MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 15 ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 15 ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में संसाधनों पर स्वामित्व होता है –
(i) निजी नियन्त्रण
(ii) सरकारी नियन्त्रण
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) निजी नियन्त्रण

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प्रश्न 2.
सिंचाई सुविधाएँ बढ़ाने के लिए किस शासक ने नहरें प्रमुखता से बनवायी? (2015)
(i) मोहम्मद तुगलक
(ii) अकबर
(iii) शाहजहाँ
(iv) हुमायूँ।
उत्तर:
(i) मोहम्मद तुगलक

प्रश्न 3.
अंग्रेजों के आगमन के पूर्व ग्रामीण अर्थव्यवस्था थी (2014)
(i) मुद्रा आधारित
(ii) आत्मनिर्भर
(iii) आयात पर निर्भर,
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(ii) आत्मनिर्भर

प्रश्न 4.
2001 में भारत में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत था
(i) 21.4
(ii) 32.8
(iii) 65.1
(iv) 72.2
उत्तर:
(iv) 72.2

प्रश्न 5.
भारत में भूमि सुधार कब प्रारम्भ किया गया?
(i) स्वतन्त्रता के पश्चात्
(ii) अंग्रेजों के आगमन से पूर्व
(iii) वैदिक काल में
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) स्वतन्त्रता के पश्चात्

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. …………. एक प्रणाली है जिसके द्वारा मनुष्य जीविकोपार्जन करता है।
  2. आजकल वर्षभर में प्रमुख रूप से ………… फसलें ली जाती है।
  3. अंग्रेजों के आगमन से पूर्व कृषि का उद्देश्य ………… था।
  4. …………. ने जमींदारी प्रथा चलाई। (2016)

उत्तर:

  1. अर्थव्यवस्था
  2. तीन फसलें
  3. जीवन निर्वाह
  4. लॉर्ड कार्नवालिस।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
फसलों के उचित बिक्री मूल्य हेतु सरकार न्यूनतम मूल्य निर्धारण करती है।
उत्तर:
सत्य

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प्रश्न 2.
अंग्रेजों के आगमन के बाद गाँव आत्मनिर्भर हो गए। (2018)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
अनार्थिक खेतों को मिलाकर चकबन्दी के द्वारा आर्थिक खेत बनाए।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद राष्ट्रीय आय में कृषि का योगदान बढ़ता जा रहा है।
उत्तर:
असत्य

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अर्थव्यवस्था से क्या आशय है?
उत्तर:
अर्थव्यवस्था से आशय आर्थिक संसाधनों के स्वामित्व से है। इसमें वह सम्पूर्ण क्षेत्र सम्मिलित किया जाता है जहाँ उसकी आर्थिक गतिविधियाँ संचालित होती हैं।

प्रश्न 2.
अंग्रेजों के आगमन के पूर्व भारत के गाँव किस प्रकार के थे?
उत्तर:
अंग्रेजों के आगमन के पूर्व भारत के गाँव आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं खुशहाल थे।

प्रश्न 3.
गाँवों की आत्मनिर्भरता से क्या आशय है? (2011)
उत्तर:
आत्मनिर्भरता से आशय यह है कि ग्रामवासी अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति अपने गाँव में ही पूर्ण कर सकें।

प्रश्न 4.
प्राचीन समय में गाँव की कार्यशील जनसंख्या के प्रमुख अंग कौनसे थे ?
उत्तर:
प्राचीन समय में गाँव की कार्यशील जनसंख्या या समुदाय के तीन प्रमुख अंग थे-कृषक, दस्तकार तथा ग्राम अधिकारी।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अंग्रेजों के आगमन से पूर्व भारतीय ग्रामीण कार्यशील समुदाय की संरचना बताइए।
उत्तर:
प्राचीन समय में गाँव की कार्यशील जनसंख्या या समुदाय के तीन प्रमुख अंग थे-कृषक, दस्तकार तथा ग्राम अधिकारी।
(1) कृषक:
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग कृषक होता है। प्राचीन समय में प्रत्येक कृषक का गाँव में अपना घर तथा भूमि में हिस्सा होता था। वे साधन सम्पन्न होते थे। खेती का उद्देश्य प्रायः जीवन निर्वाह होता था।

(2) दस्तकार :
गाँव में बढ़ई, लुहार, कुम्हार, कारीगर, मोची, जुलाहे आदि सभी प्रकार के दस्तकार पाये जाते थे। ये ग्रामीण समुदाय की विभिन्न आवश्यकताओं को गाँव में ही पूरा कर देते थे। उनके कार्यों का पारिश्रमिक अनाज या वस्तु के रूप में दिया जाता था।

(3) ग्राम अधिकारी:
ग्राम अधिकारी मुख्यत: तीन प्रकार के होते थे –

  • मुखिया गाँव का प्रमुख अधिकारी होता था। यह किसानों से लगान की वसूली कर शासक को देने के लिए उत्तरदायी था।
  • मालगुजारी का रिकार्ड रखने वाला।
  • कोटवार जो आपराधिक एवं अन्य महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ शासक को प्रदान करता था।

प्रश्न 2.
अंग्रेजों के आगमन के पश्चात् कृषि भूमि का हस्तान्तरण क्यों होने लगा? (2009, 12, 13)
उत्तर:
अंग्रेजों ने लगभग 200 वर्षों तक हमारे देश पर शासन किया। उन्होंने भारत एवं भारतीयों का हर प्रकार से शोषण किया। उन्होंने ऐसी नीतियाँ अपनाई जिसके कारण खुशहाल भारत गरीबी और भुखमरी से जूझने लगा। कृषि एवं उद्योग पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा। कृषकों में निर्धनता व्याप्त होने के कारण कृषक ऋण लेकर अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने लगे। किन्तु किन्हीं कारणोंवश ऋणों को वापस न कर पाने के कारण वे ऋणों के बोझ तले दबने लगे। समय पर ऋण चुका नहीं पाने के कारण साहूकार व महाजन ऋण के बदले उनकी जमीन पर कब्जा करने लगे। इस प्रकार कृषि भूमि का हस्तान्तरण कृषकों से साहूकारों एवं महाजनों को होने लगा। परिणामस्वरूप कृषक भूमिहीन एवं बेघर होने लगे। अतः स्पष्ट है कि अंग्रेजों ने जो जमींदारी प्रथा चलाई, उसका कृषि एवं कृषकों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा।

प्रश्न 3.
प्राचीन भारत में वस्तु विनिमय प्रणाली क्यों प्रचलित थी?
(2008, 09, 12)
उत्तर:
प्राचीन भारत में मनुष्य की आवश्यकताएँ सीमित होती थीं। परन्तु वह अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति, स्वयं नहीं कर सकता था। उसे अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अन्य व्यक्तियों पर निर्भर रहना पड़ता था। उस समय मुद्रा का चलन नहीं था। सभी ग्रामीण दस्तकारों तथा महाजनों से अपनी-अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ प्राप्त कर लेते थे और बदले में अनाज या फिर अन्य वस्तुएँ देते थे। इसी कारण इस प्रणाली को वस्तु विनिमय प्रणाली कहा गया। पण्डित, वैद्य, नाई, धोबी सभी व्यक्तियों की सेवाओं का भुगतान अनाज या अन्य वस्तुओं के रूप में किया जाता था। अन्य शब्दों में “वस्तु विनिमय प्रणाली, विनिमय की वह प्रणाली होती थी जिसमें वस्तु के बदले वस्तु या सेवा का प्रत्यक्ष आदान-प्रदान होता था। इसमें मुद्रा का प्रयोग नहीं किया जाता था।”

प्रश्न 4.
जनसंख्या का गाँव से शहरों की ओर पलायन क्यों होने लगा? समझाइए। (2008, 09, 13)
अथवा
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् जनसंख्या का गाँव से शहरों की ओर पलायन क्यों होने लगा? समझाइए। (2009)
उत्तर:
प्राचीन समय में सीमित आवश्यकताओं व यातायात व संचार के साधनों के अभाव में ग्रामीण जनसंख्या गाँवों में ही निवास करती थी, वह समृद्ध और खुशहाल थी। वह अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति गाँव में ही कर लेती थी। परन्तु अंग्रेजों के आगमन के पश्चात् खुशहाल व समृद्ध ग्रामीण जनता गरीबी व भुखमरी से जूझने लगी। ग्रामीण बेरोजगार हो गये। कृषक ऋणों के बोझ तले दब गये, उनकी भूमि उनसे छिन गयी। वे भूमिहीन और बेघर हो गये। भूमि की उत्पादकता कम हो गयी। अंग्रेजों द्वारा चलाई गई जमींदारी प्रथा से कृषि एवं कृषकों पर बुरा असर पड़ा। इन सभी बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीण जनता शहरों की ओर पलायन करने लगी। 1951 में कुल जनसंख्या में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत 82.7 था जो वर्ष 2011 में 68.84 प्रतिशत रह गया। जबकि शहरी जनसंख्या का प्रतिशत 1951 में 17:3 था जो सन् 2011 में बढ़कर 31.16 हो गया।

आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण जनसंख्या शहरों की ओर पलायन करने लगी है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की प्राचीन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ बताइए। (2009, 16)
अथवा
अंग्रेजों के आगमन से पूर्व भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कोई पाँच विशेषताएँ लिखिए। (2017)
उत्तर:
प्राचीन काल में देश की अधिकांश जनसंख्या गाँवों में रहती थी। वस्तुतः गाँव ही अर्थव्यवस्था की प्रमुख इकाई होते थे। उस समय गाँव आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं खुशहाल थे। प्राचीन ग्रामीण अर्थव्यवस्था आज के गाँवों से बहुत भिन्न थी। इसकी विशेषताओं को निम्न प्रकार स्पष्ट कर सकते हैं –
(1) कार्यशील समुदाय की संरचना :
प्राचीन ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाँव की कार्यशील जनसंख्या के प्रमुख तीन प्रकार होते थे-कृषक, दस्तकार तथा ग्राम अधिकारी।

(2) आत्मनिर्भरता :
प्राचीन समय में गाँव आत्मनिर्भर एवं स्वावलम्बी हुआ करते थे। ग्रामवासी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति गाँव में ही कर लेते थे। क्योंकि उस समय ग्रामीण जनता की आवश्यकताएँ सीमित होती थीं और यातायात और संचार के साधनों का अभाव होता था।

(3) वस्तु विनिमय प्रणाली :
प्राचीन अर्थव्यवस्था में वस्तु विनिमय प्रणाली का प्रचलन था। सभी ग्रामवासी दस्तकारों व महाजनों से अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ प्राप्त करते थे। इसके बदले उन्हें अनाज और वस्तुएँ दी जाती थीं। पण्डित, वैद्य, नाई, धोबी सभी की सेवाओं का पारिश्रमिक उस समय में अनाज या वस्तुओं के रूप में किया जाता था।

(4)श्रम की गतिहीनता :
प्राचीन अर्थव्यवस्था में परिवहन के साधनों के अभाव के कारण श्रम गतिहीन होता था। परिवहन के साधनों के अतिरिक्त जाति प्रथा, भाषा एवं खान-पान की कठिनाई आदि का प्रभाव भी श्रम की गतिहीनता पर पड़ता था। फलस्वरूप ग्रामवासी अपने गाँव में ही रहना अधिक पसन्द करते थे।

(5) सरल श्रम विभाजन :
उस काल में ग्रामवासियों में आर्थिक क्रियाएँ बँटी हुई थीं। कार्य का बँटवारा दो आधार पर किया जाता था –

  • वंशानुगत या परम्परा के आधार पर; जैसे-कृषि एवं पशुपालन व्यवसाय।
  • जातिगत परम्परा के आधार पर; जैसे-लुहार, सुनार, बढ़ई, मोची, नाई, धोबी आदि।

(6) बाह्य दुनिया से सम्पर्क का अभाव :
प्राचीन समय में हर गाँव अपने आप में सम्पूर्ण इकाई था। जहाँ प्रत्येक व्यक्ति अपनी समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेता था। बाहरी दुनिया से उसका किसी प्रकार का सम्पर्क नहीं रहता था।

(7) राज्य के प्रति उदासीनता :
ग्रामवासियों का मुख्य उद्देश्य जीवन निर्वाह करना होता था। उनका राज्य की गतिविधियों की ओर कोई विशेष रुझान नहीं होता था।

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प्रश्न 2.
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्या परिवर्तन हुए एवं विकास हेतु शासन ने क्या प्रयास किए? लिखिए।
उत्तर:
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निम्न परिवर्तन हुए
(1) उपलब्ध भूमि के आधार पर समुदाय की संरचना :
वर्तमान में कृषकों को उनके पास उपलब्ध भूमि के स्वामित्व के आधार पर निम्न भागों में बाँट सकते हैं –

  • बड़े कृषक
  • मंझोले कृषक
  • छोटे कृषक तथा
  • भूमिहीन कृषक।

(2) बहुविध फसलें :
फसलें तीन प्रकार की होती हैं-रबी, खरीफ एवं जायद। रबी जाड़ों की फसल, खरीफ वर्षाकाल की फसल और जायद गर्मी की फसल होती है। वर्तमान में परम्परागत फसलों के अतिरिक्त कुछ नगदी फसलों का प्रचलन भी हो गया है, जैसे-फूलों की खेती, तिलहन की खेती आदि।

(3) जनसंख्या का शहरों की ओर पलायन :
गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, बुनियादी सुविधाओं की कमी आदि अनेक कारणों से ग्रामीण जनता शहरों की ओर पलायन कर रही है। 1951 में कुल जनसंख्या में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत 82.7 प्रतिशत था जो वर्ष 2011 में 68.84 प्रतिशत रह गया है। जबकि शहरी जनसंख्या का प्रतिशत 1951 में 17:3 था जो 2011 में बढ़कर 31.16 हो गया। आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि ग्रामीण जनसंख्या का शहरों की ओर पलायन होने लगा है।

(4) मौद्रिक प्रणाली का प्रादुर्भाव :
गाँवों में प्राचीन समय में प्रचलित वस्तु विनिमय प्रणाली अब लुप्त हो गयी है। वर्तमान में सभी जगह मुद्रा का प्रयोग होने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी विनिमय की क्रय-विक्रय की मौद्रिक प्रणाली पूरी तरह लागू हो गयी है।

(5) अपर्याप्त संचार एवं आवागमन सुविधाएँ :
आज प्रत्येक गाँव को संचार एवं परिवहन के साधनों के माध्यम से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, परन्तु सड़कें कच्ची होने के कारण वर्षा के समय बहुत से गाँवों का अपने आस-पास के क्षेत्रों में सम्पर्क टूट जाता है। वर्षा के समय ट्रक, बस, रेल, ट्रैक्टर, जीप, मोटर साइकिल व साइकिल का प्रयोग होता है। वर्तमान में अधिकांश गाँव टेलीफोन एवं दूरदर्शन के माध्यम से भी जुड़ गये हैं।

(6) सहायक एवं कुटीर उद्योगों का विकास :
स्वतन्त्रता के पश्चात् ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ एवं उन्नत बनाने के उद्देश्य से कुटीर एवं लघु उद्योगों के विकास पर अत्यधिक ध्यान दिया गया है। कृषक और ग्रामवासी अपने खाली वक्त में इन उद्योगों के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर पा रहे हैं।

(7) तकनीकी उन्नति :
गाँवों में किसानों ने पुरानी तकनीक को छोड़कर नई को अपनाना शुरू कर दिया है। अब सिंचाई के लिए रहट की जगह पम्प का, हल की जगह हैरो व बैलगाड़ी की जगह ट्रक एवं ट्रैक्टर-ट्राली का प्रयोग किया जाने लगा है। किसान बड़ी मशीनों का प्रयोग भी करने लगे हैं। किसानों द्वारा थ्रेशर का प्रयोग करना अब आम बात हो गयी है।

(8) शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार-आधुनिक ग्रामवासी शिक्षा एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होते जा रहे हैं। गाँव में प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक सरकारी स्कूल खुल गये हैं। लड़कों के साथ लड़कियाँ भी स्कूल व कॉलेजों में पढ़ने लगी हैं। गाँवों में चिकित्सा की भी पर्याप्त सुविधाएँ उपलब्ध हो गई हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास हेतु शासन के प्रयास
सरकार द्वारा किये गये प्रयासों की विवेचना निम्न प्रकार है –
(1) भूमि सुधार :

  • सरकार ने जमींदारी प्रथा का उन्मूलन एवं चकबन्दी करके अनार्थिक जोतों को लाभप्रद बनाया है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि बहाल करने और उसके हस्तान्तरण पर रोक लगाने के लिए सरकारी बंजर भूमि, भूदान से प्राप्त भूमि, निर्धारित अधिकतम सीमा से प्राप्त भूमि आदि का वितरण किया गया है।
  • सरकार द्वारा फसल बीमा योजना शुरू की गयी है।
  • गाँवों में वित्त आपूर्ति हेतु ग्रामीण बैंकों तथा सरकारी बैंकों की स्थापना की गयी है।
  • फसलों की उचित बिक्री हेतु सरकार द्वारा न्यूनतम मूल्य का निर्धारण किया गया है। साथ ही फसलों के विपणन एवं भण्डारण की सुविधा भी मुहैया करवायी है।
  • केन्द्र सरकार की प्रधानमन्त्री सड़क योजना के माध्यम से प्राचीन इलाकों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

(2) आवास स्वच्छता एवं स्वास्थ्य :

  • स्वास्थ्यप्रद आवास व्यवस्था हेतु सरकार ने इन्दिरा आवास योजना चलाई है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता हेतु केन्द्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम चलाया गया है।
  • गाँवों में परिवार कल्याण केन्द्र एवं आँगनबाड़ी आदि के माध्यम से खान-पान, स्वास्थ्य शिक्षा सम्बन्धी जागरूकता का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
  • स्कूलों में सफाई, पेयजल एवं शिक्षण की बुनियादी आवश्यकताओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

(3) कुटीर एवं लघु उद्योग :

  • अखिल भारतीय हस्त करघा उद्योग बोर्ड, भारतीय कुटीर उद्योग, खादी ग्रामोद्योग आदि संस्थाओं द्वारा उद्योगों की समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करना।
  • कुटीर व लघु उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु लघु उद्योग विकास बैंक की स्थापना करना।
  • विपणन में सहायता प्रदान करने वाले सरकारी विभागों द्वारा इनके उत्पादों की खरीद सुनिश्चित की जाती है। इसके अतिरिक्त देश-विदेश में मेले, प्रदर्शनी व हाट आदि का भी अयोजन किया जाता है।
  • उद्योगों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये गये हैं।
  • इन उद्योगों को संरक्षण प्रदान करके बड़े उद्योगों से इनकी प्रतिस्पर्धा को समाप्त किया गया है।

उपर्युक्त सरकारी प्रयासों द्वारा गाँवों के विकास का प्रयास किया जा रहा है। हमें राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के आदर्शों को आधार बनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।

प्रश्न 3.
कुटीर एवं लघु उद्योग भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उन्नत बनाने में किस प्रकार सहायक हैं? समझाइए। (2015)
उत्तर:
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उन्नत बनाने में कुटीर एवं लघु उद्योगों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। गाँधीजी के अनुसार, “भारत का मोक्ष उसके कुटीर उद्योग-धन्धों में निहित है।” कुटीर और लघु उद्योग भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास की आधारशिला है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सन्दर्भ में लघु व कुटीर उद्योगों का औचित्य –
(1) आर्थिक विकास :
प्रत्येक गाँव में स्थानीय कच्चे माल की उपलब्धता के आधार पर छोटे-छोटे घरेलू उद्योग विकसित किये जा सकते हैं। जिससे रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है और कृषक व ग्रामवासी अपने खाली समय में इन उद्योगों के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। आय में वृद्धि होने से उनका जीवन-स्तर भी ऊँचा हो जाएगा।

(2) रोजगार :
गाँधीजी के अनुसार ग्रामोद्योग का अत्यधिक विकास कर हम राष्ट्र की महान् सेवा कर सकते हैं। केवल कुटीर एवं लघु उद्योग ही कम पूँजी के साथ अधिक श्रमिकों को रोजगार प्रदान कर सकते हैं। प्रच्छन्न बेरोजगारी और मौसमी बेरोजगारी के समाधान में लघु एवं कुटीर उद्योगों का विशेष महत्त्व है। इन उद्योगों को श्रमिकों के घरों पर ही बहुत कम पूँजी लगाकर खोला जा सकता है और आवश्यकतानुसार बन्द भी किया जा सकता है; जैसे-दियासलाई, मधुमक्खी पालन, साबुन निर्माण आदि। इस प्रकार स्पष्ट है कि लघु व कुटीर उद्योग बड़े उद्योगों की अपेक्षा ग्रामवासियों की बेरोजगारी दूर करने में सहायक होते हैं।

(3) आय वितरण :
कुटीर एवं लघु उद्योगों का स्वामित्व अधिक से अधिक लोगों के हाथ में होता है, जिससे आय का वितरण समान होता है। इन उद्योगों में श्रमिकों का शोषण भी नहीं होता है। आज देश में धनी और निर्धन के बीच एक बहुत बड़ी खाई है जो वृहत् उद्योगों के बढ़ने के साथ बढ़ती जा रही है।

(4) भारतीय ग्रामीण व्यवस्था के अनुरूप :
भारत कृषि प्रधान राष्ट्र है यहाँ की लगभग 68% जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है, परन्तु कृषकों को वर्षपर्यन्त कार्य नहीं मिल पाता है। इस दृष्टि से भी लघु व कुटीर उद्योग अत्यन्त उपयोगी हैं।

(5) कृषि पर जनसंख्या का भार कम करना :
भारत में कृषि पर जनसंख्या का भार निरन्तर बढ़ता जा रहा है। प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख व्यक्ति खेती पर आश्रित होने के लिए बढ़ जाते हैं। जिससे कृषि का विभाजन और अपखण्डन होता है। इस समस्या के समाधान की दृष्टि से लघु व कुटीर उद्योग बहुत उपयोगी हैं।

(6) कलात्मक वस्तुओं का निर्माण :
भारत की परम्परागत कलात्मक वस्तुओं के निर्माण में कुटीर व लघु उद्योगों का विशेष महत्त्व है। इन वस्तुओं के निर्यात से विदेशी मुद्रा की प्राप्ति भी होती है।

(7) तकनीकी ज्ञान की कम आवश्यकता :
पूँजी की भाँति भारत में तकनीकी ज्ञान का अभाव है। लघु उद्योगों व कुटीर उद्योगों को तकनीकी ज्ञान की बहुत कम आवश्यकता पड़ती है। इस दृष्टि से लघु व कुटीर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

(8) शीघ्र उत्पादक उद्योग :
लघु व कुटीर उद्योग शीघ्र उत्पादक उद्योग होते हैं अर्थात् इन उद्योगों में विनियोग करने और उत्पादन प्रारम्भ होने में अधिक समय नहीं लगता है।

उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि कुटीर व लघु उद्योगों का ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान है। सरकार ने भी इन क्षेत्रों में इन्हें विकसित करने के अनेक प्रयास किये हैं।

प्रश्न 4.
प्राचीन एवं आधुनिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए। (2009, 14, 16)
उत्तर:
प्राचीन एवं आधुनिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था का तुलनात्मक अध्ययन

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 15 ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास - 1

इस प्रकार स्पष्ट होता है कि वर्तमान में गाँव व ग्रामीणों का पहले से अधिक विकास हुआ। ये पहले की अपेक्षा अधिक जागरूक हो गये हैं। वे अपना और अपने परिवार के कल्याण के बारे में सोचते हैं। वे शिक्षा, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, राजनीति के बारे में जानने समझने लगे हैं।

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प्रश्न 5.
एक आदर्श ग्राम की विशेषताएँ क्या-क्या होती हैं ? लिखिए। (2008, 14, 15, 17)
अथवा
एक आदर्श ग्राम की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। (कोई पाँच) (2010, 18)
उत्तर:
देश को अग्रणी बनाने के लिये ग्राम सुधार आवश्यक है। यदि ऐसा हो जाए तो भारत एक समृद्ध, सम्पन्न एवं खुशहाल देश बन सकता है। हमें अपने गाँवों को आदर्श बनाने के प्रयास करने होंगे। एक आदर्श ग्राम की अग्रलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए –

  • उन्नत कृषि व्यवस्था :
    कृषि के विकास हेतु चकबन्दी, सामूहिक कृषि का प्रयोग, उपज में वृद्धि हेतु जैविक तथा रासायनिक उर्वरक, कृषि के लिये उन्नत बीजों का प्रयोग एवं सिंचाई की आधुनिक सुविधाओं का प्रयोग किया जाना चाहिए। उपज के भण्डारण हेतु उपयुक्त व्यवस्था एवं सहकारिता एवं शासकीय सहायता से उपज की बिक्री की व्यवस्था होनी चाहिए।
  • आवासीय सुविधाएँ :
    गाँवों में आवास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। मकान साफ-सुथरे होने चाहिए। साथ ही घर में स्नानगृह, शौचालय आदि की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। जानवरों के लिये अलग बाड़ा एवं गोबर से बायोगैस बनाने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
  • पेयजल व्यवस्था :
    ग्रामवासियों के लिये स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके लिये कुएँ, तालाब, बाबड़ी आदि का जीर्णोद्वार होना चाहिए। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि उसमें कचरा आदि न जा पाये। ग्रामवासियों को भू-जल संवर्द्धन का महत्त्व समझाना चाहिए।
  • शिक्षा का व्यवस्था :
    गाँव में प्रत्येक बच्चे को प्राथमिक शिक्षा देने का प्रयास करना चाहिए। बालिका शिक्षा के प्रति विशेष जागरूकता अपनानी चाहिए। गाँवों में परम्परागत शिक्षा के साथ-साथ प्रौढ़ । शिक्षा की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
  • स्वास्थ्य सुविधाएँ :
    प्रत्येक गाँव में प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र व अनुभवी चिकित्सक की व्यवस्था होनी चाहिए। चिकित्सा केन्द्र में आवश्यकतानुसार दवाइयों का प्रबन्ध होना चाहिए जिससे ग्रामवासियों को कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े। साथ ही शासन की विभिन्न स्वास्थ्य सम्बन्धी योजनाओं का लाभ ग्रामवासी प्राप्त कर सकें।
  • परिवार व संचार सुविधाएँ :
    गाँवों में परिवहन व संचार साधनों की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। परिवहन व्यवस्था हेतु पक्की सड़कें होनी चाहिए जो आस-पास के कस्बों और गाँवों को जिला मुख्यालय से जोड़े। टेलीफोन, डाकघर तथा इण्टरनेट की सुविधा भी उपलब्ध होनी चाहिए।
  • ऊर्जा एवं पर्यावरण जागरूकता :
    गाँवों में बिजली की व्यवस्था होनी चाहिए। सम्भव हो तो वैकल्पिक ऊर्जा का प्रयोग की समय-समय पर करना चाहिए। ग्रामवासियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करनी चाहिए। वृक्षों के उपयोग व वृक्षारोपण के प्रति ग्रामीणों को सक्रिय रहना चाहिए जिससे गाँवों में हरियाली व्याप्त हो सके।
  • औद्योगिक विकास :
    गाँवों में कृषि पर आधारित उद्योगों का विकास होना चाहिए, जैसे-डेयरी उद्योग, कुक्कुट उद्योग आदि। गाँवों में ऐसे उद्योगों का विकास होने से ग्रामवासियों को उन्हीं के गाँव में रोजगार प्राप्त हो सकता है। जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सकती है।
  • वित्तीय सुविधाएँ :
    गाँवों में वित्तीय सुविधाओं के लिये ग्रामीण बैंक व सहकारी बैंक आदि की सुविधा होनी चाहिए। गाँवों में स्वसहायता बचत समूहों के निर्माण के प्रति ग्रामीणों में जागरूकता पैदा करके उनकी बचत की आदत में वृद्धि करायी जा सकती है।
  • प्रशासनिक व्यवस्था :
    गाँवों में पंचायत व्यवस्था होनी चाहिए। ग्राम पंचायत के सदस्यों व सरपंच को गाँव के विकास के प्रति जागरूक होना चाहिए। जिससे गाँवों में स्वच्छता, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य व सुरक्षा सम्बन्धी व्यवस्थाएँ ग्रामवासियों को प्राप्त हो सकें। ग्राम पंचायत में प्रशासकीय पारदर्शिता बढ़ानी चाहिए।

प्रश्न 6.
किसी गाँव को आत्मनिर्भर व विकासशील बनाने के लिये क्या-क्या प्रयास करने की आवश्यकता होती है? लिखिए। (2009)
उत्तर:
किसी गाँव को आत्मनिर्भर व विकासशील बनाने के लिये निम्नलिखित प्रयासों की आवश्यकता होती है –

  • सिंचाई के साधनों का विकास :
    गाँवों में कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिये सिंचाई के साधनों पर ध्यान देना आवश्यक है। इसके लिये नहरों, कुओं, तालाबों एवं नलकूपों की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं जन जागृति के प्रयास :
    ग्रामीणों को जैविक खाद बनाने की विधि व उसके महत्त्व से परिचित कराने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जाने चाहिए तथा गाँवों में स्वच्छता बनाये रखने के लिये जन जागृति के प्रयास किये जाने चाहिए।
  • भण्डार गृहों की स्थापना :
    गाँवों में कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखने के लिये भण्डार गृहों की स्थापना की जाए जिससे उनकी फसल खराब न हो पाये।
  • पशुओं की दशा में सुधार :
    गाँवों में पशुओं के महत्त्व को देखते हुए उनकी हीन दशा सुधारने के लिये अच्छे व पौष्टिक चारे, पेयजल, चिकित्सा एवं नस्ल सुधारने हेतु पर्याप्त प्रयास करने चाहिए।
  • कृषि आधारित उद्योगों का विकास :
    कृषि आश्रित लघु उद्योगों; जैसे-डेयरी उद्योग, मुर्गी पालन उद्योग आदि के विकास पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।
  • अनावश्यक व्यय को रोकना :
    न्यूनतम आय होने पर भी ग्रामवासी पारिवारिक व सामाजिक कार्यक्रमों पर अधिक खर्च करते हैं। उदाहरणार्थ-विवाह कार्यों पर बीस हजार से दस लाख की राशि, शोक कार्यों पर दस से चालीस हजार की राशि व त्यौहारों पर 500 से 2000 की राशि खर्च कर दी जाती है। अतः व्यर्थ के व्ययों को रोकने के प्रयास किये जाने चाहिए तथा ग्राम पंचायत में इसकी चर्चा की जानी चाहिए।
  • बचत की प्रवृत्ति को बढ़ावा :
    गाँवों में स्वसहायता बचत समूहों के निर्माण के प्रयास किये जा सकते हैं। जिससे ग्रामवासियों में बचत की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिले।
  • शिक्षा का प्रसार :
    ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार एवं प्रचार की आवश्यकता है। जिससे किसानों को रूढ़िवादिता, अन्धविश्वासों के विचारों से उबारा जा सके। आकाशवाणी और टेलीविजन इस क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
समाजवादी अर्थव्यस्था में संसाधनों पर कैसा नियन्त्रण होता है?
(i) निजी नियन्त्रण
(ii) सरकारी नियन्त्रण
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ii) सरकारी नियन्त्रण

प्रश्न 2.
मिश्रित अर्थव्यवस्था में संसाधनों पर किस प्रकार का नियन्त्रण पाया जाता है?
(i) निजी नियन्त्रण
(ii) सरकारी नियन्त्रण
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) निजी नियन्त्रण

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प्रश्न 3.
भारतीय अर्थव्यवस्था है
(i) पूँजीवादी
(ii) समाजवादी
(iii) मिश्रित
(iv) साम्यवादी।
उत्तर:
(iii) मिश्रित

प्रश्न 4.
अकबर के शासन काल में सही ढंग से भू-मापन किसने कराया? (2009)
(i) मोहम्मद तुगलक
(ii) टोडरमल
(iii) तानसेन
(iv) शाहजहाँ।
उत्तर:
(ii) टोडरमल

प्रश्न 5.
बड़े कृषक किसे कहते हैं?
(i) जिसके पास 2 से लेकर 10 हेक्टेअर तक भूमि है
(ii) जिसके पास 2 हेक्टेयर से भी कम भूमि है
(iii) जिसके पास 20 हेक्टेयर से अधिक भूमि है
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) जिसके पास 2 से लेकर 10 हेक्टेअर तक भूमि है

प्रश्न 6.
छोटे कृषकों की श्रेणी में वे कृषक आते हैं
(i) जिनके पास 2 से लेकर 10 हेक्टेअर तक भूमि है
(ii) जिनके पास 2 हेक्टेअर से भी कम भूमि है
(iii) जिनके पास 20 हेक्टेअर से अधिक भूमि है
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ii) जिनके पास 2 हेक्टेअर से भी कम भूमि है

प्रश्न 7.
जमींदारी प्रथा के जन्मदाता कौन थे?
(i) लॉर्ड कार्नवालिस
(ii) लॉर्ड कर्जन
(iii) लॉर्ड माण्टबेटन
(iv) लॉर्ड लेनिन।
उत्तर:
(i) लॉर्ड कार्नवालिस

प्रश्न 8.
सर्वप्रथम बंगाल में जमींदारी प्रथा किस वर्ष में प्रारम्भ की गई?
(i) 1870
(ii) 1875
(iii) 1793
(iv) 17451
उत्तर:
(iii) 1793

रिक्त स्थान की पूर्ति

  1. समाजवादी अर्थव्यवस्था में संसाधनों पर ……… नियन्त्रण होता है।
  2. वस्तुओं का, वस्तुओं के बदले में लेन-देन …………. कहलाता है।
  3. छोटे कृषक वे होते हैं जिनके पास ………… से भी कम भूमि है।

उत्तर:

  1. सरकार का
  2. वस्तु विनियम
  3. 2 हेक्टेअर।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
अंग्रेजों के आगमन के पूर्व ग्रामीण अर्थव्यवस्था आयात पर निर्भर थी। (2010)
उत्तर:
असत्य

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प्रश्न 2.
अकबर के शासनकाल में टोडरमल ने सही ढंग से भू मापन कराया।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
मझोले कृषक वे होते हैं जिनके पास 5 हेक्टेअर से अधिक भूमि होती है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
प्राचीन ग्रामीण अर्थव्यवस्था में वस्तु विनियम प्रणाली प्रचलित थी। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
भारत में आज गाँवों की संख्या 6,00,000 है। (2011)
उत्तर:
सत्य

सही जोड़ी मिलाइए

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 15 ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास - 2

उत्तर:

  1. → (ङ)
  2. → (घ)
  3. → (क)
  4. → (ग)
  5. → (ख)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
अंग्रेजों के आगमन के पूर्व भारत के गाँव किस प्रकार के थे?
उत्तर:
आत्मनिर्भर

प्रश्न 2.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग। (2012)
उत्तर:
कृषक

प्रश्न 3.
जिनके पास 2 से लेकर 10 हेक्टेअर भूमि है। (2012)
उत्तर:
बड़े कृषक

प्रश्न 4.
वस्तुओं का, वस्तुओं के बदले लेन-देन की प्रणाली। (2009, 10)
उत्तर:
वस्तु विनियम प्रणाली

प्रश्न 5.
अर्थव्यवस्था में संसाधनों पर निजी नियन्त्रण कहलाता है। (2011)
उत्तर:
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था

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प्रश्न 6.
सिंचाई सुविधाएँ बढ़ाने के लिये किस शासक ने नहरें प्रमुखता से बनाई? (2008)
उत्तर:
मोहम्मद तुगलक

