क्रिया के साथ सीधा सम्बन्ध होता है, वह कारक कहलाता है।

हिन्दी में विभक्तियाँ (कारक) आठ होती हैं। संस्कृत में सम्बोधन को प्रथमा विभक्ति के अंतर्गत ही मानते हैं। इसलिए संस्कृत में विभक्तियाँ सात हुईं। संस्कृत में कारकों की संख्या छ: मानी गई है। षष्ठी विभक्ति (सम्बन्ध कारक) को कारकों की संख्या में नहीं रखते हैं क्योंकि षष्ठी विभक्ति का क्रिया से सीधा सम्बन्ध नहीं होता है।

जैसे-
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण कारक एवं उपपद विभक्ति प्रकरण img 1

इस वाक्य में ‘जाता है’ (क्रिया) से सीधा सम्बन्ध भाई। (कर्ता) का है न कि राम का। राम का सम्बन्ध तो भाई से है, ‘जाता है’ (क्रिया) से उसका सीधा सम्बन्ध नहीं है। इसलिए राम (सम्बन्ध) को ‘कारक’ नहीं कहेंगे। अतः संस्कृत में कारक छ: ही होते हैं तथा विभक्तियाँ सात होती हैं। कारक और विभक्ति में यही अन्तर होता है।

MP Board Solutions

कर्ता कर्म च करणं च सम्प्रदानं तथैव च।
अपादानाधिकरणमित्साहुः कारकाणि षट्॥

हम कारकों को सरल रूप में निम्न चित्र के माध्यम से समझ सकते हैं-
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण कारक एवं उपपद विभक्ति प्रकरण img 2

♦ कारक चिह्न

MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण कारक एवं उपपद विभक्ति प्रकरण img 3

१. कर्ता कारक (प्रथमा विभक्ति)
क्रिया के करने वाले को कर्ता कहते हैं अर्थात् वाक्य में जिस संज्ञा का सर्वनाम शब्द को कार्य करने वाला या होने वाला समझा जाए, उसे कर्ता कहते हैं। कर्ता में प्रथमा विभक्ति का प्रयोग होता है।

जैसे-

  • रामः पठति। राम पढ़ता है।
  • गीता नृत्यति। गीता नाचती है।

२. कर्म कारक (द्वितीया विभक्ति)
जिस पर क्रिया का फल पड़ता हो, उसे ‘कर्म’ कहते हैं। अथवा कर्ता जिसको सबसे अधिक चाहता है, उसे ‘कर्म’ कहते हैं। ‘कर्म कारक’ में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है।

जैसे-

  • सुरेशः जलं पिबति। सुरेश पानी पीता है।
  • बालकः चित्रं पश्यति। बच्चा चित्र देखता है।

MP Board Solutions

उपपद विभक्ति
अभितः, परितः, समया, निकषा, हा, प्रति, विना इत्यादि शब्दों का प्रयोग होने पर द्वितीया विभक्ति होती है-

जैसे-

  • ग्रामं अभितः वनम् अस्ति। गाँव के चारों ओर वन है।।
  • कृष्णं परितः भक्ताः सन्ति। कृष्ण के चारों ओर भक्त हैं।
  • नगरं समया नदी अस्ति। नगर के पास नदी है।

विशेष-‘विना’ इस उपपद के साथ में द्वितीया, तृतीया और पंचमी तीनों विभक्तियों में से कोई भी लगा सकते हैं।

उभयतः, सर्वतः, धिक्, उपर्युपरि, अधोऽधः इत्यादि के साथ भी द्वितीया विभक्ति होती है।

  • कृष्णम् उभयतः गोपाः सन्ति। कृष्ण के दोनों ओर ग्वाले
  • धिक् ! ज्ञानहीनम्। ज्ञानहीन को धिक्कार है।

३. करण कारक (तृतीया विभक्ति) –
कर्ता जिस वस्तु की सहायता से अपना कार्य पूरा करता है उसे ‘करण कारक’ कहते हैं। करण कारक में तृतीया विभक्ति का प्रयोग होता है।

जैसे-

  • प्रधानमंत्री विमानेन गच्छति। – प्रधानमंत्री विमान से जाते हैं।
  • अध्यापकः सुधाखण्डेन। – अध्यापक चॉकसे लिखता लिखति।
  • वृद्धः दण्डेन चलति। – बूढ़ा दण्डे से चलता है।

उपपद विभक्ति
सह, साकम्, सार्धम्, समम्-इन चारों शब्दों के योग में जिसके साथ कोई काम किया जाए, उसमें तृतीया विभक्ति होती है।

जैसे-

  • पुत्रः जनकेन सह गच्छति। पुत्र पिता के साथ जाता है।
  • सीता गीतया साक्म/सार्धम्/ सीता गीता के साथ समम्/सह क्रीडति। खेलती है।

अलम् (बस), हीनः (रहित) इत्यादि शब्दों के योग में तृतीया विभक्ति होती है।

जैसे-

  • अलम् विवादेन। विवाद से बस करो।
  • धनेनः हीनः नृपः न धन से रहित राजा सुशोभित नहीं शोभते। होता।

जिस अंग के कारण शरीर में कोई विकार आया हो, – उस अंगवादी शब्द में तृतीया विभक्ति होती है।

जैसे-

  • भिक्षुकः पादेन खञ्जः भिखारी पैर से लंगड़ा है। अस्ति।
  • सः कर्णेन बधिरः वह कान से बहरा है। अस्ति।

पृथक् (अलग), विना (बिना), नाना (बिना) के योग में द्वितीया, तृतीया और पंचमी विभक्ति होती है।

जैसे-

  • रामेण (रामं रामात् वा) राम के बिना दशरथ विना दशरथः न अजीवत्। जीवित नहीं रहे।
  • सः मित्रेण (मित्रं मित्रात् वह मित्र से अलग वा) पृथक् स्थातुं न , नहीं रह सकता। – शक्नोति।

जिस चिह्न से कोई व्यक्ति पहचाना जाता हो उस चिह्नवाची शब्द में तृतीया विभक्ति होती है।

जैसे-

  • स: जटाभिः साधुः अस्ति। वह जटाओं से साधु है।
  • भिक्षुकः नेत्रेण काणः भिखारी आँख से काना – अस्ति।

MP Board Solutions

४. सम्प्रदान कारक (चतुर्थी विभक्ति) : जिसके लिए कोई वस्तु दी जाए या जिसके लिए कोई कार्य। किया जाय वह सम्प्रदान कारक कहलाता है। सम्प्रदान कारक में चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है।

जैसे-

  • शिक्षकः छात्राय पुस्तकं शिक्षक छात्र के लिए ददाति। पुस्तक देता है।
  • नृपः निर्धनाय धनं यच्छति। राजा निर्धन के लिए धन देता है। उपपद विभक्ति

नमः (नमस्कार), स्वस्ति (कल्याण हो) स्वाहा (बलि है- देवता के लिए), स्वधा (बलि है-पितरों के लिए),। अलम् (पर्याप्त) आदि, अव्यय शब्दों के योग में चतुर्थी विभक्ति होती है।

जैसे-

  • श्री गणेशाय नमः। श्रीगणेश को नमस्कार।
  • सर्वेभ्यः स्वस्ति। सभी का कल्याण हो।

क्रुध्यति (क्रोध करता है), द्रुह्यति (द्रोह करता है), ईय॑ति (ईर्ष्या करता है), असूयति (डाह करता है) के योग में जिसके प्रति क्रोध आदि किया जाए जिसमें चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है।

  • दुष्टः सज्जनाय क्रुध्यति। दुष्ट सज्जन पर क्रोध करता है।
  • रामः मोहनाय द्रुह्यति। राम मोहन से द्रोह करता है।

रुच् (अच्छा लगना) के योग में जिसको अच्छा लगे, – उसमें चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है।

  • सुरेशाय मोदकं रोचते। सुरेश को लड्डू अच्छा लगता है।

स्पृहयति (चाहता है, ललचाता है) के योग में जिस वस्तु या व्यक्ति के प्रति चाह या लालच हो उसमें चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है।

  • कृपणः धनाय स्पृह्यति। कंजूस धन को चाहता है।

५. अपादान कारक (पंचमी विभक्ति)
जिस वस्तु से किसी का अलग होना पाया जाता है, उस वस्तु को अपादन संज्ञा होती है और अपादान कारक में पंचमी विभक्ति होती है।

जैसे-

  • वृक्षात् पत्रं पतति। पेड़ से पत्ता गिरता है।
  • गङ्गा हिमालयात् प्रभवति। गंगा हिमालय से निकलती उपपद विभक्ति

भय, रक्षा, प्रसाद, जुगुप्सा, विराम इत्यादि धातुओं के साथ पंचमी विभक्ति का प्रयोग होता है।

  • शिशुः कुक्कुरात् विभेति। बच्चा कुत्ते से डरता है।
  • धर्मः पापात् रक्षति। . धर्म पाप से रक्षा करता

६. सम्बन्ध (षष्ठी विभक्ति)
जहाँ पर दो शब्द (संज्ञा या सर्वनाम) एक-दूसरे से। (स्वामी-विवेक, जन्य-जनक,कार्य-कारक आदि) सम्बन्ध रखते हों, वहाँ पर जिस वस्तु का सम्बन्ध होता है, उसमें षष्ठी विभक्ति का प्रयोग होता है। जैसे

  • मोहनः रामस्य पुत्रः अस्ति। मोहन राम का पुत्र है।
  • देवकीः कृष्णस्य माता देवकी कृष्ण की माता थीं। – आसीत्।
  • गणेशः शिवस्य पुत्रः गणेश शिव का पुत्र है। – अस्ति।
  • लवस्य पिता रामः। लव के पिता राम थे।

MP Board Solutions

७. अधिकरण कारक (सप्तमी विभक्ति)
जो शब्द क्रिया का आधार हो, उसे अधिकरण कारक कहते। हैं। अधिकरण कारक में सप्तमी विभक्ति होती है।

जैसे-

  • सिंहः वने अस्ति। सिंह वन में रहता है।
  • पक्षी वृक्षे अस्ति। पक्षी वृक्ष पर है।

८. सम्बोधन
किसी को पुकारने या सावधान करने हेतु जिस शब्द का प्रयोग किया जाता है, उसे सम्बोधन कहते हैं। सम्बोधन में प्रथमा विभक्ति का प्रयोग होता है।

जैसे-

  • हे राम! तत्र गच्छ। हरे राम! वहाँ जाओ।
  • भो छात्रा:! ध्यानेन अरे छात्रो! ध्यान से सुनो। – शृणुथ।
  • हे सीते! कुत्र अस्ति ? हे सीता! कहाँ हो?

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

In this article, we will share MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण Pdf, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

MP Board Class 10th Science Chapter 1 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न श्रृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 6

MP Board Class 10th Science Chapter 1 In Hindi प्रश्न 1.
वायु में जलाने से पूर्व मैग्नीशियम रिबन को साफ क्यों किया जाता है?
उत्तर:
मैग्नीशियम रिबन के ऊपर एक धुंधली मैग्नीशियम ऑक्साइड, आरक्षक परत जम जाती है उसे हटाने के लिए वायु में जलाने से पूर्व मैग्नेशियम रिबन को साफ किया जाता है क्योंकि यह आरक्षी परत मैग्नीशियम को ऑक्सीजन से क्रिया करने से रोकती है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए संतुलित समीकरण लिखिए –

  1. हाइड्रोजन + क्लोरीन → हाइड्रोजन क्लोराइड।
  2. बेरियम क्लोराइड + ऐलुमिनियम सल्फेट → बेरियम सल्फेट + ऐलुमिनियम क्लोराइड।
  3. सोडियम + जल → सोडियम हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन।

उत्तर:

  1. H2 + Cl2 → 2HCl
  2. 3BaCl + Al2(SO4)3 → 3BaSO4 + 2AlCl3
  3. 2Na + 2H2O → 2NaOH + H2

MP Board Class 10 Science Chapter 1 प्रश्न 3.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए उनकी अवस्था के संकेतों के साथ संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए –

  1. जल में बेरियम क्लोराइड तथा सोडियम सल्फेट के विलयन अभिक्रिया करके सोडियम क्लोराइड का विलयन तथा अघुलनशील बेरियम सल्फेट का अवक्षेप बनाता है।
  2. सोडियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन (जल में) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विलयन (जल में) से अभिक्रिया करके सोडियम क्लोराइड का विलयन तथा जल बनाते हैं।

उत्तर:

  1. BaCl2(aq) + Na2(SO4)(aq) → 2NaCl(aq) + BaSO4(s)
  2. NaOH(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H2O(l)

प्रश्न श्रृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 11

MP Board Class 10th Science Chapter 1 प्रश्न 1.
किसी पदार्थ ‘X’ के विलयन का उपयोग सफेदी करने के लिए होता है।

  1. पदार्थ ‘X’ का नाम तथा इसका सूत्र लिखिए।
  2. 1 में लिखे पदार्थ ‘X’ की जल के साथ अभिक्रिया लिखिए।

उत्तर:

  1. पदार्थ ‘X’ का नाम: कैल्सियम ऑक्साइड एवं पदार्थ ‘X’ का सूत्र: CaO
  2. CaO + H2O → Ca(OH)2 + ऊष्मा।

प्रश्न 2.
क्रियाकलाप 1.7 में एक परखनली में एकत्रित गैस की मात्रा दूसरी में दोगुनी क्यों है? उस गैस का नाम बताइए।
उत्तर:
क्रियाकलाप 1.7 में जल का विद्युत् अपघटन होकर हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन गैसें बनती हैं और दो अणु जल से 2 अणु हाइड्रोजन तथा 1 अणु ऑक्सीजन बनते हैं। इसलिए एक गैस (हाइड्रोजन) दूसरी गैस (ऑक्सीजन) से दोगुनी है। उस गैस का नाम हाइड्रोजन है।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 15

MP Board Class 10 Science प्रश्न 1.
जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोया जाता है तो विलयन का रंग क्यों बदल जाता है?
उत्तर:
जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के नीले घोल में डुबोया जाता है तो लोहा कॉपर सल्फेट के घोल से कॉपर को विस्थापित करके फेरस सल्फेट का हरा विलयन बनाता है। इस कारण विलयन का रंग बदल जाता है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 1

प्रश्न 2.
क्रियाकलाप 1.10 से भिन्न द्वि – विस्थापन अभिक्रिया का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जब सिल्वर नाइट्रेट के विलयन में सोडियम क्लोराइड का विलयन मिलाते हैं तो द्वि – विस्थापन अभिक्रिया द्वारा सिल्वर क्लोराइड का सफेद अवक्षेप तथा सोडियम नाइट्रेट का विलयन बनता है।
AgNO3(aq) + NaCl(aq) → AgCl(s) + NaNO3(aq)

Class 10 Science Chapter 1 MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में उपचयित एवं अपचयित पदार्थों की पहचान कीजिए –

  1. 4Na(s) + O2(g) → 2Na2O(s)
  2. CuO(s) + H2(g) → Cu(s) + H2O(l)

उत्तर:

  1. Na = उपचयित एवं O2 = अपचयित
  2. CuO = अपचयित एवं H2 = उपचयित

MP Board Class 10th Science Chapter 1 पाठान्त प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नीचे दी गई अभिक्रिया के सम्बन्ध में कौन – सा कथन असत्य है
2PbO(s) + C(s) → 2Pb(s) + CO2(g)
(a) सीसा अपचयित हो रहा है।
(b) कार्बन डाइऑक्साइड उपचयित हो रही है।
(c) कार्बन उपचयित हो रहा है।
(d) लेड ऑक्साइड अपचयित हो रहा है।

  1. (a) एवं (b)
  2. (a) एवं (c)
  3. (a), (b) एवं (c)
  4. सभी

उत्तर:
1. (a) एवं (b)

Class 10 MP Board Science Chapter 1 प्रश्न 2.
Fe2O3 + 2Al → Al2O3 +2Fe
ऊपर दी गयी अभिक्रिया किस प्रकार की है?
(a) संयोजन अभिक्रिया।
(b) द्वि – विस्थापन अभिक्रिया।
(c) वियोजन अभिक्रिया।
(d) विस्थापन अभिक्रिया।
उत्तर:
(d) विस्थापन अभिक्रिया।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
लोह चूर्ण पर तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालने से क्या होता है? सही उत्तर पर निशान लगाइए।
(a) हाइड्रोजन गैस एवं आयरन क्लोराइड बनता है।
(b) क्लोरीन गैस एवं आयरन हाइड्रॉक्साइड बनता है।
(c) कोई अभिक्रिया नहीं होती।
(d) आयरन लवण एवं जल बनता है।
उत्तर:
(a) हाइड्रोजन गैस एवं आयरन क्लोराइड बनता है।

MP Board Class 10th Science Solutions प्रश्न 4.
संतुलित रासायनिक समीकरण क्या है? रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
संतुलित रासायनिक समीकरण:
“जिस रासायनिक समीकरण में अभिकारकों एवं उत्पादों के कुल द्रव्यमान समान हों अर्थात् अभिक्रिया के पहले एवं उसके पश्चात् प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान हो तो वह समीकरण संतुलित रासायनिक समीकरण कहलाता है।”
द्रव्यमान संरक्षण के नियम के परिपालन के लिए रासायनिक समीकरण को संतुलित करना आवश्यक है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित कथनों को रासायनिक समीकरण के रूप में परिवर्तित कर उन्हें सन्तुलित कीजिए –

  1. नाइट्रोजन, हाइड्रोजन गैस से संयोग करके अमोनिया बनाता है।
  2. हाइड्रोजन सल्फाइड गैस का वायु में दहन होने पर जल एवं सल्फर डाइऑक्साइड बनता है।
  3. ऐलुमिनियम सल्फेट के साथ अभिक्रिया करके बेरियम क्लोराइड, ऐलुमिनियम क्लोराइड एवं बेरियम सल्फेट का अवक्षेप देता है।
  4. पोटैशियम धातु जल के साथ अभिक्रिया करके पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड एवं हाइड्रोजन गैस देती है।

उत्तर:

  1. N2 + 3H2 → 2NH3
  2. 2H2S + 3O2 → 2H2O + 2SO2
  3. Al2 (SO4)3 + 3BaCl2 → 2AlCl3 + 3BaSO4
  4. 2K + 2H2O → 2KOH + H2

Class 10 Science MP Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित समीकरणों को सन्तुलित कीजिए –

  1. HNO3 + Ca(OH)2 → Ca(NO3)2 + H2O
  2. NaOH + H2SO4 → Na2SO4 + H2O
  3. NaCl + AgNO3 →AgCl+ NaNO3
  4. BaCl2 + H2SO4 → BaSO4 + HCl

उत्तर:

  1. 2HNO3(aq) + Ca(OH)2(aq) → Ca(NO3)2(aq) + 2H2O(l)
  2. 2NaOH(aq) + H2SO4(aq) → Na2SO4(aq) + 2H2O(l)
  3. NaCl(aq) + AgNO3(aq) AgCl(s) + NaNO3(aq)
  4. BaCl2(aq) + H2SO4(aq) → BaSO4(s) + 2HCl(aq)

प्रश्न 7.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए –

  1. कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड + कार्बन डाइऑक्साइड → कैल्सियम कार्बोनेट + जल
  2. जिंक + सिल्वर नाइट्रेट → जिंक नाइट्रेट + सिल्वर
  3. ऐलुमिनियम + कॉपर क्लोराइड → ऐलुमिनियम क्लोराइड + कॉपर
  4. बेरियम क्लोराइड + पोटैशियम सल्फेट → बेरियम सल्फेट + पोटैशियम क्लोराइड।

उत्तर:

  1. Ca(OH)2(aq) + CO2(g) → CaCO3(s) + H2O(l)
  2. Zn(s) + 2Ag (NO3)(aq) → Zn(NO3)2(aq) + 2Ag(s)
  3. 2Al(s) + 3CuCl2(aq) → 2AlCl3(aq) + 3Cu(s)
  4. BaCl2(aq) + K2SO4(aq) → BaSO4(s) + 2KCl(aq)

MP Board Solutions

MP Board Solution Class 10 Science प्रश्न 8.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए एवं प्रत्येक अभिक्रिया का प्रकार बताइए –

  1. पोटैशियम ब्रोमाइड(aq) + बेरियम आयोडाइड(aq) → पोटैशियम आयोडाइड(aq) + बेरियम ब्रोमाइड(s)
  2. जिंक कार्बोनेट(s) → जिंक ऑक्साइड(s) + कार्बन डाइऑक्साइड(g)
  3. हाइड्रोजन(g) + क्लोरीन(g) → हाइड्रोजन क्लोराइड(g)
  4. मैग्नीशियम(s) + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल(aq) मैग्नीशियम क्लोराइड(aq) + हाइड्रोजन(g)

उत्तर:

  1. 2KBr(aq) + BaI2(aq) → 2KI(aq) + BaBr2(s)
    अभिक्रिया का प्रकार – द्वि – विस्थापन अभिक्रिया।
  2. ZnCO3(s) → ZnO(s) + CO2(g)
    अभिक्रिया का प्रकार – वियोजन (अपघटन) अभिक्रिया।
  3. H2(g) + Cl2(g) → 2HCl(g)
    अभिक्रिया का प्रकार – संयोजन अभिक्रिया।
  4. Mg(s) + 2HCl(aq) → MgCl2(aq) + H2(g)
    अभिक्रिया का प्रकार – विस्थापन अभिक्रिया।

प्रश्न 9.
ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रिया का क्या अर्थ है? उदाहरण दीजिए। (2019)
उत्तर:

  1. ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया:
    “जिस रासायनिक अभिक्रिया में उत्पादों के साथ ऊष्मा भी निकलती है, वह ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहलाती है।”
    उदाहरण:
    CH4(g) + 2O2(g) → CO2(g) + 2H2O(g) + ऊर्जा (ऊष्मा)
  2. ऊष्माशोषी अभिक्रिया:
    “जिस रासायनिक अभिक्रिया में ऊष्मा (ऊर्जा) का अवशोषण होता है वह ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहलाती है।”
    उदाहरण:
    2Pb(NO3)2(s) \(\underrightarrow { heat } \) 2Pb(O)(s) + 4NO2(g) + O2(g)

MP Board Class 10th Science Book प्रश्न 10.
श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
श्वसन एक मंद दहन ऑक्सीकरण की अभिक्रिया है जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प एवं ATP के रूप में ऊष्मा (ऊर्जा) निकलती है। इसलिए इसे ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहते हैं।

प्रश्न 11.
वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत क्यों कहा जाता है? इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए।
उत्तर:
वियोजन अभिक्रिया में एकल अभिकर्मक टूट कर दो या दो से अधिक उत्पाद बनते हैं, जबकि संयोजन में दो या दो से अधिक अभिकर्मक संयुक्त होकर एकल उत्पाद बनाते हैं।
समीकरण – वियोजन:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 2
संयोजन: 2Mg(s) + O2(g) → 2MgO(s)

प्रश्न 12.
उन वियोजन अभिक्रियाओं के एक – एक समीकरण दीजिए जिनमें ऊष्मा, प्रकाश एवं विद्युत् के रूप में ऊर्जा प्रदान की जाती है।
उत्तर:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 3

Class 10th Science Chapter 1 MP Board प्रश्न 13.
विस्थापन एवं द्वि – विस्थापन अभिक्रियाओं में क्या अन्तर है? इन अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए।
उत्तर:
विस्थापन अभिक्रिया में एक तत्व दूसरे तत्व को उसके लवण से पृथक् करके उसका स्थान स्वयं ग्रहण कर लेता है, जबकि द्वि – विस्थापन में अभिकारकों के बीच आयनों का आदान – प्रदान होता है।
समीकरण – विस्थापन: Fe(s) + CuSO4(aq) → FeSO4(aq) + Cu(s)
द्वि – विस्थापन: Na2SO4(aq) + BaCl2(aq) → 2NaCl(aq) + BaSO4(s)

प्रश्न 14.
सिल्वर के शोधन में सिल्वर नाइट्रेट के विलयन से सिल्वर प्राप्त करने के लिए कॉपर धातु द्वारा विस्थापन किया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
2AgNO3(aq) + Cu(s) → Cu(NO3)2 (aq) + 2Ag(s)

MP Board 10th Science Chapter 1 प्रश्न 15.
अवक्षेपण अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
अवक्षेपण:
“जब दो अभिकारक (क्रियाकारक) विलयन आपस में अभिक्रिया करके अविलेय ठोस उत्पाद बनाते हैं तो उस विलयन में उस ठोस के कण अवक्षेपित हो जाते हैं इस क्रिया को अवक्षेपण कहते हैं।”
उदाहरण:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 4

प्रश्न 16.
ऑक्सीजन के योग या ह्रास के आधार पर निम्नलिखित पदों की व्याख्या कीजिए। प्रत्येक के लिए दो उदाहरण दीजिए –

  1. उपचयन।
  2. अपचयन।

उत्तर:
1. उपचयन:
जब किसी पदार्थ से ऑक्सीजन का संयोग होता है तो उस पदार्थ का उपचयन होता है। अर्थात् किसी पदार्थ (तत्व या यौगिक) एवं ऑक्सीजन के योग की अभिक्रिया उपचयन कहलाती है।

उदाहरण:
(i) MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 5
(ii) C + O2 → CO2

उपर्युक्त उदाहरणों में Cu एवं C का उपचयन हो रहा है।

2. अपचयन:
“जब किसी पदार्थ (ऑक्साइड) से ऑक्सीजन का ह्रास होता है तब उस पदार्थ का अपचयन होता है और यह O2 ह्रास की अभिक्रिया अपचयन कहलाती है।

उदाहरण:
(i) MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 6
(Ii) ZnO + C → Zn + CO

उपर्युक्त उदाहरणों में CuO एवं ZnO का अपचयन हो रहा है।

MP Board Class 10th Science प्रश्न 17.
एक भूरे रंग का चमकदार तत्व ‘X’ को वायु की उपस्थिति में गर्म करने पर वह काले रंग का हो जाता है। इस तत्व ‘X’ एवं उस काले रंग के यौगिक का नाम बताइए।
उत्तर:
तत्व ‘X’ का नाम: कॉपर (Cu) काले रंग के यौगिक का नाम: कॉपर ऑक्साइड (CuO).

