MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 3 वनस्पति जगत

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MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 3 वनस्पति जगत

वनस्पति जगत NCERT प्रश्नोत्तर

Shaival Ke Vargikaran Ka Kya Aadhar Hai प्रश्न 1.
शैवालों के वर्गीकरण का क्या आधार है?
उत्तर:
शैवालों का वर्गीकरण निम्नलिखित लक्षणों के आधार पर किया गया है –

  1. प्रकाश – संश्लेषी वर्णक का प्रकार
  2. अन्य वर्णक के प्रकार
  3. संचित भोज्य पदार्थ का प्रकार
  4. सूकाय का प्रकार।

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 3 वनस्पति जगत - 1

प्रश्न 2.
लिवरवर्ट, मॉस, फर्न, जिम्नोस्पर्म तथा एंजियोस्पर्म के जीवन – चक्र में कहाँ और कब निम्नीकरण विभाजन होता है ?
उत्तर:
लिवरवर्ट, मॉस, ‘फर्न एवं जिम्नोस्पर्म में निम्नीकरण विभाजन (Reduction division) बीजाणु (Spore) निर्माण की प्रक्रिया के समय बीजाणु मातृ कोशिका (Spore mother cell) में होता है। एंजियोस्पर्म में निम्नीकरण विभाजन पुंकेसर के परागकोष में परागण (Pollen grain) निर्माण के समय तथा भ्रूणकोष (Embryo sac) के निर्माण में अंडप (Ovule) के द्वारा किया जाता है।

Vanaspati Jagat In Hindi प्रश्न 3.
पौधों के तीन वर्गों के नाम लिखिए, जिनमें स्त्रीधानी होती है। इनमें से किसी एक के जीवन-चक्र का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पौधों के निम्नलिखित तीन वर्गों में स्त्रीधानी (Archegonia) पायी जाती है –

  1. ब्रायोफाइटा
  2. टेरिडोफाइटा एवं
  3. जिम्नोस्पर्म।

टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) का जीवन – चक्र:
टेरिडोफाइटा के जीवन-चक्र में द्विगुणित तथा अगुणित अवस्थाएँ स्पष्ट रूप से आती हैं, इस क्रिया को पीढ़ी का एकान्तरण (Alternation of generation) कहते हैं। पीढ़ी एकान्तरण करने वाले जीवों में युग्मकोद्भिद (Gametophytic phase) तथा बीजाणुद्भिद (Sporophytic phase) क्रम से बनते रहते हैं। उदाहरण – साइकस। साइकस का मुख्य पौधा स्पोरोफाइट होता है। यह एकलिंगी पौधा है, जिसमें दो प्रकार की जड़ें, शल्कपत्र व बीजाणुधानियाँ पायी जाती हैं।

नर पौधे में नर शंकु तथा मादा पौधे में मादा शंकु के स्थान पर मेगास्पोरोफिल पाया जाता है। मेगास्पोरोफिल में 4-6 बीजाण्ड होते हैं, इनमें महाबीजाणु मातृकोशिका में अर्धसूत्री विभाजन के फलस्वरूप मादा युग्मकोद्भिद बनता है। नर बीजाणुधानी में अर्द्धसूत्री विभाजन में परागकण बनते हैं, जो बीजाणुधानी के फटने से हवा में मुक्त हो जाते हैं। साइकस में युग्मकोद्भिद पूर्णतः स्पोरोफाइट पर आश्रित होता है यह अल्पकालिक व परजीवी होता है। स्पोरोफाइट ही जीवन-चक्र में विकसित रूप में होता है।

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 3 वनस्पति जगत - 2

प्रश्न 4.
निम्नलिखित की सूत्रगुणता (Ploidy) बताइए-मॉस के प्रथम तन्तुक कोशिका, द्विबीजपत्री के प्राथमिक भ्रूणपोष का केन्द्रक, मॉस की पत्तियों की कोशिका, फर्न के प्रोथैलस की कोशिकाएँ, मार्केन्शिया की जेमा कोशिका, एकबीजपत्री की मेरिस्टेम कोशिका, लिवरवर्ट के अण्डाशय तथा फर्न के युग्मनज।
उत्तर:

  1. मॉस की प्रथम तंतुक कोशिका (Protonemal cell) – अगुणित (Haploid)
  2. द्विबीजपत्री के प्राथमिक भ्रूणपोष (Endosperm) का केन्द्रक – त्रिगुणित (Triploid)
  3. मॉस की पत्तियों की कोशिका – द्विगुणित (Diploid)
  4. फर्न के प्रोथैलस की कोशिकाएँ – अगुणित (Haploid)
  5. मार्केन्शिया की जेमा (Gemma) कोशिकाएँ – अगुणित (Haploid)
  6. एकबीजपत्री की मेरिस्टेम कोशिका – द्विगुणित (Diploid)
  7. लिवरवर्ट के अण्डाशय (Ovum) – अगुणित (Haploid)
  8. फर्न के युग्मनज (Zygote) – द्विगुणित (Diploid)।

Bryophyte Mein Bijanu Matra Koshika Hoti Hai प्रश्न 5.
शैवाल तथा जिम्नोस्पर्म के आर्थिक महत्व पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
1. शैवाल का आर्थिक महत्व:
(a) लाल शैवाल का आर्थिक महत्व –

  1. औद्योगिक रूप से अगर – अगर का उत्पादन लाल शैवालों द्वारा ही किया जाता है।
  2. इनका उपयोग लक्जेटिव एवं इमल्सीफाइंग कारक के रूप में सीरप (दवाइयाँ) बनाने में किया जाता है।
  3. इससे प्राप्त अगर-अगर का उपयोग चॉकलेट उद्योग में किया जाता है।
  4. कुछ लाल शैवालों का उपयोग खाद्य के अलावा आइसक्रीम, चीज़ व सलाद के रूप में किया जाता है।

(b) भूरे शैवाल का आर्थिक महत्व –

  1. यह जापानी लोगों का एक प्रमुख भोजम है।
  2. भूरे शैवाल के शुष्क भार में लगभग 30% पोटैशियम क्लोराइड होता है। अत: इनसे पोटैशियम लवण प्राप्त किया जाता है।
  3. इनसे विटामिन, आयोडीन, ऐसीटिक अम्ल प्राप्त किया जाता है।
  4. इनका उपयोग सौन्दर्य प्रसाधनों, आइसक्रीम तथा कपड़ा उद्योग में भी किया जाता है।

2. जिम्नोस्पर्म का आर्थिक महत्व –

  1. जिम्नोस्पर्म मृदा के कणों को पकड़ कर रखती है, अतः मृदा अपरदन (Soil erosion) से बचाव होता है।
  2. बाग-बगीचों में जिम्नोस्पर्म का उपयोग सजावटी पौधों के रूप में किया जाता है। उदा.- साइकस, थूजा, ऑरोकेरिया आदि।
  3. जिम्नोस्पर्म के तनों से एक प्रकार का स्टार्च प्राप्त किया जाता है, जिसकी सहायता से साबूदाना बनाया जाता है। इसी प्रकार पाइनस के बीज का उपयोग सूखे मेवे (चिलगोजे) के रूप में किया जाता है।
  4. इसी प्रकार जिम्नोस्पर्म के विभिन्न भागों जैसे-इनकी लकड़ियों से पेंसिल, कलम, सिगार दान बनाये जाते हैं। सूखी पत्तियों एवं उसके डंठल से टोकरी, झाड़ आदि बनता है।
  5. जिम्नोस्पर्म की विभिन्न प्रजातियों से खाद्य तेल प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 6.
जिम्नोस्पर्म तथा एंजियोस्पर्म दोनों में बीज होते हैं, फिर भी उनका वर्गीकरण अलग-अलग क्यों है?
उत्तर:
जिम्नोस्पर्म तथा एंजियोस्पर्म दोनों में बीज होते हैं फिर भी उनका वर्गीकरण अलग-अलग किया जाता है। इसका कारण है कि जिम्नोस्पर्म के बीज नग्न (Nacked) होते हैं अर्थात् इनका बीज फल के अन्दर पाया जाता है, जबकि एंजियोस्पर्म के बीज फलों के अन्दर ढंके हुए होते हैं।

Bryophyta Pteridophyta Mein Antar प्रश्न 7.
विषम बीजाणुकता क्या है ? इसकी सार्थकता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। इसके दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
विषम बीजाणुकता (Heterospory) दो प्रकार के बीजाणु (Spores) बनने की प्रक्रिया है, जैसे कि छोटा लघुबीजाणु (Microspore) तथा बड़ा दीर्घबीजाणु (Megaspore) विषम बीजाणुकता को सर्वप्रथम टेरिडोफाइट्स सिलैजिनेला (Selaginella) में देखा गया। साल्विनिया में भी विषम बीजाणुकता पायी जाती है। बड़े दीर्घबीजाणु (मादा) तथा छोटे लघु बीजाणु (नर) से क्रमशः मादा और नर युग्मकोद्भिद बन जाते हैं। ऐसे पौधों में मादा युग्मकोद्भिद अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए पैतृक स्पोरोफाइट से जुड़ा रहता है।.

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प्रश्न 8.
उदाहरण सहित निम्नलिखित शब्दावली का संक्षिप्त वर्णन कीजिए –

  1. प्रथम तंतु
  2. पुंधानी
  3. स्त्रीधानी
  4. द्विगुणितक
  5. बीजाणुपर्ण
  6. समयुग्मकी।

उत्तर:
1. प्रथम तंतु (Protonema):
यह मॉस के जीवन-चक्र की प्रारंभिक अवस्था है। प्रथम तंतु का निर्माण बीज (Spore) के अंकुरण से होता है। प्रथम तंतु या प्रोटोनिमा विकसित होकर हरे रंग की, विसी, शाखित तथा तन्तुमय हो जाती है।

2. पुंधानी (Antheridium):
ब्रायोफाइटा एवं टेरिडोफाइटा के नर जनन अंग को पुंधानी कहा जाता है। पुंधानी के द्वारा द्विकशाभिक पुमंग (Antherozoids) उत्पन्न किया जाता है।

3. स्त्रीधानी (Archegonium):
ब्रायोफाइटा के मादा जनन अंग को स्त्रीधानी कहा जाता है। यह बहुकोशिकीय तथा फ्लास्क के आकार की होती है। इनके द्वारा अण्ड का निर्माण होता है।

4. द्विगुणितक (Diplontic):
यह जीवन-चक्र की एक अवस्था है, जिसमें द्विगुणित (Diploid) बीजाणुद्भिद (Sporophyte) प्रभावी होता है। इस अवस्था में पौधे स्वतंत्र होते हैं, तथा प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन का निर्माण करते हैं । युग्मकोद्भिद इसके विपरीत प्रायः एककोशिकीय तथा अगुणित (Haploid) होता है। जीवन-चक्र की इस अवस्था को द्विगुणितक (Diplointic) कहा जाता है।

5. बीजाणुपर्ण (Sporophyll):
जिम्नोस्पर्म की जिन संरचना में बीजाणुधानी (Sporangium) पाया जाता है, उन्हें बीजाणुपर्ण कहा जाता है।

6. समयुग्मकी (Isogamy):
समान युग्मकों (Gametes) के आपस में संलयित होने की क्रिया को समयुग्मकी (Isogamy) कहा जाता है। उदाहरण-क्लैमाइडोमोनास।

Sporophyte Class 11 प्रश्न 9.
निम्नलिखित में अंतर कीजिए

  1. भूरेशैवाल तथा लाल शैवाल।
  2. लिवरवर्ट तथा मॉस।
  3. विषम बीजाणुक तथा समबीजाणुक टेरिडोफाइटा।
  4. युग्मक संलयन तथा त्रिसंलयन।

उत्तर:
(i) भूरा शैवाल तथा लाल शैवाल में अंतर –
1.भूरा शैवाल-ये भूरे रंग के समुद्रीय विकसित शैवाल हैं, जिनमें निम्नलिखित लक्षण पाये जाते हैं –

  •  फ्यूकोजैन्थिन की उपस्थिति के कारण ये भूरे रंग के दिखाई देते हैं। इसके अलावा इनमें क्लोरोफिल a, c, और -कैरोटीन भी पाया जाता है।
  •  इनके प्रजनन में द्विकशाभिकीय चलजन्यु बनते हैं। इनकी एक कशाभिका बड़ी तथा एक छोटी होती है।
  • इनके भोज्य पदार्थों का संग्रहण मैनिटॉल एवं लैमीनेरिन के रूप में किया जाता है।
  • इनका शरीर अचल, बहुकोशिकीय, सूकायवत् होता है तथा इनकी कोशिका भित्ति में एल्जिनिक एवं फ्यूसिनिक अम्ल का जमाव होता है। उदाहरण-लैमिनेरिया, सारगासम।

2. लाल शैवाल-लाल रंग के इन शैवालों में निम्नलिखित लक्षण देखे जा सकते हैं –

  • इनका लाल रंग इनकी कोशिकाओं में पाये जाने वाले वर्णक फाइकोइरीथिन के कारण होता है। इसके अलावा इनमें क्लोरोफिल – a, d तथा फाइकोसायनिन वर्णक भी पाये जाते हैं।
  •  जनन अवस्था में अचल कोशिकाएँ ही पायी जाती हैं। जल कोशिकाओं का पूर्णतः अभाव होता है।
  • उनमें संचित भोजन फ्लोरिडियन स्टार्च के रूप में होता है।।
  • इनका लैंगिक जनन ऊगैमस प्रकार का होता है। उदाहरण-पोरफायरा, पॉलिसाइफोनिया।

(ii) लिवरवर्ट और मॉस में अंतर –
1. लिवरवर्ट (Liver wort) –

  1. ये ब्रायोफाइटा वर्ग के हिपैटीकोप्सिडा (Hepaticopsida) के सदस्य हैं।
  2. इनका थैलस अधर और पृष्ठ से चपटे होते हैं तथा इनकी आकृति यकृत की पालियों (Lobe) के सदृश्य दिखाई पड़ती हैं।
  3. लिवरवर्ट में अलैंगिक जनन थैलस के विखण्डन अथवा विशिष्ट संरचना जेमा द्वारा होता है।
  4. इसका मूलाभ (Rhizoids) एककोशिकीय होता है। उदाहरण – रिक्सिया।

2. मॉस (Moss):

  • ये ब्रायोफाइटा वर्ग ब्रायोप्सिडा (Bryopsida) का सदस्य है।
  • इनका थैलस पत्तीनुमा तथा त्रिज्या सममिति (Radially-symmetrical) होता है।
  • मॉस में कायिक जनन विखंडन तथा मुकुलन द्वारा होता है।
  • इनके मूलाभ (Rhizoids) बहुकोशिकीय होते हैं। उदाहरण- फ्यूनेरिया।

(iii) विषम बीजाणुक तथा समबीजाणुक टेरिडोफाइटा –
1. विषम बीजाणुक टेरिडोफाइटा (Heterosporous pteridophyte):
ये दो प्रकार के बीजाणु (Spores) उत्पन्न करते हैं, वृहत या दीर्घबीजाणु (Megaspore) तथा लघुबीजाणु (Microspore)। उदाहरण – सिलैजिनेला।

2. समबीजाणुक टेरिडोफाइटा (Homosporous pteridophyte):
ऐसे टेरिडोफाइट्स, जो केवल एक ही प्रकार के बीजाणु (Spores) उत्पन्न करते हों, उन्हें समबीजाणुक कहा जाता है। उदाहरण – लाइकोपोडियम।

(iv) युग्मक संलयन तथा त्रिसंलयन –
1. युग्मक संलयन (Syngamy):
यह प्रथम नर युग्मक का मादा के अंडकोशिका से संलयित होकर युग्मनज (Zygote) बनाने की क्रिया है।

2. त्रिसंलयन (Triple Fusion):
यह द्वितीय नर युग्मक का द्वितीयक केन्द्रक से युग्मित होकर त्रिगुणित भ्रूणपोष (Endosperm) बनाने की घटना को त्रिसंलयन (Triploid fusion) कहा जाता है।

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Aavritabiji Aur Anavrtabiji Mein Antar प्रश्न 10.
एकबीजपत्री को द्विबीजपत्री से किस प्रकार विभेदित करेंगे?
उत्तर:
एकबीजपत्री एवं द्विबीजपत्री पादपों में अन्तर –

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 3 वनस्पति जगत - 3

प्रश्न 11.
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 3 वनस्पति जगत - 4
उत्तर:

  1. (c) शैवाल
  2. (d) जिम्नोस्पर्म
  3. (b) टेरिडोफाइट
  4. (a) मॉस

Class 11th Biology Chapter 3 Question Answer In Hindi प्रश्न 12.
जिम्नोस्पर्म के महत्वपूर्ण अभिलक्षणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जिम्नोस्पर्म के महत्वपूर्ण अभिलक्षण –

  1. बीजाण्ड आवरणहीन होते हैं।
  2. भ्रूणपोष निषेचन से पहले बन जाते हैं।
  3. जनन अंग शंकु रूप में होता है।
  4. ये पौधे प्राय: एकलिंगी होते हैं।
  5. जाइलम में वाहिकाएँ व फ्लोएम में कैस्पोरियन सेल व सीव ट्यूब नहीं पाई जातीं।
    नोट-उपर्यक्त प्रश्न क्रमांक 2 भी देखें।

वनस्पति जगत अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वनस्पति जगत वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –
1. रोडोफाइटा में थैलस का रंग लाल दिखाई देता है, इसकी उपस्थिति से –
(a) R – फाइकोइरीथ्रिन
(b) R – फाइकोबिलीन
(c) दोनों साथ हों तब
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) R – फाइकोइरीथ्रिन

2. ताजे जल में पाये जाने वाले शैवाल हैं –
(a) लाल शैवाल
(b) भूरी शैवाल
(c) हरी शैवाल
(d) पीली शैवाल।
उत्तर:
(d) पीली शैवाल।

3. ब्रायोफाइट्स की प्रभावी अवस्था है –
(a) अगुणित
(b) गुणित
(c) दोनों समानः
(d) दोनों नहीं।
उत्तर:
(a) अगुणित

4. जूस्पोर्स निम्न में से किसके परिणामस्वरूप होते हैं –
(a) अलैंगिक जनन
(b) लैंगिक जनन
(c) असूत्री विभाजन
(d) समसूत्री विभाजन।
उत्तर:
(a) अलैंगिक जनन

5. फीते के समान हरितलवक किस पौधे में पाया जाता है –
(a) यूलोथ्रिक्स
(b) स्पाइरोगायरा
(c) ऊडोगोनियम
(d) मार्केन्शिया।
उत्तर:
(b) स्पाइरोगायरा

6. स्पाइरोगाइरा के जीवन-चक्र में मिओसिस की क्रिया कब होती है –
(a) युग्मकों के निर्माण के समय
(b) चल बीजाणुओं के निर्माण के समय
(c) युग्मनज के अंकुरण के समय
(d) युग्मनज के निर्माण के समय।
उत्तर:
(c) युग्मनज के अंकुरण के समय

7. मॉसों का आवास है –
(a) शुष्क स्थान
(b) स्वच्छ जल
(c) अलवणीय जल
(d) नम तथा छायादार स्थान।
उत्तर:
(d) नम तथा छायादार स्थान।

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8. मॉस का शुक्राणु होता है –
(a) एककशाभिकीय
(b) द्विकशाभिकीय
(c) बहुकशाभिकीय
(d) अचल।
उत्तर:
(b) द्विकशाभिकीय

9. मॉसों का नम वातावरण में पैदा होने का कारण है –
(a) संवहनी ऊतकों की अनुपस्थिति
(b) निषेचन के लिए जल की आवश्यकता
(c) सम्पूर्ण सतह पर जल अवशोषण
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

10. फ्यूनेरिया का मादा जनन अंग कहलाता है –
(a) बीजाणुधानी
(b) शुक्राणुधानी
(c) आर्कीगोनिया
(d) बीजाणुपर्ण।
उत्तर:
(c) आर्कीगोनिया

11. शुक्राणु का आर्कीगोनियम तक पहुँचना किस माध्यम में होता है –
(a) वायु
(b) जल
(c) जन्तु
(d) कीट।
उत्तर:
(b) जल

12. मॉस बड़े आकार के नहीं हो सकते क्योंकि इनमें –
(a) सम्वहनी तन्त्र अनुपस्थित होता है
(b) संवहनी तन्त्र उपस्थित होता है
(c) पुष्प नहीं पाया जाता
(d) बीज नहीं पाया जाता।
उत्तर:
(a) सम्वहनी तन्त्र अनुपस्थित होता है

13. फर्न प्रोथैलस होता है –
(a) अगुणित
(b) द्विगुणित
(c) त्रिगुणित
(d) स्पोरोफाइट।
उत्तर:
(a) अगुणित

14. प्रोथैलस का आकार होता है –
(a) गोलाकार
(b) लम्बा
(c) हृदय के समान
(d) बहुभुजीय।
उत्तर:
(c) हृदय के समान

15. फर्न, मॉस की अपेक्षा ज्यादा विकसित है, क्योंकि –
(a) इसमें संवहन ऊतक होता है
(b) बीजाणुद्भिद प्रभावी होता है
(c) जड़, तना और पत्तियाँ विकसित होती हैं
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

16. प्रोथैलस होता है –
(a) एक स्वतन्त्र रचना
(b) एक आश्रित रचना
(c) गैमीटोफाइट पर आश्रित
(d) स्पोरोफाइट पर आश्रित।
उत्तर:
(a) एक स्वतन्त्र रचना

17. स्पाइरोगाइरा में होता है –
(a) निकटवर्ती कोशिकाओं के मध्य लिंगी-जनन
(b) भिन्न द्विपक्ष्मी पुमंग एवं ऊगोनियम
(c) लिंगी प्रजनन एक कोशिका के विभिन्न तत्वों के मध्य
(d) केवल अलिंगी प्रजनन।
उत्तर:
(a) निकटवर्ती कोशिकाओं के मध्य लिंगी-जनन

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18. फ्यूनेरिया में होता है –
(a) एककोशिकीय सरल मूलाभास
(b) गुलिकीय मूलाभास
(c) भिन्न शाखित मूलाभास
(d) बहुकोशिकीय तिर्यक।
उत्तर:
(a) एककोशिकीय सरल मूलाभास

19. फ्यूनेरिया के पेरिस्टोम में कितने दाँत होते हैं –
(a) एक मण्डल में 4.
(b) दो मण्डल में 32
(c) एक मण्डल में 16
(d) दो मण्डलों में 16
उत्तर:
(b) दो मण्डल में 32

20. स्पाइरोगाइरा के लैंगिक जनन में किस तरह के युग्मकों का समेकन होता है –
(a) दो समान गतिशील युग्मकों का
(b) दो समान गतिहीन युग्मकों का
(c) एक गतिशील व एक गतिहीन युग्मकों का
(d) दो असमान गतिहीन युग्मकों का।
उत्तर:
(d) दो असमान गतिहीन युग्मकों का।

21. फ्यूनेरिया के किस कोशिका में न्यूनकारी विभाजन होता है –
(a) पुंधानी कोशिका
(b) प्रसूतक कोशिका
(c) युग्मकजीवीय कोशिका
(d) बीजाणु मातृ कोशिका में
उत्तर:
(d) बीजाणु मातृ कोशिका में

22. निम्नलिखित में से कौन-सी दो शैवाल अगर-अगर का उत्पादन करती हैं –
(a) स्पाइरोगायरा व नॉस्टॉक
(b) ग्रैसिलेरिया व डोलेडियम
(c) वॉलवॉक्स व वाउचेरिया
(d) रिवुलेरिया व यूलोथ्रिक्स।
उत्तर:
(b) ग्रैसिलेरिया व डोलेडियम

23. यूलोथ्रिक्स पाया जाता है –
(a) प्रवाही ताजे जल में
(b) प्रवाही लवण जल में
(c) शुद्ध ताजे जल में
(d) शुद्ध लवण जल में।
उत्तर:
(a) प्रवाही ताजे जल में

24. फ्यूनेरिया में रन्ध्र कहाँ स्थित होते हैं –
(a) पत्ती पर
(b) तने पर
(c) थीका पर
(d) एपोफाइसिस पर।
उत्तर:
(d) एपोफाइसिस पर।

25. अनावृतबीजी में जननांग कहलाते हैं –
(a) बीजाणुधर
(b) स्त्री केसर
(c) शंकु या स्ट्रॉबिलस
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) शंकु या स्ट्रॉबिलस

26. साइकस की पत्ती होती है –
(a) सरल
(b) पक्षवत् संयुक्त
(c) संयुक्त
(d) अभिमुख।
उत्तर:
(b) पक्षवत् संयुक्त

27. रसकस, स्माइलेक्स, यूक्का, उदाहरण है –
(a) पामी के
(b) ग्रैमिनी के
(c) म्यूजेसी के
(d) लिलियेसी के।
उत्तर:
(d) लिलियेसी के।

28. शाक, झाड़ी तथा वृक्ष के प्रकार का आधार है –
(a) शारीरिकी
(b) आकारिकी
(c) (a) तथा (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) आकारिकी

29. युग्मनज में अर्द्धसूत्री विभाजन होता है –
(a) सिलेजिनेला में
(b) स्पाइरोगाइरा में
(c) पाइनस में
(d) इक्वीसिटममें।
उत्तर:
(b) स्पाइरोगाइरा में

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30. स्पाइरोगाइरा का जीवन-चक्र होता है –
(a) अगुणित
(b) द्विगुणित
(c) अगुणितीय जीवी
(d) द्विगुणितीय जीवी।
उत्तर:
(a) अगुणित

Seval Ke Vargikaran Ka Kya Aadhar Hai प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. प्रभावी तथा आत्मनिर्भर स्पोरोफाइट ……………. पादप समूह में होता है।
  2. नग्न बीज वाले पौधों के समूह का नाम ……………. है।
  3. ……….. समूह में वे जीव आते हैं जिनका जनन अंग बहुकोशिकीय होता है।
  4. …………. में बहुभ्रूणता पायी जाती है जिसका कारण है स्त्रीधानियों का होना।
  5. फ्यूनेरिया का जीवन-चक्र एक ………… से शुरू होता है।
  6. ………….. शरीर में संवहनी ऊतक नहीं पाया जाता।
  7. समुद्री खरपतवार ………….. को कहते हैं।
  8. हृदय के समान अगुणित रचना …………… कहलाता है।
  9. ………….. में बीज फल के अन्दर विकसित होता है।
  10. द्वि-जगत वर्गीकरण में शैवाल व कवक को …………… में रखा जाता है।
  11. कोशिकाओं की कॉलोनी के रूप में पाये जाने वाले शैवाल …………… हैं।
  12. स्पाइरोगाइरा के वर्ग का नाम ……………. है।
  13. रिक्सिया, मार्केन्शिया के प्रतिपृष्ठ सतह पर मूल रोम समान रचना ………….. कहलाती है।
  14. हरा सूकायवत् शाखित ब्रायोफाइट ……………. कहलाते हैं।

उत्तर:

  1. ट्रैकियोफाइटा
  2. जिम्नोस्पर्म
  3. एम्ब्रियोफाइटा
  4. साइकस
  5. अगुणित बीजाणु
  6. शैवाल
  7. भूरा शैवाल
  8. प्रोथैलस
  9. आवृतबीजियों
  10. थैलोफाइटा
  11. वॉलवॉक्स
  12. क्लोरोफाइसी
  13. मूलाभास
  14. लिवरवर्ट।

Gymnosperm Ke Mahatvpurn Abhilakshan Ka Varnan Kijiye प्रश्न 3.
उचित संबंध जोडिए –
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उत्तर:

  1. (c) प्रथम स्थलीय पौधे
  2. (d) काँटेदार पौधे
  3. (a) उभयचर पौधे
  4. (b) जड़, पत्तीविहीन पौधे

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उत्तर:

  1. (d) थैलोफाइट
  2. (c) अपुष्पीय पौधे
  3. (b) स्पोरोफाइट गैमिटोफाइट की कड़ी
  4. (a) पुष्पीय पौधे

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उत्तर:

  1. (c) लाल शैवाल
  2. (e) कवक
  3. (d) माइसिलियम
  4. (b) पीढ़ियों का एकान्तरण
  5. (a) ब्रायोफाइटा

लिवरवर्ट तथा मास में अंतर बताइए प्रश्न 4.
सत्य / असत्य बताइए –

  1. ब्रायोफाइट्स केवल स्थल में पाये जाते हैं, जल में नहीं।
  2. सिलैजिनेला में विषमबीजाणुकता नहीं पाई जाती है।
  3. म्यूकर एक विषमजालिक कवक है इसे ब्रेड मोल्ड भी कहते हैं।
  4. स्पाइरोगायरा को तालाब का रेशम कहते हैं।
  5. पाइनस जिरार्डियाना के बीज से चिरौंजी प्राप्त होता है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. सत्य
  5. असत्य।

फ्यूनेरिया का जीवन चक्र प्रश्न 5.
एक शब्द में उत्तर दीजिए –

  1. लाल शैवाल में कौन-सा वर्णक होता है ?
  2. कवक जंतुओं के करीब किस गुण के कारण हैं ?
  3. हाइफा के समूह को क्या कहते हैं ?
  4. युग्मकोद्भिद का स्पोरोफाइट के साथ नियमित क्रम क्या कहलाता है ?
  5. ब्रायोफाइटा में पोषण के आधार पर युग्मकोद्भिद कैसा होता है ?

