MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 10 मध्यकालीन भारत

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 10 मध्यकालीन भारत

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
महमूद गजनवी कहाँ का शासक था?
(i) मुल्तान
(ii) मुहम्मद गौरी
(iii) बहमनी
(iv) मुहम्मद तुगलक।
उत्तर:
(ii) मुहम्मद गौरी

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प्रश्न 2.
गुलाम वंश का संस्थापक कौन था? (2008,09)
(i) इल्तुतमिश
(ii) गजनी
(iii) कुतुबुद्दीन ऐबक
(iv) ईराक।
उत्तर:
(iii) कुतुबुद्दीन ऐबक

प्रश्न 3.
सन् 1266 ई. में दिल्ली सल्तनत की सत्ता किसने सँभाली?
(i) इल्तुतमिश
(ii) रजिया
(iii) कुतुबुद्दीन ऐबक
(iv) बलबन।
उत्तर:
(iv) बलबन।

प्रश्न 4.
तराइन के प्रथम युद्ध में गौरी को किसने घायल किया?
(i) पृथ्वीराज
(ii) कृष्णराय
(iii) गोविन्दराज
(iv) दीपकराज।
उत्तर:
(i) पृथ्वीराज

प्रश्न 5.
हरिहर-बुक्का ने किस नगर की स्थापना की?
(i) बहमनी साम्राज्य
(ii) विजय नगर साम्राज्य
(iii) दिल्ली सल्तनत
(iv) मोहम्मद नगर।
उत्तर:
(ii) विजय नगर साम्राज्य

प्रश्न 6.
अफजल खाँ का वध किसने किया?
(i) शिवाजी
(ii) राजाराम
(iii) शाहू
(iv) ताराबाई।
उत्तर:
(i) शिवाजी

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. प्राचीन चोल शासकों का वर्णन …………. में किया गया है।
  2. परमार वंश का संस्थापक …………. था। (2018)
  3. महमूद गजनवी ने भारत पर कुल ………… बार आक्रमण किये।
  4. बलवन ने शासन संचालन के लिये ……….. नीति का अनुसरण किया था।

उत्तर:

  1. संगम साहित्य
  2. उपेन्द्रराज
  3. 17
  4. लौह और रक्त।

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सत्य असत्य

प्रश्न 1.
शिवाजी की माता का नाम जीजाबाई था।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
हल्दीघाटी का युद्ध अकबर और रानी दुर्गावती के बीच हुआ था।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
जहाँगीर के बाद शाहजहाँ सम्राट बना।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
हुमायूँ बाबर का बड़ा पुत्र था।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
कृष्णदेव राय ने जांबवती कल्याण ग्रन्थ की रचना की थी।
उत्तर:
सत्य।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
महमूद गजनवी ने भारत पर कितने आक्रमण किये?
उत्तर:
महमूद गजनवी ने भारत पर कुल 17 बार आक्रमण किये।

प्रश्न 2.
भारत में मुगल साम्राज्य की नींव किसने डाली थी?
अथवा
भारत में मुगल साम्राज्य की नींव किसने और किस परिस्थिति में डाली ? (2010)
उत्तर:
भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखने वाला बाबर था जो मध्य एशिया के राज्य फरगाना के शासक का पुत्र एवं तैमूर का वंशज था। बाबर के आक्रमण के समय उत्तरी-दक्षिणी भारत में राजनीतिक अस्थिरता थी। आपसी फूट, संघर्ष एवं षडयंत्र का बोलबाला था। इस राजनीतिक अव्यवस्था का बाबर ने पूरा लाभ उठाया।

प्रश्न 3.
विजयनगर की स्थापना किसने की थी?
उत्तर:
विजयनगर की स्थापना का श्रेय हरिहर तथा बुक्का नामक दो भाइयों को दिया जाता है।

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प्रश्न 4.
बहमनी साम्राज्य का संस्थापक कौन था?
उत्तर:
बहमनी राज्य की स्थापना हसन जफर खाँ (बहमनशाह) ने 1347 ई. में की थी।

प्रश्न 5.
दीन-ए-इलाही धर्म किसने चलाया था?
उत्तर:
अकबर ने ‘दीन-ए-इलाही’ नामक धर्म का प्रचलन किया था। ‘दीन’ का अर्थ है-धर्म तथा ‘इलाही’ का अर्थ है-ईश्वर। इस प्रकार दीन-ए-इलाही का अर्थ हुआ ‘ईश्वर का धर्म’।

प्रश्न 6.
गुरु गोविन्दसिंह कौन थे?
उत्तर:
गुरु गोविन्दसिंह सिक्खों के दसवें एवं अन्तिम गुरु थे। इन्होंने 1699 ई. में खालसा नामक एक संगठन की स्थापना की थी।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इल्तुतमिश कौन था? उसने कठिनाइयों पर कैसे विजय प्राप्त की ? (2008, 09)
उत्तर:
इल्तुतमिश इलबारी कबीले का तुर्क था। बाल्यकाल में ही उसके ईर्ष्यालु भाइयों ने उसे दास के रूप में जमालुद्दीन नामक व्यापारी के हाथ बेच दिया था। जमालुद्दीन उसको गजनी से दिल्ली लाया। इल्तुतमिश के गुणों से प्रभावित होकर कुतुबुद्दीन ऐबक ने उसे जमालुद्दीन से खरीद लिया। पहले उसे ऐबक ने ग्वालियर का गवर्नर नियुक्त किया तथा कुछ काल के पश्चात् ‘बरन’ का शासक बनाया गया। कुतुबुद्दीन उसके गुणों से पहले ही बहुत प्रभावित हो चुका था। अतः अपनी पुत्री का विवाह उसके साथ कर उसे बदायूँ का सूबेदार नियुक्त कर दिया। कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के पश्चात् इल्तुतमिश आरामशाह को पराजित कर 1211 ई. में दिल्ली का सुल्तान बना। अपनी प्रतिभा तथा योग्यता से उसने लगभग 25 वर्षों तक शासन कर दिल्ली सल्तनत को शक्तिशाली बनाया।

इल्तुतमिश ने अपनी कठिनाइयों का समाधान निम्न प्रकार से किया –

  • चालीस मण्डल का गठन :
    इल्तुतमिश ने अपने विरोधियों का दमन करने के लिए तथा अपनी स्थिति को दृढ़ करने के लिए अपने प्रति निष्ठावान् चालीस अमीरों का दल बनाया तथा उन्हें प्रशासन के मुख्य पदों पर नियुक्त किया।
  • यल्दौज का दमन :
    यल्दौज गजनी का सुल्तान था। इल्तुतमिश ने तराइन के मैदान में यल्दौज से युद्ध कर उसे पराजित किया।
  • कुबाचा का दमन :
    इल्तुतमिश ने 1227 ई. में कुबाचा पर आक्रमण किया तथा उसे पराजित कर अपनी अधीनता में किया।

प्रश्न 2.
अलाउद्दीन खिलजी की बाजार व्यवस्था क्या थी ? (2008, 09, 13, 15, 18)
उत्तर:
अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियन्त्रण व्यवस्था सैनिक सुधारों से सम्बन्धित थी। इस नीति का प्रमुख उद्देश्य था ऐसी बाजार व्यवस्था करना जिससे कम वेतन पर भी सैनिक सुखमय जीवन व्यतीत कर सकें। इस व्यवस्था का लाभ दिल्ली की जनता को भी मिला। अलाउद्दीन ने राशनिंग व्यवस्था भी क्रियान्वित की थी। मौसम के अचानक परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए उसने शासकीय अन्न भण्डार बनाये थे। उसने वस्तुओं के मूल्यों का निर्धारण मनमाने ढंग से न कर उत्पादन लागत के अनुसार करवाया था। बरनी ने अपने ग्रन्थ ‘तारीख-ए-फिरोजशाही’ में बाजार नियन्त्रण व्यवस्था का विस्तृत विवरण व वस्तुओं के मूल्य की सूची दी है।

प्रश्न 3.
तुगलक वंश ने दिल्ली सल्तनत पर कैसे सत्ता स्थापित की ? विवेचना कीजिए। (2009)
उत्तर:
गयासुद्दीन तुगलक, तुगलक वंश का संस्थापक था। अलाउद्दीन खिलजी को मृत्यु के पश्चात् जो अशान्ति फैली इसे वह सह न कर सका। 1320 ई. में वह सिंहासन छीनने वाले नेता नासिरुद्दीन खुसरो को हटाकर दिल्ली का सुल्तान बना। सुल्तान बनने के बाद उसने वारंगल, उड़ीसा और बंगाल के लिए सैनिक अभियान चलाये।

प्रश्न 4.
शेरशाह की शासन व्यवस्था का भारतीय इतिहास में क्या योगदान है? (2009, 10, 12, 16, 18)
उत्तर:
शेरशाह सूरी-शेरशाह सूरी मध्यकालीन भारतीय शासकों में अपना विशेष महत्त्व रखता है। उसने केवल पाँच वर्ष ही शासन किया था, परन्तु इस अल्पकाल में उसने साम्राज्य का विस्तार करने के साथ-साथ उच्चकोटि की प्रशासन व्यवस्था को भी कुशलतापूर्वक लागू किया था। शेरशाह ने जनता के हितों को सर्वोपरि रखा तथा कुशल प्रशासन की नींव रखी जिसका लाभ मुगलों को मिला। उसके प्रमुख कार्य निम्न प्रकार हैं –

  1. सैनिक प्रशासन, न्याय व्यवस्था एवं भू-राजस्व के क्षेत्र में अनेक कार्य प्रारम्भ किये जिनका अनुसरण बाद में अकबर ने किया।
  2. शेरशाह ने अपने साम्राज्य को ‘सरकारों’ एवं सरकारों को ‘परगनों’ में विभाजित किया।
  3. जनसाधारण की सुविधा के लिए शेरशाह ने चार प्रमुख सड़कों का निर्माण करवाया-ग्राण्ड ट्रंक रोड, आगरा-बुरहानपुर, आगरा-चित्तौड़-जोधपुर तथा लाहौर-मुल्तान।
  4. शेरशाह ने सड़कों के दोनों और छायादार वृक्ष लगवाये तथा दो-दो कोस की दूरी पर सरायों का निर्माण करवाया।
  5. शेरशाह ने शिक्षा के प्रसार के लिए मकतब तथा मदरसों की स्थापना करवायी।
  6. अनाथ तथा निर्धनों के लिए नि:शुल्क भोजन हेतु लंगर खोले गये।

प्रश्न 5.
पृथ्वीराज चौहान का भारतीय इतिहास में क्या योगदान रहा? लिखिए। (2008, 09, 12, 13, 14, 16, 18)
उत्तर:
पृथ्वीराज चौहान-पृथ्वीराज चौहान दिल्ली और अजमेर का योग्य, वीर, प्रतिभावान शक्तिशाली सम्राट था। उसके पास उत्तम सेना व सेनापति थे। पृथ्वीराज का समकालीन कवि ‘चंदवरदाई’ था। इस कवि ने ‘पृथ्वीराज रासो’ नामक ग्रन्थ की रचना की जिसमें पृथ्वीराज की यश गाथा का बड़ा ओजस्वी वर्णन है। पृथ्वीराज का 1191 ई. में मुहम्मद गौरी के साथ तराइन का प्रथम युद्ध हुआ। इस युद्ध में पृथ्वीराज ने मोहम्मद गौरी को बुरी तरह पराजित किया। गौरी अपनी अपमानजनक पराजय को भूल न सका और उसने पुनः तैयारी के साथ तराइन के मैदान में 1192 ई. में पृथ्वीराज से दूसरा युद्ध किया जो तराइन का द्वितीय युद्ध कहलाता है। इस युद्ध में पृथ्वीराज पराजित हुआ तथा मुहम्मद गौरी विजयी हुआ।

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प्रश्न 6.
महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास में क्यों प्रसिद्ध है? (2008, 14, 15, 17)
अथवा
महाराणा प्रताप पर टिप्पणी लिखिए। (2009, 11).
उत्तर:
महाराणा प्रताप मेवाड़ का वीर साहसी राजपूत राजा था। वह राणा उदयसिंह का पुत्र था तथा राणा सांगा का वंशज था। उसने अपनी राजधानी कुम्भलनेर को बनाया था। अकबर ने उससे सम्बन्ध स्थापित करने के लिए सन्धि के प्रयास किये पर उसे सफलता नहीं मिली तो उसने 18 जून, 1576 ई. में हल्दीघाटी के मैदान में मानसिंह की अध्यक्षता में शक्तिशाली सेना मेवाड़ पर आक्रमण करने के लिए भेजी। दोनों की सेनाओं में विकट संग्राम हुआ। मानसिंह युद्ध में विजयी हुआ। महाराणा प्रताप की सेना युद्ध में पराजित होकर भाग गयी। हल्दीघाटी की पराजय के पश्चात् महाराणा प्रताप ने वनों तथा पर्वतों को अपना निवास बनाया तथा मुगलों के साथ अनवरत संघर्ष जारी रखा तथा उनके आगे नतमस्तक नहीं हुआ। 1597 ई. में महारणा प्रताप का स्वर्गवास हो गया।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मोहम्मद गौरी व महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण किस उद्देश्य से किए थे व उन्हें सफलता मिलने के क्या कारण थे? लिखिए।
अथवा
महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण किस उद्देश्य से किये थे? (2008)
अथवा
मोहम्मद गौरी ने भारत पर आक्रमण किस उद्देश्य से किये थे? (2008)
उत्तर:
महमूद गजनवी के भारत पर आक्रमण करने के निम्नलिखित उद्देश्य थे –

  1. भारत की अपार धन-सम्पदा को लूटना महमूद गजनवी का प्रमुख उद्देश्य था।
  2. महमूद गजनवी का अन्य प्रमुख उद्देश्य भारत में इस्लाम धर्म का प्रसार करना था।
  3. महमूद गजनवी एक महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति था। वह भारत पर आक्रमण कर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना करना चाहता था।
  4. कुछ इतिहासकारों का मत है खलीफा के आदेश से ही उसने भारत पर आक्रमण किया था। परन्तु कुछ इतिहासकार उस मत का खण्डन करते हैं।
  5. महमूद गजनवी मूर्तियों तथा मूर्ति पूजकों को भी नष्ट करना चाहता था।

मुहम्मद गौरी के भारत पर आक्रमण के उद्देश्य :
मुहम्मद गौरी के भारत पर आक्रमण के निम्नलिखित उद्देश्य थे –

  1. मुहम्मद गौरी एक विशाल साम्राज्य का निर्माण करना चाहता था। अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने भारत पर आक्रमण किया।
  2. गौरी एक धर्मप्रिय मुसलमान था अतः वह भारत में मूर्ति-पूजा का विनाश करने तथा इस्लाम का प्रसार करना चाहता था।
  3. गौरी का अन्य उद्देश्य भारत की अपार धनराशि को लूटना भी था।
  4. गौरी पंजाब के गजनवी वंश का भी अन्त करना चाहता था।
  5. इस युग में सैनिक यश को बहुत महत्त्व दिया जाता था। अत: गौरी ने विजय और यश की कामना से प्रेरित होकर भी भारत पर आक्रमण किया था।

प्रश्न 2.
राजा कृष्णदेव राय की शासन व्यवस्था व जनता पर उसके प्रभाव का वर्णन कीजिए। (2009, 16)
अथवा
विजयनगर की शासन व्यवस्था का वर्णन कीजिए। (2009)
उत्तर:
कृष्ण देव राय विजयनगर का महानतम् शासक था। उसने अपने शासन काल में विजय नगर को चरम सीमा पर पहुँचा दिया।

विजय नगर की शासन व्यवस्था की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं –
(1) केन्द्रीय शासन :

  • राजा :
    राजा राज्य का सबसे बड़ा अधिकारी होता था। शासन की सम्पूर्ण शक्ति उसी में निहित थी, उसका आदेश ही कानून था। शासन, न्याय तथा सेना आदि की शक्तियाँ उसके हाथों में रहती थीं। राजा निरंकुश होते हुए भी अत्याचारी नहीं था। वह जन-कल्याण को ध्यान में रखकर शासन करता था।
  • मन्त्रिपरिषद् :
    राजा को शासन कार्यों में परामर्श देने के लिए एक मन्त्रिपरिषद् होती थी, परन्तु राजा मन्त्रिपरिषद् का परामर्श मानने के लिए बाध्य नहीं था। मन्त्रियों की नियुक्ति राजा द्वारा होती थी।
  • राजदरबार :
    विजयनगर के शासक मुस्लिम शासकों के समान राजदरबार की शोभा पर विशेष ध्यान देते थे। शासन की समस्त कार्यवाही राजदरबार में ही होती थी। दरबार के मन्त्रियों, सामन्तों, पुरोहितों तथा कवियों को सम्मान दिया जाता था।
  • वित्त व्यवस्था :
    विजयनगर में राजकीय आय का प्रमुख साधन भूमि-राजस्व था। किसानों से उनके उत्पादन का 1/3, 1/4 तथा 1/6 भाग राजस्व के रूप में वसूल किया जाता था।
  • न्याय व्यवस्था :
    विजयनगर साम्राज्य में मुख्य न्यायाधीश राजा होता था तथा उसका निर्णय ही अन्तिम माना जाता था। हिन्दू परम्पराओं तथा नियमों के आधार पर न्याय विधान बनाया हुआ था। दण्ड व्यवस्था अत्यधिक कठोर थी। गाँवों में ग्राम पंचायतों द्वारा न्याय प्रदान किया जाता था।
  • सैनिक व्यवस्था :
    विजयनगर की सैनिक व्यवस्था जागीरदारी प्रथा पर आधारित थी। सेना दो प्रकार की थी-एक केन्द्रीय या सम्राट की सेना, दूसरी प्रान्तपतियों की सेना। आवश्यकता पड़ने पर प्रान्तपति अपनी सेना राजा के पास सहायता के लिए भी भेजते थे।

(2) प्रान्तीय शासन :
सम्पूर्ण विजयनगर साम्राज्य 6 प्रान्तों में विभाजित था। प्रत्येक प्रान्त में एक प्रान्तपति या सूबेदार नियुक्त किया जाता था। सूबेदार राज-परिवार का सदस्य अथवा प्रभावशाली सामन्त होता था। सूबेदारों की अपनी-अपनी सेनाएँ होती थीं। आवश्यकता पड़ने पर सूबेदारों को राजा की सैनिक सहायता भी करनी पड़ती थी।

(3) स्थानीय शासन :
विजयनगर राज्य के प्रान्त अनेक ‘नाडुओं’ (जिलों) में विभाजित थे। प्रत्येक ‘नाडु’ अनेक नगरों तथा ग्रामों में विभाजित था। इस प्रकार ग्राम शासन की सबसे छोटी इकाई थी। गाँवों का प्रबन्ध ग्राम सभाओं द्वारा किया जाता था। ग्राम सभा में गाँव प्रमुख भाग लेते थे। ‘महानापकाचार्य’ नामक राजकर्मचारी स्थानीय शासन का निरीक्षण करता था।

प्रश्न 3.
अकबर की राजपूत व धार्मिक नीतियों की विवेचना कीजिए। (2008, 12, 15, 17)
अथवा
अकबर की राजपूत नीति की विवेचना कीजिए। (2009, 13, 14)
अथवा
अकबर की राजपूत नीति के क्या परिणाम निकले? समझाइए। (2008)
अथवा
अकबर की धार्मिक नीति बताइए। (2010) [संकेत- ‘धार्मिक नीति’ शीर्षक देखें।]
अथवा
अकबर की धार्मिक नीति के क्या परिणाम निकले? समझाइए। (2008) [संकेत- ‘अकबर की धार्मिक नीति व परिणाम’ शीर्षक देखें।]
उत्तर:
अकबर की राजपूत नीति-अकबर की राजपूत नीति की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं –

  1. अकबर ने राजपूतों को मुगल प्रशासन में उच्च पद प्रदान किये।
  2. राजपूतों के प्रति मित्रता भावना व सहयोग भावना की नीति रखी।
  3. अकबर ने राजपूत राजकुमारियों से विवाह भी किया।
  4. पराजित राजपूत राजाओं को सम्मान दिया तथा उन्हें आन्तरिक प्रशासन की स्वतन्त्रता दी।
  5. जिन राजपूत राजाओं ने अकबर की अधीनता नहीं स्वीकार की उनसे उसने युद्ध करने की नीति अपनायी।

अकबर की राजपूत नीति के निम्नलिखित परिणाम निकले :

  1. राजपूत मुगलों के मित्र तथा स्वामी भक्त बन गये।
  2. राजपूत मुगल साम्राज्य के विस्तार में सहायक हुए।
  3. मानसिंह, भगवानदास तथा राजपूत मनसबदारों ने मुगल शत्रुओं को पराजित करने में सहयोग दिया।
  4. अकबर द्वारा राजपूतों के प्रति जो सहयोग व प्रेम भावना का प्रदर्शन हुआ उससे हिन्दू और मुसलमानों के मध्य कटुता की भावना समाप्त हो गयी।
  5. अकबर को राजपूतों में से अनेक सुयोग्य सेनापति, कुशल प्रशासक तथा महान् कूटनीतिज्ञ मिले।

अकबर की धार्मिक नीति :
विभिन्न धर्मों के वाद-विवाद सुनने के पश्चात् अकबर ने अनुभव किया प्रत्येक धर्म में अच्छाई है, परन्तु संकीर्ण विचारों के धर्मान्ध व्यक्तियों द्वारा की गयी जटिल टीकाओं तथा रूढ़िवादी विचारों के कारण धर्म का भ्रमपूर्ण अर्थ किया जाता है। अतः इस विद्वेष तथा धर्म की अनुचित धारणा को समाप्त करने के लिए उसने सभी धर्मों की अच्छाइयों का समन्वय करके एक नवीन धर्म ‘दीन-ए-इलाही’ की स्थापना की।

धार्मिक नीति के परिणाम :
अकबर द्वारा प्रतिपादित धार्मिक नीति के निम्नलिखित परिणाम निकले –

  1. हिन्दू और मुसलमानों के मध्य दीर्घकाल से चली आ रही कटुता की भावना समाप्त हुई तथा वे एक-दूसरे के निकट आये।
  2. कला, साहित्य तथा संस्कृति के क्षेत्र में भी हिन्दू-मुस्लिम संस्कृतियों में समन्वय हुआ।
  3. अकबर की धार्मिक नीति के कारण राजपूत मुगल साम्राज्य के सहायक बन गये तथा विस्तार में भी उन्होंने अपूर्व सहयोग दिया।
  4. भारत की बहुसंख्यक जनता हिन्दू थी जो अकबर की धार्मिक नीति से प्रभावित होकर मुगल साम्राज्य की सहयोगी हो गयी। इस प्रकार अकबर की धार्मिक नीति ने उसे एक राष्ट्रीय शासक बना दिया।
  5. धार्मिक नीति के कारण गैर-मुस्लिम जनता में से अकबर को कुशल, योग्य प्रशासक तथा वीर रण-कुशल सैनिक भी प्राप्त हुए जिससे मुगल साम्राज्य को दृढ़ता मिली।

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प्रश्न 4.
भारत में मुगल सत्ता का प्रतिरोध करने में किन-किन भारतीय राजाओं एवं शासकों की भूमिका रही? उसका वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में मुगल सत्ता का प्रतिरोध :
भारत में मुगल सत्ता का प्रतिरोध करने में मेवाड़ के शासक राणा सांगा, महाराणा प्रताप, गोंडवाना की रानी दुर्गावती तथा मराठा शासक शिवाजी, सिक्ख गुरु गोविन्द सिंह प्रमुख थे।

राणा सांगा :
मेवाड़ के शासक राणा सांगा ने बाबर को खानवा के मैदान में कड़ी टक्कर दी। दुर्भाग्य से राणा सांगा पराजित हुए मगर जब तक वह जीवित रहे उन्होंने हार नहीं मानी। 1528 ई. को राणा सांगा की मृत्यु हो गई। राणा सांगा की मृत्यु के बाद मुगल सत्ता का प्रतिरोध महाराणा उदयसिंह (1537-1572 ई.) ने किया।

महाराणा प्रताप :
उदयसिंह की 1572 ई. में मृत्यु के पश्चात् उनका पुत्र महाराणा प्रताप मेवाड़ का शासक बना। महाराणा प्रताप ने जीवित रहने तक, मुगल सत्ता के प्रमुख शासक अकबर को कड़ी चुनौतियाँ दी। मुगल सत्ता को टक्कर देने के लिए महाराणा प्रताप ने मेवाड़ को संगठित किया। उन्होंने जनसम्पर्क द्वारा राज्य में मुगल सत्ता के विरुद्ध व्यापक जागरण चलाया। इन उपायों से मेवाड़ में एक सूत्रता आई और सम्पूर्ण मेवाड़ मुगल सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ा हुआ। राणा प्रताप को अपने राज्य के कुछ भागों को खोना पड़ा मगर हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार मुगलों से युद्ध जारी रखा और अपने खोये हुए प्रदेशों के अनेक भागों को प्राप्त कर लिया। इस प्रकार महाराणा प्रताप ने अपने देश के प्रति मरते दम तक वीरता और साहस का परिचय दिया।

रानी दुर्गावती:
रानी दुर्गावती महोला की चंदेल राजकुमारी थी। अपने पति दलपति शाह की मृत्यु के बाद उसने अपने अवयस्क पुत्र वीरनारायण की संरक्षिका के रूप में राज्य का कार्यभार ग्रहण किया। दिल्ली के सम्राट अकबर ने गढ़ा राज्य की विशालता और धन सम्पन्नता के बारे में सुना तो उसने अपनी साम्राज्य लिप्सा की पूर्ति के लिए अपने सेनापति आसफ खाँ को विशाल सेना के साथ गढ़ा पर आक्रमण करने के लिए भेज दिया। रानी दुर्गावती ने अकबर की अधीनता के स्थान पर उसकी सेनाओं से युद्ध करने का निश्चय किया। रानी ने अत्यन्त वीरता के साथ आसफ खाँ की सेनाओं के साथ युद्ध किया, वह लड़ते-लड़ते गम्भीर रूप से घायल हो गई। घायलावस्था में दुर्गावती आगे युद्ध जारी रखने में असमर्थ हो गईं किन्तु वह नहीं चाहती थीं कि अकबर के सैनिक उसको बन्दी बनाकर अपमानित करें। इसलिए उसने स्वयं को कटार मारकर अपना बलिदान कर दिया। पुत्र वीरनारायण भी युद्ध करता हुआ वीरगति को प्राप्त हुआ।

छत्रपति शिवाजी :
शिवाजी का मध्यकालीन भारतीय इतिहास में महत्त्व इस कारण है क्योंकि उनका राजनीतिक आदर्श तथा लक्ष्य हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना था। उन्होंने बड़ी वीरता के साथ मुगल सम्राट औरंगजेब से संघर्ष किया तथा कभी भी सिर नहीं झुकाया। कट्टर हिन्दू होते हुए भी वे मुसलमानों को सम्मान देते थे। खफीखाँ के शब्दों में, “शिवाजी ने यह नियम बनाया था कि लूट के समय उसके सैनिक मस्जिदों, कुरान तथा स्त्रियों को किसी प्रकार नुकसान न पहुँचाएँ।”

