MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 9 नई इबारत

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 9 नई इबारत (कविता, भवानी प्रसाद मिश्र)

नई इबारत पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

नई इबारत लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि ने सोने से पहले कौन-से दो काम करने के लिए प्रेरित किया है?
उत्तर:
कवि ने सोने से पहले ‘कुछ लिख के और कुछ पढ़के’ ये दो काम करने के लिए प्रेरित किया है।

प्रश्न 2.
खेलते समय कौन-सी सावधानी रखना है?
उत्तर:
खेलते समय समझ-बूझ करके और किसी प्रकार की जिद न करके खेलते जाने की सावधानी रखना है।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
कवि ने खेत की क्या विशेषता बताई है?
उत्तर:
कवि ने खेत की विशेषता बताई है कि वे खुले-फैले और धानी हैं। वे कभी-कभी हवा से डोलते हैं। वे कभी-कभी बरसात के झोकों से गद्गद हो उठते हैं। इस तरह वे कभी-कभी हर प्रकार की खुश्क और तर की शक्ति से प्रभावित होते रहते हैं।

नई इबारत दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कविता के माध्यम से कवि क्या सन्देश देना चाहता है?
उत्तर:
कविता के माध्यम से कवि यह सन्देश देना चाहता है कि हमें जीवन में आगे बढ़ते जाने के लिए हर समय कुछ-न-कुछ करते रहना चाहिए। इसके लिए कवि ने प्रकृति के विभिन्न रूपों-प्रतिरूपों के उदाहरण देकर यह सिद्ध करना चाहा है कि प्रकृति कभी भी निष्कर्म नहीं रहती है। वह पल-पल कर्मरत रहती है। इससे वह आने वाले हर दुःखों और कठिनाइयों का सामना करती हुई हमेशा आगे बढ़ती जाती है। प्रकृति के इस प्रक्रिया से हमें प्रेरणा लेकर अपने जीवन को समुन्नत और महान बनाते रहने का हमेशा ही प्रयास करना चाहिए।

प्रश्न 2.
कविता में प्रकृति के माध्यम से कवि ने कुछ सन्देश व्यक्त किए हैं, उनमें से किन्हीं दो को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कविता में प्रकृति के माध्यम से कवि ने कुछ सन्देश व्यक्त किए हैं। उनमें दो इस प्रकार हैं –

  1. सूरज ने किरणों की कलम से इबारत लिखी।
  2. हवा ने मन-ही-मन कुछ गुनगुनाया।

1. सूरज ने किरणों की कलम से इबारत लिखी:
उपर्युक्त सन्देश के द्वारा कवि ने मनुष्य को अपने पुरुषार्थ और कड़ी मेहनत से अपने जीवन को सुखद बनाने का सन्देश दिया है।

2. हवा ने मन ही मन कुछ गुनगुनाया:
उपर्युक्त सन्देश के द्वारा कवि ने मनुष्य को अपने जीवन में आने वाले दुखों और कठिनाइयों को डटकर खुशी-खुशी और बेफिक होकर सामना करने का सन्देश दिया है।

प्रश्न 3.
निष्क्रियता के सम्बन्ध में कवि ने कैसे संकेत किया है?
उत्तर:
निष्क्रियता के सम्बन्ध में. कवि ने इस प्रकार संकेत किया है –
“बिना समझे बिना बूझे खेलते जाना,
एक जिद को जकड़ लेकर ठेलते जाना,
गलत है, बेसूद है, कुछ रचके सो, कुछ गढ़के सो।”

नई इबारत भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पद्यांश की व्याख्या कीजिए –

  1. “तू जिस जगह जागा सबेरे उस जगह से बढ़ के सो।”
  2. “दिनभर इबारत पेड़-पत्ती और पानी की।
    बन्द घर की खुले फैले खेत धानी की।”
  3. ‘एक जिद को जकड़ लेकर ठेलते जाना।’
  4. ‘जो इबारत लहर बनकर नदी पर दरसी।’

उत्तर:

1. “तू जिस जगह जागा सबेरे, उस जगह से बढ़के सो”:
उपर्युक्त पद्यांश के द्वारा कवि ने यह प्रकट करना चाहा है कि हमें अपने दैनिक जीवन में कुछ-न-कुछ श्रेष्ठ और प्रशंसनीय कार्य करते रहना चाहिए। इससे हमारा जीवन सार्थक और सफल हो सकेगा। फलस्वरूप हमें सुख और शान्ति प्राप्त होगी। यह सुख और शान्ति दूसरे के लिए सन्देश-स्वरूप होगी। खासतौर से उलझे, मुरझाए, हारे, थके और असफल लोगों के लिए। ऐसा करके ही हम दिन-प्रतिदिन अपने जीवन को आगे बढ़ा हुआ पा सकते हैं। यह तभी सम्भव है, जब हम जो कुछ करें, सोच-विचार कर करें। दृढ़संकल्प लेकर करें।

2. “दिन-भर इबारत पेड़-पत्ती और पानी की।
बन्द घर की खुले-फैले, खेत धानी की।”

उपर्युक्त पद्यांश के द्वारा कवि ने यह भाव व्यक्त करना चाहा है कि हमें अपने जीवन की एक-एक बातों का एक इबारत की तरह महत्त्व देना चाहिए। हमें अपने जीवन को सार्थक और उपयोगी बनाने के लिए प्रकृति के स्वच्छन्द स्वरूप को महत्त्व देते हुए उससे प्रेरणा लेनी चाहिए। इस दृष्टि से हमें पेड़-पत्ती, पानी, खुले-फैले खेत धानी की स्वच्छन्दता को अपने अन्दर उतारकर हमेशा हौसला रखते हुए आगे बढ़ते जाना चाहिए।

3. “एक जिद को जकड़ लेकर ठेलते जाना:
उपर्युक्त पद्यांश के द्वारा कवि ने यह भाव व्यक्त करना चाहा है कि हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए समझ-बूझ को साथ रखना चाहिए। इसके साथ-ही-साथ हमें किसी बच्चे की तरह कोई जिद या हठ लेकर नहीं बैठ जाना चाहिए। इससे हमारा जीवन आगे न बढ़कर वहीं जाम हो जाता है। यह एक सुखद और सफल जीवन के लिए किसी प्रकार अनुकूल और उचित नहीं है।

4. “जो इबारत लहर बनकर नदी पर दरसी”:
उपर्युक्त पद्यांश के द्वारा कवि ने यह भाव प्रकट करना चाहा है कि हमें जीवन में हमेशा ही आगे बढ़ने का प्रयास करते रहना चाहिए। इसके लिए यह बहुत जरूरी है कि हम नदी पर मचलती हुई एक लहर की तरह बड़े ही स्वच्छन्द और उमंग के साथ सामने वाली हर कठिनाइयों का सामना करते चलें। इसी से हमारे जीवन की सार्थकता सिद्ध होगी।

नई इबारत भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
कविता में आए निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए –
खुश्क, उठा, बेसूद, जागना।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 9 नई इबारत img-1

नई इबारत योग्यता विस्तार

प्रश्न 1.
कवि ने सोने से पहले आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है, क्या आप प्रतिदिन विचार करते हैं, आपने आज क्या प्राप्त किया जो आपके जीवन को लक्ष्य की ओर प्रेरित कर सके। उन विचारों को सोने के पूर्व डायरी विधा में लिखने की आदत विकसित कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
इसी प्रकार की प्रेरणाप्रद कविताओं को संकलित कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

प्रश्न 3.
प्रेरणा देने वाली ऐसी ही अन्य कविताओं का संकलन कर उसे सुस्पष्ट अक्षरों में लिखकर विभिन्न अवसरों पर अपने साथियों को भेंट कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

नई इबारत परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

नई इबारत लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि ने जगने के बाद क्या काम करने के लिए प्रेरित किया है?
उत्तर:
कवि ने जगने के बाद उस जगह से आगे बढ़कर सोने के लिए प्रेरित किया है।

प्रश्न 2.
कवि ने कौन-सी इबारत के सुनहरे वर्क से मंन मढ़के सो जाने के लिए कहा है?
उत्तर:
कवि ने पेड़-पत्ती और पानी, बन्द घर की खुली-फैले खेत, धानी की, हवा की, बरसात की, हरेक खुश्क की, दिन-भर अपने और दूसरे की इबारत के सुनहरे वर्क से मन मढ़के सो जाने के लिए कहा है।

प्रश्न 3.
पंछी ने किसका नाम लेकर पुकारा?
उत्तर:
पंछी ने, सूरज ने अपने किरण की कलम से जो लिखा, उसी को पंछी ने नाम लेकर पुकारा।

नई इबारत दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि ने प्रकृति के किन-किन को किस रूप में चित्रित किया है और क्यों?
उत्तर:
कवि ने प्रकृति के विभिन्न रूपों को चित्रित किया है। कवि द्वारा चित्रित ये रूप हैं-सुबह-शाम, पेड़-पत्ती, पानी, खुले-फैले धानी खेत, हवा, बरसात, सूखा, नम, दैनिक क्रिया-व्यापार, सूरज, उसकी किरणें, पंछी, हवा, लहर, नदी आदि। इन्हें कवि ने प्रेरणादायक रूप में चित्रित किया है। यह इसलिए कि इनसे प्रेरणा लेकर मनुष्य अपने जीवन को महान बना सके।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
प्रस्तुत कविता में सुबह जागना और रात को सोना का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कविता में सुबह जागना और रात को सोना का भाव प्रेरक रूप में है। ये दोनों ही भाव जीवन मे आगे बढ़ते जाने के लिए प्रयुक्त हुए हैं। इनके माध्यम से कवि ने हमारे जीवन में उत्साह को लाते हुए हमेशा अपने को महान बनाने का सुझाव दिया है। उसका यह कहना है कि जब रात को सोते हैं, उससे पहले कुछ अच्छा और सराहनीय काम करें। फिर सुबह जगने पर और कुछ पहले से सराहनीय करने का दृढ़ संकल्प लें।

प्रश्न 3.
‘नई इबारत’ कविता के केन्द्रीय भाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कविता में कवि ने जीवन में उत्साह का संचार करते हुए निरन्तर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी है। उनके अनुसार जिस स्थिति में हम सुबह जागते हैं, उसी स्थिति में यदि रात्रि को सो जाते, हैं, तो हमारा जीवन अर्थपूर्ण नहीं हो पाता है। निरर्थक जिद किए बगैर कुछ रचके, कुछ गढ़के ही जीवन को सृजनात्मक बनाया जा सकता है। प्रकृति का सम्पूर्ण कार्य-व्यापार जीवन के नए पृष्ठ खोलने वाला है। प्रकृति की इस कर्म-शीलता से प्रेरणा लेकर जीवन में कठिनाइयों का सामना किया जाना ही उपयुक्त है। इस तरह के दृढ़निश्चय से ही जीवन के महत्त्व को प्रतिपादित किया जा सकता है।

नई इबारत कवि-परिचय

प्रश्न 1.
भवानी प्रसाद मिश्र का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
भवानी प्रसाद मिश्र का जन्म मध्य-प्रदेश के होशंगाबाद जिले के टिगरिया गाँव में 28 मार्च 1914 को हुआ था। उनका आरम्भिक जीवन बड़े संघर्षों में बीता। उन्होंने बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त की। 1942 के ‘भारत-छोड़ो’ आन्दोलन में उनका सक्रिय योगदान था। परिणामस्वरूप उन्हें तीन वर्ष का कारावास मिला। कारावास की अवधि में भी उन्होंने अपना अध्ययन जारी रखा। सन् 1946 ई. से 1950 ई. तक उन्होंने वर्धा के महिला आश्रम में शिक्षण-कर्म किया। लगभग एक वर्ष तक “राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा” से सम्बद्ध रहे।

सन् 1952 से 1955 तक वे ‘कल्पना’ (हैदराबाद) के सम्पादन-विभाग से जुड़े रहे। इसके पश्चात् उन्होंने आकाशवाणी के बम्बई केन्द्र के “विविध भारती” कार्यक्रम का निर्देशन कार्य सँभाला। गाँधी जी के जीवन-दर्शन तथा रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कविताओं से वे विशेष रूप से प्रभावित हुए। जीवन के अन्तिम दिनों तक वे “गाँधी स्मारक निधि व सर्वसेवा संघ” से जुड़े रहे।

रचनाएँ:
श्री भवानी प्रसाद की मुख्य रचनाएँ हैं-‘गीत फरोश’, ‘चकित है दुःख’, ‘अँधेरी कविताएँ’, ‘बुनी हुई रस्सी’, ‘खुशबू के शिलालेख’, ‘कवितान्तर’, ‘त्रिकाल संध्या’ तथा ‘शतदल’ आदि।

साहित्यिक विशेषताएँ:
मिश्रजी सदा सरल व सहज भाषा-प्रयोग के पक्षपाती रहे हैं। सादगी व सरलता उनकी शैली की एक प्रमुख विशेषता है। उनकी कविताओं में एक ओर तो गाँधीवादी विचारधारा की अभिव्यक्ति मिलती है तो दूसरी ओर प्रकृति की विभिन्न छवियों की सजीव व सचित्र अभिव्यक्ति मिलती है। उनकी कविताओं में कहीं-कहीं आदर्शवाद व उपदेशात्मकता का भी स्वर मुखरित हुआ है।

नई इबारत पाठ का सारांश

प्रश्न 1.
भवानी प्रसाद मिश्र विरचित कविता ‘नई इबारत’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
भवानी प्रसाद मिश्र विरचित कविता ‘नई इबारत’ एक उत्साहबर्द्धक कविता है। इसमें कवि ने हमें हमेशा आगे बढ़ने का उत्साह प्रदान किया है। कवि का कहना है कि हमें सोने से पहले कुछ लिख-पढ़कर ही रात को सोना चाहिए। इस प्रकार जब सुबह नींद खुले तो हम आगे बढ़ते हुए स्वयं को पाएं। एक बच्चे की तरह हमें बिना कुछ समझे-बूझे जिद करके बैठे रहना नहीं चाहिए। यह बिल्कुल ही गलत है। हमें तो जीवन में हमेशा ही कुछ रचते-गढ़ते रहना चाहिए। हमें तो दिनभर पेड़-पत्ती, पानी, खुले-फैले खेत, हवा, बरसात, नमी की इबारत के सुनहरे बर्फ से मन को मढ़कर रात को चुपचाप सो जाना चाहिए कि सवेरे नींद खुलने पर हम अपने को उस जगह से बढ़ा हुआ पा सकें।

कवि का पुनः कहना है कि सूरज ने किरणों की कलम से जो कुछ लिखा, उसे चिड़ियों ने पढ़ लिया। हवा ने जो कुछ गुनगुनाया, बरसात ने जो कुछ जल बरसाया और जो इबारत एक लहर की तरह नदी पर दिखाई दी, उस इबारत की यदि सीढ़िया हैं, तो हमें उस पर चढ़कर रात को ऐसे सो जाना चाहिए कि सुबह नींद खुलने पर हमें पहले से स्वयं को आगे बढ़ा हुआ पा सकें।

नई इबारत संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1.
कुछ लिखके सो कुछ पढ़के सो,
तू जिस जगह जागा सबेरे,
उस जगह से बढ़के सो।
जैसा उठा वैसा गिरा जाकर बिछौने पर,
तिफ्ल जैसा प्यार यह जीवन खिलौने पर,
बिना समझे बिना बूझे खेलते जाना,
एक जिद को जकड़ लेकर ठेलते जाना,
गलत है बेसूद है कुछ रचके सो कुछ गढ़के सो,
तू जिस जगह जागा सबेरे उस जगह से बढ़के सो।

शब्दार्थ:

  • तिफ्ल – बच्चा।
  • बेसूद – व्यर्थ, निरर्थक।

प्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य भाग-1’ में संकलित तथा भवानी प्रसाद मिश्र द्वारा विरचित कविता ‘नई इबारत’ शीर्षक से उद्धत है। इसमें कवि ने हमारे जीवन में उत्साह का संचार करते हुए हमें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हुए कहा है कि –

व्याख्या:
हमें कुछ लिखकर और कुछ पढ़कर रात को सोना चाहिए। फिर सुबह नींद खुलने पर पहले से स्वयं को आगे बढ़ा हुआ पाना चाहिए। कहने का भाव यह है कि जीवन में हमें हमेशा कुछ-न-कुछ ऐसे महान कार्य करते रहना चाहिए, जिससे हम हमेशा विकास करते हुए आगे बढ़ते जाएँ। कवि का पुनः कहना है कि जिस प्रकार कोई बच्चा बिछौने पर उठता-गिरता है, वैसे ही यह हमारा प्यारा जीवन समय रूपी खिलौने पर मचलता रहता है। यह एक नासमझ बच्चे की तरह बिना कुछ समझे-बूझे खेलता रहता है। वह एक बच्चे की तरह एक जिद को जकड़कर ठेलते जाता है। यह सचमुच में गलत है और व्यर्थ है। हमें तो कुछ-न-कुछ रचके और गढ़ के ही रात को सोना चाहिए। सुबह जब नींद खुले तो हम अपने-आपको पहले से आगे बढ़ा हुआ पाएँ।

विशेष:

  1. भाव प्रेरक रूप में है।
  2. शैली प्रेरणादायक है।
  3. वीर रस का प्रवाह है।
  4. प्रगतिशील विचारधारा है।
  5. शब्द मिश्रित हैं।

पद्यांश आधारित सौन्दर्य-बोध सम्बन्धी सम्बन्धी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौन्दर्य पर प्रकाश कीजिए।
  2. प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौन्दर्य लिखिए।
  3. कवि ने बच्चे के उदाहरण से कौन-सी समानता लाने का प्रयत्न किया है?

उत्तर:
1. प्रस्तुत पद्यांश में कवि का कथन बड़ा ही सरस और हृदय को छूने वाला है। जीवन में हमेशा आगे बढ़ते जाने की कवि द्वारा प्रेरणा देना अधिक उत्साहबर्द्धक है। यह निराश, उदास और जीवन में हारे हुए व्यक्तियों के सोए हुए भावों को बड़े ही सुन्दर ढंग से प्रेरित करने वाला है। भाकों को जगाने के लिए कवि का मार्गदर्शन बड़े ही सटीक रूप में हुआ है। इस प्रकार यह पूरा पद्यांश अधिक सरस और भावबर्द्धक है।

2. प्रस्तुत पद्यांश की भाव-योजना सरल और हिन्दी-उर्दू मिश्रित शब्दों की है। तुकान्त शब्दावली के द्वारा वीर रस का संचार अधिक आकर्षक रूप में हुआ है। नपे-तुले भावों को नपे-तुले बिम्बों और प्रतीकों द्वारा प्रेरणादायक शैली में प्रस्तुत किया गया है। इससे यह पद्यांश सराहनीय है।

3. कवि ने बच्चे के उदाहरण से जीवन में असफल और लापरवाह रहने वाले लोगों के निरर्थक जीवन की समानता लाने का प्रयास किया है। इससे कवि के कहने का आशय सुस्पष्ट और प्रभावशाली बन गया है।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
दिन-भर इबारत पेड़-पत्ती और पानी की
बन्द घर की खुले-फैले खेत धानी की
हवा की बरसात की हर खुश्क की तर की
गुजरती दिनभर रही जो आप की पर की
उस इबारत के सुनहरे वर्क से मन मढ़के सो
तू जिस जगह जागा सबेरे उस जगह से बढ़के सो।
लिखा सूरज ने किरन की कलम लेकर जो
नाम लेकर जिसे पंछी ने पुकारा सो
हवा जो कुछ गा गई बरसात जो बरसी
जो इबारत लहर बनकर नदी पर दरसी
उस इबारत की अगरचे सीढ़ियाँ हैं चढ़के सो
तू जिस जगह जागा सबेरे उस जगह से बढ़के सो।

शब्दार्थ:

  • इबारत – लेख, रचना।
  • खुश्क – शुष्क, सूखा।
  • तर – सरस, रसमय, भींगा।
  • पर की – दूसरों की।
  • वर्क – सोने या चाँदी का अत्यन्त पतला पत्तर।
  • दसी – दिखी।
  • अगरचे – यदि।

प्रसंग – पूर्ववत्!

व्याख्या:
दिन-भर पेड़-पत्ती और पानी बन्द घर की, खले-फैले खेत-धानी की. हवा की, बरसात की, हरेक सूखापन और नमी की, अपने पर दिन-भर बीती बातों की और ऐसी अनेक बातों की सुनहरे वर्क के समान रचना मन में गढ़ते हुए चुपचाप रात को सो जाना चाहिए। इस प्रकार हम जब सुबह जगें, तो हम अपने आपको पहले से बढ़ा हुआ पावें। कहने का भाव यह है कि हमें हमेशा ही कुछ-न-कुछ करते हुए आगे बढ़ते रहने का प्रयास करना चाहिए। कवि का पुनः कहना है कि सूरज ने अपनी किरणों की कलम से जो कुछ लिखा, उसे पंछी ने उसी नाम से पुकारा। हवा ने जो कुछ गुनगुनाया, बरसात ने जो कुछ बरसाया और जो इबारत लहर बनकर नदी पर दिखाई दी, अगर उस इबारत की सीढ़ियाँ हैं, तो उस पर हमें चढ़कर रात को सो जाना चाहिए। फिर सुबह जब हम जगें तो हम अपने आपको पहले से कहीं आगे पावें। दूसरे शब्दों में, हमें हमेशा ही कुछ-न-कुछ करते हुए आगे बढ़ते रहने का प्रयास करते रहना चाहिए।

विशेष:

  1. प्रस्तुत पद्यांश भाववर्द्धक और आकर्षक है।
  2. शैली दृष्टान्त है।
  3. इस पद्यांश का मुख्य अलंकार मानवीकरण है।
  4. भाषा उर्दू के प्रचलित शब्दों और हिन्दी के सहज शब्दों की है।
  5. तुकान्त योजना है।
  6. वीर रस का संचार है।

पद्यांश पर आधारित सौन्दर्य बोध सम्बन्धी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
  2. प्रस्तुत पद्यांश के काव्य-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।
  3. प्रस्तुत पद्यांश का मुख्य भाव बतलाइए।

उत्तर:
1. प्रस्तुत पद्यांश में कवि द्वारा मनुष्य ने निरन्तर कर्मरत होने का उत्साह-पूर्ण भाव भरने का प्रयास अधिक सराहनीय सिद्ध हुआ है। इसके लिए कवि ने खुली प्रकृति के प्रत्येक स्वरूप की कर्मशीलता का भावपूर्ण चित्रांकन किया है। उन भावों को ‘इबारत के सुनहरे वर्क से मन मढ़के’ कहने का दृष्टान्त निश्चय ही सोए हुए भावों को जगाने की दिशा में एक सफल प्रयास कहा जा सकता है। सूरज, पंछी, हवा, बरसात आदि के उपमान बड़े ही भाववर्द्धक और प्रेरक हैं।

2. प्रस्तुत पद्यांश की दृष्टान्त-योजना न केवल उत्साहवर्द्धक है, अपितु अधिक सटीक और विषय के अनुकूल है। इसे सार्थक, प्रभावशाली और भावपूर्ण बनाने के लिए भाषा के शब्द-चयन सरल और सुबोध हैं। सूरज, पंछी, हवा और बरसात को मनुष्य की तरह कर्मरत रहने का उल्लेख मानवीकरण अलंकार का अनूठा उदाहरण है। इसमें चित्रात्मकता नामक विशेषता आ गई है। वीर रस के प्रवाह से प्रेरणादायक शैली हृदयस्पर्शी रूप में प्रवाहित हुई है।

3. प्रस्तुत पद्यांश का मुख्य भाव है-मनुष्य के सोए हुए भावों को जगाकर उसे निरन्तर कर्मरत बनाकर विकास करते जाने का उत्साह प्रदान करना।

पद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. कवि ने किसे सुनहरे वर्क से मन को मढ़ने को कहा है?
  2. ‘जिस जगह जागा, सवेरे उस जगह से बढ़के सो’ का क्या आशय है?

उत्तर:

  1. कवि ने दिन-भर पेड़, पत्ती, पानी, बन्द घर, खुले-फैले खेत धानी, हवा, बरसात, सूखा, नमी आदि की इबारत के सुनहरे वर्क से मन को मढ़ने को कहा है।
  2. ‘जिस जगह जागा, सवेरे उस जगह से बढ़के सो’ का आशय यह है कि हम जो आज हैं आने वाले कल से कहीं बेहतर हों।

MP Board Class 11th Hindi Solutions

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 2 शिक्षा

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 2 शिक्षा (निबंध, स्वामी विवेकानन्द)

शिक्षा पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

शिक्षा लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ज्ञान का मूल उद्गम स्थान कौन-सा है?
उत्तर:
ज्ञान का मूल उद्गम स्थान मन हैं। ज्ञान पर प्रायः पर्दा पड़ा रहता है। यह पर्दा जब धीरे-धीरे हटता है, तब हम कुछ सीखने लगते हैं। इससे हमारे ज्ञान की वृद्धि होती जाती है।

प्रश्न 2.
व्यक्ति सर्वज्ञ सर्वदर्शी कब बनता है?
उत्तर:
व्यक्ति सर्वज्ञ सर्वदर्शी तब बनता है, जब उसके मन में मौजूद ज्ञान पर पड़ा हुआ पर्दा पूरी तरह से हट जाता है। जब तक यह पर्दा पड़ा रहता है, तब तक वह अज्ञानी बना रहता है।

प्रश्न 3.
शिक्षा में शिक्षक की क्या भूमिका है? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिक्षा में शिक्षक की बहुत बड़ी भूमिका है। शिक्षक यह भली प्रकार जानता है कि मनुष्य के भीतर सारे ज्ञान का भण्डार भरा हुआ है। उसे केवल प्रबोध देने और जागृति ला देने की आवश्यकता है। इससे वह किसी की भी जीवनधारा को बिल्कुल बदल देता है।

प्रश्न 4.
विवेकानन्द ने आविष्कार का क्या अर्थ बतलाया है?
उत्तर:
विवेकानन्द ने आविष्कार का अर्थ मनुष्य का अपने अनन्त ज्ञान-स्वरूप: आत्मा के ऊपर से पड़े हुए पर्दे को हटा लेना बतलाया है।

प्रश्न 5.
काँच के समान पारदर्शी किसे कहा गया है?
उत्तर:
अनेक मनुष्यों के अन्दर दिव्य ज्योति होती है। वह अज्ञान के अन्धकार से ढकी रहती है। उसे जब पवित्रता और निःस्वार्थता के द्वारा हटाने का प्रयास किया जाता है, तब वह चमकने लगती है। इसे ही काँच के समान पारदर्शी कहा गया है।

MP Board Solutions

शिक्षा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
शिक्षा मनुष्य में अन्तर्निहित पूर्णता को किस प्रकार अभिव्यक्त करती है?
उत्तर:
मनुष्य के मन में ज्ञान मौजूद होता है। वह स्वभाव-सिद्ध होता है। वह चाहे किसी प्रकार का क्यों न हो, वह उसके भीतर ही होता है। वह कहीं बाहर से उसमें नहीं आता है। उस पर अज्ञान का पर्दा पड़ा होता है। मनुष्य उसे खोज अर्थात् कुछ सीख-समझकर हटाता है। इस प्रकार मनुष्य की अन्तर्निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना ही शिक्षा है।

प्रश्न 2.
सुधार के लिए बलात् उद्योग करने का परिणाम सदैव उल्टा ही क्यों होता है?
उत्तर:
सुधार के लिए बलात् उद्योग करने का परिणाम हमेशा उल्टा ही होता है जिसमें कोई क्षमता और योग्यता न हो। अगर उसे कोई योग्य बनाना चाहे तो वह जो कुछ भी है, वह भी नहीं रह पाएगा। हम यह प्रायः देखते हैं कि माता-पिता या अभिभावक अपने बच्चों को लिखने-पढ़ने के लिए उनके पीछे हमेशा लगे रहते हैं। उन्हें कोसते रहते हैं कि वे अपने जीवन में कुछ भी न सीख सकते हैं और न बन सकते हैं। इसका परिणाम यह निकलता है कि उनके बच्चे उस हीनभावना का शिकार होकर सचमुच में कभी न कुछ सीख पाते हैं और न कुछ बन पाते हैं।

प्रश्न 3.
मनुष्य-निर्माण, जीवन-निर्माण और चरित्र-निर्माण कैसे किया जा सकता है?
उत्तर:
मनुष्य के भीतर सभी प्रकार का ज्ञान भरा हआ है। उसे केवल जगाने या प्रबोध देने की आवश्यकता होती है। यह काम शिक्षा ही करती है। शिक्षा के द्वारा हम अपने भीतर के ज्ञान का अनुभव करते हैं। अगर हमें जीवन-निर्माण, मनुष्य-निर्माण और चरित्र-निर्माण करना है, तो हमें ऐसे विचारों की अनुभूति कर लेनी चाहिए, जो इनके लिए सहायक या अनुकूल हों। इसके लिए यह बेहद आवश्यक है कि हम जीवन-निर्माण, मनुष्य- निर्माण और चरित्र-निर्माण में सहायक चुने हुए विचारों को ही अनुभूति करके अपना कदम बढ़ाएँ। इस प्रकार ही मनुष्य-निर्माण, जीवन-निर्माण और चरित्र-निर्माण किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
“तुम केवल बाधाओं को हटा सकते हो और ज्ञान अपने स्वाभाविक रूप से प्रकट हो जाएगा।” इस उक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आशय-“तुम केवल बाधाओं को हटा सकते हो और ज्ञान अपने स्वाभाविक रूप से प्रकट हो जाएगा।

उपर्युक्त वाक्य का आशय यह है कि किसी को खासतौर से बालक को शिक्षित करना बहुत ही कठिन होता है। यह इसलिए कि वह अपनी प्रकृति के ही अनुसार अपना विकास कर लेता है। इस प्रकार वह स्वयं को स्वयं ही शिक्षित करता है। उसे अपने विकास में किसी दूसरे का हस्तक्षेप करना उसके लिए हानिकारक सिद्ध होता है। इस सम्बन्ध में इतना अवश्य कहा जा सकता है कि अगर कोई उसे शिक्षित करना। चाहता है, तो वह उसे उसके अपने ही तौर-तरीके से विकास करने में उसका साथ – दे। उसकी इच्छानुसारं उसकी सहायता करे। इस प्रकार के सकारात्मक कदम उठाकर ही कोई किसी बालक को शिक्षित कर सकता है। उसके विकास के मार्ग में आने वाली कठिनाइयों को दूर कर सकता है। ऐसा करने से ही उसके भीतर का सोया’ हुआ ज्ञान अपने आप जग जाएगा।

प्रश्न 5.
पाठ के आधार पर ज्ञानी और अज्ञानी में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य के भीतर हरेक प्रकारका ज्ञान भरा होता है। उसमें लौकिक या आध्यात्मिक दोनों ही होता है। उसके भीतर के ज्ञान पर अज्ञान का पर्दा पड़ा रहता है। जब वह किसी से कुछ सीखता-समझता है, तब वह पर्दा धीरे-धीरे हटने लगता है। इससे उसका ज्ञान बढ़ता जाता है। फिर वह औरों की अपेक्षा अधिक ज्ञानी और विवेकी हो जाता है। इसके विपरीत जिस पर अज्ञान का पर्दा पड़ा ही रहता है, वह अज्ञानी और मूर्ख होता है। इस प्रकार मनुष्य के भीतर ज्ञान-अज्ञान दोनों ही होता है।

शिक्षा भाव विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव-विस्तार कीजिए।
(क) “कार्य को पूजा की भावना से करो”।
(ख) अतीत जीवनों ने हमारी प्रवृत्तियों को गढ़ा है।
(ग) स्वाधीनता विकास की पहली शर्त है।
(घ) जो जहाँ पर है उसे वहीं से आगे बढ़ाओ।
उत्तर:
(क) “कार्य को पूजा की भावना से करो”। हमें किसी काम को सच्चाई और लगन से करना चाहिए। इससे ही सफलता मिलती है। दूसरी बात यह हमें अपने काम के उचित-अनुचित पर भी अवश्य ध्यान देना चाहिए। जो काम हमारे लिए उचित है उसे ही हमें करना चाहिए। जो काम हमारे लिए अनचित है, उस हमें विल्कल ही नहीं करना चाहिए। शिक्षक का काम शिक्षार्थी को शिक्षा देना है न कि उसे उपदेश देना। उसका केवल इतना ही काम होता है कि वह शिक्षार्थी के भीतर के सोए हुए ज्ञान को जगा दे। दूसरी ओर शिक्षार्थी का यह काम होता है कि वह अपने शिक्षा के द्वारा दी गई शिक्षा को ग्रहण करें। दोनों को ही अपना-अपना काम पूजा की भावना से करना चाहिए। इस प्रकार से काम करने से निश्चय ही सफलता मिलती है। इसीलिए किसी अंग्रेजी कवि ने कहा है-
‘Work is worship

(ख) ‘अतीत जीवनों ने हमारी प्रवृत्तियों को गढ़ा है।’
अतीत का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। हम जो कुछ अनुभव करते हैं, अतीत से करते हैं। इसलिए अतीत को भूलाकर हम वर्तमान को सफल नहीं बना सकते हैं। हमारे युग महापुरुष और मार्गदर्शक अतीत की ऐसी जीवन ज्योति हैं, जिनसे हम अपने अज्ञान के अन्धकार को दूर कर अपने जीवन को खुशहाल और सम्पन्न बना सकते हैं। अगर हम अपने जीवन में सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ते जा रहे हैं, तो इसका श्रेय अतीत जीवनों को दिया जा सकता है। ऐसा इसलिए कि अतीत जीवनों ने हमारी ऐसी प्रवृत्तियों को गढ़ा है, जिनसे हम अपने जीवन की सब बातों को बहुत अधिक सुन्दर ढंग से कर सकते हैं।

(ग) ‘स्वाधीनता विकास की पहली शर्त है।’
स्वाधीनता का महत्त्व सबके के लिए होता है। जिसका जीवन स्वाधीन नहीं है, वह अपना विकास नहीं कर सकता है। इसलिए किसी को विकसित होने या करने के लिए यह सबसे पहले आवश्यक तत्त्व है। उसकी स्वाधीनता पर किसी प्रकार आँच न आने दें। ऐसा करके हम किसी का मार्गदर्शक बन सकते हैं। इसके विपरीत कदम उठाने से विकास का प्रवाह रुक जाता है। इससे बड़ी-बड़ी कठिनाइयाँ खड़ी हो जाती हैं। चारों ओर अव्यवस्था और अशान्ति फैखने लगती है। सदियों तक स्वाधीन न होने के कारण हमारे देश का विकास नहीं हो सकीर उसमें कभी चैन-शान्ति का वातावरण नहीं बन सका। लेकिन जैसे ही वह स्वाधीन हुआ, वैसे उसमें विकास के नए-नए द्वार खुलने लगे। देखते-देखते वह विकासशील देशों से आगे बढ़कर विकसित देशों के करीब-करीब पहुँच गया है।

(घ) ‘जो जहाँ पर है, उसे वहीं से आगे बढ़ाओ।’
हमें किसी का विकास करने के लिए उसकी कमजोरियों के लिए उसे नहीं कोसना चाहिए। उसे तो उत्साहित करना चाहिए। अच्छाइयों को बढ़ा-चढ़ाकर उसे बताना चाहिए। इस प्रकार हमें किसी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उसके कमजोर विचारों, हीनभावनाओं और उसके द्वारा उठाए गये अनुचित कदमों को उसे नहीं बताना चाहिए। उसे तो उत्साहित करते हुए उसकी आवश्यकता के अनुसार ही उसे आगे बढ़ाना चाहिए। इससे वह उन सभी बातों को और अधिक अच्छी तरह से कर सकता है, जिनकी उसे आवश्यकता है। इस प्रकार किसी का विकास करने के लिए उसे और हौसला देकर उसे आगे ही बढ़ाना चाहिए।

MP Board Solutions

शिक्षा भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नांकित शब्दों की सन्धि कीजिए और सन्धि का नाम भी लिखिए-
अन्तर्निहित, गुरुत्वाकर्षण, प्रतित्ये, खाद्यान्न, जीवाणु।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 2 शिक्षा img-1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए।
शिक्षा, ज्ञानी, व्यक्त, लौकिक, समर्थ, शुद्ध, धर्म।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 2 शिक्षा img-2

प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखिए

  1. प्रेरणां देने वाला।
  2. जिसे सब विषयों का ज्ञान हो।
  3. जिसकी सीमा न हो।
  4. जिसकी मृत्यु न हो।
  5. दूर की बातों को सोचने वाला।

उत्तर:

  1. प्रेरक
  2. सर्वज्ञ
  3. असीम
  4. अमर,
  5. दूरदर्शी

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों की रचना एवं शब्द के आधार पर शुद्ध करके लिखिए

  1. न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण का आविष्कार की।
  2. विसाल बुद्धि एक छोटी जीवानकोश में है।
  3. सभी ज्ञान और सभी शक्तियाँ आतमा के भीतर हैं।
  4. मृत्यु का सामना ही क्यों न करना पडे साक्षात।
  5. शायद हम लोग कानपुर अवश्यक जाँएग।

उत्तर:

  1. न्यूटन ने गुरुत्वाकार्पण का आविष्कार किया।
  2. विशाल बुद्धि एक छोटे-से जीवाणुकोश में है।
  3. सभी ज्ञान और शक्तियाँ आत्मा के भीतर हैं।
  4. साक्षात् मृत्यु का ही सामना क्यों न करना पड़े।
  5. हम लोग कानपुर अवश्य जाएँगे।

शिक्षा अपठित गद्यांश

राष्ट्रनिर्माण का दायित्व उसके नागरिकों पर होता है। इस दृष्टि से भारत के नव-निर्माण का दायित्व विद्यार्थियों के ऊपर भी है क्योंकि आज का विद्यार्थी कल का नागरिक है। राष्ट्र के विकास का अर्थ है उसके नागरिकों का विकास। अतः प्रत्येक छात्र-छात्रा को अपने भावी जीवन का निर्माण बड़ी सतर्कता के साथ करना चाहिए। उन्हें अपने राष्ट्र, समाज, धर्म-संस्कृति के विकास का लक्ष्य एक क्षण के लिए भी तिरोहित नहीं होने देना चाहिए। विद्यार्थियों को अपने जीवन का निर्माण राष्ट्रीय हित को दृष्टिगत रखते हुए करना चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनकी उन्नति राष्ट्र और समाज के लिए भार-स्वरूप होगी।

प्रश्न 1.
इस गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर:
आज के विद्यार्थी का दायित्व।

प्रश्न 2.
गद्यांश के सार को अपने शब्दों में लिखिए।
उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
उत्तर:
राष्ट्र के नव-निर्माण का दायित्व आज के विद्यार्थियों के ऊपर है। इसलिए हरेक विद्यार्थी को अपने राष्ट्र, समाज, धर्म-संस्कृति के विकास के प्रति हमेशा ही तत्पर रहना चाहिए। वे ऐसा करके ही अपने जीवन को महान बना सकते हैं।

प्रश्न 3.
राष्ट्र के विकास का क्या अर्थ है?
उत्तर:
राष्ट्र विकास का अर्थ है-राष्ट्र के नागरिकों का विकास।

प्रश्न 4.
छात्रों को अपने जीवन का निर्माण किसको दृष्टिगत रखकर करना चाहिए।
उत्तर:
छात्रों को अपने जीवन का निर्माण अपने राष्ट्र, समाज, धर्म और संस्कृति के विकास को दृष्टिगत रखकर करना चाहिए।

MP Board Solutions

शिक्षा योग्यता विस्तार

प्रश्न 1.
अपने परिवेश के विभिन्न दो शिक्षाविद्/कवि लेखक की संक्षिप्त जानकारी एकत्रित कर जीवनी लिखिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र-छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 2.
“मातृभाषा ही सर्वश्रेष्ठ है” विषय पर अपने मत को स्पष्ट करते हुए दो अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र-छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 3.
शिक्षा विषय से जुड़ी किसी लघु नाटिका को खोजकर वार्षिक उत्सव में उसका अभिनय कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र-छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

शिक्षा परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

शिक्षा लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आविष्कार का क्या अर्थ है?
उत्तर:
आविष्कार का अर्थ है-मनुष्य का अपनी अनन्त ज्ञानस्वरूप आत्मा के । ऊपर से पड़े हुए पर्दे को उठाना।

प्रश्न 2.
हमारे मन में ज्ञान किस प्रकार छिपा हुआ है?
उत्तर:
हमारे मन में ज्ञान चकमक पत्थर के टुकड़े में आग के समान छिपा हुआ है। वह किसी सुझाव या शिक्षा रूपी घर्षण के द्वारा देखते-देखते ही प्रकाशित होने लगता है।

प्रश्न 3.
लड़कों को ठोक-पीटकर शिक्षित बनाने की प्रणाली का क्यों अन्त कर देना चाहिए।
उत्तर:
लड़कों को ठोक-पीटकर शिक्षित बनाने की प्रणाली का अन्त कर देना चाहिए। यह इसलिए कि वे अपने माता-पिता के अनुचित दबाव के कारण अपने विकास का स्वतन्त्र अवसर प्राप्त नहीं कर पाते हैं।

प्रश्न 4.
श्री रामकृष्णदेव ने किस प्रकार निकम्मों की जीवन धारा को बदल दिया?
उत्तर:
श्री रामकृष्णदेव ने निकम्मों के प्रति आशा और उत्साह के भावों को. भरा। इस प्रकार उन्होंने उनकी जीवनधारा को बिल्कुल ही बदल दिया।

प्रश्न 5.
विदेशी भाषा की शिक्षा से क्या हानि होती है?
उत्तर:
विदेशी भाषा की शिक्षा से बहुत बड़ी हानि होती है। इससे समाज और समाज के लोगों का अभाव दूर नहीं हो पाता है। उनका चारित्रिक विकास भी नहीं हो पाता।

शिक्षा दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मनुष्य के अन्दर ज्ञान का स्वरूप क्या है?
उत्तर:
मनुष्य के अन्दर सभी प्रकार का ज्ञान भरा होता है। लेकिन वह अज्ञान के पर्दे से ढका रहता है। इसलिए वह प्रायः प्रकाशित नहीं हो पाता है। जब उस पर पड़ा हुआ पर्दा ज्ञान के प्रभाव से धीरे-धीरे हटने लगता है। तब वह प्रकाशित होने लगता है। इसे हम सीखना कहते हैं। सीखने की यह प्रक्रिया जैसे-जैसे बढ़ती । जाती है, वैसे-वैसे ज्ञान की वृद्धि होती जाती है। इस प्रकार जिस पर अज्ञान का पड़ा हआ पर्दा उठता जाता है, वह औरों की अपेक्षा अधिक ज्ञानी हो जाता है। जिस पर यह पर्दा पड़ा रहता है, वह अज्ञानी ही बना रहता है।

प्रश्न 2.
शिक्षक का क्या कार्य होता है?
उत्तर:
शिक्षक को यह समझकर शिक्षा नहीं देना चाहिए कि वह शिक्षा दे रहा है। अगर वह ऐसा समझकर किसी को शिक्षा दे रहा है, तो उसे सफलता नहीं मिल सकती है। उसे तो यह समझकर शिक्षा देनी चाहिए कि जिसे वह शिक्षा दे रहा है, उसके अन्दर सारा ज्ञान भरा हुआ है। उसे केवल जगाने या प्रबोध देने की आवश्यकता . है। इस प्रकार उसे केवल इतना ही करना है कि वह जिसे शिक्षा दे रहा है, वह अपने पैरों पर खड़ा होकर अपना विकास करना सीख ले।

प्रश्न 3.
विद्यार्थियों की शिक्षा में किस प्रकार का परिवर्तन होना चाहिए?
उत्तर:
विद्यार्थियों की शिक्षा में उनकी आवश्यकता के ही अनुसार परिवर्तन होना चाहिए। ऐसा करते समय हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अतीत-जीवनों से उनकी प्रवृत्तियों को गढ़ा है। इसलिए उनकी प्रवृत्तियों के अनुसार उन्हें शिक्षा देनी चाहिए। उनकी कभी भी किसी विशेष प्रवृत्तियों को नहीं नष्ट करना चाहिए। किसी प्रकार के मन्द और निकम्मे विद्यार्थियों को नहीं कोसना चाहिए। ऐसे विद्यार्थियों के भी प्रति आशा और उत्साह भरी शिक्षा देनी चाहिए। इस प्रकार परम्परागत या रूढ़िगत विचारों से हमें हटकर विद्यार्थियों की शिक्षा में युग की माँग के अनुसार परिवर्तन करना चाहिए।

प्रश्न 4.
आज की शिक्षा कैसी होनी चाहिए?
उत्तर:
आज की शिक्षा आज की आवश्यकता के ही अनुसार होनी चाहिए। आज हममें चरित्र बल, मानसिक बल, बुद्धि बल आदि की बहुत कमी हो गई है। इसके साथ ही हमारे देश में उद्योग-धन्धों की भी अधिक कमी है। फलस्वरूप हमारे यहाँ बेरोजगारी बहुत बढ़ गई है। इससे हम और देशों की तुलना में बहुत पीछे हैं। इस प्रकार कमियों को दूर करने वाली हमें आज एक ऐसी शिक्षा चाहिए, जो हमें विदेशी भाषा और विज्ञान की जानकारी दे सके और हमें विदेशी प्रभाव से मुक्त रखे। हमारे ज्ञान-भण्डार की शाखाओं को विकसित करे। हमारी विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक साधनों को बढ़ाए। इसके साथ-ही-साथ भविष्य के लिए कुछ बचाए रखने का भी ज्ञान दे सके।

प्रश्न 5.
सभी प्रकार की शिक्षा का क्या उद्देश्य होना चाहिए?
उत्तर:
सभी प्रकार की शिक्षा का उद्देश्य निम्नलिखित होना चाहिए-

  1. सभी प्रकार की शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य का निर्माण होना चाहिए।
  2. सभी प्रकार की शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य का विकास करना होना चाहिए।
  3. सभी प्रकार की शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य की इच्छाशक्ति को प्रवाहित और प्रकाशित कर कल्याणकारी बनाने का होना चाहिए।
  4. सभी प्रकार की शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य बनाने वाली होनी चाहिए।
  5. सभी प्रकार की शिक्षा का उद्देश्य परस्पर मेल-मिलाप के भावों को पैदा करना होना चाहिए।

MP Board Solutions

शिक्षा लेखक-परिचय

प्रश्न.
स्वामी विवेकानन्द का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय-स्वामी विवेकानन्द संसार के महापुरुषों में से एक हैं। उनका जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेन्द्र नाथ था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त और माता भुवनेश्वरी देवी थीं। कुछ समय बाद नरेन्द्र नाथ विवेकानन्द के नाम से संसार में प्रसिद्ध हुए। नरेन्द्र नाथ बचपन से ही मेधावी, बुद्धिमान, निर्भीक, साहसी और स्मृतिधर थे। अपनी प्रारम्भिक शिक्षा समाप्त करने के बाद बी.ए. में प्रवेश लेकर पढ़ाई आरम्भ की, तो उनके पिता का स्वर्गवास हो गया। इससे उनके पारिवारिक जीवन में महासंकट आ गया। इसे देखकर उन्होंने नौकरी की तलाश की, लेकिन उन्हें इस दिशा में कोई सफलता नहीं मिली।

उनके अन्दर एक ओर भूख से तड़पते अपने परिवार को भरपेट भोजन-पानी जुटाने की जिम्मेदारी जोर मार रही थी, तो दूसरी ओर विश्व-कल्याण के लिए. धर्म-प्रचार और सेवा की भावना प्रवाहित हो रही थी। उन्होंने जनवरी, 1887 में संन्यास लेकर अपने विवेक से धर्म प्रचार और जन सेवा का व्रत लिया। अपने साथियों को लेकर उन्होंने कोलकाता के उत्तर प्रान्त के बराह नगर में बराह नगर मठ और रामकृष्ण संघ की स्थापना की। उन्होंने देश-विदेश के अनेक स्थानों का भ्रमण कर धर्म प्रचार किया। 4 जुलाई, 1902 में उनका निधन मात्र 39 वर्ष की आयु में हो गया।

महत्त्व :
स्वामी विवेकानन्द ने धर्म का प्रचार-प्रसार करते हुए सन् 1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित विश्व धर्म परिपद् में भाग लिया। इसके बाद पाश्चात्य देशों में सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का जोरदार प्रचार किया। इसके बाद उन्होंने भारतीय युवकों को प्रज्ञावान, दृढ़ निश्चयी, तेजस्वी, निर्भीक और आत्मनिर्भर बनने के लिए उत्साहित किया। उन्होंने उन्हें प्रेरित करते हुए कहा

“ गर्व से कहो कि मैं भारतीय हूँ। और प्रत्येक भारतवासी मेरा भाई है, भारत के कल्याण में मेरा कल्याण है।”

इस प्रकार स्वामी विवेकानन्द ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को पूरे संसार में प्रसारित किया।

शिक्षा पाठ का सारांश

प्रश्न.
स्वामी विवेकानन्द द्वारा लिखित निबन्ध ‘शिक्षा’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
स्वामी विवेकानन्द द्वारा लिखित निबन्ध ‘शिक्षा’ में शिक्षा के स्वरूप और उसके उद्देश्य पर सीधा प्रकाश डाला गया है। लेखक का यह मानना है कि हमारा मन ज्ञान का भण्डार है। उसे शिक्षा ही प्रकट करती है। हम जो कुछ सीखते हैं, वह वास्तव में हम आविष्कार करते हैं। अपनी अनन्त ज्ञानस्वरूप आत्मा के ऊपर से अज्ञान के पर्दे को हटा लेना ही आविष्कार है। इसी प्रकार न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण का आविष्कार किया था। जैसे-जैसे आविष्कार की प्रक्रिया बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे हमारे अज्ञान का पर्दा हटने से ज्ञान की वृद्धि होती जाती है। जब अज्ञान का पर्दा पूरी तरह से हट जाता है, तब हम सर्वज्ञ, सर्वदर्शी हो जाते हैं। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि चकमक पत्थर के समान हमारे मन में ही ज्ञान की ज्योति छिपी हुई है। उसे किसी प्रकार के सुझाव या शिक्षा देखते-देखते प्रकाशित कर देती है। यह तभी सम्भव है, जब हम अपने अनुभव और अपनी विचार-शक्ति के द्वारा इसे अच्छी तरह से समझकर ग्रहण करें। दूसरी बात यह कि एक फैले हुए विशाल वट वृक्ष की एक छोटे से बीज में छिपी हुई शक्ति के समान हमारी आत्मा में अनन्त शक्ति है। इसको जामना ही उसका प्रकट होना है।

पौधे की तरह बालक का भी विकास अपनी प्रकृति के ही अनुसार होता है। इससे बालक स्वयं को शिक्षित करता है। इसलिए उसे दी गई शिक्षा उसमें स्वाभाविक रूप से ही प्रकट होगी। इस दृष्टि से शिक्षक को इस भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए कि वह उसे शिक्षा दे रहा है। अगर वह ऐसा भ्रम रखता है तो इससे उसे सफलता नहीं मिल सकती है। उसे यह बोध होना चाहिए कि सारा ज्ञान मनुष्य के भीतर मौजूद है। उसे केवल जगाने की आवश्यकता है। बालकों में मौजूद इस ज्ञान को जगाने के लिए शिक्षक को ऐसा प्रयास करना चाहिए कि वह अपने हाथ, पैर, कान और आँखों के उचित उपयोग के लिए अपनी बुद्धि का प्रयोग करना सीख ले। इसलिए किसी बालक को अनुचित दबाव से शिक्षित बनाने की परिपाटी को त्याग देना चाहिए। उसे तो स्वतन्त्र रूप से विकास करने का मौका देना चाहिए।

इससे वह भले ही महान न बने, लेकिन वह महान बनाने का प्रयास तो कर सकता है। अगर हम अपने बच्चों को डाँट-फटकार कर और उन्हें हीन दृष्टि से योग्य बनाने की कोशिश करते हैं, तो वे कभी योग्य नहीं बन सकते हैं। वे तो अयोग्य ही बनकर रह जाएंगे। इसलिए हमें उन्हें हौसला देकर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करना चाहिए। एक आदर्श विद्यार्थी के लिए आवश्यक है कि उसे समय की आवश्यकता के अनुसार शिक्षा दी जाए। उसकी प्रवृत्तियों के अनुसार उसे मार्ग मिले। इस आधार पर ही किसी को आगे बढ़ाया जा सकता है। श्री रामकृष्ण देव ने जीवन भर यही किया। उन्होंने निराश और दुःखी मनुष्यों में भी आशा और उत्साह की ज्योति जलाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया।

हमें शिक्षा को विविध प्रकार के ज्ञान का ढेर नहीं समझना चाहिए। हमें जीवन-निर्माण, मनुष्य-निर्माण और चरित्र-निर्माण में सहायक विचारों को ही ग्रहण करना चाहिए। ऐसे विचारों के द्वारा अपने जीवन और चरित्र-निर्माण कर लेने वाला किसी ग्रन्थालय को कण्ठस्थ करने वाले से कहीं अधिक शिक्षित और योग्य कहा जा सकता है। शिक्षा का उद्देश्य बड़ी-बड़ी उपाधियाँ लेकर वकील या इससे बड़ा कोई पदाधिकारी वन जाना बिल्कुल नहीं है। ऐसा इसलिए कि इससे देश का कुछ भी भला नहीं हो ‘सकता है। देश का भला तो उस शिक्षा से होगा, जो देश के दीन-दुखियों की पुकार सुन सके। देश के अभाव को दूर करने के लिए देशवासियों में चरित्र-बल पैदा करे। उनमें अपार बुद्धि और साहस को जगा सके।

इस प्रकार की शिक्षा से हम आत्मनिर्भर होकर पराधीनता से मुक्त होकर विविध प्रकार के ज्ञान-विज्ञान का अध्ययन-मनन कर सकते हैं। अपने देश में छोटे-बड़े उद्योग-धन्धों का विकास करके बढ़ती हुई बेरोजगारी पर लगाम कस सकते हैं। यही नहीं, अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए कुछ बचाकर रख सकते हैं। मनुष्य का निर्माण करना ही शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य होना चाहिए। वास्तविक शिक्षा वही होती है, जो मनुष्य की सोई हुई इच्छा-शक्ति को जगाकर उसे कल्याणकारी बनाती है। आज हमारे देश को हर प्रकार से मनुष्य बनाने वाली शिक्षा की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

