MP Board Class 6th Science Solutions Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण

MP Board Class 6th Science Solutions Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण

MP Board Class 6th Science Chapter 5 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
हमें किसी मिश्रण के विभिन्न अवयवों को पृथक करने की आवश्यकता क्यों होती है? दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
शुद्धता अच्छाई के लिए ही नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन के लिए भी आवश्यक है। आजकल खाद्य पदार्थों में मिलावट व्यवसाय का एक हिस्सा बन गया है। खाद्य पदार्थों में गन्दगी, सस्ती व अनुपयोगी वस्तुओं की मिलावट की जाती है। यही मिलावट हमारे स्वास्थ्य के लिए घातक है कभी-कभी यह मिलावट अनायास या आवश्यकता पड़ने पर हो जाती है। जैसेस्टोर करने के लिए। अतः मिश्रण को शुद्ध रूप में उपयोग करने के लिए उनमें उपस्थित हानिकारक अवयवों को अलग-अलग करने की आवश्यकता होती है।

उदाहरण:

  1. किसी खाद्यान्न में से छोटे-छोटे कंकड़ों धूल, मिट्टी, भूसा आदि को अलग करना।
  2. नदी अथवा तालाब के पंकिल जल को साफ करना।

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प्रश्न 2.
निष्पावन से क्या अभिप्राय है? यह कहाँ उपयोग किया जाता है?
उत्तर:
किसी मिश्रण से भारी तथा हल्के अवयवों का वायु अथवा पवन के झोंकों द्वारा पृथक करने की क्रिया निष्पावन कहलाती है।
MP Board Class 6th Science Solutions Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण 1
इस विधि का उपयोग हल्के भूसे को भारी अन्न कणों से पृथक करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 3.
पकाने से पहले दालों के किसी नमूने से आप भूसे एवं धूल के कण कैसे पृथक करेंगे?
उत्तर:
पकाने से पहले दालों के नमूने से भूसे तथा धूल के कण निस्पावन विधि द्वारा पृथक करते हैं।

प्रश्न 4.
छालन से क्या अभिप्राय है? यह कहाँ उपयोग होता है?
उत्तर:
भिन्न-भिन्न आकार के अवयवों को मिश्रण से अलग करने की विधि छालन कहलाती है। इसका उपयोग आटा से भूसी, बालू से कंकड़ अलग करने में होता है। इसके लिए भिन्न-भिन्न आकार के छेदों वाली छलनियाँ उपयोग में लाई जाती हैं।
MP Board Class 6th Science Solutions Chapter 5 पदार्थों का पृथक्करण 2

प्रश्न 5.
रेत और जल के मिश्रण से आप रेत और जल को कैसे पृथक करेंगे?
उत्तर:
रेत और जल के मिश्रण से रेत को निस्तारण की विधि द्वारा जल को पृथक करते हैं। रेत के भारी कण नीचे बैठ जाते हैं। जल को बिना हिलाए दूसरे बर्तन में इकट्ठा कर लेते हैं।

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प्रश्न 6.
आटे और चीनी के मिश्रण से क्या चीनी को पृथक करना सम्भव है? अगर हाँ, तो आप इसे कैसे करेंगे?
उत्तर:
हाँ, आटे और चीनी के मिश्रण से चीनी को पृथक करना सम्भव है, इसके लिए छलनी का उपयोग करेंगे, मिश्रण को छलनी में डालकर छानेंगे जिससे आटा नीचे चला जाएगा और चीनी छलनी में रह जाएगी। दोनों को अलग-अलग बर्तनों में एकत्र कर लेंगे।

प्रश्न 7.
पंकिल जल के किसी नमूने से आप स्वच्छ जल कैसे प्राप्त करेंगे?
उत्तर:
पंकिल जल के नमूने को गिलास में लेकर थोड़ी देर के लिए छोड़ देते हैं, कुछ समय बाद अविलेय गन्दगी बीकर की तली में बैठ जाती है, अब जल को बिना हिलाए इसके ऊपर के जल को दूसरे गिलास में उड़ेल लेते हैं, अब इस जल की अशुद्धियों को फिल्टर पत्र द्वारा निस्यान्दित करते हैं। फिल्टर पत्र को शंकु के रूप में मोड़कर एक कीप में लगा देते हैं तथा मिश्रण को फिल्टर पत्र में उड़ेलते हैं। मिश्रण के ठोस कण फिल्टर पत्र पर ही रह जाते हैं तथा स्वच्छ पानी को दूसरे गिलास में एकत्र कर लेते हैं।

प्रश्न 8.
रिक्त स्थानों को भरिए –

  1. धान के दानों को डंडियों से पृथक करने की विधि को ………… कहते हैं।
  2. किसी एक कपड़े पर दूध को उड़ेलते हैं तो मलाई उस पर रह जाती है। पृथक्करण की यह प्रक्रिया कहलाती है।
  3. समुद्र के जल से नमक …………. प्रक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है।
  4. जब पंकिल जल को पूरी रात एक बाल्टी में रखा जाता है तो अशुद्धियाँ तली में बैठ जाती हैं। इसके पश्चात् स्वच्छ जल को ऊपर से पृथक कर लेते हैं। इसमें उपयोग होने वाली पृथक्करण की प्रक्रिया को …………. कहते हैं।

उत्तर:

  1. थ्रेशिंग।
  2. निस्यन्दन।
  3. वाष्पन।
  4. निस्तारण।

प्रश्न 9.
सत्य अथवा असत्य?

  1. दूध और जल के मिश्रण को निस्यन्दन द्वारा पृथक किया जा सकता है।
  2. नमक और चीनी के मिश्रण को निस्पावन द्वारा पृथक कर सकते हैं।
  3. चाय की पत्तियों को चाय से पृथक्करण निस्यन्दन द्वारा किया जा सकता है।
  4. अनाज और भूसे का पृथक्करण निस्तारण प्रक्रम द्वारा किया जा सकता है।

उत्तर:

  1. असत्य।
  2. असत्य।
  3. सत्य।
  4. असत्य।

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प्रश्न 10.
जल में चीनी तथा नींबू का रस मिलाकर शिकंजी बनाई जाती है। आप बर्फ डालकर इसे ठण्डा करना चाहते हैं, इसके लिए शिकंजी में बर्फ चीनी घोलने से पहले डालेंगे या बाद में? किस प्रकरण में अधिक चीनी घोलना सम्भव होगा?
उत्तर:
शिकंजी में बर्फ चीनी घोलने के बाद डालेंगे। बर्फ में डालने से पहले जल में अधिक चीनी घोलना सम्भव होगा।

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MP Board Class 6th Hindi निबन्ध लेखन

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विज्ञान के चमत्कार

प्रस्तावना-अनेक वर्षों से विज्ञान निरंतर उन्नति कर रहा है। विज्ञान का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। रामायण काल में भी पुष्पक विमान, अग्नि बाण, ब्रह्मास्त्र आदि ऐसे साधन थे; जिनके मुकाबले अभी भी विज्ञान पीछे है। वैसे 19वीं एवं 20वीं सदी में विज्ञान में नवीन आविष्कार हुए और आज हम विज्ञान से इतने संबद्ध हो चुके हैं कि इसके बिना हमारा जीवन ही अधूरा रह जाएगा।

आधुनिक युग का विज्ञान-आधुनिक युग के विज्ञान को देखा जाए, तो इसे हम आविष्कारों के युग की संज्ञा दे सकते हैं। सुई से हवाई जहाज़ तक के निर्माण में हमें विज्ञान की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। विज्ञान ने मानव में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। भाप, बिजली एवं अणु शक्ति को वश में करने वाला मानव आज वैभव की चरम सीमा पर आरूढ़ है। तेज़ गति से चलने वाले वाहन, समुद्री जहाज़ एवं आकाश में वायुवेग से चलने वाले हवाई जहाज़, चंद्रलोक की यात्रा करने वाला रॉकेट आदि कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जिन्होंने प्रकृति पर मानव की विजय का उज्जवल दृष्टांत प्रस्तुत किया है।

संचार साधनों में वृद्धि-विज्ञान ने हमारे जीवन में तार, टेलीफोन, रेडियो, टेलीविज़न, सिनेमा और ग्रामोफोन आदि ने हमारे जीवन में अनेक सुविधाएँ प्रदान की हैं। इन सुविधाओं की कल्पना हमारे पूर्वजों के लिए कठिन थी।

विज्ञान वरदान के रूप में-हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। इसी प्रकार विज्ञान के भी दो पहलू हैं। यदि हम विज्ञान के लाभकारी परिणामों पर दृष्टिपात करें, तो हम पायेंगे कि यह हमारे लिए ईश्वरीय वरदान है। प्रारंभ में मनुष्यों का अधिकांश समय उदर पूर्ति हेतु ही व्यतीत हो जाता था, परंतु आज के वैज्ञानिक युग में व्यक्ति के पास इतने अधिक काम और समय की कमी रहती है कि वह अपना काम बिना विज्ञान की सहायता के कर भी नहीं सकता। बड़ी-बड़ी मशीनों की सहायता से दिन भर का काम घंटों में निपटा लिया जाता है। मशीनीकरण से कीमती समय की बचत हो जाती है तथा कम समय में अधिक उत्पादन कर हम अपना एवं अपने देश का आर्थिक विकास संभव बनाते हैं। अतः हम कह सकते हैं कि विज्ञान मनुष्य को ईश्वरीय वरदान के रूप में प्राप्त है। इसमें किंचित् मात्रा भी संदेह भी नहीं कि विज्ञान हमारे जीवन का एक अमूल्य अंश है।

विज्ञान अभिशाप के रूप में-जिस प्रकार घोड़े की लगाम पकड़ कर हम घोड़े को सही मार्ग पर चलने को विवश करते हैं, उसी प्रकार विज्ञान भी हमारे हाथ की कठपुतली है। इसका उपयोग यदि निर्माण कार्यों में किया जाए, तो हमारे लिए वरदान है। वहीं यदि इसका प्रयोग अनुचित साधन के रूप में किया जाए, तो यह सर्वनाश का प्रबल प्रतीक बन सकती है, जैसे हिरोशिमा व नागासाकी का भयंकर विस्फोट विज्ञान के अभिशाप का एक सशक्त उदाहरण है।

प्रथम एवं द्वितीय विश्व-युद्ध के मध्य जन-धन का जितना विनाश विज्ञान के द्वारा हुआ, उतना विकास हम जीवनपर्यंत नहीं कर सकते। 40 साल बाद भी वहाँ इसका कुपरिणाम दिखाई दे जाता है। छोटा-सा उदाहरण बिजली को ही लें। वही बिजली बल्ब में जलकर घर के अंधकार को दूर करती है, तो असावधानीवश बिजली के करेंट द्वारा व्यक्ति मृत्यु के मुख में जाकर कुल के दीपक को बुझा कर विज्ञान के दुष्परिणामों को उजागर करता है।

