MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 20 विदिशा

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 20 विदिशा (पत्रम्) (विदिशादिशातः)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 20 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) विद्यालयस्य शैक्षणिक भ्रमणदलं कुत्र गतवान्? (विद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण दल कहाँ गया?)
उत्तर:
विदिशानगरीम् (विदिशा नगरी में)

(ख) पूर्वस्मिन् काले विदिशानगर्याः किं नाम आसीत्? (पहले विदिशा नगरी का क्या नाम था?)
उत्तर:
भेलसा (भेलसा)

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(ग) ‘सुबाहुः कस्य पुत्रः आसीत्? (‘सुवाहु’ किसका पुत्र था?)
उत्तर:
शत्रुघ्नस्य (शत्रुघ्न का)।

(घ) विदिशानगरी कस्याः नद्यास्तटे वर्तते? (विदिशा नगरी किस नदी के तट पर है?)
उत्तर:
वेत्रवत्याः (वेत्रवती के)

(ङ) कस्य नृपस्य शासनकाले ‘हेलिओडोरस-स्तम्भः’ निर्मितः आसीत?) (किस राजा के शासनकाल में हेलिओडोरस स्तम्भ बना था?)
उत्तर:
काशीपुत्रभागभद्रस्य (काशीपुत्र भागभद्र के)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत- (एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) विदिशानगरी कस्मिन् प्रदेशे स्थिता विद्यते? (निदिशा नगरी किस प्रदेश में स्थित है?)
उत्तर:
गिदिशा नगरी मध्यप्रदेशे स्थिता विद्यते। (विदिशा नगरी मध्यप्रदेश में स्थित है।)

(ख) विदिशानगरी कस्य देशस्य राजधानी आसीत? (विदिशा नगरी किस देश की राजधानी थी?)
उत्तर:
विदिशानगरी दशार्णदेशस्य राजधानी आसीत्। (विदिशा नगरी दशार्णदेश की राजधानी थी।)

(ग) विदिशामध्ये किं नाम स्मारको वर्तते?। (विदिशा के बीच में किस नाम का स्मारक है?)
उत्तर:
विदिशामध्ये ‘लोहाङ्गी’ नामः स्मारकः वर्तते।) (विदिशा के बीच में ‘लोहाङ्गी’ नाम स्मारक है।)

(घ) दुर्गाभ्यन्तरे किं स्थितम् अस्ति? (किले के बीच में क्या स्थित है?)
उत्तर:
दुर्गाभ्यन्तरे ‘बीजामण्डलम्’ स्थितम् अस्ति। (किले के बीच में ‘बीजामण्डल’ स्थित है।)

(ङ) श्रीवैष्णवधर्मस्य दीक्षां कः ग्रहीतवान्? (श्री वैष्णधर्म की दीक्षा किसने ली?)
उत्तर:
श्रीवैष्णवधर्मस्य दीक्षां हेलिओडोरसः ग्रहीतवान्। (श्रीवैष्णव धर्म की दीक्षा हेलिओडोरस ने ली।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए-)
(क) ‘भेलसा’ नाम्नेयं नगरी कथं प्रसिद्धा? (‘भेलसा’ नाम से यह नगरी क्यों प्रसिद्ध थी?)
उत्तर:
‘भेलसा’ नाम्नेयं नगरी प्रसिद्धा यतोहि सूर्यदेवतायाः मन्दिरस्य ‘भेल्लस्वामिनः’ इति लोकख्यातिः एव। (‘भेलसा’ नाम से यह नगरी प्रसिद्ध थी क्योंकि सूर्य देवता के मन्दिर की ‘भेल्लस्वामी’ ऐसी संसार में ख्याति थी।)

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(ख) गुप्तकालस्य प्रसिद्धिः केन नाम्ना अस्ति? (गुप्तकाल की प्रसिद्धि किस के नाम से है?)
उत्तर:
गुप्तकालस्य प्रसिद्धिः ‘रामगुप्तेन’ नाम्ना अस्ति। (गुप्तकाल की प्रसिद्धि ‘रामगुप्त’ नाम से हुई।)

(ग) विदिशानगर्याः काः प्रतिमाः दर्शनीयाः सन्ति? (विदिशा नगरी में कौन-सी मूर्तियाँ दर्शनीय हैं?)
उत्तर:
विदिशानगर्याः ब्रह्मा विष्णोः शिवस्य, गणेशस्य, अर्धनारीश्वरस्य प्रतिमाः दर्शनीयाः सन्ति। (विदिशा नगरी की ब्रह्मा, विष्णु, शिव, गणेश, और अर्धनारीश्वर की प्रतिमाएँ दर्शनीय हैं।)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूयरत-(दिए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(उदारभावनाम्, पुरातनकालादेव, कुशल, ग्रहीतवान्, द्रष्टुम)
(क) अत्र …………. तत्राप्यस्तु।
(ख) वयं सर्वे पुरातत्त्वसङ्ग्रहालयं …………. अगच्छाम।
(ग) श्रीवैष्णवधर्मस्य दीक्षा ………….।
(घ) हिन्दुधर्मं प्रति तस्य …………. संसूचयति।
(ङ) नगर्याः स्थिति …………. विद्यते।
उत्तर:
(क) कुशलं
(ख) द्रष्टुम्
(ग) ग्रहीतवान्
(घ) उदारभावनाम्
(ङ) पुरातनकालादेव।

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से जोड़िए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 20 विदिशा img 1
उत्तर:
(क) 3
(ख) 5
(ग) 1
(घ) 2
(ङ) 4

प्रश्न 6.
निम्नलिखितक्रियापदानां धातुं, लकारं, पुरुषं, वचनं च लिखत
(नीचे लिखे क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 20 विदिशा img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 20 विदिशा img 3

प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के सन्धिविच्छेद कर सन्धि का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 20 विदिशा img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 20 विदिशा img 7

प्रश्न 8.
अधोलिखितसमस्तपदानां विग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत
(नीचे लिखे समस्त पदों के विग्रह कर समास का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 20 विदिशा img 5
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 20 विदिशा img 6

प्रश्न 9.
उदाहरणानुसारं पर्यायशब्दान् लिखत
(उदाहरण के अनुसार पर्यायवाची शब्द लिखिए-)
यथा- राजानः नृपाः
(क) पादाः
(ख) शिक्षकस्य
(ग) समुद्रः
(घ) मन्दिरस्य
(ङ) समीपे
उत्तर:
(क) पादाः – चरणाः
(ख) शिक्षकस्य – अध्यापकत्य
(ग) समुद्रः – जलधिः
(घ) मन्दिरस्य – देवालयस्य
(ङ) समीपे – निकटे

प्रश्न 10.
रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत (रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न बनाइए-)
(क) अहमपि तत्र अगच्छम्। (मैं भी वहाँ गया।)।
उत्तर:
अहमपि कुत्र अगच्छम्? (मैं भी कहाँ गया?)

(ख) इयं नगरी पौराणिकी वर्तते। (यह नगरी पौराणिक है।)
उत्तर:
का नगरी पौराणिकी वर्तते? (कौन-सी नगरी पौराणिक है?)

(ग) अत्र पुरातत्त्वसङ्ग्रहालयो विद्यते। (यहाँ पुरातत्त्व सङ्ग्रहालय है।)
उत्तर:
अत्र कः विद्यते? (यहाँ क्या है?)

(घ) नद्याः तटे स्तम्भः अस्ति। (नदी के तट पर स्तम्भ है।)
उत्तर:
कस्याः तटे स्तम्भः अस्ति? (किसके तट पर स्तम्भ है?)

(ङ) साञ्चीनगरे बौद्धसम्प्रदायस्य स्तूपो वर्तते।। (साञ्ची नगर में बौद्धसम्प्रदाय का स्तूप है।)
उत्तर:
साञ्ची नगरे कस्य स्तूपो वर्तते? (साञ्ची नगर में किसका स्तूप है?)

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योग्यताविस्तार –

विदिशानगर्याः समीपस्थदर्शनीयस्थलानाञ्च मानचित्रं विद्धत।
विदिशा नगरी और उसके पास के दर्शनीय स्थल मानचित्र पर दिखाओ।

आत्मनः पितृव्यस्य कृते सवकीययात्रावृत्तान्तमवलम्ब्य पत्रं लिखत।
अपने पिता के लिए अपनी यात्रा का वृतान्त बताने के लिए पत्र लिखो।

विदिशा पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में पत्रलेखन की पद्धति के विषय में बताया गया है। पत्र लिखने की विधि बताते हुए उन्होंने मध्यप्रदेश की नगरी ‘विदिशा’ का वर्णन किया। इस पत्र में पिता को पत्र लिखकर ‘विदिशा’ नगरी इतिहास, उसके दर्शनीय स्थल तथा उसकी अन्य विशेषताओं को बताया गया है।

विदिशा पाठ का अनुवाद

शासकीयउच्चतरमाध्यमिक विद्यालयः
सिंगरौलीनगरम् (मध्यप्रदेशः)
31-01-2008

पूज्यपादाः पितृचरणाः!
सश्रद्धमभिवादये!!

अत्र कुशलं तत्राऽस्तु। पितृवर्य। विदितं त्यादिदंयत् ममस्वाध्यायः सुष्टुतया प्रचलति। विगते सप्ताहेऽस्माकं विद्यालयस्य शैक्षणिक भ्रमणदलं विदिशानगरी गतवानासीदिति। तेन दलेन सह अहमपि तत्रागच्छम्।

मध्यप्रदेशस्थानगरीयं पौराणिकी ऐतिहासिकी च वर्तते। विदिशा पूर्वस्मिन् काले ‘भेलसा’ इति नाम्ना सुविख्याता आसीत्। एतस्य कारणं सूर्यदेवतायाः मन्दिरस्य ‘भेल्लस्वामिनः’ इति लोकख्यातिरेव। पुरा विदिशानगरी समुन्नतमेकं वाणिज्यिकं केन्द्रमासीत्। योगदर्शनस्य प्रणेता व्याकरणमहाभाष्यस्य कर्ता महर्षिः पतञ्जलिः सम्राट अशोकोऽपि विदिशया सह सम्बद्धौ आस्ताम्।

शब्दार्थाः :
पूज्यपादाः-पूजनीय चरणों वाले-respectable; सश्रद्धम्-श्रद्धासहितrevered, venerable; विदितम्-ज्ञात-may be known; सुष्टुतया-ठीक प्रकार सेproperly; समुन्नतम्-उन्नति को प्राप्त-prominent.

अनुवाद :

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय
सिंगरौली नगर (मध्यप्रदेश)
31-01-2008

पूज्य चरणों वाले पिता जी!
श्रद्धासहित अभिवादन करता हूँ!!

यहाँ कुशल है, वहाँ भी हो। पिताश्री! यह जानिए कि मेरी पढ़ाई अब यहाँ ठीक प्रकार से चल रही है। पिछले सप्ताह हमारे विद्यालय का शैक्षणिक भ्रमणदल विदिशा नगरी गया था। उस दल के साथ मैं भी वहाँ गया।

मध्यप्रदेश में स्थित यह नगरी पौराणिक और ऐतिहासिक है। पुराने समय में विदिशा ‘भेलसा’ नाम से प्रसिद्ध थी। इसके कारण सूर्य देवता के मन्दिर की ‘भेल्लस्वामी’ ऐसी लोगों में प्रसिद्धि हुई। पहले विदिशा नगरी एक उन्नत वाणिज्यिक केन्द्र था। योगदर्शन के प्रणेता और व्याकरण के महाभाष्य के कर्त्ता महर्षि पतञ्जलि और सम्राट अशोक भी विदिशा से ही सम्बद्ध हैं।

English :
Educational tour to Vidisha-old and historical city-Previously known as ‘Bhelsa’-Temple of sungod-Trade centre in the past Maharishi Patanjali and emperor Ashoka were also related to Vidisha.

2. पौराणिकी कथानुरूपं हैहयवंशीयाः राजानो अत्र राज्यं प्रकुर्वन्ति स्म। आदिकविना वाल्मीकिना प्रणीतेन रामायणेन विज्ञायते यत् त्रेतायुगे शत्रुघ्नेन स्वकीयं पुत्रं ‘सुबाहु’ नामानम् अत्रत्यः शासकरूपेणाभिषिच्य प्रदेशममुं स्वायत्तीकृतमासीत्। कविकुलगुरुः कालिदासः गीतिकाव्ये मेघदूते पूर्वमेघे नगरीमिमां दशार्णदेशस्य राजधानीत्वेन अवर्णयत्।

सर्वप्रथमं वयं सर्वे पुरातत्त्वसङ्ग्रहालयं द्रष्टुमगच्छाम। तत्र कलात्मिकानां पाषाणप्रतिमानाम् अद्वितीयः सङ्ग्रहोः विद्यते। ‘बेसनगर’ मित्याख्यस्य स्थलस्योत्खनने समुपलब्धाऽपि सामग्री वर्ततेऽत्रैव। अत्र यक्षस्य, ग्यारसपुरस्य शालभञ्जिकायाः सदाशिवस्य (त्रिमुखिनः शिवस्य) चाप्रतिमाः प्रतिमाः सङ्ग्रहीताः सन्ति। नगर्याः मध्ये ‘लोहागी’ स्मारको विद्यते। अन्न संरक्षितः शुङ्गकालीनः शीर्षस्तम्भस्यावशेषः कलात्मकदृष्ट्या अपूर्वः।

शब्दार्थाः :
प्रणीतेन-रचे गए के द्वारा-by composed; विज्ञायते-जाना जाता है-is known; अभिषिच्य-अभिषेक करके – on coronating/enthroning; अमुम्-इसको-him; स्वायत्तीकृतम्-अपने अधीन कर लिया-subjugated; उत्खनने-खोदने में-on digging.

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अनुवाद :
पौराणिक कथा के अनुसार हैहयवंश के राजा यहाँ राज्य करते थे। आदिकवि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के द्वारा ज्ञात होता है कि त्रेतायुग में शत्रुध्न के द्वारा अपने पुत्र ‘सुबाहु’ नाम को यहीं राज्याभिषेक करके इस प्रदेश को अपने अधीन कर लिया था। कविकुलगुरु कालिदास के गीतिकाव्य मेघदूत के ‘पूर्वमेघ में इस नगरी को दशार्ण देश की राजधानी के रूप में वर्णित किया।

सबसे पहले हम सब पुरातत्त्व सङ्ग्रहालय देखने गए। वहाँ पत्थर की कलात्मक प्रतिमाओं का अद्वितीय (अनोखा) सङ्ग्रह है। ‘बेसनगर’ इस स्थल के खोदने में उपलब्ध सामग्री भी यहीं है। यहाँ यक्ष की ग्यारसपुर के शाल भञ्जिका की और सदाशिव की (तीन मुँह वाले शिव की) अनोखी प्रतिमाएँ इकट्ठी की गई हैं। नगरी के बीच में ‘लोहाङ्गी’ स्मारक है। यहाँ शुङ्गकालीन शीर्ष स्तम्भ के अवशेष संरक्षित हैं, जो कलात्मक दृष्टि से अपूर्व है।

English :
Kings of Haihaidynasty ruled in Vidisha. Shatrughana had coronated his son Subahu here and subjugated this region. Kalidas described Visdisha as capital of Dasharna country.

Saw collection of stone effigies in museum. Lohuingi memorialRelics of top pillar of the age of Shangas preserved here-artistically unique.

3. अस्याः उत्तरपश्चिमदिशि दुर्गाभ्यन्तरे स्थितमस्ति ‘बीजामण्डलम्’। चर्चिकादेव्याः मन्दिरमिदं विजयदेव्याः अपराभिधेयेन विजयमन्दिरमिति नाम्ना लोके प्रसिद्धिमगात्।

वेत्रवत्याः वामतटे क्रोशमेकं दूरं वर्तते ‘हेलिओडोरस-स्तम्भ’ इति। इयं तु शुङ्गनृपतेः काशीपुत्रभागभद्रस्य शासनकाले विनिर्मिता वास्तुकृतिरस्ति। स्तम्भोपरि समुत्कीर्णेन लेखेन ज्ञायते यत् तक्षशिला वास्तव्यस्य दियस्य पुत्रो हेलिओडोरस नामा यवनाधिपतेः अन्तलिकितस्य राजदूतत्वेन वैदेशिको भवन्नपि श्रीवैष्णवधर्मस्य दीक्षा ग्रहीतवान्। अत्रत्यो गरुडशीर्षस्तम्भो हिन्दुधर्मं प्रति तस्योदारभावनां संसूचयति।
वेत्रवत्याः समीपे विंशतिसङ्ख्याकाः गुहाः सन्ति; याः सर्वाः “उदयगिरिगुहा” नाम्ना प्रख्याताः वर्तन्ते। इमाः सर्वाः स्वर्णयुगस्य गुप्तकालस्य माहात्म्यगाथां प्रगायन्ति।

शब्दार्थाः :
दुर्गाभ्यन्तर-किले के बीच में-inside a fort; अपराभिधेयेन-दूसरे नाम से-with other name; अगात्-प्राप्त हो गया-became; क्रोशम्-एक कोस-one mile; गहाः-गुफाएँ-Caves; समुत्कीर्णेन-खुदे हुए के द्वारा-through digging.

अनुवाद :
इसके उत्तर पश्चिम दिशा में किले के बीच में ‘बीजामण्डल’ स्थित है। चर्चिका देवी का यह मन्दिर विजय देवी के दूसरे नाम ‘विजयमन्दिर’ से संसार में प्रसिद्ध हुआ।

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वेत्रवती (बेतवा नदी) के बाएँ तट पर एक कोस दूर ‘हेलिओडोरस-स्तम्भ’ है। यह तो शुङ्ग राजा काशी पुत्र भागभद्र के शासनकाल में बनाई गई वास्तुकृति है। इस स्तम्भ के ऊपर खुदे हुए लेख से ज्ञात होता है कि तक्षशिला में वास्तव्य दिय को पुत्र ‘हेलिओडोरस’ नामक, यवन राजा ने अन्तलिकित के राजदूत के रूप में विदेशी होते हुए भी श्री वैष्णव धर्म की दीक्षा प्राप्त की। यहाँ से गरुड़शीर्ष स्तम्भ हिन्दू धर्म के प्रति उसकी उदार भावना की सूचना मिलती है।

वेत्रवती के पास 20 की संख्या में गुफाएँ हैं, जो सब ‘उदयगिरि गुफा’ नाम से प्रसिद्ध हैं। ये सारी गुफाएँ स्वर्णयुग गुप्तकाल की महात्म्यगाथा गाते हैं।

English :
Bijamandal-temple of goddess charchika is located in a fort-also known as ‘Vijaya Temple’.

Heliodus pillar on the bank of Vetravati river-raised in the rule of Shunga king-A Muslim king got initiated in Vaishnava religionThe Garuda Shirsha pillar speaks high of his generous feelingsUdayagiri caves located near Vetravati-speak high of Gupta age.

4. विदिशातः किञ्चिद् दूरस्थे चितौरियानामके ग्रामे नवम्याः दशम्याश्च शताब्याः परमारकालीनाः ब्रह्मणः, विष्णोः, शिवस्य, गणेशस्यार्द्धनारीश्वरस्य प्रतिमाः दर्शनीयाः सन्ति।

कालक्रमेणात्र जैन-बौद्धसम्प्रदाययोः विकासोऽपिसमभवत्। विशेषरूपेण, गुत्पकाले चतुर्थ्यां शताब्यां रामगुप्ताधिशासिते जैनतीर्थङ्कराणां मूर्तिनिर्माणं, तथा च तासां प्रतिष्ठापनं गोलक्यान्त्यायाः सुपुत्रस्य चेलुक्षमणस्य, तच्छिष्यस्याचार्यसlसेनस्य च प्रेरणया कारितम् आसीत्। निकटमेव साञ्चीनगरे बौद्वसम्प्रदायस्य स्तूपो वर्तते।

अन्ते चे, सर्वेभ्यः ज्येष्ठेभ्यः सादरं प्रणामाः। अनुजेभ्यः हार्दिकः स्नेह। मित्रेभ्यः शुभाकाङ्क्षां प्रकटीकरोमि।

भवदीयः पुत्रः
मूदुलः

शब्दार्थाः :

प्रतिष्ठापनम्-प्रतिष्ठित करना-establishing; कारितम्- करवाया-got done; स्तूपः-बौद्धभिक्षु का निवास स्थान-lodging of a Buddhistic mendicant; आकाङ्क्षा-कामना-desire, longing.

अनुवाद :
विदिशा से कुछ दूर स्थित चितौरिया नामक गाँव में नवीं-दसवीं शताब्दी के परमारकालीन ब्रह्मा, विष्णु, शिव, गणेश, अर्द्धनारीश्वर की मूर्तियाँ देखने योग्य हैं।

काल के क्रम से यहाँ जैन और बौद्ध सम्प्रदाय का भी बहुत विकास हुआ। विशेषरूप से, गुप्तकाल में चौथी शताब्दी के रामगुप्त के शासन में जैन तीर्थङ्करों की मूर्ति बनाना, और उनको प्रतिष्ठित करना गोलक्यान्त्या के सुपुत्र चेलुक्षमण के और उनके शिष्य आचार्य सर्ग्यसेन की प्रेरणा से करवाया था। पास ही साञ्ची नगर में बौद्ध सम्प्रदाय के स्तूप हैं।

और अन्त में, सभी बड़ों को सादर प्रणाम। सभी छोटों को हार्दिक स्नेह। मित्रों के लिए शुभकामना प्रकट करता हूँ।

आपका पुत्र
मृदुल

English :
The village named Chittori is famous for effigies of Brahma, Vishnu, Shiv, Ganesh and Ardhanareeshwar.

Spread of Jainism and Buddhism-Effigies of Jain ‘Tirathankaras’ established during the rule of Ramgupta of Gupta period-pillars of Buddhistic sect found in Sanchi town.

MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions पद्य Chapter 8 कल्याण की राह

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MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions पद्य Chapter 8 कल्याण की राह

कल्याण की राह अभ्यास

बोध प्रश्न

कल्याण की राह अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1.
चलने के पूर्व बटोही को क्या करना चाहिए?
उत्तर:
चलने के पूर्व बटोही को बाट (मार्ग) की भली-भाँति पहचान कर लेनी चाहिए।

प्रश्न 2.
कवि के अनुसार व्यक्ति को किस रास्ते पर चलना चाहिए?
उत्तर:
कवि के अनुसार व्यक्ति को उसी रास्ते पर चलना चाहिए, जिसको उसने अच्छी तरह समझ और देख लिया हो।

प्रश्न 3.
प्रत्येक सफल राहगीर क्या लेकर आगे बढ़ा है?
उत्तर:
प्रत्येक सफल राहगीर एक निश्चित उद्देश्य तथा अपनी राह में आने वाले संकटों का सामना करने का विश्वास लेकर आगे बढ़ा है तभी उसे सफलता मिली है।

प्रश्न 4.
नरेश मेहता अपनी कविता में किसके साथ चलने की बात कह रहे हैं?
उत्तर:
नरेश मेहता अपनी कविता में संघर्ष करते हुए सूरज के संग-संग चलते रहने की बात कह रहे हैं।

प्रश्न 5.
नदियाँ आगे चलकर किस रूप में परिवर्तित हो जाती हैं?
उत्तर:
नदियाँ आगे चलकर समुद्र में परिवर्तित हो जाती हैं।

प्रश्न 6.
कवि ने रुकने को किसका प्रतीक माना है?
उत्तर:
कवि ने रुकने को मरण का प्रतीक माना है।

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कल्याण की राह लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
स्वप्न पर मुग्ध न होने की राय कवि क्यों देता
उत्तर:
स्वप्न पर मुग्ध न होने की राय कवि इसलिए देता है कि इससे मनुष्य सच्चाई से दूर हो जाता है और ये स्वप्न उसे कहीं का नहीं रहने देते। वह इन्हीं पर विचरण करता हुआ जग और जीवन से अलग-थलग हो जाता है।

प्रश्न 2.
कवि ने जीवन पथ में क्या-क्या अनिश्चित माना है?
उत्तर:
कवि ने जीवन पथ में निम्न बातों को अनिश्चित माना है-किस जगह पर हमें नदी, पर्वत और गुफाएँ मिलेंगी, किस जगह पर हमें बाग, जंगल मिलेंगे, किस जगह हमारी यात्रा खत्म हो जायेगी और कब हमें फूल मिलेंगे और कब काँटे।

प्रश्न 3.
कवि के अनुसार जीवन पथ के यात्री को पथ की पहचान क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
कवि हरिवंशराय बच्चन मानते हैं कि मानव को जीवन का मार्ग सोच-विचार कर अपनाना चाहिए। जीवन में महान बनने का निश्चित लक्ष्य लेकर, उसी के अनुरूप जीवन पथ अपनाना आवश्यक है। जीवन पथ का चयन महापुरुषों की जीवनियों के आधार पर निश्चित किया जा सकता है। जीवन पथ निश्चित कर उसमें अच्छे-बुरे का द्वन्द्व नितान्त अनुचित है क्योंकि हर सफल पंथी दृढ़ विश्वास के सहारे ही मार्ग पर चलता जाता है। महान जीवन जीने का भाव आते ही तन-मन में उत्साह भर जाता है। उस समय सही जीवन पथ की पहचान न हुई तो असफलता हाथ लग सकती है। अतः जीवन पथ के यात्री को जीवन पथ की पहचान होना आवश्यक है।

प्रश्न 4.
कवि के अनुसार क्षितिज के उस पार कौन बैठा है और क्यों?
उत्तर:
कवि के अनुसार क्षितिज के उस पार श्रृंगार किये हुए लक्ष्मी बैठी हैं और वह इसलिए बैठी हैं कि कोई पुरुषार्थी आये और अपने परिश्रम से उन्हें प्राप्त कर ले।

प्रश्न 5.
मानव जिस ओर गया, उधर क्या-क्या हुआ?
उत्तर:
मानव जिस ओर गया, उधर नगर बस गये और तीर्थ बन गये।

प्रश्न 6.
‘चरैवेति’कविता में कविने लोगों को क्या-क्या सलाह दी है?
उत्तर:
‘चरैवेति’ कविता में कवि ने लोगों को सलाह दी है कि उन्हें जीवन में कहीं भी रुकना नहीं चाहिए। जिस प्रकार सूरज दिन-रात चलता रहता है, उसी तरह उनको भी दिन-रात चलते रहना चाहिए। मानव ने निरन्तर चलकर ही नगर एवं तीर्थों का निर्माण किया है। जहाँ चलना थम जाता है वहीं मृत्यु आ जाती है। अतः निरन्तर चलते रहो।

कल्याण की राह दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चलने से पूर्व बटोही को कवि किन-किन बातों के लिए आगाह कर रहा है?
उत्तर:
चलने से पूर्व बटोही को कवि आगाह कर रहा है कि हे बटोही! तू चलने से पूर्व अपने पथ की पहचान कर ले। बटोही के क्रियाकलापों और चेष्टाओं की कहानी किसी पुस्तक में छपी नहीं मिलती है। इस मार्ग पर अनगिनत राही चले, पर अधिकांश का कोई पता नहीं है पर हाँ कुछ अनौखे रास्तागीर हुए हैं जिन्होंने अपने पग चिन्हों को मार्ग पर छोड़ा है और हम लोग उन्हीं पर चल रहे हैं।

प्रश्न 2.
स्वप्न और यथार्थ में सन्तुलन किस तरह आवश्यक है? स्पष्ट करें।
उत्तर:
कवि कहता है कि हमेशा स्वप्न पर ही तुम मुग्ध मत हो जाओ; जीवन में जो सत्य है उसे भी जान लो। संसार के पथ में यदि स्वप्न दो की संख्या में हैं तो सत्य दो सौ की संख्या में हैं। अत: स्वप्न के साथ ही साथ सत्य को भी जान लो। स्वप्न देखना बुरा नहीं है, हर आदमी अपनी उमर एवं समय के अनुसार इन्हें देखता है लेकिन कोरे स्वप्न से जीवन में काम नहीं चलता है। हमें सत्य का भी सहारा लेना पड़ता।

प्रश्न 3.
‘चरैवेति जन गरबा’ कविता का मूल आशय क्या है?
उत्तर:
‘चरैवेति जन गरबा’ कविता का मूल आशय यह है कि हमें जीवन में कभी भी रुकना नहीं चाहिए। जिस प्रकार सूरज दिन-रात चलता रहता है, उसी प्रकार हमको भी दिन-रात काम में लगे रहना चाहिए। मानव ने निरन्तर चलकर ही संसार में नये और भव्य नगरों का निर्माण किया है, उसी ने नये-नये तीर्थों का निर्माण किया है। जहाँ चलना थम जाता है, वहीं मृत्यु आ जाती है। अतः निरन्तर चलते रहो।।

प्रश्न 4.
युग के संग-संग चलने की सीख कवि क्यों दे रहा है?
उत्तर:
युग के संग-संग चलने की सीख कवि इसलिए दे रहा है कि जो व्यक्ति परिवर्तित युग के साथ कदम-से-कदम मिलाकर नहीं चलेगा, वह संसार की इस दौड़ में पिछड़ जायेगा। नयी सभ्यता के सामने उसके पैर जम नहीं पायेंगे। अतः कवि युग के साथ-साथ चलने की सीख दे रहा है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित अवतरणों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए
(क) रास्ते का एक काँटा …………. सीख का सम्मान कर ले।
उत्तर:
कविवर बच्चन कहते हैं कि हमें स्वर्ग के सपने आते हैं, इससे हमारे नेत्रों के कोने में एक विशेष प्रकार की चमक आ जाती है। हमारे पैरों में पंख लग जाते हैं अर्थात् हम कल्पना लोक में विचरण करने लग जाते हैं और हमारी स्वच्छन्द छाती ललकने लगती है। रास्ते में पड़ा हुआ एक भी काँटा हमारे पाँव के दिल को चीर देता है। जब खून की दो बूंद गिरती हैं तो उसमें एक दुनिया डूब जाती है।

आगे कवि कहता है कि चाहे हमारी आँखों में स्वर्ग के सपने हों पर हमारे पैर पृथ्वी पर ही टिके रहने चाहिए कहने का भाव यह है कि हमें जीवन के यथार्थ का भी ज्ञान होना चाहिए। काँटों की इस अनोखी शिक्षा का, हे मानव! तू सम्मान कर ले। हे रास्तागीर! रास्तों पर चलने से पूर्व रास्ते की भली-भाँति पहचान कर ले।

(ख) रुकने का नाम मरण …………. संग-संग चलते चलो।
उत्तर:
कविवर नरेश मेहता कहते हैं कि निरन्तर बहने वाली नदियों ने ही अपने पानी द्वारा सागर का निर्माण किया है। बादलों ने ही उमड़-घुमड़ कर धरती को फलवती बना दिया है। रुकना मृत्यु है, पीछे सब पत्थर पड़े मिलेंगे यदि आगे बढ़ोगे तो देवयान मिलेंगे। अतः युग (समय) के साथ ही साथ चलते रहो।

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कल्याण की राह काव्य सौन्दर्य

प्रश्न 1.
वक्रोक्ति अलंकार की परिभाषा किसी अन्य उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
वक्रोक्ति अलंकार :
जहाँ पर ध्वनि द्वारा कथित का भिन्न अर्थ ग्रहण किया जाए, वहाँ वक्रोक्ति अलंकार होता है।

उदाहरण :
“को तुम हो? इत आये कहाँ? घनश्याम हो तो कितहुँ बरसो।
चितचोर कहावत है हमतौ, तहँ जाहु जहाँ घन है सरसौ।”

यहाँ कृष्ण तथा राधा का सुन्दर परिहास के माध्यम से वक्रोक्ति अलंकार को व्यक्त किया गया है।

कल्याण की राह महत्त्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

कल्याण की राह बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चलने से पूर्व बटोही को क्या करना चाहिए?
(क) नगर देखना
(ख) गाँव निर्धारित करना
(ग) राहगीर को देखना
(घ) मार्ग निर्धारित करना।
उत्तर:
(घ) मार्ग निर्धारित करना।

प्रश्न 2.
नदियाँ आगे चलकर किस रूप में परिवर्तित हो जाती हैं?
(क) बाँध
(ख) सागर
(ग) बालू
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ख) सागर

प्रश्न 3.
कवि ने रुकने को किसका प्रतीक माना है?
(क) गति का
(ख) रुग्णावस्था का
(ग) जीवन का
(घ) मृत्यु का।
उत्तर:
(घ) मृत्यु का।

प्रश्न 4.
‘चरैवेति जनगरबा’ कविता में कवि ने लोगों को क्या-क्या सलाह दी है?
(क) सूरज की भाँति प्रकाशित हो
(ख) नदी के प्रवाह की भाँति सतत् चलो
(ग) चन्द्रमा व तारे की भाँति गति करो
(घ) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी।

रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. ‘पथ की पहचान’ कविता के रचयिता ………… हैं।
  2. जीवन में उचित लक्ष्य का निर्धारण कर …………… पर अग्रसर होने पर ही सफलता मिलती
  3. पूर्व चलने के बटोही पथ की …………….. कर ले।
  4. रास्ते का एक काँटा पाँव का …………….. चीर देता।

उत्तर:

  1. श्री हरिवंशराय बच्चन
  2. जीवन-पथ
  3. पहचान
  4. दिल।

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सत्य/असत्य

  1. ‘इसकी कहानी पुस्तकों में छापी गयी’ ऐसा ‘पथ की पहचान’ में है।
  2. ‘खोल इसका अर्थ, पंथी पंथ का अनुमान कर ले’ पंक्ति श्री हरिवंशराय बच्चन की – कविता की है।
  3. कवि ने सपनों पर मुग्ध होने के लिए उत्साहित किया है।
  4. ‘क्षितिज पर श्रृंगार किये लक्ष्मी बैठी’ पंक्ति ‘चरैवेति जन गरबा’ कविता की है।
  5. नदियाँ आगे चलकर सागर में परिवर्तित हो जाती हैं। (2015)

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. सत्य।

सही जोड़ी मिलाइए

MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions पद्य Chapter 8 कल्याण की राह img-1
उत्तर:
1. → (ख)
2. → (ग)
3. → (घ)
4. → (क)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. चलने से पूर्व बटोही को क्या करना चाहिए? (2013, 15)
  2. जीवन का कल्याणमय पथ किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है?
  3. भारत छोड़ो आन्दोलन में कौन सक्रिय रहे?
  4. धरती को प्रकाश और ऋतुओं को नया शृंगार कौन प्रदान करता है?