प्रश्न 7.
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास हेतु किस उद्योग का अत्यधिक महत्त्व है? (2013)
उत्तर:
कुटीर एवं लघु उद्योग।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अर्थव्यवस्था के प्रकार लिखिए।
उत्तर:
अर्थव्यवस्था तीन प्रकार की होती है :

  1. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था
  2. समाजवादी अर्थव्यवस्था तथा
  3. मिश्रित अर्थव्यवस्था।

प्रश्न 2.
एक गाँव की अर्थव्यवस्था से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
एक गाँव की अर्थव्यवस्था में वहाँ पर स्थित खेत, दुकानें और अन्य सभी प्रतिष्ठान जहाँ व्यक्ति काम करते हैं, शामिल किये जाते हैं। इस प्रकार अर्थव्यवस्था जीविकोपार्जन का क्षेत्र होता है।

प्रश्न 3.
भारत कैसा देश है और यहाँ का मुख्य व्यवसाय क्या है?
उत्तर:
भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ का मुख्य व्यवसाय कृषि है।

प्रश्न 4.
वैदिक काल में अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार क्या था?
उत्तर:
वैदिक काल में अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि था। पशुपालन, आखेट और दस्तकारी का भी अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान था।

प्रश्न 5.
गुणवत्ता की दृष्टि से कहाँ की मलमल विश्व प्रसिद्ध है?
उत्तर:
गुणवत्ता की दृष्टि से ढाका की मलमल विश्व प्रसिद्ध है। अतः वस्त्र निर्माण का इस युग में विशेष विकास हुआ।

प्रश्न 6.
भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास को कितने भागों में विभाजित किया जा सकता है?
उत्तर:
भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास को तीन भागों में विभाजित कर सकते हैं –

  1. अंग्रेजों के आगमन के पूर्व ग्रामीण अर्थव्यवस्था
  2. अंग्रेजों के आगमन के पश्चात् ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा
  3. स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् ग्रामीण अर्थव्यवस्था।

प्रश्न 7.
प्राचीन समय में ग्रामीण समुदाय के कार्यों का पारिश्रमिक किस रूप में दिया जाता था?
उत्तर:
प्राचीन समय में गाँव में बढ़ई, लुहार, कुम्हार, कारीगर, मोची, जुलाहे आदि का पारिश्रमिक अनाज या वस्तु के रूप में दिया जाता था।

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प्रश्न 8.
ग्राम अधिकारी के रूप में मुखिया का क्या कार्य होता था?
उत्तर:
मुखिया गाँव का प्रमुख अधिकारी होता था। इसका कार्य किसानों से लगान की वसूली कर शासक को देना था।

प्रश्न 9.
वस्तु विनिमय प्रणाली किसे कहते थे?
उत्तर:
वस्तु विनिमय प्रणाली, विनिमय की वह प्रणाली होती थी जिसमें वस्तु के बदले वस्तु या सेवा का प्रत्यक्ष आदान-प्रदान होता था। इसमें मुद्रा का प्रयोग नहीं किया जाता था।

प्रश्न 10.
अंग्रेजों के आगमन के पश्चात् भारत के गाँवों की क्या दशा थी?
उत्तर:
अंग्रेजों ने भारत और भारतीयों का हर प्रकार से शोषण किया। उन्होंने ऐसी नीतियाँ अपनाईं जिसके कारण खुशहाल भारत गरीबी और भुखमरी से जूझने लगा। कृषि और उद्योग पर भी बुरा प्रभाव पड़ा।

प्रश्न 11.
ग्रामीण जनसंख्या शहरों की ओर पलायन क्यों कर रही है?
उत्तर:
गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीण जनसंख्या शहरों की ओर पलायन कर रही है।

प्रश्न 12.
न्यूनतम मूल्य का निर्धारण कौन करता है?
उत्तर:
न्यूनतम मूल्य का निर्धारण सरकार द्वारा फसलों की उचित बिक्री मूल्य हेतु किया जाता है।

प्रश्न 13.
आदर्श ग्राम कैसा होना चाहिए?
उत्तर:
एक आदर्श ग्राम में कृषि विकसित होनी चाहिए, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आवास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ग्राम में स्वच्छता के प्रति जागरूकता एवं उपलब्ध संसाधनों का सम्पूर्ण प्रयोग होना चाहिए।

प्रश्न 14.
चकबन्दी से क्या आशय है?
उत्तर:
चकबन्दी वह प्रक्रिया है जिसमें किसान की छितरी छोटी-छोटी जोतों के बदले उसी किस्म की उतने ही आकार के एक या दो भूखण्ड दे दिये जाते हैं। यह ऐच्छिक और अनिवार्य दोनों होती है।

प्रश्न 15.
भूमि सुधार क्या है?
उत्तर:
भूमि सुधार किसी संगठन या भूमि व्यवस्था की संस्थागत व्यवस्था में होने वाले प्रत्येक परिवर्तन से है। भूमि स्वामित्व एवं भूमि जोत में होने वाला सुधार भूमि सुधार के अन्तर्गत आता है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अर्थव्यवस्था से क्या आशय है ? यह कितने प्रकार की हो सकती है?
अथवा
अर्थव्यवस्था का आशय स्पष्ट कीजिए। (2008, 09)
उत्तर:
अर्थव्यवस्था एक प्रणाली है जिसके द्वारा मनुष्य जीविकोपार्जन करता है तथा अर्थव्यवस्था एक क्षेत्र विशेष में विद्यमान उत्पादन इकाइयों से बनती है। दूसरे शब्दों से हम कह सकते हैं कि अर्थव्यवस्था का अर्थ एक देश के उन सभी खेतों, कारखानों, दुकानों, खदानों, बैंकों, सड़कों, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, अस्तपाल आदि से है जो लोगों को रोजगार देते हैं एवं वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करते हैं तथा जिनका प्रयोग वहाँ की जनता द्वारा किया जाता है। अर्थव्यवस्था तीन प्रकार की हो सकती है-

  1. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था
  2. समाजवादी अर्थव्यवस्था तथा
  3. मिश्रित अर्थव्यवस्था।

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प्रश्न 2.
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् आधुनिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् 2011 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार वर्तमान में भारत की कुल जनसंख्या का 64.84 प्रतिशत भाग गाँवों में निवास करती है तथा शहरी क्षेत्रों से केवल 31.16 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। इसी प्रकार आज गाँवों की संख्या 6,38,588 है जबकि शहरों की संख्या मात्र 5,161 ही है। आज भी भारत गाँवों का देश है। यहाँ की अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान है। देश की दो-तिहाई जनसंख्या अपनी आजीविका के लिये प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर ही निर्भर है।

परन्तु देश के सकल उत्पाद में कृषि का योगदान केवल 26 प्रतिशत है। पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा देश का आर्थिक विकास तीव्र गति से हुआ है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी इससे अछूती नहीं रही है। गाँवों का स्वरूप बदलने लगा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अनेक परिवर्तन दृष्टिगोचर होने लगे। जिसमें से प्रमुख परिवर्तन मौद्रिक प्रणाली का प्रार्दुभाव, सहायक एवं कुटीर उद्योगों का विकास, तकनीकी उन्नति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, संचार एवं आवागमन की पर्याप्त सुविधाएँ आदि हैं।

प्रश्न 3.
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद ग्रामीण समुदाय की संरचना में क्या परिवर्तन हुए?
उत्तर:
ग्रामीण समुदाय की संरचना-स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् कृषकों को उनके पास उपलब्ध भूमि के स्वामित्व के आधार पर चार भागों में बाँटा जा सकता है –

  • बड़े कृषक :
    बड़े कृषकों के अन्तर्गत वह कृषक आते हैं जिनके पास 2 हेक्टेअर से लेकर 10 हेक्टेअर तक भूमि है।
  • मॅझोले कृषक :
    मँझोले कृषक वह होते हैं जिनके पास 2 हेक्टेअर या उससे कुछ अधिक भूमि होती है।
  • छोटे कृषक :
    छोटे कृषक वह कहलाते हैं जिनके पास मात्रं 2 हेक्टेअर से भी कम भूमि होती है।
  • भूमिहीन कृषक :
    भूमिहीन कृषकों के पास अपनी कोई भूमि नहीं होती है। वह बँटाई पर भूमि लेकर खेती करते हैं या फिर दूसरों के खेतों में मजदूरी करते हैं।

प्रश्न 4.
अंग्रेजों के आगमन के पश्चात् भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विशेषताओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
अथवा
अंग्रेजों के आगमन के पश्चात् भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ लिखिए। (2008, 18)
उत्तर:
भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ

  • दस्तकारी एवं हस्तकला का पतन :
    अंग्रेजों की नीतियों के फलस्वरूप गाँवों में दस्तकारी व हस्तकला का पतन होने लगा। गाँव के दस्तकार बेरोजगार हो गये। गाँवों की समृद्धि और खुशहाली समाप्त हो गयी।
  • आत्मनिर्भरता की समाप्ति :
    कृषि के व्यापारीकरण के परिणामस्वरूप उपज को गाँवों के बाहर ले जाकर बेचा जाने लगा तथा गाँव की आवश्यकताओं की पूर्ति का सामान भी बाहर से आने लगा। इस प्रकार गाँवों की आत्मनिर्भरता स्वयं ही समाप्त हो गयी।
  • कृषि भूमि का हस्तान्तरण :
    निर्धनता के फलस्वरूप कृषक, महाजनों व साहूकारों से ऋण लेने लगे; पर ऋण की वापसी न कर पाने से महाजनों व साहूकारों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया। इस प्रकार कृषि भूमि का हस्तान्तरण साहूकारों व महाजनों को होने लगा। फलस्वरूप कृषक भूमिहीन हो गये।
  • कृषि का पिछड़ापन :
    अंग्रेजों द्वारा शुरू की गयी जमींदारी प्रथा का कृषि व कृषकों पर बहुत बुरा असर पड़ा। कृषक निर्धन एवं ऋणग्रस्त होते गये। शासन और जमींदारों ने भूमि की उत्पादकता और सुधार की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जिससे भूमि की उत्पादकता कम होती गई। परिणामस्वरूप किसानों का शोषण किया जाने लगा।

प्रश्न 5.
किसी ग्राम का आर्थिक अध्ययन करते समय हमें किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर:
आर्थिक अध्ययन से तात्पर्य है कि एक क्षेत्र विशेष में उपलब्ध संसाधन, वहाँ की जनसंख्या, आजीविका के साधन, आर्थिक स्थिति, परिवहन व संचार के साधन, वानिकी, उद्यानिकी, हाट-बाजार, वित्त, सामाजिक एवं सामुदायिक स्थितियों का अध्ययन करना। किसी गाँव के आर्थिक अध्ययन के लिए सबसे पहले अध्ययन का उद्देश्य निर्धारित करना होता है। तत्पश्चात् अध्ययन का क्षेत्र सुनिश्चित कर अध्ययन की योजना बनायी जाती है। किसी भी अध्ययन के लिये आवश्यक सांख्यिकी आँकड़ों की भी आवश्यकता पड़ती है। इसके लिये सामान्यतः तालिका और प्रश्नावली का निर्माण किया जाता है।

उस गाँव का अध्ययन करके, उस गाँव में उपलब्ध संसाधनों व सुविधाओं को ध्यान में रखकर, उस गाँव की असुविधाओं व समस्याओं के समाधान के लिये ग्रामवासियों का सहयोग लेना श्रेयस्कर होता है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् ग्रामीण अर्थव्यवस्था की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् 2011 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार वर्तमान में भारत की कुल जनसंख्या का 64.84 प्रतिशत भाग गाँवों में निवास करती है तथा शहरी क्षेत्रों से केवल 31.16 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। इसी प्रकार आज गाँवों की संख्या 6,38,588 है जबकि शहरों की संख्या मात्र 5,161 ही है। आज भी भारत गाँवों का देश है। यहाँ की अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान है। देश की दो-तिहाई जनसंख्या अपनी आजीविका के लिये प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर ही निर्भर है। परन्तु देश के सकल उत्पाद में कृषि का योगदान केवल 26 प्रतिशत है। पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा देश का आर्थिक विकास तीव्र गति से हुआ है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी इससे अछूती नहीं रही है। गाँवों का स्वरूप बदलने लगा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अनेक परिवर्तन दृष्टिगोचर होने लगे। जिसमें से प्रमुख परिवर्तन मौद्रिक प्रणाली का प्रार्दुभाव, सहायक एवं कुटीर उद्योगों का विकास, तकनीकी उन्नति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, संचार एवं आवागमन की पर्याप्त सुविधाएँ आदि हैं।

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 9 प्राचीन भारत का इतिहास

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 9 प्राचीन भारत का इतिहास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सा नगर सिन्धु सभ्यता से सम्बन्धित नहीं है?
(i) मोहनजोदड़ो
(ii) कालीबंगा
(iii) लोथल
(iv) पाटलिपुत्र।
उत्तर:
(iv) पाटलिपुत्र।

प्रश्न 2.
चन्द्रगुप्त मौर्य के समय कौन-सा विदेशी यात्री भारत आया?
(i) फाह्यान
(ii) ह्वेनसांग
(iii) एरियन
(iv) मेगस्थनीज।
उत्तर:
(i) फाह्यान

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सही जोड़ी मिलाइए ‘अ’
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 9 प्राचीन भारत का इतिहास - 1

उत्तर:

  1. → (घ)
  2. → (क)
  3. → (ख)
  4. → (ग)
  5. → (ङ)

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. जैन धर्म के संस्थापक …………. थे। (2017)
  2. महात्मा बुद्ध को …………. वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था।
  3. …………. और ………….. भारत के दो महाकाव्य हैं।
  4. गुप्तवंश का संस्थापक …………. था।

उत्तर:

  1. प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव
  2. बोधि वृक्ष
  3. रामायण और महाभारत
  4. श्रीगुप्त।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वेदों की संख्या एवं उनके नाम लिखिए। (2014, 16)
उत्तर:
वेद चार हैं। उनके नाम हैं :

  1. ऋग्वेद
  2. सामवेद
  3. यजुर्वेद
  4. अथर्ववेद।

प्रश्न 2.
सिन्धु सभ्यता के चार प्रमुख नगरों के नाम लिखिए। (2016, 18)
उत्तर:

  1. मोहनजोदड़ो
  2. लोथल
  3. कालीबंगा
  4. मांडा।

प्रश्न 3.
मेगस्थनीज कौन था? उसके द्वारा रचित ग्रन्थ का नाम लिखिए।
उत्तर:
मेगस्थनीज़ चन्द्रगुप्त के दरबार में राजदूत बनकर आया था। उसने ‘इण्डिका’ नामक ग्रन्थ की रचना की थी।

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प्रश्न 4.
प्राचीन भारत के प्रमुख शिक्षा केन्द्रों के नाम लिखिए। (2014, 18)
उत्तर:
प्राचीन भारत के प्रमुख शिक्षा केन्द्र –

  1. नालन्दा विश्वविद्यालय
  2. तक्षशिला विश्वविद्यालय
  3. वल्लभी विश्वविद्यालय
  4. विक्रमशिला विश्वविद्यालय।

प्रश्न 5.
कौटिल्य (चाणक्य) कौन था? (2018) उसके प्रसिद्ध ग्रन्थ का नाम लिखिए। (2017)
उत्तर:
कौटिल्य (चाणक्य) चन्द्रगुप्त मौर्य का प्रधानमन्त्री था। उसका वास्तविक नाम विष्णुगुप्त था। चाणक्य ने ‘अर्थशास्त्र’ नामक ग्रन्थ की रचना की थी।

प्रश्न 6.
हूणों के आक्रमणों को विफल करने में कौन-सा गुप्त शासक सफल हुआ?
उत्तर:
हूणों के आक्रमणों को विफल करने में गुप्त शासक स्कन्दगुप्त सफल हुआ।

प्रश्न 7.
विक्रम संवत् किसने चलाया था?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) ने एक नवीन संवत् को प्रारम्भ किया, जिसे विक्रम संवत् के नाम से जाना जाता है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा नगर की खोज किसने की थी? (2015, 17)
उत्तर:
मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा नगर की खोज दयाराम साहनी तथा राखलदास बनर्जी ने की थी। 1921-22 ई. में इन दोनों विद्वानों ने हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में खुदाई कराकर इन नगरों की खोज की। पुरातत्ववेत्ताओं ने पुरातत्व परम्परा के अनुसार इस सभ्यता का नाम इसके सर्वप्रथम ज्ञात स्थल के नाम पर ‘हड़प्पा सभ्यता’ दिया।

प्रश्न 2.
सरस्वती नदी के बारे में प्राप्त नवीन जानकारियों का वर्णन कीजिए। (2008)
उत्तर:
सरस्वती नदी के बारे में की गई खोजों में विष्णु श्रीधर वाकणकर का योगदान महत्त्वपूर्ण है। वैदिककाल में सरस्वती एक बहुत बड़ी नदी थी। इसका उल्लेख वेदों में बार-बार आया है। पिछले 20 वर्षों में हवाई एवं भू-सर्वेक्षणों के माध्यम से सरस्वती नदी के प्रवाह क्षेत्र को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है। यह माना गया है कि हिमालय में शिवालिक, श्रृंखलाओं में सरस्वती नदी का उद्गम स्थल रहा होगा, जहाँ से यह अम्बाला, थानेश्वर, कुरुक्षेत्र, पहोवा, सिरसा, हांसी, अग्रोहा, हनुमानगढ़, कालीबंगा होती हुई अनूपगढ़ से सूरतगढ़ तक बहती थी। कालान्तर में भूगर्भीय परिवर्तन के कारण सरस्वती नदी धीरे-धीरे सूख गई और कुछ समय बाद लुप्त हो गई। सरस्वती नदी पर विकसित सभ्यता के विषय में निरन्तर शोध चल रहा है।

प्रश्न 3.
कलिंग युद्ध का भारतीय इतिहास में क्या महत्त्व है? लिखिए। (2018)
अथवा
कलिंग युद्ध किसने जीता था ? कलिंग युद्ध का भारतीय इतिहास में क्या महत्त्व है? (2008)
उत्तर:
अशोक मौर्यवंश का तीसरा और सर्वाधिक प्रसिद्ध सम्राट था। उसने कलिंग से युद्ध किया था। अशोक और कलिंग की सेनाओं के बीच बड़ा भीषण युद्ध हुआ। अन्त में विजय अशोक की हुई। इस युद्ध में डेढ़ लाख लोगों को बन्दी बना लिया गया, एक लाख हताहत हुए और उससे कई गुना अधिक मारे गए। युद्ध की विभीषिका और रक्तचाप देखकर अशोक का हृदय परिवर्तन हो उठा। भयंकर नरसंहार देखकर उसका मन पश्चात्ताप से भर उठा और उसने युद्ध के स्थान पर शान्ति की नीति अपनाई। उसने युद्ध यात्राओं के स्थान पर धर्म यात्राएँ की। उसने युद्धघोष को धर्मघोष में बदल दिया और बौद्ध धर्म का अनुयायी हो गया। कलिंग युद्ध ने अशोक के जीवन को नवीन दिशा प्रदान की।

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प्रश्न 4.
चन्द्रगुप्त द्वितीय द्वारा स्थापित वैवाहिक सम्बन्ध का राजनीतिक महत्त्व लिखिए।
उत्तर:
अपने पिता समुद्रगुप्त से प्राप्त साम्राज्य को चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अधिक सुदृढ़ और सुरक्षित बनाया। चन्द्रगुप्त ने नागवंश की राजकुमारी कुबेरनागा से विवाह किया। इससे दोनों राजवंशों में मित्रता हुई। उसने अपनी पुत्री प्रभावती का विवाह वाकाटक नरेश रुद्रसेन द्वितीय के साथ किया। इस सम्बन्ध से चन्द्रगुप्त को शकों पर नियन्त्रण प्राप्त करने में सफलता मिली। यह विवाह सम्बन्ध राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण सिद्ध हुए। कदम्बवंश की राजकन्या का विवाह भी गुप्तवंश में हुआ था। इस विवाह सम्बन्ध द्वारा चन्द्रगुप्त द्वितीय का यश दक्षिण भारत में भी फैल गया। चन्द्रगुप्त द्वितीय के लिये ‘विक्रमादित्य’ उपाधि का उल्लेख मिलता है।

प्रश्न 5.
गुप्तकाल की शासन व्यवस्था की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
मौर्य शासकों की भाँति गुप्तकाल के राजाओं ने भी लोक कल्याण को प्रशासन का मूल आधार बनाया। राजा राज्य का सर्वोच्च अधिकारी था, राज्य की अन्तिम सत्ता उसी के हाथ में थी। राजा की सहायता के लिये मन्त्रिपरिषद् व अन्य पदाधिकारी होते थे। राज्य की आय का प्रमुख स्रोत ‘भूमिकर’ था जिसे ‘भाग’ कहते थे। यह सामान्यतया उपज का 1/6 भाग हुआ करता था। गुप्त प्रशासन तीन भागों में विभाजित था-केन्द्रीय, प्रान्तीय व स्थानीय शासन। गुप्त शासकों का ध्येय जनकल्याण था। इस हेतु उन्होंने औषधालय, चिकित्सालय, धर्मशालाएँ, पाठशालाएँ, सड़कें विश्रामगृह आदि बनवाये।

प्रश्न 6.
हर्ष के साम्राज्य विस्तार के बारे में लिखिए। (2008)
उत्तर:
सम्राट हर्षवर्धन थानेश्वर के शासक प्रभाकर वर्धन का पुत्र था। प्रभाकर वर्धन के बाद उसका पुत्र राज्यवर्धन गद्दी पर बैठा। राज्यवर्धन अपनी बहन राज्यश्री के पति कन्नौज नरेश गृहवर्मा की मदद के लिये मालवा शासक देवगुरु से संघर्षरत रहा और देवगुरु ने गृहवर्मा की हत्या कर दी। राज्यवर्धन ने देवगुरु को पराजित किया किन्तु देवगुरु के मित्र बंगाल नरेश शशांक ने धोखे से राज्यवर्धन का वध कर दिया। इन परिस्थितियों में हर्ष 16 वर्ष की आयु में सिंहासन पर बैठा। उसकी बहन के कोई सन्तान न होने से कन्नौज का राज्य भी उसे ही मिला। इस प्रकार वह थानेश्वर और कन्नौज दोनों का स्वामी हो गया। उसका साम्राज्य उत्तर में हिमालय से दक्षिण में नर्मदा नदी तक, पूरब में बंगाल से सिन्धु तक फैला हुआ था।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वैदिक सभ्यता का वर्णन कीजिए। (2009, 14)
अथवा
वैदिक सभ्यता में धार्मिक जीवन का वर्णन कीजिए। (2011) [संकेत- धार्मिक जीवन शीर्षक देखें।
उत्तर:
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद इन चारों वेदों एवं अन्य समकालीन साहित्य लेखन के काल को वैदिक सभ्यता के नाम से जाना जाता है। इसकी विवेचना अग्र प्रकार कर सकते हैं

(1) सामाजिक जीवन :
वैदिक काल का भारतीय समाज आर्य ‘जनों’ से मिलकर बना था। आर्यों के पास हजारों पालतू पशु होते थे। जानवरों के लिये जहाँ चारा पानी उपलब्ध होता था, वहीं ये बस जाते थे। आर्यों के सामाजिक संगठन का मुख्य आधार परिवार या कुटुम्ब था। परिवार का स्वामी या मुखिया सबसे वयोवृद्ध पुरुष होता था। वैदिक समाज में वर्ण व्यवस्था प्रचलित थी। वर्ण चार थे-ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व शूद्र। सामाजिक व्यवस्था के संचालन के लिये आर्यों ने अपने जीवन को सौ वर्ष का मानकर उसे चार आश्रमों में बाँटा था, यथा-ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं सन्यास आश्रम। स्त्रियों को समाज में उच्च स्थान प्राप्त था। दहेज प्रथा, पर्दाप्रथा, बाल विवाह जैसी कुप्रथाएँ प्रचलन में नहीं थीं। सूती, ऊनी, रेशमी वस्त्र उपयोग में लाये जाते थे। स्त्रियाँ शृंगार में विशेष रुचि लेती थीं। चावल, जौ, घी, दूध आर्यों का प्रमुख भोजन था। रथदौड़, घुड़सवारी, आखेट, नृत्य, जुआ, चौपड़ आदि मनोरंजन के साधन थे।

(2) आर्थिक जीवन :
वैदिक सभ्यता ग्रामीण एवं कृषि प्रधान सभ्यता थी। इस समय गेहूँ, जौ, उड़द, मसूर तथा तिल की खेती होती थी। कृषि के साथ पशुपालन अन्य मुख्य व्यवसाय था। घोड़े, गाय, बैल, भेड़, बकरी आदि पालतू पशु थे। गृह उद्योग और दस्तकारी उन्नत अवस्था में थे। बढ़ई, लुहार, सुनार, चर्मकार सभी के कार्यों का यथोचित महत्त्व था। आन्तरिक और बाह्य दोनों प्रकार का व्यापार होता था। वस्तु विनिमय प्रणाली का प्रचलन था। गाय वस्तु विनिमय का प्रमुख साधन थी। गाय के बाद ‘निष्क’ का उपयोग वस्तु विनिमय के लिये किया जाता था।

(3) धार्मिक जीवन :
आर्यों के धार्मिक जीवन की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं –

  • वैदिक आर्य प्रकृति के उपासक थे। वे प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते थे। सूर्य, चन्द्र, वायु, मेघ, उषा, अदिति प्रमुख देवी-देवता थे।
  • प्रत्येक आर्य के लिये यज्ञ का विधान था। उनका विश्वास था कि यज्ञ से देवता प्रसन्न होते हैं। पूजा पद्धति का मुख्य आधार ‘यज्ञ’ थे।
  • अनेक देवताओं को पूजते हुये वे एकेश्वरवाद में विश्वास करते थे।
  • अश्वमेध, राजसूय, बाजपेय जैसे महायज्ञों का सम्पादन इसी काल में हुआ।

(4) राजनीतिक जीवन :
आर्यों के राजनीतिक जीवन की प्रमुख विशेषताएँ निम्न थीं –

  • वैदिक आर्य अनेक ‘जन’ (कबीले) के रूप में संगठित थे। एक ‘जन’ में एक ‘वंश’ या ‘परिवार’ के व्यक्ति होते थे।
  • राजनीतिक व्यवस्था का आधार कुटुम्ब था। कुटुम्ब का प्रधान पिता होता था। अनेक कुटुम्बों को मिलाकर एक ‘ग्राम’ बनता था।
  • अनेक ग्रामों को मिलाकर ‘विंश’ बनता था। जिसका प्रधान ‘विंशपति’ कहलाता था।
  • अनेक विंशों को मिलाकर ‘जन’ बनता था जिसका प्रधान ‘गोप’ होता था।
  • उत्तर वैदिक काल में राजा की शक्ति और प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई। राजा के प्रमुख कर्तव्य प्रजा की रक्षा करना, युद्ध करना, शान्ति बनाये रखना तथा प्रजा को न्याय प्रदान करना था।

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प्रश्न 2.
सिन्धु सभ्यता (हड़प्पा संस्कृति) की क्या देन है? समझाइए। (2008, 09, 17)
उत्तर:
सिन्धु सभ्यता (हड़प्पा संस्कृति) की प्रमुख देन निम्नलिखित हैं
(1) श्रेष्ठ प्राचीनतम संस्कृति:
हड़प्पा संस्कृति को भारत की श्रेष्ठ प्राचीनतम संस्कृति माना जाता है क्योंकि इस संस्कृति की जानकारी से पूर्व भारत के इतिहास को वैदिक काल से प्रारम्भ माना जाता था। यह दयाराम साहनी तथा राखलदास बनर्जी की ऐतिहासिक खोजों का परिणाम है कि हमें यह ज्ञात हो सका कि भारत में आर्यों के आगमन से पूर्व यहाँ एक नगर सभ्यता फल-फूल रही थी। वास्तव में, हड़प्पा संस्कृति का सम्पूर्ण अध्ययन करने के पश्चात् हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि यह अत्यन्त प्राचीन संस्कृति होने के पश्चात् भी एक विकसित तथा उच्च कोटि की नगर सभ्यता थी।

(2) श्रेष्ठतम सुनियोजित नगर व्यवस्था का प्रारम्भ :
हड़प्पा संस्कृति में ही व्यवस्थित ढंग से नगरों की स्थापना का कार्य प्रारम्भ हुआ था। एक विद्वान के अनुसार हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के नगरों की स्थापना ऐसे सुव्यवस्थित ढंग से की गई थी कि जिसका उदाहरण संसार में हमें और कहीं नहीं मिलता। आधुनिक काल की तरह नगरों में छोटी व बड़ी सड़कों का निर्माण किया गया था।

(3) उच्चतम नगर स्वच्छता :
नगरों की स्वच्छता का ध्यान जितना इस संस्कृति में रखा जाता था उतना तत्कालीन किसी भी सभ्यता में नहीं किया जाता था। नगरों में छोटी व बड़ी नालियों की व्यवस्था की जाती थी।

(4) नागरिक सुविधाओं का ध्यान :
हड़प्पा संस्कृति का नगर-प्रबन्ध भी उत्तम तथा व्यवस्थित ढंग का था। ऐसा किसी भी प्राचीन संस्कृति में देखने को नहीं मिलता। स्थान-स्थान पर जल पीने की व्यवस्था थी तो उचित ढंग से स्नान करने के लिए सार्वजनिक स्नानागारों की भी व्यवस्था थी। यात्रियों के लिए धर्मशालाएँ भी बनीं थीं।

(5) आकर्षक तथा उपयोगी कला का विकास :
वास्तव में भारतीय कला का प्रारम्भ भी इस संस्कृति के काल से प्रारम्भ होता है। भवन निर्माण कला, चित्रकला, मूर्तिकला आदि का विकास यहाँ अपूर्व हुआ था। इस संस्कृति की कला की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ थीं –

  • कला में बनावटीपन का प्रभाव न होकर स्वाभाविकता थी।
  • भवनों का निर्माण उपयोगिता को ध्यान में रखकर हुआ था।
  • उपयोगिता के साथ-साथ कला में अपूर्व सौन्दर्य तथा आकर्षण भी था।
  • संगीत तथा नृत्यकला का भी यहाँ अपूर्व विकास हुआ।
  • ताम्रपत्र तथा मुद्रा कला की भी अपूर्व प्रगति हुई थी।
  • लेखन कला का भी प्रारम्भ इस सभ्यता से ही हुआ।

(6) विकसित धर्म-हड़प्पाकालीन धर्म एक विकसित धर्म था। उस काल के धर्म का प्रभाव वैदिककालीन धर्म पर पड़ने के साथ-साथ वर्तमान हिन्दू धर्म पर भी पड़ा है। अन्य शब्दों में उस काल की अनेक धार्मिक रीतियाँ आज के धर्म का भी अंग बनी हुई हैं। शिव तथा पृथ्वी माता की पूजा, लिंग पूजा, पीपल पूजा, सर्प पूजा तथा मूर्ति पूजा, वर्तमान हिन्दू धर्म का एक प्रमुख अंग है।

प्रश्न 3.
चन्द्रगुप्त मौर्य की शासन व्यवस्था की विशेषताएँ लिखिए। (2008, 09, 12, 14, 15, 17)
उत्तर :
चन्द्रगुप्त मौर्य की गणना भारत के महानतम शासकों में की जाती है। चन्द्रगुप्त मौर्य महान् विजेता, महान् कूटनीतिज्ञ, कुशल प्रशासक, धर्मपरायण एवं प्रजा हितैषी शासक था। उसके शासन की विशेषताएँ निम्नानुसार हैं –

  1. सम्राट, साम्राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था। वह सेना, न्याय-व्यवहार का प्रधान होता था। वह प्रजाहित के कार्यों में संलग्न रहता था।
  2. राजा की सहायता हेतु मन्त्रिपरिषद् थी।
  3. चन्द्रगुप्त मौर्य की गुप्तचर व्यवस्था, न्याय व्यवस्था एवं सैन्य संगठन सुदृढ़ था।
  4. राज्य की आय का प्रमुख साधन भूमिकर था। उपज का 1/6 भाग कर के रूप में लिया जाता था।
  5. कर एकत्र करने वाला अधिकारी ‘समाहर्ता’ कहलाता था।
  6. साम्राज्य प्रान्तों में विभाजित थे जो चक्र कहलाते थे। इनका शासन राजकुमार अथवा राजपरिवार के व्यक्तियों द्वारा होता था।
  7. नगरों का प्रबन्ध करने हेतु छः समितियाँ होती थीं। प्रत्येक में पाँच-पाँच सदस्य होते थे।
  8. चन्द्रगुप्त मौर्य का सैन्य संगठन सुदृढ़ था। इसकी देखरेख 6 समितियों द्वारा होती थी। ये समितियाँ-नौ सेना समिति, पदाति-सेना समिति, अश्व-सेना समिति, रथ सेना समिति, गज सेना समिति, यातायात व युद्ध सामग्री वाहिनी समिति थी।
  9. चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन में दण्ड-विधान कठोर था।
  10.  तत्कालीन समय में दो प्रकार के न्यायालय विद्यमान थे –
    • धर्मस्थीय (दीवानी) न्यायालय
    • कंटक शोधन (फौजदारी) न्यायालय।

प्रश्न 4.
अशोक के धम्म को समझाते हुए उसके धर्म की विशेषताएँ बताइए। (2009, 13, 16)
अथवा
अशोक के धम्म की तीन विशेषताएँ लिखिए। (2018)
उत्तर:
अशोक का धम्म (धर्म)-अपने प्रारम्भिक काल में अशोक हिन्दू धर्म का अनुयायी था परन्तु कलिंग युद्ध के उपरान्त उसने बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया। अपने लेखों में उसने बौद्धधर्म के मूल सिद्धान्तों का ही नहीं अपितु उसके कुछ नैतिक सिद्धान्तों का प्रचार किया। उसका धम्म सब धर्मों का सार था। अशोक के धम्म की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं –

  1. अशोक के धर्म की प्रमुख विशेषता ‘सार्वभौमिकता’ है, अर्थात् उसने अपने धर्म में सभी धर्मों के सद्गुणों का समावेश किया।
  2. अशोक ने अपने धर्म में अहिंसा को विशेष महत्त्व दिया। उसने उन यज्ञों को बन्द करवा दिया जिनमें पशुबलि होती थी।
  3. शोक ने अपने धर्म में अनुशासन तथा शिष्टाचार को भी विशेष महत्त्व दिया। उसने अपने शिलालेखों में उत्कीर्ण किया कि-“माता-पिता की आज्ञा का पालन होना चाहिए तथा इसी प्रकार गुरुजनों की आज्ञा का भी पालन होना चाहिए।”
  4. अशोक ने सेवकों, मित्रों तथा ब्राह्मणों के साथ सद्-व्यवहार करने पर भी बल दिया।
  5. अशोक ने धार्मिक आडम्बरों का विशेष विरोध किया तथा सत्य बोलने तथा सद् आचरण पर विशेष बल दिया।
  6. अशोक का धम्म सर्वमंगलकारी है जिसका मूल उद्देश्य प्राणी का मानसिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक उत्थान करना था। उसका धम्म अत्यन्त सरल तथा व्यावहारिक था।

प्रश्न 5.
गुप्तकाल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा गया है, इस कथन की व्याख्या (2008, 11, 12, 13, 15)
अथवा
गुप्तकाल को भारतीय इतिहास का “स्वर्ण युग” क्यों कहा गया है? (2018)
उत्तर:
गुप्तकाल में भारत की चहुँमुखी उन्नति हुई। इसी कारण इस काल को स्वर्ण युग की संज्ञा दी गई है। गुप्तकाल को स्वर्णयुग कहलाने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