MP Board Solutions

शिक्षा संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

1. मनुष्य की अन्तर्निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना ही शिक्षा है। ज्ञान मनुष्य में स्वभाव-सिद्ध है; कोई भी ज्ञान बाहर से नहीं आता, सब अन्दर ही है। हम जो कहते हैं कि मनुष्य ‘जानता’ है, यथार्थ में, मानसशास्त्र-संगत भाषा में हमें कहना चाहिए कि वह-आविष्कार करता है, ‘अनावृत’ या ‘प्रकट’ करता है। मनुष्य जो कुछ ‘सीखता है, वह वास्तव में ‘आविष्कार करना ही है। ‘आविष्कार’ का अर्थ है-मनुष्य का अपनी अनन्त ज्ञानस्वरूप आत्मा के ऊपर से आवरण को हटा लेना।

शब्दार्थ :
अन्तर्निहित-मन में मौजूद। अभिव्यक्त-प्रकट। यथार्थ-वास्तव। आविष्कार-खोज ।अनावृत-ढका हुआ, पर्दा पड़ा हुआ।अनन्त-अन्त रहित। आवरण-पर्दा, ढक्कन।

प्रसंग :
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य भाग-1’ में संकलित तथा स्वामी विवेकानन्द लिखित निबन्ध ‘शिक्षा’ से अवतरित है। इसमें लेखक ने यह बतलाना चाहा है कि मनुष्य के अन्दर ही ज्ञान होता है।

व्याख्या :
स्वामी विवेकानन्द का कहना है कि शिक्षा का अर्थ है-मनुष्य के मन में मौजूद ज्ञान के भण्डार को प्रकट करना। दूसरे शब्दों में मनुष्य के भीतर भरे हुए ज्ञान को बाहर शिक्षा ही प्रकट करती है। इसलिए हमें इस भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए कि मनुष्य को ज्ञान बाहर से आता है। उसमें तो सभी प्रकार के ज्ञान उसके स्वभाव के अनुसार ही भरे होते हैं। अगर कोई यह कहता है कि मनुष्य सब कुछ जानता-समझता है, यह शत-प्रतिशत सही है। इसे हम मानस-शास्त्र-संगत भाषा में कहना चाहें, तो यह कह सकते हैं कि वह खोज करता है। अपने भीतर के ज्ञान के ऊपर पड़े हुए, पर्दे को हटाता हैं। इस प्रकार वह जो कुछ जानता-समझता है, वह सब कुछ उसकी खोज करना ही होता है। इस आधार पर हम यह कह सकते हैं कि मनुष्य का अपने भीतर मौजूद अपार और अनन्त ज्ञान के भण्डार के ऊपर पड़े पर्दे को हटा लेना ही उसकी खोज है।

विशेष :

  1. प्रस्तुत पंक्तियों में लेखक ने शिक्षा और खोज का अर्थ बतलाया है।
  2. भापा सरल और सुबोध है।
  3. शैली वर्णनात्मक है।
  4. यह अंश ज्ञानवर्द्धक है।
  5. यह अंश ज्ञानवर्द्धक है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) ज्ञान मनुष्य में किस प्रकार है?
(ii) आविष्कार का दूसरा अर्थ क्या है?
(iii) मनुष्य की आत्मा क्या है?
उत्तर:
(i) ज्ञान मनुष्य में स्वभाव सिद्ध है, क्योंकि वह बाहर से उसमें नहीं आता है। वह तो उसके भीतर उसके जन्म से ही होता है।
(ii) आविष्कार का दूसरा अर्थ है-सीखना, समझना।
(iii) मनुष्य की आत्मा अपार और अनन्त ज्ञान स्वरूप है।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न.
(i) शिक्षा क्या करती है?
(ii) हमारा जानना क्या है?
(iii) मनुष्य को कुछ सीखने-समझने से क्या लाभ होता है?
उत्तर:
(i) शिक्षा. मनुष्य के मन में मौजूद ज्ञान के ऊपर पड़े हुए अज्ञान के पर्दे को हटाती है।
(i) हमारा जीनना हमारे ज्ञान के ऊपर अज्ञान के पर्दे को हटाना है।
(iii) मनुष्य को सीखने-समझने से उसके ज्ञान का विस्तार होता है और अज्ञान का अन्त होने लगता है।

2. यह आवरण तह-पर-तह पड़ा है, वह अज्ञानी है। जिस पर से यह आवरण पूरा हट जाता है, वह सर्वज्ञ सर्वदर्शी हो जाता है। चकमक पत्थर के टुकड़े में अग्नि के समान, ज्ञान मन में निहित है और सुझाव या उद्दीपक-कारण ही वह घर्षण है, जो उस ज्ञानाग्नि को प्रकाशित कर देता है। सभी ज्ञान और सभी शक्तियाँ भीतर हैं। हम जिन्हें शक्तियाँ, प्रकृति के रहस्य या बल कहते हैं, वे सब भीतर ही हैं। मनुष्य की आत्मा से ही सारा ज्ञान आता है जो ज्ञान सनातन काल से मनुष्य के भीतर निहित है, उसी को वह बाहर प्रकट करता है, अपने भीतर ‘देख पाता है।

शब्दार्थ :
आवरण-पर्दा। सर्वदर्शी-सब कुछ देखने वाला। चकमक पत्थर-एक विशेष प्रकार का पत्थर। अग्नि-आग। निहित-छिपा हुआ। उद्दीपक-उत्तेजित करने वाला। ज्ञानाग्नि-ज्ञान की आग। सनातन-जो हमेशा से चला आ रहा है।

प्रसंग :
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य भाग-1’ में संकलित तथा स्वामी विवेकानन्द लिखित ‘शिक्षा’ से अवतरित है। इसमें लेखक ने मनुष्य के मन में मौजूद ज्ञान के स्वरूप को बतलाने का प्रयास किया है।

व्याख्या :
लेखक का कहना है कि जिस मनुष्य पर से अज्ञान का पर्दा उठ जाता है, वह और मनुष्यों की अपेक्षा अधिक ज्ञानी बन जाता है। इससे ठीक विपरीत जिस मनुष्य पर अज्ञान का पर्दा पड़ा रहता है, वह अज्ञानी ही बना रहता है। इस प्रकार अज्ञान के पर्दे में रहने वाला मनुष्य मूर्ख होता है और अज्ञान के पर्दे से बाहर रहने वाला मनुष्य सर्वज्ञ और सर्वदर्शी होता है। हमें यह अच्छी प्रकार से समझ लेना चाहिए कि मनुष्य के मन में ज्ञान चकमक पत्थर में छिपी हुई आग के समान होता है। वह किसी प्रकार की शिक्षा या सुझाव के द्वारा प्रकट होता है। इसके लिए मनुष्य को सत्संगति या सद्गुरु की शरण लेनी चाहिए। इससे उसे यह अच्छी प्रकार से समझ आ जाती है कि सभी प्रकार के ज्ञान और सभी प्रकार के बल मनुष्य के मन में ही मौजूद है। इस तरह मनुष्य के मन में सनातन काल से ही ज्ञान मौजूद है। उसे वह किसी सद्गुरु या सदुपदेश के द्वारा अपने भीतर होने का अनुभव कर पाता है। यही नहीं, वह उसे सबके सामने भी प्रकट कर देता है।

विशेष :

  1. मनुष्य के मन में मौजूद ज्ञान की दशा का उल्लेख किया गया है।
  2. मनुष्य के मन में मौजूद ज्ञान की उपमा चकमक पत्थर के टुकड़े से दी गई है इसलिए इसमें उपमा अलंकार है।
  3. तत्सम शब्दावली है।
  4. शैली सुबोध है।।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) कौन-सा आवरण तह पर पड़ा रहता है?
(ii) लेखक ने ‘चकमक पत्थर’ का क्यों उदाहरण दिया है?
(iii) अज्ञानी और सर्वज्ञ कौन होता है?
उत्तर:
(i) मनुष्य के मन में ज्ञान का भण्डार भरा होता है। लेकिन उसके तह पर अज्ञान का आवरण पड़ा रहता है।
(ii) लेखक ने ‘चकमक पत्थर’ का उदाहरण मनुष्य के भीतर छिपे हुए ज्ञान को समझाने के लिए दिया है। उसका यह मानना है कि जिस प्रकार चकमक पत्थर में आग छिपी रहती है, उसी प्रकार मनुष्य के भीतर ज्ञान छिपा हुआ है।
(iii) जिस मनुष्य पर अज्ञान का पदों पड़ा रहता है, वह अज्ञानी होता है। इसके विपरीत जिस मनुष्य पर से अज्ञान का पर्दा हट जाता है, वह सर्वज्ञ होता है।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) मनुष्य के भीतर कौन-कौन-सी शक्तियाँ होती हैं?
(ii) सुझाव का क्या फल होता है?
(iii) मनुष्य अपने भीतर किससे क्या देख पाता है?
उत्तर:
(i) मनुष्य के अपने भीतर सभी प्रकार के ज्ञान, प्रकृति के रहस्य और सभी प्रकार की शक्तियाँ होती हैं।
(ii) सुझाव का फल बहुत सुखद और लाभप्रद होता है, सुझाव वह घर्षण है, जो मनुष्य के भीतर छिपी हुई ज्ञान की आग को प्रकाशित कर देता है।
(iii) मनुष्य अपने भीतर छिपे हुए ज्ञान को अपनी आत्मा से देख पाता है।

MP Board Solutions

3. हमें विधायक विचार सामने रखने चाहिए। निषेधात्मक विचार लोगों को दुर्बल बना देते हैं। क्या तुमने यह नहीं देखा कि जहाँ माता-पिता पढ़ने-लिखने के लिए अपने बालकों के सदा पीछे लगे रहते हैं और कहा करते हैं कि तुम कभी कुछ सीख नहीं सकते, तुम गधे बने रहोगे, वहाँ बालक यथार्थ में वैसे ही बन जाते हैं यदि तुम उनसे सहानुभूति-भरी बातें करो और उन्हें उत्साह दो, तो समय पाकर उनकी उन्नति होना निश्चित है। यदि तुम उनके सामने विधायक विचार रखो, तो उनमें मनुष्यत्व आएगा और वे अपने पैरों पर खड़ा होना सीखेंगे। भाषा और साहित्य काव्य और कला, हर एक विषय में हमें मनुष्यों को उनके विचार और कार्य की भूलें नहीं बतानी चाहिए, वरन् उन्हें वह मार्ग दिखां देना चाहिए, जिससे वे इन सब बातों को और भी सुचारु रूप से कर सकें।

शब्दार्थ :
विधायक-सकारात्मक, निर्णयात्मक। निषेधात्मक/नकारात्मक/ दुर्बल-कमजोर । यथार्थ-वास्तव । मनुष्यत्व-मनुप्यता। पैरों पर खड़ा होना-आत्मनिर्भर होना। वरन्-बल्कि, अपितु। सुचारु-सुन्दर।

प्रसंग :
पूर्ववत्। इसमें लेखक ने बालकों को आत्मनिर्भर और योग्य बनाने के तौर-तरीकों को बतलाने का प्रयास किया है।

व्याख्या :
लेखक का कहना है कि बच्चों को शिक्षित करने के लिए उनके माता-पिता या अभिभावक को सकारात्मक अर्थात् अपनापन का विचार-भाव रखना चाहिए। उनके प्रति किसी प्रकार के नकारात्मक अर्थात् पराएपन का व्यवहार नहीं करना चाहिए। इस प्रकार के दुर्व्यवहार उनके प्रति किए जाने से वे कुछ सीख-समझ नहीं पाएंगे। यह प्रायः देखा जाता है कि जो माता-पिता या अभिभावक अपने बच्चों को उनकी इच्छा के विपरीत पढ़ने-लिखने के लिए दबाव डालते रहते हैं। उन्हें कोसते रहते हैं, वे वास्तव में पढ़-लिख नहीं पाते हैं। वे उनकी हीनता के शिकार होकर अयोग्य और दुर्बल बन जाते हैं। इसलिए हमें बच्चों की भावनाओं का आदर करना चाहिए। उनके प्रति सहानुभूति और सद्भावना रखनी चाहिए। उन्हें उत्साहित करना चाहिए। ऐसा करके ही हम उन्हें सुशिक्षित और सुयोग्य बना सकते हैं फिर उनमें मानवता आ जाएगी। वे आत्मनिर्भर होकर देश और समाज का बहुत बड़ा कल्याण करेंगे। इससे आने वाली पीढ़ी भी बहुत कुछ सीख-समझ सकती है।

लेखक का पुनः कहना है कि बच्चों को शिक्षित कर उन्हें योग्य बनाने के लिए उन्हें विविध प्रकार की भाषा, साहित्य, काव्य और कला के बारे में ज्ञान देना चाहिए। ऐसा करते समय हमें इस ओर ध्यान देना चाहिए कि वे इन विषयों में आए हुए मनुष्य के दोषों को न जान पाएं। हमारा तो यह प्रयास होना चाहिए कि वे इन विषयों में आए हुए मनुष्यों के गुणों-अच्छाइयों को अच्छी तरह से समझकर ग्रहण कर सके। इससे वे आदर्श विद्यार्थी की भूमिका निभाकर एक श्रेष्ठ नागरिक कहलाएँ।

विशेष :

  1. बच्चों को आदर्श विद्यार्थी बनाने के सुझाव दिए गए हैं।
  2. यह अंश शिक्षाप्रद है।
  3. भाषा की शब्दावली तत्सम शब्दों की है।
  4. शैली उपदेशात्मक है।
  5. ‘पैरों पर खड़ा होना’ मुहावरे का सार्थक प्रयोग है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) हमें विधायक विचार क्यों रखने चाहिए?
(ii) बच्चे कुछ नहीं सीख पाते हैं, ऐसा लेखक ने क्यों कहा हैं?
(iii) बच्चों के प्रति कैसा व्यवहार करना चाहिए?
उत्तर:
(i) हमें विधायक विचार ही बच्चों के सामने रखना चाहिए। यह इसलिए कि निषेधात्मक विचार दर्बल बना देते हैं।
(ii) बच्चे अपने माता-पिता से कुछ सीख नहीं पाते हैं। इसका कारण यह है कि उनके माता-पिता उन्हें हमेशा कोसते रहते हैं। वे उन्हें हीन और अयोग्य ही समझते हैं। वे उनमें छिपी हुई उनकी अच्छाइयों और सम्भावनाओं को नहीं देख पाते
(iii) बच्चों के प्रति हमें सरस, आत्मीयतापूर्ण और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करना चाहिए।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) बालक यथार्थ में कैसे बन जाते हैं?
(ii) बच्चों की उन्नति होना कैसे निश्चित है?
(iii) बच्चे आत्मनिर्भर होना कब सीखेंगे?
उत्तर:
(i) बालक यथार्थ में वैसे ही बन जाते हैं, जैसे उनके माता-पिता उन्हें चाहते हैं।
(ii) बच्चों की उन्नति होना तभी निश्चित है, जब उनके माता-पिता उनसे सहानुभूति-भरी बातें करें और उन्हें उत्साहित करते रहें।
(iii) बच्चे आत्मनिर्भर होना तभी सीखेंगे, जब उनमें मनुष्यता आएगी। उनमें मनुष्यता लाने के लिए विधायक विचारों को ही उनके सामने रखने होंगे।

4. विद्यार्थी की आवश्यकता के अनुसार शिक्षा में परिवर्तन होना चाहिए। अतीत जीवनों ने हमारी प्रवृत्तियों को गढ़ा है, इसलिए विद्यार्थी को उसकी प्रवृत्तियों के अनुसार मार्ग दिखाना चाहिए। जो जहाँ पर है, उसे वहीं से आगे बढ़ाओ। हमने देखा है कि जिनको हम निकम्मा समझते थे, उनको भी श्रीरामकृष्णदेव ने किस प्रकार उत्साहित किया और उनके जीवन का प्रवाह बिल्कुल बदल दिया। उन्होंने कभी भी किसी मनुष्य की विशेष प्रवृत्तियों को नष्ट नहीं किया। पन्होंने अत्यन्त पतित मनुष्यों के प्रति भी आशा और उत्साहपूर्ण वचन कहे और उन्हें ऊपर उठा दिया।

शब्दार्थ :
अतीत-बीते हुए। निकम्मा-निठल्ला, कामचोर। पतित-पापी, भ्रष्ट।

प्रसंग :
पूर्ववत्। इसमें लेखक ने विद्यार्थी को किस प्रकार शिक्षित करके योग्य बनाना चाहिए, इसे बतलाने का प्रयास किया है।

व्याख्या :
लेखक का कहना है कि विद्यार्थी को शिक्षा देने से पहले यह अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि उसे किस प्रकार की शिक्षा की आवश्यकता है। इस प्रकार उसकी आवश्यकता के अनुसार शिक्षा देनी चाहिए। आवश्यकतानुसार उसकी शिक्षा में हेर-फेर करने से हमें संकोच या देर नहीं करनी चाहिए। इस प्रकार का कदम उठाते समय हमें अतीतकालीन जीवनादर्शों को नहीं भूलना चाहिए। ऐसा इसलिए कि उसने हमारी प्रवृत्तियों को बनाया है। उससे हम आज आगे बढ़ रहे हैं। अगर हम अपने विद्यार्थियों को उन्हीं प्रवृत्तियों के अनुसार शिक्षा देंगे, तो वे निश्चय ही एक आदर्श विद्यार्थी बनकर एक श्रेष्ठ नागरिक की भूमिका निभा सकेंगे। अपने समाज और अपने देश को महान बनाने के लिए हमें यह अवश्य प्रयास करना चाहिए कि जो कोई जिस दिशा में विकास कर रहा है, उसे उसी दिशा में विकास करने दें। उसमें किसी प्रकार का. फेर-बदल न करें।

लेखक का पुनः कहना है कि हमें किसी का निठल्ला या कामचोर समझना नहीं चाहिए। अगर कोई ऐसा है, तो उसे कोसना नहीं चाहिए। उसे हीन भावना से नहीं देखना चाहिए। उसे हतोत्साहित करने के वजाय उसे उत्साहित ही करना चाहिए। यह हम अच्छी प्रकार से जानते हैं कि निठल्लों या कामचोरों को श्रीरामकृष्णदेव ने कभी न तो कोसा और न ही उन्हें हतोत्साहित किया। उन्होंने तो ऐसे व्यक्तियों को खूब उत्साहित किया। उससे उनकी जीवन धारा ऐसी वदल गई कि वे एक श्रेष्ठ नागरिक बनकर समाज और देश का कल्याण करने लगे। इस प्रकार श्रीरामकृष्णदेव ने किसी भी प्रकार के मनुष्य के जीवन को उच्च और श्रेष्ठ बनाने के लिए उसकी विशेप प्रवृत्तियों को कभी नहीं दवाया। उन्हें वैसे ही बढ़ने दिया। उन्होंने तो एक-से-एक अधम और गिरे हुए मनुप्य को उत्साहित कर और आशा दे-देकर ऊपर उठाने का सफल प्रयास किया।

विशेष :

  1. विद्यार्थी को उसकी आवश्यकतानुसार शिक्षा देने का सुझाव दिया गया
  2. श्रीरामकृष्णदेव के उल्लेख से विषय को स्पष्ट करने का सफल प्रयास है।
  3. हिन्दी-उर्दू की मिश्रित शब्दावली है।
  4. भाषा सरल है।
  5. यह अंश प्रेरणादायक रूप में है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) शिक्षा में किस प्रकार का परिवर्तन होना चाहिए?
(ii) विद्यार्थियों को किस प्रकार दिशा-निर्देश देना चाहिए?
(iii) ‘जो जहाँ पर है, उसे वहाँ से आगे बढ़ाओ।’ ऐसा लेखक ने क्यों कहा है?
उत्तर:
(i) शिक्षा में युग को ध्यान में रखकर विद्यार्थियों की आवश्यकता के अनुसार परिवर्तन होना चाहिए।
(ii) विद्यार्थियों को उनकी प्रवृत्तियों के अनुसार दिशा-निर्देश देना चाहिए।
(iii) ‘जो जहाँ पर है, उसे वहाँ से आगे बढ़ओ।’ ऐसा लेखक ने कहा है। ऐसा इसलिए कि जो जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, उस दिशा में उसके विकास की और सम्भावमाएँ बनी रहती हैं। अगर उसे विपरीत दिशा में बढ़ने के लिए उस पर दबाव डाला जाएगा, तो उसका हुआ विकास बिखर जाएगा। उसकी और सम्भावनाएँ भी समाप्त हो जाएँगी।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) श्रीरामकृष्णदेव ने किस प्रकार निकम्मों को आगे बढ़ाया?
(ii) गिरे हुए मनुष्यों को कैसे ऊपर उठाना चाहिए?
उत्तर:
(i) श्रीरामकृष्णदेव ने उत्साहित और प्रेरित करके निकम्मों को आगे बढ़ाया।
(ii) गिरे हुए मनुष्यों को ऊपर उठाने के लिए उनमें आशा और विश्वास भरना चाहिए।

MP Board Solutions

5. विदेशी भाषा में दूसरे के विचारों को रटकर, अपने मस्तिष्क में उन्हें दूंसकर और विश्वविद्यालयों की कुछ पदवियाँ प्राप्त करके, तुम अपने को शिक्षित समझते हो। क्या यही शिक्षा है? तुम्हारी शिक्षा का उद्देश्य क्या है? या तो मुन्शीगिरी करना, या वकील हो जानाध्या अधिक-से-अधिक डिप्टी मैजिस्ट्रेट बन जाना, जो मुन्शीगिरी का ही दूसरा रूप है। बस यही न? इससे तुमको या तुम्हारे देश को क्या लाभ होगा? आँखें खोलकर देखों, जो भारतखण्ड अन्न का अक्षय भण्डार रहा है, आज वही उसी अन्न के लिए कैसी करुण पुकार उठ रही है! क्या तुम्हारी शिक्षा इस अभाव की पूर्ति करेगी? वह शिक्षा जो जनसमुदाय को जीवन-संग्राम के उपयुक्त नहीं बनाती, जो उनकी चारित्र्य-शक्ति का विकास नहीं करती, जो उनमें दया का भाव और सिंह का साहस पैदा नहीं करती, क्या उसे भी हम ‘शिक्षा’ का नाम दे सकते हैं?

शब्दार्थ :
रटकर-कण्ठस्थ कर। पदवियाँ-उपाधियाँ (डिग्रियाँ)। डिप्टीमैजिस्ट्रेट-उप जिलाधीश। करुण-दुखद। अभाव-कमी। उपयुक्त-उचित। चारित्र्य-चरित्र की। भूत-प्राणी, जीव।

प्रसंग :
पूर्ववत्। इसमें लेखक ने आधुनिक शिक्षा को आड़े हाथ लेते हुए जीवनोपयोगी शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया है।

व्याख्या :
लेखक का कहना है कि हमारी आज की शिक्षा अनुपयोगी सिद्ध हो रही है। वह अपने उद्देश्य से भटक चुकी है। आज के विद्यार्थी की रुचि स्वदेशी भाषा के प्रति न होकर विदेशी भाषा के ही प्रति हो रही है। इससे वह विदेशी संस्कृति को बेहिचक अपना रहा है। उसके मन-मस्तिष्क में विदेशीपन इस तरह घुस गया है कि उसे निकाल पाना कठिन हो गया है। देखा जाए तो आज की शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य विश्वविद्यालय की उपाधियाँ प्राप्त करना रह गया है। इसके द्वारा मुन्शीगिरी या डिप्टी मैजिस्ट्रेट जैसे पद को प्राप्त कर लेने तक सिमटकर रह गया है। इस प्रकार के शिक्षकों से अगर पूछा जाए कि क्या इससे वे समाज और देश का कोई भला कर सकेंगे; तो वे हाँ नहीं कह सकते हैं। ऐसा इसलिए उनमें इस प्रकार की शिक्षा लेकर समाज और देश का भला करने की कोई योग्यता-क्षमता है ही नहीं।

लेखक आज के शिक्षित नवजवानों को फटकारते हुए कह रहा है-हे आज शिक्षित नवजवानो! अपने इस देश की दुर्दशा को देखो। यह याद करो कि तुम्हारा यह देश कृषि प्रधान देश है। इसकी धरती अपार और अक्षय अन्न को उत्पन्न करने वाली रही है। लेकिन बड़े अफसोस के साथ यह कहना पड़ता है कि आज यहाँ के लोगों को भरपेट अन्न नहीं मिल रहा है। बार-बार अन्न की कमी से यहाँ के लोग बिलबिला रहे हैं। देश की इस दुर्दशा को दूर करने के लिए तुम्हारी शिक्षा क्या कारगर कदम उठा सकती है? शायद नहीं। इसलिए उस शिक्षा को सौ बार धिक्कार है, जो अपने देश और समाज को आत्मनिर्भर नहीं बनाती है। ऐसी शिक्षा किस काम की, जो सहानुभूति और कुछ कर गुजरने के भावों को नहीं पैदा करती है।

विशेष :

  1. आधुनिक शिक्षा की कमजोरियों पर सीधा प्रकाश डाला गया है।
  2. देश और समाज के लिए उपयोगी शिक्षा को महत्त्व दिया गया है।
  3. मिश्रित शब्दावली है।
  4. शैली रोचक है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) विदेशी भाषा और संस्कृति के प्रति लेखक ने क्या कहा है?
(ii) आज की शिक्षा का स्वरूप क्या है?
उत्तर:
(i) विदेशी भाषा और संस्कृति के प्रति लेखक का यह कहना है कि उससे हमारी भाषा और संस्कृति धूमिल और शक्तिहीन होती जा रही है। फलस्वरूप हमारा देश तन-मन से पुनः पराधीन होने के करीब आ चुका है।
(ii) आज की शिक्षा विदेशी शिक्षा के चंगुल में फंस गई है। इससे वह आत्मविवेक और मौलिक दृष्टिकोण देने में असमर्थ हो चुकी है।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) शिक्षा का क्या उद्देश्य होना चाहिए?
(ii) हम किस शिक्षा को ‘शिक्षा’ कह सकते हैं?
उत्तर:
(i) शिक्षा का यही उद्देश्य होना चाहिए कि वह अपने देश के नागरिकों
को अधिक-से-अधिक अन्न, वस्त्र और आवास प्रदान कर सके। दूसरे शब्दों में देश को आत्मनिर्भर बना सके।
(ii) हम उस शिक्षा को ‘शिक्षा’ कह सकते हैं, जो हमारी चारित्रिक शक्ति का विकास करती है। जो हर प्राणी के प्रति दयाभाव और कठिनाइयों का सामना करने के लिए साहस प्रदान करती है, वही सच्ची शिक्षा है।

6. हमें तो ऐसी शिक्षा चाहिए, जिससे चरित्र बने, मानसिक बल बढ़ेबुद्धि का विकास हो और जिससे मनुष्य अपने पैरों पर खड़ा हो सके। हमें आवश्यकता इस बात की है कि हम विदेशी अधिकार से स्वतन्त्र रहकर अपने निजी ज्ञान भण्डार की विभिन्न शाखाओं का और उसके साथ ही अंग्रेजी भाषा और पाश्चात्य विज्ञान का अध्ययन करें। हमें यान्त्रिक और ऐसी सभी शिक्षाओं की आवश्यकता है, जिनसे उद्योग-धन्धों की वृद्धि और विकास हो, जिससे मनुष्य नौकरी के लिए मारा-मारा फिरने के बदले अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त कमाई कर सके और आपत्काल के लिए कुछ संचय भी कर सके।

शब्दार्थ :
पाश्चात्य-पश्चिमी। यान्त्रिक यन्त्र सम्बन्धित। पर्याप्त अधिक। कमाई-धन प्राप्त करना। आपत्काल-संकट के समय। संचय-बचत।

प्रसंग :
पूर्ववत्। इसमें आज किस प्रकार की शिक्षा की आवश्यकता है, लेखक ने इसे बतलाने का प्रयास किया है।

व्याख्या :
लेखक का कहना है कि आज विद्यार्थियों को वही शिक्षा देनी चाहिए, जिससे उनका चारित्रिक विकास हो। उनका मन-मस्तिष्क अधिक विकसित हो। उनकी बल-बुद्धि अधिक आगे बढ़े। हरेक मनुष्य आत्मनिर्भर बन सके। आज की शिक्षा ऐसी होनी चाहिए कि वह हमें विदेशी संस्कृति के प्रभाव से मुक्त रखे। हमें स्वदेशीपन को अपनाने के लिए प्रेरित करे। हमें स्वतन्त्र जीवन जीने की दृष्टि दे। हमारी निजी समझ को अच्छी तरह से बढ़ावे। इसके बाद ही अंग्रेजी भाषा और पश्चिमी ज्ञान-विज्ञान को समझे और समझने का प्रयास करे। हमें इस प्रकार की शिक्षा ही आज के इस विज्ञान के युग में चाहिए। ऐसा इसलिए कि इस प्रकार की शिक्षा से ही हमारे देश में विविध प्रकार के कल-कारखानों का विस्तार हो सकेगा। इससे बेरोजगारों को नौकरी मिल सकेगी। वे अपनी रोज की जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। यही नहीं, वे अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए भी कुछ बचा सकेंगे।

विशेष :

  1. आज के युग में किस प्रकार की शिक्षा होनी चाहिए, इसे समझाया गया है।
  2. जीवनोपयोगी शिक्षा की विशेषताएँ बतलाई गई हैं।
  3. वाक्य गठन बड़े-बड़े हैं।
  4. सामासिक शब्दावली है।
  5. शैली वर्णनात्मक है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.
(i) शिक्षा का स्वरूप कैसा होना चाहिए?
(ii) आज हमारी सबसे बड़ी क्या आवश्यकता है?
उत्तर:
(i)शिक्षा का स्वरूप विविध होना चाहिए! दूसरे शब्दों में मानसिक, चारित्रिक व बौद्धिक बल को बढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाने वाली शिक्षा का स्वरूप होना चाहिए।
(ii) आज हमारी सबसे बड़ी आवश्यकता है-बेरोजगारी के चंगुल से मुक्त होना। इसके चंगुल से मुक्त होने के लिए अपने निजी ज्ञान को बढ़ाने की बहुत जरूरत है। इससे ज्ञान-विज्ञान की समझ उपजेगी और हमारे देश में विविध प्रकार के कलकारखानों का विस्तार होगा और बेरोजगारों को नौकरी मिलेगी।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) हमें आज सभी शिक्षाओं की क्यों आवश्यकता है?
(ii) उपर्युक्त गद्यांश का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर:
(i) हमें आज सभी प्रकार की शिक्षाओं की आवश्यकता है। यह इसलिए कि उनसे हमारा देश विकासशील से विकसित बन सकेगा। फिर हमें किसी देश पर किसी प्रकार निर्भर होने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
(ii) उपर्युक्त गद्यांश का मुख्य भाव है-‘आज हमें वैविध्यपूर्ण शिक्षा की आवश्यकता है। इससे हमारा वर्तमान और भविष्य दोनों ही सुखद और उज्ज्वल हो सकेगा।

MP Board Solutions

7. सभी प्रकार की शिक्षा और अभ्यास का उद्देश्य ‘मनुष्य’ निर्माण ही हो। सारे प्रशिक्षणों का अन्तिम ध्येय मनुष्य का विकास करना ही है। जिन प्रक्रिया से.. मनुष्य की इच्छा शक्ति का प्रवाह और प्रकाश संयमित होकर फलदायी बन सके, उसी का नाम है शिक्षा। आज हमारे देश को जिस चीज की आवश्यकता है, वह है लोहे की मांसपेशियां और फौलाद के स्नायु, दुर्दमनीय प्रचण्ड इच्छाशक्ति जो सृष्टि के गुप्त तथ्यों और रहस्यों को भेद सके और जिस उपाय से भी हो अपने उद्देश्य की पूर्ति करने में समर्थ हो, फिर चाहे उसके लिए समुद्र-तल में ही क्यों न जाना पड़े-साक्षात् मृत्यु का ही सामना क्यों न करना पड़े। हम ‘मनुष्य’ बनानेवाला धर्म ही चाहते हैं। हम ‘मनुष्य’ बनानेवाला सिद्धान्त ही चाहते हैं। हम सर्वत्र, सभी क्षेत्रों में ‘मनुष्य’ बनानेवाली शिक्षा ही चाहते हैं।

शब्दार्थ-ध्येय :
उद्देश्य। स्नायु-नाड़ी संस्थान। दुर्दमनीय-जिसका दमन करना कठिन हो। गुप्त-अप्रकट, छिपे हुए। साक्षात्-प्रत्यक्ष। प्रचण्ड-अत्यधिक।

प्रसंग :
पूर्ववत्। इसमें लेखक ने सभी प्रकार की शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य का विकास करना बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या :
चाहे कोई भी शिक्षा हो, उसका एकमात्र उद्देश्य मनुष्य बनाना होना चाहिए। दूसरे शब्दों में यह कि मनुष्य को बनाना या विकास करना ही शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए। इस उद्देश्य से विपरीत होने वाली शिक्षा सार्थक नहीं हो सकती है। उसे हम शिक्षा न कहकर अशिक्षा ही कहेंगे। इस प्रकार वास्तविक शिक्षा मनुष्य के साए हुए मजबूत भावों को जगाती है। उसमें तेजी लाती है। फिर उसे प्रभावशाली वनाती हुई उसे लोककल्याणकारी रूप दे डालती है। इस प्रकार की शिक्षा ही हमारे समाज और देश को आज चाहिए। हमारे समाज और देश को आज ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है, जो लोहे की तरह मजबूत मांसपेशियां और फौलादी नाड़ी संस्थानों के साथ अत्यधिक दृढ़ इच्छाशक्ति को ला सके। इससे ही सभी प्रकार के छिपे हुए भेदों को जाना जा सकता है।

आज हमें एक ऐसी ही शिक्षा की बहुत बड़ी आवश्यकता है जो मनुष्य बनाने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए किसी प्रकार की मुसीबत का सामना करने से पीछे न हटे। वह अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए समुद्र की गहराइयों में जाने का साहस दे सके। यही नहीं, सामने आई हुई मौत को भी ललकारने की हिम्मत दे सके। इस तरह आज हमें वही शिक्षा चाहिए जो मनुष्य को बनाने का धर्म हमें सिखा सके। इस प्रकार का मत-सिद्धान्त हमें बता सके। कहने का भाव यह है कि आज के युग की माँग मनुष्य बनाने वाली या मनुष्य का विकास करने वाली शिक्षा अत्यधिक है।

विशेष :

  1. आधुनिक युग की माँग मनुष्य बनाने वाली शिक्षा की है, इसे सुस्पष्ट किया गया है।
  2. शब्द उच्चस्तरीय हैं।
  3. शैली वर्णनात्मक है।
  4. वाक्य बड़े-बड़े हैं।
  5. यह अंश बोधगम्य है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) ‘मनुष्य’ निर्माण से लेखक का क्या आशय है?
(ii) किस प्रकार मनुष्य की इच्छाशक्ति प्रवाहित होकर फलदायी बन सकती है?
उत्तर:
(i) ‘मनुष्य’ निर्माण से लेखक का बहुत बड़ा आशय है। इसके द्वारा चारों ओर अपनापन, भाईचारा और आत्मीयता का वह वातावरण तैयार होगा, जिसमें सुख-शान्ति और आनन्द के अपेक्षित फूल खिलेंगे।
(ii) मनुष्य की इच्छाशक्ति सशिक्षा की प्रक्रिया से ही प्रवाहित होकर फलदायी बन सकती है।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) आज हमारे देश को किस चीज की आवश्यकता है?
(ii) लेखक ने बार-बार ‘मनुष्य’ निर्माण का उल्लेख क्यों किया है?
उत्तर:
(i) आज हमारे देश की अनेक प्रकार की आवश्यकताएँ हैं। उसे आज ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है, जो उसके नागरिकों में फौलादी इच्छाशक्ति भर दे, जिससे सृष्टि के सभी गुप्त रहस्यों और तथ्यों का खुलासा कर सके। यही नहीं, उसे आज वही शिक्षा चाहिए, जो जीवन के हरेक क्षेत्रों में ‘मनुष्यता’ ला सके।
(ii) ‘मनुष्य’ निर्माण से चारों ओर अपनापन, भाईचारा, आत्मीयता का वातावरण निर्मित होता है जिससे मनुष्य को सुख-शान्ति और आनन्द के अपेक्षित फूल खिलेंगे।

MP Board Class 11th Hindi Solutions

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 13 धर्म की झाँकी

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 13 धर्म की झाँकी (आत्मकथा, महात्मा गाँधी)

धर्म की झाँकी पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

धर्म की झाँकी लघु-स्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आत्मबोध और आत्मज्ञान को गांधीजी ने किसका उदार अर्थ माना है?
उत्तर:
आत्मबोध और आत्मज्ञान को गांधीजी ने धर्म का उदार अर्थ माना है।

प्रश्न 2.
गांधीजी के मन पर किस चीज का गहरा असर पड़ा?
उत्तर
गांधीजी के मन पर रामायण के पारायण का गहरा असर पड़ा।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
गांधीजी के अनुसार किस ग्रंथ के पाठ से धर्म-रस उत्पन्न किया जा सकता है?
उत्तर:
गांधीजी के अनुसार भागवत ग्रंथ के पाठ से धर्म-रस उत्पन्न किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
गांधीजी ने अपने इक्कीस दिन के उपवास-काल में किन महोदय से भागवत कथा सुनी थी?
उत्तर:
गांधीजी ने अपने इक्कीस दिन के उपवास-काल में भारत-भूषण पंडित मदनमोहन मालवीय के शुभ-मुख से भागवत कथा सुनी थी?

प्रश्न 5.
गांधीजी का भूत-प्रेत का भय कैसे दूर हुआ?
उत्तर:
गांधीजी का भूत-प्रेत का भय अपनी धाय रम्भा के द्वारा राम-नाम के जप नामक अमोघ शक्ति से दूर हुआ।

धर्म की झाँकी दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गांधीजी के अनुसार धर्म का अर्थ क्या है?
उत्तर:
गांधीजी के अनुसार धर्म का अर्थ उदा है धर्म का यह भी अर्थ है-आत्मबोध, आत्मज्ञान।

प्रश्न 2.
गांधीजी के भीतर रामायण-श्रवण और रामायण के प्रति प्रेम की बुनियाद किस घटना ने रखी थी?
उत्तर:
गांधीजी के भीतर रामायण-श्रवण और रामायण के प्रति बुनियाद पोरबन्दर में घटी एक घटना ने रखी थी। उस समय वे अपने पिताजी के साथ रामजी के मंदिर में रोज रात के समय बीलेश्वर लाधा महाराज से रामायण सुनते थे। वे एक पंडित थे। वे रामचन्द्रजी के परम भक्त थे। उनके बारे में कहा जाता था कि उन्हें कोल की बीमारी हुई, तो उसका इलाज करने के बदले उन्होंने बीलेश्वर महादेव पर चढ़े हुए बेल-पत्र लेकर कोढ़ वाले अंग पर बांधे, और केवल रामनाम का जप शुरू किया। अन्त में उनका कोढ़ जड़-मूल से नष्ट हो गया। यह बात सच हो या न हो, हम सुनने वालों ने तो सच ही मानी।

यह भी सच है कि जब लाधा महाराज ने कथा शुरू की, तब उनका शरीर बिल्कुल निरोग था। लाधा महाराज का कंठ मधुर था। वे दोहा-चौपाई गाते और उनके अर्थ को समझाते थे। स्वयं उसके रस में डूब जाते थे और सुननेवालों को भी उसमें डुबो देते थे। गांधीजी का कहना है कि वे उस समय लगभग तेरह साल के थे। फिर भी उन्हें याद है कि लाधा महाराज के पाठ से उन्हें खूब आनंद आता था। यह राम-नाम श्रवण रामायण के प्रति उनके अत्यधिक प्रेम की बुनियाद है। आज वे इसीलिए तुलसीदास की रामायण को भक्ति मार्ग का सर्वोत्तम ग्रंथ मानते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
गांधीजी की दृष्टि में सर्वधर्म समभाव का उदय किन प्रसंगों की प्रेरणा से हुआ था?
उत्तर:
राजकोट में गांधीजी को अनायास ही सब सम्प्रदायों के प्रति समान भाव रखने की शिक्षा मिली। उन्होंने हिन्दू धर्म के प्रत्येक समुदाय का आदर करना सीखा, क्योंकि उनके माता-पिता वैष्णव मन्दिर में, शिवालय में और राम-मंदिर में भी जाते और अपने भाइयों को भी साथ ले जाते या भेजते थे। फिर उनके पिताजी के पास जैन धर्माचार्यों से भी कोई-न-कोई हमेशा आते रहते थे। उनके पिताजी उन्हें दान भी देते थे।

वे उनके पिताजी के साथ धर्म और व्यवहार की बातें किया करते थे। इसके सिवा उनके पिताजी के मुसलमान और पारसी मित्र भी थे। वे अपने-अपने धर्म की चर्चा करते और पिताजी उनकी बातें सम्मानपूर्वक और रसपूर्वक सुना करते थे। उनके पिताजी के बीमार होने के कारण उनकी देखभाल हेतु ऐसी चर्चा के समय वे अक्सर हाजिरें रहते थे। इस सारे वातावरण का प्रभाव उन पर यह पड़ा कि उनमें सब धर्मों के लिए समान भाव पैदा हो गया।

धर्म की झाँकी भाव विस्तार/ पल्लवन

प्रश्न.

  1. ‘बचपन में जो बीज बोया गया, वह नष्ट नहीं हुआ’ पंक्ति में विचार का विस्तार कीजिए?
  2. “आज मैं यह देख सकता हूँ, कि भागवत एक ऐसा ग्रंथ है, जिसके पाठ से धर्म-रस उत्पन्न किया जा सकता है।”
  3. “बचपन में पड़े हुए शुभ-अशुभ संस्कार बहुत गहरी जड़ें जमाते हैं।”

उत्तर:

1. उपर्युक्त पंक्ति महात्मा गाँधी-लिखित आत्मकथा ‘धर्म की झाँकी’ शीर्षक से लिया गया है। इसमें गाँधीजी ने यह कहना चाहा है कि बचपन के संस्कार बड़े ही मजबूत और महत्त्वपूर्ण होते हैं। वे बचपन में अंकुरित अवश्य होते हैं, लेकिन उनके प्रभाव बड़े ही दूरगामी होते हैं। इस तथ्य को समझकर और इसे ध्यान में बच्चों के ऐसे संस्कारों को महत्त्व देना चाहिए जो हर प्रकार से सुन्दर, सुखद और लाभकारी हों। इसके विपरीत संस्कार तो न केवल बच्चों के लिए हानिकारक होते हैं अपितु दूसरों को भी। अगर बच्चों के संस्कार अच्छे होंगे, तो उनका बचपन खुशहाल होगा और उनका शेष जीवन भी। उससे आस-पास का वातावरण भी लाभान्वित होगा। इसके विपरीत बच्चों के बुरे संस्कार उनके बचपन और शेष जीवन को हानि पहुँचाए बिना नहीं रहेगा। यही नहीं उससे आस-पास का वातावरण भी दुखी बना रहेगा। इस प्रकार बचपन में बोया गया बीज कभी नष्ट नहीं होता है।

2. उपर्युक्त कथन महात्मा गांधी-लिखित आत्मकथा ‘धर्म की झाँकी’ शीर्षक से है। इसमें महात्मा गांधी ने इस बात को स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि भागवत एक महान ग्रंथ ही नहीं है, अपितु वह एक सरस, भाववर्द्धक और धार्मिक ग्रंथ भी है। वह मुख्य रूप से एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें धार्मिक रस प्रवाहित होता है। इस तथ्य की सच्चाई तभी ज्ञात होती, जब कोई धार्मिक व्यक्ति अपने तन-मन से उसका ऐसा मधुर, भावपूर्ण और सरस पाठ करे, जिसे सुनकर लोग बाग-बाग हो उठे। उनकी धार्मिक भावधारा उमड़कर प्रवाहित होने लगे।

3. ‘उपर्युक्त वाक्य महात्मा गाँधी-लिखित आत्मकथा ‘धर्म की झाँकी’ शीर्षक से उद्धृत है। इस वाक्य के द्वारा गाँधीजी ने यह कहना चाहा है कि बचपन की आदतें जल्दी नहीं जाती हैं। वे बचपन के बाद युवावस्था और उसके बाद भी कुछ-न-कुछ अवश्य बनी रहती हैं। परिस्थितियाँ टकराकर भी अपनी जड़ें बनाए रहती हैं। वे आदतें चाहे अच्छी हों या बुरी, लेकिन उनके प्रभाव बहुत समय तक होते हैं। इसलिए बच्चों के शुभ-अशुभ संस्कारों की जानकारी न रखने की भूल बड़ी दुखद, होती है। क्योंकि अगर शुभ संस्कारों की जगह अशुभ संस्कार किसी प्रकार से हानिप्रद होते हैं तो वे बच्चों का सुनहरा बचपन छीन लेते हैं। फलस्वरूप उनका आगामी जीवन अंधकारमय हो जाता है। इसके विपरीत शुभ संस्कारों से न केवल बचपन जगमगा उठता है, अपितु आगामी जीवन भी सुगंधित होकर लोकप्रिय बन जाता है। इस आधार पर यह कहना बिल्कुल ही सच है-‘बचपन में पड़े हुए शुभ-अशुभ संस्कार बहुत गहरी जड़ें जमाते हैं।’

धर्म की झाँकी भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह कीजिए और समास का नाम भी लिखिए –
भूत-प्रेत, राम-नाम, नित्यपाठ, धर्म-रस, राम-रस।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 13 धर्म की झाँकी img-1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिएउदार, आदर, ऊपर, श्रद्धा।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 13 धर्म की झाँकी img-2

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों को संधियुक्त करते हुए संधि का नाम बताइए –

  1. वात + आवरण
  2. सर्व + उत्तम
  3. शिव + आलय
  4. राम + अयण।

उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 13 धर्म की झाँकी img-3

प्रश्न 4.
निम्नलिखित भिन्नार्थक शब्दों के अर्थ लिखते हुए वाक्य बनाइए –
भूत, जड़, भेद, फल
उत्तर:
भूत – अतीत-हमें अपना भूत नहीं भूलना चाहिए।
भूत – मृतात्मा-मैं भूतों से नहीं डरता हूं।

जड़ – मूल-बरगद की जड़ बहुत दूर तक फैली होती है।
जड़ – मूर्ख-जड़बुद्धि वालों से सावधान रहना चाहिए।

भेद – रहस्य-इसका कोई भेद नहीं जान सकता है।
भेद – अंतर-सही और गलत में भेद जानना चाहिए।

फल – परिणाम-मेहनत का फल मीठा होता है।
फल – पेड़ का फल-सेव एक स्वास्थ्यवर्धक फल है।

MP Board Solutions

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध रूप में लिखिए –

  1. वे दोहा-चौपाई को गाते और दोहा-चौपाई का अर्थ समझाते थे।
  2. पिता भी नित्य प्रतिदिन रामायण का पाठ करते थे।
  3. पिताजी रसपूर्वक उनकी बातें सम्मानपूर्वक सुना करते थे।
  4. बचपन में शुभ-अशुभ संस्कार में पड़े हुए बहुत गहरे जड़ जमाते हैं।

उत्तर:

  1. वे दोहा-चौपाई गाते और अर्थ समझाते थे।
  2. पिताजी प्रतिदिन रामायण का पाठ करते थे।
  3. पिताजी उनकी बातें सम्मानपूर्वक और रसपूर्वक सुना करते थे।
  4. बचपन में पड़े हुए शुभ-अशुभ संस्कार बहुत गहरी जड़ें जमाते हैं।

धर्म की झाँकी योग्यता विस्तार

प्रश्न 1.
अपने जीवन की प्रमुख दो घटनाओं को आधार बनाकर उन्हें आत्मकथात्मक शैली में लिखिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

प्रश्न 2.
गांधीजी की ‘मेरी आत्मकथा’ पुस्तक को पढ़कर उनके प्रेरक प्रसंगों की सूची बनाइए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

प्रश्न 3.
सभी धर्मों का मूल मानवता है। आप जिस धर्म या संप्रदाय से हैं, उनके मूल गुणों को लिखिए और अन्य धर्मों के मूल गुणों को समझिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

प्रश्न 4.
“शिक्षा केवल विद्यालय से नहीं, वरन् वातावरण से भी प्राप्त होती है।” वाद-विवाद प्रतियोगिता के माध्यम से तर्क प्रस्तुत कीजिए अथवा उपर्युक्त विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

धर्म की झाँकी परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

धर्म की झाँकी लघुउत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गाँधीजी को धर्म की शिक्षा कहाँ से मिली?
उत्तर:
गाँधीजी को धर्म की शिक्षा उनके आस-पास के वातावरण से मिली।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
गाँधीजी का मन हवेली से क्यों उदासीन हो गया?
उत्तर:
गाँधीजी का मन हवेली से उदासीन हो गया। यह इसलिए कि हवेली में अनीति की बातें होती थीं। उसे सुनकर उनका मन उदासीन हो गया।

प्रश्न 3.
गाँधीजी को रामायण के पाठ में क्यों खूब रस आता था?
उत्तर:
गाँधीजी को रामायण के पाठ में खुब रस आता था। यह इसलिए कि रामायण के पाठ को लाधा महाराज बड़ी सरसता से अर्थ समझाकर करते थे। उसे सुनने वाले स्वयं को उसी में खो देते थे।

प्रश्न 4.
किससे गाँधीजी में सब धर्मों के प्रति समान भाव पैदा हो गया?
उत्तर:
अपने वातावरण के प्रभाव से गांधीजी में सब धर्मों के प्रति समान भाव पैदा हो गया।

धर्म की झाँकी दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गाँधीजी को हवेली से क्या मिला?
उत्तर:
गाँधीजी को जो हवेली से मिला, वह उन्हें अपनी धाय रेम्भा से मिला। रम्भा उनके परिवार की पुरानी नौकरानी थी। उसका प्रेम उन्हें आज भी याद है। उन्हें भूत-प्रेत आदि का डर लगता था। रम्भा ने उन्हें समझाया कि इसकी दवा रामनाम है। उन्हें तो रामनाम से भी अधिक श्रद्धा रम्भा पर थी, इसलिए बचपन में भूत-प्रेतादि के भय से बचने के लिए उन्होंने राम-नाम जपना शुरू किया। यह जप बहुत समय तक नहीं चला। पर बचपन में जो बीज बोया गया, वह नष्ट नहीं हुआ। आज रामनाम उनके लिए अमोघ शक्ति है। वे मानते हैं कि उसके मूल में रम्भाबाई का बोया हुआ बीज है।

प्रश्न 2.
गाँधीजी के द्वारा रामायण कंठाग्र करने के कारण बताइए।
उत्तर:
गाँधीजी के चाचाजी के एक लड़के ने जो रामायण के भक्त थे, उनके दो भाइयों को राम-रक्षा का पाठ सिखाने की व्यवस्था की। उन्होंने उसे कण्ठाग्र कर लिया और स्नान के बाद उसके नित्यपाठ का नियम बनाया। जब तक पोरबंदर में रहे, यह नियम चला। राजकोट के वातावरण में यह टिकं न सका। इस क्रिया के प्रति भी खास श्रद्धा नहीं थी। अपने बड़े भाई के लिए मन में जो आदर था, उसके कारण और कुछ शुद्ध उच्चारणों के साथ राम-रक्षा का पाठ कर पाते हैं-इस अभिमान के कारण पाठ चलता रहा।

प्रश्न 3.
रामायण का पारायण सुनने वालों ने क्या बात सच मानी?
उत्तर:
गाँधीजी के पिताजी रामजी के मंदिर में रोज रात के समय रामायण सुनते थे। सुनाने वाले बीलेश्वर के लाधा महाराज नामक एक पंडित थे। वे रामचन्द्र जी के परम भक्त थे। उनके बारे में कहा जाता था कि उन्हें कोढ़ की बीमारी हुई, तो उसका इलाज करने के बदले उन्होंने बीलेश्वर महादेव पर चढ़े हुए बेलपत्र लेकर कोढ़ वाले अंग पर बांधे, और केवल रामनाम का जप शुरू हुआ। अन्त में उनका कोढ़ जड़-मूल से नष्ट हो गया। यह बात सच हो या न हो, रामायण का पारायण सुनने वालों ने तो सच ही मानी।

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
मालवीय जी से भागवत सुनकर गांधीजी पर क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर:
पंडित मदन मोहन मालवीय जी से भागवत सुनकर गांधीजी पर बड़ी भारी प्रतिक्रिया हुई। उन्हें उस समय यह ख्याल हुआ कि बचपन में उनके समान भगवत्-भक्त के मुंह से भागवत सुनी होती, तो उस पर उसी उमर में मेरा प्रगाढ़ प्रेम हो जाता। बचपन में पड़े हुए शुभ-अशुभ संस्कार बहुत गहरी जड़ें जमाते हैं, इसे मैं खूब अनुभव करता हूँ; और इस कारण उस उम्र में मुझे कई उत्तम ग्रन्थ सुनने का लाभ नहीं मिला, सो अब अखरता है।

प्रश्न 5.
‘धर्म की झाँकी’ आत्मकथा के केन्द्रीय भाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अपने बाल और किशोर जीवन के उन कतिपय प्रसंगों को महात्मा गाँधी ने अपनी आत्मकथा के इस अंश में प्रस्तुत किया है, जिन्होंने उनके परवर्ती जीवन पर प्रभाव डाला है। राम-नाम के प्रति उनकी दृढ़ आस्था ने उन्हें निर्भीकता प्रदान की। भारतीय महाकाव्यों के श्रवण-पठन ने उन्हें संस्कारी जीवन जीने की प्रेरणा दी और उनके उदार पारिवारिक वातावरण ने उन्हें सर्वधर्म समभाव की दृष्टि प्रदान की। आत्मकथा के इस हिस्से में महात्मा गांधी की स्पष्टता, आत्मीयता और सहजता का अनुभव किया जा सकता है।

धर्म की झाँकी लेखक-परिचय

प्रश्न 1.
महात्मा गाँधी का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए?
उत्तर:
जीवन-परिचय:
महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्तूबर, 1869 को गुजरात राज्य के पोरबन्दर नगर में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गाँधी था.। उनके पिता का नाम करमचन्द और माता का नाम पुतलीबाई था। उनकी आरम्भिक शिक्षा राजकोट में हुई। अपनी आरम्भिक शिक्षा को समाप्त करके अपनी उच्च शिक्षा के लिए वे इंग्लैण्ड चले गए। वहाँ पर उन्होंने लगातार अध्ययन करके बैरिस्टर की उपाधि प्राप्त कर ली। इसके बाद स्वेदश लौट जाए।

