MP Board Class 11th Special Hindi छन्द

MP Board Class 11th Special Hindi छन्द

छन्द शब्द छद् धातु से निष्पन्न होकर असन् प्रत्यय लगाने से बना है। इसका अर्थ है प्रसन्न करना, बाँधना अथवा आच्छादित करना। छन्द मात्रिक और वार्णिक भेदों के आधार पर ध्वनियों के क्रम से गति और यति के नियमों से बँधा होता है। इससे कविता में प्रवाह, लय और संगीतात्मकता की उत्पत्ति होती है। छन्दों के दो भेद हैं

1. मात्रिक और वर्णिक
[2008]

मात्राओं की गणना किए जाने वाले छन्दों को मात्रिक छन्द और वर्गों की संख्या तथा हस्व दीर्घ स्वरों की गणना किए जाने वाले छन्दों को वर्णिक छन्द कहते हैं।

2. कुण्डलियाँ
[2008, 09, 12]

कुण्डलियाँ छः पंक्तियों का छन्द है। इसके प्रथम दो दल दोहे के तथा अन्तिम चार दल रोला के होते हैं। इसके प्रत्येक चरण में 24-24 मात्राएँ होती हैं।
उदाहरण- 1
ऽऽ।।।। ऽ।।।।।।ऽऽ =24
सोई अवसर के परे को न सहै दुःख द्वन्द्व
ऽ।। ऽऽ ऽ।।। ऽ ऽ ऽ ।।ऽ। =24
जाय बिकाने डोम घर वै राजा हरिचन्द
वै राजा हरिश्चन्द करै मरघट रखवारी।
धरे तपस्वी भेष फिरे अर्जुन बलधारी।।
कह गिरिधर कविराय, तपै वह भीम रसोई।
को न करै घटि काम सरे अवसर के सोई।।

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उदाहरण 2
।।ऽ।।।।ऽ।।।।। ऽऽ ऽ ऽ।
“रहिये लट पट काटि दिन, बरु धामें मौ सोय।
छाँह न बाकी बैठिये, जो तरु पतरो होय।।” 13 + 11 = 24
ऽ।।।। ऽ ऽ। ऽ।।। ऽऽ ऽऽ
जो तरु पतरो होय एक दिन धोखा दै है।
जो दिन चले बयारि टूटि जर से जै हे।। 11 + 13 – 24
कह गिरधर’ कविराय, छाँह मोटे की गहिये।
पाती सब झरिजाय, तऊ छाया में रहिये।।

उदाहरण
3-“तुक बन्दी का बढ़ रहा, कविता में अति जोर।
लगे नाचने मुर्गे भी, समझ स्वयं को मोर।।
समझ स्वयं को मोर, अर्थ तक नहीं जानते।
पढ़ औरों से गीत, गर्व से रस बखानते।।
कहै कपिल समुझाय, चल रही है दलबन्दी।
कविता रोती आज हँस रही है तुकबन्दी।।

3. घनाक्षरी
[2008]

घनाक्षरी छन्द के प्रत्येक चरण में 32 वर्ण होते हैं। 8, 8, 8, 8 पर यति और अन्त में गुरु-लघु (51) आते हैं।
उदाहरण-
।।।ऽऽ।।।ऽ।ऽऽ। ऽ ऽ।
नगर से दूर कुछ, गाँव की सी बस्ती एक
।।ऽ।ऽ ऽऽऽ।।।।।।। = 32
हरे भरे खेतों के, समीप अति अभिराम।।
जहाँ पत्र जाल अन्तराल से झलकते हैं।
लाल खपरैल श्वेत छज्जों के सँवारे धाम।।

उदाहरण
1-“लखि घनश्याम तन, मोर है मगन मन,
सुमन सकल अलि गावहिं गुनन-गुनन।
जीवनि को जीवन-प्रदायक सबहिं विधि,
नाचैं बनसीकर सु-धारन छनन-छनन।।
सीतल सुगन्ध मन्द कहति त्रिविधि वायु,
मधुर-मधुर स्वप्न करति सनन-सनन।
हषीकेश सुषमा अलौकिक विलोकि अहो?
परम अगम सुख मिलतु जनन-जनन।।

उदाहरण
2. भूरी हरी घास आस-पास फूली सरसों है,
पीली-पीली बिन्दियों का चारों ओर है प्रसार।
कुछ दूर विरल सघन फिर और आगे,
एक रंग मिला चला पीत पारावार।।
गाढ़ी हरी श्यामता की तुंग राशि रेखा धनी,
बाँधती है दक्षिण की और उसे घेर घार।
जोड़ता है जिसे खुले नीचे नीले नभ मण्डल से,
धुंधली सी नीली नगमाला उठी धुआँधार।।

4. मन्दाक्रान्ता
[2014]

यह छन्द मगण, भगण, नगण दो तगण तथा दो गुरुओं के योग से बनता है। इसके प्रत्येक चरण में 17 वर्ण होते हैं। चौथे, छठे और सातवें वर्ण पर यति होती है।
उदाहरण-
ऽऽ ऽऽ।।।।। ऽ ऽ 1 ऽऽ। ऽ ऽ = 17 वर्ण
धाता द्वारा सृजित जग में हो धरा मध्य आ के
ऽऽऽऽ।।।।। ऽ।ऽ ऽ। ऽ ऽ
पाके खोये विभव कित प्राणियों ने अनेकों।
ऽऽऽऽ।।।।। ऽ ऽ ऽ ऽ । ऽऽ
जैसा प्यारा विभव ब्रज के हाथ से आज खोया।
ऽऽऽऽ।।।।। ऽऽ। ऽऽ।ऽऽ
पाके ऐसा विभव वसुधा में न खोया किसी ने।।

प्रश्नोत्तर

  • लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
काव्य की परिभाषा किन्हीं दो संस्कृत आचार्यों एवं एक हिन्दी आचार्य के अनुसार लिखिए। [2009]
उत्तर-
संस्कृत आचार्यों के अनुसार काव्य की परिभाषा-
(1) आचार्य विश्वनाथ ने “रसात्मकं वाक्यं काव्यम्” कहा है।
(2) पण्डितराज जगन्नाथ ने “रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्”कहा है।
हिन्दी आचार्य के अनुसार काव्य की परिभाषा-प्रश्न संख्या 2 देखिए।

प्रश्न 2.
हिन्दी के एक आचार्य की काव्य की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
हिन्दी में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की परिभाषा इस प्रकार है-“जिस प्रकार आत्मा की मुक्तावस्था ज्ञान दशा कहलाती है, उसी प्रकार हृदय की मुक्तावस्था रस दशा कहलाती है। हृदय की इसी मुक्ति साधना के लिए मनुष्य की वाणी जो शब्द-विधान करती आई है उसे कविता कहते हैं।”

प्रश्न 3.
काव्य के प्रमुख भेद कौन-से माने गये हैं?
उत्तर-
भारतीय आचार्यों ने काव्य के दो प्रकार माने हैं—
(i) श्रव्य काव्य,
(ii) दृश्य काव्य।
श्रव्य काव्य-जिस काव्य की आनन्दानुभूति पढ़ने या सुनने से होती है, उसे श्रव्य काव्य कहते हैं; जैसे-कविता, कहानी आदि।
(ii) दृश्य काव्य-जिस काव्य की अनुभूति अभिनय आदि देखकर होती है, उसे दृश्य काव्य कहते हैं; जैसे—नाटक, प्रहसन आदि।

प्रश्न 4.
प्रबन्ध काव्य के प्रमुख भेद कौन-से हैं?
उत्तर–
प्रबन्ध काव्य के दो भेद माने गये हैं—

  • महाकाव्य,
  • खण्डकाव्य।

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प्रश्न 5.
महाकाव्य किसे कहते हैं? एक महाकाव्य का नाम लिखिए।
उत्तर—
महाकाव्य में किसी महापुरुष के जीवन का समग्र चित्रण होता है। इसमें मुख्य कथा के साथ प्रासंगिक कथाएँ भी होती हैं। इसमें शृंगार, वीर, शान्त आदि रसों की योजना की जाती है। इसकी कथा कुछ खण्डों, सर्गों, काण्डों आदि में विभाजित होती है। रामचरितमानस हिन्दी का श्रेष्ठ महाकाव्य है।

प्रश्न 6.
महाकाव्य एवं खण्डकाव्य की विशेषताएँ बताते हुए प्रमुख महाकाव्यों एवं खण्डकाव्यों के नाम लिखिए।
अथवा [2009]
खण्डकाव्य की दो विशेषताएँ बताइए। [2015]
अथवा
खण्डकाव्य के दो लक्षण एवं एक खण्डकाव्य एवं उसके रचनाकार का नाम लिखिए। [2016]
उत्तर—
प्रबन्ध काव्य के दो भेद-
(1) महाकाव्य एवं
(2) खण्डकाव्य माने गये हैं।

(1) महाकाव्य–महाकाव्य शब्द ‘महत्’ और ‘काव्य’ दो शब्दों के योग से बना है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार होती हैं—
(1) महाकाव्य में किसी महापुरुष के समग्र जीवन का चित्रण होता है।
(2) इसमें प्रमुख कथा के साथ-साथ प्रासंगिक कथाएँ भी होती हैं और
(3) इसमें वीर, शान्त एवं शृंगार रसों की योजना होती है; जैसे-साकेत, प्रियप्रवास महाकाव्य हैं।

(2) खण्डकाव्य-खण्डकाव्य में जीवन के एक खण्ड का चित्रण होता है। इसकी कथा स्वयं में पूर्ण होती है; जैसे—पंचवटी (मैथिलीशरण गुप्त), रश्मिरथी (रामधारी सिंह ‘दिनकर’) खण्डकाव्य हैं।

प्रश्न 7.
महाकाव्य और खण्डकाव्य में अन्तर बताइए। [2014, 17]
उत्तर—
(1) महाकाव्य में जीवन का समग्र चित्रण होता है, जबकि खण्डकाव्य में जीवन का खण्ड चित्र प्रस्तुत हो पाता है।
(2) महाकाव्य का आकार विस्तृत होता है किन्तु खण्डकाव्य का आकार सीमित होता है।
(3) महाकाव्य में कई सर्ग, खण्ड, काण्ड आदि होते हैं, जबकि खण्डकाव्य में कम सर्ग, खण्ड, काण्ड होते हैं।
(4) पात्रों, घटनाओं आदि की संख्या महाकाव्य में अधिक होती है, खण्डकाव्य में कम।

प्रश्न 8.
मुक्तक काव्य किसे कहते हैं? [2012]
उत्तर-
वह पद्य रचना जिसके छन्द स्वतः पूर्ण और स्वतन्त्र रहते हैं और किसी क्रम से संचालित नहीं होते हैं, मुक्तक काव्य कहलाते हैं; जैसे-बिहारी सतसई, दोहावली।

प्रश्न 9.
प्रबन्ध काव्य तथा मुक्तक काव्य में अन्तर बताइए। दो मुक्तक काव्यकारों के नाम लिखिए। [2009]
उत्तर-
प्रबन्ध काव्य में छन्दों का पूर्वापर सम्बन्ध होता है। इसमें छन्दों का क्रम बदलना सम्भव नहीं है जबकि मुक्तक काव्य में प्रत्येक छन्द का स्वतः पूर्ण अर्थ होता है। ये किसी क्रम से संचालित नहीं होते हैं। रामचरितमानस, प्रिय प्रवास प्रबन्ध काव्य हैं तथा बिहारी सतसई, सूर सागर मुक्तक रचनाओं के ग्रन्थ हैं।

मुक्तक काव्यकार—सूरदास, मीराबाई एवं बिहारी।

प्रश्न 10.
मुक्तक काव्य की दो विशेषताएँ बताते हुए एक मुक्तक काव्य रचना का नाम लिखिए।
उत्तर—
मुक्तक काव्य की दो विशेषताएँ इस प्रकार हैं
(i) मुक्तक काव्य के प्रत्येक छन्द का अर्थ स्वयं में पूर्ण होता है। इसके छन्दों का पूर्वापर सम्बन्ध नहीं होता है।
(ii) मुक्तक काव्य के छन्द किसी क्रम से संचालित नहीं होते हैं। ‘बिहारी सतसई’ हिन्दी की श्रेष्ठ मुक्तक काव्य कृति है।

प्रश्न 11.
काव्य में गुण कितने प्रकार के होते हैं? परिभाषित कीजिए। [2014]
अथवा
काव्य गुण के प्रकार लिखते हुए प्रसाद गुण की परिभाषा सोदाहरण दीजिए। [2009]
अथवा
काव्य में ओजगुण किसे कहते हैं? [2012]
उत्तर–
शब्द गुण तीन प्रकार के माने गये हैं-
(i) माधुर्य,
(ii) ओज एवं
(iii) प्रसाद।

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(i) माधुर्य—जिस काव्य के सुनने या पढ़ने से मन पुलकित हो उठे और कानों को मधुर प्रतीत हो, वहाँ माधुर्य गुण होता है।
(ii) ओज-जिस काव्य के सुनने या पढ़ने से चित्त की उत्तेजना वृत्ति जाग्रत हो, वह रचना ओज गुण सम्पन्न होती है।
(iii) प्रसाद-जिस रचना के सुनने या पढ़ने से हृदय प्रभावित हो, बुद्धि निर्मल बने, मन खिल उठे, उसमें प्रसाद गुण होता है।

प्रश्न 12.
शब्द-शक्ति किसे कहते हैं? इसके भेद बताइए। [2009]
उत्तर-
शब्द और अर्थ के सम्बन्ध को शब्द-शक्ति कहते हैं। यह सम्बन्ध ही शब्द का अर्थ व्यक्त करता है। शब्द-शक्ति के तीन प्रकार माने गये हैं –
(i) अभिधा,
(ii) लक्षणा एवं
(iii) व्यंजना।

प्रश्न 13.
अभिधा, लक्षणा तथा व्यंजना की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
अभिधा—शब्द और अर्थ का साक्षात् सम्बन्ध अभिधा कहलाता है। परम्परागत रूप में प्रचलित मुख्य अर्थ का बोध कराने वाली शब्द-शक्ति अभिधा कहलाती है, जैसे—श्याम
का अर्थ काला।
लक्षणा–शब्द के मुख्य अर्थ में बाधा होने पर उसके सहयोग से रूढ़ि अथवा प्रयोजन के आधार पर अन्य अर्थ लक्षित कराने वाले शब्द-शक्ति लक्षणा कहलाती है; जैसे—’मोहन तो शेर है’ में लक्षणा के द्वारा शेर का अर्थ वीर निकलता है। [2009, 16]
व्यंजना—जब अभिधा और लक्षणा से अर्थ व्यक्त नहीं होता है तब व्यंजना शब्द-शक्ति की सहायता से व्यंग्यार्थ निकलता है। जैसे—’गंगा में घर है’ में गंगा के समान घर की पवित्रता प्रकट होती है। [2010]

प्रश्न 14.
छन्द की परिभाषा देते हुए उसके भेद बताइए। [2009, 17]
अथवा
छन्द किसे कहते हैं? इसके प्रमुख प्रकार बताइए। [2011]
उत्तर-
परिभाषा-वर्ण, मात्रा, यति, तुक आदि का ध्यान रखकर की गयी शब्द रचना छन्द कहलाती है। इससे काव्य में प्रवाह, संगीतात्मकता तथा प्रभावशीलता आ जाती है।
प्रकार-छन्द दो प्रकार के होते हैं-
(1) मात्रिक छन्द,
(2) वर्णिक छन्द।

  • मात्रिक छन्द-जिस छन्द में मात्राओं की गणना की जाती है उसे मात्रिक छन्द कहते [2015]
  • वर्णिक छन्द-वर्णिक छन्द में वर्गों की गणना की जाती है।

प्रश्न 15.
घनाक्षरी और कुण्डली छन्दों का अन्तर बताइए।
उत्तर-
कुण्डली मात्रिक छन्द है जबकि घनाक्षरी वर्णिक छन्द है। कुण्डली में छः चरण होते हैं। प्रथम दो चरण दोहा के तथा बाद के चार चरण रोला के होते हैं। प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं। जबकि घनाक्षरी के प्रत्येक चरण में 32 वर्ण होते हैं। इसमें 8,8,8,8 पर यति और अन्त में गुरु-लघु आते हैं।

प्रश्न 16.
अलंकार की परिभाषा एवं भेद लिखिए। [2017]
उत्तर-
आचार्य दण्डी ने लिखा है ‘काव्य शोभाकरान्त धर्मान् अलंकारान् प्रचक्षते’ अर्थात् काव्य का सौन्दर्य बढ़ाने वाले धर्म अलंकार कहलाते हैं।

शब्द और अर्थ के आधार पर अलंकारों के तीन प्रकार माने गये हैं-
(i) शब्दालंकार,
(ii) अर्थालंकार, व
(iii) उभयालंकार।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित में किस शब्द-शक्ति का प्रयोग हुआ है
(i) सुनील ने आसमान सिर पर उठा रखा है।
(ii) अपनी जन्मभूमि से सबको प्यार होता है।
(iii) रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरे मोती मानस चून।।
उत्तर—
इन पंक्तियों में शब्द-शक्तियाँ इस प्रकार हैं
(i) लक्षणा,
(ii) अभिधा,
(iii) व्यंजना।

प्रश्न 18.
निम्नलिखित काव्य पंक्तियों में अलंकार बताइए [2009]
(i) जान स्याम घनस्याम को, नाच उठे वन मोर।
(ii) सत्य कहहुँ हौं दीनदयाला।
बन्धु न होय मोर यह काला।।
(iii) मैं निज रोदन में राग लिए फिरता हूँ,
शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूँ।
उत्तर-
(i) भ्रान्तिमान अलंकार,
(ii) अपहृति अलंकार,
(iii) विरोधाभास अलंकार।

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प्रश्न 19.
अलंकारों के प्रकारों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
अलंकारों के तीन प्रकारों का परिचय इस प्रकार है
(1) शब्दालंकार—जहाँ शब्द से काव्य की शोभा बढ़ती है, वहाँ शब्दालंकार होता है; जैसे–अनुप्रास, यमक, श्लेष आदि।
(2) अर्थालंकार-जिनमें अर्थ के कारण सौन्दर्य वृद्धि होती है, वे अर्थालंकार कहलाते हैं; जैसे—उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा आदि।
(3) उभयालंकार-कुछ अलंकारों में शब्द और अर्थ दोनों का चमत्कार विद्यमान रहता है, वे उभयालंकार कहलाते हैं।

प्रश्न 20.
सन्देह और भ्रान्तिमान अलंकारों में सोदाहरण अन्तर बताइए। [2008,09, 12, 13, 14]
उत्तर-
सन्देह अलंकार में उपमेय में उपमान का सन्देह रहता है तथा भ्रान्तिमान अलंकार में उपमेय का ज्ञान नहीं रहता है, भ्रमवश उसे उपमान समझ लिया जाता है। सन्देह में निरन्तर सन्देह बना ही रहता है कि यह है या नहीं, जबकि भ्रान्तिमान में भ्रम अन्ततः प्रतीति बन जाता है। अतः सन्देह में अनिश्चय तथा भ्रान्तिमान में निश्चय होता है।

उदाहरण सन्देह रस्सी है या साँप।
भ्रान्तिमान-रस्सी नहीं साँप है।

प्रश्न 21.
श्लेष अलंकार की परिभाषा लिखिए। [2015]
उत्तर-
जहाँ एक शब्द के एक से अधिक अर्थ निकलते हैं वहाँ श्लेष अलंकार होता है।

प्रश्न 22.
श्रृंगार रस और वीर रस में भेद बताइए। (कोई तीन) [2015]
उत्तर-
श्रृंगार रस और वीर रस में तीन भेद इस प्रकार हैं-
(1) श्रृंगार रस का स्थायी भाव ‘रति’ होता है जबकि वीर रस का स्थायी भाव उत्साह होता है।
(2) शृंगार रस में आलम्बन प्रेमी (नायक-नायिका) होते हैं किन्तु वीर रस का आलम्बन शत्रु होता है।
(3) श्रृंगार रस में माधुर्य गुण की अधिकता होती है जबकि वीर रस में ओज गुण का प्राधान्य पाया जाता है।

प्रश्न 23.
हास्य रस की परिभाषा एवं उदाहरण लिखिए। [2017]
उत्तर-
परिभाषा-विचित्र रूप, वेष, वाणी, चेष्टा आदि के कारण हृदय में जाग्रत हास भाव पुष्ट होकर हास्य रस में परिणत होता है।

उदाहरण—
बिन्ध्य के बासी उदासी तपोव्रतधारी महाबिनु नारि दुखारे।
गौतम तीय तरी, तुलसी, सो कथा सुनि भै मुनि वृंद सुखारे।
है हैं सिला सब चन्द्रमुखी परसे पद-मंजुल कंज तिहारे।
कीन्हीं भली रघुनायक जू करुना करि कानन को पगु धारे॥

  • अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पद्य के तीन प्रकारों के नाम लिखिए।
उत्तर—
पद्य के तीन प्रकार—
(i) प्रबन्ध काव्य,
(ii) मुक्तक काव्य, तथा
(iii) गीतिकाव्य, माने गये हैं।

प्रश्न 2.
हिन्दी के दो महाकाव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर-
‘रामचरितमानस’ तथा ‘पद्मावत’ हिन्दी के श्रेष्ठ महाकाव्य हैं।

प्रश्न 3.
हिन्दी के दो खण्डकाव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर—
‘पंचवटी’ तथा ‘कुरुक्षेत्र’ हिन्दी के श्रेष्ठ खण्डकाव्य हैं।

प्रश्न 4.
‘रसात्मकं वाक्यं काव्यम्’ किसकी परिभाषा है?
उत्तर—
‘रसात्मकं वाक्यं काव्यम्’ आचार्य विश्वनाथ द्वारा दी गई काव्य की परिभाषा है।

प्रश्न 5.
पण्डितराज जगन्नाथ ने काव्य की क्या परिभाषा दी है?
उत्तर-
पण्डितराज जगन्नाथ ने काव्य की परिभाषा देते हुए लिखा है-‘रमणीयार्थ प्रतिपादकःशब्द:काव्यम्’ अर्थात् रमणीय अर्थ का प्रतिपादन करने वाले शब्द ही काव्य कहलाते हैं।

प्रश्न 6.
आधुनिक काल के दो महाकाव्यों के नाम लिखिए। उत्तर-‘प्रियप्रवास’ तथा ‘कामायनी’ आधुनिक काल के प्रमुख महाकाव्य हैं।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित पंक्ति में गुण बताइए ‘हे, प्रभो आनन्ददाता ! ज्ञान हमको दीजिए।’
उत्तर-
इस पंक्ति में ‘प्रसाद गुण’ है। प्रश्न 8. ओज गुण का उदाहरण लिखिए। [2016]
उत्तर-
ओज गुण से युक्त दो पंक्तियाँ इस प्रकार हैं
“बुन्देले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।”

प्रश्न 9.
वीर रसपूर्ण काव्य में किस गुण की अधिकता रहती है?
उत्तर–
वीर रसपूर्ण काव्य में ओज गुण’ की अधिकता रहती है।

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प्रश्न 10.
माधुर्य गुण युक्त काव्य में कैसे वर्गों का प्रयोग होता है?
उत्तर-
माधुर्य गुण युक्त काव्य में य, र, ल, ग, ज आदि कोमल वर्णों का प्रयोग होता है।

प्रश्न 11.
प्रसाद गुण युक्त काव्य में कैसे शब्दार्थ का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर-
प्रसाद गुण युक्त काव्य में सरल शब्दार्थ का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 12.
माधुर्य गुण किन रसों से युक्त काव्य में होता है?
उत्तर-
करुण, शृंगार या शान्त रसों से युक्त काव्य में माधुर्य गुण होता है।

प्रश्न 13.
शब्द-शक्ति किसे कहते हैं?
उत्तर–
शब्द और अर्थ के सम्बन्ध को शब्द-शक्ति कहते हैं।

प्रश्न 14.
अभिधा शब्द-शक्ति किसे कहते हैं?
उत्तर-
शब्द और अर्थ के साक्षात् सम्बन्ध को अभिधा शब्द-शक्ति कहते हैं; जैसे— स्वर्ण का अर्थ सोना।

प्रश्न 15.
“बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी।” में कौन-सी शब्द शक्ति है?
उत्तर-
इस पंक्ति में लक्षणा शब्द-शक्ति है।

प्रश्न 16.
“सूर्योदय हो गया।” में शब्द-शक्ति बताइए।
उत्तर-
सूर्योदय हो गया।’ का अर्थ है कि हमें जागकर शीघ्र विद्यालय जाना चाहिए। अतः इसमें व्यंजना शब्द-शक्ति है।

प्रश्न 17.
‘राकेश तो गधा है।’ में शब्द शक्ति बताइए।
उत्तर-
राकेश तो गधा है।’ में लक्षणा शब्द-शक्ति है।

प्रश्न 18.
‘प्रेम पर्यो चपल चुचाइ पुतरीन सों’ में कौन-सी शब्द शक्ति है?
उत्तर-
‘प्रेम पर्यो चपल चुचाइ पुतरीन सों’ में व्यंजना शब्द-शक्ति है।

प्रश्न 19.
वर्ण किसे कहते हैं?
उत्तर-
अक्षर को ही वर्ण कहते हैं, जैसे—क, ख, ग आदि।

प्रश्न 20.
निम्नांकित पंक्तियों में छन्द बताइए
सच्चे स्नेही अवनिजन के देश के श्याम जैसे।
राधा जैसे सदय-हृदया विश्व प्रेमानुरक्ता।।
हे विश्वात्मा! भरत भुव के अंक में और आवें।
ऐसी व्यापी विरह-घटना किन्तु कोई न होवे।।
उत्तर-
इन पंक्तियों में ‘मन्दाक्रान्ता’ छन्द का प्रयोग हुआ है।

प्रश्न 21.
निम्नांकित पद्य का छन्द बताइए-
“करनी विधि की देखिये, अहो न बरनी जाति।
हरनी के नीके नयन बसै विपिन दिन राति।।
बसै विपिन दिनराति बराबर बरही कीने।
कारी छवि कलकण्ठ किये फिर काक अधीने।।
बरनै दीनदयाल धीर धरते दिन धरनी।
बल्लभ बीच वियोग, विलोकहु निधि की करनी।।”
उत्तर—
इस पद्य का छन्द कुण्डली है।

प्रश्न 22.
छन्द के अंग बताइए।
उत्तर-
वर्ण, मात्रा, यति, चरण, तुक और गण छन्द के अंग होते हैं।

प्रश्न 23.
निम्नांकित पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है
किधी सूर को सर लग्यो, किधौं सूर की पीर।
किधौं सूर को पद लग्यो, रह-रह धुनत शरीर।।
उत्तर—
इन पंक्तियों में ‘सन्देह’ अलंकार है।

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प्रश्न 24.
निम्न पंक्तियों में कौन-से छन्द का प्रयोग हुआ है? स्पष्ट कीजिए
S SSS I III ISSIS SISS
“जो मैं कोई विहग उड़ता देखती व्योम में हूँ।
तो उत्कण्ठा विवश हो चित्त में सोचती हूँ।”
उत्तर—
इसमें 4,6 और 7 वर्णों पर यति होती है, इसलिए यह मन्दाक्रान्ता छन्द है।

प्रश्न 25.
‘कान्ह-दूत कैधो ब्रह्मदूत कै पधारे आय’ में कौन-सा अलंकार है?
उत्तर-
कान्ह-दूत कैधो ब्रह्मदूत है पधारे आय’ में ‘सन्देह’ अलंकार है।

प्रश्न 26.
जहाँ विरोध न होते हुए भी विरोध प्रतीत हो वहाँ कौन-सा अलंकार होता है?
उत्तर-
जहाँ विरोध न होते हुए भी विरोध प्रतीत हो वहाँ विरोधाभास’ अलंकार होता है।

प्रश्न 27.
वह कौन-सा अलंकार है जिसमें उपमेय में उपमान का भ्रम हो जाता है?
उत्तर-
जहाँ उपमेय में उपमान का भ्रम हो जाये वहाँ भ्रान्तिमान’ अलंकार होता है।

प्रश्न 28.
विरोधाभास अलंकार का उदाहरण लिखिए। [2016]
उत्तर-
“वा मुख की मधुराई कहा कहों,
मीठी लगे अँखियान लुनाई।” .

सम्पूर्ण अध्याय पर आधारित महत्त्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  • बहु-विकल्पीय प्रश्न

1. ‘रसात्मकं वाक्यं काव्यम्’ परिभाषा है— [2009, 16]
(i) आचार्य विश्वनाथ की,
(ii) पण्डितराज जगन्नाथ की,
(iii) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की,
(iv) भामह की।

2. निम्नलिखित में से प्रबन्ध काव्य नहीं है [2009]
(i) साकेत,
(ii) सूरसागर,
(iii) कामायनी,
(iv) रामचरितमानस।

3. महाकाव्य में होता है [2010]
(i) जीवन का खण्ड चित्रण,
(ii) जीवन का वृहत् चित्रण,
(iii) दोहा छन्द,
(iv) उत्साह भाव।

4. इनमें से कौन-सा काव्य खण्डकाव्य नहीं है? [2012, 14]
(i) पंचवटी,
(ii) रश्मिरथी,
(iii) प्रियप्रवास,
(iv) सुदामा चरित।

5. महाकाव्य में कम-से-कम कितने सर्ग होने चाहिये? [2017]
(i) तीन,
(ii) पाँच,
(iii) चार,
(iv) आठ।

6. शब्द और अर्थ का साक्षात् सम्बन्ध होता है
(i) व्यंजना में,
(ii) लक्षणा में,
(iii) अभिधा में,
(iv) किसी में नहीं।

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7. चित्त की उत्तेजना वृत्ति से सम्बन्ध होता है
(i) ओज गुण का,
(ii) प्रसाद गुण का,
(iii) माधुर्य गुण का,
(iv) किसी का नहीं।

8. “राजा शिवराज के नगारन की धाक सुनि, केते बादशाहन की छाती दरकति है।” में गुण है
(i) माधुर्य,
(ii) ओज,
(iii) प्रसाद,
(iv) कोई नहीं।

9. छन्द कितने प्रकार के होते हैं?
(i) चार प्रकार के,
(iv) तीन प्रकार के,
(iii) पाँच प्रकार के,
(iv) दो प्रकार के।

10. काव्य की शोभा बढ़ाने वाले धर्म कहलाते हैं
(i) शब्द-शक्ति,
(ii) अलंकार,
(iii) छन्द,
(iv) गुण।

11. ‘रस्सी है या साँप’ में अलंकार है….
(i) उपमा,
(ii) रूपक,
(iii) भ्रान्तिमान,
(iv) सन्देह।

12. वीर, भयानक, रौद्र रसों में प्रधानता होती है [2011]
(i) माधुर्य गुण,
(ii) ओज गुण,
(iii) प्रसाद गुण,
(iv) शब्द गुण।

13. श्रृंगार रस का स्थायी भाव है [2015]
(i) रति,
(ii) जुगुप्सा
(iii) हास्य,
(iv) रौद्र।
उत्तर-
1. (i), 2. (ii), 3. (ii), 4.(i), 5. (iv), 6. (iv), 7. (i), 8. (ii), 9. (iv), 10. (ii), 11. (iv), 12. (ii), 13. (i)।

  • रिक्त स्थान पूर्ति

1. रामचरितमानस ……….. है। [2008]
2. खण्डकाव्य में जीवन का ………. चित्रण होता है।
3. वीर, भयानक तथा रौद्र रस पूर्ण काव्य में ………” गुण होता है।
4. माधुर्य गुण में ……….” वर्णों की प्रधानता होती है। [2010]
5. ‘भूरा तो उल्लू है’ में ………. शब्द-शक्ति है।
6. ‘प्रेम पर्यो चपल चुचाइ पुतरीन सौं’ में ……….” शब्द-शक्ति है।
7. शब्द के ……. प्रकार होते हैं।
8. वर्गों की गिनती के आधार पर जिस छंद की रचना होती है, उसे ….. छंद कहते हैं। [2016]
9. विरोध न होते हुए भी जहाँ विरोध का आभास हो, वहाँ ……… अलंकार होता है। [2009]
10. ‘मुख है किधौ मयंक है’ में ………. अलंकार है। 11. रस के ……….” अंग हैं। [2011]
12. दोहा छन्द ……….. काव्य है। [2012]
13. काव्य की शोभा बढ़ाने वाले धर्म ……….’ कहलाते हैं। [2014]
14. शान्त रस का स्थायी भाव ………. है।। [2017]
उत्तर-
1. महाकाव्य, 2. खण्ड, 3. ओज, 4. कोमल, 5. लक्षणा, 6. व्यंजना, 7. तीन, 8. वर्णिक, 9. विरोधाभास, 10. सन्देह, 11. चार, 12. मुक्तक, 13. अलंकार, 14. निर्वेद।

  • सत्य/असत्य

1. प्रबन्ध काव्य में जीवन का खण्ड चित्रण होता है।
2. पंचवटी एक महाकाव्य है। [2008]
3. ‘साकेत’ मैथिलीशरण गुप्त जी द्वारा रचित एक महाकाव्य है। [2017]
4. शब्द और अर्थ का साक्षात् सम्बन्ध अभिधा कहलाता है।
5. जिस छन्द में मात्राओं की गणना की जाती है, वह मात्रिक छन्द है। [2014]
6. वर्ण, मात्रा, यति, चरण, तुक एवं गण छन्द के अंग होते हैं।
7. जहाँ एक वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है, वहाँ यमक अलंकार होता है। [2015]
8. मन्दाक्रान्ता छन्द में 17 वर्ण होते हैं।
9. ‘रस्सी नहीं साँप है’ में भ्रान्तिमान अलंकार है।
10. स्थायी भाव, संचारी भाव, विभाव और अनुभाव रस के चार अंग हैं। [2008]
11. माधुर्य गुण शृंगार, वात्सल्य और शान्त रस में पाया जाता है। [2008]
12. मुक्तक काव्य में प्रत्येक छन्द अपने आपमें स्वतन्त्र नहीं होता है। [2008]
13. “क्रान्तिधात्रि ! कविते जाग उठ आडम्बर में आग लगा दे।” इस पंक्ति में माधुर्य गुण है। [2008]
14. ‘जुगन-जुगन समझावत हारा कहा न मानत कोई रे।’ इस पंक्ति में अनुप्रास अलंकार [2011]
15. जो भाव मानव हृदय में स्थायी रहते हैं, उन्हें संचारी भाव कहते हैं। [2008, 16]
16. रस को काव्य की आत्मा कहा जाता है। [2008]
17. प्रत्येक रस का एक-एक स्थायी भाव होता है। [2010]
उत्तर-
1. असत्य, 2. असत्य, 3. सत्य,4. सत्य, 5. सत्य, 6. सत्य, 7. असत्य, 8. सत्य, 9. सत्य, 10. सत्य, 11. सत्य, 12. असत्य, 13. असत्य, 14. असत्य, 15. असत्य, 16. सत्य, 17. सत्य।

जोड़ी मिलाइए
I. 1. महाकाव्य [2015] – (क) पण्डितराज जगन्नाथ
2. ‘रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्’ परिभाषा है – (ख) रामचरितमानस
3. रसात्मकं वाक्यं काव्यम् [2010, 14] – (ग) व्यंजना
4. ‘चिन्मय नाक में दम किए रहता है’ में शब्द-शक्ति है – (घ) आचार्य विश्वनाथ
5. ‘राम का घर गंगा में है’ में शब्द-शक्ति है। – (ङ) माधुर्य लक्षणा
उत्तर-
1.→ (ख),
2. → (क),
3. → (घ),
4. →(ङ),
5. →(ग)।

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II. 1. जहाँ काव्य सुनने से मन पुलकित हो, वहाँ गुण होता है। – (क) वर्णिक छन्द
2. जिस छन्द में वर्गों की गणना की जाती है, उसे कहते हैं। – (ख) घनाक्षरी छन्द
3. जिसमें 32 वर्ण हों तथा 8,8,8,8 पर यति हो उसे कहते हैं – (ग) माधुर्य
4. जिसका अर्थ ‘चिपका हुआ’ [2017] – (घ) सन्देह अलंकार
5. जहाँ समानता से अप्रस्तुत का संशय हो जाय, वहाँ होता है – (ङ) श्लेष
उत्तर-
1. → (ग),
2. → (क),
3. → (ख),
4. → (ङ),
5. → (घ)।

  • एक शब्द /वाक्य में उत्तर

1. विस्तृत कलेवर वाले वाक्य को क्या कहते हैं?
2. जिस काव्य में प्रत्येक पद अपने आप में स्वतंत्र रहता है, उसे क्या कहते हैं? [2016]
3. गद्य-पद्य मिश्रित रचना को क्या नाम दिया गया है?
4. शब्द के प्रचलित अर्थ का बोध कराने वाली शब्द-शक्ति का क्या नाम है?
5. व्यंग्यार्थ को व्यक्त करने वाली शब्द-शक्ति को क्या कहते हैं? [2009]
6. जिस रचना को सुनने से चित्त में उत्तेजना पैदा होती है उसमें कौन-सा गुण होता है?
7. सरल शब्दार्थ का प्रयोग किस गुण में किया जाता है?
8. जहाँ भ्रमवश एक वस्तु में दूसरी की कल्पना की जाये, वहाँ कौन-सा अलंकार होता है?
9. जब अनिश्चय की स्थिति लगातार बनी रहती है, तो कौन-सा अलंकार होता है? [2016]
10. जिसमें प्रथम दो चरण दोहा के तथा चार चरण रोला के हों वहाँ कौन-सा छन्द होता है?
11. ‘सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है’ में कौन-सा अलंकार है?
12. ‘पतन पाप पाखंड जले’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है? [2012, 14]
13. ‘तरनि तनुजा तट तमाल तरुवर बहु छाये’ पंक्ति में निहित अलंकार का नाम लिखिए। [2013]
14. ‘चारु चन्द्र की चंचल किरणें’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है? [2017]
उत्तर—
1. महाकाव्य, 2. मुक्तक काव्य 3. चम्पू, 4. अभिधा, 5. व्यंजना, 6. ओज, 7. प्रसाद में, 8. भ्रान्तिमान, 9. सन्देह अलंकार, 10. कुण्डलियाँ, 11. सन्देह, 12. अनुप्रास, 13. अनुप्रास, 14. अनुप्रास।

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MP Board Class 11th Special Hindi अलंकार

MP Board Class 11th Special Hindi अलंकार

काव्य की शोभा में वृद्धि करने वाले साधनों को अलंकार कहते हैं। अलंकार से काव्य में रोचकता, चमत्कार और सुन्दरता उत्पन्न होती है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने अलंकार.को काव्य की आत्मा ठहराया है।

1. भ्रान्तिमान अलंकार [2010]

जहाँ प्रस्तुत वस्तु को देखकर किसी विशेष समानता के कारण किसी दूसरी वस्तु का भ्रम हो जाये, वहाँ भ्रान्तिमान अलंकार होता है। जैसे
(1) जान स्याम घनस्याम को, नाच उठे वन मोर।
(2) चंद के भरम होत, मोद है कुमोदिनी को।
(3) नाक का मोती अधर की कांति से,
बीज दाडिम का समझकर भ्रान्ति से,
देखकर सहसा हुआ शुक मौन है,
सोचता है, अन्य शुक यह कौन है?

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(4) कपि करि हृदय विचार, दीन्ह मुद्रिका डारि तब।
जनु अशोक अंगार, दीन्ह हरषि उठि कर गहेउ।।

(5) चाहत चकोर सूर ओर, दृग छोर करि।
चकवा की छाती तजि धीर धसकति है।।

2. सन्देह अलंकार
[2008]

जहाँ रूप, रंग और गुण की समानता के कारण किसी वस्तु को देखकर यह निश्चय न हो कि यह वही वस्तु है, वहाँ सन्देह अलंकार होता है। इसमें अन्त तक संशय बना रहता है।
(1) सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है।
कि सारी ही की नारी है कि नारी ही की सारी है।।

(2) परत चन्द्र प्रतिबिम्ब कहुँ जलनिधि चमकायो,
कै तरंग कर मुकुर लिए, शोभित छवि छायो।
कै रास-रमन में हरि मुकुट आभा जल बिखरात है,
कै जल-उर हरि मूरति बसत ना प्रतिबिम्ब लखात है।

(3) तारे आसमान के हैं आये मेहमान बनि, केशों में निशाने मुक्तावलि सजाई है।
बिखर गई है चूर-चूर के चन्द कैधों, कैधों घर-घर दीपमालिका सुहाई है।।

(4) दिग्दाही से धूम उठे या जलधर उठे क्षितिज तट के।

सन्देह और भ्रान्तिमान में अन्तर [2008]
भ्रान्तिमान में एक वस्तु में दूसरी वस्तु का झूठा निश्चय हो जाता है, जबकि सन्देह में अनिश्चय बना रहता है कि ये है कि नहीं? तर्क-वितर्क की भावना बनी रहती है। भ्रान्तिमान में हम स्वयं भ्रम दूर नहीं कर पाते, जबकि सन्देह में कर लेते हैं।

3. विरोधाभास अलंकार
[2008, 09]

जहाँ किसी पदार्थ, गुण या क्रिया में वास्तविक विरोध न होते हुए भी विरोध का आभास हो, वहाँ पर विरोधाभास अलंकार होता है।
(1) ‘वा मुख की मधुराई कहा कहौं,
मीठी लगे अँखियान लनाई।

(2) शीतल ज्वाला जलती है,
ईंधन होता दृग-जल का।
यह व्यर्थ साँस चल-चलकर,
करती है काम अनिल का।।

(3) मैं निज रोदन में राग लिए फिरता हूँ,
शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूँ।

(4) तन्त्री-नाद, कवित्त रस; सरस राग रति-रंग।
अनबूड़े बूड़े तिरे, जे बूड़े सब अंग।।

(5) या अनुरागी चित्त की, गति समुझे नहीं कोय।।
ज्यों-ज्यों बूढ़े श्याम रंग, त्यों-त्यों उज्ज्वल होय।।

(6) शाप हूँ जो बन गया वरदान जीवन में।
(7) नीर भरी अँखियाँ रहे तऊ न प्यास बुझाय।

4. अपहृति अलंकार
[2008, 11]

उपमेय का निषेध कर उसमें उपमान का आरोप किया जाये तो अपहृति अलंकार होता है।

अपहृति का अर्थ है छिपाना, निषेध करना। इस अलंकार में प्रायः निषेध आरोप करते हैं।
जैसे-
(1) सत्य कहहुँ हाँ दीनदयाल।
बन्धु न होय मोर यह काला।

(2) फूलों पत्तों सकल पर हैं वारि-बूंदें लखाती।
रोते हैं या निपट सब यों आँसुओं को दिखाके।।

(3) अंग-अंग जारत अरि, तीछन ज्वाला-जाल।
सिन्धु उठि बड़वाग्नि यह, नहीं इन्दु भव-भाल।।

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(4) छग जल युक्त वदन मण्डल को अलकें श्यामल थीं घेरे।
ओस-भरे पंकज ऊपर थे मधुकर माला के डेरे।।

(5) ये न मग हैं तब चरण रेखियों है?

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MP Board Class 11th Special Hindi काव्य की परिभाषा एवं लक्षण

MP Board Class 11th Special Hindi काव्य की परिभाषा एवं लक्षण

(1) काव्य की परिभाषा एवं लक्षण समस्त भाव प्रधान साहित्य को काव्य कहते हैं। विभिन्न विद्वानों ने काव्य के विभिन्न लक्षण बताये हैं-साहित्य दर्पण के प्रणेता आचार्य विश्वनाथ ने “रसात्मकं वाक्यं काव्यम्” कहा है। पण्डितराज जगन्नाथ ने ‘रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्’ कहा है। कुन्तक ने ‘वक्रोक्ति काव्यस्य जीवितम्’ कहा है और आनन्दवर्धन तथा अभिनवगुप्त ‘ध्वनिरात्मा काव्यस्य’ कहते हैं। मम्मट ने काव्य को हृदय की “सगुणावलंकृतौ पुन: क्वापि” कहा है।

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आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के शब्दों में, “कविता शेष सृष्टि के साथ हमारे रागात्मक सम्बन्धों की रक्षा और निर्वाह का साधन है। वह उस जगत के अनन्त रूपों, अनन्त व्यापारों और अनन्त चेष्टाओं के साथ हमारे मन की भावनाओं को जोड़ने का काम करती है।” इस प्रकार हम देखते हैं कि काव्य हृदय को आनन्द देता है।

  • काव्य के भेद

(1) मुक्तक काव्य-गीत, कविता, दोहा और पद एवं आधुनिक चतुष्पदी तथा मुक्त छन्द मुक्तक काव्य कहलाता है। मुक्तक काव्य का तात्पर्य है कि बिना पूर्वापर-सम्बन्ध के वह पद्य या छन्द अपने आप में पूर्ण एक स्वतन्त्र भाव लिये हो जिसके पढ़ने मात्र से उसका भाव भली प्रकार समझ में आ जाये। सूरदास, मीरा आदि कवियों के गेय पद और बिहारी सतसई तथा आधुनिक गीत इसके अन्तर्गत आते हैं।

(2) प्रबन्ध काव्य-प्रबन्ध काव्य वह रचना होती है जिसमें कोई एक कथा आद्योपान्त क्रमबद्ध रूप से गठित हो एवं उसमें कहीं भी तारतम्य न टूटता हो, वरन् उस कथा को पुष्ट करने उसमें अन्य कई अन्तर्कथाएँ भी हो सकती हैं। प्रबन्ध काव्य विस्तृत होता है, उसमें जीवन की विभिन्न झाँकियाँ रहती हैं। प्रबन्ध काव्य में कथानक को लेकर पात्रों के चरित्रों में घटनाओं और भावों के संघर्ष द्वारा काव्य-वस्तु रखी जाती है। इसके मुख्य दो भेद होते हैं

(i) महाकाव्य और
(ii) खण्डकाव्य।

(i) महाकाव्य-यह एक विशिष्ट गुण युक्त वृहत् आकार वाला ग्रन्थ होता है। यह सर्गों या अध्यायों में विभक्त रहता है। इसका नायक उदात्त गुणों युक्त कोई कुलीन होता है। वीर, श्रृंगार अथवा शान्त रस में से किसी एक रस की प्रधानता रहती है। अन्य रस गौण रूप में आते हैं। महाकाव्य का कथानक प्रसिद्ध होता है अथवा उसमें किसी ऐतिहासिक या पौराणिक पुरुष के चरित्र का वर्णन किया जाता है। प्रत्येक सर्ग की रचना एक ही प्रकार के छन्द में होती है, किन्तु सर्ग के अन्त में छन्द बदल जाता है। सर्गों की संख्या आठ या आठ से अधिक होती है, सर्ग के अन्त में आगामी कथानक की सूचना दी जाती है। महाकाव्य में सन्ध्या, सूर्योदय, चन्द्रोदय, रात, प्रदोष, अन्धकार, वन, ऋतु, समुद्र, पर्वत, नदी आदि प्राकृतिक पदार्थों का वर्णन होता है। जैसे—रामचरितमानस, पद्मावत, साकेत आदि।

(ii) खण्डकाव्य आचार्य विश्वनाथ के अनुसार, “खण्डकाव्य महाकाव्य के एक देश या अंश का अनुसरण करने वाला है।” यह जीवन के समस्त पक्षों का उद्घाटन नहीं करता है, अपितु केवल एक पक्ष पर प्रकाश डालता है। रुद्रट के अनुसार लघु प्रबन्धों में चतुर्वर्ग में से एक ही वर्ग रहा करता है। उसमें अनेक रस असमग्र रूप से होते हैं अथवा एक रस समग्र रूप में होता है। हेमचन्द्र ने अपने ग्रन्थ ‘काव्यानुशासन’ में कहा है कि “जब कवि एक ही विषय को एक ही छन्द में आद्यन्त वर्णन करता है, तब उसे सन्धान कोटि का काव्य कहते हैं।” खण्डकाव्य अन्तस्तत्व के उद्वेलन से पूरित और रसमय होता है। उसमें किसी की जीवन-कथा का विवरण न होकर भाव व्यंजना होती है। खण्डकाव्य गीतिकाव्य भी हो सकता है। खण्डकाव्य कथा के आंशिक आधार के साथ मूलत: गीतिकाव्य बन जाते हैं। इसमें सरस-ललित पदयोजना होती है। इसमें कथावस्तु प्राय: काल्पनिक भी हो सकती है। वह खण्डों में विभक्त हो सकता है। खण्डकाव्य में प्राकृतिक दृश्यों का अंकन समयानुसार और विषयानुसार तथा संक्षिप्त होना चाहिए। खण्डकाव्य तब तक सफल नहीं होगा, जब तक वह अपने लक्ष्य में पूर्ण न हो और जिस भी भाव को लेकर लिखा जाय वह अपने आप में पूर्ण हो, क्योंकि उसमें विस्तार की सुविधा नहीं रहती है। इसमें एक ही भाव की अनुभूतिमयी अभिव्यंजना होती है; जैसे—सुदामाचरित, पंचवटी। – उपर्युक्त सभी प्रकार के काव्य श्रव्य-काव्य के अन्तर्गत आते हैं। श्रव्य-काव्य में पठनीय और श्रवणीय महाकाव्य से लेकर मुक्तक और गीतों की भी गणना की जाती है। श्रव्य-काव्य वह होता है, जिसके सुनने से अथवा स्वयं पढ़ने से रसास्वादन प्राप्त हो।

(3) दृश्य-काव्य–दृश्य-काव्य के अन्तर्गत नाटक और प्रहसन आते हैं जिनका अभिनय रंगमंच पर पात्रों द्वारा किया जाता है। इसमें गद्य के सम्भाषण के अतिरिक्त गेय गीतों, छन्दों अथवा प्रसंगानुकूल नृत्यों की योजना रहती है। दृश्य-काव्य के अन्तर्गत अधिक रमणीयता होती है क्योंकि दर्शक उसकी प्रत्यक्षानुभूति करता है। कलाकार अपनी प्रभावशील अभिनय कला द्वारा हृदय पर सीधा प्रभाव डालते हैं। दृश्य-काव्य निश्चय ही श्रव्य-काव्य से श्रेष्ठ होता है, क्योंकि उसका आनन्द पढ़कर एवं देखकर दोनों रूपों में प्राप्त किया जा सकता है, किन्तु श्रव्य-काव्य का आनन्द केवल सुनकर ही लिया जा सकता है। नाटक में साहित्य के अन्य तत्वों के अतिरिक्त अभिनय तत्व भी होता है, जैसे-नाटक, एकांकी आदि।

(2) शब्द-शक्ति मनुष्य अपने मनोगत विचारों को दूसरों पर जिस भाषा के माध्यम से लिखकर या बोलकर प्रकट करते हैं, वह भाषा शब्दों के समूह से मिलकर बनती है। शब्द दो प्रकार के होते हैं सार्थक एवं निरर्थक। साहित्य या काव्य में सार्थक शब्द ही अपेक्षित हैं। सार्थक शब्द के कई अर्थ साहित्यिक दृष्टि से निकलते हैं—

  • वाचक,
  • लक्षण और
  • व्यंजक।

ये तीन सार्थक शब्द हैं और क्रमशः इनके तीन अर्थ निकलते हैं—

  • वाच्यार्थ,
  • लक्ष्यार्थ और
  • व्यंग्यार्थ।

शब्दों के विभिन्न अर्थ बतलाने वाले व्यापार अथवा साधन को शब्द-शक्ति कहते हैं। शब्द-कोष के मतानुसार, “शब्द की शक्ति उसके अन्तर्निहित अर्थ को व्यक्त करने का व्यापार है। यह तीन प्रकार की होती है।”

(1) अभिधा शक्ति—जिस शब्द के श्रवण मात्र से उसका परम्परागत प्रसिद्ध अर्थ सरलता से समझ में आ जाए उसे अभिधा शब्द-शक्ति कहते हैं। इस अर्थ को वाच्यार्थ, मुख्यार्थ और अभिधेयार्थ के नामों से भी जाना जाता है। अभिधा के इस अर्थ का ग्रहण जाति के नाम से, स्वतन्त्र नाम से, धर्मों से गुण यानी रंग, रूप, रस, गन्ध के नाम से और क्रिया के नाम से होता है।

जैसे—

  • ‘बैल’ बड़ा उपयोगी पशु है।
  • रमेश के ‘कान’ में पीड़ा है। इन वाक्यों में ‘बैल’ का अर्थ पशु विशेष और ‘कान’ का अर्थ श्रवणेन्द्रिय से ही होता है, जो इन शब्दों के प्रचलित अर्थ हैं। शब्द और अर्थ का ज्ञान इन कारणों से होता है व्याकरण से, उपमान से, प्रसिद्ध शब्द के सादृश्य से, शब्दकोष से, प्रामाणिक वक्ता के आप्तवाक्य से एवं सर्वव्यापक कारण है व्यवहार।

(2) लक्षणा शक्ति-लक्षणा शक्ति-शब्द के वाच्यार्थ या मुख्यार्थ से भिन्न है, परन्तु उनके समान अन्य अर्थ को प्रकट करती है। जब किसी शब्द का अभिधा के द्वारा मुख्यार्थ का बोध नहीं हो पाता, अथवा ‘मुख्यार्थ’ समझने में बाधा हो जाती है, तब उस शब्द के अर्थ का बोध कराने वाली शक्ति को लाक्षणिक शक्ति कहते हैं, जैसे-

  • सुदेश ‘बैल’ है।
  • रमेश के ‘कान’ नहीं हैं।

इन वाक्यों में सुदेश मनुष्य है पशु नहीं है, किन्तु उसे बैल कहने का तात्पर्य है. बैल के समान बुद्धि शून्य है जो दूसरों के नियन्त्रण में रहता है। इसी प्रकार रमेश के कान नहीं हैं उसका मतलब होता है कि वह सुनता नहीं है। यहाँ उक्त शब्दों का अर्थ अभिधा शक्ति द्वारा प्रकट न होकर ‘लक्षणा शक्ति’ के द्वारा प्रकट होता है।

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लक्षणा के दो मुख्य भेद हैं रूढ़ि और प्रयोजनवती। जिसमें मुख्यार्थ का बोध न होने पर जिसकी लोक में प्रसिद्धि हो, उसे रूढ़ि लक्षणा कहते हैं, जैसे “वह चौकन्ना रहता है।” यहाँ चौकन्ना का अर्थ चार कान वाला नहीं वरन् ‘सतर्क’ रूढ़ हो गया है, अत: वही अर्थ होगा। इसी प्रकार ‘तेल’ शब्द का अर्थ तो होता है तिल से निकला पदार्थ, किन्तु तरल चिकने पदार्थ के लिए रूढ़ हो जाने से तेल किसी भी तरल पदार्थ को कह देते हैं।

दूसरा प्रकार है प्रयोजनवती लक्षणा। जब मुख्यार्थ से कथन का अभिप्राय बोधगम्य न हो, तब किसी खास प्रयोजन के कारण दूसरा ऐसा अर्थ ले लिया जाये, जिसका मुख्य अर्थ से सम्बन्ध हो, उसे प्रयोजनवती लक्षणा कहते हैं, जैसे—’गंगा में साधु’ हैं।’ यहाँ पर गंगा का अर्थ गंगा नदी नहीं, वरन् गंगा का तट ही अपेक्षित अर्थ है। प्रयोजन से अभीष्ट अर्थ निकाल लिया गया। गंगा के मुख्यार्थ में बाधा पड़ी तथा प्रयोजन में उसके समीप का अर्थ ग्रहण कर लिया अतः यह प्रयोजनवती लक्षणा हुई।

(3) व्यंजना शक्ति–व्यंजना से जाने हुए अर्थ को व्यंग्यार्थ, ध्वन्यार्थ या प्रतीयमान अर्थ कहते हैं और उस शब्द को व्यंजक कहते हैं। जब अभिधा और लक्षणा शक्ति से किसी शब्द का अर्थ नहीं निकल पाता है और शब्द के वाच्यार्थ और लक्ष्यार्थ से भिन्न कोई अन्य विशिष्ट अर्थ या कई भिन्न-भिन्न ध्वनियाँ निकलती हैं, तब व्यंजना शक्ति की सहायता से अर्थ ज्ञात किया जाता है। वाच्यार्थ से भिन्न निकलने वाला विलक्षण अर्थ व्यंग्यार्थ’ होता है। इसको ध्वनि कहते हैं। श्रेष्ठ कवियों और साहित्यकारों की रचनाओं में ध्वनि का कारण ही विशेष चमत्कार होता है।

यह व्यंजना वृत्ति दो प्रकार की होती है-
(i) शाब्दी व्यंजना और
(ii) आर्थी व्यंजना।

(i) शाब्दी व्यंजना-इसमें व्यंजना का आधार वाच्यार्थ और लक्ष्यार्थ के भेद से प्रयुक्त शब्द के सम्बन्ध से होता है। अभिधा के द्वारा शब्द के अनेक अर्थ होते हैं, जैसे—’इन्दौर मध्य प्रदेश की मुम्बई है।” इसमें मुम्बई शब्द में ऐश्वर्य, सम्पन्नता की जो ध्वनि है, वही इन्दौर के लिए भी समीचीन प्रतीत होती है।

(ii) आर्थी व्यंजना–जहाँ देशकाल, परिस्थिति या कण्ठ-ध्वनि और विशेष शब्द पर जोर से कोई विशेष अर्थ निकले, वहाँ आर्थी व्यंजना होती है। एक ही वाक्य के सन्दर्भानुसार अनेक अर्थ होते हैं; जैसे..”सन्ध्या हो गयी”-इसी वाक्य को माता पुत्री से कहे तो अर्थ होगा प्रकाश कर दो। सेवक स्वामी से कहे तो अर्थ,होगा-उसके अवकाश का समय हो गया और एक मित्र दूसरे मित्र से कहे तो तात्पर्य होगा चलचित्र का समय हो गया। गुरु शिष्य से कहे तो तात्पर्य है अध्ययन का समय हो गया।

विद्वानों ने तो ‘ध्वनिरात्मा काव्यस्य’ कहा है। ध्वन्यात्मक काव्य उत्कृष्ट काव्य है। इस प्रकार शब्द-शक्तियों के अध्ययन से हम रस का पूर्ण आस्वादन कर सकते हैं। वस्तुतः उक्त तीनों शब्द शक्तियों का विवेचन एक प्राचीन संस्कृताचार्य ने निम्नांकित श्लोकों में पूर्ण रूप से कर दिया है। उसका कथन है कि

“अभिधां वदन्ति सरला।
लक्षणा नागराजनाः।
व्यंजना नर्म मर्मज्ञः।
कवयाः, कमनाजनाः।।”

तात्पर्य यह है कि सीधे-सादे, भोले-भाले सरल व्यक्ति या ग्रामीण व्यक्ति अभिधा शक्ति का प्रयोग करते हैं, क्योंकि वे जो कहेंगे उसका वही अर्थ होगा। नगरवासी शिक्षित सभ्य पुरुष अधिकतर लक्षणा शक्ति का प्रयोग करते हैं, जिसमें कई रूढ़ि शब्द होते हैं और कई शब्दों का प्रयोजन से अर्थ होता है। शेष बचे सहृदय, रसिकजनक, कवि, प्रेमी, उत्कृष्ट जन-वर्ग सदैव व्यंजना वृत्ति अपनाते हैं, जिनकी बात में चमत्कार होता है और जो आनन्दायिनी रहती है।

(3) शब्द गुण (काव्य गुण) कविता-कामिनी को अलंकारों से सुसज्जित कर भी विद्वानों ने उसके आन्तरिक रूप को ही महत्त्व दिया है। अलंकार, छन्द से काव्य का बाह्य रूप सजता है किन्तु सुन्दर सजीला तन भावपूर्ण मन के बिना तथा गुण रहित होने से व्यर्थ होता है। कहा भी है कि “गुणीनां च निर्गुणनां च दृश्यते महदन्तरम्।” अत: मानवोचित गुणों के अनुकूल ही काव्य गुण भी होते हैं। आचार्य दण्डी ने दस काव्य गुणों का उल्लेख किया है और भोज ने चौबीस गुणों का। किन्तु साहित्य में काव्य के तीन ही गुण प्रमुख माने गये हैं। उसी वर्गीकरण के अन्तर्गत इन्हीं तीनों में अन्य सभी गुण समाहित कर लिए हैं। इन गुणों का काव्य में किस प्रकार प्रणयन होता है तथा गुणयुक्त काव्य श्रोता या पाठक पर किस प्रकार प्रभावशील होता है, उनके लिए कुछ नियम हैं।

मुख्य तीन गुण हैं—

  • माधुर्य,
  • ओज,
  • प्रसाद।

(1) माधुर्य गुण–मधुरता के भाव को माधुर्य कहते हैं। मिठास अर्थात् कर्णप्रियता ही इसका मुख्य भाव है। जिस काव्य के श्रवण से आत्मा द्रवित हो जाये, मन आप्लावित और कानों में मधु घुल जाये वही माधुर्य गुणयुक्त है। यह गुण विशेष रूप से श्रृंगार, शान्त एवं करुण रस में पाया जाता है। माधुर्य गुण की रचना में

  • कठोर वर्ण यानि सम्पूर्ण ट वर्ग (ट, ठ, ड, ढ, ण) के शब्द नहीं होने चाहिए।
  • अनुनासिक वर्गों से युक्त अत्यन्त दीर्घ संयुक्ताक्षर नहीं होना चाहिए।
  • लम्बे-लम्बे सामासिक पदों का प्रयोग भी वर्जित है।
  • कोमलकांत मृदु पदावली का एवं मधुर वर्णों (क, ग, ज,द आदि) का प्रयोग होना चाहिए।

उदाहरण—
(1) ‘छाया करती रहे सदा, तुझ पर सुहाग की छाँह।
सुख-दुख में ग्रीवा के नीचे हो, प्रियतम की बाँह।।

(2) अनुराग भरे हरि बागन में,
सखि रागत राग अचूकनि सों।

(3) लेकर इतना रूप कहो तुम, दीख पड़े क्यों मुझे छली?
चले प्रभात बात फिर भी क्या खिले न कोमल कमल कली?