उपसंहार-विज्ञान हमारे लिए वरदान भी है, और अभिशाप भी। हमें चाहिए कि विज्ञान का उपयोग विध्वंसात्मक रूप से न करके रचनात्मक रूप से करें। मानव विज्ञान का स्वामी है अतः उस पर अंकुश लगाए रहें, ताकि विज्ञान द्वारा होने वाले सर्वनाश से बचा जा सके। अंत में मैं यही कहना चाहूँगा कि मनुष्य विज्ञान का उपयोग विध्वंसात्मक रूप से न कर सृजनात्मक रूप से करे, जिससे आसानी से इक्कीसवीं शताब्दी में पदार्पण करें।

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धार्मिक त्योहार : दीपावली

प्रस्तावना-भारतीय त्योहारों में दशहरा, दीपावली, रक्षाबंधन, होली, विजयादशमी आदि का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसमें दीपावली अपने ढंग का एक अनोखा त्योहार है। इस दिन लोग अपनी प्रसन्नता व्यक्त करने के लिए दीपकों द्वारा सारे संसार को प्रकाशित करते हैं। इसीलिए इस त्योहार का नाम दीपावली पड़ा।

ऐतिहासिक महत्त्व-इस त्योहार के साथ अनेक ऐतिहासिक एवं धार्मिक गाथायें जुड़ी हुई हैं। ऐसी जनश्रुति है कि भगवान् श्रीराम, रावण पर विजय प्राप्त करने के पश्चात् इसी दिन अयोध्या वापस आए थे। अयोध्यावासियों ने उनका दीपों द्वारा स्वागत किया था। कुछ पौराणिक गाथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने इसी दिन नरकासुर का वध कर खुशियाँ मनाई थीं। दीपावली के मनाने का सामाजिक कारण भी है। वैदिककाल में जब फसल काटकर धान्य घर पर आ जाता था, तो किसान इसे बड़े प्रेम से अपने इष्ट देव को अर्पित करता था, यज्ञ होते थे तथा रात्रि में दीपों के प्रकाश से सारा वातावरण प्रकाशमय हो जाता था। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इसका महत्त्व है। बरसात में गंदे पानी के कारण हानिकर कीड़े उत्पन्न हो जाते हैं। दीपों को जलाकर उन्हें भस्म कर दिया जाता है।

पूर्व तैयारी-दीपावली से कई दिन पूर्व तैयारी आरंभ हो जाती है। लोग अपने घरों की लिपाई-पुताई करवाते हैं एवं घरों को रंगीन चित्रों द्वारा सजाते हैं। पुताई से मच्छर, मक्खी एवं अन्य हानिकारक जीव नष्ट हो जाते हैं और कई तरह की बीमारियाँ होने से लोग बचे रहते हैं। कच्चे मकानों की मरम्मत भी इसी समय की जाती है तथा सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।

पंच दिवसीय कार्यक्रम-यह त्योहार पाँच दिनों का होता है। इस त्योहार का आरंभ कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से होता है। यह दिन धन तेरस के नाम से मनाया जाता है। लोग नये बर्तन एवं वस्त्र आदि का क्रय करते हैं। दूसरे दिन नरक चतुर्दशी का आयोजन होता है। तीसरे दिन दीपावली का मुख्य आयोजन होता है। लोग शाम के समय लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती आदि का पूजन कर दीपकों द्वारा घरों को प्रकाशित करते हैं। चौथे दिन गोवर्धन पूजा एवं पाँचवें दिन भाई दूज या यम द्वितीया के साथ इस त्योहार का समापन होता है।

दीपावली का पूजन-कार्तिक मास की अमावस्या को व्यापारी अपने बहीखातों का पूजन करते हैं तथा इष्ट मित्रों सहित लक्ष्मी जी का पूजन कर प्रसाद वितरण करते हैं। लक्ष्मी पूजन के उपरांत रात्रि में चारों ओर दीपकों का प्रकाश जगमगा उठता है। नगरों में दियों के स्थान पर मोमबत्तियों एवं बिजली की झालरों द्वारा प्रकाश किया जाता है। आतिशबाजी एवं पटाखों की ध्वनि से सारा आकाश गूंज उठता है। बालक-बालिकाएँ उमंग के साथ नया वस्त्र धारण कर प्रसाद वितरण एवं मिठाइयों का वितरण करते हैं। कुछ लोग रात में जुआ भी खेलते हैं, परंतु यह बुरी बात है। जुआ का दुष्परिणाम हम महाभारत में स्पष्ट रूप से देख चुके हैं, अतः इस आयोजन से हमें बचना चाहिए। बच्चों को खील, मिठाई, आतिशबाजी आदि की प्रसन्नता प्रदान करते हैं। इस दिन चारों ओर एक अनोखी छटा रहती है। चलह-पहल एवं प्रकाश से सारा वातावरण आनान्दित रहता है।

लाभ-हानि-इस त्योहार से जहाँ हमें लाभ होते हैं, वहीं नुकसान भी होते हैं। आतिशबाजी में जलकर लोग प्राण तक गंवा बैठते हैं, एवं जुए में कई घर बरबाद हो जाते हैं।

उपसंहार-यह हमारा धार्मिक त्योहार है। इसे उचित रूप से मनाया जाना चाहिए। इस दिन हमें शुभ मार्ग पर चलने की शपथ लेनी चाहिए। बुरे मार्ग पर चलने से अपने को बचाना चाहिए। आतिशबाजी आदि पर अधिक पैसा व्यय नहीं करना चाहिए।

महापुरुषों की जीवनी : महात्मा गांधी

प्रस्तावना-महात्मा गांधी हमारे देश के महान् नेताओं में अपना प्रमुख स्थान रखते हैं। सारा राष्ट्र उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ और ‘बापू’ के नाम से जानता है। आपका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। आपने अहिंसा और सत्याग्रह के बल पर भारत को स्वतंत्र कराने का बीड़ा उठाया था। विश्व इतिहास में आपका नाम सदैव सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा।

जन्म-महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 में गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। आप के. पिता का नाम करमचंद था और वे राजकोट के राजा के दीवान थे। आपकी माता का नाम पुतलीबाई था। आपकी माता धार्मिक एवं सती साध्वी महिला थीं। उनकी शिक्षाओं का प्रभाव महात्मा गाँधी पर आजीवन रहा।

शिक्षा-दीक्षा-महात्मा गाँधी की प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर में हुई। मैट्रिक तक का अध्ययन आपने स्थानीय विद्यालयों में ही किया। तेरह वर्ष की अवस्था में आपका विवाह सुयोग्य कस्तूरबा के साथ हुआ। तदनंतर आप कानूनी शिक्षा प्राप्त करने के लिए विलायत गए। वहाँ से बैरिस्टरी की परीक्षा पास कर आप स्वदेश वापस आ गए। आपने अपना वकालत का पेशा बंबई नगर में आरंभ किया। कुछ विशेष मुकद्दमों के मामले में आपको पैरवी करने के लिए दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। दक्षिण अफ्रीका में हो रहे भारतीयों पर अत्याचार को देखकर गाँधी जी का मन परिवर्तित हो गया और वे वकालत का धंधा छोड़कर राष्ट्रीय सेवा में संलग्न हो गए।

आंदोलनों का आरंभ-सन 1915 में जब महात्मा गाँधी आफ्रीका से भारत आए, तो यहाँ अंग्रेजों का दमन-चक्र अपनी चरम स्थिति पर था। रोलट एक्ट जैसा काला कानून भारत में संरक्षण पा रहा था। सन् 1919 में घटित जलियांवाला बांग हत्याकाण्ड से सारा देश क्षुब्ध था। इन सारी परिस्थितियों का अवलोकन कर महात्मा गाँधी के हृदय में शांत किंतु क्रांतिकारी परिवर्तन आया। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन की बागडोर अपने हाथों में ले ली तथा इतिहास में एक नए युग का आरंभ हुआ।

गांधी युग का आरंभ-सन् 1920 में महात्मा गाँधी ने अंग्रेजों के विरुद्ध असहयोग आंदोलन आरंभ किया। भारतीय जनता ने इनका अपूर्व सहयोग दिया और लाखों लोग विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार में कूद पड़े। अंग्रेज़ों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोगों ने सरकारी कार्यालयों की होली जलाई। शासकीय संस्थाओं में पढ़ने वाले छात्र इस आंदोलन में कूद पड़े। परिणामस्वरूप भारतीय स्वतंत्रता के प्रति एक नए वातावरण का निर्माण हुआ।

सन् 1928 में ‘साइमन कमीशन’ भारत आया। गाँधी जी ने इस कमीशन का भी बहिष्कार किया। इस आंदोलन में भी उन्हें जनता का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। उन्होंने इस बीच देश को उचित नेतृत्व प्रदान किया।

सन् 1930 में महात्मा गाँधी ने नमक-कर के विरोध में नामक आंदोलन का संचालन किया। उनके साथ असंख्य भारतीय दाण्डी पहुँचे और वहाँ नमक बनाकर कानून को तोड़ा।

भारत छोड़ो आंदोलन का श्री गणेश-द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के साथ ही 1942 में गाँधी जी ने भारत छोड़ो आंदोलन का श्री गणेश कर दिया। महात्मा गांधी के अनुसार यह उनकी अन्तिम लड़ाई थी। इस आन्दोलन में गाँधी जी तथा अनेक भारतीय गाँधी नेता और असंख्य आंदोलनकारी देश की विभिन्न जेलों में गिरफ्तार हुए। अंत में अंग्रेजों को इस आंदोलन के सम्मुख झुकना पड़ा एवं 15 अगस्त, 1947 को भारत पूर्ण रूप से आजाद हो गया।

अंतिम यात्रा-बापू के पूजा करने हेतु जाते समय नाथूराम गोडसे नामक एक युवक ने 30 जनवरी, 1948 को उन्हें गोली मार दी, जिसके कारण बापू ‘हे राम!’ कहकर चिर निद्रा में लीन हो गए। भारत में सर्वत्र शोक की लहर व्याप्त हो गयी। एक युग का सूर्य क्षण भर में अस्त हो गया। बापू मरकर भी अपने यशस्वी शरीर से अमर हो गए।

उपसंहार-बापू का नाम भारतीयों में तब तक आदर के साथ लिया जाता रहेगा, जब तक एक-एक भारतवासी के हृदय में देश-प्रेम है। उनका नाम भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। हम बापू के कार्यों का स्मरण कर धन्य हो जाते है।

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विद्यार्थी जीवन और अनुशासन

प्रस्तावना-अनुशासन देश का आधार स्तंभ है और विद्यार्थी के लिए इसकी अत्यंत आवश्यकता होती है। अनुशासन शब्द अनु और शासन शब्दों से मिलकर बना है। अनु का अर्थ पीछे चलना एवं शासन से तात्पर्य आज्ञा पालन अर्थात् किसी आदेश के अनुसार चलना ही अनुशासन है। जब तक बालक घर की चारदीवारी में रहता है, तब तक वह माँ-बाप के अनुशासन में रहता है।