प्रश्न 18. (2019)
लोहे की वस्तुओं को हम पेंट क्यों करते हैं?
उत्तर:
लोहे की वस्तुओं को संक्षारण से बचाने के लिए हम उनको पेंट करते हैं जिससे वे नमी के सम्पर्क में न आएँ।

प्रश्न 19.
तेल एवं वसा युक्त पदार्थों को नाइट्रोजन से प्रभावित क्यों किया जाता है?
उत्तर:
तेल एवं वसा युक्त खाद्य सामग्री वायु या ऑक्सीजन के सम्पर्क में अधिक समय तक रहने पर उपचयित होकर अपना स्वाद एवं गंध बदल कर विकृतगंधी हो जाते हैं इसलिए इन्हें नाइट्रोजन जैसे कम सक्रिय गैसों से प्रभावित किया जाता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 20.
निम्नलिखित पदों का वर्णन कीजिए तथा प्रत्येक का एक – एक उदाहरण दीजिए। (2019)

  1. संक्षारण।
  2. विकृतगंधिता।

उत्तर:

  1. संक्षारण:
    “जब लोहे या लोहे जैसे पदार्थों से बनी वस्तुएँ अपने आस – पास अम्ल, आर्द्रता (नमी) आदि के सम्पर्क में आती हैं तब ये संक्षारित होती हैं। इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं।
    उदाहरण: लोहे पर जंग लगना अर्थात् उस पर लाल – भूरी परत जमना।
  2. विकृतगंधिता:
    “तेल या वसा युक्त खाद्य पदार्थ उपचयित होकर अपना स्वाद एवं गंध को बदल देते हैं, यह घटना विकृतगंधिता कहलाती है।”
    उदाहरण:
    तेल या वसा में तले हुए खाद्य पदार्थ; जैसे – नमकीन, चिप्स आदि लम्बे समय तक रखने पर उनका स्वाद एवं गंध अप्रिय हो जाती हैं।

MP Board Class 10th Science Chapter 1 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 10th Science Chapter 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

MP Board Class 10th Science Solution प्रश्न 1.
निम्न में कौन भौतिक परिवर्तन नहीं है ?
(a) खौलते पानी से जलवाष्प बनना
(b) बर्फ का पिघलकर जल बनना
(c) नमक का पानी में घुलना
(d) L.P.G. का दहन
उत्तर:
(d) L.P.G. का दहन

प्रश्न 2.
निम्न अभिक्रिया एक उदाहरण है –
4NH3(g) + 5O2(g) → 4NO(g) + 6H2O(g)
(i) विस्थापन अभिक्रिया
(ii) संयोजन अभिक्रिया
(iii) उपापचय अभिक्रिया
(iv) उदासीनीकरण अभिक्रिया
(a) (i) एवं (iv)
(b) (ii) एवं (iii)
(c) (i) एवं (iii)
(d) (iii) एवं (iv)
उत्तर:
(c) (i) एवं (iii)

MP Board Class 10 Science Solutions English Medium प्रश्न 3.
दी हुई निम्न अभिक्रिया के संदर्भ में निम्न में से से सत्य कथन हैं?
3Fe(s) + 4H2O(g) → Fe3O4(s) + 4H2(g)
(i) लोह धातु उपचयित हो रही है।
(ii) जल का अपचयन हो रहा है।
(iii) जल अपचायक का कार्य कर रहा है।
(iv) जल उपचायक का कार्य कर रहा है।
(a) (i), (ii) एवं (iii)
(b) (iii) एवं (iv)
(c) (i), (ii) एवं (iv)
(d) (ii) एवं (iv)
उत्तर:
(c) (i), (ii) एवं (iv)

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में कौन ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ हैं?
(i) जल की बिना बुझे चूने से अभिक्रिया
(ii) किसी अम्ल का तनुकरण
(iii) जल का वाष्पीकरण
(iv) कपूर के क्रिस्टल्स का ऊर्ध्वपातन
(a) (i) एवं (ii)
(b) (ii) एवं (iii)
(c) (i) एवं (iv)
(d) (iii) एवं (iv)
उत्तर:
(a) (i) एवं (ii)

Class 10 Vigyan Chapter 1 Question Answer प्रश्न 5.
तीन बीकरों पर क्रमशः A, B एवं C अंकित हैं। प्रत्येक में 25 ml जल लिया गया है। थोड़ी – थोड़ी मात्रा में NaOH, निर्जल CuSO4 एवं NaCl क्रमश: A, B एवं C में मिलाया गया है। बीकर A एवं B में रखे विलयनों के ताप में वृद्धि जबकि बीकर C में रखे विलयन के ताप में कमी प्रेक्षित की गई। निम्न में सत्य कथन है –
(i) बीकर A एवं B में ऊष्माशोषी प्रक्रम घटित हुआ है।
(ii) बीकर A एवं B में ऊष्माक्षेपी प्रक्रम घटित हुआ है।
(iii) बीकर C में ऊष्माक्षेपी प्रक्रम घटित हुआ है।
(iv) बीकर D में ऊष्माशोषी प्रक्रम घटित हुआ है।
(a) केवल (i)
(b) केवल (ii)
(c) (i) एवं (iv)
(d) (ii) एवं (iii)
उत्तर:
(c) (i) एवं (iv)

प्रश्न 6.
एक अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट विलयन युक्त बीकर में धीरे – धीरे तनु फेरस सल्फेट का विलयन मिलाया जाता है तो हल्का जामुनी रंग हल्का पड़ता है और अन्त में गायब हो जाता है। उक्त प्रेक्षण के लिए निम्न में कौन – सा कथन सत्य है?
(a) KMnO4 उपचायक है यह FeSO4 का उपचयन कर देता है।
(b) FeSO4 उपचायक है यह KMnO4 का उपचयन कर देता है।
(c) रंग तो तनुता के कारण गायब होता है, यहाँ कोई अभिक्रिया नहीं हुई
(d) KMnO4 एक अस्थायी यौगिक है जो FeSO4 की उपस्थिति में रंगहीन यौगिकों में विखण्डित हो जाता है।
उत्तर:
(a) KMnO4 उपचायक है यह FeSO4 का उपचयन कर देता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में कौन द्वि – विस्थापन अभिक्रियाएँ हैं ?
(i) Pb + CuCl2 → PbCl2 + Cu
(ii) Na2SO4 + BaCl2 → BaSO4 + 2NaCl
(iii) C + O2 → CO2
(iv) CH4 + 2O2 → CO2 +2H2O
(a) (i) एवं (iv)
(b) केवल (ii)
(c) (i) एवं (ii)
(d) (iii) एवं (iv)
उत्तर:
(b) केवल (ii)

प्रश्न 8.
निम्न में कौन – सा कथन सत्य है ? देर समय तक सिल्वर क्लोराइड को सूर्य के प्रकाश में रखने पर वह काला पड़ जाता है, क्योंकि?
(i) सिल्वर क्लोराइड के विखण्डन से सिल्वर बनता है।
(ii) सिल्वर क्लोराइड का ऊर्ध्वपातन हो जाता है।
(iii) सिल्वर क्लोराइड से क्लोरीन गैस का अपघटन होता है।
(iv) सिल्वर क्लोराइड का उपचयन हो जाता है।
(a) केवल (i)
(b) (i) एवं (iii)
(c) (ii) एवं (iii)
(d) केवल (iv)
उत्तर:
(a) केवल (i)

प्रश्न 9.
ठोस कैल्सियम ऑक्साइड जल के साथ बहुत तीव्रता से अभिक्रिया करके कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड बनाता है और ऊष्मा निकलती है। यह प्रक्रिया चूने का बुझना कहलाती है। कैल्सिमय हाइड्रॉक्साइड जल में घुलकर विलयन बनाता है जिसे चूने का पानी कहते हैं। निम्न में कौन-सा कथन सत्य है, चूने के बुझने एवं विलयन के निर्माण के सन्दर्भ में –
(i) यह एक ऊष्माशोषी अभिक्रिया है।
(ii) यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।
(iii) परिणामी विलयन का pH मान 7 से अधिक होगा।
(iv) परिणामी विलयन का pH मान 7 से कम होगा।
(a) (i) एवं (ii)
(b) (ii) एवं (iii)
(c) (i) एवं (iv)
(d) (iii) एवं (iv)
उत्तर:
(b) (ii) एवं (iii)

प्रश्न 10.
बेरियम क्लोराइड अमोनियम सल्फेट से अभिक्रिया करके बेरियम सल्फेट एवं अमोनियम क्लोराइड बनाता है। निम्नलिखित में से कौन – से कथन अभिक्रिया के प्रकार को सही प्रकार प्रदर्शित करते हैं?
(i) विस्थापन अभिक्रिया।
(i) अवक्षेपण अभिक्रिया।
(iii) संयोजन अभिक्रिया।
(iv) द्वि – विस्थापन अभिक्रिया।
(a) केवल (i)
(b) केवल (ii)
(c) केवल (iv)
(d) (ii) एवं (iv)
उत्तर:
(d) (ii) एवं (iv)

प्रश्न 11.
जल का विद्युत् अपघटन एक विघटन (अपघटन) अभिक्रिया है। हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन के निकलने में मोल अनुपात होगा –
(a) 1:1
(b) 2 : 1
(c) 4:1
(d) 1 : 2
उत्तर:
(b) 2 : 1

प्रश्न 12.
निम्नलिखित प्रक्रियाओं में कौन ऊष्माशोषी है?
(i) सल्फ्यूरिक अम्ल का तनुकरण।
(ii) शुष्क बर्फ का ऊर्ध्वपातन।
(iii) जलवाष्प का संघनन।
(iv) जल का वाष्पीकरण।
(a) (i) एवं (iii)
(b) केवल (ii)
(c) केवल (iii)
(d) (ii) एवं (iv)
उत्तर:
(d) (ii) एवं (iv)

प्रश्न 13.
जलीय पोटैशियम आयोडाइड एवं जलीय लेड नाइट्रेट विलयनों के मध्य द्वि – विस्थापन की अभिक्रिया में लेड आयोडाइड का पीला अवक्षेप बनता है, लेकिन इस क्रिया के सम्पादन हेतु लेड नाइट्रेट उपलब्ध नहीं है तो इसके स्थान पर निम्नलिखित में से कौन प्रयुक्त किया जा सकता है?
(a) अविलेय लेड सल्फेट
(b) लेड ऐसीटेट
(c) अमोनियम नाइट्रेट
(d) पोटैशियम सल्फेट
उत्तर:
(b) लेड ऐसीटेट

प्रश्न 14.
निम्न में से कौन – सी गैस तेल के ताजे नमूने को लम्बे समय तक रखने के लिए प्रयुक्त की जा सकती है?
(a) कार्बन डाइऑक्साइड या ऑक्सीजन
(b) नाइट्रोजन या ऑक्सीजन
(c) कार्बन डाइऑक्साइड या हीलियम
(d) हीलियम या नाइट्रोजन
उत्तर:
(d) हीलियम या नाइट्रोजन

प्रश्न 15.
प्रयोगशाला में ऑक्सीजन गैस बनाने के लिए निम्न अभिक्रिया प्रयोग की जाती है –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 7
निम्न में कौन – सा कथन इस अभिक्रिया के सन्दर्भ में सत्य है –
(a) यह एक ऊष्माशोषी प्रकृति की अपघटन अभिक्रिया है।
(b) यह एक संयोजन अभिक्रिया है।
(c) यह एक ऊष्माक्षेपी प्रकृति की अपघटन अभिक्रिया है।
(d) यह एक ऊष्माक्षेपी प्रकाश – रसायन अपघटन की अभिक्रिया है।
उत्तर:
(a) यह एक ऊष्माशोषी प्रकृति की अपघटन अभिक्रिया है।

प्रश्न 16.
निम्न में कौन प्रक्रिया रासायनिक अभिक्रिया है ?
(a) एक गैस सिलेण्डर में उच्च दाब पर ऑक्सीजन गैस को संग्रह करना
(b) वायु का द्रवीकरण
(c) चाइना डिश में पेट्रोल को खुले में रखना
(d) ताँबे के तार को हवा की उपस्थिति में उच्च ताप पर गर्म करना।
उत्तर:
(d) ताँबे के तार को हवा की उपस्थिति में उच्च ताप पर गर्म करना।

MP Board Solutions

प्रश्न 17.
निम्नलिखित रासायनिक समीकरणों में कौन से संक्षिप्त रूप क्रियाकारक (अभिकारक) एवं उत्पादों की सही भौतिक अवस्था को प्रदर्शित करते हैं?
(a) 2H2(l) + O2(l) → 2H2O(g)
(b) 2H2(g) + O2(l) → 2H2O(l)
(c) 2H2(g) + O2(g) → 2H2O(l)
(d) 2H2(g) + O2(g) → 2H2O(g)
उत्तर:
(d) 2H2(g) + O2(g) → 2H2O(g)

प्रश्न 18.
निम्नलिखित में कौन संयोजी अभिक्रिया है?
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 8
(a) (i) एवं (iii)
(b) (iii) एवं (iv)
(c) (ii) एवं (iv)
(d) (ii) एवं (iii)
उत्तर:
(d) (ii) एवं (iii)

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. किसी रासायनिक अभिक्रिया का समीकरण के रूप में प्रतीकात्मक निरूपण ……….” कहलाता है।
2. ऐसी अभिक्रियाएँ जिनमें दो या दो से अधिक अभिकारक संयुक्त होकर एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं ……….. कहलाती हैं।
3. जब किसी अभिक्रिया में एकल अभिकर्मक टूट कर दो या दो से अधिक छोटे – छोटे उत्पादों में विभक्त होता है। तब वह अभिक्रिया ………” कहलाती है।
4. जब एक अभिकर्मक तत्व दूसरे अभिकर्मक यौगिक में से दूसरे तत्व को विस्थापित करके स्वयं उसका स्थान ग्रहण कर लेता है तब वह अभिक्रिया …..” कहलाती है।
5. वे अभिक्रियाएँ जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान प्रदान होता है ……..” कहलाती हैं।
6. वे अभिक्रियाएँ जिनमें उत्पाद के साथ – साथ ऊष्मा भी उत्पन्न होती है उन्हें ………” अभिक्रियाएँ कहते हैं। (2019)
उत्तर:

  1. रासायनिक समीकरण।
  2. संयोजन अभिक्रियाएँ।
  3. अपघटन (वियोजन) अभिक्रिया।
  4. विस्थापन अभिक्रिया।
  5. द्वि – विस्थापन अभिक्रियाएँ।
  6. ऊष्माक्षेपी।

जोड़ी बनाइए
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 9
उत्तर:

  1. → (c)
  2. → (d)
  3. → (e)
  4. → (a)
  5. → (b)

सत्य/असत्य कथन

  1. सल्फ्यूरिक अम्ल का तनुकरण ऊष्माशोषी अभिक्रिया है।
  2. MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 10
  3. अमोनियम क्लोराइड को जल में घोलने पर विलयन ठंडा हो जाना, ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।
  4. MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 11
  5. जो पदार्थ ऑक्सीकृत (उपचयित) हो जाते हैं वे ऑक्सीकारक (उपचायक) कहलाते हैं।

उत्तर:

  1. असत्य।
  2. सत्य।
  3. असत्य।
  4. सत्य।
  5. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. जब किसी यौगिक से ऑक्सीजन संयुक्त होती है तब यह अभिक्रिया क्या कहलाती है?
  2. जब किसी यौगिक से ऑक्सीजन की क्षति होती है तब यह अभिक्रिया क्या कहलाती है?
  3. दो विलयनों को मिलाने पर एक अविलेय पदार्थ बनता है उस अभिक्रिया को क्या कहेंगे?
  4. जिस अभिक्रिया में उपचयन एवं अपचयन दोनों होते हैं, वह अंभिक्रिया क्या कहलाती है?
  5. लोहे पर जंग लगना किस प्रकार की अभिक्रिया है?

उत्तर:

  1. उपचयन
  2. अपचयन
  3. अवक्षेपण
  4. उपापचयन या रेडॉक्स अभिक्रिया
  5. संक्षारण

MP Board Class 10th Science Chapter 1 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रासायनिक समीकरण से क्या समझते हो? किसी सन्तुलित समीकरण का उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
रासायनिक समीकरण:
“किसी रासायनिक अभिक्रिया को समीकरण के रूप में उसके अभिकारक एवं उत्पादों का प्रतीकात्मक निरूपण रासायनिक समीकरण कहलाता है।”
उदाहरण: (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) + (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) → (सोडियम क्लोराइड) + (जल)
NaOH(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) +H2O(l)

प्रश्न 2.
संयोजन अभिक्रिया को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
संयोजन अभिक्रियाएँ:
“वे रासायनिक अभिक्रियाएँ, जिनमें दो या दो से अधिक तत्व या यौगिक संयुक्त होकर एकल उत्पाद बनाते हैं, संयोजन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।”
उदाहरण:
NH3(g) + HCl(g) → NH4Cl(g)

प्रश्न 3.
अपघटन या वियोजन से क्या समझते हो? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अपघटन या वियोजन:
“वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें एक अभिकारक टूट कर दो या दो से अधिक छोटे उत्पादों में विखण्डित होता है, अपघटन या वियोजन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।”
उदाहरण:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 12

प्रश्न 4.
विस्थापन अभिक्रियाएँ किन्हें कहते हैं? उदाहरण दीजिए। (2019)
उत्तर:
विस्थापन अभिक्रियाएँ:
“वे अभिक्रियाएँ जिनमें एक अभिकर्मक तत्व दूसरे अभिकर्मक यौगिक में से दूसरे तत्व को विस्थापित करके स्वयं उसका स्थान ग्रहण कर लेता है, विस्थापन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
उदाहरण:
Fe(s) + CuSO4(aq) → FeSO4(aq) + Cu(s)

प्रश्न 5.
द्वि – विस्थापन अभिक्रियाएँ किन्हें कहते हैं? उदाहरण दीजिए। (2019)
उत्तर:
द्वि – विस्थापन अभिक्रियाएँ:
“वे अभिक्रियाएँ जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान – प्रदान होता है, द्वि – विस्थापन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
उदाहरण:
BaCl2(aq) + Na2SO4(aq) → BaSO4(s) + 2NaCl(aq)

MP Board Solutions

प्रश्न 6.
उपापचयन रेडॉक्स) अभिक्रियाओं से क्या समझते हो? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
उपापचयन (रेडॉक्स) अभिक्रियाएँ:
वे अभिक्रियाएँ जिनमें एक अभिकारक का उपचयन होता है तथा दूसरे का अपचयन, उपापचयन (रेडॉक्स) अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
उदाहरण:
Fe2O3(s) + 3CO(g) → 2Fe(s) + 3CO2(g)
यहाँ CO का उपचयन एवं Fe2O3 का अपचयन हो रहा है।

प्रश्न 7.
जब पोटैशियम क्लोराइड का विलयन सिल्वर नाइट्रेट के विलयन में मिलाया जाता है, तो एक अविलेय सफेद पदार्थ बनता है। इसमें होने वाली रासायनिक अभिक्रिया का समीकरण लिखिए तथा अभिक्रिया का प्रकार बताइए।
उत्तर:
KCl(aq) + AgNO3(aq) → KNO3(aq) + AgCl(s)
अभिक्रिया द्वि – विस्थापन एवं अवक्षेपण की है।

प्रश्न 8.
फेरस सल्फेट गर्म करने पर अपघटित होकर एक रंगहीन जलते गन्धक की सी गंध वाली गैस निकालता है। रासायनिक अभिक्रिया का समीकरण लिखिए तथा उसका प्रकार बताइए।
उत्तर:
2FeSO4(s) → Fe2O3(s) + SO2(g) SO3(g)
यह अभिक्रिया ऊष्मीय अपघटन की है।

प्रश्न 9.
जुगुनू (Fire – Flies) रात्रि में क्यों चमकते हैं?
उत्तर:
जुगनू के अन्दर एक प्रोटीन होता है जो एक एन्जाइम की उपस्थिति में वायु से ऑक्सीकृत हो जाता है। यह एक रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें दृश्यप्रकाश उत्पन्न होता है इसलिए रात्रि में जुगुनू चमकते हैं।

प्रश्न 10.
पौधे पर लटके अंगूरों का किण्वन नहीं होता लेकिन पेड़ से तोड़ने के बाद इनका किण्वन हो सकता है। किन स्थितियों में उनका किण्वन होता है? क्या यह एक रासायनिक परिवर्तन है या भौतिक ?
उत्तर:
जब अंगर पौधे पर लटके होते हैं तब वे जीवित होते हैं तथा अपनी प्रतिरोधक क्षमता के कारण किण्वन से अपनी सुरक्षा कर सकते हैं लेकिन जब वे पौधे से अलग हो जाते हैं तो बैक्टीरिया पनपने लगते हैं तथा अवायवीय स्थिति में वे किण्वित हो जाते हैं। यह एक रासायनिक अभिक्रिया है।

प्रश्न 11.
पदार्थ x समूह 2 के तत्व का ऑक्साइड है जो सीमेण्ट उद्योग में प्रयुक्त होता है। यह पदार्थ हड्डियों में भी उपस्थित होता है। जब इसकी अभिक्रिया जल से होती है तो यह एक विलयन बनाता है जो लाल लिटमस को नीला कर देता है। X की पहचान कीजिए तथा होने वाली अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
पदार्थ X कैल्सियम ऑक्साइड (CaO) है।
CaO(s) + H2O(l) → Ca(OH)2(aq)

प्रश्न 12.
हम सिल्वर क्लोराइड को गहरे ब्राउन रंग की बोतलों में क्यों रखते हैं?
उत्तर:
सिल्वर क्लोराइड सौर प्रकाश में निम्न अभिक्रिया के अनुसार अपघटित हो जाता है –
2AgCl(s) → 2Ag(s) + Cl2(g) इसलिए सिल्वर क्लोराइड को गहरे ब्राउन रंग की बोतलों में रखा जाता है।

MP Board Class 10th Science Chapter 1 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न अभिक्रियाओं में अज्ञात x एवं y ज्ञात कीजिए –

  1. Pb(NO3)2(aq) + 2KI(aq) → PbI2(x) + 2KNO3(y)
  2. Cu(s) + 2AgNO3(aq) → Cu(NO3)2(aq) + x(s)
  3. Zn(s) + H2SO4(aq) → ZnSO4(x) + H2(y)
  4. CaCO3(s) \(\underrightarrow { x } \) CaO(s) + CO2(g)

उत्तर:

  1. x = (s), y = (aq)
  2. x = 2Ag
  3. x = (aq), y = (g)
  4. x = Heat

प्रश्न 2.
निम्न में कौन परिवर्तन ऊष्माक्षेपी और कौन ऊष्माशोषी है –

  1. फेरस सल्फेट का अपघटन।
  2. सल्फ्यूरिक अम्ल का तनुकरण।
  3. सोडियम हाइड्रॉक्साइड को जल में घोलना।
  4. अमोनियम क्लारोइड को जल में घोलना।

उत्तर:

  1. ऊष्माशोषी।
  2. ऊष्माक्षेपी।
  3. ऊष्माक्षेपी।
  4. ऊष्माशोषी।

प्रश्न 3.
निम्न अभिक्रियाओं में अपचायक पहचानिए –

  1. 4NH3 + 5O2 → 4NO + 6H2O
  2. H2O+ F2 → HF + HOF
  3. Fe2O3 +3CO → 2Fe + 3CO2
  4. 2H2 + O2 → 2H2O

उत्तर:

  1. NH3
  2. H2O क्योंकि F2, HF में अपचयित हो रही है।
  3. CO
  4. H2

प्रश्न 4.
निम्न अभिक्रियाओं में उपचायक पहचानिए –

  1. Pb3O4 + 8HCl → 3PbCl2 + Cl2 + 4H2O
  2. 2Mg + O2 → 2MgO
  3. CuSO4 + Zn → Cu + ZnSO4
  4. V2O5 + 5Ca → 2V + 5CaO
  5. 3Fe + 4H2O → Fe3O4 + 4H2
  6. CuO + H2 → Cu + H2O

उत्तर:

  1. Pb3O4
  2. O2
  3. CuSO4
  4. V2O5
  5. H2O
  6. CuO

प्रश्न 5.
निम्न अभिक्रियाओं के लिए सन्तुलित रासायनिक समीकरण लिखिए –

  1. सोडियम कार्बोनेट समान मोलर सान्द्रता के हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करके सोडियम क्लोराइड एवं सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट देता है।
  2. सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करके सोडियम क्लोराइड एवं जल देता है तथा कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकालता है।
  3. कॉपर सल्फेट पोटैशियम आयोडाइड से अभिक्रिया करके क्यूप्रस आयोडाइड (Cu2I2) का अवक्षेप देता है और पोटैशियम सल्फेट बनाने के साथ आयोडीन गैस निकालता है।

उत्तर:

  1. Na2CO3(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) + NaHCO3(aq)
  2. NaHCO3 (aq) + HCl (aq) → NaCl (aq) + H2O(l) + CO2(g)
  3. 2CuSO4(aq) + 4Kl(aq) → Cu2I2(s) + 2K2SO4(aq) + I2(g)

प्रश्न 6.
निम्न में कौन – सा भौतिक परिवर्तन तथा कौन – सा रासायनिक परिवर्तन हैं?