  • महान शासकों का युग :
    गुप्तकाल की प्रमुख विशेषता थी कि इस युग में अनेक महान् शासकों ने जन्म लिया। चन्द्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त द्वितीय तथा स्कन्दगुप्त इस युग के महान शासक थे। समुद्रगुप्त द्वारा की गई महान् सैनिक विजयों के कारण उसे ‘भारत का नेपोलियन’ कहा जाता है। चन्द्रगुप्त द्वितीय को ‘विक्रमादित्य’ की उपाधि प्राप्त हुई। स्कन्दगुप्त भी बड़ा वीर और पराक्रमी था।
  • राजनीतिक एकता का युग :
    गुप्तकाल से पूर्व के दीर्घकाल में भारत छोटे-छोटे अनेक राज्यों में विभक्त था। विदेशी शक तथा कुषाणों ने काठियावाड़, गुजरात और महाराष्ट्र प्रदेशों पर अधिकार कर लिया था। विदेशी शक्तियों का उन्मूलन तथा छोटे-छोटे राज्यों को पराजित कर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना करना गुप्त सम्राटों का ही काम था।
  • आर्थिक सम्पन्नता का युग :
    गुप्तकाल में आर्थिक क्षेत्र में अत्यधिक उन्नति हुई थी। आन्तरिक शान्ति, कुशल प्रशासनिक व्यवस्था तथा यातायात की समुचित व्यवस्था के कारण भारत के आन्तरिक तथा बाह्य व्यापार को पर्याप्त प्रोत्साहन मिला। गुप्तकाल में भारत के चीन, जावा, बर्मा (म्यांमार) तथा रोम आदि देशों से व्यापारिक सम्बन्ध थे।।
  • लोक-कल्याणकारी राज्य :
    गुप्तकाल के शासक केवल निरंकुशता में ही विश्वास नहीं करते थे वरन् उनके अन्दर लोक-कल्याण की भी भावना थी। चीनी यात्री फाह्यान के यात्रा विवरण से स्पष्ट हो जाता है कि गुप्त सम्राट राज्य की आय का एक विशाल भाग जन या लोक-कल्याण में खर्च करते थे।
  • धार्मिक सहिष्णुता की स्थापना :
    गुप्त सम्राट वैष्णव धर्म के अनुयायी थे परन्तु वे बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म का भी आदर करते थे। प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार उपासना तथा पूजा-पाठ की स्वतन्त्रता थी।
    कीजिए।
  • साहित्य का अपूर्व विकास :
    गुप्तकाल में साहित्य का अपूर्व विकास हुआ। कालीदास, विशाखदत्त तथा भास इस काल के महान् साहित्यकार थे।।
  • विज्ञान का विकास :
    ज्योतिष, रसायनशास्त्र, गणित तथा खगोलशास्त्र का इस काल में अपूर्व विकास हुआ था। दशमलव प्रणाली की खोज इस काल में ही हुई थी। आर्यभट्ट, वराहमिहिर तथा नागार्जुन जैसे श्रेष्ठ वैज्ञानिक तथा खगोलशास्त्री इस काल में ही हुए थे।
  • ललित कलाओं का अपूर्व विकास :
    गुप्तकाल ललित कलाओं का भी स्वर्ण युग माना जाता है। स्थापत्य कला, मूर्तिकला तथा चित्रकला का इस युग में अपूर्व विकास हुआ। अजन्ता की गुफाओं के अधिकांश चित्र इस युग में ही बनाये गये थे।

प्रश्न 6.
समुद्रगुप्त के विजय अभियान का संक्षिप्त विवरण दीजिए। (2009)
उत्तर:
समुद्रगुप्त गुप्तकालीन भारत का एक महान दिग्विजयी सम्राट था। अपने शासन काल में उसने अनेक राजाओं को परास्त कर अपने साम्राज्य का अपूर्व विस्तार किया। उसकी प्रमुख दिग्विजयें निम्नलिखित थीं
(1) उत्तरी भारत की विजय :
उत्तरी भारत की विजयों का उल्लेख प्रयाग प्रशस्ति में मिलता है। इस प्रशस्ति के अनुसार समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त के 9 राज्यों को परास्त कर अपने साम्राज्य में मिला लिया था। ये राज्य थे-

  • नागदत्त
  • बलवर्मन
  • रुद्रदेव
  • मतिल
  • चन्द्रवर्मन
  • गणपति नाग
  • नागसेन
  • अच्युत
  • नंदिन।

(2) दक्षिण भारत की विजय :
उत्तरी भारत पर विजय प्राप्त करने के पश्चात् समुद्रगुप्त ने दक्षिण भारत के लगभग 12 राज्यों को पराजित कर अपने साम्राज्य में न मिलाकर अपनी अधीनता ही स्वीकार करायी तथा वार्षिक कर लेता रहा। समुद्रगुप्त ने यह नीति इस कारण अपनायी क्योंकि दक्षिण के राज्य उसके साम्राज्य से दूर पड़ते थे अतः प्रशासनिक कठिनाइयाँ आ सकती थीं।

(3) आटविक राज्यों पर विजय प्राप्त करना :
अभिलेखों से ज्ञात होता है कि जबलपुर तथा नागपुर के निकट 18 अटवी राज्य थे। इन समस्त राज्यों के राजाओं को पराजित कर अपना सेवक बनाया।

(4) सीमान्त राज्यों की विजय :
समुद्रगुप्त ने सीमान्त राज्यों पर भी अपना प्रभुत्व स्थापित किया। उसने कुछ राज्यों को तो पराजित किया तो कुछ ने बिना युद्ध किये ही उसकी अधीनता स्वीकार कर ली। प्रमुख सीमान्त राज्य निम्नलिखित थे-

  • समतट
  • दबाक
  • कामरूप
  • नेपाल
  • कर्तुरपुर।।

(5) गणराज्यों की विजय :
इस काल में अनेक गणराज्य भी थे जो गुप्त साम्राज्य के दक्षिण-पश्चिम में स्थित थे। इनमें प्रजातन्त्रात्मक शासन व्यवस्था का प्रचलन था। इन गणराज्यों ने बिना युद्ध किए ही समुद्रगुप्त की अधीनता स्वीकार कर ली। प्रमुख गणराज्य थे-मद्रक, रवरपारिक, मालव, अर्जुनायन, आभीर तथा हनकानिक।

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प्रश्न 7.
सम्राट हर्षवर्धन के शासन प्रबन्ध का वर्णन कीजिए। (2008, 09, 10, 16)
अथवा
सम्राट हर्षवर्धन की शासन व्यवस्था की तीन विशेषताएँ लिखिए। (2017, 18)
उत्तर:
सम्राट हर्षवर्धन के शासन प्रबन्ध का वर्णन निम्न प्रकार है –
(1) राजतन्त्रात्मक शासन :
हर्ष के शासन का स्वरूप राजतन्त्रात्मक था। केन्द्रीय शासन में सम्राट का स्थान सर्वोपरि था। वही सेना का प्रधान और सर्वोच्च न्यायाधीश होता था। प्रजा का कल्याण उसका मुख्य उद्देश्य था। सम्राट की सहायता के लिये अनेक मंत्री व सचिव होते थे। मन्त्रिपरिषद् के निर्णय को मानने को सम्राट बाध्य नहीं था।

(2) साम्राज्य की विशालता :
साम्राज्य की विशालता के कारण प्रशासकीय सुविधा हेतु उसे प्रान्तों में विभाजित किया गया। प्रान्त, भुक्ति या देश कहलाते थे। भुक्ति के शासक उपरिक कहलाते थे। इन पदों पर राजवंश के राजकुमार या राजपरिवार के सदस्य ही नियुक्त होते थे। प्रत्येक प्रान्त अनेक विषय (जिलों) में विभाजित था। विषय का शासक विषयपति कहलाता था। यह जिले की विभिन्न गतिविधियों का निरीक्षण करता था। शासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम होती थी।

(3) कठोर दण्ड विधान :
हर्ष के शासनकाल में दण्ड का विधान बहुत कठोर था। कुछ अपराधों के लिये अंग-भंग का दण्ड दिया जाता था। दण्ड विधान कठोर होने से अपराध कम होते थे।

(4) राज्य की आय :
राज्य की आय का प्रमुख साधन भूमिकर था। भूमिकर सामान्य उपज का 1/6 भाग लिया जाता था। अनाज के रूप में कर चुकाने की व्यवस्था थी। इसके अतिरिक्त मण्डी, घाटों, व्यापारियों पर कर व अर्थदण्ड राज्य की आय के प्रमुख साधन थे।

(5) महान् शासक :
हर्ष भारत के महान् शासकों में से एक था। सामान्यतः यह माना जाता है कि हर्षवर्धन का सम्पूर्ण उत्तरी भारत में एकछत्र राज्य था। वह महान् विजेता, कुशल प्रशासक, लोक कल्याणकारी, महान् धर्मपरायण, विद्या-प्रेमी व महान् दानी था।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सिन्धु सभ्यता की खोज डा. दयाराम साहनी ने हड़प्पा नामक स्थल पर कब की थी?
(i) सन् 1901
(ii) सन् 1951
(iii) सन् 1921
(iv) सन् 1961
उत्तर:
(iii) सन् 1921

प्रश्न 2.
मोहनजोदड़ो का शाब्दिक अर्थ क्या है? (2009)
(i) मुर्दो का टीला
(ii) भगवान राम की जन्मस्थली
(iii) महावीर स्वामी का घर
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) मुर्दो का टीला

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प्रश्न 3.
राजतरंगिणी के लेखक (2008, 09)
(i) कौटिल्य
(ii) पाणिनी
(iii) कल्हण
(iv) हर्ष।
उत्तर:
(iii) कल्हण

प्रश्न 4.
वेदों की संख्या है (2011)
(i) 4
(ii) 6
(iii) 5
(iv) 81
उत्तर:
(i) 4

प्रश्न 5.
सामवेद, यजुर्वेद व अथर्ववेद की रचना किस काल में की गई?
(i) ऋग्वैदिक काल,
(ii) वैदिक काल
(iii) उत्तर काल,
(iv) सिन्धु सभ्यता।
उत्तर:
(ii) वैदिक काल

प्रश्न 6.
जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर कौन थे? (2009)
(i) वर्धमान महावीर स्वामी
(ii) महात्मा बुद्ध
(iii) दिगम्बर जैन
(iv) श्वेताम्बर जैन।
उत्तर:
(i) वर्धमान महावीर स्वामी

प्रश्न 7.
बौद्ध धर्म के संस्थापक का नाम क्या है? (2009)
(i) महावीर जैन
(ii) महात्मा बुद्ध
(iii) शुद्धोधन
(iv) हर्षवर्द्धन।
उत्तर:
(ii) महात्मा बुद्ध

प्रश्न 8.
महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति कहाँ हुई?
(i) पीपल वृक्ष
(ii) बोधि वृक्ष
(iii) बरगद वृक्ष
(iv) नीम वृक्ष।
उत्तर:
(ii) बोधि वृक्ष

प्रश्न 9.
‘मुद्रा राक्षस’ की रचना किसने की?
(i) कौटिल्य
(ii) कालिदास
(iii) विशाखदत्त
(iv) मेगस्थनीज।
उत्तर:
(iii) विशाखदत्त

प्रश्न 10.
‘इण्डिका’ की रचना किस लेखक ने की थी?
(i) कौटिल्य
(ii) कालिदास
(iii) विशाखदत्त
(iv) मेगस्थनीज।
उत्तर:
(iv) मेगस्थनीज।

प्रश्न 11.
यूनानी लेखकों ने अपने ग्रन्थों में चन्द्रगुप्त मौर्य को किस नाम से सम्बोधित किया है?
(i) सेन्ड्रोकोटस
(ii) सेल्यूकस
(iii) बेसेनियो
(iv) एन्टोनियो।
उत्तर:
(i) सेन्ड्रोकोटस

प्रश्न 12.
किस शासक को भारतीय नेपोलियन कहा जाता है? (2008, 17)
(i) स्कन्दगुप्त
(ii) समुद्रगुप्त
(iii) श्रीगुप्त
(iv) चन्द्रगुप्त।
उत्तर:
(ii) समुद्रगुप्त

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प्रश्न 13.
चन्द्रगुप्त द्वितीय को किस उपाधि से विभूषित किया गया?
(i) नेपोलियन
(ii) विक्रमादित्य
(iii) हिटलर
(iv) कौटिल्य।
उत्तर:
(ii) विक्रमादित्य

प्रश्न 14.
सम्राट हर्षवर्धन किस शासक का पुत्र था?
(i) राज्यवर्धन
(ii) विजयवर्धन
(iii) प्रभाकर वर्धन
(iv) गृहवर्मा।
उत्तर:
(ii) विजयवर्धन

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. विक्रम संवत् …………. ने चलाया था। (2008)
  2. सिन्धु सभ्यता की खोज सन् ……… में हुई। (2015)
  3. मोहनजोदड़ो की खोज …………. ने की थी। (2012)
  4. ………. में अनेक जनपदों का उल्लेख है। (2012)
  5. ………. विश्व का प्राचीनतम ग्रन्थ है।
  6. नंदवंश के शासनकाल में …………. का भारत पर आक्रमण हुआ। (2010)
  7. मौर्य वंश का अन्तिम शासक …………. था। (2008)
  8. बुद्ध का जन्म …………. नामक स्थान पर हुआ। (2011)
  9. अशोक महान ………… का पुत्र था। (2009)
  10. मोहनजोदड़ो में उत्खनन में एक विशाल …………. मिला है। (2014)
  11.  बौद्ध धर्म के संस्थापक …………. थे। (2016)

उत्तर:

  1. चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य)
  2. 1921 ई.
  3. राखलदास बनर्जी
  4. महाभारत
  5. ऋग्वेद
  6. चन्द्रगुप्त मौर्य
  7. वृहद्रथ
  8. लुम्बिनी
  9. बिन्दुसार
  10. स्नानागार
  11. गौतम बुद्ध।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
सिन्धु सभ्यता में मुख्य व्यवसाय पशुपालन था। (2008)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
चाणक्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का गुरु था। (2008)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
सामवेद विश्व का प्राचीनतम ग्रन्थ है। (2008)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
चन्द्रगुप्त द्वितीय के लिए ‘विक्रमादित्य’ उपाधि का उल्लेख मिलता है। (2011)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
महात्मा बुद्ध का जन्म लुम्बिनी नामक स्थान पर हुआ था। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 6.
वर्द्धमान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 7.
विक्रमादित्य उज्जैन के न्यायप्रिय शासक थे। (2010)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 8.
चन्द्रगुप्त मौर्य की गणना भारत के महानतम् शासकों में की जाती है। (2012)
उत्तर:
सत्य

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प्रश्न 9.
ऋग्वैदिक काल 1500 ई. पू. से 1000 ई. पू. माना जाता है। (2012)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 10.
चाणक्य का सम्बन्ध अर्थशास्त्र से है। (2013)
उत्तर:
सत्य

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 9 प्राचीन भारत का इतिहास - 2

उत्तर:

  1. → (ग)
  2. → (घ)
  3. → (ङ)
  4. → (क)
  5. → (ख)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
महान चरित्र के जीवन से सम्बन्धित विस्तृत काव्य रचना। (2008)
उत्तर:
महाकाव्य

प्रश्न 2.
विक्रम संवत् किसने चलाया? (2008)
उत्तर:
चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य)

प्रश्न 3.
मौर्य साम्राज्य का संस्थापक कौन था? (2008)
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य

प्रश्न 4.
किसी भी प्रकार का संग्रह नहीं करना। (2008)
उत्तर:
अपरिग्रह

प्रश्न 5.
जैन धर्म के संस्थापक मुनि। (2009, 11)
उत्तर:
महावीर स्वामी

प्रश्न 6.
चन्द्रगुप्त मौर्य के समय कौन-सा विदेशी यात्री भारत आया था?
(2014)
उत्तर:
फाह्यान।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राचीन भारत के इतिहास का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
प्राचीन भारत के इतिहास का अध्ययन करके ही हम प्राचीन भारतीय संस्कृति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अध्ययन से ही हमें ज्ञात होता है कि मानव ने पाषाण युग से लौह युग में किस प्रकार प्रवेश किया तथा आध्यात्मिक, कलात्मक तथा राजनीतिक क्षेत्रों की प्रगति की।

प्रश्न 2.
प्राचीन भारतीय इतिहास पर प्रकाश डालने वाले साहित्यिक स्रोतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वेद, आरण्यक, उपनिषद्, वेदांग, सूत्र, महाकाव्य, स्मृति, पुराण, बौद्ध साहित्य, जैन साहित्य, मुद्राराक्षस, अर्थशास्त्र, महाभाष्य, अष्टाध्यायी, राजतरंगिणी आदि साहित्यिक स्रोत प्राचीन भारतीय इतिहास पर प्रकाश डालते हैं।

प्रश्न 3.
प्राचीन भारत के अध्ययन के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण स्रोत क्या है?
उत्तर:
पुरातात्विक सामग्री; जैसे-अभिलेख, शिलालेख, स्तम्भलेख, ताम्रपत्र लेख, भोजपत्र लेख, मूर्तिलेख, मुद्राएँ, स्मारक आदि प्राचीन भारत के अध्ययन के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं।

प्रश्न 4.
लोथल तथा कालीबंगा कहाँ स्थित हैं ? यह प्राचीन इतिहास में क्यों प्रसिद्ध हैं?
उत्तर:
लोथल-यह गुजरात में रंगपुर के खण्डहरों से 48 मीटर उत्तर में स्थित है। कालीबंगा-यह राजस्थान के गंगानगर जिले में सरस्वती नदी के किनारे स्थित है। ये दोनों सिन्धु सभ्यता के प्रमुख नगर थे। इन नगरों में खुदाई में प्राप्त वस्तुओं से अनेक बातों का ज्ञान होता है।

प्रश्न 5.
सिन्धु घाटी सभ्यता किसे कहते हैं?
उत्तर:
भारत और पाकिस्तान के उत्तरी पश्चिमी भाग में सिन्धु व उसकी सहायक नदियों की घाटियों में जो नगर सभ्यता विकसित हुई, उसे सामान्यतः सिन्धु घाटी सभ्यता कहते हैं।

प्रश्न 6.
ऋग्वेद के सूक्तों की रचना कहाँ हुई थी?
उत्तर:
ऋग्वेद के सूक्तों की रचना सिन्धु घाटी के तट पर हुई थी।

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प्रश्न 7.
वैदिक सभ्यता (काल) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद इन चारों वेदों एवं अन्य समकालीन साहित्य लेखन के काल को वैदिक सभ्यता के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 8.
वैदिक समाज में कौन-कौन से वर्ण थे?
उत्तर:
वैदिक समाज में चार वर्ण थे-ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र।

प्रश्न 9.
वैदिक समाज में स्त्रियों की दशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वैदिक समाज में स्त्रियों को उच्च स्थान प्राप्त था। वे उच्च शिक्षा प्राप्त करती थीं तथा समस्त सामाजिक व धार्मिक कार्यों में भाग लेती थीं। दहेज प्रथा, पर्दा प्रथा, बाल-विवाह जैसी कुप्रथाएँ प्रचलन में नहीं थीं।

प्रश्न 10.
उन विदेशी यात्रियों के नाम लिखिए जिनके विवरण प्राचीन भारतीय इतिहास पर प्रकाश डालते हैं ?
उत्तर:
मेगस्थनीज, फाह्यान तथा ह्वेनसांग नामक विदेशी यात्री भारत आये थे। इनके विवरण प्राचीन भारतीय इतिहास पर प्रकाश डालते हैं।

प्रश्न 11.
प्राचीन भारत में अभिलेख किस भाषा में लिखे गये थे?
उत्तर:
प्राचीन भारत में अभिलेख प्राकृत तथा संस्कृत भाषा में लिखे गये थे।

प्रश्न 12.
वैदिक आर्य किसके उपासक होते थे?
उत्तर:
वैदिक आर्य प्रकृति के उपासक थे। वे प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते थे। सूर्य, चन्द्र, वायु, मेघ, उषा, अदिति प्रमुख देवी-देवता थे।

प्रश्न 13.
सिकन्दर कौन था?
उत्तर:
सिकन्दर मकदूनियां के शासक फिलिप का पुत्र था।

प्रश्न 14.
चन्द्रगुप्त के शासन प्रबन्ध का ज्ञान हमें किससे होता है?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त के शासन प्रबन्ध का ज्ञान हमें मेगस्थनीज की ‘इण्डिका’ तथा कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ से होता है।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राचीन भारत के ऐतिहासिक कालक्रम के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
भारत की प्राचीन, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परम्परा अत्यन्त समृद्ध एवं गौरवशाली रही है। प्राचीन भारत के इतिहास में सिन्धु एवं सरस्वती सभ्यता अथवा हड़प्पा सभ्यता, वैदिक-सभ्यता, महाकाव्यकाल, बौद्ध एवं जैन धर्म, मौर्य साम्राज्य, गुप्त साम्राज्य एवं हर्ष साम्राज्य शामिल हैं। इन सभ्यताओं एवं राजवंशों की अपनी विशिष्टता रही है। प्राचीन काल से ही भारतीयों में ऐतिहासिक चेतना विद्यमान थी। प्राचीन भारतीय इतिहास पर प्रकाश डालने वाली सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। जैसे-साहित्यिक स्रोत, पुरातात्विक स्रोत, विदेशियों का यात्रा विवरण आदि।

प्रश्न 2.
प्राचीन भारतीय इतिहास के निर्माण में कौन-कौन से धार्मिक ग्रन्थ सहायक होते हैं? किन्हीं चार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्राचीन भारत के इतिहास के निर्माण में धार्मिक ग्रन्थों की भी विशेष भूमिका है। इनके अध्ययन से तत्कालीन सामाजिक, धार्मिक तथा राजनीतिक दशा की जानकारी होती है। प्राचीन भारतीय इतिहास पर प्रकाश डालने वाले प्रमुख धार्मिक ग्रन्थ हैं-वेद, पुराण, ब्राह्मण ग्रंथ, आरण्यक, उपनिषद्, वेदांग, स्मृति, महाभारत, पिटक, जातक तथा परिशिष्टपर्व। चार प्रमुख धार्मिक ग्रन्थ निम्नलिखित हैं –

  • वेद :
    वेद आर्यों के सर्वाधिक प्राचीनतम ग्रन्थ हैं। वेदों की संख्या चार है-ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, तथा अथर्ववेद। इनमें प्राचीनतम ऋग्वेद है।
  • ब्राह्मण ग्रन्थ :
    ब्राह्मण ग्रन्थों में विभिन्न कर्मकाण्डों का उल्लेख किया गया है। प्रमुख ब्राह्मण ग्रन्थ-ऐतरेय, शतपथ, पंचविश व गोपथ हैं।
  • उपनिषद् :
    उपनिषदों में भारतीय दर्शन तथा बिम्बसार के पूर्व के इतिहास का वर्णन है।
  • पुराण :
    पुराणों की संख्या अठारह है परन्तु विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण तथा ब्रह्म पुराण आदि विशेष महत्त्व रखते हैं। इनके अध्ययन से तत्कालीन इतिहास की पर्याप्त जानकारी होती है।

प्रश्न 3.
सिन्धु घाटी सभ्यता का विस्तार क्षेत्र कहाँ तक था?
उत्तर:
सिन्धु सभ्यता का विस्तार क्षेत्र अत्यधिक व्यापक था ? ईसा पूर्व से तीसरी और दूसरी शताब्दी में विश्व भर में किसी भी सभ्यता का क्षेत्र सिन्धु सभ्यता के क्षेत्र से बड़ा नहीं था। प्रो. आर. एन. राव के अनुसार सिन्धु सभ्यता का विस्तार पूर्व से पश्चिम 1,600 किलोमीटर तथा उत्तर से दक्षिण 1,100 किलोमीटर क्षेत्र में था। इस सभ्यता का विस्तार पाकिस्तान, दक्षिणी अफगानिस्तान तथा भारत के राजस्थान, गुजरात, जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र तक था।

प्रश्न 4.
हड़प्पा संस्कृति के चार प्रमुख नगरों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सिन्धु सभ्यता अथवा हड़प्पा संस्कृति के चार प्रमुख नगर थे-हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल तथा कालीबंगा। इनका विवरण निम्नलिखित है –
(1) हड़प्पा :
यह नगर पश्चिमी पंजाब के मॉण्टगुमरी जिले में लाहौर से कोई 100 मील की दूरी पर स्थित था। 1921 ई. में आर. बी. दयाराम ने इसकी खुदाई करायी थी। यह नगर सिन्धु सभ्यता का सबसे बड़ा नगर था। इसमें समानान्तर चतुर्भुज के आकार का एक दुर्ग था जिसमें छः कोठार मिले हैं। हड़प्पा के निवासी पक्के मकानों में रहते थे।

(2) मोहनजोदड़ो :
यह भी सिन्धु सभ्यता का प्रमुख नगर था। 1922 ई. में आर. डी. बनर्जी ने इसकी खोज की थी। यह सिन्ध प्रान्त के लरकाना जिले में स्थित है। मोहनजोदड़ो का शाब्दिक अर्थ है-‘मृतकों का टीला’ इस नगर का यह नाम इस कारण पड़ा क्योंकि इस नगर की खुदाई में सात तहें मिलीं अत: यह सात बार बना और सात बार नष्ट हुआ। इस नगर का निर्माण एक निश्चित योजना के अनुसार किया गया था। सड़कों तथा नालियों का समुचित प्रबन्ध था। यहाँ के प्रत्येक मकान में स्नानागार भी होता था।

(3) लोथल :
पुरातत्वविदों के अनुसार यह नगर एक बन्दरगाह था। यह गुजरात में खम्भात की खाड़ी के ऊपर स्थित था। यहाँ अनेक प्रकार के आभूषण, मुद्राएँ तथा मिट्टी के बर्तन भी मिले हैं।

(4) कालीबंगा :
यह नगर राजस्थान के गंगानगर जिले में स्थित है। यहाँ के भवन तथा उनकी दीवारें, गोल कुएँ तथा चौड़ी सड़कें अपने ढंग की हैं। खुदाई में प्राप्त बर्तन, ताँबे के औजार, चूड़ियाँ, मिट्टी की मूर्तियाँ तथा खिलौने विशेष दर्शनीय हैं।

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प्रश्न 5.
सिन्धु घाटी सभ्यता के लोगों के सामाजिक और आर्थिक जीवन का विवरण दीजिए।
उत्तर:
(1) सामाजिक जीवन :
सिन्धु घाटी का समाज ‘मातृ प्रधान’ था। व्यवसाय के आधार पर समाज चार भागों में विभाजित था-विद्वान, योद्धा, व्यवसायी तथा मजदूर। यहाँ के निवासी शाकाहारी होने के साथ-साथ माँसाहारी भी थे। गेहूँ और जौ की रोटी विशेष रूप से खायी जाती थी। माँस मुख्यतया सूअर और भेड़ का खाया जाता था। वस्त्र ऊनी तथा सूती दोनों प्रकार के प्रयोग किये जाते थे। स्त्री और पुरुष दोनों ही शालों का प्रयोग करते थे। स्त्री तथा पुरुष दोनों ही अंगूठियाँ, कड़े, कंगन, कण्ठहार, कुण्डल आदि आभूषणों को धारण करते थे। सिन्धुवासी मनोरंजन प्रेमी थे। मनोरंजन के प्रमुख साधन थे-नृत्य, संगीत, जुआ खेलना, शिकार खेलना तथा चौपड़ खेलना।

(2) आर्थिक जीवन :
सिन्धु घाटी के निवासियों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। गेहूँ, जौ, कपास, मटर तथा तिल आदि की खेती मुख्यतया होती थी। फलों में खरबूज, तरबूज, खजूर तथा नारियल आदि उगाये जाते थे। पशुपालन का भी प्रचलन था। गाय, भैंस, भेड़, बकरी आदि प्रमुख रूप से पाले जाते थे। कुछ इतिहासकारों के अनुसार सिन्धुवासी विश्व के सूत कातने तथा वस्त्र निर्माण करने वाले प्रथम लोग थे। यहाँ धातुओं के सुन्दर आभूषण बनाये जाते थे तथा सीप, शंख, हाथी दाँत आदि के भी आभूषण बनाये जाते थे। विदेशी व्यापार भी होता था, जो थल तथा जल दोनों मार्गों से होता था।

प्रश्न 6.
सिन्धु सभ्यता के विनाश के चार कारण लिखिए।
उत्तर:
सिन्धु सभ्यता अथवा हड़प्पा संस्कृति के विनाश के निम्नलिखित कारण हैं –

  1. कुछ विद्वानों के मत में किसी बाहरी जाति के आक्रमण ने इस सभ्यता का विनाश कर दिया था।
  2. प्रसिद्ध भूगर्भशास्त्री साहनी के मत में सिन्धु सभ्यता के विनाश का कारण जल प्लावन था।
  3. कुछ इतिहासकारों के मत में किसी शक्तिशाली भूकम्प ने इस सभ्यता का विनाश कर दिया था।
  4. कुछ विद्वानों के मत में सिन्धु प्रदेश की जलवायु में परिवर्तन आने से इस सभ्यता का विनाश हो गया। इस मत के समर्थक हैं अमलानन्द घोष।
  5. अनेक विचारकों का यह भी मत है कि किसी संक्रामक रोग ने इस सभ्यता के विनाश में योगदान दिया।
  6. इस सभ्यता का विनाश का कारण सिन्धु नदी में तीव्र बाढ़ का आना भी माना जाता है।

प्रश्न 7.
वैदिक काल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वैदिक काल भारतीय इतिहास का वह काल माना जाता है, जिस काल में वेद तथा उनसे सम्बन्धित ग्रन्थों की रचना हुई थी। वैदिक काल को दो भागों में विभाजित किया गया है

  1. ऋग्वैदिक काल, तथा
  2. उत्तर वैदिक काल

(1) ऋग्वैदिक काल :
ऋग्वैदिक काल में ऋग्वेद की रचना हुई थी। अन्य शब्दों में जिस काल में ऋग्वेद की रचना हुई थी उस काल को ही ऋग्वैदिक काल कहते हैं।

(2) उत्तरवैदिक काल :
ऋग्वैदिक काल में केवल ऋग्वेद की रचना की गयी थी परन्तु उत्तर वैदिक काल में सामवेद, अथर्ववेद के अतिरिक्त ब्राह्मण ग्रन्थों, उपनिषद एवं आरण्यक की रचना भी हुई थी।

प्रश्न 8.
वैदिक सभ्यता की आश्रम व्यवस्था का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वैदिककालीन आर्यों ने मानव की आयु को 100 वर्ष का मानकर उसे 25-25 वर्षों के निम्नलिखित चार आश्रसों में विभाजित किया-

  • ब्रह्मचर्य आश्रम (जन्म से 25 वर्ष) :
    इस काल में आर्य ब्रह्मचर्य जीवन तथा विद्यार्थी जीवन का पालन करते थे।
  • गृहस्थ आश्रम (25 से 50 वर्ष) :
    ब्रह्मचर्य जीवन के पश्चात् आर्य विवाह कर गृहस्थ जीवन व्यतीत करते थे।
  • वानप्रस्थ आश्रम (50 से 75 वर्ष) :
    गृहस्थ आश्रम के पश्चात् आर्य सांसारिक चिन्ताओं से मुक्त होने के लिए वानप्रस्थ आश्रम में प्रवेश करते थे। इस काल में व्यक्ति अपने परलोक को सुधारने का प्रयास करता था।
  • संन्यास आश्रम (75 से 100 वर्ष) :
    यह आश्रम जीवन के अन्तिम काल से सम्बन्धित होता था। इस काल में मनुष्य परिवार व समाज से अलग होकर अपना समस्त समय ईश्वर चिन्तन तथा मोक्ष प्राप्ति के प्रयासों में लगाता था।

प्रश्न 9.
जैन धर्म के प्रमुख सिद्धान्तों को लिखिए।
उत्तर:
जैन धर्म के प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित हैं –
(1) ईश्वर में अविश्वास-जैन धर्म ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं करता। महावीर स्वामी के अनुसार विश्व का निर्माता ईश्वर नहीं है।

(2) स्याद्वाद-महावीर स्वामी के मत में प्रत्येक वस्तु के अनेक पक्ष होते हैं। अतः इसे अनेक दृष्टिकोण से देखना आवश्यक है।

(3) कर्म की प्रधानता-महावीर स्वामी ने कर्म की प्रधानता पर बल दिया, उनके मत में प्रत्येक व्यक्ति को अपने अच्छे व बुरे कर्मों का फल अवश्य मिलता है।

(4) त्रिरत्न-महावीर स्वामी के अनुसार निर्वाण या मोक्ष प्राप्ति के लिए निम्नलिखित तीन सिद्धान्तों को ध्यान में रखना चाहिए-

  • सम्यक् श्रद्धा
  • सम्यक् ज्ञान
  • सम्यक् आचरण।

(5) अहिंसा पर विशेष बल :
जैन धर्म अहिंसा पर विशेष बल देता है।

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प्रश्न 10.
महात्मा बुद्ध के प्रमुख सिद्धान्त क्या थे?
अथवा
महात्मा बुद्ध के चार आर्य सत्य कौनसे हैं?
अथवा
बौद्ध धर्म के अष्टांगिक मार्ग की आठ बातें कौन-सी हैं? (2015) [संकेत-दुःख निरोध के उपाय शीर्षक में देखें।]
उत्तर:
बौद्ध धर्म की चार विशेषताएँ अथवा चार आर्य सत्य निम्नलिखित हैं –

(1) दुःखमय संसार-बुद्ध के अनुसार यह विश्व दुःखमय है।

(2) दुःख समुदाय-बुद्ध के मत में दुःख का मूल कारण तृष्णा, मोह तथा माया है।

(3) दुःख निरोध-गौतम बुद्ध के अनुसार तृष्णा पर विजय प्राप्त करके दुःखों से भी मुक्ति प्राप्त की जा सकती है।

(4) दुःख निरोध के उपाय-बुद्ध के अनुसार दुःखों पर विजय प्राप्त करने के लिए अष्टांग मार्ग का अनुसरण करना चाहिए जिसमें निम्नलिखित बातें आती हैं-

  • सम्यक् दृष्टि
  • सम्यक् संकल्प
  • सम्यक् भाषा
  • सम्यक् आजीव
  • सम्यक् व्यायाम
  • सम्यक् कर्म
  • सम्यक् ध्यान
  • सम्यक् समाधि।

प्रश्न 11.
मौर्यकालीन इतिहास जानने के प्रमुख साधनों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मौर्यकालीन इतिहास जानने के प्रमुख साधन निम्नलिखित हैं –

  • धार्मिक साहित्य :
    धार्मिक साहित्य में जैन धर्म तथा बौद्ध धर्म का साहित्य तत्कालीन सामाजिक तथा राजनीतिक दशा पर प्रकाश डालता है। अन्य ग्रन्थों में दीपवंश तथा महावंश मौर्यकालीन सामाजिक तथा राजनीतिक दशा पर विशेष प्रकाश डालते हैं।
  • विशाखदत्त का मुद्राराक्षस :
    यह संस्कृत साहित्य का प्रसिद्ध नाटक है। इसके अध्ययन से चन्द्रगुप्त, कौटिल्य, नन्दवंश तथा मगध की क्रान्ति आदि के विषय में जानकारी मिलती है।
  • कौटिल्य का अर्थशास्त्र :
    कौटिल्य सम्राट चन्द्रगुप्त का मन्त्री, परामर्शदाता तथा सहायक था। उसने अर्थशास्त्र नामक ग्रन्थ की रचना की थी। इस ग्रन्थ में तत्कालीन राजनीति तथा प्रशासनिक सिद्धान्तों व न्याय प्रणाली आदि का उल्लेख है।
  • मेगस्थनीज की इण्डिका :
    मेगस्थनीज को सैल्यूकस ने अपना राजदूत बनाकर चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था। उसके द्वारा लिखित पुस्तक ‘इण्डिका’ मौर्यकालीन शासन व्यवस्था पर व्यापक प्रकाश डालती है। इण्डिका में मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था का भी व्यापक उल्लेख किया गया है।
  • अशोक के शिलालेख :
    अशोक ने अनेक चट्टानों तथा स्तम्भों पर धर्म लेख खुदवाये थे। इन लेखों में अशोक द्वारा किये गये धर्म प्रचार तथा शासन व्यवस्था सम्बन्धी नियमों का वर्णन मिलता है।

