MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 16 रामेश्वरम्

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 16 रामेश्वरम्

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 16 प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. (क) सही जोड़ी बनाइए
1. समुद्रराज – (क) विश्नाथ नायर
2. चरण पादुका – (ख) शिव
3. कैलाशवासी – (ग) रामचन्द्र जी
4. मदुरा के राजा – (घ) वरुण
उत्तर
1. (घ), 2. (ग), 3. (ख), 4. (क)

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प्रश्न (ख)
दिए गए विकल्पों में से उपयुक्त शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. सबको अपने जीवन से…….होता है। (मोह/विद्रोह)
2. पामवन, रामेश्वरम् और धनुष्यकोटि एक…..के तीन विंद हैं। (चतुष्कोण त्रिकोण)
3. श्रीलंका के राजा……में रामेश्वरम् में मोदर बनवाया। (वरदरात शेखर/पराक्रमबाहु)
4. रामेश्वरम में मंदिर के अंदर………तीर्य है। (24/11)
उत्तर
1. मोह
2. त्रिकोण
3. वरदराज शेखर,

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 16 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य से दीजिए

(क) रामेश्वरम् क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर
रामेश्वरम् चार धामों में से एक है इसलिए प्रसिद्ध है।

(ख) कैलाश जाकर शिवजी को लाने का दायित्व किसको सोंपा गया था?
उत्तर
कैलाश जाकर शिवजी को लाने का दायित्व हनुमान को सौंपा गया था।

(ग) गंधमादन पर्वत किसे कहते हैं?
उत्तर
जिस चट्टान से हनुमान जी को लंका की भूमि नजर आई थी, उसे गंधमादन पर्वत कहते हैं।

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(घ) श्रीराम के कुपित होने पर समुद्रराज ने क्या किया?
उत्तर
श्रीराम के कुपित होने पर समुद्रराज ने क्षमायाचना

(ङ) किसका नाम विश्वनाथ पड़ा?
उत्तर
रामेश्वरम् के उत्तर में हनुमान जी द्वारा लाया गया शिवलिंग स्थापित है, जिसका नाम विश्वनाथ है।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 16 लघु उत्तीय प्रश्न

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन-से-पाँच वाक्यों में दीजिए

(क) पामवन के पुल की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर
पामवन का पुल लोहे का बना हुआ है और समुद्र पर बांधा गया है। यह रेल पुल स्थिर नहीं है। जब जहाजों को निकलना होता है तब यह पुल उठा दिया जाता है जिससे
स्टीमर एक ओर से दूसरी ओर चली जाए।

(ख) ‘उत्सर्ग में तो आनंद है’ इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए
उत्तर
इस कथन का आशय यह है कि त्याग में एक संतुष्टि का भाव छिपा होता है। अपना अस्तित्व समाप्त कर किसी और के अस्तित्व में समाहित हो जाना एक आत्मिक खुशी प्रदान करता है और बलिदान को महत्ता प्रदान करता है।

(ग) रामेश्वरम् का दर्शन करना लाभदायक क्यों माना गया है?
उत्तर
रामेश्वरम् चार धामों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि रामेश्वरम का दर्शन किए बिना एक भारतीय | अपने जीवन की सिद्धि का लाभ नहीं ले पाता। इसलिए रामेश्वरम् का दर्शन करना लाभदायक माना गया है।

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(घ) देवनगर से रामेश्वरम् नाम पड़ने की अन्तर्कया | स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
रावण वध के बाद ब्रह्म-हत्या दोष के निवारण के लिए श्री राम ने देवनगर में शिवलिंग की स्थापना की और वहाँ पूजा की। राम द्वारा ईश्वर की पूजा किए जाने के कारण इस स्थान का नाम रामेश्वरम् पड़ा।

(ड) धनुष्यकोटि का क्या महत्व है?
उत्तर
धनुष्यकोटि में पत्ररामनम नामक स्थान पर राम ने समुद्रराज वरुण से सागर पार करने हेतु मार्ग मांगा था। वरुण द्वारा अनुमति मिलने पर कुपित हो कर राम ने धनुष पर दाण सजा लिया था। तब वरुण ने प्रकट होकर क्षमायाचना की और मार्ग दिया।

भाषा की बात

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
दृश्य, समुद्र, प्रातःकाल, अस्तित्व, उत्सर्ग, रामेश्वरम्, स्थापत्य, गर्भगृह, संभवतः
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए
लालषा, हिरदय, स्थर, पंक्ती, तीरथ, मालुम, शोभाग्य, अनुमती, दृष्टीगोचर, पुराणिक।
उत्तर
लालसा, हृदय, स्थिर, पंक्ति, तीर्थ, मालूम, सौभाग्य, अनुमति, दृष्टिगोचर, पौराणिक।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
निर्माण, उदार, वतावरण, असीम, विराजमान, कलाकौशल।
उत्तर
निर्माण-मंदिर का निर्माण पूरा हो गया।
उदार-हमें उदार होना चाहिए।
वातावरण-शहर का वातावरण शुद्ध है।
असीम-मेरे मन में ईश्वर के लिए असीम श्रद्धा है।
विराजमान-बादशाह सिंहासन पर विराजमान हैं।
कलाकौशल-कारीगर का कलाकौशल देखकर सब दंग रह गए।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित वाक्यों में से विशेषण शब्द छाँटकर लिखिए
1. हमारी ट्रेन लम्बी पट्टी पर चल रही थी।
2. यह रेल का पुल स्थिर नहीं है।
3. इस कूप के मधुर जल का हमने पान किया।
उत्तर
1. लम्बी
2. स्थिर
3. मधुर

रामेश्वरम्प्र संग सहित व्याख्या

1. सबको अपने……….. नहीं रहे होंगे।

शब्दार्थ-वियोग=विरह । विगत=बीता हुआ। व्यथा = कष्ट। उल्लास=खुशी। अस्तित्व =हस्ती, सत्ता । उत्सर्ग= त्याग, बलिदान। सर्वस्व-सब कुछ। आनंदाश्रु=खुशी के आँसू।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक सुगम भारती-6 में संकलित यात्रा वृतांत ‘रामेश्वरम्’ से ली गई हैं। इसके लेखक हैं ‘महेन्द्र कुमार मानव’ । इन पंक्तियों में लेखक अपनी रामेश्वरम् यात्रा के क्रम में धरती और सागर के मिलन-स्थल पर हुए अनुभवों का वर्णन कर रहे हैं।

व्याख्या-लेखक कहते हैं कि अपने अस्तित्व को कोई भी समाप्त नहीं करना चाहता। यह बात केवल प्राणधारियों पर ही लागू नहीं होती। ऐसा नहीं है कि मनुष्य या जीव-जंतु ही अपने अंत समय में घबराहट या जीवन से तीव्र लगाव महसूस करते हैं और उसे छोड़ना नहीं चाहते। सागर किनारे जब पृथ्वी का अंत होता है तो दूर तक पानी की लहरों में पत्थर के टुकड़े दिखायी देते हैं, मानों वे अपने अस्तित्व से नाता न तोड़ पा रहे हों। परंतु कवि । कहते हैं कि बलिदान कष्टदायक ही हो यह अनिवार्य नहीं है। सर्वस्व त्याग में आत्मिक खुशी और संतोष भी छिपा होता है। हो सकता है पृथ्वी के समर्पण के आँसू उसकी खुशी के आँसू हों।

विशेष

  • प्रत्येक वस्तु या जीव का कहीं न कहीं अंत निश्चित है।
  • त्याग को महिमामंडित किया गया है।

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2. कहते हैं …………. दिलाता है।

शब्दार्थ-अनुमति=आदेश। कुपित =क्रोधित।

प्रसंग-पूर्ववत्

व्याख्या-धनुष्यकोटि से एक पौराणिक कथा जुड़ी है। इस कथा के अनुसार भगवान राम को लंका जाने के लिए समुद्र पार करना था। अतः पञरामनम में उन्होंने समुद्रराज वरुण से मार्ग देने की प्रार्थना की। परंतु वरुण के अनुमति न देने पर वे क्रोधित हो गए और उन्होंने धनुष पर बाण चढ़ा लिया। यह देख कर वरुण भयभीत हो गए और उन्होंने राम से क्षमा माँगी। तब जाकर राम शांत हुए।

विशेष

  • पौराणिक कथा का वर्णन है।
  • भगवान राम की महिमा का गुणगान है।

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MP Board Class 6th Special Hindi पत्र-लेखन

MP Board Class 6th Special Hindi पत्र-लेखन

मनुष्य अपने विचारों तथा भावों को क्रमबद्ध रूप से अपने मित्र व सम्बन्धियों को लिखकर, डाक द्वारा अथवा पत्रवाहक द्वारा भेजता है, उसे पत्र कहते हैं।

पत्र मुख्यतः तीन प्रकार के-

    1. प्रार्थना-पत्र,
  1. निजी पत्र,
  2. व्यावसायिक पत्र होते हैं।

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1. प्रार्थना-पत्र

प्रश्न 1.
अपने प्रधानाचार्य महोदय को 3 दिन के अवकाश प्राप्ति के लिए एक प्रार्थना-पत्र लिखो, जिसमें स्कूल न आने का कारण बीमारी हो।
उत्तर-
सेवा में,
श्रीमान प्रधानाचार्य महोदय,
शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, ग्वालियर

महोदय,
विनम्र प्रार्थना है कि मुझे गत रात्रि से तेज बुखार आ गया है, इस कारण मैं विद्यालय आने में असमर्थ हूँ।
कृपया आप मुझे दिनांक 15-07………..से 17-07…… तक 3 दिन का अवकाश प्रदान करने की कृपा करें।

दिनांक : 15-07…………..

आपका आज्ञाकारी शिष्य
रामप्रसाद
कक्षा 6 (ब)

प्रश्न 2.
अपने प्रधानाचार्य महोदय को स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए एक प्रार्थना-पत्र लिखो।
उत्तर-
सेवा में,
श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय,
शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, उज्जैन

विषय स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र हेतु आवेदन-पत्र महोदय,

विनम्र निवेदन है कि हाल ही में मेरे पिताजी का स्थानान्तरण वरिष्ठ अधिकारी के पद पर उज्जैन से भोपाल हो गया है। अतः मुझे यह विद्यालय छोड़ने पर विवश होना पड़ रहा है।

अतः श्रीमान् जी से प्रार्थना है कि आप मुझे स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र निर्गत करने का कष्ट करें। आपकी अति कृपा होगी।

दिनांक: 05-07…………..

आपका आज्ञाकारी शिष्य
कमल शर्मा
कक्षा 6 (अ)

प्रश्न 3.
अपने प्रधानाध्यापक महोदय को शुल्क-मुक्ति हेतु एक प्रार्थना-पत्र लिखिए।
उत्तर-
सेवा में,
श्रीमान् प्रधानाध्यापक महोदय,
शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, रीवा
विषय-शुल्क-मुक्ति हेतु प्रार्थना-पत्र

महोदय,
प्रार्थना यह है कि मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यन्त शोचनीय है। पिता की मासिक आय मात्र 4000/- है। घर में परिवार के सदस्यों की संख्या आठ है। मेरे दो छोटे भाई-बहन भी विद्यालय पढ़ने जाते हैं। ऐसी स्थिति में शुल्क देना तो दूर घर में भरण-पोषण की भी समस्या बनी रहती है।

अतः आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि मुझे पूर्ण शुल्क-मुक्ति प्रदान करके अनुगृहीत करें जिससे मेरी पढ़ाई लगातार जारी रह सके। आपकी इस महती कृपा के लिए मैं आजन्म आभारी रहूँगा।

दिनांक: 06-07……….

आपका आज्ञाकारी शिष्य
अक्षय कुलश्रेष्ठ
कक्षा 6 (अ)

प्रश्न 4.
अपने प्रधानाध्यापक को एक प्रार्थना-पत्र लिखिए जिसमें अपने भाई के विवाह में जाने हेतु तीन दिवस के अवकाश की मांग की गई हो।
उत्तर-
सेवा में,
श्रीमान प्रधानाचार्य महोदय,
शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय,
इन्दौर (म. प्र.)

