MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 16 नीति दशक

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MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 16 नीति दशक

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1.
(क) सही जोड़ियाँ बनाइए
1. डार-पात = (क) लाख विकाय
2. जहाँ पुष्प. = (ख) सम लाभ
3. जहाँ सजन = (ग) फल, फूल
4. गुण कूँ गाहक = (घ) तहँ प्रीति
5. समय लाभ = (ङ) तहँ वास
उत्तर
1. (ग), 2. (ङ), 3. (घ), 4. (क), 5. (ख)

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प्रश्न (ख)
दिए गए शब्दों में से उचित शब्द का चयन कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. कबीर ने ……………… को दूर न करने की सलाह दी है। (प्रशंसक निंदक)
2. जब तक ………………. नहीं होता तब तक मित्र नहीं बनते। (वित्त/चित्त)
3. रहिमन ……………….. अंबु बिन, रवि ताकर रिप होय। (अंबुद/अंबुज)
4. विचार पूर्वक कार्य करने से ………….. राजी रहते हैं। (निजलोक सर्वलोक)
उत्तर
1. निंदक
2. वित्त
3. अंबुज
4. सर्वलोक।

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए

(क)
कवि ने अमोल किसे कहा है?
उत्तर
कवि ने बोली को अमोल कहा है।

(ख)
कबीर के अनुसार तन-मन को निर्मल कौन करता है?
उत्तर
सबका मान करने से तन-मन निर्मल हो जाता है।

(ग)
वृंद कवि के अनुसार प्रेम का वास कहाँ होता है?
उत्तर
कवि द्वंद के अनुसार प्रेम का वास प्रेमी के हृदय में होता है।

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(घ)
रहीम कवि ने अनुसार ऊख और प्रेम में गाँठ पड़ जाने से क्या होता है?
उत्तर
कवि ने अनुसार ऊख में गाँठ पड़ने से रस में कमी आती है जबकि प्रेम में गाँठ पड़ने से रस में कमी आती है जबकि प्रेम में गाँठ पड़ने पर प्रीत में कमी आती है।

(ङ)
बंद कवि ने सब लोगों के प्रसन्न रखने के लिए कौन-सा उपचार करने के लिए कहा है?
उत्तर
कवि के अनुसार कुछ भी निर्णय लेने से पहले सबकी सुननी चाहिए तथा स्वयं के और सबके विचारों से निष्कर्ष निकालना चाहिए।

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन से पाँच वाक्यों में लिखिए

(क)
कबीर ने तराजू में तौलने के लिए किसे और क्यों कहा है?
उत्तर
कबीर ने बोली को तौलने के लिए कहा है क्योंकि बोली से बने बनाए घर उजड़ भी सकते हैं और संवर भी सकते हैं इसलिए सोच समझ कर बोलना चाहिए।

(ख)
कवि ने किस गुण की कीमत कौड़ी के समान बताई है?
उत्तर
कवि ने उस गुण की कीमत कौड़ी के समान बताई जिसे कोई स्वीकार नहीं करता अर्थात जिस गुण से समाज व लोगों को कोई लाभ नहीं होता वह ना के बराबर होता है।

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(ग)
रहीम ने बबूल के पेड़ को क्यों खराब कहा है?
उत्तर
रहीम ने बबूल के पेड़ को इसलिए खराब कहा है क्योंकि उसमें कोई फल-फूल नहीं होते अर्थात जो व्यक्ति स्वयं स्वार्थी हो, यदि वह किसी को सीख दे तो वह अनर्थक लगता है।

(घ)
‘ससि सुकेस’ दोहे में किन-किन को एक समान बताया है?
उत्तर
‘ससि सुकेस’ दोहे में ससि, सुकेस, साहस, सलिल, मान तथा सनेह को एक समान कहा गया है क्योंकि ये सारे बढ़ने पर बढ़ते चले जाते है और घटने पर घटते चले जाते हैं।

(ङ)
वृंद कवि ने सज्जन और पुष्प की क्या विशेषाएँ बताई है?
उत्तर
जिस प्रकार पुष्प अपनी खुशबू और मनमोहकता से सबको सम्मोहित कर देता है उसी प्रकार एक सज्जन व्यक्ति समाज में अपने अच्छे और निस्वार्थ कार्यों से सबको आकर्षित करता है।

भाषा की बात

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध उच्चारण कीजिए
निर्मल, वित्त, अम्बुज, ऊख, प्रीति, स्नेह, सर्व
उत्तर
निर्मल, वित्त, अंबुज, ऊख, प्रीति, स्नेह, सर्व।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिएआमोल, मित्तर, शसि, सजजन, गांठ, जहाँ, चतूर
उत्तर
शब्द = शुद्ध वर्तनी
आमोल = अमोल
मित्तर = मित्र
सजजन = सज्जन
गांठ = गाँठ
जहाँ = जहाँ
चतूर = चतुर

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए
निर्मल, पुष्प, समय, पेड़
उत्तर
शब्द = पर्यायवाची शब्द
निर्मल = शुद्ध, स्वच्छ
पुष्प = फूल, कुसुम
समय = वक्त
पेड़ = तरु, वृक्ष

प्रश्न 7.
नीचे दिए गए शब्दों में से उपसर्ग छाँटिएअमोल, निर्मल, सुकेस, सजन, सुवास, अनादर, दुर्भावना
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 16 नीति दशक 1

प्रश्न 8.
निम्नलिखित शब्दों को पृथक-पृथक वाक्यों में प्रयोग कीजिए
तराजू, निंदक, मान, विचार, उपचार, वित्त
उत्तर
शब्द = वाक्य
तराजू = मनुष्य को स्वयं सद्भाव के तराजू में तोलना चाहिए।
निंदक = निंदक व्यक्ति की भी बुराई नहीं करनी चाहिए।
मान = बड़ों का मान करना चाहिए।
विचार = मनुष्य अपना विकास अच्छे विचारों के साथ करता है।
वित्त = आजकल जिसके पास वित्त होता है, सब उसके पीछे भागते हैं।

नीति दशक पाठ का परिचय

(कबीर)

प्रस्तुत पंक्तियों में कबीर के कुछ दोहों का वर्णन किया गया है जिनमें उन्होंने जीवन की कुछ सच्चाइयों से अवगत कराया है। उन्होंने कहा है कि व्यक्ति को बोलने से पहले सोचना चाहिए क्योंकि मुख से निकला प्रत्येक शब्द अमूल्य है। इसी प्रकार जब किसी गुण को सार्थकता मिलती है तब वह खूब फलता-फूलता है किंतु जब गुण का महत्त्व समाप्त हो जाता है तो वह कौड़ी के समान हो जाता है। निंदा करने वाले से निंदा नहीं करनी चाहिए बल्कि उसकी तरफ से मन निर्मल रखना चाहिए।

नीति दशक संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

1. बोली एक अमोल है, जो कोई बोले जानि।
हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।।

शब्दार्थ – अमोल = अमूल्य; अमूल्य = अमूल्य, तौलि = तौलना; आनि = आना।

संदर्भ-प्रस्तुत दोहे की पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम भारती’ (हिंदी सामान्य) भाग-7 के पाठ-16 ‘नीति दशक’ से ली गई है। इसके रचचिता कबीर है।

प्रसंग-इसमें व्यक्ति की बोली के महत्त्व के बारे में बताया गया है।

व्याख्या
प्रस्तुत दोहे में कबीर ने कहा है कि बोली अमूल्य होती है। मुँह से निकला प्रत्येक बोल वही जानता है जो वह बोलता है। हमें सोच-समझकर और तौल कर कुछ बोलना चाहिए।

विशेष

  • दोहे की भाषा प्रवाहमय है।
  • बोली को महत्त्व दिया गया है।

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2. जब गुण कूँ गाहक मिले, तब गुण लाख बिकाइ।
जब गुण गाहक नहीं, तब कौड़ी बदले जाइ।

शब्दार्थ-गाहक = ग्राहक, ग्रहण करने वाला; कौड़ी = महत्त्वहीन।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-इसमें गुण के महत्त्व को दर्शाया गया।

नीति दशक रहीम का परिचय

रहीम का जन्म सन् 1556 ई. में लाहौर में हुआ था। वे अकबर के संरक्षक बैराम खां के पत्र थे। उनका पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था। अकबर के नौ रत्नों में वे भी एक थे। वे अकबर के प्रधान सेनापति, मंत्री और वीर योद्धा थे।

1. आप न काहू काम के, डार पात फल फूल ।
औरत को रोकत फिरे, रहिमन पेड़ बबूल।।

शब्दार्थ-रोकत-रोकना।

संदर्भ-प्रस्तुत दोहे की पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सुगम-भारती’ (हिंदी सामान्य’) भाग-7 के पाठ-16 ‘नीति दशक’ से ली गई है। इसके रचयिता ‘रहीम’ हैं।

प्रसंग-इसमें उन लोगों के विषय में कहा गया है जो कपटी है।

व्याख्या-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने उन लोगों के विषय में कहा है जो स्वयं कपटी और स्वार्थी हैं तथा सारे दिन पाप के कार्य करते हैं फिर भी दूसरों को गलत काम करने से रोकते हैं।

विशेष

  • भाषा सरल और प्रवाहमय है।
  • स्वार्थी लोगों द्वारा दी गई सीख को दर्शाया गया है।

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2. समय लाभ समय लाभ सम लाभ नहिं,
समय चूंकि सम चूक।
चतुरन चित रहिमन लगी,
समय चूंकि की हूक ॥

शब्दार्थ-वित्तत = धन, पूंजी।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-इसमें चतुर व्यक्तित्व के बारे में कहा गया है।

व्याख्या-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने कहा है कि जब व्यक्तिको लाभ का समय मिले या ईश्वर अवसर प्रदान करे तो उसे ग्रहण कर लेना चाहिए। एक बार समय निकलने पर अवसर भी हाथ से चला जाता है। एक चतुर और समझदार व्यक्ति अवसर को अपने हाथ में नहीं जाने देता।

विशेष

  • भाषा सरल और प्रवाहमय है।
  • समय की सार्थकता को प्रकट किया गया है।

3. जब लगि वित्त न आपुने, तब लगि मित्त न कोय।
रहिमन अंबुज अंबु बिन, रवि ताकर रिपु होय।।

शब्दार्थ-मित्त = मित्र; अंबुज = कमल; अंबु = पानी; रवि = सर्य; रिपु = शत्रु, दुश्मन।

संदर्भ-पूर्ववत् ।
प्रसंग-इसमें स्वार्थ के बारे में कहा गया है।

व्याख्या- प्रस्तुत दोहे में बताया गया है कि जब तक हमारे पास पैसा होता है तब तक हमारे पास मित्र होते हैं और उसके नहीं रहने पर मित्र भी चले जाते हैं। इसी | तरह बिना पानी के सूर्य भी कमल का दुश्मन बन जाता है।

विशेष

  • भाषा सरल और प्रवाहमय है
  • इसमें लालच के संदर्भ में कहा गया है।

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4. रहिमन खोजे ऊख में, जहाँ रसनि की खानि
जहाँ गाँठ तहं रस नहीं, यही प्रीति में हानि॥

शब्दार्थ-ऊख = गन्ना; रसनि = रस; खानिखान।

संदर्भ-पूर्ववत्
प्रसंग-इसमें प्रेम के मध्य ठीस को उजागर किया गया है।

व्याख्या-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने गन्ने का उदाहरण लिया है कि जिस प्रकार गन्ने में रस भरा होता है और इससे आनंद भी मिलता है परंतु हमें उसकी गाँठों को नहीं भूलना चाहिए जिनमें रस नहीं होता उसी प्रकार अधिक प्रेम में भी गाँठ आ सकती है। .

