MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत : जनसंख्या

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत : जनसंख्या

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
निम्न में से किस अवधि में जनसंख्या वृद्धि लगभग स्थिर गति से बढ़ी है?
(i) 1901-21
(ii) 1921-51
(iii) 1951-81
(iv) 1981-2001.
उत्तर:
(i) 1901-21

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प्रश्न 2.
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला प्रदेश है
(i) उत्तर प्रदेश
(ii) बिहार
(iii) केरल
(iv) पश्चिम बंगाल।
उत्तर:
(ii) बिहार

प्रश्न 3.
किस राज्य में साक्षरता का प्रतिशत सबसे अधिक है? (2008, 09)
(i) उत्तर प्रदेश
(ii) केरल
(iii) गोवा
(iv) दिल्ली
उत्तर:
(ii) केरल

प्रश्न 4.
सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला केन्द्र शासित प्रदेश है (2008)
(i) चण्डीगढ़
(ii) पुदुचेरी
(iii) दिल्ली
(iv) लक्षद्वीप।
उत्तर:
(iii) दिल्ली

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. भारत में जनसंख्या का घनत्व …………. है।
  2. भारत में सर्वाधिक साक्षरता वाला राज्य ……….. है।
  3. राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का अध्यक्ष ……….. होता है।
  4. विश्व जनसंख्या दिवस प्रतिवर्ष ……….. को मनाया जाता है।
  5. जनसंख्या के मान से भारत का विश्व में ………….. स्थान है।
  6. भारत में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ………… है।

उत्तर:

  1. बड़ा असमान
  2. केरल
  3. प्रधानमन्त्री
  4. 11 जुलाई
  5. दूसरा
  6. कम।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जन्मदर किसे कहते हैं?
उत्तर:
जन्मदर किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष, प्रति हजार जनसंख्या पर जीवित नवजात बच्चों की संख्या को कहते हैं।

प्रश्न 2.
मृत्युदर किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष, प्रति हजार व्यक्तियों पर मरने वालों की संख्या मृत्युदर कहलाती है।

प्रश्न 3.
वर्ष 2011 में भारत में जनसंख्या का घनत्व कितना था?
उत्तर:
वर्ष 2011 में भारत में जनसंख्या का औसत घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था।

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प्रश्न 4.
वर्ष 2011 में भारत का लिंग अनुपात क्या था?
उत्तर:
वर्ष 2011 में भारत का लिंग अनुपात 1000 पुरुषों पर 943 स्त्रियाँ थीं।

प्रश्न 5.
जनसंख्या और क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है ?
उत्तर:
भारत का जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में दूसरा तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में सातवाँ स्थान है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या वृद्धि की कोई चार समस्याएँ लिखिए। (2008, 09, 10, 14, 15, 17)
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण उत्पन्न प्रमुख समस्याएँ निम्न हैं –

  • बेरोजगारी की समस्या :
    जनसंख्या वृद्धि के कारण बेरोजगारी की समस्या निरन्तर बढ़ती जा रही है। सरकार जितने लोगों को रोजगार उपलब्ध कराती है, उससे अधिक नये लोग बेरोजगारी की लाइन में आ जाते हैं।
  • प्रति व्यक्ति आय :
    जनसंख्या में तेजी से वृद्धि होने पर प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि धीमी हो जाती है। ऐसे में निवेश का बड़ा भाग जनसंख्या के भरण-पोषण में लग जाता है तथा आर्थिक विकास के लिये निवेश का एक छोटा-सा भाग ही बचता है।
  • भूमि पर दबाव :
    हमारे देश में जनसंख्या वृद्धि के परिणामस्वरूप भूमि पर दबाव निरन्तर बढ़ता जा रहा है। इससे भू-जोतों का आर्थिक विभाजन हुआ है तथा कृषि उत्पादकता में कमी आयी है।
  • गरीबी :
    भारत में जनसंख्या वृद्धि का एक बड़ा दुष्परिणाम गरीबी के रूप में सामने आता है। विशाल जनसंख्या और उस पर सीमित संसाधनों के चलते बड़ी संख्या में गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहे लोगों का जीवन-स्तर सुधारना अत्यन्त दुष्कर कार्य साबित हुआ है।

प्रश्न 2.
भारत में लिंगानुपात की दर निरन्तर क्यों कम होती जा रही है ? कोई चार कारण लिखिए। (2013, 14, 16, 18)
अथवा
भारत में लिंगानुपात की दर में गिरावट होने के कारण लिखिए। (2008, 09)
उत्तर:
भारत में लिंगानुपात की दर कम होने के निम्न कारण हैं –

  1. महिलाओं में साक्षरता का कम होना।
  2. मातृ मृत्यु-दर का ऊँचा होना।
  3. पुरुष प्रधान समाज में पुत्र होने की प्रबल इच्छा होना।
  4. कन्या भ्रूण हत्या में लगातार वृद्धि होना।
  5. समाज में बालिकाओं के प्रति उपेक्षा का भाव व कन्या का बोझ समझना।
  6. समाज में प्रचलित दहेज प्रथा के कारण कन्या भ्रूण हत्या व किशोरियों व युवतियों का आत्महत्या करने के लिये प्रेरित होना।

प्रश्न 3.
राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग से आप क्या समझते हैं ? लिखिए। (2008, 09, 12, 13, 15)
उत्तर:
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 के अनुसरण में राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग की स्थापना की गई है। प्रधानमन्त्री इस आयोग के अध्यक्ष हैं। सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, प्रशासक तथा सम्बन्धित केन्द्रीय मंत्रालयों एवं विभागों के प्रभारी केन्द्रीय मंत्री, प्रतिष्ठित जनसांख्यिकीविद्, जनस्वास्थ्य, व्यवसायिक एवं गैर-सरकारी संगठन इस आयोग के सदस्य होते हैं।

प्रश्न 4.
लिंग अनुपात से क्या आशय है? देश में इसके वितरण को समझाइए। (2016)
उत्तर:
लिंग अनुपात से तात्पर्य किसी क्षेत्र में प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या से है। भारतवर्ष में 2001 की जनगणना के अनुसार प्रति हजार पुरुषों पर 933 स्त्रियाँ थीं अर्थात् भारत में पुरुषों की संख्या से स्त्रियों की संख्या कम है। भारत में लिंगानुपात लगातार घटता जा रहा है। सन् 1901 में यह 972 था, जो घटते-घटते 2011 में 940 रह गया है। भारत में लिंग अनुपात में क्षेत्रीय भिन्नता पायी जाती है। केरल में लिंगानुपात (1084) अनुकूल है जबकि दमन दीव में यह (618) प्रतिकूल है।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारणों व उसके नियन्त्रण के उपायों को लिखिए।
अथवा
जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित करने के चार उपाय बताइए। (2008, 11, 12, 17, 18)
उत्तर:
जनसंख्या वृद्धि के कारण

  • जन्मदर व मृत्युदर :
    1911-1921 की अवधि में जन्म-दर 48.1 और मृत्यु-दर 47.2 थी, अर्थात् दोनों ही अधिक थीं। 1921 से 1951 तक यद्यपि जन्म-दर धीमी गति से घटी, किन्तु मृत्यु-दर अपेक्षाकृत तेजी से घटी थी, जिससे जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हुई। वर्ष 2016 के अनुसार भारत में जन्मदर 20.4 प्रति हजार और मृत्यु-दर 64 प्रति हजारं थी। मृत्यु-दर में निरन्तर कमी का कारण चिकित्सा सुविधाओं में वृद्धि तथा भरण-पोषण की पर्याप्त सुविधा होना है।
  • गर्म जलवायु :
    उष्ण जलवायु में मानव की उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। कम आयु में ही किशोर व किशोरियाँ सन्तान उत्पत्ति के योग्य हो जाते हैं। परिणामस्वरूप जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती है।
  • भाग्यवादिता :
    भारत में अधिकांश रूढ़िवादी लोग बच्चों का पैदा होना ‘ईश्वर की इच्छा’ मानकर अधिक सन्तान उत्पत्ति को रोकना अनुचित समझते हैं। अतः धार्मिक अन्धविश्वास भी जनसंख्या वृद्धि के लिये उत्तरदायी है।
  • कम उम्र में शादी :
    भारत में विवाह की आयु कम है। कम उम्र में शादी हो जाने से जनसंख्या में वृद्धि होना स्वाभाविक हो जाता है।
  • साक्षरता का निम्न स्तर :
    भारत में साक्षरता का निम्न स्तर भी जनसंख्या वृद्धि के लिये उत्तरदायी है। निम्नवर्ग परिवार कल्याण कार्यक्रम अपनाने में संकोच करते हैं। सन् 2011 के आँकड़ों के अनुसार भारत में 82.14% पुरुष साक्षर थे व 65.46% स्त्रियाँ साक्षर थीं। आर्थिक समीक्षा 2017-18;A 163.

जनसंख्या वृद्धि रोकने के उपाय

  • परिवार कल्याण :
    परिवार कल्याण द्वारा छोटे परिवारों के लाभों का प्रचार करना चाहिए, जिससे प्रभावित होकर प्रत्येक व्यक्ति विभिन्न प्रकार के कृत्रिम साधनों को प्रयोग में लाने लगे।
  • शिक्षा तथा सामाजिक सुधार :
    जब तक देश में शिक्षा की उचित व्यवस्था नहीं होगी, परिवार नियोजन कभी भी सफलतापूर्वक कार्य नहीं कर सकता। एक अविकसित देश का अज्ञानी व्यक्ति जो सामाजिक व धार्मिक अन्धविश्वासों में जकड़ा हुआ है, परिवार नियोजन के लाभों को समझ नहीं सकेगा। अतः शिक्षा का प्रसार होना चाहिए। शिक्षा द्वारा बाल-विवाह, जातिवाद आदि सामाजिक कुरीतियाँ स्वयं समाप्त हो जाएँगी, जो जनसंख्या वृद्धि में सहायक होती हैं।
  • आर्थिक विकास :
    जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिये समाज का समुचित आर्थिक विकास होना चाहिए। साथ ही कृषि, उद्योग, व्यापार, यातायात एवं संवाद-वाहन आदि सभी क्षेत्रों का सामूहिक विकास भी आवश्यक है इससे रोजगार के स्तर में वृद्धि होगी, आय और जीवन-स्तर में वृद्धि होगी, फलस्वरूप जनसंख्या वृद्धि पर रोक लग जाएगी।
  • सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में वृद्धि :
    देश में सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में वृद्धि की जानी चाहिये, जिससे संकटकाल या वृद्धावस्था में सहारा पाने की दृष्टि से सन्तानोत्पत्ति की प्रवृत्ति को नियन्त्रित किया जा सके।
  • विवाह की आयु सम्बन्धी नियमों का पालन :
    सरकार को विवाह की आयु सम्बन्धी नियमों का कठोरता से पालन कराना चाहिए। जनसंख्या नीति के अनुसार देश में लड़के व लड़कियों के लिये विवाह योग्य आयु क्रमश: 21 व 18 वर्ष है। इस सम्बन्ध में आवश्यक दण्ड व पुरस्कार की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
  • प्रेरणाएँ :
    सीमित परिवार के संदेश को व्यापक स्तर पर फैलाने के लिये कुछ प्रेरणाओं को अपनाना आवश्यक होता है; जैसे-सीमित परिवार वालों को वेतन वृद्धि, मकान आवण्टन, कॉलेज में प्रवेश, रोजगार आदि की अतिरिक्त सुविधा प्रदान की जाएँ।
  • मनोरंजन के साधनों में वृद्धि :
    सन्तति निग्रह के लिये मनोरंजन के साधनों में वृद्धि की जानी चाहिए। मनोरंजन के साधनों के अभाव में सन्तान वृद्धि को प्रोत्साहन मिलता है।

प्रश्न 2.
भारत में जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करने वाले कारकों को उदाहरण सहित लिखिए। (2008)
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व को प्रोत्साहित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं –
(1) भौतिक कारक
(2) सामाजिक-आर्थिक कारक।

(1) भौतिक कारक :
भौतिक कारकों में धरातल, जलवायु, मिट्टी और खनिज आदि प्रमुख हैं। धरातल की बनावट जनसंख्या वितरण को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। गंगा-यमुना तथा समुद्रतटीय मैदानों में जनसंख्या घनत्व अधिक है, वहीं पर्वतीय प्रदेश अरुणाचल में सबसे कम जनसंख्या घनत्व है। जलवायु दशायें भी जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करती हैं। अनुकूल जलवायु मनुष्य के स्वास्थ्य व कार्यक्षमता पर अच्छा प्रभाव डालती है। पश्चिमी राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश में विषम जलवायु के कारण कम जनसंख्या पायी जाती है। उपजाऊ मिट्टी कृषि के लिये उपयुक्त होती है इसलिये जनसंख्या का अधिक घनत्व नदियों के उपजाऊ मैदानों में होता है क्योंकि कृषि उपजें ही उनके जीवन-यापन व भरण-पोषण का मुख्य आधार होती हैं। खनिजों की उपलब्धता और इन पर आधारित औद्योगिक विकास ने छोटा नागपुर पठार खनिज क्षेत्र में जनसंख्या को आकर्षित किया। इस प्रकार छोटा नागपुर के पठार पर जनसंख्या बहुत सधन है।

(2) सामाजिक :
आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारक-सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारक भी जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उदाहरणार्थ-सांस्कृतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक तथा राजनैतिक कारकों के कारण ही मुम्बई-पुणे के औद्योगिक क्षेत्र में जनसंख्या वृद्धि और घनत्व में तीव्रता से वृद्धि हुई है। प्राचीनकाल में मुम्बई महत्त्वहीन था परन्तु यूरोपियन लोगों के आवागमन के पश्चात् इसका महत्त्व दिनोंदिन बढ़ता गया। आज मुम्बई व्यापारिक एवं औद्योगिक केन्द्र बन गया है। परिणामस्वरूप यहाँ जनसंख्या बढ़ती जा रही है।

प्रश्न 3.
घनत्व की दृष्टि से भारत को कितने भागों में विभाजित किया जा सकता है ?
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व के आधार पर भारत को चार भागों में बाँटा जा सकता है-
(1) उच्च घनत्व वाले क्षेत्र
(2) मध्यम घनत्व वाले क्षेत्र
(3) साधारण घनत्व वाले क्षेत्र
(4) न्यूनतम घनत्व वाले क्षेत्र।

  1. उच्च घनत्व वाले क्षेत्र :
    उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल एवं केरल आते हैं यहाँ 501 से अधिक व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर निवास करते हैं। क्योंकि यहाँ की उपजाऊ मिट्टी और जल की उपलब्धता मानव के भरण-पोषण को पर्याप्त सुविधा प्रदान करती है। इन क्षेत्रों में रोजगार के पर्याप्त अवसर भी विद्यमान होते हैं।
  2. मध्यम घनत्व वाले क्षेत्र :
    इसके अन्तर्गत वे क्षेत्र आते हैं, जहाँ जनसंख्या घनत्व 251 से 500 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी पाया जाता है। इसके अन्तर्गत आन्ध्र प्रदेश, असम, गोवा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, झारखण्ड, पंजाब, हरियाणा, त्रिपुरा, दादरा व नगर-हवेली शामिल हैं। विकसित कृषि, खनिजों की उपलब्धता एवं औद्योगिक विकास आदि इन क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या घनत्व के मुख्य कारण हैं।
  3. साधारण घनत्व वाले क्षेत्र :
    मध्य प्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड, मेघालय, मणिपुर, नागालैण्ड, इस क्षेत्र के अन्तर्गत आते हैं। यहाँ जनसंख्या का घनत्व 101 से 250 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। ये पर्वतीय तथा ऊबढ़-खाबड़ वनाच्छादित प्रदेश हैं। यहाँ जीवनयापन की सुविधाएँ सीमित हैं।
  4. निम्न घनत्व वाले क्षेत्र :
    इस क्षेत्र में जम्मू व कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, सिक्किम तथा अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह आते हैं। पर्वतीय क्षेत्र, आवागमन में असुविधा, कृषि व उद्योगों का न्यून विकास आदि कारण कम जनसंख्या घनत्व के लिये उत्तरदायी हैं। इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व 13 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।

प्रश्न 4.
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 क्या है? इसके तहत सरकार द्वारा क्या प्रावधान किए गए हैं? लिखिए।
अथवा
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 क्या है? (2009)
उत्तर:
15 फरवरी, 2000 को नई ‘राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000’ की घोषणा की गई। इस नवीनतम संशोधित जनसंख्या नीति के अनुसार सामाजिक-आर्थिक विकास के लिये जीवन में गुणात्मक सुधार किया जाना आवश्यक है, ताकि मानव शक्ति समाज के लिये उत्पादक पूँजी में परिवर्तित हो सके। इस नीति के निम्नलिखित उद्देश्य हैं –

  • तात्कालिक उद्देश्य :
    गर्भ निरोधक उपायों के विस्तार हेतु स्वास्थ्य एवं बुनियादी ढाँचे का विकास।
  • मध्यकालीन उद्देश्य :
    सन् 2010 तक कुल प्रजनन दर को घटाना।
  • दीर्घकालीन उद्देश्य :
    सन् 2045 तक स्थायी आर्थिक विकास हेतु स्थिर जनसंख्या के उद्देश्य को प्राप्त करना।

नई नीति में इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिये निम्नलिखित सामाजिक जनांकिकी लक्ष्य भी घोषित किये गये हैं –

  1. बुनियादी प्रजनन तथा शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, आपूर्तियों तथा आधारभूत ढाँचे से सम्बन्धित अपूर्ण आवश्यकताओं पर ध्यान देना।
  2. 14 वर्ष तक की उम्र तक विद्यालय शिक्षा को निःशुल्क करना। प्रारम्भिक तथा माध्यमिक स्तर पर छात्र और छात्राओं के विद्यालय छोड़ने की दर में 20% तक की कमी लाना।
  3. शिशु मृत्यु दर को 100 से नीचे लाना (प्रत्येक 1 लाख जीवित जन्मों पर)।
  4. सार्वभौमिक टीकाकरण द्वारा गम्भीर बीमारियों की रोकथाम करना।
  5. कन्याओं का विवाह 20 वर्ष की उम्र के बाद करने के लिये प्रोत्साहन देना।
  6. सभी प्रसव संस्थाओं में प्रशिक्षित प्रसव नौं का शत-प्रतिशत होना।
  7. गर्भ निरोधक के व्यापक विकल्पों की जानकारी देना।
  8. जन्म, मृत्यु, विवाह तथा गर्भावस्था का शत-प्रतिशत पंजीकरण।
  9. एड्स की खतरनाक बीमारी को फैलने से रोकने के प्रयास करना तथा प्रजनन अंग संक्रमण (आर. टी. आई.) और यौन संचारी रोगों की रोकथाम करना।
  10. प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को घर-घर तक पहुँचाने के लिये भारतीय औषधि पद्धति को एकीकृत करना।
  11. संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनके नियन्त्रण के लिये भरपूर प्रयास करना।
  12. जन्म दर में कमी लाने के लिये छोटे परिवार के मानदण्डों को ठोस रूप में बढ़ावा देना।
  13. परिवार कल्याण कार्यक्रम को जन-केन्द्रित कार्यक्रम के रूप में विकसित करना।

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प्रश्न 5.
भारत में साक्षरता-विकास की स्थिति तथा महिला साक्षरता को बढ़ाने के लिये अपने सुझावात्मक विचार लिखिए।
उत्तर:
साक्षरता से तात्पर्य :
जो व्यक्ति किसी भाषा को समझने के साथ लिख और पढ़ सकता है, साक्षर कहलाता है। जो पढ़ सकता है, परन्तु लिख नहीं सकता, वह साक्षर नहीं कहलाता है। साक्षरता के लिये कोई औपचारिक शिक्षा लेना आवश्यक नहीं होता है।

भारत में साक्षरता विकास की स्थिति :
हमारा देश संसार में जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवाँ बड़ा देश है। किन्तु साक्षरता की दृष्टि से अभी भी पीछे है। स्वतन्त्रता के पश्चात् हमने साक्षरता में वृद्धि की है। लेकिन अभी भी निरन्तर प्रयास की आवश्यकता है। भारत में साक्षरता की स्थिति को निम्न तालिका से स्पष्ट किया जा सकता है –

भारत में साक्षरता की स्थिति (प्रतिशत में)
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत जनसंख्या - 1

तालिका से स्पष्ट है कि 1911 में देश में साक्षरता मात्र 6% थी। स्वतन्त्रता के पश्चात् 1950-51 में यह बढ़कर 18:33% हो गई। तब से लगातार साक्षरता प्रतिशत में वृद्धि हो रही है। वर्ष 2010-11 में यह बढ़कर 74.04% हो गई है। यह उपलब्धि भारत सरकार द्वारा निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने का ही परिणाम है। भारत में साक्षरता में भिन्नताएँ दृष्टिगोचर होती हैं। बिहार में साक्षरता की दर 63.82% है। जबकि केरल में यह 93.91% है। लक्षद्वीप में 92.98 है।

महिला साक्षरता में वृद्धि के उपाय :
भारत में महिलाओं की साक्षरता दर पुरुषों की तुलना में बहुत कम है। वर्तमान आँकड़ों को देखने पर स्पष्ट होता है कि आज भी महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम साक्षर हैं। वर्ष 2010-11 में साक्षर पुरुष 82.14% व साक्षर महिला 65.46% थी। ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति और भी खराब है।

महिला साक्षरता में वृद्धि करके जनसंख्या वृद्धि को रोका जा सकता है। शिक्षित लड़कियाँ उचित उम्र में विवाह करती हैं। विवाह करने के कुछ समय पश्चात् तक वह गर्भ धारण करना नहीं चाहती हैं। शिक्षित महिलाएँ रोजगार करने में पीछे नहीं रहती हैं। साथ ही वह कम बच्चों में विश्वास रखती हैं। शिक्षित स्त्रियों का दृष्टिकोण बहुत व्यापक होता है। वह परिवार कल्याण कार्यक्रम का महत्त्व समझती हैं। वह अपने बच्चों की संख्या सीमित रखने और दो बच्चों के जन्म के मध्य पर्याप्त समय रखती हैं। साथ ही शिक्षित महिलाएँ लड़का-लड़की में भेद न करके केवल एक-दो बच्चों को ही जन्म देती हैं। अतः लड़कियों को स्वयं शिक्षा प्राप्त करने में पहल करनी चाहिए क्योंकि शिक्षित लड़कियाँ जनसंख्या वृद्धि को एक सीमा तक रोक सकती हैं। सरकार को ग्रामीण इलाकों में लड़कियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करानी चाहिए; साथ ही उनको वजीफा भी देना चाहिए जिससे उनके माता-पिता उनको शिक्षित कराने के लिये आगे आएँ।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में संसार की कुल जनसंख्या का कितने प्रतिशत भाग निवास करता है?
(i) 16.7
(ii) 12.4
(iii) 15.0
(iv) 25.4.
उत्तर:
(i) 16.7

प्रश्न 2.
जनसंख्या की गणना कितने वर्ष के अन्तराल पर होती है?
(i) 5 वर्ष
(ii) 10 वर्ष
(iii) 3 वर्ष
(iv) 1 वर्ष।
उत्तर:
(ii) 10 वर्ष

प्रश्न 3.
5 अरबवें शिशु का जन्म किस देश में हुआ था?
(i) भारत
(ii) यूगोस्लाविया
(iii) अमेरिका
(iv) पाकिस्तान।
उत्तर:
(ii) यूगोस्लाविया

प्रश्न 4.
भारत में सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला प्रदेश है
(i) बिहार
(ii) महाराष्ट्र
(iii) मिजोरम
(iv) अरुणाचल प्रदेश।
उत्तर:
(iv) अरुणाचल प्रदेश।

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रिक्त स्थान पूर्ति

  1. भारत में महिला साक्षरता …………. प्रतिशत है।
  2. 5 अरबवें शिशु का जन्म ………… में हुआ था।
  3. क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में ………… स्थान है।

उत्तर:

  1. 65-46
  2. यूगोस्लाविया
  3. सातवाँ।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
भारत में सर्वाधिक गरीब जनसंख्या वाला राज्य बिहार है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
विश्व का हर छठवाँ व्यक्ति भारत में निवास करता है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
भारत में सर्वाधिक साक्षरता वाला राज्य केरल है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
प्रतिवर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
भारत में जनसंख्या का वितरण समान है।
उत्तर:
असत्य।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत जनसंख्या - 2
उत्तर:

  1. → (ङ)
  2. → (घ)
  3. → (क)
  4. → (ख)
  5. → (ग)
  6. → (च)।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
जनसंख्या नियन्त्रण हेतु महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम।
उत्तर:
परिवार कल्याण

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प्रश्न 2.
प्रत्येक व्यक्ति की औसत आयु। (2009)
उत्तर:
प्रत्याशित आयु

प्रश्न 3.
एक निश्चित समयान्तराल में जनसंख्या की अधिकारिक गणना। (2010)
उत्तर:
जनगणना

प्रश्न 4.
नवीन जनसंख्या नीति की घोषणा कब की गई?
उत्तर:
15 फरवरी, 2000

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि दर से क्या आशय है?
उत्तर:
प्राकृतिक वृद्धि दर से आशय जन्मदर व मृत्युदर के अन्तर से है।

प्रश्न 2.
नवीन जनसंख्या नीति की घोषणा कब की गई?
उत्तर:
नवीन जनसंख्या नीति की घोषणा 15 फरवरी, 2000 को की गई थी।

प्रश्न 3.
जनगणना का तात्पर्य क्या है? (2011)
उत्तर:
एक निश्चित समयान्तराल में जनसंख्या की आधिकारिक गणना जनगणना कहलाती है। भारत में प्रत्येक दस वर्ष पर जनगणना होती है।

प्रश्न 4.
जनसंख्या वृद्धि दर से आप क्या समझते हैं? (2010)
उत्तर:
जनसंख्या की वृद्धि दर, जनसंख्या बढ़ने की गति को बताती है। वृद्धि दर से बढ़ी हुई जनसंख्या की आधार वर्ष की जनसंख्या से तुलना की जाती है इसे वार्षिक या दशकीय गति से ज्ञात किया जाता है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की जनसंख्या की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
संसार में चीन के बाद भारत दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 1,21,01,93, 422 है। यहाँ संसार की कुल जनसंख्या का 17.5 प्रतिशत भाग निवास करता है, जबकि इसका कुल क्षेत्रफल विश्व के कुल क्षेत्रफल का केवल 2-41 प्रतिशत ही है। इस प्रकार भारत जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का दूसरा तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवाँ बड़ा देश है। भारत की जनसंख्या उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की कुल सम्मिलित जनसंख्या से भी अधिक है। अन्य शब्दों में संसार का हर छठवाँ व्यक्ति भारत में निवास करता है।

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प्रश्न 2.
“भारत में जनसंख्या का वितरण असमान है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या का वितरण असमान है। पर्वतीय भागों, वन क्षेत्रों और मरुस्थलों की अपेक्षा मैदानी भागों में अधिक जनसंख्या है। इसी प्रकार नदियों के उपजाऊ मैदानों, समुद्र तटीय क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक है। हिमालयीन छोटे राज्य सिक्किम की जनसंख्या मात्र 6.7 लाख ही है, जबकि मैदानी बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की जनसंख्या 19.95 करोड़ है। कुल मिलाकर भारत में 10 ऐसे राज्य हैं जिनमें से प्रत्येक की जनसंख्या 6 करोड़ से अधिक है। कुछ राज्य क्षेत्रफल में बड़े होते हुए भी कम जनसंख्या वाले हैं, जैसे राजस्थान और मध्य प्रदेश जबकि ये दोनों ही क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के बड़े राज्य हैं। केवल पाँच राज्यों (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और आन्ध्र प्रदेश) में देश की आधे से अधिक जनसंख्या निवास करती है।

प्रश्न 3.
जनसंख्या घनत्व क्या है? इसे कैसे ज्ञात किया जाता है? (2008)
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व:
किसी क्षेत्र में निवास करने वाली जनसंख्या और उस क्षेत्र के प्रति इकाई क्षेत्रफल (वर्ग किमी.) के अनुपात को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। किसी देश या प्रदेश की जनसंख्या का घनत्व ज्ञात करने के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है –
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत जनसंख्या - 3
प्रश्न 4.
भारत में साक्षरता दर में भिन्नताएँ पायी जाती हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
साक्षरता की दर में प्रादेशिक भिन्नताएँ अत्यधिक हैं। बिहार में साक्षरता की दर 63.82 प्रतिशत है, जबकि केरल में यह 93.9 प्रतिशत है। लक्षद्वीप में 92.8 और मिजोरम में 88.4 प्रतिशत साक्षरता है। बिहार में साक्षरता दर सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की तुलना में सबसे कम है।

पुरुषों और स्त्रियों की साक्षरता दर में भी आश्चर्यजनक अन्तर है। भारत में पुरुषों की औसत साक्षरता दर 82.14 है, जबकि स्त्रियों की साक्षरता दर केवल 65.46 प्रतिशत है। शहरी और ग्रामीण जनसंख्या की साक्षरता दर में भी बहुत अन्तर है। वर्ष 2011 में शहरी क्षेत्रों की साक्षरता दर 85.7 प्रतिशत थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह मात्र 68.9 प्रतिशत थी।

प्रश्न 5.
जनसंख्या विस्फोट से आप क्या समझते हैं? (2009)
उत्तर:
जनसंख्या विस्फोट का अर्थ
“आजकल ‘जनसंख्या विस्फोट’ शब्द का प्रयोग बहुत हो रहा है। जनसंख्या के अत्यन्त तीव्र गति से एकाएक वृद्धि के लिए इन शब्दों का प्रयोग किया जाता है। ‘विस्फोट’ शब्द उस तरह की स्थिति को बताता है जैसे उसके प्रभाव उतने ही गम्भीर या भयानक होते हैं। जैसे कि परमाणु बम के Fall out या गिरने या उसके दूषित पदार्थों से प्रभावित होने के होते हैं।”

हर देश में जब विकास होगा तो जन्म-दर की तुलना में मृत्यु-दर अधिक तीव्र गति से घटेगी और उसका परिणाम यह होगा कि जनसंख्या में वृद्धि होगी। आज पैदा होने वाले बच्चे, जिन्हें अकाल शिशु मृत्यु से बचा लिया जाएगा, 20-22 वर्ष बाद स्वयं बच्चे पैदा करेंगे। यहाँ से ही ‘जनसंख्या विस्फोट’ की स्थिति निर्मित होगी।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी पौधे की 62 पत्तियों की लम्बाइयाँ मिलीमीटर में मापी जाती हैं। इससे प्राप्त आँकड़े आगे दी गई सारणी द्वारा निरूपित हैं :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 1
उपरोक्त आँकड़ों को निरूपित करने के लिए एक आयत चित्र खींचिए।
हल :
संतत बारम्बारता बंटन सारणी बनाने पर,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 2
अभीष्ट आयत चित्र :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 3

प्रश्न 2.
कक्षा आठ की विभिन्न अनुभागों (सेक्शनों) के विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त किए गए अंकों का बंटन निम्नलिखित है: प्राप्तांक
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 4
उपरोक्त बंटन के लिए एक आयत चित्र खींचिए।
हल :
आयत की लम्बाई ज्ञात करने के लिए,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 5
अभीष्ट आयत चित्र :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 6

प्रश्न 3.
निम्नलिखित सारणी एक राजमार्ग पर किसी स्थान से होकर जाने वाली कारों की चालों के बारम्बारता बंटन को दर्शाती है :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 7
इन आँकड़ों को निरूपित करने के लिए आयत चित्र एवं बारम्बारता बहुभुज खींचिए।
हल :
अभीष्ट आयत चित्र एवं बारम्बारता बहुभुज :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 8

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित सारणी किसी कक्षा के अनुभागों A और B द्वारा प्राप्त किए गए अंकों का बंटन दर्शाती है:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 9
इन दोनों अनुभागों के विद्यार्थियों के प्राप्तांकों को एक ही आलेख पर दो बारम्बारता बहुभुजों से निरूपित कीजिए। आप क्या देखते हैं ?
हल :
अभीष्ट बारम्बारता बहुभुज :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 10
प्राप्तांक 30 एवं 60 पर प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या दोनों अनुभागों में बराबर हैं।

प्रश्न 5.
दी गयी सारणी के लिए आयत चित्र बनाइए एवं निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (2019)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 11
(i) सबसे अधिक बारम्बारता वाला वर्ग कौन-सा है?
(ii) कौन-कौन से वर्गों की बारम्बारता समान है?
हल :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 12
(i) वर्ग (20-40)
(ii) वर्ग (0-20) तथा (120-140) एवं (80-100) तथा (100-120)]

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
30 विद्यार्थियों के रक्त समूह निम्नलिखित रूप में रिकॉर्ड किए गए :
A, B, O, A, AB, O, A, O, B, A, O, B, A, AB, B, A, AB, B, A, A, O, A, AB, B, A, O, B, A, B, A.
इन आँकड़ों के लिए एक बारम्बारता बंटन सारणी तैयार कीजिए।
हल :
अभीष्ट बारम्बारता बंटन सारणी :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 13

प्रश्न 2.
निम्नलिखित आँकड़ों से एक संतत बारम्बारता बंटन तैयार कीजिए :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 14
हल :
प्रत्येक वर्ग की वर्ग माप = 10 है अत: वर्गों की सीमाएँ मध्य-बिन्दु से 5 कम एवं 5 अधिक होंगी।
अतः अभीष्ट संतत बारम्बारता बंटन सारणी:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 15
अभीष्ट वर्ग माप = 10

प्रश्न 3.
दिए हुए बारम्बारता बंटन को एक सतत् वर्गीकृत बंटन में बदलिए :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 16
किन अन्तरालों में 153.5 और 157.5 सम्मिलित किए जाएँगे ?
हल :
अभीष्ट संतत वर्गीकृत बारम्बारता बंटन :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 17
अतः 153.5 वर्ग अन्तराल (153.5 – 157.5) में एवं 157.5 वर्ग अन्तराल (157.5 – 161.5) में सम्मिलित किए जाएंगे।

प्रश्न 4.
किसी महीने में एक परिवार द्वारा विभिन्न मदों पर किए गए व्यय निम्नलिखित हैं :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 18
उपरोक्त को निरूपित करने के लिए एक दण्ड आलेख खींचिए।
हल :
अभीष्ट दण्ड आलेख :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 19

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प्रश्न 5.
यदि निम्नलिखित आँकड़ों का माध्य 20.2 है, तो p का मान ज्ञात कीजिए :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 20
हल :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 21
⇒ 606 + 20.2 p = 610 + 20 p
⇒ 0.2 p = 4
⇒ p = 20
अतःp का अभीष्ट मान = 20.

प्रश्न 6.
निम्नलिखित बंटन का माध्य ज्ञात कीजिए :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 22
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 23
अतः अभीष्ट माध्य = 8:05.