  1. पेट्रोल का वाष्पीकरण।
  2. LPG का दहन।
  3. किसी लोहे की छड़ को रक्त तप्त करना।
  4. दूध का दही जमना।
  5. ठोस अमोनियम क्लोराइड का ऊर्ध्वपातन।

उत्तर:

  1. भौतिक परिवर्तन।
  2. रासायनिक परिवर्तन।
  3. भौतिक परिवर्तन।
  4. रासायनिक परिवर्तन।
  5. भौतिक परिवर्तन।

प्रश्न 7.
कुछ धातुओं की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया के समय निम्न प्रेक्षण लिये गये

  1. सिल्वर धातु ने कोई परिवर्तन प्रदर्शित नहीं किया।
  2. जब ऐलुमिनियम के साथ अभिक्रिया की गयी तो प्रतिकारी मिश्रण का तापक्रम बढ़ जाता है।
  3. सोडियम धातु के साथ अभिक्रिया तीव्र विस्फोटक होती है।
  4. जब लेड से अभिक्रिया होती है तो बुलबुलों के साथ गैस निकलती है।

उचित कारण देते हुए उक्त प्रेक्षणों को समझाइए।

उत्तर:

  1. सिल्वर धातु तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से कोई क्रिया नहीं करती है।
  2. अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी होने के कारण तापक्रम बढ़ता है।
  3. अभिक्रिया अति विस्फोट इसलिए है क्योंकि यह अति ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।
  4. जब लेड की अभिक्रिया तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से होती है तो बुलबुलों के साथ हाइड्रोजन गैस निकलती है।

प्रश्न 8.
मैग्नीशियम की रिबन जब ऑक्सीजन में जलाई जाती है तो रोशनी के साथ सफेद यौगिक X बनाती है। अब यदि जलती हुई रिबन को नाइट्रोजन के जार में ले जाते हैं तो यह जलती रहती है और एक यौगिक Y बनाती है।

  1. X एवं Y के रासायनिक सूत्र लिखिए।
  2. जब X का जल में विलयन बनाया जाता है तो होने वाली अभिक्रिया का सन्तुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।

उत्तर:

  1. X का रासायनिक सूत्र: MgO
    एवं Y का रासायनिक सूत्र: Mg3N2
  2. MgO(s) + H2O(l) → Mg(OH)2(aq)

प्रश्न 9.
सिल्वर की बनी वस्तुएँ अधिक समय तक खुली छोड़ दी जाती हैं तो प्रायः काली पड़ जाती हैं लेकिन जब ये काली वस्तुएँ टूथपेस्ट के साथ रगड़ी जाती हैं तो पुन: चमकने लगती हैं।

  1. सिल्वर की बनी वस्तुएँ जब अधिक समय तक खुली छोड़ी जाती हैं तो काली क्यों पड़ जाती हैं? इस परिघटना का नाम लिखिए।
  2. बनने वाले काले पदार्थ का नाम लिखिए तथा होने वाली अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण दीजिए।

उत्तर:

  1. सिल्वर जैसी धातुएँ जब अधिक समय तक खुली रखी जाती हैं तो ये नमी (आर्द्रता), अम्ल, ऑक्सीजन एवं अन्य गैसों के सम्पर्क से संक्षारित होने लगती हैं। इस परिघटना को संक्षारण कहते हैं।
  2. वायु में उपस्थित H2S गैस से अभिक्रिया करके सिल्वर धातु सिल्वर सल्फाइड (Ag2S) काला यौगिक बनाती है।
    2Ag(s) + H2S(g) → Ag2S(s) + H2(g)

MP Board Class 10th Science Chapter 1 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न रासायनिक अभिक्रियाओं के सन्तुलित समीकरण लिखिए तथा प्रत्येक स्थिति में अभिक्रिया का प्रकार बताइए
(a) नाइट्रोजन गैस, हाइड्रोजन गैस के साथ उत्प्रेरक की उपस्थिति में 773K तापक्रम पर अभिक्रिया करके अमोनिया गैस बनाती है।
(b) सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन, ऐसीटिक एसिड से अभिक्रिया करके सोडियम ऐसीटेट एवं जल बनाता है।
(c) एथेनॉल को एथेनॉइक अम्ल के साथ सान्द्र H2SO5 की उपस्थिति में गर्म किया जाता है तो एथिल ऐसीटेट बनता है।
(d) एथीन को ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाया जाता है तो कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल बनता है तथा ऊष्मा एवं प्रकाश उत्पन्न होता है।
उत्तर:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 13

प्रश्न 2.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए सन्तुलित समीकरण लिखिए तथा अभिक्रिया का प्रकार भी बताइए

  1. थर्मिट – अभिक्रिया में आयरन (III) ऑक्साइड ऐलुमिनियम से अभिक्रिया करके पिघला हुआ आयरन एवं ऐलुमिनियम ऑक्साइड देता है।
  2. मैग्नेशियम रिबन नाइट्रोजन के वायुमण्डल में जलता है और ठोस मैग्नीशियम नाइट्राइड बनाता है।
  3. जब पोटैशियम आयोडाइड के जलीय विलयन में क्लोरीन गैस प्रवाहित की जाती है तो पोटैशियम क्लोराइड का विलयन एवं ठोस आयोडीन बनती है।
  4. एथेनॉल को हवा में जलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल बनता है तथा ऊष्मा निकलती है।

उत्तर:

  1. Fe2O3(s) + 2Al(s) Al2O3(s) + 2Fe(l) + ऊष्मा
    अभिक्रिया – विस्थापन एवं उपापचयन अभिक्रिया।
  2. 2Mg(s) + N2(g) → Mg2N2(s)
    अभिक्रिया – संयोजन अभिक्रिया।
  3. 2KI(aq) + Cl2(g) → 2KCl(aq) + 2I(s)
    अभिक्रिया – विस्थापन अभिक्रिया।
  4. C2H5OH(l) + 3O2(g) → 2CO2(g) + 3H2O(I) + ऊष्मा
    अभिक्रिया – उपापचयन एवं ज्वलन अभिक्रिया।

प्रश्न 3.
निम्न अभिक्रियाओं में से प्रत्येक के लिए सन्तुलित समीकरण लिखिए एवं उनका वर्गीकरण भी कीजिए –

  1. लेड ऐसीटेट का विलयन, तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करके लेड क्लोराइड एवं ऐसीटिक एसिड का विलयन बनाता है।
  2. शुद्ध एथेनॉल में सोडियम धातु डालने पर सोडियम एथॉक्साइड एवं हाइड्रोजन गैस बनती है।
  3. आयरन (III) ऑक्साइड कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ गर्म करने पर ठोस आयरन बनता है तथा कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है।
  4. हाइड्रोजन सल्फाइड गैस ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके ठोस सल्फर एवं द्रव जल बनता है।

उत्तर:

  1. Pb (CH3COO)2(aq) + 2HCl(aq) → PbCl2(s) + CH3COOH(aq)
    अभिक्रिया – द्वि – विस्थापन अभिक्रिया।
  2. 2Na(s) + 2C2H5OH(l) → 2C2H5ONa + H2(g)
    अभिक्रिया – द्वि – विस्थापन अभिक्रिया।
  3. Fe2O3(s) + 3CO(g) → 2Fe(s) + 3CO2(g)
    अभिक्रिया – उपापचयन अभिक्रिया।
  4. 2H2S(g) + O2(g) → 2S(s) + 2H2O(l)
    अभिक्रिया – उपायचयन अभिक्रिया।

प्रश्न 4.
निम्न रासायनिक अभिक्रियाओं को सन्तुलित कीजिए तथा अभिक्रियाओं का प्रकार बताइए –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 14
उत्तर:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 15

प्रश्न 5.
कॉपर (II) नाइट्रेट के नीले रंग के चूर्ण को एक क्वथन नली में गर्म करने पर काला कॉपर ऑक्साइड, ऑक्सीजन गैस एवं ब्राउन गैस X प्राप्त होती है।

  1. इस अभिक्रिया का एक सन्तुलित समीकरण लिखिए।
  2. ब्राउन गैस X की पहचान कीजिए।
  3. अभिक्रिया के प्रकार की पहचान कीजिए।
  4. गैस X के जलीय विलयन का pH परिसर (सीमा) क्या होगी?

उत्तर:

    1. अभिक्रिया का सन्तुलित समीकरण
      MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 16
    2. अभिक्रिया में निकलने वाली ब्राउन गैस नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) है।
    3. यह अभिक्रिया अपघटन अभिक्रिया है।
      चूँकि NO2 एक अधातु ऑक्साइड है। इसलिए इसका जलीय विलयन अम्लीय होगा। अतः इसके pH मान का परिसर 7 से कम होगा।

प्रश्न 6.
निम्न गैसों की पहचान के लिए परीक्षण दीजिए –

  1. CO2
  2. SO2
  3. O2
  4. H2

उत्तर:
1. CO2 का परीक्षण:
जब CO2 गैस को चूने के पानी में प्रवाहित करते हैं तो अविलेय कैल्सियम कार्बोनेट बनने से चूने का पानी दूधिया हो जाता है और अधिकता में प्रवाहित करने पर विलेय कैल्सियम हाइड्रोजन कार्बोनेट बनने के कारण दूधिया रंग गायब हो जाता है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 17
2. SO2 का परीक्षण:
जब SO2 गैस को अम्लीय पोटैशियम परमैगनेट विलयन में प्रवाहित किया जाता है तो उसका जामुनी रंग उड़ जाता है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 18
3. O2 का परीक्षण:
जब हम ऑक्सीजन के जार के पास जलती तीली या मोमबत्ती लाते हैं तो वह और तेजी से जलने लगती है क्योंकि ऑक्सीजन जलने में सहायक होती है।
4. H2 का परीक्षण: जब हम जलती हुई तीली हाइड्रोजन के जार के पास लाते हैं तो वह फक – फक की आवाज के साथ जलती है।

प्रश्न 7.
क्या होता है जबकि –

  1.  जिंक धातु का एक टुकड़ा कॉपर सल्फेट के विलयन में डालते हैं?
  2. ऐलुमिनियम धातु का एक टुकड़ा तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डाला जाता है।
  3. सिल्वर धातु का एक टुकड़ा कॉपर सल्फेट विलयन में डाला जाता है। यदि अभिक्रिया होती है तो उसका सन्तुलित रासायनिक समीकरण भी लिखिए।

उत्तर:
1. जब हम जिंक धातु का टुकड़ा कॉपर सल्फेट के नीले विलयन में डालते हैं तो विलयन का रंग उड़ जाता है क्योंकि जिंक कॉपर का विस्थापन करके रंगहीन जिंक सल्फेट का विलयन बनाती है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 19
2. जब ऐलुमिनियम धातु का कोई टुकड़ा तनु हाइड्रोक्लोरिक एसिड में डालते हैं तो ऐलुमिनियम अम्ल से हाइड्रोजन गैस को विस्थापित कर देती है तथा ऐलुमिनियम क्लोराइड का रंगहीन विलयन बनाती है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 20
3. जब सिल्वर धातु के एक टुकड़े को कॉपर सल्फेट के विलयन में डाला जाता है तो कोई भी अभिक्रिया नहीं होती।
Ag(s) + CuSO4(aq) → कोई अभिक्रिया नहीं।

प्रश्न 8.
क्या होता है जबकि दानेदार जिंक की अभिक्रिया निम्न के तनु विलयनों के साथ की जाती है – H2SO4, HCl, HNO3, NaCl एवं NaOH.
यदि अभिक्रिया होती है तो उसका रासायनिक समीकरण भी लिखिए।
उत्तर:
दानेदार जिंक की अभिक्रियाएँ –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 21

प्रश्न 9.
सोडियम सल्फाइट के जलीय विलयन में एक बूंद बेरियम क्लोराइड विलयन की मिलाने पर सफेद अवक्षेप प्राप्त होता है।

  1. होने वाली अभिक्रिया का सन्तुलित समीकरण लिखिए।
  2. इस अवक्षेपण अभिक्रिया के लिए दूसरा नाम क्या दिया जा सकता है?
  3. अभिक्रिया मिश्रण में तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाने पर सफेद अवक्षेप गायब हो जाता है, क्यों?

उत्तर:
1. संतुलित रासायनिक समीकरण:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 22
2. इस अवक्षेपण अभिक्रिया का दूसरा नाम द्वि – विस्थापन है।

3. तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बेरियम सल्फाइट का अपघटन करके सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) गैस देता है जिसकी गंध जलते गंधक की तरह है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 23
चूँकि BaCl2 जल में विलेय है इसलिए अवक्षेप गायब हो जाता है।

प्रश्न 10.
आपको दो बर्तन उपलब्ध हैं एक कॉपर का बना तथा दूसरा ऐलुमिनियम का बना। आपको तनु HCl, तनु HNO3, ZnCl2 के विलयन एवं जल (H2O) भी उपलब्ध हैं। इन विलयनों को ऊपर के किस बर्तन में रखा जा सकता है?
उत्तर:
(1) जब विभिन्न विलयनों को कॉपर के बर्तन में रखा जाता है तो –

  1.  तनु HCl:
    तनु HCl से कॉपर कोई अभिक्रिया नहीं करता है। इसलिए कॉपर के बर्तन में तनु HCl विलयन को रखा जा सकता है।
  2. तनु HNO3:
    तनु HNO3 कॉपर बर्तन से क्रिया करता है। इसलिए कॉपर के बर्तन में तनु HNO3 विलयन नहीं रखा जा सकता।
  3. तनु ZnCl2 विलयन:
    तनु ZnCl2 से कॉपर कोई अभिक्रिया नहीं करता। इसलिए कॉपर के बर्तन में तनु ZnCl2 विलयन रखा जा सकता है।
  4. H2O (जल):
    जल, कॉपर में अभिक्रिया नहीं करता। इसलिए कॉपर के बर्तन में जल रखा जा सकता है।

(2) जब विभिन्न विलयनों को ऐलुमिनियम के बर्तन में रखा जाता है तो –

  1. तनु HCl:
    तनु HCl से ऐलुमिनियम अभिक्रिया करके लवण बनाता है तथा हाइड्रोजन गैस निकालता है। इसलिए तनु HCl को ऐलुमिनियम के बर्तन में नहीं रख सकते।
  2. तनु HNO3:
    ऐलुमिनियम तनु HNO3 से अपचयित हो जाता है। इसलिए तनु HNO3 को ऐलुमिनियम के बर्तन में नहीं रख सकते।
  3. तनु ZnCl2 विलयन:
    ऐलुमिनियम ZnCl2 विलयन के साथ अभिक्रिया करता है। इसलिए ZnCl2 के विलयन को ऐलुमिनियम के बर्तन में नहीं रख सकते।
  4. H2O (जल): गर्म या ठंडा जल ऐलुमिनियम से अभिक्रिया नहीं करता। इसलिए जल को ऐलुमिनियम के बर्तन में रख सकते हैं।

MP Board Class 10th Science Solutions

MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 7 वह देश कौन-सा है?

In this article, we will share MP Board Class 10th Hindi Book Solutions Chapter 7 वह देश कौन-सा है? (पंडित रामनरेश त्रिपाठी) Pdf, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 7 वह देश कौन-सा है? (पंडित रामनरेश त्रिपाठी)

वह देश कौन-सा है? पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

वह देश कौन-सा है? लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि ने देश का मकट हिमालय को क्यों कहा है?
उत्तर-
कवि ने देश का मुकुट हिमालय को कहा है। यह इसलिए कि वह सर्वाधिक ऊँचा होकर मस्तक स्वरूप दिखाई देता है।

वह देश कौन-सा है कविता Question Answer प्रश्न 2.
राष्ट्र की सहायता को उजागर करने वाले पौराणिक महानायकों का उल्लेख कीजिए। .
उत्तर-
राष्ट्र की सहायता को उजागर करने वाले पौराणिक महानायक हैं-श्री राम, लक्ष्मण, भरत आदि हैं।

प्रश्न 3.
भारत के प्राकृतिक सौंदर्य को कवि ने स्वर्ग के सदृश्य क्यों कहा है?
उत्तर-
भारत के प्राकृतिक सौंदर्य को कवि ने स्वर्ग के सदृश्य कहा है। यह इसलिए कि इसकी प्राकृतिक सुंदरता में स्वर्ग की सुंदरता, सुख और आनंद का रोचक अनुमान हो रहा है।

MP Board Solutions

Vah Desh Kaun Sa Hai Question Answer प्रश्न 4.
कवि ने भारत की कौन-कौन-सी विशेषताएँ बताई हैं?
उत्तर-
कवि ने भारत देश की निम्नलिखित विशेषताएँ बताई हैं-

  1. भारत देश में सुख स्वर्ग के समान है।
  2. हिमालय भारत देश का मुकुट है।
  3. भारत देश की नदियाँ अमृत की धारा बहा रही हैं।
  4. भारत देश की धरती अनंत धन से लदी-भरी पड़ी है।
  5. भारत ने ही संसार के लोगों को सबसे पहले ज्ञान दिया।

प्रश्न 5.
‘जिसका चरण निरंतर रत्नेश धो रहा है, से कवि का क्या आशय है?
उत्तर-
‘जिसका चरण निरंतर रत्नेश धो रहा है’ से कवि का आशय है-भारत देश विश्व का ऐसा महान् देश है, जिसकी महानता को प्रकृति भी स्वीकारती है। उसको मानप्रतिष्ठा देने के लिए ही समुद्र बार-बार उसके चरणों को स्पर्श कर फूले नहीं समाता है।

वह देश कौन-सा है? दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कविता के आधार पर भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर-
देखें कविता का सारांश।

Vah Desh Konsa Hai Hindi Kavita Question Answer प्रश्न 2.
प्रकृति ने हमें क्या-क्या प्रदान किया है? बताइए।
उत्तर-
प्रकृति ने हमें स्वर्ग के समान-सुख, निरंतर चरण धोने वाला समुद्र, मुकुट-स्वरूप हिमालय अमृत की धारा बहाने वाली नदियाँ, बड़े रसीले, फल-कंद, नाज-मेवे, दिन-रात हँस रहे सुंदर और सुगंधित फूल, मैदानों-पहाड़ों और वनों में लहकती हई हरियालियाँ और अनंत धन से लदी-भरी हुई धरती प्रदान किया है।

प्रश्न 3.
‘कवि ने भारत को संसार का शिरोमणि कहा है।’ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
‘कवि ने भारत को संसार का शिरोमणि कहा है।’ यह इसलिए कि भारत की जो विशेषताएँ हैं, वह संसार के और किसी देश की नहीं हैं।

प्रश्न 4.
‘वह देश कौन-सा है’ कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर-
देखिए कविता का सारांश।

MP Board Solutions

Upyukt Panktiyon Mein Kis Desh Ki Baat Ho Rahi Hai प्रश्न 5.
निम्नलिखित पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए
(क) जिसके सुगंधवाले ………………….. कौन-सा है?
(ख) निष्पक्ष न्यायकारी ………………….. कौन-सा है?
(ग) जिसके अनंत ………………….. कौन-सा है?
उत्तर-
देखें व्याख्या भाग।

वह देश कौन-सा है? भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
‘नदियाँ जहाँ सुधा की धारा बहा रही है’ इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पंक्ति के द्वारा यह भाव स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि भारत देश संसार का अनोखा देश है। वह संसार का शिरोमणि है। वह अमृतमय जीवन है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम शब्द लिखिए :
अँगने, रात, भाई, दिन, सपूत, धरती।
उत्तर-
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 7 वह देश कौन-सा है img-1

वह देश कौन-सा है? योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
लक्ष्मण और भरत के भात-प्रेम की चर्चा कक्षा में कीजिए।

Vah Desh Kaun Sa Hai Question Answer Class 6 प्रश्न 2.
भारत के मानचित्र में पर्वत और नदियाँ अनुरेखित कीजिए।

प्रश्न 3.
भारत में शिक्षा के केंद्र कौन-कौन से थे? जानकारी एकत्र कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

वह देश कौन-सा है? परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

वह देश कौन-सा है? अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘वह देश कौन-सा है?’ कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
प्रस्तुत कविता में कवि ने भारत देश के अतीत का गौरव गान किया है। कवि ने इस देश की गरिमा और वैभव का प्रभावशील शब्दों में वर्णन किया है। कदि के अनुसार उत्तर में हिमालय इसका मुकुट है तो दक्षिण में समुद्र इसके चरणों को धो रहा है। इसकी नदियाँ, इसके कंदमूल-फल, अनाज, मैदान, पहाड़ सभी आकर्षक हैं। यह देश सम्पूर्ण संसार को अपने आचरण से शिक्षा देने वाला पहला देश रहा है। यह विभिन्न आदर्शों की प्रतिष्ठा का देश है। श्रीराम की पितृभक्ति, त्याग-भावना तथा लक्ष्मण और भरत के भ्रातृत्व ने उच्चादर्शों की धूम रही है। देश की प्रकृति-देश की भौतिक समृद्धि और देश की आचरणशील गरिमा का उल्लेख कवि ने इस कविता में प्रश्नात्मक शैली में किया है। प्रश्न और उत्तर की समन्वित शैली इस कविता के शिल्प-सौंदर्य को बढ़ा देती है।

वह देश कौन-सा है कविता Class 6 प्रश्न 2.
कवि ने किन पंक्तियों के द्वारा भारत देश को विश्व का शिरोमणि और पहला देश कहा है?
उत्तर-
कवि ने निम्नलिखित पंक्तियों के द्वारा भारत देश को विश्व को शिरोमणि और पहला देश कहा है जिसके अनंत धन से धरती भरी पड़ी है, संसार का शिरोमणि, वह देश कौन-सा है? पृथ्वी निवासियों को जिसने प्रथम जगाया शिक्षित किया सुधारा, वह देश कौन-सा है?

प्रश्न 3.
भारत देश के त्यागशील वीर चरित्रों का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
भारत देश के त्यागशील वीर चरित्र हैं-राम, लक्षण, भरत आदि। राम ने अपने पिता का आदेश पाते ही अपने विशाल साम्राज्य को तिनके के समान त्याग दिया। लक्ष्मण-भरत के त्यागशील चरित्र बिलकुल निःस्वार्थ भाव से भरे हुए थे। वे वास्तव में शुद्ध और प्रेम भाई थे। उनके समान और कोई हुआ ही नहीं।

MP Board Solutions

Vah Desh Kaun Sa Hai Question Answer Class 5 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्दों के चयन से कीजिए।
1. भारत प्रकृति की ……………….. में बसा है। (कोख, गोद)
2. हिमालय ……………….. का मुकुट है। (भारत, संसार)
3. भारत संसार का ……………….. देश है। (सर्वश्रेष्ठ, शिरोमणि)
4. भारत संसार का ……………….. है। (गुरु, अग्रदूत)
5. श्रीराम सर्वश्रेष्ठ ……………… थे। (मातृभक्त, पितृभक्त)
उत्तर-
1. गोद,
2. भारत,
3. शिरोमणि,
4. गुरु,
5. पितृभक्त।

प्रश्न 3.
दिए गए कथनों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए :
1. पंडित रामनरेश त्रिपाठी का जन्म हुआ था-
1. 1890 में,
2. 1891 में,
3. 1889 में,
4. 1892 में।
उत्तर-
(3) 1889 में,

2. पंडित रामनरेश त्रिपाठी की प्रमुख रचना है-
1. कौमुदी,
2. पथिक,
3. स्वप्न,
4. आदर्श।
उत्तर-
(2) पथिक,

3. पंडित रामनरेश त्रिपाठी का निधन हुआ था-
1. 1962 में,
2. 1960 में,
3. 1961 में,
4. 1959 में।
उत्तर-
(1) 1962 में,

4. रामनरेश त्रिपाठी हैं
1. प्रेमचंद युग के,
2. द्विवेदी युग के,
3. भारतेंदु युग के,
4. आधुनिक युग के।
उत्तर-
(2) द्विवेदी युग के,

5. वह देश कौन-सा है? कविता में है-
1. सौंदर्य चित्रण,
2. प्रेम चित्रण,
3. राष्ट्र-प्रेम,
4. समाज-चित्रण।
उत्तर-
(3) राष्ट्र-प्रेम।

प्रश्न 4.
सही जोड़े मिलाइए।
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 7 वह देश कौन-सा है img-2
उत्तर-
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 7 वह देश कौन-सा है img-3

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. भारत की नदियाँ अमृत की धारा बहाती हैं।
2. उत्तर में समुद्र भारत के चरणों को धो रहा है।
3. भारत ने ही संसार को सबसे पहले ज्ञान दिया।
4. लक्ष्मण-भरत निःस्वार्थ शुद्ध प्रेमी भाई थे।
5. भारत के सिवाय और भी देश हैं।
उत्तर-
1. सत्य,
2. असत्य,
3. सत्य,
4. सत्य,
5. असत्य।

MP Board Solutions

वह देश कौन-सा है प्रश्न उत्तर Class 5 प्रश्न 6.
निम्नलिखित कथनों का उत्तर एक शब्द में दीजिए।
1. मनमोहन प्रकृति की गोद में कौन बसा है?
2. भारत मुकुट कौन है?।
3. भारत के मैदानों, पहाड़ों और जंगलों में क्या लहकती हैं?
4. भारत की धरती किस धन से भरी पड़ी है?
5. भारत देश की महानता को कौन बता सकेंगे?
उत्तर-
1. भारत,
2. हिमालय,
3. हरियालियाँ,
4. अनंत,
5. शिक्षित।

वह देश कौन-सा है? लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
भारत में सुख किसके समान है?
उत्तर-
भारत में सुख स्वर्ग के समान है।

Use Desh Ke Charanon Ko Kaun Dho Raha Hai प्रश्न 2.
भारत में दिन-रात कौन हँसते रहते हैं?
उत्तर-
भारत में दिन-रात सुगंधित, सुंदर और प्यारे फूल हँसते रहते हैं।

प्रश्न 3.
किसने क्या परित्याग किया?
उत्तर-
श्री राम ने अपने पिता के आदेश से विशाल साम्राज्य का तिनके के समान परित्याग किया।

प्रश्न 4.
लक्ष्मण-भरत किस प्रकार के भाई थे?
उत्तर-
लक्ष्मण-भरत निःस्वार्थ शुद्ध प्रेमी भाई थे।

वह देश कौन-सा है? कवि-परिचय

जीवन-परिचय-रामनरेश त्रिपाठी द्विवेदी युग की राष्ट्रीय सांस्कृतिक काव्य-धारा के प्रमुख कवियों में से हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कोइरीपुर गाँव में सन् 1881 में हुआ था। इनके पिता रामायण प्रेमी थे। उनका गहरा प्रभाव इन पर पड़ा।

त्रिपाठी जी ने हिंदी, बंगला और अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया और सामाजिक तथा राष्ट्रीय कार्यों में योग देने लगे। इन्हें भ्रमण में बहुत रुचि थी। भारतीय रियासतों के अनेक राजा-महाराजाओं से इनकी मित्रता थी। उन्हीं के साथ ही वे भी भ्रमण के लिए जाया करते थे। उन्होंने 20 हजार किलोमीटर पैदल यात्रा भी की थी। इस यात्रा के दौरान उन्होंने हज़ारों ग्राम-गीतों का संकलन किया था। उनका सन् 1962 में निधन हो गया।

रचनाएं-त्रिपाठी जी की रचनाएं हैं-पथिक, मिलन और स्वप्न (खंड काव्य), मानसी (स्फुट कविता संग्रह), कविता-कौमुदी, गाम्यगीत (सम्पादित), गोस्वामी तुलसीदास और उनकी कविता (आलोचना)। इनकी रचनाओं में नवीन आदर्श और नवयुग का संकेत है।

भाव पक्ष-कविवर रामनरेश त्रिपाठी का भाव पक्ष सरस किंतु प्रेरक है। उसमें सजीवता है। प्रवाहमयता है, तो प्रभावमयता भी है। रामनरेश त्रिपाठी प्रकृति के चितेरे हैं। इसलिए उनकी कविताओं के भाव स्वस्थ और सुंदर हैं।

MP Board Solutions

कला पक्ष-वे अपनी रचनाओं में देशभक्ति की भावनाओं का समावेश बड़ी कुशलता से करते हैं। उनकी भाषा सहज-सरल खड़ी बोली है पर वे शुद्ध संस्कृत शब्दों के प्रति आग्रही नहीं हैं। उर्दू शैली के प्रचलित शब्दों का भी उन्होंने खुलकर प्रयोग किया है।

साहित्य में स्थान-साहित्य के क्षेत्र में त्रिपाठी जी ने विविध रूपों में महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने हिंदी, उर्दू, संस्कृत और बँगला के प्रतिनिधि काव्य-संकलनों का संपादन किया। बाल कथा कहानी के नाम से उन्होंने रोचक और शिक्षाप्रद कहानियों के कई संग्रह बच्चों के लिए तैयार किए। उन्हें हिंदी बाल-साहित्य का जनक कहना गलत न होगा।

वह देश कौन-सा है? कविता का सारांश

प्रस्तुत कविता ‘वह देश कौन-सा है?’ पंडित रामनरेश त्रिपाठी की देश-भक्ति के ऊँचे स्वर को जगाने वाली सरस कविता है। इस कविता में भारत देश की प्राकृतिक संपदा, सम्पन्नता, सुंदरता और रोचकता का भरपूर दर्शन और ज्ञान देने का सार्थक प्रयास किया गया है। कवि के अनुसार भारत देश मनमोहिनी प्रकृति की गोद में स्वर्ग के समान सुखों को फैलाए हुए है। समुद्र उसके चरण को धोता रहता है। हिमालय उसका मुकुट है। उसकी नदियाँ अमृत की धारा बहाती हैं। उनकी वनस्पतियाँ रस भरे फल-कंद से लदी हुई हैं। रात-दिन खिलते हुए मुसकराते रहते हैं। चारों ओर हरियाली है और आनंद उमड़ रहा है। उसकी धरती अनंत धन से भरी पड़ी है। वह संसार का शिरोमणि है। उसने सारे संसार के लोगों को जगाकर शिक्षित किया और सुधारा भी। इस देश में ही राम जैसे आदर्श पुरुष हुए। जिन्होंने अपने पिता के आदेश से तृण के समान स्वराज्य छोड़ दिया। इस देश में ही लक्ष्मण-भरत जैसे शुद्ध प्रेमी भाई थे। इस प्रकार भारत देश के सिवाय और कोई देश महान् और श्रेष्ठ नहीं है।

वह देश कौन-सा है? संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

(1) मन-मोहिनी प्रकृति की जो गोद में बसा है,
सुख स्वर्ग सा जहाँ है, वह देश कौन-सा है,
जिसका चरण निरंतर रत्नेश धो रहा है,
जिसका मुकुट हिमालय, वह देश कौन-सा है?
नदियाँ जहाँ सुधा की धारा बहा रही हैं,
सींचा हुआ सालोना, वह देश कौन-सा है?