उत्तर:

  1. फाइकोइरीथ्रिन
  2. ग्लाइकोजन (संचित भोज्य पदार्थ)
  3. माइसिलियम
  4. पीढ़ियों का एकांतरण
  5. स्वपोषी।

वनस्पति जगत अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उस शैवाल का नाम बताइए जिससे अगर-अगर नामक पदार्थ प्राप्त किया जाता है।
उत्तर:
ग्रेसिलेरिया एवं गेलिडियम नामक शैवाल से अगर-अगर प्राप्त किया जाता है।

वनस्पति जगत प्रश्न 2.
स्पाइरोगायरा को जल रेशम क्यों कहते हैं ?
उत्तर:
स्पाइरोगांयरा चिकने तथा लसलसेदार होते हैं, इसलिए इन्हें जल रेशम या तालाबी रेशम (Pond silk) कहते हैं।

प्रश्न 3.
दो खाद्य शैवालों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. लेमिनेरिया
  2. पोरफायरा।

प्रश्न 4.
चाय में रस्ट रोग किस शैवाल से होता है ?
उत्तर:
सिफैल्यूरस नामक शैवाल से।

प्रश्न 5.
भारत में शैवाल के जनक के रूप में कौन जाने जाते हैं ?
उत्तर:
एम.ओ.पी. आयंगर नामक वैज्ञानिक भारत में शैवाल के जनक कहे जाते हैं।

वनस्पति जगत के नोट्स प्रश्न 6.
सूकाय किसे कहते हैं ?
उत्तर:
वह पादप शरीर जो जड़, तना तथा पत्ती में विभेदित न किया जा सके सूकाय कहलाता है। शैवालों का शरीर सूकायवत् होता है, जैसे-स्पाइरोगायरा तथा यूलोथ्रिक्स।

प्रश्न 7.
मॉस के एक स्त्रीधानी का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 3 वनस्पति जगत - 8

अध्याय 3 वनस्पति जगत प्रश्न 8.
किस वर्ग के स्थलीय पौधे सबसे आदिम हैं ?
उत्तर:
टेरिडोफाइटा वर्ग के स्थलीय पौधे सबसे आदिम हैं। उदाहरण – राइनिया, सायलोटम।

प्रश्न 9.
फर्न में बीजाणुधानी पुंज कहाँ पाये जाते हैं ?
उत्तर:
फर्न में बीजाणुधारी पुंज विशिष्ट पत्ती सदृश रचनाओं, बीजाणुपर्ण पर पाये जाते हैं।

प्रश्न 10.
साइकस नामक जिम्नोस्पर्म में पाये जाने वाले किन्हीं दो फर्न के लक्षणों को लिखिए।
उत्तर:

  1. तरुण कली पत्तियों में सर्सिनेट वर्नेशन (अन्दर की ओर मुड़ा होना)।
  2. कशाभिकीय लघुबीजाणु का होना।

प्रश्न 11.
किस पौधे का पुष्य सबसे बड़ा होता है ?
उत्तर:
रैफ्लेशिया नामक पादप का पुष्प सबसे बड़ा होता है।

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वनस्पति जगत के प्रश्न उत्तर प्रश्न 12.
भारत में पाये जाने वाले किन्हीं तीन जिम्नोस्पर्स के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. पाइनस (चिनार)
  2. सिड्रस (देवदार)
  3. साइकस।

प्रश्न 13.
ऐन्जियोस्पर्म के किन्हीं दो अतिमहत्वपूर्ण लक्षणों को लिखिए।
उत्तर:

  1. बीज का फल के अन्दर स्थित होना।
  2. अण्डाशय की उपस्थिति।

प्रश्न 14.
शैवाल के कोई दो औषधीय महत्व लिखिये।
उत्तर:
शैवाल के औषधीय महत्व –

  1. लेमीनेरिया जेपोनिका, कोंडस क्रिस्पस आदि में Vitamin. B पाया जाता है।
  2. भूरे शैवालों से आयोडीन प्राप्त की जाती है।

वनस्पति जगत लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मॉस कैप्स्यूल के अनुलम्ब काट का नामांकित चित्र बनाइए।
अथवा
मॉस के कैप्स्यूल का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 3 वनस्पति जगत - 9
प्रश्न 2.
क्लोरोफाइटा के चार लक्षण तथा चार उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
क्लोरोफाइटा के लक्षण – ये हरे रंग के शैवाल हैं, जिनमें निम्नलिखित लक्षण पाये जाते हैं –

  1. इनका हरा रंग क्लोरोफिल-a एवं b की अधिकता के कारण होता है, इसके अलावा इनमें कैरोटीन एवं जैन्थोफिल भी पाया जाता है।
  2. इनकी कोशिकाभित्ति सेल्युलोज की बनी होती है।
  3. इनमें बराबर कशाभिकाओं वाले चल बीजाणु बनते हैं।
  4. ये भोजन का संग्रह मण्ड के रूप में करते हैं।
  5. इनमें लैंगिक जनन समयुग्मक प्रकार का होता है। उदाहरण – स्पाइरोगायरा, यूलोथ्रिक्स, जिग्निमा, क्लैडोफोरा।

प्रश्न 3.
आवृतबीजी (ऐन्जियोस्पर्म) के प्रमुख लक्षण लिखिए।
उत्तर:
आवृतबीजी के प्रमुख लक्षण –

  1. इनके बीज के चारों तरफ आवरण पाया जाता है तथा इनका मुख्य पौधा स्पोरोफाइट (2x) होता है।
  2. पौधा जड़, तना व पत्तियों में विभाजित रहता है। प्रजनन के लिए इनमें पूर्ण विकसित पुष्प बनता है।
  3. इनका संवहन पूल पूर्ण विकसित तथा जाइलम एवं फ्लोएम में विभेदित होता है। जाइलम के अन्दर वाहिकाएँ तथा फ्लोएम के अन्दर सह-कोशिकाएँ पायी जाती हैं।
  4. इनमें वातावरण के प्रति बहुत अधिक अनुकूलन पाया जाता है।
  5. इनमें प्रजनन अंग पुष्प के रूप में पाया जाता है।
  6. ये परजीवी, मृतोपजीवी, सहजीवी, उपरिरोही या जन्तु समभोजी होते हैं।

प्रश्न 4.
ब्रायोफाइटा के प्रमुख लक्षण लिखिए।
उत्तर:
ब्रायोफाइट्स उभयचर जीव हैं, जिनमें निम्नलिखित लक्षण पाये जाते हैं –

  1. ये असंवहनी, हरितलवक युक्त, नम भूमि या छालों इत्यादि पर पाये जाने वाले ऐसे पौधे हैं, जिनमें निषेचन के बाद भ्रूण बनता है।
  2. मुख्य पौधा युग्मकोद्भिद होता है, बीजाणुद्भिद युग्मकोद्भिद के ऊपर आश्रित रहता है।
  3. इनके जनन अंग बहुकोशिकीय होते हैं तथा बंध्य आवरण से घिरे रहते हैं। नर अंग को ऐन्थीरीडिया तथा मादा अंग को आर्कीगोनियम कहते हैं।
  4. निषेचन के लिए जल आवश्यक होता है।
  5. इनके जीवन – चक्र में दो बहुकोशिकीय रचनाएँ पायी जाती हैं-एक अगुणित, दूसरी द्विगुणित होती है। इन अगुणित और द्विगुणित रचनाओं में स्पष्ट विषमरूपी पीढ़ी रूपान्तरण, पीढ़ी एकान्तरण पाया जाता है।
  6.  इनका थैलसनुमा (सूकायवत्) शरीर प्रायः द्विपार्श्व सममित होता है।

प्रश्न 5.
जिम्नोस्पर्म तथा ऐन्जियोस्पर्म में समानताएँ बताइए।
उत्तर:

  1. दोनों पौधे बहुवर्षीय वृक्ष होते हैं तथा जनन अंग एक विशेष रचना में लगते हैं।
  2. दोनों के परागकण अंकुरित होकर पराग नलिका बनाते हैं।
  3. दोनों ही में जीवन की मुख्य रचना स्पोरोफाइटिक होती है तथा गैमीटोफाइट, स्पोरोफाइट पर आश्रित रहता है।
  4. दोनों में बीज तथा बीजाण्ड निर्माण की क्रिया समान होती है।

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वनस्पति जगत दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जिम्नोस्पर्म ( अनावृतबीजी) एवं ऐन्जियोस्पर्म (आवृतबीजी) पौधों में पाँच अन्तर बताइए।
उत्तर:

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 3 वनस्पति जगत - 10

प्रश्न 2.
ब्रायोफाइट्स तथा टेरिडोफाइट्स में अन्तर बताइए।
उत्तर:
ब्रायोफाइट्स तथा टेरिडोफाइट्स में अन्तर –

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 3 वनस्पति जगत - 11

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी

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MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी

पुष्पी पादपों की आकारिकी NCERT प्रश्नोत्तर

पुष्पी पादपों की आकारिकी प्रश्न उत्तर प्रश्न 1.
मूल के रूपान्तरण से आप क्या समझते हैं? निम्नलिखित में किस प्रकार का रूपान्तरण पाया जाता है –

  1. बरगद
  2. शलजम
  3. मैंग्रूव वृक्ष?

उत्तर:
जड़ें कुछ विशिष्ट कार्यों को सम्पादित करने के लिए अपने रूप में परिवर्तन कर लेती हैं। इस क्रिया को रूपान्तरण (Modification) कहते हैं। जड़ों में रूपान्तरण भोजन संग्रहण, यांत्रिक कार्यों तथा श्वसन के लिए होता है।

  1. बरगद – इसमें जड़ों का रूपान्तरण स्तम्भमूल (Prop root) के रूप में होता है, जिससे तने की क्षैतिज शाखाओं से वायवीय जड़ें निकलकर भूमि में प्रविष्ट कर जाती हैं।
  2. शलजम – भोजन संग्रह करने के लिए जड़ का ऊपरी भाग फुलकर कुंभीरूप (Napiform) में रूपान्तरित हो जाता है।
  3. मैंग्रूव वृक्ष – इसमें जड़ें श्वसनमूल (Respiratory roots) में रूपान्तरित होकर भूमि के ऊपर आ जाती हैं। इन श्वसन मूलों में अनेक वातरन्ध्र पाये जाते हैं जहाँ से वायुमण्डलीय O2 जड़ों में प्रवेश करके वायु की कमी को पूरा करते हैं।

अध्याय 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी Notes प्रश्न 2.
बाह्य लक्षणों के आधार पर निम्नलिखित कथनों की पुष्टि कीजिए –

  1. पौधे के सभी भूमिगत भाग सदैव मूल नहीं होते।
  2. फूल एक रूपान्तरित प्ररोह है।

उत्तर:
1. पौधे के सभी भूमिगत भाग सदैव मूल नहीं होते – यह सही है कि जड़ें हमेशा भूमि के अन्दर वृद्धि करती हैं तथा तने भूमि से ऊपर की ओर वृद्धि करते हैं, परन्तु कुछ तने इसके अपवाद हैं। उदाहरणअदरक, प्याज एवं आलू। ये सभी भूमिगत तनों के उदाहरण हैं। – आलू का कन्द (Potato tuber) एक रूपान्तरित भूमिगत तना है। यह तना कन्द में रूपान्तरित होकर भोज्य पदार्थों का संग्रहण करता है। अत: आलू एक तना है न कि जड़। इसे निम्नलिखित तथ्यों के द्वारा सिद्ध किया जा सकता है –

  • इसमें पर्व एवं पर्वसन्धियाँ उपस्थित होती हैं।
  • इसमें शल्क-पत्र (Scale leaves) उपस्थित होते हैं।
  • इसमें कलिका (Buds), आँखों (Eyes) के रूप में होती हैं।
  • यह भोज्य पदार्थों के संग्रहण के लिए रूपान्तरित हुआ है।

2. पुष्प एक रूपान्तरित प्ररोह है – निम्नलिखित कुछ ऐसे कारण हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि पुष्प एक रूपान्तरित प्ररोह है –

  • पुष्प का पुष्पासन एक संघनित तने के समान दिखाई देता है, जिसके पर्व (Inter-node) तथा पर्व सन्धि आपस में मिले प्रतीत होते हैं।
  • सभी पुष्पीय पत्र पत्तियों के चक्र के समान ही पुष्पासन पर लगे होते हैं। वास्तव में पुष्पीय पत्र विशिष्ट कार्यों के लिए रूपान्तरित पत्तियाँ हैं।
  • कुछ पौधों के बाह्यदल (Sepals) पत्तियों के समान दिखाई देते हैं, जो इस बात को प्रमाणित करते हैं कि बाह्यदल पत्तियों का ही रूपान्तरण है, जैसे-वाटर लिली।
  • कुछ पौधे जैसे – गाइनेण्ड्रोप्सिस में दल एवं पुमंग के बीच का पुष्पासन बड़ा होकर तने का रूप ले लेता है। ठीक उसी प्रकार कुछ पौधों में पुमंग तथा जायांग के बीच का पुष्पासन भी तने के समान बढ़ जाता है। ये दोनों उदाहरण पुष्पासन को संघनित तना तथा पुष्पपत्रों को रूपान्तरित पत्ती होने का प्रमाण देते हैं।
  • पुष्प का विकास प्ररोह के समान एक कलिका (Bud) से होता है।

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Pushpi Padpo Ki Aakariki प्रश्न 3.
एक पिच्छाकार संयुक्त पत्ती हस्ताकार संयुक्त पत्ती से किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर:
1. पिच्छवत् संयुक्त पर्ण (Pinnate compound leaf):
इस प्रकार के संयुक्त पर्ण में पार्वीय पर्णक होते हैं जो अभिमुखी (Opposite) रूप में विन्यस्त होते हैं। इसमें पत्ती का वृन्त और मध्य शिरा मिलकर रैकिस बनाते हैं जिस पर पर्णक लगे रहते हैं। एकपिच्छवत् (Unipinnate) – इस प्रकार की संयुक्त पत्ती में पर्णक सीधे रैकिस (पिच्छाक्ष) पर ही लगे रहते हैं, जैसे – गुलाब, चरौंठा (Cassia tora), इमली आदि। यदि रैकिस पर पत्रकों के जोड़ों की संख्या सम हो तो इसे समपिच्छवत् (Paripinnately compound ) जैसे – रत्ती, अशोक, इमली और असम होने पर असमपिच्छवत् (Imparipinnately compound) कहते हैं जैसे – गुलाब, चरौंठा, सेम।

2. हस्ताकार या पाणिवत् संयुक्त पर्ण (Palmately compound leaf):
हस्ताकार संयुक्त पर्ण उसे कहते हैं जिसके वृन्त के अग्रस्थ भाग पर जुड़े हुए पर्णक होते हैं जो एक सामान्य स्थान से निकलते हुए प्रतीत होते हैं, जैसे हमारी हथेली से अँगुलियाँ, उदाहरण सेमल, क्लीओमशाइनैड्रॉप्सिस आदि।

प्रश्न 4.
विभिन्न प्रकार के पर्णविन्यास का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
तने के ऊपर पत्तियों की व्यवस्था या क्रम को पर्ण – विन्यास (Phyllotaxy) कहते हैं प्रत्येक पौधे की पत्तियाँ अपने तने के ऊपर एक निश्चित क्रम में ही व्यवस्थित होती हैं। पर्ण-विन्यास के प्रकार (Types of Phyllotaxy) – पौधों में तीन प्रकार का पर्ण – विन्यास पाया जाता है –

1. एकान्तर (Alternate):
जब प्रत्येक पर्व-सन्धि से केवल एक पत्ती निकलती है और दूसरी पत्ती इसके विपरीत दूसरे पर्व पर निकलती है, तो इन पत्तियों के क्रम को एकान्तर पर्ण विन्यास कहते हैं। ये पत्तियाँ सर्पिल (Spiral) क्रम में तने के ऊपर लगी होती हैं । जैसे – गुड़हल, सूरजमुखी।

2. विपरीत या अभिमुखी (Opposite):
जब एक पर्व सन्धि पर दो पत्तियाँ एक-दूसरे के आमनेसामने लगी हों तो पत्तियों के इस क्रम को अभिमुखी पर्ण-विन्यास कहते हैं। यह दो प्रकार का होता है –

(a) अभिमुखी क्रॉसित (Opposite dicussate):
इस पर्ण विन्यास में प्रत्येक पर्वसन्धि से दो विपरीत पत्तियाँ निकलती हैं, लेकिन निकटवर्ती पर्वसन्धियों से निकलने वाली पत्तियाँ एक-दूसरे के साथ समकोण बनाती हैं जैसे – मदार या आक (Calotropis), पोदीना, तुलसी।

(b) अभिमुखी अध्यारोपित (Opposite superposed):
इस पर्ण-विन्यास में दो पर्वसन्धियों की विपरीत पत्तियाँ ठीक एक-दूसरे के ऊपर-नीचे स्थित होती हैं। जैसे-जामुन, अमरूद आदि।

3. चक्रीय (Cyclic or Whorled or Verticillate):
जब किसी पौधे के ऊपर पत्तियाँ एक पर्वसन्धि पर दो से अधिक की संख्या में चक्र के रूप में व्यवस्थित हों तो इस पर्ण-विन्यास को चक्रीय पर्ण – विन्यास कहते हैं। जैसे – कनेर (Nerium)

Pushpi Padapon Ke Aakar Ki प्रश्न 5.
निम्नलिखित की परिभाषा लिखिए –

  1. पुष्पदल विन्यास
  2. बीजांडासन
  3. त्रिज्या सममिति
  4. एकव्यास सममिति
  5. ऊर्ध्ववर्ती
  6. परिजायांगी पुष्प
  7. दललग्न पुंकेसर।

उत्तर:
1. पुष्पदल विन्यास (Aestivation):
पुष्प की कली अवस्था में बाह्यदलों, दलों अथवा परिदलों के आपसी सम्बन्ध को पुष्पदल विन्यास कहते हैं। पुष्पदलों में –

  • कोरस्पर्शी
  • व्यावर्तित
  • कोरछादी
  • पंचक प्रकार के विन्यास पाये जाते हैं।

2. बीजांडासन (Placentation):
अण्डाशय में बीजाण्ड, के लगने की व्यवस्था को बीजांडासन (Placentation) कहा जाता हैं पौधों में –

  • सीमान्त
  • भित्तीय
  • आधारलग्न
  • पृष्ठीय एवं
  • अक्षीय प्रकार का बीजांडासन पाया जाता है।

3. त्रिज्या सममिति (Actinomorphic):
किसी भी उदग्रतल (Vertical plane) से काटने पर यदि पुष्प दो बराबर भागों में बँट जाये तो ऐसे पुष्पों को त्रिज्या सममिति (Actinomorphic) कहते हैं। उदा – गुलाब, – गुड़हल।

4. एकव्यास सममिति (Zygomorphic):
यदि पुष्प को केवल एक ही तल से दो समान भागों में काटा जा सकता है तो ऐसे पुष्पों को एकव्यास सममिति कहते हैं। उदा.-टेसू, तुलसी, मटर।

5. ऊर्ध्ववर्ती (Superior):
ऐसे अण्डाशय को, जो सभी पुष्पीय पत्रों के ऊपर स्थित होता है। ऊर्ध्ववती (Superior) कहते हैं । उदा.-सरसों, बैंगन, चाइना रोज आदि।

6. परिजायांगी (Perigynous):
वह निवेशन, जिसमें पुष्पासन एक प्याले का रूप ले लेता है। जायांग पुष्पासन के अन्दर तथा अन्य पुष्पीय पत्र प्याले के किनारों पर स्थित होते हैं। इनमें अण्डाशय अधोवर्ती (Inferior) होता है। जैसे – गुलाब, सेम, मटर, अशोक।

7. दललग्न पुंकेसर (Epipetalous):
जब किसी पुष्प के पुंकेसर दल से जुड़े होते हैं, तब इन पुंकेसरों को दललग्न कहते हैं। उदा – धतूरा और कनेर।

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Morphology Of Flowering Plants Class 11 प्रश्न 6.
निम्नलिखित में अंतर लिखिए –

  1. असीमाक्षी तथा ससीमाक्षी पुष्पक्रम
  2. झकड़ा जड़(मूल) तथा अपस्थानिक मूल
  3. वियुक्ताण्डपी तथा युक्ताण्डपी अंडाशय।

उत्तर:
1. असीमाक्षी और ससीमाक्षी पुष्पक्रम में अन्तर –

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 1

2. झकड़ा (मूसला) जड़ एवं अपस्थानिक जड़ में अन्तर –

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 2

3. वियुक्ताण्डपी तथा युक्तांडपी अंडाशय –
(1) वियुक्तांडपी (Apocarpous) – यदि दो या अधिक अंडप (Carpels) अंडाशय में उपस्थित हों तथा आपस में स्वतंत्र अवस्था में रहें तब इसे वियुक्तांडपी कहा जाता है। उदाहरण-रेननकुलस में बहुअण्डपी युक्तांडप पाये जाते हैं।

(2) युक्तांडपी (Syncarpous) – यदि दो या अधिक अंडप (Carpels) आपस में संयुक्त हों, तो जुड़े हुए अंडप की यह अवस्था युक्तांडपी कहलाती है। उदाहरण-चाइना रोज में पंचांडपी, अण्डाशय पाया जाता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित के चिन्हित चित्र बनाइये –
(1) चने के बीज तथा
(2) मक्के के बीज का अनुदैर्ध्य काट।
उत्तर:
(1) चने का बीज –
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(ii) मक्के के बीज का अनुदैर्ध्य काट –
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प्रश्न 8.
उचित उदाहरण सहित तने के रूपांतरों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
(a) प्रकन्द (Rhizome):
यह एक अनिश्चित वृद्धि वाला बहुवर्षी भूमिगत तना है, जो कि Internode अनुकूल परिस्थिति में विकसित होकर प्ररोह एवं पत्तियों Node AS का निर्माण करता है। इसमें पर्व एवं पर्वसन्धियाँ उपस्थित होती हैं। प्रत्येक पर्वसन्धि पर शल्क पत्र (Scale leaves) एवं अक्षीय कलिका (Axillary bud) पायी जाती है। इसकी निचली सतह से बहुत-सी अपस्थानिक जड़ें निकलती हैं। उदाहरण – अदरक (Ginger)।
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(b) शल्ककन्द (Bulb):
इसे हम भूमिगत संपरिवर्तित कलिका कह सकते हैं, जिसमें स्तम्भ छोटा होता है, जिसे डिस्क (Disc) कहा जाता है। डिस्क (तने) पर अत्यन्त आस-पास मांसल शल्क पत्र लगे होते हैं। तने पर पर्व बहुत छोटे रहते हैं। तने के निचले भाग से अपस्थानिक जड़ें निकलती हैं। तने के अग्र भाग में शीर्षस्थ कलिका एवं शल्क पत्रों के कक्ष से कक्षस्थ कलिकाएँ निकलती हैं। शल्क पत्र विन्यास के अनुसार, शल्ककन्द निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं –

(i) कंचुकित शल्ककन्द (Tunicated bulb):
इसमें शल्क पत्र एक-दूसरे को पूर्ण रूप से ढंके एवं संकेन्द्रित होते हैं। बाहर सूखे शल्क पत्र का आवरण होता है, जो छिलका बनाता है। उदाहरणप्याज।
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(ii) शल्की शल्ककन्द (Scaly bulb):
इसमें शल्क पत्र एक – दूसरे को ढंकते नहीं। इनमें सम्पूर्ण कलियों को ढंकने हेतु एक आवरण (ट्यूनिक) नहीं होता। उदाहरण – लहसुन, लिली इसे संयुक्त शल्ककन्द (Compound bulb) कहते हैं । इसकी एक कली शल्ककन्द (Bulblet) कहलाती है।
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(c) घनकन्द (Corm):
यह भूमि में पाया जाने वाला एक बहुत मोटा एक पर्व वाला स्तम्भ है, जो भूमि में उदग्र (Vertical) होता है। इस पर शल्क पत्र और अपस्थानिक मूल होती हैं। सूरन या जिमीकन्द इसका अच्छा उदाहरण है। इसमें शीर्षस्थ कलिका वायवीय प्ररोह बनाती है, जिसमें संगृहीत भोजन काम में लाया जाता है। अपस्थानिक कलिकाएँ अन्य घनकन्द बनाती हैं।
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Musla Jad Aur Apasthanik Jad Mein Antar प्रश्न 9.
फैबेसी तथा सोलेनेसी कुल के एक – एक पुष्प को उदाहरण के रूप में लीजिए तथा उनका अर्द्ध तकनीकी विवरण प्रस्तुत कीजिए। अध्ययन के पश्चात् उनके पुष्पीय चित्र भी बनाइए।
उत्तर:
फैबेसी (Fabaceae) कुल को पहले पैपिलियोनेसी कहते थे। मटर का पुष्प पैपिलियोनेसी या फैबेसी कुल का प्रतिनिधित्व करता है।

मटर के पुष्प का वर्णन –
(1) पुष्पक्रम (Inflorescence):
प्रायः असीमाक्ष (Racemose) प्रकार होता है। क्रोटोलेरिया (Crotolaria) में टर्मिनल रेसीम (Terminal raceme), मेलिलोटस (Melilotus) में कोरिम्बोज रेसीम (Corymbose raceme) अथवा एकल कक्षस्थ (Solitary axillary) उदाहरण-साइसर ऐराइटिनम (Cicer arietinum) प्रकार का होता है।

