MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 11 सुभाषितानि

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MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 11 सुभाषितानि

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 11 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 11 Subhashitani प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) सम्पत्तौ विपत्तौ च केषाम् एकरूपता? (सुख और दुःख में किनकी एकरूपता होती है?)
उत्तर:
महताम्। (बड़े लोगों की)

(ख) अस्तसमये सूर्यस्य वर्णः कः भवति? (अस्त होते समय सूर्य का रंग कैसा होता है?)
उत्तर:
ताम्रः। (लाल)

(ग) नरत्वं दुर्लभं कुत्र? (मानव जन्म कहाँ कठिनता से प्राप्त होता है?)
उत्तर:
लोके। (संसार में)

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(घ) केषां वसुधैवकुटुम्बकम्? (किनका सारा संसार परिवार होता है?)
उत्तर:
उदारचरितानाम्। (उदार हृदय वालों का)

(ङ) परार्थाय वृक्षाः कानि यच्छन्ति? (दूसरों के लिए वृक्ष क्या देते हैं?)
उत्तर:
फलानि। (फलों को)

Class 8 Sanskrit Chapter 11 MP Board प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) सूर्यस्य वर्णः ताम्रः कदा-कदा भवति?
उत्तर:
सूर्यस्य वर्णः ताम्रः उदयकाले अस्तकाले च भवति। (सूर्य का रंग लाल उदय होते समय और अस्त होते समय होता है।)

(ख) भारत्याः कोशः कस्मात् क्षयमायाति? (विद्या का खजाना कैसे घटता है?)
उत्तर:
भारत्याः कोशः सञ्चयात् क्षयमायाति। (विद्या का खजाना एकत्र करने पर घटता है।)

(ग) वृक्षाणां स्वभावः कीदृशः? (पेड़ों का स्वभाव कैसा होता है?)
उत्तर:
वृक्षाणां स्वभावः सत्पुरुष इव। (पेड़ों का स्वभाव सज्जन जैसा होता है।)

(घ) न्याय्यात्पथः पदमपि के न विचलन्ति? (न्याय के मार्ग से एक कदम भी कौन नहीं हटते हैं।)
उत्तर:
न्याय्यात्पथः पदमपि धीराः न विचलन्ति? (न्याय के मार्ग से एक कदम भी धीर नहीं हटते हैं।)

(ङ) लोके विद्या कीदृशी? (संसार में विद्या कैसे प्राप्त होती है?)
उत्तर:
लोके विद्या सुदुर्लभा अस्ति। (संसार में विद्या बहुत कठिनता से प्राप्त होती है।)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 11 प्रश्न 3.
सन्धिविच्छेदं कुरुत(सन्धि-विच्छेद करो-)
(क) कोशोऽयम्
(ख) यथेष्टम्
(ग) फलान्यपि
(घ) युगान्तरे।
उत्तर:
(क) कोशः + अयम्
(ख) यथा + इष्टम्
(ग) फलानि + अपि
(घ) युग + अन्तरे।

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Sanskrit Chapter 11 Class 8 MP Board प्रश्न 4.
श्लोकम् पूरयत(श्लोक पूरा करो-)
विना वेदं विना गीतां, विना रामायणी कथाम्।
विना कविं कालिदासं, भारतम् भारतं न हि॥

Sanskrit Class 8 Chapter 11 MP Board प्रश्न 5.
उचितं मेलयत्(उचित को मिलाओ-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 11 सुभाषितानि 1
उत्तर:
(क) → (ii)
(ख) → (iii)
(ग) → (i)
(घ) → (v)
(ङ) → (iv)

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 11 प्रश्न 6.
अधोलिखितैः शब्दैः वाक्यरचनां कुरुत (नीचे लिखे शब्दों से वाक्य रचना करो-)
(क) देवः
(ख) व्ययतः
(ग) द्रुमः
(घ) लक्ष्मीः
(ङ) फलानि।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 11 सुभाषितानि 2

सुभाषितानि हिन्दी अनुवाद

परोक्षेकार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।
वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम्॥1॥

अनुवाद :
(पीठ) पीछे कार्य को नष्ट करने वाले और सामने प्रिय बोलने वाले मित्र को वैसे ही त्याग देना चाहिए, जिस प्रकार मुख (ऊपरी हिस्से) में दूध लगे किन्तु अन्दर विष भरे घड़े को त्याग देते हैं।

अपूर्वः कोऽपि कोशोऽयं विद्यते तव भारति।
व्ययतो वृद्धिमायाति क्षयमायाति सञ्चयात्॥2॥

अनुवाद :
हे (विद्या की देवी) सरस्वती! तुम्हारा यह (विद्या का) कोष (खजाना) कुछ अनोखा (अद्भुत) है। जो खर्च करने पर बढ़ता है और एकत्र करने पर घटता है। (अर्थात्। विद्या बाँटनी चाहिए।)

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विना वेदं विना गीतां, विना रामायणीं कथाम्।
विना कविं कालिदासं, भारतं भारतं न हि॥3॥

अनुवाद :
बिना वेदों के, बिना. श्रीमद् भगवत् गीता के बिना रामायणी कथा के, बिना कवि कालिदास के भारत (वास्तव में) भारत नहीं है। (अर्थात् इन सबके बिना भारत की कोई पहचान नहीं है।)

उदये सविता ताम्रस्ताम्र एवास्तमेति च।
सम्पत्तौ च विपत्तौ च, महतामेकरूपता॥4॥

अनुवाद :
सूर्य उदय होते समय लाल होता है और अस्त होते समय भी लाल होता है। उसी प्रकार महान् लोग सम्पत्ति (सुख) और विपत्ति (दुःख) में एक समान रहते हैं।

उद्यमं साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः।
षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र देवः सहायकः॥5॥

अनुवाद :
उद्यम (परिश्रम), साहस (बल, हिम्मत), धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम, ये छह जहाँ पर होते हैं वहाँ भगवान् सहायक होते हैं।

नरत्वं दुर्लभं लोके, विद्या तत्र सुदुर्लभा।
कवित्वं दुर्लभं तत्र, शक्तिस्त्र सुदुर्लभा॥6॥

अनुवाद :
संसार में मानव जन्म (नरत्व) कठिनता से प्राप्त। होता है, (यदि मानव जन्म मिल भी जाये तो) उसमें विद्या (ज्ञान) बहुत कठिनता से प्राप्त होती है; (यदि विद्या मिल भी जाये तो) उसमें कवित्व (कविता करना) कठिनता से प्राप्त होता है, (यदि कवित्व मिल भी जाये तो) उसमें (कविता करने की ईश्वर प्रदत्त) शक्ति (क्षमता) बहुत कठिनता से प्राप्त होती है।

अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैवकुटुम्बकम्॥7॥

अनुवाद :
‘यह मेरा है, ‘यह उसका है’, ऐसी छोटे मन वालों की सोच होती है। उदार हृदय वालों के लिए तो सारा संसार ही परिवार होता है।

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छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे।
फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव॥8॥

अनुवाद :
दूसरों के लिए छाया करते हैं और स्वयं धूप में खड़े रहते हैं। फल भी दूसरों के लिए होते हैं, इसलिए वृक्ष सज्जनों के समान होते हैं। (अर्थात् जैसे सज्जन दूसरों के लिए कष्ट सहन करके भी उपकार करते हैं, उसी प्रकार वृक्ष होते हैं।)

निन्दन्तु नीतिनिपुणाः यदि वा स्तुवन्तु
लक्ष्मीः समाविशतु, गच्छतु वा यथेष्टम्।
अद्यैव वा मरणामस्तु युगान्तरे वा
न्याय्यात्पथः प्रविचलन्ति पदं न धीराः॥9॥

अनुवाद :
धैर्यशील मनुष्यों की, नीति में कुशल विद्वान् निन्दा करें या प्रशंसा करें, इच्छानुसार सम्पत्ति आये अथवा दूर चली जाये (न आये), आज ही मृत्यु हो जाय या दूसरे युग में (बहुत दिनों के बाद) हो, परन्तु वे न्यायोचित मार्ग से एक पग भी विचलित नहीं होते हैं।

सुभाषितानि शब्दार्थाः

सम्पत्तौ = सम्पत्ति (सुख में)। एकरूपता = समानता। विपत्तौ = विपत्ति में। उदये = उदय होते समय में। महताम् = बड़ों का। सविता = सूर्य। ताम्रः = ताँबे के समान लाल। नरत्वम् = मानवता। परोक्षे = पीछे। दुर्लभम् = कठिनता से प्राप्त। वर्जयेत = रोके। कुटुम्बकम् = परिवार। क्षयमायाति = क्षीण होता है। लघुचेतसाम् = छोटे मन वाला। भारति = हे सरस्वती जी। उदारचरितानाम् = उदार हृदय वाला। निन्दन्तु = निन्दा करें। आतपे = धूप में। समाविशतु = अच्छे प्रकार से आये। परार्थाय = दूसरों के लिए। युगान्तरे = दूसरे युग में। सत्पुरुषाः = सज्जन व्यक्ति। यथेष्टम् = इच्छित को। स्तुवन्तु = स्तुति करें।

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 10 आजादचन्द्रशेखरः

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MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 10 आजादचन्द्रशेखरः

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 10 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 10 MP Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) चन्द्रशेखरस्य जन्म कस्मिन् ग्रामे अभवत्? (चन्द्रशेखर का जन्म किस गाँव में हुआ था?)
उत्तर:
भाभराग्रामे। (भाभरा गाँव में)

(ख) चन्द्रशेखरस्य जन्म कस्मिन् मण्डले अभवत्? (चन्द्रशेखर का जन्म किस मण्डल में हुआ?)
उत्तर:
झाबुआमण्डले। (झाबुआ मण्डल में)

(ग) चन्द्रशेखरस्य मातुः नाम किम्? (चन्द्रशेखर की माता का नाम क्या था?)
उत्तर:
जगरानी देवी। (जगरानी देवी)

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(घ) चन्द्रशेखरस्य पितुः नाम किम्? (चन्द्रशेखर के पिता का नाम क्या था?)
उत्तर:
सीताराम तिवारी। (सीताराम तिवारी)

(ङ) चन्द्रशेखरः काम् भाषाम् अधीतवान्? (चन्द्रशेखर ने किस भाषा को पढ़ा?)
उत्तर:
संस्कृतभाषाम्। (संस्कृत भाषा को)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 10 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) चन्द्रशेखरस्य जन्म कदा अभवत्? (चन्द्रशेखर का जन्म कब हुआ?)
उत्तर:
चन्द्रशेखरस्य जन्म १९०६ ख्रिस्ताब्दे अभवत्। (चन्द्रशेखर का जन्म 1906 ईस्वी में हुआ।)

(ख) चन्द्रशेखरस्य अध्ययनं कुत्र जातम्? (चन्द्रशेखर का अध्ययन कहाँ हुआ?)
उत्तर:
चन्द्रशेखरस्य अध्ययनं वाराणस्याम् एकस्मिन् संस्कृतविद्यालये जातम्। (चन्द्रशेखर का अध्ययन वाराणसी में एक संस्कृत विद्यालय में हुआ।)

(ग) चन्द्रशेखरेण केन नाम्ना सङ्गठनं कृतम्? (चन्द्रशेखर ने किस नाम से संगठन किया?)
उत्तर:
चन्द्रशेखरेण ‘हिन्दुस्तान सोसलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ इति नाम्ना संगठनं कृतम्। (चन्द्रशेखर ने ‘हिन्दुस्तान सोसलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ नाम से संगठन किया।)

(घ) स्वाधीनतान्दोलने के के चन्द्रशेखरस्यसहायकाः अभवन्? (स्वाधीनता के आन्दोलन में कौन-कौन चन्द्रशेखर के सहायक हुए?)
उत्तर:
स्वाधीनतान्दोलने भगतसिंह-राजगुरु-बटुकेश्वर शिवराम-सुखदेवसदृशाः क्रान्तिकारिणः चन्द्रशेखरस्य सहायकाः अभवन्। (स्वाधीनता के आन्दोलन में भगतसिंह, राजगुरु, बटुकेश्वर, शिवराम, सुखदेव जैसे क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर के सहायक हुए।)

(ङ) चन्द्रशेखरः कथं वीरगतिम् प्राप्नोत्? (चन्द्रशेर ने कैसे वीरगति प्राप्त की?)
उत्तर:
चन्द्रशेखरः स्वहस्तेनैव स्वकीये मस्तके गोलिका-प्रहारेण वीरगतिम् प्राप्नोत्। (चन्द्रशेखर ने अपने हाथ से ही अपने सिर में गोली के प्रहार से वीरगति प्राप्त की।)

Sanskrit Chapter 10 Class 8 MP Board प्रश्न 3.
उचितं मेलयत(उचित को मिलाओ-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 10 आजादचन्द्रशेखरः 1
उत्तर:
(क) → (iii)
(ख) → (i)
(ग) → (v)
(घ) → (ii)
(ङ) → (iv)

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Sanskrit Class 8 Chapter 10 MP Board प्रश्न 4.
नामोल्लेखपूर्वकं समास-विग्रहं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए समास विग्रह करो-)
(क) संस्कृतविद्यालये
(ख) पाषाणखण्डेन
(ग) निग्रहभयात्
(घ) वीरगतिम्।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 10 आजादचन्द्रशेखरः 2

Class 8th Sanskrit Chapter 10 MP Board प्रश्न 5.
अधोलिखितैः अव्ययैः वाक्यनिर्माणं कुरुत(नीचे लिखे अव्ययों से वाक्यों का निर्माण करो-)
(क) कदा
(ख) च
(ग) एव
(घ) अपि
(ङ) श्वः।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 10 आजादचन्द्रशेखरः 3

आजादचन्द्रशेखरः हिन्दी अनुवाद

(आचार्यः :
कक्षायाम् शिक्षयति) आचार्य:-भो रमे! श्वः कः दिनाङ्क अस्ति?

रमा :
श्वः जुलाईमासस्य त्रयोविंशति-दिनाङ्क अस्ति।

आचार्य :
जुलाईमासस्य त्रयोविंशति-दिनाङ्क किमर्थं प्रसिद्ध?

प्रिया :
अस्मिन्नेव दिनाङ्के आजादचन्द्रशेखरस्य जयन्त्याः उत्सवः आयोज्यते।

आचार्य: :
चन्द्रशेखरस्य जन्म कस्मिन् ख्रिस्ताब्दे अभवत्?

विभुः :
चन्द्रशेखरस्य जन्म १९०६ ख्रिस्ताब्दे अभवत्।

आचार्य: :
सम्यगुक्तं भवता।

अनुवाद :
(आचार्य कक्षा में पढ़ा रहे हैं)

आचार्य :
अरे रमा! कल कौनसी तारीख है?

रमा :
कल जुलाई महीने की 23 तारीख है।

आचार्य :
जुलाई महीने की 23 तारीख किसलिए प्रसिद्ध हैं?

प्रिया :
इसी तारीख को आजाद चन्द्रशेखर की जयन्ती का उत्सव आयोजित किया जाता है।

आचार्य :
चन्द्रशेखर का जन्म किस ईस्वी सन् में हुआ था?

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विभु :
चन्द्रशेखर का जन्म 1906 ईस्वी सन् में हुआ था।

आचार्य :
ठीक कहा आपने। रमा-भो आचार्य! चन्द्रशेखरस्य जन्म कुत्र अभवत्?

आचार्य: :
चन्द्रशेखरस्य जन्म मध्यप्रदेशे झाबुआम्ण्डलान्तर्गते ‘भाभरा’ नामकग्रामे अभवत्।

प्रिया :
भो आचार्य! कौ तस्य पितरौ?

आचार्यः :
सीतारामतिवारी तस्य पिता, जगरानीदेवी च तस्य माता आसीत्।

विभुः :
तस्य अध्ययनं कुत्र अभवत्?

आचर्यः :
वाराणस्याम् एकस्मिन् संस्कृतविद्यालये तस्य अध्ययनं जातम्। सः संस्कृतम् अधीतवान्।

(साश्चर्यम् सर्वे अहो! एषः संस्कृतम् अधीतवान्।)

पीयूषः :
ततः सः किमकरोत्?

आचार्यः :
वाराणस्यां संस्कृतविद्यालये अध्ययनं में कुर्वन् एव पंचदशवर्षीयः चन्द्रशेखरः स्वतन्त्रान्दोलने प्राविशत्। आङग्लैः स्वाधीनतान्दोलनकारिणां दमनकाले सः पाषाणखण्डेन एकं रक्षकम् प्राहरत्।

रमा :
ततः किम् अभवत्?