उत्तर:

  1. पथ की पहचान
  2. सतत् कर्म द्वारा
  3. नरेश मेहता
  4. सूरज।

पथ की पहचान भाव सारांश

‘पथ की पहचान’ कविता के रचयिता हरिवंशराय बच्चन का कथन है कि जीवन यात्रा के समान है। इसीलिए पथ का उचित ज्ञान आवश्यक है। एक बार उचित मार्ग चुनने के पश्चात् दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ना चाहिए।

मानव को सुख-दुःख में समान भाव से रहना चाहिए क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति के सपने होते हैं और ये सपने तभी पूर्ण होते हैं जब व्यक्ति अपने कर्मपथ की बाधाओं को कुचलता हुआ अपने उद्देश्य की प्राप्ति में दृढ़ता से लगा रहे।

व्यक्ति यदि असमंजस की स्थिति में बार-बार मार्ग बदलता है तो वह अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाता। यदि अपने लक्ष्य में सफलता प्राप्त करनी है तो अपने मार्ग के काँटों को अर्थात् विषमताओं को दूर करते हुए आगे बढ़ो। सफलता अवश्य तुम्हारे चरण चूमेगी। तः मानव को अपना पथ सोच-समझकर निर्धारित करना चाहिए।

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पथ की पहचान संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

(1) पूर्व चलने के बटोही
बाट की पहचान कर ले।
पुस्तकों में है नहीं छापी
गयी इनकी कहानी,
हाल इनका ज्ञात होता
हैन औरों की जुबानी।
अनगिनत राही गए इस
राह से, उनका पता क्या,
पर गए कुछ लोग इस पर
छोड़ पैरों की निशानी,
यह निशानी मूक होकर
भी बहुत कुछ बोलती है,
खोल इसका अर्थ, पंथी
पंथ का अनुमान कर ले।
पूर्व चलने के बटोही
बाट की पहचान कर ले।

शब्दार्थ :
बटोही = पथिक, रास्तागीर। बाट = रास्ता। औरों की जुबानी = औरों के कहने से। राही = पथिक। मूक = गूंगी। पंथी = रास्तागीर।

सन्दर्भ :
प्रस्तुत पंक्तियाँ पथ की पहचान’ शीर्षक कविता से ली गई हैं। इसके रचनाकार श्री हरिवंशराय बच्चन हैं।

प्रसंग :
कवि इसमें यह सन्देश देता है कि कोई भी कार्य करने से पहले उसके बारे में भली-भाँति जानकारी कर लेनी चाहिए।

व्याख्या :
कविवर हरिवंशराय बच्चन कहते हैं कि हे रास्तागीर! जिस रास्ते पर तुम चलना चाह रहे हो, उस रास्ते की भली-भाँति पहचान कर लो। इसकी कहानी किसी भी पुस्तक में नहीं छापी गयी है और न ही इसके बारे में किसी अन्य व्यक्ति से कोई जानकारी प्राप्त हो सकती है। इस मार्ग से, जिस पर तू चलना चाह रहा है, अनगिनत राही जा चुके हैं, पर आज तक उनका कोई अता-पता नहीं है, लेकिन कुछ ऐसे भी महान् पुरुष इस मार्ग से गये हैं, जहाँ उन्होंने अपने चरणों की अमिट छाप छोड़ी है। यद्यपि उनके चरणों की यह छाप मूक अर्थात् गूंगी है, लेकिन इसके बावजूद वह बहुत कुछ बोलती है। अतः हे पंथी! इस मूक निशानी का अर्थ तू भली-भाँति समझ ले और फिर उससे अपने पंथ का अनुमान लगा ले। हे राहगीर! चलने से पूर्व अपने मार्ग की पहचान कर ले।

विशेष :

  1. कवि ने सोच-समझकर किसी कार्य को करने को कहा है।
  2. कविता में लाक्षणिकता है।
  3. अनुप्रास की छटा।

(2) यह बुरा है या कि अच्छा,
व्यर्थ दिन इस पर बिताना,
अब असम्भव, छोड़ यह पथ
दूसरे पर पग बढ़ाना,
तू इसे अच्छा समझ,
यात्रा सरल इससे बनेगी,
सोच मत केवल तुझे ही,
यह पड़ा मन में बिठाना,
हर सफल पंथी,
यही विश्वास ले इस पर बढ़ा है।
तू इसी पर आज अपने
चित्त का अवधान कर ले।
पूर्व चलने के बटोही
बाट की पहचान कर ले।

शब्दार्थ :
व्यर्थ = बेकार में। पग बढ़ाना = दूसरा कार्य। शुरू करना। पंथी = राहगीर। अवधान = दृढ़ निश्चय।

सन्दर्भ एवं प्रसंग :
पूर्ववत्।।

व्याख्या :
कविवर बच्चन कहते हैं कि जो व्यक्ति शंकालु होते हैं और बार-बार यह सोचते रहते हैं कि यह अच्छा है या बुरा है और इसी सोच में बेकार में अपना समय बर्बाद किया करते हैं। किसी पहली बात को असम्भव बताकर दूसरे नये काम में लग जाया करते हैं।

कवि कहता है कि किसी भी कार्य को आरम्भ करने से पूर्व उसे अच्छी तरह समझ लो, ऐसा करने से आपकी यात्रा सरल एवं सफल हो जायेगी। तू यह मत सोच कि केवल तेरा ही इन संकटों से पाला पड़ा है बल्कि हर सफल पंथी की यही कहानी रही है और वह इसी विश्वास को लेकर उस पर आगे बढ़ा है। अतः खूब सोच-विचार कर तू अपना दृढ़ निश्चय इस पर कर ले। हे रास्तागीर! मार्ग पर चलने से पूर्व मार्ग की भली-भाँति। जाँच-पड़ताल कर ले।

विशेष :

  1. कवि ने कहा है कि किसी भी काम को अपने। हाथ में लेने से पूर्व भली-भाँति सोच-समझ लो, पर जब उस पर चल पड़ो तो फिर उसमें आने वाली विपत्तियों से मत डरो।
  2. अनुप्रास की छटा।

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(3) है अनिश्चित किस जगह पर,
सरित, गिरि, गह्वर मिलेंगे,
है अनिश्चित किस जगह पर,
बाग, वन, सुन्दर मिलेंगे।
किस जगह यात्रा खत्म हो
जाएगी, यह भी अनिश्चित,
है अनिश्चित कब सुमन, कब
कंटकों के शर मिलेंगे,
कौन सहसा छूट जाएंगे,
मिलेंगे कौन सहसा,
आ पड़े कुछ भी, रुकेगा
तू न, ऐसी आन कर ले।
पूर्व चलने के, बटोही
बाट की पहचान कर ले।

शब्दार्थ :
सरित = नदी। गिरि – पर्वत। गह्वर = गुफाएँ। वन = जंगल। सुमन = फूल। कंटकों = काँटों के। शर = बाण। आन = प्रतिज्ञा।

सन्दर्भ एवं प्रसंग :
पूर्ववत्।

व्याख्या :
कविवर बच्चन कहते हैं कि जब हम किसी मार्ग पर चल निकलते हैं तो कहाँ हमें नदी, पर्वत और गुफाएँ मिलेंगी, यह सब अनिश्चित है। इसी प्रकार कहाँ हमें बाग, जंगल और सुन्दर स्थान मिलेंगे, यह भी अनिश्चित है। साथ ही हमारी यात्रा कहाँ खत्म हो जायेगी, यह भी अनिश्चित है। यह भी अनिश्चित है कि हमें कब तो सुमन मिलेंगे और कब हमें काँटों के बाण मिलेंगे। साथ ही कौन हमारे साथ चलते-चलते हमसे अलग हो जायेगा और कौन नया मिल जायेगा। अतः तू ऐसी प्रतिज्ञा कर ले कि चाहे जो भी परिस्थिति हो, तू अपने मार्ग पर चलते रहने से रुकेगा नहीं। हे राहगीर! चलने से पहले अपनी राह की भली-भाँति पहचान कर ले।

विशेष :

  1. कवि का सन्देश है कि किसी भी कार्य के करने में हमें अनेकानेक विपरीत स्थितियाँ मिलेंगी पर हमारा ध्येय इनकी चिन्ता न कर निरन्तर आगे बढ़ते रहना है।
  2. अनुप्रास की छटा।

(4) कौन कहता है कि स्वप्नों,
को न आने दे हृदय में,
देखते सब हैं इन्हें
अपनी उमर, अपने समय में.
और तू कर यत्न भी तो
मिल नहीं सकती सफलता,
ये उदय होते, लिए कुछ
ध्येय नयनों के निलय में
किंतु जग के पंथ पर यदि
स्वप्न दो तो सत्य दो सौ,
स्वप्न पर ही मुग्ध मत हो,
सत्य का भी ज्ञान कर ले।
पूर्व चलने के, बटोही
बाट की पहचान कर ले।

शब्दार्थ :
नयनों = नेत्रों के। निलय = घर में। जग = संसार। मुग्ध = मोहित।

सन्दर्भ एवं प्रसंग :
पूर्ववत्।

व्याख्या :
कविवर बच्चन कहते हैं कि यह कौन व्यक्ति कहता है कि जीवन में कभी भी स्वप्न मत आने दो। अरे भाई ये स्वप्न तो अपनी उमर और अपने समय के अनुसार सभी देखते हैं। इसके साथ ही कवि यह भी कहता है कि हे मनुष्य! तू हजारों यत्न कर ले लेकन सफलता तुझे तब भी नहीं मिलेगी।

आगे कवि कहता है कि ये स्वप्न जब भी उदय होते हैं तो वे कोई-न-कोई लक्ष्य अपने नेत्रों में समाये रहते हैं, परन्तु हे राहगीर! इस जीवन के पथ पर यदि थोड़े से सपने हैं तो सैकड़ों सत्य (संघर्ष, विपदाएँ) भी हैं। अकेले स्वप्न पर ही हे मनुष्य! तू मोहित मत हो जा। सपने के साथ ही साथ जीवन के सत्य की भी तू पहचान कर ले। हे राहगीर! राह पर चलने से पूर्व अपने राह की पहचान कर ले।

‘विशेष :

  1. कवि स्वप्न देखना बुरा नहीं मानता है, पर वह यह कहना चाहता है कि स्वप्न के साथ ही साथ सत्यता का भी ज्ञान कर लेना चाहिए।
  2. अनुप्रास की छटा।

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(5) स्वप्न आता स्वर्ग:का; द्रग
कोरकों में दीप्ति आती,
पंख लग जाते पगों को
ललकती उन्मुक्त छाती,
रास्ते का एक काँटा
पाँव का दिल चीर देता,
रक्त की दो बूंद गिरती
एक दुनिया डूब जाती,
आँख में ही स्वर्ग लेकिन
पाँव पृथ्वी पर टिके हों,
कंटकों की इस अनोखी
सीख का सम्मान कर ले।
पूर्व चलने के, बटोही
बाट की पहचान कर ले।

शब्दार्थ :
दृग = नेत्र। कोरकों = कोनों में। दीप्ति = चमक। पगों = पैरों में। उन्मुक्त = पूरी तरह मुक्त। अनोखी = विचित्र। सीख = शिक्षा।

सन्दर्भ एवं प्रसंग :
पूर्ववत्।

व्याख्या :
कविवर बच्चन कहते हैं कि हमें स्वर्ग के सपने आते हैं, इससे हमारे नेत्रों के कोने में एक विशेष प्रकार की चमक आ जाती है। हमारे पैरों में पंख लग जाते हैं अर्थात् हम कल्पना लोक में विचरण करने लग जाते हैं और हमारी स्वच्छन्द छाती ललकने लगती है। रास्ते में पड़ा हुआ एक भी काँटा हमारे पाँव के दिल को चीर देता है। जब खून की दो बूंद गिरती हैं तो उसमें एक दुनिया डूब जाती है।

आगे कवि कहता है कि चाहे हमारी आँखों में स्वर्ग के सपने हों पर हमारे पैर पृथ्वी पर ही टिके रहने चाहिए कहने का भाव यह है कि हमें जीवन के यथार्थ का भी ज्ञान होना चाहिए। काँटों की इस अनोखी शिक्षा का, हे मानव! तू सम्मान कर ले। हे रास्तागीर! रास्तों पर चलने से पूर्व रास्ते की भली-भाँति पहचान कर ले।

विशेष :

  1. कवि स्वप्न देखना बुरा नहीं मानता, पर यथार्थ की भी हमें जानकारी होनी चाहिए इसी पर कवि जोर देता है।
  2. अनुप्रास की छटा।

चरैवेति-जन गरबा भाव सारांश

नरेश मेहता ने अपनी कविता ‘चरैवेति जनगरबा’ में मानव को निरन्तर चलने की प्रेरणा दी कवि का कथन है कि सूर्य निरन्तर चलता है। चन्द्रमा भी रात्रि में गति करता है। नित्य प्रति ऋतु परिवर्तन भी होता है, तारे आसमान में गति करते हैं।

जिस भाँति प्रकृति निरन्तर चलती है, उसी भाँति मानव को निरन्तर चलते रहना चाहिए। कवि का कथन है कि आज मनुष्य स्वतन्त्र है, अतः मानव योनि में जन्म लेने के कारण व्यक्ति को कर्म करते रहना चाहिए।

यदि व्यक्ति कर्म में रत रहेगा तो लक्ष्मी उससे दूर नहीं रहेगी,क्योंकि परिश्रम करने वाला व्यक्ति ही संसार में सुख-सम्पदा का स्वामी बनता है। कवि ने कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ते रहना चाहिए। पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। कर्म करते रहना ही सच्चा तीर्थस्थल है।

मनुष्य को युग परिवर्तन के साथ-साथ प्राचीन रूढ़ियों का परित्याग करके नवीन समय का स्वागत करने को तैयार रहना चाहिए।

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चरैवेति-जन गरबा संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

(1) चलते चलो, चलते चलो।
सूरज के संग-संग चलते चलो, चलते चलो॥
तम के जो बन्दी थे
सूरज ने मुक्त किये
किरनों से गगन पोंछ
धरती को रंग दिये
सूरज को विजय मिली, ऋतुओं की रात हुई
कह दो इन तारों से चन्दा के संग-संग चलते चलो॥

शब्दार्थ :
तम = अन्धकार। मुक्त = स्वतन्त्र।

सन्दर्भ :
प्रस्तुत कविता ‘चैरवेति-जन गरबा’ शीर्षक से ली गई है। इसके कवि श्री नरेश मेहता हैं।

प्रसंग :
कवि इस अवतरण में मनुष्यों को सदैव चलते रहने का सन्देश देना चाहता है।

व्याख्या :
कविवर नरेश मेहता कहते हैं कि हे मनुष्यो! जीवन में तुम सदैव चलते चलो, रुको मत। जिस प्रकार सूरज रात दिन, वर्ष भर चलता ही रहता है, वह थकता नहीं है, इसी प्रकार तुम भी जीवन भर चलते रहो, रुको मत। आगे कवि कहता है कि जो अन्धकार के बन्दी थे, उन्हें सूरज ने मुक्त कर दिया है तथा अपनी किरणों से सूरज ने आकाश को पोंछ कर धरती को नये-नये रंग दे दिये हैं। आज सूरज को जीत मिल गई है और ऋतुओं की रात हो गयी है। इन तारों से कह दो कि वे चन्दा के साथ-साथ सदैव चलते रहें।

विशेष :

  1. कवि ने जीवन की सार्थकता निरन्तर चलते रहने में बताई है।
  2. अनुप्रास की छटा।

(2) रत्नमयी वसुधा पर
चलने को चरण दिये
बैठी उस क्षितिज पार
लक्ष्मी, श्रृंगार किये।
आज तुम्हें मुक्ति मिली, कौन तुम्हें दास कहे
स्वामी तुम ऋतुओं के, संवत् के संग-संग चलते चलो!!

शब्दार्थ :
रलमयी = रत्नों से भरी हुई। वसुधा = पृथ्वी। संवत् = वर्ष।

सन्दर्भ एवं प्रसंग :
पूर्ववत्।

व्याख्या :
कविवर नरेश मेहता कहते हैं कि ईश्वर ने कृपा करके रत्नों की भण्डार इस पृथ्वी पर चलने के लिए तुम्हें चरण प्रदान किये हैं। क्षितिज के दूसरी ओर लक्ष्मी शृंगार किये बैठी है। कहने का अर्थ यह है कि लक्ष्मी को प्राप्त करना चाहते हो, तो जीवन में पुरुषार्थ करो।

आज तुम स्वतन्त्र हो, तुम्हें दास कहने की किसमें हिम्मत। है। तुम सभी ऋतुओं के स्वामी हो। अतः संवत्सर के साथ-साथ निरन्तर चलते रहो, रुको मत।

विशेष :

  1. कवि ने मानव को सदैव प्रयत्न करते रहने का सन्देश दिया है।
  2. अनुप्रास की छटा।

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(3) नदियों ने चलकर ही
सागर का रूप लिया
मेघों ने चलकर ही
धरती को गर्भ दिया
रुकने का मरण नाम, पीछे सब प्रस्तर है।
आगे है देवयान, युग केही संग-संग चलते चलो!!

शब्दार्थ :
प्रस्तर = पत्थर देवयान = देवताओं का वाहन।

सन्दर्भ एवं प्रसंग :
पूर्ववत्।।

व्याख्या :
कविवर नरेश मेहता कहते हैं कि निरन्तर बहने वाली नदियों ने ही अपने पानी द्वारा सागर का निर्माण किया है। बादलों ने ही उमड़-घुमड़ कर धरती को फलवती बना दिया है। रुकना मृत्यु है, पीछे सब पत्थर पड़े मिलेंगे यदि आगे बढ़ोगे तो देवयान मिलेंगे। अतः युग (समय) के साथ ही साथ चलते रहो।

विशेष :

  1. कवि ने निरन्तर आगे बढ़ने का सन्देश दिया
  2. अनुप्रास की छटा।

(4) मानव जिस ओर गया
नगर बसे, तीर्थ बने
तुमसे है कौन बड़ा
गगन सिन्धु मित्र बने
भूमा का भोगो सुख, नदियों का सोम पियो।
त्यागो सब जीर्ण बसन, नूतन के संग-संग चलते चलो!!

शब्दार्थ :
भूमा = पृथ्वी। जीर्ण बसन = पुराने वस्त्र। नूतन = नवीन।

सन्दर्भ एवं प्रसंग :
पूर्ववत्।

व्याख्या :
कविवर नरेश मेहता कहते हैं कि मानव ने जिस तरफ भी अपने चरण बढ़ाये वहीं नगरों एवं तीर्थों का निर्माण होने लगा। कवि मानव के महत्व को बताते हुए कहता है कि हे मनुष्य! तुमसे कोई भी बड़ा नहीं है। आकाश और समुद्र तक तुम्हारे मित्र बन बन गये हैं। अतः हे मनुष्यो! इस पृथ्वी का सुख भोगो, नदियों के सोम रस का पान करो, सभी पुराने वस्त्रों को त्याग दो और फिर नये वस्त्रों के साथ-साथ चलते चलो।

विशेष :

  1. मानव के महत्व को कवि ने बताया है।
  2. अनुप्रास की छटा।

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 9 स्वतन्त्रता आन्दोलन से सम्बन्धित घटनाएँ

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 9 स्वतन्त्रता आन्दोलन से सम्बन्धित घटनाएँ

MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
बंगाल विभाजन का मूल उद्देश्य था (2011)
(i) बंगाल में प्रशासनिक व्यवस्था लागू करना
(ii) राष्ट्रवादी भावनाओं को दबाना
(iii) राष्ट्रवादी भावनाओं को बढ़ाना
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ii) राष्ट्रवादी भावनाओं को दबाना

प्रश्न 2.
कांग्रेस का विभाजन हुआ (2011)
(i) नागपुर अधिवेशन में
(ii) सूरत अधिवेशन में
(iii) लाहौर अधिवेशन में
(iv) बम्बई अधिवेशन में
उत्तर:
(ii) सूरत अधिवेशन में

प्रश्न 3.
गांधीजी ने ‘खिलाफत आन्दोलन’ का समर्थन क्यों किया ?
(i) क्योंकि खलीफा भारतीय स्वतन्त्रता संघर्ष का समर्थक था
(ii) क्योंकि गाँधीजी अंग्रेजों के विरुद्ध मुसलमानों का समर्थन चाहते थे
(iii) क्योंकि खलीफा भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के प्रेमी थे
(iv) क्योंकि टर्की ने भारतीय स्वतन्त्रता का समर्थन किया।
उत्तर:
(ii) क्योंकि गाँधीजी अंग्रेजों के विरुद्ध मुसलमानों का समर्थन चाहते थे

प्रश्न 4.
रॉलेट एक्ट का उद्देश्य था (2011)
(i) सभी हड़तालों को गैर-कानूनी घोषित करना
(ii) आन्दोलनकारियों का दमन करना
(iii) सभी के मध्य समानता स्थापित करना
(iv) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(ii) आन्दोलनकारियों का दमन करना

प्रश्न 5.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कार्यक्रम में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं है ?
(i) देशवासियों को नमक बनाना चाहिए
(ii) विदेशी वस्त्रों की होली जलाई जाए
(iii) हिंसात्मक साधनों से कानूनों का उल्लंघन किया जाए
(iv) शराब की दुकानों पर ध्यान दिया जाए।
उत्तर:
(iii) हिंसात्मक साधनों से कानूनों का उल्लंघन किया जाए

प्रश्न 6.
फारवर्ड ब्लॉक की स्थापना किसने की ? (2009,11)
(i) भगतसिंह
(ii) रास बिहारी बोस
(iii) चन्द्रशेखर आजाद
(iv) सुभाष चन्द्र बोस।
उत्तर:
(iv) सुभाष चन्द्र बोस।

प्रश्न 7.
जुलाई 1947 में ब्रिटिश संसद ने भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम पारित किया जिसके अनुसार दो निम्न स्वतन्त्र देशों का निर्माण हुआ (2011, 12)
(i) भारत-बांग्लादेश
(ii) भारत-पाकिस्तान
(iii) भारत-श्रीलंका
(iv) भारत-नेपाल।
उत्तर:
(ii) भारत-पाकिस्तान

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. 1905 में बंगाल प्रान्त में बंगाल, ………………., उड़ीसा सम्मिलित थे।
  2. ‘करो या मरो’ का नारा ………………. आन्दोलन में दिया गया।
  3. 1928 में क्रान्तिकारियों ने ………………. का गठन किया।
  4. भारत की स्वाधीनता के समय ………………. भारत के वाइसराय थे। (2009, 10)
  5. ………………. के नेतृत्व में भारत की रियासतों के विलीनीकरण का कार्य सम्पन्न हुआ।

उत्तर:

  1. बिहार, असम
  2. भारत छोड़ो
  3. हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातान्त्रिक सेना
  4. माउण्टबेटन
  5. सरदार बल्लभभाई पटेल।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बंगाल विभाजन कब और क्यों किया गया था ?
उत्तर:
बंगाल विभाजन 16 अक्टूबर, 1905 को प्रभावी रूप से लागू किया गया। लार्ड कर्जन का विचार था कि प्रशासनिक दृष्टि से एक लैफ्टीनेंट गवर्नर द्वारा इतने विशाल प्रान्त पर कुशलतापूर्वक शासन करना सम्भव ‘नहीं है, अतः कर्जन ने बंगाल को दो भागों में विभाजित करने की योजना बनाई। परन्तु बंगाल का यह विभाजन प्रशासनिक कारणों से नहीं बल्कि राजनैतिक कारणों से किया गया था। लार्ड कर्जन राष्ट्रीय चेतना के केन्द्र बंगाल पर आघात कर इसे कमजोर बनाना चाहता था। लार्ड कर्जन का एक उद्देश्य हिन्दू और मुसलमानों की संगठित शक्ति को तोड़कर उसे बाँटना था।

प्रश्न 2.
असहयोग आन्दोलन अचानक क्यों स्थगित हो गया ?
उत्तर:
असहयोग आन्दोलन का स्थगन-5 फरवरी, सन् 1922 को गोरखपुर के निकट चौरी-चौरा गाँव में पुलिस ने भीड़ पर गोली चलायी। जब उसका गोला-बारूद समाप्त हो गया तो पुलिसजनों ने अपने को थाने में बन्द कर लिया। भीड़ ने थाने में आग लगा दी, जिससे 22 सिपाही जलकर मर गये। गांधीजी अहिंसात्मक आन्दोलन में विश्वास करते थे। अतः इस हिंसात्मक घटना से उन्हें आघात लगा तो उन्होंने असहयोग आन्दोलन को स्थगित कर दिया।

प्रश्न 3.
खिलाफत और असहयोग आन्दोलन के क्या लक्ष्य थे ?
उत्तर:
खिलाफत आन्दोलन – प्रथम विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद टर्की के साथ जो अन्यायपूर्ण व्यवहार किया गया था, उस पर वहाँ खिलाफत आन्दोलन प्रारम्भ हुआ। इसके समर्थन में भारत के अली भाइयों (मोहम्मद अली और शौकत अली) ने खिलाफत आन्दोलन आरम्भ किया।

असहयोग आन्दोलन – कांग्रेस ने 1920 में गांधीजी के नेतृत्व में असहयोग का नया कार्यक्रम अपनाया। जलियाँवाला बाग का हत्याकाण्ड, रॉलेट एक्ट का विरोध, ब्रिटिश सरकार की वादा खिलाफी का विरोध और स्वराज की प्राप्ति, ये असहयोग आन्दोलन के उद्देश्य थे।

प्रश्न 4.
आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर आक्रमण कर किन स्थानों को अंग्रेजों से मुक्त कराया ?
उत्तर:
सुभाषचन्द्र बोस ने भारत-बर्मा सीमा पर युद्ध आरम्भ किया। फरवरी 1944 में आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर आक्रमण कर रामू, कोहिया, पलेम, तिद्विम आदि को अंग्रजों से मुक्त कराया। अप्रैल 1944 में आजाद हिन्द फौज ने इम्फाल को घेर लिया परन्तु वर्षा के आधिक्य और रसद की कमी के कारण उन्हें लौटना पड़ा।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बंगाल विभाजन के पीछे ब्रिटिश शासन के क्या उद्देश्य थे ?
अथवा
बंगाल विभाजन का क्या उद्देश्य था ? लिखिए। (2009)
उत्तर:
बंगाल विभाजन के पीछे अंग्रेजों के निम्नलिखित उद्देश्य थे –

  1. ब्रिटिश सरकार के अनुसार बंगाल विभाजन का प्रमुख उद्देश्य बंगाल के प्रशासन को सुधारना था। लार्ड कर्जन के मत में बंगाल एक विशाल प्रान्त था, अतः समुचित प्रशासनिक संचालन के लिए उसका विभाजन करना आवश्यक था।
  2. बंगाल विभाजन का अन्य उद्देश्य बंगाल की संगठित राजनीतिक भावना को समाप्त करना तथा राष्ट्रीयता के वेग को कम करना था।
  3. इतिहासकारों के अनुसार बंगाल विभाजन का प्रमुख उद्देश्य जनता में फूट डालना था। पूर्वी बंगाल में मुसलमानों का बहुमत तथा पश्चिमी भाग में हिन्दुओं का बहुमत रखना जिससे हिन्दू-मुस्लिम एकता समाप्त हो जाए।

