MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था

संचार व्यवस्था  अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

संचार व्यवस्था  विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
संचार व्यवस्था क्या है? इसके कितने मूल अवयव हैं? स्पष्ट कीजिए।
अथवा रेडियो संचार व्यवस्था का नामांकित ब्लॉक आरेख बनाइए। [2014, 16, 17]
अथवा संचार व्यवस्था के मुख्य अवयव कौन-कौन से हैं? एक ब्लॉक आरेख द्वारा प्रदर्शित कीजिए। [2017]
अथवा संचार व्यवस्था का योजनाबद्ध आरेख खींचिए तथा इसके विभिन्न अवयवों का उल्लेख कीजिए। [2016, 18]
उत्तर :
संचार व्यवस्था (Communication System)-“सूचनाओं अथवा सन्देशों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानान्तरण की प्रक्रिया संचार कहलाती है।” इस प्रकार सन्देशों अथवा सूचनाओं को किसी विधि द्वारा (विद्युतचुम्बकीय तरंगों द्वारा अथवा केबिल्स द्वारा) एक स्थान से सम्प्रेषित करके दूसरे स्थान पर ग्रहण करने की व्यवस्था को संचार व्यवस्था कहते हैं।

संचार व्यवस्था के अवयव (Elements of a Communication System)-संचार व्यवस्था किसी भी प्रकृति की हो, इसके तीन प्रमुख अवयव होते हैं-

  1. प्रेषित्र (transmitter),
  2. संचार माध्यम (communication channel) तथा
  3. अभिग्राही (receiver)।

1. प्रेषित्र (Transmitter)- इसे सम्प्रेषण चैनल भी कहते हैं क्योंकि यह मूल सन्देश (जैसे—भाषण, सूचना) सिग्नल को एक उचित सिग्नल में बदलता है। जब कोई वक्ता व श्रोता के बीच की दूरी बहुत अधिक होती है तो तारें (केबिल्स) सम्प्रेषण चैनल का कार्य नहीं कर पाती हैं। इस स्थिति में पहले ध्वनि को माइक्रोफोन द्वारा विद्युत सिग्नलों में बदलते हैं तथा इनकी शक्ति को ऐम्पिलीफायर द्वारा बढ़ाकर इनको रेडियो आवृत्ति की वाहक तरंगों के साथ मॉडुलित करके ऐन्टिना द्वारा विद्युतचुम्बकीय तरंगों के रूप में अन्तरिक्ष में प्रेषित कर देते हैं।

2. संचार माध्यम (Communication Channel)- संचार माध्यम ऐसा भौतिक माध्यम (अथवा मुक्त आकाश) है जिसके द्वारा प्रेषित्र से भेजी गई विद्युतचुम्बकीय तरंगों के रूप में सूचना अथवा भाषण अभिग्राही के ऐन्टिना पर पहुँचती है, संचार माध्यम कहलाता है। यह तारों का एक युग्म अर्थात् केबिल तथा बेतार अर्थात् मुक्त आकाश में से कुछ भी हो सकता है।

3. अभिग्राही (Receiver)- अभिग्राही प्रेषित्र द्वारा भेजे गए परिवर्तित सिग्नल को वास्तविक सिग्नल में बदलता है। इस प्रक्रिया को विमॉडुलन (demodulation) अथवा डिमॉडुलन कहते हैं। जब अभिग्राही के ऐन्टिना पर मॉडुलित तरंगें पहुँचती हैं तो वहाँ पर पहले श्रव्य तरंगों को अलग कर लेते हैं फिर इन्हें प्रवर्धित कर लाउडस्पीकर को भेज देते हैं। यहाँ पर इन्हें पुन: ध्वनि तरंगों में परिवर्तित कर देते हैं।

संचार व्यवस्था का नामांकित आरेख चित्र-15.3 में प्रदर्शित है
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 1

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प्रश्न 2.
इलेक्ट्रॉनिक संचार व्यवस्था में प्रयुक्त होने वाली मूल शब्दावली को परिभाषित कीजिए।
उत्तर
इलेक्ट्रॉनिक संचार व्यवस्थाओं में उपयोग होने वाली मूल शब्दावली (Basic Terms Used in Electronic Telecommunication System)-किसी भी संचार व्यवस्था को समझने के लिए उसकी मूल शब्दावली को समझना आवश्यक है। संचार व्यवस्था की मूल शब्दावली में सम्मिलित मुख्य शब्द निम्न प्रकार हैं

1. ट्रान्सड्यूसर (Transducer)- ट्रान्सड्यूसर वह युक्ति है जो ऊर्जा के एक रूप को दूसरे रूप में परिवर्तित कर देती है। इलेक्ट्रॉनिक संचार व्यवस्थाओं में प्रायः ऐसी युक्तियाँ प्रयुक्त होती हैं जिनका निवेश (input) अथवा निर्गत (output) विद्युतीय रूप में होता है। विद्युतीय ट्रान्सड्यूसर एक ऐसी युक्ति है जो कुछ भौतिक चरों जैसे दाब, विस्थापन, बल, ताप आदि को अपने निर्गत (output) पर विद्युतीय सिग्नल में रूपान्तरित कर देती है।

2. सिग्नल (Signal)- प्रेषण के लिए उपयुक्त विद्युत रूप में रूपान्तरित सूचना को सिग्नल या संकेत कहते हैं। सिग्नल अनुरूप (analog) अथवा अंकीय (digital) प्रकार का हो सकता है। अनुरूप सिग्नल में वोल्टता तथा धारा निरन्तर परिवर्तित होते हैं जो अनिवार्यतः समय के एकल मान वाले फलन होते हैं। टेलीविजन के ध्वनि तथा दृश्य सिग्नल, अनुरूप सिग्नल होते हैं। अंकीय सिग्नल में वोल्टता तथा धारा क्रमवार विविक्त मान प्राप्त करते हैं। अंकीय इलेक्ट्रॉनिकी में मुख्य रूप से द्विआधारी पद्धति (binary system) प्रयुक्त होती है जिसमें किसी सिग्नल के केवल दो स्तर होते हैं। वोल्टता-धारा के निम्न स्तर को ‘0’ से तथा वोल्टता-धारा के उच्च स्तर को ‘1’ से प्रदर्शित किया जाता है।

3. शोर (Noise)- शोर का अर्थ है अवांछनीय सिग्नल जो किसी संचार व्यवस्था में सन्देश सिग्नलों के प्रेषण तथा अभिग्रहण में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयत्न करता है।

4. प्रेषित्र (प्रेषी) (Transmitter)- प्रेषित्र वह युक्ति है जो सूचनाओं के विद्युत सिग्नलों.को संसाधित कर वाहक तरंगों (carrier waves) पर अध्यारोपण के पश्चात् उसे संचार माध्यम से होकर प्रेषण तथा अभिग्राही पर अभिग्रहण के लिए उपयुक्त बनाती है।

5. अभिग्राही (Receiver)- अभिग्राही वह युक्ति है जो संचार माध्यम के निर्गत (output) पर प्राप्त सिग्नल से वांछनीय सन्देश सिग्नलों को प्राप्त करता है।

6. क्षीणता (Attenuation)- संचार माध्यम से संचरण के समय सिग्नल की प्रबलता में क्षति होने की प्रक्रिया क्षीणता कहलाती है।

7.प्रवर्धन (Amplification)- किसी इलेक्ट्रॉनिक परिपथ द्वारा सिग्नल की प्रबलता बढ़ाने की प्रक्रिया प्रवर्धन कहलाती है। संचार व्यवस्था में क्षीणता के कारण होने वाले क्षय की क्षतिपूर्ति के लिए प्रवर्धन आवश्यक है।

8. परास (Range)- प्रेषित्र तथा अभिग्राही के सिरों के बीच की वह अधिकतम दूरी है जहाँ तक सिग्नल को उसकी पर्याप्त प्रबलता के साथ अथवा मॉडुलेशन से प्राप्त किया जा सकता है, परास कहलाती है।

9. बैण्ड-चौड़ाई (Bandwidth)- बैण्ड-चौड़ाई से तात्पर्य उस आवृत्ति परास से है जिस पर कोई उपकरण कार्य करता है अथवा सिग्नल में उपस्थित तरंगों की आवृत्ति-परास को बैण्ड-चौड़ाई कहते हैं।

10. मॉडुलन अथवा मॉडुलेशन (Modulation)- निम्न आवृत्ति की विद्युतचुम्बकीय तरंगों को बहुत अधिक दूरियों तक प्रेषित नहीं किया जा सकता है। इसीलिए प्रेषित्र पर, निम्न आवृत्ति की विद्युतचुम्बकीय तरंगों को उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों पर अध्यारोपित कराया जाता है। इस प्रक्रिया को मॉडुलन अथवा मॉडुलेशन कहते हैं।

11. विमॉडुलन अथवा डिमॉडुलेशन (Demodulation)- वह प्रक्रिया जिसमें अभिग्राही से प्राप्त मॉडुलित तरंगों में से मूल विद्युतचुम्बकीय तरंगों को अलग किया जाता है, उन्हें विमॉडुलन अथवा डिमॉडुलेशन कहते हैं।

12. पुनरावर्तक (Repeater)- पुनरावर्तक अभिग्राही तथा प्रेषित्र का संयोजन होता है। पुनरावर्तक का उपयोग किसी संचार व्यवस्था का परास बढ़ाने के लिए किया जाता है। पुनरावर्तक प्रेषित से सिग्नल प्राप्त करके उसे प्रवर्धित करता है तथा उसे अभिग्राही को पुनः प्रेषित कर देता है।

प्रश्न 3.
सिग्नलों की बैण्ड-चौड़ाई से क्या तात्पर्य है? समझाइए।
उत्तर
सिग्नलों की बैण्ड-चौड़ाई (Bandwidth of Signals)-किसी संचार व्यवस्था द्वारा प्रेषित किया जाने वाला सन्देश सिग्नल, कोई आवाज, संगीत, दृश्य अथवा डिजिटल आँकड़ा हो सकता है। इन सिग्नलों में प्रत्येक का आवृत्ति परास भिन्न-भिन्न होता है। किसी दिए गए सिग्नल की संचार प्रक्रिया के लिए किस प्रकार की संचार व्यवस्था होनी चाहिए यह उस सिग्नल के आवृत्ति बैण्ड पर निर्भर करता है। किसी सिग्नल की आवृत्ति परास उस सिग्नल की आवृत्ति बैण्ड कहलाती है तथा बैण्ड में . सम्मिलित उच्चतम तथा न्यूनतम आवृत्तियों का अन्तर बैण्ड-चौड़ाई कहलाता है। बैण्ड-चौड़ाई के आधार पर सिग्नल दो प्रकार के होते हैं

1. वाक् सिग्नल (Speech Signals)-ध्वनि तरंगों की आवृत्ति का श्रव्य परिसर 20 हर्ट्स से 20 किलोहर्ट्स तक है। वाक् सिग्नलों के लिए उपयुक्त आवृत्ति परास 300 हर्ट्स से 3100 हर्ट्स है। अत: वाक् सिग्नलों के व्यापारिक टेलीफोन संचार के लिए बैण्ड-चौड़ाई 3100 हर्ट्स – 300 हर्ट्स = 2800 हर्ट्स है। वाद्य यन्त्र उच्च आवृत्तियों के स्वर उत्पन्न करते हैं, अत: संगीत के प्रेषण के लिए बैण्ड-चौड़ाई लगभग 20 किलोहर्ट्स होती है।

2. टी० वी० सिग्नल (T.V. Signals)-दृश्यों के प्रसारण (प्रेषण) के लिए वीडियो सिग्नलों को 4.2 मेगाहर्टस बैण्ड-चौड़ाई की आवश्यकता होती है। T.V. सिग्नलों में दृश्य तथा श्रव्य दोनों अवयव होते हैं तथा उनके प्रेषण के लिए प्रायः 6 मेगाहर्ट्स बैण्ड-चौड़ाई आवंटित की जाती है। विभिन्न सिग्नलों के आवृत्ति परास तथा बैण्ड-चौड़ाई सारणी-1 में दिए गए हैं
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प्रश्न 4.
प्रेषण माध्यम की बैण्ड-चौड़ाई को समझाइए।
उत्तर
प्रेषण माध्यम की बैण्ड-चौड़ाई (Bandwidth of Transmission Mediator)-सन्देश सिग्नलों की ही भाँति अलग-अलग प्रकार के प्रेषण माध्यमों के लिए भिन्न-भिन्न बैण्ड-चौड़ाई की आवश्यकता होती है। सामान्यतया प्रेषण में प्रयुक्त होने वाले माध्यम-तार, मुक्त आकाश तथा प्रकाशिक तन्तु केबिल हैं।

1. तारें (Wires)-माध्यम के रूप में समाक्षी केबिल (coaxial cable) व्यापक रूप से प्रयुक्त किया जाता है जो सामान्यत: 18 गीगाहर्ट्स आवृत्ति से नीचे कार्य करता है तथा जिसके लिए बैण्ड-चौड़ाई लगभग 750 मेगाहर्ट्स है।

2. मुक्त आकाश (Free Space)-संचार माध्यम के रूप में मुक्त आकाश से रेडियो तरंगों का विस्तृत आवृत्ति परास संचरित होता है। रेडियो तरंगों के विभिन्न आवृत्ति परिसर को अलग-अलग सेवाएँ प्रदान करने के लिए आवंटित किया गया है जिन्हें सारणी-2 में प्रदर्शित किया गया है।
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प्रश्न 5.
पृथ्वी के वायुमण्डल की विभिन्न परतों तथा उनका संचार में उपयोग समझाइए।
उत्तर
पृथ्वी का वायुमण्डल (Earth’s Atmosphere)-पृथ्वी के चारों ओर उपस्थित गैसों के आवरण को वायुमण्डल कहते हैं। वायुमण्डल में मुख्यत: नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, गैसें तथा अल्प मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड, आर्गन गैसें व जलवाष्प तथा सल्फर के यौगिक तथा धूल के कण होते हैं। पृथ्वी तल से ऊँचाई के साथ वायुमण्डल का घनत्व धीरे-धीरे घटता जाता है। पृथ्वी के वायुमण्डल की कोई स्पष्ट सीमा रेखा नहीं है, फिर भी इसे विभिन्न परतों में विभाजित किया जाता है जो निम्न प्रकार हैं

1. क्षोभमण्डल (Troposphere)-इस भाग का विस्तार पृथ्वी तल से 10 किमी की ऊँचाई तक होता है। इस क्षेत्र में पृथ्वी तल से ऊँचाई के साथ ताप 15°C से -50°C तक घटता है। हमारे पर्यावरण को प्रभावित करने वाली अधिकांश मौसमी घटनाएँ इसी क्षेत्र में उत्पन्न होती हैं।

2. समतापमण्डल (Stratosphere)-इस भाग का विस्तार पृथ्वी तल से 10 किमी से 50 किमी तक होता है। यह भाग धूल रहित, जल-वाष्प रहित होता है। इस भाग में ऊपर की ओर चलने पर ताप – 50°C से बढ़कर 10°C तक हो जाता है तथा वायु का घनत्व घटकर पृथ्वी तल पर घनत्व की तुलना में 10-3 हो जाता है। समतापमण्डल में पृथ्वी तल से 30 किमी से लेकर 50 किमी तक के भाग को ओजोन परत (ozone layer) कहते हैं। यह परत सूर्य से आने वाले अधिकांश पराबैंगनी विकिरणों का अवशोषण कर लेता है और इस प्रकार पृथ्वी के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करती है।

3. मध्यमण्डल (Mesosphere)-इस भाग का विस्तार पृथ्वी तल से 50 किमी ऊँचाई से 80 किमी ऊँचाई तक होता है। इस भाग में ऊपर की ओर जाने पर ताप एकसमान रूप से 10°C से घटकर -90°C हो जाता है तथा वायु का घनत्व घटकर पृथ्वी तल पर घनत्व की तुलना में 10-3 से 10- हो जाता है। यह क्षेत्र उच्च आवृत्ति (H.F.) की विद्युतचुम्बकीय तरंगों के एक भाग को अवशोषित कर शेष भाग को अपने में से होकर पृथ्वी की ओर आने देता है।

4. आयनमण्डल (Ionosphere)-इस भाग का विस्तार पृथ्वी तल से 80 किमी ऊँचाई से 400 किमी ऊँचाई तक होता है। इस भाग में ऊपर की ओर जाने पर ताप एकसमान रूप से -93°C से 427°C तक बढ़ता है तथा वायु का घनत्व पृथ्वी तल पर घनत्व की तुलना में 10-5 से घटकर 10-10 गुना रह जाता है। आयनमण्डल के इस भाग को तापमण्डल (thermosphere) कहते हैं। सूर्य से आने वाली पराबैंगनी तथा X-किरणें इस भाग में आयनन (ionisation) उत्पन्न करती हैं, इसी कारण इस भाग में अधिकांशत: मुक्त इलेक्ट्रॉन व धन आयन होते हैं।

इसी कारण इस भाग को आयनमण्डल कहते हैं। पृथ्वी तल से लगभग 110 किमी की ऊँचाई पर इलेक्ट्रॉनों की सान्द्रता बहुत अधिक हो जाती है तथा इसका विस्तार लगभग 150 किमी तक ऊपर की ओर होता है, इस परत को E परत अथवा कैनेली हैवीसाइड परत (Kennelly-Heaviside Layer) कहते हैं। इसके पश्चात् पृथ्वी तल से 250 किमी की ऊँचाई तक इलेक्ट्रॉनों की सान्द्रता काफी घट जाती है। इसके ऊपर इलेक्ट्रॉनों की अपेक्षाकृत अधिक सान्द्रता की एक ओर परत होती है, जिसे F-परत अथवा एपल्टन परत (Appleton layer) कहते हैं।

आयनमण्डल की E तथा F परतों से रेडियो तरंगों का परावर्तन होता है। वह अधिकतम आवृत्ति जो आयनमण्डल द्वारा परावर्तित हो सकती है, क्रान्तिक आवृत्ति (critical frequency) कहलाती है, इसे ‘fc‘ से प्रदर्शित करते हैं।
क्रान्तिक आवृत्ति \(f_{c}=9 \sqrt{N_{\max }}\)
जहाँ Nmax आयनमण्डल की उस परत का (जहाँ परावर्तन होता है) अधिकतम इलेक्ट्रॉन घनत्व है।

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प्रश्न 6.
वायुमण्डल में वैद्युतचुम्बकीय तरंगों का संचरण किस प्रकार होता है? समझाइए।
अथवा व्योम तरंगें क्या हैं? इनके संचरण का संक्षिप्त विवरण दीजिए।  [2018]
अथवा व्योम तरंग संचरण तथा आकाश तरंग संचरण से क्या तात्पर्य है?  [2014]
अथवा आकाश तरंग संचरण की आवृत्ति परास लिखिए।समझाइए कि इन तरंगों का संचरण कितने प्रकार से किया जाता है? [2018]
अथवा व्योम तरंगों तथा आकाश तरंगों का वर्णन कीजिए।  [2018]
अथवा सिद्ध किजिए कि आकाश तरंगों के संचरण हेतु एक टी०वी० प्रेषी ऐन्टिना जो पृथ्वी तल से h ऊँचाई पर है, का प्रसारण परास \(d=\sqrt{2 R h}\) है, जहाँ R पृथ्वी की त्रिज्या है। [2015,17]
अथवा एक टी०वी० ऐन्टिना की ऊँचाई मीटर है। दर्शाइए कि इसके द्वारा पृथ्वी की सतह पर दूरी \(d_{T}=\sqrt{2 h R} \sqrt{10 h}\) तक सिग्नल प्रसारित किया जा सकता है, यहाँ R पृथ्वी की त्रिज्या है।  [2018]
उत्तर
वायुमण्डल में वैद्युतचुम्बकीय तरंगों का संचरण अथवा विभिन्न संचार विधियाँ (Propagation of Electromagnetic Waves in Atmosphere or Different Modes of Propagation)-विभिन्न आवृत्ति परास की सूचना सिग्नलों के संचार के लिए भिन्न-भिन्न संचार विधियाँ प्रयुक्त की जाती हैं जो अग्र प्रकार हैं

1. भू-तरंग संचरण (Ground Wave Propagation)- वह रेडियो तरंग जो पृथ्वी के पृष्ठ के अनुदिश एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक गमन करती हैं, भू-तरंग (ground wave) कहलाती हैं। किसी भी सिग्नल को उच्च दक्षता से विकिरित करने के लिए ऐन्टिना का न्यूनतम आकार सिग्नल की तरंगदैर्घ्य (2) का एक चौथाई (214) होना चाहिए। विद्युतचुम्बकीय तरंगें (रेडियो तरंगें) जिनकी आवृत्ति 500 किलोहर्ट्स से 1500 किलोहर्ट्स तक होती है का संचरण प्रेषित्र से अभिग्राही तक पृथ्वी तल के समीप वायुमण्डल में पृथ्वी सतह की चालकता के कारण समान्तर होता है।

भू-तरंगें गमन करते समय पृथ्वी पर आवेश प्रेरित करती हैं, जो तरंग के साथ आगे बढ़ता है तथा पृथ्वी की सतह पर प्रेरित धारा उत्पन्न करता है। प्रेरित धाराओं के प्रवाह के कारण इन तरंगों की प्रबलता क्षीण होती जाती है। पृथ्वी के समीप संचरित तरंगें ऊर्ध्वाधर तल में ध्रुवित होती हैं, अत: इनका विद्युत क्षेत्र पृथ्वी तल के समान्तर होता है, जिसका अवशोषण, पृथ्वी तल के प्रतिरोध तथा वस्तुओं द्वारा विवर्तन होने के कारण बहुत अधिक होता है।

विवर्तन के कारण ही तरंगों के आगे बढ़ने के साथ उनका झुकाव कोण बढ़ता जाता है और कुछ दूरी तय करने के बाद तरंग नीचे आ जाती है तथा समाप्त हो जाती है। अत: ये बहुत दूरी तक संचरित नहीं होती है। अधिक आवृत्ति की तरंगों का अवशोषण अधिक होने के कारण, अधिक आवृत्ति की रेडियो तरंगों का संचरण इस विधि में नहीं होता है। भू-तरंग संचरण का परास रेडियो तरंगों की आवृत्ति तथा प्रेषित्र की शक्ति पर निर्भर करता है।

2. व्योम तरंग संचरण (Sky Wave Propagation)-वे रेडियो तरंगें जिनका संचरण वायुमण्डल में आयनमण्डल की उपस्थिति के कारण होता है, व्योम तरंगें कहलाती हैं। व्योम तरंगों (sky waves) की आवृत्ति 3 मेगाहर्ट्स से 30 मेगाहर्ट्स तक होती है। ये तरंगें वायुमण्डल के आयनमण्डल द्वारा परावर्तित हो जाती हैं तथा इनसे उच्च आवृत्ति की विद्युतचुम्बकीय तरंगें आयनमण्डल को भेदकर पलायन कर जाती हैं।

इनका प्रेषित्र ऐन्टिना द्वारा वायुमण्डल में प्रसारण होता है तथा वायुमण्डल के आयनमण्डल द्वारा पूर्ण आन्तरिक परावर्तन होने के बाद ये अभिग्राही ऐन्टिना में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न करती हैं। व्योम तरंग संचरण उच्च आवृत्तियों की लम्बी दूरी तक (4000 किमी तक) संचरित करने के उपयोग में लायी जाती है।

3. आकाश तरंग अथवा क्षोभमण्डलीय संचरण (Space Wave or Tropospheric Propagation)- आकाश तरंगों की आवृत्ति 40 मेगाहर्टस से 300 मेगाहर्टस होती है। आकाश तरंगें प्रेषित्र ऐन्टिना से सीधे, पृथ्वी तल से परावर्तन के पश्चात् अथवा क्षोभमण्डल (troposphere) से परावर्तन के पश्चात् अभिग्राही ऐन्टिना तक पहुँचती है। इसलिए इनके संचरण को क्षोभमण्डलीय संचरण (tropospheric propagation) भी कहते हैं।

आकाश तरंग संचरण में परा उच्च आवृत्ति (UHF), अति उच्च आवृत्ति (VHF) तथा माइक्रोवेव (microwave) तरंगों का उपयोग किया जाता है। उच्च आवृत्ति का संचरण भू-तरंग तथा व्योम तरंग के द्वारा नहीं हो सकता है क्योंकि पृथ्वी की सतह पर बहुत कम दूरी तय करने पर अति उच्च आवृत्ति तथा परा उच्च आवृत्ति की तरंगें पूर्णत: अवशोषित हो जाती हैं तथा ये तरंगें आयनमण्डल से परावर्तित नहीं होतीं वरन् उससे पारगमित हो जाती हैं। आकाश तरंग संचरण दृष्टि रेखा संचार (Line of Sight distance, LOS) तथा पृथ्वी की वक्रता (curvature of the earth) द्वारा सीमित होता है।

इन तरंगों का संचरण निम्न दो प्रकार से किया जा सकता है-

  • भू-स्थिर संचार उपग्रहों के द्वारा संचार उपग्रह सिग्नलों को परावर्तित कर अभिग्राही ऐन्टिना तक प्रेषित कर देता है।
  • सीधे प्रेषित्र ऐन्टिना के द्वारा-इन विधि में प्रेषित्र ऐन्टिना से प्रसारित सिग्नल सीधे अभिग्राही ऐन्टिना तक पहुँच जाता है। दीर्घ दूरी तक प्रसारण के लिए प्रेषित्र ऐन्टिना की ऊँचाई अधिक रखी जाती है।

(a) प्रेषित्र ऐन्टिना की पृथ्वी से ऊँचाई (h) तथा पृथ्वी पर उसके परास (d) में सम्बन्ध [Relation between Height of Transmitting Antenna from Earth (h) and its Range on Earth (d)]-माना प्रेषित्र ऐन्टिना (T) की पृथ्वी से ऊँचाई h है तथा पृथ्वी का केन्द्र 0 व त्रिज्या R है। पृथ्वी की वक्रता के कारण पृथ्वी सतह के बिन्दुओं A व B से दूर सिग्नल प्राप्त नहीं किए जा सकते। यहाँ AT व BT क्रमशः बिन्दुओं A व B पर स्पर्श रेखाएँ हैं। माना d ऐन्टिना के आधार से पृथ्वी की दूरी है जहाँ तक सिग्नल प्राप्त होते हैं।
त्रिभुज TOA में,
OT2 = (OA)2 + (AT)2
जहाँ OT = R+ h, OA = R, AP ≈ AT = d (:: h << R)
अत: (R+ h)2 = R2 +d2
अत: R2 + h2 +2 Rh = R2 +d2
अथवा h2 +2Rh = d2
अथवा 2 Rh = d2
प्रसारण परास \(d=\sqrt{2 R h}\)
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 4

d वह दूरी है जहाँ तक प्रेषित्र ऐन्टिना से पृथ्वी पर सिग्नल पहुँचता है। यह प्रेषित्र ऐन्टिना की ऊँचाई h पर निर्भर करता है अर्थात् ऊँचाई h अधिक होने पर अधिक तथा कम होने पर कम होता है। . A वह क्षेत्रफल है, जहाँ तक ऐन्टिना द्वारा प्रेषित टी०वी० प्रसारण देखा जा सकता है
A= πd2 = 2πRh
इस क्षेत्र में प्रसारण से लाभान्वित जनसंख्या = जनसंख्या घनत्व – क्षेत्रफल जिनमें TV सिग्नल प्रसारित हो सकता है।

(b) प्रेषित्र ऐन्टिना की ऊँचाई (ht) तथा अभिग्राही ऐन्टिना की ऊँचाई (hR) हो तो इनके मध्य संचरण दृष्टि रेखा (Line of Sight distance, LOS) की अधिकतम

दूरी-40 मेगाह से अधिक आवृत्तियों पर संचार केवल दृष्टि रेखीय (LOS-Line of Sight) द्वारा ही सम्भव है। LOS प्रकृति का संचार चित्र-15.4 में दर्शाया गया है, जिसमें पृथ्वी की वक्रता के कारण सीधी तरंगें किसी बिन्दु P पर अवरोधित हो जाती हैं, यदि सिग्नल को क्षैतिज से आगे (दृष्टि बाधित क्षेत्र में) प्राप्त करना है तो अभिग्राही ऐन्टिना की ऊँचाई hR अधिक रखनी होगी जिससे वह LOS तरंगों को प्राप्त कर सके। यदि प्रेषक ऐन्टिना की ऊँचाई hT,उससे क्षितिज बिन्दु P की दूरी dT तथा अभिग्राही ऐन्टिना की ऊँचाई hR, उससे क्षितिज बिन्दु P की दूरी dR हो (चित्र-15.5) तथा दोनों ऐन्टिनाओं के बीच की अधिकतम दृष्टि रेखा की दूरी dM हो, तो
\(d_{M}=d_{T}+d_{R}=\sqrt{2 R h_{T}}+\sqrt{2 R h_{R}}\)
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प्रश्न 7.
मॉडुलेशन से क्या तात्पर्य है? इसकी आवश्यकता क्यों पड़ती है? समझाइए। [2015]
अथवा तरंगों के ‘मॉडुलन’ से क्या तात्पर्य है? किसी माध्यम में तरंगों के संचरण में मॉडुलन की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए। [2018]
अथवा दो कारणों को लिखिए जिससे किसी सिग्नल के मॉडुलन की आवश्यकता स्पष्ट होती है।  [2014]
अथवा सिग्नल संचरण के लिए मॉडुलेशन की आवश्यकता क्यों है?  [2015]
उत्तर
मॉडुलन अथवा मॉडुलेशन तथा इसकी आवश्यकता (Modulation and its Need)-निम्न आवृत्ति की वैद्युतचुम्बकीय तरंगों को उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों पर अध्यारोपित करने की प्रक्रिया को मॉडुलन अथवा मॉडुलेशन कहते हैं। … निम्न आवृत्ति की अध्यारोपित की जाने वाली तरंगों को मॉडुलेटिंग तरंग (modulating waves) उच्च आवृत्ति की तरंगों को जिन पर निम्न आवृत्ति की तरंगें अध्यारोपित की जाती हैं, को वाहक तरंगें (carrier waves) तथा मॉडुलेशन प्रक्रिया के फलस्वरूप प्राप्त परिणामी तरंग को मॉडुलित तरंग (modulated waves) कहते हैं।

संचार निकाय में सन्देश सिग्नल श्रव्य आवृत्ति परास (20 हर्ट्स से 20000 हर्ट्स) के होते हैं। प्रेषित करने से पूर्व इनकों . माइक्रोफोन द्वारा विद्युत सिग्नल में परिवर्तित किया जाता है जिनका आवृत्ति परास भी इतना ही होता है। इन तरंगों को लम्बी दूरी तक प्रसारित नहीं किया जा सकता है इनके निम्नलिखित कारण हैं

1. ऐन्टिना का आकार (Size of Antenna)- किसी सन्देश सिग्नल को प्रेषित करने के लिए ऐन्टिना की आवश्यकता होती है। किसी सिग्नल को प्रसारित करने के लिए ऐन्टिना की लम्बाई सिग्नल की तरंगदैर्घ्य की कोटि की न्यूनतम 21 4 होनी चाहिए। श्रव्य तरंगों की आवृत्ति परास 20 हर्ट्स से 20 किलोहर्ट्स होती है जिनके लिए न्यूनतम तरंगदैर्घ्य λ = \(\frac { c}{ v }\)
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 6

मीटर=15000 मीटर है। अतः श्रव्य तरंगों को ऐन्टिना से प्रेषित करने के लिए उसकी न्यूनतम लम्बाई \(\frac { 15000 }{ 4 }\) मीटर के क्रम की होनी चाहिए, परन्तु इतनी लम्बाई का ऐन्टिना बनाना व्यावहारिक नहीं है। अत: श्रव्य तरंगों को ऐन्टिना से प्रसारित नहीं किया जा सकता है। यदि इन तरंगों को उच्च आवृत्ति (लगभग 106 हर्ट्स) की वाहक तरंगों पर अध्यारोपित कर दिया जाए तब आवश्यक ऐन्टिना की न्यूनतम लम्बाई \(\frac{\lambda}{4}=\frac{3 \times 10^{8}}{4 \times 10^{6}}\) मीटर होगी जोकि व्यावहारिक है।
अतः प्रेषण से पूर्व निम्न आवृत्ति के सिग्नल को उच्च आवृत्ति की तरंगों के साथ अध्यारोपित करना आवश्यक है।

2. ऐन्टिना द्वारा प्रभावी शक्ति विकिरण (Effective Power Radiation by Antenna)-किसी / लम्बाई के रेखीय ऐन्टिना द्वारा विकिरित शक्ति P तरंगदैर्घ्य 2 के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है, अर्थात्
\(P \propto \frac{1}{\lambda^{2}}\)
अत: निम्न आवृत्ति एवं दीर्घ तरंगदैर्घ्य के आधार बैण्ड सिग्नल द्वारा प्रभावी शक्ति का विकिरण कम होगा, अत: अच्छे एवं प्रभावी प्रेषण के लिए उच्च शक्ति चाहिए जो उच्च आवृत्ति एवं कम तरंगदैर्घ्य के आधार बैण्ड सिग्नल से ही सम्भव है। अतः स्पष्ट है कि निम्न आवृत्ति के सिग्नल का उच्च आवृत्ति की तरंगों के साथ मॉडुलेशन करना आवश्यक है।

3. विभिन्न प्रेषित्रों से प्राप्त सिग्नलों का मिश्रण (Mixing of Signals obtained from Different Transmitters)-जब एकसाथ कई आधार बैण्ड सिग्नल प्रेषित किए जाते हैं तो वे परस्पर मिश्रित हो जाते हैं जिनमें विभेद करना सरल नहीं होता है। अत: इस कठिनाई को दूर करने के लिए निम्न आवृत्तिं सिग्नलों को उच्च आवृत्ति की तरंगों के साथ मॉडुलित कर प्रेषित किया जाता है तथा प्रत्येक प्रसारण स्टेशन को एक अलग आवृत्ति बैण्ड आवंटित कर देते हैं।

इस प्रकार स्पष्ट है कि निम्न आवृत्ति के सन्देश सिग्नलों को प्रेषित करने से पूर्व उनका उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों के साथ मॉडुलेशन आवश्यक होता है।

प्रश्न 8.
मॉडुलन कितने प्रकार के होते हैं? प्रत्येक को समझाइए।
अथवा आयाम मॉडुलन से क्या तात्पर्य है? एक आयाम मॉडुलक का परिपथ आरेख बनाइए।  [2014, 15]
अथवा आयाम मॉडुलित तरंग के उत्पादन हेतु आवश्यक नामांकित परिपथ आरेख बनाइए।   [2015,17]
अथवा परिपथ चित्र की सहायता से रेडियो प्रसारण में मॉडुलन की प्रक्रिया समझाइए।           [2015]
उत्तर
मॉडुलन के प्रकार (Types of Modulation)-निम्न आवृत्ति के सन्देश सिग्नल को उच्च आवृत्ति की वाहक . तरंगों के किस गुण में परिवर्तन कर अध्यारोपित किया गया है, इस आधार पर मॉडुलेशन निम्नलिखित प्रकार का होता है

1. आयाम मॉडुलन (Amplitude Modulation)- जब उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों के आयाम को निम्न आवृत्ति के श्रव्य सिग्नलों के संगत आयामों के अनुरूप परिवर्तित किया जाता है तो उनके परस्पर अध्यारोपण की प्रक्रिया आयाम मॉडुलन कहलाती है। भारत में अधिकांश रेडियो प्रसारण तथा टेलीविजन प्रसारण में वीडियो संकेतों को आयाम मॉडुलित तरंगों द्वारा प्रसारित किया जाता है। आयाम मॉडुलक का परिपथ आरेख चित्र-16.6 में प्रदर्शित है।

2. आवृत्ति मॉडुलन (Frequency Modulation)- जब उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों की आवृत्ति को श्रव्य संकेतों के संगत आयामों के अनुरूप परिवर्तित किया जाता तो उनके परस्पर अध्यारोपण की प्रक्रिया आवृत्ति मॉडुलन कहलाती है। भारत में कुछ रेडियो स्टेशनों से तथा टेलीविजन प्रसारण में ध्वनि संकेतों को आवृत्ति मॉडुलित कर प्रसारित किया जाता है।

3. कला मॉडुलन (Phase Modulation)- जब उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों की कला (phase) को श्रव्य तरंगों के संगत आयामों के अनुरूप परिवर्तित किया जाता है तो उनके परस्पर अध्यारोपण की प्रक्रिया कला मॉडुलन कहलाती है।