विशेष

  • भाषा सरल और प्रवाहमय है।
  • इसमें सुख-दुख को दर्शाया गया है।

5. ससि सुकेस साहस सलिल मान सनेह रहीम।
बढ़त बढ़त बढ़ि जात है, घटत घटत घटि सीम।।

शब्दार्थ-ससि = चंद्रमा; सुकेस = बाल, सलिल = पानी, जल।

संदर्भ-पूर्ववत्।
प्रसंग-इसमें चंद्रमा, केस आदि के बढ़ने और घटने पर विचार किया गया है।

व्याख्या-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने कहा है कि चंद्रमा, बाल, साहस, पानी, माम और प्रेम आदि जितनी तेजी से बढ़ते है उतनी तेजी से ही कम होते चले जाते हैं अर्थात जीवन में कुछ भी स्थिर नहीं है, सबकी नियती और चाल में अंतर आना स्वाभाविक है।

विशेष

  • निरतंरशीलता को दर्शाया गया है।
  • भाषा सरल एवं प्रवाहमय है।

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नीति दशक वृंद का परिचय

वृंद का पूरा नाम वृंदावन दास था। वे रीतिकाल के सुप्रसिद्ध कवि थे। उनका जन्म सन् 1643 ई. में मेड़ना नामक गाँव में हुआ था, जो जोधपुर, राजस्थान में है। उनका कार्यक्षेत्र बहुत विस्तृत था। वे अपने आश्रदयाताओं के साथ सदा यात्रा करते रहे। वे कृष्णगढ़ नरेश महाराज राजसिंह के गुरु थे। वे उनके साथ औरगजेब की फौज में ढाका तक गए थे।

1. जहाँ सहन तहं प्रीति है, प्रीति तहाँ सुख ठौर।
जहाँ पुष्प तहं वास है, जहाँ बास तहं मौर।।

शब्दार्थ-ठौर = स्थान; प्रीति = प्रेम; पुष्प = फूल।

संदर्भ-इस दोहे के रचयिता महाकवि वृंद हैं।
प्रसंग-इसमें प्रेम की सार्थकता के बारे में बताया गया है।

व्याख्या-प्रस्तुत दोहे में महाकवि वृंद प्रेम की सार्थकता को प्रकट करते हुए कहते हैं कि सच्चे प्रेम का सुख तभी प्राप्त होता है जब प्रेमी भी प्रेम में डूबा हो। जहाँ फूलों का वास होगा, वहीं मोर भी घूमेगा। अतः प्रेम अतुल्नीय है।

विशेष

  • भाषा सरल एवं प्रवाहमय है।
  • प्रेम को अतुल्नीय बताया गया है।

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2. सुनिए सबही की कही, करिए सहित विचार।
सर्व लोक राजी रहै, सो कीजे उपचार।।

शब्दार्थ-सर्वलोक = सभी लोग, सारा संसार; हिये = हृदय।

संदर्भ-पूर्ववत्।
प्रसंग-सब लोगों के सुनने पर बल दिया गया है।

व्याख्या-प्रस्तुत दोहे में कवि वृंद ने व्यक्ति विशेष से कहा है कि हमें कुछ भी निर्णय लेने से पहले सबकी राय सुननी चाहिए, तत्पश्चात विचार करना चाहिए। अंतत, ऐसा निर्णय लेना चाहिए, तत्पश्चात, विचार करना चाहिए। अंतत ऐसी निर्णय लेना चाहिए। जिसमें जिससे सभी संबंधित लोग एकमत हो। अर्थात हमें कोई भी कार्य जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए।

विशेष

  • भाषा सरल एवं प्रवाहमय है।
  • इसमें कार्य की सार्थकता पर बल दिया गया है।

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2

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MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2

Question 1.
In figures (i) and (ii), DE || SC. Find EC in (i) and AD in (ii).
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 1
Solution:
(i) Since DE || BC [Given]
∴ Using the Basic proportionality theorem,
We have \(\frac{A D}{D B}=\frac{A E}{E C}\)
Since, AD = 1.5 cm, DB = 3 cm and AE = 1 cm,
∴ \(\frac{1.5 \mathrm{cm}}{3 \mathrm{cm}}=\frac{1 \mathrm{cm}}{E C}\)
By cross-multiplication, we have
EC × 1.5 = 1 × 3
⇒ EC = \(\frac{1 \times 3}{1.5}=\frac{1 \times 3 \times 10}{15}\)
EC = 2 cm
(ii) In ∆ABC, DE || BC
Using the Basic proportionality theorem,
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 2
∴ AD = 2.4 cm.

Question 2.
E and F are points on the sides PQ and PR respectively of a ∆PQR. For each of the following cases, state whether EF || QR;
(i) PE = 3.9 cm, EQ = 3 cm, PF = 3.6 cm and FR = 2.4 cm
(ii) PE = 4 cm, QE = 4.5 cm, PF = 8 cm and RF = 9cm
(iii) PQ = 1.28 cm, PR = 2.56 cm, PE = 0.18 cm and PF = 0.36 cm
Solution:
(i) We have, PE = 3.9 cm, EQ = 3 cm, PF = 3.6 cm and FR = 2.4 cm
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 3
⇒ EF is not parallel to QR.
(ii) We have, PE = 4 cm, QE = 4.5 cm PF = 8 cm and RF = 9 cm
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 4
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 5
⇒ EF is parallel to QR.

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Question 3.
In the figure, if LM || CB and LN || CD, prove that \(\frac{A M}{A B}=\frac{A N}{A D}\)
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 6
Solution:
In ∆ABC, LM || CB [given]
∴ Using the Basic proportionality theorem, we have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 7
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 8

Question 4.
In the figure, DE || ACand DF || AE.
Prove that \(\frac{B F}{F E}=\frac{B E}{E C}\)
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 9
Solution:
In ∆ABC
∵ DE || AC [given]
Using the basic proportionality theorem, we have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 10

Question 5.
In the figure, DE || OQ and DF || OR. Show that EF || QR.
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 11
Solution:
In ∆PQO,
∵ DE || OQ [given]
∴ Using the Basic proportionality theorem, we have
\(\frac{P E}{E Q}=\frac{P D}{D O}\) …………… (1)
Again, in ∆POR, DF || OR [given]
∴ Using the Basic proportionality theorem, we have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 12
Now, in ∆PQR,
∵ E and F are two distinct points on PQ and PR respectively and \(\frac{P E}{E Q}=\frac{P F}{F R}\),
i.e., E and F divide the two sides PQ and PR of ∆PQR in the same ratio.
∴ By converse of Basic proportionality theorem, EF || QR.

Question 6.
In the figure A, B and C are points on OP, OQ and OR respectively such that AB || PQ and AC || PR. Show that BC || QR.
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 13
Solution:
In ∆PQR, O is a point and OP, OQ and OR are joined. We have points A, B and C on OP, OQ and OR respectively such that AB || PQ and AC || PR.
Now, in ∆OPQ,
∵ AB || PQ [Given]
Using the Basic proportionality theorem, we have
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 14
i.e., B and C divide the sides OQ and OR of ∆OQR in the same ratio.
By converse of Basic proportionality theorem, BC || QR.

MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2

Question 7.
Using Basic proportionality theorem, prove that a line drawn through the mid-point of one side of a triangle parallel to another side bisects the third side. A
Solution:
We have ∆ABC, in which D is the midpoint of AB and E is a point on AC such that DE || BC.
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 15
∵ DE || BC [given]
∴ Using the Basic proportionality theorem, we get
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 16
⇒ E is the mid point of AC. Hence, it is proved that a line through the midpoint of one side of a triangle parallel to another side bisects the third side.

Question 8.
Using converse of basic proportionality theorem, prove that the line joining the mid-points of any two sides of a triangle is parallel to the third side.
Solution:
We have ∆ABC, in which D and E are the mid-points of sides AB and AC respectively.
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 17
∴ AD = DB ……………. (1)
and AE = EC ………….. (2)
From (1) and (2), we have
\(\frac{A D}{D B}\) = 1 and \(\frac{A E}{E C}\) = 1
⇒ \(\frac{A D}{D B}=\frac{A E}{E C}\)
⇒ DE || BC (By converse proportionality theorem).

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Question 9.
ABCD is a trapezium in which AB || DC and its diagonals intersect each other at the point O. Show that \(\frac{A O}{B O}=\frac{C O}{D O}\).
Solution:
We have, a trapezium ABCD such that AB || DC. The diagonals AC and BD intersect each other at O.
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Let us draw OE parallel to either AB or DC.
In ∆ADC
OE || DC [By construction]
∴ Using the Basic proportionality theorem, we get
\(\frac{A E}{E D}=\frac{A O}{C O}\) …………. (1)
In ∆ABD
OE || AB [By construction]
∴ Using the Basic proportionality theorem, we get
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Question 10.
The diagonals of a quadrilateral ABCD intersect each other at the point O such that \(\frac{A O}{B O}=\frac{C O}{D O}\). Show that ABCD is a trapezium.
Solution:
It is given that \(\frac{A O}{B O}=\frac{C O}{D O}\)
From \(\frac{A O}{B O}=\frac{C O}{D O}\), we have \(\frac{A O}{C O}=\frac{B O}{D O}\)
Let us draw OE such that OE || BA
In ∆ADB, OE || AB [By construction]
MP Board Class 10th Maths Solutions Chapter 6 Triangles Ex 6.2 20
i.e., the points O and E divide the sides AC and AD of ∆ADC respectively in the same ratio.
∴ Using the converse of Basic proportionality theorem, we get OE || DC and OE || AB
⇒ AB || DC
⇒ ABCD is a trapezium.

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 8 Decimals Ex 8.3

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 8 Decimals Ex 8.3

Question 1.
Which is greater?
(a) 0.3 or 0.4
(b) 0.07 or 0.02
(c) 3 or 0.8
(d) 0.5 or 0.05
(e) 1.23 or 1.2
(f) 0.099 or 0.19
(g) 1.5 or 1.50
(h) 1.431 or 1.490
(i) 3.3 or 3.300
(j) 5.64 or 5.603
Solution:
Before comparing, we write both terms in like decimals :
(a) 0.3 < 0.4
(b) 0.07 > 0.02
(c) 3.0 or 0.8 ⇒ 3.0 > 0.8
(d) 0.50 or 0.05 ⇒ 0.50 > 0.05
(e) 1.23 or 1.20 ⇒ 1.23 > 1.20
(f) 0.099 or 0.190 ⇒ 0.099 < 0.190
(g) 1.50 or 1.50 ⇒ 1.50 = 1.50
(h) 1.431 < 1.490
(i) 3.300 or 3.300 ⇒ 3.300 = 3.300
(j) 5.640 or 5.603 ⇒ 5.640 > 5.603

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Question 2.
Make five more examples and find the greater number from them.
Solution:
Five examples are :
(i) 1.8 or 1.82
(ii) 1.0009 or 1.09
(iii) 10.01 or 100.1
(iv) 5.1 or 5.01
(v) 4.213 or 421.3
Before comparing, we write both terms in like decimals
(i) 1.80 or 1.82 ⇒ 1.82 is greater than 1.8
(ii) 1.0009 or 1.0900 ⇒ 1.09 is greater than 1.0009
(iii) 10.01 or 100.10 ⇒ 100.1 is greater than 10.01
(iv) 5.10 or 5.01 ⇒ 5.1 is greater than 5.01
(v) 4.213 or 421.300 ⇒ 421.3 is greater than 4.213

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.3

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.3

Question 1.
Construct ∆DEF such that DE = 5 cm, DF = 3 cm and m ∠EDF = 90°.
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.3 1

1. Draw a line segment DE = 5 cm.
2. At Q, draw an angle EDX = 90°.
3. From ray DX, cut off DF = 3 cm.
4. Join EF.
Then, DEF is the required triangle.

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.3

Question 2.
Construct an isosceles triangle in which the lengths of each of its equal sides is 6.5 cm and the angle between them is 110°.
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.3 2
1. Draw a line segment BC = 6.5 cm.
2. At B draw an ∠CBX =110°.
3. From ray BX, cut off BA = 6.5 cm.
4. Join AC.
Then, ABC is the required isosceles triangle.

Question 3.
Construct ∆ABC with BC = 7.5 cm, AC = 5 cm and m∠C = 60°?
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.3 3
1. Draw a line segment BC = 7.5 cm.
2. At C, draw ∠BCX = 60°.
3. From ray .CX, cut off CA = 5 cm.
4. Join AB.
Then, ABC is the required triangle.

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2

Question 1.
Construct ∆XYZ in which XY = 4.5 cm, YZ = 5 cm and ZX = 6 cm.
Solution:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2 1
Steps of Construction :
1. Draw a line segment YZ = 5 cm.
2. With centre Y and radius 4.5 cm, draw Y an arc.
3. With centre Z and radius 6 cm draw another arc intersecting the previous arc at X.
4. Join YX and ZX. Then, XYZ is the required triangle.