शब्दार्थ-निरंतर-हमेशा। रत्नेश-समुद्र। सुधा-अमृत। सलोना-सुंदर।

संदर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिंदी सामान्य’ में संकलित पंडित रामनरेश त्रिपाठी विरचित कविता ‘वह देश कौन-सा है?’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत कवितांश में भारत देश की सुंदरता और छटा का चित्र खींचते हुए कहा है कि-

व्याख्या-जो मनमोहक प्रकृति की गोद में विराजमान है। जहाँ स्वर्ग के समान सुख फैला हुआ है, वह देश कौन-सा है, अर्थात् वह देश भारत ही है। जिसका चरण हमेशा समुद्र धोता रहता है और जिसका मुकुट हिमालय है, वह देश कौन-सा है; अर्थात् वह देश भारत ही है। जहाँ नदियाँ अमृत की धारा बहा रही हैं और जिसका सलोना सींचा हुआ है, वह देश कौन-सा है? अर्थात् वह देश भारत ही है।

विशेष-
1. भाषा सरल है,
2. विचारात्मक शैली है।

MP Board Solutions

सौन्दर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर भाव-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश में भारत देश की अद्भुत प्राकृतिक छटा का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण किया गया है। सम्पूर्ण भाव-चित्रण सरस और रोचक होने के साथ-साथ ज्ञानवर्द्धक और प्रेरक भी है। इस प्रकार इस पद्यांश का भाव-सौंदर्य प्रभावशाली है।

शिल्प-सौंदर्य

Manmohini Prakriti Ki Jo God Mein Basa Hai प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश की भाषा-भावों के अनुरूप है। शब्द-चयन सरल और सुबोध है। शैली वर्णनात्मक और चित्रात्मक दोनों ही है। बिम्ब-प्रतीक यथा-स्थान हैं।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का आशय लिखिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश में कवि ने भारत देश की सुंदरता और सम्पन्नता का चित्रण किया है। इसके द्वारा उसने देशवासियों के सोए हुए देश को जगाने का प्रयास किया है। इससे कवि का स्वदेश प्रेम का आशय स्पष्ट हो रहा है।

(2) जिसके बड़े रसीले फल-कंद नाज मेवे,
सब अंगने सज हैं, वह देश कौन-सा है?
जिसके सुगंधवाले सुंदर प्रसून प्यारे,
दिन-रात हँस रहे हैं, वह देश कौन-सा है?
मैदान-गिरि-वनों में हरिलियाँ लहकतीं,
आनंदमय जहाँ है, वह देश कौन-सा है?

शब्दार्थ-रसीले-रसभरे। प्रसून-फूल। गिरि-पहाड़। संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-पूर्ववत्।

व्याख्या-जिसके फल-कंद और नाज-मेवे बड़े ही रसीले हैं। सब अँगने सजे हैं। वह देश कौन-सा है? अर्थात् वह देश भारत ही है। जिसके सुगंधित और सुंदर फूल बड़े ही प्यारे-प्यारे लगते हैं। इस प्रकार के दिन-रात हँसते रहते हैं। वह ऐसा कौन-सा देश है? अर्थात् वह देश भारत ही है। जिसके मैदान, पहाड़ और वनों में भी हरियाली बिछी हुई दिन-रात लहकती रहती हैं और जहाँ आनंद-ही-आनंद का साम्राज्य है, वह देश कौन-सा है? अर्थात् वह देश भारत ही है।

विशेष-
1. भाव आकर्षक हैं।
2. इससे देश-भक्ति की प्रेरणा मिलती है।

सौंदर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर भाव-सौंदर्य

वह देश कौन-सा है कविता Question Answer Class 6 प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौंदर्य आकर्षक और भावप्रद है। भाव धारा प्रवाह हैं जो देश-भक्ति में डूबने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश की भाषा, शैली आकर्षक है। तुकान्त शब्द-योजना से लय और संगीत की रूपरेखा देखते ही बनती है। चित्रमयी शैली विधान मन को छू रही है तो शृंगार का प्रवाह अधिक जोर मार रहा है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

Is Desh Ke Charanon Ko Kaun Dho Raha Hai प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश के द्वारा कवि ने भारत देश को दुनिया का अधिक संपन्न और सरस देश चित्रित करने का प्रयास किया है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता और परिपूर्णता भला किसका मन नहीं मोह लेती है, अर्थात् सबको अपनी ओर खींच लेती है, इस तथ्य को उजागर करने का कवि प्रयास धन्य है।

3. जिसके अनंत धन से धरती भरी पड़ी है,
संसार का शिरोमणि, वह देश कौन-सा है?
पृथ्वी निवासियों को जिसने प्रथम जगाया,
शिक्षित किया सुधारा, वह देश कौन-सा है?
छोड़ा स्वराज्य तृणवत् आदेश से पिता के,
श्रीराम थे जहाँ पर, वह देश कौन-सा है?

शब्दार्थ-अनंत-जिसका अंत न हो। धरती-पृथ्वी। शिरोमणि-सर्वोच्च; सर्वश्रेष्ठ। तृणवत्-तृण के समान।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-पूर्ववत्।

व्याख्या-जिसकी धरती अनंत धन से लदी-भरी पड़ी है। जो संसार का शिरोमणि है। वह कौन-सा देश है; अर्थात् वह देश भारत ही है। जिसने सारे संसार को सबसे पहले जगाया; अर्थात् ज्ञान प्रदान किया। जिसने संसार के सभी लोगों का मार्ग-दर्शन किया। वह ऐसा देश कौन-सा है? अर्थात् वह देश भारत ही है। जिसने अपने पिता का आदेश पाते ही तिनके समान विशाल साम्राज्य का परित्याग किया। ऐसे श्री राम जहाँ पर थे, वह ऐसा देश कौन-सा है? अर्थात् वह देश भारत ही है।

विशेष-
1. भाव सजीव है।
2. इससे देश-भक्ति की भावना जग रही है।

MP Board Solutions

सौन्दर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर भाव-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश में कवि ने भारत देश के गौरवपूर्ण स्वरूप का जो चित्रांकन किया है। वह इतना भावपूर्ण और रोचक है कि उसे देखते ही बनता है। भावों की योजना अधिक सरल और सुस्पष्ट होने के कारण सराहनीय है।

शिल्प-सौंदर्य

वह देश कौन-सा है प्रश्न उत्तर Class 5 प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश की भाषा और शैली प्रशंसनीय है। भाषा की शब्दावली बोधगम्य है। लय और संगीत की योजना के लिए आई हुई तुकान्त शब्दावली के प्रयोग आकर्षक रूप में हैं।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का मुख्य भाव लिखिए।
उत्तरं-
उपर्युक्त पद्यांश में कवि ने यह भाव व्यक्त करना चाहा है कि भारत देश महान है। उसका अतीत गौरवपूर्ण है। वह प्रेरक रूप में है। इस प्रकार यह अधिक आकर्षक होने के साथ-ज्ञानवर्द्धक रूप में है, जो कवि का मुख्योद्देश्य है।

(4) निःस्वार्थ शुद्ध प्रेमी, भाई भले जहाँ थे,
लक्ष्मण-भरत सरीखे, वह देश कौन-सा है?
निष्पक्ष न्यायकारी, जन जो पढ़े-लिखे हैं,
वे सब बता सकेंगे, वह देश कौन-सा है?
चालीस कोटि भाइ, सेवक सपूत जिसके,
भारत सिवाय दूजा, वह देश कौन-सा है?

शब्दार्थ-निःस्वार्थ-बिना स्वार्थ के। सरीखे-समान। जन-मनुष्य। कोटि-करोड़। सिवाय-दूसरा।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-पूर्ववत्।

व्याख्या-जहाँ पर लक्ष्मण-भरत के समान निःस्वार्थ शुद्ध प्रेमी भाई थे। वह कौन-सा देश है; अर्थात् वह भारत देश ही है। जो लोग निष्पक्ष न्याय करने वाले पढ़े-लिखे हैं, वही यह बता सकते हैं कि वह ऐसा कौन-सा देश है; अर्थात् वह देश भारत ही है। जिस देश के चालीस करोड़ भाई-बंधु-सेवक और सपूत हैं, वह भारत के सिवाय और कौन हो सकता है। अर्थात् वह देश भारत ही हो सकता है। विशेष- 1. आजादी से पहले भारत देश की दशा का चित्रांकन है।

2. भारतीयों में देश-प्रेम की भावना भरने का प्रयास किया गया है। सौन्दर्य-बोध पर आधारित प्रश्नोत्तर भाव-सौंदर्य

वह देश कौन-सा है कविता Class 6 प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौंदर्य लिखिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश की भावधारा सरल और सपाट है। भारत देश की महानता का विश्वसनीय उल्लेख मन को छू रहा है। संसार के दूसरे देशों से इसके अनूठा होने के भाव अपने-आप प्रकट हो रहे हैं।

शिल्प-सौंदर्य

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश की भाव-योजना के अनुसार ही शिल्प-योजना है। भाषा की शब्दावली प्रचलित शब्दों की है जिनमें विविधता और अनेक रूपता है। शैली अलंकृत है। इसके लिए कवि ने अनुप्रास और रूपक अलंकारों का चुनाव किया है। फलस्वरूप पूरा पद्यांश हृदयस्पर्शी बन गया है।

विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त पद्यांश का आशय लिखिए।
उत्तर-
उपर्युक्त पद्यांश के द्वारा कवि ने यह प्रयास किया है कि भारतवासी अपने देश के अतीत को न केवल जाने-समझें अपितु उसके मान-सम्मान के लिए अपना तन-मन सब कुछ समर्पित कर सच्चे देश-भक्त के स्वरूप को प्रस्तुत कर सकें।

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 17 चाणक्यनीतिः (पद्यम्) (चाणक्यनीतितः)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 17 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) रविः केन तपते? (सूर्य को कौन तपाता है?)
उत्तर:
सत्येन (सत्य के द्वारा)

(ख) दरिद्रता कया विरानंते? (दरिद्रता किससे सुशोभित होती हैं?)
उत्तर:
धीरतया (धैर्य धारण करने के द्वारा)

MP Board Solutions

(ग) कर्मानुसारिणी का? (कर्म का अनुसरण कौन करती है?)
उत्तर:
बुद्धिः (बुद्धि)

(घ) केन शर्वरी आह्लादिता? (किससे रात खुश होती है?)
उत्तर:
चन्द्रेण (चन्द्रमा से)

(ङ) कुरूपता कया विराजते? (कुरूपता किससे सुशोभित होती है?)
उत्तर:
शीलतया (सदाचरण से)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए)
(क) वाचा किं न प्रकाशयेत्? (वाणी से क्या प्रकट नहीं करना चाहिए?)
उत्तर:
मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा न प्रकाशयेत्। (मन से सोचे हुए काम को वाणी से प्रकट नहीं करना चाहिए।)

(ख) कैः पुत्राः विविधैः शीलैः नियोज्याः? (किसके द्वारा पुत्रों को विभिन्न सदाचरणों द्वारा लगाना चाहिए?)
उत्तर:
बुधैः पुत्राः विविधैः शीलैः नियोज्याः।। (विद्वानों के द्वारा पुत्र को विभिन्न सदाचरणों द्वारा लगाना चाहिए!)

(ग) कः सर्ववस्तुषु हीनः? (कौन सब वस्तुओं में हीन है?)
उत्तर:
विद्यारत्नेन हीनः सर्ववस्तुषु हीनः। (विद्या रूपी रत्न से हीन सब वस्तुओं में हीन है।)

(घ) कुलीनः दीनोऽपि कान् न त्यजति? (दीन होते हुए भी कुलीन क्या नहीं छोड़ता है?)
उत्तर:
कुलीनः दीनोऽपि शीलगुणान् न त्यजति। (दीन होते हुए भी कुलीन शीलगुणों को नहीं छोड़ते।)

(ङ) छिन्नोऽपि चन्दनतरुः किं न जहाति? (कटने पर भी चन्दन का पेड़ क्या नहीं छोड़ता?)
उत्तर:
छिन्नोऽपि चन्दनतरुः गन्धं न जहाति। (कटने पर भी चन्दन का पेड़ खुशबू नहीं छोड़ता है।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिर-)
(क) सत्येन सर्वं कथं प्रतिष्ठितम् ? (सत्य से सब कैसे स्थित है?)
उत्तर:
पृथ्वी सत्येन धार्यते, रविः सत्येन तपते, वायुः सत्येन वाति। अनेन प्रकारेण सर्वं सत्येन प्रतिष्ठितम्। (सत्य के द्वारा पृथ्वी धारण की जाती है, सूर्य उष्णता प्रदान करता है, वायु बहती है। इस प्रकार सब सत्य के द्वारा ही स्थित है।)

(ख) किमर्थं बुधैः पुत्राः विविधैः शीलैः नियोज्याः? (किसलिए विद्वानों के द्वारा पुत्रों को शील आचरण में लगाना चाहिए?)
उत्तर:
बुधैः पुत्राः विविधैः शीलैः नियोज्या यतो हि शीलसम्पन्नाः नीतिज्ञाः कुलपूजिताः भवन्ति। (विद्वानों के द्वारा पुत्रों को विभिन्न सदाचरणों द्वारा लगाना चाहिए क्योंकि सदाचार से युक्त नीतिशास्त्र के ज्ञाता कुल में पूजे जाते हैं।)

MP Board Solutions

(ग) पदे-पदे केषां सम्पदः सुः? (कदम-कदम पर किन को खुशियाँ होती हैं?)
उत्तर:
येषां सतां हृदये परोपकरणं जागति, तेषां पदे-पदे सम्पदः स्युः। (जिन सज्जनों के मन में परोपकार की भावना जागृत रहती है, उनके कदम-कदम पर खुशियाँ होती हैं।)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत (दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(गूढम्, सत्ये, धनहीनो, लीलाम्, सविद्यानाम्)
(क) सर्वं …………….. प्रतिष्ठितम्।
मन्त्रेण रक्षयेद् ……………..।
(ग) को विदेशः ……………..।
(घ) …………….. न हीनश्च।
(ङ) वृद्धोऽपि वारणपतिर्न जहाति ………….
उत्तर:
(क) सत्ये
(ख) गूढम्
(ग) सविद्यानाम्
(घ) धनहीनो
(ङ) लीलाम्

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से जोडिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 1
उत्तर:
(क) 3
(ख) 4
(ग) 2
(ड) 1

प्रश्न 6.
शुन्द्रवाक्यानां समक्षम् जाम् अशुद्धवाक्यानां समक्षम् “न” इति तिखत-)
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए)
(क) सत्येन वायुः वाति।
(ख) प्रियवादिना कोऽपि न परः।
(ग) कदन्नता उष्णतया न विराजते।
(घ) कर्मायत्तं पुंसां फलम्।
(ड) छिन्नः चन्दनतरुः गन्धं जहाति।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) आम्
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न।

प्रश्न 7.
अधोलिखितशब्दानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनञ्च लिखत
(नीचे लिखे शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति और वचन लिखिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 9

प्रश्न 8.
निम्नलिखितक्रियापदानां धातुं लकारं पुरुषं ववनं च लिखत
(नीचे लिखे क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 3
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 4

प्रश्न 9.
अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के सन्धि-विच्छेद करके सन्धि का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 5
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 6

प्रश्न 10.
अधोलिखितसमासानां विग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत
(नीचे लिखे समासों को विग्रह कर समास का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 7
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 8

प्रश्न 11.
प्रदत्तश्लोकान्वयस्य पूर्तिं कुरुत
(दिए गए श्लोक का अन्वय पूरा कीजिए-)
बुधैः …………….. विविधैः शीलैः
(यतो हि) …………….. नीतिज्ञाः ……………..भवन्ति।
उत्तर:
बुधैः पुत्रा. विविधैः शीलैः सततं नियोज्याः।
(यतो हि) शीलसम्पन्नाः नीतिज्ञाः कुलपूजिताः भवन्ति।

योग्यताविस्तार –

पाटे समागतान् श्लोकान् कण्ठस्थं कुरुत।
पाठ में आए श्लोकों को कण्ठस्थ करो।

“चाणक्यनीति” इत्यस्मात् पुस्तकात् चित्वा (पाठे समागतान् श्लोकान् विहाय) अन्यान् दशश्लोकान् लिखत।
‘चाणक्यनीति’ पुस्तक से चुनकर अन्य दस श्लोक लिखो।

चाणक्येन विरचितानि अन्यानि पुस्तकानि पठत।
चाणक्य द्वारा रचित अन्य पुस्तकें पढ़ो।

चाणक्येतरदशनीतिश्लोकान् लिखत।।
चाणक्य से अलग दस नीति श्लोक लिखो।

MP Board Solutions

चाणक्यनीतिः पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में ‘चाणक्य’ द्वारा रचित नीति से सम्बन्धित कुछ श्लोक दिए गए हैं, जिससे छात्रों को नीति का सम्यक् ज्ञान हो सके। ये श्लोक चाणक्य द्वारा रचित ‘चाणक्यनीतिः’ नामक ग्रन्थ से लिए गए हैं।

चाणक्यनीतिः पाठ का अनुवाद

1. सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।
सत्येन वाति वायुश्च सर्वं सत्ये प्रतिष्टितम्॥1॥

अन्वयः :
पृथ्वी सत्येन धार्यते, रविः सत्येन तपते, वायुः सत्येन वाति, सर्वं च सत्ये प्रतिष्ठितम् (अस्ति)।

शब्दार्थाः :
धार्यते-धारण की जाती है-is born (propped); तपते-उष्णता प्रदान करता है-gives heat; वाति-बहता है-blows; प्रतष्ठितम्-स्थित है-is established.

अनुवाद :
धरती सत्य से धारण की जाती है। सूर्य सत्य से तपता है, वायु सत्य से बहती है, सब सत्य में स्थित है। Englisit-The earth, the sun, the wind-all of their props in truth.

2. मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा नैव प्रकाशयेत्।
मन्त्रेण रक्षयेद् गूढं कार्थे चाऽपि नियोजयेत्॥2॥

अन्वयः :
मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा न एव प्रकाशयेत्, गूढं मन्त्रेण रक्षयेत्। कार्ये च अपि नियोजयेत्।

शब्दार्थाः :
वाचा-वाणी के द्वारा-through speech; प्रकाशयेत्-प्रकट करना चाहिए-should beexpressed;गूढम्-गोपनीय-secret;मन्त्रेण-विचारपूर्वक- thoughtfully; नियोजयेत्-लगाना चाहिए-put.

अनुवाद :
मन से सोचे हुए कार्य को वाणी से प्रकट नहीं करना चाहिए। गुप्त को विचारपूर्वक रखना चाहिए। और कार्य में भी लगाना चाहिए।

English :
Don’t express your thoughts with speech. A secret must be preserved and put into action.

MP Board Solutions

3. पुत्राश्च विविधैः शीलैर्नियोज्याः सततं बुधैः।
नीतिज्ञाः शीलसम्पन्ना भवन्ति कुलपूजिताः॥3॥

अन्वयः :
बुधैः पुत्राः विविधैः शीलैः सततं नियोज्याः। (यतो हि) शीलसम्पन्नाः नीतिज्ञाः कुलपूजिताः भवन्ति।

शब्दार्थाः :
बुधैः-विद्वानों के द्वारा-by the learned; शीलैः-सदाचरणों के द्वारा-through good conduct; कुलपूजिताः-कुल में सम्मानित/जनसाह में पूजित-honoured in family and society.

अनुवाद :
विद्वानों के द्वारा पुत्रों को विभिन्न सदाचरणों के द्वारा निरंतर लगाना चाहिए। क्योंकि सदाचार युक्त नीतिशास्त्र के ज्ञाता कुल में पूजे जाते हैं।

English :
Engage sons in noble conduct. A man of good moral conduct earns respect in family.

4. को हि भारः समर्थानां किं दूरं व्यवसायिनाम्।
को विदेशः सविद्यानांकः परः प्रियवादिनाम्।।4॥

अन्वयः :
हि समर्थानां कः भारः? व्यवसायिनां कि दूरम्? सविद्यानां कः विदेशः? प्रियवादिनां कः पारः? (अर्थात् कोऽपि नास्ति ।)

शब्दार्थाः :
समर्थानाम्-सक्षम लोगों के लिए-for the capable; व्यवसायिनाम्-उद्यमशील लोगों के लिए-for the industrious; परः-शत्रु पराया-enemy.

अनुवाद :
सक्षम लोगों के लिए भार क्या है? उद्यमशील (परिश्रमी) लोगों के लिए दूर क्या है? विद्या से युक्त लोगों के लिए विदेश क्या है ? प्रिय बोलने वालों के लिए कौन पराया है? (अर्थात् कोई भी नहीं।)

English :
The capable, industrious, learned and sweet talkers know no burden, distance, foreign country or enemy respectively.

5. दरिद्रता धीरतया विराजते, कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते।
कदन्नता चोष्णतया विराजते, कुरूपता शीलतया विराजते।।5॥

अन्वयः :
दरिद्रता धीरतया विराजते, कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते, कदन्नता उष्णतया विराजते, कुरुपता च शीलतया विराजते।

शब्दार्थाः :
धीरतया-धैर्य धारण करने से-through patience, forbearance; कदन्नता-निम्न कोटी का अन्न-third-rate foodstuff; विराजते-सुशोभित होता होती है-is adorned.

अनुवाद :
दरिद्रता धैर्य धारण करने से सुशोभित होती है, बुरे वस्त्र स्वच्छता से सुशोभित होते हैं, निम्न कोटि का अन्न ताप से सुशोभित होता है और कुरुपता शील स्वभाव से सुशोभित होती है।

English :
Misery, poverty, cheap clothes, third-rate food items and vulgarity are adorned by forbearance, cleanliness, heat (warmth) and noble conduct respectively.

6. धनहीनो न हीनश्च धनिकः सः सुनिश्चयः।
विद्यारत्नेन यो हीनः सः हीनः सर्ववस्तुषु॥6॥

अन्वयः :
यः धनहीनः सः हीनः न, (अपितु) सः सुनिश्चयः धनिकः, विद्यारत्नेन हीनः सः सर्ववस्तुषु हीनः (अस्ति)।

MP Board Solutions

शब्दार्था: :
धनहीनः-धन से रहित – one who lacks money; सुनिश्चयः-निश्चयपूर्वक-definitely-by all means; सर्ववस्तुषु-सभी वस्तुओं में-in everything.

अनुवाद :
जो धन से रहित है, वह हीन नहीं है, बल्कि वह निश्चयपूर्वक धनी है। विद्या रूपी रत्न से जो हीन है वह सब वस्तुओं से हीन होता है।

English :
One who is without money is not a destitute. He is otherwise wealthy. He alone is a pauper who is deprived of learning.

7. कर्मायत्तं फलं पुंसां बुद्धिः कर्मानुसारिणी।
तथापि सुधियश्चार्याः सुविचार्यैव कुर्वते॥7॥

अन्वयः :
पुंसां कर्मायत्तं फलम्, बुद्धि, कर्मानुसारिणी, तथापि सुधियः आर्याः च सुविचार्य एव कुर्वते।

शब्दार्थाः :
पुंसाम्-मनुष्यों का-of men; कर्मायत्तम्-कर्म के अनुसार-according to action; सुधियः-विद्वान् लोग-learned people; आर्याः-श्रेष्ठ लोग-noble persons; कुर्वते-करते हैं-do.

अनुवाद :
मनुष्यों को कर्म के अनुसार फल मिलता है, बुद्धि कर्म का अनुसरण करती है। इसीलिए विद्वान और श्रेष्ठ लोग अच्छी प्रकार से विचार करके ही कार्य करते हैं।

English :
Actions are result-oriented-wisdom follows actionwise and noble persons should act thoughtfully.

8. छिन्नोऽपि चन्दनतरुन जहाति गन्धं, वृद्धोऽपि वारणपतिर्न जहाति लीलाम् ।
यन्त्रार्पितो मधुरतां न जहाति चेक्षुः, दीनोऽपि न त्यजति शीलगुणान् कुलीनः॥8॥

अन्वयः :
छिन्नः चन्दनतरुः अपि गन्धं न जहाति, वृद्धः वारणपतिः अपि लीलां न जहाति, यन्त्रार्पितः इक्षुः मधुरतां न जहाति, कुलीनः च दीनः अपि शीलगुणान् न त्यजति।

शब्दार्थाः :
छिन्नः-कटा हुआ-which is cut; जहाति-छोड़ता है-leaves, deserts; यन्त्रार्पितः-यन्त्र (कोल्ह) में डाला गया-put insugar crasher; इक्षुः-गन्ना-sugarcane; शीलगुणान्-सच्चरित्रादि गुणों को-qualities like noble conduct; त्यजति-छोड़ता है-leaves, quits.

अनुवाद :
कटा हुआ चन्दन का वृक्ष भी अपनी सुगन्ध नहीं छोड़ता है। बूढ़ा हाथियों का स्वामी भी खेल नहीं छोड़ता है, यन्त्र (कोल्हू) में डाला गया गन्ना अपनी मधुरता को नहीं छोड़ता। कुलीन और दीन भी अपने सच्चरित्रादि गुणों को नहीं छोड़ता है।

English :
Acut out sandal tree, an old lord of elephants-a sugarcanea noble born and poor fellow do not forsake their fragrance, sportive nature, sweetness and noble qualities respectively.

9. एकेनाऽपि सुपुत्रेण विद्यायुक्तेन साधुना।
आह्लादितं कुलं सर्वं यथा चन्द्रेण शर्वरी॥9॥

अन्वयः :
एकेन सुपुत्रेण विद्यायुक्तेन साधुना अपि सर्वं कुलम् आह्लादितं, यथा चन्द्रेण शर्वरी (आहलाद्यते)।

शब्दार्थाः :
सुपुत्रेण-सद्गुणी पुत्र के द्वारा-by son of noble qualities; आहुलादितम्-प्रसन्न किया गया-delighted; शर्वरी-रात्रि-night.

अनुवाद :
एक सुपुत्र के द्वारा, विद्या से युक्त के द्वारा तथा सज्जन के द्वारा भी पूरा कुल आनन्दिा किया जाता है, जैसे चन्द्रमा के द्वारा रात को।

English :
A worthy, educated and noble son delights the entire family-The moon also does the same by lighting the night.

10. परोपकरणं येषां जागर्ति हृदये सताम्।
नश्यन्ति विपदस्तेषां सम्पदः स्युः पदे पदे।।10॥

अन्वयः :
येषां सतां हृदये परोपकरणं जागर्ति तेषां विपदः नश्यन्ति, पदे पदे सम्पदः स्युः।

शब्दार्थाः :
परोपकरणम्-दूसरों का भला करना-doing good to others; विपदः-विपत्तियाँ-difficulties; पदे-पदे-कदम-कदम पर-at every step; स्युः-हों-be.