महोदय,
विनम्र निवेदन है कि मेरे बड़े भाई कौशलेन्द्र सिंह का शुभ विवाह दिनांक 17 अप्रैल, 20…….. का होना निश्चित हुआ है। मुझे भी उनके विवाह में उपस्थित होना है। अतः दिनांक 16-4-20… से 18-4-20…. तक का अवकाश देकर मुझ पर कृपा कीजिए। सधन्यवाद

आपका आज्ञाकारी शिष्य
दिनेश सिंह भदौरिया
कक्षा 6 ‘क’

दिनांक 14.4.20……..

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2. निजी पत्र

प्रश्न 5.
अपने पिताजी को वार्षिक परीक्षा की तैयारी की जानकारी देने हेतु एक पत्र लिखिए।
उत्तर-
छात्रावास मिशन उ. मा. विद्यालय
जबलपुर (म. प्र.)

आदरणीय पिताजी,

सादर चरण स्पर्श।
कल प्रातः आपका मित्र मिला। मैं यहाँ पर स्वस्थ एवं सानन्द हूँ, आशा है कि भगवान की कृपा से आप सब भी सकुशल होंगे।

मैं यहाँ पर अपनी वार्षिक परीक्षा की तैयारी करने में जुटा हुआ हूँ। इसलिए पत्र देने में विलम्ब हुआ। वार्षिक परीक्षा सम्भवतः 10 मार्च से शुरू होंगी।

मैं साल के प्रारम्भ से ही पूर्ण मनोयोग से पढ़ाई कर रहा हूँ। अत: मुझे अपनी परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने की पूर्ण आशा है। आपका आशीर्वाद ही इस दिशा में मेरे लिए आशा का सम्बल सिद्ध होगा। माताजी को चरण स्पर्श तथा छोटे भाई बहिनों को मेरा ढेर सारा प्यार।

पत्रोत्तर की प्रतीक्षा में
आपका प्रिय पुत्र
कनिष्क

प्रश्न 6.
अपने मित्र को पत्र लिखकर होली मनाने के अपने अनुभव लिखिए।
उत्तर-

625, नेहरू एन्क्ले
व हवाई अड्डा , इन्दौर (म. प्र.)
दिनांक 24 मार्च, 20…….

प्रिय मित्र सुरेश गुप्ता,

नमस्ते!
तुमने मुझे अभी तक पिछली मुलाकात के बाद कोई पत्र नहीं लिखा है। मुझे तुम्हारे विषय में बहुत चिन्ता है। तुम्हारा स्वास्थ्य ठीक होगा और पढ़ाई भी ठीक चल रही होगी। वार्षिक परीक्षा शुरू होने ही वाली है। मैं अपने गाँव चला गया था, होली मनाने। मैं समझता हूँ वहाँ का अनुभव मैं तुम्हारे लिए पत्र में लिखें।

गाँव में मैंने देखा कि लोगों में होली के उत्सव का भारी उत्साह भरा था। वे लोग आपस में प्रेम से गले मिले। गुलाल लगाया। उनके हृदय में सपाट प्रेम का जुनून अवश्य था, परन्तु जो दुःख देने वाली बात थी, वह यह कि वे लोग शराब आदि बहुत पीते हैं। नशे में भी कभी-कभी दुःखदायी घटनाएँ भी कर बैठते हैं। लोगों को गुलाल और रंग से होली खेलते देख रहा था। उन्होंने इन रंगों में बहुत से एसिड आदि मिलाए हुए थे। जो शरीर पर लगने के बाद जलन पैदा करते थे। . अंत में, मेरा सुझाव है कि गाँव में जाकर, होली से पूर्व लोगों को इन हानियों को बताया जाय। उन्हें होली के त्यौहार का महत्व ‘हेल-मेल’ का बढ़ावा देना-बताया जाए। अपने माता-पिता, भाई-बहन सभी को मेरा प्रणाम।

पत्र की प्रतीक्षा में
तुम्हारा प्रिय
सौमित्र सिंह

प्रश्न 7.
परीक्षा में सफल होने पर मित्र को बधाई पत्र लिखिये।
उत्तर-

7/65, नेहरू नगर,
भोपाल (म. प्र.)
दिनांक : 24 मई…………

प्रिय मित्र सुरेश,

नमस्कार।
तुम्हारा पत्र मिला। पढ़कर बेहद प्रसन्नता हुई कि तुमने कक्षा 5 की परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किये हैं। परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने पर मेरी बधाई स्वीकार करो। भविष्य में भी तुम अपने परिश्रम से सफलता के नित नये सोपान चढ़ो इस शुभकामना के साथ पुनः हार्दिक बधाई। तुम्हारे आदरणीय पिताजी व माताजी को सादर चरण स्पर्श।

तुम्हारा मित्र
आकाश

प्रश्न 8.
अपने ग्राम की सफाई के लिए ग्राम पंचायत को एक पत्र लिखिए।
उत्तर-
सेवा में,
ग्राम प्रधान महोदय,
ग्राम पंचायत, बीजापुर समसी (म. प्र.)

मान्यवर,
मैं बीजापुर समसी ग्राम का निवासी हूँ। ग्राम पंचायत में सरकारी सफाई कर्मचारी की नियुक्ति सरकार द्वारा की गई है। लेकिन ग्राम पंचायत के सभी मुहल्लों और नगरों में वह सफाई करने के लिए नहीं आता है। कृपया, उस कर्मचारी को नियमित सफाई के लिए भेजने का कष्ट करें। उसके द्वारा काम पर न आने से गाँव-गलियों की नालियाँ गन्दगी से भरी पड़ी हैं। मच्छर पैदा हो रहे हैं। इन मच्छरों के कारण बीमारियों के फैलने का खतरा पैदा हो गया है। अतः आपसे सानुरोध निवेदन है कि सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की कृपा करें।

धन्यवाद
दिनांक 14.4.20……

निवेदक
क, ख, ग ग्राम निवासी

प्रश्न 9.
अपने मित्र को स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की सलाह देते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर-

142, गाँधी पार्क कॉलोनी
ग्वालियर (म. प्र.) दिनांक :
16 अप्रैल, 20….

प्रिय मित्र हरिमोहन,

नमस्कार।
आपके पत्र को पाकर बेहद प्रसन्नता हुई। तुमने कक्षा-6 की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली, यह सूचना पाकर मुझे अपार खुशी हुई। अब समझता हूँ कि इस सत्र की समाप्ति से तुम्हारा ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू हो जाएगा। इस समय गर्मी भी बहुत पड़ रही है। लेकिन कभी-कभी मौसम जल्दी-जल्दी बदलाव ले लेता है। ऐसी दशा में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही इस तरह के मौसम में मच्छर और अन्य बीमारी फैलाने वाले कीटाणु अधिक जन्म लेते हैं। उनसे बचाव के उपाय तुम्हें करना चाहिए। प्रातः सूर्योदय से पूर्व नित्य कर्म से निवृत्त होकर दौड़ लगाने का प्रतिदिन कार्यक्रम रखिए। शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा बनाए रखने से बीमारियों का असर नहीं होता है। स्वच्छ और ताजा आहार लीजिए फलों का सेवन भी नियमित करते रहिए। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ दिमाग रहता है। बस इसी के साथ अपने माता-पिता को मेरा चरण स्पर्श कहिए। पत्र देना न भूलें।

इति

तुम्हारा मित्र
मनवीर सिंह चौधरी

प्रश्न 10.
अपने मित्र को पत्र लिखकर गणतन्त्र दिवस की बधाई दीजिए।
उत्तर-

17/29, महाकालेश्वर मार्ग,
उज्जैन (म. प्र.)
दिनांक : 16 मार्च, 20…..

प्रिय मित्र सोहनजी मोहनकुमार,

नमस्ते
तुम्हारा पत्र प्राप्त हुआ, पढ़कर अति प्रसन्नता हुई। तुम अपने सहपाठियों सहित प्रसन्न हो, यह जानकर मुझे भी हर्ष हुआ। अर्द्धवार्षिक परीक्षा में तुमने अच्छे अंक पाए, इसके लिए तुम्हें साधुवाद । साथ ही, तुम्हारे विद्यालय में इस वर्ष जनवरी माह में 26 जनवरी को गणतन्त्र दिवस मनाया गया। तुमने कार्यक्रम में भाग लिया और अच्छे पुरस्कार लिए, इसके लिए भी तुम्हें भूरि-भूरि साधुवाद। साथ ही गणतन्त्र दिवस के पूरे उत्सव के लिए तुम्हें बधाई है। आशा करता हूँ कि आगे आने वाले गणतन्त्र दिवस समारोह पर मैं भी आकर दर्शक बनें।

तुम्हारा शुभेच्छु
मोहन स्वरूप गर्ग

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3. व्यावसायिक पत्र

प्रश्न 11.
किसी पुस्तक प्रकाशक/विक्रेता से पुस्तकें मंगाने के लिए एक पत्र लिखिए।
उत्तर-
मैं. शिवलाल अग्रवाल कं.
खजूरी बाजार, इन्दौर
दिनांक : 02-07……………………..

मान्यवर,
कृपा करके आप निम्नलिखित पुस्तकें उचित कमीशन काटकर नीचे लिखे पते पर वी. पी. द्वारा भेजने का कष्ट करें।
MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti पत्र-लेखन 1

मेरा पता
अक्षय कुमार
45, नेपियर टाउन, जबलपुर (म. प्र.)

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MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 15 स्पष्टवादी

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 15 स्पष्टवादी

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 15  प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. (क) सही जोड़ी बनाइए
1. दिन – (क) अभिनेता
2. संगीत – (ख) प्रार्थी
3. क्षमा – (ग) वादन
4. रंगमंच – (घ) रात
उत्तर
1. (घ), 2. (ग), 3. (ख), 4. (क)

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प्रश्न (ख)
दिए गए शब्दों में से उपयुक्त शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. मि. रौनकलाल हमेशा…….की चेष्टा करते हैं। (भाषण देने/चुप रहने)
2. अन्दर से वह संवाद…….बोल रहे थे। (अटककर/धाराप्रवाह)
3. किसी तरह वह नाटक….हुआ। (गाकर/लिखकर)
4. लालाजी गाना……..बोले। (गाकर लिखकर)
उत्तर
1. भाषण देने
2. धाराप्रवाह
3. समाप्त
4 गाकर।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 15 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए

(क) खरा आदमी कैसी बातें नहीं करता?
उत्तर
खरा आदमी चिकनी चुपड़ी बातें नहीं करता।

(ख) साहित्यकार की जयंती पर कौन-कौन से कार्यक्रम आयोजित किए गए थे?
उत्तर
साहित्यकार की जयंती पर कविता पाठ, संगीत-वादन तथा दो नृत्य आयोजित किए गए थे।

(ग) लालाजी, चतुर्वेदी जी की किस बात पर बिगड़ गए?
उत्तर
चतुर्वेदी जी ने लालाजी के गाने को पसंद नहीं किया और कहा कि आप अपना समय व्यापार बढ़ाने में लगाएँ तो बेहतर होगा। इसी बात पर लाला जी भड़क गए।

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(घ) लोग सेठ जी की आवाज की तुलना किससे करते थे?
उत्तर
लोग सेठ जी की आवाज की तुलना ‘लता मंगेशकर’ और ‘मोहम्मद रफी’ से करते थे।

(ड) किशोरीलाल कौन थे? उन्हें क्या खत सवार थी?
उत्तर
किशोरीलाल लेखक के बॉस थे। उन्हें यह खब्ल सवार थी कि वे बहुत बड़े संगीतज्ञ हैं।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन-से-पाँच वाक्यों में दीजिए