प्रश्न 12.
भारत पर सिकन्दर के आक्रमण की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सिकन्दर अपने विश्व विजय अभियान के सम्बन्ध में भारत आया था। वह मकदूनियां के शासक फिलिप का पुत्र था। पिता की मृत्यु के बाद 20 वर्ष की उम्र में सिंहासन पर बैठा। वह असाधारण महत्त्वाकांक्षाओं वाला शासक था। फारस को परास्त करने के उपरान्त वह ‘सोने की चिड़िया’ कहे जाने वाले भारत में प्रविष्ट हुआ। सिकन्दर को एक जन-जातीय शासक हस्ती जिसे यूनानी एस्ड्रस कहते हैं, के विरुद्ध लड़ना पड़ा, जिन्होंने सिकन्दर का जमकर प्रतिरोध किया। हस्ती के वीरगति को प्राप्त करने के बाद उनकी रानी एवं अन्य स्त्रियों ने अन्तिम क्षण तक अपने देश की रक्षा का प्रण लेकर युद्ध में भाग लिया।

अंततः विजय सिकन्दर को मिली। सिकन्दर आगे बढ़ा और तक्षशिला के शासक आम्भी ने सिकन्दर के सामने आत्मसमर्पण कर दिया लेकिन झेलम प्रदेश के शासक पोरस ने आत्मसमर्पण से इन्कार कर दिया। पोरस और सिकन्दर में घमासान युद्ध हुआ, लेकिन जीत सिकन्दर की हुई। बाद में सिकन्दर ने पोरस की वीरता व स्वाभिमान को देखते हुए उसके साथ एक राजा के समान व्यवहार किया और उसका राज्य लौटा दिया।

प्रश्न 13.
मौर्य साम्राज्य के पतन के कारणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
मौर्य समाज के पतन के निम्नलिखित कारण थे –

  1. अशोक ने ब्राह्मणों को अपनी धार्मिक नीति के द्वारा असन्तुष्ट कर दिया था। यज्ञों में पशुबलि पर रोक लगाना तथा महामात्रों की नियुक्ति ब्राह्मणों में से न करना इसके उदाहरण हैं।
  2. सम्राट अशोक के उत्तराधिकारी अयोग्य थे अत: वे विशाल मौर्य साम्राज्य को सुरक्षित नहीं रख सके।
  3. अशोक की शान्तिवादी तथा अहिंसा की नीति ने मौर्य साम्राज्य की सेना को अत्यधिक निर्बल बना दिया था। दीर्घकाल तक अशोक द्वारा युद्ध न किये जाने के कारण मौर्य सैनिक अकर्मण्य हो गये थे।
  4. अशोक की दान प्रवृत्ति ने राजकोष को खाली कर दिया था। इसके अतिरिक्त अशोक ने स्तूपों, बिहारों, चैत्यों तथा स्तम्भों के निर्माण में भी अपार धन व्यय कर वित्तीय संकट उत्पन्न कर दिया था।
  5. प्रजा में राष्ट्रीय भावना का अभाव।
  6. मौर्यों के अन्तिम शासक वृहद्रथ का उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने वध कर दिया। उपर्युक्त कारणों से मौर्य साम्रज्य का पतन हो गया।

प्रश्न 14.
चन्द्रगुप्त प्रथम के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
घटोत्कच के उपरान्त उसके पुत्र चन्द्रगुप्त (प्रथम) ने गुप्त साम्राज्य की बागडोर सँभाली। चन्द्रगुप्त के लिये ‘महाराजाधिराज’ की उपाधि का उल्लेख मिलता है। चन्द्रगुप्त प्रथम ने लिच्छवी वंश की राजकुमारी कुमार देवी से विवाह कर अपनी राजनीतिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया। चन्द्रगुप्त ने 320 ई. में ‘गुप्त संवत्’ की स्थापना की थी। चन्द्रगुप्त प्रथम ने 335 ई. तक शासन किया था। उसने अपने शासनकाल में ही अपने पुत्र समुद्रगुप्त को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था।

प्रश्न 15.
“समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है।” क्यों?
उत्तर:
समुद्रगुप्त नेपोलियन के समान ही वीर योद्धा, साहसी, पराक्रमी तथा निर्भीक शासक था। स्मिथ के शब्दों में-“जिस प्रकार नेपोलियन ने एक महान योद्धा और विजेता के समान बाहुबल तथा रण-कौशल से अन्य राजाओं को धूल में मिला दिया था, उसी प्रकार समुद्रगुप्त ने भी वीरता और साहस के साथ समस्त भारत पर विजय प्राप्त कर अपने को एक महान योद्धा और सेनानायक सिद्ध कर दिया था।” स्मिथ के इस कथन से स्पष्ट हो जाता है कि समुद्रगुप्त नेपोलियन के समान ही एक महान योद्धा, महान सेनानायक तथा एक विशाल साम्राज्य निर्माता था।

प्रश्न 16.
फाह्यान कौन था? यह भारत कब आया था? उसने भारत के विषय में क्या लिखा है?
उत्तर:
फाह्यान चीन का निवासी तथा बौद्ध भिक्षु था। चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के शासन काल में वह बौद्ध धर्म का अध्ययन करने भारत आया था। लगभग 6 वर्ष तक वह भारत में रहा। इस काल में उसने भारत की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा धार्मिक दशा का निरीक्षण कर एक सजीव विवरण प्रस्तुत किया।

फाह्यान के अनुसार, गुप्त काल में भारत में आन्तरिक शान्ति थी। चोर लुटेरों का भय नहीं था। निर्धन तथा अनाथ लोगों को राज्य की ओर से सहायता दी जाती थी। साधारण दण्ड व्यवस्था थी। राजद्रोहियों का सीधा हाथ काट लिया जाता था। फाह्यान के अनुसार, साधारण जनता का आर्थिक स्तर अच्छा था। मनुष्य सदाचारी थे तथा परस्पर सहयोग का जीवन व्यतीत करते थे।

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प्रश्न 17.
आर्यभट्ट के विषय में आप क्या जानते हैं? उसने विज्ञान, गणित और नक्षत्र विद्या के क्षेत्र में क्या योगदान दिया?
उत्तर:
आर्यभट्ट गुप्तकाल का एक महान वैज्ञानिक तथा गणित का एक विशेषज्ञ था, उसका विज्ञान, गणित तथा नक्षत्र विद्या के क्षेत्र में निम्नलिखित योगदान था –

  1. आर्यभट्ट ने सर्वप्रथम सिद्ध किया कि पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है।
  2. आर्यभट्ट ने चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के कारणों का पता लगाया।
  3. आर्यभट्ट ने दशमलव पद्धति का आविष्कार किया।
  4. अंकगणित तथा ज्यामिति के क्षेत्र में आर्यभट्ट ने अनेक खोजें की।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सिन्धु घाटी सभ्यता अथवा हड़प्पा सभ्यता के लोगों के सामाजिक जीवन का विवरण दीजिए।
उत्तर:
सामाजिक जीवन मोहनजोदड़ो और हड़प्पा में खुदाई से प्राप्त सामग्री तथा स्रोतों से सिन्धु घाटी के निवासियों की सामाजिक स्थिति का ज्ञान होता है। सिन्धु घाटी के निवासियों के सामाजिक जीवन का वर्णन निम्न शीर्षकों में किया जा सकता है
(1) सामाजिक संगठन :
सिन्धु घाटी का समाज व्यवसाय के आधार पर चार भागों में विभाजित था-

  • विद्वान तथा शिक्षित वर्ग
  • योद्धा या सैनिक वर्ग
  • व्यापारी तथा दस्तकार
  • श्रमिक। समाज में वर्ण-व्यवस्था का अभाव था तथा समाज की इकाई परिवार थी। इतिहासकारों के अनुसार सिन्धु सभ्यता का समाज ‘मातृप्रधान’ था।

(2) भोजन :
इतिहासकार चाइल्ड के अनुसार सिन्धुवासियों का प्रमुख भोजन गेहूँ, जौ, चावल तथा दूध था। सब्जियों तथा फलों का भी सेवन किया जाता था। फलों में खजूर प्रमुख रूप से खाया जाता था। माँस खाने का भी प्रचलन था। गाय, भेड़, मछली तथा मुर्गे आदि का माँस ही खाया जाता था।

(3) वेश-भूषा :
सिन्धु सभ्यता के किसी भी क्षेत्र में तत्कालीन समय का कोई भी वस्त्र उपलब्ध नहीं हुआ। अतः ऐसी दशा में खुदाई में प्राप्त मूर्तियों का अवलोकन करके ही वेश-भूषा की जानकारी प्राप्त की गयी है। मूर्तियों को देखकर ज्ञात होता है कि सिन्धुवासी शरीर पर दो कपड़े धारण करते थे। प्रथम वस्त्र को बायें कन्धे के ऊपर तथा दाहिनी भुजा के नीचे से निकालकर पहना जाता था, जिससे सीधा हाथ उचित ढंग से कार्य कर सके। दूसरा वस्त्र जो शरीर के नीचे पहना जाता था, वर्तमान धोती के समान होता था। इतिहासकारों के मत में स्त्रियों व पुरुषों के वस्त्रों में विशेष अन्तर नहीं था। सूती वस्त्र अधिक मात्रा में पहने जाते थे परन्तु ऊनी वस्त्रों का भी प्रचलन था।

(4) आभूषण :
सिन्धु-सभ्यता के निवासियों में स्त्री व पुरुष दोनों ही आभूषण पहनने में रुचि लेते थे। आभूषण, सोने, चाँदी, हाथी-दाँत आदि के बनाये जाते थे। ताँबे, मिट्टी, सीप आदि के आभूषण निर्धन व्यक्ति पहनते थे। सोने के आभूषण अत्यधिक आकर्षक होते थे। मार्शल के अनुसार-“सोने के आभूषणों की चमक तथा रचना को देखकर ऐसा ज्ञात होता है कि ये आधुनिक बाड स्ट्रीट (जो कि लन्दन में है) के किसी सुनार की दुकान से लाये गये हैं न कि पाँच हजार वर्ष पूर्व किसी प्रागैतिहासिक घर से।” हार, बाजूबन्द, अंगूठियाँ, कड़े, कुण्डल तथा बालियाँ स्त्री और पुरुष दोनों ही पहनते थे।

(5) सौन्दर्य प्रसाधन :
खुदाई में प्राप्त सामग्री से ज्ञात होता है कि सिन्धु सभ्यता की स्त्रियाँ काजल, सुरमा, सिन्दूर तथा दर्पण व कंघी का प्रयोग अपने सौन्दर्य विकास के लिए करती थीं। इतिहासकार मैके (Mackay) के अनुसार इस काल की स्त्रियाँ लिपिस्टिक का भी प्रयोग करती थीं। स्त्रियाँ केश सज्जा का भी ध्यान रखती थीं।

(6) आमोद-प्रमोद के साधन :
सिन्धु घाटी के निवासी अनेक क्रिया-कलापों से अपना मनोरंजन करते थे। खुदाई में अनेक पाँसे प्राप्त हुए हैं जिनसे ज्ञात होता है कि यहाँ के निवासी जुआ खेलने में विशेष रुचि लेते थे। अन्य आमोद के साधन थे-शिकार करना, नृत्य करना, गाना तथा बजाना। तबले, ढोल तथा तुरही के चित्र मुद्राओं पर बने मिले हैं।

(7) मृतक संस्कार :
खुदाई में प्राप्त अवशेषों का निरीक्षण करने से स्पष्ट होता है कि यहाँ तीन प्रकार से शवों का अन्तिम संस्कार होता था

  • शवों को जैसे का तैसा दफनाना।
  • शव का पशु-पक्षियों के सम्मुख खाने को डाल देना।
  • दाह संस्कार करने के पश्चात् अस्थियों को भूमि में गाढ़ देना

(8) स्त्रियों की दशा :
मातृदेवी की उपासना करना इस बात का प्रमाण है कि सिन्धुवासी स्त्रियों को विशेष सम्मान देते थे। दूसरे यहाँ के परिवार मातृसत्तात्मक होते थे जिनमें स्त्रियों का स्थान ऊँचा होता था।

प्रश्न 2.
सिन्धु घाटी सभ्यता के लोगों के आर्थिक जीवन के बारे में अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
आर्थिक जीवन सिन्धु घाटी के आर्थिक जीवन की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं –

  • कृषि :
    सिन्धु घाटी के निवासियों का प्रमुख व्यवसाय कृषि थी। जिस प्रकार मिस्र में नील नदी ने वरदान का कार्य किया उसी प्रकार सिन्धु नदी ने भी अपने अपार जल से इस सभ्यता के विकास में योग दिया। गेहूँ, जौ, चावल तथा कपास की मुख्यतया खेती होती थी। फलों में नींबू, अनार, खजूर तथा केला आदि उगाये जाते थे।
  • पशुपालन :
    कृषि के साथ-साथ इस सभ्यता के निवासियों का अन्य प्रमुख व्यवसाय पशु-पालन था। खुदाई में प्राप्त अस्थि-पिंजरों से तथा मुद्राओं पर अंकित चित्रों से स्पष्ट होता है कि यहाँ के निवासी गाय, भैंस, बैल, भेड़, बकरी आदि प्रमुखतया पालते थे। घोड़े से यहाँ के निवासी अपरिचित थे।
  • शिकार :
    शिकार का भी एक व्यवसाय के रूप में चलन था। माँस प्राप्त करने के लिए पशुओं का शिकार किया जाता था। पशुओं की खाल तथा अस्थियों से अनेक वस्तुओं का निर्माण होता था।
  • वस्त्र-उद्योग :
    वस्त्र-उद्योग पर्याप्त उन्नति पर था। एक विद्वान के अनुसार सिन्धुवासी सम्भवतः विश्व के सूत कातने तथा वस्त्र बुनने वाले प्रथम लोग थे। वस्त्र सूती तथा ऊनी दोनों प्रकार के बुने जाते थे।
  • अन्य उद्योग :
    नगरों की खुदाई में विशाल संख्या में मिट्टी के बर्तन मिले हैं जिनमें प्याले, सुराहियाँ, मटके तथा नादें प्रमुख हैं। कुम्हार चाकों पर बर्तन बनाते थे तथा उन पर सुन्दर चित्रकारी करते थे। सिन्धु सभ्यता में धातुओं के भी सुन्दर आभूषण बनाये जाते थे।
  • धातुओं का उपयोग :
    खुदाई में प्राप्त सोने, चाँदी के आभूषण तथा ताँबा, काँसा आदि के अस्त्र-शस्त्र तथा बर्तनों से स्पष्ट हो जाता है कि सिन्धु निवासी सोना, चाँदी, ताँबा, रांगा तथा काँसा आदि धातुओं से परिचित थे।
  • व्यापार :
    सिन्धु घाटी के निवासी भारत के विभिन्न भागों के साथ व्यापार करने के साथ-साथ विश्व के अन्य देशों से भी व्यापार करते थे। विदेशों से व्यापार थल तथा जल दोनों ही मार्गों से होता था। थल मार्ग के लिए ऊँटों, बैलों तथा बैलगाड़ियों का प्रयोग होता था। जल मार्गों के लिए नावों तथा जहाजों का प्रयोग होता था। नावें नदियों में प्रयोग की जाती थीं परन्तु जहाजों का प्रयोग समुद्र में किया जाता था। सुमेरिया, ईरान तथा मिस्र से सिन्धुवासियों के घनिष्ठ व्यापारिक सम्बन्ध थे।

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प्रश्न 3.
अशोक को महान् सम्राट क्यों कहा जाता है? संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
अथवा
इतिहास में अशोक का क्या स्थान है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अधिकांश इतिहासकारों के मत में अशोक भारत का ही नहीं वरन् विश्व के महान् सम्राटों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। प्रसिद्ध इतिहासकार एच. जी. वेल्स के अनुसार, “इतिहास में प्रसिद्ध सहस्रों महान् राजाओं, सम्राटों, धर्मावतारों और राजेश्वरों में अशोक का नाम अलग और एक तारे के समान चमकता है।” निम्नलिखित कारणों से अशोक को एक महान् सम्राट कहा जाता है।

  • आदर्श व्यक्तित्व :
    अशोक का व्यक्तित्व अत्यन्त प्रभावशाली तथा महान् था। उसकी योग्यताओं तथा प्रतिभाओं को पहचानकर ही बिन्दुसार ने अपने साम्राज्य के विद्रोहों को दबाने के लिए भेजा तो उसने इस क्षेत्र में अपूर्व सफलता प्राप्त की। इसके अतिरिक्त अशोक तत्कालीन सम्राटों की तरह भोगविलास का जीवन नहीं व्यतीत करता था। उसके व्यक्तित्व में सादगी तथा कर्तव्यनिष्ठा का सुन्दरतम समन्वय था।
  • महान् विजेता :
    अशोक एक महान् विजेता था। उसके पिता बिन्दुसार ने कलिंग को जीतने का प्रयास किया था किन्तु सफल नहीं हो पाया था परन्तु अशोक ने अपने पराक्रम से कलिंग विजय प्राप्त की।
  • महान् धर्म विजेता :
    अशोक युद्ध विजेता होने के साथ-साथ एक महान् धर्म विजेता भी था। कलिंग युद्ध के पश्चात् उसने धर्म विजय का अभियान प्रारम्भ किया तथा बौद्ध धर्म के प्रचार में व्यापक सफलता प्राप्त की।
  • लोक-कल्याणकारी शासक :
    अशोक एक लोक-कल्याणकारी शासक था। उसने जनता के कल्याण के लिए चिकित्सालयों तथा धर्मशालाओं का निर्माण करवाया था।
  • धार्मिक सहिष्णुता का प्रतिपादक :
    अशोक बौद्ध धर्म का अनुयायी था परन्तु उसने अपनी प्रजा पर इस धर्म को लादने का कभी भी प्रयास नहीं किया तथा धार्मिक सहिष्णुता की नीति को अपनाकर सब धर्मों की अच्छाइयों का समन्वय किया। अशोक सब धर्मों को आदर की दृष्टि से देखता था।
  • कुशल प्रशासक :
    अशोक का साम्राज्य अत्यन्त विशाल था, परन्तु उसने अपने साम्राज्य का शासन प्रबन्ध बड़ी कुशलता तथा व्यवस्था से संचालित किया था। अशोक ने कलिंग युद्ध के पश्चात् अपने शासन में दो प्रमुख सिद्धान्तों का समावेश किया-(1) नैतिक आचरण पर बल देना, (2) लोक कल्याण की भावना।

उपर्युक्त विवरणों से स्पष्ट हो जाता है कि अशोक एक अद्वितीय महान् सम्राट था। डॉ. मुखर्जी के अनुसार, “प्रत्येक युग और प्रत्येक देश में अशोक जैसा सम्राट पैदा नहीं होता।”

प्रश्न 4.
गुप्त साम्राज्य के पतन के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए। (2010)
अथवा
गुप्त साम्राज्य के पतन के कोई तीन कारण लिखिए। (2017)
उत्तर:

  • दुर्बल तथा अयोग्य उत्तराधिकारी :
    समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य तथा स्कन्दगुप्त के पश्चात् जितने भी गुप्त सम्राट हुए वे सब दुर्बल तथा अयोग्य थे और उनमें इतनी क्षमता तथा योग्यता नहीं थी कि वे अपने पूर्वजों के साम्राज्य को जैसा का तैसा बनाये रखते।
  • उत्तराधिकार के निश्चित नियमों का न होना :
    गुप्तकाल में उत्तराधिकार का कोई निश्चित नियम न था परिणामस्वरूप सिंहासन प्राप्ति के लिए राजकुमारों में परस्पर संघर्ष और गृह कलह होते थे। राजमहल संघर्षों तथा षड्यन्त्रों के केन्द्र बन गये थे। इस प्रकार के संघर्षों ने गुप्त साम्राज्य के पतन में विशेष योगदान दिया।
  • आन्तरिक कलह :
    चन्द्रगुप्त द्वितीय के पश्चात् उत्तराधिकार नियमों के अभाव के कारण राज्य में आन्तरिक,कलह तथा संघर्ष की भावना का अपूर्व विकास हुआ जिसके कारण गुप्त साम्राज्य को गहरा आघात लगा तथा उसका पतन हो गया।
  • साम्राज्य का अत्यधिक विशाल होना :
    समुद्रगुप्त तथा चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपनी दिग्विजयों तथा युद्धप्रियता से एक दृढ़ तथा विशाल साम्राज्य की स्थापना कर ली थी। इतने विशाल साम्राज्य को कुशलता तथा दृढ़ता के साथ अपने नियन्त्रण में समुद्रगुप्त तथा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ही रख सके परन्तु उनके बाद के गुप्त शासक अपनी अयोग्यता तथा दुर्बलता के कारण उसे अपने नियन्त्रण में नहीं रख सके।
  • सीमा सुरक्षा की उपेक्षा करना :
    चन्द्रगुप्त द्वितीय के पश्चात् जितने भी गुप्त सम्राट हुए उन्होंने अपनी सीमा सुरक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया। इससे विदेशी आक्रमणकारियों को उत्तरी-पश्चिमी सीमान्त प्रदेश में से आक्रमण करने का अवसर एवं प्रोत्साहन प्राप्त हुआ। यह गुप्त साम्राज्य के लिए घातक सिद्ध हुआ।
  • दयनीय आर्थिक दशा :
    चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के शासनकाल के पश्चात् गुप्त साम्राज्य की आर्थिक दशा अत्यन्त शोचनीय हो गयी थी। समुद्रगुप्त तथा चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपने शासनकाल में सोने के सिक्के चलाये थे परन्तु कुमारगुप्त तथा स्कन्दगुप्त के काल में चाँदी तथा ताँबे के सिक्के चलाये गये। इस प्रकार यह निष्कर्ष निकलता है कि गुप्तकाल की आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन शोचनीय होती गयी।
  • हूणों के आक्रमण :
    इतिहासकारों के अनुसार गुप्त साम्राज्य के पतन का प्रमुख कारण हूणों के आक्रमण थे। यह सत्य है कि स्कन्दगुप्त के शासनकाल तक के सभी सम्राटों ने हूणों के आक्रमणों को विफल कर दिया था परन्तु उसके शासनकाल के पश्चात् गुप्तकाल के निर्बल शासक हूण आक्रमणों से गुप्त साम्राज्य की रक्षा नहीं कर सके।

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत : जनसंख्या

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत : जनसंख्या

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
निम्न में से किस अवधि में जनसंख्या वृद्धि लगभग स्थिर गति से बढ़ी है?
(i) 1901-21
(ii) 1921-51
(iii) 1951-81
(iv) 1981-2001.
उत्तर:
(i) 1901-21

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प्रश्न 2.
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला प्रदेश है
(i) उत्तर प्रदेश
(ii) बिहार
(iii) केरल
(iv) पश्चिम बंगाल।
उत्तर:
(ii) बिहार

प्रश्न 3.
किस राज्य में साक्षरता का प्रतिशत सबसे अधिक है? (2008, 09)
(i) उत्तर प्रदेश
(ii) केरल
(iii) गोवा
(iv) दिल्ली
उत्तर:
(ii) केरल

प्रश्न 4.
सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला केन्द्र शासित प्रदेश है (2008)
(i) चण्डीगढ़
(ii) पुदुचेरी
(iii) दिल्ली
(iv) लक्षद्वीप।
उत्तर:
(iii) दिल्ली

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. भारत में जनसंख्या का घनत्व …………. है।
  2. भारत में सर्वाधिक साक्षरता वाला राज्य ……….. है।
  3. राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का अध्यक्ष ……….. होता है।
  4. विश्व जनसंख्या दिवस प्रतिवर्ष ……….. को मनाया जाता है।
  5. जनसंख्या के मान से भारत का विश्व में ………….. स्थान है।
  6. भारत में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ………… है।

उत्तर:

  1. बड़ा असमान
  2. केरल
  3. प्रधानमन्त्री
  4. 11 जुलाई
  5. दूसरा
  6. कम।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जन्मदर किसे कहते हैं?
उत्तर:
जन्मदर किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष, प्रति हजार जनसंख्या पर जीवित नवजात बच्चों की संख्या को कहते हैं।

प्रश्न 2.
मृत्युदर किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष, प्रति हजार व्यक्तियों पर मरने वालों की संख्या मृत्युदर कहलाती है।

प्रश्न 3.
वर्ष 2011 में भारत में जनसंख्या का घनत्व कितना था?
उत्तर:
वर्ष 2011 में भारत में जनसंख्या का औसत घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था।

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प्रश्न 4.
वर्ष 2011 में भारत का लिंग अनुपात क्या था?
उत्तर:
वर्ष 2011 में भारत का लिंग अनुपात 1000 पुरुषों पर 943 स्त्रियाँ थीं।

प्रश्न 5.
जनसंख्या और क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है ?
उत्तर:
भारत का जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में दूसरा तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में सातवाँ स्थान है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या वृद्धि की कोई चार समस्याएँ लिखिए। (2008, 09, 10, 14, 15, 17)
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण उत्पन्न प्रमुख समस्याएँ निम्न हैं –

  • बेरोजगारी की समस्या :
    जनसंख्या वृद्धि के कारण बेरोजगारी की समस्या निरन्तर बढ़ती जा रही है। सरकार जितने लोगों को रोजगार उपलब्ध कराती है, उससे अधिक नये लोग बेरोजगारी की लाइन में आ जाते हैं।
  • प्रति व्यक्ति आय :
    जनसंख्या में तेजी से वृद्धि होने पर प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि धीमी हो जाती है। ऐसे में निवेश का बड़ा भाग जनसंख्या के भरण-पोषण में लग जाता है तथा आर्थिक विकास के लिये निवेश का एक छोटा-सा भाग ही बचता है।
  • भूमि पर दबाव :
    हमारे देश में जनसंख्या वृद्धि के परिणामस्वरूप भूमि पर दबाव निरन्तर बढ़ता जा रहा है। इससे भू-जोतों का आर्थिक विभाजन हुआ है तथा कृषि उत्पादकता में कमी आयी है।
  • गरीबी :
    भारत में जनसंख्या वृद्धि का एक बड़ा दुष्परिणाम गरीबी के रूप में सामने आता है। विशाल जनसंख्या और उस पर सीमित संसाधनों के चलते बड़ी संख्या में गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहे लोगों का जीवन-स्तर सुधारना अत्यन्त दुष्कर कार्य साबित हुआ है।

प्रश्न 2.
भारत में लिंगानुपात की दर निरन्तर क्यों कम होती जा रही है ? कोई चार कारण लिखिए। (2013, 14, 16, 18)
अथवा
भारत में लिंगानुपात की दर में गिरावट होने के कारण लिखिए। (2008, 09)
उत्तर:
भारत में लिंगानुपात की दर कम होने के निम्न कारण हैं –

  1. महिलाओं में साक्षरता का कम होना।
  2. मातृ मृत्यु-दर का ऊँचा होना।
  3. पुरुष प्रधान समाज में पुत्र होने की प्रबल इच्छा होना।
  4. कन्या भ्रूण हत्या में लगातार वृद्धि होना।
  5. समाज में बालिकाओं के प्रति उपेक्षा का भाव व कन्या का बोझ समझना।
  6. समाज में प्रचलित दहेज प्रथा के कारण कन्या भ्रूण हत्या व किशोरियों व युवतियों का आत्महत्या करने के लिये प्रेरित होना।

प्रश्न 3.
राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग से आप क्या समझते हैं ? लिखिए। (2008, 09, 12, 13, 15)
उत्तर:
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 के अनुसरण में राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग की स्थापना की गई है। प्रधानमन्त्री इस आयोग के अध्यक्ष हैं। सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, प्रशासक तथा सम्बन्धित केन्द्रीय मंत्रालयों एवं विभागों के प्रभारी केन्द्रीय मंत्री, प्रतिष्ठित जनसांख्यिकीविद्, जनस्वास्थ्य, व्यवसायिक एवं गैर-सरकारी संगठन इस आयोग के सदस्य होते हैं।

प्रश्न 4.
लिंग अनुपात से क्या आशय है? देश में इसके वितरण को समझाइए। (2016)
उत्तर:
लिंग अनुपात से तात्पर्य किसी क्षेत्र में प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या से है। भारतवर्ष में 2001 की जनगणना के अनुसार प्रति हजार पुरुषों पर 933 स्त्रियाँ थीं अर्थात् भारत में पुरुषों की संख्या से स्त्रियों की संख्या कम है। भारत में लिंगानुपात लगातार घटता जा रहा है। सन् 1901 में यह 972 था, जो घटते-घटते 2011 में 940 रह गया है। भारत में लिंग अनुपात में क्षेत्रीय भिन्नता पायी जाती है। केरल में लिंगानुपात (1084) अनुकूल है जबकि दमन दीव में यह (618) प्रतिकूल है।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारणों व उसके नियन्त्रण के उपायों को लिखिए।
अथवा
जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित करने के चार उपाय बताइए। (2008, 11, 12, 17, 18)
उत्तर:
जनसंख्या वृद्धि के कारण

  • जन्मदर व मृत्युदर :
    1911-1921 की अवधि में जन्म-दर 48.1 और मृत्यु-दर 47.2 थी, अर्थात् दोनों ही अधिक थीं। 1921 से 1951 तक यद्यपि जन्म-दर धीमी गति से घटी, किन्तु मृत्यु-दर अपेक्षाकृत तेजी से घटी थी, जिससे जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हुई। वर्ष 2016 के अनुसार भारत में जन्मदर 20.4 प्रति हजार और मृत्यु-दर 64 प्रति हजारं थी। मृत्यु-दर में निरन्तर कमी का कारण चिकित्सा सुविधाओं में वृद्धि तथा भरण-पोषण की पर्याप्त सुविधा होना है।
  • गर्म जलवायु :
    उष्ण जलवायु में मानव की उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। कम आयु में ही किशोर व किशोरियाँ सन्तान उत्पत्ति के योग्य हो जाते हैं। परिणामस्वरूप जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती है।
  • भाग्यवादिता :
    भारत में अधिकांश रूढ़िवादी लोग बच्चों का पैदा होना ‘ईश्वर की इच्छा’ मानकर अधिक सन्तान उत्पत्ति को रोकना अनुचित समझते हैं। अतः धार्मिक अन्धविश्वास भी जनसंख्या वृद्धि के लिये उत्तरदायी है।
  • कम उम्र में शादी :
    भारत में विवाह की आयु कम है। कम उम्र में शादी हो जाने से जनसंख्या में वृद्धि होना स्वाभाविक हो जाता है।
  • साक्षरता का निम्न स्तर :
    भारत में साक्षरता का निम्न स्तर भी जनसंख्या वृद्धि के लिये उत्तरदायी है। निम्नवर्ग परिवार कल्याण कार्यक्रम अपनाने में संकोच करते हैं। सन् 2011 के आँकड़ों के अनुसार भारत में 82.14% पुरुष साक्षर थे व 65.46% स्त्रियाँ साक्षर थीं। आर्थिक समीक्षा 2017-18;A 163.