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प्रश्न 9.
आयाम मॉडुलन को स्पष्ट करके मॉडुलन सूचकांक अथवा गुणांक को समझाइए।
उत्तर
आयाम मॉडुलन (Amplitude Modulation)-माना किसी क्षण t पर सूचना सिग्नल (मॉडुलक सिग्नल) की वोल्टता समीकरण निम्नलिखित है –
em = Em sinωmt
जहाँ Em = सिग्नल का आयाम, ωm = सिग्नल की कोणीय आवृत्ति तथा ωm = 2 πvm
जहाँ νm सूचना सिग्नल की आवृत्ति है।
किसी क्षण t पर वाहक तरंग का वोल्टता समीकरण ec = Ec sinωct
जहाँ Ec = वाहक तरंग का आयाम, ωc = वाहक तरंग की कोणीय आवृत्ति तथा ωc= 2 πVc.
जहाँ νc वाहक तरंग की आवृत्ति है।
आयाम मॉडुलेशन में मॉडुलित तरंग का आयाम सूचना सिग्नल (मॉडुलक सिग्नल) के आयाम की भाँति समय के साथ बदलता है, अत: मॉडुलित तरंग का आयाम
E= Ec + em = Ec + Em sinωm t
चित्र-15.6 में परिणामी आयाम मॉडुलित तरंग प्रदर्शित है।
मॉडुलित तरंग का वोल्टता समीकरण
e = E sinωct = (Ec + Em sinωmt) sinωct
\(=E_{c}\left[1+\frac{E_{m}}{E_{c}} \sin \omega_{m} t\right] \sin \omega_{c} t\)
e= Ec(1+ mα sinωmt)sinωct
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 7
जहाँ mα \(\frac{E_{m}}{E_{c}}\) मॉडुलन गुणांक (modulation factor) अथवा मॉडुलन सूचकांक (modulation index)
अथवा मॉडुलन की गहराई (depth of modulation) अथवा मॉडुलन की मात्रा (degree of modulation) कहलाता है।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 8
यह मॉडुलित तरंग का समीकरण है तथा इसके वोल्टेज स्वरूप को चित्र-15.6 में प्रदर्शित किया गया है। इस प्रकार आयाम मॉडुलित तरंग में तीन घटक तरंगें उपस्थित हैं
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 9
इस प्रकार स्पष्ट है कि मॉडुलित तरंग में मूल वाहक तरंग की आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है। है तो दो अन्य आवृत्तियों (fc-fm)तथा (fc+fm) की तरंगें उत्पन्न होती है। इन आवृत्तियों को पार्श्व बैण्ड आवृत्तियाँ (side band frequency) कहते हैं। (fc-fm) को निम्न पार्श्व बैण्ड आवृत्ति (Lower Side Band Frequency अर्थात् LSB) तथा (fc+fm) को उच्च पार्श्व बैण्ड आवृत्ति (Upper Side Band Frequency अर्थात् USB) कहते हैं।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 10
आयाम मॉडुलित तरंग का आवृत्ति स्पेक्ट्रम (Frequency Spectrum of Amplitude Modulated Wave)-आयाम मॉडुलित तरंग का आवृत्ति स्पेक्ट्रम चित्र-15.7 में प्रदर्शित किया गया है। जिससे स्पष्ट है कि मॉडुलित तरंग वाहक तरंग की आवृत्ति fc के दोनों ओर समान आवृत्ति अन्तराल fm पर स्थित है।
आयाम मॉडुलित तरंग की बैण्ड-चौड़ाई
= (fc+fm-fc-fm)= 2fm
अतः आयाम मॉडुलित तरंग की बैण्ड-चौड़ाई सूचना सिग्नल (मॉडुलक सिग्नल) की आवृत्ति की दोगुनी होती है।

प्रश्न 10.
आयाम मॉडुलित तरंग का उत्पादन समझाइए। अथवा आयाम मॉडुलन क्या है? परिपथ आरेख द्वारा एक आयाम मॉडुलित तरंग कैसे प्राप्त करते हैं, समझाइए। [2018]
उत्तर
आयाम मॉडुलन-जब उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों के आयाम को निम्न आवृत्ति के श्रव्य सिग्नलों के संगत आयाम के अनुरूप परिवर्तित किया जाता है तो उनके परस्पर अध्यारोपण की प्रक्रिया आयाम मॉडुलन कहलाती है।

आयाम मॉडुलित तरंगों का उत्पादन (Production of Amplitude Modulation)- आयाम मॉडुलित तरंग के उत्पादन के लिए संयोजन को चित्र-15.8 में प्रदर्शित किया गया है। यह परिपथ n-p-n ट्रांजिस्टर वाहक तरंगों के लिए उभयनिष्ठ उत्सर्जक प्रवर्धक की भाँति कार्य करता है। इस परिपथ में वाहक तरंग को आधार B पर लगाया जाता है जोकि संधारित्र C से होकर जाता है। इस प्रकार संधारित्र C केवल AC घटकों को ही जाने देता है। इसके आधार पर मॉडुलक सिग्नल em = Em sinωmt को इस प्रकार लगाया जाता है कि आधार बायस वोल्टेज के साथ मॉडुलक सिग्नल भी निवेशित हो।

इस प्रकार आधार वोल्टता स्थिर नहीं,रहती बल्कि यह मॉडुलक सिग्नल के तात्कालिक मान के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। अतः आधार उत्सर्जक के बीच निवेशी वोल्टता, मॉडुलक सिग्नल के अनुसार परिवर्तित होती है जिसके कारण निर्गत वोल्टता भी उसी के अनुसार प्रवर्धित होती है। इस प्रकार निर्गम में आयाम मॉडुलित तरंग प्राप्त हो जाती है।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 11

प्रश्न 11.
आयाम मॉडुलित तरंग का संसूचन (अथवा विमॉडुलन) को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
आयाम मॉडुलित तरंग का संसूचन अथवा विमॉडुलन (Demodulation of Amplitude Modulated Wave)-अभिग्राही द्वारा मॉडुलित तरंग से श्रव्य सिग्नल (मूल सिग्नल) प्राप्त करने की प्रक्रिया को विमॉडुलन अथवा संसूचन
कहते हैं।
विमॉडुलन की आवश्यकता- संचार माध्यम से प्रसारित होते समय आयाम मॉडुलित संदेश क्षीण हो जाता है। अतः अभिग्राही ऐन्टिना द्वारा प्राप्त सिग्नल को प्रवर्धित एवं संसूचित करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में निम्नलिखित दो क्रियाएँ होती हैं

  • मॉडुलित तरंग का दिष्टकरण
  • मॉडुलित तरंग से वाहक तरंग घटक को अलग करना।

आयाम मॉडुलित तरंग के लिए डायोड संसूचक- p-n सन्धि डायोड संसूचक सामान्यतया विमॉडुलन के लिए प्रयुक्त किया जाता है। इसका परिपथ चित्र-15.9 में प्रदर्शित है। इसके निवेशी परिपथ में स्वप्रेरकत्व L तथा परिवर्ती संधारित्र C परस्पर समान्तर क्रम में संयोजित होते हैं। इस परिपथ को स्वसरित परिपथ (tuned circuit) कहते हैं। ग्राही ऐन्टिना पर आने वाली विभिन्न रेडियो सिग्नलों में से वांछित रेडियो आवृत्ति सिग्नल को संधारित्र C को समायोजित करके अनुनाद के आधार पर चयन कर लिया जाता है।

p-n सन्धि डायोड इस सिग्नल का दिष्टकरण कर देता है। इस दिष्टकारी सिग्नल को उच्च प्रतिरोध के लोड प्रतिरोध R, तथा उपमार्गी संधारित्र CB (bypass condenser) के समान्तर-क्रम संयोजन पर लगाया जाता है। संधारित्र का प्रतिघात \(\left(X_{C}=\frac{1}{2 \pi f C_{B}}\right)\) उच्च आवृत्तियों के लिए कम तथा निम्न आवृत्तियों के लिए अधिक होता है। अतः संधारित्र का प्रतिघात वाहक तरंगों के लिए कम व श्रव्य तरंगों के लिए अधिक होता है। अत: उच्च आवृत्ति की वाहक रेडियो तरंगों के अवयव उपमार्गी संधारित्र से गुजरकर पृथ्वी में चले जाते हैं तथा निम्न आवृत्ति की श्रव्य तरंगों के अवयव लोड प्रतिरोध (RL) के सिरों पर प्राप्त हो जाते हैं। यह श्रव्य तरंगें हैडफोन में धारा भेजते हैं जिनके संगत मूल श्रव्य सिग्नल उत्पन्न होते हैं।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 12
संसूचन के लिए आवश्यक प्रतिबन्ध- फिल्टर परिपथ से जुड़े संधारित्र की धारिता इतनी होनी चाहिए कि
(1) जब रेडियो आवृत्ति fc के लिए, प्रतिघात \(\left(x_{C}=\frac{1}{2 \pi f_{c} C_{B}}\right)\) प्रतिरोध RL की तुलना में बहुत कम हो,
अर्थात् xc << RL अथवा \(\frac{1}{2 \pi f_{c} C_{B}}<<R_{L}\).

(2) जब श्रव्य आवृत्ति fm के लिए, प्रतिघात, प्रतिरोध RL की तुलना में बहुत अधिक हो,
अर्थात् \(\frac{1}{\omega_{m} C_{B}}>>R_{L}\) अथवा \(\frac{1}{2 \pi f_{m} C_{B}}>>R_{L}\)

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संचार व्यवस्था  लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
संचार व्यवस्था से क्या तात्पर्य है? इसके कौन-कौन से अवयव है?
उत्तर
संचार व्यवस्था-सन्देशों अथवा सूचनाओं को किसी विधि द्वारा एक स्थान से सम्प्रेषित करके दूसरे स्थान पर ग्रहण करने की व्यवस्था को संचार व्यवस्था कहते हैं। इसके तीन अवयव हैं-

  • प्रेषित्र
  • संचार चैनल तथा
  • अभिग्राही।

प्रश्न 2.
ट्रान्सड्यूसर क्या है?
उत्तर
ट्रान्सड्यूसर-एक ऐसी युक्ति जो ऊर्जा के एक रूप को दूसरे में परिवर्तित कर देती है, ट्रान्सड्यूसर कहलाती है।

प्रश्न 3.
सिग्नल की बैण्ड-चौड़ाई से आप क्या समझते हैं? [2014, 17]
उत्तर
बैण्ड-चौड़ाई-अधिकतम तथा न्यूनतम आवृत्तियों के अन्तर को आवृत्ति परास अथवा सिग्नल की बैण्ड-चौड़ाई कहते हैं।

प्रश्न 4.
क्षीणता क्या होती है?
उत्तर
क्षीणता-संचार माध्यम में संचरण के समय सिग्नल की प्रबलता में क्षति होने की प्रक्रिया क्षीणता कहलाती है।

प्रश्न 5.
मॉडुलेशन से क्या तात्पर्य है? [2015]
अथवा मॉडुलन का क्या अर्थ है?[2015, 16, 17]
उत्तर
मॉडुलन अथवा मॉडुलेशन-वह क्रिया जिसमें प्रेषित्र (प्रेषी) पर, निम्न आवृत्ति की विद्युतचुम्बकीय तरंगों को उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों पर अध्यारोपित कराया जाता है, मॉडुलन अथवा मॉडुलेशन कहलाती है।

प्रश्न 6.
मॉडुलित तरंग क्या है? [2014]
उत्तर
मॉडुलित तरंग- मॉडुलन अथवा मॉडुलेशन की प्रक्रिया के फलस्वरूप प्राप्त परिणामी तरंग मॉडुलित तरंगा कहलाती है।

प्रश्न 7.
आयाम मॉडुलन का अर्थ स्पष्ट कीजिए। [2014, 16, 17]
उत्तर
आयाम मॉडुलन (AM)-किसी उच्च आवृत्ति की वाहक तरंग के आयाम को ध्वनि तरंग के आयाम के अनुसार, परिवर्तित कर अध्यारोपित करने की प्रक्रिया आयाम मॉडुलन कहलाती है।

प्रश्न 8.
आवृत्ति मॉडुलन (FM) से आप क्या समझते हैं? [2016]
उत्तर
आवृत्ति मॉडुलन (FM)—जब उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों की आवृत्ति को श्रव्य संकेतों के संगत आयामों के अनुरूप परिवर्तित किया जाता है तो उनके परस्पर अध्यारोपण की प्रक्रिया आवृत्ति मॉडुलन कहलाती है। भारत में कुछ रेडियो स्टेशनों से तथा टेलीविजन प्रसारण में ध्वनि संकेतों को आवृत्ति मॉडुलित कर प्रसारित किया जाता है।

प्रश्न 9.
विमॉडुलन का क्या अर्थ है? [2015,17]
उत्तर
विमॉडुलन अथवा डिमॉडुलेशन-वह प्रक्रिया जिसमें अभिग्राही से प्राप्त मॉडुलेटिड तरंगों में से मूल वैद्युतचुम्बकीय तरंगों को अलग कर दिया जाता है विमॉडुलन अथवा डिमॉडुलेशन कहलाती है।

प्रश्न 10.
आयाम मॉडुलेशन संचार व्यवस्था में बैण्ड-चौड़ाई का सूत्र क्या है? [2017]
उत्तर
आयाम मॉडुलित तरंग की बैण्ड-चौड़ाई = (fc + fm)- (fc – fm)= 2fm.

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प्रश्न 11.
वाहक तरंगें क्या होती हैं? समझाइए। [2018]
उत्तर
वाहक तरंगें उच्च आवृत्ति तथा नियत आयाम की वे विद्युतचुम्बकीय तरंगें जो पृथ्वी तल पर श्रव्य आवृत्ति की तरंगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती हैं वाहक तरंगें कहलाती हैं। .

प्रश्न 12.
प्रसारण से पूर्व ध्वनि तरंगों को मॉडुलित करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर
ध्वनि तरंगों को बिना मॉडुलित किए प्रसारित करने के लिए अधिक ऊँचाई (7.5 किमी) के प्रसारण ऐन्टिना की आवश्यकता होती है, जिसे लगा पाना असम्भव है। इसके अतिरिक्त इन तरंगों की ऊर्जा कुछ दूरी तक जाते-जाते समाप्त हो जाती है।

प्रश्न 13.
भू-तरंगें क्या हैं?
उत्तर
भू-तरंगें- यदि प्रेषित्र ऐन्टिना से कोई रेडियो तरंग अभिग्राही ऐन्टीना पर सीधे अथवा पृथ्वी से परावर्तित होकर पहुँचती है तो वे भू-तरंगें कहलाती हैं।

प्रश्न 14.
ट्रान्सपोंडर किसे कहते हैं?
उत्तर
ट्रान्सपोंडर-ट्रान्सपोंडर संचार उपग्रह में लगाई जाने वाली एक ऐसी युक्ति है जो सिग्नल को ग्रहण करके उन्हें प्रवर्धित करती है तथा उनका पुनः प्रसारण करती है।

प्रश्न 15.
भू-स्थैतिक (geo-stationary) अथवा तुल्यकाली उपग्रह का क्या अर्थ है?
उत्तर
भू-स्थैतिक अथवा तुल्यकाली उपग्रह- यह एक ऐसा उपग्रह होता है जो पृथ्वी के किसी एक स्थान के सापेक्ष स्थिर रहता है। इस उपग्रह का पृथ्वी के विषुवत् तल में परिक्रमण काल 24 घण्टा होता है। इसे तुल्यकाली उपग्रह (geo-synchronus satellite) भी कहते हैं।

प्रश्न 16.
क्या लम्बी दूरी के दूरदर्शन प्रसारण के लिए उपग्रह को प्रयोग करना आवश्यक है?
उत्तर
हाँ, दूरदर्शन प्रसारण में अति उच्च आवृत्ति की (UHF) तरंगों का प्रयोग किया जाता है। ये तरंगें पृथ्वी के आयनमण्डल को पार करके अन्तरिक्ष में निकल जाती हैं। अतः इन्हें पृथ्वी पर वापस भेजने के लिए उपग्रहों का उपयोग करना आवश्यक है।

प्रश्न 17.
अधिकतम दृष्टि रेखा दूरी के लिए सूत्र लिखिए।
उत्तर
अधिकतम दृष्टि रेखा दूरी dm = dT + dR = \(\sqrt{2 R h_{T}}+\sqrt{2 R h_{R}}\)

प्रश्न 18.
आकाश तरंगों का संचरण किन विधियों से किया जाता है? [2017]
उत्तर

  • भू-स्थिर संचार उपग्रहों के द्वारा तथा
  • सीधे प्रेषित ऐन्टिना के द्वारा।

प्रश्न 19.
क्रान्तिक आवृत्ति से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
क्रान्तिक आवृत्ति-वह अधिकतम आवृत्ति, जो आयनमण्डल द्वारा परावर्तित हो सकती है क्रान्तिक आवृत्ति कहलाती है। इसे ‘fc‘ से प्रदर्शित करते हैं। \(f_{c}=9 \sqrt{N_{\mathrm{max}}}\)
जहाँ Nmax आयनमण्डल की उस परत का (जहाँ पर परावर्तन होता है) अधिकतम इलेक्ट्रॉन घनत्व है।

प्रश्न 20. सिद्ध कीजिए कि आकाश तरंगों के संचरण हेतु एक टी०वी० प्रेषी ऐन्टिना जो पृथ्वी तल से ऊँचाई पर है, का प्रसारण परास \(d=\sqrt{2 R h}\) है, जहाँ R पृथ्वी की त्रिज्या है। [2015]
उत्तर
प्रेषित्र ऐन्टिना की पृथ्वी से ऊँचाई (h) तथा पृथ्वी पर उसके परास (d) में सम्बन्ध-माना प्रेषित्र ऐन्टिना (T) की । पृथ्वी से ऊँचाई h है तथा पृथ्वी का केन्द्र 0 व त्रिज्या R है। पृथ्वी की वक्रता के कारण पृथ्वी सतह के बिन्दुओं A व B से दूर सिग्नल प्राप्त नहीं किए जा सकते। यहाँ AT व BT क्रमशः बिन्दुओं A व B पर स्पर्श रेखाएँ हैं। माना d ऐन्टिना के आधार से पृथ्वी की दूरी है जहाँ तक सिग्नल प्राप्त होते हैं।
त्रिभुज TOA में,
OT2 = (OA)2 + (AT)2
जहाँ OT = R+ h, OA = R, AP ≈ AT = d ∵ h << R
अतः (R+ h)2 = R2 + d2
अतः R2 + h2 +2Rh = R2 +d2
अथवा h2 +2Rh = d2
अथवा  2Rh ≈ d2
प्रसारण परास \(d=\sqrt{2 R h}\)
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 13

संचार व्यवस्था  अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
संचार से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
संचार-सूचना के प्रसारण तथा अभिग्रहण की प्रक्रिया को संयुक्त रूप से संचार कहा जाता है।

प्रश्न 2.
संचार व्यवस्था का नाम बताइए जिसमें\

  • सिग्नल, सूचना अथवा संदेश के समरूप तथा सतत होते हैं,
  • सिग्नल, मूल सूचना के द्विआधारी पद्धति में परिवर्तित रूप में होते हैं।

उत्तर

  • ऐनालोग (analog) संचार व्यवस्था,
  • डिजिटल (digital) संचार व्यवस्था।

प्रश्न 3.
दिए गए ब्लॉक आरेख में संचार व्यवस्था के x तथा Y भागों को पहचानिए [2017]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 14
उत्तर
X-सूचना स्रोत, Y-चैनल।

प्रश्न 4.
मॉडुलन सूचकांक क्या है? इसकी क्या महत्ता है? अथवा मॉडुलन गुणांक की परिभाषा दीजिए। [2017]
उत्तर
मॉडुलन सूचकांक अथवा गुणांक-मॉडुलक तरंग के आयाम (Em) तथा वाहक तरंग के आयाम (Ec) के अनुपात को मॉडुलन सूचकांक अथवा गुणांक कहते हैं। इसे ‘ma‘ से प्रदर्शित करते हैं।
\(m_{a}=\frac{E_{m}}{E_{c}}\)
महत्ता- मॉडुलन सूचकांक, मॉडुलन तरंग की गुणवत्ता को प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 5.
मॉडुलक का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
मॉडुलक- किसी उच्च आवृत्ति की वाहक तरंग को मॉडुलित करने वाली युक्ति मॉडुलक कहलाती है।

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प्रश्न 6.
आयाम मॉडुलन का अर्थ स्पष्ट कीजिए। [2014, 16]
उत्तर
आयाम मॉडुलन- किसी उच्च आवृत्ति की वाहक तरंग के आयाम को ध्वनि तरंग के आयाम के अनुसार परिवर्तित कर अध्यारोपित करने की प्रक्रिया आयाम मॉडुलन कहलाती है।

प्रश्न 7.
ध्वनि सिग्नल के व्यापार प्रसारण में कौन-सा मॉडुलन प्रयोग किया जाता है?
उत्तर
आयाम मॉडुलन।

प्रश्न 8.
दूरदर्शन के प्रसारण में कौन-सा मॉडुलन प्रयोग किया जाता है?
उत्तर
आवृत्ति मॉडुलन।

प्रश्न 9.
ऐन्टिना का क्या कार्य है? इसकी न्यूनतम लम्बाई कितनी होती है? [2017]
उत्तर
ऐन्टिना का कार्य–ऐण्टिना तरंगों को प्रेषित व ग्रहण करने के लिए प्रेषित व अभिग्राही में प्रयुक्त किया जाता है। ऐन्टिना की न्यूनतम लम्बाई = \(\frac { λ }{ 4 }\)

प्रश्न 10.
ऐन्टिना द्वारा प्रभावी विकिरित शक्ति तरंगदैर्घ्य के साथ किस प्रकार परिवर्तित होती है?
उत्तर
\(P \propto \frac{1}{\lambda^{2}}\)

प्रश्न 11.
वाहक तरंगों की आवृत्ति कितनी होनी चाहिए?
उत्तर
वाहक तरंगों की आवृत्ति उच्च (किलोहर्ट्स से गीगाहर्ट्स की परास में) होनी चाहिए।

प्रश्न 12.
आयाम मॉडुलेशन संचार व्यवस्था में बैण्ड-चौड़ाई का सूत्र क्या है?
उत्तर
आयाम मॉडुलित तरंग की बैण्ड-चौड़ाई = (fc + fm) – (fc – fm)= 2fm.

प्रश्न 13.
आयाम मॉडुलित तरंग में तीन आवृत्तियाँ कौन-सी हैं? अथवा आयाम मॉडुलित तरंगों में उपस्थित आवृत्तियों का उल्लेख कीजिए। [2016]
उत्तर
तीन आवृत्तियाँ हैं
निम्न पार्श्व बैण्ड आवृत्ति (fc – fm) उच्च पार्श्व बैण्ड आवृत्ति (fc + fm) तथा वाहक तरंग की आवृत्ति (fc) जहाँ (fm) मॉडुलन तरंग की आवृत्ति है।

प्रश्न 14.
LSB तथा USB क्या हैं?
उत्तर
निम्न पार्श्व बैण्ड आवृत्ति LSB = (fc – fm) तथा उच्च पार्श्व बैण्ड आवृत्ति USB = (fc + fm)

प्रश्न 15.
आवृत्ति मॉडुलन (FM) से आप क्या समझते हैं? [2016]
उत्तर
आवृत्ति मॉडुलन (FM)- जब उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों की आवृत्ति को श्रव्य संकेतों के संगत आयामों के अनुरूप परिवर्तित किया जाता तो उनके परस्पर अध्यारोपण की प्रक्रिया आवृत्ति मॉडुलन कहलाती है। भारत में कुछ रेडियो स्टेशनों से तथा टेलीविजन प्रसारण में ध्वनि संकेतों को आवृत्ति मॉडुलित कर प्रसारित किया जाता है।

प्रश्न 16.
विमॉडुलन का क्या अर्थ है? [2015]
उत्तर
विमॉडुलन अथवा डिमॉडुलेशन-वह प्रक्रिया जिसमें अभिग्राही से प्राप्त मॉडुलेटिड तरंगों में से मूल विद्युतचुम्बकीय तरंगों को अलग कर दिया जाता है विमॉडुलन अथवा डिमॉडुलेशन कहलाती है।

प्रश्न 17.
टी०वी० संकेतों का आवृत्ति परास कितना है इनका सम्प्रेषण किस प्रकार करते हैं?
उत्तर
30 मेगाहर्ट्स से 300 मेगाहर्ट्स तक। इनका सम्प्रेषण ऐनालोग की संचार विधि से करते हैं।

प्रश्न 18.
15 किलोहर्ट्स से उच्च आवृत्ति की तरंगों का प्रसारण भू-तरंगों द्वारा क्यों सम्भव नहीं है?
उत्तर
15 किलोह से उच्च आवृत्ति की तरंगें थोड़ी ही दूरी पर पृथ्वी की सतह द्वारा अवशोषित कर ली जाती हैं। अत: इनका प्रसारण भू-तरंगों द्वारा सम्भव नहीं है।

प्रश्न 19.
30 मेगाहर्ट से उच्च आवृत्ति की तरंगों का प्रसारण व्योम तरंगों द्वारा सम्भव नहीं है, क्यों?
उत्तर
30 मोगाहर्ट्स से उच्च आवृत्ति की तरंगें पृथ्वी के आयनमण्डल द्वारा वापस पृथ्वी की ओर परावर्तित नहीं होती, अपितु आयनमण्डल को पार करके अन्तरिक्ष से निकल जाती हैं। इसी कारण इनका प्रसारण व्योम तरंगों द्वारा सम्भव नहीं है।

प्रश्न 20.
व्योम तरंगें क्या है? इसकी आवृत्ति परास बताइए। [2014, 17]
उत्तर
व्योम तरंगें (Sky waves)-वे रेडियो तरंगें जो पृथ्वी के आयनमण्डल द्वारा वापस पृथ्वी की ओर परावर्तित कर दी जाती हैं, व्योम तरंगें कहलाती हैं। इनकी आवृत्ति 3 मेगाहर्ट्स से 30 मेगाहर्ट्स के बीच होती है।

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प्रश्न 21.
व्योम तरंग का संचरण क्या है?
उत्तर
व्योम तरंग का संचरण-व्योम तरंगों का संचरण वायुमण्डल में उपस्थित आयनमण्डल के कारण होता है जिसके गुण समय के साथ-साथ बदलते रहते हैं। इस प्रकार व्योम तरंगों द्वारा संचरण अविश्वसनीय है। आयनमण्डल की ऊँचाई पृथ्वी की सतह से लगभग 80 किमी से 400 किमी तक होती है।

प्रश्न 22.
आकांश तरंगें क्या हैं? इन तरंगों के संचरण के लिए प्रयुक्त आवृत्ति परास क्या है? [2014, 15, 17]
उत्तर
आकाश तरंगें (Space Waves)-आकाश तरंगें प्रेषी ऐन्टिना से सीधे, पृथ्वी तल से परावर्तन के पश्चात् अभिग्राही पर लौट आती हैं, इसीलिए इनके संचरण को क्षोभमण्डलीय संचरण भी कहते हैं। इनकी आवृत्ति 40 मेगाहर्ट्स से 300 मेगाहर्ट्स होती है।

प्रश्न 23.
आकाश तरंग संचरण क्या है?
उत्तर
आकाश तरंग संचरण-तरंग संचरण की वह प्रक्रिया, जिसमें आकाश तरंगें, प्रेषण ऐन्टिना से अभिग्राही ऐन्टिना तक दृष्टि रेखा पथ पर गमन करती हैं, आकाश तरंग संचरण कहलाता है।

प्रश्न 24.
तरंगसंचरण में ‘दृष्टि रेखा पथ (LOS) से क्या तात्पर्य है? किन तरंगों में इसका प्रयोग होता है? [2008]
उत्तर
दृष्टि रेखा पथ (LOS)-प्रेषी से ग्राही तक तरंगों के सीधे सरल रेखीय पथ को दृष्टि रेखा पथ (LOS) कहते हैं। आकाश तरंग संचरण दृष्टि रेखा पथ (LOS) से सीमित होता है।

प्रश्न 25.
भू-तरंगों की आवृत्ति कितनी होती है?
उत्तर
500 किलोह से 1500 किलोहर्ट्स तक।

प्रश्न 26.
विद्युतचुम्बकीय तरंगों के संचरण की तीन विधियाँ लिखिए। [2015]
उत्तर

  • भू-तरंगों का संचरण
  • व्योम तरंगों का संचरण तथा
  • आकाश तरंगों का संचरण।

प्रश्न 27.
सूक्ष्म तरंगों (microwaves) के संचार में बार-बार अभिग्रहण तथा पुनः प्रसारण की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर
क्योंकि ये तरंगें दृष्टि रेखा संचार व्यवस्था द्वारा प्रसारित होती हैं।

प्रश्न 28.
सम्पूर्ण पृथ्वी को दूर संचार सिग्नलों से आच्छादित करने के लिए कितने भू-स्थैतिक उपग्रह आवश्यक हैं?
उत्तर
कम-से-कम तीन।

प्रश्न 29.
कौन-सी तरंगों का प्रसारण दृष्टि रेखा संचरण के द्वारा होता है?
उत्तर
आकाश तरंगों का।

प्रश्न 30.
प्रकाशिक तन्तु (optical fibre) का सिद्धान्त बताइए।
उत्तर
प्रकाशिक तन्तु पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के सिद्धान्त पर कार्य करता है।

संचार व्यवस्था आंकिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
एक दूरदर्शन टावर की ऊँचाई 75 मीटर है। अधिकतम दूरी क्या है जो यह दूरदर्शन प्रसारण ग्रहण कर सकता है? [2015]
हल
अधिकतम दूरी d = \(\sqrt{2 R h}=\sqrt{2 \times 6.4 \times 10^{6} \times 75}\)
= 30.98 × 103 मीटर।

प्रश्न 2.
प्रेषण एन्टिना की ऊँचाई क्या होगी यदि टी०वी० प्रसारण 128 किमी तक पहुँचाना है? [2018]
हल
दिया है, d = 128 किमी = 128 × 103 मीटर, R= 6.4 × 106 मीटर
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 15

प्रश्न 3.
एक टी०वी० टावर की ऊँचाई 45 मीटर है। इसकी विस्तार दूरी क्या होगी? इन संकेतों को 40 किमी की दूरी पर प्राप्त करने के लिए अभिग्राही ऐन्टिना की न्यूनतम ऊँचाई क्या होगी? (पृथ्वी की त्रिज्या = 6400 किमी)
हल
दिया है, टी०वी० टावर की ऊँचाई (hT) = 45 मीटर, पृथ्वी की त्रिज्या (R) = 6400 किमी = 6400 × 103 मीटर
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 16
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 17

प्रश्न 4.
किसी प्रेषी एन्टिना की ऊँचाई 72 मीटर है। यदि पृथ्वी की त्रिज्या 6250 किमी ली जाए तो एन्टिना द्वारा प्रसारण के लिए प्रसारण क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। [2018]
हल :
प्रसारण क्षेत्रफल (A) = πd2 = π × 2 Rh
= 3.14 × 2 × 6250 x 103 × 72 = 2.826 × 109 मीटर2
= 2826 किमी2

प्रश्न 5.
एक टी०वी० टावर की ऊँचाई एक दिए गए स्थान पर 500 मीटर है। यदि पृथ्वी की त्रिज्या 6400 किमी हो, तो – इसके प्रसारण परास की गणना कीजिए। [2015, 17]
हल
दिया है, h = 500 मीटर, R= 6400 किमी = 6400 × 103 मीटर
प्रसारण परास = \(\sqrt{2 h R}=\sqrt{2 \times 500 \times 6400 \times 10^{3}}\)
= 80 × 103 मीटर = 80 किमी।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.
एक वाहक तरंग प्रदर्शित की जाती है
C(t) = 4 sin (8πt) वोल्ट
यदि मॉडुलक सिग्नल तरंग का आयाम 1.0 वोल्ट हो, तब मॉडुलन सूचकांक का मान क्या है?
उत्तर
दिया है, Em = 1.0 वोल्ट, Ec = 4.0 वोल्ट, mα = ?
मॉडुलन सूचकांक mα = \(\frac{E_{m}}{E_{c}}\) = \(\frac { 1 }{ 4 }\) ≈ 0.25.

प्रश्न 7.
किसी मॉडुलित वाहक तरंग का समीकरण e = 100 (1+ 0.5 cos 3000 π t) cos 4 × 106 π t है। ज्ञात कीजिए,

  1. वाहक तरंग की आवृत्ति।
  2. इस आवृत्ति पर आवश्यक एन्टिना की लम्बाई। [2018]]

हल
दी गई समीकरण की तुलना e = Ec (1+ mα cos ωmt) cos ωct से करने पर,
ωc= 4 x 106
1. वाहक तरंग की आवृत्ति (fc) = \(\frac{\omega_{c}}{2 \pi}=\frac{4 \times 10^{6}}{2 \times 3.14}\)= 6. 37x 105 हर्टस।

2. तरंग की तरंगदैर्घ्य λ = \(\frac{c}{f_{c}}=\frac{3 \times 10^{8}}{6.37 \times 10^{5}}\) = 471 मीटर
एन्टिना की लम्बाई l =\(\frac { λ }{ 4 }\)= \(\frac { 471 }{ 4 }\)= 117.75 मीटर।

प्रश्न 8.
2 × 105 हर्ट आवृत्ति तथा अधिकतम वोल्टेज 60 वोल्ट के वाहक तरंग को श्रव्य तरंग em = 30 sin 2 π X 2500 t वोल्ट द्वारा मॉडुलित किया जाता है। ज्ञात कीजिए-

  1. मॉडुलन प्रतिशतता तथा
  2. मॉडुलित तरंग के घटकों की आवृत्ति। [2017]

हल
1. मॉडुलित प्रतिशतता = \(\frac{E_{m}}{E_{c}}\) x 100 = \(\frac { 30 }{ 60 }\) = 50%

2. fc= 2×105 हर्ट्स = 200 kHz
fm = 2500 हर्ट्स = 2.5 kHz
USB= fc + fm = 200+ 2.5 = 202.5 kHz
LSB= fc– fm = 200 – 2.5 = 197.5 kHz.

प्रश्न 9.
आयाम मॉडुलित वोल्टेज का मान e = 150[1+0. 5cos 3250t]cos5x105t से दिया जाता है। गणना कीजिए

  1. मॉडुलन सूचकांक,
  2. मॉडुलन आवृत्ति,
  3. वाहक आवृत्ति तथा
  4. वाहक आयाम। ‘

हल
आयाम मॉडुलित वोल्टेज की सामान्य समीकरण
e = Ec (1+ mα cosωmt)cosωct से दी गयी समीकरण
e = 150 [1+ 0.5cos 3250 t]cos 5×105t की तुलना करने पर,
Ec = 150 वोल्ट, mα = 0.5, ωm = 3250, ωc= 5×105

  1. मॉडुलन सूचकांक ma = 0.5 = 50%.
  2. मॉडुलन आवृत्ति (fm) = \(\frac{\omega_{m}}{2 \pi}=\frac{3250}{2 \times 3.14}\)= 517.5 हर्ट्स।
  3. वाहक आवृत्ति (fc) = \(\frac{\omega_{c}}{2 \pi}=\frac{5 \times 10^{5}}{2 \times 3.14}\)= 79.6×103 हर्ट्स = 79.6 किलोहर्ट्स।
  4. वाहक आयाम Ec = 150 वोल्ट।

प्रश्न 10.
मॉडुलित वाहक तरंग के अधिकतम व न्यूनतम आयाम क्रमशः 900 मिर वोल्ट तथा 300 मिलीवोल्ट हैं। मॉडुलन प्रतिशत ज्ञात कीजिए। [2015]
हल
दिया है, मॉडुलित वाहक तरंग के लिए Emax = 900 मिलीवोल्ट, Emin = 300 मिलीवोल्ट
मॉडलन गणांक (mα) =
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 19
∴ मॉडुलन प्रतिशत = 0.5 x 100 = 50%.