प्रश्न 7.
किसी बास्केट बॉल टीम द्वारा मैचों की एक श्रृंखला में निम्नलिखित प्वाइंट अर्जित किए गए:
17, 2, 27, 25, 5, 14, 18, 10, 24, 48, 10, 8, 7, 10, 28.
इन आँकड़ों के लिए माध्यक और बहुलक ज्ञात कीजिए।
हल :
आँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर,
2, 5, 7, 8, 10, 10, 10, 14, 17, 18, 24, 25, 27, 28, 48.
माध्यक = \(\frac { x+1 }{ 2 }\) वाँ पद = 8वाँ पद = 14
बहुलक = सर्वाधिक बारम्बारता वाला पद = 10
अतः अभीष्ट माध्यक = 14 एवं बहुलक = 10.

प्रश्न 8.
निम्न आँकड़ों का माध्य ज्ञात कीजिए : 1, 2, 3, 4, 5 (2019)
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 24
अतः अभीष्ट माध्य = 3.

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विद्यार्थियों को दिए गए गणित के एक निदानात्मक टेस्ट में (100 में से) उनके द्वारा प्राप्त किए गए अंक निम्नलिखित रूप में रिकॉर्ड किए गए :
46, 52, 48, 11, 41, 62, 54, 53, 96, 40, 95, 44.
उपर्युक्त आँकड़ों के लिए कौन-सा औसत एक अच्छा प्रतिनिधित्व करेगा और क्यों?
उत्तर-
माध्यक आँकड़ों का एक अच्छा प्रतिनिधित्व करेगा क्योंकि

  • प्रत्येक मान केवल एक बार आ रहा है।
  • आँकड़े चरम मानों से प्रभावित हो रहे हैं।

प्रश्न 2.
एक बच्चा कहता है कि 3, 14, 18, 20, 5 का माध्यक 18 है। यह बच्चा माध्यक ज्ञात करने के बारे में क्या नहीं जानता ?
उत्तर-
यह बच्चा नहीं जानता कि माध्यक ज्ञात करने के लिए आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना होता है।

प्रश्न 3.
फुटबॉल के एक खिलाड़ी द्वारा 10 मैचों में किए गए गोलों की संख्या निम्नलिखित है :
1, 3, 2, 5, 8, 6, 1, 4, 7, 9.
क्योंकि मैचों की संख्या 10 (एक सम संख्या है इसलिए)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 25
क्या यह सही उत्तर है ? और क्यों ?
उत्तर-
यह उत्तर सही नहीं है, क्योंकि माध्यक ज्ञात करने के लिए प्रेक्षणों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना आवश्यक है।

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प्रश्न 4.
क्या यह कहना सही है कि आयत चित्र में प्रत्येक आयत का क्षेत्रफल संगत वर्ग अन्तराल की माप के समानुपाती होता है। यदि नहीं तो कथन का सही रूप लिखिए।
उत्तर-
कथन असत्य है, क्योंकि एक आयत चित्र में प्रत्येक आयत का क्षेत्रफल उसकी बारम्बारता के समानुपाती होता है।

प्रश्न 5.
एक सतत् ? बंटन के वर्ग चिह्न निम्नलिखित हैं :
1.04, 1.14, 1.24, 1.34, 1.44, 1.54, और 1.64.
क्या यह कहना सही है कि अन्तिम अन्तराल 1.55-1-73 होगा। अपने उत्तर का कारण दीजिए।
उत्तर-
यह उत्तर सही नहीं है, क्योंकि दो क्रमागत प्राप्तांकों का उत्तर वर्ग माप के बराबर होना चाहिए।

प्रश्न 6.
30 बच्चों से पूछा गया कि उन्होंने पिछले सप्ताह कितने घण्टे टी. वी. के प्रोग्राम देखे। इसके परिणाम निम्नलिखित रूप से रिकॉर्ड किए गए:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 26
क्या हम कह सकते हैं कि उस सप्ताह में 10 या उससे अधिक घण्टों तक टी. वी. देखने वालों बच्चों की संख्या 22 है ? अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।
उत्तर-
नहीं, क्योंकि उस सप्ताह में 10 या अधिक घण्टे तक टी. वी. देखने वाले छात्रों की संख्या 4 + 2 = 6 है।

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वर्ग 90-120 का वर्ग चिह्न है :
(a) 90
(b) 105
(c) 115
(d) 120.
उत्तर:
(b) 105

प्रश्न 2.
25, 18, 20, 22, 6, 6, 17, 15, 12, 30, 32, 10, 19, 8, 11, 20 आँकड़ों का परिसर है :
(a) 10
(b) 15
(c) 18
(d) 26.
उत्तर:
(d) 26.

प्रश्न 3.
एक बारम्बारता बंटन में एक वर्ग का मध्य-बिन्दु 10 है तथा उसकी चौड़ाई 6 है। इस वर्ग की निम्न सीमा है:
(a) 6
(b) 7
(c) 8
(d) 12.
उत्तर:
(b) 7

प्रश्न 4.
किसी बारम्बारता बंटन में पाँच सतत वर्गों में से प्रत्येक की चौड़ाई 5 है तथा सबसे छोटे वर्ग की निम्न सीमा 10 है। सबसे बड़े वर्ग की उपरि सीमा है :
(a) 15
(b) 25
(c) 35
(d) 40.
उत्तर:
(c) 35

प्रश्न 5.
मान लीजिए कि एक सतत् बारम्बारता बंटन में एक वर्ग का मध्य-बिन्दु m है और उपरि वर्ग सीमा l है। इस वर्ग की निम्न सीमा है :
(a) 2m + l
(b) 2m – l
(c) m – l
(d) m – 2l.
उत्तर:
(b) 2m – l

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प्रश्न 6.
एक बारम्बारता बंटन के वर्ग चिह्न 15, 20, 25, ……… हैं। चिह्न 20 के संगत वर्ग है :
(a) 12.5-17.5
(b) 17.5-22.5
(c) 18.5-21.5
(d) 19.5-20.5.
उत्तर:
(b) 17.5-22.5

प्रश्न 7.
वर्ग अन्तराल 10-20, 20-30 में संख्या 20 निम्नलिखित वर्ग में सम्मिलित है :
(a) 10-20
(b) 20-30
(c) दोनों में
(d) इनमें से किसी में नहीं।
उत्तर:
(b) 20-30

प्रश्न 8.
पाँच संख्याओं का माध्य 30 है। यदि इनमें से एक संख्या को हटा दिया जाए तो इसका माध्य 28 हो जाता है। हटाई गई संख्या है :
(a) 28
(b) 30
(c) 35
(d) 38.
उत्तर:
(d) 38.

प्रश्न 9.
यदि आँकड़ों के प्रत्येक प्रेक्षण में 5 की वृद्धि की जाती है तो उसका माध्य :
(a) वही रहता है
(b) प्रारम्भिक माध्य का पाँच गुना हो जाता है
(c) पाँच कम हो जाता है ।
(d) पाँच बढ़ जाता है।
उत्तर:
(d) पाँच बढ़ जाता है।

प्रश्न 10.
4, 4, 5, 7, 6, 7, 7, 12, 3 संख्याओं का माध्यक है :
(a) 4
(b) 5
(c) 6
(d) 7
उत्तर:
(c)6

प्रश्न 11.
15, 14, 19, 20, 14, 15, 10, 14, 15, 18, 14, 19, 15, 17, 15 आँकड़ों का बहुलक है :
(a) 14
(b) 15
(c) 16
(d) 17
उत्तर:
(b) 15

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. 2, 3 और 4 का माध्य ………. होता है। (2019)
2. आँकड़ों के अधिकतम एवं न्यूनतम मानों का अन्तर आँकड़ों का ……….. कहलाता है।
3. एक ही अंक की पुनरावृत्ति संख्या उस अंक की ………. कहलाती है।
4. किसी वर्ग की उच्च सीमा एवं निम्न सीमा के अन्तर को ………. कहते हैं।
5. वर्ग की आवृत्ति को उसके मध्य-बिन्दु पर केन्द्रित मानकर बनाया गया बहुभुज ……… कहलाता है।
उत्तर-
1. 3,
2. परिसर,
3. बारम्बारता,
4. वर्ग अन्तराल,
5. बारम्बारता बहुभुज।

जोड़ी मिलान

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 27
उत्तर-
1.→(c),
2.→(d),
3.→(e),
4.→(a),
5.→(b).

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सत्य/असत्य कथन

1. आँकड़ों के किसी निश्चित समूह का मान एक और केवल एक होता है।
2. संख्याओं 3, 6, 10, 12, 7 और 15 की माध्यिका 8.5 है।
3. प्रेक्षणों के अधिकतम एवं न्यूनतम मानों के अन्तर को वर्गान्तर कहते हैं।
4. संकलित आँकड़ों का सारणी के रूप में निरूपण बारम्बारता सारणी कहलाता है।
5. दण्ड चित्र सदैव ऊर्ध्वाधर बनाए जाते हैं।
6. वर्ग अन्तराल 90-100 में 90 वर्ग की निम्न वर्ग सीमा है। (2018)
उत्तर-
1. सत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य,
6. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. 2, 4, 6, 8, 10 का माध्य क्या होगा?
2. 2, 3, 4, 2, 12, 8, 7, 9, 8, 6, 8, 5, 8 का बहुलक क्या होगा?
3. किन्हीं चरों का औसत मान क्या कहलाता है?
4. किसी वर्ग के अन्तर्गत आने वाले पदों की संख्या क्या कहलाती है?
5. वर्ग 10-20 का मध्यमान क्या होगा?
6. 1, 3, 4, 4, का समान्तर माध्य होगा। (2018)
7. आँकड़े 3, 3, 2, 3 और 4 में बहुलक क्या होगा? (2019)
8. वर्ग 80-100 का परास क्या होगा? (2019)
9. प्रथम पाँच प्राकृत संख्याओं का माध्य क्या होगा? (2019)
उत्तर-
1.6 (छः),
2. 8 (आठ),
3. माध्य,
4. उस वर्ग की बारम्बारता,
5. 15 (पन्द्रह),
6. 3 (तीन)
7.3 (तीन),
8. 20 (बीस),
9. 3 (तीन)।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions

MP Board Class 9th Maths अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Maths दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संलग्न चित्र में दी हुई पतंग को बनाने के लिए प्रत्येकरंग(शेड) के कितने कागज की आवश्यकता होगी यदि ABCD विकर्ण 44 cm वाला एक वर्ग है तथा नीचे 20 cm, 20 cm और 14 cm वाला एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
हल:

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 1
ज्ञात है : एक पतंग जो एक वर्ग ABCD एवं एक समद्विबाहु ∆ CEF से बना है। वर्ग का विकर्ण AC = BD = 44 cm है जो परस्पर बिन्दु O पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
अर्थात् OA = OB = OC = OD = 22 cm
एवं ∠AOB = ∠ BOC = ∠COD = ∠DOA = 90°
समद्विबाहु त्रिभुज की भुजाएँ क्रमशः CE = 20 cm, CF = 20 cm एवं EF = 14 cm हैं। हम जानते हैं कि वर्ग के विकर्ण वर्ग को चार सर्वांगसम भागों में विभक्त करते हैं। पीला रंग का कागज वर्ग के दो चतुर्थांश I एवं II में है।
⇒ पीले रंग के कागज का क्षेत्रफल = 2 x \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 22 x 22 = 484 cm
लाल रंग का कागज केवल वर्ग के एक चतुर्थांश IV में है
⇒ लाल रंग के कागज का क्षेत्रफल = \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 22 x 22 = 242 cm2
हरे रंग का कागज वर्ग के चतुर्थांश III एवं समद्विबाहु त्रिभुज (V) में है
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 1a
∴ हरे रंग के कागज का क्षेत्रफल = ar (CEF) + ar (AOD)
= 131.14 + 242 = 373.14
अतः पीले रंग के कागज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 484 cm2
लाल रंग के कागज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 242 cm2
एवं हरे रंग के कागज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 373.14 cm2 .

प्रश्न 2.
एक त्रिभुज का परिमाप 50 cm है। त्रिभुज की एक भुजा छोटी भुजा से 4 cm लम्बी है तथा तीसरी भुजा छोटी भुजा के दुगने से 6 cm कम है। त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए ∆ की छोटी भुजा = x cm तो प्रश्नानुसार दूसरी भुजा (x + 4) cm तथा तीसरी भुजा (2x – 6) cm होगी।
परिमाप = x + (x + 4) + (2x – 6)= 50 cm
⇒ 4x – 2 = 50 ⇒ 4x = 52
⇒ x = \(\frac { 52 }{ 4 }\) = 13 cm
अतः त्रिभुज की भुजाएँ क्रमशः 13 cm, 17 cm एवं 20 cm होंगी।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 2
अतः त्रिभुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 109.54 cm2.

प्रश्न 3.
संलग्न चित्र में ∆ABC की भुजाएँ AB = 7.5 cm, AC = 6.5 cm और BC = 7 cm हैं। आधार BC पर एक समान्तर चतुर्भुज DBCE की रचना की जाती है जो क्षेत्रफल में ∆ABC के बराबर है। इस समान्तर चतुर्भुज की ऊँचाई DF ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक त्रिभुज जिसकी भुजा AB = 7.5 cm,
AC = 6.5 और BC = 7 cm
आधार BC = 7 cm पर एक समान्तर चतुर्भुज DBCE दिया है जिसका क्षेत्रफल ∆ABC के क्षेत्रफल के बराबर है। मान लीजिए समान्तर चतुर्भुज की ऊँचाई DF = d cm
∆ ABC में,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 3
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 3a
चूँकि ar (DBCE) = ar (ABC) (दिया है)
⇒ 7 x d = 21 ⇒ d = 2 = 3 cm
अतः समान्तर चतुर्भुज की अभीष्ट ऊँचाई DF = 3 cm.

प्रश्न 4.
संलग्न चित्र में 50 cm x 70 cm की विमाओं वाली एक आयताकार टाइल पर चित्र में दर्शाए गए अनुसार एक डिजाइन बनाया गया है। इस डिजाइन में 8 त्रिभुज हैं जिनमें से प्रत्येक की भुजाएँ 26 cm, 17 cm और 25 cm की हैं। डिजाइन का पूर्ण क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए तथा टाइल के शेष भाग का क्षेत्रफल भी ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक 50 cm x 70 cm विमाओं वाली 70cmटाइल जिसके अन्दर 26 cm, 17cm एवं 25 cm विमाओं वाली 8 सर्वांगसम त्रिभुजों से बनी आकृति।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 4
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 4a
∴ डिजाइन का क्षेत्रफल = 8 x त्रिभुज का क्षेत्रफल
= 8 x 204 = 1632 cm2
चूँकि आयताकार टाइल का क्षेत्रफल = लम्बाई x चौड़ाई
⇒ ar (आयताकार टाइल) = 70 x 50 = 3500 cm2
टाइल के शेष भाग का क्षेत्रफल = 3500 – 1632 = 1868 cm2
अतः टाइल की डिजाइन का अभीष्ट क्षेत्रफल = 1632 cm2
एवं शेष टाइल का अभीष्ट क्षेत्रफल = 1868 cm2.

MP Board Class 9th Maths लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भुजाओं 50 m, 65 m और 65 m वाले त्रिभुजाकार खेत में ₹ 7 प्रति m2 की दर से घास लगवाने का व्यय ज्ञात कीजिए।
हल:
त्रिभुजाकार खेत के लिए,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 5
चूँकि घास लगाने का व्यय = दर x क्षेत्रफल = 7 x 1500 = ₹ 10,500
अतः घास लगवाने का अभीष्ट व्यय = ₹ 10,500.

प्रश्न 2.
एक फ्लाई ओवर की त्रिभुजाकार दीवारों को विज्ञापन के लिए प्रयोग किया जाता है। दीवारों की भुजाएँ 13 m, 14 m और 15 m हैं। विज्ञापनों से एक वर्ष में ₹2,000 प्रति m2 की दर से आय होती है। एक कम्पनी इनमें से एक दीवार को 6 महीने के लिए किराये पर लेती है। उस कम्पनी ने कितना किराया दिया ?
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 6
अतः विज्ञापन के लिए अभीष्ट किराया = ₹ 84,000.

प्रश्न 3.
एक समद्विबाहु त्रिभुज का परिमाप 32 cm है। एक बराबर भुजा और आधार का अनुपात 3 : 2 है। इस त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक समद्विबाहु त्रिभुज जिसकी एक बराबर भुजा और आधार का अनुपात 3 : 2 है तथा परिमाप 32 cm है।
⇒ भुजाओं का अनुपात = 3 : 3 : 2
मान लीजिए भुजाएँ 3x, 3x एवं 2x हैं।
तो परिमाप 3x + 3x + 2x = 32 cm (दिया है)
⇒ x = 32 ⇒ x = \(\frac { 32 }{ 8 }\) = 4 cm
⇒ भुजाएँ क्रमश: 12 cm, 12 cm और 8 cm हैं। त्रिभुज में,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 6a
अतः त्रिभुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 32√2 cm2.

प्रश्न 4.
संलग्न चित्र में दिए हुए समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। साथ ही शीर्ष A से भुजा DC पर शीर्ष लम्ब की लम्बाई भी ज्ञात कीजिए।
हल:
दियाहैः एक समान्तर चतुर्भुज जिसकी भुजाएँ DC = 12 cm, BC = 17 cm और विकर्ण DB = 25 cm तथा A से DC पर शीर्षलम्ब = AE = d (मान लीजिए)
हम जानते हैं कि समान्तर चतुर्भुज का विकर्ण उसे दो सर्वांगसम त्रिभुजों में विभक्त करता है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 7
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 7a
चूँकि समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार (DC) x शीर्षलम्ब (AE)
⇒ 12 x d = 180 ⇒ d = \(\frac { 180 }{ 12 }\) = 15 cm
अतः समान्तर चतुर्भुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 180 cm2
एवं समान्तर चतुर्भुज का अभीष्ट शीर्षलम्ब = 15 cm.

प्रश्न 5.
एक खेत एक समान्तर चतुर्भुज के आकार का है जिसकी भुजाएँ 60 m और 40 m हैं तथा एक विकर्ण 80 m है। इस खेत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक समान्तर चतुर्भुज के आकार का खेत ABCDP
जिसकी भुजा AB = 60 m, BC = 40 m एवं विकर्ण AC = 80 m है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 8
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 8a
अत: खेत का अभीष्ट क्षेत्रफल= 600√15 m2.

प्रश्न 6.
एक त्रिभुजाकार का खेत का परिमाप 420 m हैं तथा इसकी भुजाओं का अनुपात 6 : 7 : 8 है। इस खेत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक त्रिभुजाकार खेत जिसकी परिमाप 420 m तथा भुजाओं का अनुपात 6 : 7 : 8 है।
चूँकि भुजाओं का अनुपात = 6 : 7 : 8 = भुजाएँ हैं 6x, 7x एवं 8x (मान लीजिए)
⇒ परिमाप = 6x + 7x + 8x = 420 ⇒ 21x = 420 ⇒ x = \(\frac { 420 }{ 21 }\) = 20 m
⇒ भुजाओं का वास्तविक मान a = 120 m, b = 140 m एवं c = 160 m
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 9
अतः खेत का अभीष्ट क्षेत्रफल = 2100√15 m2.

प्रश्न 7.
किसी त्रिभुज की भुजाएँ क्रमश: 60 m, 100 m और 140 m हैं। त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (2019)
हल:
दिया है : त्रिभुज की भुजाएँ क्रमश: a = 60 m, b = 100 m एवं c = 140 m
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 10
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 10a
अतः त्रिभुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 1500√3 m.

प्रश्न 8.
किसी त्रिभुज ABC की भुजाएँ क्रमशः 40 m, 24 एवं 32 m हैं, तो त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (2019)
हल:
निर्देशः उपर्युक्त प्रश्न की तरह हल करें
उत्तर:
अभीष्ट क्षेत्रफल = 384 m

MP Board Class 9th Maths अति लघु उत्तरीय प्रश्न

सत्य तथा असत्य कथन लिखिए तथा अपने उत्तर का औचित्व दीजिए।

प्रश्न 1.
आधार 4 cm और ऊँचाई 6 cm वाले त्रिभुज का क्षेत्रफल 24 cm2 है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि ar (∆) = \(\frac { 1 }{ 4 }\) x 4 x 6 = 12 cm2.

प्रश्न 2.
एक त्रिभुज ABC का क्षेत्रफल 8 cm है जिसमें AB = AC = 4 cm तथा ∠A = 90° है।
उत्तर:
कथन सत्य है, क्योंकि ar (ABC) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 4 x 4 = 8 cm2.

प्रश्न 3.
एक समद्विबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल \(\frac { 5 }{ 4 }\)√11 cm2 होगा यदि उसका परिमाप 11 cm और आधार 5 cm है।
उत्तर:
कथन सत्य है, प्रत्येक बराबर भुजा 3 cm है।

प्रश्न 4.
एक समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल 20√3 cm है जिसकी प्रत्येक भुजा 8 cm है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि समबाहु ∆ का क्षेत्रफल 16√3 cm2 होगा।

प्रश्न 5.
यदि एक समचतुर्भुज की एक भुजा 10 cm और विकर्ण 16 cm है तो उस समचतुर्भुज का क्षेत्रफल 96 cm2 है।
उत्तर:
कथन सत्य है, क्योंकि उसके विकर्ण से बने एक त्रिभुज का क्षेत्रफल = 48 cm2.

प्रश्न 6.
एक समान्तर चतुर्भुज का आधार और संगत शीर्षलम्ब क्रमशः 10 cm और 3.5 cm हैं। उस समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल 30 cm है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = 10 x 3.5 = 35 cm2.

प्रश्न 7.
भुजा a वाले एक समषद्भुज का क्षेत्रफल भुजा a वाले पाँच समबाहु त्रिभुज के क्षेत्रफल के बराबर होता है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि यह a भुजा वाले 6 समबाहु त्रिभुजों के क्षेत्रफलों के योग के बराबर होगा।

MP Board Class 9th Maths वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक समद्विबाहु समकोण त्रिभुज का क्षेत्रफल 8 cm है। इसके कर्ण की लम्बाई है:
(a) \(\sqrt { 32 }\) cm
(b) \(\sqrt { 16 }\) cm
(c) \(\sqrt { 48 }\) cm
(d) \(\sqrt { 24 }\) cm.
उत्तर:
(a) \(\sqrt { 32 }\) cm

प्रश्न 2.
एक समबाहु त्रिभुज का परिमाप 60 m है। इसका क्षेत्रफल है :
(a) 10√3 m2
(b) 15√3 m2
(c) 20√3 m2
(d) 100√3 m2.
उत्तर:
(d) 100√3 m2.

प्रश्न 3.
2√3 cm भुजा वाले समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल है :
(a) 5.196 cm2
(b) 0.866 cm2
(c) 3:496 cm2
(d) 1:392 cm2.
उत्तर:
(a) 5.196 cm2

प्रश्न 4.
क्षेत्रफल 9√3 cm वाले समबाहु त्रिभुज की प्रत्येक भुजा की लम्बाई है:
(a) 8 cm
(b) 36 cm
(c) 4 cm
(d) 6 cm.
उत्तर:
(d) 6 cm.

प्रश्न 5.
यदि एक समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल 16/3 cm है तो इसकी परिमाप होगी :
(a) 48 cm
(b) 24 cm
(c) 12 cm
(d) 36 cm.
उत्तर:
(b) 24 cm

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. एक समकोण समद्विबाहु त्रिभुज की बराबर भुजा 10 cm है तो इसके विकर्ण लम्बाई …… होगी।
2. 10 cm और 6 cm भुजाओं वाले आयत का क्षेत्रफल …….. होगा।
3. एक समबाहु त्रिभुज की प्रत्येक भुजा 10 cm है तो इसका क्षेत्रफल ……… होगा।
4. एक आयत की भुजाएँ मीटर में मापी गई हैं। इसके क्षेत्रफल का मात्रक ………. होगा।
5. आधार 12 cm तथा शीर्षलम्ब 8 cm वाले त्रिभुज का क्षेत्रफल ……. है।
उत्तर:
1. 10√2 cm,
2. 60 cm2,
3. 25√3 cm2,
4. m2,
5. 48 cm2.

जोड़ी मिलान
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 11
उत्तर:
1. → (c),
2. →(d),
3. → (e),
4. → (a),
5. → (b).

सत्य/असत्य कथन

1. हीरोन का सूत्र केवल समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात करने में प्रयुक्त होता है।
2. समान्तर चतुर्भुज की संलग्न भुजाएँ तथा एक विकर्ण दिया हो तो उसका क्षेत्रफल हीरोन के सूत्र से ज्ञात कर सकते हैं।
3. एक त्रिभुज का क्षेत्रफल होता है उसका आधार x शीर्षलम्ब।
4. आयत का क्षेत्रफल उसकी लम्बाई एवं चौड़ाई के गुणनफल के बराबर होता है।
5. समचतुर्भुज का क्षेत्रफल उसके विकर्णों के गुणनफल के बराबर होता है।
उत्तर:
1. असत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर
1. किसी त्रिभुज की परिमाप का मात्रक क्या होता है?
2. क्षेत्रफल को मापने का मात्रक क्या है?
3. किसी त्रिभुज की भुजाओं के योग को क्या कहते हैं?
4. किसी वर्ग की भुजा 4 सेमी है। उसके विकर्ण उसे चार त्रिभुजों में विभक्त करते हैं तो प्रत्येक त्रिभुज का क्षेत्रफल क्या होगा?
5. हीरोन का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर:
1. सेमी या मीटर,
2. सेमी या मीटर,
3. परिमाप,
4. 4 cm2,
5. अलेक्जेण्ड्रिया (मिस्र) में।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.6

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.6

प्रश्न 1.
एक बेलनाकार बर्तन के आधार की परिधि 132 cm है और उसकी ऊँचाई 25 cm है। इस बर्तन में कितने लीटर पानी आ सकता है ? (1000 cm³ = 1 लीटर) (2018)
हल :
बेलनाकार बर्तन के आधार की परिमाप = 2πr = 132
= \(2 \times \frac{22}{7} \times r=132 \Rightarrow r=\frac{132 \times 7}{2 \times 22}=21 \mathrm{cm}\)
बेलनाकार बर्तन का आयतन = \(\pi r^{2} h=\frac{22}{7} \times(21)^{2} \times 25 \mathrm{cm}^{2}\)
= 22 x 21 x 3 x 25 = 34650 cm³
= \(\frac { 34650 }{ 1000 }\)
= 34.650 लीटर
अत: बेलनाकार बर्तन में 34.650 लीटर पानी आ सकता है।

प्रश्न 2.
लकड़ी के एक बेलनाकार पाइप का आन्तरिक व्यास 24 cm है और बाहरी व्यास 28 cm है। इस पाइप की लम्बाई 35 cm है। इस पाइप का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए यदि 1 cm³ लकड़ी का द्रव्यमान 0.6g है। (2019)
हल :
दिया है : d1 = 28 cm ⇒ r1 = \(\frac { 28 }{ 2 }\) = 14 cm, d2 = 24 cm ⇒ r2 = \(\frac { 24 }{ 2 }\) = 12 cm, लम्बाई l या h = 35 cm
पाइप की लकड़ी का आयतन = \(\pi\left(r_{1}^{2}-r_{2}^{2}\right) \times h=\frac{22}{7}\left(14^{2}-12^{2}\right) \times 35\)
= 22 (196 – 144) x 5 = 22 x 52 x 5 = 5720 cm³
पाइप की लकड़ी का द्रव्यमान = 5720 x 0.6 g = 3432 g
अतः पाइप का अभीष्ट द्रव्यमान = 3432 g या 3:432 kg

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प्रश्न 3.
एक सोफ्ट ड्रिंक (soft drink) दो प्रकार के पैकों में उपलब्ध है :
(i) लम्बाई 5 cm और चौड़ाई 4 cm वाले एक आयताकार आधार का टिन का डिब्बा जिसकी ऊँचाई 15 cm है और
(ii) व्यास 7 cm वाले वृत्तीय आधार और 10 cm ऊँचाई वाला एक प्लास्टिक का बेलनाकार डिब्बा। किस डिब्बे की धारिता अधिक है और कितनी अधिक ?
हल :
(i) टिन के घनाभाकार डिब्बे की धारिता = 5 x 4 x 15 = 300 cm³
(ii) प्लास्टिक के बेलनाकार डिब्बे की धारिता = \(\frac{22}{7} \times\left(\frac{7}{2}\right)^{2} \times 10\) = 385 cm³
दोनों की धारिता का अन्तर = 385 – 300 = 85 cm³
अतः प्लास्टिक के डिब्बे की धारिता टिन के डिब्बे की धारिता से 85 cm³ अधिक है।

प्रश्न 4.
यदि एक बेलन का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल 94.2 cm² है और उसकी ऊँचाई 5 cm है तो ज्ञात कीजिए:
(i) आधार की त्रिज्या,
(ii) बेलन का आयतन। (π = 3.14 लीजिए)
हल :
(i) चूँकि बेलन का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
⇒ 2 x 3.14 x r x 5 = 94.2 ⇒ r = \(\frac { 94.2 }{ 31.4 }\) = 3 cm
अतः बेलन के आधार की अभीष्ट त्रिज्या = 3 cm.

(ii) बेलन का आयतन = πr²h = 3.14 x 3² x 5 = 141.3 cm³
अतः बेलन का अभीष्ट आयतन = 141.3 cm³.

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प्रश्न 5.
10 m गहरे एक बेलनाकार बर्तन के आन्तरिक वक्र पृष्ठ को पेंट कराने का व्यय Rs 2,200 है। यदि पेंट कराने की दर Rs 20 प्रति m² है, तो ज्ञात कीजिए
(i) बर्तन का आन्तरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
(ii) आधार की त्रिज्या
(iii) बर्तन की धारिता।
हल :
(i) चूँकि पेंट कराने का व्यय = दर x आन्तरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
⇒ 2200 = 20 x आन्तरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
⇒ आन्तरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = \(\frac { 2200 }{ 20 }\) = 110 m²
अतः बर्तन का अभीष्ट आन्तरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 110 m².

(ii) बेलन का वक्रपृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh = 2 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x r x 10 = 110
⇒ \(r=\frac{110 \times 7}{2 \times 22 \times 10}=\frac{7}{4} \mathrm{m}=1.75 \mathrm{m}\)
अत: बेलनाकार बर्तन के आधार की अभीष्ट त्रिज्या = 1.75 m.

(iii) बर्तन की धारिता = \(\pi r^{2} h=\frac{22}{7} \times\left(\frac{7}{4}\right)^{2} \times 10=\frac{22 \times 7 \times 10}{16}\)
बर्तन की धारिता = 96.25 m³ या 96.25 kL
अतः बेलनाकार बर्तन की अभीष्ट धारिता = 96.25 m³ (kL).

प्रश्न 6.
ऊँचाई 1 m वाले एक बेलनाकार बर्तन की धारिता 15.4 लीटर है। इसको बनाने के लिए कितने वर्ग मीटर धातु की शीट की आवश्यकता होगी ?
हल :
दी हुई धारिता = 15.4 लीटर = \(\frac { 15.4 }{ 1000 }\) m³ = πr²h
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.6 image 1
बेलनाकार बर्तन का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr (r + h)
= 2 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 0.07 (0.07+ 1)= 44 x 0.01 x 1.07 m³
= 0.4708 m³
अतः धातु की शीट की अभीष्ट आवश्यकता = 0.4708 m³.

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प्रश्न 7.
सीसे की एक पेंसिल (lead pencil) लकड़ी के एक बेलन के अभ्यन्तर में ग्रेफाइट (graphite) से बने ठोस बेलन को डालकर बनाई गई है। पेंसिल का व्यास 7 mm है और ग्रेफाइट का व्यास 1 mm है। यदि पेंसिल की लम्बाई 14 cm है तो लकड़ी का आयतन और ग्रेफाइट का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : पेंसिल का बाहरी व्यास d1 = 7 mm
r1 = \(\frac { 7 }{ 20 }\) cm
एवं पेंसिल का आन्तरिक (ग्रेफाइट) का व्यास d2 = 1 mm
r2 = \(\frac { 1 }{ 20 }\) cm
तथा पेंसिल की लम्बाई l = 14 cm
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.6 image 2
अतः लकड़ी का अभीष्ट आयतन = 5.28 cm³ एवं ग्रेफाइट का आयतन = 0.11 cm³.

प्रश्न 8.
एक अस्पताल (hospital) के एक रोगी को प्रतिदिन 7 cm व्यास वाले एक बेलनाकार कटोरे में सूप (soup) दिया जाता है। यदि यह कटोरा सूप से 4 cm ऊँचाई तक भरा जाता है, तो इस
अस्पताल में 250 रोगियों के लिए प्रतिदिन कितना सूप तैयार किया जाता है ?
हल :
दिया है : एक बेलनाकार कटोरे का व्यास d = 7 cm
r = \(\frac { 7 }{ 2 }\) cm
एवं कटोरे में सूप की ऊँचाई h = 4 cm
एक कटोरे में सूप का आयतन = \(\pi r^{2} h=\frac{22}{7} \times\left(\frac{7}{2}\right)^{2} \times 4=154 \mathrm{cm}^{3}\)
250 रोगियों के सूप का आयतन = 250 x 154 cm³ = 38500 cm³
= \(\frac { 38500 }{ 1000 }\)
= 38.5 लीटर
अतः प्रतिदिन तैयार किए गए सूप का अभीष्ट आयतन = 38.5 लीटर।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5

प्रश्न 1.
माचिस की डिब्बी का माप 4 cm x 2.5 cm x 1.5 cm है। ऐसी 12 डिब्बियों के एक पैकेट का आयतन क्या होगा?
हल :
चूँकि एक माचिस की डिब्बी का आयतन V = 4 cm x 2.5 cm x 1.5 cm = 15 cm³
⇒ 12 डिब्बियों के एक पैकेट का आयतन = 12 x 15 = 180 cm³
अत: माचिस की डिब्बियों के पैकेट का अभीष्ट आयतन = 180 cm³.

प्रश्न 2.
एक घनाभाकार पानी की टंकी 6 m लम्बी, 5 m चौड़ी और 4.5 m गहरी है। इसमें कितने लिटर पानी आ सकता है ? (1 m³ = 1000 लीटर) (2019)
हल :
पानी की टंकी की धारिता = 6 x 5 x 4.5 = 135 m³
⇒ 135 x 1000 लीटर = 1,35,000 लीटर
अतः पानी की टंकी में अभीष्ट = 1,35,000 लीटर पानी आ सकता है।

प्रश्न 3.
एक घनाभाकार बर्तन 10 m लम्बा और 8 m चौड़ा है। इसको कितना ऊँचा बनाया जाए कि इसमें 380 घनमीटर द्रव आ सके।
हल :
मान लीजिए बर्तन की ऊँचाई h m रखी जाए।
चूँकि घनाभाकार बर्तन की धारिता = लम्बाई x चौड़ाई x ऊँचाई
380 = 10 x 8 x h ⇒ h = \(\frac { 380 }{ 10\times 8 }\) = 4.75 m
अत: बर्तन की अभीष्ट ऊँचाई = 4.75 m रखी जाए।

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प्रश्न 4.
8 m लम्बा, 6 m चौड़ा और 3 m गहरा एक घनाभाकार गड्डा खुदवाने में Rs 30 प्रति m³ की दर से होने वाला व्यय ज्ञात कीजिए। (2019)
हल :
गड्डे का आयतन V = 8 m x 6 m x 3 m = 144 m³
खुदवाने का व्यय = दर x क्षेत्रफल = 30 x 144 = Rs 4,320
अत: गड्डा खुदवाने में अभीष्ट व्यय = Rs 4,320.