आचार्यः :
ततः प्रहरी तं निगृह्य न्यायालये प्रस्तुतवान्।

अनुवाद :
रमा-हे आचार्य! चन्द्रशेखर का जन्म कहाँ हुआ था?

आचार्य :
चन्द्रशेखर का जन्म मध्य प्रदेश के झाबुआ। मण्डल के अन्तर्गत ‘भाभरा’ नामक गाँव में हुआ था।

प्रिया :
हे आचार्य! उनके माता-पिता कौन थे?

आचार्य :
सीताराम तिवारी उनके पिता और जगरानी देवी। उनकी माता थीं।

‘विभु :
उनका अध्ययन कहाँ हुआ था?

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आचार्य :
वाराणसी में एक संस्कृत विद्यालय में उनका अध्ययन हुआ था। उन्होंने संस्कृत पढ़ी थी।
(आश्चर्य के साथ सभी ओहो! इन्होंने संस्कृत पढ़ी थीं?)

पीयूष :
उसके बाद उन्होंने क्या किया?

आचार्य :
वाराणसी में संस्कृत विद्यालय में अध्ययन करते हुए ही पन्द्रह वर्ष के चन्द्रशेखर स्वतन्त्रता आन्दोलन में प्रवेश कर गये। अंग्रेजों द्वारा स्वाधीनता आन्दोलन करने वालों के दमन (दबाने) के समय उन्होंने पत्थर के टुकड़े से एक सिपाही पर प्रहार किया।

रमा :
उसके बाद क्या हुआ?

आचार्य :
उसके बाद सिपाही ने उनको पकड़कर न्यायालय में प्रस्तुत किया।

प्रिया :
न्यायालये किं जातम्?

आचार्य: :
न्यायालये न्यायाधीशेन तस्य आयुषोगणनानुसारम् पंचदशवेत्रप्रहारैः सः दण्डितः।

विभुः :
दण्डकाले चन्द्रशेखरस्य का प्रतिक्रिया अभवत्?

आचार्यः :
प्रथमं तु चन्द्रशेखरन्यायाधीशयोः संवाद श्रुणुत.

न्यायाधीश: – किं तव नाम?
चन्द्रशेखरः – ‘आजादः’
न्यायाधीश: – किं तव पितुः नाम?
चन्द्रशेखरः – ‘स्वाधीनः’
न्यायाधीश: – कुत्र तव गृहम्?
चन्द्रशेखरः – कारागारः।

अनुवाद :
प्रिया-न्यायालय में क्या हुआ?

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आचार्य :
न्यायालय में न्यायाधीश ने उनकी उम्र के हिसाब के अनुसार पन्द्रह बैंत के प्रहारों से उन्हें दण्ड दिया। विभु-दण्ड के समय चन्द्रशेखर की क्या प्रतिक्रिया हुई?

आचार्य :
पहले तो चन्द्रशेखर और न्यायाधीश की बातचीत सुनो

न्यायाधीश – तुम्हारा नाम क्या है?
चन्द्रशेखर – ‘आजाद’
न्यायाधीश – तुम्हारे पिता का नाम क्या है?
चन्द्रशेखर – स्वतन्त्रता।
न्यायाधीश – तुम्हारा घर कहाँ है?
चन्द्रशेखर – जेल।
पीयूषः – ततस्ततः?

आचार्य: :
ततस्तु वेत्रप्रहारैः चन्द्रशेखरः मूर्छापर्यन्तं ‘जयतु भारतम्’ इति उच्चैः अघोषयत्। तस्मात् कालादेव सः ‘आजाद-चन्द्रशेखर’ इति नाम्ना प्रसिद्धः।

रमा :
स्वतन्त्रतायै सः किं कृतवान्?

आचार्य: :
तेन ‘हिन्दुस्तान सोसलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ इति स्वाधीनतासैनिकानाम् एकं सङ्गठनं कृतम्। तस्मिन् सङ्गठने भगतसिंह-राजगुरु-बटुकेश्वर-शिवराम-सुखदेवसदृशाःक्रान्तिकारिणः तस्यसहायका:अभवन्।काकोरीसाईमनकमीशन-केन्द्रीय-असेम्बलीमध्ये आग्नेयास्त्रप्रक्षेपणादिषुणादिषु सः शिरोमणिः।

अनुवाद :
पीयूष-उसके बाद?

आचार्य :
उसके बाद तो बैंत के प्रहारों से चन्द्रशेखर बेहोश होने तक ‘भारत माता की जय’, ऐसा जोर से कहते रहे। उस समय से ही वह आजाद चन्द्रशेखर’ नाम से प्रसिद्ध हुए।

रमा :
स्वतन्त्रता के लिए उन्होंने क्या किया?

आचार्य :
उन्होंने ‘हिन्दुस्तान सोसलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ ऐसा स्वाधीनता के सैनिकों का एक संगठन बनाया। उस संगठन में भगतसिंह, राजगुरु, बटुकेश्वर, शिवराम, सुखदेव जैसे क्रान्तिकारी उनके सहायक हुए। काकोरी, साइमन कमीशन, केन्द्रीय असेम्बली के बीच में बम फेंकने आदि में वह सबसे ऊपर थे।

प्रिया :
कः तस्य आदर्शः?

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आचार्यः :
देशभक्तिः। अपि च तस्य जनकस्य सहायतार्थं मित्रैः प्रदत्तधनमपि सः क्रान्तिकार्येषु व्ययं कृतवान्। विभुः-कथं कदा च तस्य बलिदानम् अभवत्?

आचार्यः :
फरवरी मासस्य सप्तविंशतितमे दिनाङ्के १९३१ ख्रिस्ताब्दे इलाहाबादनगरे (प्रयाग-नगरे) ‘आजाद-उद्यानम्’ (अल्फ्रेड पाक) इति स्थाने आङ्ग्लगुप्तचरेणाधीक्षकेण नॉट-बाबरेण गोलिकाभिः युद्धयमानः यदा आत्मानम् असहायम् अमन्यत तदा निग्रहभयात् स्वहस्तेनैव स्वकीये मस्तके गोलिका-प्रहारेण सः वीरगतिम् प्राप्नोत्।

अनुवाद :
प्रिया-उनका आदर्श क्या था? का आचार्य-देशभक्ति। और उनके पिता की सहायता के लिए। मित्रों द्वारा दिये धन को भी उन्होंने क्रान्ति के कार्यों में व्यय किया।

विभु :
कैसे और कब उनका बलिदान हुआ?

आचार्य :
फरवरी महीने की सत्ताइस (27) दिनांक को 1931 ईस्वी में इलाहाबाद नगर (प्रयाग नगर) में आजाद उद्यान’ (अल्फ्रेड पार्क) नामक स्थान पर अंग्रेज गुप्तचर अधीक्षक नॉट-बाबर से गोलियों से युद्ध करते हुए जब अपने को असहाय माना तब पकड़े जाने के भय से अपने हाथ से ही अपने सिर में गोली के प्रहार से उन्होंने वीरगति प्राप्त की।

आजादचन्द्रशेखरः शब्दार्थाः

जयन्त्याः = जयन्ती का। सङ्गठनम् = संघ को। ख्रिस्ताब्दे = ईस्वी में। आग्नेयास्त्रम् = बम। सम्यगुक्तम् = ठीक कहा। निग्रहभयात् = पकड़े जाने के भय से। निगृह्य = पकड़कर। वेत्रप्रहारैः = बेंत के प्रहारों से। मूर्छापर्यन्तम् = मूछित होने तक।

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions

MP Board Class 8th General English Practice Test Paper 1

MP Board Class 8th General English Solutions Practice Test Paper 1

Oral Examination
(मौखिक परीक्षा)।

1. Recite any one of the following poems:
(किसी एक कविता का पाठ करों:)
(a) Another chance.
(b) The Miser and his Gold.
Answer:
Do Yourself.

2. Read a paragraph from any one of the following lessons:
(निम्न पाठों में से किसी एक गद्यश को पढ़े:)
(a) Thrills of Kanha Kisli
(b) The Ungrateful Jeweller
(c) Trees: Our Saviours. Ans. Do Yourself.
Answer:
Do Yourself.

3. Listen to the given words carefully and write:
(दिये शब्दों को ध्यानपूर्वक सुनो:)
Answer:
Do Yourself.

4. Listen carefully and write:
(ध्यानपूर्वक सुनो और लिखो:)
Answer:
Do Yourself.

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Written Examination
(लिखित परीक्षा ):
1. All questions are compulsory.
2. Write all the answers in English only

Class 8 English Practice Test Paper 1 Question 1.
Do as directed
(निर्देशनुसार करें):

(i) Write words expressing the opposite gender for the given words:
(नीचे दिए शब्दों के विपरीत लिंग वाले शब्द लिखें:)
Madam, actor, man, horse.
Answer:

  1. madam – sir
  2. actor – actress
  3. man – woman
  4. horse – mare.

(ii) Fill in the blanks with appropriate articles (a, an, the):
(उचित आर्टिकल (a, an, the) से रिक्ता स्थान भरों:)

  1. I heard….. loud noise. It was of……. elephant.
  2. It is ….. best book available in ……… market.

Answer:

  1. a, an,
  2. the, the.

(iii) Write the comparative degree of the words given below:
(निचे देयो शब्दों की Comparative degree लिखो:)

  1. easy
  2. good
  3. small
  4. beautiful.

Answer:

  1. easier
  2. better
  3. smaller
  4. more beautiful.

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(iv) Supply appropriate pronouns to complete the sentences:
(सही सर्वनाम से वक्या पूरा करों:)

Look at Reena. …………….. is studying. Mother and father have come to see ………….
Answer:
She, her.

(V) Supply correct form of the verbs.
(क्रियाओं को सही रूप दें:)
Answer:

  1. Rohit had reached before the doctor came.
  2. The robbers had run away before the police came.

(vi) Change the tense and rewrite the following sentences:
(काल बदलकर निम्न वाक्यों को पुन: लिखो:)
Answer:

  1. I lived in Bhopal.
  2. They had done their work.

MP Board Class 8 English Practice Test Paper 1 Question 2.
(A) Match the following:
(निम्न का मिलान करों:)
MP Board Class 8th General English Practice Test Paper 1-1
Answer:
(1) → (C) tired
(2) → (d) jewellery
(3) → (b) thankless
(4) → (a) to set free

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(B) Give one word for the following:
(निम्न के लिए एक शब्द दें:)!

  1. One who makes sculptures.
  2. One who saves others.

Answer:

  1. Sculptor
  2. Saviour.

(C) Write the antonyms of the following:
(निम्न शब्द के विलोम लिखो:)

  1. win
  2. end
  3. ugly
  4. wrong.

Answer:

  1. lose
  2. start
  3. beautiful
  4. right.

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Practice Test Paper 1 Class 8 Question 3.
(A) Answer any five of the following questions in one or two sentences each:
(नीचे लिखे प्रश्नों में से किन्हीं पाँच के उत्तर एक या दो वाक्यों में दे:)

Class 8th English Practice Test Paper 1 Question 1.
What is Kanha Kisli ?
(व्हॉट इज कान्हा किसली?)
कान्हा किसली क्या है ?
Answer:
Kanha Kisli is a beautiful National Park.
(कान्हा किसली इज अ ब्यूटीफुल नेशनल पार्क।)
कान्हा किसली एक सुन्दर राष्ट्रीय उद्यान है।

Class 8 MP Board English Practice Test Paper 1 Question 2.
When did Kanha National Park come into existence?
(व्हेन डिड कान्हा नेशनल पार्क कम इन्ट्र एग्जिस्टेन्स ?)
यह कब बना ?
Answer:
Kanha National Park came into existence in 1955.
(कान्हा नेशनल पार्क केम इन्टू एग्जिस्टेन्स इन 19551)
यह 1955 में बना।

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Practice Test Paper 1 Class 8 English Question 3.
When could the woodcutter not earn any money ?
(व्हेन कुड द वुडकटर नॉट अर्न ऐनी मनी ?)
लकड़हारा कब पैसे नहीं कमा पाता था ?
Answer:
The woodcutter could not earn any money during the rainy season.
(द वुडकटर कुड नॉट अर्न ऐनी मनी ड्यूरिंग द रेनी सीजन।)
लकड़हारा बरसात के मौसम में कोई पैसे नहीं कमा पाता था।.

Class 8 Practice Test Paper 1 Question 4.
Who were trapped in the well?
(हू वर ट्रैप्ड इन द वैल ?)
कुएँ में कौन फंसे हुए थे ?
Answer:
A tiger, a monkey, a snake and a jeweler were trapped in the well.
(अ टाइगर, अ मंकी, अस्नेक एण्ड अ जुअलर वर ट्रैप्ड इन द वैल।)
एक बाघ, बन्दर, साँप और जौहरी कुएँ में फंसे हुए थे।

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Class 8 English Reader Practice Test Paper 1 Question 5.
What did the villagers decide when the axe men refused to return ?
(व्हॉट डिड द विलेजर्स डिसाइड व्हेन द ऐक्समेन रिफ्यूज्ड टु रिटर्न ?)
गाँववासियों ने क्या निर्णय लिया जब कुल्हाड़ी धारियों ने लौटने से इन्कार कर दिया ?
Answer:
The villagers decided that they would not let the axes touch the trees at any cost.
(द विलेजर्स डिसाइडिड दैट दे वुड नॉट लैट द ऐक्सिज टच द ट्रीज ऐट ऐनी कॉस्ट।)
गाँववासियों ने यह तय किया कि वे किसी भी कीमत पर पेड़ों पर कुल्हाड़ी नहीं लगने देंगे।

Class 8 English Practice Test Paper 1 MP Board Question 6.
What did the axe men do when the villagers hugged the trees and shouted “chipko, chipko”?
(व्हॉट डिड द ऐक्समेन डु व्हेन द विलेजर्स हग्ड द ट्रीज एण्ड शाउटिड “चिपको चिपको” ?)
कुल्हाड़ीधारियों ने क्या किया जब गाँववासियों ने पेड़ों को गले लगा लिया और “चिपको, चिपको” चिल्लाए ?
Answer:
The axe men were frightened and they ran away.
(द ऐक्समेन वर फ्राइटन्ड एण्ड दे रैन अवे।)
कुल्हाड़ीधारी डर गये और वे भाग गए।

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(B) Answer any three of the following questions in three or four sentences each:
(नीचे लिखे प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर 3-4 वाक्यों में दें:)

English Class 8 Practice Test Paper 1 Question 1.
What attracts the tourists there?
(व्हॉट अट्रैक्ट्स द टूरिस्ट्स देअर ?)
पर्यटकों को वहाँ क्या आकर्षित करता है ?
Answer:
Kanha Kisli’s wild life species attracts the tourists.
(कान्हा किसलीज वाइल्ड लाइफ स्पीशीज अट्रैक्ट्स द टूरिस्ट्स )
कान्हा किसली की जंगली प्रजातियाँ पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

English Reader Class 8 Practice Test Paper 1 Question 2.
How did the tiger, the monkey and the snake help the woodcutter?
(हाउ डिड द टाइगर, द मंकी एण्ड द स्नेक हैल्प द वुडकटर ?)
बाघ, बन्दर और साँप ने लकड़हारे की कैसे मदद की ?
Answer:
The tiger once gave the woodcutter a set of gold ornaments, the monkey gave him sweet fruits one day when he was very hungry and the snake helped him in coming out of the prison.
(द टाइगर वन्स गेव द वुडकटर अ सैट ऑफ गोल्ड और्नामेन्ट्स, द मंकी गेव हिम स्वीट फ्रूट्स वन डे व्हेन ही वॉज वेरी हंगरी एण्ड द स्नेक हैल्प्ड हिम इन कमिंग आउट ऑफ द प्रिजन।)
बाघ ने एक दिन लकड़हारे को सोने के आभूषण दिये, बन्दर ने उसे मीठे फल दिये जब वह बहुत भूखा था और साँप ने उसे जेल से निकलवाने में मदद की।