प्रश्न 11.
किसी दिन आयनमण्डल से परावर्तित अधिकतम आवृत्ति 10 मेगाहर्ट्स है। किसी दूसरे दिन यह घटकर 8 मेगाहर्ट्स पायी जाती है। इन दो दिनों में आयनमण्डल के अधिकतम इलेक्ट्रॉन घनत्वों की निष्पत्ति बताइए।
हल
क्रान्तिक आवृत्तियाँ (fc)1 = 10 मेगाहर्ट्स, (fc)2 = 8 मेगाहर्ट्स
क्रान्तिक आवृत्ति fc = \(9 \sqrt{N_{\max }}\)
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 20

प्रश्न 12.
एक वाहक तरंग जिसकी शिखर वोल्टता 12 वोल्ट है किसी संदेश सिग्नल को प्रेषित करने के लिए उपयोग की जाती है। मॉडुलित सिग्नल की शिखर वोल्टता क्या होनी चाहिए जिससे मॉडुलन सूचकांक 75% प्राप्त हो? [2014]
हल
दिया है, वाहक तरंग की शिखर वोल्टता (Ec) = 12 वोल्ट
मॉडुलन सूचकांक (mα) = 75% = 0.75
मॉडुलन सूचकांक (mα)= \(\frac{E_{m}}{E_{c}}\)
मॉडुलन सिग्नल की शिखर वोल्टता Em = mα x Ec = 0.75 x 12 = 9 वोल्ट।

प्रश्न 13.
एक मॉडुलित तरंग का अधिकतम आयाम 11 वोल्ट तथा न्यूनतम आयाम 3 वोल्ट है। मॉडुलन सूचकांक ज्ञात कीजिए। [2014]
हल
दिया है, Emax = 11 वोल्ट, Emin = 3 वोल्ट, mα = ?
∴ Emax = Ec + Em = 11 वोल्ट तथा Emin = Ec – Em = 3 वोल्ट
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 21

प्रश्न 14.
एक आयाम मॉडुलित वाहक तरंग का अधिकतम एवं न्यूनतम आयाम क्रमशः 8 वोल्ट तथा 2 वोल्ट है। मॉडुलेशन सूचकांक का मान ज्ञात कीजिए। [2016]
हल
दिया है, Emax= 8 वोल्ट, Emin = 2 वोल्ट, mα = ?
मॉडलेशन सूचकांक (mα) = \(\frac{E_{\max }-E_{\min }}{E_{\max }+E_{\min }}\)
=\(\frac { 8-2 }{ 8+2 }\)= \(\frac { 6 }{ 10 }\) = 0.6.

प्रश्न 15.
एक वाहक तरंग का आयाम 500 मिलीवोल्ट है। मॉडुलक सिग्नल के कारण यह 200 मिलीवोल्ट से 800 मिलीवोल्ट तक बदलता है। मॉडुलन गुणांक तथा प्रतिशत मॉडुलन की गणना कीजिए। [2018]
हल
दिया है, Ec = 500 मिली वोल्ट, Emin = 200 मिलीवोल्ट, Emax = 800 मिली वोल्ट
Emax = Ec + Em
Em = Emax – Ec
= 800 – 500 = 300 मिलीवोल्ट
मॉडुलन गुणांक (mα) =
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 22
प्रतिशत मॉडुलन = 0.6 x 100 = 60%
अथवा मॉडलेशन गणांक (mα) = \(\frac{E_{\max }-E_{\min }}{E_{\max }+E_{\min }}\) = \(\frac { 800-200 }{ 800+200 }\) = \(\frac { 600 }{ 1000 }\) =0.6
प्रतिशत मॉडुलन = 0.6 × 100 = 60%.

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प्रश्न 16.
एक मॉडुलक सिग्नल एक वर्गाकार तरंग है। वाहक तरंग e(t)= 2 sin (8πt) वोल्ट है। आयाम मॉडुलित तरंग का रेखाचित्र खींचिए। [2014]
हल
चित्र-15.11 में एक मॉडुलक सिग्नल एक वर्गाकार तरंग प्रदर्शित है
दिया है, e (t) = 2 sin (8πt)
यहाँ Ec = 2 वोल्ट
तथा Em = 1 वोल्ट
अतः Ec + Em = 2 + 1 = 3 वोल्ट
तथा Ec – Em = 2 – 1 = 1 वोल्ट
ωc = 8π, अत: 2 π fc = 8π
अथवा fc = 4 प्रति सेकण्ड।
आवर्तकाल T = \(\frac{1}{f_{c}}\) = \(\frac { 1 }{ 4 }\) = 0.25 सकण्ड।
अतः आयाम मॉडुलित तरंग चित्र-15.12 में प्रदर्शित है।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 15 संचार व्यवस्था 233

संचार व्यवस्था  बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

• निम्नलिखित प्रश्नों के चार विकल्प दिए गए हैं। सही विकल्प का चयन कीजिए

1. उच्च आवृत्ति तरंगों पर सन्देश सिग्नल के अध्यारोपण की प्रक्रिया कहलाती है [2016]
(a) संचरण
(b) मॉडुलन
(c) संसूचन
(d) अभिग्रहण।
उत्तर
(b) मॉडुलन

2. किसी रेखीय ऐन्टिना द्वारा विकिरित शक्ति तरंगदैर्घ्य पर किस प्रकार निर्भर करती है [2014]
(a) P ∝ λ
(b) P∝ λ2
(c) P∝\(\frac { 1 }{ λ }\)
(d) P∝\(\frac{1}{\lambda^{2}}\)
उत्तर
(d) P∝\(\frac{1}{\lambda^{2}}\)

3. सन्देश सिग्नल को किसी ऐन्टिना द्वारा प्रेषित करने के लिए उसकी न्यूनतम लम्बाई होनी चाहिए
(a) λ
(b) \(\frac { λ }{ 2 }\)
(c) \(\frac { λ}{ 4 }\)
(d) \(\frac { λ }{ 8 }\)
उत्तर
(c) \(\frac { λ}{ 4 }\)

4. एक ऐन्टिना एक अनुनादी परिपथ की भाँति कार्य तभी करता है जबकि उसकी लम्बाई ( λ = तरंगदैर्घ्य ) हो
(a) \(\frac { λ }{ 8 }\)
(b) \(\frac { λ}{ 4 }\)
(c) \(\frac { λ }{ 2 }\) की पूर्णांक गुणज
(d) \(\frac { λ}{ 4 }\) की विषम गुणज।
उत्तर
(b) \(\frac { λ}{ 4 }\)

5. टी०वी० प्रसारण के लिए प्रयुक्त आवृत्ति परास होता है
(a) 30 मेगाहर्ट्स -300 मेगाहर्ट्स
(b) 30 गीगाहर्ट्स-300 गीगाहर्ट्स
(c) 30 किलोहर्ट्स-300 किलोहर्ट्स
(d) 30 हर्ट्स- 300 हर्ट्स।
उत्तर
(a) 30 मेगाहर्ट्स -300 मेगाहर्ट्स

6. वाहक तरंग की आवृत्ति fm के साथ श्रव्य तरंग आवृत्ति fm के आयाम मॉडुलेशन से प्राप्त बैण्ड-चौड़ाई का मान होगा [2015]
अथवा fc आवृत्ति की वाहक तरंग fm आवृत्ति की श्रव्य तरंग द्वारा आयाम मॉडुलित की जाती है। मॉडुलित तरंग की बैण्ड चौड़ाई होगी [2018]
(a) 2fc
(b) 2fm
(c) fc + fm
(d) fc – fm.
उत्तर
(b) 2fm

7. आयाम मॉडुलित तरंग में मॉडुलन सूचकांक है
(a) सदैव शून्य .
(b) 0 तथा 1 के बीच
(c) 1 तथा अनन्त के बीच
(d) सदैव अनन्त।
उत्तर
(b) 0 तथा 1 के बीच

8. आयाम मॉडुलेशन तरंग निम्न के योग के समतुल्य है [2014]
(a) दो ज्यावक्रीय तरंगें
(b) तीन ज्यावक्रीय तरंगें
(c) चार ज्यावक्रीय तरंगें
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(b) तीन ज्यावक्रीय तरंगें

9. रेडियो तरंग के प्रसारण के लिए मॉडुलन है [2014]
(a) आयाम माडुलन
(b) कला मॉडुलन
(c) आवृत्ति मॉडुलन
(d) इनमें से कोई नहीं।।
उत्तर
(a) आयाम माडुलन

10. 3 x 108 हर्ट्स आवृत्ति की वाहक तरंगों के लिए द्विधुवी ऐन्टिना की लम्बाई होनी चाहिए [2014] .
(a) 0.25 मीटर
(b) 0.50 मीटर
(c) 1.0 मीटर
(d) 4.0 मीटर।
उत्तर
(b) 0.50 मीटर

MP Board Solutions

11. यदि संप्रेषी ऐन्टिना की ऊँचाई h तथा अभिग्राही ऐन्टिना की ऊँचाई h2 है तो दृष्टिरेखीय (LOS) संचरण विधि में संतोषजनक संचरण के लिए दोनों ऐन्टिनों के बीच की अधिकतम दूरी होती है। (पृथ्वी की त्रिज्या R है)- [2016]
(a) \(\sqrt{2 h_{1} R+2 h_{2} R}\)
(b) \(\sqrt{h_{1} R}+\sqrt{h_{2} R}\)
(c) \(\sqrt{\left(h_{1}+h_{2}\right) R}\)
(d) \(\sqrt{2 h_{1} R}+\sqrt{2 h_{2} R}\)
उत्तर
(d) \(\sqrt{2 h_{1} R}+\sqrt{2 h_{2} R}\)

12. 200 किलोहर्ट्स की वाहक आवृत्ति और 10 किलोहर्ट्स के मॉडुलन संकेत के लिए आयाम मॉडुलित (AM) सिग्नल की बैण्ड-चौड़ाई होगी [2016]
(a) 20 किलोहर्ट्स
(b) 210 किलोहर्ट्स
(c) 400 किलोहर्ट्स
(d) 190 किलोहर्ट्स।
उत्तर
(a) 20 किलोहर्ट्स

13. 10 किलोहर्ट्स आवृत्ति तथा 10 वोल्ट शिखर वोल्टता के संदेश सिग्नल का उपयोग किसी 1 मेगाहर्ट्स आवृत्ति तथा
20 वोल्ट शिखर वोल्टता की वाहक तरंगों को मॉडुलित करने में किया गया है। उत्पन्न पार्श्व बैण्ड की आवृत्तियाँ होंगी [2018]
(a) 1000 किलोहर्ट्स तथा 900 किलोहर्ट्स
(b) 1010 किलोहर्ट्स तथा 990 किलोहर्ट्स
(c) 1010 किलोहर्ट्स तथा 1020 किलोहर्ट्स
(d) 11 मेगाहर्ट्स तथा 9 मेगाहर्ट्स।
उत्तर
(b) 1010 किलोहर्ट्स तथा 990 किलोहर्ट्स

14. व्योम तरंगों द्वारा क्षितिज से पार संचार के लिए निम्न में से कौन-सी आवृत्ति उपयुक्त होगी [2018]
(a) 10 किलोहर्ट्स
(b) 10 मेगाहर्ट्स
(c) 1 गीगाहर्ट्स
(d) 1000 गीगाहर्ट्स।
उत्तर
(b) 10 मेगाहर्ट्स

15. UHF परिसर की आवृत्तियों का प्रसारण प्रायः किस प्रकार की तरंगों द्वारा होता है [2018]
(a) भू-तरंग
(b) व्योमतरंगें
(c) पृष्ठीय तरंगें
(d) आकाश तरंगें।
उत्तर
(d) आकाश तरंगें।

16. आयन मण्डल से निम्न में से कौन-सी आवृत्ति परावर्तित हो सकती है [2018]
(a) 5 किलोहर्ट्स
(b) 5 मेगाहर्ट्स
(c) 5 गीगाहर्ट्स
(d) 500 मेगाहर्ट्स।
उत्तर
(b) 5 मेगाहर्ट्स

MP Board Class 12th Physics Important Questions

MP Board Class 12th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Listening and Speaking

MP Board Class 12th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Listening and Speaking

1.1 Phonetic Transcription

See Workbook Pages 1-2

Exercises

I. Pronounce the following words and list them in the given table separately according to the vowel sounds used in them. Also, look up these words in a dictionary and check your answer.
MP Board Class 12th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Listening and Speaking img 1
Answer:
Do yourself.

II. Pronounce the following words and list them in the given table separately according to the consonant sounds used in them. Also, look up these words in a dictionary and check your answer
MP Board Class 12th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Listening and Speaking img 2
Answer:
Do yourself.

III. Transcribe the words in the two exercises above, using the symbols given. Also, look up these words in a dictionary and check your answer.
Answer:
Do yourself.

MP Board Solutions

IV. Look for the marked similar sound in the given words and pick the odd one out. First, one has been done.
MP Board Class 12th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Listening and Speaking img 3
MP Board Class 12th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Listening and Speaking img 4
Answer:

2. cattle
3. suit
4. suggestion
5. breathe
6. lead
7. both
8. dare
9. luck
10. zoo
11. wish
12. boy
13. curd
14. great
15. hope.

1.2 Syllable Division

See Workbook Pages 6-7

Exercises

I. Indicate the number of syllables in each of the following words.
MP Board Class 12th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Listening and Speaking img 5
Answer:

2. be-t-ween
3. note-book
4. a-rrange-ment
5. e-co-no-mics
6. en-gi-nee-ring
7. s-tran-ge
8. re-fresh-ment
9. pho-to-gra-phic
10. sen-sa-tio-nal.

II. Transcribe the following words, divide them into syllables with a hyphen (-) and describe the structure of each syllable in terms of CVC.
Answer:
MP Board Class 12th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Listening and Speaking img 6
MP Board Class 12th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Listening and Speaking img 7
Consonant Clusters:

See Workbook Pages 10-11

Exercises

I. Give five examples of each of the following consonant clusters. Lookup a pronouncing dictionary and correct your answers.
1. Initial : CC
2. Final : -CC
3. Initial : CCC
4. Final : -CCC
Answer:

  1. place, play, pray, scream, A school.
  2. fixed, student, pump, task, adopt.
  3. Do yourself.
  4. Do yourself.

MP Board Solutions

II. Some Indian speakers of English find it difficult to pronounce certain English consonant clusters, depending on their mother tongue. List four initial or final clusters which indian speakers find difficult to pronounce. Give three examples of words in which they occur.
Answer:
See the dictionary and find yourself.

1.3 Word Stress

See Workbook Page 12

Exercises

Try and pronounce the following words. As you pronounce them, mark the stressed syllables and refer to a pronouncing dictionary to correct your stress marks.
MP Board Class 12th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Listening and Speaking img 8
Answer:
Do yourself.

Workbook Pages 12-14

Exercises

I. Transcribe the following words marking primary stress on them as given in the example:
Answer:
Do yourself.

II. Mark the stress and pronounce the following words as noun/adjective with accent on the first syllable and as verb with accent on the second syllable.

complete……..
reason …………
Patent ………….
credit …………..
support ………..
cement ……………
matter ………..
contact …………
report ………….
comment …………..

Answer:
Find them in the dictionary and do yourself.

III. Write the derivatives of the following words and show the shift of stress.
MP Board Class 12th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Listening and Speaking img 9
Answer:
Find in the dictionary and do yourself.

MP Board Solutions

1.4 Intonation

See Workbook Page 16

Exercises

Listen carefully and mark the correct stress and intonation, using the information given below.

  1. I like tea.
  2. The train leaves at five o’clock.
  3. What do you want?
  4. It is quite strange.
  5. You are happy, aren’t you?
  6. What a stupid mistake!
  7. Drop the letter.
  8. How did you know that?
  9. What a beautiful picture!
  10. Stand up.
  11. Do as I tell you.
  12. Well done.
  13. Can you meet me at eleven?
  14. Good Morning!

Answer:
Do yourself.

Exercises

I. Divide the following conversation, held at a medicine shop, into tone groups, using the markers
(/,*) Also locate the nucleus and mark the appropriate tone (i.e fall, rise, orfali—rise).

  • Customer : Hello.
  • Chemist : Hello. Can I help you?
  • Customer : Yes, please. Can I have these drugs?
  • Chemist : Let me look at the whole prescription. I want to make sure that we
    have all the drugs. Yes, I’ll take just five minutes to make it up.
  • Customer : Can I have a look at that face-wash?
  • Chemist : Certainly.
  • Customer : Is this effective?
  • Chemist : Yes, very much. It helps in reducing pimples.
  • Customer : How much it costs?
  • Chemist : Fifty rupees only.
  • Customer : Oh, that’s quite expensive.
  • Chemist : But it’s very effective.
  • Customer : Please give me the bill for the medicines.
  • Chemist : O.K. That’s fifty-five rupees.
  • Customer : Here’s a hundred.
  • Chemist : Here’s your change.
  • Customer : Thank you.

Answer:
Do yourself.

MP Board Solutions

II. Listen carefully and divide the following sentences into tone groups, using the markers
(/,*) Also locale the nucleus and mark the appropriate tone (i.e. fall, rise, or fall—rise).

  1. Although it was winter, the sun shone brightly.
  2. Last week they had a birthday party
  3. Suddenly they heard a loud explosion.
  4. They weren’t angry, were they?
  5. I went to see the doctor but he was not there.
  6. “Don’t play on the road,” shouted the father to his son.
  7. Its very late, I think.
  8. It was a film for adults only; so I went to the circus.
  9. I simply told him, “Truth always wins.”
  10. Your answer is correct, in my opinion.

Answer:
Do yourself.

Exercises

Mark the stressed words in the following sentences with the sign (‘). Also divide them into tone-
groups (II) necessary, showing the correct intonation.

  1. Phonetics is an interesting subject.
  2. Work hard if you want to pass the examination.
  3. I’ll see you the day after tomorrow.
  4. I met my friend after a gap of ten years.
  5. The prices of essential items are increasing day by day.
  6. If it doesn’t rain tomorrow, we’ll go for a picnic.
  7. Some of the things I enjoy most is swimming and cooking.
  8. I met with an accident, but luckily, I escaped with minor injuries.
  9. Divide it between the two of us as it is in surplus.
  10. Many foreigners who visit India are impressed with the diversity of culture it has got.
  11. Look before you leap.
  12. There is the house my father has built.
  13. Whenever you want a break, you are welcome to ask For it.
  14. Get me the book lest it might be lost.
  15. What Is allotted can’t be blotted.

Answer:
Do yourself.

Exercises.

Transcribe the sentences given in the previous exercise and underline the words which have undergone reduction.
Answer:
Do yourself.

MP Board Class 12th English Solutions

MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता

MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वैद्युत विभव से क्या तात्पर्य है? किसी बिन्दु आवेश के कारण किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। [2001, 02, 06, 15, 17]
अथवा
किसी बिन्दु आवेश के कारण उससे µ दूरी पर वैद्युत विभव के लिए सूत्र की गणना कीजिए। [2010]
उत्तर :
बिन्दु आवेश के कारण किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव (Electric Potential at a Point due to a Point Charge) – माना +q कूलॉम का बिन्दु आवेश, K परावैद्युतांक वाले माध्यम में बिन्दु 0 पर स्थित है (चित्र-2.19)। बिन्दु आवेश + q के कारण उत्पन्न वैद्युत क्षेत्र में बिन्दु O से r मीटर दूरी पर कोई बिन्दु A है, जहाँ पर वैद्युत विभव ज्ञात करना है।।
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माना रेखा OA पर, बिन्दु O से x मीटर की दूरी पर कोई बिन्दु B है, जिस पर परीक्षण आवेश +qp स्थित है। .. कूलॉम के नियमानुसार बिन्दु आवेश + q के कारण, परीक्षण आवेश +qo पर लगने वाला वैद्युत बल
\(F=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0} K} \frac{q q_{0}}{x^{2}}\)

वैद्युत विभव-वैद्युत क्षेत्र में, किसी धन परीक्षण आवेश (+ qo) को अनन्त से किसी बिन्दु तक लाने में किए गए कार्य (W) तथा परीक्षण आवेश के अनुपात को उस बिन्दु पर वैद्युत विभव कहते हैं। इसे ‘V’ से प्रदर्शित करते हैं।

वैद्युत विभव V = \(\frac{W}{q_{0}}\)

इसका मात्रक ‘जूल/कूलॉम’ या ‘वोल्ट’ है। यह एक अदिश राशि हैं।
परीक्षण आवेश +qo को बल F के विरुद्ध, बिन्दु B से बिन्दु C तक अनन्त सूक्ष्म दूरी dx लाने में किया गया अल्पांश कार्य
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प्रश्न 2.
बिन्दु आवेशों के निकाय के कारण किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर :
बिन्दु आवेशों के निकाय के कारण किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव-वैद्युत विभव अदिश राशि है। इसकी दिशा नहीं होती है; अत: किसी बिन्दु पर कई आवेशों के कारण विभव को बीजगणितीय विधि से जोड़कर प्राप्त कर सकते हैं। यदि कोई बिन्दु, + q1,-q2,- -q3 तथा + q4 कूलॉम के बिन्दु आवेशों से क्रमशः r1 , r2 , r3 तथा r4 मीटर की दूरी पर हों तो उस बिन्दु पर परिणामी वैद्युत विभव, पृथक्-पृथक् वैद्युत आवेशों के कारण उत्पन्न वैद्युत विभवों के बीजगणितीय योग के बराबर होगा।
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प्रश्न 3.
वैद्युत द्विध्रुव से क्या तात्पर्य है? किसी वैद्युत द्विधुव के कारण अक्षीय स्थिति में उत्पन्न वैद्युत विभव के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। [2007, 08, 14, 18]
अथवा
किसी वैद्युत द्विध्रुव की अक्ष (अनुदैर्ध्य स्थिति) पर स्थित किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव का सूत्र स्थापित कीजिए। [2012, 14, 15, 16, 17]
उत्तर :
वैद्युत द्विध्रुव-दो समान परिमाण एवं विपरीत प्रकृति के बिन्दु आवेशों को अत्यन्त निकट रखने पर बना निकाय, वैद्युत द्विध्रुव कहलाता है।
उदाहरण-HCl का अणु, H2O का अणु आदि।
वैद्युत द्विध्रुव की अक्ष पर स्थित किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव (Electric Potential at a Point on the . Axis of the Electric Dipole) (अक्षीय अथवा अनुदैर्ध्य स्थिति : End-on Position)-माना AB वैद्युत द्विध्रुव K परावैद्युतांक के माध्यम में स्थित है, जिसके A सिरे पर + q आवेश तथा B सिरे पर -q आवेश एक-दूसरे से 21 दूरी पर स्थित हैं (चित्र 2.20)। इस वैद्युत द्विध्रुव के मध्य-बिन्दु 0 से 7 मीटर की दूरी पर इसकी अक्षीय स्थिति में कोई बिन्दु P है, जहाँ पर वैद्युत विभव ज्ञात करना है। बिन्दु P की +q आवेश से दूरी (r – 1) तथा – q आवेश से दूरी (r + 1) है। यदि इनके संगत विभव क्रमश: V1 व V2 हों तो
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चूँकि वैद्युत विभव एक अदिश राशि है; अत: वैद्युत द्विध्रुव के कारण बिन्दु P पर परिणामी वैद्युत विभव v; दोनों विभवों V, तथा V, के बीजगणितीय योग (चिह्न सहित) के बराबर होगा।
अतः बिन्दु P पर परिणामी वैद्युत विभव
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परन्तु 2 ql = p (वैद्युत द्विध्रुव का आघूर्ण) रखने पर, V \(V=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0} K} \frac{p}{\left(r^{2}-l^{2}\right)}\) वोल्ट
यदि l का मान r के सापेक्ष बहुत कम हो (l <<r) तो l2 का मान r2 की तुलना में नगण्य माना जा सकता है।
अत: वैद्युत द्विध्रुव के कारण बिन्दु P पर वैद्युत विभव \(V=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0} K} \frac{p}{r^{2}}\) वोल्ट
यदि माध्यम वायु अथवा निर्वात हो तो K = 1; अत: वैद्युत द्विध्रुव के कारण बिन्दु P पर वैद्युत विभव
\(V=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0} K} \frac{p}{r^{2}}\) वोल्ट।

प्रश्न 4.
वैद्युत द्विध्रुव-आघूर्ण से आप क्या समझते हैं? सिद्ध कीजिए कि किसी वैद्युत द्विध्रुव की अनुप्रस्थ (निरक्षीय) स्थिति में किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव शून्य होता है।
[2012, 13, 16]
उत्तर :
वैद्युत द्विध्रुव-आघूर्ण-वैद्युत द्विध्रुव के किसी एक आवेश के परिमाण तथा आवेशों के बीच की दूरी के गुणनफल को वैद्युत द्विध्रुव-आघूर्ण कहते हैं। इसे ‘p से प्रदर्शित करते हैं।
\(\overrightarrow{\mathrm{p}}=q \times 2 \vec{l}\)
इसका मात्रक ‘कूलॉम-मीटर’ है। यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा ऋणावेश से धनावेश की ओर होती है।
वैद्युत द्विध्रुव की निरक्षीय रेखा पर स्थित किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव (Electric Potential due to an Electric Dipole on Equatorial Line)-माना AB वैद्युत द्विध्रुव K परावैद्युतांक के माध्यम में स्थित है, जिसके A सिरे पर +q आवेश तथा B सिरे पर – q आवेश एक-दूसरे से 2l दूरी पर स्थित हैं (चित्र 2.21)। वैद्युत द्विध्रुव के मध्य-बिन्दु O से r मीटर की दूरी पर निरक्षीय स्थिति में कोई बिन्दु P है, जहाँ पर वैद्युत विभव ज्ञात करना है। संलग्न चित्र से स्पष्ट है कि बिन्दु P की + q व -q दोनों आवेशों से दूरी \(\sqrt{r^{2}+l^{2}}\) के बराबर है।
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अतः वैद्युत द्विध्रुव के कारण निरक्षीय स्थिति में किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव शून्य होता है (वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य नहीं होती है)।

प्रश्न 5.
किसी वैद्युत द्विध्रुव के कारण किसी व्यापक बिन्दु पर उत्पन्न वैद्युत विभव के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर :
किसी वैद्युत द्विध्रुव के कारण किसी व्यापक हिन्दु पर वैद्युत विभव-माना एक वैद्युत द्विध्रुव AB, दो बिन्दु आवेशों +q तथा -q से मिलकर बना है, जिनके बीच की दूरी 2l है। हमें वैद्युत द्विध्रुव के केन्द्र O से r दूरी पर स्थित बिन्दु P, जिसके ध्रुवीय निर्देशांक (r,θ) हैं, पर वैद्युत विभव ज्ञात करना है।
अत: OP = r तथा ∠AOP = θ
बिन्दु A से रेखा OP पर तथा बिन्दु B से बढ़ती हुई रेखा OP पर
लम्ब क्रमश: AM व BN डालते हैं (चित्र-2.22)।
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Δ OMA तथा Δ ONB mem ,
OM = ON = I cosθ
अतः AP = MP = (r – l cos θ)
तथा BN = NP = (r + l cos तथा)
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प्रश्न 6.
आवेश q को a तथा b (b > a) त्रिज्या वाले दो संकेन्द्री खोखले गोलों पर इस प्रकार वितरित किया .. गया है कि तलीय आवेश घनत्व समान हैं। इन दोनों गोलों के उभयनिष्ठ केन्द्र पर विभव की गणना कीजिए। [2012]
हल :
माना गोलों को दिया गया आवेश q उन पर क्रमशः q1 व q2 के रूप में वितरित हो जाता है।
अतः q= q1 + q2 ………………(1)
दोनों गोलों के पृष्ठीय आवेश घनत्व समान हैं।
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q2 का मान समीकरण (1) में रखने पर,
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प्रश्न 7.
विभव प्रवणता से क्या तात्पर्य है? वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता तथा विभव प्रवणता में सम्बन्ध स्थापित कीजिए। [2012]
उत्तर :
विभव प्रवणता (Potential Gradient)—किसी वैद्युत क्षेत्र में दूरी के सापेक्ष विभव परिवर्तन की दर को विभव प्रवणता कहते हैं। विभव प्रवणता का मात्रक वोल्ट/मीटर है। यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा उच्च विभव से निम्न विभव की ओर होती है।
माना बिन्दु 0 पर स्थित बिन्दु आवेश +q के कारण X-अक्ष के अनुदिश वैद्युत क्षेत्र E की दिशा में बिन्दु 0 से x तथा (x + Ax) दूरियों पर दो बिन्दु क्रमश: A तथा B स्थित हैं, जिन पर वैद्युत विभव क्रमश: V तथा (V-ΔV) हैं।
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अतः विभव प्रवणता \(\frac{(V-\Delta V)-V}{(x+\Delta x)-x}=-\frac{\Delta V}{\Delta x}\)
वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता तथा विभव प्रवणता में सम्बन्ध (Relation between Intensity of Electric Field and Potential Gradient)—माना वैद्युत क्षेत्र E में, परीक्षण धन आवेश +qo को बिन्दु B से बिन्दु A तक लाया जाता है तथा इस परीक्षण आवेश +qo पर एक वैद्युत बल F वैद्युत क्षेत्र E की दिशा में कार्य करता है।
अतः F=qo x E ……………(1)
माना परीक्षण आवेश +qo को बिन्दु B से बिन्दु A तक ले जाने में बाह्य कर्ता द्वारा वैद्युत बल F के विरुद्ध किया गया कार्य ΔW है तो
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समीकरण (2) तथा समीकरण (3) की तुलना करने पर,
– E x Δx = ΔV
अतः वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता E=-\frac{\Delta V}{\Delta x} वोल्ट/मीटर
ΔV/Δx को ही विभव प्रवणता कहते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता, ऋणात्मक विभव प्रवणता के बराबर होती है। यहाँ पर ऋण चिह्न यह प्रदर्शित करता है कि वैद्युत क्षेत्र की दिशा में वैद्युत विभव का मान घटता है।

प्रश्न 8.
एक आवेशित इलेक्ट्रॉन किसी एकसमान वैद्युत क्षेत्र में, क्षेत्र के लम्बवत् दिशा में गति करता हुआ प्रवेश करता है। दिखाइए कि वैद्युत क्षेत्र के भीतर इस इलेक्ट्रॉन का गमन पथ परवलयाकार होगा।
उत्तर :
एकसमान वैद्युत क्षेत्र में एक आवेशित इलेक्ट्रॉन का गमन-पथ (Path of a Charged Electron in an Uniform Electric Field) –
(i) जब इलेक्ट्रॉन का प्रारम्भिक वेग वैद्युत क्षेत्र की दिशा के लम्बवत् है (When initial velocity of an electron is perpendicular to electric field)—mana धातु की दो समान्तर प्लेटें जिन पर विपरीत आवेश हैं, एक-दूसरे से कुछ दूरी पर स्थित हैं। इन प्लेटों के बीच के स्थान में वैद्युत क्षेत्र एकसमान है। माना ऊपरी प्लेटधनावेशित है, जबकि नीचे की प्लेट ऋणावेशित है; अतः वैद्युत क्षेत्र E कागज के तल में नीचे की ओर दिष्ट होगा (चित्र 2.25)।
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माना एक इलेक्ट्रॉन जिस पर आवेश – e तथा द्रव्यमान m है जो X-अक्ष के अनुदिश गतिमान है तथा v वेग से वैद्युत क्षेत्र E में प्रवेश करता है। चूँकि वैद्युत क्षेत्र Y-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में नीचे की ओर है; अत: इलेक्ट्रॉन पर Y-अक्ष के अनुदिश लगने वाला बल F = eE.

‘इलेक्ट्रॉन पर X-अक्ष के अनुदिश कोई बल कार्य नहीं करेगा।
इस बल के कारण इलेक्ट्रॉन की गति में उत्पन्न तवरण \(a=\frac{F}{m}=\frac{e E}{m}\)
चूँकि इलेक्ट्रॉन का X-अक्ष के अनुदिश प्रारम्भिक वेग v तथा त्वरण शून्य है; अत: X-अक्ष के अनुदिश t सेकण्ड में चली गई दूरी
x= vt
चूँकि इलेक्ट्रॉन का Y-अक्ष के अनुदिश प्रारम्भिक वेग शून्य तथा त्वरण a है; अत: Y-अक्ष के अनुदिश t सेकण्ड में चली गई दूरी
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यह समीकरण y = cx2 के समरूप है तथा परवलय निरूपित करती है। अत: वैद्युत क्षेत्र में अभिलम्बवत् प्रवेश करने वाले आवेशित इलेक्ट्रॉन का गमन-पथ परवलयाकार होता है।
(ii) जब इलेक्ट्रॉन का प्रारम्भिक वेग वैद्युत क्षेत्र की दिशा के अनुदिश है-इस स्थिति में वैद्युत क्षेत्र द्वारा उत्पन्न त्वरण अथवा मन्दन इलेक्ट्रॉन के प्रारम्भिक वेग की ही दिशा में होता है; अत: आवेशित इलेक्ट्रॉन का गमन-पथ ऋजुरेखीय होता है।

प्रश्न 9.
वैद्युत स्थितिज ऊर्जा से क्या अभिप्राय है? q1 व q2 कूलॉम के दो आवेशों की स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए , जबकि उनके बीच की दूरी r मीटर है।
उत्तर :
वैद्युत स्थितिज ऊर्जा (Electric Potential Energy)—“किन्हीं दो अथवा दो से अधिक बिन्दु आवेशों को अनन्त से एक-दूसरे के समीप लाकर निकाय की रचना करने में कृत कार्य उन आवेशों से बने निकाय में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। इस ऊर्जा को ही निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।” इसे प्रायः ‘U’ से प्रदर्शित करते हैं।
अत: “दो या दो से अधिक बिन्दु आवेशों के किसी निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा उस कार्य के बराबर होती है जो उन आवेशों को अनन्त दूरी से
परस्पर निकट लाकर निकाय की रचना करने में किया जाता है।
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दो वैद्युत आवेशों से बने निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक-माना एक आवेश निकाय AB दो बिन्दु आवेशों + q1 व + q2 से मिलकर बना है जो कि एक-दूसरे से । दूरी पर निर्वात अथवा वायु में स्थित हैं (चित्र 2.26)।
माना +q2 आवेश, बिन्दु B पर न होकर अनन्त पर स्थित है, तब आवेश + q1 के कारण बिन्दु B पर
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वैद्युत विभव की परिभाषानुसार आवेश +q2 को अनन्त से बिन्दु B तक लाने में किया गया कार्य
W = आवेश × बिन्दु B का विभव
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यह कार्य W ही +q1 व +q2 से बने वैद्युत निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा U है।
अत: निकाय (q1 + q2) की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा \(U=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \frac{q_{1} q_{2}}{r}\) जल। ……….(2)
यदि दोनों आवेश समान प्रकार के हों तो वे एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करेंगे; अत: उन्हें एक-दूसरे के समीप लाने में क्षेत्र के विरुद्ध कार्य करना पड़ेगा; अत: ऐसे निकाय की ऊर्जा धनात्मक होगी। इसके विपरीत विजातीय आवेशों को परस्पर समीप लाकर निकाय की रचना करने में, कार्य क्षेत्र के द्वारा किया जाएगा; अत: ऐसे निकाय की ऊर्जा ऋणात्मक होगी; अत: ऊर्जा का चिह्न सहित मान ज्ञात करने के लिए उपयुक्त सूत्र (2) में q1 व q2 के मान चिह्नसहित रखने चाहिए।

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प्रश्न 10.
यदि किसी वैद्युत द्विध्रुव को एक समरूप वैद्युत क्षेत्र में 4 कोण से घुमाया जाता है तो इस क्रिया में किए गए कार्य का परिकलन कीजिए।
उत्तर :
एकसमान वैद्युत क्षेत्र में वैद्युत द्विध्रुव को घुमाने में कृत कार्य (Work Done in Rotating an Electric Dipole in an Uniform Electric Field)—माना p वैद्युत द्विध्रुव-आघूर्ण का एक वैद्युत द्विध्रुव AB किसी एकसमान वैद्युत क्षेत्र E में रखा है तथा वैद्युत द्विध्रुव को वैद्युत क्षेत्र के भीतर घुमाया जा रहा है (चित्र 2.27)। माना किसी क्षण वैद्युत द्विध्रुव-आघूर्ण p की दिशा वैद्युत क्षेत्र की दिशा से θ कोण बनाती है, तब वैद्युत द्विध्रुव पर वैद्युत क्षेत्र के कारण कार्य करने वाले बलयुग्म का आघूर्ण
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t = pE sinθ
वैद्युत द्विध्रुव AB को इस स्थिति से आगे अल्पांश कोण dθ द्वारा घुमाने में वैद्युत क्षेत्र के विरुद्ध कृत कार्य
dw = बल-युग्म का आघूर्ण x कोणीय विस्थापन
= t x dθ = pE sin θ x dθ
अत: वैद्युत द्विध्रुव को प्रारम्भिक स्थिति θ = θ1 से अन्तिम स्थिति θ = θ2 तक घुमाने में कृत कार्य
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यदि प्रारम्भ में वैद्युत द्विध्रुव बाह्य क्षेत्र की दिशा में अनुरेखित है अर्थात् θ1 = 0°,
तब वैद्युत द्विध्रुव को θ कोण से घुमाने में कृत कार्य W = pE (cos 0° – cosθ) [∵ θ2= θ]
अतः W = pE(1 – cos θ)
विशेष स्थितियाँ-1. यदि θ = 90° है अर्थात् वैद्युत द्विध्रुव को क्षेत्र की दिशा से 90° घुमाया जाए तो
W = pE (1 – cos 90°) = pE (1 – 0)= PE .
2. यदि θ = 180° है अर्थात् वैद्युत द्विध्रुव को क्षेत्र की दिशा से 180° घुमाया जाए तो
W = pE (1 – cos 180°) = pE [1 – (-1)] = 2pE.