स्वदेश आकर महात्मा गाँधी वकालत करने लगे। वे एक मुकद्दमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए। वहाँ पर उन्होंने भारतीयों और अपने साथ अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचार और दुर्व्यवहार को देखकर अंग्रेजों का विरोध किया। इसके लिए उन्होंने अहिंसात्मक आन्दोलन चलाए। इसके बाद वे स्वदेश लौट आए। स्वदेश आकर उन्होंने श्री गोपाल कृष्ण गोखले को अपना राजनीतिक गुरु मान लिया। उनकी देख-रेख में उन्होंने देश की आजादी के लिए देश के विभिन्न भागों में सत्याग्रह किए। उन्होंने अपने सत्याग्रह और असहयोग आन्दोलन को आजादी के लिए अस्त्र-शस्त्र के रूप में प्रयोग किया। उनके इस अथक प्रयास से 15 अगस्त, 1947 को देश आजाद हो गया। 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।

रचनाएँ:
‘हिन्दस्वराज्य’ सर्वोदय (रस्किन की ‘अन टु दि लास्ट’ पुस्तक का अनुवाद) दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों पर अत्याचार का वर्णन करने वाली पुस्तक ‘हरी पुस्तक’ आदि गाँधीजी की महत्त्वपूर्ण पुस्तकें हैं। उन्होंने ‘यंग इण्डिया’ और ‘हरिजन’ नामक पत्र भी निकाले। उन्होंने ‘सत्य के प्रयोग’ नामक महत्त्वपूर्ण आत्मकथा भी लिखी।

महत्त्व:
गाँधीजी के साहित्य का महत्त्व निर्विवाद रूप से है। उनका साहित्य साम्प्रदायिक सद्भाव का पक्षपाती है। वह निम्न तथा पिछड़े वर्ग के विकास का प्रेरक है। उसमें आत्मनिर्भरता का अद्भुत पाठ है। परस्पर मेल-मिलाप की सीख देने वाला वह एक बेजोड़ साहित्य है।

धर्म की झाँकी पाठ का सारांश

प्रश्न 1.
महात्मा गाँधी-लिखित ‘धर्म की झाँकी’ आत्मकथा का सारांश अपने शब्दों में लिखिए?
उत्तर:
महात्मा गाँधी-लिखित ‘धर्म की झाँकी’ आत्मकथा में अनेक प्रेरक घटनाओं प्रसंगों का उल्लेख है। महात्मा गाँधी का कहना है कि उन्हें छह या सात साल से सोलह साल तक की शिक्षा में धर्म की शिक्षा नहीं मिली। धर्म अर्थात् आत्मबोध, आत्मज्ञान। हवेली का वैभव उन्हें अच्छा नहीं लगा। उसके प्रति उदासीन हो गए। उन्हें वहाँ की रम्भा की याद आज भी है। वह उनके परिवार की पुरानी नौकरानी थी। उसने उन्हें भूत-प्रेतादि के भय से बचाने के लिए राम-नाम जपने का मन्त्र दिया था। आज भी उनके लिए यह अमोघ शक्ति है। उन्होंने अपने चाचाजी के एक लड़के से राम-रक्षा का पाठ सीख कर नियमित रूप से पाठ करके उसे कंठाग्र कर लिया। पोरबंदर में यह पाठ नियमित रूप से चलता रहा, लेकिन राजकोट में नहीं।

गाँधीजी के मन पर रामायण के पारायण का गहरा असर पड़ा। उनके बीमार पिताजी पोरबंदर के रामजी के मन्दिर में रात के समय बीलेश्वर के लाधा महाराज नामक पण्डित से रामायण सुनते थे। वे रामचन्द्र के इतने बड़े भक्त थे कि उन्होंने अपनी कोढ़ की बीमारी को बीलेश्वर महादेव पर चढ़े हुए बेल-पत्र को कोढ़ वाले अंगों पर बाँध देते थे। फिर राम नाम का जप करते थे। इससे उनका कोढ़ बिलकुल ठीक हो गया। उनका कण्ठ इतना मीठा था कि जब वे दोहा-चौपाई गाकर अर्थ समझाते थे तो उससे श्रोता रसमग्न हो जाते थे। उससे वे रामायण के प्रति अधिक लीन हो गए। फलस्वरूप वे तुलसी के रामायण को भक्तिमार्ग का सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थ मानते हैं।

वे राजकोट आए तो रामायण नहीं, एकादशी के दिन भागवद् जरूर पढ़ी जाती थी। उसे सुनने पर उन्हें रामायण जैसा आनन्द नहीं आया। इसलिए उन्होंने यह मान लिया कि भागवद् ग्रन्थ से धर्म-रस उत्पन्न किया जा सकता हैं उन्होंने अपने उपवास के दौरान मदन मोहन मालवीय के मूल संस्कृत के कुछ अंश सुने। उससे उन्हें यह पश्चाताप हुआ कि अगर वे बचपन में ऐसा सुने होते तो उस पर उस समय प्रगाढ़ प्रेम हो जाता।

राजकोट में गाँधी को सभी सम्प्रदायों के प्रति एक समान भाव रखने की शिक्षा मिली। इससे उन्होंने सभी सम्प्रदायों के प्रति सम्मान की भावना रखना सीखा। ऐसा इसलिए भी कि उनके माता-पिता उन्हें और उनके भाइयों को अपने साथ वैष्णव मन्दिर में, शिवालय में और राम-मन्दिर ले जाते थे या किसी के साथ भेजते थे। गाँधीजी के पिताजी के पास जैन धर्माचार्य आया करते थे। इनके पिताजी उन्हें दान देते थे और वे उनके साथ धर्म-व्यवहार पर चर्चा करते थे। इनके पिताजी के पारसी और मुसलमान मित्र उनसे अपने धर्म की चर्चा करते थे। वे उसे बड़े आदर से सुनते थे। इससे उनमें सब धर्मों के प्रति समान भाव पैदा हो गया।

धर्म की झाँकी संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

MP Board Solutions

प्रश्न 1.
छह या सात साल से लेकर सोलह साल की उमर तक मैंने पढ़ाई की, पर स्कूल में कहीं भी धर्म की शिक्षा नहीं मिली। यों कह सकते हैं कि शिक्षकों से जो आसानी से मिलना चाहिए था, नहीं मिला। फिर भी वातावरण से कुछ-न-कुछ तो मिलता ही रहा। यहाँ धर्म का उदार अर्थ करना चाहिए। धर्म अर्थात् आत्मबोध, आत्मज्ञान। मैं वैष्णव सम्प्रदाय में जन्मा था, इसलिए हवेली में जाने के प्रसंग बार-बार आते थे, पर उसके प्रति श्रद्धा उत्पन्न नहीं हुई। हवेली का वैभव मुझे अच्छा नहीं लगा। हवेली में चलने वाली अनीति की बातें सुनकर मन उसके प्रति उदासीन बन गया। वहाँ से मुझे कुछ भी न मिला।

शब्दार्थ:

  • उदार – दयालु, भला।
  • आत्मबोध – आत्मा का ज्ञान, स्वयं को जानना।
  • अनीति – दुराचार, दुष्टता, अनैतिकता।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य भाग-1’ में संकलित तथा महात्मा गाँधी-लिखित ‘धर्म की झाँकी’ शीर्षक से उद्धृत है। इसमें लेखक ने धर्म के अर्थ को बतलाने का प्रयास करते हुए कहा है कि –

व्याख्या:
उन्होंने अपनी पढ़ाई की शुरुआत छह या सात साल की उम्र से की थी। इस उम्र से लेकर वे सोलह साल तक लगातार पढ़ते रहे। लेकिन यह ध्यान देने . की बात है कि इस दौरान उन्हें किसी भी स्कूल या कॉलेज से धर्म की शिक्षा नहीं प्राप्त हुई। दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है कि धर्म शिक्षा का जो एक आवश्यक अंग होता है। उसे शिक्षकों ने छोड़ दिया। इस तरह की अपनी शिक्षा के दौरान धर्म का पाठ न पढ़ सके। इसके बावजूद उन्हें अपने आस-पास के वातावरण से जो कुछ प्राप्त हुआ, उसमें धर्म-शिक्षा भी थी। उससे उन्होंने अपने जीवन में बहुत सीखा। उससे बहुत कुछ हासिल भी किया।

गाँधीजी का पुनः कहना है कि धर्म का अर्थ खासतौर से उदार होना चाहिए। जिस धर्म में उदारता, दयालुता, परोपकारिता और परहित चिन्तन की भावना नहीं है, वह धर्म सच्चा नहीं हो सकता। धर्म से अभिप्राय आत्म-बोध अर्थात् अपना अनुभव। धर्म का एक दूसरा भी अर्थ होता है-आत्मज्ञान, अर्थात् आत्मा का ज्ञान, अपने आप को जान लेना, समझ लेना। गाँधीजी का स्वयं के विषय में यह कहना है कि वैष्णव सम्प्रदाय में पैदा हुए थे। यही कारण था, उन्हें हवेली में जाने की बात बार-बार आती थी। लेकिन इसका उनके मन में कोई लगाव नहीं था और न कोई श्रद्धा ही हुई थी।

इसके कई कारणों में से कुछ कारण इस प्रकार थे-हवेली की साधन-सम्पन्नता उन्हें आकर्षित न कर सकी। हवेली का वाताबरण उन्हें ठीक नहीं लगता था। वहाँ की बातचीत बड़ी ही अनैतिक और असभ्य होती थी। इससे उनका मन नहीं लगा। इस प्रकार उन्हें वहाँ पर ऐसी कोई चीज नहीं दिखाई दी, जिससे वे आकर्षित हो सकें या कुछ प्राप्त कर सकें।

विशेष:

  1. भाषा सरल और सुबोध है।
  2. शैली वर्णनात्मक है।
  3. धर्म के अर्थ और स्वरूप को स्पष्ट किया गया है।
  4. वाक्य का गठन अर्थपूर्ण है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. विद्यार्थी जीवन में महात्मा गाँधी को क्या नहीं प्राप्त हुआ?
  2. धर्म के क्या-क्या अर्थ हैं?

उत्तर:

  1. विद्यार्थी जीवन में महात्मा गाँधी को धर्म क्या होता है? इसकी शिक्षा उन्हें प्राप्त नहीं हुई।
  2. धर्म के कई अर्थ हैं-उदारता, आत्मबोध, आत्मज्ञान आदि।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. महात्मा गाँधी को किससे क्या नहीं मिला?
  2. हवेली के प्रति गाँधीजी को क्यों अरुचि हो गई थी?

उत्तर:

1. महात्मा गाँधी को अपने शिक्षकों से धर्म की शिक्षा नहीं मिली।

2. हवेली के प्रति गाँधीजी को अरुचि हो गई थी। यह इसलिए कि –

  • हवेली की साधन-सम्पन्नता उन्हें अनुचित लगती थी।
  • हवेली में होने वाली बातें अनैतिक होती थीं।
  • हवेली से उन्हें कुछ भी नहीं प्राप्त हुआ।

प्रश्न 2.
जब लाधा महाराज ने कथा शुरू की, तब उनका शरीर विल्कुल नीरोग था। लाधा महाराज का कंठ मीठा था। वे दोहा-चौपाई गाते और अर्थ समझाते थे। स्वयं उसके रस में लीन हो जाते थे और श्रोताजनों को भी लीन कर देते थे। उस समय मेरी उम्र तेरह साल की रही होगी, पर याद पड़ता है कि उनके पाठ में मुझे खूब रस आता था। यह रामायण-श्रवण रामायण के प्रति मेरे अत्यधिक प्रेम की बुनियाद है। आज मैं तुलसीदास की रामायण को भक्ति-मार्ग का सर्वोत्तम ग्रन्थ मानता हूँ।

शब्दार्थ:

  • कथा – रामायण की कथा।
  • लीन हो जाते थे – डूब जाते थे।
  • श्रोताजनों – सुनने वालों।
  • श्रवण – सुनना।
  • बुनियाद – आरम्भ, जड़, नींव, आधार।
  • सर्वोत्तम – सर्वश्रेष्ठ।

प्रसंग:
पूर्ववत्। इसमें लेखक ने तुलसीकृत रामायण के प्रति अपनी श्रद्धा-भावना को व्यक्त करने का प्रयास किया है। इस विषय में गाँधीजी का कहना है कि –

व्याख्या:
उनके मन पर तुलसीकृत रामायण के पारायण का गहरा असर पड़ा है। लाधा महाराज नामक एक पण्डित थे। उन्होंने रामायण की कथा और रामनाम के जप से अपने कोढ़ग्रस्त शरीर को ठीक कर लिये। उन्होंने जब कथा आरम्भ की, तब वे कोढ़ी नहीं थे। वे उस समय बिलकुल स्वस्थ और निरोग थे। उस समय उनका कण्ठ बहुत मधुर और सरस था। इससे वे रामायण के दोहा-चौपाई का सरस और मधुर स्वर निकालते थे। फिर उनके अर्थ और व्याख्या खूब तन-मन से किया करते थे। इस प्रकार वे उसमें ‘पूरी तरह से डूब जाते थे। फलस्वरूप सुनने वाले भी उसी में डूबकर अपनी सुध खो देते थे।

गाँधी जी का पुनः कहना है कि वे लाधा महाराज द्वारा शुरू की गई इस प्रकार की कथा को बड़े ही ध्यान देकर सुनते थे। वे उस समय लगभग तेरह साल के थे। फिर भी उन्हें उनके द्वारा किए गए रामायण के पाठ से बड़ा ही आनन्द आता था। इस प्रकार रामायण की कथा को सुनकर उसके प्रति उनकी बहुत अधिक श्रद्धा की शुरुआत थी। यही कारण है कि वे आज भी तुलसीकृत रामायण के प्रति अपार श्रद्धा रखते हैं। उसे वे भक्तिमार्ग के सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थ के रूप में देखते भी हैं।

विशेष:

  1. भाषा सरल शब्दों की है।
  2. आत्मकथात्मक शैली है।
  3. तुलसीकृत रामायण के प्रति लेखक की श्रद्धा भावना व्यक्त हुई है।
  4. तुलसीकृत रामायण का महत्त्वांकन किया गया है।
  5. यह अंश प्रेरक रूप में है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. लाधा महाराज कौन थे?
  2. लाधा महाराज के कथा कहने की खूबी क्या थी?

उत्तर:

1. लाधा महाराज एक पण्डित थे। वे रामचन्द्र जी के परम भक्त थे।

2. लाधा महाराज के कथा कहने की बहुत बड़ी खूबी थी। उनका कण्ठ बहुत मधुर और सरस था। वे दोहा-चौपाई को मधुर स्वरों से गा-गाकर उनके अर्थ और भावार्थ को अच्छी तरह से समझाते थे। वे उसमें डूब जाते थे। यही नहीं अपनी कथा-कहने । की शैली से सुनने वालों को भी उसमें डूबा देते थे।

गाद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. गाँधीजी को कैसे रामायण के प्रति अत्यधिक प्रेम उत्पन्न हो गया?
  2. गाँधी जी तुलसीदास की रामायण को किस रूप में देखते हैं?

उत्तर:

  1. गाँधीजी को रामायण को सुनने से रामायण के प्रति अत्यधिक प्रेम उत्पन्न हो गया?
  2. गाँधीजी तुलसीदास की रामायण को भक्ति मार्ग के सर्वोत्तम ग्रन्थ के रूप में देखते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
भागवत एक ऐसा ग्रन्थ है जिसके पाठ से धर्म-रस उत्पन्न किया जा सकता है। मैंने तो उसे गुजराती में बड़े चाव से पढ़ा है। लेकिन इक्कीस दिन के अपने उपवास काल में भारत-भूषण पण्डित मदनमोहन मालवीयजी के शुभ मुख से मूल संस्कृत के. कुछ अंश जब सुने तो ख्याल हुआ कि बचपन में उनके समान भगवद्-भक्त के मुँह से भागवत सुनी होती, तो उस पर उसी उमर में मेरा प्रगाढ़ प्रेम हो जाता। बचपन में पड़े हुए शुभ-अशुभ संस्कार बहुत गहरी जड़ें जमाते हैं, इसे मैं खूब अनुभव करता हूँ; और इस कारण उस उमर में मुझे कई उत्तम ग्रन्थ सुनने का लाभ नहीं मिला, सो अब अखरता है।

शब्दार्थ:

  • चाव – रुचि, शौक।
  • मुख – मुँह।
  • मूल – आरंभ, आदि, आधार, नींव।
  • ख्याल – ध्यान।
  • प्रगाढ़ – अत्यधिक, गहरा।
  • अखरता – अफ़सोस होता।

प्रसंग:
पूर्ववत्। इसमें गांधी जी ने भागवत धर्मग्रंथ की विशेषता बतलाने का प्रयास किया है। इस विषय में गांधीजो का कहना है कि –

व्याख्या:
भागवत साधारण धर्मग्रंथ नहीं है। वह तो एक ऐसा असाधारण ग्रंथ है, जिसके नियमित पाठ से धार्मिक भावों को प्रवाहित करके जीवन को महान बनाया जा सकता है। गांधीजी का यह स्पष्ट कहना है कि उन्होंने तो इस धर्मग्रंथ को गुजराती भाषा में अनुवाद के माध्यम से बड़ी रुचि के साथ पढ़ा था। फिर उस पर गहराई से मनन भी किया था। यह ध्यान देने की बात है कि अपने इक्कीस दिनों के लगातार उपवास के दौरान तो उन्होंने इसे और रुचि के साथ समझने का प्रयास किया था। उस समय उनके लिए एक वह सुवअसर प्राप्त हुआ था।

जब भारत-भूषण पंडित मदनमोहन मालवीय जी ने अपने मुखारविंद से इसके कुछ अंश को मूल संस्कृत में सुना। उससे उन्हें यह पश्चाताप हुआ कि अगर वे इसे अपने बचपन में इस तरह सुने होते, तो उसी समय ही उन्हें इससे अत्यधिक लगाव हो गया होता। इस तरह उनका पिछला समय न तो बर्बाद होता और न उन्हें इस तरह से पछताना पड़ता। सच में बचपन में जो भी आदत, चाहे अच्छी हो या बुरी पड़ जाती है, वह पूरे जीवन में स्थायी रूप से हो जाती है। यही कारण है कि उस समय के ऐसे-ऐसे श्रेष्ठ ग्रंथों को सुनने का लाभ नहीं उठा पाए, जिसके लिए उन्हें आज भी बहुत पछताना पड़ता है।

विशेष:

  1. भाषा में सरलता है।
  2. भागवत का महत्त्वांकन किया गया है।
  3. आत्मकथात्मक शैलो है।
  4. बचपन को जोवन की नींद के रूप में माना गया है।
  5. यह अंश ज्ञानवर्द्धक है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. भागवत्कैसा ग्रंथ है?
  2. मालवीय जी क्या थे?

उत्तर:

  1. भागवत् ग्रंथ एक ऐसा ग्रंथ है, जिसके पास से धर्म का रसप्रवाहित होता है।
  2. मालवीय जी भगवद्-भक्त थे। वे भागवत् मोहक और मधुर स्वरों में पाठ करतेथे।

प्रश्न.

  1. बचपन के संस्कार कैसे होते हैं?
  2. गांधीजी को क्या अखरता है?

उत्तर:

  1. बचपन के संस्कारों की जड़ें गहरी होती हैं। वे बाद में जीवन में अपना प्रभाव किसी-न-किसी प्रकार से अवश्य डालती हैं।
  2. गांधीजी को अपने बचपन में कई उत्तम ग्रंथों को सुनने का लाभ नहीं मिला। वही अब उन्हें अखरता है।

MP Board Class 11th Hindi Solutions

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 8 देश-प्रेम

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 8 देश-प्रेम (निबंध, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल)

देश-प्रेम पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

देश-प्रेम लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
देश-प्रेम का दावा कौन नहीं कर सकता?
उत्तर:
जो हृदय संसार की जातियों के बीच अपनी जाति की स्वतन्त्र सत्ता का अनुभव नहीं कर सकता, वह देश-प्रेम का दावा नहीं कर सकता।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
अपने स्वरूप को भूलने पर हमारी कैसी दशा होगी?
उत्तर:
अपने स्वरूप को भूलने पर हमारी दशा अपनी परम्परा से सम्बन्ध तोड़कर नई उभरी हुई इतिहास शून्य जातियों के समान होगी।

प्रश्न 3.
साँची की प्रसिद्धि का क्या कारण है?
उत्तर:
साँची की प्रसिद्धि का कारण है-बहुत सुन्दर छोटी-सी पहाड़ी के ऊपर स्थित होना, जिसके नीचे छोटा-मोटा जंगल है।

प्रश्न 4.
लेखक ने किस मौसम में साँची की यात्रा की थी?
उत्तर:
लेखक ने वसन्त ऋतु में साँची की यात्रा की थी।

देश-प्रेम दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
देश-प्रेम को साहचर्य प्रेम क्यों कहा गया है?
उत्तर:
देश-प्रेम को साहचर्य प्रेम कहा गया है। यह इसलिए कि इसके बिना सच्चा देश-प्रेम सम्भव नहीं है। जिनके बीच हम रहते हैं, जिन्हें हम बराबर अपनी आँखों से देखते रहते हैं, जिनकी बातें हम हमेशा सुनते रहते हैं। इस प्रकार जिनसे हमारा हर घड़ी का साथ रहता है, उनसे हमारा गहरा सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। यह सम्बन्ध स्थापित हो जाना ही साहचर्यगत प्रेम है।

प्रश्न 2.
रसखान ने ब्रजभूमि के प्रेम के सम्बन्ध में क्या कहा है?
उत्तर:
रसखान ने ब्रजभूमि के प्रेम के सम्बन्ध में यह कहा है –

“नैनन सों ‘रसखान’ जबै ब्रज के वन, बाग, तड़ाग निहारौं।
केतिक वे कलधौत के धाम, करील के कुंजन ऊपर वारौं॥”

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
देश के स्वरूप से परिचित होने के लिए लेखक ने किन-किन बातों पर बल दिया है?
उत्तर:
देश के स्वरूप से परिचित होने के लिए लेखक ने निम्नलिखित बातों पर बल दिया है –

  1. घर से बाहर निकलकर और अपनी आँखें खोलकर देखना चाहिए कि खेतों में हरियाली कैसी लहलहा रही है।
  2. झाड़ियों के बीच नाले किस प्रकार कल-कल स्वर करते हुए बह रहे हैं।
  3. दूर-दूर तक पलाश के लाल-लाल फूल कैसे खिल रहे हैं और उनसे धरती कैसे लाल हो रही है।
  4. कछारों में पशुओं के झुण्ड चराते हुए चरवाहे कैसे तानें लड़ा रहे हैं।
  5. आमों के बागों के बीच गाँव कैसे. झाँक रहे हैं। उन गाँवों के लोगों से किसी पेड़ की छाया में कुछ देर बैठकर बातें करें कि ये सब हमारे ही देश के हैं।

प्रश्न 4.
“गेहूँ का पेड़ आम के पेड़ से छोटा होता है या बड़ा।” यह कथन किस सन्दर्भ में कहा गया है?
उत्तर:
“गेहूँ का पेड़ आम के पेड़ से छोटा होता है या बड़ा।” यह कथन अपने देश का महत्त्व भूलकर दूसरे देश के महत्त्व को समझने वाले गुलामी मानसिकता के शिकार लोगों की सोच-समझ के सन्दर्भ में कहा गया है। इस कथन के द्वारा लेखक ने यह बतलाना चाहा है कि देश-प्रेम होना और स्वदेशीपन की पहचान रखना आजकल के शहरी बाबुओं के लिए लज्जा का एक विषय हो रहा है।

देश-प्रेम भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथनों का भाव पल्लवन कीजिए –

  1. स्वतन्त्रता से अभिप्राय स्वरूप की स्वतन्त्र सत्ता है।
  2. प्रेम हिसाब-किताब नहीं है। हिसाब-किताब करने वाले भाड़े पर मिल सकते हैं, पर प्रेम करने वाले नहीं।
  3. परिचय प्रेम का प्रवर्तक है।

उत्तर:
1. स्वतन्त्रता से अभिप्राय स्वरूप की स्वतन्त्र सत्ता है:
उत्तर:
उपर्युक्त कथन का भाव यह है कि स्वदेश-प्रेम स्वतन्त्र सत्ता के अनुभव बिना नहीं हो सकता है। जो जाति या प्राणी अपनी स्वतन्त्र सत्ता का अनुभव नहीं कर पाता है, वह देश-प्रेम का दावा नहीं कर सकता है। स्वतन्त्र सत्ता से अभिप्राय अपने स्वरूप की स्वतन्त्र सत्ता ही है। इसलिए देश-प्रेम तभी सम्भव है, जब कोई देशवासी स्वतन्त्रतापूर्वक अपने देश के एक-एक रूप की स्वतन्त्रता की पहचान करे। उससे . लगाव रखे। उसके साथ रहे। उसे चाहभरी दृष्टि से देखे और उसकी याद में आँसू बहाए।

2. प्रेम हिसाब-किताब नहीं है। हिसाब-किताब करने वाले भाड़े पर मिल सकते हैं, पर प्रेम करने वाले नहीं।
उत्तर:
उपर्युक्त कथन का भाव यह है कि देश-प्रेम विशुद्ध प्रेम होता है। उसमें किसी प्रकार के लाभ-हानि की सोच-समझ नहीं होती है। इस प्रकार की सोच-समझ रखने वाले देश-प्रेमी नहीं हो सकते हैं। वे तो अर्थशास्त्री हो सकते हैं, जो देश की दशा या प्रत्येक देशवासी की औसत आमदनी का परता बता सकते हैं। लेकिन देश-प्रेम का दावा नहीं कर सकते हैं। इस प्रकार सच्चा देश-प्रेमी तो अपने देश के प्रत्येक स्वरूप से परिचित होता है। वह देश के प्रत्येक स्वरूप के साथ हर घड़ी सम्बन्ध बनाए रहता है। उसके प्रति हित-चिन्तन किया करता है। इसके लिए वह किसी लाभ-हानि की बात वह तनिक भी नहीं सोचता समझता है। वह यह भलीभाँति जानता है उसका कर्तव्य है देश-प्रेम करना, हिसाब-किताब करना नहीं। हिसाब-किताब करने वाले भाड़े के भी हो सकते हैं, लेकिन देश-प्रेम करने वाले भाड़े के कभी नहीं हो सकते हैं।

3. परिचय प्रेम का प्रवर्तक है।
उत्तर:
उपर्युक्त कथन का भाव यह है कि परिचय से ही लगाव होता है। यह लगाव धीरे-धीरे प्रेम में बदल जाता है। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि बिना परिचय के प्रेम नहीं हो सकता है। हम अपने दैनिक जीवन में यह देखते हैं कि पशु-बालक भी जिनके साथ रहते हैं। उनसे परच जाते हैं। इससे उनका परस्पर प्रेम हो जाता है। वह प्रेम बिना किसी लाभ-हानि का होता है। यह इसलिए परिचय से उत्पन्न हुआ प्रेम शुद्ध हृदय से ही होता है। यह बहुत ही टिकाऊ और सरस होता है।

देश-प्रेम भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
‘भव’ से पूर्व ‘अनु’ जोड़कर ‘अनुभव’ बना है। ‘अनु’ उपसर्व जोड़कर पाँच शब्द बनाइए।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 8 देश-प्रेम img-1

प्रश्न 2.
‘देश-प्रेम’ में तत्पुरुष समास है। तत्पुरुष समास के पाँच उदाहरण लिखिए।
उत्तर:

  1. भातृ-प्रेम
  2. हठयोग
  3. राजपुरुष
  4. राजपुत्र और
  5. दुख-सागर।

प्रश्न 3.
निम्नांकित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
आख, पेड़, वन, पर्वत, देहात।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 8 देश-प्रेम img-2

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों को कोष्ठक में दिए गए निर्देशानुसार परिवर्तित कर लिखिए –

  1. स्तूप के नीचे छोटा-मोटा जंगल है। (निषेधात्मक)
  2. स्तूप छोटी-सी पहाड़ी के ऊपर नहीं है। (विधानवाचक)
  3. महुआ की महक आ रही है। (प्रश्नवाचक)
  4. किसानों के झोपड़ों में क्या हो रहा है? (विस्मयादि बोधक)
  5. तुम चुपचाप काम करते हो। (आज्ञावाचक)

उत्तर:

  1. स्तूप के नीचे छोटा-मोटा जंगल नहीं है।
  2. स्तूप छोटी-सी पहाड़ी के ऊपर है।
  3. क्या महुआ की महक आ रही है?
  4. ओह! किसानों के झोपड़ों में क्या हो रहा है।
  5. तुम चुपचाप काम करो।

देश-प्रेम योग्यता विस्तार

प्रश्न 1.
अपने आस-पास के किसी प्राकृतिक स्थल के सौन्दर्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
भारत के प्रमुख देशभक्तों के चित्रों का संकलन कर एक अलबम बनाइए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 3.
“मातृभाषा प्रेम देश-प्रेम का द्योतक है।” विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन करें।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 4.
मध्यप्रदेश के लेखकों की देशभक्ति पूर्ण रचनाओं का संकलन कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

देश-प्रेम परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

देश-प्रेम लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
स्वतन्त्र सत्ता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
स्वतन्त्र सत्ता से अभिप्राय स्वरूप की स्वतन्त्र सत्ता है।

प्रश्न 2.
अपने स्वरूप को भूलकर ‘भारतवासियों ने क्या किया?
उत्तर:
अपने स्वरूप को भूलकर भारतवासियों ने संसार में सुख-समृद्धि तो प्राप्त की लेकिन उदात्तवृत्तियों को उत्तेजित करने वाली बँधी-बँधाई परम्परा से अपना सम्बन्ध तोड़ लिया और नई उभरी हुई इतिहास शून्य जातियों में अपना नाम लिखाया।

देश-प्रेम दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सच्चे देश-प्रेमी की क्या पहचान होती है?
उत्तर:
सच्चे देश-प्रेमी की निम्नलिखित पहचान होती है –

  1. वह अपने देश के सभी मनुष्य, पशु, पक्षी, लता, गुल्म, पेड़, पत्ते, वन, पर्वत, नदी, नाले, झरने आदि से प्रेम करेगा।
  2. वह अपने देश के प्रत्येक स्वरूप को चाहभरी दृष्टि से देखेगा।
  3. विदेश में होने पर वह अपने देश के स्वरूप को याद करके तरसेगा और आँसू बहाएगा।
  4. वह अपने देश के प्रत्येक दशा को जानने के लिए उत्सुक रहेगा।
  5. वह अपने देश के सुख-दुःख को अपना सुख-दुःख समझने का प्रयास करता रहेगा।

प्रश्न 2.
“आजकल अपने देश के स्वरूप का परिचय बाबुओं की लज्जा का एक विषय हो रहा है।” ऐसा लेखक ने क्यों कहा है?
उत्तर:
“आजकल अपने देश के स्वरूप का परिचय बाबुओं की लज्जा का एक विषय हो रहा है।” ऐसा लेखक ने इसलिए कहा कि आजकल के बाबुओं अर्थात् पश्चिमी संस्कृति व सभ्यता में शिक्षित और अभ्यस्त लोगों को अपने देश के स्वरूप का कुछ भी ज्ञान नहीं होता है। उन्हें तो विदेशी स्वरूप और दशा का ही ज्ञान और पता होता है। इसलिए वे विदेशी स्वरूप को ही महत्त्व देते हैं। उसका ही गुणगान करते हैं। अगर उनके सामने कोई देश-प्रेम की बात करता है, तो उससे वे अपनी मानहानि समझकर उसे महत्त्वहीन सिद्ध करने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार वे देश के स्वरूप से अनजान रहने या बनने में अपनी बड़ी शान समझते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
‘देश-प्रेम’ निबन्ध के मुख्य भाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘देश-प्रेम’ निबन्ध आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का एक ज्ञानवर्द्धक निबन्ध है। इसमें लेखक ने यह बतलाने का प्रयास किया है कि देश-प्रेम हृदय का शुद्ध और पवित्र भाव है। यह उसी के हृदय में उत्पन्न होता है, जिसे अपने देश के प्रत्येक स्वरूप का परिचय और अनुभव प्राप्त होता है। अपने देश के लोक-जीवन के प्रति अनुराग (लगाव) और उसकी शान्ति और उन्नति के लिए हमेशा प्रयत्नशील होने वाला ही सच्चा देश-प्रेमी होता है। परिचय और साहचर्य ही प्रेम के प्रवर्तक होते हैं। इसलिए अपने देश के सभी प्राणियों और प्रकृति के साथ हमारा जितना घनिष्ठ सम्बन्ध होगा, उतना ही हमारा देश-प्रेम मजबूत और परिपूर्ण होगा। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि देश-प्रेम न कोई बाहरी दिखावा है और न कोई शाब्दिक हिसाब-किताब का विषय ही।

देश-प्रेम लेखक-परिचय

प्रश्न 1.
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
हिन्दी साहित्य की सूक्ष्म और परिपक्व रूप में देखने-परखने और मूल्यांकन की परम्परा रामचन्द्र शुक्ल ने दी। इस अभूतपूर्व योगदान के कारण उन्हें आचार्य की उपाधि प्रदान की गई। इतिहास और काव्य के क्षेत्र में आचार्य शुक्ल की भूमिका अधिक चर्चित है।

जीवन-परिचय:
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी के श्रेष्ठ निबन्धकार तथा समीक्षक हैं। आपका जन्म बस्ती जिले के अगोना नामक गाँव में सन् 1884 ई. में हुआ था। इनकी आरम्भिक शिक्षा उर्दू तथा अंग्रेजी में हुई। विधिवत् शिक्षा तो वे इण्टरमीडिएट तक ही प्राप्त कर सके। शुक्लजी ने आरम्भ में मिर्जापुर के मिशन स्कूल में पढ़ाया। जब काशी में नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा ‘हिन्दी शब्द सागर’ का सम्पादन आरम्भ हुआ, तो शुक्लजी को वहाँ कार्य करने का मौका मिला फिर हिन्दू विश्वविद्यालय, काशी के हिन्दी विभाग में प्राध्यापक नियुक्त हुए तथा विभागाध्यक्ष बने। शुक्लजी ने अंग्रेजी, बंगला, संस्कृत तथा हिन्दी के प्राचीन साहित्य का गम्भीर अध्ययन किया।

शुक्लजी का पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश ‘आनन्द-कादम्बिनी’ पत्रिका के सम्पादन से हुआ जिसका सम्पादन उन्होंने कई वर्षों तक कुशलतापूर्वक किया था। इसके बाद वे नागरी प्रचारिणी सभा में ‘हिन्दी शब्द-सागर’ के सहयोगी नियुक्त हुए थे। इसके बाद आपने ‘नागरी प्रचारिणी’ पत्रिका का कई वर्षों तक कुशलता के साथ सम्पादन किया। साहित्य-सेवा करते हुए शुक्लजी ने 8 फरवरी, 1941 को अन्तिम साँस ली।

रचनाएँ:
यों तो शुक्लजी प्रमुख रूप से निबन्धकार और समालोचक के रूप में ही सुविख्यात हैं लेकिन इसके साथ ही कवि भी रहे हैं। यह बहुत कम चर्चा में है। उनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं –

1. निबन्ध-संग्रह:

  • विचार-वीथी
  • चिन्तामणि भाग 1-2
  • त्रिवेणी।

2. समालोचना:

  • जायसी, सूर और तुलसी पर श्रेष्ठ आलोचनाएँ।

3. इतिहास:

  • हिन्दी-साहित्य का इतिहास
  • काव्य में रहस्यवाद

4. कविता-संग्रह:

  • वसन्त
  • पथिक
  • शिशिर-पथिक
  • हृदय का मधुर भार
  • अभिमन्यु-वध।

5. सम्पादन:

  • हिन्दी शब्द-सागर
  • नागरी-प्रचारिणी पत्रिका
  • तुलसी
  • जायसी।

6. अनुवाद:

  • शशांक
  • बुद्ध-चरित
  • कल्पना का आनन
  • आदर्श-जीवन
  • मेगस्थनीज का भारतवर्षीय वर्णन
  • राज्य प्रबन्ध-शिक्षा
  • विश्वप्रपंच।

भाषा-शैली:
शुक्लजी की भाषा संस्कृतनिष्ठ साहित्यिक भाषा है। उसमें कहीं-कहीं तद्भव शब्द भी आए हैं। मुख्य रूप से आपकी भाषा गम्भीर, संयत, भावपूर्ण और सारगर्भित है। आपके शब्द चयन ठोस, संस्कृत और उच्च-स्तरीय हैं। उर्दू, अंग्रेजी और फारसी शब्दों के प्रयोग कहीं-कहीं हुए हैं। अधिकतर संस्कृत और सामाजिक शब्द ही आए हैं। शुक्लजी की शैली गवेषणात्मक, मुहावरेदार और हास्य-व्यंग्यात्मक है। इससे विषय का प्रतिपादन सुन्दर ढंग से हुआ है। इस प्रकार से हम कह सकते हैं कि शुक्लजी की भाषा-शैली, विषयानुकूल होकर साभिप्राय और सफल है।

व्यक्तित्व:
शुक्लजी का व्यक्तित्व सर्वप्रथम कविमय व्यक्तित्व था जो उत्तरोत्तर समीक्षक और निबन्धकार सहित इतिहासकार के रूप में बदलता गया। इस प्रकार शुक्ल जी का व्यक्तित्व विविध है। संक्षेप में हम यह कह सकते हैं कि शुक्लजी युग-प्रवर्तक प्रधान व्यक्तित्व के धनी साहित्यकार हैं।

देश-प्रेम पाठ का सारांश

प्रश्न 1.
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल लिखित निबन्ध ‘देश-प्रेम’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल लिखित निबन्ध ‘देश-प्रेम’ एक भाववर्द्धक और प्रेरक निबन्ध है। इसमें लेखक ने देश-प्रेम के स्वरूप और उसकी विशेषताओं को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। लेखक के अनुसार देश-प्रेम एक ऐसा प्रेम है जो देश के स्वरूप से परिचित होने से प्राप्त होता है। देश के प्रत्येक स्वरूप को अर्थात् उसके मनुष्य, पशु-पक्षी, नदी-नाले, वन, पर्वत सहित सारी भूमि के बीच रहने, उसे हमेशा देखने, अनुभव आदि के द्वारा उसके प्रति लोभ या राग उत्पन्न होना ही देश-प्रेम है। यदि. यह नहीं है तो देश-प्रेम की बातें करना कोरी बकवाद है या किसी और भाव के संकेत के लिए गढ़ा हुआ शब्द है।

इस प्रकार यदि किसी को अपने देश से सच्चा प्रेम होगा तो वह उसके प्रत्यके स्वरूप आदि की याद विदेशों में भी करते हुए उसके लिए तरसता रहेगा। इसीलिए कविवर ‘रसखान’ तो किसी की ‘लकुटी अरु कामरिया’ पर तीनों पुरी का राजसिंहसान तक त्यागने का तैयार थे। लेखक का पुनः कहना है कि पशु-पालक जिसके साथ रहते हैं, उससे परिचित हो जाते हैं। यह परचना ही, परिचय ही प्रेम का प्रवर्तक है। देश-प्रेम के लिए यह आवश्यक है कि हम बाहर निकलकर देखें कि कैसे खेत-बाग लहलहा रहे हैं। कछारों में चौपायों के झुण्ड कैसे इधर-उधर घूम रहे हैं और चरवाहे कैसे तानें लड़ा रहे हैं। नाले झाड़ियों के बीच कैसे बह रहे हैं। टेसू के फूलों से वनस्थली कैसी सुन्दर लग रही है। अमराइयों के बीच झाँकते हुए गाँव में घुसिए, जो मिलें, उनके साथ किसी पेड़ की छाया में बैठकर कुछ बातें कीजिए।

उन्हें अपने देश का समझिए। इससे आपकी आँखों में देश का रूप समा जाएगा। आप उसके स्वरूप से परिचित हो जाएंगे। फिर आपके हृदय में सच्चा देश-प्रेम उत्पन्न हो जाएगा। लेखक का यह मानना है कि आजकल के पढ़े-लिखे लोग देश के स्वरूप से इस प्रकार परिचित होना लज्जा का विषय मान रहे हैं। ऐसे लोग किसी देहात शब्द को कहना या सुनना अपने बाबूपन में बड़ा भारी बट्टा लगना समझ रहे हैं। ऐसे लोगों को यह भी नहीं मालूम कि गेहूँ का पेड़ होता है या आम का।

देश-प्रेम संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

MP Board Solutions

प्रश्न 1.
देश-प्रेम है क्या? प्रेम ही तो है। इस प्रेम का आलंबन क्या है? सारा देश अर्थात् मनुष्य, पशु-पक्षी, नदी-नाले, वन, पर्वत सहित सारी भूमि। यह प्रेम किस प्रकार का है? यह साहचर्यगत प्रेम है। जिनके बीच हम रहते हैं, जिन्हें बरावर आँखों से देखते हैं, जिनकी बातें बराबर सुनते रहते हैं, जिनका हमारा हर घड़ी का साथ रहता है। सारांश यह है कि जिनके सान्निध्य का हमें अभ्यास पड़ जाता है, उनके प्रति लोभ या राग हो सकता है। देश-प्रेम यदि वास्तव में अन्तःकरण का कोई भाव है तो यही हो सकता है। यदि यह नहीं है तो वह कोरी बकवाद या किसी और भाव के संकेत के लिए गढ़ा हुआ शब्द है।

शब्दार्थ:

  • आलंबन – आधार।
  • सहित – साथ।
  • साहचर्यगत – साथ रहने से सम्बन्धित।
  • घड़ी – समय।
  • सान्निध्य – समीप, पास।
  • राग – प्रेम, लगाव।
  • अन्तःकरण – हृदय।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य भाग-1’ में संकलित तथा सुप्रसिद्ध निबन्धकार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा लिखित निबन्ध ‘देश-प्रेम’ शीर्षक से है। इसमें लेखक ने देश-प्रेम क्या है, इसे समझाते हुए कहा है कि व्याख्या-अगर हम यह जानना चाहते हैं कि देश-प्रेम किसे कहते हैं, तो इसका यह उत्तर है कि देश-प्रेम एक प्रकार का प्रेम ही तो है। इस प्रेम का आधार पूरा देश होता है। दूसरे शब्दों में देश के सभी मनुष्य, पशु, पक्षी, पेड़-पौधे, नदी-नाले, . मैदान, वन, पर्वत आदि सहित देश की सारी धरती।

इन सबसे प्रेम करना ही देश-प्रेम है। यह प्रेम साथ-साथ रहने से ही प्राप्त होता है। यह प्रेम जिनके साथ हम रहते हैं, जिन्हें हम देखा करते हैं, जिनसे हम अपने भाव-विचार प्रकट करते हैं और जिनके भाव-विचार को हम ग्रहण करते हैं। कहने का भाव यह कि जिनसे हमारा सम्बन्ध हमेशा बना रहता है, उनसे हमारा लगाव हो जाता है। यह लगाव ही देश-प्रेम है। इसलिए देश-प्रेम यदि सचमुच में हृदय से निकला हुआ कोई भाव है तो यही लगाव है। अगर यह नहीं है, तो देश-प्रेम की बात करना बेकार है। यह किसी बनावटी भाव के लिए गढ़ा हुआ कोई शब्द ही होगा।

विशेष :

  1. देश-प्रेम के स्वरूप पर प्रकाश डाला गया है।
  2. भाषा तत्सम शब्दों की है।
  3. शैली वर्णनात्मक है।
  4. भाव सरस और रोचक हैं।
  5. यह अंश भाववर्द्धक और प्रेरक रूप में है।
  6. वाक्य गठन सारगर्भित है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. देश-प्रेम किसका आलंबन है?
  2. देश-प्रेम को साहचर्यगत प्रेम क्यों कहा गया है?
  3. देश-प्रेम किसका भाव है और क्यों?

उत्तर:

  1. देश-प्रेम सारे देश का आलंबन है।
  2. देश-प्रेम साहचर्यगत प्रेम है। यह इसलिए कि इसके बिना देश-प्रेम हो ही नहीं सकता।
  3. देश-प्रेम अन्तःकरण का भाव है। यह इसलिए कि इसके बिना देश-प्रेम की बातें करना बिलकुल व्यर्थ और मनगढ़त है।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. सारा देश से क्या अभिप्राय है?
  2. हमें किसका अभ्यास कब पड़ जाता है?
  3. लोभ या राग से लेखक का आशय क्या है?

उत्तर:

  1. सारा देश से अभिप्राय है-देश का सम्पूर्ण स्वरूप अर्थात् सभी प्राणी, वन, पर्वत, नदी, नाले, मैदान, सारी धरती आदि।
  2. हमें अपने परिचितों के साथ रहने वाले का अभ्यास पड़ जाता है।
  3. लोभ या राग से लेखक का आशय है-लगाव या प्रेम। जिनके साथ हम हमेशा रहा करते हैं, उनके प्रति हमारा लोभ या राग हो जाता है।

प्रश्न 2.
यदि किसी को अपने देश से सचमुच प्रेम है तो उसे अपने देश के मनुष्य, पशु-पक्षी, लता, गुल्म, पेड़, पत्ते, वन, पर्वत, नदी, निर्झर आदि सबसे प्रेम होगा; वह सबको चाहभरी दृष्टि से देखेगा; वह सबकी सुध करके विदेश में आँसू बहाएगा। जो यह भी नहीं जानते कि कोयल किस चिड़िया का नाम है, जो यह भी नहीं सुनते कि चातक कहाँ चिल्लाता है, जो यह भी आँख भर नहीं देखते कि आम प्रणय-सौरभपूर्ण मंजरियों से कैसे लदे हुए हैं, जो यह भी नहीं झाँकते कि किसानों के झोंपड़ों के भीतर क्या हो रहा है, वे यदि दस बने-ठने मित्रों के बीच प्रत्येक भारतवासी की औसत आमदनी का परता बताकर देश-प्रेम का दावा करें तो उनसे पूछना चाहिए कि भाइयो! बिना रूप-परिचय का यह प्रेम कैसा? जिनके दुःख-सुख के तुम कभी साथी नहीं हुए, उन्हें तुम सुखी देखना चाहते हो, यह कैसे समझें?

शब्दार्थ:

  • चाहभरी – लगावभरी।
  • सुध – याद।
  • प्रणय सौरभपूर्ण – प्रेम-सुगन्धित।
  • मंजरियों – बोरों।
  • परत-हिसाब।

प्रसंग:
पूर्ववत्। इसमें लेखक ने देश-प्रेम के लिए आवश्यक तत्त्वों पर प्रकाश डालते हुए नकली देश-प्रेमियों पर तीखा व्यंग्य-प्रहार किया है। इस विषय में लेखक का कहना है कि –

व्याख्या:
यदि कोई व्यक्ति सच्चा देश-प्रेमी है, तो उसकी यही पहचान है कि वह अपने देश के प्रत्येक स्वरूप से परिचित होगा। उससे उसका अधिक लगाव होगा। कहने का भाव यह है कि अपने देश से प्रेम करने वाला अपने देश की सारी धरती, मनुष्य, पशु-पक्षी, नदी, नाले, पर्वत, झरने, हवा, पानी, आसमान और वातावरण से जी भरकर लगाव रखेगा। वह इन सबके प्रति अपना सच्चा भाव और विचार रखेगा। इन सभी को बार-बार याद करता रहेगा। अगर वह अपने देश से दूसरे देश में चला जाएगा, तो वहाँ भी वह इन सबको चाहभरी दृष्टि से देखना चाहेगा! इन सबको याद करेगा। इनके अभाव में वह रोएगा और तड़पेगा। इसके विपरीत जो सच्चा देश-प्रेमी नहीं होगा, वह देश के स्वरूप से बिलकुल नहीं परिचित होगा। वह तो यह भी न जानेगा कि कोयल किसे कहते हैं।

चातक क्या है और वह क्या करता है। उसे बाग-खेत के लहलहाने का कुछ भी ज्ञान-ध्यान नहीं होता है। उसे आम के सुगन्धित बौर, खेतों की हरी-भरी फसलें, किसानों के झोपड़ों के भीतर की दीन-दशा आदि का कुछ भी पता नहीं होता है। इस प्रकार के ढोंगी और नकली देश-प्रमियों की देश-ज्ञान की बातें फजूल की होती हैं। ऐसा इसलिए कि उन्हें देश की दशा से कुछ भी लेना-देना नहीं होता है। इसलिए अगर ऐसे लोग अपने को देश-प्रेमी कहते हैं तो उनसे यह जानना चाहिए कि देश के स्वरूप से परिचित हुए बिना वे किस आधार पर अपने को देश-प्रेमी कह रहे हैं। देश के स्वरूप से अनजान रहकर और उसकी आवश्यकताओं को अनदेखा कर भला कोई देश-प्रेमी कैसे कहा जा सकता है। अर्थात् नहीं कहा जा सकता है।

विशेष:

  1. सच्चे देश-प्रमियों की पहचान बतलायी गई है।
  2. भाषा सरल है।
  3. शैली व्यंग्यात्मक है।
  4. ढोंगी देश-प्रेमियों पर व्यंग्य प्रहार है।
  5. यह अंश रोचक और भावप्रद है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. सच्चा देश-प्रेमी कौन होता है?
  2. नकली देश-प्रेमी कौन होता है?
  3. हमें अपने देश के स्वरूप से किस प्रकार परिचित होना चाहिए?

उत्तर:

  1. सच्चा देश-प्रेमी वही होता है, जिसे अपने देश के प्रत्येक स्वरूप से प्रेम होता है।
  2. नकली देश-प्रेमी वह होता है, जिसे अपने देश के स्वरूप से प्रेम-परिचय नहीं होता है। वह देश की दशा का हिसाब-किताब बताकर देश-प्रेमी होने की बड़ी-बड़ी बातें बनाता है।
  3. हमें अपने देश के स्वरूप से भलीभाँति परिचित होना चाहिए। देश के प्रत्येक स्वरूप को चाहभरी दृष्टि से देखना चाहिए। उसकी याद में विदेश में होने पर ऑसू बहाना चाहिए।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. सच्चे देश-प्रेमी और ढोंगी देश-प्रेमी में क्या अन्तर है?
  2. देश-प्रेम की पहली शर्त क्या है?

उत्तर:

1. सच्चा देश-प्रेमी अपने देश के प्रत्येक स्वरूप से परिचित होता है। वह उससे हमेशा प्रेम करता है। अगर वह किसी कारणवश विदेश चला जाता है, तो वह वहाँ अपने देश की हरेक बातों को याद करता है। उसके लिए तरसता है। उसके अभाव में आँसू बहाता है। इसके विपरीत ढोंगी देश-प्रेमी न तो अपने देश के किसी भी स्वरूप से परिचित होता है और न उससे प्रेम करता है। यह भी वह अपने मित्रों के बीच देश की दशा का हिसाब-किताब की बातें करता रहता है।

2. देश-प्रेम की पहली शर्त है-अपने देश के स्वरूप को चाहभरी दृष्टि से देखना और उससे हमेशा प्रेम करना।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
पशु और बालक भी जिनके साथ अधिक रहते हैं, उनसे परच जाते हैं। यह परचना परिचय ही है। परिचय प्रेम का प्रवर्तक है, बिना परिचय के प्रेम नहीं हो सकता। यदि देश-प्रेम के लिए हृदय में जगह करनी है तो देश के स्वरूप से परिचित और अभ्यस्त हो जाइए। बाहर निकलिए तो आँख खोलकर देखिए कि खेत कैसे लहलहा रहे हैं, नाले झाड़ियों के बीच कैसे बह रहे हैं, टेसू के फूलों से वनस्थली कैसी लाल हो रही है, कछारों में चौपायों के झुण्ड इधर-उधर चरते हैं, चरवाहे तान लड़ा रहे हैं, अमराइयों के बीच गाँव झाँक रहे हैं; उनमें घुसिए, देखिए तो क्या हो रहा है।

जो मिलें उनसे दो-दो बातें कीजिए उनके साथ किसी पेड़ की छाया के नीचे घड़ी-आध-घड़ी बैठ जाइए और समझिए कि ये सब हमारे देश के हैं। इस प्रकार जब देश का रूप आपकी आँखों में समा जाएगा, आप उसके अंग-प्रत्यंग से परिचित हो जाएँगे, तब आपके अन्तःकरण में इस इच्छा का सचमुच उदय होगा कि वह हमसे कभी न छूटे, वह सदा हरा-भरा और फला-फूला रहे, उसके धनधान्य की वृद्धि हो, उसके सब प्राणी सुखी रहें।

शब्दार्थ:

  • परच – परिचित होना।
  • प्रवर्तक – प्रतीक।
  • टेसू – पलाश।
  • कछार – नदी का छोड़ा हुआ स्थान, भाग।
  • तान लड़ाना – गीत गाना।
  • अमराइयों – आमों।
  • अंग-प्रत्यंग – प्रत्येक स्वरूप।
  • अन्तःकरण – हृदय।
  • धनधान्य – धन-वैभव।

प्रसंग:
पूर्ववत्। इसमें लेखक ने देश के स्वरूप से परिचय करने के विषय में कहा है कि व्याख्या-साथ-साथ रहने से परिचय हो जाता है। यह परिचय किसी के लिए भी सम्भव होता है। यह न केवल मनुष्य के लिए सम्भव होता है अपितु पशु-पक्षी के लिए भी सम्भव होता है। इस परिचय से ही प्रेम का प्रर्वतन होता है। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि जब तक परिचय नहीं होगा, तब तक प्रेम नहीं हो सकता है। इसलिए अगर हमें देश-प्रेम करना है या देश-प्रेमी बनना है तो हमें अपने शुद्ध हृदय से देश के एक-एक स्वरूप से परिचित होना है। इसकी आदत डालनी होगी। इसके लिए यह जरूरी है कि जब हम बाहर निकलें तो अपनी आँखें खोलकर देश के एक-एक स्वरूप को देखें। यह देखें कि खेतों में हरी-भरी फसलें कैसे लहलहा रही हैं।

झाड़ियों के कल-कल करते हुए नाले कैसे बह रहे हैं। पलाश के लाल-लाल फूलों से कैसे धरती रंगीन हो रही है। कछारों में पशुओं को चराते हुए चरवाहे एक-से-एक बढ़कर कैसे गाने छेड़ रहे हैं। आमों के बागों के बीच में गाँवों की झलक कैसी दिखाई दे रही है। फिर गाँवों में हम जाएँ। गाँव के लोगों से मिलें। उनका समाचार पूछे। उनके साथ कुछ देर तक रहें। उनसे भाईचारा की भावना से उनमें परस्पर दुःख-सुख की बातें करें। इससे देश के स्वरूप का पूरा ज्ञान हमको हो जाएगा। हम देश के एक-एक रूप से परिचित हो जाएँगे। जब हमारी ऐसी दशा हो जाएगी, तब हमारे हृदय में देश-प्रेम के सच्चे भाव खिल उठेंगे। उन्हें हम कभी नहीं भूलना चाहेंगे। इस प्रकार हम एक सच्चे देश-प्रेमी होकर देश के सुख-शान्ति और उसकी महानता के लिए हमेशा शुभकामना करते रहेंगे।

विशेष:

  1. देश-प्रेम के लिए आवश्यक तथ्यों पर प्रकाश डाला गया है।
  2. देश के स्वरूप को स्पष्ट किया गया है।
  3. भाषा प्रभावशाली है।
  4. शैली वर्णनात्मक है।
  5. देश-प्रेम की प्रेरणा दी गई है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. परिचय प्रेम का प्रवर्तक है क्यों?
  2. हृदय से देश-प्रेम करने के लिए क्या आवश्यक है?
  3. हमें किसका अभ्यस्त हो जाना चाहिए?