(2) पुष्प (Flower):
पुष्प संवृत (Pedicillate), निपत्री (Bracteate), प्रायः सहपत्रिका युक्त (Bractiolate), द्विलिंगी (Bisexual), जायगोमॉर्फिक (Zygomorphic), अधोजायांगी (Hypogynous) या परिजायांगी (Perigynous), पूर्ण (Complete) तथा पंचतयी (Pentamerous) होते हैं।

(3) बाह्यदलपुंज (Calyx):
प्राय: 5, संयुक्त बाह्यदलीय (Gamosepalous), घण्टाकार (Campanulate), कुछ में नलिकाकार (Tubular) होता है। बाह्यदल विन्यास कोरछादी (Imbricate) या कोरस्पर्शी (Valvate) होता है। विषम सेपल (Odd sepal) हमेशा अग्रभाग (Anterior) में पाया जाता है।

(4) दलपुंज (Corolla):
प्रायः 5, स्वतन्त्रदलीय (Polypetalous), पैपीलियोनेशियस (Papilionaccous) होता है। पश्च दल (Posterior petal) सबसे बाहर तथा सबसे बड़ा होता है। इसे स्टैण्डर्ड (Standard) या वैक्सिलम (Vaxillum) कहते हैं। वैक्सिलम के दोनों ओर के पार्श्वदल (Lateral petals) को विंग (Wings) या ऐली (Alae) कहते हैं। पुष्प के अग्र भाग पर उपस्थित दो दल (Anterior petals) आपस में जुड़कर नाव के आकार की संरचना बनाते हैं, जिसे कील (Keel) या कैरिना (Carina) कहते हैं। दलपुंज विन्यास अवरोही कोरछादी (Descending imbricate) या वैक्सिलरी (Vaxillary) प्रकार का होता है।

(5) पुमंग (Androecium):
पुंकेसरों की संख्या प्रायः 10 होती है। ये पुंकेसर दो बण्डलों में व्यवस्थित रहते हैं। 9 पुंकेसर आपस में जुड़े रहते हैं, जबकि 1 पुंकेसर स्वतन्त्र होता है। ऐसे पुमंग को द्विसंघी (Diadelphous) कहते हैं। पोंगेमिया (Pongamia) एवं क्रोटेलेरिया (Crotalaria) में एकसंघी (Monoadelphous) पुंकेसर पाये जाते हैं। द्विसंघी पुंकेसर में पश्च (Posterior) 9 पुंकेसर आपस में जुड़े तथा एक अग्र (Anterior) पुंकेसर स्वतन्त्र होता है। परागकोष द्विकोष्ठीय (Dithecous), आधारलग्न (Basifixed) तथा अन्तर्मुखी (Introse) होते हैं।
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 9

(6) जायांग (Gynoecium):
यह एकाण्डपी (Monocarpellary), एककोष्ठीय (Unilocular), ऊर्ध्ववर्ती (Superior) अथवा अर्द्ध-अधोवर्ती (Half-inferior) होता है। बीजाण्डन्यास (Placentation) सीमान्त (Marginal) प्रकार का होता है । वर्तिका सरल (Simple) तथा वर्तिकाग्र (Stigma) समुण्ड (Capitate) अथवा अन्तस्थ (Terminal) होता है।

(7) फल (Fruits):
फल, लेग्यूम (Legume) या पॉड (Pod) प्रकार का होता है। यह दोनों सीवनों (Sutures) के द्वारा खुलता है अथवा अस्फोटी (Indehiscent) होता है।

(8) बीज (Seeds):
बीज अभ्रूणपोषी (Non-endospermic) होता है अथवा अत्यन्त छोटे भ्रूणपोष युक्त होते हैं।

(9) पुष्प सूत्र (Floral Formula):

मटर – पाइसम सटाइवम (Pisum sativum)
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सोलेनेसी कुल के पुष्पीय लक्षण –
पुष्पक्रम (Inflorescence):
पुष्पक्रम अधिकांशतः सायमोज (Cymose) प्रकार का होता है। परन्तु पौधों में पुष्पक्रम भिन्नता प्रदर्शित करते हैं। जैसे –

  • धतूरा (Datura) – द्विशाखित साइम (Dichasial cyme)
  • सोलेनम(Solanum s.p.p.) – हेलिकॉयड साइम (Helicoid cyme)
  • एट्रोपा बेलाडोना (Atropa beladona) – स्कॉर्पिआइड साइम (Scorpioid cyme)
  • निकेन्ड्रा (Nicandra) – एकल कक्षस्थ (Solitary axillary)।

पुष्प (Flowers):
पुष्प प्रायः सवृन्त (Pedicillate), द्विलिंगी (Bisexual or Hermaphrodite), पूर्ण (Complete), पंचतयी (Pentamerous), एक्टिनोमॉर्फिक (Actinomorphic), अधोजायांगी (Hypogynous), सहपत्री (Bracteate) अथवा असहपत्री (Ebracteate) होते हैं। हाइपोसाइमस नाइजर (Hypocymus niger) तथा सालपिगलोसिस (Salpiglosis) में पुष्प जायगोमॉर्फिक (Zygomorphic) होते हैं। इसके अलावा सालपिगलोसिस में पुष्प हमेशा बन्द रहने वाले (Cleistogamous) होते हैं।

(3) बाह्यदलपुंज (Calyx) – बाह्यदलों (Sepals) की संख्या 5, संयुक्त बाह्यदली (Gamosepalous), चिरलग्न अथवा चिरस्थायी (Persistent) होते हैं। बाह्यदल विन्यास (Aestivation) कोरस्पर्शी (Valvate) प्रकार का होता है।

(4) दलपुंज (Corolla) – दलों की संख्या 5, संयुक्तदली (Gamosepalous) तथा पुष्पदल विन्यास कोरछादी (Valvate) प्रकार का होता है। दलों का रंग प्रायः बैंगनी (Violet) अथवा सफेद (White) एवं कभी-कभी पीला (Yellow) होता है।

(5) पुमंग (Androecium) – पुंकेसरों की संख्या प्रायः 5, पृथक् पुंकेसरी (Polyandrous), दललग्न (Epipetalous), पुतन्तु (Filament) छोटे तथा रोमिल (Hairy), परागकोष (Anther) आधारलग्न (Basifixed), द्विकोष्ठीय (Dithecous) तथा लम्बे होते हैं।

(6) जायांग (Gynoecium) – द्विअण्डपी (Bicarpellary) संयुक्ताण्डपी (Syncarpous), अण्डाशय द्विकोष्ठीय (Bilocular), ऊर्ध्ववर्ती (Superior) तथा तिरछा (Oblique) होता है। यह इस कुल का प्रमुख लक्षण होता है। बीजाण्डन्यास अक्षीय (Axile) तथा अनेक बीजाण्ड युक्त होता है। वर्तिका साधारण तथा वर्तिकाग्र द्विपालित (Bilobed) होता है।

(7) फल (Fruit) – ये बेरी (Berry), उदाहरण – टमाटर, बैंगन आदि अथवा कैप्सूल (Capsule), उदाहरणधतूरा प्रकार के होते हैं।

(8) बीज (Seed) – यह भ्रूणपोषी (Endospermic) प्रकार का होता है। (9) पुष्पीय सूत्र (Floral formula)

(i) सोलेनम नाइग्रम(Solanum nigrum):
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 11

(ii) धतूरा अल्बा(Datura alba):
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MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 13

(10) पुष्प आरेख – देखें पार्श्व चित्र।

Fusiform Root Radish Diagram प्रश्न 10.
पुष्पीय पादपों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के बीजाण्डन्यासों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जरायुन्यास या बीजाण्डन्यास (Placentation):
अण्डाशय में बीजाण्ड, बीजाण्डासन पर एक विशेष क्रम में व्यवस्थित रहते हैं, इसी क्रम को बीजाण्डन्यास कहते हैं । जैसा कि हम जानते हैं कि जायांग एक रूपान्तरित पत्ती है वही पत्ती गोलाई में मुड़कर जायांग की रचना करती है इस रूपान्तरित पत्ती के दोनों किनारे एक स्थान पर मिले प्रतीत होते हैं । सामान्यतः बीजाण्डसन अण्डप तलों (किनारों) के मिलने के स्थान पर ही बनते हैं। पौधों में निम्न प्रकार के बीजाण्डन्यास पाये जाते हैं

1. सीमान्त (Marginal):
यह बीजाण्डन्यास एकाण्डपी जायांगों में पाया जाता है। इसमें बीजाण्डासन अण्डप के दोनों किनारों के मिलने के स्थान पर बनाता है तथा इसके बीजाण्ड अधर सीवन (Ventral suture) पर रेखीय क्रम में लगे होते हैं, जैसे – मटर, अरहर, चना, बबूल, अमलतास, सेम, गुलमोहर।

2. भित्तीय (Parietal):
यह बीजाण्डन्यास एक से अधिक अण्डपों वाले संयुक्ताण्डपी अर्थात् एककोष्ठीय जायांगों में पाया जाता है। इसमें बीजाण्ड अण्डाशय की भीतरी दीवार पर उस स्थान से लगे होते हैं जहाँ अण्डपों के किनारे मिलते हैं। इसमें बीजाण्डसनों (Placenta) की संख्या अण्डपों की संख्या पर निर्भर करती है। जैसेपपीता, सरसों, लौकी।

3. आधारलग्न (Basal):
यह बीजाण्डन्यास द्वि या बहुअण्डपी लेकिन अनिवार्यतः एककोष्ठीय अण्डाशय में पाया जाता है। इसमें अण्डाशय के आधार से केवल एक बीजाण्ड लगा होता है। जैसे – सूरजमुखी, गेंदा। कभी-कभी बीजाण्ड आधार के स्थान पर अण्डाशय के ऊपरी भाग से जुड़ा होता है।

4. पृष्ठीय या धरातलीय (Superficial):
यह बीजाण्डन्यास बहुअण्डपी, युक्ताण्डपी, बहुकोष्ठीय अण्डाशयों में पाया जाता है। इसमें बीजाण्ड अण्डपों की भीतरी दीवाल से चारों लगे रहते हैं। जैसे-कमल, निम्फिया, सिंघाड़ा।
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 14

5. अक्षीय (Axile):
यह बीजाण्डन्यास है जो बहुअण्डपी, युक्ताण्डपी ऐसे जायांगों में पाया जाता है जिसमें कोष्ठकों की संख्या अण्डपों की संख्या के बराबर होती है। इसमें अण्डपों के किनारे जुड़ने के पश्चात् अन्दर की ओर बढ़कर केन्द्र में जुड़ जाते हैं तथा एक केन्द्रीय अक्ष का निर्माण करते हैं। यही अक्ष फूलकर बीजाण्डासन (Placenta) बना देता है। जिससे बीजाण्ड जुड़े होते हैं। जैसे – बैंगन, गुड़हल, टमाटर, नीबू, सन्तरा, नारंगी।

6. मुक्त स्तम्भीय (Free central):
यह बीजाण्डासन ऐसे जायांग में पाया जाता है जो बहुअण्डपी, युक्ताण्डपी होता है। इसमें बीजाण्ड अण्डाशय के केन्द्रीय कक्ष के चारों तरफ स्वतन्त्र रूप से लगे होते हैं। उदाहरण – डाएन्थस, प्राइमुला।

Musla Jad Apasthanik Jad Mein Antar प्रश्न 11.
पुष्प क्या है ? एक प्रारूपी एंजियोस्पर्म पुष्प के भागों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पुष्प एक रूपान्तरित प्ररोह या कली है जो तने या शाखाओं के शीर्ष अथवा पत्ती कक्ष में उत्पन्न होकर प्रजनन का कार्य करता है तथा फल एवं बीज को उत्पादित करता है। एक प्रारूपिक पुष्प के चार भाग होते हैं –

1.  बाह्यदल पुंज (Calyx) – इसका मुख्य कार्य पुष्प की कलिका अवस्था में रक्षा करना है, बाह्यदल हरे होने के कारण पत्ती के समान भोजन का संश्लेषण करता है।

2. दल पुंज (Corolla) – यह पुष्प का रंगीन एवं आकर्षक भाग है, ये कीटों को पर-परागण के लिए आकर्षित करते हैं।

3. पुमंग (Stamen) – पुष्पासन पर स्थित पुष्पीय-पत्र के तीसरे चक्र को, जो नर जनन अंग का कार्य करता है, पुमंग कहते हैं। जबकि इसका एकक पुंकेसर (Stamen) कहलाता है। प्रत्येक पुंकेसर तीन भागों –

  • पुतन्तु (Filament)
  • परागकोष (Anther) एवं
  • योजी (Connective) से मिलकर बना होता हैं।

4. जायांग (Gynoecium):
पुष्पासन पर स्थित पुष्पीय पत्रों के चक्र को, जो मादा जनन अंग का कार्य करते हैं, जायांग कहते हैं। यह कई एककों का बना होता है, इन एककों को अण्डप (Carpel) कहते हैं। एक प्रारूपिक जायांग तीन भागों –

  • अण्डाशय (Ovary)
  • वर्तिका (Style) एवं
  • वर्तिकाग्र (Stigma) से मिलकर बना होता है।

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 15

प्रश्न 12.
पत्तियों के विभिन्न रूपान्तरण पौधे की कैसे सहायता करते हैं?
उत्तर:
पत्तियों का मुख्य कार्य प्रकाश – संश्लेषण तथा वाष्पोत्सर्जन है लेकिन कुछ पत्तियाँ इसके अलावा कुछ अन्य कार्यों को भी करती हैं जिसके कारण इनके स्वरूप में सामान्य परिवर्तन हो जाता है इन्हीं परिवर्तनों को पत्ती का रूपान्तरण कहते हैं। ऐसे विशेष रूपान्तरणों को प्रदर्शित करने वाली पत्तियाँ साधारण हरी पत्तियों से भिन्न एवं सामान्यतः हासित होती हैं। पत्तियों के प्रकार के अन्तर्गत वर्णित सहपत्रिका (Bracts), शल्क पत्र (Scale leaves) तथा पुष्पीय पत्र (Floral leaves) भी पत्तियों के रूपान्तरण ही हैं । पत्तियों के दूसरे रूपान्तरण इस प्रकार हैं –

(1) पर्ण कंटक (Leaf spines):
कभी-कभी पत्तियाँ काँटे का रूप लेकर या तो वाष्पोत्सर्जन को रोकती हैं या रक्षात्मक कार्य करती हैं इन्हीं रूपान्तरित पत्तियों को पर्णकंटक कहते हैं। केवड़ा (Padanus) में पत्तियों के किनारे, सतावर (Asparagus) एवं यूलेक्स (Ulex) तथा नागफनी में सम्पूर्ण पत्ती काँटों में रूपान्तरित होती हैं। नीबू और बेल में प्रोफिल्स काँटों में रूपान्तरित होता है।

(2) पर्ण प्रतान (Leaf tendrils):
कमजोर तने वाले कुछ पादपों की सम्पूर्ण पत्तियाँ या उनका कुछ भाग प्रतान में रूपान्तरित हो जाता है जिससे ये आरोहण का कार्य कर सकें। मटर में सम्पूर्ण पत्रक, ग्लोरिओसा में पत्राग्र प्रतान में रूपान्तरित होते हैं।

(3) पर्ण अंकुश (Leaf hooks):
कुछ पौधों जैसे – बिग्नोनिया में संयुक्त पत्ती के पर्णक नाखून के समान मुड़कर अंकुश का रूप ले लेते हैं। जो पौधे को आरोहण में मदद करने के साथ उनकी रक्षा का कार्य करते हैं।

(4) शल्क पत्र (Scaly leaves):
कलिकाओं की रक्षा के लिए कुछ पौधों की पत्तियाँ शल्क का रूप ले लेती हैं जिन्हें शल्क पत्र कहते हैं। जैसे – अदरक, जिमीकन्द।
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(5) संग्रहण पत्रक (Storage leaves):
कुछ पौधों की पत्तियाँ जल तथा भोज्य पदार्थों को संगृहीत करके मांसल हो जाती हैं जिन्हें संग्रहणी पर्ण कहते हैं। मरुभूमि के पादपों में यह रूपान्तरण पाया जाता है जिससे पौधे भविष्य के लिए भोजन तथा जल का संग्रहण करते हैं जैसे – घीक्वार (Agave), ग्वारपाठा (Aloe), ब्रायोफिलम।

(6) पर्णमूल (Leaf roots) – कुछ पौधों की पत्तियाँ जड़ों में रूपान्तरित हो जाती हैं जिन्हें पर्णमूल कहते हैं। डलझील (कश्मीर) में मिलने वाले साल्वीनिया नामक जलीय पौधे की पत्तियाँ पर्णमूल में – रूपान्तरित होकर जल को अवशोषित करने के साथ पौधे को तैरने में मदद करती हैं।
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(7) घटपर्ण (Pitcher):
कुछ कीटभक्षी पौधे जैसे – निपेन्थीसया पिचर प्लाण्ट में पत्तियों का फलक घटपर्ण (Pitcher) में बदल जाता है। पर्णाधार चौड़ा और पर्ण वृन्त प्रतान सदृश हो जाता है। पर्णाग्र कलश पादप का ढक्कन बनाता है। कीड़े पकड़कर ऐसे पौधे अपनी नाइट्रोजन की कमी को पूरा करते हैं। भारत में आसाम की गारो पहाड़ियों पर कलश पादप मिलते हैं।

(8) ब्लैडर (Bladder):
यूट्रीकुलेरिया नामक जलीय कीटभक्षी पौधे में पत्तियाँ ब्लैडर में बदल जाती हैं। ब्लैडर में भीतर की ओर खुलने वाला कपाट (वाल्व) होता है जिसके मुख पर कड़े रोमों के गुच्छे पाये जाते हैं। जलीय कीट पानी के प्रवाह के साथ बहकर ब्लैडर में प्रविष्ट तो हो सकते हैं, किन्तु बाहर नहीं निकल सकते। पाचक ग्रन्थियाँ कीट का पाचन करती हैं, अतिरिक्त पानी धीरे-धीरे बाहर चला जाता है।

प्रश्न 13.
पुष्पक्रम की परिभाषा लिखिए। पुष्पीय पादपों में विभिन्न प्रकार के पुष्पक्रमों के आधार पर वर्णन कीजिए
उत्तर:
पुष्पक्रम (Inflorescence):
प्ररोह का वह भाग जिस पर पुष्प लगे होते हैं पुष्पावली वृन्त (Peduncle) कहलाता है। इस पुष्पावली वृन्त पर पुष्प सीधे या पुष्प वृन्त (Pedicel) द्वारा जुड़े रहते हैं। पुष्पावली वृन्त पर पुष्पों के लगने के क्रम को पुष्पक्रम कहते हैं। पुष्पावली वृन्त से पुष्प एकल या समूहों में उत्पन्न होते हैं। जब एकल पुष्प पुष्पावली वृन्त (तना) के शीर्ष पर उगता है तब इसे एकल अन्तस्थ (Solitary terminal) कहते हैं। जैसे – नाइजेला, पोस्त इत्यादि। लेकिन जब एकल पुष्प किसी पत्ती के कक्ष से विकसित होता (या लगा होता) है। तब इसे एकल कक्षस्थ (Solitary axillary) कहते हैं। जैसे – गुड़हल, नास्टर्शियम।

अनिश्चित या असीमाक्ष पुष्पक्रम (Indefinite or Racemose Inflorescence):
वह पुष्पक्रम है जिसके पुष्पावली वृन्त या मुख्य अक्ष की अग्रस्थ कलिका हमेशा बनी रहती है और अपने नीचे पुष्पों को जन्म देती रहती है। जैसे-गुलमोहर, मूली, लटजीरा, चौलाई, सरसों, गेहूँ, अरबी आदि।

निश्चित या ससीमाक्ष पुष्पक्रम (Cymose or Determinate Inflorescence):
वह पुष्पक्रम है जिसमें पुष्पावली वृन्त या मुख्य अक्ष की अग्रस्थ कलिका पुष्प में परिवर्तित होकर इसकी वृद्धि को अवरुद्ध कर देती है। जैसे – कपास, रैननकुलस, सागौन, चमेली, मिश्रित पुष्पक्रम (Mixed Inflorescence)-मिश्रित पुष्पक्रम वह पुष्पक्रम है जिसमें मुख्य अक्ष (पुष्पावली वृन्त) पर अलग तथा इसकी शाखाओं पर अलग प्रकार का पुष्पक्रम पाया जाता है। दूसरे शब्दों में इस पुष्पक्रम में एक ही मुख्य अक्ष पर दो अलग – अलग पुष्पक्रम पाये जाते हैं। जैसे-केला, एक्जोरा।
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 18

प्रश्न 14.
ऐसे पुष्प का सूत्र लिखिए जो त्रिज्या सममित, उभयलिंगी, अधोजायांगी, 5 संयुक्त बाह्य दली, 5 मुक्त दली, पाँच मुक्त पुंकेसरी, द्वियुक्तांडपी तथा ऊर्ध्ववर्ती अंडाशय हो।
उत्तर:
पुष्पसूत्र –
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 20

प्रश्न 15.
पुष्पासन पर स्थिति के अनुसार लगे पुष्पी भागों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

पुष्प एक रूपान्तरित प्ररोह या कली है जो तने या शाखाओं के शीर्ष अथवा पत्ती कक्ष में उत्पन्न होकर प्रजनन का कार्य करता है तथा फल एवं बीज को उत्पादित करता है। एक प्रारूपिक पुष्प के चार भाग होते हैं –

1.  बाह्यदल पुंज (Calyx) – इसका मुख्य कार्य पुष्प की कलिका अवस्था में रक्षा करना है, बाह्यदल हरे होने के कारण पत्ती के समान भोजन का संश्लेषण करता है।
2. दल पुंज (Corolla) – यह पुष्प का रंगीन एवं आकर्षक भाग है, ये कीटों को पर-परागण के लिए आकर्षित करते हैं।
3. पुमंग (Stamen) – पुष्पासन पर स्थित पुष्पीय-पत्र के तीसरे चक्र को, जो नर जनन अंग का कार्य करता है, पुमंग कहते हैं। जबकि इसका एकक पुंकेसर (Stamen) कहलाता है। प्रत्येक पुंकेसर तीन भागों –

  • पुतन्तु (Filament)
  • परागकोष (Anther) एवं
  • योजी (Connective) से मिलकर बना होता हैं।

4. जायांग (Gynoecium):
पुष्पासन पर स्थित पुष्पीय पत्रों के चक्र को, जो मादा जनन अंग का कार्य करते हैं, जायांग कहते हैं। यह कई एककों का बना होता है, इन एककों को अण्डप (Carpel) कहते हैं। एक प्रारूपिक जायांग तीन भागों –

  • अण्डाशय (Ovary)
  • वर्तिका (Style) एवं
  • वर्तिकाग्र (Stigma) से मिलकर बना होता है।

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 15

पुष्पी पादपों की आकारिकी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

पुष्पी पादपों की आकारिकी वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
I. सही विकल्प चुनकर लिखिए –

1. किस पौधे में मूल ग्रन्थिका पायी जाती है –
(a) बरगद में
(b) चने में
(c) आम में
(d) अदरक में।
उत्तर:
(b) चने में

2. कन्दमूल पायी जाती है –
(a) मिर्च में
(b) टैपियोका में
(c) कनेर में
(d) शकरकन्द में।
उत्तर:
(d) शकरकन्द में।

3. मूलांकुर से उत्पन्न न होकर किसी अन्य भाग से विकसित होने वाली जड़ों को कहते हैं –
(a) पर्णमूल
(b) अपस्थानिक मूल
(c) मूसला मूल
(d) वायवीय मूल।
उत्तर:
(b) अपस्थानिक मूल

4. न्यूमैटोफोर जड़ें पायी जाती हैं –
(a) टीनोस्पोरा में
(b) अजूबा में
(c) जूसिया में
(d) राइजोफोरा में।
उत्तर:
(d) राइजोफोरा में।

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5. जूसिया में उपस्थित जड़ों का कार्य है –
(a) सहारा देना
(b) भोजन का संग्रह करना
(c) श्वसन करना
(d) आरोहण।
उत्तर:
(c) श्वसन करना

6. बरगद के वृक्ष की स्तम्भ मूल (Prop roots) काम करती है –
(a) वृक्ष के बड़े आकार को सहारा देने का
(b) भूमि में जल को रोकने का
(c) भूमि से जल के अवशोषण का
(d) वायुमण्डल से वायु के अवशोषण का।
उत्तर:
(a) वृक्ष के बड़े आकार को सहारा देने का

7. जो तना, हरा एवं पत्ती जैसा होता है, कहलाता है –
(a) द्विबीजपत्री तना
(b) एकबीजपत्री तना
(c) पर्णकाय स्तम्भ
(d) प्रकन्द।
उत्तर:
(c) पर्णकाय स्तम्भ

8. निम्न में कौन-सा तने का रूपान्तरण नहीं है –
(a) अदरक
(b) आम, अदरक
(c) स्तम्भ कन्द
(d) लहसुन।
उत्तर:
(b) आम, अदरक

9. केले का पौधा विकसित होता है –
(a) प्रकन्द से
(b) बीज़ से
(c) अन्त:भूस्तारी से
(d) भूस्तारी से।
उत्तर:
(c) अन्त:भूस्तारी से

10. आलू की कायिक वृद्धि होती है –
(a) प्रकन्द द्वारा
(b) स्तम्भ कन्द द्वारा
(c) अन्त:भूस्तारी द्वारा
(d) शल्क कन्द द्वारा।
उत्तर:
(b) स्तम्भ कन्द द्वारा

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11. जब तना हरी पर्णिल संरचना में रूपान्तरित होता है, तो यह कहलाता है –
(a) पत्रकन्द
(b) प्रतान
(c) पर्णायित वृन्त
(d) पर्णकाय स्तम्भ।
उत्तर:
(d) पर्णकाय स्तम्भ।

12. फूला हुआ पर्णाधार कहलाता है –
(a) अनुपर्ण
(b) सहपत्र
(c) पल्विनस
(d) स्तम्भ कन्द।
उत्तर:
(c) पल्विनस

13. स्माइलैक्स का कौन-सा भाग प्रतान में रूपान्तरित होता है –
(a) पत्तियाँ
(b) अनुपर्ण
(c) तना
(d) पर्णक।
उत्तर:
(b) अनुपर्ण

14. कक्षस्थ कलिकाएँ निकलती हैं –
(a) वल्कुट की बाह्य स्तरों से बाह्यजनित रूप में
(b) अधिचर्म से बाह्यजनित रूप में
(c) परिरम्भ से अन्त:जनित रूप में
(d) वर्धी बिन्दु से अन्त:जनित रूप में।
उत्तर:
(a) वल्कुट की बाह्य स्तरों से बाह्यजनित रूप में

15. पर्णवृन्त, प्रतानों में रूपान्तरित हो जाते हैं –
(a) पैसीफ्लोरा में
(b) क्लीमैटिस में
(c) ग्लोरिओसा में
(d) एण्टीगोनन में।
उत्तर:
(b) क्लीमैटिस में

II. सही विकल्प चुनकर लिखिए –
1. मटर के पुष्प के दलपुंज के पुष्पदल विन्यास को कहते हैं –
(a) कॉण्टॉर्टेड
(b) वाल्वेट
(c) ध्वजिक
(d) इम्ब्रीकेट।
उत्तर:
(c) ध्वजिक