प्रश्न 11.
एकसमान वैद्युत क्षेत्र में स्थित वैद्युत द्विध्रुव की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा की गणना कीजिए। वैद्युत द्विध्रुव को क्षेत्र के लम्बवत् रखने पर वैद्युत स्थितिज ऊर्जा क्या होगी?
उत्तर :
एकसमान वैद्युत क्षेत्र में वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy of an Electric Dipole in an Uniform Electric Field)—“वैद्युत क्षेत्र में किसी वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा उस कार्य के बराबर होती है जो कि वैद्युत द्विध्रुव को अनन्त से वैद्युत क्षेत्र के भीतर लाने में करना पड़ता है।”
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माना AB वैद्युत द्विध्रुव + q तथा -q आवेशों से मिलकर बना है जिनके बीच की दूरी 2l है। इस वैद्युत द्विध्रुव को अनन्त से किसी एकसमान वैद्युत क्षेत्र E में इस प्रकार लाया जाता है कि वैद्युत द्विध्रुव के आघूर्ण p की दिशा सदैव वैद्युत क्षेत्र E की दिशा के समान्तर रहे (चित्र-2.28)। वैद्युत क्षेत्र E के कारण + q आवेश पर बल F = qE क्षेत्र की दिशा में तथा -q आवेश पर बल F = qE क्षेत्र की विपरीत दिशा में लगता है; अत: वैद्युत
द्विध्रुव को अनन्त से वैद्युत क्षेत्र में लाने के लिए +q आवेश पर बाह्य कर्ता द्वारा कार्य किया जाएगा, जबकि -q आवेश पर स्वयं वैद्युत क्षेत्र कार्य करेगा। वैद्युत द्विध्रुव को अनन्त से वैद्युत क्षेत्र के भीतर लाने में -q आवेश; + q आवेश से 2l दूरी अधिक चलता है। इस कारण -q आवेश पर वैद्युत क्षेत्र द्वारा किया गया कार्य अधिक होगा तथा इसका मान ऋणात्मक होगा; अत: वैद्युत द्विध्रुव को अनन्त से वैद्युत क्षेत्र के भीतर लाने में वैद्युत क्षेत्र द्वारा किया गया नैट कार्य
W1= आवेश (-q) पर बल.x आवेश द्वारा चली गई अतिरिक्त दूरी (AB)
= – qE x 2l = – pE
जहाँ q x 2l =p वैद्युत द्विध्रुव-आघूर्ण है। यह कार्य ही वैद्युत क्षेत्र में क्षेत्र के समान्तर रखे वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा है। इसे ‘U0‘ से प्रदर्शित करते हैं।
अतः Uo = – pE
वैद्युत द्विध्रुव की इस स्थिति को स्थायी सन्तुलन (stable equilibrium) की स्थिति कहते हैं।
यदि वैद्युत द्विध्रुव को वैद्युत क्षेत्र के भीतर θ कोण से घुमाएँ तो वैद्युत द्विध्रुव पर किया गया कार्य
W2 = pE (1 – cos θ)
इसके कारण वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा बढ़ जाएगी; अत: θ कोण की स्थिति में वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा .
Uθ = Uo + W2 = – pE + pE (1 – cos θ) = – pE cos θ
यह वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा का व्यापक समीकरण है।
विशेष स्थितियाँ-1. यदि θ = 0° है अर्थात् वैद्युत द्विध्रुव, वैद्युत क्षेत्र की दिशा में है, तब स्थितिज ऊर्जा
Uo = – pE
इस स्थिति में वैद्युत द्विध्रुव स्थायी सन्तुलन (stable equilibrium) में होगा; अत: स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होगी।
2. यदि θ = 90° है अर्थात् वैद्युत द्विध्रुव, वैद्युत क्षेत्र E के लम्बवत् है, तब स्थितिज ऊर्जा
U90°= – pE cos 90° = 0
अर्थात् यदि वैद्युत द्विध्रुव को वैद्युत क्षेत्र E के लम्बवत् रखकर अनन्त से लाएँ तो वैद्युत द्विध्रुव पर कोई कार्य नहीं करना पड़ेगा।
3. यदि θ = 180° है अर्थात् वैद्युत द्विध्रुव को स्थायी सन्तुलन से 180° घुमाने पर स्थितिज ऊर्जा
U180° = – pE cos 180° = + pE
इस स्थिति में, वैद्युत द्विध्रुव अस्थायी सन्तुलन (unstable equilibrium) में होगा।

प्रश्न 12.
किसी आवेशित चालक में संगृहीत स्थितिज ऊर्जा के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
अथवा
सिद्ध कीजिए कि किसी आवेशित चालक की स्थितिज ऊर्जा \(U=\frac{1}{2} C V^{2}\) अथवा \(\frac{1}{2} \frac{q^{2}}{C}\) होती है, जहाँ c चालक की धारिता, q चालक पर आवेश तथा V उसका विभव है। [2011]
उत्तर :
आवेशित चालक की स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy of a Charged Conductor)- “किसी चालक को आवेशित करने में किए गए सम्पूर्ण कार्य को आवेशित चालक की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।”
माना C धारिता वाले किसी चालक को आवेशित किया जा रहा है। माना आवेशन की क्रिया में किसी क्षण चालक . . पर उपस्थित आवेश की मात्रा 41 है तथा चालक का विभव V1 है, तब
सूत्र q1 = CV1 से, V1 = q1/C
अब अनन्त सूक्ष्म आवेश dq को अनन्त से लाकर, V1 विभव पर चालक को देने में किया गया कार्य
dW = V1 x dq = (q1/C) x dq
माना आवेशन की क्रिया में चालक को कुल q आवेश दिया जाता है, तब चालक को q1 = 0 से q1 = q
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विशेष स्थितियाँ-1. चालक की स्थितिज ऊर्जा सदैव धनात्मक होती है चाहे चालक को धन आवेश देकर आवेशित किया जाए अथवा ऋण आवेश देकर।
2. यदि आवेशित चालक के सम्पूर्ण आवेश को किसी चालक तार अथवा प्रतिरोध में प्रवाहित करके इसे निरावेशित कर दिया जाए तो उसकी सम्पूर्ण वैद्युत स्थितिज ऊर्जा चालक तार में ऊष्मा में बदल जाती है।

प्रश्न 13.
(i) सिद्ध कीजिए कि दो आवेशित चालकों को परस्पर स्पर्श कराके अलग कर देने से उन पर आवेश, चालकों की धारिताओं के अनुपात में बँट जाएगा।. – (ii) सिद्ध कीजिए कि आवेशों के पुनर्वितरण में ऊर्जा का ह्रास होता है। यह ऊर्जा किस रूप में लुप्त होती है? अथवा दो आवेशित चालकों को तार द्वारा जोड़ने पर ऊर्जा हानि के सूत्र का निगमन कीजिए। [2008, 17]
अथवा सिद्ध कीजिए कि दो आवेशित चालकों को तार से जोड़ने पर आवेश के पूर्ण वितरण के दौरान सदैव ऊर्जा की हानि होती है तथा ऊर्जा-हानि का व्यंजक प्राप्त कीजिए। [2018]
उत्तर :
(i) आवेशों का पुनर्वितरण (Redistribution of Charges)- माना दो पृथक्कृत चालकों A तथा B की धारिताएँ क्रमश: C1 व C2 हैं। जब इन चालकों को q1 व q2 आवेश दिया जाता है तो इनके विभव क्रमश: V1 व V2 हो जाते हैं।
अत: चालक A पर आवेश q1 = C1V1 तथा चालक B पर आवेश q2 = C2V2
यदि इन चालकों को एक चालक तार द्वारा जोड़ दें तो धन आवेश उच्च विभव वाले चालक से निम्न विभव वाले चालक की ओर तब तक बहता है जब तक कि दोनों चालकों का विभव समान नहीं हो जाता है (चित्र 2.29)। इस विभव को उभयनिष्ठ विभव (V) कहते हैं। इस प्रकार दो आवेशित चालकों को आपस में जोड़ने पर आवेश का पुनर्वितरण होता है, यद्यपि आवेश की कुल मात्रा (q1 +q2) ही रहती है।
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माना दोनों चालक एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी पर हैं तथा जोड़ने वाले चालक तार की वैद्युत धारिता नगण्य है।
चूँकि q1= C1V1 तथा q2 = C2V2 अतः चालकों पर कुल आवेश q = q1 + q2 = C1V1 + C2V2 ………………(1)
माना चालकों को तार द्वारा जोड़ने के बाद उन पर आवेश क्रमशः q1‘ व q2‘ तथा दोनों का उभयनिष्ठ विभव V हो जाता है, तब
प्रथम च (क पर आवेश q’1 = C1V ………………(2)
तथा दूसरे चालक पर आवेश q’2 = C2V ………………(3)
समीकरण (2) को समीकरण (3) से भाग देने पर,
\(\frac{q_{1}^{\prime}}{q_{2}^{\prime}}=\frac{C_{1} V}{C_{2} V}=\frac{C_{1}}{C_{2}}\)
अर्थात् दो आवेशित चालकों को परस्पर जोड़ने पर, चालकों पर आवेश का पुनर्वितरण उनकी धारिताओं के अनुपात में होता है।
अब संयोजन पर कुल आवेशq = q’1 + q’2 = q1 + q2
अथवा C1V + C2V = C1V2 +C2V2
अथवा
V(C1 + C2) = C1V1 + C2V2
अतः उभयनिष्ठ विभव \(V=\frac{C_{1} V_{1}+C_{2} V_{2}}{C_{1}+C_{2}}=\frac{q_{1}+q_{2}}{C_{1}+C_{2}}\) ………….(4)
स्थानान्तरित आवेश की मात्रा (Quantity of Transferred Charge)-चूँकि चालकों को परस्पर जोड़ने से पहले, चालक A पर आवेश q1 है तथा चालक तार द्वारा जोड़ने के पश्चात् इस पर आवेश q’1 रह जाता है।
अत: चालक A से चालक B पर स्थानान्तरित आवेश की मात्रा
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(ii) आवेशों के पुनर्वितरण में ऊर्जा का ह्रास (Loss of Energy in Redistribution of Charges)—आवेशों के पुनर्वितरण की प्रक्रिया में जब आवेश चालक तार में प्रवाहित होता है तो इस क्रिया में कुछ कार्य किया जाता है। यह कार्य ऊष्मा के रूप में क्षय होता है। इस प्रकार दोनों चालकों के आवेश की कुल मात्रा तो वही रहती है, परन्तु चालकों की कुल स्थितिज ऊर्जा कम हो जाती है। जोड़ने से पूर्व
पहले चालक A की स्थितिज ऊर्जा U1 = = \(\frac { 1 }{ 2 }\)C1V12
दूसरे चालक B की स्थितिज ऊर्जा U2 = = \(\frac { 1 }{ 2 }\)C2V22
अत: जोड़ने से पूर्व दोनों चालकों की कुल स्थितिज ऊर्जा U = U1 + U2 = \(\frac { 1 }{ 2 }\)C1V12 + \(\frac { 1 }{ 2 }\)C2V22)
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इस समीकरण में C1 व C2 दोनों धनात्मक हैं तथा (V1~V2)2 पूर्ण वर्ग होने के कारण एक धनात्मक संख्या है; अत: ∆U = (U – U’) भी धनात्मक संख्या है। यह तभी सम्भव है जबकि U’

प्रश्न 14.
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता के लिए सूत्र का निगमन कीजिए। इसकी धारिता को किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है? [2013, 14, 15, 16, 17]
अथवा
किसी समान्तर प्लेट वायु संधारित्र की धारिता का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। [2011, 18]
उत्तर :
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता का व्यंजक (Expression for Capacitance of a Parallel Plate Capacitor)-दो समतल तथा समान्तर धातु की प्लेटों एवं उनके बीच स्थित वैद्युतरोधी माध्यम से बने संकाय को समान्तर प्लेट संधारित्र कहते हैं।
माना P1 व P2 धातु की दो समतल प्लेटें हैं, जिनके बीच की दूरी d तथा प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A है। माना प्लेटों के बीच भरे माध्यम का परावैद्युतांक K है। जब प्लेट P1 को + q आवेश दिया जाता है तो प्लेट P2 पर प्रेरण के कारण -q आवेश उत्पन्न हो जाता है। चूंकि प्लेट P2 पृथ्वी से जुड़ी है इसीलिए इसके बाह्य तल का + q आवेश पृथ्वी से आने वाले इलेक्ट्रॉनों द्वारा निरावेशित हो जाता है। इस प्रकार प्लेटों P व P2 पर बराबर तथा विपरीत प्रकार के आवेश होंगे; अतः प्रत्येक प्लेट पर आवेश का पृष्ठ घनत्व
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समीकरण (2) से स्पष्ट है कि समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता निम्नलिखित बातों पर निर्भर करती है –
1. प्लेटों के क्षेत्रफल A पर – C ∝ A अर्थात् धारिता प्लेटों के क्षेत्रफल के अनुक्रमानुपाती होती है; अत: संधारित्र की धारिता बढ़ाने के लिए प्लेटों का क्षेत्रफल A अधिक होना चाहिए अर्थात् प्लेटें बड़े क्षेत्रफल की लेनी चाहिए।
2. प्लेटों के बीच की दूरी d पर-C ∝ 1/d अर्थात् धारिता प्लेटों के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है; अतः संधारित्र की धारिता बढ़ाने के लिए प्लेटों के बीच की दूरी d कम होनी चाहिए अर्थात् प्लेटें एक-दूसरे के समीप रखनी चाहिए।
3. प्लेटों के बीच के माध्यम पर-C ∝ K अर्थात् धारिता माध्यम के परावैद्युतांक के अनुक्रमानुपाती होती है; अतः संधारित्र की धारिता बढ़ाने के लिए प्लेटों के बीच ऐसा माध्यम अर्थात् पदार्थ रखना चाहिए जिसका परावैद्युतांक (K) अधिक हो।
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समान्तर प्लेट वायु संधारित्र की धारिता–यदि प्लेटों के बीच निर्वात (अथवा वायु ) हो अर्थात् K = 1 तो संधारित्र की धारिता
\(C_{0}=\frac{\varepsilon_{0} A}{d}\)फैरड
संधारित्र की धारिता के पद में परावैद्युतांक की परिभाषा–जब समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के बीच परावैद्युत माध्यम भरा है तो संधारित्र की धारिता \(C_{0}=\frac{K\varepsilon_{0} A}{d}\) जब समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के बीच वायु अथवा निर्वात है तो संधारित्र की धारिता \(C_{0}=\frac{\varepsilon_{0} A}{d}\)
अत: \(\frac{C}{C_{0}}=\frac{K \varepsilon_{0} A / d}{\varepsilon_{0} A / d}=K\) अथवा C = KC0
अत: यदि प्लेटों के बीच निर्वात के स्थान पर परावैद्युत माध्यम हो तो संधारित्र की धारिता K गुना बढ़ जाएगी।
अतः “किसी माध्यम का परावैद्युतांक (dielectric constant) उस माध्यम से युक्त संधारित्र की धारिता तथा उसी आकार के निर्वात अथवा वायु. संधारित्र की धारिता के अनुपात के बराबर होता है (अर्थात् K = C/C0)

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प्रश्न 15.
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता के लिए सूत्र का निगमन कीजिए , जब इसकी प्लेटों के बीच आंशिक रूप से परावैद्युत पदार्थ रखा हो।[2013]]
अथवा
t मोटाई तथा K परावैद्युतांक वाले पदार्थ से आंशिक रूप से भरे एक समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।[2005, 09]
उत्तर :
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता, जब उसकी प्लेटों के बीच आंशिक रूप से परावैद्युतांक रखा हो (Capacity of Parallel Plate Capacitor when Partially Filled with Dielectric)-माना P1 व P2 समान्तर प्लेट संधारित्र की दो प्लेटें हैं, जिनके बीच की दूरी d है एवं प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A है। माना t मोटाई की परावैद्युत पदार्थ की एक प्लेट संधारित्र की प्लेटों के बीच रखी है। इस प्रकार प्लेटों के बीच (d – t) मोटाई में वायु तथा t मोटाई में परावैद्युत माध्यम है। प्लेट P1 को +q आवेश देने पर प्रेरण के कारण प्लेट P2 पर -q आवेश उत्पन्न हो जाता है,
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चूँकि K का मान सदैव 1 से अधिक होता है; अतः प्लेटों के बीच प्रभावी दूरी d से कुछ कम हो जाती है, जिससे संधारित्र की धारिता बढ़ जाती है।
विशेष स्थितियाँ-1. यदि प्लेटों के बीच पूरे स्थान में परावैद्युतांक भरा हो (अर्थात् t = d) तो
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2. यदि प्लेटों के बीच पूरे स्थान में वायु अथवा निर्वात हो (अर्थात् t = 0) तो
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3. यदि प्लेटों के बीच 1 मोटाई की धातु की पट्टी हो (K = ∞) तो
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4. यदि प्लेटों के बीच K1, K2, K3,…., Kn परावैद्युतांकों की पट्टियाँ रखी हों, जिनकी मोटाइयाँ क्रमशः t1 , t2 , t3, ….. , tn हों तो
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5. यदि प्लेटों के बीच पूरे स्थान में परावैद्युत की पट्टियाँ भरी हों तो d = t1 + t2 + t3 + …. + tn
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प्रश्न 16.
श्रेणीक्रम में जुड़े तीन संधारित्रों की तुल्य धारिता के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर :
श्रेणीक्रम में (In Series) जुड़े संधारित्र—माना तीन संधारित्रों को, जिनकी धारिताएँ C1, C2 व C3 हैं, श्रेणीक्रम में चित्रानुसार जोड़ा गया है।
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जब किसी वैद्युत स्रोत द्वारा संधारित्र C1की पहली प्लेट को +q आवेश देते हैं। प्रेरण द्वारा इसकी दूसरी प्लेट पर -q आवेश उत्पन्न हो जाता है तथा इस प्लेट का स्वतन्त्र आवेश + q; दूसरे संधारित्र C2 की पहली प्लेट पर चला जाता है और संधारित्र C2 की दूसरी प्लेट पर -q आवेश उत्पन्न हो जाता है।
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अतः “श्रेणीक्रम में जुड़े संधारित्रों की तुल्य धारिता का व्युत्क्रम, उन संधारित्रों की अलग-अलग धारिताओं के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है।” वास्तव में तुल्य धारिता का मान श्रेणीक्रम में जुड़े सबसे कम धारिता वाले संधारित्र की धारिता से भी कम होता है।
श्रेणीक्रम में जडे संधारित्रों के लिए-1. सभी संधारित्रों पर आवेश की मात्रा समान रहती है।
2. संयोजन के सिरों के बीच आरोपित कुल विभवान्तर, अलग-अलग संधारित्रों की प्लेटों के बीच उत्पन्न विभवान्तर के योग के बराबर होता है अर्थात् V = V1 + V2 +V3
इसीलिए श्रेणीक्रम संयोग का प्रयोग तब करते हैं, जबकि किसी ऊँचे वोल्टेज को (जिसे अकेला संधारित्र सहन न कर सके), अनेक संधारित्रों पर विभाजित करना होता है।
3. इस संयोजन में न्यूनतम धारिता वाले संधारित्र की प्लेटों के बीच विभवान्तर अधिकतम होता है।

प्रश्न 17.
समान्तर क्रम में जुड़े तीन संधारित्रों की तुल्य धारिता के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। अथवा संधारित्रों के समान्तर संयोजन के तुल्य संधारित्र की धारिता के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। [2004]
उत्तर :
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समान्तर क्रम में (In Parallel) जुड़े संधारित्र-माना तीन संधारित्रों को, जिनकी धारिताएँ C1,C2 व C3 हैं, समान्तर क्रम में बिन्दु A व B के बीच जोड़ा गया है। इसमें सभी संधारित्रों की पहली प्लेटों को एक बिन्दु A से तथा दूसरी प्लेटों को दूसरे बिन्दु B से जोड़ते हैं और बिन्दु B को पृथ्वी से जोड़ देते हैं। यदि किसी वैद्युत स्रोत द्वारा बिन्दु A को + q आवेश दिया जाता है तो यह आवेश तीनों संधारित्रों पर उनकी धारिताओं के अनुपात में बँट जाता है। प्रेरण की क्रिया से संधारित्रों की दूसरी प्लेटों के अन्दर वाले तलों पर बराबर व विपरीत ऋण आवेश उत्पन्न हो जाता है तथा बाहरी तलों पर उत्पन्न धन आवेश पृथ्वी से आने वाले इलेक्ट्रॉनों द्वारा निरावेशित हो जाता है। चूँकि तीनों संधारित्र बिन्दुओं A व B के बीच जुड़े हैं; अत: प्रत्येक संधारित्र की प्लेटों के बीच विभवान्तर समान होगा। माना यह विभवान्तर V है तथा संधारित्रों पर आवेश क्रमश: q1; q2व q3 हैं, तब q1 = C1V, q2 = C2V तथा q3 = C3V तीनों संधारित्रों पर कुल आवेश
q= q1 + q2 + q3
= C1V + C2V + C3V
= V (C1 + C2+ C3)………..(1)
यदि इन तीनों संधारित्रों के स्थान पर एक ऐसा संधारित्र लगाया जाए जिसे 4 आवेश देने पर उसकी प्लेटों के बीच विभवान्तर V हो जाए, तो वह तुल्य संधारित्र होगा। यदि इस संधारित्र की धारिता C हो तो
समीकरण (1) व समीकरण (2) की तुलना करने पर,
VC = V(C1 + C2 + C3)
अतः C = C1 + C2 + C3
अत: “समान्तर क्रम में जुड़े संधारित्रों की तुल्य धारिता, उन संधारित्रों की अलग-अलग धारिताओं के योग के बराबर होती है।” इस प्रकार संधारित्रों को जोड़कर धारिता बढ़ाई जा सकती है।
समान्तर क्रम में जुड़े संधारित्रों के लिए –
1. सभी संधारित्रों की प्लेटों के बीच विभवान्तर (V) समान रहता है।
2. संधारित्रों के निकाय का कुल आवेश, उनके अलग-अलग आवेशों के योग के बराबर होता है।
अर्थात् q= q1 + q2 + q3
संधारित्रों पर अलग-अलग आवेश, उनकी धारिताओं के अनुपात में होता है।
4. समान्तर-संयोजन का प्रयोग तब करते हैं, जबकि कम विभव पर अधिक धारिता की आवश्यकता होती है।

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प्रश्न 18.
किसी आवेशित संधारित्र की ऊर्जा से क्या तात्पर्य है? किसी आवेशित संधारित्र की ऊर्जा के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। यह ऊर्जा कहाँ रहती है?
अथवा
सिद्ध कीजिए कि आवेशित संधारित्र की स्थितिज ऊर्जा U = \(\frac { 1 }{ 2 }\)CV2जहाँ C संधारित्र की धारिता तथा V विभवान्तर हैं। [2016, 17]
उत्तर :
आवेशित संधारित्र की स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक (Expression for Potential Energy of a Charged Capacitor)—किसी संधारित्र को आवेशित करने में जो कार्य करना पड़ता. है, वह संधारित्र में वैद्युत स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है, जब संधारित्र को किसी प्रतिरोध तार से जोड़ा जाता है तो आवेश का प्रवाह तार में हो जाता है, जिस कारण संधारित्र विसर्जित हो जाता है तथा संधारित्र द्वारा संचित ऊर्जा ऊष्मा के रूप में प्रकट होती है।
माना C धारिता के संधारित्र को आवेशित किया जा रहा है। माना किसी क्षण संधारित्र पर q1 आवेश है तथा इसकी प्लेटों के बीच विभवान्तर V1 है।
अत: संधारित्र की प्लेटों के बीच विभवान्तर V1 = q1/C
संधारित्र को और एक अनन्त सूक्ष्म आवेश dq देने में किया गया कार्य अर्थात् संधारित्र में संचित स्थितिज ऊर्जा
dU = V1 x dq = (q1/C) x dq
अतः संधारित्र को शून्य से q आवेश देने में संचित कुल ऊर्जा
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अत: आवेशित संधारित्र की ऊर्जा उसकी प्लेटों के बीच स्थित माध्यम में उत्पन्न वैद्युत क्षेत्र में रहती है।

प्रश्न 19.
आवेशित संधारित्र के ऊर्जा घनत्व से क्या तात्पर्य है? समान्तर पट्ट संधारित्र के ऊर्जा घनत्व का सूत्र ज्ञात कीजिए।
अथवा
सिद्ध कीजिए कि संधारित्र का ऊर्जा घनत्व – \(\frac { 1 }{ 2 }\)ε0E2 के बराबर होता है जहाँ ε0 निर्वात की वैद्युतशीलता तथा E संधारित्र की दोनों प्लेटों के मध्य उत्पन्न वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता है। [2013]
अथवा
सिद्ध कीजिए कि एकांक आयतन में किसी समान्तर प्लेट संधारित्र में संचित ऊर्जा \(\frac { 1 }{ 2 }\)ε0E2 है। प्रतीकों के सामान्य अर्थ हैं।
उत्तर :
आवेशित संधारित्र का ऊर्जा घनत्व (Energy Density of a Charged Capacitor)-जब किसी
[2015] संधारित्र को आवेशित किया जाता है तो संधारित्र में ऊर्जा संचित हो जाती है जो प्लेटों के बीच के आयतन में वैद्युत क्षेत्र की ऊर्जा के रूप में संचित रहती है। अत: “संधारित्र के एकांक आयतन में संचित ऊर्जा को संधारित्र का ऊर्जा घनत्व कहते हैं।”
माना किसी समान्तर पट्ट संधारित्र का प्लेट क्षेत्रफल A तथा उनके बीच की दूरी d है, प्लेटों के बीच का स्थान परावैद्युत माध्यम K द्वारा भरा है तथा प्लेटों के बीच का विभवान्तर V है।
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प्रश्न 20.
वान डे ग्राफ जनित्र का सिद्धान्त बताइए तथा चित्र की सहायता से इसकी रचना एवं कार्यविधि समझाइए। [2011, 15, 17]
अथवा
उपयुक्त चित्र की सहायता से वान डे ग्राफ जनित्र की कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। [2018]
अथवा
वान डे ग्राफ जेनरेटर का नामांकित चित्र बनाइए। इसके कार्य करने का सिद्धान्त बताइए। बताइए यह किस तरह से उच्च वोल्टेज उत्पन्न करता है?
[2018]
उत्तर :
वान डे ग्राफ जनित्र (Van de Graff Generator)—वैज्ञानिक रॉबर्ट जे० वान डे ग्राफ ने सन् 1931 ई० में एक स्थिर वैद्युत जनित्र की रचना की जिसकी सहायता से कुछ मिलियन वोल्ट के उच्च विभव को उत्पन्न किया जा सकता है। इस उच्च विभव से प्राप्त प्रबल वैद्युत क्षेत्र का प्रयोग आवेशित कणों जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन आदि को त्वरित कर उनकी ऊर्जा में वृद्धि करने में किया जाता है।
सिद्धान्त (Principle)-इस जनित्र का सिद्धान्त दो प्रमुख स्थिर वैद्युत घटनाओं पर आधारित है. –

(i) किसी खोखले चालक को दिया गया आवेश केवल उसके बाहरी पृष्ठ पर विद्यमान रहता है तथा एकसमान रूप से वितरित रहता है।
यदि r त्रिज्या के खोखले गोलीय चालक को q आवेश दिया जाए तब उसका वैद्युत विभव
\(V=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \frac{q}{r}\) वोल्ट

(ii) किसी आवेशित चालक से वायु में वैद्युत विसर्जन उसके तीक्ष्ण नुकीले सिरों (sharp points) से प्राथमिकता से होता है।
गोले का आवेश पृष्ठ घनत्व \(\sigma=\frac{q}{A}\)

तीक्ष्ण नुकीले सिरों का क्षेत्रफल बहुत कम होने के कारण वहाँ आवेश पृष्ठ घनत्व बहुत अधिक होता है, जिस कारण उनसे वायु में आवेश का क्षरण होने लगता है। .
संरचना (Construction)-इसमें एक धातु का एक बड़ा गोला S, दो अचालक स्तम्भों A व B पर सधा होता है तथा इसमें एक रबर अथवा सिल्क की सिरेहीन बैल्ट (endless string) होती है जो दो घिरनियों P1 व P2 द्वारा एक वैद्युत मोटर की सहायता से चलायी जा सकती है। घिरनी P1 पृथ्वी के तल में तथा घिरनी P2 गोले के केन्द्र से तल पर होती है। इसमें दो तीक्ष्ण नुकीले सिरों वाले धातु के चालक (conductor) होते हैं। निचला चालक (कंघा) C1 अति उच्च विभव वाले स्रोत (High Tension Source, HTS ) (≈ 104 वोल्ट) के धन टर्मिनल से तथा ऊपरी चालक (कंघा) C2 खोखले गोले S के आन्तरिक पृष्ठ से सम्बन्धित रहता है। इन्हें क्रमश: फुहार चालक (spray conductor) तथा संग्राहक चालक (collecting conductor) कहते हैं। एक विसर्जन नलिका गतिमान डोरी के समान्तर लगी होती है इस नलिका का ऊपरी सिरा गोले S के केन्द्र पर होता है, जहाँ आयन स्रोत स्थित होता है तथा नलिका का दूसरा सिरा पृथ्वी से सम्बन्धित रहता है।

कार्यविधि (Working)-जब चालक (कंघे) C1 को अति उच्च विभव (HTS) दिया जाता है तो तीक्ष्ण बिन्दुओं की क्रिया के फलस्वरूप यह अपने चारों ओर के स्थान में आयन उत्पन्न करता है। धन-आयनों व चालक (कंघे) C1 के बीच प्रतिकर्षण के कारण ये धन-आयन गति करती बैल्ट पर चले जाते हैं। गतिमान बैल्ट द्वारा ये आयन ऊपर ले जाए जाते हैं। चालक (कंघे) C2 के तीक्ष्ण सिरे बैल्ट को ठीक छूते हैं। इस प्रकार चालक(कंघा) C2 बैल्ट के धन आवेश को एकत्रित करता है। यह धन-आवेश शीघ्र ही गोले S के बाहरी पृष्ठ पर स्थानान्तरित हो जाता है। चूंकि बैल्ट घूमती रहती है। अत: यह धन आवेश को ऊपर की ओर ले जाती है जो चालक (कंघे) C2 द्वारा एकत्रित कर लिया जाता है तथा गोले S के बाहरी पृष्ठ पर स्थानान्तरित हो जाता है। इस प्रकार गोले S का बाहरी पृष्ठ निरन्तर धन आवेश प्राप्त करता है तथा इसका विभव अति उच्च हो जाता है।
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जब गोले S का विभव बहुत अधिक (लगभग 3 x 106 वोल्ट/मीटर) हो जाता है, तो निकटवर्ती वायु की परावैद्युत तीव्रता (dielectric strength) टूट जाती है तथा आवेश का निकटवर्ती वायु में क्षरण (leakage) हो जाता है। अधिकतम विभव की स्थिति में आवेश के क्षरण होने की दर गोले पर स्थानान्तरित आवेश की दर के बराबर हो जाती है। गोले से आवेश का क्षरण रोकने के लिए, जनित्र को स्टील के आवरण से घिरे एक टैंक में रखा जाता है जिसमें उच्च दाब LED पर नाइट्रोजन अथवा मेथेन गैस भरी होती है।
वान डे ग्राफ जनित्र धन आवेशित कणों को अति उच्च वेग तक त्वरित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

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स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वैद्युत विभव से क्या तात्पर्य है? [2015]
उत्तर :
वैद्युत विभव-किसी बिन्दु आवेश q को अनन्त से वैद्युत क्षेत्र के भीतर किसी बिन्दु तक लाने में क्षेत्र के विरुद्ध किए गए कार्य W तथा बिन्दु आवेश q के अनुपात को उस बिन्दु का वैद्युत विभव कहते हैं, इसे ‘V’ से प्रदर्शित करते हैं।
अतः वैद्युत विभव V = \(\frac{W}{q}\) जूल/कूलॉम अथवा वोल्ट।

प्रश्न 2.
वैद्युत विभवान्तर को परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
वैद्युत विभवान्तर–वैद्युत क्षेत्र में, किसी बिन्दु आवेश q को एक बिन्दु A से दूसरे बिन्दु B तक लाने में क्षेत्र के विरुद्ध किए गए कार्य (W) तथा बिन्दु आवेश के अनुपात को उन बिन्दुओं के बीच वैद्युत विभवान्तर कहते हैं।”
अतः बिन्दुओं A व B के बीच वैद्युत विभवान्तर VB – VA = \(\frac{W}{q}\) जूल/कूलॉम अथवा वोल्ट।

प्रश्न 3.
वैद्युत विभव तथा विभवान्तर का मात्रक बताइए तथा इसकी परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
वैद्युत विभव तथा विभवान्तर का मात्रक वोल्ट है।
सूत्र V = \(\frac{W}{q}\) से, यदि q= 1 कूलॉम तथा W = 1 जूल हो तो V = 1 वोल्ट।
वोल्ट की परिभाषा–यदि + 1 कूलॉम के आवेश को अनन्त से किसी बिन्दु तक लाने में 1 जूल कार्य करना पड़ता है तो उस बिन्दु का वैद्युत विभव 1 वोल्ट होगा।

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प्रश्न 4.
समविभव पृष्ठ से क्या तात्पर्य है? [2015, 18]]
उत्तर :
समविभव पृष्ठ-किसी वैद्युत क्षेत्र में स्थित कोई ऐसा पृष्ठ, जिस पर स्थित किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच वैद्युत विभवान्तर शून्य है, समविभव पृष्ठ कहलाता है। परिभाषा से स्पष्ट है कि समविभव पृष्ठ पर स्थित सभी बिन्दु एक ही विभव पर होते हैं।

प्रश्न 5.
सिद्ध कीजिए कि विद्युत बल रेखाएँ समविभव सतह के लम्वबत् होती हैं। [2018]
उत्तर :
यदि, विद्युत क्षेत्र समविभव पृष्ठ के लम्बवत् नहीं है तो वैद्युत क्षेत्र का समविभव पृष्ठ के अनुदिश कोई शून्येतर (non-zero) घटक होगा। अतः किसी परीक्षण आवेश को समविभव पृष्ठ पर इस घटक के विरुद्ध गति कराने में कुछ कार्य करना होगा? जबकि समविभव पृष्ठ पर परीक्षण आवेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में किया गया कार्य शून्य होता है। अत: विद्युत क्षेत्र एवं विद्युत बल रेखाएँ समविभव सतह के लम्बवत् होती हैं।

प्रश्न 6.
दो समविभव पृष्ठ परस्पर काटते क्यों नहीं हैं?
उत्तर :
समविभव पृष्ठ पर वैद्युत क्षेत्र की दिशा पृष्ठ पर लम्ब होती है। यदि दो समविभव पृष्ठ एक-दूसरे को काटते हैं तो कटान बिन्दु पर दो लम्ब खींचे जा सकेंगे; अत: वैद्युत क्षेत्र की भी दो दिशाएँ होंगी, जोकि असम्भव है।

प्रश्न 7.
इलेक्ट्रॉन-वोल्ट किस भौतिक राशि का मात्रक है? इसकी परिभाषा लिखिए।
उत्तर :
इलेक्ट्रॉन-वोल्ट, ऊर्जा का मात्रक है। 1 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट, ऊर्जा की उस मात्रा के बराबर होता है, जो एक इलेक्ट्रॉन, 1 वोल्ट के विभवान्तर से त्वरित किए जाने पर अर्जित करता है। .