उत्तर:

  1. परिचय प्रेम का प्रवर्तक है। यह इसलिए कि बिना परिचय के प्रेम नहीं हो सकता है।
  2. हृदय से देश-प्रेम करने के लिए आवश्यक है कि हम देश के अंग-प्रत्यंग से बखूबी परिचित हो जाएं।
  3. हमें देश के प्रत्येक स्वरूप से परिचित और अभ्यस्त हो जाना चाहिए।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. लेखक ने सच्चे देश-प्रेम का भाव किसे माना है?
  2. देश-प्रेम की परिपूर्णता कैसे सम्भव है?

उत्तर:

  1. लेखक ने अपने देश के लोक-जीवन के प्रति लगाव और उसके सुख-शान्ति की कामना करते रहना ही सच्चे देश-प्रेम का भाव माना है।
  2. देश-प्रेम की परिपूर्णता अपने देश की प्रकृति के साथ गहरा सम्बन्ध और साहचर्य से ही सम्भव है।

MP Board Class 11th Hindi Solutions

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था

साम्यावस्था (Equilibrium) NCERT अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
स्थिर ताप पर बंद पात्र में एक दव अपनी वाष्प के साथ साम्यावस्था में है तथा अचानक पात्र का आयतन बढ़ जाता है
(a) वाष्पदाब परिवर्तन में क्या प्रभाव पड़ा?
(b) प्रारंभिक वाष्पन तथा संघनन दर में क्या परिवर्तन हुआ ?
(c) क्या होता है जब अंत में पुनः साम्यावस्था आती है तथा अंतिम वाष्पदाब क्या होगा?

उत्तर:
(a) प्रारंभ में वाष्पदाब घटता है, क्योंकि समान मात्रा की वाष्प बड़े स्थान पर बँट जाती है।
(b) प्रारंभ में वाष्पन की दर बढ़ती है क्योंकि ज्यादा स्थान उपलब्ध होता है परन्तु इकाई आयतन में उपस्थित वाष्प घटती है आयतन बढ़ने पर, इसलिये संघनन की दर प्रारंभ में घटती है।
(c) अंत में साम्यावस्था फिर से स्थापित हो जाती है, जब अग्र क्रिया तथा प्रतीप क्रिया की दर बराबर हो जाती है। अतः वाष्पदाब नहीं बदलता क्योंकि ये ताप पर निर्भर करता है, पात्र के आयतन पर निर्भर नहीं।

प्रश्न 2.
निम्न रासायनिक साम्य के लिये K. का मान ज्ञात कीजिए जबकि साम्यावस्था में सान्द्रण है – [SO2] = 0.60M, [O2] = 0.82 M एवं [SO3] = 1.90 M.
2SO2(g + O2(g)) ⇄ 2SO3(g)
हल:
अभिक्रिया 2SO2(g) + O2(g) ⇄ 2SO3(g) के लिये,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 1

प्रश्न 3.
108 Pa दाब तथा निश्चित ताप पर I2 वाष्य में 40% आयतन के माप पर I परमाणु है –
I2(g) ⇄  I2(g)
साम्य पर Kp की गणना कीजिए।
हल:
I2 व I के मोल का अनुपात है 60 : 40 या 3 : 2
अतः इस अनुपात पर I2 का अंश प्रभाज = \(\frac { 3 }{ 5 }\)
I का अंश प्रभाज == \(\frac { 2 }{ 5 }\)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 2

प्रश्न 4.
निम्न अभिक्रियाओं के लिये साम्य स्थिरांक K. के लिये व्यंजक लिखिए –
1. 2NOCl(g) ⇄ 2NO(g) + Cl2(g)
2. 2Cu(NO3)2(s) ⇄ 2CuO(s) + 4NO2(g) + O2(g)
3. CH3COOC2H5(aq) + H2O(l) ⇄  CH3 – COOH(aq) + C2H5OH(aq)
4. Fe(aq)+3 + 3OH(aq) ⇄ Fe(OH)3(s)
5. I2(s) + 5F2 ⇄  2IF5

MP Board Solutions

उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 29

प्रश्न 5.
निम्न रासायनिक साम्यों हेतु K के मान ज्ञात कीजिए जबकि K, के मान दिये हुए हैं –
1. 2NOCl(g) ⇄ 2NO(g) + Cl2(g), [Kp = 1.8 x 10-2 (at 500 K)]
2. CaCO3(s) ⇄ CaO(s) + CO2(g), [Kp = 167 (at 1073 K)]
हल:
1. ∆ng = 3 – 2 = 1,
Kp = \(\mathrm{K}_{p}=\mathrm{K}_{c}(\mathrm{RT})^{\Delta n_{g}}\),
1.8 x 10-2 = Kc × 500 × 0.082
Kc = 4.38 × 10-4mol L-1.

2. ∆n = 1, क्योंकि, ठोस पर विचार नहीं किया गया।
Kp =Kc (RT)∆n
167 = Kc × 0.0821 × 1073 या Kc = 1.9 मोल / लीटर।

प्रश्न 6.
निम्न साम्य के लिये K. = 6.3 x 10-3 (at 1000 K) NO(g)+ O(g) ⇄  NO2 + O2(g))
अग्र – प्रतीप क्रिया (साम्यावस्था) में तत्वीय द्वि-आण्विक अभिक्रिया है, तो प्रतीप क्रिया (विपरीत क्रिया) के लिये K. क्या होगा?
हल:
उत्क्रमणीय (उल्टी) क्रिया के लिये,
\(\frac { 1 }{ { K }_{ c } } \) = \(\frac { 1 }{ 6.3\times { 10 }^{ -3 } } \) = 0.159 ×103 = 159

प्रश्न 7.
शुद्ध द्रव व ठोस साम्य स्थिरांक, व्यंजक लिखते समय क्यों नहीं लिखते हैं ?
उत्तर:
[शुद्ध द्रव] या [शुद्ध ठोस]

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 3
स्थिर ताप पर शुद्ध द्रव या ठोस का घनत्व व अणुभार स्थिर होता है, इसलिये उनकी मोलर सान्द्रता स्थिर होती है, जो साम्य स्थिरांक में शामिल होता है।

प्रश्न 8.
N2 व O(g) के बीच रासायनिक अभिक्रिया निम्नानुसार होती है –
2N2(g) + O2(g) ⇄ 2N2O(g) यदि 0.482 मोल N2 एवं 0.933 मोल O2 को 10 लीटर के अभिक्रिया पात्र में किसी नियत ताप में रखकर N2O बनने दिया जाता है, जिसके लिये Kc= 2.0 × 10-37 है। साम्य पर साम्य मिश्रण का संघटन बताइए।
हल:
2N2(g) + O2(g) ⇄ 2N2O(g)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 4
Kc= 2.0 × 10-37 का मान अत्यधिक कम है अर्थात् अभिकारक की कम मात्रा क्रिया करती है। अतः x अत्यधिक कम होता है और उसे उपेक्षित कर देते हैं।

[N2] = 0.0482 मोल लीटर’-1, [O2] = 0.0933 मोल लीटर-1, [N2O] = 0.1x
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 5
हल करने पर, यह देता है, x = 6.6 × 10-20.
[N2O] = 0.1 × 6.6 × 10-20 = 6.6 × 10-21 मोल लीटर-1

प्रश्न 9.
नाइट्रिक ऑक्साइड, Br, से अभिक्रिया कर नाइट्रोसिल ब्रोमाइड बनाता है, जिसकी रासायनिक अभिक्रिया निम्न है –
2NO(g)+ Br(g) ⇄ 2NOBr(g)
जब 0.087 मोल NO एवं 0.0437 मोल Br2 को स्थिर ताप पर एक बन्द पात्र में मिलाया जाता है तो 0.0518 मोल NOBr साम्यावस्था में प्राप्त होता है। साम्य पर NO एवं Br2 की मात्राएँ ज्ञात कीजिए।
हल:
0.0581 मोल NOBr का 0.0518 मोल NO और 0.518/2 = 0.0259 Br2 का मोल
साम्यावस्था पर NO की मात्रा = 0.087 – 0.0518 = 0.0352 मोल
Br2की मात्रा =0.0437 – 0:0259 = 0.0178 मोल।

MP Board Solutions

प्रश्न 10.
450 K पर K, = 2.0 × 1010/bar की साम्यावस्था अभिक्रिया के लिये 2SO2(g) + O2(g) ⇄ 2SO3(g) इस ताप पर K. का क्या मान होगा?
हल:
दी गई अभिक्रिया में ∆n = 2 – 2 – 1 = -1,
Kp = Kc (RT)-1
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 6

प्रश्न 11.
एक HI(g) का सैम्पल 0.2 वायुमण्डल दाब पर फ्लास्क में रखा गया। साम्यावस्था पर HI(g) का आंशिक दाब 0.04 वायुमण्डल पाया गया। दिये गये साम्य के लिये Kp का मान ज्ञात कीजिए।
2HI(g) ⇄ H2(g) + I2(g)
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 7

प्रश्न 12.
1.57 मोल N2 1.92 मोल H2 तथा 8.13 मोल NH3 को 20 लीटर के पात्र में 500 K पर रखा है। इस ताप पर अभिक्रिया N2(g)+ 3H2(g) → 2NH3(g) के लिये Kc = 1.7 × 102है। तो क्या अभिक्रिया मिश्रण साम्यावस्था पर है ? यदि नहीं तो नेट क्रिया की दिशा बताइए।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 8
Qc < Kc इसलिये अभिक्रिया प्रतीप दिशा में चलेगी।

प्रश्न 13.
गैस अभिक्रिया के लिये साम्य स्थिरांक व्यंजक है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 9
इस व्यंजक के लिये संबंधित संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
साम्य स्थिरांक के व्यंजक के अनुसार अभिक्रिया होगी –
4NO(g) + 6H2O(g) ⇄  4NH3(g) + 502(g).

प्रश्न 14.
एक मोल H2O व एक मोल CO को 10 लीटर के पात्र में लेकर 725 K तक गर्म किया गया। साम्यावस्था पर भारानुसार 40% जल CO से निम्नानुसार अभिक्रिया करता है –
H2 O(g) + Co(g) ⇄  H2(g) + CO2(g) अभिक्रिया के लिये साम्य स्थिरांक की गणना कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 10

MP Board Solutions

प्रश्न 15.
700 Kताप पर अभिक्रिया H2(g) + I2(g) ⇄  2HI2(g) के लिये साम्य स्थिरांक 54.8 है। यदि साम्यावस्था पर 0.5 mol L-1 HI(g) इसी ताप पर उपस्थित हो तो H2(g) व I2(g) के सान्द्रण क्या होंगे ? अभिक्रिया को प्रारम्भिक रूप में HI(g) लेकर प्रारम्भ की गयी तथा 700 K तक साम्य स्थापित हुआ है।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 30

प्रश्न 16.
साम्यावस्था पर प्रत्येक पदार्थ का सान्द्रण क्या होगा, जबकि ICI का प्रारम्भिक सान्द्रण 0.78 M था –
2ICI(g) ⇄  I2(g) + Cl2(g), Kc = 0.14
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 11
[I2] [Cl2] = 0.167 M तथा [ICI] = 0.78 – 2 × 0.167 = 0.446 M.

प्रश्न 17.
नीचे दी गयी साम्य के लिये 899 K पर Kp, = 0.04 atm है। C2H6 का साम्य सान्द्रण क्या होगा, जबकि इसे 4.0 atm दाब पर फ्लास्क में साम्य स्थापित होने तक रखा गया है –
C2H6(g) ⇄  CH2 + H4(g) + H2(g)
हल:
यहाँ, Kp= 0.04 atm, C2H6 का प्रारंभिक दाब = 4 atm, साम्यावस्था पर C2H6 का दाब = ?
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 12
उपर्युक्त समीकरण में मान रखकर हम C2H6 का साम्यावस्था दाब की गणना करते हैं –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 13

प्रश्न 18.
एथेनॉल एवं ऐसीटिक अम्ल की अभिक्रिया से एथिल ऐसीटेट बनाया जाता है एवं साम्य को इस प्रकार दर्शाया जा सकता है –
CH3COOH(l) + C2H5OH(l) ⇄  CH2COOC5H5(l) + H2O(l)
इस अभिक्रिया के लिए सांद्रता अनुपात (अभिक्रिया – भागफल) Q.लिखिए (टीप-यहाँ पर जल आधिक्य में नहीं है एवं विलायक भी नहीं है –
यदि 293 K पर 1.00 मोल ऐसीटिक अम्ल एवं 0.18 मोल एथेनॉल प्रारंभ में लिये जाएँ तो अंतिम साम्य मिश्रण में 0.171 मोल एथिल ऐसीटेट है। साम्य स्थिरांक की गणना कीजिए। 0.5 मोल एथेनॉल एवं 1.0 मोल ऐसीटिक अम्ल से प्रारंभ करते हुए 293 K ताप पर कुछ समय पश्चात् एथिल ऐसीटेट के 0.214 मोल प्राप्त किया जाए तो क्या साम्य स्थापित हो गया ?
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 14
क्योंकि, Qc का मान Kc से कम है, अतः साम्यावस्था नहीं आई है तथा अभिक्रिया अग्र दिशा में चलेगी।

प्रश्न 19.
PCI5 के एक शुद्ध सैम्पल को एक खाली पात्र में 473 K पर रखा गया। साम्यावस्था स्थापित हो जाने पर PCl,5 का सान्द्रण 0.5 x 10.1 मोल/लीटर पाया गया। यदि साम्य स्थिरांक Kc= 8.3 × 10-3 हो, तो साम्य पर PCl3 एवं CI2 के सागण बताइए।
PCl5(g) ⇄  PCl3(g) + Cl2(g).
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 15

MP Board Solutions

प्रश्न 20.
लौह अयस्क से स्टील बनाने की प्रक्रिया में आयरन (II) ऑक्साइड का अपचयन CO द्वारा होता है, जिसमें आयरन धातु व CO2 बनते हैं –
FeO(s) + CO(g) ⇄ Fe(s) + CO2(g), Kp = 0.265 atm (at 1050 K)
यदि प्रारम्भिक आंशिक दाब Pco = 1.4 atm एवं \({ P }_{ { CO }_{ 2 } }\) = 0.80 atm हो, तो CO व CO2 के साम्य आंशिक दाब क्या होंगे?
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 16
क्योंकि, Qp>Kp इसलिये क्रिया प्रतीप दिशा में चलेगी।

प्रश्न 21.
अभिक्रिया N2(g) + 3H2(g)) ⇄ 2NH3(g) के लिये Kc 500 K पर 0.061 है। संघटन मिश्रण में 3.0 mol L-1 N2, 2.0 मोल L-1H2 तथा 0.5 mol L-1 NH3 हो, तो क्या अभिक्रिया साम्य में है, यदि नहीं तो साम्यावस्था के लिये अभिक्रिया किस दिशा में जायेगी?
हल:
N2(g) + 3H2(g)) ⇄ 2NH3(g)
किसी समय पर सान्द्रण, [N2] = 3.0 mol L-1,[H2] = 2.0 mol L-1,[NH3] = 0.5
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 17
अतः उस समय पर अभिक्रिया साम्य स्थिति में नहीं है क्योंकि Qc का मान Kc के बराबर नहीं है। (Kc>Qc)
चूँकि Qc का मान साम्य स्थिरांक, K. से कम है अतः साम्यावस्था प्राप्त करने हेतु अभिक्रिया अग्र दिशा में अग्रसर होगी।

प्रश्न 22.
BrCI वियोजन द्वारा Br2 तथा CI2 देकर साम्यावस्था पर पहुँचती है। 2BrCl(g) ⇄  Br2(g) + CL2(g) के लिये, Kc = 32, 500K ताप पर है। प्रारंभ में शुद्ध BrCI की सान्द्रता 3.3 × 10-3 मोल L-1है, तो साम्यावस्था पर मिश्रण में इसकी मोलर सान्दता क्या होगी?
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 18

प्रश्न 23.
1127 K एवं 1 वायुमण्डलीय दाब पर CO एवं CO2 का गैसीय मिश्रण इस प्रकार साम्य में है कि कार्बन भारानुसार 90-55% CO में है –
C(s) + CO2(g) ⇄ 2CO(g)
इस ताप पर अभिक्रिया के लिये K. की गणना कीजिए।
हल:
माना, गैसीय मिश्रण का कुल भार 100g है।
अत: CO का भार = 90.55 g
तथा CO2 का भार = 100 – 90.55 = 9.45g
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 19

प्रश्न 24.
NO और O2 से NO2 बनने में साम्य स्थिरांक व ∆G° की गणना 298K पर कीजिए –
NO(g) + \(\frac { 1 }{ 2 }\) O2(g) ⇄  NO(g)
जबकि \({ \triangle G° }_{ { NO }_{ 2 } }\) = 52.0 kJ/mol, ∆fG°NO(NO)= 87.0 kJ/mol एवं ∆fG° (O2) = 0 k.J / mol.
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 20

MP Board Solutions

प्रश्न 25.
निम्न रासायनिक साम्यों में अभिक्रिया के क्रियाफलों के मोलों की संख्या बढ़ेगी, घटेगी या समान रहेगी, जब आयतन बढ़ाते हुए दाब कम कर दिया जाये –
(a) PCl5(g) ⇄  PCl3(g) + Cl2(g)
(b) CaO(s) + CO2(g) ⇄ CaCO3(g)
(c) 3Fe(s) + 4H2O(g) ⇄  Fe3O4(s) + 4H2(g)
उत्तर:
(a) अभिक्रिया अग्र दिशा में चलती है – उत्पाद के मोलों की संख्या बढ़ती है।
(b) अभिक्रिया प्रतीप दिशा में चलती है- अभिकारक के मोलों की संख्या बढ़ती है।
(c) कोई प्रभाव नहीं, गैसों के मोलों की संख्या दोनों तरफ समान है।

प्रश्न 26.
निम्न में कौन-सी क्रिया दाब बढ़ाने पर प्रभावित होती है तथा बताइए कि क्या परिवर्तन से क्रिया अग्र या प्रतीप दिशा में जायेगी

  1. COCl2(g) ⇄ CO(g)+ Cl2(g)
  2. CH4(g) + 2S2(g) ⇄ CS2(g) + 2H2S(g)
  3. CO2(g) + C(s) ⇄ 2CO(g)
  4. 2H2(g) + CO(g) ⇄  CH3OH(g)
  5. CaCO3(s) ⇄ CaO(s) + CO2(g)
  6. 4NH3(g) + 5O2(g) ⇄  4NO(g) + 6H2O(g).

उत्तर:

  1. ∆n(g), = 2 – 1 = 1, ∆n(g) > 0 दाब बढ़ाने पर प्रतीप दिशा में
  2. ∆n(g), = 3 – 3 = 0, दाब का कोई प्रभाव नहीं
  3. ∆n(g), = 2 – 1 = 1, ∆n(g) > 0 दाब बढ़ाने पर प्रतीप दिशा में
  4. ∆n(g), = 1 – 3 = -2, ∆n(g) < 0 दाब बढ़ाने पर अग्र दिशा में
  5. ∆n(g), = 1, ∆n(g) > 0 दाब बढ़ाने पर प्रतीप दिशा में
  6. ∆n(g), = 10-93 1, ∆n(g) > 0 दाब बढ़ाने पर प्रतीप दिशा में जायेगी।

प्रश्न 27.
निम्न अभिक्रिया के लिये साम्य स्थिरांक 1024 K पर 1.6 × 105 है –
H2(g) + Br2(g) ⇄ 2HBr(g)
यदि HBr को 10.0 बार दाब पर एक सीलबन्द पात्र में लिया गया हो तो सभी गैसों के लिये साम्य दाब की गणना कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 21
प्रश्न 28.
निम्न ऊष्माशोषी क्रिया से प्राकृतिक गैस के आंशिक ऑक्सीकरण से डाइहाइड्रोजन गैस मिलती है –
CH4(g) + H2O(g) ⇄ CO(g) + 3H2(g)

  1. उपर्युक्त क्रिया का Kpके लिये व्यंजक लिखिए।
  2. Kpका मान तथा साम्य मिश्रण का संघनन किस तरह प्रभावित होगा –
    • दाब बढ़ने पर
    • ताप बढ़ने पर
    • उत्प्रेरक के उपयोग द्वारा।

उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 23
(b) ∆n(g) = 4 – 2 = 2 ∆n(g) > O

  • ली-शातेलिए सिद्धांतानुसार अभिक्रिया साम्य प्रतीप दिशा में विस्थापित होती है।
  • अभिक्रिया ऊष्माशोषी है, अतः साम्य अग्र दिशा में विस्थापित होती है।
  • साम्य संघटन में कोई व्यवधान नहीं होता क्योंकि साम्य बहुत जल्दी स्थापित हो जाता है।

प्रश्न 29.
प्रभाव को समझाइए –

  1. H2के योग का,
  2. CH3OH के योग का,
  3. CO के निष्कासन का,
  4. CH3OH के निष्कासन का निम्न अभिक्रिया की साम्यावस्था पर –
    2H2(g)+ CO(g) ⇄ CH3OH(g).

उत्तर:

  1. साम्य अग्र दिशा में विस्थापित हो जाती है।
  2. साम्य प्रतीप दिशा में विस्थापित हो जाती है।
  3. साम्य प्रतीप दिशा में विस्थापित हो जाती है।
  4. साम्य अग्र दिशा में विस्थापित हो जाती है।

MP Board Solutions

प्रश्न 30.
473 K पर PCI5 के विघटन के लिये साम्य स्थिरांक (Kc) 8.3 x 10-3 है।
PCI5(g) ⇄  PCl3(g) + Cl2(g) AH° = 124.0 kJ mol-1
(i) अभिक्रिया में Kc के लिये व्यंजक लिखिए।
(ii) इसी ताप पर विपरीत अभिक्रिया के लिये Kc का मान क्या होगा ?
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 24

प्रश्न 31.
हैबर विधि में प्रयुक्त हाइड्रोजन को प्राकृतिक गैस से प्राप्त मेथेन को उच्च ताप की भाप से क्रिया कर बनाया जाता है। दो पदों वाली अभिक्रिया में प्रथम में Co और अधिक भाप से अभिक्रिया करती है। CO(g) + H2O(g) ⇄ CO2(g) + H2(g)यदि 400°C पर अभिक्रिया पात्र में CO एवं भाप का सममोलर मिश्रण इस प्रकार लिया जाए कि PCO = \({ P }_{ { H }_{ 2 }O }\) = 4.0 bar, H2 का साम्यावस्था पर आंशिक दाब क्या होगा ? (400°C पर Kp= 10.1.)
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 25

प्रश्न 32.
बताइये निम्न में से किस रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों व क्रियाफलों की सान्द्रता तुलनात्मक रूप से अधिक है –
(a) Cl2(g) ⇄ 2Cl(g); Kc= 5 x 10-39
(b) Cl2(g) + 2NO(g) ⇄ 2NOCl(g); Kc = 3.7 × 108
(c) Cl2(g) + 2NO2(g) ⇄ 2NO2Cl(g); Kc= 1.8.
उत्तर:
Kc = 1.8. यहाँ अभिकारक व उत्पाद की सान्द्रता पर्याप्त है।

प्रश्न 33.
अभिक्रिया 3O2(g) ⇄ 2O3(g) के लिये Kc का मान 2.0 x 10-50 25°C पर है। यदि O2 का 25°C पर साम्य सान्द्रता 1.6 × 10-2 है, तो O3 की सान्द्रता क्या होगी?
हल:
अभिक्रिया 3O2(g) ⇄ 2O2(g) में
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 26

प्रश्न 34.
अभिक्रिया CO(g) + 3H2(g) ⇄ CH4(g) + H2O(g), 1 लीटर फ्लास्क में साम्य में है। इस फ्लास्क में 0.30 मोल CO, 0.10 मोल H2, 0.02 मोल H2O तथा CH4 का अज्ञात आयतन भी है तो मिश्रण में CH4 की सान्द्रता ज्ञात कीजिए। दिये गये ताप Kc का मान 3.90 है।
हल:
अभिक्रिया है – CO(g) + 3H22(g) ⇄ CH4(g) + H2O(g) .
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 27

आयनिक साम्यावस्था (Ionic Equilibrium)  NCERT अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म का क्या अर्थ है ? निम्नलिखित स्पीशीज के लिए संयुग्मी अम्ल / क्षार बताइए –
HNO2, CN, HCIO4, F, OH, Co2-3– एवं S2-.
उत्तर:
अम्ल एवं क्षार के वे युग्म जिनमें केवल एक प्रोटॉन H+ का अन्तर होता है, संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म कहलाते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 31

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा लुईस अम्ल है –
H2O, BF3, H+‘ एवं NH+4.
उत्तर:
BF3, H+ और NH+4 (लुईस अम्ल इलेक्ट्रॉन-न्यून होते हैं)।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित ब्रॉन्स्टेड अम्लों के लिए संयुग्मी क्षारकों के सूत्र लिखिए –
HF, H2SO4 एवं HCO3.
उत्तर:
संयुग्मी अम्ल ⇄ संयुग्मी क्षार + H+
या संयुग्मी क्षार = संयुग्मी अम्ल – H+
अतः दिये गये अम्लों के संयुग्मी क्षार F, HSO4, CO32- हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
ब्रॉन्स्टेड क्षारकों NH3, NH2, तथा HCOO के संयुग्मी अम्ल लिखिए।
उत्तर:
NH3, NH4+, HCOOH.

प्रश्न 5.
स्पीशीज H2O, HCO3, HSO4, तथा NH3, ब्रॉन्स्टेड अम्ल तथा क्षारक दोनों की भाँति व्यवहार करते हैं। प्रत्येक के संयुग्मी अम्ल तथा क्षारक बताइए।
उत्तर:
संयुग्मी अम्ल:
H3O+, H2CO3, H2SO4, NH4+

संयुग्मी क्षारक:
OH, CO2-4 , SO2-4 , NH2.

प्रश्न 6.
निम्नलिखित स्पीशीज को लुईस अम्ल तथा क्षारक में वर्गीकृत कीजिए तथा बताइए कि ये किस प्रकार लुईस अम्ल-क्षारक के समान कार्य करते हैं –

  1. OH
  2. F
  3. H+
  4. BCI3

उत्तर:

  1. OH एक लुईस क्षार है क्योंकि यह एक इलेक्ट्रॉन युग्म दाता की तरह व्यवहार करता है।
  2. F भी लुईस क्षार है।
  3. H+ एक लुईस अम्ल है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही की तरह व्यवहार करता है।
  4. BCI3 एक इलेक्ट्रॉन – न्यून यौगिक है अत: यह एक इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही होगा। अत: यह एक लुईस अम्ल है।

प्रश्न 7.
एक मृदु पेय के नमूने में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता 3.8 x 10-3 M है। उसकी pH परिकलित कीजिए।
हल:
pH = – log [H+] = – log [3.8 x 10-3] = 2.42.

प्रश्न 8.
सिरके के एक नमूने की pH, 3.76 है, इसमें हाइड्रोजन आयन की सांद्रता ज्ञात कीजिए।
हल:
[H’] = Anti log [- pH]
= Anti log [- 3.76]
= 1.737 × 10-4M.

MP Board Solutions

प्रश्न 9.
HF, HCOOH तथा HCN का 298 K पर आयनन स्थिरांक क्रमशः 6.8 × 10-4, 1.8 × 10-4 तथा 4.8 × 10-9 है। इनके संयुग्मी क्षारकों के आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए। हल-यदि अम्ल एवं उनके संयुग्मी क्षारों के आयनन स्थिरांक Ka, एवं Kb, हो, तो
Ka × Kb= Kw
HCN – Ka = 4.8 × 10-9
4.8 × 10-9 × Kb = 10-14
.:. Kb = 2.083 × 10-6.

HCOOH – Ka = 1.8 x 10-4
1.8 x 10-4 × Kb = 10-10
∴ Kb = 5.55 × 10-11

HF – Ka = 6.8 × 10-4
6.8 × 10-4 × Kb = 10-14
∴ Kb= 1.47 × 10-11 .

प्रश्न 10.
फीनॉल का आयनन स्थिरांक 1.0 × 10-10 है। 0.05 M फीनॉल के विलयन में फीनोलेट आयन की सांद्रता तथा 0.01 M सोडियम फीनोलेट विलयन में उसके आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल:
फीनॉल का आयनन निम्नानुसार होगा –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 32
0.01 M सोडियम फीनोलेट की उपस्थिति में आयनन की कोटि की गणना इस प्रकार की जा सकती है
C6H5O Na+ → C6H5O + Na+
[C6H5O] = 0.01 = Cα

सोडियम फीनोलेट प्रबल विद्युत् अपघट्य है। इसलिए इसके फीनोलेट आयन, फीनॉल के फीनोलेट आयन सान्द्रण को कम करता है।
Kα = Cα2
= Cα × α
10-10 = 0.01 × α
α= 10-8.

प्रश्न 11.
H2S का प्रथम आयनन स्थिरांक 9.1 × 10-8 है। इसके 0.1 M विलयन में HS आयनों की सांद्रता की गणना कीजिए तथा बताइए कि यदि इसमें 0.1 M HCI भी उपस्थित हो, तो सांदता किस प्रकार प्रभावित होगी ? यदि H2S का द्वितीय वियोजन स्थिरांक 1.2 × 10-13 हो, तो सल्फाइड S2-आयनों की दोनों स्थितियों में सांद्रता की गणना कीजिए।
हल:
H2S का आयनन निम्न प्रकार होगा –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 33

0.1 M HCl की उपस्थिति में [H+] का सान्द्रण 0.1 M है, क्योंकि HCl, H2S से प्रबल अम्ल है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 34
H2S का कुल वियोजन स्थिरांक है –
\({ K }_{ a }={ K }_{ { a }_{ 1 } }\times { K }_{ { a }_{ 2 } }\)
= 9.1 × 10-8 × 1.2 × 10-13
= 1.092 × 10-20
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 35
0.1M HCl की उपस्थिति में
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 36

MP Board Solutions

प्रश्न 12.
एसीटिक अम्ल का आयनन स्थिरांक 1.74 × 10-5 है। इसके 0.05 M विलयन में वियोजन की मात्रा, ऐसीटेट आयन सांद्रता तथा pH का परिकलन कीजिए।
हल:
CH3COOH ⇄ CH3COO + H+

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 37

प्रश्न 13.
0.01 M कार्बनिक अम्ल (HA) के विलयन की pH, 4.15 है। इसके ऋणायन की सांदता, अम्ल का आयनन स्थिरांक तथा pKa मान परिकलित कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 38
[H+ ] [A ] = 7.08 × 10-5 M
pKa = – log Ka = – log 5 × 10-7 = 6.3.

प्रश्न 14.
पूर्ण वियोजन मानते हुए निम्नलिखित विलयनों के pH ज्ञात कीजिए –

1. 0.003 M HCl
2. 0.005 M NaOH
3. 0.002 M HBr
4. 0.002 M KOH.

हल:
1. [H+] = [HCl] = 0.003 M
pH = -log[H+] = – log( 3 × 10-3)= 2.52.

2.  [OH] = [NaOH] = 0.005 M
pOH = -log 5 × 10-3 = 2.301
pH = 14 – 2.301 = 11.699.

3. [H+] = [HBr] = 0.002 M
pH = -logH+ = -log(2 × 10H-3)= 2.6989.

4. [OH] = [KOH] = 0.002 M
POH = -log[OH ] = -log(2 × 10-3)= 2.6989
pH = 14 – 2.6989 = 11.3011.

प्रश्न 15.
निम्नलिखित के pH की गणना कीजिये –
(a) 2 ग्राम TiOH जल में घोलकर 2 लीटर विलयन बनाया जाए।
(b) 0.3 ग्राम Ca(OH)2 को जल में घोलकर 500 ml विलयन बनाया जाए।
(c) 0.3 ग्राम NaOH को जल में घोलकर 200 ml विलयन बनाया जाए।
(d) 13.6 M HCI के 1ml का जल से तनुकरण करके कुल आयतन 1 लीटर विलयन बनाया जाए।
हल:
(a) मोलरता
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 39
Ti(OH)(aq) → Ti+ + OH(aq)
[OH ] = 4.9 × 10-3M, POH = -log(OH)
= – log(4.9 × 10-3 M) = 2.309
pH = 14 -2.309 = 11.691.

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 40
Ca(OH)2 → Ca2+ + 2OH(aq)
[OH] = 2 x 8.1 × 1-3 = 0.0162 M
POH = – log[OH ] = -log(1.62 × 10-2‘) = 1.79
pH = 14 – 1.79 = 12.21.

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 41
NaOH → Na+(aq) + OH(aq)
[OH] = 0.0375 M, POH = -log[OH]
= – log [3.75 × 10-2] = 1.426
pH = 14 – 1.426 = 12.574.

(d) M1V1 (तनुकरण से पहले) = M2V2 (तनुकरण के बाद)
13.6 x 1 = M2 × 1000
M2 = 0.0136 M, HCl(aq) → H+(aq) + Cl(aq)
[H+] = 0.0136 M, pH = -log(1.36 × 10-2) = 1.866.

MP Board Solutions

प्रश्न 16.
ब्रोमोएसीटिक अम्ल के आयनन की मात्रा 0.132 है। 0.1 M अम्ल की pH तथा pKa का मान ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 42
[H+] = Ca = 0.1 ×- 0.132 = 1.32 × 10-2
pH = -log(1.32 × 10-2) = 1.88
[H+] =\(\sqrt { { K }_{ a }×C } \) या 1.32 × 10-2 = \(\sqrt { { K }_{ a }×0.1 } \)
Ka = 1.74 × 10-3
pKa = -log Ka = -log(1.74 × 10-3) = 2.76.

प्रश्न 17.
0.005 M कोडीन (CH18H21NO3) विलयन की pH 9.95 है। इसका आयनन स्थिरांक एवं pKb ज्ञात कीजिए।
हल:
कोडीन + H2O ⇄ कोडीन H+ + OH
pH = 9.95
pOH = 14 – 9.95 = 4.05
या – log [OH ] = 4.05 या log [OH] = – 4.05
[OH] = Anti log [- 4.05] = 8.913 × 10-5M
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 43
= 1:59 × 10-6
pKb= – log (1.59 × 10-6) = 6 – 0.1987 = 5.8.

प्रश्न 18.
0.001 M एनिलीन विलयन का pH क्या है? एनिलीन का आयनन स्थिरांक 4.27 = 10-10 है। इसके संयुग्मी अम्ल का आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
हल:
एनिलीन एक दुर्बल क्षार है जो निम्नानुसार आयनन होगा –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 44
= 6.53 ×  10-7
pOH = – log [OH ] = – log (6.53 × 10-7) = 6.19
∴ pH = 14 – 6.19 = 7.81
[OH ] = Cα या 6.53 × 10-7 = 0.001 × α
या α = 6.53 × 10-4
संयुग्मित अम्ल के लिए,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 45

प्रश्न 19.
यदि 0.05 M ऐसीटिक अम्ल के pK, का मान 4.74 है, तो आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए। यदि इसे (a) 0.01 M, (b) 0-1 M HCI विलयन में डाला जाए, तो वियोजन की मात्रा किस प्रकार प्रभावित होती है ?
हल:
pKα = – log Kα = 4.74
Kα = Antilog (-4.74)
= 1.82 × 10-5
α की गणना निम्नानुसार की जा सकती है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 46

(a) 0.01 M HCl की उपस्थिति में,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 47
(b) 0.1 M HCl की उपस्थिति में
HCl → H+ + Cl
[H+] = 0.1 M
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 48
या 1.82 – 10-5 = latex]\frac { 0.05α × 0.1 }{ 0.01 }[/latex]
α = 1.82 × 10-4

MP Board Solutions

प्रश्न 20.
डाइमेथिल एमीन का आयनन स्थिरांक 5.4 × 10-4 है। इसके 0.02 M विलयन की आयनन की मात्रा की गणना कीजिए। यदि यह विलयन NaOH प्रति 0.1 M हो, तो डाइमेथिल एमीन का प्रतिशत आयनन क्या होगा?

हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 49

प्रबल क्षार NaOH की उपस्थिति में डाइमेथिल ऐमीन का आयनन समायन प्रभाव के कारण घट जाता है। यदि डाइमेथिल एमीन का वियोजन x हो, तो
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 50

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 51
या 0.54% = वियोजित।

प्रश्न 21.
निम्नलिखित जैविक द्रवों, जिनमें pH दी गई है, की हाइड्रोजन आयन सांद्रता परिकलित कीजिए –

  1. मानव पेशीय द्रव, 6.83
  2. मानव उदर द्रव, 1.2
  3. मानव रुधिर, 7.38
  4. मानव लार, 6.4.

हल:

  1. [H+] = Anti log [-PH] = Anti log (-6.83) = -479 × 10-7M
  2. [H+] = Anti log (-1.2] = 0.063 M
  3. [H+] = Anti log (-1.38] = 4.168 × 10-8M
  4. [H+] = Anti log [- 6.4] = 3.98 × 10-7 M.

प्रश्न 22.
दूध, काली कॉफी, टमाटर रस, नीबू रस तथा अंडे की सफेदी के pH का मान क्रमशः 6.8, 5.0, 4-2, 2-2 तथा 7.8 हैं। प्रत्येक के संगत H+ आयन की सान्द्रता ज्ञात कीजिए।
हल:
दूध (Milk) [H+] = Antilog [-pH]
= Anti log [6.8]
= 1.58 × 10-7M

काली कॉफी (Black Coffee) [H+] = Antilog [-pH]
= Anti log[-5] = 10-5M

टमाटर का रस (Tomato Juice) [H+] = Antilog [-pH]
= Anti log [-4.2] = 6.3 × 10-5M

नीबू का रस (Lemon Juice) [H+] = Anti log [-pH] –
= Anti log [-2.2] = 6.309 × 10-3M

अण्डे की सफेदी (White Egg) [H+] = Anti log [-pH]
= Anti log [-7.8] = 1.584 × 10-8M.

प्रश्न 23.
298 K पर 0.561g, KOH जल में घोलने पर प्राप्त 200 mL विलयन की है, पोटैशियम, हाइड्रोजन तथा हाइड्रॉक्सिल आयनों की सांद्रताएँ ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 52

प्रश्न 24.
298K पर Sr(OH)2 विलयन की विलेयता 19.23 gm/L है।स्ट्राँशियम तथा हाइड्रॉक्सिल आयन की सांद्रता तथा विलयन की pH ज्ञात कीजिए।
हल:
Sr(OH)2 का अणुभार = 87.6 + 34 = 121.6 g mol-1
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 53
Sr(OH)2 → Sr+2 + 2OH
[Sr+2 ] = 0.1581, [OH ] = 2 × 0.1581 = 0.3162
pOH = – log [0.3162] = 0.5
pH = 14 – pOH = 14 – 0.5 = 13.5

MP Board Solutions

प्रश्न 25.
प्रोपेनोइक अम्ल का आयनन स्थिरांक 1:32 × 10-5 है। 0.05 M अम्ल विलयन के आयनन की मात्रा तथा pH ज्ञात कीजिए। यदि विलयन में 0.01 M HCl मिलाया जाए तो उसके आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 54
HCl उपस्थिति में प्रोपेनोइक अम्ल का वियोजन कम होता है। मानलो x मोल वियोजित होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 55
जहाँ x बहुत कम (0.05 – x) है इसलिये इसे 0.05 लेने पर और 0.1 – x = 0.1
Kα \(\frac { x × 0.01 }{0.05 }\) =132 × 10-5
या x = 6.60 × 10-5
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 55
या 0.132% वियोजित हुआ।

प्रश्न 26.
यदि साइनिक अम्ल (HCNO) के 0.1M विलयन की pH 2.34 हो, तो अम्ल के आयनन स्थिरांक तथा आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल:
HCNO एक दुर्बल अम्ल है। अत: निम्नानुसार आयनित होगा –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 57
Cα = Anti log [- pH].
या 0.1 × α = Anti log [-2.34]
α = 0.0457
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 58

प्रश्न 27.
यदि नाइट्रस अम्ल का आयनन स्थिरांक 4.5 × 10-4है, तो 0.04 M सोडियम नाइट्राइट विलयन की pH तथा जलयोजन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल:
यह दुर्बल अम्ल एवं प्रबल क्षार का लवण है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 59
= 1.06 × 10-8
अब pH = – log [H+ ] = – log (1.06 × 10-8 ) = 7.97
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 60

प्रश्न 28.
यदि पिरिडीनियम हाइड्रोजन क्लोराइड के 0.02 M विलयन का pH 3.44 है, तो पिरिडीन का आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
हल:
पिरिडीनियम हाइड्रोक्लोराइड एक प्रबल अम्ल एवं दुर्बल क्षार से बना लवण है।
pH = 3.44
[H+ ] = Anti log [-pH]
[H+ ] = Anti log [-3.44] = 3.63 × 10-4M
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 61

प्रश्न 29.
निम्नलिखित लवणों के जलीय विलयनों के उदासीन, अम्लीय तथा क्षारीय होने की प्रागुक्ति कीजिए –
NaCl, KBr, NaCN, NH4NO3, NaNO2, तथा KE.
उत्तर:
NaCN, NaNO2 एवं KF के विलयन क्षारीय होंगे, क्योंकि ये दुर्बल अम्ल एवं प्रबल क्षार से बने लवण हैं। NaCl एवं KBr के विलयन उदासीन होंगे, क्योंकि ये लवण प्रबल अम्ल एवं प्रबल क्षार से बने हैं। NH4NO3 का विलयन अम्लीय होगा, क्योंकि यह प्रबल अम्ल एवं दुर्बल क्षार से बने लवण का विलयन है।

MP Board Solutions

प्रश्न 30.
क्लोरोएसीटिक अम्ल का आयनन स्थिरांक 1.35 × 10-3 है। 0.1 M अम्ल तथा इसके 0.1 M सोडियम लवण की pH ज्ञात कीजिए।
हल:
0.1 M अम्ल का pH:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 62
pH = – log (1.16 × 10-2) = 1.94
0.1 M सोडियम लवण का pH = ये दुर्बल अम्ल का प्रबल क्षार का लवण है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 63
= 1.16 × 10-8 या pH = -log[H+] = -log[1.16 × 10-8] = 7.94.

प्रश्न 31.
310 K पर जल का आयनिक गुणनफल 2.7 × 10-14 है। इसी तापक्रम पर उदासीन जल की pH ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 117

प्रश्न 32.
निम्नलिखित मिश्रणों की pH परिकलित कीजिए –
(a) 0.2 M Ca(OH)2 का 10 mL+ 0-1 M HCI का 25 mL
(b) 0.01 M H2SO4. का 10 mL + 0.01 M Ca(OH)2 का 10 mL
(c) 0.1 M H2SO4 का 10 mL + 0.1 M KOH का 10 mL.
हल:
(a) Ca(OH)2 के मोलों की संख्या = \(\frac { MV }{ 1000 }\) = \(\frac { 0.2×10 }{ 1000 }\) =0.002
HCl के मोलों की संख्या = \(\frac { MV }{ 1000 }\) = \(\frac { 0.1 × 25 }{ 1000 }\) =0.0025
OH के मोलों की संख्या
अर्थात् nOH = 2 × 0.002 = 0.004
तथा \({ n }_{ { H }^{ + } }\) = 0.0025
उदासीनीकरण के बाद बचे OH आयन = 0.004 – 0.0025 = 0.0015
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 64
=0.0428
pOH = -log[OH] = -log[4.28 × 10-2] = 1.368
pH = 14 – 1.368 = 12.64.
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 65
OH मोलों की संख्या \({ n }_{ { H }^{ + } }\) = 2 × Ca(OH)2 के मोलों की संख्या
H+, OH दोनों बराबर हैं। अतः विलयन उदासीन होगा।

(c) H के मोलों की संख्या, \({ n }_{ { H }^{ + } }\) = 2  × H2SO4 के मोलों की संख्या
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 68
OH के मोलों की संख्या, \({ n }_{ { OH }^{ – } }\) = KOH के मोलों की संख्या
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 69
उदासीनीकरण के बाद बचे H* मोलों की संख्या = 2 × 10-3 – 1 × 10-3 = 1 × 10-3 मोललता या [H+] का सान्द्रण –
pH = -log (5 × 10-2) = 1.301.

प्रश्न 33.
सिल्वर क्रोमेट, बेरियम क्रोमेट, फेरिक हाइड्रॉक्साइड, लेड क्लोराइड तथा मर्पूरस आयोडाइड विलयन की विलेयता गुणनफल स्थिरांक की सहायता से विलेयता ज्ञात कीजिए तथा प्रत्येक आयन की मोलरता भी ज्ञात कीजिए।
हल:
यदि सभी लवणों की विलेयता 5 मोल/लीटर है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 70
[Ag+] = 2 × 6.5 × 10-5 = 13 × 10-5M
[Cro2-4] = s = 6.5 × 10-5M.

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 71

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 72
[Fe+3] = s = 1.38 × 10-10 M
[OH] = 3 × 1. 38 × 10-10= 4.14 × 10-10 M.

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 73
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 74

प्रश्न 34.
Ag2Cro4 तथा Ag Br का विलेयता गुणनफल स्थिरांक क्रमशः 1.1 × 10-12 तथा 5.0 × 10-13 है। उनके संतृप्त विलयन की मोलरता का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल:
Ag2CrO4 का Ksp = 4s3 = 1.1 × 10-12 या s = 6.5 × 10-5
AgBr का Ksp = s2 = 5 × 10-13 या s = 7.07 × 10-7
अनुपात = \(\frac { 6.5 × 10-5 }{ 7.07 × 10-7 }\) = 91.9

MP Board Solutions

प्रश्न 35.
यदि 0.002 M सांद्रता वाले सोडियम आयोडेट तथा क्यप्रिक क्लोरेट विलयन के समान आयतन को मिलाया जाए, तो क्या कॉपर आयोडेट का अवक्षेपण होगा? (कॉपर आयोडेट के लिए K = 7.4 × 1-8).
हल:
2NalO3 + CuCrO4 – Na2CrO4 + Cu(IO3)2
मिश्रित करने के पश्चात् [NalO3] = [IO3 ] = \(\frac { 2\times { 10 }^{ -3 } }{ { 2 } } \) = 10-3M
[CuCrO4] = [Cu+2] = \(\frac { 2\times { 10 }^{ -3 } }{ { 2 } } \) = 10-3 M
Cu(IO3)2 का आयनिक गुणनफल = [Cu+2] [IO3]2
= (10-3) (10-3)2
= 10-9
चूँकि आयनिक गुणनफल का मान Ksp से कम है। अतः अवक्षेपण प्रारंभ नहीं होगा।

प्रश्न 36.
बेन्जोइक अम्ल का आयनन स्थिरांक 6.46 × 10-5 तथा सिल्वर बेन्जोएट का Ksp2.5 × 10-13 है। 3.19 pH वाले बफर विलयन में सिल्वर बेन्जोएट जल की तुलना में कितना गुना विलेय होगा?
हल:
मानलो, सिल्वर बेन्जोएट की विलेयता s है।
C6H5COOAg ⇄ C6H5COO + Ag+
[Ag+] = [C6H5COO] =s, Ksp = s2, s = \(\sqrt { { K }_{ sp } } \) s = \(\sqrt { 12-5\times { 10 }^{ -13 } } \) = 5 × 10-7 मोल L-1

बफर में विलेयता [H+], बफर = Anti log [-3.19]
C6H5COOH ⇄ C6H5COO + H+ = 6.45 × 10-4M
H+, C6H5COO मिलकर C6H5COOH बनाते हैं, विलयन बफर है इसलिये H+ स्थिर होगा। दिया है –
Kα = 6.46 × 10-5
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 75
[C6H5COOH) = 10 × [C6H5COO”]
मानलो, बफर विलयन में सिल्वर बेन्जोएट की घुलनशीलता = × mol L-1 है।
अधिकतर C6H5COO , C6H5COOH में बदल जाते हैं।
[Ag+] = × = C6H5COOH + C6H5COO
= 10C6H5COO + C6H5COO
= 11C6H5COO
[C6H5COO] = \(\frac { x }{ 11 }\)[Ag+] =x
Ksp = [C6H5COO ] [Ag+]
या 2.5 × 10-13 = \(\frac { x × x }{ 11 }\) या x = 1.66 × 10-6
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 76

प्रश्न 37.
फेरस सल्फेट तथा सोडियम सल्फाइड के सममोलर विलयनों की अधिकतम सान्द्रता बताइए जब उनके समान आयतन मिलाने पर आयरन सल्फाइड अवक्षेपित न हो (आयरन सल्फाइड के लिए Ksp = 6.3 × 10-18)
हल:
मानलो, प्रत्येक FeSO4 व Na2S की सान्द्रता C मोल L-1 है। दोनों के बराबर आयतन मिलाने पर,
[FeSO4] = [Na2S] = \(\frac {C }{ 2 }\)M
अर्थात् [Fe2+] = [S-2] \(\frac {C }{ 2 }\)
Ksp [FeS के लिये] = [Fe2+] [S-2] = 6.3 × 10-18 = \(\frac {C }{ 2 }\) × \(\frac {C }{ 2 }\)
या C2 = 25.2 × 10-18 या C = 5.02 x 10-9M.

प्रश्न 38.
1 ग्राम कैल्सियम सल्फेट को 298K घोलने के लिए कम-से-कम कितने आयतन जल की आवश्यकता होगी? (कैल्सियम सल्फेट के लिए Ksp = 9.1 × 10-6 ).
हल:
यदि 298 K ताप पर CuSO4 की विलेयता ‘s’ मोल प्रति लीटर हो, तो Ksp = S2
S = \(\sqrt { 9.1\times { 10 }^{ -6 } } \) = 3.016 × 10-3 मोल प्रति लीटर
ग्राम प्रति लीटर में विलेयता = 3:016 x 10-3 × 136 = 0.41 ग्राम प्रति लीटर
1 g को घोलने के लिए आवश्यक जल =\(\frac {1 }{ 0.411 }\) लीटर = 2.43 लीटर।

प्रश्न 39.
0.1 M HCI में हाइड्रोजन सल्फाइड से संतृप्त विलयन की सांद्रता 1.0 × 10-19 M है। यदि इस विलयन का 10 mL निम्नलिखित 0.04 M विलयन के 5 mL डाला जाए, तो किन विलयनों से अवक्षेप प्राप्त होगा – FeSO4 MnCl2, ZnCl2 Ta CaCl4.
हल:
हम जानते हैं जब आयनिक गुणनफल का मान विलेयता गुणनफल से अधिक होता है, तो अवक्षेपण प्रारंभ होता है। मिश्रित करने के पश्चात् -आयनों का सान्द्रण होगा –
M1V1 = M2V2
1 x 10-19 × 10 = M2 x 15.
M2 = 6.67 × 10-20M

मिश्रित होने के पश्चात् धातु आयनों का सान्द्रण होगा –
[Fe+2] = [Mn+2] = [Zn+2] = [Cd+2] = \(\frac {5 × 0.04 }{ 15 }\)
= 1.33 × 10-2 M

इन धातु सल्फाइडों का आयनिक गुणनफल –
= 1:33 × 10-2 × 6.67 × 10-20
= 8.87 × 10-22 M2.
केवल ZnS एवं Cds आयनों का अवक्षेपण होगा क्योंकि इनके आयनिक गुणनफल का मान विलेयता गुणनफल से अधिक है।

MP Board Solutions

साम्यावस्था अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

साम्यावस्था वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
इनमें से किस अभिक्रिया के लिए K. और K, बराबर होंगे
(a) N2(g) + 3H2(g) ⇄ 2NH3(g))
(b) 2H2S(g) + 3O2(g) ⇄ 2SO2(g) + 2H2 O2(g)
(c) Br2(g) + Cl2(g) ⇄ 2BrCl(g)
(d) P4(g) + 6Cl2(g) ⇄ 4PCl3(g)
उत्तर:
(c) Br2(g) + Cl2(g) ⇄ 2BrCl(g)

प्रश्न 2.
अभिक्रिया N2(g) + 3H2(g) ⇄ 2NH3 ; AH = – 92kJ में ताप वृद्धि में साम्यावस्था पर NH3 की सान्द्रता –
(a) बढ़ती है।
(b) नहीं बदलती
(c) घटती है
(d) पहले घटती तथा बाद में बढ़ती है।
उत्तर:
(c) घटती है

प्रश्न  3.
अमोनिया संश्लेषण की ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया N2(g) + 3H2(g)= 2NH3(g). किस अवस्था में अधिक होगी –
(a) उच्च ताप, उच्च दाब
(b) उच्च ताप, निम्न दाब
(c) निम्न ताप, उच्च दाब
(d) निम्न ताप, निम्न दाब।
उत्तर:
(c) निम्न ताप, उच्च दाब

प्रश्न 4.
SO2 व O2 द्वारा SO2 में ऑक्सीकरण एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।SO का निर्माण अधिकतम होगा यदि –
(a) ताप बढ़ाया जाए, दाब घटाया जाए।
(b) ताप घटाया जाए, दाब बढ़ाया जाए
(c) ताप व दाब दोनों बढ़ाए जाएँ
(d) ताप व दाब दोनों घटाए जाएँ।
उत्तर:
(b) ताप घटाया जाए, दाब बढ़ाया जाए

प्रश्न 5.
साम्य में स्थित किसी उत्क्रमणीय अभिक्रिया का क्या होगा जब दाब स्थिर रहते हुए कोई निष्क्रिय गैस मिला दी जाय –
(a) अधिक उत्पाद बनेगा
(b) कम उत्पाद बनेगा
(c) अधिक अभिकारक बनेगा
(d) अप्रभावित रहेगी।
उत्तर:
(d) अप्रभावित रहेगी।

प्रश्न  6.
N2 + 3H2 = 2NH3+ ऊष्मा, के लिए –
(a) pKp = Kc
(b) Kp = KcRT
(c) Kp = Kc(RT)-2
(d) Kp = Kc(RT)-1
उत्तर:
(a) pKp = Kc

MP Board Solutionsc

प्रश्न  7.
साम्य पर उत्क्रमणीय अभिक्रिया पर मुक्त ऊर्जा परिवर्तन होगा –
(a) 0
(b) >0
(c) α
(d) 1.
उत्तर:
(a) 0

प्रश्न  8.
जल – वाष्प भौतिक साम्य के लिए दाब प्रयुक्त करने पर –
(a) क्वथनांक बढ़ेगा
(b) गलनांक घटेगा
(c) क्वथनांक कम होगा
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) क्वथनांक बढ़ेगा

प्रश्न  9.
निम्न में किसका pH मान उच्चतम है –
(a) CH3COOK
(b) Na2CO3
(c) NH4Cl
(d) NaNO3
उत्तर:
(b) Na2CO3

प्रश्न  10.
10-8M HCl का pH होगा –
(a)8
(b)7
(c) 7 और 8 के बीच
(d) 6 और 7 के बीच।
उत्तर:
(d) 6 और 7 के बीच।

प्रश्न  11.
यदि N2 + 3H2 ⇄ 2NH3 के लिए K है तब 2N2 + 6H2 ⇄ 4NH3 के लिए K’ होगा –
(a) K2
(b) \(\sqrt { K } \)
(c) \(\frac { 1 }{ \sqrt { K } }\)
(d) \(\frac { 1 }{ { k }^{ 2 } }\)
उत्तर:
(a) K2

MP Board Solutions

प्रश्न  12.
ऐल्युमिनियम क्लोराइड है –
(a) ब्रॉन्स्टेड अम्ल
(b) आर्चीनियस अम्ल
(c) लुईस अम्ल
(d) लुईस क्षार।
उत्तर:
(d) लुईस क्षार।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. बर्फ ⇄ जल – Q cal. इस अभिक्रिया में उच्च ताप अभिक्रिया को ……………… दिशा में तथा दाब वृद्धि क्रिया को ………….. दिशा में प्रेरित करेगी।
  2. ओस्टवाल्ड तनुता नियम के अनुसार आयनन की मात्रा और आयनन स्थिरांक के मध्य सम्बन्ध के गणितीय रूप को …………… द्वारा व्यक्त किया जाता है। दुर्बल विद्युत् अपघट्य के वियोजन की मात्रा उसकी ………… के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
  3. एसीटिक अम्ल और सोडियम एसीटेट का मिश्रित विलयन ……………. विलयन का उदाहरण है।
  4. अमोनियम क्लोराइड और अमोनियम हाइड्रॉक्साइड का मिश्रित विलयन …………… विलयन का उदाहरण है।
  5. अवक्षेपण हेतु आयनिक गुणनफल विलेयता गुणनफल से ………………….. होना चाहिये।
  6. ओस्टवाल्ड का तनुता नियम …………………….के लिये लागू नहीं होता है।
  7. साम्य स्थिरांक पर ताप के प्रभाव ………………. समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है।
  8. अभिक्रिया N2 + 3H2 ⇄ 2NH3 के लिए Kc की इकाई …………. है।
  9. Kp और Kc का मान ……………… के साथ परिवर्तित होते हैं।
  10. साम्य स्थिरांक का मान अधिक होने पर अभिक्रिया ………………… में अधिक विस्थापित रहती है।

उत्तर:

  1. अग्र, अग्र
  2. α =\(\sqrt { \frac { { K }_{ a } }{ c } } \) सान्द्रण के वर्गमूल
  3. अम्लीय बफर
  4. क्षारीय बफर
  5. अधिक
  6. प्रबल विद्युत् अपघट्य
  7. वाण्ट हॉफ समीकरण
  8. (मोल/ लीटर)-2
  9. ताप
  10. अग्र दिशा।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
उचित संबंध जोडिए –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 28
उत्तर:

  1. (c) क्षारीय होता है जलीय विलयन
  2. (a) अम्लीय होता है
  3. (d) दुर्बल अम्ल और दुर्बल क्षार होता है
  4. (b) उदासीन होता है
  5. (1) Kp = Kc
  6. (e) Kp > Kc
  7. (g) Kp < Kc.