गुरुगोविन्द सिंह :
मुगल प्रशासन ने 1675 ई. में गुरु तेगबहादुर को फाँसी का हुक्म दिया जिससे सिक्ख समुदाय औरंगजेब से बहुत नाराज हो गया। दसवें गुरु गोविन्दसिंह ने सिक्खों को सैनिक के रूप में संगठित कर मुगल सेनाओं के विरुद्ध युद्ध करने के लिए तैयार किया। गुरु गोविन्दसिंह ने 1699 ई. में खालसा नामक एक संगठन की स्थापना की। यह एक जाति विहीन सैनिक संगठन था जिसमें सभी लोगों को बिना जाति भेद के शामिल करने की व्यवस्था थी। सिक्ख समुदाय ने मुगल साम्राज्य के समक्ष चुनौतियाँ खड़ी कर दीं।

इन भारतीय राजाओं व शासकों ने मुगल शासकों से अपनी स्वतन्त्रता के बदले न तो मित्रता की और न ही समर्पण किया, बल्कि वीरता के साथ मुगलों को हर मोड़ पर कड़ी चुनौतियाँ दीं।

प्रश्न 5.
मुगल साम्राज्य के पतन के कारण लिखिए। (2008,09, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18)
अथवा
मुगल साम्राज्य के पतन के कोई पाँच कारण लिखिए और किसी एक कारण को विस्तार से लिखिए। (2011)
उत्तर:
मुगल साम्राज्य के पतन के निम्नलिखित कारण थे –
(1) निरंकुश तथा केन्द्रीभूत शासन :
मुगलकालीन शासन व्यवस्था पूर्णतया निरंकुश तथा केन्द्रीभूत थी। निरंकुश तथा केन्द्रीभूत शासन में शासन की समस्त शक्तियाँ सम्राट के हाथों में केन्द्रित रहती हैं। ऐसी शासन व्यवस्था उस समय ही दृढ़ रहती है, जबकि सम्राट योग्य तथा कुशल हो। औरंगजेब के पश्चात् मुगल वंश के शासक अपने पूर्वज शासकों की तरह योग्य तथा कुशल नहीं थे। अत: वे मुगल साम्राज्य को सुरक्षित तथा संगठित नहीं रख सके। अतः ऐसी दशा में मुगल साम्राज्य का पतन होना अनिवार्य था।

(2) औरंगजेब की धार्मिक नीति :
अकबर ने जिस धार्मिक सहिष्णुता तथा सुलहकुल की नीति को अपनाया था उसे औरंगजेब ने पूर्णतया त्याग दिया था। उसने हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया तथा हिन्दूओं को बलपूर्वक मुसलमान बनाने का प्रयास किया था। उसकी इस धार्मिक नीति के कारण ही हिन्दू तथा सिक्ख मुगल साम्राज्य के विरोधी हो गये। साथ ही बुन्देलों, जाटों, मराठों तथा राजपूतों ने विद्रोह कर मुगल साम्राज्य को हिला दिया।

(3) साम्राज्य की विशालता :
औरंगजेब के शासनकाल तक मुगल साम्राज्य इतना विशाल हो गया था कि उस पर व्यवस्थित ढंग से शासन करना तथा शान्ति की व्यवस्था करना एक जटिल समस्या थी। साम्राज्य की विशालता के कारण ही दूर के प्रान्तों पर भी नियन्त्रण रखना कठिन हो गया था।

(4) औरंगजेब के अयोग्य उत्तराधिकारी :
औरंगजेब के समस्त उत्तराधिकारी अयोग्य थे। वे सब नाममात्र के सम्राट थे। वे परस्पर अपनी समस्याओं में ही उलझे रहते थे तथा शासन की सुरक्षा की ओर तनिक भी ध्यान नहीं देते थे।

(5) औरंगजेब द्वारा दीर्घकाल तक युद्ध करना :
औरंगजेब ने अपने शासन के पहले पच्चीस वर्ष उत्तरी भारत में विद्रोहों को दबाने में व्यतीत किये। इसी प्रकार दक्षिण के अभियान में भी उसका पर्याप्त समय लगा जिससे उसकी शक्ति पर्याप्त दुर्बल हो गयी। परिणामस्वरूप औरंगजेब के कुछ काल के बाद ही मुगल साम्राज्य का पतन हो गया।

(6) उत्तराधिकार के नियमों का अभाव :
मुगलों में उत्तराधिकार के कोई निश्चित नियम नहीं थे। परिणामस्वरूप सम्राट की मृत्यु के पश्चात् राजपुत्रों में सिंहासन प्राप्त करने के लिये परस्पर संघर्ष छिड़ जाता था। इस प्रकार के संघर्षों ने मुगल साम्राज्य को छिन्न-भिन्न कर दिया।

(7) औरंगजेब की दक्षिण की नीति :
औरंगजेब की दक्षिण की नीति भी मुगल साम्राज्य के पतन का कारण सिद्ध हुई। उसने अपने शासन के 25 वर्ष दक्षिण में संघर्ष करने में ही व्यतीत किये। परिणामस्वरूप वह उत्तरी भारत की ओर ध्यान ही नहीं दे पाया जिससे स्थान-स्थान पर विद्रोह होने लगे तथा मुगल साम्राज्य सैनिक, प्रशासनिक तथा आर्थिक दृष्टि से खोखला हो गया।

(8) मराठों का उत्थान :
मराठों के उत्थान ने भी मुगल साम्राज्य पर आघात किया। शिवाजी से संघर्ष करने से मुगल सेना अत्यन्त दुर्बल हो गयी तथा औरंगजेब के लिए मराठे जीवन-पर्यन्त सिरदर्द बने रहे। औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात् भी मराठे मुगलों से संघर्ष करते रहे।

(9) आर्थिक दुर्बलता :
अकबर के पश्चात् समस्त मुगल शासकों ने अपना समय साम्राज्य विस्तार तथा युद्धों के करने में लगाया, जिससे साम्राज्य की आर्थिक व्यवस्था जर्जर हो गयी।

इस प्रकार निरन्तर युद्ध, स्वेच्छाचारी शासन, अयोग्य उत्तराधिकारी, धर्म आधारित शासन, सैन्य शक्ति में ह्रास, गुटबन्दी आदि मुगल साम्राज्य के पतन में सहायक हुए।

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टिप्पणी लिखिए

प्रश्न 1.
(1) महाराणा प्रताप
(2) रानी दुर्गावती
(3) छत्रपति शिवाजी। (2008)
अथवा
शिवाजी भारतीय इतिहास में क्यों प्रसिद्ध हैं? वर्णन कीजिए। (2009, 17)
उत्तर:
छत्रपति शिवाजी-शिवाजी का जन्म 20 अप्रैल, 1627 ई. में शिवनेर के किले में हुआ था। उनके पिता का नाम शाहजी भोंसले तथा माता का नाम जीजाबाई था। जीजाबाई एक धर्मात्मा, सदाचारिणी तथा बुद्धिमान स्त्री थीं। उन्होंने शिवाजी को धर्म नेताओं तथा साधु-सन्तों की शिक्षा का ज्ञान कराकर उनमें धर्मनिष्ठा का विकास किया। रामदास तथा तुकाराम ने उनमें हिन्दू धर्म तथा राष्ट्र प्रेम की भावना का विकास किया। शिवाजी के प्रारम्भ के नौ वर्ष शिवनेर, बैजपुर, शिवपुर आदि में व्यतीत हुए। शाहजी भोंसले ने दादा कोणदेव को शिवाजी का संरक्षक नियुक्त किया था। कोणदेव ने उन्हें प्रशासनिक तथा सैनिक शिक्षा दी। 18 वर्ष की अल्प आयु में ही शिवाजी ने पूना के आस-पास रायगढ़, कोंकण तथा तोरण के किलों पर अधिकार जमा लिया था। दादा कोणदेव की मृत्यु के पश्चात् शिवाजी ने अपनी जागीर का विस्तार किया तथा मराठों को संगठित कर मराठा राज्य की स्थापना की।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इतिहासकारों के अनुसार ईसा की कौन-सी शताब्दी को मध्यकाल का आरम्भ माना जाता है?
(i) ईसा की छठी शताब्दी
(ii) ईसा की सातवीं शताब्दी
(iii) ईसा की आठवीं शताब्दी
(iv) ईसा की दसवीं शताब्दी।
उत्तर:
(iii) ईसा की आठवीं शताब्दी

प्रश्न 2.
तराइन का प्रथम युद्ध हुआ
(i) 1030 ई. में
(ii) 1150 ई. में
(iii) 1170 ई. में
(iv) 1191 ई. में।
उत्तर:
(iv) 1191 ई. में।

प्रश्न 3.
मुहम्मद गौरी के आक्रमण के समय कन्नौज का शासक था
(i) मिहिर भोज
(ii) पृथ्वीराज चौहान
(iii) जयचन्द
(iv) धर्मपाल।
उत्तर:
(iii) जयचन्द

प्रश्न 4.
तालीकोट का युद्ध हुआ
(i) 1565 ई. में
(ii) 1585 ई. में
(iii) 1505 ई. में
(iv) 1525 ई. में।
उत्तर:
(i) 1565 ई. में

प्रश्न 5.
अकबर का जन्म हुआ
(i) 1505 ई. में
(ii) 1530 ई. में
(iii) 1542 ई. में
(iv) 1545 ई. में।
उत्तर:
(iii) 1542 ई. में

प्रश्न 6.
नूरजहाँ पत्नी थी
(i) अकबर की
(ii) हुमायूँ की
(iii) बाबर की
(iv) जहाँगीर की।
उत्तर:
(iv) जहाँगीर की।

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प्रश्न 7.
पानीपत का द्वितीय युद्ध हुआ था
(i) अकबर और आदिल शाह में
(ii) अकबर और हेमू में
(iii) अकबर और उजवेको में
(iv) अकबर और अधमखाँ में।
उत्तर:
(ii) अकबर और हेमू में

प्रश्न 8.
महाराणा प्रताप के घोड़े का नाम था
(i) मेवाड़
(ii) पूजा
(iii) रामशाह
(iv) चेतक।
उत्तर:
(iv) चेतक।

प्रश्न 9.
रानी दुर्गावती का विवाह हुआ था
(i) दलपति शाह से
(ii) बाजबहादुर से
(iii) आसफ से
(iv) मानसिंह से।
उत्तर:
(i) दलपति शाह से

प्रश्न 10.
पुरन्दर की सन्धि की गई
(i) 1605 ई. में
(ii) 1645 ई. में
(iii) 1665 ई. में
(iv) 1685 ई. में।
उत्तर:
(iii) 1665 ई. में

प्रश्न 11.
खालसा नामक संगठन की स्थापना की
(i) गुरुनानक ने
(ii) गुरु तेगबहादुर ने
(iii) गुरु गोविन्दसिंह ने
(iv) उपर्युक्त में कोई नहीं।
उत्तर:
(iii) गुरु गोविन्दसिंह ने

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. मुगल शासनकाल में सही ढंग से भू-मापन …………. ने कराया। (2008)
  2. ताजमहल का निर्माण मुगल शासक …………. ने कराया। (2008, 09)
  3. शिवाजी की माता का नाम …………. था। (2016)
  4. मेवाड़ का शासक ………… था। (2012)

उत्तर:

  1. शेरशाह सूरी
  2. शाहजहाँ
  3. जीजाबाई
  4. महाराणा प्रताप।

सत्य असत्य

प्रश्न 1.
गुलाम वंश का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक था। (2010)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
हुमायूँ बाबर का बड़ा पुत्र था।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
कुतुबमीनार आगरा में है। (2009)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
जजिया हिन्दुओं पर लगाया गया कर था। (2011)
उत्तर:
सत्य।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 10 मध्यकालीन भारत - 1
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (घ)
  3. → (ङ)
  4. → (क)
  5. → (ग)
  6. → (च)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
खजुराहो के मन्दिरों का निर्माण किसने किया? (2008)
उत्तर:
चन्देल वंश के शासकों ने

प्रश्न 2.
महमूद गजनवी ने भारत पर कितने बार आक्रमण किए? (2017)
उत्तर:
17 बार

प्रश्न 3.
अफजल खाँ का वध किया था। (2008)
उत्तर:
छत्रपति शिवाजी

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प्रश्न 4.
एलोरा के मन्दिरों का निर्माण किस काल में हुआ? (2017)
उत्तर:
गुप्तकाल में

प्रश्न 5.
अकबर द्वारा चलायी गयी धार्मिक नीति। (2009)
उत्तर:
दीन-ए-इलाही।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अध्ययन की दृष्टि से मध्यकाल को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर:
मध्यकाल को अध्ययन की दृष्टि से दो भागों में बाँटा गया है। आठवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक के काल को पूर्व मध्यकाल कहते हैं। तेरहवीं शताब्दी से अठारहवीं शताब्दी तक का काल उत्तर मध्यकाल के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 2.
प्रसिद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना किसने की थी?
उत्तर:
विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना धर्मपाल ने की थी। यह बौद्ध धर्म की शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था।

प्रश्न 3.
प्रसिद्ध भोजपुर मन्दिर एवं भोपाल का बड़ा तालाब किस राजा ने बनवाये?
उत्तर:
प्रसिद्ध भोजपुर मन्दिर एवं भोपाल का बड़ा तालाब राजा भोज के काल के बने हैं।

प्रश्न 4.
चौहान वंश का सर्वाधिक प्रतापी शासक कौन था?
उत्तर:
चौहान वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली और अन्तिम शासक पृथ्वीराज चौहान था।

प्रश्न 5.
मुहम्मद गौरी कहाँ का शासक था? उसने भारत पर कब और कहाँ आक्रमण किया था?
उत्तर:
मुहम्मद गौरी गजनी का शासक था, उसने भारत पर प्रथम आक्रमण 1175 ई. में मुल्तान पर किया था।

प्रश्न 6.
तराइन का प्रथम युद्ध कब और किसके मध्य हुआ था?
उत्तर:
तराइन का प्रथम युद्ध 1191 ई. में मुहम्मद गौरी तथा पृथ्वीराज चौहान के मध्य हुआ था।

प्रश्न 7.
तराइन का द्वितीय युद्ध कब और किसके मध्य हुआ था? इस युद्ध का क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
तराइन का द्वितीय युद्ध 1192 ई. में मुहम्मद गौरी तथा पृथ्वीराज चौहान के मध्य हुआ था। इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान पराजित हुआ तथा उसकी हत्या कर दी गयी।

प्रश्न 8.
कुतुबुद्दीन ऐबक कौन था? उसने कौन-सी इमारत बनवायी थी?
उत्तर:
कुतुबुद्दीन ऐबक मुहम्मद गौरी का प्रमुख गुलाम था। तराइन के द्वितीय युद्ध के पश्चात् मुहम्मद गौरी ने उसे अपने भारतीय साम्राज्य का शासक नियुक्त किया था। दिल्ली स्थित कुतुबमीनार को बनवाने का श्रेय उसी को दिया जाता है।

प्रश्न 9.
रजिया सुल्तान कौन थी?
उत्तर:
रजिया सुल्तान इल्तुतमिश की पुत्री थी तथा दिल्ली सल्तनत की प्रथम महिला सुल्तान थी।

प्रश्न 10.
चालीस गुलामों के दल का गठन किस सुल्तान ने किया था?
उत्तर:
इल्तुतमिश ने चालीस गुलामों के दल का गठन किया था।

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प्रश्न 11.
पागल बादशाह तुगलक वंश के किस शासक को माना जाता है?
उत्तर:
मुहम्मद तुगलक को।

प्रश्न 12.
पानीपत का प्रथम युद्ध कब हुआ था ? इस युद्ध के क्या परिणाम निकले?
उत्तर:
पानीपत का प्रथम युद्ध 1526 ई. में हुआ था। इस युद्ध में बाबर की विजय के साथ मुगल साम्राज्य की स्थापना हुई।

प्रश्न 13.
चौसा का युद्ध कब और किसके मध्य हुआ था?
उत्तर:
चौसा का युद्ध 1539 ई. में हुमायूँ और शेरखाँ के मध्य हुआ था।

प्रश्न 14.
हुमायूँ की मृत्यु कब और कैसे हुई?
उत्तर:
1556 ई. को पुस्तकालय की छत से उतरते समय पैर फिसलने से हुमायूँ की मृत्यु हो गई।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मध्यकाल से क्या आशय है? इसका अन्त कौन-सी शताब्दी में माना जाता है?
उत्तर:
मध्यकाल का आशय :
मध्यकाल से आशय उस काल से लिया जाता है, जो प्राचीन काल और आधुनिक काल के मध्य का समय था। इतिहासकारों ने ईसा की आठवीं शताब्दी को मध्यकाल का प्रारम्भ तथा अठारहवीं शताब्दी को उसका अन्त माना है। मध्यकाल का प्रारम्भ आठवीं शताब्दी को इसलिए माना जाता है क्योंकि इस समय भारत के सामाजिक जीवन में अनेक परिवर्तन हो रहे थे और इन परिवर्तनों ने भारत के सामाजिक जीवन के अनेक पक्षों को प्रभावित किया था। जीवन के राजनीतिक और आर्थिक पक्षों पर उनका प्रभाव पड़ा जैसे सामाजिक जीवन, धर्म, भाषा, कला आदि सभी क्षेत्रों को इन परिवर्तनों ने प्रभावित किया। इसलिए आठवीं शताब्दी को मध्यकाल का प्रारम्भ माना जाता है। इसी प्रकार अठारहवीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य के पतन और अंग्रेजों के आने से भी अनेक परिवर्तन हुए। इसीलिए मध्यकाल का अन्त अठारहवीं शताब्दी को माना जाता है।

प्रश्न 2.
मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत
मध्यकालीन भारतीय इतिहास को जानने के लिए हमारे पास पुरातात्विक व साहित्यिक स्रोत उपलब्ध हैं, जो निम्न प्रकार हैं

  • पुरातात्विक स्रोत :
    इसमें स्मारक, मूर्तियाँ, मन्दिर, मस्जिद, मीनारें, किले, दीवारों पर कलाकृति, चित्रकला, मुद्राएँ, धातु पत्रक आदि।
  • साहित्यिक स्रोत :
    इसमें राजतंरगिणी, तुज्क-ए-बाबरी, पृथ्वीराज रासो, पद्यावत तथा अकबरनामा आदि प्रमुख हैं।

प्रश्न 3.
हर्ष के पश्चात् भारत की राजनैतिक स्थिति में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर:
हर्षवर्धन की मृत्यु के पश्चात् भारत में राजनैतिक रिक्तता की स्थिति निर्मित हो गई और विकेन्द्रीकरण की प्रवृत्ति के कारण सामन्ती शक्तियों ने देश की राजनैतिक एकता को छिन्न-भिन्न कर दिया। इसी दौरान भारत में अनेक राजवंश उत्पन्न हो गये। जैसे उत्तर भारत में गुर्जर प्रतिहार, पालवंश, चालुक्य, परमार, चौहान मुख्य राजवंश थे। दक्षिण भारत में पल्लव, राष्ट्रकूट, कल्याणी के चालुक्य, चेर, पाण्ड्य, चोल प्रमुख साम्राज्य थे।

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प्रश्न 4.
पल्लव कौन थे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पल्लव :
पल्लवों का उदय कृष्णा नदी के दक्षिण प्रदेश (आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडु) में हुआ। नरसिंह वर्मन प्रथम और नरसिंह वर्मन द्वितीय इस वंश के प्रतापी शासक हुए। कालान्तर में चालुक्य, पाण्ड्य और राष्ट्रकूटों से पल्लवों के संघर्ष चलते रहे। लगभग 899 ई. में इस वंश के अन्तिम शासक अपराजित वर्मन को चोलों ने हराकर इस राज्य पर अपना अधिकार कर लिया। पल्लव राजाओं ने लगभग 500 वर्षों तक शासन किया।

प्रश्न 5.
चालुक्य कौन थे? चालुक्य प्रशासन की प्रमुख विशेषताएँ बताइए। (2008, 11)
उत्तर:
चालुक्य :
चालुक्य वंश ने दक्षिण भारत में छठी शताब्दी ई. के मध्य से आठवीं शताब्दी के मध्य शासन किया। इसकी राजधानी कर्नाटक (वातापी) थी, तथा यहीं से इस वंश का राजनैतिक उत्कर्ष हुआ, इसलिए इन चालुक्यों को बादायी (वातापी) के चालुक्य कहा जाता है। चालुक्य राजाओं ने दक्षिण भारत को राजनीतिक एकता के सूत्र में एकीकृत करने का प्रयास किया। इनके प्रशासन की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार थीं –

  1. राजतन्त्र शासन प्रणाली प्रचलित थी। सम्राट प्रशासन तन्त्र का केन्द्र बिन्दु होता था।
  2. अपने विजय करे हुए प्रदेशों पर सामन्तों को शासन करने का अधिकार प्रदान किया।
  3. ग्राम, शासन की सबसे छोटी इकाई थी।
  4. चालुक्यों ने लगभग दो सौ वर्षों तक शासन किया।

प्रश्न 6.
चोल प्रशासन की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। (2008, 09, 10)
उत्तर:
दक्षिण भारत का प्राचीनतम शक्तिशाली राजवंश चोल था। प्राचीन चोल शासकों का वर्णन संगम साहित्य में किया गया है। चोल राजवंश अपने प्रशासनिक सुधार कार्यों के लिए इतिहास में जाना जाता है।

चोल प्रशासन की विशेषताएँ –

  1. चोल शासन का स्वरूप राजतन्त्रात्मक था। राजा ही शासन का प्रमुख संचालक था।
  2. साम्राज्य प्रान्तों में जो मण्डलम कहलाते थे, बँटा हुआ था। मण्डलम को वलनाडुओं (जिलों) में विभाजित किया गया था।
  3. शासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम थी व महत्त्वपूर्ण इकाई ग्राम सभा तीन भागों में अर्थात् उर (आम लोगों की सभा), सभा (विद्वान, ब्राह्मण), नगरम् (व्यापारी, दुकानदार, शिल्पी) में विभाजित थी।
  4. ग्राम की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अनेक समितियाँ गठित थीं।
  5. राज्य की आय का मुख्य स्रोत भूमि तथा व्यापार कर थे।

प्रश्न 7.
नीचे दिये गये राजवंशों पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए
(i) राष्ट्रकूट
(ii) चेर राज्य
(iii) पाण्डय राज्य।
उत्तर:
(i) राष्ट्रकूट :
इस वंश के प्रारम्भिक नरेश का नाम नन्नराज था। इस वंश के द्वितीय शासक (650 से 665 ई.) ने साम्राज्य विस्तार के लिए अनेक कार्य किये। राष्ट्रकूट शासक दक्षिण भारत में अपनी शक्ति का साम्राज्य विस्तार के लिये जाने जाते हैं। कन्नौज तथा उत्तर भारत पर अधिकार करने के लिये राष्ट्रकूटों को गुर्जर प्रतिहार व पाल वंश से सतत् संघर्ष करना पड़ा। जिससे इनकी शक्ति कमजोर हो गई। लगभग 973 ई. में चालुक्य शासक तैलप द्वितीय ने अन्तिम राष्ट्रकूट शासक कर्क द्वितीय को पराजित कर उसके राज्यों पर अपना अधिकार कर लिया।

(ii) चेर राज्य :
चेर वंश की स्थापना प्राचीन काल में हुई थी इसका उल्लेख अशोक के शिलालेखों में मिलता है। इनके राज्य में मलाबार, त्रावणकोर और कोचीन सम्मिलित थे। चेर राज्य के बन्दरगाह व्यापार के बड़े केन्द्र थे। ये अधिक समय तक शासन नहीं कर सके। आठवीं शताब्दी में पल्लवों ने, दसवीं शताब्दी में चोलों ने तथा तेरहवीं शताब्दी में पाण्डयों ने चेर राज्य पर अधिकार किया।

(iii) पाण्डय राज्य :
पाण्डय राज्य प्राचीन तमिल राज्यों में प्रमुख था। जिसकी राजधानी मदुरै थी। पाण्डय राजाओं में अतिकेशरी भारवर्मन प्रसिद्ध शासक रहा।

प्रश्न 8.
गुर्जर प्रतिहार वंश का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
गुर्जर प्रतिहार :
प्रतिहार वंश का संस्थापक नागभट्ट प्रथम था। इसने सम्पूर्ण मालवा तथा पूर्वी राजस्थान को अपने अधीन कर लिया था। नागभट्ट के पश्चात् दो छोटे-छोटे शासक हुए जिनके शासन का विशेष उल्लेख नहीं है। इनके पश्चात् चौथा महत्त्वपूर्ण शासक वत्सराज हुआ जिसने साम्राज्य विस्तार के प्रयास किये। वत्सराज के पश्चात् क्रमश: नागभट्ट द्वितीय, रामचन्द्र, मिहिर भोज, महेन्द्र पाल, भोज द्वितीय तथा महिपाल आदि शासक हुए। महिपाल के पश्चात् प्रतिहार वंश का पतन हो गया। गुर्जर प्रतिहार राजवंश ने आठवीं शताब्दी से ग्यारहवीं शताब्दी तक शासन किया।

प्रश्न 9.
पाल वंश और चालुक्य वंश पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
पालवंश :
इस वंश का संस्थापक गोपाल था। इस वंश के प्रमुख शासक धर्मपाल व देवपाल थे। कन्नौज पर अधिकार को लेकर पाल शासकों का प्रतिहारों और राष्ट्रकूटों से संघर्ष होता रहा। बंगाल के पालवंश के शासकों ने आठवीं शताब्दी के मध्य में उत्तर भारत में एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया।

चालुक्य वंश :
गुजरात के सोलंकी (चालुक्य वंश) का संस्थापक मूलराज था। यह राजवंश दो शाखाओं बादामी के चालुक्य और कल्याणी के चालुक्य के नाम से प्रसिद्ध हुआ। पुलकेशिन इस राजवंश का महान् राजा था। इस वंश के शासक भीम प्रथम के समय महमूद गजनवी ने गुजरात पर आक्रमण किया था, जिसमें भीम प्रथम पराजित हुआ था।

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प्रश्न 10.
राजा भोज कौन था? उसकी उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
राजा भोज परमार वंश का एक महान् तथा प्रतिभाशाली शासक था। वह सिन्धुराज का पुत्र था। वह महान् विजेता, उच्चकोटि का लेखक, कवि विद्यानुरागी और विद्वान् था। उसकी राजसभा में अनेक विद्वान् और कवि आश्रय पाते थे। उसके अनेक मन्दिर, राज प्रासाद, तालाब निर्मित कराये। प्रसिद्ध भोजपुर मन्दिर एवं भोपाल का बड़ा तालाब राजा भोज के काल में बने हैं। उसके समय में धारा नगरी (वर्तमान मध्य प्रदेश का धार जिला) साहित्य और संस्कृति का संगम केन्द्र थी। डॉ. डी. जी. गांगुली के अनुसार, “जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हुई भोज की ये सभी उपलब्धियाँ, उसे मध्ययुगीन भारत के महानतम् शासकों में एक स्थान प्रदान करती है।

प्रश्न 11.
नीचे दिये गये राजवंशों के बारे समझाइए
(i) चाहमान (चौहान) वंश
(ii) चंदेल वंश।
उत्तर:
(i) चाहमान (चौहान) वंश :
इस वंश का प्रथम स्वतन्त्र शासक विग्रहराज द्वितीय था। इस वंश का राज्य जोधपुर और जयपुर के मध्यवर्ती सांभर प्रदेश तक विस्तृत था। इस वंश के अजयराज ने अजयमेरु (अजमेर) नगर की नींव डाली। चौहान वंश का सबसे शक्तिशाली और अन्तिम शासक पृथ्वीराज चौहान था।