प्रश्न 8.
आवेशों के निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
वैद्युत स्थितिज ऊर्जा-आवेशों के निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा आवेशों को परस्पर अनन्त दूरी से उनकी वर्तमान स्थिति में लाकर निकाय की रचना करने में बाह्य स्रोत द्वारा किए गए कार्य के बराबर होती है।

प्रश्न 9.
चित्र-2.35 में प्रदर्शित आवेशों के निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए। [2014]
हल :
निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा
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प्रश्न 10.
1 MeV को जूल में व्यक्त कीजिए। [2007]
हल :
∵ 1eV = 1.6 x 10-19 जूल
अतः 1MeV = 106 eV = 106 x 1.6 x 10-19 जूल = 1.6 x 10-13जूल।

प्रश्न 11.
दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर 50 वोल्ट हैं। एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक 2 x 10-5 कूलॉम आवेश को ले जाने पर कितना कार्य करना होगा? [2011, 12]
हल :
दिया है, q= 2 x 10-5 कूलॉम, ∆V = 50 वोल्ट, W = ?
अतः कृत कार्य W = q∆V = 2 x 10-5 x 50 = 10-3 जूल।

प्रश्न 12.
5 सेमी की दूरी पर स्थित दो बिन्दुओं A व B के विभव +10 वोल्ट तथा -10 वोल्ट हैं। 1.0 कूलॉम आवेश को A से B तक ले जाने में कितना कार्य करना होगा? [2012]
हल :
दिया है, q= 1.0 कूलॉम, ∆V = 10-(-10) = 20 वोल्ट, W = ?
अतः किया गया कार्य W = q∆V = 1.0 x 20 = 20 जूल।

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प्रश्न 13.
5 सेमी की दूरी पर दो बिन्दुओं A और B में से प्रत्येक 10 वोल्ट के विभव पर है। 10 कूलॉम के धन आवेश को बिन्दु A से बिन्दु B तक ले जाने में कितना कार्य करना होगा? [2010]
हल :
किया गया कार्य W = q (VB – VA) = q x 0 [∵ VB = VA = 10 वोल्ट]

प्रश्न 14.
निर्वात में किसी बिन्दु (x, Y, 2 सभी मीटर में) पर वैद्युत विभव V = 4x2 वोल्ट है। बिन्दु (1 मीटर, 0 मीटर,.2 मीटर) पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए। [2012]
हल :
बिन्दु (x, y, 2) पर वैद्युत विभव V = 4x2
इससे स्पष्ट है कि विभव केवल x पर निर्भर करता है y अथवा z पर नहीं।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 44
इसमें x = 1 मीटर, y = 0 मीटर, 2 = 2 मीटर रखने पर, बिन्दु (1 मीटर, 0 मीटर, 2 मीटर) पर
वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता E = -8 x 1 = -8 वोल्ट/मीटर।
ऋण चिह्न यह प्रदर्शित करता है कि वैद्युत क्षेत्र ऋण X-अक्ष की ओर दिष्ट है।

प्रश्न 15.
चित्र-2.36 के अनुसार दो प्लेटें A तथा B परस्पर 2 मिमी की दूरी पर रखी हैं। प्लेट A का विभव 10,000 वोल्ट है, प्लेट B पृथ्वी से सम्बन्धित है। इन प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए।[2001]
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हल :
दिया है, d = 2 मिमी = 2 x 10-3 मीटर,
VA = +10,000 वोल्ट, VB = 0, E = ?
सूत्र \(E=\frac{V_{A}-V_{B}}{d}\)
प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता \(E=\frac{10,000-0}{2 \times 10^{-3}}=5 \times 10^{6}\) वोल्ट/मीटर।

प्रश्न 16.
दो बिन्दुओं A तथा B के विभव क्रमशः +V तथा – V वोल्ट हैं। यदि उनके बीच की दूरीr मीटर है। तो ज्ञात कीजिए-
(i) A व B के बीच औसत वैद्युत क्षेत्र तथा
(ii) -q कूलॉम आवेश को A से B तक ले जाने में उसकी स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन।
हल :
(i) A व B के बीच औसत वैद्युत क्षेत्र
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(ii) स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि = 2qV जूल।

प्रश्न 17.
आवेश q को a तथा b(b> a) त्रिज्या वाले दो संकेन्द्री खोखले गोलों पर इस प्रकार वितरित किया गया है कि पृष्ठीय आवेश घनत्व समान हैं। इन दोनों गोलों के उभयनिष्ठ केन्द्र पर विभव की गणना कीजिए। [2012]
हल :
माना a तथा b त्रिज्याओं वाले संकेन्द्री खोखले गोलों पर आवेश q1 व q2 हैं।
अतः q= q1 + q2
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प्रश्न 18.
यदि दो वैद्युत द्विध्रुवों के केन्द्रों के बीच की दूरी दोगुनी कर दी जाए तो
(i) उनके बीच लगने वाले बल तथा
(ii) उनकी स्थितिज ऊर्जा का मान कितने गुना परिवर्तित हो जाएँगे? [2005]
हल :
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प्रश्न 19.
चित्र-2.37 में प्रदर्शित A व B बिन्दुओं के बीच विभवान्तर ज्ञात कीजिए।
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हल :
सूत्र V = iR से,
VAB = 2 × 2 + 3+ 2 × 1- 2 + 2 × 1 ,
= 9 वोल्ट।

प्रश्न 20.
संधारित्र से क्या तात्पर्य है? [2004, 14, 16]
उत्तर :
संधारित्र-संधारित्र किसी भी प्रकार के दो ऐसे चालकों का युग्म है जो कि एक-दूसरे के समीप हों, जिन पर बराबर व विपरीत आवेश हों तथा जिसकी एक प्लेट पृथ्वी से जुड़ी हो।

प्रश्न 21.
संधारित्रों के उपयोग लिखिए। [2016]
उत्तर :
संधारित्रों के उपयोग-निम्नलिखित में संधारित्रों का उपयोग किया जाता है –

  1. आवेश का संचय करने में
  2. ऊर्जा का संचय करने में
  3. वैद्युत उपकरणों में
  4. इलेक्ट्रॉनिक परिपथों में
  5. वैज्ञानिक अध्ययन में
  6. प्रत्यावर्ती धारा नियन्त्रण में।

प्रश्न 22.
फैरड क्या है? एक फैरड में कितने पिकोफैरड होते हैं?
उत्तर :
फैरड की परिभाषा-सूत्र C = q/V में,q = 1 कूलॉम, V = 1 वोल्ट रखने पर, C=1 फैरड।
“1 फैरड उस चालक की धारिता है, जिसको 1 कूलॉम का आवेश देने पर उसके विभव में 1 वोल्ट की वृद्धि हो।”
1 पिकोफैरड = 10-12 फैरड; अत: 1 फैरड = 1012 पिकोफैरड।

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प्रश्न 23.
परावैद्युत पदार्थ से आप क्या समझते हैं? (1) जर्मेनियम, (2) अभ्रक, (3) कार्बन में से कौन-सा परावैद्युत है? [2010, 12]
उत्तर :
परावैद्युत पदार्थ—“वे पदार्थ, जिनके अणुओं में इलेक्ट्रॉन नाभिक के साथ दृढ़तापूर्वक बँधे होते हैं, परावैद्युत पदार्थ कहलाते हैं।” जैसे-काँच, मोम, अभ्रक आदि। जर्मेनियम, अभ्रक तथा कार्बन में अभ्रक परावैद्युत पदार्थ है।

प्रश्न 24.
संधारित्र में परावैद्युत का क्या कार्य है? [2006]
उत्तर :
संधारित्र में परावैद्युत का कार्य-संधारित्र में परावैद्युत इसकी प्लेटों के बीच उपस्थित वैद्युत क्षेत्र की दिशा के विपरीत दिशा में ध्रुवित होकर प्लेटों के बीच के वैद्युत क्षेत्र को कम कर देता है, जिसके कारण प्लेटों के बीच विभवान्तर कम हो जाता है; अत: संधारित्र की धारिता बढ़ जाती है।

प्रश्न 25.
संधारित्र की प्लेटों के बीच परावैद्युत भरने अथवा उपयोग से धारिता क्यों बढ़ जाती है? [2000, 06]
अथवा
किसी संधारित्र की प्लेटों के बीच परावैद्युत पदार्थ भरने पर उसकी धारिता पर क्या प्रभाव पड़ता है? [2014, 17]
उत्तर :
आवेशित संधारित्र की प्लेटों के बीच परावैद्युत माध्यम भरने से उसके अणु ध्रुवित हो जाते हैं तथा माध्यम के अन्दर एक वैद्युत क्षेत्र, मुख्य वैद्युत क्षेत्र की विपरीत दिशा में उत्पन्न हो जाता है। इस कारण दोनों प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता कम हो जाती है। तीव्रता कम होने के कारण प्लेटों के बीच उत्पन्न विभवान्तर कम हो जाता है। विभवान्तर के कम होने से संधारित्र की धारिता बढ़ जाती है।

प्रश्न 26.
क्या आप एक फैरड धारिता वाले समान्तर प्लेट धारित्र को एक अलमारी में रख सकते हैं? स्पष्ट कीजिए। [2018]
उत्तर :
समान्तर प्लेट धारित्र की धारिता \(C=\frac{A \varepsilon_{0}}{d}\)
या \(\frac{A}{d}=\frac{C}{\varepsilon_{0}}=\frac{1}{8.85 \times 10^{-12}}\)
= 1.13 x 1011
सामान्य संधारित्रों के लिए d मिमी कोटि का होता है।
∴ A = 1.13 x 1011 x 10-3
= 113 x 108 मीटर2
इस आकार के संधारित्र को अलमारी में रख पाना सम्भव नहीं है।

प्रश्न 27.
एक आवेशित संधारित्र की प्लेटों को एक वोल्टमीटर से जोड़ा गया है। यदि संधारित्र की प्लेटों को परस्पर दूर हटाया जाए तो वोल्टमीटर के पाठ्यांक पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर :
सूत्र C ∝ 1/d से, प्लेटों के बीच की दूरी d बढ़ाने पर धारिता C घट जाएगी। निश्चित आवेश के लिए . प्लेटों के बीच विभवान्तर V ∝ 1/C से, धारिता C के घटने पर विभवान्तर V बढ़ जाएगा; अत: वोल्टमीटर का पाठ्यांक बढ़ जाएगा।

प्रश्न 28.
सिद्ध कीजिए कि कूलॉम /न्यूटन-मीटर तथा फैरड/मीटर एक ही भौतिक राशि के मात्रक हैं। [2010]
उत्तर :
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प्रश्न 29.
C1 तथा C2 धारिता वाले दो संधारित्रों पर आवेश क्रमशः q1 व q2 हैं तथा विभव क्रमशः V1 व V2 हैं। इनको स्पर्श कराकर फिर अलग करने के पश्चात् संधारित्रों का आवेश q’1 व q’2 एवं विभव में परिवर्तन क्रमशः ΔV1 तथा ΔV2 हो जाता है। सिद्ध कीजिए – [2006]
(i) \(\frac{q^{\prime}_{1}}{q_{2}^{\prime}}=\frac{C_{1}}{C_{2}}\) तथा
(ii) C1ΔV1 = C2ΔV2
हल :
(i) पहले संधारित्र पर आवेश q1 = C1V1 तथा दूसरे संधारित्र पर आवेश q2 = C2V2
दोनों पर कुल आवेश q = q1 + q2 = C1V1 + C2V2
स्पर्श कराने के बाद माना दोनों का उभयनिष्ठ विभव V है तो
q’1=C1V तथा q’2 = C2V ।
अत: \(\frac{q_{1}^{\prime}}{q_{2}^{\prime}} \doteq \frac{C_{1} V}{C_{2} V}=\frac{C_{1}}{C_{2}}\)

(ii) जोड़ने से पहले कुल आवेश q = q1 + q2 = C1V1 + C2V2| चूँकि जोड़ने पर दोनों का विभव समान हो जाता है; अत: एक का विभव बढ़ेगा तथा दूसरे का घटेगा। इसलिए जोड़ने के बाद कुल आवेश
q = C1(V1 + ∆V1) + C2 (V2 – ∆V2)

चूँकि जोड़ने से पहले तथा बाद में कुल आवेश वही रहता है।
1. C1(V1 + ∆V1) + C2 (V2– ∆V2) = C1V1 + C2V2
अथवा [C1V1 + C1∆V1] + C2V2 – C2∆V2 = C1V1 + C2V2.
अथवा C1∆V1 – C2∆V2 = 0
अतः C1∆V1 = C2∆V2

प्रश्न 30.
C1 व C2 धारिताओं वाले दो संधारित्रों को समान्तर क्रम में जोड़कर q आवेश दिया गया है। प्रत्येक संधारित्र का विभवान्तर तथा आवेश बताइए।
हल :
समान्तर क्रम में जुड़े होने के कारण विभवान्तर समान होगा। प्रत्येक संधारित्र का विभवान्तर V = q/ (C1 + C2)
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प्रश्न 31.
धातु की चार एकसमान प्लेटों में प्रत्येक की एक तरफ की सतह का क्षेत्रफल A है। ये प्लेटें वायु में एक-दूसरे से d दूरी पर रखी हैं। इन्हें चित्र 2.38 के अनुसार आपस में जोड़ दिया गया है। A तथा B के बीच तुल्य धारिता ज्ञात कीजिए। [2002]]
हल :
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दिए गए परिपथ में प्लेटें 1 व 2 एक संधारित्र तथा प्लेटें 3 व 4 दूसरा संधारित्र बनाती हैं। इनके तुल्य परिपथ संलग्न चित्रों (2.38) में प्रदर्शित हैं। स्पष्ट है कि दोनों संधारित्र समान्तरक्रम में जुड़े हैं।
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प्रत्येक संधारित्र की धारिता C1 = C2 = \(\frac{\varepsilon_{0} A}{d}\)
अतः बिन्दुओं A व B के बीच तुल्य धारिता C = C1 + C2
\(=\frac{\varepsilon_{0} A}{d}+\frac{\varepsilon_{0} A}{d}=\frac{2 \varepsilon_{0} A}{d}\)

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प्रश्न 32.
संलग्न चित्र-2.40 में दिखाई गई चार प्लेटों में प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A मीटर2 तथा संलग्न प्लेटों के बीच दूरी d मीटर है। एकान्तर प्लेटें पतले तारों से जोड़ी गई हैं। बिन्दुओं A व B के बीच तुल्य धारिता ज्ञात कीजिए। [2004]
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हल :
यह तीन संधारित्रों (1, 2); (2, 3) व (3, 4) का समान्तर संयोजन है। प्लेट 2, पहले व दूसरे संधारित्रों की दूसरी उभयनिष्ठ प्लेट है तथा प्लेट 3, दूसरे व तीसरे संधारित्रों की पहली उभयनिष्ठ प्लेट है।
अतः बिन्दुओं A व B के बीच तुल्य धारिता C = C1 + C2 + C3
\(=\frac{\varepsilon_{0} A}{d}+\frac{\varepsilon_{0} A}{d}+\frac{\varepsilon_{0} A}{d}=\frac{3 \varepsilon_{0} A}{d}\) फैरड

प्रश्न 33.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A तथा प्लेटों के बीच की दूरी d है। इसकी दोनों प्लेटों के बीच t मोटाई की एक धातु की प्लेट खिसकाई जाती है। इससे निकाय की धारिता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर :
पट्टी रखने से पहले धारिता \(C_{0}=\frac{\varepsilon_{0} A}{d}\)
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अत: निकाय की धारिता बढ़ जाएगी।

प्रश्न 34.
एक समान्तर पट्ट संधारित्र की प्लेटों के बीच की दूरी d है। प्लेटों के बीच d/2 मोटाई की एक धातु की पट्टी रख दी जाती है। धारिता पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
हल :
t मोटाई की पट्टी रखने से पहले धारिता \(C_{0}=\frac{\varepsilon_{0} A}{d}\)
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 56

प्रश्न 35.
R1 व R2 त्रिज्याओं वाले दो गोलीय चालकों को आवेशित किया गया है। यदि इन्हें एक तार द्वारा जोड़ा जाए तो उनके पृष्ठ आवेश घनत्वों का अनुपात क्या होगा? किस गोले पर पृष्ठ आवेश घनत्व अधिक होगा? [2005, 06]
हल :
चूँकि दोनों गोलीय चालकों पर विभव V समान है; अत: गोलों के आवेशों का अनुपात
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 57
पृष्ठ आवेश घनत्व छोटे गोले (जिसकी त्रिज्या R2 है) पर अधिक होगा।

प्रश्न 36.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र को बैटरी से आवेशित किया जाता है। बैटरी का सम्बन्ध संधारित्र से विच्छेदित करने के उपरान्त प्लेटों के बीच की दूरी दोगुनी करने पर संधारित्र की
(i) धारिता तथा (ii) संगृहीत ऊर्जा पर क्या प्रभाव पड़ेगा? [2012]
हल :
(i) माना d1 = d अत: d2 = 2d सूत्र C ∝ 1/ d से, संधारित्र की धारिता आधी हो जाएगी।
(ii) सूत्र U ∝ 1/C से, संगृहित ऊर्जा दोगुनी हो जाएगी।

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प्रश्न 37.
स्थैतिक वैद्युत ऊर्जा में क्या परिवर्तन होगा तथा क्यों, जब एक आवेशित समान्तर प्लेट धारित्र की प्लेटों के बीच एक परावैद्युतांक K वाला परावैद्युतांक स्लैब डाला जाता है, जब धारित्र को बैटरी से अलग कर दिया जाता है? [2018]
हल :
धारित्र को बैटरी से अलग कर देने पर उसकी प्लेटों पर आवेश अपरिवर्तित रहेगा।
संधारित्र की धारिता \(C=\frac{A \varepsilon_{0}}{d}\)
संधारित्र में संचित स्थैतिक वैद्युत ऊर्जा \(U=\frac{1}{2} \frac{q^{2}}{C}\)
संधारित्र की प्लेटों के बीच परावैद्युतांक स्लैब रखने पर,
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 58

प्रश्न 38.
धातु का एक बड़ा गोला, एक दूसरे बाहरी छोटे गोले से तार द्वारा जुड़ा है। इस समायोजन को कुछ आवेश दिया जाता है। (i) किस गोले पर अधिक आवेश होगा? (ii) किस गोले पर पृष्ठ आवेश घनत्व अधिक होगा? [2006]
उत्तर :
(i) चूँकि बड़े गोले की त्रिज्या अधिक है; अत: इसकी धारिता भी अधिक होगी जिसके कारण बड़े गोले के पृष्ठ पर अधिक आवेश होगा।
(ii) पृष्ठ आवेश घनत्व छोटे गोले पर अधिक होगा।

प्रश्न 39.
दो विभिन्न धारिता वाले गोले भिन्न-भिन्न विभवों तक आवेशित किए जाते हैं। अब इन गोलों को एक तार द्वारा जोड़ दिया जाता है। बताइए कि उनकी कुल ऊर्जा पहली स्थिति से बढ़ेगी, घटेगी अथवा समान रहेगी। ऊर्जा में यह अन्तर किस रूप में होता है?
उत्तर :
आवेश के पुनर्वितरण से सदैव ऊर्जा का ह्रास होता है; अत: कुल ऊर्जा घटेगी। ऊर्जा में यह अन्तर संयोजक तार में ऊष्मा के रूप में क्षय होगा।

प्रश्न 40.
किसी आवेशित चालक के चारों ओर परावैद्युत पदार्थ रखने पर उसके विभव तथा धारिता पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर :
किसी आवेशित चालक के चारों ओर K परावैद्युतांक वाला पदार्थ रखने पर उसका विभव V से घटकर V/K रह जाता है तथा धारिता C से बढ़कर KC हो जाती है।

प्रश्न 41.
दिए गए ग्राफ में एक संधारित्र की कुल संचित ऊर्जा (U) तथा धारिता (C) का परिवर्तन प्रदर्शित है। संधारित्र की प्लेटों पर आवेश (q) तथा प्लेटों के बीच विभवान्तर (V) में से कौन-सी राशि नियत है? [2013]
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उत्तर :
दिए गए ग्राफ से स्पष्ट है कि U ∝ 1/C
संधारित्र में संचित कुल ऊर्जा \(\frac{1}{2} \frac{q^{2}}{C}\)
U व C के बीच ग्राफ अतिपरवलय है।
यदि q नियत है तो U ∝ 1/C
अत: संधारित्र की प्लेटों पर आवेश (q) नियत है।

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प्रश्न 42.
n समरूप संधारित्र (प्रत्येक की धारिता C) समान्तर क्रम में जुड़े हैं, जिन्हें V विभव तक आवेशित किया गया है। इस संयोजन का कुल आवेश, कुल विभवान्तर तथा कुल ऊर्जा बताइए। यदि इन्हें अलग-अलग करके श्रेणीक्रम में जोड़ें तब उपर्युक्त मान बताइए। [2013]
हल :
समान्तर क्रम में, प्रत्येक संधारित्र पर आवेश = CV
अतः कुल आवेश = n x CV = nCV
कुल विभवान्तर V है; अत: कुल ऊर्जा = \(\frac { 1 }{ 2 }\) (nC)V2 = \(\frac { 1 }{ 2 }\) nCV2
श्रेणीक्रम में, कुल आवेश = प्रत्येक संधारित्र पर आवेश = CV
कुल विभवान्तर = nv
कुल ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\left(\frac{C}{n}\right)\)(nV)2 = InCV2

प्रश्न 43.
N समान आवेशित छोटी बूंदें मिलकर बड़ी बूँद बनाती हैं। बड़ी बूंद तथा छोटी बूंद के लिए निम्न का अनुपात ज्ञात कीजिए-(i) धारिता, (ii) विभव, (iii) आवेश, (iv) स्थैतिक वैद्युत ऊर्जा। [2018]
उत्तर :
माना प्रत्येक छोटी बूंद की त्रिज्या 7 व उस पर आवेश q है।
बड़ी बूंद पर आवेश (Q) = Nq
बड़ी बूंद का आयतन = N x छोटी बूंद का आयतन
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प्रश्न 44.
यदि वायु की परावैद्युत सामर्थ्य 3.0 x 106 वोल्ट/मीटर हो तो दर्शाइए कि वान डे ग्राफ जनित्र के 0.1 मीटर त्रिज्या वाले गोले का विभव 3.0 x 105 वोल्ट से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। [2018]
उत्तर :
किसी माध्यम का परावैद्युत सामर्थ्य, वैद्युत क्षेत्र का वह अधिकतम मान है जो वह अपना परावैद्युत भंजन हुए बिना सहन कर सकता है।
अतः Emax = 3.0 x 106 वोल्ट/मीटर, r = 0.1 मीटर
गोले के पृष्ठ पर वैद्युत क्षेत्र, \(E=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \cdot \frac{q}{r^{2}}\)
गोले के पृष्ठ पर वैद्युत विभव, \(V=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \frac{q}{r}\)
∴ \(\frac{E}{V}=\frac{1}{r}\) या V= E.r
या Vmax = Emax.r = 3.0 x 106 x 0.1
= 3.0 x 105 वोल्ट।
अतः वान डे ग्राफ जनित्र के गोले का विभव 3.0 x 105 वोल्ट से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है।

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
S.I. पद्धति में वैद्युत विभव का मात्रक लिखिए।
उत्तर :
S.I. पद्धति में वैद्युत विभव का मात्रक वोल्ट है।

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प्रश्न 2.
वैद्युत विभवान्तर तथा वैद्युत विभव की विमा लिखिए।
उत्तर :
वैद्युत विभवान्तर तथा वैद्युत विभव दोनों की विमा [ML2T-3A-1] है।

प्रश्न 3.
उस भौतिक राशि का नाम बताइए जिसका S.I. मात्रक ‘जूल/कूलॉम’ होता है। यह एक अदिश राशि है अथवा सदिश राशि?
उत्तर :
‘जूल/कूलॉम’ वैद्युत विभव अथवा विभवान्तर का मात्रक है। यह एक अदिश राशि है।

प्रश्न 4.
बताइए वैद्यत क्षेत्र तथा वैद्यत विभव सदिश राशियाँ हैं अथवा अदिश राशियाँ।
उत्तर :
वैद्युत क्षेत्र सदिश राशि है, जबकि वैद्युत विभव अदिश राशि है।

प्रश्न 5.
एक बिन्दु आवेश q सेr दूरी पर वैद्युत विभव के लिए सूत्र लिखिए।
हल :
वैद्युत विभव \(V=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \frac{q}{r}\)

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प्रश्न 6.
एक वैद्युत द्विध्रुव के कारण उसकी अक्षीय एवं निरक्षीय स्थिति में वैद्युत विभव का व्यंजक लिखिए। [2018]
हल :
अक्षीय स्थिति में, \(V=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \frac{p}{r^{2}}\) तथा निरक्षीय स्थिति में, V = 0

प्रश्न 7.
विभव प्रवणता तथा वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता के बीच सम्बन्ध लिखिए। [2003, 05, 13]
उत्तर :
वैद्युत क्षेत्र की ताजता \(E=-\frac{d V}{d r}\)
अर्थात् वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ऋणात्मक विभव प्रवणता के बराबर होती है।

प्रश्न 8.
यदि दो समान्तर प्लेटों के बीच की दूरी d हो तथा उनके बीच विभवान्तर V हो तो प्लेटों के बीच विभव प्रवणता एवं वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता कितनी होगी?
उत्तर :
विभव प्रवणता तथा वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता अर्थात् दोनों का आंकिक मान E =V/d होगा।

प्रश्न 9.
विभव प्रवणता का मात्रक क्या है?
उत्तर :
विभव प्रवणता का मात्रक वोल्ट/मीटर है।

प्रश्न 10.
किसी सम वैद्युत क्षेत्र में वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता तथा विभवान्तर में सम्बन्ध लिखिए। [2009]]
उत्तर :
वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता E = (V1 – V2)/d वोल्ट/मीटर।

प्रश्न 11.
दो बिन्दुओं A तथा B पर वैद्युत विभव क्रमशः +V वोल्ट तथा – V वोल्ट हैं। यदि उनके बीच की दूरी r मीटर हो तो A और B के बीच औसत वैद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए। [2018]
हल :
बिन्दु A व B के बीच विभवान्तर = VB – VA = – V – (V) = – 2V
A व B के बीच वैद्यत क्षेत्र की तीव्रता \(E=\frac{-d V}{d r}=\frac{-(-2 V)}{r}=\frac{2 V}{r}\)

प्रश्न 12.
कोई आवेशित कण एकसमान स्थिर वैद्युत क्षेत्र में, क्षेत्र के लम्बवत् प्रवेश करता है। कण का पथ क्या होगा?
उत्तर :
आवेशित कण का पथ परवलयाकार होगा।

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प्रश्न 13.
क्षैतिज दिशा में एकसमान वेग v से गति करती हुई कैथोड किरण एक ऊर्ध्वाधर वैद्युत क्षेत्र E से गुजर रही है। किरण के ऊर्ध्वाधर विक्षेप के लिए व्यंजक लिखिए।
उत्तर :
कैथोड किरण पर आवेश q= e है; अतः कैथोड किरण का ऊर्ध्वाधर दिशा में विक्षेप \(y=\left(\frac{e E}{2 m v^{2}}\right) x^{2}\) जहाँ x क्षैतिज दिशा में चली गई दूरी है।

प्रश्न 14.
वैद्युत क्षेत्र रेखा के अनुदिश वैद्युत विभव बढ़ता है अथवा घटता है?
उत्तर :
वैद्युत क्षेत्र रेखा के अनुदिश वैद्युत विभव घटता है।

प्रश्न 15.
एक प्रोटॉन को दूसरे प्रोटॉन की ओर लाने पर, निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा में क्या परिवर्तन होता है? [2006]
उत्तर :
निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा बढ़ जाएगी।

प्रश्न 16.
किसी समविभवी पृष्ठ के दो बिन्दुओं के बीच 500 माइक्रोकूलॉम आवेश को गति कराने में कितना कार्य किया जाता है? [2003, 13]
हल :
कार्य W = qΔV = q x 0 = 0 (∵ ΔV = 0)

प्रश्न 17.
वैद्युत क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन उच्च विभव से निम्न विभव की ओर अथवा निम्न विभव से उच्च विभव में से किस ओर गति करता है? इसी क्षेत्र में प्रोटॉन किस ओर गति करेगा?.
उत्तर :
इलेक्ट्रॉन निम्न विभव से उच्च विभव की ओर गति करता है, जबकि प्रोटॉन उच्च विभव से निम्न विभव की ओर गति करेगा।

प्रश्न 18.
क्या ऐसा सम्भव है कि किसी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र शून्य हो परन्तु वैद्युत विभव शून्य न हो? उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
हाँ, किसी खोखले आवेशित चालक के अन्दर वैद्युत क्षेत्र शून्य होता है, परन्तु वैद्युत विभव शून्य नहीं होता

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प्रश्न 19.
क्या ऐसा सम्भव है कि किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव शून्य हो परन्तु वैद्युत क्षेत्र शून्य न हो? उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
हाँ, किसी वैद्युत द्विध्रव की निरक्ष पर वैद्युत विभव शून्य होता है, जबकि वैद्युत क्षेत्र शून्य नहीं होता

प्रश्न 20.
किसी बिन्दु आवेश q को एक अन्य आवेश Q के परितः r त्रिज्या के वृत्तीय पथ में घूर्णन कराया जाता है। किया गया कार्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर :
बिन्दु आवेश एक समविभव पृष्ठ पर गति करता है; अत: किया गया कार्य शून्य होगा।

प्रश्न 21.
किसी धन बिन्दु आवेश के लिए दो समविभव खींचिए। .
उत्तर :
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चित्र 2.42 में प्रदर्शित गोलीय पृष्ठ S1 व S1 धन बिन्दु आवेश के समविभव पृष्ठ हैं।

प्रश्न 22.
एक खोखले आवेशित चालक के बाहरी पृष्ठ पर वैद्युत बल क्षेत्र लम्बवत् चित्र-2.42 क्यों होता है?
उत्तर :
आवेशित चालक का बाहरी पृष्ठ समविभव पृष्ठ होता है इसीलिए उसके बाहरी पृष्ठ पर वैद्युत बल क्षेत्र .. लम्बवत् होता है।

प्रश्न 23.
समविभव पृष्ठ के सापेक्ष वैद्युत बल रेखाओं की दिशा बताइए।
उत्तर :
समविभव पृष्ठ पर वैद्युत बल रेखाएँ अभिलम्बवत् होती हैं।

प्रश्न 24.
\([latex][latex]\overrightarrow{\mathbf{p}}\)[/latex][/latex] वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण वाला एक वैद्युत द्विध्रुव एकसमान वैद्युत क्षेत्र \([latex][latex]\overrightarrow{\mathbf{E}}\)[/latex][/latex] में स्थायी सन्तुलन में रखा हुआ है। वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा क्या होगी?
उत्तर :
स्थायी सन्तुलन की अवस्था में θ = 0°
अतः वैद्युत द्विध्रुव की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा U = – pE cos 0° = pE

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प्रश्न 25.
p वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण वाले एक वैद्युत द्विध्रुव को E तीव्रता के एकसमान वैद्युत क्षेत्र में स्थायी सन्तुलन की स्थिति से 90° तथा 180° विक्षेपित करने में कितना कार्य करना पड़ेगा?
हल :
स्थायी सन्तुलन की स्थिति से 90° विक्षेपित करने में किया गया कार्य
W1 = pE (cos 0° – cos 90° ) = pE
स्थायी सन्तुलन की स्थिति से 180° विक्षेपित करने में किया गया कार्य
W2 = pE (cos 0° – cos 180°) = 2 pE

प्रश्न 26.
एक इलेक्ट्रॉन तथा एक प्रोटॉन परस्पर 1Å की दूरी पर हैं। इस निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है, q1 = -e तथा q2 = e, r = 1Å = 10-10 मीटर, U = ?
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प्रश्न 27.
दो बिन्दु आवेशों के निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा के लिए सूत्र लिखिए।
उत्तर :
परस्पर r दूरी पर निर्वात या वायु में स्थित बिन्दु आवेशों q1 व q2 के निकाय की
वैद्युत स्थितिज ऊर्जा \(U=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \frac{q_{1} q_{2}}{r}\)

प्रश्न 28.
दो समान बिन्दु आवेश q प्रत्येक कूलॉम, परस्पर r मीटर की दूरी पर हैं। इनकी वैद्युत स्थितिज ऊर्जा कितनी होगी? [2004]
उत्तर :
वैद्युत स्थितिज ऊर्जा \(U=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \frac{q^{2}}{r}\)जूल

प्रश्न 29.
दिखाइए कि मात्रक वोल्ट/मीटर तथा न्यूटन/कूलॉम एक ही भौतिक राशि के मात्रक हैं। ये मात्रक किस भौतिक राशि से सम्बद्ध हैं?
उत्तर :
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 63
ये दोनों मात्रक वैद्यत क्षेत्र की तीव्रता के हैं।

प्रश्न 30.
बिन्दु आवेश के कारण वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता तथा वैद्युत विभव, दूरी r के साथ कैसे विचरण करते [2002]
उत्तर :
वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता E, दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है अर्थात् E ∝ 1/r2
वैद्युत विभव V, दूरी r के व्युत्क्रमानुपाती होता है अर्थात् V ∝ 1/r ; अत: वैद्युत विभव की तुलना में, वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता, दूरी r के बढ़ने पर तेजी से घटती है।

प्रश्न 31.
बिन्दु आवेश तथा रेखीय आवेश के कारण वैद्युत क्षेत्र दूरी के साथ कैसे परिवर्तित होता है? [2005]
उत्तर :
बिन्दु आवेश के लिए वैद्युत क्षेत्र E ∝ 1/r2 तथा रेखीय आवेश के लिए वैद्युत क्षेत्र E & 1/r होता है।

प्रश्न 32.
एकसमान वैद्युत क्षेत्र में क्षेत्र की दिशा से θ कोण पर संरेखित वैद्युत द्विध्रुव की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा के लिए, सूत्र लिखिए।
उत्तर :
एकसमान वैद्युत क्षेत्र \overrightarrow{\mathrm{E}} से θ कोण पर संरेखित द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा
Uθ = – \(\overrightarrow{\mathrm{P}}\).\(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) = – pE cosθ

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प्रश्न 33.
1 सेमी त्रिज्या के गोले को 1 कूलॉम आवेश देने से गोले के पृष्ठ पर वैद्युत विभव ज्ञात कीजिए। [2016]
हल :
दिया है, r = 1 सेमी = 10-2 मीटर, q= 1 कूलॉम, V = ?
वैद्युत विभव V = 9 x 109 x \(\frac{q}{r}\) = 9 x 109 x \(\frac{1}{10^{-2}}\) = 9 x 1011 वोल्ट।

प्रश्न 34.
धारिता का विमीय सूत्र तथा मात्रक लिखिए। [2014]
उत्तर :
धारिता का विमीय सूत्र = [M-1L-2T4A2] तथा मात्रक फैरड है।

प्रश्न 35.
M.K.S.A. पद्धति में R त्रिज्या के धातु के खोखले गोले की धारिता का सूत्र लिखिए। अथवा विलगित गोलीय चालक की धारिता का सूत्र लिखिए।
[2001, 03]
उत्तर :
R त्रिज्या के धातु के खोखले गोले की धारिता C = 4 πε0R फैरड।

प्रश्न 36.
संधारित्र के श्रेणी संयोजन का सूत्र लिखिए।
उत्तर :
संधारित्र के श्रेणी संयोजन का सूत्र
\(\frac{1}{C}=\frac{1}{C_{1}}+\frac{1}{C_{2}}\)

प्रश्न 37.
किसी आवेशित संधारित्र की ऊर्जा के लिए सूत्र लिखिए।
उत्तर :
आवेशित संधारित्र की ऊर्जा = \(\frac{1}{2} \frac{q^{2}}{C}\) जूल अथवा \(\frac{1}{2} C V^{2}\) जूल।।

प्रश्न 38.
संधारित्र में साधारणतया प्रयुक्त होने वाले किन्हीं दो परावैद्युत पदार्थों के नाम लिखिए। [2002]
उत्तर :
अभ्रक, मोम, कागज।

प्रश्न 39.
समान्तर प्लेट संधारित्र में दूसरी प्लेट का क्या कार्य है?
उत्तर :
संधारित्र में दूसरी प्लेट का कार्य, प्लेटों का आकार स्थिर रखते हुए पहली प्लेट के विभव को कम करना है, जिससे कि उसे अधिक आवेश दिया जा सके तथा धारिता बढ़ाई जा सके।

प्रश्न 40.
किसी आवेशित चालक की धारिता C फैरड तथा आवेश q के कारण उसमें संचित स्थितिज ऊर्जा U जूल है। चालक पर उपस्थित आवेश का व्यंजक लिखिए।
उत्तर :
चालक की स्थितिज ऊर्जा U = q2/2C; अत: चालक पर आवेश \(q=\sqrt{2 U C}\)

प्रश्न 41.
एक नियत विभवान्तर के लिए कौन-सा संधारित्र अधिक आवेश संगृहीत करेगा? (i) परावैद्युत से भरा संधारित्र या (ii) वायु संधारित्र।
[2018] .
उत्तर :
संधारित्र में संगृहीत आवेश q= CV = \(\frac{K A \varepsilon_{0}}{d} V\)
अत: परावैद्युत से भरा संधारित्र अधिक आवेश संगृहीत करेगा।

प्रश्न 42.
एक आवेशित छड़ के निकट एक अनावेशित धातु की छड़ रखने पर प्रथम छड़ के विभव पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर :
प्रथम छड़ का विभव घट जाएगा।

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प्रश्न 43.
सिद्ध कीजिए कि दो आवेशित चालकों को परस्पर स्पर्श कराके अलग कर देने से उन पर आवेश, चालकों की धारिताओं के अनुपात में बँट जाता है।
उत्तर :
दो आवेशित चालकों को स्पर्श कराने पर उनका विभव V समान हो जाएगा इसलिए उन पर आवेश क्रमशः
q1 = C1V व q2 = C2V हो जाएगा।
अतः .
\(\frac{q_{1}}{q_{2}}=\frac{C_{1}}{C_{2}}\)