प्रश्न 2.
कांग्रेस का विभाजन भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की दृष्टि से विनाशकारी सिद्ध हुआ। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
1907 ई. में सूरत में कांग्रेस के अधिवेशन में कांग्रेस के उग्रराष्ट्रवादियों तथा उदारवादियों के मध्य खुलकर संघर्ष हुआ। उग्रराष्ट्रवादियों ने लाला लाजपतराय को अध्यक्ष पद पर खड़ा किया जिसका उदारवादियों ने विरोध किया। उदारवादी डॉ. रासबिहारी को अध्यक्ष बनाना चाहते थे।

सूरत अधिवेशन की घटना ने कांग्रेस के उदार और उग्रराष्ट्रवादी नेताओं को सोचने पर विवश किया किन्तु दोनों पक्षों के कुछ नेता मतभेदों को समाप्त करने पर एकमत नहीं हुए जिसके कारण अन्ततः कांग्रेस में विभाजन हो गया, जिसे ‘सूरत की फूट’ कहा जाता है। कांग्रेस का यह विभाजन भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की दृष्टि से विनाशकारी सिद्ध हुआ। ब्रिटिश सरकार ने इसे अपनी जीत के रूप में लिया। वस्तुतः सूरत अधिवेशन से स्वाधीनता का नया अध्याय आरम्भ होता है।

प्रश्न 3.
स्वतन्त्रता संग्राम के इतिहास में 1929 के लाहौर अधिवेशन का क्या महत्त्व है ? (2014)
उत्तर:
कांग्रेस का 44वाँ अधिवेशन 1929 में लाहौर में हुआ। इस अधिवेशन के अध्यक्ष पं. जवाहर लाल नेहरू थे। अपने इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य की माँग का प्रस्ताव पास किया। स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू करने का निर्णय भी लिया गया। यह भी निर्णय लिया गया कि हर वर्ष 26 जनवरी का दिन सम्पूर्ण भारत में स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाया जाए। इस प्रकार 26 जनवरी, 1930 को स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाया गया। इसके मनाये जाने से जन-साधारण में एक बड़ा जोश पैदा हो गया और पूर्ण स्वराज्य का सन्देश घर-घर पहुँच गया। इसी कारण लाहौर अधिवेशन का भारतीय इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान है।

प्रश्न 4.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाए जाने के क्या कारण थे? (2009, 10, 14, 15, 18)
उत्तर:
दिसम्बर 1929 के लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में कांग्रेस कार्यसमिति को सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ करने की स्वीकृति दी गई थी। वायसराय लार्ड इरविन ने लाहौर अधिवेशन के पूर्ण स्वाधीनता प्रस्ताव को मानने से इन्कार कर दिया था परन्तु गांधीजी अभी भी समझौते की आशा रखते थे। अतः उन्होंने 30 जनवरी, 1930 को लार्ड इरविन के समक्ष 11 माँगें प्रस्तुत की। गांधीजी ने यह भी घोषित किया कि माँगें स्वीकार न होने की स्थिति में सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ किया जायेगा।

गांधीजी चाहते थे कि सरकार विनिमय की दर घटाए, भू-स्वराज कम करे, पूर्ण नशाबन्दी लागू हो, बन्दूकों को रखने का लाइसेंस दिया जाये, नमक पर कर समाप्त हो, हिंसा से दूर रहने वाले राजनीतिक बन्दी छोड़े जाएँ, गुप्तचर विभाग पर नियन्त्रण स्थापित हो, सैनिक व्यय में पचास प्रतिशत कमी हो, कपड़ों का आयात कम हो आदि। वायसराय ने इन माँगों को अस्वीकार कर दिया। अत: गांधीजी ने योजनानुसार सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ किया।

प्रश्न 5.
गांधीजी के आरम्भिक आन्दोलनों की तुलना में भारत छोड़ो आन्दोलन किस प्रकार भिन्न है ? स्पष्ट कीजिए। (2009)
उत्तर:
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 8 अगस्त, 1942 को ‘भारत छोड़ो’ का प्रस्ताव मुम्बई में पारित किया। गांधीजी ने इस अवसर पर कहा कि “प्रत्येक भारतवासी को चाहिए कि वह अपने आपको स्वाधीन मनुष्य समझे। उसे स्वाधीनता की यथार्थतापूर्ण प्राप्ति या उसके हेतु किए गए प्रयत्न में मर मिटने को तत्पर रहना चाहिए।”

महाजन दम्पत्ति के अनुसार, “1942 का राष्ट्रीय आन्दोलन 1921 और 1930 के आन्दोलनों से अनेक बातों में भिन्न तथा विशेष था। पहले आन्दोलन इसलिए किये गये थे, ताकि भारत के लोगों को ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध अन्तिम संग्राम के लिए तैयार किया जाए। उनका ध्येय देश में जागृति उत्पन्न करना था। वे लोग जो शताब्दियों से विदेशियों के नीचे पिस रहे थे उनके हृदय से भय दूर करना था और देश-प्रेम को भरना था। उनके सम्मुख स्वराज्य की स्थापना का ध्येय तो था परन्तु बहुत दूर था। 1942 के आन्दोलन करने वालों का यह निश्चय था कि यह आन्दोलन आजादी के लिए अन्तिम संग्राम है और इसलिए वे अपने ध्येय की पूर्ति के लिए सब कुछ बलिदान करने के लिए उद्यत थे।”

प्रश्न 6.
स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान गांधीजी ने किन तरीकों को अपनाने के लिए कहा ?
उत्तर:
स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान गांधीजी ने निम्न तरीकों को अपनाने को कहा –

(1) आन्दोलन में अहिंसा को अपनाना – प्रारम्भ से ही महात्मा गांधी के राजनीतिक विचारों का आधारभूत सिद्धान्त अहिंसा था। उन्होंने यह समझ लिया था कि भारत में शस्त्र की शक्ति अथवा हिंसा द्वारा अंग्रेजी राज्य को नहीं हटाया जा सकता। अत: उन्होंने कांग्रेस के क्रान्तिकारी विचार के कार्यकर्ताओं को समझाया कि वे अपने हिंसा के मार्ग के छोड़कर जनजागृति एवं संगठन को महत्त्व देकर ही संघर्ष करें। गांधीजी अहिंसा को कायरों का नहीं वरन् शक्तिशाली लोगों का हथियार मानते थे। गांधीजी के अनुसार, “अहिंसा एक ऐसा सच्चा हथियार है जिसमें सभी को जीतने की शक्ति होती है।”

(2) आन्दोलन में नैतिक साधनों के प्रयोग पर बल देना – अहिंसा के अतिरिक्त गांधीजी ने सत्य, नैतिकता, न्याय, पवित्रता तथा निर्भयता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, “सत्य तथा अहिंसा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।” उनके मत में आदर्श आन्दोलनकारी वह है जो सत्य में भी निष्ठा रखता है। वे नैतिकता पर भी बल देते थे। उनके अनुसार नैतिकता से ही मनुष्य में आत्मबल का विकास होता है तथा आत्मबल वाला व्यक्ति निहत्था होकर भी बड़ी-से-बड़ी शक्ति को अपने अनुकूल बना सकता है। वे राजनीति तथा नैतिकता को अलग-अलग नहीं मानते थे।

(3) महात्मा गांधी द्वारा चलाये आन्दोलनों के साधन – महात्मा गांधी के आन्दोलन पूर्णतया अहिंसात्मक थे तथा उनके प्रमुख साधन थे-व्यक्तिगत सत्याग्रह, सामूहिक सत्याग्रह, विदेशी माल का बहिष्कार, शराब की दुकानों पर धरना तथा सरकारी नौकरियों का बहिष्कार।

ये विधियाँ अहिंसक तो थीं, पर कुछ कम क्रान्तिकारी न थीं, इनके कारण समाज के सभी वर्गों के लाखों लोग प्रभावित हुए। उनके अन्दर वीरता और आत्मविश्वास की भावना जागी। लाखों लोग निर्भय होकर सरकार का दमन झेलने लगे, जेल जाने लगे तथा लाठी-गोली का सामना करने लगे।

प्रश्न 7.
क्रान्तिकारी आन्दोलन का भारत के इतिहास में महत्त्व स्पष्ट कीजिए। (2010, 17)
उत्तर:
क्रान्तिकारियों ने राष्ट्रीय आन्दोलन को एक नई दिशा प्रदान की। अब ब्रिटिश सरकार के प्रति सहयोग की नीति से हटकर विरोध की नीति अपनाई गई। इसके लिए उन्हें पुलिस की लाठियों का शिकार होना पड़ा और अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी। इससे जन-आन्दोलन भड़क उठा और कई क्रान्तिकारी युवकों ने बदला लेने की कसम खाई। भगतसिंह, खुदीराम बोस, चन्द्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, बटुकेश्वर दत्त, वीर सावरकर जैसे अनेक क्रान्तिकारी युवकों ने ब्रिटिश अफसरों की हत्या करने तथा हथियारों को प्राप्त करने के लिए सरकारी खजाने एवं मालगोदामों को लूटने तक में भी संकोच नहीं किया। इन सबका उद्देश्य था, हर सम्भव प्रयत्न से अंग्रेजों को देश के बाहर खदेड़ना तथा देश को गुलामी की बेड़ियों से छुटकारा दिलाना। भगतसिंह ने फाँसी के तख्ते को चूमा, राम प्रसाद बिस्मिल तथा खुदीराम बोस ने यह कहते हुए हँसते-हँसते फाँसी का फन्दा अपने गले में डाल दिया –

“सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।”

इसी तरह पुलिस के साथ मुठभेड़ में चन्द्रशेखर आजाद इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद हो गये।

इन क्रान्तिकारियों का बलिदान निष्फल नहीं गया। ब्रिटिश शासन डगमगाने लगा और उन्होंने सोच लिया कि भारत की धरती पर रहने के उनके कुछ ही दिन बाकी रह गये हैं।

प्रश्न 8.
कैबिनेट मिशन का क्या उद्देश्य था ? वह उन उद्देश्यों में कहाँ तक सफल रहा ?
उत्तर:
कैबिनेट मिशन – शिमला सम्मेलन की असफलता के बाद इंग्लैण्ड की नयी मजदूर दल की सरकार ने भारत की स्थिति की जानकारी लेने के लिए एक शिष्टमण्डल भारत भेजा। ब्रिटिश संसदीय शिष्टमण्डल ने अपनी रिपोर्ट में भारत में सत्ता को तुरन्त हस्तान्तरित किये जाने की अनुशंसा की। इस स्थिति में ब्रिटिश प्रधानमन्त्री लार्ड एटली ने कैबिनेट मिशन भारत भेजा।

कैबिनेट मिशन ने भारत के भावी स्वरूप को निश्चित करने वाली एक योजना 16 मई, 1946 को प्रस्तुत की। योजना के दो मुख्य भाग थे – अन्तरिम सरकार की स्थापना की तात्कालिक योजना तथा संविधान निर्माण की दीर्घकालीन योजना।

यह सत्य है कि कैबिनेट मिशन योजना में अनेक दोष थे फिर भी यह योजना अब तक प्रस्तुत की गयी योजनाओं से कहीं अधिक सारगर्भित तथा पर्याप्त सीमा तक व्यावहारिक थी। महात्मा गांधी के अनुसार, “यह उन परिस्थितियों में ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रस्तुत की जा सकने वाली सर्वश्रेष्ठ योजना थी।”

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत छोड़ो आन्दोलन का क्या अर्थ है एवं यह कब शुरू हुआ ? भारतीय स्वतन्त्रता के इतिहास में इसके महत्त्व को लिखिए।
अथवा
भारत छोड़ो आन्दोलन कब शुरू हुआ था ? भारतीय स्वतन्त्रता के इतिहास में इसका महत्व लिखिए। (2018)
उत्तर:
भारत छोड़ो आन्दोलन

1942 के वर्ष में देश के राजनीतिक मंच पर एक ऐसा ऐतिहासिक आन्दोलन आरम्भ हुआ, जिसे ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ के नाम से जाना जाता है। यह यथार्थत: जन-आन्दोलन था। यह एक ऐसा अन्त:प्रेरित और स्वेच्छासूचक सामूहिक आन्दोलन था, जिसका जन्म राष्ट्र की स्वाधीनता के लिए स्व-प्रेरणा के फलस्वरूप हुआ था। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 8 अगस्त, 1942 को ‘भारत छोड़ो’ का प्रसिद्ध प्रस्ताव पास किया।

भारत छोड़ो आन्दोलन के अवसर पर महात्मा गांधी ने अपने उत्साहपूर्ण तथा जोशीले भाषण में भारतवासियों को ‘करो या मरो’ का ऐतिहासिक सन्देश दिया। इस सन्देश का आशय था कि स्वतन्त्रता की प्राप्ति के लिए भारतवासियों को अहिंसक ढंग से हर सम्भव उपाय करना चाहिए।

आन्दोलन का प्रारम्भ – भारत छोड़ो प्रस्ताव के पारित होने के दूसरे दिन ही ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी को गिरफ्तार कर लिया। परिणामस्वरूप ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन की आग सारे देश में फैल गयी। . प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं को गिरफ्तार कर लेने के कारण इस आन्दोलन ने हिंसात्मक रूप ले लिया। जगह-जगह पर उग्र प्रदर्शन हुए। नगरों तथा गाँवों में विशाल जुलूस निकाले गये। स्थान-स्थान पर रेलवे स्टेशन, डाकखाने, तारघर तथा थानों को जला दिया गया।

बलिया, सतारा, बंगात तथा बिहार के कुछ स्थानों पर तो कुछ काल के लिए ब्रिटिश शासन का नामोनिशान ही मिटा दिया गया। इन स्थानों पर आन्दोलनकारियों ने स्वतन्त्र शासन की स्थापना कर दी, परन्तु ब्रिटिश सरकार ने भी कठोरता से अपना दमन चक्र चलाया। यह आन्दोलन 1945 तक किसी-न-किसी रूप में चलता रहा। यह सत्य है कि ब्रिटिश सरकार ने इस आन्दोलन का दमन कर दिया था, परन्तु इस जनजागृति ने ऐसे वातावरण का निर्माण किया कि कुछ वर्षों के बाद ही ब्रिटिश सरकार को भारत छोड़कर जाना पड़ा।

भारत छोड़ो आन्दोलन का महत्त्व – भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन के इतिहास में भारत छोड़ो आन्दोलन’ का अपना विशेष महत्त्व है। यह सत्य है कि जिस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आन्दोलन को प्रारम्भ किया गया था, वह तुरन्त प्राप्त नहीं हो सका, परन्तु इसके प्रभाव व्यापक रहे। इस आन्दोलन के कारण अमेरिका, चीन आदि विशाल राष्ट्रों को भारत के जन असन्तोष का ध्यान हुआ जिससे उन्होंने ब्रिटेन पर दबाव डाला कि वह भारत को स्वतन्त्र कर दे। साथ ही ब्रिटेन को भी यह ज्ञात हो गया कि वह अधिक दिनों तक भारत को पराधीन नहीं रख सकता। अन्य शब्दों में, इस आन्दोलन ने भारत की स्वतन्त्रता की पृष्ठभूमि तैयार कर दी थी।

प्रश्न 2.
क्रान्तिकारियों के बारे में आप क्या जानते हैं ? ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उन्होंने कौनसे तरीके अपनाए ? (2011, 13)
उत्तर:
ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रियावादी नीति के फलस्वरूप 19वीं शताब्दी के अन्तिम दशक में भारत में क्रान्तिकारी राष्ट्रीयता का विकास हुआ। बंगाल विभाजन के बाद भारतीयों में क्रान्तिकारी भावना का तेजी से प्रसार हुआ। क्रान्तिकारी विचारधारा के अनुयायियों का विश्वास था कि अहिंसा और वैधानिक साधनों द्वारा राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं किये जा सकते हैं। क्रान्तिकारी मानते थे कि हिंसा और भय दिखाकर स्वराज व स्वशासन प्राप्त किया जा सकता है। वे मातृभूमि को तत्काल विदेशी बन्धन से मुक्त करना चाहते थे। अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए क्रान्तिकारियों ने गुप्त समितियों का गठन किया, युवकों को सैनिक प्रशिक्षण दिया, अस्त्र-शस्त्र एकत्र किये तथा समाचार-पत्रों और अन्य माध्यमों से क्रान्तिकारी विचारों का प्रसार किया। अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए क्रान्तिकारियों ने बंगाल में अनुशीलन समितियों की स्थापना की। ये समितियाँ युवकों को भारतीय इतिहास और संस्कृति से अवगत कराती थीं तथा उनमें स्वतन्त्रता की भावना जागृत करती थीं। वे युवकों में त्याग और बलिदान की भावना उत्पन्न कर उन्हें मातृभूमि को विदेशी बन्धनों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए तैयार करती थीं। इस कार्य के लिए क्रान्तिकारियों ने पिस्तौल, बन्दूक और गोला-बारूद का रास्ता चुना।

प्रमुख क्रान्तिकारी व घटनाएँ – इस विचारधारा के प्रमुख समर्थक थे-चापेकर बन्धु, रामप्रसाद बिस्मिल, खुदीराम बोस, अशफाक उल्ला खाँ, सावरकर बन्धु, चन्द्रशेखर आजाद तथा सरदार भगतसिंह ये सभी क्रान्तिकारी भीख माँगकर स्वराज्य प्राप्त करने में विश्वास नहीं करते थे। 1928 में दिल्ली में क्रान्तिकारियों की बैठक आयोजित की गई और ‘हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातान्त्रिक सेना’ का गठन किया गया। पंजाब में भगवती चरण व भगतसिंह ने ‘नौजवान भारत सभा’ का गठन किया।

ब्रिटिश सरकार ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’ पास कराना चाहती थी। क्रान्तिकारियों ने इस बिल को रुकवाने के लिए केन्द्रीय असेम्बली में बम फेंकने की योजना बनाई। इस कार्य को सरकार भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त को सौंपा गया। जब 9 अप्रैल, 1929 को इस बिल पर असेम्बली में चर्चा चल रही थी, भगतसिंह ने असेम्बली में बम फेंक दिया। क्रान्तिकारियों का उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं था अपितु वे अपनी आवाज सरकार तक पहुँचाना चाहते थे। बाद में भगतसिंह तथा बटुकेश्वर दत्त पर मुकदमा चलाया गया। 23 मार्च, 1931 को ब्रिटिश सरकार द्वारा भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी के तख्ते पर लटका दिया गया।

1928 में लाहौर में ‘साइमन वापस जाओ’ आन्दोलन लाला लाजपतराय के नेतृत्व में शुरू हुआ। पुलिस में हुई झड़प के दौरान लाजपतराय की मृत्यु हो गई जिससे क्रान्तिकारियों भड़क उठे और पुलिस अधिकारी साण्डर्स की हत्या कर दी गई।

जतीन्द्रनाथ दास द्वारा भगतसिंह व अन्य क्रान्तिकारियों को जेल में सुविधाएँ दिए जाने की माँग को लेकर भूख हड़ताल की गयी और अन्ततः उन्होंने प्राणों की आहुति दे दी।

इधर ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीति के कारण और अनेक क्रान्तिकारियों नेताओं की मृत्यु से क्रान्तिकारी आन्दोलन को बहुत हानि हुई। चन्द्रशेखर आजाद ने इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में क्रान्ति की योजना बनाने के लिए 27 फरवरी, 1931 में क्रान्तिकारियों की एक बैठक बुलाई किन्तु दुर्भाग्य से ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें घेर लिया। आजाद ने अन्तिम क्षण तक ब्रिटिश सिपाहियों से लोहा लिया किन्तु जब उन्हें लगा कि वे बच नहीं पाएंगे तो उन्होंने स्वयं को गोली मार ली और अन्तत: वे वीरगति को प्राप्त हुए। क्रान्तिकारी आन्दोलन में भारतीय वीरांगनाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। श्रीमती सुशीला देवी, श्रीमती दुर्गा देवी, प्रेमवती आदि महिलाओं ने आन्दोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

प्रश्न 3.
आजाद हिन्द फौज की स्थापना क्यों की गई थी एवं भारत की स्वतन्त्रता के लिए उसके योगदान को लिखिए। (2009, 18)
अथवा
आजाद हिन्द फौज का स्वतन्त्रता आन्दोलन में क्या योगदान था ? (2009)
उत्तर:
आजाद हिन्द फौज

जापानियों द्वारा ब्रिटिश सेना के अनेक सैनिक युद्धबन्दी बना लिये गये थे। उनमें एक सैनिक अधिकारी कैप्टन मोहन सिंह थे जिन्होंने भारतीय युद्धबन्दियों को संगठित करके फरवरी 1942 ई. में आजाद हिन्द फौज की स्थापना की। इस फौज की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य भारत की मुक्ति के लिए संघर्ष करना था। सुभाष चन्द्र बोस 1943 ई. में जापान पहुँचे तो रास बिहारी बोस ने आजाद हिन्द फौज के संचालन का कार्य उनको सौंपा। सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिन्द फौज का नेतृत्व सँभालने के पश्चात् घोषणा की कि, “ईश्वर के नाम पर मैं पवित्र शपथ लेता हूँ कि मैं भारत और उसके 38 करोड़ लोगों को स्वतन्त्र कराऊँगा और मैं इस पवित्र युद्ध को अपने जीवन की अन्तिम साँस तक जारी रखेंगा।” इसके अतिरिक्त सुभाष चन्द्र बोस ने “दिल्ली चलो” का नारा भी लगाया।

1944 ई. को रंगून (यंगून) से प्रस्थान कर बर्मा (म्यांमार) में अंग्रेजों को पराजित करने के पश्चात् भारत में प्रवेश किया। भारत की भूमि पर आजाद हिन्द फौज ने युद्ध किये तथा अनेक बार ब्रिटिश सेनाओं को परास्त किया। बर्मा (म्यांमार) भारत सीमा पार कर प्रथम बार 1944 ई. में आजाद हिन्द फौज ने भारत की स्वतन्त्र भूमि पर तिरंगा झण्डा फहराया। इसके पश्चात् नागालैण्ड तथा कोहिमा पर भी अधिकार कर लिया, परन्तु आगे उसे पराजय का मुख देखना पड़ा। 1945 ई. में एक वायुयान दुर्घटना में सुभाषचन्द्र बोस का स्वर्गवास हो गया। इसी वर्ष अंग्रेजी सरकार ने आजाद हिन्द फौज के सैनिकों पर जिनमें प्रमुख थे-सहगल, ढिल्लन तथा शाहनवाज खाँ आदि पर मुकदमा चलाया। देश भर में उनकी रक्षा के लिए आवाज उठी, अतः ब्रिटिश सरकार को मजबूर होकर आजाद हिन्द के सभी सैनिकों को मुक्त करना पड़ा जिससे भारतीय जनता में आजाद हिन्द फौज के प्रति एक अपार निष्ठा की भावना बढ़ी तथा भारत की नौ-सेना तथा वायुसेना को शासन के विरुद्ध विद्रोह करने की प्रेरणा मिली। वास्तव में आजाद हिन्द फौज ने ब्रिटिश साम्राज्य के पतन की क्रिया को और अधिक तीव्र कर दिया।

प्रश्न 4.
मुस्लिम लीग के कार्यों ने पाकिस्तान के निर्माण की पृष्ठभूमि कैसे तैयार की ? समझाइए।
उत्तर:
मुस्लिम लीग

20वीं शताब्दी के आरम्भ में साम्प्रदायिकता की भावना ने जोर पकड़ा। मुसलमानों का एक वर्ग कांग्रेस को मुस्लिम विरोधी मानने लगा था। अंग्रेज शासक भी कांग्रेस के आन्दोलनों को विद्रोह के रूप में देखते थे। इसलिए वे कांग्रेस की एक प्रतिद्वन्द्वी संस्था की स्थापना करना चाहते थे। ब्रिटिश सरकार के संकेतों को देखते हुए मुसलमानों का एक शिष्टमण्डल अक्टूबर. 1906 में आगा खाँ के नेतृत्व में भारत में भारत के वायसराय लार्ड मिण्टो से मिला और एक माँग-पत्र प्रस्तुत किया। माँगों में मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र, विधानमण्डलों में मुसलमानों को अधिक स्थान, सरकारी नौकरियों और विश्वविद्यालयों की स्थापना में रियायतें और गवर्नर जनरल की परिषद् में मुसलमान प्रतिनिधि की नियुक्ति का आग्रह था।

अन्ततः लार्ड मिण्टो भारत में मुस्लिम साम्प्रदायिकता का जनक बना। इस प्रकार अंग्रेज सरकार से प्रोत्साहन प्राप्त करके आगा खाँ तथा अन्य मुस्लिम नेताओं ने 30 दिसम्बर, 1906 ई. में मुस्लिम लीग की स्थापना की। उन्होंने 1907 के लखनऊ अधिवेशन में लीग के संविधान को लागू किया।

मुस्लिम लीग के उद्देश्य –

  1. भारतीय मुसलमानों में ब्रिटिश राज के प्रति भक्ति भावना उत्पन्न करना।
  2. ब्रिटिश शासन के समक्ष मुसलमानों के राजनीतिक अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए माँग करना।
  3. लीग के उद्देश्यों को हानि पहुँचाये बिना मुसलमानों एवं अन्य जातियों में यथासम्भव मेल-जोल रखना।

लीग के उद्देश्यों से स्पष्ट हो जाता है कि वह एक साम्प्रदायिक संस्था थी अतः राष्ट्रवादी मुसलमानों ने लीग की स्थापना का विरोध किया और वे कांग्रेस में ही बने रहे।

लीग द्वारा पाकिस्तान निर्माण की पृष्ठभूमि – मुस्लिम नेताओं के मन में पाकिस्तान की स्थापना का विचार अचानक नहीं हुआ अपितु यह धीरे-धीरे विकसित हुआ। 1930 में मुस्लिम लीग के इलाहाबाद अधिवेशन में डॉ. मोहम्मद इकबाल ने ‘सर्व इस्लाम’ की भावना से प्रेरित होकर पाकिस्तान की स्थापना के विचार को प्रस्तुत किया। अंग्रेजी विश्वकोष के अनुसार पाकिस्तान की सबसे पहली परिकल्पना एक पंजाबी मुसलमान रहमतअली के दिमाग की उपज थी। पूर्व में राष्ट्रवादी मुसलमान रहे मोहम्मद अली जिन्ना भी अन्ततः साम्प्रदायिक बन गये और अक्टूबर 1938 में उन्होंने द्विराष्ट्र सिद्धान्त’ की माँग की। 1941 में मुस्लिम लीग ने मद्रास अधिवेशन में पाकिस्तान के निर्माण को अपना मुख्य लक्ष्य बनाया। 1942 में क्रिप्स मिशन ने आग में घी का काम करते हुए पाकिस्तान की माँग को प्रोत्साहित किया और इस तरह अन्ततः भारत विभाजन पर कांग्रेस को आम सहमति बनानी पड़ी।

प्रश्न 5.
किन परिस्थितियों में भारत का विभाजन किया गया ? कांग्रेस ने भारत विभाजन क्यों स्वीकार किया ? (2011)
उत्तर:
माउण्टबेटन योजना और भारत का विभाजन

23 मार्च, 1947 को लार्ड वैवेल के स्थान पर लार्ड माउण्टबेटन नया गवर्नर जनरल बनकर भारत आया। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें पूर्ण अधिकार देकर भारत भेजा था, जिससे वे कैबिनेट योजना के अनुसार गठित . संविधान सभा के माध्यम से भारतीयों को शासन सत्ता सौंप सकें। माण्उटबेटन ने भारतीय राजनीति का गहनता से अध्ययन किया। अनेक विभिन्न दलों के नेताओं से विचार-विमर्श करने के पश्चात् वे इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि भारत में स्थायी शान्ति के लिए पाकिस्तान की योजना को स्वीकार करना आवश्यक है।

कांग्रेस के नेता विभाजन नहीं चाहते थे परन्तु लीग विभाजन के अलावा और कोई बात करने को तैयार नहीं थी। अन्ततः साम्प्रदायिकता पागलपन के ज्वार के समक्ष विवश होकर कांग्रेस को भारत विभाजन की सहमति देनी पड़ी। अन्तरिम सरकार की अपंगता, साम्प्रदायिक हिंसा का ज्वार, मुस्लिम लीग की हठधर्मिता, कांग्रेस नेताओं की विवशता तथा ब्रिटिश कूटनीति के परिणामस्वरूप भारत का विभाजन हुआ। माण्उटबेटन ने जो योजना प्रस्तुत की उसके अनुसार भारत को दो भागों, भारत तथा पाकिस्तान में विभाजित किये जाने तथा सत्ता का हस्तान्तरण 15 अगस्त, 1947 को करने सम्बन्धी प्रावधान किया गया। योजना में पंजाब, बंगाल, सिन्ध, असम, बलूचिस्तान के विषय में स्पष्ट नीति निर्धारित की गयी।

माउण्टबेटन की योजना को कांग्रेस ने स्वीकृति प्रदान की। मुस्लिम लीग समस्त बंगाल, असम, पंजाब, उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त तथा बलूचिस्तान को पाकिस्तान में मिलाना चाहती थी परन्तु माउण्टबेटन के दबाव के आगे उसे योजना को स्वीकार करना पड़ा।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 वस्तुनिष्ट प्रश्न

बहु-विकल्पीय

प्रश्न 1.
बंगाल विभाजन किसने किया? (2012)
(i) विलियम बैंटिंक
(ii) लार्ड रिपन
(iii) लॉर्ड कर्जन
(iv) महारानी विक्टोरिया।
उत्तर:
(iii)

प्रश्न 2.
साइमन कमीशन का विरोध करते हुए लाहौर में किस नेता का स्वर्गवास हो गया था ?
(i) विपिनचन्द्र पाल
(ii) लाला लाजपतराय
(iii) बाल गंगाधर तिलक
(iv) केशवदेव।
उत्तर:
(ii)

प्रश्न 3.
गांधीवादी के नेतृत्व में असहयोग का कार्यक्रम अपनाया गया
(i) 1908 में
(ii) 1912 में
(iii) 1918 में
(iv) 1920 में
उत्तर:
(iv)

प्रश्न 4.
दिसम्बर 1929 में हुए लाहौर अधिवेशन के अध्यक्ष थे
(i) मोतीलाल नेहरू
(ii) पं. जवाहरलाल नेहरू
(iii) महात्मा गांधी
(iv) मौलाना आजाद
उत्तर:
(ii)

प्रश्न 5.
स्वराज्य दल की स्थापना की
(i) चितरंजनदास ने
(ii) ऊधमसिंह ने
(iii) चन्द्रशेखर आजाद ने
(iv) अरविन्द घोष ने।
उत्तर:
(ii)

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. 1942 में …………….. मिशन भारत आया। (2009)
  2. बंगाल विभाजन का विरोध लोगों ने सड़कों पर …………….. गीत गाते हुए किया। (2012)
  3. ‘जय हिन्द’ का नारा …………….. ने दिया था। (2009, 17)
  4. 9 अगस्त, 1925 को क्रान्तिकारियों ने लखनऊ के निकट …………….. नामक स्थान पर गाड़ी रोककर सरकारी खजाना लूट लिया था। (2012)

उत्तर:

  1. क्रिप्स
  2. वंदेमातरम्
  3. सुभाष चन्द्र बोस
  4. काकोरी।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
1938 में सुभाषचन्द्र बोस कांग्रेस के अध्यक्ष बने। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
1929 के लाहौर अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज्य’ का प्रस्ताव किया गया। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
‘करो या मरो’ का नारा असहयोग आन्दोलन में दिया गया। (2013)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
कांग्रेस का विभाजन सूरत अधिवेशन में हुआ। (2010, 18)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
भारत 15 अगस्त, 1947 को आजाद नहीं हुआ। (2009)
उत्तर:
असत्य

जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 9 स्वतन्त्रता आन्दोलन से सम्बन्धित घटनाएँ 1
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (क)
  3. → (घ)
  4. → (ङ)
  5. → (ग)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
रोलेट अधिनियम कब लागू हुआ ? (2009)
उत्तर:
मार्च 1919 में
उत्तर:

प्रश्न 2.
राष्ट्रीय आन्दोलन में पूर्ण स्वाधीनता दिवस किस दिन मनाया गया था ?
उत्तर:
26 जनवरी, 1930

प्रश्न 3.
‘साइमन कमीशन’ के अध्यक्ष कौन थे ?
उत्तर:
सर जॉन साइमन

प्रश्न 4.
किस क्रान्तिकारी ने पंजाब के पूर्व गवर्नर की गोली मारकर हत्या कर दी थी ? (2009)
उत्तर:
ऊधम सिंह

प्रश्न 5.
मोहम्मडन एंग्लो-ओरियण्टल कॉलेज की स्थापना किसने की थी ? (2009)
उत्तर:
सर सैयद अहमद खाँ

प्रश्न 6.
क्रिप्स मिशन भारत कब आया ? (2012)
उत्तर:
22 मार्च, 1942

प्रश्न 7.
फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना किसने की ? (2013)
उत्तर:
सुभाषचन्द्र बोस

प्रश्न 8.
भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम कब पारित हुआ था ?
उत्तर:
4 जुलाई, 1947.