अनुशासन का महत्त्व-बालक जो कुछ अपनी छात्रावस्था में गुण ग्रहण करता है और क्षमता प्राप्त करता है, वह उसकी सम्पत्ति बन जाती है। इस सम्पत्ति का लाभ वह जीवन पर्यंत उठाता रहता है। विद्यार्थी का जीवन समाज एवं देश की अमूल्य निधि होता है। समाज एवं देश की उन्नति मात्र विद्यार्थियों पर ही निर्भर है। यही आगे चलकर देश के कर्णधार बनते हैं।

अनुशासन को हम सफलता के मार्ग का सोपान मान सकते हैं। अनुशासन जीवन को उन्नत बनाने का मूल मंत्र है। अनुशासन से बालकों को अपने माता-पिता, गुरु एवं बड़े, लोगों का स्नेह प्राप्त होता है। स्नेह बालक के जीवन के भावी विकास में सहायक सिद्ध होता है। यह स्नेह जिस बालक को जितना प्राप्त होता है, उसका उतना ही चारित्रिक विकास संभव होता है। अनुशासन से बालक के विकास के स्मस्त मार्ग खुल जाते हैं। विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का तात्पर्य है-‘विद्यार्थी का अपने से बड़ों की आज्ञा का पालन’। बालक को बड़ों की आज्ञा के विपरीत कोई काम नहीं करता चाहिए। क्योंकि माता-पिता, गुरु एवं परिजन ही उसके वास्तविक शुभचिंतक होते हैं; ये उसे कभी बुरे मार्ग पर जाने की सलाह नहीं देंगे। विद्यार्थी के अनुशासन का तात्पर्य यह भी है कि उसे समय से उठना, समय से सोना, खेलना, पढ़ना, पाठशाला जाना, गृह-कार्य करना, घर के काम आना आदि समयबद्ध तरीके से करना चाहिए। अर्थात् जीवन में उसे समय की कीमत का ध्यान करना चाहिए।

जो विद्यार्थी अपने अध्यापकों की आज्ञा का पालन कर समय से पढ़ते-लिखते और खेलते हैं, वे परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण होते हैं और उनका भविष्य सुखद एवं उज्जवल बनता है।

अनुशासन के प्रकार-अनुशासन को हम दो वर्गों में विभक्त कर सकते हैं। प्रथम आंतरिक अनुशासन एवं द्वितीय बाह्य अनुशासन। आन्तरिक अनुशासन में विद्यार्थी अपने शरीर, मन एवं बुद्धि पर पूर्ण नियन्त्रण रखता है, जबकि बाह्य अनुशासन भय या लोभ वश किया जाता है। आत्म-अनुशासित व्यक्ति ही अपने जीवन में महान् बन सकता है। दुनिया में जितने भी महान् व्यक्तित्व हुए हैं, आत्म-अनुशासित ही थे। जबकि बाह्य अनुशासन बालकों को डरपोक एवं रिश्वतखोर बनाता है। यह हमारे जीवन के लिए हानिकर हो सकता है।

अनुशासनहीनता के दुष्परिवास-आजकल के विद्यार्थियों में अनुशासन का अभाव है। वे अपने माता-पिता एवं गुरुओं की आज्ञा का कम ही पालन करते हैं। स्कूल, कॉलेजों में हड़ताल, आंदोलन, परीक्षा में नकल आदि की गंदी प्रवृत्तियाँ उनमें पनपने लगती हैं। ये उनके लिए घातक है। विद्यार्थियों को इन बुराइयों से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। जिससे समाज में बेकारी एवं अव्यवस्था फैल जाती है।

उपसंहार-विद्यार्थी के जीवन के पूर्ण विकास के लिए अनुशासन का विशेष महत्त्व है। अनुशासित व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपना मानसिक संतुलन बनाए रखता है। सभी लोग अनुशासन प्रिय व्यक्ति पर विश्वास करते हैं। दायित्व का कार्य करने में ऐसे व्यक्ति पूर्ण सक्षम होते हैं। अनुशासन से हमारा जीवन सुंदर बनता है। सुंदर जीवन सभी सुखों का आधार होता है तथा सुखी जीवन स्वस्थ मानसिकता का निर्माण करता है। अतः विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का विशेष महत्त्व है।

स्वतंत्रता दिवस : 15 अगस्त

प्रस्तावना-15 अगस्त, 1947 का दिन हम भारतवासियों के लिए एक अविस्मरणीय दिन रहेगा। इस दिन को इतिहास कभी भुला नहीं सकता। सदियों की गुलामी के बाद आज ही के दिन हम भारवासी आजाद हुए थे। सब ने शांति एवं सुख का अनुभव किया था। इस दिन का प्रभाव कुछ अद्भुत यादें संजोए हुए आया था। लोग जब सोए तो परतंत्र थे; परंतु जब प्रातः उनकी आँख खुली, तो वे पूर्ण स्वतंत्र नागरिक थे। यह हमारे लिए एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय त्योहार है।

अनेक बलिदान-भारत सदियों तक अंग्रेजों का गुलाम रहा। आजादी प्राप्ति के लिए अनेक लोगों को अपनी कुर्बानी देनी पडी। अनेक वीरों की गाथाएँ इस आजादी के साथ जड़ी हुई हैं। देश की आजादी के लिए लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने हमें नारा दिया ‘स्वाधीनता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है और इसे लेकर ही रहेंगे, इस हेतु उन्होंने महाराष्ट्र में गणेशोत्सव एवं शिवाजी उत्सव का आयोजन किया, जिसकी आड़ में लोगों में स्वतंत्रता में चिनगारी फॅकी। लाला लाजपत राय ने लाठियों के वार सहकार भी अपना आंदोलन बंद न किया। उनका कहना था कि “मेरी पीठ पर पड़ा एक-एक लाठी का प्रहार अंग्रेजों के कफन में कील का काम करेगा।” वास्तव में हुआ भी ऐसा ही। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने क्रांतिकारी नारा दिया ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’ उनका कहना था कि बिना आत्म-बलिदान के आजादी प्राप्त करना असंभव है।

स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गाँधी का योगदान-महात्मा गाँधी का राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक विशेष महत्त्व था। वे अहिंसा एवं सत्याग्रह पर विश्वास करते रहे। वे सन् 1928 से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में कूदे और अंत तक अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आंदोलन करते रहे। इन्होंने अहिंसा को अपना सबसे बड़ा अस्त्र बनाया। इन्होंने देश के लोगों को अहिंसा के बल पर आज़ादी प्राप्ति हेतु प्रेरित किया। महात्मा गाँधी के सत्य, अहिंसा एवं त्याग सम्मुख अंग्रेजों को नत मस्तक होना पड़ा। फलस्वरूप 15 अगस्त, 1947 को देश आजाद हुआ। नेहरू परिवार का योगदान भी आजादी के लिए अविस्मरणीय रहेगा। पं. मोतीलाल नेहरू, पं. जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गाँधी आदि ने आज़ादी पाने के लिए अनेक प्रयत्न किए। इन्हें कई बार जेल यात्राएं भी करनी पड़ीं एवं न जाने कितनी यातनाओं का सामना करना पड़ा। पं. जवाहरलाल नेहरू ने सन 1929 में लाहौर में रावी नदी के तट पर भारत को पूर्ण स्वतंत्र कराने की पहली ऐतिहासिक घोषणा की। इन्होंने निरंतर अठारह वर्ष तक अंग्रेजों के साथ संघर्ष किया। अंततः अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाना पड़ा और हम आजाद हुए।

विविध आयोजन-यह उत्सव भारत के प्रत्येक ग्राम, नगर एवं शहर में बड़े धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। शालाओं में आज के दिन विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। राष्ट्रीय ध्वज फहराकर राष्ट्रगीत गाया जाता है एवं सारा वातावरण उल्लासमय रहता है। विदेशों में रहने वाले भारतीय भी अपना राष्ट्रीय पर्व सोल्लास मानते हैं। दिल्ली के लाल किले एवं अन्य प्रमुख स्थलों पर तिरंगा झंडा लहराया जाता है एवं विभिन्न शालाओं में प्रभात फेरियों का आयोजन किया जाता है।

उपसंहार-15 अगस्त के दिन हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि देश की अखंडता, एकता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हर भारतवासी समान रूप से समर्थ है। यह त्योहार हमें देश-भक्ति की प्रेरणा देता है। तथा अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सफलता की प्रेरणा प्रदान करता है। यह हमारे लिए एक महान् राष्ट्रीय पर्व है।

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किसी खेल का वर्णन
(मेरी शाला का हॉकी मैच)

खेल विद्यार्थियों के लिए स्फूर्तिदायक टॉनिक का कार्य करते हैं। अतः स्कूलों में विभिन्न प्रकार के खेलों का आयोजन होता रहता है। इनमें प्रमुख हैं-हॉकी, फुटबॉल वालीबॉल, कबड्डी, खो-खो, क्रिकेट आदि। मेरे विद्यालय में एक हॉकी टीम भी है। एक दिन मेरे स्कूल एवं आदर्श बुनियादी शाला में हॉकी मैच खेलने का निर्णय लिया गया। दोनों ही टीमें अपने-अपने क्षेत्र में एक से बढ़कर एक थीं। यह फाइनल मैच था अतः सभी खेल प्रेमियों की दृष्टि इसी खेल पर अड़ी थी। आखिर वह शुभ घड़ी आ ही गयी, जब दोनों टीमें आमने-सामने आकर अपने कौशल का प्रदर्शन करने के लिए तैयार थीं। .. मैच का आयोजन स्टेडियम ग्राउंड में किया गया। लोग पहले से ही आकर वहाँ काफी संख्या में बैठ चुके थे। हमारे स्कूल के छात्र भी जुलूस के रूप में स्टेडियम ग्राउंड पहुंचे। हम लोगों में उत्साह का अपार सागर हिलोरें ले रहा था।

दोनों टीमें आमने-सामने आयीं। निश्चित समय पर खेल आरंभ हुआ। सीटी बजते ही टीम के बालकों में उत्साह का संचार हो गया। शालेय छात्रों ने भी हाथ हिलाकर अपने-अपने दल वालों का हौसला बुलंद किया। खेल आरंभ हुआ। खिलाड़ी गेंद के पीछे-पीछे भागने लगे और दर्शकों की आँखें साथ-ही-साथ दौड़ने लगीं। खिलाड़ियों का प्रदर्शन काफी उत्तम था। इनकी कार्य कुशलता पर लोगों के मुँह से स्वतः ही ‘वाह-वाह’ की ध्वनि निकल जाती थी। तालियों की गड़गड़ाहट से सारा आकाश बीच-बीच में निनादित हो जाया करता था। खेल बड़े उत्तम तरीके से चल रहा था। दोनों टीमें अपने लिए अवसर खोज रही थीं। परंतु यह काम इतना आसान न था। खेल का लगभग आधा समय समाप्त हो गया परंतु किसी भी टीम को अभी तक कोई सफलता प्राप्त न हो सकी। निर्णायक महोदय ने सीटी बजाई और दोनों टीमों ने खेल बंद कर दिया। आराम करने के लिए अवकाश हो गया। प्राचार्य महोदय ने खिलाड़ियों को फल आदि खिलाकर आवश्यक नियमों से उन्हें अवगत कराया।