2. चिस्थायी (Persistant) बाह्यदलपुंज खाने योग्य बेरी (Berry) को बन्द किए हुए एक शुष्क गुब्बारे जैसी रचना बनाता है –
(a) निकोटियाना में
(b) सोलेनम में
(c) फाइसेलिस में:
(d) कैप्सीकम में।
उत्तर:
(c) फाइसेलिस में:

3. एक ऑथोपस बीजाण्ड वह होता है जिसमें बीजाण्डद्वार एवं निभाग (Micropyle and Chalaza) होते हैं –
(a) बीजाण्डवृन्त से तिरछा
(b) बीजाण्डवृन्त के समकोण पर
(c) बीजाण्डवृन्त के समानान्तर
(d) बीजाण्डवृन्त की सीधी रेखा में।
उत्तर:
(d) बीजाण्डवृन्त की सीधी रेखा में।

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4. आधारीय बीजाण्डन्यास उपस्थित होता है –
(a) कम्पोजिटी में
(b) सोलेनेसी में
(c) माल्वेसी में
(d) माइमोसॉइडी में।
उत्तर:
(a) कम्पोजिटी में

5. परागकण प्रदर्शित करते हैं –
(a) नर युग्मकोद्भिद को
(b) मादा युग्मकोद्भिद को
(c) नर बीजाणुद्भिद को
(d) मादा बीजाणुद्भिद को।
उत्तर:
(a) नर युग्मकोद्भिद को

6. फूलगोभी का खाने योग्य भाग होता है –
(a) फल
(b) कलिका
(c) पुष्पक्रम
(d) पुष्प।
उत्तर:
(d) पुष्प।

7. जिह्वाकार (Lingulate) दलपुंज, जो कम्पोजिटी कुल में भी मिलता है, कहलाता है –
(a) मास्कड
(b) द्विओष्ठीय
(c) स्ट्रैप के आकार का
(d) चक्राकार।
उत्तर:
(c) स्ट्रैप के आकार का

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8. मटर के पुष्प में ध्वजक तथा कील (Keel) बनाते हैं –
(a) बाह्यदलपुंज
(b) दलपुंज
(c) पुमंग
(d) जायांग।
उत्तर:
(b) दलपुंज

9. पुष्प के विभिन्न भागों के अध्ययन हेतु अत्यधिक उपयुक्त पुष्प होगा –
(a) सरसों का
(b) चम्पा का
(c) खीरा का
(d) सूर्यमुखी का।
उत्तर:
(a) सरसों का

10. दललग्न सम्बन्धित है –
(a) दलों के पुष्पदल विन्यास से
(b) अण्डाशय की स्थिति से
(c) पुंकेसरों से
(d) जरायुन्यास से।
उत्तर:
(c) पुंकेसरों से

11. रोमपुच्छ (Pappus) रूपान्तरण है –
(a) दलपुंज का
(b) बाह्यदलपुंज का
(c) सहपत्रों का
(d) जायांग का।
उत्तर:
(b) बाह्यदलपुंज का

12. किसी पुष्प को जाइगोमॉर्फिक कहते हैं, जब –
(a) इसके केन्द्र से होकर गुजरती हुई प्रत्येक ऊर्ध्व काट इसे दो सम भागों में विभाजित करती है
(b) इसके केन्द्र से होकर केवल एक ही ऊर्ध्व काट सम्भव होता है जो इसे दो समान भागों में बाँटता है
(c) उपर्युक्त में से कोई एक दशा उपस्थित होती है
(d) उपर्युक्त में से कोई भी स्थिति नहीं मिलती है।
उत्तर:
(b) इसके केन्द्र से होकर केवल एक ही ऊर्ध्व काट सम्भव होता है जो इसे दो समान भागों में बाँटता है

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13. जब पुंकेसर दलों से लगे होते हैं तब यह दशा होती है –
(a) बाह्यदल लग्न
(b) गायनेण्ड्स
(c) दललग्न
(d) परिदललग्न।
उत्तर:
(c) दललग्न

14. चतुर्दी / (Tetradynamous) दशा सम्बन्धित होती है –
(a) पुमंग से
(b) जायांग से
(c) पुष्पक्रम से
(d) परिदललग्न से।
उत्तर:
(a) पुमंग से

15. निम्न में से किसमें एक ही पादप में नर तथा मादा पुष्प मिलते हैं –
(a) एकलिंगी
(b) द्विलिंगी
(c) मोनोसियस
(d) डायोसियस।
उत्तर:
(c) मोनोसियस

16. पुष्पों के समूह को धारण किये हुए प्ररोह की शाखा तन्त्र को कहते हैं –
(a) जरायुन्यास
(b) शिराविन्यास
(c) पुष्पक्रम
(d) पर्णविन्यास।
उत्तर:
(c) पुष्पक्रम

17. असीमाक्ष में पुष्प होते हैं –
(a) पृथक् लिंगों के
(b) एक ही लिंग के
(c) तलाभिसारी क्रम में व्यवस्थित
(d) अग्रकाभिसारी क्रर में व्यवस्थित।
उत्तर:
(d) अग्रकाभिसारी क्रर में व्यवस्थित।

18. वह पुष्पक्रम जिस पर अवृन्त और एकलिंगी पुष्प पाये जाते हैं –
(a) स्थूलमंजरी
(b) मंजरी
(c) एकीन
(d) पैनीकिल।
उत्तर:
(b) मंजरी

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19. कैटकिन या वर्टीसिलास्टर एक प्रकार है –
(a) जरायुन्यास का
(b) शिराविन्यास का
(c) पुष्पक्रम का
(d) पर्णविन्यास का।
उत्तर:
(c) पुष्पक्रम का

20. म्यूजेसी (Musaseae) में पुष्पक्रम होता है –
(a) शूकी
(b) शीर्ष
(c) कैपीटुलम
(d) स्थूलमंजरी।
उत्तर:
(d) स्थूलमंजरी।

III. सही विकल्प चुनकर लिखिए –
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 20
(a) मालवेसी
(b) सोलेनेसी
(c) कम्पोजिटी
(d) लेग्यूमिनोसी।
उत्तर:
(b) सोलेनेसी

2. तन्तु स्वतन्त्र, परागकोष समेकित एवं दललग्न पुंकेसर किस कुल में पाये जाते हैं –
(a) सोलेनेसी
(b) एस्टेरेसी।
(c) एस्केलपियेडेसी
(d) कान्वॉलवुलेसी।
उत्तर:
(b) एस्टेरेसी।

3. किस कुल में परिदलपुंज पाया जाता है –
(a) मालवेसी
(b) लिलिएसी
(c) क्रुसीफेरी
(d) सोलेनेसी।
उत्तर:
(b) लिलिएसी

4. चना किस कुल का पौधा है –
(a) सोलेनेसी
(b) पैपिलियोनेसी
(c) ग्रैमिनी
(d) माइमोसाइडी।
उत्तर:
(b) पैपिलियोनेसी

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5. किस कुल के पुंकेसर अण्डाशय के ऊपर पैदा होते हैं –
(a) क्रुसीफेरी
(b) लिलिएसी
(c) सोलेनेसी
(d) एस्टेरेसी।
उत्तर:
(d) एस्टेरेसी।

6. सूरजमुखी का फल है –
(a) सिप्सेला
(b) बेरी
(c) डूप
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) सिप्सेला

7. सूरजमुखी के रश्मि पुष्पक होते हैं –
(a) अलिंगी
(b) द्विलिंगी
(c) एकलिंगी
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) एकलिंगी

प्रश्न 2.
I. एक शब्द में उत्तर दीजिए –

  1. तना भ्रूण के किस भाग से विकसित होता है?
  2. द्वि-पार्श्व पत्तियाँ किन पौधों में पाई जाती हैं?
  3. पर्णकाय स्तम्भ रूपान्तरण किस पौधे में होता है?
  4. जड़ का कौन-सा क्षेत्र जल अवशोषण करता है?
  5. नर्म तथा हरे तनों वाले छोटे पौधे के लिये वानस्पतिक शब्दावली क्या है?
  6. केले की पत्ती के आकार का नाम लिखिए।
  7. ब्रायोफिलम में पत्ती के किसी भी भाग से विकसित जड़ों को क्या कहते हैं?
  8. राइजोफोरा में पायी जाने वाली विशिष्ट जड़ों का नाम लिखिए।
  9. पर्णाभ स्तम्भ पौधे के किस भाग का रूपान्तरण है?
  10. कैक्टस की पत्तियाँ कैसी होती हैं?
  11. प्रकन्द क्या है?

उत्तर:

  1. प्रांकुर
  2. द्विबीजपत्री पौधों
  3. नागफनी
  4. मूल रोम
  5. शाक
  6. दीर्घायत (Oblong)
  7. जनन मूल
  8. न्यूमैटोफोर
  9. तने
  10. काँटे के रूप में
  11. तनों का अधोभूमिक रूपान्तरण।

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II. एक शब्द में उत्तर दीजिए –

  1. दल के समान सहदल पत्र किस पुष्प में पाये जाते हैं?
  2. उपरिजाय पुष्प का उदाहरण दीजिये।
  3. गेहूँ का दाना फल है या बीज?
  4. शुष्क फल का नाम लिखिए जिसमें फलभित्ति बीजावरण के साथ मिल जाती है।
  5. पैपस पुष्प की किस रचना का रूपांतरण है?
  6. निषेचित तथा परिपक्व बीजाण्ड के लिये वैज्ञानिक शब्द लिखिये।
  7. तुलसी में किस प्रकार का पुष्पक्रम पाया जाता है?
  8. सरसों में किस प्रकार का दलपुंज पाया जाता है?
  9. परिदलपुंज का एक उदाहरण लिखिए।

उत्तर:

  1. बोगेनवेलिया
  2. सूर्यमुखी
  3. फल
  4. कैरियोप्सिस
  5. बाह्यदलपुंज
  6. फल एवं बीज
  7. कूटचक्रक
  8. पृथक्दली
  9. मक्का।

III. एक शब्द में उत्तर दीजिए –

  1. ग्रैमिनी कुल के परिदलपुंज को क्या कहते हैं?
  2. किस कुल के पुष्पों के बाह्यदलपुंज रोमिल (पैपस) होते हैं?
  3. वे पुष्प जो त्रितयी, हाइपोगाइनस, जायांग-त्रिअंडपी, युक्तांडपी व त्रिकोष्ठीय होते हैं किस कुल में आते हैं?
  4. जिस कुल में पादपों की जड़ें ग्रंथिमय होती हैं, उनके नाम बताइये।
  5. उस कुल का नाम बताइये जिसमें फल सिलिक्युआ एवं पुष्प क्रॉसित होते हैं।
  6. टमाटर का वानस्पतिक नाम लिखिए।
  7. मटर का वानस्पतिक नाम लिखिए।
  8. धतूरे का पुष्प सूत्र लिखिए।

उत्तर:

  1. लॉडिक्यूल
  2. कंपोजिटी
  3. लिलियेसी
  4. पैपिलियोनेसी
  5. क्रुसीफेरी
  6. लाइकोपर्सिकम एस्कुलेन्टम
  7. पाइसम सटाइवम
  8. MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 21

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प्रश्न 3.
I. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1.  …………….. पौधे को यांत्रिक आधार देती हैं।
  2. जड़ भ्रूण के …………….. से विकसित होती है।
  3. पर्व तथा …………….. जड़ में नहीं होते हैं।
  4. न्यूमैटोफोर दलदली पौधों की जड़ों में …………….. के लिये विकसित होते हैं।
  5. आर्द्रताग्राही जड़ों में …………….. ऊतक पाये जाते हैं।
  6. महाबरगद वृक्ष …………….. में है, जिसमें …………. जड़ें हैं।
  7. पर्णाभ वृंत का उदाहरण …………….. होता है।
  8. छुईमुई में पर्णाधार ……………..होता है।
  9. कैक्टस में प्रकाश-संश्लेषण का कार्य …………….. करता है।
  10. अमरबेल में पोषक से भोजन प्राप्त करने वाली रचना को …………….. कहते हैं।

उत्तर:

  1. जड़ें
  2. मूलांकुर
  3. पर्वसंधि
  4. श्वसन
  5. गुंठिका (Velamen)
  6. कलकत्ता, स्तम्भ
  7. आस्ट्रे लियन बबूल या पर्किनसोनिया
  8. फूला हुआ
  9. तना
  10. हॉस्टोरिया।

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. पक्षियों द्वारा परागण को …………….. कहते हैं।
  2. पुष्प रूपान्तरित …………….. है।
  3. पुमंग …………….. तथा जायांग पुष्प का …………….. अंग है।
  4. पुष्पासन पर पुष्पीय चक्रों का स्थित होना
  5.  ……………. के बिना फल का निर्माण पार्थीनोजेनेसिस कहलाता है।
  6. युग्मक जनन में …………….. का निर्माण होता है।
  7. वे फल जो अंडाशय से विकसित होते हैं …………….. फल कहलाते हैं।
  8. भ्रूणपोष पोषक ऊतक है जो विकसित होते …………….. को पोषण देती है।
  9. अधोजाय पुष्प में, अंडाशय …………….. होता है।
  10. परिदलपुंज बाह्यदल तथा दल की वह अवस्था जब दोनों एक ………….. दिखाई देते हैं।

उत्तर:

  1. जन्तु (पक्षी) परागण
  2. प्ररोह
  3. नर, मादा जनन
  4. पुष्पपत्रों का निवेशन
  5. निषेचन
  6. युग्मक
  7. सत्य
  8. भ्रूण
  9. उत्तरवर्ती
  10. समान।

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III. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. पुष्पीय पादपों का सबसे बड़ा कुल …………….. है।
  2. …………….. कुल का पुंकेसर अंडाशय के ऊपर पैदा होता है।
  3. एण्ड्रोपोगान म्यूरीकेट्स …………….. का वानस्पतिक नाम है, यह गर्मी में शीतलता प्रदान करता है।
  4. दालें …………….. कुल के सदस्य हैं।
  5. परिदलपुंज …………….. कुल में पाया जाता है।

उत्तर:

  1. कंपोजिटी
  2. एस्टेरेसी
  3. खस
  4. पेपिलियोनेसी
  5. लिलिएसी।

प्रश्न 3.
I. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1.  …………….. पौधे को यांत्रिक आधार देती हैं।
  2. जड़ भ्रूण के …………….. से विकसित होती है।
  3. पर्व तथा …………….. जड़ में नहीं होते हैं।
  4. न्यूमैटोफोर दलदली पौधों की जड़ों में …………….. के लिये विकसित होते हैं।
  5. आर्द्रताग्राही जड़ों में …………….. ऊतक पाये जाते हैं।
  6. महाबरगद वृक्ष …………….. में है, जिसमें …………. जड़ें हैं।
  7. पर्णाभ वृंत का उदाहरण …………….. होता है।
  8. छुईमुई में पर्णाधार ……………..होता है।
  9. कैक्टस में प्रकाश-संश्लेषण का कार्य …………….. करता है।
  10. अमरबेल में पोषक से भोजन प्राप्त करने वाली रचना को …………….. कहते हैं।

उत्तर:

  1. जड़ें
  2. मूलांकुर
  3. पर्वसंधि
  4. श्वसन
  5. गुंठिका (Velamen)
  6. कलकत्ता, स्तम्भ
  7. आस्ट्रे लियन बबूल या पर्किनसोनिया
  8. फूला हुआ
  9. तना
  10. हॉस्टोरिया।

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II. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. पक्षियों द्वारा परागण को …………….. कहते हैं।
  2. पुष्प रूपान्तरित …………….. है।
  3. पुमंग …………….. तथा जायांग पुष्प का …………….. अंग है।
  4. पुष्पासन पर पुष्पीय चक्रों का स्थित होना
  5.  ……………. के बिना फल का निर्माण पार्थीनोजेनेसिस कहलाता है।
  6. युग्मक जनन में …………….. का निर्माण होता है।
  7. वे फल जो अंडाशय से विकसित होते हैं …………….. फल कहलाते हैं।
  8. भ्रूणपोष पोषक ऊतक है जो विकसित होते …………….. को पोषण देती है।
  9. अधोजाय पुष्प में, अंडाशय …………….. होता है।
  10. परिदलपुंज बाह्यदल तथा दल की वह अवस्था जब दोनों एक ………….. दिखाई देते हैं।

उत्तर:

  1. जन्तु (पक्षी) परागण
  2. प्ररोह
  3.  नर, मादा जनन
  4. पुष्पपत्रों का निवेशन
  5. निषेचन
  6. युग्मक
  7. सत्य
  8. भ्रूण
  9. उत्तरवर्ती
  10. समान

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III. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -.

  1. पुष्पीय पादपों का सबसे बड़ा कुल …………….. है।
  2. ……………. कुल का पुंकेसर अंडाशय के ऊपर पैदा होता है।
  3. एण्ड्रोपोगान म्यूरीकेट्स …………….. का वानस्पतिक नाम है, यह गर्मी में शीतलता प्रदान करता है।
  4. दालें …………….. कुल के सदस्य हैं।
  5. परिदलपुंज …………….. कुल में पाया जाता है।

उत्तर:

  1. कंपोजिटी
  2. एस्टेरेसी
  3. खस
  4. पेपिलियोनेसी
  5. लिलिएसी।

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प्रश्न 4.
उचित संबंध जोडिए –
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 22
उत्तर:

  1. (d) पर्व संधि पर उत्पन्न जड़ें
  2. (e) सहजीवी जड़
  3. (a) अग्रभाग में भोजन संचित जड़
  4. (c) तने के आधार पर विकसित जड़
  5. (b) जूसिया

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 23
उत्तर:

  1. (d) सतावर
  2. (c) नीबू
  3. (b) कुछ समय की वायवीय जड़
  4. (e) कंद
  5. (a) संघनित कक्षस्थ कलिका

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 24
उत्तर:

  1. (b) केला
  2. (d) घास
  3. (a) शहतूत
  4. (e) फूलगोभी
  5. (c) कद्दू

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 26
उत्तर:

  1. (e) असीमाक्षी
  2. (d) स्पाइक
  3. (f) ससीमाक्षी पुष्पक्रम
  4. (a) स्पैडिक्स
  5. (b) कटोरिया पुष्पक्रम
  6. (c) हाइपैन्थोडियम

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 27
उत्तर:

  1. (d) प्याज
  2. (e) सरसों
  3. (a) धतूरा
  4. (b) मटर
  5. (c) कम्पोजिटी
  6. (f) क्रुसीफेरी।

प्रश्न 5.
I.सत्य / असत्य बताइए –

  1. जड़ें गुरुत्वानुवर्ती गति प्रदर्शित करती हैं।
  2. जड़ के अग्रभाग पर उपस्थित संरचना मूल छद कहलाती है।
  3. कुछ विशिष्ट कार्यों के लिये जड़, तना एवं पत्ती अपने मूल स्वरूप में कुछ परिवर्तन कर लेती है, इसे रूपांतरण कहते हैं।
  4. तने का अधोभूमिक रूपांतरण कुल तीन प्रकार का होता है।
  5. कुछ पादपों में दो प्रकार की पत्तियाँ होती हैं, इस दशा को पत्तियों की विभिन्नरूपकता कहते हैं।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

II. सत्य / असत्य बताइए –

  1. पुष्प के अंग विशेष कार्यों को करने के लिये रूपांतरित पत्तियाँ हैं अतः इन्हें पुष्पीय पत्र कहते हैं।
  2. एक फूलगोभी पूरा पुष्पक्रम है जो संयुक्त कोरिम्ब कहलाता है।
  3. बीज के अन्दर पौधा सुरक्षित होता है।
  4. पुष्पक्रम के केवल तीन प्रकार होते हैं –
    1. सरल
    2. संयुक्त
    3. मिश्रित।
  5. फल, फलभित्ति एवं बीज का बना होता है।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

III. सत्य / असत्य बताइए –

  1. स्पाइकलेट का स्पाइक पुष्पक्रम ग्रैमिनी कुल में पाया जाता है।
  2. सूरजमुखी में बिंब पुष्पक परिधि में स्थित होते हैं।
  3. सोलेनेसी कुल का पौधा विथानिया सोम्नीफेरा खाँसी ठीक करने की औषधि के रूप में काम आता है।
  4. लिलियम कैन्डिडम चाँदनी पुष्प का वानस्पतिक नाम है।
  5. राई, दूबघास व बाँस ग्रैमिनी कुल के सदस्य हैं।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

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पुष्पी पादपों की आकारिकी अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पार्श्व मूल की उत्पत्ति किस प्रकार होती है ?
उत्तर:
पार्श्व मूलों (Lateral roots) की उत्पत्ति अन्तर्जात (Endogenous) अर्थात् आन्तरिक ऊतकों से होती है। वास्तव में पार्श्व जड़ों की उत्पत्ति परिरंभ (Pericycle) से होती है।

प्रश्न 2.
पुश्त मूल को उदाहरण देकर समझाइये।
उत्तर:
पुश्त मूल (Root buttresses):
कुछ बड़े वृक्षों में पौधे के निचले भाग से पटियेनुमा रचनाएँ निकलती हैं, जो कि स्वभाव में आधी जड़ एवं आधी तना होती हैं। ये जड़ें पौधे को आधार प्रदान करती हैं। उदाहरण – सेमल (Prombab malabaricum)।

प्रश्न 3.
जड़ द्वारा जल एवं खनिज लवणों का अवशोषण किस प्रदेश द्वारा किया जाता है ?
उत्तर:
जड़ों द्वारा जल एवं खनिज लवणों का अवशोषण मूल रोम प्रदेश (Root hair zone) द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 4.
मूल टोप क्या है ? इसका क्या महत्व है ?
उत्तर:
जड़ों के अग्रभाग पर उपस्थित टोपीनुमा संरचना को ही मूल टोप (Root cap) कहते हैं। यह जड़ के सिरे की रक्षा करती है।

प्रश्न 5.
ऐसे जड़ का नाम बताइये जो कि प्रकाश-संश्लेषण में सहायक होता है ?
उत्तर:
परिपाची मूल (Assimilatory root) उदाहरण – टीनोस्पोरा, ट्रॉपा (Trapa) आदि।

प्रश्न 6.
न्यूमैटोफोर क्या है ?
उत्तर:
दलदली पौधों में पायी जाने वाली श्वसन मूलों को ही न्यूमैटोफोर (Pneumatophore) कहते हैं। यह जड़ों का श्वसन हेतु एक रूपान्तरण है।

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प्रश्न 7.
अपस्थानिक जड़ें क्या हैं ?
उत्तर:
ऐसी जड़ें जो कि मूलांकुर से विकसित न होकर तने के आधार पर पर्वसन्धियों से निकलती हैं, उन्हें ही अपस्थानिक जड़ें (Adventitious roots) कहते हैं।

प्रश्न 8.
पौधे के किस भाग से जड़ों की उत्पत्ति होती है?
उत्तर:
जड़ों की उत्पत्ति पौधों के बीजों में उपस्थित भ्रूण के मूलांकुर (Radicle) से होती है।

प्रश्न 9.
कुंभीरूपी मूल एवं शंकुरूपी मूल के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  • कुंभीरूपी मूल (Napiform roots) – शलजम, चुकन्दर।
  • शंकुरूपी मूल (Conical roots) – गाजर।

प्रश्न 10.
प्याज एवं आलू के खाने योग्य भाग का नाम लिखिए।
उत्तर:
प्याज का शल्क पत्र एवं आलू का स्तंभकंद खाने योग्य भाग है।

प्रश्न 11.
प्रकन्द घनकन्द एवं शल्ककंद की तुलना कीजिये।
उत्तर:
प्रकन्द, घनकन्द एवं शल्ककंद में तुलनाक्र –
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 28

प्रश्न 12.
स्टोलोन एवं रनर में अन्तर बताइये।
उत्तर:
स्टोलोन एवं रनर में अन्तर –
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 29

प्रश्न 13.
फिल्लोक्लैड एवं क्लैडोड में अन्तर लिखिए।
उत्तर:

  • फिल्लोक्लैड (पर्णाभस्तम्भ) अनिश्चित वृद्धि वाला हरा तना, है जो कि रूपान्तरित होकर पत्ती का कार्य करता है, जबकि क्लैडोड (पर्णाभ पर्व) निश्चित वृद्धि वाला हरा तना है।
  • फिल्लोक्लैड में कई पर्व एवं पर्वसंधियाँ होती हैं, जबकि क्लैडोड में केवल एक या दो पर्व होते हैं।

प्रश्न 14.
रूपान्तरण का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
रूपान्तरण – अपने सामान्य कार्यों से हटकर कुछ विशिष्ट कार्यों को करने के लिए तने अपने सामान्य रूप एवं आकार में परिवर्तन कर लेते हैं। इसे ही तनों का रूपान्तरण कहते हैं।

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प्रश्न 15.
स्तम्भ कन्द एवं मूल कन्द में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
स्तम्भ कन्द (Stem tuber) में पर्व, पर्वसन्धि, पर्व कलिकाएँ और शल्क पत्र पाये जाते हैं। इनकी आन्तरिक रचना भी तने के समान होती है जबकि मूल कन्द (Root tuber) में ये रचनाएँ नहीं होती

प्रश्न 16.
रनर, सकर एवं ऑफसेट में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
रनर, सकर और ऑफसेट में अन्तर –
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 30

प्रश्न 17.
पर्णकाय स्तंभ तथा पर्णाभवृन्त में अन्तर लिखिये।
उत्तर:
पर्णकाय स्तंभ में तना रूपान्तरित होकर मांसल हो जाती हैं, जबकि पर्णाभवृन्त में पर्णवृन्त रूपान्तरित होकर पत्ती सदृश संरचना बनाते हैं।

प्रश्न 18.
समद्विपार्श्विक पत्ती किसे कहते हैं ?
उत्तर:
ऐसी पत्तियाँ, जिनकी ऊपरी एवं निचली सतह संरचना की दृष्टि से समान होती हैं, समद्विपाश्विक पत्तियाँ कहलाती हैं। प्रायः एकबीजपत्री पौधों में पाया जाता है। उदाहरण – मक्का की पत्ती।

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प्रश्न 19.
पृष्ठाधारी पत्ती किसे कहते हैं ?
उत्तर:
पृष्ठाधारी पत्ती (Dorsiventral leaf):
ऐसी पत्ती जिसकी ऊपरी तथा निचली सतह में संरचनात्मक भिन्नता पायी जाती है, पृष्ठाधारी पत्ती कहलाती है। प्रायः द्विबीजपत्री पौधों में पाया जाता है। उदाहरणआम।

प्रश्न 20.
समानान्तर एवं जालिकावत् शिराविन्यास में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समानान्तर एवं जालिकावत् शिराविन्यास में अन्तर –
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 31

प्रश्न 21.
पुष्प क्या है ?
उत्तर:
पुष्प एक रूपान्तरित प्ररोह या कली है, जो तने या शाखाओं के शीर्ष अथवा पत्ती के कक्ष में उत्पन्न होकर प्रजनन का कार्य करता है तथा फल एवं बीज को उत्पादित करता है।

प्रश्न 22.
द्विलिंगी पुष्प से क्या समझते हैं ?
उत्तर;
पुष्प में चार चक्र होते हैं, जिसमें दो चक्र सहायक अंगों का चक्र (बाह्यदल) है और दो चक्र जनन अंग के होते हैं, ये एण्डोशियम और गायनोशियम हैं। यदि ये दोनों चक्र एक ही पुष्प में हों तो इसे द्विलिंगी पुष्प कहते हैं।