प्रश्न 9.
रोलेट एक्ट का कोई एक उद्देश्य लिखिए। (2010)
उत्तर:
आन्दोलनकारियों का दमन करना।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
साइमन कमीशन का बहिष्कार क्यों किया गया ?
उत्तर:
साइमन कमीशन का बहिष्कार इसलिए किया गया, क्योंकि इसमें सभी सदस्य अंग्रेज थे और भारतीयों का इसमें कोई प्रतिनिधि नहीं था।

प्रश्न 2.
पूर्ण स्वराज्य के लक्ष्य को कब और कहाँ स्वीकार किया गया ?
अथवा
1929 के लाहौर कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी ? इसमें कौन-सा महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया ?
उत्तर:
दिसम्बर, 1929 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन में जो कि लाहौर में हुआ। इसके अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू थे। यहाँ कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य को अपना लक्ष्य स्वीकार किया और इसकी प्राप्ति के लिए गांधीजी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाने का फैसला किया।

प्रश्न 3.
रॉलेट एक्ट क्या था ? समझाइए। (2014, 16)
उत्तर:
यह एक ऐसा कानून था जिसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को बिना अभियोग चलाये अनिश्चित समय तक जेल में डाला जा सकता था। यह सन् 1919 में पारित हुआ था। रॉलेट एक्ट का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय आन्दोलनों को कुचलना था। अत: गांधीजी ने इस एक्ट का व्यापक विरोध किया।

प्रश्न 4.
“गांधीजी साधारण नागरिक थे। फिर भी सारी दुनिया उन्हें सम्मान देती है,” क्यों ? समझाइए।
उत्तर:
गांधी जी जनसाधारण के प्रतीक थे। वे सादा जीवन उच्च विचार में विश्वास रखते थे तथा जनता से उसी भाषा में बात करते थे जो भ्वह समझती थी। इसी कारण दुनिया उन्हें सम्मान देती है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड की घटना को लिखिए। (2012, 14)
अथवा
जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड क्यों हुआ? इसके क्या परिणाम हुए ?
उत्तर:
जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड-रॉलेट अधिनियम मार्च 1919 में लागू किया गया। विरोध में पूरे देश से आवाज उठी। पंजाब में भी रॉलेट अधिनियम का विरोध हुआ। पंजाब में ब्रिटिश सरकार ने अनेक जगहों पर लाठी-गोली चलवाई। 10 अप्रैल को कांग्रेस के दो प्रभावशाली नेता डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू गिरफ्तार किए गए और उन्हें जेल भेज दिया गया। इन गिरफ्तारियों के विरोध में अमृतसर के जलियाँवाला बाग में 13 अप्रैल बैशाखी के दिन विरोध सभा हुई। जैसे ही सभा प्रारम्भ हुई जनरल डायर नामक एक सैनिक अधिकारी ने सभा को किसी भी प्रकार की चेतावनी दिये बिना अपने सैनिकों को सभा की भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया। सैनिकों ने भीड़ पर गोली चलायी जिसके परिणामस्वरूप लगभग 800 से अधिक व्यक्ति मारे गये तथा 2000 के लगभग घायल हो गये। जलियाँवाला काण्ड से जनता में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध व्यापक असन्तोष की भावना जागृत हुई। इसके बाद असहयोग आन्दोलन प्रारम्भ हो गया।

प्रश्न 2.
गांधीजी ने असहयोग आन्दोलन क्यों प्रारम्भ किया ? इसके क्या सिद्धान्त थे ?
अथवा
असहयोग आन्दोलन का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। (2015)
उत्तर:
गांधीजी के नेतृत्व में 1920 में असहयोग आन्दोलन का नया कार्यक्रम अपनाया गया। जलियाँवाला बाग का हत्याकाण्ड एवं रॉलेट एक्ट का विरोध, अंग्रेजी सरकार की वादाखिलाफी का विरोध और स्वराज्य की प्राप्ति असहयोग आन्दोलन के उद्देश्य थे। असहयोग आन्दोलन के तीन आधारभूत सूत्र थे-कौंसिलों का बहिष्कार, न्यायालयों का बहिष्कार और विद्यालयों का बहिष्कार। इस आन्दोलन के निम्नलिखित कार्यक्रम थे –

  1. सरकारी उपाधियों का त्याग व अवैतनिक पदों का बहिष्कार।
  2. वकीलों और बैरिस्टरों द्वारा न्यायालयों का बहिष्कार।
  3. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।
  4. स्थानीय संस्थाओं के मनोनीत सदस्यों द्वारा अपने पदों का त्याग।
  5. सरकारी उत्सवों का बहिष्कार।

प्रश्न 3.
असहयोग आन्दोलन के परिणाम बताइए।
उत्तर:
असहयोग आन्दोलन के परिणाम-इस आन्दोलन के निम्नलिखित परिणाम सामने आये –

  1. देश-भर में एक-सी विचारधारा व राष्ट्रीयता की भावना का प्रसार हुआ व विभिन्न सम्प्रदायों और प्रान्तों के लोग कांग्रेस के झण्डे के नीचे आ गये।
  2. हिन्दू-मुस्लिम एकता स्थापित हुई। गांधीजी ने सभी वर्गों के लोगों पर जादू-सा कर दिया था और सबको एक दिशा में चलने वाला एक पचरंगी दल बना लिया था।
  3. इस आन्दोलन ने ब्रिटिश शासन-व्यवस्था के ढाँचे को झकझोर दिया। अंग्रेजों को लगने लगा कि बिना उदारवादियों के सहयोग के वे आगे नहीं बढ़ पायेंगे।
  4. लोगों में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तथा स्वदेशी वस्तुओं के प्रति लगाव की प्रवृत्ति जाग्रत हुई। परिणामस्वरूप कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन मिला।
  5. अंग्रेजी भाषा का महत्त्व जाता रहा और कांग्रेस ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार कर लिया।

प्रश्न 4.
साइमन कमीशन कब और क्यों भेजा गया था ? इसका भारतीयों द्वारा विरोध क्यों किया गया? (2016)
उत्तर:
साइमन कमीशन-1927 में ब्रिटिश सरकार ने सर जॉन साइमन की अध्यक्षता में 7 सदस्यों का एक कमीशन नियुक्त किया जिसका काम सरकार ने सामने यह रिपोर्ट प्रस्तुत करना था कि 1919 ई. का एक्ट कहाँ तक सफल रहा है। इस कमीशन का बहिष्कार इसलिए किया गया, क्योंकि इसमें सभी सदस्य अंग्रेज थे और भारतीयों का इसमें कोई प्रतिनिधि नहीं था। जहाँ यह कमीशन जाता था वहाँ हड़तालें होती थीं, काली झण्डियाँ दिखायी जाती थीं और ‘साइमन लौट जाओ’ का नारा लगाया जाता था। इसी आन्दोलन का नेतृत्व करते हुए पुलिस की लाठियों के प्रहार से लाला लाजपतराय का निधन हो गया।

प्रश्न 5.
‘स्वराज्य दल’ की स्थापना कब व किसने की थी ? इसके मुख्य उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
कांग्रेस के कुछ नेताओं, जिनमें प्रमुख थे-चितरंजन दास, मोतीलाल नेहरू, ने मार्च 1923 ई. में ‘स्वराज्य दल’ की स्थापना की। स्वराज्य दल के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित थे –

  1. असहयोग की नीति का त्याग कर नवीन नीतियों पर चलना।
  2. नौकरशाही के कार्यों में कौंसिल में प्रवेश करके रुकावट डालना।
  3. विधान परिषद् का चुनाव लड़कर उसमें अपना पक्ष रखना।
  4. सरकारी अनुचित कार्यवाहियों के साथ असहयोग की भावना रखना।
  5. विधान परिषद् के चुनाव जीतकर संविधान को असफल तथा खोखला सिद्ध करना।

प्रश्न 6.
खिलाफत आन्दोलन क्या था ? इसके महत्त्व को बताइए।
उत्तर:
खिलाफत आन्दोलन असहयोग की एक महत्त्वपूर्ण घटना थी। इस आन्दोलन का प्रारम्भ प्रथम विश्व-युद्ध के बाद हुआ। खिलाफत आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य इस्लाम के खलीफा सुल्तान को फिर से शक्ति दिलाना था। इसके समर्थन में भारत से अली बन्धुओं (मुहम्मद अली और शौकत अली) ने खिलाफत आन्दोलन प्रारम्भ किया। खिलाफत आन्दोलन में कांग्रेस के नेता भी सम्मिलित हुए और आन्दोलन को पूरे भारत में फैलाने में उन्होंने सहायता दी। किन्तु टर्की में इस आन्दोलन के समाप्त होते ही भारत के मुसलमानों ने भी इसे समाप्त कर दिया। खिलाफत आन्दोलन का महत्त्व-भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन में खिलाफ तथा असहयोग आन्दोलन का विशेष महत्व रहा है। इसके कारण हिन्दू और मुस्लिम एकता को बल मिला जिससे स्वतन्त्रता आन्दोलन सबल बना।

प्रश्न 7.
क्रिप्स प्रस्ताव क्या थे ? सरकार ने इन प्रस्तावों को वापस क्यों लिया ??
उत्तर:
क्रिप्स 22 मार्च, 1942 को भारत आया। उसने पर्याप्त काल तक भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों तथा सम्प्रदायों के नेताओं से वार्ता की तथा अपनी योजना प्रस्तुत की, परन्तु उसकी योजना को सभी राजनीतिक दलों द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया। कांग्रेस ने इसे निम्नलिखित कारणों से अस्वीकृत कर दिया था –

  1. कांग्रेस मुख्यतया क्रिप्स योजना से इस कारण असन्तुष्ट थी, क्योंकि इसमें उसकी पूर्ण स्वाधीनता की माँग को स्वीकार नहीं किया गया था।
  2. क्रिप्स योजना में मुस्लिम लीग की भारत विभाजन की माँग को स्वीकार कर लिया गया था जिसके कांग्रेस पूर्णतया विरुद्ध थी।
  3. सम्पूर्ण प्रशासनिक शक्ति देशी नरेशों को प्रदान करके राज्यों की प्रजा के हितों की अवहेलना की गयी थी।
  4. कांग्रेस चाहती थी कि युद्धकाल में ही भारत में संसदीय शासन प्रणाली की स्थापना हो, परन्तु युद्धकाल में ब्रिटेन तनिक भी शक्ति का परित्याग नहीं करना चाहता था।

प्रश्न 8.
शिमला सम्मेलन क्यों बुलाया गया था ? यह क्यों असफल रहा ?
उत्तर:
शिमला सम्मेलन-लार्ड वैवेल ने घोषणा की कि 25 जन, 1945 को शिमला में एक सम्मेलन होगा। सम्मेलन में तय हुआ कि केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल मिला-जुला होगा तथा उसमें 14 मन्त्री होंगे। इसमें 5 कांग्रेस, 5 लीग तथा 4 वायसराय द्वारा मनोनीत होंगे। वायसराय ने कांग्रेस तथा लीग को 8 से 12 नाम देने को कहा। कांग्रेस ने जो सूची वायसराय को भेजी, उसमें दो सदस्य मुस्लिम थे। परन्तु जिन्ना चाहते थे कि मुसलमान प्रतिनिधि लीग के सदस्यों में से ही लिये जायें। इसका कारण यह था कि जिन्ना कांग्रेस को हिन्दू संस्था सिद्ध करके, लीग को भारतीय मुसलमानों की एकमात्र प्रतिनिधि संस्था होने का दावा करना था।

लीग के असहयोग के कारण शिमला सम्मेलन असफल हुआ। सम्मेलन की असफलता का कारण जिन्ना का हठधर्मी होना था।

प्रश्न 9.
भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता के कारणों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता के कारण-भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता के कारण निम्नलिखित थे –

  1. ब्रिटिश सरकार ने राष्ट्रीय नेताओं को अचानक गिरफ्तार कर लिया था।
  2. भारत छोड़ो आन्दोलन में योजना तथा संगठन का भी अभाव था।
  3. इस आन्दोलन की रूपरेखा तथा स्वरूप भी स्पष्ट नहीं था।
  4. ब्रिटिश सरकार की दमन नीति अत्यधिक कठोर थी।
  5. आन्दोलनकारियों के पास समुचित हथियारों तथा धन का भी अभाव था।

प्रश्न 10.
भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सुभाषचन्द्र बोस एक निर्भीक योद्धा थे और उनका स्थान विश्व के महानतम देश भक्तों में है। दिसम्बर 1940 में वे गुप्त रूप से देश छोड़कर निकल गये। वे मार्च 1941 में वायुयान द्वारा काबुल से बर्लिन पहुँच गये। देश से भाग निकलने तथा पेशावर और काबुल होकर जर्मनी जा पहुँचने की कहानी उनके साहसपूर्ण कार्य की वीरगाथा है। जून 1943 में बोस जापान जा पहुँचे। 5 जुलाई, 1943 को उन्होंने आजाद हिन्द फौज के गठन की घोषणा की। उस समय उसमें 60 हजार से कुछ अधिक भारतीय शामिल थे। उनका युद्ध-घोष था ‘दिल्ली चलो’। 21 अक्टूबर, 1943 को बोस ने स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार की स्थापना की। सुभाषचन्द्र बोस ने ही हिन्दुस्तान को ‘जय हिन्द’ का जयघोष दिया। उनके राजनीतिक जीवन में यह कथन अत्यधिक रोचक है, ‘जो व्यक्ति एक समय स्वराज दल का सक्रिय सदस्य था वह देश की स्वाधीनता के लिए आजाद हिन्द फौज का महासेनानायक बन गया।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 9 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय स्वाधीनता अधिनियम क्या है ? इसके प्रमुख प्रावधानों को लिखिए। (2009, 17)
उत्तर:
भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947

माउण्टबेटन की योजनानुसार सरकार ने हस्तान्तरण की कार्यवाही को पूर्ण करने के लिए भारतीय स्वाधीनता अधिनियम’ का प्रारूप तैयार किया। प्रारूप को कांग्रेस और लीग के अनुमोदन के लिए भेजा गया। अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात् विधेयक को ब्रिटिश संसद ने पारित किया गया। 18 जुलाई, 1947 को इसने अधिनियम का रूप लिया।

प्रमुख प्रावधान – भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम में कुल 20 धाराएँ तथा दो परिशिष्ट थे। इसके प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित थे –

  1. 15 अगस्त, 1947 ई. को भारत तथा पाकिस्तान नामक दो स्वतन्त्र राज्यों की स्थापना की जायेगी। ब्रिटिश सरकार द्वारा उन्हें सत्ता भी सौंप दी जायेगी।
  2. सिन्ध, उत्तर-पूर्वी सीमा प्रान्त, पश्चिमी पंजाब, बलूचिस्तान तथा असम का सिलहट जिला पाकिस्तान में तथा शेष भाग भारत में रहेगा।
  3. दोनों राज्यों की विधान सभाएँ अपने-अपने संविधानों का निर्माण करेंगी।
  4. दोनों राज्यों में नवीन संविधानों के निर्माण तक शासन 1935 ई. के अधिनियम के अनुसार चलता रहेगा।
  5. भारत तथा पाकिस्तान दोनों को राष्ट्र-मण्डल के सदस्य बने रहने या छोड़ने की भी स्वतन्त्रता होगी।
  6. 15 अगस्त, 1947 ई. से भारत सचिव का पद समाप्त कर दिया जायेगा।
  7. 15 अगस्त, 1947 ई. के पश्चात् ब्रिटिश शासन का दोनों राज्यों पर कोई अधिकार तथा नियन्त्रण नहीं रहेगा।
  8. भारतीय रियासतों को भारत अथवा पाकिस्तान दोनों में से किसी भी देश में सम्मिलित होने का अधिकार होगा।
  9. भारत तथा पाकिस्तान दोनों के लिए एक-एक गवर्नर जनरल होगा। गवर्नर जनरल की नियुक्ति उनके मन्त्रिमण्डल के परामर्श से की जायेगी।

प्रश्न 2.
बंगाल विभाजन के पीछे अंग्रेजों के क्या उद्देश्य थे? बंगाल विभाजन का राष्ट्रीय आन्दोलन पर क्या प्रभाव पड़ा?
अथवा
‘बंग-भंग’ आन्दोलन के प्रभाव लिखिए। (2009)
उत्तर:

बंगाल विभाजन के पीछे अंग्रेजों के निम्नलिखित उद्देश्य थे –

  1. ब्रिटिश सरकार के अनुसार बंगाल विभाजन का प्रमुख उद्देश्य बंगाल के प्रशासन को सुधारना था। लार्ड कर्जन के मत में बंगाल एक विशाल प्रान्त था, अतः समुचित प्रशासनिक संचालन के लिए उसका विभाजन करना आवश्यक था।
  2. बंगाल विभाजन का अन्य उद्देश्य बंगाल की संगठित राजनीतिक भावना को समाप्त करना तथा राष्ट्रीयता के वेग को कम करना था।
  3. इतिहासकारों के अनुसार बंगाल विभाजन का प्रमुख उद्देश्य जनता में फूट डालना था। पूर्वी बंगाल में मुसलमानों का बहुमत तथा पश्चिमी भाग में हिन्दुओं का बहुमत रखना जिससे हिन्दू-मुस्लिम एकता समाप्त हो जाए।

बंग-भंग और स्वदेशी आन्दोलन के प्रभाव

1905 के बंगाल विभाजन के दूरगामी परिणाम सामने आये जिनके कारण भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन को एक नई दिशा मिली। इसक प्रमुख प्रभाव इस प्रकार थे –
(1) बंगाल विभाजन से न केवल बंगालियों में रोष उत्पन्न हुआ वरन् सम्पूर्ण राष्ट्र ने इसे अपना अपमान समझा। 16 अक्टूबर, 1905 ई. में बंगाल का विभाजन जब सरकारी रूप में मनाया गया तो राष्ट्रीय नेताओं ने सशक्त शब्दों में इसका विरोध किया। सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने कहा, “बंगाल का विभाजन हमारे ऊपर बम की तरह गिरा। हमने समझा कि हमारा घोर अपमान किया गया है।”

(2) भारतीय जनता ने बंगाल के विभाजन के विरोध में देश भर में अनेक सभाओं का आयोजन किया। सरकार ने भी क्रूरतापूर्वक दमन चक्र चलाया जिसका उत्तर जनता ने विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करके तथा स्वदेशी आन्दोलन चलाकर दिया। स्थान-स्थान पर विदेशी कपड़ों की होली जलायी गयी।

(3) राष्ट्रीय शिक्षा के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया तथा सरकारी शिक्षा संस्थाओं का बहिष्कार किया गया। इसके अतिरिक्त स्वतन्त्र राष्ट्रीय शिक्षा संस्थाओं की स्थापना की गयी।

(4) बंगला विरोधी आन्दोलन ने शिक्षा संस्थाओं के अतिरिक्त शिक्षा स्वदेशी उद्योगों की स्थापना के भी प्रयत्न किये जिससे व्यापारिक जनता तथा श्रमिकों में भी राष्ट्रीयता की भावना का विकास हुआ।

(5) बंगाल के विभाजन से बौद्धिक वर्ग में जागृति उत्पन्न हुई। कांग्रेस के बुद्धिजीवियों में उग्रता की भावना तीव्र हुई तथा वे पूर्णतया सरकार विरोधी हो गये। लाल-बाल-पाल राष्ट्रीय जन-नेता के रूप में उभरे।

(6) बंगाल के विभाजन के पश्चात् ही कांग्रेस उदारवादियों तथा उग्रराष्ट्रवादियों में विभाजित हो गयी। इसके अतिरिक्त देश में उग्रराष्ट्रवादी आन्दोलन भी प्रारम्भ हो गये। ब्रिटिश शासन के अत्याचारों के विरोध में देश के नवयुवकों ने संगठित होकर क्रांतिकारी गतिविधियाँ प्रारम्भ कर दी।

(7) बंग-भंग विरोधी आन्दोलन को मिले व्यापक जन-समर्थन से ब्रिटिश सरकार घबरा गयी, अतः हिन्दू और मुसलमानों को लड़ाने के लिए मुस्लिम साम्प्रदायिकता को प्रोत्साहन देना आरम्भ कर दिया। अन्य शब्दों में, “फूट डालो तथा राज्य करो” की नीति को प्रारम्भ किया।

(8) बंगाल-विभाजन के विरुद्ध तीव्र प्रतिक्रिया होने के कारण ब्रिटिश सरकार को इसे 1911 ई. में रद्द करना पड़ा जिससे कांग्रेस के उग्रराष्ट्रवादियों की प्रतिष्ठा बढ़ी।

कर्जन के छ: वर्ष के लम्बे शासनकाल में स्वाधीनता आन्दोलन की दिशा वास्तविक रूप में बदल दी।

स्वदेशी आन्दोलन उपनिवेशवाद के विरुद्ध भारतीयों का पहला सशक्त राष्ट्रीय आन्दोलन था। इसी के साथ भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की नई चेतना का विकास हुआ।

प्रश्न 3.
‘सविनय अवज्ञा आन्दोलन’ का वर्णन कीजिए।
अथवा
सविनय अवज्ञा आन्दोलन का क्या अभिप्राय है ? इसके कार्यक्रम एवं महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
सन् 1930 ई. में लाहौर में हुए अधिवेशन में पूर्ण स्वाधीनता को अपना लक्ष्य घोषित किया और गांधीजी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ करने का निश्चय किया गया। गांधीजी ने इस आन्दोलन में निम्न प्रमुख कार्यक्रम रखे –

  1. जगह-जगह नमक कानून तोड़कर नमक बनाया जाए।
  2. सरकारी कर्मचारी सरकारी नौकरियाँ को त्याग दें और छात्र सरकारी स्कूल-कॉलेजों का बहिष्कार करें।
  3. विदेशी वस्त्रों को त्याग कर उनकी होली जलायी जाए।
  4. स्त्रियाँ शराब, अफीम और विदेशी कपड़े की दुकानों पर धरना दें।
  5. जनता सरकार को कर न दे।

गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन का शुभारम्भ कानून का उल्लंघन कर किया। 12 मार्च, 1930 को गांधीजी ने डाण्डी के लिए प्रस्थान किया और वहाँ 5 अप्रैल को पहँचे। यह घटना ‘डाण्डी-यात्रा’ के नाम से प्रसिद्ध है। मार्ग में जनता ने सत्याग्रहियों का अभूतपूर्व स्वागत किया। वहाँ उन्होंने नमक कानून तोड़ा। इस प्रकार देश में नमक कानून भंग करने का आन्दोलन चल पड़ा। आम जनता ने भी नमक कानून का उल्लंघन किया। यह सविनय अवज्ञा आन्दोलन का प्रारम्भ था। हिन्दुस्तान के सभी भागों में लोगों ने सरकारी कानूनों को भंग करना शुरू किया। स्त्रियों ने भी पर्दा छोड़कर इस आन्दोलन में भाग लिया। किसानों में भी सरकार को कर देने से इन्कार कर दिया। विदेशी कपड़े का बहिष्कार हुआ।

5 मार्च, 1931 को गांधीजी का वायसराय इरविन से समझौता हो गया और गांधीजी ने आन्दोलन स्थगित कर दिया। नवम्बर, 1931 ई. में गांधीजी ने कांग्रेस की ओर से लन्दन में द्वितीय गोलमेल सम्मेलन में भाग लिया और भारत के लिए पूर्ण स्वाधीनता की माँग की, परन्तु ब्रिटिश शासन ने उनकी माँग को स्वीकार नहीं किया। अत: 1932 ई. में कांग्रेस ने गांधीजी के नेतृत्व में पुनः सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया। सरकार ने दमन-चक्र तेज किया। एक लाख से अधिक व्यक्ति गिरफ्तार हुए। 1934 ई. में गांधीजी ने आन्दोलन को समाप्त कर दिया।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन का महत्त्व

यह सत्य है कि असहयोग आन्दोलन की तरह सविनय अवज्ञा आन्दोलन भी बीच में ही स्थगित कर दिया गया था जिससे जनता में कुछ निराशा फैली, परन्तु इस आन्दोलन ने कांग्रेस की शक्ति को भी बढ़ाया। जनता ने गांधीजी के नेतृत्व में अपार कष्टों को सहन किया तथा उनके आदेशों का पालन आँख मींचकर किया। ब्रिटिश सरकार को भी इस बार गांधीजी के व्यक्तित्व ने प्रभावित किया और वह समझ गयी कि उनके पीछे एक अपार जन बल है। इस आन्दोलन ने गांधीजी को एक विश्वविख्यात राजनीतिज्ञ बना दिया।

प्रश्न 4.
भारत छोड़ो आन्दोलन क्यों प्रारम्भ हुआ ? यह असफल क्यों हुआ ?
अथवा
भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता के क्या कारण थे? कोई पाँच कारण लिखिए। (2017)
उत्तर:
क्रिप्स मिशन के असफल हो जाने से तथा क्रिप्स के द्वारा कांग्रेस को असफलता के लिए उत्तरदायी ठहराये जाने के कारण भारतीय जनता में अत्यन्त असन्तोष तथा निराशा की भावना उत्पन्न हुई। क्रिप्स मिशन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ब्रिटिश सरकार साम्प्रदायिकता के पक्ष को लेकर भारत को स्वतन्त्रता प्रदान नहीं करेगी। अन्य शब्दों में क्रिप्स मिशन का उद्देश्य भारत को स्वतन्त्रता प्रदान करना नहीं था, अत: भारत की स्वतन्त्रता के लिए भारत छोड़ो आन्दोलन चलाना आवश्यक हो गया।

आन्दोलन की असफलता के कारण

भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता के निम्न कारण थे –

  1. संगठन तथा निश्चित योजना का अभाव-भारत छोड़ो आन्दोलन आरम्भ करने से पूर्व महात्मा गांधी ने इसकी कोई स्पष्ट योजना नहीं बनायी थी कि इसे किस प्रकार संचालित किया जायेगा। अन्य शब्दों में किसी भी आन्दोलनकारी को यह ज्ञात नहीं था कि उन्हें क्या करना है ?
  2. ब्रिटिश शासन का शक्तिशाली होना-भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता का अन्य प्रमुख कारण ब्रिटिश शासन का आन्दोलनकारियों की अपेक्षा अत्यधिक शक्तिशाली होना था। आन्दोलनकारियों के पास धन तथा अस्त्र-शस्त्रों का अभाव था, अतः उन्हें बिन अस्त्र-शस्त्र के पुलिस तथा सेना का सामना करना पड़ता था।
  3. राष्ट्रीय नेताओं को बन्दी बनाया जाना–भारत छोड़ो आन्दोलन के प्रारम्भ होते ही ब्रिटिश सरकार ने प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं को अचानक गिरफ्तार कर लिया था जिससे जनता समुचित मार्ग-दर्शन प्राप्त नहीं कर सकी तथा आन्दोलन को गहरा आघात लगा।
  4. मुस्लिम लीग की राजनीति-मुस्लिम लीग ने मुसलमानों को आन्दोलन से पृथक् रहने का परामर्श दिया जिससे मुसलमानों ने आन्दोलन में भाग नहीं लिया। इससे भी आन्दोलन पर गहरा आघात लगा।
  5. कठोर दमन चक्र-ब्रिटिश शासन ने भारत छोड़ो आन्दोलन का अत्यन्त क्रूरता तथा कठोरता के साथ दमन किया। पुलिस तथा सेना ने लाखों व्यक्तियों को बन्दी बनाया तथा हजारों व्यक्तियों को गोली से भून दिया। महिलाओं को अपमानित किया गया तथा सामूहिक जुर्माने का कर कठोरतापूर्वक वसूल किया गया।
  6. साम्यवादी दल का अलग रहना-साम्यवादी दल ने इस आन्दोलन से अपने को पूर्णतया पृथक् रखा क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध में इंग्लैण्ड तथा रूस दोनों ने मिलकर जर्मनी तथा जापान की फासिस्ट शक्तियों के विरुद्ध संघर्ष किया था। ऐसी दशा में भारतीय कम्युनिस्ट रूस के मित्र ब्रिटेन का विरोध नहीं करना चाहते थे। अतः उन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन से अपने को दूर रखा।
  7. राजकीय सेवाओं तथा उच्च वर्गका ब्रिटिश शासन के प्रति निष्ठावान होना-भारत छोड़ो आन्दोलन के समय ब्रिटिश शासन के राजकीय कर्मचारियों तथा पदाधिकारियों ने पूर्णतया वफादारी के साथ इस आन्दोलन को कुचलने में सहयोग दिया था। देशी राजाओं तथा जमींदार वर्ग ने भी इस आन्दोलन का विरोध किया था।