Class 8 Subject English Practice Test Paper 1 Question 3.
What is the work of “Dasohli Gram Swarajya Mandal ?”
(व्हॉट इट द वर्क ऑफ “दसोहली ग्राम स्वराज्य मण्डल’)
“दसोहली ग्राम स्वराज्य मण्डल” का क्या कार्य है ?
Answer:
This organisation works to regenerate the degraded forests.
(दिस ऑर्गेनाइजेशन वर्क्स टु रीजनरेट द डिग्रेडिड फॉरेस्ट्स।)
ये संस्था उन जंगलों को नवजीवन प्रदान करने का कार्य करती है जिनका पतन हो गया है।

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Class 8 English Practice Test Paper 1 Special Series Question 4.
What else can be seen at Kanha besides animals?
(व्हाट ऐल्स कैन बी सीन ऐट कान्हा बिसाइड्स एनीमल्स।)
वहाँ और क्या देखा जा सकता है ?
Answer:
Natural Scenery, Jungle life and birds can be seen there besides animals.
(नैचुरल सीनरी, जंगल लाइफ एण्ड बर्डस कैन बी सीन देअर बिसाइड्स एनीमल्स।)
प्राकृतिक सौन्दर्य, जंगल की जिन्दगी, और पक्षी देखे जा सकते हैं।

(C) Answer any three of the following questions:
(किन्ही तीन प्रशनों के उत्तर दें:)

Class 8 English Paper MP Board Question 1.
Why do we wish for another chance?
(व्हाय डू वी विश फॉर एनदर चान्स ?)
हम एक और मौके की इच्छा क्यों करते हैं?
Answer:
We wish for another chance to change our failure into winning.
(वी विश फॉर एनदर चान्स टू चेंज आवर फेल्यर इन्टू विनिंग।)
हम एक और मौके की इच्छा इसलिए करते हैं ताकि हम अपनी हार को जीत में बदल सकें।

Class 8th MP Board English Paper Question 2.
Why should we never give up in despair?
(व्हॉय शुड वी नैवर गिव अप इन डिस्पेअर?)
हमें कभी निराश होकर क्यों नहीं छोड़ देना चाहिए?
Answer:
We should never give up in despair as there is always a tomorrow to start anew.
(वी शुड नैवर गिव अप इन डिस्पेअर ऐज़ देअर इज़ औलवेज़ अ टुमौरो टू स्टार्ट अन्यू) हमें निराश इसलिए नहीं होना चाहिए क्योंकि कल अवश्य आता है।

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MP Board Class 8th English Paper Question 3.
What was the only pleasure of the miser?
(व्हॉट वॉज़ द ओन्ली प्लेज़र ऑफ द माइजर ?)
कंजूस का एकमात्र आनन्द क्या था ?
Answer:
His only pleasure was to see his treasure everyday.
(हिज ओन्ली प्लेज़र वॉज टु सी हिज़ ट्रेजर एवरीडे।)
उसे अपने खज़ाने को रोज देखने में आनन्द मिलता था।

MP Board Class 8 English Paper Question 4.
What did the neighbors ask? the miser?
(व्हॉट डिड द नेबर्स आस्क द माइज़र ?)
पड़ोसियों ने कंजूस से क्या पूछा ?
Answer:
The neighbors asked the miser what was the “matter.
(द नेबर्स आस्कड द माइजर व्हॉट वॉज द मैटर।)
पड़ोसियों ने कंजूस से पूछा कि मामला क्या था ?

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Class 8 MP Board English Paper Question 5.
Write any four lines of a poem you have read.
(Tots a fant ont ar viferrent feratii)
Answer:
Do yourself.

Class 8th English Paper 2023 MP Board Question 6.
Read the passage given in the book carefully.
(A) Now answer the following questions.
(पुस्तक में दिए पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें। अब निम्न प्रश्नों के उत्तर दें:)

1. Where did the hen lay the egg?
Answer:
The hen lay. the egg upon the roof of the farmhouse.

2. Who found the egg in the end?
Answer:
A small mouse found the egg in the end.

3. Who did the hen ask about her egg?
Answer:
The hen had asked the Goat, bird and a small mouse about her egg.

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4. Why was the hen happy?
Answer:
The hen was happy because she had got a baby chick in place of the egg.

5. What did the bird tell the hen about the egg?
Answer:
The bird told that the egg rolled along the drain pipe and them into a hole.

(B) Say true or false:
(सत्य या असत्य बताएँ:)
1. The egg rolled along the table.
2. The Goat and the hen lived in a farmhouse.
Answer:
1. True
2. True.

(C) Tick the correct answer:
(सही उत्तर चिह्नित करें:)
“If you look closely, you will see that you’ve a new baby chick in its place.” Here ‘closely means’
(i) nearly
(ii) carefully
(iii) quickly
(iv) rapidly.
Answer:
(ii) carefully.

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(D) Write the past tense form of the following verbs with the help of the story:
(कहानी की सहायता से निम्न क्रियाओं के भूतकाल के रुप लिखें:)
1. fall
2. run.
Answer:
1. fell
2. ran.

Test Paper 1 Class 8 Question 7.
Write an application to your class teacher requesting him to add your name in the list of the students going to the Kanha Kisli National Park.
(कान्हा किसली राष्ट्रीय पार्क जाने वाले विद्यार्थियों की सूची 1 में अपना नाम जोड़ने के लिए प्रार्थना करते हुए अपने कक्षाध्यापक को एक पत्र लिखें।)

Or (या)

Write a letter to your friend narrating your visit to Kanha Kisli.
(अपने मित्र को कान्हा किसली की सैर का वर्णन करते हुए एक पत्र लिखें।)

Answer:

10, Prabhu Nagar
Indore
20.3.20 ……..

Dear Mahesh,
Hope you are fine there. I am also fine here. As I had been to Kanha National Park in my vacations. I wish to share my experience with you. It was a great fun. We saw many animals like deer, elephants, lions, etc. We gave bananas to monkeys and elephants. We took photographs of beautiful birds and animals. We had our lunch there. We played some outdoor games and enjoyed a lot. I missed you a lot. Rest is fine.

(or)

Ram Pal Singh
26 / 102, Ashok Nagar,
Kanpur
4 – 3 – 20 …….

Dear Raj,
I am fine here and hope the same at your end 1. also. As our exams are over, what are your plans for your vacations. I am planning to go for a picnic to the Kanha Kisli National Park on 14th of this month. If you wish, you may also join us. Rest is fine. Pay my regards to elders and love to younger. Waiting for your letter,

Yours
Ramesh

Practice Test Paper 2 Class 8 English Question 8.
Write an essay on any one of the following:
(निम्न में से किसी एक पर एक निबन्ध लिखें:)

  1. My School
  2. Importance of trees
  3. Independence Day celebration in your school.

Answer:

1. My School

I read in Senior Model School, Bhopal. It is situated in a peaceful environment as it is far from | the city. It has a red building with fifteen rooms. It has a big hall, a library, store room, games and sports room, clerks room and principal’s room. My school has a big play ground where cricket, hockey, football and other games are played. The name of my Principal is Mr. S.D. Sharma. He is a learned person.

There are 35 teachers in my school. All the teachers are well qualified The library of our school is well managed. We can read magazines and newspapers there. Annual functions are held in our school. There is a scheme of holding debate on every Saturday in my school. Sometimes picnics and tours are arranged in my school. All the children come in proper uniform to the school. I love my school very much.

कठिन शब्द –

  • Peaceful environment = शान्त वातावरण
  • situated = स्थित
  • well qualified = सुयोग्य
  • Debate = वाद – विवाद
  • Magazines = पत्रिकाएँ

2. Importance of trees

We cannot imagine life without trees. Trees . are one of the most important creations of God. Trees are essential part of our lives. They help us in several ways. They produce oxygen in the presence of sunlight which is important for our survival and take in carbon di oxdie making the environment pure. We get wood from trees for making furniture, houses and paper. They provide us food to eat. Trees act as home for many animals and birds. Some trees have medicinal value like tulsi, neem, eucalyptus etc. Trees maintain the ecological balance of nature and bring rain through transpiration. They make the environment pollution-free. So we should try our level best to preserve trees.

कठिन शब्द –

  • essential = जरूरी
  • environment = वातावरण
  • ecological = स्थिति विज्ञान का
  • balance = सन्तुलन
  • Transpiration = वाष्पोत्सर्जन
  • pollution = दूषित
  • Preserve = रक्षा

3. Independence Day celebration in your school.

Celebrations In Your School Our country got freedom on 15th August, 1947. Britishers quieted India on this day. Therefore, this day is known as Independence Day. It is our National festival. It is celebrated all over India. In schools and colleges, it is celebrated with great pomp and show. It is celebrated in my school. The school building is decorated nicely. We reach school at 7 a.m. in proper uniform. Principal hoists the flag.

Then we all sing the national anthem. After that some, cultural programme is presented and then the teachers deliver speeches to teach us to be faithful to our country. In the end, the principal delivers a speech thanking the audience, teachers and the taught .We come back home with the laddoos given to us with the feeling of patriotism.

कठिन शब्द –

  • quit= छोड़कर जाना
  • pomp and show – = ठाठबाट
  • national anthem = राष्ट्रीय गान
  • patriotism = देशभक्ति

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MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti विविध प्रश्नावली 1

MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions विविध प्रश्नावली 1

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. निम्नलिखित पर्यायवाची शब्दों की सही जोड़ी बनाइए
(1) निशा – (क) अमृत
(2) वीणावादिनी – (ख) विहग
(3) पक्षी – (ग) कमल
(4) सुधा – (घ) रात
(5) सरोज – (ङ) सरस्वती
उत्तर-
(क) → (4),
(ख) → (3),
(ग) → (5),
(घ) → (1),
(ङ) → (2).

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2. सही विकल्प चुनिए
(1) हृदय भर आना मुहावरे का अर्थ है-
(क) प्यास बुझाना,
(ख) दुःखी होना,
(ग) खुशी होना।
उत्तर-
(ख) दुःखी होना,

(2) निम्नलिखित रचनाकारों में से किसका सम्बन्ध राजस्थान से है ?
(क) सूर,
(ख) तुलसी,
(ग) मीरा।
उत्तर-
(ग) मीरा,

(3) ‘श्रुति ईमानदार है और प्रतिभाशाली भी है।’ यह वाक्य है
(क) साधारण वाक्य,
(ख) मिश्रित वाक्य,
(ग) संयुक्त वाक्य।
उत्तर-
(ग) संयुक्त वाक्य।

3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) जहाज का पंछी’ शब्द कवि …………………………………….’ की कविता में प्रयुक्त हुए हैं।
(ख) आधी ताकत खींच लेने की शक्ति का वरदान राजा ……………………………………. को प्राप्त था।
(ग) छंद दो प्रकार के हैं। एक ……………………………………. छंद,दूसरा वर्णिक छन्द।
उत्तर-
(क) सूरदास,
(ख) बाली,
(ग) मात्रिक।

4. निम्नलिखित शब्द उपसर्ग जुड़कर बने हैं। इन शब्दों के उपसर्ग अलग कर निम्न तालिका में लिखिए-
प्रतिक्षण, पराजय, अभिशाप, अनुगमन, विज्ञान।
उत्तर-

MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. किस बात के मान लेने से हमारी शक्ति आधी हो जाती है?
उत्तर-
विरोधी के बल और अपने बल को तौले बिना, उसे शक्तिशाली मान लेने से हमारी शक्ति आधी हो जाती है।

2. उपमा’ अलंकार में कौन-कौन से चार अंग होते हैं ?
उत्तर-
उपमा अलंकार में चार अंग होते हैं
(1) उपमेय (प्रस्तुत),
(2) उपमान (अप्रस्तुत),
(3) साधारण धर्म,
(4) वाचक।

3. अपराजिता महिला का नाम क्या है ? ‘अपराजिता’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर-
अपराजिता महिला का नाम डॉ. चन्द्रा है।

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MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti लघु उत्तरीय प्रश्न.

1. कवि वीणावादिनी से किस प्रकार का झरना बहाने के लिए आग्रह कर रहा है ?
उत्तर-
कवि वीणावादिनी से ज्योर्तिमय निर्झर (झरना) बहाने के लिए आग्रह कर रहा है। …

2. कलषु भेद से कवि का क्या आशय है ?
उत्तर-
कलुष भेद से कवि का आशय मन के विकारों को दूर (नष्ट) करने से है।

3. आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए लेखक ने कौन-सा सूत्र बताया है ?
उत्तर-
आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए लेखक ने सूत्र बताया है कि हम दुविधा से ऊपर उठे अर्थात् दुविधा को नष्ट कर देना चाहिए क्योंकि इससे एकाग्रता नष्ट हो जाती है। .

4. उपसर्ग और प्रत्यय में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपसर्ग और प्रत्यय में अन्तर को, समझने के लिए इनकी परिभाषाओं को ध्यान में रखना होगा। इनकी परिभाषाएँ इस प्रकार हैं

  1. उपसर्ग-जो शब्दांश या ध्वनि किसी सार्थक शब्द के शुरू में जुड़कर इसके अर्थ में बदलाव कर देते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं; जैसे-प्र, परा, अप, सम आदि।
  2. प्रत्यय-जो शब्दांश सार्थक शब्दों के अन्त में जुड़कर नयापन या भिन्न अर्थ की उत्पत्ति करता है, वह प्रत्यय कहलाता है; जैसे-योग के बाद इक जोड़े जाने पर यौगिक शब्द बनता

MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर उत्तर दीजिए-
“नव गति नव लय ताल-छन्द नव।
नवल कंठ, नव जलद मन्द रव॥”
(1) उपर्युक्त पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है ?
(2) उपर्युक्त पंक्तियाँ किस पाठ से ली गई हैं ?
(3) कविता के कवि का नाम लिखिए।
(4) ताल छन्द का क्या आशय है ?
उत्तर-
(1) उपर्युक्त पंक्तियों में अनुप्रास अलंकार है।
(2) उपर्युक्त पंक्तियाँ ‘ वर दें’ पाठ से ली गई हैं।
(3) इस कविता के कवि का नाम सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ है।
(4) ताल-छन्द का आशय यह है कि ‘कविता’ करने के लिए किसी भी ताल अथवा छन्द की अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए। कविता तो सीधे हृदय से निकले भावों का उद्गार होती है। ताल और छन्द का बन्धन वहाँ नहीं होना चाहिए।

2. रचना की दृष्टि से वाक्य कितने प्रकार के हैं ? नाम लिखिए।
उत्तर-
रचना की दृष्टि से वाक्य तीन प्रकार के होते हैं

  • साधारण वाक्य,
  • मिश्रित वाक्य,
  • संयुक्त वाक्य।

3. मुफ़्तानन्द जी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर-
मुफ़्तानन्द जी बिना निमन्त्रण के भी किसी के . द्वारा दिए गये भोज आदि में चले जाते हैं। वे मुफ्त खाकर मस्त रहते हैं। पैसा खर्च करना वे सीखे ही नहीं। वे अखबार पर भी खर्च नहीं करते। अपनी सन्तान की शिक्षा पर भी कोई खर्च नहीं करते। मुफ्त में प्राप्त की गई पुस्तकों में से वे अपने पुस्तकालय की शोभा बढ़ाते हैं। ‘फ्री पास’ से सिनेमा देखना वे अच्छा मानते हैं। औषधि तक वे मुफ़्त ही प्राप्त करते हैं। यहाँ तक है कि वे मुफ्त में ही अपनी मृत्यु प्राप्त करने के लिए ‘फ्री पास’ की इच्छा करते हैं।

4. तुलसीदास जी ने “अपनपौ हारे” क्यों कहा है ? समझाइए।
उत्तर-
तुलसीदास जी भगवान राम के चरणों की भक्ति छोड़कर कहीं दूसरी जगह जाना नहीं चाहते अर्थात् वे किसी दूसरे देवता की भक्ति नहीं करना चाहते। जितने भी देवता, दनुज, मुनि, नाग और मनुष्य हैं, वे सब माया के वशीभूत हैं। वे बेचारे हैं और दीन बने हए हैं। अत: वे (तुलसीदास) इनके हाथों में जाकर, अर्थात् इनकी शरण में जाकर अपनेपन का (अपने स्वाभिमान का) त्याग नहीं करना चाहते। अपने स्वाभिमान को ‘हारकर जीवन जीवित रहना अपमानजनक है, मृत्यु प्राप्त करने से भी अधिक पीड़ादायक होगा।

5. निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़िए और मात्राएँ बताइए कि उनमें कौन-सा छन्द है ?
उत्तर-
यह दोहा छन्द है, क्योंकि जिस छन्द के विषम व सम चरणों में क्रमशः 13 और 11 मात्राएँ हों और उसके चार चरण हों तो वह दोहा छन्द होता है अर्थात् पहले और तीसरे चरण में तेरह और दूसरे तथा चौथे चरण में ग्यारह-ग्यारह मात्राएँ हों तो वह दोहा छन्द होता है।

6. निम्नलिखित शब्दों का अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
नतमस्तक, आभामण्डित, रंचमात्र, जिजीविषा, जिह्वाग्र, पुष्पवेषी, यातनाप्रद।
उत्तर-
(1) नतमस्तक = सिर झुकाकर।
वाक्य प्रयोग-हमें नतमस्तक होकर नमस्कार करना चाहिए।

(2) आभामण्डित-कांति से सुशोभित।
वाक्य प्रयोग-आभामण्डित मुखमण्डल तेज बिखेर रहा था।

(3) रंचमात्र = थोड़ा-सा, तनिक-सा।
वाक्य प्रयोग-वह रंचमात्र भी अपने दुष्कर्म पर लज्जित नहीं था।

(4) जिजीविषा = जीवित रहने की इच्छा।
वाक्य प्रयोग-छोटा भी जीव विरोधी दशा में भी जिजीविषा लिए होता है।

(5) जिह्वाग्र = जीभ पर।
वाक्य प्रयोग-अपने दुश्मनों का नाम हम जिह्वाग्र पर नहीं आने देते हैं।

(6) पुष्पवेषी = फूलों का वेश बनाने वाला।
वाक्य प्रयोग-देवाङ्गनाएँ प्रायः पुष्प वेषी होती हैं।

(7) यातनाप्रद = कष्टदायक।
वाक्य प्रयोग-यातनाप्रद परिस्थितियों ने उसे निराश बना दिया।

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7. आर्यभट्ट नामक उपग्रह के अतिरिक्त भारत ने और कौन-कौन से उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे ?
उत्तर-
आर्यभट्ट के अतिरिक्त भारत ने अनेक कृत्रिम उपग्रह । अंतरिक्ष में भेजे हैं। इनमें से भास्कर – I व II, रोहिणी, ऐरियन
मैसेंजर, इण्सैट 1A; 1B, 1C, 1D, IRS-1A, 1B, इण्सेट 2A, 2B, 2C, 2D, 2E, ओसियन सेट, इण्सेट 3A, 3B, 3C, 3D, 3E, कल्पना-I, ऐड्सेट, इण्सेट -4A, 4B, 4C, 4D इत्यादि प्रमुख हैं।

8. यदि आपने कोई दर्शनीय स्थल देखा है, तो उसकी विशेषताएँ बतलाते हुए यात्रा-वृत्तान्त लिखिए।
उत्तर-
विद्यार्थी स्वयं लिखें।

9. किसी संत कवि द्वारा रचित कोई एक पद/कविता लिखिए।
उत्तर-
बसो मैरे नैनन में नंदलाल। – मोर मुकुट मकराकृति कुंडल, अरुण तिलक दिए भाल॥ मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने बिसाल। अधर-सुधा-रस मुरली राजत, उर बैजंती-माल॥ छुद्रं घंटिका कटि-तट सोभित, नूपुर सबदं रसाल। मीरा प्रभु संतन सुखदाई, भगत बछल गोपाल॥
-मीराबाई

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MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 8 यक्षप्रश्नाः

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MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 8 यक्षप्रश्नाः

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 8 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 8 Mp Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत्. (एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) भूमेः गुरुतरा का? (पृथ्वी से भारी क्या है?)
उत्तर:
माता। (माता)

(ख) खात् उच्चतरः कः? (आकाश से अधिक ऊँचा क्या है?)
उत्तर:
पिता। (पिता)

(ग) वातात् शीघ्रतरं किम्? (वायु से तेज क्या है?)
उत्तर:
मनः। (मन)

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(घ) प्रवसतः किं मित्रम्? (विदेश में रहने वाले का मित्र क्या है?)
उत्तर:
सार्थः। (धनयुक्त होना)

(ङ) आतुरस्य मित्रं किम्? (रोगी का मित्र क्या है?)
उत्तर:
भिषग्। (वैद्य)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 8 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) का तृणात् बहुतरी? (तिनके से अधिक क्या है?)
उत्तर:
चिन्ता तृणात् बहुतरी। (चिन्ता तिनके से अधिक है।)

(ख) गृहे सतः किं मित्रम्? (घर में रहने वाले का मित्र क्या है?)
उत्तर:
गृहे सतः भार्या मित्रम्। (घर में रहने वाले का मित्र पत्नी है।)

(ग) युधिष्ठिरस्य मातुः नाम किम्? (युधिष्ठिर की माता का नाम क्या था?)
उत्तर:
युधिष्ठिरस्य मातुः नाम कुन्ती। (युधिष्ठिर की माता का नाम कुन्ती था।)

(घ) मरिष्यतः मित्रं किम्? (मरने वाले का मित्र क्या है?)
उत्तर:
मरिष्यतः मित्रं दानम्। (मरने वाले का मित्र दान है।)

(ङ) नकुलस्य मातुः नाम किम्? (नकुल की माता का नाम क्या था?)
उत्तर:
नकुलस्य मातुः नाम माद्री। (नकुल की माता का नाम माद्री था।)

(च) प्रसन्नो भूत्वा यक्षः किम् अकरोत्? (प्रसन्न होकर यक्ष ने क्या किया?)
उत्तर:
प्रसन्नो भूत्वा यक्षः सर्वेभ्यः जीवनं दत्तवान्। (प्रसन्न होकर यक्ष ने सभी को जीवन दे दिया।)

Class 8 Sanskrit Chapter 8 Yaksha Prashna प्रश्न 3.
कोष्ठकप्रदत्तैः शब्दैः सह उचितं विभक्ति प्रयुज्य रिक्तस्थानपूर्ति कुरुत (कोष्ठक में दिये गये शब्दों के साथ उचित विभक्ति लगाकर रिक्त स्थान भरो-)
(क) चिन्ता ……….. बहुतरी भवति।
(ख) माता ……….. गुरुतरा अस्ति। (भूमि)
(ग) वायोः ……….. शीघ्रतरं भवति। (मन)
(घ) भार्या मम गृहे सतः ……….. भवति। (मित्र)
(ङ) ……….. भिषग् मित्रं भवति। (आतुर)
उत्तर:
(क) तृणात्
(ख) भूमेः
(ग) मनः
(घ) मित्रम्
(ङ) आतुरस्य।

Class 8th Sanskrit Chapter 8 Mp Board प्रश्न 4.
युग्मनिर्माणं कुरुत(जोड़े बनाओ-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 8 यक्षप्रश्नाः 1
उत्तर:
(क) → (iii)
(ख) → (iv)
(ग) → (i)
(घ) → (ii)
(ङ) → (vi)
(च)→ (v)

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Sanskrit Chapter 8 Class 8 Mp Board प्रश्न 5.
उदाहरणानुसारं निम्नलिखितपदानां समानार्थकपदानि लिखत
(उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित पदों के समानार्थक पद लिखो-)
यथा- खात् – आकाशात्
उत्तर:
भूमेः – पृथिव्याः।
वातात् – पवनात्।
आतुरस्य – रुग्णस्य।
तृणात् – बुसात्।
भ्रातृणाम् – सहोदराणाम्।
मातृभ्याम् – जननीभ्याम्।

(महाभारत के यक्ष प्रश्न अत्यन्त प्रसिद्ध हैं। वनपर्व की कथा के अनुसार, वनवास के समय एक बार पाण्डव वन में घूम रहे थे। मार्ग में द्रोपदी ने पानी माँगा। सबसे पहले सहदेव बर्तन लेकर पानी लेने पास के एक तालाब पर गया परन्तु नहीं लौटा। इसी प्रकार क्रम से नकुल, अर्जुन और भीम गये, परन्तु वे भी नहीं लौटे। अन्त में स्वयं युधिष्ठिर ने वहाँ आकर देखा कि मेरे चार छोटे भाई भूमि पर प्राणहीन गिरे हुए हैं। उन्होंने उसके कारण को जानना चाहा, अचानक एक विशालकाय यक्ष आया। उसने कहा कि “मेरे प्रश्नों के उत्तर दिये बिना यदि तुमने पानी लिया तो तुम भी ऐसे ही निष्प्राणता को प्राप्त करोगे।” इसके बाद यक्ष प्रश्न करता है। युधिष्ठिर के उत्तरों से सन्तुष्ट होकर छोटे भाइयों को जीवन दान के साथ ही पानी भी दिया।)

यक्षप्रश्नाः हिन्दी अनुवाद

यक्ष उवाच-
केनस्विच्छोत्रियो भवति केनस्विद्विन्दते महत्?
केन द्वितीयवान्भवति राजन्! केन च बुद्धिमान?

अनुवाद :
यक्ष बोला-हे राजन्! (मनुष्य) श्रोत्रिय (वेद में प्रवीण) किससे होता है? महत्पद (बड़ा स्थान) किससे प्राप्त करता है? द्वितीयवान् (दूसरे साथी से युक्त) किससे होता है और बुद्धिमान् किससे होता है?

युधिष्ठिर उवाच-
श्रुतेन श्रोत्रियो भवति, तपसा विन्दते महत्।
धृत्या द्वितीयवान्भवति, बुद्धिमान्वृद्धसेवया॥

अनुवाद :
युधिष्ठिर बोला-(मनुष्य) वेदाध्ययन से श्रोत्रिय होता है, तपस्या से महत्पद (बड़ा स्थान) प्राप्त करता है; धैर्य से द्वितीयवान् (दूसरे साथी से युक्त) होता है और वृद्धों की सेवा से बुद्धिमान् होता है।

यक्ष उवाच-
किंस्विद् गुरुतरं भूमेः किंस्विदुच्चतरं च खात्।
किंस्विच्छीघ्रतरं वायोः किस्विद बहतरं तणात्॥

अनुवाद :
यक्ष बोला-पृथ्वी से भारी क्या है (गौरव किसका है)? आकाश से अधिक ऊँचा क्या है? वायु से तेज क्या है? तिनकों से भी अधिक (असंख्य) क्या है?

युधिष्ठिर उवाच-
माता गुरुतरा भूमेः खात्यितोच्चतरस्तथा।
मनः शीघ्रतरं वाताच्चिन्ता बहतरी तणात्॥

अनुवाद :
युधिष्ठिर बोला-माता पृथ्वी से भारी है (अर्थात् माता का गौरव पृथ्वी से ज्यादा है)। पिता आकाश से अधिक ऊँचे हैं, मन वायु से तेज चलने वाला है और चिन्ता तिनकों से भी अधिक (जनसंख्या या अनन्त) है।

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यक्ष उवाच-
किंस्वित्प्रवसतो मित्रं किंस्विन्मित्रं गृहे सतः।
आतुरस्य च किं मित्रं किंस्विन्मित्रं मरिष्यतः॥

अनुवाद :
यक्ष बोला-विदेश में रहने वाले का मित्र क्या है? घर में रहने वाले (गृहस्थ) का मित्र क्या है? रोगी का मित्र क्या है और मरने वाले का मित्र क्या है?

युधिष्ठिर उवाच-
सार्थः प्रवसतोमित्रं भार्या मित्रं गृहे सतः।
आतुरस्य भिषमित्रं दानं मित्रं मरिष्यतः॥

अनुवाद :
युधिष्ठिर बोला-धन से युक्त होना विदेश में रहने का मित्र है। घर में रहने वाले (गृहस्थ) का मित्र पत्नी है। रोगी का मित्र वैद्य है और मरने वाले का मित्र दान है।

(युधिष्ठिरस्य उत्तरेण सन्तुष्टः यक्षः अवदत्)
यक्ष उवाच-
भो राजन्! त्वं भ्रातृषु यम् एकम् इच्छसि सः जीवेत्। युधिष्ठिर उवाच-नकुलो जीवेत् इति ममेच्छा अस्ति।

यक्ष उवाच-
प्रियस्ते भीमसेनोऽयमर्जुनो वः परायणम्।
तत् कस्मान्नकुलं राजन् सापलं जीवमिच्छसि॥

अनुवाद :
(युधिष्ठिर के उत्तर से सन्तुष्ट यक्ष बोला) यक्ष ने कहा-हे राजन्! भाइयों में तुम जिस एक को चाहो वह जीवित हो जाये। युधिष्ठिर ने कहा-‘नकुल जीवित हो जाये’ यह मेरी इच्छा यक्ष ने कहा-हे राजन्! तुम्हारा प्रिय भीमसेन है और अर्जुन तुम सबका अनन्य भक्त है, तो फिर किसलिए सौतेले भाई। (नकुल) को जिलाना चाहते हो?

युधिष्ठिर उवाच-
यथा कुन्ती तथा माद्री विशेषो नास्ति मे तयोः।
मातृभ्यां सममिच्छामि नकुलो यक्ष जीवितु॥
युधिष्ठिरस्य निष्पक्षतया धर्मनिष्ठया च प्रसन्नः यक्षः सर्वेभ्यः जीवनं दत्तवान्।

अनुवाद:
युधिष्ठिर ने कहा-हे यक्ष! जैसी मेरे लिए कुन्ती, वैसी माद्री हैं, दोनों में अन्तर नहीं है। दोनों के प्रति समान भाव रखना चाहता हूँ, इसलिए नकुल जीवित हो।

युधिष्ठिर की निष्पक्षता और धर्मनिष्ठा से प्रसन्न यक्ष ने सभी को जीवन दे दिया।

यक्षप्रश्नाः शब्दार्थाः

विन्दते = लाभ प्राप्त करता है। गृहे सतः = घर में रहने वाले का। किंस्विद् = क्या। आतुरस्य = बीमार का। उच्चतरम् = अधिक ऊँचा। मरिष्यतः = मरने वाले का। खात् = आकाश से। सार्थः = धनयुक्त/अर्थसहित। शीघ्रतरम् = अधिक गतिशील, तेज। भिषग् = वैद्य। वातात् = वायु से। वः = तुम सब का। बहुतरम् = बहुत फैलने वाली। परायणम् = अनन्य भक्त। तृणात् = तिनके से। सापत्नम् = सौतेले भाई (नकुल) को। प्रसतः = विदेश में रहने वाले का। साम्प्रतम् = इस समय।

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MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 2 कालज्ञो वराहमिहिरः

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MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 2 कालज्ञो वराहमिहिरः

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 2 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 2 Mp Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत(एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) वराहमिहिरस्य जन्म कुत्र अभवत्? (वराहमिहिर का जन्म कहाँ हुआ?)
उत्तर:
कपित्थग्रामे। (कपित्थ गाँव में)

(ख) वराहमिहिरस्य पितुः नाम किम्? (वराहमिहिर के पिता का नाम क्या था?)
उत्तर:
आदित्यदासः। (आदित्यदास)

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(ग) वराहमिहिरः कस्मात् ज्यौतिषं पठितवान्? (वराहमिहिर ने किससे ज्योतिष पढ़ी?)
उत्तर:
स्वकीयजनकात्। (अपने पिता से)

(घ) वराहमिहिरः खगोलशास्त्रं कस्मात् पठितवान्? (वराहमिहिर ने खगोलशास्त्र किससे पढ़ा?)
उत्तर:
आर्यभट्टात्। (आर्यभट्ट से)

(ङ) वराहमिहिरः अध्ययनं समाप्य कुत्र अगच्छत्? (वराहमिहिर अध्ययन समाप्त करके कहाँ गये?)
उत्तर:
उज्जयिनीम्। ( उज्जयिनी)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 2 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) वराहमिहिरस्य जन्म कदा अभवत्? (वराहमिहिर का जन्म कब हुआ?)
उत्तर:
वराहमिहिरस्य जन्म ४९९ ख्रिस्ताब्दे सजातम्। (वराहमिहिर का जन्म चार सौ निन्यानवे ईस्वी में हुआ।)

(ख) वराहमिहिरः कदा दिवङ्गतः? (वराहमिहिर कब स्वर्गवासी हुए?)
उत्तर:
वराहमिहिरः ५८७ ख्रिस्ताब्दे दिवङ्गतः। (वराहमिहिर पांच सौ सतासी ईस्वी में स्वर्गवासी हुए।)

(ग) भारते फलितज्यौतिषस्य प्रथमः आचार्यः कः। अभवत्? (भारत में फलितज्योतिष के प्रथम आचार्य कौन हुए?)
उत्तर:
भारते फलितज्योतिषस्य प्रथमः आचार्यः वराहमिहिरः अभवत्। (भारत में फलितज्योतिष के प्रथम आचार्य वराहमिहिर हुए)