(ii) चंदेल वंश :
चन्देल वंश की स्थापना नवीं शताब्दी के प्रारम्भ में हुई थी। बुन्देलखण्ड में चंदेल शासकों का प्रभुत्व था। इस राज्य की राजधानी खुजराहो थी। इस वंश के प्रमुख शासक नन्नुक, यशोवर्मन, धंग, विद्याधर, कीर्तिवर्मन, परमार्दिदेव थे। चन्देल राजाओं का शासनकाल प्रगति की दृष्टि से सुविख्यात है।

प्रश्न 12.
उत्तर मध्यकाल के विषय में क्या जानते हैं?
उत्तर:
उत्तर मध्यकाल-तेरहवीं शताब्दी से अठारहवीं शताब्दी का काल उत्तर मध्यकाल के रूप में जाना जाता है। इस काल में भारत में एक के बाद एक विदेशी आक्रमणकारियों ने अपनी विध्वंसक गतिविधियों को जारी रखा जिसका समय-समय पर भारतीयों ने कड़ा प्रतिरोध किया। कठिन संघर्ष के बाद आक्रमणकारी भारत में अपना शासन स्थापित कर सके।

प्रश्न 13.
महमूद गजनवी के आक्रमणों का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
महमूद गजनवी के आक्रमणों से भारत पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े –

  1. पंजाब गजनवी साम्राज्य का अंग बन गया।
  2. राजपूत राजाओं की सैनिक शक्ति को गहरा आघात लगा।
  3. महमूद के आक्रमण से तुर्कों को भारत की राजनीतिक दुर्बलता का ज्ञान हुआ, जिससे अन्य आक्रमणकारियों को प्रोत्साहन मिला।
  4. भारत की अपार धन-सम्पदा को महमूद लूट कर ले गया तथा लाखों लोगों की हत्या हुई।
  5. महमूद गजनवी के आक्रमणों से भारतीय स्थापत्य-कला तथा मूर्ति-कला को गहरा आघात लगा क्योंकि उसने मथुरा, कन्नौज, नगरकोट तथा सोमनाथ के मन्दिरों तथा उनकी मूर्तियों को पूर्णतया नष्ट कर दिया।

प्रश्न 14.
रजिया सुल्तान कौन थी? उसने किस प्रकार से विद्रोहों का दमन किया?
अथवा
रजिया सुल्तान पर टिप्पणी लिखिए। (2009)
उत्तर:
सुल्तान रजिया इल्तुतमिश की होनहार तथा विदुषी व प्रतिभाशाली पुत्री थी। 1236 ई. में इल्तुतमिश के पुत्र की मृत्यु के पश्चात् रजिया दिल्ली की शासिका बनी। इल्तुतमिश रजिया की योग्यता तथा प्रतिभा से विशेष प्रभावित था। मिन्हाज ने लिखा है कि इल्तुतमिश से जब उसके उत्तराधिकारी के विषय में पूछा गया तो उसका कहना था-“मेरे पुत्रों में कोई भी सुल्तान बनने योग्य नहीं है। मेरी मृत्यु के पश्चात् आप देखेंगे कि कोई भी इतना योग्य नहीं है जो इस देश पर शासन कर सके।” इल्तुतमिश ने रजिया को समुचित शिक्षा भी प्रदान की थी।

रजिया ने तत्कालीन विद्रोहों का दमन बड़ी कुशलता तथा रणनीति से किया। बदायूँ, झाँसी, मुल्तान तथा लाहौर के प्रान्तपतियों ने अपनी सेनाओं को लेकर दिल्ली को घेर लिया था। रजिया अत्यन्त साहसी महिला होने के साथ-साथ कूटनीतिज्ञ भी थी। उसने बड़ी चतुरता और कूटनीति से विद्रोही प्रान्तपतियों में फूट डलवा कर लोगों ने विद्रोह किया जिसका रजिया ने शक्तिशाली सेना भेजकर दमन कर दिया।

प्रश्न 15.
अलाउद्दीन खिलजी के ऊपर टिप्पणी लिखिए। (2011)
उत्तर:
अलाउद्दीन महत्त्वाकांक्षी था। उसकी इच्छा सम्पूर्ण भारत का सुल्तान बनने की थी। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने उत्तर भारत में सिन्ध, मुल्तान, गुजरात, जालौर, जैसलमेर, रणथम्भौर, चित्तौड़, उज्जैन एवं चंदेरी पर आक्रमण किया और उन पर विजय प्राप्त की। उसने एक विशाल सेना तथा गुप्तचर विभाग का गठन किया। उसने विद्रोही सरदारों तथा अमीरों की शक्ति को कुचल दिया। 1316 ई. में अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु के साथ ही खिलजी वंश का पतन आरम्भ हो गया।

प्रश्न 16.
मुहम्मद बिन तुगलक की प्रमुख योजनाओं को संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
मुहम्मद बिन तुगलक की योजनाएँ-मुहम्मद तुगलक अत्यन्त महत्त्वाकांक्षी सुल्तान था। वह अपनी महत्त्वाकांक्षी योजनाओं के कारण विश्व इतिहास में प्रसिद्ध हो गया। दोआब कर वृद्धि, दिल्ली के स्थान पर दौलताबाद (देवगिरि) को राजधानी बनाने की योजना, सोना-चाँदी के सिक्कों के स्थान पर ताँबे के सिक्के (सांकेतिक मुद्रा) का चलन, विजयों की कथित योजना बनाना आदि ऐसी योजनाएँ थीं जिनको कार्य रूप में परिणत किया गया और फिर वापस भी ले लिया गया। योजनाओं को बनाना, लागू करना और वापस लेना, धन और समय की बर्बादी थी।

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प्रश्न 17.
तैमूर कौन था? उसके भारत पर आक्रमण करने के क्या उद्देश्य थे?
उत्तर:
समरकन्द का शासक तैमूर अत्यधिक साहसी, वीर और महत्त्वाकांक्षी था। भारत की अपार धन-सम्पत्ति उसे भारत पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित कर रही थी। साथ ही उसके भारत में आक्रमण का उद्देश्य धार्मिक भी था। 1398 ई. में एक विशाल सेना के साथ भारत में प्रवेश किया और शीघ्र ही दिल्ली पर अधिकार कर लिया। तैमूर की भारत पर शासन की इच्छा नहीं थी। अत: लूट-पाट, भीषण नरसंहार एवं कृषि को अपार हानि पहुँचाकर वह वापस समरकन्द चला गया।

प्रश्न 18.
इब्राहीम लोदी का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
सिकन्दर लोदी की मृत्यु के पश्चात् अफगान अमीरों ने सर्वसम्मति से उसके पुत्र इब्राहीम लोदी को 1517 ई. में सिंहासन पर बैठाया। उसने ‘इब्राहीम शाह’ की उपाधि धारण की। उसकी विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य अपने पिता द्वारा प्रारम्भ किये गये विजय कार्य को पूरा करना था। सर्वप्रथम उसने ग्वालियर पर आक्रमण किया तथा ग्वालियर के राजा विक्रमाजीत को पराजित कर अपना सामन्त बना लिया। इब्राहीम ने मेवाड़ के राणा सांगा पर भी आक्रमण किया परन्तु इब्राहीम लोदी इस युद्ध में पराजित हुआ। इब्राहीम लोदी का पंजाब के सूबेदार दौलत खाँ से मतभेद हो गया था। दौलत खाँ ने काबुल के शासक बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए निमन्त्रित किया। 1526 ई. में बाबर ने भारत पर आक्रमण कर दिया। पानीपत के मैदान में इब्राहीम लोदी की भयंकर पराजय हुई। इस युद्ध में ही दिल्ली सल्तनत का अन्त हो गया तथा भारत में मुगल वंश की नींव पड़ी।

प्रश्न 19.
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना का विवरण दीजिए।
उत्तर:
मुहम्मद तुगलक के शासनकाल में विजयनगर राज्य की स्थापना हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने 1336 ई. में की थी। ये दोनों भाई वारंगल के शासक प्रताप रुद्रदेव काकतीय के कोषागार में कार्य करते थे। जब वारंगल पर मुसलमानों का अधिकार स्थापित हो गया तो बन्दी बनाकर उन्हें दिल्ली भेज दिया गया। परन्तु मुहम्मद तुगलक ने उन्हें मुक्त कर अनगोड़ी का प्रदेश उनको दे दिया। इस प्रदेश में दोनों भाइयों ने विजयनगर राज्य की स्थापना की। हरिहर इस प्रदेश का प्रथम शासक हुआ तथा उसकी मृत्यु के पश्चात् उसका भाई बुक्का शासक हुआ।

प्रश्न 20.
तालीकोट के युद्ध के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
तालीकोट का युद्ध मुस्लिम राज्यों की संयुक्त सेना तथा विजयनगर के मन्त्री रामराय के मध्य 1565 ई. में कृष्णा नदी के तट पर हुआ था। रामराय ने अहमदनगर पर आक्रमण करके उसे तहत-नहस कर दिया था तथा मस्जिदों को तोड़ा तथा कुरान का अपमान किया। रामराय के अत्याचारों से मुस्लिम राज्यों में रोष फैल गया। अत: बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुण्डा तथा बीदर की सम्मिलित सेनाओं ने विजयनगर पर आक्रमण किया। 1565 ई. में तालीकोट के युद्ध में रामराय को भयंकर पराजय मिली, वह पकड़ा गया तथा अहमदनगर के सुल्तान ने उसकी हत्या कर दी।

प्रश्न 21.
नरसिंह सालुव कौन था? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
नरसिंह सालुव :
नरसिंह सालुव वीर, शक्तिशाली और योग्य शासक था। उसने साम्राज्य में हो रहे विद्रोहों को दबाया और बहमनी राज्य द्वारा जीते गये प्रदेशों पर पुनः अधिकार किया। उसने शक्तिशाली सेना के गठन के लिए अरब व्यापारियों से श्रेष्ठ घोड़े क्रय किये। वह साहित्यानुरागी था। इसके काल में प्रसिद्ध ग्रन्थ जेमनी भारतम् लिखा गया। नरसिंह सालुव की 1490 ई. में मृत्यु हो गई।

प्रश्न 22.
बहमनी राज्य की स्थापना किस प्रकार हुई?
उत्तर:
बहमनी राज्य की स्थापना दक्षिण भारत में मुहम्मद तुगलक के विरुद्ध विद्रोह की भावना से हुई थी। इस राज्य की नींव रखने वाला हसन गंगू था जो अमीर उमरा की सहायता से 1347 ई. में अलाउद्दीन बहमनशाह के नाम से स्वतन्त्र शासक बन बैठा। इस प्रकार दक्षिण भारत में मुस्लिम राज्य की स्थापना बहमनी राज्य के नाम से हुई। बहमनशाह, मुहम्मदशाह, फिरोजशाह, अहमदशाह तथा अलाउद्दीन द्वितीय आदि प्रमुख बहमनी शासक थे। अलाउद्दीन बहमनशाह ने गुलबर्गा में अपनी राजधानी स्थापित की तथा उसका नाम अहसनाबाद रखा। इस काल में मुहम्मद तुगलक उत्तरी भारत की समस्याओं में उलझा हुआ था। अत: दक्षिण भारत में बहमनी राज्य को फलने-फूलने का पर्याप्त अवसर मिला।

प्रश्न 23.
मध्यकालीन भारतीय सम्राटों में अकबर का नाम विशेष उल्लेखनीय है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अकबर :
मध्यकालीन भारतीय सम्राटों में अकबर का नाम विशेष उल्लेखनीय है। उसे भारत का एक राष्ट्रीय शासक कहा जाता है। हुमायूँ की मृत्यु के पश्चात् 1556 ई. में वह मुगल सम्राट बना। जब वह सम्राट बना उस समय मुगल साम्राज्य की सीमा अत्यन्त सीमित थी। अकबर ने अनेक युद्ध कर विजय प्राप्त की तथा एक विशाल साम्राज्य की नींव डाली। अकबर ने धार्मिक सहिष्णुता की नीति का पालन दिया तथा राजपूतों को अपना मित्र बनाया। समस्त धर्मों के उत्तम सिद्धान्तों का समन्वय करके उसने दीन-ए-इलाही धर्म चलाया। हिन्दुओं को उसने योग्यता के आधार पर उच्च पदों पर भी नियुक्त किया। उसके शासन काल में कला और साहित्य का भी विकास हुआ। इन कारणों से ही अकबर को एक राष्ट्रीय शासक कहते हैं।

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प्रश्न 24.
जहाँगीर का संक्षिप्त जीवन परिचय दीजिए।
उत्तर:
जहाँगीर :
जहाँगीर का जन्म 30 अगस्त, 1569 ई. में हुआ था। उसका बचपन का नाम सलीम था। अकबर की मृत्यु के बाद 1605 ई. मुगल सिंहासन पर आसीन हुआ। जहाँगीर ने अनेक विवाह किये थे जिनमें शेर अफगान की विधवा नूरजहाँ से किया गया विवाह प्रमुख था। जहाँगीर नूरजहाँ से इतना प्रभावित था कि उसने सम्पूर्ण राज्य का भार उसी पर छोड़ दिया। जिसके परिणामस्वरूप उसका अन्तिम समय कष्ट में व्यतीत हुआ। जहाँगीर के एक पुत्र खुर्रम (शाहजहाँ) ने विद्रोह कर दिया जिसके कारण राज्य की स्थिति चिन्ताजनक हो गई। 1627 ई. में जहाँगीर की मृत्यु हो गयी।

प्रश्न 25.
शाहजहाँ कौन था? उसके मुगल साम्राज्य के विस्तार का वर्णन संक्षेप में कीजिए।
उत्तर:
शाहजहाँ :
शाहजहाँ जहाँगीर का पुत्र था। वह एक योग्य, प्रतिभाशाली तथा साहसी शहजादा था। जहाँगीर के शासन काल में वह दक्षिण का सूबेदार रह चुका था तथा अनेक सैनिक सफलताएँ भी प्राप्त की थीं। 1628 ई. में वह मुगल सिंहासन पर बैठा। शासक बनते ही उसके खानजहाँ लोदी का विद्रोह, बुन्देलखण्ड तथा नुरपूर के जमींदार जगतसिंह के विद्रोहों का दमन किया। पुर्तगालियों से युद्ध कर उन्हें खदेड़ दिया। उसने अपने राज्य को मजबूत बनाने के उद्देश्य से दक्षिण भारत के अहमदनगर, गोलकुण्डा, बीजापुर पर आक्रमण किये। मराठों के साथ भी मुगल सेना का संघर्ष हुआ। शाहजहाँ के चार पुत्र दाराशिकोह, शाहशुजा, औरंगजेब तथा मुराद थे। शाहजहाँ के जीवनकाल में ही सिंहासन के लिए संघर्ष प्रारम्भ हो गया था जिसमें औरंगजेब को सफलता मिली।

प्रश्न 26.
औरंगजेब के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
औरंगजेब :
शाहजहाँ 1657 ई. में बीमार पड़ा। उसके पुत्रों में उत्तराधिकार का युद्ध छिड़ गया। औरंगजेब ने अपने सभी भाइयों व सम्बन्धियों का रक्त बहाकर 1658 ई. में सिंहासन पर अधिकार कर लिया। उसने अपने पिता शाहजहाँ को आगरा के लाल किले में बन्दी बना दिया। 1666 ई. में शाहजहाँ की बन्दी के रूप में मृत्यु हुई।

औरंगजेब ने राजपूतों, जाटों, सिक्खों और मराठों को भी अपना विरोधी बना लिया जिसके कारण राज्य में निरन्तर विद्रोह हुए। शिवाजी ने उसकी हिन्दू विरोधी नीति के कारण उसका सामना किया और एक स्वतन्त्र मराठा राज्य की नींव डाली। सिक्खों के नवें गुरु तेगबहादुर ने विद्रोह किया जिनका औरंगजेब ने वध करवा दिया। तब गुरु गोविन्दसिंह ने सिक्ख सेना (खालसा) को तैयार किया। दुर्गादास राठौड़ जैसे राजपूतों ने औरंगजेब को चुनौतियाँ दीं। 1707 ई. में औरंगजेब की मृत्यु हो गयी और उसी के साथ ही मुगल साम्राज्य का पतन भी प्रारम्भ हो गया।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आठवीं शताब्दी में उत्तरी भारत के पाँच प्रमुख राजवंशों के नाम लिखिए और किसी एक राजवंश का वर्णन कीजिए। (2011)
उत्तर:
आठवीं शताब्दी में उत्तरी भारत के प्रमुख राजवंश निम्नलिखित हैं-

  1. गुर्जर प्रतिहार
  2. पालवंश
  3. चालुक्य वंश (सोलंकी)
  4. परमार वंश
  5. चंदेल वंश।

गुर्जर प्रतिहार :
प्रतिहार वंश का संस्थापक नागभट्ट प्रथम था। इसने सम्पूर्ण मालवा तथा पूर्वी राजस्थान को अपने अधीन कर लिया था। नागभट्ट के पश्चात् दो छोटे-छोटे शासक हुए जिनके शासन का विशेष उल्लेख नहीं है। इनके पश्चात् चौथा महत्त्वपूर्ण शासक वत्सराज हुआ जिसने साम्राज्य विस्तार के प्रयास किये। वत्सराज के पश्चात् क्रमश: नागभट्ट द्वितीय, रामचन्द्र, मिहिर भोज, महेन्द्र पाल, भोज द्वितीय तथा महिपाल आदि शासक हुए। महिपाल के पश्चात् प्रतिहार वंश का पतन हो गया। गुर्जर प्रतिहार राजवंश ने आठवीं शताब्दी से ग्यारहवीं शताब्दी तक शासन किया।

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 2 पर्यावरण संरक्षण के प्रयास व सफलताएँ

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 2 पर्यावरण संरक्षण के प्रयास व सफलताएँ

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
आधुनिक कृषि में प्रोत्साहन दिया जा रहा है – (2016)
(i) जैविक खेती को
(ii) जैव उर्वरकों के उपयोग को
(iii) जैव कीटनाशकों के उपयोग को
(iv) उपर्युक्त सभी को।
उत्तर:
(iv) उपर्युक्त सभी को।

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प्रश्न 2.
पर्यावरण प्रभाव के निर्धारण का अन्तिम स्तर है
(i) विस्तृत प्रभाव निर्धारण
(ii) आलोचनात्मक पहलुओं का अध्ययन,
(iii) तीव्र प्रभाव निर्धारण
(iv) जोखिम का विश्लेषण।
उत्तर:
(i) विस्तृत प्रभाव निर्धारण

प्रश्न 3.
भारत में पर्यावरण प्रभाव के निर्धारण की जिम्मेदारी है
(i) पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की
(ii) रक्षा मंत्रालय की
(iii) पर्यटन एवं शहरी मंत्रालय की
(iv) कृषि मंत्रालय की।
उत्तर:
(i) पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की

प्रश्न 4.
चिपको आन्दोलन का प्रारम्भ हुआ (2008)
(i) कर्नाटक में
(ii) पूर्वोत्तर भारत में
(iii) उत्तराखण्ड में
(iv) केरल में।
उत्तर:
(iii) उत्तराखण्ड में

प्रश्न 5.
भारत में सी. एन. जी. का उपयोग सबसे पहले प्रारम्भ हुआ (2009, 12)
(i) मुम्बई में
(ii) दिल्ली में
(iii) कोलकाता में
(iv) चेन्नई में।
उत्तर:
(ii) दिल्ली में

रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए

  1. साइलेण्ट वेली …………. राज्य का एक छोटा-सा वन क्षेत्र है।
  2. चिपको आन्दोलन की शुरूआत वर्ष ………… में हुई।

उत्तर:

  1. केरल,
  2. 19741

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण संरक्षण से क्या आशय है? समझाइए। (2008)
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण और संसाधन को नष्ट होने से बचाने के लिए आयोजित प्रबन्धन को पर्यावरण संरक्षण कहते हैं।

प्रश्न 2.
पर्यावरण प्रभाव निर्धारण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
पर्यावरण प्रभाव निर्धारण पर्यावरणीय गुणवत्ता को बनाए रखने की महत्त्वपूर्ण तकनीक है।

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प्रश्न 3.
पर्यावरण प्रभाव का निर्धारण भारत में किस मंत्रालय की जिम्मेदारी है?
उत्तर:
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की।

प्रश्न 4.
जैविक खेती से आप क्या समझते हैं? (2017, 18)
उत्तर:
जैविक खेती वह खेती है जिसमें कृत्रिम रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया जाता है, वरन् जैविक खाद (गोबर या पेड़-पौधों की पत्तियों से बनी हरी खाद) का उपयोग होता है।

प्रश्न 5.
पर्यावरण प्रभाव निर्धारण के तीन प्रमुख स्तर कौन-कौन-से हैं?
उत्तर:

  1. प्रथम स्तर-प्रारम्भिक जाँच;
  2. द्वितीय स्तर-तीव्र प्रभाव निर्धारण;
  3. तृतीय स्तर-विस्तृत प्रभाव निर्धारण।

प्रश्न 6.
हमें पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता क्यों है? (2008)
उत्तर:
भावी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मानव, वनस्पति, जीव-जन्तु एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों (जल, वायु, खनिज) को संरक्षित किया जाना आवश्यक है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चिपको आन्दोलन क्या है एवं इसके आधारभूत तत्व कौन-कौन-से हैं?
उत्तर:
चिपको आन्दोलन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए एक कारगर उपाय है। यह केवल वृक्षों को बचाने का आन्दोलन ही नहीं है, अपितु भूमि नीति में आमूल परिवर्तन की माँग कर स्थायी कल्याणकारी आर्थिक पक्ष (अनाज, चारा, ईंधन, खाद, उर्वरक, कपड़ा) के लिए एक आधार प्रस्तुत करता है। इस आन्दोलन में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय है। इस आन्दोलन की सफलता ने सिद्ध कर दिया है कि गहन समस्याओं का निदान केवल नियम कानून बनाने से ही सम्भव नहीं होता। इसके लिए जनचेतना और अधिकारों की समझ होना भी आवश्यक है।

प्रश्न 2.
पर्यावरण संरक्षण किन महत्त्वपूर्ण उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आवश्यक है ? समझाइए।
उत्तर:
पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता :
पृथ्वी पर विविध प्रकार के पेड़-पौधे और जन्तु निवास करते हैं। मनुष्य पृथ्वी का सबसे बुद्धिमान और शक्तिशाली जीव है, पर प्रकृति ने मनुष्य को यह अधिकार नहीं दिया है कि वह यहाँ के संसाधनों को नष्ट करें। आवश्यकता इस बात की है कि हम इन संसाधनों को सजगता के साथ उपयोग करें। आज पर्यावरण असन्तुलन विश्व की सबसे बड़ी समस्या है। दूसरी ओर भावी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मानव, वनस्पति, जीव-जन्तु एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों (जल, वायु, खनिज) को संरक्षित किया जाना आवश्यक है।

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प्रश्न 3.
ई.आई.ए. की क्या भूमिका है? किन तत्वों को आधार मानकर ई. आई. ए. तैयार किया जाता है, वर्णन कीजिए।
(2009)
उत्तर:
पर्यावरणीय प्रभाव अनुमानक (ई.आई.ए.)-वर्तमान में पर्यावरण प्रदूषण और विघटन उच्च स्तर तक पहुंच चुका है। पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे, इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए पर्यावरणीय प्रभाव अनुमानक या ई.आई.ए. (Environment Impact Assessment) महत्त्वपूर्ण हो जाता है। पर्यावरणीय प्रभाव का निर्धारण अपनी परियोजनाओं से पर्यावरण पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव को शामिल करता है। पर्यावरण प्रभाव अनुमानक परियोजना से होने वाले लाभकारी और नुकसानदेह प्रभाव का मूल्यांकन गुणात्मक और संख्यात्मक दोनों प्रकार से करता है। ई.आई.ए. का लक्ष्य इस बात का ध्यान रखना होता है कि पर्यावरण का विघटन कम से कम हो।

पर्यावरणीय प्रभाव अनुमानक (ई.आई.ए.) के तत्व –

  1. भूमि पर प्रभाव-भूमि विघटन
  2. भूकम्प की सम्भावना
  3. मिट्टी एवं वायु की गुणवत्ता, धरातलीय एवं भूगर्भिक जल
  4. पौधों एवं वन्य जीवों की खतरे में पड़ी किस्मों की जानकारी
  5. ध्वनि प्रदूषण की स्थिति का आकलन
  6. सामाजिक आर्थिक प्रभाव
  7. अवशिष्ट व बचे पदार्थों का पर्याप्त उपयोग तथा
  8. जोखिम विश्लेषण व आपदा प्रबन्धन।

प्रश्न 4.
सी.एन.जी. से क्या आशय है? (2018) भारत में इसका सर्वाधिक उपयोग किस रूप में किया जा रहा है?
उत्तर:
सी.एन.जी. यानी कम्प्रैस्ड नेचुरल गैस धरती के भीतर पाए जाने वाले हाइड्रोकार्बन का मिश्रण है और इसमें 80 से 90 प्रतिशत मात्रा मीथेन गैस की होती है। सी.एन.जी. को वाहनों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने के लिए 200 से 250 किग्रा. प्रति वर्ग सेमी. तक दबाया यानी कम्प्रैस किया जाता है। यह गैस रंगहीन, गंधहीन, हवा से हल्की तथा पर्यावरण की दृष्टि से सबसे कम प्रदूषण उत्पन्न करती है। सी.एन.जी. को जलाने के लिए एल.पी.जी. की अपेक्षा ऊँचे तापमान की आवश्यकता पड़ती है इसलिए आसानी से आग पकड़ने का खतरा भी नहीं रहता। इसका उपयोग आज बिजलीघरों, खाद-कारखानों, इस्पात कारखानों, घरेलू ईंधन तथा वाहन के ईंधन के रूप में हो रहा है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चिपको आन्दोलन से क्या आशय है? इसका प्रारम्भ कैसे हुआ तथा इसकी अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के क्या कारण थे? (2008, 15)
अथवा
चिपको आन्दोलन से क्या आशय है? समझाइए। (2013, 17)
उत्तर:
विश्व प्रसिद्ध ‘चिपको आन्दोलन’ गढ़वाल की महिलाओं द्वारा चलाया गया था। आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य वनों की कटाई पर रोक लगाना था। इस आन्दोलन के प्रणेता सुन्दरलाल बहुगुणा हैं। इनके द्वारा प्रारम्भ किया गया चिपको आन्दोलन जंगल बचाने का एक पर्यायवाची शब्द बन चुका है।

यह केवल वृक्षों को बचाने का आन्दोलन ही नहीं है, अपितु भूमि नीति में आमूल परिवर्तन की माँग कर स्थायी कल्याणकारी आर्थिक पक्ष (अनाज, चारा, ईंधन, खाद, उर्वरक, कपड़ा) के लिए एक आधार. प्रस्तुत करता है। इस आन्दोलन का कर्म क्षेत्र, अब केवल भारतवर्ष में न होकर स्विट्जरलैण्ड जर्मनी और हॉलैण्ड भी है। यह आन्दोलन 1974 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश (वर्तमान में उत्तराखण्ड) सरकार द्वारा जंगलों को काटने का ठेका देने के विरोध में एक गांधीवादी संस्था ‘दशोली ग्राम स्वराज मण्डल’ ने चमोली जिले के गोपेश्वर में रेनी नामक ग्राम में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् बहुगुणा के नेतृत्व में प्रारम्भ किया गया।