(क) लेखक को सबसे सरल क्या बनना लगा और क्यों ?
उत्तर
लेखक को सबसे सरल स्पष्टवादी बनना लगा। उन्हें लगा कि सच्चाई की राह सीधी होती है। झूठ बोलने और चिकनी-चुपड़ी बातें करने में खतरा अधिक है। इसलिए
उन्होंने स्पष्टवादिता को अपनाया।

(ख) रौनकलाल जी को क्या मर्ज था और उसका क्या परिणाम निकला?
उत्तर
रौनकलाल जी को भाषण देने का मर्ज था। वे जब भाषण देते थे तो समय, प्रसंग और श्रोता की’ रुचि का खयाल नहीं रखते थे। परिणाम यह हुआ कि एक दिन उन्होंने अपने भाषण से एक उत्सव का सत्यानाश कर दिया और फिर इसी बात पर लेखक से उनकी झड़प हो गई।

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(ग) संयोजक विद्यार्थी ने रौनकलाल के सामने क्या प्रस्ताव रखा?
उत्तर
संयोजक विद्यार्थी को रोनकलाल के भाषण देने के मर्ज का पता नहीं था। अज्ञानतावश उसने रौनकलाल से साहित्यकार के जीवन के बारे में पाँच मिनट बोलने का प्रस्ताव रखा। नतीजा यह हुआ कि उनके भाषण ने पूरे उत्सव को मटियामेट करके रख दिया।

(घ) लेखक घर में स्पष्टवादी क्यों नहीं बन सका?
उत्तर
लेखक घर में स्पष्टवादी नहीं बन सका क्योंकि इस आदत के कारण पत्नी से कई बार उनकी झड़प होने से बची। उनका जीवन दूभर हो गया। अतः उन्होंने स्पष्टवादिता को त्यागने का फैसला कर लिया।

(ड) लेखक कटुवादी होने से क्यों बचना चाहता था?
उत्तर
लेखक कटुवादी होने से इसलिए बचना चाहता था ताकि वह सबका प्रिय बना रह सके। उसकी जिंदगी
चैन से गुजरे तथा उसके मित्र और सगे-संबंधी उससे खुश रह सकें।

भाषा की बात

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
अज्ञानतावश, स्पष्टवादिता, समानांतर, कटुवादी, रंगमंच।
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए
दूनीया, नीदेशक, कवी, जिंदगी
उत्तर
दुनिया, निदेशक, कवि, जिंदगी

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों का उच्चारण करते हुए हिंदी अंग्रेजी और उर्दू के शब्द छाँटकर लिखिए
स्पष्टवादी, मिस्टर, प्रतिज्ञा, गोष्ठी, बॉस, फर्म, सम्मेलन, मेहरबान, आरम्भ, मर्ज, चिट, रोशन, पैन, महफिल।
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 15 स्पष्टवादी 1

प्रश्न 7.
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
नौ दो ग्यारह होना, दिन रात एक करना, पार उतारना, राग अलापना, गाठ बांधना।
उत्तर
पुलिस को देखकर चोर नौ दो ग्यारह हो गया।
कक्षा में प्रथम आने के लिए मैने दिन रात एक कर दिया
केवट ने अपनी नैया से श्रीराम को पार उतार दिया।
वह किसी की नहीं सुनता, अपना राग अलापता रहता है। मोहन ने राजू की बात गांठ बांध ली है।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित शब्दो में ‘र’ के विभिन्न रूपों का प्रयोग कर शुद्ध शब्द बनाइए
खरचें, टरक, पिरिय, मरज, टरामगाड़ी, कार्यकर्म, परस्ताव, राष्टरपति, चरचा, फरम, स्वारथी।
उत्तर
खर्च, ट्रक, प्रिय, मर्ज, ट्रामगाड़ी, कार्यक्रम, प्रस्ताव, राष्ट्रपति, चर्चा, फर्म, स्वार्थी।

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित वाक्यों में से विकारी एवं अविकारी शब्दों को रेखांकित कीजिए

  • वह शीघ्र चला आया।
  • लड़कों को बुलाओ।
  • उसने खाना खाया।
  • खरा आदमी किसी से चिकनी चुपड़ी बातें नहीं करता।
  • अभिनेता रो रहे थे।

उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 15 स्पष्टवादी 2

स्पष्टवादी प्रसंग सहित व्याख्या

1. हमारे प्रिय-मित्र मिस्टर रौनकलाल को भाषण देने का मर्ज है। राजनैतिक सम्मेलन हो, साहित्यिक गोष्ठी हो अथवा रिक्शेवालों की हड़ताल से संबंधित समारोह वे भाषण देने की चेष्टा अवश्यक करते हैं। उनके भाषण का हाल यह है कि आरंभ में पाँच सौ व्यक्ति हों तो भाषण के खत्म होने तक पाँच रह जाएँ। वे क्या बोलते हैं या तो वे जानते हैं या उनका भगवान । कोई चुप होने को कहता है तो हाथापाई करने पर उतर आते हैं।

शब्दार्थ-मर्जबीमारी । चेष्टा=प्रयास । साहित्यिक=साहित्य से संबंधित। गोष्टी=बैठक।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक सुगम भारती-6 में संकलित ‘स्पष्टवादी’ से ली गई हैं। इसके लेखक ‘बरसाने लाल चतुर्वेदी’ हैं। इन पंक्तियों में वे अपने मित्र के स्वभाव पर व्यंग्य कर रहे हैं।

व्याख्या-लेखक के मित्र रौनकलाल को भाषण देने की इतनी बुरी आदत है कि वे बहाना ढूँढ़ते रहते हैं। चाहे कोई भी अवसर हो, वे चूकते नहीं हैं। इतना ही नहीं उनका भाषण एक बार शरू हो जाए तो रुकने का नाम भी नहीं लेते। यहाँ तक कि श्रोता धीरे-धीरे खिसकने लगते हैं पर उनका बोलना बंद नहीं होता। उनके भाषण में एक कमी यह भी है कि वे प्रसंग से अलग हटकर बोलते हैं, जो श्रोता की समझ के बाहर होता है। यदि कोई साहस करके उन्हें चुप कराने का प्रयास करता है, तो वे उसके साथ मारपीट पर उतर आते हैं।

विशेष

  • मानवीय स्वभाव की कमजोरी पर व्यंग्य किया गया है।

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2. बाहर की दुनिया में तो स्पष्टवादिता की प्रतिज्ञा निभ गई, किंतु घर में इस प्रतिज्ञा को झक मारकर तोड़ना पड़ा। दो-एक बार स्पष्टवादिता के चक्कर में श्रीमती जी से झगड़ा होते-होते बचा। मैने सोचा कि प्रतिज्ञा के पीछे ज्यादा पडूंगा तो वह दिन दूर नहीं, जब मेरी जिंदगी दूभर हो जाएगी।

शब्दार्थ-प्रतिज्ञा = शपथ, कसम । दूभर = कठिन, मुश्किल।

प्रसंग-पूर्ववत्

व्याख्या-अपनी स्पष्टवादिता के कारण बाहर की दुनिया में जब मुश्किलें खड़ी होने लगी तो लेखक ने बोलना ही छोड़ दिया परंतु अपनी प्रतिज्ञा नहीं छोड़ी। लेकिन घर में यह संभव नहीं था। अपनी आदत के कारण कई बार पली से झड़प होने से बची। लेखक समझ गए कि अगर उन्होंने स्पष्टवादिता की आदत नहीं छोड़ी तो उनका जीवन कठिन हो जाएगा।

विशेष

  • स्पष्टवादिता की कठिनाई को प्रकट किया गया है।
  • मानवीय स्वभाव पर व्यंग्य किया गया है।

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 3 The Family and the Society

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 3 The Family and the Society

MP Board Class 6th Social Science Chapter 3 Text Book Exercise

MP Board Class 6th Social Science Chapter 3 Short Answer Type Questions

Question 1.
Question (a)
What is the unit of family?
Answer:
Father, mother, brother and sister together constitute a family. In bigger families grandfather, grandmother, uncles, aunts also live with their children. This type of family is called joint family.

Question (b)
How is a person known in society?
Answer:
A person known in society through the relationship with the neighbour and other families.

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Question (c)
Who is considered to be the first teacher of a child?
Answer:
Parents are considered to be the first teacher of a child.

Question (d)
What occupations are taken up by people in a society?
Answer:
The occupations taken up by people in a society are interdependence among people, the spirit of working together, respect for the ideas of others and the capacity to analyse social events in a right manner.

MP Board Class 6th Social Science Chapter 3 Long Answer Type Questions

Question 2.
Question (a)
What do you understand by a nuclear and joint family?
Answer:
A nuclear family is usually small family consisting of father, mother, brother and sister. A joint family, on the other hand, also has grandfather, grandmother, uncles, aunts and their children.

Question (b)
How a society is formed? What evils can be controlled by the society?
Answer:
A society is a network of social relations. In fact, a society is formed by the relationship among many families. Man is a social animal, so man lives in a family and society. Many problems come in the life of a man, like selection of a partner for marriage and bringing up children and educating them. The members of the family and their family friends help to resolve these problems.

A society can control many social evils like child – marriage, large families not giving elementary education to children.

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Question 3.
Fill in the blanks:

  1.  …………. accept the responsibility of their children naturally.
  2. A small family is considered to be ……………. family.
  3. The unit of the family is ……………
  4. The unit of the society is …………..

Answer:

  1. parent
  2. an ideal
  3. individual
  4. system

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Project Work

Question 1.
Make a list of five nuclear familes and five joint families. Observe one nucelar family and one joint family. Write a note on their activites, interdependence and social relation?
Answer:
Please do with the help of your teacher.

Question 2.
Observe the food habits, life style, traditions and festivals of people around you. Write a brief report on them?
Answer:
Please do with the help of your teacher.

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MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti महत्त्वपूर्ण पाठों के सारांश

MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions महत्त्वपूर्ण पाठों के सारांश

कटक वचन मत बोल

प्रस्तुत पाठ रामेश्वर दयाल दुबे की रचना है। इस पाठ में लेखक ने स्पष्ट किया है कि वाणी अति महत्वपूर्ण है। संसार में वाणी का वरदान केवल मनुष्य को ही प्राप्त है। अतः उसे सदैव विनम्र और मृदुभाषी होना चाहिए। विनम्र व्यक्ति सदैव लम्बी आयु प्राप्त करता है। कटु वचन लोगों को चुभ जाते हैं। श्रोताओं पर कटु वचनों का प्रभाव ऐसा होता है कि इससे बड़े-बड़े अनर्थ हो जाते हैं।

यद्यपि सत्य आचरण और सत्य कथन दोनों का पालन करना भी कठिन होता है परन्तु दोनों के पालन में मनुष्य को अपनी वाणी पर नियन्त्रण रखना चाहिए। विनम्रतापूर्वक कटु सत्य को भी लोगों तक पहुँचाया जा सकता है। उससे दूसरे को ठेस भी नहीं लगती है और सत्य बात भी कह दी जाती है। इसे ही वाणी की चतुराई कहते हैं। इससे ही मनुष्य का व्यक्तित्व निखरकर प्रभावशाली हो जाता है।

लेखक ने अनेक उदाहरण देकर यही तथ्य सामने रखा है कि जीभ में कोमलता है, अतः हमें कोमल और मृदुभाषी होना चाहिए। वाणी के प्रयोग से ही अनेक युद्ध हुए हैं। महाभारत युद्ध वाणी के दुरुपयोग का ही नतीजा था। मीठा वचन औषधि के समान लाभकारी होता है और कटु वचन वाण सदृश जो हृदय को चीर देता है। मृदु वचन अमृत समान प्रभावशाली होता है। वाणी की चतुराई से कटु सत्य को प्रिय और मधुर बनाया जा सकता है। अतः हमें अपने व्यक्तित्व को लोकप्रिय बनाना है, तो हमें मृदुभाषी होना पड़ेगा।