जनसंख्या वृद्धि रोकने के उपाय

  • परिवार कल्याण :
    परिवार कल्याण द्वारा छोटे परिवारों के लाभों का प्रचार करना चाहिए, जिससे प्रभावित होकर प्रत्येक व्यक्ति विभिन्न प्रकार के कृत्रिम साधनों को प्रयोग में लाने लगे।
  • शिक्षा तथा सामाजिक सुधार :
    जब तक देश में शिक्षा की उचित व्यवस्था नहीं होगी, परिवार नियोजन कभी भी सफलतापूर्वक कार्य नहीं कर सकता। एक अविकसित देश का अज्ञानी व्यक्ति जो सामाजिक व धार्मिक अन्धविश्वासों में जकड़ा हुआ है, परिवार नियोजन के लाभों को समझ नहीं सकेगा। अतः शिक्षा का प्रसार होना चाहिए। शिक्षा द्वारा बाल-विवाह, जातिवाद आदि सामाजिक कुरीतियाँ स्वयं समाप्त हो जाएँगी, जो जनसंख्या वृद्धि में सहायक होती हैं।
  • आर्थिक विकास :
    जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिये समाज का समुचित आर्थिक विकास होना चाहिए। साथ ही कृषि, उद्योग, व्यापार, यातायात एवं संवाद-वाहन आदि सभी क्षेत्रों का सामूहिक विकास भी आवश्यक है इससे रोजगार के स्तर में वृद्धि होगी, आय और जीवन-स्तर में वृद्धि होगी, फलस्वरूप जनसंख्या वृद्धि पर रोक लग जाएगी।
  • सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में वृद्धि :
    देश में सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में वृद्धि की जानी चाहिये, जिससे संकटकाल या वृद्धावस्था में सहारा पाने की दृष्टि से सन्तानोत्पत्ति की प्रवृत्ति को नियन्त्रित किया जा सके।
  • विवाह की आयु सम्बन्धी नियमों का पालन :
    सरकार को विवाह की आयु सम्बन्धी नियमों का कठोरता से पालन कराना चाहिए। जनसंख्या नीति के अनुसार देश में लड़के व लड़कियों के लिये विवाह योग्य आयु क्रमश: 21 व 18 वर्ष है। इस सम्बन्ध में आवश्यक दण्ड व पुरस्कार की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
  • प्रेरणाएँ :
    सीमित परिवार के संदेश को व्यापक स्तर पर फैलाने के लिये कुछ प्रेरणाओं को अपनाना आवश्यक होता है; जैसे-सीमित परिवार वालों को वेतन वृद्धि, मकान आवण्टन, कॉलेज में प्रवेश, रोजगार आदि की अतिरिक्त सुविधा प्रदान की जाएँ।
  • मनोरंजन के साधनों में वृद्धि :
    सन्तति निग्रह के लिये मनोरंजन के साधनों में वृद्धि की जानी चाहिए। मनोरंजन के साधनों के अभाव में सन्तान वृद्धि को प्रोत्साहन मिलता है।

प्रश्न 2.
भारत में जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करने वाले कारकों को उदाहरण सहित लिखिए। (2008)
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व को प्रोत्साहित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं –
(1) भौतिक कारक
(2) सामाजिक-आर्थिक कारक।

(1) भौतिक कारक :
भौतिक कारकों में धरातल, जलवायु, मिट्टी और खनिज आदि प्रमुख हैं। धरातल की बनावट जनसंख्या वितरण को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। गंगा-यमुना तथा समुद्रतटीय मैदानों में जनसंख्या घनत्व अधिक है, वहीं पर्वतीय प्रदेश अरुणाचल में सबसे कम जनसंख्या घनत्व है। जलवायु दशायें भी जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करती हैं। अनुकूल जलवायु मनुष्य के स्वास्थ्य व कार्यक्षमता पर अच्छा प्रभाव डालती है। पश्चिमी राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश में विषम जलवायु के कारण कम जनसंख्या पायी जाती है। उपजाऊ मिट्टी कृषि के लिये उपयुक्त होती है इसलिये जनसंख्या का अधिक घनत्व नदियों के उपजाऊ मैदानों में होता है क्योंकि कृषि उपजें ही उनके जीवन-यापन व भरण-पोषण का मुख्य आधार होती हैं। खनिजों की उपलब्धता और इन पर आधारित औद्योगिक विकास ने छोटा नागपुर पठार खनिज क्षेत्र में जनसंख्या को आकर्षित किया। इस प्रकार छोटा नागपुर के पठार पर जनसंख्या बहुत सधन है।

(2) सामाजिक :
आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारक-सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारक भी जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उदाहरणार्थ-सांस्कृतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक तथा राजनैतिक कारकों के कारण ही मुम्बई-पुणे के औद्योगिक क्षेत्र में जनसंख्या वृद्धि और घनत्व में तीव्रता से वृद्धि हुई है। प्राचीनकाल में मुम्बई महत्त्वहीन था परन्तु यूरोपियन लोगों के आवागमन के पश्चात् इसका महत्त्व दिनोंदिन बढ़ता गया। आज मुम्बई व्यापारिक एवं औद्योगिक केन्द्र बन गया है। परिणामस्वरूप यहाँ जनसंख्या बढ़ती जा रही है।

प्रश्न 3.
घनत्व की दृष्टि से भारत को कितने भागों में विभाजित किया जा सकता है ?
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व के आधार पर भारत को चार भागों में बाँटा जा सकता है-
(1) उच्च घनत्व वाले क्षेत्र
(2) मध्यम घनत्व वाले क्षेत्र
(3) साधारण घनत्व वाले क्षेत्र
(4) न्यूनतम घनत्व वाले क्षेत्र।

  1. उच्च घनत्व वाले क्षेत्र :
    उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल एवं केरल आते हैं यहाँ 501 से अधिक व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर निवास करते हैं। क्योंकि यहाँ की उपजाऊ मिट्टी और जल की उपलब्धता मानव के भरण-पोषण को पर्याप्त सुविधा प्रदान करती है। इन क्षेत्रों में रोजगार के पर्याप्त अवसर भी विद्यमान होते हैं।
  2. मध्यम घनत्व वाले क्षेत्र :
    इसके अन्तर्गत वे क्षेत्र आते हैं, जहाँ जनसंख्या घनत्व 251 से 500 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी पाया जाता है। इसके अन्तर्गत आन्ध्र प्रदेश, असम, गोवा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, झारखण्ड, पंजाब, हरियाणा, त्रिपुरा, दादरा व नगर-हवेली शामिल हैं। विकसित कृषि, खनिजों की उपलब्धता एवं औद्योगिक विकास आदि इन क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या घनत्व के मुख्य कारण हैं।
  3. साधारण घनत्व वाले क्षेत्र :
    मध्य प्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड, मेघालय, मणिपुर, नागालैण्ड, इस क्षेत्र के अन्तर्गत आते हैं। यहाँ जनसंख्या का घनत्व 101 से 250 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। ये पर्वतीय तथा ऊबढ़-खाबड़ वनाच्छादित प्रदेश हैं। यहाँ जीवनयापन की सुविधाएँ सीमित हैं।
  4. निम्न घनत्व वाले क्षेत्र :
    इस क्षेत्र में जम्मू व कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, सिक्किम तथा अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह आते हैं। पर्वतीय क्षेत्र, आवागमन में असुविधा, कृषि व उद्योगों का न्यून विकास आदि कारण कम जनसंख्या घनत्व के लिये उत्तरदायी हैं। इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व 13 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।

प्रश्न 4.
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 क्या है? इसके तहत सरकार द्वारा क्या प्रावधान किए गए हैं? लिखिए।
अथवा
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 क्या है? (2009)
उत्तर:
15 फरवरी, 2000 को नई ‘राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000’ की घोषणा की गई। इस नवीनतम संशोधित जनसंख्या नीति के अनुसार सामाजिक-आर्थिक विकास के लिये जीवन में गुणात्मक सुधार किया जाना आवश्यक है, ताकि मानव शक्ति समाज के लिये उत्पादक पूँजी में परिवर्तित हो सके। इस नीति के निम्नलिखित उद्देश्य हैं –

  • तात्कालिक उद्देश्य :
    गर्भ निरोधक उपायों के विस्तार हेतु स्वास्थ्य एवं बुनियादी ढाँचे का विकास।
  • मध्यकालीन उद्देश्य :
    सन् 2010 तक कुल प्रजनन दर को घटाना।
  • दीर्घकालीन उद्देश्य :
    सन् 2045 तक स्थायी आर्थिक विकास हेतु स्थिर जनसंख्या के उद्देश्य को प्राप्त करना।

नई नीति में इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिये निम्नलिखित सामाजिक जनांकिकी लक्ष्य भी घोषित किये गये हैं –

  1. बुनियादी प्रजनन तथा शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, आपूर्तियों तथा आधारभूत ढाँचे से सम्बन्धित अपूर्ण आवश्यकताओं पर ध्यान देना।
  2. 14 वर्ष तक की उम्र तक विद्यालय शिक्षा को निःशुल्क करना। प्रारम्भिक तथा माध्यमिक स्तर पर छात्र और छात्राओं के विद्यालय छोड़ने की दर में 20% तक की कमी लाना।
  3. शिशु मृत्यु दर को 100 से नीचे लाना (प्रत्येक 1 लाख जीवित जन्मों पर)।
  4. सार्वभौमिक टीकाकरण द्वारा गम्भीर बीमारियों की रोकथाम करना।
  5. कन्याओं का विवाह 20 वर्ष की उम्र के बाद करने के लिये प्रोत्साहन देना।
  6. सभी प्रसव संस्थाओं में प्रशिक्षित प्रसव नौं का शत-प्रतिशत होना।
  7. गर्भ निरोधक के व्यापक विकल्पों की जानकारी देना।
  8. जन्म, मृत्यु, विवाह तथा गर्भावस्था का शत-प्रतिशत पंजीकरण।
  9. एड्स की खतरनाक बीमारी को फैलने से रोकने के प्रयास करना तथा प्रजनन अंग संक्रमण (आर. टी. आई.) और यौन संचारी रोगों की रोकथाम करना।
  10. प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को घर-घर तक पहुँचाने के लिये भारतीय औषधि पद्धति को एकीकृत करना।
  11. संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनके नियन्त्रण के लिये भरपूर प्रयास करना।
  12. जन्म दर में कमी लाने के लिये छोटे परिवार के मानदण्डों को ठोस रूप में बढ़ावा देना।
  13. परिवार कल्याण कार्यक्रम को जन-केन्द्रित कार्यक्रम के रूप में विकसित करना।

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प्रश्न 5.
भारत में साक्षरता-विकास की स्थिति तथा महिला साक्षरता को बढ़ाने के लिये अपने सुझावात्मक विचार लिखिए।
उत्तर:
साक्षरता से तात्पर्य :
जो व्यक्ति किसी भाषा को समझने के साथ लिख और पढ़ सकता है, साक्षर कहलाता है। जो पढ़ सकता है, परन्तु लिख नहीं सकता, वह साक्षर नहीं कहलाता है। साक्षरता के लिये कोई औपचारिक शिक्षा लेना आवश्यक नहीं होता है।

भारत में साक्षरता विकास की स्थिति :
हमारा देश संसार में जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवाँ बड़ा देश है। किन्तु साक्षरता की दृष्टि से अभी भी पीछे है। स्वतन्त्रता के पश्चात् हमने साक्षरता में वृद्धि की है। लेकिन अभी भी निरन्तर प्रयास की आवश्यकता है। भारत में साक्षरता की स्थिति को निम्न तालिका से स्पष्ट किया जा सकता है –

भारत में साक्षरता की स्थिति (प्रतिशत में)
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत जनसंख्या - 1

तालिका से स्पष्ट है कि 1911 में देश में साक्षरता मात्र 6% थी। स्वतन्त्रता के पश्चात् 1950-51 में यह बढ़कर 18:33% हो गई। तब से लगातार साक्षरता प्रतिशत में वृद्धि हो रही है। वर्ष 2010-11 में यह बढ़कर 74.04% हो गई है। यह उपलब्धि भारत सरकार द्वारा निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने का ही परिणाम है। भारत में साक्षरता में भिन्नताएँ दृष्टिगोचर होती हैं। बिहार में साक्षरता की दर 63.82% है। जबकि केरल में यह 93.91% है। लक्षद्वीप में 92.98 है।

महिला साक्षरता में वृद्धि के उपाय :
भारत में महिलाओं की साक्षरता दर पुरुषों की तुलना में बहुत कम है। वर्तमान आँकड़ों को देखने पर स्पष्ट होता है कि आज भी महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम साक्षर हैं। वर्ष 2010-11 में साक्षर पुरुष 82.14% व साक्षर महिला 65.46% थी। ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति और भी खराब है।

महिला साक्षरता में वृद्धि करके जनसंख्या वृद्धि को रोका जा सकता है। शिक्षित लड़कियाँ उचित उम्र में विवाह करती हैं। विवाह करने के कुछ समय पश्चात् तक वह गर्भ धारण करना नहीं चाहती हैं। शिक्षित महिलाएँ रोजगार करने में पीछे नहीं रहती हैं। साथ ही वह कम बच्चों में विश्वास रखती हैं। शिक्षित स्त्रियों का दृष्टिकोण बहुत व्यापक होता है। वह परिवार कल्याण कार्यक्रम का महत्त्व समझती हैं। वह अपने बच्चों की संख्या सीमित रखने और दो बच्चों के जन्म के मध्य पर्याप्त समय रखती हैं। साथ ही शिक्षित महिलाएँ लड़का-लड़की में भेद न करके केवल एक-दो बच्चों को ही जन्म देती हैं। अतः लड़कियों को स्वयं शिक्षा प्राप्त करने में पहल करनी चाहिए क्योंकि शिक्षित लड़कियाँ जनसंख्या वृद्धि को एक सीमा तक रोक सकती हैं। सरकार को ग्रामीण इलाकों में लड़कियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करानी चाहिए; साथ ही उनको वजीफा भी देना चाहिए जिससे उनके माता-पिता उनको शिक्षित कराने के लिये आगे आएँ।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में संसार की कुल जनसंख्या का कितने प्रतिशत भाग निवास करता है?
(i) 16.7
(ii) 12.4
(iii) 15.0
(iv) 25.4.
उत्तर:
(i) 16.7

प्रश्न 2.
जनसंख्या की गणना कितने वर्ष के अन्तराल पर होती है?
(i) 5 वर्ष
(ii) 10 वर्ष
(iii) 3 वर्ष
(iv) 1 वर्ष।
उत्तर:
(ii) 10 वर्ष

प्रश्न 3.
5 अरबवें शिशु का जन्म किस देश में हुआ था?
(i) भारत
(ii) यूगोस्लाविया
(iii) अमेरिका
(iv) पाकिस्तान।
उत्तर:
(ii) यूगोस्लाविया

प्रश्न 4.
भारत में सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला प्रदेश है
(i) बिहार
(ii) महाराष्ट्र
(iii) मिजोरम
(iv) अरुणाचल प्रदेश।
उत्तर:
(iv) अरुणाचल प्रदेश।

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रिक्त स्थान पूर्ति

  1. भारत में महिला साक्षरता …………. प्रतिशत है।
  2. 5 अरबवें शिशु का जन्म ………… में हुआ था।
  3. क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में ………… स्थान है।

उत्तर:

  1. 65-46
  2. यूगोस्लाविया
  3. सातवाँ।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
भारत में सर्वाधिक गरीब जनसंख्या वाला राज्य बिहार है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
विश्व का हर छठवाँ व्यक्ति भारत में निवास करता है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
भारत में सर्वाधिक साक्षरता वाला राज्य केरल है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
प्रतिवर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
भारत में जनसंख्या का वितरण समान है।
उत्तर:
असत्य।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत जनसंख्या - 2
उत्तर:

  1. → (ङ)
  2. → (घ)
  3. → (क)
  4. → (ख)
  5. → (ग)
  6. → (च)।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
जनसंख्या नियन्त्रण हेतु महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम।
उत्तर:
परिवार कल्याण

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प्रश्न 2.
प्रत्येक व्यक्ति की औसत आयु। (2009)
उत्तर:
प्रत्याशित आयु

प्रश्न 3.
एक निश्चित समयान्तराल में जनसंख्या की अधिकारिक गणना। (2010)
उत्तर:
जनगणना

प्रश्न 4.
नवीन जनसंख्या नीति की घोषणा कब की गई?
उत्तर:
15 फरवरी, 2000

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि दर से क्या आशय है?
उत्तर:
प्राकृतिक वृद्धि दर से आशय जन्मदर व मृत्युदर के अन्तर से है।

प्रश्न 2.
नवीन जनसंख्या नीति की घोषणा कब की गई?
उत्तर:
नवीन जनसंख्या नीति की घोषणा 15 फरवरी, 2000 को की गई थी।

प्रश्न 3.
जनगणना का तात्पर्य क्या है? (2011)
उत्तर:
एक निश्चित समयान्तराल में जनसंख्या की आधिकारिक गणना जनगणना कहलाती है। भारत में प्रत्येक दस वर्ष पर जनगणना होती है।

प्रश्न 4.
जनसंख्या वृद्धि दर से आप क्या समझते हैं? (2010)
उत्तर:
जनसंख्या की वृद्धि दर, जनसंख्या बढ़ने की गति को बताती है। वृद्धि दर से बढ़ी हुई जनसंख्या की आधार वर्ष की जनसंख्या से तुलना की जाती है इसे वार्षिक या दशकीय गति से ज्ञात किया जाता है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की जनसंख्या की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
संसार में चीन के बाद भारत दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 1,21,01,93, 422 है। यहाँ संसार की कुल जनसंख्या का 17.5 प्रतिशत भाग निवास करता है, जबकि इसका कुल क्षेत्रफल विश्व के कुल क्षेत्रफल का केवल 2-41 प्रतिशत ही है। इस प्रकार भारत जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का दूसरा तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवाँ बड़ा देश है। भारत की जनसंख्या उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की कुल सम्मिलित जनसंख्या से भी अधिक है। अन्य शब्दों में संसार का हर छठवाँ व्यक्ति भारत में निवास करता है।

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प्रश्न 2.
“भारत में जनसंख्या का वितरण असमान है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या का वितरण असमान है। पर्वतीय भागों, वन क्षेत्रों और मरुस्थलों की अपेक्षा मैदानी भागों में अधिक जनसंख्या है। इसी प्रकार नदियों के उपजाऊ मैदानों, समुद्र तटीय क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक है। हिमालयीन छोटे राज्य सिक्किम की जनसंख्या मात्र 6.7 लाख ही है, जबकि मैदानी बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की जनसंख्या 19.95 करोड़ है। कुल मिलाकर भारत में 10 ऐसे राज्य हैं जिनमें से प्रत्येक की जनसंख्या 6 करोड़ से अधिक है। कुछ राज्य क्षेत्रफल में बड़े होते हुए भी कम जनसंख्या वाले हैं, जैसे राजस्थान और मध्य प्रदेश जबकि ये दोनों ही क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के बड़े राज्य हैं। केवल पाँच राज्यों (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और आन्ध्र प्रदेश) में देश की आधे से अधिक जनसंख्या निवास करती है।

प्रश्न 3.
जनसंख्या घनत्व क्या है? इसे कैसे ज्ञात किया जाता है? (2008)
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व:
किसी क्षेत्र में निवास करने वाली जनसंख्या और उस क्षेत्र के प्रति इकाई क्षेत्रफल (वर्ग किमी.) के अनुपात को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। किसी देश या प्रदेश की जनसंख्या का घनत्व ज्ञात करने के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है –
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत जनसंख्या - 3
प्रश्न 4.
भारत में साक्षरता दर में भिन्नताएँ पायी जाती हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
साक्षरता की दर में प्रादेशिक भिन्नताएँ अत्यधिक हैं। बिहार में साक्षरता की दर 63.82 प्रतिशत है, जबकि केरल में यह 93.9 प्रतिशत है। लक्षद्वीप में 92.8 और मिजोरम में 88.4 प्रतिशत साक्षरता है। बिहार में साक्षरता दर सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की तुलना में सबसे कम है।

पुरुषों और स्त्रियों की साक्षरता दर में भी आश्चर्यजनक अन्तर है। भारत में पुरुषों की औसत साक्षरता दर 82.14 है, जबकि स्त्रियों की साक्षरता दर केवल 65.46 प्रतिशत है। शहरी और ग्रामीण जनसंख्या की साक्षरता दर में भी बहुत अन्तर है। वर्ष 2011 में शहरी क्षेत्रों की साक्षरता दर 85.7 प्रतिशत थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह मात्र 68.9 प्रतिशत थी।

प्रश्न 5.
जनसंख्या विस्फोट से आप क्या समझते हैं? (2009)
उत्तर:
जनसंख्या विस्फोट का अर्थ
“आजकल ‘जनसंख्या विस्फोट’ शब्द का प्रयोग बहुत हो रहा है। जनसंख्या के अत्यन्त तीव्र गति से एकाएक वृद्धि के लिए इन शब्दों का प्रयोग किया जाता है। ‘विस्फोट’ शब्द उस तरह की स्थिति को बताता है जैसे उसके प्रभाव उतने ही गम्भीर या भयानक होते हैं। जैसे कि परमाणु बम के Fall out या गिरने या उसके दूषित पदार्थों से प्रभावित होने के होते हैं।”

हर देश में जब विकास होगा तो जन्म-दर की तुलना में मृत्यु-दर अधिक तीव्र गति से घटेगी और उसका परिणाम यह होगा कि जनसंख्या में वृद्धि होगी। आज पैदा होने वाले बच्चे, जिन्हें अकाल शिशु मृत्यु से बचा लिया जाएगा, 20-22 वर्ष बाद स्वयं बच्चे पैदा करेंगे। यहाँ से ही ‘जनसंख्या विस्फोट’ की स्थिति निर्मित होगी।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी पौधे की 62 पत्तियों की लम्बाइयाँ मिलीमीटर में मापी जाती हैं। इससे प्राप्त आँकड़े आगे दी गई सारणी द्वारा निरूपित हैं :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 1
उपरोक्त आँकड़ों को निरूपित करने के लिए एक आयत चित्र खींचिए।
हल :
संतत बारम्बारता बंटन सारणी बनाने पर,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 2
अभीष्ट आयत चित्र :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 3

प्रश्न 2.
कक्षा आठ की विभिन्न अनुभागों (सेक्शनों) के विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त किए गए अंकों का बंटन निम्नलिखित है: प्राप्तांक
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 4
उपरोक्त बंटन के लिए एक आयत चित्र खींचिए।
हल :
आयत की लम्बाई ज्ञात करने के लिए,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 5
अभीष्ट आयत चित्र :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 6

प्रश्न 3.
निम्नलिखित सारणी एक राजमार्ग पर किसी स्थान से होकर जाने वाली कारों की चालों के बारम्बारता बंटन को दर्शाती है :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 7
इन आँकड़ों को निरूपित करने के लिए आयत चित्र एवं बारम्बारता बहुभुज खींचिए।
हल :
अभीष्ट आयत चित्र एवं बारम्बारता बहुभुज :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 8

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित सारणी किसी कक्षा के अनुभागों A और B द्वारा प्राप्त किए गए अंकों का बंटन दर्शाती है:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 9
इन दोनों अनुभागों के विद्यार्थियों के प्राप्तांकों को एक ही आलेख पर दो बारम्बारता बहुभुजों से निरूपित कीजिए। आप क्या देखते हैं ?
हल :
अभीष्ट बारम्बारता बहुभुज :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 10
प्राप्तांक 30 एवं 60 पर प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या दोनों अनुभागों में बराबर हैं।

प्रश्न 5.
दी गयी सारणी के लिए आयत चित्र बनाइए एवं निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (2019)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 11
(i) सबसे अधिक बारम्बारता वाला वर्ग कौन-सा है?
(ii) कौन-कौन से वर्गों की बारम्बारता समान है?
हल :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 12
(i) वर्ग (20-40)
(ii) वर्ग (0-20) तथा (120-140) एवं (80-100) तथा (100-120)]

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
30 विद्यार्थियों के रक्त समूह निम्नलिखित रूप में रिकॉर्ड किए गए :
A, B, O, A, AB, O, A, O, B, A, O, B, A, AB, B, A, AB, B, A, A, O, A, AB, B, A, O, B, A, B, A.
इन आँकड़ों के लिए एक बारम्बारता बंटन सारणी तैयार कीजिए।
हल :
अभीष्ट बारम्बारता बंटन सारणी :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 13

प्रश्न 2.
निम्नलिखित आँकड़ों से एक संतत बारम्बारता बंटन तैयार कीजिए :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 14
हल :
प्रत्येक वर्ग की वर्ग माप = 10 है अत: वर्गों की सीमाएँ मध्य-बिन्दु से 5 कम एवं 5 अधिक होंगी।
अतः अभीष्ट संतत बारम्बारता बंटन सारणी:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 15
अभीष्ट वर्ग माप = 10

प्रश्न 3.
दिए हुए बारम्बारता बंटन को एक सतत् वर्गीकृत बंटन में बदलिए :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 16
किन अन्तरालों में 153.5 और 157.5 सम्मिलित किए जाएँगे ?
हल :
अभीष्ट संतत वर्गीकृत बारम्बारता बंटन :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 17
अतः 153.5 वर्ग अन्तराल (153.5 – 157.5) में एवं 157.5 वर्ग अन्तराल (157.5 – 161.5) में सम्मिलित किए जाएंगे।

प्रश्न 4.
किसी महीने में एक परिवार द्वारा विभिन्न मदों पर किए गए व्यय निम्नलिखित हैं :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 18
उपरोक्त को निरूपित करने के लिए एक दण्ड आलेख खींचिए।
हल :
अभीष्ट दण्ड आलेख :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 19

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प्रश्न 5.
यदि निम्नलिखित आँकड़ों का माध्य 20.2 है, तो p का मान ज्ञात कीजिए :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 20
हल :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 21
⇒ 606 + 20.2 p = 610 + 20 p
⇒ 0.2 p = 4
⇒ p = 20
अतःp का अभीष्ट मान = 20.

प्रश्न 6.
निम्नलिखित बंटन का माध्य ज्ञात कीजिए :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 22
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 23
अतः अभीष्ट माध्य = 8:05.

प्रश्न 7.
किसी बास्केट बॉल टीम द्वारा मैचों की एक श्रृंखला में निम्नलिखित प्वाइंट अर्जित किए गए:
17, 2, 27, 25, 5, 14, 18, 10, 24, 48, 10, 8, 7, 10, 28.
इन आँकड़ों के लिए माध्यक और बहुलक ज्ञात कीजिए।
हल :
आँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर,
2, 5, 7, 8, 10, 10, 10, 14, 17, 18, 24, 25, 27, 28, 48.
माध्यक = \(\frac { x+1 }{ 2 }\) वाँ पद = 8वाँ पद = 14
बहुलक = सर्वाधिक बारम्बारता वाला पद = 10
अतः अभीष्ट माध्यक = 14 एवं बहुलक = 10.

प्रश्न 8.
निम्न आँकड़ों का माध्य ज्ञात कीजिए : 1, 2, 3, 4, 5 (2019)
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 24
अतः अभीष्ट माध्य = 3.

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विद्यार्थियों को दिए गए गणित के एक निदानात्मक टेस्ट में (100 में से) उनके द्वारा प्राप्त किए गए अंक निम्नलिखित रूप में रिकॉर्ड किए गए :
46, 52, 48, 11, 41, 62, 54, 53, 96, 40, 95, 44.
उपर्युक्त आँकड़ों के लिए कौन-सा औसत एक अच्छा प्रतिनिधित्व करेगा और क्यों?
उत्तर-
माध्यक आँकड़ों का एक अच्छा प्रतिनिधित्व करेगा क्योंकि

  • प्रत्येक मान केवल एक बार आ रहा है।
  • आँकड़े चरम मानों से प्रभावित हो रहे हैं।

प्रश्न 2.
एक बच्चा कहता है कि 3, 14, 18, 20, 5 का माध्यक 18 है। यह बच्चा माध्यक ज्ञात करने के बारे में क्या नहीं जानता ?
उत्तर-
यह बच्चा नहीं जानता कि माध्यक ज्ञात करने के लिए आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना होता है।

प्रश्न 3.
फुटबॉल के एक खिलाड़ी द्वारा 10 मैचों में किए गए गोलों की संख्या निम्नलिखित है :
1, 3, 2, 5, 8, 6, 1, 4, 7, 9.
क्योंकि मैचों की संख्या 10 (एक सम संख्या है इसलिए)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 25
क्या यह सही उत्तर है ? और क्यों ?
उत्तर-
यह उत्तर सही नहीं है, क्योंकि माध्यक ज्ञात करने के लिए प्रेक्षणों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना आवश्यक है।

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प्रश्न 4.
क्या यह कहना सही है कि आयत चित्र में प्रत्येक आयत का क्षेत्रफल संगत वर्ग अन्तराल की माप के समानुपाती होता है। यदि नहीं तो कथन का सही रूप लिखिए।
उत्तर-
कथन असत्य है, क्योंकि एक आयत चित्र में प्रत्येक आयत का क्षेत्रफल उसकी बारम्बारता के समानुपाती होता है।

प्रश्न 5.
एक सतत् ? बंटन के वर्ग चिह्न निम्नलिखित हैं :
1.04, 1.14, 1.24, 1.34, 1.44, 1.54, और 1.64.
क्या यह कहना सही है कि अन्तिम अन्तराल 1.55-1-73 होगा। अपने उत्तर का कारण दीजिए।
उत्तर-
यह उत्तर सही नहीं है, क्योंकि दो क्रमागत प्राप्तांकों का उत्तर वर्ग माप के बराबर होना चाहिए।

प्रश्न 6.
30 बच्चों से पूछा गया कि उन्होंने पिछले सप्ताह कितने घण्टे टी. वी. के प्रोग्राम देखे। इसके परिणाम निम्नलिखित रूप से रिकॉर्ड किए गए:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 26
क्या हम कह सकते हैं कि उस सप्ताह में 10 या उससे अधिक घण्टों तक टी. वी. देखने वालों बच्चों की संख्या 22 है ? अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।
उत्तर-
नहीं, क्योंकि उस सप्ताह में 10 या अधिक घण्टे तक टी. वी. देखने वाले छात्रों की संख्या 4 + 2 = 6 है।

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वर्ग 90-120 का वर्ग चिह्न है :
(a) 90
(b) 105
(c) 115
(d) 120.
उत्तर:
(b) 105

प्रश्न 2.
25, 18, 20, 22, 6, 6, 17, 15, 12, 30, 32, 10, 19, 8, 11, 20 आँकड़ों का परिसर है :
(a) 10
(b) 15
(c) 18
(d) 26.
उत्तर:
(d) 26.

प्रश्न 3.
एक बारम्बारता बंटन में एक वर्ग का मध्य-बिन्दु 10 है तथा उसकी चौड़ाई 6 है। इस वर्ग की निम्न सीमा है:
(a) 6
(b) 7
(c) 8
(d) 12.
उत्तर:
(b) 7

प्रश्न 4.
किसी बारम्बारता बंटन में पाँच सतत वर्गों में से प्रत्येक की चौड़ाई 5 है तथा सबसे छोटे वर्ग की निम्न सीमा 10 है। सबसे बड़े वर्ग की उपरि सीमा है :
(a) 15
(b) 25
(c) 35
(d) 40.
उत्तर:
(c) 35

प्रश्न 5.
मान लीजिए कि एक सतत् बारम्बारता बंटन में एक वर्ग का मध्य-बिन्दु m है और उपरि वर्ग सीमा l है। इस वर्ग की निम्न सीमा है :
(a) 2m + l
(b) 2m – l
(c) m – l
(d) m – 2l.
उत्तर:
(b) 2m – l

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प्रश्न 6.
एक बारम्बारता बंटन के वर्ग चिह्न 15, 20, 25, ……… हैं। चिह्न 20 के संगत वर्ग है :
(a) 12.5-17.5
(b) 17.5-22.5
(c) 18.5-21.5
(d) 19.5-20.5.
उत्तर:
(b) 17.5-22.5

प्रश्न 7.
वर्ग अन्तराल 10-20, 20-30 में संख्या 20 निम्नलिखित वर्ग में सम्मिलित है :
(a) 10-20
(b) 20-30
(c) दोनों में
(d) इनमें से किसी में नहीं।
उत्तर:
(b) 20-30

प्रश्न 8.
पाँच संख्याओं का माध्य 30 है। यदि इनमें से एक संख्या को हटा दिया जाए तो इसका माध्य 28 हो जाता है। हटाई गई संख्या है :
(a) 28
(b) 30
(c) 35
(d) 38.
उत्तर:
(d) 38.

प्रश्न 9.
यदि आँकड़ों के प्रत्येक प्रेक्षण में 5 की वृद्धि की जाती है तो उसका माध्य :
(a) वही रहता है
(b) प्रारम्भिक माध्य का पाँच गुना हो जाता है
(c) पाँच कम हो जाता है ।
(d) पाँच बढ़ जाता है।
उत्तर:
(d) पाँच बढ़ जाता है।

प्रश्न 10.
4, 4, 5, 7, 6, 7, 7, 12, 3 संख्याओं का माध्यक है :
(a) 4
(b) 5
(c) 6
(d) 7
उत्तर:
(c)6

प्रश्न 11.
15, 14, 19, 20, 14, 15, 10, 14, 15, 18, 14, 19, 15, 17, 15 आँकड़ों का बहुलक है :
(a) 14
(b) 15
(c) 16
(d) 17
उत्तर:
(b) 15

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. 2, 3 और 4 का माध्य ………. होता है। (2019)
2. आँकड़ों के अधिकतम एवं न्यूनतम मानों का अन्तर आँकड़ों का ……….. कहलाता है।
3. एक ही अंक की पुनरावृत्ति संख्या उस अंक की ………. कहलाती है।
4. किसी वर्ग की उच्च सीमा एवं निम्न सीमा के अन्तर को ………. कहते हैं।
5. वर्ग की आवृत्ति को उसके मध्य-बिन्दु पर केन्द्रित मानकर बनाया गया बहुभुज ……… कहलाता है।
उत्तर-
1. 3,
2. परिसर,
3. बारम्बारता,
4. वर्ग अन्तराल,
5. बारम्बारता बहुभुज।

जोड़ी मिलान

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 27
उत्तर-
1.→(c),
2.→(d),
3.→(e),
4.→(a),
5.→(b).

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सत्य/असत्य कथन

1. आँकड़ों के किसी निश्चित समूह का मान एक और केवल एक होता है।
2. संख्याओं 3, 6, 10, 12, 7 और 15 की माध्यिका 8.5 है।
3. प्रेक्षणों के अधिकतम एवं न्यूनतम मानों के अन्तर को वर्गान्तर कहते हैं।
4. संकलित आँकड़ों का सारणी के रूप में निरूपण बारम्बारता सारणी कहलाता है।
5. दण्ड चित्र सदैव ऊर्ध्वाधर बनाए जाते हैं।
6. वर्ग अन्तराल 90-100 में 90 वर्ग की निम्न वर्ग सीमा है। (2018)
उत्तर-
1. सत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य,
6. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. 2, 4, 6, 8, 10 का माध्य क्या होगा?
2. 2, 3, 4, 2, 12, 8, 7, 9, 8, 6, 8, 5, 8 का बहुलक क्या होगा?
3. किन्हीं चरों का औसत मान क्या कहलाता है?
4. किसी वर्ग के अन्तर्गत आने वाले पदों की संख्या क्या कहलाती है?
5. वर्ग 10-20 का मध्यमान क्या होगा?
6. 1, 3, 4, 4, का समान्तर माध्य होगा। (2018)
7. आँकड़े 3, 3, 2, 3 और 4 में बहुलक क्या होगा? (2019)
8. वर्ग 80-100 का परास क्या होगा? (2019)
9. प्रथम पाँच प्राकृत संख्याओं का माध्य क्या होगा? (2019)
उत्तर-
1.6 (छः),
2. 8 (आठ),
3. माध्य,
4. उस वर्ग की बारम्बारता,
5. 15 (पन्द्रह),
6. 3 (तीन)
7.3 (तीन),
8. 20 (बीस),
9. 3 (तीन)।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions

MP Board Class 9th Maths अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Maths दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संलग्न चित्र में दी हुई पतंग को बनाने के लिए प्रत्येकरंग(शेड) के कितने कागज की आवश्यकता होगी यदि ABCD विकर्ण 44 cm वाला एक वर्ग है तथा नीचे 20 cm, 20 cm और 14 cm वाला एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
हल:

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 1
ज्ञात है : एक पतंग जो एक वर्ग ABCD एवं एक समद्विबाहु ∆ CEF से बना है। वर्ग का विकर्ण AC = BD = 44 cm है जो परस्पर बिन्दु O पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
अर्थात् OA = OB = OC = OD = 22 cm
एवं ∠AOB = ∠ BOC = ∠COD = ∠DOA = 90°
समद्विबाहु त्रिभुज की भुजाएँ क्रमशः CE = 20 cm, CF = 20 cm एवं EF = 14 cm हैं। हम जानते हैं कि वर्ग के विकर्ण वर्ग को चार सर्वांगसम भागों में विभक्त करते हैं। पीला रंग का कागज वर्ग के दो चतुर्थांश I एवं II में है।
⇒ पीले रंग के कागज का क्षेत्रफल = 2 x \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 22 x 22 = 484 cm
लाल रंग का कागज केवल वर्ग के एक चतुर्थांश IV में है
⇒ लाल रंग के कागज का क्षेत्रफल = \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 22 x 22 = 242 cm2
हरे रंग का कागज वर्ग के चतुर्थांश III एवं समद्विबाहु त्रिभुज (V) में है
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 1a
∴ हरे रंग के कागज का क्षेत्रफल = ar (CEF) + ar (AOD)
= 131.14 + 242 = 373.14
अतः पीले रंग के कागज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 484 cm2
लाल रंग के कागज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 242 cm2
एवं हरे रंग के कागज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 373.14 cm2 .

प्रश्न 2.
एक त्रिभुज का परिमाप 50 cm है। त्रिभुज की एक भुजा छोटी भुजा से 4 cm लम्बी है तथा तीसरी भुजा छोटी भुजा के दुगने से 6 cm कम है। त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए ∆ की छोटी भुजा = x cm तो प्रश्नानुसार दूसरी भुजा (x + 4) cm तथा तीसरी भुजा (2x – 6) cm होगी।
परिमाप = x + (x + 4) + (2x – 6)= 50 cm
⇒ 4x – 2 = 50 ⇒ 4x = 52
⇒ x = \(\frac { 52 }{ 4 }\) = 13 cm
अतः त्रिभुज की भुजाएँ क्रमशः 13 cm, 17 cm एवं 20 cm होंगी।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 2
अतः त्रिभुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 109.54 cm2.

प्रश्न 3.
संलग्न चित्र में ∆ABC की भुजाएँ AB = 7.5 cm, AC = 6.5 cm और BC = 7 cm हैं। आधार BC पर एक समान्तर चतुर्भुज DBCE की रचना की जाती है जो क्षेत्रफल में ∆ABC के बराबर है। इस समान्तर चतुर्भुज की ऊँचाई DF ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक त्रिभुज जिसकी भुजा AB = 7.5 cm,
AC = 6.5 और BC = 7 cm
आधार BC = 7 cm पर एक समान्तर चतुर्भुज DBCE दिया है जिसका क्षेत्रफल ∆ABC के क्षेत्रफल के बराबर है। मान लीजिए समान्तर चतुर्भुज की ऊँचाई DF = d cm
∆ ABC में,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 3
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 3a
चूँकि ar (DBCE) = ar (ABC) (दिया है)
⇒ 7 x d = 21 ⇒ d = 2 = 3 cm
अतः समान्तर चतुर्भुज की अभीष्ट ऊँचाई DF = 3 cm.