(घ) वराहमिहिरेण के ग्रन्थाः विरचिताः। (वराहमिहिर ने कौन से ग्रन्थ रचे?)
उत्तर:
वराहमिहिरेण बृहत्संहिता-बृहज्जातकम्पञ्च सिद्धान्तिका ग्रन्थाः विरचिताः। (वराहमिहिर ने वृहत्संहिता, बृहज्जातकम् पंञ्चसिद्धान्तिका ग्रन्थ रचे।)

(ङ) पादपाः वल्मीकाश्च किं प्रदर्शयन्ति? (वृक्ष और दीमक क्या प्रकट करते हैं?)
उत्तर:
पादपाः वल्मीकाश्च अधोभौमिकजलस्थिति प्रदर्शयन्ति। (वृक्ष और दीमक भूमि के नीचे जल होना प्रकट करते हैं।)

Class 8th Sanskrit Chapter 2 Mp Board प्रश्न 3.
उचितशब्देन रिक्तस्थानं पूरयत(उचित शब्द द्वारा खाली स्थान भरो-)
(क) वराहमिहिरः अध्ययनं समाप्य ………… आगतः। (उज्जयिनीम्/पाटलीपुत्र नगरम्)
(ख) आर्यभट्टः ……….. आसीत्। (खगोलशास्त्री/साहित्यशास्त्री)
(ग) बृहज्जातकम् नाम ग्रन्थः ………… विरचितः। (आर्यभटेन/वराहमिहिरेण)
(घ) कपित्थग्रामः ………… निकटे अस्ति। (पाटलिपुत्रनगरस्य/उज्जयिन्याः)
(ङ) गुरुवाकर्षणस्य सिद्धान्तं ……….. प्रतिपादितम्।। (आदित्यदासेन/वराहमिहिरेण)
उत्तर:
(क) उज्जयिनीम्
(ख) खगोलशास्त्री
(ग) वराहमिहिरेण
(घ) उज्जयिन्याः
(ङ) वराहमिहिरेण।

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MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 2 प्रश्न 4.
उचितं योजयत(सही को मिलाओ-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 2 कालज्ञो वराहमिहिरः 1
उत्तर:
(क) → (iii)
(ख) → (iv)
(ग) → (i)
(घ) → (v)
(ङ) → (ii)

Class 8 Sanskrit Chapter 2 Kalagyo Varahmihir प्रश्न 5.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षं’न’ इति लिखत (शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ (हाँ) एवं अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न”नहीं) लिखो-)
(क) “पञ्चसिद्धान्तिका” इत्यस्य ग्रन्थस्य रचयिता वराहमिहिरः अस्ति।
(ख) बृहज्जातकम् ग्रन्थस्य रचयिता आर्यभट्टः अस्ति।
(ग) आर्यभट्टः खगोलशास्त्री आसीत्।
(घ) वराहमिहिरस्य कृता कालगणना प्रामाणिकी अस्ति।
(ङ) वराहमिहिरस्य जन्म वर्तमानमध्यप्रदेशराज्ये अभवत्।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) आम्
(घ) आम्
(ङ) आम्।

Sanskrit Chapter 2 Class 8 Mp Board प्रश्न 6.
नामोल्लेखपूर्वकं सन्धिविच्छेदं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए सन्धि विच्छेद करो-)
(क) आदित्योपासकः
(ख) अस्मिन्नेव
(ग) समाप्याध्ययनम्
(घ) बालकोऽजायत
(ङ) वर्द्धिताश्च
(च) खगोलशास्त्रस्याध्ययनम्।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 2 कालज्ञो वराहमिहिरः 2

कालज्ञो वराहमिहिरः हिन्दी अनुवाद

अस्ति उज्जयिन्याः निकटे ‘कपित्थ’ (कायथा) नामाख्यो ग्रामः। तत्र आदित्योपासकः ‘आदित्यदासः नामा कश्चित् विप्रः प्रतिवसति स्म। तस्य गृहे ‘वराहमिहिरः नामः बालकोऽजायत। वराहमिहिरम्य जन्म ४९९ (नवनवत्यधिक चतुश्शतके), ख्रिस्ताब्दे सञ्जातम्।।

अनुवाद :
उज्जयिनी के पास ‘कपित्थ’ (कायथा) नामक गाँव है। वहाँ सूर्य का भक्त ‘आदित्यदास’ नामक कोई ब्राह्मण रहता था। उसके घर में ‘वराहमिहिर’ नामक बालक ने जन्म लिया। वराहमिहिर का जन्म 499 (चार सौ निन्यानवे) ईस्वी में हुआ।

बालकः वराहमिहिरः स्वकीयपित्रा एक ज्यौतिष-विद्यामध्यगच्छत्। ततः सः पाटिलपुत्रनगरं गन्या प्रसिद्धखगोलशास्त्रज्ञात् आर्यभट्टात् खगोलशास्त्रस्याध्ययनं कृतवान्।

अनुवाद :
बालक वराहमिहिर ने अपने पिता से ही ज्योतिष विद्या का अध्ययन किया। उसके पश्चात् उन्होंने पाटलिपुत्र (पटना) नगर जाकर प्रसिद्ध खगोलशास्त्री आर्यभट्ट से खगोलशास्त्र (आकाश मण्डल का शास्त्र) का अध्ययन किया।

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तदानीम् उज्जयिनी विद्यायाः प्रमुखकेन्द्रमासीत्। उज्जयिन्यां गुप्तवंशस्य संरक्षणे बहुविधकला-विज्ञान-सांस्कृतिककेन्द्रादीनि संरक्षितानि वर्द्धितानि चासन्। अत्र नानादिग्देशेभ्यः विद्वज्जनानां समागमः भवतिस्म अत एव वराहमिहिरोऽपि समाप्याध्ययनम् अस्मिन्नेव नगरे समागतः।

अनुवाद :
उस समय उज्जयिनी विद्या का प्रमुख केन्द्र थी। उज्जयिनी में गुप्तवंश के संरक्षण (देखरेख) में अनेक प्रकार के कला, विज्ञान और सांस्कृतिक केन्द्र आदि संरक्षित और विकसित थे। यहाँ विभिन्न दिशाओं और देशों से विद्वान् लोगों का मेल होता था। इसीलिए वराहमिहिर भी अध्ययन समाप्त करके इसी नगर में आ गये।

वराहमिहिरः देवज्ञः वैज्ञानिकश्चासीत्। सः। गतानुगतिकताया: स्थाने वैज्ञानिकदृष्टिकोणस्य महत्वं प्रतिपादिलवान्। ग्रहनक्षत्रप्रभावाश्रितं फलित-ज्यौतिषं नाम शास्त्रं तस्दा प्रियपतिपााविषयोऽभवत्। तेन कृता कालगणना प्रामाणिकी अस्ति। भारते फलितज्यौतिषस्य प्रथमः आचार्य: वराहमिहिरः एव अस्ति न तत्पूर्वं फलितज्योतिषस्य शास्त्रं प्राप्यते भारते। एष एवं सर्वप्रथमं प्रतिपादितवान् यत् चन्द्रस्त्र प्रकाश: स्वीकीयः नास्ति, अपितु सः सूर्यस्य प्रकाशेन प्रकाशते।

अनुवाद :
वराहमिहिर वेदों के ज्ञाता और वैज्ञानिक थे। उन्होंने गतानुगतिकता (अन्धानुकरण या दूसरों की नकल करना) के स्थान पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण का महत्त्व समझाया। ग्रह नक्षत्रों के प्रभाव पर आधारित फलित-ज्योतिष (नक्षत्र ग्रहों के अनुसार फल बताने वाली विद्या) नामक शास्त्र उनका प्रिय प्रतिपादन (विचार) किये जाने योग्य विषय हुआ। उनके द्वारा की गयी काल की गणना प्रामाणिक है। भारत में फलितज्योतिष के प्रथम आचार्य वराहमिहिर ही हैं। उनसे पहले भारत में फलितज्योतिष का शास्त्र प्राप्त नहीं होता। इन्होंने ही सबसे पहले समझाया कि चन्द्रमा का प्रकाश अपना नहीं है, बल्कि वह सूर्य के प्रकाश से चमकता है।

वराहमिहिरेण बृहत्संहिता-बृहज्जातकम्-पञ्चसिद्धान्तिका ग्रन्थाः विरचिताः। एतेषु ग्रन्थेषु खगोलविद्यायाः गूढ़तत्त्वानां प्रतिपादनमस्ति। अनेन न केवल खगोलतत्त्वानां निरूपणं कृतम् अपितु पृथिव्याः गोलकत्वम्, गुरुत्वाकर्षणस्य सिद्धान्तम्, पर्यावरणविज्ञानम्, जलविज्ञानम्, भूविज्ञानमपि विस्तरेण विवेचितम्। “पादपाः वल्मीकाश्च अधोभौमिकजलस्थितिं प्रदर्शयन्ति।” इति तस्य कथनमासीत्। आधुनिकवैज्ञानिकाः अपि तानवलम्ब्य अन्वेषणं कुर्वन्ति।

अनुवाद :
वराहमिहिर ने ‘वृहत्संहिता,’ बृहज्जातकम्’ और ‘पञ्चसिद्धान्तिका’ ग्रन्थ रचे। इन ग्रन्थों में आकाशमण्डल की विद्या के गहन तत्वों को समझाया गया है। इन्होंने न केवल खगोल तत्त्वों का निरूपण किया बल्कि पृथ्वी के गोल होने का, गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का, पर्यावरण विज्ञान का जलविज्ञान का और भू-विज्ञान का भी विस्तार से वर्णन किया। “वृक्ष और दीमक भूमि के नीचे जल होना प्रकट करते हैं।” यह उनका कहना था। आधुनिक वैज्ञानिक भी उनका सहारा लेकर खोज करते हैं।

नानादेशेषु परिभ्रमन् स्वकीयज्ञानदीप्त्या दीप्यमानः ५८७ (सप्तशीत्यधिकं पञ्चशतम्) ख्रिस्ताब्दे सः दिवङ्गतः। स्वकीयविस्तृतज्ञानेन खगोलसदृशं गहनविषयमपि सरलं प्रस्तुतवान्। ज्यौतिषविद्यामहार्णवं तर्तुं तस्य ग्रन्थाः नौकाः इव सन्ति। सः महान् कालज्ञः आसीत्। ज्योतिर्विद्यायां तु वराहमिहिरः तिमिरनाशकः सूर्य इव आसीत्।

अनुवाद :
अनेक देशों में घूमते हुए अपनी ज्ञान की ज्योति से प्रकाशमान वह 587 (पाँच सौ सतासी) ईस्वी में स्वर्गवासी हो गये। अपने विस्तृत ज्ञान से खगोल जैसे गहन विषय को भी सरल कर दिया। ज्योतिष विद्या के महासागर को पार करने के लिए उनके ‘ग्रन्थ नाव के समान हैं। वह महान ज्योतिषी थे। ज्योतिर्विद्या में तो वराहमिहिर अन्धकार का विनाश करने वाले सूर्य के समान थे।

कालज्ञो वराहमिहिरः शब्दार्थाः

कालज्ञः = ज्योतिषी। अजायत = जन्म लिया। वल्मीकाः = दीमक। महार्णवम् = महासागर को। गतानुगतिकताया: = अन्धानुकरण। तिमिरनाशकः = अन्धकार विनाशक। खगोल = आकाशमण्डल। फलितज्यौतिषम् = नक्षत्र ग्रहों के अनुसार फल बताने वाली विद्या।

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1

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MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi विविधप्रश्नावलिः 1

Class 8 Sanskrit Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 1.
प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत(प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखो-)
(क) मनसा किं करणीयम्? (मन से क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
स्मरणीयम्। (स्मरण करना चाहिए।)

(ख) वराहमिहिरस्य पितुः नाम किम्? (वराहमिहिर के पिता का नाम क्या था?)
उत्तर:
आदित्यदासः। (आदित्यदास)

(ग) कस्मिन् मासे गणतन्त्रदिवसः भवति? (किस महीने में गणतन्त्र दिवस होता है।)
उत्तर:
जनवरिमासे। (जनवरी महीने में।)

(घ) विद्या कीदृशी भवेत्? (विद्या कैसी होनी चाहिए?)
उत्तर:
अर्थकरी। (धन का संग्रह कराने वाली।)

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(ङ) ओरछानगरस्य स्थापना केन कृता? (ओरछा नगर की स्थापना किसके द्वारा की गयी?)
उत्तर:
रुद्रप्रतापेन। (रुद्रप्रताप के द्वारा)

(च) नरेन्द्रनाथस्य पितुः नाम किम् आसीत्? (नरेन्द्रनाथ के पिता का नाम क्या था?)
उत्तर:
विश्वनाथदत्तः। (विश्वनाथदत्त)

(छ) गजः कां नाशितवान्? (हाथी ने किसको नष्ट किया?)
उत्तर:
अण्डानि। (अण्डों को)

(ज) मित्रं कदा जानीयात्? (मित्र को कब जानना चाहिए?)
उत्तर:
आपत्सु। (आपत्तियों में)

MP Board Class 8 Sanskrit Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 2.
प्रश्नानाम् एकवाक्येन उत्तरं लिखत(प्रश्नों के एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) कुत्र चरणीयम्? (कहाँ चढ़ना चाहिए?)
उत्तर:
कष्टपर्वते चरणीयम्। (कष्टरूपी पर्वत पर चढ़ना चाहिए।)

(ख) वराहमिहिरेण के ग्रन्थाः विरचिताः? (वराहमिहिर ने कौन से ग्रन्थ रचे?)
उत्तर:
वराहमिहिरेण बृहत्संहिता-बृहज्जातकम्-पञ्च सिद्धान्तिका ग्रन्थाः विरचिताः। (वराहमिहिर ने बृहत्संहिता, बृहज्जातकम्, पसिद्धान्तिका ग्रन्थ रचे।)

(ग) राष्ट्रभक्तैः का प्रतिज्ञा कृता? (राष्ट्रभक्तों द्वारा क्या प्रतिज्ञा की गयी?)
उत्तर:
राष्ट्रभक्तैः ‘सर्वैः राष्ट्रनायकैः सार्वभौमतन्त्रं रचयामः’ इति प्रतिज्ञा कृता। (राष्ट्रभक्तों द्वारा ‘सभी राष्ट्र के नायकों द्वारा सार्वभौमतन्त्र बनाना है’ ऐसी प्रतिज्ञा की गयी।)

(घ) अनभ्यासे किं विषम्? (अभ्यास न करने पर क्या विष है?)
उत्तर:
अनभ्यासे शास्त्रम् विषम्। (अभ्यास न करने पर शास्त्र विष है।)

(ङ) हरदौलमहाराजः किमर्थं विषपानं कृतवान्? (हरदौल महाराज ने किसलिये विषपान किया?)
उत्तर:
हरदौल महाराजः महाराज्याः सम्मानरक्षणाय राज्ञः सन्देहनिवारणाय च विषपानं कृतवान्। (हरदौल महाराज ने महारानी के सम्मान की रक्षा के लिए और राजा के सन्देह को दूर करने के लिए विषपान किया।)

(च) शिकागोनगरे विश्वधर्मसम्मेलने भारतस्य प्रतिनिधिः कः अभवत्? (शिकागो नगर में विश्वधर्म सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधि कौन हुए?)
उत्तर:
शिकागोनगरे विश्वधर्मसम्मेलने भारतस्य प्रतिनिधि स्वामी विवेकानन्दः अभवत्। (शिकागो नगर में विश्वधर्म सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधि स्वामी विवेकानन्द हुए?)