अनुवाद :
जिन सज्जनों के हृदय में दूसरों का भला करने की भावना जागृत रहती है, उनकी विपत्तियाँ नष्ट हो जाती हैं और कदम-कदम पर खुशियाँ होती हैं।

English :
The gentlemen who have a feeling of others’ welfare are rid of difficulties and seek pleasure at every step.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 19 गुरुदक्षिणा (पद्यम्) (रघुवंशात्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 19 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) वरन्तन्तुशिष्यः कः आसीत्? (वरतन्तु का शिष्य कौन था?)
उत्तर:
कौत्सः (कौत्स)

(ख) अनर्घशीलः कः? (निश्छल व्यवहार किसका था?)
उत्तर:
रघुः (रघु का)

MP Board Solutions

(ग) वरतन्तुशिष्यः स्वार्थोपपत्तिं प्रति कीदृशः सञ्जातः? (वरतन्तु शिष्य अपने कार्य की सिद्धि के लिए कैसा हो गया?)
उत्तर:
दुर्बलाशः (निराश)

(घ) गुरुणा किम् अचिन्तयित्वा उक्तः? (गुरु ने क्या विचार न करके कहा?)
उत्तर:
अर्थकार्यम् (गरीबी को)

(ङ) रघुः कस्मात् धनं प्राप्तुम् इष्टवान्? (रघु ने किससे धन लेने की इच्छा की?)
उत्तर:
कुबेरात् (कुबेर से)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) रघुः कस्मात् हेमराशिम् लब्धवान्? (रघु ने किससे सुवर्ण राशि प्राप्त की?)
उत्तर:
रघुः कुबेरात् हेमराशिम् लब्धवान्। (ग्घु ने कुबेर से स्वर्ण राशि प्राप्त की।)

(ख) वरतन्तुः कौत्सं कियत् धनं याचितवान्? (वरतन्तु ने कौत्स से कितना धन माँगा?)
उत्तर:
वरतन्तुः कौत्सं चतुर्दशः कोटीः धनं याचितवान्। (वरतन्तु ने कौत्स से 14 करोड़ स्वर्ण मुद्राएं माँगी।)

(ग) विश्वजिति अध्वरे रघुः कीदृशः सञ्जातः? (विश्वजित् यज्ञ में रघु कैसा हो गया?)
उत्तर:
विश्वजिति अध्वरे रघुः निःशेषविश्राणितकोष जातम्। (विश्वजित् यज्ञ की दक्षिणा में रघु रिक्त खजाने वाला हो गया।)

(घ) रघुः गां कीदृशीम् अमन्यत्? (रघु ने पृथ्वी को कैसा माना?)
उत्तर:
रघुः गाम् आन्तसाराम् अमन्यत्। (रघु ने पृथ्वी को सारहीन माना।)

(ङ) तौ द्वौ कस्य अभिनन्द्यसत्वौ अभूताम्? (वे दोनों किसके अभिनन्दन के पात्र हुए?)
उत्तर:
तौ द्वौ साकेतनिवासिनः जनस्य अभिनन्धसत्वौ अभूताम्। (वे दोनों साकेत (अयोध्या) में रहने वाले लोगों के अभिनन्दन का पात्र बने।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत। (नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) रघोः समीपं कः किमर्थम् आगतः? (रघु के पास कौन और क्यों आया?)
उत्तर:
रघोः समीपं कौत्सः गुरुदक्षिणाय चतुदर्शः कोटीः सुवर्णराशिः ग्रहीतुम् आगतः। (रघु के पास कौत्स गुरु दक्षिणा के लिए 14 करोड़ स्वर्ण राशि लेने के लिए आया था।)

MP Board Solutions

(ख) कीदृशः रघुः कस्मिन् पात्रे अर्घ्यं निघाय अतिथिं प्रत्युज्जगाम? (कैसा रघु किस पात्र में अर्घ्य लेकर अतिथि के पास आया?)
उत्तर:
अनर्घशीलः यशस्वी आतिथेयः च रघुः मृण्मये पात्रे अर्घ्य निधाय अतिथिं प्रत्युजंगाम। (निश्छल व्यवहार वाला, यशस्वी और अतिथि सेवी रघु मिट्टी के पात्र में अर्घ्य लेकर अतिथि के पास गया।)

(ग) वारं-वारं प्रार्थयन्तं कौत्सं गुरुः किमुक्तवान्? (बार-बार प्रार्थना करने पर कौत्स को गुरु ने क्या कहा?)
उत्तर:
वारं-वारं प्रार्थयन्तं कौत्सं गुरुः उक्तवान् यत्-‘वित्तस्य चतस्रः दश च कोटीः मे आहर’ इति। (वार-बार प्रार्थना करने पर कौत्स को गुरु ने कहा-’14 करोड़ (स्वर्ण राशि) का धन मुझे दो।’)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत-(दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(मनः, द्वावपि, मा, अर्थम्, मृण्मये)
(क) रघुः ………….. पाने अर्घ्य दत्तवान्।
(ख) तव अभिगमेन मे…………..न तृप्तम्।
(ग) ………….. अभूताम् अभिनन्यसत्वौ।
(घ) मे परिवादनवावतारः ………….. भूत्।
(ङ) रघुः कुबेरात् ………….. निष्कष्टुम् चकमे।
उत्तर:
(क) मृण्मये
(ख) मनः
(ग) द्वावपि
(घ) मा
(ङ) अर्थम्

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत्-(उचित क्रम से जोडिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 1
उत्तर:
(क) 4
(ख) 5
(ग) 1
(घ) 3
(ङ) 2

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘न’ इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘त्र’ लिखिए-)
(क) कुबेरः रघु धनं दत्तवान्।
(ख) रघुः हिरण्मयपात्रे कौत्साय अर्घ्यं दत्तवान्।
(ग) कौत्सः धनं स्बीकर्तुं गुरुसमीपं गतवान्।
(घ) कौत्सः गुरुदक्षिणार्थी आसीत्।
(ङ) रघुः वरतन्तुशिष्यः आसीत्।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न।

MP Board Solutions

प्रश्न 7.
अधोलिखितशब्दानां विभक्तिं वचनं च लिखत
(नीचे लिखे शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 3

प्रश्न 8.
अधोलिखितशब्दानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत।
(नीचे लिखे शब्दों के सन्धि-विच्छेद कर सन्धि का नाम लिखिए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 5

प्रश्न 9.
अधोलिखितशब्दानां पर्यायशब्दान् लिखत
(नीचे लिखे शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए-)
यथा- वित्तम् – धनम्
(क) अध्वरः
(ख) क्षितीशः
(ग) गुरुः
(घ) याचकः
उत्तर:
(क) अध्वरः – यज्ञः
(ख) क्षितीशः – भूपतिः
(ग) गुरुः – आचर्थ
(घ) याचकः – दक्षिणार्थी

प्रश्न 10.
अव्ययः वाक्यनिर्माणं कुरुत (अव्ययों से वाक्य बनाइए-)
यथा- अपि – अहम् अपि पठामि।
(क) इति
(ख) न
(ग) प्रति
(घ) इव
उत्तर:
(क) इति – सः कथयति-‘अहं न गच्छामि’ इति। (वह कहता है-मैं नहीं जा रहा हूँ।)
(ख) न – रामः भेजनं न खादति। (राम भोजन नहीं खाता है।)
(ग) प्रति – विद्यार्थी ग्रहं प्रति गच्छति। (विद्यार्थी घर की ओर जाता है।)
(घ) इव – सा मयूरः इव नृत्यति। (वह मोर की तरह नाचती है।)

MP Board Solutions

प्रश्न 11.
प्रदत्तश्लोकान्वयस्य पूर्ति कुरुत-(दिए श्लोक का अन्वय पूरा कीजिए)
निर्बन्धसञ्जातरुषा ………..अर्थकार्यम्………….अहं वित्तस्य चतस्रः
दश च कोटीः मे………….इति……….उक्तः
उत्तर:
निर्बन्धसञ्जातरुषा गुरुणा अर्थकाय॑म् अचिन्तयित्वा अहं वित्तस्य चतस्रः
दश च कोटीः मे आहर इति विद्यापरिसङ्खयया उक्तः। योग्यताविस्तारः

पाठे आगतानां श्लोकानां सस्वरगायनं कुरुत।
(पाठ में आए श्लोकों को सस्वर गाइए।)

रघोः अन्यान् आदर्शगुणान् अन्विष्य लिखत।
(रघु के अन्य आदर्श गुणों को ढूंढ़ कर लिखो।)

गुरुदक्षिणा पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में ‘गुरुदक्षिणा’ पर आधारित कछ श्लोक दिए गए हैं, जिन्हें महाकवि कालिदास जी द्वारा रचित महाकाव्य ‘रघुवंश’ से लिया गया है। इनमें गुरु दक्षिणा के लिए आए कौत्स और देने वाले महाराज रघु के उदात्तभाव को दर्शाया गया। याचक आवश्यकता से अधिक नहीं लेना चाहता, पर दातां सब कुछ देना चाहता है। न लेने वाले का उदात्त भाव महाकवि द्वारा इन श्लोकों में सुन्दरता से वर्णित किया गया है।

गुरुदक्षिणा पाठ का अनुवाद

1. तमध्वरे विश्वनिति क्षितीशं निःशेषविश्राणितकोष जातम्।
उपात्तविद्यो गुरुदक्षिणार्थी कौत्सः प्रपेदे वरतन्तुशिष्यः॥२॥

अन्वयः :
विश्वजिति अध्वरे निःशेषविश्राणितकोषजातम् तं क्षितीशम् उपात्तविधिः गुरुदक्षिणार्थी वरतन्तुशिष्यः कौत्स प्रपेदे।

शब्दार्थाः :
विश्वजिति अध्वरे-विश्वजित् यज्ञ की दक्षिणा में-as offerings in world winning sacrifice; निःशेषविश्राणितकोषजातम्-दान में दिए जाने के कारण जिसका खजाना रिक्त हो गया है।-exchequer empty on being given in charity; तं क्षितीशम्-उस रघु के पास-to that lord of earth Raghu; उपात्तविद्यः-विद्या पढ़करhaving sought education; वरतन्तुशिष्यः कौत्सः-वरतन्तु के शिष्य कौत्स-Kautsa, the disciple of Vartantu; प्रपेदे-आए-approached.

अनुवाद :
विश्वजित् यज्ञ की दक्षिणा में दिए जाने के कारण जिसका खजाना रिक्त हो गया है, उस रघु के पास विद्या पढ़कर गुरुदक्षिणा के लिए वरतन्तुशिष्य कौत्स आए।

English : Kautsa, the son of Vartantu approached Raghu who had offered every thing in charity.

2. स मृण्मये वीतहिरण्मयत्वात्पात्रे निधायार्थ्यमनर्घशीलः।
श्रुतप्रकाशं यशसा प्रकाशः प्रत्युज्जगामातिथिमातिथेयः॥२॥

अन्वययः :
अनर्घशीलः यशसा प्रकाशः आतिथेयः सः वीतहिरण्मयत्वात् मृण्मये पात्रे अर्ध्यम् निधाय श्रुतप्रकाशम् अतिथिम् प्रत्युज्जगाम्।।

शब्दार्थाः :
अनर्घशीलः-निश्छल व्यवहार/असाधारण स्वभाव वाला- fraudless conduct of extra-ordinary nature; यशसा प्रकाशः-यशस्वी-illustrious, reputed; सः-वह (रघु)-he (Raghu) वीतहिरण्मयत्वात्-सुवर्ण पात्रों के अभाव में-in the absence of golden utensils; मृण्मये पात्रे-मिट्टी के पात्र में-in earthen-wares; श्रुतप्रकाशम्-वेदाध्ययन से देदीप्यमान (कौत्स के)-illumined with the studyofvedas of Kautsa; प्रत्युज्जगाम-पास आए-approached.

अनुवाद :
निश्छल व्यवहार वाले, यशस्वी और अतिथिसेवी वह सुवर्ण पात्रों के अभाव में मिट्टी के पात्र में अर्ध्य लेकर वेदाध्ययन से देदीप्यमान् अतिथि के पास आए।

MP Board Solutions

English :
The deceitless, illustrious and hospitable king offered ‘Arghya’ in earthenwares and approached the learned guest.

3. तवाहतो नाभिगमेन तृप्तं मनो नियोगक्रिययोत्सुकं मे।।
अप्याज्ञया शासितुरात्मना वा प्राप्तोऽसि सम्भावयितुं वनान्माम्॥३॥

अन्वयः :
अर्हतः तव अभिगमेन मे मनः न, तृप्तम्, किन्तु नियोगक्रियया उत्सुकम् शासितुः आज्ञया अपि आत्मना वा माम् सम्भावयितुम् वनात् प्राप्तोऽसि।

शब्दार्थाः :
अर्हतः -पूज्य के (आपके)-worthy of worship; अभिगमेन-आगमन मात्र से-by merevisit; तृप्तम्-सन्तुष्ट-satisfied; नियोगक्रियया-दान की क्रिया से-by the action of charity; उत्सुकम्-उत्सुक को (मुझ रघु को)-me who am curious, शासितुः-गुरु को-of the guru, आत्मना-स्वेच्छा से-with own desire (of your own will), सम्भावयितुम्-कृतार्थ करने के लिए-to oblige.

अनुवाद :
आप जैसे पूज्य के आने मात्र से मेरा मन सन्तुष्ट नहीं हुआ है। मैं दान का काम करने के लिए उत्सुक हूँ। क्या आप वन से अपने गुरु की आज्ञा से मुझे कृतार्थ करने आए हैं या स्वयं अपनी इच्छा से?

English :
Your visit alone has not gratified me. I have a desire to serve you with an act of charity. Have you came to oblige with your preceptors permission or of your own free will?

4. इत्यर्थ्यपात्रानुमितव्ययस्य रघोरुदारामपि गां निशम्य।
स्वार्थोपपत्ति प्रति दुर्बलाशस्तमित्यवोचद्वरतन्तुशिष्यः॥4॥

अन्वयः :
अर्घ्यपात्रानुमितव्ययस्य रघोः इति उदारम् अपि गाम् निशम्य वरतन्तुशिष्यः स्वार्थोपपत्तिम् प्रति दुर्बलाशः सन् तम् इति अवोचत्।

शब्दार्थाः :
अर्घ्यपात्रानुभितव्ययस्य–अर्घ्यपात्र से (यज्ञ में हुए) व्यय को व्यक्त करने act-expressing the expenditure incurred on sacrifice through Arghya vessels.; गाम्-वाणी को-speech, voice; स्वार्थोपपत्तिम्-अपनी कार्य सिद्धि में-in fulfilment of own desire. दुर्बलाशः सन्-निराश होते हुए-getting desperate, तम्-उस रघु से-him (Raghu), अवोचत्-कहा-said.

अनुवाद :
इस प्रकार अर्घ्य पात्र से (यज्ञ में हुए) खर्च का अनुमान लगाए हुए तथा रघु की उदार वाणी को सुनने पर भी अपने मनोरथ की सिद्धि की दुर्बल आशा रखते हुए, वरतन्तु का शिष्य (कौत्स) उनसे इस प्रकार बोला।

English :
Kautsa calculated the expenditure on sacrifice but heard Raghu’s generous talk-Got desperate about the fulfilment of his wish.

MP Board Solutions

5. समाप्तविद्येन मया महर्षिवैिज्ञापितोऽभूद्गुरुदक्षिणायै।
स मे चिरायस्खलितोपचारां तां भक्तिमेवागणयत्पुरस्तात्॥5॥

अन्वय :
समाप्तविद्येन मया महर्षिः गुरुदक्षिणायै विज्ञापितः अभूद् स च चिराय अस्खलितोपचारां ताम् भक्तिम् एव पुरस्तात् अगणयत्।

शब्दार्थाः :
समाप्तविद्येन मया-समस्त विद्याओं को पढ़ने के बाद मैंने-after learning all education,गुरुदक्षिणायैः-गुरुदक्षिणा के लिए-for fee topreceptor; विज्ञापितः-प्रार्थना की-requested; चिराय-बहुत दिनों तक-foralong time; अस्खलितोपचाराम्-नियमपूर्वक की गई-done regularly, तां भक्तिम्-उस गुरु सेवा को-that service to guru, पुरस्तात्-श्रेष्ठ दक्षिणा-spureme (excellent) fee. अगणयत्-गिना/माना-considered.

अनुवाद :
समस्त विद्याओं को पढ़ने के बाद मैंने महर्षि से गुरुदक्षिणा देने के लिए प्रार्थना की और उन्होंने (गुरु ने) बहुत दिनों तक नियमपूर्वक की गई उनकी भक्ति को ही श्रेष्ठ दक्षिणा माना।

English :
Kausta finished his education-requested the Maharishi to name the fee. The Maharishi considered his (Kautsa’s) services with devotion as supreme fee.

6. निर्बन्धसञ्जातरुषाऽर्थकाय॑मचिन्तयित्वा गुरुणाऽहमुक्तः।
वित्तस्य विद्यापरिसङ्घयया मे कोटीश्चतस्रो दश चाहरेति।।6।

अन्वय :
निर्बन्धसञ्जातरुषा गुरुणा अर्थकार्यम् अचिन्तयित्वा अहम् ‘वित्तस्य चतस्रः दश च कोटीः मे आहर’ इति विद्यापरिसङ्ख्यया उक्तः।

शब्दार्थाः :
निर्बन्धसञ्जातरुषा-वार-बार (गुरुदक्षिणा के लिए) आग्रह करने पर क्रोध #-on account of anger aroused by repeated insistence for offer of fee, अर्थकार्यम्-दरिद्रता/गरीबी को-poverty; अचिन्तयित्वा-विचार न करके-not considering; वित्तस्य-धन की/मुद्रा की-of money; चतस्रः दश च कोटी:-चौदह करोड़-fourteen crores, आहर-दो-bring, विद्यापरिसङ्ख्यया-चौदह विद्याओं की सङ्ख्या के मान से-in exchange of fourteen types of education.

अनुवाद :
बार-बार आग्रह करने पर क्रोध से गुरु के द्वारा मेरी गरीबी का विचार न करके मुझे कहा गया कि चौदह विद्याओं की सङ्ख्या के मान (हिसाब) से ’14 करोड़ स्वर्ण मुद्राएँ मुझे दो।’

English :
Kautssa’s repeated insistence for fee aroused guru’s anger. Asked him to bring fourteen crores.

7. गुर्वर्थमर्थी श्रुतपारदृश्वा रघोः सकाशादनवाप्य कामम्।
गतो वदान्यान्तरमित्ययं मे मा भूत्परिवादनवावतारः॥7॥

अन्वय :
‘श्रुतपारदृश्वा गुर्वर्थम् अर्थी रघोः सकाशात् कामम् अनवाप्य वदान्यान्तरम् गतः’ इति अयम् मे परिवादनवावतारः मा भूत्।

शब्दार्थाः :
श्रुतपारदृश्वा-शास्त्रों में पारङ्गत-learned in seriptures, गुर्वर्थम्-गुरु के लिए-for his guru; अर्थी-गुरुदक्षिणायाचक-asking for offering fee to guru; सकाशात्-पास से-from; कामम्-मनोरथ को-heart’s desire, longing, अनवाप्य-पूर्ण न होने पर-not getting fulfilled, वदान्यान्तरम्-अधिक दान देने वाले दूसरे दानी के पास-to another more generous fellow, परिवादनवावतारः-निन्दा का नया अवतार-object of censure.

अनुवाद :
शास्त्रों में पारंगत एक विद्यार्थी की गुरु के लिए दक्षिणा देने की इच्छा रघु के पास पूरी नहीं होने के कारण उसे किसी दूसरे अधिक दानवीर के पास जाना पड़ा। इस प्रकार की निन्दा का मैं पात्र नहीं बनूं।

English :
A learned scholar was asking from Raghu about fee for his teacher. He had to go to another generous fellow when his desire was not fulfilled there. It was a matter of censure for Raghu.

MP Board Solutions

8. तथेति तस्थावितथं प्रतीतः प्रत्यग्रहीत्सङ्गरमग्रजन्मा।
गामान्तसारां रघुरप्यवेक्ष्य निष्क्रष्टुमर्थं चकमे कुबेरात्॥8॥

अन्वय :
अग्रजन्मा प्रतीतः सन् तस्य अवितथम् सङ्गरम् इति प्रत्यग्रहीता, तथा रघु अपि गाम् आन्तसाराम् अवेक्ष्य कुबेरात् अर्थम् निष्क्रष्टुम चकमे।

शब्दार्थाः :
अग्रजन्मा-ब्राह्मण (कौत्स)-Brahman (Kautsa), प्रतीतः सन्-प्रसन्न होते हुए-being pleased; अवितथम्-सत्य-true; सङ्गरम्-प्रतिज्ञा को-promise; गाम्-पृथिवी को-earth, आन्तसाराम्-सारहीन-meaningless, अवेक्ष्य-समझकर-thinking, अर्थम्-धन-money, निष्क्रष्टुम-लेने की इच्छा-desire to take, चकमे-किया-showed.

अनुवाद :
ब्राह्मण ने प्रसन्न होते हुए उसकी सत्य प्रतिज्ञा को स्वीकार किया और रघु ने भी पृथ्वी को सारहीन समझकर कुबेर से धन लेने की इच्छा की।

English :
The brahmin (Kautsa) got pleased, accepted his promise-Raghu desired to get money from Kuber.

9. तं भूपतिर्भासुरहेमराशिं लब्धं कुबेरादभियास्यमानात्।
दिदेश कौत्साय समस्तमेव पादं सुमेरोरिव वज्रभिन्नम्॥9॥

अन्वय :
भूपतिः अभियास्यमानात् कुबेरात् लब्धम् वज्रभिन्नम् सुमेरोः पादम् इव स्थितम् तम् भासुरहेमराशिम् समस्तम् एव कौत्साय दिदेश।

शब्दार्थाः :
भूपतिः-रघुः-king, अभियास्यमानात्-युद्ध के लिए चढ़ाई किए जाने वाले (से)-from object of invasion for battle; कुबेरात्-कुबेर से (धन के देवता)-from kuber (god of wealth); वज्रभिन्नम्-वज्र से काटकर गिराये हुए-being severed and felled; सुमेरोः-सुमेरु के-of sumeru, पादम् इव-टुकड़े के समान-like a piece, भासुरहेमराशिम्-चमकती हुई सुवर्ण राशि (को)-shining heap of gold, दिदेश-दे दी-gave.

अनुवाद :
रघु ने युद्ध के लिए चढ़ाई किए जाने वाले (से) अर्थात् युद्ध कर के कुबेर से प्राप्त वज्र से काटकर गिराये हुए सुमेरु के टुकड़े के समान चमकती हुई सुवर्ण राशि पूरी ही कौत्स को दे दी।

English :
Raghu got money from Kuber like a piece of Sumeru mountain severed with the trident gave all to Kautsa.

10. जनस्य साकेतनिवासिनस्तौ द्वावप्यभूतामाभिनन्द्यसत्त्वौ
गुरुप्रदेयाधिकनिःस्पृहोऽर्थी नृपोऽत्रिकामादधिकप्रदश्च॥10॥

अन्वय :
तौ द्वौ अपि साकेतनिवासिनः जनस्य अभिनन्धसत्वौ अभूताम्। गुरुप्रदेयाधिकनिःस्पृहः अर्थी, अर्थिकामात् अधिकप्रदः नृपः च।

शब्दार्थाः :
तौ द्वौ-वे दोनों (दाता और याचक)-Both the donor and the aspirant, साकेतनिवासिनः जनस्य-अयोध्या निवासी लोगों का-of residents of Ayodhya; अभिनन्धसत्वौ-अभिनन्दन के पात्र-object of praise (felicitation); अभूताम्-हो गए -became; गुरुप्रदेयाधिकनिः स्पृहः-गुरुदक्षिणा से अधिक न लेने का इच्छुक-not desiring to accept more than fee for guru, अर्थी-याचक (कौत्स)-aspirant (Kautsa), अर्थिकामात्-याचक की कामना से-the desire of aspirant, अधिकप्रदः-अधिक देने वाला-donor of more, नृपः-राजा (रघु)-King (Raghu).

अनुवाद :
वे दोनों (दाता और याचक) ही अयोध्या निवासी लोगों के अभिनन्दन के पात्र बन गए। गुरुदक्षिणा से अधिक न लेने का इच्छुक (संतोषी) याचक कौत्स और याचक की कामना से अधिक देने वाला (दाता) राजा रघु।।

English :
Raghu desired to give more than what Kautsa had desired. Kautsa was not willing to accept more than fee for Guru. Both became praiseworthy in the eyes of residents of Ayodhya.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम्

In this article, we will share MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् Pdf, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् (नाट्यांशः) (वाल्मीकिरामायणतः)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 11 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) का रूपं नाशयिष्यति? (कौन रूप को नष्ट करेगा?)
उत्तर:
जरा। (बुढ़ापा ।)

(ख) सिद्धार्थः कस्य पुत्रः आसीत्? (सिद्धार्थ किसका पुत्र था?)
उत्तर:
शुद्धोदनस्य। (शुद्धोदन का)

MP Board Solutions

(ग) धरा कस्य पत्नी आसीत? (यशोधरा किसकी पत्नी थी?)
उत्तर:
सिद्धार्थस्य। (सिद्धार्थ की)

(घ) सिद्धार्थस्य पुत्रः कः आसीत्? (सिद्धार्थ का पुत्र कौन था?)
उत्तर:
राहुलः। (राहुल)

(ङ) सिद्धार्थ : कस्मिन् वंशे उत्पन्नः अभूत्? (सिद्धार्थ किस वंश में पैदा हुआ था?)
उत्तर:
शाक्यवंशे। (शाक्यवंश में)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए)
(क) कस्य अभिनिष्क्रमणसंस्कारः अस्ति: (किसका अभिनिष्क्रमण संस्कार है?)
उत्तर:
कुमार राहुलस्य अभिनिष्क्रमणसंस्कारः अस्ति। (कुमार राहुल का अभिनिष्क्रमण संस्कार है।)

(ख) सिद्धार्थः अनुज्ञां प्राप्तुं कस्य समीपं गतः? (सिद्धार्थ आज्ञा गप्त करने किसके पास गए थे?)
उत्तर:
सिद्धार्थः अनुज्ञां प्राप्तुं शुद्धोदनस्य समीपं गतः। (सिद्धार्थ आज्ञा लेने के लिए शुद्धोदन के पास गया था।)

(ग) सिद्धार्थः केषु नानुरञ्ज्यति? (सिद्धार्थ किससे खुश नहीं हो रहा था?)
उत्तर:
सिद्धार्थः नृत्यसङ्गीत-वादित्रेषु नानुरञ्जयति। (सिद्धार्थ नृत्य-संगीत-वाद्य आदि में खुश नहीं हो रहा था।)

(घ) वयं मनुष्याः कां जानन्तोऽपि न शोचामः? (हम लोग किसको जानते हुए भी नहीं सोचते?)
उत्तर:
वयं मनुष्याः प्रतिदिनं ग्रसन्ती मृत्युराक्षसीं जानन्तोऽपि न शोचामः। (हम लोग प्रतिदिन खाती हुई मृत्यु रूपी राक्षसी को जानते हुए भी नहीं सोचते हैं।)

(ङ) मनुष्यस्य यौवनं विलासश्च कदा शोभते? (मनुष्य का यौवन और विलास कब शोभा देते हैं?)
उत्तर:
जरां व्याधिं मृत्युं च विजित्यैव मनुष्यस्य यौवनं विलासश्च शोभते। (बुढ़ापा, रोग और मृत्यु को जीतकर ही मनुष्य का यौवन और विलास शोभा पाते हैं।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) यशोधरा तारस्वरेण सिद्धार्थं किम् उक्तवती? (यशोधरा ने ऊँचे स्वर में सिद्धार्थ को क्या कहा?)
उत्तर:
यशोधरा तारस्वरेण सिद्धार्थं उक्तवती यत्-“कुत्र प्रयातिः कुमारः?” इति। (यशोधरा ने ऊँचे स्वर से सिद्धार्थ को कहा कि-कुमार, आप कहाँ जा रहे हैं।”)

(ख) सिद्धार्थः किमर्थं लोकयात्रातः व्यरञ्ज्यत? (सिद्धार्थ क्यों लोकयात्रा पर जाना चाहता था?)
उत्तर:
सिद्धार्थः संसारस्य निःसारता, जनन-मरण-चक्रस्य बन्धनं, मानुषी गतिः, सर्वमिदं विचिन्त्य लोकयात्रातः व्यरज्यत।

(सिद्धार्थ, संसार की सारहीनता, जन्म-मरण के चक्र का बन्धन, मानुषी गति, इन सब को सोचकर लोकयात्रा पर जाना चाहता था।)

(ग) मनोज्ञेषु विषयेषु रतिविषये सिद्धार्थः शुद्धोदनं किम् अकथयत्? (मन के विषयों पर रति के विषय में शुद्धोदन ने क्या कहा?)
उत्तर:
मनोज्ञेषु विषयेषु रतिविषये सिद्धार्थः शुद्धोदनं अकथयत् यत्-“जरा व्याधिश्च मृत्युश्च यदि न स्युः तर्हि मम मनोज्ञेषु विषयेषु रतिर्भवेत्? (मन के विषयों पर रति के विषय में सिद्धार्थ ने शुद्धोदन से कहा कि-“बुढ़ापा, रोग और मृत्यु यदि न हों तो मेरे मन में विषयों पर रति होगी

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
शुद्धवाक्याना समक्षम् ‘आम्’ अशुद्ध वाक्यानां समक्षम् ‘न’ इति लिखत- (शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) शुद्धोदनः राहुलस्य पिता असीत्।
(ख) यशोधरा राहुलस्य माता आसीत्।
(ग) सिद्धार्थः प्रव्रज्यार्थम् इच्छति।
(घ) सिद्धार्थः यशोधरायाः अनुज्ञां प्राप्तं गतः।
(ङ) शुद्धोदनः शाक्यवंशीयः न आसीत्।
उत्तर:
(क) न
(ख) आम्
(ग) आम्
(घ) न
(ङ) न।

प्रश्न 5.
अधोलिखितशब्दानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनं च लिखत-(नीचे लिखे शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 1
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 2

प्रश्न 6.
अघोलिखितपदानां धातुं लकारं च लिखत (नीचे लिखे पदों के धातु और लकार लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 3
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 4

प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानां धातुं प्रत्ययञ्च पृथक्कुरुत (नीचे लिखे पदों के धातु और प्रत्यय अलग कीजिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 5
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 6

प्रश्न 8.
अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत (नीचे लिखे पदों के संधिविच्छेद करके संधि का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 7
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 8

प्रश्न 9.
अधोलिखितपदानां समासविग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत (नीचे लिखे पदों के विग्रह कर समास का नाम लिखिए)
(क) धर्मचर्या
(ख) क्रीडोद्यानम्
(ग) विनोदसामग्री
(घ) लोकयात्रा
(ङ) महाराजः
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 9

प्रश्न 10.
रेखाङ्कितसंज्ञाशब्दानां स्थाने सर्वनामशब्दानां प्रयोगं कुरुत (रखाङ्कित शब्दों के स्थान पर सर्वनाम शब्दों का प्रयोग कीजिए-)
(क) राहुलः शाक्यवंशधरः आसीत्। (राहुल शाक्यवंशधर था।)
उत्तर:
कः शाक्यवंशधरः आसीत्? (कौन शाक्यवंशधर था?)