प्रश्न 5.
एक घनाभाकार टंकी की धारिता 50,000 लीटर पानी की है। यदि इस टंकी की लम्बाई और गहराई क्रमशः 2.5 m और 10 m है, तो इसकी चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : टंकी की धारिता V = 50,000 लीटर ⇒ V = 50 m³, लम्बाई l = 2.5 m, गहराई d = 10 m
पतन) V = l x b x h
⇒ 50 = 2.5 x b x 10 ⇒ b = \(\frac { 50 }{ 25 }\) = 2 m
अतः टंकी की अभीष्ट चौड़ाई = 2 m.

प्रश्न 6.
एक गाँव जिसकी जनसंख्या 4000 है, को प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 150 लीटर पानी की आवश्यकता है। इस गाँव में 20 m x 15 m x 6 m मापों वाली एक टंकी बनी हुई है। इस टंकी का पानी वहाँ कितने दिन के लिए पर्याप्त होगा ?
हल :
टंकी की धारिता = 20 m x 15 m x 6 m = 1800 m³
⇒ धारिता (लीटर में) = 1800 x 1000 = 18,00,000 लीटर
एक दिन में जल की आवश्यकता = 4000 x 150 = 6,00,000 लीटर
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5 image 1
अतः टंकी का पानी अभीष्ट 3 दिन के लिए पर्याप्त होगा।

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प्रश्न 7.
किसी गोदाम की माप 40 m x 25 m x 15 m है। इस गोदाम में 1.5 m x 1.25 m x 0.5 m की माप वाली लकड़ी की कितनी अधिकतम क्रेट (crate) रखी जा सकती हैं?
हल :
चूँकि गोदाम की धारिता V = 40 m x 25 m x 15 m = 15,000 m³
एवं एक क्रेट का आयतन V1 = 1.5 m x 1.25 m x 0.5 m = 0.9375 m³
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5 image 2
अतः क्रेटों की अभीष्ट संख्या = 16,000.

प्रश्न 8.
12 cm भुजा वाले एक ठोस घन को बराबर आयतन वाले 8 घनों में काटा जाता है। नए घन की भुजा क्या होगी ? साथ ही इन दोनों घनों के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात भी ज्ञात कीजिए। हल :
माना नए घन की भुजा = a cm
प्रश्नानुसार, (12)³ = 8a³ ⇒ a³ = \(\frac{12 \times 12 \times 12}{8}\) = (6)³ ⇒ a = 6 cm
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5 image 3
अतः नए घन की अभीष्ट भुजा = 6 cm एवं उनके पृष्ठों के क्षेत्रफल का अनुपात = 4:1.

प्रश्न 9.
3 m गहरी और 40 m चौड़ी एक नदी 2 किमी प्रति घण्टा की चाल से बहकर समुद्र में गिरती है। एक मिनट में समुद्र में कितना पानी गिरेगा ?
हल :
1 मिनट में नदी द्वारा तय की गई दूरी l = \(\frac { 2000 }{ 60 }\) मीटर [∵ वेग = 2 किमी/घण्टा]
1 मिनट में समुद्र में नदी द्वारा गिरा पानी = \(\frac { 2000 }{ 60 }\) x 3 x 40 = 4,000 m³
अतः 1 मिनट में नदी द्वारा समुद्र में 4,000 m³ पानी गिरेगा।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

प्रश्न 1.
निम्न त्रिज्या वाले गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए :
(i) 10.5 cm (2018)
(ii) 5.6 cm
(iii) 14 cm.
हल :
(i) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² = 4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (10.5)²
= 88 x 10.5 x 1.5
= 1386 cm²
अतः गोले का अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफल = 1386 cm².

(ii) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² = 4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (5.6)²
= 88 x 5.6 x 0.8
= 394.24 cm²
अतः गोले का अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफल = 394.24 cm².

(iii) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² = 4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (14)²
= 88 x 28
= 2464 cm²
अतः गोले का अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2464 cm².

प्रश्न 2.
निम्न व्यास वाले गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए:
(i) 14 cm
(ii) 21 cm
(iii) 3.5 m.
हल :
(i) गोले का व्यास d = 14 cm (दिया है)
⇒ R = \(\frac { 14 }{ 2 }\) = 7 cm
गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² = 4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (7)² = 616 cm²
अतः गोले का अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफल = 616 cm².

(ii) गोले का व्यास d = 21 cm (दिया है)
⇒ R = \(\frac { 21 }{ 2 }\) = 10.5 cm
गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² = 4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (10.5)².
= 88 x 10.5 x 1.5 = 1386 cm²
अत: गोले का अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफल = 1386 cm².

(iii) गोले का व्यास d = 3.5 m (दिया है)
⇒ R = \(\frac { 3.5 }{ 2 }\) = 1.75 m
गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² = 4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (1.75)²
= 88 x 1.75 x 0.25 = 38.5 m²
अत: गोले का अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफल = 38.5 m².

प्रश्न 3.
10 cm त्रिज्या वाले एक अर्द्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (π = 3.14 लीजिए)।
हल :
दिया है : अर्धगोले की त्रिज्या R = 10 cm
चूँकि अर्द्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 3πR²
= 3 x 3.14 x 10²
= 942 cm²
अतः अर्द्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल का अभीष्ट मान = 942 cm².

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प्रश्न 4.
एक गोलाकार गुब्बारे में हवा भरने पर, उसकी त्रिज्या 7 cm से 14 cm हो जाती है। इन दोनों स्थितियों में गुब्बारे के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : दोनों स्थितियों में गुब्बारे की त्रिज्याएँ क्रमशः R1 = 7 cm एवं R2 = 14 cm हैं।
चूँकि पहली स्थिति में गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल S1 = 4πR1²
⇒ S1 = 4π(7)² cm²
एवं दूसरी स्थिति में गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल S2 = 4πR2²
⇒ S2 = 4π(14)² cm²
∴ S1 : S2 = 4π (7)² : 4π (14)² = 1 : 4
अतः दोनों स्थितियों में अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात = 1 : 4.

प्रश्न 5.
पीतल के बने एक अर्द्धगोलाकार कटोरे का आन्तरिक व्यास 10.5 cm है। Rs 16 प्रति 100 cm² की दर से इसके आन्तरिक पृष्ठ पर कलई कराने का व्यय ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : कटोरे का आन्तरिक व्यास, d = 10.5 cm ⇒ त्रिज्या R = 5.25 cm
कटोरे का आन्तरिक पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πR² = 2 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (5.25)²
⇒ Sc = 44 x 5.25 x 0.75 cm² = 173.25 cm²
कलई का व्यय = दर x क्षेत्रफल = \(\frac { 16 }{ 100 }\) x 173.25 = Rs 27.72
अतः कलई कराने का अभीष्ट व्यय = Rs 27.72.

प्रश्न 6.
उस गोले की त्रिज्या ज्ञात कीजिए जिसका पृष्ठीय क्षेत्रफल 154 cm² है। (2018)
हल :
गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 154 cm² (दिया हुआ है)
चूँकि गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल Sc = 4πR²
4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x R² = 154
R² = \(\frac { 154\times 7 }{ 4 \times 22 }\) = 12.25 cm²
R = √12.25 = 3.5 cm
अतः गोले की अभीष्ट त्रिज्या = 3.5 cm.

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प्रश्न 7.
चन्द्रमा का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग एक-चौथाई है। इन दोनों के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : चन्द्रमा और पृथ्वी के व्यासों का अनुपात
\(=d_{m} : d_{e}=1 : 4 \Rightarrow R_{m} : R_{e}=1 : 4 \Rightarrow \frac{R_{m}}{R_{e}}=\frac{1}{4}\)
चूँकि चन्द्रमा एवं पृथ्वी के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात \(S_{m} : S_{e}=4 \pi R_{m}^{2} : 4 \pi R_{e}^{2}\)
\(\frac{S_{m}}{S_{e}}=\left(\frac{1}{4}\right)^{2}=\frac{1}{16} \Rightarrow S_{m} : S_{e}=1 : 16\)
अतः दोनों के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अभीष्ट अनुपात = 1:16.

प्रश्न 8.
एक अर्द्धगोलाकार कटोरा 0.25 cm मोटी स्टील से बना है। इस कटोरे की आन्तरिक त्रिज्या 5 cm है। कटोरे का बाहरी वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल :
ज्ञात है : कटोरे की आन्तरिक त्रिज्या Ri = 5 cm एवं स्टील की मोटाई d = 0.25 cm
⇒ कटोरे की बाह्य त्रिज्या Re = Ri + d = 5 + 0.25 = 5.25 cm
कटोरे का बाह्य वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = \(2 \pi R_{e}^{2}=2 \times \frac{22}{7} \times(5 \cdot 25)^{2}\)
= 44 x 5.25 x 0.75 cm² = 173.25 cm²
अतः कटोरे का अभीष्ट बाहरी वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 173.25 cm².

प्रश्न 9.
एक लम्बवृत्तीय बेलन त्रिज्या r वाले एक गोले को पूर्णतया घेरे हुए हैं (देखिए संलग्न चित्र)। ज्ञात कीजिए
(i) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल,
(ii) बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल,
(iii) ऊपर (i) एवं (ii) में प्राप्त क्षेत्रफलों का अनुपात।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4 image 1
हल :
गोले की त्रिज्या r मात्रक दी गई है। चित्रानुसार बेलन की
त्रिज्या = r मात्रक तथा बेलन की ऊँचाई h = 2r मात्रक
(i) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² (मात्रक)।
(ii) बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh = 2πr. 2r = 4πr²
अतः बेलन का वक्र पृष्ठीय अभीष्ट क्षेत्रफल = 4πr².
(iii) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल : बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr² : 4πr² = 1 : 1
अतः दोनों पृष्ठों का अभीष्ट अनुपात = 1 : 1.

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 12 प्रजातन्त्र

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 12 प्रजातन्त्र

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता लोकतन्त्र की नहीं है?
(i) निर्वाचित प्रतिनिधियों की सरकार
(ii) अधिकारों का सम्मान
(iii) शक्तियों का एक व्यक्ति में केन्द्रीयकरण
(iv) स्वतन्त्रता और निष्पक्ष चुनाव।
उत्तर:
(iii) शक्तियों का एक व्यक्ति में केन्द्रीयकरण

प्रश्न 2.
कौन-सी अवधारणा प्रजातन्त्र की है?
(2016)
(i) स्वतन्त्रता
(ii) शोषण
(iii) असमानता
(iv) व्यक्तिवादिता।
उत्तर:
(i) स्वतन्त्रता

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित में कौन-सा प्रजातन्त्र का दोष नहीं है?
(i) सार्वजनिक धन व समय का अपव्यय
(i) धनिकों का वर्चस्व
(iii) दलीय गुटबन्दी
(iv) लोक कल्याण।
उत्तर:
(iv) लोक कल्याण।

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र, जनता का जनता के लिये जनता द्वारा संचालित शासन है
(2008, 14, 15)
(i) मैकियावली
(ii) रूसो
(iii) लिंकन
(iv) हाट्स।
उत्तर:
(iii) लिंकन

रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए

  1. अरस्तु ने प्रजातन्त्र को ………… का शासन कहा है। (2009, 10, 18)
  2. साम्यवाद के प्रवर्तक ………… और ………… थे।
  3. सफल प्रजातन्त्र के लिए संविधान का …………. होना आवश्यक है।
  4. निर्बल प्रजातन्त्र ………….. और …………. के समय प्रभावहीन सिद्ध होता है।

उत्तर:

  1. ‘बहुतों का शासन’
  2. कार्ल मार्क्स और लेनिन
  3. लिखित
  4. युद्ध और संकट।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उत्तर वैदिक काल में प्रजातान्त्रिक सन्दर्भ में उसका उल्लेख पाया जाता है?
उत्तर :
उत्तर वैदिककाल में शासन का गणतान्त्रिक रूप एवं स्थानीय स्वशासन की संस्थाएँ विद्यमान थीं। ऋग्वेद में सभा और समिति का उल्लेख मिलता है।

प्रश्न 2.
प्राचीन भारत में शासन की मूल इकाई के रूप में किस प्रकार की व्यवस्था थी?
उत्तर:
प्राचीन भारत में भारतीय समाज कृषि प्रधान था जिसकी मूल इकाई स्वशासित एवं स्वतन्त्र ग्राम थे।

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र का मार्क्सवादी सिद्धान्त किस अधिकार पर बल देता है?
उत्तर:
प्रजातन्त्र का मार्क्सवादी सिद्धान्त राजनीतिक एवं नागरिक समानताओं की अपेक्षा आर्थिक समानता पर अधिक बल देता है।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र का अर्थ समझाते हुए कोई दो परिभाषा लिखिए। (2009, 13, 15)
उत्तर:
प्रजातन्त्र का अर्थ-प्रजातन्त्र का अर्थ एक ऐसी शासन व्यवस्था से है जिसमें जनहित सर्वोपरि है। प्रजातन्त्र का अर्थ केवल एक शासन प्रणाली तक सीमित नहीं है। यह राज्य व समाज का रूप भी है। अर्थात् इसमें राज्य, समाज व शासन तीनों का समावेश होता है। राज्य के रूप में प्रजातन्त्र, जनता को शासन करने, उस पर नियन्त्रण करने एवं उसे हटाने की शक्ति है। समाज के रूप में प्रजातन्त्र इस प्रकार की सामाजिक व्यवस्था है जिसमें समानता का विचार और व्यवहार सर्वोपरि हो। व्यक्तित्व की गरिमा का समान मूल्य हो एवं विकास के समान अवसर सभी को प्राप्त हों। यह सम्पूर्ण जीवन का एक मार्ग है। यह मूल्यों की एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें व्यक्ति साध्य है और व्यक्तित्व का विकास इसका उद्देश्य है। यह स्वतन्त्रता एवं समरसता की पूर्व कल्पना पर आधारित है।

परिभाषाएँ :
अरस्तू ने प्रजातन्त्र को बहुतों का शासन’ कहा है। डायसी के अनुसार, “प्रजातन्त्र शासन .. का वह रूप है जिसमें शासन व्यवस्था की शक्ति सम्पूर्ण राष्ट्र में विस्तृत हो।”

प्रश्न 2.
अप्रत्यक्ष अथवा प्रतिनिधि प्रजातन्त्र से आप क्या समझते हैं? (2009, 16)
उत्तर:
अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र :
जब जनता निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से विधि निर्माण तथा शासन के कार्यों पर नियन्त्रण रखने का कार्य करती है तो उसे अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कहते हैं। वर्तमान समय में अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र ही प्रचलित है। इसमें जनता निश्चित अवधि के लिए अपने प्रतिनिधि चुनती है, जो व्यवस्थापिका का गठन करते हैं और कानूनों का निर्माण करते हैं। अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में जनता की इच्छा की अभिव्यक्ति, निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम होती है।

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र में राजनीतिक शिक्षण कैसे होता है?
उत्तर:
प्रजातन्त्र राजनीतिक शिक्षण का श्रेष्ठ साधन है। मताधिकार और राजनीतिक पद प्राप्त करने की स्वतन्त्रता के कारण जनता स्वाभाविक रूप से राजनीतिक क्षेत्र में रुचि लेने लगती है। भाषण अभिव्यक्ति एवं संचार माध्यमों के उपयोग की स्वतन्त्रता, जनता में विचारों के आदान-प्रदान करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है। उनमें उत्तरदायित्व तथा आत्म-निर्भरता की भावना का विकास होता है। सभी राजनीतिक दल निरन्तर प्रचार द्वारा जनता को राजनीतिक शिक्षा प्रदान करते हैं। अतः प्रजातन्त्र में नागरिकों को प्रशासनिक, राजनीतिक व सामाजिक सभी प्रकार का शिक्षण प्राप्त होता है।

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र के लिये संविधान क्यों आवश्यक है? इस पर टिप्पणी लिखिए। (2009, 10, 16)
उत्तर:
शासन संगठन के मूलभूत सिद्धान्त तथा प्रक्रिया निश्चित होना प्रजातन्त्र का महत्त्वपूर्ण लक्षण है, जिसमें कोई भी सत्तारूढ़ दल अपने बहुमत के आधार पर इसे जैसा चाहे वैसा परिभाषित या परिवर्तित न कर सके। शासन के अंगों का गठन, शासन की शक्तियाँ एवं कार्य, प्रक्रिया आदि संविधान में स्पष्ट हों, इसलिए लिखित संविधान का होना अनिवार्य माना गया है। प्रजातन्त्र नागरिकों की समानता एवं स्वतन्त्रता पर आधारित है। वास्तव में संविधान प्रजातन्त्र का प्राण होता है। बिना संविधान के कोई भी प्रजातन्त्र सफल नहीं हो सकता। इस प्रकार प्रजातन्त्र के लिए संविधान परम आवश्यक है।

प्रश्न 5.
वर्तमान में भारतीय प्रजातन्त्र किन-किन चुनौतियों से गुजर रहा है? लिखिए।
उत्तर:
भारत में प्रजातन्त्र के समक्ष चुनौतियाँ-भारत में प्रजातन्त्र के समक्ष कुछ चुनौतियाँ भी हैं। भारतीय प्रजातन्त्र आज निरक्षरता, जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, पृथक्तावाद, साम्प्रदायिकता, राजनीतिक हिंसा, सामाजिक-आर्थिक असमानता, धन व बाहुबल के वर्चस्व, भ्रष्टाचार और वोट बैंक की राजनीति की समस्याओं से प्रभावित हो रहा है।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र से क्या आशय है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ बताइए। (2008, 09)
अथवा
प्रजातन्त्र की कोई पाँच विशेषताएँ बताइए और किसी एक विशेषता के बारे में वर्णन कीजिए। (2010)
अथवा
प्रजातन्त्र का क्या अर्थ है? प्रजातन्त्र की प्रमुख दो परिभाषाएँ लिखिए। (2008)
अथवा
प्रजातन्त्र की चार विशेषताएँ लिखिए। (2017, 18)
उत्तर:
प्रजातन्त्र का आशय-प्रजातन्त्र को अंग्रेजी भाषा में डेमोक्रेसी (Democracy) कहते हैं। प्रजातन्त्र का अंग्रेजी पर्याय डेमोक्रेसी दो यूनानी शब्दों से मिलकर बना है-‘डेमो’ (Demo) यानी ‘जनता’ तथा ‘क्रेटिया’ (Kratia) अर्थ है-शक्ति। इस प्रकार डेमोक्रेसी या प्रजातन्त्र का अर्थ हुआ जनता की शक्ति’ । अन्य शब्दों में कहा जाए तो ऐसी शासन प्रणाली जिसमें सर्वोच्च सत्ता जनता के पास रहती है और उसका उपयोग वह प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में करती है। इसे लोकतन्त्र या जनतन्त्र भी कहा जाता है।

परिभाषाएँ :
प्रजातन्त्र का अर्थ-प्रजातन्त्र का अर्थ एक ऐसी शासन व्यवस्था से है जिसमें जनहित सर्वोपरि है। प्रजातन्त्र का अर्थ केवल एक शासन प्रणाली तक सीमित नहीं है। यह राज्य व समाज का रूप भी है। अर्थात् इसमें राज्य, समाज व शासन तीनों का समावेश होता है। राज्य के रूप में प्रजातन्त्र, जनता को शासन करने, उस पर नियन्त्रण करने एवं उसे हटाने की शक्ति है। समाज के रूप में प्रजातन्त्र इस प्रकार की सामाजिक व्यवस्था है जिसमें समानता का विचार और व्यवहार सर्वोपरि हो। व्यक्तित्व की गरिमा का समान मूल्य हो एवं विकास के समान अवसर सभी को प्राप्त हों। यह सम्पूर्ण जीवन का एक मार्ग है। यह मूल्यों की एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें व्यक्ति साध्य है और व्यक्तित्व का विकास इसका उद्देश्य है। यह स्वतन्त्रता एवं समरसता की पूर्व कल्पना पर आधारित है।

आशय यह है कि प्रजातन्त्रात्मक शासन व्यवस्था लोक कल्याणकारी राज्य से सम्बन्धित है। इसमें व्यक्ति की महत्ता और उसकी स्वतन्त्रता पर बल दिया गया है तथा सम्प्रभुता जनता में निहित होना माना गया है।

प्रजातन्त्र की विशेषताएँ :
प्रजातन्त्र एकमात्र ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें सभी को अपने सर्वांगीण विकास के लिए बिना किसी भेदभाव के समान अवसर प्राप्त होते हैं प्रजातान्त्रिक व्यवस्था नागरिकों की गरिमा तथा समानता, स्वतन्त्रता, मातृत्व और न्याय के सिद्धान्तों पर आधारित है। प्रजातन्त्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • जनता प्रभुसत्ता की स्वामी :
    प्रजातन्त्र में सत्ता का अन्तिम स्रोत राज्य की सम्पूर्ण जनता होती है।
  • शासन का संचालन जन प्रतिनिधियों द्वारा :
    प्रजातन्त्रात्मक व्यवस्था में शासन का संचालन जनता के प्रतिनिधि करते हैं।
  • राजनीतिक दलों के गठन की व्यवस्था :
    प्रजातन्त्र में राजनीतिक दलों का गठन अनिवार्य रूप से किया जाता है। दो या अधिक राजनीतिक दल होते हैं। जिस दल को सर्वाधिक बहुमत प्राप्त होता है, वही शासन का संचालन करता है।
  • चुनावों की व्यवस्था :
    प्रजातन्त्र में संविधान द्वारा निर्धारित तिथि पर चुनाव होते हैं। चुनाव का आधार वयस्क मताधिकार होता है।
  • नागरिकों को अधिकार व स्वतन्त्रताएँ प्रदान करना :
    नागरिक अपने मतों का उचित ढंग से प्रयोग कर सकें तथा अपने व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास कर सकें। इसके लिए उन्हें यथा सम्भव अधिकार व स्वतन्त्रताएँ प्रदान की जाती हैं।
  • शासन जनता के प्रति उत्तरदायी :
    प्रजातन्त्रीय शासन जनता के प्रति उत्तरदायी होता है। जनहित की अवहेलना करने पर उसे पदच्युत किया जा सकता है।
  • लोक या जन कल्याणकारी राज्य का आदर्श :
    प्रजातन्त्र का प्रमुख आदर्श जनहित होता है। अत: इस शासन व्यवस्था में यथासम्भव लोक कल्याणकारी कार्यों को महत्त्व दिया जाता है।
  • स्वतन्त्र व निष्पक्ष न्यायपालिका :
    संविधान की समस्त व्यवस्थाएँ व्यवहार में लागू की जा सकें, इसलिए प्रजातन्त्र में स्वतन्त्र व निष्पक्ष न्यायपालिका का होना एक अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण लक्षण है।

प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र के गुण-दोषों का वर्णन कीजिए।
अथवा
प्रजातन्त्र के कोई चार गुण लिखिए। (2017)
अथवा
प्रजातन्त्र के दो-दो गुण-दोषों का वर्णन कीजिए। (2008, 14, 18)
अथवा
प्रजातन्त्र के दोषों का वर्णन कीजिए। (2008, 09)
उत्तर :
प्रजातन्त्र के गुण-प्रजातन्त्र के निम्नलिखित गुण हैं –

1. जन-कल्याण की भावना :
प्रजातन्त्र की सबसे बड़ी अच्छाई यह है कि इसमें शासक गण जन-कल्याण के प्रति विशेष रूप से सजग तथा क्रियाशील रहते हैं। प्रजातन्त्र में जनता के चुने हुए प्रतिनिधि ही शासन करते हैं। अतः वे जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं। ऐसी दशा में उनके लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे जनता के हित में ही शासन करें।

2. व्यक्तित्व के विकास के अवसर :
प्रजातन्त्र शासन में नागरिकों के प्रतिनिधि ही शासन में भाग लेते हैं। अतः इस प्रकार की प्रणाली में प्रत्येक नागरिक को अपने व्यक्तित्व के विकास के समान अवसर प्राप्त होते हैं।

3. देश-भक्ति की भावना का विकास :
प्रजातन्त्र में नागरिकों के हृदय में राज्य के प्रति निष्ठा तथा भक्ति की भावना उत्पन्न होती है। नागरिक यह अनुभव करते हैं कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि ही शासन का संचालन कर रहे हैं और वे जो कुछ भी करेंगे वह उनके हित में ही होगा। अतः प्रजातन्त्र में प्रत्येक नागरिक के हृदय में अपने देश के प्रति अगाध प्रेम होता है। मिल के अनुसार “प्रजातन्त्र लोगों में देश-भक्ति की भावना का विकास करता है, क्योंकि नागरिक यह अनुभव करते हैं कि सरकार उन्हीं की बनाई हुई है और अधिकारी उनके स्वामी न होकर, सेवक हैं।”

4. नैतिकता तथा उत्तरदायित्व की भावनाओं का विकास :
प्रजातन्त्रात्मक शासन-प्रणाली नागरिकों में उत्तरदायित्व की भावना का विकास करती है। इस सम्बन्ध में मिल का कहना है कि “सत्यता, नैतिकता, साहस, आत्मविश्वास तथा उद्योगशीलता आदि गुणों का किसी अन्य शासन-प्रणाली की अपेक्षा लोकतन्त्र में अधिक विकास होता है।

5. क्रान्ति से सुरक्षा :
प्रजातन्त्र में नागरिकों की इच्छा के अनुसार ही शासन होता है। नागरिक जानते हैं कि वे इच्छानुसार अपने मत द्वारा अत्याचारी शासकों को अपदस्थ कर सकते हैं। अतः सरकार बदलने के लिए क्रान्ति की आवश्यकता नहीं पड़ती।

6. सार्वजनिक शिक्षण :
प्रजातन्त्रात्मक शासन में समस्त व्यक्तियों को सार्वजनिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। वे मतदान द्वारा तथा चुनाव में खड़े होकर राजनीति की शिक्षा प्राप्त करते हैं। उनमें उत्तरदायित्व तथा आत्मनिर्भरता की भावना का विकास होता है। बर्क के शब्दों में “सभी शासन शिक्षा के साधन होते हैं और सबसे अच्छी शिक्षा स्वशिक्षा है। इस प्रकार सबसे अच्छा शासन स्वशासन है, जिसे लोकतन्त्र कहते हैं।

7. स्वतन्त्रता व समानता की प्राप्ति :
प्रजातन्त्र का मूल आधार स्वतन्त्रता और समानता है। इस कारण प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेद-भाव के समान रूप से राजनीतिक अधिकार प्रदान किये जाते हैं। जाति, धर्म, नस्ल, रंग, सम्पत्ति आदि के आधार पर उनमें भेद-भाव नहीं किया जाता। यही ऐसा शासन है जिसमें सभी को अपना विकास करने के समान अवसर प्राप्त होते हैं।

प्रजातन्त्र के दोष :
प्रजातन्त्र के प्रमुख दोष निम्न प्रकार हैं –

  • योग्यता और गुण की अपेक्षा बहुमत का महत्त्व :
    प्रजातन्त्रात्मक शासन में योग्यता और गुण के स्थान पर संख्या और बहुमत को अधिक महत्त्व दिया जाता है। प्रत्येक बात का निर्णय बहुमत के आधार पर होता है, चाहे वह गलत ही क्यों न हो।
  • दल प्रणाली और गुटबन्दी के प्रभाव :
    प्रजातन्त्र शासन में दल प्रणाली और गुटबन्दी के दोष उत्पन्न हो जाते हैं। विभिन्न राजनीतिक दल चुनाव जीतने के प्रयास में जनता को भ्रामक प्रचार द्वारा गुमराह करने का प्रयास करते हैं। एक दल दूसरे दल की कटु आलोचना करता है। योग्य व्यक्ति दलबन्दी से दूर भागते हैं तथा अयोग्य व्यक्ति राजनीति में सफलता प्राप्त कर लेते हैं।
  • अनुत्तरदायी शासन :
    इसे (प्रजातन्त्र को) जनता का शासन कहा जाता है क्योंकि सैद्धान्तिक रूप से उसे जनता के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए परन्तु व्यवहार में ऐसा नहीं होता। प्रजातन्त्र में केवल चुने हुए प्रतिनिधि जो शासन के स्वामी हो जाते हैं, मन्त्रिमण्डल आदि के चुनाव के पश्चात् सर्वसाधारण की आवश्यकताओं, हितों तथा उनकी कठिनाइयों के प्रति तनिक भी चिन्ता नहीं करते। इस प्रकार प्रजातन्त्र अनुत्तरदायी शसान है।
  • समय की बर्बादी-प्रजातन्त्रात्मक शासन :
    प्रणाली में अनावश्यक रूप से समय का अपव्यय होता है। चुनाव तथा नीति निर्धारण आदि में ही काफी समय बर्बाद हो जाता है। किसी भी निर्णय पर पहुँचने से पूर्व वाद-विवाद में भी समय व्यर्थ ही नष्ट होता है तथा निर्णय लेने में देर लगती है।
  • धन का अत्यधिक अपव्यय :
    इस प्रणाली में व्यवस्थापिका सभाओं के सदस्यों तथा मन्त्रिमण्डलं आदि पर पर्याप्त धन व्यय किया जाता है। चुनाव के समय भी पैसा आवश्यक रूप से खर्च होता है। व्यर्थ में कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ जाती है।
  • पूँजीपतियों का शासन :
    प्रजातन्त्र में शासन तथा सरकार पूँजीपतियों के हाथ की कठपुतली बन जाती है। धनवान व्यक्ति दलों को चन्दा देते हैं तथा पैसे की सहायता देकर अपने उम्मीदवारों को चुनाव में खड़ा करके उन्हें विजयी बनाते हैं। पूँजीपतियों द्वारा खड़े किये गये उम्मीदवार चुने जाने के पश्चात् उनके ही हित-साधन में जुट जाते हैं तथा जनसाधारण की उपेक्षा करते हैं। इस प्रकार प्रजातन्त्र में पूँजीवाद का पोषण ‘ होता है और जनसाधारण की उपेक्षा होती है।
  • युद्ध और संकट के समय दुर्बल :
    प्रजातन्त्रात्मक सरकार युद्ध और संकट के समय प्रायः दुर्बल सिद्ध होती है। युद्ध के समय शीघ्र निर्णय लेने की आवश्यकता होती है, परन्तु इस प्रणाली की गति अत्यन्त मन्द होती है। इसीलिए शीघ्र निर्णय नहीं हो पाते।
  • पक्षपात और भ्रष्टाचार का बोलबाला :
    इस शासन-प्रणाली में शासन भ्रष्ट और शिथिल हो जाता है। जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि जनसाधारण के हितों की उपेक्षा कर भाई-भतीजे तथा सगे-सम्बन्धियों के हितों का ही ध्यान रखते हैं। इससे भाई-भतीजेवाद और भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन मिलता है।

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र के आधारभूत सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए। (2009, 14)
उत्तर:
प्रजातन्त्र के आधारभूत सिद्धान्त-प्रजातन्त्र के प्रमुख सिद्धान्त निम्न प्रकार हैं –
(1) प्रजातन्त्र का अभिजनवादी सिद्धान्त :
बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में प्रतिपादित यह सिद्धान्त मानव की प्राकृतिक असमानता के सिद्धान्त पर जोर देते हुए यह मानता है कि प्रत्येक राजनीतिक व्यवस्था में शासक और शासित दो वर्ग होते है। शासक वर्ग हमेशा अल्पसंख्यक होते हुए भी सत्ता के केन्द्र में विशिष्ट वर्ग होता है। शासन की शक्ति इसी विशिष्ट वर्ग के हाथ में केन्द्रित होती है। सामान्यत: व्यक्ति यह सोचते हैं कि वे राजनीतिक प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं, लेकिन वास्तव में उनका प्रभाव चुनाव तक सीमित होता है। अभिजन का आधार है-श्रेष्ठता के आधार पर चयन। प्रकृति, विचार, आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक पृष्ठभूमि आदि किसी भी आधार पर इनकी श्रेष्ठता निर्भर हो सकती है, जो इन्हें आम लोगों से अलग बनाती है।

अभिजन भी स्वयं को आम लोगों से भिन्न एवं श्रेष्ठ समझते हैं, परन्तु जनसाधारण के साथ इनकी क्रिया-प्रतिक्रिया होती रहती है। इस प्रकार जन सम्प्रभुता का समन्वय हो जाता है। समाज की धन सम्पदा एवं नीति निर्धारण में अभिजन की प्रभावशाली भूमिका होती है, परन्तु प्रजातन्त्र में इस वर्ग में प्रवेश के सभी को समान अवसर प्राप्त होते हैं। दूसरी ओर नियमित एवं खुली निर्वाचन प्रक्रिया अभिजन को जनहित में कार्य करने हेतु बाध्य करती है।

(2) बहुलवादी सिद्धान्त :
यह सिद्धान्त इस मान्यता पर आधारित है कि प्रजातन्त्र में व्यक्ति को अपने विभिन्न हितों की पूर्ति के लिये समूह में संगठित होने की स्वतन्त्रता है। ये समूह अपने-अपने क्षेत्र में स्वायत्त भी होते हैं और अपनी हितपूर्ति के लिये शासन पर दबाव भी डालते हैं। इस प्रकार सभी समूहों को अपनी हितपूर्ति की सीमा तक सत्ता में भागीदारी मिलती है। अतः सत्ता का विकेन्द्रीकरण इस सिद्धान्त की मूल धारणा है। अर्थात् राज्य ही सर्वोच्च सत्ता का अधिकारी नहीं अपितु प्रजातन्त्र में समाज के सभी समूहों की राजनीतिक शक्ति एवं शासन की सत्ता में भागीदारी होती है।

(3) प्रजातन्त्र का उदारवादी या शास्त्रीय सिद्धान्त :
इस सिद्धान्त में व्यक्ति की स्वतन्त्रता एवं समाज की सर्वोपरिता पर बल दिया गया है। इस सिद्धान्त के अनुसार शासन का आधार जनता की सहमति है, लेकिन सरकार यदि जनता की कसौटी पर खरी नहीं उतरती है, तो जनता निर्वाचन के माध्यम से सरकार को हटा सकती है। जनहित साधना उसका उद्देश्य है।

