MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 19 देशहिताय

MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 19 देशहिताय

MP Board Class 7th Sanskrit Chapter 19 अभ्यासः

प्रश्न 1.
एक शब्द में उत्तर लिखो
(क) सिद्धार्थः कस्यां कक्षायां पठति? [सिद्धार्थ किस कक्षा में पढ़ता है?]
उत्तर:
‘सप्तम कक्षायां’

(ख) देशः कस्य तुल्यः अस्ति? [देश किसके समान है?]
उत्तर:
मातृतुल्यः

(ग) “शन्नोवरुणः’ इति कस्याः ध्येयवाक्यम् अस्ति? [‘शन्नो वरुण’ किसका ध्येय वाक्य है?]
उत्तर:
जलसेनायाः

(घ) देशसेवायाः सर्वेषां मार्गाणाम् उद्देश्यं किम्? [देशसेवा के सभी मार्गों का क्या उद्देश्य है?]
उत्तर:
‘देशहितम्’

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(ङ) सिद्धार्थस्य मित्रं कः? [सिद्धार्थ का मित्र कौन है?]
उत्तर:
सुधीशः।

प्रश्न 2.
एक वाक्य में उत्तर लिखो
(क) बालचरः इत्युक्ते किं ज्ञायते? [बालचर कहे जाने से क्या प्रतीत होता है?]
उत्तर:
‘बालचरः’ इति बालानां एका सेवासंस्था अस्ति। [‘बालचर’ नामक बालकों की एक सेवा संस्था है।]

(ख) राष्ट्रियछात्रसेनायाः’ (एन.सी.सी.) ध्येयवाक्यं किम्? [राष्ट्रीय छात्र सेना का ध्येय वाक्य क्या है?]
उत्तर:
राष्ट्रियछात्रसेनायाः (एन.सी.सी.) ध्येयवाक्यं ‘अहं न भवान्’ इति। [राष्ट्रीय छात्र सेना का ध्येय वाक्य “मैं नहीं, आप” है।]

(ग) सेनायाः त्रिविधप्रकाराः के सन्ति? [सेना के तीन भेद कौन से हैं?]
उत्तर:
सेनायाः त्रिविधप्रकाराः सन्ति-जल सेना, वायु सेना, स्थल सेना च। [सेना के तीन भेद हैं-जल सेना, वायु सेना और स्थल सेना।]

(घ) बालचरस्य प्रथमा प्रतिज्ञा का अस्ति? [बालचर की पहली प्रतिज्ञा क्या है?]
उत्तर:
बालचरस्य प्रथमा प्रतिज्ञा अस्ति-‘ईश्वरं स्वदेशं प्रति च कर्त्तव्य पालनं’। [बालचर की पहली प्रतिज्ञा है-ईश्वर और अपने देश के प्रति कर्त्तव्य का पालन करना।]

(ङ) छात्रजीवने देशसेवायाः मार्गों को? [छात्र जीवन में देश सेवा के कौन से दो मार्ग हैं?]
उत्तर:
छात्रजीवने देश सेवायाः मार्गौ–’राष्ट्रीय छात्र सेना’, ‘राष्ट्रीय सेवायोजना’ च। [छात्र जीवन में देशसेवा के दो मार्ग (उपाय) हैं- ‘राष्ट्रीय छात्र सेना’ तथा ‘राष्ट्रीय सेवा योजना’।]

प्रश्न 3.
रेखांकित शब्द के आधार पर प्रश्न बनाओ
(क) ‘सिद्धार्थ:’ सप्तम्यां कक्षायां पठति।
(ख) गणवेशधारिणः वयं बालचराः स्मः।
(ग) “सर्वेषां सहायता” इति द्वितीया प्रतिज्ञा।
(घ) जलसेना जलमार्गात् देशसुरक्षां करोति।
(ङ) बालचरः एकं ग्रामं जनसेवायै गच्छति।
उत्तर:
(क) कः सप्तम्यां कक्षायां पठति?
(ख) गणवेशधारिणः वयं के स्मः?
(ग) ‘सर्वेषां का’ इति द्वितीया प्रतिज्ञा?
(घ) जलसेना कस्मात् देश सुरक्षां करोति?
(ङ) बालचरः एक ग्रामं कस्याथै गच्छति?

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प्रश्न 4.
मिलान करो-
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 19 देशहिताय img 1
उत्तर:
(क) → (2)
(ख) → (3)
(ग) → (1)
(घ) → (4)

प्रश्न 5.
कोष्ठक से चुनकर वाक्य बनाओ-
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 19 देशहिताय img 2
उत्तर:
(क) अहम् लिखामि।
(ख) अहम् गच्छामि।
(ग) अहम् करोमि।
(घ) अहम् प्रेरयामि।
(ङ) भवान् पठति।
(च) भवान् गच्छति।
(छ) भवान् प्रेरयति।
(ज) भवान् रक्षति।
(झ) वयम् अनुपालयामः।
(ब) वयम् कुर्मः।
(ट) वयम् विचरामः।
(ठ) वयम् गच्छामः।
(ड) वयम् भवामः।
(ढ) अहम् शृणोमि।

प्रश्न 6.
उदाहरण के अनुसार रूप लिखो
धातुएँ :
लिख्, दृश् (पश्य), वद्, क्रीड, उपविश।
लकार :
लट्, लोट् (सभी पुरुष व सभी वचनों में)
उत्तर:
लट् लकार (वर्तमान में)
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 19 देशहिताय img 3

लोट् लकार (आज्ञायां)
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 19 देशहिताय img 4

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प्रश्न 7.
कोष्ठक में दिये गये शब्दों से रिक्त स्थानों को पूरा करो
(कक्षायां, ग्रामम्, सेवासंस्था, मातृतुल्यः, सेना, बालचराः, के मार्गाः, ताः प्रतिज्ञाः, मार्गाभ्याम्)
(क) कस्यां ………।
(ख) एकं ……….।
(ग) एका ……….।
(घ) गणवेशधारिणः ………।
(ङ) काः प्रतिज्ञाः ……….।
(च) देशः ……….।
(छ) एताभ्यां ………।
(ज) एषा ……..।
उत्तर:
(क) कक्षायां
(ख) ग्रामम्
(ग) सेवासंस्था
(घ) बालचरा
(ङ) ताः प्रतिज्ञाः
(च) मातृतुल्यः
(छ) मार्गाभ्याम्
(ज) सेना।

देशहिताय हिन्दी अनुवाद

सुधीश: :
मित्र सिद्धार्थ! भवान् कस्यां कक्षायां पठति?

सिद्धार्थः :
अहं सप्तमकक्षायां पठामि। सुधीशः-एतद् वेशं धृत्वा भवान् कुत्र गच्छति?

सिद्धार्थ :
मित्र! पश्यतु मम गणवेशम्। अहं बालचरः। अतः जनसेवायै एक ग्रामं गच्छामि।

सुधीश: :
‘बालचरः’ इत्युक्ते किं ज्ञायते?

सिद्धार्थः :
बालचरः इति बालानां एका सेवासंस्था अस्ति। तस्याः सदस्यः भूत्वा वयं देशसेवां कर्तुं समर्थाः भवामः।

अनुवाद :
सुधीश :
हे मित्र सिद्धार्थ! आप किस कक्षा में पढ़ते हो?

सिद्धार्थ :
मैं सातवीं कक्षा में पढ़ता हूँ। सुधीश-यह वेश धारण करके आप कहाँ जा रहे हो?

सिद्धार्थ :
मित्र! मेरे गणवेश को देखो। मैं बालचर हैं। इसलिए मनुष्यों की सेवा के लिए एक गाँव को जा रहा हूँ।

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सुधीश :
‘बालचर’ इसके कहने से क्या ज्ञात होता है?

सिद्धार्थ :
‘बालचर’ नामक बालकों की एक सेवा संस्था है। उसके सदस्य बनकर हम देश सेवा करने में समर्थ होते हैं।

सुधीश: :
बालचरो भूत्वा भवान् किं किं करोति?

सिद्धार्थः :
गणवेशधारिणः वयं बालचराः सर्वत्र विचरामः। वयं देवालयेषु मेलापकेषु हट्टेषु जनसमूहेषु सामाजिकार्यक्रमेषु भूकम्पादि आपात्कालेषु च उत्साहेन जनानां साहाय्यं कुर्मः। प्रतिज्ञाः अपि अनुपालयामः।

सुधीश: :
काः ताः प्रतिज्ञाः?

सिद्धार्थः :
प्रथमा तु ‘ईश्वरं स्वदेशं प्रति च कर्त्तव्यपालनं’, द्वितीया तावत् ‘सर्वेषां सहायता’ तृतीया प्रतिज्ञा ‘संस्थायाः अनुशासनस्य पालनम्’ इति।

अनुवाद :
सुधीश :
बालचर होकर आप क्या-क्या करते हो?

सिद्धार्थ :
गणवेश धारण किये हुए हम सभी बालचर सर्वत्र घूमते हैं। हम सब मन्दिरों में, मेलों में, हाटों में (पैठ में), मनुष्यों की भीड़ में, सामाजिक कार्यक्रमों में और भूकम्प आदि आपातकाल में उत्साहपूर्वक मनुष्यों की सहायता करते हैं। प्रतिज्ञा का भी पालन करते हैं।

सुधीश :
वह कौन सी प्रतिज्ञा है?