(ख) यशोधरा सिद्धार्थस्य पत्नी आसीत्। (यशोधरा सिद्धार्थ की पत्नी थी।)
उत्तर:
का सिद्धार्थस्य पत्नी आसीत्? (कौन सिद्धार्थ की पत्नी थी?)

(ग) सिद्धार्थस्य पिता शुद्धोदनः आसीत्। (सिद्धार्थ के पिता शुद्धोदन थे।)
उत्तर:
कस्य पिता शुद्धोदनः आसीत्? (किसके पिता शुद्धोदन थे?)

(घ) सिद्धार्थः परिव्राजकः अभवत्। (सिद्धार्थ संन्यासी बना।)
उत्तर:
कः परिव्राजकः अभवत्? (कौन संन्यासी बना?)

(ङ) सिद्धार्थः राहुलस्व जनकः आसीत्। (सिद्धार्थ राहल के पिता थे।)
उत्तर:
सिद्धार्थः कस्य जनकः आसीत्? (सिद्धार्थ किसका पिता था?)

MP Board Solutions

योग्यताविस्तार –

सिद्धार्थस्य विस्तृतजीवनचरितम् अन्विष्य लिखत।
(सिद्धार्थ का विस्तृत जीवन चरित्र ढूँढकर लिखिए

अस्य नाट्यांशस्य सामूहिकम् अभिनयं कुरुत।
(इस नाट्यांश का सामूहिक अभिनय कीजिए।)

महाभिनिष्क्रमणम् पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ सिद्धार्थ के जीवन का अंश है। इस पाठ में उनके संन्यास लेने से पूर्व की कथा है। जब उन्होंने शरीर की विभिन्न अवस्थाएँ-जरा, रोग व मृत्यु-देखी तो उन्हें इस संसार से विरक्ति हो गई और उन्होंने गृहत्याग कर संन्यास ले लिया था। इससे पूर्व उनकी जो मानसिक स्थिति थी, उसका वर्णन इस पाठ में किया गया है।

महाभिनिष्क्रमणम् पाठ का अनुवाद

1. सिद्धार्थः-(स्वगतं चिन्तयन्) हन्त। कियती विडम्बना मानवशरीरस्य। वासन्तिकं यौवनं, कुसुमसुकुमारमनोहरा देहसम्पत्, किमिदं सर्वं स्थिरम्? किं यशोधरायाः यौवनमचलम्? किं जरा व्याधिर्मत्युश्य मदीया अन्तः पुरपरिचारिकाः कदापि नाक्रमिष्यन्ति? किमेता न जानन्ति यद्यौवनं चपलम्? जरा रूपं नाशयिष्यति?
यशोधरा-कुमार! कुमार, किं चिन्तयति भवान्?

सिद्धार्थः :
न किमपि यशोधरे! उद्विग्नमिव मे चेतः। इत एहि अत्रोपविश। इदमेव विलोक्य आश्चर्यम् अनुभवामि यशोधरे यत् वयं मनुष्याः प्रतिदिनं ग्रसन्ती मृत्युराक्षसीं जानन्तोऽपि न शोचामः । अद्य न जाने मदीये हृदये कश्चन् वक्ति यत् जरां व्याधि मृत्यु च विजित्यैव मनुष्यस्य यौवनं विलासश्च शोभते। नृत्यसङ्गीत-वादिषु नानुरञ्ज्यामि, न च तुष्यामि क्रीडाद्यानद्रमः, प्रेक्षागृहपञ्जरैः, स्नानगृहनिर्झरैः।

यशोधरा-तर्हि कुमार! किं व्यवसीयते भवता?

सिद्धार्थः :
इदभेव वाञ्छामि यशोधरे, यदधुना परिवाजको भूत्वा मृत्योर्निग्रहाय तपश्चरेयम्।

शब्दार्थाः :
स्वगतम्-मन में-Inward, in heart; उद्विग्नम् -दुखी-grieved; ग्रसन्तीम्-खाती हुई-swallowing; शोचामः-(हम) सोचते हैं-feel sorrowful; नदीये-मेरे-mine; विजित्यैव-जीतकर ही-on getting victory; नानुरज्यामि-प्रसन्न नहीं होता हूँ-do not feel delighted; प्रेक्षागृहपज्जरैः-नाट्यशाला के पात्रों को-actors of theatre.

MP Board Solutions

अनुवाद :
सिद्धार्थ-(मन में सोचते हुए) आह! मानव शरीर की यह कैसी विडंबना है। वसन्त की तरह जवानी, फूल की तरह कोमल और सुन्दर शरीर क्या ये सब स्थिर हैं? क्या यशोधरा का यौवन अचल है? क्या बुढ़ापा, रोग और मृत्यु मेरे अन्तःपुर की सेविकाओं पर कभी आक्रमण नहीं करेंगे? क्या ये नहीं जानती हैं कि यौवन चंचल है? बुढ़ापा रूप को नष्ट कर देगा?

यशोधरा-कुमार! कुमार, आप क्या सोच रहे हैं?

सिद्धार्थ :
यशोधरा! कुछ नहीं। मेरा मन दुखी सा हो रहा है। यहाँ आजो, यहाँ बैठो। यशोधरा, यही देखकर मुझे आश्चर्य हो रहा है कि हम मनुष्य प्रतिदिन खाती हुई मृत्यु रूपी राक्षसी को जानते हुए भी नहीं सोचते हैं। आज न जाने मेरे मन में कोई कह रहा है कि बुढ़ापा, रोग और मृत्यु को जीतकर ही मनुष्य का यौवन और विलास शोभा पाता है। नृत्य-सङ्गति, बाजे आदि मुझे प्रसन्न नहीं कर रहे और न ही उद्यान, पेड़ों से नाट्यशाला के पात्रों से और स्नानगृह के झरनों के खेल से मैं खुश हूँ।

यशोधरा ;
तो कुमार। आपको क्या चाहिए?

सिद्धार्थ :
यशोधरा! मैं यही चाहता हूँ कि अब संन्यासी बनकर मृत्यु को पराजित करने के लिए तप करूँ!

English :
Old age, diseases and death bring about decay in beauty and youth-youth is flickering-old age disfigures beauty-nothing appeals an aggrieved soul-wish to get sanyasa (liberation) to defeat death through penance.

2. यशोधरा-किमिदं भाषते भवान्? परिव्रज्यायाः नायं समयः। कतिपयमासेभ्यः पूर्वमेव तु भवान शाक्यवंशधरस्य कुमार-राहुलस्य जनकः सञ्जातोऽस्ति। आगच्छतु भवान् अद्य कुमार-राहुलस्य अभिनिष्क्रमणसंस्कारः।

सिद्धार्थः :
न किमपि इच्छामि यशोधरे। अद्यैव प्रव्रज्यायै अनुमतिं ग्रहीतुं महाराजस्य सौधमुपसमि। अथैव प्रव्रज्यायै अनु। यशोधरा-(तारस्वरेण) कुत्र प्रयाति कुमारः? कुमार! कुमार!
(दृश्यपरिवर्तनम्) सिद्धार्थः-आर्य! अभिवादये। शुद्धोदनः-सिद्धार्थ! शाक्यवंशधरो भव।

सिद्धार्थः :
आर्य! अद्य एकामनुज्ञां ग्रहीतुं समुपस्थितोऽस्मि। अहं जानामि यदाजन्म महाराजस्य मह्यं किमप्यदेयं नास्ति।

शुद्धोदनः :
नि:शङ्कं ब्रूहि सिद्धार्थ! मम प्राणा अपि त्वदधीनाः कुमार।।

शब्दार्था: :
प्रव्रज्यायै-संन्यास के लिए-for assuming sanyasa; सौधमुपसमि-महल में जाऊँगा-.go to the palace; तारस्वरेण-ऊँचे स्वर में-loudly;प्रयाति-जाता है-goes; त्वदधीनाः-तुम्हारे अधीन-render under control.

अनुवाद :
सिद्धार्थः-यह आप क्या कह रहे हैं? यह समय संन्यास का नहीं है। कुछ महीने पूर्व ही तो आप शाक्यंवशधर कुमार राहुल के पिता बने हैं। आप आइए, आज कुमार राहुल का अभिनिष्क्रमण संस्कार है।

सिद्धार्थ :
यशोधरा! कुछ भी इच्छा नहीं है। आज ही संन्यास के लिए अनुमति लेने महाराज के महल में जाऊँगा। आज ही संन्यास के लिए। यशोधरा-(ऊँचे स्वर से) कुमार आप कहाँ जा रहे हैं? कुमार! कुमार!

(दृश्य बदलता है)

सिद्धार्थ :
आर्य! अभिवादन करता हूँ। शुद्धोदन-सिद्धार्थ! शाक्यवंश के धारक (रक्षक) हो।

सिद्धार्थ :
आर्य! आज एक आता लेने के लिएपस्थित हुआ हूँ। मैं जानता हूँ कि जब मेरा जन्म हुआ है, महाराज का मेरे लिए कुछ भी अदेय नहीं है।

शुद्धोदन :
निःसंकोच होकर कहो सिद्धार्थ! मेरे प्राण भी तुम्हारे अधीन हैं, कुमार!

English :
Yashodhra advises him not to take the drastic step Siddhartha is adamant. Siddhartha approaches his father to seek his permission.

3. सिद्धार्थः-महाराज! सुबहु मया विचारितं प्रजानां लोकयात्रार्थम्। अधुना शोकमृत्युभयानां निग्रहाय तपश्चिकीर्षामि। प्रव्रज्यायै अनुज्ञातुमर्हति मां महाराजः।

(कोलाहलो वर्धते, आश्रचर्यम्, आश्चर्यम् इति ध्वनयश्च) शुद्धोदनः-कुमार सिद्धार्थ! किमिदं व्यवसितं त्वया? न हि कालस्ते प्रव्रज्यां ग्रहीतुम्। प्रथमे वयसि चलायां मतौ धर्मचर्या बहु दोषा भवति। मया हि तव कुतूहलार्थं क्रीडोद्याने सर्वापि विनोदसामग्री समुदपस्थापिता। चित्रं मनोज्ञेऽपि विषये तव रतिर्न जायते।

सिद्धार्थ :
आर्य! जरा व्याधिश्च मृत्युश्च यदि न स्युस्तर्हि मम मनोज्ञेषु विषयेषु रतिर्भवत्। असंशयं मृत्युरिति जानतोऽपि यस्प हृदि रागो जायते तस्य चेतना लोहमयीमेव उत्प्रेक्षे।

शब्दार्थाः :
सुबहु-अच्छी तरह से-from all angles; चिकीर्षामि-इच्छा करता हूँ-wish for; व्यवसितम्-संङ्कल्प-resolve.

MP Board Solutions

अनुवाद :
सिद्धार्थः-महाराज! अच्छी तरह से मेरे द्वारा प्रजा की लोकयात्रा का विचार किया गया। अब शोक व मृत्यु के भय पराजित करने के लिए तप की इच्छा करता हूँ। महाराज, जाप मुझे संन्यास की आज्ञा दे, (शोर बढ़ जाता है, आश्चर्य है, आश्चर्य है, ऐसी ध्वनि होती है।)

शुद्धोदन :
कुमार सिद्धार्थ! क्या वह तुम्हारा सङ्कल्प है? यह समरः तुम्हारे संन्यास लेने का नहीं है। प्रथम आयु में चलते हुए विचार में धर्माचरण बहुत दोषपूर्ण होता है। मेरे द्वारा ही तुम्हारे मनोरंजन के लिए क्रीड़ास्थल में सभी मनोरंजन की सामग्री लाई गयी थी। चित्र भी तुम्हारे मन और बुद्धि के विषयों पर अनुराग उत्पन्न नहीं कर सके।

सिद्धार्थ :
आर्य! बुढ़ापा, रोग और मृत्यु यदि न होते तो मेरे मन-मस्तिष्क के विषयों पर अनुराग होता। संशय रहित, मृत्यु है, यह जानकर भी जिसके मन में राग उत्पन हो, उसका भन लोहे के समान होगा।

English :
Siddhartha expressed his desire to perform penances. The king advised him against his decision. He had arranged recreational facilities in his son’s palace. Siddhartha is hell bent on encountering old age, diseases and death.

4. शुद्धोदनः-कुमार! कस्त्वामेदं दोधितवान्? तवदं सुकुमारं वयः प्रसन्नसुन्दरं च वपुः किं प्रव्रज्यायै भगवता सृष्टम्? नायं कालस्तव तपोवनाश्रयस्य। गच्छ क्रीडोपवनम्। अनुभव नृत्यवादित्रविनोदम्।

सिद्धार्थः :
कथमहं चेतनां वञ्चयेयमार्य। यदि भवान्मे प्रतिभूर्भवति यन्मम जीवनं मरणाय न सृष्टमस्ति, मम शरीरं रोगेभ्यः सर्वदा मुक्तं स्यात्, मम यौदलं च जरा न कदाप्याक्षिपेत, तर्हि अहं तपोवनं न श्रयिष्ये।

सूत्रधारः :
संसारस्य निःसारता, जनन-मरण-चक्रस्य वन्धनं, मानुषी गतिः, र्वमिदं विचिन्त्य सिद्धार्थों व्यरञ्ज्यत लोकयात्रातः। सकृन्निशीथ तेन व्यवगितं यत्सर्वमिदं प्रपञ्चं परित्यजय जननमरणयोः पारं द्रष्टुं स तपस्तप्स्यति, साधनां विधास्यति, जीवनरहस्यं बोद्धं प्रयतिष्यते। (इति निष्क्रान्तः सर्वे)

शब्दार्थाः :
सष्टम-बनाया है-Created; वञ्चयेयम्-धोखा दूँगाँ-deceive; आक्षिपेक्-चढ़े-overrule; श्रयिष्ये-आश्रय ग्रहण करूँगा-seekshelter; निशीथे-अधी-रात में-at midnight; व्यवसितम्-निर्धारित कर-resolved;बोद्धम्-जानने के लिए-toknow; प्रतिभूः-जमानत, प्रमाण-evidence.

अनुवाद :
शुद्धोदन-कुमार! यह तुम्हें किसने बताया? तुम्हारी यह कोमल आयु और प्रसन्न व सुन्दर शरीर क्या संन्यास के लिए भगवान द्वारा बनाई गई है? यह समय तुम्हारे वन में आश्रय लेने का नहीं है। अपने क्रीडाग्रह में जाओ। नृत्य-संगीत आदि से मनोरञ्जन करो।

सिद्धार्थ :
आर्य! मैं अपने मन को कैसे धोखा दूं? यदि आप मुझे प्रमाण देते हैं कि मेरा जीवन मरने के लिए नहीं बना है, मेरा शरीर रोग से सदा मुक्त रहेगा, मेरी जवानी पर कभी बुढ़ापा नहीं चढ़ेगा, तो मैं तपोवन का आश्रय नहीं लूँगा।

सूत्रधार :
संसार की सारहीनता, जन्म-मरण के चक्र का बन्धन मनुष्य की गति, यह सब सोचकर सिद्धार्थ विरक्त हो कर लोकयात्रा को चला गया। ठीक आधी रात में उसके द्वारा निर्धारित करके कि यह सब दिखावा त्याग कर जन्म-मरण के पार देखने के लिए, वह तप करेगा, साधना करेगा और जीवन रहस्य जानने का प्रयास करेगा। (सब निकल जाते हैं।)

English :
The king asked the prince to return to the palace and enjoy himself.

The Prince rejected the king’s advice-he realised the futility of earthly pleasures.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम्

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 6 यशः शरीरम् (कथा) (सङ्कलिता)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 6 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए-)।
(क) मार्कण्डेयः नाम ऋषिः कुत्र वसति स्म? (मार्कण्डेय ऋषि कहाँ रहते थे?)
उत्तर:
गङ्गातीरे (गङ्गा के किनारे)

(ख) वासुदेवः कस्य प्रियशिष्यः आसीत्? (वासुदेव किसका प्रिय शिष्य था?)
उत्तर:
मार्कण्डेयस्य (मार्कण्डेय का)।

MP Board Solutions

(ग) वासुदेवः प्रथमं कस्य गृहं प्रति प्रस्थितः? (वासुदेव पहले किसके घर गया?)
उत्तर:
देवराजस्य (देवराज के)

(घ) रामदेवः कस्मिन् ग्रामे वसति स्म? (रामदेव किस गाँव में रहता था?)
उत्तर:
रामनाथपुरे (रामनाथ पुर में)

(ङ) जनाः प्रतिदिनं कं स्मरन्ति स्म? (लोग प्रतिदिन किसको याद करते थे?)
उत्तर:
रामदेवम् (रामदेव को)

You can download MP Board 10th sanskrit solution to help you to revise complete syllabus and score more marks in your examinations.

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत- (एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) कः मृतोऽपि जीवति? (कौन मरकर भी जीवित है?)
उत्तर:
यः समाजहितं चिन्तयति सः मृतोऽपि जीवति।।
(जो समाज के हित की सोचता है, वह मरकर भी जीवित है।)

(ख) कः जीवन्नपि मृतः एव? (कौन जीते हुए भी मृत है?)
उत्तर:
यः स्वार्थमात्रं चिन्तयति सः जीवन्नपि मृतः एव।
(जो केवल अपने विषय में सोचता है, वह जीवित होकर भी मृत है।)

(ग) देवालये किं प्रचलति स्म? (मंदिर में क्या चल रहा था?)
उत्तर:
देवालये प्रसादत्वेन भोजनवितरणं प्रचलति स्म। (मंदिर में प्रसाद के रूप में भोजन बँट रहा था।)

(घ) जलं दत्वा माता किम् अपृच्छत? (जल देकर माता ने क्या पूछा?)
उत्तर:
जलं दत्वा माता अपृच्छत्-भवता कुत्र गम्यते?” इति। (जल देकर माता ने पूछा- “आप कहाँ जा रहे हैं?)

(ङ) भोजनपरिवेषकाः किं कृतवन्तः? (भोजन परोसने वालों ने क्या किया?)
उत्तर:
भोजनपरिवेषकाः वासुदेवाय अन्नं पायसादिकं न परिविष्टवन्तः। (भोजन परोसने वालों ने वासुदेव के लिए अन्न-खीर आदि नहीं परोसा।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए।)
(क) कोपेन देवराजः किम् उक्तवान् ? (क्रोध में देवराज ने त्म्या कहा?)
उत्तर:
कोपेन देवराजः उक्तवान्–“किं धनं याचयितुम् आगतं भवता? मया कस्मैचित् किमपि न दीयते। मम विश्रान्तिः नाशिता भवता। निर्गम्यताम इतः” इति।

(क्रोध में देवराज ने कहा-“क्या तुम धन माँगने आए हो? मैं किसी को कुछ नहीं दूंगा। मेरा आराम भंग कर दिया तुमने। चले जाओ यहाँ से।”)

(ख) पुत्रः वासुदेवं विषादेन किमुक्तवान् ? (पुत्र ने वासुदेव को दुख से क्या कहा?)
उत्तर:
पुत्रः वासुदेवं विषादेन उक्तवान्-“मम पिता विंशति वर्षेभ्यः पूर्वम् एव दिवं गतः। इदानीं लोके तस्य स्मृतिमात्रम् अस्ति।” इति।

(पुत्र ने वासुदेव को दुख से कहा-“मेरे पिता 20 वर्ष पहले ही स्वर्ग चले गए। अब संसार में उनकी केवल याद ही है।”)

(ग) यदा वासुदेवस्य अध्ययनं समाप्तं तदा गुरुः तमाहूय किमवदत्? (जब वासुदेव का अध्ययन समाप्त हो गया, तब गुरु ने उसे बुलाकर क्या कहा?)
उत्तर:
यदा वासुदेवस्य अध्ययनं समाप्तं तदा गुरुः तमाहूय अवदत्-“शिष्य! अधुना भवान सर्वविद्यापारङ्गतः अस्ति। अतः इतः परं स्वग्रामं गन्तुम् अर्हति भवान्। गमनात् पूर्वं भवता द्वारकापुरस्य देवराजस्य गृहं दृष्ट्वा आगन्तव्यम्। किन्तु गृहस्यान्तः न गन्तव्यम्’ इति।

(जब वासुदेव का अध्ययन समाप्त हुआ तब गुरु ने उसे बुलाकर कहा, शिष्य! अब तुम समस्त विद्याओं में निपुण हो। अब तुम यहाँ से अपने गाँव जाने योग्य हो। जाने से पूर्व तुम द्वारकापुर के देवराज के घर जाकर देखकर आओ। पर घर के अन्दर नहीं जाना।”)

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूयरत
(दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(बहवः, भोजनम्, मध्येमार्गम्, रामदेवस्य, देवालयम्)
(क) तत्र प्रसादत्वेन ………………. प्रचलति स्म।
(ख) वासुदेवः कञ्चित्………………. अपश्यत।
(ग) मया……………….जीवनम् एव अनुसरणीयम्।
(घ) गुरुकुले……………….शिष्याः आसन्।
(ङ) …………….तेन सोमपुरं प्राप्तम्।
उत्तर:
(क) भोजनम्
(ख) देवालयम्
(ग) रामदेवस्य
(घ) बहवः
(ङ) मध्येमार्गम्।

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से मिलाइए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 1
उत्तर:
(क) 3
(ख) 5
(ग) 4
(घ) 1
(ङ) 2

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्धवाक्यानां समक्ष “न” इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) गुरुकुले बहवः शिष्याः आसन्।
(ख) मध्येमागं तेन रत्नपुर प्राप्तम्।।
(ग) ग्रामे सर्वे देवराजं सगौरवं स्मरन्ति स्म।
(घ) रामदेवः प्रातः स्मरणीयः आसीत्।
(ङ) रामदेवस्य गृहं वैभवोपेतम् आसीत्।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न।।

प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानां विभक्तिं वचनं च लिखत
(नीचे लिखे पदों की विभक्ति व वचन लिखिए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 3

प्रश्न 8.
उदाहरणानुसारं पदानां प्रकृतिं प्रत्ययं च पृथक्कुरुत
(उदाहरणानुसार पदों की प्रकृति व प्रत्यय अलग करके लिखिए-)
(क) गन्तव्यम्
(ख) प्रस्थितवान्
(ग) प्राप्तवान्
(घ) उक्त्वा
(ङ) सत्कृत्व
(च) आगत्य
(छ) यात्विा
(ज) वदन्दः
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 4

प्रश्न 9.
अधोलिखितशब्दानां पर्यायशब्दान् लिखत।
(नीचे लिखे शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए।)
(क) मुनिः
(ख) युक्कः
(ग) अम्ब
(घ) बुभुक्षितः।
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 7

प्रश्न 10.
अधोलिखितवाक्यानां कथानुसारेण क्रमसंयोजनं कुरुत
(नीचे लिखे वाक्यों को कथा के अनुसार क्रम से लिखिए।)
(क) ततः वासुदेवः रामनाथपुरं प्राप्य रामदेवस्य गृहम् अगच्छत्।
(ख) गङ्गातीरे मार्कण्डेयः नाम कश्चन मुनिः वसति स्म।
(ग) मया रामदेवस्य जीवनम् एव अनुसरणीयम्
(घ) किञ्चिदने गतः वासुदेवः किञ्चित् देवालयम् अपश्यत्।
(ङ) शिष्यः अनन्तरं रामनाथपुरं प्रति प्रस्थितवान्।
(च) वासुदेवः तस्य प्रियशिष्यः आसीत्।
उत्तर:
(क) गङ्गातीरे मार्कण्डेयः नाम कश्चन मुनिः वसति स्म।
(ख) वासुदेवः तस्य प्रियशिष्यः आसीत्।
(ग) किञ्चिदग्रे गतः वासुदेवः किञ्चित् देवालयम् अपश्यत्।
(घ) शिष्यः अनन्तरं रामनाथपुरं प्रति प्रस्थितवान्।
(ङ) ततः वासुदेवः रामनाथपुरं प्राप्य रामदेवस्य गृहम् अगच्छत्।
(च) मया रामदेवस्य जीवनम् एव अनुसरणीयम्।

प्रश्न 11.
प्रदत्तं चित्रम् अवलम्ब्य पञ्चवाक्यानि रचयत।
(दिए गए चित्र को देखकर पाँच वाक्य बनाइए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 6
उत्तर:
(क) अस्मिन् चित्रे द्वे स्त्रियौ स्तः।
(ख) ते वार्तालापं कुरुतः।
(ग) गवेषणेन बालकः पश्यति।
(घ) आकाशे वायुयानं गच्छति।।
(ङ) द्वे स्त्रियौ गृहात् बहिः तिष्ठतः।

योग्यताविस्तार –

संस्कृतसाहित्यस्य अन्याः कथाः अन्विष्य पठत।
(संस्कृत साहित्य की अन्य कथाएँ ढूँढ़कर पढ़ो।)

अन्ये ये महापुरुषाः यशः शरीरेण ख्याताः सन्ति तेषां जीवनवृत्तान्तं कथारूपेण लिखत।
(अन्य जो महापुरुष यशरूपी शरीर से प्रसिद्ध हैं, उनके जीवन-वृत्तान्त को कथा रूप में लिखो।)

MP Board Solutions

यशः शरीरम् पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में यश की महत्ता को एक कथा के माध्यम से सिद्ध किया गया है। इस पाठ में दो विशेष पात्रो का वर्णन है जिनमें से एक धनी होते हुए भी जीवित होने पर अपयश के कारण मृत के समान व घृणित है, तथा दूसरा जीवित न होने पर भी यश रूप शरीर से लोगों के हृदयों में जीवित है। अतः मनुष्य को सदा यश-प्राप्ति के लिए अच्छे कार्य करने चाहिएं।

यशः शरीरम् पाठ का अनुवाद

1. गङ्गातीरे मार्कण्डेयः नाम कश्चन मुनिः वसति स्म। तस्य गुरुकुले बहवः शिष्याः आसन्। वासुदेवः तस्य प्रिय शिष्यः। तस्य द्वादशवर्षात्मकम् अध्ययनं यदा समाप्तं तदा गुरुः तम् आहूय अवदत्-“शिष्य! अधुना भवान् सर्वविद्यापारङ्गतः अस्ति। अतः इतः परं स्वग्रामं गन्तुम् अर्हति भवान्। गमनात् पूर्वं भवता द्वारकापुरस्य देवराजस्य गृहं दृष्ट्वा आगन्तव्यम्। किन्तु गृहस्यान्तः न गन्तव्यम्” इति।।

वासुदेवः तस्मिन् एव दिने द्वारकापुरं प्रति प्रस्थितवान्। दिनत्रयात्मकस्य प्रयाणस्य अनन्तरं तं ग्रामं प्राप्य सः ग्रामद्वारे स्थितान् जनान् अपृच्छत्-“देवराजस्य गृहं कुत्र?” इति। “वृथा किमर्थं गम्यते तत्र?” इति उपेक्षया वदन्तः ते देवराजगृहस्थलं सूचितवन्तः। अग्रे गतः सः कूपात् जलम् उद्धरन्तीं महिला याचित्वा जलं प्राप्य तत् पिबन् ताम् अपृच्छत्-“देवराजगृहं कुत्र?” “तस्य पापिनः नाम किमर्थं मम पुरतः उच्चारयति भवान्?” इति वदन्ती सा महिला ततः निरगच्छत् एव।

शब्दार्था :
आहूय-बुलाकर-caling; सर्वविद्यापारङ्गतः-समस्त विद्याओं में निपुण-skilled in all types of learning; प्रस्थितवान्-गया-started, वृथा-व्यर्थ में-in vain, वदन्तः-बोलते हुए-speaking, उद्धरन्तीम्-निकालती हुई को-drawing.