अवकाश का समय समाप्त हुआ। पुनः निर्णायक की सीटी सुनाई दी और खिलाड़ी दूने उत्साह में भर कर मैदान की ओर लपके। इस बार खिलाड़ियों ने आक्रामक रुख अपनाया। – ऐसा लगता था जैसे खिलाड़ी गेंद के साथ उड़े जा रहे हों। दर्शकों का उत्साह भी दुगुना हो रहा था। बच्चे बीच-बीच में शोरगल भी मचा रहे थे, परंतु इससे खेल में कोई व्यावधान नहीं पड़ रहा था।

खेल समाप्त होने में कुछ ही देर थी, परंतु अभी किसी भी टीम को कोई सफलता प्राप्त न हो सकी थी। हमारी शाला के विद्यार्थियों ने आक्रामक रुख अपनाया और उन्हें एक पेनाल्टी कॉर्नर मिला। बस क्या था, टीम के कप्तान ने रेखा पर गेंद रख कर इस प्रकार कुशल प्रहार किया कि गेंद गोल पोस्ट के भीतर हो गयी। सारा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट एवं बच्चों के शोरगुल से गूंज उठा। प्रतिद्वंद्वी टीम के हौसले पस्त हो गए। इसी बीच एक और पेनाल्टी कॉर्नर मिला और अगले ही हिट में गेंद पुनः गोल पोस्ट में प्रविष्ट हो गयी। पुनः तालियों की गड़गड़ाहट से सारा आकाश गूंज उठा। अगले ही क्षण सीटी बज उठी और निर्णायक ने हमारे विद्यालय को 2 गोल से विजयी घोषित किया। प्राचार्य जी ने पुरस्कार वितरण किया और अगले दिन की छुटी भी घोषित की। हम सभी प्रसन्नतापूर्वक अपने घर आ गए।

उपसंहार-खेलों का नियम ही एक पक्ष को जय तथा दूसरे को पराजय है। हमें जय या पराजय को उतना महत्त्वपूर्ण नहीं मानना चाहिए जितना महत्त्वपूर्ण कौशल को माना जाता
है। हमें पराजय के पश्चात् भी अपने मार्ग से विचलित नहीं __ होना चाहिए, सफलता अवश्य ही हमारे कदमों तले आ गिरेगी,
इसमें संदेह उन्हीं है।

बाल दिवस

हमारे विद्यालय में प्रतिवर्ष 14 नवंबर को बाल दिवस का आयोजन किया जाता है। बाल दिवस पूज्य चाचा नेहरू का जन्मदिवस है। चाचा नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे। वे स्वतंत्रता संग्राम के महान् सेनानी थे। उन्होंने अपने देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया। अपने जीवन _ के अनेक अमूल्य वर्ष देश की सेवा में बिताए। अनेक वर्षों तक विदेशी शासकों ने उन्हें जेल में बंद रखा। उन्होंने साहस नहीं छोड़ा और देशवासियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे।

पं. नेहरू बच्चों के प्रिय नेता थे। बच्चे उन्हें प्यार से ‘चाचा’ कहकर संबोधित करते थे। उन्होंने देश में बच्चों के लिए शिक्षा सुविधाओं का विस्तार कराया। उनके अच्छे भविष्य के लिए अनेक योजनाएँ आरंभ की। वे कहा करते थे ‘कि आज के बच्चे ही कल के नागरिक बनेंगे। यदि आज उनकी अच्छी देखभाल की जाएगी तो आगे आने वाले समय में वे अच्छे डॉक्टर, इंजीनियर, सैनिक, विद्वान, लेखक और वैज्ञानिक बनेंगे।’ इसी कारण उन्होंने बाल कल्याण की अनेक योजनाएँ बनाईं। अनेक नगरों में बालघर और मनोरंजन केंद्र बनवाए। प्रतिवर्ष बाल दिवस पर डाक टिकटों का प्रचलन किया। बालकों के लिए अनेक प्रतियोगिताएँ आरंभ कराईं। वे देश-विदेश में जहाँ भी जाते बच्चे उन्हें घेर लेते थे। उनके जन्मदिवस को भारत में बाल-दिवस के रूप में मनाया जाता है।

हमारे विद्यालय में प्रतिवर्ष बाल-दिवस के अवसर पर बाल मेले का आयोजन किया जाता है। बच्चे अपनी छोटी-छोटी दुकानें लगाते हैं। विभिन्न प्रकार की विक्रय योग्य वस्तुएँ अपने हाथ से तैयार करते हैं। बच्चों के माता-पिता और मित्र उस अवसर पर खरीददारी करते हैं। सारे विद्यालय को अच्छी प्रकार सजाया जाता है। विद्यालय को झंडियों, चित्रों और रंगों की सहायता से आकर्षक रूप दिया जाता है। – बाल दिवस के अवसर पर खेल-कूद प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। बच्चे मंच पर आकर नाटक, गीत, कविता, नृत्य और फैंसी ड्रेस शो का प्रदर्शन करते हैं। सहगान, बाँसुरी वादन का कार्यक्रम दर्शकों का मन मोह लेता है। तत्पश्चात् सफल और अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कार वितरण किए जाते हैं। बच्चों को मिठाई का भी वितरण किया जाता है। इस प्रकार दिवस विद्यालय का एक प्रमुख उत्सव बन जाता है।

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अगर मैं प्रधानमंत्री होता

किसी आजाद मुल्क का नागरिक अपनी योग्यताओं का विस्तार करके अपनी आकांक्षाओं को पूरा कर सकता है, वह कोई भी पद, स्थान या अवस्था को प्राप्त कर सकता है, उसको ऐसा होने का अधिकार उसका संविधान प्रदान करता है। भारत जैसे विशाल राष्ट्र में प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के पद को प्राप्त करना यों तो आकाश कुसुम तोड़ने के समान है फिर भी ‘जहाँ चाह वहाँ राह’ के अनुसार यहाँ का अत्यंत सामान्य नागरिक भी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बन सकता है। लालबहादुर शास्त्री और ज्ञानी जैलसिंह इसके प्रमाण हैं।

यहाँ प्रतिपाद्य विषय का उल्लेख प्रस्तुत है कि ‘अगर मैं प्रधानमंत्री होता’ तो क्या करता? में यह भली-भाँति जानता हूँ कि प्रधानमंत्री का पद अत्यंत विशिष्ट और महान् उत्तरदायित्वपूर्ण पद है। इसकी गरिमा और महानता को बनाए रखने में किसी एक सामान्य और भावुक व्यक्ति के लिए संभव नहीं है फिर मैं महत्त्वाकांक्षी हूँ और अगर मैं प्रधानमंत्री बन गया तो निश्चय समूचे राष्ट्र की काया पलट कर दूंगा। मैं क्या-क्या राष्ट्रोत्थान के लिए कदम उठाऊँगा, उसे मैं प्रस्तुत करना पहला कर्तव्य मानता हूँ जिससे मैं लगातार इस पद पर बना रहूँ।

सबसे पहले शिक्षा-नीति में आमूल चूल परिवर्तन लाऊँगा। मुझे सुविज्ञात है कि हमारी कोई स्थायी शिक्षा-नीति नहीं है जिससे शिक्षा का स्तर दिनोंदिन गिरता जा रहा है, यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण से हम शिक्षा के क्षेत्र में बहुत. पीछे हैं, बेरोजगारी की जो आज विभीषिका आज के शिक्षित युवकों को त्रस्त कर रही है, उनका मुख्य कारण हमारी बुनियादी शिक्षा की कमजोरी, प्राचीन काल की गुरु-शिष्य परंपरा की गुरुकुल परिपाटी की शुरुआत नये सिरे से करके धर्म और राजनीति के समन्वय से आधुनिक शिक्षा का सूत्रपात कराना चाहूँगा। राष्ट्र को बाह्य शक्तियों के आक्रमण का खतरा आज भी बना हुआ है। हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा अभी अपेक्षित रूप में नहीं है। इसके लिए अत्याधुनिक युद्ध के उपकरणों का आयात बढ़ाना होगा। मैं खुले आम न्यूक्लीयर विस्फोट का उपयोग सृजनात्मक कार्यों के लिए ही करना चाहूँगा। मैं किसी प्रकार ढुलमुल राजनीति का शिकार नहीं बनूँगा अगर कोई राष्ट्र हमारे राष्ट्र की ओर आँख उठाकर देखें तो मैं उसका मुँहतोड़ जवाब देने में संकोच नहीं करूंगा। मैं अपने वीर सैनिकों का उत्साहवर्द्धन करते हुए उनके जीवन को अत्यधिक संपन्न और खुशहाल बनाने के लिए उन्हें पूरी समुचित सुविधाएँ प्रदान कराऊँगा जिससे वे राष्ट्र की आन-मान पर न्योछावर होने में पीछे नहीं हटेंगे।

हमारे देश की खाद्य समस्या सर्वाधिक जटिल और दुखद समस्या है। कृषि प्रधान राष्ट्र होने के बावजूद यहाँ खाद्य संकट हमेशा मँडराया करता है। इसको ध्यान में रखते हुए मैं नवीनतम कृषि यंत्रों, उपकरणों और रासायनिक खादों और सिंचाई के विभिन्न साधनों के द्वारा कृषि-दशा की दयनीय स्थिति को सबल बनाऊँगा। देश की जो बंजर और बेकार भूमि है उसका पूर्ण उपयोग कृषि के लिए करवाते हुए कृषकों को एक-से-एक बढ़कर उन्नतिशील बीज उपलब्ध कराके उनकी अपेक्षित सहायता सुलभ कराऊँगा।

यदि मैं प्रधानमंत्री हँगा तो देश में फैलती हई राजनीतिक अस्थिरता पर कड़ा अंकुश लगाकर दलों के दलदल को रोक दूंगा। राष्ट्र को पतन की ओर ले जाने वाली राजनीतिक अस्थिरता के फलस्वरूप प्रतिदिन होने वाले आंदोलनों, काम-रोको और विरोध दिवस बंद को समाप्त करने के लिए पूरा प्रयास करूँगा। देश में गिरती हुई अर्थव्यवस्था के कारण मुद्रा प्रसार पर रोक लगाना अपना मैं प्रमुख कर्त्तव्य समझूगा। उत्पादन, उपभोग और विनियम की व्यवस्था को पूरी तरह से बदलकर देश को आर्थिक दृष्टि से अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व प्रदान कराऊँगा।

देश को विकलांग करने वाले तत्त्वों, जैसे-मुनाफाखोरी और भ्रष्टाचार ही नव अवगुणों की जड़ है। इसको जड़मूल से समाप्त करने के लिए अपराधी तत्त्वों को कड़ी-से-कड़ी सजा दिलाकर समस्त वातावरण को शिष्ट और स्वच्छ व्यवहारों से भरने की मेरी सबल कोशिश होगी। यहीं आज धर्म और जाति को लेकर तो साम्प्रदायिकता फैलाई जा रही है वह राष्ट्र को पराधीनता की ओर ढकेलने के ही अर्थ में हैं, इसलिए ऐसी राष्ट्र विरोधी शक्तियों को आज दंड की सजा देने के लिए मैं सबसे संसद के दोनों सदनों से अधिक-से-अधिक मतों से इस प्रस्ताव को पारित करा करके राष्ट्रपति से सिफारिश करके संविधान में परिवर्तन के बाद एक विशेष अधिनियम जारी कराऊंगा जिससे विदेशी हाथ अपना बटोर सकें।