Question 2.
Construct an equilateral triangle of side 5.5 cm.
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2 2
1. Draw a line segment BC = 5.5 cm.
2. With B as centre and radius equal to 5.5 cm (= BA), draw an arc.
3. With C as centre and radius equal to 5.5 cm (= CA), draw another arc intersecting the previous arc at A.
4. Join AB and AC.
Then, ABC is the required equilateral triangle.

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2

Question 3.
Draw ∆PQR with PQ = 4 cm, QR = 3.5 What type of triangle is this?
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2 3
1. Draw a line segment QR = 3.5 cm.
2. With Q as centre and radius equal to 4.0 cm (= QP), draw another arc intersecting the previous arc at P.
3. With R as centre and radius equal to 4.0 cm (= PR), draw another arc intersecting the previous arc at P.
4. Join PQ and PR
Then, PQR is the required triangle.
From above construction, ∆PQR is an isosceles triangle.

Question 4.
Construct ∆ABC such that AB = 2.5 cm, BC = 6 cm and AC = 6.5 cm. Measure ∠B.
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.2 4
1. Draw a line segment BC = 6 cm.
2. With B as centre and radius equal to 2.5 cm. (AB) draw an arc.
3. With C as centre and radius equal to 6.5 cm (AC), draw another arc intersecting the
4. Join AB and AC.
Then, ABC is the required triangle.
On measuring, we find that ∠B = 90°.

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1

Question 1.
Draw a line, say AB, take a point C outside it. Through C, draw a line parallel to AB using ruler and compasses only.
Solution:
Step of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1 1
1. Take any point P on line AB.
2. Take any point C (Given) outside AB and join PC.
3. With P as centre and a convenient radius, draw an arc cutting line AB at R and PC at S.
4. Now with C as centre and the same radius as in Step 3, draw an arc intersecting PC at T.
5. With T as centre and radius equal to R draw an arc intersecting the previous arc at N.
6. Now, join CN and produce it on both sides to form a line EF.
Thus, EF is the required line parallel to AB and passing through the given point C.

Question 2.
Draw a line l. Draw a perpendicular to l at a xy n point on l. On this perpendicular choose a point X, 4 cm away from l. Through X, draw a line m parallel to l.
Solution:
Steps of Constructions :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1 2
1. Draw a line l and take any point P on it.
2. With P as centre and any suitable radius draw an arc intersecting line l at A and B.
3. With A as centre and radius equal to more than AP draw an arc.
4. Again with B as centre and same radius as in Step 3 draw another arc to intersects the previous arc at C.
5. Join PC and produce it to Q.
Then PQ is the required perpendicular.
6. Now with P as centre and radius equal to 4 cm, draw an arc to intersect PQ at X, such that PX = 4 cm.
7. With X as centre and a convenient radius draw an arc intersecting PQ at D.
8. Again with D as centre and same radius as in Step 7 draw an arc to intersect the previous arc at E.
9. Join XE and produce if to form a line m.
Thus, m is the required line.

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1

Question 3.
Let l be a line and P be a point not on l. Through P, draw a line m parallel to l. Now join P to any point Q on l. Choose any other point R on m. Through R, draw a line parallel to PQ. Let this meet l at S. What shape do the two sets of parallel lines enclose?
Solution:
Steps of Construction :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 Practical Geometry Ex 10.1 3
1. Draw a line l and take any point P outside it.
2. Take any point Q on line l
3. Join QP.
4. With Q as centre and any suitable radius, draw an arc intersecting line l and QP at A and B respectively.
5. Now with P as centre and same radius as in Step 4, draw an arc on the opposite side of PQ to intersect PQ at C.
6. Again with C as centre and radius equal to AB, draw an arc to intersect the previous arc at D.
7. Join PD and produce it in both directions to obtain the required line m.
8. Further take any point R on m.
9. Through R, draw a line RS || PQ by following the steps explained above.
The shape of the figure enclosed by these lines is a parallelogram QPRS.

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MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण

MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण

संज्ञा

परिभाषा-किसी व्यक्ति, जाति, वस्तु, स्थान, गुण एवं भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे- रजनीकान्त (व्यक्ति), घोड़ा (जाति), कुर्सी (वस्तु), आगरा (स्थान), पवित्रता (गुण)।

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संज्ञा के भेद-संज्ञा के निम्नलिखित तीन भेद होते हैं-

  1. जातिवाचक-जिस संज्ञा से एक जाति के प्राणियों या पदार्थों का बोध होता है, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। यथा- नदी, नगर, नहर, भोज, फूल आदि। जातिवाचक संज्ञा के अन्तर्गत दो संज्ञाएँ और मानी जाती हैं जो क्रमशः समुदायवाचक एवं द्रव्यवाचक संज्ञाएँ कहलाती हैं।
    • समुदायवाचक-एक प्रकार की वस्तुओं के समूह का बोध कराने वाली संज्ञा समुदायवाचक संज्ञा कहलाती है। यथा-सभा, सोना, कक्षा आदि।
    • द्रव्यवाचक-धातुओं के नाम को द्रव्यवाचक कहा जाता है, यथा-मिट्टी, चाँदी, सोना, ताँबा, लोहा आदि।
  2. व्यक्तिवाचक-जिस संज्ञा से किसी खास व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध होता है। उसे हम व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं, यथा-हिमालय, गंगा, आगरा, निष्ठा, अक्षय कुमार आदि।
  3. भाववाचक-जिस संज्ञा से किसी गुण, दशा, स्वभाव अथवा व्यापार का बोध होता है, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं, यथा-भलाई, अहिंसा, पवित्रता, शत्रुता, बालकपन।

सर्वनाम

परिभाषा-जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग में लाये जाते हैं, उन्हें हम सर्वनाम कहते हैं।

सर्वनाम के भेद-सर्वनाम के निम्नलिखित छः भेद होते-

  1. पुरुषवाचक सर्वनाम-वह सर्वनाम जो किसी व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है, पुरुषवाचक सर्वनाम कहलाता है। जैसे-मैं, तू, तुम, यह, वह। पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के होते हैं-
    • उत्तम पुरुष-बोलने वाला या लिखने वाला अपने नाम के बदले जिस सर्वनाम का प्रयोग करता है, उसे उत्तम पुरुष कहते हैं। जैसे- मैं, हम।
    • मध्यम पुरुष-जिससे बात की जाए अथवा जिसे सम्बोधित किया जाए, उसके नाम के बदले प्रयुक्त सर्वनाम को मध्यम पुरुष कहते हैं। जैसे-तू, तुम, आप।
    • अन्य पुरुष-जिसके बारे में बात करते हैं या लिखते हैं उसके नाम के बदले प्रयुक्त सर्वनाम को अन्य पुरुष सर्वनाम कहते हैं। जैसे- यह, ये, वह, वे। ‘यह’ और ‘ये’ समीपस्थ अन्य पुरुष सर्वनाम हैं। तथा ‘वह’ और ‘वे’ दूरस्थ अन्य पुरुष सर्वनाम हैं।
  2. निश्चय वाचक सर्वनाम-वे सर्वनाम हैं जो किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करते हैं। जैसे- यह, वह।
  3. अनिश्चय वाचक सर्वनाम-वे सर्वनाम जो किसी अनिश्चित व्यक्ति या वस्तु के लिए प्रयुक्त होते हैं। जैसे-कोई, कुछ।
  4. प्रश्नवाचक सर्वनाम-वे सर्वनाम जिनका प्रयोग किसी व्यक्ति या वस्तु के सम्बन्ध में प्रश्न पूछने के लिए होता है। जैसे-कौन, क्या।
  5. निजवाचक सर्वनाम-जो सर्वनाम कर्ता के साथ अपनापन (निजत्व) बनाने के लिए आता है, उसे निजवाचक सर्वनाम कहा जाता है। जैसे-आप, खुद, स्वयं।
  6. सम्बन्धवाचक सर्वनाम-जो सर्वनाम साथ में आए किसी अन्य उपवाक्य में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम से सम्बन्ध बताने के लिए प्रयोग किए जाते हैं, सम्बन्ध सूचक सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे- जो, वे, जो-वह, जो-सो।

कारक एवं विभक्ति जिस शब्द द्वारा संज्ञा या सर्वनाम का सम्बन्ध सिद्ध होता है उसे कारक कहते हैं। जिस चिन्ह को कारक द्वारा ज्ञात किया जाता है उसमें उसी प्रकार की विभक्ति का प्रयोग होता है। जैसे-कर्ता ‘ने’ प्रथमा विभक्ति, कर्म’को’ द्वितीया विभक्ति आदि। उदाहरण के लिए-राम ने रावण को मारा। रामः रावण हतवान ‘ने’, ‘को’ और ‘से’ तीन विभक्तियाँ हैं तथा इन्हीं से वाक्य के कारकों का निर्धारण होता है।

हिन्दी में कारकों की संख्या आठ मानी गई है-

  1. कर्ता कारक-वाक्य में करने वाले को कर्ता कारक कहा जाता है। इसका चिन्ह ‘ने’ होता है।
  2. कर्म कारक-जिस वस्तु पर क्रिया के व्यापार का फल पड़े, उसे हम कर्म कारक कहते हैं। इसका चिन्ह “को’ है, यथा-तुमने कुत्ते को मारा। (विभक्ति को’)
  3. करण कारक-कर्ता जिसकी सहायता से कोई व्यापार पूर्ण करता है, उसे हम करण कारक कहते हैं। जैसे-राम ने रावण को बाण से मारा। (विभक्ति-से)
  4. सम्प्रदान कारक-कर्ता जिसके लिए कोई कार्य करता है, उसे हम सम्प्रदान कारक कहते हैं। यथा-कनिष्ठ पल्लव के लिए पेड़े लाता है। (विभक्ति-को, के, लिए)
  5. अपादान कारक-जिसका अलग होना व्यक्त हो।। जैसे-यह बालक छत से गिरता है। (विभक्ति-से)
  6. सम्बन्ध कारक-जिसके द्वारा संज्ञा का सम्बन्ध या अधिकार स्थापित किया जाता है। उसे हम सम्बन्ध कारक कहते हैं। यथा-नरेन्द्र कुमार का घर है। (विभक्ति-का, की, के)
  7. अधिकरण कारक-संज्ञा के जिस रूप से क्रिया के आधार का ज्ञान हो उसे अधिकरण कारक कहते हैं। जैसे कोयल आम की डाली पर बैठी है। (विभक्ति-मैं, पै, पर)
  8. सम्बोधन कारक-जिसके द्वारा किसी को बुलाया या सचेत किया जाता है वहाँ पर सम्बोधन कारक होता है। यथा-हे अक्षय उठो। (विभक्ति-हे, अरे, अहो)

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विशेषण

परिभाषा-जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाते हैं, उन्हें हम विशेषण कहते हैं, यथा-नीला पैन, अच्छी पुस्तक। यहाँ पर ‘नीला’ और ‘अच्छी’ क्रमशः पैन और पुस्तक संज्ञा की विशेषता प्रकट कर रहे हैं, अतः ये दोनों विशेषण हैं।

विशेष्य-जिन शब्दों की विशेषता बताई जाती है, वे शब्द विशेष्य होते हैं, जैसे सफेद गाय। ‘गाय’ शब्द विशेष्य है।