इस आन्दोलन के तहत् महिलाएँ पेड़ों से चिपककर पेड़ को काटने से रक्षा करती थीं। पुरुषों की अनुपस्थिति में रेनी गाँव की एक साधारण महिला गौरा देवी श्रमिकों द्वारा वृक्षों को काटने से रोकने के लिए आगे आई। गौरा देवी ने गाँव में घर-घर जाकर लड़कियों और स्त्रियों को प्रतिरोध करने के लिए प्रेरित किया। गौरा देवी के नेतृत्व में वृक्षों को बचाने के लिए अहिंसक तकनीक चिपको का प्रयोग किया गया। स्त्रियों का कहना था कि ये जंगल हमारा मायका है, इसे हम किसी भी कीमत पर कटने नहीं देंगे। महिलाओं ने निरन्तर 48 घण्टे दिन-रात जंगल को घेरे रखा और ठेकेदार व वनकर्मियों की बन्दूक का भय भी इनकी हिम्मत को कम न कर पाया। इस घटना के बाद पूरे उत्तराखण्ड में वन संरक्षण हेतु जनता में नवीन उत्साह का संचार हुआ। इस आन्दोलन को गति प्रदान करने के लिए सुन्दरलाल बहुगुणा ने 2800 किमी की पदयात्रा की।

इस आन्दोलन के फलस्वरूप हिमालय क्षेत्र के वनों को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की माँग स्वीकार की गई। इस क्षेत्र के वनों के हरे वृक्षों को अगले 15 वर्षों तक काटने पर रोक लगा दी गयी। परिणामस्वरूप जंगलों का संवर्द्धन, भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि एवं वन्य प्राणियों के शिकार पर नियन्त्रण सम्भव हुआ।

प्रश्न 2.
साइलेण्ट वैली पर टिप्पणी कीजिए। (2008, 09, 10, 12)
उत्तर:
साइलेण्ट वैली (शान्त घाटी)-साइलेण्ट वैली केरल का एक छोटा वन क्षेत्र है। यह पश्चिमी घाट पर नीलगिरि के दक्षिण-पश्चिमी ढाल पर स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल 90 वर्ग किमी है। यह क्षेत्र चारों ओर से ऊँची पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह जनसंख्याविहीन, क्षेत्र है। कुन्तीपूजा नदी साइलेण्ट वैली के बीच से होकर बहती है। इस घाटी में दुर्लभ एवं मूल्यवान वनस्पति एवं जन्तुओं का भण्डार है।

केरल राज्य विद्युत् बोर्ड कुन्तीपूजा नदी पर बाँध बनाकर जल विद्युत् पैदा करना चाहता है। इसी प्रस्ताव के कारण पर्यावरणीय विवाद प्रारम्भ हुआ। केन्द्र सरकार के पर्यावरण विभाग ने केरल सरकार को बाँध निर्माण पर पुनः विचार करने को कहा। उक्त कार्य हेतु एक समिति गठित की गयी। एम. जी. के. मेनन की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने बाँध निर्माण को पर्यावरण की अपूरणीय क्षति बताकर बाँध न बनाने की सिफारिश की। समिति की जाँच रिपोर्ट के अनुसार शान्त घाटी कुछ विशिष्ट प्रकार की वनस्पतियों एवं वन्य प्राणियों का आश्रय स्थल है। यहाँ के भूमध्यरेखीय वर्षा वन बिना मानवीय हस्तक्षेप की स्थिति में ही सुरक्षित है। 1985 में साइलेण्ट वैली ‘राष्ट्रीय आरक्षित वन क्षेत्र’ घोषित करना पड़ा। इस प्रकार जन आन्दोलन के कारण ही बहुमूल्य वर्षा वन, दुर्लभ वनस्पति एवं जीव-जन्तुओं को सुरक्षित किया जा सका।

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प्रश्न 3.
जल संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए मध्य प्रदेश में कौन-कौन-से प्रयास किये गये हैं ? विस्तार से वर्णन कीजिए। (2008,09)
उत्तर:
मध्य प्रदेश में जल संरक्षण संवर्द्धन हेतु किये गए प्रयास पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में मील के पत्थर हैं। प्रमुख प्रयास निम्न प्रकार हैं –
(1) राजीव गांधी जल संग्रहण मिशन :
वर्ष 1994 में सूखा, अकाल एवं वन विनाश की समस्याओं के समाधान के लिए राजीव गांधी जल संग्रहण मिशन का कार्य प्रारम्भ हुआ। यह मिशन अन्तिम उपभोक्ता को भूमि और जल संरक्षण कार्यक्रम से जोड़कर उसके क्रियाकलाप और रख-रखाव पर बल देता है। मिशन के तहत जल संग्रहण हेतु स्थानीय समुदाय की माँग पर स्टाप डेम और तालाब बनाये गये। इन स्टाप डेमों और तालाबों में जल संग्रहण से जल की मात्रा में वृद्धि हुई। मृदा का कटाव रुका, सिंचाई हेतु जल मिला, पेड़-पौधे हरे-भरे हुए तथा जल संकट से मुक्ति हुई एवं पशुओं को सरलता से जल उपलब्ध होने लगा जिससे पशुधन व कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई।

(2) एक पंच एक तालाब योजना :
वर्ष 1999 में राज्य सरकार ने इस योजना के अन्तर्गत पंचायत के प्रत्येक सरपंच को अपने पाँच वर्ष के कार्यकाल में कम से कम एक तालाब के निर्माण को व पुराने तालाब के सुधार को अनिवार्य कर दिया। इनकी लागत का एक-चौथाई व्यय जनता द्वारा वहन किया।

(3) मिट्टी बचाओ अभियान :
मध्य प्रदेश में तवा बाँध के कारण अत्यन्त जल-जमाव एवं खारेपन को रोकने तथा किसानों को उसके लिए मुआवजा दिलाने हेतु वर्ष 1977 में मिट्टी बचाओ आन्दोलन प्रारम्भ किया गया।

(4) पानी रोको अभियान :
वर्ष 2000 में पानी रोको अभियान के अन्तर्गत छोटे-छोटे बाँध बनाकर पानी के संग्रहण को बढ़ाया गया, इससे लगभग 7 लाख जल संग्रहण क्षेत्र विकसित हुए।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चिपको आन्दोलन के प्रणोता कौन थे? (2009)
(i) नारायण दत्त तिवारी
(ii) सुन्दरलाल बहुगुणा
(iii) उमा भारती,
(iv) चौधरी देवीलाल।
उत्तर:
(ii) सुन्दरलाल बहुगुणा

प्रश्न 2.
साइलेण्ट वैली को राष्ट्रीय उद्यान कब घोषित किया गया?
(i) 1980
(ii) 1985
(iii) 1975
(iv) 1995
उत्तर:
(ii) 1985

प्रश्न 3.
सी. एन. जी. (C.N.G) का पूरा नाम है
(i) Compressed Natural Gas
(ii) Computerised Natural Gas
(iii) Common Natural Gas
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) Compressed Natural Gas

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. मनुष्य प्रकृति का सर्जक ही नहीं, एक …………. भी है।
  2. चिपको आन्दोलन …………. के संरक्षण के लिए एक कारगर उपाय है।
  3. वर्ष 2000 में पानी रोको अभियान के अन्तर्गत ……….. बनाकर पानी के संग्रहण को बढ़ाया गया।

उत्तर:

  1. घटक
  2. प्राकृतिक संसाधनों
  3. छोटे-छोटे बाँध

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सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
कुन्तीपूजा नदी साइलेण्ट वैली के बीच से होकर गुजरती है। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
भारत में पर्यावरणीय प्रभाव निर्धारण का कार्य कृषि मन्त्रालय द्वारा किया जाता है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
भारत में सी. एन. जी का उपयोग सबसे पहले दिल्ली में प्रारम्भ हुआ। (2008)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
सन् 1999 में राज्य सरकार ने एक पंच एक तालाब योजना लागू की।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
चिपको आन्दोलन को राष्ट्रीय समर्थन व लोकप्रियता मिली।
उत्तर:
सत्य

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 2 पर्यावरण संरक्षण के प्रयास व सफलताएँ - 1

उत्तर:

  1. → (ग)
  2. → (घ)
  3. → (ङ)
  4. → (क)
  5. → (ख)

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एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
राजीव गांधी जल संग्रहण मिशन कब प्रारम्भ किया गया? (2009)
उत्तर:
1994

प्रश्न 2.
एक सस्ता, अच्छा और कम प्रदूषण फैलाने वाला ऊर्जा संसाधन, जो वाहनों के लिए उपयोगी है, क्या है?
उत्तर:
सी. एन. जी. (Compressed Natural Gas)

प्रश्न 3.
मृदा को उपजाऊ बनाने के लिए खेतों में मौसम के अनुसार बदल-बदलकर पैदावार की व्यवस्था को क्या कहते हैं?
उत्तर:
फसल चक्र

प्रश्न 4.
वे जीव जो मृदा में पौष्टिक तत्व उत्पन्न करते हैं। (2008)
उत्तर:
जैव उर्वरक

प्रश्न 5.
चिपको आन्दोलन का प्रारम्भ किस राज्य में हुआ? (2018)
उत्तर:
उत्तराखण्ड।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
फसल चक्र से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिये खेतों में मौसम के अनुसार बदल-बदलकर पैदावार की व्यवस्था करना ही फसल चक्र कहलाता है।

प्रश्न 2.
जैव उर्वरक किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे जीव जो मिट्टी में पौष्टिक तत्व पैदा करते हैं; जैसे-जीवाणु, वर्मी, फफूंद आदि जैव उर्वरक कहलाते हैं।

प्रश्न 3.
पुनः चक्रण से क्या आशय है?
उत्तर:
ऐसी वस्तुओं या उत्पादों जिनका वास्तविक मूल्य उपयोग के कारण खत्म हो गया हो, को पुनः उपयोगी बनाना पुनः चक्रण कहलाता है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण प्रभाव अनुमानक के प्रमुख उद्देश्य बताइए। (2008)
उत्तर:
पर्यावरण प्रभाव निर्धारण पर्यावरणीय गुणवत्ता को बनाए रखने की महत्त्वपूर्ण तकनीक है। इसके मुख्य उद्देश्य निम्न हैं –

  1. पर्यावरण की गुणवत्ता बनी रहे।
  2. पर्यावरण को विघटन से बचाया जाए ताकि उपचार किया जा सके।
  3. पर्यावरण को क्षति पहुँचाए बिना प्रगति हो।

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प्रश्न 2.
एक उदाहरण देकर समझाइए कि मनुष्य ने प्राकृतिक पर्यावरण की आपदाओं पर विजय कैसे प्राप्त की है?
उत्तर:
मनुष्य पहले पर्यावरण का दास था। ऐसा माना जाता है कि मानव के क्रिया-कलाप पर्यावरण के प्रतिबन्धों से प्रभावित होते हैं अर्थात् मनुष्य जिस प्रकार के पर्यावरण में रहता है, उसके क्रिया-कलाप उसी पर्यावरण के अनुसार होते हैं। परन्तु आज मनुष्य ने विज्ञान और तकनीक के विकास द्वारा पर्यावरण की आपदाओं पर विजय प्राप्त कर ली है। उसने पर्यावरण प्रतिबन्धों को हटाना सीख लिया है। उदाहरण के लिए-अब उष्ण कटिबन्धीय मरुस्थलों की भयानक गर्मी मनुष्य के लिए कोई समस्या नहीं है।

उसने इस भीषण गर्मी से बचाव के लिए वातानुकूलित (एयरकंडीशन) निवास स्थान बना लिए हैं। मनुष्य ने समुद्र के खारे जल को मीठे जल में परिवर्तित करना सीख लिया है। मनुष्य ने बाढ़ जैसी आपदाओं से बचाव हेतु नदियों पर बाँध बना लिये हैं, इन बाँधों से वह सिंचाई हेतु जल तथा विद्युत् भी प्राप्त करने लगा है। इस प्रकार स्पष्ट है कि मनुष्य ने प्राकृतिक पर्यावरण की आपदाओं पर विजय प्राप्त कर उन्हें अपनी आवश्यकतानुसार परिवर्तित कर लिया है।

प्रश्न 3.
कोई विकासात्मक परियोजना प्रारम्भ करने के पूर्व परियोजनाकर्ता एवं प्रबन्धक को किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है, वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कोई विकासात्मक परियोजना प्रारम्भ करने के पूर्व परियोजनाकर्ता एवं प्रबन्धक को यह जानना आवश्यक हो जाता है कि उस योजना का उस स्थान विशेष की जलवायु, वनस्पति, जीव-जन्तु एवं समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा। विकास की इन योजनाओं; जैसे-विद्युत् संयन्त्र, बाँध, इस्पात एवं लौह कारखाने का पर्यावरण पर क्या प्रभाव होगा। खाद्यान्न तेल, कागज, सीमेण्ट उद्योग में यह और भी अधिक आवश्यक हो जाता है। अत: इन योजनाओं को प्रारम्भ से पूर्व पर्यावरण मसौदा तैयार किया जाता है। इस प्रकार विकास योजना के पूर्व पर्यावरण प्रभाव वक्तव्य तैयार किया जाता है, इसमें भूमि, धरातल, मिट्टी, जीव-जन्तु, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, प्रदूषण एवं आपदा प्रबन्धन से सम्बन्धित जानकारियाँ होती हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण संरक्षण से क्या अभिप्राय है? इसके लिए सुझाव दीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण संरक्षण का अर्थ विकास ही समझा जाना चाहिए और इस कार्य में ग्रामीण तथा शहरी सभी लोगों को सक्रिय होकर हिस्सा लेना चाहिए। बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए रचनात्मक कदम उठाने होंगे जिससे न तो पर्यावरण प्रदूषित हो और न ही आर्थिक, सामाजिक विकास अवरुद्ध हो। इस सम्बन्ध में यहाँ कुछ सकारात्मक सुझाव दिए जा रहे हैं –

  1. जनसाधारण को प्रदूषण से उत्पन्न खतरों से अवगत कराया जाय जिससे प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर प्रदूषण कम करने का हर सम्भव प्रयास ईमानदारी से करे।
  2. पर्यावरण की सुरक्षा के लिए औद्योगिक विकास अवरुद्ध न किया जाय बल्कि औद्योगिक विकास नियोजित ढंग से हो, जिससे कि पर्यावरण में किसी भी प्रकार का असन्तुलन उत्पन्न न हो। क्योंकि देखा गया है कि जिस ढंग से औद्योगिक विकास के लिए पेड़-पौधों को काटा जा रहा है वह आज की पर्यावरण सम्बन्धी सबसे बड़ी समस्या है।
  3. यातायात के साधनों से होने वाले प्रदूषण से बचने के लिए मोटर वाहन सम्बन्धी नियमों व कानून को सख्ती से लागू किया जाय। अत्यधिक धुआँ छोड़ने वाले तथा तीव्र ध्वनि के हॉर्न वाले वाहनों पर प्रतिबन्ध लगाया जाए।
  4. उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषित जल, जोकि नदियों व कृषि भूमि में पहुँचता है, इस पर भी प्रतिबन्ध लगाया जाना चाहिए। सभी उद्योगों में जल उपचार संयन्त्र स्थापित किये जाने चाहिए जिससे प्रदूषित जल को शुद्ध किया जा सके।
  5. जनसंख्या वृद्धि पर नियन्त्रण कर प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
  6. वनों की अन्धाधुन्ध कटाई पर सरकार को सख्ती बरतनी चाहिए, भूमि को बंजर होने से बचाने, पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने तथा वन रोपने हेतु सिंचाई की व्यवस्था में सुधार के लिए सघन वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया जाना चाहिए।
  7. योजना आयोग, पर्यावरण और वन विभाग और परम्परागत ऊर्जा विभाग, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभागों के बीच ऐसा समन्वय हो कि ये तीनों विभाग पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कृत संकल्प होकर कार्य करें।

प्रश्न 2.
वाटर हार्वेस्टिंग से क्या आशय है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वाटर हार्वेस्टिंग का आशय है पानी को रोकना, सहेजना, जमा करना और बाद में उसे पृथ्वी के ऊपर या नीचे जलस्रोतों में डालना। यह तकनीक बहुत सरल, सुगम और सस्ती है। अनुमान है कि 2000 वर्ग फुट की छत पर एक सेण्टीमीटर वर्षा होने पर वहाँ से लगभग 2000 लीटर पानी बहकर निकल जाता है। किसी क्षेत्र में अगर 100 सेण्टीमीटर वर्षा हो तो 100 वर्ग फुट की छत से वर्षाकाल में लगभग एक लाख लीटर पानी नलकूप, हैण्डपम्प, कुएँ, बावड़ी या जलाशय जैसे जलस्रोतों तक पहुँचाया जा सकता है। इस तरह इन जलस्रोतों की हर वर्ष भरपाई होते रहने से क्षेत्रों को सूखने से बचाया जा सकता है।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.2

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.2

प्रश्न 1.
याद कीजिए कि दो वृत्त सर्वांगसम होते हैं, यदि उनकी त्रिज्याएँ बराबर हैं। सिद्ध कीजिए कि सर्वांगसम वृत्तों की बराबर जीवाएँ उनके केन्द्रों पर बराबर कोण अन्तरित करती हैं। (2018, 19)
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.2 1
चित्र 10.1
दिया है : दो सर्वांगसम वृत्त जिनके केन्द्र O तथा O’ हैं।
जीवा AB = जीवा PQ केन्द्रों पर ∠AOB और ∠PO’Q अन्तरित करते हैं।
अब ΔOAB और OPQ में,
चूँकि OA = O’P (सर्वांगसम वृत्तों की त्रिज्याएँ हैं)
OB = O’Q (सर्वांगसम वृत्तों की त्रिज्याएँ हैं)
AB = PQ (दिया है)
⇒ ΔΟΑΒ ≅ ΔΟΡΟ (SSS सर्वांगसम प्रमेय)
⇒ ∠AOB = ∠PO’Q (CPCT)
अतः सर्वांगसम वृत्तों की बराबर जीवाएँ केन्द्रों पर बराबर कोण अन्तरित करती हैं। इति सिद्धम्

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प्रश्न 2.
सिद्ध कीजिए कि यदि सर्वांगसम वृत्तों की जीवाएँ उनके केन्द्रों पर बराबर कोण अन्तरित करें, तो जीवाएँ बराबर होती हैं।
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.2 2
चित्र 10.2
दिया है : दो सर्वांगसम वृत्त जिनके केन्द्र O तथा O’ है तथा जीवाएँ AB और PQ केन्द्रों पर क्रमशः
∠AOB = ∠PO’Q अन्तरित करती हैं।
अब ΔAOB और ΔPO’Q में,
चूँकि OA = O’P (सर्वांगसम वृत्तों की त्रिज्याएँ हैं)
∠AOB = ∠PO’Q (दिया है)
OB = O’Q (सर्वांगसम वृत्तों की त्रिज्याएँ)
⇒ ΔAOB ≅ ΔPO’Q (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AB = PQ (CPCT)
अतः सर्वांगसम वृत्तों में वे जीवाएँ जो केन्द्र पर बराबर कोण अन्तरित करती हैं आपस में बराबर होती हैं। इति सिद्धम्

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.1

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.1

प्रश्न 1.
खाली स्थान भरिए
(i) वृत्त का केन्द्र वृत्त के ………………… में स्थित होता है। (बहिर्भाग/अभ्यन्तर)
(ii) एक बिन्दु, जिसकी वृत्त के केन्द्र से दूरी त्रिज्या से अधिक हो, वृत्त के ……….. स्थित होता है। (बहिर्भाग/अभ्यन्तर)
(iii) वृत्त की सबसे बड़ी जीवा वृत्त का ………….. होता है।
(iv) एक चाप ……………… होता है, जब इसके सिरे एक व्यास के सिरे हों।
(v) वृत्तखण्ड एक चाप तथा ………………. के बीच का भाग होता है।
(vi) एक वृत्त, जिस तल पर स्थित है, उसे ………………. भागों में विभाजित करता है।
उत्तर:
(i) अभ्यन्तर,
(ii) बहिर्भाग,
(iii) व्यास,
(iv) अर्द्धवृत्त,
(v) जीवा,
(vi) तीन।

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प्रश्न 2.
लिखिए सत्य/असत्य। अपने उत्तर का कारण दीजिए-
(i) केन्द्र को वृत्त पर किसी बिन्दु से मिलाने वाला रेखाखण्ड वृत्त की त्रिज्या होती है।
(ii) एक वृत्त में समान लम्बाई की सीमित जीवाएँ होती हैं।
(iii) यदि एक वृत्त को तीन बराबर भागों में बाँट दिया जाये, तो प्रत्येक भाग दीर्घ चाप होता है।
(iv) वृत्त की एक जीवा जिसकी लम्बाई त्रिज्या से दो गुनी होती है, वृत्त का व्यास कहलाती है।
(v) त्रिज्यखण्ड जीवा एवं संगत चाप के बीच का क्षेत्र होता है।
(vi) वृत्त एक समतल आकृति है।
उत्तर:
(i) कथन सत्य है, यही वृत्त की त्रिज्या की परिभाषा है।
(ii) कथन असत्य है, क्योंकि वृत्त में समान लम्बाई की असीमित जीवाएँ होती हैं।
(iii) कथन असत्य है, क्योंकि दीर्घ चाप वृत्त के आधे से अधिक होता है।
(iv) कथन सत्य है, क्योंकि वृत्त का व्यास केन्द्र से होकर जाने वाली जीवा है, जो दो त्रिज्याओं से मिलकर बना है।
(v) कथन असत्य है, क्योंकि यह वृत्तखण्ड होता है।
(vi) कथन सत्य है, क्योंकि वृत्त एक तल पर बिन्दुओं का समूह है।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Chapter 9 अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Maths Chapter 9 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी समान्तर चतुर्भुज ABCD की भुजा BC पर कोई बिन्दु E लिया जाता है। AE और DC को बढ़ाया जाता है जिससे वे F पर मिलते हैं। सिद्ध कीजिए किar (ADF) = ar (ABFC) है।
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 1
चित्र 9.26
समान्तर चतुर्भुज ABCD दिया है जिसकी भुजा BC पर कोई बिन्दु E है। AE और DC को बढ़ाया गया है जो बिन्दु F पर मिलते हैं। AC और BF को मिलाइए।
चूँकि AC समान्तर चतुर्भुज ABCD का विकर्ण है
⇒ ar (ADC) = ar (ABC) …(1)
चूँकि उभयनिष्ठ आधार FC पर DF || AB के मध्य ∆ACF एवं ∆BCF स्थित हैं।
⇒ ar (ACF) = ar (BCF) …(2)
⇒ ar (ADC) + ar (ACF) = ar (ABC) + ar (BCF) [समी. (1) और (2) से]
ar (ADF) = ar (ABFC). (चित्रानुसार) इति सिद्धम्

प्रश्न 2.
संलग्न चित्र में ABCDE एक पंचभुज है। AC के समान्तर खींची गई BP बढ़ायी गई DC को P पर तथा AD के समान्तर खींची गई EQ बढ़ायी गई CD से Q पर मिलती है।
सिद्ध कीजिए कि-
ar (ABCDE) = ar (APQ)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 2
चित्र 9.27
हल:
दिया है : ABCDE एक पंचभुज है। BP || AC और EQ || AD खींची गई हैं जो DC को दोनों ओर बढ़ाने पर क्रमशः P और Q बिन्दुओं पर मिलती हैं।
चूँकि उभयनिष्ठ आधार AC पर AC || BP के मध्य ∆ABC एवं ∆APC स्थित हैं। =
⇒ ar (ABC) = ar (APC) ….(1)
चूँकि उभयनिष्ठ आधार AD पर AD || EQ के मध्य ∆ADE और ∆ADO स्थित हैं।
⇒ ar (ADE) = ar (ADQ) …(2)
⇒ ar (ABC) + ar (ADE) = ar (APC) + ar (ADQ) [समीकरण (1) और (2) से]
⇒ ar (ABC) + ar (ACD) + ar (ADE) = ar (APC) + ar (ACD) + ar (ADQ) [दोनों ओर ar (ACD) जोड़ने पर]
अतः ar (ABCDE) = ar (APQ). (चित्रानुसार) इति सिद्धम्

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प्रश्न 3.
एक समान्तर चतुर्भुज ABCD के विकर्ण बिन्दु पर प्रतिच्छेद करते हैं। O से होकर एक रेखा खींची जाती है, जो AD को P और BC को Q पर मिलती है। दर्शाइए कि PQ इस समान्तर
चतुर्भुज ABCD को बराबर क्षेत्रफल वाले दो भागों में विभाजित करती है।
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 3
चित्र 9.28
ABCD एक दिया हुआ चतुर्भुज है जिसके विकर्ण AC और BD परस्पर O बिन्दु पर प्रतिच्छेद करते हैं। O से होकर रेखा POQ खींची गई है जो AD और BC को क्रमशः P और Q पर प्रतिच्छेद करती है। सिद्ध करना है कि PQ समान्तर चतुर्भुज ABCD को दो समान क्षेत्रफल वाले भागों में विभाजित करती है।
अर्थात् ar (ABQP) = ar (PQCD)
∆POA और ∆QOC में,
चूँकि ∠OAP = ∠OCQ (एकान्तर कोण हैं)
OA = OC (O, कर्ण AC का मध्य-बिन्दु है)
∠POA = ∠QOC (सम्मुख कोण हैं)
⇒ ∆POA = ∆QOC (ASA सर्वांगसमता प्रमेय से) …(1)
∆AOB और ∆COD में,
OA = OC (O, कर्ण AC का मध्य-बिन्दु है)
OB = OD (O, कर्ण BD का मध्य-बिन्दु है)
∠AOB = ∠COD (सम्मुख कोण हैं) AAOB = A COD (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)…(2)
∆BOQ और ∆DOP में,
चूँकि ∠QOB = ∠POD (सम्मुख कोण हैं)
OB = OD (O कर्ण BD का मध्य-बिन्दु है)
∠OBQ = ∠ODP (एकान्तर कोण हैं)
∆BOQ ≅ ∆DOP (ASA सर्वांगसमता प्रमेय)…(3)
⇒ ar (POA) + ar (AOB) + ar (BOQ) = ar (QOC) + ar (COD) + ar (DOP) [समी (1) + (2) + (3) से]
अतः ar (ABQP) = ar (PQCD). (चित्रानुसार)
इति सिद्धम्