संक्षेप में यही कहना चाहता हूँ कि यदि मैं प्रधानमंत्री हूँगा तो राष्ट्र और समाज के कल्याण और पूरे उत्थान के लिए मैं एड़ी-चोटी का प्रयास करके प्रधानमंत्रियों की परम्परा और इतिहास में अपना सबसे अधिक लोकापेक्षित नाम स्थापित करूँगा। भारत को सोने की चिड़िया बनाने वाला यदि मैं प्रधानमंत्री होता तो कथनी और करनी को साकार कर देता।

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MP Board Class 6th Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

MP Board Class 6th Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना

MP Board Class 6th Science Chapter 4 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
लकड़ी से बनाई जा सकने वाली पाँच वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
लकड़ी से बनाई जाने वाली वस्तुएँ – मेज, कुर्सी, सोफा सेट, बैलगाड़ी, अलमारी आदि।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से चमकदार पदार्थों का चयन कीजिए – काँच की प्याली, प्लास्टिक का खिलौना, स्टील का चम्मच, सूती कमीज।
उत्तर:
चमकदार पदार्थ काँच की प्याली, प्लास्टिक का खिलौना, स्टील का चम्मच।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित वस्तुओं का मिलान उन पदार्थों से कीजिए जिनसे उन्हें बनाया जा सकता है। याद रखिए कोई वस्तु एक से अधिक पदार्थों से भी मिलकर बनी हो सकती है तथा किसी दिए गए पदार्थ का उपयोग बहुत-सी वस्तुओं के बनाने में भी किया जा सकता है।
MP Board Class 6th Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना 1
उत्तर:
MP Board Class 6th Science Solutions Chapter 4 वस्तुओं के समूह बनाना 2

प्रश्न 4.
नीचे दिए गए कथन सत्य हैं अथवा असत्य। इसका उल्लेख कीजिए –

  1. पत्थर पारदर्शी होता है, जबकि काँच अपारदर्शी होता है।
  2. नोटबुक में द्युति होती है जबकि रबड़ (इरेजर) में नहीं होती।
  3. चाक जल में विलीन हो जाता है।
  4. लकड़ी का टुकड़ा जल पर तैरता है।
  5. चीनी जल में विलीन नहीं होती।
  6. तेल जल के साथ मिश्रणीय है।
  7. बालू (रेत) जल में निःसादित हो जाता है।
  8. सिरका जल में विलीन हो जाता है।

उत्तर:

  1. असत्य।
  2. सत्य।
  3. असत्य।
  4. सत्य।
  5. असत्य।
  6. असत्य।
  7. सत्य।
  8. सत्य।

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प्रश्न 5.
नीचे कुछ वस्तुओं तथा पदार्थों के नाम दिए गए हैं – जल, बॉस्केट बॉल, सन्तरा, चीनी, ग्लोब, सेब तथा मिट्टी का घड़ा। इनको इस प्रकार समूहित कीजिए।

  1. गोल आकृति तथा अन्य आकृतियाँ।
  2. खाद्य तथा अखाद्य।

उत्तर:

  1. गोल आकृति: बॉस्केट बॉल, सन्तरा, ग्लोब, सेब तथा मिट्टी का घड़ा।
    अन्य आकृतियाँ: जल तथा चीनी।
  2. खाद्य वस्तुएँ: जल, सन्तरा, चीनी तथा सेब।
    अखाद्य वस्तुएँ: बॉस्केट बॉल, ग्लोब, तथा मिट्टी का घड़ा।

प्रश्न 6.
जल में तैरने वाली जिन वस्तुओं को आप जानते हैं उनकी सूची बनाइए। जाँच कीजिए और देखिए कि क्या वे तेल अथवा मिट्टी के तेल में तैरती हैं?
उत्तर:
जल में तैरने वाली वस्तुएँ:

  1. लकड़ी का टुकड़ा।
  2. कागज का टुकड़ा।
  3. प्लास्टिक का टुकड़ा।
  4. स्पन्ज।
  5. थर्मोकोल का टुकड़ा।
  6. कॉर्क।
  7. बाँस इत्यादि।

उपर्युक्त वस्तुएँ मिट्टी के तेल मे नहीं तैरती हैं।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित समूह में मेल न खाने वाला ज्ञात कीजिए –

  1. कुर्सी, पलंग, मेज, बच्चा, अलमारी।
  2. गुलाब, चमेली, नाव, गेंदा, कमल।
  3. ऐलुमिनियम, आयरन, ताँबा, चाँदी, रेत।
  4. चीनी, नमक, रेत, कॉपर सल्फेट।

उत्तर:

  1. बच्चा।
  2. नाव।
  3. रेत।
  4. रेत।

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MP Board Class 6th General Hindi पत्र-लेखन

MP Board Class 6th General Hindi पत्र-लेखन

पिता जी को पत्र

भोपाल
दिनांक ………………………………

आदरणीय पिता जी,
सादर चरण स्पर्श!

आपका पत्र प्राप्त हुआ। समाचार ज्ञात हुआ। माता जी की तबीयत में सुधार का समाचार सुनकर प्रसन्नता हुई। मेरी शाला प्रारंभ हो चुकी है। आप पुस्तकों के लिए 100 रु. भेजने की व्यवस्था करें। छोटे भाई-बहिनों को प्यार एवं दादा-दादी, काका-काकी को चरण स्पर्श। माता जी के लिए ध्यान लगा रहता है।

आपका आज्ञाकारी पुत्र
दिनेश गोस्वामी

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मित्र को पत्र

सागर
दिनांक ………………………………

प्रिय मित्र दिलीप,
सादर अभिवादन्

पत्र प्राप्त कर समाचार ज्ञात किया। आवश्यक कार्य में व्यस्त होने के कारण प्रश्नोत्तर में विलंब हुआ। तिमाही परीक्षा की तैयारी चल रही है। आशा है तुम भी मन लगाकर विद्याध्ययन कर रहे होगे। इस बार भी से इतना परिश्रम करो कि अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करो। इसी आशा से साथ शेष अगले पत्र में।

तुम्हारा मित्र
देवाशीश मिश्र

अस्वस्थता के कारण छुट्टी के लिए आवेदन-पत्र

सेवा में,
माननीय प्रधानाध्यापक महोदय,
शासकीय माध्यमिक शाला, बालाघाट।

विषय : अस्वस्थता के कारण छुट्टी हेतु आवेदन।

महोदय,
नम्र निवेदन है कि मुझे अचानक बुखार आ जाने के कारण मैं शाला आने में असमर्थ हूँ। साथ ही डाक्टर ने पूर्ण आराम करने की सलाह दी है। अतः आप मुझे तीन दिन के लिए. अवकाश देने की कृपा करें। गृहकार्य मैं स्वस्थ होने पर पूरा कर लूँगा। धन्यवाद।

आपका प्रिय शिष्य
प्रदीप बक्शी
7वीं ‘अ’

दिनांक ………………………………

बहिन की शादी के लिए अवकाश हेतु

सेवा में,
माननीय प्राचार्य महोदय,
शासकीय बालक उ.मा. शाला, सिवनी।

महोदय,
निवेदन है कि मेरी बड़ी बहिन उषा का शुभ-विवाह 3-3-20.. को संपन्न होना निश्चित हुआ है। मेरा इस विवाह में सम्मिलित होना अत्यंत आवश्यक है, अतः आप मुझे एक मार्च 20.. से एक सप्ताह का अवकाश देने की कृपा करें। कष्ट के लिए क्षमा!

आपका आज्ञाकारी शिष्य
सुरेश वाधवा
7वीं ‘स’

दिनांक ………………………………

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शिक्षा शुल्क माफी हेतु आवेदन-पत्र

प्रति,
माननीय प्रधानाध्यापक महोदय, शासकीय मिडिल स्कूल, रायसेन।
विषय : शिक्षण शुल्क माफ करने हेतु निवेदन।

महोदय,
मैं अति निर्धन छात्र हूँ। मेरे पिता जी की आर्थिक स्थिति काफी गिरी हुई है तथा वे मुझे पढ़ाने में असमर्थ हैं। यदि आप मेरा शिक्षण शुल्क माफ कर दें, तो मेरा अंधकारमय भविष्य उज्जवल बन सकता है।

कृपया शिक्षण शुल्क माफ करके मुझ पर महती कृपा करें।

निवेदक
राकेश रस्तौगी
सातवीं ‘स’

दिनांक ………………………………

स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र हेतु आवेदन

प्रति,
माननीय प्राचार्य महोदय,
शासकीय मॉडल स्कूल, जबलपुर
विषय : ट्रांस्फर सर्टिफिकेट हेतु आवेदन-पत्र।

महोदय,
मैं आपकी शाला की कक्षा सातवीं ‘अ’ का छात्र हूँ। मेरे पिता जी का ट्रांस्फर इंदौर हो गया है। मुझे इस कारण यहाँ पढ़ने में असुविधा हो रही है। अतः आप मुझे ट्रांस्फर सर्टिफिकेट प्रदान करने की व्यवस्था करें। धन्यवाद!

आपका शिष्य,
मनोहर कश्यप
कक्षा सातवीं ‘अ’

दिनांक ………………………………

पुस्तकें मंगवाने हेतु पत्र

प्रति,

दिनांक ………………………………, रीवा
व्यवस्थापक महोदय
कमल प्रकाशन ………………………………

महोदय,
नीचे लिखी पुस्तकें आप पत्र मिलते ही V.P.P. द्वारा भेजने की व्यवस्था करें। पैकेट पाते ही मैं उन्हें छुड़ा लूँगा। पुस्तकें इस प्रकार हैं-
1. बाल भारती भाग 7 2 प्रति
2. कमल विज्ञान (कक्षा सातवीं के लिए) 2 प्रति
3. कमल गणित VII 3 प्रति
4. कमल गाइड VII 3 प्रति

कृपया पुस्तकें नीचे लिखे पते पर भेजें। मेरा पता-

राम स्वरूप भारती
C/o सीता राम भारती,
बस स्टैण्ड रोड, रीवा (म. प्र.)