(4) मार्क्सवादी सिद्धान्त :
साम्यवाद की विचारधारा के आधुनिक प्रवर्त्तक कार्ल मार्क्स व लेनिन के विचारों पर आधारित प्रजातन्त्र का एक नवीन सिद्धान्त 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में सामने आया। इस सिद्धान्त के अनुसार उदारवादी प्रजातान्त्रिक व्यवस्था में वास्तविक प्रजातन्त्र सम्भव नहीं है, क्योंकि इसमें शासन पर एक छोटे साधन सम्पन्न वर्ग का नियन्त्रण हो जाता है, जबकि प्रजातन्त्र जन कल्याण व उनकी समानता पर आधारित है। इस सिद्धान्त के अनुसार वास्तविक प्रजातन्त्र के लिये एक वर्ग विहीन तथा राज्यविहीन समाज की स्थापना होनी चाहिए। प्रजातन्त्र का यह सिद्धान्त राजनीतिक एवं नागरिक समानताओं की अपेक्षा आर्थिक समानता पर अधिक जोर देता है। इसकी मान्यता है कि यदि व्यक्ति के पास रोटी, कपड़ा, मकान नहीं है तो उसके पास मतदान या निर्वाचित होने का अधिकार कोई अर्थ नहीं रखता है। मार्क्सवाद वास्तविक प्रजातन्त्र की स्थापना हेतु निम्नलिखित सुझाव देता है –

  1. सम्पत्ति का समान वितरण तथा सभी की मूलभूत आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति होना।
  2. उत्पादन एवं वितरण के साधनों पर सामाजिक स्वामित्व देना।
  3. सभी के आर्थिक हित समान होने से इनके प्रतिनिधित्व के लिए एक दल-साम्यवाद दल के हाथ में शासन संचालन की सम्पूर्ण शक्ति देना।

प्रश्न 4.
भारत में प्रजातन्त्र के महत्त्व तथा स्वरूप का वर्णन कीजिए। (2009)
उत्तर:
प्रजातन्त्र का महत्त्व :
अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र-जब जनता निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से विधि निर्माण तथा शासन के कार्यों पर नियन्त्रण रखने का कार्य करती है तो उसे अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कहते हैं। वर्तमान समय में अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र ही प्रचलित है। इसमें जनता निश्चित अवधि के लिए अपने प्रतिनिधि चुनती है, जो व्यवस्थापिका का गठन करते हैं और कानूनों का निर्माण करते हैं। अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में जनता की इच्छा की अभिव्यक्ति, निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम होती है।

भारत में प्रजातन्त्र का स्वरूप :
भारत के लिए प्रजातन्त्र व प्रजातान्त्रिक संस्थाओं के विचार नवीन नहीं है। ऐसा कहा जाता है कि लगभग 3000 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्व के वैदिक काल में भारत की जनता के मध्य प्रतिनिधिक विचार-विमर्श की परम्परा थी। उत्तर वैदिककाल में शासन का गणतान्त्रिक रूप एवं स्थानीय स्वशासन की संस्थाएँ मौजूद थीं। ऋग्वेद व अथर्ववेद में सभा और समिति का वर्णन मिलता है। महाभारत के युद्ध के बाद बड़े साम्राज्य लुप्त होने लगे और कई गणतान्त्रिक राज्यों का उदय हुआ। महाजनपद काल में सोलह महाजनपद जन्मे जिनमें काशी, कोशल, मगध, कुरु, अंग, अवंति, गन्धार, वैशाली, मत्स्य इत्यादि शामिल थे।

इनमें से कुछ महाजनपदों में राजतन्त्र व अन्य में गणतन्त्र थे। महावीर और गौतम बुद्ध दोनों ही गणतन्त्र से आये थे। बौद्ध भिक्षुओं के कई नियम आधुनिक संसदीय शासन प्रणाली के नियमों से मिलते हैं। उदाहरण के लिए बैठक व्यवस्था, विभिन्न प्रकार के प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण, गणपूर्ति (कोरम) हिप, वोटों की गिनती, रोक प्रस्ताव, न्याय सम्बन्धी विचार आदि। बज्जि संघ में तो सभी लोग एक साथ एकत्रित होकर अपनी-अपनी सभाएँ करते थे। यह प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र का स्वरूप था। यह संघ छ: गणराज्यों से मिलकर बना था। मौर्यकालीन भारत में ग्रामों और नगरों में स्वशासन की व्यापक व्यवस्था थी। भारत कृषि प्रधान था जिसकी मूल इकाई स्वशासित एवं स्वतन्त्र ग्राम थे। राजनीतिक संरचना इन ग्राम समुदायों की इकाईयों पर आधारित थी। चुनी हुई पंचायत गाँव का शासन चलाती थी। गाँव के मध्य में पंचायत हुआ करती थी, जहाँ बुजुर्ग परस्पर मिला करते थे। प्रत्येक वर्ष गाँव में पंचायत का चुनाव हुआ करता था। इन पंचायतों को न्याय करने का अधिकार प्राप्त था।

पंचायत ही भूमि का बँटवारा करती थी और कर एकत्रित करके गाँव की ओर से सरकार को भी देती थी। पंचायत के चुने हुए सदस्यों से कुछ समितियों का निर्माण किया जाता था और प्रत्येक समिति एक वर्ष के लिए बनाई जाती थी। यदि कोई सदस्य विपरीत व्यवहार करे तो उसे हटाया जा सकता था। यदि कोई सदस्य जन कोष का उचित लेखा-जोखा पेश न करे तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाता था। केन्द्रीय स्तर पर राजा शासक था। यदि राजा दुर्व्यवहार करे तो उसे हटाने का प्रजा को भी अधिकार था। राजा को सलाह देने के लिए राज्य परिषद हुआ करती थी। राजा प्रजा की इच्छा के अनुसार कार्य करता था और राजा के सलाहकार (मन्त्री) स्थानीय स्तर के पंचों का सम्मान करते थे। अर्थात् प्राचीन समय में राजा के शासन का आशय प्रजा की सेवा करना था।

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प्रश्न 5.
प्रजातन्त्र की अवधारणा क्या है? वर्तमान भारतीय प्रजातन्त्र के स्वरूप का वर्णन कीजिए। (2008)
अथवा
वर्तमान भारतीय प्रजातन्त्र के स्वरूप का वर्णन कीजिए। (2013)
उत्तर:
प्रजातन्त्र की अवधारणा-राजनीतिक विकास में जो विभिन्न प्रकार की शासन व्यवस्थाएँ रहीं उनमें प्रजातन्त्र संसार की प्रमुख शासन प्रणाली मानी जाती है। इसकी प्रमुख अवधारणा यह है कि राज्य की सम्पूर्ण शक्ति की स्वामी जनता है, कोई व्यक्ति, समूह या कोई वंश नहीं। अतः जनता की सहभागिता प्रजातन्त्र का मूल आधार है। जिन निर्णयों या कार्यों का प्रभाव सभी पर पड़ता है, उन निर्णयों में सभी की भूमिका होनी चाहिए।

प्रजातन्त्र के प्रारम्भिक काल में सीमित जनसंख्या एवं सीमित क्षेत्रफल वाले छोटे राज्य होने से सारी जनता शासन संचालन सम्बन्धी निर्णयों में सहभागी होती थी। अतः सीमित क्षेत्रफल एवं सीमित जनसंख्या वाले छोटे-छोटे राज्यों में इसका व्यवहार होने लगा। यूनान के नगर राज्यों में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की शुरूआत मानी जाती है। वर्तमान राज्यों में उनके विस्तार एवं जनसंख्या की दृष्टि से बड़े होने से जनता द्वारा प्रत्यक्ष शासन सम्भव नहीं था। अत: जनता अप्रत्यक्ष रूप से अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन की शक्ति का उपयोग करती है। अतः वर्तमान में प्रजातन्त्र अप्रत्यक्ष रूप से जन प्रतिनिधियों के माध्यम से संचालित प्रजातन्त्र कहलाता है।

वर्तमान भारतीय प्रजातन्त्र-स्वतन्त्रता प्राप्त होने के कुछ समय पूर्व ही भारत में एक संविधान सभा की स्थापना की गयी थी, जिसने 26 नवम्बर, 1949 को संविधान निर्माण का कार्य पूर्ण किया और 26 जनवरी, 1950 से यह संविधान लागू किया गया। संविधान के द्वारा भारत में एक प्रजातन्त्रात्मक गणराज्य की स्थापना की गयी है और प्रजातन्त्र के आधारभूत सिद्धान्त ‘वयस्क मताधिकार’ को स्वीकार किया गया है। संविधान के द्वारा एक धर्म निरपेक्ष राज्य की स्थापना की गयी और नागरिकों को शासन के हस्तक्षेप से स्वतन्त्र रूप में मौलिक अधिकार प्रदान किये गये हैं। व्यवहार में भी भारतीय नागरिक इन स्वतन्त्रताओं का पूर्ण उपभोग कर रहे हैं। इस प्रकार यह कहा जाता है कि भारतीय संविधान आदर्श रूप में एक लोकतन्त्रात्मक संविधान है।

आज तक सम्पन्न हुए विभिन्न लोकसभा और विधान सभा चुनावों में भारतीय नागरिकों के द्वारा सक्रिय सहभागिता एवं परिपक्वता का परिचय दिया है। आपातकाल के अपवाद को छोड़कर समय से एवं निष्पक्ष चुनावों का होना, भारतीय प्रजातन्त्र की निरन्तरता का सूचक है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पन्न होने वाले पंचायतों एवं नगरीय क्षेत्रों में नगरीय निकायों के चुनाव भी भारतीय प्रजातन्त्र की व्यापकता का प्रमाण है।

भारतीय जनता लोकतन्त्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध है और भविष्य में किसी भी शासक वर्ग के द्वारा लोकतन्त्र की अवहेलना का दुस्साहस नहीं किया जा सकेगा। लेकिन लोकतन्त्रीय शासन के ढाँचे को बनाये रखना ही पर्याप्त नहीं है; लोकतन्त्र की सफलता के लिए आवश्यक है कि लोकतन्त्र के लक्ष्य को प्राप्त किया जाए और वह लक्ष्य है-सामाजिक एवं आर्थिक न्याय। हम इस लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाये हैं और दुःखद तथ्य यह है कि हम इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भी आगे नहीं बढ़ रहे हैं। भारत और भारतीय मनोभूमि में लोकतन्त्र गहरा बैठ गया है और यही भविष्य में इसकी सफलता का सबसे बड़ा आधार है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की शुरूआत मानी जाती है (2008)
(i) ब्रिटिश के नगर राज्यों से
(ii) यूनान के नगर राज्यों से
(iii) फ्रांस के नगर राज्यों से
(iv) जर्मनी के राज्यों से।
उत्तर:
(ii) यूनान के नगर राज्यों से

प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र को ‘बहुतों का शासन’ कहा है (2008)
(i) डायसी,
(ii) अब्राहम लिंकन
(iii) अरस्तू
(iv) लेनिन।
उत्तर:
(iii) अरस्तू

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र का अभिजनवादी सिद्धान्त किस शताब्दी के प्रारम्भ में प्रतिपादित हुआ?
(i) 18वीं शताब्दी के प्रारम्भ में
(ii) 19वीं शताब्दी के प्रारम्भ में
(iii) 20वीं शताब्दी के प्रारम्भ में
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(iii) 20वीं शताब्दी के प्रारम्भ में

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र का शास्त्रीय सिद्धान्त
(i) बहुलवादी सिद्धान्त भी कहलाता है
(ii) प्रजातन्त्र का विशिष्ट वर्गीय सिद्धान्त भी कहलाता है
(iii) उदारवादी सिद्धान्त भी कहलाता है
(iv) अभिजनवादी सिद्धान्त भी कहलाता है।
उत्तर:
(iii) उदारवादी सिद्धान्त भी कहलाता है

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प्रश्न 5.
प्रथम महायुद्ध के पश्चात् 1990 तक साम्यवाद की विचारधारा का प्रयोग हुआ
(i) स्विट्जरलैण्ड में
(ii) ब्रिटेन में
(iii) सोवियत संघ में
(iv) फ्रांस में।
उत्तर:
(iii) सोवियत संघ में

प्रश्न 6.
भारत में आपातकाल लागू हुआ
(i) 1970-1972
(ii) 1972-1974
(iii) 1975-1977
(iv) 1978-1980
उत्तर:
(iii) 1975-1977

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. ………. जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा संचालित शासन है। (2017)
  2. निश्चित भू-भाग, जनसंख्या, सरकार और सम्प्रभुता से निर्मित समूह ………… कहलाता है। (2011)
  3. वर्तमान में भारत विश्व का सबसे बड़ा ……….. देश है। (2012)
  4. स्वतन्त्रता प्राप्ति के उपरान्त भारतीय संविधान ………. में लागू हुआ। (2009)

उत्तर:

  1. प्रजातन्त्र
  2. राज्य
  3. प्रजातांत्रिक
  4. 26 जनवरी, 1950।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
शोषण की अवधारणा प्रजातन्त्र की है। (2017)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 2.
वर्तमान समय में अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र ही प्रचलित है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र में स्वतन्त्र व निष्पक्ष चुनाव होना चाहिए। (2015)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र में उत्तरदायी शासन व्यवस्था नहीं होती। (2009)
उत्तर:
असत्य

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प्रश्न 5.
डायसी ने प्रजातन्त्र को ‘बहुतों का शासन’ कहा है। (2014)
उत्तर:
असत्य।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 12 प्रजातन्त्र - 1

उत्तर:

  1. → (घ)
  2. → (ग)
  3. → (ख)
  4. → (ङ)
  5. → (क)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
राज्य की. सर्वोच्च सत्ता। (2016)
उत्तर:
सम्प्रभुता

प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र का मार्क्सवादी सिद्धान्त किस अधिकार पर बल देता है?
उत्तर:
आर्थिक समानता

प्रश्न 3.
‘प्रजातन्त्र, जनता का, जनता के लिये, जनता द्वारा संचालित शासन है’ यह कथन किसका है? (2009)
उत्तर:
अब्राहम लिंकन का

प्रश्न 4.
स्विट्जरलैण्ड के राजनैतिक प्रशासनिक प्रान्त/इकाई। (2016)
उत्तर:
कैण्टन

प्रश्न 5.
कौन-सी अवधारणा प्रजातन्त्र की है? (2013)
उत्तर:
स्वतन्त्रता।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र आरम्भिक काल में किन निर्णयों में सहभागी होती थी ?
उत्तर:
प्रजातन्त्र के आरम्भिक काल में सीमित जनसंख्या एवं सीमित क्षेत्रफल वाले छोटे राज्य होने से सारी जनता शासन संचालन सम्बन्धी निर्णयों में सहभागी होती थी।

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प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रजातन्त्र एक ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें शासन की शक्ति जनता के पास होती है और शासन . संचालन जनता स्वयं प्रत्यक्ष रूप से या अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से करती है।

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र के बहुलवादी सिद्धान्त की मूल धारणा क्या है?
उत्तर:
सत्ता का विकेन्द्रीकरण इस सिद्धान्त की मूल धारणा है।

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र के मार्क्सवादी सिद्धान्त के अनुसार किस प्रकार के समाज की स्थापना होनी चाहिए?
उत्तर:
प्रजातन्त्र के मार्क्सवादी सिद्धान्त के अनुसार सच्चे प्रजातन्त्र के लिये एक वर्ग विहीन तथा राज्य विहीन समाज की स्थापना होनी चाहिए।

प्रश्न 5.
प्रजातन्त्र के प्रमुख प्रकार लिखिए।
उत्तर:
साधारणतः प्रजातन्त्र दो प्रकार का होता है-प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र और अप्रत्यक्ष या प्रतिनिधि मूलक प्रजातन्त्र।

प्रश्न 6.
प्रजातन्त्र की रक्षा के लिए किस प्रकार का संविधान होना आवश्यक है?
उत्तर:
प्रजातन्त्र की रक्षा के लिए लिखित संविधान का होना आवश्यक है।

प्रश्न 7.
भारतीय प्रजातन्त्र की आंशिक पूर्वपीठिका किसे कहा गया?
उत्तर:
ब्रिटिश संसद द्वारा पारित अधिनियम एवं भारत में ब्रिटिश शासन द्वारा बनाये गये कानून, वर्तमान भारतीय प्रजातन्त्र की आंशिक पूर्वपीठिका कही जा सकती है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र :
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में राज्य की प्रभुता सम्पन्न जनता प्रत्यक्ष रूप से शासन के कार्यों में भाग लेती है, नीति निर्धारित करती है, कानून बनाती है और प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त कर उन पर नियन्त्रण रखती है।

प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कम जनसंख्या वाले एवं छोटे आकार वाले राज्यों में ही सम्भव है। वर्तमान में बड़े आकार वाले राष्ट्रों में जहाँ नागरिकों की संख्या करोड़ों में होती है, प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र सम्भव नहीं है। वर्तमान में स्विट्जरलैण्ड के कुछ कैंटनों एवं भारत में पंचायत राज व्यवस्था के अन्तर्गत ग्रामसभाओं में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की व्यवस्था है।

प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र का महत्त्व स्पष्ट कीजिए। (2008, 09, 11)
उत्तर:
प्रजातन्त्र का महत्त्व :
प्रजातन्त्र स्वतन्त्रता, समानता, सहभागिता और भाई-चारे की भावना पर आधारित शासन व्यवस्था है। इसे हम एक सामाजिक व्यवस्था भी कह सकते हैं। इसके अन्तर्गत मानव का सम्पूर्ण जीवन इस लोकतन्त्रीय मान्यता पर आधारित होता है कि प्रत्येक व्यक्ति को समाज में समान महत्त्व एवं व्यक्तित्व की गरिमा प्राप्त है। व्यक्ति के महत्त्व की यह स्थिति यदि जीवन के केवल राजनीतिक क्षेत्र में ही हो, तो प्रजातन्त्र अधूरा रहता है। प्रजातन्त्र की पूर्णता के लिए यह अनिवार्य है कि जीवन के राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक तीनों ही क्षेत्रों में सभी व्यक्तियों को अपने विकास के समान अवसर प्राप्त हों।

मानव जीवन के राजनीतिक क्षेत्र में प्रजातन्त्र से आशय ऐसी राजनीतिक व्यवस्था से है जिसमें निर्णय लेने की शक्ति किसी एक व्यक्ति में न होकर जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों में निहित होती है। सामाजिक क्षेत्र में प्रजातन्त्र से आशय इस प्रकार के समाज से है, जिसमें जाति, धर्म, रंग, लिंग, नस्ल, मूलवंश व सम्पत्ति के आधार पर भेद-भाव न हो।

आर्थिक क्षेत्र में प्रजातन्त्र से आशय इस प्रकार की व्यवस्था से है जिसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आजीविका चुनने या व्यवसाय करने की स्वतन्त्रता प्राप्त हो। अर्थात् व्यक्ति को रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य, शिक्षा रोजगार आदि की सुविधाएँ प्रजातन्त्र के आधार हैं। अतः प्रजातन्त्र न केवल शासन का एक विशेष प्रकार है बल्कि यह जीवन के प्रति एक विशिष्ट दृष्टिकोण है।

प्रश्न 3.
“स्वतन्त्रता प्रजातंत्र की आत्मा है।” कथन की पुष्टि कीजिए। (2015)
उत्तर:
प्रजातंत्र में नागरिकों के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक प्रकार की स्वतन्त्रताएँ प्राप्त होती हैं। राजनैतिक स्वतन्त्रता के अतिरिक्त नागरिकों को अनेक प्रकार की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतन्त्रताओं के अधिकार भी प्राप्त होते हैं। प्रजातंत्र में नागरिकों को मत देने, निर्वाचित होने, सार्वजनिक पद ग्रहण करने, भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता सूचना प्राप्त करने का अधिकार सम्मेलन सभा करने, समूह बनाने, व्यापार व्यवसाय करने आदि की स्वतन्त्रताएँ प्राप्त होती हैं। नागरिक यदि शासन की नीतियों से असहमत हों, तो संयमित विरोध की स्वतन्त्रता भी उन्हें प्राप्त है। स्वतन्त्रता प्रजातंत्र की आत्मा है। बिना स्वतन्त्रता प्रजातंत्र सम्भव नहीं है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र के प्रकारों का वर्णन कीजिए।(2011)
अथवा
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में अन्तर लिखिए। (2012)
उत्तर:
साधारणतः प्रजातन्त्र दो प्रकार का होता है –
(1) प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र :
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में राज्य की प्रभुता सम्पन्न जनता प्रत्यक्ष रूप से शासन के कार्यों में भाग लेती है, नीति निर्धारित करती है, कानून बनाती है और प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त कर उन पर नियन्त्रण रखती है।

प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कम जनसंख्या वाले एवं छोटे आकार वाले राज्यों में ही सम्भव है। वर्तमान में बड़े आकार वाले राष्ट्रों में जहाँ नागरिकों की संख्या करोड़ों में होती है, प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र सम्भव नहीं है। वर्तमान में स्विट्जरलैण्ड के कुछ कैंटनों एवं भारत में पंचायत राज व्यवस्था के अन्तर्गत ग्रामसभाओं में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की व्यवस्था है।

(2) अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र :
जब जनता निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से विधि निर्माण तथा शासन के कार्यों पर नियन्त्रण रखने का कार्य करती है तो उसे अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कहते हैं। वर्तमान समय में अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र ही प्रचलित है। इसमें जनता निश्चित अवधि के लिए अपने प्रतिनिधि चुनती है, जो व्यवस्थापिका का गठन करते हैं और कानूनों का निर्माण करते हैं। अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में जनता की इच्छा की अभिव्यक्ति, निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम होती है।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Chapter 13 अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Maths Chapter 13 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दोनों ओर से खली एक बेलनाकार टयूब एक लोहे की चादर की बनी है, जिसकी मोटाई 2 cm है। यदि इसका व्यास 16 cm और लम्बाई 100 cm है, तो ज्ञात कीजिए कि इस को
बनाने में कितने cm³ लोहे का प्रयोग किया गया ?
हल :
दिया है: एक बेलनाकार ट्यूब के आधार का बाह्य व्यास d = 16 cm
⇒ त्रिज्या r1 = 16/2 = 8 cm
और लम्बाई (लम्बाई) h = 100 cm तथा धातु की मोटाई = 2 cm.
⇒ आधार की आन्तरिक त्रिज्या r2 = 8 – 2 = 6 cm
लोहे का आयतन = π(r12 – r22) h = \(\frac { 22 }{ 7 }\) [(8)² – (6)²] x 100
= \(\frac { 22 }{ 7 }\) (64 – 36) x 100
= \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 28 x 100
= 8800 cm³
अत: लोहे का अभीष्ट आयतन = 8800 cm³.

प्रश्न 2.
28 cm व्यास वाली एक अर्द्धवृताकार धातु की चादर को मोड़कर एक शंकु के आकार का खुला कप बनाया गया है। इस कप की धारिता ज्ञात कीजिए।
हल :
ज्ञात है : 28 cm व्यास वाले एक अर्द्धवृताकार धातु की चादर को मोड़कर एक शंकु के आकार में मोड़ा गया है जिसकी तिर्यक ऊँचाई l = \(\frac { 28 }{ 2 }\) = 14 cm तथा आधार की परिधि
2πr’ = π x 14 cm
⇒ r’ = 14/2 = 7 cm
शंकु की ऊँचाई \(h=\sqrt{l^{2}-\left(r^{\prime}\right)^{2}}\)
\(=\sqrt{(14)^{2}-(7)^{2}}\)
\(=\sqrt{196-49}\)
= √147
= 7√3 cm
कप की धारिता = शंकु का आयतन = \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h\)
⇒ \(V=\frac{1}{3} \times \frac{22}{7} \times(7)^{2} \times 7 \sqrt{3}\)
= 622.38 cm³ (लगभग)
अतः कप की अभीष्ट धारिता = 622.38 cm³. (लगभग)

प्रश्न 3.
165 m² क्षेत्रफल वाले एक कपड़े को 5 m त्रिज्या वाले एक शंक्वाकार तम्बू के रूप में बनाया जाता है।
(i) इस तम्बू में कितने विद्यार्थी बैठ सकते हैं, यदि औसतन एक विद्यार्थी भूमि पर \(\frac { 5 }{ 7 }\) m² स्थान घेरता है ?
(ii) इस शंकु का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
∵ शंक्वाकार तम्बू का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = कपड़े का क्षेत्रफल
πrl = \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 5 x l= 165
\(l=\frac{165 \times 7}{22 \times 5}=\frac{21}{2}=10 \cdot 5 \mathrm{m}\)
शंकु की ऊँचाई \(h=\sqrt{l^{2}-r^{2}}\)
\(=\sqrt{(10 \cdot 5)^{2}-(5)^{2}}\)
\(h=\sqrt{110 \cdot 25-25}=\sqrt{85 \cdot 25}\)
= 9.233 m

(i) वृत्ताकार आधार का क्षेत्रफल = πr² = \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (5)² = \(\frac { 550 }{ 7 }\) m²
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 1
\(=\frac{550 / 7}{5 / 7}\)
= 110
अतः विद्यार्थियों की अभीष्ट संख्या = 110.

(ii) तम्बू का आयतन \(V=\frac{1}{3} \pi r^{2} h=\frac{1}{3} \times \frac{22}{7} \times 5^{2} \times 9 \cdot 233\)
= 241.81
अतः शंकु का अभीष्ट आयतन = 241.81 m³.

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प्रश्न 4.
किसी फैक्ट्री के लिए पानी एक अर्द्धगोलाकर टंकी से संचरित किया जाता है जिसका आन्तरिक व्यास 14 m है। इस टंकी में 50 किलोलीटर पानी है। इस टंकी को पूरा भरने के लिए पम्प द्वारा भरा जाता है। टंकी में पम्प द्वारा भरे गए पानी का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : अर्द्धगोलाकार टंकी का आन्तरिक व्यास d = 14 m
त्रिज्या R = d/2 = 14/2 = 7 cm टंकी में पानी 50 किलोलीटर
टंकी की धारिता \(V=\frac{2}{3} \pi R^{3}=\frac{2}{3} \times \frac{22}{7} \times(7)^{3}\)
= \(\frac { 2156 }{ 3 }\)
= 718.67 m³
= 718.67 kL
पम्प द्वारा भरा गया पानी = 718.67 – 50
= 668.67 kL
अतः पम्प द्वारा भरे गए पानी का आयतन = 668.67 kL.

प्रश्न 5.
दो गोलों के आयतनों का अनुपात 64 : 27 है, उनके पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए गोलों के आयतन V1 एवं V2, पृष्ठीय क्षेत्रफल S1 और S2 तथा त्रिज्याएँ R1 और R2 हैं। दिया है : V1 : V2 = 64 : 27
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 2
अत: गोलों के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात = 16 : 9.

प्रश्न 6.
4 cm भुजा वाले एक घन के अन्दर एक गोला जो उसके तलों को स्पर्श करता है। इन दोनों के बीच में रिक्त स्थान का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : घन की प्रत्येक भुजा 4 cm, घन के अन्दर एक गोला उसके तलों को स्पर्श करता हुआ अतः गोले कां व्यास = धन की भुजा
d = 4 cm
R = \(\frac { 4 }{ 2 }\) = 2 cm,
गोले का आयतन = \(=\frac{4}{3} \pi R^{3}=\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(2)^{3}\)
\(=\frac{22 \times 32}{21}=\frac{704}{21}\)
= 33.52 cm³
एवं घन का आयतन = (a)³ = (4)³ = 64 cm³
रिक्त स्थान का आयतन = 64 – 33.52
= 30.48 cm³
अतः अभीष्ट रिक्त स्थान का आयतन = 30.48 cm³.

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प्रश्न 7.
एक ही त्रिज्या वाले एक गोले और एक लम्बवृत्तीय बेलन के आयतन बराबर हैं। बेलन का व्यास उसकी ऊँचाई से कितने प्रतिशत अधिक है ?
हल :
दिया है : बेलन की त्रिज्या = गोले की त्रिज्या = R मात्रक
मान लीजिए बेलन की ऊँचाई = h मात्रक, बेलन का आयतन = गोले का आयतन (दिया है)
πR²h = \(\frac { 4 }{ 3 }\)πR³
बेलन की ऊँचाई h = \(\frac { 4 }{ 3 }\)R
बेलन का व्यास d = 2R
बेलन का व्यास – बेलन की ऊँचाई \(=2 R-\frac{4}{3} R=\frac{6 R-4 R}{3}=\frac{2}{3} R\)
प्रतिशत अधिकता \(=\frac{2 / 3 R}{4 / 3 R} \times 100\)
= 50%
अतः बेलन का व्यास बेलन की ऊँचाई से 50% अधिक है।

प्रश्न 8.
30 वृत्ताकार प्लेटों को जिनमें से प्रत्येक की त्रिज्या 14 cm है और मोटाई 3 cm है, एक के ऊपर एक रखकर एक बेलनाकार ठोस बनाया गया है। इस प्रकार बने बेलन का ज्ञात कीजिए
(i) कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल
(ii) आयतन।
हल :
ज्ञात है : बने बेलन की त्रिज्या = वृत्ताकार प्लेट की त्रिज्या = 14 cm,
बने बेलन की ऊँचाई h = प्लेटों की संख्या x मोटाई = 30 x 3 = 90 cm
(i) बेलन का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr (h + r)
= 2 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 14(90 + 14)
= 88 x 104
= 9152 cm²
अतः बेलन का अभीष्ट कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 9152 cm².

(ii) बेलन का आयतन = πr²h = \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (14)² x 90
= 55440 cm³
अतः बेलन का अभीष्ट आयतन = 55440 cm³.

MP Board Class 9th Maths Chapter 13 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक 16 cm x 8 cm x 8 cm आन्तरिक विमाओं वाले आयताकार पेटी में, धातु के गोले पैक किए जाते हैं जिनमें से प्रत्येक की त्रिज्या 2 सेमी है। 16 गोले पैक किए (रखे) जाने पर पेटी को एक परिरक्षक द्रव से भर दिया जाता है। इस द्रव का आयतन ज्ञात कीजिए। अपना उत्तर निकटतम पूर्णांक तक दीजिए। (π = 3.14 का प्रयोग कीजिए।)
हल :
पेटी की धारिता = 16 x 8 x 8 = 1024 cm³
1 गोले का आयतन \(=\frac{4}{3} \pi R^{3}=\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(2)^{3}\)
\(=\frac{32 \times 22}{21}=\frac{704}{21}\)
= 33.524 cm
गोलों का आयतन V2 = 16 x 33.524
= 536.384 cm³
= 536 cm³
(निकटतम पूर्णांक से) द्रव का आयतन = पेटी का आयतन – 16 गोलों का आयतन
= 1024 – 536
= 488 cm³
अतः द्रव का अभीष्ट आयतन = 488 cm³.

प्रश्न 2.
पानी को संचरित करने वाली एक टंकी एक घन के आकार की है। इसे पूरा भरने पर इसमें पानी का आयतन 15.625 m³ है। यदि इस टंकी में पानी की गहराई 1.3 m है, तो इस टंकी
में से पहले से प्रयुक्त किए गए पानी का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
माना घनाकार टंकी की एक भुजा = a m है, तो टंकी का आयतन = a³ = 15.625 (दिया गया है)
a³ = (2.5)³ = a = 2.5 m
प्रयुक्त पानी का ऊँचाई h = 2.5 – 1.3 = 1.2 m
प्रयुक्त पानी का आयतन V = 2.5 x 2.5 x 1.2 = 7.5 m³
अतः पहले से प्रयुक्त पानी का अभीष्ट आयतन = 7.5 m³.

प्रश्न 3.
यदि 4.2 cm व्यास वाली एक गोलाकार गेंद को पूर्णतः पानी में डुबो दिया जाए तो उसके द्वारा विस्थापित पानी का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : गोलाकार गेंद का व्यास d = 4.2 cm ⇒ त्रिज्या R = 2.1 cm
चूँकि हटाए गए पानी का आयतन = गोलाकार गेंद का आयतन
⇒ हटाए गए पानी का आयतन = \(\frac{4}{3} \pi R^{3}=\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(2 \cdot 1)^{3} \cdot \mathrm{cm}^{3}\)
= 88 x 2.1 x 2.1 x 0.1
= 38.808 cm³
अतः गेंद द्वारा हटाए गए पानी का अभीष्ट आयतन = 38:808 cm³.

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प्रश्न 4.
उस शंक्वाकार तम्बूको बनाने में लगे कैनवासका क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए जिसकी ऊँचाई 3.5m है तथा आधार की त्रिज्या 12 m है।
हल :
शंकु की ऊँचाई h = 3.5 m एवं त्रिज्या 12 मीटर दी गई है।
शंक्वाकार तम्बू की तिर्यक ऊँचाई
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 3
कैनवास का क्षेत्रफल = शंक्वाकार तम्बू का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल
= πrl
= \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 12 x 12.5
= \(\frac { 3300 }{ 7 }\)
= 471.43 m²
अतः कैनवास का अभीष्ट क्षेत्रफल = 471.43 m².

प्रश्न 5.
एक ही धातु के बने दो ठोस गोलों का भार 5920g और 740g है। यदि छोटे गोले का व्यास 5 cm है तो बड़े गोले की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : बड़े गोले का द्रव्यमान m1 = 5920 g एवं छोटे गोले का द्रव्यमान m2 = 740g
छोटे गोले का व्यास d1 = 5 cm ⇒ उसकी त्रिज्या r2 = 5/2 cm
मान लीजिए बड़े गोले की त्रिज्या r1 तथा धातु का घनत्व d है, तो
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 4
अत: बड़े गोले की अभीष्ट त्रिज्या = 5 cm.

प्रश्न 6.
कोई स्कूल अपने विद्यार्थियों को प्रतिदिन 7 cm व्यास वाले बेलनाकार गिलासों में दूध देता है। यदि गिलास दूध से 12 cm ऊँचाई तक भरा जाता है, तो ज्ञात कीजिए कि 1600 विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन कितने लीटर दूध की आवश्यकता होगी ?
हल :
दिया है : बेलनाकार गिलास का व्यास d = 7 cm ⇒ त्रिज्या r = 7/2 cm
गिलास में दूध स्तम्भ की ऊँचाई h = 12 cm तथा स्कूल में छात्रों की संख्या = 1600
1 गिलास में दूध का आयतन = πr²h
= \(\frac{22}{7} \times\left(\frac{7}{2}\right)^{2} \times 12 \mathrm{cm}^{3}\)
= 462 cm³
1600 विद्यार्थियों के लिए आवश्यक दूध = 1600 x 462 cm³
= 739200 cm³
= 739.2 लीटर
अतः आवश्यक अभीष्ट दूध = 739.2 लीटर।

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प्रश्न 7.
2.5 m लम्बे और 1.75m त्रिज्या वाले एक बेलनाकार रोलर (roller) को जब सड़क पर रोल किया गया, तो पाया गया कि उसने 5500 m² के क्षेत्रफल को तय कर लिया। रोलर ने कितने चक्कर लगाए ?
हल :
रोलर की लम्बाई l = 2.5 m एवं त्रिज्या r = 1.75 m
तय किया गया कुल क्षेत्रफल = 5500 m²
रोलर का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
= 2 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 1.75 x 2.5 m³
= 44 x 0.25 x 2.5
= 27.5 m²
चूँकि रोलर द्वारा लगाए गए चक्करों की संख्या
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 5
अतः रोलर द्वारा लगाए गए अभीष्ट चक्कर = 200.