(4) बसो मोरे नैनन में नन्दलाल
मोहिनी मूरत साँवरी सूरत नैना बने बिसाल।

(2) ओज गुण-जिस काव्य-रचना को सुनने से मन में उत्तेजना पैदा होती है, उस कविता में ओजगुण होता है। ओज का सम्बन्ध चित्त की उत्तेजना वृत्ति से है। इसलिए जिस काव्य को पढ़ने या सुनने से पढ़ने वाले के हृदय में उत्तेजना आ जाती है, वही ओजगुण प्रधान रचना होती है। वीर रस रचना के लिए इस गुण की आवश्यकता होती है। इस गुण को उत्पन्न करने के लिए विद्वानों ने निम्नलिखित गुणों का विधान किया है-

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  • रचना की शैली एवं शब्द योजना दोनों का ही सुगठित एवं सुनियोजित होना आवश्यक
  • पंक्ति अथवा छन्द की रचना में कहीं भी शिथिलता होना अनपेक्षित है।
  • रचना में ट वर्ग (ट, ठ, ड, ढ, ण) और सभी कठोर व्यंजनों का आधिक्य होना चाहिए।
  • र के संयोग से बने शब्द प्रथम एवं तृतीय, द्वितीय और चतुर्थ वर्गों का प्रयोग होते संयोजन तथा रेफ युक्त शब्द प्रभावशाली हैं।
  • लम्बे-लम्बे समासों से युक्त शब्दों का प्रयोग होना चाहिए। अधिकाधिक संयुक्ताक्षरों का प्रयोग होना चाहिए।

उदाहरण-
(1) अमर राष्ट्र, उदण्ड राष्ट्र, उन्मुक्त राष्ट्र-यह मेरी बोली।
यह ‘सुधार’, ‘समझौते’ वाली मुझको भाती नहीं ठिठोली।।

(2) निकसत म्यान तें मयूखै प्रलै भानु कैसी,
फारै तम-तोम से गयंदन के जाल को।

(3) महलों ने दी आग, झोंपड़ियों में ज्वाला सुलगाई थी
वह स्वतन्त्रता की चिनगारी, अन्तरतम से आई थी।

(4) हिमाद्रि तुंग शृंग पर, प्रबुद्ध शुद्ध भारती
स्वयं प्रभा समुज्वला, स्वतन्त्रता पुकारती।

(3) प्रसाद गुण—प्रसाद का अर्थ है—प्रसन्नता या निर्मलता। जिस काव्य को सुनते या पढ़ते समय वह हृदय पर छा जाये और बुद्धि शब्दों के दुरूह जाल में या क्लिष्ट अर्थों की कलुषता में मलिन न होकर एकदम प्रभावित हो जाये, मन खिल जाये, उसे प्रसाद गुण कहते हैं। कवि का उद्देश्य होता है मानव हृदय को प्रभावित करना। प्रेमी की बात प्रिय पात्र के हृदय को रस से सराबोर न कर दे, ममता वात्सल्य को आहूदित न कर पाये, करुणा नयनों के कोरों को यदि अविरल न कर पाये और वीरता का उत्साह यदि ओजित न कर पाये-ये सभी यदि शब्दों की भूलभुलैया में पड़कर क्लिष्टता के अस्त-व्यस्त मार्ग पर चल पड़े तो काव्य ब्रह्मानन्द सहोदर न होकर मस्तक की पीड़ा बन जायेगा। व्यस्तता के इस गुण में हमें आज प्रसाद गुण युक्त काव्य की आवश्यकता है। यही गुण अधिक समय तक प्रभावशाली रह सकता है, क्योंकि यह सीधे हृदय पर छाप छोड़ता है। सभी रसों की रचना प्रसाद गुण युक्त हो सकती है। प्रसाद गुण का सम्बन्ध सभी रसों से है। उक्त दोनों गुणों की तरह यह गुण किसी रस विशेष से नियन्त्रित नहीं है। शब्दों के साथ अर्थ का भी सरल होना आवश्यक है। इसमें जो बात कही जाये, उसका वही अर्थ होता है। ‘साहित्य-दर्पण’ के प्रणेता आचार्य विश्वनाथ का कथन है कि-“समस्त रसों और रचनाओं में जो चित्र को सूखे ईंधन में अग्नि के समान शीघ्र व्याप्त करे—वह प्रसाद गुण है।”

उदाहरण-
(1) “चुप रहो जरा सपना पूरा हो जाने दो,
घर की मैना को जरा प्रभाती गाने दो,
ये फूल सेज के चरणों पर धर देने दो,
मुझको आँचल में हरसिंगार भर लेने दो।”

(2) मानुस हौं तो वही रसखान
बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन।

(3) तन भी सुन्दर मन भी सुन्दर
प्रभु मेरा जीवन हो सुन्दर।

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(4) हे प्रभो आनन्द दाता ! ज्ञान हमको दीजिए।
(5) आशीषों का आँचल भर कर, प्यारे बच्चो लाई हूँ।
युग जननी मैं भारत माता द्वार तुम्हारे आई हूँ।

-बालकृष्ण बैरागी

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MP Board Class 11th Special Hindi Sahayak Vachan Solutions Chapter 1 कर्मयोगी लाल बहादुर शास्त्री

MP Board Class 11th Special Hindi सहायक वाचन Solutions Chapter 1 कर्मयोगी लाल बहादुर शास्त्री

कर्मयोगी लाल बहादुर शास्त्री अभ्यास प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

प्रश्न 1.
लाल बहादुर शास्त्री को निष्काम कर्मयोगी क्यों कहा गया? (2014)
उत्तर:
प्रस्तावना-लाल बहादुर शास्त्री के नाम के साथ यदि ‘कर्मयोगी’ भी जोड़ दिया जाए, तो यह अधिक उपयुक्त होगा। उनका सम्पूर्ण जीवन कर्म से परिपूर्ण था। शास्त्री जी एक सामान्य परिवार में जन्मे, पले, बड़े हुए और शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा भी सामान्य स्तर से प्रारम्भ हुई। इस तरह एक साधारण परिवार का बालक प्रधानमन्त्री के उत्तरदायित्वपूर्ण पद तक पहुँचे, यह एक अति आश्चर्य की बात मानी जाएगी। उनके जीवन में असुविधाएँ ही असुविधाएँ थीं। कठिनाइयों का तो कोई जोड़-तोड़ ही नहीं रहा। लेकिन इन सबके पीछे स्वयं शास्त्री जी की विचारधारा और कर्म प्रधान जीवन में ही उनके जीवन की सफलता का रहस्य छिपा था। उनको जीवन का रास्ता स्वयं निर्मित करना पड़ा। उन्हें किसी के द्वारा बना-बनाया रास्ता नहीं मिला।

जीवन शैली और दर्शन :
अब आती है बात, शास्त्री के जीवन की शैली और उनके जीवन के प्रति दर्शन की। वे ऐसे लोगों में से नहीं थे जो भाग्य में विश्वास करते थे और यह सोचकर बैठ जाते कि जो भाग्य में होगा, वही प्राप्त होगा और देखा जाएगा। भाग्यवादी लोगों को कभी अचानक सफलता मिल जाती है, ऐसा उनके साथ नहीं था। यह उनके जीवन की शैली नहीं थी। वे ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें अपने चिन्तन और कर्म शक्ति पर अधिक भरोसा होता है। वे अपने हाथ की लकीरों को मिटाकर चलने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने अपने जीवन का रास्ता स्वयं चुना और उस पर आगे बढ़ते गये।

कर्मफल में निष्काम भाव :
शास्त्री ने अपने कर्म और उत्तरदायित्व का निर्वाह किया। कर्म साधना ही उनके लिए ईश्वर की साधना थी, भक्ति थी। वे अपने कर्म के लिए समर्पित थे। कर्म के फल और उसकी परिणति में उन्हें कभी भी आशा नहीं थी। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि वे निराशावादी थे। सम्पूर्ण भाव से कर्म में निरत रहना, उनकी ईश आराधना और भक्ति से कम नहीं थी। उन्हें अपने कर्म फलानुसार जब भी अवसर प्राप्त हुए, वे उस कर्म के फल की ओर उपेक्षापूर्ण दृष्टि ही अपनाते रहे। इस तरह ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ में भगवान् श्रीकृष्ण ने निष्काम कर्म की व्याख्या करते हुए जो मार्ग दिखाया है, उसी का अनुपालन उन्होंने अपने जीवन में पूरे समय किया। इस सबका यह निष्कर्ष निकलता है कि श्री शास्त्री जी निष्काम कर्मयोगी थे।

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प्रश्न 2.
“शास्त्री जी अत्यन्त लोकप्रिय थे”, कारण सहित उनकी लोकप्रियता पर प्रकाश डालिए। (2008, 09)
उत्तर:
प्रस्तावना :
शास्त्री जी सदैव ही भारतीय आजादी के आन्दोलनों के दौरान- चाहे जेल में रहे या जेल से बाहर; वे समाजगत समस्याओं के निराकरण के लिए जूझते रहे। उनके जीवन का उद्देश्य समाज और देश में रचनात्मक कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करना था। इस दिशा में, वे पूरी लगन और तत्परता से प्रयत्नशील रहे और कार्यों को सम्पन्न किया और सहयोगीजनों से सहयोग प्राप्त किया।

शास्त्रीजी और जनसेवा :
रचनात्मक कार्यों के अतिरिक्त एक पदाधिकारी के रूप में भी जनसेवा को महत्त्व प्रदान किया। वे सन् 1935 ई. में संयुक्त प्रान्तीय कांग्रेस कमेटी के सचिव रहे और सन् 1938 तक जनसेवा में लगे रहे। खासतौर से उनका लगाव किसानों की सेवा व उनके उत्थान के उपायों के प्रति रहा। उन्होंने किसानों को संगठित किया। इस कार्य शैली और जीवन दिशा की सोच के कारण उन्हें उस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया, जो किसानों की दशा का अध्ययन कर रही थी। यह सन् 1936 की बात है। उन्होंने अपनी पक्की लगन और दृढ़ आस्था से अपनी रिपोर्ट तैयार की और उस रिपोर्ट में जमींदारी उन्मूलन पर विशेष बल दिया था।

इलाहाबाद की नगरपालिका से भी लगातार 6 वर्षों तक किसी न किसी रूप में जुड़े रहे। वे ग्रामीण जीवन शैली से पूर्णतः परिचित थे ही। अब इसके साथ इलाहाबाद नगरपालिका ने जनसेवा का भी अनुभव जोड़ दिया। लोकतन्त्र की आधारभूत इकाई इलाहाबाद नगरपालिका थी। इसके कार्य करने से देश की छोटी-छोटी समस्याओं और उनके निराकरण की व्यावहारिक प्रक्रिया से वे बहुत अच्छी तरह परिचित हो चुके थे।

शास्त्रीजी का संसदीय जीवन :
शास्त्री जी के व्यक्तित्व में कार्य के प्रति निष्ठा और परिश्रम करने की अदम्य क्षमता व्याप्त थी। इसका परिणाम यह हुआ कि उन्हें सन् 1937 ई. में संयुक्त प्रान्तीय व्यवस्थापिका सभा के लिए निर्वाचित कर लिया गया। अगर सही अर्थ की बात मानें तो शास्त्री जी का संसदीय जीवन यहीं से प्रारम्भ हुआ और उसका समापन देश के प्रधानमन्त्री के पद तक पहुँचने में हुआ।

उपसंहार :
शास्त्रीजी को भारतीय राजनीति की इतनी सही और गहरी पकड़ थी कि श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने कहा कि वे उनके राजनीतिक गुरु थे और उन्हीं के मार्गदर्शन में उनके राजनीतिक जीवन की शुरूआत हुई।

प्रश्न 3.
शास्त्री जी के चरित्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। (2012)
अथवा
कर्मयोगी लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व की दो विशेषताएँ लिखिए। (2016)
उत्तर:
शास्त्री जी के चरित्र में निम्नलिखित विशेषताएँ परिलक्षित होती हैं-
(1) शास्त्री जी का निष्काम कर्मयोग :
शास्त्री जी एक सामान्य स्थिति के परिवार से ऊपर उठकर देश के प्रधानमन्त्री के अति महत्त्वपूर्ण पद तक पहुँचे, इस सबका रहस्य उनके कर्मयोगी होने में निहित है। लोगों को बहुत से आसान तरीके मिल जाते हैं और वे आगे तक सुविधाभोगी जीवन बिताते हैं। लेकिन शास्त्री जी ऐसे नहीं थे। वे भाग्य पर भरोसा करके बैठे रहने वाले व्यक्ति नहीं थे। वे तो उन लोगों में से थे, जो अपने हाथ की लकीर मिटाकर अपने चिन्तन और कर्म की शक्ति पर भरोसा करते थे और आगे बढ़ते थे। शास्त्री जी के लिए कर्म ही ईश्वर था। वे किसी भी कर्म के फल के प्रति आशावान नहीं थे। वे तो मात्र कर्म में ही समर्पित थे। उनका जीवन दर्शन गीता के निष्काम कर्मयोग से प्रभावित था।

(2) अपने उद्देश्य के प्रति दृढ़ आस्था :
शास्त्री जी अपने कर्म उद्देश्य को प्राप्त करने में आस्था रखते थे। उद्देश्य में सफलता उनका ध्येय होता था।

(3) उद्देश्य प्राप्ति के लिए कर्म :
शास्त्री जी अपने निर्धारित उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए कर्म के प्रति पूर्णतः समर्पित थे। अपनी समग्र क्षमताओं से विश्वास के द्वारा उद्देश्य प्राप्ति के लिए कर्म करते जाना उनके जीवन का प्रधान लक्ष्य था।

(4) उद्देश्य प्राप्ति हेतु कर्म करने के लिए समर्पित :
शास्त्री जी सदैव ही अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के प्रति सद्प्रयासों से कर्म के प्रति संकल्पित थे। इस संकल्प की पूर्ति करने तक वे कर्म निष्पादन में समर्पित रहते थे।

(5) स्वस्थ चिन्तन :
शास्त्री जी का चिन्तन पूर्णतः स्वस्थ था। अपने स्वस्थ चिन्तन से ही वे अपनी सफलताएँ प्राप्त करते चले गये। शास्त्री का चिन्तन ही ऐसा था जिससे स्वयं अपना, देश का विकास आगे बढ़ सका। इस चिन्तन में भी भक्ति और कर्म का सिद्धान्त निहित था।

(6) श्रम, सेवा, सादगी और समर्पण :
शास्त्री जी को कोई भी उत्तरदायित्व सौंपा गया, वे उस उत्तरदायित्व का निर्वाह श्रम से, सेवाभाव से, सादगी से और समर्पण (त्याग) की भावना से करते थे। इस तरह किसी भी कर्म के फल के प्रति उनका स्वार्थ अथवा लगाव नहीं था।

(7) सादगी, विनम्रता एवं सरलता :
शास्त्री जी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता थी उनकी सादगी। वे साधारण परिवार में उत्पन्न हुए, सादगी से ही परवरिश हुई परन्तु देश के प्रधानमन्त्री पद पर आरूढ़ शास्त्री जी सदैव सामान्य बने रहे, सादगी से जीवन बिताते रहे। विनम्रता, सादगी और सरलता ने उनके व्यक्तित्व में एक विचित्र आकर्षण पैदा कर दिया था।

(8) कठिनाइयों में भी न घबराना :
शास्त्री जी ने सन् 1930 से सन् 1942 तक के जीवन के सफर में अर्थात् बारह वर्ष की इस समयावधि में लगभग सात वर्ष तक जेल का जीवन काटा। उस साधारण स्थिति वाले व्यक्ति के लिए इस तरह की साधना अत्यन्त कठिनताओं से भरी हुई थी। वे अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं हुए। राजनैतिक अथवा सामाजिक तौर पर उन्हें कोई भी कार्य सौंपा गया, वे उस कार्य के सम्पादन में सफल हुए, घबराए नहीं।

(9) लोकप्रियता :
शास्त्री जी अपनी कार्य शैली और विविध पहलुओं की पूर्ति सम्बन्धी कार्यों के लिए लोगों में बहुत ही प्रिय और प्रसिद्ध हो गए।

(10) आत्मसंयम :
देश में शास्त्री को अति महत्त्वपूर्ण पदों पर स्वाभाविक रूप से अधिकार भी प्राप्त थे परन्तु उन अधिकारों का उपयोग कर्त्तव्यपालन से किया, जिसमें शास्त्री जी का आत्मसंयम ही काम आया। आत्मसंयम से एक श्रेष्ठ नागरिक के गुण विकसित किये जा सकते हैं, ऐसा विचार था शास्त्री जी का।

शास्त्री जी सोचते थे कि हमारा देश प्रजातन्त्रात्मक रूप से आजाद है। अतः उस आजादी का उपभोग एक व्यवस्थित समाज के हित में स्वेच्छा से लगाए गए प्रतिबन्धों के तहत होना चाहिए। इस तरह शास्त्री जी का व्यक्तित्व एक अनुशासित रूप से कर्त्तव्य और अधिकार सम्पन्न कर्मशीलत्व लिए हुए धैर्य और शौर्य (वैचारिक दृढ़ता) का अनुकरणीय उदाहरण है।

प्रश्न 4.
शास्त्री जी ने किन रूपों में प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया?
उत्तर:
प्रस्तावना :
श्री लाल बहादुर शास्त्री जी स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान गाँधी जी द्वारा निर्देशित रचनात्मक कार्यों में लगे रहे। इसके अतिरिक्त उन्होंने एक पदाधिकारी के रूप में जनसेवा के कार्यों को भी महत्त्व दिया।

संयुक्त प्रान्तीय कांग्रेस कमेटी के सचिव :
शास्त्री जी सन् 1935 ई. में संयुक्त प्रान्तीय कांग्रेस कमेटी के सचिव बनाए गये। इस पद पर सन् 1938 ई. तक बने रहे। किसानों के प्रति उनके मन में विशेष लगाव था। इसलिए किसानों की दशा का अध्ययन करने के लिए एक विशेष कमेटी बनाई गई और उस कमेटी का उन्हें अध्यक्ष बनाया गया।

जमींदारी उन्मूलन की सिफारिश :
शास्त्री जी ने किसानों की दशा का अध्ययन पूरी लगन से किया। काम पूरा करके एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जिस रिपोर्ट में जमींदारी उन्मूलन पर विशेष जोर दिया गया।

नगरपालिका इलाहाबाद से जुड़ाव :
इसके बाद छः वर्ष तक वे इलाहाबाद की नगरपालिका में किसी न किसी रूप में जुड़े रहे। इससे शास्त्री जी के व्यक्तित्व और चिन्तन को नागरिकों की समस्याओं का अति निकटता से अनुभव प्राप्त हुआ। नगरपालिका प्रजातन्त्र की एक आधारभूत इकाई होती है। अतः इसमें कार्य करने से वे देश की छोटी-छोटी समस्याओं और उनके निराकरण की व्यावहारिक प्रक्रिया से अच्छी तरह परिचित हो गए थे।

संयुक्त प्रान्तीय व्यवस्थापिका सभा के लिए निर्वाचित :
शास्त्री जी सन् 1937 ई. में संयुक्त प्रान्तीय व्यवस्थापिका सभा के लिए निर्वाचित हुए। इस निर्वाचन के पीछे शास्त्री जी की कार्य के प्रति निष्ठा और मेहनत करने की अदम्य क्षमता थी। सही अर्थ में यदि देखा जाए तो शास्त्री जी के संसदीय जीवन की शुरूआत यहीं से हुई। इसके साथ ही शास्त्री जी प्रधानमन्त्री के पद पर सुशोभित हुए तो इस पद तक पहुँचने के साथ ही संसदीय जीवन का समापन हो गया।

भारतीय राजनीति की सही और गहरी पकड :
शास्त्री जी को भारतीय राजनीति की इतनी सही और गहरी पकड़ थी कि श्रीमती इन्दिरा गाँधी उन्हें अपना राजनीतिक गुरु मानती थीं। उन्हें उत्तर प्रदेश और केन्द्र में भिन्न-भिन्न पदों पर कार्य करने का विशद अनुभव था। उन्होंने रेल, परिवहन, संचार, वाणिज्य, उद्योग और गृह मन्त्रालय जैसे महत्त्वपूर्ण पदों को सम्भाला।

उपसंहार :
अन्त में यह कहा जा सकता है कि शास्त्री जी ने भारतीय प्रदेश और संघीय सरकार के पदों पर रहकर अपनी प्रशासकीय दक्षता का परिचय दिया, वह एक उदाहरण के रूप में देश के लिए एक गौरव की बात है। अपने मन्त्रालयों के कार्यों में उनका दृष्टिकोण अत्यन्त व्यावहारिक बना रहा एवं सभी प्रकार की औपचारिकताओं से परे रहा। उन्होंने देश की सेवा एक शासक के रूप में नहीं, वरन् एक जनसेवक के रूप में की। लोक सेवक शास्त्री जी को अपनी कार्य शैली के कारण लोकप्रियता प्राप्त हुई। वे एक लोकप्रिय नेता थे। आत्मानुशासन, अधिकार और कर्तव्य का तालमेल लोकतन्त्र प्रशासकीय पद्धति का मूल आधार होता है, ऐसा मानते हुए एक व्यवस्थित समाज के लिए निष्ठा, भक्ति और श्रद्धा से निष्काम कर्म करना अति महत्त्वपूर्ण है।

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प्रश्न 5.
“शास्त्री जी श्रम, सेवा, सादगी और समर्पण की प्रतिमूर्ति थे।” उदाहरण देकर समझाइए। (2009)
उत्तर:
प्रस्तावना-श्री लाल बहादुर शास्त्री का सम्पूर्ण जीवन श्रम, सेवा, सादगी और समर्पण (त्याग) की भावना से भरा हुआ था। श्रम’ से उन्होंने जन्म से ही नाता जोड़ा हुआ था। सेवा और सादगी उनके व्यवहार और वार्तालाप से परिलक्षित होते थे। समर्पण (त्याग) तो उनकी जीवन शैली थी।

समन्वय :
उनके ये गुण केवल उनके कार्यों और विचारों में ही अभिव्यक्ति नहीं पाते थे। वरन् उनको देखने मात्र से ही इन सभी भावों का अहसास हो जाता था। उनमें श्रम, सेवा, सादगी और समर्पण का समन्वय था। वे अपने मुख से जो भी कहते, उसे तद्नुसार ही करके रहते थे।

राष्ट्रहित :
शास्त्री जी का वचन, उनका कथन और उनकी करनी इन तीनों की समय पर अन्विति होती थी जिसमें राष्ट्रहित, कल्याण समाहित रहता था। वे जो भी करते अथवा कहते उस सब में राष्ट्र के लाभ की बात छिपी रहती थी। उनका वचन और कथन एकमात्र राष्ट्र-लाभ की भावना से प्रेरित रहता था।

समर्पण :
शास्त्री जी में समर्पण भाव भरा हुआ था। उनके समर्पण के भाव की विशेषता उनके चरित्र से आभासित होती थी। इस चारित्रिक विशेषता के कारण देशवासी उनका विश्वास करते थे और वे सम्पूर्ण भारतीय नागरिकों की प्रथम पसंद थे।

विनम्रता और सूझबूझ :
शास्त्री जी विनम्रता और सूझबूझ के धनी थे। उनकी प्रत्येक बात से, आचरण से, वेशभूषा से उनकी विनम्रता झलकती थी। उनके वचनों की विनम्रता के आगे शक्तिसम्पन्न राष्ट्र भी नतमस्तष्क थे। राजनैतिक सूझबूझ ने तो उन्हें इतना विशाल हृदय और उदारता प्रदान की हुई थी कि देश की जनता का प्रतिनिधित्व शास्त्री जी जैसा व्यक्तित्व ही कर सका।

उपसंहार :
अन्त में, कहा जा सकता है कि शास्त्री जी की ताकत और शख्त-नम्र व्यक्तित्व ही पंडित जवाहरलाल नेहरू की समृद्ध राजनैतिक विरासत को सँभालने में सफल हो सका। वे ही उस विरासत को आगे बढ़ा सके। अन्य किसी के लिए यह काम बहुत ही कठिन रहा होता। सम्पूर्ण देश ने इन सभी विशेषताओं के समन्वित स्वरूप को शास्त्री जी में देखा और उनके निर्मल चरित्र और दृढ़ संकल्प शक्ति के द्वारा सम्पूर्ण देश की इस आकांक्षा को पूरा किया।

प्रश्न 6.
“संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति शास्त्री जी के क्या विचार थे?” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रस्तावना :
सन् 1964 ई. में पं. नेहरू का देहावसान हो गया। इनके बाद, देश ने श्री लाल बहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार किया। इसका एकमात्र कारण था शास्त्री जी का भारतीय जनता के प्रति सेवा का भाव। वे स्वयं को शासक नहीं सेवक मानते थे। उनकी लोकप्रियता एवं श्रम साध्य कर्मों में सफलता ने ही शास्त्री जी को पं. नेहरू के बाद प्रधानमंत्री के रूप में देश ने स्वीकार किया। शास्त्री जी ने प्रधानमंत्री के रूप में मात्र 19 महीने की बहुत छोटी सी अवधि में जितनी लोकप्रियता और सफलताएँ अर्जित की वे एक उदाहरण हैं।

प्रत्येक व्यक्ति भारत का नागरिक है :
शास्त्री जी ने 19 दिसम्बर, 1964 ई. में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह में अपने सम्बोधन में कहा था कि आपके जीवन के उद्देश्य अलग-अलग हो सकते हैं, आपकी मंजिलें जो भी हों, लेकिन आप सभी को यह सोचना चाहिए कि आप सबसे पहले देश के नागरिक हैं।

अधिकार और कर्त्तव्य :
विशाल भारतीय संघ के नागरिक होने के कारण आप सभी को संविधान द्वारा कुछ अधिकार दिए गए हैं, लेकिन साथ ही आप सभी नागरिकों पर कुछ कर्बव्यों का बोझ भी स्वतः ही आ गया है अर्थात् अधिकारों की प्राप्ति कर्त्तव्यों के निर्वाह करने में ही परिणति होती है। यह बात बहुत महत्त्वपूर्ण है, इसका समझना अति आवश्यक है।

स्वैच्छिक प्रतिबन्धों में ही स्वतंत्रता का उपयोग :
श्री शास्त्री जी ने आगे कहा कि हमारे देश में प्रजातांत्रिक (लोकतंत्रात्मक) शासन पद्धति प्रस्तावित की है। अत: यहाँ के प्रत्येक नागरिक को निजी स्वतंत्रता भी प्राप्त है। लेकिन उन्हें इस स्वतंत्रता का उपयोग स्वेच्छा से लगाए गए प्रतिबन्धों के अनुसार करना चाहिए। इसका एक कारण है-हम सभी यह देख चुके हैं कि हमारा समाज एक व्यवस्थित समाज है। उस व्यवस्था का प्रधान समाज के लिए प्रतिबन्ध बहुत अनिवार्य है। इस तरह, इन स्वैच्छिक प्रतिबन्धों का उपयोग और प्रदर्शन जीवन में प्रतिदिन ही होना चाहिए।

उपसंहार :
अन्त में, यह बात स्पष्ट है कि शास्त्री जी ने अधिकारों और कर्त्तव्यों के प्रति बड़ी विशेष व्याख्या अत्यल्प शब्दों के प्रयोग में कर दी थी कि अधिकारों की उपभुक्ति कर्त्तव्यों के सुयोग्य सम्पादन से ही सम्भव है।

प्रश्न 7.
शास्त्री जी देश के प्रधानमंत्री कब बने? (2015)
उत्तर:
भारत राष्ट्र के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का देहावसान 27 मई, 1964 ई. को हो गया। इसके निधन के बाद देश ने श्री लाल बहादुर शास्त्री में वे महान् गुण और विशेषताओं को देखा जिनसे वे पं. नेहरू द्वारा प्रस्थापित समृद्ध राजनैतिक विरासत को आगे बढ़ा सकते थे। अतः सन् 1964 ई. में ही श्री लाल बहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री बने।

प्रश्न 8.
इस पाठ से हमें क्या प्रेरणा मिलती है? लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत पाठ से हम सभी छात्रों एवं पाठकों को इस बात की प्रेरणा मिलती है कि हम सभी कर्मयोगी बनें। क्रियाशील व्यक्ति रचनात्मक शैली के गुण से सम्पन्न होता है। वह सदैव कर्म सम्पादन में संलग्न होकर स्वयं को उस स्थान तक ले जाता है, जहाँ से उसमें निस्वार्थ भाव की जागृति हो। निस्वार्थ भाव से किया कर्म ही असली और निष्काम भाव की उत्पत्ति करता है। प्रलोभनों से ऊपर उठकर अपने कर्तव्य कर्म का निर्वाह करते रहें।

अपने जीवन के निर्धारित उद्देश्यों और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपनी आन्तरिक और बाह्य क्षमताओं में दृढ़ विश्वास रखें। अपने आपको कर्म में समर्पण भाव से, निष्ठा से लगा देंगे तो हमें चारित्रिक बल की प्राप्ति होगी जिसके द्वारा राजनैतिक और सामाजिक क्षेत्र के सभी कार्यों का निष्पादन करते जायेंगे।

हमारा चिन्तन स्वस्थ रहना चाहिए। जीवन में श्रम, सेवा, सादगी और समर्पण भाव का विकास हमें उन्नत बनाता है। साथ ही व्यक्तित्व में विनम्रता मनुष्य को पृथ्वी का वारिस बना देती है। कठिनाइयों के दौर में भी धैर्य और शौर्य व शील का त्याग नहीं होना चाहिए। हमारा व्यावहारिक पक्ष खुला और समृद्ध हो, इसका हमें प्रयास करना चाहिए।

हमें अपने अधिकारों की माँग न करके अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने वाला होना चाहिए क्योंकि कर्त्तव्यों की इति अधिकारों के रूप में प्रतिफलित होती ही है। व्यक्तिगत आजादी के उपयोग में भी प्रतिबन्धन होते हैं। तब ही सम्पूर्ण समाज व्यवस्थित रूप से चल सकता है। वहाँ उच्छृखलता के लिए कोई अवकाश नहीं है।

सर्वोपरि मुख्य बात है जिसकी प्रेरणा हमें मिलती है, वह है आत्मसंयम। आत्मसंयम खो देने से किसी भी कार्य के सम्पादन की शक्ति का ह्रास हो जाता है।

उपर्युक्त सभी गुणों को अपने अन्दर विकसित करने की प्रेरणा प्रस्तुत पाठ से हमें प्राप्त होती है।

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कर्मयोगी लाल बहादुर शास्त्री अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘कर्मयोगी’ विशेषण किसके नाम के साथ जोड़ना उपयुक्त है?
उत्तर:
पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी के नाम के साथ कर्मयोगी विशेषण जोड़ना बिल्कुल उपयुक्त है।

प्रश्न 2.
शास्त्री जी के चरित्र एवं जीवन दर्शन में कौन-सी तीन बातें स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती हैं?
उत्तर:
अपने उद्देश्य के प्रति दृढ़ आस्था, उस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए कर्म का भाव तथा उस कर्म के प्रति सम्पूर्ण समर्पण-ये तीन बातें शास्त्री जी के सम्पूर्ण चरित्र तथा जीवन दर्शन में दिखाई पड़ती हैं।

कर्मयोगी लाल बहादुर शास्त्री पाठ का सारांश

कर्मयोगी शास्त्री जी :
श्री लालबहादुर शास्त्री का सम्पूर्ण जीवन कर्म प्रधान ही था। शास्त्री जी एक साधारण परिवार से ऊपर उठकर भारतवर्ष के प्रधानमन्त्री पद तक पहुँचे। यह सब उनकी कर्त्तव्यपरायणता, निष्ठा, देशभक्ति का परिणाम था। उन्होंने अपने कर्म और चिन्तन की विशिष्ट शैली से भाग्य की रेखाओं को पलट दिया। शास्त्री जी को अपने कर्म और ईश्वर पर ही भरोसा था। उन्होंने पं. जवाहरलाल नेहरू जैसे राजनेता की समृद्ध राजनीति की विरासत को सँभाल कर रखा। यह शास्त्री जी का निष्काम कर्मयोगी का प्रतिरूप ही था।

शास्त्री जी का जीवन दर्शन :
शास्त्री जी के जीवन दर्शन में कुछ महत्त्वपूर्ण बातें दिखायी पड़ती हैं-(1) उद्देश्य के प्रति दृढ़ आस्था, (2) उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कर्म का भाव, (3) उस कर्म के प्रति सम्पूर्ण समर्पण। शास्त्री जी ने सदैव ही यह कहा कि यदि अपने दायित्वों की पूर्ति करना चाहते हो तो अपने कार्य, समर्पण, भक्ति और कर्म में समन्वय होना चाहिए। वे सोचा करते थे कि किसी भी व्यक्ति, समाज और देश के विकास का रहस्य भक्ति और कर्म के सिद्धान्त में निहित है।

सेवा, सादगी का सिद्धान्त :
उन्होंने श्रम, सेवा और सादगी के सिद्धान्त का अनुसरण किया। उन्होंने अपने निर्मल चरित्र और दृढ़ संकल्प शक्ति द्वारा देश की आकांक्षा को पूरा किया। शास्त्री जी का जन्म सामान्य परिवार में हुआ, सामान्य रूप से ही परवरिश हुई। आप देश के प्रधानमन्त्री होकर भी सामान्य बने रहे। विनम्रता, सादगी और सरलता उनके व्यक्तित्व के असाधारण आभूषण थे।

शास्त्री जी और भारतीय आजादी का आन्दोलन :
शास्त्री जी अपनी अल्पायु (17 वर्ष की उम्र) से ही भारतीय आजादी के आन्दोलनों से जुड़े रहे। सन् 1930 से सन् 1942 तक के आजादी के आन्दोलनों के बारह वर्षों के दौरान, शास्त्री जी ने सात वर्ष जेल में बिताए। सबसे लम्बी जेल यात्रा 1942 ई. की थी जो तीन वर्ष तक चली।

साहस और अनुशासन :
शास्त्री जी में अदम्य साहस और अनुशासन की भावना परिपक्वता को प्राप्त थी। वे समस्याओं के निराकरण में पूर्ण सक्षम थे। वे इन्दिरा गाँधी के राजनैतिक गुरु थे। शास्त्री जी ने उत्तर प्रदेश और केन्द्र में विभिन्न पदों पर कार्य किया। उन्हें जिन विभागों का उत्तरदायित्व दिया गया, उन्होंने उन सभी विभागों के कार्य को पूर्ण दक्षता से निभाया।

जनता के सेवक :
शास्त्री जी अपनी छवि ‘जनता के सेवक’ के कारण लोकप्रिय हुए। यद्यपि प्रधानमन्त्री जैसे भारी भरकम पद का कार्य उन्होंने मात्र 19 महीने ही किया लेकिन इस पद पर रहकर सफलताएँ और लोकप्रियता अपने आप में एक उदाहरण हैं। वे प्रायः प्रत्येक भारतीयजन से यही अपेक्षा करते थे कि वे यह समझें कि वे सबसे पहले देश के नागरिक हैं। देश के नागरिक हैं तो संविधान आपको अधिकार तो देता ही है, लेकिन उसके साथ तुम सभी से अपने कर्तव्यों के निर्वाह की आशा भी करता है। आप सभी स्वतन्त्र हैं परन्तु स्वतन्त्रता का उपयोग एक व्यवस्थित समाज के हित में स्वेच्छा से लगाए गए प्रतिबन्धों के अनुसार होना चाहिए। शास्त्री जी कहा करते थे कि अधिकार, कर्त्तव्य और आत्मसंयम अति महत्त्वपूर्ण बात हैं। हमें इनको व्यवहार में लाना चाहिए।

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MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व

11 p-ब्लॉक तत्त्व NCERT अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.

  1. B से TIतक
  2. C से Pb तक की ऑक्सीकरण अवस्थाओं की भिन्नता के क्रम की – व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
1. B से TI तक की ऑक्सीकरण अवस्थाओं की भिन्नता का क्रम –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 3
बोरॉन तथा ऐल्युमिनियम केवल +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं, क्योंकि ये d-अथवा f- इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति के कारण अक्रिय युग्म प्रभाव नहीं दर्शाते हैं। Ga से TI तक के तत्व + 1 तथा +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं। + 1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाने की प्रवृत्ति वर्ग में नीचे की ओर जाने पर बढ़ती जाती है, क्योंकि संयोजी कोश के ns2 इलेक्ट्रॉनों की आबंध की प्रवृत्ति घटती जाती है। इसे अक्रिय युग्म प्रभाव कहते हैं। TI+ TI की अपेक्षा अधिक स्थायी है।

2. से Pb तक की ऑक्सीकरण अवस्थाओं की भिन्नता का क्रम –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 4
कार्बन तथा सिलिकॉन केवल + 4 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं। भारी सदस्यों + 2 में ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करने की प्रवृत्ति Ge < Sn < Pb के क्रम में बढ़ती है। यह संयोजी कोश के ns इलेक्ट्रॉनों की आबंध के प्रति कम रूचि के कारण होता है (अक्रिय युग्म प्रभाव) Ge + 4 अवस्था में स्थायी यौगिक बनाता है । Sn दोनों अवस्थाओं में यौगिक बनाता है तथा लेड के यौगिक +4 अवस्था की तुलना में, + 2 अवस्था में अधिक स्थायी होते हैं।

प्रश्न 2.
TICl3 की तुलना में BCl3 के उच्च स्थायित्व को आप कैसे समझायेंगे ?
उत्तर:
बोरॉन केवल + 3 अवस्था प्रदर्शित करता है। अतः यह एक स्थायी यौगिक BCl3 बनाता है। वर्ग में नीचे आने पर अक्रिय युग्म प्रभाव क्रमशः अधिक प्रभावी होता जाता है, जिसके कारण थैलियम की + 1 ऑक्सीकरण अवस्था, + 3 ऑक्सीकरण अवस्था की अपेक्षा BCl3 अधिक स्थायी होता है।

प्रश्न 3.
बोरॉन ट्राइफ्लुओराइड लुईस अम्ल के समान व्यवहार क्यों प्रदर्शित करता है ?
उत्तर:
BF3, इलेक्ट्रॉन न्यून होने के कारण, एक प्रबल लुईस अम्ल है। यह लुईस क्षार के कारण, एक प्रबल लुईस अम्ल है। यह लुईस क्षार के साथ सुगमतापूर्वक क्रिया करके बोरॉन के प्रति अष्टक पूरा करता है।
F3B + : NH3 → F3B → NH3
लुईस अम्ल लुईस क्षार

प्रश्न 4.
BCl3 तथा CCl4 यौगिक का उदाहरण देते हुए जल के प्रति इनके व्यवहार के औचित्य समझाइए।
उत्तर:
BCl3 एक इलेक्ट्रॉन न्यून अणु है। यह जल से सरलता से इलेक्ट्रॉनों का एक युग्म ग्रहण करता है तथा बोरिक अम्ल (H3BO3) तथा HCl बनाता है।
BCl3 + 3H2O → H3BO3 + 3HCl
CCl4 एक इलेक्ट्रॉन समृद्ध अणु है, जिसमें C परमाणु में d- कक्षक अनुपस्थित होते हैं । जिसके कारण यह ना तो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करता है और न ही देता है। अतः CCl4का जल-अपघटन नहीं होता है।

प्रश्न 5.
क्या बोरिक अम्ल प्रोटीनो अम्ल है ? समझाइए।
उत्तर:
बोरिक अम्ल प्रोटीनो अम्ल नहीं है, क्योंकि यह जल में आयनीकृत होकर प्रोटॉन नहीं देता है। यह एक लुईस अम्ल की भाँति व्यवहार करते हुए H2O अणु के हाइड्रॉक्सिल आयन से इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करता है तथा अंत में H+ आयन मुक्त करता है।
B(OH)3 + 2HOH → [B(OH)3] + H3O+

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प्रश्न 6.
क्या होता है, जब बोरिक अम्ल को गर्म किया जाता है ?
उत्तर:
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प्रश्न 7.
BF3 तथा BH4 की आकृति की व्याख्या कीजिए।इन स्पीशीज में बोरॉन के संकरण को निर्दिष्ट कीजिए।
उत्तर:
BF3 में बोरॉन में 3 आबंध युग्म उपस्थित होते हैं । अतः यह sp2संकरित तथा त्रिकोणीय तथा त्रिकोणीय समतलीय संरचना का होता है जबकि [BH4] में आबंध संख्या = 4 होने के कारण संकरण sp3 तथा संरचना चतुष्फलकीय होती है।
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प्रश्न 8.
ऐल्युमिनियम के उभयधर्मी व्यवहार दर्शाने वाली अभिक्रियाएँ दीजिए।
उत्तर:
Al, अम्ल तथा क्षार दोनों में घुलकर डाइहाइड्रोजन मुक्त करता है, इसका यह व्यवहार उभयधर्मी होता है।
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प्रश्न 9.
इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक क्या होते हैं ? क्या BCl3 तथा SiCl4 इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक है ? समझाइए।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक वे यौगिक होते हैं, जिनमें इनके अणुओं में उपस्थित केन्द्रीय परमाणु एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने की प्रवृत्ति रखता है। इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक लुईस अम्ल भी कहलाते हैं। हाँ, BCI और SiCl, दोनों इलेक्ट्रॉन न्यून होते हैं। जहाँ B परमाणु में एक रिक्त 2p – कक्षक होता है। वहीं Si परमाणु मे रिक्त 3d-कक्षक होता है। ये दोनों परमाणु, इलेक्ट्रॉन दाता स्पीशीज से इलेक्ट्रॉन युग्मों को ग्रहण कर सकते हैं।

प्रश्न 10.
CO2-3 – तथा HCO 3 की अनुनादी संरचनाएँ लिखिए।
उत्तर:
CO2-3आयन की अनुनादी संरचनाएँ –
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HCO 3 आयन की अनुनादी संरचनाएँ –
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प्रश्न 11.

  1. CO2-3
  2. हीरा तथा
  3. ग्रेफाइट में कार्बन की संकरण अवस्था क्या होती है ?

उत्तर:
CO2-3 हीरा तथा ग्रेफाइट में कार्बन की संकरण अवस्थाएँ क्रमशः sp2 sp3 तथा sp2 हैं।
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प्रश्न 12.
संरचना के आधार पर हीरा तथा ग्रेफाइट के गुणों में निहित भिन्नता समझाइए।
उत्तर:
हीरा तथा ग्रेफाइट में अंतर –
हीरा:

  • इसमें C2 sp3संकरित अवस्था में है।
  • इसमें ज्यामिति द्विविमीय परतीय होती है।
  • यह उच्च घनत्व तथा उच्च क्वथनांक के साथ कठोरतम पदार्थ है।
  • यह ऊष्मा तथा विद्युत् का कुचालक (मुक्त इलेक्ट्रॉन मुक्त होता है) होता है।
  • इसका प्रयोग काँच काटने में, आभूषणों तथा अपघर्षक के रूप में होता है।

ग्रेफाइट:

  • इसमें C2 sp2 संकरित अवस्था में है।
  • इसकी ज्यामिति त्रिविमीय चतुष्फलकीय होती है।
  • यह निम्न घनत्व तथा उच्च क्वथनांक के साथ मुलायम तथा चिकनाई वाला पदार्थ है।
  • यह ऊष्मा तथा विद्युत् का सुचालक (चौथा इलेक्ट्रॉन की अनुपस्थिति) होता है।
  • यह स्नेहक के रूप में, इलेक्ट्रोड निर्माण में, पेंसिल में, क्रूसीबल (उच्च गलनांक के कारण) आदि के निर्माण में प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित कथनों को युक्तिसंगत कीजिए तथा रासायनिक समीकरण दीजिए –
1. लेड (II) क्लोराइड, Cl2 से क्रिया करके PbCl4 देता है।
2. लेड (IV) क्लोराइड ऊष्मा के प्रति अत्यधिक अस्थायी है।
3. लेड एक आयोडाइड PbI4 नहीं बनाता है।
उत्तर:
1. लेड (Pb) की +2 ऑक्सीकरण अवस्था अर्थात् Pb(II), + 4 ऑक्सीकरण अवस्था अर्थात् Pb(IV) की अपेक्षा अधिक स्थायी क्लोराइड Pb(IV) क्लोराइड नहीं बनाएगा।
PbCl2(g) + Cl2(g) →PbCl4(g)

2. लेड की (II) ऑक्सीकरण अवस्था, (IV) ऑक्सीकरण अवस्था की तुलना में अधिक स्थायी होती है। अतः लेड (IV) क्लोराइड ऊष्मा के प्रति अत्यधिक अस्थायी होता है। यह गर्म करने पर विघटित होकर लेड (II) क्लोराइड बनाता है।
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3. शक्तिशाली अपचायक होने के कारण I आयन विलयन में Pb4+ आयन को Pb2+ आयन में अपचयित कर देता है, जिससे लेड PbI4 नहीं बना पाता है। अतः प्रायः PbI2 बनाता है।
Pb4+ + 2I → Pb2+ + I2

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प्रश्न 14.
BF3 तथा BF4 में B – F बंध लम्बाई क्रमशः 130 pm तथा 143 pm होने का कारण बताइए।
उत्तर:
BF3 में, बोरॉन sp2 – संकरित है। इसमें रिक्त कक्षक होता है। प्रत्येक में पूर्णतया भरे हुए, अप्रयुक्त कक्षक होते हैं। चूँकि ये दोनों कक्षक समान ऊर्जा-स्तर के होते हैं। अतः pr – pz पश्च बंधन होता है, जिसमें पूर्णतया भरे हुए अप्रयुक्त 2p – कक्षक द्वारा एक इलेक्ट्रॉन युग्म, B के अतिरिक्त 2p – कक्षक को स्थानांतरित होता है। इस प्रकार का बंध निर्माण पश्च बंधन कहलाता है। अत: B – Fबंध में कुछ द्विबंध व्यवहार पाया जाता है। यही कारण है कि सभी तीन B – F बंधों की बंध लम्बाई से कम होती है।

[B – F4] आयन में, बोरॉन sp3 संकरित होती है। इसके पास रिक्त 2p – कक्षक नहीं होते हैं, जिसके कारण इसमें पश्च बंधन नहीं पाया जाता है।[B – F4]आयन में, सभी 4B – F की पूर्णतया एकल बंध होते हैं। द्विबंध, एकल बंध की अपेक्षा छोटे होते हैं। अत: B-F बंध लम्बाई [B – F4] (143 pm) की अपेक्षा BF3 (130 pm) में कम होती है।
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प्रश्न 15.
B – Cl आबंध द्विध्रुव आघूर्ण रखता है, किन्तु BCl3 अणु का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है। क्यों?
उत्तर:
BCl3 में बोरॉन sp2 संकरित होती है, जिसके कारण BCl3 अणु की संरचना ज्यामिति त्रिकोणीय समतलीय होती है। यह आकार में सममित होता है तथा सममित अणुओं के लिए परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण का मान शून्य होता है (क्योंकि सभी द्विध्रुव आघूर्ण, अणु की सममितता के कारण निरस्त हो जाते हैं)।
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अतः BCl3 का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है।

प्रश्न 16.
निर्जलीय HF में ऐल्युमिनियम ट्राइफ्लुओराइड अविलेय है, परन्तु NaF मिलाने पर घुल जाता है। गैसीय BF3 को प्रवाहित करने पर परिणामी विलयन में से ऐल्युमिनियम ट्राइफ्लुओराइड अवक्षेपित हो जाता है। इसका कारण बताइए।
उत्तर:
ऐल्युमिनियम ट्राइफ्लुओराइड (AIF3) अपनी सहसंयोजी प्रकृति के कारण निर्जल HF में अघुलनशील होता है। किन्तु NaF के साथ क्रिया करने पर यह एक जटिल यौगिक बनाता है जो जल में घुलनशील होता है।
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(घुलनशील) जब BF3की वाष्प को जलीय विलयन में प्रवाहित कराया जाता है तो संकुल विदलित हो जाता है। इसके फलस्वरूप ऐल्युमिनियम ट्राइफ्लुओराइड पुनः अवक्षेपित हो जाता है।
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प्रश्न 17.
co के विषैली होने का एक कारण बताइए।
उत्तर:
रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन के साथ ऑक्सीजन फेफड़े में संयोजित होकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है। हीमोग्लोबिन + ऑक्सीजन ⥨ ऑक्सीहीमोग्लोबिन। कार्बन मोनोऑक्साइड अत्यधिक विषाक्त प्रकृति की होती है। इसकी विषाक्तता रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन के साथ संयोग करने की इसकी प्रवृत्ति के कारण होता है, जिससे कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनता है।

कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन अन्दर खींची गयी ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न भागों में ले जाने की स्थिति में नहीं होता है। इससे गला घुटने लगता है और अंत में मृत्यु हो जाती है। हीमोग्लोबिन + CO → कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन
हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि मोनोऑक्साइड, हीमोग्लोबिन की रक्त परिवहन की क्षमता को कम कर देती है।

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प्रश्न 18.
CO2 की अधिक मात्रा भूमण्डलीय ताप वृद्धि के लिए उत्तरदायी कैसे है ?
उत्तर;
हम जानते हैं कि पौधों के प्रकाश संश्लेषण के लिए CO2 अति आवश्यक है। विभिन्न प्रकार की दहन अभिक्रियाओं से यह गैस बनकर वातावरण में मुक्त होती है। जैसा कि ऊपर बताया गया है, पौधों द्वारा इसे ग्रहण किया जाता है। अत: वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड चक्र कार्य करता है और इसकी प्रतिशतता लगभग नियत रहती है। जबकि पिछले कई वर्षों में दहन अभिक्रियाएँ अत्यधिक बढ़ गयी हैं और पेड़-पौधे (जंगल) घट गये हैं।

इससे अब वातावरण में CO2 अधिकता में उपस्थित है। मेथेन की भाँति यह भी हरित गृह गैस की भाँति व्यवहार करती है और पृथ्वी के ऊष्मीय विकिरण को अवशोषित कर लेती है। कुछ ऊष्मा वातावरण में मुक्त होती है और शेष पृथ्वी की ओर पुनः विकिरित हो जाती है। इससे धीरे-धीरे भूमण्डलीय ताप वृद्धि हो जाती है एवं बड़े मौसमी परिवर्तन होते हैं।

प्रश्न 19.
डाइबोरेन तथा बोरिक अम्ल की संरचना समझाइए।
उत्तर:
डाइबोरेन की संरचना:
डाइबोरेन में, सिरे वाले चार हाइड्रोजन परमाणु तथा दो बोरॉन परमाणु एक ही तल में होते हैं। इस तल के ऊपर तथा नीचे दो सेतुबंध हाइड्रोजन परमाणु होते हैं। सिरे वाले चार – B – Hबंध नियमित बंध होते हैं, जबकि दो सेतु बंध (B – H – B) भिन्न प्रकार के होते हैं तथा इन्हें केला बंध (या विकेंद्रीय बंध) कहते हैं।
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बोरिक अम्ल की संरचना-बोरिक अम्ल की परतीय संरचना होती है, जिससे H3BO3 इकाइयाँ हाइड्रोजन बंध द्वारा जुड़ी होती है।
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प्रश्न 20.
क्या होता है ? जब –
1. बोरेक्स को अधिक गर्म किया जाता है।
2. बोरिक अम्ल को जल में मिलाया जाता है।
3. ऐल्युमिनियम की तनु NaOH से अभिक्रिया कराई जाती है।
4. BF3 की क्रिया अमोनिया से की जाती है।
उत्तर:
1. बोरेक्स को अत्यधिक गर्म करने पर सोडियम मेटाबोरेट तथा बोरिक एनहाइड्राइड का काँच के समान पारदर्शक मानक प्राप्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 18
2. बोरिक अम्ल ठण्डे जल में अल्प विलेय है जबकि गर्म जल में शीघ्र विलेय है। यह दुर्बल मोनो क्षारीय अम्ल की भाँति कार्य करता है। यह प्रोटीन अम्ल नहीं है परन्तु जल के एक हाइड्रॉक्साइड आयन को ग्रहण करके प्रोटॉन देने के कारण लुईस अम्ल की भाँति व्यवहार करता है।
H – OH + B(OH)3 — [B(OH)3] + H+

3. जब ऐल्युमिनियम की क्रिया तनु NaOH से कराई जाती है तो डाइहाइड्रोजन मुक्त होती है।
2Al(s) + 2NaOH(aq) + 6H2O(l) → 2Na+[AI(OH)4](aq) + 3H2(g)

4. BF3 लुईस अम्ल होने के कारण, NHसे एक इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करके संकर यौगिक बनाता है।
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प्रश्न 21.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को समझाइए –
1. कॉपर की उपस्थिति में उच्च ताप पर सिलिकॉन को मेथिल क्लोराइड के साथ गर्म किया जाता है।
2. सिलिकॉन डाइऑक्साइड की क्रिया हाइड्रोजन फ्लुओराइड के साथ की जाती है।
3. CO को ZnO के साथ गर्म किया जाता है।
4. जलीय ऐलुमिना की क्रिया जलीय NaOH के साथ की जाती है।
उत्तर:
1. सिलिकॉन को कॉपर उत्प्रेरक की उपस्थिति में लगभग 300°C ताप पर मेथिल क्लोराइड के साथ गर्म करने पर निम्न क्रिया होती है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 20
जल अपघटन करने पर यह सिलिकॉन के बहुलकों का निर्माण करता है।

2. सिलिकॉन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन फ्लुओराइड के साथ अभिक्रिया करके सिलिकॉन टेट्राफ्लुओराइड (SiFa) बनाता है।
SiO2 + 4HF → SiF4 + 2H2O
पुनः SiF4 हाइड्रोजन फ्लुओराइड के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोफ्लुओरोसैलिसिलीक अम्ल बनाता है।
SiF4 + 2HF → H2SiF6

3. CO द्वारा जो कि एक प्रबल अपचायक है, ZnO जिंक (Zn) में अपचयित हो जाता है।
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4. ये दोनों यौगिक दाब के अधिक गर्म करने पर अभिक्रिया करके एक घुलनशील संकुल बनाते हैं।
Al2O3(s)+ 2NaOH(aq) + 3H2 O(l) → 2Na[Al(OH)Al4](aq)

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प्रश्न 22.
कारण बताइए –
1. सांद HNO3 का परिवहन ऐल्युमिनियम के पात्र द्वारा किया जा सकता है।
2. तनु NaOH तथा ऐल्युमिनियम के टुकड़ों के मिश्रण का प्रयोग अपवाहिका खोलने के लिए किया जाता है।
3. ग्रेफाइट शुष्क स्नेहक के रूप में प्रयुक्त होता है।
4. हीरे का प्रयोग अपघर्षक के रूप में क्यों करते हैं ?
5. वायुयान बनाने में ऐल्युमिनियम मिश्रधातु का उपयोग होता है।
6. जल को ऐल्युमिनियम पात्र में पूरी रात नहीं रखना चाहिए।
7. संचरण केबल बनाने में ऐल्युमिनियम तार का प्रयोग होता है।
उत्तर:
1. Al सांद्र HNO3 के साथ क्रिया करके अपनी सतह पर ऐल्युमिनियम ऑक्साइड की रक्षी परत बना लेता है, जो इसकी पुनः क्रियाओं को रोकती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 22
अत: A निष्क्रिय हो जाता है। यही कारण है कि, सांद्र HNO3 का परिवहन ऐल्युमिनियम के पात्र द्वारा किया जाता है।

2. NaOH, AI के साथ क्रिया करके डाइहाइड्रोजन गैस मुक्त करता है । इस हाइड्रोजन गैस के दाब का प्रयोग अपवाहिका खोलने के लिए किया जाता है।
2Al(s) + 2NaOH(aq) + 2H2O(l) → 2NaAlO2(aq) + 3H2(g)

3. ग्रेफाइट की परतीय संरचना होती है। ये परतें परस्पर दुर्बल वाण्डर वाल्स आकर्षण बलों द्वारा बँधी होती हैं, अतः एक दूसरे के ऊपर फिसल सकती हैं। इसी कारण ग्रेफाइट को शुष्क स्नेहक के रूप में प्रयुक्त करते हैं।

5. हीरे में, प्रत्येक sp3 संकरित परमाणु, चार अन्य कार्बन परमाणुओं द्वारा जुड़ा रहता है। इससे परमाणुओं के त्रिविमीय जालक का निर्माण होता है। इस विस्तृत सहसंयोजक बंधन को तोड़ना कठिन कार्य होता है। अतः हीरा पृथ्वी पर पाये जाने वाला कठोरतम पदार्थ है। इसी कारण इसका प्रयोग अपघर्षक के रूप में करते हैं।

6. ऐल्युमिनियम के मिश्रधातु जैसे ड्यूरालुमीन हल्की, मजबूत तथा जंगरोधी होती है। इसी कारण इनका प्रयोग वायुयान बनाने में होता है।

7. ऐल्युमिनियम जल तथा ऑक्सीजन (जल में उपस्थित) के साथ क्रिया करके विषैले ऐल्युमिनियम ऑक्साइड की पतली परत पात्र दीवार पर बना देता है। इसलिए जल को ऐल्युमिनियम पात्र में पूरी रात नहीं रखना चाहिए।

8. ऐल्युमिनियम में विद्युत् चालकता अत्यधिक होती है। इसका प्रयोग संचरण केबल बनाने में होता है। पुनः भारानुसार AI विद्युत् चालकता Cu की अपेक्षा दुगुनी होती है।
2Al(s) + O2(g) + H2O(l) → Al2O(s) + H2(g)

प्रश्न 23.
कार्बन से सिलिकॉन तक आयनीकरण एन्थैल्पी में प्रघटनीय कमी होती है, क्यों ?
उत्तर:
आवर्त सारणी में कार्बन से सिलिकॉन की ओर चलने पर, परमाणु आकार में वृद्धि होती है, अर्थात् बाह्यतम इलेक्ट्रॉन तथा नाभिक में दूरी बढ़ती है। अतः ये इलेक्ट्रॉन नाभिक का आकर्षण बहुत कम अनुभव करते हैं, जिसके कारण इन्हें निकालना अत्यन्त आसान है। चूँकि Si परमाणु का आकार छोटा है, जिसके कारण बाह्यतम इलेक्ट्रॉन न्यूनतम आकर्षण अनुभव करते हैं। अतः इसकी आयनन एन्थैल्पी (1 इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा) न्यूनतम होती है।

प्रश्न 24.
AI की तुलना में Ga की कम परमाण्वीय त्रिज्या को आप कैसे समझाएँगे?
उत्तर:
AI तथा Ga की इलेक्ट्रॉनिक संरचनाएँ निम्न हैं –
Al13= 1s2,2s22p6, 3s23p1
Ga51 = 1s2,2s22p6, 3s23p63d10, 4s2,4p1.
इनमें d – इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण प्रभाव अत्यन्त कम है। अत: AI से Ga की ओर चलने पर, 10 d – इलेक्ट्रॉनों का रक्षी प्रभाव बढ़े हुए नाभिकीय आवेश को निष्प्रभावी करने में असमर्थ है। अतः Ga की परमाण्विक त्रिज्या प्रभावी नाभिकीय आवेश के कारण ऐल्युमिनियम की परमाण्विक त्रिज्या से कम होती है।

प्रश्न 25.
अपरूप क्या होता है ? कार्बन के दो महत्वपूर्ण अपरूप हीरा तथा ग्रेफाइट की संरचना का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
जब कोई तत्व दो या दो से अधिक रूपों में पाया जाता है तथा इन रूपों के भौतिक गुण भिन्नभिन्न तथा रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं, तो इस गुण को अपरूपता तथा तत्व के विभिन्न रूप अपरूप कहलाते हैं। क्रिस्टलीय कार्बन मुख्यतः दो अपररूपों –

  • ग्रेफाइट तथा
  • हीरा रूप में पाया जाता है।

1985 में कार्बन का एक तीसरा अपररूप फुलरीन की खोज एच. डब्लू. क्रोटो, ई. स्माले तथा आर. एफ. कर्ल द्वारा की गई। हीरे में प्रत्येक कार्बन sp3 संकरित होता है तथा चतुष्फलकीय ज्यामिति से चार अन्य कार्बन परमाणु से होता रहता है। हीरे में कार्बन परमाणुओं का त्रिविमीय जालक बना होता है। ग्रेफाइट में प्रत्येक कार्बन sp2 संकरित होता है तथा तीन समीपवर्ती कार्बन परमाणुओं के साथ तीन सिग्मा (6) बंध बनाता है। इसकी संरचना परतीय होती है तथा ये परतें दुर्बल वाण्डर वाल्स बलों से जुड़ी होती हैं।
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कार्बन के दो अपरूपों हीरा तथा ग्रेफाइट की संरचना तथा इनके भौतिक गुणों पर प्रभाव –

  • हीरा, अपनी कठोरता के कारण, अपघर्षक तथा रूपदा (dye) बनाने में प्रयुक्त होता है, जबकि ग्रेफाइट मुलायम होने के कारण पेंसिल के रूप तथा मशीनों में शुष्क स्नेहक के रूप में प्रयुक्त होता है।
  • हीरा विद्युत् का चालक नहीं है, जबकि ग्रेफाइट विद्युत् का अच्छा चालक है, क्योंकि इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु का इलेक्ट्रॉन मुक्त अवस्था में होता है।
  • हीरा पारदर्शी है, जबकि ग्रेफाइट अपारदर्शी है।

प्रश्न 26.
1. निम्नलिखित ऑक्साइड को उदासीन, क्षारीय तथा उभयधर्मी ऑक्साइड के रूप में वर्गीकृत कीजिए – CO, B,03, SiO2, AI,03, Pb02, TI2O3.
(b) इनकी प्रकृति को दर्शाने वाली रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
1. उदासीन ऑक्साइड – CO
अम्लीय ऑक्साइड – B2O3, SiO2, CO2
क्षारीय ऑक्साइड – TI2O3
उभयधर्मी ऑक्साइड – Al2O3, PbO2.

2. (i) B2O3, SiO2 तथा CO2 अम्लीय होने के कारण क्षारों के साथ क्रिया करके लवण बनाते हैं।
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3. Al2O3 तथा PbO2 उभयधर्मी होने के कारण, अम्लों तथा क्षारों दोनों के साथ क्रिया करते हैं।
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4. Tl2O3क्षारीय होने के कारण अम्लों के साथ क्रिया करता है।
TI2O3 + 6HCl → 2TICl3 +3H2O

प्रश्न 27.
कुछ अभिक्रियाओं में थैलियम, ऐल्युमिनियम से समानता दर्शाता है, जबकि अन्य में यह समह – 1 के धातुओं से समानता दर्शाता है। इस तथ्य को कुछ प्रमाणों के द्वारा सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
थैलियम तथा ऐल्युमिनियम दोनों वर्ग – 13 के तत्व हैं। इसके संयोजी कोश का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np1 है। ऐल्युमिनियम केवल +3 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है। ऐल्युमिनियम की भाँति, थैलियम भी कुछ यौगिकों में + 3 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है। उदाहरण- TI2O3, TIC, आदि। ऐल्युमिनियम की भाँति थैलियम भी अष्टफलकीय आयन जैसे [AlF6]3- तथा [TIF]3- बनाता है।

वर्ग – 1 की क्षार धातुओं के समान, थैलियम अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण + 1 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है। उदाहरण- TICl, TIO आदि। क्षार धातु हाइड्रॉक्साइडों की भाँति, TIOH भी जल में विलेय है तथा जलीय विलयन प्रबल क्षारीय है। TI,SOA, क्षार धातु सल्फेटों की भाँति फिटकरी बनाता है तथा TI2O3, क्षार धातु कार्बोनेट की भाँति जल में विलेय है।

प्रश्न 28.
जब धातु X की क्रिया सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ की जाती है, तो श्वेत अवक्षेप (A) प्राप्त होता है, जो NaOH के आधिक्य में विलेय होकर विलेय संकुल (B) बनाता है। यौगिक (A) तनु HCl में घुलकर यौगिक (C) बनाता है। यौगिक (A) को अधिक गर्म किए जाने पर यौगिक (D) बनता है, जो एक निष्कर्षित धातु के रूप में प्रयुक्त होता है।X,A, B, C तथा D को पहचानिए तथा इनकी पहचान के समर्थन में उपयुक्त समीकरण दीजिए।
उत्तर:
आँकड़े सुझाते हैं कि यह धातु ‘X’ ऐल्युमिनियम है। यौगिक (A), (B), (C) और (D) के निर्माण में ऐल्युमिनियम की अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं –
1. ऐल्युमिनियम (X) को NaOH के साथ गर्म करने पर AI(OH)3 का एक सफेद अवक्षेप अर्थात् यौगिक A बनता है, जो NaOH के आधिक्य में घुलकर घुलनशील संकुल ‘B’ बनाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 27
2. यौगिक (A) तनु HCl में घुलकर ऐल्युमिनियम क्लोराइड (C) बनाता है।
Al(OH)3 + 3HCl(aq) → AlCl3(aq) + 3H2O(l)

3. AI(OH)3 गर्म करने पर ऐलुमिना (D) में बदल जाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 28
Al2O3, Al धातु के निष्कर्षण में प्रयुक्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 29

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प्रश्न 29.
निम्नलिखित से आप क्या समझते हैं(a) अक्रिय युग्म प्रभाव, (b) अपरूप, (c) श्रृंखलन।
उत्तर:
1. अक्रिय युग्म प्रभाव:
जबs – इलेक्ट्रॉनों की प्रवृत्ति स्वयं के साथ ही रहने की हो या sइलेक्ट्रॉनों की प्रवृत्ति अभिक्रिया में भाग लेने के प्रति विमुखता हो तो इस प्रवृत्ति को अक्रिय युग्म प्रभाव कहते हैं । इसका कारण यह है कि ns – इलेक्ट्रॉनों को अयुग्मित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा दो अतिरिक्त ऊर्जा दो अतिरिक्त बंध बनाने में निर्मुक्त ऊर्जा से अधिक नहीं होती है। वर्ग-13, 14, 15 के भारी सदस्य तत्व अपने संयोजी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या से कम ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं। उदाहरण के लिए TI में +1 ऑक्सीकरण अवस्था, + 3 ऑक्सीकरण अवस्था की अपेक्षा अधिक स्थायी है।

2. अपरूप:
जब कोई तत्व दो. या दो से अधिक रूपों में पाया जाता है तथा इन रूपों के भौतिक गुण भिन्न-भिन्न तथा रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं, तो इन रूपों को अपरूप तथा इस गुण को अपरूपता कहते हैं। इसका कारण या तो अणुओं में परमाणुओं की संख्या में अंतर है (जैसे- O2 तथा O3) अथवा अणु में परमाणुओं की व्याख्या में भिन्नता होती है। [जैसे – ग्रेफाइट, हीरा तथा फुलेरीन (कार्बन के क्रिस्टलीय अपरूप)]

3. श्रृंखलन:
एक जैसे परमाणुओं की परस्पर, जुड़कर लंबी, खुली या बंद श्रृंखला बनाने का गुण श्रृंखलन कहलाता है। यह कार्बन में अधिकतम पाया जाता है तथा वर्ग में नीचे की ओर जाने पर क्रमशः घटता है। वर्ग-14 में क्रम निम्नवत् है –
C >> Si > Ge = Sn >> Pb

प्रश्न 30.
एक लवण x निम्नलिखित परिणाम देता है –
1. इसका जलीय विलयन लिटमस के प्रति क्षारीय होता है।
2. तीव्र गर्म किए जाने पर यह काँच के समान ठोस में स्वेदित हो जाता है।
3. जब X के गर्म विलयन में सान्द्र H2SO4 मिलाया जाता है, तो एक अम्ल Z का श्वेत क्रिस्टल बनता है।
उपर्युक्त अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए और X, Y तथा Z को पहचानिए।
उत्तर:
आँकड़ों से पता चलता है कि लवण ‘X’ बोरेक्स (Na2B4O7. 10H2O) है।
1. बोरेक्स का जलीय विलयन क्षारीय प्रकृति का होता है और लाल लिटमस को नीला कर देता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 30
2. बोरेक्स को तेज गर्म करने पर इसका आकार बढ़ जाता है और यह क्रिस्टलन जल के अणुओं को त्यागकर ठोस (Y) बनाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 31
3. बोरेक्स, सान्द्र H2SO4 के साथ अभिक्रिया करके बोरिक अम्ल (H3BO3) बनाता है। यह विलयन में सफेद क्रिस्टलों (Z) के रूप में प्राप्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 38

प्रश्न 31.
निम्नलिखित के लिये संतुलित समीकरण लिखिये –
1. BF3 + LiH →
2. B2H6 + H2O →
3. NaH + B2H6
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 32
5. AI + NaOH + H2O →
6. B2H6 + NH2
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 33

प्रश्न 32.
CO तथा CO2 प्रत्येक के संश्लेषण के लिए एक प्रयोगशाला तथा एक औद्योगिक विधि समझाइए।
उत्तर:
(a) कार्बन मोनोऑक्साइड –
1. औद्योगिक विधि;
गर्म कोक पर भाप प्रवाहित करने पर CO प्राप्त होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 34
2. प्रयोगशाला विधि:
सांद्र H2SO4 की उपस्थिति में फॉर्मिक अम्ल के निर्जलीकरण द्वारा CO प्राप्त होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 35

(b) कार्बन डाइऑक्साइड –
1.  औद्योगिक विधि – चूने के पत्थर को गर्म करने पर CO2प्राप्त होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 36
2. प्रयोगशाला विधि – CaCO3 पर तनु HCl की क्रिया से CO2 प्राप्त होती है।
CaCO3(s) + 2HCl(aq) →CaCl2(aq)+ CO2(g)+ H2O(l)

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प्रश्न 33.
बोरेक्स के जलीय विलयन की प्रकृति कौन-सी होती है –
(i) उदासीन
(ii) उभयधर्मी
(iii) क्षारीय
(iv) अम्लीय।
उत्तर:
क्षारीय।

प्रश्न 34.
बोरिक अम्ल के बहुलकीय होने का कारण
(i) इसकी अम्लीय प्रकृति है
(ii) इसमें हाइड्रोजन बन्धों की उपस्थिति है
(iii) इसकी एकक्षारीय प्रकृति है
(iv) इसकी ज्यामिति है।
उत्तर:
(ii) हाइड्रोजन बन्धों की उपस्थिति।

प्रश्न 35.
डाइबोरेन में बोरॉन का संकरण कौन:
सा होता है –
(i) sp2
(ii) sp2
(iii) sp3
(iv) dsp2
उत्तर:
(iii) sp3 संकरण।

प्रश्न 36.
ऊष्मागतिकीय रूप से कार्बन का सर्वाधिक स्थायी रूप कौन-सा है –
(i) हीरा
(ii) ग्रेफाइट
(iii) फुलेरीन्स
(iv) कोयला।
उत्तर:
(ii) कार्बन अपरूपों में ग्रेफाइट सर्वाधिक स्थायी है।

प्रश्न 37.
निम्नलिखित में से समूह-14 के तत्वों के लिए कौन-सा कथन सत्य है –
(i) +4 ऑक्सीकरण प्रदर्शित करते हैं।
(ii) +2 तथा + 4 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं।
(iii) M2- तथा M4+ आयन बनाते हैं।
(iv) M2+ तथा M4-आयन बनाते हैं।
उत्तर:
(ii) +2 और +4 ऑक्सीकरण अवस्था।

प्रश्न 38.
यदि सिलिकॉन-निर्माण में प्रारंभिक पदार्थ RSiC3 है, तो बनने वाले उत्पाद की संरचना दीजिए।
उत्तर:
एल्किलट्राइक्लोरोसिलेन के जल-अपघटन तथा इसके पश्चात् संघनन बहुलीकरण द्वारा शृंखला बहुलक (सिलिकॉन) प्राप्त होते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 37

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11 p-ब्लॉक तत्त्व अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

11 p-ब्लॉक तत्त्व वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
बोरिक अम्ल के बारे में कौन-सा कथन असत्य है –
(a) यह एक भास्मिक अम्ल है
(b) यह बोरॉन हैलाइड के जल-अपघटन से बनता है
(c) इसकी आकृति समतलीय होती है
(d) यह त्रिभास्मिक अम्ल है।
उत्तर:
(a) यह एक भास्मिक अम्ल है

प्रश्न 2.
डाइबोरेन में बोरॉन परमाणु का संकरण है –
(a) sp
(b) sp2
(c) sp3
(d) sp3d2
उत्तर:
(b) sp2

प्रश्न 3.
बोरिक अम्ल के बहुलीकृत होने का कारण है –
(a) अम्लीय प्रकृति
(b) H – बंध
(c) मोनो-भास्मिक प्रकृति
(d) इसकी ज्यामिति।
उत्तर:
(b) H – बंध

प्रश्न 4.
ऐल्युमिनियम का प्रमुख अयस्क है –
(a) बॉक्साइट
(b) डोलोमाइट
(c) गैलेना
(d) फेल्स्पार।
उत्तर:
(a) बॉक्साइट

प्रश्न 5.
त्रिकेन्द्रित दो इलेक्ट्रॉन बंध किसमें उपस्थित हैं –
(a) NH3
(b)B2H 6
(c) BCl3
(d) Al2Cl6
उत्तर:
(b)B2H6

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प्रश्न 6.
कार्बोरंडम है –
(a) B4C
(b) SiC
(c) Al3C4
(d) CaC2
उत्तर:
(b) SiC

प्रश्न 7.
कौन-सा हैलाइड इलेक्ट्रॉन न्यून है –
(a) CCl4
(b) NCl3
(c) Cl2O
(d) BCl3
उत्तर:
(d) BCl3

प्रश्न 8.
कार्बन का स्थायी अपरूप है –
(a) हीरा
(b) ग्रेफाइट
(c) कोल
(d) ऐंथेसाइट।
उत्तर:
(b) ग्रेफाइट

प्रश्न 9.
विद्युत् चालकता किसमें नहीं है –
(a)K
(b) ग्रेफाइट
(c) हीरा
(d) Na.
उत्तर:
(c) हीरा

प्रश्न 10.
कठोरतम ज्ञात पदार्थ है –
(a) कोक
(b) कार्बोरण्डम
(c) कोरंडम
(d) हीरा।
उत्तर:
(d) हीरा।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. जब एलुमिना में Fe2O3 एवं SiO2दोनों प्रकार की अशुद्धियाँ उपस्थित रहती हैं तो इसका शोधन ………….. की विधि द्वारा किया जाता है।
  2. सिलिका युक्त अशुद्धि वाले बॉक्साइट खनिज को N2 की धारा में कोक के साथ 1800°C पर गर्म करने से ………….. प्राप्त होता है तथा सिलिकॉन वाष्पशील होने से अलग हो जाता है।
  3. समूह 13 के तत्वों के कुछ ऑक्साइड जलीय विलयन में नीले लिटमस को लाल एवं लाल लिटमस को नीला करते हों, इस प्रकार के ऑक्साइडों का विलयन ………….. कहा जाता है।
  4. ऐल्युमिनियम क्लोराइड द्विलक के रूप में पाया जाता है, जिसका रासायनिक सूत्र ………….. है।
  5. ठोस CO2 को ………….. कहते हैं।
  6. ओजोन परत को नष्ट करने वाला प्रमुख कारक ………….. है।
  7. कार्बन मोनोऑक्साइड सूर्य प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन से क्रिया करके एक विषैली गैस ………….. बनाती है।
  8. कृत्रिम हीरे बनाने वाले सर्वप्रथम वैज्ञानिक ………….. हैं।
  9. जर्मेनियम एक ………….. है।
  10. ग्रेफाइट विद्युत् का ………….. तथा हीरा ………….. है।

उत्तर:

  1. हॉल की
  2. ऐल्युमिनियम नाइट्राइड, (AIN)
  3. उदासीन
  4. Al2Cl6
  5. शुष्क बर्फ
  6. क्लोरो फ्लोरो कार्बन
  7. फॉस्जीन
  8. मोयसाँ
  9. उपधातु
  10. कुचालक, सुचालक।

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प्रश्न 3.
उचित संबंध जोडिए –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 1
उत्तर:

  1. (b) अम्लीय
  2. (c) क्षारीय
  3. (d) क्षारीय
  4. (a) उभयधर्मी
  5. (e) उभयधर्मी।

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 2
उत्तर:

  1. (e) CS2
  2. (c) B4C
  3. (a) CCl4
  4. (b) C2 H2
  5. (d) ग्रेफाइट

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प्रश्न 4.
एक शब्द / वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. TI की + 1 ऑक्सीकरण अवस्था + 3 की अपेक्षा अधिक स्थायी होता है।
  2. बोरॉन के हाइड्राइड को क्या कहते हैं ?
  3. Two electron three center bond’ किसे कहते हैं ? .
  4. कॉपर सल्फेट के विलयन में अमोनिया विलयन को अधिकता में मिलाने पर क्या होगा?
  5. ऐलम का सूत्र लिखिए।
  6. C60 कार्बन क्रिस्टल का नाम क्या है?
  7. कौन-सा कार्बाइड हीरे से भी कठोर है?
  8. कार्बन के किस गुण के कारण इसके यौगिकों की संख्या इतनी अधिक है?
  9. कार्बन के विद्युत् सुचालक अपररूप का नाम बताइये।
  10. जल ग्लॉस किसे कहते हैं?