(छ) मण्डूकः मक्षिकां किम् उपायम् उक्तवान्? (मेंढक ने मक्खी को क्या उपाय कहा?)
उत्तर:
मण्डूकः मक्षिकां एकीभूता दुर्बलाः अपि सबलं शत्रु हन्तुं शक्नुवन्ति इति उपायम् उक्तवान्। (मेंढक ने मक्खी से एक होकर दुर्बल भी सबल शत्रु को मार सकते हैं, इस उपाय को कहा।)

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Sanskrit Class 8 Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 3.
कोष्ठकात् उचितानिपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत (कोष्ठक से उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थान भरो-)
(क) वराहमिहिरः अध्ययनं समाप्य ………… आगतः। (उज्जयिनीम्/पाटलिपुत्रनगरम्)
(ख) प्रतिग्रहणस्य कामना ………….. । (कुरु/मा कुरु)
(ग) उद्योगे ………… दारिद्रयम्। (अस्ति/नास्ति)
(घ) केशवदासः ………….. कविः आसीत्। (संस्कृत भाषायाः/हिन्दीभाषायाः)
(ङ) राज्येषु ………….. प्रातिनिध्यं वहन्ति। (भोपालम्/राज्यपाला:)
(च) लोकहितं …………..। (वदनीयम्/करणीयम्)
(छ) मत्तगजः…………..पतितः। (अङ्के/पड़े)
उत्तर:
(क) उज्जयिनीम्
(ख) मा कुरु
(ग) नास्ति
(घ) हिन्दी भाषायाः
(ङ) राज्यपालाः
(च) करणीयम्
(छ) पड़े।

Class 8th Sanskrit Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 4.
अधोलिखितपदानां विलोमानि लिखत(नीचे लिखे शब्दों के विलोम शब्द लिखो-)
(क) सततम्
(ख) तिमिरः
(ग) उत्कर्षस्य
(घ) अमृतम्
(ङ) गुणेषु
(च) मित्रम्।
उत्तर:
(क) असततम्
(ख) प्रकाशः
(ग) अपकर्षस्य
(घ) विषम्
(ङ) दोषेषु
(च) शत्रुः।

MP Board Solution Class 8 Sanskrit Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 5.
पदानां समानार्थकम् पदं लिखत(शब्दों के समान अर्थ वाले शब्द लिखो-)
(क) बुद्धिः
(ख) मार्गदर्शनम्
(ग) पुष्पाणि
(घ) वीरः
(ङ) नृपः
(च) महार्णवम्।
उत्तर:
(क) मतिः
(ख) पथप्रदर्शनम्
(ग) कुसुमानि
(घ) शूरः
(ङ) राजा
(च) महासागरम्।

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Class 8 Sanskrit Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 6.
नामोल्लेखपूर्वकं सन्धिविच्छेदं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए सन्धि विच्छेद करो-)
(क) बालकोऽजायत
(ख) वर्द्धिताश्च
(ग) अत्रैव
(घ) अद्यावधि
(ङ) एवाकर्म।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1 Q6

Vividh Prashnavali 1 Class 8 Sanskrit प्रश्न 7.
नामोल्लेखपूर्वकं समासविग्रहं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए समास विग्रह करो-)
(क) परोपकारः
(ख) पर्यावरणविज्ञानम्
(ग) धनाभावेन
(घ) क्षीरविवर्जिताः
(ङ) शिल्पकार्यम्
(च) गणतन्त्रदिवसः।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1 Q7

Vividh Prashnavali 1 Sanskrit प्रश्न 8.
उचितं मेलयत (उचित को जोड़ो-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1 Q8
उत्तर:
(क) → (v)
(ख) → (i)
(ग) → (iv)
(घ) → (ii)
(ङ) → (iii)

Sanskrit Vividh Prashnavali 1 Class 8 प्रश्न 9.
धातुरूपाणांसमक्षंधातु-लंकार-पुरुष-वचनानि च लिखत (धातु रूपों के सामने धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखो-)
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1 Q9
MP Board Class 8 Sanskrit प्रश्न 10.
शब्दरूपाणां समक्षं मूलशब्द-विभक्तिलिङ्ग-वचनानि च लिखत (शब्द रूपों के सामने मूल शब्द, विभक्ति, लिङ्ग और वचन लिखो-)
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1 Q10
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Class 8 Sanskrit Prashnavali 1 प्रश्न 11.
अधोलिखितगद्यांशंपठित्वा उत्तराणि लिखत (नीचे लिखे हुए गद्यांश को पढ़कर उत्तर लिखो-)
(I) ममपरिसरे एकम् पुष्पोद्यानं वर्तते। तत्रविविधवर्णानि पुष्पाणि पर्यटकानां चित्तं मोदयन्ते। उद्यानस्य नातिदूरे हिन्दीभाषायाः प्रसिद्धकवेः केशवदासस्य स्थानमास्ति। षोडशशताब्दात् आरभ्य मम निर्माणम् अद्यावधि चलति एवं। परं सर्वाधिकं निर्माणकार्यम् महाराजवीरसिंहप्रथमस्य शासने अभवत्।

अनुवाद :
मेरे परिसर में एक फूलों का बाग है। वहाँ विभिन्न रंगों के फूल पर्यटकों के मन को प्रसन्न करते हैं। उद्यान के पास में हिन्दी भाषा के प्रसिद्ध कवि केशवदास का स्थान है। सोलहवीं शताब्दी से लेकर मेरा निर्माण आज भी चल ही रहा है। परन्तु सबसे अधिक निर्माण कार्य महाराज वीरसिंह प्रथम के शासन में हुआ। मेरा इतिहास रोचक और कौतूहलपूर्ण है। मध्यकाल में मेरा विशिष्ट स्थान और महत्त्व था। आज भी रामराजा वहीं विराजते हैं। अब भी लोग प्रतिवर्ष आते हैं (और) मुझे देखकर प्रसन्न होते हैं। लक्ष्मीनारायण मन्दिर, फूलबाग, दीवान, हरदौल भवन, सुन्दर भवन, शहीद स्मारक आदि अन्य स्थल भी देखने योग्य हैं। प्रतिदिन यात्री आकर मेरे ऐतिहासिक स्वरूप को देखकर प्रसन्न होते हैं तथा उनको देखकर मैं भी प्रसन्न होता हूँ।

(क) मम परिसरे किं वर्तते? (मेरे परिसर में क्या है?)
उत्तर:
मम परिसरे एकम् पुष्पोद्यानं वर्तते। (मेरे परिसर में एक फूलों का बगीचा है।)

(ख) पर्यटकानां चित्तं कानि मोदयन्ति? (पर्यटकों के मन को कौन प्रसन्न करते हैं?)
उत्तर:
पर्यटकानां चित्तं विविधवर्णानि पुष्पाणि मोदयन्ति। (पर्यटकों के मन को अनेक रंगों के फूल प्रसन्न करते हैं।)

(ग) सर्वाधिक निर्माणकार्य कस्य शासने अभवत्? (सबसे अधिक निर्माणकार्य किसके शासन में हुआ?)
उत्तर:
सर्वाधिकं निर्माणकार्य महाराजवीरसिंह प्रथमस्य शासने अभवत्। (सबसे अधिक निर्माण कार्य महाराज वीरसिंह प्रथम के शासन में हुआ।)

(घ) केशवदासः कस्याः भाषायाः कविः आसीत्? (केशवदास किस भाषा के कवि थे?)
उत्तर:
केशवदासः हिन्दी भाषायाः कविः आसीत्। (केशवदासः हिन्दी भाषा के कवि थे।)
अथवा
(II) अस्ति उज्जयिन्याः निकटे ‘कपित्थ’ (कायथा) नामाख्यो ग्रामः। तत्र आदित्योपासकः आदित्यदासः’ नामा कश्चित् विप्रः प्रसिवसति स्म। तस्य गृहे वराहमिहिरः नामा बालकोऽजायत। वराहमिहिरस्य जन्म ४९९ (नवनवत्यधिक चतुश्शतके) ख्रिस्ताब्दे सञ्जातम्।।

बालकः वराहमिहिरः स्वकीयपित्रा एक ज्यौतिषविद्यामध्यगच्छत्। ततः सः पाटलिपुत्रनगरं गत्वा प्रसिद्ध-खगोलशास्त्रज्ञात् आर्यभट्टात् खगोलशास्त्रस्याध्ययन कृतवान्।

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अनुवाद :
उज्जयिनी के पास ‘कपित्थ’ (कायथा) नामक गाँव है। वहाँ सूर्य का भक्त ‘आदित्यदास’ नामक कोई ब्राह्मण रहता था। उसके घर में ‘वराहमिहिर’ नामक बालक ने जन्म लिया। वराहमिहिर का जन्म 499 (चार सौ निन्यानवे) ईस्वी में हुआ।

बालक वराहमिहिर ने अपने पिता से ही ज्योतिष विद्या का अध्ययन किया। उसके पश्चात् उन्होंने पाटलिपुत्र (पटना) नगर जाकर प्रसिद्ध खगोलशास्त्री आर्यभट्ट से खगोलशास्त्र (आकाश मण्डल का शास्त्र) का अध्ययन किया।

(क) ‘कपित्थ’ नामाख्यो ग्रामः कस्याः निकटे अस्ति? (‘कपित्थ’ नामक ग्राम किसके पास है?)
उत्तर:
‘कपित्थ’ नामाख्यो ग्रामः उज्जयिन्याः निकटे अस्ति। (‘कपित्थ’ नामक ग्राम उज्जयिनी के पास है।)

(ख) आदित्यदासस्य पुत्रस्य नाम किम्? (आदित्यदास के पुत्र का नाम क्या था?)
उत्तर:
आदित्यदासस्य पुत्रस्य नाम ‘वराहमिहिरः। (आदित्यदास के पुत्र का नाम ‘वराहमिहिर’ था।)

(ग) वराहमिहिरस्य जन्म कदा अभवत्? (वराहमिहिर का जन्म कब हुआ?)
उत्तर:
वराहमिहिरस्य जन्म ४९९ (नवनवत्यधिक चतुश्ततके) ख्रिस्ताब्दे अभवत्। (वराहमिहिर का जन्म 499 (चार सौ निन्नानवे) ईस्वी सन् में हुआ।)

(घ) वराहमिहिरः कस्मात् खगोलशास्त्रस्याध्ययनं कृतवान्? (वराहमिहिर ने किससे खगोलशास्त्र का अध्ययन किया?)
उत्तर:
वराहमिहिरः आर्यभट्टात् खगोलशास्त्रस्याध्ययनं कृतवान्। (वराहमिहिर ने आर्यभट्ट से खगोलशास्त्र का अध्ययन किया।)

MP Board Sanskrit Class 8 प्रश्न 12.
अधोलिखितं पद्यं पठित्वा उत्तराणि लिखत (नीचे लिखे हुए पद्य को पढ़कर उत्तर लिखो-)
(I) उद्योग नास्ति दारिद्रयं जपतः नास्ति पातकम्।
मौने च कलहो नास्ति नास्ति जागरिते भयम्॥

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अनुवाद :
परिश्रम करने से दरिद्रता (गरीबी) नहीं रहती – है, भगवान् का नाम लेने से पाप नहीं रहते हैं। मौन (चुप) रहने। से लड़ाई-झगड़ा नहीं होता है और जागते रहने से (चोर आदि का) भय नहीं होता है।

(क) दारिद्रयं केन नष्टम्? (दरिद्रता किससे नष्ट होती है?)
उत्तर:
दारिद्र्यं उद्योगेन नष्टम्। (दरिद्रता परिश्रम से नष्ट होती है।)

(ख) कस्य पातकं नास्ति? (किसके पाप नहीं होते हैं?)
उत्तर:
जपतः पातकं नास्ति। (भगवान् का नाम लेने वाले के पाप नहीं होते हैं।)

(ग) कलहः कुत्र नास्ति? (लड़ाई-झगड़ा कहाँ नहीं होता है?)
उत्तर:
कलहः मौने नास्ति। (लड़ाई-झगड़ा चुप रहने में नहीं होता है।)

(घ) जागरिते किं नास्ति? (जागते रहने से क्या नहीं होता?)
उत्तर:
जागरिते भयं नास्ति। (जागते रहने से भय नहीं होता।)
अथवा
(II) न भोंगभवने रमणीयम्,नच सुखशयने शयनीयम्।
अहर्निशं जागरणीयम्, लोकहितं मम करणीयम्?

अनुवाद :
(मुझे) न सुख देने वाले घर में रहना चाहिए और न सुख देने वाले बिस्तर पर सोना चाहिए। (मुझे) दिन-रात जागना चाहिए (और) संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए।

(क) कुत्र न रमणीयम्? (कहाँ नहीं रहना चाहिए?)
उत्तर:
भोगभवने न रमणीयम्। (सुख देने वाले घर में नहीं रहना चाहिए।)

(ख) कुत्र न शयनीयम्? (कहाँ नहीं सोना चाहिए?)
उत्तर:
सुखशयने न शयनीयम्। (सुख देने वाले बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए।)

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(ग) अहर्निशं किं करणीयम्? (दिन-रात क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
अहर्निशं जागरणीयम्। (दिन-रात जागना चाहिए।)

(घ) मम किं करणीयम्? (मुझे क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
मम लोकहितम् करणीयम् (मुझे संसार का कल्याण करना चाहिए।)

Sanskrit Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 13.
कोष्ठकात् उचितशब्दं चित्वा लिखत (कोष्ठक से उचित शब्द चुनकर लिखो-)
(क) स्वामीविवेकानन्दस्य गुरु ……….. आसीत्? (रामकृष्णपरमहंस/वेदव्यासः/रामः कृष्णः)
(ख) वराहमिहिरः ……….. आसीत्। (अज्ञः/विज्ञः/कालज्ञः/नीतिज्ञः)
(ग) मनसा सततम् ……….. (वदनीयम्/करणीयम्/स्मरणीयम्/रमणीयम्)
(घ) ……….. निर्धनस्य विषमस्ति। (रोगः/भोग:/योगः/नियोगः)
(ङ) ओरछानगरम् ……….. अस्ति। (भोपालमण्डले/टीकमगढ़मण्डले/रायसेनमण्डले/मन्दसौर मण्डले)
उत्तर:
(क) रामकृष्णपरमहंसः
(ख) कालज्ञः
(ग) स्मरणीयम्
(घ) भोगः
(ङ) टीकमगढ़मण्डले।

MP Board Class 8 Sanskrit Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 14.
भिन्नप्रकृतिकं शब्दं चिनुत(भिन्न स्वभाव के शब्द को चुनो-)
(क) जम्बूफलम्, कदलीफलम्, परीक्षाफलम्, श्रीफलम्।
(ख) गच्छति, धावति, हरिः, खेलति।
(ग) पाटलम्, चम्पकम्, दाडिमम्, कमलम्।
(घ) पितामहः, मातामहः, अतुलः, मातुलः।
(ङ) अद्य, श्वः, अश्वः, परश्वः।
उत्तर:
(क) परीक्षाफलम्
(ख) हरिः
(ग) दाडिमम्
(घ) अतुलः
(ङ) अश्वः

Sanskrit Mp Board Class 8 प्रश्न 15.
उचितविकल्पं चित्वा लिखत्(उचित विकल्प चुनकर लिखो-)
(क) स्वामीविवेकानन्दस्य बाल्यकालस्य नाम आसीत्? (गोरखनाथ:/नरेन्द्रनाथ:/केदारनाथ:/मत्स्येन्द्रनाथः)
(ख) शङ्करस्य भूषणम् अस्ति। (सर्प:/चन्द्र:/गङ्गा/विषम्)
(ग) आर्यभट्टः आसीत्। (खगोलशास्त्री/रसायनशास्त्री/शास्त्री/समाजशास्त्री)
(घ) दुःखसागरे। (त्वरणीयम्/करणीयम्/तरणीयम्/चरणीयम्)
उत्तर:
(क) नरेन्द्रनाथः
(ख) विषम्
(ग) खगोलशास्त्री
(घ) तरणीयम्।

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MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 9 वसन्तोत्सवः

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MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 9 वसन्तोत्सवः

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 9 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 9 Mp Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत(एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) वसन्तपञ्चमी कस्य आगमनं सूचयति? (वसन्त पञ्चमी किसके आगमन को सूचित करती है?)
उत्तर:
ऋतुराजवसन्तस्य (ऋतुराज वसन्त के)

(ख) केषु नूतनकिसलयरागः राजते? (किन पर नये पत्तों की शोभा सुशोभित होती है?)
उत्तर:
वृक्षेषु। (पेड़ों पर)

(ग) केकिलानां मधुरस्वरः किम् आकर्षित? (कोयलों का मधुर स्वर किसको आकर्षित करता है?)
उत्तर:
चित्तम्। (मन को)

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(घ) वसन्तोत्सवे कस्याः पूजनम् भवति? (वसन्त उत्सव में किसका पूजन होता है।)
उत्तर:
सरस्वत्याः। (सरस्वती का)