प्रश्न 4.
संलग्न चित्र में ABCD और AEFD दो समान्तर चतुर्भुज है। सिद्ध कीजिए कि ar (PEA) = ar (QFD).
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 4
चित्र 9.28
हल:
ABCD एवं AEFD दो समान्तर चतुर्भुज दिए हैं।
⇒ BA || CD तथा EA || FD (चित्रानुसार)
चूँकि BA || CD को EQ तिर्यक रेखा बिन्दु P और Q पर प्रतिच्छेद करती है।
⇒ ∠EPA = ∠FQD (संगत कोण हैं)…(1)
चूँकि EA || FD को EQ तिर्यक रेखा बिन्दु E और F पर प्रतिच्छेद करती है।
∠PEA = ∠QFD (संगत कोण हैं) …(2)
अब ∆PEA और ∆QFD में,
∠EPA = ∠FQD [समीकरण (1) से]
∠PEA = ∠QFD [समीकरण (2) से]
एवं EA = FD (समान्तर चतुर्भुज AEFD की सम्मुख भुजाएँ हैं)
⇒ ∆PEA ≅ ∆QFD
अतः ar (PEA) = ar (QFD) (सर्वांगसम त्रिभुज क्षेत्रफल में समान होते हैं) इति सिद्धम्

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MP Board Class 9th Maths Chapter 9 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संलग्न चित्र में PSDA एक समान्तर चतुर्भुज है। PS पर P बिन्दुए और R इस प्रकार लिए गए हैं कि PQ = QR = RS है। तथा PA || QB || RC है। सिद्ध कीजिए कि-
ar (PQE) = ar (CFD) है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 5
चित्र 9.30
हल:
चूँकि PS | | AD को तिर्यक रेखा PD क्रमशः बिन्दु P और D पर प्रतिच्छेद करती है।
⇒ ∠SPD = ∠ADP अर्थात् ∠OPE = ∠CDF …(1) (एकान्तर कोण हैं)
चूँकि OP || RC को तिर्यक रेखा PD क्रमशः E और F पर प्रतिच्छेद करती है।
⇒ ∠PEQ = ∠EFR (संगत कोण हैं)
लेकिन ∠EFR = ∠DFC (सम्मुख कोण हैं)
∠PEQ = ∠DFC …(2)
अब ∆PEQ एवं ∆DFC में,
चूंकि ∠QPE = ∠CDF [समीकरण (1) से]
⇒ ∠PEQ = ∠DFC [समीकरण (2) से]
PQ = DC [PQ = RS दिया है RS = CD (RCDS एक समान्तर चतुर्भुज है)]
⇒ ∆PEQ = ∆DFC
अत: ar (PEQ) = ar (DFC). (सर्वांगसम त्रिभुजों के क्षेत्रफल बराबर होते हैं)
इति सिद्धम् वैकल्पिक विधि: PA || QB || RC || SD तिर्यक रेखा PS से PQ = QR = RS …(1)
अन्त:खण्ड काटते हैं, तो तिर्यक रेखा PD से PE = EF = FD …(2)
अन्त:खण्ड काटेंगे और तिर्यक रेखा AD से भी AB = BC = CD …(3)
अन्त:खण्ड काटेंगे।
चूँकि PS एवं AD समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ हैं।
⇒ PS = AD …(4)
अब ∆PQE और ∆CFD में,
चूँकि PQ = CD [समीकरण (1), (2) और (4) से]
∠QPE = ∠CDF (PS || AD एवं तिर्यक रेखा PD से बने एकान्तर कोण)
एवं PE = FD [समीकरण (2) से]
AQPE = ACFD (SAS सर्वांगसमता प्रमेय से)
अतः ar (POE) = ar (CFD). (सर्वांगसम के क्षेत्रफल बराबर होते हैं) इति सिद्धम्

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प्रश्न 2.
XY त्रिभुज LMN की भुजा LN पर स्थित दो बिन्दु इस प्रकार हैं कि LX = XY = YN है। Xसे होकर जाती हुई एक रेखा LM के समान्तर खींची गई है जो MNको zपर मिलती है देखिए संलग्न चित्र। सिद्ध कीजिए कि
ar (LZY) = ar (MZYX) है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 6
चित्र 9.31
हल:
दिया है : ∆LMN की भुजा पर स्थित दो बिन्दु X और Y इस M –
प्रकार कि LX=XY = YN एवं XZ|| LM रेखाखण्ड MN को Z पर मिलती है। LZ को मिलाया गया है।
अब उभयनिष्ठ आधार XZ पर XZ || LM के बीच दो ∆LXZ और ∆MXZ स्थित हैं।
ar (LXZ) = ar (MXZ) 2 ar (LXZ) + ar (XYZ) = ar (MXZ) + ar (XYZ) (ar (XYZ) को दोनों ओर जोड़ने पर)
⇒ ar (LZY) = ar (MZYX). (चित्रानुसार) इति सिद्धम्

प्रश्न 3.
संलग्न चित्र में समान्तर चतुर्भुज ABCD एवं ABEF हैं। यदि समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल 90 cm2 है तो ज्ञात कीजिए
(i) ar (ABEF),
(ii) ar (ABD),
(iii) ar (BEF).
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 7
चित्र 9.32
हल:
दिया है : दो समान्तर चतुर्भुज ABCD एवं ABEF तथा समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल 90 cm2 है। BF एवं BD को। मिलाया।

(i) उभयनिष्ठ आधार पर समान्तर चतुर्भुज ABCD और समान्तर चतुर्भुज ABEF एक ही AB || FC के मध्य स्थित हैं।
⇒ ar (ABEF) = ar (ABCD)
अतः ar (ABEF) = 90 cm2 . (∵ ar (ABCD) = 90 cm2)

(ii) चूँकि BD समान्तर चतुर्भुज ABCD का विकर्ण है।
ar (ABD) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) ar (ABCD)
अतः ar (ABD) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 90 cm2 = 45 cm2. (∵ ar (ABCD) = 90 cm2)

(iii) चूँकि FB समान्तर चतुर्भुज ABEF का विकर्ण हैं।
⇒ ar (BEF) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) ar (ABEF)
अतः ar (BEF) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 90 cm2 = 45 cm2. (ar (ABEF) = 90 cm2)

प्रश्न 4.
संलग्न चित्र में त्रिभुज ABC की भुजा AB का मध्य-बिन्दु है। यदि रेखाखण्ड CQ || PD भुजा AB में Q पर मिलता है तो सिद्ध कीजिए कि ar (BPQ) = \(\frac { 1 }{ 2 }\)ar (ABC) है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 8
चित्र 9.33
हल:
∆ABC की भुजा AB का मध्य-बिन्दु D है तथा भुजा BC पर दिया हुआ कोई बिन्दु P है एवं CQ || PD भुजा AB से Q पर मिलता है।
PQ और CD को मिलाइए।
अब उभयनिष्ठ आधार DP पर DP || QC के मध्य ADPQ एवं ADPC स्थित हैं।
ar (DPQ) = ar (DPC) = ar (DPQ) + ar (DBP) = ar (DPC) + ar (DBP) [ar (DBP) को दोनों ओर जोड़ने पर]
⇒ ar (BPQ) = ar (DBC) (चित्रानुसार) …(2)
लेकिन ar (DBC) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) ar (ABC) (DC, ∆ ABC की माध्यिका है) …(3)
अतः ar (BPQ) = \(\frac { 1 }{ 2 }\)ar (ABC). [समीकरण (2) एवं (3) से] इति सिद्धम्

प्रश्न 5.
संलग्न चित्र में ABCD एक वर्ग है। E और F क्रमशः BC और CD भुजाओं के मध्य-बिन्दु हैं। यदि R रेखाखण्ड EF का मध्य-बिन्दु है। सिद्ध कीजिए कि-
ar (AER) = ar (AFR) है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 9
चित्र 9.34
हल:
ABCD एक वर्ग दिया है जिसकी भुजा BC और CD के मध्य-बिन्दु
क्रमशः E और F हैं तथा R रेखाखण्ड EF का मध्य-बिन्दु है।
अब ∆ABE और ∆ADF में,
चूँकि AB = AD (वर्ग की भुजाएँ हैं)
∠ABE = ∠ADF (वर्ग के कोण हैं)
एवं BE = DF (वर्ग की भुजाओं के आधे हैं)
⇒ ∆ABE ≅ ∆ADF (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AE = AF (CPCT)
अब ∆AER और ∆AFR में,
चूंकि AE = AF (सिद्ध कर चुके हैं)
ER = FR (EF का मध्य-बिन्दु R दिया है)
AR = AR (उभयनिष्ठ है)
∆AER ≅ ∆AFR (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
अत: ar (AER) = ar (AFR). (सर्वांगसम क्षेत्रों के क्षेत्रफल बराबर होते हैं) इति सिद्धम्

वैकल्पिक विधि :
∆AEF की माध्यिका AR है (∵ R रेखाखण्ड EF का मध्य-बिन्दु है)
ar (AER) = ar (AFR). (माध्यिका त्रिभुज को दो बराबर क्षेत्रफल के क्षेत्रों में विभक्त करती हैं) इति सिद्धम्

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प्रश्न 6.
एक समलम्ब ABCD में, AB || DC है तथा L भुजा BC का मध्य-बिन्दु है। L से होकर एक रेखा PQ || AD खींची गई है जो AB को P पर और बढ़ाई गई DC को Q पर मिलती है (देखिए संलग्न चित्र)। सिद्ध कीजिए कि-
ar (ABCD) = ar (APQD) है
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 10
चित्र 9.35
हल:
ABCD एक समलम्ब चतुर्भुज दिया है जिसकी भुजा BC का A मध्य-बिन्दु L है। से होकर PQ || AD खींची गई है तथा
समलम्ब की भुजाएँ AB || DC है।
अब ∆LPB और ∆LOC में,
चूँकि ∠LPB = ∠LQC (एकान्तर कोण हैं, क्योंकि AB || DQ एवं PQ तिर्यक)
∠LBP ≅ ∠LCQ (एकान्तर कोण हैं, क्योंकि AB || DQ एवं CB तिर्यक)
एवं BL = LC (BC का मध्य-बिन्दु L दिया है)
⇒ ∆LPB ≅ ∆LQC (AAS सर्वांगसमता प्रमेय से)
⇒ ar (LPB) = ar (LQC) (सर्वांगसमता क्षेत्रों के क्षेत्रफल बराबर होते हैं)
⇒ ar (APLCD) + ar (LPB) = ar (APLCD) + ar (LQC) [ar (APLCD) को दोनों ओर जोड़ने पर]
अतः ar (ABCD) = ar (APQD). (चित्रानुसार) इति सिद्धम्

प्रश्न 7.
किसी समान्तर चतुर्भुज का आधार 20 सेमी तथा ऊँचाई (शीर्षलम्ब) 10 सेमी है, तो समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (2019)
हल:
समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार x ऊँचाई (शीर्षलम्ब)
= 20 x 10 = 200 सेमी2
अतः समान्तर चतुर्भुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 200 सेमी2

प्रश्न 8.
यदि किसी समान्तर चतुर्भुज का आधार 4 cm तथा शीर्षलम्ब (ऊँचाई) 2 cm है, तो समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (2019)
हल:
निर्देश : उपर्युक्त प्रश्न की तरह हल करें
उत्तर-अभीष्ट क्षेत्रफल = 8 cm

प्रश्न 9.
संलग्न चित्र में यदि AB || CD और ∆ABC का क्षेत्रफल 100 वर्ग सेमी है, तो ∆ABD का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए और कारण भी दीजिए। (2019)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 11
चित्र 9.36
हल:
चूँकि ∆ABC एवं ∆ABD दोनों ही समान आधार AB पर तथा AB || CD के मध्य स्थित हैं।
इसलिए, क्षेत्रफल (∆ABD) = क्षेत्रफल (∆ABC)
⇒ क्षेत्रफल (∆ABD) = 100 वर्ग सेमी
अतः ∆ABD का अभीष्ट क्षेत्रफल = 100 वर्ग सेमी।

प्रश्न 10.
केवल चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए कि समान्तर चतुर्भुज के दोनों विकर्ण उसे बराबर (क्षेत्रफल वाले चार) त्रिभुजों में बाँटते हैं। (2019)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 12
चित्र 9.37
हल:
ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है जिसके विकर्ण AC एवं BD परस्पर O बिन्दु पर समद्विभाजित करके इसे चार बराबर-बराबर क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में विभाजित कर रहे हैं, अर्थात् क्षेत्रफल (∆ OBC) = क्षेत्रफल (∆ OCD) = क्षेत्रफल B (∆ODA) = क्षेत्रफल (∆OAB)

MP Board Class 9th Maths Chapter 9 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

सत्य/असत्य लिखिए और अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।

प्रश्न 1.
ABCD एक समान्तर चतुर्भुज और X- भुजा AB का मध्य-बिन्दु है। यदि ar(AXCD) = 24cm2 है तो ar (ABC) = 24 cm है।
उत्तर:
असत्य कथन, क्योंकि ar (AXCD) ≠ ar (ABC).

प्रश्न 2.
PORS एक आयत है, जो त्रिज्या 13 cm वाले वृत्त के चतुर्थांश के अन्तर्गत है। A भुजा PQ पर स्थित कोई बिन्दु है। यदि PS = 5 cm है, तो ar (PAS) = 30 cm2 है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंक
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 13

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प्रश्न 3.
PQRS एक समान्तर चतुर्भुज है जिसका क्षेत्रफल 180 cm2 है तथा A विकर्ण QS पर स्थित कोई बिन्दु है तब ∆ASR का क्षेत्रफल 90 cm2 है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि ∆QSR का क्षेत्रफल = \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 180 = 90 cm2 तथा
ar (ASR) < ar (QSR).

प्रश्न 4.
ABC और BDE दो समबाहु त्रिभुज इस प्रकार है कि D भुजा BC का मध्य-बिन्दु है। तब
ar (BDE) = \(\frac { 1 }{ 4 }\)ar (ABC).
उत्तर:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 14

प्रश्न 5.
संलग्न चित्र में ABCD और EFGD दो समान्तर चतुर्भुज है तथा G भुजा CD का मध्य-बिन्दु है, तब
ar (DPC) = ar (EFGD).
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 15
चित्र 9.38
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि ar(DPC) ≠ ar(EFGD) है।

MP Board Class 9th Maths Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
12 cm और 16 cm विकर्णों वाले एक समचतुर्भुज की भुजाओं के मध्य-बिन्दुओं को मिलाने से बनी आकृति का क्षेत्रफल है :
(a) 48 cm2 .
(b) 64 cm
(c) 96 cm2
(d) 192 cm2.
उत्तर:
(a) 48 cm2 .

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प्रश्न 2.
त्रिभुज की माध्यिकाएँ उसे विभाजित करती हैं, दो :
(a) बराबर क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में
(b) सर्वांगसम त्रिभुजों में
(c) समकोण त्रिभुजों में
(d) समद्विबाहु त्रिभुजों में।
उत्तर:
(a) बराबर क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में

प्रश्न 3.
8 cm और 6 cm भुजाओं वाले एक आयत की आसन्न भुजाओं के मध्य-बिन्दुओं को मिलाने से बनी आकृति है :
(a) 24 cm2 क्षेत्रफल का एक आयत
(b) 25 cm2 क्षेत्रफल का एक वर्ग
(c) 24 cm2 क्षेत्रफल का एक समलम्ब
(d) 24 cm2 क्षेत्रफल एक समचतुर्भुज।
उत्तर:
(d) 24 cm2 क्षेत्रफल एक समचतुर्भुज

प्रश्न 4.
संलग्न चित्र में समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल है :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 16
चित्र 9.39
(a) AB x BM
(b) BC – BN
(c) DC – DL
(d) AD x DL.
उत्तर:
(c) DC – DL

प्रश्न 5.
संलग्न चित्र में यदि समान्तर चतुर्भुज ABCD और आयत ABEM समान क्षेत्रफल वाले हैं, तो :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 17
चित्र 9.40
(a) ABCD का परिमाप = ABEM का परिमाप
(b) ABCD का परिमाप < ABEM का परिमाप (c) ABCD का परिमाप > ABEM का परिमाप
(d) ABCD का परिमाप = = (ABEM का परिमाप)।
उत्तर:
(c) ABCD का परिमाप > ABEM का परिमाप

प्रश्न 6.
किसी त्रिभुज की भुजाओं के मध्य-बिन्दु किसी भी एक शीर्ष को चौथा बिन्दु लेकर एक समान्तर चतुर्भुज बनाते हैं जिसका क्षेत्रफल बराबर है :
(a) \(\frac { 1 }{ 2 }\)ar (ABC)
(b) \(\frac { 1 }{ 3 }\)Jar (ABC).
(c) \(\frac { 1 }{ 4 }\)ar (ABC)
(d) ar (ABC).
उत्तर:
(a) \(\frac { 1 }{ 2 }\)ar (ABC)

प्रश्न 7.
दो समान्तर चतुर्भज बराबर आधारों पर और एक ही समान्तर रेखाओं के मध्य स्थित हैं। उनके क्षेत्रफलों में अनुपात होगा :
(a) 1 : 2
(b) 1 : 1
(c) 2 : 1
(d) 3 : 1.
उत्तर:
(b) 1 : 1

प्रश्न 8.
ABCD एक चतुर्भुज है जिसका विकर्ण AC है, उसे बराबर क्षेत्रफल वाले दो भागों में विभाजित करता है। तब ABCD :
(a) एक आयत है
(b) सदैव एक सम चतुर्भुज है
(c) एक समान्तर चतुर्भुज है
(d) (a), (b) या (c) में से कोई भी होना आवश्यक नहीं।
उत्तर:
(d) (a), (b) या (c) में से कोई भी होना आवश्यक नहीं

प्रश्न 9.
एक त्रिभुज और एक समान्तर चतुर्भुज एक ही आधार पर और एक ही समान्तर रेखाओं के बीच स्थित हैं, तो त्रिभुज के क्षेत्रफल का समान्तर चतुर्भुज के क्षेत्रफल से अनुपात है :
(a) 1 : 3
(b) 1 : 2
(c) 3 : 1
(d) 1 : 4.
उत्तर:
(b) 1 : 2

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प्रश्न 10.
ABCD एक समलम्ब है जिसकी समान्तर भुजाएँ AB = a cm और DC = b cm है (देखिए चित्र 9.41)। E और F समान्तर भुजाओं के मध्य-बिन्दु हैं। ar (ABFE) और ar (EFCD) का अनुपात है :

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 18
(a) a : b
(b) (3a + b) : (a + 3b)
(c) (a + 3b) : (3a + b)
(d) (2a + b) : (3a + b).
उत्तर:
(b) (3a + b) : (a + 3b)

प्रश्न 11.
समानान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल होता है : (2018)
(a) आधार x ऊँचाई
(b) आधार + ऊँचाई
(c) 1/2 आधार x ऊँचाई
(d) आसन्न भुजाओं का गुणनफल
उत्तर:
(a) आधार x ऊँचाई

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. समचतुर्भुज का क्षेत्रफल उसके विकर्णों के गुणनफल का ……..होता है।
2. एक ही आधार और दो समान्तर रेखाओं के बीच बने समान्तर चतुर्भुज क्षेत्रफल में … होते हैं। (2019)
3. एक ही आधार पर व एक ही समान्तर रेखाओं के एक युग्म के बीच स्थित त्रिभुज क्षेत्रफल में ……. होते हैं।
4. एक ही आधार और उन्हीं समान्तर रेखाओं के मध्य स्थित आयत और समान्तर चतुर्भुज के क्षेत्रफल ……. होते हैं।
5. एक ही आधार और समान्तर रेखाओं के मध्य स्थित समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल त्रिभुज के क्षेत्रफल का ……… होता है।
उत्तर:
1. आधा,
2. बराबर,
3. बराबर,
4. बराबर,
5. दो गुना।

जोड़ी मिलान
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 19
उत्तर:
1. → (c),
2. → (d),
3. → (e),
4. → (a),
5. → (b).

सत्य/असत्य कथन
1. समान्तर चतुर्भुज जो एक ही आधार और समान्तर रेखाओं के बीच स्थित हों, क्षेत्रफल में बराबर नहीं होते।
2. समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण उसे दो समान क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में विभक्त करते हैं।
3. प्रत्येक समान्तर चतुर्भुज समचतुर्भुज होता है।
4. प्रत्येक वर्ग एक आयत होता है लेकिन प्रत्येक आयत एक वर्ग नहीं होता।
5. आयत के विकर्ण परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
उत्तर:
1. असत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य।

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एक शब्द/वाक्य में उत्तर
1. एक सरल बन्द आकृति द्वारा घेरा गया तल क्या कहलाता है?
2. किसी बंद आकृति द्वारा घेरे गए तल का परिमाण क्या कहलाता है?
3. समान भुजाओं वाले समान्तर चतुर्भुज को क्या कहते हैं ?
4. यदि किसी चतुर्भुज की सम्मुख भुजाओं का एक युग्म समान्तर हो तो उसे क्या कहते हैं?
5. किसी समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण उस समान्तर चतुर्भुज को चार त्रिभुजों में विभक्त करते हैं, उनके क्षेत्रफल में क्या सम्बन्ध होता है ?
6. यदि त्रिभुज का आधार एवं शीर्षलम्ब दिया हो, तो त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात करने का सूत्र लिखिए। (2019)
उत्तर:
1. तलीय क्षेत्र,
2. उस आकृति का क्षेत्रफल,
3. समचतुर्भुज,
4. समलम्ब चतुर्भुज या समलम्ब,
5. बराबर होते हैं।,
6. \(\frac { 1 }{ 2 }\) x आधार x शीर्षलम्ब।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1

प्रश्न 1.
एक चतुर्भुज के कोण 3 : 5 : 9 : 13 के अनुपात में हैं। इस चतुर्भुज के सभी कोण ज्ञात कीजिए। (2018, 19)
हल:
चूँकि चतुर्भुज के चारों कोणों का अनुपात = 3 : 5 : 9 : 13 (दिया है)
मान लीजिए उसके कोण क्रमश: 3x, 5x, 9x एवं 13x हैं तो 3x + 5x + 9x + 13x = 360° (चतुर्भुज के कोणों का योग 360° होगा।)
⇒ 30x = 360°
⇒ x = 360°/30 = 12
इसलिए प्रथम कोण = 3 x x = 3 x 12 = 36°
द्वितीय कोण = 5 x x = 5 x 12 = 60°
तृतीय कोण = 9 x x = 9 x 12 = 108°
चतुर्थ कोण = 13 x x = 13 x 12 = 156°
अतः कोणों का अभीष्ट मान क्रमशः 36°, 60°, 108° एवं 156° हैं।

प्रश्न 2.
यदि एक समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण बराबर हों तो दर्शाइए कि वह एक आयत है। (2019)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 1
चित्र 8.1
हल:
समान्तर चतुर्भुज ABCD के विकर्ण AC = DB (दिया है)
∆ABC एवं ∆DCB में,
चूँकि AB = DC (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ हैं)
AC = DB (दिया है)
एवं BC = BC (उभयनिष्ठ है)
∆ABC ≅ ∆DCB (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
∠ABC = ∠DCB (CPCT)
लेकिन ∠ABC + ∠DCB = 180° (AB || DC, BC तिर्यक के एक ओर के अन्तः कोण हैं)
⇒ ∠ABC = ∠DCB = 90°
लेकिन ∠A = ∠C तथा ∠B = ∠D (समान्तर – के सम्मुख कोण)
⇒ ∠A =∠B = ∠C = ∠D = 90° (समकोण)
अत: ABCD एक आयत है। इति सिद्धम्

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प्रश्न 3.
दर्शाइए कि यदि एक चतुर्भुज के विकर्ण परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करें तो वह एक समचतुर्भुज होता है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 2
हल:
दिया है: एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण AC और BD परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं, अर्थात्
AO = CO एवं BO = DO …..(1)
और ∠AOB = ∠ BOC = ∠COD = ∠DOA = 90° …(2)
∆AOB और ∆AOD में,
चूँकि BO = DO [समीकरण (1) से]
∠AOB = ∠DOA [समीकरण (2) से]
एवं AO = AO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆AOB ≅ ∆AOD (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AB = AD (CPCT)
अब ∆AOD और ∆COB में,
चूँकि AO = CO [समीकरण (1) से]
⇒ ∆AOD ≅ ∆COB [समीकरण (2) से]
एवं DO = BO [समीकरण (1) से]
⇒ ∆AOD ≅ ∆COB (SAS प्रमेय से)
⇒ AD = BC (CPCT)
एवं ∠ADO = ∠CBO (CPCT)
AD || BC (एकान्तर कोण ∠ADO = ∠CBO)
इसलिए ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। (क्योंकि रेखा युग्म AD, BC बराबर और समान्तर हैं)
AB = BC = CD = DA (∵ AB = CD, DA = BC एवं AB = DA)
अतः ABCD एक सम चतुर्भुज है। इति सिद्धम्

प्रश्न 4.
दर्शाइए कि एक वर्ग के विकर्ण बराबर होते हैं और परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 3
चित्र 8.3
दिया है : एक वर्ग ABCD जिसके विकर्ण AC एवं BD परस्पर O बिन्दु पर प्रतिच्छेद करते हैं।
अब ∆ABC एवं ∆DCB में,
चूँकि AB = DC (वर्ग की भुजाएँ हैं)।
∠ABC = ∆DCB = 90° (वर्ग के कोण हैं)
एवं BC = BC (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆ABC ≅ ∆DCB (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AC = BD (CPCT)
अतः वर्ग के विकर्ण बराबर होते हैं।
इति सिद्धम् चूँकि वर्ग एक समान्तर चतुर्भुज है, इसलिए उसके विकर्ण AC एवं BD परस्पर O बिन्दु पर समद्विभाजित करेंगे।
अर्थात् AO = CO एवं BO = DO …(1)
अब, ∆ABO और ∆ADO में, AB = AD (वर्ग की भुजाएँ हैं)
BO = DO [समीकरण (1) से]
एवं AO = AO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆ABO ≅ ∆ADO (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠AOB = ∠AOD (CPCT)
लेकिन ∠AOB + ∠AOD = 180° (रेखाखण्ड BD बिन्दु 0 पर एक ही ओर बने कोण हैं)
⇒∠AOB = ∠AOD = 90°
अतः वर्ग के विकर्ण परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं। इति सिद्धम्

प्रश्न 5.
दर्शाइए कि यदि एक चतुर्भुज के विकर्ण बराबर हों और परस्पर लम्बवत् समद्विभाजित करें तो वह एक वर्ग होगा।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 4
चित्र 8.4
हल:
दिया है : ABCD चतुर्भुज के विकर्ण AC और BD परस्पर बिन्दु O पर लम्ब समद्विभाजित करते हैं तथा परस्पर बराबर हैं अर्थात्
AO = CO, BO = DO,
∠AOB = ∠ BOC = ∠COD = ∠DOA = 90°
एवं विकर्ण AC = BD
अब ∆AOD और ∆COB में,
चूँकि AO = CO (दिया है)
∠DOA = ∠BOC = 90° (दिया है)
एवं DO = BO (दिया है)
⇒ ∆AOD ≅ ∆COB (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AD = BC (CPCT)
⇒ ∠ADO = ∠OBC (CPCT)
⇒ AD || BC (∠ADO एवं ∠OBC एकान्तर कोण हैं)
⇒ □ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। (चूँकि AD = BC एवं AD || BC)
AB = CD एवं BC = DA (सम्मुख भुजाएँ हैं) …(1)
अब ∆AOB और ∆AOD में,
चूँकि BO = DO (दिया है)
∠AOB = ∠AOD = 90° (दिया है)
एवं AO = AO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆AOB ≅ ∆AOD (CPCT) (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AB = DA …(2)
⇒ AB = BC = CD = DA [समीकरण (1) एवं (2) से]
इसलिए ABCD एक समचतुर्भुज है।
अब ∆ABC एवं ∆DCB में,
चूँकि AB = DC (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ हैं)
AC = DB (दिया है)
एवं BC = BC (उभयनिष्ठ है)
∆ABC ≅ ∆DCB (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
∠ABC = ∠DCB (CPCT)
∠ABC = ∠CDA
एवं ∠DAB = ∠ BCD (समान्तर □ के सम्मुख कोण हैं)
∠ABC = ∠BCD = ∠CDA = ∠ DAB
लेकिन ∠ABC + ∠BCD + ∠CDA + ∠DAB = 360° (चतुर्भुज के अन्तः कोण)
= ∠ABC = ∠BCD = ∠CDA = ∠DAB = 90°
अत: ABCD एक वर्ग है। (परिभाषा से) इति सिद्धम्