विशेषण के भेद-विशेषण निम्नलिखित छः प्रकार के होते हैं-

  1. गुण वाचक-जिन शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम के गुणों का बोध हो उन्हें हम गुण वाचक विशेषण कहते हैं। यथा-यह तस्वीर सुन्दर है। इस वाक्य में ‘सुन्दर तस्वीर संज्ञा का गुण बता रहा है। अत: यहाँ गुण वाचक विशेषण हुआ। यथा-मोटा आदमी, पतला लड़का, पीली गाय, लाल बकरी।
  2. संख्या वाचक-जो शब्द संज्ञा की संख्या का ज्ञान कराता है, उसे हम संख्या वाचक विशेषण कहते हैं, जैसे-दस आदमी, चार पुस्तक आदि।
  3. परिमाण वाचक-जिस शब्द से किसी वस्तु के परिमाण का बोध होता है, उसे हम परिमाण वाचक विशेषण कहते हैं, यथा-तुम्हारे पास कितने रुपये हैं, थोड़ा पानी पिओ। जरा, काफी, बहुत, थोड़ा आदि परिमाण वाचक विशेषण हैं।
  4. संकेत वाचक-जो शब्द संज्ञा की ओर संकेत करें, उन्हें हम संकेत वाचक विशेषण कहते हैं, यथा-आप इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें। इस वाक्य में इस’ शब्द ‘पुस्तक’ संज्ञा की ओर संकेत करता है, अतः यहाँ संकेत वाचक विशेषण हुआ।
  5. व्यक्ति वाचक-जिन विशेषणों का निर्माण व्यक्ति वाचक संज्ञाओं से होता है, उन्हें हम व्यक्ति वाचक विशेषण कहते हैं यथा-इलाहाबादी अमरूद, कश्मीरी सेव।
  6. विभाग वाचक-जिन विशेषणों के माध्यम से पृथकता का बोध हो, उन्हें विभाग वाचक विशेषण कहते हैं; यथा-प्रत्येक छात्र को पारितोषक दो। इस वाक्य में ‘प्रत्येक’ शब्द से अलग-अलग छात्रों का बोध होता है, अतः यहाँ विभाग वाचक विशेषण हुआ।

क्रिया विशेषण

परिभाषा-जिन शब्दों से क्रिया के अर्थ में विशेषता आती है, उन्हें हम क्रिया विशेषण कहते हैं, यथा-कम खेलो, जल्दी जाओ-में कम और जल्दी दोनों ही क्रिया विशेषण हैं।

क्रिया विशेषण के भेद-क्रिया विशेषण निम्नलिखित पाँच प्रकार के होते हैं-

  1. गुण वाचक क्रिया विशेषण-जो क्रियाएँ विशेषण के गुण प्रदर्शित करती हैं, उन्हें गुण वाचक क्रिया विशेषण कहते हैं; जैसे-कोयल बहुत मधुर बोलती है। मोहन जोर से बोलता है। (मधुर, जोर, बहुत)।
  2. परिमाण वाचक क्रिया विशेषण-जिन शब्दों से क्रिया के परिमाण का ज्ञान होता है, वहाँ परिमाण वाचक क्रिया-विशेषण माना जाता है। यथा-‘ज्यादा लिखो’ में ज्यादा’ परिमाण वाचक क्रिया विशेषण है।
  3. स्थान वाचक क्रिया विशेषण-जिन शब्दों के द्वारा क्रिया होने का स्थान ज्ञात हो वहाँ स्थान वाचक क्रिया विशेषण होता है। यथा-‘पल्लव कहाँ रहता है’, में कहीं स्थान वाचक क्रिया विशेषण है।
  4. रीति वाचक क्रिया विशेषण-जिन शब्दों से क्रिया होने की रीति या ढंग का ज्ञान हो वहाँ रीति वाचक क्रिया विशेषण होता है। यथा-अक्षय कुमार सहसा आ गया-में ‘सहसा’ रीति वाचक क्रिया विशेषण है।
  5. काल वाचक क्रिया विशेषण-जिन शब्दों से क्रिया के घटित होने की अवधि का निश्चय हो, यथा-कल यहाँ महात्मा गाँधी आये थे-इस वाक्य में ‘कल’ काल वाचक क्रिया विशेषण है। विशेषण और क्रिया विशेषण में अन्तर विशेषण के द्वारा किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताई जाती है जबकि क्रिया विशेषण के द्वारा क्रिया के अर्थ में विशेषता को स्पष्ट किया जाता है। जैसे-
    • लाल कमीज, नीला कुर्ता इन शब्दों में लाल और नीला कमीज और कुर्ता की अच्छाई बताते हैं, अत: लाल और नीला शब्द विशेषण हैं।
    • जल्दी लिखो, तेज चलो में जल्दी और तेज-दोनों लिखो और चलो क्रिया के अर्थ की विशेषता बताते हैं। इसलिए जल्दी और तेज दोनों ही क्रिया विशेषण हैं।

क्रिया

परिभाषा-जिन शब्दों से किसी कार्य का करना या होना पाया जाये, उन्हें क्रिया करते हैं। क्रिया के अभाव में कोई कार्य पूर्ण नहीं होता। यथा-कनिष्क खेलता है, पल्लव पुस्तक खरीदता है, आदि वाक्यों में खेलता है, खरीदता है शब्दों से खेलने तथा खरीदने की क्रिया का बोध होता है।

  1. सकर्मक क्रिया-जिस क्रिया के साथ कर्म प्रयुक्त हो। जैसे-पल्लव आम खरीदता है-इस वाक्य में खरीदना क्रिया का फल आम पर पड़ रहा है, अतः खरीदना सकर्मक क्रिया है।
  2. अकर्मक क्रिया-जिस क्रिया का कोई कर्म न हो। जैसे-अक्षय पढ़ता है।

शब्द ज्ञान
प्रयोग के विचार से शब्दों के दो मुख्य भेद हैं-
(क) विकारी,
(ख) अविकारी।

(क) जिन शब्दों के रूप लिंग, वचन और कारक के आधार पर बदल जाते हैं, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं; जैसे-लड़का, लड़की, लड़कों। अच्छा, अच्छे, अच्छों, जाता, जाती, जाते, मैं, मुझे, तुम, तुम्हारा, हम, हमें, हमारा आदि।
(ख) जिन शब्दों में लिंग, वचन और कारक के द्वारा कोई परिवर्तन नहीं होता अर्थात् जिनका रूप एक-सा रहता है, उन्हें अविकारी शब्द कहते हैं; जैसे-यहाँ, वहाँ, प्रतिदिन, परन्तु, भी, हो, आज आदि।

अविकारी शब्दों को अव्यय शब्द भी कहते हैं। अविकारी शब्द या अव्यय को मुख्य रूप से चार भेदों में बाँटा गया है। वे भेद हैं-

  1. क्रिया-विशेषण,
  2. सम्बन्ध बोधक,
  3. समुच्चय बोधक
  4. विस्मयादिबोधक।

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(1) क्रिया विशेषण ऊपर पढ़ चुके हैं।
(2) सम्बन्ध बोधक-जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम का सम्बन्ध अन्य शब्दों से जोड़ते हैं, उन्हें सम्बन्ध बोधक कहते हैं।

जैसे-
(क) सुमित बाग में खेल रहा है।
(ख) पेड़ के ऊपर तोते हैं।
(ग) मेज के नीचे बिल्ली है।
(घ) जल के बिना जीवन कठिन है।
(ड.) चिराग तले अँधेरा रहता है।

इन वाक्यों में रेखांकित शब्द सम्बन्धबोधक अव्यय हैं। कुछ अन्य शब्द; जैसे-के लिए, के हेतु, के साथ, के मारे, के बाहर, के अन्दर, के आगे, के पीछे, के बिना, के द्वारा, के विरुद्ध, के अतिरिक्त, के बदले, के विपरीत, के अनुकूल की उपेक्षा भी अव्यय का अविकारी शब्द हैं।
(3) समुच्चय बोधक-दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को आपस में जोड़ने वाले अविकारी शब्दों को समुच्चय बोधक कहते हैं, जैसे
(क) रवि और अशोक मित्र हैं।
(ख) तुम जाते हो या मैं जाऊँ।
(ग) यदि परिश्रम करोगे तो अवश्य सफल होगे। इन वाक्यों में रेखांकित शब्द समुच्चय बोधक अव्यय हैं।

(4) विस्मयादिबोधक-जो अव्यय शब्द विस्मय, हर्ष, शोक, घृणा आदि भावों को प्रकट करते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक
कहते हैं। विस्मयादिबोधक अव्यय के बाद विस्मय चिन्ह (!) लगता है।

जैसे-
(क) बाप रे ! इतना बड़ा साँप!
(ख) अरे ! तुम यहाँ आ गए।
(ग) शाबास ! आगे बढ़ते चलो।
(घ) हाय ! मार डाला।
(ड.) वाह ! तुमने तो कमाल कर दिया। रेखांकित शब्द विस्मयबोधक अव्यय हैं।

शब्द वर्ग के आधार पर हिन्दी भाषा में निम्नलिखित पाँच प्रकार के शब्द हैं-

  1. तत्सम शब्द-संस्कृत भाषा के ऐसे शब्द जो हिन्दी में ज्यों के त्यों प्रचलित हैं, तत्सम शब्द कहलाते हैं। जैसे-दुग्ध, हस्त, स्नेह, सूर्य, चन्द्र, अग्नि। .
  2. तद्भव शब्द-तत्सम शब्दों में विकार आने से जब उनका शब्द परिवर्तित हो जाता है, तो वे तद्भव शब्द कहलाते हैं। जैसे- दूध, हाथ, स्नेह, सूरज, चाँद आदि।
  3. देशज शब्द-ऐसे शब्द जिनकी व्युत्पत्ति का ठीक से पता नहीं है और जो क्षेत्रीय बोलियों से हिन्दी में आ गये हैं, देशज शब्द कहलाते हैं। जैसे- पेड़, खिड़की, गाड़ी, माखन, चिड़िया, जूता, कटोरा, लोटा, पगड़ी।
  4. विदेशी शब्द-अन्य देशों की भाषाओं से हिन्दी में आए शब्द को विदेशी शब्द कहते हैं। जैसे-स्टेशन, स्कूल, पिस्तौल, बोतल, पाजामा, दुकान, तमाशा।
  5. संकर-ऐसे शब्द जो तत्सम, तद्भव, देशज एवं अन्य किसी विदेशी भाषा से मिलकर बनते हैं, संकर शब्द कहलाते हैं। जैसे-डबल रोटी, रेलगाड़ी, अजायबघर।

कुछ प्रमुख तत्सम/तद्भव शब्द
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 1
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 2

उपसर्ग

परिभाषा-वे शब्द या शब्दांश जो शब्दों के पूर्व (पहले) जुड़कर नये शब्द बनाते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं। जैसे-‘अ’ उपसर्ग से अज्ञान, असफल आदि शब्द बनते हैं।

उपसर्ग लगाने से शब्द का अर्थ बदल जाता है। जैसे-डर का अर्थ भय है किन्तु इसके आगे ‘नि’ उपसर्ग लगाकर निडर शब्द बनता है जिसका अर्थ है ‘न’ डरने वाला।

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उपसर्ग से बने हुआ शब्द निमन प्रकार के हैं-
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 3

प्रत्यय

परिभाषा-वे शब्द या शब्दांश जो किसी शब्द के अन्त में लगाने से नया शब्द बनाते हैं, प्रत्यय कहलाते हैं। जैसे-गाड़ी शब्द में ‘वान’ प्रत्यय लगाने से ‘गाड़ीवान’ शब्द बना है। प्रत्यय लगाने से शब्द का अर्थ परिवर्तित हो जाता है। जैसे-मोटा में यदि ‘पा’ प्रत्यय लग जाये तो मोटापा हो जाता है। कुछ प्रत्यय निम्नलिखित हैं-
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 4

काल

परिभाषा-“क्रिया के जिस रूप से उसके होने अथवा करने का समय ज्ञात होता है, उसे काल कहते हैं।
काल के भेद-मुख्य रूप से काल के निम्नलिखित भेद होते हैं

  1. वर्तमान काल-जिस काल में क्रिया का वर्तमान समय में होना पाया जाता है, उसे वर्तमान काल कहते हैं।
    उदाहरण के लिए-मैं पढ़ रहा हूँ।
  2. भूतकाल-जिस काल में क्रिया का बीते हुए समय में होना पाया जाय, उसे भूतकाल कहते हैं।
    उदाहरण के लिए-मैं पढ़ रहा था।
  3. भविष्य काल-जिस काल में क्रिया का आने वाले समय में होना पाया जाता है,उसे भविष्य काल कहते हैं।
    उदाहरण के लिए-मैं पढ़ रहा हूँगा।

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वाक्य प्रकार

वाक्य विचार
परिभाषा-शब्दों के उस क्रमबद्ध समूह को वाक्य कहते हैं, जिससे अर्थ पूरी तरह से स्पष्ट हो जाए। जैसे-‘गंगातट पर स्थित एक पाठशाला में आचार्य ध्रुवनारायण पढ़ाया करते थे।’

भाव और अर्थ को स्पष्ट करने वाला वाक्य सफल कहा जाता है। सरल और सुन्दर वाक्य में अग्रलिखित गुण होने चाहिए

  1. आकांक्षा,
  2. योग्यता,
  3. आसक्ति या सन्निधि,
  4. पदक्रम,
  5. अन्विति,
  6. सार्थकता।

मुख्य रूप से वाक्य के निम्नलिखित तीन प्रकार होते हैं-

  1. विधिवाचक वाक्य-जिन वाक्यों से किसी बात के होने का बोध होता है, विधिवाचक वाक्य कहलाते हैं।
    उदाहरण के लिए-

    • जुम्मन शेख की एक बूढ़ी खाला थी।
    • मैं आज वहाँ जाऊँगा।
  2. निषेधवाचक वाक्य-जिन वाक्यों में किसी बात के न होने अथवा न करने का बोध होता है, निषेधवाचक वाक्य कहलाते हैं।
    उदाहरण के लिए-

    • मैं स्कूल नहीं जाऊँगा।
    • उसने खाना नहीं खाया।
  3. आज्ञावाचक वाक्य-जिन वाक्यों से किसी भी प्रकार की आज्ञा का बोध होता है, आज्ञावाचक वाक्य कहलाते हैं।
    उदाहरण के लिए-

    1. वहाँ कौन है ?
    2. क्या तुम वहाँ नहीं गये ?