प्रश्न 8.
5000 जनसंख्या वाले एक छोटे गाँव में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 75 लीटर पानी की आवश्यकता है। इस गाँव में 40 m x 25 m x 15 m मापन की एक उपरि टंकी हैं। इस टंकी का पानी कितने दिन तक पर्याप्त रहेगा?
हल :
टंकी का आयतन V = 40 x 25 x 15
= 15,000 m³
= 15,000 x 1000
= 1,50,00,000 लीटर
एक दिन में गाँव में पानी की आवश्यकता = 5000 x 75 लीटर
= 3,75,000 लीटर
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 6
अतः टंकी का पानी अभीष्ट 40 दिन तक पर्याप्त होगा।

प्रश्न 9.
एक दुकानदार के पास 5 cm त्रिज्या का एक लड्डू है। इतनी ही सामग्री से 2.5 cm त्रिज्या वाले कितने लड्डू बनाए जा सकते हैं ?
हल :
दिया है : बड़े लड्डू की त्रिज्या r1 = 5 cm और छोटे की त्रिज्या r2 = 2.5 cm
मान लीजिए छोटे लड्डुओं की संख्या n है, तो
बड़े लड्डू का आयतन = n छोटे लड्डुओं का आयतन
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 7
अतः 8 नए लड्डू बनाए जा सकते हैं।

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प्रश्न 10.
6 cm, 8 cm और 10 cm वाले एक समकोण त्रिभुज को 8 cm वाली भुजा के परितः घुमाया जाता है। इस प्रकार बनने वाले ठोस का आयतन और वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : 6 cm, 8 cm एवं 10 cm भुजाओं वाले एक समकोण त्रिभुज को 8 सेमी वाली भुजा के परितः घुमाने पर बना ठोस एक लम्बवृत्तीय शंकु है जिसके आधार की त्रिज्या r = 6 cm, ऊँचाई h = 8 cm एवं तिर्यक ऊँचाई l = 10 cm है।
शंक्वाकार ठोस शंकु का आयतन = \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h=\frac{1}{3} \times \frac{22}{7} \times(6)^{2} \times 8\)
ठोस का आयतन = \(\frac { 6336 }{ 21 }\)
= 301.7 cm³ (लगभग)
शंक्वाकार ठोस का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = πrl = \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 6 x 10
= \(\frac { 1320 }{ 7 }\)
= 188.6 cm² (लगभग)
अतः ठोस का अभीष्ट आयतन = 301.7 cm³ (लगभग)
एवं वक्र पृष्ठीय अभीष्ट क्षेत्रफल = 188.6 cm² (लगभग)।।

प्रश्न 11.
यदि घन की कोर 12 cm है, तो घन का आयतन ज्ञात कीजिए। (2019)
हल :
दिया है : घन की कोर a = 12 cm
∵ घन का आयतन V = a³
⇒ घन का आयतन V= (12)³
= 1728 cm³
अतः घन का अभीष्ट आयतन = 1728 cm³.

प्रश्न 12.
एक घन की भुजा 4 cm है, तो उसका सम्पूर्ण पृष्ठ ज्ञात कीजिए। (2019)
हल :
दिया है : घन की भुजा a = 4 cm
∵ घन का सम्पूर्ण पृष्ठ Sw = 6a²
⇒ घन का सम्पूर्ण पृष्ठ = 6 x (4)²
= 96 cm²
अतः घन का अभीष्ट सम्पूर्ण पृष्ठ = 96 cm².

MP Board Class 9th Maths Chapter 13 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

निम्नलिखित में से प्रत्येक में सत्य या असत्य लिखिए और अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।

प्रश्न 1.
एक गोले का आयतन उस बेलन के आयतन का \(\frac { 2 }{ 3 }\) होता है जिसकी ऊँचाई और व्यास गोले के व्यास के बराबर हैं।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि गोले का आयतन = \(\frac{4}{3} \pi r^{3}=\frac{2}{3} \pi r^{2}(2 r)\) = बेलन का आयतन।

प्रश्न 2.
यदि एक लम्बवृत्तीय शंकु की त्रिज्या आधी कर दी जाए और ऊँचाई दो गुनी कर दी जाए, तो उसके आयतन में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
उत्तर-
कथन असत्य है, क्योंकि नया आयतन प्रारम्भिक आयतन का आधा है।

प्रश्न 3.
एक लम्बवृत्तीय शंकु की ऊँचाई, त्रिज्या और तिर्यक ऊँचाई सदैव एक समकोण त्रिभुज की भुजाएँ नहीं होती हैं।
उत्तर-
कथन असत्य है, क्योंकि r² + h² = l² समकोण त्रिभुज की सदैव भुजाएँ होती हैं।

प्रश्न 4.
यदि एक बेलन की त्रिज्या दुगनी कर दी जाए तथा उसके वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल में कोई परिवर्तन न किया जाए तो उसकी ऊँचाई अवश्य ही आधी हो जाएगी।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि 2πrh = 2π (2r) x h/2

प्रश्न 5.
किनारे 2r वाले एक घन में समावेशित किए जा सकने वाले सबसे बड़े लम्बवृत्तीय शंकु का आयतन त्रिज्या r वाले अर्द्धगोले के आयतन के बराबर होता है।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि शंकु का आयतन = \(\frac { 1 }{ 3 }\)πr²(2r)
= \(\frac { 2 }{ 3 }\)πr³ = अर्द्धगोले का आयतन।

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प्रश्न 6.
एक बेलन और एक लम्बवृत्तीय शंकु के समान आधार और समान ऊँचाई है। बेलन का आयतन शंकु के आयतन का तीन गुना होगा।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि बेलन का आयतन = πr²h
= 3 x \(\frac { 1 }{ 3 }\) πr²h
= 3 x शंकु का आयतन।

प्रश्न 7.
एक शंकु, अर्द्धगोला और बेलन समान आधार और समान ऊँचाई के हैं। इनके आयतनों में अनुपात 1 : 2 : 3 है।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि शंकु का आयतन : अर्द्धगोले का आयतन : बेलन का आयतन
= \(\frac{1}{3} \pi r^{2} r : \frac{2}{3} \pi r^{3} : \pi r^{2} . r\)
= 1 : 2 : 3.

प्रश्न 8.
यदि किसी घन के विकर्ण की लम्बाई 6√3 है तो इसके किनारे की लम्बाई 3 cm है।
उत्तर-
कथन असत्य है, क्योंकि a√3 = 6√3
= a = 6 cm होगी।

प्रश्न 9.
यदि एक गोला एक घन के अन्तर्गत हैं तो घन के आयतन का गोले के आयतन में अनुपात 6 : π है।
उत्तर-
कथन सत्य है क्योंकि घन का आयतन a³ : गोले का आयतन , \(\frac { 4 }{ 3 }\)π(a/2)³
= a³ : π/6 a³ ⇒ 6 : π.

प्रश्न 10.
यदि एक बेलन की त्रिज्या दुगनी कर दी जाए और उसकी ऊँचाई आधी कर दी जाए तो उसका आयतन दो गुना हो जाएगा।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि नया आयतन = π(2r)² h/2 = 2πr²h
⇒ नया आयतन = 2 x पुराना आयतन।

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MP Board Class 9th Maths Chapter 13 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यदि एक गोले की त्रिज्या 2r है, तो उसका आयतन होगा :
(a) \(\frac{4}{3} \pi r^{3}\)
(b) \(4 \pi r^{2}\)
(c) \(\frac{8 \pi r^{3}}{3}\)
(d) \(\frac{32 \pi r^{3}}{3}\)
उत्तर:
(d) \(\frac{32 \pi r^{3}}{3}\)

प्रश्न 2.
एक घन का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल 96 cm है। घन का आयतन है :
(a) 8 cm³
(b) 512 cm³
(c) 64 cm³
(d) 27 cm³.
उत्तर:
(c) 64 cm³

प्रश्न 3.
एक शंकु की ऊँचाई 8.4 cm है। और उसके आधार की त्रिज्या 2.1 cm है। इसे पिघलाकार एक गोले के रूप में ढाला जाता है। गोले की त्रिज्या है :
(a) 4.2 cm
(b) 2.1 cm
(c) 2.4 cm
(d) 1.6 cm.
उत्तर:
(b) 2.1 cm

प्रश्न 4.
यदि एक बेलन की त्रिज्या दो गुनी कर दी जाए और ऊँचाई आधी कर दी जाए तो उसका वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल :
(a) आधा हो जायेगा
(b) दो गुना हो जायेगा
(c) वही रहेगा
(d) चार गुना हो जायेगा।
उत्तर:
(c) वही रहेगा

प्रश्न 5.
एक शंकु जिसकी त्रिज्या r/2 है और तिर्यक ऊँचाई 2l है का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा :
(a) 2πr (1 + r)
(b) πr (1 + r/4)
(c) πr (1 + r)
(d) 2πrl.
उत्तर:
(b) πr (1 + r/4)

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प्रश्न 6.
दो बेलनों की त्रिज्याएँ 2 : 3 के अनुपात में हैं तथा उनकी ऊँचाइयों का अनुपात 5 : 3 है। इनके आयतनों का अनुपात है :
(a) 10 : 17
(b) 20 : 27
(c) 17 : 27
(d) 20 : 37.
उत्तर:
(b) 20 : 27

प्रश्न 7.
एक घन का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल 256 m² है। घन का आयतन है :
(a) 512 m³
(b) 64 m³
(c) 216 m³
(d) 256 m³.
उत्तर:
(a) 512 m³

प्रश्न 8.
16 m लम्बे, 12 m चौड़े तथा 4 m गहरे एक गड्ढे में रखे जा सकने वाले 4 m x 50 cm x 20 cm विमाओं वाले बॉक्सों की संख्या :
(a) 1900
(b) 1920
(c) 1800
(d) 1840.
उत्तर:
(b) 1920

प्रश्न 9.
10 m x 10 m x 5 m विमाओं वाले एक कमरे में रखे जा सकने वाले सबसे लम्बे डण्डे की लम्बाई
(a) 15 m
(b) 16 m
(c) 10 m
(d) 12 m.
उत्तर:
(a) 15 m

प्रश्न 10.
एक अर्द्धगोलाकार गुब्बारे में हवा भरने पर उसकी त्रिज्या 6 cm से बढ़कर 12 cm हो जाती है। दोनों स्थितियों में गुब्बारे के पृष्ठीय क्षेत्रफल का अनुपात है :
(a) 1 : 4
(b) 1 : 3
(c) 2 : 3
(d) 2 : 1.
उत्तर:
(a) 1 :4

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प्रश्न 11.
बेलन का वक्र पृष्ठ है :
(a) πr²h
(b) πr (r + h)
(c) 2πrh
(d) \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h\)
उत्तर:
(c) 2πrh

प्रश्न 12.
शंकु का आयतन है:
(a) πr²h1
(b) \(\frac{4}{3} \pi r^{2} h\)
(c) \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h\)
(d) 4a²h
उत्तर:
(c) \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h\)

प्रश्न 13.
एक बेलन का व्यास 14 cm है तथा इसकी ऊँचाई 7 cm है, तब इस बेलन का आयतन है :
(a) 7π cm³
(b) 49π cm³
(c) 343π cm³
(d) 443π cm³.
उत्तर:
(c) 343π cm³

प्रश्न 14.
एक घन के विकर्ण की लम्बाई 15√3 cm है तो घन की भुजा की लम्बाई होगी :
(a) 30√2 cm
(b) 15 cm
(c) 5√2 cm
(d) 30 cm.
उत्तर:
(b) 15 cm

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प्रश्न 15.
एक शंकु की तिर्यक ऊँचाई 13 cm है तथा त्रिज्या 5 cm है तो इसकी ऊँचाई है:
(a) 5 cm
(b) 22 cm
(c) 12 cm
(d) 18 cm.
उत्तर:
(c) 12 cm

प्रश्न 16.
अर्द्ध गोले का आयतन होगा : (2019)
(a) \(\frac{4}{3} \pi r^{3}\)
(b) \(\frac{2}{3} \pi r^{3}\)
(c) 2πr²
(d) 4πr²
उत्तर:
(b) \(\frac{2}{3} \pi r^{3}\)

प्रश्न 17.
यदि घन की भुजा 3 cm है, तो उसका आयतन होगा : (2019)
(a) 3 cm³
(b) 9 cm³
(c) 54 cm³
(d) 27 cm³
उत्तर:
(d) 27 cm³

प्रश्न 18.
घन के सम्पूर्ण पृष्ठ का सूत्र है : (2019)
(a) 6a²
(b) 4a²
(c) a³
(d) abc.
उत्तर:
(a) 6a²

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. एक घनाभ की कोरों की लम्बाइयाँ 3 cm, 4 cm एवं 5 cm हों तो उनके विकर्ण की लम्बाई ………… होगी।
2. किसी घन की कोर 2a हो, तो इसके विकर्ण की लम्बाई ………. होगी।
3. घनाभ के विकर्ण की लम्बाई का सूत्र ………. है। (2018)
4. एक घनाभ में कुल फलकों (तलों) की संख्या ………….. होती है।
5. एक ही केन्द्र के दो भिन्न त्रिज्याओं के गोलों से घिरे ठोस भाग को ………… कहते हैं।
6. बेलन का आयतन ………… होता है। (2019)
उत्तर-
1. 5√2 cm,
2. 2√3a,
3. \(d=\sqrt{l^{2}+b^{2}+h^{2}}\)
4. छ:
5. गोलीय कोश,
6. πr²h

जोड़ी मिलान

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 8
उत्तर-
1. →(c),
2. →(d),
3. →(e),
4. →(a),
5. →(b).

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सत्य/असत्य कथन

1. बेलन के सम्पूर्ण पृष्ठ का क्षेत्रफल = 2πrh
2. शंकु के पार्श्व पृष्ठ का क्षेत्रफल = πrl
3. गोले का पार्श्व पृष्ठ = 4/3 πR²
4. घनाभ का सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2 (lb + bh + hl)
5. घन का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6a²
6. बेलन का आधार वृत्ताकार होता है।
उत्तर-
1. असत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य,
6. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. वह समान्तर षट्फलक जिसका प्रत्येक फलक आयत हो, क्या कहलाता है?
2. वह समान्तर षट्फलक जिसका प्रत्येक फलक एक वर्ग हो, क्या कहलाता है?
3. किसी आयत को उसकी एक भुजा के परितः घुमाने पर बना ठोस क्या कहलाता है?
4. किसी अर्द्धवृत्त को उसके व्यास के परितः घुमाने पर बना ठोस क्या कहलाता है?
5. एक ही त्रिज्या और एक ही ऊँचाई वाले बेलन और शंकु के आयतनों में क्या अनुपात होगा?
6. बेलन के सम्पूर्ण पृष्ठ का क्षेत्रफल होता है। (2018)
7. गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल लिखिए। (2019)
उत्तर-
1. घनाभ,
2. घन,
3. बेलन,
4. गोला,
5. 3 : 1,
6. 2πr(r + h),
7. 4πr².

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 11 प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 11 प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
रथ-चालक कांस्य प्रतिमा कहाँ से प्राप्त है?
(i) दैमाबाद
(ii) मोहनजोदड़ो
(iii) कालीबंगा
(iv) पंजाब।
उत्तर:
(ii) मोहनजोदड़ो

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प्रश्न 2.
प्रथम नगरीकरण कब हुआ?
(i). नव पाषाण काल में
(ii) सिन्धु सभ्यता में
(iii) मौर्य काल में
(iv) गुप्तकाल में।
उत्तर:
(ii) सिन्धु सभ्यता में

प्रश्न 3.
चित्रकला में वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन-अध्यापन की बात गुप्तकाल में किसने कही?
(i) वात्सायन ने
(ii) अशोक ने
(iii) समुद्रगुप्त ने
(iv) कुमारगुप्त ने।
उत्तर:
(iii) समुद्रगुप्त ने

प्रश्न 4.
वीणाधारी सिक्कों का चलन किस राजवंश ने किया? (2014)
(i) मौर्य राजवंश
(ii) गुप्त राजवंश
(iii) वर्धन वंश
(iv) राजपूत वंश।
उत्तर:
(ii) गुप्त राजवंश

प्रश्न 5.
कव्वाली का जनक था (2008,09)
(i) अकबर
(ii) शाहजहाँ
(iii) तानसेन
(iv) अमीर खुसरो।
उत्तर:
(iv) अमीर खुसरो।

सही जोड़ी बनाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 11 प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ - 1
उत्तर:

  1. → (घ)
  2. → (क)
  3. → (ख)
  4. → (ग)
  5. → (च)
  6. → (ङ)।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सिन्धु सभ्यता के सबसे लम्बे अभिलेख में कितने अक्षर हैं?
उत्तर:
सिन्धु सभ्यता में अब तक लगभग 2500 से अधिक अभिलेख प्राप्त हैं। सबसे लम्बे अभिलेख में 17 अक्षर हैं।

प्रश्न 2.
दीपवंश, महावंश, दिव्यावदान किस साहित्य से सम्बन्धित हैं?
उत्तर:
दीपवंश, महावंश, दिव्यावदान बौद्ध साहित्य से सम्बन्धित हैं।

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प्रश्न 3.
कल्पसूत्र और परिशिष्ट पर्व किस धर्म की साहित्यिक कृति है?
उत्तर:
भद्रबाहु का कल्पसूत्र और हेमचन्द्र का परिशिष्ट पर्व जैन धर्म की साहित्यिक कृति है।

प्रश्न 4.
तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई, रसखान किस भक्ति मार्ग के उपासक थे?
उत्तर:
तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई, रसखान सगुण भक्ति मार्ग के उपासक थे।

प्रश्न 5.
एलोरा के मन्दिरों का निर्माण किस काल में हुआ? (2008,09)
उत्तर:
एलोरा के मन्दिरों का निर्माण गुप्तकाल में हुआ।

प्रश्न 6.
ताजमहल किसने बनवाया था? (2018)
उत्तर:
ताजमहल मुगल सम्राट शाहजहाँ ने बनवाया था। यह 313 फुट ऊँचा चौकोर संगमरमर का मकबरा है। जो 22 फुट ऊँचे चबूतरे पर बना है। चबूतरे के चारों कोनों पर एक-एक मीनार है और शीर्ष भाग पर एक गुम्बद है।

प्रश्न 7.
तानसेन कौन थे?
उत्तर:
अकबर के दरबार में नवरत्नों में से एक रत्न तानसेन उस युग का सर्वश्रेष्ठ संगीतज्ञ था। वृन्दावन के बाबा हरिदास तानसेन के गुरु थे।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गुप्तकालीन चित्रकला की विशेषताएँ लिखिए। (2008, 09, 10, 14, 16, 18)
उत्तर:
गुप्तकाल में चित्रकला वैज्ञानिक सिद्धान्तों पर आधारित थी। चित्रकला के सर्वोत्कृष्ट उदाहरण अजन्ता की गुफाओं के चित्र हैं इसे विश्व धरोहर के रूप में शामिल किया गया है। ये चित्र मुख्यतः धार्मिक विषयों पर आधारित हैं। इसमें बुद्ध और बोधिसत्व के चित्र हैं। जातक ग्रन्थों के वर्णनात्मक दृश्य हैं। यह चित्र वास्तविक, सजीव तथा प्रभावोत्पादक हैं। इस काल की चित्रकला बाघ (म. प्र. में धार जिले में) की गुफाओं में भी देखी जा सकती है। इन गुफाओं के चित्रों के विषय लौकिक हैं। इस काल में चित्रकारी में सुन्दर रंगों का प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 2.
सिन्धु सभ्यता की वास्तुशिल्प की विशेषताएँ लिखिए। (2008, 09, 12, 16)
उत्तर:
सिन्धु घाटी के मोहनजोदड़ो व हड़प्पा नगर की खुदाई से तत्कालीन वास्तुशिल्प की जानकारी मिलती है। इस काल में लोग भवन निर्माण कला में दक्ष थे। विशाल अन्नागार, मकान, सुनियोजित नगर, बड़े प्रासाद, बन्दरगाह, स्नानागार आदि तत्कालीन वास्तुशिल्प पर पर्याप्त प्रकाश डालते हैं। तत्कालीन अवशेषों को देखकर किसी आधुनिक विकसित नगर से इनकी तुलना की जा सकती है। पक्की ढुकी हुई नालियाँ, भवनों के खिड़की-दरवाजे मुख्य मार्ग से विपरीत बनाना, भवनों में रसोईघर, स्नानागार, रोशनदान की पर्याप्त व्यवस्था, साधारण व राजकीय भवनों का निर्माण आदि तत्कालीन वास्तुशिल्प के अनुपम उदाहरण हैं। सिन्धु सभ्यता के नगर में प्रथम नगरीकरण के प्रमाण हैं।

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प्रश्न 3.
अशोक के स्तम्भ पर टिप्पणी लिखिए। (2008, 09, 10, 14, 15, 18)
उत्तर:
मौर्य वास्तुकला के सर्वोत्तम नमूने अशोक के स्तम्भ हैं। जो कि उसने धम्म के प्रचार हेतु बनवाये थे। ये स्तम्भ संख्या में लगभग 20 हैं। ये स्तम्भ देश के विभिन्न भागों में स्थित हैं। उत्तर प्रदेश में सारनाथ, प्रयाग, कौशाम्बी, नेपाल की तराई में लुम्बनी व निग्लिवा में अशोक के स्तम्भ मिले हैं। इन स्थानों के अतिरिक्त साँची, लोरिया, नन्दगढ़ आदि स्थानों में भी अशोक के स्तम्भ मिले हैं। स्तम्भों में शीर्ष अत्यधिक कलापूर्ण बनाये जाते थे। मौर्यकालीन स्थापत्य कला के प्रसिद्ध स्तम्भ लेख-साँची (म. प्र.), सारनाथ (उ. प्र.), गुहालेख-बाराबर, नागार्जुनी (बिहार) एवं स्तूप-साँची (म. प्र.) बोधगया (बिहार) में हैं।

प्रश्न 4.
गुप्तकालीन मन्दिरों की विशेषताएँ बताइए। (2008, 09, 12, 13, 15, 17)
अथवा
गुप्तकालीन वास्तुशिल्प की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
गुप्तकाल में वास्तुशिल्प चर्मोत्कर्ष पर थी। इस काल की विशेष उपलब्धि मन्दिर निर्माण रही है। मन्दिर ईंट तथा पत्थरों आदि से बनाये जाते थे। गुप्तकाल में बने मन्दिरों की छतें सपाट थीं। सबसे पहले देवगढ़ (झाँसी, उ. प्र.) के दशावतार मन्दिर में शिखर का निर्माण हुआ था, इसके बाद ही मन्दिरों में शिखर बनने शुरू हो गये। इनमें से अनेक मन्दिर आज भी अबस्थित हैं; जैसे-म. प्र. में विदिशा जिले में साँची का मन्दिर उत्तर प्रदेश में झाँसी तथा भीतरगाँव (महाराष्ट्र) के देवगढ़ के मन्दिर इसके उदाहरण हैं। अजन्ता की 16, 17, 19 नम्बर की गुफा गुप्तकालीन मानी जाती है। उदयगिरि (विदिश म. प्र.), बाघ (धार म. प्र.) आदि गुफाओं का निर्माण गुप्तकाल में हुआ था। गुप्तकाल के शिल्पकार लोहे तथा काँसे के काम में कुशल थे। नई दिल्ली में महरौली में स्थित लौह स्तम्भ लौह प्रौद्योगिकी का एक अनुपम उदाहरण है जिसे ईसा की चौथी शताब्दी में बनाया गया था और आज तक इसमें जंग नहीं लगा।

प्रश्न 5.
नागर शैली व द्राविड़ शैली के मन्दिर में क्या अन्तर है? लिखिए।(2009, 14, 16, 18)
उत्तर:
उत्तर भारत के अतिरिक्त दक्षिण भारत व पूर्वी भारत में भी अनेक मन्दिरों का निर्माण हुआ। इस काल में बने मन्दिरों को मुख्यतः दो शैलियों में विभाजित कर सकते हैं-नागर शैली व द्राविड़ शैली। इन दोनों शैलियों में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं –
नागर व द्राविड़ शैली में अन्तर

नागर शैली द्राविड़ शैली
1. नागर शैली के मन्दिर प्रमुखतया उत्तर भारत में पाये जाते हैं। 1. द्रविड़ शैली के मन्दिर प्रमुखतया दक्षिण भारत में पाये जाते हैं।
2. नागर शैली में मन्दिरों के शिखर लगभग वक्राकार होते हैं। 2. द्राविड़ शैली में मन्दिरों के शिखर आयताकार होते हैं।
3. नागर शैली में मन्दिरों के शिखर पर गोलाकार आमलक और कलश पाया जाता है। 3. द्राविड़ शैली में मन्दिरों के शिखर आयताकार खण्डों की सहायता से बनते हैं।

प्रश्न 6.
मथुरा व गांधार कला में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2008, 09, 11, 13, 14, 16, 18)
उत्तर:
मथुरा व गांधार कला में अन्तर

मथुरा कला गांधार कला
1. मथुरा कला राजस्थान व उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में विकसित हुई। 1. गांधार कला पुष्कलरावती, तक्षशिला, पुरूषपुर  (पेशावर) के आस-पास विकसित हुई।
2. मथुरा कला की मूर्तियों के लिये बिंदीदार लाल पत्थर का प्रयोग किया गया है। 2. गांधार कला में मूर्तियाँ चूने, सीमेण्ट, पकी हुई मिट्टी और चिकनी मिट्टी तथा पत्थर की है।
3. मथुरा कलाकारों ने शारीरिक सुन्दरता के स्थान पर स्थलाकृतियों को आध्यात्मिक आकर्षण देने का प्रयास किया है। 3. मूर्तियों को अधिक आकर्षक और सुन्दर बनाने का प्रयास किया गया है। इसके लिये वस्त्रों और आभूषणों का खूब प्रयोग किया गया।
4. इस कला के विषय, विचार और भाव भारतीय हैं। परन्तु मूर्तियाँ बनाने का ढंग भी भारतीय है। 4. इस कला के विषय, विचार और भाव ही भारतीय नहीं थे वरन् बनाने के ढंग यूनानी है।
5. इस कला में बुद्ध और बोधिसत्वों के अतिरिक्त अनेक हिन्दू और जैन देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बनायी गयीं। 5. इस कला में महात्मा बुद्ध और बोधिसत्वों की आदमकद मूर्तियों का निर्माण किया गया है।

प्रश्न 7.
मध्यकालीन चित्रकला की विशेषताएँ लिखिए। (2017)
उत्तर:
सल्तनत काल में चित्रकला का पतन हुआ। फिर भी गुजरात, राजस्थान, मालवा के क्षेत्रों में चित्रकला जीवित रही। मध्यकालीन चित्रकला की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं –

  1. यहाँ धार्मिक जनजीवन से सम्बन्धित चित्र प्रस्तुत किये।
  2. मालवा और राजस्थानी चित्रकला शैलियों का विकास हुआ।
  3. गुजरात में जैन मुनियों द्वारा ताड़पत्र पर लिखे हुए ग्रन्थों में उच्चकोटि के छोटे-छोटे चित्र बनाये गये।
  4. मुगलकालीन चित्रों की विशेषता है-विदेशी पेड़-पौधों और उनके फूल-पत्तों, स्थापत्य अलंकरण की बारीकियाँ साज समान के साथ स्त्री आकृतियाँ, अलंकारिक तत्वों के रूप में विशिष्ट राजस्थानी चित्रकला।
  5. जहाँगीर के काल में छवि चित्र (व्यक्तिगत चित्र) प्राकृतिक दृश्यों एवं व्यक्तियों के सम्बन्धित चित्रण की पद्धति आरम्भ हुई।
  6. शाहजहाँ के काल में चित्रों में रेखांकन और बॉर्डर बनाने में विशेष प्रगति हुई।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ कौन-सी हैं? किसी एक का प्राचीनकाल एवं मध्यकाल के सन्दर्भ में तुलनात्मक विवरण लिखिए।
उत्तर:
सांस्कृतिक प्रवृत्तियों से आशय यहाँ की भारतीय संस्कृति के स्वरूप से है। भारत की प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ साहित्य, चित्रकला, वास्तुकला, मूर्तिकला, नृत्य एवं संगीत एवं अन्य ललित कलाएँ हैं।

वास्तुकला :
वास्तुकला मानव जीवन के रीति-रिवाजों और तत्कालीन समय की सभ्यता व समाज व्यवस्था पर प्रकाश डालती है। किसी भी युग के इतिहास का अनुमान उस युग की निर्मित इमारतों से लगाया जा सकता है। वास्तुशिल्प तत्कालीन समय के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनैतिक व सांस्कृतिक इतिहास की जानकारी देने में सक्षम होता है।

प्राचीनकाल व मध्यकाल की वास्तुकला का तुलनात्मक अध्ययन
प्राचीनकाल में वास्तुकला :
प्राचीन काल में लोग भवन निर्माण कला में दक्ष थे। विशाल अन्नागार, मकान, सुनियोजित नगर, बड़े प्रासाद, बन्दरगाह, स्नानागार, पक्की ढंकी हुई नालियाँ, भवनों के खिड़की-दरवाजे मुख्य मार्ग से विपरीत बनाना, भवनों में रसोई घर, स्नानागार, रोशनदान की पर्याप्त व्यवस्था, साधारण व राजकीय भवनों के निर्माण आदि तत्कालीन वास्तु शिल्प के उदाहरण हैं। सिन्धु सभ्यता के नगर भारत में प्रथम नगरीकरण के प्रमाण हैं।

वैदिककाल में यज्ञवेदियों, हवनकुण्डों, यज्ञ शालाओं, पाषाण-प्रासादों, खम्बों व द्वारों वाले भवनों, आश्रमों का उल्लेख मिलता है। इस काल में बड़े-बड़े राजप्रसादों व भवनों का उल्लेख मिलता है। मौर्य वास्तुकला के सर्वोत्तम नमूने अशोक के स्तम्भ, अशोक द्वारा निर्मित बौद्ध स्तूप, पाटलिपुत्र स्थित राज प्रसाद, गया में बारांबर तथा नागार्जुनी पहाड़ियों के पहाड़ों को काटकर तैयार किये गये चैत्य गृह-आवास आदि हैं।

गुप्तकाल में वास्तुकला चर्मोत्कर्ष पर थी। इस काल की विशेष उपलब्धि मन्दिर निर्माण रही है। मन्दिर ईंट तथा पत्थरों से बनाये जाते थे इनकी छतें सपाट होती थीं। सबसे पहले देवगढ़ (झाँसी, उ. प्र.) के दशावतार मन्दिर में शिखर का निर्माण हुआ, इसके पश्चात् ही मन्दिरों में शिखर का निर्माण होने लगा। गुप्तकाल में शिल्पकार लोहे तथा कांसे का काम करने में कुशल थे। नई दिल्ली में महरौली स्थित लौह स्तम्भ लौह प्रौद्योगिकी का अनुपम उदाहरण है। यह ईसा की चौथी शताब्दी में बना था इसमें अभी तक जंग नहीं लगी है।

पूर्व मध्यकाल में शासक अपने वैभव को प्रदर्शित करने के लिये विशाल मन्दिरों का निर्माण करवाते थे। इस काल में बने मन्दिरों में खजुराहो का मन्दिर समूह, ओसिया में ब्राह्मण तथा जैन मन्दिर, चित्तौड़गढ़ में कालिका देवी का मन्दिर व आबू में जैन मन्दिर इस काल की वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

मध्यकाल की वास्तुकला :
भारत में मध्यकालीन वास्तुशिल्प पर इस्लाम प्रभाव दिखायी देता है। विभिन्न सुल्तानों व मुगलों के समय बनी हुई इमारतों में भारतीय वास्तुकला का समन्वय ईरानी तुर्की व अन्य इस्लामी देशों में प्रचलित वास्तुकला व शैलियों के साथ हुआ। इस्लामी वास्तुकला में मुख्यतः मस्जिद, मकबरे, महल तोरण, गुम्बद, मेहराब तथा मीनारों का निर्माण किया गया। महरौली की कुब्बतुल इस्लाम मस्जिद, कुतुबमीनार, कुतुबी मस्जिद, अलाई दरवाजा, गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा, फिरोजशाह कोटला आदि भवनों का निर्माण सल्तनत काल में हुआ। इसी प्रकार हुमायूँ का मकबरा, आगरा का किला, फतेहपुर सीकरी के अगणित भवनों (विशेषकर बुलन्द दरवाजा, शेख चिश्ती का मकबरा, पंचमहल) मोती मस्जिद, लाल किला, जामा मस्जिद, ताजमहल आदि अद्वितीय भवनों का निर्माण मुगलकाल में हुआ।

मुगलकालीन भवन अपने रंग-बिरंगे टाइलों, महराबों, गुम्बद, ऊँची मीनारों, फूल-पत्तियों व ज्यामितीय के नमूनों के कारण प्रसिद्ध हैं। ये भवन सुन्दर, सफेद संगमरमर से निर्मित होने, बगीचों, दोहरे गुम्बदों, ऊँचे द्वार पथी, शानदार विशाल हॉलों के कारण विश्व प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 2.
प्राचीनकाल से लेकर मध्यकाल तक साहित्य का विकास किस प्रकार हुआ? लिखिए। (2009, 12)
उत्तर:
साहित्य समाज का दर्पण माना जाता है। भारत का इतिहास जितना गौरवशाली है, उतना ही उसका साहित्य समृद्धशाली है। भारतीय साहित्य के केन्द्र में संस्कृत साहित्य का अपार भण्डार है।

प्राचीन भारत में साहित्य का अपूर्व विकास हुआ। जिस समय अमेरिका, इंग्लैण्ड तथा पश्चिम के अनेक देशों में लोग पशुवत् असभ्यता का जीवन व्यतीत कर रहे थे, उसी समय भारत में वेदों की रचना हुई थी। वेदों की संख्या चार है-ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद। इसके अतिरिक्त आरण्यक व उपनिषदों की रचना हुई। वैदिक काल के पश्चात् रामायण, महाभारत तथा भगवद्गीता जैसे महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ लिखे गये। गुप्तकाल में साहित्य का सर्वाधिक विकास हुआ। इस काल में धर्मशास्त्र पर अनेक ग्रन्थ लिखे गये जिसमें स्मृति साहित्य, याज्ञवलक्य स्मृति, नारद स्मृति, काव्यायन स्मृति प्रमुख हैं।

कालिदास इस काल के प्रमुख साहित्यकार थे, उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं-अभिज्ञान शाकुन्तलम्, मालविकाग्निमित्रं, मेघदूत, विक्रमोर्वशीयम्, कुमारसंभव, रघुवंश, ऋतुसंहार। इसके अतिरिक्त इस काल के प्रमुख साहित्यकार विशाखदत्त, शूद्रक, विष्णु शर्मा व आर्यभट्ट थे। हर्षवर्धन काल के प्रमुख विद्वान् बाणभट्ट थे जिन्होंने कादम्बरी की रचना की। राजपूत काल में भी साहित्य के सृजन का कार्य उन्नति की ओर अग्रसर था। राजा मुंज, भोज, अमोघवर्ष आदि प्रमुख साहित्यकार थे। इस समय चिकित्सा, ज्योतिष, व्याकरण, वास्तुकला आदि विषयों पर ग्रन्थ लिखे गये।