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अग्नि-पीड़ितों की सहायता हेतु पत्र

प्रति,
आदरणीय जिलाध्यक्ष महोदय,
भोपाल।

विषय : अग्नि-पीड़ितों की तुरंत सहायता।
मान्यवर,
हमारे ग्राम में गत दिवस गेहूँ के एक खलिहान में आग लगने से आस-पास के अनेक किसानों की गेहूँ की गंजियाँ आग में स्वाहा हो गयीं। हम गरीब किसान दाने-दाने के लिए तरस रहे हैं। अतः श्रीमान् जी से प्रार्थना है कि हम अग्नि-पीड़ितों की तुरंत सहायता की जाए, ताकि हम अपने बाल-बच्चों का पालन-पोषण कर सकें। साथ ही यहाँ पर कोई राहत कार्य खोल दिया जाए, ताकि हम अपनी आजीविका कमा सकें। आशा एवं धन्यवाद सहित,

हम हैं पीड़ित किसान
(ग्राम के बीस किसानों के हस्ताक्षर)

दिनांक ………………………………

ग्राम ………………………………
जिला-भोपाल।

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MP Board Class 6th General English Essay Writing

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The Cow (द काउ)
गाय

  1. The cow is a pet animal.
  2. She is four footed animal.
  3. She has two eyes and two horns.
  4. She has a long tail and two big ears.
  5. She eats grass, leaves, corn and hay.
  6. She gives us milk.
  7. She gives us calves.
  8. Her calves are used for agriculture.
  9. Curd, butter and ghee is made from her milk.
  10. Hindus worship the cow.
  11. We call her ‘Gau Mata’.

Meanings of Difficult Words (कठिन शब्दों के अर्थ) :
Pet (पैट) = पालतू, animal (एनिमल) = जानवर, four footed (फोर फुटेड) = चौपाया, eyes (आइज़) = आँखें, horns (हॉर्स) = सींग, long (लौंग) = लम्बा, tail (टेल) = पूँछ, big (बिग) = बड़ा, ears (ईयर्स) = कान, eat (ईट) = खाना, grass (ग्रास) = घास, leaves (लीव्ज़) = पत्तियाँ, corn (कॉर्न) = अनाज, hay (हे) = भूसा, give (गिव) = देना, milk (मिल्क) = दूध, calves (काव्ज़) = बछड़े, used (यूज्ड) = प्रयोग किया जाता है, agriculture (एग्रीकल्चर) = कृषि, curd (कर्ड) = दही, butter (बटर) = मक्खन, ghee (घी) = घी, Hindu (हिन्दू) = हिन्दू, worship (वर्शिप) = पूजा करते हैं, Gau Mata (गऊ माता) = गऊ माता।

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The Dog (द डॉग)
कुत्ता

  1. The dog is a pet animal.
  2. It is found all over the world.
  3. It is found in many colors such as black, white, brown and black and white.
  4. It has four legs, a tail, two eyes and two ears.
  5. Its has sharp teeth also.
  6. It eats bread, milk and meat.
  7. It watches its master’s house.
  8. It barks when its sees a stranger.
  9. The dog is a good friend of man.
  10. It is very useful and faithful animal.

Meanings of Difficult Words (कठिन शब्दों के अर्थ) :
Found (फउण्ड) = पाया जाता है, world (वर्ल्ड) = विश्व, संसार, many (मैनी) = बहुत, colors (कलर्स) = रंगों, black (ब्लैक) = काला, white (व्हाइट) = सफेद, brown (ब्राउन) = कत्थई, black and white (ब्लैक एण्ड ह्वाइट) = चितकबरा, sharp (शार्प) = तेज, bread (ब्रेड) = रोटी, meat (मीट) = माँस, watch (वॉच) = रखवाली करना, master (मास्टर) = मालिक, house (हाउस) = घर, bark (बार्क) = भौंकना, when (व्हेन) = जब, see (सी) = देखना, stranger (स्ट्रेन्जर) = अजनबी, friend (फ्रेण्ड) = मित्र, useful (यूज़फुल) = उपयोगी, faithful (फेथफुल) = स्वामी भक्त।

My School (माई स्कूल)
मेरा स्कूल

  1. I read in Sarafa School, Lashkar.
  2. Mr. P.C. Dubey is my Head Master.
  3. There are five hundred students in my school.
  4. There are nine teachers in my school.
  5. All teachers are very hard working.
  6. My school has a beautiful building.
  7. There are nine rooms and an office.
  8. There is a big playground also.
  9. There is a big library in my school.
  10. The result of my school is always very good.
  11. like my school very much.

Meanings of Difficult Words (कठिन शब्दों के अर्थ) :
Head Master (हैड मास्टर) = प्रधान अध्यापक, five hundred (फाइव हण्ड्रेड) = पाँच सौ, hard working (हार्ड वर्किंग) = कठिन परिश्रमी, beautiful (ब्युटीफुल) = सुन्दर, building (बिल्डिंग) = भवन, rooms (रूम्स) = कमरे, office (ऑफिस) = कार्यालय, playground (प्ले-ग्राउण्ड) = खेल का मैदान, big (बिग) = बड़ी, library (लायब्रेरी) = पुस्तकालय, result (रिज़ल्ट) = परिणाम, always (ऑलवेज़) = हमेशा, like (लाइक) = पसन्द करना।

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The Postman (द पोस्टमैन)
डाकिया

  1. The Postman is a government servant.
  2. He wears khaki uniform.
  3. He goes door to door.
  4. He has a leather bag on his shoulder.
  5. He delivers letters and money-orders.
  6. We all wait for him every day.
  7. His duty is very hard.
  8. But his pay is very low.
  9. We should be kind to him.
  10. He must be paid well.

Meanings of Difficult Words (कठिन शब्दों के अर्थ) :
Government (गवर्नमेण्ट) = सरकारी, servant (सर्वेण्ट) = नौकर, wears (वेअर्स) = पहनता है, khaki (खाकी) = खाकी, uniform (यूनीफॉर्म) = वर्दी, door (डोर) = द्वार, leather (लैदर) = चमड़ा, bag बैग = थैला, shoulder (शोल्डर) = कन्धा, delivers (डेलीवर्स) = बाँटता है, letter (लैटर) = पत्र, moneyorder (मनी-ऑडर्र) = धनादेश, wait (वेट) = इन्तजार, every day (एवरी डे) = रोजाना, duty (ड्यूटी) = कर्त्तव्य, hard (हार्ड) = कठिन, but (बट) = किन्तु, pay (पे) = वेतन, low (लो) = कम, नीचा, kind (काइण्ड) = दयालु, well (वैल) = अच्छा

My Daily Life (माई डेली लाइफ)
मेरी दिनचर्या

  1. I get up at 5 O’clock in the morning.
  2. After attending to nature call I go for a walk.
  3. I return and take breakfast.
  4. I study from 7 a.m. to 9 a.m.
  5. Then I take bath and lunch and go to school.
  6. I study at school from 10.30 a.m. to 4:30 p.m.
  7. I return home and have tea at 5 p.m.
  8. I play games for an hour, then I study for three hours and take dinner at 9:00 p.m.
  9. I watch television for an hour.
  10. I go to bed at 10 p.m.
  11. On Sundays I watch films and serials on T.V. and help my parents in domestic work.

Meanings of Difficult Words (कठिन शब्दों के अर्थ) :
Nature call (नेचर कॉल) = नित्य कर्म, breakfast (ब्रेकफॉस्ट) = सुबह का नाश्ता, lunch (लन्च) = दोपहर का नाश्ता, dinner (डिनर) = रात का भोजन, study (स्टडी) = अध्ययन करना, domestic (डोमेस्टिक) = घरेलू, serials (सीरियल्स) = धारावाहिक।

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My Best Friend (माई बेस्ट फ्रेण्ड)
मेरा प्रिय मित्र

  1. I have several friends but Ram is my best friend.
  2. He is my neighbour and also my classmate.
  3. He always stands first in the class.
  4. But he is not proud.
  5. He always helps his classmates.
  6. His father is a businessman and his mother is a teacher.
  7. We go to school together and study at home together.
  8. He is good at sports and games too.
  9. He faces problems boldly.
  10. I like him for his qualities and good nature.

Meanings of Difficult Words (कठिन शब्दों के अर्थ) :
Several (सेवरल) = अनेक, neighbour (नेबर) = पड़ोसी, classmate (क्लासमेट), = सहपाठी, proud (प्राउड) = घमण्ड, businessman (बिजेनेसमैन) = व्यापारी, face (फेस) = सामना करना, boldly (बोल्डली) = हिम्मत से, qualities (क्वालिटीज़) = अच्छाइयाँ, nature (नेचर) = व्यवहार।

MP Board Class 6 English Solutions

MP Board Class 6th General English Letters and Applications

MP Board Class 6th General English Letters and Applications

Applications
(प्रार्थना-पत्र)

Question 1.
Write an application to your head master for four days sick leave.
(अपने प्रधानाध्यापक को चार दिन की बीमारी की छुट्टी के लिए प्रार्थना-पत्र लिखिए।)
Answer:
To,
The Head Master
Janta Junior School,
Gwalior

Sir,
I beg to say that I am suffering from fever since last night. So I cannot come to school. Kindly grant me leave for four days only. Thanks.

Yours obedient pupil
Mohan Rawat
Class VI-A
November 5,20……

Meanings of the Difficult Words :
sir (सर) = महोदय, beg (बेग) = प्रार्थना, suffering (सफरिंग) = पीड़ित, fever (फीवर) = बुखार, since (सिन्स) = से, night (नाइट) = रात्रि, cannot (कैननॉट) = नहीं सकता, kindly (काइण्डली) = कृपया, grant (ग्राण्ट) = स्वीकृत करना, leave (लीव) = अवकाश, thank (र्थंक) = धन्यवाद, obedient (ओबेडिएण्ट) = आज्ञाकारी, pupil (प्यूपिल) = शिष्य।

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Question 2.
Write an application to your head-master for seven days leave for the marriage of your brother.
(अपने भाई के विवाह में सम्मिलित होने के लिए 7 दिन के अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र लिखिए।)
Answer:
To.
The Headmaster
Govt. Middle School,
Raipur (M.P.)

Sir,
I beg to say that I have to attend the marriage of my brother. So I cannot come to school.
Please grant me leave for seven days from today.
Thanks.

Yours obedient
John Paul
Class VI-A
Date 8.12.20………

Meaning of Difficult Words :
attend (अटैण्ड) = शामिल होना, marriage (मैरिज) = विवाह, brother (ब्रदर) = भाई, grant (ग्राण्ट) = स्वीकृत, please (प्लीज़) = कृपया, seven (सेवन) = सात, days (डेज़) = दिन, today (टुडे) = आज, from (फ्रॉम) = से।

Question 3.
Write an application for fee concession.
(शुल्क मुक्ति के लिए एक प्रार्थना-पत्र लिखिए।)
Answer:
To,
The Headmaster
V.J. Middle School,
Guna (M.P.)

Sir,
I beg to say that my father is very poor and unable to pay the school fee. Kindly grant me freeship. I shall be highly obliged.
Thanks.

Your’s obediently
Ranjan Dubey
Class VI-B
Date 15.7.20……

Meaning of Difficult words :
father (फादर) = पिता, very (वैरी) = बहुत, poor (पूअर) = गरीब, unable (अनेबल) = असमर्थ, to pay (टू पे) = धन जमा करना, fee (फी) = शुल्क, freeship (फ्रीशिप) = शुल्क मुक्ति, shall (शैल) = गा, गी, गे, highly (हाइली) = बहुत ज्यादा, obliged (ओबलाइज्ड) = कृतज्ञ।

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Letters
(पत्र)

Question 1.
Write a letter to your father to send you Rs 100/- by money-order.
(अपने पिता को ₹ 100 का धनादेश भेजने के लिए एक पत्र लिखिए।)
Answer:

1/10. P.T. Road,
Gwalior
6th October, 20 …..