प्रश्न 5.
स्वतन्त्रता आन्दोलन में गांधीजी के योगदान का वर्णन कीजिए।
अथवा
महात्मा गांधी का राष्ट्रीय आन्दोलन में क्या योगदान था ?
उत्तर:
भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में महात्मा गांधी का योगदान भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में महात्मा गांधी का स्थान सर्वोच्च है। गांधीजी ने भारत के स्वाधीनता संघर्ष को अहिंसा व सत्याग्रह के आधार पर चलाया। उनका कहना था कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही स्वराज हासिल किया जा सकता है। अंग्रेजों के प्रति असन्तोष प्रकट करने के लिए उन्होंने असहयोग आन्दोलन और सविनय अवज्ञा आन्दोलन आदि शुरू किये। इन आन्दोलनों ने भारत में अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिला दी।

1914 में गांधीजी भारत लौटे और आते ही भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन में कूद पड़े। अहमदाबाद में साबरमती के किनारे एक आश्रम की स्थापना की और बिहार के चम्पारन जिले से किसानों की रक्षा के लिए गोरे कोठीवालों के अत्याचारों के विरुद्ध छोटे पैमाने पर सत्याग्रह किया। इसमें उन्हें पर्याप्त सफलता मिली। उन्होंने गाँव-गाँव जाकर लोगों के सामने पराधीन भारत की करुणावस्था का चित्र खींचा और देश के उत्थान हेतु कमर कसने के लिए लोगों को प्रेरित किया। भयभीत जनता को उन्होंने निर्भय बनाया। उन्हीं के प्रयासों से राष्ट्रीय आन्दोलन एक जन-आन्दोलन बन सका।

प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात् 1919 ई. में ब्रिटिश सरकार ने रॉलेट एक्ट पास किया जिसका उद्देश्य भारतीयों को दबाना था। गांधीजी के आह्वान पर हिन्दू-मुसलमान इस एक्ट के विरोध में एकजुट हो गये। गांधीजी ने खिलाफत आन्दोलन में पूर्ण सहयोग दिया। खिलाफत कमेटी ने भी 31 अगस्त, 1920 को असहयोग आन्दोलन छेड़ दिया। इसके नेतृत्व की बागडोर गांधीजी के हाथों में दे दी गयी। साइमन कमीशन के विरोध में 1930 ई. में सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ किया गया। 12 मार्च, 1930 को डाण्डी यात्रा से गांधीजी ने दूसरे सविनय अवज्ञा आन्दोलन का सूत्रपात किया। दूसरी गोलमेज परिषद में गांधीजी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया और वहाँ यह दावा किया कि कांग्रेस सम्पूर्ण देश और समस्त हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है।

कांग्रेस ने गांधी के नेतृत्व में बम्बई में 8 अगस्त को ‘भारत छोड़ो’ के ऐतिहासिक प्रस्ताव को पारित किया। गांधीजी ने इस प्रस्ताव पर बोलते हुए भारतीय जनता को ‘करो या मरो’ का सन्देश दिया। 9 अगस्त, 1942 को गांधीजी तथा कार्य-समिति के सभी नेताओं को गिरफ्तार कर किसी अज्ञात स्थान पर भेज दिया गया। इन आन्दोलनों ने भारत में अंग्रेजी राज्य की नींव हिला दी और अन्त में 15 अगस्त, 1947 को भारत आजाद हो गया।

MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 13 समय नहीं मिला

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 13 समय नहीं मिला (श्रीमन्नारायण अग्रवाल)

समय नहीं मिला पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

समय नहीं मिला लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
समय न मिलने का बहाना कैसे लोग करते हैं?
उत्तर
समय न मिलने का बहाना ज्यादातर वे लोग करते हैं, जो कछ नहीं करते हैं और उनकी टालमटोल करने की आदत पड़ जाती है।

प्रश्न 2.
समय के संबंध में अंग्रेजी की मशहूर कहावत कौन-सी है?
उत्तर
समय के संबंध में अंग्रेजी की मशहूर कहावत ‘समय धन’ है।

प्रश्न 3.
मालवीय जी द्वारा आयोजित सम्मेलन सफल क्यों न हो सका?
उत्तर
मालवीय जी द्वारा आयोजित सम्मेलन सफल न हो सका। उसका खास कारण तो ब्रिटिश सरकार के राजनैतिक दाँवपेंच ही थे। पर एक बात की ओर भी हमारा ध्यान गए बिना न रहा। सम्मेलन में शरीक होने के लिए नेता निश्चित समय पर ही आया करते थे, पर मालवीय जी की अनुपस्थिति के कारण वे थोड़ी देर राह देखकर तितर-बितर हो जाते थे। उन्हें खबर मिलती कि अभी मालवीय जी के आने में दो घण्टे की देर है। समय की इस गैर-पाबंदी के कारण मैंने कई नेताओं को हताश व परेशान होते देखा। कई लोग तो निराश होकर बीच ही में सम्मेलन का कार्य छोड़ कर चले गए।

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प्रश्न 4.
लेखक ने किन लोगों को मुबारकबाद देना चाहा है?
उत्तर
लेखक ने उन लोगों को मुबारकबाद देना चाहा है, जो अपने समय का पूरा फायदा उठाते हैं और एक मिनट भी बरबाद नहीं करते हैं।

प्रश्न 5.
सुबह जल्दी उठने से क्या लाभ होता है?
उत्तर
सुबह जल्दी उठने से अनेक लाभ होते हैं। इससे समय की काफी बचत होती है। दिन भर स्फूर्ति का अनुभव होता रहता है।

प्रश्न 6.
लेखक ने बड़ा व्यक्ति किसे कहा है?
उत्तर
लेखक ने बहुत व्यस्त रहने वाले व्यक्ति को बड़ा व्यक्ति कहा है।

समय नहीं मिला दीर्य-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘वक्त सबके लिए बराबर है’ पंक्ति को लेखक ने किन उदाहरणों से समझाया है?
उत्तर
‘वक्त सबके लिए बराबर है’ पंक्ति को लेखक ने बैंक और शेयर बाजार के उदाहरणों से समझाया है। वह इस तरह अगर बैंक जवाब दे दें तो एक करोड़पति मिनटों में गरीब और भिखमँगा भी बन सकता है, लेकिन कुदरत का इन्तजाम नहीं बिगड़ता। समय के सागर में शेयर बाजार की तरह दिन में कितने ही बार ज्वार-भाटा नहीं आता। धन की दुनिया में अमीर-गरीब बादशाह-कंगाल का फ़र्क है। पर खुशकिस्मती से समय के साम्राज्य में ऊँच-नीच का भेदभाव नहीं है।

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प्रश्न 2.
सभा-सम्मेलनों में समय के संबंध में क्या देखा जाता है?
उत्तर
समय की तत्परता के संबंध में सभी सूबों की कहानी करीब एक-सी है। मीटिंग का समय पर शुरू होना हमेशा अपवाद रहा करता है, नियम नहीं। उड़ीसा में तो कई जगह मुकर्रर किए गए वक्त से दो घण्टे बाद मीटिंग शुरू करने का रिवाज ही पड़ गया है। वक्त बताते हुए भी मीटिंग बुलाने वाले, मीटिंग में आने वाले सभी सज्जन यही मानकर चलते हैं कि अगर चार बजे का समय दिया है तो मीटिंग छः बजे शुरू होगी। उसके बाद भले ही हो. पर छः के पहले नहीं।

प्रश्न 3.
किसी भी बैठक का समय पर आरंभ हो जाना अपवाद क्यों रहा है?
उत्तर
किसी भी बैठक का समय पर आरंभ हो जाना अपवाद ही रहा है। यह इसलिए कि देर से बैठक शुरू करने का रिवाज ही पड़ गया है।

प्रश्न 4.
लेखक ने विदेशों में समय की बरबादी के क्या उदाहरण दिए हैं?
उत्तर
इंग्लैण्ड व यूरोप के दूसरे देशों में भी समय की बरबादी दिल खोलकर की जाती है। वहाँ की सभाएँ वक्त पर होती हैं और लोग समय के पाबंद भी हैं। लेकिन अगर सिनेमा व थियेटर के टिकट लेने के लिए लंबी-लंबी कतारों का दृश्य आप देखें तो हैरान होंगे कि जो लोग इतने व्यस्त दिखते हैं और सड़कों पर भी दौड़-दौड़ कर चलते हैं, वे इन कतारों में दो-दो, तीन-तीन घण्टे लगातार किस तरह खड़े रहते हैं और केवल यही राह देखते रहते हैं कि कब टिकट घर की खिड़की खुले। इन , कतारों में जवान, बूढ़े, स्त्री, पुरुष सभी रहते हैं, कभी-कभी तीन घण्टे खड़े रहने के बाद भी थियेटर में जगह न रहने के कारण कुछ लोगों का वापस जाना पड़ता है।

प्रश्न 5.
जीवन में समय की पाबंदी के साथ-साथ कुछ लचक रखना भी जरूरी क्यों हैं?
उत्तर
जीवन में समय की पाबंदी के साथ-साथ कुछ लचक रखना भी जरूरी है। यह इसलिए कि इसके बिना कोई भी व्यक्ति अपना और अपने घरवालों का जीवन सुखी नहीं बना सकेगा। इससे वह चिड़चिड़ा और नाराज रहने लगेगा।

समय नहीं मिला भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
संधि-विच्छेद कर संघि का नाम लिखिए।
सज्जन, सदुपयोग, सम्मेलन, विद्यार्थी, मनोविकार।
उत्तर
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 13 समय नहीं मिला img-1

प्रश्न 2.
समास-विग्रह कर प्रकार लिखिए
यवा-समय, अस्त-व्यस्त, ऊँच-नीच, अर्वव्यवस्था, पंचतंत्र, गजानन।
उत्तर
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 13 समय नहीं मिला img-2

प्रश्न 3.
ख्याल, सिनेमा जैसे अनेक आगत शब्द इस पाठ में आए हैं। ऐसे अन्य आगत शब्दों को छाँटकर लिखिए।
उत्तर
उत्तर, अक्सर, काफी, बेशुमार, फैशन, डाकघर, बहाना, मशहूर, मुकाबला, लालसा आदि।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिए
देश, आदमी, सुबह, लालसा, राह।
उत्तर
देश – वतन, राष्ट्र
आदमी – मनुष्य, मानव
सुबह – सबेरा, प्रातः
लालसा – अभिलाषा, इच्छा
राह – मार्ग, रास्ता।

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प्रश्न 5.
वाक्यों में प्रयोग कीजिए
टाल मटोल करना, तितर-बितर होना, राह देखना, मशीन बन जाना।
उत्तर
मुहावरे – वाक्य-प्रयोग
टालमटोल – आलसी मनुष्य टालमटोल करते रहते हैं।
तितर-बितर होना – घबड़ाहट में सारा सामान तितर-बितर हो गया।
राह देखना – वह देर तक अपने साथी की राह देखता रहा।
मशीन बन जाना – आज विज्ञान के युग में मनुष्य का मशीन बन जाना कोई आश्चर्य नहीं है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्य को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए
गोपाल कल आएगा।
(क) निषेधवाचक
(ख) प्रश्नवाचक
(ग) विस्मयादिवाचक
(घ) संदेहवाचक।
उत्तर
गोपाल कल आएगा।
(क) निषेधवाचक – गोपाल कल नहीं आएगा।
(ख) प्रश्नवाचक – क्या गोपाल कल आएगा?
(ग) विस्मयादिवाचक – अहा! गोपाल कल आएगा!
(घ) संदेहवाचक – शायद गोपाल कल आएगा।

समय नहीं मिला योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
समय का पालन करने वाले जिन महापुरुषों के नाम आप जानते हैं, उनकी सूची बनाइए।

प्रश्न 2.
समय का दुरुपयोग करने वाले लोगों को क्या-क्या दुष्परिणाम भोगने पड़ते हैं? संक्षिप्त लेख लिखिए।

प्रश्न 3.
समय की नियमितता से संबंधित अनुभवों को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

समय नहीं मिला परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘समय नहीं मिला’ निबंध का प्रतिपाय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
लेखक ने इस व्यंग्यात्मक लेख में समय का महत्त्व समझाने का प्रयास किया है। लेखक का मानना है कि समय के साथ चलना. जीवन को नियमित बनाना. हर कार्य को गंभीरता से समझना, उसे भली-भाँति पूरा करना आदि बातें जीवन की सफलता के लिए बहुत आवश्यक हैं। इन्हें लेखक ने विविध उदाहरणों द्वारा स्पष्ट किया है। लेखक ने यह भी बताने का प्रयास किया है कि समय का महत्त्व न समझने वाले बहुत पीछे रह जाते हैं। समाज में उनका सम्मान भी सुरक्षित नहीं रहता। समयाभाव का बहाना बनाने वाले जीवन लक्ष्य तक नहीं पहुँचते। प्रस्तुत पाठ में लेखक ने दिनचर्या की अनियमितता और बहाना बनाने की आदत से बचने का संदेश दिया है।

प्रश्न 2.
समय पर किसी का जवाब न मिलने पर लेखक क्या समझ लेता है?
उत्तर
समय पर किसी का जवाब न मिलने पर लेखक यह समझ लेता है कि शायद डाकघर की कुछ गलती से पत्र ही देर से पहुँचा या न भी पहुँचा हो। या फिर महाशयजी का जीवन ही अस्त-व्यस्त और ढीला होगा। वे पत्र पढ़कर कहीं इधर-उधर डाल देते होंगे और या फिर उन्हें जवाब देने का ख्याल अक्सर नहीं रहता होगा या उत्तर देने के वक्त पत्र ही नहीं मिलता होगा।

प्रश्न 3.
समय धन से कहीं अधिक अहम् चीज है कैसे?
उत्तर
समय धन से कहीं अधिक अहम चीज़ है। यह इसलिए कि हम अधिकसे-अधिक मेहनत करके बहुत धन कमा सकते हैं। लेकिन हजार परिश्रम करने पर भी हम चौबीस घण्टों में एक भी मिनट नहीं बढ़ा सकते हैं। इस प्रकार की बहुमूल्य चीज का सामना धन से नहीं किया जा सकता है।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित कथनों के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।
1. श्रीमन्नारायण अग्रवाल आर्थिक सिद्धान्तों के विशेषज्ञ थे।
1. समाजवादी
2. गाँधीवादी
3. राजनीतिक
4. आध्यात्मिक।
उत्तर
2. गाँधीवादी

2. श्रीमन्नारायण अग्रवाल की रचना है
1. मानव
2. मानव और दानव
3. अभिनव मानव
4. आदि मानव
उत्तर
1. मानव

3. श्रीमन्नारायण का जन्म कहाँ हुआ था
1. वाराणसी में
2. इलाहाबाद में
3. मैनपुरी में
4. उन्नाव में।
उत्तर
3. मैनपुरी में

4. श्रीमन्नारायण का जन्म किस सन में हुआ था
1. 1900 में
2. 1901 में
3. 1910 में
4. 1912 में।
उत्तर
4. 1912 में।

5. श्रीमन्नारायण सम्पादक थे।
1. सबकी बोली के
2. सरस्वती के
3. राष्ट्रभाषा प्रचार के
4. सबकी बोली’ और ‘राष्ट्रभाषा प्रचार’ के।
उत्तर
4. सबकी बोली’ और ‘राष्ट्रभाषा प्रचार’ के।

प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से उचित शब्दों के चयन से कीजिए
1. ज्यादातर लोगों की ………….. आदत ही पड़ जाती है। (बहाना बनाने की, टालमटोल करने की)
2. बड़े लोगों का व्यवहार भी बहुत ………….. रहता है। (व्यस्त, व्यवस्थित)
3. समय न मिलने का बहाना अक्सर अपनी …………… को ढाँकने के लिए किया जाता है। (मजबूरी, कमजोरी)
4. अंग्रेजी की मशहूर कहावत है-‘समय …………… है’। (बलवान, धन)
5. धन से कहीं अधिक अहम् चीज है। (बुद्धि, समय)
उत्तर

  1. टालमटोल
  2. व्यवस्थित
  3. कमजोरी
  4. धन
  5. समय

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प्रश्न 6.
सही जोड़ी का मिलान किजिए
छोटे-छोटे सवाल – रामचंद्र शुक्ल
उत्साह – मीराबाई
रोटी का राग – तुलसीदास
वर्षा गीत – श्रीमन्नारायण अग्रवाल
विनय पत्रिका – दुष्यंत कुमार।
उत्तर
छोटे-छोटे सवाल – दुष्यंत कुमार
उत्साह – रामचंद्र शुक्ल
रोटी का राग – श्रीमन्नारायण अग्रवाल
वर्षा गीत – मीराबाई
विनय पत्रिका – तुलसीदास।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित वाक्य सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. बड़े लोगों का जीवन नियमित रहता है।
2. जो व्यक्ति खतों का जवाब देरी से देता है, वह इसी कारण बड़ा हो जाता है।
3. वक्त के लिए सब बराबर हैं।
4. ज्यादातर लोग कुछ नहीं करते हैं।
5. 1930 में मालवीय जी ने प्रयाग में ‘एकता सम्मेलन’ बुलाया था।
उत्तर

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. सत्य
  5. असत्य

प्रश्न 8.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए
1. अधिकांश लोग क्या करते हैं?
2. अपनी कमजोरी को ढाँकने के लिए क्या न मिलने का बहाना किया जाता है?
3. किसका अपमान करके कोई बड़ा आदमी न बन सका है और न बन सकेगा?
4. मालवीय जी ने ‘एकता सम्मेलन’ कब बुलाया था?
5. सुबह जल्दी उठकर हम दिनभर क्या महसूस करेगे?
उत्तर

  1. टालमटोल
  2. समय
  3. समय का
  4. 1932 में
  5. स्फूर्ति ।

समय नहीं मिला लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किस तरह की बातें लोगों को सुननी पड़ती हैं?
उत्तर
‘मुझे आपका काम याद था, पर क्या करूँ, बिल्कुल समय ही नहीं मिला। क्षमा करें।…कल इसी वक्त आ जाइये। समय निकालने की जरूर कोशिश करूँगा।’ कुछ इसी तरह की बातें लोगों को सननी पड़ती हैं।

प्रश्न 2.
लेखक का बड़े लोगों के बारे में क्या अनुभव है?
उत्तर
लेखक का बड़े लोगों के बारे में अनुभव है कि जो लोग सचमुच बड़े हैं और बहुत व्यस्त रहते हैं उनका पत्र-व्यवहार भी बहुत व्यवस्थित रहता है। उनका जीवन नियमित रहता है और वे रोज का काम उसी समय निपटा देते हैं।

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प्रश्न 3.
लेखक किसकी तारीफ़ करता है?
उत्तर
लेखक उन लोगों की तारीफ़ करता है, जो खुशदिल रहकर दूसरों को भी खुशदिल रखें। उससे वह अपने-आप समय का जितना उपयोग कर सकें, उतना ही वह काबिलेतारीफ़ है।

प्रश्न 4.
लेखक के मुबारकबाद का पात्र कौन है?
उत्तर
लेखक के मुबारकबाद का पात्र वह है, जो अपने-आप समय का पूरा फायदा उठाता है और एक मिनट भी बरबाद नहीं करता है।

समय नहीं मिला लेखक-परिचय

जीवन-परिचय-श्रीमन्नारायण अग्रवाल गाँधीवादी चिंतकों-विचारकों में प्रमुख हैं। आपका जन्म उत्तर-प्रदेश के मैनपुरी जिलान्तर्गत हआ था। आपकी आरंभिक शिक्षा कलकत्ता में हुई। इसके बाद आपने अपनी उच्च शिक्षा के लिए प्रयाग विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। वहीं से आपने उच्च शिक्षा प्राप्त करके आजीविका के लिए नौकरी कर ली। इस दृष्टि से आप ‘सबकी बोली’ और ‘राष्ट्र-भाषा-प्रचार’ के भी संपादक रहे। यही नहीं, आप लगातार अनेक वर्षों तक राष्ट्र भाषा-प्रचार समिति, वर्धा के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी अहं भूमिका निभाते थे। रचनाएँ-श्रीमन्नारायण अग्रवाल का गद्य और पद्य दोनों पर अधिकार रहा है। उनकी रचनाएँ इस प्रकार हैं

काव्य-संग्रह-‘सेगाँव का संत’, ‘रोटी का राग’ तथा ‘मानव’

भाषा-शैली-श्रीमन्नारायण अग्रवाल की साहित्यिक धारा अधिक सरल और सपाट शब्दों की है। उसमें बहुप्रचलित शब्दों की भरमार है। इस प्रकार के शब्दों से निर्मित भाषा के अर्थ सहज रूप से प्रकट हो जाते हैं। इनसे बने हुए वाक्य बोधगम्य हैं। श्रीमन्नारायण अग्रवाल की शैली में विविधता है। कहीं तो वह पत्रकारिता के छाँव तले पनपती है और कहीं तो अध्यापन के अधीन होकर सरकती है। इस प्रकार आपकी शैली एक पत्रकार की शैली के साथ-साथ एक अध्यापक आचार्य की शैली है। इस प्रकार की शैलियों से विषय-वस्तु का प्रतिपादन अच्छी तरह से हुआ है।

साहित्य में स्थान-श्रीमन्नारायण का हिन्दी गद्य-पद्य दोनों ही विधाओं के रचनाकारों में उल्लेखनीय स्थान है। यह सर्वविदित है कि साहित्य के प्रति इनका अनुराग शुरू से ही रहा है। गाँधीवादी दृष्टिकोण को रेखांकित करने वाले प्रमुख साहित्यकारों में से आप एक हैं।

समय नहीं मिला निबंध का सारांश

प्रस्तुत निबंध ‘समय नहीं मिला’ एक व्यंग्यात्मक निबंध है। इसमें लेखक ने समय को समझाने का प्रयास किया है। लेखक के अनुसार अधिकांश लोग समय पर न मिलने का प्रयत्न करते हैं। अपनी टालमटोल आदत से व्यस्तता का बहाना बनाकर करते हैं। इसी प्रकार पत्रों का उत्तर देने में भी अधिकांश लोग अपनी व्यस्तता का बहाना बनाकर अपनी टालमटोल की आदत से बाज नहीं आते हैं, जो हो, समय न मिलने का बहाना प्रायः अपनी कमजोरी और अनियमितता को ढाँकने के लिए किया जाता है। लेकिन समय का अपमान करके आज तक न कोई बड़ा बन सका है और न कोई बन सकेगा। समय धन है। यों तो हम अधिक मेहनत करके अधिक-से-अधिक धन तो कमा सकते हैं लेकिन वक्त को न तो बढ़ा सकते हैं और न घटा ही सकते हैं। धन की दुनिया में अमीर-गरीब बादशाह-कंगाल का फर्क है लेकिन समय के साम्राज्य में ऊँच-नीच का भेदभाव नहीं है। समय के लिए सब बराबर हैं। फिर भी हम समय का महत्त्व नहीं समझ पाते।

लेखक समय की पूरी-पूरी पाबंदी करने वालों को मुबारक बाद देते हुए यह सलाह दे रहा है कि अगर आप केवल सुबह ही जल्दी उठना शुरू कर दें, तो आप काफी समय बचा लेंगे। फिर दिन भर आप स्फूर्ति का अनुभव करेंगे। लेकिन ध्यान रहे कि आप कहीं मशीन की तरह न बन जाएँ। घड़ी के ठोके के साथ अपनी जिंदगी की ताल न बैठा लें। अगर आपने अपने कार्यक्रम में जरा भी लचक न रखी। उसमें भिन्नता की गुंजाइश न रही हो तो भी आप अपना और अपने घरवालों का जीवन सुखी न बना सकेंगे। फलस्वरूप आपका मिजाज भी चिड़चिड़ा हो जाएगा। अपना समय बर्बाद करने वालों पर आप नाराज होना शुरू कर देंगे। अंततः यह कहना है कि खुशदिल रहकर और दूसरों को भी निभाकर आप अपने समय का जितना अधिक और अच्छा उपयोग कर सकें, उतनी आपकी प्रशंसा है। और कृपया आज से किसी से न कहें ‘मुझे समय नहीं मिला।

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समय नहीं मिला संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

(1) जहाँ वक्त बढ़ाया नहीं जा सकता, वहाँ लाख कोशिश करने पर वह घटाया भी नहीं जा सकता। आजकल की विचित्र अर्थव्यवस्था में हमारे धन की कीमत रोज घट बढ़ सकती है। अगर बैंक जवाब दे दें तो एक करोड़पति मिनटों में गरीब और भिखमंगा भी बन सकता है, किंतु कुदरत का इन्तजाम नहीं बिगड़ता। समय के सागर में शेयर बाजार की तरह दिन में कितने ही बार ज्वार-भाटा नहीं आता। धन की दुनिया में अमीर-गरीब बादशाह-कंगाल का फर्क है। पर खुशकिस्मती से समय के साम्राज्य में ऊँच-नीच का भेद-भाव नहीं है। वक्त के लिए सब बराबर हैं, उसमें आदर्श लोकतंत्र है। फिर भी हम उसका महत्त्व नहीं समझते।

शब्दार्थ-कुदरत-ईश्वर ।ज्वार-भाटा-उतार-चढ़ाव,। खुशकिस्मती-सौभाग्य।

संदर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पस्तक ‘हिंदी सामान्य’ 10वीं में संकलित लेखक श्रीमन्नारायण अग्रवाल लिखित व्यंग्यात्मक निबंध ‘समय नहीं मिला’ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने ‘समय पर किसी का कोई अधिकार नहीं होता है’ इसे समझाते हुए कहा है कि

व्याख्या-आज के इस विज्ञान युग में भले ही सब कुछ सम्भव हो सकता है, लेकिन समय को न तो बढ़ाया जा सकता है और न घटाया ही जा सकता है। जहाँ तक आज की अर्थव्यवस्था का प्रश्न है तो यह भी कहा जा सकता है कि हम अपने मन की कीमत जब चाहे घटा-बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई बैंक किसी करोड़पति को मदद करना बंद कर दे, तो उसे चंद मिनटों में गरीब और भिखमंगा होने में देर नहीं लगेगी। लेकिन जो ईश्वरीय विधान है, वह इससे अलग है। वह अपना प्रबंध अपने ढंग से बनाए रखता है। इस प्रकार समय का उतार-चढ़ाव ज्वार-भाटा या शेयर बाजार की तरह गिरता-उठता नहीं है। इस प्रकार समय की तुलना धन से नहीं की जा सकती है। यह इसलिए कि धन के संसार में अमीरी-गरीबी का भेदभाव भरा होता है। लेकिन समय का संसार इससे कहीं अलग ही होता है। वहाँ तो किसी प्रकार का कोई भेदभाव होता ही नहीं है। वहाँ तो सब एक समान हैं। वहाँ एक आदर्श लोकतंत्र है। अफ़सोस की बात है कि हम यह सब कुछ जानते हुए समय के महत्त्व नहीं समझ पाते हैं।

विशेष-

  1. समय के महत्त्व को बतलाया गया है।
  2. भाषा-शैली में प्रवाह है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वक्त की क्या विशेषता है?
उत्तर
वक्त की यह विशेषता होती है कि उसे न तो हम घटा सकते हैं और न बढ़ा ही सकते हैं।

प्रश्न 2.
धन और समय की दुनिया में क्या फर्क है?
उत्तर
धन की दुनिया और समय की दुनिया में बहुत फर्क है। धन की दुनिया में अमीरी-गरीबी का भेद होता है, जबकि समय की दुनिया में सब बराबर होते हैं।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर :

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का मुख्य भाव लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त गद्यांश के द्वारा लेखक ने यह भाव प्रकट करना चाहा है कि समय को घटाया और बढ़ाया नहीं जा सकता है। इसकी तुलना धन से नहीं की जा सकती है। यह इसलिए कि धन की दुनिया में अमीरी-गरीबी का भेदभाव होता है, जबकि समय की दुनिया में सब बराबर होते हैं। अफसोस यह है कि हम समय की कीमत जानते हुए उसके महत्व को नहीं समझते हैं।

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2. पर मेहरबानी करके आप कहीं मशीन की तरह भी न बन जाएँ। घड़ी के ठोके के साथ अपनी जिंदगी की ताल न बैठा लें। अगर अपने कार्यक्रम में आपने जरा भी लचक न रखी और उसमें भिन्नता की गुंजाइश न रही हो तो भी आप अपना और अपने घरवालों का जीवन सुखी न बना सकेंगे। फिर तो शायद आपका मिजाज भी चिड़चिड़ा हो जाएगा और आप दूसरों पर, जो अपना समय जरा भी बर्बाद करते हैं, नाराज होना शुरू कर देंगे।

शब्दार्च-ताल-मेल । लचक-सरस। मिजाज़-दिमाग।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने समय के सदुपयोग के तरीके पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-आप समय का सदुपयोग अवश्य करें। लेकिन इससे पहले आप यह जान लें कि यह किस तरह होना चाहिए। आपके लिए यह सुझाव है कि आप कृपया समय का सदुपयोग मशीन की तरह न करें। दूसरे शब्दों में, यह कि आप समय के सदुपयोगी मशीन न बन जाएँ। यही नहीं आप अपनी जिंदगी के ताल घड़ी के ठोके के साथ न बैठा लें। यह ध्यान रहे कि आप अपने कार्यक्रम में लचक रखें। अगर आपने ऐसा नहीं किया और उसमें कोई फर्क की संभावना न रखी तो आप न केवल अपना ही, अपितु अपने घर-परिवार के जीवन को दुखमय ही बनायेंगे। फलस्वरूप आपका मिजाज चिड़चिड़ा हो जाए तो, इसमें कोई आश्चर्य नहीं। इससे जो अपना समय बर्बाद करते हैं, उन पर अपनी नाराजगी दिखाना शरू कर देंगे।

विशेष

  1. समय के सदुपयोग के तौर-तरीके पर प्रकाश डाला गया है।
  2. यह अंश ज्ञानवर्द्धक है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मशीन की तरह न बनने की क्यों सीख दी गई है?
उत्तर
मशीन की तरह न बनने की सीख दी गई है। यह इसलिए कि इससे अपना और अपने घरवालों का जीवन सुखी नहीं बन सकता है।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गयांश का मुख्य भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त गद्यांश के द्वारा लेखक का कहना है कि हमें मशीन की तरह बनकर समय का सदुपयोग नहीं करना चाहिए। इसमें लचक न रखने से घर-परिवार का सुख-चैन समाप्त हो जायेगा। मिजाज चिड़चिड़ा हो जाएगा और नाराज होने की आदत पड़ जाती है।

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3

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MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3

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Question 1.
The following frequency distribution gives the monthly consumption of electricity of 68 consumers of a locality. Find the median, mean and mode of the data and compare them.
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 1
Solution:
Median:
Let us prepare a cumulative frequency table:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 2
Now, we have N = 68 ⇒ \(\frac{N}{2}=\frac{68}{2}\) = 34
The cumulative frequency just greater than 34 is 42 and it corresponds to the class 125 – 145.
∴ 125 – 145 is the median class.
∴ l = 125, cf = 22, f= 20 and h = 20
Using the formula,
Median = l + \(\left[\frac{\frac{N}{2}-c f}{f}\right] \) × h
= 125 + \(\left[\frac{34-22}{20}\right]\) × 20
= 125 + \(\frac{12}{20}\) × 20 = 125 + 12 = 137 units.
Mean: Let assumed mean, a = 135
∵ Class size, h = 20
∴ ui = \(\frac{x_{i}-a}{h}=\frac{x_{i}-135}{20}\)
Now, we have the following table:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 3
∴ \(\overline{x}\) = a + h × [\(\frac{1}{N}\) Σfiui] = 135 + 20 × \(\frac{7}{68}\)
= 135 + 2.05 = 137.05 units.
Mode:
∵ Class 125 – 145 has the highest frequency i.e., 20.
∴ 125 – 145 is the modal class.
We have: h = 20, l = 125 , f1 = 20, f0 = 13, f2 = 14
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 4
We observe that the three measures are approximately equal.