मध्यकाल में साहित्य का विकास क्रम चलता रहा। इस काल का साहित्य सल्तनत एवं मुगलकालीन व्यवस्थाओं पर प्रकाश डालता है। तत्काली समय में व्यक्तिवादी इतिहास में लेखन कार्य प्रारम्भ हो चुका था। सल्तनत काल में धार्मिक एवं धर्म निरपेक्ष साहित्य का सृजन किया गया। अमीर खुसरो द्वारा रचित दोहे और पहेलियाँ आज भी लोकप्रिय हैं। मुगलकाल में कई भाषाओं का विकास हुआ। हिन्दी भाषा में कबीर, जायसी, सूरदास, तुलसीदास की रचनाओं का विशेष महत्त्व है। जबकि मीराबाई ने राजस्थानी व मैथिली भाषा का प्रयोग किया है। बंगाल में रामायण और महाभारत का संस्कृत से बंगाली भाषा में अनुवाद किया गया।

इस काल में फारसी तथा तुर्की भाषा में भी रचनाएँ लिखी गयीं। मुगलकाल में ही उर्दू साहित्य का विकास हुआ। प्रारम्भ में उर्दू को ‘जबान-ए-हिन्दर्वा’ कहा जाता था। अकबर द्वारा संस्कृत भाषा के अनेक ग्रन्थों का अनुवाद फारसी भाषा में करवाया गया था। इस प्रकार मध्यकाल में साहित्य का विकास विभिन्न प्रकार से होता रहा।

प्रश्न 3.
प्राचीनकाल से लेकर मध्यकाल तक की चित्रकला की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
चित्रकला का विकास मानव के विचारों की अभिव्यक्ति के चित्रात्मक स्वरूप पर आधारित है। विभिन्न कालों में चित्रकला का अंकन तत्कालीन समाज के चित्रकारों द्वारा किया गया।

सिन्धु सभ्यता में चित्रकला के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं। इस काल में प्राप्त बर्तनों एवं मोहरों पर अनेक चित्र मिलते हैं। भवनों पर चित्रकारी और रंगों का प्रयोग भी किया जाता था। वैदिक काल में मन की अभिव्यक्ति को दीवारों के साथ-साथ बर्तनों तथा कपड़ों पर कढ़ाई के रूप में अंकित किया जाता था। मौर्यकाल में चित्रकला का विकास लोककला के रूप में हुआ। मौर्यकालीन भवनों एवं प्रासादों के स्तम्भों पर चित्रकारी की जाती थी। अजन्ता की गुफाओं के कुछ चित्र ई. पू. प्रथम शताब्दी के हैं। यहाँ स्थित गुफा संख्या 10 में छद्दत जातक का चित्रांकन विशेष है। चित्रकला के सर्वोत्कृष्ट उदाहरण हमें गुप्तकाल में दिखाई देते हैं।

अजन्ता की गुफाओं के चित्र मुख्यतः धार्मिक विषयों पर आधारित हैं। इनमें बुद्ध और बोधिसत्व के चित्र हैं। इस काल की चित्रकला बाघ (म. प्र. में धार जिले में) की गुफाओं में दिखाई देती है। हर्ष के समय में कपड़ों पर चित्रकारी की जाती थी। विवाह कार्यों में मांगलिक दृश्यों का अंकन किया जाता था व महिलाओं द्वारा कच्ची मिट्टी के बर्तन को अलंकृत किया जाता था। राजपूत काल में चित्रकला पूर्णतः विकसित हो चुकी थी। इस काल में गुजरात शैली और राजपूताना शैली विकसित हो गयी थीं। मन्दिरों और राजमहलों को सजाने के लिये भित्ति चित्र बनाये जाते थे। लघु चित्रों को बनाने की कला भी इसी काल से शुरू हुई थी।

मध्यकालीन चित्रकला :

  1. यहाँ धार्मिक जनजीवन से सम्बन्धित चित्र प्रस्तुत किये।
  2. मालवा और राजस्थानी चित्रकला शैलियों का विकास हुआ।
  3. गुजरात में जैन मुनियों द्वारा ताड़पत्र पर लिखे हुए ग्रन्थों में उच्चकोटि के छोटे-छोटे चित्र बनाये गये।
  4. मुगलकालीन चित्रों की विशेषता है-विदेशी पेड़-पौधों और उनके फूल-पत्तों, स्थापत्य अलंकरण की बारीकियाँ साज समान के साथ स्त्री आकृतियाँ, अलंकारिक तत्वों के रूप में विशिष्ट राजस्थानी चित्रकला।
  5. जहाँगीर के काल में छवि चित्र (व्यक्तिगत चित्र) प्राकृतिक दृश्यों एवं व्यक्तियों के सम्बन्धित चित्रण की पद्धति आरम्भ हुई।
  6. शाहजहाँ के काल में चित्रों में रेखांकन और बॉर्डर बनाने में विशेष प्रगति हुई।

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प्रश्न 4.
मुगलकालीन स्थापत्य कला का वर्णन कीजिए।(2008, 09, 13, 17)
उत्तर:
मुगलकालीन स्थापत्य कला के अनेक प्रमाण उपलब्ध हैं। मुगलकालीन स्थापत्य कला की प्रमुख विशेषताएँ हैं-गोल गुम्बद, पतले स्तम्भ तथा विशाल खुले प्रवेश द्वार।

बाबर द्वारा भवन निर्माण :
बाबर का अधिकांश समय युद्ध करने में ही व्यतीत हुआ। उसे भवन बनवाने का समय नहीं मिला। जो भवन उसने बनवाये हैं, उनमें से मात्र दो ही भवन शेष हैं –

  1. पानीपत के काबुली बाग में स्थित मस्जिद
  2. रुहेलखण्ड में स्थित मस्जिद।

हुमायूँ द्वार भवन निर्माण :
हुमायूँ का शासनकाल स्थापत्य कला की दृष्टि से साधारण है। उसे भी नवीन इमारतें बनवाने का समय नहीं मिल सका। दिल्ली में उसने दीनपनाह नामक महल का निर्माण करवाया था जो शेरशाह द्वारा नष्ट कर दिया गया। आगरा और फतेहाबाद (हिसार) में दो मस्जिदों का निर्माण भी करवाया था।

शेरशाहकालीन स्थापत्य कला :
शेरशाह महान् प्रशासक होने के साथ-साथ एक महान् निर्माता भी था। उसके शासन काल की प्रमुख इमारते हैं –

  1. दिल्ली के समीप पुराने किले की मस्जिद
  2. सहसराम का मकबरा। इसमें सहसराम का मकबरा प्रसिद्ध है।

इसका निर्माण बड़े आकर्षक और प्रभावशाली ढंग से किया गया है।

अकबरकालीन स्थापत्य कला :
मुगलकालीन स्थापत्य कला का वास्तविक प्रारम्भ अकबर के शासन से होता है। इसके शासनकाल में अनेक विशाल और भव्य इमारतों का निर्माण हुआ। अकबरकालीन भवनों में हिन्दू स्थापत्य कला का प्रभाव अत्यधिक दृष्टिगोचर होता है। अकबर द्वारा निर्मित प्रमुख भवन निम्न हैं-हुमायूँ का मकबरा, आगरे का लाल किला, जहाँगीरी महल, अकबरी महल, फतेहपुर सीकरी (दीवाने-आम, दीवाने-खांस, बीरबल का महल, मरियम भवन, जामा मस्जिद, बुलन्द दरवाजा, सलीम चिश्ती का मकबरा) आदि। फतेहपुर सीकरी का बुलन्द दरवाजा स्थापत्य कला का एक भव्य तथा आश्चर्यजनक उदाहरण है। यह दरवाजा सड़क से 176 फीट ऊँचा है तथा सीढ़ियों से इसकी ऊँचाई 134 फीट है।

जहाँगीरकालीन स्थापत्य कला :
जहाँगीर को स्थापत्य कला की अपेक्षा चित्रकला से अधिक प्रेम था, अतः उसके शासन काल में अधिक भवनों का निर्माण नहीं हुआ। परन्तु जो भवन बने वे सुन्दर और आकर्षक हैं। ये निम्न हैं-अकबर का मकबरा सिकन्दरा, मरियम की समाधि, एत्माद्उद्दौला का मकबरा। इनमें एत्मादद्दौला का मकबरा सबसे आकर्षक है।

शाहजहाँकालीन स्थापत्य कला :
मुगलकालीन स्थापत्य कला का चरम विकास शाहजहाँकालीन इमारतों में झलकता है। शाहजहाँ की सर्वश्रेष्ठ कृति ताजमहल है। इसका निर्माण उसने अपनी प्रिय बेगम मुमताज महल की यादगार में किया था। इसके बनने में लगभग 22 वर्ष लगे तथा 50 लाख रुपये खर्च हुये। शाहजहाँ के काल को मुगल स्थापत्य कला का स्वर्ण युग कहा जाता है। इस काल की प्रमुख विशेषताएँ थीं-नक्काशी युक्त मेहराबें, बंगाली शैली में मुड़े हुए कंगूरे तथा जंगले के खम्भे। शाहजहाँ की अन्य प्रसिद्ध इमारतें दिल्ली का लाल किला, दीवाने खास और जामा मस्जिद।

औरंगजेबकालीन स्थापत्य कला :
औरंगजेब शुष्क और नीरस स्वभाव का था। उसे स्थापत्य कला से विशेष प्रेम नहीं था। अत: उसके शासनकाल में बहुत कम इमारतें बनीं और जो भी बनीं वे अत्यन्त घटिया किस्म की थीं।

प्रश्न 5.
मध्यकाल में मूर्तिकला का विकास किस प्रकार हुआ? लिखिए। (2008, 09, 12)
उत्तर:
मध्यकाल में दक्षिण भारत में मूर्तिकला का अभूतपूर्व विकास हुआ। मन्दिरों के बाह्य व अंतरंग भागों को अलंकृत करने के लिए तक्षण शिल्प व मूर्तिशिल्प का उपयोग किया गया। इस्लाम धर्म मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करता था। ऐसे में मध्यकालीन मूर्तिकला पर उसका प्रभाव पड़ा। मुगलकाल में इस कला की विशेष उन्नति नहीं हुई। अकबर के समय मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। उसने चित्तौड़ के जयमल और पत्ता की हाथियों पर सवार मूर्तियाँ बनवायीं और उन्हें आगरा के किले के फाटक पर रखवा दिया। जहाँगीर शासनकाल में भी मूर्तिकला को प्रोत्साहित किया गया। आगरा किले में झरोखा दर्शन के नीचे अमरसिंह व कर्णसिंह की मूर्तियाँ लगायी गयीं। फतेहपुर सीकरी में महल के हाथी द्वार पर दो विशालकाय हाथियों की टूटी हुई मूर्तियाँ अब भी विद्यमान हैं।

जहाँगीर ने उदयपुर के राणा अमरसिंह एवं उनके पुत्र कर्णसिंह की मूर्तियाँ आगरा के महलों के बाग में रखवायीं। शाहजहाँ के समय मूर्तिकला को प्रोत्साहन नहीं दिया। औरंगजेब शुष्क और नीरस स्वभाव का था उसे मूर्तिकला से विशेष प्रेम नहीं था। इसलिये उसके शासनकाल में मूर्तिकला के विकास में उदासीनता आ गई। कुल मिलाकर मध्यकाल में मूर्ति के विकास को प्रोत्साहन नहीं मिला जिसके चलते मूर्तिकला प्रभावित हुई।

प्रश्न 6.
मध्यकाल में नृत्य व संगीत के विकास व उसके प्रभाव का समीक्षात्मक विवरण दीजिए।
उत्तर:
संगीत के विषय में मध्ययुगीन हिन्दू शासकों की विशेष रुचि रही है। नृत्य संगीत से सम्बन्धित कुछ ग्रन्थ लिपिबद्ध हो चुके थे, इससे भोज, सोमेश्वर और सारंगदेव का संगीत रत्नाकर बहुत प्रसिद्ध ग्रन्थ है। बाद में संगीत के कई अन्य ग्रन्थ भी रचे गये। तेरहवीं सदी में जयदेव द्वारा रचित ‘गीत गोविन्द’ इसी दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। मध्यकाल में भक्ति संगीत को अधिक महत्त्व प्राप्त हुआ। मीराबाई, तुलसीदास, कबीरदास और सूरदास के भजनों को लोग मन लगाकर गाते थे।

सल्तनत काल में नये रागों एवं वाद्य यन्त्रों से हिन्दुस्तानी संगीत का परिचय हुआ। यद्यपि मुस्लिमों के प्रसिद्ध ग्रन्थ कुरान में संगीत को वर्जित माना जाता है। परन्तु समय-समय पर सुल्तानों, सामन्तों व खलीफाओं ने नृत्य-संगीत को प्रोत्साहन दिया। सल्तनत काल का प्रसिद्ध संगीतकार अमीर खुसरो था जिसने अपनी पुस्तक ‘नूरह सिपहर’ में संगीत की व्याख्या की है। इस पुस्तक में उन्होंने लिखा है कि भारतीय संगीत केवल मनुष्य मात्र को ही प्रभावित नहीं करता वरन् यह पशुओं तक को मन्त्रमुग्ध कर देता है। अमीर खुसरो ने भारतीय-ईरानी संगीत सिद्धान्तों के मिश्रण से कुछ नवीन रागों का आविष्कार किया। अमीर खुसरो को ‘कब्बाली का जनक’ माना जाता है। उस काल में ख्याल तराना आदि संगीत की नवीन विधाओं के कारण संगीत का रूप परिवर्तित हो गया। नृत्य-संगीत उस काल में मनोरंजन का प्रमुख साधन था।

मुगलकाल में नृत्य संगीत कला फली-फूली। मुगल बादशाह संगीत प्रेमी होते थे। प्रत्येक राजकुमार को संगीत को विधिवत् शिक्षा दी जाती थी। बाबर स्वयं संगीत प्रेमी था। वह स्वयं गीतों का रचयिता था। उसके बनाये हुए गीत बहुत समय तक प्रचलित रहे। हुमायूँ व शेरशाह सूरी को भी संगीत का बड़ा शौक था। मुगल सम्राट अकबर ने अपने दरबार में संगीतज्ञों को प्रश्रय दिया। अकबर स्वयं नक्कारा बजाने में माहिर था। संगीतशास्त्र में उसकी बहुत रुचि थी। अकबर के दरबार में नवरत्नों में से एक रत्न तानसेन था जो उस काल का सर्वश्रेष्ठ संगीतकार था। अबुल फजल के अनुसार उस जैसा गायक न तो है और न ही होगा।

तानसेन के गुरु बाबा हरिदास थे। तानसेन के अतिरिक्त 36 अन्य गायकों को भी अकबर के दरबार में संरक्षण मिला हुआ था। तत्कालीन समय में संगीत के संस्कृत ग्रन्थों का फारसी में अनुवाद किया गया। अकबर के काल में ध्रुपद गायन की चार शैलियाँ प्रचलन में थीं। मुगलकाल में जहाँगीर के दरबार में खुर्रमदाद, मक्खू, चतुरखाँ और हमजा आदि संगीतज्ञ थे। इसी प्रकार शाहजहाँ के दरबार में रामदास, जगन्नाथ, सुखसैन और लाल खाँ आदि प्रमुख संगीतज्ञ थे। औरंगजेब संगीत कला का विरोधी था। अत: मुगलकालीन संगीत का विकास शाहजहाँ के पश्चात् रुक गया।

मध्यकाल में भारतीय नृत्य की शास्त्रीय शैलियाँ दिखाई देती रहीं। इनमें भरतनाट्यम्, कुचीपुड़ी, कत्थकली आदि शास्त्रीय शैलियों के नृत्य दक्षिण भारतीय क्षेत्रों में प्रचलित रहे हैं। भरतनाट्यम् व कुचीपुड़ी नृत्य कृष्णलीला पर आधारित होते थे। जबकि कत्थक नृत्य उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब व मध्य प्रदेश तक सीमित था। इसमें कृष्ण लीलाओं तथा अन्य पौराणिक कथाओं पर आधारित नृत्य किये जाते थे। दरबारों में नृत्य संगीत चलता था जो कि मनोरंजन का प्रमुख साधन था।

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प्रश्न 7.
ललित कलाओं का विकास प्राचीनकाल से मध्यकाल तक किस प्रकार हुआ ? लिखिए।
उत्तर:
अन्य ललित कलाओं में नाट्य, रंगोली व वनवासी कलाओं को शामिल किया जाता है। भारतीय परम्पराओं में इसका प्रचलन अत्यन्त प्राचीन काल से है।
सिन्धु सभ्यता में ललित कला :
सिन्धु सभ्यता में ललित कलाएँ प्रचलन में थीं। सिन्धु सभ्यता के राखीगढ़ी से प्राप्त ऊँचे चबूतरे पर बनायी गयी अग्निवेदिकाएँ, कालीबंगा के फर्श की अलंकृत ईंटें, पक्की मिट्टी की जालियाँ, मूर्तियाँ, अलंकृत आभूषण, बर्तनों पर चमकदार लेप, पशु-पक्षियों का अंकन, मंगल चिह्न स्वास्तिक, सूर्य आकृति आदि से ललित कलाओं के प्रचलन की जानकारी प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त उस काल में थियेटर की जानकारी भी मिलती है। जिसका उपयोग मुख्यतः नाट्य व नृत्य संगीत के लिये किया जाता होगा।

वैदिक काल में ललित कला :
वैदिक काल में भी ललित कलाओं का उल्लेख प्राप्त होता है। वैदिक काल में लौकिक धर्म के विकास के साथ-साथ लोक संस्कृति का भी विकास हुआ। इस काल में प्रमुखतया मंगल चिह्नों, भवनों की सजावट, जादू कला, यज्ञ वेदिकाओं आदि के उल्लेख मिलते हैं।

मौर्यकाल में ललित कला :
मौर्यकाल में लोक कलाओं का प्रचलन था। तमाशे दिखाकर लोग जनता का मनोरंजन करते थे। यह काल नट (मदारी), विभिन्न प्रकार की बोलियाँ बोलकर मनोरंजन करने वालों, रस्सी पर नाचने वालों और रंगमंच पर अभिनय कर जीवन-यापन करने वालों का था।

गुप्तकाल में ललित कला :
गुप्तकाल में ललित कलाओं का प्रचलन रहा। गुप्तकालीन सिक्कों पर सुन्दर चित्रण इस कला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। काष्ठ शिल्प, पाषाण शिल्प, धातु शिल्प, ताबीज, हाथी दाँत शिल्प, आभूषण आदि तत्कालीन ललित कलाओं के परिचायक हैं। गुहा मन्दिरों में अलंकरण, दीवारों पर चित्रकारी, प्रेक्षणिकाएँ, चमर दुलाते द्वारपाल, मूर्तियों में केश सज्जा, यक्ष, पशु-पक्षी, नदी, झरनों का अंकन आदि ललित कलाओं के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। तत्कालीन समय में नाट्यशालाओं के लिये प्रेक्षागृह तथा रंगशाला जैसे शब्दों का उल्लेख मिलता है।

पूर्वमध्यकाल में ललित कला :
पूर्वमध्यकाल में नट, जादूगर, हाथी दाँत के कारीगर आदि का उल्लेख कला सौन्दर्य के सन्दर्भ में मिलता है। मन्दिरों की दीवारें पर बनी मूर्तियाँ राग-रागिनी, नायक-नायिकाओं का चित्रण, पादप-पत्रों, पुष्पों व पशुओं का चित्रण, लोक चित्रण आदि इस काल की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ हैं। पूर्व मध्यकाल में विभिन्न ऐतिहासिक व पौराणिक नृत्य नाटिकाएँ भी ललित कला में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

मध्यकाल में ललितकला :
मध्यकाल में ललितकलाओं का अभूतपूर्व विकास हुआ। वृन्दावन, मथुरा आदि में रासलीलाओं का मंचन किया जाता था। इस समय महाकाव्यों के अतिरिक्त ऐतिहासिक पात्रों पर भी नाटिकाओं का मंचन किया जाता था। विजय नगर के शासक हरिहर द्वितीय के पुत्र वीरू दादा ने ‘नारायण विलास’ नामक नाटक की रचना की, साथ ही उन्मत्तराघव एकांकी भी लिखा। महाकवि बाणभट्ट ने ‘कुमार संभव’ तथा रामचन्द्र ने ‘जगन्नाथवल्लभ’ की रचना की। मध्यकाल में नाटकों के मंचन में सामाजिक व धार्मिक नाटकों को प्राथमिकता प्रदान की जाती थी। उस काल में सुलेख कला भी विकसित हुई। इसके अतिरिक्त अलंकृत बर्तन, अलंकृत दीवारें, महल, मीनारें, मकबरे आदि पर नक्काशीदार जालियाँ, जरी के कपड़े, कशीदाकारी, पच्चीकारी कला, नक्काशीदार फब्बारे आदि तत्कालीन ललित कलाओं के अभूतपूर्व उदाहरण हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रामायण की रचना किसने की थी?
(i) महर्षि वाल्मिकी
(ii) महर्षि वेद व्यास
(iii) महर्षि पतंजलि
(iv) महर्षि कालिदास।
उत्तर:
(i) महर्षि वाल्मिकी

प्रश्न 2.
नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना किस काल में हुई थी?
(i) गुप्तकाल
(ii) मौर्यकाल
(iii) वैदिक काल
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) गुप्तकाल

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना ………… काल में हुई थी।
  2. भोपाल के निकट ………… शैलाश्रय है। (2012)
  3. माउण्ट आबू का …………. मन्दिर बहुत प्रसिद्ध है।
  4. बौद्ध ग्रन्थ ‘मिलिन्द के प्रश्न’ की रचना ………… ने की।
  5. आर्यभट्टीयम् पुस्तक गुप्तकाल में …………. के द्वारा लिखी गयी। (2009)
  6. रामायण और महाभारत भारतवर्ष के दो ………… हैं। (2013)

उत्तर:

  1. गुप्तकाल
  2. भीमबेटका
  3. दिलवाड़ा
  4. नागसेन
  5. आर्यभट्ट
  6. महाकाव्य।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
सामवेद विश्व का प्राचीनतम ग्रन्थ है। (2008)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 2.
प्रथम नगरीकरण गुप्तकाल में हुआ था। (2008)
उत्तर:
असत्य

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प्रश्न 3.
प्रारम्भ में उर्दू को जबान-ए-हिन्द कहा जाता था। (2011)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
कब्बाली का जनक अमीर खुसरो था। (2010)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना मौर्य काल में हुई। (2009)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 6.
कम्बन नामक कवि ने तमिल ‘रामायण’ की रचना की। (2014)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 7.
सिंधु सभ्यता में लिपि का ज्ञान था। (2015)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 8.
वैदिक काल साहित्य सृजन की दृष्टि से समृद्ध है। (2017)
उत्तर:
सत्य।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 11 प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ - 2

उत्तर:

  1. → (ग)
  2. → (घ)
  3. → (क)
  4. → (ख)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
भिक्षुओं के रहने के मठ।
उत्तर:
बिहार

प्रश्न 2.
अशोक के अभिलेख किन प्रमुख लिपियों में हैं?
उत्तर:
ब्राह्मी एवं खरोष्ठि लिपि

प्रश्न 3.
पाली और संस्कृत भाषा का विकास किस धर्म में हुआ?
उत्तर:
बौद्ध धर्म

प्रश्न 4.
श्रोतसूत्र का विषय क्या है? (2016)
उत्तर:
यज्ञ

प्रश्न 5.
मौर्यकालीन सामूहिक पूजा के मन्दिर। (2008)
उत्तर:
चैत्य।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सांस्कृतिक प्रवृत्तियों से क्या आशय है?
उत्तर:
सांस्कृतिक प्रवृत्तियों से आशय भारतीय संस्कृति के स्वरूप से है। जिसमें साहित्य, चित्रकला, वास्तुकला, मूर्तिकला, नृत्य एवं संगीत तथा अन्य ललित कलाएँ शामिल हैं।

प्रश्न 2.
साहित्य क्या है?
उत्तर:
साहित्य समाज का दर्पण है। भारत का इतिहास जितना गौरवशाली है उतना ही साहित्य समृद्धशाली है। भारतीय साहित्य के केन्द्र में संस्कृत साहित्य का अक्षय भण्डार है।

प्रश्न 3.
महाकाव्य कालीन काल में किन ग्रन्थों की रचना की गयी थी?
उत्तर:
महाकाव्य कालीन काल में रामायण एवं महाभारत ग्रन्थों की रचना की गयी थी।

प्रश्न 4.
मौर्यकालीन साहित्य में कौन-सी दो लिपियाँ प्रयोग में लायी जाती थीं?
उत्तर:
मौर्यकालीन साहित्य में ब्राह्मी एवं खरोष्ठि लिपियाँ प्रयोग में लायी जाती थीं।

प्रश्न 5.
पतंजलि कौन थे?
उत्तर:
शुंग सातवाहन के काल में पतंजलि जैसे विद्वान हुए, इन्होंने पाणिनी की अष्टाध्यायी पर महाभाष्य लिखा व संस्कृत भाषा के नियमों को संशोधित रूप में प्रस्तुत किया।

प्रश्न 6.
गुप्तकाल में शिक्षा के प्रमुख केन्द्र कौन से थे?
उत्तर:
गुप्तकाल में शिक्षा के प्रमुख केन्द्र काशी, मथुरा, अयोध्या, पाटलिपुत्र आदि थे।

प्रश्न 7.
शून्य के सिद्धान्त का प्रारम्भ और दशमलव प्रणाली के विकास का श्रेय किस युग के गणितज्ञों को है?
उत्तर:
शून्य के सिद्धान्त का प्रारम्भ और दशमलव प्रणाली के विकास का श्रेय गुप्त युग के गणितज्ञों को है।

प्रश्न 8.
बाणभट्ट ने किन दो महान् ग्रन्थों की रचना की?
उत्तर:
बाणभट्ट ने दो महान् ग्रन्थों-

  1. हर्षचरित्र, तथा
  2. कादम्बरी की रचना की।

प्रश्न 9.
कुषाण काल में मूर्तिकला की किन दो शैलियों का विकास हुआ ?
उत्तर:
कुषाण काल में मूर्तिकला की दो प्रमुख शैलियों का विकास हुआ-गान्धार शैली और मथुरा शैली।

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प्रश्न 10.
अकबरकालीन स्थापत्य कला की प्रमुख इमारतें कौन-सी हैं?
उत्तर:
फतेहपुर सीकरी का दीवाने आम, दीवाने खास, आगरा का किला, जोधाबाई का महल, पंचमहल, जामा मस्जिद, बुलन्द दरवाजा आदि अकबरकालीन स्थापत्य कला की प्रमुख इमारतें हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सांस्कृतिक प्रवृत्तियों से क्या आशय है? (2008)
उत्तर:
सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ हमें प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर से परिचित कराती हैं। किसी भी देश का इतिहास तभी महत्त्वपूर्ण होता है जब उसके सांस्कृतिक प्रतिमानों का अध्ययन वैज्ञानिक आधार पर किया जाए। भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है। भारत प्राचीनकाल से विश्व भर में अपनी समृद्ध संस्कृति के लिये जाना जाता रहा है। इसकी प्रमुख विशेषता निरन्तरता के साथ पुरातनता, अध्यात्मवाद, एकीकरण व समन्वय की शक्ति आदि है। भारतीय संस्कृति मानव समाज की अमूल्य निधि है।

प्रश्न 2.
“वैदिक काल साहित्य सृजन की दृष्टि से समृद्ध है।” व्याख्या करें। (2008)
उत्तर:
वैदिक काल साहित्य सृजन की दृष्टि से समृद्ध है। इस काल की साहित्यिक रचनाओं में प्राचीन जीवन मूल्यों का सजीव वर्णन किया गया है। वैदिक साहित्य में वेद, ब्राह्मण ग्रन्थ, आरण्यक, उपनिषद्, वेदांग, सूत्र, महाकाव्य स्मृति ग्रन्थ, पुराण आदि आते हैं। वेदों की संख्या चार हैं-ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। वैदिक साहित्य का सबसे प्राचीनतम ग्रन्थ ऋग्वेद हैं।

महाकाव्य कालीन समय में रामायण एवं महाभारत जैसे ग्रन्थों की रचना की गई जिसमें उस समय का सामाजिक एवं राजनीतिक चित्रण मिलता है। रामायण की रचना महर्षि वाल्मिकी द्वारा एवं महाभारत की रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी।

प्रश्न 3.
बौद्ध साहित्य के बारे में वर्णन कीजिए।
अथवा
बौद्ध धर्म में ‘त्रिपिटकाएँ यानि तीन टोकरियाँ’ का क्या आशय है ?
उत्तर:
बौद्ध धर्म में पाली और संस्कृत भाषाओं को अत्यधिक समृद्ध किया है। बौद्ध धर्म ने त्रिपिटकाएँ यानि तीन टोकरियाँ-विनयपटिक, सूतपिटक और अभिधम्मपिटक। विनय-पिटक में दैनिक जीवन के नियम व उपनियम हैं। सूतपिटक में नैतिकता और चार महासत्यों पर बुद्ध के संवाद और संभाषण संग्रहीत हैं। अभिधम्मपिटक में दर्शन और तत्व संग्रहीत हैं। बौद्ध साहित्य में दीपवंश, महावंश, दिव्यावदान, मिलिन्द पन्हों, महोबोधि वंश, महावंश टीका, आर्य मंजूश्री मूलकल्प आदि शामिल हैं।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित साहित्यकारों की एक-एक मुख्य रचना का नाम लिखिएभारवि, माघ, कल्हण, विल्हण, परिमल, बल्लाल, हरिषेण, वज्जिका, वराहमिहिर।
उत्तर:
साहित्यकार – रचना
1. भारवि – किरातार्जुनीय
2. माघ – शिशुपाल वध
3. कल्हण – राज तरंगिणी
4. विल्हण – विक्रमांक चरित्र
5. परिमल – नवसाहसांक चरित्र
6. बल्लाल – भोज प्रबन्ध
7. हरिषेण – प्रयाग प्रशस्ति लेख
8. वज्जिका – कौमुदी महोत्सव
9. वराहमिहिर – वृहत्संहिता

प्रश्न 5.
कालिदास की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
कालिदास की प्रमुख रचनाएँ अभिज्ञान शाकुन्तलम्, मालविकाग्निमित्र, मेघदूत, विक्रमोर्वशीयम, कुमारसम्भव, रघुवंश, ऋतुसंहार आदि हैं।

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प्रश्न 6.
राजपूतकालीन चित्रकला की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (2008)
उत्तर:
राजपूत काल में चित्रकला पूर्ण विकसित स्वरूप में आ चुकी थी। इस काल में चित्रकला की अनेक क्षेत्रीय शैलियाँ विकसित हो चुकी थीं; जैसे-गुजरात शैली, राजपूताना शैली। गुजरात शैली में जैन जीवन पद्धति एवं धर्म से सम्बन्धित चित्र हैं। राजपूताना शैली में राधाकृष्ण की रास लीला व नायक-नायिका के भेद सम्बन्धित चित्र हैं। मन्दिरों और राजमहलों को सजाने के लिये भित्ति चित्र बनाये जाते थे। लघु चित्रों को बनाने की कला भी इसी काल से प्रारम्भ हुई। पुस्तकों को आकर्षक बनाने के लिये यह चित्र बनाये जाते थे।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित राजपूतकालीन प्रमुख मन्दिर कहाँ स्थित हैं?
कन्दरिया महादेव, दिलवाड़ा मन्दिर, लिंगराज मन्दिर, मुक्तेश्वर मन्दिर, सूर्य मन्दिर, महाबलिपुरम् और वृहदीश्वर मन्दिर।
अथवा
राजपूतकालीन किन्हीं चार मन्दिरों के नाम एवं उनके स्थान बताइए। (2010, 15)
उत्तर:
राजपूतकालीन प्रमुख मन्दिर
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 11 प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ - 3

प्रश्न 8.
सिन्धु सभ्यता में मूर्ति शिल्प की विशेषताएँ बताइए। (2011)
उत्तर:
सिन्धु सभ्यता में धातु की मूर्तियों का चलन शुरू हो चुका था। मोहनजोदड़ो से एक नर्तकी की कांस्य मूर्ति मिली है। इसी सभ्यता का एक कांस्य रथ मूर्ति के रूप में मिला है। दो पहिए वाले रथ को दो बैल खींच रहे हैं। इसी समय की अन्य मूर्तियों में हाथी, गैंडा, कूबड़दार बैल सर्वाधिक प्राप्त हैं। अन्य पशु-मूर्तियों में कुत्ता, भेड़, सुअर, बन्दर और अन्य पशु-पक्षियों का अंकन मोहरों पर मिलता है। सिन्धु सभ्यता में मृणमूर्तियाँ बहुत मिलती हैं। सिन्धु सभ्यता की मोहरें वर्गाकार, आयतकार व बटन के आकार की हैं। ये गोमेद, चर्ट और मिट्ठी की हैं। लोथल के देसलपुर से ताँबे की मोहर भी प्राप्त हुई हैं। इसमें एक चौकी पर पशुपति शिव आसीन हैं जिनके आस-पास हाथी, चीता, गैंडा, भैंस आदि का अंकन मिलता है।

प्रश्न 9.
गुप्तकाल साहित्य का स्वर्ण युग था। कारण बताइए। (2009)
उत्तर:
गुप्तकाल साहित्य का स्वर्ण युग-गुप्त शासकों के शासन काल में साहित्य जिस रूप में पुष्पित-फलित हुआ, वह अद्वितीय है। इस काल में ज्ञान-विज्ञान की अनेक विधाओं में साहित्य सृजन किया गया। स्मृति साहित्य का सृजन इसी काल में किया गया। याज्ञवल्क्य स्मृति, नारद स्मृति, कात्यायन स्मृति आदि प्रमुख हैं। रामायण तथा महाभारत को गुप्तकाल में लिपिबद्ध किया गया। बौद्ध दार्शनिक असंग ने महायानसूत्रानंकार व योगाचार भूमिशास्त्र, वसुबंध ने अभिधर्म कोष की रचना की। जैन लेखकों में जिनचन्द्र, सिद्धसेन, देवनन्दिन आदि प्रमुख हैं। गुप्तकालीन साहित्य को देखकर प्रतीत होता है कि उस युग में प्रचलित शिक्षा पद्धति उत्तम रही होगी। नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना इसी काल में हुई थी। इसीलिए गुप्तकाल साहित्य का स्वर्ण युग था।

प्रश्न 10.
“सिन्धु सभ्यता में नृत्य संगीत की परम्परा थी।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में नृत्य संगीत की परम्परा अत्यन्त प्राचीन है। नृत्य के माध्यम से कलाकार अपनी कला को प्रकट करता है। जबकि संगीत का उपयोग मनोरंजन के साथ-साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक अवसरों पर किया जाता है।