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हार की जीत

प्रस्तुत कहानी ‘हार की जीत’ में सुदर्शन जी ने इस तथ्य को सभी के सामने उजागर कर दिया है कि मनुष्य अपने श्रेष्ठ विचारों और सद्व्यवहार से बड़े से बड़े दुर्दान्त डाकुओं और क्रूर हृदय वाले व्यक्तियों के हृदय को भी परिवर्तित कर सकता है। इस कहानी के पुरुष पात्र दो हैं-एक बाबा भारती और दूसरा डाकू खड्गसिंह। बाबा भारती के पास अमूल्य सम्पत्ति है उनका घोड़ा सुलतान । बाबा भारती अपने घोड़े से बहुत प्यार करते हैं। वह घोड़ा बाबा भारती का परिवारी सदस्य है।

उसी क्षेत्र में डाकू खड्गसिंह रहता है। उसके नाम से सभी काँपते हैं। उसने बाबा भारती के घोड़े की विशेषताओं को सुना। वह आता है, घोड़े को देखकर वह बाबा भारती से कहता है कि मैं इस घोड़े को तुम्हारे पास नहीं रहने दूँगा। बाबा भारती घोड़े की रखवाली के लिए रात-दिन चिन्तित रहने लगे। एक दिन कंगले अपाहित का वेश धारण करके खड्गसिंह ने घोड़े को बाबा भारती से छीन लिया। बाबा भारती ने सोचा कि यदि घोड़े की इस चोरी का लोगों को पता चलेगा कि डाकू खड्गसिंह ने अपाहिज के वेश में बाबा को ठगकर घोड़ा छीन लिया है, तो गरीबों का आगे से कोई विश्वास नहीं करेगा। इसलिए बाबा भारती ने खड्ग सिंह डाकू को आवाज लगाते हुए कहा कि तू मेरी एक विनती सुनं ले कि इस घटना को किसी के सामने मत कहना, नहीं तो लोग गरीबों और अपाहिजों का विश्वास नहीं करेंगे।

बाबा भारती ने घोड़े की ओर से अपनी आँखें फिरा ली और अपनी कुटिया की ओर चल दिए। घोड़े की ओर आसक्ति नाम मात्र भी नहीं रह गई। परन्तु बाबा भारती के वचनों कि ‘गरीबों और अपाहिजों का कोई विश्वास नहीं करेगा,’ की गूंज डाकू खड्गसिंह के कानों में बार-बार उठ रही थी। अन्ततः डाकू खड्गसिंह का हृदय परिवर्तित हुआ। वह बाबा भारती के घोड़े सुलतान को अस्तबल में चुपचाप बाँध कर चला गया। इस कहानी का मूल सन्देश यह है कि मनुष्य का सद्व्यवहार और अच्छे विचार कठोर हृदय निर्दयी लोगों तक के हृदय को बदल देते हैं।

हम बीमार ही क्यों हों ?

प्रस्तुत पाठ ‘हम बीमार ही क्यों हों ?’ में डॉ. आनन्द ने बड़ी तथ्यपरक परक बात बहुत सरल रूप में हमें समझाई है कि हम लोग ऐसा आचरण अपनाएँ जिससे हम कभी बीमार न हों और सदैव स्वस्थ बने रहें। किसी भी बीमारी का उपचार कराने से तो यही अच्छा है कि हम बीमार ही न पड़ें। लेखक ने अपना स्वास्थ्य सामान्य बनाए रखने के लिए नियम बताए हैं, उन नियमों का पालन करते रहने से मनुष्य सदैव स्वस्थ बना रह सकता है क्योंकि बीमारी का निदान कराने की बजाए बीमार न पड़ना ही बुद्धिमानी है।

हमारा शरीर-पाँच तत्वों के योग से निर्मित है।

वे तत्व हैं-

  1. पृथ्वी,
  2. जल,
  3. अग्नि,
  4. गगन (आकाश),
  5. समीर (वायु)।

इन तत्वों में से कोई भी एक या दो तत्व यदि हमारे शरीर में कम हो जाते हैं, तो हम बीमार हो जाते हैं। आरोग्य लाभ के लिए इन सभी तत्वों का उपयोग बुद्धिमानी से करना चाहिए।

इन पाँच तत्वों को सदा से स्वच्छ बनाए रखने का प्रयास किया जाता रहा है। स्वच्छ निर्मल आकाश में सांस लेने से और पवित्र जल से प्राण शक्ति मिलती है। सूर्य का प्रकाश हमें गर्मी देकर हमारे अन्दर विटामिनों को संरक्षित करता है। धरती से हमें अन्न, फल और पेय पदार्थ मिलते हैं जिनसे हमें स्वास्थ्य, बल और तेज की प्राप्ति होती है।

वन-उपवनों की रक्षा करनी है। अणुबमों के परीक्षणों से इन पाँचों तत्वों को सुरक्षित बचाने का प्रयास करना चाहिए। रासायनिक खादों का उपयोग सीमित करना होगा। आकाश तत्व आरोग्य-सम्राट है। साफ-सुथरे स्थान पर टहलना चाहिए। सूर्य नमस्कार से शरीर में लाल रक्तकण उत्पन्न होते हैं। इससे हमारी जीवनी शक्ति बढ़ती है। जल हमारे रक्त में सत्तर प्रतिशत होता है। हम थलचरों को पृथ्वी को विशुद्ध बनाने का प्रयास करना चाहिए। भोजन में आहार संतुलित होना चाहिए। अत: इस भौतिक शरीर को भौतिक तत्वों के आधार पर ही स्वस्थ रखा जा सकता है।

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डॉ. होमी जहाँगीर भाभा

आजकल विश्व के सर्वाधिक देशों में अणु शक्ति का प्रयोग बहुत अधिक किया जा रहा है। हमारे देश में अणु शक्ति का विकास पर्याप्त रूप से किया जा रहा है। अणुशक्ति का विकास करने वाले सबसे पहले भारतीय वैज्ञानिक का नाम है-डॉ. होमी जहाँगीर भाभा।

इनका जन्म 30 अक्टूबर, सन् 1909 ई. में सुशिक्षित एवं सम्पन्न पारसी परिवार में हुआ था। इनके पिता श्री जे. एस भाभा मुम्बई के प्रसिद्ध बैरिस्टर थे। होमी जहाँगीर बचपन से कुशाग्र बुद्धि थे। उन्हें बचपन में नींद नहीं आती थी। वे रोते रहते थे, अतः डॉक्टरों की सलाह से उन्हें ग्रामोफोन पर संगीत सुनाया गया। वे चुप होकर सुनने लगे और संगीत की ओर उनका झुकाव हो गया।

बालक होमी ने 15 वर्ष की आयु में सीनियर कैम्ब्रिज की परीक्षा उत्तीर्ण की। मुम्बई विश्वविद्यालय से ई. एम. सी. की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इंग्लैण्ड जाकर उन्होंने इंजीनियरिंग की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्हें गणित और भौतिक विज्ञान के प्रति बहुत झुकाव था। उन्होंने विद्युत एवं चुम्बक के अतिरिक्त कॉस्मिक किरण की मौलिक खोजों पर भाषण दिया। सन् 1941 में पी-एच. डी. की उपाधि मिली। भारत आकर बंगलुरू में भारतीय विज्ञान संस्थान में रीडर नियुक्त हुए। कॉस्मिक किरणों पर खोज करने के कारण लंदन की रॉयल सोसायटी का इन्हें फैलो चुना गया। इन्हें विभिन्न विश्वविद्यालयों से डी. एस-सी. की उपाधि मिली।

सन् 1951 ई. में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। सन् 1954 ई. में इन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण की पदवी से अलंकृत किया। उसी वर्ष अणु शक्ति निर्माणकारी अन्तर्राष्ट्रीय कांग्रेस के जिनेवा में अध्यक्ष चुने गए। वे अणु शक्ति से अणुबम बनाना नहीं चाहते थे। शान्तिपूर्ण रचनात्मक कार्यों के लिए इसका प्रयोग करना चाहते थे। इसलिए इनके अनुरोध से मुम्बई के दौराबजी टाटा ट्रस्ट द्वारा ‘टाटा इन्स्टीट्यूट ऑफ फण्डामेंटल रिसर्च’ संस्था की स्थापना की गयी। वे इस संस्था के डाइरेक्टर बनकर बंगलुरू से मुम्बई आ गये।

डॉ. भाभा अणुशक्ति कमीशन के अध्यक्ष रहे। ट्रॉम्बे का अणु शक्ति केन्द्र उनकी महान् कृति है। डॉ. भाभा को संगीत, नृत्य और चित्रकला में भी रुचि थी। उनका जीवन सादा, सरल और उदार था। 24 जनवरी, 1966 ई. में डॉ. भाभा जिनेवा की यात्रा पर थे। भारतीय विमान सेवा की ‘कंचनजंघा’ नामक जेट विमान जिनेवा के पास बहुत ऊँचे पहाड़ माउण्ट ब्लॉक’ से टकरा गया। उस दुर्घटना में डॉ. भाभा की मृत्यु हो गई।

नारियल का बगीचा-केरल

“सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्ताँ हमारा” के अनुसार भारत की प्राकृतिक सौन्दर्य-सम्पदा सर्वोपरि है। चारों ओर नारियल ही नारियल के वृक्ष खड़े देख कर केरल को नारियल का बगीचा कहा जा सकता है। केरल की सीमाएँ-पश्चिम में अरब सागर तक हैं। उसकी पूरी पट्टी पर नरियल के कुंज ही दीख पड़ते हैं। यह भाग नारियल के विशाल बगीचे सदृश लगता है। नारियल का वृक्ष वहाँ पर कल्पवृक्ष कहलाता है। इससे अमृत समान मीठा पानी मिलता है। गिरी का साग-सब्जी और चटनी में प्रयोग किया जाता है। गोले का तेल निकाला जाता है जिसका साबुन बनाने और शरीर में मालिश के लिए प्रयोग करते हैं। नारियल से रस्सी, मोटे रस्से, चटाई, कूँची, पायदान बनते हैं। इसके बड़े छिलके से कटोरे, प्याले तथा चमचे बनाए जाते हैं। इसकी लकड़ी से मकान और पत्तों से छत बनाते हैं।

केरल में 400 से 500 सेंटीमीटर तक वर्षा होती है। पर्वतीय क्षेत्र जंगलों से ढका हुआ है। वनों में सागौन, शीशम, रबर और चन्दन के वृक्ष होते हैं। इन वृक्षों के आधार पर कई उद्योग-धन्धे जन्म लेते हैं। पहाड़ीनुमा जमीन होने के कारण रेलें बहुत कम होती है। सड़कें अच्छी हैं।

यहाँ के लोगों का खान-पान भी स्वास्थ्यवर्द्धक है। चावल मुख्य भोजन है। रसम्, सांभर, इडली और डोसा यहाँ के प्रिय खाद्य पदार्थ हैं। केरल के लोग लुंगी पहनते हैं। उनके कपड़े ढीले- ढाले होते हैं। स्त्रियाँ धोती और ब्लाउज पहनती हैं। कपड़े प्रायः सफेद होते हैं।

यहाँ का मुख्य त्यौहार ओणम है। नौकाओं की प्रतियोगिता प्रसिद्ध है। ओणम के त्यौहार पर लक्ष्मी और नौका की पूजा होती है। यहाँ लोग संगीत और नृत्य के बड़े शौकीन होते हैं। ‘कथकली’ यहाँ की प्रसिद्ध नृत्यकला है। अनेक कथाओं को नृत्य में ढाल कर ‘कथकली’ नृत्य विकसित किया गया है। यहाँ के लोग कॉफी पीने के शौकीन होते हैं।

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दस्तक

लेखक डॉ. शिवभूषण त्रिपाठी ने अपनी ‘दस्तक’ शीर्षक कहानी के माध्यम से यह सन्देश दिया है कि मनुष्यों में परस्पर सहयोग, सहानुभूति एवं सद्भाव रखना बहुत ही अनिवार्य है। इन भावों से मनुष्य एक-दूसरे की मदद करने और सह-भाव रखने से एक-दूसरे के प्रति अपने मनुष्य होने की अवस्था का ज्ञान करा देता है।