सिद्धार्थ :
पहली (प्रतिज्ञा है) ‘ईश्वर और अपने देश के प्रति कर्त्तव्य का पालन’, दूसरी (प्रतिज्ञा है) ‘सबकी सहायता करना’, तीसरी (प्रतिज्ञा है) ‘संस्था के अनुशासन का पालन करना।’

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सुधीशः :
भवन्तं सेवायै कः प्रेरयति? सिद्धार्थः-देशस्तु मातृतुल्यः। मातृसेवायै सर्वे समानयोग्याः। आत्मप्रेरणया एव देशसेवां कुर्मः।

सुधीशः :
कथमहं देशसेवां कर्तुं शक्नोमि? के ते मार्गाः?

सिद्धार्थ: :
देशसेवायाः बहवः मार्गाः सन्ति। छात्रजीवने ‘राष्ट्रियछात्रसेना (एन.सी.सी.)’ इति। ‘राष्ट्रियसेवायोजना (एन.एस.एस.)’ इति देशसेवामार्गौ। ‘एकता अनुशासनञ्च’ राष्ट्रियछात्रसेनायाः ध्येयवाक्यम् एवञ्च ‘अहं न भवान्’ इति राष्ट्रियसेवायोजनायाः ध्येयवाक्यमस्ति। एताभ्यां मार्गाभ्यां वयं व्यक्तित्वविकासेन सह समाजसेवां देशसेवां च कर्तुं शक्नुमः।

अनुवाद :
सुधीश-आपको सेवा करने के लिए कौन प्रेरणा देता है?

सिद्धार्थ :
देश तो माता के समान है। माता की सेवा के लिए सभी समान रूप से योग्य हैं (सक्षम हैं)। आत्मा से प्राप्त प्रेरणा से ही देश की सेवा करते हैं।

सुधीश :
मैं किस तरह देश सेवा कर सकता हूँ? वे कौन से उपाय हैं?

सिद्धार्थ :
देश सेवा के बहुत से योग्य उपाय हैं। विद्यार्थी जीवन में “राष्ट्रीय छात्र सेना (एन. सी. सी.)” होती हैं। ‘राष्ट्रीय सेवायोजना’ (एन. एस. एस.) देश सेवा के उपाय हैं। ‘एकता और अनुशासन’ राष्ट्रीय छात्र सेना का ध्येय वाक्य ही है और ‘मैं नहीं आप’ भी राष्ट्रीय सेवायोजना का ध्येय वाक्य हैं। इन दोनों उपायों से (मार्गों से) हम सभी व्यक्तित्व विकास के साथ ही समाजसेवा और देश सेवा करने में समर्थ हैं।

सुधीशः :
छात्रजीवनस्य अनन्तरं देशसेवायाः के मार्गाः?

सिद्धार्थ: :
जल-वायु-स्थलसेना इति त्रिविधसेनाप्रकाराः देशसेवायाः एव मार्गाः सन्ति।

सुधीश: :
मित्र! एतासां सेनानां विषये किञ्चित् विवरणं ददातु।

सिद्धार्थ: :
जलसेनायाः ध्येयवाक्यं ‘शन्नोवरुणः’ इति अस्ति। एषा जलमार्गात् देशरक्षां करोति। वायुसेना ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ इति ध्येयवाक्यं स्वीकृत्य आकाशमार्गात् देशं रक्षति। स्थलसेनायाः ध्येयवाक्यं-‘सेवा अस्माकं धर्मः’ इति। एषा स्थलात् देशरक्षणं करोति।

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सुधीश: :
भवतु, ज्ञातं देशहितमार्गाणां विषयेः, किन्तु एतेषु कः भेदः।

सिद्धार्थ: :
न कोऽपि भेदः। एते सर्वे जाति-धर्म-भाषाभेदरहिताः देशसेवायाः विभिन्नाः मार्गाः वर्तन्ते। सर्वेषामुद्देश्यं तु एकम् एव ‘देशहितम्’ इति।

अनुवाद :
सुधीश :
छात्र जीवन के बाद देशसेवा के कौन से उपाय हैं?

सिद्धार्थ :
जल सेना, वायु सेना तथा थल सेना, जो तीन प्रकार की सेना है, (वह भी) देशसेवा के उपाय हैं।

सुधीश :
हे मित्र! इन सभी सेनाओं के विषय में कुछ विवरण दीजिए।

सिद्धार्थ :
‘जल सेना’ का ध्येय वाक्य ‘शन्नोवरुण:’ (वरुण देवता हमारा कल्याण करे) है। यह जलमार्ग से देश की रक्षा करती है। वायुसेना ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ (आकाश प्रकाश से युक्त हो) इस ध्येय वाक्य को स्वीकार करके आकाशमार्ग से देश की रक्षा करती है। स्थल सेना (थल सेना) का ध्येय वाक्य है-‘सेवा (ही) हमारा धर्म है।’ यह स्थल से देश की रक्षा करती है।

सुधीश :
ठीक है, देश की भलाई के मार्गों (उपायों) के विषय में जानकारी मिली। किन्तु इनमें कौन सा भेद है?

सिद्धार्थ :
कोई भी भेद नहीं है। ये सभी जाति-धर्म और भाषा के भेद से रहित देश सेवा के विभिन्न मार्ग (उपाय) हैं। सभी का एक ही उद्देश्य ‘देश की भलाई (कल्याण)’ है।

देशहिताय शब्दार्थाः

धृत्वा = पहनकर। जनसेवायै = लोगों की सेवा के लिए। मेलापकेषु = मेलों में। हट्टेषु = बाजारों में। मातृतुल्यः = माता के समान।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti महत्त्वपूर्ण पाठों के सारांश

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions महत्त्वपूर्ण पाठों के सारांश

मेरी भावना

‘मेरी भावना’ नामक कविता में जुगल किशोर ‘युगवीर’ ने हम सभी को सदुपदेश दिया है कि हमारे अन्दर अभिमान, ईर्ष्या, द्वेष और क्रोध की भावना न रहे। सबके प्रति हमारा व्यवहार सरल और सत्य से परिपूर्ण हो तथा प्रत्येक क्षण दूसरों का उपकार करने की भावना बनी रहे। सभी जीवों के प्रति मैत्री भाव और करुणा का स्रोत हमारे हदयों में बहता रहे। समता का भाव बना रहे। दुर्जनों की संगति से बचे रहें। गुणवान जनों का सम्मान करते रहें। हम सदैव किए गये उपकार को भूले नहीं। द्रोह न करें. दोषों को न देखें। न्याय मार्ग पर चलें,लालच में न फंसे। मृत्यु का भी भय न हो।

अन्त में कवि कामना करता है कि संसार के सभी लोग परस्पर प्रेमपूर्वक रहें। उनमें मोह भाव उत्पन्न हो। किसी से कोई भी कटु वचन बोलने वाला न हो।

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छोटा जादूगर

कार्निवाल के मैदान में मेला लगा था। चारों ओर बिजली की जगमगाहट थी। फब्बारे के पास लेखक खड़ा था। वहीं एक लड़का चुपचाप उन लोगों को देख रहा था जो शरबत पी रहे थे। इस लड़के की उम्र तेरह-चौदह वर्ष की रही होगी। उसका कुर्ता फटा था। उसके गले में एक मोटी-सी सूत की रस्सी पड़ी थी। उसकी जेब में ताश के पत्ते थे। उसके चेहरे से दु:ख टपक रहा था, लेकिन वह धैर्यवान था।

लेखक के पूछने पर उसने बताया कि वह वहाँ के जादूगर से भी अच्छा ताश का खेल दिखा सकता है। लेखक और छोटा जादूगर दोनों शरबत पीते हैं। लेखक ने परिचय पूछा, तो उसने बताया कि उसके परिवार में तीन आदमी है-उसकी माँ और बाप तथा वह स्वयं। उसके पिता देश की आजादी के लिए जेल गये हैं। माँ बीमार है। माँ के बीमार होते हुए भी वह खेल दिखाने के लिए चला आया है। खेल-तमाशा दिखाने से मिले पैसों से माँ की बीमारी का इलाज करता है और अपना पेट भी भरता है, परन्तु इस कमाई से खर्च पूरा नहीं होता है।

लेखक की पत्नी ने कमलिनी की छोटी झील पर उसे एक रुपया खेल दिखाने के लिए दिया। वह उसे लेकर चलने लगा। छोटा जादूगर ने बताया कि सबसे पहले वह पकौड़े खायेगा और फिर सूती चादर खरीदेगा अपनी माँ के लिए। लेखक ने अपनी स्वार्थ भरी आदत पर अचम्भा किया। छोटा जादूगर नमस्कार करके चला गया। लेखक अपने परिवार सहित कुंज देखने चला जाता है। छोटा जादूगर उन्हें वहाँ स्मरण हो आता है।छोटा जादूगर की माँ को अस्पताल से बाहर निकाल दिया गया है। लेखक भी अपनी कार से उतर छोटे जादूगर की झोपड़ी में उसकी बीमार काँपती हुई माँ को देखता है। उसकी दशा दयनीय थी।

छोटा जादूगर अन्य किसी दिन उद्यान में अपना रंगमंच जमाये हुए है। विभिन्न खेल दिखा रहा है। लेखक ने आगे बढ़कर पूछा कि आज तुम्हारा खेल क्यों नहीं जमा है। छोटा जादूगर ने बताया कि “माँ ने कहा था कि आज तुरन्त चले आना। मेरी घड़ी समीप है।” लेखक ने कहा “फिर भी तुम खेल दिखाने चले आये।” लेखक के कहने पर उसने कहा ‘क्यों नहीं आता?’ लेखक ने तुरन्त ही उसका झोला गाड़ी में फेंका, उसे पीछ बैठाया और बताये मार्ग से गाड़ी चला दी।