लिंग

परिभाषा-जिस संज्ञा शब्द से किसी स्त्री अथवा पुरुष जाति का ज्ञान होता है, उसे हम लिंग कहते हैं। हिन्दी में लिंग के निम्नलिखित दो भेद हैं

  1. स्त्रीलिंग-जिस संज्ञा शब्द से स्त्री जाति का बोध होता है, उसे हम स्त्रीलिंग कहते हैं। यथा- गाय, लड़की, बिल्ली।
  2. पुल्लिंग-जिस संज्ञा शब्द से पुरुष जाति का बोध होता है। उसे हम पुल्लिंग कहते हैं, यथा-अक्षयकुमार, कनिष्क, कुत्ता, बैल, लड़का।

वचन

परिभाषा-“संज्ञा अथवा सर्वनाम के जिस रूप से वस्तु अथवा प्राणी की संख्या का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं।

वचन के भेद-मुख्य रूप से वचन के निम्नलिखित दो भेद होते हैं-

  1. एकवचन-संज्ञा अथवा सर्वनाम का वह रूप जिससे एक ही वस्तु अथवा प्राणी का बोध होता है, एकवचन कहलाता है। जैसे-वायु, पुस्तक, मटका, लड़का आदि।
  2. बहुवचन-संज्ञा अथवा सर्वनाम का वह रूप जिससे एक से अधिक वस्तु अथवा प्राणी का बोध होता है, उसे बहुवचन कहते हैं। – जैसे- गायें, पुस्तकें, मटके, लड़के आदि।

सन्धि
परिभाषा-दो वर्णों के मेल से होने वाले विकार को संधि कहते हैं। यथा–रमेश में = रमा + ईश (आ + इ = ए हो गया)।

सन्धि के भेद-सन्धि के निम्नलिखित तीन भेद होते हैं-
1. स्वर संधि-दो स्वरों के परस्पर मेल से होने वाले विकार को स्वर संधि कहते हैं। यथा-हिमालय में, हिम + आलय = अ + आ = आ हो गया।

उदाहरण-

  1. सूर्य + अस्त (अ + अ = आ) = सूर्यास्त।
  2. कवि + इन्द्र (इ + इ = ई) = कवीन्द्र।
  3. नदी + ईश (ई + ई = ई) = नदीश।
  4. सु + उक्ति (उ + उ = ऊ) = सूक्ति।
  5. लघु + ऊर्मि (उ+ ऊ = ऊ) लघूर्मि।

उपर्युक्त उदाहरणों में दर्शाया गया है कि जब दो सवर्ण (समान वर्ण अर्थात् अ, आ के साथ अ या आ हो) हस्व या दीर्घ स्वर परस्पर निकट होने के कारण मिल जाते हैं, तो दोनों के मिलने पर दीर्घ स्वर हो जाता है।

2. व्यंजन संधि-व्यंजन के साथ स्वर अथवा व्यंजन के मेल को व्यंजन संधि कहते हैं।

  • यथा-सत् + जन = सज्जन।
  • जगत् + नाथ = जगन्नाथ।

3. विसर्ग संधि-विसर्ग के साथ स्वर अथवा व्यंजन के मेल को विसर्ग संधि कहते हैं।
यथा-

  • निः + फल = निष्फल।
  • मनः + हर = मनोहर,
  • तेजः + मय = तेजोमयः,
  • निः + धन = निर्धन।

समास

परिभाषा-दो शब्दों को मिलाकर जो नया पद बनता है वह समास कहलाता है।

जैसे-
राजपुत्र = राजा का पुत्र ।

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समास के भेद-समास के निम्नलिखित छः भेद होते हैं-

1. तत्पुरुष समास-जिस समास में प्रथमा से लेकर सप्तमी तक विभक्ति का लोप हो, वहाँ तत्पुरुष समास होता है।
जैसे-

  • राजमाता = राजा की माता।
  • राज पुत्र = राजा का पुत्र।

2. कर्मधारय समास-विशेषण एवं विशेष्य के योग से बने समास को कर्मधारय कहते हैं,
जैसे-

  • नील कमल, काला घोड़ा, लाल गुलाब आदि।

3. द्वन्द्व समास-इसमें दो पदों के बीच और का लोप होता है।
जैसे-

  • राम-सीता = राम और सीता।
  • लाभ-हानि = लाभ और हानि।

4. द्विगु समास-इसमें पहला शब्द संख्यावाचक होता है।
जैसे-

  • नवरत्न = नव रत्नों का समूह;
  • चौराहा = चार राहों का समूह आदि।

5. बहुब्रीहि समास-जिसमें अन्य अर्थ प्रधान हो।
जैसे-

  • दशानन = दश हैं आनन जिसके अर्थात् रावण
  • चन्द्रशेखर = चन्द्रमा है शिखर पर जिसके अर्थात् शंकर जी।

6. अव्ययी भाव समास-जिस पद में प्रथम पद अव्यय हो।
जैसे-

  • यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार;
  • प्रतिदिन = दिन-दिन आदि।

मुहावरे

परिभाषा-जब वाक्य में किसी शब्द या शब्द-समूह का सामान्य अर्थ न लेकर उसका अन्य विशेष अर्थ लिया जाता है, तब उसे मुहावरा कहते हैं। जैसे-‘पेट में चूहे कूदना’ का अर्थ है-‘भूख लगना’। इसका वाक्य प्रयोग होगा-‘आज तो मेरे पेट में चूहे कूद रहे हैं।’

कुछ प्रमुख मुहावरे
(अर्थ व प्रयोग सहित)
1. बगुलों में हंस-मूों में बुद्धिमान। आजकल कपट वेषधारी मनुष्यों की वजह से बगुलों में हंस की परख कठिन है।
2. हृदय पर साँप लेटना-जलन से दुःखी होना। कारगिल के मोर्चे पर भारत से परास्त होने पर पाकिस्तान के हृदय पर साँप लोट गया।
3. खून की नदी बहाना-बहुतों को मार गिराना। सम्राट अशोक ने कलिंग के युद्ध में खून की नदी बहा दी।
4. प्राण फूंकना-उत्साहित करना। पूर्व प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री ने विगत भारत-पाक युद्ध में सैनिकों में नये प्राण फूंक दिए। ‘
5.कलेजा धड़कना-व्याकुल होना। अनहोनी की आशंका से मेरा कलेजा धड़क रहा है।
6. मंत्र मुग्ध-अत्यधिक वश में। रामायण की चौपाइयों को सुनकर लोग मंत्र मुग्ध हो जाते हैं।
7. छाती चौड़ी होना-खुशी या स्वाभिमान का अनुभव होना। भारतीय सैनिकों के शौर्यपूर्ण कारनामों से देशवासियों की छाती चौड़ी हो जाती है।
8. पीठ ठोंकना-शाबासी देना, जोश भरना। अक्षय कुमार परीक्षा में प्रथम श्रेणी के अंक लेकर उत्तीर्ण हुआ है, अत: उसकी पीठ ठोंकनी चाहिए।
9. दस्तक देना-खटखटाना। असमय किसी के घर जाकर दस्तक देना बुरी बात है।
10. गोद सूनी होना-संतान का मरना। भारत-पाक युद्ध में न जाने कितनी माँ-बहिनों की गोद सूनी हो गई।
11. कार्य सिद्ध होना-काम सम्पन्न होना। भगवान की कृपा से ही मेरी पुत्री के विवाह का कार्य सफलतापूर्वक सिद्ध हो गया।
12. जीवन से हाथ धोना-जिन्दगी गँवाना। भीड़ भरी सड़क पर असावधानी से चलने की वजह से कभी-कभी जीवन से हाथ धोना पड़ता है।
13. आँख में खटकना-बुरा लगना। आलसी मनुष्य सबकी आँखों में खटकते हैं।
14. अवस्था ढलना-वृद्ध होना। अवस्था ढलने पर हाथ-पाँव शिथिल हो जाते हैं।
15. साक्षात् चण्डी सी-बहुत अधिक गुस्से में। युद्ध के मैदानी में झाँसी की रानी साक्षात् चण्डी का रूप धारण किए हुए थी।
16. मन मोह लेना-आकर्षित करना। संगीत की मधुर ध्वनि सबका मन मोह लेती है।
17. दम लेना-परिश्रम के बाद सुस्ताना। कठिन श्रम के बाद दम लेना आवश्यक है।
18. माँग का सिन्दूर पोंछना-किसी के पति को मौत के घाट उतारना। कलिंग के युद्ध में अनेक माँ-बहिनों की माँग का सिन्दूर पोंछ दिया गया।
19. भाग्य पर इठलाना-स्वयं पर गर्व करना। ओछे मनुष्य व्यर्थ में ही अपने भाग्य पर इठलाया करते हैं।
20. शीश चढ़ाना-जान कुर्बान करना। आजादी की लड़ाई में जाने कितने देश भक्तों ने अपने शीश चढ़ाकर अपने कर्तव्य का पालन किया।
21. खून में उबाल आना-उमंग का संचार होना। श्री लाल बहादुर के ओजमय भाषण से सैनिकों के खून में उबाल “आने लगा।
22. आँखों में खून उतरना-अत्यधिक क्रोध में भरना। मुगलों की ललकार सुनकर राणा प्रताप की आँखों में खून उतर आया।
23. सिर पर पाँव रखकर भागना-शीघ्रता से भागना। प्रधानाचार्य को आता देखकर शरारती छात्र सिर पर पाँव रखकर भागा।
24.खून पसीना एक करना-अथक परिश्रम करना। राम ने परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये खून पसीना एक कर दिया।
25. हाथ पैर जवाब देना-अधिक थक जाना। रमेश का घर ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मेरे हाथ-पैर जवाब दे गये।
26. चकमा देना-धोखा देना। सीता को चकमा देकर उसका पड़ोसी पाँच सौ रुपये ले गया।
27. ईद का चाँद होना-बहुत समय बाद मिलना। रजनीकान्त बाहर नौकरी करने के कारण आजकल ईद का चाँद हो गया है।
28. हवाई किले बनाना-कल्पित योजनाएँ बनाना। आलसी आदमी बैठे-बैठे हवाई किले बनाता रहता है।
29. छक्के छुड़ाना-हरा देना। हल्दी घाटी के युद्ध में सैनिकों ने मुगल सेना के छक्के छुड़ा दिये।
30. कोल्हू का बैल-दिन-रात मेहनत करना। पिता की मृत्यु के पश्चात् मोहन परिवार का पेट भरने के लिये कोल्हू का बैल बना रहता है।
31. ईंट से ईंट बजाना-पूर्ण रूप से नष्ट कर देना। मराठों ने दुश्मन सेना की ईंट से ईंट बजा दी।
32. उड़ती चिड़िया पहचानना-मन का भाव जानना। ओमप्रकाश इतना चतुर है कि वह उड़ती चिड़िया को पहचान लेता है।
33. मिट्टी में मिलना-नष्ट होना। बाढ़ के कारण सैकड़ों भवन मिट्टी में मिल गये।
34. कुत्ते की मौत मरना-दयनीय दशा में मरना। कोढ़ होने के कारण वह कुत्ते की मौत मरा।
35.घी के दिये जलाना-बहुत अधिक खुशी मनाना। देश के आजाद होने पर लोगों ने घी के दिये जलाये।
36. कंधे डालना-हार स्वीकार करना। कैलाश मेले के अवसर पर अपार जन-समूह को देखकर पुलिस ने कंधे डाल दिये।
37. आग बबूला होना-गुस्सा करना। राम अपने पुत्र को जूआ खेलते देखकर आग बबूला हो गया।
38. कान का कच्चा होना-चुगलखोरों पर भरोसा करना। प्रधानाचार्य कान का कच्चा होने के कारण लिपिक की बात को सत्य मान लेते हैं।
39. आँख का तारा होना-बहुत प्यारा होना। श्रवण कुमार अपने माता-पिता की आँखों का तारा था।
40. आँखें दिखाना-गुस्सा करना। पिता ने जैसे ही आँखें दिखाई, पुत्र चुप हो गया।
41. उल्लू सीधा करना-मतलब पूरा करना। आजकल लोग अपना उल्लू सीधा करने में माहिर हैं।
42. सन्नाटा पसरना-शान्ति छाई रहना। विद्यालय में तो सन्नाटा पसरा हुआ है।
43. गप्पें लड़ाना-व्यर्थ की बातें करना। मुझे गप्पें लड़ाना अच्छा नहीं लगता है।
44. हाथ बँटाना-काम में सहायता करना। अब तो मोहन का पुत्र उसका हाथ बँटाने लगा है।
45. अन्धे की लाठी-एकमात्र सहारा। मोहन तो अपने पिता के लिए अन्धे की लाठी है।
46. अंगूठा दिखाना-इन्कार कर देना। रवि ने सहायता करने के नाम पर अंगूठा दिखा दिया।
47. फूटी आँख न सुहाना-बिल्कुल अच्छा न लगना। लक्ष्मण को राक्षस फूटी आँख भी न सुहाते थे।
48. आग में घी डालना-क्रोध को और भड़काना। लक्ष्मण की तीखी बातों ने परशुराम की आग में घी डाल दिया।
49. एक तो चोरी दूसरे सीना जोरी-अपराधी होकर अकड़ना। राधा ने श्याम की पेंसिल तोड़ दी। उलाहना देते हुए उसने एक तो चोरी की दूसरी सीना जोरी भी की।
50. तू डाल-डाल, मैं पात-पात-तू तो चतुर है, मगर मैं तुझसे भी चतुर हूँ। सही बात के लिए तू डाल-डाल मत डोल, मैं भी फिर पात-पात पर आऊँगा।