लेखक सदैव ही समाज सेवा के लिए तत्पर रहता है। वह अपने अधिकांश समय को पीड़ितों और जरूरतमंदों की सेवा में बिताया करता है। इस तरह की उसकी आदत को लेखक की पत्नी पसन्द नहीं करती है। एक बार ऐसा होता है कि लेखक अपने अन्य मित्र के किसी काम से अपने शहर के बाहर चला जाता है। वहाँ वह कई दिन रहता है। इधर लेखक का पुत्र तीन मंजिल के मकान की छत से गिर कर बेहोश हो जाता है। उसके गिरने की सूचना कानों-कान सुनकर मुहल्ले और आस-पास के लोगों को मिलती है, तो वे अपना काम-धाम छोड़ लेखक के पुत्र सोनू को अस्पताल ले जाते हैं और इसके इलाज पर होने वाले खर्चे को भी वे आपस में मिलकर पूरा कर लेते हैं।

लेखक की पत्नी भी इस सूचना से आहत है। वह भी अस्पताल पहुँचती है लेकिन सोनू की चोट की सहानुभूति में इकट्ठ लोगों की भीड़ देखकर लेखक की पत्नी भी बेहोश हो जाती है। उसे पता नहीं कि यहाँ क्या हो रहा है ? होश में आने पर पता चला कि वे सभी उसके पुत्र और उनके परिवार की सहायता के लिए इकटे हुए हैं। वह दंग रह जाती है।

उधर लेखक भी दूसरे शहर में एक बालक के पैर में आई हुई चोट के लिए उसकी सहायता करता है। घर आने पर सोनू के गिरने की दुर्घटना को सुनकर वह भी आश्चर्य करता है। परन्तु लेखक की पत्नी के हृदय का परिवर्तन हो चुका है। वह अब मानती है कि भलाई का नतीजा भलाई में ही मिलता है। सोनू स्वस्थ हो जाता है। उस दिन से लेखक की पत्नी भी शहर के प्रत्येक मुहल्ले में समाज सेवा और सहायता केन्द्र चलाना प्रारम्भ कर देती है।

श्रम की महिमा

संसार में वे ही व्यक्ति असफलताओं से घिरे हुए रहते हैं जो कार्य को प्रारम्भ करने से पहले उसके विषय में अच्छी तरह सोच-विचार नहीं करते और कार्य को बिना विचारे कर डालते हैं। दूसरे वे व्यक्ति जो कार्य के विषय में सिर्फ सोचते रहते हैं। उसे क्रिया रूप में परिणत नहीं करते। सोचकर न करना और बिना विचार और सोच के कार्य कर बैठना हमारी असफलता का मुख्य कारण है। जीवन में सफलता उन्हें ही मिलती है जो सदैव सोच-विचार कर उसके करने का प्रतिफल क्या होगा, इसे भी विचार करके जो कार्य करते हैं, वे सफल होते हैं।

गाँधीजी ने सफलता का मंत्र यही बताया कि सोच-विचार कर किया गया कार्य सफलता दिलाता है। खुशी मिलती है। गाँधीजी आत्मनिर्भर थे। वे सेवा करने को कोई ईश्वर मानते थे। इसका कारण भी गाँधीजी ने बताया कि सेवाधारी का मन निर्मल होता है। स्वभाव में मिठास और अपनापन होता है। गाँधीजी अपने आश्रम के प्रत्येक कार्य को स्वंय करते थे। चक्की घिसते थे, अनाज में से कंकड़ चुनते थे। वे रुई धुनते थे, सूत कातते थे, वस्त्र बुनते थे। आश्रम के प्रत्येक कार्य को करने के लिए सदैव तत्पर रहते थे। सेवा करने से ही मेवा मिलती है। यह श्रम ही ईश्वर है। दीन हीन की सेवा करने से ईश्वर प्रसन्न होता है। सेवा धर्म कठिन अवश्य है, परन्तु शुभ फलदायक और कल्याणकारी होता है।

गाँधीजी के अनुसार कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है। सभी कामों के करने में, दूसरों को अपनी सेवा अर्पित करने में कोई झिझक नहीं होना चाहिए।

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MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 14 सहनशीलता

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 14 सहनशीलता

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 14 प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. (क) सही जोड़ी बनाइए
1. दीप्ति – (क) व्याघ्र
2. सहन – (ख) विनय.
3. नर – (ग) हीन
4. दंत – (घ) शीलता
उत्तर
1. (ख), 2. (घ), 3. (क), 4. (ग)

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प्रश्न (ख)
दिए गए विकल्पों में से उपयुक्त विकल्प चुनकर रिक्त स्थान भरिए- .
1. नर व्याघ्र……को कहा गया है। (युधिष्ठर दुर्योधन)
2. रामचन्द्र सिंधु के किनारे…..तक पथ माँगते रहे। (तीन दिवस/पाँच दिवस)
3. उठी अधीर धधक पौरुष की आग राम के…….से। (शर/बल)
4. क्षमा शोमती उस भुजंग को जिसके पास….. हो। (अभिय/गरल)
उत्तर
1. दुर्योधन, 2. तीन दिवस, 3. शर, 4. गरल।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 14 अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए

(क) कौरवों ने कायर किसको समझा?
उत्तर
कौरवों ने पांडवों को कायर समझा।

(ख) क्षमा किसे शोभती है?
उत्तर
क्षमा उसे शोभती है जिसके पास दम है, ताकत है, साहस है।

(ग) सिंधु से रास्ता किसने माँगा?
उत्तर
सिंधु से रास्ता राम ने माँगा।

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(घ) इस कविता में ‘सुयोधन’ संबोधन का प्रयोग किसके लिए किया है?
उत्तर
इस कविता में ‘सुयोधन का संबोधन दुर्योधन के लिए किया गया है।

(ङ) किन गुणों को सारा जग पूजता है?
उत्तर
सहनशीलता, क्षमा और दया, तप और त्याग जैसे गुणों को सारा जग पूजता है।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 14 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन से पाँच वाक्यों में दीजिए

(क) ‘नर व्याघ्र’ का प्रयोग कवि ने क्यों किया है?
उत्तर
कवि ने ‘नर व्याघ्र’ का प्रयोग सुयोधन (दुर्योधन) के लिए किया है। वह आदमी होकर भी जानवर जैसा वर्ताव कर रहा था। उसमें मानवता नाम की कोई चीज नहीं थी इसीलिए कवि ने ‘नर व्याघ्र’ का प्रयोग किया है।

(ख) सागर किसके चरणों में आ गिरा और क्यों?
उत्तर
सागर राम के चरणों में आ गिरा क्योंकि वह राम के क्रोध को देखकर डर गया। उसे लगा कि राम अपने बाणों से उसे जलाकर भस्म कर देंगे।

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(ग) ‘क्षमा शोमती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उपरोक्त पंक्ति का शाब्दिक अर्थ है-विष वाला सांप अगर आपको नहीं काटता है, तो इसका मतलब है कि उसने आप पर उपकार किया। अर्थात् क्षमा उस व्यक्ति को शोभा देता है जो वीर है, ताकतवर है और कर्तव्यनिष्ठ है।

(घ) ‘सच पूछो तो शर में ही बसती है दीप्ति विनय की’ पंक्ति के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर
उपरोक्त पंक्ति के माध्यम से कवि यह कहना चाह रहा है कि वाणों में विनय का तेज भी निहित होता है। उसी के साथ कोई संधि चाहता है। उसी को लोग पूजते हैं और अंत में जीत भी उसी की होती है।

(ङ)
कवि इस कविता के माध्यम से क्या सन्देश देना चाहता
उत्तर
क्षमा किसी सुपात्र को शोभा देता है। आप यदि किसी दुर्जन को क्षमा करते हैं तो वह आपको कमजोर समझेगा। क्षमा देने का अधिकार केवल सक्षम और शक्तिशाली को होता है। कमजोर क्या किसी को क्षमा करेगा।

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भाषा की बात

प्रश्न 4.
शुद्ध उच्चारण कीजिए
क्षमा, व्याघ्र, क्षमाशील, समक्ष, पौरुष, दीप्ति, संपूज्य
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 5.
शुद्ध वर्तनी पर गोला लगाइए
सहारा, साहरा, साहारा
शोमति, शीमीति, शोमती
वनीत, विनीत, वीनीत
दिपिती, दीप्ति, दीपती
उत्तर

सहारा, साहरा, साहारा
शोमति, शोमीति, शोमती
वनीत, विनीत, वीनीत
दिपिती, दीप्ति, दीपती

प्रश्न 6.
‘सहनशील’ शब्द में ‘ता’ प्रत्यय लगाकर ‘सहनशीलता’ शब्द बना है। इसी प्रकार के अन्य शब्द बनाइए
उत्तर
सफल – सफलता
धीर – धीरता
वीर – वीरता
अधीर – अधीरता
व्याकुल – याकुलता
सरल – मरलता
मधुर – मधुरता

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों में से अनुस्वार एवं अनुनासिकता वाले शब्दों को छांटिए
कहाँ, “भुजंग, दंतहीन, माँगना, सिंधु, बंधा, बंधन, संपूज्य, आँच, प्रशंसा, आँख, चाँद, कलाएँ, तुरंत।
उत्तर
अनुस्वर वाले शब्द-भुजंग, दंतहीन, सिंधु, बंधन, संपूज्य, प्रशंसा, तुरंत
अनुनासिकता वाले शब्द-कहाँ, माँगना, बंधा, आँच, आँख, चाँद, कलाएँ ।

प्रश्न 8.
दिए गए शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए
भुजंग, गरल, दर्प, पथ, शर, नर
उत्तर
सांप, विष, घमंड, रास्ता, बाण, पुरुष।

प्रश्न 9.
दिए गए शब्दों में से विलोम शब्दों की जोड़ी बनाइए
सरल, दयालु, चरण, कठिन, दुष्ट, दासता, आजादी, शीश
उत्तर
सरल- कठिन
दयालु – दुष्ट
चरण – शीश
दासता – आजादी

सहनशीलता प्रसंग सहित व्याख्या

1. क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल
सबका लिया सहारा
पर नर-व्याघ्र, सुयोधन तुमसे
कहो, कहाँ, कब हारा?