कुछ क्षण में झोंपड़ी के सामने गाड़ी पहुँची। छोटा जादूगर दौड़कर “माँ, माँ” पुकारता हुआ झोपड़ी में घुसा। उस बीमार स्त्री के मुख से अस्पष्ट शब्द “बे……..” निकलकर रहा गया। छोटा जादूगर उससे लिपटा रो रहा था। लेखक चकित था। चारों ओर धूप फैली हुई थी। संसार सपना सा-एक जादू-सा चारों ओर नाचता-सा लग रहा था।

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हींगवाला 

लगभग पैंतीस वर्ष का एक खान “अम्माँ हींगवाला” कहता हुआ सावित्री के आँगन में मौलश्री के पेड़ के चबूतरे पर आकर बैठ गया। सावित्री के नौ-दस बरस के बच्चे ने कहा कि अभी कुछ नहीं लेना है। खान ने फिर कहा कि वह अपने देश को लौट कर जा रहा है। बहुत दिनों में आयेगा। हींग ले लो। खान की बात सुन सावित्री रसोईघर से बाहर निकलकर आती है। खान कहता है कि वह उसके हाथ से बोहनी करना चाहता है। उसकी हींग, हेरा हींग है। वह धोखे का व्यापार नहीं करता है। सावित्री के न

चाहते हुए भी वह हींग तोलकर देता है जिसकी कीमत सवा छः आने होती है। सावित्री मूल्य देती है। खान चला जाता है। बच्चे अपनी खर्ची मांगने की रट लगाते हैं। सावित्री बच्चों को खाना खाने के लिए कहती है।समय बीता। होली निकली। शहर में दंगा हो गया। खान तो नहीं मर गया। वह हींग वालों की बात करते हुए खान को याद कर बैठती है।

एकदिन ‘खान’ अचानक ही “हींग है हींग” कहता हुआ सावित्री के घर में घुस जाता है। दंगे की बात करने पर खान ने कहा कि लड़ने वाले नासमझ हैं। दशहरे और होली के त्यौहारों पर दंगा हुआ। दशहरे का त्यौहार है। पक्के प्रबन्ध हैं। त्यौहार का जोश है। सावित्री का पति घर पर नहीं है। उसके बच्चे काली के जुलूस को देखने की जिद कर बैठते हैं। उसने घर के नौकर के साथ उन्हें जुलूस में भेज दिया।

थोड़ी देर बाद, सावित्री ने गली में लोगों की भगदड़ सुनी। उसने बाहर निकलकर पूछा कि वे क्यों भागे जा रहे हैं। लोगों ने कहा दंगा हो गया है। सावित्री सालभर के बच्चे सहित घर में अकेली है। जुलूस में गये बच्चों को देखने कैसे जाये। उसे न अन्दर चैन न बाहर। बच्चों को भेजने की अपनी मूर्खता के लिए स्वयं को कोस रही थी। देर रात का समय था। दरवाजे पर ‘खान’ बच्चों को लेकर आता है। घर का नौकर बच्चों को जुलूस में छोड़कर कहीं भाग गया। खान ने कहा “माँ, वक्त अच्छा नहीं। बच्चों को भीड़भाड़ में मत भेजा करो।” बच्चे सावित्री से लिपट जाते है। कहते हैं, ‘खान बहुत अच्छा आदमी है। खान हमारा दोस्त है।’ खान ने कहा, “दोस्त नहीं-भाई है।”

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नरबदी

मैकल पर्वत के घने जंगलों में आठ-दस झोपड़ियों का एक गाँव था। वहाँ एक झोपड़ी में दुग्गन रहता था। उसकी एक पुत्री थी नरबदी। उसकी माँ उसे जन्म देकर मर गयी थी। नरबदी अब बारह बरस की हो गयी थी। वह अपनी बेटी को सदा अपने साथ ही रखता था।

एक दिन झोपड़ी की मरम्मत के लिए वह एक बाँस लेने के लिए मैकल पर्वत पर गया। धूप तेज थी। वे दोनों चढ़ते गये। नरबदी को प्यास लगी। वह पानी की खोज में मैकल के घने वनों में इधर-उधर भटका। नरबदी पेड़ों की घनी छाया में बैठी रही। उसने अनुभव किया कि वह तो यहाँ छौंव में बैठी है। उसका पिता तो धूप और थकावट से बहुत प्यासा होगा। नरबदी देवता को मनाने लगी. “हे बड़े देवता ! तू मेरे बाबा की रक्षा करना।” लौटकर दुग्गन झुरमुट के पास पहुँचा।

नरबदी झुरमुट में नहीं दिखी। वह व्याकुल हो गया। तभी झुरमुट के बीच कल-कल की आवाज करते झरने को सुना। दुग्गन रोता हुआ अपनी पुत्री को पुकार रहा था। नरबदी झरने के रूप में कल-कल कर बहती जा रही थी। नरबदी ने दुग्गन से कहा, “तुम अपनी प्यास बुझा लो, मैं झरने में बदल गयी हूँ। अब इस जंगल में कोई प्यासा नहीं रहेगा।” नरबदी बाँसों के झुरमुटों से बह रही थी, कल-कल करती। वह तब से अमरकण्टक से बह रही है-समुद्र तक। वही नरबदी-नर्मदा के रूप में अमरकण्टक से जीवनरेखा बनकर बहती रहती है।

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MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 12 पादप में जनन

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MP Board Class 7th Science Chapter 12 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. जनक पादप के कायिक भागों से नये पादप के उत्पादन का प्रक्रम ….. कहलाता है।
  2. ऐसे पुष्पों को, जिनमें केवल नर अथवा मादा जनन अंग होता है ……….. पुष्प कहते हैं।
  3. परागकणों का उसी अथवा उसी प्रकार के अन्य पुष्प के परागकोश से वर्तिकाग्र पर स्थानान्तरण का प्रक्रम ……….. कहलाता है।
  4. नर और मादा युग्मकों का युग्मन ………. कहलाता है।
  5. बीज प्रकीर्णन ……….., …………. और …………. के द्वारा होता है।

उत्तर:

  1. कायिक प्रवर्धन।
  2. एकलिंगी।
  3. परागण।
  4. युग्मनज।
  5. पवन, जल, जन्तुओं।

प्रश्न 2.
अलैंगिक जनन की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए। प्रत्येक का उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अलैंगिक जनन की विधियाँ:
(1) कायिक प्रवर्धन विधि:
इस विधि में पादप के मूल, तने, पत्ती अथवा कली/मुकुल जैसे किसी कायिक अंग द्वारा नया पादप प्राप्त किया जाता है।

उदाहरण:
गुलाब के पौधे की एक शाखा का पर्वसन्धि से काटकर शाखा का एक टुकड़ा निकाल लिया जाता है। इस टुकड़े को कलम कहते हैं। कलम को सीधा खड़ा करके इसका कुछ भाग मिट्टी में दबा देते हैं। कलम को प्रतिदिन पानी देते हैं। कुछ दिन बाद इससे जड़ और पत्तियाँ निकलने लगती हैं।

(2) मुकुलन विधि:
मुकुलन विधि में कोशिका से एक उभार के समान बाहर की ओर एक रचना निकलती है। इसे मुकुल या कली कहते हैं। यह मुकुल वृद्धि करता है और परिपक्व होकर मातृ कोशा से अलग हो जाता है तथा स्वतन्त्र होकर कार्य करता है। कभी-कभी मुकुल मातृ कोषा में लगे रहकर भी नए जीव उत्पन्न करता है।

उदाहरण:
थोड़ा यीस्ट पाउडर लेकर इसे एक ऐसे बर्तन में डाल देते हैं जिसमें कुछ जल हो। इस जल में एक चम्मच शक्कर डालकर घोल लेते हैं। कुछ समय बाद कोशा से एक उभार के समान मुकुल निकलने लगते हैं।

(3) खण्डन विधि:
खण्डन विधि से अलैंगिक प्रजनन सामान्य रूप से एक कोशीय जीवों में होता है। इस विधि में जीव का शरीर दो भागों में टूट जाता है। इसमें अनुकूल परिस्थिति में परिपक्व कोशिका का केन्द्रक दो भागों में विभाजित हो जाता है। ‘इसके पश्चात कोशिका द्रव्य भी दो भागों में विभाजित होकर दो कोशिकाओं को जन्म देता है जो स्वतन्त्र रूप से वृद्धि करते हैं।

उदाहरण:
जलाशयों में शैवाल जल और पोषक तत्व पाकर दो या दो से अधिक खण्डों में विखण्डित हो जाते हैं। ये खण्ड नये जीवों में वृद्धि कर जाते हैं। प्रक्रम निरंतर चलता ही रहता है।

(4) बीजाणु निर्माण विधि:
यह अलैंगिक जनन की विधि है। इस विधि द्वारा जीवाणु जनन करते हैं। जीवाणु उच्च ताप और निम्न आर्द्रता जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण कठोर सुरक्षात्मक आवरण से ढके रहते हैं। इसलिए ये लम्बे समय तक जीवित रह सकते हैं। अनुकूल परिस्थितियों में बीजाणु अंकुरित होकर नये पौधे बनाते हैं।