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प्रश्न 23.
पुष्प सूत्र से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
वह सूत्र जिसके द्वारा पुष्प की संरचना को संक्षिप्त रूप में एक सूत्र के द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है, उसे पुष्प सूत्र कहते हैं। इस सूत्र या समीकरण में पुष्प की विभिन्न संरचनाओं तथा स्थितियों को विभिन्न संकेतों द्वारा व्यक्त किया जाता है। उदाहरण – सरसों
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 55

प्रश्न 24.
उत्तरवर्ती व अधोवर्ती अंडाशय में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
उत्तरवर्ती एवं अधोवर्ती अंडाशय में अन्तर –
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 32

पुष्पी पादपों की आकारिकी लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भूमिगत तने तथा जड़ में कोई चार अन्तर लिखिये।
उत्तर:
भूमिगत तने एवं जड़ में अन्तर –
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 33

प्रश्न 2.
तने के कार्यों को लिखिये।
उत्तर:
तने के कार्य (Functions of stems):
तना पौधे का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो निम्नलिखित कार्यों का सम्पादन करता है –

  • इसी के ऊपर शाखाएँ, पुष्प तथा फल लगे होते हैं। इस प्रकार यह इन्हें आधार प्रदान करता है। तना इन्हें इस प्रकार साधे रखता है कि इन्हें प्रकाश मिल सके। अतः यह पौधे को यान्त्रिक सहारा देता है।
  • बाल अवस्था में यह हरा होकर प्रकाश-संश्लेषण का कार्य करता है।
  • यह जड़ द्वारा अवशोषित पदार्थ का संवहन करता है।
  • रेगिस्तान में यह भोजन निर्माण तथा संग्रहण का कार्य करता है।
  • कुछ पौधों में यह वर्धी प्रजनन का कार्य करता है। जैसे-आलू, अदरक।
  • कुछ पौधों में यह काँटों में रूपान्तरित होकर उनकी पशुओं से रक्षा करता है।
  • भूमिगत होने पर यह मृदा को बाँधने का कार्य करता है।

प्रश्न 3.
पत्ती के सामान्य कार्य लिखिए।
उत्तर:
पत्ती के सामान्य कार्य –

  • यह प्रकाश-संश्लेषण के द्वारा पौधे तथा समस्त जीवीय समुदाय के लिए भोज्य पदार्थों का संश्लेषण करती हैं।
  • यह रन्ध्रों (Stomata) के द्वारा गैसीय आदान-प्रदान करके श्वसन में मदद करती है।
  • यह स्टोमेटा के द्वारा वाष्पोत्सर्जन का कार्य करती है।
  • यह भोज्य पदार्थों का संवहन करती है।

प्रश्न 4.
पत्ती के विशिष्ट कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पत्तियों के विशिष्ट कार्य –

  • कुछ पत्तियाँ भोजन संग्रहण का कार्य करती हैं।
  • कुछ पत्तियाँ रूपान्तरित होकर आरोहण, रक्षा और विशिष्ट भोजन ग्रहण (कीटभक्षी पौधों में) का कार्य करती हैं।
  • कुछ पत्तियाँ रंग बदलकर पर-परागण में सहायता करती हैं और परागण में भाग लेने वाले जन्तुओं को आकर्षित करती हैं।
  • कुछ पत्तियाँ वर्षी प्रजनन में सहायता करती हैं जैसे—ब्रायोफिलम।
  • कुछ पत्तियाँ जड़ों में रूपान्तरित होकर अवशोषण का कार्य करती हैं, जैसे—साल्वीनिया की पत्ती।

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प्रश्न 5.
पर्णाभस्तम्भ एवं पर्णाभवृन्त में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
पर्णाभस्तम्भ और पर्णाभवृन्त में अन्तर –
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 34

प्रश्न 6.
बाह्यदलों के चार कार्य लिखिए।
उत्तर:
बाह्यदलों के कार्य (Functions of calyx) –

  • इसका मुख्य कार्य पुष्प की कलिकावस्था में इसकी रक्षा करना है।
  • बाह्यदल हरे होने के कारण पत्ती के समान भोज्य पदार्थों का संश्लेषण करते हैं।
  • ये रंगीन होकर कीटों को पर-परागण के लिए आकर्षित करते हैं।
  • कभी-कभी ये रोमगुच्छ (Pappus) के रूप में फलों तथा बीजों से जुड़े रहकर इनके विकिरण में सहायता करते हैं।

प्रश्न 7.
पुंकेसरों के आसंजन से आप क्या समझते हैं ? इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पुंकेसरों का आसंजन (Adhesion of Stamens):
जब पुष्प के किसी चक्र के अवयव किसी दूसरे चक्र से सम्बद्ध होते हैं, तब इस क्रिया को आसंजन कहते हैं। पुंकेसरों में निम्नलिखित प्रकार के आसंजन पाये जाते हैं –

  • दललग्न (Epipetalous) – जब किसी पुष्प के पुंकेसर दल से जुड़े होते हैं, तब इन पुंकेसरों को दललग्न कहते हैं। जैसे – धतूरा और कनेर।
  • परिदललग्न (Epiphyllous) – जब पुंकेसर परिदलों से जुड़े रहते हैं, तब इन्हें परिदललग्न कहते हैं। जैसे – प्याज, सतावर।
  • पुजायांगी (Gynandrous) – जब पुंकेसर जायांग से जुड़े हों, तब इन्हें पुजायांगी कहा जाता है। जैसे – मदार।
  • पुजायांग स्तम्भी (Gynostegium) – आर्किड जैसे कुछ पादपों में पुष्पासन अण्डाशय के आगे तक बढ़ जाता है, जिससे अवृन्ती पुंकेसर और कुक्षीय पालि (Stigmatic lobes) जुड़े रहते हैं।

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प्रश्न 8.
पुष्प पत्रों के निवेशन से आप क्या समझते हैं ?
अथवा
जायांगधर, परिजायांगी एवं जायांगोपरिक अण्डाशय से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
पुष्प पत्रों का निवेशन (Insertion of Floral Leaves) – पुष्पासन पर जायांग के सापेक्ष अन्य अंगों की स्थिति को पुष्प पत्रों का निवेशन कहते हैं। यह तीन प्रकार का हो सकता है –

1. अधोजाय या जायांगधर (Hypogynous):
वह निवेशन है, जिसमें पुष्पासन फूलकर शंक्वाकार हो जाता है। इसके शीर्ष पर अण्डाशय स्थित होता है, शेष पुष्पीय पत्र अण्डाशय से नीचे स्थित होते हैं, ऐसे अण्डाशय को जो सभी पुष्पीय पत्रों में ऊपर स्थित होता है उत्तरवर्ती (Superior) कहते Hypogynous Perigynous Epigynous हैं उदाहरण-सरसों, बैंगन, चाइना रोज आदि।
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2. परिजाय या परिजायांगी (Perigynous):
वह निवेशन है, जिसमें पुष्पासन एक प्याले का रूप ले लेता है। जायांग पुष्पासन के अन्दर तथा अन्य पुष्पीय पत्र प्याले के किनारों पर स्थित होते हैं। ऐसे अण्डाशय को जो सभी पुष्पीय पत्रों के नीचे स्थित होता है, अधोवर्ती अण्डाशय (Inferior ovary) कहते हैं। जैसे – गुलाब, सेम, मटर, अशोक, गुलमोहर आदि।

3. जायांगोपरिक या उपरिजाय (Epigynous):
वह निवेशन है, जिसमें पुष्पासन प्याले के समान गहरा हो जाता है, जिसके अन्दर अण्डाशय स्थित होता है, लेकिन इस निवेशन में अण्डाशय तथा पुष्पासन की भित्तियाँ एक-दूसरे से सटी रहती हैं और प्याले के शीर्ष से पुष्पीय पत्र निकलते हैं। इस निवेशन में भी अण्डाशय अन्य पुष्पीय पत्रों से नीचे स्थित रहता है। अत: यह अण्डाशय भी अधोवर्ती होता है। जैसे – सेय, सूर्यमुखी, एक्जोरा आदि।

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पुष्पी पादपों की आकारिकी दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अपस्थानिक जड़ों के भोजन संग्रहण हेतु बने रूपान्तरणों को समझाइये।
उत्तर:
अपस्थानिक जड़ों का भोजन संग्रहण हेतु रूपान्तरण-भोजन संग्रहण के कारण अपस्थानिक जड़ों में निम्नलिखित रूपान्तरण पाये जाते हैं –
(1) पुलकित या गुच्छ मूल (Fasciculated roots):
कुछ पौधों की अपस्थानिक या रेशेदार जड़ें भोज्य पदार्थों के एकत्रित हो जाने के कारण फूलकर गुच्छे का रूप ले लेती हैं इन्हें ही गुच्छमूल कहते हैं। जैसेडहेलिया (Dahlia), सतावर (Asparagus)।

(2) कन्द मूल (Tuberous roots):
वे जड़ें हैं, जो भोजन को संगृहीत करके अनियमित आकार की हो जाती हैं। ये जड़ें तने की पर्वसन्धियों से निकलती हैं तथा भोजन को संगृहीत करके अनियमित आकार में फूल जाती हैं। उदाहरणस्वरूप-शकरकन्द का तना भूमि पर रेंगकर चलता है, इसकी पर्वसन्धियों से अपस्थानिक जड़ें निकलती हैं, जो भूमि में जाकर खाद्य पदार्थों को संचित करके फूल जाती हैं और कन्द मूल का निर्माण करती हैं।

(3) ग्रन्थिल मूल (Nodulated roots):
ये जड़ें हैं, जो तने के आधार से निकलकर सामान्य जड़ के समान वृद्धि करती हैं लेकिन इनके अग्रस्थ भाग खाद्य पदार्थों के जमा हो जाने के कारण फूल जाते हैं। जैसेहल्दी की जड़।
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(4) मणिकामय मूल (Moniliform roots):
वे जड़ें हैं, जो मोतियों की माला के समान फूल जाती हैं। अंगूर, कुछ घासों एवं दलदली घासों (Sedge) में जड़ें मोतियों की माला के समान फूली-संकुचित-फूली दिखाई देती हैं। डायोस्कोरिया एलाटा में भी इसी प्रकार की जड़ें पायी जाती हैं।
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(5) वलयित मूल (Annulated roots):
वे जड़ें हैं, जो भोज्य पदार्थों के संग्रहण के कारण छल्ले का रूप ले लेती हैं, जो एक के ऊपर एक रखी प्रतीत होती हैं। इपीकॉक में इसी प्रकार की जड़ें पायी जाती हैं।

प्रश्न 2.
यांत्रिक कार्यों के लिए अपस्थानिक जड़ों में होने वाले रूपान्तरण लिखिये।
उत्तर:
यांत्रिक कार्यों (आधार प्रदान करने) के लिए अपस्थानिक जड़ों के रूपान्तरण-पौधे को यान्त्रिक सहारा प्रदान करने के लिए अपस्थानिक जड़ों में निम्नलिखित रूपान्तरण पाये जाते हैं –

(1) स्तम्भ मूल (Prop root):
यह जड़ का वह रूपान्तरण है, जिससे तने की क्षैतिज शाखाओं से वायवीय जड़ें निकलकर भूमि में प्रविष्ट कर जाती हैं। भूमि में प्रवेश के बाद ये स्थूलकाय होकर स्तम्भाकार हो जाती हैं तथा वृक्ष की शाखाओं के वजन को साधने के साथ भूमि से जल तथा पोषक पदार्थों को अवशोषित करती हैं। बरगद के वृक्ष में इसी प्रकार की जड़ें पायी जाती हैं। कलकत्ता के वानस्पतिक उद्यान में भारत का सबसे पुराना वृक्ष है, जो लगभग 200 वर्ष पुराना और 300 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है। इतने विशाल क्षेत्रफल में फैले रहने के बावजूद इसके मूल तने को निकाल दिया गया है। फलतः पूरा वृक्ष स्तम्भ मूल पर ही टिका है।
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(2) पुस्त मूल (Root buttresses) :
कुछ बड़े ख्ने जैसी जड़ें पौधों (वृक्षों) में पटियेनुमा रचनाएँ निचले भाग से निकलती हैं जो कि वास्तविकता में स्वभावगत आधी जड़ एवं आधा तना होती हैं । ऐसी जड़ें आधार प्रदान करती हैं। सेमल (Prombab maladaricum) के प्रौढ़ वृक्षों में ये मिलती है।

(3) आरोही मूल (Climbing root):
कुछ पौधों में इस प्रकार की जड़ें आधार पर आरोहण में सहायता पहुँचाती हैं। ये जड़ें पतली एवं लम्बी होती हैं तथा तने की पर्वसन्धियों (Nodes) से निकलती हैं। कालीमिर्च, मनीप्लाण्ट (पोथॉस) और पान में इस प्रकार की जड़ें पायी जाती हैं। इन पौधों की आरोही मूलों से एक प्रकार का चिपचिपा पदार्थ निकलता है। जिसकी सहायता से जड़ें आधार से चिपकती जाती हैं और तना चिपककर ऊपर बढ़ता जाता है।
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(4) चिपकने वाली जड़ें (Clinging roots)-जो पौधे दूसरे पौधों पर उगते हैं, उनको अधिपादप (epiphytes) कहते हैं। कुछ अधिपादपों में एक विशेष प्रकार की जड़ें पायी जाती हैं, जो इन्हें आधार से पिचकाये रखती हैं, इन्हें ही चिपकने वाली जड़ें कहते हैं, जैसे-वैण्डा की जड़ें।
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प्रश्न 3.
मूसला जड़ों में पाये जाने वाले विभिन्न रूपान्तरणों का वर्णन कीजिए।
अथवा
भोजन संग्रह के लिए मूसला जड़ के रूपान्तरण को चित्र सहित समझाइए।
उत्तर:
मूसला जड़ों के रूपान्तरण (Modification of tap roots) – मूसला जड़ों में मुख्यतः दो कार्यों के लिए रूपान्तरण पाया जाता है –

1. भोजन संग्रहण के लिए (For food storage):
कुछ मूसला जड़ें खाद्य पदार्थों को संगृहीत करके फूलकर मांसल हो जाती हैं और अलग-अलग आकार ग्रहण कर लेती हैं। इस संगृहीत भोजन सामग्री का उपयोग पादप करते हैं। इन रूपान्तरणों का नामकरण जड़ के आकार के आधार पर निम्न प्रकार से किया जाता है –

(i) शंक्वाकार (Conical):
इसमें जड़ आधार से अग्रस्थ भाग तक क्रमश: पतली होती जाती है। इनका आधार भाग सबसे मोटा और अग्र भाग सबसे पतला होता है। उदाहरण-गाजर का फूला हुआ भाग मांसल जड़ द्वारा बनाया जाता है।
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(ii) तर्कुरूप (Fusiform):
यह जड़ बीच में मोटी और दोनों सिरों की ओर क्रमशः पतली होती जाती है। इसमें ऊपर का पतला भाग बीजपत्राधार (Hypocotyl) तथा शेष सम्पूर्ण भाग जड़ होता है। उदाहरण-मूली।

(iii) कुंभीरूप (Napiform):
इस जड़ का ऊपरी भाग बहुत अधिक फूला लेकिन अग्र भाग एकदम पतला होता है। इसका ऊपरी फूला हुआ भाग बीजपत्राधार एवं जड़ दोनों के फूलने से बनता है। उदाहरणशलजम, चुकन्दर।

2. श्वसन के लिए (For respiration):
श्वसन मूल (Respiratory roots)-ये जड़ें दल-दल में उगने वाले पौधों में पायी जाती हैं। चूँकि, ऐसे स्थानों पर भूमि में वायु की कमी रहती है अत: श्वसन क्रिया हेतु पौधे की द्वितीयक जड़ें अपने स्वभाव के विपरीत विकसित होकर भूमि के ऊपर आ जाती हैं। भूमि के ऊपर विकसित इस ऊर्ध्वाधर भाग को श्वसन मूल या न्यूमैटोफोर (Pneumatophore) कहते हैं। इन श्वसन मूलों में अनेक वातरन्ध्र (Lenticels) पाये जाते हैं। इन्हीं रन्ध्रों से वायुमण्डलीय ऑक्सीजन जड़ों में प्रवेश करके वायु की कमी को पूरा करती है। इस प्रकार की जड़ें बंगाल के सुन्दरवन में उगने वाले पौधों में पायी जाती हैं। उदाहरणराइजोफोरा (Rhizophora)।

प्रश्न 4.
तनों के अधोभूमिक रूपान्तरणों को उदाहरण देकर समझाइये।
उत्तर:
तनों के अधोभूमिक रूपान्तरण (Underground modifications of Stem):
ऐसे तने जो कि भूमि के नीचे स्थित रहते हैं उन्हें अधोभूमिक रूपान्तरण कहते हैं । तनों का यह रूपान्तरण प्रतिकूल परिस्थितियों में अपने आपको जीवित रखने के लिए होता है। प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिए भूमिगत तने वाले भाग में भोज्य पदार्थ एकत्र करके अपने-आपको सुरक्षित रखते हैं। अनुकूल परिस्थिति आते ही ये विकसित होकर एक नया पौधा बना लेता है।
भूमिगत तनों में निम्नलिखित चार प्रकार के रूपान्तरण पाये जाते हैं –

  1. प्रकन्द
  2. स्तम्भ कन्द
  3. शल्ककन्द

(1) प्रकन्द (Rhizome):
यह एक अनिश्चित वृद्धि Nod वाला बहुवर्षी भूमिगत तना है, जो कि अनुकूल परिस्थिति में विकसित होकर प्ररोह एवं पत्तियों का निर्माण करता है। इसमें पर्व एवं पर्वसन्धियाँ उपस्थित होती हैं। प्रत्येक पर्वसन्धि पर शल्क पत्र (Scale. leaves) एवं अक्षीय कलिका (Axillary bud) पायी जाती है। इसकी निचली ‘सतह से बहुत-सी अपस्थानिक जड़ें निकलती हैं। चित्र-अदरक के प्रकन्द उदाहरण – अदरक (Ginger)।
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(2) स्तम्भ कन्द (Stem tuber):
पौधे का भूमि के अन्दर बनने वाला मांसल भाग कन्द (Tuber) कहलाता है। यह जड़ Scar of Scar of Germinating scale leaf eye bud अथवा तना दोनों से विकसित हो सकता है, जब यह जड़ से stem विकसित होता है, तब इसे मूलकन्द (Root tuber) लेकिन Apex जब यह तने से विकसित होता है, तब इसे स्तम्भ कन्द (Stem tuber) कहते हैं। स्तम्भ कन्द में तने की कक्षस्थ कलिका भूमि के अन्दर विकसित होकर भोज्य पदार्थों को संगृहीत कर लेती Base end है।

इसी संगठित भाग को स्तम्भ कन्द कहते हैं। आलू स्तम्भ कन्द का अच्छा उदाहरण है। अगर हम आलू को ध्यान से देखें तो इस पर अनेक गड्ढे सर्पिलाकार रूप में विन्यस्त रहते हैं, जिन्हें अक्षि (Eyes) कहते हैं। वास्तव में ये इनकी पर्वसन्धियाँ हैं, जिनमें तीन कलिकाएँ स्थित होती हैं, जो शल्क पत्रों से ढंकी रहती हैं। दो अक्षियों के बीच का स्थान पर्व कहलाता है। आलू का कन्द वर्धा प्रसारण के काम आता है।
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(3) शल्ककन्द (Bulb):
इसे हम भूमिगत संपरिवर्तित कलिका कह सकते हैं, जिसमें स्तम्भ छोटा होता है, जिसे डिस्क (Disc) कहा जाता है। डिस्क (तने) पर अत्यन्त आस-पास मांसल शल्क पत्र लगे होते हैं। तने पर पर्व बहुत छोटे रहते हैं। तने के निचले भाग से अपस्थानिक जड़ें निकलती हैं। तने के अग्र भाग में शीर्षस्थ कलिका एवं शल्क पत्रों के कक्ष से कक्षस्थ कलिकाएँ निकलती हैं। शल्क पत्र विन्यास के अनुसार, शल्ककन्द निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं –

(a) कंचुकित शल्ककन्द (Tunicated bulb):
इसमें शल्क पत्र एक-दूसरे को पूर्ण रूप से ढंके एवं संकेन्द्रित होते हैं। बाहर सूखे शल्क पत्र का आवरण होता है, जो छिलका बनाता है। उदाहरण – प्याज।
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(b) शल्की शल्ककन्द (Scaly bulb):
इसमें शल्क पत्र एक – दूसरे को ढंकते नहीं। इनमें सम्पूर्ण कलियों को ढंकने हेतु एक आवरण (ट्यूनिक) नहीं होता। उदाहरण-लहसुन, लिली इसे संयुक्त शल्ककन्द (Compound bulb) कहते हैं। इसकी एक कली शल्ककन्द (Bulblet) कहलाती है।
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(4) घनकन्द (Corm):
यह भूमि में पाया जाने वाला एक बहुत मोटा एक पर्व वाला स्तम्भ है, जो भूमि में उदग्र (Vertical) होता है। इस पर शल्क पत्र और अपस्थानिक मूल होती हैं। सूरन या जिमीकन्द इसका अच्छा उदाहरण है। इसमें शीर्षस्थ कलिका वायवीय प्ररोह बनाती है, जिसमें संगृहीत भोजन काम में लाया जाता है। अपस्थानिक कलिकाएँ अन्य घनकन्द बनाती हैं।
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प्रश्न 5.
तनों के वायवीय रूपान्तरण का सचित्र वर्णन कीजिये।
उत्तर:
वायवीय रूपान्तरण या कायान्तरित तने (Aerial Modifications or Metamorphoseal Stems):
वायवीय रूपान्तरण में तने का स्वरूप इतना अधिक बदल जाता है कि उन्हें पहचानना कठिन होता है। इसलिए इन रूपान्तरणों या सम्परिवर्तनों को कायान्तरित (Metamorphoseal) तना कहा जाता है। इस प्रकार के रूपान्तरित तनों को उनके उद्भव एवं स्थिति के द्वारा ही पहचाना जा सकता है। यह रूपान्तरण चार प्रकार का हो सकता है –

  1. स्तम्भ प्रतान
  2. स्तम्भ मूल
  3. पर्णाभ स्तम्भ और
  4. पत्र प्रकलिका।

(1) स्तम्भ प्रतान (Stem Tendril):
यह तना रूपान्तरण है जिसमें पत्तियों की कक्षस्थ कलिका सामान्य शाखा के स्थान पर रूपान्तरित होकर एक तन्तुमय संरचना का निर्माण करती है जिसे प्रतान (Tendril) कहते हैं। यह प्रतान पौधे के आरोहण में सहायता करता है। तने का यह रूपान्तरण कमजोर तने वाले पादपों में पाया जाता है। इस रूपान्तरण को अंगूर, एण्टीगोनॉन, पैसीफ्लोरा, कार्डियोस्पर्मम में देखा जा सकता है।
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(2) स्तम्भ शूल (Stem thorn):
इस रूपान्तरण में कक्षस्थ कलिका (नीलकण्ठ Duranta में) काँटे में परिवर्तित हो जाती है इसे स्तम्भ शूल या कण्टक कहते हैं । इस कण्टक पर पत्तियाँ, शाखाएँ, फूल भी उत्पन्न होते हैं। इससे जाहिर है कि यह काँटा स्तम्भ के रूपान्तरण से बना है। करौंदा, हालग्रेफिला स्पाइनोसा, नीबू, बेल में इस प्रकार का रूपान्तरण पाया जाता है।

(3) पर्णाभस्तम्भ या पर्णकाय स्तम्भ (Phylloclade):
तने के इस रूपान्तरण में तना रूपान्तरित होकर पत्ती का रूप ले लेता है। यह रूपान्तरण सामान्यतः मरुभूमि में उगने वाले उन पादपों में पाया जाता है जिनकी पत्तियाँ वाष्पोत्सर्जन को रोकने के लिए काँटों या शल्कों का रूप ले लेती हैं। यह रूपान्तरण नागफनी (Opuntia), कोकोलोबा, मुहलेन, बेकिया इत्यादि में पाया जाता है।

(4) पत्र प्रकलिका (Bulbils):
तने के इस रूपान्तरण में तने या प्ररोह को बनाने वाली कलिकाएँ समूह में व्यवस्थित होकर विशेष रूप धारण कर लेती हैं। ये रूपान्तरण पौधों में वर्धी प्रजनन के लिए पाया जाता है। डायकोरिया, एगेव, अनन्नास इत्यादि में यह रूपान्तरण देखा जा सकता है।

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प्रश्न 6.
शिरा विन्यास किसे कहते हैं ? विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शिरा विन्यास (Venation):
पर्णफलक के मध्य में संवहन पूल पाया जाता है इसे मध्य शिरा (Mid vein) कहते हैं। इससे अनेक शाखाएँ निकलकर सम्पूर्ण पर्ण फलक में बिखरी होती हैं इन शाखाओं को नाड़ी या शिरा (Vein) कहते हैं, इस प्रकार ये शिराएँ संवहन के लिए बनी रचनाएँ हैं। इनकी सहायता से फलक को खाद्य सामग्री, जल व लवणों का वितरण होता है । इसके अलावा ये शिराएँ पर्णफलक का कंकाल बनाती हैं। पर्ण फलक में शिराओं के विन्यास को ही शिरा विन्यास कहते हैं। यह दो प्रकार का हो सकता है –

  • जालिकावत् तथा
  • समानान्तर शिरा विन्यास।

(1) जालिकावत् शिरा विन्यास (Reticulate Venation):
वह शिरा विन्यास है जिसमें फलक के अन्दर शिराएँ जाल के रूप में व्यवस्थित होती हैं। यह शिरा विन्यास कुछ अपवादों को छोड़कर सभी द्विबीजपत्री पादपों की पत्तियों में पाया जाता है। यह दो प्रकार का हो सकता है –

  • एक शिरीय
  • बहुशिरीय।

(i) एकशिरीय या पिच्छवत् (Unicostate or Pinnate):
इस शिराविन्यास में फलक के मध्य में एक मजबूत मध्य शिरा (Midrib or Costa) पाया जाता है इसमें से पार्वीय शिराएँ निकलकर फलक के किनारे तक जाती हैं। सभी दिशाओं में फैली हुई अन्य अनेक पतली शिराएँ जाल सदृश रचना बनाती हैं जैसे – आम, अमरूद, पीपल।
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(ii) बहुशिरीय या हस्ताकार (Multicostate or Palmate):
इस शिराविन्यास में मध्य शिरा कई समान शाखाओं में बँटकर फलकों में फैली होती है। यह शिरा विन्यास दो प्रकार का हो सकता है –

(a) अपसारी (Divergent):
इसमें शिराएँ केन्द्र से निकलकर फलक के किनारे की ओर अग्रसित होने में एक-दूसरे से दूर होती जाती हैं, जैसे-अण्डी , कपास आदि।

(b) अभिसारी (Convergent):
इसमें वृन्त के केन्द्र से तो अनेक शिराएँ निकलती हैं। किन्तु फलक के अग्रक की ओर जाते हुए आपस में मिल जाती हैं; जैसे – बेर, तेजपात, स्माइलैक्स (अपवाद स्वरूप एकबीजपत्री होने पर भी जालिकावत्)।

(2) समानान्तर या समदिश शिरा विन्यास (Parallel Venation):
यह शिरा विन्यास है जिसमें शिराएँ एक-दूसरे के समानान्तर स्थित होती हैं। यह शिरा विन्यास दो प्रकार का हो सकता है –