सिन्धु सभ्यता में नृत्य संगीत की परम्परा थी, इसके स्पष्ट प्रमाण भी उपलब्ध हैं। मोहनजोदड़ो से प्राप्त कांस्य नर्तकी की प्रतिमा इस बात की पुष्टि करती है कि तत्कालीन समय में नृत्यकला, मनोरंजन आदि भाव एवं मोहरों पर ढोलक का अंकन प्राप्त होता है, जो उस समय संगीत के होने का प्रमाण देती है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि सिन्धु सभ्यता में नृत्य तथा संगीत कला लोकप्रिय रही होगी।

प्रश्न 11.
गुप्तकाल में नृत्य-संगीत कला का वर्णन कीजिए। (2008, 09)
उत्तर:
गुप्तकाल में नृत्य-संगीत विधा का बहुत विकास हुआ। तत्कालीन समय में वसन्तोत्सव, कौमुदी महोत्सव, दीपोत्सव आदि पर नृत्य-संगीत का प्रचलन था। उस काल में गणिकाओं का उल्लेख मिलता है जिनका प्रमुख कार्य नृत्य और गायन था। गुप्त शासकों द्वारा कलाकारों को प्रश्रय देने की जानकारी भी मिलती है। समुद्रगुप्त स्वयं एक श्रेष्ठ वीणावादक थे इसलिये अपनी स्मृति को जीवित रखने के लिये उन्होंने वीणाधारी प्रकार के सिक्कों को चलवाया। गुप्तकालीन वाघ की गुफाओं में नृत्य-संगीत का एक महत्त्वपूर्ण चित्र मिलता है जो तत्कालीन समय में नृत्य-संगीत के वैभव के परिचायक हैं। मालविकाग्निमित्र से स्पष्ट होता है कि नगरों में संगीत की शिक्षा के लिये कलाभवन और आचार्य भी होते थे। इस प्रकार गुप्तकाल में नृत्य-संगीत के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं।

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प्रश्न 12.
मुगलकाल में किन-किन भाषाओं का विकास हुआ?
उत्तर:
मुगलकाल में, वर्तमान में प्रचलित भाषाओं में से कई भाषाओं का विकास हुआ। कबीर, जायसी, सूरदास, तुलसीदास आदि की रचनाओं का हिन्दी भाषा में विशेष महत्त्व है। मीरा ने राजस्थानी भाषा व मैथली शब्दों का प्रयोग किया। बंगाल में रामायण और महाभारत का संस्कृत से बंगाली भाषा में अनुवाद किया गया। महाराष्ट्र में नामदेव तथा एकनाथ मराठी के प्रसिद्ध सन्त और साहित्यकार हुए। मुगलकाल में शासक साहित्य प्रेमी थे। सभी ने विद्वानों को संरक्षण प्रदान किया था। इस काल में फारसी और तुर्की भाषा में रचनाएँ लिखी गईं। मुगलकाल में उर्दू साहित्य का सबसे अधिक विकास हुआ। प्रारम्भ में उर्दू को ‘जबान-ए-हिन्दर्वा’ कहा जाता था। अकबर ने संस्कृत भाषा के अनेक ग्रन्थों का अनुवाद फारसी भाषा में करवाया था।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित लेखकों की रचनाएँ लिखिएबाबर, गुलाबदत्त, अब्बास खान, अबुल फजल, मलिक मोहम्मद जायसी, सूरदास, तुलसीदास।
उत्तर:

प्रश्न 14.
जैन साहित्य के बारे में वर्णन कीजिए। (2010, 15)
अथवा
जैन साहित्य के बारे में कोई चार बिन्दु लिखिए। (2017)
उत्तर:
जैन साहित्य-इस साहित्य की तीन शाखाएँ हैं –

  1. धार्मिक ग्रन्थ, दर्शन और धर्म निरपेक्ष लेखन।
  2. इनमें मुख्यतः काव्य, दन्त कथाएँ, व्याकरण एवं नाटक हैं। इनमें से अधिकार रचनाएँ अभी तक पाण्डुलिपि के रूप में है और गुजरात तथा राजस्थान के चैत्यों में मिलती हैं। रचनाएँ हैं-अंग, पंग, प्रकीर्ण, छेद, सूत्र और मलसूत्र।
  3. अन्तिम चरण में आख्यान एवं दन्तकथाएँ लिखने के लिए उन्होंने प्राकृत के स्थान पर संस्कृत भाषा का प्रयोग किया। व्याकरण और काव्यशास्त्र पर उनके कार्य से संस्कृत की वृद्धि में काफी योगदान हुआ।
  4. जैन साहित्य में भद्रबाहु का कथसूत्र, हेमचन्द्र का परिशिष्ट पर्वन प्रमुख ग्रन्थ हैं।

प्रश्न 15.
सल्तनतकालीन नृत्य-संगीत का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सल्तनत काल में नवीन रागों एवं वाद्य यन्त्रों से हिन्दुस्तानी संगीत का परिचय हुआ। यद्यपि कुरान में संगीत को वर्जित माना गया है। किन्तु समय-समय पर सुल्तानों, सामन्तों आदि खलीफाओं ने इसे प्रोत्साहित किया। इस समय का प्रसिद्ध संगीतकार अमीर खुसरो था जिसने संगीत का वर्णन अपनी पुस्तक ‘नूरह सिपहर’ (नव आकाश) में किया है। इस पुस्तक में लिखा है कि ‘भारतीय संगीत से हृदय और आत्मा उद्वेलित हो जाते हैं। भारतीय संगीत मात्र मनुष्य को ही प्रभावित नहीं करता वरन् यह पशुओं तक को मन्त्र मुग्ध कर देता है। हिरन संगीत सुनकर अवाक खड़े रह जाते हैं और उनका आसानी से शिकार कर लिया जाता है।’ अमीर खुसरो ने भारतीय ईरानी संगीत सिद्धान्तों के मिश्रण से कुछ नवीन रागों को ईजाद किया। कब्बाली का जनक अमीर खुसरो था। तत्कालीन समय में ख्याल तराना जैसी संगीत की नई विधाओं के कारण संगीत के रूप में परिवर्तन आया।

प्रश्न 16.
अमृतसर के हरिमन्दिर की प्रसिद्धि का क्या कारण है?
उत्तर:
गुरुद्वारों में अमृतसर का हरिमन्दिर तत्कालीन समय की अनुपम कृति है। इसका निर्माण 1588 से 1601 ई. के बीच किया गया। यह स्वर्ण मन्दिर अमृतसर नामक सरोवर के मध्य बना हुआ। यह 20 मीटर लम्बे और 20 मीटर चौड़े चार कोनों में चार बुर्जियाँ और बीच में मुख्य गुम्बद है। बाद में इस गुम्बद को महाराजा रणजीत सिंह ने सोने की प्लेटों से सुसज्जित कर दिया। इसलिए यह हरिमन्दिर स्वर्ण मन्दिर के नाम से पुकारा जाने लगा। इसकी चारों दिशाओं में चार चाँदी की दीवारों से मढ़े हुए द्वार हैं। इसकी दीवारें सफेद संगमरमर से बनी हुई हैं।

प्रश्न 17.
मुगलकालीन नृत्य-संगीत कला का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मुगलकालीन में नृत्य-संगीत कला फली-फूली। बाबर स्वयं संगीत प्रेमी था। हुमायूँ व शेरशाह सूरी को भी संगीत का शौक था। मुगल सम्राट अकबर ने संगीतज्ञों को आश्रय दिया। अकबर के दरबार में नवरत्नों में से तानसेन उस युग का सर्वश्रेष्ठ संगीतज्ञ था। उस जैसा गायक हजारों वर्षों से नहीं हुआ है। तानसेन की शिक्षा ग्वालियर में हुई थी। तानसेन के अतिरिक्त 36 गायकों को अकबर के दरबार में संरक्षण प्राप्त था। अकबर के समय ध्रुपद गायन की चार शैलियाँ चलन में थीं। मुगलकाल में संगीत के संस्कृत ग्रन्थों का फारसी में अनुवाद किया गया। मुगलकाल में जहाँगीर के समय खुर्रम दाद, मक्खू, चतुरखाँ और हमजा आदि संगीतज्ञ थे। इसी तरह शाहजहाँ के समय रामदास, जगन्नाथ, सुखसैन और लाल खाँ आदि प्रमुख संगीतज्ञ थे। औरंगजेब संगीत कला का विरोधी था। अत: मुगलकालीन नृत्य-संगीत कला शाहजहाँ के बाद पतन की ओर बढ़ने लगी।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राचीन भारतीय इतिहास जानने के साहित्यिक स्रोतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्राचीन भारतीय इतिहास जानने के प्रमुख साहित्यिक स्रोत निम्नलिखित हैं –
(1) वैदिक साहित्य :
आर्यों के प्राचीनतम ग्रन्थ वेद हैं, जिनकी संख्या चार है। ये वेद हैं-ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद तथा अथर्ववेद। इनमें सबसे प्राचीनतम ऋग्वेद है। ऋग्वेद में वैदिककालीन आर्यों के सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक जीवन का विवरण मिलता है तो सामवेद, यजुर्वेद तथा अथर्ववेद में उत्तर वैदिक कालीन सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन की विवेचना की गयी है। ऋग्वेद में आर्यों और अनार्यों के मध्य होने वाले संघर्षों तथा आर्यों के राजनीतिक संगठन का भी उल्लेख है।

(2) ब्राह्मण ग्रन्थ तथा उपनिषद् :
ब्राह्मण ग्रन्थों की रचना यज्ञ तथा कर्मकाण्डों के विधान को समझने के लिए की गयी थी। प्रमुख ब्राह्मण ग्रन्थ-ऐतरेय, शतपथ तथा पंचविश थे। उपनिषदों से तत्कालीन दार्शनिक, सामाजिक तथा धार्मिक चिन्तन का ज्ञान प्राप्त होता है।

(3) पुराण :
पुराणों की संख्या अठारह है परन्तु इनमें वायु, विष्णु, मत्स्य, भविष्य तथा भागवत पुराण सर्वाधिक महत्त्व के हैं। यद्यपि ये सभी धार्मिक ग्रन्थ हैं परन्तु इनका सावधानी से अध्ययन करने पर तत्कालीन इतिहास की पर्याप्त जानकारी हो जाती है।

(4) रामायण तथा महाभारत :
रामायण तथा महाभारत वेदों के पश्चात् सर्वाधिक महत्त्व के ग्रन्थ हैं। रामायण के लेखक महाकवि वाल्मीकि थे तथा महाभारत के मुनि व्यास थे। इन दोनों काव्य ग्रन्थों से हमें उस काल के सामाजिक, थार्मिक तथा आर्थिक जीवन की पर्याप्त जानकारी होती है।

(5) बौद्ध तथा जैन ग्रन्थ :
उपर्युक्त धर्मग्रन्थों के समान ही बौद्ध तथा जैन धर्म के ग्रन्थों का भी अपना विशेष महत्त्व है। प्रमुख बौद्ध ग्रन्थ हैं-विनयपिटक, अभिधम्मपिटक तथा सूतपिटक। इन तीनों ग्रन्थों में भगवान बुद्ध के उपदेशों का उल्लेख करने के साथ-साथ तत्कालीन राजनीतिक घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। मौर्यकालीन सामाजिक तथा राजनीतिक दशा का ज्ञान कराने में दीपवंश व महावंश नामक अन्य बौद्ध ग्रन्थ सहायक होते हैं।

बौद्ध ग्रन्थों के समान जैन ग्रन्थ भी ऐतिहासिक जानकारी कराने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं। जैन ग्रन्थों में तत्कालीन भारत के राजतन्त्रों तथा गणतन्त्रों की व्यवस्था पर प्रकाश डाला गया है। आचार्य हेमचन्द्र द्वारा लिखित ‘परिशिष्ट पर्व’ नामक ग्रन्थ का विशेष महत्त्व है।

(6) साहित्यिक ग्रन्थ :
प्राचीन काल में धार्मिक ग्रन्थों के अतिरिक्त अनेक साहित्यिक ग्रन्थों की भी रचना हुई थी जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं-पाणिनी का अष्टाध्यायी, पतंजलि का महाभाष्य, कालिदास का अभिज्ञानशाकुन्तलम्, विशाखदत्त का मुद्राराक्षस तथा कल्हण की राजतरंगिणी। इन ग्रन्थों के अध्ययन से तत्कालीन भारत की सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक दशा का भी ज्ञान होता है। जयद्रथ की पृथ्वीराज विजय तथा जयचन्द,का हमीर काव्य भी महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ हैं। तमिल साहित्य में संगम साहित्य का भी अपना विशेष महत्त्व है। संगम साहित्य का अध्ययन करने से हमें दक्षिण भारत के तत्कालीन सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक जीवन का ज्ञान होता है।

प्रश्न 2.
शाहजहाँ द्वारा बनाई गई इमारतें कौन-कौन-सी हैं? वर्णन कीजिए। (2008)
उत्तर:
स्थापत्य कला की दृष्टि से शाहजहाँ के काल को स्वर्ण युग कहते हैं। उसकी अधिकांश इमारतें संगमरमर के पत्थरों की बनी हुई हैं। शाहजहाँ की इमारतों का विवरण निम्न प्रकार है –

(1) ताजमहल :
ताजमहल विश्व की सबसे सुन्दर तथा कला का उच्चकोटि का नमूना है। इसका निर्माण शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल की यादगार में कराया था। इसका निर्माण आगरा नगर के दक्षिण में यमुना के किनारे पर राजा जयसिंह के बगीचे में किया गया था। ताजमहल का नमूना उस्ताद अहमद लाहौरी ने तैयार किया था। वह शाहजहाँ का प्रधान कारीगर था। ताजमहल के निर्माण में 22 वर्ष लगे थे और उसमें 50 लाख रुपये खर्च हुए थे। ताजमहल कला का अद्भुत नमूना माना जाता है।

(2) दीवान-ए-आम :
दीवान-ए-आम का निर्माण शाहजहाँ ने 1628 ई. में आगरा के किले में कराया था। यहाँ पर सम्राट का दरबार लगता था। इसमें दोहरे खम्भों की 40 कतारें हैं। यह हॉल तीनों ओर से खुला हुआ है। उसके खम्भे सुन्दर संगमरमर के बने हुए हैं।

(3) जामा मस्जिद :
यह मस्जिद आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन (मीटरगेज) के सामने स्थित है। इसका निर्माण शाहजहाँ की पुत्री जहाँआरा बेगम ने कराया था। इसकी मुख्य इमारत 103 फुट लम्बी तथा 10 फुट चौड़ी है। इसके निर्माण पर 5 लाख रुपये व्यय हुए थे।

(4) दिल्ली का लाल किला :
इस किले का निर्माण शाहजहाँ ने यमुना के किनारे कराया था। इसकी चौड़ाई 1,600 फुट तथा लम्बाई 3,200 फुट है। इसके भीतर दरबार-ए-आम तथा दरबार-ए-खास का भी निर्माण कराया गया। इस किले में स्थित मोती महल, हीरामहल और रंग महल अधिक प्रसिद्ध हैं।

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MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

MP Board Class 9th Science Chapter 10 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

प्रश्न शृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 149

प्रश्न 1.
गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम बताइए। (2018, 19)
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम-“विश्व का प्रत्येक पिण्ड प्रत्येक अन्य पिण्ड को एक बल से आकर्षित करता है, जो दोनों पिण्डों के द्रव्यमान के समानुपाती होता है तथा दोनों के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है।” यह बल गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता है तथा दोनों पिण्डों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में लगता है।

प्रश्न 2.
पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी वस्तु के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिमाण ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण बल (F) = \(\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{\mathrm{R}^{2}}\)
जहाँ M = पृथ्वी का द्रव्यमान
m = वस्तु का द्रव्यमान
R = पृथ्वी की त्रिज्या एवं
G = गुरुत्वाकर्षण नियतांक है।

प्रश्न शृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 152

प्रश्न 1.
मुक्त पतन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मुक्त पतन-“जब वस्तुएँ पृथ्वी की ओर उस पर लगने वाले केवल गुरुत्वीय बल के कारण गिरती हैं तो उनका इस प्रकार गिरना मुक्त पतन कहलाता है।”

प्रश्न 2.
गुरुत्वीय त्वरण से आप क्या समझते हैं? (2019)
उत्तर:
गुरुत्वीय त्वरण-“पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण किसी गिरते हुए पिण्ड में उत्पन्न त्वरण गुरुत्वीय त्वरण कहलाता है।” इसे g से प्रदर्शित करते हैं।

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प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 153

प्रश्न 1.
किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा भार में क्या अन्तर है?
उत्तर:
किसी वस्तु के द्रव्यमान एवं उसके भार में अन्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 1

प्रश्न 2.
किसी वस्तु का चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर इसके भार का \(\frac{1}{6}\) गुना क्यों होता है?
उत्तर:
चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण के मान का \(\frac{1}{6}\) होता है और किसी वस्तु का भार उसके द्रव्यमान एवं गुरुत्वीय त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है इसलिए किसी वस्तु का चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर इसके भार का \(\frac{1}{6}\) गुना होता है।

प्रश्न श्रृंखला-4 # पृष्ठ संख्या 157

प्रश्न 1.
एक पतली तथा मजबूत डोरी से बने पट्टे की सहायता से स्कूल बैग को उठाना कठिन होता है, क्यों?
उत्तर:
पतली डोरी से बना पट्टा कम सम्पर्क क्षेत्रफल घेरता है अतः बैग अधिक दाब डालता है। इसलिए इसकी सहायता से स्कूल बैग को उठाना कठिन होता है।

प्रश्न 2.
उत्प्लावकता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
उत्प्लावकता-“जब किसी वस्तु को किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो वह द्रव उस वस्तु के ऊपर एक उत्प्लावन बल लगाता है। द्रव की इस प्रवृत्ति या गुण को उत्प्लावकता कहते हैं।”

प्रश्न 3.
पानी की सतह पर रखने पर कोई वस्तु क्यों तैरती या डूबती है?
उत्तर:
जब किसी वस्तु को पानी के पृष्ठ पर रखते हैं तो उस पर दो बल कार्य करते हैं। एक वस्तु का भार नीचे की ओर दूसरा उस पर लगा उत्प्लावन बल ऊपर की ओर। यह उत्प्लावन बल उस वस्तु द्वारा हटाए गए पानी के भार के बराबर होता है। जब वस्तु का भार उत्प्लावन बल से अधिक होता है तो वस्तु डूब जाती है और जब यह कम या बराबर होता है तो वस्तु तैरती है।

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प्रश्न श्रृंखला-5 # पृष्ठ संख्या 158

प्रश्न 1.
एक तुला (Weighing machine) पर आप अपना द्रव्यमान 42 kg नोट करते हैं? क्या आपका द्रव्यमान 42 kg से अधिक है या कम?
उत्तर:
हमारा वास्तविक द्रव्यमान 42 kg से अत्यन्त सूक्ष्म मात्रा में अधिक होगा।

प्रश्न 2.
आपके पास एक रुई का बोरा तथा एक लोहे की छड़ है। तुला पर मापने पर दोनों 100 kg द्रव्यमान दर्शाते हैं। वास्तविकता में एक दूसरे से भारी है। क्या आप बता सकते हैं कि कौन-सा भारी है और क्यों?
उत्तर:
वास्तविकता में रुई का बोरा, लोहे की छड़ से अधिक भारी है क्योंकि रुई के बोरे का आयतन लोहे की छड़ से अधिक है, इसलिए बोरे पर वायु द्वारा आरोपित उत्प्लावन बल छड़ पर लगे उत्प्लावन बल से अधिक है।

MP Board Class 9th Science Chapter 10 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाय, तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल किस प्रकार बदलेगा?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण बल चौथाई रह जायेगा क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

प्रश्न 2.
सभी वस्तुओं पर लगने वाला गुरुत्वीय बल उनके द्रव्यमान के समानुपाती होता है। फिर एक भारी वस्तु हल्की वस्तु के मुकाबले तेजी से क्यों नहीं गिरती ?
उत्तर:
गिरती हुई वस्तुओं का वेग गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भर करता है, वस्तु के भार पर नहीं और गुरुत्वीय त्वरण सभी वस्तुओं पर समान लगता है। इसलिए भारी वस्तु हल्की वस्तु के मुकाबले तेजी से नहीं गिरती।

प्रश्न 3.
पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी 1 kg की वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल का परिमाण क्या होगा? (पृथ्वी का द्रव्यमान 6 x 1024 kg तथा पृथ्वी की त्रिज्या 6.4 x 106 m है।)
हल:
ज्ञात है:
पृथ्वी का द्रव्यमान M = 6 x 1024kg
पृथ्वी की त्रिज्या R = 6.4x 106 m
वस्तु का द्रव्यमान m = 1 kg
सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक G = 6.7 x 10-11
Nm2kg-2
हम जानते हैं कि पृथ्वी तल पर
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 2
= 9:814N.
अतः अभीष्ट गुरुत्वीय बल = 9.814 N.

प्रश्न 4.
पृथ्वी तथा चन्द्रमा एक-दूसरे को गुरुत्वीय बल से आकर्षित करते हैं। क्या पृथ्वी जिस बल से चन्द्रमा को आकर्षित करती है वह बल, उस बल से जिससे चन्द्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है, बड़ा है या छोटा है या बराबर है? बताइए क्यों?
उत्तर:
गुरुत्वीय बल परस्पर आकर्षण बल है। यह पृथ्वी द्वारा चन्द्रमा पर या चन्द्रमा द्वारा पृथ्वी पर समान रूप से लगता है तथा बीच की दूरी के अनुदिश होता है। इसलिए यह बराबर है।

प्रश्न 5.
यदि चन्द्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है तो पृथ्वी चन्द्रमा की ओर गति क्यों नहीं करती?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण बल परस्पर होता है अर्थात् जिस बल से चन्द्रमा पृथ्वी को अपनी ओर आकर्षित करता है उसी बल से पृथ्वी चन्द्रमा को अपनी ओर आकर्षित करती है। इसलिए पृथ्वी चन्द्रमा की ओर गति नहीं करती।

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प्रश्न 6.
दो वस्तुओं के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का क्या होगा? यदि –
(i) एक वस्तु का द्रव्यमान दो गुना कर दिया जाए।
(ii) वस्तुओं के बीच की दूरी दो गुनी अथवा तीन गुनी कर दी जाए।
(iii) दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान दो गुने कर दिए जाएँ।
दो वस्तुओं के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल \(\mathrm{F}=\frac{\mathrm{G} m_{1} m_{2}}{r^{2}}\) होता है।
उत्तर:
(i)
जब किसी एक वस्तु का द्रव्यमान दो गुना कर दिया जाये तो बल
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 3
अर्थात् गुरुत्वाकर्षण बल दो गुना हो जाएगा।

(ii)
जब दूरी दो गुनी कर दी जाएगी, तो
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 4
अर्थात् बल \(\frac{1}{4}\) गुना हो जाएगा। इसी प्रकार जब दूरी तीन गुनी कर दी जाएगी तो बल – गुना हो जाएगा।

(iii)
जब दोनों वस्तुओं का द्रव्यमान दो गुना कर दिया जाए तो
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 5
अर्थात् गुरुत्वाकर्षण चार गुना हो जाएगा।

प्रश्न 7.
गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के क्या महत्व हैं? (2018, 19)
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के महत्व-गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम अनेक ऐसी परिघटनाओं की सफलतापूर्वक व्याख्या करता है जो असम्बद्ध मानी जाती थीं –

  1. हमें पृथ्वी से बाँधे रखने वाला बल।
  2. पृथ्वी के चारों ओर चन्द्रमा की गति।
  3. सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति।
  4. चन्द्रमा तथा सूर्य के कारण ज्वार-भाटा।

प्रश्न 8.
मुक्त पतन का त्वरण क्या है?
उत्तर:
मुक्त पतन का त्वरण गुरुत्वीय त्वरण ‘g’ है। इसका मान सामान्यत: 9.8 m s-2 होता है।

प्रश्न 9.
पृथ्वी तथा किसी वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल को हम क्या कहेंगे?
उत्तर:
उस वस्तु का भार।

प्रश्न 10.
एक व्यक्ति ‘A’ अपने एक मित्र के निर्देश पर ध्रुवों पर कुछ ग्राम सोना खरीदता है। वह इस सोने को विषुवत् वृत्त पर अपने मित्र को देता है। क्या उसका मित्र खरीदे हुए सोने के भार से सन्तुष्ट होगा? यदि नहीं तो क्यों? (संकेत: ध्रुवों पर g का मान विषुवत् वृत्त की अपेक्षा अधिक है।)
उत्तर:
चूँकि ध्रुवों पर g का मान विषुवत् वृत्त की अपेक्षा अधिक है। इसलिए सोने का भार ध्रुवों पर अधिक होगा तथा विषुवत् वृत्त पर कम होगा। इसलिए उसका मित्र सन्तुष्ट नहीं होगा।
[नोट: यदि सोने के द्रव्यमान का मापन किया गया है तो कोई अन्तर नहीं होगा।]

प्रश्न 11.
एक कागज की शीट, उसी प्रकार की शीट को मरोड़कर बनाई गई गेंद से धीमी क्यों गिरती है?
उत्तर:
कागज की शीट का आयतन गेंद के आयतन से अधिक होगा। इस कारण हवा का उत्प्लावन बल उस पर अधिक होगा। इसलिए वह शीट धीमी गिरेगी।

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प्रश्न 12.
चन्द्रमा की सतह पर गुरुत्वीय बल, पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय बल की अपेक्षा \(\frac{1}{6}\) गुना है। एक 10 kg की वस्तु का चन्द्रमा पर तथा पृथ्वी पर न्यूटन में भार क्या होगा?
हल:
ज्ञात है:
वस्तु का द्रव्यमान m = 10 kg
गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी पर ge = 9.8 m s-2
गुरुत्वीय त्वरण चन्द्रमा पर gm = \(\frac{1}{6}\) ge
= \(\frac{1}{2}\) x 9.8 = 1.63 m s-2
वस्तु का भार w = mg
⇒ वस्तु का पृथ्वी पर भार we = mge
⇒ 10 x 9.8 = 98 N
एवं वस्तु का चन्द्रमा पर भार wm = m gm
= 10 x 1.63 = 16.3 N
अतः वस्तु का अभीष्ट भार पृथ्वी पर= 98 N एवं चन्द्रमा पर = 16.3 N

प्रश्न 13.
एक गेंद ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 49 m/s के वेग से फेंकी जाती है। परिकलन कीजिए –
(i) अधिकतम ऊँचाई जहाँ तक कि गेंद पहुँचती है
(ii) पृथ्वी की सतह पर वापस लौटने में लिया गया कुल समय।
हल:
(i)
हम जानते हैं कि
ज्ञात है:
गेंद का प्रारम्भिक वेग u = 49 m s-1
गेंद का अन्तिम वेग v = 0 m s-1
त्वरण (गुरुत्वीय)g = – 9.8 m s-2
ज्ञात करना है:

  1. अधिकतम ऊँचाई h = ?
  2. वापस आने में कुल समय = 2t = ?

2gh = v2 – u2
⇒ 2 x (-9.8)h = (0)2 – (49)2
⇒ – 2 x 9.8h = – 49 x 49
⇒ \(h=\frac{49 \times 49}{2 \times 9.8}\)
⇒ h = 122.5m.

(ii)
v = u + gt
⇒ 0 = 49 – 9.8t
⇒ t = \(\frac{49}{9.8}\) = 5s
चूँकि जाने एवं आने में समय बराबर लगता है।
इसलिए वापस आने में कुल समय = 2 x 5 = 10 s
अतः अभीष्ट

  1. ऊँचाई = 122.5 m एवं
  2. अभीष्ट समय = 10 s.

प्रश्न 14.
19.6 m ऊँची एक मीनार की चोटी से एक पत्थर छोड़ा जाता है। पृथ्वी पर पहुँचने से पहले इसका अन्तिम वेग ज्ञात कीजिए।
हल:
हम जानते हैं कि
ज्ञात है:
पत्थर का प्रारम्भिक वेग ५ = 0 m s-1
पत्थर की ऊँचाई h = 19.6 m
त्वरण (गुरुत्वीय) g = 9.8 m s-2
v2 – u2 = 2gh
v2 – (0)2 = 2 (9.8) x 19.6
v2 = 19.6 x 19.6
v = \(\sqrt{19 \cdot 6 \times 19 \cdot 6}\) = 19.6 m s-1
अतः अभीष्ट वेग = 19.6 m s-1.

प्रश्न 15.
कोई पत्थर ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 40 m s-1 के प्रारम्भिक वेग से फेंका गया है। g= 10 m s-2 लेते हुए पत्थर द्वारा पहुँची हुई अधिकतम ऊँचाई ज्ञात कीजिए। नेट विस्थापन तथा पत्थर द्वारा चली गयी कुल दूरी कितनी होगी?
हल:
हम जानते हैं कि
ज्ञात है:
पत्थर का प्रारम्भिक वेग u = 40 m s-1
पत्थर का अन्तिम वेग v = 0 m s-1
गुरुत्वीय त्वरण g = – 10 m s-2
2gh = v2 – u2
2 (-10) h = (0)2 – (40)2
– 20 h = 0 – 1600
h = \(\frac{1600}{20}\) = 80 m
चूँकि पत्थर लौटकर वापस अपनी पूर्वावस्था में आ जाता है। इसलिए नेट विस्थापन शून्य होगा।
कुल दूरी (चली गई) = 2h = 2 x 80 = 160 m
अभीष्ट अधिकतम ऊँचाई = 80 m
नेट विस्थापन = 0 (शून्य)
कुल चली गई दूरी = 160 m.

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प्रश्न 16.
पृथ्वी तथा सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का परिकलन कीजिए। दिया है-पृथ्वी का द्रव्यमान =6x 1024 kg तथा सूर्य का द्रव्यमान =2 x 1030 kg, दोनों के बीच औसत दूरी = 1.5 x 10lm.
हल:
ज्ञात है:
पृथ्वी का द्रव्यमान ma = 6 x 1024 kg
सूर्य का द्रव्यमान m2 = 2 x 1030 kg
दोनों के बीच की औसत दूरी d= 1.5 x 1011m
गुरुत्वीय स्थिरांक G = 6.7 x 10-11N m2 kg-2
गुरुत्वाकर्षण के नियम से
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 6
= 3.573 x 1022N
अतः अभीष्ट गुरुत्वाकर्षण बल = 3.573 x 1022 N

प्रश्न 17.
कोई पत्थर 100 m ऊँची किसी मीनार की चोटी से गिराया गया और उसी समय कोई दूसरा पत्थर 25 m/s के वेग से ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंका गया। परिकलन कीजिए कि दोनों पत्थर कब और कहाँ मिलेंगे?
हल:
माना दोनों यात्रा प्रारम्भ के t s बाद पृथ्वी तल से hm ऊँचाई पर मिलेंगे।
पहले पत्थर द्वारा तय की गयी दूरी
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 7
चूँकि
h1 + h2 =h
4.9t2 + 25t – 4.9t2 = 100
25t = 100
t = \(\frac{100}{25}\) = 4 s
h = ut + \(\frac{1}{2}\)gt2
= 25 x 4+ \(\frac{1}{2}\) (-9.8) (4)2
= 100 – 78.4 = 21.6 m
अतः दोनों पत्थर पृथ्वी तल से 21.6 m की ऊँचाई पर 4 s बाद मिलेंगे।

प्रश्न 18.
ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंकी गई एक गेंद 6 s पश्चात् फेंकने वाले के पास लौट आती है। ज्ञात कीजिए –
(a) यह किस वेग से ऊपर फेंकी गई।
(b) गेंद द्वारा पहुँची गयी अधिकतम ऊँचाई।
(c) 4 s पश्चात् गेंद की स्थिति।
हल:
चूँकि गेंद ऊपर जाने और वापस आने में 6 s का समय लेती है।
इसलिए ऊपर जाने में लगा समय t = \(\frac{6}{2}\) = 3 s एवं
अन्तिम वेग v = 0 m s-1
माना गेंद का प्रारम्भिक वेग = u m s-1 तथा गुरुत्वीय त्वरण g = – 9.8 m s-2
(a)
v = u + gt
0 = u – 9.8 x 3
⇒ u = 29.4 m s-1
अत: गेंद अभीष्ट वेग 29.4 m s-1 से ऊपर फेंकी गयी।

(b)
⇒ h = ut + \(\frac{1}{2}\) gt2
⇒ h = 29.4 x 3 + \(\frac{1}{2}\) + (-9.8) (3)2
h = 88.2 – 44.1 = 44.1 m.
अत: गेंद द्वारा पहुँची गयी अभीष्ट m = अधिकतम ऊँचाई = 44.1 m.

(c)
प्रथम 3 सेकण्ड में गेंद अधिकतम ऊँचाई 44.1 m पर पहुँचकर लौटना प्रारम्भ कर देगी तथा अगले 1 s में माना वह उच्चतम बिन्दु से h1m नीचे आती है, तो
h1 = u1t + gt2
= 0 x 1 + \(\frac{1}{2}\)(9.8)(1)2 = 0 + 4.9 m
इस प्रकार 4 s बाद गेंद की पृथ्वी तल से ऊँचाई
= 44.1 – 4.9 = 39.2 m.
अत: 4s पश्चात् गेंद की अभीष्ट स्थिति 39.2 m पृथ्वी तल से ऊपर।

प्रश्न 19.
किसी द्रव में डुबोई गई वस्तु पर उत्प्लावन बल किस दिशा में कार्य करता है?
उत्तर:
ऊपर की ओर।

प्रश्न 20.
पानी के भीतर किसी प्लास्टिक के टुकड़े को छोड़ने पर यह पानी के पृष्ठ पर क्यों आ जाता है?
उत्तर:
पानी के अन्दर डूबे प्लास्टिक के टुकड़े पर जल द्वारा आरोपित उप्लावन बल उसके गुरुत्व बल (भार) से अधिक होता है। इसलिए वह प्लास्टिक का टुकड़ा जल के पृष्ठ पर आ जाता है।

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प्रश्न 21.
50 g के किसी पदार्थ का आयतन 20 cm3 है। यदि पानी का घनत्व 1 g cm-3 हो, तो पदार्थ तैरेगा या डूबेगा।
हल:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 8
चूँकि पदार्थ का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक है इसलिए पदार्थ पानी में डूब जाएगा।

प्रश्न 22.
500g के एक मोहरबन्द पैकेट का आयतन 350 cm3 है। पैकेट 1 g cm-3 घनत्व वाले पानी में तैरेगा या डूबेगा। इस पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान कितना होगा?
हल:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 9
चूँकि पैकेट का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक है। इसलिए पैकेट डूब जाएगा।
पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान = पैकेट का आयतन x पानी का घनत्व
= 350 cm3 x 1g cm-3 = 350 g
अतः पैकेट पानी में डूब जाएगा तथा पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान = 350 g.