उत्तर:

  1. अक्रिय युग्म प्रभाव
  2. बोरेन
  3. डाइबोरेन
  4. क्यूप्रिक अमोनियम सल्फेट का संकर यौगिक बनेगा.
  5. K2SO4Al2 (SO4)3.24H20
  6. बकमिंस्टर फुलेरीन
  7. बोरॉन कार्बाइड
  8. श्रृंखलन का गुण
  9. ग्रेफाइट
  10. सोडियम सिलिकेट।

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11 p-ब्लॉक तत्त्व अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्या कारण है कि कास्टिक क्षार जैसे NaOH को ऐल्युमिनियम के बर्तन में नहीं रखा जाता?
उत्तर:
कास्टिक क्षार जैसे NaOH को ऐल्युमिनियम के पात्र में रखने पर ऐल्युमिनियम क्षार में विलेय होकर सोडियम मेटा ऐल्युमिनेट बनाता है इसीलिए क्षार को ऐल्युमिनियम के पात्र में नहीं रखा जाता। 2Al + 2NaOH + 2H2O → 2NaAlO2  + 3H2

प्रश्न 2.
साधारण ताप पर ऐल्युमिनियम जल के साथ कोई अभिक्रिया नहीं करता, क्यों?
उत्तर:
वायु की उपस्थिति में AI की सतह पर पारदर्शी असरन्ध्रमय संरक्षक ऑक्साइड पर्त बन जाती है। इस पर्त के कारण साधारण ताप पर जल के साथ कोई अभिक्रिया नहीं दर्शाता।

प्रश्न 3.
आयरन तथा ऐल्युमिनियम में ऐल्युमिनियम, आयरन की तुलना में अधिक क्रियाशील है किन्तु ऐल्युमिनियम की तुलना में आयरन पर जंग सरलता से लगता है, क्यों?
उत्तर:
वायु की उपस्थिति में ऐल्युमिनियम की सतह पर पारदर्शी असरन्ध्रमय संरक्षक ऑक्साइड पर्त बन जाती है, जिसके कारण यह साधारण ताप पर वायु में उपस्थित ऑक्सीजन तथा नमी के साथ कोई अभिक्रिया नहीं दर्शाती जबकि आयरन की सतह पर सरन्ध्रमय ऑक्साइड पर्त बनती है। जिसके कारण आयरन की क्रियाशीलता बढ़ जाती है। इसीलिये आयरन पर सरलता से जंग लगता है।

प्रश्न 4.
द्विक लवण या एलम का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
द्विक लवण का सामान्य सूत्र R2SO4 M2(SO4)3 है। जहाँ R कोई एकसंयोजी धातु जैसे – Na, K, Rb, Cs या NH+4 मूल तथा M त्रिसंयोजक धातु जैसे- Fe+3 Al+3 या Cr+3 हो सकता है।
उदाहरण – K2SO4 Al2 (SO4)3.24H2O पोटाश एलम

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प्रश्न 5.
ऐल्युमिनियम के अयस्कों के नाम बताइये। अयस्कों के सूत्र दीजिए।
उत्तर:
ऐल्युमिनियम के अयस्क निम्नलिखित हैं –

  1. बॉक्साइट – Al2O3 2H2O
  2. डायस्योर – Al2O3H2O2
  3. क्रायोलाइट – Na3AlF 6
  4. एलुनाइट – K2SO4 Al2 (SO4)3 2Al(OH)3
  5. कोरण्डम – Al2O3
  6. फेल्स्पार – K2OA2O3 SiO3

प्रश्न 6.
क्या होता है जब (समीकरण देकर स्पष्ट कीजिए) –

  1. ऐल्युमिनियम क्लोराइड को गर्म करते हैं।
  2. फिटकरी को गर्म करते हैं।

उत्तर:
(1) ऐल्युमिनियम क्लोराइड को गर्म करने पर Al2O3प्राप्त होता है।
2AlCl3l.6H2 O → Al2O3 + 6HCl + 3H2O
(2) फिटकरी को गर्म करने पर 200°C पर सरन्ध्र पदार्थ में बदल जाती है।
K2SO4.Al2 (SO4)3 .24H2O → K2O + Al2O3 + 4SO2 + 24H2O

प्रश्न 7.
ऐल्युमिनियम एक प्रबल अपचायक है, क्यों?
उत्तर:
वे तत्व जो रासायनिक अभिक्रिया में इलेक्ट्रॉन दान करके धनायन बनाते हैं, अपचायक कहलाते हैं। किसी भी तत्व की अपचायक प्रवृत्ति उसके मानक इलेक्ट्रोड विभव पर निर्भर करती है। किसी भी तत्व का मानक इलेक्ट्रोड विभव का मान जितना अधिक ऋणात्मक होगा वह तत्व उतना प्रबल अपचायक होगा। Al का मानक इलेक्ट्रोड विभव -1.67 है इसलिये ऐल्युमिनियम एक प्रबल अपचायक की तरह कार्य करता है।

प्रश्न 8.
कमरे के तापक्रम पर गैलियम द्रव क्यों है ?
उत्तर:
ठोस अवस्था में गैलियम की क्रिस्टलीय संरचना इस प्रकार की होती है कि इसकी जालक ऊर्जा बहुत कम होती है तथा कम ताप पर ही इसके परमाणुओं के बीच के धात्विक बंध टूटने लगता है। इसलिये कमरे के तापक्रम पर ही गैलियम द्रव अवस्था में प्राप्त होता है।

प्रश्न 9.
बोरॉन त्रिसंयोजी आयन नहीं बनाता, क्यों?
उत्तर:
बोरॉन के छोटे आकार के कारण इसकी आयनन ऊर्जा अत्यन्त उच्च होती है तथा तृतीय आयनन ऊर्जा का मान प्रथम आयनन ऊर्जा तथा द्वितीय आयनन ऊर्जा से अधिक होता है। इसलिये बोरॉन के संयोजी कोश से तीन इलेक्ट्रॉन का सरलता से निकाला जाना या दान करना संभव नहीं है। इसलिये बोरॉन त्रिसंयोजी आयन नहीं बनाता।

प्रश्न 10.
बोरॉन के गलनांक तथा क्वथनांक अत्यधिक उच्च क्यों हैं ?
उत्तर:
बोरॉन का क्रिस्टल परमाणुओं के बीच सहसंयोजी बंध स्थापित होकर बनता है। 2 परमाणु ‘मिलकर इकोसेहेड्रॉन नेटवर्क तैयार करते हैं, जिसके 20 त्रिभुजाकार फलक तथा 12 कोने होते हैं। यह बोरॉन को अत्यधिक कठोर बनाता है इसीलिये बोरॉन के गलनांक तथा क्वथनांक अत्यधिक उच्च होते हैं।

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प्रश्न 11.
बोरॉन सामान्यतः अम्ल या क्षार से अभिक्रिया नहीं करता, वह किन परिस्थितियों में अम्ल या क्षार से अभिक्रिया करता है?
उत्तर:
बोरॉन सामान्यतः अम्ल या क्षार से अभिक्रिया नहीं करता है लेकिन अम्ल यदि प्रबल ऑक्सीकारक हो तो बोरॉन उसके साथ उच्च ताप पर अभिक्रिया कर बोरिक अम्ल बनाता है। इसी प्रकार क्षार के साथ उच्च ताप पर अभिक्रिया करके बोरेट बनाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 39

प्रश्न 12.
अकार्बनिक बेंजीन किसे कहते हैं?
उत्तर:
बोरेजीन को अकार्बनिक बेंजीन कहा जाता है इसका रासायनिक सूत्र B3N3H6 है। बोरेजीन की संरचना बेंजीन के समान चक्रीय तथा समतलीय षट्कोणीय संरचना होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 40

प्रश्न 13.
कोरण्डम किसे कहते हैं ?
उत्तर:
Al एक से अधिक क्रिस्टलीय रूपों में मिलता है। इसका सबसे अधिक कठोर क्रिस्टलीय रूप कोरन्डम कहलाता है, जो अपघर्षक की तरह कार्य करता है।

प्रश्न 14.
बोरॉन के अयस्कों के नाम बताइये। अयस्कों के सूत्र दीजिये।
उत्तर:
बोरॉन के अयस्क निम्नलिखित हैं –

  • बोरेक्स – Na2 B4O710H2O
  • केनाइट – Na2B4O7 2H2O
  • कोलेमेनाइट – Ca3[B3HO4 (OH)3] .2H2O
  • आर्थोबोरिक अम्ल – H3BO3

प्रश्न 15.
सिद्ध कीजिए कि TI+3 ऑक्सीकारक है जबकि Al+3 नहीं।
उत्तर-अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण बोरॉन परिवार में +1 ऑक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व समूह में ऊपर से नीचे आने पर बढ़ता है जबकि + 3 ऑक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व घटता है इसलिये TI+1, TI+3 की तुलना में अधिक स्थायी है, अतः
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 41
अभिक्रिया से स्पष्ट है कि TI+3 का TI+1 में अपचयन हो रहा है इसलिये TI+3 ऑक्सीकारक है लेकिन Al में Al+3 ऑक्सीकरण अवस्था संभव है। किन्तु Al+3 का ऑक्सीकारक होना संभव नहीं है।

प्रश्न 16.
क्या होता है, जब बोरॉन की अभिक्रिया कास्टिक क्षार के साथ कराई जाती है?
उत्तर:
बोरॉन साधारण ताप पर क्षार के साथ कोई अभिक्रिया नहीं दर्शाता लेकिन कास्टिक क्षार NaOH या कास्टिक पोटाश KOH के साथ अभिक्रिया कर बोरेट बनाता है तथा H2 गैस मुक्त करता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 42

प्रश्न 17.
विषमानुपाती अभिक्रिया को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
गैलियम +1 तथा +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है। गैलियम की +3 ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी होती है इसलिये गैलियम की +1 ऑक्सीकरण अवस्था वाला यौगिक + 3 ऑक्सीकरण अवस्था वाले यौगिक में ऑक्सीकृत हो जाता है।
3GaCl → 2Ga + GaCl3

प्रश्न 18.
बोरिक अम्ल लुईस अम्ल की तरह कार्य करता है प्रोटिक अम्ल की तरह नहीं, क्यों?
उत्तर:
बोरिक अम्ल में केन्द्रीय धातु बोरॉन का अष्टक पूर्ण नहीं होता है। इसके संयोजी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं इसे अपना अष्टक पूर्ण करने के लिये एक एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म की आवश्यकता होती है। इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही होने की वजह से बोरिक अम्ल लुईस अम्ल की तरह कार्य करता है। यह जल से अभिक्रिया कराने पर H + आयन मुक्त करता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 43

प्रश्न 19.
कोलेमेनाइट से बोरेक्स किस प्रकार प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर:
कोलेमेनाइट को सान्द्र सोडियम कार्बोनेट विलयन के साथ उबालने पर बोरेक्स प्राप्त होता है।
Ca2B6O11 + 2Na2CO3 → Na2B4O7 + 2NaBO2 + 2CaCO3
प्राप्त निस्यंद का सान्द्रण करने पर बोरेक्स के क्रिस्टल प्राप्त होते हैं। मातृद्रव में कार्बन डाइ-ऑक्साइड प्रवाहित करने पर बोरेक्स प्राप्त होता है।
4NaBO2 + CO2 → Na2B407 + Na2CO3

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प्रश्न 20.
बोरिक अम्ल पर ऊष्मा का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
बोरिक अम्ल को 100°C ताप पर गर्म करने पर मेटाबोरिक अम्ल बनता है जो उच्च ताप पर गर्म करने पर बोरिक एनहाइड्राइड बनाता है।
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प्रश्न 21.
ऐलुमिना से ऐल्युमिनियम के निष्कर्षण में क्रायोलाइट का उपयोग किया जाता है, क्यों?
उत्तर:
शुद्ध ऐलुमिना का गलनांक बहुत उच्च 2050°C होता है, परन्तु क्रायोलाइट और फ्लोरस्पार की उपस्थिति में यह 870°C पर ही पिघल जाता है। इस प्रकार क्रायोलाइट ऐलुमिना का गलनांक कम कर देता है एवं वैद्युत अपघट्य का भी कार्य करता है।

प्रश्न 22.
कैसे सिद्ध करोगे कि हीरा तथा ग्रेफाइट कार्बन के अपरूप हैं ?
उत्तर:
हीरा तथा ग्रेफाइट को वायु की उपस्थिति में दहन करने पर CO2 गैस निकलती है जिसे चूने के पानी में प्रवाहित करने पर चूने का पानी दूधिया हो जाता है। जिससे स्पष्ट है कि हीरा तथा ग्रेफाइट कार्बन के . अपरूप हैं।
Cहीरा + O2 → CO2
Cप्रेफाइट + O2 → CO2

प्रश्न 23.
क्या होगा यदि हीरे के किसी टुकड़े को दहकते चारकोल में डाल दिया जाये?
उत्तर:
यदि हीरे के टुकड़े को दहकते चारकोल में डाल दिया जाये तो वह पूर्णत: जल जाएगा और जलने के पश्चात् केवल CO2 गैस प्राप्त होती है तथा दहन के पश्चात् कोई अवशेष नहीं रहता जिससे स्पष्ट है कि हीरा कार्बन का शुद्धतम रूप है।
Cहीरा + O2 → CO2

प्रश्न 24.
कार्बन मोनोऑक्साइड के उपयोग लिखिये।
उत्तर:

  • यह जल गैस (CO + H2) तथा प्रोड्यूसर गैस (CO + N2) का प्रमुख घटक है।
  • कुछ धातु कार्बोनिल को बनाने के लिये प्रयुक्त होता है।
  • कार्बन मोनोऑक्साइड अपचायक के रूप में प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 25.
प्रकृति में ग्रेफाइट की तुलना में हीरा कम मिलता है, क्यों? .
उत्तर:
हीरे का निर्माण कार्बन की पिघली हुई अवस्था में अत्यधिक दाब से क्रिस्टलीय रूप में परिवर्तन के कारण होता है। लेकिन प्रकृति में ऐसी अवस्था बहुत कम होती है इसलिये हीरा ग्रेफाइट की तुलना में कम मिलता है।

प्रश्न 26.
शुष्क बर्फ किसे कहते हैं ? इसके प्रमुख उपयोग लिखिए।
उत्तर:
ठोस कार्बन डाइ-ऑक्साइड को शुष्क बर्फ कहते हैं क्योंकि इसके क्रिस्टल बर्फ के समान दिखते हैं तथा ये कागज तथा कपड़े को गीला नहीं करते हैं। – 78.5° पर द्रव हुए बिना ही ठोस अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। इसका उपयोग शीतलक के रूप से खाद्य पदार्थों को सड़ने से बचाने के लिये तथा शल्य चिकित्सा में निश्चेतक के रूप में किया जाता है।

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प्रश्न 27.
कार्बोरण्डम क्या है ? इसका प्रमुख उपयोग लिखिए।
उत्तर:
सिलिकॉन कार्बाइड की संरचना हीरे के समान कठोर होती है इसे कार्बोरण्डम कहते हैं। इसका उपयोग धातुओं में धार बनाने के लिये तथा पीसने के लिये होता है।

प्रश्न 28.
प्रशीतक, निश्चेतक एवं विलायक के रूप में प्रयुक्त होने वाले कार्बनिक यौगिक का नाम एवं संरचना सूत्र लिखिए।
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 45

प्रश्न 29.
ग्रेफाइट के उपयोग लिखिए।
उत्तर:
ग्रेफाइट के उपयोग –

  • यह विद्युत् का सुचालक है। इसलिये इसका उपयोग शुष्क सेल, विद्युत् आर्क में इलेक्ट्रोड के रूप में होता है।
  • इससे पेंसिल, काला पेंट, काली स्याही बनाई जाती है।
  • इसके स्नेहक गुण के कारण इसका उपयोग उच्च ताप पर मशीनों को चिकना बनाये रखने में होता है।

प्रश्न 30.
कोल की किस्मों के नाम लिखिये।
उत्तर:
कोल में उपस्थित कार्बन के आधार पर इसके निम्न प्रकार होते हैं –

  • पीट – इसमें 60% कार्बन होता है।
  • लिग्नाइट – इसमें 70% कार्बन होता है।
  • बिटुमिनस – इसमें 80% कार्बन होता है।
  • ऐन्थेसाइटइसमें 90% कार्बन होता है।

प्रश्न 31.
हीरे के उपयोग लिखिए।
उत्तर:
हीरे के उपयोग –

  • बहुमूल्य जवाहरात के रूप में
  • काँच को काटने के काम में आता है।
  • चट्टानों में छेद करने के काम आता है।
  • नगों पर पॉलिश करने के काम आता है।

प्रश्न 32.
कार्बन डाइ-ऑक्साइड की प्रकृति अम्लीय है। समीकरण सहित समझाइये।
उत्तर:
कार्बन डाइ – ऑक्साइड का जलीय विलयन अम्लीय होता है।
CO2 + H2O →H2CO2 (कार्बोनिक अम्ल)
यह नीले लिटमस को लाल कर देता है तथा क्षार में क्रिया कराने पर लवण बनाता है। .
2 NaOH + CO2 → Na2CO3 + H2O
Ca (OH)2 + CO2 → CaCO3 + H2O.

प्रश्न 33.
किसी बंद कमरे में अंगीठी जलाकर क्यों नहीं सोना चाहिए?
उत्तर:
बंद कमरे में अंगीठी इसलिये नहीं जलानी चाहिए, क्योंकि अंगीठी से निकलने वाली गैस में CO की मात्रा अधिक होती है। यह श्वसन की क्रिया के द्वारा शरीर के भीतर पहुँचकर रक्त की हीमोग्लोबिन के साथ संयुक्त होकर कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन बनाती है जो शरीर के विभिन्न भागों में ऑक्सीजन एवं रक्त परिवहन में बाधा उत्पन्न कर देता है। इस कारण मनुष्य को बेहोशी आ सकती है तथा उसकी मृत्यु भी हो सकती है।

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प्रश्न 34.
कार्बाइड क्या होते हैं ?
उत्तर:
कार्बन के वे द्विअंगी यौगिक जो कार्बन अपने से कम ऋणविद्युती या उच्च धनविद्युती तत्व के साथ बनाता है, कार्बाइड कहलाते हैं। ये अनेक प्रकार के होते हैं, जैसे –

  • आयनिक कार्बाइड
  • धात्विक कार्बाइड
  • माध्यमिक कार्बाइड
  • सहसंयोजी कार्बाइड।

प्रश्न 35.
सिलिका जेल का उपयोग लिखिए।
उत्तर:
सिलिका जेल सरन्ध्र अक्रिस्टलीय ठोस हैं जिसमें 4% नमी होती है-इसका उपयोग उत्प्रेरक के रूप में पेट्रोलियम उद्योग में होता है। क्रोमेटोग्राफी में भी प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 36.
थिक्सोट्रॉपी किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी द्रव को हिलाने से या मथने से अस्थायी रूप से उसकी श्यानता घट जाती है। इस गुण को थिक्सोट्रॉपी कहते हैं। जब SiCl4 का जल-अपघटन उच्च ताप पर किया जाता है तो प्राप्त होने वाले सिलिका में थिक्सोट्रॉपी का गुण होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 46
पॉलीएस्टर तथा एपॉक्सी रेजिन एवं पेंट की श्यानता कम करने के लिये इसका उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 37.
अंतराकाशी कार्बाइड किसे कहते हैं ?
उत्तर:
संक्रमण धातुओं के क्रिस्टल जालकों के अंतराकाशी स्थानों में जब कार्बन परमाणु समावेशित होते हैं। तो ऐसे बनने वाले कार्बाइड अंतराकाशी कार्बाइड होते हैं। ये अत्यंत कठोर होते हैं तथा इनके गलनांक उच्च होते हैं।
उदाहरण – टंगस्टन कार्बाइड, आयरन कार्बाइड।

प्रश्न 38.
मेथेनाइड तथा एसीटिलाइड क्या होते हैं ?
उत्तर:
1. जो कार्बाइड जल-अपघटित होकर मेथेन देते हैं वे मेथेनाइड कहलाते हैं।
Al4C3 +12H2O →4Al(OH)3 + 3CH4
2. जो कार्बाइड जल-अपघटित होकर एसीटिलीन देते हैं, एसीटिलाइड कहलाते हैं।
CaC2 + 2H2O → Ca(OH)2 + C2H2

प्रश्न 39.
बेरीलियम तथा कैल्सियम दोनों एक ही समूह के सदस्य हैं फिर भी कैल्सियम कार्बाइड CaC2 है जबकि बेरीलियम कार्बाइड Be2C है, क्यों?
उत्तर:
कैल्सियम कार्बाइड का जल-अपघटित होकर एसीटिलीन बनता है, अतः इसकी संरचना कैल्सियम कार्बाइड के रूप में है।
जबकि बेरीलियम कार्बाइड का जल-अपघटित होकर मेथेन बनता है, अतः इसकी संरचना बेरोलियम मेथेनाइड के रूप में होनी चाहिये।

प्रश्न 40.
सिलेन तथा जर्मेन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
Si तथा Ge के हाइड्राइड को सिलेन तथा जर्मेन कहते हैं जिसे Mn H2n+2) से दर्शाते हैं जहाँ M = Si, Ge है। सिलेन में n का मान 1 से 8 तक हो सकता है। जबकि जर्मेन में n का मान 1 से 5 तक हो सकता है।

प्रश्न 41.
सक्रिय चारकोल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
चारकोल मुलायम तथा सरन्ध्र होता है। यह रंगीन पदार्थ एवं गंध वाली गैसों को शोषित कर लेता है। यदि इसको भाप में 1100°C पर गर्म किया जाता है, तो इसकी शोषण शक्ति और बढ़ जाती है और यह सक्रिय चारकोल कहलाता है।

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11 p-ब्लॉक तत्त्व लघु उत्तरीय प्रश्न – I

प्रश्न 1.
क्या होता है, जब बोरिक अम्ल को गर्म किया जाता है ?
उत्तर:
बोरिक अम्ल को गर्म करने पर विभिन्न तापों पर जल के तीन अणु मुक्त करता है तथा अन्त में बोरॉन ट्राइऑक्साइड बनाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 47

प्रश्न 2.
फिटकरी क्या है ? इसका सामान्य सूत्र बताकर इसके उपयोग बताइये।
उत्तर:
पहले पोटैशियम सल्फेट और ऐल्युमिनियम सल्फेट के द्विक लवण K2SO4 AI2 (SO4)3.24H2O को फिटकरी कहते थे। परन्तु आजकल R2SO4 : M2 (SO4)3.24H2O सामान्य सूत्र वाले सभी द्विक लवण फिटकरी कहलाते हैं । जहाँ K = एकसंयोजी धातु जैसे- Na, K, Rb, Cs आदि ।
M= त्रिसंयोजी धातु जैसे – Al, Cr, Fe इत्यादि।
उपयोग –

  • जल के शोधन में
  • चमड़ा रंगने में
  • कागज उद्योग में
  • आग बुझाने के यंत्रों में
  • कपड़ों की रंगाई में
  • रक्त का बहना रोकने में।

प्रश्न 3.
ऐल्युमिनियम की चार मिश्र धातुओं के नाम, संघटन एवं उपयोग लिखिये।
उत्तर:
ऐल्युमिनियम की मिश्र धातुएँ –
(1) ऐल्युमिनियम ब्रांज – Cu (90%) + Al (10%)
उपयोग –
बर्तन, सस्ते आभूषण, सिक्के बनाने में।

(2) मैग्नेलियम –
Mg (10%) + Al (90%)
उपयोग –
वायुयान, औजार और तुला बनाने में।

(3) यूरेनियम – Al(95%) + Cu (4%) + Mn (0.5%) + Mg (0.5%)
उपयोग –
वायुयान बनाने में।

(4) निकेलॉय –
AI(95%) + Cu(4%) + Ni (1%)

प्रश्न 4.
ऐल्युमिनियम ताँबे की तुलना में विद्युत् का दुर्बल सुचालक है फिर भी विद्युत् केबल में ऐल्युमिनियम का उपयोग होता है। क्यों ?
उत्तर:
कॉपर, ऐल्युमिनियम की तुलना में अच्छा सुचालक है, किन्तु ऐल्युमिनियम हल्की धातु है तथा ऐल्युमिनियम का घनत्व कॉपर की तुलना में अत्यंत कम है। इस प्रकार भारानुसार ऐल्युमिनियम कॉपर की तुलना में अच्छा चालक है। इसलिये इलेक्ट्रिक वायर तथा केबल बनाने में कॉपर के स्थान पर ऐल्युमिनियम का उपयोग ज्यादा होता है।

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प्रश्न 5.
बोरॉन केवल सहसंयोजी यौगिक बनाता है, क्यों?
उत्तर:
बोरॉन के छोटे आकार तथा उच्च आयनन ऊर्जा के कारण धनायन बनाने की प्रवृत्ति अत्यन्त कम होती है। इसलिये बोरॉन तीन इलेक्ट्रॉन को त्यागकर त्रिसंयोजी आयन नहीं बना सकता है। अपना स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिये यह अन्य तत्वों के परमाणु के साथ इलेक्ट्रॉन का साझा करके स्थायी यौगिकों का निर्माण करता है इसलिये बोरॉन केवल सहसंयोजी यौगिक बनाता है।

प्रश्न 6.
बोरॉन के हैलाइड प्रबल लुईस अम्ल की तरह कार्य करते हैं, क्यों?
उत्तर:
बोरॉन के संयोजी कोश में तीन इलेक्ट्रॉन होते हैं। जब यह तीन हैलोजन परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉन का साझा करके बोरॉन ट्राई हैलाइड बनाता है। तब भी इस बोरॉन ट्राई हैलाइड के संयोजी कोश में कुल 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं इन्हें अभी भी अपना अष्टक पूर्ण करने के लिये एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की आवश्यकता होती है। इसलिये ये इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक है तथा इलेक्ट्रॉन ग्राही की तरह कार्य करता है तथा किसी भी इलेक्ट्रॉन युग्म दाता यौगिक द्वारा दिये गये एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर उप-सहसंयोजी बंध बनाते हैं तथा एक योगात्मक यौगिक का निर्माण करते हैं । इसलिये ये प्रबल लुईस अम्ल की तरह कार्य करते हैं।

प्रश्न 7.
ऐल्युमिनियम को उसके अयस्कों से अपचयन विधि द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता, क्यों?
उत्तर:
ऐल्युमिनियम प्रबल धन विद्युती होने के कारण अपचायक की तरह कार्य करता है। इसलिये ऐल्युमिनियम को सरलता से ऑक्सीकृत किया जा सकता है, आयनन ऊर्जा तथा इलेक्ट्रॉन बंधुता के आधार पर यह स्पष्ट है कि ऐल्युमिनियम इलेक्ट्रॉन दाता की तरह कार्य करता है इलेक्ट्रॉन ग्राही की तरह नहीं । इसलिये इसे अपचयित नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि ऐल्युमिनियम को उसके अयस्कों के अपचयन द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न 8.
गैलियम की परमाण्विक त्रिज्या ऐल्युमिनियम से कम होती है, क्यों?
उत्तर:
गैलियम में d कक्षक में 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं। d कक्षक की आकृति इस प्रकार की होती है कि उसका परिरक्षण प्रभाव कम प्रभावी होता है। जिसके कारण बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन के प्रति नाभिक का आकर्षण बल अधिक होता है जिसके फलस्वरूप बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर अधिक दृढ़ता से आकर्षित होने लगते हैं। जिसके कारण गैलियम की परमाण्विक त्रिज्या में कमी आती है। इसलिये गैलियम की परमाण्विक त्रिज्या ऐल्युमिनियम से कम है।

प्रश्न 9.
क्या कारण है कि बोरॉन के हैलाइड अमोनिया तथा एमीन के साथ सहसंयोजी यौगिक बनाते हैं ?
उत्तर:
बोरॉन के संयोजी कोश में तीन इलेक्ट्रॉन होते हैं । जब यह तीन हैलोजन परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉन का साझा करके बोरॉन ट्राइहैलाइड बनाता है। तब भी इस बोरॉन ट्राइहैलाइड के संयोजी कोश में कुल 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इन्हें अभी भी अपना अष्टक पूर्ण करने के लिये एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की आवश्यकता होती है। इसलिये ये इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक हैं तथा इलेक्ट्रॉन ग्राही की तरह कार्य करते हैं तथा किसी भी इलेक्ट्रॉन युग्म दाता यौगिक जैसे अमोनिया या एमीन द्वारा दिये गये एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर उप-सहसंयोजी बंध बनाते हैं तथा एक योगात्मक यौगिक का निर्माण करते हैं।

प्रश्न 10.
बोरॉन परिवार सामान्यतः + 1 तथा + 3 ऑक्सीकरण संख्या दर्शाते हैं, क्यों ?
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 48
बोरॉन परिवार के सभी सदस्यों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns- np’ है । साधारण अवस्था में इनके संयोजी कोश के p उपकोश में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन रहता है। लेकिन उत्तेजित अवस्था में 2s का एक इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर 2p उपकोश में चला जाता है। इस प्रकार उत्तेजित अवस्था में तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं । इसलिये बोरॉन परिवार के सभी सदस्य + 1 तथा + 3 ऑक्सीकरण संख्या दर्शाते हैं।

प्रश्न 11.
बोरॉन परिवार में अक्रिय युग्म प्रभाव को समझाइये।
उत्तर:
बोरॉन परिवार के सदस्य साधारण अवस्था में +1 तथा उत्तेजित अवस्था में +3 ऑक्सीकरण संख्या दर्शाते हैं। समूह में ऊपर से नीचे आने पर +1ऑक्सीकरण संख्या का स्थायित्व बढ़ता है लेकिन +3 ऑक्सीकरण संख्या का स्थायित्व कम होता है। क्योंकि संयोजी कोश के 5 कक्षक के दो इलेक्ट्रॉन बंध निर्माण में भाग नहीं लेते। इसे अक्रिय युग्म प्रभाव कहते हैं।

जब परमाणु क्रमांक में वृद्धि होती है तो इलेक्ट्रॉन d उपकोश में प्रवेश करता है तथा d तथा f उपकोश की आकृति इस प्रकार की होती है कि उनका परिरक्षण प्रभाव न्यूनतम होता है जिसके कारण संयोजी कोश के इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का आकर्षण बल बढ़ जाता है तथा इस आकर्षण बल में वृद्धि 5 उपकोश के इलेक्ट्रॉनों पर p उपकोश की तुलना में अधिक होती है। इसलिये ऽ उपकोश के इलेक्ट्रॉन बंध बनाने में भाग नहीं लेते।

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प्रश्न 12.
कोलमेनाइट से बोरिक अम्ल किस प्रकार प्राप्त करते हैं ?
उत्तर:
कोलमेनाइट को उबलते हुये जल में विलेय करके सल्फर डाइ ऑक्साइड गैस प्रवाहित करने पर बोरिक अम्ल व कैल्सियम बाइ सल्फाइट बनता है। कैल्सियम बाइसल्फाइट विलेय रहता है जबकि बोरिक अम्ल क्रिस्टलीत हो जाता है।

  • Ca2B6O11  + 4H2 O + 4SO2  → H4 B6O11 + 2Ca(HSO3 )2
  • H4 B6 O11  + 7H2O → 6H3BO3
  • Ca2B6O11 + 11H2O + 4SO2 → 6H3BO3 + 2Ca(HSO3)2

प्रश्न 13.
बोरेक्स काँच क्या है ?
उत्तर:
निर्जल सोडियम टेट्राबोरेट Na2 B4O7 बोरेक्स काँच कहलाता है। साधारण बोरेक्स को उसके गलनांक के ऊपर गर्म करने पर प्राप्त होता है। यह एक रंगहीन काँच जैसा पदार्थ है। वायु से नमी शोषित करके डेकाहाइड्रेट रूप में बदल जाता है। गर्म जल में विलेय है। इसका जलीय विलयन अपघटन के कारण क्षारीय होता है। गर्म करने पर श्वेत अपारदर्शी पदार्थ में फूल जाता है। निर्जल पदार्थ 740°C पर बोरेक्स काँच देता है।
Na2B4O7 + 2H2O  ⇌  H2B4O7 + 2NaOH

प्रश्न 14.
बोरेक्स पर ऊष्मा के प्रभाव को समझाइये।
उत्तर:
बोरेक्स को तीव्र गर्म करने पर इसका क्रिस्टलीय जल अलग हो जाता है तथा अंततः वह पिघल कर पारदर्शी मणिका में बदल जाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 49
बोरिक एनहाइड्राइड B2O3 धात्विक ऑक्साइडों से क्रिया कर मेटाबोरेट बनाता है। जिनका अपना विशिष्ट रंग होता है। सुहागा मणिका परीक्षण के नाम से जानी जाती है यह क्रिया भास्मिक मूलकों के परीक्षण में सहायक होती है।

प्रश्न 15.
बोरेक्स बीड परीक्षण क्या है ?
उत्तर:
बोरेक्स को गर्म करने पर क्रिस्टलन जल का निष्कर्षण करके श्वेत काँच जैसा पदार्थ देता है जो मनका बना लेता है। इस मनके में सोडियम मेटाबोरेट और बोरिक एनहाइड्राइड होता है।
Na2B4O7. 10H2O →2NaBO2 + B2O2 + 10H2O
जब इस मनके को रंगीन मिश्रण के साथ गर्म किया जाता है तो बोरिक एनहाइड्राइड धातु लवण के साथ क्रिया करके मेटा बोरेट बना लेता है जिसका एक विशेष रंगीन मनका होता है।
उदाहरण –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 50
इस परीक्षण को करने के लिये साफ प्लेटीनम तार का छल्ला बनाकर उस पर बोरेक्स के क्रिस्टल को गर्म करके एक पारदर्शक मनका प्राप्त कर लिया जाता है। गर्म मनके को रंगीन मिश्रण के साथ छुआ देते हैं और फिर ऑक्सीकारक तथा अपचायक ज्वाला पर गर्म करते हैं । रंगों के आधार पर धातुओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

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प्रश्न 16.
बोरेक्स के कितने रूप होते हैं ? इनका संक्षिप्त में वर्णन कीजिये।
उत्तर:
बोरेक्स निम्नलिखित तीन रूपों में पाया जाता है –
(1) प्रिज्मीय बोरेक्स – यह डेकाहाइड्रेट Na2B4O7 10H2O है। यह साधारण रूप है तथा साधारण ताप पर विलयन का क्रिस्टलीकरण करने पर प्राप्त होता है।
(2) अष्टफलकीय बोरेक्स – यह बोरेक्स पेन्टा हाइड्रेट Na2B4O7 ·5H2O है। यह विलयन का 60°C से ऊपर क्रिस्टलीकरण करने पर बनता है।
(3) बोरेक्स काँच – यह निर्जल सोडियम टेट्राबोरेट Na2B4O7 है । यह साधारण बोरेक्स को उसके गलनांक के ऊपर गर्म करने पर प्राप्त होता है। यह एक रंगहीन काँच जैसा पदार्थ है। यह वायु से नमी शोषित करके डेकाहाइड्रेट रूप में बदल जाता है। इसका जलीय विलयन क्षारीय होता है।
Na2B4O7 + 2H2O → H2B4O7 +2NaOH

प्रश्न 17.
बोरेट मूलक का परीक्षण किस प्रकार करते हैं ? ..
उत्तर:
प्रयोगशाला में अम्लीय बोरेट मूलक BO-33 का परीक्षण करने के लिये लवण को एथेनॉल तथा सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म करते हैं जिससे एथिल बोरेट की वाष्प निकलती है। यह वाष्प हरे कोर की ज्वाला से जलती है। वास्तव में लवण पहले बोरिक अम्ल में परिवर्तित होता है। यह बोरिक अम्ल एथेनॉल से क्रिया कर ट्राइ एथिल बोरेट बनाता है।
H3BO3 + 3C2H5OH → BOC2H5)3 + 3H2O

प्रश्न 18.
ऐल्युमिनियम क्लोराइड की संरचना को समझाइये।
उत्तर:
ऐल्युमिनियम ट्राइक्लोराइड वास्तव में डाईमर Al2Cl6 के रूप में प्राप्त होता है। Al के संयोजी कोश में तीन इलेक्ट्रॉन होते हैं। जब यह तीन क्लोरीन के साथ इलेक्ट्रॉन का साझा करके AlCl3 का निर्माण करता है तो Al के संयोजी कोश में कुल 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसे अपना अष्टक पूर्ण करने के लिये एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में AlCl3 का ऐल्युमिनियम इसके AlCl3 के क्लोरीन का इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर अपना अष्टक पूर्ण कर लेता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 51

प्रश्न 19.
कुछ अभिक्रियाओं में थैलियम, ऐल्युमिनियम से समानता दर्शाता है, जबकि अन्य में यह समूह-1 के धातुओं से समानता दर्शाता है। इस तथ्य को कुछ प्रमाणों के द्वारा सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
थैलियम तथा ऐल्युमिनियम दोनों वर्ग-13 के तत्व हैं। इसके संयोजी कोश का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns – np’ है। ऐल्युमिनियम केवल + 3 ऑक्सीकरण अवस्था, प्रदर्शित करता है। ऐल्युमिनियम की भाँति, थैलियम भी कुछ यौगिकों में + 3 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।  उदाहरण- TI2O3, TIC3 आदि। ऐल्युमिनियम की भाँति थैलियम भी अष्टफलकीय आयन जैसे [AIF6]-3 तथा [TIF6]-3 बनाता है। वर्ग-1 की क्षार धातुओं के समान, थैलियम अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण + 1 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है। उदाहरण- TICl, TI2O आदि। क्षार धातु हाइड्रॉक्साइडों की भाँति, TIOH भी जल में विलेय है तथा जलीय विलयन प्रबल क्षारीय है। TI2SO4, क्षार धातु सल्फेटों की भाँति फिटकरी बनाता है। TI2SO2, क्षार धातु सल्फेटों की भाँति फिटकरी बनाता है तथा TI2CO3, क्षार धातु कार्बोनेट की भाँति जल में विलेय है।

प्रश्न 20.
संरचना के आधार पर हीरा तथा ग्रेफाइट के गुणों में निहित भिन्नता समझाइए।
उत्तर:
हीरा तथा ग्रेफाइट के गुणों में भिन्नता –

हीरा:

  • इसमें C, sp3 संकरित है।
  • इसकी ज्यामिति त्रिविमीय चतुष्फलकीय होती है।
  • यह उच्च घनत्व तथा उच्च क्वथनांक के साथ
  • यह ऊष्मा तथा विद्युत् का कुचालक (मुक्त इलेक्ट्रॉन मुक्त होता है) होता है।
  • इसका प्रयोग काँच काटने में, आभूषणों तथा अपघर्षक के रूप में होता है।

ग्रेफाइट:

  • इसमें C, sp2 संकरित है।
  • इसमें ज्यामिति द्विविमीय परतीय होती है।
  • यह निम्न घनत्व तथा उच्च क्वथनांक के साथ कठोरतम पदार्थ है। मुलायम तथा चिकनाई वाला पदार्थ है।
  • यह ऊष्मा तथा विद्युत् का सुचालक (चौथा इलेक्ट्रॉन की अनुपस्थिति) होता है।
  • यह स्नेहक के रूप में, इलेक्ट्रोड निर्माण में, पेंसिल में, क्रूसीबल (उच्च गलनांक के कारण) आदि के निर्माण में प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 21.
बैक बॉण्डिंग को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
बोरॉन ट्राइ क्लोराइड के संयोजी कोश में कुल 6 इलेक्ट्रॉन हैं, इलेक्ट्रॉन ग्राही होने की वजह से BF लुईस अम्ल की तरह कार्य करता है तथा इसे प्रबल लुईस अम्ल होना चाहिये लेकिन यह दुर्बल लुईस अम्ल की तरह कार्य करता है। BF3 में बोरॉन sp2संकरित अवस्था में होने के कारण BF3 समतलीय अणु है। इस अणु में बोरॉन का एक 2pz कक्षक पूर्णतः रिक्त रहता है। दूसरी ओर फ्लुओरीन के 2pz कक्षक में 2 इलेक्ट्रॉन हैं। ऐसी स्थिति में बोरॉन के 2pz कक्षक तथा फ्लुओरीन के 2pz कक्षक में अतिव्यापन कर बंध बना सकते हैं। इसे बैक बॉण्डिंग कहते हैं।

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प्रश्न 22.
(1) BCl3 स्थायी है किन्तु B2Cl6 का अस्तित्व नहीं जबकि AlCl3 अस्थायी है, क्यों ?
(2) AlCl3 अस्थायी है, Al2Cl6 स्थायी, इसका क्या कारण है ?
उत्तर:
(1) BCl3 स्थायी है क्योंकि BCl3 के संयोजी कोश में इलेक्ट्रॉन होते हैं लेकिन बैक बॉण्डिंग (Back Bonding) के कारण बनने वाली विभिन्न अनुनाद संरचनाएँ अनुनाद के द्वारा BCl3 को स्थायित्व प्रदान करती है। लेकिन B के पास रिक्त d कक्षक नहीं है इसलिये बोरॉन क्लोरीन परमाणु द्वारा दिये जाने वाले इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण नहीं कर पाता इसलिये B2Cl6 का बनना संभव नहीं है।

(2) AlCl3 के संयोजी कोश में कुल 6 इलेक्ट्रॉन हैं अष्टक पूर्ण न होने के वजह से AlCl3 अस्थायी है लेकिन Al2Cl6 डाईमर में ऐल्युमिनियम का रिक्त d कक्षक क्लोरीन द्वारा दिये गये एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर अपना अष्टक पूर्ण कर लेता है इसलिये Al2Cl6 स्थायी है।

प्रश्न 23.
निम्नलिखित यौगिकों के सूत्र एवं कोई दो उपयोग लिखिए –
(1) बोरेक्स
(2) बोरिक अम्ल।
उत्तर:
(1) बोरेक्स-सूत्र-Na2B4O7.10H2O
उपयोग –
(1) अपने प्रतिरोधी गुण के कारण औषधीय साबुन बनाने में इसका उपयोग किया जाता है।
(2) चश्में के काँच (बोरोग्लास) बनाने में।

(2) बोरिक अम्ल-सूत्र – H3BO3
उपयोग –
(1) बोरिक अम्ल का उपयोग इनेमल के निर्माण में तथा बर्तनों को चमकाने में किया जाता है।
(2) बोरिक अम्ल अपने पूतिरोधी (Antiseptic) स्वभाव के कारण आँखों को धोने में काम आता है।

11 p-ब्लॉक तत्त्व लघु उत्तरीय प्रश्न – II

प्रश्न 1.
श्रृंखलन किसे कहते हैं तथा यह प्रवृत्ति किस तत्व में सबसे अधिक है और क्यों?
उत्तर:
किसी तत्व की अपने अन्य परमाणुओं के साथ संयोग कर लंबी श्रृंखला बनाने की प्रवृत्ति को श्रृंखलन कहते हैं। यह प्रवृत्ति कार्बन में सबसे अधिक होती है, क्योंकि कार्बन के छोटे आकार तथा प्रबल बंध के कारण श्रृंखला में बनने वाले बंध अधिक प्रबल व स्थायी होते हैं। Si में यह प्रवृत्ति कार्बन से कम होती है। Ge में यह प्रवृत्ति अत्यन्त कम होती है। Sn तथा Pb में यह प्रवृत्ति नगण्य होती है।

प्रश्न 2.
हीरे की संरचना लिखिये।
उत्तर:
हीरे में प्रत्येक कार्बन परमाणु sp3 संकरित अवस्था में होता है तथा प्रत्येक कार्बन अन्य चार कार्बन परमाणुओं से एकल सहसंयोजी बंध द्वारा जुड़ा रहता है तथा प्रत्येक कार्बन परमाणु एक समचतुष्फलक के केन्द्र पर स्थित है, तथा अन्य चार कार्बन परमाणु समचतुष्फलक के कोनों पर स्थित है। इस त्रिविमीय संरचना के कारण हीरा अत्यंत कठोर व उच्च गलनांक वाला होता है। इसमें C-C बंध लंबाई 1.54 A होता है।

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प्रश्न 3.
ग्रेफाइट की संरचना लिखिये।
उत्तर:
ग्रेफाइट में प्रत्येक C परमाणु sp3संकरित अवस्था में / होता है। प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन अन्य कार्बन परमाणुओं द्वारा एकल सहसंयोजक बंध से जुड़ा रहता है एवं प्रत्येक परमाणु का चौथा इलेक्ट्रॉन मुक्त होता है। इससे C – C बंध लंबाई 1.42 A होती है। इसमें कार्बन परमाणु एक-दूसरे के साथ जुड़कर अनेक षट्भुजीय रिंग बनाते हैं। ये रिंग आपस में मिलकर तल बनाते हैं, तथा इन पर्तों के मध्य दुर्बल वाण्डर वाल्स बल होने के कारण ये पर्ते एक-दूसरे के ऊपर आसानी से फिसल सकती हैं। अतः इसका उपयोग स्नेहक के रूप में होता है।
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प्रश्न 4.
कृत्रिम ग्रेफाइट बनाने की औद्योगिक विधि का रासायनिक समीकरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कृत्रिम ग्रेफाइट अमेरिका के रसायनज्ञ एडवर्ड जी. एकीसन की विधि द्वारा बनाया जाता है। इस विधि द्वारा कोक और बालू के मिश्रण 6 को एक विद्युत् भट्टी में गर्म करते हैं जिसमें कार्बन के दो इलेक्ट्रोड लगे रहते हैं जो आपस में कार्बन कोक+बालू की एक पतली सलाखा से जुड़े रहते हैं। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर 3000°C ताप पर कार्बन सिलिका के साथ अभिक्रिया कर सिलिकॉन कार्बाइड बनाता है, इस अभिक्रिया में आयरन ऑक्साइड उत्प्रेरक का कार्य करता है। यह सिलिकॉन कार्बाइड विघटित होकर ग्रेफाइट बनाता है।
3C + SiO2  → 2CO + SiC
SiC → Si + C (ग्रेफाइट)।
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प्रश्न 5.
कृत्रिम हीरा बनाने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ग्रेफाइट की प्याली में शर्करा, चारकोल एवं आयरन ऑक्साइड का मिश्रण लेकर उसे विद्युत् भट्टी में 3000°C ताप पर गर्म करते हैं। इसके बाद इसे गलित लेड में रखा जाता है। गलित लेड का ताप लोहे की तुलना में कम होता है जिसके कारण लोहा ठोस अवस्था में आने लगता है जिसके फलस्वरूप दाब के कारण कार्बन छोटे-छोटे हीरे के क्रिस्टल के रूप में पृथक होने लगता है। लोहे को HCl में विलेय करके पृथक् कर लिया जाता है। इस प्रकार कृत्रिम हीरा प्राप्त होता है।

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प्रश्न 6.
कार्बन परमाणु की संयोजकता सम्बन्धी लेवेल तथा वाण्ट हॉफ का नियम समझाइये। अथवा, कार्बन की समचतुष्फलक प्रकृति से क्या समझते हो?
उत्तर:
कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है इसके आधार पर प्रथम कक्ष में 2 इलेक्ट्रॉन और द्वितीय कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। अत: इसकी संयोजकता चार होती है। लेवेल तथा वाण्ट हॉफ के अनुसार यदि कार्बन परमाणु को समचतुष्फलक के केन्द्र पर स्थित माने तो चतुष्फलक की चारों भुजायें कार्बन की चारों संयोजकता को दर्शाती है, किन्हीं भी दो संयोजकताओं के बीच कोण का मान 109° 28° होता है। हेनरी के प्रयोग के अनुसार कार्बन संयोजकतायें सममित रूप में व्यवस्थित होती हैं। ये अंतरिक्ष में चतुष्फलकीय रूप से व्यवस्थित होती हैं। एक ही तल में स्थित नहीं होती हैं।
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प्रश्न 7.
ग्रेफाइट में स्नेहक गुण का कारण लिखिये।
उत्तर:
ग्रेफाइट में कार्बन परमाणु एक-दूसरे से सहसंयोजक बंधों द्वारा जुड़कर षट्कोणीय जाल बनाते हैं। ये रिंग आपस में मिलकर तल बनाते हैं। ग्रेफाइट में ऐसे कई तल एक के ऊपर एक, एक-दूसरे से 3.4A की दूरी पर होते हैं तथा प्रत्येक तल दुर्बल वाण्डर वाल्स बल के द्वारा बँधे होने के कारण एक-दूसरे पर सरलता से फिसल सकते हैं जिसके कारण ग्रेफाइट नर्म होता है तथा इसके गलनांक उच्च होते हैं। इसलिये ऐसी मशीनें जो चलने पर अधिक गर्म हो जाती हैं उनके लिये ग्रेफाइट का उपयोग स्नेहक के रूप में किया जाता है।

प्रश्न 8.
हीरे का उपयोग काटने वाले औजारों में किया जाता है, क्यों?
उत्तर:
हीरे में प्रत्येक कार्बन परमाणु sp2 संकरित अवस्था में होता है तथा प्रत्येक कार्बन अन्य चार कार्बन परमाणुओं से प्रबल सहसंयोजी बंध द्वारा जुड़ा होता है। इस प्रकार हीरे में एक चतुष्फलकीय त्रि – आयामी संरचना बन जाती है जो अत्यन्त सुदृढ़ होती है। इसलिये हीरा सबसे कठोर ज्ञात तत्व है और इसलिये इसका उपयोग काटने वाले औजारों में किया जाता है।

प्रश्न 9.
हीरे में एक विशेष चमक होती है, क्यों? अथवा, हीरे का उपयोग आभूषण बनाने में होता है, क्यों?
उत्तर:
हीरे के उच्च अपवर्तनांक होने के कारण पूर्ण आंतरिक परावर्तन इसे चमकदार एवं सुंदर बना देता है। इसलिये हीरा अत्यन्त चमकीला होता है और इसका उपयोग कीमती आभूषण बनाने में होता है।

प्रश्न 10.
ग्रेफाइट मुलायम तथा हीरा कठोर होता है, क्यों ?
उत्तर:
ग्रेफाइट में प्रत्येक कार्बन परमाणु sp2संकरित अवस्था में होता है तथा ग्रेफाइट में कार्बन का प्रत्येक परमाणु अपने निकट के तीन परमाणुओं से उसी तल में जुड़कर एक षट्कोणीय जाल बनाता है। ऐसे अनेक तल एक के ऊपर एक ढीली अवस्था में सटे रहते हैं तथा इनके मध्य दुर्बल वाण्डर वाल्स बल होते हैं जिसके कारण ग्रेफाइट की पर्ते एक-दूसरे के ऊपर सरक सकती हैं इसी गुण के कारण ग्रेफाइट मुलायम होता है। हीरे में प्रत्येक कार्बन परमाणु sp3 संकरित अवस्था में होता है जिसमें प्रत्येक कार्बन अन्य चार कार्बन परमाणुओं द्वारा सहसंयोजी बंध द्वारा जुड़ा रहता है और एक चतुष्फलकीय त्रि-आयामी संरचना बनाता है इसलिये हीरा अत्यंत कठोर होता है।

प्रश्न 11.
हीरा विद्युत् का कुचालक है जबकि ग्रेफाइट सुचालक है, कारण स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
हीरा तथा ग्रेफाइट दोनों ही कार्बन के अपररूप हैं तथा इनके परमाणु के बाह्यतम कोश में चार इलेक्ट्रॉन होते हैं। हीरे में कार्बन sp3 संकरित अवस्था में होता है तथा प्रत्येक कार्बन के चारों संयोजी इलेक्ट्रॉन अपने निकटतम चार कार्बन परमाणुओं से प्रबल सहसंयोजी बंध द्वारा जुड़े होते हैं इस प्रकार किसी भी कार्बन के पास कोई स्वतंत्र इलेक्ट्रॉन नहीं होता इसलिये यह अत्यन्त कठोर व विद्युत् का कुचालक है।

ग्रेफाइट में प्रत्येक कार्बन sp2 संकरित अवस्था में होता है तथा प्रत्येक कार्बन केवल तीन संयोजी इलेक्ट्रॉन अपने निकटतम तीन कार्बन परमाणुओं से प्रबल सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़े रहते हैं तथा चौथा संयोजी इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र रहता है। इसलिये ग्रेफाइट में इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह सरलता से हो सकता है । इसलिये ग्रेफाइट नर्म एवं विद्युत् का सुचालक होता है।

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प्रश्न 12.
हीरे तथा ग्रेफाइट के भौतिक गुणों को तालिकाबद्ध कीजिए।
उत्तर:
हीरे तथा ग्रेफाइट के भौतिक गुणों की तुलना –
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प्रश्न 13.
सुपर क्रिटिकल द्रव क्या होता है ?
उत्तर;
किसी भी गैस को उसके क्रिटिकल ताप से कम ताप पर दबाव बढ़ाते हुये द्रवित किया जा सकता है। जिस दाब पर किसी गैस को द्रवित किया जा सकता है उसे उस द्रव का क्रिटिकल दाब कहते हैं। लेकिन CO2 गैस के ऊर्ध्वपातन गुण के कारण इसे द्रव अवस्था में नहीं लाया जा सकता इसलिये क्रिटिकल दाब से अधिक पर यह सुपर क्रिटिकल द्रव में बदल जाती है। CO2 के लिये क्रिटिकल ताप तथा क्रिटिकल दाब क्रमशः 31°C तथा 72.9 वायुमण्डलीय दाब है।

प्रश्न 14.
कार्बन मोनो-ऑक्साइड की वे अभिक्रियाएँ लिखिये जो बताती हैं कि वे हैं
1. ज्वलनशील,
2. असंतृप्त यौगिक
3. अपचायक।
उत्तर:
1. ज्वलनशील – ऑक्सीजन की उपस्थिति में यह दहन के पश्चात् CO, गैस देती है।
CO + \(\frac {1 }{ 2 }\)O2 → CO2
2. असंतृप्त यौगिक – कार्बन मोनो-ऑक्साइड असंतृप्त यौगिक होने के कारण योगात्मक यौगिक बनाती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 57
3. अपचायक – धातु ऑक्साइडों से क्रिया करके धातु अवकृत करती है।
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प्रश्न 15.
कार्बन तथा सिलिकॉन में समानता तथा असमानता लिखिये।
उत्तर:
समानता –

  • कार्बन तथा सिलिकॉन दोनों अधातु हैं।
  • दोनों के संयोजी कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2 np2 है।
  • दोनों अपरूपता दर्शाते हैं।
  • दोनों सहसंयोजी यौगिक बनाते हैं।
  • दोनों की सहसंयोजकता 4 है।
  • दोनों में शृंखलन की प्रवृत्ति होती है।
  • दोनों के ऑक्साइड अम्लीय हैं।

असमानता:
कार्बन तथा सिलिकॉन में असमानताएँ –
कार्बन:

  • ग्रेफाइट को छोड़कर कार्बन विद्युत् का कुचालक है।
  • कार्बन की अधिकतम सहसंयोजकता 4 है।
  • कार्बन में श्रृंखलन की प्रवृत्ति अधिक है।
  • कार्बन बहु आबंध बनाता है।
  • CO ज्ञात है।
  • CCl2  जल – अपघटित नहीं होता।

सिलिकॉन:

  • सिलिकॉन अर्धचालक है।
  • सिलिकॉन की अधिकतम सह संयोजकता 6 है।
  • सिलिकॉन में श्रृंखलन की प्रवृत्ति कम है।
  • सिलिकॉन बहु आबन्ध नहीं बनाता है।
  • SiO अज्ञात है।
  • SiC4  जल-अपघटित नहीं होता।

प्रश्न 16.
कार्बन तथा सिलिकॉन चतुर्संयोजकता दर्शाते हैं। जबकि Ge, Sn तथा Pb द्विसंयोजी होते हैं, क्यों?
उत्तर:
कार्बन तथा सिलिकॉन के छोटे आकार के कारण इनकी आयनन ऊर्जा अत्यधिक उच्च होती है। इसलिये यह इलेक्ट्रॉन का त्याग कर आयनिक यौगिक नहीं बनाते लेकिन अपना अष्टक पूर्ण करने के लिये अन्य तत्वों के परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉन का साझा करके सहसंयोजी यौगिक बनाते हैं और चतुर्संयोजकता को दर्शाते हैं। Ge, Sn तथा Pb के बड़े आकार के कारण इनकी आयनन ऊर्जा अत्यन्त कम होती है।

इसलिये यह इलेक्ट्रॉन दान करके आयनिक यौगिक भी बना सकते हैं तथा इन यौगिकों में +2 तथा +4 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं। अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण समूह में ऊपर से नीचे आने पर समूह में + 4 ऑक्सीकरण संख्या का स्थायित्व कम होता है। लेकिन +2 ऑक्सीकरण संख्या का स्थायित्व बढ़ता है। इसलिये यह +2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं।

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प्रश्न 17.
SnCl4 द्रव है जबकि SnCl2 ठोस है, क्यों?
अथवा,
टिन के एक यौगिक का अणुभार 189 तथा दूसरे का 260 है। इसके बावजूद पहला यौगिक ठोस जबकि दूसरा द्रव है। ऐसा क्यों? ।
उत्तर:
SnCl4 में Sn + 2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है तथा सहसंयोजी यौगिकों का निर्माण करता है इसलिये SnCl4 द्रव है जबकि SnCl4 में Sn + 2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है तथा आयनिक यौगिकों का निर्माण करता है इसलिये SnCl4 ठोस है।

प्रश्न 18.
Si, C के समान ग्रेफाइट संरचना नहीं बनाता, क्यों?
उत्तर:
Si ग्रेफाइट के समान संरचना नहीं बनाता, क्योंकि –
1. Si, sp2 संकरित यौगिकों का निर्माण नहीं करता जबकि ग्रेफाइट में कार्बन sp2संकरित अवस्था में होता है।
2. Si की परमाण्विक त्रिज्या कार्बन की परमाण्विक त्रिज्या से अधिक है जिसके कारण Si की इलेक्ट्रॉन बंधुता आयनन ऊर्जा इत्यादि कार्बन से कम है। जिसके कारण Si, C के समान 7 बंधों का निर्माण नहीं करता।

प्रश्न 19.
कार्बन की अधिकतम सहसंयोजकता 4 है जबकि इस समूह के अन्य सदस्यों की अधिकतम सहसंयोजकता 6 है, क्यों?
अथवा
कार्बन Si के समान उच्च ऑक्सीकरण नहीं दर्शाते, क्यों?
उत्तर:
कार्बन परिवार के सभी सदस्यों के संयोजी कोश में उत्तेजित अवस्था में 4 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। इन्हें अपना अष्टक पूर्ण करने के लिये 4 अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। इसलिये अन्य तत्वों के साथ साझा कर सहसंयोजी बंध बनाते हैं। इसलिये इनकी सहसंयोजकता 4 होती है। कार्बन में d कक्षक की उपस्थिति के कारण उच्च ऑक्सीकरण संख्या संभव नहीं है।

जबकि अन्य सदस्यों में रिक्त d कक्षक की उपस्थिति के कारण उच्च ऑक्सीकरण संख्या संभव है क्योंकि रिक्त d कक्षक की उपस्थिति के कारण इलेक्ट्रॉन ग्राही की तरह कार्य करने लगता है तथा किसी भी अन्य इलेक्ट्रॉन दाता समूह द्वारा दिये गये एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करके उप-सहसंयोजी बंध बना सकते हैं। इसलिये इनकी अधिकतम ऑक्सीकरण संख्या 6 होती है।

प्रश्न 20.
CCl4 जल – अपघटित नहीं होता जबकि SiCl4 जल – अपघटित हो जाता है, क्यों?
उत्तर:
कार्बन में रिक्त d कक्षक की अनुपस्थिति के कारण उच्चतम ऑक्सीकरण संख्या 4 है तथा d कक्षक की अनुपस्थिति के कारण यह अपनी ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि नहीं कर सकता इसलिये CCl4जल अपघटित नहीं होता। जबकि Si में रिक्त d कक्षक की उपस्थिति के कारण अधिकतम ऑक्सीकरण संख्या 6 है इसलिये SiCl4 जल द्वारा दिये गये एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म को सरलता से ग्रहण कर लेता है और इस प्रकार उसकी ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि हो जाती है। जिसके कारण यह सरलता से जल-अपघटित हो जाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 59

प्रश्न 21.
CO2 गैस है जबकि SiO2 उच्च गलनांक वाला ठोस है, क्यों ?
अथवा
CO2तथा SiO2 की संरचना को समझाइये।
उत्तर:
CO2की संरचना रेखीय होती है। इसमें कार्बन sp संकरित अवस्था में होता है तथा CO2 के अणु दुर्बल वाण्डर वाल्स आकर्षण बल द्वारा आकर्षित रहते हैं। इसलिये साधारण ताप पर CO2 गैस अवस्था में होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 60
SiO2 ठोस है। इसकी संरचना त्रिविम जाल के समान होती है। इसमें प्रत्येक Si चार ऑक्सीजन परमाणु के साथ चतुष्फलकीय रूप से जुड़ा होता है। Si तथा 0 परमाणु के बीच एकल सह-संयोजी बंध होता है। यह एकल। सहसंयोजी बंध वाण्डर वाल्स की तुलना में अधिक प्रबल है। इसलिये SiO2 ठोस व कठोर है तथा इसके गलनांक उच्च होते हैं।
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प्रश्न 22.
CO2तथा SiO4 में तुलना कीजिए।
उत्तर:
CO2 तथा SiO2 में तुलना| –
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प्रश्न 23.
कार्बन अपने समूह के अन्य सदस्यों के समान संकुल यौगिक का निर्माण नहीं करता, क्यों?
उत्तर:
किसी भी तत्व की उपसहसंयोजी या संकुल यौगिक बनाने की प्रवृत्ति निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है –
(1) छोटी परमाण्विक त्रिज्या
(2) उच्च आवेश घनत्व
(3) d कक्षक की उपस्थिति।
कार्बन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से स्पष्ट है कि कार्बन के पास रिक्त d कक्षक अनुपस्थित होता है। इसलिये वह लिगेण्ड द्वारा दिये गये इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर संकुल यौगिक नहीं बनाता। जबकि इस समूह के अन्य सदस्यों के पास रिक्त d कक्षक होता है। जिसके कारण वह लिगेण्ड द्वारा दिये गये इलेक्ट्रॉन युग्म को सरलता से ग्रहण करके उपसहसंयोजी बंध बना सकते हैं। इसलिये वह सरलता से संकुल यौगिक का निर्माण करते हैं।

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प्रश्न 24.
M+2 आयन प्रबल अपचायक है, जबकि M+4 आयन सहसंयोजी गुण दर्शाता है, क्यों?
उत्तर:
कार्बन परिवार के सभी सदस्यों के संयोजी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं तथा M +4 अवस्था में आयनन ऊर्जा अत्यधिक उच्च होती है। इसलिये सभी तत्व अपना अष्टक पूर्ण करने के लिये अन्य तत्वों के H परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉन का साझा करके सहसंयोजी यौगिक बनाते हैं। जबकि दो इलेक्ट्रॉन निकालने के लिये कम आयनन ऊर्जा की आवश्यकता होती है इसलिये +2 ऑक्सीकरण अवस्था में यह आयनिक यौगिकों का निर्माण करते हैं। इलेक्ट्रॉन दान करने की प्रवृत्ति के कारण यह अपचायक की तरह कार्य करते हैं।

प्रश्न 25.
सामान्यतः टिन तथा लेड के यौगिक जैसे SnCl, तथा PbCl, का उपयोग अपचायक के रूप में जबकि SnCl, तथा PbCl का उपयोग ऑक्सीकारक के रूप में होता है, क्यों?
उत्तर:
Sn तथा Pb में +2 की तुलना में +4 ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी है। अत: Sn+2,Sn+4 में जाने की प्रवृति रखता है जिसके कारण यह दूसरों का अपचयन करता है। Sn तथा Pb में +4 ऑक्सीकरण संख्या कम स्थायी हैं। अत: Pb+2 से Pb+4 में जाने की प्रवृत्ति रखता है। इसी कारण यह दूसरों का ऑक्सीकरण करता है।

प्रश्न 26.
कार्बन से मोनो-ऑक्साइड की आर्बिटल संरचना को समझाइये।
उत्तर:
CO में कार्बन तथा ऑक्सीजन दोनों sp संकरित अवस्था में होते हैं। कार्बन का एक sp आर्बिटल ऑक्सीजन के एक sp आर्बिटल के साथ अतिव्यापन कर ०-बंध बनाते हैं। कार्बन के तथा ऑक्सीजन के दूसरे sp आर्बिटल में एक-एक इलेक्ट्रॉन युग्म होता है, जो अनाबंधित रहता है। कार्बन के pz आर्बिटल में एक इलेक्ट्रॉन ऑक्सीजन के pz आर्बिटल के एक इलेक्ट्रॉन से पार्वीय अतिव्यापन करके एक L – बंध बनाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 63
अब कार्बन के py आर्बिटल में एक भी इलेक्ट्रॉन नहीं है, जबकि ऑक्सीजन के py आर्बिटल में 2 इलेक्ट्रॉन हैं। इनके बीच भी पार्वीय अतिव्यापन होकर बंध बनता है। जो लुईस संरचना में उपसहसंयोजकता को दर्शाता है।
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प्रश्न 27.
सिलिका उद्यान किसे कहते हैं?
उत्तर:
सोडियम सिलिकेट के संतृप्त जलीय विलयन की नली में यदि बालू, कॉपर सल्फेट, फेरस सल्फेट, निकिल सल्फेट, कैडमियम नाइट्रेट, मैंगनीज सल्फेट और कोबाल्ट नाइट्रेट आदि के क्रिस्टल डाल दें तो दो तीन दिन पश्चात् विलयन में रंग-बिरंगे पौधे उगे हुये प्रतीत होते हैं तथा यह सिलिका उद्यान कहलाता है।

प्रश्न 28.
कार्बन मोनो-ऑक्साइड की तरह सिलिकॉन मोनो-ऑक्साइड क्यों नहीं बनता?
उत्तर:
कार्बन ऑक्सीजन के साथ एक सहसंयोजी बंध बना लेने के बाद एक बंध बना सकता है। साथ ही कार्बन के एक और रिक्त 2pz आर्बिटल के साथ ऑक्सीजन के 2pz में स्थित एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म का अतिव्यापन भी हो सकता है। क्योंकि ऑक्सीजन से एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सके इतनी ऋणविद्युतता कार्बन में है। जबकि.Si की ऋणविद्युतता भी कम है तथा आकार भी बड़ा है। जिससे वह ऑक्सीजन के साथ 3pr – 2pz बंध नहीं बना सकता इसलिये SiO संभव नहीं है।

प्रश्न 29.
भाप अंगार गैस, कार्बोरेटेड भाप अंगार गैस तथा प्रोड्यूसर गैस बनाने के लिये संतुलित समीकरण लिखिए।
उत्तर:
1. भाप अंगार गैस:
यह गैस कार्बन मोनो-ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन का मिश्रण होती है। पानी की भाप को रक्त तप्त कोक पर प्रवाहित करके बनायी जाती है।
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2. कार्बोरेटेड भाप अंगार गैस-भाप अंगार गैस को तेल में पड़ी हुई गर्म ईंटों पर प्रवाहित करने पर एसीटिलीन तथा एथिलीन बनती है तथा भाप अंगार गैस से मिश्रित होकर कार्बोरेटेड भाप अंगार गैस बनती है। इसमें CO = 30%, H2 = 35%, संतृप्त हाइड्रोकार्बन = 15-20%, हाइड्रोकार्बन = 10%, N2 = 2.5-5%, CO2 = 2% होती है।

3. प्रोड्यूसर गैस:
कार्बन मोनो-ऑक्साइड तथा नाइट्रोजन का मिश्रण होती है। रक्त तप्त कोक पर वायु की सीमित मात्रा प्रवाहित करने पर प्राप्त होती है।
2C + वायु (O2 + N2) → 2CO + N2

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प्रश्न 30.
सिलिकॉन टेट्राक्लोराइड से सिलिका जेल किस प्रकार प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर:
सिलिकॉन की क्लोरीन से क्रिया कराने पर सिलिकॉन टेट्रा क्लोराइड प्राप्त होता है।
Si + 2Cl2 → SiCl4

SiCl4 का जल-अपघटन कराने पर सिलिकॉन टेट्रा हाइड्रॉक्साइड प्राप्त होता है।
SiCl4 + 4HOH → Si(OH)4 + 4HCl

यह सिलिकॉन टेट्रा हाइड्रॉक्साइड वास्तव में सिलिसिक अम्ल मोनोहाइड्रेट है।
Si (OH)4H2SiO3.H2O

यह सिलिसिक अम्ल गर्म करने पर सिलिका में टूट जाता है।
H2SiO3 ⥨ H2O → SiO2 + 2H2O
यही सिलिका, सिलिका जेल (SiO2 xH2O) कहलाता है।

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11 p-ब्लॉक तत्त्व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
Be तथा Al में विकर्ण संबंध लिखिए।
उत्तर:
द्वितीय एवं तृतीय आवर्त में एक-दूसरे के विकर्णतः उपस्थित तत्वों के गुणों में समानता होती है विकर्णतः उपस्थित समान गुणों वाले तत्वों के बीच संबंध को विकर्ण संबंध कहते हैं।
(1) दोनों की विद्युत् ऋणात्मकता समान होती है।
Be = 1.5 Al = 1.5
(2) Be+2 तथा Al+3 के ध्रुवित करने की क्षमता लगभग समान होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 66
(3) क्षारीय मृदा धातुएँ कोमल होती हैं परन्तु बेरीलियम ऐल्युमिनियम के समान कठोर है।