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Question 2.
If the median of the distribution given below is 28.5, find the values of x and y.
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 5
Solution:
Here, we have N = 60
Now, cumulative frequency table is:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 6
Since, median = 28.5 (Given)
∴ Median class is 20 – 30 and l = 20, f = 20, cf = 5 + x, N = 60
∴ l + \(\left[\frac{\frac{N}{2}-c f}{f}\right] \) × h
⇒ 28.5 = 20 + \(\left[\frac{30-(5+x)}{20}\right]\) × 10
⇒ 28.5 = 20 + \(\frac{25-x}{2}\)
⇒ 57 = 40 + 25 – x
⇒ x = 40 + 25 – 57 = 8
Also, 45 + x + y = 60
⇒ 45 + 8 + y = 60
⇒ y = 60 – 45 – 8 = 7.
Thus x = 8, y = 7

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3

The percentage difference calculator is here to help you compare two numbers.

Question 3.
A life insurance agent found the following data for distribution of ages of 100 policy holders. Calculate the median age, if policies are given only to persons having age 18 years onwards but less than 60 year.
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 7
Solution:
The given table is cumulative frequency distribution. We write the frequency distribution as given below :
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 8
∵ The cumulative frequency just greater than 50 is 78.
∴ The median class is 35 – 40.
Now, \(\frac{N}{2}\) = 50, l = 35, cf = 45, f = 33 and h = 5
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 9
Thus, the median age = 35.76 years.

Also you can check the age difference between your loved ones, friends using the Age difference Calculator.

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When the positive number a is rounded to the nearest tenth, the result is the number b.

Question 4.
The lengths of 40 leaves of a plant are measured correct to the nearest millimeter, and the data obtained is represented in the following table:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 10
Find the median length of the leaves.
[Hint: The data needs to be converted to continuous classes for finding the median, since the formula assumes continuous classes. The classes then change to 117.5-126.5,
126.5 – 135.5 ………… 171.5 – 180.5.]
Solution:
After changing the given table as continuous classes we prepare the cumulative frequency table as follows:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 11
The cumulative frequency just above 20 is 29 and it corresponds to the class 144.5 – 153.5.
So, 144.5 – 153.5 is the median class.
We have: \(\frac{N}{2}\) = 20, l = 144.5, f= 12, cf = 17 and h = 9
∴ Median = l + \(\left[\frac{\frac{N}{2}-c f}{f}\right] \) × h
= 144.5 + \(\left[\frac{20-17}{12}\right]\) × 9
= 144.5 + \(\frac{3}{12}\) × 9 = 144.5 + \(\frac{9}{4}\)
= 144.5 + 2.25 = 146.75
Median length of leaves = 146.75 mm.

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Question 5.
The following table gives the distribution of the life time of 400 neon lamps:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 12
Find the median life time of a lamp.
Solution:
To compute the median, let us write the cumulative frequency distribution as given below:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 13
Since, the cumulative frequency just greater than 200 is 216.
∴ The median class is 3000-3500 and so l = 3000, cf= 130, f = 86, h = 500
∴ Median = l + \(\left[\frac{\frac{N}{2}-c f}{f}\right] \) × h
= 3000 + \(\left[\frac{200-130}{86}\right]\) × 500
= 3000 + \(\frac{70}{86}\) × 500 = 3000 + \(\frac{35000}{86}\)
= 3000 + 406.98 = 3406.98
Thus, median life time of a lamp = 3406.98 hours.

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3

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Question 6.
100 surnames were randomly picked up from a local telephone directory and the frequency distribution of the number of letters in the English alphabets in the surnames was obtained as follows:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 14
Determine the median number of letters in the surnames. Find the mean number of letters in the surnames? Also, find the modal size of the surnames.
Solution:
Median: The cumulative frequency distribution table is as follows:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 15
Since, the cumulative frequency just greater than 50 is 76.
∴ The class 7-10 is the median class.
We have, \(\frac{N}{2}\) = 50 , f = 7, cf = 36, f = 40 and h = 3
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 16
Mode:
Since the class 7 – 10 has the maximum frequency i.e., 40.
∴ The modal class is 7 – 10.
So, we have l = 7,h = 3, f1 = 40, f0 = 30, f2 = 16
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 17
Thus, the required median = 8.05, mean = 8.32 and mode = 7.88.

Guidelines for conversion of CGPA into percentage.

Question 7.
The distribution below gives the weights of 30 students of a class. Find the median weight of the students.
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 18
Solution:
We have cumulative frequency table as follows:
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 19
The cumulative frequency just greater than 15 is 19, which corresponds to the class 55 – 60.
So, median class is 55-60 and we have \(\frac{N}{2}\) = 15,
l = 55, f = 6, cf = 13 and h = 5
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 14 Statistics Ex 14.3 20
Thus, the required median weight of the students = 56.67 kg.

MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions पद्य Chapter 7 सामाजिक समरसता

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MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions पद्य Chapter 7 सामाजिक समरसता

सामाजिक समरसता अभ्यास

बोध प्रश्न

सामाजिक समरसता अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1.
लोहा किसकी श्वांस से भस्म हो जाता है?
उत्तर:
लोहा मरे हुए जानवर की खाल से बनी हुई मसक की श्वांस (हवा) से भस्म हो जाता है।

प्रश्न 2.
भक्ति किस प्रकार के प्राणियों से नहीं हो सकती?
उत्तर:
कामी, क्रोधी और लालची प्रकृति के प्राणियों से भक्ति नहीं हो सकती।

प्रश्न 3.
गुण लाख रुपये में कब बिकता है?
उत्तर:
गुण लाख रुपये में तब बिकता है जब उसे गुण का ग्राहक मिल जाता है।

प्रश्न 4.
संसार में विद्यमान सचर-अचर प्राणी क्या कर रहे हैं?
उत्तर:
संसार में विद्यमान जितने भी सचर या अचर प्राणी हैं, वे सभी अपने-अपने कर्मों में लगे हुए हैं।

प्रश्न 5.
दयामयी माता के तुल्य किसे माना गया है?
उत्तर:
दयामयी माता के तुल्य पृथ्वी को माना गया है।

प्रश्न 6.
जीवन को सफल बनाने के लिए कवि क्या निर्देश देते हैं?
उत्तर:
जीवन को सफल बनाने के लिए कवि ने मनुष्यों को अपने-अपने उद्देश्य में लगे रहने का निर्देश दिया है।

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सामाजिक समरसता लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कबीर ईश्वर से क्या माँगते हैं?
उत्तर:
कबीर ईश्वर से यह माँगते हैं कि हे भगवान तुम कृपा करके मुझे इतना दे देना जिससे मैं अपने परिवार को पाल लूँ, मैं खुद भी भूखा न रहूँ और कोई साधु भी मेरे घर से खाली हाथ न जाये।

प्रश्न 2.
कवि के अनुसार किस प्रकार के वृक्ष के नीचे विश्राम करना चाहिए?
उत्तर:
कवि के अनुसार उस वृक्ष के नीचे विश्राम करना चाहिए जिसमें बारह महीने फल लगते हों, जिसमें शीतल छाया हो और घने फल हों तथा जिस पर पक्षी गण क्रीड़ा करते हों।

प्रश्न 3.
साधु से किस प्रकार के प्रश्न नहीं करने चाहिए?
उत्तर:
साधु से उसकी जाति नहीं पूछनी चाहिए, उससे तो केवल ज्ञान की बातें पूछनी चाहिए।

प्रश्न 4.
‘लोक कल्याण कामना’ से कवि का क्या आशय है?
उत्तर:
लोक कल्याण कामना से कवि का आशय है कि हमें संसार में रहकर ऐसे कार्य करने चाहिए जिनसे अधिक-से-अधिक लोगों का कल्याण हो। स्वार्थ के लिए हमें कार्य नहीं करने चाहिए।

प्रश्न 5.
कवि जग की विषम आँधियों के सम्मुख किस प्रकार के स्वभाव की अपेक्षा कर रहा है?
उत्तर:
कवि जग की विषम आँधियों के सम्मुख हिम्मत से डटे रहने के स्वभाव की अपेक्षा कर रहा है।

प्रश्न 6.
कर्मच्युत होने से क्या परिणाम होगा?
उत्तर:
कर्मच्युत होने से यह परिणाम निकलेगा कि तुम धोखे में पड़कर इस अलभ्य (अनमोल) अवसर से हाथ धो बैठोगे।

सामाजिक समरसता दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दुर्बल को सताने का क्या दुष्परिणाम होता है?
उत्तर:
दुर्बल व्यक्ति को सताने का यह परिणाम होता है कि उसकी मोटी आहों से कोई बच नहीं पायेगा।

प्रश्न 2.
अवगुण का निवास कहाँ है?
उत्तर:
अवगुण का निवास मनुष्यों के हृदय में होता है।

प्रश्न 3.
किन विशेषताओं को खोकर भक्ति की जा सकती है?
उत्तर:
जाति एवं वर्ण जैसी विशेषताओं को खोकर ही भक्ति की जा सकती है।

प्रश्न 4.
मनुष्य किन-किन शक्तियों से सम्पन्न है? संसार में जीने का उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
मनुष्य अमित बुद्धि एवं बल से युक्त है, अतः उसका संसार में जीने का भी निश्चित उद्देश्य है; और वह है जीवन में प्रतिक्षण अपने उद्देश्य को पाने के लिए कर्म में जुटे रहना।

प्रश्न 5.
‘जीवन सन्देश’ कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए।
उत्तर:
‘जीवन सन्देश’ कविता में कवि ने स्पष्ट किया है कि मनुष्य एक कर्त्तव्यपरायण व्यक्ति है, किन्तु कभी-कभी वह कर्तव्य से विमुख होकर भी काम करने लगता है और जीवन के उच्च उद्देश्यों से भटक जाता है। इस प्रकार के कार्यों से वह समाज की कोई भलाई नहीं कर सकता। अपने समाज और अपनी जन्म-भूमि के प्रति भी मनुष्य में कर्त्तव्य भावना होनी चाहिए, तभी उसकी जीवन यात्रा सार्थक है।

प्रश्न 6.
संसार मनुष्य के लिए एक परीक्षा स्थल है, ऐसा कवि ने क्यों कहा है ?
उत्तर:
संसार में अनेकानेक विषम परिस्थितियाँ और विपदाएँ आती रहती हैं, इसलिए कवि ने संसार को एक परीक्षा स्थल कहा है। इन विषम परिस्थितियों और आपदाओं से मनुष्य को घबड़ाना नहीं चाहिए बल्कि उनका डटकर सामना करना। चाहिए तथा अपने उद्देश्य को पाने के लिए निरन्तर संघर्ष करते रहना चाहिए।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए
(क) ऊँचै कुल का ………. निंद्या सोई॥
उत्तर:
कबीरदास जी कहते हैं कि ऊँचे कुल में जन्म लेने भर से कोई व्यक्ति ऊँचा नहीं हो जाता। यदि उसके कार्य ऊँचे नहीं हैं, तो वह कभी ऊँचा नहीं हो सकता है। ऊँचे अर्थात् श्रेष्ठ कार्य करने वाला व्यक्ति ही.ऊँचा होता है। वे उदाहरण देते हुए कहते हैं कि यदि सोने के कलश में मदिरा भरी हुई है, तो साधु लोग उस कलश की प्रशंसा न करके निन्दा ही करेंगे।

(ख) जब गुण ………… बदलै जाइ॥
उत्तर:
कबीरदास जी कहते हैं कि जब गुण के ग्राहक मिल जाते हैं तो गुण लाख रुपये में बिकता है और यदि गुण के ग्राहक न मिलें तो वह गुण कौड़ियों में बिक जाता है।

(ग) तुम मनुष्य हो ………….. निज जीवन में?
उत्तर:
कविवर त्रिपाठी जी कहते हैं कि तुम मनुष्य हो और तुम्हारा जन्म इस संसार में अत्यधिक बुद्धि एवं बल से युक्त है। ऐसी दशा में क्या तुमने अपने मन में कभी इस बात पर विचार किया है कि तुम्हारा जीवन क्या उद्देश्य रहित है? अर्थात् नहीं। कवि पुनः कहता है कि हे मनुष्यो! तुम बुरा मत मानना। तुम अपने मन में एक बार सोचो तो कि क्या तुमने अपने जीवन के सभी कर्त्तव्य पूरे कर लिये हैं अर्थात् अभी नहीं किये हैं।

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सामाजिक समरसता काव्य सौन्दर्य

प्रश्न 1.
करुण रस को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
करुण रस-किसी प्रिय वस्तु अथवा व्यक्ति की अनिष्ट की आशंका या विनाश से हृदय में उत्पन्न क्षोभ या दुःख को करुण रस कहते हैं। इसका स्थायी भाव शोक’ है।

उदाहरण :
अभी तो मुकुट बँधा था माथ हुए कल ही हल्दी के हाथ।
खुले भी न थे लाज के बोल, खिले भी चुंबन शून्य कपोल। हाय रुक गया यहीं संसार,बना सिन्दूर अंगार।
बातहत लतिका वह सुकुमार पड़ी है छिन्न धार।
स्पष्टीकरण स्थायी भाव-शोक।
विभाव :
(क) आलम्बन विनष्ट पति।
(ख) आश्रय-पत्नी।
(ग) उद्दीपन-मुकुट का बाँधना, हल्दी के हाथ होना,लाज के बोल न खलना।
अनुभाव :
वातहत लतिका के समान नायिका का बेहाल पड़े रहना। संचारी भाव-जड़ता,स्मृति, दैन्य और विषाद आदि।

प्रश्न 2.
गीतिका छन्द को अन्य उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
गीतिका छन्द में 26 मात्रा, 14-12 पर यति तथा प्रत्येक चरण के अन्त में ‘लघु-गुरु’ (15) होता है।

उदाहरण :
हे प्रभो! आनन्ददाता, ज्ञान हमको दीजिए।
शीघ्र सारे दुर्गुणों कों दूर हमसे कीजिए।
लीजिए हमको शरण में, हम सदाचारी बनें।
ब्रह्मचारी धर्मरक्षक, वीर व्रत धारी बनें।।

प्रश्न 3.
हरिगीतिका छन्द के लक्षण देते हुए एक अन्य उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
हरिगीतिका सममात्रिक छन्द है। इसमें चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 16 एवं 12 पर यति के साथ कुल 28 मात्राएँ होती हैं। चरण के अन्त में लघु-गुरु होता है।

उदाहरण :
‘गाते प्रियाओं के सहित रस राग यक्ष जहाँ तहाँ। प्रत्यक्ष दो उत्तर दिशा की दीखती लक्ष्मी यहाँ। कहते हुए यों पार्श्व में सहसा उदासी छा गई। उत्तर दिशा से याद सहसा उत्तरा की आ गई।’

सामाजिक समरसता महत्त्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सामाजिक समरसता बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लोहा किसकी श्वांस से भस्म हो जाता है?
(क) कोयले की
(ख) सोने की
(ग) लकड़ी की
(घ) मरी हुई खाल की।
उत्तर:
(ग) लकड़ी की

प्रश्न 2.
दयामयी माता के तुल्य किसे माना गया है?
(क) माँ
(ख) भारत की धरती को
(ग) भारत
(घ) प्रान्त को।
उत्तर:
(ख) भारत की धरती को

प्रश्न 3.
कवि के अनुसार किस प्रकार के वृक्ष के नीचे विश्राम करना चाहिए?
(क) छायादार
(ख) घना
(ग) फलयुक्त
(घ) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 4.
सज्जन व्यक्ति से क्या पूछना चाहिए? (2009)
(क) जाति
(ख) नाम
(ग) ज्ञान
(घ) काम।
उत्तर:
(ग) ज्ञान

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. जाति न पूछो साधु की पूछि लीजिए ………..
  2. कबीर ने बाह्य आडम्बरों तथा ………… का व मूर्तिपूजा का विरोध किया।
  3. ऊँचे कुल में जन्म लिया हो पर करनी ऊँची न हो, ऐसा व्यक्ति ……….. स्वर्ण कलश के समान है।
  4. लोक कल्याण की कामना ही सच्ची ……….. है।

उत्तर:

  1. ज्ञान
  2. अन्ध विश्वास
  3. मदिरा से भरे
  4. लोक सेवा।

सत्य/असत्य

  1. कबीर की भाषा को खिचड़ी या सधुक्कड़ी भाषा कहा जाता है।
  2. कबीर ने बाहरी आडम्बरों का समर्थन किया। (2009)
  3. ‘सबसे अधिक अवगुण औरों में ही होते हैं’ कबीर का यह कथन है।
  4. रामनरेश त्रिपाठी स्वच्छन्दतावादी काव्यधारा के प्रतिष्ठित कवि हैं। इन्होंने स्वच्छन्दतावादी परम्परा को बढ़ाया।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. असत्य
  4. सत्य।

सही जोड़ी मिलाइए

MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions पद्य Chapter 7 सामाजिक समरसता img-1
उत्तर:
1. → (घ)
2. → (ग)
3. → (क)
4. → (ख)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. कबीर सच्चे अर्थों में कवि होते हुए भी क्या थे?
  2. साधु से क्या नहीं पूछना चाहिए? (2012)
  3. कवि ने जीवन सन्देश में अपने कर्म में कैसी तत्परता बतायी है?
  4. अटल निश्चय व भय रहित संसार में कौन है?
  5. जीवन संदेश कविता का मूल स्वर क्या है? (2012)
  6. गुण कब लाख रुपये में बिकता है? (2018)

उत्तर:

  1. समाज सुधारक
  2. जाति
  3. तुच्छ पत्र जैसी
  4. ध्रुव जैसा
  5. कर्म में रत रहना
  6. जब गुणों को समझने वाला ग्राहक मिलता है।

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कबीर की साखियाँ भाव सारांश

कबीर ने अपनी साखियों में जीवन से सम्बन्धित अनेक उपयोगी सीखें दी हैं। मानव को भगवान से उतनी ही याचना करनी चाहिए जितनी आवश्यकता हो। दुर्बल को सताना अपने लिए काँटे बोना है। साधु की जाति नहीं पूछनी चाहिए अपितु उसके गुणों पर दृष्टिपात करना चाहिए। भक्ति के मार्ग में काम,क्रोध तथा लोभ बाधक हैं, अत: इनका त्याज्य अनिवार्य है। उच्च कुल में जन्म लेने वाले मानव का आचरण भी पवित्र होना आवश्यक है। फलदायी वृक्ष का आश्रय सुखद होता है। गुणी मानव हीं गुणों की परख कर सकता है। हीरा की परख जौहरी ही जानता है। भगवान गुणों के अक्षय कोष हैं, अवगुण तो हमारे मन-मानस में पल्लवित हैं। कबीर की साखियों में उच्चादर्शों से सम्बन्धित उत्कृष्ट काव्य सृष्टि है।

कबीर की साखियाँ संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

साईं इतना दीजिए, जामैं कुटुम समाय।
मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय॥ (1)

शब्दार्थ :
साईं = स्वामी, भगवान। कुटुम = कुटुम्ब। समाय = भरण-पोषण हो जाए। साधु = अतिथि।

सन्दर्भ :
प्रस्तुत साखी कबीरदास द्वारा रचित ‘कबीर की साखियाँ’ शीर्षक से ली गयी है।

प्रसंग :
इसमें कवि ने भगवान से प्रार्थना की है कि हे भगवान! हमें इतना दे दो कि हमारा भली-भाँति गुजारा हो जाए।

व्याख्या :
कबीरदास जी कहते हैं कि हे भगवान! आप हमें इतना भर दे दें जिसमें हमारे कुटुम्ब का भली-भाँति भरण-पोषण हो जाए। मैं भी भूखा न रहूँ और मेरे घर पर जो भी साधु-संन्यासी आएँ, वे भी खाली हाथ न लौटें।

विशेष :

  1. कवि ने मात्र कुटुम्ब भरण तक की सुविधा ही भगवान से माँगी है।
  2. दोहा छन्द।

दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय।
मरी चाम की स्वांस से, लौह भसम है जाय॥ (2)

शब्दार्थ :
दुर्बल = कमजोर व्यक्ति। चाम = चमड़े।

सदर्भ :
पूर्ववत।

प्रसंग :
कबीर ने दुर्बल व्यक्ति को न सताने का उपदेश दिया है।

व्याख्या :
कबीरदास जी कहते हैं कि दुर्बल व्यक्तियों को मत सताओ। इनकी आहे बड़ी मोटी अर्थात् भारी होती हैं। एक उदाहरण देकर वे कहते हैं कि जब मरे हुए चमड़े से बनाई गई मसक की श्वांस से लोहा भी भस्म हो जाता है तो जीवित व्यक्ति की आहों से कितना अहित हो जायेगा, इसे अच्छी तरह सोच लो और दुर्बलों को मत सताओ।

विशेष :

  1. कवि ने दुर्बलों को न सताने का उपदेश दिया।
  2. दोहा छन्द।

जाति न पूछो साधु की, पूछि लीजिए ज्ञान।
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥ (3)

शब्दार्थ :
मोल = मोल-भाव।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कबीरदास जी साधु संन्यासी की जाति न पूछने और ज्ञान जानने की बात कहते हैं।

व्याख्या :
कबीरदास जी संसारी मनुष्यों से कहते हैं कि हे मनुष्यो! तुम कभी भी किसी साधु-संन्यासी की जाति के बारे में मत पूछो। यदि तुम्हें पूछना ही है तो उससे उसके ज्ञान के बारे में जानकारी लो। एक उदाहरण देकर कबीर बताते हैं कि मोल-भाव तो तलवार का किया जाता है, म्यान को कौन पूछता है।

विशेष :

  1. गुणों को जानना चाहिए, जाति को नहीं।
  2. दोहा छन्द।

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जाति हमारी आतमा, प्रान हमारा नाम।
अलख हमारा इष्ट है, गगन हमारा ग्राम॥ (4)

शब्दार्थ :
अलख = अदृश्य। इष्ट = भगवान। गगन = आकाश।

सन्दर्भ ;
पूर्ववत्।

प्रसंग :
इस साखी में कबीरदास जी अपना परिचय देते हुए कह रहे हैं।

व्याख्या :
कबीरदास जी कहते हैं कि हमारी आत्मा ही हमारी जाति है, हमारा नाम ही हमारे प्राण हैं। अदृश्य अर्थात् न दिखाई देने वाला निर्गुण निराकार ईश्वर ही हमारा इष्ट है और आकाश हमारा ग्राम है।
विशेष :

  1. कवि ने अपनी व्यापकता का परिचय दिया है।
  2. दोहा छन्द है।

कामी क्रोधी लालची, इन पै भक्ति न होय।
भक्ति करै कोई शूरमाँ, जाति वरण कुल खोय॥ (5)

शब्दार्थ :
कामी = काम वासना में रत रहने वाला। जाति = जाति, कुल। वर्ण = वर्ण व्यवस्था। खोय = खोकर।

सन्दर्भ-:
पूर्ववत्।

प्रसंग :
इस छन्द में कबीरदास जी ने बताया है कि कामी-क्रोधी व्यक्तियों से ईश्वर की भक्ति नहीं हो सकती है।

व्याख्या :
कबीरदास जी कहते हैं कि कामी, क्रोधी और लालची स्वभाव के व्यक्तियों से भगवान की भक्ति नहीं हो सकती है जो व्यक्ति जाति एवं वर्ण भूल जाता है, वही शूरमाँ होता है और वही भगवान की भक्ति कर सकता है।

विशेष :

  1. विषय-वासनाओं से मुक्त होकर ही भक्ति की जा सकती है।
  2. दोहा छन्द।

ऊँचै कुल का जनमियाँ, जे करणी ऊँच न होइ।।
सोवन कलस सुरै भऱ्या, साधू निंद्या सोई॥ (6)

शब्दार्थ :
जनमियाँ = जन्म लेने वाला। करणी = कार्य। सोवन = सोने के। सुरै = मदिरा। भऱ्या = भरी हुई है। निंद्या = निंदा करता है। सोइ = उसकी।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कबीरदास जी कहते हैं कि ऊँचे कुल में जन्म लेने से कोई व्यक्ति ऊँचा नहीं होता है।

व्याख्या :
कबीरदास जी कहते हैं कि ऊँचे कुल में जन्म लेने भर से कोई व्यक्ति ऊँचा नहीं हो जाता। यदि उसके कार्य ऊँचे नहीं हैं, तो वह कभी ऊँचा नहीं हो सकता है। ऊँचे अर्थात् श्रेष्ठ कार्य करने वाला व्यक्ति ही.ऊँचा होता है। वे उदाहरण देते हुए कहते हैं कि यदि सोने के कलश में मदिरा भरी हुई है, तो साधु लोग उस कलश की प्रशंसा न करके निन्दा ही करेंगे।

विशेष :

  1. व्यक्ति अच्छे कामों से ऊँचा होता है, ऊँचे कुल में जन्म लेने से नहीं।
  2. दोहा छन्द।

तरवर तास बिलंबिए, बारह मास फलंत।
सीतल छाया गहर फल, पंधी केलि करत॥ (7)

शब्दार्थ :
तरवर = श्रेष्ठ वृक्ष। तास = उसी का। बिलंबिए = सहारा लीजिए। फलंत = फलता है। गहर = घने। पंषी = पक्षी। केलि = क्रीड़ाएँ।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कबीरदास जी ने ऐसे व्यक्ति का आश्रय लेने का उपदेश दिया है, जिससे हर व्यक्ति सुखी हो।

व्याख्या :
कबीरदास जी तरुवर के माध्यम से उस श्रेष्ठ व्यक्ति का आश्रयं ग्रहण करने का उपदेश देते हैं कि उसी श्रेष्ठ वृक्ष का आश्रय लेना चाहिए जो बारह महीने फल देता हो, जिसकी छाया शीतल हो, जिसमें घने फल लगते हों और जिस पर बैठकर पक्षीगण अपनी क्रीड़ाएँ करते हों।

विशेष :

  1. सज्जन लोगों का आश्रय लेने की बात कही है।
  2. दोहा छन्द।

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जब गुण कँगाहक मिलै, तब गुण लाख बिकाइ।
जब गुण कौं गाहक नहीं, कौड़ी बदले जाइ॥ (8)

शब्दार्थ :
गाहक = ग्रहण करने वाला, जानकार।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि कहता है कि गुणों का महत्त्व तभी तक है जब तक उसके ग्राहक मिलते हैं।

व्याख्या :
कबीरदास जी कहते हैं कि जब गुण के ग्राहक मिल जाते हैं तो गुण लाख रुपये में बिकता है और यदि गुण के ग्राहक न मिलें तो वह गुण कौड़ियों में बिक जाता है।

विशेष :

  1. गुण के ग्राहक का महत्व है।
  2. दोहा छन्द।

सरपहि दूध पिलाइये, दूधैं विष है जाइ।
ऐसा कोई नां मिलै, सौं सरपैं विष खाइ॥ (9)

शब्दार्थ :
सरपहि = साँप को। लै जाइ = हो जायेगा।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि कहता है कि सर्प को दूध पिलाने से कोई लाभ नहीं है, क्योंकि वह दूध भी विष बन जायेगा।

व्याख्या :
कबीरदास जी कहते हैं कि सर्प को दूध पिलाने से कोई लाभ नहीं है क्योंकि सर्प के गले में जाकर दूध भी विष बन जायेगा। कबीर कहते हैं कि मुझे आज तक ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला, जो सर्प के विष को खा जाये।

विशेष :

  1. साँप से आशय दुष्ट लोग हैं।
  2. दोहा छन्द।

करता करे बहुत गुण, आगुण कोई नांहि।
जे दिल खोजौं आपणौं, तो सब औगुण मुझ माहि॥ (10)

शब्दार्थ :
करता = कर्ता, सृष्टि का निर्माणकर्ता। केरे = तेरे। आगुण = अवगुण। आपणौ = अपना। मांहि = अन्दर।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कर्ता (भगवान) में गुण ही गुण होते हैं, अवगुण नहीं।

व्याख्या :
कबीरदास जी कहते हैं कि कर्ता अर्थात् भगवान में केवल गुण ही गुण हैं, उनमें कोई भी अवगुण नहीं है। कबीर दास जी कहते हैं कि जब मैंने अपना दिल खोजा तो मैंने पाया कि सभी अवगुण मेरे अन्दर हैं।

विशेष :

  1. ईश्वर (कर्ता) की महत्ता का वर्णन तथा अपने अवगुणों का वर्णन कवि ने किया है।
  2. दोहा छन्द।

जीवन संदेश भाव सारांश

प्रस्तुत कविता ‘जीवन संदेश’ में श्री रामनरेश त्रिपाठी ने मानव को कर्म में रत रहने का संदेश दिया है। संसार में जड़,चेतन सभी पदार्थ अपने-अपने कर्म में लगे रहते हैं। सूर्य संसार में नवीन शोभा विकीर्ण करता है। चन्द्रमा रात्रि में अमृत की वर्षा करता है।

तुच्छ तिनका भी कर्म में रत रहकर अपना सर्वस्व न्योछावर कर देता है। कवि मनुष्य को सचेत करता हुआ कहता है कि तुम मनुष्य हो, तुम्हारे पास बुद्धि,बल है। तुम्हें भी सोद्देश्य जीवन बिताना चाहिए।