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लोकोक्तियाँ
मुहावरे के समान वाक्यों में लोकोक्तियों का प्रयोग भी किया जाता है। लोकोक्ति शब्द ‘लोक’ और ‘उक्ति’ से मिलकर बना है। लोकोक्तियाँ सामाजिक जीवन के अनुभव के आधार पर बनती हैं। हम इनका प्रयोग आवश्यकता के अनुसार करते हैं। कहीं कथन की पुष्टि के लिए तो कहीं उपदेश देने के लिए। लोकोक्तियों का प्रयोग प्रभावकारी सिद्ध होता है। लोकोक्तियाँ मुहावरे की भाँति वाक्य का अंग नहीं होती। ये प्रायः पूर्ण वाक्य होती हैं। इन्हें ‘कहावत’ भी कहते हैं।

लोकोक्तियाँ विशेष सन्दर्भ में प्रयुक्त होती हैं और उनका विशेष अर्थ ही लिया जाता है; जैसे-‘कोयल होय न ऊजरी, सौ मन साबुन लाय। इसमें कोयल’ उसके जन्मजात गुण कालापन को प्रकट करता है, ऊजरी होना’ इस गुण के परिवर्तन को प्रकट करता है और ‘सौ मन साबुन लाय’ विभिन्न उपायों का बोध कराता है। यही विशेष अर्थ है। अतः पूरी लोकोक्ति का अर्थ है, ‘भिन्न-भिन्न उपायों से भी व्यक्ति का जन्मजात गुण या अवगुण बदला नहीं जा सकता।’

मुहावरा और लोकोक्ति में अंतर मुहावरे का प्रयोग वाक्यांश की भाँति किया जाता है जबकि लोकोक्ति का प्रयोग कथन के अंत में, स्वतन्त्र वाक्य के रूप में किया जाता है।

कुछ प्रमुख लोकोक्तियाँ
नीचे कुछ लोकोक्तियाँ व उनके अर्थ दिए गए हैं, इनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए

  1. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता-कोई बड़ा काम अकेले नहीं किया जा सकता है।
    राम भला इतने बड़े खेत को एक दिन में कैसे जोत पाता ठीक ही है, अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।
  2. अधजल गगरी छलकत जाए-अल्पज्ञान वाला बहुत बढ़-चढ़कर बोलता है।
    आठवीं फेल राजू बात ऐसी करता है मानो दुनिया में सबसे बड़ा विद्वान वही है। किसी ने ठीक ही कहा है कि अधजल गगरी छलकत जाए।
  3. आम के आम गुठलियों के दाम-एक काम से दो लाभ।
    सरिता छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर पैसे भी कमा लेती है और उसके ज्ञान में भी वृद्धि होती है। ठीक ही कहा है, आम के आम गुठलियों के दाम।
  4. जिसकी लाठी उसकी भैंस-बलवान की ही जीत होती है।
    गाँव के जमींदार ने गरीब अलगू की भूमि जबरन कब्जा ली। किसी ने ठीक ही कहा है, जिसकी लाठी उसकी भैंस।
  5. होनहार बिरवान के होत चीकने पात-प्रतिभाशाली व्यक्तियों के लक्षण बचपन में ही प्रकट हो जाते हैं।
    प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ रामानुजम् बचपन से ही गणित विषय में पारंगत थे। शायद ऐसे ही लोगों के लिए कहा जाता है, होनहार बिरवान के होत चीकने पात।
  6. कंगाली में आटा गीला-मुसीबत में मुसीबत आना।
    बड़ी कठिनाई से तो रवि ने अपने पुत्र को पढ़ने भेजा, ऊपर से वह फेल हो गया; तभी तो कहते हैं कंगाली में आटा गीला।

अलंकार

परिभाषा-कविता को सजाने वाले शब्द और अर्थ से युक्त वाक्यों को अलंकार कहते हैं। कुछ प्रमुख अलंकार हैं
यमक-
जहाँ एक शब्द के दो अर्थ होते हैं।

जैसे-
कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय।
वा खाये बौराय जग या पाये बौराय।

श्लेष-
जिसमें एक शब्द के कई अर्थ हैं,

जैसे-
पानी गये न ऊबरे मोती मानस चून।

यहाँ पानी शब्द के आब, प्रतिष्ठा और जल यह तीन अर्थ हैं।

उपमा-
जब एक वस्तु की दूसरी से तुलना की जाए वहाँ उपमा अलंकार होता है।

जैसे-
तवा समा तपती थी वसुन्धरा।
यहाँ जेठ की तपती धरती को तवे के समान बतलाया गया है।

रूपक-
जहाँ एक वस्तु को दूसरी वस्तु का रूप दिया जाये।

जैसे-
चरण कमल वन्दों हरि-राई।
यहाँ भगवान के चरणों को कमल का रूप दिया गया है।

अनुप्रास-
कविता में जहाँ एक ही वर्ण से प्रारम्भ होने वाले शब्दों का प्रयोग बार-बार किया जाता है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
रघुपति राघव राजा राम। यहाँ ‘र’ वर्ण की आवृत्ति हुई है।

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विराम चिन्ह

विराम का शाब्दिक अर्थ है रुकना, ठहराव या विश्राम। पढ़ते – वक्त शब्दों या वाक्य के आखिर में रुकने के हेतु प्रयोग होने वाले चिन्हों को विराम कहा जाता है।

  1. पूर्ण विराम-इसका चिन्ह (।) है। इसका प्रयोग वाक्य के अन्त में होता है।
  2. अल्प विराम-इसका चिन्ह (,) है। यह शब्द के पश्चात् थोड़ी देर रुकने के लिए प्रयुक्त होता है। यथा-कनिष्क, पल्लव और अक्षय बाजार गये।
  3. अर्द्ध विराम-इसका चिन्ह (;) है। अर्द्ध विराम का प्रयोग अल्प विराम से कुछ अधिक देर तक रुकने के लिए होता है। यथा-पल्लव साल भर पढ़ा; परन्तु परीक्षा में सफल न हो सका।
  4. संयोजक चिह्न-इसका चिन्ह (-) है। दो या दो से . अधिक शब्दों में सम्बन्ध व्यक्त करने के लिए संयोजक चिन्ह प्रयोग में लाया जाता है। यथा-सुख-दु:ख, धीरे-धीरे।
  5. विस्मयादिबोधक-इनका चिन्ह (!) है। यह विस्मय सूचक शब्द या वाक्य के पश्चात् लगाया जाता है। यथा-हे राम! तुम कहाँ गए ? \
  6. प्रश्नवाचक-इसका चिन्ह (?) है। प्रश्न पूछने की जगह इसका प्रयोग होता है। यथा-तुम कहाँ रहते हो ?
  7. खाली स्थान-इसका चिन्ह (……..) है। इसका प्रयोग रिक्त स्थान के निमित्त होता है।
  8. विवरण चिह्न-किसी बात को स्पष्ट करने के लिए (:) इसका प्रयोग होता है।
  9. कोष्ठक-इसका चिन्ह () है। किसी का विभाजन करते समय कोष्ठकों में रखकर संख्या डालते चलते हैं। यथा-संज्ञा तीन प्रकार की होती है-
    • व्यक्तिवाचक,
    • जातिवाचक,
    • भाववाचक।
  10. हंस पद या त्रुटिसूचक चिह्न (4)-जब वाक्य में लिखते समय कुछ अंश छूट जाता है तब हंस पद (A) का प्रयोग करते हैं।

पर्यायवाची शब्द

परिभाषा-“जिन शब्दों का अर्थ समान हो, उन्हें समानार्थी अथवा पर्यायवाची शब्द कहते हैं।
जैसे- फूल को पुष्प, कुसुम, सुमन, पुहुप आदि भी कहते

  • कुछ प्रमुख पर्यायवाची शब्द
  • अमृत-सोम, अमी, सुधा, पीयूष।
  • अग्नि-आग, अनल, पावक, हुताशन।
  • आकाश-गगन, नभ, अम्बर, व्योम।
  • अश्व-हय, घोटक, तुरंग, सैन्धव।
  • चन्द्रमा-सुधांशु, राकापति, सुधाकर, शशी।
  • गंगा-सुरसरि, भागीरथी, देवनदी, त्रिपथगा।
  • यमुना-अर्कजा, तरणिजा, कालिन्दी, रविसुता।
  • पानी-नीर, अम्बु, वारि, तोय, जल।
  • कमल-नीरज, अम्बुज, वारिज, जलज।
  • मेघ-नीरद, अम्बुद, जलद, वारिद।
  • समुद्र-वारिधि, सागर, पयोधि, नीरधि।
  • असुर-दानव, दैत्य, निशाचर।
  • इन्द्र-सुरपति, शचीपति, देवेन्द्र, शक्र।
  • तालाब-तड़ाग, सरसी, सरोवर, सर।
  • दिन-दिवस, वासर, दिवा, अहन।
  • पवन-वायु, मरुत, समीर, वात।
  • नदी-सरिता, तटिनी, नद, तरंगिणी।
  • पर्वत-भूधर, गिरि, नग, महोदर।
  • पृथ्वी-भू, भूमि, मही, धरा।
  • फल-सुमन, पुष्प, प्रसून।
  • राजा-भूपति, महीपति, नृप, महीप।
  • रात-निशा, रैन, रजनी, रात्रि।
  • सूर्य-भानु, दिनकर, दिवाकर, रवि।
  • सोना-हाटक, स्वर्ण, कंचन।
  • हाथी-गज, नाग, हसती, वारण।
  • जंगल-वन, कानन, अरण्य।
  • पेड़-वृक्ष, पादप, विटप, तरु।
  • आँख-नेत्र, चक्षु, नयन।
  • ईश्वर-परमात्मा, सर्वेश्वर, अन्तर्यामी, प्रभु।
  • पुत्र-सुत, तात, आत्मज, बेटा, तनय।
  • हिमालय-नगराज, पर्वतराज, गिरिराज, हिमगिरि।
  • पुत्री-सुता, तनया, बेटी, आत्मजा।
  • कर-गृह, निकेतन, आवास, निवास।
  • हाथ-कर, भुजाग्र, हस्त। मित्र-सखा, सहचर, सुहृद।

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विलोम शब्द

परिभाषा-“ऐसे शब्द जो किसी शब्द का विपरीत अर्थ बताते हैं, उन्हें विपरीतार्थी अथवा विलोम शब्द कहते हैं। जैसे-ऊँचा का विलोम शब्द नीचा है।

कुछ प्रमुख विलोम शब्द
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 5
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 6
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 7

वाक्यांश के लिए एक शब्द

परिभाषा-“वे शब्द जिन्हें पूरे वाक्य या किसी शब्द समूह के स्थान पर प्रयोग किया जाता है, अनेक शब्दों के लिए एक शब्द कहा जाता है। जैसे- ‘जिसे कोई डर न हो’ को हम शब्द संक्षेप में ‘निडर’लिख सकते हैं।
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 8
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 9
MP Board Class 6th Special Hindi व्याकरण 10

अव्यय

परिभाषा-वे शब्द जिनके रूप में लिंग, वचन व कारक आदि के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता है, उन्हें अव्यय कहते हैं। जैसे-धीरे, दूर, परन्तु, शीघ्र लेकिन आदि।

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अव्यय के भेद-मुख्य रूप से अव्यय के निम्नलिखित चार भेद होते हैं.