(4) Be, Al के समान सान्द्र नाइट्रिक अम्ल में निष्क्रिय हो जाता है।

(5) Be2C ऐल्युमिनियम कार्बाइड की तरह जल से अभिक्रिया कर मेथेन मुक्त करता है।

  • Be2C + 2H2O + 2BeO + CH4
  • Al4C3 + 12H2O → 4Al(OH)3 + 3CH4

(6) Be तथा A1 की NaOH से क्रिया कर हाइड्रोजन मुक्त करते हैं।

  • Be + 2NaOH →Na2BeO2 + H2
  • 2Al + 2NaOH + 2H2O → 2NaAlO2 + 3H2

(7) दोनों के ऑक्साइड उभयधर्मी है।

  • BeO +2HCl → BeCl2 + H2O
  • BeO + 2NaOH → Na2BeO2 + H2O
  • Al2O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2O
  • Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O

(8) BeCl2 तथा AlCl3, द्विलक तथा बहुलक रूप में मिलते हैं।

(9) दोनों के हाइड्रॉक्साइड जल में अविलेय हैं तथा गर्म करने पर अपघटित हो जाते हैं।

  • Be(OH)2 → BeO + H2O
  • 2Al(OH)3 → Al2O3 + 3H2O

(10) BeCl2 तथा AlCl3 प्रबल लुईस अम्ल है।

(11) दोनों धातुएँ हैलोजन से क्रिया कर हैलाइड बनाते हैं।

  • Be + Cl2 → BeCl2
  • 2Al + 3Cl2 → 2AlCl3

(12) दोनों के हैलाइड सहसंयोजक प्रवृत्ति दर्शाते हैं तथा कार्बनिक विलायकों में विलेय हैं।

प्रश्न 2.
B तथा AI में समानता तथा असमानता लिखिए।
उत्तर:
समानता:

  • दोनों के संयोजी कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np1 है।
  • दोनों की सहसंयोजकता 6 है।
  • दोनों की ऑक्सीकरण संख्या +3 है।
  • दोनों M2O3 प्रकार के ऑक्साइड बनाते हैं।
  • दोनों के यौगिक प्रबल लुईस अम्ल की तरह कार्य करते हैं।
  • दोनों के ऑक्साइड उभयधर्मी प्रकृति के होते बोरॉन

असमानता:
बोरॉन तथा ऐल्युमिनियम में असमानताएँ हैं –

बोरॉन:

  • बोरॉन अधातु है।
  • बोरॉन विद्युत् एवं ऊष्मा का कुचालक होता है।
  • इसका गलनांक बहुत अधिक है।
  • ये तनु HCl एवं H2SO4 के साथ क्रिया नहीं करते
  • ये सान्द्र HNO3 से क्रिया करते हैं।
  • B + 3HNO3 → H3BO3 + 3NO2
  • ये धातु के साथ क्रिया कर मिश्र धातु बनाते हैं।
  • 3Mg + 2B → Mg2B2
  • बोरॉन कई हाइड्राइड बनाता है।
  • बोरॉन की अधिकतम सहसंयोजकता 4 है।
  • इसके कार्बाइड सहसंयोजी हैं।

ऐल्युमिनियम:

  • ऐल्युमिनियम धातु है।
  • ऐल्युमिनियम विद्युत् एवं ऊष्मा का सुचालक है।
  • इसका गलनांक बहुत कम है।
  • ये तनु HCl एवं H2SO4 से क्रिया कर H2 मुक्त करते हैं।
  • 2Al + 3H2SO4 → Al2 (SO4)3 + 3H2
  • ये सान्द्र HNO3 के लिये निष्क्रिय होते हैं।
  • ये धातु के साथ क्रिया कर बोराइड बनाते हैं।
  • ऐल्युमिनियम का हाइड्राइड अस्थायी है।
  • Al की अधिकतम सहसंयोजकता 6 है।
  • इनके कार्बाइड आयनिक होते हैं तथा जल अपघटित होकर मेथेन देते हैं।

प्रश्न 3.
बोरॉन अपने समूह के अन्य सदस्यों से अपसामान्य व्यवहार दर्शाता है, समझाइये।
उत्तर:
बोरॉन अपने समूह के अन्य सदस्यों से अपसामान्य व्यवहार दर्शाता है, क्योंकि –

  • बोरॉन की परमाण्विक तथा आयनिक त्रिज्या कम होती है।
  • आयनन ऊर्जा उच्च होती है।
  • इलेक्ट्रॉन बंधुता उच्च होती है।
  • d कक्षक की अनुपस्थिति है।

अपसामान्य व्यवहार:

  • बोरॉन अधातु है जबकि समूह के अन्य सदस्य धातु हैं।
  • बोरॉन विद्युत् का कुचालक है जबकि अन्य सदस्य विद्युत् के सुचालक हैं।
  • बोरॉन सहसंयोजी यौगिक बनाता है जबकि समूह के अन्य सदस्य आयनिक यौगिक बनाते हैं।
  • बोरॉन के यौगिक जल में अविलेय लेकिन कार्बनिक विलायकों में विलेय हैं जबकि समूह के अन्य सदस्यों के यौगिक जल में विलेय हैं।
  • बोरॉन अन्य सदस्यों के समान त्रिसंयोजी आयन नहीं बनाता।
  • बोरॉन की अधिकतम सहसंयोजकता 4 है जबकि अन्य सदस्यों की अधिकतम सहसंयोजकता 6 है।
  • बोरॉन का ऑक्साइड अम्लीय है जबकि अन्य सदस्यों के ऑक्साइड उभयधर्मी या क्षारीय प्रकृति के होते हैं।
  • बोरॉन अन्य धातु के साथ क्रिया करके बोराइड बनाता है जबकि अन्य सदस्य धातुओं के साथ क्रिया करके मिश्र धातु बनाते हैं।
  • बोरॉन एक से अधिक प्रकार के हाइड्राइड बनाता है जबकि अन्य सदस्य केवल एक ही हाइड्राइड बनाते हैं।

प्रश्न 4.
बोरेन क्या है ? इसकी विशेषतायें व उपयोग लिखिए।
उत्तर:
बोरॉन के हाइड्राइड को बोरेन कहा जाता है। बोरॉन दो श्रेणियों में हाइड्राइड बनाता है –
निडो बोरेन श्रेणी:
इसका सामान्य सूत्र BnHn+4 +4 है। इसके प्रथम सदस्य BH5 का अस्तित्व नहीं है, दूसरा सदस्य B2H6 सबसे महत्वपूर्ण है जिसे डाइबोरेन कहा जाता है। अन्य महत्वपूर्ण सदस्य पेंटा बोरेन B5H9 हेक्साबोरेन B6H10 है।

एरेक्नो बोरेन श्रेणी:
जिसका सामान्य सूत्र BnHn+6 है। इस श्रेणी के महत्वपूर्ण सदस्य टेट्राबोरेन B4H10,पेंटा बोरेन B5H11, हेक्सा बोरेन B6H12 हैं।

बनाने की विधि:
1. BX3की अभिक्रिया लीथियम हाइड्राइड के साथ 450K ताप पर कराने पर डाइबोरेन प्राप्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 67

2. बोरॉन ट्राइ हैलाइड का अपचयन लीथियम ऐल्युमिनियम टेट्राहाइड्राइड के द्वारा कराने पर डाइबोरेन प्राप्त होता है।
4BCl3 + 3LiAlH4 → 2B2H6 + 3LiCl + 3AlCl3

विशेषताएँ:

  • डाइबोरेन रंगहीन गैस है जबकि उच्चतर सदस्य वाष्पशील तथा ठोस हैं।
  • डाइबोरेन ऑक्सीजन की उपस्थिति में दहन के पश्चात् ऊष्मा उत्सर्जित करता है। इसलिये इसका उपयोग रॉकेट ईंधन के रूप में करते हैं।
  • यह निम्न ताप पर स्थायी होते हैं। उच्च ताप पर यह विघटित होने लगते हैं।

उपयोग:

  • रॉकेट ईंधन के रूप में
  • बहुलीकरण अभिक्रिया में उत्प्रेरक के रूप में।

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प्रश्न 5.
डाइबोरेन की संरचना को समझाइये।
अथवा
इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक किसे कहते हैं?
अथवा
2 इलेक्ट्रॉन -3 केन्द्रीय यौगिक किसे कहते हैं ?
उत्तर:
डाइबोरेन के संयोजी कोश में कुल 12 इलेक्ट्रॉन होते हैं। जिसमें से तीन-तीन इलेक्ट्रॉन दोनों बोरॉन के संयोजी कोश में तथा एक-एक प्रत्येक हाइड्रोजन के संयोजी कोश में होता है। B2H6 के स्थायी अवस्था हेतु 16 अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है। डाइबोरेन के अणु में दो समतलीय BH2 समूह होते हैं तथा दो हाइड्रोजन इन दोनों BH2 समूह के मध्य लंबवत् रूप से स्थित रहते हैं। चारों कोनों पर स्थित चारों हाइड्रोजन बोरॉन के साथ सहसंयोजी बंध द्वारा जुड़े रहते हैं।

इन्हें टर्मिनल हाइड्रोजन कहते हैं। जबकि सेतु बनाने वाले हाइड्रोजन इस तल के ऊपर व नीचे लंबवत् रूप से व्यवस्थित होते हैं तथा B – H – B बंध में इलेक्ट्रॉन की न्यूनता होती है। इस बंध संरचना में 2 इलेक्ट्रॉन 3 परमाणुओं को जोड़ने का कार्य करते हैं इसलिये इन्हें 2- इलेक्ट्रॉन 3- केन्द्र यौगिक कहते हैं तथा इलेक्ट्रॉन की न्यूनता के कारण इन्हें इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक कहते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 68

प्रश्न 6.
बोरॉन तथा कार्बन में तुलना कीजिए।
उत्तर:
समानता:

  • बोरॉन तथा कार्बन दोनों अधातु हैं।
  • दोनों अपरूपता दर्शाते हैं।
  • दोनों एक से अधिक प्रकार के हाइड्राइड बनाते हैं।
  • दोनों के यौगिक सहसंयोजी यौगिक होते हैं।
  • दोनों के यौगिक कार्बनिक विलायकों में विलेय हैं।
  • बोरॉन का क्रिस्टलीय रूप भी डायमंड के समान कठोर है।
  • CO2 तथा B2 O3 दोनों क्षार में विलेय होकर कार्बोनेट तथा बोरेट बनाते हैं।
    2NaOH + CO2 → Na2 CO3 + H2 O
    2NaOH + B5O3 → Na2 B2 O3 + H2O

असमानता:
बोरॉन तथा कार्बन में असमानताएँ –

बोरॉन:

  • बोरॉन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s2-2s22p1 है।
  • बोरॉन की सहसंयोजकता 3 है।
  • बोरॉन द्विबंध तथा त्रिबंध नहीं बनाता।
  • बोरॉन के यौगिक इलेक्ट्रॉन न्यून हैं।
  • कार्बन के यौगिक लुईस अम्ल नहीं हैं।

कार्बन:

  • कार्बन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s22s22p1 है।
  • कार्बन की सहसंयोजकता 4 है।
  • कार्बन द्विबंध तथा त्रिबंध बनाता है।
  • कार्बन के यौगिक इलेक्ट्रॉन न्यून नहीं हैं।
  • बोरॉन के यौगिक लुईस अम्ल हैं।

प्रश्न 7.
BCl3 तथा AlCl3 की संरचना में तुलना कीजिए।
उत्तर:
BCl3 एक इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक है जो हमेशा एकलक अवस्था में मिलता है। BCl3 में बोरॉन sp2 संकरित अवस्था में होता है। इसलिये इसकी संरचना त्रिफलकीय होती है तथा बंध कोण 120° होता है। क्योंकि बोरॉन की परमाण्विक त्रिज्या छोटी होती है तथा क्लोरीन सेतु अस्थायी होता है इसलिये यह द्विलक संरचना नहीं बनाता। AlCl3 सदैव द्विलक संरचना के रूप में होता है इस द्विलक संरचना र में प्रत्येक Al परमाणु दूसरे Al से जुड़े क्लोरीन परमाणु से एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर अपना अष्टक पूर्ण कर लेता है तथा स्थायित्व प्राप्त कर लेता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 69
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 70

प्रश्न 8.
गोल्ड श्मिट की ऐल्युमिनो थर्मिक विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
अथवा
थर्माइट वेल्डिंग विधि को समझाइये।
उत्तर:
कुछ धात्विक ऑक्साइडों, जैसे – Cr2O3
Fe2O3 आदि का कार्बन से अपचयन नहीं होता है। इनका अपचयन ऐल्युमिनियम चूर्ण द्वारा किया जाता है तो इस विधि को गोल्ड श्मिट ऐल्युमिनो तापी विधि या थर्माइट. विधि कहा जाता है।
Cr2O3 + 2Al → Al2O3 + 2Cr
Fe2O3 + 2Al → 2Fe + Al2O3

इस विधि में एक अग्निसह क्रूसीबल में धातु ऑक्साइड एवं Al चूर्ण जिसे थर्माइट कहते हैं, भरते हैं। इस मिश्रण में फायर क्ले का साँचा Mg फीते के द्वारा जिसके सिरे पर Mg चूर्ण एवं बेरियम परॉक्साइड की पोटली बँधी होती है, आग लगा देते हैं। अभिक्रिया के ऊष्माक्षेपी होने के कारण उच्च ताप उत्पन्न होता है और ऑक्साइड के अपचयित होने के कारण धातु मुक्त होती है। इस विधि का उपयोग टूटे हुये लोहे के गर्डर या मशीनों के पुों को जोड़ने के लिये होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 71

प्रश्न 9.
फिटकरी बनाने की विधि, गुण तथा उपयोग लिखिए।
अथवा
फिटकरी क्या है ? इसका सामान्य सूत्र लिखकर कोई एक उदाहरण दीजिए तथा फिटकरी के कोई चार उपयोग लिखिए।
उत्तर:
वे द्विक सल्फेट लवण जिनका सामान्य सूत्र R2SO4 · Al2 (SO4)3 24H2O होता है फिटकरी या एलम कहलाते हैं जहाँ R एकसंयोजी धातु जैसे – Na, K, NH4 इत्यादि और M त्रिसंयोजक धातु जैसे – Al, Fe, Cr आदि होता है।

नामकरण:
1. वे फिटकरी जिनमें त्रिसंयोजक धातु के रूप में Al रहता है उसमें उपस्थित एकसंयोजक धातु या मूलक के एकलक के नाम से जानी जाती है। जैसे –
K2SO4 . Al2 (SO4)3 24H2O (पोटाश एलम)
(NH4)SO4Al2 (SO4)3 24H2O (अमोनियम एलम)

2. वे फिटकरी जिनमें Al नहीं होता उनमें उपस्थित दोनों धातुओं के नाम से जानी जाती है।
K2SO2 Cr(SO4)3 .24H2O (पोटैशियम क्रोमियम एलम)
(NH4)2 SO4. Fe2 (SO4)3.24H2O (अमोनियम आयरन एलम)

बनाने की विधि:
(1) पोटैशियम सल्फेट के विलयन में ऐल्युमिनियम सल्फेट की सम अणुक मात्रा का विलयन मिलाकर विलयन का क्रिस्टलन करने पर एलम प्राप्त होता है।
K2SO4 + Al2 (SO4)3 + 24H2O → K2SO4 . Al2 (SO4)324H2O

(2) एलम स्टोन से:
एलम स्टोन K2SO4 Al2 (SO4)3.4Al(OH)3 को बारीक पीस कर तनु H,SO, के साथ उबाला जाता है। प्राप्त विलयन को छानकर आवश्यक मात्रा में K2SO4मिलाकर सम्पूर्ण विलयन का सान्द्रण कर क्रिस्टलन करने पर फिटकरी के क्रिस्टल प्राप्त होते हैं।
K2SO4 + Al2 (SO4)3 + 4AI(OH)3+ 6H2SO4 → K2SO4 + 3Al2 (SO4)2 + 12H2O K2SO4 + Al2 (SO4)3 + 24H2O → K2SO4 + Al2 (SO4).24H2O

गुण:

  • रंगहीन, अष्टफलकीय क्रिस्टल।
  • इसका जलीय विलयन जल-अपघटन के कारण अम्लीय होता है।
  • जल में विलेय परन्तु ऐल्कोहॉल में अविलेय।
  • गर्म करने पर 92°C पर पिघल जाता है। 200°C तक गर्म करने पर सम्पूर्ण क्रिस्टलन जल के निकल जाने के कारण सरन्ध्र होकर फूल जाता है इस प्रकार की फिटकरी को जली हुई फिटकरी कहते हैं।

उपयोग:

  • रक्त के बहाव को रोकने में
  • कपड़े की रंगाई और छपाई में
  • चमड़ा पकाने में
  • कागज को चिकना करने में
  • जल को साफ करने में।

प्रश्न 10.
कार्बन अपने समूह के अन्य सदस्यों की तुलना में अपसामान्य व्यवहार दर्शाता है, क्यों? उत्तर- कार्बन अपने समूह के अन्य सदस्यों की तुलना में अपसामान्य व्यवहार दर्शाता है, क्योंकि

  • परमाण्विक त्रिज्या तथा आयनिक त्रिज्या कम होती है।
  • आयनन ऊर्जा उच्च होती है।
  • उच्च इलेक्ट्रॉन बंधुता,
  • d कक्षक की अनुपस्थिति।

अपसामान्य व्यवहार:

  • कार्बन के गलनांक तथा क्वथनांक अन्य सदस्यों की तुलना में उच्च है।
  • C की श्रृंखलन की प्रवृत्ति अन्य सदस्यों से अधिक है।
  • कार्बन बहुआबन्ध बनाता है। जबकि अन्य सदस्य बहुआबन्ध नहीं बनाते।
  • C का मोनो-ऑक्साइड ज्ञात है जबकि अन्य सदस्यों के मोनो-ऑक्साइड अज्ञात हैं।
  • C की अधिकतम सहसंयोजकता 4 है जबकि अन्य सदस्यों की अधिकतम सहसंयोजकता 6 है।
  • कार्बन अन्य सदस्यों की तरह संकुल यौगिकों का निर्माण नहीं करता।
  • कार्बन एक से अधिक प्रकार के हाइड्राइड बनाता है जबकि अन्य सदस्य केवल एक ही प्रकार के हाइड्राइड बनाते हैं।
  • CCl4 जल-अपघटित नहीं होता जबकि अन्य सदस्यों के टेट्रा हैलाइड सरलता से जल-अपघटित हो जाते हैं।
  • CO2 गैस है जबकि अन्य सदस्यों के डाइऑक्साइड ठोस हैं।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए –
1. फ्रिऑन,
2. सिलिकॉन।
उत्तर:
1. फ्रिऑन:
डाइ क्लोरो डाइ – फ्लोरोमिथेन को फ्रिऑन कहते हैं, कार्बन टेट्रा क्लोराइड की अभिक्रिया HF या SbF3 के साथ SbCl5 की उपस्थिति में कराने पर फ्रिऑन बनता है। फ्रिऑन का उपयोग प्रशीतक के रूप में रेफ्रिजरेटर तथा ए.सी. में करते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 72

2. सिलिकॉन:
सिलिकॉन एक संश्लेषित बहुलक है। जिसकी मूल इकाई R2 SiCl2 है। इसका मूलानुपाती सूत्र कीटोन के समान होता है इसलिये इन्हें सिलिकॉन नाम दिया है। एल्किल हैलाइड और Si की अभिक्रिया Cu की उपस्थिति में 575K ताप पर कराने पर डाइ-एल्किल डाइ-क्लोरो हैलाइड सिलेन प्राप्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 73

इनका जल:
अपघटन कराने पर Si – Cl बंध टूटने लगता है तथा Cl का प्रतिस्थापन OH समूह द्वारा होने लगता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 74

OH बंध बनने के बाद संघनन होने लगता है। इस प्रक्रम में HO के अणु निकलते हैं और सिलिकॉन प्राप्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 75
गुण:

  • रासायनिक रूप से निष्क्रिय
  • जल प्रतिकर्षी
  • कुचालक
  • ऊष्मा द्वारा अप्रभावित या.. ऊष्मा प्रतिकर्षी।

उपयोग:

  • वॉटर प्रूफ पेपर के रूप में
  • स्नेहक के रूप में।

प्रश्न 12.
फुलेरीन्स पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
फुलेरीन्स कार्बन का क्रिस्टलीय अपरूप है, किन्तु इसकी गेंद के समान आकृति होती है तथा प्रत्येक गोलीय क्रिस्टल में कार्बन के 60 परमाणु होते हैं, इस प्रकार से इसके क्रिस्टल धूल के कणों के समान होते हैं। एक क्रिस्टल इकाई का सूत्र C60, Cr70, C84 होता है। C60 फुलेरीन्स को बकमिन्स्टर फुलेरीन भी कहा जाता है। ग्रेफाइट को विद्युत् आर्क में हीलियम या ऑर्गन माध्यम में वाष्पीकृत कर संघनित्र करने से धूल के समान पाउडर एकत्र होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 76
गुण:
फुलेरीन्स धूल के कण के समान होते हैं जो चिकने तथा गोल होते हैं। कार्बनिक विलायकों में विलेय होकर रंगीन विलयन देते हैं। सोडियम जैसी क्षार धातुओं से क्रिया कर Na3C60यौगिक देता है । पराबैंगनी किरणों में फुलेरीन्स का बहुलीकरण होता है। जबकि लगभग 1375K तापक्रम पर भी इनके क्रिस्टल टूटते नहीं हैं।

संरचना:
फुलेरीन्स में 20 छ: कार्बन परमाणु के चक्र तथा 12 पाँच कार्बन परमाणु के चक्र होते हैं। सभी पाँच परमाण्विक चक्र छः परमाण्विक चक्र के साथ जुड़े रहते हैं। जिससे एक गोलीय सममित आकृति प्राप्त होती है। इसीलिये Co60 फुलेरीन्स बकी बॉल के नाम से भी जाना जाता है । फुटबॉल की तरह यह पिंजरा होता है। प्रत्येक गोले का व्यास 700 pm होता है।

उपयोग:

  • स्नेहक के रूप में
  • क्षार धातुओं के साथ बने यौगिक अतिचालक के रूप में।

प्रश्न 13.
जियोलाइट पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जियोलाइट एक प्रकार के जटिल सिलिकेट हैं जिनमें कुछ सिलिकॉन आयनों को प्रतिस्थापित कर Al+3 आयन जुड़े रहते हैं। Si+4 तथा Al+3 आयन की संयोजकता के अंतर को संतुलित करने के लिये कुछ अन्य आयन जैसे – Na+, K+; Ca+2, Mg+2 इत्यादि उपस्थित रहते हैं। जो अणु को विद्युत् उदासीन बनाये रखते हैं। इनका सामान्य सूत्र Mx [(AIO2)x(SiO2)y] – mH2O है।
उदाहरण:
Na2[Al2Si3O10].2H2O
Ca[Al2Si7O18].6H2O
जियोलाइट की संरचना मधुमक्खी के छत्ते के समान होती है। इसमें विभिन्न आकार के छिद्र व गुहिकाएँ होती हैं। इन छिद्रों का आकार 260 pm से 740 pm के मध्य होता है इन छिद्रों में उचित आकार के अणुओं या आयनों का अवशोषण हो सकता है।

तथा गुहिकाओं के द्वारा जल आदि अणुओं का उत्सर्जन व अवशोषण हो सकता है। इसलिये इन्हें आण्विक चालनी भी कहते हैं तथा ये आकार चयन करने वाले उत्प्रेरक की तरह कार्य करते हैं। इनके द्वारा उत्प्रेरित अभिक्रिया इनमें उपस्थित छिद्रों के आकार तथा अभिकारक व उत्पाद के आकार पर निर्भर करती है।

संरचना:
चतुष्फलकीय SiO-44 आयन की 24 इकाइयाँ जुड़कर जियोलाइट का एक ब्लॉक निर्मित करती है। इस घनीय अष्टफलकीय ब्लॉक या सोडालाइट केज कहते हैं। सोडालाइट केज के ये ब्लॉक चार सदस्यीय रिंग के द्वारा आपस में जुड़कर द्विविमीय अथवा त्रिविमीय नेटवर्क का निर्माण करते हैं । इस प्रकार की संरचना के कारण जियोलाइट की संरध्रता बहुत अधिक होती है। यदि सोडालाइट केज के ब्लॉक दोहरी छः सदस्यीय रिंग के द्वारा जुड़े होते हैं तो बनने वाला नेटवर्क फौजासाइट कहलाता है।

उपयोग –

  • व्यावसायिक एवं घरेलू उपयोग में जियोलाइट का उपयोग आयन विनिमय द्वारा पानी को शुद्ध करने में किया जाता है।
  • गैसों के पृथक्करण में – जियोलाइट की छिद्रयुक्त संरचना के उपयोग से प्राकृतिक गैसों से H2O, CO2 एवं SO2 को पृथक् किया जाता है।
  • कृषि क्षेत्र में प्राकृतिक जियोलाइट क्लिनोप्टिलोलाइट (Clinoptilolite) का उपयोग भूमि उपचार में किया जाता है। यह भूमि में धीरे-धीरे पोटैशियम को मुक्त करता है।
  • डिटर्जेन्ट बनाने में – कृत्रिम जियोलाइट का उपयोग डिटर्जेन्ट बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 14.
CO2की लुईस संरचना एवं अनुनाद संरचना लिखिए।
उत्तर:
संरचना:
CO2 की लुईस संरचना निम्नानुसार है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 77
CO2 की मानक ऊष्मा AH° f = -393.5kJ/mol होती है तथा C – O बंध लंबाई 115 pm होती है। इससे स्पष्ट है कि लुईस संरचना के आधार पर CO2 का जो स्थायित्व आना चाहिये CO2 उससे भी अधिक स्थायी है। यह तभी संभव है जब CO2 की अनुनाद संरचना संभव है। कार्बन डाइ-ऑक्साइड अग्रलिखित अनुनाद संरचना का अनुनाद संकर है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 78
ऑर्बिटल संरचना – CO2 में कार्बन sp संकरित अवस्था में तथा दोनों ऑक्सीजन sp2संकरित अवस्था में होते हैं। प्रत्येक ऑक्सीजन के दो-दो sp कक्षक में अनाबंधित इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं। एक sp2 कक्षक कार्बन के sp2 कक्षक के साथ अतिव्यापन करके बंध बनाता है। एक ऑक्सीजन का pzकक्षक कार्बन के pzकक्षक से पाश्वर्ती अतिव्यापन करके 7 बंध बनाता है। दूसरे ऑक्सीजन का py कक्षक कार्बन के py कक्षक से पाश्वर्ती अतिव्यापन करके 7 बंध बनाता है। इस प्रकार CO2 का अणु रेखीय होता है तथा इसका द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 79

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प्रश्न 15.
(a) R2SiCl2 तथा RSiCl3के जल – अपघटन से बनने वाले सिलिकोन्स में मूलभूत अंतर क्या है ?
(b) [SiF6]-2 ज्ञात है जबकि [SiCl6]-2 नहीं, क्यों?
उत्तर:
(a) R2SiCl2 के जल-अपघटन से सिलिकोन्स का रेखीय बहुलक बनता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 80
जबकि RSiCl3 के जल – अपघटन से सिलिकोन्स का द्विविमीय बहुलक बनता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 81
(b) फ्लुओराइड आयनों का आकार छोटा होता है इसलिये सिलिकॉन परमाणु 6 फ्लुओराइड आयनों को समाहित कर सकता है। इसलिये [SiF6]-2 ज्ञात है जबकि क्लोराइड के बड़े आकार के सिलिकॉन क्लोराइड आयनों को समाहित नहीं कर सकता इसलिये [SiCl6]-2 अज्ञात है।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए –
(1) सोडियम जियोलाइट
(2) सोडियम सिलिकेट
(3) सिलिकोन्स।
उत्तर:
(1) सोडियम जियोलाइट:
सोडियम और ऐल्युमिनियम के मिश्रित सिलिकेट्स को परम्यूटिट कहते हैं। इसका सूत्र Na2 [Al2SiO8.xH3O] है। इसको सोडियम जियोलाइट या सोडियम परम्यूटिट भी कहते हैं। कठोर पानी स्तम्भ में रखते हुए परम्यूटिट से प्रवाहित पुनर्निर्माण हेतु किया जाता है। कैल्सियम और मैग्नीशियम लवण सोडियम NaCl विलयन द्वारा विस्थापित हो जाते हैं। सोडियम लवण जल को कठोर नहीं करते। इस प्रकार मृदु जल प्राप्त होता है। बाइ-सोडियम परम्यूटिट Na2P से व्यक्त किया जाये तो पानी को मृदु बनाने की अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार लिखी मृदु जल जा सकती हैं –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 84
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 82
इस विधि द्वारा पानी की अस्थायी कठोरता भी दूर की जा सकती है।

(2) सोडियम सिलिकेट:
यह काँच की भाँति चमकदार तथा जल में विलेय है, इसी कारण यह जल काँच (Water glass) कहलाता है। यह सोडियम कार्बोनेट और बालू के मिश्रण को एक परावर्तनी भट्टी में गलाकर बनाया जाता है।
Na2CO3 + SiO2 Na2SiO3 + CO2
प्राप्त पदार्थ कड़ा होने पर काँच जैसा-ठोस कठोर जल होता है तथा जल में विलेय हो जाता है सोडियम मृदु जल सिलिकेट के संतृप्त जलीय विलयन को नली में बालू CuSO4, FeSO4, NISO4, Cd(NO3)2 MnSO4 और CO(NO3)2 आदि के क्रिस्टल डाले तो दो तीन दिन पश्चात् विलयन में रंग बिरंगे पौधे उगे हुए प्रतीत होते हैं जो सिलिका गार्डन कहलाता है।

(3) सिलिकोन्स:
ये सिलिकॉन और कार्बन क्वार्टजी यौगिकों के रेजिन है ये प्रायः रेत NaCl तथा पेट्रोलियम से बनाये जाते हैं। इनको गैस, चिपचिपे द्रव, रबर की भाँति ठोस या पत्थर के समान कठोर ठोस रुप में प्राप्त किया जा सकता है। ये कार्ब सिलिकॉन बहुलक है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 11 p-ब्लॉक तत्त्व - 83

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MP Board Class 11th Special English Poems Important Questions

MP Board Class 11th Special English Poems Important Questions

MP Board Class 11th Special English Chapter 1 Patriotism Important Questions and Answers

I. Read the following stanzas carefully and answer the questions given below : [M.P. 2015]

1. Breathes there the man with soul so dead,
Who never to himself hath said,
“This is my own, my native land! ”
Whose heart hath never within him burn’d,
As home his footsteps he hath turn’d,
From wandering in a foreign strand!

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Questions :
(i) What meaning does the word ‘breathe’ convey?
(ii) Whose soul does the poet say is dead?
(iii) What does the poet imply by ……….. As home his footsteps he hath turned’?
(iv) Who has composed this poem?
(v) Find the antonyms the words ‘alive’ and ‘native’ from the lines given above.
Answers :
(i) The word ‘breathe’ stands for a person who is alive.
(ii) A person who does not love his native land.
(iii) Returning home.
(iv) Sir Walter Scott.
(v) Alive – dead, Native – foreign.

2. Despite Those titles, power and peef, [M.P. 2013]
The wretch, concentred all in self,
Living, shall forfeit fair renown?
And doubly dying shall go down.

Questions :
(i) Who is a ‘wretch’?
(ii) Why does the poet says the powerful man will lose his reputation?
(iii) Explain the meaning of the expression ‘doubly dying’
(iv) Find the word in the stanza similar in meaning of
(a) money, (b) lose.
Answers :
(i) A ‘wretch’ is a man who does not love his native land.
(ii) The poet says this because a man without love for his native land does not deserve any power.
(iii) The expressions ‘doubly dying’ means that a man without patriotic feeling is almost dead and after his real death no one remembers him. It is another death.
(iv) (a) pelf, (b) forfeit.

II. Answer the following questions in one sentence :

Question 1.
Whose soul does the poet say is ‘dead’?
Answer :
The soul of one who has no love for his native land is ‘dead’.

Question 2.
Who does the poet ask to mark well?
Answer :
One who does not love his native land.

Question 3.
What delights the minstrel?
Answer :
The return of a patriotic person to his motherland delights the minstrel.

Question 4.
How can a person doubly die? (Imp)
Answer :
An unpatriotic man is almost dead and after his real death no one remembers him which is another death.

Question 5.
What is meant by ‘vile dust?
Answer :
“Vile dust is used in the sense that is given birth to a person without love for his native land.

III. Answer the following questions in 100 to 150 words :

Question 1.
What happens to a person who returns home from a foreign land? (M.P. 2012)
Answer :
The return of a person from a foreign land is a matter of great joy. It is his love and attraction to his native land that brings him home. He feels proud. He is confident and proudly declares that ‘this is my home, my native land all the time. He feels delight of his feeling and love for nation. People welcome him with all pride and pleasure. The minstrel entertains him with all his art and skill. He is given honour and name and fame. He becomes an ideal man. He makes his country great. He brought all laurels for his native land. Such a person becomes a role model. The nation feels proud to have such a patriotic son of the soil.

Question 2.
What does the poet mean by ‘for him so minstrel raptures swell’?
Answer :
The poet in this poem deals with the theme of patriotism. He feels that a man who loves his country is great. He is the real son of the soil. The poet hardly believes that there would be anyone who has no love for his native land. There is perhaps no one whose soul is not ecstatic at the feeling of his land. A person with such a feeling of love for nation is worthy of all our praise and honour. Whenever he returns home after wandering from foreign lands, he is welcomed warmly. But the man with no such feeling is a bad name for the nation. He does not deserve any praise or honour. No minstrel tries to praise him or honour him.

Question 3.
Write a note to justify the title of the poem.
Answer :
The poem Patriotism deals with the similar theme of patriotism. All through the poem, the poet talks about the man who has love for his native land. Such a man gets praise and position everywhere. Minstrels honour him with all pleasure. Even after his death he is remembered forever. His death becomes a national mourning. The poet also talks about the person who has no patriotic feeling for his nation. Such a man does not deserve any praise. Despite his power and position, he lives unknown and dies unnoticed. No one weeps for him. As the poem only present the aspects of patriotism, the title becomes appropriate.

Question 4.
What are the attributes of a patriot? (M.P. 2009)
Answer :
A patriot deserves all kinds of honour and affection. He is given high respect by his countrymen. If he comes back from foreign countries, he is worthy of reputation. If he comes back from foreign countries, he is warranty received by them. Minstrels praise him highly in their notes. Even after death, he is paid tribute by weeping countrymen. The people of entire nation remember his death. Poets admire him through poem. The writers praise him in their essays and volumes. He never dies unwept, unhonoured and unsung.

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MP Board Class 11th Special English Chapter 4 The Brook Important Questions and Answers

I. Read the given extracts from the poem carefully and answer the questions given below:

1. I come from haunts of coot hern;
I make a sudden sally
And sparkle out among the fern,
To bicker down a valley.

Questions :
(i) What is the birth place of the brook?
(ii) What type of poem is it?
(iii) What does the word bicker point out?
(iv) Name two water birds mentioned in the passage?
(v) How does the brook come out after its birth?
Answers :
(i) The birth place of the brook is actually the haunt of water birds like coot and hern.
(ii) It is an autobiographical poem.
(iii) The word bicker point out the noise created by the brook when it flows.
(iv) The two water birds mentioned are coot and hern.
(v) The brook gushes out in a sudden sally after its birth.

2. I chatter over stony ways,
In title sharps and trebles,
I bubble into eddying bays,
I babble on the pebbles, (Imp)

Questions :
(i) What does the word “heater points out”?
(ii) What difference do these two words ‘bubble’ and ‘babble’ point out?
(iii) Choose the word which point outs movement and one word which points out sound?
(iv) Choose an aliteration from the stanza.
(v) What figure of speech is used in the stanza.
Answers :
(i) The word ‘chatter’ points out that while passing over the stony ways it is creating heavy noise.
(ii) The word bubble points out that when the brook flows in the spiral movement of water its noise is lost. But when it strikes on the pebble it
produces a high pitched sound as if expressing its happiness.
(iii) The word which points out movement is bubble and the word which points out sound is babble.
(iv) The aliteration used in ‘bubble-bays’.
(v) In this poem brook has been personified. Brook has been indicated as a human being.

3. I slip, I slide, I gloom, I glance
Among my skimming swallows
I make the netted sunbeam dance
Against my sandy shallows. (Imp)

Questions:
(i) Which words points out its carefree nature?
(ii) What does the word ‘netted’ point out?
(iii) How is ‘I responsible for making sunbeam dance?
(iv) Explain the picturesque view of the stanza in a sentence or two.
Answers :
(i) The carefree nature is pointed out by the words: slip, slide, gloom, galnce.
(ii) The word ‘netted’ means captured.
(iii) The brook is making the rays of its sun to flicker light on its flowing water. It seems as if the sun rays are dancing on the brook.
(iv) The brook passes along the shallow by filtering along the sun rays falling on it.

4. Tilt last by Philips farm
I flow To join the brimming river.
For men may come and men may go
But I go on for ever (Imp)

Questions :
(i) What does it cross before reaching teh phillips farm?
(ii) What does the expression brimming river point out?
(iii) What paralletism does this poem have with man?
(iv) What lesson there lines teach you?
(v) Choose a word which means ‘full’.
Answers :
(i) Before reaching the philips farm it eroses the hills, ridges, towards and bridges.
(ii) The enpression brimming river point out that the river is overflowing with water as the brook brings walis in it.
(iii) The parallelism that this poem have with man is that men may go but the brook keeps on flowing for ever.
(iv) These lines teach us a lesson that we should be strong and determined.
(v) ‘Brimming is the word which means “Full’. II. Answer the following questions in two or three sentences each :

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Question 1.
Who is the ‘l’ in the poem and what does he do throughout the poem?
Answer :
The ‘I’ in the poem is the stream. He flows and flows throughout the poem and never stops.

Question 2.
Identify the places that the brook travels through. Make a list of the items.
Answer :
A list of the items :

  • thirty hills
  • twenty hamlets
  • fifty bridges
  • philip’s form
  • many fields and fallows
  • many lawns and grassy plots.

Question 3.
Where does the brook flow to an what happens in the end? (Imp)
Answer :
The brook flows to the river. Along with the river water it continues its movement on forever.

III. Explain the following:

(i) For men may come and men may go,
But I go on forever.
Answer :
Generation after generation of men come and die but the brook continues to flows forever. The movement of brook is a never-ending process. It means that men may come and go but the world goes on as ever.

(ii) I chatter over stony ways,.
In little sharps and trebles
I bubble into eddying bays
I babble on the bays.
Answer :
The brook is a small stream. It creates tremendous noise where it passes over the stony ways. When it flows in the circular movement of water its noise is reduced. But when it strikes in the pebble it produces shall sound as if expressing its happiness.

(iii) What is the poet referring to when he says:
And draw them all along, and flow
To join the brimming river.
Answer :
The poet explains the onward movement of the brook which moves on and on to join the brimming river. All over its way it crosses and meets with many foamy flakes, silver water-break, golden gravel. It takes them all with its flow and gives them too a larger meaning to their existence.

MP Board Class 11th Special English Chapter 6 Cherry Tree Important Questions and Answers

I. Read the following stanzas carefully and answer the questions that follow them :

1. Since I placed my cherry seed in the grass, (Imp)
“Must have a tree of my own, I said,
And watered it once and went to bed
And forgot.

Questions :
(i) Who is ‘I’ in these lines?
(i) What did ‘l’ do eight years ago?
(iii) Why did ‘I’ do so?
(iv) What did ‘I’ do after that?
(v) Give a word from the stanza which is opposite to ‘remembered’.
Answers :
(i) ‘I’ in these lines is the poet-the narrator.
(ii) l’ placed a cherry seed in the grass eight years ago.
(iii) ‘I’ did so thinking it to be a tree of his own.
(iv) ‘I’ watered it once and then forgot it.
(v) ‘Forgot’.

2. Goats ate the leaves, the grass cutter’s scythe
split it apart and a monsoon blight
Shrivelled the slender stem …………. Even so.

Questions :
(i) What is being talked about her in these lines?
(ii) What did the goats do to it?
(iii) What did the monsoon blight do to the tree?
(iv) How was the tree split apart?
(v) Give a word from the above stanza similar in meaning to ‘thin’.
Answers :
(i) A little cherry tree is being talked about here.
(ii) The goats ate the leaves of the tree.
(iii) The monsoon blight made its stem shrivelled and slender.
(iv) The tree was split apart by the grasscutter’s scythe.
(v) ‘slender’.

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3. Eight years have passed
Since I placed my cherry seed in the grass.
“Must have a tree of my own,’ I said,
And watered it once and went to bed
And forgot, but cherries have a way of growing,
Though no one’s caring very much or knowing.

Questions
(i). Where did the poet plant the cherry seed?
(ii) Why did he do so?
(iii) What mistake did he commit?
(iv) What does the poet mean byʻ….cherries have a way of growing?
(v) Find the antonyms the words “remembered’ and ‘little’ from the lines given above.
Answer:
(i) The poet planted the cherry seed in the grass.
(ii) He wanted to have a tree of his own.
(iii) He forgot to water the plant.
(iv) Unlike other plants which require constant care, cherries grow unattended. –
(v) remembered = forgot, little = much.

II. On the basis of the reading of the poem, answer the questions :

Question 1.
What difficulties did the cherry tree face in growing up? (Imp)
Answer :
The difficulties that the cherry tree faced in growing up were that: he it was not watered. It was suppressed by the tall, wild grass, Goats often ate up its leaves. Grasscutter scythe it and split it apart.

Question 2.
What is the miracle? How was it caused by time and rain? (Imp)
Answer :
The miracle is something that is thought to be done by some divine or super natural power. Here, time and rain caused the growth and bloom of the cherry tree despite all its difficulties.

Question 3.
What does the poet refer to in ‘five month’s child?
Answer :
The poet refers to the cherry tree as ‘five month’s child.

Question 4.
The poet says, Its arms in fresh fierce lust’. What do ‘Its arms’ stand for?
Answer :
Its are stand for the branches of the cherry tree.

Question 5.
Mention two things that the poet saw when he was trying to look at the sky through the leaves of the cheery tree.
Answer :
The two things that the poet saw when he was trying to look at the sky through the leaves of the cherry tree were.
(i) The finches which flew and flitted.

(A) What is the poet trying to say in the expression ‘cherries have a way of growing? (Imp)
Answer :
By the expression cherries have a way of growing the poet means to say that cherry is tree and hence a natural object. Nature has its own way to protect its world. So, despite all hurdles the cherry tree grows and blooms. There is no power which can stop the process of nature.

(B) What do you understand by the following expression?
Write a sentence for each expression to bring out its meaning :
1. grass running wild
2. monsoon blight
3. growing pains
4. sleepiest breeze
5. dappled green
6. blue blind sky
7. fresh fiercest lust.
Answer :
1. Grass running wild : The cherry tree is covered with grass that has grown on it.
2. Growing pains : The monsoon blight has adversely affected the growth of the plant.
3. Growing pains : I was very much depressed at the growing pains at every step.
4. Sleepiest breeze : The sleepiest breeze soothed my hurt feelings.
5. Dappled green : It was strange to see the bees drinking nectar through dappled green.
6. Blue blind sky: The blue blind sky fascinated me.
7. Fresh fierest lust : No fresh fierest lust could affect my way.

III. Objective Type Questions :

Choose the correct answer from the giving options :
(i) The poem ‘Cherry Tree’ has been composed by:
(Ruskin Bond, P.B. Shelley, William Wordsworth, None of these)

(ii) The poet compares the small cherry plant with a :
(kid, young boy, an adult person, five month child)

(iii) The poet loves the cherry tree very much and call it :
(the national tree, the international tree, the tree of his own)

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(iv)“Shrivelled the slender stem …………. Even so” is the example of:
(simple metaphor, alliteration, none of these)
Answers :
(i) Ruskin Bond.
(ii) five month child.
(iii) the tree of his own.
(iv) alliteration

MP Board Class 11th Special English Chapter 7 Mercy Tree Important Questions and Answers

I. Read the following stanzas carefully and answer the questions given below :

1. The quality of mercy is not strained; (M.P. 2009, 11)
It droppeth as the gentle rain from heaven
Upon the place beneath. It is twice blest
It blesseth him that gives, and him that takes.

Questions :
(i) What is talked about in these lines?
(ii) How does the poet qualify, mercy?
(iii) For whom is the mercy a bliss?
(iv) Give a word from the stanza similar in meaning to ‘forced’.
Answers :
(i) Mercy is talked about here in these lines.
(ii) The poet qualifies mercy as gentle rain from heaven.
(iii) Mercy is a bliss both for the giver and the taker.
(iv) Strained.

2. It is enthroned in the hearts of kings,
It is an attribute to God himself.
And earthly power then show likest God’s
When mercy season’s life……….

Questions :
(i) What does mercy do with the king?
(ii) What is mercy?
(iii) When it becomes a divine grace?
(iv) Give a word from the above stanza which is opposite in meaning to dethroned.
Answers :
(i) Mercy is enthroned in the hearts of kings.
(ii) Mercy is an attribute to God. It is unearthy power.
(iii) It becomes divine grace when combined with justice.
(iv) To enthroned.

II. Write answer of the following questions in one sentence :

Question 1.
But mercy is above this sceptred sway. Explain.
Answer :
It is above the sceptred sway because it is enthroned in the hearts of the kings.

Question 2.
Why does the poet believe that ‘earthly power then show likest God’s when mercy seasons justice…….?
Answer :
The poet tells so because it appears to be God when it administers justice.

Question 3.
His scepter shows the force of temporal power,
The attribute to awe and majesty,
(a) What is an attribute to awe and majesty?
(b) What does show the force of temporal power?
Answer :
(a) An attribute to awe and majesty is force.
(b) The scepter shows the force of temporal powers.

Question 4.
It droppeth as the gentle rain from heaven.
Upon the place beneath. It is twice blest.
It blesseth him that gives, and him that takes.
(a) What is mercy compared above lines?
(b) How is mercy twice-blessed.
Answer :
(a) Mercy is compared with the gentle rain that drops from heaven. :
(b) Mercy is double blessings. On the one hand, it is a boon for the one who gives and a blessing for the other who takes.

III. Write the answer to the following questions in two or three sentences each :

Question 1.
What is the quality of mercy?
Answer :
Mercy is a super divine power. It is not a binding obligation but self-generating thing.

Question 2.
What makes mercy twice-blessed?
Answer :
On the once hand mercy falls upon the giver as a gift of God and on the other it obliges the taker.

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Question 3.
What does quality a monarch more-mercy or throne, Why?
Answer :
It is mercy that qualifies a monarch more. A monarch, by showing mercy, can win the hearts of his subjects.

Question 4.
What does the scepter show?
Answer :
It shows the force of temporal power.

Question 5.
What is an attribute of God himself?
Answer :
It is mercy itself.

Question 6.
What happens when mercy is tempered with justice?
Answer :
When mercy is tempered with justice, it becomes divine.

IV. Write answer to the following questions in about 150 words :

Question 1.
How does mercy bless the giver and the taker alike? (Imp)
Answer :
Mercy is a human virtue. When combined with justice, it becomes divine grace. Then it transcends worldly power. One who shows mercy finds himself in a state of fulfilment. In this way Mercy blesses the giver and the taker alike.

V. Objective Type Questions :

Choose the correct answer from the giving options :
(i) The poem “Mercy’ has been composed by: [M.P. 2013]
(John Keats, William Shakespeare, P.B. Shelley, S.T. Coleridge)

(ii) The poem “Mercy’ is an extract from Shakespeares :
(The merchant of Venice, Mid Summer Nights dream, Othello, Twelfth Night)

(iii) “It dropeth as the gentle rain from heaven”. It is an example of:
(an alliteration, simple, personification)

(iv) According to the poet’s view mercy is :
(British quality, divine quality of man, rare quality, the quality of every living being)
Answers :
(i) William Shakespeare.
(ii) The merchant of Venice.
(iii) Alliteration.
(iv) Divine quality of man.

MP Board Class 11th Special English Chapter 9 To a Skylark Important Questions and Answers

I. Read the following stanzas carefully and answer the questions given below :

1. Hail to thee, blithe spirit !
Bird thou never wert
That form heaven or near it
Pourest they full heart
In profuse strains of unpremeditated art.
Higher still and higher
From the earth thou springest, like a cloud of fire,
The blue deep thou wingest,
And singing still does soar and soaring ever singest.

Questions :
(i) Who is ‘Thee’ in these lines?
(ii) What does the poet mean by ‘blithe spirit?
(iii) What does the bird do?
(iv) From where does the bird spring and where does it go?
(v) Find a word from the lines which means same as “unplanned’.
Aņswers :
(i) ‘Thee’ is the skylark (a bird).
(ii) The poet means a carefree and light-hearted bird.
(iii) The bird spring from the earth and it goes higher and higher in the sky.
(v) ‘Premeditated’.

2. Like a high-born baliin
In a palace tower,
Soothing her love-laden
Soul in secret hour
With music sweet as love, which overflows her bower
Like a glow-worm golden
In a dell of dew,
Scattering unbeholden
Its aerial hue
Among the flowers and grass which screen it from the view :

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Questions :
(i) Who does the poet compose with the bird in the first given stanza?
(ii) What does she do?
(iii) What is the effect of her music?
(iv) What is composed with in the second stanza given here?
(v) Find a word from the above stanzas which is similar in meaning to ‘invisible’.
Answers :
(i) The bird is compared with a high-born maiden.
(ii) She soothes her love-laden soul.
(iii) Her music overflows her power.
(iv) Here, the bird is compared with glow worm.
(v) ‘Unbeholden’.

3. Teach us, sprite or bird,
What sweet thoughts are thine :
I have never heard
Praise of love or wine
That panted forth a flood of rapture so divine.
Chorus hymeneal,
Or trimumphal chant,
Match’d with thine would be all
But an empty vaunt
A thing wherein we feel there is some hidden want.

Questions :
(i) What does the poet ask the bird to teach him?
(ii) What has the poet never heard?
(iii) What is chorus?
(iv) What does the poet guess in the bird’s song?
(v) Give a word from the above stanzas which is similar in meaning to victory’.
Answers :
(i) The poet asks the bird to teach him the secret of its song.
(ii) The poet has never heard a song as sweet and divine as that of the bird.
(iii) Chorus is givup song.
(iv) The poet guesses that there is some hidden want in the bird’s song.
(v) triumphal’.

4. We look before and after, (M.P. 2010) (Imp)
And pine for what is not
Our sincerest laughter With some pain is fraught;
Our sweetest songs are those that tell of saddest thought.

Questions :
(i) What human weakness that the poet finds in these lines?
(ii) What does the poet mean by ‘sincerest laughter’?
(iii) What are our sweetest songs?
(iv) Give the opposite word from the above stanza for “enjoy’.
Answers :
(i) The poet finds that human being looks before and after and feels sad for what is not.
(ii) By “sincerest laughter’ the poet means extreme happiness.
(iii) Our sweetest songs are those that express our saddest thought.
(iv) ‘pine’.

II. Answer the following questions briefly :

Question 1.
Why is Shelley not able to define the Skylark? How does the Skylark exceed the capacity of human language to describe its qualities or the qualities of its song? (M.P. 2015, Imp)
Answer :
Shelley finds himself unable to define the Skylark exactly. It is because the Skylark is not seen. It is carefree and cheerful bird without any physical frame. Its spontaneous overflow of song creates mysteries in the mind of the poet. Its song pervades the entire universe. Unlike human being it is never sad. In this sense it surpasses us.

Question 2.
Why does the poet use the similes in place of direct definition? Do they adequately describe the Skylark?
Answer :
In place of direct definition the poet uses the similes like ‘blithe spirit’, ‘unbodied joy’, These similes exactly suit the skylark. It is because it sings spontaneously. It is above all the cares and fears. It is hardly visible, Still is soothes the whole $ world.

Question 3.
What prevents the poet from singing like the Skylark? Why is the Skylark’s song is better than even the best productions of human genius, language
and emotion?
Answer :
The poet feels that he cannot sing like Skylark because being a human, he is full of vices like hate, pride and fear which prevent him to compete with Skylark. It is human nature that we look to the past and future feel sad for what we have not. The bird is above all these feelings.

Question 4.
Why does poet call the Skylark’s song “unpremeditated art”?
Answer :
The poet calls the Skylark’s song “unpremeditated art” because it flows spontaneously with varying mood. It has a tremendous kind of joy and freedom, which is not possible with a preplanned art.

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Question 5.
Why does the poet compare the Skylark’s flight to an unbodied joy?
Answer :
The Skylark’s melodious note resounds and echo in the whole earth and air. But the bird is not visible anywhere as it flies higher and higher, Still its presence is felt somewhere nearby. So, the poet calls its flight as an ‘unbodied joy’.

Question 6.
Why does the poet compare the loud voice of the bird with rain? Why is the Skylark’s song called “rain of melody”?
Answer :
As the musical notes of the bird seem to be falling direct from heaven spontaneously and soar in the whole atmosphere so the poet feels it is like rain. The melody of Skylark pours joy and natural freedom. There is no shadow of sadness near it. So, the poet calls it ‘rain of melody’.

Question 7.
What does the poet ask the bird to teach him?
Answer :
The poet asks the bird to teach at least half of the gladness that the bird’s brain possesses. The poet has a wish to immortalize the bird’s song and make the world feel the joy that the bird pours as the poet imagines and enjoys.

Question 8.
What does the poet lament about the mortals? (Imp)
Answer :
The poet in no way feels human beings to be near the greatness of the bird. It is because we have become a prey to vices like hate pride and fear. We look forward and backward and feel sad for what we have not. The bird is free from all these vices and it is grater than us.

III. Objective Type Questions :

Choose the correct answer from the giving options :

(i) Waking or asleep
Thou of death must deem
things more true and deep
than we martals dream.

Name of the poem from which these lines have been taken.
(To a Skylark, The brook, Patriotism)
Answers :
(i) “The critic’ is the frog.
(ii) He had said that the nightingale’s song was not so bad but it was unduly long. He had further said that the nightingale’s rendering was fine, but her song lacked force.
(iii) The nightingale was greatly flattered and impressed by his criticism.
(iv) She is submissive and perhaps brainless also.

3. And the ticket office gross
Crashed and she grew more morose
For her ears were now addicted
To applause quite unrestricted,
And to sing into the night
All alone gave no delight

Questions :
(i) Why had the ticket office collection fallen?
(ii) How did it affect the nightingale?
(iii) Who else was affected by it? And why?
(iv) Why was the nightingale no longer delighted to sing?
Answers :
(i) The ticket office collection had fallen because fewer audience would coine now to hear her song.
(ii) The nightingale grew miserable.
(iii) The frog was affected by it because the ticket office collection would go into his pocket.
(iv) The nightingale now used to sing to a large audiene. So, she was no longer delighted to sing alone.

III. Objective Type Questions :

Choose the correct answer from the giving options.
(i) The poem “The frog and Nightigale” has been composed by:
(Mary Howrin, Andrew Barlon, Ben Johnson, Vikram Seth)

(ii) There lived a frog that croaked under a :
(Sumac tree, coconut tree, banyan tree, oak tree)

(iii) The frog croaked under á sumac tree :
(throughout the day, throughout the night, throughout the summer, throu ghout the winter)

(iv) The next night when the nightingale got ready to sing, she was started by:
(loud noise, loud thundering sound, sudden flash, croaking of a frog)
Answers :
(i) Vikram Seth.
(ii) Sumac tree.
(iii) throughout the night.
(iv) croaking of a frog.

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MP Board Class 11th Special English Chapter 13 Peace Important Questions and Answers

I. Read the following stanzas carefully and answer the questions given below :

1. Behold, it comes in might,
The power that is not power,
The light that is in darkness,
The shade in dazzling light,
It is joy that never spoke,
And grief unfelt, profound.

Questions :
(i) What is ‘it’ in the above lines?
(ii) How does “it’ come?
(iii) What sort of power is it?
(iv) Where does this light appcar?
(v) What sort of joy is it?
Answers :
(i) ‘It’ stands for the ultimate need of life.
(ii) ‘It’ comes in might.
(iii) It is the power that is really not a power.
(iv) This light appears in darkness.
(v) It is the joy that is never spoken.

2. It is sweet rest in music.
And pause in sacred art.
The silence between speaking,
Between two fits of passion
It is the calm of heart.

Questions :
(i) What type of rest is ‘it’?
(ii) What does the second line in the above stanza signify?
(iii) Explain the meaning of the third line.
(iv) Give the opposite word from the stanza for ‘start.
Answers :
(i) ‘It’ is the sweet rest.
(ii) The second line signifies that it is the pause in the sacred art that heightens its beauty.
(iii) It means that the silence in the midst of speaking is rejuvenation of strength.
(iv) Pause’.

3. To it the tear-drop goes,
To spread the smiling form
It is the smiling form
It is the Goal of Life,
And Peace-its only home!

Questions :
(i) What happens to tear-drop?
(ii) What does ‘it’ do to tear-drop?
(iii) What is its form?
(iv) What do you mean by ‘goal of life’?
Answers :
(i) ‘It’ absorbs the tear-drops.
(ii) ‘It spreads the tear-drops in the smiling form.
(iii) Its form is smiling.
(iv) It means the ultimate aim of one’s life.

II. Answer the following questions :

Question 1.
“Behold, it comes in might ……….’ in this line, what is implied by ‘it?
Answer :
‘It’ implies the ‘eternal peace’.

Question 2.
What does the poet mean by ‘eternal death unmourned”?
Answer :
By this expression, the poet means the death which hasn’t been mourned for it being for salvation and eternity.

Question 3.
Explain the following lines :
It is sweet rest in music
And pause in sacred art;
Answer :
Here the poet signifies peace in the sense that it is a rest for rejuvenation during music and pause during a sacred art. Such rest gives a new gain of energy.

III. Answer the following questions in one sentence :

Question 1.
What is the ‘Goal of life?
Answer :
The ‘Goal of life’ is salvation.

Question 2.
Where does the spirit return to?
Answer :
The spirit return to eternity.

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Question 3.
What sort of joy and sorrow does the poet refer to?
Answer :
The poet refers to the joy never spoken and sorrow never felt.

Question 4.
What is it that joins might and the next day?
Answer :
Peace joins might and the next day.

Question 5.
What element is present in silence admist two fits of passion?
Answer :
Eternal peace is present in silence admist two fits of passion.

Question 6.
Give the central idea of poem.
Answer :
The central idea of poem is to attain real eternal salvation and peace of inind. Spirit is immortal.

IV. Answer the following questions in about 150 words :

Question 1.
Why does the poet say that it is ‘death between two lives’? (M.P. 2010, 11, 12)
Answer :
The poet is highly philosophical in this poem. Here he highlights the ultimate peace of life. As the all-pervading force, it maintains the harmony needed to energies the human spirit. It is a state of our existence that inspires us to rise above worldly limitations and appreciates real power, joy, beauty and knowledge. The poet believes in the life after death, i.e., the life or eternity of spirit. He says that peace is there, i.e., death which can be said to be just an internal or pause which one takes to rejuvenate one’s strength and vigour. It is the element which one to begin a new life with more enthusiasm. It is a divine bliss.

Question 2.
Write the summary of the poem “Peace’. (M.P. 2013, 15)
Answer :
‘Peace’, by Swami Vivekananda, is a spiritual poem, signifying the ultimate need of life. The poem starts as invocation to attend the real self for solving the worldly problems. It refers to the inner self, or the spirit. By pointing to the everlasting quality of the human spirit, the poet has tried to speak for coming to terms with one’s own self. Living through the outer world, the uneasy mind is forced to take sides. It is, therefore, necessary to find harmony whereby confrontation is avoided. For this the need to realize one’s true bearing is important. In fact, ‘it’ foregrounds the meaning of the poem, which calls for responding to all-encompassing inner self.

MP Board Class 11th Special English Chapter 16 The Captive Air of Chandipur Important Questions and Answers

I. Read the following stanzas carefully and answer the questions given below :

1. Or of smells paralysed through the centuries, of deltas hard and white that stretched once.
to lure the feet of women bidding their men goodbye?
Or of salt and light that dark and provocative eyes
demanded, their shoulders drooping like lotuses in the noondays sun?

Questions :
(i) What is stretched along the sea beach?
(ii) What does it do?
(iii) Why do women come there?
(iv) What is compared with ‘lotuses in the noonday sun?
(v) What is the meaning of ‘drooping’?
Answer:
(i) White sandy land is stretched along the sea beach.
(ii) It lures the feet of women.
(iii) Women come there to bid their men goodbye.
(iv) The drooping shoulders of the men is compared with ‘lotuses in the noonday sun’.
(v) ‘Weak.

2. The ground seems only a memory now, a turn breath (M.P. 2009)
and as we wait for the tide to flood the mudflats
the song that reaches our ears is just our own
The cries of fishermen come drifting through the spray.
music of what the world has lost.

Questions :
(i) What does the ground seem to be?
(ii) Why do we wait?
(iii) What is the song that reaches our ears?
(iv) What does drift through the spray?
(v) Explain the last line.
Answer :
(i) The ground seems to be only a memory of a tom breath.
(ii) We wait for the tide.
(iii) It is the song just our own that echo in our ears.
(iv) The cries of fishermen drift through the spray.
(v) It is the music of the world that is lost in the tide.

II. Read the following lines from the poem and write answers to the questions given below :

Question 1.
Who can tell of the songs of this sea that go on to baffle and double the space around our lives?
(a) What does the poet mean by ‘to baffle’?
(b) What is implied by the songs of sea’?
Answer :
(a) Sea appears to be a mystery. It often confuses us. The poet means that sea which is calm works violently and takes lives of fishermen silently.
(b) ‘The song of sea’ is the tale of struggle of the fishermen and nature people of Chandipur are destined to die. Still they struggle.

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Question 2.
Of deltas hard and white that stretched once to lure the feet of women bidding their men goodbye?
(a) Why did the destas lure the feet of women?
(b) Why did the women bid goodbye to men?
Answer :
(a) Delta is the stretch of land piece from where the river meets the sea. Here delta is said to lure the women with new hopes for life.
(b) Because they know the fate of their men which make them bid goodbye to them.

III. Answer the following questions in a few sentences :

Question 1.
What is meant by ‘the ridicule of the dead’? (Imp)
Answer :
“The ridicule of the dead’ signifies that the men think themselves to be warrior and powerful but they can’t beat nature. Sea is almighty. It destroys the lives of fishermen. Hence, this lines mocks men’s might.

Question 2.
Who is the ‘occupant of the silent sigh of the conch’?
Answer :
Fishermen of Chandipur are the occupants of the silent sigh of the conch. They are destined to lose their lives in their struggle against the tide.

Question 3.
Why does the poet call the sea at Chandipur drunk?
Answer :
The sea at Chandipur is called so because it is violent and shows no mercy to the fishermen to struggle against it. The sea overpowers the whole region.

Question 4.
How do ‘songs of sea’ double the space around our lines?
Answer :
The sea is the killer for the fishermen of Chandipur. The fishermen knew the truth and lost their life. Still they fought. The songs of sea gives them courage and remain them of the brave struggle of their forefathers.

Question 5.
Why does the poet says that the ground is only a memory now? (Imp)
Answer :
The poet says that the ground is only a memory now because lives have been lost. The fishermen who went on their struggle did not return. They have been killed.

Question 6.
What has the world lost?
Answer :
The world has lost the lives of the fishermen who had gone on the search of their livelihood. The tide swallowed them. The violent cruel sea showed no mercy to them.

IV. Answer the following questions in about 150 words each :

Question 1.
Why does the poet say that the song that reaches our ears is our own’? (Imp)
Answer :
The Captive Air of Chandipur-on-Sea’ is a poem that relives the tale of struggle between Man and Nature in the background of the seascape at Chandipur. It recounts the nostalgia about he lost labour and efforts of our predecessors in the conquest of Nature. The poet with all realistic touches explains how the sea waves wash away the lives of people Įiving at Chandipur. The tide swallows them while they are on the search for their livelihood. They know their fate. Their forefathers had lost their lives while trying to conquer the sea. Nature is all powerful. No one can win over it. Hence they are ready to face whatever comes to them. Still they celebrate their living. They wait for their fate. They sing songs of their misery and this echoes in their ears.

Question 2.
What does the poet glorify in the poem, Why? [M.P. 2013]
Answer :
This poem is all about the struggle between man and nature. People of Chandipur are all set to meet their fateful end in the sea. They meet their end in the waves of sea. The tide engulf them. Still they struggle for their life. They go in the sea in search of their food. Sea is the main source of their life. They know what the sea has in its. It is their fate. So, they don’t mourn. They forget all their woes and miseries. They know how their predecessors lost their lives. Still women come forward to bid goodbye to their men. This is the truth and reality of life. Life comes and goes but nature never ceases to work. This is the theme of this poem.

V. Objective Type Questions :

Choose the correct answer from the giving options : (Imp)
(i) The poet describe the sea at ………… (M.P. 2009)
(Puri, Cochin, Chandipur, Paradip)

(ii) The sea spilts out the wings of ………….
(birds, shells, planes, none of the them)

(iii) What do the said whisper?
(legends, warnings, praises, all of them)

(iv) The tide floods the …………..
(village, river, mudflash, none of above)
Answers :
(i) Chandipure.
(ii) planes.
(iii) legends
(iv) mudflash.

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MP Board Class 11th Special English Chapter 18 King Porus – A Legend of Old Important Questions and Answers

I. Read the following stanzas carefully and answer the questions given below :
1. Loudly the midnight tempest sang.
Ah! it was thy dirge, fair Liberty!
And clouds in thundering accents roar’d
Unheeded warning from on high;
The train in darksome torrents fell,
Hydaspes’ waves did onwards sweep,
Like fiery passio’s heandlong flow.
To meet th’ awaken’d calling deep.

Questions :
(i) Name the poem and the poet.
(ii) What is talked about in these lines?
(iii) What was the thundring accent?
(iv) What happened at the midnight hour?
(v) What is the meaning of ‘tempest??
Answers :
(i) The poem is King Porus-A legend of Old and the poet is Michael Madhusudan Datta.
(ii) The great battle between Alexander. The Great King Porus is talked about in these lines.
(iii) The thundering accent was the roaring sound of the battle.
(iv) The army of Alexander attacked on the kingdom of India, ruled by the Porus at the midnight hour.
(v) tempest-storing.

2. Like to a lion chain’d [M.P. 2015]
That tho’ faint-bleeding-stands in pride
With eyes, where unsubdued
Yet flash’d the fire-looks that defied;
King Porus boldly went
Where ‘midst the gay and flittering crowd’
Sat god-like Alexander;

Questions :
(i) Who is compared with a lion chained here?
(ii) How was he looking?
(iii) How did he march on?
(iv) What does the expression ‘god-like’ signify?
(v) Giye a word opposite in meaning to ‘cowardly’.
Answers :
(i) King Porus is compared with a lion chained here.
(ii) He was confident and fearless.
(iii) He marched on boldly.
(iv) It signifies the supreme authority.
(v) boldly’.

II. Write answer to the following questions in three or four sentences :

Question 1.
How does the poet describe the heroic King Porus in the battle-field?
Answer :
The heroic King Porus was like a lion. He was full of triumphant feeling. He was fiery and brave in his fight.

Question 2.
What did Alexander do when he saw Porus fighting on with his gaping wounds?
Answer :
Alexander was really great. When he saw gaping a winds of King. Porus bleeding, he cried, “Desist-desist ! such noble blood should not be shen

Question 3.
Porus is compared to a chained lion as he walks to the Macedonian King. What qualities of Porus is the poet trying to highlight?
Answer :
The poet is living to highlight Porus courage and confidence. He fought with all his power to save his kinguom. His personality overpower all. He was the real king.

Question 4.
Why does the poet says “Thus India’s crown was lost and won’? Explain.
Answer :
The poet glorifies India’s winning culture. Indian army faced the enemy with all bravery without caring their own self. However they were defeated. But the confidence of King Porus made Alexander realise that he was not a coward. Alexander at last recognized his bravery honoured king Porus and returned his kingdom with all praise.

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Question 5.
What quality of Alexander is also inherent in his act of forgiveness?
Answer :
Alexander’s act of forgiveness proves that he was a man of great soul. He himself was brave and knew how to honour bravery. He was a considerate person. He realized King Porus’ greatness.