उदाहरण: फर्न अनुकूल परिस्थिति पाकर नये पौधों का निर्माण करते हैं।

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प्रश्न 3.
पादपों में लैंगिक जनन के प्रक्रम को समझाइए।
उत्तर:
पुष्प पादप का जनन अंग होते हैं। पुष्प में पुंकेसर नर जनन अंग तथा स्त्रीकेसर मादा जनन अंग हैं। पुंकेसर में परागकोश होता है जिसमें परागकण होते हैं जो नर युग्मकों को बनाते हैं। स्त्रीकेसर में अंडाशय होते हैं। अण्डाशय में एक या अधिक बीजांड होते हैं। मादा युग्मक (अण्ड) का निर्माण बीजांड में होता है। लैगिंक जनन में नर और मादा युग्मकों के युग्मन से युग्मनज बनता है। युग्मनज भ्रूण के रूप में विकसित होता है।

प्रश्न 4.
अलैंगिक और लैंगिक जनन के बीच प्रमुख अन्तर बताइए।
उत्तर:
लैंगिक और अलैंगिक जनन में अन्तर:

लैगिक ननन अलैंगिक जनन
लैंगिक जनन में नर और मादा दोनों की आवश्यकता होती है। अलैंगिक जनन में नर एवं मादा की आवश्यकता नहीं होती।
नये जीव की उत्पत्ति दोनों से होती है। नये जीव की उत्पत्ति एक ही जनक से होती है।
इसमें निषेचन की क्रिया होती है। इसमें निषेचन की क्रिया नहीं होती।

प्रश्न 5.
किसी पुष्प का चित्र खींचकर उसमें जनन अंगों को नामांकित कीजिए।
उत्तर:
पुष्प के जनन अंग:
MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 12 पादप में जनन 1

प्रश्न 6.
स्व-परागण और पर-परागण के बीच अन्तर बताइए।
उत्तर:
स्व-परागण और पर-परागण में अन्तर:

स्व-परागण पर-परागण
जब किसी पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं तो इसे स्व-परागण कहते हैं। जब किसी एक पुष्प केपरागकण किसी अन्य पुष्प के वर्तिकान पर गिरते हैं, तो कहते हैं। इसे पर-परागण कहते हैं।

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प्रश्न 7.
पुष्पों में निषेचन का प्रक्रम किस प्रकार सम्पन होता है?
उत्तर:
पुष्पों में निषेचन-पुंगकेसरों के परागकोशों से । परागकरण स्त्रीकेसर की वर्तिकान पर पहुँचते हैं। यहाँ इनका अंकुरण होता है जिसके फलस्वरूप पराग नलिका बनती है। पराग नलिका वर्तिका में प्रवेश करके अण्डाशय में पहुँचती है। अण्डाशय में बीजाण्ड होते हैं जिसमें अण्डाणु होते हैं। पराग नलिका बीजाण्ड में नरयुग्मक छोड़ती है। नर एवं मादा युग्मक मिलकर युग्मनज बनाते हैं। इस प्रकार पुष्पों में निषेचन की प्रक्रिया होती है। निषेचन के पश्चात् बीजाण्ड एवं अण्डाशय परिवर्धित होकर, क्रमशः बीज एवं फल बनाते हैं।

प्रश्न 8.
बीजों के प्रकीर्णन की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रकृति में पादप के फलों और बीजों का प्रकीर्णन पवन, जल और जन्तुओं द्वारा होता है –
(1) पवन द्वारा प्रकीर्णन:
कुछ पादपों के पंखयुक्त बीज जैसे सेहिजन (ड्रमिस्टक), द्विफल (मैपिल), घासों के हल्के बीज, मदार के रोमयुक्त बीज, सूरजमुखी के रोमयुक्त फल पवन के साथ उड़कर सुदूर स्थानों तक चले जाते हैं और वहाँ जाकर प्रकीर्णित हो जाते हैं।

(2) जल द्वारा प्रकीर्णन:
कुछ बीज अथवा फल जल के द्वारा प्रकीर्णित होते हैं, ऐसे बीजों के आवरण स्पन्ज़ी अथवा तन्तुमय होते हैं जिससे वे जल में आसानी से तैरते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान को चले जाते हैं। जैसे- नारियल।

(3) जन्तुओं द्वारा प्रकीर्णन:
कुछ बीजों का प्रकीर्णन जन्तुओं द्वारा होता है। इस प्रकार के बीजों में ऐसी संरचनाएँ होती हैं जिससे ये जन्तुओं के शरीर से चिपक जाते हैं और दूर स्थान पर पहुँच जाते हैं। ऐसे बीज काँटेदार अथवा हुक जैसी संरचनाओं के होते हैं। जैसे- यूरेना, जैन्थियम आदि।

प्रश्न 9.
कॉलम A में दिए गए शब्दों का कॉलम B में दिए गए जीवों से मिलान कीजिए –
MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 12 पादप में जनन 2
उत्तर:
(क) → (iii)
(ख) → (v)
(ग) → (ii)
(घ) → (i)
(च) → (iv)

प्रश्न 10.
सही विकल्प पर (✓) निशान लगाइए –
(क) पादप का जनन भाग होता है, उसका –

  1. पत्ती/पर्ण।
  2. तना।
  3. मूल।
  4. पुष्प।

(ख) नर और मादा युग्मक के युग्मन का प्रक्रम कहलाता है –

  1. निषेचन।
  2. परागण।
  3. जनन।
  4. बीज निर्माण।

(ग) परिपक्व होने पर अंडाशय विकसित हो जाता है –

  1. बीज में।
  2. पुंकेसर में।
  3. स्त्रीकेसर में।
  4. फल में।

(घ) बीजाणु उत्पन्न करने वाला एक पादप जीव है –

  1. गुलाब।
  2. डबलरोटी का फफूंद।
  3. आलू।
  4. अदरक।

(च) ब्रायोफिल्लम अपने जिस भाग द्वारा जनन करता है, वह है –

  1. तना।
  2. पत्ती।
  3. मूल।
  4. पुष्प।

उत्तर:
(क) पुष्प।
(ख) निषेचन।
(ग) फल में।
(घ) डबलरोटी का फफूंद।
(च) पत्ती।

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.3

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.3

Question 1.
Construct ∆DEF such that DE = 5 cm, DF = 3 cm and m ∠EDF = 90°.
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.3 1

1. Draw a line segment DE = 5 cm.
2. At Q, draw an angle EDX = 90°.
3. From ray DX, cut off DF = 3 cm.
4. Join EF.
Then, DEF is the required triangle.

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.3

Question 2.
Construct an isosceles triangle in which the lengths of each of its equal sides is 6.5 cm and the angle between them is 110°.
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.3 2
1. Draw a line segment BC = 6.5 cm.
2. At B draw an ∠CBX =110°.
3. From ray BX, cut off BA = 6.5 cm.
4. Join AC.
Then, ABC is the required isosceles triangle.

Question 3.
Construct ∆ABC with BC = 7.5 cm, AC = 5 cm and m∠C = 60°?
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.3 3
1. Draw a line segment BC = 7.5 cm.
2. At C, draw ∠BCX = 60°.
3. From ray .CX, cut off CA = 5 cm.
4. Join AB.
Then, ABC is the required triangle.

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2

Question 1.
Construct ∆XYZ in which XY = 4.5 cm, YZ = 5 cm and ZX = 6 cm.
Solution:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2 1
Steps of Construction :
1. Draw a line segment YZ = 5 cm.
2. With centre Y and radius 4.5 cm, draw Y an arc.
3. With centre Z and radius 6 cm draw another arc intersecting the previous arc at X.
4. Join YX and ZX. Then, XYZ is the required triangle.

Question 2.
Construct an equilateral triangle of side 5.5 cm.
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2 2
1. Draw a line segment BC = 5.5 cm.
2. With B as centre and radius equal to 5.5 cm (= BA), draw an arc.
3. With C as centre and radius equal to 5.5 cm (= CA), draw another arc intersecting the previous arc at A.
4. Join AB and AC.
Then, ABC is the required equilateral triangle.

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2

Question 3.
Draw ∆PQR with PQ = 4 cm, QR = 3.5 What type of triangle is this?
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2 3
1. Draw a line segment QR = 3.5 cm.
2. With Q as centre and radius equal to 4.0 cm (= QP), draw another arc intersecting the previous arc at P.
3. With R as centre and radius equal to 4.0 cm (= PR), draw another arc intersecting the previous arc at P.
4. Join PQ and PR
Then, PQR is the required triangle.
From above construction, ∆PQR is an isosceles triangle.

Question 4.
Construct ∆ABC such that AB = 2.5 cm, BC = 6 cm and AC = 6.5 cm. Measure ∠B.
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2 4
1. Draw a line segment BC = 6 cm.
2. With B as centre and radius equal to 2.5 cm. (AB) draw an arc.
3. With C as centre and radius equal to 6.5 cm (AC), draw another arc intersecting the
4. Join AB and AC.
Then, ABC is the required triangle.
On measuring, we find that ∠B = 90°.

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1

Question 1.
Draw a line, say AB, take a point C outside it. Through C, draw a line parallel to AB using ruler and compasses only.
Solution:
Step of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1 1
1. Take any point P on line AB.
2. Take any point C (Given) outside AB and join PC.
3. With P as centre and a convenient radius, draw an arc cutting line AB at R and PC at S.
4. Now with C as centre and the same radius as in Step 3, draw an arc intersecting PC at T.
5. With T as centre and radius equal to R draw an arc intersecting the previous arc at N.
6. Now, join CN and produce it on both sides to form a line EF.
Thus, EF is the required line parallel to AB and passing through the given point C.