प्रश्न 4.
संलग्न चित्र में 50 cm x 70 cm की विमाओं वाली एक आयताकार टाइल पर चित्र में दर्शाए गए अनुसार एक डिजाइन बनाया गया है। इस डिजाइन में 8 त्रिभुज हैं जिनमें से प्रत्येक की भुजाएँ 26 cm, 17 cm और 25 cm की हैं। डिजाइन का पूर्ण क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए तथा टाइल के शेष भाग का क्षेत्रफल भी ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक 50 cm x 70 cm विमाओं वाली 70cmटाइल जिसके अन्दर 26 cm, 17cm एवं 25 cm विमाओं वाली 8 सर्वांगसम त्रिभुजों से बनी आकृति।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 4
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 4a
∴ डिजाइन का क्षेत्रफल = 8 x त्रिभुज का क्षेत्रफल
= 8 x 204 = 1632 cm2
चूँकि आयताकार टाइल का क्षेत्रफल = लम्बाई x चौड़ाई
⇒ ar (आयताकार टाइल) = 70 x 50 = 3500 cm2
टाइल के शेष भाग का क्षेत्रफल = 3500 – 1632 = 1868 cm2
अतः टाइल की डिजाइन का अभीष्ट क्षेत्रफल = 1632 cm2
एवं शेष टाइल का अभीष्ट क्षेत्रफल = 1868 cm2.

MP Board Class 9th Maths लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भुजाओं 50 m, 65 m और 65 m वाले त्रिभुजाकार खेत में ₹ 7 प्रति m2 की दर से घास लगवाने का व्यय ज्ञात कीजिए।
हल:
त्रिभुजाकार खेत के लिए,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 5
चूँकि घास लगाने का व्यय = दर x क्षेत्रफल = 7 x 1500 = ₹ 10,500
अतः घास लगवाने का अभीष्ट व्यय = ₹ 10,500.

प्रश्न 2.
एक फ्लाई ओवर की त्रिभुजाकार दीवारों को विज्ञापन के लिए प्रयोग किया जाता है। दीवारों की भुजाएँ 13 m, 14 m और 15 m हैं। विज्ञापनों से एक वर्ष में ₹2,000 प्रति m2 की दर से आय होती है। एक कम्पनी इनमें से एक दीवार को 6 महीने के लिए किराये पर लेती है। उस कम्पनी ने कितना किराया दिया ?
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 6
अतः विज्ञापन के लिए अभीष्ट किराया = ₹ 84,000.

प्रश्न 3.
एक समद्विबाहु त्रिभुज का परिमाप 32 cm है। एक बराबर भुजा और आधार का अनुपात 3 : 2 है। इस त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक समद्विबाहु त्रिभुज जिसकी एक बराबर भुजा और आधार का अनुपात 3 : 2 है तथा परिमाप 32 cm है।
⇒ भुजाओं का अनुपात = 3 : 3 : 2
मान लीजिए भुजाएँ 3x, 3x एवं 2x हैं।
तो परिमाप 3x + 3x + 2x = 32 cm (दिया है)
⇒ x = 32 ⇒ x = \(\frac { 32 }{ 8 }\) = 4 cm
⇒ भुजाएँ क्रमश: 12 cm, 12 cm और 8 cm हैं। त्रिभुज में,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 6a
अतः त्रिभुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 32√2 cm2.

प्रश्न 4.
संलग्न चित्र में दिए हुए समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। साथ ही शीर्ष A से भुजा DC पर शीर्ष लम्ब की लम्बाई भी ज्ञात कीजिए।
हल:
दियाहैः एक समान्तर चतुर्भुज जिसकी भुजाएँ DC = 12 cm, BC = 17 cm और विकर्ण DB = 25 cm तथा A से DC पर शीर्षलम्ब = AE = d (मान लीजिए)
हम जानते हैं कि समान्तर चतुर्भुज का विकर्ण उसे दो सर्वांगसम त्रिभुजों में विभक्त करता है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 7
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 7a
चूँकि समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार (DC) x शीर्षलम्ब (AE)
⇒ 12 x d = 180 ⇒ d = \(\frac { 180 }{ 12 }\) = 15 cm
अतः समान्तर चतुर्भुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 180 cm2
एवं समान्तर चतुर्भुज का अभीष्ट शीर्षलम्ब = 15 cm.

प्रश्न 5.
एक खेत एक समान्तर चतुर्भुज के आकार का है जिसकी भुजाएँ 60 m और 40 m हैं तथा एक विकर्ण 80 m है। इस खेत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक समान्तर चतुर्भुज के आकार का खेत ABCDP
जिसकी भुजा AB = 60 m, BC = 40 m एवं विकर्ण AC = 80 m है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 8
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 8a
अत: खेत का अभीष्ट क्षेत्रफल= 600√15 m2.

प्रश्न 6.
एक त्रिभुजाकार का खेत का परिमाप 420 m हैं तथा इसकी भुजाओं का अनुपात 6 : 7 : 8 है। इस खेत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक त्रिभुजाकार खेत जिसकी परिमाप 420 m तथा भुजाओं का अनुपात 6 : 7 : 8 है।
चूँकि भुजाओं का अनुपात = 6 : 7 : 8 = भुजाएँ हैं 6x, 7x एवं 8x (मान लीजिए)
⇒ परिमाप = 6x + 7x + 8x = 420 ⇒ 21x = 420 ⇒ x = \(\frac { 420 }{ 21 }\) = 20 m
⇒ भुजाओं का वास्तविक मान a = 120 m, b = 140 m एवं c = 160 m
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 9
अतः खेत का अभीष्ट क्षेत्रफल = 2100√15 m2.

प्रश्न 7.
किसी त्रिभुज की भुजाएँ क्रमश: 60 m, 100 m और 140 m हैं। त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (2019)
हल:
दिया है : त्रिभुज की भुजाएँ क्रमश: a = 60 m, b = 100 m एवं c = 140 m
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 10
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 10a
अतः त्रिभुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 1500√3 m.

प्रश्न 8.
किसी त्रिभुज ABC की भुजाएँ क्रमशः 40 m, 24 एवं 32 m हैं, तो त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (2019)
हल:
निर्देशः उपर्युक्त प्रश्न की तरह हल करें
उत्तर:
अभीष्ट क्षेत्रफल = 384 m

MP Board Class 9th Maths अति लघु उत्तरीय प्रश्न

सत्य तथा असत्य कथन लिखिए तथा अपने उत्तर का औचित्व दीजिए।

प्रश्न 1.
आधार 4 cm और ऊँचाई 6 cm वाले त्रिभुज का क्षेत्रफल 24 cm2 है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि ar (∆) = \(\frac { 1 }{ 4 }\) x 4 x 6 = 12 cm2.

प्रश्न 2.
एक त्रिभुज ABC का क्षेत्रफल 8 cm है जिसमें AB = AC = 4 cm तथा ∠A = 90° है।
उत्तर:
कथन सत्य है, क्योंकि ar (ABC) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 4 x 4 = 8 cm2.

प्रश्न 3.
एक समद्विबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल \(\frac { 5 }{ 4 }\)√11 cm2 होगा यदि उसका परिमाप 11 cm और आधार 5 cm है।
उत्तर:
कथन सत्य है, प्रत्येक बराबर भुजा 3 cm है।

प्रश्न 4.
एक समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल 20√3 cm है जिसकी प्रत्येक भुजा 8 cm है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि समबाहु ∆ का क्षेत्रफल 16√3 cm2 होगा।

प्रश्न 5.
यदि एक समचतुर्भुज की एक भुजा 10 cm और विकर्ण 16 cm है तो उस समचतुर्भुज का क्षेत्रफल 96 cm2 है।
उत्तर:
कथन सत्य है, क्योंकि उसके विकर्ण से बने एक त्रिभुज का क्षेत्रफल = 48 cm2.

प्रश्न 6.
एक समान्तर चतुर्भुज का आधार और संगत शीर्षलम्ब क्रमशः 10 cm और 3.5 cm हैं। उस समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल 30 cm है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = 10 x 3.5 = 35 cm2.

प्रश्न 7.
भुजा a वाले एक समषद्भुज का क्षेत्रफल भुजा a वाले पाँच समबाहु त्रिभुज के क्षेत्रफल के बराबर होता है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि यह a भुजा वाले 6 समबाहु त्रिभुजों के क्षेत्रफलों के योग के बराबर होगा।

MP Board Class 9th Maths वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक समद्विबाहु समकोण त्रिभुज का क्षेत्रफल 8 cm है। इसके कर्ण की लम्बाई है:
(a) \(\sqrt { 32 }\) cm
(b) \(\sqrt { 16 }\) cm
(c) \(\sqrt { 48 }\) cm
(d) \(\sqrt { 24 }\) cm.
उत्तर:
(a) \(\sqrt { 32 }\) cm

प्रश्न 2.
एक समबाहु त्रिभुज का परिमाप 60 m है। इसका क्षेत्रफल है :
(a) 10√3 m2
(b) 15√3 m2
(c) 20√3 m2
(d) 100√3 m2.
उत्तर:
(d) 100√3 m2.

प्रश्न 3.
2√3 cm भुजा वाले समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल है :
(a) 5.196 cm2
(b) 0.866 cm2
(c) 3:496 cm2
(d) 1:392 cm2.
उत्तर:
(a) 5.196 cm2

प्रश्न 4.
क्षेत्रफल 9√3 cm वाले समबाहु त्रिभुज की प्रत्येक भुजा की लम्बाई है:
(a) 8 cm
(b) 36 cm
(c) 4 cm
(d) 6 cm.
उत्तर:
(d) 6 cm.

प्रश्न 5.
यदि एक समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल 16/3 cm है तो इसकी परिमाप होगी :
(a) 48 cm
(b) 24 cm
(c) 12 cm
(d) 36 cm.
उत्तर:
(b) 24 cm

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. एक समकोण समद्विबाहु त्रिभुज की बराबर भुजा 10 cm है तो इसके विकर्ण लम्बाई …… होगी।
2. 10 cm और 6 cm भुजाओं वाले आयत का क्षेत्रफल …….. होगा।
3. एक समबाहु त्रिभुज की प्रत्येक भुजा 10 cm है तो इसका क्षेत्रफल ……… होगा।
4. एक आयत की भुजाएँ मीटर में मापी गई हैं। इसके क्षेत्रफल का मात्रक ………. होगा।
5. आधार 12 cm तथा शीर्षलम्ब 8 cm वाले त्रिभुज का क्षेत्रफल ……. है।
उत्तर:
1. 10√2 cm,
2. 60 cm2,
3. 25√3 cm2,
4. m2,
5. 48 cm2.

जोड़ी मिलान
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 11
उत्तर:
1. → (c),
2. →(d),
3. → (e),
4. → (a),
5. → (b).

सत्य/असत्य कथन

1. हीरोन का सूत्र केवल समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात करने में प्रयुक्त होता है।
2. समान्तर चतुर्भुज की संलग्न भुजाएँ तथा एक विकर्ण दिया हो तो उसका क्षेत्रफल हीरोन के सूत्र से ज्ञात कर सकते हैं।
3. एक त्रिभुज का क्षेत्रफल होता है उसका आधार x शीर्षलम्ब।
4. आयत का क्षेत्रफल उसकी लम्बाई एवं चौड़ाई के गुणनफल के बराबर होता है।
5. समचतुर्भुज का क्षेत्रफल उसके विकर्णों के गुणनफल के बराबर होता है।
उत्तर:
1. असत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर
1. किसी त्रिभुज की परिमाप का मात्रक क्या होता है?
2. क्षेत्रफल को मापने का मात्रक क्या है?
3. किसी त्रिभुज की भुजाओं के योग को क्या कहते हैं?
4. किसी वर्ग की भुजा 4 सेमी है। उसके विकर्ण उसे चार त्रिभुजों में विभक्त करते हैं तो प्रत्येक त्रिभुज का क्षेत्रफल क्या होगा?
5. हीरोन का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर:
1. सेमी या मीटर,
2. सेमी या मीटर,
3. परिमाप,
4. 4 cm2,
5. अलेक्जेण्ड्रिया (मिस्र) में।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.6

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.6

प्रश्न 1.
एक बेलनाकार बर्तन के आधार की परिधि 132 cm है और उसकी ऊँचाई 25 cm है। इस बर्तन में कितने लीटर पानी आ सकता है ? (1000 cm³ = 1 लीटर) (2018)
हल :
बेलनाकार बर्तन के आधार की परिमाप = 2πr = 132
= \(2 \times \frac{22}{7} \times r=132 \Rightarrow r=\frac{132 \times 7}{2 \times 22}=21 \mathrm{cm}\)
बेलनाकार बर्तन का आयतन = \(\pi r^{2} h=\frac{22}{7} \times(21)^{2} \times 25 \mathrm{cm}^{2}\)
= 22 x 21 x 3 x 25 = 34650 cm³
= \(\frac { 34650 }{ 1000 }\)
= 34.650 लीटर
अत: बेलनाकार बर्तन में 34.650 लीटर पानी आ सकता है।

प्रश्न 2.
लकड़ी के एक बेलनाकार पाइप का आन्तरिक व्यास 24 cm है और बाहरी व्यास 28 cm है। इस पाइप की लम्बाई 35 cm है। इस पाइप का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए यदि 1 cm³ लकड़ी का द्रव्यमान 0.6g है। (2019)
हल :
दिया है : d1 = 28 cm ⇒ r1 = \(\frac { 28 }{ 2 }\) = 14 cm, d2 = 24 cm ⇒ r2 = \(\frac { 24 }{ 2 }\) = 12 cm, लम्बाई l या h = 35 cm
पाइप की लकड़ी का आयतन = \(\pi\left(r_{1}^{2}-r_{2}^{2}\right) \times h=\frac{22}{7}\left(14^{2}-12^{2}\right) \times 35\)
= 22 (196 – 144) x 5 = 22 x 52 x 5 = 5720 cm³
पाइप की लकड़ी का द्रव्यमान = 5720 x 0.6 g = 3432 g
अतः पाइप का अभीष्ट द्रव्यमान = 3432 g या 3:432 kg

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प्रश्न 3.
एक सोफ्ट ड्रिंक (soft drink) दो प्रकार के पैकों में उपलब्ध है :
(i) लम्बाई 5 cm और चौड़ाई 4 cm वाले एक आयताकार आधार का टिन का डिब्बा जिसकी ऊँचाई 15 cm है और
(ii) व्यास 7 cm वाले वृत्तीय आधार और 10 cm ऊँचाई वाला एक प्लास्टिक का बेलनाकार डिब्बा। किस डिब्बे की धारिता अधिक है और कितनी अधिक ?
हल :
(i) टिन के घनाभाकार डिब्बे की धारिता = 5 x 4 x 15 = 300 cm³
(ii) प्लास्टिक के बेलनाकार डिब्बे की धारिता = \(\frac{22}{7} \times\left(\frac{7}{2}\right)^{2} \times 10\) = 385 cm³
दोनों की धारिता का अन्तर = 385 – 300 = 85 cm³
अतः प्लास्टिक के डिब्बे की धारिता टिन के डिब्बे की धारिता से 85 cm³ अधिक है।

प्रश्न 4.
यदि एक बेलन का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल 94.2 cm² है और उसकी ऊँचाई 5 cm है तो ज्ञात कीजिए:
(i) आधार की त्रिज्या,
(ii) बेलन का आयतन। (π = 3.14 लीजिए)
हल :
(i) चूँकि बेलन का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
⇒ 2 x 3.14 x r x 5 = 94.2 ⇒ r = \(\frac { 94.2 }{ 31.4 }\) = 3 cm
अतः बेलन के आधार की अभीष्ट त्रिज्या = 3 cm.

(ii) बेलन का आयतन = πr²h = 3.14 x 3² x 5 = 141.3 cm³
अतः बेलन का अभीष्ट आयतन = 141.3 cm³.

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प्रश्न 5.
10 m गहरे एक बेलनाकार बर्तन के आन्तरिक वक्र पृष्ठ को पेंट कराने का व्यय Rs 2,200 है। यदि पेंट कराने की दर Rs 20 प्रति m² है, तो ज्ञात कीजिए
(i) बर्तन का आन्तरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
(ii) आधार की त्रिज्या
(iii) बर्तन की धारिता।
हल :
(i) चूँकि पेंट कराने का व्यय = दर x आन्तरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
⇒ 2200 = 20 x आन्तरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
⇒ आन्तरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = \(\frac { 2200 }{ 20 }\) = 110 m²
अतः बर्तन का अभीष्ट आन्तरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 110 m².

(ii) बेलन का वक्रपृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh = 2 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x r x 10 = 110
⇒ \(r=\frac{110 \times 7}{2 \times 22 \times 10}=\frac{7}{4} \mathrm{m}=1.75 \mathrm{m}\)
अत: बेलनाकार बर्तन के आधार की अभीष्ट त्रिज्या = 1.75 m.

(iii) बर्तन की धारिता = \(\pi r^{2} h=\frac{22}{7} \times\left(\frac{7}{4}\right)^{2} \times 10=\frac{22 \times 7 \times 10}{16}\)
बर्तन की धारिता = 96.25 m³ या 96.25 kL
अतः बेलनाकार बर्तन की अभीष्ट धारिता = 96.25 m³ (kL).

प्रश्न 6.
ऊँचाई 1 m वाले एक बेलनाकार बर्तन की धारिता 15.4 लीटर है। इसको बनाने के लिए कितने वर्ग मीटर धातु की शीट की आवश्यकता होगी ?
हल :
दी हुई धारिता = 15.4 लीटर = \(\frac { 15.4 }{ 1000 }\) m³ = πr²h
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.6 image 1
बेलनाकार बर्तन का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr (r + h)
= 2 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 0.07 (0.07+ 1)= 44 x 0.01 x 1.07 m³
= 0.4708 m³
अतः धातु की शीट की अभीष्ट आवश्यकता = 0.4708 m³.

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प्रश्न 7.
सीसे की एक पेंसिल (lead pencil) लकड़ी के एक बेलन के अभ्यन्तर में ग्रेफाइट (graphite) से बने ठोस बेलन को डालकर बनाई गई है। पेंसिल का व्यास 7 mm है और ग्रेफाइट का व्यास 1 mm है। यदि पेंसिल की लम्बाई 14 cm है तो लकड़ी का आयतन और ग्रेफाइट का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : पेंसिल का बाहरी व्यास d1 = 7 mm
r1 = \(\frac { 7 }{ 20 }\) cm
एवं पेंसिल का आन्तरिक (ग्रेफाइट) का व्यास d2 = 1 mm
r2 = \(\frac { 1 }{ 20 }\) cm
तथा पेंसिल की लम्बाई l = 14 cm
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.6 image 2
अतः लकड़ी का अभीष्ट आयतन = 5.28 cm³ एवं ग्रेफाइट का आयतन = 0.11 cm³.

प्रश्न 8.
एक अस्पताल (hospital) के एक रोगी को प्रतिदिन 7 cm व्यास वाले एक बेलनाकार कटोरे में सूप (soup) दिया जाता है। यदि यह कटोरा सूप से 4 cm ऊँचाई तक भरा जाता है, तो इस
अस्पताल में 250 रोगियों के लिए प्रतिदिन कितना सूप तैयार किया जाता है ?
हल :
दिया है : एक बेलनाकार कटोरे का व्यास d = 7 cm
r = \(\frac { 7 }{ 2 }\) cm
एवं कटोरे में सूप की ऊँचाई h = 4 cm
एक कटोरे में सूप का आयतन = \(\pi r^{2} h=\frac{22}{7} \times\left(\frac{7}{2}\right)^{2} \times 4=154 \mathrm{cm}^{3}\)
250 रोगियों के सूप का आयतन = 250 x 154 cm³ = 38500 cm³
= \(\frac { 38500 }{ 1000 }\)
= 38.5 लीटर
अतः प्रतिदिन तैयार किए गए सूप का अभीष्ट आयतन = 38.5 लीटर।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5

प्रश्न 1.
माचिस की डिब्बी का माप 4 cm x 2.5 cm x 1.5 cm है। ऐसी 12 डिब्बियों के एक पैकेट का आयतन क्या होगा?
हल :
चूँकि एक माचिस की डिब्बी का आयतन V = 4 cm x 2.5 cm x 1.5 cm = 15 cm³
⇒ 12 डिब्बियों के एक पैकेट का आयतन = 12 x 15 = 180 cm³
अत: माचिस की डिब्बियों के पैकेट का अभीष्ट आयतन = 180 cm³.

प्रश्न 2.
एक घनाभाकार पानी की टंकी 6 m लम्बी, 5 m चौड़ी और 4.5 m गहरी है। इसमें कितने लिटर पानी आ सकता है ? (1 m³ = 1000 लीटर) (2019)
हल :
पानी की टंकी की धारिता = 6 x 5 x 4.5 = 135 m³
⇒ 135 x 1000 लीटर = 1,35,000 लीटर
अतः पानी की टंकी में अभीष्ट = 1,35,000 लीटर पानी आ सकता है।

प्रश्न 3.
एक घनाभाकार बर्तन 10 m लम्बा और 8 m चौड़ा है। इसको कितना ऊँचा बनाया जाए कि इसमें 380 घनमीटर द्रव आ सके।
हल :
मान लीजिए बर्तन की ऊँचाई h m रखी जाए।
चूँकि घनाभाकार बर्तन की धारिता = लम्बाई x चौड़ाई x ऊँचाई
380 = 10 x 8 x h ⇒ h = \(\frac { 380 }{ 10\times 8 }\) = 4.75 m
अत: बर्तन की अभीष्ट ऊँचाई = 4.75 m रखी जाए।

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प्रश्न 4.
8 m लम्बा, 6 m चौड़ा और 3 m गहरा एक घनाभाकार गड्डा खुदवाने में Rs 30 प्रति m³ की दर से होने वाला व्यय ज्ञात कीजिए। (2019)
हल :
गड्डे का आयतन V = 8 m x 6 m x 3 m = 144 m³
खुदवाने का व्यय = दर x क्षेत्रफल = 30 x 144 = Rs 4,320
अत: गड्डा खुदवाने में अभीष्ट व्यय = Rs 4,320.

प्रश्न 5.
एक घनाभाकार टंकी की धारिता 50,000 लीटर पानी की है। यदि इस टंकी की लम्बाई और गहराई क्रमशः 2.5 m और 10 m है, तो इसकी चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : टंकी की धारिता V = 50,000 लीटर ⇒ V = 50 m³, लम्बाई l = 2.5 m, गहराई d = 10 m
पतन) V = l x b x h
⇒ 50 = 2.5 x b x 10 ⇒ b = \(\frac { 50 }{ 25 }\) = 2 m
अतः टंकी की अभीष्ट चौड़ाई = 2 m.

प्रश्न 6.
एक गाँव जिसकी जनसंख्या 4000 है, को प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 150 लीटर पानी की आवश्यकता है। इस गाँव में 20 m x 15 m x 6 m मापों वाली एक टंकी बनी हुई है। इस टंकी का पानी वहाँ कितने दिन के लिए पर्याप्त होगा ?
हल :
टंकी की धारिता = 20 m x 15 m x 6 m = 1800 m³
⇒ धारिता (लीटर में) = 1800 x 1000 = 18,00,000 लीटर
एक दिन में जल की आवश्यकता = 4000 x 150 = 6,00,000 लीटर
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5 image 1
अतः टंकी का पानी अभीष्ट 3 दिन के लिए पर्याप्त होगा।

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प्रश्न 7.
किसी गोदाम की माप 40 m x 25 m x 15 m है। इस गोदाम में 1.5 m x 1.25 m x 0.5 m की माप वाली लकड़ी की कितनी अधिकतम क्रेट (crate) रखी जा सकती हैं?
हल :
चूँकि गोदाम की धारिता V = 40 m x 25 m x 15 m = 15,000 m³
एवं एक क्रेट का आयतन V1 = 1.5 m x 1.25 m x 0.5 m = 0.9375 m³
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5 image 2
अतः क्रेटों की अभीष्ट संख्या = 16,000.

प्रश्न 8.
12 cm भुजा वाले एक ठोस घन को बराबर आयतन वाले 8 घनों में काटा जाता है। नए घन की भुजा क्या होगी ? साथ ही इन दोनों घनों के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात भी ज्ञात कीजिए। हल :
माना नए घन की भुजा = a cm
प्रश्नानुसार, (12)³ = 8a³ ⇒ a³ = \(\frac{12 \times 12 \times 12}{8}\) = (6)³ ⇒ a = 6 cm
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5 image 3
अतः नए घन की अभीष्ट भुजा = 6 cm एवं उनके पृष्ठों के क्षेत्रफल का अनुपात = 4:1.

प्रश्न 9.
3 m गहरी और 40 m चौड़ी एक नदी 2 किमी प्रति घण्टा की चाल से बहकर समुद्र में गिरती है। एक मिनट में समुद्र में कितना पानी गिरेगा ?
हल :
1 मिनट में नदी द्वारा तय की गई दूरी l = \(\frac { 2000 }{ 60 }\) मीटर [∵ वेग = 2 किमी/घण्टा]
1 मिनट में समुद्र में नदी द्वारा गिरा पानी = \(\frac { 2000 }{ 60 }\) x 3 x 40 = 4,000 m³
अतः 1 मिनट में नदी द्वारा समुद्र में 4,000 m³ पानी गिरेगा।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

प्रश्न 1.
निम्न त्रिज्या वाले गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए :
(i) 10.5 cm (2018)
(ii) 5.6 cm
(iii) 14 cm.
हल :
(i) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² = 4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (10.5)²
= 88 x 10.5 x 1.5
= 1386 cm²
अतः गोले का अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफल = 1386 cm².

(ii) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² = 4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (5.6)²
= 88 x 5.6 x 0.8
= 394.24 cm²
अतः गोले का अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफल = 394.24 cm².

(iii) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² = 4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (14)²
= 88 x 28
= 2464 cm²
अतः गोले का अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2464 cm².

प्रश्न 2.
निम्न व्यास वाले गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए:
(i) 14 cm
(ii) 21 cm
(iii) 3.5 m.
हल :
(i) गोले का व्यास d = 14 cm (दिया है)
⇒ R = \(\frac { 14 }{ 2 }\) = 7 cm
गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² = 4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (7)² = 616 cm²
अतः गोले का अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफल = 616 cm².

(ii) गोले का व्यास d = 21 cm (दिया है)
⇒ R = \(\frac { 21 }{ 2 }\) = 10.5 cm
गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² = 4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (10.5)².
= 88 x 10.5 x 1.5 = 1386 cm²
अत: गोले का अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफल = 1386 cm².

(iii) गोले का व्यास d = 3.5 m (दिया है)
⇒ R = \(\frac { 3.5 }{ 2 }\) = 1.75 m
गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² = 4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (1.75)²
= 88 x 1.75 x 0.25 = 38.5 m²
अत: गोले का अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफल = 38.5 m².

प्रश्न 3.
10 cm त्रिज्या वाले एक अर्द्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (π = 3.14 लीजिए)।
हल :
दिया है : अर्धगोले की त्रिज्या R = 10 cm
चूँकि अर्द्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 3πR²
= 3 x 3.14 x 10²
= 942 cm²
अतः अर्द्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल का अभीष्ट मान = 942 cm².

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प्रश्न 4.
एक गोलाकार गुब्बारे में हवा भरने पर, उसकी त्रिज्या 7 cm से 14 cm हो जाती है। इन दोनों स्थितियों में गुब्बारे के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : दोनों स्थितियों में गुब्बारे की त्रिज्याएँ क्रमशः R1 = 7 cm एवं R2 = 14 cm हैं।
चूँकि पहली स्थिति में गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल S1 = 4πR1²
⇒ S1 = 4π(7)² cm²
एवं दूसरी स्थिति में गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल S2 = 4πR2²
⇒ S2 = 4π(14)² cm²
∴ S1 : S2 = 4π (7)² : 4π (14)² = 1 : 4
अतः दोनों स्थितियों में अभीष्ट पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात = 1 : 4.

प्रश्न 5.
पीतल के बने एक अर्द्धगोलाकार कटोरे का आन्तरिक व्यास 10.5 cm है। Rs 16 प्रति 100 cm² की दर से इसके आन्तरिक पृष्ठ पर कलई कराने का व्यय ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : कटोरे का आन्तरिक व्यास, d = 10.5 cm ⇒ त्रिज्या R = 5.25 cm
कटोरे का आन्तरिक पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πR² = 2 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (5.25)²
⇒ Sc = 44 x 5.25 x 0.75 cm² = 173.25 cm²
कलई का व्यय = दर x क्षेत्रफल = \(\frac { 16 }{ 100 }\) x 173.25 = Rs 27.72
अतः कलई कराने का अभीष्ट व्यय = Rs 27.72.

प्रश्न 6.
उस गोले की त्रिज्या ज्ञात कीजिए जिसका पृष्ठीय क्षेत्रफल 154 cm² है। (2018)
हल :
गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 154 cm² (दिया हुआ है)
चूँकि गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल Sc = 4πR²
4 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x R² = 154
R² = \(\frac { 154\times 7 }{ 4 \times 22 }\) = 12.25 cm²
R = √12.25 = 3.5 cm
अतः गोले की अभीष्ट त्रिज्या = 3.5 cm.

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प्रश्न 7.
चन्द्रमा का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग एक-चौथाई है। इन दोनों के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : चन्द्रमा और पृथ्वी के व्यासों का अनुपात
\(=d_{m} : d_{e}=1 : 4 \Rightarrow R_{m} : R_{e}=1 : 4 \Rightarrow \frac{R_{m}}{R_{e}}=\frac{1}{4}\)
चूँकि चन्द्रमा एवं पृथ्वी के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात \(S_{m} : S_{e}=4 \pi R_{m}^{2} : 4 \pi R_{e}^{2}\)
\(\frac{S_{m}}{S_{e}}=\left(\frac{1}{4}\right)^{2}=\frac{1}{16} \Rightarrow S_{m} : S_{e}=1 : 16\)
अतः दोनों के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अभीष्ट अनुपात = 1:16.

प्रश्न 8.
एक अर्द्धगोलाकार कटोरा 0.25 cm मोटी स्टील से बना है। इस कटोरे की आन्तरिक त्रिज्या 5 cm है। कटोरे का बाहरी वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल :
ज्ञात है : कटोरे की आन्तरिक त्रिज्या Ri = 5 cm एवं स्टील की मोटाई d = 0.25 cm
⇒ कटोरे की बाह्य त्रिज्या Re = Ri + d = 5 + 0.25 = 5.25 cm
कटोरे का बाह्य वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = \(2 \pi R_{e}^{2}=2 \times \frac{22}{7} \times(5 \cdot 25)^{2}\)
= 44 x 5.25 x 0.75 cm² = 173.25 cm²
अतः कटोरे का अभीष्ट बाहरी वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 173.25 cm².

प्रश्न 9.
एक लम्बवृत्तीय बेलन त्रिज्या r वाले एक गोले को पूर्णतया घेरे हुए हैं (देखिए संलग्न चित्र)। ज्ञात कीजिए
(i) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल,
(ii) बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल,
(iii) ऊपर (i) एवं (ii) में प्राप्त क्षेत्रफलों का अनुपात।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4 image 1
हल :
गोले की त्रिज्या r मात्रक दी गई है। चित्रानुसार बेलन की
त्रिज्या = r मात्रक तथा बेलन की ऊँचाई h = 2r मात्रक
(i) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πR² (मात्रक)।
(ii) बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh = 2πr. 2r = 4πr²
अतः बेलन का वक्र पृष्ठीय अभीष्ट क्षेत्रफल = 4πr².
(iii) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल : बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr² : 4πr² = 1 : 1
अतः दोनों पृष्ठों का अभीष्ट अनुपात = 1 : 1.