(ङ) ज्ञानस्य अधिष्ठात्री देवी का? (ज्ञान की मुख्य देवी कौन है?)
उत्तर:
शारदा। (सरस्वती)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 9 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) ऋतुराजवसन्तस्य आगमन-सूचना कदा भवति? (ऋतुराज वसन्त के आगमन की सूचना कब होती है?)
उत्तर:
ऋतुराजवसन्तस्य आगमन-सूचना माघमासस्य शुक्लपक्षस्य पञ्चम्यां तिथौ भवति। (ऋतुराज वसन्त के आगमन की सूचना माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होती है।)

(ख) आमेषु कीदृशाःभ्रमराः दृश्यन्ते? (आमों पर कैसे भंवरे दिखाई देते है?)
उत्तर:
आनेषु भ्रमन्तः भ्रमराः दृश्यन्ते? (आमों पर घूमते हुए भंवरे दिखाई देते हैं।)

(ग) तमिलनाडुराज्ये जनाः शारदां कथम् अर्चयन्ति। (तमिलनाडु राज्य में लोग शारदा को कैसे पूजते हैं?)
उत्तर:
तमिलनाडुराज्ये जनाः प्रकाशितान् हस्तलिखितान् ग्रन्थान् एकस्याम् पीठिकायां संस्थाप्य विविधैः उपचारैः शारदां अर्चयन्ति। (तमिलनाडु राज्य में लोग प्रकाशित हस्तलिखित ग्रन्थों को एक चौकी पर रखकर विभिन्न पूजा की विधियों से शारदा की पूजा करते हैं।)

(घ) वसन्तोत्सवः किं किं द्योतयति? (वसन्तोत्सव क्या-क्या प्रकट करता है।)
उत्तर:
वसन्तोत्सवः भारतीयानां उत्सवप्रियतायाः शास्त्रीयं, सामाजिक तथा वैज्ञानिक चिन्तनं अपि द्योतयति। (वसन्तोत्सव भारतीयों की उत्सव प्रियता की शास्त्रीय, सामाजिक तथा वैज्ञानिक सोच को भी प्रकट करता है।)

(ङ) उत्तरभारते कुत्र-कुत्र सरस्वतीपूजनं बहुमान्यम् अस्ति? (उत्तरभारत में कहाँ-कहाँ सरस्वती पूजा बहुत मान्य है?)
उत्तर:
उत्तर भारते बिहार प्रान्ते, बङ्गालप्रान्ते तथा काश्मीर प्रदेशे सरस्वतीपूजनं बहुमान्यम् अस्ति। (उत्तर भारत में बिहार प्रान्त में, बंगाल प्रान्त में तथा कश्मीर प्रदेश में सरस्वती पूजा बहुत मान्य है।)

Sanskrit Class 8 Chapter 9 Vasant Utsav प्रश्न 3.
प्रश्ननिर्माणं कुरुत (रेखांकितपदम् आधृत्य) [प्रश्न निर्माण करो (रेखांकित शब्द के आधार पर])
(क) विविधैः पुष्पैः ऋतुराजस्य स्वागतम् भवति। (विविध पुष्पों के द्वारा ऋतुराज का स्वागत होता है।)
उत्तर:
विविधैः पुष्पैः कस्य स्वागतम् भवति? (विविध पुष्पों के द्वारा किसका स्वागत होता है?)

(ख) पुस्तकानाम् अपि पूजनम् भवति। (पुस्तकों का भी पूजन होता है।)
उत्तर:
केषाम् अपि पूजनम् भवति? (किनका पूजन भी होता है?)

(ग) शारदाम् अर्चयन्ति। (शारदा की अर्चना करते हैं।)
उत्तर:
काम् अर्चयन्ति? (किसकी अर्चना करते हैं?)

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(घ) सौन्दर्य कामयिंतु वसन्तपूजनम् भवति। (सुन्दरता की कामना के लिए वसन्त पूजा होती
उत्तर :
सौन्दर्य कामयितु किम् भवति? (सुन्दरता की कामना के लिए क्या होती है?)

(ङ) श्रीपञ्चमीनाम्ना वसन्तपञ्चमी ज्ञायते। (श्रीपंचमी नाम से वसन्तपंचमी जानी जाती है।)
उत्तर:
श्री पञ्चमीनाम्ना का ज्ञायते? (श्रीपंचमी नाम से क्या जानी जाती है।)

Sanskrit Chapter 9 Class 8 Mp Board प्रश्न 4.
अर्थानुसारं युग्मानि योजयत (अर्थ के अनुसार जोड़े मिलाओ-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 9 वसन्तोत्सवः 1
उत्तर:
(क) → (iii)
(ख) → (v)
(ग) → (i)
(घ) → (ii)
(ङ) → (iv)

Class 8th Sanskrit Chapter 9 Mp Board प्रश्न 5.
नामोल्लेखपूर्वकं समासविग्रह कुरुत (नाम का उल्लेख करते हुए समास विग्रह करो-)
(क) सरस्वतीपूजनम्
(ख) वसन्तसमये
(ग) प्राचीनकाले
(घ) वसन्तोत्सवः।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 9 वसन्तोत्सवः 2

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 9 प्रश्न 6.
नामोल्लेखपूर्वकं सन्धिविच्छेदं कुरुत (नाम का उल्लेख करते हुए सन्धि-विच्छेद करो-)
(क) चरमोत्कर्षम्
(ख) पुराणेष्वपि
(ग) पूजनमपि
(घ) सममेव।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 9 वसन्तोत्सवः 3

Sanskrit Class 8 Chapter 9 Mp Board प्रश्न 7.
पाठात् पञ्च अव्ययानि चित्वा लिखत। (पाठ में से पाँच अव्यय चुनकर लिखो।)
उत्तर:
(क) अपि:
(ख) सर्वत्र
(ग) च
(घ) अधुना
(ङ) एव।

वसन्तोत्सवः हिन्दी अनुवाद

माघमासस्य शुक्लपक्षस्य पञ्चम्यां तिथौ ऋतुराजवसन्तस्य आगमनसूचना भवति। वसन्तपञ्चमी श्रीपञ्चमी नाम्ना अपि. ज्ञायते। अस्मिन् समये प्रकृतेः सौन्दर्यं चरमोत्कर्ष प्राप्नोति। सर्वत्र रमणीयतायाः दर्शनं भवति। वृक्षेषु नूतनकिसलयरागः राजते। क्षेत्रेषु सर्षपपुष्याणां सुषमा पीतिमा च मनोहारिणी दृश्यते। आनेषु मञ्जरीम् परितः भ्रमन्तः भ्रमराः दृश्यन्ते। कोकिलानां मधुरस्वरः चित्तम् आकर्षति। वसन्तसमये सर्वत्र रमणीयतायाः दर्शनम् भवति। वसन्तोत्सवे शीतकालस्य अनन्तरम् परम्परया सौन्दर्यस्य पूजनं क्रियते। विविधैः पुष्पैः, नवान्नैः, फलैः च ऋतुराजस्य वसन्तस्य स्वागतम् भवति। एषः उत्सवः सौन्दर्यस्य रमणीयतायाः पुष्याणां, किसलयानां मधुरागमनस्य च उत्सवः अस्ति।

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अनुवाद :
माघ के महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋतुओं के राजा वसन्त के आगमन की सूचना होती है वसन्त पंचमी को ‘श्री पंचमी’ के नाम से भी जाना जाता है। इस समय प्रकृति की सुन्दरता अत्यधिक उन्नति को प्राप्त करती है। सब जगह सुन्दरता के दर्शन होते हैं। पेड़ों पर नवीन पत्तों की शोभा सुशोभित होती है। खेतों में सरसों के फूलों की अत्यधिक शोभा और पीलापन मन को हरने वाला दिखाई देता है। आम के पेड़ों पर बौरों के चारों ओर घूमते हुए भँवरे दिखाई देते हैं। कोयलों का मधुर स्वर मन को आकर्षित करता है। वसन्त के समय में सब जगह सुन्दरता के दर्शन होते हैं। वसन्त के उत्सव में शीतकाल के बाद परम्परा से सुन्दरता का पूजन किया जाता है। अनेक फूलों, नये अन्नों और फलों से ऋतुओं के राजा वसन्त का स्वागत होता है। यह उत्सव सुन्दरता मनोहरता फूलों और पल्लवों के मधुर आगमन का उत्सव होता है।

वसन्तोत्सवस्य द्वितीयपक्षः अधिकः महनीयः अस्ति। भारते वसन्तवेलायां भगवत्याः सरस्वत्याः आराधनस्य अपि परम्परा विद्यते। वसन्तपञ्चमी ज्ञानस्य उपासनायाः आराधनायाः उत्सवः अस्ति। प्राचीनकाले वसन्तपञ्चम्यां ज्ञानयज्ञतपस्वरूपां सरस्वतीं जनाः पूजयन्ति स्म। अधुना अपि सम्पूर्णे देशे आध्यात्मिकजिज्ञासया अस्मिन् दिने जनाः ज्ञानस्य अधिष्ठात्रीं शारदां पूजयन्ति।

अनुवाद :
वसन्त उत्सव का द्वितीय पक्ष अधिक सम्मान के योग्य होता है। भारत में वसन्त की बेला में देवी सरस्वती की आराधना भी परम्परा है। वसन्त पंचमी ज्ञान की उपासना। (और) आराधना का उत्सव है। प्राचीन समय में वसन्त पंचमी पर ज्ञानयज्ञ (और) तप स्वरूप सरस्वती को लोग पूजते थे। अब भी सम्पूर्ण देश में आध्यात्मिक जिज्ञासा से इस दिन लोग ज्ञान की मुख्य देवी शारदा (सरस्वती) को पूजते हैं।

वसन्तोत्सवः वस्तुतः सांस्कृतिकः उत्सवः अस्ति। वैदिककालात् एव अस्मिन् दिने सरस्वत्याः उपासना भवति। महाभारते पुराणेष्वपि वसन्तोत्सवः सरस्वत्याः उपासनायाः उत्सवरूपेण दर्शितः। वसन्तपञ्चम्यां आगमविधिना महाशक्त्याः सरस्वत्याः वार्षिकपूजायाः विधानम् भवति।

अनुवाद :
वसन्त उत्सव वास्तव में सांस्कृतिक उत्सव है। वैदिक काल से ही इस दिन सरस्वती की उपासना होती है। महाभारत में पुराणों में भी वसन्त उत्सव सरस्वती की उपासना के उत्सव के रूप में दिखाया गया है। वसन्त पंचमी पर शास्त्र में वर्णित विधि से महाशक्ति सरस्वती की वार्षिक पूजा का विधान होता है।

विशेषतः उत्तरभारते बिहारप्रान्ते, बङ्गालप्रान्ते तथा काश्मीरप्रदेशे सरस्वतीपूजनं बहुमान्यम् अस्ति। दक्षिणे तमिलनाडुक्षेत्रे अपि एतस्य महत्त्वं विद्यते। तत्र आबालवृद्धपरिजनाः प्रकाशितान् हस्तलिखितान् ग्रन्थान् एकस्याम् पीठिकायां संस्थाप्य विविधैः उपचारैः शारदाम् अर्चयन्ति। एतेन सममेव वाद्ययन्त्राणां वीणादीनाम् पूजनमपि भवति। कुत्रचित् दक्षिणभारते शिल्पिनः स्वयन्त्राणाम् अपि अस्मिन् दिने पूजनं कुर्वन्ति।

अनुवाद :
विशेष रूप से उत्तर भारत में बिहार 7 में, बंगाल प्रान्त में तथा कश्मीर प्रदेश में सरस्वती पूजन ब न्य है। दक्षिण में तमिलनाडु क्षेत्र में भी इसका महत्त्व है. वहाँ बच्चों से लेकर वृद्ध तक (सभी) परिवार के लोग प्रकाशित (छपे) हाथ से लिखे ग्रन्थों को एक चौकी पर रखकर विविध पूजा की विधियों से शारदा की पूजा करते हैं। इसी समय वाद्य यन्त्र वीणा आदि का पूजन भी होती है। वहीं दक्षिण भारत में शिल्पी (कारीगर) अपने यन्त्रों (औजारों) का भी इसी दिन पूजन करते हैं।

सरस्वतीपूजनस्य वेदाध्ययन सत्रं श्रावणीपूर्णिमातः आरभ्य वसन्तपञ्चमी यावत् भवति। सरस्वती पूजयित्वा ऋतुपरिवर्तनस्यारम्भे जीवने हर्षोल्लासं, सौन्दर्य, शृंङ्गारं च कामयितु वसन्तस्य, कामदेवस्य अपि पूजनं परम्परा भवति। वस्तुतः भारतीयपरम्परायां वसन्तोत्सवः सौन्दर्यस्य, उल्लासस्य, ज्ञानस्य उपासनायाः उत्सवः। एषः भारतीयानां उत्सवप्रियतायाः शास्त्रीय, सामाजिक तथा वैज्ञानिक चिन्तनम् अपि द्योतयति।

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अनुवाद :
सरस्वती की पूजा वेद के अध्ययन की अवधि श्रावणी पूर्णिमा से आरम्भ होकर वसन्तपंचमी तक होती है। सरस्वती को पूजकर ऋतु परिवर्तन के आरम्भ में जीवन में हर्षोल्लास, सौन्दर्य और श्रृंगार की कामना के लिए वसन्त का (और) कामदेव का भी पूजन परम्परा से होता है। वस्तुतः भारतीय परम्परा में वसन्तोत्सव सौन्दर्य की, उल्लास की (और) ज्ञान की उपासना का उत्सव है। यह भारतीयों की उत्सव प्रियता की शास्त्रीय, सामाजिक तथा वैज्ञानिक सोच को भी प्रकट करता है।

वसन्तोत्सवः शब्दार्थाः

चरमोत्कर्षम् = अत्यधिक उन्नत। उल्लासः = हर्ष। नूतनकिसलयरागः = नवीन पत्तों की शोभा। आबालवृद्धाः = बच्चों से लेकर वृद्ध तक। मञ्जरी = बौर (आम के बौर)। अधिष्ठात्रीम्=मुख्यदेवीको।पीठिका-चौकी।वाद्ययन्त्राणाम् – (वाद्योपकरणानाम्) = बजाये जाने वाले यन्त्रों का (वीणा आदि। विधानम् = विधि। उपचारैः = पूजा विधि से। महनीयः = महत्तर। वेदाध्ययनसत्रम् = वेद की अध्ययन की अवधि। आगमविधिना = शास्त्रवर्णित विधि से।

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MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 1 लोकहितं मम करणीयम्

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MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 1 लोकहितं मम करणीयम्

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 1 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 1 लोकहितं मम करणीयम् प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) मनसा किं करणीयम्? (मन से क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
स्मरणीयम्। (स्मरण करना चाहिए।)

(ख) वचसा किं करणीयम्? (वाणी से क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
वदनीयम्। (बोलना चाहिए।)

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(ग) कस्मिन् न रमणीयम्? (किसमें नहीं रहना चाहिए?)
उत्तर:
भोगभवने। (सुख देने वाले घर में।)

(घ) किंन गणनीयम्? (क्या नहीं ध्यान रखना चाहिए?)
उत्तर:
दुःखम्। (दुःख को।)

(ङ) किंन मननीयम्? (क्या नहीं सोचना चाहिए?)
उत्तर:
निजसौख्यम्। (अपने सुख को।)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 1 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) कुत्र त्वरणीयम्? (कहाँ शीघ्रता करनी चाहिए?)
उत्तर:
कार्यक्षेत्रे त्वरणीयम्। (कार्य के क्षेत्र में शीघ्रता करनी चाहिए।)

(ख) कस्मिन् तरणीयम्? (किसमें तैरना चाहिए?)
उत्तर:
दुःखसागरे तरणीयम्। (दुःख रूपी सागर में तैरना चाहिए।)

(ग) कुत्र चरणीयम्? (कहाँ चढ़ना चाहिए?)
उत्तर:
कष्टपर्वते चरणीयम्। (कष्टरूपी पर्वत पर चढ़ना चाहिए।)

(घ) विपत्ति-विपिने किं करणीयम्? (संकट रूपी वन में क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
विपत्ति-विपिने भ्रमणीयम्। (संकट रूपी वन में घूमना चाहिए।)

(ङ) मम किं करणीयम्? (मुझे क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
मम लोकहितं करणीयम्। (मुझे संसार का कल्याण करना चाहिए।)