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. K. की इकाई हेतु सान्द्रता को व्यक्त करते हैं।
  2. अमोनिया गैस जल में घुलकर NH4OH देता है यहाँ जल किस प्रकार व्यवहार करता है ?
  3. जब NH4CI को NH4OH विलयन में मिलाया जाता है तो NH4OH का आयनन कम हो जाता है इसका क्या कारण है ?
  4. जल का 25°C पर pH = 7 है, यदि जल को 50°C तक गर्म किया जाये, तो pH में क्या परिवर्तन होगा?
  5. H2PO4 तथा HCO3 के संयुग्मी क्षारक लिखिए।
  6. एक आयन का नाम लिखिए जो ब्रॉन्स्टेड अम्ल और क्षार दोनों की तरह व्यवहार करता है।
  7. दुर्बल अम्ल व दुर्बल क्षार से बने लवण का कोई एक उदाहरण बताइये।
  8. मानव रक्त का pH मान क्या है ?
  9. NaCl विलयन में HCl गैस गुजारने से क्या होता है ?
  10. निम्न संयुग्मी क्षारकों में कौन-सा प्रबल है CN या F ?

उत्तर:

  1. मोल/लीटर
  2. अम्ल की भाँति
  3. समआयन प्रभाव
  4. pH मान घट जायेगा
  5. HPO42, Co32-
  6. HCO3
  7. अमोनियम ऐसीटेट
  8. 7.4
  9. NaCl अवक्षेपित होगा
  10. CN प्रबल क्षारक।

MP Board Solutions

साम्यावस्था अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
साम्य स्थिरांक का व्यंजक लिखते समय समझाइए कि शुद्ध द्रवों एवं ठोस को उपेक्षित क्यों किया जा सकता है ?
उत्तर:
शुद्ध ठोस अथवा द्रव (यदि आधिक्य में हो) की मोलर सान्द्रता नियत रहती है अर्थात् उपस्थित मात्रा से स्वतंत्र होती है।) यही कारण है कि साम्य स्थिरांक का व्यंजक लिखते समय शुद्ध द्रवों एवं ठोसों को उपेक्षित किया जाता है।

प्रश्न 4.
सक्रिय द्रव्यमान से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
किसी विलयन की आण्विक सान्द्रता प्रति लीटर को उसका सक्रिय द्रव्यमान कहते हैं। दूसरे शब्दों में, सक्रिय भाग लेने वाले पदार्थ के ग्राम अणुओं की संख्या प्रति लीटर को सक्रिय द्रव्यमान कहते हैं। इसे ग्राम अणु/लीटर से दर्शाते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 77

प्रश्न 5.
भौतिक साम्यावस्था से आप क्या समझते हो ? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
वह साम्य जो भौतिक परिवर्तनों या प्रक्रमों में प्राप्त होता है भौतिक साम्य कहलाता है। किसी भी पदार्थ की ठोस, द्रव, गैस तीन अवस्थाएँ हो सकती हैं। जो एक-दूसरे में अन्तर परिवर्तित हो सकती है अतः भौतिक साम्य तीन प्रकार का हो सकता है।
(1) ठोस -द्रव
(2) द्रव = गैस
(3) ठोस – गैस।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.
ओस्टवाल्ड का तनुता नियम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
ओस्टवाल्ड का तनुता नियम-दुर्बल वैद्युत अपघट्य के वियोजन की मात्रा विलयन के तनुता के वर्गमूल के अनुक्रमानुपाती होती है।
\(\sqrt { Kv } \)

जहाँ α = वियोजन की मात्रा, K = वियोजन स्थिरांक। v = तनुता (विलयन का लीटर में आयतन जिसमें एक ग्राम तुल्यांक विद्युत अपघट्य विलेय है)। c = एक लीटर विलयन में विलेय के ग्राम तुल्यांक की संख्या।

प्रश्न 7.
रासायनिक साम्यावस्था पर दाब का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
रासायनिक साम्य पर दाब बढ़ाने से साम्य उस दिशा की ओर अग्रसर होता है जिस दिशा में आयतन में कमी आती है अर्थात् अणुओं की संख्या में कमी आती है।
उदाहरण:
SO2 , और O2 , के संयोग से SO3, बनता है तथा 45.2 kcal ऊष्मा मुक्त होती है।
2SO2(g) + O2(g) ⇄ 2SO3(g), ∆H = -45-2kcal
इस अभिक्रिया में 2 आयतन SO2, एक आयतन O2, से क्रिया करके 2 आयतन SO3, के बनते हैं। अतः दाब बढ़ाने से साम्य अग्र दिशा की ओर विस्थापित होता है।

प्रश्न 8.
बफर विलयन या प्रतिरोधी विलयन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
बफर विलयन या प्रतिरोधी विलयन जिसका वह विलयन है –

  • pH मान निश्चित होता है।
  • तनुता से pH परिवर्तित नहीं होता।
  • अल्प मात्रा में अम्ल या क्षार मिलाने पर जिनका pH मान में परिवर्तन नगण्य होता है।

प्रश्न 9.
अम्लीय बफर और क्षारीय बफर विलयन क्या है ?
उत्तर:
अम्लीय बफर:
अम्लीय बफर दुर्बल अम्ल और उसके अकार्बनिक लवण के मिश्रित विलयन होते हैं।
उदाहरण:
CH3COOH + CH3COONa विलयन।

क्षारीय बफर:
क्षारीय बफर दुर्बल क्षार और उसके अकार्बनिक लवण के मिश्रित विलयन होते हैं।
उदाहरण:
NH4OH + NH4C1 विलयन।

प्रश्न 10.
ली-शातेलिये का नियम क्या है ?
उत्तर:
ली-शातेलिये का नियम-इस नियम के अनुसार, “यदि साम्यावस्था पर स्थापित किसी निकाय के ताप, दाब या सान्द्रण में से कोई परिवर्तन किया जाये तो साम्य इस प्रकार से विस्थापित होता है जिससे परिवर्तन को उदासीन या प्रभावहीन किया जा सके। यह नियम भौतिक एवं रासायनिक साम्यों पर लागू किया जा सकता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 11.
साम्यावस्था पर उत्प्रेरक के प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उत्प्रेरक मिलाने से साम्यावस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता तथा साम्य स्थिरांक का मान अपरिवर्तित रहता है। उत्प्रेरक के उपयोग से साम्य जल्दी स्थापित होता है क्योंकि उत्प्रेरक अग्र व प्रतीप अभिक्रिया दोनों की दर को समान रूप से बढ़ाता है। वास्तव में उत्प्रेरक मिलाने से सक्रियण ऊर्जा में कमी हो जाती है जिससे अग्र व प्रतीप अभिक्रिया दोनों समान रूप से प्रभावित होती है।

प्रश्न 12.
समीकरण pH = -log[H+] के आधार पर, 10-8mol dm-3 HCI विलयन की pH 8 होनी चाहिए। परन्तु इसका प्रेक्षित मान 7 से कम आता है। कारण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
10-8 mol dm-3 HCI सान्द्रता प्रदर्शित करती है कि विलयन अति तनु होना चाहिए। अतः हम विलयन में जल से उत्पन्न H3O+ आयनों की उपेक्षा नहीं कर सकते हैं। अतः प्राप्त कुल [H3O+] = (10-8 +10-7)M इस मान से हमें विलयन की pH 7 के लगभग परन्तु 7 से कम प्राप्त होती है। (क्योंकि विलयन अम्लीय है)।

प्रश्न 13.
अमोनिया लुईस क्षारक है, क्यों ?
उत्तर:
लुईस की अम्ल-क्षार अवधारणा के अनुसार वे यौगिक या पदार्थ जो एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म दान कर सकते हैं। अमोनिया के इलेक्ट्रॉनिक संरचना से स्पष्ट है कि अमोनिया में नाइट्रोजन के पास एक एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म है जिसे वह रासायनिक अभिक्रिया में दान कर सकता है। इसलिये अमोनिया प्रबल लुईस क्षार की तरह कार्य करता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 78

प्रश्न 14.
तृतीय समूह के हाइड्रॉक्साइडों के अवक्षेपण में NH4Cl व NH4OH के स्थान पर NaCl की उपस्थिति में NaOH मिलाया जा सकता है, या नहीं?
उत्तर:
तृतीय समूह के हाइड्रॉक्साइडों के अवक्षेपण हेतु NH4Cl की उपस्थिति में NH4OHसम आयन प्रभाव के कारण मिलाया जाता है जिससे NH4OH का वियोजन कम हो। इनके स्थान पर NaCl + NaOH नहीं मिलाया जा सकता क्योंकि NaOH प्रबल क्षार है तथा सम आयन प्रभाव से केवल दुर्बल वैद्युत अपघट्य का वियोजन कम होता है। NaOH डालने पर आगे के हाइड्रॉक्साइड भी अवक्षेपित होने लगते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 15.
बफर विलयन के उपयोग लिखिए।
उत्तर:
उपयोग:

  • रासायनिक क्रियाओं के वेग के अध्ययन में pH का मान स्थिर रखने के लिये बफर विलयन प्रयुक्त होते हैं।
  • किण्वन से एल्कोहॉल का निर्माण करने के लिये pH 5 से 6.8 के बीच होना चाहिये।
  • शक्कर और कागज का निर्माण तथा विद्युत लेपन निश्चित pH पर होता है।

प्रश्न 16.
गैसों की द्रवों में विलेयता पर दाब एवं ताप का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:

  • दाब का प्रभाव – दाब बढ़ाने से गैसों की द्रवों में विलेयता बढ़ती है क्योंकि गैस के अणु विलायक के अन्तर अणुक स्थान में समा जाते हैं।
  • ताप का प्रभाव – ताप बढ़ाने से गैसों की द्रवों में विलेयता घटती है क्योंकि गैसों के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है।

प्रश्न 17.
निम्न में से प्रत्येक अम्ल के संयुग्मी भस्म का सूत्र तथा नाम लिखिए –

  1. H3O+
  2. NH4+
  3. CH3NH3+
  4. H3PO4,
  5. NH2 – NH3+

उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 79

प्रश्न 18.
ब्रॉन्स्टेड क्षारकों NH2, NH3, तथा HCOO के संयुग्मी अम्ल लिखिए। ]
उत्तर:
क्षारक + H+ ⇄ संयुग्मी अम्ल
NH2 + H+ ⇄ NH
NH3+H+ ⇄ NH4+
HCOO + H+ ⇄ HCOOH

प्रश्न 19.
किसी दुर्बल क्षारक का संयुग्मी अम्ल सदैव प्रबल होता है। निम्नलिखित संयुग्मी क्षारकों की क्षारकता का घटता हुआ क्रम क्या होगा –
OH, RO,CH3COO,Cl
उत्तर:
दिए गए क्षारकों के संयुग्मी अम्ल क्रमशः H2O,ROH, CH3COOH तथा HCl है इनकी अम्लीयता का क्रम निम्न है –
HCI > CH3COOH > H2O > ROH
अतः इनके संयुग्मी क्षारकों की क्षारकता का क्रम निम्न होगा –
RO> OH > CH3COO >Cl..

MP Board Solutions

प्रश्न 20.
साम्य स्थिरांक की इकाई क्या है ?
उत्तर:
साम्य स्थिरांक की इकाई अभिक्रिया के प्रकार पर निर्भर करती है यदि अभिक्रिया में अणुओं की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता है तब साम्य स्थिरांक की कोई इकाई नहीं होती है। लेकिन अभिक्रिया के दौरान अणुओं की संख्या में परिवर्तन हो रहा है तो उनके लिये साम्य स्थिरांक की इकाई होती है।
उदाहरण:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 80

प्रश्न 21.
pH मान की उपयोगिता अम्लीय तथा क्षारीय विलयन की पहचान के लिये अधिक हैं, . क्यों?
उत्तर:
किसी विलयन का pH मान ज्ञात होने पर हम यह ज्ञात कर सकते हैं कि दिया गया विलयन अम्लीय, क्षारीय या उदासीन है –

  • यदि pH का मान 7 से कम है तो विलयन अम्लीय होगा।
  • यदि pH का मान 7 से अधिक है तो विलयन क्षारीय होगा।
  • यदि pH का मान 7 है तो विलयन उदासीन होगा।

प्रश्न 22.
रासायनिक साम्य पर प्रभाव डालने वाले कारकों के नाम बताइये।
उत्तर:
रासायनिक साम्य को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं –

  • ताप
  • दाब
  • सान्द्रण परिवर्तन
  • उत्प्रेरक।

प्रश्न 23.
सान्द्रण एवं दाब साम्य स्थिरांक में संबंध बताने वाला सूत्र लिखिए।
अथवा,
Kp एवं Kc में संबंध लिखिए।
उत्तर:
सान्द्रण एवं दाब साम्य स्थिरांक में संबंध – Kp = Kc × RT∆n
जहाँ Kp = दाब साम्य स्थिरांक,Kc = साम्य स्थिरांक, R = गैस स्थिरांक, T = परम ताप, ∆n = उत्पाद तथा अभिकारकों के मोलों का अंतर।

प्रश्न 24.
ताप में वृद्धि करने से CO2 की विलेयता कम होती है, क्यों?
उत्तर:
CO2(g) + H2O(g) ⇄ CO2(aq), CO2, की जल में विलेयता एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है। अतः ली-शातेलिए सिद्धान्त के अनुसार ताप बढ़ाने पर यह अभिक्रिया प्रतीप दिशा में विस्थापित होती है। इसलिये ताप में वृद्धि करने पर CO2, की विलेयता कम होती है।

साम्यावस्था लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सोडियम कार्बोनेट का जलीय विलयन क्षारीय होता है, क्यों ?
उत्तर:
Na2CO3 ⇄ 2Na+ + CO-23
2H2O ⇄ 2H+ + 2OH
Na2CO3 + 2H2O ⇄ 2NaOH + H2CO3,
प्रबल क्षार दुर्बल अम्ल

Na2CO3 से प्राप्त Na+ आयन जल के OH आयनों के साथ संयोग कर प्रबल विद्युत् अपघट्य NaOH बनाने के कारण जल में आयनों के रूप में रहता है जबकि CO3-2, आयन जल के H* आयन के साथ संयोग कर दुर्बल अम्ल H2CO3, बनाता है जो दुर्बल विद्युत् अपघट्य होने के कारण आंशिक रूप से आयनित रहता है। साम्यावस्था बनाये रखने के लिये H2O आयनित होने लगता है जिससे OH आयनों का सान्द्रण बढ़ने लगता है। इसलिये सोडियम कार्बोनेट का जलीय विलयन क्षारीय होता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
गैसों को द्रवों में घोलने पर साम्य पर क्या प्रभाव पड़ता है ? उदाहरण देकर समझाइये।
उत्तर:
सोडा वाटर की बोतल खोलने पर उसमें विलेय CO2 गैस तेजी से बाहर निकलती है। यह किसी गैस तथा द्रव में विलयन के मध्य स्थापित साम्यावस्था को दर्शाता है। निश्चित दाब पर गैस के विलेय एवं अविलेय अणुओं के मध्य साम्य स्थापित रहता है तथा इस प्रकार के साम्य के लिये हेनरी के नियम का पालन करते हैं।

हेनरी का नियम:
इस नियम के अनुसार, “स्थिर ताप पर विलायक की ज्ञात मात्रा में विलेय होने वाली गैस की मात्रा साम्यावस्था पर विलयन में गैस के दाब के समानुपाती होती है”। यदि विलेय होने वाली गैस की मात्रा m व दाब P हो, तो
m ∝ P m = KP.

उदाहरण:
सोडा वाटर की बोतल बंद करते समय बोतल के अंदर गैस का दाब वायुमण्डलीय दाब से बहुत अधिक होता है जिसके कारण द्रव में CO2, की अत्यधिक मात्रा विलेय रहती है। बोतल को खोलने पर विलयन पर आरोपित दाब में अचानक कमी आ जाने के कारण CO2, की विलेयता में कमी आती है जिसके कारण साम्यावस्था स्थापित करने के लिये CO2 गैस तेजी से बाहर निकलने लगती है।

प्रश्न 3.
सम आयन प्रभाव क्या है ? समझाइये ।
उत्तर:
सम आयन प्रभाव:
किसी दुर्बल विद्युत् अपघट्य के विलयन में कोई सम आयन युक्त प्रबल विद्युत् अपघट्य का विलयन मिलाने पर दुर्बल विद्युत् अपघट्य का आयनन कम हो जाता है। यह प्रभाव सम आयन प्रभाव कहलाता है।

उदाहरण:
द्वितीय समूह के परीक्षण में HCl + H2S का उपयोग समूह अभिकर्मक के रूप में करते हैं समूह II के सल्फाइडों का विलेयता गुणनफल चतुर्थ समूह के सल्फाइडों के विलेयता गुणनफल की अपेक्षा कम होता है। HCl की उपस्थिति में H2S प्रवाहित करने पर सम आयन प्रभाव के कारण H2S का आयनन और कम हो जाता है जिसके कारण विलयन से सल्फाइड आयनों का सान्द्रण घट जाता है।
HCl ⇄ H++Cl
H2S ⇄ 2H+ + S-2
अतः समूह IV के सल्फाइडों का आयनिक गुणनफल उनके विलेयता गुणनफल से अधिक नहीं हो पाता परन्तु सल्फाइड आयनों का सान्द्रण द्वितीय समूह के सल्फाइडों के लिये पर्याप्त रहता है। क्योंकि द्वितीय समूह के सल्फाइडों का विलेयता गुणनफल कम होता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
साम्यावस्था स्थिरांक की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
साम्यावस्था स्थिरांक की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  • किसी निश्चित ताप पर किसी भी अभिक्रिया के लिये साम्य स्थिरांक का मान निश्चित होता है। इसका मान ताप परिवर्तन होने पर बदल जाता है।
  • किसी भी अभिक्रिया के साम्यावस्था स्थिरांक का मान दाब तथा आयतन पर निर्भर नहीं करता।
  • साम्य स्थिरांक का मान अभिकारकों व क्रियाफलों के प्रारंभिक मोलर सान्द्रण पर निर्भर नहीं करता बल्कि साम्यावस्था में उनके सान्द्रण पर निर्भर है।
  • यदि अभिक्रिया विपरीत करायी जाती है तो साम्य स्थिरांक का मान भी पूर्व अभिक्रिया के विलोम होता है।
  • यदि किसी रासायनिक अभिक्रिया को 2 से विभाजित किया जाता है तो प्राप्त नयी अभिक्रिया के लिये साम्य स्थिरांक पूर्व में ज्ञात साम्य स्थिरांक का वर्गमूल होगा। K’=\(\sqrt { K } \)
  • यदि किसी रासायनिक अभिक्रिया जिसका साम्य स्थिरांक K है को 2 से गुणा किया जाता है तो नई अभिक्रिया के लिये प्राप्त साम्य स्थिरांक K का वर्ग होगा। K’= K2
  • यदि अभिक्रिया को दो चरणों में लिखा जाता है इन पदों के साम्य स्थिरांक K1 व K2 हैं, तो
    K = K1 × K2.

प्रश्न 5.
समांगी तथा विषमांगी साम्यावस्था को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
समांगी साम्यावस्था:
जब रासायनिक साम्यावस्था में अभिकारक तथा उत्पादों की भौतिक अवस्था एकसमान हो, तो उसे समांगी साम्यावस्था कहते हैं।
N2(g) + 3H2(g) ⇄ 2NH3(g)
H2(g) +  I2(g) ⇄ 2HI(g)

विषमांगी साम्यावस्था:
जब रासायनिक साम्यावस्था में अभिकारक एवं उत्पाद की भौतिक अवस्था असमान हो, तो उसे विषमांगी साम्यावस्था कहते हैं।
CaCO3(s) ⇄ CaO(s) + CO2(g)
BaCO3(s) ⇄ BaO(s) + CO2(g)

प्रश्न 6.
Kc तथा Qc के मानों की तुलना करके आप किसी अभिक्रिया की निम्नलिखित अवस्थाओं का पता किस प्रकार लगाओगे –

  • परिणामी अभिक्रिया अग्र दिशा की ओर अग्रसर होती है।
  • परिणामी अभिक्रिया पश्च दिशा की ओर अग्रसर होती है।
  • अभिक्रिया में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

उत्तर:

  • यदि Qc < Kc ; अभिक्रिया उत्पादों की दिशा में अग्रसर होगी। (अग्र अभिक्रिया)
  • यदि Qc > Kc; अभिक्रिया अभिकारकों की दिशा की ओर अग्रसर होगी। (अर्थात् प्रतीप या पश्चगामी अभिक्रिया)
  • यदि Qc. = Kc ; अभिक्रिया मिश्रण पर साम्यावस्था में पूर्वतः होता है अतः अभिक्रिया में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से प्रत्येक साम्य में जब आयतन बढ़ाकर दाब कम किया जाता है, तब बतलाइए कि अभिक्रिया के उत्पादों के मोलों की संख्या बढ़ती है या घटती है या समान रहती है ?

  • PCl5(g) ⇄ PCl3(g) + Cl2(g)
  • Ca(s) + CO2(g) ⇄ CaCO3(s)
  • 3Fe(s) + 4H2O(g) ⇄ Fe3O4(s) + 4H2(g).

उत्तर:
ली-शातेलिए सिद्धान्त के अनुसार दाब घटाने पर साम्य उस दिशा में विस्थापित होता है जिस ओर दाब बढ़ता है। (अर्थात् गैसीय अवस्था में मोलों की संख्या अधिक होती है) अतः अभिक्रिया के उत्पादों के मोलों की संख्या:

  • बढ़ती है।
  • घटती है।
  • समान रहती है। (यदि ∆ n(g) = 0 , तो दाब में परिवर्तन का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।)

प्रश्न 8.
सान्द्रता भागफल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
उत्पादों तथा अभिकारकों की सान्द्रताओं के अनुपात को सान्द्रता भागफल कहते हैं। इसे Q से दर्शाते हैं। किसी भी उत्क्रमणीय अभिक्रिया के लिये सान्द्रता भागफल Q उसके साम्यावस्था स्थिरांक K. के बराबर होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 82
साम्यावस्था पर Q = Kc

MP Board Solutions

प्रश्न 9.
आयनन साम्यावस्था को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
जब भी किसी आयनिक यौगिक को जल या किसी उचित विलायक में विलेय किया जाता है तो वह विभाजित होकर धनायन तथा ऋणायन देता है। इस प्रकार किसी भी आयनिक यौगिक के आयनों में विभाजित होने की प्रक्रिया को आयनन या आयनीकरण कहते हैं। तथा इन यौगिकों को विद्युत् अपघट्य कहते हैं। वे आयनिक यौगिक जो पूर्णतः आयनित हो जाते हैं, प्रबल वैद्युत अपघट्य कहलाते हैं।

जैसे – NaCl, NaOH, H2SO4. इत्यादि, दूसरी तरफ वे यौगिक जो पूर्णतः आयनित नहीं होते, दुर्बल वैद्युत अपघट्य कहलाते हैं। जैसे – NH4OH, CH3COOH इत्यादि । दुर्बल वैद्युत अपघट्यों को जब H2O में विलेय कर विलयन बनाया जाता है तो विलयन में आयनों तथा अनआयनित अणुओं के मध्य एक साम्यावस्था स्थापित हो जाती है जिसे आयनन साम्यावस्था कहते हैं।
NH4OH(aq) = NH4(aq)+ + OH(aq)(aq)

प्रश्न 10.
रासायनिक साम्य से क्या समझते हैं ? इसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
किसी उत्क्रमणीय रासायनिक अभिक्रिया की वह अवस्था जिसमें क्रियाकारकों तथा क्रियाफलों के सान्द्रण में समय के साथ कोई परिवर्तन नहीं होता। अर्थात् किसी रासायनिक उत्क्रमणीय अभिक्रिया की वह अवस्था जिसमें अग्र अभिक्रिया प्रतीप अभिक्रिया समान वेग से घटित होती है। रासायनिक साम्यावस्था कहलाती है।

साम्यावस्था की विशेषताएँ:

  • साम्यावस्था पर अग्र और प्रतीप अभिक्रियाओं का वेग समान रहता है।
  • क्रियाकारकों और क्रियाफलों की आपेक्षिक मात्राएँ साम्य मिश्रण में स्थिर रहती हैं।
  • साम्य की प्रकृति गतिक होती है। अर्थात् साम्यावस्था पर अभिक्रिया रुकती नहीं है बल्कि अग्र अभिक्रिया और प्रतीप अभिक्रिया समान वेग से निरन्तर होती रहती है।
  • ताप, दाब या सान्द्रण में परिवर्तन करा के साम्य की स्थिति को बदला जा सकता है।
  • साम्यावस्था पर मुक्त ऊर्जा परिवर्तन शून्य होता है अर्थात् ∆G = 0 होता है।

प्रश्न 11.
दाब बढ़ाने पर निम्न में से कौन-सी अभिक्रियाएँ प्रभावित होगी। यह भी बताइए दाब परिवर्तन करने पर अभिक्रिया अग्र या प्रतीप दिशा में गतिमान होगी

  • COCI2(g) CO(g) + Cl2(g)
  • CH4(g) + 2S2(g) ⇄ CS2(g) + 2H2S(g)
  • CO2(g) + C(S) ⇄ 2CO(g)
  • CaCO3(S) ⇄ Cao(S) + CO2(S)
  • 4NH3(g) +5O2(g) ⇄ 4NO(g) +6H2O(g)

उत्तर:

  • np>nr, प्रतीप दिशा में अग्रसर होगी।
  • np = nr दाब वृद्धि के कारण साम्य प्रभावित नहीं होगा।
  • np>nr प्रतीप दिशा में अग्रसर होगी।
  • np > nrप्रतीप दिशा में अग्रसर होगी।
  • np >nr प्रतीप दिशा में अग्रसर होगी।

प्रश्न 12.
भौतिक साम्यावस्था से क्या समझते हैं ? इसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
वह साम्य जो भौतिक परिवर्तनों या प्रक्रमों में प्राप्त होता है भौतिक साम्य कहलाता है। दूसरे शब्दों में भौतिक साम्यावस्था वह साम्य है जो एक ही रासायनिक यौगिक की दो विभिन्न प्रावस्थाओं के मध्य स्थापित होती है तथा अभिक्रिया के दौरान उस यौगिक के रासायनिक संगठन में कोई परिवर्तन नहीं होता केवल उसकी भौतिक अवस्था में परिवर्तन होता है।
उदाहरण:
बर्फ(ठोस) ⇄ जल(द्रव)
जल(द्रव) ⇄ जलवाष्प(गैस)

भौतिक साम्य की विशेषताएँ:

  • बंद निकाय होना चाहिये अर्थात् घिराव से पदार्थ का आदान-प्रदान नहीं होना चाहिये।
  • इस स्थिति में गतिशील परन्तु स्थिर अवस्था रहती है। अर्थात् दोनों विपरीत प्रक्रम समान गति से चलने चाहिये।
  • पदार्थ का सान्द्रण स्थिर रहना चाहिये तथा मापने योग्य गुण जैसे ताप, दाब इत्यादि स्थिर होने चाहिये।
  • ठोस तथा द्रव के बीच साम्यावस्था एक निश्चित ताप पर स्थापित होती है जिसे गलनांक या हिमांक कहते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 13.
विलेयता गुणनफल की परिभाषा देकर इसे स्पष्ट कीजिए।
उत्तर;
निश्चित ताप पर किसी विलेय वैद्युत अपघट्य के संतृप्त विलयन में उसके आयनों की सान्द्रताओं का गुणनफल विलेयता गुणनफल कहलाता है। यह मान किसी दिये हुये ताप पर स्थिर होता है। किसी वैद्युत अपघट्य पदार्थ का संतृप्त विलयन यदि अपने ठोस के संपर्क में हो, तो उसमें निम्नलिखित साम्यावस्था होती है –
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 83
द्रव्य अनुपाती क्रिया नियम के अनुसार,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 84

जहाँ Ksp एक स्थिरांक है जिसे विलेयता गुणनफल कहते हैं।

प्रश्न 14.
किसी अल्प विलेय द्विअंगी विद्युत् अपघट्य की विलेयता एवं विलेयता गुणनफल में संबंध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
माना कि AB एक द्विअंगी वैद्युत अपघट्य है जिसकी विलेयता 3 ग्राम मोल/ लीटर है।
AB ⇄ A+ + Br
[A+] = S तथा [B] = S
विलेयता गुणनफल के अनुसार,
Ksp = [A+][B]
मान रखने पर,
Ksp = [S][S]
⇒ Ksp = S2
⇒ \(\sqrt { { K }_{ sp } } \) = S
अर्थात् किसी अल्प विलेय द्विअंगी वैद्युत अपघट्य की विलेयता उसके विलेयता गुणनफल के वर्गमूल के बराबर होती है।

प्रश्न 15.
AgCl का उदाहरण देकर विलेयता गुणनफल को समझाइये।
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 85
द्रव्य अनुपाती क्रिया नियम के अनुसार,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 86

अत: AgCl के संतृप्त विलयन में Ag+ तथा Cr आयनों की सान्द्रता का गुणनफल, विलेयता गुणनफल होगा।

प्रश्न 16.
लुईस अम्ल एवं लुईस क्षार से क्या समझते हो? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लुईस अम्ल:
ऐसे अणु, आयन या मूलक जिनके केन्द्रीय परमाणु को अष्टक पूर्ण करने के लिये एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की आवश्यकता होती है लुईस अम्ल कहलाते हैं। अर्थात् इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही लुईस अम्ल कहलाता है।

उदाहरण:
BF3 AICl3 Br+, NO+2 इत्यादि।

लुईस क्षार:
ऐसे अणु, आयन या मूलक जिनके केन्द्रीय परमाणु का अष्टक पूर्ण होता है तथा इनके पास एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं जिसे ये रासायनिक अभिक्रिया में दान करके उपसहसंयोजी बंध बना सकते हैं, लुईस क्षार कहलाते हैं । अर्थात् इलेक्ट्रॉन युग्म दाता लुईस क्षार कहलाते हैं।

उदाहरण:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 116

प्रश्न 17.
संयुग्मी अम्ल एवं संयुग्मी क्षार से क्या समझते हैं ?
उत्तर:
संयुग्मी अम्ल:
जब कोई अणु या आयन प्रोटॉन ग्रहण करता है तो बनने वाला समूह अम्ल की तरह कार्य करता है। क्योंकि इसमें प्रोटॉन दान करने की प्रवृत्ति होती है। इसे उस क्षार का संयुग्मी अम्ल कहते

उदाहरण:
NH3 का संयुग्मी अम्ल NH3+ है।

संयुग्मी क्षार:
जब कोई अणु, आयन या अम्ल प्रोटॉन दान करता है तो बचा हुआ समूह क्षार की तरह कार्य करता है। क्योंकि इसमें प्रोटॉन ग्रहण करने की शक्ति होती है। इसे उस अम्ल का संयुग्मी क्षार कहते हैं।

उदाहरण:
HCl का Cl आयन संयुग्मी क्षार है। अत: संयुग्मी अम्ल एवं संयुग्मी क्षार में एक प्रोटॉन का अन्तर होता है। प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार सदैव दुर्बल होता है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 88

प्रश्न 18.
310 K पर जल का आयनिक गुणनफल 2.7× 10-14 है। इसी तापक्रम पर उदासीन जल की pH ज्ञात कीजिए।
हल:
K.w = [H3O+] [OH ] = 2.7 × 10-14
अभिक्रिया H2O + H2O ⇄  [H2O+][OH ] हेतु
[H3O+] = [OH]
अतः [H2O+] = \(\sqrt { 2.7\times { 10 }^{ -14 } } \) = 1.643 × 10-7M
pH = – log[H3O+] = -log 1.643 × 10-7 = 7 + (-0.2156) = 6.7844.

प्रश्न 19.
pH मान क्या है ? स्पष्ट कीजिए। अथवा, pH किसे कहते हैं ? और इसका हाइड्रोजन सान्द्रण से क्या संबंध है ?
उत्तर:
किसी विलयन की अम्लीयता एवं क्षारीयता को व्यक्त करने के लिये सन् 1909 में सारेन्सन ने एक पैमाना प्रस्तुत किया जिसे pH मापक्रम या स्केल कहते हैं। किसी विलयन का pH मान उस ऋणात्मक घात के संख्यात्मक मान के बराबर होता है जिसे 10 की घात पर लगाया जाना चाहिए जो उस विलयन के H’ आयन या H3O+ आयन के सान्द्रण को दर्शाता है। दूसरे शब्दों में किसी विलयन का pH मान उसके H+ आयन सान्द्रण का ऋण चिन्ह के साथ 10 आधार पर लघुगणक होता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 20.
H2S प्रवाहित करने से पहले प्रथम वर्ग के छनित को HCl द्वारा अम्लीय किया जाता है। क्यों?
उत्तर:
प्रथम वर्ग के छनित का उपयोग द्वितीय वर्ग के सल्फाइडों के परीक्षण के लिये किया जाता है। इसके लिये H2S प्रवाहित करने के पूर्व छनित को तनु HCI मिलाकर अम्लीय कर लिया जाता है। समूह द्वितीय के सल्फाइडों का विलेयता गुणनफल चतुर्थ समूह के सल्फाइडों के विलेयता गुणनफल से कम होता है। H2S दुर्बल वैद्युत अपघट्य है जिसका आयनन कम होता है।

किन्तु HCl प्रबल वैद्युत अपघट्य है जिसके सम आयन प्रभाव के कारण H2S का आयनन कम हो जाता है। जिसके फलस्वरूप सल्फाइड आयनों का सान्द्रण घट जाता है। जिसके कारण चतुर्थ समूह के धातु सल्फाइडों का आयनिक गुणनफल उनके विलेयता गुणनफल से अधिक नहीं हो पाता इसलिये वे अवक्षेपित नहीं होते हैं, परन्तु सल्फाइड आयनों का सान्द्रण द्वितीय समूह के सल्फाइडों के अवक्षेपण के लिये पर्याप्त रहता है क्योंकि इनका विलेयता गुणनफल कम होता है।

प्रश्न 21.
FeSO4तथा Na2S के सममोलर विलयनों की अधिकतम सान्द्रता बताइए जब उनके समान आयतन मिलाने पर आयरन सल्फाइड न हो।(आयरन सल्फाइड के लिएKsp = 6.3 × 10-18 )
हल:
अवक्षेपण बिन्दु पर [Fe2+][S2-] = Ksp
[Fe2+] = [S2-] = \(\sqrt { { K }_{ sp } } \) = \(\sqrt { 6.3\times { 10 }^{ -18 } } \)
[Fe2+] = [S2-] = 2.51 × 10-9M

चूँकि विलयनों के समान आयतन मिलाए गए हैं। अतः प्रत्येक विलयन की मोलर सान्द्रता आधी रह जाती है जिसके कारण मूल विलयन में [FeSO4.] = [Na2S] = 2 × 2.51 × 10-9M = 5.02 × 10-9M अतः विलयन की उच्चतम मोलरता = 2.5 × 10-‘M है।

प्रश्न 22.
यदि पिरीडिनीयम हाइड्रोजन क्लोराइड के 0.02 M विलयन का pH 3.44 है तो पिरीडीन का आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
हल:
पिरीडिनीयम हाइड्रोजन क्लोराइड दुर्बल क्षारक (पिरीडीन) तथा प्रबल अम्ल HCI का लवण है।
C6H5N HCl + H2O ⇄ C6H5N+ HOH + HCl (जलयोजन के कारण अम्लीय विलयन है।)
अतः pH = – \(\frac {1 }{ 2 }\) [log Kw – logKb +log C]
⇒ 3.44 =- \(\frac {1 }{ 2 }\) [-14 -log Kb + log 2.0 × 10-2]
⇒ 6.88 = 14 + logKb +1.70
⇒ log Kb = – 8.82 = \(\overline { 9 } \) .18
∴ Kb= antilog \(\overline { 9 } \) .18 = 1.5 × 10-9 .

प्रश्न 23.
NaCl की जल के साथ अभिक्रिया को जल अपघटन अभिक्रिया में नहीं गिना जाता है, क्यों?
उत्तर:
NaCl जल अपघटित नहीं होता क्योंकि जब NaCl को जल में विलेय किया जाता है तो वह आयनित होकर Na+ तथा Cl आयन देता है। Na+ आयन OH आयन के साथ संयोग नहीं कर पाता। क्योंकि NaOH प्रबल वैद्युत अपघट्य है। इसी प्रकार Cr आयन H+ आयनों के साथ संयोग नहीं करते क्योंकि HCl भी प्रबल वैद्युत अपघट्य है। इस प्रकार इसके जलीय विलयन में H+ तथा OH आयनों की सान्द्रता बराबर होगी। इस प्रकार NaCl का जलीय विलयन न तो अम्ल की तरह कार्य करेगा और न ही क्षार की तरह इसलिये इसे जल अपघटन अभिक्रिया में नहीं गिना जा सकता है।
NaCl + H2O ⇄ NaOH + HCl

प्रश्न 24.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिये सान्द्रता भागफल प्राप्त कीजिए –
(1) Cro-24(aq) + Pb+24(aq) ⇄ PbCrO4(s)
(2) CaCO3(s) ⇄ Ca0(s) + CO2(s)
(3) NH3(aq) + H2O(l) ⇄ NH4(aq)+ + OH(aq)
(4) H2O(l) ⇄  H2O(g)
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 89

प्रश्न 25.
क्लोरोऐसीटिक अम्ल का आयनन स्थिरांक 1.35 × 10-3 है। 0.1 M तथा इसके 0.1 M सोडियम लवण का pH ज्ञात कीजिए।
हल:
CH2ClCOOH + H2O ⇄ CH2ClCOO + H3O+
प्रश्नानुसार K.α = 1.35 × 10-3 (दिया है) क्लोरोएसीटिक अम्ल का सोडियम लवण, प्रबल क्षारक NaOH तथा दुर्बल अम्ल क्लोरोएसीटिक अम्ल से बना है। अतः प्रबल क्षारक एवं दुर्बल अम्ल से बने लवण हेतु
pH = \(\frac { 3 }{ 2 }\)[log Kw + log Kα– log C]
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 90

MP Board Solutions

प्रश्न 26.
निम्नलिखित लवणों के जलीय विलयनों के उदासीन, अम्लीय तथा क्षारीय होने की प्रागुक्ति कीजिए – NaCl, KBr, NaCN, NH,NO3,NaNO, एवं KE.
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 91

प्रश्न 27.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिये साम्य स्थिरांक व्यंजक लिखिए –
1. BaCO3(s) ⇄ BaO(s)+ CO2(s)
2. CH3COCH3(l) ⇄ CH3 COCH3(g)
3. AgBr3(s) + aq ⇄ Ag(aq)+ + Br(aq)
4. CH4(g)+ 2O2(g) ⇄ CO2(g) + 2H2O(l)
उत्तर:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 92

प्रश्न 28.
नमक के शोधन में विलेयता गुणनफल का क्या महत्व है ?
उत्तर:
साधारण नमक का शोधन करने के लिये उसके संतृप्त विलयन से निलम्बित अशुद्धियाँ हटाकर HCl गैस प्रवाहित करते हैं, संतृप्त विलयन में निम्नलिखित साम्यावस्था होती है।
NaCl ठोस ⇄ NaCl विलयन – Na+ + CI
HCl एक प्रबल वैद्युत अपघट्य है जिसका आयनन बहुत अधिक होता है । HCl गैस प्रवाहित करने पर विलयन में Cl आयनों का सान्द्रण बहुत अधिक हो जाता है इससे आयनिक गुणनफल का मान विलेयता गुणनफल से बहुत अधिक हो जाता है तथा सोडियम क्लोराइड विलयन अति संतृप्त हो जाता है। साम्य को स्थापित करने के लिये NaCl के अति संतृप्त विलयन से ठोस NaCl अवक्षेपित होने लगता है। इस प्रकार अवक्षेपित NaCl शुद्ध अवस्था में प्राप्त होता है जिसे छान कर सुखा लेते हैं।

प्रश्न 29.
AgCl की जल में विलेयता साधारण नमक के विलयन की अपेक्षा अधिक होती है, क्यों?
उत्तर:
जब कोई अल्प विलेय लवण सम आयन के साथ संकर लवण नहीं बनाता तो सम आयन की उपस्थिति में लवण की विलेयता घट जाती है। क्योंकि लवण का आयनिक गुणनफल उसके विलेयता गुणनफल से अधिक होती है। AgCl की विलेयता नमक के विलयन की अपेक्षा जल में अधिक होती है। NaCl की उपस्थिति में विलयन के आयनों की सान्द्रता बढ़ जाती है जिससे आयनिक गुणनफल का मान विलेयता गुणनफल से बढ़ जाता है या अधिक हो जाता है। जिससे लवण अवक्षेपित होने लगता है और उसकी विलेयता कम होने लगती है।

MP Board Solutions

प्रश्न 30.
साबुन के अवक्षेपण में विलेयता गुणनफल का क्या महत्व है ?
उत्तर:
साबुन उच्च वसीय अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं जो तेल या वसा का क्षार द्वारा जल अपघटन करने से प्राप्त होता है। साबुन बनाने की गर्म विधि में साबुन सान्द्र विलयन के रूप में प्राप्त होता है जिसे अवक्षेपित करने के लिये नमक का संतृप्त विलयन मिलाया जाता है। नमक का सान्द्र विलयन मिलाने से Na* आयनों का सान्द्रण बढ़ जाता है जिससे आयनिक गुणनफल उस ताप पर साबुन के विलेयता गुणनफल के मान से अधिक हो जाता है। इस प्रकार ठोस साबुन का उसके विलयन से अवक्षेपण हो जाता है।

प्रश्न 31.
NH4OH विलयन द्वारा तृतीय समूह के हाइड्रॉक्साइडों का अवक्षेपण करने के पहले NH4Cl मिलाना आवश्यक होता है, क्यों?
उत्तर:
तृतीय समूह में Fe+3,Cr+3, और A+3 को उनके हाइड्रॉक्साइड के रूप में NH4Cl तथा अधिक मात्रा में NH4 OH मिलाकर अवक्षेपित किया जाता है। समूह III के हाइड्रॉक्साइड का विलेयता गुणनफल का मान समूह IV, V, VI के हाइड्रॉक्साइडों के विलेयता गुणनफल से कम है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 93

तृतीय समूह के अवक्षेपण में यदि केवल NH4OH का उपयोग किया जाये तो OH आयनों का सान्द्रण इतना अधिक होगा कि तृतीय समूह के हाइड्रॉक्साइड के साथ IV, V, VI समूह के हाइड्रॉक्साइड का भी अवक्षेपण हो जायेगा। लेकिन यदि तृतीय समूह के परीक्षण में NH4OH से पहले NH4CI मिलाते हैं तो समआयन प्रभाव के कारण दुर्बल वैद्युत अपघट्य NH4OH का वियोजन, कम हो जाता है जिसमें कम OH आयन प्राप्त होते हैं और ये OH आयन केवल तृतीय समूह के हाइड्रॉक्साइड को ही अवक्षेपित करते हैं।

प्रश्न 32.
नाइट्रिक ऑक्साइड के संश्लेषण में अमोनिया संश्लेषण की अपेक्षा उच्च ताप क्यों प्रयुक्त किया जाता है ?
उत्तर:
N2 + O2 ⇄ 2NO ; ∆H = + 43KCal
N2 + 3H2 ⇄ 2NH3; ∆H = -92.4KCal

ली-शातेलिये सिद्धान्त के अनुसार ताप में वृद्धि करने पर अभिक्रिया उस दिशा में विस्थापित होती है जिस दिशा में अभिक्रिया ऊष्माशोषी होती हैं। नाइट्रिक ऑक्साइड का संश्लेषण ऊष्माशोषी अभिक्रिया है जबकि अमोनिया का संश्लेषण ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है। इसलिये ताप में वृद्धि करने से नाइट्रिक ऑक्साइड के संश्लेषण में अभिक्रिया अग्र दिशा की ओर विस्थापित होती है जिससे NO के बनने की दर बढ़ जाती है जबकि NH3 संश्लेषण में ताप वृद्धि करने से अभिक्रिया प्रतीप दिशा में विस्थापित होती है जिससे NH3 के बनने की दर कम हो जाती है। इसलिये NO का संश्लेषण NH3 की तुलना में उच्च ताप पर कराया जाता है।

प्रश्न 33.
अम्ल एवं क्षार की ब्रॉन्स्टेड – लॉरी अवधारणा को उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
ब्रॉन्स्टेड – लॉरी अवधारणा:
इस सिद्धान्त के अनुसार अम्ल वह पदार्थ है, जो प्रोटॉन दान कर सकता है जबकि क्षार वह पदार्थ है जो प्रोटॉन ग्रहण कर सकता है।

MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 94

उपर्युक्त उदाहरण में HCl प्रोटॉन दाता है इसलिये यह अम्ल है जबकि H2O प्रोटॉन ग्राही है इसलिये H2O क्षार है। अम्ल जब प्रोटॉन दान करता है तो बचा हुआ समूह क्षार की तरह कार्य करता है इसे उस अम्ल का संयुग्मी क्षार कहते हैं। इसी प्रकार जब क्षार एक प्रोटॉन ग्रहण करता है तो बनने वाला समूह अम्ल की तरह कार्य करता है इसे उस क्षार का संयुग्मी अम्ल कहते हैं तथा संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म में केवल एक प्रोटॉन का अंतर होता है।

MP Board Solutions

साम्यावस्था दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
साम्य स्थिरांक Kp और Kc में संबंध स्थापित कीजिए। अथवा, सिद्ध कीजिए कि Kp = Kc RT∆n .
उत्त:
सन् 1867 में गुल्डबर्ग एवं वागे ने अभिक्रिया की दर तथा अभिकारकों के सान्द्रण के बीच संबंध स्थापित किया जिसे बाद में द्रव्य अनुपाती क्रिया का नियम दिया। जिसके अनुसार “निश्चित ताप पर किसी पदार्थ के क्रिया करने की दर उसकी सक्रिय मात्रा के समानुपाती होती है तथा रासायनिक अभिक्रिया की दर अभिकारकों के सक्रिय मात्राओं के गुणनफल के समानुपाती होती है।”
उदाहरण –
aA + bB ⇄ cC  + dD
यदि A, B, C तथा D के सक्रिय द्रव्यमान [A], [B], [C] तथा [D] हैं, तो
अग्र अभिक्रिया का वेग α [A][B].
या अग्र अभिक्रिया की दर = Kf[A][B]
इसी प्रकार प्रतीप अभिक्रिया की दर = Kb[C][D]
साम्यावस्था पर, Kf [A][B] = Kb[C][D]

जहाँ Kcअभिक्रिया का साम्य स्थिरांक है।
Kpतथा Kcमें संबंध:
माना एक रासायनिक उत्क्रमणीय अभिक्रिया में अभिकारक A व B तथा उत्पाद C व D सभी गैसीय अवस्था में हैं।
aA +bB ⇄ cC + dD
द्रव्य अनुपाती क्रिया नियम के अनुसार,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 96
आण्विक सान्द्रण के स्थान पर आंशिक दाब का प्रयोग करने पर
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 97

आदर्श गैस समीकरण के अनुसार,
⇒PV = nRT
⇒ P = \(\frac { n}{ v }\)RT
∴ \(\frac { n}{ v }\) = C
⇒ P = CRT,
जहाँ C गैस के मोलर सान्द्रण को दर्शाता है।
Pa = CaRT = [A] RT
Pb = CbRT = [B] RT
Pc = CcRT = [C] RT
Pd = CdRT = [D] RT
समीकरण (2) में मान रखने पर,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 98

समीकरण (1) के अनुसार,
Kp = Kc × RT = Kc × RT (c+d)-(a+b)
[∴ (c+d) – (a+b) = ∆n]
या Kp = Kc RT∆n

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
नीचे दर्शाए गए साम्य में 899 K पर Kp का मान 0.04 atm है। C2H6 की साम्य पर सान्द्रता क्या होगी, यदि 4.0 atm दाब पर C2H6 को एक फ्लास्क में रखा गया है एवं साम्यावस्था पर आने दिया जाता है।
हल:
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 99

प्रश्न 3.
निम्नलिखित समीकरण के लिये साम्य स्थिरांक की गणना कीजिए –
(1) PCl5 ⇄ PCl3 + Cl2,
(2) H2 + I2 ⇄ 2HI.
उत्तर:
(1) माना कि PCl5 के a मोल अभिक्रिया प्रारंभ करते हैं और साम्यावस्था पर x मोल वियोजित होते हैं। यदि पात्र का आयतन v लीटर हो, तो
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 100
(2) HI का संश्लेषण-माना कि प्रारंभ में H2 व I2 के क्रमश: a तथा b मोल लेकर अभिक्रिया प्रारंभ करते हैं। साम्यावस्था पर दोनों के x मोल संयोग करते हैं। यदि पात्र का आयतन v लीटर हो, तो।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 101

प्रश्न 4.
दुर्बल वैद्युत अपघट्यों के वियोजन सम्बन्धी ओस्टवाल्ड का तनुता सिद्धान्त का प्रतिपादन कीजिए। इसकी क्या सीमाएँ हैं ?
अथवा
आयनन की मात्रा और आयनन स्थिरांक में संबंध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
सन् 1888 में ओस्टवाल्ड ने बताया कि दुर्बल वैद्युत अपघट्य के विलयन में आयनों तथा अनआयनित अणुओं के मध्य एक साम्य स्थापित हो जाता है और इस आयनिक साम्यावस्था पर द्रव्य अनुपाती क्रिया नियम का प्रयोग किया जा सकता है जिसे ओस्टवाल्ड का तनुता नियम कहते हैं। माना AB एक दुर्बल वैद्युत अपघट्य है जिसके एक मोल को । लीटर में विलेय है यदि आयनन की मात्रा α है, तो
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 102
दुर्बल वैद्युत अपघट्य में आयनन की मात्रा अत्यंत कम होती है। अतः ४ का मान नगण्य होगा अतः (1 – α) = 1 रखने पर,
K = \(\frac { { α }^{ 2 } }{ v } \)
KV = α2
\(\sqrt { K v} \) = α
∴ \(\frac { 1 }{ v }\)
\(\sqrt { K\frac { 1 }{ c } }\)
ओस्टवाल्ड के तनुता नियमानुसार दुर्बल वैद्युत अपघट्य के वियोजन की मात्रा उसकी तनुता के वर्गमूल के समानुपाती तथा उसकी सान्द्रता के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