(i) एकशिरीय या पिच्छाकार (Unicostate or Pinnate):
फलक में एक मुख्य शिरा होती है जिससे पार्श्व शिराएँ समानान्तर क्रम में निकलती हैं। जैसे – अदरक, हल्दी, कैना, केला।
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(ii) बहुशिरीय या हस्ताकार (Multicostate of palmate) – इस शिरा विन्यास में मुख्य शिरा कई शाखाओं में बँट जाती है। यह विन्यास दो प्रकार का होता है

(a) अपसारी (Divergent):
इसमें वृन्ताग्र से अनेक शिरायें फैलती हुई फलक के किनारे की ओर समानान्तर रूप में जाती हैं तथा एक-दूसरे से मिलती नहीं हैं। जैसे – ताड़।

(b) अभिसारी (Convergent):
इसमें शिराएँ वृतान्त से निकलकर समान्तर रूप से बढ़कर फलक के अग्र भाग पर एक-दूसरे से मिल जाती हैं, जैसे-धान, बाँस, जलकुम्भी।
अपवाद (Exceptions) – निम्नलिखित पौधे अपने स्वभाव के विपरीत शिरा विन्यास का प्रदर्शन करते हैं –
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  • स्माइलैक्स एवं डायोस्कोरिया एकबीजपत्री होने के बाद भी जालिकावत् शिरा विन्यास का प्रदर्शन करते हैं।
  • कैलोफाइलम, द्विबीजपत्री होने के बाद भी समानान्तर शिरा विन्यास का प्रदर्शन करता है।

प्रश्न 7.
पुष्पदल विन्यास से आप क्या समझते हैं? पुष्पों में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के पुष्पदल विन्यास का सचित्र वर्णन कीजिए। .
उत्तर:
पुष्पदल विन्यास (Aestivation) – पुष्प की कली अवस्था में बाह्यदलों, दलों अथवा परिदलों के आपसी सम्बन्ध को पुष्पदल विन्यास कहते हैं। पुष्पदलों में निम्नलिखित विन्यास पाये जाते हैं –

(1) कोरस्पर्शी (Valvate):
इस पुष्पदल विन्यास में पुष्पदल के किनारे या तो एक दूसरे के पास-पास स्थित होते हैं या एक-दूसरे को स्पर्श करते रहते हैं लेकिन ये कभी भी एक-दूसरे को ढकते नहीं हैं। जैसे-मदार, धतूरा।
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(2) व्यावर्तित (Twisted):
इस पुष्पदल विन्यास में पुष्पदल का एक किनारा एक पुष्पदल से ढका रहता है तथा इसका दूसरा किनारा दूसरे पुष्पदल के किनारे को ढंकता है, जैसे- गुड़हल एवं कपास।

(3) कोरछादी (Imbricate):
इस विन्यास में एक पुष्पदल के दोनों किनारे पड़ोसी पुष्पदलों के दोनों किनारों से ढंके रहते हैं। इसी प्रकार दूसरा पुष्पदल अपने पड़ोसी पुष्पदल के किनारे को स्वयं ढकता है। शेष पुष्पदलों का एक किनारा समीपवर्ती पुष्पदल से ढंका रहता है जबकि दूसरा किनारा ऊपर रहता है। जैसे-सेव, गुलमोहर आदि।

(4) पंचक (Quincuncial):
इस विन्यास में पश्च पुष्पदल के दोनों किनारे पार्श्व पश्चदल के ऊपर एवं पार्श्व पुष्पदलों के किनारे समीपस्थ पुष्पदलों के किनारों को ढंके रहते हैं। शेष दलों के किनारों के बीच व्यावर्तित विन्यास पाया जाता है। दूसरे शब्दों में इस विन्यास में दो पुष्पदल पूर्णतः अन्य दो पुष्पदलों द्वारा ढंके तथा एक पुष्पदल व्यावर्तित विन्यास में होता है, जैसे- लौकी, अमरूद।

(5) ध्वजक (Vaxillary):
इस विन्यास में ध्वजक नामक एक बड़ा पुष्पदल पाया जाता है जिसके दोनों किनारे पार्श्व पुष्पदलों के दोनों किनारों को ढंके रहते हैं। शेष दो पुष्पदल आपस में जुड़े रहते हैं जबकि इनके स्वतन्त्र किनारे पार्श्व दलों के किनारों से ढंके रहते हैं।

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प्रश्न 8.
अंकुरण किसे कहते हैं ? यह कितने प्रकार का होता है ? संक्षेप में समझाइये।
उत्तर:
अंकुरण (Germination):
बीज के अन्दर भ्रूण सुप्तावस्था में पड़ा रहता है, लेकिन अनुकूल परिस्थितियों के आने पर यह सुसुप्तावस्था त्यागकर सक्रिय अवस्था में आता है तथा विकसित होकर एक शिशु पादप बनता है। इस क्रिया को अंकुरण या परिवर्धन कहते हैं। पौधों में दो प्रकार का अंकुरण पाया जाता है-

(i) अधोभूमिक अंकुरण (Hypogeal germination):
वह अंकुरण है जिसमें अंकुरण के बाद बीजपत्र भूमि के ऊपर नहीं आते हैं। इस अंकुरण में भ्रूण के अक्ष का मूलांकुर पहले विकसित होकर जड़ तथा बाद में प्रांकुर विकसित होकर प्ररोह बना देता है और बीज अपने स्थान पर ही रह जाता है। जैसे-चना, मटर, मक्का, आम, कटहल, धान, गेहूँ, नारियल, खजूर आदि का अंकुरण।
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(ii) उपरिभूमिक अंकुरण (Epigeal germination):
वह अंकुरण है जिसमें अंकुरण के बाद बीजपत्र भूमि के ऊपर आकर पत्ती का रूप धारण कर लेता है और प्रकाश-संश्लेषण का Leaves कार्य करता है तथा कुछ दिनों बाद असली पत्तियों के निर्माण के बाद सूखकर गिर जाते हैं। वास्तव में इस Epicotyle अंकुरण में मूलांकुर के बनने के बाद हाइपोकोटाइल बढ़कर एक चाप के रूप Plumule में भूमि के ऊपर निकल आता है और इसके साथ ही बीजपत्र तथा भ्रूणपोष भी बाहर आ जाते हैं।

कुछ समय बाद Kadicle चाप के रूप में निकला हाइपोकोटाइल (बीजपत्राधार) सीधा खड़ा हो जाता है और भ्रूणपोष से बीजपत्रों में भोजन एकत्र हो जाता है। इसी के साथ बीजपत्र भी हरा हो जाता है, लेकिन कुछ समय बाद सूखकर झड़ जाता है। अंकुरण के समय अनुकूल परिस्थितियों में बीज बीजाण्डद्वार से आर्द्रता को सोखकर फूल जाता है। आर्द्र बीज में से मूलांकुर बीजावरण को भेद कर बाहर आ जाता है और भूमि की ओर वृद्धि करके मूलतन्त्र बनाता है। इसके बाद प्रांकुर वृद्धि करके प्ररोह तन्त्र बना देता है।
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प्रश्न 9.
चने के बीज की संरचना को चित्र सहित समझाइये।
उत्तर:
चने का बीज (Seed of gram)- यह एक भूरे या सफेद या गुलाबी रंग का द्विबीजपत्री अभ्रूणपोषी बीज है जिसके चारों तरफ बीजचोल या बीजावरण (Seed coat) पाया जाता है। भीगे बीज के छिलके को हटाकर देखने पर यह बीजचोल दो स्तरों का बना दिखाई देता है। बाहरी मोटे तथा भूरे आवरण की बाह्य आवरण (Testa) कहते हैं। चने के बीज का एक सिरा नुकीला होता है, नुकीले सिरे पर एक गड्ढा पाया जाता है जिसके द्वारा बीज एक तन्तु द्वारा फल से जुड़ा होता है, इस गड्ढे को नाभिका (Hilum) कहते हैं।

नाभिका के बीच में एक छोटा सा छिद्र पाया जाता है जिसे बीजाण्डद्वार (Micropyle) कहते हैं। भीगे बीज को दबाने से यहीं से पानी निकलता है। नाभिका के ऊपर बीजचोल पर एक पतली धारी पायी जाती है जिसे सन्धि रेखा (Raphe) कहते हैं। यह रेखा बीज को दो भागों में बाँटती है। बीजचोल के हटाने पर बीज में जो भाग दिखाई देता है उसे भ्रूण कहते है। इसके भ्रूण में निम्न भाग पाये जाते हैं –

1. बीजपत्र (Cotyledon):
बीजों को खोलने के बाद दो मोटी, चपटी रचनाएँ दिखाई देती हैं, जिन्हें बीजपत्र कहते हैं।

2. अक्ष (Axis):
दोनों बीजपत्रों के बीच एक छोटी सी संरचना अक्ष होती। है, जिससे दोनों बीजपत्र जुड़े होते हैं। वास्तव में दोनों बीजपत्र रूपान्तरित पत्तियाँ हैं और अक्ष पौधों का मुख्य भाग। अक्ष (C) का वह भाग जो बीजपत्रों के बीच दबा होता है प्रांकर (Plumule) कहलाता है। यह अंकुरण के बाद पौधे के प्ररोह का निर्माण करता है।

अग्र का दूसरा सिरा जो बीजपत्रों के बाहर स्थित होता है मूलांकुर (Radicle) कहलाता है और जड़ बनाता है। प्रांकुर के ठीक नीचे का भाग बीजपत्रोपरिक (Epicotyle) कहलाता है। अक्ष का वह भाग जो बीजपत्रों के ठीक नीचे या मूलांकुर के ठीक ऊपर स्थित होता है बीजपत्राधार (Hypocotyle) कहलाता है।
MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 5 पुष्पी पादपों की आकारिकी - 54

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 1 जीव जगत

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MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 1 जीव जगत

जीव जगत NCERT प्रश्नोत्तर

Sajeev Jivo Ko Kyon Vargikrit Kiya Gaya Hai प्रश्न 1.
जीवों को वर्गीकृत क्यों करते हैं ?
उत्तर:
जैव-वर्गीकरण का उद्देश्य बड़ी संख्या में ज्ञात पादपों और जन्तुओं को ऐसे वर्गों में व्यवस्थित करना है, कि उन्हें नाम प्रदान किया जा सके एवं अध्ययन में सरलता हो। जीवों को वर्गीकृत करने से निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. इसके कारण विश्व के विविध प्रकार, असंख्य जीवों के अध्ययन में सुविधा होती है।
  2. इसके कारण जन्तु पादपों के सम्बन्धों का पता चलता है।
  3. इसके कारण जीवों को पहचानने में सरलता होती है।
  4. जीवों की उत्पत्ति तथा दूसरे जीवों से सम्बन्ध का पता चलता है।
  5. इसके कारण जीवों के विकास के क्रम एवं प्रमाण का पता लगता है।

Sajeev Jivo Ko Kyon Vargikrit Kiya Jata Hai प्रश्न 2.
वर्गीकरण प्रणाली को बार-बार क्यों बदलते हैं ?
उत्तर:
वर्गीकरण प्रणाली को बार-बार बदलने का प्रमुख कारण जैव – विकास है। जीवों में सतत् चलने वाली विकास प्रक्रिया के कारण नई-नई विभिन्न प्रजातियों के पादप एवं जन्तु पहले से मौजूद जीव-विविधता (Bio – diversity) से जुड़ते जाते हैं। इन नवीन जीवों को पहचानकर वर्गीकरण प्रणाली से संबद्ध किया जाता है। विकास के कारण पादप एवं जन्तुओं की जातियाँ (Species) बदलती रहती हैं। अत: इसके कारण प्रचलित वर्गीकरण प्रणाली को परिवर्तित कर जीवों को उनके क्रम में रखना पड़ता है।

जीव जगत के प्रश्न उत्तर प्रश्न 3.
जिन लोगों से प्रायः आप मिलते रहते हैं, आप उन्हें किस आधार पर वर्गीकृत करना पसंद करेंगे?(संकेत-ड्रेस, मातृभाषा, प्रदेश जिसमें वे रहते हैं, आर्थिक स्तर आदि)।
उत्तर:
सबसे पहले हम मातृभाषा के आधार पर अपने से मिलने वाले लोगों का वर्गीकरण करते हैं, उसके पश्चात् प्रदेश जहाँ वह रहता है तथा अन्त में उसकी वेशभूषा, धर्म, जाति, शारीरिक रंगरूप की बनावट, आर्थिक स्थिति के आधार पर हम वर्गीकृत करना पसंद करेंगे।

जीव जगत के प्रश्न उत्तर Pdf प्रश्न 4.
व्यष्टि तथा समष्टि की पहचान से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर:
व्यष्टि (Individual) तथा समष्टि (Population) की पहचान से वर्तमान के सभी जीवों के परस्पर संबंधों के बारे में जानकारी मिलती है। इसमें हमें समान प्रकार के जीवों तथा अन्य प्रकार के जीवों में समानता तथा विभिन्नता को पहचानने में मदद मिलती है। उदाहरण-आलू की दो विभिन्न जातियाँ (Species) हैं –

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Sajeev Jivo Ko Kyon Vargikrit Kiya Gaya प्रश्न 5.
आम का वैज्ञानिक नाम निम्नलिखित है-इसमें से कौन-सा सही है? मैगिफेरा इंडिका (Mangifera indica) या मैंगिफेरा इंडिका (Mangifera indica)
उत्तर:
आम के वैज्ञानिक नाम को लिखने की सही विधि है-मैगिफेरा इंडिका (Mangifera indica)।

जीवों को वर्गीकृत क्यों करते हैं क्लास 11 प्रश्न 6.
टैक्सॉन की परिभाषा दीजिए। विभिन्न पदानुक्रम स्तर पर टैक्सा के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
टैक्सॉन (Taxon) जीवों का एक समूह है जो कि किसी भी स्तर की वर्गिकी पदानुक्रम (Hierarchical classification) में पाया जाता है। टैक्सॉन मुख्यत: जीवों के समान लक्षणों पर आधारित होता है।

उदाहरण:
कीट, संघ ऑर्थोपोडा के एक वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। सभी कीटों में एक समान लक्षण तीन जोड़ी युग्मित उपांग पाये जाते हैं। टैक्सा के प्रमुख उदाहरण हैं – जगत, संघ, वर्ग, गण, कुल, जाति एवं वंश। ये सभी टैक्सा (संवर्ग) मिलकर वर्गिकी पदानुक्रम बनाते हैं।

उदाहरण – मनुष्य का टैक्सा (संवर्ग) है –

  1. संघ – कॉर्डेटा
  2. वर्ग – स्तनधारी
  3. गण – प्राइमेट्स
  4. कुल – होमिनिडी
  5. वंश – होमो
  6. जाति – सैपियन्स।

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Sajeev Jio Ko Kyon Vargikrit Kiya Gaya Hai प्रश्न 7.
क्या आप वर्गिकी संवर्ग का सही क्रम पहचान सकते हैं –
(अ) जाति (स्पीशीज) → गण ( ऑर्डर) → संघ (फाइलम) → जगत (किंगडम)
(ब) वंश (जीनस) → जाति → गण → जगत
(स) जाति → वंश → गण → संघ।
उत्तर:
वर्गिकी संवर्ग (Taxonomical categories) का सही क्रम है –
(स) जाति → वंश → गण → संघ।

वर्गीकरण प्रणाली को बार-बार क्यों बदलते हैं प्रश्न 8.
जाति शब्द के सभी मानवीय वर्तमान कालिक अर्थों को एकत्र कीजिए। क्या आप अपने शिक्षक से उच्च कोटि के पौधों तथा प्राणियों तथा बैक्टीरिया की स्पीशीज का अर्थ जानने के लिए चर्चा कर सकते हैं ?
उत्तर:
जाति वर्गीकरण की सबसे छोटी इकाई है। मेयर (1942) के अनुसार, “जाति आपस में संकरण या संयोग करने वाले एक समान जीवों का समूह है।” आधुनिक विचारधारा के अनुसार, निम्नलिखित लक्षण वाले जीवों को जाति (Species) कहते हैं –

  1. इनके सदस्यों में अन्तरा प्रजनन की क्षमता पायी जाती है।
  2. इस समूह या आबादी में एक समान जीन पूल (जीन समूह) पाया जाता है।
  3. प्रत्येक जाति में वातावरण के साथ अनुकूलन एवं प्राकृतिक चयन चलता रहता है।
  4. प्रत्येक जाति में जैव विकास के द्वारा नयी जाति पैदा करने की क्षमता पायी जाती है।
  5. प्रत्येक जाति में पृथक्करण के कुछ ऐसे कारक पाये जाते हैं, जो निकट सम्बन्धी जाति के सदस्यों से प्रजनन करने में रुकावट पैदा करते हैं।

मैंगिफेरा इंडिका (आम), सोलेनम ट्यूबरोसम (आलू), तथा पैंथेरा लियो (शेर) उच्चकोटि के पौधे तथा प्राणी के उदाहरण हैं। इन सभी नामों में ” इंडिका, ट्यूबरोसम'” तथा “लियों” जाति संकेत के पद हैं। जबकि पहले शब्द ” मैंगिफेरा’, “सोलेनम” तथा ” पैंथेरा” वंश के नाम हैं और यह टैक्सा अथवा संवर्ग का भी निरुपण करते हैं। प्रत्येक वंश में एक अथवा एक से अधिक जाति के संकेत पद हो सकते हैं जो विभिन्न जीवों जिनमें आकारिकी गुण समान हों को प्रदर्शित करते हैं। उदाहरणार्थ “पैंथेरा” में एक अन्य जाति संकेत पद है जिसे टिग्रिस कहते हैं। सोलेनेम’ वंश में नाइग्रम, मैलान्जेना भी आते हैं। लेकिन बैक्टीरिया को उनके आकार के आधार पर चार वर्ग समूहों में रखा जाता है-गोलाकार, छड़नुमा, कॉमा एवं तर्कुरूपी। अतः इस प्रकार का अर्थ उच्च जीवों के लिए है, बैक्टीरिया के लिए अलग-अलग है।

Sajeev Jivon Ko Kyon Vargikrit Kiya Gaya Hai प्रश्न 9.
निम्नलिखित शब्दों को समझाइए तथा परिभाषित कीजिए –

  1. संघ
  2. वर्ग
  3. कुल
  4. गण
  5. वंश।

उत्तर:
वर्गीकरण की पदानुक्रमी स्तरें:
जीवों का वर्गीकरण करते समय अध्ययन की सुविधा के लिए इन्हें कई छोटे-बड़े समूहों में रखा गया है, जिन्हें संवर्ग या श्रेणी (Category) कहा जाता है। इन संवर्गों का वर्गीकरण में एक निश्चित स्थान होता है और इन्हें इनके गुणों के आधार पर बढ़ते हुए क्रम में रखा जाता है। इसी क्रम को वर्गीकरण का पदानुक्रम (Hierarchy) कहते हैं। इस पदानुक्रम की सबसे छोटी इकाई जाति तथा बड़ी इकाई जगत है। वर्गीकरण में संवर्गों का क्रम निम्नानुसार होता है –

1. जाति:
यह वर्गीकरण की मूल तथा बहुत छोटी इकाई है। वर्गीकरण की इस इकाई में आपस में संकरण करने वाले जीवों के समूह को रखा जाता है जैसे-सभी प्रकार के मानवों को होमो सैपियन्स में रखा जाता है, जबकि वे बाह्य आकार में विविधता प्रदर्शित करते हैं।

2. वंश:
कुछ एक समान गुणों को प्रदर्शित करने वाली जातियों को एक वंश में रखा जाता है, जैसेशेर, बाघ, चीता को एक वंश पैंथेरा में रखा गया है।

3. कुल:
कुछ एक समान गुणों वाले वंशों को एक कुल में रखते हैं। जैसे-सभी दालों का प्रतिनिधित्व करने वाले पादपों को एक कुल पैपीलियोनेसी में रखा जाता है।

4. गण:
एक या कई मिलते-जुलते गुणों वाले कुलों को एक गण में रखा जाता है। जैसे-जन्तुओं के फेलिडी तथा कैनिडी कुल को कार्निवोरा गण में रखा जाता है।

5. वर्ग:
कुछ सर्वश्रेष्ठ गुणों वाले गणों को एक वर्ग में रखा जाता है।

6. संघ:
कुछ सर्वनिष्ठ गुणों वाले वर्गों को एक संघ में रखा जाता है। जैसे-नोटोकॉड, नर्वकॉर्ड तथा गिल की उपस्थिति के कारण मत्स्य, ऐम्फिबिया, सरीसृप, पक्षी एवं स्तनी वर्ग को संघ कॉर्डेटा में रखा जाता है।

7. जगत:
कई सर्वनिष्ठ गुणों वाले संघों को एक जगत में रखा जाता है। उपर्युक्त वर्णित संवर्ग मुख्य संवर्ग हैं, इन्हें आवश्यकतानुसार कई छोटे संवर्गों में भी बाँटा जाता है।

जीवों को वर्गीकृत क्यों करते हैं प्रश्न 10.
जीव के वर्गीकरण तथा पहचान में कुंजी किस प्रकार सहायक है ?
उत्तर:
पादपों एवं जन्तुओं को पहचानने की रूपरेखा कुंजी (Key) है। वर्गिकी की कुंजियाँ विपरीत लक्षणों पर आधारित होती हैं। कुल, वंश और जाति जैसी वर्गिकी की प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग अलग वर्गिक की कुंजियों की आवश्यकता होती है। यह अज्ञात जीवों की पहचान के लिए अधिक उपयोगी होती है। कुंजियाँ दो प्रकार की होती हैं –

  1. दोहरे प्रलेखधारी अथवा द्विशाखित (Yolked)
  2. कोष्ठधारी कुंजी (Bracketed key)।

1. द्विशाखित कुंजी:
यह एक अन्य साधन सामग्री है, जिसका प्रयोग समानताओं और असमानताओं पर आधारित होकर पौधों तथा प्राणियों की पहचान में किया जाता है।

2. कोष्ठधारी कुंजी:
यह कुंजी विपर्यायी लक्षणों (Contrasting:characters), जो प्रायः युग्मों के आधार पर होती है। कुंजी दो विपरीत विकल्पों को चुनने को दिखाती है। इसके परिणामस्वरूप एक को मान्यता तथा दूसरे को अमान्य किया जाता है।

कुंजी में प्रत्येक कथन मार्गदर्शन का कार्य करता है। पहचानने के लिए प्रत्येक वर्गिकी संवर्ग जैसे-कुल, वंश, तथा जाति के लिए अलग-अलग वर्गिकी कुंजी की आवश्यकता होती है।

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Jeev Jagat प्रश्न 11.
पौधों तथा प्राणियों के उचित उदाहरण देते हुए वर्गिकी पदानुक्रम का चित्रण कीजिए।
उत्तर:
वर्गीकरण (Classification) एकल सोपान प्रक्रम नहीं है बल्कि इसमें पदानुक्रम (Hierarchy) सोपान होते हैं जिसमें प्रत्येक सोपान पद (Rank) अथवा संवर्ग (Category) को प्रदर्शित करता है। चूंकि संवर्ग समस्त वर्गिकी व्यवस्था है इसलिए इसे वर्गीकरण संवर्ग (Taxonomic categories) कहते हैं और सभी संवर्ग मिलकर वर्गिकी पदानुक्रम (Taxonomic hierarchy) बनाते हैं। प्रत्येक संवर्ग वर्गीकरण की एक इकाई को प्रदर्शित करता है, इसे प्रायः वर्गक या टैक्सॉन (Taxon) कहते हैं।

सभी ज्ञात जीवों के वर्गीकीय अध्ययन से सामान्य संवर्ग जैसे-जगत (Kingdom), संघ (Phylum), वर्ग (Class), गण (Order), कुल (Family), वंश (Genus) तथा जाति (Species) का विकास हुआ। पौधे तथा प्राणियों, दोनों में जाति (Species) सबसे निचले संवर्ग में आती है। किसी भी जीव को विभिन्न संवर्गों में रखने के लिए उनके वर्ग के गुणों का ज्ञान होना आवश्यक है। जाति से लेकर जगत तक विभिन्न वर्गिकी संवर्ग को आरोही क्रम में निम्नानुसार दर्शाया जा सकता है –

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उपरोक्त पदानुक्रम अनुसार, जैसे – जैसे हम जाति से जगत की ओर ऊपर जाते हैं वैसे ही समान गुणों में कमी आती जाती है। सबसे नीचे जो टैक्सा होगा, उसके सदस्यों में सबसे अधिक समान गुण होंगे।

तालिका – वर्गिकी संवर्ग सहित कुछ जीव
(Organisms with their Taxanomic Categories)
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जीव जगत अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

जीव जगत वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Jivo Ko Vargikrit Kyon Karte Hain प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –

1. सजीव जब अपने शत्रुओं से बचने के लिए स्वयं को उस परिस्थिति के अनुसार ढाल लेता है, उसे कहते हैं –
(a) अनुकूलन
(b) मिमिक्री
(c) हीमोलॉजी
(d) एनोलॉजी।
उत्तर:
(a) अनुकूलन

2. जीवों में ऊर्जा प्रवाह तथा ऊर्जा के रूपान्तरण में किस नियम का पालन होता है –
(a) सीमित कारक का नियम
(b) ऊष्मागतिक का नियम
(c) लिबिंग्स के न्यूनतता का नियम
(d) बायोजेनिक के नियम।
उत्तर:
(b) ऊष्मागतिक का नियम

3. बाहरी वातावरण में बदलाव के बाद भी जीवों में उचित आंतरिक अवस्था को बनाए रखना कहलाता है –
(a) एन्थैल्पी
(b) साम्यावस्था
(c) एन्ट्रॉपी
(d) स्थायी अवस्था।
उत्तर:
(b) साम्यावस्था

4. ग्लाइकोजन बहुलक है –
(a) ग्लैक्टोज
(b) ग्लूकोज
(c) फ्रक्टोज
(d) सुक्रोज।
उत्तर:
(b) ग्लूकोज

5. एक ऑर्किड का पुष्य किसी कीट के मादा के समान दिखाई देता है ताकि उसमें परागण क्रिया आसानी से हो सके, यह घटना कहलाती है-
(a) मिमिक्रीम
(b) स्यूडोकॉपुलेशन
(c) स्यूडोपॉलीनेशन
(d) स्यूडोकार्पोनोकाी।
उत्तर:
(a) मिमिक्रीम

6. जीवन की सबसे छोटी इकाई है –
(a) DNA
(b)RNA
(c) कोशिका
(d) प्रोटीन।
उत्तर:
(a) DNA

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7. निम्न में से किसे होमियोस्टेसिस या साम्यावस्था कहते हैं –
(a) वातावरण के साथ बदलाव लाना
(b) नियंत्रण में बदलाव
(c) बदलाव का प्रतिरोध करना
(d) पादप एवं जन्तु रस का होम्योपैथी उपयोग।
उत्तर:
(b) नियंत्रण में बदलाव

8. शरीर का तापक्रम किसके द्वारा नियंत्रित होता है –
(a) फेफड़ा, पेशी तथा त्वचा
(b) केवल त्वचा
(c) परिसंचरण तंत्र
(d) कंकाल तंत्र।
उत्तर:
(a) फेफड़ा, पेशी तथा त्वचा