शब्दार्थ-मनोबल= मन की शक्ति। सहारा =मदद। सुयोध = दुर्योधन।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक सुगम भारती-6 में संकलित कविता ‘सहनशीलता’ से ली गई हैं। इसके कवि हैं-रामधारी सिंह दिनकर’। कवि ने महाभारत के प्रसंग को लेकर युधिष्ठिर की सहनशीलता का परिचय दिया है। श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को समझाते हुए कहते हैं कि तुमने तो हमेशा ही क्षमा, दया, तप, त्याग और मनोबल का सहारा लिया किंतु सुयोधन (दुर्योधन) पर उसका कोई असर नहीं पड़ा।

उसने कभी तुम्हारे सामने हार नहीं मानी। अतः तुम्हें उसके सामने अपनी शक्ति दिखानी पड़ेगी। अपने शत्रु के आगे विनयशील बनमे से अच्छा है उसे अपनी ताकत दिखाओ। इस प्रकार इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने सहनशीलता की प्रशंसा तो की ही है, लेकिन कभी-कभी -उसके साथ पौरुष बल दिखाने की भी आवश्यकता पड़ती है।

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2. क्षमा शोभती उस भुजंग को,
जिसके पास गरल हो।
उसको क्या, जो दंतहीन,
विषरहित, विनीत, सरल हो।

शब्दार्थ-शोभती = शोभा देना। भुजंग = सांप । गरल= विष । दंतहीन = बिना दाँत का। विनीत = सरल सज्जन।

प्रसंग-पूर्ववत्

व्याख्या-महाभारत के प्रसंग को लेकर युधिष्ठिर की सहनशीलता का परिचय दिया गया है। श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को समझाते हुए कहते हैं कि तुमने हमेशा से ही क्षमा, दया, तप आदि का सहारा लिया है, लेकिन सुयोधन (हुर्योधन) पर उनका कोई असर नहीं हुआ है। तुम अपने दुश्मन के आगे क्षमाशील बने रहे और वह तुम्हें कायर समझता रहा। क्षमा दरअसल उसी को शोभा देती है जो शक्तिशाली है। जो स्वयं कमजोर है, वह किसी को क्या क्षमा दे सकता है।

श्रीकृष्ण एक उदाहरण द्वारा इसकी पुष्टि करते हैं। वे कहते हैं कि विष वाला सर्प अगर तुम्हें छोड़ दे अर्थात् काटे नहीं तब हम कह सकते हैं कि उसने तुम पर कृपा की। लेकिन जो सांप विषहीन और दंतहीन है, उसकी क्षमा के लिए कोई मोहताज नहीं होता।

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3. सिंधु देह धर, त्राहि-त्राहि’
करता आ गिरा शरण में।
चरण पूज, दासता ग्रहण की,
बंधा मूढ़ बंधन में।

शब्दार्थ-देह=शरीर । त्राहि-त्राहि=बचाओ-बचाओ। | दासता=गुलामी। मूद्र=मूर्ख।

प्रसंग-पूर्ववत्

राम तीन दिनों तक समुद्र की पूजा कर उससे रास्ता देने के लिए आग्रह करते रहे। लेकिन समुद्र अनसुनी करता रहा। आखिरकार राम की सहनशीलता खत्म हो गई। वे क्रोधित हो उठे। जब क्रोध में आकर उन्होंने समुद्र को जला देने के लिए अपना धनुष उठाया, तब वही समुद्र ‘त्राहि-त्राहि’ करते हुए राम के चरणों में गिर |पड़ा। उसने सदा के लिए राम की दासता स्वीकार कर ली। इसलिए श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को समझाते हुए कहा |कि उसे भी अब सहनशीलता छोड़नी चाहिए और अपने शत्रु के सामने अपना असली रूप दिखाना चाहिए।

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MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti विविध प्रश्नावली 3

MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions विविध प्रश्नावली 3

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) केरल को नारियल का कहते हैं
(i) बगीचा,
(ii) जंगल,
(iii) सागर,
(iv) खेत।
उत्तर-
(i) बगीचा,

(ख) सेवा के कार्य को ईश्वर मानते थे.
(i) ईश्वरचन्द्र,
(ii) भवानी प्रसाद,
(iii) महात्मा गाँधी,
(iv) बाबा भारती।
उत्तर-
(iii) महात्मा गाँधी,

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(ग) आरुणि के गुरु का नाम था
(i) धौम्य,
(ii) द्रोणाचार्य,
(iii) उपमन्यु,
(iv) वशिष्ठ।
उत्तर-
(i) धौम्य,

(घ) सदाशिव गोविन्द कात्रे को कहा गया
(i) नेताजी,
(ii) महात्मा,
(iii) परमानन्द माधवम्,
(iv) गुरुजी।
उत्तर-
(iii) परमानन्द माधवम्,

(ङ) समाज शब्द में ‘इक’ प्रत्यय लगाने पर बनने वाला शब्द है
(i) सामाजीक,
(ii) सामाजिक,
(iii) सामासिक,
(iv) सामाजिकी।
उत्तर-
(ii) सामाजिक।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(क) अपना काम सफाई से करना ………………………………. को भाता था।
(ख) बसंत के स्वागत में ………………………………. गीत गाती है।
(ग) परमानन्द माधवम् की मृत्यु सन् ……………………………….’ में हुई।
(घ) र रुपये की ………………………………. पहचान है।
(ङ) ‘सहज’ शब्द में ‘ता’ प्रत्यय लगने पर ……………………………….” शब्द बनता है।
उत्तर-
(क) महात्मा गाँधी,
(ख) प्रकृति भी,
(ग) 1977 ई.,
(घ) अन्तर्राष्ट्रीय,
(ङ) सहजता।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में लिखिए
(क) केरलवासी किस चीज के शौकीन हैं?
उत्तर-
केरलवासी (केरल के लोग) नृत्य और संगीत के बड़े शौकीन होते हैं।

(ख) शीला की रुचि समाज-सेवा में कैसे उत्पन्न हुई?
उत्तर-
लेखक के घर पर न होने पर एक दिन उनका पुत्र सोनू छत से गिरकर बेहोश हो गया। मुहल्ले और आस-पास के जिस किसी ने भी सुना, वह सहायता के लिए दौड़ पड़ा। गरीब-अमीर सभी अस्पताल में सोनू की देख-रेख के लिए धन और बल से तैयार थे। इस सब को देखकर बेहोश हुई लेखक की पत्नी को ज्ञात न हो सका कि यह सब क्या है? उसने होश आने पर असंख्य लोगों को सोनू की सहायता के लिए देखा वह दंग रह गई। साथ ही शीला के अन्दर लेखक के सिद्धान्तों के प्रति आस्था और विश्वास पक्का होता चला गया कि जो समाज की सेवा में तत्पर रहते हैं, समाज उनकी सेवा में तन, मन, धन देकर सेवा करता है। उस दिन से शीला की रुचि समाज सेवा में उत्पन्न हो गई।

(ग) आरुणि ने शिष्य का परमधर्म किसे कहा है?
उत्तर-
आरुणि ने गुरु सेवा को ही शिष्य का परमधर्म कहा है।

(घ) वर्तमान में बसन्त का स्वरूप क्यों बदल गया है?
उत्तर-
लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए पेड़-पौधों को काटकर हरियाली को समाप्त कर दिया है। इसलिए बसन्त का स्वरूप ही बदल गया है।

(ङ) बिस्मिल की माताजी ने गृहकार्य की शिक्षा किससे प्राप्त की?
उत्तर-
मात्र ग्यारह वर्ष की अल्पायु में बिस्मिल की माताजी का विवाह हो गया था। तब वह नितान्त अशिक्षित एवं ग्रामीण कन्या थीं। ऐसे में दादीजी ने अपनी छोटी बहन को शाहजहाँपुर बुला लिया था। उन्हीं ने माताजी को गृहकार्य आदि की शिक्षा प्रदान की थी।

(च) अकर्मक और सकर्मक क्रिया का एक-एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर-

  1. अकर्मक क्रिया-वह हँसता है। ‘हँसना’ अकर्मक क्रिया है।
  2. सकर्मक क्रिया-सीता पत्र लिखती है। ‘लिखना’ सकर्मक क्रिया है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन से पाँच वाक्यों में लिखिए

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(क) गाँधीजी आश्रम में कौन-कौन से काम स्वयं करतेथे?
उत्तर-
गाँधीजी अपने आश्रम में सूत कातते थे, वे कपड़ा बुनते थे, कपास धुनते थे। आश्रम के लोगों के भोजन के लिए अनाज में से कंकड़ चुनकर उसे साफ करते थे। अनाज से आटा बनाने के लिए चक्की भी घिसते थे। अनाज पीसते और पुस्तकों की जिल्द भी बहुत अच्छी तरह बनाते थे।

(ख) ‘आत्म-बलिदान’ एकांकी का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
‘आत्म-बलिदान’ एकांकी का मूल भाव यह है कि गुरु और शिष्य दोनों ही एक-दूसरे के लिए समर्पित रहते हैं। गुरु को अपने शिष्यों के शारीरिक, बौद्धिक और आत्मिक विकास के लिए हर समय चिन्ता रहती थी। शिष्य भी आश्रम के सारे कार्यों की पूर्ति तन, मन तथा श्रद्धा से करते हैं। धौम्य ऋषि को अतिवृष्टि से खेत की मिट्टी बह जाने की चिन्ता है। परन्तु आरुणि भी उन्हें चिन्ता मुक्त करने का प्रयास करता है। मेड़ के कटाव में स्वयं लेट जाता है और मिट्टी के कटाव को रोक देता है। गुरु भी उसे तलाशते हुए विपरीत मौसम में जाते हैं। उन्हें उसके स्वास्थ्य की चिन्ता है। इस तरह गुरु और शिष्य दोनों परस्पर सेवा में समर्पित हैं।

(ग) हमीर ने कर्तव्य का महत्व किस प्रकार बताया है?
उत्तर-
हमीर रणथम्भौर के राणा हैं। वे माहमशाह को अपने यहाँ शरण देने का वचन देते हैं। दिल्ली के बादशाह खिलजी ने उसे मामूली गलती के लिए फाँसी की सजा देने का आदेश करके उसे जेल में बन्द कर दिया। वह जेल से फरार होकर रणथम्भौर पहुँचकर अपनी सुरक्षा की गुहार लगाता है जिसे राणा अभयदान देते हैं। राणा हमीर के सामंत और सरदार सभी इसके विरुद्ध हैं लेकिन राणा ने अपने क्षत्रियत्व और राजपूत होने की श्रेष्ठता। बताते हुए उनकी सलाह नहीं मानी। उन्होंने शरणागत को सुरक्षा देना राजपूत का कर्तव्य बताया। उसकी पूर्ति के लिए अपनी आन, बान, शान की परवाह नहीं करते। यहाँ तक है कि अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटते। राजपूत धर्म की शरणागत वत्सलता एवं सर्वस्व समर्पण ही उनके लिए कर्त्तव्य पालन की बलिवेदी है।

(घ) दशमलव प्रणाली में रुपये को किस प्रकार विभाजित किया गया है?
उत्तर-
दशमलव प्रणाली में रुपये को 100 पैसों में बाँटा गया है। इस तरह छोटे सिक्कों के रूप में 50 पैसे, 25 पैसे, 10 पैसे, 5 पैसे, 3 पैसे, 2 पैसे तथा 1 पैसे के सिक्के भी प्रचलन में आए। उन्हें नए पैसे कहा गया।

(ङ) सुभाषचन्द्र बोस ने युवकों को किस प्रकार प्रेरित किया?
उत्तर-
सुभाषचन्द्र बोस ने युवकों को आजादी प्राप्त करने के लिये प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आजादी के लिए बलिदान देने होंगे। जिन युवकों के खून में आजादी प्राप्त करने के लिए उबाल नहीं, गतिशीलता नहीं, उनका खून खून नहीं वह तो पानी जैसा है। आजादी की लड़ाई शीश कटाने का सौदा है। आजादी का इतिहास खून की लाल स्याही से लिखा जाता है। इतना सुनते ही युवकों के चेहरे लाल पड़ गए। उन्होंने आजादी की लड़ाई करने के लिए कागज पर अपने खून से हस्ताक्षर कर दिए। युवकों में बढ़ते साहस को देख सभी दंग रह गये।