MP Board Solutions

प्रश्न 5.
∆G और के मध्य संबंध लिखिये तथा पद के अर्थ को परिभाषित कीजिए।निम्न प्रश्नों के उत्तर भी दीजिए –
(a) जब Q < K तब अभिक्रिया अग्र दिशा में क्यों अग्रसर होती है तथा जब Q = K तब परिणामी अभिक्रिया क्यों नहीं होती है ?
(b) निम्न अभिक्रिया के दाब में वृद्धि का अभिक्रिया भागफल (Q) पर प्रभाव बताइये –
CO2(g) + 3H2(g) ⇄ CH4(g) + H2O(g)
हल:
∆G तथा Q के मध्य निम्नलिखित संबंध है –
∆G = ∆G°+ RT In Q जहाँ ∆G = अभिक्रिया होने के फलस्वरूप मुक्त ऊर्जा में परिवर्तन, ∆G° = मानक मुक्त ऊर्जा Q = अभिक्रिया भागफल, R = गैस नियतांक, T = परम ताप

(a) AG° = -RT in K
∆G = -RT In K + RT In Q = RT In \(\frac { Q }{ K}\)
यदि Q < K, ∆G = ऋणात्मक होगा तथा अभिक्रिया अग्र दिशा में अग्रसर होगी।
यदि Q = K, ∆G = शून्य अभिक्रिया साम्य में होगी तथा क्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

(b) CO(g) + 3H2(g) ⇄ CH4(g) + H2O(g).
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 103
दाब घटाने पर आयतन घटता है। दाब दोगुना करने पर आयतन आधा रह जाता है परन्तु मोलर सान्द्रताएँ दोगुनी हो जाती हैं तब
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 104

अत: Q, K. की अपेक्षा कम है अत: Q साम्यावस्था को पुनः प्राप्त करने के लिए वृद्धि करने का प्रयास करेगा जिसके कारण अभिक्रिया अग्र दिशा में अग्रसर होगी।

प्रश्न 6.
आयनन की मात्रा से क्या समझते हो ? तथा आयनन की मात्रा को प्रभावित करने वाला कारक लिखिए।
उत्तर:
आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में ही स्थायी होते हैं। क्योंकि ये स्थिर वैद्युत आकर्षण बल द्वारा जुड़े रहते हैं। इन आयनिक यौगिकों को जब किसी विलायक में विलेय किया जाता है तो स्थिर वैद्युत आकर्षण बल में कमी के कारण ये आयनों में विभक्त हो जाते हैं। किसी विलयन में यौगिकों का आयनों में पृथक् होना आयनन कहलाता है। कुल मात्रा में से जिस अंश तक किसी यौगिक का आयनन होता है, उसे आयनन की मात्रा या वियोजन की मात्रा कहते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 105

आयनन को प्रभावित करने वाले कारक –
(1) विलेय की प्रकृति:
प्रबल वैद्युत अपघट्य जलीय विलयन में पूर्णतः आयनित हो जाते हैं इसलिये इनकी आयनन की मात्रा अधिक होती है जबकि दुर्बल वैद्युत आयनों में आंशिक रूप से आयनित होते हैं । इसलिये इनकी आयनन की मात्रा कम होती है।

(2) सान्द्रता:
आयनन की मात्रा सान्द्रता के व्युत्क्रमानुपाती होती है अत: विलयन की तनुता में वृद्धि करने पर आयनन की मात्रा में वृद्धि होती है।

(3) विलायक की प्रकृति:
विलायक विलेय में उपस्थित स्थिर विद्युत् आकर्षण बल में कमी लाते हैं। इस गुण को विलायक का डाई इलेक्ट्रिक स्थिरांक कहते हैं। किसी भी विलायक का डाई इलेक्ट्रिक स्थिरांक का मान जितना अधिक होगा उसमें विलेय के आयनन की मात्रा उतनी अधिक होगी।

(4) ताप:
आयनन की मात्रा ताप के समानुपाती होती है ताप में वृद्धि करने से आयनन की मात्रा में वृद्धि होती है क्योंकि ताप में वृद्धि करने से स्थिर विद्युत् आकर्षण बल में कमी आती है।

प्रश्न 7.
अम्ल तथा क्षारक क्या है ? इनकी आपेक्षिक प्रबलता कैसे ज्ञात करते हैं ?
उत्तर:
आर्तीनियस के अनुसार अम्ल वह पदार्थ है जो जल में विलेय होकर H’ आयन दान करते हैं।
HCl ⇄ H+ + Cl

ब्रॉन्स्टेड-लॉरी अवधारणा के अनुसार अम्ल वह पदार्थ है जो विलयन में किसी अन्य यौगिक या पदार्थ को प्रोटॉन दान करते हैं।
HCl + H2O ⇄ Cl + H3O+
लुईस परिकल्पना के अनुसार अम्ल वह पदार्थ है जो किसी अन्य पदार्थ से इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकते हैं।
NH4: + BE3 → NH3 → BF3
लुईस अम्ल

अम्ल की प्रबलता:
किसी भी अम्ल की प्रबलता को अम्ल के आयनन स्थिरांक की सहायता से दर्शाया जा सकता है।
HA + H2O ⇄ A+ H3O++ द्रव्य अनुपाती क्रिया नियम के अनुसार,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 106

जहाँ Kα अम्ल का आयनन स्थिरांक है जिसे अम्लीयता स्थिरांक कहते हैं। Kα का मान जितना अधिक होगा। अम्ल उतना प्रबल होगा।

क्षारक:
आर्टीनियस के अनुसार क्षारक वह पदार्थ है जो जल में विलेय होकर OH आयन देता है।
KOH ⇄ K+ + OH
ब्रॉन्स्टेड एवं लॉरी के अनुसार क्षारक वह पदार्थ है जो विलयन में किसी अन्य पदार्थ से प्रोटॉन ग्रहण करता है।

NH3 + H2O ⇄ NH4+ + OH

लुईस परिकल्पना के अनुसार क्षारक वह पदार्थ है जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान कर सकता है।
NH3 + BF3 → NH3 → BF3
लुईस क्षार

क्षार की प्रबलता:
किसी भी क्षार की प्रबलता उसके प्रोटॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति पर निर्भर करती है। क्षार की प्रबलता को आयनन स्थिरांक की सहायता से ज्ञात कर सकते हैं।
NH3 + H2O ⇄ NH4+ + OH
द्रव्य अनुपाती क्रिया नियम के अनुसार,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 107
यहाँ पर Kb क्षार का आयनन स्थिरांक है जिसे क्षारीयता स्थिरांक कहते हैं। इसका मान जितना अधिक होगा क्षार उतना प्रबल क्षार होगा।

MP Board Solutions

प्रश्न 8.
निम्नलिखित ऊष्माशोषी अभिक्रिया के अनुसार ऑक्सीकरण द्वारा डाइहाड्रोजन गैस प्राकृतिक गैस से प्राप्त की जाती है-
CH4(g) + H2O(g) ⇄ CO(g) + H2(g)

  1. उपरोक्त अभिक्रिया के लिए Kpका व्यंजक लिखिए।
  2. Kp एवं अभिक्रिया मिश्रण का साम्य पर संघटन किस प्रकार प्रभावित होगा, यदि –
    • दाब बढ़ा दिया जाय
    • ताप बढ़ा दिया जाय
    • उत्प्रेरक प्रयुक्त किया जाए।

हल:
CH4(g) + H2O(g) ⇄ CO(g) + H2(g)
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 108
(b) 1. दाब में वृद्धि के कारण साम्य उस दिशा में अग्रसर होगा, जहाँ दाब में कमी होती है (अर्थात् गैसीय मोलों की संख्या कम हो)। यह प्रतीप अभिक्रिया है। दाब में परिवर्तन के फलस्वरूप Kp समान रहेगा।
2. चूँकि ∆H = धनात्मक (ऊष्माशोषी होती है) अतः अभिक्रिया ऊष्मा के अवशोषण द्वारा सम्पन्न होगी।
इसी कारण ताप में वृद्धि के कारण साम्य उस दिशा में विस्थापित होगा जिस ओर ऊष्मा अवशोषित होती हो (अर्थात् अग्र दिशा)। इसके कारण Kp के मान में वृद्धि होती है।
3. कोई प्रभाव नहीं पड़ता है क्योंकि उत्प्रेरक दोनों दिशाओं की दर पर समान प्रभाव डालता है।

प्रश्न 9.
ली-शातेलिये का नियम क्या है ? निम्न समीकरणों पर ताप, दाब एवं सान्द्रण बढ़ाने पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(a) N2 + 3H2 ⇄ 2NH3; ∆H = – 93.6KJ
(b) N2 + O2 ⇄  2NO; ∆H = + 180.7KJ
उत्तर:
सन् 1885 में ली-शातेलिये ने उत्क्रमणीय अभिक्रिया के रासायनिक साम्य पर ताप, दाब व सान्द्रण के गुणात्मक प्रभाव को एक नियम के रूप में दर्शाया। इस नियम के अनुसार, “यदि किसी अभिक्रिया की साम्यावस्था पर स्थापित किसी निकाय के ताप, दाब व सान्द्रण में से कोई परिवर्तन किया जाये तो साम्य इस प्रकार से विस्थापित होगा जिससे परिवर्तन को उदासीन या प्रभावहीन किया जा सके।”

(a) N2 + 3H2 ⇄  2NH3; ∆H = – 93.6KJ
दाब:
उपर्युक्त अभिक्रिया में यदि दाब बढ़ा दिया जाये तो अग्र अभिक्रिया की दर बढ़ जायेगी क्योंकि दाब बढ़ाने से आयतन में कमी आती है। अर्थात् अभिक्रिया के दौरान आयतन में कमी हो रही है। इसलिये ताप बढ़ाने से अभिक्रिया अग्र दिशा की ओर विस्थापित होगी जिससे NH3 के बनने की दर बढ़ जायेगी।

ताप:
NH3 का बनना एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है इसीलिये ताप बढ़ाने से अभिक्रिया प्रतीप दिशा में चलेगी जिससे NH3 के बनने की दर कम हो जायेगी। सान्द्रण – N2 या H2 के सान्द्रण में वृद्धि करने से अभिक्रिया अग्र दिशा की ओर चलेगी अर्थात् NH3 के बनने की दर बढ़ जायेगी क्योंकि। का मान स्थिर रहना चाहिये।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 109

(b) N2 +O2 ⇄ 2NO; ∆H = + 180.7KJ

  • सान्द्रण:
    N2 या O2 का सान्द्रण बढ़ाने से साम्यावस्था अग्र दिशा की ओर विस्थापित होता है जिससे NO के बनने की दर बढ़ जाती है।
  • ताप:
    NO का बनना एक ऊष्माशोषी प्रक्रम है इसलिये ताप में वृद्धि करने से साम्य दाँयी ओर विस्थापित होता है जिससे NO अधिक बढ़ेगा।
  • दाब:
    इस अभिक्रिया के दौरान आयतन में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है इसलिये इस अभिक्रिया पर दाब का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 10.
ली-शातेलिये नियम की सहायता से साम्यावस्था में 2SO2 + O2 ⇄ 2SO3; ∆H = -188.2 kJ अभिक्रिया द्वारा सल्फर ट्राइऑक्साइड के अधिक उत्पादन के लिये आवश्यक प्रतिबन्ध निकालिये।
उत्तर:
2SO2 + O2 ⇄ 2SO3; ∆H = -188.2kJ

सान्द्रण का प्रभाव:
उपर्युक्त अभिक्रिया में साम्यावस्था में अभिक्रिया मिश्रण में SO2 या O2 का सान्द्रण बढ़ाने पर ली-शातेलिये सिद्धान्त के अनुसार साम्यावस्था दाँयी ओर विस्थापित हो जायेगा। अर्थात् SO3 अधिक मात्रा में बनेगा।

ताप:
SO3का बनना एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है। ली-शातेलिये सिद्धान्त के अनुसार ताप में वृद्धि करने से अभिक्रिया उस दिशा में विस्थापित होती है जिस दिशा में अभिक्रिया ऊष्माशोषी हो इसलिये ताप में वृद्धि करने पर यह अभिक्रिया प्रतीप दिशा में विस्थापित होती है जिससे SO3के बनने की दर में कमी आती है।

दाब का प्रभाव:
SO3 के निर्माण में एक आयतन SO2 एक आयतन O2 के साथ संयोग कर 2 आयतन SO3 का निर्माण करता है अर्थात् SO3 के निर्माण के दौरान आयतन में कमी आती है। इस अभिक्रिया में दाब में वृद्धि करने पर अभिक्रिया अग्र दिशा की ओर विस्थापित होती है जिससे SO3 के बनने की दर बढ़ जाती है।

MP Board Solutions

प्रश्न 11.
ली-शातेलिये सिद्धान्त के अनुसार निम्नलिखित भौतिक साम्यों पर निम्नलिखित प्रभाव समझाइये
(1) बर्फ के पिघलने पर ताप तथा दाब का प्रभाव
(2) जल के वाष्पीकरण पर ताप तथा दाब का प्रभाव
(3) जल की विलेयता पर ताप का प्रभाव।
उत्तर:
(1) बर्फ के पिघलने पर ताप तथा दाब का प्रभाव  –
बर्फ ⇄ जल – Q cal
बर्फ का जल में परिवर्तन एक ऊष्माशोषी अभिक्रिया है तथा आयतन में कमी आती है। इसलिये ताप व दाब में वृद्धि करने पर साम्यावस्था अग्र दिशा की ओर विस्थापित होती है।

(2) जल के वाष्पीकरण पर ताप तथा दाब का प्रभाव –
जल ⇄  जलवाष्प – Qcal
जल के वाष्पीकरण के दौरान आयतन में वृद्धि होती है। इसलिये दाब में वृद्धि करने पर साम्यावस्था प्रतीप दिशा की ओर विस्थापित होती है। अर्थात् दाब में वृद्धि करने पर जल का वाष्पीकरण कम होता है तथा यह प्रक्रम ऊष्माशोषी प्रक्रम है। इसलिये ताप में वृद्धि करने पर साम्यावस्था अग्र दिशा की ओर विस्थापित होती है।

(3) जल में विलेयता पर ताप का प्रभाव –
NH4Cl, NaCl इत्यादि को जल में विलेय करने पर अभिक्रिया ऊष्माशोषी होती है। ऐसे लवणों की जल में विलेयता ताप में वृद्धि करने पर बढ़ती है। दूसरी तरफ CaCO3 तथा Cao की जल में विलेयता ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है। इसलिये इन यौगिकों की जल में विलेयता ताप में वृद्धि करने पर घटती है।

प्रश्न 12.
हाइड्रोजन आयोडाइड के विरचन (बनने) और वियोजन को उदाहरण के रूप में लेते हुए रासायनिक साम्य का वर्णन कीजिए।
हल:
720 K ताप पर एक बंद पात्र में H2 और I2 के बीच होने वाली अभिक्रिया को निम्न प्रकार से दर्शाया जाता है –
H2(g) + I2(g) → 2HI2(g) अभिकर्मकों H2 और I2 के प्रभावी टकराव से HI का विरचन होता है क्योंकि अभिक्रिया बंद पात्र में होती है इसलिए कोई अणु बाहर नहीं जाता और वे आपस में टकराते रहते हैं । अत: अभिक्रिया दोनों दिशाओं में संपन्न होती है और यह उत्क्रमणीय अभिक्रिया है।

अग्रगामी अभिक्रिया H2(g) + I2(g) → 2HI2(g)
प्रतीप अभिक्रिया 2HI2(g) → H2(g) + I2(g)
उत्क्रमणीय अभिक्रिया H2(g) + I2(g) ⇄ 2HI2(g)

प्रारंभ में अभिकारक की सान्द्रता अधिक होती है अतः अग्रगामी क्रिया की दर अधिक होगी। समय के साथ अग्रगामी क्रिया की दर घटती जाती है और प्रतीप दिशा में उत्पादों की सान्द्रता बढ़ती जाती है। परिणामस्वरूप प्रतीप दिशा में अभिक्रिया दर बढ़ती है। एक अवस्था में दोनों दिशाओं में अभिक्रिया दर समान हो जायेगी अर्थात् HI का वियोजन, HI के विरचन (बनने) के बराबर हो र जायेगा। यह अवस्था उत्क्रमणीय अभिक्रिया की साम्यावस्था कहलाती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 110

प्रश्न 13.
अम्लीय बफर विलयन की बफर क्रिया को समझाइये।
उत्तर:
अम्लीय बफर विलयन की बफर क्रिया:
CH3COONa प्रबल वैद्युत अपघट्य है इसलिये यह पूर्णतः आयनित होकर CH3COO– आयन देता है। जबकि CH3COOH दुर्बल वैद्युत अपघट्य है, यह आंशिक रूप से आयनित होकर कम मात्रा में CH3COO आयन देता है। C3COONa से प्राप्त एसीटेट आयन H+ आयन के साथ संयोग कर एसीटिक अम्ल बनाता है। CH3COONa सम आयन प्रभाव के कारण एसीटिक अम्ल के आयनन को कम कर देता है जिससे बहुत कम H+ बनते हैं इसलिये pH विलयन में कोई परिवर्तन नहीं होता।
CH3COOH  ⇄  CH3COO + H+
CH3COONa  ⇄  CH COO + Na+
CH3COO+ H+ ⇄ CH3COOH

बफर विलयन में अम्ल की अल्प मात्रा मिलाने पर अम्ल से प्राप्त H आयन CH3COO आयन से संयुक्त होकर CH3COOH बनाता है जो दुर्बल वैद्युत अपघट्य है जिसके कारण HCl जैसे प्रबल वैद्युत अपघट्य मिलाने पर भी विलयन के H* आयन सान्द्रण में वृद्धि नहीं हो पाती इसलिये pH में भी कोई परिवर्तन नहीं होता है।
HCl ⇄ H+ + Cl
CH3COO + H+ ⇄  CH3COOH बफर विलयन में क्षार मिलाने पर क्षार से प्राप्त OH आयन H+ आयन के साथ संयोग कर जल बनाते हैं। इस परिस्थिति में साम्यावस्था बनाये रखने के लिये कुछ CH3COOH वियोजित होने लगते हैं। जिसके फलस्वरूप H+ आयनों के सान्द्रण में कोई परिवर्तन नहीं होता इस प्रकार विलयन का pH निश्चित रहता है।
NaOH ⇄ Na+ +OH
OH+ + H ⇄ H2O

प्रश्न 14.
क्षारीय बफर विलयन की बफर क्रिया को समझाइये। बफर क्रिया का महत्व समझाइये।
उत्तर:
NH4Cl प्रबल वैद्युत अपघट्य है इसलिये यह पूर्णतः आयनित होकर अधिक मात्रा में NH4+ आयन देता है। जबकि NH4OH दुर्बल वैद्युत अपघट्य है जो आंशिक रूप से आयनित होकर कम मात्रा में NH4+ आयन देता है। NH4Cl से प्राप्त NH4+आयन OH आयन से संयोग कर NH4OH बनाते हैं। इस प्रकार NH4Cl सम आयन प्रभाव द्वारा NH4OH के वियोजन को कम कर देता है जिससे बहुत कम OH आयन बनते हैं अतः pH मान में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
NH4 OH ⇄ NH4+ + OH
NH4Cl → NH4+ + Cl
NH4+ + OH ⇄ NH4OH
बफर विलयन में क्षार मिलाने पर क्षार से प्राप्त OH आयन NH4+आयनों के साथ संयोग कर NH,OH बनाते हैं जो दुर्बल वैद्युत अपघट्य है जिसका आयनन बहुत कम होता है। इस प्रकार NaOH जैसे प्रबल वैद्युत अपघट्य मिलाने पर भी OH आयनों के सान्द्रण में वृद्धि नहीं हो पाती इसलिये pH स्थिर रहता है।
NaOH ⇄ Na+ + OH
NH4+ + OH ⇄ NH4OH
अम्ल मिलाने पर अम्ल से प्राप्त H+ आयन OHआयनों के साथ संयोग कर HO बनाते हैं। इस परिस्थिति में साम्यावस्था को बनाये रखने के लिये कुछ NH4OH वियोजित हो जाते हैं और इस प्रकार OH आयनों के सान्द्रण स्थिर रहता है अतः pH मान स्थिर रहता है।
HCl ⇄ H++ Cl
H+ + OH→ H2O

बफर विलयन का महत्व:

  • प्रयोगशाला में रासायनिक क्रियाओं के वेग के अध्ययन में pH मान स्थिर रखने के लिये बफर विलयन प्रयुक्त होता है।
  • गुणात्मक विश्लेषण में-फॉस्फेट के निष्कर्षण में CH3COONa और CH3COOH का बफर विलयन प्रयुक्त होता है।
  • उद्योग में – शक्कर और कागज का निर्माण तथा वैद्युत लेपन निश्चित pH पर होता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 15.
pH और pOH मान में संबंध स्थापित कीजिए। अथवा, सिद्ध कीजिये कि pH + pOH = 14.
उत्तर:
जल के स्वआयनन से,
H4O + H4O ⇄ H3O+ + OH
द्रव्य अनुपाती क्रिया नियम के अनुसार,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 118
Kw, एक स्थिरांक है जिसे जल का आयनिक गुणनफल कहते हैं। 298K ताप पर Kw = 1 × 10-14
समीकरण (1) में मान रखने पर,
10-14 = [H3O+][OH]

दोनों तरफ log10 लेने पर,
-14 log10 10 = log10 [H3O+ ] + log10[OH ]
[∴ log10 10 = 1]
-14 = log10[H3O+] + log10[OH ]

दोनों तरफ (-) का गुणा करने पर,
या 14 = [-log10[H3O+] + [-log10[OH]
या 14 = pH + pOH [-log10[H3O+] = pH, – log10[OH ] = pOH]

प्रश्न 16.
बफर विलयन के pH मान की गणना करने के लिये हेन्डर्सन समीकरण की व्युत्पत्ति कीजिए।
उत्तर:
किसी दुर्बल अम्ल HA और उसके आयनित होने वाले लवण NaA लेते हैं।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 111

माना कि मिश्रण में अम्ल और लवण के आण्विक सान्द्रण क्रमशः C1 और C2 है। लवण के भी A आयन की उपस्थिति के कारण विलयन में अम्ल का वियोजन कम हो जायेगा।
[HA] =C1
[A ] = C1
मान रखने पर,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 112
दोनों पक्षों का 10 आधार पर log लेने पर,
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 113
यह समीकरण हेन्डर्सन समीकरण कहलाता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 17.
द्रव्य अनुपाती क्रिया के नियम का प्रायोगिक सत्यापन हेतु एक प्रयोग का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
काँच के कुछ बल्ब में H2 और I2 की भिन्न-भिन्न मात्राएँ लेकर उनके मुँह को बंद कर देते हैं । इन बल्बों को उबलती हुई गंधक की वाष्प में कुछ समय तक गर्म करते हैं जिससे साम्य शीघ्र ही स्थापित हो जाता है। इन बल्बों को फिर एकाएक कमरे के ताप पर ठण्डा करके साम्यावस्था स्थापित करते हैं। इन बल्बों के मुँह को NaOH के विलयन में खोलने पर NaOH विलयन प्रत्येक बल्ब की H व आयोडीन को सोख लेता है।

शेष बची हुई हाइड्रोजन का आयतन ज्ञात कर लेते हैं तथा साम्यावस्था पर HI व I2 का सान्द्रण भी प्राप्त कर लेते हैं इस प्रकार प्रत्येक बल्ब में H2, I2 व HI की मात्रा ज्ञात कर लेते हैं तथा इन मानों की सहायता से प्रत्येक बल्ब के लिये K के मान की गणना करते हैं। यदि सभी बल्ब में K का मान लगभग समान रहता है जिससे द्रव्य अनुपाती क्रिया नियम की पुष्टि होती है।
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 114

प्रश्न 18.
1127 K एवं 1 atm दाब पर CO तथा CO2 के गैसीय मिश्रण में साम्यावस्था पर ठोस कार्बन में 90.55% CO है।
C(s) + CO2(g) ⇄  2CO(g)
उपरोक्त ताप पर अभिक्रिया के लिए K. के मान की गणना कीजिए।
हल:
अभिक्रिया C(s) + CO2(g) ⇄ 2CO(g)
यदि मिश्रण CO और CO2 का कुल द्रव्यमान 100g है तब
CO = 90.55 gm तथा CO2 = 100 – 90.55 = 9.45g
MP Board Class 11th Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था - 115

MP Board Class 11th Chemistry Solutions

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 1 कवितावली

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 1 कवितावली (कविता, तुलसीदास)

कवितावली पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

कवितावली लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि तुलसीदास ने किसके बालस्वरूप का वर्णन किया है?
उत्तर:
कवि तुलसीदास ने श्रीराम के बालस्वरूप का वर्णन किया है।

प्रश्न 2.
बालक राम की दन्त-पंक्ति की चमक की उपमा किससे दी गई है?
उत्तर:
बालक राम की दन्त-पंक्ति की चमक की उपमा ‘कुन्द’ नामक फूल की कली से दी गई है।

प्रश्न 3.
बालक राम किसको देखकर डर जाते हैं?
उत्तर:
बालक अपनी परछाईं को देखकर डर जाते हैं।

MP Board Solutions

कवितावली दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कविता के आधार पर बालक राम की सुन्दरता का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
बालक श्रीराम के पैरों में धुंघरू हैं। कमल के समान कोमल हाथों में पहुँचियाँ और हृदय पर मन को हरने वाली मणियों की माला शोभा दे रही है। नए नीले कमल के समान उनके साँवले शरीर पर पीले रंग की झिंगुली (कपड़ा) झलक रही है। ऐसे बालक श्रीराम को अपनी गोद में लिए हुए राजा दशरथ अत्यधिक खुश हो रहे हैं। उन श्रीराम की आँखों रूपी भौरे कमल के समान सुन्दर उनके मुख रूपी पराग का आनन्द के साथ पान कर रहे हैं। यदि किसी के मन में ऐसे सुन्दर बाल रूप का ध्यान नहीं आया तो फिर इस संसार में रहने का क्या फल है। अर्थात् कुछ भी नहीं है।

प्रश्न 2.
कवि के अनुसार जीवन का सर्वोत्तम फल क्या है?
उत्तर:
कवि के अनुसार जीवन का सर्वोत्तम फल भगवान श्रीराम के बाल-रूप और उनकी बाल-लीलाओं का दर्शन कर लेना है। ऐसा इसलिए कि यह भगवदनुरक्ति – योग, तप और समाधि से कहीं अधिक बढ़कर है। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि अगर कोई भगवान श्रीराम के बाल-रूप और बाल-लीलाओं का दर्शन नहीं करता है, तो उसका जीवन गधों, सुअरों और कुत्तों के समान है। इसलिए उसका इस संसार में जीवित रहना बिल्कुल व्यर्थ है।

प्रश्न 3.
पाठ में आई तीन उपमाओं को उनके भाव सहित लिखिए।
उत्तर:
पाठ में आई तीन उपमाएँ और उनके भाव इस प्रकार हैं-
1. उपमा :
रंजित-अंजन नैन सुखंजन-जातक से-
भाव :
बालक श्रीराम की आँखें न केवल आकर्षक हैं, अपितु सुन्दर और विशाल भी हैं। उनकी आँखों की इन विशेषताओं को व्यंजित करने के लिए खंजन पक्षी के बच्चे की आँखों से उपमा देना अपने आप में एक सार्थक प्रयोग है।

2. अरविन्द सो आनन
भाव :
बालक श्रीराम का मुखमण्डल साधारण नहीं है। वह असाधारण और अधिक प्रभावशाली है। वह तो कमल के समान कोमल, आकर्षक और मनमोहक है। दूसरे शब्दों में यह कि राम का मुखमण्डल वैसे है, जैसे खिला हुआ कनल। इसलिए अत्यधिक मन को छू लेने वाला है।

3. झलकै दंतिया दुति दामिनी ज्यों
भाव :
बालक श्रीराम के दाँतों की चमक अद्भुत है। उसकी झलक बिजली की झलक के समान हृदयस्पर्शी है। उससे उनकी शारीरिक सुन्दरता में चार चाँद लग जाता है। इस प्रकार वह दर्शनीय और प्रेरक है।

कवितावली भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव-विस्तार कीजिए
(क) कबहुँ ससि माँगत……….मोद भरै।
(ख) कही जग में फलु कौन जिएँ।
उत्तर:
(क) कबहुँ ससि माँगत………मोद भरै।
उपर्युक्त काव्य-पंक्तियों के द्वारा कवि ने बाल स्वभाव का सटीक उल्लेख करना चाहा है। कवि का यह मानना है कि बाल-स्वभाव बड़ा ही क्षणिक, अस्थिर और स्वाभिमानी होता है। इसलिए वह अपने सामने किसी की कुछ भी परवाह नहीं करता है। अपने नटखट और चंचल स्वभाव से अपने माता-पिता और अन्य परिजनों के दिलों को बाग-बाग कर देता है।

(ख) ‘कहाँ जग में फलु कौन जिएँ।’
उपर्युक्त काव्यांश में कवि बालक श्रीराम के प्रति अपनी एकमात्र भक्तिधारा को प्रवाहित करना चाहा है। इसलिए उसका यह मानना है कि यदि किसी के मन में सर्वाधिक सुन्दर बालक श्रीराम के बाल-सौन्दर्य का ध्यान न आया तो इस संसार में उसके जीते रहने का कोई फल नहीं है।

कवितावली भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखें
कमल, नेत्र, बालक, पग, नृप।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 1 कवितावली img-1

प्रश्न 2.
कविता में से प्रत्ययांत (प्रत्यय से अन्त होने वाले) तीन शब्द खोजकर लिखिए
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 1 कवितावली img-2

MP Board Solutions

कवितावली योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
चन्द्रमा लेने की हठ से जुड़ा कोई अन्य प्रसंग या पद खोजें एवं कक्षा में सुनाएँ।
उत्तर:
योग्यता-विस्तार के उपर्युक्त सभी प्रश्नों के उत्तर छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 2.
बालक की वेश-भूषा से सम्बन्धित कुछ वस्तुओं के नाम लिखें।
उत्तर:
योग्यता-विस्तार के उपर्युक्त सभी प्रश्नों के उत्तर छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 3.
वात्सल्य सम्राट किसे माना जाता है, उनके पदों को खोजिए और कवितावली के इन पदों से उनकी तुलना कीजिए।
उत्तर:
योग्यता-विस्तार के उपर्युक्त सभी प्रश्नों के उत्तर छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

कवितावली परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

कवितावली लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि तुलसीदास ने श्रीराम के बाल स्वरूप का वर्णन कैसा किया है?
उत्तर:
कवि तुलसीदास ने श्रीराम के बाल स्वरूप का वर्णन बड़ा ही अद्भुत, रोचक और स्वाभाविक रूप में किया है।

प्रश्न 2.
बालक राम की आँखों की उपमा किससे दी गई है?
उत्तर:
बालक राम की आँखों की उपमा खंजन पक्षी के बच्चे की आँखों से। दी गई है।

प्रश्न 3.
माताएँ अपने बालकों की किस प्रकार की वाल-लीला को देखकर अपने मन में परमानन्दित हो उठती हैं?
उत्तर:
माताएँ अपने बालकों द्वारा अपने-अपने हाथों से तालियाँ बजा-बजा कर बाल-लीला करते हुए देखकर अपने मन में परमान्दित हो उठती हैं।

कवितावली दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कविता के आधार पर बालक श्रीराम के रूप-सौन्दर्य और बाल-लीला का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
‘बाल-रूप’ शीर्षक के अन्तर्गत संकलित पद महाकवि तुलसीदास की प्रमुख रचना ‘कवितावली’ से उद्धृत हैं। इन पदों में कवि ने राम के बाल-रूप सौन्दर्य का वर्णन किया है। इसके लिए कवि ने अनेक उपमाओं का आश्रय लिया है। उन उपमाओं के माध्यम से कवि ने राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम के बाल-सौन्दर्य को चकित करने वाला, खंजन पक्षी के बच्चे के समान मन को लुभाने वाला और चन्द्रमा में खिले हुए दो नए नील-कमल के समान कहा है। ऐसे श्रीराम के चरणों में घुघरू, कमल के समान कोमल हाथों में पहुँचियाँ, और हृदय पर मनोहर मणियों की माला शोभा दे रही है। उनके साँवले शरीर पर पीले रंग की झिंगुली झलक रही है। उनकी आँखें रूपी भौरे कमल के समान सुन्दर मुँह रूपी मकरन्द का आनन्द के साथ पान कर रहे हैं। इससे उनका शरीर सुन्दर और आँखें कमल के समान लग रही हैं, जो कामदेव को भी लज्जित करने वाली हैं। उनकी दंतावलियां बिजली के समान चमक रही हैं। वे किलकारी मारते हुए बाल सुलभ लीलाएँ कर रहे हैं।

प्रश्न 2.
किसके जीवन को कवि ने सार्थक कहा है?
उत्तर:
कवि ने उस व्यक्ति के जीवन को सार्थक कहा है, जो श्रीराम के बाल रूप और बाल मनोविनोद में अपनी सच्ची श्रद्धा भावना रखता है। इसके विपरीत जीवन जीने वाले व्यक्ति के जीवन को निष्फल और निरर्थक माना है। उसके अनुसार ऐसे व्यक्तियों का जीवनतो गधों,सुअरोंऔर कुत्तों के समान है।फिर इस संसार में उनकेजीवनकाक्या अर्थ है?

प्रश्न 3.
प्रस्तुत कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कविता महाकवि तुलसीदास की अत्यधिक महत्त्वपूर्ण कविता है। इसमें उन्होंने श्रीराम के बाल-रूप का बड़ा ही रोचक उल्लेख किया है, तो उनकी बाल-लीलाओं के भी अनूठे चित्र खींचे हैं। इन दोनों ही प्रकार के चित्रों को मनमोहक बनाने के लिए उन्होंने सटीक उपमाओं का आश्रय लिया है। उनके ये चित्र बाल-मनोविज्ञान पर आधारित हैं। इसके लिए. कवि ने वात्सल्य रस को इस प्रकार प्रवाहित किया है कि उससे सहृदय पाठक रसमग्न हो उठता है। अन्ततः कवि ने उस व्यक्ति के जीवन को सार्थक माना है, जो राम के बालरूप और बाल-लीला से प्रेम रखता है।

MP Board Solutions

कवितावली कवि-परिचय

प्रश्न 1.
गोस्वामी तुलसीदास का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय :
गोस्वामी तुलसीदास का जन्म सन् 1532 ई. में उत्तर-प्रदेश के बाँदा जिले के राजापुर गाँव में हुआ था। कुछ विद्वान उनका जन्म-स्थान सोरों (एटा) मानते हैं। उनके पिता का नाम श्री आत्माराम और माता का नाम हुलसी था। अभुक्त मूल नक्षत्र में जन्म लेने के कारण उनको अशुभ माना गया। इसलिए उनके माता-पिता ने उन्हें त्याग दिया। इससे उन्हें बचपन में अनेक प्रकार के कष्ट उठाने पड़े। सौभाग्य से उनकी भेंट बाबा नरहरिदास से हो गई। उन्होंने उन्हें शिक्षा और गुरु-मन्त्र दिया। उनकी योग्यता और नम्रता से प्रभावित होकर दीनबन्धु पाठक ने अपनी पुत्री रत्नावली का विवाह उनके साथ कर दिया। अपनी पत्नी रत्नावली से उनका बहुत अधिक प्यार था। कहा जाता है कि उसके अपने मायके चले जाने पर वे भी उफनती हुई नदी को पार कर उसके पास पहुँच गए। अर्द्धरात्रि में सामने देखकर उसने उन्हें इतना फटकरा कि वे संसार से विरक्त हो गए। वे राम-भक्ति में लीन हो गए। काशी जाकर उन्होंने शास्त्रों का अध्ययन-मनन किया। फिर भारत के प्रमुख तीर्थ-स्थानों की यात्रा करते हुए सन्त-महात्माओं का सत्संग किया। इसके बाद उन्होंने अनेक ग्रन्थ लिखे। उनका निधन सन् 1623 ई. में काशी के अस्सी घाट पर हो गया।

रचनाएँ :
तुलसीदास ने बारह ग्रन्थ लिखे हैं-रामचरितमानस, विनयपत्रिका कवितावली, दोहावली, गीतावली, बरवैरामायण, वैराग्य संदीपनी, रामलला नहछू, पार्वती मंगल, जानकी मंगल, रामाज्ञा प्रश्न और हनुमान बाहुक । इनमें रामचरितमानस सर्वाधिक प्रसिद्ध है। इसमें रामचरित्र को प्रेरणादायक रूप में प्रस्तुत किया गया है।

साहित्य की विशेषताएँ :
तुलसीदास रामभक्त थे। उन्होंने राम के अतिरिक्त अन्य देवी-देवताओं का भी गुणगान किया है।

(क) भाव पक्ष :
तुलसीदासं राम के अनन्य भक्त थे। उनके काव्य में राम के प्रति पूरी श्रद्धाभावना व्यक्त हुई है। लोक-कल्याण की भावना उनके काव्य में मुख्य रूप से है। उन्होंने प्रकृति के सभी रूपों का मोहक चित्रण किया है। राम-कथा के द्वारा उन्होंने अनेक मतों-सिद्धान्तों का खण्डन-मण्डन किया है। उन्होंने अपनी भक्ति भावना से सबको प्रभावित और आकर्षित किया है।

(ख) कला पक्ष :
तुलसीदास के काव्य की भाषा अवधी और ब्रज दोनों ही है। इन दोनों भाषाओं के अतिरिक्त उनके काव्य में संस्कृत, उर्दू, फारसी आदि के भी शब्द मिलते हैं। उन्होंने अपने काव्य में प्रचलित मुहावरों-कहावतों का सुन्दर प्रयोग किया है। उनके काव्य में सभी रसों के प्रयोग हुए हैं। उनकी कविताओं में दोहा, चौपाई, सोरठा, सवैया, कवित्त आदि छन्द हैं। उनके काव्य में अनुप्रास, उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, सन्देह, अतिशयोक्ति आदि अलंकार यथास्थान प्रयुक्त हुए हैं। उन्होंने भावात्मक, वर्णनात्मक, चित्रात्मक आदि शैलियों के सफल प्रयोग किए हैं।

(ग) साहित्य में स्थान :
तुलसीदास का साहित्य एक ऐसी सरिता है, जिसमें स्नान करने से सभी प्रकार के क्लेश दूर हो जाते हैं, मन पवित्र हो जाता है और उसमें आस्था-विश्वास के अंकुर फूटने लगते हैं। तुलसीदास का गुणगान करते हुए किसी कवि ने ठीक ही कहा है-
सूर ससी, तुलसी रवी, उड्गन केसवदास।
अब के कवि खद्योत सम, जहँ-जहँ करत प्रकास॥

बाल-रूप की झाँकी भाव सारांश

कविता का सार

प्रश्न 1.
तुलसीदास द्वारा रचित ‘बाल-रूप’ शीर्षक के अंतर्गत संकलित पदों का सारांश लिखिए।
उत्तर:
‘बाल-रूप’ शीर्षक के अन्तर्गत संकलित पद महाकवि तुलसीदास की प्रमुख रचना ‘कवितावली’ से उद्धृत हैं। इन पदों में कवि ने राम के बाल-रूप सौन्दर्य का वर्णन किया है। इसके लिए कवि ने अनेक उपमाओं का आश्रय लिया है। उन उपमाओं के माध्यम से कवि ने राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम के बाल-सौन्दर्य को चकित करने वाला, खंजन पक्षी के बच्चे के समान मन को लुभाने वाला और चन्द्रमा में खिले हुए दो नए नील-कमल के समान कहा है। ऐसे श्रीराम के चरणों में घुघरू, कमल के समान कोमल हाथों में पहुँचियाँ, और हृदय पर मनोहर मणियों की माला शोभा दे रही है। उनके साँवले शरीर पर पीले रंग की झिंगुली झलक रही है। उनकी आँखें रूपी भौरे कमल के समान सुन्दर मुँह रूपी मकरन्द का आनन्द के साथ पान कर रहे हैं। इससे उनका शरीर सुन्दर और आँखें कमल के समान लग रही हैं, जो कामदेव को भी लज्जित करने वाली हैं। उनकी दंतावलियां बिजली के समान चमक रही हैं। वे किलकारी मारते हुए बाल सुलभ लीलाएँ कर रहे हैं।

बाल-रूप की झाँकी संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

1. अवधेश के द्वारे सकारे गई सुत गोद कै भूपति लै निकसे।
अवलोकि हौं सोच बिमोचन को ठगि-सी रही, जे न ठगे धिक-से।।
तुलसी मन-रंजन रंजित-अंजन नैन सुखंजन-जातक-से।
सजनी ससि में समसील उभै नवनील सरोरुह से बिकसे ॥1॥

शब्दार्थ :
अवधेश-राजा दशरथ। सुत-पुत्र। भूपति-राजा। सकारे-सुबह। कै-लै-लेकर। अवलोकि-देखकर। सोच-विमोचन-शोक (दुख) से छुटकारा दिलाने वाले। हौं-मैं। ठगि-सी रही-चकित रह गई। खंजन-जातक-खंजन नाम के पक्षी का बच्चा। रंजित अंजन नैन-काजल लगे नेत्र। उभै-दो। नवनील-नए। सरोरुह-नील कमल। विकसे-खिले हुए।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य पुस्तक ‘सामान्य हिन्दी भाग-1’ में संकलित तथा महाकवि तुलसीदास विरचित काव्य-रचना कवितावली के ‘बाल-रूप की झाँकी शीर्षक से लिया गया है। इसमें महाकवि तुलसीदास ने श्रीराम की बाल-शोभा का आकर्षक चित्रण किया है। कवि ने इस विषय में कहा है कि-

व्याख्या :
एक सखी दूसरी सखी से कह रही है कि हे सखी! मैं सुबह अयोध्या के स्वामी दशरथ के महल के द्वार गई। उस समय राजा दशरथ अपने पुत्र रामचन्द्र को अपनी गोद में लेकर राजमहल से बाहर निकल रहे थे। मैं तो शोक से मुक्त करने वाले उन रामचन्द्र की सुन्दरता को देखकर चकित रह गई। उस अपार और अत्यधिक सुन्दरता को देखकर जो चकित न हो, उसे धिक्कार है। खंजन पक्षी के बच्चे के समान मन को लुभाने वाले काजल लगी हुई उनकी आँखें उस समय ऐसी लग रही थीं, मानो चन्द्रमा में दो नए और समान सुन्दरता वाले नील कमल खिले हुए हैं।

विशेष :

  1. बालक राम की आँखों की आकर्षक सुन्दरता का चित्रण है।
  2. खंजन पक्षी के बच्चों की आँखों की उपमा देने से उपमा अलंकार है।
  3. वात्सल्य रस का प्रवाह है।
  4. सवैया छन्द है।
  5. चित्रात्मक शैली है।

MP Board Solutions

पद पर आधारित सौन्दर्य-बोध सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न.
(i) प्रस्तुत पद के भाव-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
(ii) प्रस्तुत पद के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
(iii) ‘अवलोकि हौं………………………धिक से।’ का भाव-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए
उत्तर:
(i) प्रस्तुत पद में महाकवि तुलसीदास ने बालक श्रीराम के रूप-सौन्दर्य का आकर्षक चित्र खींचा है। यह चित्र बड़ा मनमोहक और रोचक होने के कारण प्रेरक भी है। कवि का मानना है कि बालक श्रीराम की सुन्दरता चकित करने वाली है। उस रूप-सौन्दर्य को देखकर जो चकित न हो, उसे धिक्कार है। काजल लगी उनकी आँखों की सुन्दरता खंजन-पक्षी के बच्चे की आँखों के समान बार-बार मन को लुभाने वाली है। इस प्रकार की उनकी आँखें वैसे ही सुन्दर दिखाई दे रही हैं, मानो चन्द्रमा में दो नए और समान सुन्दरता वाले नील कमल खिले हुए हों।

(ii) प्रस्तुत पद का काव्य-सौन्दर्य देखते ही बनता है। उसमें विशुद्ध ब्रज भाषा का प्रयोग किया गया है। खंजन पक्षी के बच्चों की आँखों और चन्द्रमा में खिल रहे कमलों से दी गई उपमा बड़ी सटीक और सार्थक रूप में है। ‘ठगे-से रह जाना’ मुहावरे का सफल प्रयोग हुआ है। वात्सल्य रस के प्रवाह से यह पद बड़ा ही सरस बन गया है। इस प्रकार इस पद में प्रस्तुत बिम्ब और प्रतीक चित्रात्मक शैली में होने से अधिक महत्त्वपूर्ण सिद्ध हो रहे हैं।

(iii) इसमें कवि तुलसीदास ने बालक श्रीराम के रूप को चकित करने वाला कहा है। इसके साथ ही ऐसे रूप-सौन्दर्य को देखकर चकित न होने वाले को धिक्कारा है। उससे कवि को बालक श्रीराम का अद्भुत सौन्दर्य प्रति एकमात्र प्रेम सिद्ध हो रहा है।
पद पर आधारित विषय-वस्तु से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर

प्रश्न.
(i) कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ii) कविता का मुख्य विषय क्या है?
(iii) तुलसीदास ने बालक श्रीराम के रूप-सौन्दर्य को देखकर चकित न होने वाले को क्यों धिक्कारा है?
(iv) किसके माध्यम से बालक श्रीराम के रूप-सौन्दर्य पर प्रकाश डाला गया है?
उत्तर:
(i) कवि-तुलसीदास, कविता- ‘बालकाण्ड’ ।
(ii) बालक श्रीराम के अद्भुत रूप-सौन्दर्य का चित्रण।
(iii) एक सखी अपनी दूसरी सखी को सम्बोधित करते हुए कह रही है, इसके माध्यम से बालक श्रीराम के रूप-सौन्दर्य पर. प्रकाश डाला गया है।

2. पग नूपुर औ पहुँची करकंजनि मंजु बनी मनिमाल हिएँ।
नवनील कलेवर पीत अँगा झलकै पुलकैं नूपु गोद लिएँ।
अरबिन्दु सो आननु रूप मरंदु अनन्दित लोचन-भृग पिएँ।
मनमो न बस्यौ अस बालकु जौं तुलसी जगमें फलु कौन जिएँ॥2॥

शब्दार्थ :
पग-पैर। नूपुर-घुघुरू। करकजनि-कमल रूपी हाथों में। मंजु-सुन्दर। मनिमाल-मणियों की माला। हिए-हृदय। नवनील-नया नीला कमल। कलेवर-शरीर। पीत-पीला। झगा-झिंगुली (कपड़ा)। पुलके-प्रसन्न।नृप-राजा दशरथ। अरविन्द-कमल। आनन-मुखमण्डल। मरंद-पराग। लोचन-ग-आँख रूपी भौंरा।।

प्रसंग :
पूर्ववत्। इस पद में महाकवि ने बालक श्रीराम के शारीरिक सुन्दरता का चित्रण करते हुए कहा है कि-

व्याख्या :
बालक श्रीराम के पैरों में धुंघरू हैं। कमल के समान कोमल हाथों में पहुँचियाँ और हृदय पर मन को हरने वाली मणियों की माला शोभा दे रही है। नए नीले कमल के समान उनके साँवले शरीर पर पीले रंग की झिंगुली (कपड़ा) झलक रही है। ऐसे बालक श्रीराम को अपनी गोद में लिए हुए राजा दशरथ अत्यधिक खुश हो रहे हैं। उन श्रीराम की आँखों रूपी भौरे कमल के समान सुन्दर उनके मुख रूपी पराग का आनन्द के साथ पान कर रहे हैं। यदि किसी के मन में ऐसे सुन्दर बाल रूप का ध्यान नहीं आया तो फिर इस संसार में रहने का क्या फल है। अर्थात् कुछ भी नहीं है।

विशेष :

  1. बालक रान की शारीरिक सुन्दरता का मनमोहक चित्रण है।
  2. वात्सल्य रस का सुन्दर प्रवाह है।
  3. शैली चित्रमयी है।
  4. सवैया छन्द है।
  5. उपमा अलंकार है।

पद पर आधारित सौन्दर्य-बोध सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न.
(i) प्रस्तुत पद के भाव-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
(ii) प्रस्तुत पद के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
(iii) ‘नवनील कलेवर पीत अँगा, झलकै पुलकै नूपु गोद लिए’ काव्यांश में कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?
उत्तर:
(i) प्रस्तुत पद में कवि तुलसीदास ने बालक श्रीराम के रूप-सौन्दर्य का स्वाभाविक चित्रांकन किया है। बालक श्रीराम के पैरों में घुघुरू, हाथों में पहुँची, हृदय पर मोतियों की माला और पीला वस्त्र उनके साँवले शरीर पर असाधारण शोभा दे रहे हैं। उनकी आँखों के रूप-सौन्दर्य का रसपान भौरे कर रहे हैं। यह सम्पूर्ण चित्रण अपने आप में भाववर्द्धक और आकर्षक है। इसके लिए कवि ने उपयुक्त उपमाओं का चुनाव किया है। तुकान्त शब्दावली और चित्रमयी शैली में ढला हुआ यह पद बड़ा ही अनूठा है।

(ii) प्रस्तुत पद काव्य-सौन्दर्य, भाषा, शैली, रस, छन्द, प्रतीक और योजना की विविधता के कारण देखते ही बनता है। इसकी भाषा सरल और सपाट है, तो शैली विविधता लिए हुए चित्रमयी हो गई है। ‘झगा झलकै’ में अनुप्रास अलंकार है तो ‘अरबिन्दु सो आनन’ में उपमा अलंकार है। इसी प्रकार ‘लोचन-शृंग’ में रूपक अलंकार है। सम्पूर्ण पद सवैया छन्द में गीतबद्ध होकर अधिक सरस और हृदयस्पर्शी बन गया है।

MP Board Solutions

पद पर आधारित विषय-वस्तु से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर

प्रश्न.
(i) कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ii) कविता का मुख्य विषय क्या है?
(iii) श्रीराम के किस रूप का वर्णन किया गया है?
उत्तर:
(i) कवि-तुलसीदास, कविता- ‘बालकाण्ड’।
(ii) कविता का मुख्य विषय है-श्रीराम के बाल-सौन्दर्य का आकर्षक और मनोहारी वर्णन करके उसे मन में उतारकर जीवन को सफल बनाने का उल्लेख करना है।
(iii) श्रीराम के बाल-रूप-सौन्दर्य का नखशिख वर्णन किया गया है?