9. पसीना बहने का उद्देश्य होता है –
(a) त्वचा पर उपस्थित जीवाणुओं को मारना
(b) शरीर के ताप का नियमन
(c) अधिक लवण का निष्कासन
(d) अधिक जल का निष्कासन।
उत्तर:
(b) शरीर के ताप का नियमन

10. आयोडीन किसका घटक होता है –
(a) नाइट्रेट रिडक्टेज
(b) थायरॉक्सीन हॉर्मोन्स
(c) TSH हॉर्मोन्स
(d) नाइट्रोजिनेज।
उत्तर:
(b) थायरॉक्सीन हॉर्मोन्स

11. जीवित कोशिकाओं के लिए कौन-सा सही है –
(a) पहले ऊर्जा का स्थानांतरण तब ऊर्जा का रूपान्तरण
(b) पहले ऊर्जा का रूपान्तरण तब स्थानांतरण
(c) दोनों का साथ-साथ होना
(d) दोनों का लगातार होना।
उत्तर:
(d) दोनों का लगातार होना।

12. जीवों के सामान्य लक्षण होते हैं –
(a) कोशिकीय संरचना
(b) उपापचय
(c) श्वसन
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

13. जीवों की आधारभूत आवश्यकता होती है –
(a) विकास
(b) क्रम
(c) ऊर्जा
(d) वृद्धि।
उत्तर:
(c) ऊर्जा

14. निम्न में से स्टोरेज पॉलीसैकेराइड है –
(a) सुक्रोज
(b) सेल्युलोज
(c) स्टार्च
(d) स्टार्च एवं ग्लाइकोजन।
उत्तर:
(d) स्टार्च एवं ग्लाइकोजन।

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15. जहाँ पर पौधों के नमूने एकत्रित करके रखे जाते हैं, उस स्थान को कहा जाता है –
(a) हरियम
(b) संग्रहालय
(c) वनस्पति उद्यान
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) हरियम

16. जिस स्थान पर जीवित पौधों का संग्रहण किया जाता है, उसे कहा जाता है –
(a) वनस्पति उद्यान
(b) संग्रहालय
(c) हर्बेरियम
(d) जूलॉजिकल पार्क।
उत्तर:
(a) वनस्पति उद्यान

17. जिन स्थानों पर जीवित प्राणी रखे जाते हैं, उसे कहा जाता है –
(a) संग्रहालय
(b) जूलॉजिकल पार्क
(c) वनस्पति उद्यान
(d) हर्बेरियम।
उत्तर:
(b) जूलॉजिकल पार्क

18. जीवधारियों को वैज्ञानिक नाम दिये जाते हैं, क्योंकि –
(a) प्रत्येक तकनीकी ज्ञान की शाखा की अपनी शब्दावली होती है
(b) वैज्ञानिक लोगों पर अपना अमिट प्रभाव डालना चाहते थे
(c) वैज्ञानिक नहीं चाहते थे कि आम आदमी जीव विज्ञान पढ़ सके
(d) बिना किसी संशय के वैज्ञानिकों में विचार-विनिमय हो सके।
उत्तर:
(d) बिना किसी संशय के वैज्ञानिकों में विचार-विनिमय हो सके।

वर्गीकरण प्रणाली को बार बार क्यों बदलते हैं प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. त्वचा का धूप में काला होना ………….. अनुकूलन है।
  2. जैव संगठन का सूक्ष्मतम जैविक स्तर …………. है।
  3. जीवन का भौतिक आधार …………… है।
  4. समष्टि के कुल जीन समूह को …………… कहते हैं।
  5. वह तंत्र जिसमें पदार्थों का विनिमय वातावरणीय परिवेश से नहीं होता ………….. कहलाता है।
  6. ………….. जीवधारियों के शरीर में होने वाली समस्त क्रियाओं के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराता है।
  7. जीवधारियों में वातावरण के अनुसार परिवर्तित होने की क्रिया …………… कहलाती है।
  8. ………….. पदार्थ की सबसे छोटी इकाई है, जो सबसे छोटी जैविक इकाई का निर्माण करता है।
  9. जीवों के शरीर में पाये जाने वाली समस्त क्रियाओं को सामूहिक रूप से …………… कहते हैं।
  10. जीवों में पाये जाने वाले स्थिर अवस्था को …………… कहते हैं।

उत्तर:

  1. अल्पकालिक
  2. आण्विक स्तर
  3. जीवद्रव्य
  4. जीन पूल
  5. बंद तंत्र
  6. ATP
  7. अनुकूलन
  8. परमाण
  9. उपापचय
  10. साम्यावस्था।

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Jeev Jagat Question Answer प्रश्न 3.
एक शब्द में उत्तर दीजिए –

  1. ऊतकों व अंग तंत्रों की कार्यक्षमता में बढ़ती उम्र के कारण होने वाले ह्रास को क्या कहते हैं ?
  2. जैव-संगठन के उच्चतम स्तर का नाम लिखिए।
  3. जीवों में आनुवंशिक अणु किसे कहते हैं ?
  4. वातावरण के परिवर्तन को जीवों द्वारा अनुभव करने की क्षमता को क्या कहते हैं ?
  5. जैव-मण्डल के अपघटक जीवों का नाम दीजिए।

उत्तर:

  1. वयता या जरण
  2. जीव जगत (समष्टि)
  3. D.N.A.
  4. संवेदनशीलता
  5. विषाणु, जीवाणु, कवक (सूक्ष्मजीव)।

Vargikaran Pranali Ko Bar Bar Kyon Badalte Hain प्रश्न 4.
उचित संबंध जोडिए –

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 1 जीव जगत -1

उत्तर:

  1. (c) जनन क्रिया न होने से
  2. (d) वृद्धि
  3. (a) स्टार्च व मंड के रूप में संग्रहण
  4. (b) जल

MP Board Class 11th Biology Solutions Chapter 1 जीव जगत -2
उत्तर:

  1. (c) वंश
  2. (e) कुल
  3. (d) गण
  4. (a) जगत
  5. (b) संघ

जीवों को वर्गीकृत क्यों करते प्रश्न 5.
सत्य / असत्य बताइये –

  1. पौधे तथा प्राणियों दोनों में जाति (Species) सबसे निचले संवर्ग में आती है।
  2. जीवों के वर्ग जिसमें मौलिक समानता होती है, उसे जाति कहते हैं।
  3. मानव का वैज्ञानिक नाम “मैंगिफेरा इंडिका’ है।
  4. वंश (Genus) समीपस्थ संबंधित जातियों का समूह है।
  5. कुल (Family) के वर्गीकरण का आधार पौधों के कायिक तथा जनन गुण हैं।
  6. वर्ग (Class) संवर्ग में प्राइमेट गण जिसमें बंदर, गोरिल्ला तथा गिब्बन आते हैं।
  7. मानव का वर्ग इंसेक्टा है।
  8. कुंजी में प्रत्येक कथन मार्गदर्शन का कार्य करता है। पहचानने के लिए प्रत्येक वर्गिकी संवर्ग जैसे – कुल, वंश, तथा जाति के लिए अलग, वर्गिकी कुंजी की आवश्यकता होती है।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. सत्य
  6. सत्य
  7. असत्य
  8. सत्य।

जीव जगत अति लघु उत्तरीय प्रश्न

Sajeev Jio Ko Kyon Vargikrit Kiya Jata Hai प्रश्न 1.
वर्गीकरण विज्ञान का जनक किसे कहा जाता है?
उत्तर:
कैरोलस लिनीयस (1707 – 1778) को वर्गीकरण विज्ञान का जनक कहा जाता है।

1. जीवों को वर्गीकृत क्यों करते हैं? प्रश्न 2.
स्वयंपोषी से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
वे जीव, जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, उन्हें स्वयंपोषी जीव कहते हैं। उदाहरण – समस्त हरे पौधे।

अध्याय 1 जीव जगत प्रश्न 3.
पाँच जगत वर्गीकरण के प्रणेता कौन हैं ?
उत्तर:
पाँच जगत वर्गीकरण के प्रणेता आर. एच. ह्विटैकर (1969) हैं।

कक्षा 11 वीं जीव विज्ञान अध्याय 1 Question Answer प्रश्न 4.
जाति किसे कहते हैं ?
उत्तर:
मेयर (1942) के अनुसार, “आपस में संकरण करने वाले जीवों के समूह को जाति (Species) कहते हैं।”

जीव जगत प्रश्न 5.
वर्गीकरण की प्राकृतिक पद्धति क्या है ?
उत्तर:
वर्गीकरण वह पद्धति है, जिसमें गुणों के एक विस्तृत समूह को वर्गीकरण का आधार बनाया जाता है।

Sajeev Jio Ko Kyon Vargikrit Kiya Gaya प्रश्न 6.
वर्गीकरण की कृत्रिम पद्धति क्या है ?
उत्तर:
वर्गीकरण की वह पद्धति जिसमें एक या कुछ गुणों को वर्गीकरण का आधार बनाया जाता है कृत्रिम पद्धति कहलाती है। यह वर्गीकरण की अप्राकृतिक पद्धति है।

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Jivo Ko Vargikrat Kyo Karte Hai प्रश्न 7.
लिनीयस द्वारा लिखित दो पुस्तकों तथा उनके दो योगदानों को लिखिए।
उत्तर:
लिनीयस द्वारा लिखित पुस्तकें –

  • जेनेरा प्लाण्टेरम
  • सिस्टेमा नैचुरी।

लिनीयस के दो प्रमुख योगदा –

  • द्वि – जगत वर्गीकरण को प्रस्तुत करना।
  • जीवों के लिए द्वि – नामकरण पद्धति को प्रस्तुत करना।

Sajeev Jivon Ko Kyon Vargikrit Kiya Jata Hai प्रश्न 8.
वर्गक एवं संवर्ग को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
वर्गक (Texa):
जीवों के वर्गीकरण में प्रयुक्त विभिन्न समूहों को वर्गक कहते हैं, चाहे वर्गीकरण में इनका स्थान कुछ भी हो, जैसे-शैवाल, कीट, मछली आदि।

संवर्ग या श्रेणी (Category):
वर्गीकरण में प्रयुक्त समूहों की विभिन्न स्तरों को संवर्ग या श्रेणी या वर्गीकरण की इकाई कहते हैं। वर्गीकरण का सबसे छोटा संवर्ग जाति तथा बड़ा संवर्ग जगत है।

जीव जगत लघु उत्तरीय प्रश्न

Sajeev Ko Kyon Vargikrit Kiya Jata Hai प्रश्न 1.
निम्नलिखित जीवों के वैज्ञानिक नाम लिखिए –

  1. प्याज
  2.  मनुष्य
  3. हाथी
  4. फीताकृमि
  5. मेढक
  6. गेहूँ
  7. चावल
  8. सरसों
  9. मटर
  10. आम।

उत्तर:
सामान्य नाम – वैज्ञानिक नाम

  1. प्याज – एलियम सेपा
  2. मनुष्य – होमो सैपियन्स
  3. हाथी – एलिफस इन्डीकस
  4. फीताकृमि – टीनिया सोलियम
  5. मेढक – राना टिग्रिना
  6. गेहूँ – ट्रिटिकम एस्टीवम
  7. चावल – ओराइजा सटाइवा
  8. सरसों – ब्रेसिका कम्पेस्ट्रीस
  9. मटर – पाइसम सटाइवम
  10. ‘आम – मैंगिफेरा इंडिका।

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प्रश्न 2.
द्विपद नामकरण पद्धति से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
द्विपद नामकरण पद्धति जीवों के नामकरण की एक ऐसी पद्धति है, जिसमें प्रत्येक जीव का नाम दो शब्दों का होता है। इसका प्रथम शब्द जीव के वंश तथा दूसरा शब्द उसकी जाति को व्यक्त करता है। इस पद्धति का आविष्कार कैरोलस लिनीयस ने किया था। इसमें नाम के अक्षर इटैलिक में छापे जाते हैं या लिखते समय इनके नीचे रेखाएँ खींचते हैं।

प्रथम शब्द का पहला अक्षर कैपिटल लेटर तथा शेष सभी छोटे अक्षरों में ही होते हैं। दूसरे शब्द के सभी अक्षर छोटे अक्षरों में होते हैं। जैसे-मेढक का इस पद्धति में नाम Rana tigrina होता है। इसमें राना वंश तथा टिग्रिनाजाति को प्रदर्शित कर रहा है। यह नाम रखने का अधिकार उस जीव के आविष्कारकर्ता को होता है।

दो जीवों के वैज्ञानिक नाम –
सामान्य नाम – वैज्ञानिक नाम

  1. मेढक – राना टिग्रिना
  2. मनुष्य – होमो सेपियन्स।

प्रश्न 3.
जातिवृत्तीय रेखा को समझाइए।
उत्तर:
किसी एक जाति के विकासात्मक इतिहास को जातिवृत्ति कहते हैं। जातिवृत्ति की विभिन्न जातियों के क्रम को जातिवृत्ति रेखा (Phylogenic – line) कहते हैं। जातिवृत्तीय रेखा किसी जाति विकास के क्रम को प्रदर्शित करती है। जिस प्रकार विकसित जीवों का जीवन एक कोशिका से शुरू होता है, धीरे – धीरे इस कोशिका में परिवर्तन होता रहता है और कुछ समय बाद इसी एक कोशिका से विशालकाय जीव बन जाता है।

ठीक इसी तरहं इस पृथ्वी पर सबसे पहले एककोशिकीय जीव बना। इसके बाद वातावरण के अनुसार, इसमें परिवर्तन होता गया और विविध प्रकार की जातियाँ बनीं। इस प्रकार जातिवृत्तीय रेखा में सबसे पहले मोनेरा जगत के जीव बनें, जिन्होंने विकसित होकर प्रोटिस्टा जगत के जीव बनाए। प्रोटिस्टा जगत के जीवों ने कई दिशाओं में विकसित होकर पादप कवक एवं जन्तु जगतों का निर्माण किया।

जीव जगत दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वानस्पतिक उद्यान को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
वानस्पतिक उद्यान मानव द्वारा स्थापित प्राकृतिक स्थल होते हैं जहाँ पर पौधों को जीवित अवस्था में संरक्षित रखा जाता है। यहाँ पर पौधों के विभिन्न प्रजातियों का समुचित प्रबंध किया जाता है। एक आधुनिक वानस्पतिक उद्योग में निम्न प्रकार के पौधे लगाये जाते हैं –

  1. कृषि में उपयोगी पौधे की विभिन्न प्रजातियाँ
  2. औषधीय एवं अन्य महत्व वाले पौधे
  3. विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में पाये जाने वाले पौधे
  4. धर्म ग्रंथों एवं साहित्यों में उल्लेखित पौधे।

वानस्पतिक उद्यान मूलतः जीवित पौधों का एक खुला संग्रह होता है जिससे हमें विभिन्न प्रकार के पौधों के बारे में मूलभूत जानकारियाँ प्राप्त होती हैं।

प्रमुख वानस्पतिक उद्यान:

  1. रॉयल बॉटनिकल गार्डन, किव (इंग्लैंड)
  2. इंडियन बॉटनिकल गार्डन, शिबपुर (कोलकाता)
  3. लॉयड बॉटनिकल गार्डन, दार्जिलिंग
  4. नेशनल बॉटनिकल गार्डन, लखनऊ
  5. वन अनुसंधान संस्थान, वानस्पतिक उद्यान, देहरादून।

MP Board Class 11th Biology Solutions

MP Board Class 11th Maths Solutions गणित

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MP Board Class 11th Maths Book Solutions in Hindi Medium

MP Board Class 11th Maths Chapter 1 समुच्चय

MP Board Class 11th Maths Chapter 2 संबंध एवं फलन

MP Board Class 11th Maths Chapter 3 त्रिकोणमितीय फलन

MP Board Class 11th Maths Chapter 4 गणितीय आगमन का सिद्धांत

MP Board Class 11th Maths Chapter 5 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण

MP Board Class 11th Maths Chapter 6 रैखिक असमिकाएँ

MP Board Class 11th Maths Chapter 7 क्रमचय और संचयं

MP Board Class 11th Maths Chapter 8 द्विपद प्रमेय

MP Board Class 11th Maths Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी

MP Board Class 11th Maths Chapter 10 सरल रेखाएँ

MP Board Class 11th Maths Chapter 11 शंकु परिच्छेद

MP Board Class 11th Maths Chapter 12 त्रिविमीय ज्यामिति का परिचय

MP Board Class 11th Maths Chapter 13 सीमा और अवकलज

MP Board Class 11th Maths Chapter 14 गणितीय विवेचन

MP Board Class 11th Maths Chapter 15 सांख्यिकी

MP Board Class 11th Maths Chapter 16 प्रायिकता

MP Board Class 11th Maths Book Solutions in English Medium

MP Board Class 11th Maths Chapter 1 Sets

MP Board Class 11th Maths Chapter 2 Relations and Functions

MP Board Class 11th Maths Chapter 3 Trigonometric Functions

MP Board Class 11th Maths Chapter 4 Principle of Mathematical Induction

MP Board Class 11th Maths Chapter 5 Complex Numbers and Quadratic Equations

MP Board Class 11th Maths Chapter 6 Linear Inequalities

MP Board Class 11th Maths Chapter 7 Permutations and Combinations

MP Board Class 11th Maths Chapter 8 Binomial Theorem

MP Board Class 11th Maths Chapter 9 Sequences and Series

MP Board Class 11th Maths Chapter 10 Straight Lines

MP Board Class 11th Maths Chapter 11 Conic Sections

MP Board Class 11th Maths Chapter 12 Introduction to three Dimensional Geometry

MP Board Class 11th Maths Chapter 13 Limits and Derivatives

MP Board Class 11th Maths Chapter 14 Mathematical Reasoning

MP Board Class 11th Maths Chapter 15 Statistics

MP Board Class 11th Maths Chapter 16 Probability

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MP Board Class 11th English Solutions A Voyage, The Spectrum

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MP Board Class 11th English Book Solutions

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A Voyage Textbook Special English Class 11th Solutions

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MP Board Class 11th English A Voyage Textbook (Fiction and Drama)

MP Board Class 11th Special English Reading Skills

MP Board Class 11th Special English Reading Unseen Passages

MP Board Class 11th Special English Writing Skills

MP Board Class 11th Special English Grammar

A Voyage Workbook Special English Class 11th Solutions

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MP Board Class 11th Special English Model Question Paper

The Spectrum Textbook General English Class 11th Solutions

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Objective Questions

Important Extracts from the Poems

MP Board Class 11th General English Reading Comprehension

MP Board Class 11th General English Reading Unseen Passages and Note Making

MP Board Class 11th General English Writing

MP Board Class 11th General English Grammar

MP Board Class 11th General English Model Question Paper

MP Board Class 11 Special English Syllabus & Marking Scheme

Time: 3 Hours
Maximum Marks: 100

Unit wise Weightage

S. No. Unit Topics Marks
1. Unit 1 Reading an Unseen Passage and a Poem 15
2. Unit 2 Text for detailed study 40
3. Unit 3 Drama 10
4. Unit 4 Fiction 10
5. Unit 5 Writing 15
6. Unit 6 Grammar 10
Total 100

1. Texts for study (30 Marks)
(a) Two passages followed by short answer type questions. (5+5 Marks)
(b) Two questions in about 75 words each. (6+6 Marks)
(c) Two short answer type questions to be answered in about 60 words each. (4+4 Marks)

2. Grammar and Phonology (10 Marks)
(a) Revision of functional grammar exercises prescribed in class 11 th to test basic grammatical concepts.
(b) Phonology (syllable division, word stress, phonemic transcription, intonation.) 18 Periods

3. Fiction (15 Marks)
(a) One out of two questions in about 150 words. (9 Marks) 54 Periods
(b) Two out of three questions to be answered in about 60 words. (6 Marks)

4. Drama (15 Marks)
(a) One out of two questions in about 150 words. (9 Marks)
(b) Two out of three short answer questions to be answered in about 60 words each. (6 Marks)

5. Reading an unseen passage and poem. (15 Marks)
(a) One literary or discursive passage of about 500-600 words followed by short questions. (10 Marks) 27 Periods
(b) A poem of about 15 lines followed by short questions. (5 Marks)

6. Writing (15 Marks)
(a) One essay (200-250 words ) – out of four or five topics (10 Marks)
(b) To write a shorter composition such as an article, report, a statement of purpose (100-125 words). (5 Marks)

Prescribed Books :-
1. Text Book – A Voyage
2. Work Book – A Voyage
Compiled by M.P. Rajya Shiksha Kendra and Published by M.P. Text Book Corporation.

MP Board Class 11 General English Syllabus & Marking Scheme

Time: 3 Hours
Maximum Marks: 100

Unit wise Weightage

S.No. Unit/Areas of Learning Marks
A. Reading Unseen Passages (Two) 25
B. Writing 20
C. Grammar 10
D. Text Book 45
Total (Max. Marks) 100

Section – A (25 Marks)
Reading Unseen Passages for Comprehension & Note-Making

Two unseen passages with a variety of questions including 6 marks for vocabulary such as word formation and inferring meaning. The total length of both the passages together should be around 350 words.
The passages could be any of the following two types :

  • Factual passages: e.g., instructions, descriptions, reports.
  • Discursive passages: involving opinion e.g., argumentative, persuasive.

Summary

Unseen Passages No.of Words Testing Areas Marks Allotted
(A-1)
15 marks
Around 200 Short answer type questions to test local, global and inferential comprehension 12
Vocabulary 03
(A-2)
10 marks
Around 150 Note-making in an appropriate format 07
Vocabulary 03

One of the passages should have about 200 words carrying 15 marks, the other passage should have about 150 words, carrying 10 marks.
The passage carrying 10 marks should be used for testing note-making for 07 marks and testing vocabulary for 03 marks; vocabulary for 03 marks may be tested in the other passage carrying 15 marks.

Section – B (20 Marks)
Writing

(B-1) A factual description of any event or incident e.g.. a report or a process based on verbal input provided (in about 40-50 words). (04 Marks)

(B-2) Composition based on a visual and/or verbal input (in about 80-100 words). The output may be descriptive or argumentative in nature such as an article for publication in a newspaper or a school magazine, a speech etc. (07 Marks)
or
An essay on day-to-day life topics in about 250 words.
After giving ample practice to students to write original compositions for two or three years the option of ‘Essay’ may be eliminated.

(B-3) Writing letters based on the given input. Letter types include

  • business or official letters (for making enquiries, registering complaints, asking for and – giving information, placing orders and sending replies);
  • letters to the editors (giving suggestions, opinions on an issue of public interest) or
  • apply for a job;
  • personal/informal letters. (4 + 5 = 09 Marks)

Section – C (10 Marks)
Grammar

Different grammatical structures in meaningful contexts will be tested. Item- types will include gap-filling, sentences re-ordering, dialogue completion and sentence transformation. The grammar syllabus will include the following areas:

  • Determiners
  • Tenses
  • Active and passive constructions
  • Clauses
  • Modals.

Section – D (45 Marks)
Textual Questions

Questions on the prescribed textbooks will test comprehension at different levels- literal, inferential and evaluative based on the following prescribed textbooks:
(D-1) (a) One out of two extracts based on poetry from the text to test comprehension and appreciation. (40-50 words) (04 Marks)
(b) Three short questions from the poetry section to test local and global comprehension of the text. (30-40 words) (09 Marks)

(D-2) Six short answer type questions on the lessons from the prescribed text. (30 words) (2 × 6 = 12 Marks)

(D-3) Two (out of three) long answer type questions based on the text to test global comprehension. (Expected word limit would be about 50-60 words each) (2 × 5 = 10 Marks)

(D-4) Objective questions based on Text Book. (1 × 10 = 10 Marks)

MP Board Class 11 Special English Blue Print of Question Paper

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MP Board Class 11 English Blue Print of Question Paper 3
MP Board Class 11 English Blue Print of Question Paper 4

MP Board Class 11 General English Blue Print of Question Paper

MP Board Class 11 English Blue Print of Question Paper 1
MP Board Class 11 English Blue Print of Question Paper 2

MP Board Class 11 Special English Format of Question Paper

MP Board Class 11 English Format of Question Paper 3
MP Board Class 11 English Format of Question Paper 4

MP Board Class 11 General English Format of Question Paper

MP Board Class 11 English Format of Question Paper 1
MP Board Class 11 English Format of Question Paper 2

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MP Board Class 11th Hindi Solutions मकरंद, स्वाति

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MP Board Class 11th Hindi Book Solutions Makrand

Here we have given MP Board Class 11 General Hindi Makrand Solutions Hindi Samanya Kaksha 11 (मकरंद हिंदी सामान्य कक्षा 11).

Makrand Hindi Book Class 11 Solutions

MP Board Class 11th General Hindi व्याकरण

MP Board Class 11th Hindi Book Solutions Swati

Here we have given MP Board Class 11 Special Hindi Swati Solutions Hindi Vishisht Kaksha 11 (स्वाति हिंदी विशिष्ट कक्षा 11).

Swati Hindi Book Class 11 Solutions

पद्य खण्ड : भाव सारांश,सम्पूर्ण पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

गद्य खण्ड : सारांश, शब्दार्थ, व्याख्या एवं अभ्यास

MP Board Class 11th Hindi सहायक वाचन Solutions

MP Board Class 11th Special Hindi व्याकरण

भाषा-बोध

काव्य-बोध

अपठित बोध

MP Board Class 11th Special Hindi Model Question Paper

MP Board Class 11 General Hindi Syllabus & Marking Scheme

समय : 3 घण्टे
पूर्णांक : 100

क्रम विषय सामग्री अंक कालखण्ड

1.