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 12 प्रजातन्त्र

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 12 प्रजातन्त्र

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता लोकतन्त्र की नहीं है?
(i) निर्वाचित प्रतिनिधियों की सरकार
(ii) अधिकारों का सम्मान
(iii) शक्तियों का एक व्यक्ति में केन्द्रीयकरण
(iv) स्वतन्त्रता और निष्पक्ष चुनाव।
उत्तर:
(iii) शक्तियों का एक व्यक्ति में केन्द्रीयकरण

प्रश्न 2.
कौन-सी अवधारणा प्रजातन्त्र की है?
(2016)
(i) स्वतन्त्रता
(ii) शोषण
(iii) असमानता
(iv) व्यक्तिवादिता।
उत्तर:
(i) स्वतन्त्रता

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित में कौन-सा प्रजातन्त्र का दोष नहीं है?
(i) सार्वजनिक धन व समय का अपव्यय
(i) धनिकों का वर्चस्व
(iii) दलीय गुटबन्दी
(iv) लोक कल्याण।
उत्तर:
(iv) लोक कल्याण।

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र, जनता का जनता के लिये जनता द्वारा संचालित शासन है
(2008, 14, 15)
(i) मैकियावली
(ii) रूसो
(iii) लिंकन
(iv) हाट्स।
उत्तर:
(iii) लिंकन

रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए

  1. अरस्तु ने प्रजातन्त्र को ………… का शासन कहा है। (2009, 10, 18)
  2. साम्यवाद के प्रवर्तक ………… और ………… थे।
  3. सफल प्रजातन्त्र के लिए संविधान का …………. होना आवश्यक है।
  4. निर्बल प्रजातन्त्र ………….. और …………. के समय प्रभावहीन सिद्ध होता है।

उत्तर:

  1. ‘बहुतों का शासन’
  2. कार्ल मार्क्स और लेनिन
  3. लिखित
  4. युद्ध और संकट।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उत्तर वैदिक काल में प्रजातान्त्रिक सन्दर्भ में उसका उल्लेख पाया जाता है?
उत्तर :
उत्तर वैदिककाल में शासन का गणतान्त्रिक रूप एवं स्थानीय स्वशासन की संस्थाएँ विद्यमान थीं। ऋग्वेद में सभा और समिति का उल्लेख मिलता है।

प्रश्न 2.
प्राचीन भारत में शासन की मूल इकाई के रूप में किस प्रकार की व्यवस्था थी?
उत्तर:
प्राचीन भारत में भारतीय समाज कृषि प्रधान था जिसकी मूल इकाई स्वशासित एवं स्वतन्त्र ग्राम थे।

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र का मार्क्सवादी सिद्धान्त किस अधिकार पर बल देता है?
उत्तर:
प्रजातन्त्र का मार्क्सवादी सिद्धान्त राजनीतिक एवं नागरिक समानताओं की अपेक्षा आर्थिक समानता पर अधिक बल देता है।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र का अर्थ समझाते हुए कोई दो परिभाषा लिखिए। (2009, 13, 15)
उत्तर:
प्रजातन्त्र का अर्थ-प्रजातन्त्र का अर्थ एक ऐसी शासन व्यवस्था से है जिसमें जनहित सर्वोपरि है। प्रजातन्त्र का अर्थ केवल एक शासन प्रणाली तक सीमित नहीं है। यह राज्य व समाज का रूप भी है। अर्थात् इसमें राज्य, समाज व शासन तीनों का समावेश होता है। राज्य के रूप में प्रजातन्त्र, जनता को शासन करने, उस पर नियन्त्रण करने एवं उसे हटाने की शक्ति है। समाज के रूप में प्रजातन्त्र इस प्रकार की सामाजिक व्यवस्था है जिसमें समानता का विचार और व्यवहार सर्वोपरि हो। व्यक्तित्व की गरिमा का समान मूल्य हो एवं विकास के समान अवसर सभी को प्राप्त हों। यह सम्पूर्ण जीवन का एक मार्ग है। यह मूल्यों की एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें व्यक्ति साध्य है और व्यक्तित्व का विकास इसका उद्देश्य है। यह स्वतन्त्रता एवं समरसता की पूर्व कल्पना पर आधारित है।

परिभाषाएँ :
अरस्तू ने प्रजातन्त्र को बहुतों का शासन’ कहा है। डायसी के अनुसार, “प्रजातन्त्र शासन .. का वह रूप है जिसमें शासन व्यवस्था की शक्ति सम्पूर्ण राष्ट्र में विस्तृत हो।”

प्रश्न 2.
अप्रत्यक्ष अथवा प्रतिनिधि प्रजातन्त्र से आप क्या समझते हैं? (2009, 16)
उत्तर:
अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र :
जब जनता निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से विधि निर्माण तथा शासन के कार्यों पर नियन्त्रण रखने का कार्य करती है तो उसे अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कहते हैं। वर्तमान समय में अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र ही प्रचलित है। इसमें जनता निश्चित अवधि के लिए अपने प्रतिनिधि चुनती है, जो व्यवस्थापिका का गठन करते हैं और कानूनों का निर्माण करते हैं। अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में जनता की इच्छा की अभिव्यक्ति, निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम होती है।

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र में राजनीतिक शिक्षण कैसे होता है?
उत्तर:
प्रजातन्त्र राजनीतिक शिक्षण का श्रेष्ठ साधन है। मताधिकार और राजनीतिक पद प्राप्त करने की स्वतन्त्रता के कारण जनता स्वाभाविक रूप से राजनीतिक क्षेत्र में रुचि लेने लगती है। भाषण अभिव्यक्ति एवं संचार माध्यमों के उपयोग की स्वतन्त्रता, जनता में विचारों के आदान-प्रदान करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है। उनमें उत्तरदायित्व तथा आत्म-निर्भरता की भावना का विकास होता है। सभी राजनीतिक दल निरन्तर प्रचार द्वारा जनता को राजनीतिक शिक्षा प्रदान करते हैं। अतः प्रजातन्त्र में नागरिकों को प्रशासनिक, राजनीतिक व सामाजिक सभी प्रकार का शिक्षण प्राप्त होता है।

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र के लिये संविधान क्यों आवश्यक है? इस पर टिप्पणी लिखिए। (2009, 10, 16)
उत्तर:
शासन संगठन के मूलभूत सिद्धान्त तथा प्रक्रिया निश्चित होना प्रजातन्त्र का महत्त्वपूर्ण लक्षण है, जिसमें कोई भी सत्तारूढ़ दल अपने बहुमत के आधार पर इसे जैसा चाहे वैसा परिभाषित या परिवर्तित न कर सके। शासन के अंगों का गठन, शासन की शक्तियाँ एवं कार्य, प्रक्रिया आदि संविधान में स्पष्ट हों, इसलिए लिखित संविधान का होना अनिवार्य माना गया है। प्रजातन्त्र नागरिकों की समानता एवं स्वतन्त्रता पर आधारित है। वास्तव में संविधान प्रजातन्त्र का प्राण होता है। बिना संविधान के कोई भी प्रजातन्त्र सफल नहीं हो सकता। इस प्रकार प्रजातन्त्र के लिए संविधान परम आवश्यक है।

प्रश्न 5.
वर्तमान में भारतीय प्रजातन्त्र किन-किन चुनौतियों से गुजर रहा है? लिखिए।
उत्तर:
भारत में प्रजातन्त्र के समक्ष चुनौतियाँ-भारत में प्रजातन्त्र के समक्ष कुछ चुनौतियाँ भी हैं। भारतीय प्रजातन्त्र आज निरक्षरता, जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, पृथक्तावाद, साम्प्रदायिकता, राजनीतिक हिंसा, सामाजिक-आर्थिक असमानता, धन व बाहुबल के वर्चस्व, भ्रष्टाचार और वोट बैंक की राजनीति की समस्याओं से प्रभावित हो रहा है।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र से क्या आशय है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ बताइए। (2008, 09)
अथवा
प्रजातन्त्र की कोई पाँच विशेषताएँ बताइए और किसी एक विशेषता के बारे में वर्णन कीजिए। (2010)
अथवा
प्रजातन्त्र का क्या अर्थ है? प्रजातन्त्र की प्रमुख दो परिभाषाएँ लिखिए। (2008)
अथवा
प्रजातन्त्र की चार विशेषताएँ लिखिए। (2017, 18)
उत्तर:
प्रजातन्त्र का आशय-प्रजातन्त्र को अंग्रेजी भाषा में डेमोक्रेसी (Democracy) कहते हैं। प्रजातन्त्र का अंग्रेजी पर्याय डेमोक्रेसी दो यूनानी शब्दों से मिलकर बना है-‘डेमो’ (Demo) यानी ‘जनता’ तथा ‘क्रेटिया’ (Kratia) अर्थ है-शक्ति। इस प्रकार डेमोक्रेसी या प्रजातन्त्र का अर्थ हुआ जनता की शक्ति’ । अन्य शब्दों में कहा जाए तो ऐसी शासन प्रणाली जिसमें सर्वोच्च सत्ता जनता के पास रहती है और उसका उपयोग वह प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में करती है। इसे लोकतन्त्र या जनतन्त्र भी कहा जाता है।

परिभाषाएँ :
प्रजातन्त्र का अर्थ-प्रजातन्त्र का अर्थ एक ऐसी शासन व्यवस्था से है जिसमें जनहित सर्वोपरि है। प्रजातन्त्र का अर्थ केवल एक शासन प्रणाली तक सीमित नहीं है। यह राज्य व समाज का रूप भी है। अर्थात् इसमें राज्य, समाज व शासन तीनों का समावेश होता है। राज्य के रूप में प्रजातन्त्र, जनता को शासन करने, उस पर नियन्त्रण करने एवं उसे हटाने की शक्ति है। समाज के रूप में प्रजातन्त्र इस प्रकार की सामाजिक व्यवस्था है जिसमें समानता का विचार और व्यवहार सर्वोपरि हो। व्यक्तित्व की गरिमा का समान मूल्य हो एवं विकास के समान अवसर सभी को प्राप्त हों। यह सम्पूर्ण जीवन का एक मार्ग है। यह मूल्यों की एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें व्यक्ति साध्य है और व्यक्तित्व का विकास इसका उद्देश्य है। यह स्वतन्त्रता एवं समरसता की पूर्व कल्पना पर आधारित है।

आशय यह है कि प्रजातन्त्रात्मक शासन व्यवस्था लोक कल्याणकारी राज्य से सम्बन्धित है। इसमें व्यक्ति की महत्ता और उसकी स्वतन्त्रता पर बल दिया गया है तथा सम्प्रभुता जनता में निहित होना माना गया है।

प्रजातन्त्र की विशेषताएँ :
प्रजातन्त्र एकमात्र ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें सभी को अपने सर्वांगीण विकास के लिए बिना किसी भेदभाव के समान अवसर प्राप्त होते हैं प्रजातान्त्रिक व्यवस्था नागरिकों की गरिमा तथा समानता, स्वतन्त्रता, मातृत्व और न्याय के सिद्धान्तों पर आधारित है। प्रजातन्त्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • जनता प्रभुसत्ता की स्वामी :
    प्रजातन्त्र में सत्ता का अन्तिम स्रोत राज्य की सम्पूर्ण जनता होती है।
  • शासन का संचालन जन प्रतिनिधियों द्वारा :
    प्रजातन्त्रात्मक व्यवस्था में शासन का संचालन जनता के प्रतिनिधि करते हैं।
  • राजनीतिक दलों के गठन की व्यवस्था :
    प्रजातन्त्र में राजनीतिक दलों का गठन अनिवार्य रूप से किया जाता है। दो या अधिक राजनीतिक दल होते हैं। जिस दल को सर्वाधिक बहुमत प्राप्त होता है, वही शासन का संचालन करता है।
  • चुनावों की व्यवस्था :
    प्रजातन्त्र में संविधान द्वारा निर्धारित तिथि पर चुनाव होते हैं। चुनाव का आधार वयस्क मताधिकार होता है।
  • नागरिकों को अधिकार व स्वतन्त्रताएँ प्रदान करना :
    नागरिक अपने मतों का उचित ढंग से प्रयोग कर सकें तथा अपने व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास कर सकें। इसके लिए उन्हें यथा सम्भव अधिकार व स्वतन्त्रताएँ प्रदान की जाती हैं।
  • शासन जनता के प्रति उत्तरदायी :
    प्रजातन्त्रीय शासन जनता के प्रति उत्तरदायी होता है। जनहित की अवहेलना करने पर उसे पदच्युत किया जा सकता है।
  • लोक या जन कल्याणकारी राज्य का आदर्श :
    प्रजातन्त्र का प्रमुख आदर्श जनहित होता है। अत: इस शासन व्यवस्था में यथासम्भव लोक कल्याणकारी कार्यों को महत्त्व दिया जाता है।
  • स्वतन्त्र व निष्पक्ष न्यायपालिका :
    संविधान की समस्त व्यवस्थाएँ व्यवहार में लागू की जा सकें, इसलिए प्रजातन्त्र में स्वतन्त्र व निष्पक्ष न्यायपालिका का होना एक अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण लक्षण है।

प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र के गुण-दोषों का वर्णन कीजिए।
अथवा
प्रजातन्त्र के कोई चार गुण लिखिए। (2017)
अथवा
प्रजातन्त्र के दो-दो गुण-दोषों का वर्णन कीजिए। (2008, 14, 18)
अथवा
प्रजातन्त्र के दोषों का वर्णन कीजिए। (2008, 09)
उत्तर :
प्रजातन्त्र के गुण-प्रजातन्त्र के निम्नलिखित गुण हैं –

1. जन-कल्याण की भावना :
प्रजातन्त्र की सबसे बड़ी अच्छाई यह है कि इसमें शासक गण जन-कल्याण के प्रति विशेष रूप से सजग तथा क्रियाशील रहते हैं। प्रजातन्त्र में जनता के चुने हुए प्रतिनिधि ही शासन करते हैं। अतः वे जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं। ऐसी दशा में उनके लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे जनता के हित में ही शासन करें।

2. व्यक्तित्व के विकास के अवसर :
प्रजातन्त्र शासन में नागरिकों के प्रतिनिधि ही शासन में भाग लेते हैं। अतः इस प्रकार की प्रणाली में प्रत्येक नागरिक को अपने व्यक्तित्व के विकास के समान अवसर प्राप्त होते हैं।

3. देश-भक्ति की भावना का विकास :
प्रजातन्त्र में नागरिकों के हृदय में राज्य के प्रति निष्ठा तथा भक्ति की भावना उत्पन्न होती है। नागरिक यह अनुभव करते हैं कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि ही शासन का संचालन कर रहे हैं और वे जो कुछ भी करेंगे वह उनके हित में ही होगा। अतः प्रजातन्त्र में प्रत्येक नागरिक के हृदय में अपने देश के प्रति अगाध प्रेम होता है। मिल के अनुसार “प्रजातन्त्र लोगों में देश-भक्ति की भावना का विकास करता है, क्योंकि नागरिक यह अनुभव करते हैं कि सरकार उन्हीं की बनाई हुई है और अधिकारी उनके स्वामी न होकर, सेवक हैं।”

4. नैतिकता तथा उत्तरदायित्व की भावनाओं का विकास :
प्रजातन्त्रात्मक शासन-प्रणाली नागरिकों में उत्तरदायित्व की भावना का विकास करती है। इस सम्बन्ध में मिल का कहना है कि “सत्यता, नैतिकता, साहस, आत्मविश्वास तथा उद्योगशीलता आदि गुणों का किसी अन्य शासन-प्रणाली की अपेक्षा लोकतन्त्र में अधिक विकास होता है।

5. क्रान्ति से सुरक्षा :
प्रजातन्त्र में नागरिकों की इच्छा के अनुसार ही शासन होता है। नागरिक जानते हैं कि वे इच्छानुसार अपने मत द्वारा अत्याचारी शासकों को अपदस्थ कर सकते हैं। अतः सरकार बदलने के लिए क्रान्ति की आवश्यकता नहीं पड़ती।

6. सार्वजनिक शिक्षण :
प्रजातन्त्रात्मक शासन में समस्त व्यक्तियों को सार्वजनिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। वे मतदान द्वारा तथा चुनाव में खड़े होकर राजनीति की शिक्षा प्राप्त करते हैं। उनमें उत्तरदायित्व तथा आत्मनिर्भरता की भावना का विकास होता है। बर्क के शब्दों में “सभी शासन शिक्षा के साधन होते हैं और सबसे अच्छी शिक्षा स्वशिक्षा है। इस प्रकार सबसे अच्छा शासन स्वशासन है, जिसे लोकतन्त्र कहते हैं।

7. स्वतन्त्रता व समानता की प्राप्ति :
प्रजातन्त्र का मूल आधार स्वतन्त्रता और समानता है। इस कारण प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेद-भाव के समान रूप से राजनीतिक अधिकार प्रदान किये जाते हैं। जाति, धर्म, नस्ल, रंग, सम्पत्ति आदि के आधार पर उनमें भेद-भाव नहीं किया जाता। यही ऐसा शासन है जिसमें सभी को अपना विकास करने के समान अवसर प्राप्त होते हैं।

प्रजातन्त्र के दोष :
प्रजातन्त्र के प्रमुख दोष निम्न प्रकार हैं –

  • योग्यता और गुण की अपेक्षा बहुमत का महत्त्व :
    प्रजातन्त्रात्मक शासन में योग्यता और गुण के स्थान पर संख्या और बहुमत को अधिक महत्त्व दिया जाता है। प्रत्येक बात का निर्णय बहुमत के आधार पर होता है, चाहे वह गलत ही क्यों न हो।
  • दल प्रणाली और गुटबन्दी के प्रभाव :
    प्रजातन्त्र शासन में दल प्रणाली और गुटबन्दी के दोष उत्पन्न हो जाते हैं। विभिन्न राजनीतिक दल चुनाव जीतने के प्रयास में जनता को भ्रामक प्रचार द्वारा गुमराह करने का प्रयास करते हैं। एक दल दूसरे दल की कटु आलोचना करता है। योग्य व्यक्ति दलबन्दी से दूर भागते हैं तथा अयोग्य व्यक्ति राजनीति में सफलता प्राप्त कर लेते हैं।
  • अनुत्तरदायी शासन :
    इसे (प्रजातन्त्र को) जनता का शासन कहा जाता है क्योंकि सैद्धान्तिक रूप से उसे जनता के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए परन्तु व्यवहार में ऐसा नहीं होता। प्रजातन्त्र में केवल चुने हुए प्रतिनिधि जो शासन के स्वामी हो जाते हैं, मन्त्रिमण्डल आदि के चुनाव के पश्चात् सर्वसाधारण की आवश्यकताओं, हितों तथा उनकी कठिनाइयों के प्रति तनिक भी चिन्ता नहीं करते। इस प्रकार प्रजातन्त्र अनुत्तरदायी शसान है।
  • समय की बर्बादी-प्रजातन्त्रात्मक शासन :
    प्रणाली में अनावश्यक रूप से समय का अपव्यय होता है। चुनाव तथा नीति निर्धारण आदि में ही काफी समय बर्बाद हो जाता है। किसी भी निर्णय पर पहुँचने से पूर्व वाद-विवाद में भी समय व्यर्थ ही नष्ट होता है तथा निर्णय लेने में देर लगती है।
  • धन का अत्यधिक अपव्यय :
    इस प्रणाली में व्यवस्थापिका सभाओं के सदस्यों तथा मन्त्रिमण्डलं आदि पर पर्याप्त धन व्यय किया जाता है। चुनाव के समय भी पैसा आवश्यक रूप से खर्च होता है। व्यर्थ में कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ जाती है।
  • पूँजीपतियों का शासन :
    प्रजातन्त्र में शासन तथा सरकार पूँजीपतियों के हाथ की कठपुतली बन जाती है। धनवान व्यक्ति दलों को चन्दा देते हैं तथा पैसे की सहायता देकर अपने उम्मीदवारों को चुनाव में खड़ा करके उन्हें विजयी बनाते हैं। पूँजीपतियों द्वारा खड़े किये गये उम्मीदवार चुने जाने के पश्चात् उनके ही हित-साधन में जुट जाते हैं तथा जनसाधारण की उपेक्षा करते हैं। इस प्रकार प्रजातन्त्र में पूँजीवाद का पोषण ‘ होता है और जनसाधारण की उपेक्षा होती है।
  • युद्ध और संकट के समय दुर्बल :
    प्रजातन्त्रात्मक सरकार युद्ध और संकट के समय प्रायः दुर्बल सिद्ध होती है। युद्ध के समय शीघ्र निर्णय लेने की आवश्यकता होती है, परन्तु इस प्रणाली की गति अत्यन्त मन्द होती है। इसीलिए शीघ्र निर्णय नहीं हो पाते।
  • पक्षपात और भ्रष्टाचार का बोलबाला :
    इस शासन-प्रणाली में शासन भ्रष्ट और शिथिल हो जाता है। जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि जनसाधारण के हितों की उपेक्षा कर भाई-भतीजे तथा सगे-सम्बन्धियों के हितों का ही ध्यान रखते हैं। इससे भाई-भतीजेवाद और भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन मिलता है।

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र के आधारभूत सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए। (2009, 14)
उत्तर:
प्रजातन्त्र के आधारभूत सिद्धान्त-प्रजातन्त्र के प्रमुख सिद्धान्त निम्न प्रकार हैं –
(1) प्रजातन्त्र का अभिजनवादी सिद्धान्त :
बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में प्रतिपादित यह सिद्धान्त मानव की प्राकृतिक असमानता के सिद्धान्त पर जोर देते हुए यह मानता है कि प्रत्येक राजनीतिक व्यवस्था में शासक और शासित दो वर्ग होते है। शासक वर्ग हमेशा अल्पसंख्यक होते हुए भी सत्ता के केन्द्र में विशिष्ट वर्ग होता है। शासन की शक्ति इसी विशिष्ट वर्ग के हाथ में केन्द्रित होती है। सामान्यत: व्यक्ति यह सोचते हैं कि वे राजनीतिक प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं, लेकिन वास्तव में उनका प्रभाव चुनाव तक सीमित होता है। अभिजन का आधार है-श्रेष्ठता के आधार पर चयन। प्रकृति, विचार, आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक पृष्ठभूमि आदि किसी भी आधार पर इनकी श्रेष्ठता निर्भर हो सकती है, जो इन्हें आम लोगों से अलग बनाती है।

अभिजन भी स्वयं को आम लोगों से भिन्न एवं श्रेष्ठ समझते हैं, परन्तु जनसाधारण के साथ इनकी क्रिया-प्रतिक्रिया होती रहती है। इस प्रकार जन सम्प्रभुता का समन्वय हो जाता है। समाज की धन सम्पदा एवं नीति निर्धारण में अभिजन की प्रभावशाली भूमिका होती है, परन्तु प्रजातन्त्र में इस वर्ग में प्रवेश के सभी को समान अवसर प्राप्त होते हैं। दूसरी ओर नियमित एवं खुली निर्वाचन प्रक्रिया अभिजन को जनहित में कार्य करने हेतु बाध्य करती है।

(2) बहुलवादी सिद्धान्त :
यह सिद्धान्त इस मान्यता पर आधारित है कि प्रजातन्त्र में व्यक्ति को अपने विभिन्न हितों की पूर्ति के लिये समूह में संगठित होने की स्वतन्त्रता है। ये समूह अपने-अपने क्षेत्र में स्वायत्त भी होते हैं और अपनी हितपूर्ति के लिये शासन पर दबाव भी डालते हैं। इस प्रकार सभी समूहों को अपनी हितपूर्ति की सीमा तक सत्ता में भागीदारी मिलती है। अतः सत्ता का विकेन्द्रीकरण इस सिद्धान्त की मूल धारणा है। अर्थात् राज्य ही सर्वोच्च सत्ता का अधिकारी नहीं अपितु प्रजातन्त्र में समाज के सभी समूहों की राजनीतिक शक्ति एवं शासन की सत्ता में भागीदारी होती है।

(3) प्रजातन्त्र का उदारवादी या शास्त्रीय सिद्धान्त :
इस सिद्धान्त में व्यक्ति की स्वतन्त्रता एवं समाज की सर्वोपरिता पर बल दिया गया है। इस सिद्धान्त के अनुसार शासन का आधार जनता की सहमति है, लेकिन सरकार यदि जनता की कसौटी पर खरी नहीं उतरती है, तो जनता निर्वाचन के माध्यम से सरकार को हटा सकती है। जनहित साधना उसका उद्देश्य है।

(4) मार्क्सवादी सिद्धान्त :
साम्यवाद की विचारधारा के आधुनिक प्रवर्त्तक कार्ल मार्क्स व लेनिन के विचारों पर आधारित प्रजातन्त्र का एक नवीन सिद्धान्त 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में सामने आया। इस सिद्धान्त के अनुसार उदारवादी प्रजातान्त्रिक व्यवस्था में वास्तविक प्रजातन्त्र सम्भव नहीं है, क्योंकि इसमें शासन पर एक छोटे साधन सम्पन्न वर्ग का नियन्त्रण हो जाता है, जबकि प्रजातन्त्र जन कल्याण व उनकी समानता पर आधारित है। इस सिद्धान्त के अनुसार वास्तविक प्रजातन्त्र के लिये एक वर्ग विहीन तथा राज्यविहीन समाज की स्थापना होनी चाहिए। प्रजातन्त्र का यह सिद्धान्त राजनीतिक एवं नागरिक समानताओं की अपेक्षा आर्थिक समानता पर अधिक जोर देता है। इसकी मान्यता है कि यदि व्यक्ति के पास रोटी, कपड़ा, मकान नहीं है तो उसके पास मतदान या निर्वाचित होने का अधिकार कोई अर्थ नहीं रखता है। मार्क्सवाद वास्तविक प्रजातन्त्र की स्थापना हेतु निम्नलिखित सुझाव देता है –

  1. सम्पत्ति का समान वितरण तथा सभी की मूलभूत आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति होना।
  2. उत्पादन एवं वितरण के साधनों पर सामाजिक स्वामित्व देना।
  3. सभी के आर्थिक हित समान होने से इनके प्रतिनिधित्व के लिए एक दल-साम्यवाद दल के हाथ में शासन संचालन की सम्पूर्ण शक्ति देना।

प्रश्न 4.
भारत में प्रजातन्त्र के महत्त्व तथा स्वरूप का वर्णन कीजिए। (2009)
उत्तर:
प्रजातन्त्र का महत्त्व :
अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र-जब जनता निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से विधि निर्माण तथा शासन के कार्यों पर नियन्त्रण रखने का कार्य करती है तो उसे अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कहते हैं। वर्तमान समय में अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र ही प्रचलित है। इसमें जनता निश्चित अवधि के लिए अपने प्रतिनिधि चुनती है, जो व्यवस्थापिका का गठन करते हैं और कानूनों का निर्माण करते हैं। अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में जनता की इच्छा की अभिव्यक्ति, निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम होती है।

भारत में प्रजातन्त्र का स्वरूप :
भारत के लिए प्रजातन्त्र व प्रजातान्त्रिक संस्थाओं के विचार नवीन नहीं है। ऐसा कहा जाता है कि लगभग 3000 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्व के वैदिक काल में भारत की जनता के मध्य प्रतिनिधिक विचार-विमर्श की परम्परा थी। उत्तर वैदिककाल में शासन का गणतान्त्रिक रूप एवं स्थानीय स्वशासन की संस्थाएँ मौजूद थीं। ऋग्वेद व अथर्ववेद में सभा और समिति का वर्णन मिलता है। महाभारत के युद्ध के बाद बड़े साम्राज्य लुप्त होने लगे और कई गणतान्त्रिक राज्यों का उदय हुआ। महाजनपद काल में सोलह महाजनपद जन्मे जिनमें काशी, कोशल, मगध, कुरु, अंग, अवंति, गन्धार, वैशाली, मत्स्य इत्यादि शामिल थे।

इनमें से कुछ महाजनपदों में राजतन्त्र व अन्य में गणतन्त्र थे। महावीर और गौतम बुद्ध दोनों ही गणतन्त्र से आये थे। बौद्ध भिक्षुओं के कई नियम आधुनिक संसदीय शासन प्रणाली के नियमों से मिलते हैं। उदाहरण के लिए बैठक व्यवस्था, विभिन्न प्रकार के प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण, गणपूर्ति (कोरम) हिप, वोटों की गिनती, रोक प्रस्ताव, न्याय सम्बन्धी विचार आदि। बज्जि संघ में तो सभी लोग एक साथ एकत्रित होकर अपनी-अपनी सभाएँ करते थे। यह प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र का स्वरूप था। यह संघ छ: गणराज्यों से मिलकर बना था। मौर्यकालीन भारत में ग्रामों और नगरों में स्वशासन की व्यापक व्यवस्था थी। भारत कृषि प्रधान था जिसकी मूल इकाई स्वशासित एवं स्वतन्त्र ग्राम थे। राजनीतिक संरचना इन ग्राम समुदायों की इकाईयों पर आधारित थी। चुनी हुई पंचायत गाँव का शासन चलाती थी। गाँव के मध्य में पंचायत हुआ करती थी, जहाँ बुजुर्ग परस्पर मिला करते थे। प्रत्येक वर्ष गाँव में पंचायत का चुनाव हुआ करता था। इन पंचायतों को न्याय करने का अधिकार प्राप्त था।

पंचायत ही भूमि का बँटवारा करती थी और कर एकत्रित करके गाँव की ओर से सरकार को भी देती थी। पंचायत के चुने हुए सदस्यों से कुछ समितियों का निर्माण किया जाता था और प्रत्येक समिति एक वर्ष के लिए बनाई जाती थी। यदि कोई सदस्य विपरीत व्यवहार करे तो उसे हटाया जा सकता था। यदि कोई सदस्य जन कोष का उचित लेखा-जोखा पेश न करे तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाता था। केन्द्रीय स्तर पर राजा शासक था। यदि राजा दुर्व्यवहार करे तो उसे हटाने का प्रजा को भी अधिकार था। राजा को सलाह देने के लिए राज्य परिषद हुआ करती थी। राजा प्रजा की इच्छा के अनुसार कार्य करता था और राजा के सलाहकार (मन्त्री) स्थानीय स्तर के पंचों का सम्मान करते थे। अर्थात् प्राचीन समय में राजा के शासन का आशय प्रजा की सेवा करना था।

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प्रश्न 5.
प्रजातन्त्र की अवधारणा क्या है? वर्तमान भारतीय प्रजातन्त्र के स्वरूप का वर्णन कीजिए। (2008)
अथवा
वर्तमान भारतीय प्रजातन्त्र के स्वरूप का वर्णन कीजिए। (2013)
उत्तर:
प्रजातन्त्र की अवधारणा-राजनीतिक विकास में जो विभिन्न प्रकार की शासन व्यवस्थाएँ रहीं उनमें प्रजातन्त्र संसार की प्रमुख शासन प्रणाली मानी जाती है। इसकी प्रमुख अवधारणा यह है कि राज्य की सम्पूर्ण शक्ति की स्वामी जनता है, कोई व्यक्ति, समूह या कोई वंश नहीं। अतः जनता की सहभागिता प्रजातन्त्र का मूल आधार है। जिन निर्णयों या कार्यों का प्रभाव सभी पर पड़ता है, उन निर्णयों में सभी की भूमिका होनी चाहिए।

प्रजातन्त्र के प्रारम्भिक काल में सीमित जनसंख्या एवं सीमित क्षेत्रफल वाले छोटे राज्य होने से सारी जनता शासन संचालन सम्बन्धी निर्णयों में सहभागी होती थी। अतः सीमित क्षेत्रफल एवं सीमित जनसंख्या वाले छोटे-छोटे राज्यों में इसका व्यवहार होने लगा। यूनान के नगर राज्यों में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की शुरूआत मानी जाती है। वर्तमान राज्यों में उनके विस्तार एवं जनसंख्या की दृष्टि से बड़े होने से जनता द्वारा प्रत्यक्ष शासन सम्भव नहीं था। अत: जनता अप्रत्यक्ष रूप से अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन की शक्ति का उपयोग करती है। अतः वर्तमान में प्रजातन्त्र अप्रत्यक्ष रूप से जन प्रतिनिधियों के माध्यम से संचालित प्रजातन्त्र कहलाता है।

वर्तमान भारतीय प्रजातन्त्र-स्वतन्त्रता प्राप्त होने के कुछ समय पूर्व ही भारत में एक संविधान सभा की स्थापना की गयी थी, जिसने 26 नवम्बर, 1949 को संविधान निर्माण का कार्य पूर्ण किया और 26 जनवरी, 1950 से यह संविधान लागू किया गया। संविधान के द्वारा भारत में एक प्रजातन्त्रात्मक गणराज्य की स्थापना की गयी है और प्रजातन्त्र के आधारभूत सिद्धान्त ‘वयस्क मताधिकार’ को स्वीकार किया गया है। संविधान के द्वारा एक धर्म निरपेक्ष राज्य की स्थापना की गयी और नागरिकों को शासन के हस्तक्षेप से स्वतन्त्र रूप में मौलिक अधिकार प्रदान किये गये हैं। व्यवहार में भी भारतीय नागरिक इन स्वतन्त्रताओं का पूर्ण उपभोग कर रहे हैं। इस प्रकार यह कहा जाता है कि भारतीय संविधान आदर्श रूप में एक लोकतन्त्रात्मक संविधान है।

आज तक सम्पन्न हुए विभिन्न लोकसभा और विधान सभा चुनावों में भारतीय नागरिकों के द्वारा सक्रिय सहभागिता एवं परिपक्वता का परिचय दिया है। आपातकाल के अपवाद को छोड़कर समय से एवं निष्पक्ष चुनावों का होना, भारतीय प्रजातन्त्र की निरन्तरता का सूचक है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पन्न होने वाले पंचायतों एवं नगरीय क्षेत्रों में नगरीय निकायों के चुनाव भी भारतीय प्रजातन्त्र की व्यापकता का प्रमाण है।

भारतीय जनता लोकतन्त्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध है और भविष्य में किसी भी शासक वर्ग के द्वारा लोकतन्त्र की अवहेलना का दुस्साहस नहीं किया जा सकेगा। लेकिन लोकतन्त्रीय शासन के ढाँचे को बनाये रखना ही पर्याप्त नहीं है; लोकतन्त्र की सफलता के लिए आवश्यक है कि लोकतन्त्र के लक्ष्य को प्राप्त किया जाए और वह लक्ष्य है-सामाजिक एवं आर्थिक न्याय। हम इस लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाये हैं और दुःखद तथ्य यह है कि हम इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भी आगे नहीं बढ़ रहे हैं। भारत और भारतीय मनोभूमि में लोकतन्त्र गहरा बैठ गया है और यही भविष्य में इसकी सफलता का सबसे बड़ा आधार है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की शुरूआत मानी जाती है (2008)
(i) ब्रिटिश के नगर राज्यों से
(ii) यूनान के नगर राज्यों से
(iii) फ्रांस के नगर राज्यों से
(iv) जर्मनी के राज्यों से।
उत्तर:
(ii) यूनान के नगर राज्यों से

प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र को ‘बहुतों का शासन’ कहा है (2008)
(i) डायसी,
(ii) अब्राहम लिंकन
(iii) अरस्तू
(iv) लेनिन।
उत्तर:
(iii) अरस्तू

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र का अभिजनवादी सिद्धान्त किस शताब्दी के प्रारम्भ में प्रतिपादित हुआ?
(i) 18वीं शताब्दी के प्रारम्भ में
(ii) 19वीं शताब्दी के प्रारम्भ में
(iii) 20वीं शताब्दी के प्रारम्भ में
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(iii) 20वीं शताब्दी के प्रारम्भ में

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र का शास्त्रीय सिद्धान्त
(i) बहुलवादी सिद्धान्त भी कहलाता है
(ii) प्रजातन्त्र का विशिष्ट वर्गीय सिद्धान्त भी कहलाता है
(iii) उदारवादी सिद्धान्त भी कहलाता है
(iv) अभिजनवादी सिद्धान्त भी कहलाता है।
उत्तर:
(iii) उदारवादी सिद्धान्त भी कहलाता है

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प्रश्न 5.
प्रथम महायुद्ध के पश्चात् 1990 तक साम्यवाद की विचारधारा का प्रयोग हुआ
(i) स्विट्जरलैण्ड में
(ii) ब्रिटेन में
(iii) सोवियत संघ में
(iv) फ्रांस में।
उत्तर:
(iii) सोवियत संघ में

प्रश्न 6.
भारत में आपातकाल लागू हुआ
(i) 1970-1972
(ii) 1972-1974
(iii) 1975-1977
(iv) 1978-1980
उत्तर:
(iii) 1975-1977

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. ………. जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा संचालित शासन है। (2017)
  2. निश्चित भू-भाग, जनसंख्या, सरकार और सम्प्रभुता से निर्मित समूह ………… कहलाता है। (2011)
  3. वर्तमान में भारत विश्व का सबसे बड़ा ……….. देश है। (2012)
  4. स्वतन्त्रता प्राप्ति के उपरान्त भारतीय संविधान ………. में लागू हुआ। (2009)

उत्तर:

  1. प्रजातन्त्र
  2. राज्य
  3. प्रजातांत्रिक
  4. 26 जनवरी, 1950।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
शोषण की अवधारणा प्रजातन्त्र की है। (2017)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 2.
वर्तमान समय में अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र ही प्रचलित है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र में स्वतन्त्र व निष्पक्ष चुनाव होना चाहिए। (2015)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र में उत्तरदायी शासन व्यवस्था नहीं होती। (2009)
उत्तर:
असत्य

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प्रश्न 5.
डायसी ने प्रजातन्त्र को ‘बहुतों का शासन’ कहा है। (2014)
उत्तर:
असत्य।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 12 प्रजातन्त्र - 1

उत्तर:

  1. → (घ)
  2. → (ग)
  3. → (ख)
  4. → (ङ)
  5. → (क)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
राज्य की. सर्वोच्च सत्ता। (2016)
उत्तर:
सम्प्रभुता

प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र का मार्क्सवादी सिद्धान्त किस अधिकार पर बल देता है?
उत्तर:
आर्थिक समानता

प्रश्न 3.
‘प्रजातन्त्र, जनता का, जनता के लिये, जनता द्वारा संचालित शासन है’ यह कथन किसका है? (2009)
उत्तर:
अब्राहम लिंकन का

प्रश्न 4.
स्विट्जरलैण्ड के राजनैतिक प्रशासनिक प्रान्त/इकाई। (2016)
उत्तर:
कैण्टन

प्रश्न 5.
कौन-सी अवधारणा प्रजातन्त्र की है? (2013)
उत्तर:
स्वतन्त्रता।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र आरम्भिक काल में किन निर्णयों में सहभागी होती थी ?
उत्तर:
प्रजातन्त्र के आरम्भिक काल में सीमित जनसंख्या एवं सीमित क्षेत्रफल वाले छोटे राज्य होने से सारी जनता शासन संचालन सम्बन्धी निर्णयों में सहभागी होती थी।

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प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रजातन्त्र एक ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें शासन की शक्ति जनता के पास होती है और शासन . संचालन जनता स्वयं प्रत्यक्ष रूप से या अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से करती है।