3. तन की दुति स्याम सरोरुह लोचन कंज की मंजुलताई हरैं।
अति सुंदर सोहत, धूरि भरे छबि भूरि अनंग की दूरि धरै॥
दमकैं द॑तियाँ दुति दामिनी-ज्यौं किलक कल बाल-बिनोद करें।
अवधेस के बालक चारि सदा तुलसी-मन-मन्दिर में बिहरै ॥3॥

शब्दार्थ :
तन-शरीर। दुति-चमक। सरोरुह-कमल। लोचन-आँख। कंज-कमल। मंजुलताई-सुन्दरता, सुकोमलता। छवि-सुन्दर। भूरि-बहुत। अनंग-कामदेव। दंतिया-छोटे-छोटे दाँत। दुति-चमक। दामिनी-बिजली। ज्यों-जैसे। किलके-किलकारी। विनोद-मनोरंजन।

प्रसंग :
पूर्ववत्। इसमें कवि ने बालक श्रीराम के आकर्षक और कामदेव को लज्जित करने वाले रूप की सुन्दरता का उल्लेख किया है। कवि का कहना है कि-

व्याख्या :
बालक श्रीराम की शरीर की सुन्दरता साँवले कमल के समान चमक रही है। उनकी आँखें कमलों की सुन्दरता को हर रही हैं। धूल से धूसरित होने पर भी उनका शरीर इतना अधिक सुन्दर दिखाई दे रहा है उसके सामने कामदेव की सुन्दरता भी फीकी पड़ रही है। उनके छोटे-छोटे दाँतों की चमक बिजली के समान है। वे किलकारी मारते हुए अपने साथियों का मनोरंजन कर रहे हैं। कवि तुलसीदास का पुनः कहना है कि अयोध्या के राजा दशरथ के चारों बालक उनके मन-मन्दिर में सदैव विहार करें।

विशेष :

  1. बालक श्रीराम की शारीरिक सुन्दरता को बेजोड़ कहा गया है।
  2. भाषा शुद्ध ब्रजभाषा है।
  3. शैली चित्रमयी है।
  4. वात्सल्य का सुन्दर प्रवाह है।
  5. सम्पूर्ण वर्णन भाववर्द्धक रूप में है।

पद पर आधारित सौन्दर्य-बोध सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न.
(i) प्रस्तुत पद के भाव-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
(ii) प्रस्तुत पद के काव्य-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।
(iii) ‘मन-मन्दिर में बिहरै’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
(i) कवि तुलसीदास ने इस पद में यह बतलाने का प्रयास किया है कि बालक श्रीराम का साँवला शरीर धूल से भरा होने पर भी बहुत अधिक सुन्दर दिखाई दे रहा है इसलिए वह कामदेव की भी सुन्दरता को मात दे रहा है। उनकी आँखों की सुन्दरता कमल की सुन्दरता से बढ़कर है तो उनके दाँतों की चमक बिजली की चमक से कहीं अधिक चमकदार है। इस प्रकार बालक श्रीराम की शोभा पर ऐसा कौन है, जो अपने आपको निछावर न कर दे; अर्थात् हर कोई अपने आपको निछावर कर देने के लिए तैयार है।

(ii) प्रस्तुत पद में कवि ने श्रीराम के शारीरिक सौन्दर्य को हृदयस्पर्शी बनाने के लिए कई प्रकार की उपमाओं का आश्रय लिया है। उनके साँवले शरीर और आँखों की सुन्दरता के लिए कमल और दाँतों की चमक के लिए बिजली की चमक से तुलना की है। उनके साँवले शरीर को अत्यधिक सुन्दर बतलाने के लिए कामदेव की भी सुन्दरता को फीका कहा है। इस प्रकार इस पद में मुख्य रूप से उपमा अलंकार का बाहुल्य है, ‘मन-मन्दिर’ में रूपक अलंकार है। शृंगार रस का प्रवाह है। अभिधा शब्द-शक्ति है। इस पद में ब्रज भाषा की प्रचलित शब्दावली का प्रयोग हुआ है। शैली चित्रमयी है।

(iii) मन रूपी मंदिर में ईश्वर विचरण करते हैं। कवि यह दिखाना चाहता है कि ईश्वर का निवास हमारे मन में है।
पद पर आधारित विषय-वस्तु से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर

प्रश्न.
(i) कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ii) कविता का मुख्य विषय क्या है?
(iii) बालक श्रीराम के रूप-सौन्दर्य को कौन और क्यों अपने में बसा लेना चाहता है?
उत्तर:
(i) कवि-तुलसीदास, कविता-‘बालकाण्ड’।
(ii) कविता का मुख्य विषय है-बालक श्रीराम की शारीरिक सुन्दरता कामदेव की सुन्दरता से बढ़कर बतलाते हुए उसे हृदयस्पर्शी बना लेने का प्रयास करना है।
(iii) बालक श्रीराम के रूप-सौन्दर्य को कवि तुलसीदास अपने हृदय में बसा लेना चाहते हैं। यह इसलिए कि वे श्रीराम के अनन्य भक्त हैं।

MP Board Solutions

बाललीला भाव सारांश

प्रश्न 1.
‘बाललीला’ कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
‘बाललीला’ कवितांश महाकवि तुलसीदास की अमर रचना ‘कवितावली’ के ‘बालकाण्ड’ से उद्धृत है। राजा दशरथ के बालक कभी चन्द्रमा लेने का हठ करते हैं, तो कभी अपनी छाया को देखकर डर जाते हैं। कभी अपनी-अपनी तालियों को बजाकर अपनी माताओं को खुश कर देते हैं। कभी-कभी क्रोध में आकर अपनी मनचाही वस्तु को ले ही लेते हैं। उनके पैर कमल के समान कोमल और सुन्दर हैं। उनमें जूतियाँ शोभा दे रही हैं। वे अपने साथियों के साथ सरयू नदी के किनारे बाल-लीला करते हुए लोगों के मनों को मोह रहे हैं। ऐसे बालकों के प्रति जिनका प्रेम नहीं है, तो वे गधों और कुत्तों के समान हैं। फिर इस संसार में उनका जन्म लेना ही व्यर्थ है।

बाललीला संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

1. कबहूँ ससि माँगत आरि करें, कबहूँ प्रतिबिम्ब निहारि डरें।
कबहूँ करताल बजाइ कै नाचत मातु सबै मन मोद भरें।
कबहूँ रिसिआई कहैं हठिकै पुनि लेत सोई जेहि लागि अरैं।
अवधेस के बालक चारि सदा तुलसी-मन-मन्दिर में बिहरे॥

शब्दार्थ :
कबहुँ-कभी। ससि-चन्द्रमा। माँगत-माँगते हैं। आरि-करै-हठ करते हैं। प्रतिबिम्ब-परछाईं, छाया। निहारि-देखकर। करताल-हाथों से ताली बजाना। रिसिआई-क्रोध में आकर। सोई-वही। जेहि-जिसे। लागि अरै-अड़ जाते हैं।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सामान्य हिन्दी भाग-1’ में संकलित तथा कवि तुलसीदास विरचित काव्य-रचना ‘कवितावली’ के ‘बाल-लीला’ शीर्षक से ली गई है। इसमें कवि ने राजा दशरथ के चारों पुत्रों अर्थात् राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के बाललीला का स्वाभाविक चित्रांकन किया है। इस सम्बन्ध में कवि का कहना है कि-

व्याख्या :
राजा दशरथ के पुत्र कभी-कभी तो चन्द्रमा लेने का हठ करते हैं, तो कभी अपनी ही परछाई को देखकर डर जाते हैं। वे कभी-कभी अपने हाथों से तालियाँ . बजा-बजाकर अपनी माताओं को खुश कर देते हैं। वे कभी-कभी क्रोध में आते हैं, तो अपनी मनचाही वस्तु को लेने के लिए हठ करते हैं। फिर उसे लेकर ही वे शान्त होते हैं। इस प्रकार राजा दशरथ के चारों पुत्र उसके (कवि तुलसीदास) के मन रूपी मन्दिर में विहार करते हैं।

विशेष :

  1. सारा चित्रण स्वाभाविक है।
  2. ब्रजभाषा का यथोचित प्रयोग हुआ है।
  3. शैली चित्रमयी है।
  4. पद में वात्सल्य रस का प्रवाह है।

पद पर आधारित सौन्दर्य-बोध सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न.
(i) प्रस्तुत पद का भाव-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
(ii) प्रस्तुत पद के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
(iii) ‘कबहुँ रिसिआई कहै हठि के, पुनि लेत सोइ, जेहि लागि अरै’ से किस बाल-स्वभाव का पता लगता है?
उत्तर:
(i) प्रस्तुत पद का भाव-सौन्दर्य अत्यधिक भाववर्द्धक है। बाल-स्वभाव का सहज और सजीव चित्रण हुआ है। इसके लिए सरल और यथोचित वस्तु स्वरूपों को सामने लाया गया है। फिर उनसे रोचक लगने वाली स्थितियों को नपे-तुले भावों के द्वारा व्यक्त किया गया है। फलस्वरूप इस पद का भाव-सौन्दर्य अनूठा हो गया है।

(ii) प्रस्तुत पद का काव्य-सौन्दर्य भाव, भाषा, शैली और बिम्बों-प्रतीकों के सटीक प्रयोगों के कारण देखते ही बनता है। ब्रज भाषा की शब्दावली के द्वारा ‘कबहुँ’ पुनरुक्ति अलंकार का चमत्कार है, तो पूरे पद में वात्सल्य रस का सुन्दर प्रवाह है। बाल-स्वभाव के मनोवैज्ञानिक उल्लेख से कवि की असाधारण काव्य-प्रतिभा की पहचान हो रही है।

(iii) ‘कबहुँ रिसिआई कहै हठि कै, पुनि लेत सोई, जेहि लागि अरै’ से बाल-स्वभाव की मनोवैज्ञानिक दशा का पता लगता है। पद पर आधारित विषय-बोध से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर

प्रश्न.
(i) कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ii) कविता का मुख्य भाव क्या है?
(iii) बाल-स्वभाव कैसा होता है?
उत्तर:
(i) कवि-तुलसीदास, कविता-‘बाल-लीला।’
(ii) स्वभाव के रोचक और हृदयस्पर्शी स्वरूपों का चित्रण करना।
(iii) बाल स्वभाव बड़ा ही चंचल, अस्थिर, स्वतन्त्र और हठी होता है।

2. पदकंजनि मंजु बनीं पनहीं धनुहीं सर पंकज-पानि लिएँ।
लरिका सँग खेलत डोलत हैं सरजू-तट चौहट हाट हिएँ।।
तुलसी अस बालक-सों नहिं नेहु कहा जप जोग समाधि किएँ।
नर वे खर सूकर स्वान समान कहो जगमें फल कौन जिएँ।

शब्दार्थ :
पदकंजनि-कमल के समान कोमल पैर। मंजु-सुन्दर। पनहीं-जूतियाँ। पानि-हाथ। लरिका-साथी। चौहट हाट-चारों ओर फैला हुआ बाजार। नेह-प्रेम। सूकर-सुअर। खर-गधा। श्वान-कुत्ता।

प्रसंग :
पूर्ववत्! इसमें कवि ने बालक श्रीराम के मनमोहक बाललीला का चित्रण किया है। कवि का कहना है कि-

व्याख्या :
बालक श्रीराम के पैर कमल के समान सुन्दर और कोमल हैं। उनकी जूतियाँ भी उसी तरह सुन्दर हैं और मन को मोहने वाली हैं। वे अपने साथियों के साथ सरयू नदी के किनारे स्थित बाजारों और चौराहों पर बाल-लीला करते हुए सबके मन को मोह रहे हैं। कवि का पुनः कहना है कि यदि ऐसे मनोहर बालक के प्रति जिसका प्रेमभाव नहीं है, उसे जप, योग और समाधि लेने से भी कुछ लाभ नहीं प्राप्त होगा। इस प्रकार के लोगों का जीवन तो गधों, सुअरों और कुत्ते के समान ही निरर्थक है। बतलाइए, इस संसार में उनके जीवन का क्या अर्थ है। उनका जीवन किसी प्रकार भी सार्थक नहीं है।

विशेष :

  1. बालक श्रीराम और भाइयों-मित्रों की स्वच्छन्दता का उल्लेख है।
  2. सवैया छन्द है।
  3. आध्यात्मिक स्वरूपों का उल्लेख यथार्थ रूप में है।
  4. ब्रजभाषा की शब्दावली है।

MP Board Solutions

पद पर आधारित सौन्दर्य-बोध सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न.
(i) प्रस्तुत पद के भाव-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
(ii) प्रस्तुत पद का काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
(iii) किसका जीवन गधों, सुअरों और कुत्तों के समान है?
उत्तर:
(i) प्रस्तुत पद में बालक श्रीराम की बाल-लीला का चित्र खींचा है। यह चित्र स्वाभाविक होने के साथ भाववर्द्धक है। बालक श्रीराम की बाल-लीला को सरल और सहज रूप में प्रस्तुत कर उसे अधिक मनोरम बनाने का प्रयास सराहनीय है।
(ii) प्रस्तुत पद में चित्रित बालक श्रीराम के बाल स्वरूप को ब्रज भाषा की प्रचलित शब्दावली, रूपक, उपमा और अनुप्रास अलंकार से अलंकृत करने का सफल प्रयास किया गया है। सवैया छन्द और गीतात्मक शैली के कारण इस पद का आकर्षण और बढ़ गया है।
(iii) ऐसे व्यक्तियों का जीवन गधों, सुअरों और कुत्तों के समान है, जिनके मन को श्रीराम और उनके भाइयों की यह बालक्रीड़ा मोहित न कर पा रही हो। पद पर आधारित विषय-वस्तु से सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न.
(i) कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ii) प्रस्तुत पद का मुख्य भाव बताइए।
(iii) जप, योग और समाधि को निरर्थक क्यों कहा गया है?
उत्तर:
(i) कवि-तुलसीदास, कविता-‘बाल-लीला’।
(ii) प्रस्तुत पद का मुख्य भाव बालक श्रीराम के पैरों की सुन्दरता को आकर्षक रूप में प्रस्तुत करके उनके प्रति अपनी एकमात्र भक्ति-भावना प्रकट करना है।
(iii) जप, योग और समाधि को निरर्थक कहा गया है। ऐसा इसलिए कि बालक श्रीराम का बाल-सौन्दर्य और बाल-लीला के प्रति एकमात्र प्रेमभाव के सामने जप, योग और समाधि का कुछ भी महत्त्व नहीं है।

MP Board Class 11th Hindi Solutions

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति

कार्य, ऊर्जा और शक्ति अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 6.1.
किसी वस्तु पर किसी बल द्वारा किए गए कार्य का चिह्न समझना महत्वपूर्ण है। सावधानीपूर्वक बताइए कि निम्नलिखित राशियाँ धनात्मक हैं या ऋणात्मक:

  1. किसी व्यक्ति द्वारा किसी कुएँ में से रस्सी से बँधी बाल्टी को रस्सी द्वारा बाहर निकालने में किया गया कार्य।
  2. उपर्युक्त स्थिति में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य।
  3. किसी आनत तल पर फिसलती हुई किसी वस्तु पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य।
  4. किसी खुरदरे क्षैतिज तल पर एकसमान वेग से गतिमान किसी वस्तु पर लगाए गए बल द्वारा किया गया कार्य।
  5. किसी दोलायमान लोलक को विरामावस्था में लाने के लिए वायु के प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य।

उत्तर:

  1. चूँकि रस्सी का विस्थापन तथा मनुष्य द्वारा लगाया गया बल दोनों ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर दिष्ट हैं। अत: कार्य धनात्मक होगा।
  2. चूँकि गुरुत्वीय बल व बाल्टी का विस्थापन विपरीत दिशा में है। अतः गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।
  3. चूँकि घर्षण बल व बाल्टी का विस्थापन विपरीत दिशा में है। अतः घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।
  4. चूँकि वस्तु पर लगाया गया बल, वस्तु की गति की दिशा में है। अतः कृतं कार्य धनात्मक होगा।
  5. चूँकि वायु का प्रतिरोधी बल सदैव गति के विपरीत दिशा में है अतः कार्य ऋणात्मक होगा।

प्रश्न 6.2.
2 kg द्रव्यमान की कोई वस्तु जो आरंभ में विरामावस्था में है,7N के किसी क्षैतिज बल के प्रभाव से एक मेज पर गति करती है। मेज का गतिज – घर्षण गुणांक 0.1 है। निम्नलिखित का परिकलन कीजिए और अपने परिणामों की व्याख्या कीजिए।

  1. लगाए गए बल द्वारा 10s में किया गया कार्य।
  2. घर्षण द्वारा 10 s में किया गया कार्य।
  3. वस्तु पर कुल बल द्वारा 10 s में किया गया कार्य।
  4. वस्तु की गतिज ऊर्जा में 10s में परिवर्तन।

उत्तर:
दिया है: बल, F = 7 न्यूटन,
m = 2 किग्रा, µ = 0, µk = 0.1
चूँकि गति क्षैतिज मेज पर हो रही है।
अतः घर्षण बल, µkR = µkmg
= 0.1 x 2 x 10 = 2 न्यूटन
अतः पिण्ड पर गति की दिशा में नेट बल,
F1 = F – µkN
= 7 – 2 = 5 न्यूटन
सूत्र F1 = ma से,
त्वरण, a = \(\frac { F_{ 1 } }{ m } \) = \(\frac{5}{2}\)
= 2.5 मीटर/सेकण्डर
अतः 10 सेकण्ड में चली दूरी,
सूत्र S = ut + \(\frac{1}{2}\)at2 से,
S = 0 x 10 + \(\frac{1}{2}\) x 2.5 x 102
= 125 मीटर

1. आरोपित बल द्वारा 10 सेकण्ड में किया गया कार्य,
w1 = F.S cos 0°
= 7 x 125 = 875 जूल

2. घर्षण बल द्वारा 10 सेकण्ड में किया गया कार्य,
w2 = – (µkR).S
= – 2 x 25 = – 250 जूल
चूँकि विस्थापन घर्षण बल के विरुद्ध है। इसी कारण यह कार्य ऋणात्मक है।

3. सम्पूर्ण बल द्वारा कृत कार्य,
W = सम्पूर्ण बल x कुल विस्थापन
= 5 x 125 = 625 न्यूटन

4. कार्य ऊर्जा प्रमेय से,
गतिज ऊर्जा में परिवर्तन,
∆K = सम्पूर्ण बल द्वारा किया गया कार्य
= 625 न्यूटन
यहाँ गतिज ऊर्जा में कुल परिवर्तन बाह्य बल द्वारा किए गए कार्य से कम है। इसका कारण यह है कि बाह्य बल द्वारा किए गए कार्य का कुछ भाग घर्षण प्रभाव को समाप्त करने में कम होता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.3.
चित्र में कुछ एकविमीय स्थितिज ऊर्जा – फलनों के उदाहरण दिए गए हैं। कण की कुल ऊर्जा कोटि – अक्ष पर क्रॉस द्वारा निर्देशित की गई है। प्रत्येक स्थिति में, कोई ऐसे क्षेत्र बताइए, यदि कोई हैं तो जिनमें दी गई ऊर्जा के लिए, कण को नहीं पाया जा सकता। इसके अतिरिक्त, कण की कुल न्यूनतम ऊर्जा भी निर्देशित कीजिए। कुछ ऐसे भौतिक सन्दर्भो के विषय में सोचिए जिनके लिए ये स्थितिज ऊर्जा आकृतियाँ प्रासंगिक हों।
उत्तर:
∴ KE. + P.E. = E (constant)
∴ K.E. = E – P.E.
1. इस ग्राफ में x < a के लिए स्थितिज ऊर्जा कुल ऊर्जा से अधिक है; अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक हो जाएगी जो कि असम्भव है।
अतः कण x > a क्षेत्र में नहीं पाया जा सकता।

2. इस ग्राफ से स्पष्ट है कि प्रत्येक स्थान पर P.E. > E
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी जो कि असम्भव है; अतः कण को कहीं भी नहीं पाया जा सकता।

3. 0 E अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी; अतः कण को इन क्षेत्रों में नहीं पाया जा सकता।

4. \(\frac{-b}{2}\) <  x  <  \(\frac{-a}{2}\) <  x  < \(\frac{b}{2}\)
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी इसलिए कण इन क्षेत्रों में नहीं पाया जा सकता।

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 1

प्रश्न 6.4.
रेखीय सरल आवर्त गति कर रहे किसी कण का स्थितिज ऊर्जा फलन V(x) = kx2/2 है, जहाँ k दोलक का बल नियतांक है। k = 0.5 Nm-1 के लिए V(x) व x के मध्य ग्राफ चित्र में दिखाया गया है। यह दिखाइए कि इस विभव के अंतर्गत गतिमान कुल 1 J ऊर्जा वाले कण को अवश्य ही ‘वापिस आना’ चाहिए जब यह x = + 2 m पर पहुँचता है।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 5
उत्तर:
हम जानते हैं कि,
E = KE + PE
∴ E = \(\frac{1}{2}\) mv 2 + \(\frac{1}{2}\)kx 2
[∴ PE = v(x) = \(\frac { kx^{ 2 } }{ 2 } \)
कण उस स्थिति x =xn से लौटना शुरू करेगा जबकि कण की गतिज ऊर्जा शून्य होगी।
इस प्रकार \(\frac{1}{2}\) mv 2 = 0 तथा x = xm पर,
E = \(\frac{1}{2}\) kx2m
दिया है:
E = 1 जूल व k = 0.5 न्यूटन/मीटर
∴ 1 = \(\frac{1}{2}\) × 0.5 × x2m
था \(x^{ 2 }m\) = \(\frac{2}{0.5}\)
= 4
∴ xm = ± 2 मीटर
इस प्रकार कण x = ± 2 मीटर पर पहुँचने पर ही वहाँ से वापस लौटना प्रारम्भ करता है।

प्रश्न 6.5.
निम्नलिखित का उत्तर दीजिए:
1. किसी रॉकेट का बाह्य आवरण उड़ान के दौरान घर्षण के कारण जल जाता है। जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा किसके व्यय पर प्राप्त की गई – रॉकेट या वातावरण?

2. धूमकेतु सूर्य के चारों ओर बहुत ही दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में घूमते हैं। साधारणतया धूमकेतु पर सूर्य का गुरुत्वीय बल धूमकेतु के लंबवत् नहीं होता है। फिर भी धूमकेतु की संपूर्ण कक्षा में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है। क्यों?

3. पृथ्वी के चारों ओर बहुत ही क्षीण वायुमण्डल में घूमते हुए किसी कृत्रिम उपग्रह की ऊर्जा धीरे – धीरे वायुमण्डलीय प्रतिरोध (चाहे यह कितना ही कम क्यों न हो) के विरुद्ध क्षय के कारण कम होती जाती है फिर भी जैसे – जैसे कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के समीप आता है तो उसकी चाल में लगातार वृद्धि क्यों होती है?

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 6

4. चित्र

  1. में एक व्यक्ति अपने हाथों में 15 kg का कोई द्रव्यमान लेकर 2 m चलता है।
  2. चित्र में वह उतनी ही दूरी अपने पीछे रस्सी को खींचते हुए चलता है। रस्सी घिरनी पर चढ़ी हुई है और उसके दूसरे सिरे पर 15 kg का द्रव्यमान लटका हुआ है। परिकलन कीजिए कि किस स्थिति में किया गया कार्य अधिक है?

उत्तर:
1. बाहरी आवरण के जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा रॉकेट की यान्त्रिक ऊर्जा से प्राप्त होती है।

2. धूमकेतु पर सूर्य द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल एक संरक्षी बल है। संरक्षी बल के द्वारा बन्द पथ में गति करने वाले पिण्ड पर किया गया नेट कार्य शून्य होता है। इस प्रकार धूमकेतु की सम्पूर्ण कक्षा में सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा।

3. जैसे – 2 उपग्रह पृथ्वी के समीप आता है वैसे – 2 उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कम होती है। ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती रहती है। अतः उसकी चाल बढ़ती जाती है। कुल ऊर्जा का कुछ भाग घर्षण बल के विरुद्ध कार्य करने में खर्च हो जाता है।

4. चित्र (i) में स्थिति में, व्यक्ति द्रव्यमान को उठाए रखने के लिए भार के विरुद्ध ऊपर की ओर बल लगाता है जबकि उसका विस्थापन क्षैतिज दिशा में है (i.e., 0 = 90) अतः मनुष्य द्वारा किया गया कार्य, W = Fs cos 90° = 0
चित्र (ii) स्थिति में, घिरनी मनुष्य द्वारा लगाए गए क्षैतिज बल की दिशा को ऊर्ध्वाधर कर देती है व द्रव्यमान का विस्थापन भी ऊपर की ओर है (i.e., θ = 0°)
अतः मनुष्य द्वारा किया गया कार्य,
W = mgh cos 0°
= 15 x 20 x 2 = 300 जूल।

प्रश्न 6.6.
सही विकल्प को रेखांकित कीजिए:

  1. जब कोई संरक्षी बल किसी वस्तु पर धनात्मक कार्य करता है तो वस्तु की स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है/घटती है/अपरिवर्ती रहती है।
  2. किसी वस्तु द्वारा घर्षण के विरुद्ध किए गए कार्य का परिणाम हमेशा इसकी गतिज/स्थितिज ऊर्जा में क्षय होता है।
  3. किसी बहुकण निकाय के कुल संवेग-परिवर्तन की दर निकाय के बाह्य बल/आंतरिक बलों के जोड़ के अनुक्रमानुपाती होती है।
  4. किन्हीं दो पिंडों के अप्रत्यास्थ संघट्ट में वे राशियाँ, जो संघट्ट के बाद नहीं बदलती हैं; निकाय की कुल गतिज ऊर्जा/कुल रेखीय संवेग/कुल ऊर्जा हैं।

उत्तर:

  1. घटती है, चूँकि संरक्षी बल के विरुद्ध किया गया कार्य ही स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है।
  2. गतिज ऊर्जा, चूँकि घर्षण के विरुद्ध कार्य तभी होता है जबकि गति हो रही है।
  3. बाह्य बल, चूँकि बहुकण निकाय में, आन्तरिक बलों का परिणामी शून्य होता है एवम् आन्तरिक बल संवेग परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं होते हैं।
  4. कुल रेखीय संवेग तथा कुल ऊर्जा भी जबकि दो पिंडों का निकास वियुक्त है।

प्रश्न 6.7.
बतलाइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य। अपने उत्तर के लिए कारण भी दीजिए।

  1. किन्हीं दो पिंडों के प्रत्यास्थ संघट्ट में, प्रत्येक पिंड का संवेग व ऊर्जा संरक्षित रहती है।
  2. किसी पिंड पर चाहे कोई भी आंतरिक व बाह्य बल क्यों न लग रहा हो, निकाय की कुल ऊर्जा सर्वदा संरक्षित रहती है।
  3. प्रकृति में प्रत्येक बल के लिए किसी बंद लूप में, किसी पिंड की गति में किया गया कार्य शून्य होता है।
  4. किसी अप्रत्यास्थ संघट्ट में, किसी निकाय की अंतिम गतिज ऊर्जा, आरंभिक गतिज ऊर्जा से हमेशा कम होती है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.8.
निम्नलिखित का उत्तर ध्यानपूर्वक, कारण सहित दीजिए:

  1. किन्हीं दो बिलियर्ड-गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट में, क्या गेंदों के संघट्ट की अल्पावधि में (जब वे संपर्क में होती है) कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है?
  2. दो गेंदों के किसी प्रत्यास्थ संघट्ट की लघु अवधि में क्या कुल रेखीय संवेग संरक्षित रहता है?
  3. किसी अप्रत्यास्थ संघट्ट के लिए प्रश्न (a) व (b) के लिए आपके उत्तर क्या हैं?
  4. यदि दो बिलियर्ड – गेंदों की स्थितिज ऊर्जा केवल उनके केंद्रों के मध्य, पृथक्करण-दूरी पर निर्भर करती है तो संघट्ट प्रत्यास्थ होगा या अप्रत्यास्थ? (ध्यान दीजिए कि यहाँ हम संघट्ट के दौरान बल के संगत स्थितिज ऊर्जा की बात कर रहे हैं, ना कि गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा की)

उत्तर:

  1. नहीं, चूँकि संघट्ट काल के दौरान गेंद सम्पीडित हो जाती है। अतः गतिज ऊर्जा, गेंदों की स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
  2. हाँ, संवेग संरक्षित रहता है।
  3. हाँ, दोनों उत्तर उपर्युक्त ही रहेंगे।
  4. चूँकि स्थितिज ऊर्जा केन्द्रों के मध्य दूरी पर निर्भर करती है इसका तात्पर्य यह है कि संघट्ट काल में पिंडों के मध्य लगने वाला संरक्षी बल है। अतः ऊर्जा संरक्षित रहेगी। अतः प्रत्यास्थ संघट्ट होगा।

प्रश्न 6.9.
कोई पिंड जो विरामावस्था में है, अचर त्वरण से एकविमीय गति करता है। इसको किसी । समय पर दी गई शक्ति अनुक्रमानुपाती है।

  1. t1/2
  2. t
  3. t3/2
  4.  t2

उत्तर:
a = नियत, µ =0
∴ बल = ma, अचर होगा तथा = at होगा।
∴ शक्ति P = Fv = ma. at = ma2
∴ P ∝ t
अतः विकल्प (ii) सत्य है।

प्रश्न 6.10.
एक पिंड अचर शक्ति के स्त्रोत के प्रभाव में एक ही दिशा में गतिमान है। इसका t समय में विस्थापन, अनुक्रमानुपाती है।

  1. t1/2
  2. t
  3. t3/2
  4. t2

उत्तर:
शक्ति P = Fv अचर है।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 7
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 7 -1

प्रश्न 6.11.
किसी पिंड पर नियत बल लगाकर उसे किसी निर्देशांक प्रणाली के अनुसार z – अक्ष के अनुदिश गति करने के लिए बाध्य किया गया है जो इस प्रकार है –
F = (\(\hat { -i } \) + 2\(\hat { j } \)+ 3\(\hat { k } \)) न्यूटन
चूँकि विस्थापन z – अक्ष के अनुदिश है। अतः \(\vec { s } \) = 4k मीटर
∴ बल द्वारा किया गया कार्य, W = \(\overline { F } .\hat { S } \quad \)
= (- \(\hat { -i } \) + 2 \(\hat { j } \) + 3 \(\hat { k } \) . (4\(\hat { k } \))
= 12 जूल [∴\(\hat { j } \) . \(\hat { k } \) = 0 व \(\hat { k } \) \(\hat { k } \) =1 इत्यादि]

MP Board Solutions

प्रश्न 6.12.
किसी अंतरिक्ष किरण प्रयोग में एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन का संसूचन होता है जिसमें पहले कण की गतिज ऊर्जा 10 kev है और दूसरे कण की गतिज ऊर्जा 100 kev है। इनमें कौन – सा तीव्रगामी है, इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन? इनकी चालों का अनुपात ज्ञात कीजिए। (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.11 x 10-31 kg, प्रोटॉन का द्रव्यमान = 1.67 x 10-27 1eV = 1.60 x 10-19) जूल
उत्तर:
दिया है: इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान me = 9.11 x 10-31 किग्रा,
प्रोटॉन का द्रव्यमान mp = 1.67 x 10-27 किग्रा,
1eV = 1.6 x 10-19 जूल
प्रोटॉन की गतिज ऊर्जा,
Kp = 100 KeV = 105 eV
= 10 5 x 1.6 x 10-19 J
इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा
Ke = 10 keV = 104eV
= 104 x 1.6 x 10-19 J
माना कि प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन की चाल क्रमशः
vp व ve हैं।
सूत्र गतिज ऊर्जा, K = \(\frac { 1 }{ 2 }\) mv2 से,
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img t

प्रश्न 6.13.
2 mm त्रिज्या की वर्षा की कोई बूंद 500 m की ऊँचाई से पृथ्वी पर गिरती है। यह अपनी आरंभिक ऊँचाई के आधे हिस्से तक (वायु के श्यान प्रतिरोध के कारण) घटते त्वरण के साथ गिरती है और अपनी अधिकतम (सीमान्त) चाल प्राप्त कर लेती है, और उसके बाद एकसमान चाल से गति करती है। वर्षा की बूंद पर उसकी यात्रा के पहले व दूसरे अर्ध भागों में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा? यदि बूंद की चाल पृथ्वी तक पहुँचने पर 10 ms-1 हो तो संपूर्ण यात्रा में प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
दिया है: वर्षा की बूंद की त्रिज्या, r = 2 मिमी
= 2 x 10-3 मीटर,
प्रारम्भिक ऊँचाईं, h = 500 मीटर
प्रारम्भिक चाल, u =0 पृथ्वी तल पर बूंद की चाल, v = 10 मीटर/सेकण्ड
त्वरण, 8 = 9.8 मीटर/सेकण्ड2
जल का घनत्व ρ = 103 किग्रा प्रति मीटर 3
बूंद का द्रव्यमान, m = (\(\frac{4}{3}\) πr 3) x (ρ)
= \(\frac{4}{3}\) x \(\frac{22}{7}\) x (2 x 10 -3)3 x 10 3
= 3.35 x 10 -5 किग्रा
बूंद पर गुरुत्वीय बल,
F1 = mg = 3.35 x 10-5 x 9.8
= 3.28 x 10-4 न्यूटन
यात्रा के दोनों अर्धभाग समान हैं।
∴ h1 = h2 = \(\frac{h}{2}\)
= 250 मीटर
यात्रा के इन भागों में गुरुत्वीय बल द्वारा कृत कार्य,
W1 = W2 = mgh1
= (3.28×10-4) x 250 = 0.082 जूल
वर्षा की बूँद की गतिज ऊर्जा में कुल वृद्धि,
∆K = K2 – K1
= 1 x 3.35 x 10-5 x (10)2 – 0
= 0.001 जूल
गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कुल कार्य,
Wg = W1 + W2
= 0.082 + 0.082 = 0.164 जूल

MP Board Solutions

प्रश्न 6.14.
किसी गैस – पात्र में कोई अणु 200 ms-1 की चाल से अभिलंब के साथ 30° का कोण बनाता हुआ क्षैतिज दीवार से टकराकर पुन: उसी चाल से वापस लौट जाता है। क्या इस संघट्ट में संवेग संरक्षित है? यह संघट्ट प्रत्यास्थ है या अप्रत्यास्थ?
उत्तर:
दिया है: θ = 30°, u = 200 मीटर प्रति सेकण्ड दीवार से संघट्ट के बाद चाल,
v = u = 200 मीटर प्रति सेकण्ड
चूँकि प्रत्येक संघट्ट में भी संवेग संरक्षित रहता है। अतः इस संघट्ट में भी संवेग संरक्षित रहता है।
माना अणु का द्रव्यमान m है।
अतः दीवार से टकराते समय निकाय की गतिज ऊर्जा,
K 1 = \(\frac{1}{2}\) mu2 =\(\frac{1}{2}\) m (200) 2 जूल
एवम् संघट्ट के बाद गतिज ऊर्जा,
K2 = \(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) m (200)2 जूल
∴ K1 = K2
अतः यह एक प्रत्यास्थ संघट्ट है।

प्रश्न 6.15.
किसी भवन के भूतल पर लगा कोई पंप 30 m3 आयतन की पानी की टंकी को 15 मिनट में भर देता है। यदि टंकी पृथ्वी तल से 40 m ऊपर हो और पंप की दक्षता 30% हो तो पंप द्वारा कितनी विद्युत शक्ति का उपयोग किया गया?
उत्तर:
दिया है: टंकी की ऊँचाई, h = 40 मीटर
टंकी का आयतन, V = 30 मीटर3
लगा समय, t = 15 मिनट = 15 x 60 सेकण्ड, पम्प की दक्षता, n=30%
जल का घनत्व, ρ = 103 किग्रा प्रति मीटर 3
उठाए गए जल का द्रव्यमान,
m = V x p = 30 x 103
= 3 x 104 किग्रा
पम्प द्वारा टंकी भरने में खर्च की गई शक्ति,
P0 = \(\frac{ω}{t}\) = \(\frac{mgh}{t}\)
= \(\frac { 3\times 10^{ 4 }\times 9.8\times 40 }{ 1.5\times 60 } \)
= 13066 वॉट
माना पम्प द्वारा उपयोग की गई शक्ति P1 है।
∴η = \(\frac { P_{ 0 } }{ P_{ 1 } } \) x 100
या
P1 = \(\frac { P_{ 0 } }{ { η } } \)
= \(\frac{13066}{30}\) x 100
= 43553 वॉट
= 43.55 किलो वॉट।

प्रश्न 6.16.
दो समरूपी बॉल बियरिंग एक – दूसरे के सम्पर्क में हैं और किसी घर्षणरहित मेज पर विरामावस्था में हैं। इनके साथ समान द्रव्यमान का कोई दूसरा बाल बियरिंग, जो आरंभ में V चाल से गतिमान है, सम्मुख संघट्ट करता है। यदि संघट्ट प्रत्यास्थ है तो संघट्ट के पश्चात् निम्नलिखित (चित्र) में कौन-सा परिणाम संभव है?
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 9
उत्तर:
माना प्रत्येक बॉल बियरिंग का द्रव्यमान m है। अतः संघट्ट से पूर्व निकाय की गतिज ऊर्जा,
K1 = \(\frac{1}{2}\) mv2 + 0 + 0 = \(\frac{1}{2}\) mv2
प्रथम स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की गतिज ऊर्जा,
K2 = 0 + \(\frac{1}{2}\) (m + m) (\(\frac{V}{2}\)2)
= \(\frac{1}{2}\) x 2m x \(\frac { V^{ 2 } }{ 4 } \)
= \(\frac{1}{2}\)mv2
अतः k 1 > K2
द्वितीय स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की कुल ऊर्जा,
K2 = 0 + 0 + \(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\) mv2
अतः K1 = K2
तृतीय स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की गतिज ऊर्जा,
K2 = \(\frac{1}{2}\) (m + m + m) (\(\frac{V}{3}\)2)
= \(\frac{1}{2}\) x 3m x \(\frac { v^{ 2 } }{ 9 } \)
= \(\frac{1}{6}\) mv2
अतः K1 & gt; K2
प्रश्नानुसार संघट्ट प्रत्यास्थ है। अतः निकाय की गतिज ऊर्जा संरक्षित रहेगी। चूँकि केवल द्वितीय स्थिति में ही गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है अर्थात् केवल यही परिणाम सम्भव होगा।

प्रश्न 6.17.
किसी लोलक के गोलकA को, जो ऊर्ध्वाधर से 30° का कोण बनाता है, छोड़े जाने पर मेज पर, विरामावस्था में रखे दूसरे गोलक B से टकराता है जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है। ज्ञात कीजिए कि संघट्ट के पश्चात् गोलक A कितना ऊँचा उठता है? गोलकों के आकारों की उपेक्षा कीजिए और मान लीजिए कि संघट्ट प्रत्यास्थ है।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 10
उत्तर:
दोनों गोलक समरूप हैं तथा संघट्ट प्रत्यास्थ है; अतः संघट्ट के दौरान लटका हुआ गोलक अपना सम्पूर्ण संवेग नीचे रखे गोलक को दे देता है और जरा भी ऊपर नहीं उठता।

प्रश्न 6.18.
किसी लोलक के गोलक को क्षैतिज अवस्था से छोड़ा गया है। यदि लोलक की लंबाई 1.5 m है तो निम्नतम बिंदु पर, आने पर गोलक की चाल क्या होगी? यह दिया गया है कि इसकी आरंभिक ऊर्जा का 5% अंश वायु प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय हो जाता है।
उत्तर:
निम्नतम बिन्दु P पर, लोलक में केवल स्थितिज ऊर्जा है। बिन्दु B पर, लोलक में केवल गतिज ऊर्जा है। इका अर्थ है कि जब लोलक P से Q पर पहुँचता है, तब स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
अतः बिन्दु Q पर KE = PEV
लेकिन 5% स्थितिज ऊर्जा, वायु प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय हो जाती है।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 11
∴ Q पर गतिज ऊर्जा
= P पर स्थितिज ऊर्जा का 95%
माना लोलक का द्रव्यमान = m
बिन्दु Q पर लोलक की चाल = v
तथा बिन्दु P की Q के सापेक्ष ऊँचाई = h =1.5 मीटर
∴ समी० (1) से,
\(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{95}{100}\) x mgh
अथवा
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 12
= 5.29 मीटर/सेकण्ड
v = 5.3 मीटर।

प्रश्न 6.19.
300 kg द्रव्यमान की कोई ट्राली, 25 kg रेत का बोरा लिए हुए किसी घर्षणरहित पथ पर 27 km h-1 की एकसमान चाल से गतिमान है। कुछ समय पश्चात् बोरे में किसी छिद्र से रेत 0.05 kgs-1 की दर से निकलकर ट्राली के फर्श पर रिसने लगती है। रेत का बोरा खाली होने के पश्चात् ट्रॉली की चाल क्या होगी?
उत्तर:
चूँकि वेग एक समान है व ट्रॉली व रेत का बोरा एक ही निकाय के अंग हैं जिस पर कोई बाह्य बल नहीं लगा है अतः निकाय का रेखीय संवेग नियत रहेगा भले ही निकाय में किसी भी तरह का आन्तरिक परिवर्तन क्यों न हो जाए। इस प्रकार ट्रॉली की चाल 27 किमी प्रति घण्टा ही बनी रहेगी।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.20.
0.5 kg द्रव्यमान का एक कण v = ax2 वेग से सरल रेखीय गति करता है जहाँ a = 5m-1/2s-1 है। x = 0 से x = 2m तक इसके विस्थापन में कुल बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
दिया है: m = 0.5 किग्रा
v = ax3/2
a = 5m-1/2 प्रति सेकण्ड
माना वस्तु पर F बल से d त्वरण उत्पन्न होता है।
∴ F = ma’ = \(\frac{mdv}{dt}\)
∴ माना वस्तु को dx दूरी विस्थापित करने पर किया गया कार्य dw है।
∴ dw = F.dx = m\(\frac{dv}{dt}\).dx
= m.dv.\(\frac{dx}{dt}\) = mvdv
माना वस्तु को x =0 से x = 2 मीटर तक चलाने में किया गया कुल कार्य w है।
∴ समी० (1) से,
W = \(\int { dw } \) = \(\int { mvdv } \)
= \(\frac { mv^{ 2 } }{ 2 } \) = \(\frac { m(ax^{ 3/2 })^{ 2 } }{ 2 } \)
= \(\frac{1}{2}\) ma2x3
= \(\frac{1}{2}\) x 0.5 x 52 x 23
= 50 जूल।

प्रश्न 6.21.
किसी पवनचक्की के ब्लेड, क्षेत्रफल A के वृत्त जितना क्षेत्रफल प्रसर्प करते हैं। (a) यदि हवा वेग से वृत्त के लंबवत् दिशा में बहती है तो t समय में इससे गुजरने वाली वायु का द्रव्यमान क्या होगा? (b) वायु की गतिज ऊर्जा क्या होगी? (c) मान लीजिए कि पवनचक्की हवा की 25% ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित कर देती है यदि A = 30 m2, और v = 36 kmh-1 और वायु का घनत्व 1.2 kgm-3 है तो उत्पन्न विद्युत शक्ति का परिकलन कीजिए।
उत्तर:
दिया है: वायु का घनत्व, ρ = 1.2 किग्रा प्रति मीटर3, वायु का वेग, v = 36 किमी/घण्टा
= 36 x \(\frac{5}{18}\) = 10 मीटर/सेकण्ड
= 30 मीटर2, समय, t = ?

(a) समय में वृत्त से प्रवाहित वायु का आयतन,
V = A x vt
वृत्त से प्रवाहित वायु का द्रव्यमान,
m = vρ = Avtρ

(b) इस वायु की गतिज ऊर्जा,
K = \(\frac{1}{2}\)mv2
= \(\frac{1}{2}\) (Avtρ)v3
= \(\frac{1}{2}\) ρAv2t

(c) इस समय में पवन चक्की द्वारा उत्पन्न विद्युत ऊर्जा, E = वायु की गतिज ऊर्जा का 25%
= (\(\frac{1}{2}\) Aρv3t) x \(\frac{25}{100}\) = \(\frac{1}{8}\) Aρv3t
अतः इस ऊर्जा द्वारा उत्पन्न विद्युत शक्ति,
P = \(\frac{E}{t}\)
= \(\frac{1}{8}\) Aρv3
= \(\frac{1}{8}\) x 30 x 1.2 x 103
= 4.5 किलोवॉट

MP Board Solutions

प्रश्न 6.22.
कोई व्यक्ति वजन कम करने के लिए 10 kg द्रव्यमान को 0.5 m की ऊँचाई तक 1000 बार उठाता है। मान लीजिए कि प्रत्येक बार द्रव्यमान को नीचे लाने में खोई हुई ऊर्जा क्षयित हो जाती है। (a) वह गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कितना कार्य करता है? (b) यदि वसा 3.8x 107 J ऊर्जा प्रति किलोग्राम आपूर्ति करता हो जो कि 20% दक्षता की दर से यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है तो वह कितनी क्सा खर्च कर डालेगा?
उत्तर:
दिया है: m=10 किग्रा, h = 0.5 मीटर
द्रव्यमान को उठाया गया, n = 1000 बार

(a) 10 किग्रा के द्रव्यमान को 1000 बार उठाने में किया गया कार्य,
W = n x mgh = 1000 x 10 x 9.8 x 0.5
= 49000 = 49 किलो जूल

(b) 1 किग्रा वसा द्वारा प्रदत्त यान्त्रिक ऊर्जा
= 3.8 x 107 जूल का 20%
= 3.8 x 107 x \(\frac{20}{100}\)
= \(\frac{3.8}{5}\) x 107 जूल
इसलिए (\(\frac{3.8}{5}\) x 107) जूल ऊर्जा मिलती है = 1 किग्रा वसा से,
∴ 1 जूल ऊर्जा मिलती है = \(\frac { 5 }{ 3.8\times 10^{ 7 } } [latex] x 49000 किग्रा वसा से,
= 6.45 x 10 -3 किग्रा वसा से

प्रश्न 6.23.
कोई परिवार 8 kW विद्युत – शक्ति का उपभोग करता है। (a) किसी क्षैतिज सतह पर सीधे आपतित होने वाली सौर ऊर्जा की औसत दर 200 Wm-2 है। यदि इस ऊर्जा का 20% भाग लाभदायक विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित किया जा सकता है तो 8 KW की विद्युत आपूर्ति के लिए कितने क्षेत्रफल की आवश्यकता होगी? (b) इस क्षेत्रफल की तुलना किसी विशिष्ट भवन की छत के क्षेत्रफल से कीजिए।
उत्तर:
दिया है: उपभोग की गई विद्युत शक्ति = 8 KW
(a) सौर ऊर्जा की औसत दर = 200 वॉट/मीटर2
उपयोगी विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरण दर = 20%
8 किलो वॉट के लिए आवश्यक क्षे० = ?
प्रति वर्ग मीटर क्षेत्रफल से प्राप्त उपयोगी विद्युत शक्ति
= 200 वॉट का 20%
= 200 x 20 = 40 वॉट
इसलिए 40 वॉट उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है = 1 मी क्षेत्रफल से।
∴ 1 वॉट उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है
= [latex]\frac{1}{40}\)
= क्षेत्रफल से
∴ 8 kw उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है
= \(\frac{1}{40}\) x 8 x 1000 क्षेत्रफल से।

(b) इस क्षेत्रफल की तुलना जटिल घर की छत से करने के लिए माना छत की भुजा a है।
∴ छत का क्षेत्रफल = a x a = a2
∴ a2 = 200
a = \(\sqrt { 200 } \) = 14.14 मीटर
=14 मीटर
अर्थात् आवश्यक क्षेत्रफल 14 मीटर x 14 मीटर आकार के भवन की छत के क्षेत्रफल के समतुल्य है।

कार्य, ऊर्जा और शक्ति अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 6.24.
0.012 kg द्रव्यमान की कोई गोली 70 ms-1 की क्षैतिज चाल से चलते हुए 0.4 kg द्रव्यमान के लकड़ी के गुटके से टकराकर गुटके के सापेक्ष तुरंत ही विरामावस्था में आ जाती है। गुटके को छत से पतली तारों द्वारा लटकाया गया है। परिकलन कीजिए कि गुटका किस ऊँचाई तक ऊपर उठता है? गुटके में पैदा हुई ऊष्मा की मात्रा का भी अनुमान लगाइए।
उत्तर:
दिया है:
गोली का द्रव्यमान, m = 0.012 किग्रा,
गोली की प्रा० चाल, u =70 मीटर/सेकण्ड
गोली की अन्तिम चाल v = 0
लकड़ी के गुटके का द्रव्यमान, m = 0.4 किग्रा
लकड़ी के गुटके की प्रा० चाल, u1 = 0
माना कि संघट्ट के बाद गोली तथा गुटके की अन्तिम चाल । मीटर/सेकण्ड है।
संवेग संरक्षण के नियमानुसार,
संघट्ट से पूर्व गोली तथा गुटके का संवेग = संघट्ट के पश्चात् दोनों का अन्तिम संवेग।
∴mu + mu1 = (m + m) v
∴ 0.012 x 70 + 0.4 x 0
v = \(\frac{0.012 x 70}{0.412}\)
= 2.04 मीटर/सेकण्ड
माना गुटका संघट्ट के बाद h ऊँचाई तक ऊपर उठता है।
∴ संघट्ट से पूर्व गुटके व गोली की KE में कमी = संघट्ट के बाद गुटके व गोली की P.E. में वृद्धि
∴ \(\frac{1}{2}\) (m + m) v2 = (m + m) gh
∴ h = \(\frac{0.012 × 70}{0.412}\)
= \(\frac{2.04 x 2.04}{2 x 9.8}\)
= 0.212 मीटर = 21.2 सेमी
गोली धंसने से उत्पन्न हुई ऊष्मा
= \(\frac{1}{2}\) mu2 – \(\frac{1}{2}\)(m + m)v2
= \(\frac{1}{2}\) x 0.012 x 70 2 – \(\frac{1}{2}\) x 0.412 x 2.042

MP Board Solutions

प्रश्न 6.25.
दो घर्षण रहित आनत पथ, जिनमें से एक की ढाल अधिक है और दूसरे की ढाल कम है, बिंदु पर मिलते हैं। बिंदु A से प्रत्येक पथ पर एक – एक पत्थर को विरामावस्था से नीचे सरकाया जाता है (चित्र)। क्या ये पत्थर एक ही समय पर नीचे पहुँचेंगे? क्या वे वहाँ एक ही चाल से पहुँचेंगे? व्याख्या कीजिए। यदि 01 = 302, 02 = 60° और h=10m दिया है, तो दोनों पत्थरों की चाल एवं उनके द्वारा नीचे पहुंचने में लिए गए समय क्या हैं?
उत्तर:
AB तथा AC क्रमश: θ1, व θ2, पर झुके दो समतल तल हैं। दोनों पत्थर एक ही समय नीचे नहीं आएंगे।
व्याख्या: माना इन तलों पर इन पत्थरों के भार क्रमशः m1g
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 13
व m2g हैं। m1g तथा m2g के वियोजित घटक चित्र के अनुसार होंगे।
माना पहले व दूसरे पत्थर में उत्पन्न त्वरण क्रमशः a1, व a2 हैं। तब
या
ma1 = m1g sin θ1
a1 = g sin θ1
इसी प्रकार, a2 = g sin θ2
∴ a2 > a1 i.e., a1 = sin 30° = \(\frac{g}{2}\)
तथा a2 = g sin 60° = \(\frac { g\sqrt { 3 } }{ 2 } \)
v = u + at से v = ar
या t = \(\frac{v}{a}\)
यहाँ u = 0, चूँकि प्रारम्भ में दोनों पत्थर विराम में हैं।
या
t ∝ \(\frac{1}{a}\)
t 1 ∝ \(\frac { 1 }{ a_{ 1 } } \) and t 2 ∝ \(\frac { 1 }{ a_{ 2 } } \)
या
\(\frac { t_{ 2 } }{ t_{ 1 } } \) = \(\frac { a_{ 2 } }{ a_{ 1 } } \)
चूँकि a2 > a1, या \(\frac { a_{ 2 } }{ a_{ 1 } } \)
समी० (i) व (ii) से,
\(\frac { t_{ 2 } }{ t_{ 1 } } \) < 1 या t2 < t1
अर्थात् दूसरा पत्थर कम समय लेगा व पहले पत्थर पर जल्दी नीचे पहुँचेगा।
(iii) हाँ, दानों पत्थर एक साथ नीचे पहुँचेंगे।
व्याख्या: बिन्दु A पर तल की ऊँचाई, h = 10 मीटर है। माना दोनों पत्थर, क्रमश: v1 व v 2वेग से नीचे पहुँचते हैं।
ऊर्जा संरक्षण के नियम से, चोटी पर स्थितिज ऊर्जा में क्षय = नीचे गतिज ऊर्जा में वृद्धि
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 14
या
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 15

प्रश्न 6.26.
किसी रुक्ष आनत तल पर रखा हुआ 1 kg द्रव्यमान का गुटका किसी 100 Nm-1 स्प्रिंग नियतांक वाले स्प्रिंग से दिए गए चित्र के अनुसार जुड़ा है। गुटके को स्प्रिंग की बिना खिंची स्थिति में, विरामावस्था से छोड़ा जाता है। गुटका विरामावस्था में आने से पहले आनत तल पर 10 cm नीचे खिसक जाता है। गटके और आनत तल के मध्य घर्षण गणांक ज्ञात कीजिए।मान लीजिए कि स्प्रिंग का द्रव्यमान उपेक्षणीय है और घिरनी घर्षणरहित है।
उत्तर:
दिया है: गुटके का द्रव्यमान, m = 1 किग्रा स्प्रिंग नियतांक,
K = 100 न्यूटन/मीटर,
8 = 10 मीटर/सेकण्ड2
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 16
माना गुटके को छोड़ने पर विस्थापन,
x = 10 सेमी = 0.1 मीटर झुकाव,
θ = 37°
∴ sin 37° = 0.6018 व cos 37° = 0.7996
माना नीचे की ओर x दूरी चलने में किया गया कार्य w है।
∴ W = (mg sin θ – µ mg cos θ) x
लेकिन स्प्रिंग में यह कार्य स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित रहेगा। ‘
∴ PE = \(\frac{1}{2}\) kx2
समी० (1) व (2) से,
\(\frac{1}{2}\) kx2 = mg (sin θ – µ cos θ) . x
∴µ = \(\frac{2mg sin θ – kx}{2mg cosθ}\)
= \(\frac{2 x 1 x 10 x 0.6018 – 100 x 0.1 }{2 x 1 x 10 x 0.7996 }\)
= 0.125

प्रश्न 6.27.
0.3 kg द्रव्यमान का कोई बोल्ट 7 ms-1 की एकसमान चाल से नीचे आरही किसी लिफ्ट की छत से गिरता है। यह लिफ्ट के फर्श से टकराता है (लिफ्ट की लंबाई =3 m) और वापस नहीं लौटता है। टक्कर द्वारा कितनी ऊष्मा उत्पन्न हुई? यदि लिफ्ट स्थिर होती तो क्या आपका उत्तर इससे भिन्न होता?
उत्तर:
दिया है:
बोल्ट का द्रव्यमान, m = – 0.3 किग्रा
लिफ्ट की लम्बाई, h = 3 मीटर
छत पर बोल्ट की स्थितिज ऊर्जा, V = mgh
= 0.3 x 9.8 x 3
= 8.82 जूल
चूँकि बोल्ट लिफ्ट के फर्श से टकराकर बिल्कुल भी ऊपर नहीं उठता है, इसका तात्पर्य है कि फर्श से टकराने पर बोल्ट की सम्पूर्ण स्थितिज ऊर्जा, ऊष्मा में बदल जाती है। अत: बोल्ट के फर्श से टकराने पर उत्पन्न ऊष्मा 8.82 जूल है।लिफ्ट के स्थिर होने पर, यह एक जड़त्वीय निर्देश तन्त्र होता है। चूँकि गुरुत्वीय त्वरण का मान सभी स्थानों पर एक समान होता अर्थात् हमारा उत्तर समान होगा।

प्रश्न 6.28.
200 kg द्रव्यमान की कोई ट्रॉली किसी घर्षणरहित पथ पर 36 km h-1 की एकसमान चाल से गतिमान है। 20 kg द्रव्यमान का कोई बच्चा ट्रॉली के एक सिरे से दूसरे सिरे तक (10 m दूर) ट्रॉली के सापेक्ष 4 ms-1 की चाल से ट्रॉली की गति की विपरीत दिशा में दौड़ता है और ट्रॉली से बाहर कूद जाता है। ट्रॉली की अंतिम चाल क्या है? बच्चे के दौड़ना आरंभ करने के समय से ट्रॉली ने कितनी दूरी तय की?
उत्तर:
दिया है: ट्रॉली का द्रव्यमान, m, = 200 किग्रा,
ट्रॉली की चाल u =36 किमी प्रति घण्टा
= 36 x \(\frac{5}{18}\) = 10 मी/से
बच्चे का द्रव्यमान m2 = 20 किग्रा
बच्चे की ट्रॉली के सापेक्ष चाल, V2 = 4 मीटर/सेकण्ड
माना ट्रॉली की अन्तिम चाल v1 है
∴ बच्चे के दौड़ना प्रारम्भ करने से पूर्व निकाय का संवेग,
Pi = (m1v1 + m2) u1
= (200 + 20) x 10 = 2200 किग्रा मीटर/सेकण्ड
बच्चे के ट्रॉली से कूदते समय निकाय का संवेग,
P1 = m1V1 + m2(v1 – v2)
= 200(v1 + 20 (v1 – 4)
= 200vvt – 80
परन्तु संवेग संरक्षण के नियमानुसार, Pi = Pf
2200 = 220vt – 80
या 220 v1 = 2280
∴v1 = \(\frac{2280}{220}\)
= 10.36 मीटर/सेकण्ड
ट्रॉली में 10 मीटर की दूरी चलने में बच्चे द्वारा लिया गया समय,
image 16 = \(\frac{10}{4}\) = 2.5 सेकण्ड
माना इस समय में ट्राली द्वारा चली गई दूरी x है।
∴ x = v x t = 10.36 x 2.5
= 25.9 मीटर।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.29.
चित्र में दिए गए स्थितिज ऊर्जा वक्रों में से कौन – सा वक्र सम्भवतः दो बिलियर्ड – गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट का वर्णन नहीं करेगा? यहाँ r गेंदों के केन्द्रों के मध्य की दूरी है और प्रत्येक गेंद का अर्धव्यास R है।
उत्तर:
जब गेंदें संघट्ट करेंगी और एक-दूसरे को संपीडित करेंगी तो उनके केन्द्रों के बीच की दूरीr, 2R से घटती जाएगी और इनकी स्थितिज ऊर्जा बढ़ती जाएगी। प्रत्यानयन काल में गेंदें अपने आकार को वापस पाने की क्रिया में एक-दूसरे से दूर हटेंगी तो उनकी स्थितिज ऊर्जा घटेगी और प्रारम्भिक आकार पूर्णतः प्राप्त कर लेने पर (r = 2R) स्थितिज ऊर्जा शून्य हो जाएगी।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 17
केवल ग्राफ (V) की ही उपर्युक्त व्याख्या हो सकती है; अतः अन्य ग्राफों में से कोई भी बिलियर्ड गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट को प्रदर्शित नहीं करता है।

प्रश्न 6.30.
विरामावस्था में किसी मुक्त न्यूट्रॉन के क्षय पर विचार कीजिए n → p + e प्रदर्शित कीजिए कि इस प्रकार के द्विपिंड क्षय से नियत ऊर्जा का कोई इलेक्ट्रॉन अवश्य उत्सर्जित होना चाहिए, और इसलिए यह किसी न्यूट्रॉन या किसी नाभिक के क्षय में प्रेक्षित सतत ऊर्जा वितरण का स्पष्टीकरण नहीं दे सकता (चित्र)।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img 18
[नोट : इस अभ्यास का हल उन कई तर्कों में से एक है जिन्हें डब्ल्यू पॉली द्वारा क्षय के क्षय उत्पादों में किसी तीसरे कण के अस्तित्व का पूर्वानुमान करने के लिए दिया गया था। यह कण न्यूट्रिनो के नाम से जाना जाता है। अब हम जानते हैं कि यह निजी प्रचक्रण 1/2 (जैसे e, p तथा n) का कोई कण है। लेकिन यह उदासीन है या द्रव्यमानरहित या (इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान की तुलना में) इसका द्रव्यमान अत्यधिक कम है और जो द्रव्य के साथ दुर्बलता से परस्पर क्रिया करता है। न्यूट्रॉन की उचित क्षय – प्रक्रिया इस प्रकार है: n →p + e + v]
उत्तर:
माना न्यूट्रॉन के प्रोट्रॉन तथा इलेक्ट्रॉन में क्षय होने पर अवनमन (disintegration) द्रव्यमान ∆m है।
उत्सर्जित ऊर्जा, E = ∆mc2
परन्तु ∆m = न्यूट्रॉन का द्रव्यमान – (प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान)
= 1.6747 x 10-24 – (1.6724 x 10-24 + 9.11 x 10-28
= (1.6747 – 1.6733) x 10-24
= 0.0014 x 10-24 ग्राम
∴ E = 0.0014 – 10-24 x (3 x 1010)2
= 0.0126 x 10-4 ऊर्जा
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 6 कार्य, ऊर्जा और शक्ति img A
= 0.79 Mev
पाजिट्रॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान के समान परन्तु आवेश इलेक्ट्रॉन का विपरीत होता है। जब इलेक्ट्रॉन तथा पाजिट्रॉन एक दूसरे के समीप आते हैं तो वे एक दूसरे को समाप्त कर देते हैं। इसके द्रव्यमान आइन्सटीन के समीकरण के अनुसार ऊर्जा में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रकार प्राप्त ऊर्जा गामा किरणों के रूप में उत्सर्जित होती है जो कि निम्नवत् है –
E’ = mc2
= 2 x 9 x 10 -31 x (3 x 108)2
= 1.64 x 10-13 जूल
= \(\frac { 1.64\times 10^{ -31 } }{ 1.6\times 10^{ -19 }\times 10^{ 6 } } \)
= 1.02 Mev

MP Board Class 11th Physics Solutions

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली

प्रश्न 1.
दर्शाइए कि किसी समांतर श्रेढ़ी के (m + n) वें तथा (m – n) पदों का योग m वें पद का दुगुना है।
हल:
मान लीजिए समांतर श्रेढ़ी का पहला पद a और सार्व अंतर d है।
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-1

प्रश्न 2.
यदि किसी समांतर श्रेढ़ी की तीन संख्याओं का योग 24 है तथा उनका गुणनफल 440 है तो संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए समांतर श्रेढ़ी की तीन संख्याएँ a – d, a और a + d हैं।
तीनों संख्याओं का योग = (a – d) + a + (a + d) = 24
∴ 3a = 24 या a = 8
तीन संख्याओं का गुणनफल = (a – d). a .(a + a)
= a (a2 – d2)
= 8(64 – d2) [∵ a = 8]
या 8(64 – d2) = 440
या 64 – d2 = 55
d2 = 64 – 55 = 9 या d = 3
अतः अभीष्ट संख्याएँ 5, 8, 11.