MP Board Class 11th Special English Important Questions

MP Board Class 11th Samanya Hindi निबंध लेखन Important Questions

MP Board Class 11th Samanya Hindi निबंध लेखन Important Questions

1. समाचार-पत्र (Imp.)
या
समाचार-पत्रों का महत्व
(म. प्र. 1997, 12, 13, 15)

सुबह बिस्तर छोड़ते ही आज का नागरिक एक कप चाय और समाचार-पत्र की माँग करता है। वह चाय की चुस्की लेकर शारीरिक स्फूर्ति का अनुभव करता है तथा समाचार-पत्रों के पृष्ठों पर आँखें दौड़ाकर देश-काल की घटनाओं, विचारों से वाकिफ होकर मानसिक रूप से वह अपने आपको तरोताजा अनुभव करता है। इस तरह समाचार-पत्र आज की दुनिया में एक निहायत जरूरी चीज बन गया है। .. समाचार-पत्र में अंग्रेजी न्यूज (NEWS) के N,E,W,S-N for North, E for East, W for West, S for South ये चार अक्षर जुड़े हैं जो क्रमशः उत्तर, पूर्व, पश्चिम तथा दक्षिण के प्रतीक हैं, अर्थात् समाचार-पत्र वह है जिसमें चारों दिशाओं के समाचार होते हैं।

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समाचार-पत्र का जन्म इटली के वेनिस नगर में 13वीं शताब्दी में हुआ। इससे पूर्व लोगों में समाचार-पत्र की परिकल्पना भी नहीं थी। 17वीं सदी में धीरे-धीरे अपनी उपयोगिता के कारण समाचार-पत्र इंग्लैण्ड पहुँचा, फिर धीरे-धीरे सारे संसार में फैला।

भारत में सर्वप्रथम कलकत्ता (कोलकाता) में इसका जन्म और विकास हुआ! 19 जनवरी 178) को ‘बंगाल गजट’ का कैलकटा जनरल एडवरटाइजर’ के प्रकाशन के साथ ही भारतीय पत्रकारिता का जन्म हुआ। 1857 से पूर्व ‘उदन्त मार्तण्ड’, ‘बंगदूत’, ‘प्रजामित्र’ आदि हिन्दी समाचार-पत्रों का प्रकाशन हो चुका था। धीरे धीरे वैज्ञानिक आविष्कार बढ़ते गये, मुद्रण यन्त्रों के विकास के साथ ही समाचार-पत्रों का विकास होता गया।

समाचार-पत्रों के महत्त्व का बखान जितना किया जाये उतना कम होगा। आधुनिक युग की प्रभावपूर्ण उपलब्धियों में समाचार-पत्र एक है। सामाजिक चेतना एवं समाज के उन्नयन में समाचार-पत्रों की भूमिका उल्लेखनीय है। सांस्कृतिक चेतना जगाने, छात्रों के सामान्य ज्ञान को बढ़ाने में भी समाचार-पत्र उल्लेखनीय भूमिका अदा करते हैं।

राजनीतिज्ञों के लिए, राजनीतिक प्रौढ़ता बढ़ाने के लिए एवं लोगों में साहित्यिक चेतना जगाने की दृष्टि से भी समाचार-पत्र महत्त्वपूर्ण हैं। व्यापारियों के लिए तो यह आवश्यक चीज बन गया है। यह युग विज्ञापन का युग है, प्रचार का युग है और समाचार-पत्र प्रचार का सरल एवं सस्ता माध्यम है।

वैयक्तिक दृष्टि से भी विज्ञापनों का कम महत्त्व नहीं है। नौकरी का विज्ञापन, वर-वधु विज्ञापन, शुभकामनाएँ, आभार प्रदर्शन, निमन्त्रण आदि का काम समाचार-पत्र करता है।

समाचार-पत्र तो प्रजातन्त्र की रीढ़ कहे जाते हैं। जनमत बनाने का काम यही करते हैं। वैचारिक स्वतन्त्रता को प्रश्रय समाचार-पत्र ही देते हैं। इस तरह समाचार-पत्र आज के संसार में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान बना चुके

अच्छे समाचार-पत्रों के गुण-अच्छे समाचार-पत्र निष्पक्ष रहते हैं तथा स्वस्थ पत्रकारिता पर आधारित होते हैं। वे जनता एवं सरकार को सही दिशा और सलाह देते हैं। वे किसी के हाथ बिके नहीं होते। वे समाज हित और राष्ट्र हित को ध्यान में रखकर ही समाचार छापते हैं। वे पीत पत्रकारिता से बचते हैं। वे चरित्रहनन वाली पत्रकारिता से बचते हैं।

उपसंहार-समाचार-पत्र मात्र घटनाओं का विवरण नहीं है, समीक्षण और चिन्तन भी है। वे लोकमत को प्रभावित करते हैं। अतएव समाचार-पत्रों को हमेशा लोकहित की भावना से काम करना चाहिये। विश्वसनीय समाचार देने चाहिये तथा उत्तेजक समाचार से बचना चाहिये। समाचार-पत्रों को सदैव देश-हित एवं लोक-हित की भावना से काम करना चाहिये।

2. राष्ट्र निर्माण में छात्रों का योगदान
(म. प्र. 2011, 15)

रूपरेखा-

  1. भूमिका,
  2. आधुनिक भारत में नव-निर्माण की विभिन्न दशाएँ और उनमें विद्यार्थियों का योग,
  3. उनका विवेकपूर्ण सहयोग,
  4. सहयोग से लाभ,
  5. उपसंहार।

सैकड़ों वर्षों की परतन्त्रता के बाद हमारा देश स्वतन्त्र हुआ। पराधीनता की स्थिति में भारतवासियों को स्वेच्छापूर्वक अपनी उन्नति करने का अवसर प्राप्त नहीं था। विदेशी सरकार के दबाव के कारण भारतीय अपनी योजना के अनुसार कार्य नहीं कर पाते थे। देश में प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप में सरकार का दबाव अवश्य बना रहता था। उस समय विद्यार्थियों का योग केवल उत्कृष्ट अधिकारी बनकर शासन को दृढ़ बनाये रखना था। आज की बदलती हुई परिस्थितियों में किसी भी देश का भविष्य उस देश के विद्यार्थियों के ऊपर निर्भर है। विद्यार्थी वर्ग ही एक ऐसा वर्ग है जो हर क्षेत्र में पहुँच सकता है। भारत का नव-निर्माण विद्यार्थियों के उचित और पूर्ण सहयोग के बिना सफलतापूर्वक पूर्ण नहीं हो सकता। इस देश के नव-निर्माण में विद्यार्थियों का योगदान आवश्यक है।

मानव अपनी आवश्यक सुविधाएँ प्राप्त करने के लिए उसी की खोज में लगा रहता है। वर्तमान समय वैज्ञानिक तथा पूँजीवादी युग के नाम से जाना जाता है। भारत में वैज्ञानिक तथा आर्थिक उन्नति अत्यन्त आवश्यक है। भारत में प्राकृतिक साधन तो प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, पर वैज्ञानिक दोनों ही क्षेत्रों में पिछड़े हुए हैं। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद देश में नव-निर्माण का कार्य आरम्भ हो गया है। पर इसकी अन्तिम सफलता विद्यार्थी वर्ग पर निर्भर करती है, विद्यार्थी को पूरी लगन व श्रद्धा के साथ देश के नव-निर्माण का कार्य करना होगा, तभी देश उन्नति की ओर अग्रसर होगा। वर्तमान समय में कारखानों का निर्माण हो रहा है। विद्युत् शक्ति का उत्पादन हो रहा है। कृषि, व्यवसाय, यातायात तथा वैज्ञानिक अनुसन्धान स्थापित करने के लिए अनेक योजनाएँ बनायी जा रही हैं, पर इन सबके बाद इसकी अन्तिम सफलता विद्यार्थी वर्ग पर ही निर्भर है।

सामाजिक तथा धार्मिक क्षेत्र में भी परिवर्तन के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। समाज में कुछ दुर्गुण हैं। उन्हें दूर करना अत्यन्त आवश्यक है, जिससे समाज के ढाँचे को बिगड़ने से बचाया जा सके। कोई भी सुधार अन्धानुकरण के आधार पर नहीं होना चाहिए। सुधारों के भावी परिणामों को दृष्टि में रखकर बढ़ना आवश्यक है। भारतीय धर्म तथा संस्कृति की मूल विशेषताओं को ध्यान में रखकर उपयोगी सुधार होना चाहिए। इन सभी का अन्तिम परिणाम तो विद्यार्थी वर्ग को पूर्णतया भोगना पड़ेगा। अत: उन्हें बुद्धि से कार्य करना चाहिए। विद्यार्थी वर्ग ही सामाजिक तथा धार्मिक क्षेत्र में क्रान्ति ला सकते हैं।

संसार की राजनैतिक मान्यताएँ बदल रही हैं। प्रजातान्त्रिक भावना का विकास हो रहा है। व्यक्तिवादी दृष्टिकोण बदलता जा रहा है। एक पक्ष साम्यवादी विचारधारा का है, जिसमें व्यक्ति नहीं राष्ट्र सर्वोपरि है। सारा विश्व इन्हीं विचारधाराओं से प्रभावित है। आज सबसे बड़ी समस्या यह है कि आज का विद्यार्थी और कल का नागरिक अपने देश की परिस्थितियों के अनुकूल राजनैतिक विचारों को अपनाये। उसका दृष्टिकोण समन्वयवादी होना चाहिए, जिसमें किसी विचारधारा का बहिष्कार केवल इसलिए न हो कि वह पुरानी है अथवा किसी विचारधारा को केवल इसलिए न स्वीकार किया जाय कि वह नई है।

संसार की राजनीति इतनी तीव्रता से गतिशील है कि यह निर्णय करना कठिन हो जाता है कि कौन-सी बात सही है, इस उलझन की स्थिति से निकलने के लिए विवेकपूर्ण निर्णय की आवश्यकता है। आज विद्यार्थी पर बड़ा उत्तरदायित्व है कि वह अपने विवेक से सही व गलत का निर्णय करे और देश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयत्नशील हो। भारत एक ऐसा देश है जहाँ जनसंख्या का बड़ा भाग गाँव में रहता है। गाँव के विकास के बिना भारत के विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती। आज के नवयुवक पर सबसे बड़ा उत्तरदायित्व गाँवों के विकास का है।

इसके लिए उन्हें शहर के विलासितापूर्ण जीवन को छोड़कर ग्रामीण अंचल में जाना होगा, उनको आधुनिक विचारधारा एवं सहकारिता की भावना का प्रचार करना होगा। हमारे गाँवों को अन्धविश्वास और अवैज्ञानिक दृष्टिकोण से मुक्त करना होगा। उन्हें प्रगतिशील बनाना होगा।

आज के विद्यार्थियों की पीढ़ी के हाथों में कल के देश की बागडोर आने वाली है, उन्हीं में से राजनीतिक नेता होंगे, अधिकारी होंगे, उद्योगपति होंगे और किसान, मजदूर भी होंगे। देश उनसे यह अपेक्षा करता है कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में वे नये उत्साह और नई विचारधारा के साथ प्रवेश करेंगे। देश को नई दिशा प्रदान करेंगे। सरकार ने देश के नवनिर्माण के लिए अनेक योजनाएँ बनाई हैं, उन कागजी योजनाओं का मूल्य नहीं यदि उनको पूरा जन-सहयोग न मिले। गाँवों की पिछड़ी जनता से अधिक आशाएँ नहीं की जा सकती। इन योजनाओं की सफलता के लिए देश की निगाहें विद्यार्थियों पर टिक जाती हैं। विद्यार्थी वर्ग यदि विद्यार्जन के साथ-ही-साथ देश की प्रगति की दिशा में नहीं सोचता तो यह उसका अनुत्तरदायित्वपूर्ण कार्य ही कहा जायेगा।

3. साहित्य और समाज (साहित्य का महत्व)
(म. प्र. 2009, 15)

“अन्धकार है, वहाँ जहाँ आदित्य नहीं है।
मुर्दा है वह देश, जहाँ साहित्य नहीं है।”

वस्तुत: साहित्य राष्ट्र की, समाज की जीवनशक्ति की पहचान होता है। साहित्य के बिना राष्ट्र और समाज अज्ञानता के अन्धकार में मुर्दा बनकर जीवित रहते हैं।

साहित्य क्या है? इस पर विचार करें तो ज्ञात होता है कि साहित्य रमणीय शब्द-अर्थों से गुम्फित ‘भावों की माला’ है, जिसमें सत्यम्, शिवम् और सुन्दरम् तीनों का समन्वय होता है। आचार्य जगन्नाथ ने साहित्य को परिभाषित करते हुए लिखा है— रमणीयार्थ प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्’, अर्थात् रमणीय अर्थ के प्रतिपादक शब्द एवं अर्थों के साहित्य को ‘साहित्य’ कहते हैं।

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आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के अनुसार साहित्य समाज का दर्पण है। समाज का सृजन करता है। इस प्रकार साहित्य समाज की विभिन्न प्रवृत्तियों की विवेचना करता है। उन्हें सुरक्षित रखता है। समाज से परे साहित्य और साहित्यकार का अस्तित्व नहीं होता। अतः समाज और साहित्य एक दूसरे के पूरक हैं।

“ज्ञान राशि के संचित कोष का नाम साहित्य है।” अर्थात् साहित्य में ज्ञान-विज्ञान संचित रहता है। इसका सेवन कर मनुष्य महान् बनता है। भर्तृहरि के अनुसार—“यदि मनुष्य साहित्य, संगीत और कला से रहित हो तो वह बिना पूंछ और सींग के पशु है। ”

समाज की घटनाओं के आधार पर साहित्य का निर्माण होता है-साहित्यकार कल्पना का मिश्रण कर समाज का मार्ग-दर्शन करता है। शिवि, दधीचि, हरिशचन्द्र, रूसो, गाँधी के जीवन से संबंधित घटनाएँ ऐसा ही आदर्श समाज के समक्ष प्रस्तुत करती हैं। उससे समाज के मस्तिष्क में चिन्तन की दिशा में मोड़ उत्पन्न हो जाता है। समाज की त्रुटियों का निराकरण होता है। समाज के दुर्गुण नष्ट हो जाते हैं। सद्गुणों का विकास होता है। इस प्रकार साहित्य समाज सुधार का साधन बनता है।

साहित्य और समाज में बड़ा घनिष्ठ सम्बन्ध है- साहित्य समाज का दर्पण कहलाता है और साहित्य की रचना साहित्यकार समाज में रहकर ही करता है। वह समाज में जो कुछ देखता है तथा महसूस करता है, उसी को साहित्य में वाणी देता हैं। किसी समाज के बारे में जानना हो, उसकी सभ्यता व संस्कृति से परिचित होना हो तो आपको उस समाज के साहित्य से परिचित होना होगा, उसके साहित्य रूपी आइने में झांकना होगा।

समाज अपने अनुरूप साहित्य को बदलता है तो साहित्य समाज को बदलने का प्रयास करता है। साहित्य मनुष्य को गतिशीलता प्रदान करता है। वह अंधविश्वासों, रूढ़ियों एवं सड़ी-गली मानसिकता को दूर कर समाज को नयी रोशनी प्रदान करता है। यदि फ्रांस में रूसो का, रूस में मार्क्स का और भारत में गाँधी, तिलक,प्रेमचन्द आदि का साहित्य नहीं होता तो इन देशों में क्रान्तियाँ नहीं हुई होती और सम्भवतः इनका हाल बद्तर होता।

साहित्य और समाज में घना सम्बन्ध है-यह तथ्य सूचित करता है कि साहित्य समाज के लिए तो महत्वपूर्ण है ही व्यक्ति, राष्ट्र सबके लिए महत्वपूर्ण है। साहित्य राष्ट्र की या जाति की पहचान है। वाल्मीकि, कालिदापा, सूर, तुलसी, प्रसाद, निराला आदि की रचनाओं ने विश्व में भारत का सिर ऊँचा किया है तथा उसे एक विशिष्ट पहचान दी है।

साहित्य मस्तिष्क का भोजन है-अपने मस्तिष्क को तरोताजा रखने के लिए साहित्य का अध्ययन बहुत आवश्यक है। माना कि यह विज्ञान का युग है, किन्तु विज्ञान मनुष्य को शक्तिशाली बनाकर बाघ से भी भयंकर बना सकता है किन्तु प्रेम, दया, सेवा, उपकार जैसे मानवीय गुणों का संचार साहित्य ही कर सकता है, जिसके सामने सारी भौतिक समृद्धि तुच्छ है, इसलिए पाश्चात्य विद्वान कार्लाईल ने साहित्य की सर्वोपरि महत्ता को स्वीकार करते हुए लिखा है-“ मैं ब्रिटिश साम्राज्य छोड़ सकता हूँ, पर शेक्सपियर की रचना को नहीं छोड़ सकता।” यह है साहित्य की महत्ता। आज यूनानी साम्राज्य कहाँ है,पर यूनानी महाकवि होमर की वाणी आज भी विद्यमान है। प्लेटो और अरस्तू के साहित्य आज भी लोगों को प्रेरणा दे रहे हैं।

वस्तुतः साहित्य बहुत ही महत्वपूर्ण वस्तु है। अच्छे साहित्य के बिना समाज अधूरा है। अतः समाज को चाहिए कि वह अच्छे साहित्य एवं साहित्यकारों को सम्मान दे, प्रेरित करे। आजकल गन्दे किस्म के साहित्य बहुत पढ़े जाने लगे हैं। जासूसी उपन्यास तथा गन्दे साहित्य समाज के मस्तिष्क को विकृत बना रहे हैं, इनसे सावधान रहना तथा स्वस्थ साहित्य का निर्माण एवं अध्ययन करना हम सबका कर्त्तव्य होना चाहिए।

4. कम्प्यूटर आज की आवश्यकता
(म. प्र. 2009, 13)

प्रस्तावना-विज्ञान के क्षेत्र में कम्प्यूटर अपने प्रभाव की वृद्धि कर रहा है। आज इसकी उपयोगिता भी बढ़ रही है। आज देश के अनेक क्षेत्रों में, जैसे-बैंक, उद्योग, अन्य प्रतिष्ठानों में इसका प्रयोग होने लगा है।

कम्प्यूटर का महत्व-वस्तुतः कम्प्यूटर एक यांत्रिक मस्तिष्क का रूपात्मक योग है। यह एक ऐसा गुणात्मक घनत्व है जो शीघ्र गति से, कम से कम समय में त्रुटिहीन गणना करता है। मनुष्य सदा से गणितीय हल करने में अपने मस्तिष्क का प्रयोग करता रहा है। इस कार्य के लिए सबसे पहले पहले किया जाना वाला यन्त्र ‘अबेकस’ (Abacus).प्रथम साधन था। आज के वैज्ञानिक युग में अनेक प्रकार के गणना यन्त्र बना लिए गये हैं, परन्तु इन सबसे अधिक तीव्र शुद्ध उपयोगी गणना करने वाला यन्त्र कम्प्यूटर है। यह कम्प्यूटर लम्बी गणना करके उसके परिणामों को स्पष्ट कर देता था। कम्प्यूटर स्वयं गणना करके जटिल समस्याओं को मिनटों में हल कर देता है। कम्प्यूटर की गणना के लिए विशेष भाषा को तैयार किया जाता है। निर्देशों और सूचनाओं को कम्प्यूटर का प्रोग्राम कहा जाता है।

कम्प्यूटर का उपयोग-इक्कीसवीं शताब्दी कम्प्यूटर का युग कहलायेगा। आज इसकी उपयोगिता बढ़ गयी है। हजारों मील दूर की सूचनाएँ इससे ज्ञात हो जाती है। भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में इसका उपयोग हो रहा है।

  1. बैंकिंग के क्षेत्र में भारतीय बैंकों के बड़े कार्यालयों में खातों का हिसाब-किताब रखने के लिए इसका प्रयोग प्रारम्भ हो चुका है। कई राष्ट्रीयकृत बैंकों ने नयी चुम्बकीय संख्याओं वाली नई चेक बुक जारी की है। यूरोप तो कई में घर निजी कम्प्यूटर को अन्य कम्प्यूटर के साथ जोड़कर लेन-देन का कार्य किया जाता है।
  2. सूचना व समाचार प्रेषण के क्षेत्र में-कम्प्यूटर नेटवर्क द्वारा देश के बड़े नगरों को एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य किया जाता है।
  3. प्रकाशन के क्षेत्र में पुस्तकों और समाचार-पत्रों के प्रकाशन में कम्प्यूटर का महत्वपूर्ण योगदान है। अब तो समाचार-पत्रों के सम्पादकीय विभाग में एक ओर कम्प्यूटर के मैटर भर जायेगा। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक प्रिन्टर शीघ्र ही मुद्रित सामग्री तैयार कर देंगे।
  4. डिजाइनिंग के क्षेत्र में-कम्प्यूटर के माध्यम से भवनों, मोटर, कारों, वायुयानों आदि के डिजाइन तैयार करने में कम्प्यूटर ग्राफिक का प्रयोग किया जा रहा है। वास्तुशिल्पी अपनी डिजाइन कम्प्यूटर के स्क्रीन पर तैयार करते हैं।
  5. कला के क्षेत्र में अब कम्प्यूटर कलाकार तथा चित्रकार का सहायक बन गया है। कलाकार कम्प्यूटर के सामने बैठकर अपने नियोजित प्रोग्राम के अनुसार स्क्रीन पर चित्र निर्मित करता है। वास्तविक रंगों के साथ प्रिन्ट छप जाता है।
  6. वैज्ञानिक खोज के क्षेत्र में विज्ञान के क्षेत्र में कम्प्यूटर ने एक नई क्रान्ति ला दी है। अन्तरिक्ष के व्यापक चित्र अब कम्प्यूटर द्वारा उतारे जाते हैं। चित्रों का विश्लेषण भी कम्प्यूटर द्वारा ही किया जाता है। आधुनिक वेधशालाओं के लिए कम्प्यूटर की आवश्यकता है। विज्ञान का कोई भी क्षेत्र इससे अलग नहीं है।
  7. युद्ध के क्षेत्र में अमेरिका में पहला इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर एटम बम से संबंधित गणनाएँ करने के लिए था। जर्मन के गुप्त संदेश जानने के लिए अंग्रेजों ने कोलोसम नामक कम्प्यूटर का प्रयोग किया।

जीवन का हर क्षेत्र कम्प्यूटर की परिधि में आ गया है। वायुयान या रेल यात्रा के आरक्षण की व्यवस्था कम्प्यूटर द्वारा की जाती है। रेलवे तथा बस का टाइम भी आपको कम्प्यूटर ही बतलायेगा। इसके अतिरिक्त चिकित्सा के क्षेत्र में, परीक्षाफल निर्माण में, मौसम सम्बन्धी जानकारी में, चुनाव कार्य में कम्प्यूटर का महत्वपूर्ण योगदान है।

दैनिक जीवन में कम्प्यूटर क्षमताएँ एवं सम्भावनाएँ और बढ़ गई है। छात्रों के लिए प्रिंटिंग के बाद कम्प्यूटर ही सबसे बड़ा आविष्कार है। इससे छात्रों व आध्यापकों का समय बचता है। भारत में भूतपूर्व युवा प्रधानमन्त्री स्व. राजीव गाँधी का कम्प्यूटर के प्रति अत्यधिक रुज्ञान था। भारत ने कम्प्यूटर टेक्नालॉजी प्राप्त करने के लिए अमेरिका की ओर दोस्ताना कदम बढ़ाये है। अब सरकार ने कम्प्यूटर पर कर घटाया है ताकि भारत में भी विदेशी टेक्नालॉजी वाली कम्पनियाँ स्थापित हो सकें। भारत इस प्रकार के अनेक विषयों पर विदेशों से सौदा कर रहा है।

कम्प्यूटर और मानव मस्तिष्क-कम्प्यूटर एक मानव यन्त्र है। इसमें न मानवीय संवेदनाएँ हैं और न रुचियां, परन्तु यह मानव द्वारा निर्देशित ऐसा यन्त्र है जो स्वयं के निर्णय लेने में असमर्थ है। वास्तव में यह मानव मस्तिष्क की रचना है जो कम समय में समस्याओं का हल कर सकता है।

6. उपसंहार-कम्प्यूटर टेक्नालॉजी भारत के आर्थिक जगत में क्रांति ला सकती है। यह प्रयोग समाजवादी आदर्शों के अनुसार किया जाय। अभी तक भारतीय पूँजीवाद तब का प्रत्येक तकनीक का प्रयोग केवल अपने काम के लिए करता रहा है। अत: आज साधारण जन इसे जानना चाहता है। यद्यपि आज का विश्व कम्प्यूटर के युग में साँस ले रहा है। कम्प्यूटर पर आज का विश्व निर्भर है। कम्प्यूटर कम समय में सब समस्याओं को हल कर सकता है। वह दिन दूर नहीं जब कम्प्यूटर सबके हाथ होगा।

5. जीवन में खेलों का महत्व
(म. प्र. 2012, 15)

मानव-जीवन का प्रमुख उद्देश्य व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। सर्वांगीण विकास का तात्पर्य है कि व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, भावात्मक तथा नैतिक दृष्टि से पूरी तरह समर्थ हो। शारीरिक विकास हर मनुष्य की प्रथम आवश्यकता है। कहा भी गया है

“A healthy mind is in a healthy body.”

स्वस्थ शरीर के साथ ही स्वस्थ मनोरंजन भी मनुष्य के लिए आवश्यक है। ‘खेल’ ऐसी क्रिया है जिससे न केवल शरीर का विकास होता है अपितु मनोरंजन भी प्राप्त होता है। यही कारण है कि सभ्यता के आदिकाल से ही, मानव समाज में खेलों का प्रचलन रहा है। आज से पचास हजार वर्ष पूर्व की मानव सभ्यता को दर्शाने वाले भित्ति-चित्र प्राचीन गुफाओं में देखने को मिलते हैं। उन आड़ी-तिरछी रेखाओं से बने चित्रों में भी मनुष्यों को खेल खेलते दिखाया गया है। मनुष्य का प्राचीनतम खेल जानवरों का शिकार करना अथवा मछली मारना था। इससे मनोरंजन के साथ ही भोजन की समस्या भी हल होती थी।

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सभ्यता के विकास के साथ शारीरिक क्षमता को परखने के लिए मल्ल-विद्या अर्थात् कुश्ती, तीरंदाजी, घुड़दौड़ आदि खेल प्रारम्भ हुए। प्राचीन रोम के स्टेडियम में एक बड़ा भयंकर खेल खेला जाता था, इसमें मनुष्य को भूखे शेर के पिंजड़े में छोड़ दिया जाता था। भूखे शेर से बचने के लिए वह मनुष्य भागता था, चीखता चिल्लाता था और लोग तालियाँ बजा-बजाकर अपना मनोरंजन करते थे। इसी प्रकार फ्रांस में किसी मनुष्य की वीरता के परीक्षण के लिए उसे, शराब में मदमस्त बैल के साथ, लड़ने छोड़ दिया जाता था। इस खेल को ‘बुल फाइटिंग’कहते थे।

भारत का प्राचीन इतिहास भी बतलाता है कि यहाँ भी महाभारत काल में कुछ ऐसे भी खेल प्रचलित थे जो कमरे के भीतर खेले जाते थे, जैसे–चौपड़, शतरंज, द्यूत-क्रीड़ा आदि। इसमें पासे के आधार पर हार-जीत का निर्णय होता था। कुश्ती, तीरंदाजी, तलवारबाजी तथा कंदूक-क्रीड़ा ऐसे ही प्राचीन भारतीय खेल थे।

आजकल खेलों को दो भागों में बाँटा जाता है-घर के भीतर खेले जाने वाले खेल, जैसे-ताश, कैरम, शतरंज, टेबल-टेनिस, लूडो, बिलियर्ड, आदि। दूसरे प्रकार के वे खेल हैं जो मैदान में खेले जाते हैं, जैसे हॉकी, क्रिकेट, फुटबाल, बेसबाल, बास्केटबाल आदि।

भारतीय खेलों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें बिना किसी खर्च के खेला जा सकता है। इन खेलों में कबड्डी, खो-खो आदि प्रसिद्ध हैं। प्रसन्नता की बात है कि कबड्डी व खो-खो को अब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त होने लगी है। खेलों के महत्त्व पर अब सभी देशों की सरकारें ध्यान दे रही हैं। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रति चार वर्षों में ओलम्पिक खेलों का आयोजन होता है। एशिया महाद्वीपीय स्तर पर सर्वप्रथम 4 मार्च, 1951 को दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में एशियाड खेलों को प्रारम्भ किया गया। इसमें 491 प्रतियोगियों ने भाग लिया तथा भारत ने सबसे अधिक स्वर्ण पदक प्राप्त किये। इसके बाद मनीला, टोक्यो, बैंकाक, तेहरान आदि में एशियाड खेलों का आयोजन हुआ। सन् 1982 में पुन: दिल्ली में एशियाड का आयोजन किया गया जिसमें चीन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

आजकल खेलों को शिक्षा का अनिवार्य अंग मान लिया गया है। दूरदर्शन के बढ़ते हुए प्रभाव ने भी खेलों के प्रति बच्चों के रुझान को विकसित किया है। आप कहीं भी निकल जाइये जहाँ भी खुली जगह मिलेगी बालक व किशोर क्रिकेट, फुटबाल, हॉकी आदि खेलते नजर आयेंगे। यह एक शुभ लक्षण है, क्योंकि खेलों से शारीरिक विकास के साथ ही अन्य लाभ भी हैं, जैसे-स्वस्थ मनोरंजन, समय का सदुपयोग व भाई-चारे की भावना में वृद्धि, मिल-जुलकर काम करने की आदत का निर्माण, साहस, वीरता, सहनशीलता आदि नैतिक गुणों का विकास होता है।

खेलों के विकास के लिए भारत शासन ने एक खेल मन्त्रालय ही स्थापित कर दिया है। यह मन्त्रालय क्षेत्रीय, प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है। उत्तम खिलाड़ियों का चुनाव करके उन्हें प्रशिक्षित करने की व्यवस्था करता है और खेल की उत्तम सामग्री के निर्माण के लिए अनुदान व ऋण प्रदान कर प्रोत्साहित करता है।

मध्य प्रदेश शासन ने भी खेलों के विकास के लिए प्रत्येक संभाग में ‘खेल संगम केन्द्र’ (Sports Complex) स्थापित किये हैं। इन केन्द्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ी छात्रों के लिए छात्रावास बनाये जायेंगे, वहाँ स्कूली शिक्षा के साथ-साथ उन्हें विभिन्न खेलों में प्रशिक्षित किया जायेगा। आशा है शासन को इस दिशा में पर्याप्त जन-सहयोग मिला तो अवश्य ही 21 वीं शताब्दी में हमारा देश विश्व स्तर की किसी भी खेल प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करेगा।

6. प्रदूषण की समस्या
(म. प्र. 2010,11, 15)

गंगा मैली हो गयी। आकाश विषैली धूलों और धुओं से भर उठा है। वायुमण्डल विषाक्त हो उठा है। प्रदूषण की समस्या इतनी जटिल हो गयी है कि लोगों का जीना दूभर हो गया है।

यह प्रदूषण क्या है? जिसने लोगों का जीना हराम कर दिया है। प्रदूषण जल, वायु तथा भूमि के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों में होने वाला कोई भी अवांछनीय परिवर्तन है, जो विकृति को जन्म देता है। प्रदूषण वे सभी पदार्थ या तत्त्व हैं, जो प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से वायुमण्डल, जलमण्डल तथा पृथ्वीमण्डल को दूषित बनाकर, प्राणीमात्र के जीवन एवं संसाधनों पर बुरा प्रभाव डालते हैं।

प्रदूषण की समस्या दिन-प्रतिदिन भयावह बनती जा रही है। शुद्ध जल और शुद्ध हवा का अभाव हो गया है। जिससे प्रतिवर्ष हजारों लोग मौत के मुँह में समाते जा रहे हैं। भोपाल गैसकाण्ड, नागासाकी, हिरोशिमा पर द्वितीय विश्व-युद्ध में गिराये गये बमों के द्वारा जो विनाश-लीला हुई, उसकी याद दिलाता है। कैंसर जैसे असाध्य रोगों का बढ़ता प्रकोप प्रदूषण की समस्या का ही दुष्परिणाम है।

इस समस्या के कारणों पर विचार करने पर ज्ञात होता है कि अणु-परमाणु विस्फोटों से फैलने वाली धूलों से वायुमण्डल और पृथ्वीमण्डल सभी विषाक्त हो रहे हैं जिससे रक्त कैंसर होता है। आज सम्पूर्ण विश्व तेजी से औद्योगिकीकरण की ओर बढ़ रहा है। परिणामस्वरूप पग-पग पर, गाँव-गाँव, नगर-नगर में कल-कारखाने स्थापित होते जा रहे हैं। इन कारखानों से निकलने वाले सड़े-गले पदार्थ एवं गैसें, सभी मिलकर प्रदूषण की समस्या को भयावह बनाते जा रहे हैं। नदी, सरोवर, वायुमण्डल सभी दूषित होते जा रहे हैं। वृक्षों और वनों को काटकर बड़े-बड़े नगर बसाये जा रहे हैं, भवन और बाँध बनाये जा रहे हैं। ये सब प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। प्रदूषण के भेद निम्नलिखित हैं-

  1. जल प्रदूषण
  2. वायु प्रदूषण
  3. ध्वनि प्रदूषण
  4. मृदा प्रदूषण

कारण है, तो समस्या का समाधान भी है। सर्वप्रथम भारत सहित विकासशील राष्ट्रों को यह विचार करना होगा कि उसे कैसा विकास चाहिये। पाश्चात्य देशों का अन्धानुकरण छोड़कर इन देशों को अपने प्राकृतिक पर्यावरण तथा आवश्यकता के अनुकूल कल-कारखानों को लगाना चाहिये। कारखाने स्थापित करने से पूर्व उनसे निकलने वाली हानिकारक धूल-गैसों को उचित दिशा व स्थानों की ओर स्थानान्तरित करने के लिए उपाय कर लिये जाने चाहिये। परमाणु परीक्षणों पर रोक लगायी जाये। वनों की निर्ममतापूर्वक कटायी न की जाये। जितने वृक्ष काटे जायें, उनसे अधिक लगाये जायें। नगरों की बढ़ती जनसंख्या को रोका जाये।

समय रहते यदि प्रदूषण की समस्या का निराकरण नहीं किया गया तो भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व का विनाश निश्चित है। भोपाल गैसकाण्ड एक बड़ी चेतावनी है। सभी लोगों और देशों को चाहिये कि मानव जाति को सर्वनाश से बचाने के लिए पर्यावरण को स्वच्छ बनायें तथा ऐसा कार्य न करें जिससे प्रदूषण की समस्या बढ़े और पावन गंगा भी मैली हो जाये।

7. विज्ञान के नये आविष्कार
(म. प्र. 2010,11, 15)

प्रस्तावना-मानव ने अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नये-नये आविष्कार किये हैं। इस शताब्दी में विज्ञान ने भारी प्रगति की है और संसार का नक्शा ही बदल दिया है।

विज्ञान ने हमारी बड़ी-से-बड़ी और छोटी-से-छोटी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति की है। उसने मानव जीवन में अधिक आनन्द बढ़ाया है। अंधे को आँखें, बहरे को कान, पंगु को पैर दिये हैं और मनुष्य को पक्षियों के समान आकाश में उड़ने की सुविधा दी है। मनुष्य जल पर भी चल सकता है। वैज्ञानिक उपकरणों के सहारे आज हम सैकड़ों मील दूर बैठे हुए अपने किसी मित्र से बातचीत कर सकते हैं।

  1. मनोरंजन के क्षेत्र में मनोरंजन की आधुनिक वस्तुएँ विज्ञान की ही देन हैं। सिनेमा, टेलीविजन, टेपरिकार्डर, रेडियो आदि के माध्यम से हम मनोरंजनार्थ प्रस्तुत की जाने वाली सामग्री देख-सुन सकते हैं। हमारी शिक्षा, संस्कृति, आचार-विचार पर भी इसका प्रभाव पड़ा है।
  2. चिकित्सा के क्षेत्र में स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में भी विज्ञान ने मानव को बड़ा लाभ पहुँचाया है। खतरनाक रोगों पर काबू पा लिया गया है। कई प्रकार के टीकों का आविष्कार हो चुका है। एक्स रे द्वारा तो शरीर का भीतरी भाग तक अच्छी तरह से देखा जा सकता है, शल्य चिकित्सा का भी अच्छा विकास हुआ है। अब तो विज्ञान मौत को भी जीतने का प्रयास कर रहा है।
  3. कृषि के क्षेत्र में कृषि और उद्योग-धन्धों के विकास में भी विज्ञान ने हमारी बड़ी मदद की है। उसने नलकूप, ट्रैक्टर, वैज्ञानिक खाद आदि ऐसे अनेक उपकरण निर्मित किये हैं जिनके कारण उत्पादन अनेक गुना बढ़ गया है। ट्रैक्टर, सिंचाई के पम्प, बीज बोने से लेकर काटने और साफ करने तक के यंत्र, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक दवाईयाँ आदि विज्ञान के कारण सम्भव हो सकी हैं।
  4. आवागमन के क्षेत्र में आज संसार की दूरी कम हो गयी है। वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना साकार हुई है। आवागमन के द्रुतगामी साधनों के कारण आज मनुष्य दिल्ली में भोजन करता है, मुम्बई जाकर पानी पीता है और कोलकाता जाकर शयन करता है। इंग्लैण्ड, अमेरिका, रूस आदि देशों की यात्रा अब स्वप्न नहीं रह गयी है। यात्रा द्रुत, सुगम, सुखद और सुरक्षित हो गयी है।
  5. अन्य क्षेत्रों में विज्ञान ने मानव जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित किया है। गैस का चूल्हा, विद्युत् चूल्हा, रेफ्रीजरेटर, बिजली का पंखा आदि कई वस्तुएँ हमारे दैनिक जीवन के लिए अत्यन्त उपयोगी हैं। नई-नई मशीनों का चलन हो गया है। .
  6. अन्तरिक्ष में विज्ञान-वैज्ञानिकों ने आर्यभट्ट, भास्कर, रोहिणी, इन्सैट के उपग्रह अन्तरिक्ष में स्थापित कर अपनी श्रेष्ठता प्रतिपादित कर दी है। मानव चन्द्र यात्रा कर आया है अब मंगल और दूरस्थ ग्रहों की बारी है।

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अभिशाप-विज्ञान ने मनुष्य को अनेक प्रकार से लाभान्वित किया है, वहीं कई प्रकार से अहित भी किया है। अनेक लाभकारी आविष्कारों के साथ उसने भयंकर-से-भयंकर शस्त्रों का निर्माण किया है। ये अस्त्र शस्त्र इतने घातक होते हैं कि देखते-ही-देखते लाखों व्यक्तियों को मौत के घाट उतार सकते हैं। हिरोशिमा और नागासाकी में अणु बम का दुष्परिणाम हम देख ही चुके हैं। अब तो अणु बम से भी अधिक भयंकर, अधिक विनाशकारी शस्त्रास्त्र बन चुके हैं, जिनका कि अभी हाल ही में हुए युद्ध में इराक तथा बहुराष्ट्रीय सेनाओं ने डटकर प्रयोग किया था। इस प्रकार इन अस्त्रों के कारण मानवता के लिए एक जबरदस्त खतरा पैदा हो गया है।

विज्ञान ने बड़ी-बड़ी मशीनों और कारखानों के द्वारा उत्पादन अवश्य बढ़ाया है, लेकिन बेरोजगारी, स्पर्धा, शोषण, अस्वास्थ्य आदि की समस्याएँ भी पैदा की हैं। उद्योगों का बड़े पैमाने पर केन्द्रीयकरण हो गया है, समाज पूँजीपति और श्रमिक वर्ग में बँट गया है। इन्हीं कारखानों ने बड़े-बड़े देशों में स्पर्धा की भावना पैदा की जिसके परिणामस्वरूप युद्ध होते रहते हैं।

उत्पादन वृद्धि के साथ बेकारी भी बढ़ रही है। भोपाल में दिसम्बर 1984 में यूनियन कार्बाइड कारखाने में गैस रिसने के कारण 25000 से अधिक लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। विज्ञान के कारण समाज में भौतिकवाद और विलासिता की भावना भी बढ़ी है। आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे पागल है। जितनी सुविधाएँ बढ़ रही हैं मनुष्य उतना ही विलासी बनता जा रहा है। विलासिता के कारण शक्ति का क्षय होता जा रहा है। आज मनुष्य शारीरिक दृष्टि से पहले की अपेक्षा बहुत कमजोर हो गया है। विभिन्न प्रकार के बढ़ते हुए प्रदूषण ने भी मानव जीवन को बहुत प्रभावित किया है।

उपसंहार-विज्ञान की उपलब्धियाँ एक ओर आनन्दकारी हैं, तो दूसरी ओर विध्वंसकारी भी। आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी प्रवृत्तियों का परिमार्जन करें और विज्ञान द्वारा प्रदत्त वस्तुओं का उपयोग मानवता की रक्षा, खुशहाली और कल्याण के लिए करें। विज्ञान, विनाश का नहीं सृजन का साधन बनाया जाना चाहिए। विज्ञान दोषी नहीं, दोषी है मनुष्य जो इसका दुरुपयोग करता है।

18. परमाणु शक्ति और मानव जीवन (Imp.)

प्रस्तावना-आज विज्ञान अपनी उन्नति के शिखर पर है। विज्ञान के क्षेत्र में अनेक आविष्कार हुए हैं उन सबमें परमाणु शक्ति का विशेष महत्त्व है। परमाणु शक्ति दो रूपों वाली है। इसका एक रूप जनजीवन के भयंकर संहार में लग सकता है। दूसरा रूप उनका शांतिमय उपयोग है जिसके द्वारा विश्व-मानव का जीवन कल्याणमय बन सकता है। – भारत में परमाणु परीक्षण का विकास-18 मई, 1974 का वर्ष भारत की वैज्ञानिक प्रगति के इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ माना जाएगा। यह वह पावन तिथि है जिसकी कल्पना डॉ. होमी जहाँगीर भाभा ने की थी, जिसके लिए प्रयत्नशील डॉ. साराभाई हुए, जिनका क्रियान्वयन डॉ. सेठना के तत्वावधान में हुआ। 18 मई, 1974 को भारत ने शांति कार्यों के लिए भूमिगत अणु विस्फोट करके सारे संसार के हृदय में विस्फोट कर दिया। इसके पश्चात् 11 एवं 13 मई, 1998 को पाँच और परमाणु परीक्षण किए गए, जिससे भारत विश्व के परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों की पंक्ति में शामिल हो गया। सारा संसार भारत की इस वैज्ञानिक उपलब्धि से चकित रह गया है।

परमाणु शक्ति का दुष्परिणाम-विज्ञान की उन्नति के साथ-साथ विनाश की भयंकरता भी दिन प्रतिदिन बढ़ती गई। आज विश्व में यदि तृतीय युद्ध होता है तो वह परम्परागत अस्त्र-शस्त्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चलित शस्त्रों का प्रयोग होगा और जनजीवन का भयंकर विनाश होगा। द्वितीय महायुद्ध में जापान के युद्ध का अंत एक छोटे एटम बम से हुआ। आज तो उसकी तुलना में बहुत विशाल एवं भयंकर परमाणु बमों से भरे हवाई जहाज चक्कर काटते रहते हैं। परमाणु शक्ति से चलित प्रक्षेपास्त्रों के अड्डे निरंतर आक्रमण के लिये सजग रहते हैं। इस प्रकार परमाणु शक्ति का युद्ध के लिये उपयोग करने से भयंकर विनाश सम्भव है जिसकी कल्पना करना सम्भव नहीं है।

लाभ-हाइड्रोजन बम और कोबाल्ट बमों के रोमांचकारी परिणामों से भयभीत विश्व-मानव का विवेक आज परमाणु शक्ति के शांतिमय उपयोग की बात सोच रहा है। इस शक्ति का उपयोग मानव कल्याण के लिये होने पर विश्व का नक्शा ही बदल जाएगा। यह असीम शक्ति है। इसके द्वारा मानव बहुत उन्नति कर सकता है। परमाणु शक्ति का जीवन के विविध क्षेत्रों में शांतिमय उपयोग सम्भव है। आज संयुक्त राष्ट्र संघ भी इस निष्कर्ष पर पहुँचा है कि परमाणु शक्ति के शांतिमय उपयोग से मानव का कल्याण होगा और उसको समृद्धि प्राप्त होगी। अणु-परमाणु शक्ति महान् शक्ति है। परमाणु शक्ति के औंस भर ईंधन से 15 लाख टन कोयले की शक्ति प्राप्त की जा सकती है।

परमाणु शक्ति के विकास से निम्नलिखित लाभ हैं-

  1. वैज्ञानिकों का मत है कि यदि इसी रफ्तार से मानव प्राकृतिक ईंधन का प्रयोग करता रहा तो इन स्रोतों का कुछ समय बाद अंत आ जाएगा। ऐसी स्थिति में परमाणु शक्ति के द्वारा मानव, ईंधन की कमी पूरी करने में समर्थ होगा।
  2. परमाणु शक्ति से कम खर्च में सस्ती विद्युत् तैयार की जा रही है।
  3. इस शक्ति के द्वारा कम खर्च में पानी के जहाज एवं पनडुब्बियाँ चलाई जा रही हैं। फ्रांस, रूस और अमेरिका इस क्षेत्र में उन्नति कर रहे हैं। भविष्य में वायुयान, मोटरगाड़ियाँ और रेलें भी परमाणु शक्ति से चला करेंगी।
  4. परमाणु शक्ति का चिकित्सा के क्षेत्र में भी बड़ा उपयोग है। घातक रोगों के उपचार के लिए परमाणु शक्ति अत्यन्त उपयोगी सिद्ध हुई है। परमाणु ऊर्जा से प्राप्त विभिन्न प्रकार के रेडियो आइसोटोपों से शरीर के आन्तरिक विकारों का ज्ञान हो जाता है। रेडियो आइसोटोपों द्वारा ही कैंसर जैसे भयंकर रोग की चिकित्सा हो सकती है। रेडियो कैल्सियम द्वारा हड्डी की बढ़ोतरी की जानकारी हो जाती है।
  5. परमाणु शक्ति किसानों और पशुपालकों की भी सहायता करती है। रेडियो कोबाल्ट के टुकड़ों को खेत में गाड़ देने पर बहुत उत्तम और अधिक मात्रा में खाद्यान्न पैदा होता है। फसलों को नष्ट करने वाले कीटाणुओं का ज्ञान भी रेडियो आइसोटोपों द्वारा होता है। यदि शाक-सब्जी, अन्न, फल, दूध और मांस आदि पदार्थों पर कुछ क्षणों के लिये रेडियो आइसोटोप सक्रिय छोड़ दिये जाएँ तो वे कीटाणुरहित हो जायेंगी और बहुत समय तक खराब नहीं होंगी।
  6. कोबाल्ट से बने छोटे-छोटे एक्स-रे यंत्रों की सहायता से प्राचीन मूर्तियों की जाँच-पड़ताल की जा सकती है। उनका रचनाकाल जाना जा सकता है।
  7. परमाणु ऊर्जा से पॉली एथीलीन (पॉलीथीन) नामक नया प्लास्टिक भी बनाया गया है। अन्य रासायनिक पदार्थों के निर्माण में भी यह सहायक सिद्ध हुआ है।
  8. परमाणु ऊर्जा के द्वारा साइबेरिया के रेगिस्तान अब उपजाऊ मैदान बन चुके हैं। परमाणु शक्ति से बड़े-बड़े पहाड़ों को काटकर आवागमन के मार्ग बनाए गए हैं।

हानि इस प्रकार हम देखते हैं कि विश्व के अनेक देशों में परमाणु शक्ति का विनियोग मानव कल्याण के कार्यों में हो रहा है। अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, रूस और भारत आदि अनेक देशों में परमाणु शक्ति के मानव हित में शांतिमय उपयोग किए जा रहे हैं।

गत वर्षों में अणुबमों और उद्जन बमों के जो परीक्षण हुए हैं उनसे यह बात स्पष्ट हो गई कि यदि अब कोई विश्व-युद्ध हुआ तो समस्त संसार खत्म हो जाएगा। अणुबम युद्ध दोनों पक्षों का ऐसा विनाश कर देगा कि विजेता और विजित में कोई अन्तर नहीं रहेगा। यह भी सम्भव है कि बड़े परमाणु युद्ध में अणु एवं हाइड्रोजन बमों के विस्फोट के फलस्वरूप समस्त मानव जाति ही नष्ट हो जाए। रेडियो सक्रियता का प्रभाव सभी जीवित प्राणियों पर अत्यन्त घातक होता है।

उपसंहार-परमाणु शक्ति अपने आपमें कोई संहारक शक्ति नहीं है। इसके शांतिमय उपयोग से मानव कल्याण होगा। अणुशक्ति से परिचालित राकेटों के द्वारा मनुष्य चन्द्रमा तथा पृथ्वी से दूर अन्य ग्रहों तक पहुँच सका है। यदि इसका रचनात्मक कार्यों में उपयोग किया जाये तो यह मानव जाति के लिये वरदान सिद्ध होगा।

9. इक्कीसवीं सदी का भारत
(म. प्र. 2013, 15)

प्रस्तावना-21 वीं सदी का भारत एक नवजात शिशु की भाँति कुण्ठाओं से रहित निरंतर वृद्धिगत एवं विकासशील राष्ट्र होगा। वह एक ऐसा वट वृक्ष होगा जिसकी जडें गहरी होंगी। वे गौरवशाली परम्पराओं के ग्रहण करती हुई नित्य नई शाखाओं को प्रस्फुटित करने में समर्थ होंगी। वह वट वृक्ष प्रत्येक पक्षी और पथिक को आश्रय एवं व्यवहार प्रदान करने वाले स्थायी स्रोत होगा।

21 वीं सदी में प्रवेश-20 वीं सदी नित्य नये उतार-चढ़ाव परिवर्तनों एवं सघर्षों से परिपूर्ण रही है। इसके पूर्वार्द्ध में दो विश्व युद्ध हुए जिसके कारण भगवान और विधान दोनों के प्रति जन- सामान्य की आस्थाएँ डगमगा गयी। इसी कालावधि में भारत का विभाजन एवं साम्प्रदायिक रक्त- रंजित नरसंहार हुआ। सत्य और अहिंसा के अवतार महात्मा गाँधी की नृशंस हत्या भी इस सदी ने देखी।

21 वीं सदी के कर्णधार नागरिक बीसवीं सदी की विषमताओं से विहीन एवं समस्त कुण्ठाओं पूर्वाग्रहों आदि से मुक्त होंगे। वे नव-भारत के निर्माण में प्राणप्रण से संलग्न हो जायेंगे। यह नई पीढ़ी प्रगति के पथ पर अतीत के सुफल बटोरेगी, वर्तमान के फूल बिखेरेगी तथा भविष्य के बीज बोती हुई निरंतर गतिमान रहेगी।

विज्ञान एवं कम्प्यूटर-पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा कम्प्यूटर के सहारे भारत को 21 वीं शताब्दी में ले जाने को निरंतर प्रयत्नशील थे। वे इसी मार्ग से 21 वीं सदी में प्रवेश करना-कराना चाहते थे। वस्तुत: तकनीकी उन्नति की माँग ही है हम ज्ञानेन्द्रियों की क्षमता में वृद्धि करने वाले उपकरणों का नित्य नया विकास करें।

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आध्यात्मिकता-हमारी परिकल्पना है कि 21 वीं सदी के भारत में मनीषी, संत, श्रेष्ठ वैज्ञानिक तथा शक्ति संपन्न राजपुरुष मानव होंगे। भारत की आत्मिक शक्ति नये रूप में प्रस्फुटित होगी और पूर्ण वेगं के साथ प्रवाहमान होगी। 21 वीं सदी के भारत के सम्मुख गौरवशाली परम्पराओं के वरदान के साथ परम्परागत समस्याओं के अभिशाप भी होंगे। सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक आदि सभी प्रकार की समस्यायें अपना समाधान नये सिरे से चाहेंगी। 21 वीं सदी के भारत में गाँधीवादी जीवन दर्शन कथनी की उपेक्षा करके, करनी का वरण कर चुका होगा। तब बापू के सुख स्वप्न को साकार करने वाला राम राज्य हमारा जीवनादर्श होगा। उनकी परम्पराएँ हमारे जीवन मूल्य होगी। तब राजनीति का धर्म होगा और धर्म की राजनीति होगी। प्रत्येक भारतवासी अपने गुण स्वभाव के अनुसार अपने जीवन का निर्माण करने के लिए स्वतंत्र होगा।

शिक्षा-दीक्षा-21 वीं सदी की शिक्षा नीति भारत को नया मानव प्रदान करेंगी। उस शिक्षा पद्धति के अंतर्गत बालक को भीड़ के अंग के रूप में नहीं, एक स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में शिक्षित-प्रशिक्षित होने के अवसर प्रदान किये जायेंगे। उसको न तो कोरा कागज समझा जायेगा जिसमें चाहे जो कुछ लिखा जा सके और न उसको एक खाली बर्तन ही समझा जायेगा जिसमें चाहे कुछ भी हो भर दिया जाये। उसको एक विकासशील पौधे की तरह विकसित होने के लिए उन्मुक्त एवं उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जायेगा। इसका निर्माण समर्पित शिक्षकों के हाथों में होगा। प्रत्येक स्तर पर रोजगार-परक शिक्षा की व्यवस्था होगी। 21 वीं सदी के भारत की शिक्षा नीति का लक्ष्य ऐसे नागरिकों का निर्माण करना होगा जो अपने परिवार, समाज, देश और उसकी मिट्टी से प्यार करें और अपने आपको भारतीय कहने में आत्मगौरव का अनुभव करें।

उपसंहार-इस प्रकार 21 वीं सदी का भारत सही अर्थों में भारतीय मानव का देश होगा। इनमें छुआछूत, ऊँच-नीच, अमीर-गरीब, राजा-रंक का यहाँ नाम भी नहीं होगा। ईश्वर 21 वीं सदी में भारत का स्वरूप हमारी कल्पना से भी अधिक समृद्ध एवं श्रेष्ठ हो।

निम्नलिखित विषय पर रूपरेखा लिखिए (म. प्र. 2015)

स्त्री शिक्षा

  1. प्रस्तावना
  2. शिक्षा का महत्व
  3. बालिका शिक्षा प्रयत्न
  4. बालिका शिक्षा के लक्ष्य तक पहुँचने में बाधाएँ
  5. बाधाओं का निराकरण
  6. उपसंहार।

MP Board Class 11th General Hindi Important Questions

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व

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MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व

s-ब्लॉक तत्त्व NCERT अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
क्षार धातुओं के सामान्य भौतिक तथा रासायनिक गुण क्या हैं ?
उत्तर:
भौतिक गुण –
1. क्षार धातुएँ चाँदी के समान सफेद, नरम तथा हल्की धातुएँ होती हैं।
2. इनके धनत्व बहुत कम होते हैं (बड़े आकार के कारण)। यह वर्ग में नीचे जाने पर घटता है। यद्यपि पोटैशियम, सोडियम से हल्की धातु है।
3. क्षार धातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक निम्न होते हैं, क्योंकि इन धातुओं में मात्र एक संयोजी इलेक्ट्रॉन के उपस्थिति के कारण इनके बीच दुर्बल धात्विक बंध होते हैं।
4. क्षार धातुएँ, Be तथा Mg इनके लवण ज्वाला में विशिष्ट रंग प्रदान करते हैं, क्योंकि इनके संयोजी इलेक्ट्रॉन आसानी से निम्न से उच्च ऊर्जा स्तर तक उत्तेजित हो जाते हैं –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 1 (2)

रासायनिक गुण:
क्षार धातुएँ अपनी निम्न आयनन एन्थैल्पी के कारण अत्यधिक क्रियाशील होती है। इनकी क्रियाशीलता वर्ग में नीचे जाने पर घटती है –

1. वायु के साथ अभिक्रियाशीलता:
क्षार धातुएँ वायु की उपस्थिति में ऑक्साइड बनाने के कारण मलिन हो जाती है। लीथियम मोनोऑक्साइड, सोडियम परॉक्साइड तथा अन्य धातुएँ सुपर ऑक्साइड बनाती है।

  • 4Li+ O2 → 2Li2O (ऑक्साइड)
  • 2Na + O2 → NaO2 (परॉक्साइड)
  • M+ O2 → MO2 (सुपरऑक्साइड) (M = K, Rb, Cs)

लीथियम वायु की नाइट्रोजन के साथ सीधे संयोग करके लीथियम नाइट्राइड (Li3N) बनाती है।

2. जल के साथ क्रिया:
क्षार धातुएँ जल के साथ क्रिया करके हाइड्रॉक्साइड तथा डाइहाइड्रोजन बनाती हैं।
2M + 2H2O → 2M+ + 2OH + H2, (M = क्षार धातु) लीथियम का जल के साथ क्रिया सोडियम की तुलना में कम होता है। क्षार धातुएँ प्रोटॉन दाता स्पीशीज, जैसे – एल्कोहॉल, ऐल्काइन और गैसीय NHS से भी क्रिया करती हैं।

3. डाइहाइड्रोजन के साथ क्रिया:
क्षार धातुएँ डाइहाइड्रोजन के साथ सुगमतापूर्वक क्रिया करके आयनिक या लवणीय हाइड्राइड बनाती हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 2
(M = Li,Na, K आदि)

(iv) हैलोजन के साथ क्रिया:
क्षार धातुएँ हैलोजनों के साथ सुगमतापूर्वक क्रिया करके आयनिक हैलाइड बनाती हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 3
(M = क्षार धातु)

(v) अपचायक प्रकृति:
क्षार धातुएँ अपने संयोजी इलेक्ट्रॉन को सरलता से त्याग देती है। अतः ये प्रबल अपचायक होती हैं।
Na → Na+ +e
लीथियम सर्वाधिक प्रबल तथा सोडियम दुर्बलतम अपचायक है।

(vi) दव अमोनिया में विलेयता:
सभी क्षार धातुएँ अमोनिया में विलेय हो जाती है तथा गहरे नीले रंग का विलयन बनाती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 4

(vii) सभी क्षार धातुएँ परस्पर तथा अन्य धातुओं के साथ मिलकर मिश्रधातु बनाती हैं। मर्करी के साथ अमलगम बनाती है तथा इस प्रकार की क्रियाएँ अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती हैं।

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प्रश्न 2.
क्षारीय मृदा धातुओं के सामान्य अभिलाक्षणिक गुणों में आवर्तिता की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
वर्ग – 2 के तत्व Be, Mg, Ca, Sr, Ba तथा Ra को संयुक्त रूप से क्षारीय धातु कहते हैं (Be के अतिरिक्त)।
सामान्य गुण (A) परमाण्विक गुण:
1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास – इनके सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को [उत्कृष्ट गैस] ns2 द्वारा दर्शाते हैं।
2. परमाण्विक तथा आयनिक त्रिज्या – इन तत्वों की परमाण्विक तथा आयनिक त्रिज्याएँ एक ही आवर्त में निकटवर्ती क्षार धातुओं की अपेक्षा कम होती है। एक ही वर्ग में परमाण्विक तथा आयनिक त्रिज्याएँ, परमाणु संख्या में वृद्धि के साथ – साथ बढ़ती है।
3. आयनन एन्थैल्पी – क्षारीय मृदा धातुओं की प्रथम आयनन एन्थैल्पी, इनके छोटे आकार के कारण –

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 5
क्षारीय मृदा धातुओं की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी, संगत क्षार धातुओं की अपेक्षा कम होती है।
4. जलयोजन एन्थैल्पी – क्षारीय मृदा धातुओं की जलयोजन एन्थैल्पी क्षार धातु आयनों के समान वर्ग में नीचे की ओर जाने से क्रमशः घटती है।
Be2+ > Mg2+ > Ca2+ > Sr2+ > Ba2+
क्षारीय मृदा धातु आयनों की जलयोजन एन्थैल्पी, संगत क्षार धातुओं की अपेक्षा कम होती है।

(B) भौतिक गुण:
1. ये धातुएँ चाँदी के समान सफेद, चमकीली तथा नरम (परन्तु क्षार धातुओं की अपेक्षा कठोर) होती है।
2. इन धातुओं के छोटे आकार के कारण इनके गलनांक तथा क्वथनांक संगत क्षार धातुओं की अपेक्षा कम होते हैं। यह क्रम यद्यपि नियमित नहीं है।
3. ज्वाला के प्रति रंग – Be तथा Mg के अतिरिक्त सभी क्षारीय मृदा धातुएँ ज्वाला के साथ एक विशिष्ट रंग देते हैं। इनके विभिन्न रंग इलेक्ट्रॉनों को उत्तेजित तथा उत्तेजनहीन करने में प्रयुक्त ऊर्जाओं के विभिन्नता के कारण होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 6
4. घनत्व – इन धातुओं के घनत्व Be से Ca तक घटते हैं, तदुपरान्त बढ़ते हैं, ये धातुएँ अपने छोटे आकार के कारण, संगत क्षार धातुओं की अपेक्षा सघन, भारी तथा कठोर होती हैं।

(C) रासायनिक गुण:
क्षारीय मृदा धातुएँ क्षार धातुओं की अपेक्षा कम क्रियाशील होती हैं। इन धातुओं की क्रियाशीलता वर्ग में नीचे की ओर जाने पर क्रमशः घटती है।
1. वायु तथा जल के साथ क्रिया – Be तथा Mg वायु (ऑक्सीजन) तथा जल के प्रति अक्रिय होते हैं क्योंकि इनकी सतह पर ऑक्साइड की परत जम जाती है। यद्यपि, बेरीलियम चूर्ण वायु में आसानी से जल जाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 7
इसी प्रकार मैग्नीशियम अधिक विद्युत् धनात्मक है तथा वायु में चमकीले प्रकाश के साथ जलकर Mgo तथा Mg,N, बनाता है। Ca, Sr तथा Ba वायु के साथ शीघ्रता से क्रिया करके ऑक्साइड तथा नाइट्राइड बनाते हैं।
2. हाइड्रोजन के साथ क्रिया – Be के अतिरिक्त ये सभी धातुएँ गर्म करने पर हाइड्रोजन के साथ योग करके MH, प्रकार के हाइड्राइड बनाती है। (M = Be, Mg, Ca, Sr, Ba)
3. हैलोजन के साथ क्रिया – ये धातुएँ हैलोजन के साथ उच्च ताप पर क्रिया करके MX2 प्रकार के हैलाइड बनाती है। M + X2 → MX2,
(X = F, CI, Br)
4. अम्लों के साथ क्रिया-ये धातुएँ अम्लों के साथ शीघ्रता से क्रिया करती हैं तथा H, गैस मुक्त करती हैं।
M + 2HCl → MCl2 + H2
5. अपचायक प्रकृति- क्षार धातुओं की भाँति, क्षारीय मृदा धातुएँ भी प्रबल अपचायक प्रकृति की होती है। यद्यपि इनकी अपचायक क्षमता क्षार धातुओं की अपेक्षा कम होती है। वर्ग में नीचे जाने पर इनकी अपचायक क्षमता क्रमशः घटती है।

6.  द्रव NH3 में विलेयता:
क्षार धातुओं की भाँति, क्षारीय मृदा धातुएँ द्रव अमोनिया में घुलकर गहरा नीला काला विलयन बनाती हैं।
M + (x + y)NH3 → [M(NH3)x]2+ + 2[e(NH3)y]

प्रश्न 3.
क्षार धातुएँ प्रकृति में क्यों नहीं पाई जाती हैं ?
उत्तर:
क्षार धातुएँ अत्यधिक रासायनिक सक्रियता के कारण प्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं पाई जाती हैं। ये भूपर्पटी में हैलाइड, सल्फेट, कार्बोनेट, सिलिकेट, बोरेट, ऑक्साइड आदि अयस्कों के रूप में पाई जाती हैं।

प्रश्न 4.
Na2O2में सोडियम की ऑक्सीकरण अवस्था ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना Na2O2में Na की ऑक्सीकरण अवस्था x है। H2O2 के समान Na2O2 में परॉक्साइड बंध (-O-O-) होता है। अत: Na2O2 में Na की ऑक्सीकरण अवस्था –
x × 2 + (-1) × 2 = 0
2x – 2 = 0
⇒ x = \(\frac { 2 }{ 2 }\) = +1

प्रश्न 5.
पोटैशियम की तुलना में सोडियम कम अभिक्रियाशील क्यों है ? बताइए। ‘
उत्तर:
पोटैशियम की आयनन एन्थैल्पी (∆iH) (419 kJmol-1) सोडियम की आयनन एन्थैल्पी (496 kJmol-1) की अपेक्षा कम होती है तथा पोटैशियम का मान इलेक्ट्रोड विभव, (-2.925 V), सोडियम के संगत मान (-2.714 V) की अपेक्षा अधिक ऋणात्मक है। यही कारण है कि पोटैशियम, सोडियम की अपेक्षा अधिक ऋणात्मक है। अत: पोटैशियम, सोडियम से अधिक क्रियाशील होता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित के सन्दर्भ में क्षार धातुओं एवं क्षारीय मृदा धातुओं की तुलना कीजिए –

  1. आयनन एन्थैल्पी
  2. ऑक्साइडों की क्षारकता
  3.  हाइड्रॉक्साइडों की विलेयता।

उत्तर:

  1. आयनन एन्थैल्पी – अधिक नाभिक आवेश एवं छोटे परमाणु आकार के कारण, क्षारीय मृदा धातुओं की आयनन एन्थैल्पी संगत क्षार धातुओं से अधिक होती है।
  2. ऑक्साइडों की क्षारकता – क्षार धातुओं के आयनन एन्थैल्पी कम अथवा वैद्युत धनात्मक गुण संगत क्षारीय मृदा धातुओं से अधिक होते हैं। अतः क्षारीय धातु ऑक्साइड संगत क्षारीय मृदा धातु ऑक्साइडों से अधिक क्षारीय होते हैं।
  3. हाइड्रॉक्साइडों की विलेयता – क्षारीय मृदा धातुओं के हाइड्रॉक्साइडों की विलेयता संगत क्षारीय हाइड्रॉक्साइडों की अपेक्षा कम होती है।

प्रश्न 7.
लीथियम किस प्रकार मैग्नीशियम से रासायनिक गुणों में समानताएँ दर्शाता है ?
उत्तर:
लीथियम तथा मैग्नीशियम समान आकार के कारण गुणों में अत्यधिक समानता प्रदर्शित करते हैं –
(परमाण्विक त्रिज्या : Li = 152pm, Mg = 160pm; आयनिक त्रिज्या Li+ = 76pm, Mg2+ = 72pm)। इनके समान गुण निम्न हैं –
1. लीथियम तथा मैग्नीशियम दोनों अपने संबंधित वर्गों के तत्वों की अपेक्षा हल्के तथा कठोर हैं।
2. लीथियम तथा मैग्नीशियम दोनों जल के साथ धीरे-धीरे क्रिया करते हैं।
3. लीथियम तथा मैग्नीशियम दोनों के ऑक्साइड तथा हाइड्रॉक्साइड जल में बहुत कम विलेय हैं। इनके हाइड्रॉक्साइड गर्म करने पर अपघटित होते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 8
4. Li तथा Mg दोनों वायु की नाइट्रोजन से सीधे क्रिया करके नाइट्राइड (Li3N तथा Mg3N2) बनाते हैं।
5. Li तथा Mg दोनों गर्म करने पर कार्बन के साथ संयुक्त होते हैं।

  • 2Li + 2C → Li2C2
  • Mg + 2C → MgC2

6. Li एवं Mg दोनों का ऑक्सीजन में गर्म करने पर मोनोऑक्साइड बनाते हैं।

  • 4Li + O2 → 2Li2o
  • 2Mg + O2 → 2MgO

7. Li2SO4 , MgSO4 की भाँति फिटकरी नहीं बनाता है।
8. LiCl, MgCl दोनों प्रस्वेद्य है तथा जलीय विलयन में हाइड्रेट (LiCl – 2H2O तथा MgCl26H2O) के रूप में क्रिस्टलीय होते हैं।
9. LiCO3 तथा MgCO3 दोनों गर्म करने पर आसानी से अपघटित होकर ऑक्साइड तथा CO2 बनाते हैं।
10. Li तथा Mg दोनों द्वारा ठोस हाइड्रोजन कार्बोनेट नहीं बनाए जा सकते हैं।
11. LiNO3 तथा Mg(NO3)2 दोनों गर्म करने पर अपघटित होकर नाइट्रोजन डाइऑक्साइड बनाते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 54

प्रश्न 8.
क्षार धातुएँ तथा क्षारीय मृदा धातुएँ रासायनिक अपचयन विधि से क्यों प्राप्त नहीं किए जा सकते ? समझाइए।
उत्तर:

  • क्षार धातुएँ तथा क्षारीय मृदा धातुएँ स्वयं में प्रबल अपचायक हैं। अतः ये धातुएँ अपने ऑक्साइंड तथा अन्य यौगिकों द्वारा रासायनिक अपचयन विधि द्वारा प्राप्त नहीं की जा सकती है।
  • इन धातुओं की प्रकृति अत्यधिक विद्युत् धनात्मक होती है। अतः इनके लवणों में जलीय विलयन से इन्हें अन्य धातुओं द्वारा विस्थापित नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न 9.
प्रकाश वैद्युत सेल में लीथियम के स्थान पर पोटैशियम एवं सीज़ियम क्यों प्रयुक्त किए जाते हैं?
उत्तर:
पोटैशियम तथा सीज़ियम की आयनन एन्थैल्पी लीथियम की अपेक्षा अधिक कम होती है। अतः ये धातुएँ प्रकाश में रखने पर इलेक्ट्रॉन आसानी से उत्सर्जित करती है, परन्तु लीथियम ऐसा नहीं कर पाती है। यही कारण है Li की अपेक्षा K तथा Cs का प्रयोग प्रकाश वैद्युत सेल में किया जाता है।

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प्रश्न 10.
जब एक क्षार धातु को दव अमोनिया में घोला जाता है, तब विलियन विभिन्न रंग प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार के रंग-परिवर्तन कारण बताइए।
उत्तर:
क्षार धातुओं का अमोनिया में तनु विलयन का रंग गहरा नीला होता है क्योंकि अमोनीकृत इलेक्ट्रॉन प्रकाश के अदृश्य क्षेत्र में ऊर्जा अवशोषित करते हैं। यदि विलयन की सान्द्रता 3M से अधिक बढ़ा दी जाये तो रंग ताँबे – काँस्य जैसा हो जाता है।