  1. क्रिया विशेषण
  2. सम्बन्ध बोधक
  3. समुच्चय बोधक
  4. विस्मयादि बोधक।

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti महत्त्वपूर्ण पाठों के सारांश

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions महत्त्वपूर्ण पाठों के सारांश

मेरी भावना

‘मेरी भावना’ नामक कविता में जुगल किशोर ‘युगवीर’ ने हम सभी को सदुपदेश दिया है कि हमारे अन्दर अभिमान, ईर्ष्या, द्वेष और क्रोध की भावना न रहे। सबके प्रति हमारा व्यवहार सरल और सत्य से परिपूर्ण हो तथा प्रत्येक क्षण दूसरों का उपकार करने की भावना बनी रहे। सभी जीवों के प्रति मैत्री भाव और करुणा का स्रोत हमारे हदयों में बहता रहे। समता का भाव बना रहे। दुर्जनों की संगति से बचे रहें। गुणवान जनों का सम्मान करते रहें। हम सदैव किए गये उपकार को भूले नहीं। द्रोह न करें. दोषों को न देखें। न्याय मार्ग पर चलें,लालच में न फंसे। मृत्यु का भी भय न हो।

अन्त में कवि कामना करता है कि संसार के सभी लोग परस्पर प्रेमपूर्वक रहें। उनमें मोह भाव उत्पन्न हो। किसी से कोई भी कटु वचन बोलने वाला न हो।

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छोटा जादूगर

कार्निवाल के मैदान में मेला लगा था। चारों ओर बिजली की जगमगाहट थी। फब्बारे के पास लेखक खड़ा था। वहीं एक लड़का चुपचाप उन लोगों को देख रहा था जो शरबत पी रहे थे। इस लड़के की उम्र तेरह-चौदह वर्ष की रही होगी। उसका कुर्ता फटा था। उसके गले में एक मोटी-सी सूत की रस्सी पड़ी थी। उसकी जेब में ताश के पत्ते थे। उसके चेहरे से दु:ख टपक रहा था, लेकिन वह धैर्यवान था।

लेखक के पूछने पर उसने बताया कि वह वहाँ के जादूगर से भी अच्छा ताश का खेल दिखा सकता है। लेखक और छोटा जादूगर दोनों शरबत पीते हैं। लेखक ने परिचय पूछा, तो उसने बताया कि उसके परिवार में तीन आदमी है-उसकी माँ और बाप तथा वह स्वयं। उसके पिता देश की आजादी के लिए जेल गये हैं। माँ बीमार है। माँ के बीमार होते हुए भी वह खेल दिखाने के लिए चला आया है। खेल-तमाशा दिखाने से मिले पैसों से माँ की बीमारी का इलाज करता है और अपना पेट भी भरता है, परन्तु इस कमाई से खर्च पूरा नहीं होता है।

लेखक की पत्नी ने कमलिनी की छोटी झील पर उसे एक रुपया खेल दिखाने के लिए दिया। वह उसे लेकर चलने लगा। छोटा जादूगर ने बताया कि सबसे पहले वह पकौड़े खायेगा और फिर सूती चादर खरीदेगा अपनी माँ के लिए। लेखक ने अपनी स्वार्थ भरी आदत पर अचम्भा किया। छोटा जादूगर नमस्कार करके चला गया। लेखक अपने परिवार सहित कुंज देखने चला जाता है। छोटा जादूगर उन्हें वहाँ स्मरण हो आता है।छोटा जादूगर की माँ को अस्पताल से बाहर निकाल दिया गया है। लेखक भी अपनी कार से उतर छोटे जादूगर की झोपड़ी में उसकी बीमार काँपती हुई माँ को देखता है। उसकी दशा दयनीय थी।

छोटा जादूगर अन्य किसी दिन उद्यान में अपना रंगमंच जमाये हुए है। विभिन्न खेल दिखा रहा है। लेखक ने आगे बढ़कर पूछा कि आज तुम्हारा खेल क्यों नहीं जमा है। छोटा जादूगर ने बताया कि “माँ ने कहा था कि आज तुरन्त चले आना। मेरी घड़ी समीप है।” लेखक ने कहा “फिर भी तुम खेल दिखाने चले आये।” लेखक के कहने पर उसने कहा ‘क्यों नहीं आता?’ लेखक ने तुरन्त ही उसका झोला गाड़ी में फेंका, उसे पीछ बैठाया और बताये मार्ग से गाड़ी चला दी।

कुछ क्षण में झोंपड़ी के सामने गाड़ी पहुँची। छोटा जादूगर दौड़कर “माँ, माँ” पुकारता हुआ झोपड़ी में घुसा। उस बीमार स्त्री के मुख से अस्पष्ट शब्द “बे……..” निकलकर रहा गया। छोटा जादूगर उससे लिपटा रो रहा था। लेखक चकित था। चारों ओर धूप फैली हुई थी। संसार सपना सा-एक जादू-सा चारों ओर नाचता-सा लग रहा था।

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हींगवाला 

लगभग पैंतीस वर्ष का एक खान “अम्माँ हींगवाला” कहता हुआ सावित्री के आँगन में मौलश्री के पेड़ के चबूतरे पर आकर बैठ गया। सावित्री के नौ-दस बरस के बच्चे ने कहा कि अभी कुछ नहीं लेना है। खान ने फिर कहा कि वह अपने देश को लौट कर जा रहा है। बहुत दिनों में आयेगा। हींग ले लो। खान की बात सुन सावित्री रसोईघर से बाहर निकलकर आती है। खान कहता है कि वह उसके हाथ से बोहनी करना चाहता है। उसकी हींग, हेरा हींग है। वह धोखे का व्यापार नहीं करता है। सावित्री के न

चाहते हुए भी वह हींग तोलकर देता है जिसकी कीमत सवा छः आने होती है। सावित्री मूल्य देती है। खान चला जाता है। बच्चे अपनी खर्ची मांगने की रट लगाते हैं। सावित्री बच्चों को खाना खाने के लिए कहती है।समय बीता। होली निकली। शहर में दंगा हो गया। खान तो नहीं मर गया। वह हींग वालों की बात करते हुए खान को याद कर बैठती है।

एकदिन ‘खान’ अचानक ही “हींग है हींग” कहता हुआ सावित्री के घर में घुस जाता है। दंगे की बात करने पर खान ने कहा कि लड़ने वाले नासमझ हैं। दशहरे और होली के त्यौहारों पर दंगा हुआ। दशहरे का त्यौहार है। पक्के प्रबन्ध हैं। त्यौहार का जोश है। सावित्री का पति घर पर नहीं है। उसके बच्चे काली के जुलूस को देखने की जिद कर बैठते हैं। उसने घर के नौकर के साथ उन्हें जुलूस में भेज दिया।

थोड़ी देर बाद, सावित्री ने गली में लोगों की भगदड़ सुनी। उसने बाहर निकलकर पूछा कि वे क्यों भागे जा रहे हैं। लोगों ने कहा दंगा हो गया है। सावित्री सालभर के बच्चे सहित घर में अकेली है। जुलूस में गये बच्चों को देखने कैसे जाये। उसे न अन्दर चैन न बाहर। बच्चों को भेजने की अपनी मूर्खता के लिए स्वयं को कोस रही थी। देर रात का समय था। दरवाजे पर ‘खान’ बच्चों को लेकर आता है। घर का नौकर बच्चों को जुलूस में छोड़कर कहीं भाग गया। खान ने कहा “माँ, वक्त अच्छा नहीं। बच्चों को भीड़भाड़ में मत भेजा करो।” बच्चे सावित्री से लिपट जाते है। कहते हैं, ‘खान बहुत अच्छा आदमी है। खान हमारा दोस्त है।’ खान ने कहा, “दोस्त नहीं-भाई है।”

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नरबदी

मैकल पर्वत के घने जंगलों में आठ-दस झोपड़ियों का एक गाँव था। वहाँ एक झोपड़ी में दुग्गन रहता था। उसकी एक पुत्री थी नरबदी। उसकी माँ उसे जन्म देकर मर गयी थी। नरबदी अब बारह बरस की हो गयी थी। वह अपनी बेटी को सदा अपने साथ ही रखता था।

एक दिन झोपड़ी की मरम्मत के लिए वह एक बाँस लेने के लिए मैकल पर्वत पर गया। धूप तेज थी। वे दोनों चढ़ते गये। नरबदी को प्यास लगी। वह पानी की खोज में मैकल के घने वनों में इधर-उधर भटका। नरबदी पेड़ों की घनी छाया में बैठी रही। उसने अनुभव किया कि वह तो यहाँ छौंव में बैठी है। उसका पिता तो धूप और थकावट से बहुत प्यासा होगा। नरबदी देवता को मनाने लगी. “हे बड़े देवता ! तू मेरे बाबा की रक्षा करना।” लौटकर दुग्गन झुरमुट के पास पहुँचा।

नरबदी झुरमुट में नहीं दिखी। वह व्याकुल हो गया। तभी झुरमुट के बीच कल-कल की आवाज करते झरने को सुना। दुग्गन रोता हुआ अपनी पुत्री को पुकार रहा था। नरबदी झरने के रूप में कल-कल कर बहती जा रही थी। नरबदी ने दुग्गन से कहा, “तुम अपनी प्यास बुझा लो, मैं झरने में बदल गयी हूँ। अब इस जंगल में कोई प्यासा नहीं रहेगा।” नरबदी बाँसों के झुरमुटों से बह रही थी, कल-कल करती। वह तब से अमरकण्टक से बह रही है-समुद्र तक। वही नरबदी-नर्मदा के रूप में अमरकण्टक से जीवनरेखा बनकर बहती रहती है।

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MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 3 Playing With Numbers Ex 3.1

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 3 Playing With Numbers Ex 3.1

Question 1.
Write all the factors of the following numbers:
(a) 24
(b) 15
(c) 21
(d) 27
(e) 12
(f) 20
(g) 18
(h) 23
(i) 36
Solution:
(a) 24 =1 × 24 = 2 × 12 = 3 × 8 = 4 × 6 = 6 × 4
∴ Factors of 24 are 1, 2, 3, 4, 6, 8, 12 and 24
(b) 15 = 1 × 15 = 3 × 5 = 5 × 3
∴ Factors of 15 are 1, 3, 5 and 15
(c) 21 = 1 × 21 = 3 × 7 = 7 × 3
∴ Factors of 21 are 1, 3, 7 and 21
(d) 27 = 1 × 27 = 3 × 9 = 9 × 3
∴ Factors of 27 are 1, 3, 9 and 27
(e) 12 = 1 × 12 = 2 × 6 = 3 × 4 = 4 × 3 = 6 × 2
∴ Factors of 12 are 1, 2, 3, 4, 6 and 12
(f) 20 = 1 × 20 = 2 × 10 = 4 × 5 = 5 × 4
∴ Factors of 20 are 1, 2, 4, 5, 10 and 20
(g) 18 = 1 × 18 = 2 × 9 = 3 × 6 = 6 × 3 = 9 × 2
∴ Factors of 18 are 1, 2, 3, 6, 9 and 18
(h) 23 = 1 × 23
∴ Factors of 23 are 1 and 23,
(i) 36 = 1 × 36 = 2 × 18 = 3 × 12 = 4 × 9 = 6 × 6
∴ Factors of 36 are 1, 2, 3, 4, 6, 9, 12, 18 and 36

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 3 Playing With Numbers Ex 3.1

Question 2.
Write first five multiples of:
(a) 5
(b) 8
(c) 9
Solution:
(a) 5 × 1 = 5, 5 × 2 = 10, 5 × 3 = 15, 5 × 4 = 20, 5 × 5 = 25
∴ First five multiples of 5 are 5,10,15, 20, 25.
(b) 8 × 1 = 8, 8 × 2 = 16, 8 × 3 = 24, 8 × 4 = 32,
8 × 5 = 40
∴ First five multiples of 8 are 8,16, 24, 32, 40.
(c) 9 × 1 = 9, 9 × 2 = 18, 9 × 3 = 27, 9 × 4 = 36,
9 × 5 = 45
∴ First five multiples of 9 are 9, 18, 27, 36, 45.