पद्य खण्ड – व्याख्या, सौन्दर्य-बोध, विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्न 25 40
2. गद्य खण्ड – अर्थग्रहण संबंधी, बोधात्मक प्रश्न 25 40
3. हिन्दी साहित्य का इतिहास – कहानी एवं एकांकी का विकास क्रम 05 10
4. व्याकरण-भाषा-बोध : शब्द, वाक्य, भाव पल्लवन, मुहावरे/लोकोक्तियाँ 20 30
5. अपठित बोध – पद्यांश-शीर्षक, सारांश एवं प्रश्न 05 10
गद्यांश-शीर्षक, सारांश एवं प्रश्न 05
6. पत्र लेखन/प्रपत्र लेखन 05 10
7. निबन्ध लेखन 10 15
पुनरावृत्ति 20
योग 100 180

पद्य खण्ड- (25 Marks)

  • पद्य पाठों पर आधारित दो में से किसी एक पद्यांश की सन्दर्भ (5 Marks)
  • प्रसंग सहित व्याख्या सौन्दर्य बोध पर तीन प्रश्न (3 + 3 + 4 = 10 Marks)
  • कविता की विषय वस्तु से सम्बन्धित तीन लघुउत्तरीय प्रश्न (3 + 3 + 4 = 10 Marks)

गद्य खण्ड- (25 Marks)

  • गद्य पाठों पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी तीन प्रश्न (3 + 3 + 4 = 10 Marks)
  • गद्य पाठों की विषय वस्तु पर आधारित चार बोधात्मक प्रश्न (4 + 4 + 4 + 3 = 15 Marks)

हिन्दी साहित्य का इतिहास- (5 Marks)
कहानी एवं एकांकी विकास क्रम पर दो प्रश्न (परिभाषा, तत्त्व एवं विकास) (3 + 2 = 5 Marks)

व्याकरण-
भाषा-बोध

  • शब्द निर्माण-(उपसर्ग, प्रत्यय, संधि, समास) पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • अनेकार्थी शब्द पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • विलोम शब्द पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • पर्यायवाची शब्द पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • वाक्यांश के लिए एक शब्द पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • भाव पल्लवन/भाव विस्तार पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • वाक्य-अशुद्धि संशोधन पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • वाक्य परिवर्तन पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • मुहावरे/लोकोक्तियों पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)

अपठित बोध-

  • एक गद्यांश-शीर्षक सारांश एवं प्रश्न (5 Marks)
  • पर आधारित दो प्रश्न (10 Marks)
  • एक पद्यांश-शीर्षक, सारांश एवं प्रश्न (5 Marks)

पत्र लेखन एवं प्रपत्र पूर्ति-
पत्र-आवेदन पत्र, शिकायती पत्र, कार्यालयीन एवं व्यावहारिक पत्र लेखन (5 Marks)
प्रपत्र-(प्रयोजन भूलक) बैंक, डाकखाने, तार तथा रेलवे आरक्षण आदि के प्रपत्र भरना
विचारात्मक, भावात्मक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं समसामयिक विषयों पर निबंध लेखन एक प्रश्न

प्रायोजना कार्य-

  1. क्षेत्रीय बोली-पहेलियाँ, चुटकुले, लोकगीत, लोक कथाओं का परिचय तथा खड़ी बोली में उनका अनुवाद।
  2. दूरदर्शन/आकाशवाणी के कार्यक्रम पर प्रतिक्रियाएँ/विश्लेषण।
  3. हिन्दी साहित्य का स्वतन्त्र पठन/टिप्पणी एवं प्रेरणाएँ।
  4. हस्त लिखित पत्रिका तैयार करना।
  5. म.प्र. से प्रकाशित होने वाली हिन्दी भाषा की पत्र-पत्रिकाओं की जानकारी।

टिप्पणी-प्रायोजना कार्य से सम्बन्धित विषय वस्तु पर (अंक आबंटित न होने के कारण) परीक्षा में प्रश्न पूछे जाना अपेक्षित नहीं है।

MP Board Class 11 Special Hindi Syllabus & Marking Scheme

क्रम विषय सामग्री काल खण्ड अंक
1. पद्य खण्ड-
पद्य साहित्य का इतिहास
कवि परिचय, व्याख्या, सौन्दर्य बोध एवं विषय-वस्तु तथा मूल्य पर आधारित प्रश्न
40 (4 + 23 = 27)
2. गद्य खण्ड-
गद्य साहित्य : विविध विधाएँ
लेखक परिचय, व्याख्या, विचार बोध एवं विषय बोध पर प्रश्न
35 (4 + 19 = 23)
3. सहायक वाचन-
विविध पाठों की विषय-वस्तु तथा आँचलिक भाषा के पाठों पर प्रश्न
15 10
4. भाषा बोध-
विराम चिह्न, शुद्ध वाक्य, मुहावरे, लोकोक्तियाँ और भाव-विस्तार
15 10
5. काव्य बोध-
काव्य परिभाषा, भेद, शब्द गुण, शब्द शक्ति, छन्द एवं अलंकार
15 10
6. अपठित बोध- 10 05
7. पत्र लेखन- 10 05
8. निबंध लेखन- 20 10
पुनरावृत्ति- 20
सम्पूर्ण योग (पूर्णांक) 100

पद्य खण्ड- (27 Marks)

  • पद्य साहित्य का विकास आदिकाल, भक्तिकाल एवं रीतिकाल के सामान्य परिचय पर आधारित दो प्रश्न (2 + 2 = 04 Marks)
  • पद्य पाठों पर आधारित कवि का संक्षिप्त साहित्यिक परिचय (रचनाएँ, काव्यगत विशेषताएँ, भावपक्ष, कलापक्ष) पर एक पश्न (05 Marks)
  • दो में से एक पद्यांश की प्रसंग सहित व्याख्या (05 Marks)
  • सौन्दर्य बोध पर आधारित दो प्रश्न (4 + 3 = 07 Marks)
  • भावपक्ष पर (विषय-वस्तु एवं मूल्य आधारित) दो प्रश्न (3 + 3 = 06 Marks)

गद्य खण्ड- (23 Marks)

  • गद्य साहित्य-विविध विधाओं के सामान्य परिचय पर एक प्रश्न (04 Marks)
  • संक्षिप्त लेखक परिचय-रचनाएँ, भाषा-शैली पर एक प्रश्न (05 Marks)
  • दो गद्यांश में से एक की प्रसंग सहित व्याख्या पर एक प्रश्न (05 Marks)
  • विचार-बोध सम्बन्धी दो प्रश्न (3 + 2 = 05 Marks)
  • विषय-बोध पर एक प्रश्न (04 Marks)

सहायक वाचन- (10 Marks)

  • पाठों की विषय-वस्तु पर दो प्रश्न (3 + 3 = 06 Marks)
  • आँचलिक भाषा के पाठों पर आधारित दो प्रश्न (2 + 2 = 04 Marks)

भाषा बोध- (10 Marks)

  • विराम चिहन पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • शुद्ध वाक्य रचना पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • मुहावरे/लोकोक्तियों पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • भाव विस्तार पर आधारित एक प्रश्न (4 Marks)

काव्य बोध- (10 Marks)

  • काव्य की परिभाषा, काव्य के भेद पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • काव्य-गण पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • शब्द-शक्ति पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • अलंकार-भ्रान्तिमान, सन्देह, विरोधाभास, अपहनुती पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)
  • छन्द-मात्रिक, वर्णिक छन्द, कुण्डलियाँ, घनाक्षरी, मन्दाक्रान्ता पर आधारित एक प्रश्न (2 Marks)

अपठित बोध- (05 Marks)
गद्यांश / पद्यांश, शीर्षक, सारांश पर आधारित एक प्रश्न (05 Marks)

पत्र-लेखन- (05 Marks)
औपचारिक पत्र, अनौपचारिक पत्र पर आधारित एक प्रश्न (05 Marks)

निबन्ध-लेखन- (10 Marks)
सामाजिक, सांस्कृतिक, समसामयिक समस्याओं पर आधारित निबन्धों पर एक प्रश्न (10 Marks)

प्रायोजना कार्य-

  1. क्षेत्रीय बोली-पहेलियाँ, चुटकुले, लोकगीत, लोक कथाओं का परिचय तथा खड़ी बोली में उनका अनुबाद।
  2. दूरदर्शन/आकाशवाणी के कार्यक्रम पर प्रतिक्रियाएँ/विश्लेषण।
  3. हिन्दी साहित्य का स्वतंत्र पठन/टिप्पणी एवं प्रेरणाएँ।
  4. हस्तलिखित पत्रिका तैयार करना।
  5. म. प्र. से प्रकाशित होने वाली हिन्दी भाषा की पत्र-पत्रिकाओं की जानकारी।

नोट- प्रायोजना कार्य से सम्बन्धित विषय-वस्तु पर (अंक आबंटित न होने के कारण) परीक्षा में प्रश्न पूछे जाना अपेक्षित नहीं है।

MP Board Class 12 Special Hindi Blue Print of Question Paper

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MP Board Class 11 Hindi Blue Print of Question Paper 2

MP Board Class 12 General Hindi Blue Print of Question Paper

MP Board Class 11 Hindi Blue Print of Question Paper 1

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MP Board Class 11th Maths Important Questions with Answers

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MP Board Class 11th Maths Important Questions in English Medium

MP Board Class 11th Maths Important Questions in Hindi Medium

  • Chapter 1 समुच्चय Important Questions
  • Chapter 2 संबंध एवं फलन Important Questions
  • Chapter 3 त्रिकोणमितीय फलन Important Questions
  • Chapter 4 गणितीय आगमन का सिद्धांत Important Questions
  • Chapter 5 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Important Questions
  • Chapter 6 रैखिक असमिकाएँ Important Questions
  • Chapter 7 क्रमचय और संचयं Important Questions
  • Chapter 8 द्विपद प्रमेय Important Questions
  • Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Important Questions
  • Chapter 10 सरल रेखाएँ Important Questions
  • Chapter 11 शंकु परिच्छेद Important Questions
  • Chapter 12 त्रिविमीय ज्यामिति का परिचय Important Questions
  • Chapter 13 सीमा और अवकलज Important Questions
  • Chapter 14 गणितीय विवेचन Important Questions
  • Chapter 15 सांख्यिकी Important Questions
  • Chapter 16 प्रायिकता Important Questions

MP Board Class 11th Maths Syllabus and Marking Scheme

Latest Syllabus and Marks Distribution Maths Class XI for the academic year 2019 – 2020 Year Examination.

Maths
Class XI

Time : 3 Hours.
Maximum Marks: 100

Unit Wise Division of Marks

Unit Name Marks
I Sets and Functions 29
II Algebra 37
III Coordinate Geometry 13
IV Calculus 6
V Mathematical Reasoning 6
VI Statistics and Probability 12
Total 100

 

Unit-I: Sets and Functions

Chapter 1 Sets:
Sets and their representations. Empty set. Finite and Infinite sets. Equal sets. Subsets. Subsets of a set of real numbers especially intervals (with notations). Power set. Universal set. Venn diagrams. Union and Intersection of sets. Difference of sets. Complement of a set. Properties of Complement Sets. Practical Problems based on sets. (8 Hours)

Chapter 2 Relations & Functions:
Ordered pairs, Cartesian product of sets. Number of elements in the cartesian product of two finite sets. Cartesian product of the sets of real (upto R x R). Definition of relation, pictorial diagrams, domain, co-domain and range of a relation. Function as a special kind of relation from one set to another. Pictorial representation of a function, domain, co-domain and range of a function. Real valued functions, domain and range of these functions: constant, identity, polynomial, rational, modulus, signum, exponential, logarithmic and greatest integer functions, with their graphs. Sum, difference, product and quotients of functions. (10 Hours)

Chapter 3 Trigonometric Functions
Positive and negative angles. Measuring angles in radians and in degrees and conversion of one into other. Definition of trigonometric functions with the help of unit circle. Truth of the sin2x+cos2x=1, for all x. Signs of trigonometric functions. Domain and range of trignometric functions and their graphs. Expressing sin (x±y) and cos (x±y) in terms of sin x, sin y, cos x & cos y and their simple application. Deducing identities like the following:

Identities related to sin 2x, cos 2x, tan 2x, sin 3x, cos 3x and tan 3x. General solution of trigonometric equations of the type sin y = sin a, cos y = cos a and tan y = tan a and problems. Proofs and simple applications of sine and cosine rule. (18 Hours)

Unit-II: Algebra

Chapter 4 Principle of Mathematical Induction:
Process of the proof by induction, motivating the application of the method by looking at natural numbers as the least inductive subset of real numbers. The principle of mathematical induction and simple applications. (4 Hours)

Chapter 5 Complex Numbers and Quadratic Equations:
Need for complex numbers, especially √1, to be motivated by inability to solve some of the quardratic equations. Algebraic properties of complex numbers. Argand plane and polar representation of complex numbers. Statement of Fundamental Theorem of Algebra, solution of quadratic equations in the complex number system. Square root of a complex number. (8 Hours)

Chapter 6 Linear Inequalities:
Linear inequalities. Algebraic solutions of linear inequalities in one variable and their representation on the number line. Graphical solution of linear inequalities in two variables. Graphical solution of system of linear inequalities in two variables. (8 Hours)

Chapter 7 Permutations and Combinations:
Fundamental principle of counting. Factorial n. Permutations and combinations, derivation of formulae and their connections, simple applications. (9 Hours)

Chapter 8 Binomial Theorem:
History, statement and proof of the binomial theorem for positive integral indices. Pascal’s triangle, General and middle term in binomial expansion, simple applications. (7 Hours)

Chapter 9 Sequence and Series:
Sequence and Series. Arithmetic Progression (A.P.). Arithmetic Mean (A.M.) Geometric Progression (G.P.), general term of a G.P., sum of n terms of a G.P., Arithmetic and Geometric series infinite G.P. and its sum, geometric mean (G.M.), relation between A.M. and G.M. Formula for the following special sum: (9 Hours)

Unit-III: Coordinate Geometry

Chapter 10 Straight Lines:
Brief recall of two dimensional geometry from earlier classes. Shifting of origin. Slope of a line and angle between two lines. Various forms of equations of a line: parallel to axis, point-slope form, slope-intercept form, two-point form, intercept form and normal form. General equation of a line. Equation of family of lines passing through the point of intersection of two lines. Distance of a point from a line. (10 Hours)

Chapter 11 Conic Sections:
Sections of a cone: circles, ellipse, parabola, hyperbola; a point, a straight line and a pair of intersecting lines as a degenerated case of a conic section. Standard equations and simple properties of parabola, ellipse and hyperbola. Standard equation of a circle. (8 Hours)

Chapter 12 Introduction to Three–dimensional Geometry:
Coordinate axes and coordinate planes in three dimensions. Coordinates of a point. Distance between two points and section formula. (5 Hours)

Unit-IV: Calculus

Chapter 13 Limits and Derivatives:
Derivative introduced as rate of change both as that of distance function and geometrically.

Intutive idea of limit. Limits of polynomials and rational functions, trignometric, exponential and logarithmic functions. Definition of derivative, relate it to slope of tangent of a curve, derivative of sum, difference, product and quotient of functions. The derivative of polynomial and trignometric functions. (14 Hours)

Unit-V: Mathematical Reasoning

Chapter 14 Mathematical Reasoning:
Mathematically acceptable statements. Connecting words/ phrases – consolidating the understanding of “if and only if (necessary and sufficient) condition”, “implies”, “and/or”, “implied by”, “and”, “or”, “there exists” and their use through variety of examples related to real life and Mathematics. Validating the statements involving the connecting words difference between contradiction, converse and contrapositive. (6 Hours)

Unit-VI: Statistics and Probability

Chapter 15 Statistics:
Measures of dispersion; Range, mean deviation, variance and standard deviation of ungrouped/grouped data. Analysis of frequency distributions with equal means but different variances. (7 Hours)

Chapter 16 Probability:
Random experiments; outcomes, sample spaces (set representation). Events; occurrence of events, ‘not’, ‘and’ and ‘or’ events, exhaustive events, mutually exclusive events, Axiomatic (set theoretic) probability, connections with the theories of earlier classes. Probability of an event, probability of ‘not’, ‘and’ and ‘or’ events. (8 Hours)

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MP Board Class 11th General Hindi Important Questions with Answers

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MP Board Class 11th Samanya Hindi Important Questions with Answers

  1. पद्य खण्ड Important Questions
  2. गद्य खण्ड Important Questions
  3. हिन्दी साहित्य का इतिहास Important Questions
  4. व्याकरण, भाषा बोध Important Questions
  5. अपठित बोध Important Questions
  6. पत्र लेखन Important Questions
  7. निबंध लेखन Important Questions

MP Board Class 11th Samanya Hindi Syllabus and Marking Scheme

Latest Syllabus and Marks Distribution Samanya Hindi Class XI for the academic year 2019 – 2020 Year Examination.

सामान्य हिन्दी : कक्षा 11
समय : 3 घण्टे
पूर्णांक : 100

1. पद्य खण्ड (25 Marks)
पद्य पाठों पर आधारित दो में से किसी एक पद्यांश की सन्दर्भ प्रसंग सहित व्याख्या, सौन्दर्य बोध पर तीन प्रश्न, कविता की विषय वस्तु से सम्बन्धित तीन लघु उत्तरीय प्रश्न।

2. गद्य खण्ड (25 Marks)
गद्य पाठों पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी तीन प्रश्न, गद्य पाठों की विषय-वस्तु पर आधारित चार बोधात्मक प्रश्न।

3. हिन्दी साहित्य का इतिहास (5 Marks)
कहानी एवं एकांकी विकास क्रम पर दो प्रश्न (परिभाषा, तत्व एवं विकास)

4 व्याकरण (20 Marks)
भाषा बोध – शब्द निर्माण (उपसर्ग, प्रत्यय, संधि, समास) पर आधारित एक प्रश्न, समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द पर आधारित एक प्रश्न, अनेकार्थी शब्द पर आधारित एक प्रश्न, विलोम शब्द पर आधारित एक प्रश्न, पयार्यवाची शब्द पर आधारित एक प्रश्न, वाक्यांश के लिए एक शब्द पर आधारित एक प्रश्न, भाव पल्लवन/भाव विस्तार पर आधारित एक प्रश्न, वाक्य-अशुद्धि संशोधन पर आधारित एक प्रश्न, वाक्य परिवर्तन पर आधारित एक प्रश्न, मुहावरे/लोकोक्तियाँ पर आधारित एक प्रश्न।

5. अपठित बोध (10 Marks)
एक गद्यांश – शीर्षक, सारांश एवं प्रश्न, एक पद्यांश-शीर्षक, सारांश एवं प्रश्न। गद्य एवं पद्य पर आधारित दो प्रश्न

6. पत्र लेखन एवं प्रपत्र पूर्ति (5 Marks)
पत्र – आवेदन पत्र, शिकायती पत्र, कार्यालयीन एवं व्यावहारिक पत्र लेखन, प्रपत्र (प्रयोजन मूलक)-बैंक, डाकखाने, तार तथा रेलवे आरक्षण आदि के प्रपत्र भरना।

7. निबंध (10 Marks)
विचारात्मक, भावात्मक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं समसामयिक विषयों पर निबंध लेखन एक प्रश्न।
प्रायोजना कार्य-

  • क्षेत्रीय बोली-पहेलियाँ, चुटकुले, लोकगीत, लोक कथाओं का परिचय तथा खड़ी बोली में उनका अनुवाद।
  • दूरदर्शन/आकाशवाणी के कार्यक्रम पर प्रतिक्रियाएँ। विश्लेषण।
  • हिन्दी साहित्य का स्वतंत्र पठन/टिप्पणी एवं प्रेरणाएँ।
  • हस्त लिखित पत्रिका तैयार करना।
  • म. प्र. से प्रकाशित होने वाली हिन्दी भाषा की पत्र पत्रिकाओं की जानकारी।

टिप्पणी – प्रायोजना कार्य से सम्बन्धित विषय-वस्तु पर (अंक आबंटित न होने के कारण) परीक्षा में प्रश्न पूछा जाना अपेक्षित नहीं है।

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MP Board Class 11th Business Studies Important Questions with Answers

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MP Board Class 11th Business Studies Important Questions with Answers

MP Board Class 11th Business Studies: Foundation of Business Important Questions with Answers

MP Board Class 11th Business Studies: Finance and Trade Important Questions with Answers

MP Board Class 11th Business Studies Syllabus and Marking Scheme

Latest Syllabus and Marks Distribution Business Studies Class XI for the academic year 2019 – 2020 Examination.

Business Studies
Class XI

Time : 3 Hours.
Maximum Marks: 100

Unit Wise Division of Marks

Unit Title Marks
Part A: Foundations of Business
1. Nature and Purpose of Business 20
2. Forms of Business Organisation
3. Public, Private and Global Enterprises 18
4. Business Services
5. Emerging Modes of Business 12
6. Social Responsibility of Business and Business Ethics
Part B: Finance and Trade
7. Sources of Business Finance 20
8. Small Business
9. Internal Trade 20
10. International Business
11. Project Work 10
Total 100

Part A: Foundations of Business (50 Marks)

1. Nature and Purpose of Business

  • Concept and characteristics of the business.
  • Business, profession and employment: Meaning and their distinctive features.
  • Objectives of business: Economic and social, the role of profit in business.
  • Classification of business activities: Industry and Commerce.
  • Industry: Types: Primary, secondary, tertiary: Meaning and subtypes.
  • Commerce: Trade – Types (internal, external, wholesale and retail) and auxiliaries to trade: Banking, insurance, transportation, warehousing, communication and advertising.
  • Business risks: Meaning, nature and causes.

2. Forms of Business Organisation

  • Sole proprietorship: Meaning, features, merits and limitations.
  • Partnership: Features, Types, merits and limitations of partnership and partners, registration of a partnership firm, partnership deed. Type of partners.
  • Hindu undivided family business: Features
  • Co-operative societies: Features, Types, merits and limitations.
  • Company: Private and public company: Features, merits and limitations.
  • Formation of a company: Four stages, important document (MOA, AOA) relevances of the certificate of incorporation and certificate of commencement.
  • Starting a business: Basic factors.

3. Public, Private and Global Enterprises

  • Private sector and public sector enterprises.
  • Forms of public sector enterprises: Features, merits and limitations of departmental undertakings, statutory corporation and Government Company.
  • Changing role of public sector enterprises.
  • Global enterprises, joint ventures and public-private partnership: Features.

4. Business Services

  • Banking: Types of bank accounts: Savings, current, recurring, fixed deposit and multiple option deposit account.
  • Banking services with particular reference to the issue of bank draft, banker’s cheque (pay order), RTGS (Real Time Gross Settlement) NEFT (National Electronic Funds Transfer), bank overdraft, cash credits and e-banking.
  • Insurance: Principles, the concept of life, health, fire and marine insurance.
  • Postal and telecom services: Mail (UPC, registered post, parcel, speed post and courier) and other services.

5. Emerging Modes of Business

  • E-business: Scope and benefits, resources required for successful E-business implementation, Online transactions, Payment mechanism, security and safety of business transactions.
  • Outsourcing: Concept, Need and scope of BPO (Business Process Outsourcing) and KPO (Knowledge Process Outsourcing).
  • Smart cards and ATM’s meaning and utility.

6. Social Responsibility of Business and Business Ethics

  • Concept of social responsibility.
  • Case for social responsibility.
  • Responsibility towards owners, investors, consumers, employees, government and community.
  • Environment protection and business.

Part B: Finance and Trade (50 Marks)

7. Sources of Business Finance

  • Concept of business finance.
  • Owner’s funds: Equity shares, preference share, GDR, ADR, IDR and retained earnings.
  • Borrowed funds: Debentures and bonds, the loan from a financial institution, loans from commercial banks, public deposits, trade credit, ICD (inter-corporate deposits).

8. Small Business

  • Small scale enterprise as defined by MSMED Act 2006 (Micro, Small and Medium Enterprise Development Act).
  • Role of small business in India with special reference to rural areas.
  • Government schemes and agencies for small scale industries: NSIC (National Small Industries Corporation) and DIC (District Industrial Center) with special reference to rural, backward and hilly areas.

9. Internal Trade

  • Services rendered by a wholesaler and a retailer.
  • Types of retail: Trade: Itinerant and small scale fixed shops.
  • Large scale retailers: Departmental stores, Chain stores, Mail order business.
  • Concept of Automatic Vending Machine.
  • Chambers of commerce and industry: Basic functions.
  • Main documents used in internal trade: Performa invoice, invoice, debit note, credit note. LR (Lorry receipt) and RR (Railway Receipt)
  • Terms of trade: COD (Cash on Delivery), FOB (Free on Board), CIF (Cost, Insurance and Freight), E&OE (Errors and Omissions Excepted)

10. International Business

  • Meaning, the difference between internal trade and external trade: Meaning and characteristics of international trade.
  • Problems of international trade: Advantages and disadvantages of international trade.
  • Export trade: Meaning, objective and procedure of Export Trade.
  • Import Trade: Meaning, objective and procedure- meaning and func¬tions of import trade; purpose and procedure.
  • Documents involved in International Trade; documents involved in export trade, indent, letter of credit, shipping order, shipping bills, mate’s receipt, bill of lading, certificate of origin, consular invoice, documentary bill of exchange (DA/DP), specimen, importance.
  • World Trade Organization (WTO): Meaning and objective.

11. Project Work

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MP Board Class 11th Economics Important Questions with Answers

MP Board Class 11th Economics Important Questions with Answers Guide Pdf Free Download अर्थशास्त्र in both Hindi Medium and English Medium are part of MP Board Class 11th Solutions. Here we have given NCERT Madhya Pradesh Syllabus MP Board Class 11 Economics Book Question Bank Solutions Arthashastra Pdf.

MP Board Class 11th Economics Important Questions with Answers

MP Board Class 11th Economics: Statistics for Economics Important Questions with Answers

MP Board Class 11th Economics: Indian Economic Development Important Questions with Answers

MP Board Class 11th Economics Syllabus and Marking Scheme

Latest Syllabus and Marks Distribution Economics Class XI for the academic year 2019 – 2020 Year Examination.

Economics
Class XI

Time : 3 Hours.
Maximum Marks: 100

Unit Wise Division of Marks

Unit Title Marks
Part A: Statistics for Economics
1.
2. Collection, Organisation and Presentation of Data 13
3. Statistical Tools and Interpretation 27
Part B: Indian Economic Development
4. Development Experience (1947 – 90) and Economic Reforms Since 1991 (13 + 12)
5. Current Challenges Facing the Indian Economy 15
6. Development Experience of India: A Comparison with Neighbours (OTBA) 10
Part C: Project Work 10
Total 100

Part A: Statistics for Economics (40 Marks)

Unit 1: Introduction

  • What is economics?
  • Meaning, scope and importance of statistics in economics.

Unit 2: Collection, Organisation and Presentation of Data

  • Collection of Data: Sources of data: primary and secondary, how basic data is collected, methods of collecting data, some important sources of secondary data, census of India and national sample survey organisation.
  • The organisation of Data: Meaning and types of variables, frequency distribution.
  • Presentation of Data: Tabular presentation and diagrammatic presentation of data: (i) Geometric forms (bar diagrams and pie diagrams) (ii) Frequency diagrams (Histogram, polygon and ogive) and (iii) Arithmetic line graphs (Time-series graph).

Unit 3: Statistical Tools and Interpretation

  • Measures of Central Tendency: Mean (Simple and weighted), median and mode.
  • Measures of Dispersion: Absolute dispersion (Range, quartile deviation, mean deviation and standard deviation), relative dispersion (Coefficient of quartile-deviation, coefficient of mean deviation, coefficient of variation), Lorenz curve: Meaning and its application.
  • Correlation: Meaning, scatter diagram, measures of correlation Karl Pearson’s method Two variables ungrouped data) Spearman’s rank correlation.
  • Introduction to Index Numbers: Meaning, Types: Wholesale I price index, consumer price index and index of industrial production, uses of index numbers, Inflation and index numbers.

Part B: Indian Economic Development (50 Marks)

Unit 4: Development Experience (1947 – 90) and Economic Reforms Since 1991

  • A brief introduction of the state of Indian economy on the eve of independence, common goals of five-year plans, main features, problems and policies of agriculture (institutional aspects and new agricultural strategy, etc.), industry (Industrial licensing, etc.) and foreign trade.
  • Economic Reforms Since 1991
  • Need and Main Features: Liberalisation, globalisation and privatisation, an appraisal of LPG policies.

Unit 5: Current Challenges Facing the Indian Economy

  • Poverty: Absolute and relative, main programmes for poverty alleviation: A critical assessment.
  • Rural Development: Key issues: Credit and marketing-role of cooperatives, agricultural diversification, alternative farming-organic farming.
  • Human Capital Formation: How people become a resource, the role of human capital in economic development, growth of the education sector in India
  • Employment: Formal and informal, growth and other issues: Problems and policies.
  • Inflation: Problems and policies
  • Infrastructure: Meaning and Types: Case studies, energy and health: Problems and policies a critical assessment.
  • Sustainable Economic Development: Meaning, effects of economic development on resources and environment, including global warming.

Unit 6: Development Experience of India: A Comparison with Neighbours

  • India and Pakistan, India and China.
  • Issues: Growth, population, sectoral development and other developmental indicators.

Part C: Project Work (10 Marks)

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