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प्रश्न 6.
संलग्न चित्र में समान्तर चतुर्भुज ABCD का विकर्ण AC कोण A को समद्विभाजित करता है। दर्शाइए कि
(i) यह LC को भी समद्विभाजित करता है।
(ii) ABCD एक समचतुर्भुज है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 6
चित्र 8.4
हल:
ABCD एक समान्तर चतुर्भुज दिया है जिसका विकर्ण AC ∠A का समद्विभाजक है अर्थात्
∠DAC = ∠ BAC …(1)
एवं DC || AB एवं AD || BC (समान्तर – की सम्मुख भुजाएँ हैं)

(i) चूँकि DC || AB को तिर्यक रेखा AC प्रतिच्छेद करती है।
⇒ ∠DCA = ∠BAC (एकान्तर कोण है।) …(2)
चूँकि AD || BC को AC तिर्यक रेखा प्रतिच्छेद करती है
⇒ ∠DAC = ∠ BCA (एकान्तर कोण है) …(3)
⇒ ∠DCA = ∠BCA [समीकरण (1), (2) एवं (3) से]
अतः विकर्ण AC कोण LC को भी समद्विभाजित करता है। । इति सिद्धम्

(ii) ∆DAC में, ∠DAC = ∠DCA (∠A = ∠C के अर्द्धक हैं)
⇒ DA = CD (बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ हैं)…(4)
चूँकि AB = CD एवं DA = BC (समान्तर □ की सम्मुख भुजाएँ हैं) …(5)
⇒ AB = BC = CD = DA [समीकरण (4) और (5) से]
अतः चतुर्भुज ABCD एक समचतुर्भुज है। इति सिद्धम्

प्रश्न 7.
ABCD एक समचतुर्भुज है। दर्शाइए कि विकर्ण AC कोणों A और C दोनों को समद्विभाजित करता है तथा विकर्ण BD कोणों B और D दोनों को समद्विभाजित करता है।
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 7
चित्र 8.6
दिया है : ABCD एक समचतुर्भुज जिसमें AC एवं BD विकर्ण एक-दूसरे को बिन्दु 0 पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं,
AB = BC = CD = DA …(1)
AO = OC, BO = OD …(2)
∆AOB और ∆AOD में,
चूँकि AB = AD [समीकरण (1) से।]
BO = OD [समीकरण (2) से]
एवं AO = AO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆AOB ≅ ∆AOD (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠BAO = ∠DAO (CPCT)
∆COB और ∆COD में,
चूँकि CB = CD [समीकरण (1) से]
BO = OD [समीकरण (2) से]
एवं CO = CO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆COB ≅ ∆COD (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠BCO = ∠ DCO (CPCT)
अत: AC विकर्ण ∠A और LC दोनों को समद्विभाजित करता है। इति सिद्धम्
अब ∆BOA और ∆BOC में,
चूँकि BA = BC [समीकरण (1) से]
AO = OC [समीकरण (2) से]
एवं BO = BO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆BOA ≅ ∆BOC (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠ABO = ∠CBO. (CPCT)
∆DOA और ∆DOC में,
चूँकि DA = DC [समीकरण (1) से]
AO = OC [समीकरण (2) से ]
एवं DO = DO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆DOA = ∆DOC (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠ADO = ∠CDO (CPCT)
अतः विकर्ण BD, LB और CD दोनों को समद्विभाजित करता है। इति सिद्धम्

प्रश्न 8.
ABCD एक आयत है जिसके विकर्ण AC दोनों कोणों A और C को समद्विभाजित करता है। दर्शाइए कि-
(i) ABCD एक वर्ग है।
(ii) विकर्ण BD दोनों कोणों B और D को समद्विभाजित करता है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 8
चित्र 8.7
हल:
(i) ABCD एक आयत है जिसका विकर्ण AC दोनों कोणों A और C को समद्विभाजित करता है।
अब ∆ABC एवं ∆ADC में,
चूँकि ∠BAC = ∠DAC (∠A के आधे हैं)
AC = AC (उभयनिष्ठ है)
एवं ∠ACB = ∠ACD (∠C के आधे हैं)
⇒ ∆ABC ≅ ∆ADC (ASA सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AB = AD (CPCT) …(1)
AB = CD एवं AD = BC ( आयत की सम्मुख भुजाएँ हैं)…(2)
AB = BC = CD = DA [समीकरण (1) और (2) से]
अत: ABCD एक वर्ग है। (आयत जिसकी भुजाएँ बराबर हों वर्ग होता है।) इति सिद्धम्

(ii) मान लीजिए कि विकर्ण AC एवं BD परस्पर O बिन्दु पर प्रतिच्छेद करते हैं।
∆AOB और ∆COB में,
चूँकि AB = BC (वर्ग की भुजाएँ हैं)
चूँकि AO = CO (वर्ग के विकर्ण परस्पर समद्विभाजित करते हैं)
चूँकि BO = BO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆AOB ≅ ∆COB (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠ABO = ∠CBO (CPCT)
अब ∆AOD और ∆COD में,
चूँकि AD = CD (वर्ग की भुजाएँ हैं)
AO = CO (वर्ग के विकर्ण परस्पर समद्विभाजित करते हैं)
चूँकि DO = DO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆AOD ≅ ∆COD (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠ADO ≅ ∠CDO (CPCT)
अतः विकर्ण BD दोनों कोणों B और D को समद्विभाजित करता है। इति सिद्धम्

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प्रश्न 9.
समान्तर चतुर्भुज ABCD के विकर्ण BD पर दो बिन्दु P और Q इस प्रकार स्थित है कि DP = BQ है (देखिए संलग्न चित्र)। दर्शाइए कि-
(i) ∆APD ≅ ∆CQB
(ii) AP= CQ
(iii) ∆AQB ≅ ∆CPD
(iv) AQ = CP
(v) APCQ एक समान्तर चतुर्भुज है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 9
चित्र 8.8
हल:
(i) ∆APD और ∆COB में,
चूँकि AD = CB (समान्तर – की सम्मुख भुजाएँ हैं)
DP = BQ (दिया है)
एवं ∠ADP = ∠CBQ (एकान्तर कोण हैं)
अतः ∆APD ≅ ∆CQB. (SAS सर्वांगसमता प्रमेय) इति सिद्धम्

(ii) चूँकि ∆APD ≅ ∆CQB (सिद्ध कर चुके हैं)
अतः AP = CQ. (CPCT) इति सिद्धम्

(iii) ∆AQB और ∆CPD में,
AB = CD (समान्तर □ की सम्मुख भुजाएँ हैं)
BQ = PD (दिया है)
∠ABQ = ∠ CDP (एकान्तर कोण है)
अतः ∆AQB ≅ ∆CPD. (SAS सर्वांगसमता प्रमेय) इति सिद्धम्

(iv) चूंकि ∆AQB ≅ ∆CPD (सिद्ध कर चुके हैं)
अतः AQ = CP. (CPCT) इति सिद्धम्

(v) चूँकि AP = CQ [भाग (ii) में सिद्ध कर चुके हैं।]
चूँकि AQ = CP [भाग (iv) में सिद्ध कर चुके हैं।]
अतः चतुर्भुज ∆PCQ एक समान्तर चतुर्भुज है। (चूँकि सम्मुख भुजाएँ समान हैं) इति सिद्धम्

प्रश्न 10.
ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है तथा AP और CQ शीर्ष A और C से विकर्ण BD पर क्रमशः डाले गए लम्ब हैं देखिए संलग्न चित्र। दर्शाइए कि-
(i) ∆APB ≅ ∆COD
(ii) AP = CP.
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 10
चित्र 8.9
हल:
(i) ∆APB और ∆COD में,
चूँकि DC = AB (समान्तर □ की सम्मुख भुजाएँ हैं)
∠CDQ = ∠ABP (एकान्तर कोण है)
∠APB = ∠CQD = 90° (AP ⊥ DB एवं CQ ⊥ DB)
अतः ∆APB ≅ ∆CQD. (SAA सर्वांगसमता प्रमेय) इति सिद्धम्

(ii) चूँकि ∆APB ≅ ∆COD (सिद्ध कर चुके हैं)
अतः AP = CQ. (CPCT) इति सिद्धम्

प्रश्न 11.
∆ABC और ∆DEF में, AB = DE, AB || DE, BC = EF और BC || EF है। शीर्ष A, B और C को क्रमशः शीर्ष D, E और F से जोड़ा जाता है (देखिए संलग्न चित्र)। दर्शाइए कि –
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 11
चित्र 8.10
(i) चतुर्भुज ABED एक समान्तर चतुर्भुज है।
(ii) चतुर्भुज BEFC एक समान्तर चतुर्भुज है।
(iii) AD || CF और AD = CE
(iv) चतुर्भुज ACFD एक समान्तर चतुर्भुज है।
(v) AC = DF है।
(vi) ∆ABC ≅ ∆DEF है।
हल:
(i) चूंकि AB = DE एवं AB || DE (दिया है)
अत: ABED एक समान्तर चतुर्भुज है। इति सिद्धम्

(ii) चूँकि BC = EF एवं BC || EF (दिया है)
अतः BEFC एक समान्तर चतुर्भुज है। इति सिद्धम्

(iii) चूँकि AD = BE एवं AD || BE (समान्तर □ABED की सम्मुख भुजाएँ हैं) …(1)
CF = BE एवं CF || BE (समान्तर □ BEFC की सम्मुख भुजाएँ हैं)…(2)
अत: AD = CF एवं AD || CE [समीकरण (1) एवं (2) से] । इति सिद्धम्

(iv) चूँकि AD = CF एवं AD || CF (सिद्ध कर चुके हैं)
अत: ACFD एक समान्तर चतुर्भुज है। इति सिद्धम्

(v) चूँकि चतुर्भुज ACFD एक समान्तर चतुर्भुज है (सिद्ध कर चुके हैं)
अत: AC = DE (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजा हैं) इति सिद्धम्

(vi) ∆ABC और ∆DEF में,
चूँकि AB = DE (समान्तर □ABED की सम्मुख भुजाएँ हैं)
AC = DF (समान्तर □ACFD की सम्मुख भुजाएँ हैं)
BC = EF (समान्तर □CBEF की सम्मुख भुजाएँ हैं)
अत: ∆ABC ≅ ∆DEE (SSS सर्वांगसम प्रमेय) इति सिद्धम्

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प्रश्न 12.
संलग्न आकृति में ABCD एक समलम्ब है जिसमें AB || DC और AD = BC है। दर्शाइए कि
(i) ∠A = ∠B.
(ii) ∠C = ∠D.
(iii) ∆ABC ≅ ∆BAD.
(iv) विकर्ण AC = विकर्ण BD है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 12
चित्र 8.11
हल:
दिया है : ABCD एक समलम्ब चतुर्भुज जिसमें AB || DC और AD = BC है। विकर्ण AC और BD को मिलाया गया है।
रचना : AB को आगे बढ़ाइए और C से होकर CE || DA खींचिए जो AB को E पर प्रतिच्छेद करती है।

(i) AD = BC (दिया है) तथा AD = EC (रचना से)
⇒ BC = EC (एक वस्तु के बराबर वस्तुएँ बराबर होती हैं)
⇒ ∠CBE = ∠CEB (त्रिभुज की बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण हैं)
चूँकि ∠ABC + ∠ CBE = 180° (रेखा AE के बिन्दु B पर एक ओर बने कोण है)…(1)
चूँकि AD || EC को AE तिर्यक रेखा मिलती है।
⇒ ∠DAE + ∠CEB = 180° (एक ही ओर के अन्तः कोण हैं)
⇒ ∠DAE + ∠CBE = 180° (∵ ∠CEB = ∠CBE) …(2)
∠DAE = ∠ABC [समीकरण (1) और (2) से]
∠A = ∠B. इति सिद्धम्

(ii) चूँकि ∠A + ∠D = 180° (AB || DC, AD तिर्यक रेखा है) …(3)
∠B + ∠C = 180° (AB || DC, BC तिर्यक रेखा है) …(4)
∠A + ∠D = ∠B + ∠C [समीकरण (3) और (4) से]
अतः ∠C = ∠D. (क्योंकि ∠A = ∠B सिद्ध कर चुके हैं) इति सिद्धम्

(iii) ∆ABC और ∆BAD में,
चूँकि BC = AD (दिया है)
∠B = ∠A (सिद्ध कर चुके हैं)
एवं AB = AB (उभयनिष्ठ है)
अतः ∆ABC ≅ ∆BAD. (SAS सर्वांगसमता नियम) इति सिद्धम्

(iv) चूँकि AABC ≅ A BAD (सिद्ध कर चुके हैं)
अतः विकर्ण AC = विकर्ण BD है। (CPCT) इति सिद्धम्

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Chapter 11 अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Maths Chapter 11 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक त्रिभुज की रचना कीजिए यदि उसका परिमाप 10-4 cm और दो कोण 45° और 120° है।
हल:
एक त्रिभुज ABC की रचना करनी है जिसमें ∠ B = 45°, ∠C = 120° तथा परिमाप AB + BC + CA = 10.4 cm
रचना:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 1
चित्र 11.23
(i) रेखाखण्ड PQ = 10.4 cm खींचा
(ii) रेखाखण्ड PQ के बिन्दु P और Q पर क्रमशः 45° और 120° के कोण बनाते हुए किरण PR एवं QS खींचे।
(iii) ∠ RPQ और ∠SQP की समद्विभाजक किरणे PX और QY खींचे जो परस्पर बिन्दु A पर प्रतिच्छेद करती हैं।
(iv) AP एवं AQ के लम्ब समद्विभाजक खींचिए जो रेखाखण्ड PQ को क्रमशः B और C बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद करते हैं।
(v) AB और AC को मिलाइए।
यही ∆ABC अभीष्ट त्रिभुज है।

प्रश्न 2.
त्रिभुज PQR की रचना कीजिए जिसमें QR = 3 cm, ∠ POR = 45° और QP – PR = 2 cm दिया है।
हल:
रचना :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 2
चित्र 11.24
(i) रेखाखण्ड QR = 3 cm खींचा।
(ii) QR के बिन्दु Q पर 45° का कोण बनाती हुए किरण QX खींची।
(iii) किरण QX में से Qs = 2 सेमी का रेखाखण्ड काटा।
(iv) SR को मिलाया।
(v) SR का लम्ब समद्विभाजक खींचा जो किरण Qx को बिन्दु P पर प्रतिच्छेद करता है।
(vi) PR को मिलाया।
यही ∆POR अभीष्ट त्रिभुज है।

प्रश्न 3.
एक समकोण त्रिभुज की रचना कीजिए जिसकी एक भुजा 3.5 cm तथा अन्य भुजा और कर्ण का योग 5.5 cm है।
हल:
एक समकोण ∆ABC की रचना करनी है जिसका कोण B समकोण है। आधार BC = 3.5 cm, कर्ण AC + भुजा AB = 5.5 cm है।
रचना:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 3
चित्र 11.25
(i) BC = 3.5 cm का एक रेखाखण्ड खींचिए।
(ii) बिन्दु B पर BC के साथ 90° का कोण बनाते हुए किरण BX खींचिए।
(iii) किरण BX में से BD = 5.5 cm का एक रेखाखण्ड काटिए।
(iv) DC को मिलाइए।
(v) DC का लम्ब समद्विभाजक खींचिए जो BD को बिन्दु A पर काटता है।
(vi) AC को मिलाइए।
यही ∆ABC अभीष्ट त्रिभुज है।

प्रश्न 4.
एक त्रिभुज ABC की रचना कीजिए जिसमें BC = 5 cm, ∠B = 60° और AC + AB = 7.5 cm है।
हल:
रचना :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 4
चित्र 11.26
(i) एक रेखाखण्ड BC = 5 cm खींचिए।
(ii) BC के बिन्दु B पर 60° का कोण बनाते हुए एक किरण BX खींचिए।
(iii) किरण BX में से BD = 7.5 cm का रेखाखण्ड काटिए।
(iv) DC को मिलाइए।
(v) DC का लम्ब समद्विभाजक खींचिए जो BD को बिन्दु पर प्रतिच्छेद करता है।
(vi) AC को मिलाइए।
यही ∆ABC अभीष्ट त्रिभुज है।

MP Board Class 9th Maths Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चाँदे की सहायता से 110° का एक कोण खींचिए और फिर उसे समद्विभाजित कीजिए। प्रत्येक कोण को मापिए।
हल:
रचना:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 5
चित्र 11.27
(i) एक रेखाखण्ड BC खींचिए।
(ii) B पर ∠ ABC = 110° का कोण बनाइए।
(iii) ∠ABC का समद्विभाजक BD खींचिए।
मापन करने पर प्रत्येक कोण का माप = 55° है।

प्रश्न 2.
3.6 cm, 3.0 cm और 4.8 cm भुजाओं वाले एक त्रिभुज की रचना कीजिए।
हल:
एक त्रिभुज ABC की रचना करनी है जिसमें AB = 3.6 cm, BC = 3.0 cm और AC = 4.8 cm।
रचना :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 6
चित्र 11.28
(i) AB = 3.6 cm का एक रेखाखण्ड खींचिए।
(ii) A को केन्द्र लेकर 4.8 cm की त्रिज्या से एक चाप खींचिए।
(iii) B को केन्द्र लेकर 3.0 cm की त्रिज्या से एक चाप खींचिए जो पहले चाप को बिन्दु C पर प्रतिच्छेद करता है।
(iv) AC और BC को मिलाइए।
यही ∆ABC अभीष्ट त्रिभुज है।

प्रश्न 3.
60° का कोण बनाकर इसका कोणार्द्धक खींचिए। (2019)
अथवा
60° का कोण बनाकर उसका समद्विभाजक खींचिए। (2019)
हल:
रचना :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 7
चित्र 11.29
(i) एक किरण BC खींचिए।
(ii) B को केन्द्र लेकर किसी त्रिज्या से एक चाप खींचिए जो BC को बिन्दु P पर प्रतिच्छेद करता है।
(iii) P को केन्द्र लेकर उसी त्रिज्या से एक चाप खींचिए जो पूर्व से चाप को Q बिन्दु पर प्रतिच्छेद करता है।
(iv) BQ से होकर एक किरण BA खींचिए।
यही ∠ABC = 60° का अभीष्ट कोण है।
(v) P और Q को केन्द्र लेकर PQ के आधे से अधिक की त्रिज्या लेकर चाप खींचिए जो परस्पर बिन्दु R पर प्रतिच्छेद करते हैं।
(vi) BR से होकर किरण BD खींचिए।
यही BD अभीष्ट कोणार्द्धक (समद्विभाजक) है।

MP Board Class 9th Maths Chapter 11 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

निम्नलिखित में प्रत्येक में सत्य या असत्य कथन लिखिए। अपने उत्तर का कारण दीजिए।

प्रश्न 1.
52.5° के कोण की रचना की जा सकती है।
उत्तर:
कथन सत्य है, क्योंकि 52.5° = 105°/2 की रचना की जा सकती है।

प्रश्न 2.
42.5° के कोण की रचना की जा सकती है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि 42.5° = 85°/2 और 85° के कोण की रचना नहीं की जा सकती है।

प्रश्न 3.
एक त्रिभुज ABC की रचना की जा सकती है जिसमें AB = 5 cm, ∠A = 45° और BC + AC = 5 cm ।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि दो भुजाओं का योग तीसरी के बराबर है।

प्रश्न 4.
एक त्रिभुज ABC की रचना की जा सकती है जिसमें BC = 6 cm, ∠C = 30° और AC – AB = 4 cm है।
उत्तर:
कथन सत्य है, क्योंकि AC – AB < BC. प्रश्न 5. एक त्रिभुज ABC की रचना की जा सकती है जिसमें ∠B = 105°, ∠ C = 90° और AB + CA = 10 cm है। उत्तर: कथन असत्य है, क्योंकि ∠ B + ∠C = 105° + 90° = 195° > 180°.

प्रश्न 6.
एक त्रिभुज ABC की रचना की जा सकती है जिसमें ∠B = 60°, ∠C = 45° और AB+ BC + AC = 12 cm है।
उत्तर:
कथन सत्य है, क्योंकि ∠ B + ∠ C = 60° + 45° = 105° < 180°.

MP Board Class 9th Maths Chapter 11 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पटरी और परकार की सहायता से निम्न कोण की रचना सम्भव नहीं है :
(a) 37.5°
(b) 40°
(c) 22.5°
(d) 67.50.
उत्तर:
(b) 40°

प्रश्न 2.
एक त्रिभुज ABC जिसमें BC = 6 cm और ∠B = 45° दिया है, की रचना सम्भव नहीं है यदि AB और AC का अन्तर है:
(a) 6.9 cm
(b) 5.2 cm
(c) 5.0 cm
(d) 4.0 cm.
उत्तर:
(a) 6.9 cm

प्रश्न 3.
एक त्रिभुज ABC, जिसमें BC = 3 cm और ∠C = 60° की रचना सम्भव है जब AB और AC का अन्तर बराबर है :
(a) 3 : 2 cm
(b) 3.1 cm
(c) 3 cm
(d) 2.8 cm.
उत्तर:
(d) 2.8 cm.

प्रश्न 4.
पटरी और परकार की सहायता से निम्न कोण की रचना सम्भव है :
(a) 35°
(b) 40°
(c) 37.5°
(d) 47.5°
उत्तर:
(c) 37.5°

प्रश्न 5.
एक त्रिभुज ABC जिसमें AB = 4 cm और A = 60° है, की रचना सम्भव नहीं है, यदि BC और AC का अन्तर है:
(a) 3.5 cm
(b) 4.5 cm
(c) 3 cm
(d) 2.5 cm.
उत्तर:
(b) 4.5 cm

रिक्त स्थानों की पूर्ति
1. वह मापक यन्त्र जिसके एक ओर सेण्टीमीटर, मिलीमीटर तथा दूसरी ओर इंच और उसके भाग चिह्नित हों कहलाता है।
2. त्रिभुजाकार युग्म जिसमें एक के कोण 60°, 30° और 90° तथा दूसरे के 45°, 450 और 90° होते हैं कहलाता है।
3. मापक यन्त्र जिसकी दोनों भुजाओं में दो नुकीले सिरे होते हैं ……….. कहलाता है।
4. दो टाँगों वाला यन्त्र जिसके एक सिरे पर नुकीला सिरा तथा दूसरे सिरे पर पेंसिल लगाने की व्यवस्था हो …….. कहलाता है।
5. अर्द्धचन्द्राकार पारदर्शी मापक यन्त्र जिसकी वृत्तकार परिधि अंशांकित हो ..कहलाता है।
उत्तर:
1. अंशांकित पटरी (स्केल),
2. सेटस्क्वायर,
3. डिवाइडर,
4. परकार (कम्पास),
5. चाँदा।

सत्य/असत्य कथन

1. उस त्रिभुज की रचना सम्भव है जिसकी दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा के बराबर हो।
2. पटरी एवं परकार की सहायता से 50° का कोण बनाना सम्भव नहीं है।
3. उस त्रिभुज की रचना सम्भव है जिसकी दो भुजाओं का अन्तर तीसरी भुजा के बराबर हो।
4. पटरी और परकार की सहायता से उस कोण की रचना सम्भव है जिसकी माप 7.5 के पूर्ण गुणक में हो।
5. उस त्रिभुज की रचना सम्भव है जिसकी दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से छोटा हो।
उत्तर:
1. असत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. वह त्रिभुज क्या कहलाता है जिसकी भुजाएँ बराबर हों?
2. समबाहु त्रिभुज के प्रत्येक कोण का मान क्या होता है?
3. समकोण त्रिभुज में अधिकतर कितने समकोण हो सकते हैं?
4. किसी त्रिभुज के तीनों कोणों का योग कितना होता है?
5. वह रेखा क्या कहलाती है जो किसी रेखाखण्ड को समकोण पर दो बराबर भागों में विभक्त करती है।
उत्तर:
1. समबाहु त्रिभुज,
2. 60°,
3. एक
4. 180°
5. लम्ब समद्विभाजक।

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 6 भारत : प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीव

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
भारत में सबसे कम वन क्षेत्र वाला राज्य है (2009, 11)
(i) असम
(ii) राजस्थान
(iii) झारखण्ड
(iv) हरियाणा।
उत्तर:
(iv) हरियाणा।

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प्रश्न 2.
सुन्दरी वृक्ष पाया जाता है (2009, 10)
(i) उष्ण कटिबन्धीय वन में
(ii) हिमालयीन वन में
(iii) मैंग्रोव वन में,
(iv) उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन में।
उत्तर:
(iii) मैंग्रोव वन में,

प्रश्न 3.
राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति है (2009)
(i) आर्द्र उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन
(ii) अल्पाइन प्रकार के वन,
(iii) उष्ण कटिबन्धीय कंटीले वन
(iv) आर्द्र उष्ण कटिबन्धीय अर्द्ध सदाबहार वन।
उत्तर:
(iii) उष्ण कटिबन्धीय कंटीले वन

प्रश्न 4.
भारतीय सिंहों का प्राकृतिक आवास आरक्षित क्षेत्र है (2008, 09, 12, 15)
(i) गुजरात का गिर क्षेत्र
(ii) असम का काजीरंगा वन क्षेत्र
(iii) पश्चिम बंगाल का सुन्दरवन
(iv) नीलगिरि वन क्षेत्र।
उत्तर:
(i) गुजरात का गिर क्षेत्र

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राकृतिक वनस्पति से क्या तात्पर्य है? (2017)
उत्तर:
प्राकृतिक रूप से मानव के हस्तक्षेप के बिना उगने वाले पेड़-पौधों को प्राकृतिक वनस्पति कहते हैं।

प्रश्न 2.
वन किसे कहते हैं? (2014, 16, 18)
उत्तर:
वन उस बड़े भू-भाग को कहते हैं, जो प्राकृतिक रूप से उगने वाले पेड़-पौधों तथा झाड़ियों द्वारा आच्छादित होता है।

प्रश्न 3.
मैंग्रोव वन किसे कहते हैं? (2017)
उत्तर:
भारत के तटवर्ती क्षेत्रों में जहाँ ज्वारभाटा आते हैं, वहाँ मैंग्रोव या ज्वारीय वन पाये जाते हैं।

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प्रश्न 4.
देशज व विदेशज वनस्पति से क्या आशय है?
उत्तर:
जो वनस्पति मूलरूप से भारतीय है, उसे देशज वनस्पति कहते हैं लेकिन जो पौधे भारत के बाहर से आये हैं, उन्हें विदेशज वनस्पति कहते हैं।