अनुवाद :
गङ्गा के किनारे मार्कण्डेय नाम के कोई मुनि रहते थे। उनके गुरुकुल में बहुत सारे शिष्य थे। वासुदेव उनका प्रिय शिष्य था। उसका बारह वर्ष तक का अध्ययन जब समाप्त हुआ, तब गुरु ने उसको बुलाकर कहा-“शिष्य! अब आप समस्त विद्याओं में निपुण हो गए हो। इसलिए यहाँ से दूर अपने गाँव में जाने योग्य हो गए हो । जाने से पहले तुम्हारे द्वारा द्वारकापुर के देवराज के घर को देखकर आना होगा। पर घर के अन्दर मत जाना।”

वासुदेव उसी दिन ही द्वारकापुर की ओर चला गया। तीन दिन की यात्रा के बाद उस गाँव में पहुँचकर उस गाँव के द्वार पर खड़े लोगों से पूछा-“देवराज का घर कहाँ है?” “व्यर्थ में वहाँ क्यों जा रहे हो?” इस प्रकार गुस्से में बोलते हुए उन्होंने देवराज का घर बता दिया। आगे जाते हुए उसने कुएँ से जल निकालती हुई महिला से माँगकर जल लेकर व पीकर उससे पूछा-“देवराज का घर कहाँ है?” “उस पापी का नाम मेरे सामने क्यों बोला, आपने?” ऐसा कहते हुए वह महिला वहाँ से चली ही गई।

English :
Vasudev learnt all subjects. Directed by Guru Markandeya to locate the house of Devraj at Dwakrapur-went to the village and learnt that Devraj was an evil-minded person.

MP Board Solutions

2. किञ्चिदग्रेगतः वासुदेवः कञ्चित् देवालयम् अपश्यत्। तत्र प्रसादत्वेन भोजनवितरणं प्रचलति स्म। नितरां बुभुक्षितः वासुदेवः जनानां पङ्क्तौ उपाविशत्। भोजनसमये स्वपार्श्वे उपविष्टवन्तं कञ्चित् जनम् अपृच्छत् वासुदेवः-“देवराजः किं धनिक?” इति। तदा सः पार्श्वस्थः जनः-“धिक् भवन्तम्। भोजनकाले तस्य पापिनः नाम स्मारितम्” इति वदन् भोजनं परित्यज्य उत्थितः एव। एतत् दृष्ट्वा परिवेषकाः वासुदेवाय अन्नं पायसादिकं न परिविष्टवन्तः एव। अपूर्णोदरः एव सः ततः उत्थितवान्।

शब्दार्था :
प्रसादत्वेन–प्रसाद के रूप में-as; नितराम्-बहुत अधिक-excessively, extremely; बुभुक्षितः-भूखा-hungry,स्वपार्श्वे अपने पास में-near him, उपविष्टवन्तः-बैठे हुए-sitting, धिक-धिक्कार है-fie, वदन-बोलते हुए-saying,परित्यज्य-छोड़कर-leaving, परिवेषकाः-खाना परोसने वाले-servers of food, पायसादिकम्-खीर इत्यादि-porridge etc, परिविष्टवन्तः-परोसा-served, अपूर्णोदरः-खाली पेट-empty bellied.

अनुवाद :
कुछ आगे जाने पर वासुदेव ने एक मन्दिर देखा। वहाँ प्रसाद के रूप में भोजन बँट रहा था। बहुत अधिक भूखा वासुदेव लोगों की पंक्ति में बैठ गया। भोजन के समय अपने पास में बैठे किसी व्यक्ति से वासुदेव ने पूछा-“देवराज क्या धनी है?’ तब पास में बैठा वह व्यक्ति बोला, “आपको धिक्कार है। भोजन के समय उस पापी का नाम याद किया।” ऐसा कहते हुए भोजन छोड़कर उठ ही गया। यह देखकर खाना परोसने वालों ने वासुदेव के लिए अन्न खीर आदि परोसा ही नहीं। खाली पेट ही वह वहाँ से उठ गया।

English :
Vasudev reached a temple-sat in the line to receive ‘Prasad’-asked somebody about Devraj-The fellow cursed him and stood up ‘Vasudev also remained hungry-Prasad was net served to him.”

3. दूरात् एव देवराजस्य गृहं दृष्ट्वा प्रत्यागतः सः दिनद्वयस्य अनन्तरं गुरुकुलं प्राप्तवान्। गुरुः तं पुनः अवदत्-‘रामनाथपुरं गत्वा रामदेवस्य गृहं ज्ञात्वा आगन्तव्यम्” इति। शिष्यः अनन्तरदिने एव रामनाथपुरं प्रति प्रस्थितवान्। मध्येमागं तेन सोमपुरं प्राप्तम्। तत्र स्वगृहस्य पुरतः उपविष्टां काञ्चित् मातरम् अवदत् सः-“अम्ब! किञ्चित् जल ददातु” इति।

जलं दत्वा माता अपृच्छत्-“भवता कुत्र गम्यते?” इति।
‘रामदेवस्य गृहं प्रति’ इति अवदत् वासुदेवः।

“अहो, प्रातः स्मरणीयः सः” इति उक्त्वा सा माता वासुदेवं सस्नेहम् अन्तः नीत्वा भोजनादिकं दत्वा सत्कृतवती। ततः निर्गतः वासुदेवः रामनाथपुरं प्राप्य ‘रामदेवस्य गृहं कुत्र?’ इति कञ्चित् अपृच्छत् । सः अपि सत्कृत्य स्वयम् आगत्य रामदेवगृहं प्रादर्शयत् । दूरात् एव तत् दृष्टवा वासुदेवः गुरुकुलं प्रत्यगच्छत्।

शब्दार्था :
प्रत्यागतः-लौट आया-returned, ज्ञात्वा-जानकर-knowing; मध्येमार्गम्-रास्ते के बीच में-on the way; पुरतः-सामने-in front of; नीत्वा-ले जाकर-taking; सत्कृत्य-सत्कार करके-honouring, welcoming, प्रादर्शयत्-दिखाया-showed.

अनुवाद :
दूर से ही देवराज का घर देखकर वह लौट आया। वह दो दिन बाद गुरुकुल पहुँचा। गुरु ने उसे फिर कहा-रामनाथपुर जाकर रामदेव का घर जानकर आओ।” शिष्य दूसरे दिन ही रामनाथपुर की ओर चला गया। रास्ते के बीच में वह सोमपुर पहुंचा। वह अपने घर के सामने बैठी हुई किसी माता (वृद्ध स्त्री) से बोला-“माता! थोड़ा जल दे दो।”
जल देकर माता ने पूछा-“आप कहाँ जा रहे हो?
“रामदेव के घर की ओर।” वासुदेव बोला।

“वाह, वह प्रातः याद करने योग्य है।” ऐसा कहकर उस माता ने वासुदेव को प्रेम से अन्दर ले जाकर भोजन आदि देकर सत्कार किया ! वहाँ से निकल कर वासुदेव रामनाथ पुर पहुँचकर ‘रामदेव का घर कहाँ है?” किसी से पूछा। उसने भी सत्कार करके स्वयं आकर रामदेव का घर दिखाया। दूर से ही वह देखकर वासुदेव गुरुकुल लौट आया।

English :
Vasudev was again directed to learn about Ramdev’s house at Ramnathpur. Vasudev left for the place-Reached Sompur on the way. Asked a woman about Ramdev. She welcomed him-Reached Ramnathpur-Somebody greeted him and showed Ramdev’s house-Viewing the house from a distance Vasudev returned to the Gurukul.

5. दिनद्वयस्य अनन्तरं गुरुः अकथयत्-‘वासुदेव! भवान् इतः स्वगृह गन्तुम् अर्हति। गमनात् पूर्वं भवता देवराज-रामदेवयोः पूर्णः परिचयः प्राप्तव्यः” इति। एतम् आदेशं पालयन् वासुदेवः पुनरपि द्वारकापुरं प्राप्य देवराजस्य गृहम् अगच्छत्। वैभवोपेतं गृहं तत्। द्वाररक्षकः तस्य प्रवेशं निषिद्धवान्। बहुधा प्रार्थना यदा कृता तदा सः अन्तः गत्वा देवराजं वासुदेवागमनं निवेदितवान्। कोपेन एव बहिः आगत्य देवराजः-“किं धनं याचितुम् आगतं भवता? मया कस्मैचित् किमपि न दीयते । मम विश्रान्तिः नाशिता भवता। निर्गम्यताम् इतः” इति तर्जयित्वा तं प्रेषितवान्।

शब्दार्था :
वैभवोपेतम्-वैभव, विशालता से युक्त को-grand, splendid, निषिद्धवान्-रोका-refused, checked; निर्गम्यताम्-निकल जाओ-go away, तर्जयित्वा-डाँटकर-scolding, snubbing.

अनुवाद :
दो दिन बाद गुरु ने कहा-“वासुदेव! तुम यहाँ से अपने घर जाने योग्य हो.। जाने से पहले तुम देवराज व रामदेव का पूरा परिचय प्राप्त करना।”

इस आदेश को पालते हुए वासुदेव फिर द्वारकापुर पहुँचकर देवराज के घर गया। उसका घर विशालता से युक्त था। द्वारपाल ने उसे अन्दर जाने से रोका। बहुत प्रार्थना जब की तब उसने अन्दर जाकर देवराज को वासुदेव के आने की बात बताई। क्रोध में ही बाहर आकर देवराज ने-“क्या तुम धन माँगने आए हो? मैं किसी को कुछ नहीं दूंगा। मेरे आराम को भंग कर दिया तुमने। यहाँ से चले जाओ।” डाँटकर उसे निकाल (भेज) दिया।

English :
Guru asked Vasudev to gather detailed information about Devraj and Ramdev. Vasudev was not allowed to enter Devraj’s building. Devraj came out-called him a beggar-turned him awaysnubbed him also for robbing him of his rest.

MP Board Solutions

7. ततः वासुदेवः रामनाथपुरं प्राप्य रामदेवस्य गृहम् अगच्छत्। पर्णेः निर्मितं प्राचीनं गृहं तत्। कश्चन् युवकः तं सादरं स्वागतीकृत्य पानीयभोजनादिभिः तं सत्कृत्य विश्रान्त्यर्थं व्यवस्थाम् अकरोत्। विश्रान्तेः अनन्तरं सः ‘अहं रामदेवस्य पुत्रः’ इति स्वपरिचयम् उक्त्वा आगमनकारणम् अपृच्छत्। यदा वासुदेवः रामदेवस्य दर्शनेच्छा प्राकटयत् तदा पुत्रः एक भावचित्रं प्रदर्श्य-“मम पिता विंशति वर्षेभ्यः पूर्वम् एव दिवं गतः। इदानीं तस्य स्मृतिमात्रम् अस्ति लोके” इति विषादेन अवदत्। रामदेवः ग्रामस्य विकासाय देवालय-चिकित्सालय-विद्यालय-ग्रन्थालय-धर्मशालोद्यानानि यानि कारितवान तत्सर्वम अपश्यत् वासुदेवः। ग्रामे सर्वे रामदेवं सगौरवं स्मरन्ति स्म।

‘देवराजे जीवति सति अपि कोऽपि तस्मिन् आदरवान् न । रामदेवः तु विंशतिवर्षेभ्यः पूर्वम् एव दिवं गतः चेदपि जनाः प्रतिदिनं तं स्मरन्ति । यः समाजहितं चिन्तयति सः मृतोऽपि जीवति। यः स्वार्धमात्रं चिन्तयति सः तु जीवन्नपि मृतः एव’ इति अवगतवान् वासुदेवःमया रामदेवस्य जीवनम् एव अनुसरणीयम्’ इति सङ्कल्प्य स्वग्रामम् अगच्छत्।

शब्दार्था :
पर्णैः-पत्तों से-leaves, दर्शनेच्छाम्-देखने की इच्छा को-adesire to see, भावचित्रम्-छायाचित्र को-photo, प्रदर्श्य-दिखाकर-showing, विषादेन-दुःख से-with grief.

अनुवाद :
तब वासुदेव रामनाथपुर पहुँचकर रामदेव के घर गया। वह पत्तों का बना पुराना घर था। किसी युवक ने उसका आदर सहित स्वागत कर, पानी भोजन आदि से उसका सत्कार कर आराम करने की व्यवस्था की। आराम करने के बाद उसने, “मैं रामदेव का पुत्र हूँ।” ऐसा अपना परिचय देकर आने का कारण पूछा। जब वसुदेव ने रामदेव को देखने की इच्छा प्रकट की तब पुत्र ने एक छायाचित्र दिखाकर– “मेरे पिता बीस वर्ष पहले ही स्वर्ग चले गए। अब इस संसार में उनकी केवल स्मृति ही रह गई है।” दुःख से कहा। रामदेव ने गाँव के विकास के लिए जो मंदिर-चिकित्सालयविद्यालय-ग्रन्थालय-धर्मशाला, उद्यान आदि बनवाये, वह सब वासुदेव ने देखे। गाँव में रामदेव को गर्व से याद करते थे।

“देवराज जीवित होते हुए भी कोई उसका आदर नहीं करता। रामदेव तो बीस वर्ष पूर्व ही स्वर्ग चले गए, फिर भी लोग उन्हें प्रतिदिन याद करते हैं। जो समाज के हित की सोचता है, वह मरकर भी जीवित है। जो स्वार्थ की ही सोचता है, वह तो जीवित होते हुए भी मृत ही है।” यह जानकर वासुदेव, “मेरे द्वारा रामदेव के जीवन का ही अनुसरण करना चाहिए,” यह सङ्कल्प कर अपने गाँव को चला गया।

English :
Vasudev then reached Ramnathpur. Ramdev’s son greeted him-served food and drink Ramdev had built a temple, a dispensary, a school, a library and an inn before his death. All the villagers remembered him with honour, Vasudev learnt the difference between a selfish and egoistic richman and a poor social workerVasudev resolved to follow Ramdev’s path of social service.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम्

In this article, we will share MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् Pdf, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 10 आह्वानम् (गीतम्) (सङ्कलितम्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 10 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) भारतस्य पुरातनः सखा कः विद्यते? (भारत का पुराना मित्र कौन है?)
उत्तर:
चीनः (चीन)

(ख) कस्मिन् प्रवर्तितुं कदापि न खिद्यते? (किसमें प्रवृत्त होने के लिए दुख नहीं होता?)
उत्तर:
स्वकर्मणि (अपने कर्म में)

MP Board Solutions

(ग) पापसिन्धवः शत्रवः का प्रयान्तु? (पापरूपी समुद्र/शत्रु किसको प्राप्त हो?)
उत्तर:
अशेषताम् (समाप्ति को)

(घ) वयं कया स्वदेशरक्षणोद्यताः? (हम किससे अपने देश की रक्षा के लिए तैयार हों?)
उत्तर:
सत्यनिष्ठया (सत्य निष्ठा से)

(ङ) भारतीयकेतवः कां वृत्तिं स्फुरन्तु? (भारतीय झण्डे किस वृत्ति को स्फुरित करें?)
उत्तर:
अरातिनीवृतिम् (शत्रु को सब ओर से पकड़कर मारने के भाव को)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तर लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) कृषीबलैः काः समेधिताः भवन्तु? (किसानों के द्वारा वया वृद्धि को प्राप्त हो?
उत्तर:
कृषीबलैः धान्यवृद्धयः समेधिताः भवन्तु। (किसानों के द्वारा धानअदि वृद्धि को प्राप्त हों।)

(ख) ऊर्जितं यशः कैः अर्जितम्? (तेजस्वितापूर्ण यश किसके द्वारा अर्जित किया गया?)
उत्तर:
ऊर्जितं यशः पूर्वपुरुषैः अर्जितम्। (तेजस्वितापूर्ण यश पूर्वजों द्वारा अर्जित किया गया।)

(ग) अखर्वगर्ववृत्तिना केन वीक्षितम्? (बड़े घमण्डी आचरण वाले किराको देखा गया?)
उत्तर:
अखर्वगर्ववृत्तिना अरिणा वीक्षितम्।
(बड़े धमण्डी आचरण वाले शत्रु के द्वारा देखा गया।)

(घ) भारतीयाः केषां वंशजाः सन्ति? (भारतीय किसके वंशज हैं?)
उत्तर:
भारतीयाः वसिष्ठ-याज्ञवल्क्य-गौतम-अत्रि एतेषाम् वंशजाः सन्ति। (भारतीय वसिष्ठ-याज्ञवल्क्य-गौतम व अत्रि के वंशज हैं।)

(ङ) शत्रवः द्रुतं किं फलं प्राप्नुवन्तु? (शत्रु शीघ्र किस फल को प्राप्त हों?)
उत्तर:
शत्रवः द्रुतं निजप्रवञ्चनाफलं प्राप्नुवन्तु। (शत्रु शीघ्र अपने उगी रूपी कर्म के फल को प्राप्त हों।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) वीरबन्धवः किं कुर्वन्तु? (वीर बन्धु क्या करें?)
उत्तर:
वीरबन्धवः पापसिन्धवः शत्रवः अशेषतां प्रयान्तु।। (वीरबन्धु पाप रूपी समुद्र जैसे शत्रुओं को समाप्त करें।)

MP Board Solutions

(ख) अद्य कं स्मरन्तु? (आज किसको याद करें?)
उत्तर:
अद्य पूर्वपुरुषैः समस्तदिक्षुविश्रुतं अर्जितम् ऊर्जितम् यशः स्मरन्तु। (आज पूर्वजों के द्वारा, सारी दिशाओं में विख्यात, अर्जित तेजस्वीपूर्ण यश को स्मरण करें।)

(ग) भवत्सु जीवितेषु के नदन्ति? (आप सब में जीवित रहते हुए कौन अस्पष्ट बोल रहे हैं?)
उत्तर:
भवत्सु जीवितेषु दस्यवः नदन्ति। (आप सब में जीवित रहते हुए लुटेरे अस्पष्ट बोल रहे हैं।)

प्रश्न 4.
उचितशब्देन रिक्तस्थानानि पूरयत (उचित शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(क) स्वकर्मणि प्रवर्तितुं ………………. नैव खिद्यते। (अद्यापि/कदापि)
(ख) पुरातनं स्वपौरुष ………………. वीरबन्धवः। (विस्मरन्तु/स्मरन्तु)
(ग) यथा विहाय ………………. आचरन्तु तेऽद्भुतम् ।(कूटनीतिम्/राजनीतिम्)
(घ) समस्तदिक्षु ………………. तदद्य यावदूर्जितम्। (श्रुतं/विश्रुत)
(ङ) कदा प्रदर्शयिष्यते द्विषां ………………. बलस्य वः। (बलं/फल)
उत्तर:
(क) कदापि
(ख) स्मरन्तु
(ग) कूटनीतिम्
(घ) विश्रुतं
(ङ) फलं

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से जोड़िए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 1
उत्तर:
(क) 2
(ख) 1
(ग) 4
(घ) 5
(ङ) 3

प्रश्न 6.
अधोलिखितपदानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनञ्च लिखत (नीचे लिखे पदों के मूलशब्द विभक्ति और वचन लिखिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 3

प्रश्न 7.
अघोलिखितक्रियापदानां धातुं लकारं पुरुषं वचनञ्च लिखत (नीचे लिखे क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष व वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 5

प्रश्न 8.
विलोमशब्दान् लिखत-(विलोम शब्द लिखिए)
यथा – स्वदेशः – विदेशः
(क) स्मरन्तु
(ख) पुरातनम्
(ग) अशेषताम्
(घ) सत्यनिष्ठया
उत्तर:
(क) स्मरन्तु – विस्मरन्तु
(ख) पुरातनम् – नवीनम्
(ग) अशेषताम् – शेषताम्
(घ) सत्यनिष्ठया – असत्यनिष्ठया

प्रश्न 9.
पर्यायशब्दान् लिखत-(पर्यायशब्द लिखिए)
यथा – सूर्य दिवाकरः, भास्करः
(क) कालः
(ख) क्षितौ
(ग) शत्रवः
(घ) जगत्सु
उत्तर:
(क) कालः – समयः
(ख) क्षितौ – पृथिव्याम्, धरायाम्
(ग) शत्रवः – रिपवः, अरयः
(घ) जगत्सु – संसारेषु, विश्वेषु

MP Board Solutions

प्रश्न 10.
रेखाङ्कितपदान्याधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत (रखाङ्कित पदों के आधार पर प्रश्न बनाइए)
(क) दस्यवः नदन्ति
(लुटेरे अस्पष्ट बोल रहे हैं।)
उत्तर:
के नदन्ति? (कौन अस्पष्ट बोल रहे हैं?)

(ख) वयं हिमालयस्य रक्षणे समुद्यताः। (हम सब हिमालय की रक्षा के लिए तैयार हों।)
उत्तर:
वयं कस्य रक्षणे समुद्यताः? (हम किसकी रक्षा के लिए तैयार हों?)

(ग) पापसिन्धवः शत्रवः अशेषतां प्रयान्तु। (पाप रूपी समुद्र शत्रु समाप्ति को प्राप्त हों।)
उत्तर:
के शत्रवः अशेषतां प्रयान्तु? (कौन से शत्रु समाप्ति को प्राप्त हों?)

(घ) ते कूटनीतिं विहाय आचरन्तु। (वे कुटनीति को छोड़कर आचरण करें।)
उत्तर:
ते किं विहाय आचरन्तु? (वे किसको छोड़कर आचरण करें?)

(ङ) नदीषु यन्त्रयानलौहमार्गसेतवः सन्तु। (नदियों पर मशीनों द्वारा चलने वाले वाहन, लोहे की पटरी वाले रास्ते तथा पुल हों।)
उत्तर:
केषु यन्त्रयान लौह मार्ग सेतवः सन्तु?
(किन पर मशीनों द्वारा चलने वाले वाहन, लौहे की पटरी वाले रास्ते तथा पुल हों।)

योग्यताविस्तार –

पाठे आगतं गीतं लयबद्धं गायत।
(पाठ में आए गीत को लयबद्ध करके गाओ।)

अन्यदेशभक्तिविषयकं संस्कृतगीतम् अन्विष्य गायत।
(अन्य देश भक्ति के संस्कृत गीत ढूंट कर गाओ।)

आह्वानम् पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ एक गीत है जो श्री दयाशङ्कर वाजपेयी के द्वारा रचा गया है, जिसमें भारत और चीन के मध्य हुए युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों के साथ प्रत्यक्ष चर्चा करके लिखा गया है।

आह्वानम् पाठ का अनुवाद

1. युवान एष वः परीक्षणस्य काल आगतः हिमालयस्य रक्षणे समुद्यताः स्थ सर्वतः।
अयं सखा पुरातनोऽस्य भातरस्य विद्यते स्वकर्मणि प्रवर्तितुं कदापि नैव खिद्यते॥1॥

MP Board Solutions

अन्वयः :
युवान! एषः कालः वः परीक्षणस्य आगतः (अस्ति), सर्वतः, हिमालयस्य रक्षणे समुद्यताः स्थ। अयम् अस्य भारतस्थ पुरातनः सखा विद्यते स्वकर्मणि प्रवर्तितुं कदापि न एव खिद्यते।

शब्दार्थाः :
युवान!-हे युवको!-oh young men; वः-तुम्हारा-yours; समुद्यताःतैयार-ready; स्थ-हों-be; खिद्यते-दुखी होता है-is aggrieved.

अनुवाद :
हे युवको! यह समय तुम्हारी परीक्षा का है, सब ओर से हिमालय की रक्षा के लिए तैयार हो। यह इस भारत का पुराना मित्र है। अपने कर्म में प्रवृत्त होने के लिए कभी भी दुखी नहीं होता है।

English :
Young men, be ready to defend Himalaya-India’s oldest friend never aggrieved in getting inclined to self duties.

2. अखर्वगर्ववृत्तिनारिणात्र येन वीक्षितं सहेक्षणेन तत्क्षणन्तु तच्छिरः क्षितौ धृतम्।
यथा क्षमावशा वयं तथैव रोषपूरिताः यथैव शीलसंस्कृतास्तथा प्रसिद्धशूरताः॥2॥

अन्वयः :
अत्र येन अखर्वगर्ववृत्तिना अरिणा वीक्षितम् (तदा) तत् क्षणं तु ईक्षणेन सह तच्छिरः क्षितौ धृतम्, वयं यथा क्षमावशाः (स्मः) तथैव वयं रोषपूरिता (अपि स्मः), (एवमेव) यथा शील-संस्कृता एव तथा प्रसिद्धशूरताः (स्मः)।

शब्दार्थाः :
अखर्वगर्ववृत्तिना-बड़े घमण्डी आचरण वाले के द्वारा-of proud conduct (arrogant);अरिणा-शत्रु के द्वारा-by enemy; वीक्षितम्-देखा गया-seen; सहेक्षणेन-देखने के साथ ही-at the very sight; धृतम्-रख दिया-placed.