प्रश्न 11.
ज्वाला को बेरीलियम एवं मैग्नीशियम कोई रंग प्रदान नहीं करते हैं, जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातुएँ ऐसा करती हैं, क्यों?
उत्तर:
Be तथा Mg परमाणु अपने छोटे आकार तथा अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश के कारण अपने इलेक्ट्रॉनों को अधिक प्रबलता सं बाँधे रखते हैं। अतः इन्हें उच्च उत्तेजन ऊर्जा की आवश्यकता होती है तथा ये बुन्सन ज्वाला द्वारा उत्तेजित नहीं हो पाते हैं। जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातुओं के उच्च ऊर्जा स्तरों में इलेक्ट्रॉनों का सरलतापूर्वक उत्सर्जन हो सकता है। अतः ज्वाला में विशिष्ट रंग देते हैं।

प्रश्न 12.
सॉल्वे प्रक्रम में होने वाली विभिन्न अभिक्रियाओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
सॉल्वे अमोनिया प्रक्रम में, अमोनिया द्वारा संतृप्त ब्राइन (NaCl का सान्द्र विलयन) में CO2 प्रवाहित की जाती है। इस प्रक्रम में शीघ्र विलेय सोडियम बाइकार्बोनेट बनता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 60
इस प्रकार बने सोडियम बाइकार्बोनेट को छानकर, सुखाकर तथा गर्म करके सोडियम कार्बोनेट प्राप्त करते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 9

कार्बोनेटिंग स्तंभ में प्रयुक्त CO2 को कैल्सियम कार्बोनेट को गर्म करके प्राप्त करते हैं। इस क्रिया में बने Cao को जल में घोलकर बुझा हुआ चूना प्राप्त कर लेते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 10
अमोनिया पुनः प्राप्ति स्तंभ में NH4Cl तथा Ca(OH)2 को गर्म करके NH3 प्राप्त करते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 11

प्रश्न 13.
पोटैशियम कार्बोनेट सॉल्वे विधि द्वारा नहीं बनाया जा सकता है, क्यों?
उत्तर:
पोटैशियम कार्बोनेट को सॉल्वे विधि से नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि पोटैशियम कार्बोनेट जल में अत्यधिक विलेय होने के कारण अवक्षेपित नहीं होता है।

प्रश्न 14.
Li2CO3 कम ताप पर एवं Na2CO3 उच्च ताप पर क्यों विघटित होता है ?
उत्तर:
Li+ आयन आकार में छोटे होते हैं, जो छोटे ऋणायन ऑक्साइड O2-के साथ, CO32- की तुलना में स्थायी जालक बनाते हैं इसलिए Li2CO3 निम्न ताप पर Li2O में विघटित होता है। जबकि Na+ आयन बड़े आकार का होता है, जो बड़े ऋणायन CO32- के साथ O2-आयन की तुलना में स्थायी जालक बनाता है। अतः Na2CO3 अत्यधिक स्थायी है, जो उच्च ताप पर ही Na2O में विघटित होता है।

प्रश्न 15.
क्षार धातुओं के निम्नलिखित यौगिकों की तुलना क्षारीय मृदा धातुओं के संगत यौगिकों से विलेयता एवं तापीय स्थायित्व के आधार पर कीजिए –
(a) नाइट्रेट
(b) कार्बोनेट
(c) सल्फेट।
उत्तर:
(a) क्षार तथा क्षारीय मृदा धातुओं में नाइट्रेट –
1. क्षार तथा क्षारीय मृदा धातुओं के नाइट्रेट जल में अति विलेय होते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 12
2. क्षार धातुओं के नाइट्रेट (लीथियम नाइट्रेट के अतिरिक्त) उच्च ताप पर नाइट्राइड में अपघटित हो जाते हैं। अधिक ताप पर पुनः गर्म करने पर, ऑक्साइड प्राप्त होते हैं। क्षारीय मृदा धातुओं के नाइट्रेट (बेरियम नाइट्रेट के अतिरिक्त) गर्म करने पर संगत ऑक्साइड देते हैं तथा NO2 तथा O2 का मिश्रण मुक्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 13

(b) क्षार तथा क्षारीय मृदा धातुओं में कार्बोनेट –
1. क्षार धातुओं के कार्बोनेट 1273 K तक स्थायी होता है। इससे अधिक ताप पर ये पिघलकर संगत ऑक्साइड बनाते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 14
अपेक्षाकृत कम स्थायी है तथा शीघ्रता से अपघटित हो जाती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 15
सभी क्षारीय मृदा धातुओं के कार्बोनेट गर्म करने पर संगत धातु ऑक्साइड तथा CO2 देते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 16
क्षारीय मृदा धातुओं के कार्बोनेटों का तापीय स्थायित्व वर्ग में नीचे जाने पर क्रमशः घटता है। BeCO2 सबसे कम स्थायी है।
2. सभी क्षार धातु कार्बोनेट सामान्यतः जल में विलेय होते हैं तथा इनकी विलेयता वर्ग में नीचे जाने पर क्रमशः बढ़ती है, क्योंकि इनकी जलयोजन ऊर्जा की अपेक्षा जालक ऊर्जा अधिक शीघ्रता से घटती है। क्षारीय मृदा धातुएँ कार्बोनेट जल में विलेय होती है तथा इनकी विलेयता वर्ग में नीचे जाने पर क्रमशः घटती है। यद्यपि ये CO2 की उपस्थिति में अधिक विलेय होती है।

(c) क्षार तथा क्षारीय मृदा धातुओं में सल्फेट –
1. क्षार धातुओं के सल्फेट (Li2SO4 के अतिरिक्त) ताप स्थायी होते हैं, जबकि क्षारीय मृदा धातुओं के सल्फेट गर्म करने पर अपघटित हो जाते हैं। इनका ताप स्थायित्व वर्ग में नीचे की ओर जाने पर क्रमशः बढ़ता है।
2. क्षार धातु सल्फेट (Li2SO4 के अतिरिक्त) जल में विलेय होते हैं। क्षारीय मृदा धातुओं के सल्फेटों की विलेयता वर्ग में नीचे की ओर जाने पर क्रमशः घटती है। BeSO4 तथा MgSO4 जल में शीघ्र विलेय हैं, जबकि BaSO4 जल में पूर्णतया अविलेय है।

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प्रश्न 16.
सोडियम क्लोराइड से प्रारम्भ करके निम्नलिखित को आप किस प्रकार बनाएँगे –

  1. सोडियम धातु
  2. सोडियम हाइड्रॉक्साइड
  3. सोडियम परॉक्साइड
  4. सोडियम कार्बोनेट।

उत्तर:
1. सोडियम धातु:
इसे NaCl (40%) तथा CaCl2(60%) के गलित मिश्रण द्वारा 273K पर डाउन्स सेल में वैद्युत-अपघटन द्वारा बनाया जाता है। कैथोड पर मुक्त Na को केरोसीन (मिट्टी के तेल)में एकत्रित करते हैं, जबकि Cl2 एनोड पर मुक्त होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 61
कैथोड पर – Na+ + e →Na(s)
एनोड पर – 2Cl → Cl2(g) + 2e

2. सोडियम हाइड्रॉक्साइड:
इसे कास्टनर – कैलनर सेल में NaCl के जलीय संतृप्त विलयन (ब्राइन) के वैद्युत – अपघटन द्वारा प्राप्त करते हैं। इस सेल में मर्करी कैथोड तथा कार्बन एनोड का प्रयोग करते हैं। सोडियम धातु जो कैथोड पर मुक्त होती है, मर्करी के साथ संयोग करके सोडियम अमलगम बनाती है। Cl2 गैस एनोड पर मुक्त होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 18
एनोड पर – 2Cl → Cl2(g) + 2e
इस प्रकार प्राप्त सोडियम अमलगम की क्रिया जल से कराने पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है।
2Na – अमलगम + 2H2O → 2NaOH + 2Hg + H2

3. सोडियम परॉक्साइड:
गलित NaCl के वैद्युत – अपघटन से प्राप्त गलित सोडियम धातु को वायु की अधिकता में गर्म करने पर सोडियम ऑक्साइड प्राप्त होता है। इससे वायु की पुनः क्रिया कराने पर Na2O2 प्राप्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 19

4. सोडियम कार्बोनेट- इसे सॉल्वे अमोनिया प्रक्रम द्वारा बनाया जाता है। अमोनियाकृत सान्द्र ब्राइन विलयन (NaCl के जलीय विलयन) में CO2 प्रवाहित करने पर, सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट अवक्षेपित होता है। जिसे पुनः गर्म कराने पर सोडियम कार्बोनेट प्राप्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 64

प्रश्न 17.
क्या होता है, जब –

  1. मैग्नीशियम को हवा में जलाया जाता है
  2. बिना बुझे चूने को सिलिका के साथ गर्म किया जाता है
  3. क्लोरीन को बुझे चूने से क्रिया कराया जाता है
  4. कैल्सियम नाइट्रेट को गर्म किया जाता है।

उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 20
(iii) यह Cl2 से क्रिया करके कैल्सियम हाइपोक्लोराइड बनाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 62
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प्रश्न 18.
निम्नलिखित में से प्रत्येक के दो-दो उपयोग बताइए –
(a) कास्टिक सोडा
(b) सोडियम कार्बोनेट
(c) बिना बुझा चूना।
उत्तर:
(a) कास्टिक सोडा –

  • इसका उपयोग साबुन, कागज, कृत्रिम रेशम आदि बनाने में होता है।
  • वस्त्र उद्योग में सूती कपड़ों के मर्सरीकरण में इसका प्रयोग होता है।

(b) सोडियम कार्बोनेट –

  • इसका प्रयोग जल के मृदुकरण, धुलाई तथा निर्मलन में करते हैं।
  • इसका उपयोग काँच, साबुन, बोरेक्स कास्टिक सोडा के निर्माण में होता है।

(c) बिना बुझा चूना –

  • इसका प्रयोग कास्टिक सोडा से धावन सोडा बनाने में करते हैं।
  • इसका प्रयोग शर्करा के शुद्धिकरण में तथा रंजकों के निर्माण में करते हैं।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित की संरचना बताइए –

  1. BeCl(वाष्य)
  2. BeCl2(ठोस)।

उत्तर:
1. वाष्प अवस्था में यह सेतु बंधित क्लोराइड द्विलक की भाँति रहता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 23
2. ठोस अवस्था में, यह क्लोरीन आबंध के साथ बहुलक श्रृंखला संरचना प्रदर्शित करता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 55

प्रश्न 20.
सोडियम एवं पोटैशियम के हाइड्रॉक्साइड एवं कार्बोनेट जल मे विलेय है, जबकि मैग्नीशियम एवं कैल्सियम के संगत लवण जल में अल्प विलेय है। समझाइए।
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 24
∆Hविलयन का मान जितना अधिक ऋणात्मक होता है, यौगिक की विलेयता उतनी ही कम होती है। सोडियम तथा पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड तथा कार्बोनेटों की जल योजन ऊर्जा उनकी जालक ऊर्जा से अधिक होती है। अतः ये जल में विलेय होते हैं। मैग्नीशियम तथा कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड की जालक ऊर्जा इनकी जलयोजन ऊर्जा से अधिक होती है। अतः ये जल में अल्प विलेय होते हैं।

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प्रश्न 21.
निम्नलिखित की महत्व बताइए –
(a) चूना पत्थर
(b) सीमेंट
(c) प्लास्टर ऑफ पेरिस।
उत्तर:
(a) चूना पत्थर (CaCO3):

  • इसे मैग्नीशियम कार्बोनेट के साथ आयरन जैसी धातुओं के निष्कर्षण में गालक के रूप में प्रयोग करते हैं।
  • इसका प्रयोग ऐन्टासिड, टूथपेस्ट में अपघर्षक के रूप में, च्यूइंगम में संघटक तथा सौन्दर्य प्रसाधनों के रूप में भी करते हैं।

(b) सीमेंट:

  • यह भवन निर्माण हेतु एक महत्वपूर्ण यौगिक है।
  • इसका उपयोग काँक्रीट, प्रगलित काँक्रीट, प्लास्टीरंग, पुल-निर्माण, भवन-निर्माण आदि में किया जाता है।

(c) प्लास्टर ऑफ पेरिस:

  • इसका उपयोग भवन निर्माण तथा टूटी हुई हड्डियों के प्लास्टर में होता है।
  • इसका उपयोग दंत चिकित्सा, अलंकरण कार्य तथा मूर्तियों एवं अर्द्धप्रतिमाओं को बनाने में भी होता है।

प्रश्न 22.
लीथियम के लवण साधारणतया जलयोजित होते हैं, जबकि अन्य क्षार धातुओं के लवण साधारणतया निर्जलीय होते है, क्यों?
उत्तर:
क्षार धातुओं में सबसे छोटा आकार होने के कारण Li+ की जलयोजन कार्य सबसे कम होती है। यही कारण है कि लीथियम लवण सामान्यतः जलयोजित होते हैं तथा अन्य क्षार धातुओं के लवण साधारणतः निर्जलीय होते हैं।
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प्रश्न 23.
LiF जल में लगभग विलेय होता है, जबकि LiCl न सिर्फ जल में, बल्कि एसीटोन में भी विलेय होता है। कारण बताइए, अन्य क्षार धातुओं के लवण साधारणतया निर्जलीय होते है। क्यों ?
उत्तर:
LiF, उच्च जालक ऊर्जा के कारण जल में लगभग विलेय होता है। परन्तु LiCl जल में विलेय होता है। LiCl अपनी विशिष्ट सहसंयोजी प्रकृति के कारण, एसीटोन में भी विलेय होता है। (चूँकि सहसंयोजी प्रकृति, ऋणायन के आकार के साथ बढ़ती है। अतः विलेयता का क्रम निम्न है –
LiF < LiCl< LiBr < Lil

प्रश्न 24.
जैव द्रवों में सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम एवं कैल्सियम की सार्थकता बताइए।
उत्तर:
सोडियम तथा पोटैशियम आयन अंतराकाशी द्रव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये आयन शिरा-संकेतों के संचरण में भाग लेते हैं। पोटैशियम आयन कोशिका द्रव में प्रचुरता में पाए जाने वाले धनायन हैं। जहाँ ये अनेक एन्जाइमों को सक्रिय करते हैं, ग्लूकोस के ऑक्सीकरण से ATP के निर्माण में भाग लेते हैं।

पौधे में, प्रकाश अवशोषण के लिए मुख्य रंजक क्लोरोफिल होता है। क्लोरोफिल में मैग्नीशियम होता है। शरीर में कैल्सियम का 99% भाग हड्डियों तथा दांतों में होता है। यह अंतर तांत्रिकीय पेशीय कार्यप्रणाली, अंतर तांत्रिकीय प्रेषण, कोशिका झिल्ली अखंडता तथा रक्त स्कंदन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रश्न 25.
क्या होता है, जब –
(a) सोडियम धातु को जल में डाला जाता है।
(b) सोडियम धातु को हवा की अधिकता में गर्म किया जाता है।
(c) सोडियम परॉक्साइड को जल में घोला जाता है।
उत्तर:
(a) H2 गैस मुक्त होती है, जो अभिक्रिया में अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न करने के कारण आग पकड़ लेती है।
2Na2(s) + 2H2O(l) → 2NaOH(aq)+ H2(g)

(b) Nazo की समान मात्रा के साथ Na20, प्राप्त होता है।
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(c) HO2 बनता है।
Na2O2(s) + 2H2O(l) → 2NaOH(aq) + H2O2(l).

प्रश्न 26.
निम्नलिखित में से प्रत्येक प्रेक्षण पर टिप्पणी लिखिए –
(a) जलीय विलयनों में क्षार धातु आयनों की गतिशीलता Li+ < Na+ <K+ <Rb+ <Cs+ क्रम में होती है।
(b) लीथियम ऐसी एकमात्र क्षार धातु है, जो नाइट्राइड बनाती है।
(c) M2+(aq) + 2e → M(s); हेतु E° ( जहाँ, M = Ca, Sr या Ba) लगभग समान है।
उत्तर:
(a) आयन का आकार जितना कम होता है, जलयोजन उतना ही अधिक होता है तथा आयन का जलयोजन जितना अधिक होता है, उसकी आयनिक गतिशीलता उतनी ही कम होती है। अतः जलयोजन क्षमता का क्रम निम्न होगा –
Li+ < Na+ <K+ <Rb+ <Cs+
अतः आयनिक गतिशीलता विपरीत क्रम में बढ़ेगी –
Li+(aq) < Na+(aq) <K+(aq) <Rb+(aq) <Cs+(aq)
(b) अपने छोटे आकार के कारण, क्षार धातुओं में केवल लीथियम नाइट्राइड बनाती है।
(c) M2+ + 2e M(s); जहाँ, M = Ca, Sr, Ba के लिए E° का मान लगभग समान होता है। किसी भी इलेक्ट्रोड के लिए E का मान निम्नलिखित तीन कारकों पर निर्भर करता है –

  • वाष्पन एन्थैल्पी
  • आयनन एन्थैल्पी
  • जलयोजन एन्थैल्पी

चूँकि इन तीनों कारकों का संयुक्त प्रभाव Ca, Sr तथा Ba के लिए लगभग समान रहता है। अतः इनके इलेक्ट्रोड विभव का मान लगभग स्थिर रहता है।

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प्रश्न 27.
निम्नलिखित में से प्रत्येक प्रेक्षण पर टिप्पणी लिखिए –
(a) Na2CO3 का विलयन क्षारीय होता है।
(b) क्षार धातुएँ उनके संगलित क्लोराइडों के वैद्युत-अपघटन से प्राप्त की जाती है।
(c) पोटैशियम की तुलना में सोडियम अधिक उपयोगी है।
उत्तर:
(a) Na2CO3 एक दुर्बल अम्ल (H2CO3) तथा प्रबल क्षार का लवण है। अतः जल-अपघटन कराने पर यह क्षार (NaOH) देता है, जिसके कारण इसका जलीय विलयन क्षारीय होता है।
Na2CO3(s) + 2H2O(l) → 2NaOH(aq) + H2CO3(aq)

(b)1. क्षार धातुएँ प्रबल अपचायक होती है, अतः इन्हें इनके ऑक्साइड तथा यौगिकों से निष्कर्षित नहीं किया जा सकता है।
2. अत्यधिक धनात्मक प्रकृति के कारण इनके लवणों के विलयन से इन्हें किसी अन्य धातु द्वारा विस्थापित नहीं किया जा सकता है।
3. क्षार धातुएँ अपने लवणों के जलीय विलयन के विद्युत्-अपघटन विधि द्वारा प्राप्त नहीं की जा सकती है, क्योंकि कैथोड पर Na धातु की अपेक्षा H, मुक्त होती है। यही कारण है कि क्षार धातुएँ अपने गलित क्लोराइडों के विद्युत्-अपघटन द्वारा प्राप्त होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 27
वैद्युत अपघटन में निम्नलिखित क्रियाएँ होती हैं –
कैथोड पर – 2cl → Cl2 + 2e
एनोड पर – 2Na+ + 2e →2Na

(c) पोटैशियम की तुलना में सोडियम अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्रियाशील तो है परन्तु पोटैशियम की भाँति अतिक्रियाशील नहीं है। सोडियम के अन्य उपयोग हैं –

  • नाभिकीय संयंत्रों में शीतलक के रूप में।
  • पेट्रोल के लिए अपस्फोटन-रोधी पदार्थ, टेट्राएथिल लेड (TEL) के निर्माण में।
    4C2H2Cl + 4Na – Pb →(C2H5)4Pb + 3Pb + 4NaCl

प्रश्न 28.
निम्नलिखित के मध्य क्रियाओं के संतुलित समीकरण लिखिए –

  1. Na2O2 एवं जल
  2. KO2 एवं जल
  3. Na2O2 एवं CO2.

उत्तर:

  1. Na2O2(s) +2H2O(l) → 2NaOH(aq) + H2O2(aq)
  2. 2KO2(s) + H2O(l) →2KOH(aq) + \(\frac { 3 }{ 2 }\)O2(g)
    या 2KO2(s) + H2O(l) →2KOH(aq) + \(\frac { 3 }{ 2 }\)O2(g)
  3. Na2O + CO2 → Na2CO3 .

प्रश्न 29.
आप निम्नलिखित तत्वों को कैसे समझाएँगे –

  1. BeO जल में अविलेय है, जबकि BeSO4 विलेय है।
  2. Bao जल में विलेय है, जबकि BaSO4 अविलेय है।
  3. एथेनॉल में dil. KI की तुलना में अधिक विलेय है।

उत्तर:
1. BeO जल में अविलेय है, क्योंकि BeO की जालक ऊर्जा का मान जलयोजन ऊर्जा से अधिक है, जबकि BeSO जल में घुलनशील है क्योंकि इसकी जलयोजन ऊर्जा जालक ऊर्जा से अधिक है।

2. दूसरे वर्ग के ऑक्साइड की विलेयता के लिए दोनों जालक ऊर्जा और जलयोजन ऊर्जा वर्ग में नीचे जाते समय घटती है, क्योंकि धनायन का आकार बढ़ता है। लेकिन जालक ऊर्जा, जलयोजन की अपेक्षा अधिक तीव्रता से घटती है। अत: BaO जल में घुलनशील है, क्योंकि जलयोजन ऊर्जा जालक ऊर्जा से अधिक है। परन्तु दूसरी ओर BaSO4 जल में अविलेय है। जालक ऊर्जा की प्रबलता समान रहती है, क्योंकि ऋणायन का आकर इतना बड़ा है कि धनायन का आकार बढ़ने से कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अत: BaSO4 के लिए जालक ऊर्जा मान जलयोजन ऊर्जा से अधिक है।

3. एथेनॉल में Lil अधिक घुलनशील है, KI की तुलना में Lil में Li4 आयन का आकार छोटा है और घुलनशील है KI आयनिक यौगिक है अतः एथेनॉल में कम घुलनशील है।

प्रश्न 30.
इनमें से किस क्षार धातु का गलनांक न्यूनतम है-
(a) Na,
(b) K,
(c) Rb,
(d) Cs.
उत्तर:
(d) सीज़ियम का गलनांक न्यूनतम है (312K)।

प्रश्न 31.
निम्नलिखित में से कौन-सी क्षार धातु जलयोजित लवण देती है –
(a) Li,
(b) Na,
(c) K,
(d) Cs.
उत्तर:
(a) लीथियम अकेला ऐसा क्षार तत्व है, जो जलयोजित लवण देती है।

प्रश्न 32.
निम्नलिखित में कौन-सी क्षारीय मृदा धातु कार्बोनेट ताप के प्रति सबसे अधिक स्थायी है –
(a) MgCO3
(b) CaCO3
(c) SrCO3
(d) BaCO3
उत्तर:
(d) BaCO3 ताप के प्रति अधिक स्थाई है, यह 1633K पर वियोजित होता है।

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s-ब्लॉक तत्त्व अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

s-ब्लॉक तत्त्व वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
प्लास्टर ऑफ पेरिस होता है –
(a) (CaSO4)2. H2O
(b) CaSO4.2H2O
(c) CaSO4. H2O
(d) CaSO4.
उत्तर:
(a) (CaSO4)2. H2O

प्रश्न 2.
ब्लीचिंग पाउडर का सक्रिय घटक –
(a) Ca(OCl)2
(b) Ca(OCl)Cl
(c) Ca(O2Cl)2
(d) CaCl2O2.
उत्तर:
(b) Ca(OCl)Cl

प्रश्न 3.
द्रव अमोनिया में सोडियम का विलयन निम्न के कारण अपचायक होता है –
(a) Na परमाणु
(b) NaH
(c) NaNH2
(d) e (NH3)x
उत्तर:
(d) e (NH3)x

प्रश्न 4.
जल के साथ सोडियम की क्रिया तीव्र होती है, लीथियम की नहीं, क्योंकि लीथियम –
(a) का परमाणु भार अधिक है
(b) एक धातु है
(c) अधिक विद्युत् धनी है
(d) अधिक विद्युत् ऋणी है।
उत्तर:
(d) अधिक विद्युत् ऋणी है।

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प्रश्न 5. विभिन्न क्लोराइडों में स्थायित्व का क्रम –
(a) LiCl > KCl > NaCl > CsCl
(b) CsCl > KCI > NaCl > LICl
(c) NaCl > KCl > LiCl > Csci
(d) KCl> CsCl> NaCl> LiCl.
उत्तर:
(a) LiCl > KCl > NaCl > CsCl

प्रश्न 6.
M 2+ की जलयोजन ऊर्जा अधिक होगी इससे –
(a) A3+
(b) Na+
(c) Be2+
(d) Mg3+
उत्तर:
(b) Na+

प्रश्न 7.
क्षारीय मृदा धातुओं का कौन-सा गुण परमाणु-क्रमांक बढ़ने के साथ बढ़ता है –
(a) आयनन ऊर्जा
(b) हाइड्रॉक्साइड की विलेयता
(c) सल्फेट की विलेयता
(d) ऋण-विद्युतता।
उत्तर:
(b) हाइड्रॉक्साइड की विलेयता

प्रश्न 8.
वायु को शुष्क करने के लिये किसका उपयोग ठीक है –
(a) CaCO3
(b) Na2CO3
(c) NaHCO 3
(d) CaO.
उत्तर:
(d) CaO.

प्रश्न 9. किस सल्फेट की विलेयता सबसे कम है –
(a) BaSO4
(b) MgSO4
(c) SrSO4
(d) CaSO4
उत्तर:
(a) BaSO4

प्रश्न 10.
क्षारीय मृदा धातुओं के कार्बोनेटों में तापीय स्थायित्व का क्रम होगा –
(a) BaCO3 > SrCO3 > CaCO3 > MgCO3
(b) BaCO3 > SrCO3 > MgCO3 > CaCO3
(c) CaCO3 > SrCO3 > MgCO3 > BaCO3
(d) MgCO3 > CaCO3 > SrCO3 > BaCO3.
उत्तर:
(d) MgCO3 > CaCO3 > SrCO3 > BaCO3.

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प्रश्न 11.
मैग्नीशियम का महत्वपूर्ण अयस्क है –
(a) मेलाकाइट
(b) केसीटेराइट
(c) कार्नेलाइट
(d) गेलेना।
उत्तर:
(c) कार्नेलाइट

प्रश्न 12.
क्षारीय मृदा धातुओं के सल्फेटों की घुलनशीलता समूह में नीचे जाने पर घटती है। इसका कारण है –
(a) गलनांक का बढ़ना
(b) जालक ऊर्जा का बढ़ना
(c) समन्वयन संख्या का बढ़ना
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(b) जालक ऊर्जा का बढ़ना

प्रश्न 13.
कौन-सा अयस्क लीथियम का नहीं है –
(a) पेंटालाइट
(b) ट्राइफिलाइट
(c) एल्बाइट
(d) स्पोड्यूमीन।
उत्तर:
(c) एल्बाइट

प्रश्न 14.
मैग्नीशियम उपस्थित है इसमें –
(a) हीमोग्लोबीन
(b) क्लोरोफिल
(c) विटामिन B12
(d) विटामिन C.
उत्तर:
(b) क्लोरोफिल

प्रश्न 15.
CaCN2 तथा C के मिश्रण को कहते हैं –
(a) बेराइट
(b) एनहाइड्राइट
(c) नाइट्रोलियम
(d) आइसलैंड स्पॉट।
उत्तर:
(c) नाइट्रोलियम

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. Ca2+ आयन की त्रिज्या K+ आयन से कम है क्योंकि …………. है।।
  2. Be(OH)2अम्ल तथा क्षार दोनों में विलेय है, क्योंकि इसकी प्रकृति ………….. है।
  3. लीथियम समूह – 2 के ……………… तत्व से समानता रखता है।
  4. द्रव अमोनिया में सोडियम धातु नीला रंग देती है यह ………….. के कारण है।
  5. हाइड्रोलिथ का सूत्र …………… है।
  6. s – ब्लॉक तत्व प्रबल …………… है।
  7. क्षारीय मृदा धातु …………. रेडियोधर्मी गुण प्रदर्शित करता है।
  8. क्षारीय धातु …………….. रेडियोधर्मी गुण प्रदर्शित करता है।
  9. …………. क्षारीय मृदा धातु हाइड्रॉक्साइड उभयधर्मी है।
  10. कार्नेलाइट का रासायनिक सूत्र …………… है।

उत्तर:

  1. धनावेश अधिक
  2. उभयधर्मी
  3. Mg
  4. e (NH3)x
  5. CaH2
  6. अपचायक
  7. रेडियम
  8. फ्रान्सियम (Fr)
  9. Be(OH)2
  10. KClMgCl2 6H2O.

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प्रश्न 3.
उचित संबंध जोड़िए –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 59
उत्तर:

  1. (e) CaO
  2. (d) CaCN2 तथा C
  3. (b) MgCl2
  4. (a) Ca(OCI)Cl
  5. (c) BaSO4
  6. (g) चूना पत्थर
  7. (f) धुएँ का पर्दा

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प्रश्न 4.
एक शब्द / वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. क्षारीय मृदा धातुओं को बढ़ती हुई क्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
  2. लीथियम अयस्क के दो नाम सूत्र सहित लिखिए।
  3. मैग्नीशियम के दो अयस्कों के नाम लिखिए।
  4. क्षार धातुओं को मिट्टी के तेल में रखा जाता है। क्यों?
  5. ग्लोबल लवण का आण्विक सूत्र है।

उत्तर:

  1. क्षारीय मृदा धातुओं की रासायनिक क्रियाशीलता समूह में ऊपर से नीचे आने (Be-Ra) पर बढ़ती है। Be < Mg < Ca < Sr < Ba < Ra
  2. Li अयस्क के दो नाम व सूत्र –
    • स्पोड्यूमीन LiAl(SiO3)2
    • लेपिडोलाइट Li2Al2(SiO3)3.F(OH)2
  3. Mg के दो अयस्कों के नाम –
    • कार्नेलाइट
    • डोलोमाइट
  4. अत्यधिक क्रियाशीलता के कारण
  5. Na2SO4.10H2O

s-ब्लॉक तत्त्व अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक ऐसे खनिज का नाम तथा सूत्र बताइये जिसमें Ca एवं Mg दोनों उपस्थित होते हैं।
उत्तर:
खनिज का नाम-डोलोमाइट। सूत्र – MgCO3,CaCO3

प्रश्न 2.
फ्लक्स का नाम लिखिए जिसको धात्विक प्रक्रमों में अम्लीय अशुद्धियों को दूर करने के लिये प्रयोग करते हैं।
उत्तर:

  • लाइमस्टोन CaCO3
  • मैग्नेसाइट MgCO3

प्रश्न 3.
प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग प्लास्टर चढ़ाने में किस गुण के कारण किया गया है ?
उत्तर:
प्लास्टर ऑफ पेरिस जल से क्रिया करके सीमेण्ट के समान कठोर हो जाता है। इस गुण के कारण इसका उपयोग टूटी हड्डियों को जोड़ने के लिये प्लास्टर चढ़ाने में किया जाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 28

प्रश्न 4.
IA तथा IIA समूह को s-ब्लॉक तत्व कहते हैं। क्यों?
उत्तर:
IA तथा IIA समूह में उपस्थित सभी तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास करने पर अंतिम इलेक्ट्रॉन S – उपकोश में प्रवेश करता है, इसलिये इसे s-ब्लॉक तत्व कहते हैं।
उदाहरण –

  • Na11 → 1s2 2s22p63s1
  • Ca20 → 1s2 2s22p63s23p64s2

प्रश्न 5.
सॉरेल सीमेंट क्या है ? इसका उपयोग किन कार्यों में होता है ?
उत्तर:
MgCl2के सान्द्र विलयन में MgO मिलाया जाये तो MgCl2 2MgO. xH2O संघटन वाले मैग्नीशियम क्लोराइड का एक सफेद पेस्ट बनता है, जो जमकर कड़ा हो जाता है। इसे सॉरेल सीमेन्ट कहा जाता है। इसका उपयोग दाँतों की खोह भरने में तथा चीनी मिट्टी एवं पोर्सलेन के बर्तनों को जोड़ने में किया जाता है।

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प्रश्न 6.
सोडियम कार्बोनेट को वायु में खुला छोड़ देने पर क्या परिवर्तन होता है ? समीकरण सहित समझाइये।
उत्तर:
Na2CO3 10H2O को वायु में खुला छोड़ देने पर इसका क्रिस्टलीय जल धीरे-धीरे निकल जाता है और यह मोनोहाइड्रेट Na2CO2 H2O देता है जो 750°C पर गर्म करने पर निर्जल Na2CO3 देता है जिसे सोडा राख कहते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 29

प्रश्न 7.
लीथियम हाइड्राइड का प्रयोग अन्य हाइड्राइडों के निर्माण में किया जा सकता है। बेरेलियम हाइड्राइड उनमें से एक है। इसके निर्माण के विभिन्न पद बताइए। इस प्रक्रम में प्रयुक्त रासायनिक समीकरण भी दीजिए।
उत्तर:
BeH2 का निर्माण संगत जटिल क्षारीय धातुओं हाइड्राइडों जैसे लीथियम-ऐल्युमिनियम हाइड्राइड के अपचयन द्वारा करते हैं।

  • 8LiH + Al2Cl6 → 2LiAlH4 + 6LiCl
  • 2BeCl2 + LiAlH4 → 2BeH2 + LiCl + AlCl2

प्रश्न 8.
कैल्सियम सल्फेट किस प्रकार बनाया जाता है ? इसके उपयोग लिखिए।
उत्तर:
प्रयोगशाला में Ca के ऑक्साइड, कार्बोनेट, क्लोराइड की अभिक्रिया तनु H2SO4 के साथ कराने पर कैल्सियम सल्फेट प्राप्त होता है।

  • CaO+ H2SO4 → CaSO4 + H4O
  • CaCO3 + H2SO4 → CaSO4 + H2O + CO2

उपयोग:

  • चाक बनाने में
  • सीमेंट उद्योग में
  • प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाने में
  • खाद के रूप में।

प्रश्न 9.
जिप्सम किसे कहते हैं ? इससे प्लास्टर ऑफ पेरिस कैसे बनाते हैं ?
उत्तर:
कैल्सियम सल्फेट CaSO4 2H2O को जिप्सम कहते हैं । जिप्सम को 120 – 130°C तक गर्म करने पर इसमें से तीन चौथाई क्रिस्टल जल निकल जाता है तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस प्राप्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 30
प्लास्टर ऑफ पेरिस जल अवशोषित करके पुनः जिप्सम में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न 10.
अनबुझा चूना बनाते समय भट्टी का ताप 1000°C से अधिक गर्म नहीं करते।रासायनिक समीकरण सहित समझाइये।
उत्तर:
अनबुझा चूना बनाते समय भट्टी का ताप 1000°C से अधिक नहीं रखते क्योंकि इससे उच्च ताप पर CaO अशुद्धि के रूप में उपस्थित SiO2 से मिलकर गलनीय सिलिकेट बना लेता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 31

प्रश्न 11.
सोडियम को मिट्टी के तेल में रखा जाता है। क्यों?
उत्तर:
सोडियम अत्यन्त क्रियाशील तथा प्रबल धन विद्युती तत्व है। यह वायुमण्डल में उपस्थित 02, नमी तथा कार्बन डाइ-ऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करके ऑक्साइड तथा हाइड्राक्साइड बनाता है। इसलिये सोडियम को मिट्टी के तेल में रखा जाता है जिससे वह वायु के संपर्क में न आ सके।

  • 4Na + O2 → 2Na2O
  • Na2O+ H2O → 2NaOH
  • 2NaOH + CO2 → Na2CO3 + H2O

प्रश्न 12.
चूने के पानी का सूत्र लिखिए। इसमें CO2 के प्रवाह से क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
बुझे हुये चूने का जल में स्वच्छ विलयन चूने का पानी कहलाता है। इसका सूत्र Ca(OH)2 होगा।

  • चूने के पानी में CO2 प्रवाहित करने से CaCO3 बनने के कारण विलयन दूधिया हो जाता है।
    Ca(OH)2 + CO2 → CaCO3 + H2O
  • चूने के पानी में CO2 को देर तक प्रवाहित करने पर चूने के पानी का दूधियापन समाप्त हो जाता है।
    Ca(OH)2 + CO2 + H2O → Ca(HCO3)2

प्रश्न 13.
फोटो रासायनिक सेल में किस धातु का उपयोग होता है और क्यों?
उत्तर:
फोटो रासायनिक सेल में पोटैशियम तथा सीजियम का उपयोग होता है, क्योंकि इनकी आयनन ऊर्जा अत्यन्त कम होती है।

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प्रश्न 14.
सोडियम क्लोराइड से सोडियम का निष्कर्षण सामान्य अपचायक से क्यों नहीं किया जा सकता है ?
उत्तर:
सोडियम प्रबल अपचायक है। विद्युत् रासायनिक श्रेणी में इसका स्थान सबसे ऊँचा है। इससे प्रबल अपचायक उपलब्ध न होने से इसे सामान्य अपचायकों द्वारा अपचयित नहीं किया जा सकता है इसे केवल विद्युत् अपघटन द्वारा ही अपचयित किया जाता है।

प्रश्न 15.
Li और Be सहसंयोजी यौगिक बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं। समझाइये।
उत्तर:
Li और Be परमाणु का आकार बहुत छोटा होता है और उनकी आयनन ऊर्जा अधिक होती है। अतः इनके संयोजकता कोश के इलेक्ट्रॉन नाभिक से दृढ़ता से जुड़े रहते हैं। साथ ही साथ आयनों की ध्रुवण क्षमता उच्च आवेश घनत्व के कारण अधिक होती है। इसलिये Li और Be सहसंयोजी यौगिक बनाने की प्रवृत्ति रखते हैं।

प्रश्न 16.
Li की तुलना में K और Cs का उपयोग फोटो रासायनिक सेल में करते हैं। क्यों?
उत्तर:
Cs तथा K के बड़े आकार के कारण इनकी आयनन ऊर्जा Li की तुलना में अत्यन्त कम है इसलिये सरलता से इलेक्ट्रॉन का त्याग कर सकते हैं। इसलिये फोटो रासायनिक सेल में Li की तुलना में K तथा Cs का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 17.
BeCl2, को वायुमण्डल में रखने पर यह सफेद धूम्र देता है। क्यों?
उत्तर:
BeCl2 आर्द्रता ग्राही होता है। यह वायुमण्डल में उपस्थित नमी को अवशोषित करके जल अपघटित हो जाता है और HCl गैस उत्पन्न करता है। HCl गैस बनने के कारण ही सफेद धूम्र प्राप्त होते हैं।
BeCl2 + 2H2O → Be(OH)2 + 2HCl

प्रश्न 18.
प्रथम वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर तत्वों की कठोरता बढ़ती जाती है, क्यों?
उत्तर:
प्रथम वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर तत्वों के आकार में वृद्धि के साथ-साथ इनके घनत्वों में भी वृद्धि होती है और उनके परमाणुओं के मध्य आकर्षण बल भी बढ़ता जाता है। जिससे तत्वों की कठोरता बढ़ती जाती है।

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s-ब्लॉक तत्त्व लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
s – ब्लॉक तत्व तथा p – ब्लॉक तत्वों को प्रतिनिधि तत्व कहते हैं। क्यों ?
उत्तर:
वे तत्व जिनके बाहरी कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns1-2 तथा ns2np1-6 होता है, प्रतिनिधि तत्व कहलाते हैं। क्योंकि इस समूह में उपस्थित प्रत्येक तत्व अपने समूह के गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा प्रत्येक समूह के गुण दूसरे समूह के गुण से पूर्णतः भिन्न होते हैं।
(1) s – ब्लॉक तत्व – वे तत्व जिनका अंतिम इलेक्ट्रॉन s – उपकोश में प्रवेश करता है, s – ब्लॉक तत्व कहलाते हैं। इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns1-2 होता है।
(2) p – ब्लॉक तत्व-वे तत्व जिनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास करने पर अंतिम इलेक्ट्रॉन p – उपकोश में प्रवेश करता है, p – ब्लॉक तत्व कहलाते हैं। इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np1-6 होता है।

प्रश्न 2.
क्षार धातु प्रबल अपचायक होते हैं, क्यों?
उत्तर:
क्षार धातुओं के बड़े आकार के कारण इनकी आयनन ऊर्जा कम होती है। जिसके कारण ये संयोजी कोश के इलेक्ट्रॉन को आसानी से त्याग कर ऑक्सीकृत हो जाते हैं तथा इनके मानक इलेक्ट्रोड विभव का मान अधिक ऋणात्मक होता है। इसलिये ये इलेक्ट्रॉन का त्याग कर सरलता से M+ आयन बनाते हैं। इसलिये ये प्रबल अपचायक की तरह कार्य करते हैं।

प्रश्न 3.
BeSO4 तथा MgSO4 जल में शीघ्र विलेय है जबकि CaSO4 SrSO4 तथा BaSO4 अविलेय है। क्यों?
उत्तर:
क्षारीय मृदा धातुओं की जालक ऊर्जा, सल्फेट आयन के वृहद् आकार के कारण लगभग समान होती है। अतः इनकी विलेयता जलयोजन ऊर्जा पर निर्भर करती है, जो वर्ग में नीचे जाने पर क्रमशः घटती है। Be2+ तथा Mg2+ आयनों की उच्च जलयोजन एन्थैल्पी, जालक एन्थैल्पी कारक को हीन कर देती है जिसके कारण इनके सल्फेट जल में विलेय होते हैं। दूसरी ओर Ca2+, Sr2+ तथा Ba2+ आयनों के लिए जलयोजन एन्थैल्पी कम होती है। अत: यह जालक एन्थैल्पी कारक को हीन नहीं कर पाती है। अतः इनके सल्फेट जल में अविलेय होते हैं।

प्रश्न 4.
जलीय विलयन में लीथियम की अपचायक क्षमता अधिक क्यों होती है ?
उत्तर:
किसी तत्व के जलीय विलयन में इलेक्ट्रॉनों की त्यागने की क्षमता का मापन इलेक्ट्रोड विभव द्वारा करते हैं। यह मुख्यतः निम्नलिखित तीन कारकों पर निर्भर करता है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 32

अपने आयनों के छोटे आकार के कारण, लीथियम की जलयोजन एन्थैल्पी सर्वाधिक होती है। यद्यपि Li की आयनन एन्थैल्पी, क्षार धातुओं से सर्वाधिक होती है परन्तु जलयोजन एन्थैल्पी भी आयनन एन्थैल्पी से अधिक होती है। अतः उच्च जलयोजन एन्थैल्पी के कारण, लीथियम जलीय विलयन में प्रबलतम अपचायक होता है।

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प्रश्न 5.
प्रकाश वैद्युत सेल में लीथियम के स्थान पर पोटैशियम एवं सीजियम क्यों प्रयुक्त किए जाते हैं ?
उत्तर:
पोटैशियम तथा सीजियम की आयनन एन्थैल्पी लीथियम की अपेक्षा अधिक कम होती है। अतः ये धातुएँ प्रकाश में रखने पर इलेक्ट्रॉन आसानी से उत्सर्जित करती है, परन्तु लीथियम ऐसा नहीं कर पाती है। यही कारण है Li की अपेक्षा K तथा Cs का प्रयोग प्रकाश वैद्युत सेल में किया जाता है।

प्रश्न 6.
क्या कारण है कि क्षार धातुएँ M+ प्रकार का धनायन बनाती है, M+2 प्रकार का धनायन नहीं?
उत्तर:
क्षार धातुओं के संयोजी कोश में 1 इलेक्ट्रॉन होता है। इनके बड़े आकार के कारण इनकी आयनन ऊर्जा अत्यन्त कम होती है। इसलिये ये सरलता से इलेक्ट्रॉन का त्याग कर M+ आयन बनाते हैं। इस M+1 आयनिक अवस्था में इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अक्रिय गैसों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के समान अत्यन्त स्थायी होता है। इसलिये इस अवस्था में ये रासायनिक दृष्टि से निष्क्रिय होते हैं और इसकी आयनन ऊर्जा अत्यन्त उच्च होती है। इसी कारण ये M+2 आयन नहीं बनाते।

प्रश्न 7.
क्षार धातुओं में कौन-सी धातु प्रबल अपचायक है तथा क्यों ?
उत्तर:
किसी भी तत्व की अपचायक प्रवृत्ति उसके मानक इलेक्ट्रोड विभव पर निर्भर करती है। वे तत्व जिनका मानक इलेक्ट्रोड विभव ऋणात्मक होता है अपचायक की तरह कार्य करते हैं तथा मानक इलेक्ट्रोड विभव का मान जितना अधिक ऋणात्मक होता है वह तत्व उतना प्रबल अपचायक होता है। Li का मानक इलेक्ट्रोड विभव अत्यधिक उच्च ऋणात्मक मान दर्शाता है। इसलिये यह प्रबल अपचायक है।

प्रश्न 8.
क्षार धातु प्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं प्राप्त होते हैं, क्यों? अथवा, क्षार धातु सदैव आयनिक यौगिक का निर्माण करते हैं, क्यों?
उत्तर:
क्षार धातुओं के बड़े आकार के कारण इनकी आयनन ऊर्जा अत्यन्त कम होती है। इसलिये यह सरलता से इलेक्ट्रॉन का त्याग करके धनायन बना सकते हैं। अर्थात् प्रबल धनविद्युती तथा अत्यधिक क्रियाशील होने के कारण वायुमण्डल में उपस्थित ऋणविद्युती तत्व, जैसे-नमी, CO2 के साथ सरलता से अभिक्रिया करके आयनिक यौगिकों का निर्माण करते हैं। इसलिये प्रकृति में मुक्त अवस्था में प्राप्त नहीं होते हैं।

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प्रश्न 9.
क्षार धातु सरलता से ज्वाला परीक्षण देते हैं। क्यों ?
उत्तर:
क्षार धातुओं के बड़े आकार के कारण इनकी आयनन ऊर्जा के मान अत्यन्त कम होते हैं। इसलिये इन क्षारीय धातुओं तथा इनके यौगिकों को जब बुन्सन ज्वाला में गर्म किया जाता है तो संयोजी कोश का इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तर में चला जाता है। कुछ समय पश्चात् यह इलेक्ट्रॉन अतिरिक्त ऊर्जा को दृश्य प्रकाश के रूप में प्रकीर्णित कर अपनी मूल स्थिति में वापस आ जाता है । इस प्रकार प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण यह ज्वाला को विशिष्ट रंग प्रदान करते हैं।

प्रश्न 10.
Be तथा Mg ज्वाला परीक्षण नहीं देते हैं। क्यों ?
उत्तर:
Be तथा Mg में s – कक्षक पूर्ण कक्षक के रूप में होता है। इनके छोटे आकार तथा :-कक्षक के पूर्ण कक्षक होने की वजह से इनका स्थायित्व अधिक होता है जिसके कारण इनकी आयनन ऊर्जा उच्च होती है। जिसके कारण इलेक्ट्रॉन को बुन्सन ज्वाला द्वारा उत्तेजित करना संभव नहीं है। दूसरे शब्दों में, दृश्य प्रकाश द्वारा विकिरण संभव नहीं है। इसलिये Mg तथा Be ज्वाला परीक्षण नहीं देते हैं।

प्रश्न 11.
क्षार धातुएँ द्रव अमोनिया में घुलकर नीला विलयन बनाती है, जो प्रबल विद्युत् चालक होते हैं। समीकरण सहित कारण बताइये।
उत्तर:
क्षार धातुओं का द्रव अमोनिया में विलयन अमोनीकृत इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण नीले रंग का होता है। इस विलयन की चालकता अमोनीकृत इलेक्ट्रॉन एवं अमोनिया युक्त धनायन दोनों की उपस्थिति के कारण होती है।
M + (x + y)NH3 → [M(NH3)x]+ + [e(NH3)y]

प्रश्न 12.
Na क्षारीय है अथवा Na2O, स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
Na2O, Na की तुलना में अधिक क्षारीय है क्योंकि Na2O जल से क्रिया करके NaOH बनाते हैं जबकि Na भी जल से अभिक्रिया करके NaOH बनाता है लेकिन पहले वह Nago बनाता है फिर NaOH

  • 4Na + 2H2O → 2Na2O + 2H2
  • Na2O + H2O → 2NaOH

प्रश्न 13.
क्षार धातुएँ तथा क्षारीय मृदा धातुओं की तुलना निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार परकीजिये –

  1. N2 के साथ क्रिया
  2. कार्बोनेट पर ऊष्मा का प्रभाव
  3. सल्फेटों की जल में विलेयता।

उत्तर:
क्षार धातुएँ तथा क्षारीय मृदा धातु में तुलना –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 33

प्रश्न 14.
क्षार धातुओं को यदि वायुमंडल में खुला रखा जाये तो कुछ समय पश्चात् उनकी धात्विक चमक नष्ट हो जाती है। क्यों?
उत्तर:
प्रत्येक धातु में एक विशिष्ट चमक होती है जिसे धात्विक चमक कहते हैं । क्षार धातुओं के बड़े आकार के कारण इनकी आयनन ऊर्जा अत्यधिक कम होती है। इसलिये यह अत्यधिक क्रियाशील तथा प्रबल धनविद्युती होते हैं तथा वायुमण्डल में उपस्थित नमी, O2 तथा CO2 के साथ अभिक्रिया करके क्षारीय कार्बोनेट बनाते हैं। धातुओं की सतह पर ऑक्साइड तथा कार्बोनेट की पर्त बनने के कारण इनकी धात्विक चमक नष्ट हो जाती है।

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प्रश्न 15.
क्षार धातु एवं क्षारीय मृदा धातुओं में प्रमुख अंतर लिखिये।
उत्तर:
क्षार धातु एवं क्षारीय मृदा धातुओं में प्रमुख अंतर –

क्षार धातु:

  • ये + 1 संयोजकता दर्शाते हैं।
  • इनके हाइड्रॉक्साइड प्रबल क्षार होते हैं।
  • इनके कार्बोनेट, सल्फेट, फॉस्फेट जल में विलेय होते हैं।
  • इनकी आयनन ऊर्जा का मान अपेक्षाकृत कम होता है।
  • ये चमकदार, आघातवर्धनीय एवं तन्य होते हैं।

क्षारीय मृदा धातु:

  • ये + 2 संयोजकता दर्शाते हैं।
  • इनके हाइड्रॉक्साइड दुर्बल क्षार होते हैं, क्षार धातु की तुलना में।
  • इनके यौगिक जल में अविलेय होते हैं।
  • इनकी आयनन ऊर्जा का मान उच्च होता है।
  • इनके ये गुण क्षार धातु की तुलना में अपेक्षाकृत कम होते हैं।

प्रश्न 16.
LiCl और RbCl में कौन प्रबल आयनिक होगा और क्यों ?
उत्तर:
LiCl की तुलना में RbCl प्रबल आयनिक यौगिक है। क्योंकि Li के छोटे आकार के कारण इसकी आयनन ऊर्जा अत्यधिक उच्च होती है। इसलिये यह सहसंयोजी यौगिक बनाता है जबकि Rb के बड़े आकार के कारण इसकी आयनन ऊर्जा अत्यन्त कम होती है। इसलिये यह सरलता से इलेक्ट्रॉन का त्याग करके धनायन बनाता है। इसलिये इसके यौगिक प्रबल आयनिक प्रवृत्ति दर्शाते हैं।

प्रश्न 17.
क्षार धातु और क्षारीय मृदा धातु में किसके कार्बोनेट जल में विलेय हैं और क्यों?
अथवा
क्षार धातु के कार्बोनेट जल में विलेय हैं जबकि क्षारीय मृदा धातु के कार्बोनेट जल में अविलेय हैं। क्यों?
उत्तर:
क्षार धातु के कार्बोनेट जल में विलेय है क्योंकि इनकी जलयोजन ऊर्जा, जालक ऊर्जा से अधिक होती है जबकि क्षारीय मृदा धातु के छोटे आकार तथा उच्च आवेश घनत्व के कारण इनकी जालक ऊर्जा उच्च तथा जलयोजन ऊर्जा से अधिक होती है। इसलिये क्षारीय मृदा धातु के कार्बोनेट जल में अविलेय है।

प्रश्न 18.
क्षारीय मृदा धातुओं के द्वितीय आयनन विभव का मान प्रथम आयनन विभव से अधिक है फिर भी क्षारीय मृदा धातु + 2 ऑक्सीकरण संख्या दर्शाते हैं + 1 नहीं, क्यों?
उत्तर:
क्षारीय मृदा धातु + 2 आयन का निर्माण करते हैं + 1 आयन का नहीं, क्योंकि

  • इनके संयोजी कोश में 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं ये तत्व स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिये 2e का त्याग कर M+2 आयन का निर्माण करते हैं।
  • इस द्विसंयोजी आयन के निर्माण के दौरान जालक ऊर्जा मुक्त होने लग जाती है जो द्वितीय आयनन ऊर्जा के मान को कम कर देती है। इसलिये ये सरलता से द्विसंयोजी आयन का निर्माण करते हैं।

प्रश्न 19.
BeCl2 तथा अन्य क्षारीय मृदा धातुओं के क्लोराइडों में असमानता बताइए।
उत्तर:

  • BeCl2 सहसंयोजी यौगिक है जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातुओं के क्लोराइड आयनिक है।
  • BeCl2 जल में अविलेय है जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातुओं के क्लोराइड जल में विलेय है।
  • BeCl2 कार्बनिक विलायकों में विलेय है जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातुओं के क्लोराइड कार्बनिक विलायकों में विलेय है।
  • BeCl2 के गलनांक, क्वथनांक निम्न हैं जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातुओं के क्लोराइड के गलनांक, क्वथनांक उच्च हैं।

प्रश्न 20.
BaSO4 की विलेयता CaSO4 से कम है। क्यों?
उत्तर:
क्षारीय मृदा धातुओं के सल्फेटों की विलेयता समूह में ऊपर से नीचे आने पर कम होती है। क्योंकि जालक ऊर्जा तो लगभग समान रहती है। परन्तु समूह में ऊपर से नीचे आने पर परमाणविक त्रिज्या में वृद्धि के कारण जलयोजन ऊर्जा में कमी आती है। जलयोजन ऊर्जा का मान जालक ऊर्जा से कम होने लगता है जिसके कारण विलेयता में कमी आती है।

प्रश्न 21.
Be की आयनन ऊर्जा B से अधिक है। क्यों?
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 56
Be में s – कक्षक पूर्ण कक्षक है। जबकि B में p कक्षक अपूर्ण कक्षक है। अर्धपूर्ण तथा पूर्ण कक्षक अपूर्ण कक्षक की तुलना में अधिक स्थायी होते हैं तथा इनमें से इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिये अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिये Be की आयनन ऊर्जा बोरॉन से अधिक है।

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प्रश्न 22.
सोडियम कार्बोनेट को अमोनिया सोडा विधि से कैसे बनाया जाता है ? इसके सिद्धान्त को लिखिये।
उत्तर:
इस विधि में पहले NaCl के सान्द्र विलयन को NH3 द्वारा संतृप्त करते हैं । जिससे अमोनियामय सोडियम क्लोराइड बनाता है।
इस अमोनियामय सोडियम क्लोराइड विलयन में CO2 गैस प्रवाहित करते हैं। जिससे अमोनियम बाइकार्बोनेट बनता है जो सोडियम क्लोराइड से क्रिया करके सोडियम बाइ-कार्बोनेट बनाता है।

  • NH3 + CO2 + H2O → NH4HCO3
  • NH4HCO3 + NaCl → NaHCO3 + NH4Cl

सोडियम बाइ-कार्बोनेट अल्प विलेय होने से अवक्षेप के रूप में नीचे बैठ जाता है। इसे छानकर निस्तापित करने पर सोडियम कार्बोनेट बना लेता है।
2NaHCO3 → Na2CO3 + H2O + CO2

प्रश्न 23.
सोडियम कार्बोनेट से –

  • सोडियम बाइ-कार्बोनेट
  • सोडियम हाइड्रॉक्साइड
  • सोडियम सिलीकेट कैसे प्राप्त करते हैं ?

उत्तर:

  • सोडियम कार्बोनेट के जलीय विलयन में CO2 गैस प्रवाहित करने पर सोडियम बाइकार्बोनेट का सफेद अवक्षेप प्राप्त होता है।
    NaCO3 + H2O + CO2 → 2NaHCO3
  • सोडियम कार्बोनेट को चूने के पानी के साथ उबालने पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड बनता है।
    Na4CO3 + Ca(OH)2 → 2NaOH + CaCO3
  • सोडियम कार्बोनेट को सिलिका के साथ गर्म करने पर सोडियम सिलिकेट बनता है।
    Na2CO3 + SiO2 → Na2SiO3 + CO2

प्रश्न 24.
बेकिंग सोडा क्या है ? इसे बनाने की विधि, गुण तथा उपयोग लिखिए।
उत्तर:
परिभाषा-सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट को बेकिंग सोडा कहते हैं तथा इसका सूत्र NaHCO, है।
बनाने की विधि –

  • अमोनिया सोडा विधि में सोडियम बाइ-कार्बोनेट माध्यमिक यौगिक के रूप में मिलता है।
    NH4HCO3 + NaCl + NaHCO3 + NH4Cl
  • सोडियम कार्बोनेट विलयन में CO2 गैस प्रवाहित करने पर सोडियम बाइकार्बोनेट बनता है।
    NaCO3 + H2O + CO2 → 2NaHCO3

गुण:
सफेद क्रिस्टलीय पदार्थ जल में अल्प विलेय, जलीय विलयन दुर्बल क्षारीय।
उपयोग:

  • बेकिंग पाउडर बनाने में
  • पेट की अम्लीयता कम करने की दवा में
  • आग बुझाने के यंत्र में।

प्रश्न 25.
सोडियम कार्बोनेट बनाने की ली-ब्लॉक विधि का संक्षिप्त विवरण देते हुये समझाइये कि ली ब्लॉक-विधि से सॉल्वे विधि अच्छी क्यों है ?
उत्तर:
ली-ब्लॉक प्रक्रम – यह प्रक्रम तीन पदों में पूर्ण होता है।
(1) नमक को सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म करने पर सोडियम सल्फेट (साल्ट केक) बनता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 34
(2) पिसे हुये साल्ट केक, चूने पत्थर और कोक के मिश्रण को गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट के साथ कैल्सियम सल्फाइड बनता है। CaCO3,Na2CO3 और Cas के इस मिश्रण को काली राख कहा जाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 35
(3) बारीक पिसी काली राख को जल के साथ उबालने पर Na2CO3 विलेय हो जाता है। अविलेय Cas और CaCO3 के छानकर अलग कर देते हैं। छनित को वाष्पित करके ठोस Na2CO3प्राप्त कर लेते हैं।

सॉल्वे विधि की ली-ब्लॉक से श्रेष्ठता –

  • सॉल्वे विधि सस्ती है।
  • सॉल्वे विधि में शुद्ध Na2CO3 बनता है।
  • सॉल्वे विधि में कोई हानिकारक धूम नहीं निकलते।
  • सॉल्वे विधि में बीच में NaHCO3 भी बनता है जो एक उपयोगी यौगिक है।

प्रश्न 26.
सोडियम कार्बोनेट की हारग्रीव-बर्ड सेल विधि का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
हारग्रीव बर्ड सेल में कार्बन का एनोड तथा छिद्रयुक्त कॉपर का कैथोड होता है तथा इन्हें ऐस्बेस्टॉस झिल्ली द्वारा पृथक् रखा जाता है। NaCl विलयन का वैद्युत अपघटन कराने पर सोडियम तथा क्लोरीन बनते हैं । सेल में ऐस्बेस्टॉस के बाहरी ओर भाप और CO2भेजी जाती है, जो Na से अभिक्रिया करके Na2CO3 बनाते हैं। इन विलयन का वाष्पन करने पर Na2CO3.10H2O प्राप्त होता है।

  • 2NaCl – 2Na+ + 2Cl
  • 2Na+ + 2e → 2Na
  • कैथोड पर – 2Na + 2H2O → 2NaOH + H2.
  • 2NaOH + CO2 →Na2CO3 + H2O

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 36

प्रश्न 27.
सोडियम हाइड्रॉक्साइड बनाने की नेल्सन सेल विधि का चित्र सहित वर्णन नमक का ग्रेफाइट का ऐनोड कीजिये।
उत्तर:
नेल्सन सेल इस्पात की टंकी में ऐस्बेस्टॉस बेलनाकार ऐस्बेस्टॉस की तह लगी इस्पात की की खोल छिद्रयुक्त नली लगाकर बनाया जाता है। इस्पात की छिद्र युक्त नली कैथोड का कार्य करती है। इस नली में NaCl विलयन भरकर इस्पात की नली में लटका इस्पात का कैथोड देते हैं। कार्बन की छड़ एनोड का कार्य करती है। विद्युत् अपघटन पर सोडियम आयन मुक्त होता है NaOH का विलयन जो ऐस्बेस्टॉस की तह को पार कर कैथोड पर मुक्त होने के बाद टंकी में आने वाली भाप से क्रिया कर NaOH बनाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 38

2NaCl ⇌ 2Na+ + 2Cl
कैथोड पर – 2Na+ + 2e →2Na
2Na + 2H2O → 2NaOH + H2
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प्रश्न 28.
बुझा हुआ चूना बनाने की विधि, गुण तथा उपयोग लिखिए।
उत्तर:
(1) अनबुझे चूने पर पानी का छिड़काव करने पर बुझा चूना प्राप्त होता है।
CaO + H2O → Ca(OH)2

(2) कैल्सियम लवणों पर क्षार की अभिक्रिया कराने पर Ca(OH)2 प्राप्त होता है।
Ca(NO3)2 + 2NaOH → Ca(OH)2 + 2NaNO3

गुण:
(1) इसे 400°C तक गर्म करने पर कैल्सियम ऑक्साइड बनता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 58
(2) चूने के पानी में CO2 प्रवाहित करने पर CaCO3 का सफेद दूधिया अवक्षेप बनता है।
Ca(OH)2 + CO2 → CaCO3 + H2 O
(3) चूने के पानी में देर तक CO2 प्रवाहित करने पर Ca(HCO3 )2 बनने के कारण दूधियापन समाप्त हो जाता है।
CaCO3 + CO2 + H2O → Ca(HCO3 )2
(4) शुष्क बुझे चूने पर Cl2 गैस प्रवाहित करने पर ब्लीचिंग पाउडर प्राप्त होता है।
Ca(OH)2 + Cl2 → CaoCl2 + H2 O
उपयोग:

  • कॉस्टिक सोडा तथा विरंजक चूर्ण के निर्माण में।
  • कोल गैस के शोधन में।
  • दीवारों पर सफेदी करने में।
  • अमोनिया के निर्माण में।

प्रश्न 29.
सोडा लाइम विधि से सोडियम हाइड्रॉक्साइड कैसे बनाते हैं ?
उत्तर:
सोडियम कार्बोनेट के 10 – 20% विलयन को बुझे हुये चूने की उचित मात्रा के साथ भाप के द्वारा 84-85°C ताप गर्म करने पर कैल्सियम कार्बोनेट एवं कास्टिक सोडा बनता है। कास्टिक सोडा विलयन में रहता है जबकि CaCO3 का सफेद अवक्षेप प्राप्त होता है। विलयन को छानकर वाष्पन करने या 98% शुद्ध ठोस कास्टिक सोडा प्राप्त होता है।
Na2 CO3 + Ca[OH]2 → 2NaOH + CaCO3

s-ब्लॉक तत्त्व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से प्रत्येक प्रेक्षण पर टिप्पणी लिखिए –
(a) जलीय विलयनों में क्षार धातु आयनों की गतिशीलता Li + > Na+ > K+ > Rb+ > Cs+
(b) लीथियम ऐसी एकमात्र क्षार धातु है, जो नाइट्राइट बनाती है।
(c) M2+(aq) + 2e →M(s) हेतु E° ( जहाँ, M = Ca, Sr या Ba) लगभग स्थिरांक है।
उत्तर:
(a) आयन का आकार जितना कम होता है, जलयोजन उतना ही अधिक होता है तथा आयन का जलयोजन जितना अधिक होता है, उसकी आयनिक गतिशीलता उतनी ही कम होती है। अतः जलयोजन क्षमता का क्रम निम्न होगा –
Li + > Na+ > K+ > Rb+ > Cs+
अतः आयनिक गतिशीलता विपरीत क्रम में बढ़ेगी
(b) अपने छोटे आकार के कारण, क्षार धातुओं में केवल लीथियम नाइट्राइड बनाती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 39
(c) M2+(aq) + 2e →M(s)
जहाँ, M = Ca, Sr, Ba के लिए E° का मान लगभग समान होता है। किसी भी M2+/ M इलेक्ट्रोड के लिए E° का मान निम्नलिखित तीन कारकों पर निर्भर करता है –

  • वाष्पन एन्थैल्पी
  • आयनन एन्थैल्पी
  • जलयोजन एन्थैल्पी।

चूँकि इन तीनों कारकों का संयुक्त प्रभाव Ca, Sr तथा Ba के लिए लगभग समान रहता है। अतः इन इलेक्ट्रोड विभव का मान भी लगभग स्थिर रहता है।

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प्रश्न 2.
लीथियम अपने समूह के अन्य सदस्यों से अपसामान्य व्यवहार दर्शाता है, क्यों?
उत्तर:
Li अपने समूह के अन्य सदस्यों से अपसामान्य व्यवहार दर्शाता है, क्योंकि –

  • इसके परमाणु तथा आयन का आकार छोटा होता है।
  • आयनन ऊर्जा उच्च है।
  • इलेक्ट्रॉनबंधुता उच्च है।
  • d – कक्षक अनुपस्थित है।

अपसामान्य व्यवहार:

  • Li अन्य क्षार-धातुओं की तुलना में अधिक कठोर है।
  • Li के गलनांक तथा क्वथनांक अन्य क्षार धातुओं की तुलना में उच्च है।
  • Liसहसंयोजी यौगिक बनाता है जबकि समूह के अन्य सदस्य आयनिक यौगिक बनाते हैं।
  • Li केवल ऑक्साइड बनाता है जबकि अन्य क्षार धातुएँ परॉक्साइड तथा सुपर ऑक्साइड भी बनाते हैं।
  • लीथियम हाइड्रॉक्साइड समूह के अन्य धातुओं के हाइड्राइड की तुलना में अधिक स्थायी है।
  • लीथियम हाइड्रॉक्साइड दुर्बल क्षार है जबकि अन्य क्षार धातुओं के हाइड्रॉक्साइड प्रबल क्षार है।
  • Li नाइट्रोजन के साथ संयोग कर नाइट्राइड बनाता है जबकि समूह की अन्य धातु नाइट्रोजन से संयोग नहीं करती है।
  • लीथियम नाइट्रेट गर्म करने पर विघटित होकर Li2O देता है जबकि अन्य क्षार धातु के नाइट्रेट गर्म करने पर अपघटित होकर नाइट्राइट देते हैं।
    1. 4LiNO3 → 2Li2O + 4NO2 + O2
    2. 2NaNO3 → 2NaNO2 + O2
  • Li2CO3 गर्म करने पर विघटित हो जाता है जबकि अन्य क्षार धातु के कार्बोनेट गर्म करने पर अपघटित नहीं होते हैं।
    MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 40

प्रश्न 3.
विकर्ण संबंध क्या है ? Li तथा Mg में विकर्ण संबंध लिखिये।
उत्तर:
विकर्ण संबंध:
द्वितीय आवर्त के कुछ तत्व तृतीय आवर्त के कुछ तत्व के साथ विकर्ण में समानता दर्शाते हैं जिसे विकर्ण संबंध कहते हैं।
Liतथा Mg में विकर्ण संबंध:

  • लीथियम की परमाणु त्रिज्या 1.34A तथा Mg की परमाणु त्रिज्या 1.36A लगभग बराबर है।
  • Liव Mg+2 की ध्रुवण क्षमता लगभग समान है।
  • Li व Mg दोनों कठोर होते हैं।
  • Li व Mg की ऋण विद्युतता (1.0 और 1.2) बराबर होती हैं।
  • Li तथा Mg दोनों के गलनांक तथा क्वथनांक उच्च हैं।
  • Li तथा Mg दोनों N, के साथ अभिक्रिया करके नाइट्राइड बनाते हैं।
  • Li तथा Mg दोनों ऑक्सीजन के साथ संयोग करके मोनो ऑक्साइड देते हैं।
  • Li तथा Mg दोनों जल को विघटित करके H2 देते हैं।
  • Li तथा Mg के कार्बोनेट गर्म करने पर CO2 गैस देते हैं।
  • LiOH तथा Mg (OH)2 दोनों दुर्बल क्षार हैं।।

प्रश्न 4.
क्षार धातु तथा क्षारीय मृदा धातु में क्या समानता है ?
उत्तर:

  • क्षार धातु तथा क्षारीय मृदा धातु प्रकृति में मुक्त अवस्था में प्राप्त नहीं होते।
  • क्षार धातु तथा क्षारीय मृदा धातु के ऑक्साइड जल में विलेय होकर प्रबल क्षार का निर्माण करते हैं।
  • क्षार धातु तथा क्षारीय मृदा धातु कोमल तथा चमकीली होती हैं।
  • इन्हें वायु में रखने पर इनकी सतह मलिन हो जाती है।
  • क्षार धातु तथा क्षारीय मृदा धातु (Be तथा Mg को छोड़कर) ज्वाला परीक्षण देते हैं।
  • क्षार धातु तथा क्षारीय मृदा धातु प्रबल अपचायक है।
  • क्षार धातु तथा क्षारीय मृदा धातु दोनों आयनिक यौगिक का निर्माण करते हैं।
  • दोनों के नाइट्रेट तथा हैलाइड जल में विलेय हैं।