प्रश्न 44.
एक अनावेशित वैद्युतरोधी चालक A एक-दूसरे आवेशित वैद्युतरोधी चालक B के समीप लाया जाता है तो चालक B के आवेश तथा विभव में क्या परिवर्तन होगा? [2010]
उत्तर :
चालक B पर आवेश में कोई परिवर्तन नहीं होगा परन्तु विभव कम हो जाएगा क्योंकि यह चालक A पर अपने से विपरीत आवेश प्रेरित करता है।

प्रश्न 45.
किसी आवेशित संधारित्र पर नैट आवेश कितना होता है?
उत्तर :
शून्य।

प्रश्न 46.
किसी माध्यम के परावैद्युतांक से क्या तात्पर्य है?[2010]
उत्तर :
परावैद्युतांक-“किसी माध्यम की निरपेक्ष वैद्युतशीलता ६ तथा निर्वात की वैद्युतशीलता ६० के अनुपात को उस माध्यम का परावैद्युतांक K कहते हैं।” अर्थात् ε/ε0 = K

प्रश्न 47.
किसी संधारित्र की धारिता को कैसे बढ़ाया जा सकता है? [2004]
उत्तर :
संधारित्र प्लेटों का क्षेत्रफल बढ़ाकर, प्लेटों के बीच की दूरी कम करके तथा प्लेटों के बीच परावैद्युत पदार्थ रखकर संधारित्र की धारिता को बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 48.
आवेशित संधारित्र में ऊर्जा किस रूप में कहाँ संचित रहती है? [2002, 04]
उत्तर :
आवेशित संधारित्र की ऊर्जा, संधारित्र की प्लेटों के बीच स्थित परावैद्युत माध्यम में वैद्युत क्षेत्र की ऊर्जा के रूप में संचित रहती है।

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प्रश्न 49.
यदि आवेशित संधारित्र की प्लेटों के बीच की दूरी को बढ़ाया जाए तो उनके बीच विभवान्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा? [2005]
उत्तर :
सूत्र V ∝ d से, विभवान्तर बढ़ जाएगा।

प्रश्न 50.
यदि आवेशित समान्तर पट्ट संधारित्र की प्लेटों को परस्पर निकट लाया जाए तो उनके विभवान्तर में क्या परिवर्तन होगा? [2003]
उत्तर :
सूत्र C ∝ 1/d से, दूरी d के कम होने से धारिता C बढ़ जाएगी तथा सूत्र V ∝ 1/C से, धारिता C के बढ़ने से विभवान्तर V कम हो जाएगा।

प्रश्न 51.
किसी संधारित्र की धारिता की परिभाषा व मात्रक लिखिए। [2014, 15, 16]
उत्तर :
संधारित्र की धारिता–“संधारित्र की एक प्लेट को दिए गए आवेश तथा दोनों प्लेटों के बीच उत्पन्न विभवान्तर के अनुपात को संधारित्र की धारिता कहते हैं।” इसका मात्रक फैरड है।

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प्रश्न 52.
किसी संधारित्र की धारिता किन-किन बातों पर निर्भर करती है?
उत्तर :
संधारित्र की धारिता प्लेटों के क्षेत्रफल, प्लेटों के बीच की दूरी तथा प्लेटों के बीच रखे परावैद्युत माध्यम पर निर्भर करती है।

प्रश्न 53.
तीन संधारित्रों के संयोग से अधिकतम तथा न्यूनतम धारिता कैसे प्राप्त करेंगे?
उत्तर :
तीनों संधारित्रों को समान्तर क्रम में जोड़कर अधिकतम धारिता तथा श्रेणीक्रम में जोड़कर न्यूनतम धारिता प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 54.
तीन समान धारिता C के संधारित्र श्रेणीक्रम में जुड़े हुए हैं। इनकी परिणामी धारिता कितनी होगी? यदि संधारित्र समान्तर क्रम में जुड़े हों, तब?
उत्तर :
श्रेणीक्रम में परिणामी धारिता = C/3 तथा समान्तर क्रम में परिणामी धारिता = 3C

प्रश्न 55.
किसी आवेशित चालक में संचित स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक धारिता तथा विभव के पदों में लिखिए। [2001]
अथवा
किसी चालक का विभव V तथा धारिता C है, चालक की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा का सूत्र बताइए। [2004]
उत्तर :
संचित स्थितिज ऊर्जा \(U=\frac{1}{2} C V^{2}\) जूल; जहाँ C धारिता तथा V विभव है।

प्रश्न 56.
किसी संधारित्र की धारिता C है। यदि इस पर Q आवेश हो तो इस पर संगृहीत ऊर्जा कितनी होगी? [2004]
उत्तर :
संचित स्थितिज ऊर्जा \(U=\frac{1}{2} \frac{Q^{2}}{C}\) जूल।

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प्रश्न 57.
C धारिता के संधारित्र को q आवेश देने पर संचित ऊर्जा U है। यदि आवेश बढ़ाकर 24 कर दिया जाए तो संचित ऊर्जा का मान क्या होगा? । [2006]
उत्तर :
सूत्र U ∝ q2 से, संचित ऊर्जा 4U होगी।

प्रश्न 58.
संधारित्रों के संयोजन की समतुल्य धारिता से क्या तात्पर्य है? [2004]
उत्तर :
संयोजन की समतुल्य धारिता-संयोजन की समतुल्य धारिता, उस एकल संधारित्र की धारिता के तुल्य होती है जो किसी बैटरी से जोड़े जाने पर उतना ही आवेश संचित करे, जितना कि उस बैटरी से जोड़े जाने पर संयोजन करता है।

प्रश्न 59.
यदि एक परिवर्ती वायु संधारित्र में n प्लेटें हों तथा दो समीपवर्ती प्लेटों के बीच की दूरी d हो तो संधारित्र की धारिता कितनी होगी? ।
उत्तर :
संधारित्र की धारिता \(C=\frac{(n-1) \varepsilon_{0} A}{d}[latex] फैरड होगी।

प्रश्न 60.
समान्तर पट्ट संधारित्र की धारिता का सूत्र लिखिए , जब उसकी प्लेटों के बीच आंशिक रूप से परावैद्युत पदार्थ रखा हो। .
उत्तर :
समान्तर पट्ट संधारित्र की धारिता C=\frac{\varepsilon_{0} A}{[(d-t)+t / K]} फैरड

प्रश्न 61.
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता का सूत्र लिखिए। प्रयुक्त संकेतों का अर्थ स्पष्ट कीजिए। [2009]
उत्तर :
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता [latex]C=\frac{K \varepsilon_{0} A}{d}\) फैरड।
जहाँ d प्लेटों के बीच की दूरी, A प्लेटों का क्षेत्रफल तथा K प्लेटों के बीच के माध्यम का परावैद्युतांक है।

प्रश्न 62.
निर्वात की वैद्युतशीलता से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
सूत्र C = ε0A/d से, यदि A = 1 मीटर2, d = 1 मीटर है तो C = ε0
अतः निर्वात की वैद्युतशीलता उस समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता के तुल्य होती है जिसकी प्लेटों का क्षेत्रफल 1 मीटर2 तथा उनके बीच की दूरी 1 मीटर हो।

प्रश्न 63.
\(\frac{1}{2} \varepsilon_{0} E^{2}\) की विमा लिखिए, जहाँ , मुक्त स्थान की वैद्युतशीलता तथा E वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता है।
[2002]
उत्तर :
व्यंजक \(\frac{1}{2} \varepsilon_{0} E^{2}\), प्रति एकांक आयतन में संचित ऊर्जा अर्थात् ऊर्जा घनत्व को प्रदर्शित करता है।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 64

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प्रश्न 64.
किसी संधारित्र को एक सीमा से अधिक आवेश देना सम्भव क्यों नहीं है? [2000]
उत्तर :
संधारित्र को लगातार आवेश देते रहने से उसकी प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र बढ़ता जाएगा। अन्त में एक स्थिति ऐसी आ जाएगी जब संधारित्र की प्लेटों के बीच के माध्यम का रोधन (insulation) टूट जाएगा और संधारित्र चिनगारी देकर निरावेशित हो जाएगा।

प्रश्न 65.
दो आवेशित चालकों को तार द्वारा जोड़ने पर ऊर्जा-हानि के लिए सूत्र लिखिए। [2005]
उत्तर :
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 65

प्रश्न 66.
पृथ्वी के वैद्युत विभव को शून्य माना जाता है, क्यों?
[2003]
उत्तर :
क्योंकि पृथ्वी की धारिता अनन्त होती है; अत: सूत्र V = q/C से, पृथ्वी का वैद्युत विभव V = \(\frac{q}{\infty}\)= 0 (शून्य) होगा।

प्रश्न 67.
क्या कोई ऐसा चालक है जिसे असीमित आवेश दिया जा सके?
उत्तर :
हाँ, पृथ्वी।

प्रश्न 68.
एक आवेशित समान्तर प्लेट संधारित्र किसी पदार्थ, जिसका परावैद्युतांक 2 है, में पूर्ण रूप से डुबो , दिया जाता है। इस संधारित्र की प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता में क्या परिवर्तन होगा? [2001]
उत्तर :
सूत्र \(E=\frac{q}{K \varepsilon_{0} A}\) से, \(E \propto \frac{1}{K}\) अत: K= 2 रखने पर, वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता आधी हो जाएगी।

प्रश्न 69.
धातु का परावैद्युतांक कितना होता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
धातु का परावैद्युतांक अनन्त होता है; क्योंकि जब किसी धातु को वैद्युत क्षेत्र में रखते हैं तो धातु के भीतर वैद्युत क्षेत्र शून्य ही रहता है।

प्रश्न 70.
परावैद्युत सामर्थ्य से क्या अभिप्राय है? [2010, 13]
उत्तर :
परावैद्युत सामर्थ्य-किसी परावैद्युत पदार्थ के लिए वह महत्तम वैद्युत क्षेत्र जिसे वह बिना वैद्युत भंजन के सहन कर सकता है, परावैधत सामर्थ्य कहलाता है।

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प्रश्न 71.
भंजक विभवान्तर से क्या तात्पर्य है? [2010, 13, 18]
उत्तर :
भंजक विभवान्तर—किसी संधारित्र की प्लेटों के बीच वह अधिकतम विभवान्तर जिस पर प्लेटों के बीच रखे परावैद्युत पदार्थ में वैद्युत भंजन होने लगता है, भंजक विभवान्तर कहलाता है।

प्रश्न 72.
एक आवेशित संधारित्र एवं एक वैद्युत सेल में मूल अन्तर क्या है?
उत्तर :
वैद्युत सेल से ली गई धारा नियत होती है जबकि आवेशित संधारित्र से ली गई धारा क्षीण होती जाती है।

प्रश्न 73.
किसी समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता पर, उसमें परावैद्युत पदार्थ भरने से क्या प्रभाव पड़ता है? [2004]
उत्तर :
ऐसा करने से संधारित्र की धारिता बढ़ जाएगी।

प्रश्न 74.
ऊर्जा घनत्व से क्या तात्पर्य है? अथवा आवेशित समान्तर पट्ट संधारित्र की प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र में ऊर्जा घनत्व का सूत्र लिखिए। [2013]
उत्तर :
ऊर्जा घनत्व-संधारित्र के एकांक आयतन में संचित ऊर्जा को संधारित्र का ऊर्जा घनत्व कहते हैं। इसे ‘u’ से प्रदर्शित करते हैं।
ऊर्जा घनत्व \(u=\frac{1}{2} \varepsilon_{0} E^{2}\)
यहाँ E प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता तथा ε0 निर्वात की वैद्युतशीलता है।

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता आंकिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर 50 वोल्ट है। एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक 3 x 10-5 कूलॉम आवेश को ले जाने पर कितना कार्य करना होगा? [2018]
हल :
दिया है, विभवान्तर V = 50 वोल्ट, q= 3 x 10-5 कूलॉम, W = ?
किया गया कार्य (W)= qV
= 3 x 10-5 x 50
= 1.5 x 10-3 जूल।

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प्रश्न 2.
किसी α-कण को 10 वोल्ट के विभवान्तर से ले जाया जाता है। किए गए कार्य की गणना जूल में कीजिए। [2005]
हल :
दिया है, α= a-कण = 3.2 x 10-19 कूलॉम, V = 10 वोल्ट, w = ?
किया गया कार्य W = q x V = 3.2 x 10-19 x 10 = 3.2 x 10-18 जूल।

प्रश्न 3.
5 कूलॉम वाले एक वैद्युत आवेश को एक वैद्युत क्षेत्र में एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में 25 जूल ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। यदि पहले बिन्दु का विभव 10 वोल्ट हो तो दूसरे बिन्दु का विभव कितना होगा? [2010]
हल :
दिया है, q= 5 कूलॉम, W = 25 जूल, VA = 10 वोल्ट, VB = 0
सूत्र VB – VA = \(\frac{W}{q}\) से, VB – 10 = \(\frac{25}{5}\); अत: दूसरे बिन्दु का विभव VB = 15 वोल्ट।

प्रश्न 4.
+ 40 μC के दो आवेश परस्पर 0.4 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। इनके मध्य-बिन्दु पर विभव की गणना कीजिए। माध्यम का परावैद्युतांक 2 है।
[2004, 14]
हल :
दिया है, q1 = q2 = q = + 40 μC = 40 x 10-6C, K = 2
मध्य-बिन्दु की प्रत्येक आवेश से दूरी r = 0.4/2 = 0.2 मीटर, V = ?
एक आवेश के कारण मध्य-बिन्दु पर वैद्युत विभव
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 66

प्रश्न 5.
दो बिन्दु आवेश +q तथा -2q एक-दूसरे से d दूरी पर स्थित हैं। दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा पर ऐसे बिन्दुओं की स्थिति ज्ञात कीजिए, जहाँ पर आवेशों के इस निकाय के कारण विभव शून्य हो। [2017]
उत्तर :
माना बिन्दु आवेशों को मिलाने वाली रेखा पर +q से आवेश – 2q की ओर x दूरी पर वैद्युत विभव शून्य है। विभव के सूत्र
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 67
इस प्रकार आवेशों को मिलाने वाली रेखा पर +q से -2q की ओर, +q से d 13 दूरी पर वैद्युत विभव शून्य है। यदि आवेशों को मिलाने वाले रेखा पर आवेशों के बाहर x दूरी पर वैद्युत विभव शून्य है, तो
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 68

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प्रश्न 6.
संलग्न चित्र 2.44 के अनुसार आवेशों को मिलाने वाली रेखा के किन बिन्दुओं पर (i) वैद्युत विभव तथा (ii) वैद्युत क्षेत्र शून्य होंगे? [2005]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 69
(i) Step 1. माना + q आवेश से x सेमी दूरी पर वैद्युत विभव शून्य होगा।
सूत्र V = 9 x 109 q/r से,
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 70

Step 2.
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 71
अतः = 25 सेमी की दूरी पर दोनों आवेशों के बीच में वैद्युत विभव शून्य होगा।

(ii) Step 3 माना +q आवेश से बायीं ओर × सेमी पर वैद्युत क्षेत्र शून्य होगा; अत:
सूत्र E = 9 × 109 q/r2 से,
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Step 4.
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 73
अत: +q आवेश से बाहर की ओर x = 136.6 सेमी की दूरी पर वैद्युत क्षेत्र शून्य होगा।

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प्रश्न 7.
एक 9μC के बिन्दु आवेश से 5 मीटर की दूरी पर – 2μC का दूसरा बिन्दु आवेश वायु में रखा हुआ है। इन दोनों आवेशों से 3 मीटर की दूरी पर स्थित बिन्दु पर वैद्युत विभव के मान की गणना कीजिए। (दिया है, 1/4πεo = 9 × 109 न्यूटन-मीटर/कूलॉम2) [2000]
हल :
दिया है, q1 = 9 μC = 9 × 10-6 कूलॉम, r1 = 3 मीटर,
q2 = -2μC = – 2 x 10-6 कूलॉम, r2 = 3 मीटर, V = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 74
चित्र-2.45 से दोनों आवेशों से समान दूरी r1 = r2 = 3 मीटर पर वैद्युत विभव
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प्रश्न 8.
एक वर्ग की प्रत्येक भुजा 60 सेमी लम्बी है। इसके कोनों पर क्रमशः -2, 3, -4 तथा 5 माइक्रोकूलॉम के आवेश रखे हैं। वर्ग के केन्द्र पर विभव ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है, q1 = -2μ0 = – 2 × 10-6 कूलॉम, q2 = 3μC = 3 × 10-6 कूलॉम,
q3 = – 4μC = – 4 × 10-6 कूलॉम, q4 = 5μC = 5 × 10-6 कूलॉम
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 76

प्रश्न 9.
चार बिन्दु आवेश 1.0 मीटर लम्बाई की भुजा वाले वर्ग ABCD के कोनों पर चित्र-2.47 के अनुसार रखे हैं। यदि वर्ग के विकर्णों के कटान बिन्दु O तथा भुजा BC का मध्य-बिन्दु E हो तो ज्ञात कीजिए –
(i) बिन्दु O पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मान तथा दिशा,
(ii) बिन्दु O पर वैद्युत विभव का मान,
(iii) बिन्दु आवेश 1.0 C को बिन्दु O से बिन्दु E तक ले जाने के लिए आवश्यक ऊर्जा।
(दिया है, 1/4πεo = 9 × 109 न्यूटन-मीटर2/कूलॉम2) .
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 77
हल :
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 78

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EXTRA SHOTS

  • वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता एक सदिश राशि है, अत: किसी बिन्दु पर अनेक बिन्दु आवेशों के कारण उत्पन्न परिणामी . वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता, सभी आवेशों के कारण उत्पन्न वैद्युत क्षेत्र की तीव्रताओं के सदिश योग के बराबर होती है।
  • वैद्युत विभव एक अदिश राशि है, अत: किसी बिन्दु पर परिणामी विभव, अनेक बिन्दु आवेशों के कारण उस
    बिन्दु पर उत्पन्न वैद्युत विभवों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।

बिन्दुओं A व C पर स्थित आवेशों के कारण बिन्दु O पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
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इसी प्रकार बिन्दुओं B व D पर स्थित आवेशों के कारण बिन्दु O पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 80
अतः बिन्दु O पर परिणामी वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 81

(ii) चारों कोनों पर स्थित आवेशों के कारण बिन्दु O पर परिणामी वैद्युत विभव
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 82
परन्तु A0 = CO = BO = DO; अतः V0 = 0 शून्य।

(iii) चारों कोनों पर स्थित आवेशों के कारण बिन्दु E पर परिणामी वैद्युत विभव
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 83
अत: बिन्दु O तथा बिन्दु E के बीच वैद्युत विभवान्तर ∆V = V0 – VE = 0 (शून्य)
अतः 1.0 कूलॉम आवेश को बिन्दु O से बिन्दु E तक ले जाने में किया गया कार्य
w= q × ∆V = 1.0 कूलॉम × 0 वोल्ट = 0 (शून्य)
अर्थात् 1.0 कूलॉम के आवेश को बिन्दु 0 से बिन्दु E तक ले जाने में किसी ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होगी।

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प्रश्न 10.
किसी बिन्दु P पर वैद्युत विभव दिया गया है –
V(x, y, 2) = 6x- 8xy2 – 8y+ 6yz – 4z2 मूलबिन्दु पर स्थित 2 कूलॉम बिन्दु आवेश पर वैद्युत बल की गणना कीजिए। [2007]
हल :
V(x, y, 2) = 6x – 8xy2 – 8y + 6yz – 4z2
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 84
अत: 2 कूलॉम बिन्दु आवेश पर वैद्युत बल F = qE = 2 × 10 = 20 न्यूटन।

CLASSROOM EXPERIENCE

प्रश्न 11.
एक इलेक्ट्रॉन को 15 × 103 वोल्ट विभवान्तर से त्वरित किया जाता है। इसकी ऊर्जा में वृद्धि जूल तथा इलेक्ट्रॉन-वोल्ट में ज्ञात कीजिए। यह कितनी चाल प्राप्त करेगा? (e = 1.6 × 10-19 कूलॉम, m = 9.0 × 10-31 किग्रा)
[2001, 14] ..
हल :
Step 1. सर्वप्रथम प्रश्न में दिए गए आँकड़े नोट कर लेते हैं।
दिया है, V = 15 × 103 वोल्ट, q= e = 1.6 × 10-19 कूलॉम, K = ?, y = ?
Step 2. V विभवान्तर से त्वरित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा वृद्धि
K = q × v = (1.6 × 10-19) × (15 × 103)= 2.4 × 10-15 जूल।
Step 3. परन्तु 1.6 × 10-19 जूल = 1 eV
∴ इलेक्ट्रॉन-वोल्ट में ऊर्जा वृद्धि K = \(\frac{2.4 \times 10^{-15}}{1.6 \times 10^{-19}}\) = 15 × 103eV

Step 4.
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 85

प्रश्न 12.
एक समबाहु त्रिभुज के प्रत्येक कोने पर + 250 μC के आवेश वायु में रखे हैं। इस त्रिभुज के परिकेन्द्र पर जिसकी प्रत्येक कोने से दूरी 18 सेमी है, परिणामी वैद्युत विभव की गणना कीजिए।
हल :
दिया है, q= + 250 μC = + 250 × 10-6 कूलॉम,
r = 18 सेमी = 18 × 10-2 मीटर, V = ?
चित्र-2.48 से तीनों कोनों पर स्थित आवेशों के कारण त्रिभुज के परिकेन्द्र O पर वैद्युत विभव
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प्रश्न 13.
एक तार को 10 सेमी त्रिज्या के वृत्त में मोड़कर उसे 250 μC आवेश दिया जाता है जो उस पर समान रूप से फैल जाता है। इसके केन्द्र पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता तथा विभव ज्ञात कीजिए। –
हल :
दिया है, r = 10 सेमी = 10 × 10-2 मीटर = 0.1 मीटर,
q= 250μC = 250 × 10-6 कूलॉम, E = ?,V = ?
आवेश के वृत्त पर समान रूप से फैलने के कारण यह वृत्त एक सम विभव वृत्त होगा। चूँकि सम विभव के कारण वृत्त के भीतर प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र शून्य होता है; अत: वृत्त के केन्द्र पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता E = 0 (शून्य) होगी।
तथा वृत्त के केन्द्र पर वैद्युत विभव V = 9 × 109\(\frac{q}{r}=\frac{9 \times 10^{9} \times 250 \times 10^{-6}}{0.1}\)
= 2.25 × 107 वोल्ट। ,

प्रश्न 14.
+10μC तथा -10μC के दो बिन्दु आवेशों के बीच की दूरी 1 मीटर है। इनके मध्य-बिन्दु पर वैद्युत विभव ज्ञात कीजिए। [2004, 10]
हल :
दिया है, q1 = + 10μC, q2 = – 10μC, r = 1 मीटर, V = ?
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अत: मध्य-बिन्दु पर परिणामी वैद्युत विभव V = V1 + V2 = 0

प्रश्न 15.
+5.0 × 10-7 कूलॉम तथा – 5.0 × 10-7 कूलॉम के दो बिन्दु आवेशों के बीच की दूरी 1.0 सेमी है। इन आवेशों से बने द्विध्रुव की अक्ष पर केन्द्र से 50 सेमी की दूरी पर स्थित बिन्दु पर वैद्युत विभव की गणना कीजिए। [2007]
हल :
दिया है, q= 5.0 × 10-7 कूलॉम, 2l = 1.0 सेमी = 1.0 × 10-2 मीटर,
r= 50 सेमी = 50 × 10-2 मीटर, V= ?
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प्रश्न 16.
दो समान्तर प्लेटें परस्पर 15 सेमी की दूरी पर हैं, उनके बीच 450 वोल्ट का विभवान्तर लगाने पर प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए। हल :
विभवान्तर V = 450 वोल्ट, दूरी d = 15 सेमी = 0.15 मीटर, E = ?
वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता \(E=\frac{V}{d}=\frac{450}{0.15}=3000\) वोल्ट/मीटर।

प्रश्न 17.
एक वैद्युत क्षेत्र में किसी बिन्दु x पर विभव V = 5x2 – 2x + 10 वोल्ट है जहाँ x मीटर में है। बिन्दु x= 1 मीटर पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता तथा इसकी दिशा बताइए।
हल :
V = (5x2 – 2x + 10) वोल्ट
E =- \(\frac{d V}{d x}\) = –\(\frac{d}{d x}\) (5x2 – 2x + 10)
= – [5 × 2x – 2 × 1+ 0] = – 10x + 2 वोल्ट/मीटर
x = 1 मीटर रखने पर,
E = – 10 × 1+ 2 = – 8 वोल्ट/मीटर।
ऋण चिह्न प्रदर्शित करता है कि वैद्युत क्षेत्र ऋण X-अक्ष की ओर दिष्ट है।

प्रश्न 18.
U238 नाभिक में दो प्रोटॉन 6.0 × 10-15 मीटर की दूरी पर हैं। उनकी पारस्परिक वैद्युत स्थितिज ऊर्जा की गणना कीजिए।
हल :
दिया है, r = 6.0 × 10-15 मीटर, q1 = q2 = 1.6 × 10-19 जूल, U = ?
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= 3:84 × 10-14 जूल।

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प्रश्न 19.
6.0 × 10-8 कूलॉम का एक बिन्दु आवेश निर्देशांक मूलबिन्दु पर स्थित है। एक इलेक्ट्रॉन को बिन्दु x = 3 मीटर से x= 6 मीटर तक ले जाने में कितना कार्य करना होगा?
हल :
मूलबिन्दु पर स्थित आवेश के कारण x = 3 मीटर पर,
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प्रश्न 20.
हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन व प्रोटॉन के बीच की दूरी 0.5A है। इनकी पारस्परिक वैद्युत स्थितिज ऊर्जा क्या होगी?
हल :
दिया है, q1 = +1.6 × 10-19 कूलॉम, q2 = -1.6 × 10-19 कूलॉम,
r = 0.5 Å = 5 × 10-11 मीटर, U = ?
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प्रश्न 21.
+ 1 × 10-6 कूलॉम और – 1 × 10-6 कूलॉम के दो बिन्दु आवेश परस्पर 2.0 सेमी की दूरी पर स्थित हैं। यह वैद्युत द्विध्रुव 1 × 105 वोल्ट/मीटर के एक समान वैद्युत क्षेत्र में स्थित है। द्विधुव की स्थायी सन्तुलन की स्थिति में स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए। [2012, 18]
हल :
दिया है, q = 1 × 10-6 कूलॉम, 2l = 2.0 सेमी = 2.0 × 10-2 मीटर
E = 1 × 105 वोल्ट/मीटर
वैद्युत क्षेत्र में वैद्युत द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा U = – pE cos θ
स्थायी सन्तुलन की अवस्था में, θ = 0°
U = – pE = – (q × 2l) E –
= -1 × 10-6 × 2 × 10-2 × 1 × 105
= – 2 × 10-3 जूल।

प्रश्न 22.
एक गेंद जिसका द्रव्यमान 1 ग्राम है तथा जिस पर 10-8C आवेश है, एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु की ओर चलती है। यदि पहले बिन्दु का विभव 600 वोल्ट हो तथा दूसरे बिन्दु का विभव शून्य हो तथा दूसरे बिन्दु पर गेंद का वेग 20 सेमी/सेकण्ड हो तो पहले बिन्दु पर गेंद का वेग क्या होगा? [2009]
हल :
दिया है, m = 1 ग्राम = 10-3 किग्रा, q = 10-8C, V1 = 600 वोल्ट, V2 = 0,
V2 = 20 सेमी/सेकण्ड = 0.2 मीटर/सेकण्ड, V1 = ?
गतिज ऊर्जा में वृद्धि = किया गया कार्य
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प्रश्न 23.
जब एक आवेशित कण को 100 वोल्ट विभव के बिन्दु से 200 वोल्ट विभव के बिन्दु तक ले जाया जाता है तो इसकी गतिज ऊर्जा 10 जूल कम हो जाती है। कण पर आवेश की गणना कीजिए।
हल :
दिया है, विभवान्तर V = (200-100) = 100 वोल्ट, K = 10 जूल, q= ?
सूत्र गतिज ऊर्जा K = qV से, कण पर आवेश \(q=\frac{K}{V}=\frac{10}{100}=0.1\) कूलॉम।
चूँकि उच्च विभव की ओर जाने में ऊर्जा में कमी होती है; अतः कण पर आवेश धनात्मक होगा।

प्रश्न 24.
एक प्रोटॉन 500 वोल्ट के विभवान्तर से त्वरित किया जाता है। प्रोटॉन का वेग ज्ञात कीजिए। [2018]
हल :
दिया है, V = 500 वोल्ट
प्रोटॉन का द्रव्यमान (m) = 1.66 × 10-24 kg, q = 1.6 × 10-19 कूलॉम
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प्रश्न 25.
+ q, + 2q तथा + 4q आवेशों को a मीटर भुजा वाले एक समबाहु त्रिभुज के कोणों पर रखने में कितना कार्य करना होगा? निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा क्या होगी?
हल :
+q व + 2q के निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा
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प्रश्न 26.
दो समान आवेश +q, 2 a दूरी पर रखे गए हैं। एक तीसरा आवेश – 2q इन दोनों के मध्य बिन्दु पर रखा जाता है। निकाय की स्थितिज ऊर्जा की गणना कीजिए। [2013]
हल :
माना q1 = q2 = q, 43 = – 2q
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निकाय की स्थितिज ऊर्जा
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प्रश्न 27.
दो समान आवेशों में प्रत्येक 2.0 × 10-7 कूलॉम है। दोनों आवेश परस्पर 20 सेमी की दूरी पर हैं। उसी परिमाण का एक तीसरा आवेश दोनों आवेशों के ठीक बीच में स्थित है। इसे दोनों आवेशों से 20 सेमी दूर एक बिन्दु तक ले जाया जाता है। इस प्रक्रिया में वैद्युत क्षेत्र द्वारा कितना कार्य किया जाता है?
हल :
चित्र-2.50 से A व B पर स्थित बिन्दु आवेशों के कारण इनके मध्य-बिन्दु O पर परिणामी वैद्युत विभव
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P एक ऐसा बिन्दु है जो दोनों आवेशों से समान दूरी 20 सेमी पर है; अत: A तथा B आवेशों के कारण बिन्दु P पर परिणामी वैद्युत विभव
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एक अन्य समान परिमाण के आवेश को बिन्दु O से बिन्दु P तक ले जाने में वैद्युत क्षेत्र के विरुद्ध किया गया कार्य
W = q × (Vp  – Vo )
= 2.0 × 10-7 × (18 – 36) × 103 जूल
= -2.0 × 18 x 10-4
=-3.6 × 10-3 जूल।
ऋण चिह्न प्रदर्शित करता है कि कार्य वैद्युत क्षेत्र द्वारा किया गया है। अतः
अभीष्ट कार्य W = 3.6 × 10-3 जूल।

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प्रश्न 28.
दो इलेक्ट्रॉन 106 मीटर/सेकण्ड के वेग से एक-दूसरे की ओर छोड़े गए। वे अधिक-से-अधिक एक-दूसरे के कितने समीप आ सकते हैं?
हल :
दिया है, q = 1.6 × 10-19 कूलॉम, v = 106 मीटर/सेकण्ड, m = 9.0 × 10-31 किग्रा, r = ?
दो इलेक्ट्रॉनों की कुल गतिज ऊर्जा = अधिकतम समीप की स्थितिज ऊर्जा
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प्रश्न 29.
विभवमापी के 10 मीटर लम्बे तार के सिरों के बीच 1.0 वोल्ट का विभवान्तर लगाया जाता है। तार में विभव प्रवणता तथा वैद्युत क्षेत्र का मान लिखिए।।
[2003]
हल :
दिया है, Δx= 10 मीटर, ΔV = 1.0 वोल्ट, E = ? ..
चूँकि विभव प्रवणता = वैद्युत क्षेत्र = ΔV/Δ x = 1.0/10 = 0.1वोल्ट/मीटर।

प्रश्न 30.
धातु की दो प्लेटें एक-दूसरे से 5 सेमी की दूरी पर समान्तर स्थित हैं। इनके बीच 200 वोल्ट की एक बैटरी जुड़ी है। गणना कीजिए-(i) इन प्लेटों के बीच गुजरने वाले -कण पर कार्यरत बल तथा (ii) एक प्लेट से दूसरी प्लेट तक पहुँचने में α-कण की गतिज ऊर्जा में वृद्धि। [2007]
हल :
दिया है, d = 5 सेमी = 0.05 मीटर, V = 200 वोल्ट
α-कण का आवेश q= + 2e = 2 × 1.6 × 10-19 कूलॉम, F = ?, ΔK = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 102

प्रश्न 31.
107 मीटर/सेकण्ड की चाल से गतिमान इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा, इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (eV) में ज्ञात . कीजिए। (m = 9.1 × 10-31 किग्रा)।[2004]
हल :
दिया है, v = 107 मीटर/सेकण्ड, m = 9.1 × 10-31 किग्रा, K = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 103

प्रश्न 32.
एक इलेक्ट्रॉन 500 वोल्ट के विभवान्तर पर त्वरित किया जाता है। उसकी गतिज ऊर्जा की गणना कीजिए। वह कितनी चाल प्राप्त कर लेगा?
हल :
दिया है, (q) = 1.6 × 10-19 कूलॉम, V = 500 वोल्ट, K = ?, v = ?
गतिज ऊर्जा K = Vq = 500 × 1.6 × 10-19 जूल = 8.0 × 10-17 जूल।
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प्रश्न 33.
एक इलेक्ट्रॉन धारा में इलेक्ट्रॉन का वेग 2.0 × 107 मीटर/सेकण्ड, 1.6 × 103 वोल्ट/मीटर के वैद्युत क्षेत्र के लम्बवत् दिशा में 10 सेमी चलने में 3.4 मिमी विक्षेपित हो जाती है। इलेक्ट्रॉन का विशिष्ट आवेश (e/m) ज्ञात कीजिए। [2013]
हल :
दिया है, v = 2.0 × 107 मीटर/सेकण्ड, E = 1.6 × 103 वोल्ट/मीटर, e / m = ?
x = 10 सेमी = 10 × 10-2 मीटर, y = 3.4 मिमी = 3.4 × 10-3मीटर
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प्रश्न 34.
आसुत जल की 64 छोटी बूंदें, प्रत्येक की त्रिज्या 0.1 मिमी तथा आवेश (2/3) × 10-12 कूलॉम है, मिलकर एक बड़ी बूंद बनाती हैं। बड़ी बूंद पर विभव ज्ञात कीजिए। [2007]
हल :
दिया है, r = 0.1 मिमी = 10-4 मीटर, q= (2/3) × 10-12 कूलॉम, V= ?
एक बड़ी बूंद का आयतन = 64 × छोटी बूंदों का आयतन
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 106

प्रश्न 35.
समान रूप से आवेशित तथा समान त्रिज्या वाली जल की 64 छोटी बूंदें मिलकर एक बड़ी बूंद बनाती हैं। बड़ी बूंद के लिए-(i) त्रिज्या, (ii) विभव तथा (iii) स्थितिज ऊर्जा के मान एक छोटी बूँद की तुलना में कितने-कितने होंगे?.
[2005]
हल :
माना छोटी बूंद की त्रिज्या r तथा बड़ी बूंद की त्रिज्या R है।
(i) एक बड़ी बूंद का आयतन = 64 × छोटी बूंदों का आयतन
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 107
(ii)
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(iii)
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प्रश्न 36.
एक संधारित्र को 1000 वोल्ट से आवेशित करने पर वह 2 माइक्रोकूलॉम आवेश ग्रहण करता है। संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है, V = 1000 वोल्ट, q= 2 माइक्रोकूलॉम = 2 × 10-6 कूलॉम, C = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 110

प्रश्न 37.
25 μF धारिता के संधारित्र की प्लेटों के बीच 250 वोल्ट का विभवान्तर लगाने से संधारित्र प्लेटों पर कितना आवेश एकत्रित होगा?
हल :
दिया है, C = 25 μF = 25 × 10-6 फैरड़, V = 250 वोल्ट, q = ?
प्लेटों पर आवेश q= CV = 25 × 10-6 × 250 = 6250 × 10-6 कूलॉम ।
= 6.250 × 10-3 कूलॉम।
अत: संधारित्र की पहली प्लेट पर + 6.250 × 10-3 कूलॉम तथा दूसरी प्लेट पर -6.250 × 10-3 कूलॉम आवेश होगा।

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प्रश्न 38.
एक धातु के गोले को, जिसकी त्रिज्या 1 सेमी है, 1 कूलॉम का आवेश देने पर उसका विभव कितना हो जाएगा? [2001]
हल :
दिया है, q= 1 कूलॉम, R= 1 सेमी = 10-2 मीटर, V = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 111

प्रश्न 39.
पृथ्वी को 1.28 × 104 किमी व्यास का गोलाकार चालक मानकर उसकी वैद्युत धारिता की गणना कीजिए। [2007]
हल :
दिया है, = 6.4 × 103 किमी = 6.4 × 106 मीटर, C = ?
गोलाकार चालक की धारिता C = 4 πεoR = \(\frac{1}{9 \times 10^{9}}\) × 6.4 × 106
= 711 × 10-6 फैरड = 711μF.