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Question 3.
Match the items in column 1 with the items in column 2.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 3 Playing With Numbers Ex 3.1 1
Solution:
(i) ➝
(b) ;
(ii) ➝ (d);
(iii) ➝ (a);
(iv) ➝ (f);
(v) ➝ (c)
(a) Multiples of 8 are 8, 16, 24, 32, 40, ….
(b) Multiples of 7 are 7, 14, 21, 28, 35, …..
(c) Multiples of 70 are 70,140, 210, ……
(d) Factors of 30 are 1, 2, 3, 5, 6, 10,15, 30.
(e) Factors of 50 are 1, 2, 5, 10, 25.
(f) Factors of 20 are 1, 2, 4, 5, 10, 20.

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Question 4.
Find all the multiples of 9 upto 100.
Solution:
Multiples of 9 upto 100 are 9, 18, 27, 36, 45, 54, 63, 72, 81, 90, 99

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MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 12 पादप में जनन

MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 12 पादप में जनन

MP Board Class 7th Science Chapter 12 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. जनक पादप के कायिक भागों से नये पादप के उत्पादन का प्रक्रम ….. कहलाता है।
  2. ऐसे पुष्पों को, जिनमें केवल नर अथवा मादा जनन अंग होता है ……….. पुष्प कहते हैं।
  3. परागकणों का उसी अथवा उसी प्रकार के अन्य पुष्प के परागकोश से वर्तिकाग्र पर स्थानान्तरण का प्रक्रम ……….. कहलाता है।
  4. नर और मादा युग्मकों का युग्मन ………. कहलाता है।
  5. बीज प्रकीर्णन ……….., …………. और …………. के द्वारा होता है।

उत्तर:

  1. कायिक प्रवर्धन।
  2. एकलिंगी।
  3. परागण।
  4. युग्मनज।
  5. पवन, जल, जन्तुओं।

प्रश्न 2.
अलैंगिक जनन की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए। प्रत्येक का उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अलैंगिक जनन की विधियाँ:
(1) कायिक प्रवर्धन विधि:
इस विधि में पादप के मूल, तने, पत्ती अथवा कली/मुकुल जैसे किसी कायिक अंग द्वारा नया पादप प्राप्त किया जाता है।

उदाहरण:
गुलाब के पौधे की एक शाखा का पर्वसन्धि से काटकर शाखा का एक टुकड़ा निकाल लिया जाता है। इस टुकड़े को कलम कहते हैं। कलम को सीधा खड़ा करके इसका कुछ भाग मिट्टी में दबा देते हैं। कलम को प्रतिदिन पानी देते हैं। कुछ दिन बाद इससे जड़ और पत्तियाँ निकलने लगती हैं।

(2) मुकुलन विधि:
मुकुलन विधि में कोशिका से एक उभार के समान बाहर की ओर एक रचना निकलती है। इसे मुकुल या कली कहते हैं। यह मुकुल वृद्धि करता है और परिपक्व होकर मातृ कोशा से अलग हो जाता है तथा स्वतन्त्र होकर कार्य करता है। कभी-कभी मुकुल मातृ कोषा में लगे रहकर भी नए जीव उत्पन्न करता है।

उदाहरण:
थोड़ा यीस्ट पाउडर लेकर इसे एक ऐसे बर्तन में डाल देते हैं जिसमें कुछ जल हो। इस जल में एक चम्मच शक्कर डालकर घोल लेते हैं। कुछ समय बाद कोशा से एक उभार के समान मुकुल निकलने लगते हैं।

(3) खण्डन विधि:
खण्डन विधि से अलैंगिक प्रजनन सामान्य रूप से एक कोशीय जीवों में होता है। इस विधि में जीव का शरीर दो भागों में टूट जाता है। इसमें अनुकूल परिस्थिति में परिपक्व कोशिका का केन्द्रक दो भागों में विभाजित हो जाता है। ‘इसके पश्चात कोशिका द्रव्य भी दो भागों में विभाजित होकर दो कोशिकाओं को जन्म देता है जो स्वतन्त्र रूप से वृद्धि करते हैं।

उदाहरण:
जलाशयों में शैवाल जल और पोषक तत्व पाकर दो या दो से अधिक खण्डों में विखण्डित हो जाते हैं। ये खण्ड नये जीवों में वृद्धि कर जाते हैं। प्रक्रम निरंतर चलता ही रहता है।

(4) बीजाणु निर्माण विधि:
यह अलैंगिक जनन की विधि है। इस विधि द्वारा जीवाणु जनन करते हैं। जीवाणु उच्च ताप और निम्न आर्द्रता जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण कठोर सुरक्षात्मक आवरण से ढके रहते हैं। इसलिए ये लम्बे समय तक जीवित रह सकते हैं। अनुकूल परिस्थितियों में बीजाणु अंकुरित होकर नये पौधे बनाते हैं।

उदाहरण: फर्न अनुकूल परिस्थिति पाकर नये पौधों का निर्माण करते हैं।

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प्रश्न 3.
पादपों में लैंगिक जनन के प्रक्रम को समझाइए।
उत्तर:
पुष्प पादप का जनन अंग होते हैं। पुष्प में पुंकेसर नर जनन अंग तथा स्त्रीकेसर मादा जनन अंग हैं। पुंकेसर में परागकोश होता है जिसमें परागकण होते हैं जो नर युग्मकों को बनाते हैं। स्त्रीकेसर में अंडाशय होते हैं। अण्डाशय में एक या अधिक बीजांड होते हैं। मादा युग्मक (अण्ड) का निर्माण बीजांड में होता है। लैगिंक जनन में नर और मादा युग्मकों के युग्मन से युग्मनज बनता है। युग्मनज भ्रूण के रूप में विकसित होता है।

प्रश्न 4.
अलैंगिक और लैंगिक जनन के बीच प्रमुख अन्तर बताइए।
उत्तर:
लैंगिक और अलैंगिक जनन में अन्तर:

लैगिक ननन अलैंगिक जनन
लैंगिक जनन में नर और मादा दोनों की आवश्यकता होती है। अलैंगिक जनन में नर एवं मादा की आवश्यकता नहीं होती।
नये जीव की उत्पत्ति दोनों से होती है। नये जीव की उत्पत्ति एक ही जनक से होती है।
इसमें निषेचन की क्रिया होती है। इसमें निषेचन की क्रिया नहीं होती।

प्रश्न 5.
किसी पुष्प का चित्र खींचकर उसमें जनन अंगों को नामांकित कीजिए।
उत्तर:
पुष्प के जनन अंग:
MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 12 पादप में जनन 1

प्रश्न 6.
स्व-परागण और पर-परागण के बीच अन्तर बताइए।
उत्तर:
स्व-परागण और पर-परागण में अन्तर:

स्व-परागण पर-परागण
जब किसी पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर गिरते हैं तो इसे स्व-परागण कहते हैं। जब किसी एक पुष्प केपरागकण किसी अन्य पुष्प के वर्तिकान पर गिरते हैं, तो कहते हैं। इसे पर-परागण कहते हैं।

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प्रश्न 7.
पुष्पों में निषेचन का प्रक्रम किस प्रकार सम्पन होता है?
उत्तर:
पुष्पों में निषेचन-पुंगकेसरों के परागकोशों से । परागकरण स्त्रीकेसर की वर्तिकान पर पहुँचते हैं। यहाँ इनका अंकुरण होता है जिसके फलस्वरूप पराग नलिका बनती है। पराग नलिका वर्तिका में प्रवेश करके अण्डाशय में पहुँचती है। अण्डाशय में बीजाण्ड होते हैं जिसमें अण्डाणु होते हैं। पराग नलिका बीजाण्ड में नरयुग्मक छोड़ती है। नर एवं मादा युग्मक मिलकर युग्मनज बनाते हैं। इस प्रकार पुष्पों में निषेचन की प्रक्रिया होती है। निषेचन के पश्चात् बीजाण्ड एवं अण्डाशय परिवर्धित होकर, क्रमशः बीज एवं फल बनाते हैं।

प्रश्न 8.
बीजों के प्रकीर्णन की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रकृति में पादप के फलों और बीजों का प्रकीर्णन पवन, जल और जन्तुओं द्वारा होता है –
(1) पवन द्वारा प्रकीर्णन:
कुछ पादपों के पंखयुक्त बीज जैसे सेहिजन (ड्रमिस्टक), द्विफल (मैपिल), घासों के हल्के बीज, मदार के रोमयुक्त बीज, सूरजमुखी के रोमयुक्त फल पवन के साथ उड़कर सुदूर स्थानों तक चले जाते हैं और वहाँ जाकर प्रकीर्णित हो जाते हैं।

(2) जल द्वारा प्रकीर्णन:
कुछ बीज अथवा फल जल के द्वारा प्रकीर्णित होते हैं, ऐसे बीजों के आवरण स्पन्ज़ी अथवा तन्तुमय होते हैं जिससे वे जल में आसानी से तैरते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान को चले जाते हैं। जैसे- नारियल।

(3) जन्तुओं द्वारा प्रकीर्णन:
कुछ बीजों का प्रकीर्णन जन्तुओं द्वारा होता है। इस प्रकार के बीजों में ऐसी संरचनाएँ होती हैं जिससे ये जन्तुओं के शरीर से चिपक जाते हैं और दूर स्थान पर पहुँच जाते हैं। ऐसे बीज काँटेदार अथवा हुक जैसी संरचनाओं के होते हैं। जैसे- यूरेना, जैन्थियम आदि।

प्रश्न 9.
कॉलम A में दिए गए शब्दों का कॉलम B में दिए गए जीवों से मिलान कीजिए –
MP Board Class 7th Science Solutions Chapter 12 पादप में जनन 2
उत्तर:
(क) → (iii)
(ख) → (v)
(ग) → (ii)
(घ) → (i)
(च) → (iv)

प्रश्न 10.
सही विकल्प पर (✓) निशान लगाइए –
(क) पादप का जनन भाग होता है, उसका –

  1. पत्ती/पर्ण।
  2. तना।
  3. मूल।
  4. पुष्प।

(ख) नर और मादा युग्मक के युग्मन का प्रक्रम कहलाता है –

  1. निषेचन।
  2. परागण।
  3. जनन।
  4. बीज निर्माण।

(ग) परिपक्व होने पर अंडाशय विकसित हो जाता है –

  1. बीज में।
  2. पुंकेसर में।
  3. स्त्रीकेसर में।
  4. फल में।

(घ) बीजाणु उत्पन्न करने वाला एक पादप जीव है –

  1. गुलाब।
  2. डबलरोटी का फफूंद।
  3. आलू।
  4. अदरक।

(च) ब्रायोफिल्लम अपने जिस भाग द्वारा जनन करता है, वह है –

  1. तना।
  2. पत्ती।
  3. मूल।
  4. पुष्प।

उत्तर:
(क) पुष्प।
(ख) निषेचन।
(ग) फल में।
(घ) डबलरोटी का फफूंद।
(च) पत्ती।

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