Question 2.
Draw a line l. Draw a perpendicular to l at a xy n point on l. On this perpendicular choose a point X, 4 cm away from l. Through X, draw a line m parallel to l.
Solution:
Steps of Constructions :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1 2
1. Draw a line l and take any point P on it.
2. With P as centre and any suitable radius draw an arc intersecting line l at A and B.
3. With A as centre and radius equal to more than AP draw an arc.
4. Again with B as centre and same radius as in Step 3 draw another arc to intersects the previous arc at C.
5. Join PC and produce it to Q.
Then PQ is the required perpendicular.
6. Now with P as centre and radius equal to 4 cm, draw an arc to intersect PQ at X, such that PX = 4 cm.
7. With X as centre and a convenient radius draw an arc intersecting PQ at D.
8. Again with D as centre and same radius as in Step 7 draw an arc to intersect the previous arc at E.
9. Join XE and produce if to form a line m.
Thus, m is the required line.

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1

Question 3.
Let l be a line and P be a point not on l. Through P, draw a line m parallel to l. Now join P to any point Q on l. Choose any other point R on m. Through R, draw a line parallel to PQ. Let this meet l at S. What shape do the two sets of parallel lines enclose?
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1 3
1. Draw a line l and take any point P outside it.
2. Take any point Q on line l
3. Join QP.
4. With Q as centre and any suitable radius, draw an arc intersecting line l and QP at A and B respectively.
5. Now with P as centre and same radius as in Step 4, draw an arc on the opposite side of PQ to intersect PQ at C.
6. Again with C as centre and radius equal to AB, draw an arc to intersect the previous arc at D.
7. Join PD and produce it in both directions to obtain the required line m.
8. Further take any point R on m.
9. Through R, draw a line RS || PQ by following the steps explained above.
The shape of the figure enclosed by these lines is a parallelogram QPRS.

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MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti विविध प्रश्नावली 1

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Solutions विविध प्रश्नावली 1

Class 7 Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 1.
सही जोड़ी बनाइए
1. अमृत = (क) क्षमता
2. मनुष्य = (ख) महल
3. कार्य = (ग) घट
4. राज = (घ) समाज
उत्तर-
1. (ग),
2. (घ),
3. (क),
4. (ख)

Class 7th Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 2.
उपयुक्त शब्द से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) जिन-जज भूखों की ………………………… दीनू ने बुझाई है, उनकी दुआएँ भी वह राजकुमार के लिए लाया है। (भूख/प्यास)
(ख) दुश्मन का मुख ………………………… करता, जन-जन की पीड़ा को हरता। (काला/पीला)
(ग) यदि एक तिहाई उम्र बिना कोई ………………………… गुजर भी जाए तो क्या फर्क पड़ेगा। (देखे/सोचे).
(घ) चक्रवात ………………………… दबाव में आकस्मिक पविर्तन के कारण होता है। (वायुमण्डलीय/ जैव.मण्डलीय)
उत्तर-
1. भूख
2. काला
3. देखे
4. वायुमण्डलीय।

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MP Board Class 7th Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए-
(अ) सिक्के की विश्वसनीयता और पहचान के लिए प्राचनी काल से राजा लोग क्या करते आए हैं।
उत्तर-
सिक्के की विश्वसनीयता और पहचान के लिए प्राचीन समय से ही राजाओं ने इसके एक ओर अपने राज्य की मुद्रा तथा दूसरी तरफ इसका मूल्य अंकित कर ढाला।

(ब) ‘महूरत न सोचो, मचलते चलो’ में ‘मचलते चलो’ का अर्थ क्या है?
उत्तर-
मचलते चलो = जिद करके अपनी धुन में बढ़े चलो।

(स) बाढ़ों के लिए कौन जिम्मेदार है?
उत्तर-
प्रकृति और मनुष्य बाढ़ो के लिए जिम्मेदार है।

(द) दीनू ने क्या सोचकर भिखारी को रोटियाँ दी?
उत्तर-
दीने के पास जो रोटियाँ थी उनमें से चार इसको दे दूंगा तो क्या फर्क पड़ जाएगा, उसने यह सोच कर चार रोटियाँ भिखारी को दी।

(इ) कर्मों के संकीर्तन में सबसे ऊँचा स्वर किसका है?
उत्तर-
कर्मों के संकीर्तन में सबसे ऊँचा स्वर उसका होता है जो समाज की सच्ची सेवा करता है।

MP Board Class 7th Hindi प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन से पाँच वाक्यों में लिखिए-
(अ) मनुष्य समाज के उन्नतिशील होने के कारण लिखिए।
उत्तर-
मनुष्य समाज के उन्नतिशील होने में सिक्के का महत्त्वपूर्ण योगदान है। पहले मनुष्य कुछ भी उत्पादित करता था, वह अपने उपयोग पर खर्च कर डालता था, परंतु सिक्कों के आने से वह अल्पबचत कर सकता है तथा भविष्य में उत्पन्न सभी समस्याओं से लड़ सकता

(ब) अविचल खड़ा हिमालय कौन-कौन से दायित्व निभा रहा है।
उत्तर-
प्रारंभिककाल से ही हिमालय भारत की रक्षा कर रहा है। हिमालय के उस पार कई बार दुश्मनों ने घुसपैठ करने की कोशिश की किंतु हिमालय ने अडिग रहकर हमारी मदद की। इसके अलावा हिमालय उत्तर दिशा में आने वाली बर्फ की आंधियों से हमारी रक्षा करता है। आज संपूर्ण विश्व में हिमालय ही हमारी पहचान है।

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(स) ‘बहुमत के आधार पर दाँत सर्वोपरि है’ सिद्ध करो।
उत्तर-
बहुमत के आधार पर भी दाँत सर्वोपरि है। शरीर के अधिकतर अंग इकलौते हैं या फिर उनकी संख्या दो तक हो सकती है, पर दाँत संख्या में सर्वाधिक है।

(द) जल के बहाव को काम करने के लिए कौन-कौन से उपाय किए जाते हैं?
उत्तर-
जल के बहाव को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए गए जल के बहाव में कमी करने के लिए वन लगवाना। -जल प्रवाह मार्ग में नहरी तंत्र का विकास करना। -बाढ़ की भविष्यवाणी करना।

(इ) आर्थिक उन्नति में सिक्के की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
किसी भी समाज की आर्थिक उन्नति में सिक्कों का सबसे अधिक योगदान होता है। सिक्कों से व्यापार में उन्नति होती है। समाज की सभी छोटी-बड़ी आर्थिक इकाइयों में सिक्कों का लेनदेन होता है। सिक्कों का सबसे अधिक लाभ ‘अल्पबचत’ करना होता है। बचत से समाज का भविष्य सुरक्षित बना रहता है।

Class 7th Vividh Prashnavali 1 Hindi प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए-
स्वतंत्रता, बहुमत, हानि, दुश्मन, गरीब, उन्नति, ऊंचा, यश, उपेक्षा, आवश्यक, समर्थ
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti विविध प्रश्नावली 1 1

MP Board Class 7 Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 6.
निम्नलिखित तत्सम, तद्भव और आगत शब्दों को छाँटकर लिखिए-
प्यासा, जन, धड़ा, रास्ता, काम, जरूरत, कोशिश,। प्रयत्न, जड़ा, मुकाबला, मुस्कान, आँख, खिसकाना, किटकिट, गड़गड़ाहट, टकसाल, सिक्का, मुद्रा, बैंक, पेंसिल, अयस्क, दुआएँ, शताब्दी, जहान॥
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti विविध प्रश्नावली 1 2

Sugam Bharti Class 7 प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यावाची लिखिएपथ, पग, शरीर, चेष्टा, हलचल, परहित, पीड़ा।
उत्तर-
शब्द – पर्यायवाची
पथ – मार्ग, रास्ता।
पग – पैर, कदम।
शरीर – तन, काया।
चेष्टा – प्रयत्न, कोशिश।
हलचल – कंपन
परहित – हितेषी।
पीड़ा – दुख, शोक।

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Class 7th Hindi Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 8.
निम्नलिखित अवतरण में से संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया शब्द छाँटिए-
उसके झोले में तीन रोटियाँ ही बची थी। कुछ दूर चलने पर उसे एक गाय मिली। एक बछड़ा भी साथ था जो लगातार गौ के थन खींच रहा था। उनमें दूध नहीं था। दीनू गाय को हमेशा ही श्रद्धा से गो-माता के रूप में देखता था। उसने गो-माता को नमस्कार किया। एक रोटी उसे खिला दी। एक रोटी बछड़े को भी दे दी। सोचा-एक रोटी है मेरे पास। कौन ये मेरी रोटी खा ही – लेंगे। उपहार के लिए एक ही रोटी काफी है।
उत्तर-
संज्ञा शब्द : झोले, रोटियाँ, गाय, बछड़ा, गौ, दूध, दीनू।
सर्वनाम शब्द : उसके, कुछ, उसे, जो, उनमें आदि।
विशेषण : तीन, एक आदि।
क्रिया : बची, मिली, खींच, देखता नमस्कार करना, खिला, देना, खा लेना।