अनुवाद :
यहाँ जिस, बड़े घमण्डी आचरण वाले शत्रु के द्वारा देखा गया, तब उस क्षण तो देखने के साथ ही पृथ्वी पर गिरा दिया, हम जितने क्षमाशील हैं, उतने ही क्रोध से भरे हुए भी हैं। इस प्रकार जैसे हमारी शील संस्कृति प्रसिद्ध है वैसे ही वीरता भी।

English :
We beheaded the proud enemy for his evil intentions-We are both forgiving and equally brave.

3.पुरातनं स्वपौरुषं स्मरन्तु वीरबन्धवः अशेषतां प्रयान्तु शत्रवोऽद्य पापसिन्धव। – निजप्रवञ्चनाफलं समाप्नुवन्तु ते द्रुतं यथा विहाय कूटनीतिमाचरन्तु तेऽद्भुतम्॥3॥

अन्वयः :
वीरबन्धवः! पुरातनं स्वपौरुषं स्मरन्तु अद्य पापसिन्धवः शत्रवः अशेषतां प्रयान्तु। ते द्रुतं निजप्रवञ्चनाफलं समाप्नुवन्तु, यथा ते अद्भुतं कूटनीतिं विहाय आचरन्तु।।

शब्दार्थाः :
स्वपौरुषम्-अपने पुरुषत्व को-own valour; पापसिन्धवः-पापरूपी समुद्र-ocean in the form of sin; अशेषताम्-समाप्ति का-completion; निजप्रवञ्चनाफलम्-अपने ठगी रूपी कर्म के फल को-fruitof their trickery;समाप्नुवन्तु-प्राप्त करें-obtain; विहाय-छोड़कर-leaving.

अनुवाद :
हे वीर बन्धुओ! अपने पुराने पुरुषत्व को याद करो, आज पापरूपी समुद्र से शत्रु समाप्ति को प्राप्त हो। वे शीघ्र अपने ठगी रूपी कर्म के फल को प्राप्त करें, जिससे वे अपनी अजीब सी कूटनीति को छोड़कर अच्छा आचरण करें।

English :
Remember your chivalry-Bring an end to sinful enemies-tell them suffer the fruit of their trickery and leave diplomacy.

4. कृषीबलैः समेधिता भवन्तु धान्यवृद्धयः श्रमेण सन्तु साधितास्तु वीरसाहसर्द्धयः।
स्मरन्तु पूर्वपूरुषैर्जगत्सु यद् यशोऽर्जितम् समस्तदिक्षु विश्रुतं तदद्य यावदूर्जितम्॥4॥

MP Board Solutions

अन्वयः :
कृषीबलैः धान्यवृद्धयः समेधिताः भवन्तु श्रमेण साधिताः तु वीरसहासर्द्धयः सन्तु। पूर्वपुरुषैः जगत्सु, समस्तदिक्षुविश्रुतं यावद् ऊर्जितं यशः अर्जितं, तद् अद्य स्मरन्तु।

शब्दार्थाः :
कृषीवलैः-किसानों के द्वारा-By farmers; समेधिताः-वृद्धि को प्राप्त-attain propserity; वीरसाहसर्द्धय-पराक्रम-उत्साह की वृद्धि-increase invalour and courage; दिक्षु-दिशाओं में-indirections; विश्रुतम्-विख्यात-famous; अर्जितम्-तेजस्विता पूर्ण-full of bu’stre; स्मरन्तु-स्मरण करें-remember.

अनुवाद :
किसानों के द्वारा धान्य-वृद्धि से वृद्धि को प्राप्त हो, परिश्रम से प्राप्त । पराक्रम व उत्साह की वृद्धि हो। संसार में पूर्वजों के द्वारा समस्त दिशाओं में विख्यात, जो तेजस्वितापूर्ण यश प्राप्त किया है, उसे आज याद करो।

English :
Let farmers flourish-let there be advancement in courage-remember the renown of your ancestors through the world.

5. वयं तु सत्यनिष्ठया स्वदेशरक्षणोधताः प्रवञ्चनैकदक्षशत्रुपक्षतक्षणव्रताः।
नदीषु सन्तु यन्त्रयानलौहमार्गसेतवः अरातिनीवृतिं स्फुरन्तु भारतीयकेतवः॥5॥

अन्वयः :
वयं तु सत्यनिष्ठया स्वदेशरक्षणोद्यताः प्रवञ्चनैकदक्षशत्रुपक्षतक्षणव्रताः (स्मः), नदीषु यन्त्रयानलौहमार्गसेतवः भारतीय केतवः अरातिनीवृत्तिं स्फुरन्तु।

शब्दार्थाः :
सत्यनिष्ठया-सत्यनिष्ठा से-with sincere loyalty; उद्यताः-तैयार -ready; केतवः-झण्डे-flags; अरातिनीवृत्तिम्-शत्रु को सब ओर से पकड़कर मारने के भाव को-enemies by grabbing them all over.

अनुवाद :
हम सब तो सत्यनिष्ठा से अपने देश की रक्षा के लिए तैयार हैं, एकमात्र छल-कपट में निपुण शत्रुओं के पक्ष को काटने का वृत धारण करने वाले हैं, नदियों पर मशीनों द्वारा चलने वाले वाहन, लोहे की पटरी वाले रास्ते तथा पुल हों, भारतीय पताकाएँ शत्रु को सब ओर से पकड़कर मारने के भाव को स्फुरित करें।

English :
We are ready to serve our country honestly. We will sever the heads of deceitful enemies-let there be machines and iron rails. Let the Indian flags be unfurled around the enemies.

6. अये वशिष्ठ-याज्ञवल्क्य-गौतमात्रिवंशजाः तथैव सूर्यचन्द्रपावकान्ववायतल्लजाः। – भवत्सु जीवितेषु हन्त! किं नदन्ति दस्यवः? कदा प्रदर्शयिष्यते द्विषां फलं बलस्य वः॥6॥

अन्वयः :
हन्त! अये वसिष्ठ-याज्ञवल्क्य-गौतम-अत्रि वंशजा (सन्ति), तथैव सूर्यचन्द्रपावकान्ववायतल्लजाः भवत्सु जीवितेषु दस्यवः किंनदन्ति? वः बलस्य फलं द्विषां (कृते) कदा प्रदर्शयिष्यते।

शब्दार्थाः :
हन्त!-खेद है-Alas! fie; अन्ववायतल्लजाः-कुल में सर्वश्रेष्ठ-of noblest family; भवत्सु-आप सब में-in you all; जीवितेषु-जीवित रहते हुए-while living; दस्यवः-लुटेरे-robbers; नदन्ति-अस्पष्ट बोल रहे हैं -speaking vaguely; वः-तुम्हारे-yours; द्विषाभ्-शत्रुओं के-of enemies.

अनुवाद :
खेद है। अरे, वसिष्ठ, याज्ञवल्क्य, गौतम अत्रि के वंश में आप उत्पन्न हुए हैं। वैसे ही, सूर्य और चन्द्र से पवित्र, कुल में सर्वश्रेष्ठ आप सब के जीवित रहते हुए लुटेरे अस्पष्ट बोल रहे हैं। तुम्हारे बल का फल शत्रुओं को कब दिखाओगे।

English :
You are the descendants of rishis and of noble birth show your valour to let down robberr.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः

In this article, we will share MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः Pdf, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः (नाट्यांशः) (मध्यमव्यायोगात्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 5 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए-)।
(क) घटोत्कचः कया आज्ञप्तः? (घटोत्कच ने किससे आज्ञा ली?)
उत्तर:
जनन्या (माता से)

(ख) किमहमब्राह्मणः इति कः उक्तवान्? (‘क्या मैं ब्राह्मण नहीं यह किसने कहा?)
उत्तर:
वृद्धः (बूढ़े व्यक्ति ने)

MP Board Solutions

(ग) पुरुषादः कः आसीत्? (मनुष्य को खाने वाला कौन था?)
उत्तर:
घटोत्कचः (घटोत्कच)।

(घ) कुलं का रक्षितुमिच्छति? (कुल को कौन बचाना चाहती है?)
उत्तर;
ब्राह्मणी (ब्राह्मण की पत्नी)

(ङ) ज्येष्ठः पितृसमः इति कैः उक्तम्? (बड़ा भाई पिता के समान है-यह किसने कहा?)
उत्तर:
ब्रह्मवादिभिः (ब्रह्मज्ञों द्वारा)

You can download MP Board 10th sanskrit solution to help you to revise complete syllabus and score more marks in your examinations.

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत- (एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) ब्राह्मणपरिवारः केन समासादितः? (ब्राह्मण परिवार किसके द्वारा पकड़ा गया?)
उत्तर:
ब्राह्मणपरिवारः घटोत्कचेन समासादितः। (ब्राह्मण परिवार घटोत्कच के द्वारा पकड़ा गया।)

(ख) सुतापेक्षी कः आसीत्? (पुत्र की अपेक्षा वाला कौन था?)
उत्तर:
सुतापेक्षी वृद्धः आसीत्। (पुत्र की अपेक्षा वाला बूढ़ा व्यक्ति था।)

(ग) पितॄणां सुसम्प्रियः कः भवति? (पिता को सबसे प्यारा कौन होता है?)
उत्तर:
पितृणां सुसम्प्रियः ज्येष्ठः श्रेष्ठः भवति।। (पिता को सबसे प्यारा बड़ा तथा श्रेष्ठ बेटा होता है।)

(घ) घटोत्कचः कति पुत्रान् विसर्जयितुं कथयति? (घटोत्कच कितने पुत्रों को छोड़ने के लिए कहता है?)
उत्तर:
घटोत्कचः एकं पुत्रं विसर्जयितुं कथयति। (घटोत्कच एक पुत्र को छोड़ने के लिए कहता है।)

(ङ) घटोत्कचः अन्ते किं कथयति? (घटोत्कच अन्त में क्या कहता है?)
उत्तर:
घटोत्कचः अन्ते कथयति-‘अहो स्वजनवात्सल्यम्। (घटोत्कच ने अन्त में कहा-‘वाह, अपने लोगों के प्रति कितना स्नेह ।’)

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)

(क) ब्राह्मणी वृद्धं किं कथयति? (ब्राह्मणी वृद्ध से क्या कहती है?)
उत्तर:
ब्राह्मणी वृद्धं कथयति-“पतिमात्रधर्मिणी पतिव्रतेति नाम गृहीतफलेनैतेन शरीरेणार्यं कलं च रक्षितमिच्छामि।”

(ब्राह्मणी ने बूढ़े व्यक्ति को कहा-पति के धर्म का पालन करने वाली मैं पतिव्रता हूँ। गृहीत फल वाले इस शरीर से आर्य, स्वामी तथा कुल की रक्षा करना चाहती हूँ।)

(ख) द्वितीयः पुत्र स्वभ्रातरं किं कथयति? (दूसरे पुत्र ने अपने भाई से क्या कहा?)
उत्तर:
द्वितीयः पुत्रः स्वभ्रातरं कथयति-“कुले, लोके पितृणां च ज्येष्ठः श्रेष्ठः सुसंप्रियः ततः गुरुवृत्तिम् अनुस्मरन् अहमेव यास्यामि।”

(दूसरे पुत्र ने अपने भाई से कहा-इस संसार में, कुल में पिता का ज्येष्ठ पुत्र से अधिक स्नेह होता है। अतः पूर्वजों के आदर्श को निभाते हुए मैं ही जाऊँगा।)

(ग) तृतीयः पुत्रः स्वभ्रातरौ किं कथयति? (तीसरे पुत्र ने अपने भाइयों को क्या कहा?)
उत्तर:
तृतीयः पुत्रः स्वभ्रातरौ कथयति-“ब्रह्मवादिभिः ज्येष्ठो भ्राता पितृसमः कथितः ततः गुरुणां प्राणरक्षणं कर्तुम् अहम् अर्हः अस्मि।

(तीसरे पुत्र ने दोनों भाइयों से कहा- “ब्राह्मणों द्वारा बड़ा भाई पिता समान कहा गया है, तो बड़ों के प्राणों की रक्षा करने के लिए मैं योग्य हूँ।”)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूयरत-(दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(परिणामेन, पतिव्रतेति, बलाबलं, श्रेष्ठः, पितृसमः)
(क) पतिमात्रधर्मिणी………….नाम।
(ख) ज्येष्ठः ……………कुले लोके।
(ग) कृतकृत्यं शरीरं मे…………….जर्जरम्।
(घ) ज्येष्ठो भ्राता………!
(ङ) ……….परिज्ञाय पुत्रमेकं विसर्जय।
उत्तर:
(क) पतिव्रतेति
(ख) श्रेष्ठः
(ग) परिणामेन
(घ) पितृसमः
(ङ) बलाबलं

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से जोडिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 1
उत्तर:
(क) 4
(ख) 3
(ग) 1
(घ) 5
(ङ) 2

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षं ‘न’ इति लिखत–
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) घटीत्कचः जनन्या आज्ञप्तः।।
(ख) किमहमब्राह्मणः इति प्रथमः पुत्रः कथयति।
(ग) कुले लोके च अनुजः श्रेष्ठः भवति।
(घ) ज्येष्ठो भ्राता पितृसमः इति ब्रह्मवादिभिः कथितः।
(ङ) ब्राह्मणी पतिमात्रधर्मिणी आसीत्।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) आम्।

MP Board Solutions

प्रश्न 7.
अधोलिखित शब्दानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनं च लिखत-
(नीचे लिखे शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति व वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 2
(क) गुरुणाम्
(ख) तया
(ग) पल्या
(घ) भवन्तम्
(ङ) पितृणाम्
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 3

प्रश्न 8.
निम्नलिखितक्रियापदानां धातुं लकारं पुरुषं वचनं च लिखत
(नीचे लिखे क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखिए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 5

प्रश्न 9.
उदाहरणानुसारं धातुं प्रत्ययं च पृथक् कुरुत
(उदाहरण के अनुसार धातु और प्रत्यय अलग कीजिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 6
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 8

प्रश्न 10.
अधोलिखितसमासानां विग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत
(नीचे लिखे समासों के विग्रह कर समास का नाम लिखिए।)
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 7

योग्यताविस्तार –

संस्कृतभाषायां रूपकाणां दश भेदाः भवन्ति। ते च, नाटकम्, प्रकरणम्, भाणः, प्रहसनम्, डिमः, व्यायोगः, समवकारः, वीथी, अङ्कः, ईहामृगः। संस्कृत भाषा में रूपक के दस भेद होते हैं। वे हैं-नाटक, प्रकरण, भाण, प्रहसन, डिम, व्यायोगह, समवकार, वीथी, अङ्क, ईहामृग।

नाट्यांशस्य सामूहिकम् अभिनयं कुरुत। (नाट्यांश का सामूहिक अभिनय कीजिए।)

कुटुम्बानुरक्तिः पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ महाकवि भास द्वारा रचित ‘मध्ययव्यायोगः’ नामक ग्रन्थ का एक अंश है। इस पाठ में घटोत्कच जब बलि के लिए एक ब्राह्मण परिवार को पकड़ता है, तब उस परिवार के सभी सदस्य अपने परिवार वालों के अन्य सदस्यों को छुड़ाने के लिए अपने प्राण देने के लिए आगे बढ़ते हैं। इस प्रकार अपने परिवार के प्रति समर्पण व प्रेम भाव इस पाठ में दर्शाया गया है।

MP Board Solutions

कुटुम्बानुरक्तिः  पाठ का अनुवाद

1. वृद्धः-हन्त निराशाः स्मः। भवतु पुत्र व्यपाश्रयिष्ये तावदेनम्।
प्रथमः (पुत्रः)-अलमलं परिश्रमेण।
वृद्धः-पुत्र! निर्वेदप्रत्यर्थिनी खलु प्रार्थना। भवतु पश्यामस्तावत्। भो भोः पुरुष! अस्त्वस्माकं मोक्षः?
घटोत्कचः-मोक्षोऽस्ति समयतः।
वृद्धः-कः समयः।

घटोत्कच :
अस्ति मे तत्रभवती जननी। तयाऽहमाज्ञप्तः। पुत्र! ममोपवासनिसर्गार्थमस्मिन्वनप्रदेशे कश्चिन्मानुषः प्रतिगृह्यानेतव्य इति। ततो मयाऽऽसादितो भवान्।।

शब्दार्था :
व्यपाश्रयिष्ये-निवेदन करते हैं-appeal, submit; निर्वेदप्रत्यर्थिनी-मुक्ति की याचना-appeal for freedom, मोक्षः-मुक्ति-freedom, समयतः-शर्त पर/से–on one condition, निसर्गार्थम्-पूर्ति के लिए-for the perfection, प्रतिगृह्यानेतव्य-पकड़कर लाओ-catch and bring, आसादितः-पकड़ा है-have caught.

अनुवाद :
वृद्ध पुरुष-हाय! हम निराश हो गये हैं। अच्छा पुत्र, तब निवेदन करते हैं। प्रथम पुरुष-अधिक परिश्रम मत करो।
वृद्ध-पुत्र, मुक्ति के लिए प्रार्थना करनी पड़ेगी। ठीक है, तब देखते हैं। हे पुरुष! हमें छोड़ दो।
घटोत्कच-एक शर्त पर छोड़ सकता हूँ।
वृद्ध-कैसी शर्त?

घटोत्कच :
मेरी आदरणीय माता है। उनके द्वारा मुझे आज्ञा दी गई है। पुत्र! मेरे उपवास की पूर्ति के लिए इस वन प्रदेश से कोई मनुष्य पकड़कर लाओ। इसलिए मेरे द्वारा आपको पकड़ा गया है।

English :
The old man asked Ghatotkach to leave him and his sons. Ghatotk. ch told them that he has been ordered by his mother to bring some man for perfection of her fast.

2. घटोत्कचः- पत्न्या चारित्रशालिन्या द्विपुत्रो मोक्षमिच्छसि।
बलाबलं परिज्ञाय पुत्रमेकं विसर्जय।।1॥

अन्वय :
(हे वृद्धः!) चारित्रशालिन्या पत्न्या (सह) द्विपुत्रः मोक्षम् इच्छसि (तर्हि) बलावलं परिज्ञाय एकं पुत्रं विसर्जय।

शब्दार्था :
बलाबलम्-प्रिय और अप्रिय-dear or not dear, परिज्ञाय-जानकरconsidering

अनुवाद :
हे वृद्ध ! चरित्रशाली पत्नी के साथ दो पुत्रों की मुक्ति चाहते हो, तो प्रिय और अप्रिय जानकर एक पुत्र को छोड़ दो।

English :
Consider the merits and demerits-leave one of the sons.

3. वृद्धः-हे भो राक्षसापसद! किमहमब्राह्मणः।
ब्राह्मणः श्रुतवान्वृद्धः पुत्रं शीलगुणान्वितम्।
पुरुषादस्य दत्त्वाहं कथं निवृत्तिमाप्नुयाम्॥2॥

अन्वय :
(अहम्) वृद्धः ब्राह्मणः श्रुतवान् शीलगुणान्वितं पुत्रं पुरुषादस्य दत्वा क्थं निर्वृत्तिम् आप्नुयाम्।

शब्दार्था :
राक्षसापसद-नीच राक्षस-Mean demon; श्रुतवान्-शास्त्रज्ञ-having knowledge of scriptures, पुरुषादस्य-मनुष्य को खाने के लिए-to be eaten by man, निर्वृत्तिम्-शान्ति को-peace.

अनुवाद :
(वृद्धः-अरे, नीच राक्षस! क्या मैं ब्राह्मण नहीं हूँ (अर्थात् नीच हूँ।) मैं बूढ़ा ब्राह्मण अपने शास्त्रज्ञ, शील व गुणों से युक्त पुत्र को मनुष्य को खाने के लिए देकर कैसे शान्ति प्राप्त करूँगा।

English :
I am not so mean. How can I seek peace by leaving my learned and virtuous son to be eaten.

MP Board Solutions

4. घटोत्कच :
यद्यर्थितो द्विजश्रेष्ठ! पुत्रमेकं न मुञ्चसि।
सकुटुम्बः क्षणेनैव विनाशमुपयास्यसि॥3॥

अन्वय :
द्विजश्रेष्ठः ! यदि अर्थितः एकं पुत्रं न मुञ्चसि (तर्हि) सकुटुम्बः क्षणेनैव विनाशम् उपयास्यसि।

शब्दार्था :
अर्थितः-धन के लिए/प्रार्थना किए जाने पर-for money, on our words, मुञ्चसि-छोड़ते हो-leave, उपयास्यसि-प्राप्त हो जाओगे-will attain.

अनुवाद :
घटोत्कच कहता है-हे ब्राह्मण श्रेष्ठ! यदि धन के कारण (हमारे कहने से) एक पुत्र को नहीं छोड़ते हो, तो कुटुम्ब सहित क्षण भर में ही विनाश को प्राप्त हो जाओगे।

English :
If you fail to leave one of the sons, you will soon be destroyed along with your family.

5. वृद्धः-एष एव मे निश्चयः
कृतकृत्यं शरीरं मे परिणामेन जर्जरम्।
राक्षसाम्नौ सुतापेक्षी होष्यामि विधिसंस्कृतम्॥4॥

अन्वय :
सुतापेक्षी (अहम्) परिणामेन जर्जरं विधिसंस्कृतं कृतकृत्यं मे वृद्धस्य शरीरं राक्षसाम्नौ होष्यामि।

शब्दार्था :
सुतापेक्षी-पुत्र की अपेक्षा वाला- expectation of boy, विधिसंस्कृतम्अनुष्ठानों द्वारा पवित्र-purified by observance of sacraments, कृतकृत्यम्-जिसके द्वारा समस्त कार्य पूर्ण कर लिए गए हों-who has finished all the activities.

अनुवाद :
वृद्धः-यह ही मेरा निश्चय है। पुत्र की अपेक्षा वाले, वृद्धावस्था के कारण थके हुए, अनुष्ठानों के कारण पवित्र, सभी कार्यों को पूर्ण करने वाले अपने बूढ़े शरीर की मैं राक्षस की अग्नि में आहुति दे दूंगा।

English :
The old man said, “My old and exhausted body will be burnt in the fire of the demon” for the sake of my son.

6. ब्राह्मणी-आर्य, वा मैवम्। पतिमात्रधर्मिणी पतिव्रतेति नाम। गृहीतफलेनैतेन शरीरेणार्यं कुलं च रक्षितुमिच्छामि।
घटोत्कचः-भवति! न खलु स्त्रीजनोऽभिमतस्तत्रभवत्या।
वृद्धः-अनुगमिष्यामि भवन्तम्।
घटोत्कचः-आः वृद्धस्त्वमपसर।
प्रथमः (पुत्र)-भोस्तात-ब्रवीमि खलु तावत्किञ्चित्।
वृद्धः-ब्रूहि, ब्रूहि शीघ्रम्।
शब्दार्थाः-अपसर-दूर हटो-keepaside, ब्रूहि-कहो-say, अभिमतः-उचित-proper.

अनुवाद :
ब्राह्मणी-ऐसा मत कहो।मैं केवल पति के धर्म का पालन करने वाली पतिव्रता हूँ। इस फल प्राप्त किए हुए शरीर के द्वारा आर्य और कुल की रक्षा करना चाहती हूँ।

घटोत्कच-देवी! उनके आदेश के अनुसार स्त्री नहीं चाहिए।
वृद्ध-तुम्हारे साथ मैं चलूँगा।
घटोत्कच-तुम वृद्ध हो, तुम दूर हटो।
प्रथम (पुत्र)-हे पिता! तो मैं कुछ कहूँ।
वृद्ध-कहो, शीघ्र कहो।

English :
The Brahmin woman and the old man offered themselves to save the family. Ghatotkach asked them to keep aside. The first son desired to say something.

MP Board Solutions

7. प्रथमः (पुत्र)- मम प्राणैर्गुरुप्राणानिच्छामि परिरक्षितम्।
रक्षणार्थ कुलस्यास्य मोक्तुमर्हति मां भवान॥5॥

अन्वय :
(अहं प्रथमः पुत्रः) मम प्राणैः गुरुप्राणान् परिरक्षितुम इच्छामि (अतः) भवान् अस्य कुलस्य रक्षणार्थं मां मोक्तुम अर्हति।

शब्दार्था :
परिरक्षितुम्-रक्षा करने के लिए-toprotect, गुरु-(पूर्वजों) बड़ों के-of the elderly people.

अनुवाद :
(मैं, पहला पुत्र) अपने प्राणों के द्वारा बड़ों के प्राणों की रक्षा करना चाहता हूँ। इसलिए आप इस कुल की रक्षा के लिए मुझे छोड़ दीजिए।

English :
The first son desired that he should be left to protect the lives of the elderly people in the family.

8. द्वितीयः (पुत्रः) आर्य! मा मैवम् ।
ज्येष्ठः श्रेष्ठ कुले लोके पितृणां च सुसंप्रियः।
ततोऽहमेव यास्यामि गुरुवृत्तिमनुस्मरन॥6॥

अन्वय :
(भो जनक!) कुले, लोके पितॄणां च ज्येष्ठः श्रेष्ठः सुसंप्रियः (भवति) ततः गुरुवृत्तिम् अनुस्मरन् अहमेव यास्यामि।।

शब्दार्था :
सुसंप्रियः-अच्छा व प्यारा-mostloving,गुरुवृत्तिम्-पूर्वजों के आदर्श को-the ideals of the ancestors, अनुस्मरन्-चलाते हुए, याद करते हुए-following, recalling, यास्यामि-जाऊँगा-shall go.

अनुवाद :
दूसरा (पुत्र)-आर्य! ऐसा मत कहो।
हे पिता! इस संसार में, कुल में सबसे बड़ा व श्रेष्ठ ही माता-पिता को अच्छा व प्यारा लगता है। तब पूर्वजों के आदर्श का अनुकरण करते हुए मैं ही जाऊँगा।

English :
Second son : Being the elder, the better and the more loving son, I would go in accordance with the ancestral practice.

9. तृतीयः (पुत्रः)-आर्य! मा मैवम्।
ज्येष्ठो भ्राता पितृसमः कथितो ब्रह्मवादिभिः।
ततोऽहं कर्तुमस्म्य) गुरुणां प्राणरक्षणम्॥7॥
घटोत्कचः-अहो स्वजनवात्सल्यम्।
(इति निष्क्रान्ताः सर्वे)

अन्वयः-ज्येष्ठः भ्राता ब्रह्मवादिभिः पितृसमः कथितः ततः गुरुणां प्राणरक्षणं कर्तुम् अहम् अर्हः अस्मि।

शब्दार्था :
पितृसमः-पिता के समान-like a father, ब्रह्मवादिभिः-ब्रह्मज्ञों ने-by the brahmins, अर्हः-योग्य-capable, वात्सल्यम्-प्रेम-affection.

अनुवाद :
तृतीय (पुत्र) – आर्य! ऐता मत कहो।
ब्रह्मज्ञों के अनुसार बड़े भाई को पिता के समान कहा गया है। तो बड़ों की प्राणरक्षा करने के लिए मैं योग्य हूँ।
घटोत्कच-वाह! अपने लोगों के लिए कितना स्नेह।
(सब निकल जाते हैं)

English :
Eldest son is like a father-Hence Iam capable of saving my elderly people-filial affection praised (appreciated)