मातृभूमि के प्रति भी अपने कर्तव्य का दृढ़ता से पालन करना चाहिए। जीवन में लोक कल्याण व लोक सेवा आवश्यक है। संसार में मानव को विषम परिस्थितियों का दृढ़ता से सामना करना चाहए, चाहे कितनी ही विषम आँधियाँ आयें। व्यक्ति को चन्द्रमा सा शान्त व ध्रुव तारे की भाँति अचल भावना रखनी चाहिए।

यह संसार ईश्वर के द्वारा निर्मित है। उसी के द्वारा समस्त सृष्टि का संचालन होता है। अतः कवि का कथन है कि जिस भूमि पर तुमने जन्म लिया है उसके प्रति अपने कर्तव्य का पालन अन्तिम श्वांस तक करना चाहिए। यही मानव का परम धर्म है।

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जीवन संदेश संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

(1) जग में सचर अचर जितने हैं सारे कर्म निरत हैं।
धुन है एक न एक सभी को सबके निश्चित व्रत हैं।
जीवनभर आतप सह वसुधा पर छाया करता है।
तुच्छ पत्र की भी स्वकर्म में कैसी तत्परता है।

शब्दार्थ :
सचर = चलने-फिरने वाले प्राणी। अचर = न चलने-फिरने वाली जड़ वस्तुएँ। कर्म निरत हैं अपने-अपने आप में लगे हुए हैं। व्रत = उद्देश्य, निश्चय। आतप = धूप। वसुधा = पृथ्वी। पत्र = पत्ता। स्वकर्म= अपने काम में। तत्परता = लगन।

सन्दर्भ :
प्रस्तुत छन्द ‘जीवन सन्देश’ शीर्षक कविता से लिया गया है। इसके रचयिता श्री रामनरेश त्रिपाठी हैं।

प्रसंग :
कवि ने यहाँ बताने का प्रयास किया है कि संसार में जड़ एवं चेतन सभी अपने-अपने काम में लगे हुए हैं।

व्याख्या :
श्री रामनरेश त्रिपाठी कहते हैं कि इस संसार। में जितने भी जड़ और चेतन हैं, वे सभी अपने-अपने कामों में लगे हुए हैं। सभी को कोई-न-कोई धुन होती है और उनका कोई-न-कोई व्रत (उद्देश्य) होता है। कवि पत्ते का उदाहरण देते हुए कहता है कि वह तुच्छ पत्ता जीवन भर धूप को सहता हुआ पृथ्वी पर छाया करता रहता है। देखिए उस तुच्छ पत्ते की भी अपने काम में कितनी तत्परता है।

विशेष :

  1. कवि का मानना है कि जड़ और चेतन सभी अपने कामों में लगे हुए हैं।
  2. अनुप्रास की छटा।

(2) रवि जग में शोभा सरसाता सोम सुधा बरसाता।
सब हैं लगे कर्म में कोई निष्क्रिय दृष्टि न आता॥
हैं उद्देश्य नितान्त तुच्छ तृण के भी लघु जीवन का।
उसी पूर्ति में वह करता है अन्त कर्ममय तन का॥

शब्दार्थ :
रवि = सूर्य। सोम = चन्द्रमा। सुधा = अमृत। निष्क्रिय = बिना काम के। नितान्त = पूरी तरह से। तुच्छ = छोटे। तृण = घास। कर्ममय = काम में लगते हुए।

सन्दर्भ-:
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि का कथन है कि सूर्य, चन्द्रमा आदि सभी अपने-अपने कर्म में लगे हुए हैं।

व्याख्या :
कविवर त्रिपाठी जी कहते हैं कि सूर्य संसार में शोभा का विस्तार करता है तो चन्द्रमा पृथ्वी पर अमृत बरसाता है। इस संसार में सभी जड़, चेतन अपने-अपने कामों में लगे हुए हैं। कोई भी व्यक्ति हमें बिना काम के नजर नहीं आता है। तुच्छ तिनके के लघु जीवन का भी उद्देश्य है और उसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु वह अपने शरीर का अन्त कर देता है।

विशेष :

  1. सभी संसार में कार्यरत हैं, बिना काम के कोई नहीं है।
  2. अनुप्रास की छटा।

(3) तुम मनुष्य हो, अमित बुद्धिबल-विलसित जन्म तुम्हारा।
क्या उद्देश्य रहित है जग में तुमने कभी विचारा?
बुरा न मानो, एक बार सोचो तुम अपने मन में।
क्या कर्त्तव्य समाप्त कर लिए तुमने निज जीवन में॥

शब्दार्थ :
अमित = अत्यधिक। बुद्धि-बल विलसित = बुद्धि और बल से सुशोभित।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि मनुष्यों को सचेत करते हुए कहता है कि तुम्हें भी अपने जीवन को काम करते हुए सार्थक बनाना है।

व्याख्या :
कविवर त्रिपाठी जी कहते हैं कि तुम मनुष्य हो और तुम्हारा जन्म इस संसार में अत्यधिक बुद्धि एवं बल से युक्त है। ऐसी दशा में क्या तुमने अपने मन में कभी इस बात पर विचार किया है कि तुम्हारा जीवन क्या उद्देश्य रहित है? अर्थात् नहीं।

कवि पुनः कहता है कि हे मनुष्यो ! तुम बुरा मत मानना। तुम अपने मन में एक बार सोचो तो कि क्या तुमने अपने जीवन के सभी कर्त्तव्य पूरे कर लिये हैं अर्थात् अभी नहीं किये हैं।

विशेष :

  1. कवि मनुष्य का कर्म क्षेत्र में निरन्तर लगे रहने की प्रेरणा देता है।
  2. अनुप्रास की छटा।

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(4) वह सनेह की मूर्ति दयामयि माता-तुल्य मही है।
उसके प्रति कर्त्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नहीं है।
हाथ पकड़कर प्रथम जिन्होंने चलना तुम्हें सिखाया।
भाषा सिखा हृदय का अद्भुत रूप स्वरूप दिखाया।

शब्दार्थ :
सनेह = स्नेह, प्रेम। दयामयि = दया करने वाली। मही = पृथ्वी।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि कहता है कि तुमने जन्म तो ले लिया पर जन्म देने वालों के प्रति तुम्हारे जो कर्त्तव्य हैं, उन्हें पूरा करो।

व्याख्या :
कविवर त्रिपाठी कहते हैं कि वह प्रेम की मूर्ति। और दयामयी पृथ्वी माता के समान है। क्या उसके प्रति तुम्हारा। कोई कर्त्तव्य नहीं है? अर्थात् निश्चय ही उसके प्रति हमारा कर्तव्य है? हाथ पकड़कर जिन्होंने सर्वप्रथम तुम्हें पृथ्वी पर चलना सिखाया है, बाद में भाषा का ज्ञान देकर हृदय के अद्भुत रूप। एवं स्वरूप को दिखाया है; क्या उनके प्रति तुम्हारा कर्त्तव्य नहीं? हाँ अवश्य है।

विशेष :

  1. कवि का सन्देश है कि जिन्होंने हमारे साथ कुछ भी उपकार किया है, उनके प्रति हमें कर्त्तव्य पूरा करना चाहिए।
  2. अनुप्रास की छटा।

(5) जिनकी कठिन कमाई का फल खाकर बड़े हुए हो।
दीर्घ देह की बाधाओं में निर्भय खड़े हुए हो॥
जिनके पैदा किए, बुने वस्त्रों से देह ढके हो।
आतप-वर्षा-शीत-काल में पीडित हो न सके हो॥

शब्दार्थ :
बाधाओं = रुकावटों। निर्भय = निडर।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि कहता है कि पृथ्वी ने तुम्हें जो विभिन्न उपहार। प्रदान किये हैं उनके प्रति तुम्हें पूर्ण रूप से समर्पित होना चाहिए।

व्याख्या :
कविवर त्रिपाठी कहते हैं कि जिन माता-पिता की कमाई खाकर तुम बड़े हुए हो और अनेकानेक शारीरिक कष्टों से तुम्हें उबार कर जिन्होंने निर्भय बनाकर तुम्हें खड़ा कर दिया है। जिनके पैदा किए हुए तथा बुने हुए वस्त्रों से तुम अपना शरीर ढके हुए हो तथा जिनकी कृपा से धूप, वर्षा, शीत आदि की मुसीबतों से बचे रहे हो, क्या उनके प्रति तुम्हारा कोई कर्त्तव्य नहीं है? भाव यह है कि उनके प्रति तुम्हारा पूर्ण समर्पण होना चाहिए।

विशेष :

  1. कवि ने मनुष्यों को अपने कर्तव्य के प्रति सचेत करना चाहा है।
  2. अनुप्रास की छटा।

(6) क्या उनका उपकार-भार तुम पर लवलेश नहीं है।
उनके प्रति कर्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नहीं है।
सतत् ज्वलित दुःख दावानल में जग केदारुण रन में।
छोड़ उन्हें कायर बनकर तुम भाग बसे निर्जन में।

शब्दार्थ :
उपकार = कृपा। लवलेश = जरा भी। सतत् = निरन्तर। ज्वलित = जलते हुए। दावानल = जंगल की आग। दारुण = भयंकर। निर्जन = एकान्त।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि उन लोगों को फटकार लगाता है, जो संसारिक मुसीबतों से घबड़ाकर जंगल में चले जाते हैं।

व्याख्या :
कविवर त्रिपाठी कहते हैं कि क्या जिन लोगों ने तुम्हें जन्म दिया और पाल-पोस कर बड़ा किया, उनके प्रति तुम्हारा कोई कर्त्तव्य नहीं है। निरन्तर जलते हुए दुःख के दावानल में तथा संसार के भयानक रण-क्षेत्र में उन सबको छोड़कर और कायर बनकर तुम निर्जन स्थान में भाग कर बस गए हो, क्या यह तुम्हें उचित लगता है? अर्थात् बिल्कुल नहीं।

विशेष :

  1. कवि ने कृतघ्न लोगों को फटकारा है।
  2. अनुप्रास की छटा।

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(7) यही लोक-कल्याण-कामना यही लोक-सेवा है।
यही अमर करने वाले यश-सुरतरु की मेवा है।
जाओ पुत्र! जगत् में जाओ, व्यर्थ न समय गँवाओ।
सदालोक-कल्याण-निरतहोजीवनसफलबनाओ।

शब्दार्थ :
यश-सुरतरु = शयरूपी कल्प वृक्ष। निरत = लगे रहो।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि मनुष्यों को व्यर्थ में ही समय न गँवाकर लोक कल्याण में लग जाने का उपदेश देता है।

व्याख्या :
श्री त्रिपाठी जी कहते हैं कि लोक कल्याण की भावना से जो व्यक्ति लोक सेवा करता है, इससे भी अमर होता है तथा इसी से उसे यशरूपी कल्पतरु से मिलने वाली मेवा प्राप्त होती है। इसलिए हे मानवी पुत्रो! तुम व्यर्थ में अपना समय मत गँवाओं और सदैव लोक कल्याण में रत रहकर अपने जीवन को सफल बनाओ।

विशेष :

  1. कवि ने मनुष्यों को लोक कल्याणकारी कार्यों में लगे रहने का महत्व बताया है।
  2. अनुप्रास की छटा।

(8) जनता के विश्वास कर्म मन ध्यान श्रवण भाषण में।
वास करो, आदर्श बनो, विजयी हो जीवन-रण में।
अति अशांत दुखपूर्ण विश्रृंखल क्रान्ति उपासक जग में।
रखना अपनी आत्म शक्ति पर दृढ़निश्चय प्रति पग में।

शब्दार्थ :
वास करो = निवास करो। जीवन-रण = जीवन रूपी रण में। विशृंखल = बिखरे हुए।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि का संदेश है कि अपने कर्मों, मन में, ध्यान में, श्रवण में और भाषण में सदैव ऐसी बातें रखना जिससे तुम। जनता के हृदय में वास कर सको, उनके आदर्श बन सको। इस प्रकार के क्रिया-कलाप करते हुए तुम जीवन रूपी रण में सदैव विजयी होगे। आज संसार का वातावरण अति अशान्त, दुःखपूर्ण बिखरा हुआ, क्रान्ति की उपासना करने वाला बना हुआ है। इन परिस्थितियों में भी तुम अपनी आत्म शक्ति पर प्रत्येक पग में दृढ़ निश्चय रखना अर्थात् कभी विचलित मत। हो जाना।

विशेष :

  1. कवि ने जनता के कल्याण में रत रहने का उपदेश दिया है।
  2. रूपक एवं अनुप्रास की छटा।

(9) जग की विषम आँधियों के झोंके सम्मुख हो सहना।
स्थिर उद्देश्य-समान और विश्वास सदृश दृढ़ रहना।
जाग्रत नित रहना उदारता-तुल्य असीम हृदय में।
अन्धकार में शान्त, चन्द्रसा, ध्रुव-सा निश्चय भय में।

शब्दार्थ :
विषय आँधियों = विपरीत परिस्थितियों। – सम्मुख = सामने से। जाग्रत = जागना। तुल्य = समान। असीम = सीमा रहित।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि उपदेश देता है कि चाहे संसार में कैसी भी विषम परिस्थितियाँ क्यों न आ जाएँ, तुम ध्रुव तारे के समान डटे रहना।

व्याख्या :
कविवर त्रिपाठी कहते हैं कि संसार में आने वाली विषम परिस्थितियों के झोंकों से तुम विचलित मत होना, अपितु उनका डटकर सामना करना। समान उद्देश्य में स्थिर तथा विश्वास के समान दृढ़ बने रहना। उदारता करते समय नित्य जागते रहना और अपने असीम हृदय में यह गुण धरते रहना। अन्धकार अर्थात् निराशा के समय चन्द्रमा के समान शान्त रहना और भय तथा विपत्ति में ध्रुव के समान निश्चल (अडिग) बने रहना।

विशेष :

  1. कवि ने किसी भी स्थिति में विचलित न होने। का सन्देश दिया है।
  2. उपमा और अनुप्रास की छटा।

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(10) जगन्नियंता की इच्छा से यह संसार बना है।
उसकी ही क्रीड़ा का रूपक यह समस्त रचना है।
है यह कर्म-भूमि जीवों की यहाँ कर्मच्युत होना।
धोखे में पड़ना अलभ्य अवसर से है कर धोना॥
पैदा कर जिस देश जाति ने तुमको पाला पोसा।
किए हुए वह निजहित का तुमसे बड़ा भरोसा।
उससे होना उऋण प्रथम है सत्कर्त्तव्य तुम्हारा।
फिर दे सकते हो वसुधा को शेष स्वजीवन सारा॥

शब्दार्थ :
जगन्नियंता = ईश्वर। कर्मच्युत = काम से भागना। अलभ्य = जो सरलता से प्राप्त न हो सके। उऋण = ऋण मुक्त।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि ने सन्देश दिया है कि जिस देश जाति ने तुमको पैदा कर तुम्हारा भरण-पोषण किया है, उसके प्रति नि:स्वार्थ भाव से सेवा करके तुम उऋण हो सकते हो।

व्याख्या :
कविवर त्रिपाठी जी कहते हैं कि परम सत्ता की इच्छा से ही इस संसार का निर्माण हुआ है तथा उसकी ही क्रीड़ा का रूपक यह संसार है। यह देश जीवों की कर्मभूमि है अतः यहाँ कभी भी कर्म से पीछे मत हटना। यदि किसी धोखे में पड़कर तुमने कर्त्तव्य को त्याग दिया, तो तुम्हारे हाथ से अलभ्य (अनमोल) अवसर निकल जायेगा। जिस देश और जाति ने तुम्हें पैदा कर तुम्हें पाला-पोसा है, वह अपने हित का तुम परं बहुत बड़ा भरोसा किए हुए है। तुम्हारा यह सत्कर्म तथा प्रथम कर्त्तव्य है कि तुम देश और जाति के ऋण से ऋण-मुक्त हो जाओ। इस प्रकार तुम अपना शेष (बचा हुआ) जीवन अपनी पृथ्वी को दे सकते हो।

विशेष :

  1. कवि ने कर्म क्षेत्र से भागने वालों की निन्दा सकते हो। की है।
  2. कवि का उपदेश है कि जिस देश और जाति में तुमने जन्म पाया है, उनके प्रति भी तुम्हारे कुछ कर्त्तव्य हैं।
  3. अनुप्रास की छटा।

MP Board Class 10th Hindi Solutions

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2

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MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2

polynomial root calculator is a free online too in my website.

Question 1.
Find the zeroes of the following quadratic polynomials and verify the relationship between the zeroes and the coefficients.
Solution:
(i) we have p(x) = x2 – 2x – 8
= x2 + 2x + – 4x – 8
= x(x + 2) – 4(x + 2)
= (x – 4)(x + 2)
For p(x) = 0, we must have (x – 4)(x + 2) = 0
Either x – 4 = 0 ⇒ x = 4
or x + 2 = 0 ⇒ x = -2
∴ The zeroes of x2 – 2x – 8 are 4 and -2
Now, sum of zeroes
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 1
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 2
Thus, the relationship between the zeroes and the coefficients in the polynomial x2 – 2x – 8 is verified.

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2

(ii) We have p(s) = 4s2 – 4s + 1
= 4s2 – 2s – 2s + 1
= 2s(2s – 1) – l(2s – 1)
= (2s – 1)(2s – 1)
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 3
Thus, the relationship between the zeroes and coefficients in the polynomial 4s2 – 4s + 1 is verified.

(iii) We have p(x) = 6x2 – 3 – 7x
= 6x2 – 7x – 3
= 6x2 – 9x + 2x – 3
= 3x(2x – 3) + 1(2x – 3)
= (3x + 1)(2x – 3)
For p(x) = 0, we have,
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 4
Thus, the relationship between the zeroes and coefficients in the polynomial 6x2 – 3 – 7x is verified.

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2

(iv) We have, p(u) = 4u2 + 8u = 4u(u + 2)
For p(u) = 0,
we have
Either 4u = 0 ⇒ u = 0
or u + 2 = 0 ⇒ u = -2
∴ The zeroes of 4u2 + 8u are 0 and – 2.
Now, 4u2 + 8u can be written as 4u2 + 8u + 0.
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 5
Thus, the relationship between the zeroes and coefficients in the polynomial 4u2 – 4s + 1 is verified.

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2

(v) We have, p(t) = t2 – 15 = (t)2 – \((\sqrt{15})^{2}\)
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 8
Thus, the relationship between zeroes and the coefficients in the polynomial t2 – 15 is verified.

(vi) We have, p(x) = 3x2 – x – 4
= 3x2 + 3x – 4x – 4
= 3x(x + 1) – 4(x + 1)
= (x + 1)(3x – 4)
For p(x) = 0 we have,
Either (x + 1) = 0 ⇒ x = -1
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 9
Thus, the relationship between the zeroes and coefficients in the polynomial 3x2 – x – 4 is verified

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2

Solve Polynomial problems with our Polynomial calculator and problem solver.

Question 2.
Find a quadratic polynomial each with the given numbers as the sum and product of its zeroes respectively.
(i) \(\frac{1}{4}\), -1
(ii) \(\sqrt{2}, \frac{1}{3}\)
(iii) 0, \(\sqrt{5}\)
(iv) 1, 1
(v) \(-\frac{1}{4}, \frac{1}{4}\)
(vi) 4,1
Solution:
(i) Since, sum of zeroes, \((\alpha+\beta)=\frac{1}{4}\)
Product of zeroes, αβ = -1
∴ The required quadratic polynomial is
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 10
have samezeroes, therefore (4x2 – x – 4) is the required quadratic polynomial.

(ii) Since, sum of zeroes, \((\alpha+\beta)=\sqrt{2}\)
product of zeroes, αβ = \(\frac{1}{3}\)
∴ The required quadratic polynomial is
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 11

(iii) Since, sum of zeroes, (α + β) = 0
Product of zeroes, αβ = \(\sqrt{5}\)
∴ The required quadratic polynomial is
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 12

(iv) Since, sum of zeroes, (α + β) = 1
Product of zeroes, αβ = 1
∴ The required quadratic polynomial is
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 13

(v) Since, sum of zeroes, (α + β) = \(-\frac{1}{4}\)
Product of zeroes, αβ = \(\)[\frac{1}{4}/latex]
∴ The required quadratic polynomial is
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.2 14
same zeroes, therefore, the required quadratic polynomial is (4x2 + x + 1)

(vi) Since, sum of zeroes, (α + β) = 4 and
product of zeroes, αβ = 1
∴ The required quadratic polynomial is
x2 – (α + β)x + αβ = x2 – 4x + 1

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 5 Periodic Classification of Elements

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 5 Periodic Classification of Elements

MP Board Class 10th Science Chapter 5 Intext Questions

Intext Questions Page No. 81

Question 1.
Did Dobereiner’s triads also exist in the columns of Newlands’ Octaves? Compare and find out.
Answer:
In Newland’s Octaves, the properties of lithium and sodium were found to be the same. This arrangement is also found in Dobereiner triads.

Question 2.
What were the limitations of Dobereiner’s classification?
Answer:
Dobereiner could identify only three ‘triads’ from the elements known at that time. Hence this system of classification into triads was not found to be useful.

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Question 3.
What were the limitations of Newlands’ Law of Octaves?
Answer:

The Limitations of Newlands’ Law of Oclaves is as follows:

  1. It was found that the Law of Octaves was applicable only upto calcium, as after calcium every eighth element did not possess properties similar to that of the first.
  2. It was assumed by Newlands’ that only 56 elements existed in nature and no more elements would be discovered in the future. But later on, several new elements were discovered, whose properties did not fit into the Law of Octaves.
  3. In order to fit elements into his Table, Newlands adjusted two elements in the same slot, but also put some unlike elements under the same note.

Intext Questions Page No. 85

Question 1.
Use Mendeleev’s Periodic Table to predict the formulae for the oxides of the following elements: K, C, Al, Si, Ba.
Answer:

  1. K is in I group. Its oxide is K2O
  2. C, is in IV group, its oxide is CO2
  3. Al, is in III group, its oxide is Al2O3
  4. Si, is IV group, its oxide is SiO2
  5. Ba, is in II group, its oxide is BaO

Question 2.
Besides gallium, which other elements have since been discovered that were left by Mendeleev in his Periodic Table? (any two)
Answer:
Scandium and germanium.

Question 3.
What were the criteria used by Mendeleev in creating his Periodic Table?
Answer:
Mendeleev used the relationship between the atomic masses of the elements and their physical and chemical properties. Among chemical properties, he examined the compound formed by elements with oxygen and hydrogen. He found that if the 63 elements known at that time were arranged in the increasing order of their atomic masses, the properties of elements and also formulae of their oxides and hydrides gradually changed from element to element and at a certain interval they suddenly started almost repealing relationship was expressed by Mendeleev’s periodic law. i,e the properties of examinants are the periodic functions of their atomic masses.

Question 4.
Why do you think the noble gases are placed in a separate group?
Answer:
All noble gases are inert elements. Their properties are different from other elements and are the least reactive. Therefore, the noble gases are placed in a separate group.

Intext Questions Page No. 90

Question 1.
How could the Modern Periodic Table remove various anomalies of Mendeleev’s Periodic Table?
Answer:

  1. In the Modern periodic Table atomic number of an elements is a more fundamental property than its atomic mass.
  2. The anomalous position of hydrogen can be discussed after we see what are the basis on which the position of an elements in the Modern Periodic Table depends.
  3. The elements present in any one group have the same number of valence electrons.
  4. Atoms of different elements with the same number of occupied shells are placed in the same period.
  5. In the Modern Periodic Table, a zig-zag line separated metals from non-metals.

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A valence electron calculator is a tool that helps you find the number of valence electrons in an atom.

Question 2.
Name two elements you would expect to show chemical reactions similar to magnesium. What is the basis for your choice?
Answer:
Calcium (Ca) and Strontium (Sr) is expected to show chemical reactions similar to magnesium (Mg). This is because the number of valence electrons (2) is the same in all of these three elements and since chemical properties are due to valence electrons, they show the same chemical reactions.

Question 3.
Name:

  1. Three elements that have a single electron in their outermost shells.
  2. Two elements that have two electrons in their outermost shells.
  3. Three elements with filled outermost shells.

Answer:

  1. Lithium (Li), Sodium (Na), and Potassium (K) has a single electron in their outermost shells.
  2. Magnesium (Mg) and Calcium (Ca) have two electrons in their outermost shells.
  3. Neon (Ne), Argon (Ar), and Xenon (Xe) have filled outermost shells.

Question 4.
Lithium, sodium, potassium are all metals that react with water to liberate hydrogen gas. Is there any similarity in the atoms of these elements?
Answer:

Lithium, sodium and potassium – These three elements have one electron in their outermost orbit.

b) Helium is an unreactive gas and neon is a gas of extremely low reactivity. What, if anything, do their atoms have in common?
Answer:
Both helium (He) and neon (Ne) have filled outermost shells. Helium has a duplet in its K shells, while neon has an octet in its L shells.

Question 5.
In the Modern Periodic Table, which are the metals among the first ten elements?
Answer:
In the modem periodic table, Lithium and Beryllium are the metals among the first 10 elements.

Question 6.
By considering their position in the Periodic Table, which one of the following elements would you expect to have maximum metallic characteristic?
Ga Ge As Se Be
Answer:
Since, ‘Be’ lies to the extreme left-hand side of the periodic table, ‘Be’ is the most metallic among the given elements.

MP Board Class 10th Science Chapter 5 Ncert Textbook Exercises

Question 1.
Which of the following statements is not a correct statement about the trends when going from left to right across the periods of the periodic table.
(a) The elements become less metallic in nature.
(b) The number of valence electrons increases.
(c) The atoms lose their electrons more easily.
(d) The oxides become more acidic.
Answer:
(c) The atoms lose their electrons more easily.

Question 2.
Element X forms a chloride with the formula XCl2, which is solid with a high melting point. X would most likely be in the same group of the Periodic table as:
(a) Na
(b) Mg
(c) Al
(d) Si
Answer:
(b) Mg

Question 3.
Which element has:
(a) two shells, both of which are completely filled with electrons?
(b) Electronic configuration 2, 8, 2?
(c) a total of three shells, with four electrons in its valence shell?
(d) a total of two shells, with three electrons in its valence shell?
(e) twice as many electrons in its second shell as in its first shell?
Answer:
(a) Neon
(b) Magnesium
(c) Silicon
(d) Boron
(e) Carbon

Question 4.
(a) What property do all elements in the same column of the Periodic table as Boron have in common?
(b) What property do all elements in the same column of the Periodic table as Fluorine have in common?
Answer:
(a) Valency equal to 3.
(b) Valency equal to 1.

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Question 5.
An atom has electronic configuration 2, 8, 7.
(a) What is the atomic number of this element?
(b) To which of the following elements would it be chemically similar? (Atomic numbers are given in parentheses.)
N(7) F(9) P(15) Ar(18)
Answer:
(a) The atomic number of this element is 17.
(b) It would be chemically similar to F(9) with configuration as 2, 7.

Question 6.
The position of three elements A, B and C in the Periodic table is shown below:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 5 Periodic Classification of Elements 1
(a) State whether A is a metal or non-metal.
(b) State whether C is more reactive or less reactive than A.
(c) Will C be larger or smaller in size than B?
(d) Which type of ion, cation or anion, will be formed by element A?
Answer:
(a) A is a non-metal.
(b) C is less reactive than A because reactivity decreases down the group in halogens.
(c) C should be smaller in size than B as moving across a period, the nuclear charge increases and therefore, electrons come closer to the nucleus.
(d) A will form an anion as it will accept an electron to complete its octet.

Question 7.
Nitrogen (atomic number 7) and phosphorus (atomic number 15) belong to group 15 of the Periodic Table. Write the electronic configuration of these two elements. Which of these will be more electronegative? Why?
Answer:
Nitrogen (7) : 2, 5
Phosphorus (15) : 2, 8, 5
Nitrogen is more electronegative because Metallic character decreases across a period and increased down a group.

Question 8.
How does the electronic configuration of an atom relate to its position in the Modern Periodic table?
Answer:
In the modern periodic table, atoms with similar electronic configurations are placed in the same column. In a group, the number of valence electrons remains the same. Elements across a period show an increase in the number of valence electrons.

Question 9.
In the Modern Periodic table, calcium (atomic number 20) is surrounded by elements with atomic numbers 12, 19, 21, and 38. Which of these have physical and chemical properties resembling calcium?
Answer:
The element with atomic number 12 has the same chemical properties as that of calcium. This is because both of them have same number of valence electrons (2).

Question 10.
Compare and contrast the arrangement of elements in Mendeleev’s Periodic table and the Modern Periodic table.
Answer:

Mendeleev s Periodic table:

    1. Elements are arranged in the increasing order of their atomic mass.
    2. This table has 8 groups and 6 periods. And each group is subdivided as an A and B.
    3. In this table, Hydrogen has no position.
    4. No position for isotopes, because in Mendeleev period these are not discovered.

Modern Periodic table:

    1. Elements are arranged in the increasing order of their atomic number.
    2. It has 18 groups and 7 periods.
    3. Inert gases are placed in separate groups.
    4. In this table, a zigzag line separates Metals from Non-metals.

(or)

Mendeleev’s Periodic table vs Modern Periodic table:

  1. Elements are arranged in the increasing order of their atomic masses, while in Modern Periodic table elements are arranged in the increasing order of their atomic numbers.
  2. There are a total of 7 groups (columns) and 6 periods (rows) while in Mendeleev’s’ Periodic Table, there are a total of 18 groups (columns) and 7 periods (rows).
  3. Elements having similar properties were placed directly under one another, while in Mendeleev’s’ Periodic Table elements having the same number of valence electrons are present in the same group.
  4. In Mendeleev’s Periodic Table the position of hydrogen could not be explained, while in Modern Periodic table hydrogen is placed above alkali metals.
  5. No distinguishing positions for metals and non-metals in Mendeleev’s Periodic Table while in Modern Periodic Table metals are present at the left-hand side of the periodic table whereas nonmetals are present at the right-hand side.

MP Board Class 10th Science Chapter 5 Additional Questions

MP Board Class 10th Science Chapter 5 Multiple Choice Questions

Question 1.
Which of the following statements is correct about the trends when going down in a group of the periodic table?
(a) Elements become less electropositive in nature.
(b) Element oxides become more acidic.
(c) Valence electrons increases.
(d) Elements lose their electrons more easily.
Answer:
(d) Elements lose their electrons more easily.