Class 7th Hindi MP Board प्रश्न 9.
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्य में प्रयोग कीजिए-
आँख फेरना, बन्दर धुड़की देना, मुँह में अँगुली दबाना, दाँत किट किटाना, जेब गर्म होना, हाथों-हाथ उठाना, फिसड्डी होना, खिल उठना।
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti विविध प्रश्नावली 1 3

Class 7th MP Board Hindi प्रश्न 10.
निम्नलिखित शब्दों में ग्रस्त, हीन और रहित शब्द जोड़कर नए सार्थक शब्द बनाइए-
बुद्धि, भेद-भाव, स्वार्थ, पंख, विचार, मर्यादा, अंग, रोग, शोक, मोह, लकवा, शर्म।
उत्तर-
शब्द = सार्थक शब्द
बुद्धि = बुद्धिहीन
भेदभाव = भेदभावरहित
स्वार्थ = स्वार्थरहित
पंख = पंखरहित
विचार = विचारहीन
मर्यादा = मर्यादाहीन
अंग = अंगहीन
रोग = रोगग्रस्त
शोक = शोकग्रस्त
मोह = मोहरहित
लकवा = लकवाग्रस्त
शर्म = शर्मरहित

Class 7 Sanskrit Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 11.
निम्नलिखित अवतरण में संयुक्त क्रियाओं को रेखांकित कीजिए-
मेरे सर्वेक्षण में आँखों को इतना महत्त्व नहीं दिया जा सकता। आँखें सिर्फ देखने के काम आती हैं। मैंने दो-तिहाई उम्र इनसे काम ले लिया और इनमें जो-जो चीजें या हालात देखे, उन्हें देखकर इस निर्णय पर पहुँचा हूँ कि अब और कुछ देखने को जी नहीं चाहता॥
उत्तर-
मेरे सर्वेक्षण में आँखों को इतना महत्त्व नहीं दिया जा सकता। आँखें सिर्फ देखने के काम आती हैं। मैंने दो-तिहाई उम्र इनसे काम ले लिया और इनमें जो-जो चीजें या हालात देखे, उन्हें देखकर इस निर्णय पर पहुँचा हूँ कि अब और कुछ देखने को जी नहीं चाहता।

MP Board Class 7 Hindi प्रश्न 12.
निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए कहानी लिखिए-
बालक हलवाई की दुकान पर है। ललचाई आँखों से जलेबी को देखता है। कमीज-पेण्ट की जेबों में हाथ डालता है। कुछ भी न होने का भाव प्रकट करता है। हताश लौटने लगता है। हलवाई उसे जलेबियाँ देता है। बालक मुफ्त की चीज नहीं लूँगा। हलवाई मेहनत कर खाना अच्छी बात है। बालक-कमाकर लाऊँगा, तब खाऊँगा।
उत्तर-

“मेहनत ही इज्जत है”

सारे दिन कनिष्क शहर में इधर-उधर घूमता रहा। कभी इस गली से उस गली, कभी टूटी चप्पल से खाली प्लास्टिक की बोतल को लात मारता है। तभी बोतल पास के नत्थु हलवाई की दुकान के आगे लुढ़कती है। कनिष्क बोतल तक पहुँचता है। तभी उसकी नजर गर्म-गर्म जलेबी पर पड़ती है, उसके मुँह में पानी आ रहा है। वह नत्थु हलवाई की ओर देखते हुए अपनी जेबे टटोलता है। लेकिन उसके पास तो चवन्नी भी नहीं है। हलवाई उसकी ओर देखता है। कनिष्क हताश और अधूरे मन से वहाँ से लौटने के लिए मुड़ता है। नत्थु को बालक पर तरस आ जाता है, वह उसे रोककर दो जलेबी के टुकड़े देता है लेकिन कनिष्क अचानक जलेबी लेने से मना कर देता है, वह नत्थु से कहता है कि वह मुफ्त की चीज नहीं लेगा। हलवाई को बालक की खुद्दारी अच्छी लगती है। वह उसके सिर पर हाथ रखकर बोलता है-शाबाश बेटा, जिंदगी में कभी कोई चीज माँग कर मत लेना। खुद पैसा कमाकर चीजे खरीदना गर्व की बात है। बालक मुस्कराते हुए नत्थु से कहता है-ठीक है बाबा, अब तो ये जलेबियाँ तभी लूँगा जब मैं पैसे कमा कर लाऊँगा।

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Class 7 Hindi MP Board प्रश्न 13.
निम्नलिखित अवतरण में विराम लगाइए-
मैं जानता हूँ सभी बातें झटपट सिखाते नहीं बनती फिर भी हो सके तो उसके मन में जगाइए पसीना बहाकर कमाया हुआ एक पैसा भी फोकट में मिले खजाने से ज्यादा मूल्यवान है सिखाइए उसे कैसे झेलते हैं हार और सिखाकर जीत की खुशी में संयम बरतना अगर आपमें सामर्थ्य हो तो सिखाइए उसे ईर्ष्या द्वेष से दूर रहना
उत्तर-
मैं जानता हूँ सभी बातें झटपट सिखाते नहीं बनती फिर भी हो सके तो उसके मन में जगाइए। पसीना बहाकर कमाया हुआ एक पैसा भी फोकट में मिले खजाने से ज्यादा मूल्यवान है। सिखाइए उसे कैसे झेलते हैं हार और सिखाकर जीत की खुशी में संयम बरतना अगर आपमें सामर्थ्य हो तो सिखाइए उसे ईर्ष्या द्वेष से दूर रहना।

Class 7 Hindi Sugam Bharti प्रश्न 14.
निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर वर्षाऋतु पर निबंध लिखिए-
ऋतुएँ कितने प्रकार की होती हैं। ग्रीष्मकाल के बाद किस ऋतु का आगमन होता है। बादलों के बनने की प्रक्रिया क्या है। हिन्द महासागर तथा अरब सागर से उठने वाले बहाव कि दिशा में जाते हैं। मानसून से क्या आशय है। भारत वर्ष में मानसून की वर्षा का समय जुलाई से सितम्बर तक का है। वर्षा पर भारत वर्ष में कृषि की निर्भरता का उल्लेख कीजिए। यदि वर्णन हो तो देश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है।

Class 7th Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 15.
पत्र लेखन अपने मित्र को पत्र लिखिए जिससे उसे पर्वतों की रानी पचमढ़ी घूमने का निमंत्रण दीजिए।
परीक्षा भवन,
9 जून 2009
प्रिय रोहित
सप्रेम नमस्कार

हम सब कुशल से हैं। आशा है कि तुम भी ठीक से होंगे। तुम्हारा पत्र आज ही मिला है। इसे पढ़कर मैं बाग-बाग हो गया। जैसे कि तुम जानते हो कि हम हर वर्ष किसी पहाड़ी क्षेत्र की यात्रा करते हैं। इस वर्ष हम पर्वतों की रानी पंचमढ़ी घूमने गए। वहाँ के प्राकृतिक दृश्य देखने लायक थे। पर्वत को चोटी पर जब धूप पड़ रही थी, उस समय सोने की-सी छटा प्रतीत हो रही थी। यहाँ के लोग बड़े ही भोले और मासूम होते हैं। यहाँ परं एक झील भी है। जिसमें नाव का विशेष प्रबंध है। हमने वहाँ पर घुड़सवारी भी की। वहाँ पर खाने-पीने और ठहरने का विशेष प्रबंध है। सात दिन के टूर में हमने वहाँ बहुत लुत्क और ज्ञान अर्जित किया। मैं चाहता हूँ तुम भी अगली बार हमारे साथ पर्वतों की रानी पंचमढ़ी आओ!

अनेक शुभकामनाओं सहित,
तुम्हारा मित्र
क ख ग।

MP Board Class 7th Hindi Solutions

MP Board Class 7th Solutions

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MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 17 राज्ञी दुर्गावती

MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 17 राज्ञी दुर्गावती

MP Board Class 7th Sanskrit Chapter 17 अभ्यासः

प्रश्न 1.
अधोलिखित प्रश्नों के उत्तरों को एक शब्द में लिखो
(क) महाराज्ञी दुर्गावती कुत्र जाता? [महारानी दुर्गावती का जन्म कहाँ हुआ?]
उत्तर:
मण्डलाक्षेत्रे

(ख) दुर्गावत्याः विवाहः केन सह जातः? [दुर्गावती का विवाह किसके साथ हुआ?]
उत्तर:
दलपतशाहेन सह

(ग) दुर्गावती कृपाणेन किम् अकरोत्? [दुर्गावती ने तलवार से क्या किया?]
उत्तर:
प्राणघातम्

(घ) दुर्गावत्या पुत्र कः आसीत्? [दुर्गावती का पुत्र कौन था?]
उत्तर:
वीरनारायणः

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(ङ) दुर्गावतीविश्वविद्यालयः कुत्र स्थितः? [दुर्गावती विश्वविद्यालय कहाँ स्थित है?]
उत्तर:
जबलपुरनगरे।

प्रश्न 2.
अधोलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखो
(क) दुर्गावत्याः समाधिः कुत्र अस्ति? [दुर्गावती की समाधि कहाँ है?]
उत्तर:
जबलपुरमण्डलामार्गे तस्याः समाधिः अस्ति। [जबलपुर और मण्डला के मार्ग पर उसकी समाधि है।]