(च) बिस्मिल ने वकालतनामे पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किये?
उत्तर-
एक बार बिस्मिल के पिताजी दीवानी मुकदमे में वकील से कह गए कि जो काम हो वह उनकी अनुपस्थिति में बिस्मिल से करा लें। कुछ आवश्यकता पड़ने पर वकील साहब ने बिस्मिल को बुलवाकर उनसे वकालतनामे पर अपने पिताजी के हस्ताक्षर करने को कहा। बिस्मिल ने यह कहते हुए कि वकालतनामे पर पिताजी के हस्ताक्षर करने से मना कर दिया कि यह तो धर्म के विरुद्ध होगा। सदैव सत्य के मार्ग पर चलने वाले बिस्मिल ने वकील साहब के यह समझाने पर भी हस्ताक्षर नहीं किये कि हस्ताक्षर न करने पर मुकदमा खारिज हो जायेगा।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए
(क) “कुछ लोग बातों से कमाते हैं। किसी का रुपया कमाई करता है। कुछ लोग दिमाग चलाकर कमाते हैं। दिमाग से कमाने वाले लोग जल्दी बुढ़ापा बुला लेते हैं। रक्त चाप और जोड़ों के दर्द से परेशान रहते हैं लेकिन हाथपैर चलाकर दिमाग से काम करने वाले कभी लाचार नहीं होते।”
उत्तर-
आशय-लेखक का तात्पर्य यह है कि धन कमाने के लिए लोग अलग-अलग तरीका अपनाते हैं। कुछ लोग तो केवल अपनी बातों के बल पर धन कमा लेते हैं अर्थात् उनका कार्य केवल दलाली, बट्टे या कानूनी दांव-पेंच लड़ा कर धन इकट्ठा कर लेना है। दूसरी ओर वे लोग हैं जो धनवान हैं और उसके सहारे व्यापार या ब्याज बट्टे के काम से धन कमा लेते हैं। इनके अलावा कुछ लोग अपने दिमाग से ही धन कमा सकते हैं। लेकिन ऐसे लोग जल्दी ही बूढ़े हो जाते हैं, उन्हें रक्तचाप और हाथ-पैर के जोड़ों का दर्द शुरू हो जाता है। लेकिन वे लोग जो अपने हाथ-पैर से, परिश्रम और बुद्धि के बल के योग से भी धन कमाने वाले होते हैं, ऐसे लोग प्रायः किसी के सामने अपनी लाचारी नहीं दिखाते। वे स्वावलम्बी होते हैं।

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(ख) अभी तुम अधखिले पुष्प के समान हो। अगर तुमको इसी पुष्य की भाँति अविकसित अवस्था में मुझ जैसे पौधे से अलग कर दिया जाए, तो मुझे भी दुःख होगा।
उत्तर-
धौम्य अपने शिष्य उपमन्यु को बताते हैं कि वह (उपमन्यु) अभी आधे खिले फूल के समान है। वह अभी पूर्ण फूल नहीं बन सका। एक अधखिला फूल अपने पौधे से अलग कर दिया जाए, तो वह अधखिला ही मुरझा जाएगा। उसका विकास तो हो सकेगा, पर उसका जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा। इसी तरह उपमन्यु अभी तक अविकसित फूल के समान है। उसे विकास के लिए अभी अपनी गुरु रूपी पौधे के आश्रय की जरूरत है। यदि उसे गुरु रूपी पौधे से अलग कर दिया गया तो पुष्परूपी शिष्य-उपमन्यु अपनी अविकसित अवस्था में ही अपने अस्तित्व के लिए अनिश्चय की स्थिति में आ जाएगा। इसका गुरु रूपी पौधे को अपार कष्ट होगा।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए
(क) दुखी है मेरा मन, कुछ तो अब दुख बाँटो।
जंगल ही जीवन है जंगल को मत काटो।
(ख) आजादी का संग्राम कहीं, पैसे पर खेला जाता है?
यह शीश कटाने का सौदा, नंगे सर झेला जाता है।
उत्तर-
(क) बसन्त के बदलते स्वरूप के प्रति चिन्ता व्यक्त करते हुए कवि कहता है कि बसन्त के मन में व्याप्त कष्ट को ‘थोड़ा-बहुत आप (संसार के लोग) बाँट लीजिए। जंगल से जीवन सम्भव है, इसलिए इन जंगलों को मत काटिए। वन लगाइए, जीवन बचाइए।

(ख) शब्दार्थ-सौदा = सामान, व्यापार। सन्दर्भ-पूर्व की तरह। प्रसंग-आजादी प्राप्त करने के लिए शीश कटाना होता है।

व्याख्या-कवि कहता है कि स्वतन्त्रता देवी के चरणों में वह जयमाला अर्पित की जाएगी, जिसे तुम्हारे (देशवासियों के) शीशों रूपी फूलों से गूंथा जाएगा।

तुम्हें ध्यान रखना चाहिए कि यह आजादी की लड़ाई कभी भी पैसों के आधार पर नहीं लड़ी जा सकती। यह तो सिर कटाने का सौदा है (व्यापार है)। इस सिर कटाने के सौदे को नंगे सिर ही झेलना पड़ता है।

प्रश्न 7.
दो देशों की मुद्राओं के नाम लिखिए।
उत्तर-

  1. अमेरिका-डॉलर
  2. जापान-येन।

प्रश्न 8.
वीर रस से ओत-प्रोत किसी कविता की चार पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर-
“सारी जनता हुँकार उठी
हम आते हैं, हम आते हैं।

माता के चरणों में यह लो,
हम अपना रक्त चढ़ाते हैं।”

प्रश्न 9.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़कर नीचे दिए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
अपने ही बल पर काम करने को स्वावलम्बन कहते हैं। इस गुण के आ जाने से किसी सहारे की आवश्यकता नहीं होती। स्वावलम्बी मनुष्य के पास आलस्य फटकता भी नहीं। स्वावलम्बन कर्त्तव्यपरायणता भी सिखाता है। स्वावलम्बी के प्रति सभी की सद्भावना रहती है। ऐसे पुरुष का समाज, राष्ट्र और जाति में सम्मान व आदर होता है।

प्रश्न

  1. स्वावलम्बन किसे कहते हैं?
  2. रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए-
    स्वावलम्बन ………………………..” भी सिखाता है।
  3. स्वावलम्बी पुरुष को किस-किस से सम्मान मिलता है?
  4. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।

उत्तर-

  1. अपने ही बल पर काम करने को स्वावलम्बन कहते हैं।
  2. रिक्त स्थान की पूर्ति-“कर्त्तव्य परायणता।”
  3. स्वावलम्बी पुरुष को समाज, राष्ट्र और जाति से सम्मान मिलता है।
  4. उचित शीर्षक-“स्वावलम्बन।”

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प्रश्न 10.
अपने प्रधानाध्यापक को एक प्रार्थना-पत्र लिखिए जिसमें अपने भाई के विवाह में जाने हेतु तीन दिवस के अवकाश की माँग की गई हो।
अथवा
अपने मित्र को पत्र लिखकर होली मनाने के अपने अनुभव लिखिए।
उत्तर-
अध्याय-4 पत्र लेखन’ शीर्षक देखिए।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर निबन्ध लिखिए (लगभग 100 शब्दों में)
प्रिय खेल, मेला, महापुरुष।
उत्तर-
अध्याय-5 ‘निबन्ध लेखन’ शीर्षक देखिए।

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MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 13 लोक संस्कृति और नर्मदा

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 13 लोक संस्कृति और नर्मदा

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 13 प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ट प्रश्न

प्रश्न 1. (क) सही जोड़ी बनाइए
1. श्रेष्ठ गंगा है – (क) देश के सर्वोत्तम घाटों में से है
2. प्राकृतिक परिवेश की रक्षा – (ख) वह प्रकृति की रक्षा करे
3. होशंगाबाद और महेश्वर के घाट – (ग) लेकिन ज्येष्ठ नर्मदा है।
4. संस्कृति को चाहिए – (घ) हमारे युग की सबसे बड़ी माँग है
उत्तर
1. (ग), 2. (घ), 3. (क), 4. (ख)

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प्रश्न (ख)
दिए गए शब्दों में से उपयुक्त शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. भारतीय संस्कृति मूलतः……..संस्कृति है। (आरण्यक/नागर)
2. नर्मदा…….की ओर बहती है। (पूर्व पश्चिम)
3. प्रकृति को वश में करने में मनुष्य ने अभूतपूर्व……. पा ली है। (असफलता/विफलता)
4. नर्मदा तट की जनजातियाँ……जरूर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे संस्कृति संपन्न नहीं है। (अशिक्षित/शिक्षित)
उत्तर
1. आरण्यक
2. पश्चिम
3. सफलता
4. अशिक्षित।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 13 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए
(क) संसार की सभी प्रमुख संस्कृतियों का जन्म कहाँ हुआ? .
उत्तर
संसार की प्रमुख संस्कृतियों का जन्म नदियों की कोख से हुआ।

(ख) प्राचीन समय में आर्यावर्त की सीमा रेखा क्या थी?
उत्तर
प्राचीन समय में आर्यावर्त्त की सीमा रेखा नर्मदा नदी थी।

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(ग) गौड़, भील, बैगा स्त्रियों को किस चीज़ से लगाव होता है?
उत्तर
गौंड़ भील, और बैगा स्त्रियों को गुदनों से बड़ा लगाव था।

(घ) ग्रामीण जनता के एक सूत्र में बंधने का क्या कारण है?
उत्तर-मेलों के कारण जनता एक सूत्र में बंधती है।

(ङ) प्रकृति अपनी स्थिरता क्यों खो रही है?
उत्तर
संस्कृति के संपर्क में आने पर प्रकृति अपनी स्थिरता खो रही है।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 13 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन-से-पाँच वाक्यों में दीजिए

(क) ‘भारतीय संस्कृति को आरण्यक संस्कृति क्यों कहा गया है?
उत्तर
नर्मदा तट पर मोहनजोदड़ो या हड़प्पा जैसी नगर संस्कृति नहीं रही, लेकिन एक आरण्यक संस्कृति अवश्य रही। भारतीय संस्कृति मूलतः आरण्यक संस्कृति है। नर्मदा के तटवर्ती वनों में मार्कण्डेय, मृगु, कपिल, जमदग्नि आदि अनेक ऋषियों के आश्रम रहे।

(ख) ‘नर्मदा चिरकुमारी है’ इस कवन को स्पष्ट करें।
उत्तर
कहते हैं नर्मदा और सोन का विवाह होने वाला था पर सोन नर्मदा की दासी जुहिला पर ही आसक्त हो बैठा। नर्मदा इस बात से नाराज हो गई और कभी विवाह न करने के संकल्प के साथ पश्चिम की ओर चल दी। लज्जित सोन पूर्व की ओर गया। इसीलिए नर्मदा चिरकुमारी कहलाई।

(ग) लोकगीतों की रचना किस प्रकार हुई?
उत्तर
लोकगीतों की रचना किसी एक आदमी ने नहीं बल्कि सैकड़ों पीढ़ियों के प्रयासों से हुई। गायक ने अपने गीत की रचना नहीं की, उसने जो सुना, उसे औरों को दिया, लेकिन एक गायक से दूसरे गायक तक आते-आते गीत बदलते चले गए।

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(घ) नर्मदा तट के सौंदर्य का वर्णन करें।
उत्तर
समूचा नर्मदा तट मंदिरों ओर देवालयों से भरा है। प्रत्येक तीर्थ किसी पौराणिक आख्यान से जुड़ा है। इन देवालयों और घाटों में सुबह-शाम आरती का स्वर या शंख की ध्वनि गूंजती है। कहीं कथा-वार्ता या भजन-कीर्तन का स्वर लहराता है, तो कहीं कोई भक्त ‘त्वदीय पाद पङ्कजं नमामि देवनिर्मदे’ का स्त्रोत पाठ करता है। नर्मदा तट पर मेले भी खूब लगते हैं।

(ङ) संस्कृति के विकास में नदियों का महत्त्व लिखिए।
उत्तर
संस्कृति की कहानी मनुष्य और नदी की जुगलबंदी की कहानी है। संसार की सभी प्रमुख संस्कृतियों का जन्म नदियों की कोख से हुआ। भारतीय संस्कृति गंगा की देन है। जब हिमालय नहीं था, विन्ध्य और सतपुड़ा तब भी थे। विन्ध्य तो शायद भारत भूमि का सबसे पुराना प्रदेश है। नर्मदा आदिम संस्कृतियों का भंडार है। गिरि, जन और वनजातियों की प्राचीन लीला भूमि है।