Dear Father,
I am quite well here. I hope you will be quite well there. I have to buy some books so I need one hundred rupees. Kindly send it by money-order early.
With best regards to mother and love to brother and sister.

Yours loving son
Manish Sharma

Meaning of Difficult Words :
dear (डियर) = प्रिय, father (फादर) = पिता, quite (क्वाइट) = बिल्कुल, पूर्णतः, well (वैल) = अच्छा, ठीक, here (हिअर) = यहाँ, buy (बाय) = खरीदना, some (सम) = कुछ, books (बुक्स) = किताबें, need (नीड) = आवश्यकता, kindly (काइण्डली) = कृपया, दयापूर्वक, send (सेण्ड) = भेजना, money-order (मनी-ऑडर्र) = धनादेश, early (अर्ली) = शीघ्र, with (विद) = साथ, regard (रिगार्ड) = सम्मान आदर, love (लव) = प्यार।

Question 2.
Write a letter to your friend inviting him on your birthday.
(अपने जन्मदिन पर अपने मित्र को आमन्त्रित करने के लिए पत्र लिखो।)
Answer:

206, Sahil Colony.
Gwalior,
7th May, 20 …….

Dear Richa,
I am happy to inform that my birthday falls on 15th May. I invite you to attend my birthday party at 8 p.m. at my residence. Please try your best to come. Please convey my best regards to dear aunt and uncle. Waiting eagerly for you.

Yours affectionately
Divya.

Meaning of Difficult Words :
invite (इनवाइट) = न्यौता, inform (इन्फॉर्म) = सूचित करना, attend (अटैण्ड) = शामिल होना, convey (कन्वे) = देना, eagerly (ईगर्ली) = बेसब्री से, affectionately (अफेक्शनेट्ली) = स्नेही।

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Question 3.
Write a letter to your friend inviting him to spend the vacations with you in your village.
(अपने मित्र को, अपने गाँव में छुट्टियाँ बिताने के लिए पत्र लिखो।)
Answer:

Vishakha Enclave
Sagar
16th Oct., 20 …….

Dear Sohan,
Our school has been closed for Diwali holidays. I want to spend holidays with you in my village about 30 kilometers from here. I invite you to spend some days with me in my village. You will feel very good here. I hope you will come here soon. Waiting for you.

Yours affectionately
Rohan

Meanings of Difficult Words :
spend (pas) = बिताना, invite (इन्वाइट) = न्यौता, soon (सून) = जल्दी, waiting (वेटिंग) = इन्तजार में, village (विलेज) = गाँव, affectionately (अफेक्शनेट्ली) = स्नेही।

MP Board Class 6 English Solutions

MP Board Class 6th General English Paragraph Writing

MP Board Class 6th General English Paragraph Writing

एक ही विषय पर या उससे सम्बन्धित पर कहे गये वाक्यों के समूह को गद्यांश कहते हैं।

गद्यांश लेखन के नियम :

  1. प्रत्येक गद्यांश एक ही विषय से सम्बन्धित होना चाहिए एवं उसका प्रत्येक वाक्य मुख्य विषय से सम्बन्धित होना चाहिए।
  2. गद्यांश का प्रथम वाक्य पाठक की उत्सुकता जगाने वाला व अन्तिम वाक्य उसकी जिज्ञासा शान्त करने वाला होना चाहिए।
  3. गद्यांश में विचारों या घटनाओं का क्रम उनके घटित होने के क्रम में व मुख्य विषय से सम्बन्धित होना चाहिए।

Question 1.
Write a short paragraph on the importance of trees.
Answer:
The trees are very important. They supply us with food and shelter. They give us oxygen. We also get fuel from them. They maintain the balance of carbon dioxide and oxygen in the air. Every part of the trees is very useful for us. Several trees have oil in their seeds and they supply medicines also. We get wood from trees for making furniture, houses and paper.

कठिन शब्द :
important = महत्वपूर्ण, supply = उपलब्ध करना, shelter = आश्रय, oxygen = ऑक्सीजन, fuel = ईंधन, maintain = बनाये रखते हैं, balance = सन्तुलन, carbon dioxide = कार्बन डाइ-ऑक्साइड, useful! = लाभदायक, several = अनेक, oil = तेल, seeds = बीज, medicines = औषधियाँ, wood = लकड़ी।

MP Board Solutions

Question 2.
Write a paragraph on Mahatma Gandhi
Answer:
Mahatma Gandhi was a saint. He wore only Khadi. He generally walked on foot. He fought for the independence of India and freed it on 15th of August, 1947. He was against social evils like untouchability, caste system, illiteracy and poverty. Many people did not like his social reforms and opposed him. He was shot dead by Nathuram Godse when he was going in a prayer meeting. He will always be remembered as Father of the Nation.

कठिन शब्द :
Saint = साधू, untouchability = छुआछूत, illiteracy = अशिक्षा, poverty = गरीबी, reforms = सुधार, opposed = विरोध किया।

Question 3.
Write a paragraph on the Himalayas.
Answer:
The Himalayas are beautiful mountains in the north of India. Some of the world’s highest peaks are in Himalayas. The highest peak is the Mount Everest. The tops of the mountains are covered with snow throughout the year. Many rivers flow from these mountains. The climate and the scenery are most charming. Many visitors go to the hill stations for pleasure.

कठिन शब्द :
peak = चोटी, climate = जलवायु, charming = आकर्षक, visitors = दर्शकगण, pleasure! = 3717561

Question 4.
My Friend
उपर्युक्त शीर्षक के आधार पर निम्न लेख को दी गई Aids की सहायता से पूर्ण कीजिए-
Answer:
His Name and Age :
Ajay is my ……… He is about 11 years ……… He lives in ……… He is a …….. boy. He reads in my ……… He is the son of a ……..

His Health and Habits :
Ajay is a ……. boy. He is very …….. He gets up early in the ……… He goes for a ……… daily. He works very ……… He is good at …….. He is a …….. boy. He reads in my ……….

His Dress :
He wears …….. dress. He wears a shirt and a ……….. His ………… are always laced.

His Behaviour :
Ajay always speaks …….. His ……… is good to all. He is loving to all.

कठिन शब्द :
Old = आयु का , simple = साधारण , class = कक्षा, healthy = तन्दुरुस्त, active = चुस्त, behaviour = व्यवहार, shoes = जूते, shorts = नेकर, morning = प्रातः, walk = घूमना, studies = अध्ययन, truth = सच्चाई, obey = आज्ञा पालन करना, clean = साफ करना, friend = मित्र, hard = कठिन।

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Question 5.
My Classroom

My class-room :
(मेरी कक्षा) पर गद्यांश निम्न शब्दों की सहायता से पूर्ण कीजिए।
Aids :
Maps, picture, study, room, walls, blackboard, bags, ceiling, tables, clean, windows, chairs, desks, stones.
Answer:
I ……. in room number four. It is my class ……. Its ……. are white. There are two doors and two ……. in it. There is a …..on the front wall.

There are forty ……. and forty …….. in it. There is also a …….. and ……… for the teacher. My classroom is neat and ………

Its floor is made of …….. It is swept daily. There are two ……… fans in it. There are ……. big almirahs in it. We put our …… in them. There is a ……..of Mahatma Gandhi in it. There are also some ……. hanging on the walls.

We like our class-room very much.

MP Board Class 6 English Solutions

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 10 क्षेत्रमिति Intext Questions

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 10 क्षेत्रमिति Intext Questions

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 222-223

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
अपनी अध्ययन टेबल के ऊपरी चारों सिरों की लम्बाइयों को मापिए तथा उन्हें लिखिए।
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 10 क्षेत्रमिति Intext Questions image 1
AB = _ सेमी, BC = _ सेमी, CD = _ सेमी, DA = _ सेमी
अब चारों भुजाओं की लम्बाइयों का योगफल
= AB + BC + CD + DA
= _ सेमी + _ सेमी + _ सेमी + _ सेमी
= _ सेमी
क्या आप बता सकते हैं कि परिमाप कितना है?
हल :
AB = 130 सेमी, BC = 80 सेमी, CD = 130 सेमी, DA = 80 सेमी
∴ AB + BC + CD + DA
= 130 सेमी + 80 सेमी + 130 सेमी + 80 सेमी
= 420 सेमी
हाँ, इसका परिमाप = 420 सेमी

प्रश्न 2.
अपनी नोटबुक के एक पृष्ठ की चारों भुजाओं की लम्बाइयों को मापिए और उन्हें लिखिए। चारों भुजाओं की लम्बाइयों का योगफल ।
= AB + BC + CD + DA
= _ सेमी + _ सेमी + _ सेमी + _ सेमी
= _ सेमी
पृष्ठ का परिमाप कितना है?
हल : AB + BC + CD + DA = 20 सेमी + 16 सेमी + 20 सेमी + 16 सेमी = 72 सेमी
अतः पृष्ठ का परिमाप = 72 सेमी

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
मीरा 150 मी लम्बाई तथा 80 मी चौड़ाई वाले एक पार्क में जाती है। वह इस पार्क का एक पूरा चक्कर लगाती है। उसके द्वारा तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए।
हल :
पार्क की लम्बाई = 150 मी,
पार्क की चौड़ाई = 80 मी
पार्क का परिमाप = 2 x (लम्बाई + चौड़ाई)
= 2 x (150 मी + 80 मी)
= 2 x (230 मी)
= 460 मी
∴ मीरा द्वारा तय की गई दूरी = 460 मी

प्रश्न 4.
निम्न आकृतियों का परिमाप ज्ञात कीजिए :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 10 क्षेत्रमिति Intext Questions image 2
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 10 क्षेत्रमिति Intext Questions image 3
हल :
(a) ∵ AB = 40 सेमी, BC = 10 सेमी, CD = 40 सेमी, DA = 10 सेमी
∴ परिमाप = AB + BC + CD + DA
= 40 सेमी + 10 सेमी + 40 सेमी + 10 सेमी
= 100 सेमी

(b) ∵ AB = BC = CD = DA = 5 सेमी
∴ परिमाप = AB + BC + CD + DA
= 5 सेमी + 5 सेमी + 5 सेमी + 5 सेमी
= 20 सेमी

(c) परिमाप = AB + BC + CD + DE + EF + FG + GH + HI + IJ + JK + KL + LA
= 1 सेमी + 3 सेमी + 3 सेमी + 1 सेमी + 3 सेमी + 3 सेमी + 1 सेमी + 3 सेमी + 3 सेमी + 1 सेमी + 3 सेमी + 3 सेमी
= 28 सेमी

(d) परिमाप = AB + BC + CD + DE + EF + FA
= 100 मी + 120 मी + 90 मी + 45 मी + 60 मी + 80 मी
= 495 मी

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 224

प्रश्न 1. निम्नलिखित आयतों के परिमाप ज्ञात कीजिए :
हल :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 10 क्षेत्रमिति Intext Questions image 4

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MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.4