Class 8 Sanskrit Chapter 1 Mp Board प्रश्न 3.
उचितं योजयत (उचित को जोड़ो-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 1 लोकहितं मम करणीयम् 1
उत्तर:
(क) → (ii)
(ख) → (i)
(ग) → (iv)
(घ) → (v)
(ङ) → (iii)

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Class 8 Sanskrit Chapter 1 Lokhitam Mam Karniyam प्रश्न 4.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षं’न’ इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ (हाँ) तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ (नहीं) लिखो-)
(क) कष्टपर्वते चरणीयम्।
(ख) दु:खसागरे न तरणीयम्।
(ग) न जातु दुःखं गणनीयम्।
(घ) विपत्ति-विपिने न भ्रमणीयम्।
(ङ) अहर्निशं जागरणीयम्।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) आम्
(घ) न
(ङ) आम्।

Class 8th Sanskrit Chapter 1 Mp Board प्रश्न 5.
उचितपदेन रिक्तस्थानं पूरयत(उचित शब्द द्वारा रिक्त स्थानों को भरो-)
(क) बन्धुजना ये स्थिता ……………..। (सागरे/गह्वरे)
(ख) लोकहितं ……………। (वदनीयम्।करणीयम्)
(ग) भोगभवने …………… । (रमणीयम्/न रमणीयम्)
(घ) कार्यक्षेत्रे ……………। (तरणीयम्/त्वरणीयम्)
(ङ) कष्टपर्वते …………….। (करणीयम्/चरणीयम्)
उत्तर:
(क) गह्वरे
(ख) करणीयम्
(ग) न रमणीयम्
(घ) त्वरणीयम्
(ङ) चरणीयम्।

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 1 प्रश्न 6.
नामोल्लेखपूर्वक समासविग्रहं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए समास विग्रह करो-)
(क) लोकहितम्
(ख) भोगभवने
(ग) कार्यक्षेत्रे
(घ) दुःख-सागरे
(ङ) कष्टपर्वते।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 1 लोकहितं मम करणीयम् 2

Sanskrit Chapter 1 Class 8 Mp Board प्रश्न 7.
रिक्तस्थानम् पूरयत (खाली जगह भरो-)
उत्तर:
(क) न जातु दुःखं गणनीयम्, न च निज सौख्यं मननीयम्।
कार्यक्षेत्रे त्वरणीयम्, लोकहितम् मम करणीयम्

(ख) दुःख सागरे तरणीयम्, कष्टपर्वते चरणीयम्
विपत्ति-विपिने भ्रमणीयम्, लोकहितम्मम करणीयम्॥

Class 8 Sanskrit Chapter 1 प्रश्न 8.
उदाहरणानुसारं धातुं प्रत्ययं च पृथक्कुरुत(उदाहरण के अनुसार धातु और प्रत्यय अलग करो-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 1 लोकहितं मम करणीयम् 3

Sanskrit Class 8 Chapter 1 Mp Board प्रश्न 9.
“मम कर्त्तव्यम्” इति विषयमवलम्ब्य संस्कृते दशवाक्यानि लिखत।
(“मेरा कर्तव्य” इस विषय पर संस्कृत में दस वाक्य लिखो।)
उत्तर:
व्याकरण भाग में निबन्ध रचना देखें।

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Sanskrit Class 8 Chapter 1 Lokhitam Mam Karniyam प्रश्न 10.
“लोकहितं मम करणीयम्” इत्यस्मिन् पाठे आगतानि अव्ययानि चित्वा लिखत।
(“लोकहितं मम करणीयम्” इस पाठ में आये हुए अव्ययों को चुनकर लिखो।)
उत्तर:
(क) सततम्
(ख) न
(ग) च
(घ) अहर्निशम्
(ङ) जातु
(च) दुःखम्
(छ) निज
(ज) तत्र।

लोकहितं मम करणीयम् हिन्दी अनुवाद 

मनसा सततं स्मरणीयम्, वचसा सततं वदनीयम्।
लोकहितमम करणीयम्, लोकहितं मम करणीयम्॥१॥

अनुवाद :
मन से सदा (मुझे) स्मरण (सोचना) करना चाहिए, वाणी (मुँह) से सदा (मुझे) बोलना चाहिए (कि) संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए, संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए।

न भोगभवने रमणीयम, न च सखशयने शयनीयम।
अहर्निशं जागरणीयम्, लोकहितं मम करणीयम्॥२॥

अनुवाद :
(मुझे) न सुख देने वाले घर में रहना चाहिए और न सुख देने वाले बिस्तर पर सोना चाहिए। (मुझे) दिन-रात जागना चाहिए (और) संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए।

न जातु दुःखंगणनीयम्, न च निज सौख्यम् मननीयम्।
कार्यक्षेत्रे त्वरणीयम्, लोकहितं मम करणीयम्॥३॥

अनुवाद :
(मुझे) कभी भी दुःख का ध्यान नहीं रखना चाहिए और न अपने सुख को सोचना चाहिए। (अपने) कार्य के क्षेत्र में शीघ्रता करनी चाहिए, (और) संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए।

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दुःखसागरे तरणीयम्, कष्टपर्वते चरणीयम्।
विपत्ति-विपिने भ्रमणीयम्, लोकहितंमम करणीयम्॥४॥

अनुवाद :
(मुझे) दुःख रूपी सागर में तैरना चाहिए, कष्ट रूपी पर्वत पर चढ़ना चाहिए, संकट रूपी वन में घूमना चाहिए (और) संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए।

गहनारण्ये घनान्धकारे, बन्धुजना ये स्थिता गह्वरे।
तंत्र मया सञ्चरणीयम् लोकहितं मम करणीयम्॥५॥

अनुवाद :
जो भाई-बन्धु घने अन्धकार में, गहन वन में गुफाओं में रहते हैं, वहाँ मुझे जाना चाहिए (और) संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए।

लोकहितं मम करणीयम् शब्दार्याः

करणीयम् = करना चाहिए। त्वरणीयम् = शीघ्रता करनी चाहिए। दुःखसागरे = दुःख रूपी सागर में। कष्टपर्वते = कष्ट रूपी पर्वत पर। गहनारण्ये = गहन वन में। गह्वरे = गुफा में।

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MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 7 ऐक्यबलम्

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MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 7 ऐक्यबलम्

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 7 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 7 Mp Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत(शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) चटकायुगलं कुत्र निवसति स्म? (चिड़ियों का जोड़ा कहाँ रहता था।)
उत्तर:
निम्बवृक्षे। (नीम के पेड़ पर)

(ख) गजः कां नाशितवान्? (हाथी ने किसको नष्ट किया?)
उत्तर:
अण्डानि। (अण्डों को)

(ग) चटकायुगलस्य रोदनं श्रुत्वा कः आगतः? (चिड़ियों के जोड़े का रोना सुनकर कौन आया ?)
उत्तर:
काष्ठभेदकः। (कठफोड़वा)

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(घ) काष्ठभेदकः काम् आनीतवान्? (कठफोड़वा किसको लाया?)
उत्तर-मक्षिकाम्। (मक्खी को)

(ङ) जलं पातुं गजं कः आकर्षितवान्? (पानी पीने के लिए हाथी को किसने आकर्षित किया?)
उत्तर:
मण्डूकः। (मेंढक ने)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 7 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) बुद्धिमान् कः अस्ति? (बुद्धिमान् कौन है?)
उत्तर:
यः मृतं गतं च न चिन्तयति। (जो मरे हुए और गये हुए की नहीं सोचता है।)

(ख) मित्रस्य कार्य कः साधयति? (मित्र के कार्य को कौन पूरा करता है?)
उत्तर:
मित्रस्य कार्यं मित्रं साधयति। (मित्र के काम को मित्र पूरा करता है।)

(ग) मण्डूकः मक्षिकां किम् उपायम् उक्तवान्? (मेंढक ने मक्खी को क्या उपाय कहा?)
उत्तर:
मण्डूकः मक्षिका एकीभूता दुर्बलाः अपि सबलं शत्रु हन्तुं शक्नुवन्ति इति उपायम् उक्तवान्। (मेंढक ने मक्खी से एक होकर दुर्बल भी सबल शत्रु को मार सकते हैं, इस उपाय को कहा।)

(घ) मक्षिका गजस्य कर्णयोः किं कृतवती? (मक्खी ने हाथी के कानों में क्या किया?)
उत्तर:
मक्षिका गजस्य कर्णयों वीणावादनं कृतवती। (मक्खी ने हाथी के कानों में वीणा वादन किया।)

(ङ) तैः मत्तगजं केन बलेन मारितः? (उन्होंने मतवाले हाथी को किस शक्ति से मारा?)
उत्तर:
तैः मत्तगजं ऐक्यबलेन मारितः। (उन्होंने मतवाले हाथी को एकता की शक्ति से मारा।)

Sanskrit Chapter 7 Class 8 Mp Board प्रश्न 3.
युग्मनिर्माणं कुरुत(जोड़े बनाओ-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 7 ऐक्यबलम् 1
उत्तर:
(क) → (iv)
(ख) → (v)
(ग) → (i)
(घ) → (ii)
(ङ) → (iii)

Class 8th Sanskrit Chapter 7 Mp Board प्रश्न 4.
रिक्तस्थानानि पूरयत(रिक्त स्थान भरो-)
(क) निम्बवृक्षे एकं ……… प्रतिवसति स्म।
(ख) चटकायुगलं ………….. आरब्धवत्।
(ग) मक्षिका स्वमित्रम् ……….. पृष्टवती।
(घ) मत्तगजः ………….. पतितः।
(ङ) ते ………….. मत्तगजं मारितवन्तः।
उत्तर:
(क) चटकायुगलम्
(ख) कातरक्रन्दनम्
(ग) उपायम्
(घ) पङ्के
(ङ) ऐक्येन।

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Class 8 Sanskrit Chapter 7 प्रश्न 5.
एकताविषये पञ्चवाक्यानि लिखत(एकता के विषय पर पाँच वाक्य लिखो-)
उत्तर:
(क) ऐक्यबलेन दुर्बलाः अपि सबलं शत्रु हन्तुं शक्नुवन्ति।
(ख) एकतया सर्वाणि कार्याणि सिद्धयन्ति।
(ग) एकतया तैः मत्तगजः मारितः।
(घ) वर्तमानसमये एकतायाः महती आवश्यकता अस्ति।
(ङ) मानवजीवने एकतायाः विशेषमहत्वं वर्तते।

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 7 प्रश्न 6.
पाठे आगतानां जीवानां नामानि परस्परं सम्बन्धं च लिखत (पाठ में आये हुए जीवों के नाम और आपस में सम्बन्ध लिखो-)
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 7 ऐक्यबलम् 2

ऐक्यबलम् हिन्दी अनुवाद

कस्मिञ्चित् वने निम्बवृक्षे एकं चटकायुगलं प्रतिवसति स्म। समये चटकया अण्डानि दत्तानि, युगलम् अति प्रसन्नम् आसीत्। एकस्मिन् दिने आतपपीडितः एकः मदमत्त: गजः तत्र आगतः। मदेन सः तस्य वृक्षस्य तां शाखां नाशितवान् यस्यां शाखायां चटकायाः अण्डानि आसन्। अतः अण्डानि अपि नष्टानि। चटकायुगलं कातरक्रन्दनम् आरब्धवत्। रोदनं श्रुत्वा तयोः मित्रं काष्ठभेदकः पक्षी आगतः। सः उक्तवान् रोदनेन अलम्। तेन उक्तं सः एव बुद्धिमान् यः मृतं गतं च न चिन्तयति। चटका तम् अवदत्, “एषः मत्तगजः हन्तव्यः अन्यथा एषः सर्वान् पशुपक्षिपादपान् नाशयिष्यति।” काष्ठभेदकः अवदत्-अहं स्वमित्रम् मक्षिकाम् आनयामि कदाचित् सा गजं हन्तुम् उपायं चिन्तयेत्।

अनुवाद:
किसी वन में नीम के पेड़ पर एक चिड़ियों का जोड़ा (नर-मादा) रहता था। समय पर चिड़िया द्वारा अण्डे दिये गये, जोड़ा बहुत प्रसन्न था। एक दिन धूप से दुःखी एक मतवाला हाथी वहाँ आया। मस्ती में उसने उस पेड़ की उस डाल को तोड़ दिया जिसमें चिड़िया के अण्डे थे। इसलिए अण्डे भी नष्ट हो गये। चिड़ियों के जोड़े ने करुण रोदन प्रारम्भ कर दिया। रोना सुनकर उन दोनों का मित्र कठफोड़वा नामक पक्षी आ गया। उसने कहा रोना बस करो। उसने कहा वह ही बुद्धिमान है जो मरे हुए और गये हुए की चिन्ता नहीं करता। चिड़िया ने उससे कहा, “यह मतवाला हाथी मारा जाना चाहिए अन्यथा यह सभी पशु-पक्षी और पेड़ों को नष्ट कर देगा।” कठफोड़वा बोला-मैं अपनी मित्र मक्खी को लाता हूँ शायद वह हाथी को मारने के लिए उपाय सोचे।

सः गत्वा मक्षिकां न्यवेदयत् यत्-मम चटकामित्रस्य गृहम् एकेन मत्तगजेन विनष्टम्। तस्य वधाय सहायतां करोतु। मक्षिका अवदत-“यत् मित्रम् एव मित्रस्य कार्य साधयति।” मक्षिका तदा स्वमित्रं चतुरमण्डूकम् उपायं पृष्टवती। मण्डूकः उक्तवान्-‘एकीभूता दुर्बलाः अपि सबलं शत्रु हन्तुं शक्नुवन्ति।’ तैः सर्वेः मिलित्वा एका योजना निश्चिता। सर्वेषां दायित्वं वितरितम्। तदनुसारं मध्याह्ने मक्षिकया गजस्य कर्णयोः वीणावादनं कृत्रम्। एतेन गजः नयने निमील्य वीणावादनेनमुग्धः अभवत्। तावत् एव काष्ठभेदकः तस्य नयने च प्रहारेण व्यनाशयत्। अनन्तरं यत्र महान् पङ्कः आसीत् तत्र मण्डूकः ध्वनिना तं जलं पातुम् आकर्षितवान्। अन्ध: गजः तस्मिन् पङ्के पतितः मृतश्च। एवं तैः तीक्ष्णबुद्धया ऐक्येन सः मत्तगजः मारितः। आत्मनो वनस्य च रक्षणं कृतम्।

MP Board Solutions

अनुवाद :
उसने जाकर मक्खी से कहा कि-मेरी चिड़िया। मित्र का घर एक मतवाले हाथी ने नष्ट कर दिया है। उसके वध। (मारने) करने में सहायता करो। मक्खी ने कहा कि “मित्र ही। मित्र का कार्य पूरा करता है।” मक्खी ने तब अपने मित्र मेंढक से उपाय पूछा। मेंढक ने कहा-‘एकत्र होकर कमजोर भी बलशाली। शत्रु को मार सकते हैं।’ उन सबने मिलकर एक योजना निश्चित। की। सभी का दायित्व बाँट दिया गया। उसके अनुसार मध्यान्ह। में मक्खी ने हाथी के कानों में वीणा वादन किया। इससे हाथी। आँखें बन्द कर वीणा वादन से मोहित हो गया। तभी कठफोड़वे ने उसकी आँखें चोंच के प्रहार से फोड़ दी। इसके बाद जहाँ बहुत दलदल था वहाँ मेंढक ने आवाज से उसको पानी पीने केलिए आकर्षित किया। अन्धा हाथी उस दलदल में गिर गया और मर गया।

इस प्रकार, उन सबके द्वारा तेज बुद्धि के द्वारा एकता से वह मतवाला हाथी मारा गया। उन्होंने अपनी और वन की रक्षा की।

ऐक्यबलम् शब्दार्थाः

आतपपीडितः = धूप से दुःखित। निम्बवृक्षे = नीम के पेड़ पर। चटकायुगलम् = चिड़ियों का जोड़ा (नर-मादा)। काष्ठभेदकः = कठफोड़वा नाम का पक्षी। मत्तगजः = मतवाला हाथी। चतुरमण्डूकम् = होशियार मेंढक। कातरक्रन्दनम् = करुण रोदन। मक्षिका = मक्खी। एकीभूताः = एकत्र होकर। सबलम् = बलशाली को। निमील्य = बन्दकर। तीक्ष्णबुद्धया = तेज बुद्धि के द्वारा। वीणावादनमुग्धः = वीणा वादन से मोहित हुआ।

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