प्रश्न 5.
Be अपने समूह के अन्य सदस्यों की तुलना में अपसामान्य व्यवहार दर्शाता है, क्यों?
उत्तर:
Be अपने समूह के अन्य सदस्यों से अपसामान्य व्यवहार दर्शाता है, क्योंकि

  • इसके परमाणु तथा आयन का आकार छोटा होता है।
  • आयनन ऊर्जा अत्यधिक उच्च होती है।
  • इलेक्ट्रॉनबंधुता उच्च होती है।
  • d-कक्षक की अनुपस्थिति।

अपसामान्य व्यवहार:

  • Be कठोर है जबकि इस समूह के अन्य सदस्य कोमल धातु होती है।
  • अन्य क्षारीय मृदा धातु की तुलना में Be के गलनांक तथा क्वथनांक उच्च होते हैं।
  • Be के यौगिक सहसंयोजी होते हैं। जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातु के यौगिक आयनिक होते हैं।
  • Be अम्लों से सरलता से H2 मुक्त नहीं करता जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातु शीघ्रता से H2 मुक्त करती है।
  • बेरीलियम कार्बाइड जल अभिक्रिया कराने पर मेथेन देता है, जबकि अन्य सदस्य एसीटिलीन देते हैं ।
    Be2C + 2H2O → 2BeO + CH4
    CaC2 + 2H20 → Ca(OH)2 + C2H,2
  • BeO उभयधर्मी है जबकि अन्य सदस्यों के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं।
  • Be व Mg को छोड़कर सभी सदस्य ज्वाला परीक्षण देते हैं।
  • Be गर्म करने पर भी जल के साथ कोई अभिक्रिया नहीं दर्शाता जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातु जल के साथ सरलता से अभिक्रिया दर्शाते हैं।
  • Be हाइड्रोजन के साथ मंद गति से अभिक्रिया करता है, जबकि अन्य शीघ्रता से अभिक्रिया करते हैं।

प्रश्न 6.
Be व AI में विकर्ण संबंध लिखिये।
उत्तर:

  • Be व AI की परमाणविक त्रिज्या तथा आयनिक त्रिज्या लगभग बराबर है।
  • दोनों सहसंयोजी यौगिक बनाते हैं।
  • दोनों धातुएँ दुर्बल विद्युती धनी प्रकृति के होते हैं।
  • दोनों धातुओं की सान्द्र HNO, से क्रिया कराने पर ये निष्क्रिय होते हैं।
  • दोनों शीघ्रता से हाइड्राइड नहीं बनाती।
  • Be तथा AI दोनों के ऑक्साइड उभयधर्मी प्रकृति के होते हैं।
    1. BeO +2HCl→ BeCl2 + H2O
    2. BeO + 2NaOH → Na2BeO2 + H2O
    3. Al2O3+6HCl → 2AlCl3 + 3H2O
    4.  Al203 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O
  • दोनों धातुओं के कार्बाइड जल से क्रिया करके मीथेन देते हैं।
    Be2C + 2H2O → 2BeO + CH2
    Al4C3 + 6H2O → 2AI2O3 + 3CH4
  • BeCl2 तथा AlCl3 द्विलक तथा बहुलक के रूप में मिलते हैं।
  • Be तथा A1 के ऑक्साइड दुर्बल क्षार हैं।
  • BeCl2तथा AlCl3 प्रबल लुईस अम्ल हैं।

प्रश्न 7.
सॉल्वे विधि द्वारा सोडियम कार्बोनेट का निर्माण किस प्रकार किया जाता है ? नामांकित रेखाचित्र खींचिए एवं समीकरण लिखिये।
उत्तर:
जब अमोनियामय NaCl विलयन में CO2 गैस प्रवाहित करते हैं तो अमोनियम बाइकार्बोनेट बनता है। जो NaCl से अभिक्रिया करके सोडियम बाइकार्बोनेट बनाता है।

  • NH3 + CO2 + H2O → NH4HCO3
  • NH4HCO3 + NaCl → NaHCO3 + NH4Cl

सोडियम बाइकार्बोनेट अल्प विलेय होने से अवक्षेपित होकर नीचे बैठ जाता है। इसे छानकर निस्तापित करने पर Na2co3 प्राप्त होता है।
2NaHCO3 → Na2CO3 + H2O + CO2

उपकरण एवं विधि –
(1) अमोनिया संतृप्त स्तम्भ – इसमें ब्राइन को अमोनिया से संतृप्त करते हैं। अमोनियामय ब्राइन बनता है तथा Ca एवं Mg की अशुद्धि अवक्षेपित होकर नीचे बैठ जाती है।
(2) छन्ना – Ca तथा Mg के अवक्षेप अमोनियामय ब्राइन से पृथक् हो जाते हैं।
(3) शीतकारक-अमोनियामय ब्राइन को ठण्डा करते हैं।
(4) कार्बोनेटीकरण स्तम्भ – अमोनियामय ब्राइन में चूने के भट्टी से प्राप्त CO2 प्रवाहित करने पर सोडियम बाइकार्बोनेट प्राप्त होता है।

  • 2NH3 + H2O + CO2 → (NH4)2 CO3
  • (NH4)2CO3CO2 + H2O → 2NH4HCO3
  • NH4HCO3 + NaCl → NaHCO3 + NaCl

(5) निर्वात् छन्ना – अविलेय NaHCO3 छनकर पृथक् हो जाता है। विलयन में NH4Cl तथा NH4HCO3 शेष रहता है। इसे पुनः प्राप्ति स्तम्भ में भेजा जाता है।
(6) चूने की भट्टी – चूने के पत्थर से CO2 गैस प्राप्त की जाती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 41
CaO जल के साथ क्रिया कर Ca(OH)2 बनाता है जो NH4Cl के साथ अभिक्रिया कर पुन: NH3 देता है।
CaO + H2O + Ca(OH)2
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 42
(7) अमोनिया पुनः प्राप्ति स्तम्भ – निर्वात् छन्ने से प्राप्त द्रव पर ऊष्मा तथा बुझे चूने की क्रिया से अमोनिया प्राप्त करते हैं।

  • NH4HCO3 → NH3 + H2O+CO
  • 2NH4Cl + Ca(OH)2 → CaCl2 + 2NH3 + 2H2O

(8) NaHCO4 का जारण – निर्वात् छन्ना से प्राप्त सोडियम बाइकार्बोनेट प्राप्त होता है। इसे बेलनाकार भट्टियों में गर्म करते हैं जिससे सोडियम कार्बोनेट प्राप्त होता है।
2NaHCO2 → Na2CO3 + H2O + CO2

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प्रश्न 8.
जब वर्ग – 1 की एक धातु को द्रव अमोनिया में घोला गया, तो निम्नलिखित प्रेक्षण प्राप्त हुए –
(a) प्रारंभ में नीला विलयन प्राप्त हुआ।
(b) विलयन को सान्द्र करने पर, नीला रंग-काँस्य-रंग में परिवर्तित हो गया। विलयन के नीले रंग की व्याख्या कीजिए। विलयन को कुछ समय तक रखने पर प्राप्त उत्पाद का नाम बताइए।
उत्तर:
(a) वर्ग-1 धातुओं को द्रव अमोनिया में घोलने पर निम्नलिखित अभिक्रिया प्राप्त हुई –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 43
विलयन का नीला रंग अमोनीकृत इलेक्ट्रॉनों के कारण होता है, जो दृश्य प्रकाश क्षेत्र की संगत् ऊर्जा का अवशोषण करके विलयन को नीला रंग प्रदान करता है।

(b) सान्द्र विलयन में, धातु आयन स्तर बन जाने के कारण नीला रंग, काँस्य रंग में बदल जाता है। नीला विलयन कुछ समय तक पड़े रहने पर हाइड्रोजन को मुक्त करता है तथा ऐमाइड बनते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 44

प्रश्न 9.
क्षार धातुओं के परॉक्साइड तथा सुपर ऑक्साइडों का स्थायित्व वर्ग में नीचे की ओर जाने पर घटता है। उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए ?
उत्तर:
परॉक्साइड तथा सुपर ऑक्साइडों का स्थायित्व धातु आयन का आकार बढ़ने पर बढ़ता है।
KO2 < RbO2 < CsO2
क्षार धातुओं का ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके विभिन्न ऑक्साइड बनाने का कारण, क्षार धातु के धनायन के परितः प्रबल धनात्मक क्षेत्र का निर्माण होता है। Li* का आकार सबसे छोटा है, जिसके कारण यह O2-आयन को पुन: O2 से क्रिया नहीं करने देता है। Na+ का आकार Li से बड़ा है अतः इसका धनात्मक Li+ के क्षेत्र से क्षीण होता है। K+ Rb+ Cs+जैसे बड़े आयन O2-2 आयन को पुन: 02 से क्रिया करके सुपरऑक्साइड (O2) बनाने देते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 45
पुनः धातु आयनों का आकार बढ़ने के साथ-साथ परॉक्साइडों तथा सुपरऑक्साइडों के स्थायित्व में भी वृद्धि होती है। इसका प्रमुख कारण जालक ऊर्जा प्रभाव के फलस्वरूप बड़े ऋणायनों का बड़े धनायनों द्वारा स्थायित्व प्रदान करना है।

प्रश्न 10.
सोडियम हाइड्रॉक्साइड प्राप्त करने की कास्टनर केलनर सेल का चित्र सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
इसमें एक लोहे की आयताकार टंकी होती है जो स्लेट की पट्टियों द्वारा तीन भागों में विभाजित रहती है। ये पट्टियाँ हौज पेंदे को छूती नहीं हैं बल्कि निचला भाग हौज के तले में रखे हुये पारे से ढंका रहता है। पारे की पर्त तीनों भागों को एक-दूसरे से पृथक् रखती है। पारे की पर्त यांत्रिक प्रबन्ध द्वारा इधर – उधर घूमती रहती है।

बाहरी कक्ष में NaCl का विलयन भरा रहता है, जिसमें ग्रेफाइट की छड़ लगी रहती है। ये एनोड का कार्य करती है। बीच ऐनोड वाले भाग में NaOH का तनु विलयन भरा रहता है, जिसमें लोहे की छड़ का बना कैथोड लटका – रहता है। विद्युत् धारा प्रवाहित करने पर पारा प्रेरण बीच का कक्ष एनोड का तथा बाहरी कक्ष कैथोड का कार्य करते हैं।

बाहरी कक्ष में एनोड पर Cl2 मुक्त होती है। सोडियम कैथोड पर मुक्त होकर पारे के साथ सोडियम अमलगम बना लेता है। सोडियम अमलगम उत्क्रेन्द्रीय पट्टियों की सहायता से सेल के मध्य भाग में आता है । यहाँ पर सोडियम अमलगम ऐनोड का कार्य करता है और आयरन की छड़ कैथोड का। इस भाग में NaOH भरा रहता है। विद्युत् धारा प्रवाहित करने पर OH आयन एनोड पर विसर्जित होते हैं तथा अमलगम में उपस्थित सोडियम से क्रिया कर NaOH बनाते हैं तथा H2 गैस मुक्त करते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 46

अभिक्रिया-बाहरी कक्ष में –
2NaCl ⇄ 2Na+ + 2Cl

कैथोड पर –
2Na+ + 2e → 2Na
2Na + xHg → HgxNa2
एनोड पर –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 66
मध्य कक्ष में –
NaOH ⇄  Na+ + OH

कैथोड पर –
2NaHg + 2H2O → 2NaOH + 2Hg + H2
Na+ + e → Na
2Na + 2H2O → 2NaOH + H2

एनोड पर –
2OH → 2OH + 2e
Hgx Na2 + 2OH → 2NaOH + xHg

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प्रश्न 11.
जब कैल्सियम के यौगिक –
(A) में जल मिलाया जाता है तो यौगिक (B) के विलयन का निर्माण होता है। इस विलयन में कार्बन डाइ-ऑक्साइड प्रवाहित करने पर यह यौगिक (C) बनने के कारण दुधिया हो जाता है। कार्बन डाइ-ऑक्साइड की अधिक मात्रा में प्रवाहित करने पर, यौगिक (D) के निर्माण के कारण यह दुधियापन लुप्त हो जाता है तथा यौगिक (A), (B), (C) तथा (D) को पहचानिए तथा बताइए कि अंतिम पद में दुधियापन क्यों समाप्त हो जाता है ?
उत्तर:
यौगिक (B) के विलयन में CO2 प्रवाहित करने पर विलयन का दुधिया होना संकेत करता है कि यौगिक (B) बुझा हुआ चूना [Ca(OH)2] है तथा यौगिक (C) कैल्सियम कार्बोनेट है। चूँकि यौगिक (B), यौगिक (A) में H2O को मिलाने से प्राप्त होता है। अतः यौगिक (A) में बिना बुझा चूना (CaO) है। संगत अभिक्रियाएँ निम्नलखित हैं –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 47
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 48
(iii) CO2 को अधिकता में प्रवाहित करने पर, विलेय कैल्सियम बाइकार्बोनेट बनाने के कारण दुधियापन लुप्त हो जाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 49

प्रश्न 12.
कैल्सियम ऑक्साइड बनाने की विधि, रासायनिक गुण तथा उपयोग लिखिये।
उत्तर:
चूने के पत्थर को गर्म करके कैल्सियम ऑक्साइड बनाते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 50
यह अभिक्रिया उत्क्रमणीय है। अतः चूना प्राप्त करने हेतु CO2 को जल्दी-जल्दी-हटाते रहना आवश्यक है। अभिक्रिया का-ताप 900°C होना चाहिये क्योंकि अधिक ताप पर मिट्टी और चूने की अभिक्रिया से गलनीय सिलिकेट बन जाता है। भट्टी में बाजू से दो अँगीठियों में कोयला जलाया जाता है। ऊपर से धीरे-धीरे चूने का पत्थर डालते रहते हैं, जो नीचे आते-आते अपघटित हो जाता है। CO2 गैस ऊपरी भाग से बाहर निकलती है। इसे द्रवित कर सिलेण्डरों में भर लिया जाता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 51
रासायनिक गुण:
(1) नम वायु से नमी तथा CO2 सोखकर Ca(OH)2 तथा CaCO3 बनाता है।

  • CaO + H2O Ạ Ca(OH)2
  • CaO + CO2 CaCO2

(2) यह एक प्रबल क्षारीय ऑक्साइड है जो अम्लों के साथ अभिक्रिया कर लवण बनाता है।

  • CaO + 2HCl → CaCl2 + H2O
  • Cao + SiO2→ CaSiO3

(3) अमोनियम लवणों के साथ गर्म करने पर NH, गैस बनती है।
2NH4Cl + CaO → CaCl2 + H2O + 2NH2
(4) कार्बन और कैल्सियम ऑक्साइड को गर्म करने से CaC2 प्राप्त होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 52
उपयोग:

  • धातुकर्म के गालक के रूप में
  • ऐल्कोहॉल तथा गैसों को सुखाने में
  • लाइम लाइट उत्पन्न करने के लिये
  • कोल गैस को शुद्ध करने में
  • कागज बनाने में।

प्रश्न 13.
वर्ग-1 के एक तत्व का आयन कोशिकाओं में शिरा-संकेतों के संचरण, शर्करा तथा एमीनो अम्लों के प्रवाह में सहायक है। यह तत्व ज्वाला परीक्षण में ज्वाला के साथ पीला रंग देता है तथा
ऑक्सीजन के साथ ऑक्साइड तथा परॉक्साइड बनाता है।तत्व की पहचान कीजिए तथा इसके परॉक्साइड निर्माण की रासायनिक समीकरणों को लिखिए। यह तत्व ज्वाला के साथ रंग क्यों देता है ?
उत्तर:
ज्वाला परीक्षण में पीले रंग की ज्वाला दर्शाता है कि धातु सोडियम ही होनी चाहिए। यह 0, के साथ क्रिया करके सोडियम परॉक्साइड Na2O2 तथा सोडियम ऑक्साइड, Nao का मिश्रण देता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व - 53
सोडियम की आयनन एन्थैल्पी कम होती है। जब सोडियम धातु या इसके लवण को बुन्सन ज्वाला में गर्म किया जाता है, तब ज्वाला की ऊष्मा बाह्यतम इलेक्ट्रॉन को उच्च ऊर्जा स्तर पर उत्तेजित कर देती है तब ये इलेक्ट्रॉन पुनः अपनी तलस्थ / आद्य अवस्था में आते हैं तो दृश्य क्षेत्र में विकिरण उत्सर्जन के कारण ज्वाला को पीला रंग प्रदान करते हैं।

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प्रश्न 14.
निम्नलिखित की महत्ता बताइए –
(a) चूना पत्थर
(b) सीमेंट
(c) प्लास्टर ऑफ पेरिस।
उत्तर:
(a) चूना पत्थर (CaCO3):

  • इसे मैग्नीशियम कार्बोनेट के साथ आयरन जैसी धातुओं के निष्कर्षण में गालक के रूप में प्रयोग करते हैं।
  • इसका प्रयोग ऐन्टासिड, टूथपेस्ट में अपघर्षक के रूप में, च्यूइंगम में संघटक तथा सौन्दर्य प्रसाधनों में रूपक के रूप में भी करते हैं।

(b) सीमेंट:

  • यह भवन निर्माण हेतु एक महत्वपूर्ण यौगिक है।
  • इसका उपयोग कांक्रीट, प्रबलित कांक्रीट, प्लास्टरिंग, पुल-निर्माण, भवन-निर्माण आदि में किया जाता है।

(c) प्लास्टर ऑफ पेरिस:

  • इसका उपयोग भवन निर्माण तथा टूटी हुई हड्डियों के प्लास्टर में होता है।
  • इसका उपयोग दंत-चिकित्सा, अलंकरण कार्य तथा मूर्तियों एवं अर्द्धप्रतिमाओं को बनाने में भी होता है।

MP Board Class 11th Special Hindi पद्य साहित्य का इतिहास

MP Board Class 11th Special Hindi पद्य साहित्य का इतिहास

वीरगाथा काल (आदिकाल)

समाज की विविध मनोवृत्ति की झलक हमें यथातथ्य रूप में साहित्य में दिखाई देती है। परिवर्तनशील मन-अवस्था का चित्रण विविध समय में विविध रूपों में होता रहा है। जिस काल-विशेष में जिस भावना-विशेष की प्रधानता रही, उसके आधार पर इतिहासकारों ने उस काल का नामकरण या वर्गीकरण कर दिया। विक्रम सम्वत् 1050 से 1375 तक हिन्दी साहित्य में को झकार एवं कोलाहल विद्यमान है। इस काल में एकता के अभाव में युद्धों की प्रधानता रही। उस समय के कवियों में वीरभाव के प्रति विशेष आग्रह रहा, किन्तु ये कवि शृंगार रस से भी विमुख नहीं थे। इस काल के प्रमुख ग्रन्थ निम्नांकित हैं-

  1. विजयपाल रासो,
  2. हम्मीर रासो,
  3. कीर्तिलता,
  4. कीर्तिपताका,
  5. खुमान रासो,
  6. बीसलदेव रासो,
  7. पृथ्वीराज रासो,
  8. जयचन्द्र प्रकाश,
  9. जयमयंक चन्द्रिका,
  10. खुसरो की पहेलियाँ,
  11. विद्यापति की पदावलियाँ,
  12. परमाल रासो।

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इन ग्रन्थों में अधिकांश वीरगाथाएँ हैं, अतएव इस काल का नामकरण वीरगाथा काल हुआ। वीरगाथाएँ मुक्तक एवं प्रबन्ध काव्य के रूप में लिखी गयीं। जगनिक कवि का परमाल रासो’ या आल्हा एवं नरपतिनाल्ह का ‘बीसलदेव रासो’ मुक्तक हैं। प्रबन्ध काव्य में दलपति विजय का ‘खुमान रासो’, चन्दबरदाई का ‘पृथ्वीराज रासो’ बहुत प्रसिद्ध है। वीरगाथा काल के प्रमुख विषय शौर्य, प्रेम और कीर्ति रहे, जो अपभ्रंश और प्राचीन हिन्दी में वीर और श्रृंगार रस के माध्यम से अभिव्यक्त हुए। इस काल के प्रमुख छन्द थे-दूहा (दोहा), गाथा, त्रोटक, तोमर, छप्पय, आल्हा, वीर और आर्या। कवि लोग प्रायः राज्याश्रित रहते थे तथा अपने राजाओं की प्रशंसा गा-गाकर किया करते थे। वे भाट और चारण कहलाते थे। अपने राजाओं की शौर्य-गाथा का वर्णन करते-करते कवि अतिशयोक्ति एवं वर्णन की नीरस सूची से नहीं बच पाया। अतएव इन रचनाओं में राष्ट्रीय भावना एवं ऐतिहासिक प्रामाणिकता का अभाव ही है। वीरगाथाकाल में जिन युद्धों का वर्णन है, वे पारस्परिक वैमनस्य एवं सुन्दरियों को लेकर होते थे। अतएव कवि सुन्दर नायिकाओं का वर्णन कर श्रृंगार रस का समावेश कर लिया करते थे। इस काल की भाषा सर्वथा भावानुरूप थी। डिंगल भाषा में हुए अभूतपूर्व युद्ध-वर्णन ही वीरगाथा काल को चमत्कृत किये हुए हैं। छन्दों का प्रयोग रसानुभूति एवं भावाभिव्यंजना में सहायक है। इस काल का प्रिय अलंकार यद्यपि अतिशयोक्ति और अनुप्रास रहा है, फिर भी उपमा, रूपक, सन्देह, उत्प्रेक्षा का प्रयोग भी उपयुक्त व सफल है। इस युग की प्रमुख धारणा मनोरंजन की थी। विद्यापति की पदावलियाँ भक्ति-शृंगार से ओत-प्रोत हैं। सिद्धों और नाथों की रचनाओं में भक्ति के तत्व विद्यमान थे। यही हिन्दी का आदिकाल है।

वीरगाथा काल (आदिकाल) की प्रमुख प्रवृत्तियाँ और विशेषताएँ

  1. राज्याश्रित चारण कवि,
  2. आश्रयदाता राजाओं की प्रशंसा,
  3. सजीव युद्ध वर्णन,
  4. चरित काव्यों की रचना,
  5. वीर तथा श्रृंगार रसों की प्रधानता,
  6. राजस्थानी, अपभ्रंश खड़ी बोली तथा मैथिली मिश्रित भाषा,
  7. छप्पय और दोहा छन्द।
  • प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ

कवि – रचनाएँ
दलपति विजय – खुमान रासो
नरपति नाल्ह – बीसलदेव रासो
चन्दबरदाई – पृथ्वीराज रासो
जगनिक – परमाल रासो (आल्हा खण्ड)
अमीर खुसरो – पहेलियाँ, दोहे
नल्लसिंह – विजयपाल रासो
विद्यापति – कीर्तिलता, पदावली

भक्तिकाल
भक्तिकाल सम्वत् 1375 से प्रारम्भ होकर सम्वत् 1700 तक समाप्त हुआ। वीरगाथा काल की युद्ध विभीषिका से त्रस्त मानव हृदय शान्ति की खोज में भटकने लगा। हिन्दू-मुस्लिम के मध्य विद्वेष की भावना को दूर कर उन्हें एकता के सूत्र में आबद्ध करने हेतु पण्डितों और मौलवियों दोनों ने ही जनता में भक्ति का प्रसार कर असीम की छत्रछाया की ओर संकेत किया। धर्म ने मस्तिष्क से हटकर हृदय में आश्रय लिया, वह भावाकुल हो उठा। बस, इसी बिन्दु से भक्ति का उन्मेष हुआ। इसलिए इस युग का नाम भक्तिकाल पड़ा। सगुण भक्ति का प्रतिपादन हुआ, जो आगे चलकर राम-भक्ति और कृष्ण-भक्ति दो धाराओं में विभाजित हो गयी। दूसरी ओर ब्रह्म उपासना या एकेश्वरवाद के प्रतिपादकों ने अपने काव्य में एक ऐसे ईश्वर की उपासना की, जो हिन्दू तथा मुसलमानों को समान रूप से मान्य हो। इस निर्गुण धारा की भी ज्ञानमार्गी और प्रेममार्गी दो शाखाएँ हुईं।

(1) भक्तिकालीन निर्गुण प्रेममार्गी शाखा-इस शाखा में प्रेम-प्रधान निराकार ब्रह्म की उपासना का प्राधान्य था। इसमें प्रबन्ध काव्यों की रचना हुई, जिसमें मलिक मुहम्मद जायसी का ‘पद्मावत’ ग्रन्थ बहुत प्रसिद्ध हुआ। प्रमुख छन्द, सोरठा, दोहा, चौपाई हैं। अवधी और फारसी भाषा का प्रयोग है तथा मसनवी शैली है। इस काल में सूफी कवियों ने आत्मा को प्रियतम मानकर हिन्दू प्रेम कहानियों का वर्णन किया है। हिन्दू-मुस्लिम एकता इस शाखा की प्रमुखता है। कवि कुतुबन, मंझन, उस्मान एवं जायसी ने प्रेमगाथाओं को काव्य-रूप में गूंथ दिया। पद्मावत के अतिरिक्त स्वप्नवती, मुग्धावती एवं मृगावती आदि प्रमुख काव्य ग्रन्थ हैं। मधु मालती कवि मंझन का सुन्दर प्रेम काव्य है। ये सभी काव्य श्रृंगार रस के भण्डार हैं जिसके संयोग और विप्रलम्भ दो तट हैं। इस काल के काव्य ग्रन्थ उत्कृष्ट एवं अलौकिक प्रेम तत्व से परिपूर्ण हैं। इन सूफी काव्यों की रचना-शैली दोहा-चौपाई है और इसमें कथा को आदि से अन्त तक लिखा जाता है। इनकी भाषा-शैली बड़ी ही हृदयस्पर्शी एवं भावभीनी है। इस काल के सभी महाकाव्य प्रेम कथाओं पर आधारित हैं, जो शास्त्रीय कसौटी पर खरे उतरते हैं। इन काव्यों में कवि ने कल्पना की चादर ओढ़कर इतिहास की पृष्ठभूमि पर लेखनी चलाकर भावपूर्ण चित्र अंकित किए हैं।

3 इस काल के काव्य में कला-पक्ष के अतिरिक्त भाव-पक्ष भी सबल है। श्रृंगार रस के दोनों पक्षों पर कवियों ने समान ध्यान दिया है, किन्तु रस-प्रयोग में शृंगार में कहीं-कहीं जुगुप्सा का भाव मिलता है। इसके अतिरिक्त करुण, रौद्र के भी दर्शन होते हैं। इस काल में यदि किसी रस का अभाव है, तो वह है-वात्सल्य। इस काल की भाषा ठेठ अवधी है। काव्य में रहस्यवाद, एकेश्वरवाद के समन्वय के दर्शन होते हैं, जो अत्यन्त प्रभावशाली है।

(2) भक्तिकालीन ज्ञानमार्गी निर्गुण शाखा–भक्ति की इस शाखा में केवल ज्ञानप्रधान निराकार ब्रह्म की उपासना की प्रधानता है। इसमें प्रायः मुक्तक काव्य रचे गये। दोहा और पद आदि स्फुट छन्दों का प्रयोग हुआ है। भाषा खिचड़ी एवं सधुक्कड़ी है। भारतीय दर्शन के आधार पर आत्मा को प्रियतमा मानकर आत्मा-परमात्मा के विरह-मिलन का वर्णन है। राम और रहीम की एकता का प्रतिपादन है। इस काल में आडम्बरों का घोर विरोध किया गया और हिन्दू-मुस्लिम एकता पर जोर दिया गया। इस समय का प्रमुख रस शान्त रस है।।

इस बात की प्रमुख विशेषता एक ऐसे ईश्वर की उपासना है जो हिन्दू-मुस्लिम दोनों को समान रूप से मान्य हो। इन कवियों के मतानुसार ईश्वर का वास आत्मा में है, न कि बाहरी साज-सज्जा में। ईश्वर के केवल तात्विक स्वरूप की ही मीमांसा की गई है। इस काल की एक और विशेषता है-‘रहस्यवाद’। इस शाखा के कवि साम्प्रदायिकता और वर्णाश्रम धर्म के विरोधी थे। वे इन्द्रिय-निग्रह और साधना पर जोर देते थे।

इस काल के मुख्य कवि कबीरदास हैं। इनके अतिरिक्त अन्य मुख्य कवि सुन्दरलाल, मलूकदास, गुरुनानक, रैदास, दादू दयाल एवं पलटू साहब हैं।

इस शाखा के कवि सन्त कवि कहलाते हैं, क्योंकि उनके काव्यों की प्रमुख विशेषता उसमें निहित उदात्त भावों की प्रधानता है। जिसका न केवल विशुद्ध जीवन के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध है, अपितु जिनकी अभिव्यक्ति भी प्रधानतः ऐसे कवियों के द्वारा की गयी-जिन्होंने स्वानुभूति की प्रयोगशाला में उनका मूल्यांकन एवं सत्यापन कर लिया था।

(3) भक्तिकालीन सगुण रामभक्ति शाखा [2008]-इस काल में भगवान श्रीराम के सत्य, शील एवं सौन्दर्य प्रधान अवतार की उपासना की गयी है। राम के सम्पूर्ण जीवन चरित का आधार लेकर इस काल में प्रबन्ध एवं मुक्तक काव्य दोनों प्रकार के काव्यों की रचना की गयी। इस काल में प्रमुख रूप से दोनों अवधी और ब्रजभाषा का उपयोग हआ और कई छन्दों में रचनाएँ . हुईं। दोहा, चौपाई,कवित्त,सवैया, बरवै,रोला, तोमर, त्रोटक,गीतिका,हरिगीतिका और पद आदि प्रमख छन्द हैं। तत्कालीन कवियों ने मर्यादित भक्ति एवं भारतीय संस्कृति के पुनःनिर्माण की भावना के साथ रामकथा का वर्णन किया। कवियों की विनय भावना में परम दैन्य के दर्शन होते हैं। इस काल के काव्य में सभी रसों का समावेश हुआ,किन्तु शान्त और श्रृंगार प्रधान रस हैं। रामचरितमानस’ इस काल का सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थ है। इसके रचयिता तुलसीदास हैं। तुलसीदास ही इस काल के प्रमुख कवि हैं। इसके अतिरिक्त नाभादास, प्राणचन्द चौहान, हृदयराम, रघुराज सिंह और केशवदास के नाम उल्लेखनीय हैं। रामभक्ति शाखा के प्रवर्तक रामानन्द हैं। उन्होंने रामानुजाचार्य की शिष्य परम्परा में भक्ति को ब्रह्म प्राप्ति का परम साधन बताया और सभी रामाश्रयी भक्तिकालीन कवियों ने इसी भक्ति मार्ग को अपनाया। उन्होंने भगवान राम की लोकमंगलकारी शक्ति का निरूपण किया। दास्य रूप में रामभक्ति का प्रारम्भ काव्य में तुलसीदास द्वारा ही हुआ।

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अन्य कवियों ने भी लिखा है, किन्तु तुलसी ने राम के बारे में इतना अधिक लिखकर राम-जीवन के सभी पक्षों का उद्घाटन किया कि और लोगों को लिखने के लिए कुछ भी शेषनरहा। रामकाव्य की मुख्य तीन विशेषताएँ हैं। वैष्णव धर्म को सामने रखकर भक्ति के सेव्य-सेवक रूप पर ही ध्यान दिया गया। इस काल में ज्ञान और कर्म से भक्ति की श्रेष्ठता दर्शायी है और जो सबसे प्रभावशाली बना है, वह है रचना-शैली। रामभक्त कवि किसी एक परिपाटी में नहीं बँधे। उन्होंने विभिन्न रचना-शैलियों का प्रयोग किया है। दृश्य, श्रव्य, मुक्तक और प्रबन्ध काव्य सभी की रचना हुई है। इस काल का काव्य स्वतन्त्र वातावरण में विकसित हुआ। कवियों पर किसी राजा का नियन्त्रण नहीं था, अतएव किसी की प्रशंसा करना या धनोपार्जन करना कवियों का उद्देश्य नहीं था। कवियों ने राम को अपना इष्टदेव माना और अपने हृदय का उल्लास, विनय तथा आत्म-निवेदन करना उनका मुख्य उद्देश्य था। अत: कवियों की कविता स्वान्तः सुखाय है। परम प्रतिभासम्पन्न, आदर्श भक्त एवं लोकनायक तुलसी ने लोक कल्याणार्थ कविता की रचना की। उन्होंने बारम्बार अपने काव्य में ज्ञान से भक्ति की श्रेष्ठता प्रतिपादित की है। इस काल के काव्य का भाव-पक्ष और कला-पक्षदोनों ही सबल हैं। काव्य में अति स्वाभाविक और सौन्दर्यवर्द्धक अलंकार योजना है, जिससे यत्र-तत्र सभी रस प्रवाहित हैं।

(4) भक्तिकालीन सगुण कृष्णभक्ति शाखा-कृष्णभक्ति शाखा में भगवान विष्णु के कृष्णावतार की उपासना है। इस शाखा में केवल मुक्तक काव्यों की रचना हुई। भगवान कृष्ण की भक्ति के सभी पद ब्रजभाषा की माधुरी से ओत-प्रोत हैं। केवल ‘पद’ छन्द का ही प्रयोग हुआ। इन पदों का मुख्य विषय-राधाकृष्ण की प्रेमपूर्ण उपासना है, किन्तु सूरदास ने कृष्ण की बाल-लीलाओं का भी वर्णन किया है, जो स्वाभाविक और हृदयस्पर्शी है। इस काल के प्रमुख रस भंगार के दोनों पक्ष और वात्सल्य रस हैं। प्रमुख कवि सूरदास द्वारा रचित सूरसागर ही प्रमुख ग्रन्थ है।

कृष्णभक्ति काव्य के प्रमुख प्रवर्तक बल्लभाचार्य हैं। इन्होंने कृष्णभक्ति में माधुर्य भाव को ही प्रधानता दी है। माधुर्य भाव की प्रधानता होने से कृष्ण के केवल लोकरंजक रूप का ही प्राधान्य है। किन्तु कहीं लोकरक्षक रूप का भी आभास होता है। इस काल में केवल मुक्तक रचनाएँ हुई हैं और प्रबन्ध काव्य का सर्वथा अभाव है। किन्तु ये मुक्तक भी इतने मर्मस्पर्शी हैं कि एक-एक पद पढ़कर पाठक भावानुकूल हो जाते हैं, जो स्मृति पटल में न जाने कितना विस्तार कल्पना के लिए छोड़ जाते हैं। सर्वत्र स्वतन्त्र प्रेम की झलक प्राप्त होती है, इसलिए लोक-जीवन की प्रायः अवहेलना ही हो गयी है। यदि कहीं लोक-जीवन का सामान्य-सा चित्रण है भी तो वह रस की पुष्टि के अर्थ में चित्रित है। पद-शैली में संगीत की विभिन्न राग-रागनियों का अच्छा समायोजन है। इसी से कृष्णभक्ति के अधिक पद गाये जाते हैं, जिसमें उत्कृष्ट माधुर्य भावना है। इस मधुरता को रक्षित करने के लिए ही मानो कृष्ण भक्त कवियों ने केवल एकमात्र माधुरी ब्रजभाषा को अपनाया है। अलंकारों का सुन्दर स्वाभाविक प्रयोग है।

कृष्णभक्ति काल की रचनाओं में एक और बात जो ध्यान आकर्षित करती है, वह है-कृष्ण काव्य की व्यंग्यात्मक उपालम्भ शैली। विप्रलम्भ श्रृंगार इस काल में अपने चरमोत्कर्ष को प्राप्त कर चुका है। भ्रमर गीतों की अनूठी परम्परा इस रसराज की पोषक है। केवल मीराबाई ने कृष्ण की एकभाव से प्रेमिका के रूप में उपासना की है।

कृष्णकाव्य के प्रसंग में हमें ‘अष्टछाप’ को विस्मृत नहीं करना चाहिए। बल्लभाचार्य के पश्चात् उनके उत्तराधिकारी विट्ठलनाथजी थे। उनके समय तक कृष्ण की पुष्टिमार्ग के सिद्धान्तानुसार भक्ति करने वाले कवि अनेक थे। उन कवियों में से जिन आठ कवियों के काव्य का संग्रह विट्ठलनाथ ने किया, वह ‘अष्टछाप’ कहलाता है।

ये आठ कवि हैं-

  1. सूरदास,
  2. नन्ददास,
  3. कुम्भनदास,
  4. परमानन्ददास,
  5. चतुर्भुजदास,
  6. छीत स्वामी,
  7. गोविन्द स्वामी और
  8. कृष्णदास।

सूरदास व नन्ददास इनमें श्रेष्ठ हैं। इसके अतिरिक्त कुछ कवि और भी हुए, जिन्होंने स्वतन्त्र रूप से कृष्णभक्ति की कविताएँ लिखीं। मीराबाई, रसखान, नरोत्तमदास आदि की कृष्ण सम्बन्धी कविताएँ भावों की व्यंजना से पूर्ण हैं। रसखान मुस्लिम कवि थे, जो अपनी तन्मयता के लिए प्रसिद्ध थे। ‘सुजान रसखान’ और ‘प्रेमवाटिका’ इनके दो ग्रन्थ हैं। मीराबाई जोधपुर की राजकुमारी थीं। ये कृष्ण-प्रेम की मतवाली थीं और गा-गाकर नाचा करती थीं। ‘मीरा की पदावली’ में इनके पदों का संग्रह है। इनकी प्रेमवाणी हिन्दी-साहित्य में अनुपम है।

नरोत्तमदास का ‘सुदामा चरित्र’ ब्रजभाषा का खण्डकाव्य है।

जिस प्रकार राम चरित्र का गान करने वाले भक्त कवियों में गोस्वामी तुलसीदासजी का स्थान सर्वश्रेष्ठ है। उसी प्रकार कृष्ण चरित्र गाने वालों में भक्त कवि सूरदासजी का शीर्षस्थ स्थान है। इन्हीं के काव्यों की सरसता से हिन्दी काव्य का स्रोत अविरल प्रवाहित है। सूरदास जन्मान्ध थे; किन्तु कृष्ण की बाल-लीलाओं का जो सजीव वर्णन है, वह कोई आँख वाला कवि भी नहीं कर सकता। जीवन भर सूरदास ने कृष्ण लीलाओं का गायन किया। ‘सूरसागर’, ‘सूरसारावली’ एवं ‘साहित्य लहरी’ इनके रचित ग्रन्थ हैं। बताया जाता है कि सूर ने सवा लाख पदों की रचना की। सूरदास वात्सल्य रस के सम्राट कहे जाते हैं। अंगार और शान्त रसों का भी वर्णन किया है। सूरदास बालक बनकर एक सखा की भाँति बालकृष्ण के साथ खेलते हैं। इनकी भक्ति सखा भाव की है। विनय के पदों में सूर ने सच्चे मानव जीवन की छवि अंकित की है। वह मार्मिक चित्रण शान्त रस का उत्कृष्ट उदाहरण है। सूर एक भक्ति कवि हैं। उनके काव्य का मुख्य गुण है सरलता और स्वाभाविकता। श्रृंगार के विप्रलम्भ पक्ष का अद्वितीय वर्णन भ्रमरगीत में है। इसमें सन्देह नहीं कि कृष्ण परम्परा में कवियों ने गीतिकाव्य को इतना सम्पन्न किया जो अक्षय है। यद्यपि रचनाएँ एकांगी हैं, उनमें बहुरूपता नहीं, तब भी सरस हैं।

(5) भक्तिकाल की स्फुट शाखा-भक्ति का जो प्रवाह उमड़ा वह राजाओं और शासकों के प्रोत्साहन पर अवलम्बित नहीं था। वह जनता की प्रवृत्ति का द्योतक था। उसी प्रवाहकाल के बीच अकबर जैसे शासक द्वारा स्थापित शान्तिसुख के परिणामस्वरूप जो रचनाएँ लिखी गईं वह दूसरे प्रकार की थीं। नरहरि, गंग, रहीम जैसे सुकवि और तानसेन जैसे गायक अकबरी दरबार की शोभा बढ़ाते थे। इस काल में मुक्तक कविता की रचना हुई दोहा, कवित्त आदि स्फुट छन्दों का प्रयोग हुआ। ब्रजभाषा के साथ अन्य बोलियों के शब्दों का भी निर्माण हुआ। स्फुट रूप में सभी रसों का समावेश हुआ। दरबारी कविता, नीति कविता, रीति कविता और प्रकृति की कविताएँ लिखी गयीं। प्रमुख कवि रहीम, गंग, सेनापति आदि थे। इनके अतिरिक्त कृपाराम, नरहरि, बन्दीजन, नरोत्तमदास, आलम, टोडरमल, बीरबल, मनोहर, बलभद्र मिश्र, जमाल, केशवदास, मुबारक, बनारसीदास, पुहुकर, लालचन्द या लक्षोदय और सुन्दर आदि कवियों का उल्लेख भी आचार्य शुक्ल ने अपने इतिहास ग्रन्थ में किया है।

रहीम अरबी, फारसी और संस्कृत के प्रकाण्ड पण्डित थे। इन्होंने चार ग्रन्थ लिखे। गंग अकबर के दरबारी कवि थे। सेनापति ने ‘कविता रत्नाकर’ और ‘काव्य कल्पद्रुम’ दो ग्रन्थ लिखे। ‘ऋतु वर्णन ‘हिन्दी साहित्य में अद्वितीय है। केशवदास भक्तिकाल और रीतिकाल के बीच की कड़ी हैं।

  • भक्तिकाल की प्रमुख प्रवृत्तियाँ और विशेषताएँ
  1. ईश्वरभक्ति,
  2. गुरु महिमा,
  3. सादा जीवन,
  4. समन्वय की भावना,
  5. राज्याश्रय से मुक्ति,
  6. विविध रसों का परिपाक,
  7. भाषा की विविधता।

प्रमुख कवि एवं उनकी रचनाएँ
MP Board Class 11th Special Hindi पद्य साहित्य का इतिहास 1

रीतिकाल रीतिकाल का समय सम्वत् 1700 से सम्वत् 1900 तक (सन् 1643 से 1843 ई.) तक है। काल की काव्यगत रीतिबद्धता की मूल प्रवृत्ति के कारण इसे रीतिकाल कहा है।

इस काल में मुगलों का क्रमशः पतन हो रहा था, जिसके फलस्वरूप देश में छोटे-छोटे राजाओं ने अपनी रियासतें स्थापित करना शुरू कर दिया। इन राजाओं के आश्रय में कवि रहा करते थे। कवि अपने आश्रयदाताओं के मनोरंजनार्थ काव्य की रचना करते थे। इन कवियों को विषय भक्तिकाल से सहज रूप में मिल गये थे। भक्तिकाल के अलौकिक और आध्यात्मिक आराध्य राधाकृष्ण को रीतिकालीन कवियों ने बौद्धिक स्तर पर उनके लौकिक रूप को अपनी काव्य रचना में स्थान दिया। इस काल में रस, छन्द, अलंकार के शास्त्रीय पक्ष को विशेष बल मिला। रस में श्रृंगार रस के संयोग और वियोग दोनों बहिर्मुखी रूप में व्यंजित हुए। यही कारण है कि इन कवियों में नारी विषयक दृष्टिकोण में अन्तर आ गया। अलंकारों को इतना अधिक महत्त्व दिया कि काव्य का भाव-पक्ष उतना उभरकर सामने नहीं आ पाया। इससे बौद्धिक व्यायाम का रूप बढ़ता गया और रीतिकालीन कविता का भाव ग्रहण करने में कष्ट और परिश्रम की आवश्यकता पड़ी।

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रीतिकालीन काव्य की विशेषताएँ-

  1. सांसारिक सुख का प्राधान्य-यह समय विलास और समृद्धि का था। जीवन क्षणभंगुर है, अत: जितने दिन सुख भोग सके उतना ही अच्छा है। अत: काव्य रचना का उद्देश्य सुख प्राप्ति माना गया।
  2. कविराज्याश्रित होने के कारण कविता भरण-पोषण और धन-प्राप्ति का साधन बनी।
  3. मुक्तक काव्य और गीतिकाव्य-इस काल में मुक्तक रचनाएँ ही अधिक लिखी गयीं, जो काव्यात्मक हैं। कवित्त, सवैया, बरवै, दोहा, छन्द, मुक्तक लिखने के लिए अनुकूल थे।
  4. श्रृंगार और नखशिख वर्णन-इनकी श्रृंगार विषयक धारा में राम, कृष्ण जो भगवान थे, वे भी अछूते नहीं रहे। नायिकाओं के अंग-अंग और हर अदा का वर्णन बहुत ही लालित्यपूर्ण और विशुद्ध शृंगारपरक है।
  5. नायिका भेद-काव्य-कला की दृष्टि से उत्कृष्ट नायिका भेद का वर्णन है, किन्तु यह काव्य विलास की वस्तु बन गया।
  6. प्रकृति-चित्रण-प्रकृति वर्णन अधिक नहीं हुआ, पर प्रकृति प्रायः विप्रलम्भ श्रृंगार के उद्दीपन के अर्थों में ही अधिक प्रयुक्त हुई। फिर भी प्रकृति वर्णन उपेक्षित नहीं है। जहाँ कहीं भी प्रकृति वर्णन हुआ है, बहुत ही उत्कृष्ट कोटि का बन पड़ा है। नये-नये उपमानों का प्रयोग हुआ है।
  7. रीतिकालीन कविता में कला-पक्ष की प्रधानता रही। इस कला के प्रदर्शन में संस्कृत की सभी परम्पराओं का प्रभाव स्पष्ट है। कई रीति ग्रन्थ भी लिखे गये। भाषा मे शब्दो का चमत्कार और अलंकारों की विविधता है।
  8. विरह-वर्णन में फारसी शैली का प्रभाव है। सूक्ष्म भाव-निरूपण नहीं हुआ है।
  9. भाषा-रीतिकाल की भाषा प्रायः ब्रजभाषा ही है। कुछ कवियों ने फारसी के शब्द अपनाये और कुछ ने संस्कृत के शब्द तथा पद अपनाये।
  10. रस-वीर और श्रृंगार रस के अतिरिक्त जीवन के सन्ध्याकाल में कवियों ने शान्त रस की भी अच्छी रचनाएँ की।
  11. भाव-पक्ष कला-पक्ष से बोझिल है। इस काल के कुछ प्रेमी कवियों ने भावनाओं का हृदयस्पर्शी चित्रण किया है।
  12. छन्द-हिन्दी के प्रचलित छन्दों के अतिरिक्त संस्कृत के कुछ छन्दों को भी अपनाया गया।
  13. संस्कृत साहित्य का अत्यधिक प्रभाव-इस काल के कवि पण्डित और विद्वान थे। इनका गहन अध्ययन था। संस्कृत के ‘अमरूकशतक’ आदि के आधार पर भावों को ग्रहण कर सतसई आदि लिखी और संस्कृत के लहरी काव्य के अनुसार ‘गंगालहरी’, ‘यमुनालहरी’ आदि भी लिखी गईं।

इस काल के प्रमुख कवि हैं-केशव, बिहारी, देव, घनानन्द आदि। घनानन्द रीतिमुक्त काव्यधारा के कवि हैं। रीतिबद्ध कवियों की अपेक्षा रीतिमुक्त कवियों के काव्य में अधिक भावुकता तथा मार्मिकता पायी जाती है।

  • प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँ

कवि – रचनाएँ
केशवदास – रसिकप्रिया, कविप्रिया, रामचन्द्रिका
मतिराम – रसराज, ललित ललाम
भूषण – शिवराजभूषण, शिवाबावनी, छत्रसाल दशक
बिहारी – बिहारी सतसई
देव – भाव-विलास, रस-विलास
सेनापति – कवित्त रत्नाकर
पद्माकर – जगद्विनोद, गंगालहरी, पद्माभरण
घनानन्द – सुजानसागर, विरह लीला
गिरधर कविराय – नीति की कुण्डलियाँ

आधुनिक काल की कविता (1900 से अब तक) ‘उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं सामाजिक आन्दोलनों के फलस्वरूप हिन्दी काव्य में नई चेतना तथा विचारों ने जन्म लिया और साहित्य बहुआयामी क्षेत्रों को संस्पर्श करने लगा। भारतेन्दु युग हिन्दी कविता का जागरण काल है। देशोद्धार, राष्ट्र-प्रेम, अतीत-गरिमा आदि विषयों की ओर ध्यान दिया गया और कवियों की वाणी में राष्ट्रीयता का स्वर निनादित होने लगा। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, प्रतापनारायण मिश्र, चौधरी बद्रीनारायण ‘प्रेमघन’, लाला सीताराम आदि प्रमुख रचनाकार हुए।

द्विवेदी युग में खड़ी बोली कविता की सम्वाहिका बनी। काव्य में सामाजिक तथा पौराणिक विषयों का विस्तार हुआ। श्रीधर पाठक, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ मैथिलीशरण गुप्त, गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’, रामचरित उपाध्याय, रामनरेश त्रिपाठी, गोपालशरण सिंह, जगन्नाथ प्रसाद ‘रत्नाकर’, सत्यनारायण ‘कविरत्न’ आदि विशेष उल्लेखनीय हैं। …

हिन्दी कविता में आधुनिकता तथा नवीन युग के सूत्रपात का श्रेय छायावादी युग को प्रदान किया जाता है।

छायावादी कविता (1920-1935) परिभाषा-डॉ. नगेन्द्र के शब्दों में, “छायावाद स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह था।””

अंग्रेजी शिक्षा के फलस्वरूप हिन्दी कवि अंग्रेजी के स्वच्छन्दतावादी काव्य के सम्पर्क में आये और कवीन्द्र-रवीन्द्र की नोबुल पुरस्कार प्राप्त ‘गीतांजलि’ ने भी छायावादी कविता को प्रभावित किया।

छायावादी काव्य की प्रवृत्तियाँ व प्रमुख विशेषताएँ

  1. बाह्यार्थ निरूपण के स्थान पर स्वानुभूति-निरूपण की प्रमुखता।
  2. सौन्दर्य तथा प्रणय-भावनाओं का प्राधान्य।
  3. कल्पना का उन्मुक्त प्रयोग।
  4. करुणा और वेदना की प्रवृत्ति।
  5. प्रकृति का सजीव सत्य के रूप में चित्रण तथा प्रकृति पर कवि द्वारा अपने भावों का आरोपण।
  6. प्रगीतों का आधिक्य।
  7. छन्द-विधान में नूतनता।
  8. भाषा में माधुर्य।
  9. भाषा में लाक्षणिकता तथा वक्रता की प्रमुखता।
  10. प्रतीक-विधान।
  11. उपमा, उत्प्रेक्षा आदि अलंकारों की अपेक्षा अन्योक्ति, समासोक्ति आदि व्यंग्य-मूलक अलंकारों की प्रमुखता के साथ-ही-साथ विशेषता विपर्यय, मानवीकरण आदि पाश्चात्य साहित्य के अलंकारों का प्रयोग।

छायावादी काव्यधारा के कवियों में जयशंकर प्रसाद, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानन्दन पन्त, महादेवी वर्मा और अन्य कवियों में मुकुटधर पाण्डेय तथा डॉ. रामकुमार वर्मा के नाम उल्लेखनीय हैं। छायावाद-युग की राष्ट्रीय, सांस्कृतिक काव्यधारा में माखनलाल चतुर्वेदी ‘एक भारतीय आत्मा’, बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ और सुभद्रा कुमारी चौहान के नाम उल्लेखनीय हैं। जयशंकर प्रसाद मूलतः सौन्दर्य, प्रेम, यौवन और श्रृंगार के कवि हैं, उनकी ‘कामायनी’ शैव दर्शन के आनन्दवाद तथा समरसता पर आधारित छायावादी काव्य है, जो आधुनिक हिन्दी-साहित्य का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है। सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ ने ‘राम की शक्ति पूजा’, ‘तुलसीदास’, ‘कुकुरमुत्ता’, ‘नये पत्ते’ आदि अपनी प्रमुख कृतियों में पौरुष, क्रान्ति तथा विद्रोह के स्वर प्रदान किये हैं। ‘निराला’ की महत्वपूर्ण देन मुक्त छन्द है। सुमित्रानन्दन पन्त प्रकृति तथा रोमांटिक काव्य के पुरस्कर्ता हैं। उन पर गाँधीवाद, मार्क्सवाद तथा अरविन्द दर्शन का प्रभाव पड़ा। ‘वीणा’, ‘पल्लव’, ‘स्वर्ण किरण’, ‘युगान्त’, ‘ग्राम्या’,’लोकायतन’ उनकी महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं। महादेवी वर्मा के काव्य में प्रधान रूप से विरह और वेदना के स्वर मिलते हैं। ‘एक भारतीय आत्मा’ और ‘नवीन’ ने राष्ट्रीय आन्दोलन में सक्रियतापूर्वक भाग लेकर राष्ट्रीय काव्य को बहुमुखी बनाया उत्तर छायावादी काव्य में सियारामशरण गुप्त तथा रामधारीसिंह ‘दिनकर’ के नाम अत्यन्त आदर से लिये जाते हैं।

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रहस्यवादी कविता
परिभाषा-आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के शब्दों में, “चिन्तन के क्षेत्र में जो अद्वैतवाद है वही भावना के क्षेत्र में रहस्यवाद है।”

हिन्दी की रहस्यवादी कविता अपना आदि स्रोत कबीर तथा जायसी में पाती है। आधुनिक काल में रहस्यवादी कविता व्यापक स्वच्छन्दतावादी काव्य-क्षेत्र के अन्तर्गत समाविष्ट है। रहस्यवादी कविता में विस्मय, जिज्ञासा, व्यथा तथा आध्यात्मिकता के तत्व मिलते हैं। इस कविता में अप्रस्तुत योजना की न्यूनता है। छायावादी कवियों में रहस्य भावना की व्यापक छाप महादेवी वर्मा की कविता में मिलती है। उनके प्रमुख काव्य-संग्रह ‘नीहार’,’रश्मि’, ‘नीरजा’ और ‘सांध्यगीत’ में अनुभूति तथा विचार के धरातल पर एकान्विति मिलती है। प्रतिपाद्य गीतकाव्य है जिसमें भावप्रधानता के अतिरिक्त व्यथा, पीड़ा, आशा, अज्ञात प्रिय के प्रति प्रणय निवेदन और साधना की विविध अनुभूतियों के स्वर मुखरित हुए हैं। महादेवी ने अज्ञात प्रियतम के प्रति प्रणय-निवेदन किया है, किन्तु उनका प्रणय दुःख प्रधान है। हिन्दी के रहस्यवादी काव्य को बौद्ध दर्शन के अतिरिक्त, उपनिषदों, सर्ववादी दर्शन आदि ने प्रभावित किया है। महादेवी वर्मा ने मध्यकालीन रहस्य-साधना की परम्परा को स्वीकार कर और उसे लोक-कल्याण से सम्पृक्त कर अपने युगबोध के अनुकूल निर्मित करने का प्रयास किया है। यह रहस्यवाद का एक अभिनव अध्याय है जिसके उद्घाटन का सम्पूर्ण श्रेय महादेवी को है। महादेवी के अतिरिक्त प्रसाद, निराला, बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’, रामकुमार वर्मा, मोहनलाल महतो ‘वियोगी’, लक्ष्मीनारायण मिश्र, जनार्दन झा ‘द्विज’ आदि में भी रहस्य साधना के अनेक रूप विद्यमान हैं।

उन्मुक्त प्रेम काव्य
इस श्रेणी के प्रमुख कवियों में भगवतीचरण वर्मा, डॉ. हरिवंशराय बच्चन, नरेन्द्र शर्मा, गोपालसिंह ‘नेपाली’, रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’, हरिकृष्ण प्रेमी’, हृदयनारायण ‘हृदयेश’ आदि परिगणित हैं। इस काव्य में लाचारी तथा कर्म से विमुखता है। छायावादी कविता व्यक्ति चेतना से ऊपर उठकर मन एवं फिर आत्मा को संस्पर्श करती हैं परन्तु प्रेम तथा मस्ती के काव्य गायकों की व्यक्तिनिष्ठ चेतना मुख्य रूप में शरीर तथा मन के स्तर पर ही अभिव्यक्त होती रही है। इनके लिए प्रणय मार्ग न होकर मंजिल है। ये कवि मात्र प्रणय में तल्लीन होना चाहते हैं। मादकता, मदिरा आदि में व्यक्ति-स्वातन्त्र्य की भावना प्रकट हुई है। करुणा तथा हालावाद को भी प्रमुख वाणी मिली।

प्रगतिवादी कविता (1936-1943)
परिभाषा-“राजनीति के क्षेत्र में जो साम्यवाद है,वह काव्य के क्षेत्र में प्रगतिवाद है।” प्रगतिवादी काव्य की संज्ञा उस कविता को प्रदान की गई जो.कि छायावाद के समापन काल में सन् 1936 के आस-पास सामाजिक चेतना को लेकर अग्रसर हुआ। प्रगतिवादी कविता में राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक शोषण से मुक्ति का स्वर प्रमुख है। इस कविता पर मार्क्सवाद का प्रभाव है। रूस के नये संविधान और सन् 1905 में लखनऊ में भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ की प्रेमचन्द की अध्यक्षता में हुई सभा इसके विकास-क्रम के महत्वपूर्ण सोपान हैं। प्रगतिवाद की प्रमुख विशिष्टताएँ अग्रलिखित हैं-

  1. यथार्थवाद की ओर झुकाव।
  2. भाव प्रवणता के स्थान पर बौद्धिकता की प्रमुखता।
  3. श्रद्धा एवं आध्यात्मिकता का विरोध।
  4. रूढ़ियों का विरोध और समस्त क्षेत्रों में क्रान्ति की भावना।
  5. पूँजीवाद का विरोध, शोषकों के प्रति आक्रोश और शोषितों के प्रति सहानुभूति संवेदना।
  6. सुबोध तथा सहज भाषा-शैली।
  7. मार्क्सवादी विचारधारा का पल्लवन।

प्रगतिवाद ने साहित्य को सोद्देश्य रूप में स्वीकार किया और किसी विशेष दृष्टि से कला की साधना करना आवश्यक माना। उसने सौन्दर्य को नये दृष्टिकोण से देखा-परखा और उसे जन-जीवन में खोजा। प्रगतिवादी काव्य के शिल्प में सामाजिक जीवन की वास्तविकता के प्रति आग्रह और जनता के जीवन की बात को जनता तक पहुँचाने के कारण, उसकी भाषा सुस्पष्ट, सामान्य और प्रचलित रूप लेकर चली। उसने प्रतीक, बिम्ब, शब्द, मुहावरे और चित्र सभी जन-सामान्य के बीच से लिये। अतएव, एक अत्यन्त जीवन्त भाषा को प्रमुखता मिली। बाद में कविता प्रचारात्मक, अभिधात्मक और सपाट होती चली गई। इसमें कोई सन्देह नहीं कि प्रगतिवाद ने भाषा को कृत्रिमता के कुहरे से निकालकर सामान्य धरातल पर प्रतिष्ठित किया। ‘निराला’, सुमित्रानन्दन पन्त, केदारनाथ अग्रवाल, रामविलास शर्मा, नागार्जुन, डॉ. रांगेय राघव, डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’, त्रिलोचन, मुक्तिबोध आदि इस धारा के प्रमुख कवि हैं।

प्रयोगवादी कविता (1943-1950)-
‘प्रयोगवाद’ उन कविताओं के लिए प्रमुख सम्बोधन बना जो कतिपय नूतन बोधों, संवेदनाओं, शिल्पगत चमत्कारों को लेकर, प्रारम्भ में तार सप्तक’ के माध्यम से सन् 1943 में प्रकाश में आईं। इसके उन्नायक सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ स्वीकार किये गये। यह वर्ग अंग्रेजी के कवियों यथा टी. एस. इलियट, ऐजरा पाउण्ड, लारेंस आदि से प्रभावित हुआ। इस क्षेत्र में अनेक वर्ग के कवियों ने अपना योगदान दिया है तथा विचारों से समाजवादी किन्तु संस्कारों से व्यष्टिपरक, जैसे-शमशेर बहादुर सिंह, नरेश मेहता और नेमिचन्द्र जैन, विचारों और क्रियाओं, दोनों से समाजवादी, जैसे-रामविलास शर्मा तथा गजानन माधव मुक्तिबोध। प्रयोगवादी कविता में हासोन्मुख मध्यमवर्गीय समाज के जीवन का चित्र मिलता है। इन कवियों ने नये सत्य के शोध तथा प्रेषण के नूतन माध्यम की खोज की। प्रयोगवादी कवि जन-जीवन के प्रवाह से कटकर उसी के मध्य नदी के द्वीप की भाँति अपनी इकाई में संस्थित रहता है। उनमें गहरा तथा सजग पीड़ा का बोध है।

प्रयोगवादी कवि यथार्थवादी होने के साथ ही साथ भावुकता के स्थान पर बौद्धिकता को विशेष रूप से ग्रहण करते हैं। ये कवि मध्यमवर्गीय व्यक्ति-जीवन की समूची कुण्ठा, पराजय, मानसिक संघर्ष तथा जड़ता को बड़ी बौद्धिकता के साथ प्रकट करते है। फ्रॉयड के काम सिद्धान्त को सिरमौर बनाया गया। छायावादी कवि कल्पना लोक में नारी के साथ तादात्म्य स्थापित कर अपनी पिपासा को शान्त करता है, परन्तु प्रयोगवादी कवियों ने कल्पना के रंगीन आवरण को उच्छेद कर, अवदमित यौनाकांक्षाओं को खुले रूप में भास्वर बना दिया। अज्ञेय, शमशेर बहादुर सिंह, गिरिजा कुमार माथुर और डॉ. धर्मवीर भारती ने स्पष्ट या बारीक प्रतीकों, बिम्बों एवं माध्यमों से उलझी हुई संवेदनाओं को मूर्त किया। प्रयोगवादी काव्य महान् संघर्षों तथा जीवन प्रसंगों से न जुड़कर व्यक्ति के अन्तः संघर्षों और मन की विविध स्थितियों के प्रति प्रतिबद्ध होकर, छोटी, तीव्र तथा प्रभावशाली कवियों का स्रष्टा बना। उसने लघु मानव के प्रति सहानुभूति का मार्ग अपनाया। प्रयोग के नाम पर भाव, विचार, प्रक्रिया, छन्द, प्रतीक, अलंकार आदि सब में परिवर्तन करने की प्रवृत्ति इस दशक की कविता में प्रचुरता पा गई।

नई कविता (1950 से अब तक)
नई कविता भारतीय स्वाधीनता के अनन्तर लिखी गई उन कविताओं को कहा गया जिन्होंने नये भावबोध, नये मूल्यों और नूतन शिल्पविधान को अन्वेषित तथा स्थापित किया। नई कविता अपनी वस्तु-छवि तथा रूपायन में पूर्ववर्ती प्रगतिवाद तथा प्रयोगवाद की विकासान्विति होकर भी अपने में सर्वथा विशिष्ट तथा असामान्य है।

नई कविता की प्रमुख प्रवृत्तियों में आज की क्षणवादी, लघु मानववादी जीवन दृष्टि के प्रति नकार-निषेध नहीं अपितु स्वीकार सहमति के साथ जीवन को पूर्णतया स्वीकार करके उसके भोगने की आकांक्षा है। नई कविता क्षणों की अनुभूतियों में अपनी आस्था प्रकट करती है जो कि समस्त जीवनानुभूतियों के लिए अवरोध न बनकर सहायक होते हैं। नई कविता, लघु मानवत्व को स्वीकार करती है जिसका तात्पर्य है सामान्य मनुष्य की अपेक्षित समूची संवेदनाओं और मानसिकता की खोज या प्रतिष्ठा करना। नई कविता कोई वाद नहीं है। उसमें सर्व महान् विशिष्ट कश्य की व्यापकता तथा सृष्टि की उन्मुक्तता है। नई कविता के दो प्रमुख घटक हैं-

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(क) अनुभूति की सच्चाई और
(ख) बुद्धि की यथार्थवादी दृष्टि।

नई कविता जीवन के प्रत्येक क्षण को सत्य मानती है। आन्तरिक और मार्मिकता के कारण नई कविता में जीवन के अति साधारण सन्दर्भ अथवा क्रिया-कलाप नूतन अर्थ तथा छवि पा लेते हैं। नई कविता में क्षणों की अनुभूति को लेकर अनेकानेक मार्मिक एवं विचारोत्तेजक कविताएँ लिखी गई हैं जो कि अपने लघु आकार के बावजूद प्रभावोत्पादकता में अत्यन्त तीव्र तथा सघन हैं। नई कविता की वाणी अपने परिवेश की जीवानुभूतियों से संसिक्त है। अज्ञेय के अनुभव-क्षेत्र तथा परिवेश में ग्राम एवं नगर, दोनों ही समाहित हैं। शहरी परिवेश के साथ जुड़ने वाले रचनाकारों में बालकृष्ण राव,शमशेर बहादुर सिंह, गिरिजाकुमार माथुर, कुँवर नारायण, डॉ. धर्मवीर भारती, डॉ. प्रभाकर माचवे, विजयदेव नारायण साही, रघुवीर सहाय आदि कवि आते हैं परन्तु भवानीप्रसाद मिश्र, केदारनाथ सिंह, शम्भूनाथ सिंह, ठाकुर प्रसाद सिंह, नागार्जुन, केदारनाथ अग्रवाल आदि ऐसे सृजनकर्ता हैं जिन्होंने मुख्यतः ग्रामीण संस्कारों को अभिव्यक्ति दी। मदन वात्स्यायन में यान्त्रिक परिवेश और ठाकुर प्रसाद सिंह में संथाली जीवन का वातावरण आर्द्र हो गया है। नई कविता में जीवन मूल्यों की पुन: परीक्षा की गई है। प्रगतिवाद में लोक जीवन एक आन्दोलन के रूप में आया, प्रयोगवाद में वह कट गया परन्तु सम्प्रक्ति नई कविता की एक प्रमुख विशेषता बन गई। नई कविता के शिल्प को भी लोक-जीवन ने प्रभावित किया। उसने लोक-जीवन से बिम्बों, प्रतीकों, शब्दों तथा उपमानों को चुनकर निजी संवेदनाओं तथा सजीवता को द्विगुणित किया। नई कविता अपनी अन्तर्लय, बिम्बात्मकता, नव प्रतीक योजना, नये विशेषणों के प्रयोग, नव उपमान-संघटना के कारण प्रयोगवाद से अपना पृथक् अस्तित्व भी सिद्ध करती है।

प्रयोगवाद बोझिल शब्दावली को लेकर चलता है, परन्तु नई कविता ने प्रगतिवाद की तरह विशेष क्षेत्रों के विशिष्ट सन्दर्भ के लिए ही लोक शब्द नहीं लिये, परन्तु समस्त प्रकार के प्रसंगों के लिए लोक शब्दों का चयन किया। नई कविता की भाषा में एक खुलापन और ताजगी है।

निष्कर्षत: नई कविता मानव मूल्यों एवं संवेदनाओं की नूतन तलाश की कविता है।

प्रश्नोत्तर

  • लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हिन्दी साहित्य के प्रथम युग का नाम वीरगाथा काल क्यों पड़ा?
उत्तर-
इस काल के राज्याश्रित चारण कवियों ने वीर रस के फुटकर दोहे लिखे हैं। श्रृंगार के साथ वीर रस प्रधान है। वीर रस की प्रधानता के कारण कतिपय विद्वान इसे वीरगाथा काल कहते हैं। शस्त्रों की झंकार तथा युद्धों का नाद है।

प्रश्न 2.
वीरगाथा काल की कोई तीन विशेषताएँ लिखते हुए इस युग के प्रमुख कवि एवं उनकी रचना का नाम लिखिए। [2017]
उत्तर-
पृष्ठ 2 देखें।

प्रश्न 3.
भक्तिकाल को हिन्दी साहित्य का स्वर्णयुग क्यों कहा जाता है? [2008, 15]
उत्तर-
निम्नलिखित कारणों से भक्तिकाल को हिन्दी साहित्य का स्वर्णयुग कहा जाता है-

  1. लोक मंगल तथा समन्वय की भावना।
  2. भक्ति भाव का प्राधान्य।।
  3. स्वान्त सुखाय काव्य साधना।
  4. भाव एवं कलापक्ष का मणिकांचन योग।
  5. निराशा में आशा का स्वर्णिम प्रकाश है।

प्रश्न 4.
भक्तिकाल की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उस काल के दो कवियों के नाम लिखिए। [2011, 17]
उत्तर-
भक्तिकाल की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं –

  1. ईश्वर भक्ति,
  2. गुरु महिमा,
  3. सादा जीवन,
  4. समन्वय की भावना,
  5. राज्याश्रय से मुक्ति,
  6. विविध रसों का परिपाक,
  7. भाषा की विविधता।

प्रमुख दो कवि-

  1. तुलसीदास,
  2. सूरदास।

प्रश्न 5.
भक्तिकाल की प्रमुख शाखाओं के नाम बताइए तथा उन शाखाओं के प्रवर्तक का नाम लिखिए।
अथवा [2010]
भक्तिकाल का वर्गीकरण कर प्रत्येक शाखा के प्रमुख कवि एवं उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए। [2016]
उत्तर-
भक्तिकाल की प्रमुख शाखाओं तथा उनके प्रवर्तकों के नाम निम्न प्रकार हैं-
MP Board Class 11th Special Hindi पद्य साहित्य का इतिहास 2