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.4

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 219-220

प्रश्न 1.
एक स्कूल के 120 विद्यार्थियों का इस आशय से सर्वेक्षण किया गया है कि वे अपने खाली समय में किस क्रियाकलाप को पसन्द करते हैं। निम्न आँकड़े प्राप्त हुए
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.4 image 1
1 इकाई लम्बाई = 5 विद्यार्थी का पैमाना लेकर एक दण्ड आलेख बनाइए। खेलने के अतिरिक्त कौन-सा क्रियाकलाप अधिकांश विद्यार्थियों द्वारा पसन्द किया जाता हैं?
हल :
दण्ड आलेख
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.4 image 2
खेलने के अतिरिक्त अधिकांश विद्यार्थियों द्वारा कहानी की पुस्तक पढ़ना पसन्द किया जाता है।

प्रश्न 2.
छः क्रमागत दिनों में किसी दुकानदार द्वारा बेची गई गणित की पुस्तकों की संख्या आगे दी गई है
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.4 image 3
अपनी पसन्द का पैमाना चुनते हुए, उपर्युक्त सूचना के लिए एक दण्ड आरेख खींचिए।
हल :
दण्ड आलेख
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.4 image 4

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प्रश्न 3.
वर्ष 1998 से 2002 के बीच एक फैक्टरी द्वारा निर्मित साइकिलों की संख्या निम्नलिखित सारणी द्वारा दर्शाई गई है
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.4 image 5
इन आँकड़ों को एक दण्ड आलेख द्वारा प्रदर्शित कीजिए। अपनी पसन्द का पैमाना चुनिए।
(a) किस वर्ष में अधिकतम संख्या में साइकिलें निर्मित की गईं ?
(b) किस वर्ष में न्यूनतम संख्या में साइकिलें निर्मित की गईं ?
हल :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.4 image 6
(a) वर्ष 2002 में अधिकतम संख्या में साइकिलें निर्मित की गईं।
(b) वर्ष 1999 में न्यूनतम संख्या में साइकिलें निर्मित की गईं।

प्रश्न 4.
किसी शहर के व्यक्तियों की संख्या विभिन्न आयु समूहों के अनुसार नीचे सारणी में दी हुई हैं।
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.4 image 7
इन आँकड़ों को एक दण्ड आलेख द्वारा निरूपित कीजिए। (1 इकाई लम्बाई = 1 हजार लीजिए।)
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(a) किन दो आयु समूहों में जनसंख्या बराबर है?
(b) 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी व्यक्ति वरिष्ठ नागरिक कहलाते हैं इस शहर में कितने वरिष्ठ नागरिक हैं ?
हल :
दण्ड आलेख
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.4 image 8
(a) आयु समूह 30-44 और 45-59 की जनसंख्या बराबर है।
(b) इस शहर में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 80,000 + 40,000 = 1,20,000 है।

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MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.3

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.3

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 215-216

प्रश्न 1.
आगे दिया हुआ दण्ड आलेख वर्ष 1998-2002 में सरकार द्वारा खरीदे गए गेहूँ की मात्रा दर्शाता है :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.3 image 1
इस दण्ड आलेख को पढ़िए और अपने प्रेक्षणों को लिखिए :
(a) किस वर्ष में गेहूँ का अधिकतम उत्पादन हुआ ?
(b) किस वर्ष में गेहूँ का न्यूनतम उत्पादन हुआ ?
उत्तर-
(a) वर्ष 2002 में गेहूँ का अधिकतम उत्पादन हुआ।
(b) वर्ष 1998 में गेहूँ का न्यूनतम उत्पादन हुआ।

प्रश्न 2.
इस दण्ड आलेख को देखिए जो एक रेडीमेड कपड़ों की दुकान में सोमवार से शनिवार तक हुई कमीजों की बिक्री को दर्शाता है :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.3 image 2
अब निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(a) उपर्युक्त दण्ड आलेख में क्या सूचना दर्शाई गई है ?
(b) कमीजों की संख्या को निरूपित करने के लिए क्षैतिज रेखा पर क्या पैमाना लिया गया है ?
(c) किस दिन अधिकतम कमीजें बेची गईं और कितनी संख्या में बेची गईं, लिखें?
(d) किस दिन न्यूनतम संख्या में कमीजें बेची गईं ?
(e) बृहस्पतिवार को कितनी कमीजें बेची गईं ?
उत्तर-
(a) यह दण्ड आलेख सोमवार से शनिवार तक बेची गई कमीजों की संख्या दर्शाता है।
(b) कमीजों की संख्या को निरूपित करने के लिए क्षैतिज रेखा पर पैमाना 1 सेमी = 5 कमीजें ली गई हैं।
(c) शनिवार को अधिकतम कमीजें बेची गईं। इस दिन 60 कमीजें बेची गईं।
(d) मंगलवार को न्यूनतम कमीजें बेची गईं।
(e) बृहस्पतिवार को 35 कमीजें बेची गईं।

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प्रश्न 3.
इस दण्ड आलेख को देखिए जो अजीज द्वारा अर्धवार्षिक परीक्षा में विभिन्न विषयों में प्राप्त किए गए अंकों को प्रदर्शित करता है:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.3 image 3
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(a) यह दण्ड आलेख क्या सूचना प्रदर्शित करता है ?
(b) किस विषय में अजीज ने अधिकतम अंक प्राप्त किए ?
(c) किस विषय में उसने न्यूनतम अंक प्राप्त किए ?
(d) विषयों के नाम लिखिए और उनमें से प्रत्येक में प्राप्त किए गए अंक भी लिखिए।
उत्तर-
(a) यह दण्ड आलेख अजीज द्वारा विभिन्न विषयों में प्राप्त अंकों को प्रदर्शित करता है।
(b) अजीज ने हिन्दी में अधिकतम अंक प्राप्त किए।
(c) उसने सामाजिक विषय में न्यूनतम अंक प्राप्त किए।
(d) हिन्दी – 80, अंग्रेजी – 60, गणित – 70, विज्ञान – 50 और सामाजिक विषय – 40.

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 218

इन्हें कीजिए

अपने मित्रों के साथ पाँच और ऐसी स्थितियों के बारे में सोचिए, जहाँ हम आँकड़े प्राप्त कर सकते हैं। संख्याओं का प्रयोग करके सारणियाँ बनाइए और उन्हें दण्ड आलेखों द्वारा प्रदर्शित कीजिए।

प्रश्न 1.
निम्नांकित दी गई सारणी में छात्रवृत्तियों का विभिन्न वर्षों में वितरण निम्नानुसार है :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.3 image 4
दण्ड आलेख द्वारा निरूपित कीजिए।
हल:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.3 image 5

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प्रश्न 2.
नीचे दिए गए दण्ड आलेख को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.3 image 6
(i) इस दण्ड आलेख से आपको कौन-सी जानकारी प्राप्त होती है ?
(ii) अलग-अलग शिक्षण सत्र में छात्राओं की संख्या के परिवर्तन का क्रम क्या है?
(iii) 2011-12 में छात्राओं की संख्या क्या थी?
(iv) किस सत्र में छात्राओं की संख्या सबसे अधिक है?
(v) 2012-13 की छात्राओं की संख्या कौन-से सत्र की तुलना में दो गुनी है ?
उत्तर-
(i) इस दण्ड आलेख से हमें विभिन्न शिक्षण सत्रों में कक्षा VI की छात्राओं की संख्या की जानकारी प्राप्त होती है।
(ii) अलग-अलग शिक्षण सत्र के लिए दण्डों की ऊँचाई निरन्तर बढ़ रही है, जो दर्शाती है कि छात्राओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है।
(iii) 2011-12 में छात्राओं की संख्या 200 थी।
(iv) सत्र 2014-15 का दण्ड सर्वाधिक ऊँचाई (400 छात्राएँ) दर्शा रहा है। अतः सत्र 2014-15 में छात्राओं की संख्या सबसे अधिक है।
(v) 2012-13 की छात्राओं की संख्या (300), सत्र 201011 की तुलना में दोगुनी है।

प्रश्न 3.
नीचे दिए गए दण्ड आलेख को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
विभिन्न साधनों से स्कूल आने वाले विद्यार्थियों की संख्या
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.3 image 7
(i) दण्डालेख से हमें कौन-सी जानकारी मिलती है ?
(ii) स्कूल आने के साधन कौन-से अक्ष पर दर्शाए गए हैं ?
(iii) Y-अक्ष पर क्या दर्शाया गया है ?
(iv) पैदल स्कूल आने वाले विद्यार्थियों की संख्या कितनी है ?
(v) सरकारी बस से कितने विद्यार्थी स्कूल आते हैं ?
(vi) स्कूल में कुल कितने विद्यार्थी हैं ?
(vii) स्कूल बस कितने विद्यार्थियों को स्कूल लाती है ?
(viii) स्कूटर से आने वाले विद्यार्थियों की संख्या कितनी है ?
उत्तर-
(i) इस दण्डालेख से विभिन्न साधनों से स्कूल आने वाले विद्यार्थियों की संख्या से सम्बन्धित जानकारी मिलती है।
(ii) स्कूल आने के साधन X-अक्ष पर दर्शाए गए हैं।
(iii) Y-अक्ष पर विद्यार्थियों की संख्या दर्शाई गयी है।
(iv) पैदल स्कूल आने वाले विद्यार्थियों की संख्या 50 है।
(v) सरकारी बस से 40 विद्यार्थी स्कूल आते हैं।
(vi) स्कूल में कुल 300 विद्यार्थी हैं।
(vii) स्कूल बस 120 विद्यार्थियों को स्कूल लाती है।
(viii) स्कूटर से स्कूल आने वाले विद्यार्थियों की संख्या 20 है।

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प्रश्न 4.
एक दुकानदार द्वारा छः क्रमागत दिनों में बेचे गए बल्बों की संख्या इस प्रकार है
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.3 image 8
इस सूचना को दण्ड आलेख द्वारा निरूपित कीजिए।
हल:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.3 image 9

प्रश्न 5.
एक प्राथमिक स्कूल में रखी अलमारी में विभिन्न प्रकार की पुस्तकों की संख्या निम्न प्रकार है:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.3 image 10
इन आँकड़ों को दण्ड आलेख द्वारा दर्शाइए और निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(i) अलमारी में सर्वाधिक पुस्तकें किस विषय की हैं ?
(ii) अलमारी में किस विषय की पुस्तकें सबसे कम हैं ?
(ii) अलमारी में बराबर पुस्तकें कौन-सी हैं ?
(iv) अलमारी में विज्ञान और गणित की कुल कितनी पुस्तकें हैं ?
हल :
दण्ड आलेख
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 9 आँकड़ों का प्रबंधन Ex 9.3 image 11
(i) अलमारी में सर्वाधिक पुस्तकें हिन्दी की हैं।
(ii) अलमारी में सबसे कम पुस्तकें अंग्रेजी की हैं।
(iii) अलमारी में विज्ञान और लघु कथाओं की पुस्तकें बराबर हैं।
(iv) अलमारी में विज्ञान और गणित की कुल पुस्तकें 75 हैं।

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