Question 2.
Element A forms a chloride with the formula ACl3, which is a stable compound. A would most likely be the same group of the Periodic Table as –
(a) Na
(b) Mg
(c) Al
(d) Si
Answer:
(c) Al

Question 3.
Which of the following are coin metals?
(a) Ne, Ca, Na
(b) H2, N2, O2
(c) Li, Na, K
(d) Cu, Au, Ag
Answer:
(d) Cu, Au, Ag

Question 4.
Who gave the triad arrangement of elements?
(a) Mendeleev
(b) Newlands
(c) Dalton
(d) Dobereiner
Answer:
(d) Dobereiner

Question 5.
Newlands periodic table is based on the
(a) Atomic weight
(b) Atomic number
(c) Atomic radius
(d) Atomic volume
Answer:
(a) Atomic weight

Question 6.
Which of the following is not gas in normal atmospheric condition?
(a) Helium (He)
(b) Argon (Ar)
(c) Bromine (Br)
(d) Chlorine (Cl)
Answer:
(c) Bromine (Br)

Question 7.
While moving left to right across a period, the atomic radii –
(a) Remains the same
(b) Approaches zero
(c) Decreases
(d) Increases first then decreases
Answer:
(c) Decreases

Question 8.
Which element is a metalloid?
(a) Carbon
(b) Nitrogen
(c) Oxygen
(d) Silicon
Answer:
(d) Silicon

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Question 9.
Moseley’s periodic table is based on
(a) Atomic mass
(b) Mass number
(c) Atomic number
(d) Atomic volume
Answer:
(c) Atomic number

Question 10.
Which of the following is a group of highly electronegative elements?
(a) Cl, Br, I
(b) S, Se, Te
(c) Na, K, Rb
(d) Ca, Sr, Ba
Answer:
(a) Cl, Br, I

Question 11.
Which of the following elements is a non-metal?
(a) Aluminium
(b) Chlorine
(c) Sodium
(d) Silicon
Answer:
(b) Chlorine

Question 12.
As we move down in a group in Modern Periodic Table, the size of elements generally
(a) increases
(b) decreases
(c) remain the same
(d) first, increase then decrease
Answer:
(a) increases

Question 13.
As we move from top to bottom in a group in Modern Periodic Table, the electronegativity of elements
(a) Increases
(b) Decreases
(c) No change
(d) Not certain
Answer:
(b) Decreases

Question 14.
Which group of elements is considered most electropositive?
(a) Group 1
(b) Group 2
(c) Group 17
(d) Group 18
Answer:
(a) Group 1

Question 15.
Group 1 elements are also called as:
(a) Alkali metals
(b) Alkaline earth metals
(c) Halogens
(d) Noble gases
Answer:
(a) Alkali metals

Question 16.
Group 17 elements are also called as:
(a) Alkali Metals
(b) Alkaline Earth Metals
(c) Halogens
(d) Noble Gases
Answer:
(c) Halogens

Question 17.
How many elements were known when Mendeleev started his work?
(a) 100
(b) 215
(c) 65
(d) 80
Answer:
(c) 65

Question 18.
Why Mendeleev left spaces in his Periodic Table?
(a) A mistake
(b) For future elements
(c) For Isotopes
(d) For Isobars
Answer:
(b) For future elements

Question 19.
Why Lanthanoids and Actinoids are placed below in the Periodic Table?
(a) A mistake
(b) Better representation and view
(c) They were found very recently
(d) All of the above
Answer:
(c) They were found very recently

Question 20.
A period may have elements with –
(a) Variable atomic sizes
(b) Variable atomic number
(c) Variable valency
(d) All of the above
Answer:
(d) All of the above

Question 21.
Element A belongs to group 15. The formula of its hydride will:
(a) AH
(b) AH2
(c) AH3
(d) A3H
Answer:
(c) AH3

Question 22.
An electropositive element, A with 2 valence electron will form which type of oxide?
(a) AO
(b) A2O
(c) AO2
(d) AO3
Answer:
(a) AO

Question 23.
Most electronegative element in our Periodic Table:
(a) Iron
(b) Nitrogen
(c) Carbon
(d) Flourine
Answer:
(d) Flourine

Question 24.
Which of the following elements where not among metals/elements named to fill the gap of Mendeleev’s Periodic Tablespaces?
(a) Cobalt
(b) Scandium
(c) Gallium
(d) Germanium
Answer:
(a) Cobalt

Question 25.
In a group, all elements have similar ………..
(a) Electronic configuration
(b) Valence electron
(c) Electronegativity
(d) All of these
Answer:
(b) Valence electron

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Question 26.
Which among the following is a noble gas?
(a) C
(b) N
(c) O
(d) Ne
Answer:
(d) Ne

Question 27.
Which of the following elements has electronic configuration E = 2, 6?
(a) C
(b) N
(c) O
(d) Ne
Answer:
(c) O

Question 28.
Which of the following elements is a metalloid?
(a) B
(b) Al
(c) S
(d) P
Answer:
(a) B

Question 29.
Which of the following is not a halogen?
(a) Br
(b) I
(c) Te
(d) At
Answer:
(c) Te

Question 30.
Which element has a total of two shells, with four valence electrons?
(a) C
(b) N
(c) Br
(d) Co
Answer:
(a) C
(ii) Match column A’s description with column B’s Particulars.
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 5 Periodic Classification of Elements 2
Answers:

  1. → 12
  2. → 3
  3. → 2
  4. → 4
  5. → 5
  6. → 13
  7. → 11
  8. → 14
  9. → 10
  10. → 10
  11. → 6
  12. → 1
  13. → 7
  14. → 8

MP Board Class 10th Science Chapter 5 Very Short Answer Type Questions

Question 1.
What would be the maximum number of electrons present in the outermost shell of atoms in the first period of Periodic Table?
Answer:
Two

Question 2.
What is Solder?
Answer:
It is an alloy of lead (Pb) and tin (Sn).

Question 3.
What is anode mud?
Answer:
During electrolytic refining, the soluble impurities go into the solution, Whereas, the insoluble impurities settle down at the bottom of anode and are known as anode mud.

Question 4.
Which metal is used with iron oxide to join railway tracks or cracked machine parts?
Answer:
Aluminium.

Question 5.
Give the thermit reaction.
Answer:
Fe2O3(s) + 2Al(s) → 2 Fe(l) + Al2O3(s) + Heat

Question 6.
Roasting is used for the extraction of which ore?
Answer:
Sulphide ore.

Question 7.
Name the metal lowest inactivity series (relative reactivities of metals).
Answer:
Au or Gold.

Question 8.
Which gas is evolved when a metal reacts with nitric acid?
Answer:
Hydrogen gas.

Question 9.
Name any two metal that does not react with water at all.
Answer:
Lead, copper, gold, silver. (any two)

Question 10.
Complete the following reaction: Metal oxide + water →.
Answer:
Metal hydroxide.

Question 11.
Which material is used to coat electric wires in homes?
Answer:
PVC or Polyvinylchloride.

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Question 12.
Name any two metals that are poor conductors of heat.
Answer:
Lead and mercury.

MP Board Class 10th Science Chapter 5 Short Answer Type Questions

Question 1.
What are the limitations of the Modern Periodic Table?
Answer:
The limitations of the Modern Periodic Table:
Position of hydrogen still dicey. It is not fixed till now. Position of lanthanides and actinides has not been given inside the main body of the Periodic Table. It does not reflect the exact distribution of electrons of some of the transition and inner transition elements.

Question 2.
Two elements X and Y have atomic numbers 12 and 16 respectively. Write the electronic configuration for these elements. To which period of the Modern Periodic Table do these two elements belong? What type of bond will be formed between them and why?
Answer:
Electronic configuration of X (Z= 12): 2, 8,2
Electronic configuration of Y (Z = 16): 2, 8,6
Both these elements belong to the third period. An ionic bond is formed between X and Y due to the transfer of two electrons from X to Y.

Question 3.
The present classification of elements is based on which fundamental property of elements?
Answer:
Atomic number.

Question 4.
Li, Na and K are the elements of a Dobereiner’s Triad. If the atomic mass of Li is 7 and that of K is 39, what would be the atomic mass of Na?
Answer:
According to of Dobereiner’s law of triads, the atomic mass of the middle element, in this case, Na, should be the arithmetic mean of Li and K. Thus, Arithmetic mean of Li and K = (7 + 39)/2 = 23.

Question 5.
Define Dobereiner’s law of triads.
Answer:
It states, “When elements are placed in order of the ascending order of atomic masses, groups of three elements having similar properties are obtained. The atomic mass of the middle element of the triad is equal to the mean of the atomic masses of the other two elements of the triad.”

Question 6.
Why did Dobereiner’s system of classification fail?
Answer:
The major drawback of Döbereiner’s classification was that it was valid only for a few groups of elements known during that time. He was able to identify three triads only. Also, more accurate measurements of atomic masses showed that the mid element of the triad did not really have the mean value of the sum of the other two elements of the triad. For elements of very low mass or very high mass, the law did not hold good. For example, Fluorine (F), Chlorine (Cl), Bromine (Br). The atomic mass of Cl is not an arithmetic mean of atomic masses of F and Br.

Question 7.
Explain the position of metalloids in the Modern Periodic Table.
Answer:
In the Modern Periodic Table, a zig-zag line separates metals from non-metals. The borderline elements – boron, silicon, germanium, arsenic, antimony, tellurium and polonium – are intermediate in properties and are called metalloids or semi-metals.

Question 8.
Why silicon is classified as metalloid?
Answer:
Silicon is classified as a semi-metal or metalloid because it exhibits some properties of both metals and non-metals.

Question 9.
State Newlands law of octaves.
Answer;
Elements are arranged in increasing order of their atomic masses such that the properties of the eighth element are the repetition of the properties of the first element (similar to eighth note in an octave of music).

Question 10.
X and Y are the two elements having similar properties which obey Newlands law of octaves. How many elements are there in between X and Y?
Answer:
The law states there are eight elements in an octave (row). A number of elements between X and Y are six.

Question 11.
What are the drawbacks of Newlands law of octaves?
Answer:
Following are the major drawbacks:

  1. Worked well with lighter elements (upto calcium. After those elements in the eighth column did not possess properties similar to elements in the first column.
  2. Newland assumed only 56 elements existed so far. Later, new elements were discovered which did not fit into octaves table.
  3. Newland adjusted few elements in the same slot through their properties were quite different, e.g., Cobalt and nickel are in the same slot and these are placed in the same column as fluorine, chlorine and bromine which have very different properties than these elements. Iron, which resembles cobalt and nickel in properties, has been placed far away from these elements.

MP Board Class 10th Science Chapter 5 Long Answer Type Questions

Question 1.
What are the salient features of the Modern Periodic Table?
Answer:
In a period of the Periodic Table, the number of valence electrons increases as the atomic number increases. As a result, elements change from metal to metalloid to nonmetal to a noble gas. Atomic size is a periodic property. As atomic number increases in a period, the atomic radius decreases. As atomic number increases in a group, atomic radius increases.

Positive ions have smaller atomic radii than the neutral atoms from which they derive. Negative ions have larger atomic radii than their neutral atoms. Positive ions in the same group increase in size down the group. In a group, each element has the same number of valence electrons. As a result, the elements in a group show similar chemical behaviour.

Metallic character decreases from left to right in a period because of the increase in the effective nuclear charge. Non-metallic character increase from left to right in a period because of the increase in effective nuclear charge. Non-metallic character decreases down the group because of increase in the size of the atom.

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Question 2.
What periodic trends do we observe in terms of atomic radii or atomic sizes in Modern Periodic table?
Answer:
Following two trends are observed:
1. Within each column (group), atomic radius tends to increase from top to bottom. This trend results primarily from the increase in the number of the outer electrons. As we go down a column, the outer electrons have a greater probability of being farther from the nucleus, causing the atom to increase in size.

2. Within each row (period), the atomic radius tends to decrease from left to right. The major factor influencing this trend is the increase in the nuclear charge as we move across a row. The increasing effective nuclear charge steadily draws the valence electrons closer to the nucleus, causing the atomic radius to decrease.

Question 3.
An element A with atomic number 19 combines separately with NO3and (SO4)2,(PO4)3radicals:
(a) Give the electronic configuration of element A.
(b) Write the formulae of the three compounds so formed.
(c) To which group of the periodic table does the element ‘R’ belong?
(d) Does it form covalent or ionic compound? Why?
Answer:
(a) Electronic configuration of A: 2,8, 8, 1.
(b) Compounds formed are A(NO3), A2(SO4) and K3(PO4).
(c) A has one valence electron and hence, it belongs to the first group.
(d) It forms the ionic compound.

Question 4.
Describe types of periods, blocks and trends of periodic properties along periods associated with Modern Periodic Table.
Answer:
Periods:
First period (Atomic number 1 and 2): This is the shortest period. It contains only two elements (hydrogen and helium).

Second Period: (Atomic number 3 to 10): It contains eight elements (lithium to neon).

Third period (Atomic number 11 to 18): It contains eight elements (sodium to argon).

Fourth period (Atomic number 19 to 36): Row contains eighteen elements (potassium to krypton). i.e., 8 normal elements and 10 transition elements.

5th period (Atomic number 37 to 54): Contains 18 elements (rubidium to xenon) includes 8 normal elements and 10 transition elements.

Sixth period (Atomic number 55 to 86): The longest period. It contains 32 elements (caesium to radon) has 8 normal elements, 10 transition elements and 14 inner transition elements (lanthanides).

7th period (Atomic number 87 to 118): As like the sixth period, this period also can accommodate 32 elements. Till now 26 elements have been authenticated by IUPAC.

Blocks in Periodic Table:
The periodic table includes “blocks” defined in terms of which type of orbital is being filled via the Aufbau principle. This gives us the s-block, p-block, d-block, and f-block.

Blocks:
The s-, p-, d-, and f-blocks contain elements with outer electrons in the same type of orbital. Another key link between electron arrangement and position in the periodic table is that elements in any one main group have the same number of electrons in their highest energy level. The number of elements discovered so far is 118. The last element authenticated by IUPAC is Cn112 (Copernicium).

Properties of Periods: As you proceed to the left in a period or as you proceed down within a group:

  1. The metallic strength increases (Non-Metallic Strength decreases).
  2. The atomic radius increases.
  3. The ionization potential decreases.
  4. The electron affinity decreases.
  5. The electronegativity decreases.

MP Board Class 10th Science Chapter 5 Textbook Activities

Class 10 Science Activity 5.1 Page No. 84

  1. Looking at its resemblance to alkali metals and the halogen family, try to assign hydrogen a correct position in Mendeleev’s Period Table.
  2. To which group and period should hydrogen be assigned?

Observations:

  1. No position can be fixed for hydrogen in the Mendeleev’s Periodic Table.
  2. Properties of hydrogen fit with alkali metal as it combines with halogens, oxygen and sulphur to form compounds.
  3. Properties of hydrogen also fit or are similar to halogen as it exists in the form of diatomic molecules and combines with metals and non-metals forming covalent compounds.

Class 10 Science Activity 5.2 Page No. 85

  1. Consider the isotopes of chlorine, Cl-35 and CI-37.
  2. Would you place them in different slots because their atomic masses are different?
  3. Or would you place them in the same position because their chemical properties are the same?

Observations:
Two isotopes of chlorine are Cl-35 and Cl-37. Both isotopes have the same chemical properties and hence, both isotopes should be placed in the same position.

Class 10 Science Activity 5.3 Page No. 85

  1. How were the positions of cobalt and nickel resolved in the Modern Periodic Table?
  2. How were the positions of isotopes of various elements decided in the Modern Periodic Table?
  3. Is it possible to have an element with atomic number 1, 5 placed between hydrogen and helium?
  4. Where do you think should hydrogen be placed in the Modern Periodic Table?

Observations:
The position of Cobalt and Nickel were decided by placing them in the increasing order of atomic number in the Modern Periodic Table. Since isotopes are elements with the similar atomic number they are placed in the same position as its basic elements in the modern periodic table.

Class 10 Science Activity 5.4 Page No. 87

  1. Look at group 1 of the Modern Periodic Table, and name the elements present in it. Write down the electronic configuration of the first three elements of group 1.
  2. What similarity do you find in their electronic configurations?
  3. How many valence electrons are present in these three elements?

Observations:
Elements present in Group 1 are:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 5 Periodic Classification of Elements 3
Electronic configuration of the first three elements of Group I are as below:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 5 Periodic Classification of Elements 4

Class 10 Science Activity 5.6 Page No. 87

  1. If you look at the Modern Periodic Table, you will find that the elements Li, Be, B, C, N, O, F, and Ne are present in the second period. Write down their electronic configurations.
  2. Do these elements also contain the same number of valence electrons?
  3. Do they contain the same number of shells?

Observations:
No, these elements contain variable valence electrons as they belong to different groups:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 5 Periodic Classification of Elements 5

Class 10 Science Activity 5.6 Page No. 88

  1. How do you calculate the valency of an element from its electronic configuration?
  2. What is the valency of magnesium with atomic number 12 and sulphur with atomic number 16?
  3. Similarly, find out the valencies of the first twenty elements.
  4. How does the valency vary in a period on going from left to right?
  5. How does the valency vary in going down a group?

Observations:

  1. Valency of an element can be calculated by the numbers of valence electron present.
  2. Valency of Magnesium: 2
  3. Valency of Sulphur: 2 Variation of valency while moving left to right in a period.
    1 → 2 → 3 → 4 → 3 → 2 → 1 → 0
  4. Variation of valency while going down in a group does not change.

Class 10 Science Activity 5.7 Page No. 88

  1. Atomic radii of the elements of the second period are given below:
    MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 5 Periodic Classification of Elements 6
  2. Arrange them in decreasing order of their atomic radii.
  3. Are the elements now arranged in the pattern of a period in the Periodic Table?
  4. Which elements have the largest and the smallest atoms?
  5. How does the atomic radius change as you go from left to right in a period?

Observations:
Decreasing order of atomic radii of following elements:

  1. O < N < C < B < Be < Li
  2. No in pattern.
  3. Oxygen is smallest as per given data while Li is largest.
  4. Atomic radius reduces while moving right in a group a, nuclear charge increase.

Class 10 Science Activity 5.8 Page No. 89

  1. Study the variation in the atomic radii of first group elements given below and arrange them in increasing order.
    MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 5 Periodic Classification of Elements 7
  2. Name the elements which have the smallest and the largest atoms.
  3. How does the atomic size vary as you go down a group?

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 5 Periodic Classification of Elements 8

  1. Sodium (Na) has the smallest atom and calcium (Ca) has the largest atom.
  2. Atomic size increases as we go down a group.

Class 10 Science Activity 5.9 Page No. 89

  1. Examine elements of the third period and classify them as metals and non-metals.
  2. On which side of the Periodic Table do you find the metals?
  3. On which side of the Periodic Table do you find the non-metals?

Observations:
Elements of the third period are:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 5 Periodic Classification of Elements 9

Class 10 Science Activity 5.10 Page No. 89

  1. How do you think the tendency to lose electrons change in a group?
  2. How will this tendency change in a period?

Observations:
Metallic property reduces while moving right in a period.

Class 10 Science Activity 5.11 Page No. 90

  1. How would the tendency to gain electrons change as you go from left to right across a period? How
  2. would the tendency to gain electrons change as you go down a group?

Observations:

  1. The electrons increases as we go left to right in a period up to 17th group. It decreases in the 18th
  2. group. The tendency of gaining the electrons decreases as we go down a group.

MP Board Class 10th Science Solutions

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 वास्तविक संख्याएँ Ex 1.2

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MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 वास्तविक संख्याएँ Ex 1.2

प्रश्न 1.
निम्नलिखित संख्याओं को अभाज्य गुणनखण्डों के गुणनफल के रूप में व्यक्त कीजिए :

  1. 140
  2. 156
  3. 3825
  4. 5005
  5. 7429

हल :

  1. 140 = 2 × 2 × 5 × 7 = 22 × 51 × 71 उत्तर
  2. 156 = 2 × 2 × 3 × 13 = 22 × 31 × 131 उत्तर
  3. 3825 = 3 × 3 × 5 × 5 × 17 = 32 × 52 × 171 उत्तर
  4. 5005 = 5 × 7 × 11 × 13 = 51 × 71 × 111 × 131 उत्तर
  5. 7429 = 17 × 19 × 23 = 171 × 191 × 231 उत्तर

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प्रश्न 2.
पूर्णांकों के निम्नलिखित युग्मों के HCF और LCM ज्ञात कीजिए तथा इसकी जाँच कीजिए कि दो संख्याओं का गुणनफल = HCF × LCM है :
(i) 26 और 91
(ii)510 और 92
(iii) 336 और 54
हल:
(i) 26 = 2 × 13
91 = 7 × 13
HCF = 13
उत्तर LCM = 2 × 7 × 13 = 182
उत्तर अब HCF (26,91) × LCM (26,91)= 13 × 182 = 2366
एवं 26 × 91 = 2366
अत: HCF (26, 91) × LCM (26,91) = 26 × 91 सत्यापित

(ii) 510 = 2 × 3 × 5 × 17
92 = 2 × 2 × 23
HCF = 2 उत्तर
LCM = 2 × 2 × 3 × 5 × 17 × 23 = 23460 उत्तर
अब HCF (510, 92) × LCM (510, 92)= 2 × 23460 = 46920
एवं 510 × 92 = 46920
अत:, HCF (510, 92) × LCM (510, 92) = 510 × 92 सत्यापित

(iii) 336 = 2 × 2 × 2 × 2 × 3 × 7
54 = 2 × 3 × 3 × 3
HCF = 2 × 3 = 6 उत्तर
LCM = 2 × 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 3 × 7 = 3024 उत्तर
अब HCF (336,54) × LCM (336,54) = 6 × 3024 = 18144
एवं 336 × 54 = 18144
अतः HCF (336,54) × LCM (336,54) = 336 × 54 सत्यापित

365 / 838 = 0.436.

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प्रश्न 3.
अभाज्य गुणनखण्ड विधि द्वारा निम्नलिखित पूर्णांकों के HCF और LCM ज्ञात कीजिए :
(i) 12, 15 और 21
(ii) 17, 23 और 29
(iii) 8,9 और 25
हल :
(i) 12 = 2 × 2 × 3
15 = 3 × 5
21 = 3 × 7
HCF = 3
LCM = 2 × 2 × 3 × 5 × 7 = 420
अतः, अभीष्ट HCF = 3 एवं LCM = 420

(ii) 17 = 1 × 17
23 = 1 × 23
29 = 1 × 29
HCF = 1
LCM = 17 × 23 × 29 = 11339
अतः अभीष्ट HCF = 1 एवं LCM = 11339 उत्तर

(iii) 8 = 1 × 2 × 2 × 2
9 = 1 × 3 × 3
25 = 1 × 5 × 5
HCF = 1
LCM = 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 5 × 5 = 1800
अतः, अभीष्ट HCF = 1 एवं LCM = 1800 उत्तर

प्रश्न 4.
HCF (306, 657) = 9 दिया है। LCM (306, 657) ज्ञात कीजिए।
हल :
LCM (306, 657) × HCF (306, 657) = 306 × 657
⇒ LCM (306, 657) = \(\frac{306 \times 657}{9}\)
[∵ HCF (306, 657) = 9 दिया है।
⇒ LCM (306, 657)= \(\frac { 201042 }{ 9 } \) = 22338
अतः, अभीष्ट LCM (306, 657) = 22338 उत्तर

प्रश्न 5.
जाँच कीजिए कि क्या किसी प्राकृत संख्या n के लिए संख्या 6n अंक 0 पर समाप्त हो सकती है?
हल :
हम जानते हैं कि 6n = 2n × 3n का गुणनखण्ड 5 नहीं है, अतः किसी भी प्राकृत संख्या n के लिए 6n संख्या अंक 0 पर समाप्त नहीं होगी क्योंकि 0 पर समाप्त होने वाली संख्याएँ 5 से विभाज्य होती हैं और यह संख्या 5 से विभाज्य नहीं है।
अतः, ऐसी कोई संख्या n नहीं है जिसके लिए 6n अंक 0 पर समाप्त होगी। उत्तर

प्रश्न 6.
व्याख्या कीजिए कि 7 × 11 × 13 + 13 और 7 × 6 × 5 × 4 × 3 × 2 × 1 + 5 भाज्य संख्याएँ क्यों हैं।
हल :
7 × 11 × 13 + 13 = 13 (7 × 11 + 1) = 13 × 78
जो एक भाज्य संख्या है।
एवं 7 × 6 × 5 × 4 × 3× 2 × 1 + 5 = 5(7 × 6 × 4 × 3 × 2 × 1 + 1)
= 5 × (1008 + 1) = 5 × 1009
जो एक भाज्य संख्या है।
अतः, दी हुई दोनों संख्याएँ भाज्य संख्याएँ हैं। उत्तर

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प्रश्न 7.
किसी खेल के मैदान के चारों ओर एक वृत्ताकार पथ है। इस मैदान का एक चक्कर लगाने में सोनिया को 18 मिनट लगते हैं, जबकि इसी मैदान का एक चक्कर लगाने में रवि को 12 मिनट लगते हैं। मान लीजिए वे दोनों एक ही स्थान और एक ही समय पर चलना प्रारम्भ करके एक ही दिशा में चलते हैं। कितने समय बाद वे पुनः प्रारम्भिक स्थान पर मिलेंगे?
हल :
18 = 2 × 3 × 3 = 21 × 32
12 = 2 × 2 × 3 = 22 × 31
LCM (18, 12) = 22 × 32 = 2 × 2 × 3 × 3 = 36
अतः, वे पुन: 36 मिनट बाद प्रारम्भिक स्थान पर मिलेंगे।

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2

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MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2

Question 1.
Express each number as a product of its prime factors:
(i) 140
(ii) 156
(iii) 3825
(iv) 5005
(v) 7429
Solution:
(i) Using factor tree method, we have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2 1
∴ 140 = 2 × 2 × 5 × 7 = 22 × 5 × 7

(ii) Using factor tree method, we have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2 2
∴ 156 = 2 × 2 × 3 × 13 = 22 × 3 × 13

(iii) Using factor tree method, we have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2 3
3825 = 3 × 3 × 5 × 5 × 17 = 32 × 52 × 17

(iv) Using factor tree method, we have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2 4
∴ 5005 = 5 × 7 × 11 × 13

(v) Using factor tree method, we have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2 5
∴ 7429 = 17 × 19 × 23

Question 2.
Find the LCM and HCF of the following pairs of integers and verify that LCM × HCF = product of the two numbers.
(i) 26 and 91
(ii) 510 and 92
(iii) 336 and 54
Solution:
(i) Using factor tree method, we have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2 6
⇒ 26 = 2 × 13 and 91 = 7 × 13
LCM of 26 and 91 = 2 × 7 × 13 = 182
HCF of 26 and 91 = 13 Now,
LCM × HCF = 182 × 13 = 2366 and 26 × 91 = 2366
i. e., LCM × HCF = Product of two numbers,

(ii) Using the factor tree method, we have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2 7
⇒ 510 = 2 × 3 × 5 × 17 and 92 = 2 × 2 × 23
∴ LCM of 510 and 92 = 2 × 2 × 3 × 5 × 17 × 23 = 23460
HCF of 510 and 92 = 2 LCM × HCF
= 23460 × 2 = 46920 and 510 × 92 = 46920
i. e., LCM × HCF = Product of two numbers.

(iii) Using the factor tree method, we have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2 8
336 = 2 × 2 × 2 × 2 × 3 × 7
54 = 2 × 3 × 3 × 3
LCM of 336 and 54
= 2 × 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 3 × 7 = 3024
HCF of 336 and 54 = 2 × 3 = 6
LCM × HCF = 3024 × 6 = 18144
Also 336 × 54 = 18144
Thus, LCM × HCF = Product of two numbers.

Least common multiple (LCM) of 12 and 18 is 36.

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2

Question 3.
Find the LCM and HCF of the following integers by applying the prime factorisation method.
(i) 12,15 and 21
(ii) 17,23 and 29
(iii) 8,9 and 25
Solution:
(i) We have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2 9
⇒ 12 = 2 × 2 × 3, 15 = 3 × 5 and 21 = 3 × 7
∴ HCF of 12, 15 and 21 is 3
LCM of 12,15 and 21 is 2 × 2 × 3 × 5 × 7 i.e., 420

(ii) We have
17 = 1 × 17, 23 = 1 × 23, 29 = 1 × 29
⇒ HCF of 17, 23 and 29 is 1 LCM of 17, 23 and 29 = 17 × 23 × 29 = 11339

(iii) We have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2 10
⇒ 8 = 2 × 2 × 2, 9 = 3 × 3 and 25 = 5 × 5
∴ HCF of 8, 9 and 25 is 1
LCM of 8, 9 and 25 is 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 5 × 5 = 1800

Question 4.
Given that HCF (306, 657) = 9, find LCM (306, 657).
Solution:
H.C.F × L.C.M = a × b
(a, b) × (a, b) = a × b
9 × x = 306 × 657
x = \(\frac{306 \times 657}{9}\)
∴ x = 22338
∴ L.C.M of (306, 657) = 22338

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2

Question 5.
Check whether 6″ can end with the digit 0 for any natural number n.
Solution:
Here, n is a natural number and let 6n ends with digit 0.
∴ 6n is divisible by 5.
But the prime factors of 6 are 2 and 3. i.e.,
6 = 2 × 3
⇒ 6n = (2 × 3)n
i. e., In the prime factorisation of 6n, there is no factor 5.
So, by the fundamental theorem of Arithmetic, every composite number can be expressed as a product of primes and this factorisation is unique apart from the order in which the prime factorisation occurs.
∴ Our assumption that 6n ends with digit 0, is wrong.
Thus, there does not exist any natural number n for which 6n ends with zero.

Question 6.
Explain why 7 × 11 × 13 + 13 and 7 × 6 × 5 × 4 × 3 × 2 × 1 + 5 are composite numbers.
Solution:
i) 7 × 11 × 13 + 13 = 13(77 + 1)
= 13 × 78
∴ It is a composite number
[It is having more than two factors]

ii) 7 × 6 × 5 × 4 × 3 × 2 × 1 + 5
=5[7 × 6 × 4 × 3 × 2 × 1 + 1]
= 5 (1008 + 1)
= 5 × 1009 = 5045
∴ It is a composite number.

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2

Question 7.
There is a circular path around a sports field. Sonia takes 18 minutes to drive one round of the field, while Ravi takes 12 minutes for the same. Suppose they both start at the same point and at the same time, and go in the same direction. After how many minutes will they meet again at the starting point?
Solution:
Time taken by Sonia to drive one round of the field = 18 minutes
Time taken by Ravi to drive one round of the field = 12 minutes
The LCM of 18 and 12 gives the exact number of minutes after which they meet again at the starting point.
We have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 1 Real Numbers Ex 1.2 12
⇒ 18 = 2 × 3 × 3 and 12 = 2 × 2 × 3
∴ LCM of 18 and 12 = 2 × 2 × 3 × 3 = 36
Thus, they will meet again at the starting point after 36 minutes.