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
माना कि किसी समांतर श्रेढ़ी के n, 2n तथा 3n पदों का योगफल क्रमशः S1, S2 तथा S3 हैं, तो दिखाइए कि S3 = 3(S2 – S1).
हल:
मान लीजिए समांतर श्रेढ़ी का पहला पद a और सार्व अंतर d है।
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-2

प्रश्न 4.
200 और 400 के मध्य आने वाली उन सभी संख्याओं का योगफल ज्ञात कीजिए जो 7 से विभाजित हों।
हल:
200 से 400 के मध्य आने वाली संख्याएँ 203, 210, 217,…….., 399
मान लीजिए 399, n वाँ पद है।
∴ 399 = a + (n – 1).7
= 203 + 7 (n – 1)
या 399 – 203 = 196 = 7(n – 1)
∴ n – 1 = \(\frac{196}{7}\) = 28 या n = 29
∴ 203 + 210 + 217 +……+ 399
= \(\frac{29}{2}\)[203 + 399] [∵ S = \(\frac{n}{2}\)(a + l)]
= \(\frac{29}{2}\)(602) = 29 × 301
= 8729.

प्रश्न 5.
1 से 100 तक आने वाले उन सभी पूर्णांकों का योगफल ज्ञात कीजिए जो 2 या 5 से विभाजित हों।
हल:
2 से विभाजित होने वाले पूर्णांक 2, 4, 6,…., 100
इनकी कुल संख्या = 50
5 से विभाजित होने वाले पूर्णांक 5, 10, 15, 20,……100
इनकी कुल संख्या = 20
2 और 5 दोनों से विभाजित होने वाले पूर्णांक 10, 20, 30,…., 100
इनकी कुल संख्या = 10
1 से 100 तक आने वाले पूर्णांक जो 2 या 5 से विभाजित हों, तब
= (2 + 4 + 6 + ……50 पदों तक) + (5 + 10 + 15 +…… 20 पदों तक) – (10 + 20 + 30 +……10 पदों तक)
= \(\frac{50}{2}\)[4 + (50 – 1). 2] + \(\frac{20}{2}\)[10 + (20 – 1).5] – \(\frac{10}{2}\)[20 + (10 – 1). 10]
= \(\frac{50 \times 102}{2}\) + 10 x 105 – 5 x 110
= 2250 + 1050 – 550
= 3050.

MP Board Solutions

प्रश्न 6.
दो अंकों की उन सभी संख्याओं का योगफल ज्ञात कीजिए, जिनको 4 से विभाजित करने पर शेषफल 1 हो।
हल:
दो अंको की वे संख्याएँ जो 4 से विभाजित करने पर 1 शेष रहता है 13, 17, 21,….., 97
मान लीजिए n पद हों, तब n वाँ पद,
97 = 13 + (n – 1). 4
∴ 84 = (n – 1) × 4
∴ n = 22
∴ 13 + 17 + 21 +…..+ 97 = \(\frac{22}{2}\)[26 + (22 – 1).4]
= 11 × (26 + 84)
= 11 × 110
= 1210.

प्रश्न 7.
सभी x, y ϵ N के लिए f(x + y) = f(x).f(y) को संतुष्ट करता हुआ f एक ऐसा फलन है कि f(1) = 3 एवं \(\sum_{x=1}^{n}\)f(x) = 120 तो n का मान ज्ञात करो।
हल:
f(1) = 3, f(2) = f(1 + 1) = f(1) .f(1) = 3.3 = 9
f(3) = f(1 + 2) = f(1). f(2) = 3.9 = 27
f(4) = f(1 + 3) = f(1). (3) = 3 . 27 = 81
इस प्रकार f(1) + f(2) + f(3) +……, n पदों तक
= 3 + 9 + 27 + 81 + ……., n पदों तक = 120
⇒ \(\frac{3\left(3^{n}-1\right)}{3-1}\) = 120
या 3(3n – 1) = 120 × 2 = 240
3n – 1 = \(\frac{240}{3}\) = 80
या 3n = 81 = 34
अतः n = 4.

प्रश्न 8.
गुणोत्तर श्रेढ़ी के कुछ पदों का योग 315 है, उसका प्रथम पद तथा सार्व अनुपात क्रमशः 5 और 2 हैं।
अंतिम पद तथा पदों की संख्या ज्ञात करो।
हल:
दी हुई गुणोत्तर श्रेणी
5 + 10 + 20 + 40 +…….
n पदों का योग = \(\frac{5\left(2^{n}-1\right)}{2-1}\) = 315
∴ 2n – 1 = 63
या 2n = 64 = 26
n = 6
6 वाँ पद = 5 × 26 – 1
= 5.25
= 5 × 32 = 160.

MP Board Solutions

प्रश्न 9.
किसी गुणोत्तर श्रेढ़ी का प्रथम पद 1 है। तीसरे एवं पाँचवें पदों का योग 90 हो, तो गुणोत्तर श्रेढ़ी का सार्व अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेढ़ी का सार्व अनुपात r है।
तीसरा पद = ar2 = 1.r2 = r2
पाँचवाँ पद = ar4 = r4
तीसरे और पाँचवें पद का योग = r2 + r4 = 90
r4 + r2 – 90 = 0
या (r2 + 10)(r2 – 9) = 0
∴ r2 = – 10 मान्य नहीं है।
∴ r2 – 9 = 0, r2 = 9
∴ r = ± 3.

प्रश्न 10.
किसी गुणोत्तर श्रेढ़ी के तीन पदों का योग 56 है। यदि हम क्रम से इन संख्याओं में से 1, 7, 21 घटाएँ तो हमें एक समांतर श्रेढ़ी प्राप्त होती है। संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेढ़ी की तीन संख्याएँ a, ar, ar2 हैं।
तीनों पदों का योग = a + ar + ar2 = 56 …..(1)
इन संख्याओं में से 1, 7, 21 घटाने पर संख्याएँ
ar – 1, ar – 7, ar2 – 21 समांतर श्रेढ़ी में हैं।
∴ 2(ar – 7) = (a – 1) + (ar2 – 21)
या 2ar – 14 = ar2 + a – 22
ar2 – 2ar + a = 22 – 14 = 8 ….(2)
समी. (1) को (2) से भाग देने पर
= \(\frac{a\left(1+r+r^{2}\right)}{a\left(1-2 r+r^{2}\right)}\) = \(\frac{56}{8}\) = 7
या 7(1 – 2r + r2) = 1 + r + r2
6r2 – 15r + 6 = 0
2r2 – 5r + 2 = 0
या (r – 2) (2r – 1) = 0 या r = 2, \(\frac{1}{2}\)
समी (1) में r = 2 रखने पर,
a(1 + 2 + 4) = 56 या a = \(\frac{56}{7}\) = 8
इस प्रकार तीन संख्याएँ हैं: 8, 16, 32.
पुन: समी (1) में r = \(\frac{1}{2}\) रखने से,
a\(\left(1+\frac{1}{2}+\frac{1}{4}\right)\) = 56
a = \(\frac{56 \times 4}{7}\) = 32
∴ तीन संख्याएँ 32, 16, 8.
अतः अभीष्ट संख्याएं 8, 16, 32 हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 11.
किसी गुणोत्तर श्रेढ़ी के पदों की संख्या सम है। यदि उसके सभी पदों का योगफल, विषम स्थान पर रखे पदों के योगफल का 5 गुना है, तो सार्व अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेढ़ी का पहला पद = a सार्व अनुपात = r और पदों की संख्या = 2n
सभी पदों का योगफल = \(\frac{a\left(r^{2 n}-1\right)}{r-1}\)
विषम स्थानों पर रखे पद a, ar2, ar4, …. n पदों तक
इनका योग = a + ar2 + ar2 +……n पदों तक
= \(\frac{a\left[\left(r^{2}\right)^{n}-1\right]}{r^{2}-1}=\frac{a\left(r^{2 n}-1\right)}{r^{2}-1}\)
दिया है :
गुणोत्तर श्रेढ़ी के 2n पदों का योगफल = 5 × [विषम स्थानों पर स्थित पदों का योगफल]
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-3

प्रश्न 12.
एक समांतर श्रेढ़ी के प्रथम चार पदों का योगफल 56 है। अंतिम चार पदों का योगफल 112 है। यदि इसका प्रथम पद 11 है, तो पदों की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए समांतर श्रेणी
a + (a + d) + (a + 2a) +……+ l जबकि l अंतिम पद n वाँ पद है।
प्रथम 4 पदों का योगफल = \(\frac{4}{2}\)[2a + (4 – 1) d]
= 2[22 + 3d] [∵ a = 11]
दिया है: 2[22 + 3d) = 56
⇒ 3d + 22 = 28 या d = 2
अंतिम पद = a + (n – 1) d = 11 + (n – 1).2
= 2n + 9
अंतिम चार पद 2n + 9, 2n + 7, 2n + 5, 2n + 3
इनका योगफल = \(\frac{4}{2}\)[2(2n + 9) + (4 – 1). (- 2)]
= 2[4n + 18 – 6]
= 2[4n + 12]
दिया है : 2(4n + 12) = 112
∴ 4n + 12 = 56
4n = 56 – 12 = 44
∴ n = 11.

प्रश्न 13.
यदि \(\frac{a+b x}{a-b x}=\frac{b+c x}{b-c x}=\frac{c+d x}{c-d x}\) (x ≠ 0) हो, तो दिखाइए कि a, b, c, d गुणोत्तर श्रेढ़ी में है।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-4
अतः a, b, c, d गुणोत्तर श्रेढ़ी में है।

MP Board Solutions

प्रश्न 14.
किसी गुणोत्तर श्रेढ़ी में S,n पदों का योग, P उनका गुणनफल तथा R उनके व्युत्क्रमों का योग हो तो सिद्ध कीजिए कि P2Rn = Sn.
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेढ़ी a + ar + ar2 +….. + arn – 1
इन n पदों का गुणनफल, P = a. ar . ar2….. arn – 1
= an. r1 + 2 +…+ (n – 1)
= \(a^{n} r \frac{n(n-1)}{2}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-5
अतः P2Rn = Sn.

प्रश्न 15.
किसी समांतर श्रेढ़ी का p वाँ, धूवाँ, वाँ पद क्रमशः a, b, c हैं, तो सिद्ध कीजिए
(q – r)a + (r – p)b + (p – q) c = 0.
हल:
मान लीजिए समांतर श्रेणी
A + (A + d) + (A + 2d) +…. है।
p वाँ पद = A + (p – 1) d = a ….(1)
q वाँ पद = A + (q – 1) d = b ….(2)
r वाँ पद = A + (r – 1) d=c …..(3)
समी (2) में से समी (3) को, समी (3) में से समी (1) को, समी (1) में से समी (2) को घटाने पर
(q – r)d = b – c ….(4)
(r – p)d = c – a …(5)
(p – q)d = a – b ….(6)
समीकरण (4), (5) तथा (6) को क्रमशः a, b तथा c से गुणा करके जोड़ने पर,
a(q – r)d + b(r – p)d + c(p – d)d
= a(b – c) + b(c – a) + c(a – b)
= ab – ac + bc – ba + ca – bc
= 0
दोनों पक्षों में d से भाग देने पर,
(q – r)a + (r – p)b + (p – q)c = 0.

प्रश्न 16.
यदि \(a\left(\frac{1}{b}+\frac{1}{c}\right), b\left(\frac{1}{c}+\frac{1}{a}\right), c\left(\frac{1}{a}+\frac{1}{b}\right)\) समांतर श्रेड़ी में हैं, तो सिद्ध करो कि a, b, c समांतर भेट्टी में हैं।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-6

प्रश्न 17.
यदि a, b, c, d गुणोत्तर श्रेढ़ी में हैं, तो सिद्ध कीजिए कि \(\left(a^{n}+b^{n}\right),\left(b^{n}+c^{n}\right),\left(c^{n}+d^{n}\right)\) गुणोत्तर श्रेढ़ी में हैं।
हल:
a, b, c, d गुणोत्तर श्रेढ़ी में हैं।
मान लीजिए सार्व अनुपात r है।
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-7

प्रश्न 18.
यदि x2 – 3x + p = 0 के मूल a तथा b हैं तथा x2 – 12x + q = 0 के मूल c तथा d हैं, जहाँ a, b, c, d गुणोत्तर श्रेढ़ी के रूप में हैं। सिद्ध कीजिए कि
(q+ p) : (q – p) = 17 : 15.
हल:
यदि समीकरण Ax2 + Bx + C = 0 के मूल a , B हैं, तो
α + β = \(\frac{-B}{A}\), αβ = \(\frac{C}{A}\)
दिया है कि x2 – 3x + p = 0 के मूल a, b हैं
∴ a+ b = 3, ab = p …..(1)
इसी प्रकार x2 – 12x + q = 0 के मूल c, d हैं
∴ c + d = 12. cd = q …..(2)
अब a, b, c, d गुणोत्तर श्रेढ़ी में हैं, जिसका मान लीजिए r सार्व अनुपात है।
∴ b = ar, c = ar2, d= ar3
a + b = 3, a + ar = 3 …(3)
c + d = 12 या ar2 + ar3 = 12 …(4)
समी (3) को (4) से भाग देने पर,
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-8

MP Board Solutions

प्रश्न 19.
दो धनात्मक संख्याओं a और b के बीच समांतर माध्य तथा गुणोत्तर माध्य का अनुपात m : n है। दर्शाइए कि
a : b = \((m+\sqrt{m^{2}-n^{2}}):(m-\sqrt{m^{2}-n^{2}})\).
हल:
a और b के बीच समांतर माध्य = \(\frac{a+b}{2}\)
a और b के बीच गुणोत्तर माध्य = \(\sqrt{a b}\)
दोनों माध्यों का अनुपात m : n
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-9
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-10

प्रश्न 20.
यदि a, b, c समांतर श्रेढ़ी में हैं; b, c, d गुणोत्तर श्रेढ़ी में हैं तथा \(\frac{1}{c}, \frac{1}{d}, \frac{1}{e}\) समांतर श्रेढ़ी में हैं, तो सिद्ध कीजिए कि a, c, e गुणोत्तर श्रेढ़ी में हैं।
हल:
a, b, c समांतर श्रेढ़ी में हैं ∴ \(\frac{a+c}{2}\) = b …(1)
b, c, d, गुणोत्तर श्रेढ़ी में हैं, ∴ bd = c2 …(2)
\(\frac{1}{c}, \frac{1}{d}, \frac{1}{e}\) समांतर श्रेढ़ी में हैं, ∴ \(\frac{2}{d}\) = \(\frac{1}{c}+\frac{1}{e}\)
⇒ d = \(\frac{2 c e}{c+e}\) …..(3)
b और d का मान (1) और (3) से लेकर (2) में रखने पर
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-11

प्रश्न 21.
निम्नलिखित श्रेढ़ियों के n पदों का योग ज्ञात कीजिए :
(i) 5 + 55 + 555+ ……
(ii) 0.6 + 0.66 + 0.666 +…..
हल:
(i) S = 5 + 55 + 555 +…..n पदों तक
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-12
(ii) S = 0.6 + 0.66 + 0.666 +….n पदों तक
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-13

प्रश्न 22.
श्रेढ़ी का 20वाँ पद ज्ञात कीजिए :
2 × 4 + 4 × 6 + 6 × 8 +…..+ n पदों तक
हल:
2, 4, 6,….. का 20 वाँ पद = 2n = 2 × 20 = 40.
4, 6, 8….. का 20 वाँ पद = 4 + 19 × 2 = 4 + 38 = 42
∴ 2 × 4 + 4 × 6 + 6 × 8+…… का 20 वाँ पद
= 40 × 42 = 1680.

प्रश्न 23.
श्रेणी 3 + 7 + 13 + 21 + 31 +….. के n पदों का योगफल ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-14
= n2 + n – 2 +3
= n2 + n + 1
∴ दी हुई श्रेणी का योग
= Σn2 + Σn + n
= \(\frac{n(n+1)(2 n+1)}{6}+\frac{n(n+1)}{2}+n\)
= \(\frac{n}{6}\)[(n + 1)(2n + 1) + 3(n + 1) + 6]
= \(\frac{n}{6}\)[2n2 + 6n + 10]
= \(\frac{n}{3}\)[n2 + 3n + 5].

MP Board Solutions

प्रश्न 24.
यदि S1, S2, S3, क्रमशः प्रथम n प्राकृत संख्याओं का योग, उनके वर्गों का योग तथा घनों का योग है, तो सिद्ध कीजिए कि
\(9 S_{2}^{2}=S_{3}\left(1+8 S_{1}\right)\)
हल:
S1 = n प्राकृत संख्याओं का योग
= 1 + 2 + 3 +…..n पदों तक
= \(\frac{n(n+1)}{2}\) …..(1)
S2 = n प्राकृत संख्याओं के वर्गों का योग
= 12 + 22 + 32 +…..+ n2
= \(\frac{n(n+1)(2 n+1)}{6}\) …..(2)
S3 = n प्राकृत संख्याओं के घनों का योग
= 13 + 23 + 33 +…..+ n3
= \(\frac{n^{2}(n+1)^{2}}{4}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-15
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-16

प्रश्न 25.
निम्नलिखित श्रेणियों के n पदों का योग ज्ञात कीजिए :
\(\frac{1^{3}}{1}+\frac{1^{3}+2^{3}}{1+3}+\frac{1^{3}+2^{3}+3^{3}}{1+3+5}+\ldots\)
हल:
अंश में दी हुई संख्याएँ 13, 13 + 23, 13 + 23 + 33, …..
n वाँ पद = 13 + 23 + 33 +…..+ n3
= \(\frac{n^{2}(n+1)^{2}}{4}\)
हर में दी हुई संख्याएँ 1, (1 + 3), (1 + 3 + 5), ……
n वाँ पद = 1 + 3 + 5 +……n पदों तक
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-17

प्रश्न 26.
दशाइए कि \(\frac{1 \times 2^{2}+2 \times 3^{2}+\ldots . .+n(n+1)^{2}}{1^{2} \times 2+2^{2} \times 3+\ldots .+n^{2}(n+1)}\) = \(\frac{3 n+5}{3 n+1}\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-18
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-19

प्रश्न 27.
कोई किसान एक पुराने ट्रैक्टर को 12000 रू. में खरीदता है। वह 6000 रु. नकद भुगतान करता है और शेष राशि को 500 रू की वार्षिक किस्त के अतिरिक्त उस धन पर जिसका भुगतान न किया गया हो 12% वार्षिक ब्याज भी देता है। किसान को ट्रैक्टर की कुल कितनी कीमत देनी पड़ेगी?
हल:
पुराने ट्रैक्टर का मूल्य = 12000 रू
नकद भुगतान = 6000 रू
शेष = 12000 – 6000 = 6000 रू
एक किस्त का भुगतान = 500 रू
कुल किस्तें = \(\frac{6000}{12}\) = 12
P मूलधन पर 12% प्रतिवर्ष की दर से 1 वर्ष का ब्याज
= \(\frac{P \times 12 \times 1}{100}=\frac{3}{25} P\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी विविध प्रश्नावली img-20
कुल भुगतान = (12000 + 4680) रू
= 16680 रू।

MP Board Solutions

प्रश्न 28.
शमशाद अली 22000 रू में एक स्कूटर खरीदता है। वह 4000 रू नकद देता है और शेष राशि को 1000 रू वार्षिक किस्त के अतिरिक्त उस धन पर जिसका भुगतान न किया गया हो 10% वार्षिक ब्याज भी देता है। उसे स्कूटर के लिए कुल कितनी राशि चुकानी पड़ेगी?
हल:
स्कूटर की कीमत = 22000 रू
नकद भुगतान = 4000 रू
शेष = 22000 – 4000 = 18000 रू
एक किस्त की राशि = 1000 रू
∴ कुल किस्तें = \(\frac{18000}{1000}\) = 18
P मूलधन पर एक वर्ष का 10% प्रति वर्ष की दर से ब्याज
= \(\frac{P \times 10 \times 1}{100}\) = \(\frac{P}{10}\)
किस्त देने के बाद शेष राशि जिस पर एक वर्ष का ब्याज लगना है,
= 18000, 17000, 16000,….., 1000
कुल ब्याज की राशि
= \(\frac{1}{10}\)(18000 + 17000 + 16000 +…..+ 18 पदों तक)
= \(\frac{1}{10} \times \frac{18}{2}\)[2 × 18000 – (18 – 1) × 1000]
= \(\frac{9}{10}\)[36000 – 17000)
= \(\frac{9 \times 19000}{10}\) = 17100 रू
कुल किश्तों की राशि = 18000 रू
नकद = 4000 रू
कुल भुगतान = (18000 + 17000) + 4000 रू
= 39,100 रू।

प्रश्न 29.
एक व्यक्ति अपने चार मित्रों को पत्र लिखता है। वह प्रत्येक को उसकी नकल करके चार दूसरे व्यक्तियों को भेजने का निर्देश देता है, तथा जिनसे यह भी करने को कहता है कि प्रत्येक पत्र प्राप्त करने वाला व्यक्ति इस श्रृंखला को जारी रखे। यह कल्पना करके कि श्रंखला न टूटे तो 8वें पत्रों के समूह भेजे जाने तक कितना डाक खर्च होगा जबकि एक पत्र का डाक खर्च 50 पैसे है।
हल:
पहला व्यक्ति चार पत्र लिखता है। पत्र प्राप्त करने वाले 4 व्यक्ति फिर चार-चार पत्र लिखते हैं। इस प्रकार श्रृंखला बढ़ती चली जाती है।
हर अवसर पर पत्रों की संख्याएँ 4, 16, 24…… 8 पदों तक
कुल पत्रों की संख्या = 4 + 16 + 64 + ……………8 पदों तक
= \(\frac{4\left(4^{8}-1\right)}{4-1}\) = \(\frac{4}{3}\)(65536 – 1)
= \(\frac{4}{3}\) × 65535 = 87380
एक पत्र का डाक खर्च = 50 पै. = \(\frac{1}{2}\)रू
कुल डाक खर्च = 87380 x \(\frac{1}{2}\)
= 43690 रू

प्रश्न 30.
एक आदमी ने एक बैंक में 10000 रूपये 5% वार्षिक साधारण ब्याज पर जमा किया। जब से रकम बैंक में जमा की गई तब से, 15वें वर्ष में उसके खाते में कितनी रकम हो गई तथा 20 वर्षों बाद कल कितनी रकम हो गयी, ज्ञात कीजिए।
हल:
बैंक में जमा की गई राशि = 10000 रू
ब्याज की दर = 5% प्रति वर्ष
एक वर्ष बाद ब्याज = \(\frac{10000 \times 5 \times 1}{100}\) = 500रू
इस प्रकार हर वर्ष उसे 500 रू ब्याज के मिलेंगे।
1 वर्ष, 2 वर्ष, 3 वर्ष,…….बाद ब्याज की राशि
500, 1000, 1500, ….
15 वें वर्ष में ब्याज = (n – 1) × 500 = (15 – 1) x 500
= 14 × 500
= 7000 रू
मूलधन = 10000 रू
उसके खाते में 15वें वर्ष में = 10000 + 7000
= 17000 रू होंगें
20 वर्ष का ब्याज = 20 × 500
= 10000 रू
मूलधन = 10000 रू
20 वर्ष बाद बैंक में कुल जमा राशि = 10000 + 10000 = 20000 रू।

प्रश्न 31.
एक निर्माता घोषित करता है कि उस की मशीन जिसका मूल्य 15625 रूपये है, हर वर्ष 20% की दर से उसका अवमूल्यन होता है। 5 वर्ष के बाद मशीन का अनुमानित मूल्य ज्ञात कीजिए।
हल:
यदि किसी मशीन का r% की दर से अवमूल्यन हो रहा है n वर्ष बाद मशीन का मूल्य \(P\left(1-\frac{r}{100}\right)^{n}\) होगा।
प्रारभ में मशीन का मूल्य P रूपये है।
यहां पर P = 15625, r = 20% प्रति वर्ष, n = 5 वर्ष
∴ उस मशीन का 5 वर्ष बाद का मूल्य
= 15625 \(\left(1-\frac{20}{100}\right)^{5}\)
= 15625 \(\left(\frac{4}{5}\right)^{5}\)
= 15625 x (.8),sup>5 = 5120 रू।

MP Board Solutions

प्रश्न 32.
किसी कार्य को कुछ दिनों में पूरा करने के लिए 150 कर्मचारी लगाए गए। दूसरे दिन 4 कर्मचारियों ने काम छोड़ दिया, तीसरे दिन चार और कर्मचारियों ने काम छोड़ दिया तथा इस प्रकार अन्य। अब कार्य पूरा करने में 8 दिन अधिक लगते हैं, तो दिनों की संख्या ज्ञात कीजिए, जिनमें कार्य पूरा किया गया।
हल:
150 कर्मचारी उस कार्य को n दिनों में समाप्त करते हैं
150 कर्मचारियों का 1 दिन का काम = \(\frac{1}{n}\)
1 कर्मचारी का 1 दिन का काम = \(\frac{1}{150n}\)
पहले दिन 150 कर्मचारी 1 दिन में \(\frac{150}{150 n}\) कार्य करते हैं
दूसरे दिन 146 कर्मचारी 1 दिन में \(\frac{146}{150 n}\) कार्य करते हैं
तीसरे दिन 142 कर्मचारी 1 दिन में \(\frac{146}{150 n}\) कार्य करते हैं
वह काम n + 8 दिन में पूरा हुआ
∴ \(\frac{150}{150 n}+\frac{146}{150 n}+\frac{142}{150 n}\) +…….(n + 8) पदों तक = 1
या \(\frac{1}{150 n}\)[150 + 146 + 142 +…n + 8) पदों तक] = 1
या \(\frac{n+8}{2(150 n)}\)[2 x 150 +(n + 8 – 1) x (- 4)] = 1
(n + 8)[300 – 4(n + 7)] = 300n
या (n + 8)(- 4n + 272) = 300n
या (n + 8)(n – 68) = – 75n
या n2 – 60n – 544 = – 75n
या n2 + 15n – 544 = 0
या (n + 32)(n – 17) = 0
n ≠ – 32 या n = 17
कुल समय = n + 8 दिन
= 17 + 8 = 25 दिन।

MP Board Class 11th Maths Solutions

MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 5 Using A Dictionary

MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 5 Using A Dictionary

See Workbook Page 193-194

Exercises

Consult a dictionary and answer the following:
Question 1.
Are the following pairs of words pronounced alike?
yes, put a (✓) mark against that pair and of no, put (✗) mark against that pair :

  • principal — principle (✓)
  • where — were (✗)
  • oral — auraI (✗)
  • sailing — selling (✗)
  • horse — hoarse (✗)
  • Stationary — stationery (✓)
  • except — accept (✗)
  • advise — advice (✗)
  • Caste — cast (✓)
  • rite — riot (✗)

MP Board Solutions

Question 2.
IdentIfy the part of speech of ‘round’ in the following sentences:

  • The final of voting is going on. Noun
  • Her eyes with terror. Verb
  • The earth moves the sun. Adverb
  • The students stood waiting for the teacher. Preposition
  • He has some beautiful and balls. Adjective

Question 3.
Two different pronunciations of the following words have
been given. Put a (✓) mark against the right pronunciation. Check your answer from the dictionary.
MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 5 Using A Dictionary 1

Question 4.
Look up the meaning of each of the following words. List at least two different meanings for each word.
MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 5 Using A Dictionary 2

Question 5.
Look up each of the following words. Decide whether both spellings are in use or one is more common than the other.

  • color – color
  • acknowledgment – acknowledgment
  • harbour – harbor
  • lambast – lambaste
  • fledgeling – fledgling.
  • programme – program
  • center – center
  • almanac – almanack
  • moveable – movable
  • focused – focussed

Ans.
Do yourself.

MP Board Solutions

Question 6.
Find out plurals of the following nouns. If words have two plurals write both.

  • scarf – scarfs
  • memorandum – meronda
  • formula – formulas/ formula
  • motto – mottos
  • duck – ducks
  • fungus – fungi
  • syllabus – syllabii
  • dwarf – dwarfs
  • medium – media
  • lacuna – lacuae/lacunas
  • buffalo – buffaloes
  • pheasant – pheasants/pheasant

Question 7.
Find out the meanings of the following phrases/idioms.

  • a curate’s egg — something that has some good parts and some bad ones.
  • to crown it all — the worst of all in a series of unpleasant events.
  • be in the doghouse — somebody’s arnnoyance for doing wrong.
  • draw a blank — to get no response or result.
  • an educated guess – a correct and calculated guess
  • fast and furious — full of rapid action and sudden changes.

MP Board Class 11th English Solutions

MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 4 Report Writing

MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 4 Report Writing

See Workbook Page- 152-153

Exercise

Write formal reports (100 to 150 words) on the themes given below:

1. You are the School Captain. You have been asked by the Principal to write a report on additional facilities required by the students.
Answer:

From: David John
To: The Principal
3 Sep. 2008

Additional facilities required by the students
As I have been asked to submit a report on the additional facilities required by the students. I surveyed and came to the following conclusions.

  1. A better Sanitary condition is the first requirement.
  2. A big hall for some indoor games is required.
  3. Some audio visual aids are required for better education.
  4. Transport facility needs to be impured.
  5. Security on transport is needed.
  6. Excussion tours need to be organised at least two times a year.
    The above points are the prime additional need at this hour.

David John
School captain

MP Board Solutions

Question 2.
You are the Head of the Disaster Management Committee of M.P. Which was affected by flood. The Home Minister has sought a report from you on the extent of damage and loss of life, relief and rescue operations, grant and compensations given to the affected people and financial support needed Tor their rehabilitation from the government. Write a report including all the necessary details.
Answer:
From: Sushma Singh
To: The Home Minister Govt, of India
25 Aug. 2008

Damages caused by flood and relief measures
As I have been asked to submit a detailed report on the damages and loss of life, relief and resume operations grant and compensation given to affected people and financial support needed for their rehabilitation from the govt. I have prepared the following report.
Heavy damages have been caused. A great loss need to be compensated. Relief and other grants are very insufficient villages and local NGO’S are trying their best for rescued operation. People need govt, aid immediately.

Sushma Singh
Head, Disaster Management Committee

Report Writing: Newspaper Reports

See Workbook Page- 155-156

Exercises

Write reports (100 to 150 words) on the themes given below :

Question 1.
Yesterday a fire broke out in the busy Bada Bazaar Area. More than 1,000 shops were gutted. There has been a heavy loss of life and property. As a correspondent of a Local Daily, write a report.
Answer:

Fire Broke Out: Heavy Loss To Life

By Local Correspondent

New Delhi Aug 25. A fire broke up in the wee hours in the busy Bada Bazaar Area. More than 1000 shops were gutted. As it was the busy hours there was a panicky situation. People began running nervously to save themselves. Many fell down and were crushed down. Nearly 50 People were badly injured while 5 died in hospital. Fire brigade reached the spot but it was too late. However, the fire was controlled after the rigorous attempt of three hours. Most of the shops were completely ruined. Property estimated around  5 crore have been burnt and damaged. The businessmen are very upset. It will take a long time to compensate for the loss.

Question 2.
The misuse of water is a concern that affects everyone. Write a report for a Daily Newspaper urging people to stop the misuse and help in conserving water.
Answer:

Conserve Water : Save Life

By Local Correspondent

It has been a shocking fact that the people of this locality are not conscious enough to conserve water. Water is the prime need of our life. As it is a natural resource its availability is limited. People misuse it is washing their vehicles roads. They don’t care to turn off then taps when they are not in use. It is affecting us badly. Govt, supply can’t help us. We’ll have to take use steps. There is a need to be conscitous of our need and nature’s capacity to compensate it. We should find other ways to conserve water. Rain water harvesting, plantation are some of the useful ways to conserve water.

Question 3.
Recently your school organized a ‘book-week’. During this week many competitions were held such as-book reviews, discussions on books, meeting with authors etc. Write a report for your school magazine.
Answer:

Celebration Of Book Week

By Rohit Sharma

Last week our school organised a book week. It was a very purposeful occasion. Collection of rare books was put on dis- /play.’Some comptetions were also organised. Students were very much exited during the discussions if on books and meeting with famous authors who come to grace the occasion.
The Minister for Human Resources was the chief guest while the chairman UGC presided over the function on the closing day. It was grand occasion for the school.

4.2 Diary Entry

See Workbook Page-158

Exercise

Write diary entries on the themes given below :

Question 1.
You discover that Anita, whom you consider a good friend, has been indulging in backbiting against you. Record your feelings in your diary.
Answer:
August 15
Friday
Today I was shocked to know the fact that Anita, my best friend has turned to be my critic. She indulges in backbiting against me. I don’t know why she is doing so. I have always honoured her feelings. I am very close to her. I have always supported her in every situation still she is doing so. I really didn’t believe it when I came to know it. But I later got it confirmed. It has really hurt me and made me very upset. Once I think to ask her what the reason is. It is unbearable for me.

MP Board Solutions

Question 2.
You have just joined a new school in a big city where your father has been transferred. It was difficult for you to leave your friends and shift to a strange place. Make a diary entry after your first day in the new school.
Answer:
August 25
Monday
It was my first day in the Greenfield Public School Bhopal. Recently my father has been transferred here and so I was to join this school. I was very much sad I couldn’t forget my friends at Jabalpur. I had spent four years with them. It is a long time. Some of the boys and teachers there were so special to me that I miss them. It will take time to adjust without them. They all were very helpful and unique for me. I have written letters to them today.

4.3 E-Mail Writing

See Workbook Page-160-161

Exercises

Compose e-mail messages on the following themes :

Question 1.
You are Deepa. Compose an e-mail to your friend Jaya whose address is jayal418@yahoo.com, asking her to mail you the pictures she had collected for the science project.
Answer:
To: jayal418@yahoo.com cc :
Subject: Pictures of Science Project.
Hi Jaya
Please send the pictures you have collected for the science project through mail without delay as I need it urgently.
Deepa

Question 2.
You are Managing Director of Agro-Products Ltd. Write an e-mail message wishing Happy Diwali on behalf of your firm, intended to be sent to three of your vice-presidents. (Hint : Write one e-mail address in the ‘To’ box and the other two in the ‘Cc’ box separated by a semicolon.)
Answer:
To: Agro@yahoo.com
Cc: Vice Presidents
Sub: Diwali greetings
This is to great you all the very very happy and prosperous Diwali.
Managing Director

4.4 Writing Advertisements

See Workbook Page-162

Exercise

Write short advertisements on the topics given below :

Question 1.
You are Anand Singh. You wish to sell your car, Tata Indica 2004 model in good condition. Write a classified advertisement.
Answer:

SALE -SALE -SALE
A car TATA INDICA 2004 Model in a good condition is on sale. Interested persons may contact soon.
Anand Singh
Contact No. 9350655123

Question 2.
You are the proprietor of Payal Book Depot. Your firm is celebrating its Silver jubilee. You have decided to put up a week long exhibition-cum-sale at Community Hall Raipur. Compose an attractive display advertisement highlighting the variety of books and the special discounts offered.
Answer:

A Grand Occasion

Don’t miss

An exhibition-cum-sale has been organised at community Hall Raipur. It is first of its kind. A variety of books are available at an attractive discount. You can get even rare books.
This is nine days wonder only.
Come-Enjoy-Avail-Be Benefitted.
for detail contact
Proprietor
Payal Book Depot Tel. No. 25659518

Question 3.
You are Shalini Khanna. You are going to launch a new toothpaste. Write a display advertisement.
Answer:

Shine—A Herbal Toothpaste.
Product—A revolution in the field of
Protects your gum. An all-round Protection.
Affordable Price—Available in 50g, 100g and 175g.
for Business enquiry contact
Shalini Khanna 9439295436

Question 4.
DAV School, Narsinghpur needs teachers for Maths, English and Economics. Only experienced and qualified teachers are asked to apply within 15 days. Write a classified advertisement for the posts.
Answer:

Staff Required
DAV School Narsinghpur requires qualified and experienced teaching staff for Math, English and Economics. Salary no bar for suitable candidates. Residential facility is available. Apply/Contact personally with in 15 days to :
The Principal
Time: 8 AM-2 PM
Tel. No. : 2395632

 4.5 Paragraph Writing

See Workbook Page-165-166

Exercises

Question 1.
Write a paragraph on the ‘Evils of Gender Discrimination’ in about 100 words. You may use the following suggestions as well as your own ideas :

  • male-dominated society-privileges to boys-biased behaviour-evil effects
  • curse to society-put an end-measures etc.

Evils Of Gender Discrimination
Answer:
Gender discrimination is an age-old orthodox view of our social system. It has created a very awkward situation in our society. It is very unjust to treat women with so much disgust. They are the pillars of success for a society. They can build a society. If we ignore their contribution we ignore the development of society. This distributing attitude must be abolished otherwise we shall leg behind in the race of globalisation.

MP Board Solutions

Question 2.
Write a paragraph on ‘My Favourite Festival’ in about 100 words. You may use the following suggestions as well as your own ideas :
– Diwali-firecrackers-happy children-sweets-decorate the houses-cleaning the houses-exchange presents-Laxmi Puja- festival of joy-victory of good over evil etc.
Answer:
Diwali is my favourite festival. It is celebrated after the great festival of Durga Puja. It is a festival of light. The goddess Laxmi is worshipped. Children burst firecrackers and eat sweets. Houses are cleaned and decorated. We exchange presents. It is a festival of the victory of good over evil. It is a festival of joy and happiness. It brings wealth and prosperity to all.

Question 3.
Write a paragraph in about 100 words describing ‘A Train Accident’. Mention the following points :
– date-time-venue-impact of the accident-relief measures- probable causes reactions of passengers and Railway Staff etc
Answer:
Last week on 10th of August, 2008 at about 6 AM a train collided with one coming from the opposite direction just a few yards away from the Indore station. The accident was so serious that 5 boggiss of the train deraited. About 100 passengers were seriously injured, 5 died on the spot. The local people come to their rescue and took the injured to hospital. As it was assumed that the accident was the fault of the railway staff on duty. The railway staff became the victim of people’s outrage. However, the situation was controlled with the help of RPF.

Question 4.
Write paragraphs in about 100 words on each of the following topics :
(i). Where there is a will, there is away.
Answer:
‘Where there is a will, there is a way’ is a very old and perfect proverb. It is said in the context that if one has a with one can do anything. Will paves the way for any destination. It leads to success. It gives one determination and confidence. Confidence can win over every impossible target. Hence will is the way that brings success to us. If one has no will one make effort and shall always be idle. He can never get success.

(ii). Wars are no solutions to peace
Answer:
Wars are the worst form of man-made disaster. It always brings- ruin and destruction to life and property. It leads to nowhere but to great devastation. If one thinks to achieve peace through war it is just an illusion. Peace can never be achieved through it because one war gives birth to another. It is an endless process. War leads to war not to peace. Peace is achieved only through peaceful ways.

iii. Importance of sports in education
iv. Save the trees
v. Influence of media on students
vi. Beggary-a nuisance
vii All that glitters is not gold
Answer:
Do yourself in your notebook.

4.6 Letter Writing: Informal Letters

See Workbook Page-170-172

Exercises

Write informal letters on the themes given below :

Question 1.
A friend of yours has been hospitalized because of a fracture while playing football. Write him a letter giving some cheerful news, a promise of an early visit and wishing him a speedy recovery.
Answer:
6/5, Shivaji Enclave Bhopal
My dear Rohit
I was shocked .to know about your accident. I wished to see you come to see myself but I have to appear at an inter exam so I couldn’t came. I wish all my best for your early recovery. You shouldn’t be nervous. One can’t know what the god has for us in this store. I shall come to meet you very soon. I pray to god for your well being.
Yours
Rakesh

MP Board Solutions

Question 2.
Write a letter to your younger sister who has failed in the final examination advising her not to give up hope and to do her best next time.
Answer:
Laxmibai Park
Gwalior
Dear Kusum
I have come to know about your result. You don’t get disheartened. Failures are the pillars of success. It gives a new spirit to start a new; labour hard concentrate yourself upon study, you are sure to get a better result next time. Hope for the best. Chances are bright. It depends upon the man how one takes it or how one avails it. If you have any problem is study inform me. First take up those subjects which are weak.
Hoping for your better future
Yours
Avneet

Question 3.
You have had a quarrel with your best friend and are not on talking terms anymore. Write a letter to your father seeking his advice about how to make up and be friends again.
Answer:
Gandhi Colony
Jabalpur
My dear father
You now Chanden has been my best friend since I joined this school. He has always been so helped and co-operative and loving that I never thought of him other than my own brother. But due to some misunderstanding, we are not on the talking terms and our friendship is broken for some quired him much. I went to pitch it up. but don’t. I misunderstand how. Advise me on how I can do it. I am very upset. The other student ridicule us. please write soon,
yours
Anup

MP Board Solutions

Question 4.
Suppose you have done something against your father’s wishes and desire to be forgiven. Write a letter to your father, asking him to forgive you.
Answer:
Do yourself in your notebook.

Letter Writing : Formal Letters

See Workbook Pase-174-175

Exercises

Question 1.
Write a letter to the Principal of your school requesting him/ her to open a career-counseling centre in the school to help and guide the students in the choice of subjects at + 2 level.
Answer:
To
The Principal
Vivekanand Shiksha Niketan
Jabalpur
25 Aug. 2008.
Sir
With due regards I wish to request you that we need a career councelling centre in our school. As the modern trend in education creates much confusion we feel its need urgently. We can get proper guidence for the choice of subject for our career. I hope you’ll arrange to start it soon.
Thanking you
Your sincerely
Ankur Chandra
Students’ Representative

Question 2.
Write an application to the Principal of your school requesting him/her to issue you a certificate in connection with a; Blood Donation Camp, which you attended.
Answer:
To
The Principal
St Lawrence Convent
Jabalpur
20 Aug. 2008
Sub : Certificate for Blood Donation Camp.
Sir
With due regards, I wish to bring to your notice that I arranged a Blood Donation Camp last week. It was a grand success. It brought many lands to our school. I request you to please issue a certificate in this connection which I will be an added benefit in my career.
Yours faithfully
Rakesh Singh
Students Representative

(II) Job Application

See Workbook Page-177-178

Exercises

Write job applications in response to advertisements as described below. Also, write your resume :

Question 1.
You have seen an advertisement for a salesperson in a fast food restaurant.
Answer:
To
The Manager
Navelty Fast Food Restaurant Gwalior
Date : 28 Sep. 2008
Re : Post of Selesperson
Dear Sir
I have come to know through an advertisement that a post said above is lying vacant under your control. I hereby submit my bio-data for the post. I am confident of serving your job satisfactorily.

Bio-Data
Name : Avinash Chandra
Address : 3/149, Ashok Vihar, Bhopal
Contact No. : 235439/9433259616
E-mail : Chandra25@yahoo.com
Date of birth :25 Jan. 1985
Educational Qualification: PG Diploma in Sales Management
Experience: Three years job experience at Hotel Ashoka
Skills: Computer Basics
Language Known: Hindi, English, Marathi, Bengali, Frenchi

MP Board Solutions

Question 2.
You are Pawan. You have done your M.Sc. in Mathematics from Vikram Vishwavidyalaya, Ujjain and have also done your B.Ed. You have seen an advertisement from Maharani Laxmi Bai Senior Secondary School, Rewa in The Hindustan Times asking for Post Graduate teachers.
Answer:
To
The Principal
Maharani Laxmi Bai Senior Secondary School, Rewa
Sub: Post of Postgraduate teachers
Date: August 30, 2008 Dear Sir
In response of your advertisement for the post said above I hereby submit my bio-data. I am confident to prove my ability to the maximum satisfaction of your requirement.

Bio-Data
Name : Sheetal Desai
Address : 14, Cresent Road, Rewa
Contact No. : 9319352526
Date of birth : 25 Dec. 1980
Educational qualification: M.Sc., B.Ed.
Experience : 5 years teaching experience as TGT in DAV Public School.
Skills : Dancing, Singing, Debate
Language known : English, Hindi.
Sheetal
Desal

(iii) Letters Of Complaint

See Workbook Page-181

Exercises

Write letters of complaint on the following themes :

Question 1.
You have ordered some books from Messrs Agni Prakashan. On receipt of the package, you find that the books are not the same as ordered by you.
Answer:
To
The Manager
M/s Agni Prakashan
Indore
Sub : Complaint for wrong order
Dear Sir
This is to bring to your notice that I had placed order for books vide letter No. 25/08 dated 13 Sep. 08. But to my surprise when I received the package I found the books were not the same. I had ordered. Hence I request you to replace their books and supply the exact that I had ordered otherwise refund my advance.
Thanking you.
Yours Sincerely
Prakash Singh

MP Board Solutions

Question 2.
You are Arvind. Every time you stop at the red light crossing you find a number of beggars who swarm around the cars begging for alms. You have also noticed that recently the number of child beggars is increasing. Write a letter to the Editor highlighting the evils of beggary and suggesting some positive measures to check children from begging.
Answer:
To, The Editor
The Times Jabalpur
3 Sep. 2008
Sub: Problems of Beggar in the city
Sir,
This is through your esteemed newspaper that I wish to draw ‘ the attention of the concrened authorities to the grimmest problem of beggar at public places and red light signals. Every day we come across a number of beggars begging at these place. You know they present a very bad picture of our country. The tourists and people from other countries also come to visit our country.
They travel in cities but at red light Signals they see these beggars and get a very poor impression about our country. There beggars also do crimes like snatching, robbery etc. This practice should be controlled. Their rehabititation should be taken with priority. They should be promoted to awk in positive direction. I hope you would highlight this cause of forcefully.
Thanking you.
Yours Sincerely
Arvind Pandey

(iv) Letters Newspapers

See Workbook Page-184

Exercises

Question 1.
Write letters to newspaper editors on the following themes:
You are Varun Rohila. You are quite concerned about the bad condition of roads in your locality. Your letters to the authorities concerned have gone unheeded.
Answer:
To
The Editor
Bhopal Times
Bhopal
Sub: Poor Condition of Roads.
Sir,
Through your esteemed newspaper, I wish to draw attention of the authorities to the poor condition of the roads of Bhopal. It causes many accidents. People had to risk their life while driving along these roads. For a number of time, we sent our complaints to the officials but of no use.
Hence raise our need with strong concern in under to save our life.
Yours Sincerely
Varun Rohila
President, Bhopal citizens forum.

Question 2.
You are Shailja Khakre. In your locality, it is common that certain people pilfer electricity from electric poles by putting wires on the main lines. As a result there are frequent break-downs in the supply of electricity.
Answer:
To
The Editor
The Hindustan Times Gwalior
Sub : Tampering with electric poles.
Sir,
I would like the attention of the concerned authorities to the pilfering electricity from electric poles by some people causing frequent breakdowns in the supply. It is very nuisance. Local police don’t bother for its. Please highlight this cause strongly.
Yours sincerely
Shailja Khakre
Secretary
RWA shineji colony
Gwalior

4.7 Essay Writing

See Workbook Page-186-189

Exercises

A. Write essays (about 300 words) on the following topics. You can use the words/phrases given below as hints:
Answer:
1. A scene of an Accident
an unpleasant event-happens unexpectedly-causes injury-late after-noon-going for tuition-crowded street-lots of traffic-a young boyriding a bicycle-suddenly takes a right turn-car in its own lane- screeching tyres-smell of burning rubber-could not stop in time-boy flung up high in the air-people shrieking-gather around-car sped away- no police in the vicinity-another car stops-a kind elderly man-takes the child to hospital-police arrives-license plate number noted by me- children should be instructed on rules of the road-rash driving punished-social awareness.

No one can say what will happen the next moment. Yesterday I was going to my tuition in the afternoon at about 3 p.m. Road was busy. Suddenly a young by on a bicycle look a right turn. A car was coming at fast speed. It hit the boy and speed away. There was no police in the vicinity. People gathered. The boy was ’ unconscions. He was bleeding. In the meantime another car came and stopped.

There was an elderly kind man in it. He took the child to the hospital. As I had seen the car that hit the boy from a close distance. I noted the number of the car. I reported the police that reached after an hour. The boy was very serious. As I saw it was not the fault of the car driver solely. The boy had turned suddenly at a great speed which caused the accident. I feel the boys should be taught properly how to walk or more along the road. There is a need of social awatenss.

MP Board Solutions

2. Journey to Jupiter’s Moon
Year 2057-India’s first manned flight to Europa, one of Jupiter’s larger moons-scientific research-Europa’s surface consisting of ice sheets-warm ocean of water may be below-possibility of life forms-blast off at midnight-refuelling for the long journey at a permanent space station in our Moon’s orbit-pass by Mars-red planet-human colonies already established-asteroid belt-danger of colliding-Jupiter looms over-gas giant- red spot-landing on Europa-calm but extremely cold-sun, a small bright star-under water exploration-samples collected-excited to find some thing unexpected-safe return-congratulation-government and every Indian. Year 2057 will add a new chapter in the history of India when its first manned flight will land at Europa, one of the Jupiter’s large moons.

Scientific research have confirmed the existence of life including ice sheets warm ocean of water. There would be blast off midnight and refuelling would be done for a long – journey at a permanent space station in our Moon’s orbit. It would pass by Mars-red planet, human colonies which would have already established asteriod belt. But there may be a danger of collision. There would Jupiter looming large over gas giant- red spot landing on Europa. It is a calm but extremely cold- sun, a small bright star.

There would be exploration under water. Samples would be collected. Man would be excited to find something unexpected. He would return to earth safely and will be greated from all over world. The government would appreciate the team with several rewards. It would be a giant leap for mankind.

B. Write an essay about 300 words each on the following topics:
1. A friend in need is a friend indeed
2. All work and no play makes jack a dull boy
3. Choosing the right career
4. Computerization-its advantages and disadvantages
5. It I were a millionare
6. India of my dreams
7. Population explosion
8. Self help is the best help
9. The book I like most
10. Think before you shop
Answer
Do these topics in your notebook.

MP Board Class 11th English Solutions