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भाषा की बात

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
ऋषि, संस्कृति, आरण्यक, दंडकारण्य, समन्वय
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए
सेष्ठ, परिकरमा, इस्त्रियाँ, रचइता, परिस्कार, प्रदूसित
उत्तर
श्रेष्ठ, परिक्रमा, स्त्रियाँ, रचयिता, परिष्कार, प्रदूषित।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग करेंबंजर, मोहक, सृजन, प्रधान, हदय
उत्तर
बंजर-कई सालों से वर्षा नहीं होने के कारण भूमि बंजर हो गई है।
मोहक-प्रकृति के एक मोहक तस्वीर मैंने खींची है।
सृजन-हमें नए-नए विचारों का सृजन करना चाहिए।।
प्रधान-इस गाँव का प्रधान ईमानदार व्यक्ति है।
हृदय-मैं सच्चे हृदय से आपका आभारी हूँ।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द बताइए
गिरि, परिधान, गंगा, तट, भूमि, नदी
उत्तर
पर्वत, वस्त्र, देवनदी, किनारा, धरती, सरिता

प्रश्न 8.
नीचे लिखे शब्दों के अंत में ‘ई’ मात्रा लगाकर शब्द बनाइए
उत्तर
सन्यास – सन्यासी
साहस – साहसी
पश्चिम – पश्चिमी
नागर – नागरी
निवास – निवासी
पहाड़ – पहाड़ी

प्रश्न 9.
दिए गए वाक्यों में से विकारी एवं अविकारी शब्द छाँटिए
1. हमें प्रतिदिन परिश्रम करना चाहिए।
2. छात्र भलीभाँति काम नहीं कर सकता।
3. आह! कैसा सुंदर दृश्य है।
4. मयंक को साथियों के साथ मिलकर रहना चाहिए।
5. सूर्यकांत बीमार पड़ गया; इसलिए स्कूल नहीं गया।
उत्तर
विकारी – अविकारी
1. प्रतिदिन – परिश्रम
2. छात्र – भलीभाँति
3. सुंदर – आह!
4. साथियों – के साथ
5. बीमार – इसलिए

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लोक संस्कृति और नर्मदा प्रसंग सहित व्याख्या

1. नर्मदा की महत्ता उसकी प्ररिक्रमा से ही सिद्ध हो जाती है। हमारे पुराणों में गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती आदि नदियों का चाहे जितना महात्म्य बताया गया हो; कोई भक्त इन नदियों की परिक्रमा नहीं करता। घर की तमाम सुख सुविधा छोड़कर एक ही नदी की सवा तीन वर्ष में परिक्रमा पूरी करना-इस व्रत में एक प्रकार की वीरता है। यह गरीबों के साथ एकरूप होने की भावना है। प्रकृति के सान्निध्य में रहने की ललक है और है अंतर्मुख होकर प्रभु से लौ लगाने की आकांक्षा।

शब्दार्थ-महात्म्य = महत्ता। तमामसारी। सान्निध्य = नजदीक ललक=इच्छा। अंतर्मुख = भीतर की ओर। आकांक्षा=इच्छा।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक सुगम भारती-6 में संकलित पाठ ‘लोक संस्कृति और नर्मदा से ली गई है। इसके लेखक हैं-अमृतलाल वेगड़। इसमें नर्मदा नदी की महत्ता का व्याख्यान किया गया है।

व्याख्या-नर्मदा एक अद्भुत नदी है। भक्तगण इसे सबसे पवित्र नदी मानते हैं। शायद इसीलिए वे इसकी परिक्रमा करते हैं। गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती आदि नदियाँ भी पवित्र मानी जाती हैं, और पुराणों में इनकी महिमा का भी काफी उल्लेख मिलता है किंतु कोई भक्त इन नदियों की परिक्रमा नहीं करता। केवल नर्मदा ही है। जिसकी परिक्रमा करने में उनकी आस्था है।

ऐसे भक्तगण भी हैं जो घर की सुख-सुविधा को तिलांजलि देकर नर्मदा की परिक्रमा सवा तीन वर्ष में पूरी कर लेते हैं। निस्संदेह यह बहुत मुश्किल काम है। लेकिन भक्तगणों की श्रद्धा के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं है।

विशेष-नर्मदा नदी का महात्म्य स्पष्ट किया गया है। इसकी परिक्रमा करना भक्तगणों का मुख्य उद्देश्य होता है।

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2. लोक संस्कृति को दूसरी विशेषता है उसकी सादगी, उसकी सरलता। सरल को जटिल बना देना आमबात है, पर जटिल को सरल बनाना बहुत कठिन है। लोक कला में कहीं कोई आडंबर नहीं होता। कोई बनाव-सिंगार नहीं होता। सहज हृदय से सहज रूप में प्रवाहित कला बड़ी बलवती और बड़ी तेजस्वी होती है। हमें प्रभावित करने की उसमें आधार शक्ति होती है।

शब्दार्थ-जटिल = कठिन, उलझा हुआ। आडंबर = दिखावा । तेजस्वी = प्रतिभाशाली। अपार = बहुत अधिक।

प्रसंग-पूर्ववत्

व्याख्या-लोक संस्कृति में सादगी और सरलता होती है। इसमें जटिलता भी नहीं है। लोककला में दिखावा लेशमात्र नहीं है और न ही कोई बनाव-सिंगार । लोक-कला सहज रूप से उत्पन्न इसकी शक्ति है। यह अपना प्रभाव स्वतः सहज रूप से बना लेती है।

विशेष-हमें लोक-कला की सहजता पर गर्व होना चाहिए तथा इसे प्रदूषित होने से बचाना चाहिए। यदि इस पर आडम्बर का लेस मात्र की प्रभाव आ जाता है तो इसकी महत्ता समाप्त हो जाएगी।

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MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.2

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.2

Question 1.
Draw a line segment of length 7.3 cm using a ruler.
Solution:
Steps of construction :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.2 1
(i) Place the zero mark of the ruler at a point A.
(ii) Mark a point B at a distance of 7.3 cm from A.
(iii) Join AB.
\(\overline{A B}\) is the required line segment of length 7.3 cm.

Question 2.
Construct a line segment of length 5.6 cm using ruler and compasses.
Solution:
Steps of construction :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.2 2
(i) Draw a line l. Mark a point A on this line.
(ii) Place the compasses pointer on zero mark of the ruler. Open it to place the pencil point upto 5.6 cm mark.
(iii) Without changing the opening of the compasses, place the pointer on A and draw an arc that cuts l at B.
\(\overline{A B}\) is the required line segment of length 5.6 cm.

Question 3.
Construct \(\overline{A B}\) of length 7.8 cm. From this, cut off \(\overline{A C}\) of length 4.7 cm. Measure \(\overline{B C}\).
Solution:
Steps of construction :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.2 3
(i) Place the zero mark of the ruler at A.
(ii) Mark a point B at a distance 7.8 cm from A.
(iii) Again, mark a point C at a distance 4.7 from A.
(iv) By measuring \(\overline{B C}\), we find that BC = 3.1 cm.

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.2

Question 4.
Given \(\overline{A B}\) of length 3.9 cm, construct \(\overline{P Q}\) such that the length of \(\overline{P Q}\) is twice that of \(\overline{A B}\). Verify by measurement.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.2 4
(Hint: Construct \(\overline{P X}\) such that length of \(\overline{P X}\) = length of \(\overline{A B}\); then cut off \(\overline{X Q}\) such that \(\overline{X Q}\) also has the length of \(\overline{A B}\).)
Solution:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.2 5
Steps of construction :
(i) Draw a line ‘l’.
(ii) Construct \(\overline{P X}\) such that length of \(\overline{P X}\) = length of \(\overline{A B}\) = 3.9 cm
(iii) Then cut of \(\overline{X Q}\) such that \(\overline{X Q}\) also has the length of \(\overline{A B}\).
(iv) Thus the length of \(\overline{P X}\) and the length of \(\overline{X Q}\) added together make twice the length of \(\overline{A B}\).
Verification:
By measurement we find that
PQ = 7.8 cm = 3.9 cm + 3.9 cm
= \(\overline{A B}\) + \(\overline{A B}\) = 2 × \(\overline{A B}\)

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.2

Question 5.
Given \(\overline{A B}\) of length 7.3 cm and \(\overline{C D}\) of length 3.4 cm, construct a line segment \(\overline{X Y}\) such that the length of \(\overline{X Y}\) is equal to the difference between the lengths of \(\overline{A B}\) and \(\overline{C D}\). Verify by measurement.
Solution:
Steps of construction :
(i) Draw a line ‘l’ and take a point X on it.
(ii) Construct \(\overline{X Z}\) such that length \(\overline{X Z}\) = length of \(\overline{A B}\) = 7.3 cm.
(iii) Then cut off \(\overline{Z Y}\) = length of \(\overline{C D}\) = 3.4 cm
(iv) Thus the length of \(\overline{X Y}\) = length of \(\overline{A B}\) – length of \(\overline{C D}\)
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.2 6
Verification:
By measurement, we find that length of \(\overline{X Y}\) = 3.9 cm
= 7.3 cm – 3.4 cm = \(\overline{A B}-\overline{C D}\)

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MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.1

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.1

Question 1.
Draw a circle of radius 3.2 cm.
Solution:
Steps of construction :
(i) Mark a point ‘O’ with a sharp pencil where we want the centre of the circle.
(ii) Open the compasses for the required radius of 3.2 cm.
(iii) Place the pointer of compasses on O.
(iv) Turn the compasses slowly to draw the circle.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.1 1

Question 2.
With the same centre O, draw two circles of radii 4 cm and 2.5 cm.
Solution:
Steps of construction :
(i) Mark a point ‘O’ with a sharp pencil where we want the centre of the circle.
(ii) Open the compasses for 4 cm.
(iii) Place the pointer of the compasses on O.
(iv) Turn the compasses slowly to draw the circle.
(v) Again open the compasses for 2.5 cm and place the pointer of the compasses on O.
(vi) Turn the compasses slowly to draw the second circle.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.1 2

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.1

Question 3.
Draw a circle and any two of its diameters. If you join the ends of these diameters, what is the figure obtained? What figure is obtained if the diameters are perpendicular to each other? How do you check your answer?
Solution:
(i) Mark a point ‘O’ with sharp pencil where we want the centre of the circle.
(ii) Place the pointer of the compasses on ‘O’.
(iii) Turn the compasses slowly to draw the circle.
(a) By joining the ends of two diameters, we get a rectangle. By measuring, we find AB = CD and BC = AD, i.e., pairs of opposite sides are equal and also ∠A = ∠B = ∠C = ∠D = 90°, i.e., each angle is of 90°.
Hence, it is a rectangle.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.1 3

(b) If the diameters are perpendicular to each other, then by joining the ends of two diameters, we get a square.
By measuring, we find that AB = BC = CD = DA, i.e., all four sides are equal. Also ∠A = ∠B = ∠C = ∠D = 90°, i.e. ,each angle is 90°.
Hence, it is a square.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.1 4

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.1

Question 4.
Draw any circle and mark points A, B and C such that
(a) A is on the circle.
(b) 6 is in the interior of the circle.
(c) C is in the exterior of the circle.
Solution:
(i) Mark a point ‘O’ with sharp pencil where we want centre of the circle.
(ii) ‘Place the pointer of the compasses on ‘O’.
(iii) Turn the compasses slowly to draw a circle.
(a) Point A is on the circle.
(b) Point B is in the interior of the circle.
(c) Point C is in the exterior of the circle.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.1 5

Question 5.
Let A, B be the centres of two circles of equal radii; draw them so that each one of them passes through the centre of the other. Let them intersect at C and D. Examine whether \(\overline{A B}\) and \(\overline{C D}\) are at right angles.
Solution:
Steps of construction:
(i) Mark a point ‘A’ with sharp pencil.
(ii) Place the pointer of the compasses on A
(iii) Turn the compasses slowly to draw a circle with centre A.
(iv) Take a point ‘B’ on the circle with centre A.
(v) Place the pointer of the compasses on B.
(vi) Draw the circle with the radius same as radius of circle with centre A.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 14 Practical Geometry Ex 14.1 6
Now, both circles intersect at C and D.
Let AB and CD intersect at O.
Now, measuring ∠COB, we get
∠COB = 90°
∴ \(\overline{A B}\) and \(\overline{C D}\) are perpendicular.

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