(ख) प्रजासु दुर्गावत्याः कीदृशः स्नेहः आसीत्? [प्रजा पर दुर्गावती का कैसा स्नेह था?]
उत्तर:
प्रजासु तस्याः पुत्रवत् स्नेहः आसीत्। [प्रजा पर उसका पुत्र के समान स्नेह था।]

(ग) कः दुर्गावत्याः उपरि आक्रमणम् अकरोत्? [किसने दुर्गावती पर आक्रमण किया?]
उत्तर:
अकबरस्य सेनापतिः आसफखानः तस्याः उपरि आक्रमणम् अकरोत्। [अकबर के सेनापति आसफखान ने उसके ऊपर आक्रमण किया।]

प्रश्न 3.
अधोलिखित शब्दों के मूल शब्द, विभक्ति और वचन लिखो
(क) मण्डलाक्षेत्रे
(ख) दलपतशाहेन
(ग) राजकार्येषु
(घ) राजधान्याम्
(ङ) रक्षायै
(च) तस्याः।
उत्तर:
(क) ‘मण्डलाक्षेत्र’ शब्द, सप्तमी विभक्तिः, एकवचनं।
(ख) ‘दलपतशाह’ शब्द, तृतीया विभक्तिः, एकवचनं।
(ग) ‘राजकार्य’ शब्द, सप्तमी विभक्तिः, बहुवचनं।
(घ) ‘राजधानी’ शब्द, सप्तमी विभक्तिः, एकवचनं।
(ङ) ‘रक्षा’ शब्द, चतुर्थी विभक्तिः, एकवचनं
(च) ‘सा’ शब्द, चतुर्थी विभक्तिः, एकवचनं।

प्रश्न 4.
अधोलिखित शब्दों का मूलधातु-लकार-पुरुषवचन लिखो
(क) न्यवसत्
(ख) अकरोत्
(ग) आसीत्
(घ) अपश्यत्
(ङ) प्राप्नोत्
(च) अत्यजत्।।
उत्तर:
(क) ‘वस्’ धातु, लङ् लकार, अन्य पुरुषः, एकवचनम्।
(ख) ‘कृ’ धातु, लङ् लकार, अन्य पुरुषः, एकवचनम्।
(ग) ‘अस्’ धातुः, लङ् लकारः, अन्य पुरुषः, एकवचनम्।
(घ) ‘दृश्’ धातुः, लङ् लकारः, अन्य पुरुषः, एकवचनम्।
(ङ) ‘आप्’ धातुः, लङ् लकारः, अन्य पुरुषः, एकवचनम्।
(च) ‘त्यज्’ धातुः, लङ् लकारः, अन्य पुरुषः, एकवचनम्।

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प्रश्न 5.
कोष्ठक में उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थानों को पूरा करो
(क) सा चन्देलराज्यपुत्री …………। (आसीत्/आस्ताम्)
(ख) प्रजाः अपि तां मातेव …………. (पश्यत्/अपश्यन्)
(ग) सा रणचण्डी भूत्वा युद्धम् …………। (अकरोत्/अकुर्वन्)
(घ) तस्याः बलिदानम् अधुनापि जनाः ………। (स्मरतः/स्मरन्ति)
(ङ) सा अद्यापि यशः शरीरेण ……….। (जीवति/जीवन्ति)
उत्तर:
(क) आसीत्
(ख) अपश्यन्
(ग) अकरोत्
(घ) स्मरन्ति
(ङ) जीवति।

प्रश्न 6.
अधोलिखित तालिका से वाक्य बनाओ
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 17 राज्ञी दुर्गावती img 1
उत्तर:
(क) वीरनारायणः बालकः एव आसीत्।
(ख) दुर्गावती चातुर्येण शौर्यण च राज्यमकरोत्।
(ग) राज्ञी दुर्गावती धीरा वीरा च आसीत्।
(घ) प्रजासु तस्याः पुत्रवत् स्नेहः आसीत्।
(ङ) प्रजाः अपि तां माता इव अपश्यन्।

प्रश्न 7.
लङ्लकार में निम्नलिखित धातुओं के रूप लिखो
(वस्, लिख्, भू(भव), क्रीड्, धाव, खाद्, गम् (गच्छ))
उत्तर:
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 17 राज्ञी दुर्गावती img 2

प्रश्न 8.
अधोलिखित वाक्यों के शुद्ध रूप लिखो
(क) सा “महाराज्ञी” उपाधिना विभूषितः।
(ख) महिला अगच्छन्।
(ग) वीरनारायणः जाता।
(घ) आसफखानः आक्रमणम् अकुर्मः।
(ङ) बालकाः अक्रीडत।
उत्तर:
(क) विभूषिता
(ख) अगच्छत्
(ग) जातः
(घ) अकरोत्
(ङ) अक्रीडन्।

राज्ञी दुर्गावती हिन्दी अनुवाद

दीक्षा :
भ्रात! त्वं कुत्र पठसि?

रमण :
अहं जबलपुरनगरे पठामि। दीक्षा-तत्र कस्यां संस्थायाम् अध्ययनं करोषि?

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रमणः :
अहं “राज्ञीदुर्गावतीविश्वविद्यालये” अध्ययनं करोमि।

दीक्षा :
महाराज्ञी दुर्गावती का आसीत् यस्याः नाम्ना विश्वविद्यालयः प्रचलित।

रमणः :
महाराज्ञी दुर्गावती मध्यप्रदेशस्य मण्डलाक्षेत्रस्य वीराङ्गना आसीत्। सा चन्देलराज्यपुत्री आसीत्। तस्याः विवाहः गोंडराजदलपतशाहेन सह अभवत्। दलपतशाहः गोंडवानाराजस्य राजधान्यां मण्डलानगरे न्यवसत्। विवाहात् चतुर्वर्षाणाम् अनन्तरं दलपतशाहः दिवङ्गतः।

अनुवाद :
दीक्षा:
भाई! तुम कहाँ पढ़ते ह?

रमण :
मैं जबलपुर नगर में पढ़ता हूँ।

दीक्षा :
वहाँ किस संस्था में अध्ययन करते हो?

रमण :
मैं “रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में” अध्ययन करता हूँ।

दीक्षा :
महारानी दुर्गावती कौन थी, जिसके नाम से विश्वविद्यालय चलता है।

रमण :
महारानी दुर्गावती मध्य प्रदेश के मण्डला क्षेत्र की वीरांगना (वीर स्त्री) थी। वह चन्देल राज्य की पुत्री थी। उसका विवाह गौंडराज दलपतशाह के साथ हुआ था। दलपतशाह गौंडवाना राज की राजधानी में मण्डला नगर में रहते थे। विवाह के चार वर्षों के बाद ही दलपतशाह का स्वर्गवास हो गया।

दीक्षा :
तदा दलपतशाहस्य पुत्रः नृपः अभवत् किम्?

रमण: :
आम्! राज्ञः मरणोपरान्तं तस्य अल्पवयस्कपुत्रः। वीरनारायणः राजा अभवत्।

दीक्षा :
केन कारणेन सा इयती प्रसिद्धा?

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रमणः :
वीरनारायणः बालक एव आसीत्। अतः सा दुगा. ‘वती चातुर्येण शौर्यण च राज्यमकरोत्। अतएव सा “महाराज्ञी” इति उपाधिना विभूषिता।

दीक्षा :
तस्याः राज्यस्य वैशिष्ट्यं किम् आसीत्?

रमणः :
राज्ञी दुर्गावती धीरा वीरा च आसीत्। राजकार्येषु युद्धविद्यायां च प्रवीणा आसीत्। प्रजासु तस्याः पुत्रवत् स्नेहः आसीत्। प्रजा अपि तां माता इव अपश्यन्। लोककल्याणमेव तस्याः आदर्शः। तस्याः राज्यकाले सर्वत्र सम्पन्नता आसीत्।।

अनुवाद :
दीक्षा :
क्या तब दलपतशाह का पुत्र राजा हो गया था?

रमण :
हाँ! राजा की मृत्यु के बाद उनका अल्पवयस्क पुत्र वीरनारायण राजा हो गया था।

दीक्षा :
वह किस कारण से इतनी प्रसिद्ध हो गयी?

रमण :
वीरनारायण बालक ही था। इसलिए उस दुर्गावती ने चतुराई से और शूरवीरता से राज्य किया। इसलिए वह महारानी’ इस उपाधि से विभूषित हुई।

दीक्षा :
उसके राज्य की क्या विशेषता थी?

रमण :
रानी दुर्गावती धैर्यवान और वीर थी। राजकार्यों में और युद्धविद्या में चतुर थी। प्रजा पर उसका पुत्र के समान प्रेम था। प्रजा भी उसे माता की तरह देखती थी। लोककल्याण ही उसका आदर्श था। उसके राज्य काल में सर्वत्र सम्पन्नता थी।

दीक्षा :
केनापि सह तस्याः युद्धः अभवत् किम्?

रमण :
आम्! अवश्यमेव, तस्याः राजस्य सुखसमृद्धिम् असहमानः अकबरस्य सेनापतिः आसफखान: तस्याः उपरि आक्रमणम् अकरोत्। सा रणचण्डी भूत्वा युद्धं कृतवती, प्रथमदिवसे विजयं प्राप्नोत्।

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दीक्षा :
तदन्तरं दुर्गावत्याः पूर्णविजयः अभवत् किम्?