प्रश्न 6.
निर्गुण काव्य धारा के प्रकार बताते हुए उनके प्रमुख दो कवियों के नाम लिखिए। [2008, 09]
उत्तर-
भक्तिकाल हिन्दी साहित्य का स्वर्णिम काल है। भक्तिकाल को प्रमुख दो रूपों में बाँटा जा सकता है-
(क) निर्गुण काव्य धारा एवं
(ख) सगुण काव्य धारा।

(क) निर्गुण काव्य धारा-इसे निम्नलिखित दो भागों में विभाजित किया गया है
(1) ज्ञानमार्गी शाखा-यह काव्य धारा बाह्य आडम्बर पर विश्वास नहीं करती। इस धारा के कवि आन्तरिक शुद्धता पर विशेष बल देते हैं। इन्होंने जीवन को सरल तथा निर्मल बनाने पर बल दिया है। जाति भेद, वर्ण भेद को समाप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के दोहे तथा पदों की रचना की है। इस धारा के प्रमुख कवि थे-कबीरदास, दादू दयाल, गुरु नानक देव तथा रैदास
(2) प्रेममार्गी शाखा-इस काव्य धारा को सूफी या प्रेममार्गी काव्य धारा कहते हैं। इस काव्य धारा में मुसलमान सन्त कवि सम्मिलित थे। इन कवियों ने अद्वैतवाद पर अपनी लेखनी चलायी है। प्रेम का रहस्यमयी रूप प्रेममार्गी, शाखा में देखने को मिलता है। इनमें भारतीय लोकगाथाओं को आधार बनाया गया है। लौकिक प्रेम के माध्यम से अलौकिक प्रेम की अभिव्यक्ति की गयी है। हिन्दू-मुस्लिम एकता पर विशेष बल दिया गया है। दोहा, चौपाई तथा मसनवी शैली में सूफी कवियों ने आध्यात्मिक प्रेम की अभिव्यक्ति की है। इस शाखा के कवियों ने जीव को ब्रह्म का अंश माना है। संसार में अज्ञानता को दूर करने का सशक्त माध्यम गुरु है।

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जायसी, कुतुबन, मंझन, आलम, उस्मान तथा शेखनवी इसके प्रमुख कवि हैं।

प्रश्न 7.
निर्गुण भक्ति धारा की कोई तीन विशेषताएँ लिखते हुए निर्गुण भक्ति धारा के किन्हीं दो कवियों के नाम लिखिए। [2013]
उत्तर-
निर्गुण भक्ति धारा की तीन विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

  1. निर्गुण ब्रह्म में विश्वास रखने वाले ये कवि गुरु को ईश्वर के समान मानते हैं।
  2. इस धारा के कवियों ने रूढ़ियों, छुआछूत, कुरीतियों पर प्रहार किये हैं।
  3. इस धारा के कवियों ने अवधी, सधुक्कड़ी (मिश्रित) भाषा अपनाई है।

दो कवि-कबीर तथा जायसी निर्गुण भक्ति धारा के श्रेष्ठ कवि हैं।

प्रश्न 8.
भक्तिकाल की निर्गुण प्रेममार्गी शाखा की चार विशेषताएँ लिखिए। [2008, 14]
उत्तर-

  1. इस काल के काव्य में कलापक्ष के अतिरिक्त भावपक्ष भी सबल है।
  2. प्रमुख छन्द दोहा, सोरठा एवं चौपाई का प्रयोग किया गया है।
  3. अवधी और फारसी भाषा का प्रयोग है तथा मसनवी शैली है।
  4. कवि कुतुबन, मंझन एवं जायसी ने प्रेमगाथाओं को काव्य रूप में गूंथ लिया।

प्रश्न 9.
भक्तिकाल की निर्गुण धारा का परिचय देते हुए ज्ञानमार्गी शाखा की दो विशेषताएँ एवं दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए। [2012]
उत्तर-
भक्तिकाल में निराकार ब्रह्म में विश्वास रखने वाले कवि निर्गुण धारा के माने जाते हैं। इनके ब्रह्म घट-घट वासी हैं। ये अवतार नहीं लेते हैं। गुरु के प्रति गहरी आस्था रखने वाले इस धारा के कवि मानते हैं कि गुरु के द्वारा बताये गये ज्ञान के मार्ग पर चलकर ही मुक्ति मिल सकती है। इस धारा की दो विशेषताएँ इस प्रकार हैं
1. निर्गुण ब्रह्म में विश्वास-निर्गुण भक्तिधारा के कवि निर्गुण ब्रह्म में विश्वास रखते हैं। इनके ब्रह्म आकार रहित हैं, वे घट-घट वासी हैं।
2. गुरु की महत्ता-इस धारा के कवि गुरु का बहुत महत्व मानते हैं। गुरु की कृपा से ही सच्चा ज्ञान प्राप्त होता है।

प्रमुख कवि-कबीर एवं दादू दयाल दो प्रमुख कवि हैं।

प्रश्न 10.
निर्गुण धारा और सगुण धारा में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (कोई तीन) [2015]
उत्तर-
निर्गुण धारा एवं सगुण धारा भक्तिकाल के काव्य के दो रूप हैं। इन दोनों धाराओं में तीन अन्तर इस प्रकार हैं-

  1. निर्गुण धारा के काव्य में निराकार ब्रह्म की आराधना की गई है जबकि सगुण धारा के काव्य में साकार (राम एवं कृष्ण) परमात्मा की भक्ति का अंकन किया गया है।
  2. निर्गुण धारा के कवियों ने जाति-पाँति, रूढ़ियों का विरोध कर समाज सुधार पर बल दिया है जबकि सगुण भक्ति धारा के कवियों ने राम और कृष्ण के लोकरंजक रूपों का वर्णन करके लोक मंगल पर बल दिया है।
  3. निर्गुण धारा के काव्य में रहस्यवाद एवं मसनवी शैली को अपनाया गया है जबकि सगुण धारा के काव्य में समन्वय एवं सौन्दर्य अंकन की प्रधानता है।

प्रश्न 11.
ज्ञानमार्गी शाखा की दो विशेषताएँ लिखते हुए इसके प्रवर्तक कवि का नाम एक रचना सहित लिखिए। [2010]
उत्तर-

  1. ज्ञानमार्गी शाखा में केवल ज्ञान प्रधान निराकार ब्रह्म की उपासना की प्रधानता है।
  2. इस काल की प्रमुख विशेषता एक ऐसे ईश्वर की उपासना है जो हिन्दू-मुस्लिम दोनों को समान रूप से मान्य हो।

इसके प्रवर्तक कवि कबीरदास हैं तथा इनकी प्रमुख रचना ‘बीजक’ है।

प्रश्न 12.
रीतिकाल का नाम ‘रीतिकाल’ क्यों पड़ा? इस युग की कोई तीन प्रवृत्तियों को समझाइए।
अथवा
रीतिकाल की प्रमुख प्रवृत्तियाँ लिखिए। [2008, 15]
अथवा
रीतिकाल की प्रमुख प्रवृत्तियों का उल्लेख करते हुए दो कवियों के नाम लिखिए।
अथवा [2009, 11]
रीतिकाल की तीन विशेषताएँ तथा इस युग के प्रमुख कवि एवं उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए। [2016]
उत्तर-
नामकरण का कारण-कवियों ने रीति अर्थात् संस्कृत साहित्य के लक्षण ग्रन्थों की बँधी-बँधायी लीक का अनुसरण किया है। परिणामस्वरूप रीतिबद्ध रचनाओं के लेखन के फलस्वरूप इस काल को रीतिकाल नाम से जाना गया।

प्रमुख प्रवृत्तियाँ (विशेषताएँ)-

  1. सांसारिक सुख का प्राधान्य-यह समय विलास और समृद्धि का था। जीवन क्षणभंगुर है, अत: जितने दिन सुख भोग सके उतना ही अच्छा है।
  2. राज्याश्रित होने के कारण कविता भरण-पोषण और धन-प्राप्ति का साधन बनी।
  3. रीतिकालीन कविता में कलापक्ष की प्रधानता रही। इस कला के प्रदर्शन में संस्कृत की सभी परम्पराओं को प्रभाव स्पष्ट है। रीतिग्रन्थ भी लिखे गये, भाषा में शब्दों का चमत्कार और अलंकारों की विविधता है।

प्रमुख कवि-भूषण (शिवा वावनी),बिहारी (सतसई), पद्माकर (पद्माभरण), केशवदास (रामचन्द्रिका) आदि।

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प्रश्न 13.
रीतिकाल को श्रृंगार काल क्यों कहा जाता है? रीतिकाल के किन्हीं दो कवियों के नाम एवं उनकी एक-एक रचना लिखिए। [2009, 13]
उत्तर-
17वीं शताब्दी के मध्य से उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य तक का काल हिन्दी साहित्य के इतिहास का उत्तर-मध्य काल कहलाता है। इस काल को आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने रीतिकाल नाम दिया। सामंतों और राजाओं के इस काल में अधिकांश कवि राज्याश्रित थे। वे राजदरबार में रहते थे। अतः राजाओं को प्रसन्न करने के लिए कवियों का श्रृंगार प्रधान काव्य रचना करना स्वाभाविक ही था। नायक-नायिका भेद के साथ, प्रकृति के उद्दीपन रूप में भी श्रृंगारिकता के दर्शन होते हैं। इस काल की रचनाओं में श्रृंगार रस की प्रधानता रही। अतः मिश्र बंधुओं ने इसे ‘शृंगार काल’ कहा।

कवि एवं उनकी रचना-

  • बिहारी (बिहारी सतसई);
  • भूषण (छत्रसाल दशक)।

प्रश्न 14.
भारतेन्दु युग हिन्दी कविता का जागरण काल क्यों कहा जाता है? [2009]
उत्तर-
भारतेन्दु युग के कवियों की कविता में देशोद्धार, राष्ट्र प्रेम, अतीत गरिमा आदि विषयों की ओर ध्यान दिया गया है। कवियों की वाणी में राष्ट्रीयता के स्वर मुखरित हैं। सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं सामाजिक आन्दोलनों के फलस्वरूप हिन्दी काव्य में नयी चेतना तथा विचारों का समावेश हुआ।

प्रश्न 15.
छायावादी कविता की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2014, 15]
अथवा
छायावाद की चार विशेषताएँ तथा प्रमुख छायावादी कवियों के नाम लिखिए।
अथवा [2009]
छायावाद के सम्बन्ध में दो विचारकों का कथन देते हुए छायावाद की प्रमुख प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए। [2009]
उत्तर-

  1. डॉ. नगेन्द्र के शब्दों में, “छायावाद स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह है।”
  2. डॉ. रामकुमार वर्मा के अनुसार, “परमात्मा की छाया आत्मा में पड़ने लगती है और आत्मा की छाया परमात्मा में, यही छायावाद है।”

विशेषताएँ-

  1. सौन्दर्य तथा प्रणय-भावनाओं का प्राधान्य।
  2. भाषा में लाक्षणिकता तथा वक्रता की प्रमुखता।
  3. बाह्यार्थ निरूपण के स्थान पर स्वानुभूति निरूपण की प्रमुखता।
  4. प्रकृति का सजीव सत्य के रूप में चित्रण तथा प्रकृति पर कवि द्वारा अपने भावों का आरोपण।
  5. छन्द विधान में नूतनता। प्रमुख कवि-जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानन्दन पन्त, महादेवी वर्मा, रामकुमार वर्मा आदि।

प्रश्न 16.
रहस्यवाद की परिभाषा देते हुए रहस्यवादी कविता की चार विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-

  1. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के शब्दों में, “चिन्तन के क्षेत्र में जो अद्वैतवाद है वही भावना के क्षेत्र में रहस्यवाद है।”
  2. आधुनिक काल में रहस्यवादी कविता व्यापक स्वच्छन्दतावादी काव्य क्षेत्र के अन्तर्गत समाविष्ट है।
  3. कविता में अप्रस्तुत योजना की नूतनता है।
  4. रहस्यवादी कविता में बौद्ध दर्शन के अतिरिक्त उपनिषदों का प्रभाव भी परिलक्षित है।

प्रश्न 17.
प्रयोगवादी कविता की चार विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर-

  1. प्रयोगवादी कविता पर मार्क्सवादी प्रभाव परिलक्षित है।
  2. इस काव्य में सजग एवं गहरी पीड़ा का बोध है।
  3. प्रयोगवादी कविता भावुकता के स्थान पर बौद्धिकता पर विशेष बल देती है।
  4. फ्रायड के काम सिद्धान्त को सर्वोपरि रूप में स्वीकार किया गया है।

प्रश्न 18.
प्रगतिवादी कविता की चार विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर-

  1. प्रगतिवादी कविता में दीन-हीन श्रमिक तथा पद-दलित मानवों का सजीव चित्रण है।
  2. मजदूरों के शोषण के प्रति विद्रोह के स्वर हैं।
  3. प्रगतिवादी काव्य की भाषा जन सामान्य की सरल एवं सामान्य भाषा है।
  4. मार्क्सवादी विचारधारा का प्रभाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित है।

प्रश्न 19.
नई कविता की चार विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर-

  1. नई कविता जीवन के हर क्षण को सत्य ठहराती है।
  2. नई कविता की वाणी अपने परिवेश के जीवन अनुभव पर आधारित है।
  3. नई कविता लघु मानवत्व को स्वीकार करती है।
  4. नई कविता में जीवन मूल्यों की पुनः परीक्षा की गयी है।

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प्रश्न 20.
नई कविता एवं प्रयोगवादी कविता में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
नई कविता ने प्रगतिवाद की तरह विशेष क्षेत्रों में विशिष्ट शब्द नहीं लिए हैं। समस्त प्रकार के प्रश्नों हेतु लोक शब्दों का चयन किया है। प्रयोगवाद बोझिल शब्दावली को लेकर चलता है। प्रयोगवादी कविता में मध्यमवर्गीय जीवन के संघर्ष को बौद्धिकता के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।

  • अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पृथ्वीराज रासो की रचना किस काव्य में हुई?
उत्तर-
‘पृथ्वीराज रासो’ प्रबन्ध काव्य में रचित है।

प्रश्न 2.
वीरगाथा काल के कवि किसके आश्रय में रहते थे?
उत्तर-
वीरगाथा काल के कवि राज्याश्रय में रहते थे।

प्रश्न 3.
वीरगाथाकालीन कवियों के काव्य की रचना का प्रमुख विषय क्या था?
उत्तर-
वीरगाथाकालीन कवि अपने राजाओं की शौर्य गाथा को अपने काव्य का विषय बनाते थे।

प्रश्न 4.
वीरगाथा काल का मुख्य रस कौन- था?
उत्तर-
वीरगाथा काल का मुख्य रस वीर रस था।

प्रश्न 5.
भक्तिकाल का प्रारम्भ कब हुआ?
उत्तर-
भक्तिकाल का प्रारम्भ सम्वत् 1375 में हुआ।

प्रश्न 6.
सूफी कवियों ने आत्मा का किस रूप में वर्णन किया है?
उत्तर-
सूफी कवियों ने आत्मा को प्रियतम मानकर हिन्दू प्रेम कहानियों का वर्णन किया है।

प्रश्न 7.
सूफी काव्यों की रचना किन छन्दों में की गयी है?
उत्तर-
रचना शैली दोहा एवं चौपाई है।

प्रश्न 8.
निर्गुण प्रेममार्गी शाखा में कौन-सी भाषा एवं शैली प्रयुक्त है?
उत्तर-
निर्गुण प्रेममार्गी शाखा में अरबी एवं फारसी भाषा तथा मसनवी शैली का प्रयोग है।

प्रश्न 9.
प्रेममार्गी शाखा के महाकाव्य कौन-सी कथाओं पर आधारित हैं?
उत्तर-
प्रेम कथाओं पर आधारित हैं।

प्रश्न 10.
प्रेममार्गी शाखा में प्रमुख रूप से किस रस का प्रयोग है?
उत्तर-
शृंगार रस।

प्रश्न 11.
भक्तिकालीन ज्ञानमार्गी शाखा में कौन-सी भाषा का प्रयोग किया है?
उत्तर-
खिचड़ी एवं सधुक्कड़ी।

प्रश्न 12.
ज्ञानमार्गी शाखा के कवियों ने आत्मा एवं परमात्मा का वर्णन किस रूप में किया है?
उत्तर-
आत्मा को प्रियतमा मानकर आत्मा एवं परमात्मा के विरह मिलन का वर्णन है।

प्रश्न 13.
रामचरितमानस के रचयिता कौन हैं?
उत्तर-
तुलसीदास।

प्रश्न 14.
राम भक्ति शाखा के प्रवर्तक कौन हैं?
उत्तर-
रामानन्द।

प्रश्न 15.
तुलसी ने राम की किस रूप में उपासना की है?
उत्तर-
तुलसी ने राम को स्वामी तथा स्वयं को दास स्वीकार किया है।

प्रश्न 16.
राम भक्ति शाखा के कवियों ने किसे अपना इष्ट देव माना है?
उत्तर-
राम को।

प्रश्न 17.
राम भक्ति शाखा में किस प्रकार के काव्य लिखे गये हैं?
उत्तर-
प्रबन्ध एवं मुक्तक काव्य। ,

प्रश्न 18.
राम भक्ति शाखा के कवियों ने प्रमुख रूप से किस भाषा का प्रयोग किया है?
उत्तर-
ब्रजभाषा एवं अवधी।

प्रश्न 19.
कृष्ण भक्ति शाखा के मुख्य प्रवर्तक कौन हैं?
उत्तर-
बल्लभाचार्य।

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प्रश्न 20.
कृष्ण भक्ति शाखा के एक कवि का नाम क्या लिखिए।
उत्तर-
सूरदास।

प्रश्न 21.
सूरदास के काव्य में प्रमुख रूप से किन रसों का प्रयोग है?
उत्तर-
शृंगार एवं वात्सल्य रस।

प्रश्न 22.
कृष्ण भक्ति शाखा में कवियों ने प्रमुख रूप से किस भाषा का प्रयोग किया है?
उत्तर-
ब्रजभाषा एवं अन्य बोलियों का प्रयोग किया है।

प्रश्न 23.
भक्तिकाल की स्फुट शाखा में किस प्रकार की कविता की रचना
उत्तर-
मुक्तक काव्य की रचना हुई है।

प्रश्न 24.
स्फुट शाखा के तीन कवियों के नाम बताइए।
उत्तर-

  • रहीम,
  • गंग तथा
  • सेनापति।

प्रश्न 25.
रीतिकालीन काव्य में प्रमुख रूप से किस भाषा का प्रयोग है?
उत्तर-
ब्रजभाषा का प्रयोग है।

प्रश्न 26.
रीतिकाल में प्रयुक्त प्रमुख रसों के नाम बताइए।
उत्तर-
वीर एवं श्रृंगार के अतिरिक्त शान्त रस का प्रयोग है।

प्रश्न 27.
रीतिकालीन कवियों ने अपने जीवनयापन के लिए किसका आश्रय लिया?
उत्तर-
राजाओं का आश्रय लिया।

प्रश्न 28.
रीतिकाल के प्रमुख तीन कवियों के नाम बताइए। [2008]
उत्तर-

  • देव,
  • बिहारी एवं
  • घनानन्द।

प्रश्न 29.
रीतिकाल में कवियों ने अपनी कविता में किन-किन छन्दों का प्रयोग किया है?
उत्तर-
कवित्त, सवैया, बरवै, दोहा आदि छन्दों का प्रयोग किया है।

प्रश्न 30.
रीतिकाल के कवियों ने संस्कृत के लहरी काव्य के अनुसार किन दो ग्रन्थों की रचना की है?
उत्तर-

  • गंगा लहरी,
  • यमुना लहरी।

प्रश्न 31.
भारतेन्दु युग के कवियों की वाणी में कौन-सा स्वर मुखरित है?
उत्तर-
राष्ट्रीयता का स्वर।।

प्रश्न 32.
भारतेन्दु युग के दो लेखकों के नाम लिखो।
उत्तर-

  • प्रताप नारायण मिश्र,
  • चौधरी बद्रीनारायण ‘प्रेमघन’।

प्रश्न 33.
द्विवेदी युग के तीन साहित्यकारों के नामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-

  • रामनरेश त्रिपाठी,
  • गोपाल शरण सिंह,
  • जगन्नाथ प्रसाद ‘रत्नाकरा

प्रश्न 34.
हिन्दी कविता में नवीन युग के सूत्रपात का श्रेय किस युग को प्रदान किया जाता है?
उत्तर-
छायावादी युग।

प्रश्न 35.
छायावादी कवियों के दो नाम बताइए।
उत्तर-

  • सुमित्रानन्दन पन्त,
  • महादेवी वर्मा।

प्रश्न 36.
महादेवी वर्मा के काव्य में प्रधान रूप से कौनसे स्वर मुखरित हैं?
उत्तर-
विरह-वेदना।

प्रश्न 37.
छायावादी युग के किस कवि ने क्रान्ति एवं विद्रोह का स्वर निनादित किया है?
उत्तर-
सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’।

सम्पूर्ण अध्याय पर आधारित महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  • बहु-विकल्पीय

प्रश्न
1. हिन्दी पद्य साहित्य को बाँटा गया है
(i) चार कालों में, (ii) तीन कालों में, (iii) पाँच कालों में, (iv) छ: कालों में।

2. वीरगाथा काल की प्रसिद्ध रचना है
(i) रामचरितमानस, (ii) पद्मावत, (iii) पृथ्वीराज रासो, (iv) साकेत।

3. आदिकाल के कवि हैं
(i) सूरदास, (ii) कबीरदास, (i) चन्दबरदाई (iv) भूषण।

4. भक्तिकाल के लोकनायक कवि हैं
(i) मीराबाई, (ii) तुलसीदास, (iii) रसखान, (iv) रहीम।

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5. हिन्दी साहित्य का स्वर्ण युग कहलाता है [2009]
(i) वीरगाथा काल, (ii) रीतिकाल, (iii) भक्तिकाल, (iv) आधुनिक काल।

6. लौकिक प्रेम से अलौकिक प्रेम की अवधारणा देखने को मिलती है- [2008]
(i) ज्ञानमार्गी शाखा में, (ii) प्रेममार्गी शाखा में, (ii)रीतिकालीन कविता में, (iv) आधुनिक कविता में।

7. विराट के प्रति जिज्ञासा की भावना मिलती है [2010]
(i) प्रगतिवाद में, (ii) छायावाद में, (iii) प्रयोगवाद में, (iv) नर्य कविता में।

8. रीतिकाल की प्रतिनिधि रचना है
(iii) बिहारी सतसई, (iv) प्रेम माधुरी।

9. रीतिकालीन कवि हैं [2013]
(i) सुमित्रानन्दन पन्त, (ii) भूषण, (iii)दिनकर, (iv) हरिऔध।

10. पद्माकर कवि हैं [2015]
(i) भक्तिकाल के, (ii) आधुनिक काल के, (iii) रीतिकाल के, (iv) आदिकाल के।

11. हिन्दी कविता का जागरण काल किस युग को माना जाता है? [2009]
(i) द्विवेदी युग, (ii) भारतेन्दु युग, (iii) शुक्ल युग, (iv) प्रसाद युग।

12. नई कविता का समय माना जाता है
(i) सन् 1900 से, (ii) 1936-1943, (iii) 1943-1950, (iv) 1950 से अब तक।

13. ‘महाप्राण’ के नाम से प्रख्यात कवि हैं [2011]
(i) जवाहरलाल नेहरू, (i) लाल बहादुर शास्त्री, (iii) सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ (iv) महात्मा गाँधी।

14. कबीर को हजारीप्रसाद द्विवेदी ने कहा है
(i) भाषा का डिक्टेटर, (ii) सधुक्कड़ी भाषी, (iii) खिचड़ी भाषी, (iv) सहज भाषी।
उत्तर-
1. (i), 2. (iii), 3. (iii), 4.(ii), 5. (iii), 6. (ii), 7.(ii), 8. (iii), 9.(ii), 10. (iii), 11. (ii), 12. (iv), 13. (iii), 14. (i).

  • रिक्त स्थान पूर्ति

1. वीरगाथा काल के काव्य की भाषा प्रमुखतः ……….’ है।
2. आदिकाल में प्रमुख रूप से ……….. का सजीव वर्णन हुआ है।
3. भक्तिकाल की प्रेममार्गी काव्यधारा के प्रमुख कवि ……….’ हैं। [2009]
4. भक्तिकाल के प्रसिद्ध ग्रन्थ का नाम ………. है।
5. ………… रीतिकाल में वीर रस के कवि हुए। [2008]
6. सूरदास ………… के कवि हैं। [2009]
7. नागार्जुन ………. के कवि हैं। [2009]
8. भक्तिकाल संवत् ……….’ तक माना जाता है। [2009]
9. रीतिकाल के प्रतिनिधि कवि ……….’ हैं।
10. …………. ग्रन्थ में पारिवारिक मर्यादा का सर्वोत्तम उदाहरण देखने को मिलता है। [2015]
11. निर्गुण काव्य धारा के मत के अनुसार ईश्वर ………..’ है। [2015]
उत्तर-
1. डिंगल, 2. युद्धों, 3. जायसी, 4. रामचरितमानस, 5. भूषण, 6. सगुण धारा, 7. प्रगतिवाद, 8. 1375 से 1700, 9. बिहारी, 10. रामचरितमानस, 11. निराकार।

  • सत्य/असत्य

1. वीरगाथा काल का प्रिय अलंकार अतिशयोक्ति है।
2. आदिकाल के काव्य की रचना हरिगीतिका छन्द में हुई है। [2009]
3. कबीर के काव्य में रूढ़ियों का खुलकर विरोध हुआ है।
4. जायसी ने ब्रजभाषा में काव्य रचना की है।
5. तुलसीदास रामभक्ति शाखा के श्रेष्ठ कवि हैं। [2009]
6. रीतिकाल में मात्र रीतिबद्ध रचनाएँ की गईं।
7. सूरदास की श्रेष्ठ रचना का नाम ‘सूरसागर’ है।
8. उत्तर मध्यकाल या रीतिकाल संवत् 1050 से 1375 तक है। [2009]
9. शोषकों के प्रति घृणा और शोषितों के प्रति करुणा प्रगतिवाद है। [2009]
10. जयशंकर प्रसाद छायावादी कवि हैं। [2009]
11. प्रयोगवादी कवियों ने प्रकृति का मानवीकरण किया है। [2008]
12. छायावादी कवियों ने प्रकृति का मानवीकरण किया है। [2008]
13. लौकिक साहित्य आदिकाल की विशेष उपलब्धि है। [2012]
14. भूषण रीतिकाल के कवि थे। [2012]
15. हिन्दी साहित्य का स्वर्णयुग रीतिकाल को कहा जाता है। [2016]
उत्तर-
1. सत्य, 2. असत्य, 3. सत्य, 4. असत्य, 5. सत्य, 6. असत्य, 7. सत्य, 8. असत्य, 9. सत्य, 10. सत्य, 11. असत्य, 12. सत्य, 13. सत्य, 14. सत्य, 15. असत्य।

  • जोड़ी मिलाइए

I.
1. हिन्दी कविता का जागरण काल [2010] – (क) तुलसीदास
2. भक्तिकाल के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि हैं [2009] – (ख) भारतेन्दु युग
3. ज्ञानमार्गी शाखा [2008] – (ग) महावीर प्रसाद द्विवेदी
4. कृष्णभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि हैं [2009] – (घ) रीतिकाल
5. श्रृंगार काल [2010] – (ङ) कबीरदास
6. द्विवेदी युग के प्रवर्तक [2011] – (च) सूरदास
उत्तर-
1. → (ख),
2. → (क),
3. → (ङ),
4. → (च),
5. → (घ),
6. → (ग)।

II.
1. हिन्दी साहित्य का स्वर्ण युग (2008, 09, 13) – (क) जायसी
2. छायावाद के प्रवर्तक कवि [2008] – (ख) भक्तिकाल
3. प्रेममार्गी शाखा [2008] – (ग) जयशंकर प्रसाद
4. प्रगतिवाद [2008] – (घ) तुलसीदास
5. रीतिकाल की मुख्य भाषा है [2009] – (ङ) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
6. रामभक्ति शाखा [2011] – (च) ब्रजभाषा
उत्तर-
1. → (ख),
2. → (ग),
3. → (क),
4. → (ङ),
5. → (च),
6. → (घ)।

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  • एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. पृथ्वीराज रासो का काव्य रूप क्या है?
2. जगनिक द्वारा रचित कृति का क्या नाम है?
3. ‘पद्मावत’ किस कवि की रचना है?
4. ज्ञानमार्गी शाखा में किस उपासना की प्रधानता है?
5. कृष्णभक्ति काव्य में किस भाव की प्रधानता है?
6. रीतिकालीन कविता में भावपक्ष प्रबल है या कलापक्ष?
7. बिहारी सतसई किस काल की रचना है? [2009]
8. रीतिकाल को अन्य नाम क्या दिया गया है?
9. तुलसीदास ने ‘रामचरितमानस’ की रचना किस भाषा में की है?
10. सूरदास की काव्य भाषा कौन-सी है?
उत्तर-
1. महाकाव्य,
2. परमाल रासो,
3. मलिक मुहम्मद जायसी,
4. निर्गुण ब्रह्म की,
5. माधुर्य भाव की,
6. कलापक्ष,
7. रीतिकाल,
8. शृंगारकाल,
9. अवधी,
10. ब्रजभाषा।

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MP Board Class 11th Special Hindi विचार एवं भाव-विस्तार

MP Board Class 11th Special Hindi विचार एवं भाव-विस्तार

थोड़े में कही हुई बात को विस्तार से व्याख्या करके समझाना ही भाव-विस्तार है। संक्षेप में जो बात कही जाती है, उसमें अलंकृत भाषा शैली का उपयोग होता है। जीवन का गम्भीर अनुभव उसमें छिपा रहता है। उस अनुभव को समझकर ही उसे समझाया जा सकता है। अतः भाव-विस्तार करते समय हमें इन बातों पर ध्यान देना चाहिए

  1. पहले पढ़कर समझ लेना चाहिए कि वाक्य में जीवन के किस महत्त्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख है।
  2. फिर यह ज्ञात करें कि वह तथ्य कब और किस दशा में गठित होगा।
  3. फिर विचार कीजिए कि क्या उस वाक्य में, रूपक, लोकोक्ति, उपमा अथवा मुहावरे का प्रयोग हुआ है।
  4. अब सोची हुई बात को क्रम से व्यवस्थित करके समझाते हुए लिखिए।
  5. भाव विस्तार 5-6 पंक्तियों के आस-पास होना चाहिए।
  6. उसमें कोई कठिन या महत्त्वपूर्ण शब्द हो तो उस पर विशेष ध्यान देकर उसकी व्याख्या करनी चाहिए।

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कुछ चुने हुए भाव-विस्तार
(1) समन्वय युक्त जीवन ही राष्ट्र का सुखदायी रूप है। [2009]
एक राष्ट्र के अन्तर्गत विभिन्न भाषाएँ, संस्कृतियाँ एवं धर्म होते हैं। जब तक इन सबके मध्य प्रेम, सहयोग, सद्भावना एवं सामंजस्य नहीं होगा तब तक राष्ट्र का सुखदायी स्वरूप निर्मित नहीं हो सकता, राष्ट्र में सुख चैन तथा बन्धुत्व की भावना का विकास होना नितान्त असम्भव है। जिस राष्ट्र में द्वेष, कलह एवं अशान्ति होगी, वहाँ दुःख का ही वातावरण दृष्टिगोचर होगा। जिस प्रकार अनेक नदियाँ सागर में एकाकार हो जाती हैं तदनुसार भिन्न-भिन्न संस्कृतियाँ राष्ट्रीय संस्कृति में विलीन हो जाती हैं।

(2) जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं। [2010]
इस संसार में जन्म देने की जननी (माँ) होती है और संसार में आने के पश्चात् पालन-पोषण करने वाली जन्मभूमि होती है। इस प्रकार जननी और जन्मभूमि सबसे श्रेष्ठ होती है। इन दोनों के बिना मनुष्य का जन्म तथा जीवन सम्भव नहीं है। ईश्वर के बाद जननी ही पूज्य तथा श्रद्धेय होती है। हम जन्मभूमि पर निवास करते हैं, उसी के अन्न, फल, दूध आदि से हमारा शरीर पुष्ट होता है। इसीलिए जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ हैं।

(3) बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा है। [2017]
बैर क्रोध का स्थिर रूप है जिस प्रकार आँवले या आम का मुरब्बा आम या आँवले की तुलना में अधिक टिकाऊ होता है। तद्नुसार बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा है। जब किसी के प्रति मन में क्रोध हो लेकिन उसका प्रदर्शन न किया जाये तो वह मनुष्य के मन में टिक जाता है। वह मौके की तलाश में रहता है। जैसे ही स्वयं के लक्ष्य को देखता है अपना प्रतिकार चुका लेता है। यही प्रतिकार (बदला) बैर की कोटि में आता है।

(4) अज्ञान सर्वत्र आदमी को पछाड़ता है।
आदमी की जिन्दगी में अज्ञानता सबसे बड़ा अभिशाप है। ज्ञान की पगडंडी पर ही कदम बढ़ाकर ही सत् एवं असत्, शुभ एवं अशुभ की परख करने की क्षमता उत्पन्न हुई है। अज्ञानता विकास के मार्ग को अवरुद्ध करती है अतः यह कथन सत्य है कि अज्ञान सर्वत्र आदमी को पछाड़ता है।

(5) क्रोध अन्धा होता है।
अन्धा का आशय है कि बिना सोचे-विचारे काम में जुट जाना। उदाहरणस्वरूप जैसे अन्धा मानव पथ पर अग्रसर होने पर ठोकर खाता है। तद्नुसार बिना विचारे काम करने वाला इन्सान यत्र- तत्र भटकता फिरता है। क्रोध का संचार बहुत ही तेज गति से होता है। क्रोधी व्यक्ति में सोचने-विचारने की शक्ति नहीं रहती है। इसलिए क्रोध को अन्धा कहा गया है।

(6) जीवन के विटप का पुष्य संस्कृति है।
संस्कृति मानव जीवन का सर्वोत्तम रूप है अथवा जीवन का पुष्प है जिस भाँति बीज अंकुर से विशाल वृक्ष बनता है। तद्नुसार मनुष्य अपने समाज में निवास करके स्वयं के सुख के साथ-साथ समाज की सुविधा के लिए सोचता-विचारता है, कुछ नियमों का समाज में रहकर पालन करना अनिवार्य है। ये सामाजिक नियम परिपालन संस्कृति कहलाते हैं। इस भाँति जिस प्रकार वृक्ष का परिणाम पुष्प है उसी भाँति संस्कृति मानव-जीवन का सर्वोत्तम परिणाम है। इस हेतु सदृश्य के आधार पर यह कहा जा सकता है कि जीवन रूपी वृक्ष का पुष्प संस्कृति है। सांस्कृतिक सुषमा और सुगन्ध ही राष्ट्रीय सौन्दर्य का आधार है।

(7) चरित्र सबसे बड़ा धन है।। [2012]
उत्तर-
जीवन में चरित्र का बहुत महत्त्व है। इसीलिए चरित्र की सुरक्षा सर्वोपरि मानी गयी है। चरित्र के आधार पर ही मनुष्य का मूल्यांकन होता है। जिनका चरित्र श्रेष्ठ होता है ध व्यक्ति महान होते हैं। लक्ष्मी तो आती-जाती रहती है किन्तु चरित्र एक बार गिर जाने पर फिर नहीं उठता है। इसीलिए माना गया है कि ‘धन जाने पर कुछ नष्ट नहीं होता, स्वास्थ्य जाने पर कुछ नष्ट होता है किन्तु चरित्र जाने पर सब कुछ नष्ट हो जाता है। यही कारण है कि चरित्र सबसे बड़ा धन है जिसकी रक्षा हर हाल में करनी चाहिए।

(8) दूर के ढोल सुहावने होते हैं। [2016]
उत्तर-
दूर के ढोल सुहावने होते हैं क्योंकि उनकी तीव्र ध्वनि की कर्कशता दूर तक नहीं पहुँच पाती है। इसके विपरीत ढोल के पास बैठने वाले लोगों के कानों के पर्दे फटते रहते हैं। दूर किसी मनोरम स्थान पर शाम के समय बजने वाले ढोलों की आवाज अपनी मधुरता के साथ पहुँचती है तो सुनने वाले के मन में विवाहोत्सव का मनोरम चित्र उभर आता है। शोर-शराबे के बीच घर के एक कोने में बैठी लाजवंती नव-वधू की कल्पना से उसका हृदय आनंदित होने लगता है। प्रेम, उल्लास आदि के भाव उसके मन में उठने लगते हैं। इस प्रकार पास के लोगों को कटु लगने वाली ढोल की आवाज दूर पहुँचकर मधुर बन जाती है।

प्रश्नोत्तर

  • लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अल्पविराम किसे कहते हैं? इसका प्रयोग कहाँ होता है? उदाहरण देकर समझाइए। [2016]
उत्तर-
अल्पविराम एक विराम चिह्न है जिसका प्रयोग बहुत थोड़ी देर रुकने के संकेत के लिए होता है। जैसे-शिवाजी, महाराणा प्रताप हमारे आदर्श पुरुष हैं।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित गद्यांश में उचित विराम चिह्न लगाइए- [2013]
बसें बदलता हुआ रात भर का सफर तय करके अगले दिन सुबह ही मैं रामेश्वरम् पहुँच गया मेरे पिताजी बहुत देर तक मेरा हाथ थामे रहे उनकी आँखों में आँसू नहीं थे क्या तुम नहीं देखते अबुल ईश्वर किस प्रकार अँधेरा कर देता है
उत्तर-
बसें बदलता हुआ रात भर का सफर तय करके अगले दिन सुबह ही मैं रामेश्वरम् पहुँच गया, मेरे पिताजी बहुत देर तक मेरा हाथ थामे रहे, उनकी आँखों में आँसू नहीं थे। क्या तुम नहीं देखते अबुल? ईश्वर किस प्रकार अँधेरा कर देता है?

प्रश्न 3.
निम्नांकित गद्यांश में विराम चिह्नों का यथास्थान प्रयोग कीजिए [2009]
बड़प्पन कहीं रहने या नहीं रहने से नहीं आता है, आता है दूसरे को बड़प्पन देने से दूसरे के दुःख को अपना दुःख मानने से अपभ्रंश का एक पुराना दोहा है जिसका भावार्थ है यदि तुम पूछते हो बड़ा घर कौन है तो देखो वह छोटी सी टूटी-फूटी झोंपड़ी उसमें सबके प्यारे बन्धु रहते हैं जो कोई भी कष्ट में हो उसके कष्ट का निवारण करने के लिए तत्पर रहते हैं।
उत्तर-
बड़प्पन कहीं रहने या नहीं रहने से नहीं आता है, आता है दूसरे को बड़प्पन देने से। दूसरे के दुःख को अपना दुःख मानने से। अपभ्रंश का एक पुराना दोहा है जिसका अर्थ है यदि तुम पूछते हो बड़ा घर कौन है तो देखो वह छोटी सी टूटी-फूटी झोंपड़ी। उसमें सबके प्यारे बन्धु रहते हैं। जो कोई भी कष्ट में हो, उसके कष्ट का निवारण करने के लिए तत्पर रहते हैं।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अनुच्छेद में विराम चिह्नों का यथास्थान प्रयोग कीजिए [2008]
कभी कभार वह भी घर आ जाती पर पहले का सा तूफान नहीं करती हँसती खिलखिलाती पर उसमें पहले की सी जीवंतता नहीं थी जब वह चली जाती तो यह कहते कहा था साथ चली जाओ तब नहीं मानी पैसे का मुँह देखती रही अब मन ही मन घुल रही है।
उत्तर-
कभी कभार वह भी घर आ जाती, पर पहले का सा तूफान नहीं करती। हँसती खिलखिलाती, पर उसमें पहले की-सी जीवंतता नहीं थी। जब वह चली जाती तो यह कहते, “कहा था साथ चली जाओ। तब नहीं मानी, पैसे का मुँह देखती रही। अब मन ही मन घुल रही है।”

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम चिह्न लगाइए
(1) देवेन्द्र श्याम अनुपम इन्दौर ग्वालियर जबलपुर होकर आज ही लौटे हैं। [2008]
(2) मेरा मित्र अभी आएगा पर रुकेगा नहीं [2008]
(3) हे ईश्वर उसकी रक्षा करो [2008]
(4) हाय यह तो बहुत बुरा हुआ [2008]
(5) आपका पत्र क्यों नहीं मिला [2012]
(6) अनेक बार मैंने उसे समझाया हठ न करो [2012]
उत्तर-
(1) देवेन्द्र, श्याम, अनुपम इन्दौर, ग्वालियर, जबलपुर होकर आज ही लौटे हैं।
(2) मेरा मित्र अभी आएगा, पर रुकेगा नहीं।
(3) हे ईश्वर ! उसकी रक्षा करो।
(4) हाय ! यह तो बहुत बुरा हुआ।
(5) आपका पत्र क्यों नहीं मिला?
(6) अनेक बार मैंने उसे समझाया, हठ न करो।

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प्रश्न 6.
कोई तीन विराम चिह्नों का वर्णन करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए। [2017]
उत्तर-
पूर्ण विराम वाक्य के पूर्ण होने पर लगाते हैं, अल्प विराम थोड़ी-सी देर रुकने को लगाते हैं और प्रश्नवाचक चिह्न प्रश्नवाचक वाक्यों के अन्त में लगाया जाता है।
उदाहरण वाक्य-अच्छा जी आप दु:खी हुए न? क्या करूँ, बिना चोरी किए इस बेरोजगारी में काम नहीं चलता।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध कीजिए
(1) श्रीकृष्ण के अनेकों नाम हैं। [2009, 13]
(2) आपका पत्र सधन्यवाद मिला।
(3) क्या आप देवनागरी भाषा जानते हैं। [2009]
(4) भाषा की माधुर्यता बस देखते ही बनती है। [2013]
(5) कृपया शीघ्र पत्र देने की कृपा करें। [2016]
(6) मेले में भारी भीड़ थी। [2016]
उत्तर-
(1) श्रीकृष्ण के अनेक नाम हैं।
(2) आपका पत्र मिला, धन्यवाद।
(3) क्या आप देवनागरी लिपि जानते हैं?
(4) भाषा की मधुरता, बस देखते ही बनती है।
(5) शीघ्र पत्र देने की कृपा करें।
(6) मेले में बहुत भीड़ थी।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध कीजिए-
(1) उसे अनुत्तीर्ण होने की आशा है। [2009, 14]
(2) तुम्हारा सब काम गलत होता है। [2012, 14]
(3) मेरे को खाना खाना है। [2012]
(4) हत्यारे को मृत्युदण्ड की सजा मिली है।
(5) मुझे तुम्हारी पदोन्नति की आशंका है। [2012]
उत्तर-
(1) उसे अनुत्तीर्ण होने की आशंका है।
(2) तुम्हारे सब काम गलत होते हैं।
(3) मुझे खाना खाना है।
(4) हत्यारे को मृत्युदण्ड मिला है।
(5) मुझे तुम्हारी पदोन्नति की आशा है।

प्रश्न 9.
निम्नांकित वाक्यों की अशुद्धियाँ दूर कीजिए
(1) किरन एक मोतियों का हार पहिने है।
(2) प्रधानाचार्य को प्रार्थना करनी चाहिए।
(3) मैंने कल पुस्तकें खरीदा।
(4) रामा एक विद्वान छात्रा है।
उत्तर-
(1) किरन मोतियों का एक हार पहने है।
(2) प्रधानाचार्य से प्रार्थना करनी चाहिए।
(3) मैंने कल पुस्तकें खरीदी।
(4) रामा एक विदुषी छात्रा है।

प्रश्न 10.
मुहावरे और लोकोक्ति में क्या अन्तर है? स्पष्ट कीजिए। [2014]
उत्तर-
ऐसा वाक्यांश, जो सामान्य अर्थ का बोध न कराकर किसी विशेष अर्थ का आभास दे, उसे मुहावरा कहते हैं। लोकोक्तियाँ किसी विशेष घटना या कहानी से निकलकर प्रचलित होती हैं। इनमें लोक अनुभव छिपा होता है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ बताते हुए वाक्य प्रयोग कीजिए
अन्धे की लकड़ी, ईद का चाँद होना, छप्पर फाड़ कर देना, पेट में चूहे कूदना।
उत्तर-
अन्धे की लकड़ी (एक ही सहारा)-श्रवण कुमार अपने माता-पिता की अंधे की लकड़ी थे।
ईद का चाँद होना (बहुत दिनों में दिखना) श्याम, तुम्हें देखने को आँखें तरस गईं, तुम तो ईद का चाँद हो गए।
छप्पर फाड़कर देना (बिना परिश्रम के अनायास प्राप्ति)-भगवान देता है तो छप्पर फाड़कर देता है।
पेट में चूहे कूदना (जोर से भूख लगना)-पेट में चूहे कूद रहे हैं, पहले कुछ खा लें तब काम निपटायेंगे।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित का अर्थ बताते हुए वाक्य प्रयोग कीजिए
नौ-दो ग्यारह होना, पौ बारह होना, ऊँची दुकान फीका पकवान, आँख के अन्धे गाँठ के पूरे।
उत्तर-
नौ-दो ग्यारह होना (चम्पत हो जाना)-जगार पड़ते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गए।
पौ बारह होना (खूब लाभ)-आजकल जमीन के व्यापार में पौ बारह है।
ऊँची दुकान फीका पकवान (दिखावा मात्र) यह शुद्ध घी का विज्ञापन करने वाले के यहाँ रेपसीड का सामान पकड़ा गया है तो सभी कहने लगे इसकी तो ऊँची दुकान और फीका पकवान है।
आँख के अन्धे, गाँठ के पूरे (मूर्ख धनवान) वकीलों के क्या कहने उनके यहाँ तो आँख के अन्धे और गाँठ के पूरे आते ही रहते हैं।

प्रश्न 13.
“सब उन्नतियों का मूल धर्म है” का भाव विस्तार कीजिए।
उत्तर-
प्रस्तुत कथन भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का है। उन्होंने देशोपकारिणी सभा में भाषण करते हुए भारतवासियों को राष्ट्र के प्रति सजग किया था। भारतेन्दु जी मानते थे कि सभी प्रकार की उन्नतियों का आधार धर्म होता है। धर्म में समाज गठन की अनेक नीतियाँ हैं। धार्मिक अनुष्ठान, त्यौहार आदि समाज को उन्नत बनाने के लिए हैं। हमारे यहाँ धर्म और समाज सुधार दूध तथा पानी के समान मिले हुए हैं। धर्म समाज सुधार के लिए होता है। धर्म समाज में अनुशासन, व्यवस्था तथा पवित्र भावनाओं का विकास करता है। अत: राष्ट्र, समाज तथा व्यक्ति का हित धर्म के अनुसार कार्य करने में है। मंगलकारी भावना से किए गए कार्य विकास की ओर ले जाने वाले होते हैं। ऐसे कार्यों से हमारा ध्यान समाज कल्याण तथा विश्व बन्धुत्व पर केन्द्रित होगा। इससे मानव मात्र का मंगल विधान होगा। इसीलिए धर्म को सभी प्रकार की उन्नतियों का मूल आधार माना गया है।

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प्रश्न 14.
“उत्साह की गिनती अच्छे गुणों में होती है।”का भाव विस्तार कीजिए। [2009]
उत्तर-
गुण अच्छे तथा बुरे दो प्रकार के माने गये हैं। भाव का अच्छा या बुरा होना उसकी प्रवृत्ति के अच्छे या बुरे फल के आधार पर निश्चित होता है। इस प्रकार देखें तो उत्साह अच्छे गुणों की कोटि में आता है। उत्साह की प्रशंसा तभी होती है, जब वह करने के योग्य कर्मों में दिखाया जाता है। न करने योग्य कामों के प्रति होने वाला उत्साह उतना प्रशंसनीय नहीं होता है।

प्रश्न 15.
“साँझ की आँखों में करुणा क्यों उभर आती है” का भाव विस्तार कीजिए। [2009]
उत्तर-
घर लौटते निरीह वनवासियों की पगड़ी पर तथा वनवासी स्त्रियों की चूनर पर दो चार फूल-पत्ते गिर जाते हैं। यह देखकर साँझ की आँखों में करुणा उभर आती है। यह करुणा ओस की बूंद रूपी आँसुओं में प्रकट होती है।

प्रश्न 16.
“प्रेम की भाषा शब्द रहित है” का भाव विस्तार कीजिए।
उत्तर-
प्रस्तुत उक्ति सरदार पूर्णसिंह के आचरण की सभ्यता’ निबन्ध की है। भावात्मक निबन्धों के श्रेष्ठ रचनाकार ने यहाँ पर प्रेम की सहज अभिव्यक्ति के विषय में बताया है। प्रेम सहज सम्प्रेषित होने वाला भाव है। बिना शब्दों के हाव-भावों द्वारा ही प्रेम की अभिव्यक्ति हो जाती है। नेत्र, कपोल, मस्तक आदि की चेष्टाएँ प्रेम को व्यक्त करने में समर्थ हैं। प्रेम की अभिव्यक्ति के लिए वाक्यों से निर्मित भाषा के प्रयोग की आवश्यकता नहीं पड़ती है। शब्द तो मात्र साधारण विषयों को ही सम्प्रेषित कर पाते हैं। प्रेम एक विशिष्ट स्तर का भाव है इसलिए इसकी अभिव्यक्ति भाषा नहीं कर सकती है। इसकी भाषा शब्दों से परे होती है।

प्रश्न 17.
“साहसपूर्ण आनन्द की उमंग का नाम उत्साह है” का भाव विस्तार कीजिए। [2011, 14]
उत्तर-
गम्भीर विचारक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के ‘उत्साह’ निबन्ध में यह कथन आया है। उत्साह का स्थान आनन्द वर्ग में माना गया है क्योंकि ‘उत्साही’ कर्म सौन्दर्य के उपासक होते हैं। वे कठिन स्थिति के बीच भी साहसपूर्ण उल्लास के साथ कर्म में प्रवृत्त होते हैं। कठिन स्थिति आने से भयभीत होकर प्रायः उससे बचने का प्रयास करते हैं। लेकिन कठिनतम स्थिति में भी साहस के साथ आनन्द का अनुभव करते हुए उल्लासपूर्वक कार्य में लगने का प्रयत्न करते हैं वे प्रशंसा के योग्य होते हैं। वे सच्चे उत्साही कहे जाते हैं। उत्साह में साहसमय आनन्द के भाव का होना आवश्यक है।

प्रश्न 18.
“कला जीवन भी है और जीवनयापन का साधन भी।” का भाव विस्तार कीजिए। [2008, 13]
उत्तर-
कला ही जीवन है। जीवन जीने की शैली को कला कहते हैं। हम पल-पल जो कुछ भी सीखते हैं। उन सभी में किसी-न-किसी रूप में कला के दर्शन होते हैं। कला में संघर्ष करने की शक्ति, कर्त्तव्यनिष्ठा, दयालुता आदि मानवीय गुण पाये जाते हैं। कला रोजी-रोटी का साधन है। कला से सम्बन्धित विभिन्न कार्यों के द्वारा जीवनयापन करना सीखते हैं। कला सम्पूर्ण जीवन का प्रतिबिम्ब है।

प्रश्न 19.
“मुल्क बदल जाए वतन तो वतन होता है” का भाव पल्लवन कीजिए। [2015]
उत्तर-
विदेश में निवास करने वाला व्यक्ति कहता है कि रहें कहीं पर, किन्तु अपना वतन तो अपना ही होता है। भाव यह है कि जिस धरती पर जन्म लिया है, जिसके अन्न-जल से यह शरीर पुष्ट हुआ, उसे भला कैसे भुलाया जा सकता है? विविध प्रकार के कार्यों से, आवश्यकताओं से, विवशता से अनेक देशों में जाया जा सकता है, किन्तु वहाँ जाने पर भी अपना निजी देश तो हृदय में समाया रहता है। रहने से देश तो बदल सकते हैं, किन्तु जन्म का देश नहीं बदला जा सकता है। उसके प्रति तो अटूट भाव रहेगा ही।

प्रश्न 20.
“आज तो मर्यादाओं को फिर से पहचानना है।” पंक्ति का भाव पल्लवन कीजिए। [2008, 15
उत्तर-
‘आज तो मर्यादाओं को फिर से पहचानना है।’ का भाव है कि वर्तमान अर्थप्रधान युग में मर्यादाएँ समाप्त हो रही हैं। स्वार्थग्रस्त होकर मनुष्य सामाजिक मान्यताओं को त्याग रहा है। जिन मर्यादाओं ने परिवार को संगठित और खुशहाल रखा, आज वे चरमरा रही हैं। मर्यादा एकांकी में जगदीश के भाई स्वार्थ हित के कारण अलग हो जाते हैं, बँधा-बँधाया परिवार बिखर जाता है तभी जगदीश अनुभव करते हैं कि हमें आज की परिस्थितियों में पारिवारिक मर्यादाओं को पहचानना होगा। तभी संयुक्त परिवार चल पायेंगे।

प्रश्न 21.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए- [2015] पृथ्वी, आँख, पुष्प, कमल।
उत्तर-
पृथ्वी-भू, भूमि; आँख-नेत्र, नयन; पुष्प-फूल, सुमन; कमल-जलज, पंकज।

प्रश्न 22.
निम्नलिखित शब्दों के हिन्दी मानक रूप लिखिए [2015]
सांझ, न्हात, जरी, बिगरी।
उत्तर-
संध्या, स्नान, जड़ी, बिगड़ी।

प्रश्न 23.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए-(कोई दो) [2015]
भय, शत्रु, उपस्थित, अल्पज्ञ।
उत्तर-
निर्भय, मित्र, अनुपस्थित, सर्वज्ञ।

  • अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश में उचित विराम चिह्न लगाइए
(अ) अच्छा महोदय आपको कष्ट हुआ न क्या करूँ बिना भीख माँगे इस सर्दी में पेट गालियाँ देने लगता है [2010]
उत्तर-
अच्छा महोदय, आपको कष्ट हुआ न, क्या करूँ? बिना भीख माँगे इस सर्दी में पेट गालियाँ देने लगता है।

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(ब) मनुष्य मनुष्य का विश्वास नहीं कर सका इसीलिए तो एक सुखी दूसरे दु:खी की ओर घृणा से देखता था दु:ख ने ईश्वर का अवलम्बन लिया तो भी भगवान ने संसार के दुःखों की सृष्टि बन्द कर दी क्या। . उत्तर-मनुष्य मनुष्य का विश्वास नहीं कर सका। इसीलिए तो एक सुखी दूसरे दुःखी की ओर घृणा से देखता था। दुःख ने ईश्वर का अवलम्बन लिया तो भी भगवान ने संसार के दुःखों की सृष्टि बन्द कर दी क्या?

प्रश्न 2.
हिन्दी में विराम चिह्नों का क्या महत्व है? हिन्दी में प्रयोग किए जाने वाले दो विराम चिह्नों के नाम लिखिए। [2014]
उत्तर-
भाषा एक व्यक्ति के विचारों को दूसरे तक पहुँचाने का माध्यम है। सही विचार सम्प्रेषित करने के लिए बोलने में रुकना पड़ता है। इस रुकने को इंगित करने के लिए विराम चिह्नों का प्रयोग होता है। यदि विराम चिह्नों का सही प्रयोग नहीं है तो बात का भाव बदल जाता है। अत: भाव सम्प्रेषण के लिए हिन्दी में विराम चिह्नों का बहुत महत्व है। पूर्ण विराम (1) तथा अर्द्ध विराम (,) हिन्दी के दो प्रमुख विराम चिह्न हैं।

प्रश्न 3.
विराम चिह्नों के प्रयोग से भाषा की शुद्धता पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
विराम चिह्नों के प्रयोग से भाषा शुद्ध हो जाती है।

प्रश्न 4.
हर्ष,शोक, विस्मय आदि को प्रकट करने वाले वाक्यों में कौन-सा विराम चिह्न प्रयोग किया जाता है?
उत्तर-
हर्ष, शोक, विस्मय आदि को प्रकट करने वाले वाक्यों में (!) विराम चिह्न का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ बताइए कलम तोड़ना, खेत रहना।
उत्तर-
कलम तोड़ना-अच्छा लिखना। खेत रहना-वीरगति प्राप्त करना।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्य प्रयोग कीजिए
(i) खाक छानना,
(ii) पट्टी पढ़ाना।
उत्तर-
(i) नौकरी के लिए वह खाक छानता फिर रहा है।
(ii) आपने राकेश को क्या पट्टी पढ़ा दी है, वह घर जाने का नाम ही नहीं लेता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित लोकोक्तियों के अर्थ लिखिए-
(i) आँख का अंधा नाम नयनसुख,
(ii) नाच न जाने आँगन टेढ़ा।
उत्तर-
(i) आँख का अन्धा नाम नयनसुख….गुण के विपरीत नाम।
(ii) नाच न जाने आँगन टेढ़ा-काम न जानना और बहाना बनाना।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखिए
(i) अपना उल्लू सीधा करना,
(ii) उन्नीस-बीस होना।
उत्तर-
(i) अपना उल्लू सीधा करना-अपना काम निकालना।
(ii) उन्नीस-बीस होना-मामूली अन्तर।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्य प्रयोग कीजिए
(i) गाल बजाना,
(ii) जान पर खेलना।
उत्तर-
(i) गाल बजाने से कुछ नहीं होता, काम तो करने से ही होता है।
(ii) भारतीय सैनिक देश की रक्षा के लिए जान पर खेल जाते हैं।

प्रश्न 10.
‘नाक नचाना’ का अर्थ बताते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए
उत्तर-
नाक नचाना (तंग करना)-चिन्मय अपनी माँ को सारे दिन नाक नचाता है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित लोकोक्ति का अर्थ वाक्य प्रयोग द्वारा स्पष्ट कीजिए-
आगे नाथ न पीछे पगहा।। उत्तर…तुम्हारे तो आगे नाथ न पीछे पगहा, इसीलिए घूमते रहते हो।

प्रश्न 12.
“कान देना’ मुहावरे का अर्थ वाक्य प्रयोग द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
शिक्षकों की बातों पर कान देना आवश्यक है।

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प्रश्न 13.
‘सिर पीटना’ का वाक्य में प्रयोग करके अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
अब सिर पीटने से क्या होता है, सारा माल तो चला गया।

प्रश्न 14.
‘चाँदी का जूता मारना’ लोकोक्ति का सही अर्थ बताइए।
उत्तर-
चाँदी का जूता मारना-पैसे के बल पर काम कराना।

प्रश्न 15.
‘आग में घी डालना’ मुहावरे का अर्थ वाक्य प्रयोगद्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
श्याम ने आग में घी डालकर झगड़ा बढ़ा दिया नहीं तो दोनों शान्त हो रहे थे।

प्रश्न 16.
भाव विस्तार से क्या आशय है?
उत्तर-
सूत्र रूप में कही गई बात को विस्तार से समझाना, भाव विस्तार कहलाता है।

प्रश्न 17.
भाव विस्तार की क्या उपयोगिता है? संक्षेप में लिखिए।
उत्तर-
भाव विस्तार से गूढ कथन का अर्थ उजागर होता है। उस कथन के सभी पक्ष समझ में आ जाते हैं।

सम्पूर्ण अध्याय पर आधारित महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न |

  • बहु-विकल्पीय प्रश्न

1. ‘क्या तुम घर जाओगे’ वाक्य के अन्त में कौन-सा विराम चिह्न लगेगा?
(i) ,
(ii) ।
(ii) ?
(iv) !

2. पूर्णविराम चिह्न होता है
(i) () (ii)। (iii) ; (iv) !

3. निम्नलिखित में उद्धरण विराम चिह्न कौन-सा है?
(i) “” (ii)? (iii) () (iv) ………..

4. “इस नगर में अनेकों आदमी रहते हैं।” का शुद्ध रूप है-
(i) इस नगर में रहते हैं अनेकों आदमी,
(ii) अनेकों आदमी रहते हैं, इस नगर में,
(iii) इस नगर में अनेक आदमी रहते हैं,
(iv) इस नगर में अनेकों सज्जन रहते हैं।

5. “भारत में अनेकों पर्व मनाये जाते हैं।”का शुद्ध वाक्य है- [2011]
(i) भारत भर में अनेकों पर्व मनाये जाते हैं,
(ii) भारत में अनेकों त्यौहार मनाये जाते हैं,
(iii) भारत में अनेक पर्व मनाये जाते हैं,
(iv) भारत में नाना पर्व मनाये जाते हैं।

6. “सोहन अगले वर्ष भोपाल गया था।” में अशुद्धि है [2014]
(i) काल सम्बन्धी, (ii) वर्तनी सम्बन्धी, (iii) वचन सम्बन्धी, (iv) कर्ता सम्बन्धी।

7. ‘टेढ़ी खीर’ मुहावरे का अर्थ है [2016]
(i) खीर खाना, (ii) मीठी खीर, (iii) सरल कार्य, (iv) कठिन कार्य।

8. ‘सब धान बाईस पसेरी’ का अर्थ है
(i) बहुत सस्ता होना, (ii) बहुत महँगा होना, (iii) अधिक से सुविधा, (iv) अच्छे-बुरे को समान समझना।

9. ‘मँह में राम बगल में छुरी’ का अर्थ है
(i) कठोर स्वभाव, (ii) कपटपूर्ण व्यवहार, (iii) कोमल स्वभाव, (iv) राम-राम जपने वाला।

10. ‘ईद का चाँद’ का अर्थ है… [2009]
(i) ईद पर मिलना, (ii) बहुत दिन बाद मिलना, (iii) ईद पर खुश होना, (iv) ईद पर चाँद दिखना।

11. ‘कवित्री’ शब्द की सही वर्तनी होगी [2017]
(i) कवीत्री, (ii) कवीयत्री, (iii) कवयित्री, (iv) कवयीत्री।
उत्तर-
1. (iii), 2. (ii), 3. (i), 4. (iii), 5. (iii), 6. (i), 7. (iv), 8. (iv), 9. (ii), 10. (ii), 11.(iii)।

  • रिक्त स्थान पूर्ति

1. क्या भोपाल सुन्दर शहर है ……….।
2. वाक्य के अन्त में ………….’ लगाया जाता है। [2017]
3. ‘हानि’ का विलोम शब्द ‘………….. ‘ है। [2015]
4. ‘एक पंथ ………….. ‘ प्रसिद्ध मुहावरा है।
5. ‘ऊँट के मुँह में जीरा’ का अर्थ ………….. है।
6. ‘आम के आम …………..’ प्रचलित लोकोक्ति है।
7. माधुर्यता का शुद्ध रूप ………….’ है।
8. ‘अनेकों’ का शुद्ध ………….. होता है।
9. ‘आस्तीन का साँप’ मुहावरे का अर्थ ………… है। [2009]
10. ‘सब धान बाईस पसेरी’ मुहावरे का अर्थ ……. है। [2014]
11. ‘ईद का चाँद होना’ मुहावरे का अर्थ है ………….. | [2016]
उत्तर-
1. ?, 2. पूर्णविराम, 3. लाभ, 4. दो काज, 5. बहुत कम, 6. गुठलियों के दाम, 7. माधुर्य, 8. अनेक, 9. कपटी मित्र, 10. अच्छे-बुरे को समान समझना, 11. कभी-कभी दिखना।

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  • सत्य असत्य

1. प्रश्नवाचक वाक्य के अन्त में (?) विराम चिह्न लगाया जाता है।
2. ‘नाक रगड़ना’ का अर्थ खुशामद करना है।
3. ‘लोहा लेना’ मुहावरे का अर्थ युद्ध करना है। [2017]
4. ‘टेढ़ी खीर’ मुहावरे का अर्थ खीर खाना है।
5. ‘उज्ज्वल’ शब्द पूर्ण शुद्ध है। [2013]
6. पूर्ण विराम का प्रयोग किसी कथन के पूर्ण होने पर किया जाता है। [2008]
7. लोक + उक्ति से लोकोक्ति शब्द की उत्पत्ति हुई है। [2008, 14]
8. यह चिन्ह्न ! प्रश्नवाचक चिह्न के लिए प्रयोग किया जाता है। [2008]
9. “अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग” यह एक लोकोक्ति है। [2008]
10. लोकोक्ति पूर्ण स्वतन्त्र होती है जबकि मुहावरा पूर्ण स्वतन्त्र नहीं होता। [2008]
11. लोकोक्ति को कहावत भी कहते हैं। [2010, 16]
12. मुहावरे का प्रयोग भाषा में चमत्कार उत्पन्न करता है। [2011]
उत्तर-
1. सत्य, 2. सत्य, 3. सत्य, 4. सत्य, 5. सत्य, 6. सत्य, 7. सत्य, 8. असत्य, 9. सत्य, 10. सत्य, 11. सत्य, 12. सत्य।

  • जोड़ी मिलाइए

I. 1. रात-दिन [2015] – (क) विस्मयादिबोधक
2. ‘हे राम ! क्या-क्या सहना पड़ेगा?’ वाक्य है – (ख) द्वन्द्व समास
3. ‘दाँत खट्टे करना’ का अर्थ है – (ग) प्रश्नवाचक वाक्य
4. ‘पौन’ का तत्सम है [2015] – (घ) परास्त करना
5. वह कहाँ जा रहा है? [2017] – (ङ) पवन
उत्तर-
1.→ (ख),
2. → (क),
3. → (घ),
4.→ (ङ),
5. → (ग)।

II.
1. तुम तो कुर्सी में बैठे हो वाक्य है – (क) अशुद्ध
2. ‘एक मात्र सहारा’ के लिए मुहावरा है – (ख) बिखर जाना
3. तीन तेरह होना [2014, 17] – (ग) अन्धे की लकड़ी
4. ‘चार चाँद लगाना’ का अर्थ है – (घ) मुँह मोड़ना
5. उपेक्षा के लिए मुहावरा है – (ङ) शोभा बढ़ाना
उत्तर-
1. → (क),
2. → (ग),
3. → (ख),
4. → (ङ),
5. → (घ)।

  • एक शब्द /वाक्य में उत्तर

1. जो समाज की सेवा करता है। [2008]
2. जो हमेशा सत्य बोलता है। [2008]
3. जिसे पराजित न किया जा सके। [2008, 09]
4. जहाँ से चार रास्ते जाते हों। [2008]
5. जो सब कुछ सहन कर लेता है। [2008]
6. जिसका अस्तित्व लोक में न हो। [2008, 09]
7. जिसकी धर्म में आस्था हो। [2008]
8. जिसका विश्वास ईश्वर में न हो। [2008, 09, 16]
9. जो देश पर बलिदान हो गया हो। [2008]
10. जिनकी गिनती न की जा सके। [2008]
11. जो आदर के योग्य हो। [2008]
12. जिसे देखा न जा सके। [2008, 09]
13. जिसकी ईश्वर में आस्था हो। [2008]
14. जिस पर नियन्त्रण न हो। [2008]
15. जिसे विभाजित न किया जा सके। [2008]
16. किये गये उपकार को मानने वाला। [2009]
17. जिसके आने की तिथि ज्ञात न हो। [2010]
18. जो सबसे श्रेष्ठ हो। [2010]
19. जो उच्च कुल में पैदा हुआ हो। [2010]
20. जिसके पास धन नहीं है। [2010]

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21. तपस्या करने वाला। [2010]
22. जिसका कोई शुल्क न देना पड़े। [2011, 15, 16]
23. परिश्रम करने वाला। [2011]
24. जिसका क्षय न हो। [2011]
25. जिसका कोई शत्रु न हो। [2011]
26. जिसे क्षमा न किया जा सके। [2011]
27. जो वेतन लेकर काम करता है। [2013]
28. जो कम बोलता हो। [2013]
29. जो समाज की सेवा करता है, उसे क्या कहते हैं? [2014]
30. जिसके समान कोई दूसरा न हो। [2015]
31. व्यवसाय से सम्बन्धित। [2016]
32. जिसकी कोई उपमा न हो। [2017]
33. आकाश को छूने वाला। [2017]
34. ‘मोहन को गर्म भैंस का दूध पिलाओ’-वाक्य शुद्ध कीजिए। [2016]
35. ‘मुझे केवल मात्र पाँच रुपये चाहिए।’ वाक्य को शुद्ध करके लिखिए। [2017]
उत्तर-
1. समाजसेवक, 2. सत्यवादी, 3. अपराजेय, 4. चौराहा, 5. सहनशील, 6. अलौकिक,7. धार्मिक,8. नास्तिक,9.शहीद, 10. अनगिनत, 11. आदरणीय, 12. अदृश्य, 13. आस्तिक, 14. अनियन्त्रित, 15. अविभाज्य, 16. कृतज्ञ, 17. अतिथि, 18. सर्वश्रेष्ठ, 19. कुलीन, 20.निर्धन, 21.तपस्वी, 22. निःशुल्क, 23. परिश्रमी, 24. अक्षय, 25. अजातशत्रु, 26. अक्षम्य, 27. वैतनिक, 28. अल्पभाषी, 29. समाजसेवी, 30. अद्वितीय, 31. व्यावसायिक, 32. अनुपमेय, 33. गगनचुम्बी, 34. मोहन को भैंस का गर्म दूध पिलाओ, 35. मुझे मात्र पाँच रुपये चाहिए।

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