MP Board Class 9th Science Chapter 10 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 9th Science Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चन्द्रमा के पृष्ठ के निकट मुक्त रूप से गिरते विभिन्न द्रव्यमानों के दो पिण्डों –
(a) के वेग किसी भी क्षण समान होंगे
(b) के विभिन्न त्वरण होंगे
(c) पर समान परिमाण के बल कार्य करेंगे
(d) के जड़त्वों में परिवर्तन हो जायेंगे।
उत्तर:
(a) के वेग किसी भी क्षण समान होंगे

प्रश्न 2.
गुरुत्वीय त्वरण का मान
(a) विषुवत् वृत्त तथा ध्रुवों पर समान होता है
(b) ध्रुवों पर न्यूनतम होता है
(c) विषुवत् वृत्त पर न्यूनतम होता है
(d) ध्रुवों से विषुवत् वृत्तों की ओर बढ़ता है।
उत्तर:
(c) विषुवत् वृत्त पर न्यूनतम होता है

प्रश्न 3.
दो पिण्डों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल F है। यदि दोनों पिण्डों के द्रव्यमान उनके बीच की दूरी को समान रखते हुए आधे कर दिए जायें, तो गुरुत्वाकर्षण बल हो जायेगा –
(a) F/4
(b) F/2
(c) F
(d) 2 F
उत्तर:
(a) F/4

प्रश्न 4.
कोई लड़का डोरी से बँधे पत्थर को किसी क्षैतिज वृत्ताकार पथ पर घुमा रहा है। यदि डोरी टूट जाये तो वह पत्थर –
(a) वृत्ताकार पथ में गति करेगा
(b) वृत्ताकार पथ के केन्द्र की ओर सरल रेखा के अनुदिश गति करेगा।
(c) वृत्ताकार पथ पर किसी सरल रेखीय स्पर्शी के अनुदिश गति करेगा
(d) लड़के से दूर वृत्ताकार पथ के अभिलम्बवत् सरल रेखा के अनुदिश गति करेगा।
उत्तर:
(c) वृत्ताकार पथ पर किसी सरल रेखीय स्पर्शी के अनुदिश गति करेगा

प्रश्न 5.
किसी पिण्ड को बारी-बारी से विभिन्न घनत्वों के तीन द्रवों में रखा जाता है। वह पिण्ड d2, d2 तथा d3 घनत्वों के द्रवों में क्रमशः \(\frac{1}{9}\), \(\frac{2}{11}\) तथा \(\frac{1}{2}\) भाग को द्रव के बाहर रखते हुए तैरता है। घनत्वों के विषय में कौन-सा कथन सही है?
(a) d1 > d2 > d3
(b) d1 > d2 < d3
(c) d1 < d2 > d3
(d) d1 < d2 < d3
उत्तर:
(d) d1 < d2 < d3

प्रश्न 6.
कथन F = \(\frac{\mathrm{GMm}}{d^{2}}\) में राशि G –
(a) परीक्षण स्थल पर g के मान पर निर्भर करता है
(b) का उपयोग दो द्रव्यमानों में से एक पृथ्वी होने पर ही किया जाता है
(c) पृथ्वी की सतह पर अधिक होता है
(d) प्रकृति का सार्वत्रिक नियतांक है
उत्तर:
(d) प्रकृति का सार्वत्रिक नियतांक है

प्रश्न 7.
गुरुत्वाकर्षण के नियम में गुरुत्वाकर्षण बल –
(a) केवल पृथ्वी तथा बिन्दु द्रव्यमान के बीच होता है
(b) केवल सूर्य तथा पृथ्वी के बीच होता है
(c) द्रव्यमान रखने वाले किन्हीं भी दो पिण्डों के बीच होता है
(d) केवल दो आवेशित पिण्डों के बीच होता है
उत्तर:
(c) द्रव्यमान रखने वाले किन्हीं भी दो पिण्डों के बीच होता है

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प्रश्न 8.
गुरुत्वाकर्षण के नियम से राशि G का मान –
(a) केवल पृथ्वी के द्रव्यमान पर निर्भर करता है
(b) केवल पृथ्वी की त्रिज्या पर निर्भर करता है
(c) पृथ्वी के द्रव्यमान एवं त्रिज्या दोनों पर निर्भर करता है
(d) पृथ्वी के द्रव्यमान एवं त्रिज्या पर निर्भर नहीं करता है
उत्तर:
(d) पृथ्वी के द्रव्यमान एवं त्रिज्या पर निर्भर नहीं करता है

प्रश्न 9.
दो कण कुछ दूरी पर रखे हैं। यदि दोनों कणों के द्रव्यमान दो गुने कर दिए जाएँ तथा इनके बीच की दूरी अपरिवर्तित रखें, तो इनके बीच का गुरुत्वाकर्षण बल –
(a) = गुना हो जाएगा
(b) 4 गुना हो जाएगा
(c) गुना हो जाएगा
(d) अपरिवर्तित रहेगा
उत्तर:
(b) 4 गुना हो जाएगा

प्रश्न 10.
वायुमण्डल पृथ्वी से जकड़ा हुआ है –
(a) गुरुत्वीय बल द्वारा
(b) पवन द्वारा
(c) बादलों द्वारा
(d) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा
उत्तर:
(a) गुरुत्वीय बल द्वारा

प्रश्न 11.
एकांक दूरी पर स्थित दो एकांक द्रव्यमानों के बीच आकर्षण बल कहलाता है –
(a) गुरुत्वीय विभव
(b) गुरुत्वीय त्वरण
(c) गुरुत्वीय क्षेत्र
(d) सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक
उत्तर:
(d) सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक

प्रश्न 12.
R त्रिज्या की पृथ्वी के केन्द्र पर किसी पिण्ड का भार –
(a) शून्य होता है
(b) अनन्त होता है
(c) पृथ्वी के पृष्ठ पर भार का R गुना होता है
(d) पृथ्वी के पृष्ठ पर भार का 7 गुना होता है
उत्तर:
(a) शून्य होता है

प्रश्न 13.
किसी पिण्ड का वायु में भार 10 N है। जल में पूरा डुबाने पर इसका भार केवल 8 N है। पिण्ड द्वारा विस्थापित जल का भार होगा –
(a) 2 N
(b) 8 N
(c) 10 N
(d) 12 N
उत्तर:
(a) 2 N

प्रश्न 14.
कोई लड़की 60 cm लम्बे, 40 cm चौड़े तथा 20 cm ऊँचे किसी बॉक्स पर तीन ढंग से खड़ी होती है। बॉक्स द्वारा लगाया गया दाब –
(a) तब अधिकतम होगा जब आधार लम्बाई एवं चौड़ाई से बना है
(b) तब अधिकतम होगा जब आधार चौड़ाई एवं ऊँचाई से बना है
(c) तब अधिकतम होगा जब आधार ऊँचाई एवं लम्बाई से बना है
(d) उपर्युक्त तीनों प्रकरणों में समान होगा
उत्तर:
(b) तब अधिकतम होगा जब आधार चौड़ाई एवं ऊँचाई से बना है

प्रश्न 15.
कोई सेब किसी वृक्ष से पृथ्वी पर पृथ्वी एवं सेब के बीच गुरुत्वाकर्षण बल के कारण गिरता है। यदि पृथ्वी द्वारा सेब पर आरोपित बल का परिमाण F1 है तथा सेब द्वारा पृथ्वी पर आरोपित बल का परिमाण F2 है, तो –
(a) F2 की तुलना में F1 बहुत अधिक होता है
(b) F1 की तुलना में F2 बहुत अधिक होता है
(c) F2 की तुलना में F1 केवल थोड़ा अधिक होता है
(d) F1 एवं F2 बराबर होते हैं
उत्तर:
(d) F1 एवं F2 बराबर होते हैं

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प्रश्न 16.
आकाशीय पिण्डों के बीच लगता है –
(a) चुम्बकीय बल
(b) विद्युत बल
(c) गुरुत्वीय बल
(d) घर्षण बल
उत्तर:
(c) गुरुत्वीय बल

प्रश्न 17.
चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण (gm) होता है –
(a) 6g
(b) g/6
(c) 10g
(d) शून्य
उत्तर:
(b) g/6

प्रश्न 18.
g का मान होता है सामान्यतः
(a) 9.8 m s
(b) 9.8 m s-1
(c) 9.8 m s
(d) 9.8 m s-2
उत्तर:
(b) 9.8 m s-1

प्रश्न 19.
g और G में सम्बन्ध होता है –
(a) gR2 = GM
(b) G = MgR2
(c) g = MGR2
(d) M = GgR2
उत्तर:
(a) gR2 = GM

प्रश्न 20.
g का सर्वाधिक मान होता है – (2019)
(a) ध्रुवों पर
(b) भूमध्य रेखा पर
(c) पृथ्वी के केन्द्र पर
(d) आकाश में।
उत्तर:
(a) ध्रुवों पर

प्रश्न 21.
गुरुत्वीय नियतांक को किस संकेत से व्यक्त करते हैं?
(a)g
(b) m
(c) G
(d) K
उत्तर:
(c) G

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. ……………… ने गुरुत्वाकर्षण का नियम दिया था। (2019)
2. दो पिण्डों के बीच ………….. बल लगता है।
3. गुरुत्वाकर्षण के कारण पेड़ से टूटा फल ……………. आता है।
4. एक किलोग्राम भार ……………. न्यूटन के बराबर होता है। (2019)
5. G का S.I. का मात्रक …………….. होता हैं।
6. दाब का S.I. का मात्रक ………….. होता है।
7. घनत्व का SI मात्रक …………. है। (2019)
उत्तर:

  1. न्यूटन
  2. गुरुत्वाकर्षण
  3. नीचे
  4. 9.8
  5. N m2 kg-2
  6. N m-2
  7. kg m-3

सही जोड़ी बनाना
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 10
उत्तर:

  1. → (iii)
  2. → (iv)
  3. → (v)
  4. → (vi)
  5. → (i)
  6. → (ii)

सत्य/असत्य कथन

1. G का मान हैनरी केवेण्डिश ने ज्ञात किया।
2. गुरुत्वाकर्षण का नियम गैलीलियो ने दिया।
3. गुरुत्वाकर्षण को केन्द्रीय बल कहा जाता है।
4. सभी वस्तुओं पर गुरुत्वाकर्षण बल समान होता है।
5. चन्द्रमा पर वस्तुओं के भार पृथ्वी की अपेक्षा कम होते हैं।
उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम का गणितीय सूत्र लिखिए।
उत्तर:
F = \(\mathrm{G} \frac{m_{1} m_{2}}{d^{2}}\)

प्रश्न 2.
पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी वस्तु के मध्य लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिमाण ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
F = \(\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{\mathrm{R}^{2}}\)

प्रश्न 3.
‘G’ का S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर:
N m2 kg-2

प्रश्न 4.
‘G’ का मान लिखिए।
उत्तर:
6.673 x 10-11 N m2 kg-2

प्रश्न 5.
‘G’ का मान किस वैज्ञानिक ने ज्ञात किया?
उत्तर:
हेनरी कैवेण्डिशने

प्रश्न 6.
गुरुत्वीय त्वरण ‘g’ का S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर:
ms-2

प्रश्न 7.
‘g’ एवं ‘G’ में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
g = \(\mathrm{G} \frac{\mathrm{M}}{\mathrm{R}^{2}}\) अथवा gR2 = GM

प्रश्न 8.
सामान्यतः g का मान क्या लिखा जाता है?
उत्तर:
9.8 m s-2

प्रश्न 9.
चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान कितना होता है?
उत्तर:
g/6 या 1.63 m s-2

प्रश्न 10.
किसी वस्तु के भार (w) एवं द्रव्यमान (m) में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
w = mg

प्रश्न 11.
भार के विभिन्न मात्रकों में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
1 किग्रा भार = 1 किग्रा बल = 9.8 न्यूटन

प्रश्न 12.
बल (F), दाब (P) एवं क्षेत्रफल (A) में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 11

प्रश्न 13.
दाब का S.I. मात्रक लिखिए। (2018)
उत्तर:
N m-2

प्रश्न 14.
घनत्व के लिए व्यंजक (सूत्र) लिखिए।
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 12

प्रश्न 15.
आपेक्षिक घनत्व के लिए व्यंजक (सूत्र) लिखिए।
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 13

प्रश्न 16.
घनत्व का S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर:
kg m-3

प्रश्न 17.
आपेक्षिक घनत्व का S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर:
कोई मात्रक नहीं

प्रश्न 18.
दाब सदिश राशि है या अदिश?
उत्तर:
अदिश

प्रश्न 19.
घनत्व सदिश राशि है या अदिश?
उत्तर:
अदिश

प्रश्न 20.
आपेक्षिक घनत्व सदिश राशि है या अदिश?
उत्तर:
अदिश।

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MP Board Class 9th Science Chapter 10 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘गुरुत्वाकर्षण बल’ से क्या समझते हो?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational force):
“वह बल जिससे दो पिण्ड एक-दूसरे से आकर्षित होते हैं, गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता है।”

प्रश्न 2.
द्रव्यमान केन्द्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
द्रव्यमान केन्द्र:
“वह बिन्दु जहाँ पर पिण्ड का सम्पूर्ण द्रव्यमान केन्द्रित माना जाता है, उस पिण्ड का द्रव्यमान केन्द्र कहलाता है।”

प्रश्न 3.
दो पिण्डों के मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके मध्य दूरी के अनुसार किस प्रकार बदलता है?
उत्तर:
दो पिण्डों के मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल F उनके मध्य दूरी d के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात्
\(\mathrm{F} \propto \frac{1}{d^{2}}\)

प्रश्न 4.
दो वस्तुओं के बीच गुरुत्वीय बल उनके द्रव्यमान पर किस प्रकार निर्भर करता है?
उत्तर:
दो वस्तुओं के मध्य गुरुत्वीय बल उन वस्तुओं के द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती होता है। अर्थात्
F = m1m2

प्रश्न 5.
गुरुत्वाकर्षण बल को केन्द्रीय बल क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण बल को केन्द्रीय बल कहा जाता है, क्योंकि इसकी माप पिण्ड के द्रव्यमान केन्द्र से की जाती है।

प्रश्न 6.
‘न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम’ में सार्वत्रिक से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सार्वत्रिक (Universal) से यहाँ अभिप्राय यह है कि वह सभी पिण्डों (वस्तुओं) पर लागू होता है चाहे वे छोटे हों या बड़े, खगोलीय हों या पार्थिव।

प्रश्न 7.
सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक से क्या समझते हो?
उत्तर:
सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (Universal Gravitational Constant):
“गुरुत्वाकर्षण बल की वह मात्रा जो एकांक द्रव्यमान के दो समान पिण्डों के बीच आरोपित होता है जबकि उनके द्रव्यमान केन्द्रों के बीच एकांक दूरी हो, सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहलाता है।” इसे G से प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 8.
गुरुत्वीय त्वरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
गुरुत्वीय त्वरण:
“पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण पिण्ड में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं।” इसे ‘g’ से प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 9.
द्रव्यमान से क्या समझते हो? इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर:
द्रव्यमान (Mass):
“किसी पिण्ड का द्रव्यमान वह भौतिक राशि है जो यह प्रदर्शित करती है कि उस पिण्ड में पदार्थ की कितनी मात्रा समाहित है।” इसे संकेत m से व्यक्त करते हैं।

द्रव्यात्मक का मात्रक:
S.I. पद्धति में द्रव्यमान का मात्रक kg है।

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प्रश्न 10.
भार से आप क्या समझते हो? इसका S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर:
भार (Weight):
“किसी पिण्ड का पृथ्वी पर भार उस बल के बराबर होता है जिससे पृथ्वी उस पिण्ड को अपनी ओर आकर्षित करती है।” इसे W से प्रदर्शित करते हैं।

भार का S.I. मात्रक:
न्यूटन (N)

प्रश्न 11.
यदि चन्द्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है तो पृथ्वी चन्द्रमा की ओर गति क्यों नहीं करती?
उत्तर:
चन्द्रमा पृथ्वी के चारों ओर वृत्ताकार मार्ग पर सदैव गतिमान रहता है जिसके कारण उस पर एक अपकेन्द्र बल आरोपित होता है जो दोनों के मध्य लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल को सन्तुलित कर देता है इसलिए न तो चन्द्रमा पृथ्वी की ओर गति करता है और न पृथ्वी चन्द्रमा की ओर गति करती है।

प्रश्न 12.
सभी वस्तुओं पर लगने वाला गुरुत्वीय बल उनके द्रव्यमान के समानुपाती होता है फिर भी एक भारी वस्तु एक हल्की वस्तु की तुलना में तेजी से क्यों नहीं गिरती ?
उत्तर:
गिरती हुई वस्तुओं के वेग को गुरुत्वीय त्वरण प्रभावित करता है उन पर लगने वाला गुरुत्वीय बल नहीं और गुरुत्वीय त्वरण भारी एवं हल्की सभी वस्तुओं पर समान होता है इसलिए एक भारी वस्तु एक हल्की वस्तु की तुलना में तेजी से नहीं गिरती बल्कि समान रूप से गिरती है।

प्रश्न 13.
वस्तु के द्रव्यमान एवं भार में एक मुख्य अन्तर बताइए।
उत्तर:
किसी वस्तु का द्रव्यमान उस वस्तु में निहित पदार्थ की मात्रा का मापन है जबकि उस वस्तु का भार उस वस्तु पर पृथ्वी द्वारा आरोपित बल है।

प्रश्न 14.
हम चन्द्रमा पर भारहीनता का अनुभव क्यों करते हैं?
उत्तर:
चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का भाग होता है इसलिए चन्द्रमा पर हमारे शरीर का भार पृथ्वी पर हमारे शरीर के भार से बहुत कम अर्थात् 1/6 भाग होता है इसलिए हमको चन्द्रमा पर भारहीनता का अनुभव होता है।

प्रश्न 15.
प्रणोद किसे कहते हैं? इसका मात्रक लिखिए। (2019)
उत्तर:
प्रणोद (Thrust):
“किसी वस्तु की सतह पर लम्बवत् लगने वाले बल को प्रणोद कहते हैं।” प्रणोद का मात्रक-न्यूटन।

प्रश्न 16.
दाब से क्या समझते हो? इसका मात्रक लिखिए।
अथवा
दाब को परिभाषित कीजिए एवं इसका S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर:
दाब (Pressure):
“एकांक क्षेत्रफल पर आरोपित प्रणोद को दाब कहते हैं। दूसरे शब्दों में, “एकांक क्षेत्रफल पर आरोपित लम्बवत् बल को दाब कहते हैं।” इसे P से निरूपित करते हैं। अर्थात्
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 14
दाब का मात्रक:
न्यूटन/मीटर2 या पास्कल।

प्रश्न 17.
दाब एवं क्षेत्रफल में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर:
दाब एवं क्षेत्रफल में सम्बन्ध-दाब क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात्
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 15

प्रश्न 18.
भारी सामान ढोने वाले वाहन में अतिरिक्त पहिए क्यों लगाए जाते हैं?
उत्तर:
भारी सामान होने वाले वाहन में अतिरिक्त पहिए लगाने से वाहन का पृथ्वी तल से सम्पर्क क्षेत्रफल बढ़ जाता है इससे उसके द्वारा पृथ्वी पर आरोपित दाब कम हो जाता है। इसलिए उसमें अतिरिक्त पहिए लगाए जाते हैं।

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प्रश्न 19.
चाकू या कुल्हाड़ी धारदार क्यों बनाये जाते हैं?
अथवा
पिन या कील नुकीली क्यों बनाई जाती है?
उत्तर:
चाकू या कुल्हाड़ी धारदार एवं पिन या कील नुकीली इसलिए बनाई जाती है जिससे सम्पर्क क्षेत्र कम हो जाता है। इससे दाब बढ़ जाता है जिसके कारण चाकू या कुल्हाड़ी द्वारा वस्तुओं को काटने एवं पिन या कील को गाढ़ने में आसानी होती है।

प्रश्न 20.
उत्प्लावन बल एवं उत्प्लावकता से क्या समझते हो?
उत्तर:
उत्प्लावन बल एवं उत्प्लावकता:
“किसी द्रव द्वारा उसमें आंशिक या पूर्णरूप से डूबी हुई वस्तु पर ऊपर की ओर आरोपित बल, उत्प्लावन बल कहलाता है एवं द्रव के इस गुण को उत्प्लावकता कहते हैं।”

प्रश्न 21.
आर्किमिडीज के सिद्धान्त से क्या समझते हो? (2018, 19)
उत्तर:
आर्किमिडीज का सिद्धान्त:
“जब किसी वस्तु को आंशिक या पूर्णरूप से किसी तरल में डुबाया जाता है तो उस पर ऊपर की ओर एक बल (उत्प्लावक बल) कार्य करता है जिसके कारण उस वस्तु के भार में कमी आ जाती है। भार में यह कमी उस वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होती है।”

प्रश्न 22.
किसी वस्तु के घनत्व से क्या तात्पर्य है? इसका S.I. मात्रक लिखिए। (2019)
उत्तर:
घनत्व (Density):
“किसी वस्तु के एकांक आयतन के द्रव्यमान को उस वस्तु का घनत्व कहते हैं।” अर्थात्
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 16
घनत्व का S.I. मात्रक किग्रा प्रति मीटर (Kg m-3)

प्रश्न 23.
किसी पदार्थ के आपेक्षित घनत्व से क्या समझते हो? इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर:
आपेक्षिक घनत्व (Relative Density):
“किसी पदार्थ के घनत्व एवं 4°C तापमान के शुद्ध पानी के घनत्व के अनुपात को उस पदार्थ का आपेक्षिक धनत्व कहते हैं।” अर्थात्
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 17
आपेक्षिक घनत्व का कोई मात्रक नहीं होता, क्योंकि यह एक अनुपात है।

प्रश्न 24.
सूर्य के चारों ओर किसी गृह की परिक्रमा करने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल का स्रोत क्या है? यह बल किन कारकों पर निर्भर करेगा?
उत्तर:
आवश्यक स्रोत है गुरुत्वाकर्षण बल। यह बल सूर्य तथा ग्रह के द्रव्यमानों के गुणनफल एवं उनके बीच की दूरी के वर्ग पर निर्भर करता है।

प्रश्न 25.
पृथ्वी पर किसी ऊँचाई से कोई पत्थर पृथ्वी के पृष्ठ के समानान्तर फेंका जाता है तथा उसी समय (क्षण) कोई अन्य पत्थर उसी ऊँचाई से ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर गिराया जाता है। इनमें से कौन-सा पत्थर पृथ्वी पर पहले पहुँचेगा और क्यों ?
उत्तर:
दोनों पत्थर पृथ्वी पर एक साथ पहुंचेंगे क्योंकि दोनों पत्थर समान ऊँचाई से ऊर्ध्वाधर शून्य वेग से गिरते हैं तथा दोनों पर समान गुरुत्वीय त्वरण लग रहा है।

प्रश्न 26.
मान लीजिए पृथ्वी का गुरुत्व बल अचानक शून्य हो जाता है, तो चन्द्रमा किस दिशा में गति करना प्रारम्भ कर देगा। (यदि उसे अन्य आकाशीय पिण्ड प्रभावित न करें।)
उत्तर:
चन्द्रमा सरल रेखीय पथ पर उसी दिशा में गति करना प्रारम्भ कर देगा जिस दिशा में वह उस क्षण था क्योंकि चन्द्रमा की वर्तुल गति पृथ्वी के गुरुत्व बल के द्वारा प्रदान किए गए अभिकेन्द्र बल के कारण थी।

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प्रश्न 27.
दो वायुयानों जिनमें एक विषुवत् वृत्त के ऊपर तथा दूसरा उत्तरी ध्रुव के ऊपर है, से h ऊँचाई से सर्वसम पैकेट गिराये जाते हैं। यह मानते हुए कि सभी स्थितियाँ सर्वसम हैं, क्या सभी पैकेट पृथ्वी के पृष्ठ पर एक ही समय पहुँचेंगे ? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
विषुवत् वृत्त पर ‘g’ का मान ध्रुवों पर ‘g’ के मान से कम होता है। अतः पैकेट ध्रुवों की तुलना में विषुवत् वृत्त पर धीरे से गिरेगा तथा वह वायु में अधिक समय तक रहेगा।

प्रश्न 28.
पृथ्वी पर सूर्य का गुरुत्व बल कार्य करता है तथापि पृथ्वी सूर्य में नहीं गिरती है, क्यों?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण बल आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करने के लिए उत्तरदायी है। इसलिए पृथ्वी पर सूर्य का गुरुत्व बल कार्य करते हुए भी पृथ्वी सूर्य में नहीं गिरती है।

MP Board Class 9th Science Chapter 10 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पृथ्वी के तल पर रखी किसी वस्तु एवं पृथ्वी के मध्य लगने वाले गुरुत्वीय बल के परिमाण के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
हम जानते हैं कि d दूरी पर रखी m1 एवं m2 द्रव्यमान को दो वस्तुओं के मध्य लगने वाला गुरुत्वीय बल F होता है –
\(\mathrm{F}=\mathrm{G} \frac{m_{1} m_{2}}{d^{2}}\)
(न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के आधार पर) इसलिए M द्रव्यमान की पृथ्वी एवं m द्रव्यमान की वस्तु के मध्य लगने वाला गुरुत्वीय बल F होगा –
\(\mathrm{F}=\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{d^{2}}\)
लेकिन जब वस्तु पृथ्वी की सतह (तल) पर रखी हो तो पृथ्वी एवं वस्तु के मध्य दूरी पृथ्वी की त्रिज्या R के बराबर होगी अर्थात् d = R, तब
\(\mathrm{F}=\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{\mathrm{R}^{2}}\)
अतः अभीष्ट व्यंजक होगा
\(\mathrm{F}=\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{\mathrm{R}^{2}}\)

प्रश्न 2.
गुरुत्वीय त्वरण (g) एवं गुरुत्वीय नियतांक (G) के मध्य सम्बन्ध स्थापित कीजिए। (2019)
उत्तर:
गुरुत्वीय नियतांक (G) एवं गुरुत्वीय त्वरण (g) के मध्य सम्बन्ध ज्ञात करनाहम जानते हैं कि पृथ्वी तल पर रखी हुई m द्रव्यमान की वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वीय बल F होता है –
\(\mathrm{F}=\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{\mathrm{R}^{2}}\) ….(1)
यदि यह बल वस्तु पर a त्वरण उत्पन्न करता है तो न्यूटन के गति के द्वितीय नियमानुसार हम पाते हैं कि –
F = mg …(2)
समीकरण (1) एवं समीकरण (2) से हम पाते हैं कि
\(m g=\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{\mathrm{R}^{2}}\)
अर्थात् \(g=\mathrm{G} \frac{\mathrm{M}}{\mathrm{R}^{2}}\)
अतः यही g एवं G के मध्य अभीष्ट सम्बन्ध है।

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प्रश्न 3.
किसी व्यक्ति का चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर भार का 1/6 गुना है। वह पृथ्वी पर 15 kg द्रव्यमान उठा सकता है। चन्द्रमा पर उतना ही बल लगाकर वह व्यक्ति कितना अधिकतम द्रव्यमान उठा सकेगा?
हल:
माना पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण ge = g है तो चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण gm = g/6 होगा क्योंकि चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर भार का 1/6 है।
पृथ्वी पर 15 kg द्रव्यमान उठाने के लिए अनुप्रयुक्त बल
F = mge = 15 g N
उसी बल से चन्द्रमा पर मान लीजिए अधिकतम m kg द्रव्यमान उठा सकता है तो
m x gm = 15 ge
m x g/6 = 15 g
m = 15 x 6 = 90 kg
अतः अभीष्ट अधिकतम द्रव्यमान = 90 kg.

प्रश्न 4.
‘g’, ‘G’ तथा ‘R’ के पदों में पृथ्वी का औसत घनत्व परिकलित कीजिए।
हल:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 18
अतः पृथ्वी का अभीष्ट घनत्व \(\mathbf{D}=\frac{3 \mathbf{g}}{4 \pi \mathbf{G} \mathbf{R}}\)

प्रश्न 5.
किसी पिण्ड के भार में पृथ्वी के द्रव्यमान तथा त्रिज्या के सापेक्ष किस प्रकार परिवर्तन होता है? किसी परिकल्पित प्रकरण में यदि पृथ्वी का व्यास अपने वर्तमान व्यास का आधा तथा इसका द्रव्यमान अपने वर्तमान मान का चार गुना हो जाये तो पृथ्वी के पृष्ठ पर रखे किसी पिण्ड के भार पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
किसी पिण्ड का भार पृथ्वी के द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती एवं उसकी त्रिज्या के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है अर्थात्
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 19
अर्थात् पिण्ड का नवीन भार उसके मूल भार का 16 गुना हो जाएगा।

प्रश्न 6.
दो पिण्डों के बीच आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों तथा उनके बीच की दूरी पर किस प्रकार निर्भर करता है? किसी छात्र ने यह सोचा कि एक-दूसरे से बँधी दो ईंटें, एक ईंट की तुलना में, गुरुत्व बल के अधीन अधिक तेजी से गिरेंगी। क्या आप उसकी इस परिकल्पना से सहमत हैं अथवा नहीं? कारण लिखिए।
उत्तर:
दो पिण्डों के बीच आकर्षण बल उसके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है। अर्थात्
F ∝ m1m2
तथा उन दोनों पिण्डों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात्
\(\mathrm{F} \propto \frac{1}{d^{2}}\)
उस छात्र की परिकल्पना से हम सहमत नहीं हैं। उसकी परिकल्पना गलत है क्योंकि बँधी हुई दो ईंटें एक पिण्ड की तरह व्यवहार करेंगी तथा मुक्त पतन के प्रकरण में समान त्वरण से गिरकर समान समय में पृथ्वी पर गिरेंगी। इसका कारण यह है कि गुरुत्वीय त्वरण गिरते पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।

प्रश्न 7.
समान साइज तथा m एवं m2 द्रव्यमान के दो पिण्ड h1 एवं h2 ऊँचाइयों से एक ही क्षण गिराये जाते हैं। उनके द्वारा पृथ्वी तक पहुँचने में लिए गए समयों का अनुपात ज्ञात कीजिए। क्या यह अनुपात यही रहेगा यदि –
(i) एक पिण्ड खोखला तथा दूसरा ठोस हो, तथा
(ii) दोनों पिण्ड खोखले हों तथा प्रत्येक प्रकरण में उनके साइज समान रहें, कारण लिखिए।
हल:
मान लीजिए कि दोनों पिण्डों के पृथ्वी तक पहुँचने में लिए गए समय क्रमशः t1 एवं t2 हैं तो
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 20
अतः पिण्डों द्वारा लिए गए समयों में अनुपात = \(\sqrt{\frac{h_{1}}{h_{2}}}\)
चूँकि त्वरण समान हैं अतः दोनों प्रकरणों में अनुपात में कोई परिवर्तन नहीं होगा। मुक्त पतन के प्रकरण में त्वरण द्रव्यमान एवं साइज पर निर्भर नहीं करता है।

प्रश्न 8.
आर्किमिडीज के सिद्धान्त के अनुप्रयोग लिखिए। (2018, 19)
उत्तर:
आर्किमिडीज के सिद्धान्त के अनुप्रयोग:

  1. विभिन्न पदार्थों के आपेक्षिक घनत्व की गणना करना।
  2. स्वर्ण आदि धातुओं में मिलावट की जाँच करना।
  3. दुग्धमापी की क्रियाविधि।
  4. गुब्बारों का उड़ान भरना आदि।

प्रश्न 9.
एक वस्तु का भार पृथ्वी की सतह पर मापने पर 10 N आता है। इसका चन्द्रमा की सतह पर मापने पर कितना भार होगा? (2019)
हल:
हम जानते हैं कि
∵ चन्द्रमा की सतह पर किसी वस्तु का भार = \(\frac{1}{6}\) पृथ्वी की सतह पर उस वस्तु का भार
⇒ चन्द्रमा की सतह पर उस वस्तु का भार = \(\frac{1}{6}\) x 10 N = \(\frac{5}{3}\)N
= 1.7 N (लगभग)
अतः दी हुई वस्तु का चन्द्रमा की सतह पर अभीष्ट भार = 1.7N (लगभग)।

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MP Board Class 9th Science Chapter 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम’ की व्याख्या कीजिए।
अथवा
“न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण के नियम” को समझाते हुए नियम के सूत्र की व्युत्पत्ति कीजिए। (2019)
उत्तर:
न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम (Newton’s UniversalGravitational Law):
न्यूटन ने दो पिण्डों के मध्य लगने वाले आकर्षण बल की गणना के लिए एक नियम का प्रतिपादन किया जिसे ‘न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम’ नाम से जाना जाता है। इसके अनुसार-“ब्रह्माण्ड में प्रत्येक पिण्ड अन्य पिण्ड को एक निश्चित बल से आकर्षित करता है, यह बल पिण्डों के द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उन दोनों पिण्डों के मध्य की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।”
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मान लीजिए कि दो पिण्ड A एवं B हैं जिनके द्रव्यमान m1 एवं m2 हैं तथा जिनके केन्द्रों के बीच की दूरी d है और यदि उनके बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल F हो तो उस नियमानुसार
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 22
जहाँ, G एक समानुपाती नियतांक है जिसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं।

प्रश्न 2.
(a) 5 cm भुजा के किसी घन को पहले जल में तथा फिर नमक के संतृप्त विलयन में डुबोया गया है। किस प्रकरण में यह अधिक उछाल बल अनुभव करेगा ? यदि इस घन की प्रत्येक भुजा घटाकर 4 cm कर दी जाये और फिर इसे जल में डुबोया जाये तो जल के लिए पहले प्रकरण की तुलना में अब घन द्वारा अनुभव किए जाने वाले उछाल बल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

(b) 4 kg भार की 4,000 kg m-3 घनत्व की किसी गेंद को 103kg m-3 घनत्व के जल में पूरा डुबाया जाता है। इस पर उछाल बल ज्ञात कीजिए। (दिया है: g= 10 m s-2)
उत्तर:
(a) नमक के संतृप्त घोल में डुबोने पर अधिक उछाल बल का अनुभव करेगा क्योंकि नमक के संतृप्त घोल का घनत्व जल के घनत्व से अधिक है।

चूँकि छोटे घन का आयतन प्रारम्भिक घन से कम है अतः यह कम आयतन का जल विस्थापित करेगा। इसलिए इस प्रकरण में कम उछाल का अनुभव करेगा।

(b) संख्यात्मक भाग का हल:
ज्ञात है:
गेंद का द्रव्यमान m = 4 kg
गेंद का घनत्व d = 4,000 kg m-3
जल का घनत्व dw = 103 kg m-3
गुरुत्वीय त्वरण = 10 m s-2
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विस्थापित जल का आयतन = गेंद का आयतन = 10-3ms
जल का द्रव्यमान = जल का आयतन x जल का घनत्व
= 10-3 x 103 = 1 kg
उछाल बल = जल का द्रव्यमान x गुरुत्वीय त्वरण
F = 1 x 10 = 10 N
अतः अभीष्ट उछाल बल = 10 N.

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