प्रश्न 5.
अभ्यारण्य किसे कहते हैं? (2014, 16, 18)
उत्तर:
अभ्यारण्य राष्ट्रीय उद्यानों के समान ही होते हैं। ये वन्य प्राणियों को संरक्षित और प्रजातियों को सुरक्षित करने के लिए प्राकृतिक स्थल हैं यहाँ बिना अनुमति के शिकार करना मना होता है।

प्रश्न 6.
प्रशासनिक आधार पर वनों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
प्रशासनिक आधार पर वनों को तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है –

  • आरक्षित वन :
    जो वन इमारती लकड़ी अथवा वन उत्पादों को प्राप्त करने के लिए स्थायी रूप से सुरक्षित किये गये हैं जिनमें पशुओं की चराई व कृषि करने की अनुमति प्राप्त नहीं होती है, आरक्षित वन कहलाते हैं।
  • संरक्षित वन :
    ये वन जिनमें पशुओं को चराने व खेती करने की अनुमति सामान्य प्रतिबन्धों के साथ दे दी जाती है, संरक्षित वन कहलाते हैं।
  • अवर्गीकृत वन :
    वे वन जो न तो आरक्षित हैं और न ही सुरक्षित हैं, अवर्गीकृत वन कहलाते हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रवासी पक्षी क्या है?
उत्तर:
उत्तरी एशिया से भारत में अल्पकाल के लिए आने वाले पक्षियों को प्रवासी पक्षी कहा जाता है। भारत के कुछ दलदली भाग प्रवासी पक्षियों के लिये प्रसिद्ध हैं। शीत ऋतु में साइबेरियन सारस बहुत संख्या में यहाँ आते हैं। इन पक्षियों का मनपसन्द स्थान कच्छ का रन है। जिस स्थान पर मरुभूमि समुद्र से मिलती है, वहाँ लाल सुन्दर कलगी वाले फ्लैमिंगो हजारों की संख्या में आते हैं।

प्रश्न 2.
वन संरक्षण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
वन राष्ट्रीय सम्पदा हैं। यह मानव के लिये विभिन्न प्रकार से उपयोगी हैं। वनों से हमें प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होते हैं। मनुष्य की आवश्यकताएँ अनन्त होती हैं जबकि उन आवश्यकताओं को पूरा करने वाले प्रकृति प्रदत्त साधन सीमित हैं और यदि हम इन साधनों का अन्धाधुन्ध उपयोग करेंगे तो यह एक निश्चित समय के पश्चात् समाप्त हो जायेंगे। अतः वनों की देखभाल करना व उनको काटने से रोकना आदि ही वन संरक्षण कहलाते हैं। सरकार भी समय-समय पर अनेक कार्यक्रम शुरू करके वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करती है जिससे हम जीवन-पर्यन्त तक वनों से लाभान्वित होते रहें।

प्रश्न 3.
भारत की हिमालयी क्षेत्र की वनस्पति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हिमालयी क्षेत्रों में तापमान की कमी तथा ऊँचाई के कारण अन्य भागों की तुलना में वनस्पति में अधिक अन्तर होता है। शिवालिक श्रेणियों में 1000 मीटर की ऊँचाई पर, पर्वतपदीय क्षेत्र, भाबर व तराई में उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन पाये जाते हैं। 1000 से 2000 मीटर की ऊँचाई पर आर्द्र शीतोष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन पाये जाते हैं। ये लम्बे पेड़ों से युक्त घने वन हैं। पूर्वी हिमालय में ओक तथा चेस्टनट, पश्चिमी हिमालय में चीड़ तथा 2000 से 3000 मीटर की ऊँचाई वाले भागों में देवदार, सिल्वर, फर, स्यूस कम घने रूप में मिलते हैं। कम ऊँचाई वाले भागों में साल मुख्य वृक्ष है। जहाँ तापमान कम तथा वर्षा 100 सेमी से कम होती है; वहाँ जंगली जैतून, कठोर बबूल एवं कठोर सवाना घास के साथ ओक व देवदार के वृक्ष पाये जाते हैं। 3000 से 4000 मीटर की ऊँचाई पर अल्पाइन वनस्पति पाई जाती है।

प्रश्न 4.
राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य में अन्तर
राष्ट्रीय उद्यान तुलनात्मक रूप से एक विस्तृत क्षेत्र होता है। यह क्षेत्र मानव के शोषण और अधिग्रहण के द्वारा परिवर्तित नहीं हुआ है। विशिष्ट वैज्ञानिक शिक्षा और मनोरंजन के लिए इसके पेड़-पौधे, जीव-जन्तुओं की प्रजातियों को भू-आकृतिक स्थलों और आवासों के साथ संरक्षित किया गया है। राष्ट्रीय उद्यान में शिकार और चराई पूर्णतया वर्जित होते हैं। राष्ट्रीय उद्यानों में मानवीय हस्तक्षेप पूर्णतया प्रतिबन्धित होता है।

अभ्यारण्य राष्ट्रीय उद्यानों के समान ही होते हैं। ये वन्य प्राणियों को संरक्षित और प्रजातियों को सुरक्षित करने के प्रति समर्पित हैं। अभ्यारण्य में अनुमति के बिना शिकार करना मना है, लेकिन चराई और गौ-पशुओं का आना-जाना नियमित होता रहता है। अभ्यारण्य में मानवीय क्रिया-कलापों की अनुमति होती है।

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प्रश्न 5.
भारत में पौधों तथा वनस्पति का वितरण किन तत्वों पर निर्भर करता है? लिखिए।
उत्तर:
भारत में पौधों तथा वनस्पति का वितरण निम्न तत्वों पर निर्भर करता है

  • भूमि :
    भूमि का वनस्पति पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। ऊबड़-खाबड़ तथा असमान भू-भाग पर जंगल व घास के मैदान मिलते हैं जो कि वन्य प्राणियों के आश्रय स्थल हैं।
  • मिट्टी :
    विभिन्न स्थानों की विभिन्न प्रकार की मिट्टियाँ विविध प्रकार की वनस्पति का आधार है। नदियों के डेल्टाई क्षेत्रों में मैंग्रोव वन, ऊँचे पर्वतों के ढलानों पर शंकुधारी वन पाये जाते हैं। मैदानी क्षेत्र कृषि के लिये अनुकूल है तो पठारी क्षेत्रों में पर्णपाती वन मिलते हैं।
  • तापमान :
    प्रत्येक पौधे के अंकुरण, वृद्धि एवं प्रजनन के लिए अनुकूल तापमान की आवश्यकता होती है। उष्ण कटिबन्ध में उच्च तापमान और आर्द्रता के कारण विविध प्रकार के पेड़-पौधे उगते हैं। ऊँचे पर्वतों पर तापमान कम होने के कारण वनस्पति का वर्द्धन काल छोटा होता है।
  • सूर्य का प्रकाश :
    सूर्य का प्रकाश अधिक समय तक मिलने के कारण वृक्ष गर्मी की ऋतु में जल्दी बढ़ते हैं। जैसे-हिमालय पर्वतीय क्षेत्र की दक्षिणी ढलानों पर अधिक सूर्यताप मिलने के कारण उत्तरी ढलानों की अपेक्षा अधिक सघन वनस्पति पायी जाती है।
  • वर्षा :
    भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में बड़े-बड़े पेड़ सघनता में पाये जाते हैं। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में बौने वृक्ष, घास तथा झाड़ियाँ पायी जाती हैं। मरुस्थलीय क्षेत्रों में पेड़-पौधों की जड़ें लम्बी होती हैं। थार मरुस्थल की वनस्पति पानी की कमी के कारण काँटेदार होती है।

प्रश्न 6.
सदाबहार वन तथा पर्णपाती वन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सदाबहार वन तथा पर्णपाती वन

सदाबहार वन पर्णपाती वन
1. सदाबहार वनों के वृक्ष अत्यन्त सघन, लम्बे तथा सदा हरे-भरे रहते हैं। 1. पर्णपाती वनों के वृक्ष कम घने, अपेक्षाकृत छोटे होते हैं तथा गर्मियों में अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं।
2. इन वृक्षों के नीचे दलदल तथा विषैले जीव-जन्तु पाये जाते हैं। 2. इन वनों के नीचे दलदल नहीं पाया जाता, किन्तु जंगली जानवर पाये जाते हैं।
3. आबनूस, महोगनी तथा रोजवुड इन वनों के व्यापारिक महत्त्व के वृक्ष हैं। 3. साल और सागौन इन वनों के बहुत ही महत्त्वपूर्ण और उपयोगी वृक्ष हैं
4. इन वनों में एक साथ अनेक जातियों के वृक्ष पाये जाते हैं। 4. ये विरल वन हैं। एक जाति के वृक्ष समूह एक साथ मिल जाते हैं।
5. ये वन महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, त्रिपुरा, मणिपुर आदि राज्यों में पाये जाते हैं। 5. ये मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान आदि राज्यों में पाये जाते हैं।

प्रश्न 7.
उष्ण आर्द्र सदाबहार वनों की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. ये वन भारत के उन प्रदेशों में पाये जाते हैं जहाँ वार्षिक वर्षा 300 सेमी से अधिक होती है तथा शुष्क ऋतु छोटी होती है।
  2. ये वन अत्यधिक घने होते हैं। इनमें पेड़ों की लम्बाई 60 मीटर या इससे अधिक होती है।
  3. इन वनों के पेड़ों के नीचे झाड़ियाँ, बेलें, लताएँ आदि का सघन जाल पाया जाता है। घास प्रायः अनुपस्थित होती है।
  4. इनके पेड़ों की लकड़ी अधिक कठोर व भारी होती है।
  5. वृक्षों में पतझड़ का कोई निश्चित समय नहीं होता है। अतः ये वन सदैव हरे-भरे लगते हैं।
  6. भारत में ये वन पश्चिमी घाट के दक्षिणी भाग, केरल, कर्नाटक तथा उत्तर पूर्व की पहाड़ियों में प्रमुखता से पाये जाते हैं।

प्रश्न 8.
मानव के लिये वन किस प्रकार उपयोगी हैं? वर्णन कीजिए।
अथवा
वनों के प्रत्यक्ष लाभ की तुलना में अप्रत्यक्ष लाभ कैसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण है? समझाइए।
उत्तर:
वन राष्ट्रीय सम्पदा हैं। यह मानव के लिए विभिन्न प्रकार से उपयोगी हैं। वन उत्पाद व संरक्षण दोनों प्रकार के कार्य करते हुए देश के आर्थिक विकास में योगदान देते हैं। वनों से हमें दो प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं-प्रत्यक्ष लाभ एवं अप्रत्यक्ष लाभ।
(A) प्रत्यक्ष लाभ :

  1. वनों से पर्याप्त मात्रा में लकड़ी प्राप्त होती है। वनों की लकड़ियों का उपयोग ईंधन, फर्नीचर, खेल का सामान, दियासलाई तथा कागज आदि वस्तुएँ बनाने में किया जाता है।
  2. वनों से अनेक प्रकार के गौण पदार्थ प्राप्त होते हैं, जिनमें बाँस, बेंत, लाख, राल, शहद, गोंद, चमड़ा रंगने के पदार्थ तथा जड़ी-बूटियाँ प्रमुख हैं।
  3. वनों से हमें वस्त्र बनाने के लिए रेशम और समूर प्राप्त होता है।
  4. खैर नामक वृक्ष से कत्था प्राप्त होता है।
  5. वनों से अनेक लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।

(B) अप्रत्यक्ष लाभ :

  1. वन भूमि के कटाव को रोकते हैं, क्योंकि वृक्ष जल की बूंदों को सीधे भूमि पर गिरने से रोक देते हैं।
  2. वनों द्वारा भूमि की उर्वरता में अत्यधिक वृद्धि होती है, क्योंकि वृक्षों की पत्तियाँ, घास व पेड़-पौधे, झाड़ियाँ आदि भूमि पर गिरकर व सड़कर ह्यूमस रूप में भूमि की उर्वरा-शक्ति को बढ़ाते हैं।
  3. वन बाढ़ के प्रकोप को रोकते हैं, क्योंकि वृक्ष जल के तीव्र प्रवाह पर रोक लगा देते हैं जिससे जल का प्रवाह मन्द पड़ जाता है।
  4. वायु-प्रदूषण भी वन रोकने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  5. वन वर्षा करने में सहायक होते हैं।
  6. वन जलवायु को मृदुल बनाते हैं। वन गर्मी और सर्दी की तीव्रता को कम करने में सहायक होते हैं।
  7. वन पक्षियों तथा जीव-जन्तुओं के प्राकृतिक आश्रय स्थल हैं।
  8. वन प्राकृतिक सौन्दर्य के प्रतीक हैं।
  9. वन प्राकृतिक सन्तुलन के स्रोत हैं।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत के मुख्य वनस्पति प्रकारों का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में कितने प्रकार के वन पाये जाते हैं। संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
(1) उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन :
इस प्रकार के वन भारत के उन भागों में पाये जाते हैं जहाँ वर्षा का वार्षिक औसत 200 सेमी या उससे अधिक रहता है। ये वृक्ष 60 मीटर या इससे भी अधिक ऊँचाई तक बढ़ जाते हैं। ये वन पश्चिमी घाट, मेघालय तथा उत्तरी-पूर्वी भारत के अन्य भागों में पाये जाते हैं। इस प्रकार के वनों में महोगनी, आबनूस तथा कपूरा जैसे अनेक प्रकार के वृक्ष पाये जाते हैं।

(2) उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन :
इस प्रकार के वन भारत के उन क्षेत्रों में पाये जाते हैं जहाँ वर्षा का औसत 75 से 200 सेमी के मध्य रहता है। इन वनों को मानसूनी वन’ भी कहते हैं। इन वनों के दो उपवर्ग हैं –

  • आर्द्र पर्णपाती वन
  • शुष्क पर्णपाती वन।

प्रथम वर्ग के वनों का विस्तार उत्तर में हिमालय की तराई व भावर प्रदेश, प्रायद्वीप के उत्तर-पूर्वी भागों तथा पश्चिमी घाट के पूर्वी भागों में पाया जाता है। सागौन इन वनों का महत्त्वपूर्ण वृक्ष है। आर्थिक दृष्टि से ये महत्त्वपूर्ण वन हैं। शुष्क पर्णपाती वनों के प्रमुख क्षेत्र दक्षिण-पश्चिमी बिहार, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश, पूर्वी महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक आदि में विस्तृत हैं। साल इन वनों का सर्वाधिक लाभदायक और महत्त्वपूर्ण वृक्ष है। इन्हें पर्णपाती (शुष्क और आर्द्र) इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये ग्रीष्म ऋतु में 6 से लेकर 8 सप्ताह तक अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं। प्रत्येक जाति के वृक्षों के पतझड़ का समय अलग-अलग होता है।

(3) कँटीले वन तथा झाड़ियाँ :
इस प्रकार के वन भारत के उन भागों में उगते हैं जहाँ वर्षा का वार्षिक औसत 75 सेमी से कम है। ये वन प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी भाग में, दक्षिण में सौराष्ट्र से लेकर उत्तर में पंजाब के मैदानों तक फैले हैं। पूर्व में ये वन उत्तरी मध्य प्रदेश प्रमुख रूप से मालवा का पठार तथा दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड के पठार पर फैले हैं। इन वनों में कीकर, बबूल, बेर, खजूर, रामबाँस, नागफनी, खजेड़ा आदि वृक्ष अधिक उगते हैं। आर्थिक दृष्टि से ये वन उपयोगी नहीं हैं, केवल खजूर ही उपयोगी है।

(4) पर्वतीय वन :
पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान की कमी व ऊँचाई के कारण अन्य भागों की तुलना में वनस्पति में अधिक अन्तर पाया जाता है। शिवालिक श्रेणियों में 1000 मीटर की ऊँचाई पर पर्वतपदीय क्षेत्र, भावर व तराई में उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन पाये जाते हैं। 1000 से 2000 मीटर की ऊँचाई पर आर्द्र शीतोष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन पाये जाते हैं। ये लम्बे पेड़ों से युक्त घने वन हैं। पूर्वी हिमालय में ओक तथा चेस्टनट, पश्चिमी हिमालय में चीड़ तथा 2000 से 3000 मीटर की ऊँचाई वाले भागों में देवदार, सिल्वर फर, स्प्रूस कम घने रूप में मिलते हैं। कम ऊँचाई वाले भागों में साल मुख्य वृक्ष है। जहाँ तापमान कम तथा वर्षा 100 सेमी से कम होती है, वहाँ जंगली जैतून, कठोर बबूल एवं कठोर सवाना घास के साथ ओक व देवदार के वृक्ष पाये जाते हैं। 3000 से 4000 मीटर की ऊँचाई पर अल्पाइन वनस्पति पायी जाती है।

(5) मैंग्रोव या ज्वारीय वन :
भारत के तटवर्ती क्षेत्रों में जहाँ ज्वारभाटा आता है, ये वन पाये जाते हैं। इन वनों में ताड़, नारियल मैंग्रोव, नीपा, फोनेक्स, कैसटाइना आदि वृक्षों की प्रधानता होती है। गंगा तथा ब्रह्मपुत्र नदियों के डेल्टा में सुन्दरी वृक्ष पाये जाते हैं। इन वनों में सागरीय जल भरा रहता है। अतः इनमें आने-जाने के लिये नावों का प्रयोग किया जाता है। इन वनों में वृक्षों की छाल खारे जल के कारण नमकीन व कठोर हो जाती है। वृक्षों की लकड़ी का उपयोग नाव बनाने तथा नमकीन छाल का प्रयोग चमड़ा रंगने में किया जाता है।

प्रश्न 2.
वन संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता क्यों है ? उनके संरक्षण के प्रमुख उपाय बताइए।
उत्तर:
वन संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता :
वन राष्ट्रीय सम्पदा हैं। यह मानव के लिये विभिन्न प्रकार से उपयोगी हैं। मनुष्य की आवश्यकताएँ अनन्त होती हैं जबकि उनको पूरा करने के लिये प्रकृति प्रदत्त साधन सीमित हैं। यदि हम इन संसाधनों का तीव्रता से प्रयोग करते जाएँगे तो एक समय पश्चात् इन संसाधनों की कमी हो जाएँगी। अतः संसाधनों की कमी से उत्पन्न समस्याओं को देखते हुए इनका संरक्षण व संवर्द्धन आवश्यक है। इसके साथ-साथ हमें वनों से इमारती लकड़ी, ईंधन की लकड़ी, पशुओं के लिये चारा, लघु व कुटीर उद्योगों के लिये कच्चा माल तथा औषधियों हेतु कच्ची सामग्री प्राप्त होती है। अत: इनका संरक्षण आवश्यक है।

वन संरक्षण के उपाय :
वन संरक्षण हेतु निम्नलिखित उपाय किये गये –

  1. सरकार द्वारा क्रियान्वित वन नीति का मुख्य उद्देश्य पर्यावरणीय स्थिरता और पारिस्थितिक सन्तुलन बनाये रखना है।
  2. वन संरक्षण कानून-1980 वनों के विनाश तथा वनभूमि का वनों के अतिरिक्त दूसरे कार्यों के लिये उपयोग को रोकना है।
  3. वन रोपण एवं बंजर भूमि का विकास।
  4. मौजूदा वनों में पुनर्रोपण करना।
  5. वनों की नियन्त्रित एवं वैज्ञानिक विधि से कटाई।
  6. वनों को आग से बचाना और इसके निरीक्षण के लिये अनुवीक्षण मीनारों की स्थापना करना।
  7. ईंधन के लिये वैकल्पिक स्रोत; जैसे-रसोई गैस, सौर चूल्हे आदि का प्रयोग करना।
  8. भवन निर्माण में लकड़ी की अपेक्षा लोहा, टिन आदि का प्रयोग करना।
  9. पशुचारण और ईंधन हेतु वृक्षों व झाड़ियों की कटाई पर रोक।
  10. इमारती लकड़ी के व्यापार को सीमित करना।
  11. दीमक, सँडी, झींगुर, गुबरेला जैसे हानिकारक कीटों पर नियन्त्रण।
  12. कृषि वानिकी, विस्तार वानिकी, रक्षा पंक्ति वानिकी, वन संरक्षण, चिपको आन्दोलन एवं वन महोत्सव के प्रति लोगों में चेतना विकसित करना।

प्रश्न 3.
वन्य जीवों के संरक्षण के लिये किये गये उपायों को लिखिए।
अथवा
‘वन्य जीवों का संरक्षण’ पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
‘वन्य-जीवों का संरक्षण :
वन्य-प्राणी प्रकृति की धरोहर हैं। वन्य जीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। संकटापन्न वन्य-जीवों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इनकी अब गणना की जाने लगी है। बाघ परियोजना को सफलता मिल चुकी है। असम में गैंडे के संरक्षण की एक विशेष योजना चलायी जा रही है। सिंहों की घटती संख्या चिन्ता का विषय बन गयी है। अत: आरक्षित क्षेत्रों की संख्या और उनके क्षेत्रों के विस्तार पर बल दिया जा रहा है। वन्य-प्राणियों की सुरक्षा के लिए भारत में वन प्राणी संरक्षण क्षेत्रों की स्थापना की गयी है, जहाँ पशु-पक्षियों को प्राकृतिक वातावरण में फलने-फूलने का अवसर प्रदान किया जाता है।

“वर्तमान में संरक्षित क्षेत्र के अन्तर्गत 103 राष्ट्रीय उद्यानों और 535 अभ्यारण्यों की गिनती की जाती है जो देश के एक लाख 56 हजार वर्ग किमी क्षेत्र पर फैले हैं।” देश में प्राणी उद्यानों के प्रबन्धन की देख-रेख के लिए एक केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण स्थापित किया गया है। यह संस्था 200 से अधिक चिड़ियाघरों के कार्यों में तालमेल रखती है और जानवरों के आदान-प्रदान की वैज्ञानिक ढंग से देख-रेख करती है।

वन्य जीवों के संरक्षण हेतु उपाय-संसार की 5 लाख जीव प्रजातियों में से लगभग 75,000 भारत में है। पक्षियों की लगभग 12,000 प्रजातियाँ एवं 900 उपजातियाँ भारत में विद्यमान हैं। वन्य जीवों के संरक्षण हेतु निम्न उपाय किये गये हैं –

  • बाघ परियोजना :
    1 अप्रैल, 1973 को ‘बाघ परियोजना’ की शुरूआत हुई। इस समय देश के 27 अभ्यारण्यों में यह परियोजना चल रही है।
  • लाल पांडा परियोजना :
    हिमालय क्षेत्र में संरक्षण करने की परियोजना की शुरूआत वर्ष 1996 . में की। 1 भारत 2017, पृष्ठ 297.
  • मणिपुर थामिन (ब्रो ऐन्टलर हिरण) परियोजना :
    1977 में मणिपुर थामिन परियोजना शुरू की गयी।
  • गिर सिंह अभ्यारण्य योजना :
    1972 में गुजरात सरकार ने इनके संरक्षण, सुरक्षा एवं सुधार के लिए केन्द्र सरकार के सहयोग से यह परियोजना शुरू की।
  • हिमालय कस्तूरी परियोजना :
    भारत सरकार के सहयोग से संरक्षण परियोजना उत्तर प्रदेश के ‘केदारनाथ अभ्यारण्य’ में आरम्भ की गयी।
  • हाथी परियोजना :
    यह परियोजना झारखण्ड के सिंहभूमि जिले में 7 दिसम्बर, 1992 को शुरू की गयी।
  • मगर प्रजनन परियोजना :
    भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यू.एन.डी. पी.) की सहायता से 1975 में उड़ीसा में मगर प्रजनन तथा प्रबन्ध की परियोजना आरम्भ की।
  • प्रोजेक्ट हांगुल :
    ‘प्रोजेक्ट हांगुल’ 1970 में शुरू की गयी।
  • देश में जीवमण्डल निचय (आरक्षित क्षेत्र) की स्थापना :
    देश में 14 जीवमण्डल निचय स्थापित किये गये हैं। इनमें से सुन्दर वन (पश्चिम बंगाल), नंदादेवी (उत्तराखण्ड), मन्नार की खाड़ी (तमिलनाडु) नीलगिरि (केरल, कर्नाटक तथा तमिलनाडु) की गणना विश्व के जीवमण्डल निचय में की जाती है। अन्य जीवमण्डल नाकरेक, ग्रेट निकोबार, मानस, सिमलीपाल, दिहांग-दिबांग, डिब्रु साइकवोबा, अगस्तमलाई, कंचनजंघा, पंचमढ़ी, अचनकमट-अभटूकंटक हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कौन-सी औषधीय वनस्पति नहीं हैं? (2008)
(i) तुलसी
(ii) नीम
(iii) सर्पगंधा
(iv) टीक।
उत्तर:
(iv) टीक।

प्रश्न 2.
संसार की 5 लाख जीव प्रजातियों में भारत में कितनी प्रजातियाँ पायी जाती हैं?
(i) 50,000 लगभग
(ii) 5,000 लगभग
(iii) 75,000 लगभग
(iv) 15,000 लगभग।
उत्तर:
(iii) 75,000 लगभग

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प्रश्न 3.
बाघ विकास कार्यक्रम परियोजना कब प्रारम्भ की गई?
(i) 1971
(ii) 1973
(iii) 1975
(iv) 19791
उत्तर:
(ii) 1973

प्रश्न 4.
भारत में वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम कब पारित हुआ? (2008,09)
(i) 1971
(ii) 1972
(iii) 1970
(iv) 19751
उत्तर:
(ii) 1972

प्रश्न 5.
मगर प्रजनन एवं प्रबन्ध परियोजना कब प्रारम्भ की गई?
(i) 1970
(ii) 1972
(iii) 1975
(iv) 19741
उत्तर:
(iii) 1975

प्रश्न 6.
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में कहाँ स्थित है? (2017)
(i) जबलपुर
(ii) नरसिंहपुर
(iii) होशंगाबाद,
(iv) मण्डला।
उत्तर:
(iv) मण्डला।

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. जो वनस्पति मूल रूप से भारतीय है, उसे …………. वनस्पति कहते हैं। (2008, 09)
  2. जो वनस्पति भारत के बाहर से आती है, उन्हें …………. वनस्पति कहते हैं। (2008)
  3. भारत में प्रथम जीव आरक्षित क्षेत्र …………. में स्थापित किया गया। (2008)
  4. ………… में भारत में वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम पारित हुआ। (2011)
  5. …………. राष्ट्रीय उद्यान में बाघ नहीं पाये जाते हैं। (2008)
  6. देश में सिंहों का प्राकृतिक आवास स्थल गुजरात का ………… जंगल है। (2010)
  7. कान्हा राष्ट्रीय उद्यान …………. जिले में स्थित है। (2008, 09)
  8. सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान …………. जिले में हैं। (2009, 17)
  9. ज्वारीय वन में ………… वृक्ष पाया जाता है। (2013)
  10. सुन्दरी वृक्ष ………… में पाया जाता है। (2016)
  11. राजस्थान की ………… प्राकृतिक वनस्पति है। (2016)

उत्तर:

  1. देशज
  2. विदेशज
  3. नीलगिरि
  4. 1972
  5. माधव (शिवपुरी)
  6. गिर क्षेत्र
  7. मण्डला,
  8. होशंगाबाद
  9. सुन्दरी
  10. मैंग्रोव वन
  11. उष्ण कटिबन्धीय कटीले वन।