प्रश्न 40.
0.9 मीटर त्रिज्या के एक धनावेशित गोले का विभव 960 वोल्ट है। गोले पर कितने इलेक्ट्रॉनों की कमी है?
हल :
दिया है, R= 0.9 मीटर, V = 960 वोल्ट, n= ? . माना
गोले पर n इलेक्ट्रॉनों की कमी है।
गोले की धारिता C = 4 πεo R; अत: गोले पर आवेश q = CV = πεoRV
परन्तु q= ne अत: ne = 4 πεo RV
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 112
= 6.0 × 1011 इलेक्ट्रॉनों की कमी।

प्रश्न 41.
धातु के दो गोलों के व्यास 12 सेमी तथा 8 सेमी हैं। इन्हें समान विभव तक आवेशित किया गया है। इन पर आवेश के पृष्ठ घनत्वों का अनुपात बताइए।
[2012]
हल :
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प्रश्न 42.
धातु के दो आवेशित गोलों की त्रिज्याएँ 5 सेमी तथा 10 सेमी हैं। दोनों पर अलग-अलग 75 μC का आवेश है। किसी चालक तार द्वारा दोनों गोलों को जोड़ दिया जाता है। गणना कीजिए- (i) जोड़ने के पश्चात् गोलों का उभयनिष्ठ विभव, (ii) प्रत्येक गोले पर आवेश की मात्रा, (iii) तार में से होकर स्थानान्तरित आवेश की मात्रा तथा (iv) जोड़ने के बाद ऊर्जा में ह्रास (क्षय)। [2004, 05]
हल :
दिया है, R1 = 5 सेमी = 5 × 10-2 मीटर, R2 = 10 सेमी = 10 × 10-2 मीटर,q1 = q2 = 75 μC = 75 × 10-6 कूलॉम
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(i) दोनों गोलों को जोड़ने पर उभयनिष्ठ विभव
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(ii) पहले गोले पर नया आवेश q’1 = C1V = \(\frac{5}{9}\) × 10-11 × 9.0 × 106 = 50 μC.
दूसरे गोले पर नया आवेश q’2 = C2V = \(\frac{10}{9}\) × 10-11 × 9.0 × 106 = 100 μC.

(iii) तार में होकर स्थानान्तरित आवेश की मात्रा = 75 – 50 = 25 μC छोटे गोले से।
(iv)
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प्रश्न 43.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल 100 सेमी2 है तथा दोनों प्लेटों के बीच की दूरी 0.05 सेमी है। इनके बीच एक परावैद्युत पदार्थ भर देने पर संधारित्र की धारिता 3.54 × 1010 फैरड हो । जाती है। पंदार्थ के परावैद्युतांक की गणना कीजिए।
हल :
दिया है, A = 100 सेमी 2 = 1 × 10-2 मीटर2, d = 0.05 सेमी = 5 × 10-4 मीटर, C = 3.54 × 10-10 फैरड, K = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 118

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प्रश्न 44.
एक वायु संधारित्र की धारिता 2.0μF है। यदि इसकी प्लेटों के बीच कोई अन्य माध्यम रखने पर धारिता 12 μF हो जाए तो माध्यम के परावैद्युतांक की गणना कीजिए।
हल :
दिया है, Co = 2.0 μr, C = 12 μF, K = ?
अत: माध्यम का परावैद्युतांक K = \(\frac{C}{C_{0}}=\frac{12}{2}\) = 6

प्रश्न 45.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र को 500 वोल्ट तक आवेशित किया जाता है, अब इसकी प्लेटों के बीच की . . दूरी को घटाकर आधा कर दिया जाता है। संधारित्र पर नए विभवान्तर की गणना कीजिए।
हल :
दिया है, V1 = 500 वोल्ट, d1 = d, d2 = d/2, V2 = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 119

प्रश्न 46.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों का व्यास 8 सेमी है तथा उसमें परावैद्युत के रूप में वायु है। यदि इस संधारित्र की धारिता 100 सेमी त्रिज्या वाले गोले की धारिता के समान हो तो इसकी प्लेटों के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए। [2010, 14]
हल :
दिया है, r = 4 सेमी = 4 × 10-2 मीटर, R = 100 सेमी = 1 मीटर, d = ?
प्लेट का क्षेत्रफल A = Tr2 = n × (4 × 10-2)2 = 16 n × 10-4 मीटर2
समान्तर प्लेटसंधारित्र की धारिता C = Aεo /d
तथा गोले की धारिता C = 4πεo R
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 120

प्रश्न 47.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के बीच की दूरी 1.0 सेमी तथा प्लेट क्षेत्रफल 0.01 मीटर2 है। इसको 150 वोल्ट विभवान्तर से आवेशित किया गया है। आवेशन बैटरी को हटाकर संधारित्र की प्लेटों के बीच में 7 परावैद्युत स्थिरांक का एक गुटका रख दिया जाता है। परावैद्युत माध्यम में वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता की गणना कीजिए।
[2007]
हल :
दिया है, V0 = 150 वोल्ट, d = 1.0 सेमी = 1.0 × 10-2 मीटर, A = 0.01 मीटर2, K = 7, E = ?
चूँकि बैटरी हटा ली गई है; अतः आवेश नियत रहेगा।
अर्थात् q= C0V0 = CV अथवा C0 V0 = KC0 V
[∵ C = KC0]
अत: नया विभवान्तर V=\frac{V_{0}}{K}=\frac{150}{7} = 21.43 वोल्ट।
परावैद्युत माध्यम में वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
E=\frac{V}{d}=\frac{21.43}{10^{-2}}
= 2.143 × 103 वोल्ट/मीटर।

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प्रश्न 48.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल 3.0 × 10-2 मीटर2 है तथा प्लेटों के बीच की दूरी 0.6 मिमी है। इसे 1000 वोल्ट विभवान्तर तक आवेशित किया जाता है। इसमें कितनी ऊर्जा संचित होगी? [2009]]
हल :
दिया है, A = 3.0 × 10-2 मीटर2, d = 0.6 मिमी = 6 × 10-4 मीटर, Vo = 1000 वोल्ट, U = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 121

प्रश्न 49.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल 40 सेमी2 है तथा दोनों प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता 50 न्यूटन/कूलॉम है। प्रत्येक प्लेट पर कितना आवेश है? [2009, 14]
हल :
दिया है, A= 40 सेमी2 = 40 × 10-4 मीटर2, E = 50 न्यूटन/कूलॉम, q= ?
सूत्र E = q/εoA से, q= E× εoA .
अतः प्रत्येक प्लेट पर आवेश q= 50 × (8.85 × 10-12) × 40 × 10-4
= 1.77 × 10-12 कूलॉम।।

प्रश्न 50.
एक समान्तर प्लेट वायु संधारित्र की धारिता 2 μF है। जब इसकी प्लेटों के बीच, प्लेटों के बीच की दूरी की तीन-चौथाई मोटाई की K परावैद्युतांक की प्लेट रखी जाती है, तब संधारित्र की धारिता 4 μF हो जाती है। K का मान ज्ञात कीजिए जहाँ प्लेटों का तथा परावैद्युत प्लेट का क्षेत्रफल समान है। [2014]
हल :
दिया है, Co = 2μF, C = 4 μF, \(t=\frac{3}{4} d\)
समान्तर प्लेट वायु संधारित्र की धारिता \(C_{0}=\frac{A \varepsilon_{0}}{d}\)
t मोटाई तथा K परावैद्युतांक की प्लेट संधारित्र के बीच रखने पर संधारित्र की धारिता
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प्रश्न 51.
100μF समान्तर प्लेट संधारित्र 400 वोल्ट तक आवेशित है। यदि इसकी प्लेटों के बीच की दूरी आधी कर दी जाए तो प्लेटों के बीच नया विभवान्तर क्या होगा तथा इसकी संचित ऊर्जा में क्या परिवर्तन होगा? [2004, 06, 14]
हल :
दिया है, C = 100 μF = 100 × 10-6 F = 10-4F, V1= 400 वोल्ट, d1=d, d2 = d/2, V2= ? ∆U = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 123

प्रश्न 52.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल 100 सेमी है तथा दोनों प्लेटों के बीच अन्तराल 0.025 सेमी है। यदि संधारित्र को 3.54 μC आवेश दिया जाए, तो इसकी प्लेटों के बीच विभवान्तर कितना होगा? यदि प्लेटों के बीच अन्तराल बढ़ाकर 0.05 सेमी कर दिया जाए तो नया विभवान्तर कितना होगा? [2018]
हल :
A = 100 सेमी2 = 100 × 10-4 मीटर2, d = 0.025 सेमी = 2.5 × 10-4 मीटर
q = 3.54 μC= 3.54 × 10-6C, V= ?
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प्रश्न 53.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र 300pF है तथा इसकी दोनों प्लेटों के बीच 1 मिमी की दूरी है। प्लेटों के बीच वायु है—(i) यदि संधारित्र को 1200 वोल्ट तक आवेशित किया जाए तो इसकी ऊर्जा क्या होगी? (ii) यदि प्लेटों के बीच की दूरी दोगुनी कर दी जाए तो प्लेटों के बीच विभवान्तर कितना हो जाएगा? [2007]]
हल :
दिया है, C = 300pF = 300 × 10-12F, d = 1 मिमी = 10-3 मीटर,V = 1200 वोल्ट,U = ?,V = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 125

प्रश्न 54.
20 μF के एक संधारित्र को, जिसे 500 वोल्ट तक आवेशित किया गया है, एक अन्य 10 uF के संधारित्र के साथ, जिसे 200 वोल्ट तक आवेशित किया गया है, समान्तर क्रम में जोड़ दिया जाता है। उनका उभयनिष्ठ विभव ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है, C1= 20 μF, V1 = 500 वोल्ट, C2 = 10 μr, V2 = 200 वोल्ट, V = ?
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प्रश्न 55.
4 तथा 2 माइक्रोफैरड धारिता के दो संधारित्र 6 वोल्ट की बैटरी के समान्तर क्रम में जोड़ दिए गए हैं—
(i) प्रत्येक संधारित्र की प्लेटों के बीच विभवान्तर बताइए तथा
(ii) प्रत्येक संधारित्र पर आवेश ज्ञात कीजिए।
हल :
(i) चूँकि संधारित्र बैटरी के समान्तर क्रम में लगे हैं; अतः प्रत्येक संधारित्र की प्लेटों के बीच विभवान्तर बैटरी के विद्युत वाहक बल अर्थात् 6 वोल्ट के बराबर होगा।
(ii) 4μF धारिता वाले संधारित्र पर आवेश q1 = 4 μF × 6V = 24 μC.
2 μF धारिता वाले संधारित्र पर आवेश q2 = 2 μF × 6V = 12 μC.

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प्रश्न 56.
दो संधारित्र, जिनकी धारिताएँ 4 μF तथा 12 μF हैं, 120 वोल्ट की लाइन से श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। संयोजन की प्रभावी धारिता तथा प्रत्येक संधारित्र के विभवान्तर व आवेश की गणना कीजिए। ..
हल :
दिया है, C1 = 4 uF, C2 = 12 uF, V = 120 वोल्ट, C = ?, q= ?, V1 = ?, V2 = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 127

प्रश्न 57.
तीन समरूप संधारित्र C1,C2तथा C3 जिनकी प्रत्येक की धारिता 6 μF है, 12 वोल्ट की बैटरी से जुड़े हैं जो कि चित्र में प्रदर्शित है।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 128
ज्ञात कीजिए-(i) प्रत्येक संधारित्र का आवेश,
(ii) परिपथ की समतुल्य धारिता। – [2018]
हल :
(i) संधारित्र C1 व C2 परस्पर श्रेणीक्रम में हैं। अत: इनकी तुल्य धारिता,
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 129
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 130

(ii) संधारित्र C’ व C3 परस्पर समान्तर क्रम में हैं।
अतः इनकी समतुल्य धारिता C = C’ + C3 = 3+ 6 = 9μF

प्रश्न 58.
दो संधारित्र जिनकी धारिताएँ क्रमशः 2 व 3 माइक्रोफैरड हैं, श्रेणीक्रम में लगे हैं। पहले संधारित्र की बाहरी प्लेट 1000 वोल्ट पर है और दूसरे संधारित्र की बाहरी प्लेट पृथ्वी से जुड़ी है। प्रत्येक संधारित्र की भीतरी प्लेट का विभव तथा आवेश ज्ञात कीजिए।
हल :
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 131
इस संधारित्र की भीतरी प्लेट 1000 वोल्ट पर है; अत: बाहरी प्लेट (1000 – 600)
= 400 वोल्ट पर होगी।
∵ दूसरे संधारित्र की भीतरी प्लेट पहले संधारित्र की बाहरी प्लेट से जुड़ी है। अत: दूसरे संधारित्र की भीतरी प्लेट भी 400 वोल्ट पर होगी।

प्रश्न 59.
20 वोल्ट की एक बैटरी को एक वायु संधारित्र से जोड़ने पर संधारित्र पर 30 µC आवेश आ जाता है। यदि प्लेटों के बीच तेल भर दिया जाए तो प्लेटों पर 75µC आवेश आ जाता है-(i) तेल का परावैद्युतांक तथा (ii) तेल से भरे संधारित्र में संचित ऊर्जा की गणना कीजिए।
हल :
(i) दिया है, V = 20 वोल्ट तथा q= 30 µC
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 132

(ii)
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 133

प्रश्न 60.
किसी वायु संधारित्र को 5 वोल्ट के स्रोत से आवेशित करके स्रोत से अलग कर दिया गया। अब संधारित्र की प्लेटों के बीच एक परावैद्युत भर दिया गया जिसका परावैद्युतांक 2 है। यदि वायु संधारित्र की धारिता 10 uF हो तो परावैद्युत पदार्थ भरने के पश्चात् इस संधारित्र में संचित ऊर्जा की गणना कीजिए।
[2006]
हल :
दिया है, Vo = 5 वोल्ट, Co = 10 uF, K = 2, U = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 134

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प्रश्न 61.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता 50 पिकोफैरड व प्लेटों के बीच की दूरी 4 मिमी है। इसे बैटरी द्वारा 200 वोल्ट तक आवेशित करके बैटरी को हटा लिया जाता है। फिर प्लेटों के बीच 2 मिमी मोटी परावैद्युत की पट्टी (K = 4) रखी जाती है। ज्ञात कीजिए
(i) प्रत्येक प्लेट पर अन्तिम आवेश, (ii) प्लेटों के बीच अन्तिम विभवान्तर, (iii) ऊर्जा-हानि। [2018]
हल :
दिया है, C = 50 पिकोफैरड = 50 × 10-12 फैरड, d = 4 मिमी = 4 × 10-3 मीटर,
V= 200 वोल्ट, t = 2 मिमी = 2 × 10-3 मीटर, K = 4
(i) संधारित्र को आवेशित कर बैटरी हटा ली गई है; अतः प्लेटों पर प्रारिम्भक आवेश
= प्लेटों पर अन्तिम आवेश
q= CV = 50 × 10-12 × 200 कूलॉम
= 1 × 10-8 कूलॉम।
(ii)
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(iii)
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 136

प्रश्न 62.
समान धारिता के चार संधारित्र समान्तर क्रम में जुड़े हैं। जब इन्हें 1.5 वोल्ट के सेल से जोड़ते हैं तो प्रत्येक पर 1.5µC आवेश संचित हो जाता है। यदि इन्हें श्रेणीक्रम में जोड़कर उसी सेल से आवेशित किया जाए तब उन संधारित्रों पर कितना आवेश संचित होगा? [2009, 16]]
हल :
दिया है, V = 1.5 वोल्ट, q= 1.5 µC, Q= ?
प्रत्येक संधारित्र की धारिता \(C=\frac{q}{V}=\frac{1.5}{1.5}\)= 1 µF
श्रेणीक्रम में जोड़ने पर तुल्य धारिता C1 = 0.25µF
अतः संधारित्रों पर आवेश Q = C1 V = 0.25 × 1.5 = 0.375µc

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प्रश्न 63.
एक 100 pF धारिता के संधारित्र को 100 वोल्ट के विभवान्तर तक आवेशित किया गया है। इसे एक-दूसरे संधारित्र के समान्तर क्रम में जोड़ा गया है। यदि अन्तिम वोल्टेज 30 वोल्ट हो तो संधारित्र की धारिता क्या होगी? कितनी ऊर्जा का ह्रास होगा और उसका क्या होगा? .
हल :
दिया है, C= 100 pF = 100 × 10-12 F = 10-10 F, V1= 100 वोल्ट, .
V2= 0, V = 30 वोल्ट, C2 = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 137
इस ऊर्जा का ऊष्मा के रूप में ह्रास होगा।

प्रश्न 64.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता 16 μF है तथा इस पर आवेश 3.2 × 10-4 कूलॉम है। आवेश को अपरिवर्तित रखते हुए प्लेटों के बीच की दूरी दोगुनी करने के लिए कितना कार्य करना होगा? [2012]
हल :
दिया है , C1 = 16 μF = 16 × 10-6 F, q= 3.2 × 10-4 कूलॉम,
d1 = d, d2 = 2 d, W = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 138

प्रश्न 65.
एक 10 μF के संधारित्र का विभवान्तर 100 वोल्ट से 200 वोल्ट कर देने पर उसकी ऊर्जा में वृद्धि की गणना कीजिए।
[2007, 12, 13, 14]
हल :
दिया है, C = 10 μF = 10 × 10-6 F, V2 = 200 वोल्ट, V1 = 100 वोल्ट, ΔU = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 139
प्रश्न 66.
एक 8 माइक्रोफैरड के संधारित्र का विभवान्तर 20 वोल्ट से बढ़कर 25 वोल्ट कर देने पर उसकी स्थितिज ऊर्जा में हुई वृद्धि की गणना कीजिए। [2018]]
हल :
दिया है, C = 8 माइक्रोफैरड = 8 × 10-6 फैरड, V1 = 20 वोल्ट, V2 = 25 वोल्ट
संधारित्र की स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि ΔU = \(\frac{1}{2} C V_{2}^{2}-\frac{1}{2} C V_{1}^{2}\)
= \(\frac{1}{2}\) C(V22 – V12
= \(\frac{1}{2}\) × 8 × 10-6 [(25)2 – (20)2] = 4 × 10-6 [625 – 400]
= 4 × 10-6 × 225
= 9.0 × 10-4 जूल।

प्रश्न 67.
0.5μF के संधारित्र को इतना आवेशित किया गया कि उसकी प्लेटों के बीच विभवान्तर 25 वोल्ट हो जाता है। संधारित्र में संचित ऊर्जा की गणना कीजिए।
[2005, 06, 09]
हल :
दिया है, C = 0.5μF = 5 × 10-7F, V = 25 वोल्ट, U = ?
संचित ऊर्जा U = \(\frac { 1 }{ 2 }\)CV2 ==\(\frac { 1 }{ 2 }\) × (5 x 10-7) × (25)2 = 1.5625 × 10-4 जूल।

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प्रश्न 68.
4.0 μF तथा 6.0 μF के दो संधारित्र 20 V की बैटरी के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित हैं। 4.0 uF धारिता के संधारित्र में संगृहीत ऊर्जा तथा प्रति सेकण्ड बैटरी द्वारा दी गयी ऊर्जा का मान ज्ञात कीजिए। [2017]
हल :
4.0 μF व 6.0 μF श्रेणीक्रम में हैं।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 140

प्रश्न 69.
एक आवेशित समान्तर प्लेट संधारित्र द्वारा संचित ऊर्जा घनत्व 17.70 जूल/मीटर3 है। संधारित्र की प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए। (εo = 8.85 x 10-12 कूलॉम2/न्यूटन-मीटर2) [2000, 04]
हल :
दिया है, U = 17.70 जूल/मीटर3 εo = 8.85 × 10-12 कूलॉम2/न्यूटन-मीटर2, E = ?
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 141

प्रश्न 70.
3 μF, 3 μF और 6 μF धारिता के संधारित्रों को किस प्रकार संयुक्त करें कि तुल्य धारिता 5μF हो?
हल :
3 μF व 6 μF को श्रेणीक्रम में जोड़ने पर, तुल्य धारिता C = \(\frac{3 \times 6}{3+6}\) = 2 μF
2 μF व 3 μF को समान्तर क्रम में जोड़ने पर, तुल्य धारिता C = 2+ 3 = 5μF

प्रश्न 71.
दो संधारित्रों की तुल्य धारिता समान्तर क्रम में 24 μF तथा श्रेणीक्रम में 6μF है। उनकी अलग-अलग धारिताएँ क्या हैं?
हल :
समान्तर क्रम में, C = C1+C2; अतः 24 = C1 + C2 …………(1)
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 142
∴  C1C2 = 24 × 6 = 144
सूत्र (C1 – C2)2 = (C1+C2)2 – 4 C1C2 से,
(C1 – C2)2 = (24)2-4 × 144 = 576 – 576 = 0
अतः C1 = C2
अतः दोनों संधारित्रों की धारिताएँ C1 = C2 = 12 μF.

प्रश्न 72.
बिन्दुओं A तथा B के बीच तुल्य धारिता ज्ञात कीजिए। [2017]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 143
हल :
दिए गए चित्र को निम्न रूप में व्यवस्थित करने पर
2 μF, 3 μF व 6 μF समान्तर क्रम में हैं। अतः तुल्य धारिता
C1 = 2+ 3+ 6 = 11 μF
4 μF व 5μF समान्तर-क्रम में हैं। अत: तुल्य धारिता ।
C2 = 4+ 5 = 9 μF
8 μF, 11 μF व 9 μF श्रेणीक्रम में हैं। अतः तुल्य धारिता
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 144

प्रश्न 73.
संलग्न परिपथ चित्र-2.54 में यदि A तथा B बिन्दुओं के बीच 150 वोल्ट विभवान्तर लगाया जाए तो 6 μF के संधारित्र के प्लेटों के बीच उत्पन्न विभवान्तर एवं संचित ऊर्जा की गणना कीजिए। [2015]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 145
हल :
(i) 2 μF व 3 μF के संधारित्र श्रेणीक्रम में हैं, अत: इनकी
तुल्य धारिता C1 = \(\frac{2 \times 3}{2+3}\) = 1.2 μF
1.8uF व 1.2uF समान्तर क्रम में हैं, अत: इनकी तुल्य धारिता
C2 = 1.8+ 1.2 = 3 μF
अब 3 μF व 6μF के संधारित्र श्रेणीक्रम में हैं; अत: A व B के बीच तुल्य धारिता
C = \(\frac{3 \times 6}{3+6}\) = 2 μF
(ii) सम्पूर्ण निकाय पर आवेश Q = CV = 2μF × 150 = 300 μC
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 146

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प्रश्न 74.
3 μF की धारिता वाले तीन संधारित्रों को किस प्रकार जोड़ा जाए कि उनकी सम्मिलित धारिता-(i) 4.5 μF तथा (ii) 9 μF हो जाए? प्रत्येक का परिपथ आरेख भी खींचिए। [2010]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 147
हल :
(i) दो संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़कर तीसरा संधारित्र इनके साथ समान्तरक्रम में जोड़ने पर [चित्र-2.55],
चित्र-2.55
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 148
अतः तुल्य धारिता C = 1.5+ 3 = 4.5 μF
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 149

(ii) तीनों संधारित्रों को समान्तर-क्रम में जोड़ने पर [चित्र-2.55]
तुल्य धारिता C = 3 + 3 +3 = 9 μF.

प्रश्न 75.
चित्रानुसार संयोजन के समतुल्य संधारित्र की गणना कीजिए। [2018]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 150
हल :
संधारित्र C1 व C2 परस्पर श्रेणीक्रम में हैं।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 151

प्रश्न 76.
संलग्न चित्र में संधारित्रों के जालक्रम में A तथा B बिन्दुओं के बीच तुल्य धारिता 1μF है। संधारित्र C की धारिता का मान ज्ञात कीजिए।[2017]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 152
हल :
6 μF व 1 μF श्रेणीक्रम में हैं, अतः तुल्य धारिता
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 153
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 154

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प्रश्न 77.
दिए गए चित्र में A तथा B के मध्य विभवान्तर 100 वोल्ट का लगाया गया है। C व D के मध्य विभवान्तर ज्ञात कीजिए।
[2018]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 155
हल :
बिन्दु E व F के बीच संधारित्र C2, C3 तथा C4 परस्पर श्रेणीक्रम में हैं।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 156
संधारित्रों C2,C3 तथा C4 पर समान आवेश q = C’V = 2 × 100 = 200μC
C व D के मध्य विभवान्तर, V = \(\frac{q}{C_{3}}=\frac{200}{6}\) वोल्ट = 33. 3 वोल्ट।

प्रश्न 78.
संलग्न परिपथ चित्र-2.62 में स्थिर अवस्था में दोनों संधारित्रों पर संचित आवेशों तथा विभव की गणना कीजिए।
[2002, 14]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 157
हल;
4 μF व 6 μF के संधारित्रों के आवेशित हो जाने पर इनमें कोई धारा नहीं बहेगी; अत: 4 μF व 6 μF कार्य नहीं करेंगे। 4Ω, 5Ω व 1Ω श्रेणीक्रम में हैं; अत: इनका तुल्य प्रतिरोध R = 4+ 5 + 1 = 10Ω
4Ω, 5Ω व 1Ω में बहने वाली धारा
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 158
4Ω व 5Ω श्रेणीक्रम में हैं; अत: इनका तुल्य प्रतिरोध
R= 4 + 5 = 9Ω
9Ω के सिरों के बीच विभवान्तर V = iR = 2 × 9 = 18 वोल्ट
4 μF व 6 μF श्रेणीक्रम में हैं; अत: इनकी तुल्य धारिता
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 159
अतः 4 μF व 6 μF के संधारित्रों पर संचित आवेश q= CV = 2.4 × 18 = 43.2 μC.
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 160

प्रश्न 79.
संलग्न परिपथ चित्र-2.63 में प्रदर्शित संधारित्र में संचित ऊर्जा ज्ञात कीजिए। [2008]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 161
हल :
संधारित्र के आवेशित हो जाने पर इसमें कोई धारा नहीं बहेगी; अत: 2 μF कार्य नहीं करेगा।
2Ω, 3Ω व 5Ω श्रेणीक्रम में हैं; अत: इनका तुल्य प्रतिरोध
R= 2 + 3 + 5 = 10Ω
परिपथ का विभवान्तर V = iR = 2 × 10 = 20 वोल्ट
अतः संधारित्र में संचित ऊर्जा U = \(\frac { 1 }{ 2 }\) CV2
=\(\frac { 1 }{ 2 }\) × 2 x 10-6 × (20)2 = 4 × 10-4 जूल।

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प्रश्न 80.
संलग्न परिपथ चित्र-2.64 में यदि B को पृथ्वी से जोड़ दिया जाए तथा A को 1500 वोल्ट विभव पर रखा जाए तो P पर विभव की गणना कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 162
हल :
5 μF व 5 μF श्रेणीक्रम में हैं; अत: इनकी तुल्य धारिता
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 163
2.5 μF व 1 μF समान्तर क्रम में हैं; अत: इनकी तुल्य धारिता
C2 = 1+ 2.5 = 3.5 μF
3.5μF व 3.5 μF श्रेणीक्रम में हैं; अत: A व B के बीच तुल्य धारिता
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 164
अतः संधारित्रों पर आवेश q= CV = 1.75 × 10-6 × 1500 = 2625 × 10-6 कूलॉम
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 165
∵ B पृथ्वी से जुड़ा है; अत: VB = 0 वोल्ट
अतः . बिन्दु P पर विभव VP = VB + 750 = 0+ 750 = 750 वोल्ट।

प्रश्न 81.
चित्र में प्रदर्शित संधारित्र C2 में विभवान्तर व संचित ऊर्जा की गणना कीजिए। बिन्दु A पर विभव 90 वोल्ट है। C1 = 20 μF, C2 = 30μF और C = 15μF हैं। [2018]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 166
हल :
संयोजन के सिरों पर विभवान्तर = 90 – 0 = 90 वोल्ट
संधारित्र C1, C2 व C3 परस्पर श्रेणीक्रम में हैं। अत: इनकी तुल्य धारिता,
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 167

प्रश्न 82.
निम्नांकित परिपथ [चित्र-2.66 (a)] में प्रदर्शित परिपथ में बिन्दु A एवं B के बीच की कुल धारिता का मान इसका सरल समतुल्य परिपथ बनाकर ज्ञात कीजिए। [2000, 04, 06]]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 168
हल :
चित्र-2.66 (a) में प्रत्येक संधारित्र की प्रथम प्लेट A बिन्दु से तथा द्वितीय प्लेट B बिन्दु से जुड़ी है। इस प्रकार तीनों संधारित्र समान्तर-क्रम में हैं चित्र-2.66 (b)। अतः इनकी तुल्य धारिता C = 3 + 4 + 5 = 12 μF.

प्रश्न 83.
निम्नांकित परिपथ चित्र-2.67 (a) में A व B के बीच तुल्य धारिता की गणना कीजिए। [2003]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 169
हल:
सर्वप्रथम चित्र-2.67 (a) को चित्र-2.67 (b) के अनुसार प्रतिस्थापित करते हैं; अतः दिया गया परिपथ एक व्हीटस्टोन सेतु की व्यवस्था है। भुजाओं MN व NO की धारिताओं का अनुपात तथा भुजाओं MP व PO की धारिताओं का अनुपात समान है; अतः सेतु सन्तुलित है।
प्रत्येक श्रेणी की संयोजन की धारिता
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प्रश्न 84.
निम्नांकित परिपथ चित्र-2.68 (a) में A और B बिन्दुओं के बीच तुल्य धारिता ज्ञात कीजिए। [2015]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 171
हल :
सर्वप्रथम परिपथ-2.68 (a) को चित्र 2.64 (b) की भाँति व्यवस्थित करते हैं जो कि एक व्हीटस्टोन सेतु है। अत: 8 μF पर कोई आवेश संचित नहीं होगा। AC व CB के मध्य 3 μF व 6 μF श्रेणीक्रम में हैं तथा AD व DB के मध्य 3 μF व 6 μF श्रेणीक्रम में हैं।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 172

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प्रश्न 85.
तीन संधारित्र एक 30 वोल्ट की बैटरी से चित्र-2.69 के अनुसार जुड़े हैं। गणना कीजिए-
(i) संधारित्र की तुल्य धारिता तथा
(ii) 10 μF धारिता के संधारित्र द्वारा संचित ऊर्जा। [2011]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 173
हल :
(i) 6 μF व 12 μF श्रेणीक्रम में हैं।
अत: इनकी तुल्य धारिता C1= \frac{6 \times 12}{6+12} = 4 μF
4 μF व 10 μF समान्तर क्रम में हैं।
अत: इनकी तुल्य धारिता C = 4+ 10 = 14 μF

(ii) 10 μF में संचित ऊर्जा U = = \(\frac { 1 }{ 2 }\)C’V2
=\(\frac { 1 }{ 2 }\) × 10 × 10-6 × (30)2 = 4.5 × 10-3 जूल।

प्रश्न 86.
संलग्न परिपथ चित्र-2.70 की सहायता से ज्ञात कीजिए –
C = 100 pF
(i) संयोजन की तुल्य धारिता
(ii) C1 संधारित्र पर आवेश तथा
(iii) संयोजन की कुल संचित ऊर्जा।[2008, 13]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 174
हल :
(i) 200pF व 200pF श्रेणीक्रम में हैं; अत: इनकी तुल्य धारिता
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 175
100pF व 100pF समान्तर क्रम में हैं। अत: इनकी तुल्य धारिता
C” ‘ = 100 + 100 = 200pF
200pF श्रेणीक्रम में हैं; अत: A व B के बीच तुल्य धारिता
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 176

(ii) संयोजन पर कुल आवेश q = CV = 100 × 200 = 20000 pC
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 177

(iii)
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 178

प्रश्न 87.
किसी समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता 2 μ F है, जब इसकी प्लेटों के बीच निर्वात रहता है। प्लेटों के बीच के स्थान को दो परावैद्युतों की बराबर-बराबर मात्राओं से चित्र-2.71 में प्रदर्शित गई दो विधियों से भरा जाता है। यदि उनके परावैद्युतांक 3 व 6 हों तो दोनों स्थितियों में संधारित्र की धारिता की गणना कीजिए। [2006]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 179
हल :
दिया है, K1 = 3, K2 = 6, εoA/d = 2 μF
(i) जब संधारित्र समान्तर क्रम में हैं तो क्षेत्रफल A/2 होगा।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 180
अतः प्रथम स्थिति में संधारित्र की तुल्य धारिता
CI = C1+C2 = 3 + 6 = 9 μF

(ii) श्रेणीक्रम में दूरी d/2 होगी; अत:
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 181

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प्रश्न 88.
किसी समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता 2 μF है। इसके आधे भाग को चित्रानुसार एक परावैद्युत पदार्थ से भरा जाता है तो इसकी धारिता 5 μF हो जाती है। परावैद्युतांक K का मान ज्ञात कीजिए। [2018]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 182
हल :
माना समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों का क्षेत्रफल A तथा उनके बीच की दूरी d है।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 183

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

निम्नलिखित प्रश्नों के चार विकल्प दिए गए हैं। सही विकल्प का चयन कीजिए –

प्रश्न 1.
वैद्युत विभव का मात्रक है [2011]
(a) जूल/कूलॉम
(b) जूल-कूलॉम
(c) कूलॉम/जूल
(d) न्यूटन/कूलॉम।
उत्तर :
(a) जूल/कूलॉम

प्रश्न 2.
वैद्युत विभव का मात्रक [2014]
(a) जूल/कूलॉम
(b) वोल्ट/मीटर
(c) जूल-कूलॉम
(d) जूल/कूलॉम-मीटर।
उत्तर :
(a) जूल/कूलॉम

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से कौन वैद्युत विभव का मात्रक नहीं है [2013]
(a) वोल्ट
(b) जूल/कूलॉम
(c) न्यूटन/कूलॉम
(d) न्यूटन-मीटर/कूलॉम।
उत्तर :
(c) न्यूटन/कूलॉम

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प्रश्न 4.
एक-दूसरे से 0.5 मीटर की दूरी पर स्थित दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर 50 वोल्ट है।2 कूलॉम आवेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में आवश्यक कार्य का मान होगा – [2004]
(a) 1 जूल
(b) 25 जूल
(c) 50 जूल
(d) 100 जूल।
उत्तर :
(d) 100 जूल।

प्रश्न 5.
0.45 मीटर त्रिज्या की एक अचालक वलय की परिधि पर एकसमान रूप से वितरित कुल आवेश 2 × 10-10कूलॉम है। 2 कूलॉम आवेश को अनन्त से वलय के केन्द्र तक ले जाने में आवश्यक कार्य होगा – [2005]
(a) 4 जूल
(b) 8 जूल
(c) – 4 जूल
(d) शून्य।
उत्तर :
(b) 8 जूल

प्रश्न 6.
दो प्लेटें एक-दूसरे से 1 सेमी दूरी पर हैं और उनमें विभवान्तर 10 वोल्ट है। प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता है – [2009]
(a) 10 न्यूटन/कूलॉम
(b) 500 न्यूटन/कूलॉम
(c) 1000 न्यूटन/कूलॉम
(d) 250 न्यूटन/कूलॉम।
उत्तर :
(c) 1000 न्यूटन/कूलॉम

प्रश्न 7.
1 वोल्ट विभवान्तर पर त्वरित करने पर इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा होती है [2007]
(a) 1 जूल
(b) 1 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
(c) 1 अर्ग
(d) 1 वाट।
उत्तर :
(b) 1 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट

प्रश्न 8.
1 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट का मान होता है – [2004, 08, 13]
(a) 2 × 10-18 जूल
(b) 1.6 × 10-31 जूल
(c) 1.6 × 10-19 जूल
(d) 3.1 × 10-31 जूला
उत्तर :
(c) 1.6 × 10-19 जूल

प्रश्न 9.
1 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (eV) मात्रक है [2005]
(a) ऊर्जा का
(b) वैद्युत विभव का
(c) वेग का
(d) कोणीय संवेग का।
उत्तर :
(a) ऊर्जा का

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प्रश्न 10.
एक इलेक्ट्रॉन 5 वोल्ट विभवान्तर द्वारा त्वरित किया जाता है। इलेक्ट्रॉन द्वारा अर्जित ऊर्जा होगी- [2006, 07]
(a) 5 जूल
(b) 5 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
(c) 5 अर्ग
(d) 5 वाट।
उत्तर :
(b) 5 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट

प्रश्न 11.
एक इलेक्ट्रॉन को दूसरे इलेक्ट्रॉन के अधिक समीप लाने पर निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा [2010]
(a) घटती है
(b) बढ़ती है
(c) उतनी ही रहती है
(d) शून्य हो जाती है।
उत्तर :
(b) बढ़ती है