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र के बहुलवादी सिद्धान्त की मूल धारणा क्या है?
उत्तर:
सत्ता का विकेन्द्रीकरण इस सिद्धान्त की मूल धारणा है।

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र के मार्क्सवादी सिद्धान्त के अनुसार किस प्रकार के समाज की स्थापना होनी चाहिए?
उत्तर:
प्रजातन्त्र के मार्क्सवादी सिद्धान्त के अनुसार सच्चे प्रजातन्त्र के लिये एक वर्ग विहीन तथा राज्य विहीन समाज की स्थापना होनी चाहिए।

प्रश्न 5.
प्रजातन्त्र के प्रमुख प्रकार लिखिए।
उत्तर:
साधारणतः प्रजातन्त्र दो प्रकार का होता है-प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र और अप्रत्यक्ष या प्रतिनिधि मूलक प्रजातन्त्र।

प्रश्न 6.
प्रजातन्त्र की रक्षा के लिए किस प्रकार का संविधान होना आवश्यक है?
उत्तर:
प्रजातन्त्र की रक्षा के लिए लिखित संविधान का होना आवश्यक है।

प्रश्न 7.
भारतीय प्रजातन्त्र की आंशिक पूर्वपीठिका किसे कहा गया?
उत्तर:
ब्रिटिश संसद द्वारा पारित अधिनियम एवं भारत में ब्रिटिश शासन द्वारा बनाये गये कानून, वर्तमान भारतीय प्रजातन्त्र की आंशिक पूर्वपीठिका कही जा सकती है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र :
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में राज्य की प्रभुता सम्पन्न जनता प्रत्यक्ष रूप से शासन के कार्यों में भाग लेती है, नीति निर्धारित करती है, कानून बनाती है और प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त कर उन पर नियन्त्रण रखती है।

प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कम जनसंख्या वाले एवं छोटे आकार वाले राज्यों में ही सम्भव है। वर्तमान में बड़े आकार वाले राष्ट्रों में जहाँ नागरिकों की संख्या करोड़ों में होती है, प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र सम्भव नहीं है। वर्तमान में स्विट्जरलैण्ड के कुछ कैंटनों एवं भारत में पंचायत राज व्यवस्था के अन्तर्गत ग्रामसभाओं में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की व्यवस्था है।

प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र का महत्त्व स्पष्ट कीजिए। (2008, 09, 11)
उत्तर:
प्रजातन्त्र का महत्त्व :
प्रजातन्त्र स्वतन्त्रता, समानता, सहभागिता और भाई-चारे की भावना पर आधारित शासन व्यवस्था है। इसे हम एक सामाजिक व्यवस्था भी कह सकते हैं। इसके अन्तर्गत मानव का सम्पूर्ण जीवन इस लोकतन्त्रीय मान्यता पर आधारित होता है कि प्रत्येक व्यक्ति को समाज में समान महत्त्व एवं व्यक्तित्व की गरिमा प्राप्त है। व्यक्ति के महत्त्व की यह स्थिति यदि जीवन के केवल राजनीतिक क्षेत्र में ही हो, तो प्रजातन्त्र अधूरा रहता है। प्रजातन्त्र की पूर्णता के लिए यह अनिवार्य है कि जीवन के राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक तीनों ही क्षेत्रों में सभी व्यक्तियों को अपने विकास के समान अवसर प्राप्त हों।

मानव जीवन के राजनीतिक क्षेत्र में प्रजातन्त्र से आशय ऐसी राजनीतिक व्यवस्था से है जिसमें निर्णय लेने की शक्ति किसी एक व्यक्ति में न होकर जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों में निहित होती है। सामाजिक क्षेत्र में प्रजातन्त्र से आशय इस प्रकार के समाज से है, जिसमें जाति, धर्म, रंग, लिंग, नस्ल, मूलवंश व सम्पत्ति के आधार पर भेद-भाव न हो।

आर्थिक क्षेत्र में प्रजातन्त्र से आशय इस प्रकार की व्यवस्था से है जिसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आजीविका चुनने या व्यवसाय करने की स्वतन्त्रता प्राप्त हो। अर्थात् व्यक्ति को रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य, शिक्षा रोजगार आदि की सुविधाएँ प्रजातन्त्र के आधार हैं। अतः प्रजातन्त्र न केवल शासन का एक विशेष प्रकार है बल्कि यह जीवन के प्रति एक विशिष्ट दृष्टिकोण है।

प्रश्न 3.
“स्वतन्त्रता प्रजातंत्र की आत्मा है।” कथन की पुष्टि कीजिए। (2015)
उत्तर:
प्रजातंत्र में नागरिकों के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक प्रकार की स्वतन्त्रताएँ प्राप्त होती हैं। राजनैतिक स्वतन्त्रता के अतिरिक्त नागरिकों को अनेक प्रकार की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतन्त्रताओं के अधिकार भी प्राप्त होते हैं। प्रजातंत्र में नागरिकों को मत देने, निर्वाचित होने, सार्वजनिक पद ग्रहण करने, भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता सूचना प्राप्त करने का अधिकार सम्मेलन सभा करने, समूह बनाने, व्यापार व्यवसाय करने आदि की स्वतन्त्रताएँ प्राप्त होती हैं। नागरिक यदि शासन की नीतियों से असहमत हों, तो संयमित विरोध की स्वतन्त्रता भी उन्हें प्राप्त है। स्वतन्त्रता प्रजातंत्र की आत्मा है। बिना स्वतन्त्रता प्रजातंत्र सम्भव नहीं है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र के प्रकारों का वर्णन कीजिए।(2011)
अथवा
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में अन्तर लिखिए। (2012)
उत्तर:
साधारणतः प्रजातन्त्र दो प्रकार का होता है –
(1) प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र :
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में राज्य की प्रभुता सम्पन्न जनता प्रत्यक्ष रूप से शासन के कार्यों में भाग लेती है, नीति निर्धारित करती है, कानून बनाती है और प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त कर उन पर नियन्त्रण रखती है।

प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कम जनसंख्या वाले एवं छोटे आकार वाले राज्यों में ही सम्भव है। वर्तमान में बड़े आकार वाले राष्ट्रों में जहाँ नागरिकों की संख्या करोड़ों में होती है, प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र सम्भव नहीं है। वर्तमान में स्विट्जरलैण्ड के कुछ कैंटनों एवं भारत में पंचायत राज व्यवस्था के अन्तर्गत ग्रामसभाओं में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की व्यवस्था है।

(2) अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र :
जब जनता निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से विधि निर्माण तथा शासन के कार्यों पर नियन्त्रण रखने का कार्य करती है तो उसे अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कहते हैं। वर्तमान समय में अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र ही प्रचलित है। इसमें जनता निश्चित अवधि के लिए अपने प्रतिनिधि चुनती है, जो व्यवस्थापिका का गठन करते हैं और कानूनों का निर्माण करते हैं। अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में जनता की इच्छा की अभिव्यक्ति, निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम होती है।

MP Board Class 9th Social Science Solutions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Chapter 13 अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Maths Chapter 13 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दोनों ओर से खली एक बेलनाकार टयूब एक लोहे की चादर की बनी है, जिसकी मोटाई 2 cm है। यदि इसका व्यास 16 cm और लम्बाई 100 cm है, तो ज्ञात कीजिए कि इस को
बनाने में कितने cm³ लोहे का प्रयोग किया गया ?
हल :
दिया है: एक बेलनाकार ट्यूब के आधार का बाह्य व्यास d = 16 cm
⇒ त्रिज्या r1 = 16/2 = 8 cm
और लम्बाई (लम्बाई) h = 100 cm तथा धातु की मोटाई = 2 cm.
⇒ आधार की आन्तरिक त्रिज्या r2 = 8 – 2 = 6 cm
लोहे का आयतन = π(r12 – r22) h = \(\frac { 22 }{ 7 }\) [(8)² – (6)²] x 100
= \(\frac { 22 }{ 7 }\) (64 – 36) x 100
= \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 28 x 100
= 8800 cm³
अत: लोहे का अभीष्ट आयतन = 8800 cm³.

प्रश्न 2.
28 cm व्यास वाली एक अर्द्धवृताकार धातु की चादर को मोड़कर एक शंकु के आकार का खुला कप बनाया गया है। इस कप की धारिता ज्ञात कीजिए।
हल :
ज्ञात है : 28 cm व्यास वाले एक अर्द्धवृताकार धातु की चादर को मोड़कर एक शंकु के आकार में मोड़ा गया है जिसकी तिर्यक ऊँचाई l = \(\frac { 28 }{ 2 }\) = 14 cm तथा आधार की परिधि
2πr’ = π x 14 cm
⇒ r’ = 14/2 = 7 cm
शंकु की ऊँचाई \(h=\sqrt{l^{2}-\left(r^{\prime}\right)^{2}}\)
\(=\sqrt{(14)^{2}-(7)^{2}}\)
\(=\sqrt{196-49}\)
= √147
= 7√3 cm
कप की धारिता = शंकु का आयतन = \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h\)
⇒ \(V=\frac{1}{3} \times \frac{22}{7} \times(7)^{2} \times 7 \sqrt{3}\)
= 622.38 cm³ (लगभग)
अतः कप की अभीष्ट धारिता = 622.38 cm³. (लगभग)

प्रश्न 3.
165 m² क्षेत्रफल वाले एक कपड़े को 5 m त्रिज्या वाले एक शंक्वाकार तम्बू के रूप में बनाया जाता है।
(i) इस तम्बू में कितने विद्यार्थी बैठ सकते हैं, यदि औसतन एक विद्यार्थी भूमि पर \(\frac { 5 }{ 7 }\) m² स्थान घेरता है ?
(ii) इस शंकु का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
∵ शंक्वाकार तम्बू का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = कपड़े का क्षेत्रफल
πrl = \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 5 x l= 165
\(l=\frac{165 \times 7}{22 \times 5}=\frac{21}{2}=10 \cdot 5 \mathrm{m}\)
शंकु की ऊँचाई \(h=\sqrt{l^{2}-r^{2}}\)
\(=\sqrt{(10 \cdot 5)^{2}-(5)^{2}}\)
\(h=\sqrt{110 \cdot 25-25}=\sqrt{85 \cdot 25}\)
= 9.233 m

(i) वृत्ताकार आधार का क्षेत्रफल = πr² = \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (5)² = \(\frac { 550 }{ 7 }\) m²
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 1
\(=\frac{550 / 7}{5 / 7}\)
= 110
अतः विद्यार्थियों की अभीष्ट संख्या = 110.

(ii) तम्बू का आयतन \(V=\frac{1}{3} \pi r^{2} h=\frac{1}{3} \times \frac{22}{7} \times 5^{2} \times 9 \cdot 233\)
= 241.81
अतः शंकु का अभीष्ट आयतन = 241.81 m³.

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प्रश्न 4.
किसी फैक्ट्री के लिए पानी एक अर्द्धगोलाकर टंकी से संचरित किया जाता है जिसका आन्तरिक व्यास 14 m है। इस टंकी में 50 किलोलीटर पानी है। इस टंकी को पूरा भरने के लिए पम्प द्वारा भरा जाता है। टंकी में पम्प द्वारा भरे गए पानी का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : अर्द्धगोलाकार टंकी का आन्तरिक व्यास d = 14 m
त्रिज्या R = d/2 = 14/2 = 7 cm टंकी में पानी 50 किलोलीटर
टंकी की धारिता \(V=\frac{2}{3} \pi R^{3}=\frac{2}{3} \times \frac{22}{7} \times(7)^{3}\)
= \(\frac { 2156 }{ 3 }\)
= 718.67 m³
= 718.67 kL
पम्प द्वारा भरा गया पानी = 718.67 – 50
= 668.67 kL
अतः पम्प द्वारा भरे गए पानी का आयतन = 668.67 kL.

प्रश्न 5.
दो गोलों के आयतनों का अनुपात 64 : 27 है, उनके पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए गोलों के आयतन V1 एवं V2, पृष्ठीय क्षेत्रफल S1 और S2 तथा त्रिज्याएँ R1 और R2 हैं। दिया है : V1 : V2 = 64 : 27
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 2
अत: गोलों के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात = 16 : 9.

प्रश्न 6.
4 cm भुजा वाले एक घन के अन्दर एक गोला जो उसके तलों को स्पर्श करता है। इन दोनों के बीच में रिक्त स्थान का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : घन की प्रत्येक भुजा 4 cm, घन के अन्दर एक गोला उसके तलों को स्पर्श करता हुआ अतः गोले कां व्यास = धन की भुजा
d = 4 cm
R = \(\frac { 4 }{ 2 }\) = 2 cm,
गोले का आयतन = \(=\frac{4}{3} \pi R^{3}=\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(2)^{3}\)
\(=\frac{22 \times 32}{21}=\frac{704}{21}\)
= 33.52 cm³
एवं घन का आयतन = (a)³ = (4)³ = 64 cm³
रिक्त स्थान का आयतन = 64 – 33.52
= 30.48 cm³
अतः अभीष्ट रिक्त स्थान का आयतन = 30.48 cm³.

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प्रश्न 7.
एक ही त्रिज्या वाले एक गोले और एक लम्बवृत्तीय बेलन के आयतन बराबर हैं। बेलन का व्यास उसकी ऊँचाई से कितने प्रतिशत अधिक है ?
हल :
दिया है : बेलन की त्रिज्या = गोले की त्रिज्या = R मात्रक
मान लीजिए बेलन की ऊँचाई = h मात्रक, बेलन का आयतन = गोले का आयतन (दिया है)
πR²h = \(\frac { 4 }{ 3 }\)πR³
बेलन की ऊँचाई h = \(\frac { 4 }{ 3 }\)R
बेलन का व्यास d = 2R
बेलन का व्यास – बेलन की ऊँचाई \(=2 R-\frac{4}{3} R=\frac{6 R-4 R}{3}=\frac{2}{3} R\)
प्रतिशत अधिकता \(=\frac{2 / 3 R}{4 / 3 R} \times 100\)
= 50%
अतः बेलन का व्यास बेलन की ऊँचाई से 50% अधिक है।

प्रश्न 8.
30 वृत्ताकार प्लेटों को जिनमें से प्रत्येक की त्रिज्या 14 cm है और मोटाई 3 cm है, एक के ऊपर एक रखकर एक बेलनाकार ठोस बनाया गया है। इस प्रकार बने बेलन का ज्ञात कीजिए
(i) कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल
(ii) आयतन।
हल :
ज्ञात है : बने बेलन की त्रिज्या = वृत्ताकार प्लेट की त्रिज्या = 14 cm,
बने बेलन की ऊँचाई h = प्लेटों की संख्या x मोटाई = 30 x 3 = 90 cm
(i) बेलन का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr (h + r)
= 2 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 14(90 + 14)
= 88 x 104
= 9152 cm²
अतः बेलन का अभीष्ट कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 9152 cm².

(ii) बेलन का आयतन = πr²h = \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (14)² x 90
= 55440 cm³
अतः बेलन का अभीष्ट आयतन = 55440 cm³.

MP Board Class 9th Maths Chapter 13 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक 16 cm x 8 cm x 8 cm आन्तरिक विमाओं वाले आयताकार पेटी में, धातु के गोले पैक किए जाते हैं जिनमें से प्रत्येक की त्रिज्या 2 सेमी है। 16 गोले पैक किए (रखे) जाने पर पेटी को एक परिरक्षक द्रव से भर दिया जाता है। इस द्रव का आयतन ज्ञात कीजिए। अपना उत्तर निकटतम पूर्णांक तक दीजिए। (π = 3.14 का प्रयोग कीजिए।)
हल :
पेटी की धारिता = 16 x 8 x 8 = 1024 cm³
1 गोले का आयतन \(=\frac{4}{3} \pi R^{3}=\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(2)^{3}\)
\(=\frac{32 \times 22}{21}=\frac{704}{21}\)
= 33.524 cm
गोलों का आयतन V2 = 16 x 33.524
= 536.384 cm³
= 536 cm³
(निकटतम पूर्णांक से) द्रव का आयतन = पेटी का आयतन – 16 गोलों का आयतन
= 1024 – 536
= 488 cm³
अतः द्रव का अभीष्ट आयतन = 488 cm³.

प्रश्न 2.
पानी को संचरित करने वाली एक टंकी एक घन के आकार की है। इसे पूरा भरने पर इसमें पानी का आयतन 15.625 m³ है। यदि इस टंकी में पानी की गहराई 1.3 m है, तो इस टंकी
में से पहले से प्रयुक्त किए गए पानी का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
माना घनाकार टंकी की एक भुजा = a m है, तो टंकी का आयतन = a³ = 15.625 (दिया गया है)
a³ = (2.5)³ = a = 2.5 m
प्रयुक्त पानी का ऊँचाई h = 2.5 – 1.3 = 1.2 m
प्रयुक्त पानी का आयतन V = 2.5 x 2.5 x 1.2 = 7.5 m³
अतः पहले से प्रयुक्त पानी का अभीष्ट आयतन = 7.5 m³.

प्रश्न 3.
यदि 4.2 cm व्यास वाली एक गोलाकार गेंद को पूर्णतः पानी में डुबो दिया जाए तो उसके द्वारा विस्थापित पानी का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : गोलाकार गेंद का व्यास d = 4.2 cm ⇒ त्रिज्या R = 2.1 cm
चूँकि हटाए गए पानी का आयतन = गोलाकार गेंद का आयतन
⇒ हटाए गए पानी का आयतन = \(\frac{4}{3} \pi R^{3}=\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(2 \cdot 1)^{3} \cdot \mathrm{cm}^{3}\)
= 88 x 2.1 x 2.1 x 0.1
= 38.808 cm³
अतः गेंद द्वारा हटाए गए पानी का अभीष्ट आयतन = 38:808 cm³.

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प्रश्न 4.
उस शंक्वाकार तम्बूको बनाने में लगे कैनवासका क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए जिसकी ऊँचाई 3.5m है तथा आधार की त्रिज्या 12 m है।
हल :
शंकु की ऊँचाई h = 3.5 m एवं त्रिज्या 12 मीटर दी गई है।
शंक्वाकार तम्बू की तिर्यक ऊँचाई
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 3
कैनवास का क्षेत्रफल = शंक्वाकार तम्बू का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल
= πrl
= \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 12 x 12.5
= \(\frac { 3300 }{ 7 }\)
= 471.43 m²
अतः कैनवास का अभीष्ट क्षेत्रफल = 471.43 m².

प्रश्न 5.
एक ही धातु के बने दो ठोस गोलों का भार 5920g और 740g है। यदि छोटे गोले का व्यास 5 cm है तो बड़े गोले की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : बड़े गोले का द्रव्यमान m1 = 5920 g एवं छोटे गोले का द्रव्यमान m2 = 740g
छोटे गोले का व्यास d1 = 5 cm ⇒ उसकी त्रिज्या r2 = 5/2 cm
मान लीजिए बड़े गोले की त्रिज्या r1 तथा धातु का घनत्व d है, तो
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 4
अत: बड़े गोले की अभीष्ट त्रिज्या = 5 cm.

प्रश्न 6.
कोई स्कूल अपने विद्यार्थियों को प्रतिदिन 7 cm व्यास वाले बेलनाकार गिलासों में दूध देता है। यदि गिलास दूध से 12 cm ऊँचाई तक भरा जाता है, तो ज्ञात कीजिए कि 1600 विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन कितने लीटर दूध की आवश्यकता होगी ?
हल :
दिया है : बेलनाकार गिलास का व्यास d = 7 cm ⇒ त्रिज्या r = 7/2 cm
गिलास में दूध स्तम्भ की ऊँचाई h = 12 cm तथा स्कूल में छात्रों की संख्या = 1600
1 गिलास में दूध का आयतन = πr²h
= \(\frac{22}{7} \times\left(\frac{7}{2}\right)^{2} \times 12 \mathrm{cm}^{3}\)
= 462 cm³
1600 विद्यार्थियों के लिए आवश्यक दूध = 1600 x 462 cm³
= 739200 cm³
= 739.2 लीटर
अतः आवश्यक अभीष्ट दूध = 739.2 लीटर।

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प्रश्न 7.
2.5 m लम्बे और 1.75m त्रिज्या वाले एक बेलनाकार रोलर (roller) को जब सड़क पर रोल किया गया, तो पाया गया कि उसने 5500 m² के क्षेत्रफल को तय कर लिया। रोलर ने कितने चक्कर लगाए ?
हल :
रोलर की लम्बाई l = 2.5 m एवं त्रिज्या r = 1.75 m
तय किया गया कुल क्षेत्रफल = 5500 m²
रोलर का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
= 2 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 1.75 x 2.5 m³
= 44 x 0.25 x 2.5
= 27.5 m²
चूँकि रोलर द्वारा लगाए गए चक्करों की संख्या
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 5
अतः रोलर द्वारा लगाए गए अभीष्ट चक्कर = 200.

प्रश्न 8.
5000 जनसंख्या वाले एक छोटे गाँव में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 75 लीटर पानी की आवश्यकता है। इस गाँव में 40 m x 25 m x 15 m मापन की एक उपरि टंकी हैं। इस टंकी का पानी कितने दिन तक पर्याप्त रहेगा?
हल :
टंकी का आयतन V = 40 x 25 x 15
= 15,000 m³
= 15,000 x 1000
= 1,50,00,000 लीटर
एक दिन में गाँव में पानी की आवश्यकता = 5000 x 75 लीटर
= 3,75,000 लीटर
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 6
अतः टंकी का पानी अभीष्ट 40 दिन तक पर्याप्त होगा।

प्रश्न 9.
एक दुकानदार के पास 5 cm त्रिज्या का एक लड्डू है। इतनी ही सामग्री से 2.5 cm त्रिज्या वाले कितने लड्डू बनाए जा सकते हैं ?
हल :
दिया है : बड़े लड्डू की त्रिज्या r1 = 5 cm और छोटे की त्रिज्या r2 = 2.5 cm
मान लीजिए छोटे लड्डुओं की संख्या n है, तो
बड़े लड्डू का आयतन = n छोटे लड्डुओं का आयतन
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 7
अतः 8 नए लड्डू बनाए जा सकते हैं।

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प्रश्न 10.
6 cm, 8 cm और 10 cm वाले एक समकोण त्रिभुज को 8 cm वाली भुजा के परितः घुमाया जाता है। इस प्रकार बनने वाले ठोस का आयतन और वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : 6 cm, 8 cm एवं 10 cm भुजाओं वाले एक समकोण त्रिभुज को 8 सेमी वाली भुजा के परितः घुमाने पर बना ठोस एक लम्बवृत्तीय शंकु है जिसके आधार की त्रिज्या r = 6 cm, ऊँचाई h = 8 cm एवं तिर्यक ऊँचाई l = 10 cm है।
शंक्वाकार ठोस शंकु का आयतन = \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h=\frac{1}{3} \times \frac{22}{7} \times(6)^{2} \times 8\)
ठोस का आयतन = \(\frac { 6336 }{ 21 }\)
= 301.7 cm³ (लगभग)
शंक्वाकार ठोस का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = πrl = \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 6 x 10
= \(\frac { 1320 }{ 7 }\)
= 188.6 cm² (लगभग)
अतः ठोस का अभीष्ट आयतन = 301.7 cm³ (लगभग)
एवं वक्र पृष्ठीय अभीष्ट क्षेत्रफल = 188.6 cm² (लगभग)।।

प्रश्न 11.
यदि घन की कोर 12 cm है, तो घन का आयतन ज्ञात कीजिए। (2019)
हल :
दिया है : घन की कोर a = 12 cm
∵ घन का आयतन V = a³
⇒ घन का आयतन V= (12)³
= 1728 cm³
अतः घन का अभीष्ट आयतन = 1728 cm³.

प्रश्न 12.
एक घन की भुजा 4 cm है, तो उसका सम्पूर्ण पृष्ठ ज्ञात कीजिए। (2019)
हल :
दिया है : घन की भुजा a = 4 cm
∵ घन का सम्पूर्ण पृष्ठ Sw = 6a²
⇒ घन का सम्पूर्ण पृष्ठ = 6 x (4)²
= 96 cm²
अतः घन का अभीष्ट सम्पूर्ण पृष्ठ = 96 cm².

MP Board Class 9th Maths Chapter 13 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

निम्नलिखित में से प्रत्येक में सत्य या असत्य लिखिए और अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।

प्रश्न 1.
एक गोले का आयतन उस बेलन के आयतन का \(\frac { 2 }{ 3 }\) होता है जिसकी ऊँचाई और व्यास गोले के व्यास के बराबर हैं।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि गोले का आयतन = \(\frac{4}{3} \pi r^{3}=\frac{2}{3} \pi r^{2}(2 r)\) = बेलन का आयतन।

प्रश्न 2.
यदि एक लम्बवृत्तीय शंकु की त्रिज्या आधी कर दी जाए और ऊँचाई दो गुनी कर दी जाए, तो उसके आयतन में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
उत्तर-
कथन असत्य है, क्योंकि नया आयतन प्रारम्भिक आयतन का आधा है।

प्रश्न 3.
एक लम्बवृत्तीय शंकु की ऊँचाई, त्रिज्या और तिर्यक ऊँचाई सदैव एक समकोण त्रिभुज की भुजाएँ नहीं होती हैं।
उत्तर-
कथन असत्य है, क्योंकि r² + h² = l² समकोण त्रिभुज की सदैव भुजाएँ होती हैं।

प्रश्न 4.
यदि एक बेलन की त्रिज्या दुगनी कर दी जाए तथा उसके वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल में कोई परिवर्तन न किया जाए तो उसकी ऊँचाई अवश्य ही आधी हो जाएगी।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि 2πrh = 2π (2r) x h/2

प्रश्न 5.
किनारे 2r वाले एक घन में समावेशित किए जा सकने वाले सबसे बड़े लम्बवृत्तीय शंकु का आयतन त्रिज्या r वाले अर्द्धगोले के आयतन के बराबर होता है।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि शंकु का आयतन = \(\frac { 1 }{ 3 }\)πr²(2r)
= \(\frac { 2 }{ 3 }\)πr³ = अर्द्धगोले का आयतन।

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प्रश्न 6.
एक बेलन और एक लम्बवृत्तीय शंकु के समान आधार और समान ऊँचाई है। बेलन का आयतन शंकु के आयतन का तीन गुना होगा।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि बेलन का आयतन = πr²h
= 3 x \(\frac { 1 }{ 3 }\) πr²h
= 3 x शंकु का आयतन।

प्रश्न 7.
एक शंकु, अर्द्धगोला और बेलन समान आधार और समान ऊँचाई के हैं। इनके आयतनों में अनुपात 1 : 2 : 3 है।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि शंकु का आयतन : अर्द्धगोले का आयतन : बेलन का आयतन
= \(\frac{1}{3} \pi r^{2} r : \frac{2}{3} \pi r^{3} : \pi r^{2} . r\)
= 1 : 2 : 3.

प्रश्न 8.
यदि किसी घन के विकर्ण की लम्बाई 6√3 है तो इसके किनारे की लम्बाई 3 cm है।
उत्तर-
कथन असत्य है, क्योंकि a√3 = 6√3
= a = 6 cm होगी।

प्रश्न 9.
यदि एक गोला एक घन के अन्तर्गत हैं तो घन के आयतन का गोले के आयतन में अनुपात 6 : π है।
उत्तर-
कथन सत्य है क्योंकि घन का आयतन a³ : गोले का आयतन , \(\frac { 4 }{ 3 }\)π(a/2)³
= a³ : π/6 a³ ⇒ 6 : π.

प्रश्न 10.
यदि एक बेलन की त्रिज्या दुगनी कर दी जाए और उसकी ऊँचाई आधी कर दी जाए तो उसका आयतन दो गुना हो जाएगा।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि नया आयतन = π(2r)² h/2 = 2πr²h
⇒ नया आयतन = 2 x पुराना आयतन।

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MP Board Class 9th Maths Chapter 13 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यदि एक गोले की त्रिज्या 2r है, तो उसका आयतन होगा :
(a) \(\frac{4}{3} \pi r^{3}\)
(b) \(4 \pi r^{2}\)
(c) \(\frac{8 \pi r^{3}}{3}\)
(d) \(\frac{32 \pi r^{3}}{3}\)
उत्तर:
(d) \(\frac{32 \pi r^{3}}{3}\)

प्रश्न 2.
एक घन का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल 96 cm है। घन का आयतन है :
(a) 8 cm³
(b) 512 cm³
(c) 64 cm³
(d) 27 cm³.
उत्तर:
(c) 64 cm³

प्रश्न 3.
एक शंकु की ऊँचाई 8.4 cm है। और उसके आधार की त्रिज्या 2.1 cm है। इसे पिघलाकार एक गोले के रूप में ढाला जाता है। गोले की त्रिज्या है :
(a) 4.2 cm
(b) 2.1 cm
(c) 2.4 cm
(d) 1.6 cm.
उत्तर:
(b) 2.1 cm

प्रश्न 4.
यदि एक बेलन की त्रिज्या दो गुनी कर दी जाए और ऊँचाई आधी कर दी जाए तो उसका वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल :
(a) आधा हो जायेगा
(b) दो गुना हो जायेगा
(c) वही रहेगा
(d) चार गुना हो जायेगा।
उत्तर:
(c) वही रहेगा

प्रश्न 5.
एक शंकु जिसकी त्रिज्या r/2 है और तिर्यक ऊँचाई 2l है का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा :
(a) 2πr (1 + r)
(b) πr (1 + r/4)
(c) πr (1 + r)
(d) 2πrl.
उत्तर:
(b) πr (1 + r/4)

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प्रश्न 6.
दो बेलनों की त्रिज्याएँ 2 : 3 के अनुपात में हैं तथा उनकी ऊँचाइयों का अनुपात 5 : 3 है। इनके आयतनों का अनुपात है :
(a) 10 : 17
(b) 20 : 27
(c) 17 : 27
(d) 20 : 37.
उत्तर:
(b) 20 : 27

प्रश्न 7.
एक घन का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल 256 m² है। घन का आयतन है :
(a) 512 m³
(b) 64 m³
(c) 216 m³
(d) 256 m³.
उत्तर:
(a) 512 m³

प्रश्न 8.
16 m लम्बे, 12 m चौड़े तथा 4 m गहरे एक गड्ढे में रखे जा सकने वाले 4 m x 50 cm x 20 cm विमाओं वाले बॉक्सों की संख्या :
(a) 1900
(b) 1920
(c) 1800
(d) 1840.
उत्तर:
(b) 1920

प्रश्न 9.
10 m x 10 m x 5 m विमाओं वाले एक कमरे में रखे जा सकने वाले सबसे लम्बे डण्डे की लम्बाई
(a) 15 m
(b) 16 m
(c) 10 m
(d) 12 m.
उत्तर:
(a) 15 m

प्रश्न 10.
एक अर्द्धगोलाकार गुब्बारे में हवा भरने पर उसकी त्रिज्या 6 cm से बढ़कर 12 cm हो जाती है। दोनों स्थितियों में गुब्बारे के पृष्ठीय क्षेत्रफल का अनुपात है :
(a) 1 : 4
(b) 1 : 3
(c) 2 : 3
(d) 2 : 1.
उत्तर:
(a) 1 :4

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प्रश्न 11.
बेलन का वक्र पृष्ठ है :
(a) πr²h
(b) πr (r + h)
(c) 2πrh
(d) \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h\)
उत्तर:
(c) 2πrh

प्रश्न 12.
शंकु का आयतन है:
(a) πr²h1
(b) \(\frac{4}{3} \pi r^{2} h\)
(c) \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h\)
(d) 4a²h
उत्तर:
(c) \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h\)

प्रश्न 13.
एक बेलन का व्यास 14 cm है तथा इसकी ऊँचाई 7 cm है, तब इस बेलन का आयतन है :
(a) 7π cm³
(b) 49π cm³
(c) 343π cm³
(d) 443π cm³.
उत्तर:
(c) 343π cm³

प्रश्न 14.
एक घन के विकर्ण की लम्बाई 15√3 cm है तो घन की भुजा की लम्बाई होगी :
(a) 30√2 cm
(b) 15 cm
(c) 5√2 cm
(d) 30 cm.
उत्तर:
(b) 15 cm

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प्रश्न 15.
एक शंकु की तिर्यक ऊँचाई 13 cm है तथा त्रिज्या 5 cm है तो इसकी ऊँचाई है:
(a) 5 cm
(b) 22 cm
(c) 12 cm
(d) 18 cm.
उत्तर:
(c) 12 cm

प्रश्न 16.
अर्द्ध गोले का आयतन होगा : (2019)
(a) \(\frac{4}{3} \pi r^{3}\)
(b) \(\frac{2}{3} \pi r^{3}\)
(c) 2πr²
(d) 4πr²
उत्तर:
(b) \(\frac{2}{3} \pi r^{3}\)

प्रश्न 17.
यदि घन की भुजा 3 cm है, तो उसका आयतन होगा : (2019)
(a) 3 cm³
(b) 9 cm³
(c) 54 cm³
(d) 27 cm³
उत्तर:
(d) 27 cm³

प्रश्न 18.
घन के सम्पूर्ण पृष्ठ का सूत्र है : (2019)
(a) 6a²
(b) 4a²
(c) a³
(d) abc.
उत्तर:
(a) 6a²

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. एक घनाभ की कोरों की लम्बाइयाँ 3 cm, 4 cm एवं 5 cm हों तो उनके विकर्ण की लम्बाई ………… होगी।
2. किसी घन की कोर 2a हो, तो इसके विकर्ण की लम्बाई ………. होगी।
3. घनाभ के विकर्ण की लम्बाई का सूत्र ………. है। (2018)
4. एक घनाभ में कुल फलकों (तलों) की संख्या ………….. होती है।
5. एक ही केन्द्र के दो भिन्न त्रिज्याओं के गोलों से घिरे ठोस भाग को ………… कहते हैं।
6. बेलन का आयतन ………… होता है। (2019)
उत्तर-
1. 5√2 cm,
2. 2√3a,
3. \(d=\sqrt{l^{2}+b^{2}+h^{2}}\)
4. छ:
5. गोलीय कोश,
6. πr²h

जोड़ी मिलान

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 8
उत्तर-
1. →(c),
2. →(d),
3. →(e),
4. →(a),
5. →(b).

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सत्य/असत्य कथन

1. बेलन के सम्पूर्ण पृष्ठ का क्षेत्रफल = 2πrh
2. शंकु के पार्श्व पृष्ठ का क्षेत्रफल = πrl
3. गोले का पार्श्व पृष्ठ = 4/3 πR²
4. घनाभ का सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2 (lb + bh + hl)
5. घन का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6a²
6. बेलन का आधार वृत्ताकार होता है।
उत्तर-
1. असत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य,
6. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. वह समान्तर षट्फलक जिसका प्रत्येक फलक आयत हो, क्या कहलाता है?
2. वह समान्तर षट्फलक जिसका प्रत्येक फलक एक वर्ग हो, क्या कहलाता है?
3. किसी आयत को उसकी एक भुजा के परितः घुमाने पर बना ठोस क्या कहलाता है?
4. किसी अर्द्धवृत्त को उसके व्यास के परितः घुमाने पर बना ठोस क्या कहलाता है?
5. एक ही त्रिज्या और एक ही ऊँचाई वाले बेलन और शंकु के आयतनों में क्या अनुपात होगा?
6. बेलन के सम्पूर्ण पृष्ठ का क्षेत्रफल होता है। (2018)
7. गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल लिखिए। (2019)
उत्तर-
1. घनाभ,
2. घन,
3. बेलन,
4. गोला,
5. 3 : 1,
6. 2πr(r + h),
7. 4πr².

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