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सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में सुन्दरी वृक्ष पाये जाते हैं। (2008)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
जो वनस्पति मूल रूप से भारतीय नहीं है, उसे देशज वनस्पति कहते हैं। (2013)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
आरक्षित वनों में पशुओं को चराने की अनुमति दी जाती है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
मध्य प्रदेश में 45% क्षेत्र में वन है। (2008)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 5.
तुलसी वनस्पति का जुकाम व खाँसी के लिए उपयोग होता है। (2008)
उत्तर:
सत्य

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 6 भारत प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीव - 1
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (ङ)
  3. → (घ)
  4. → (क)
  5. → (ग)
  6. → (च)।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
ऐसे वन जो न तो आरक्षित हैं और न ही सुरक्षित हैं। (2008)
उत्तर:
अवर्गीकृत वन

प्रश्न 2.
ऐसे वन जो एक ऋतु विशेष से पत्ते गिरा देते हैं। (2008, 09, 11)
उत्तर:
पर्णपाती

प्रश्न 3.
भाबर से लगा हुआ अधिक नम तथा दलदली क्षेत्र जहाँ घने वन तथा विविध वन्य जीव पाए जाते हैं। (2010)
उत्तर:
तराई

प्रश्न 4.
वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देने का कार्यक्रम। (2009)
उत्तर:
सामाजिक वानिकी

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प्रश्न 5.
सुन्दरी वृक्ष पाया जाता है। (2008)
उत्तर:
गंगा, ब्रह्मपुत्र डेल्टा में

प्रश्न 6.
अल्पकाल के लिए आने वाले पक्षी को कहते हैं। (2012, 15)
उत्तर:
प्रवासी पक्षी

प्रश्न 7.
प्रशासनिक आधार पर वनों को कितनी श्रेणियों में रखा गया है? (2013)
उत्तर:
तीन

प्रश्न 8.
भारतीय सिंहों का प्राकृतिक आवास आरक्षित क्षेत्र। (2013)
उत्तर:
गुजरात का गिर क्षेत्र

प्रश्न 9.
राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति है। (2014)
उत्तर:
उष्ण-कटिबन्धीय कँटीले वन

प्रश्न 10.
भारत में सबसे कम वन क्षेत्र वाला राज्य कौन-सा हैं? (2018)
उत्तर:
हरियाणा।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी क्षेत्र की वनस्पति को प्रभावित करने वाले तत्वों का नाम लिखिए।
उत्तर:
किसी क्षेत्र की वनस्पति को प्रभावित करने वाले तत्वों में वर्षा, तापमान, आर्द्रता, मिट्टी, समुद्र तल से ऊँचाई तथा भूगर्भिक संरचना महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 2.
प्राकृतिक आधार पर वनों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर:
प्राकृतिक आधार पर वनों को पाँच भागों में बाँटा जा सकता है –

  1. उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन
  2. उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन
  3. पर्वतीय वन
  4. मैंग्रोव वन
  5. उष्ण कटिबन्धीय कँटीले वन।

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प्रश्न 3.
उन वन्य प्राणियों के नाम लिखिए जो अब विलुप्त होने के कगार पर हैं?
उत्तर:
गैंडा, चीता, शेर, सोहन चिड़िया आदि वन्य प्राणी अब विलुप्त होने के कगार पर हैं।

प्रश्न 4.
भारत की वनस्पति में इतनी विविधता क्यों हैं? (2015)
उत्तर:
दक्षिण से लेकर उत्तर ध्रुव तक विविध प्रकार की जलवायु के कारण भारत में अनेक प्रकार की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं जो समान आकार के अन्य देशों में बहुत कम मिलती हैं। यहाँ लगभग 46,000 प्रकार के पेड़-पौधे पाए जाते हैं।

प्रश्न 5.
पारिस्थितिक तन्त्र से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
भौतिक पर्यावरण और उसमें रहने वाले जीवों के सम्मिलित रूप को पारिस्थितिक तन्त्र या पारितन्त्र कहते हैं।

प्रश्न 6.
भाबर किसे कहते हैं?
उत्तर:
हिमालय क्षेत्र की पहाड़ियों के गिरीपाद प्रदेश में कंकड़ पत्थरों की एक पतली पेटी नदी की धारा के समानान्तर फैली है जो लगभग 8 से 16 किमी चौड़ी है, वह भाबर कहलाती है।

प्रश्न 7.
सागौन, बबूल, खैर और चन्दन वृक्षों का एक-एक मुख्य उपयोग लिखिए।
उत्तर:

  1. बबूल – दन्त मंजन
  2. सागौन – इमारती लकड़ी व फर्नीचर
  3. खैर – कत्था
  4. चन्दन – अगरबत्ती।

प्रश्न 8.
भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों के नाम लिखिए और बताइए कि ये किन-किन प्रदेशों में स्थित हैं? 1 भारत 2017, पृष्ठ 5 व 6
उत्तर:

  1. काजीरंगा-असम
  2. रणथम्भौर-राजस्थान
  3. बांधवगढ़-मध्य प्रदेश
  4. कान्हा किसली-मध्य प्रदेश
  5. माधव (शिवपुरी)-मध्य प्रदेश
  6. नन्दादेवी-उत्तराखण्ड।

प्रश्न 9.
मनुष्य के जीवित रहने के लिये पारितन्त्र का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
पारितन्त्र का विकास लाखों :
करोड़ों वर्षों में हुआ है। पारितन्त्र के अन्तर्गत आने वाले पौधों तथा जीव-जन्तुओं में गहरा सम्बन्ध होता है। मानव भी अपने अस्तित्व एवं विकास के लिये पारितन्त्र के जीव-जन्तुओं और वनस्पति पर आश्रित हो जाता है। पारितन्त्र से छेड़छाड़ करने से अत्यन्त गम्भीर परिणाम हो सकते हैं अतः पारितन्त्र का संरक्षण आवश्यक है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय वनस्पति के प्रमुख कटिबन्धों के नाम लिखिए। ज्वारीय वन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारतीय वनस्पति के चार प्रमुख कटिबन्ध निम्नलिखित हैं :

  1. उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन
  2. उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन
  3. कँटीले वन तथा झाड़ियाँ
  4. ज्वारीय वन।

ज्वारीय वन :
ये वन तट के सहारे नदियों के ज्वारीय क्षेत्र में पाये जाते हैं। ज्वारीय क्षेत्र में मिलने के कारण इन वनों को ज्वारीय वन कहा जाता है। इन वनों में ताड़, नारियल, मैंग्रोव, नीपा, फोनेक्स, कैज्युराइना आदि के वृक्षों की प्रधानता होती है। गंगा तथा ब्रह्मपुत्र नदियों के डेल्टा में सुन्दरी नामक वृक्ष पाये जाते हैं। इन वनों में सागरीय जल भरा रहता है, अतः इनमें आने-जाने के लिए नावों का प्रयोग किया जाता है। इन वनों के वृक्षों की छाल खारे जल के प्रभाव से नमकीन तथा लकड़ी कठोर हो जाती है। इन वृक्षों की कठोर लकड़ी का उपयोग नाव बनाने तथा नमकीन छाल का उपयोग चमड़ा रंगने में किया जाता है।

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प्रश्न 2.
वनस्पति तथा जीव-जन्तु में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वनस्पति तथा जीव-जन्तु

वनस्पति जीव-जन्तु
1. प्राकृतिक वनस्पति के आवरण में वन, घास भूमियाँ तथा झाड़ियाँ शामिल हैं। 1. जीव-जन्तुओं में मछलियाँ, पक्षी, स्तनधारी पश, छोटे कीट, कृमि आदि शामिल हैं।
2. भारत में पेड़-पौधों की 46,000 प्रकार की जातियाँ पायी जाती हैं। 2. यहाँ लगभग 92,037 जातियों के जीव-जन्तु पाये जाते हैं।
3. वनस्पति सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को खाद्य ऊर्जा में बदल सकती है। 3. जीव-जन्तु अस्तित्व के लिए पूर्णरूपेण वनस्पति जगत पर आधारित हैं।
4. पौधों को दो वर्गों-फूल वाले पौधे तथा बिना फूल वाले पौधे के रूप में बाँटा जाता है। 4. जीव-जन्तुओं को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है-(i) शाकाहारी जीव तथा (ii) माँसाहारी जीव।
5. वनस्पति जीव-जन्तुओं की पूरक है। 5. जीव-जन्तु वनस्पति जगत के पूरक हैं।

प्रश्न 3.
भारत में प्रायः औषधि के लिये प्रयोग होने वाले कुछ प्रमुख पादप-सर्पगंधा, तुलसी, नीम, जामुन, बबूल, कचनार व अर्जुन के उपयोग बताइए।
उत्तर:

  1. सर्पगंधा-रक्तचाप के निदान के लिए
  2. तुलसी-जुकाम और खाँसी के लिए
  3. नीम-जैव व जीवाणु प्रतिरोध हेतु
  4. जामुन-पाचन क्रिया को ठीक करने, मधुमेह में उपयोगी
  5. बबूल-फुन्सी में लाभदायक व शारीरिक शक्ति में वृद्धि हेतु उपयोगी
  6. कचनार-फोड़ा व दमा रोग के लिये उपयोगी
  7. अर्जुन-कान का दर्द ठीक करने व रक्तचाप को नियन्त्रित करने के लिए।

प्रश्न 4.
प्रायद्वीपीय पर्वतीय वनों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. इन वनों में अधिक ऊँचाई वाले भागों में अविकसित वनों या झाड़ियों के साथ खुली हुई विकसित तरंगित घास भूमि पायी जाती है।
  2. इन वनों में पेड़ों के नीचे वनस्पति का जाल पाया जाता है। इसमें परपोषी पौधे, काई व बारीक पत्तियों वाले पौधे प्रमुख होते हैं।
  3. ये वन नीलगिरि, अन्नामलाई, पालनी, पश्चिमी घाट व महाबलेश्वर, सतपुड़ा व मैकल पहाड़ियों पर पाये जाते हैं।
  4. इन वनों में पाया जाने वाले मैग्लोनिया, लारेल, एल्म सामान्य वृक्ष हैं। जबकि सिनकोना व यूकेलिप्टस वृक्षों को विदेश से लाकर लगाया गया है।

प्रश्न 5.
आर्द्र तथा शुष्क पर्णपाती वन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आर्द्र तथा शुष्क पर्णपाती वन

आर्द्र पर्णपाती वन शुष्क पर्णपाती वन
1. इन वनों का विस्तार उत्तरी-पूर्वी राज्यों, हिमालय के गिरिपाद क्षेत्रों, झारखण्ड, पश्चिमी उड़ीसा, छत्तीसगढ़ तथा पश्चिमी घाट से पूर्वी ढाल पर है। 1. यह प्रायद्वीपीय पठार के वर्षा वाले भागों में पाये ये जाते हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश में पाये जाते हैं।
2. ये वन उन क्षेत्रों में पाये जाते हैं जहाँ वर्षा की मात्रा 100 सेमी से 200 सेमी होती है। 2. शुष्क पर्णपाती वन 70 से 100 सेमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं।
3. सागौन इन वनों का प्रमुख वृक्ष है। बाँस, साल शीशम, चन्दन तथा खैर महत्त्वपूर्ण व्यापारिक प्रजातियाँ हैं। 3. विस्तृत क्षेत्रों में सागौन तथा अन्य वृक्ष उगते हैं। अधिक सूखे भागों में झाड़ियाँ तथा कँटीले वनों का विस्तार पाया जाता है।

प्रश्न 6.
“वन पर्यावरण के महत्त्वपूर्ण अंग हैं।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
पर्यावरण सन्तुलन के लिए वन क्यों आवश्यक हैं? कोई चार कारण बताइए।
उत्तर:
वनों एवं पर्यावरण में घनिष्ठ सम्बन्ध है। यह निम्न तथ्यों से स्पष्ट है –

  1. वन वायुमण्डल को शुद्ध रखते हैं और वायु प्रदूषण को कम करते हैं।
  2. वन वायुमण्डल को ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
  3. वन वायु के तापमान को बनाये रखते हैं, जिससे वर्षा होती है।
  4. वन जलवायु को सम रखते हैं।
  5. वन जल के बहाव को रोकते हैं, जिससे भूमि का कटाव रुक जाता है तथा भूगर्भीय जल-स्तर में वृद्धि होती है।

प्रश्न 7.
जीव-आरक्षित क्षेत्र (बायोस्फीयर रिजर्व) किसे कहते हैं? ऐसे दो क्षेत्रों के नाम बताइए। (2015)
उत्तर:
भारत में जैव-विविधता की सुरक्षा के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। इस योजना के अन्तर्गत नीलगिरि में भारत का प्रथम जीव-आरक्षित क्षेत्र (बायोस्फीयर रिजर्व) स्थापित किया गया है। यह कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के सीमावर्ती क्षेत्रों में फैला है। इसका क्षेत्रफल 5500 वर्ग किमी है। इस योजना के अन्तर्गत प्रत्येक जन्तु तथा पौधे का रक्षण अनिवार्य है। इसकी स्थापना 1986 में की गयी थी। उत्तराखण्ड के हिमालय क्षेत्र में नन्दादेवी का जीव-आरक्षित क्षेत्र 1988 में स्थापित किया गया था।

प्रश्न 8.
पारिस्थितिक सन्तुलन के लिए वन क्यों आवश्यक हैं?
अथवा
वन संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
वनों को काटे जाने के कारण पर्यावरण प्रदूषित हुआ है तथा पारिस्थितिकी में भी परिवर्तन आया है। इसी प्रकार वर्तमान युग में अधिकांश देशों में वनों का क्षेत्रफल कम हो रहा है। इस कमी के कारण भू-अपरदन, अनावृष्टि, बाढ़ आदि समस्याएँ आज मानव के समक्ष आ खड़ी हैं। अतः वायु प्रदूषण की समस्या आज के मानव के सामने सबसे बड़ी समस्या के रूप में उपस्थित हुई है। इसी कारण वन-संरक्षण पारिस्थितिक सन्तुलन के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 9.
वनों के विनाश के क्या कारण हैं?
उत्तर:
वनों के विनाश के कारण –

  1. जनसंख्या में तीव्र वृद्धि होने से कृषि भूमि की प्राप्ति के लिए वनों को काटकर खेती की जा रही है।
  2. इमारती लकड़ी और चारे की बढ़ती माँग तथा वन्य भूमि के खेती के लिए उपयोग से वनों पर जबरदस्त प्रभाव पड़ा रहा है।
  3. ईंधन के रूप में प्रयोग करने हेतु लकड़ी काटी जा रही है।
  4. आवागमन के साधनों, रेल, सड़क मार्गों के विकास हेतु वनों को काटा जा रहा है।
  5. आवास समस्या की पूर्ति के लिए वनों को काटकर रिहायशी भूमि का विस्तार किया जा रहा है।

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प्रश्न 10.
कँटीले वनों की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
जिन क्षेत्रों में 70 सेमी से भी कम वार्षिक वर्षा होती है। वहाँ कँटीले वन तथा झाड़ियाँ पायी जाती हैं। इस प्रकार की वनस्पति देश के उत्तर-पश्चिमी भागों में पायी जाती है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं –

  1. इन वनों के वृक्षों का आकार छोटा, पत्तियाँ छोटी तथा जड़ें लम्बी होती हैं।
  2. इन वनों के कीकर, बबूल, खैर तथा खजूर उपयोगी वृक्ष हैं।
  3. इन वनों में वृक्ष दूर-दूर पाये जाते हैं।
  4. कँटीली झाड़ियों में चूहे, खरगोश, लोमड़ी, भेड़िये, जंगली गधा, घोड़े, ऊँट तथा सिंह पाये जाते हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मध्य प्रदेश में पाये जाने वाले जीव-जन्तुओं व प्रमुख वन्य-जीव अभ्यारण्यों के नाम लिखिए।
अथवा
मध्य प्रदेश में पाये जाने वाले जीव-जन्तुओं व प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
वन सम्पदा की दृष्टि से मध्य प्रदेश सम्पन्न राज्य है। यहाँ कुल भूमि का लगभग 30 प्रतिशत भाग वनों से घिरा हुआ है जिसमें विभिन्न प्रकार के वन्य-पशु एवं जीव-जन्तु पाये जाते हैं। मध्य प्रदेश के प्रमुख वन्य-पशु, जीव व पक्षी, काला हिरण, तेंदुआ, चिंकारा, बन्दर, गौर, नीलगाय, चीतल, साँभर, शेर, भालू, घड़ियाल, मगर, कछुआ, सोन चिड़िया, खरमौर आदि हैं। इन वन्य पशुओं, जीवों व पक्षियों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने एवं प्रजातीय सुरक्षा हेतु वन्य जीव अभ्यारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान विकसित किये गये हैं जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं –
मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 6 भारत प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीव - 2

मध्य प्रदेश के वन्य जीव अभ्यारण्य
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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.4

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.4

प्रश्न 1.
एक टीम ने फुटबॉल के 10 मैचों में निम्नलिखित गोल किए :(2018, 19)
2, 3, 4, 5, 0, 1, 3, 3, 4, 3.
इन गोलों के माध्य, माध्यक और बहुलक ज्ञात कीजिए।
हल :
आँकड़ों को आरोही क्रम में लगाने पर हम पाते हैं कि :
0, 1, 2, 3, 3, 3, 3, 4, 4, 5.
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.4 image 1
बहुलक = अधिकतम बारम्बारता वाला प्रेक्षण = 3
अत: अभीष्ट माध्य = 2.8, माध्यक = 3 एवं बहुलक = 3.

प्रश्न 2.
गणित की परीक्षा में 15 विद्यार्थियों ने (100 में से) निम्नलिखित अंक प्राप्त किए :
41, 39, 48, 52, 46, 62, 54, 40, 96, 52, 98, 40, 42, 52, 60.
इन आँकड़ों के माध्य, माध्यक और बहुलक ज्ञात कीजिए। (2019)
हल :
आँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर,
39, 40, 40, 41, 42, 46, 48, 52, 52, 52, 54, 60, 62, 96, 98.
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.4 image 2
बहुलक = अधिकतम बारम्बारता वाला प्रेक्षण = 52
अतः अभीष्ट माध्य = 54.8, माध्यक = 52 एवं बहुलक = 52..

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रेक्षणों को आरोही क्रम में व्यवस्थित किया गया है। यदि आँकड़ों का माध्यक 63 हो, तो x का मान ज्ञात कीजिए:
29, 32, 48, 50, x, x + 2, 72, 78, 84, 95.
हल :
चूँकि
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अत: का अभीष्ट मान = 62.

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प्रश्न 4.
आँकड़ों 14, 25, 14, 28, 18, 17, 18, 14, 23, 22, 14, 18 का बहुलक ज्ञात कीजिए। (2018, 19)
हल :
आँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर,
14, 14, 14, 14, 17, 18, 18, 18, 22, 23, 25, 28
बहुलक = अधिकतम बारम्बारता वाला प्रेक्षण = 14
अतः अभीष्ट बहुलक = 14.

प्रश्न 5.
निम्न सारणी से एक फैक्टरी में काम कर रहे 60 कर्मचारियाँ का माध्य वेतन ज्ञात कीजिए:
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हल:
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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.4 image 6
अत: 60 कर्मचारियों का अभीष्ट माध्य वेतन = Rs 508.33.

प्रश्न 6.
निम्न स्थिति पर आधारित एक उदाहरण दीजिए :
(i) माध्य ही केन्द्रीय प्रवृत्ति का उपयुक्त माप है।
(ii) माध्य केन्द्रीय प्रवृत्ति का उपयुक्त माप नहीं है जबकि माध्यक एक उपयुक्त माप है।
हल :
(i) मैरी और हरि के एक परीक्षा में पूछे गए 5 प्रश्नों में प्राप्तांक निम्न प्रकार हैं :
मैरी के प्राप्तांक 10, 8, 9, 8, 7
माध्य = \(\frac{\sum x}{n}=\frac{42}{5}=8 \cdot 4\)
एवं हरि के प्राप्तांक 4, 7, 10, 10, 10
माध्य = \(\frac{\sum x}{n}=\frac{41}{5}=5 \cdot 8.2\)
अतः मैरी का प्रदर्शन हरि से अच्छा है।

(ii) उपर्युक्त उदाहरण में मैरी और हरि के प्राप्तांकों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर,
मैरी के प्राप्तांक 7, 8, 8, 9, 10
माध्यक = तीसरा पद = 8
एवं हरि के प्राप्तांक 4, 7, 10, 10, 10
माध्यक = तीसरा पद = 10
अतः हरि का प्रदर्शन मैरी से अच्छा है।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3

प्रश्न 1.
एक संगठन ने पूरे विश्व में 15 – 44(वर्षों में) की आयु वाली महिलाओं में बीमारी और मृत्यु के कारणों का पता लगाने के लिए किए गए सर्वेक्षण में निम्नलिखित आँकड़े (% में) प्राप्त किए :
(i) ऊपर दी गई सूचनाओं को आलेखीय रूप में निरूपित कीजिए।
(ii) कौन-सी अवस्था पूरे विश्व की महिलाओं के खराब स्वास्थ्य और मृत्यु का बड़ा कारण हैं ?
(iii) अपनी अध्यापिका की सहायता से ऐसे दो कारणों का पता लगाने का प्रयत्न कीजिए जिनकी ऊपर (ii) में मुख्य भूमिका रही हो।
हल :
(i) अभीष्ट आलेख :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 1
(ii) जनन स्वास्थ अवस्था
(iii) तन्त्रिका मनोविकारी अवस्था एवं अन्य कारण।

प्रश्न 2.
भारतीय समाज के विभिन्न क्षेत्रों में प्रति हजार लड़कों पर लड़कियों की (निकटतम 10 तक की) संख्या के आँकड़े नीचे दिए गए हैं :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 3
(i) ऊपर दी गई सूचनाओं को एक दण्ड आलेख द्वारा निरूपित कीजिए।
(ii) कक्षा में चर्चा करके बताइए कि आप इस ओलख से कौन-कौन से निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
हल :
(i) अभीष्ट दण्ड आलेख :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 4
(ii) अनुसूचित जनजातियों में लड़कियों का लड़कों में अनुपात गैर-अनुसूचित जाति/जनजाति एवं अनुसूचित जातियों की अपेक्षा अच्छा है। इसी प्रकार पिछड़े जिलों में गैर-पिछड़े जिलों से तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा लड़कियों और लड़कों का अनुपात अच्छा है।

प्रश्न 3.
एक राज्य के विधान सभा के चुनाव में विभिन्न राजनैतिक पार्टियों द्वारा जीती गई सीटों के परिणाम नीचे दिए गए हैं : (2019)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 5
(i) मतदान के परिणमों को निरूपित करने वाला दण्ड आलेख खींचिए।
(ii) किस राजनैतिक पार्टी ने सर्वाधिक (अधिकतम) सीटें जीती हैं ?
(iii) किस राजनैतिक पार्टी ने न्यूनतम सीटें जीती हैं?
हल :
(i) अभीष्ट दण्ड आलेख :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 6
(ii) राजनैतिक पार्टी A ने अधिकतम सीटें जीती हैं।
(iii) राजनैतिक पार्टी E ने न्यूनतम सीटें जीती हैं।

प्रश्न 4.
एक पौधे की 40 पत्तियों की लम्बाइयाँ एक मिलीमीटर तक शुद्ध मापी गई और प्राप्त आँकड़ों को निम्नलिखित सारणी में निरूपित किया गया है :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 7
(i) दिए हुए आँकड़ों को निरूपित करने वाला एक आयत चित्र खींचिए।
(ii) क्या इन्हीं आँकड़ों को निरूपित करने वाला कोई अन्य उपयुक्त आलेख है ?
(iii) क्या यह सही निष्कर्ष है कि 153 मिलीमीटर लम्बाई वाली पत्तियों की संख्या सबसे अधिक है ? क्यों ?
हल :
(i) संतत वर्ग सारणी बनाने पर हम प्राप्त करते हैं :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 8
अभीष्ट आयत चित्र :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 9
(ii) हाँ, इन आकड़ों को निरूपित करने वाला अन्य उपलब्ध आलेख बारम्बारता बहुभुज है।
(iii) यह निष्कर्ष सही नहीं है, गलत है क्योंकि पत्तियों की सर्वाधिक संख्या 153 मिली लम्बाई की न होकर 144.5 मिली से 153.5 मिली के बीच है।

प्रश्न 5.
नीचे की सारणी में 400 नियॉन लैम्पों के जीवन काल दिए गए हैं (2018, 19)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 10
(i) एक आयत चित्र की सहायता से दी हुई सूचनाओं को निरूपित कीजिए।
(ii) कितने लैम्पों के जीवनकाल 700 घण्टों से अधिक है ?
हल :
(i) अभीष्ट आयत चित्र :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 11
(ii) 700 घण्टों से अधिक जीवनकाल वाले लैम्पों की संख्या = 74 + 62 + 48 = 184
अत: अभीष्ट लैम्पों की संख्या = 184

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प्रश्न 6.
नीचे की दो सारणियों में प्राप्त किए गए अंकों के अनुसार दो सेक्शनों के विद्यार्थियों का बंटन किया गया है:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 12
दो बारम्बारता बहुभुजों की सहायता से एक ही आलेख पर दोनों सेक्शनों के विद्यार्थियों के प्राप्तांक निरूपित कीजिए। दोनों बहुभुजों का अध्ययन करके दोनों सेक्शनों के निष्पादनों की तुलना कीजिए।
हल :
अभीष्ट बारम्बारता बहुभुज :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 13
20 अंक प्राप्त करने तक सेक्शन ‘B’ के छात्रों की संख्या सेक्शन ‘A’ के छात्रों से अधिक है, लेकिन इसके बाद अधिक अंक पाने के लिए सेक्शन ‘A’ की छात्र संख्या सेक्शन ‘B’ की छात्र संख्या से अधिक हो जाती है।

प्रश्न 7.
एक क्रिकेट मैच में दो टीमें ‘A’ और ‘B’ द्वारा प्रथम 60 गेंदों में बनाए गए रन नीचे दिए गए हैं : गेंदों की संख्या टीम ‘A’
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 14
बारम्बारता बहुभुजों की सहायता से एक ही आलेख पर दोनों टीमों के आँकड़े निरूपित कीजिए।
हल :
वर्ग अन्तरालों को संतत बनाने पर,
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अभीष्ट बारम्बारता बहुभुज :
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प्रश्न 8.
एक पार्क में खेल रहे विभिन्न आयु वर्गों के बच्चों की संख्या का एक यादृच्छिक सर्वेक्षण (random survey) करने पर निम्नलिखित आँकड़े प्राप्त हुए :
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हल:
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अभीष्ट आयत चित्र :
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प्रश्न 9.
एक स्थानीय टेलीफोन निर्देशिका से 100 कुलनाम (surname) यादृच्छया लिए गए और उनसे वर्णमाला के अक्षरों की संख्या का निम्न बारम्बारता बंटन प्राप्त किया गया :
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दी हुई सूचनाओं को निरूपित करने वाला एक आयत चित्र खींचिए एवं वह वर्ग अन्तराल बताइए जिसमें अधिकतम संख्या में कुलनाम हैं।
हल:
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अभीष्ट आयत चित्र :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.3 image 22

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