रमण: :
न, पराजित: आसफखानः द्वितीयदिवसे शतघ्नीनां प्रयोगं कुर्वन् प्रचण्डाक्रमणम् अकरोत्। तस्य प्रतिरोधे असमर्थाः बहवः गौंडसैनिकाः हताः। अस्मिन् युद्धे एकः बाणः तस्याः नेत्रे, द्वितीयश्च कण्ठे लग्नः, तथापि सा युद्धं कृतवती अन्ते मृत्यु समीपम् अवलोक्य स्वसम्मानरक्षायै सा स्वयमेव कृपाणघातेन प्राणान् अत्यजत्।

अनुवाद :
दीक्षा :
क्या उसका किसी के साथ युद्ध हुआ?

रमण :
हाँ! अवश्य ही, उसके राज्य की सुखसमृद्धि को न सह सकने वाले अकबर के सेनापति आसफखान ने उसके ऊपर आक्रमण कर दिया। उसने रणचण्डी होकर युद्ध किया, पहले दिन विजय प्राप्त की।

दीक्षा :
क्या उसके बाद दुर्गावती की पूर्ण विजय हो गयी?

रमण :
नहीं, पराजित आसफखान ने दूसरे दिनशतघ्नीयों का (तोपों का) प्रयोग करते हुए भयंकर आक्रमण किया। उसका प्रतिरोध करने में असमर्थ बहुत से गौंड सैनिक मारे गये। इस युद्ध में एक बाण उसके नेत्र में और दूसरा कण्ठ में लग गया था फिर भी वह युद्ध करती रही। अन्त में मृत्यु को समीप ही देखकर अपने सम्मान की रक्षा के लिए उसने स्वयं ही तलवार के प्रहार से प्राणों को त्याग दिया।

दीक्षा :
इदं तु बहुकष्टकारकम्।

रमणः :
आम्, तस्याः, बलिदानम् अधुनापि जनाः स्मरन्ति। जबलपुरमण्डलामार्गे तस्या समाधिः अस्ति। काव्येषु लोकगीतेषु इतिहासे च सा अद्यापि यशः शरीरेण जीवति।

दीक्षा :

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सत्यम्! दुर्गावती दुर्गा इव आसीत्।

अनुवाद :
दीक्षा :
यह तो बहुत ही कष्ट देने वाली बात है।

रमण :
हाँ, उसके बलिदान को तो आज भी लोग याद करते हैं। जबलपुर और मण्डला के मार्ग पर उसकी समाधि है। काव्यों में और लोकगीतों में तथा इतिहास में वह आज भी यशरूपी शरीर से जीवित है।

दीक्षा :
सत्य है। दुर्गावती दुर्गा की भाँति थी।

राज्ञी दुर्गावती शब्दाथा:

सह = साथ में। न्यवसत् = निवास करते थे। दिवङ्गतः = स्वर्गवास होना। प्रतिरोधः विरोध करना।

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MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तयः

MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 21 सूक्तयः

MP Board Class 7th Sanskrit Chapter 21 अभ्यासः

प्रश्न 1.
एक शब्द में उत्तर लिखो
(क) कः परमो धर्म:? [परम धर्म कौन-सा है?]
उत्तर:
आचारः

(ख) विपरीत बुद्धिः कदा भवति? [बुद्धि किस समय विपरीत हो जाती है?]
उत्तर:
विनाशकाले

(ग) कूपखननं कदा न युक्तम्? [कुएँ का खोदना कब उचित नहीं है?]
उत्तर:
प्रदीप्तेवह्निकागृहे

(घ) केन कार्याणि सिद्धयन्ति? [कार्य किससे सिद्ध हो जाते हैं?]
उत्तर:
उद्यमेन

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(ङ) किं सर्वत्र वर्जयेत्? [सभी स्थानों पर क्या वर्जनीय है?]
उत्तर:
अति।

प्रश्न 2.
एक वाक्य में उत्तर लिखो-
(क) कानि परेषां न समाचरेत्? [कौन-से कार्य दूसरों के लिए नहीं करने चाहिए?]
उत्तर:
आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्। [जो काम अपने लिए विपरीत हों, उन्हें दूसरों के लिए नहीं करना चाहिए।]

(ख) संसर्गजाः के भवन्ति? [संगति से क्या हो जाते हैं?]
उत्तर:
संसर्गजा दोषगुणाः भवन्ति। [संगति से दोष भी गुण हो जाते हैं।]

(ग) सर्वोत्तम भूषणं किम् अस्ति? [सबसे अच्छा आभूषण क्या है?]
उत्तर:
वाग्भूषणं सर्वोत्तमं भूषणं अस्ति। [वाणी का आभूषण ही सबसे अच्छा आभूषण है।]

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करो
(क) ……… वसुधैव कुटुम्बकम्।
(ख) हितं मनोहारि च ………. वचः।
(ग) आत्मनः ……….. परेषां न समाचरेत्।
(घ) न ……… युक्तं प्रदीप्ते वह्निकागृहे।
(ङ) विनाशकाले ……….
उत्तर:
(क) उदारचरितानां तु
(ख) दुर्लभम्
(ग) प्रतिकूलानि
(घ) कूपखननं
(ङ) विपरीतबुद्धिः।

प्रश्न 4.
उचित शब्दों का मेल करो
MP Board Class 7th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तयः img 1
उत्तर:
(क) → (3)
(ख) → (4)
(ग) → (1)
(घ) → (5)
(ङ) → (2)

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प्रश्न 5.
समानार्थक शब्द लिखो
(1) वह्निना
(2) युक्तम्
(3) उद्यमेन
(4) वसुधा।
उत्तर:
(1) अग्निना
(2) सहितम्
(3) परिश्रमेन
(4) पृथिवी।

प्रश्न 6.
अधोलिखित शब्दों के विलोम शब्द पाठ से चुनकर लिखो
(क) अनुदारचरितानाम्
(ख) अनुकूलानि
(ग) सुलभम्
(घ) आलस्येन
(ङ) समृद्धिकाले।
उत्तर:
(क) उदारचरितानाम्
(ख) प्रतिकूलानि
(ग) दुर्लभम्
(घ) उद्यमेन
(ङ) विनाशकाले।

प्रश्न 7.
शुद्ध वाक्यों के समक्ष ‘आम्’ तथा अशुद्ध वाक्यों के समक्ष ‘न’ लिखो
(क) संसर्गजा दोषगुणाः न भवन्ति।
(ख) आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां समाचरेत्।
(ग) वाग्भूषणं भूषणं न अस्ति।
(घ) अति सर्वत्र न वर्जयेत्।
(ङ) कार्याणि मनोरथैः सिध्यन्ति।
उत्तर:
(क) न
(ख) न
(ग) न
(घ) न
(ङ) न

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प्रश्न 8.
संस्कृत वाक्यों में प्रयोग करो
(क) खलु
(ख) सततं
(ग) गृहे
(घ) बृद्धिः
उत्तर:
(क) सः खलुः अत्र आगच्छेत्.
(ख) सततम् श्रम करणेन साफल्यं भवति।
(ग) गृहे सति कः मित्रम् भवति।
(घ) विपत्तिकाले बद्धिः विपरीतम् भवति।

प्रश्न 9.
रेखांकित शब्दों के आधार पर प्रश्न बनाओ
(क) अति सर्वत्र वर्जयेत्।
(ख) आचारः परमो धर्मः।
(ग) उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि।
(घ) उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।
उत्तर:
(क) का सर्वत्र वर्जयेत्?
(ख) कः परमो धर्मः?
(ग) केन हि सिध्यन्ति कार्याणि?
(घ) केषाम् तु वसुधैव कुटुम्बकम्?

सूक्तयः हिन्दी अनुवाद

  1. आचारः परमोधर्मः।
  2. संसर्गजाः दोषगुणाः भवन्ति।
  3. उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।
  4. हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः।।
  5. उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
  6. अति सर्वत्र वर्जयेत्।
  7. विनाशकाले विपरीतबुद्धिः।
  8. न कूपखननं युक्तं प्रदीप्ते वह्निना गृहे।
  9. आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्।
  10. क्षीयन्ते खलु भूषणानि सततं वाग्भूषणं भूषणम्।

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अनुवाद :

  1. आचरण सबसे बड़ा धर्म है।
  2. संगति से दोष भी गुण हो जाया करते हैं।
  3. उदार चरित्र वाले लोगों के लिए तो सारी पृथ्वी ही कुटुम्ब के समान होती है।
  4. हितकारी और मनोहारी वचन दुर्लभ होते हैं।
  5. परिश्रम करने से ही कार्य हुआ करते हैं, इच्छाओं से नहीं।
  6. किसी काम की अति सभी जगह रोक लेनी चाहिए।
  7. जब विनाशकाल आता है, तो बुद्धि भी उल्टी हो जाती है अर्थात् मनुष्य का आचरण भी विपरीत होने लगता है।
  8. घर में आग लगने पर कुएँ का खोदना उचित नहीं होता है।
  9. जो काम अपने लिए विपरीत हो, वह दूसरों के लिए नहीं करना चाहिए।
  10. आभूषण तो नष्ट हो जाते हैं परन्तु वाणी का आभूषण सदा आभूषण रूप में बना रहता है।

सूक्तयः शब्दार्थाः

उद्यमेन = मेहनत से। संसर्गजाः = साथ रहने से। प्रदीप्ते = जलने पर। कूपखननं = कुआँ खोदना। आत्मनः = अपने। क्षीयन्ते = नष्ट हो जाते हैं। भूषणानि = गहने।

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