प्रश्न 12.
दो समान धनावेशित बिन्दु आवेशों, जिनमें प्रत्येक पर 1 μC का आवेश है, को 1 मीटर की दूरी पर वायु में रखा
जाता है। इसकी स्थितिज ऊर्जा है –
(a) 1 जूल
(b) 1 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
(c) 9 × 10-3 जूल
(d) शून्य।
उत्तर :
(c) 9 × 10-3 जूल

प्रश्न 13.
E = 0 तीव्रता वाले वैद्युत क्षेत्र में विभव V का दूरी r के साथ परिवर्तन होगा – [2012,17]
(a) V \propto \frac{1}{r}
(b) V ∝ r
(c) V \propto \frac{1}{r^{2}}
(d) V = नियत अर्थात् r पर निर्भर नहीं।
उत्तर :
(d) V = नियत अर्थात् r पर निर्भर नहीं।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में से कौन-सा तथ्य समविभव पृष्ठ के लिए सत्य नहीं है – [2009]
(a) पृष्ठ पर किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर शून्य होता है
(b) वैद्युत बल रेखाएँ पृष्ठ के सर्वथा लम्बवत् होती हैं
(c) पृष्ठ पर किसी आवेश को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने पर कोई कार्य नहीं होता
(d) समविभव पृष्ठ सर्वदा गोलाकार होता है।
उत्तर :
(d) समविभव पृष्ठ सर्वदा गोलाकार होता है।

प्रश्न 15.
दूरी पर रखे वैद्युत द्विध्रुवों के बीच लगने वाला बल अनुक्रमानुपाती है – [2005]
(a) r2 के
(b) r4 के
(c) r-2के
(d) r-4 के।
उत्तर :
(d) r-4 के।

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प्रश्न 16.
एक इलेक्ट्रॉन एक वैद्युत क्षेत्र में, क्षेत्र के अभिलम्बवत् प्रवेश करता है। इसका गमन पथ होगा – [2006]
(a) वृत्ताकार
(b) दीर्घवृत्ताकार
(c) कुण्डलिनी के आकार का
(d) परवलयाकार।
उत्तर :
(d) परवलयाकार।

प्रश्न 17.
क्षैतिज दिशा में गति करता हुआ इलेक्ट्रॉन एक ऐसे स्थान में प्रवेश करता है जहाँ ऊर्ध्वाधर दिशा में एकसमान वैद्युत क्षेत्र है। इस स्थान में इलेक्ट्रॉन का पथ होगा – [2008]
(a) क्षैतिज से 45° के कोण पर सीधी रेखा
(b) ऊर्ध्वाधर तल में एक वृत्त
(c) क्षैतिज तल में एक परवलय
(d) ऊर्ध्वाधर तल में एक परवलय।
उत्तर :
(d) ऊर्ध्वाधर तल में एक परवलय।

प्रश्न 18.
दो बिन्दु आवेश 8μC तथा 12μC एक-दूसरे से 10 सेमी की दूरी पर वायु में रखे गए हैं। इनके बीच की दूरी 6 सेमी परिवर्तित करने के लिए कार्य आवश्यक होगा – [2018]
(a) 5.8जूल
(b) 4.8जूल
(c) 3.8जूल
(d) 2.8 जूल।
उत्तर :
(a) 5.8जूल

प्रश्न 19.
एक समान वैद्युत क्षेत्र E में रखे वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण pवाले वैद्युत द्विध्रुव को 90° से घुमाने में कुल कार्य है- [2018]
(a) pE/2
(b) 2pE
(c) pE
(d) √2pE.
उत्तर :
(c) pE

प्रश्न 20.
एक धातु के गोले की धारिता 1.0 μF है। उसकी त्रिज्या लगभग होगी – [2011]
(a) 9 किमी
(b) 10 मीटर
(c) 1.11 मीटर
(d) 1.11 सेमी।
उत्तर :
(a) 9 किमी

प्रश्न 21.
एक गोलाकार चालक की त्रिज्या 9 मीटर है। इसकी विद्युत-धारिता है – [2018]
(a) 109 फैरड
(b) 9 × 109 फैरड
(c) 9 × 10-9 फैरड
(d) 10-9 फैरड।
उत्तर :
(d) 10-9 फैरड।

प्रश्न 22.
दो गोलीय चालक A1 तथा A2 व उनकी त्रिज्याएँ क्रमशः तथाr हैं। चालक A1 व A2 पर क्रमशः r1 तथा r2
आवेश हैं। चित्र के अनुसार चालकों को हवा में एक ताँबे के तार द्वारा जोड़ा जाता है।
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 184
इस निकाय की तुल्य धारिता होगी
[2018]
(a) 4πεor1r2/r1 – r2
(b) 4πεo1 + r2
(c) 4πεor1
(d) 4πεor2
उत्तर :
(b) 4πεo1 + r2

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प्रश्न 23.
एक आवेशित वायुसंधारित्र में Uo ऊर्जा संचित है। एक परावैद्युत की पट्टी जिसका परावैद्युतांक K है, को इसमें प्रवेश कराने पर ऊर्जा U हो जाती है, तो – [2018]
(a) U = Uo.
(b) U = KUo.
(c) U = K2Uo.
(d) U = \(\frac{u_{0}}{K}\)
उत्तर :
(d) U = \(\frac{u_{0}}{K}\)

प्रश्न 24.
संलग्न परिपथ चित्र-2.74 में बिन्दुओं PवQ के बीच तुल्य धारिता होगी – [2004]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 185
(a) 4 μF
(b) 3/4 μF
(c) 4/3 μF
(d) 1/2 μF.
उत्तर :
(c) 4/3 μF

प्रश्न 25.
श्रेणीक्रम में जोड़े गए पाँच समान संधारित्रों की परिणामी धारिता 4 μF है। यदि इनको समान्तरक्रम में जोड़कर 400 वोल्ट तक आवेशित करें तो इसमें संगृहीत कुल ऊर्जा होगी – [2005]
(a) 80 जूल
(b) 16 जूल
(c) 8 जूल
(d) 4 जूल।
उत्तर :
(c) 8 जूल

प्रश्न 26.
एक आवेशित संधारित्र बैटरी से जुड़ा है। यदि इसकी प्लेटों के बीच परावैद्युत पदार्थ की एक पट्टी रखी जाए तो निम्नलिखित में से कौन-सी मात्रा अपरिवर्तित रहेगी [2005, 10]]
(a) आवेश
(b) विभवान्तर
(c) धारिता
(d) ऊर्जा।
उत्तर :
(b) विभवान्तर

प्रश्न 27.
संलग्न परिपथ चित्र-2.75 में यदि A व B के बीच तुल्य धारिता 5uF हो तब संधारित्र C .
की धारिता होगी –
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 186
(a) 3μF
(b) 6μF
(c) 9μF
(d) 12 μF.
उत्तर :
(b) 6μF

प्रश्न 28.
संलग्न चित्र-2.76 में बिन्दुओं A व B के बीच तुल्य धारिता है- [2009]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 187
(a) \(\frac{2}{3} \mu \mathrm{F}\)
(b) \(\frac{3}{2} \mu \mathrm{F}\)
(c) \(\frac{11}{3} \mu \mathrm{F}\)
(d) 1 µF
उत्तर :
(b) \(\frac{3}{2} \mu \mathrm{F}\)

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प्रश्न 29.
100 μF धारिता वाले संधारित्र को 10 वोल्ट तक आवेशित करने पर उसमें संचित ऊर्जा होगी – [2009,16]
(a) 5.0 × 10-3 जूल
(b) 0.5 × 10-3 जूल
(c) 0.5 जूल
(d) 5.0 जूल।
उत्तर :
(a) 5.0 × 10-3 जूल

प्रश्न 30.
संलग्न चित्र-2.77 में बिन्दुओं A व B के बीच तुल्य धारिता है- [2009]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 188
(a) 4 µF
(b) \(\frac{12}{7} \mu \mathrm{F}\)
(c) \(\frac{1}{4} \mu \mathrm{F}\)
(d) \(\frac{7}{12} \mu \mathrm{F}\)
उत्तर :
(a) 4 µF

प्रश्न 31.
60 μF धारिता वाले एक संधारित्र की प्रत्येक प्लेट पर 3 × 10-8C आवेश है। संधारित्र में संचित ऊर्जा होगी [2009]
(a) 2.5 × 10-15 जूल
(b) 1.5 × 10-14 जूल
(c) 3.5 × 10-13 जूल
(d) 7.5 × 10-12 जूल।
उत्तर :
(d) 7.5 × 10-12 जूल।

प्रश्न 32.
तीन बराबर धारिता वाले संधारित्रों को पहले समान्तर क्रम में तथा बाद में श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है। दोनों दशाओं में तुल्य धारिताओं का अनुपात होगा [2009]
(a) 9:1
(b) 6:1
(c) 3:1
(d) 1:9.
उत्तर :
(a) 9:1

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प्रश्न 33.
एक संधारित्र जिसकी धारिता 100 μF है, 200 वोल्ट तक आवेशित किया जाता है। उसे 22 के प्रतिरोध द्वारा विसर्जित करने पर उत्पन्न हुई ऊष्मा है [2009]
(a) 1 जूल
(b) 2 जूल
(c) 3 जूल
(d) 4 जूल।
उत्तर :
(b) 2 जूल

प्रश्न 34.
संलग्न परिपथ चित्र-2.78 में प्रदर्शित संधारित्रों की तुल्य धारिता A व B के बीच है – [2015]
MP Board Class 12th Physics Important Questions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता 189
(a) 4 μF
(b) 2.5 μF
(c) 2 μF
(d) 0.25 μF.
उत्तर :
(b) 2.5 μF

MP Board Class 12th Physics Important Questions

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण मुहावरे व लोकोक्तियाँ

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण मुहावरे व लोकोक्तियाँ

भाषा को प्राणवान और प्रभावशाली बनाने के लिए आवश्यकतानुसार मुहावरे और कहावतें (लोकोक्तियों) के प्रयोग किए जाते हैं। इनके प्रयोग से भाषा न केवल सार्थक और आकर्षक दिखाई देती है अपितु वह एक अद्भुत शक्ति से परिपूर्ण भी लगने लगती है, जो एक सफल और असाधारण रचना शिल्प व शिल्पकार की अभियोजना और उद्देश्य होता है। इस प्रकार मुहावरों और कहावतों के बिना भाषा प्राणहीन, अशक्त और प्रभावहीन बन जाती है।

मुहावरों और कहावतों से एक विशिष्ट भाषा, संस्कृति, जाति, सभ्यता, लोकजीवन, रहन – सहन, चेतना और भविष्य का पूरा पता लगता है। उसकी छाप सर्वत्र पड़ने लगती है। वह सबको समुन्नत दिशा की ओर अग्रसर करने लगती है।

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मुहावरों और कहावतों से भाषा एक वाक्यांश के रूप में प्रकट होकर एक विलक्षणता और रोचकता के रूप में अपने महान उद्देश्य की ओर रती है और अंततः पाठक – श्रोता वर्ग पर अपनी पूर्व नियोजित छाप छोड़ती है। यही कारण है कि विश्व की सभी भाषाओं में मुहावरों – कहावतों के प्रयोग होते हैं। इस मुहावरों और कहावतों का प्रयोग किसी भी भाषा. के लिए नितान्त आवश्यक है।

मुहावरे
प्रचलित मुहावरे और उनका प्रयोग
1. अपना ही राग अलापना – अपनी बातें ही करते रहना।
प्रयोग – मोहन दूसरे की बात सुनता नहीं है केवल अपना ही राग अलापता रहता है।

2. आँखों का तारा – बहुत प्यारा लगना।
प्रयोग – इकलौता पुत्र अपने माता – पिता की आँखों का तारा होता है।

3. अपना उल्लू सीधा करना – केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करना।
प्रयोग – जो मनुष्य स्वार्थी होता है वह अपना ही उल्लू सीधा करता है।

4. अपने मुँह मियाँ मिठू बनना – अपनी प्रशंसा स्वयं करना।
प्रयोग – अभिमानी मनुष्य अपने मुँह मियाँ मिठू बनते हैं।

5. अन्धे को चिराग दिखाना – व्यर्थ का कार्य करना।
प्रयोग – किसी मूर्ख और पागल मनुष्य को उपदेश देना वास्तव में अन्धे को चिराग दिखाना है।

6. अन्धे की लकड़ी – समय पर काम आना।
प्रयोग – वृद्धावस्था में बेटा अन्धे की लकड़ी के समान होता है।

7. अँगूठा दिखाना – अपमानपूर्ण अवज्ञा करना।
प्रयोग – मैंने कल तुमसे पैसा लौटाने के लिए कहा था। आज तुम मुझको अँगूठा दिखा रहे हो।

8. अक्ल पर पत्थर पड़ना – अज्ञानता से काम करना।
प्रयोग – उस समय न जाने क्यों मेरी अक्ल पर पत्थर पड़ गए थे तब मैंने अपने
बड़े भाई को कटु शब्द कहे थे।

9. अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना – स्वयं अपना नाश करना।
प्रयोग – राकेश ने अपनी जायदाद जुआ में हारकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है।

10. आगबबूला होना – अधिक क्रोधित होना।
प्रयोग – जब पिता ने अपने पुत्र को घर में चोरी करते देखा तो वे.आगबबूला हो गए।

11. आसमान टूट पड़ना – अचानक विपत्ति आ जाना।
प्रयोग – मोटर दुर्घटना में अपने पुत्र का समाचार सुनकर माँ के हृदय पर जैसे आसमान टूट पड़ा हो।

12. ईद का चाँद होना – कठिनता से दिखाई देना।
प्रयोग – रमेश ने जब दो महीने बाद अपने मित्र को सामने आता हुआ देखा तो कहा कि आजकल तुम तो ईद के चाँद हो गये हो।

13. ईंट से ईंट बजाना – बिलकुल नष्ट करना।
प्रयोग – महाराज शिवाजी ने मुगल बादशाह की ईंट से ईंट बजा दी।

14. उल्टी गंगा बहाना – नियम के विरुद्ध काम करना।
प्रयोग – आजकल लोग नियमित काम न करके उल्टी गंगा बहा रहे हैं।

15. गाल बजाना – बक – बक करना।
प्रयोग – आजकल के नेता मंचों पर गाल बजाते हैं। ठोस काम करना नहीं जानते

16. गले का हार – प्रिय वस्तु।
प्रयोग – महात्मा तुलसीदास का रामचरितमानस हिन्दुओं के गले का हार है।

17. गड़े मुर्दे उखाड़ना – पुरानी बातें दोहराना।
प्रयोग – वृद्ध मनुष्य सबके सामने गड़े मुर्दे उखाड़कर दूसरों को लज्जित करते रहते हैं।

18. कुत्ते की मौत मरना – बुरी मौत मरना।
प्रयोग – देशद्रोही मनुष्य कुत्ते की मौत मारा जाता है।

19. काम तमाम करना – मार डालना।
प्रयोग – बन्दूक की एक गोली से मैंने डाकू का काम तमाफ कर दिया।

20. छाती पर साँप लोटना – ईर्ष्या होना।
प्रयोग – महेश ने जब से नई मोटर साइकिल खरीदी है, उसके पड़ोसी की छाती पर साँप लोटने लगे हैं।

21. नौ – दो ग्यारह होना – भाग जाना।
प्रयोग – पुलिस (सिपाही) को देखकर चोर नौ – दो ग्यारह हो गए।

22. दाँत खट्टे करना – – पराजित करना।
प्रयोग – भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के दाँत खट्टे कर दिए।

23. मुँह में पानी भर आना – ललचाना।
प्रयोग – मिठाई की दुकान को देखकर बालकों के मुँह में पानी भर आता है।

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24. फूला न समाना – बहुत प्रसन्न होना।
प्रयोग – बहुत दिनों से खोये हुए बालक को अचानक देखकर माँ का हृदय फूला न समाया।

25. हाथ – पाँव फूलना – भयभीत हो जाना।
प्रयोग – जंगल में शेर को देखकर मेरे हाथ – पाँव फूल गए।

26. लोहा मानना – प्रभाव स्वीकार करना।
प्रयोग – एशिया के सभी राष्ट्र भारत की शक्ति का लोहा मानते हैं।

27. हक्का – बक्का रह जाना – आश्चर्यचकित होना।
प्रयोग – ताजमहल की सुंदरता को देखकर लोग हक्के – बक्के रह जाते हैं।

28. हवा से बातें करना – बहुत वेग से चलना।
प्रयोग – महाराणा प्रताप का चेतक घोड़ा बुद्ध के मैदान में हवा से बातें करता था।

29. लकीर का फकीर होना – अंधविश्वासी होना।
प्रयोग – आदिवासी लोग लकीर के फकीर होते हैं।

30. सिर नीचा होना – लज्जित होना।
प्रयोग – अयोग्य पुत्र के अनुचित कार्यों को देखकर माता – पिता का सिर लज्जा से नीचा हो गया।

31. टेढ़ी – सीधी सुनना – खरी – खोटी सुनना।
प्रयोग – मेरे विलम्ब से घर पहुंचने पर पिताजी ने मुझे अनेक टेढ़ी – सीधी बातें सुना डालीं।

32. धूल में मिला देना – नष्ट करना।
प्रयोग – मोहन को परीक्षा में नकल करते हुए जब. अध्यापक ने पकड़ लिया तो उसकी सारी इज्जत धूल में मिल गयी।

33. सिर पटक लेना – दहाड़ मारकर रोना।
प्रयोग – अपने भाई की असफलता का समाचार सुनकर राकेश अपना सिर जमीन पर पटककर खूब रोने लगा।

34. त्यौरियाँ चढ़ जाना – क्रोधित होना।
प्रयोग – आजकल जरा – सी बात पर लोग अपनी त्यौरियाँ चढ़ा लेते हैं।

35. आसमान सिर पर उठाना – बहुत कोलाहल करना।
प्रयोग – जिस समय शिक्षक कक्षा में नहीं होता उस समय विद्यार्थी आसमान सिर पर उठा लेते हैं।

36. आस्तीन का साँप होना – विश्वासघात करना।
प्रयोग – चीन के आक्रमण के समय अनेक लोग देश के आस्तीन के साँप बन गए।

37. आठ – आठ आँसू रोना – फूट – फूटकर रोना।
प्रयोग – माँ की मृत्यु के समय राम आठ – आठ आँसू रोया।

38. कसौटी पर कसना – परीक्षा लेना।
प्रयोग – सोने की कसौटी पर कसकर उसके खरे – खोटे की पहचान की जाती है।

39. कंगाली में आटा – गीला होना – कष्ट पर कष्ट आना।
प्रयोग – इधर मोहन के घर में आग लगी, उधर चोरी में सारा सामान चला गया, उसकी कंगाली में आटा गीला हो गया।

40. कान में तेल डालकर सोना – बात सुनने की चेष्टा न करना।
प्रयोग – मैं तुम्हें कब से बुला रहा हूँ और तुम हो कि कान में तेल डालकर बैठे हो।

41. कलई खुलना – भेद खुलना।
प्रयोग – जब मोहन का झगड़ा राकेश से हुआ तो मोहन ने राकेश की सारी कलई खोल दी।

42. गर्दन पर छुरी फेरना – अत्याचार करना।
प्रयोग – ठेकेदार गरीब मजदूरों के पैसे काटकर उनकी गर्दन पर छुरी फेरते हैं।

43. गोबर गणेश – बिलकुल मूर्ख।
प्रयोग – वह कभी परीक्षा पास नहीं कर सकता, वह तो पूरा गोबर गणेश है।

44. घी के चिराग जलाना – खुशियाँ मनाना।
प्रयोग – जब भगवान श्री राम चौदह वर्ष के बाद वनवास से अयोध्या लौटकर
आये तब पूरी प्रजा ने घी के चिराग जलाए।

45. घोड़ा बेचकर सोना – निश्चित रहना।
प्रयोग – जब परीक्षा समाप्त हो जाती है, तो विद्यार्थी घोड़े बेचकर सोते हैं।

46. छप्पर फाड़कर देना – बिना मेहनत के धन मिलना।
प्रयोग – भगवान जब देता है तो छप्पर फाड़कर देता है।

47. टेढ़ी खीर होना – कठिन कार्य होना।
प्रयोग – हिमालय पार करना टेढ़ी खीर है।

48. दाँतकाटी रोटी होना – गहरी दोस्ती होना।
प्रयोग – पहले हम दोनों में दाँतकाटी रोटी थी किंतु जब से झगड़ा हुआ है तब से हम दोनों एक – दूसरे के शत्रु बन गए हैं।

49. कलेजा मुँह को आना – बहुत दुःखी होना।
प्रयोग – अचानक पिता की मृत्यु का समाचार सुनकर कलेजा मुँह को आ गया।

50. चकमा देना – धोखा देना।
प्रयोग – एक लड़का दुकानदार को चकमा देकर सामान लेकर भाग गया।

51. हाँ में हाँ मिलाना – चापलूसी करना।
प्रयोग – छोटे कर्मचारी अपनी पदोन्नति के लिए बड़े अधिकारियों की दिन – रात हाँ में हाँ मिलाते हैं।

52. सिर धुनना – पश्चात्ताप करना।
प्रयोग – हायर सेकेण्ड्री की परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर मोहन ने अपना सिर धुन लिया।

53. बाल – बाल बचना – बड़ी हानि होने से बचना।
प्रयोग – वह कुएं में गिरने से बाल – बाल बच गया।

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54. कफन सिर पर बाँधना – बलिदान के लिए तैयार रहना।
प्रयोग – वीर सैनिक युद्ध के दौरान कफन सिर पर बाँध लेते हैं।

55. लहू सूखना – शक्तिहीन होना। (म.प्र. 1991)
प्रयोग – साँप को सामने देखते ही उसका लहू सूख गया।

56. बाल बाँका न होना – कुछ भी नुकसान न होना। (म.प्र. 1991)
प्रयोग – प्रहलाद को बार – बार कष्ट देने का प्रयास करके भी हिरण्यकशिपु उसका बाल बाँका न कर सका।

57. काया पलट होना – रूप – परिवर्तन होना। (म.प्र. 1992)
प्रयोग – बड़े – बड़े सिद्ध – पुरुष मनचाही काया पलट कर लेते हैं।

58. मिट्टी में मिलाना – बरबाद करना। (म.प्र. 1992)
प्रयोग – भारत ने पाकिस्तान से युद्ध करके पूर्वी पाकिस्तान को मिट्टी में मिला दिया।

59. नेत्र लाल होना – क्रोधित होना। (म.प्र. 1993)
प्रयोग – छात्र के अशिष्टाचार से अध्यापक के नेत्र लाल हो गए।

60. हाथ के तोते उड़ना – कीमती वस्तु का खो जाना। (म.प्र. 1993)
प्रयोग – परीक्षा में भूल से कुछ प्रश्नों के छूटने पर उसने घर आते ही कहा कि मेरे हाथ के तोते उड़ गए।

61. नोन, तेल, लकड़ी के फेर में पड़ना – रोजी – रोटी के लिए परेशान होना।
प्रयोग – शादी होते ही वह नोन, तेल, लकड़ी के फेर में पड़ गया।

62. टूट जाना – बरबाद होना।। (म.प्र. 1994)
प्रयोग – मजदूर जीवनपर्यंत कड़ी मेहनत करते – करते टूट जाते हैं।

63. मौके की तलाश में रहना – स्वार्थ साधना। (म.प्र. 1994)
प्रयोग – स्वार्थी हरदम मौके की तलाश में रहते हैं।

64. भाषण की दुकान खोलना – बतंगड़ी का अड्डा होना। (म.प्र. 1994)
प्रयोग – आजकल तो जगह – जगह भाषण की दुकानें खुल गई हैं।

65. आँखें खोलना – सजग करना। (म.प्र. 1994)
प्रयोग – निंदक अक्सर आँखें खोल देते हैं।

लोकोक्तियाँ
भाषा को प्रभावशाली एवं सारगर्भित बनाने के लिए मुहावरों की भाँति लोकोक्तियों का प्रयोग किया जाता है। लोकोक्ति पारिभाषिक रूप से ऐसा मुहावरेदार वाक्य होता है जिसे व्यक्ति अपने कथन की पुष्टि में प्रमाण – स्वरूप प्रयोग करता है। लोकोक्ति . अपने में एक संपूर्ण वाक्य है और उसका प्रयोग स्वतंत्र रूप से होता है।

प्रचलित लोकोक्तियाँ और उनका प्रयोग

1. अपना हाथ जगन्नाथ – बड़ी स्वच्छन्दता से किसी वस्तु को ग्रहण करना।
प्रयोग – महावीर को आज भोजन – गृह का मालिक बना दिया है, अब तो उसका अपना हाथ जगन्नाथ है।

2. अपनी ढपली अपना राग – जब सभी लोग मिलकर काम न करें।
प्रयोग – वह संस्था अधिक दिनों तक चल नहीं सकती क्योंकि उसके सभी सदस्य अपनी ढपली अपना राग वाले हैं।

3. ऊँची दुकान फीका पकवान – दुकान तो बड़ी प्रसिद्ध परंतु माल घटिया।
प्रयोग – नगर के सबसे धनाढ्य सेठ की दुकान में घटिया मिष्टान्न देखकर वह बोला – ऊँची दुकान फीका पकवान।

4. एक हाथ से ताली नहीं बजती – कोई भी कार्य में दो पक्षों का होना आवश्यक है।
प्रयोग – मैं यह बात तुम्हारी मान ही नहीं सकता कि तुम्हें पुलिस ने बिना कसूर पीटा है। यह सम्भव नहीं, एक हाथ से ताली नहीं बजती।

5. अंधों में काना राजा – अयोग्य लोगों में अल्पबुद्धि वाला मनुष्य ही योग्य माना जाता है।
प्रयोग – ग्रामों में अधिकतर सभी लोग अशिक्षित होते हैं; किंतु जरा – सा पढ़ा – लिखा व्यक्ति ही उनके लिए अंधों में काना राजा के समान है।

6. काला अक्षर भैंस बराबर – बिलकुल निरक्षर होना।
प्रयोग – अशिक्षित लोग वेद – पुराणों की बातें क्या जाने उनके लिए तो काला अक्षर भैंस बराबर होता है।

7. एक अनार सौ बीमार – वस्तु थोड़ी किंतु माँग अधिक।
प्रयोग कार्यालय में एक स्थान रिक्त है किंतु सौ से भी अधिक आवेदन – प., आने पर अधिकारी कहने लगा कि एक अनार सौ बीमार।

8. घर का भेदी लंका ढाहे – घर का भेद बताने वाला ही सबसे बड़ा शत्रु होता है।
प्रयोग – आजकल देश को बड़ी सावधानी की आवश्यकता है क्योंकि घर का भेदी लंका ढहाना चाहता है।

9. चिकने घड़े पर पानी नहीं ठहरता – निर्लज्ज व्यक्ति पर किसी बात का प्रभा. नहीं पड़ता।
प्रयोग – तुम अपने भाई को चार दिन से समझाते – समझाते थक गए किंत उसने
अपनी आदत सुधारी नहीं; सच है कि चिकने घड़े पर पानी ठहरता नहीं है।

10. दूर के ढोल सुहावने – जितनी प्रसिद्धि सुनी वैसा पाया नहीं।
प्रयोग – लखनऊ के दशहरी आम जब स्वादिष्ट न निकले तो मेरा भाई वो दूर के ढोल सुहावने होते हैं।

11. थाली के बैंगन – अस्थिर बुद्धिवाला।
प्रयोग – मैं तो उसकी मित्रता पर कोई भरोसा नहीं करता। वह तो थाली का बैंगन है, कभी इधर तो कभी उधर।।

12. थोथा चना बाजे घना – आडम्बरयुक्त व्यक्ति सारहीन होता है।
प्रयोग – वह हायर सेकंडरी तक पढ़ा नहीं है लेकिन वह बी.ए. पास होने तक की शेखी बघारता है। सच है – थोथा चना बाजे घना वाली कहावत है।

13. एक पंथ दो काज – एक साथ दो कार्य पूर्ण होना।
प्रयोग – प्रयाग पहुँचने पर गंगा स्नान भी किया और कुम्भ का मेला भी देखा; इस तरह एक पंथ दो काज पूरे हुए।

14. का वर्षा जब कृषि सुखानी – समय निकल जाने पर प्रयत्न करना व्यर्थ है।
प्रयोग – जब शहर में डाकू लोग उपद्रव और लूटपाट करके चले गए तब बहुत देर बाद वहाँ पुलिस पहुंची तो सब लोग बोले, का वर्षा जब कृषि सुखानी।

15. मुख में राम बगल में छुरी – कपटपूर्ण व्यवहार।
प्रयोग – रामनरेश सामने तो खुशामद करता फिरता है पर पाडे से वह सबकी बुराई करता है। उसका व्यवहार मुख में राम बगल में छुरी के समान है।

16. सावन सूखा न भादों हरा – सदा एक समान रहना।
प्रयोग – वीरेन्द्र नाथ को हमने जबसे देखा है वह एक समान दिखाई देता है, सच है वह न सावन सूखा न भादों हरा।

17. बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा – अचानक किसी वस्तु का प्राप्त होना।
प्रयोग – एक निर्धन व्यक्ति को अचानक मार्ग में रुपयों का भरा थेला मिल गया, वह बहुत खुश हुआ, उसे ऐसा लगा जैसे बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा हो।

18. गेहूँ के साथ घुन भी पिस जाता है – बड़े के साथ में उसके सहारे रहने वाले को भी कष्ट होता है।
प्रयोग – जब बड़े लोग चोरी में पकड़े जाते हों तो उनके साथ नौकर – चाकर भी पुलिस के हाथ पकड़े जाते हैं। सच है – गेहूँ के साथ घुन भी पिस जाता है।

19. धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का किसी काम का न होना।
प्रयोग – कोई काम न करूं तो भूखा मरता हूँ और जब काम करता हूँ तो बीमार हो जाता हूँ। इस समय मेरी स्थिति ठीक इस प्रकार है, जैसे – धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का।

20. बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद – अयोग्य व्यक्ति ज्ञान की बातें नहीं जानता।
प्रयोग – अशिक्षित लोगों के सामने छायावादी कविता सुनाने से क्या लाभ, बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद

21. हाथ कंगन को आरसी क्या – प्रत्यक्ष के लिए प्रमाण की आवश्यकता नहीं।
प्रयोग – तुमने कल मेरी बात का विश्वास नहीं किया, आज दैनिक समाचार – पत्र में वह घटना प्रकाशित हुई है। अब तो आप विश्वास करेंगे। हाथ कंगन को आरसी क्या?

22. साँच को आँच नहीं – सच्चे व्यक्ति को कोई भय नहीं होता।
प्रयोग – आप चाहे मुझे फाँसी पर चढ़ा दें, मुझे मार डालें लेकिन मैं बात सही – सही कहूँगा। साँच को आँच नहीं।

23. यह मुँह और मसूर की दाल – अपनी स्थिति से अधिक इच्छा करना।
प्रयोग – पास में नहीं है फूटी कौडी भी और चले हैं बाजार में मारुति कार खरीदने। कहावत सही है – यह मुँह और मसूर की दाल।

24. बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी – दुष्ट व्यक्ति को एक – न – एक दिन सजा अवश्य मिलेगी।

प्रयोग – चोर कब तक बचा रहेगा। एक – न – एक दिन पुलिस के हाथों पकड़ा जाएगा। आखिर बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी।

25. नौ सौ चूहे मार के विल्ली हज को चली – जीवनभर पाप किया, मरने के वक्त साधु बन गए।
प्रयोग – जवानी में तो सदा दूसरों को ठगते रहे और जब बुढ़ापा आ गया तब राम – राम का नाम लेने गए। आखिर नौ सौ चूहे मार के बिल्ली हज को चली।

26. अधजल गगरी छलकत जाय – छोटा और ओछा आदमी दिखावा अधिक करता है।
प्रयोग – सुरेश की जबसे लॉटरी खुली है तब से वह घमण्ड में ही रहता है, जैसे अधजल गगरी छलकत जाय।

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27. न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी – कारण न होने पर कोई नहीं हो सकता।
प्रयोग – जब से रमेश ने दुकान खोली है तब से घर में झगड़ा ही होता रहता है। अब उसने अपनी दुकान बन्द कर दी, न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी।

28. हाथी के दाँत दिखाने के और, और खाने के और – दिखावटी होना।
प्रयोग – महेश का रूप ऐसा है जैसे – हाथी के दाँत खाने के और, और दिखाने के और।

29. नक्कारखाने में तूती की आवाज सुनाई नहीं पड़ती – बड़ों के सामने छोटों की बात नहीं सुनी जाती।
प्रयोग – जब बड़े लोग बोल रहे थे तब मेरी बात तो किसी ने सुनी ही नहीं। नक्कारखाने में तूती की आवाज सुनाई नहीं पड़ती।

30. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता – एक व्यक्ति कोई बड़ा काम नहीं कर सकता।
प्रयोग – मैं अपने घर में अकेला व्यक्ति हूँ, जो बनता है वह करता हूँ। आखिर अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता है।

31. मान न मान मैं तेरा मेहमान – जवरदस्ती किसी के गले पड़ना।
प्रयोग – एक अपरिचित व्यक्ति रात के समय घर आकर बोला, में यहाँ ठहरूँगा। मान न मान मैं तेरा मेहमान।

32. अकल बड़ी कि भैंस – शारीरिक शक्ति से मानसिक शक्ति बड़ी होती है।
प्रयोग – उस आदमी ने बुद्धि बल से एक पहलवान को पटक दिया। वास्तव में भैंस से अक्ल बड़ी होती है।

33. खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है – एक को देखकर दूसरे के विचारों में परिवर्तन होना।
प्रयोग – एक शराबी को नशे में झूमता हुआ देखकर दूसरा शराबी भी झूम – झूमकर नाचने लगा। सच ही है खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है।

34. आम के आम गुठलियों के दाम – दोनों हाथ में लाभ होना।
प्रयोग – रमेश को सरकारी नौकरी मिली साथ ही अमेरिका जाने का निमंत्रण भी मिला। आम के आम गुठलियों के दाम।

35. खोदा पहाड़ निकली चुहिया – खूब परिश्रम किया लेकिन फल थोड़ा – सा मिला।
प्रयोग – एक व्यक्ति ने पुराना गड़ा हुआ धन मिलने की लालच में सारा घर खोद डाला किंतु उसे केवल पीतल के कुछ पुराने बर्तन ही हाथ लगे; यह तो वही बात हुई, खोदा पहाड़ निकली चुहिया।

36. ऊँट के मुँह में जीरा – अधिक की तो आवश्यकता है और दिया थोड़ा।
प्रयोग – एक व्यक्ति की खुराक दस रोटी है लेकिन जब वह खाने वैटा तो केवल दो रोटी ही दी; यह तो ऊँट के मुंह में जीरे के समान है।

37. सिर मुंड़ाते ओले पड़े – काम शुरू करते ही संकट आ गया।
प्रयोग – रात को दुकान का शुभारम्भ हुआ और सुबह होते ही उसमें आग लग गई, यह तो सिर मुंड़ाते ही ओले पड़ गए।

38. ओखली में सिर दिया फिर मूसर से क्या डरना – जब जान की बाजी लगाना है तो फिर डरना क्या।
प्रयोग – जब युद्ध के मैदान में आ गया तो गोली से क्या डरना। जब ओखली में सिर दिया तो मूसर से क्या डरना।

39. आँखों का अंधा नाम नैनसुख – नाम और गुणों में अंतर।
प्रयोग – नाम तो करोड़ीमल है लेकिन पास में एक पैसा नहीं अर्थात् आँखों का अंधा और नाम नैनसुख।

40. घर की मुर्गी दाल बराबर – गुणवान् की इज्जत घर में नहीं होती है। (म.प्र. 1990)
प्रयोग – अमेरिका में भाषण देने से पहले स्वामी विवेकानंद भारतीयों के लिए घर की मुर्गी दाल बराबर थे।

41. अंधा पीसे कुत्ता खाए – मूर्ख का धन चालाक के हाथ में आना। (म.प्र. 1990)
प्रयोग – मोहन दिन – रात कड़ी मेहनत करता है लेकिन उसके बेटे मौज उड़ाते हैं। सच है अंधा पीसे कुत्ता खाए।

42. पहाड़ खड़ा होना – बड़ी मुसीबत पड़ना। (म.प्र. 1991)
प्रयोग – परीक्षा के समय मोहन को बुखारग्रस्त देखकर मैंने कहा, यार – यह बुखार क्या आया, यह तो तुम्हारे लिए पहाड़ खड़ा हो गया है।

43. बंदर के हाथ में मोतियों की माला होना – अयोग्य के हाथ में मूल्यवान वस्तु का होना। (म.प्र. 1991)
प्रयोग – आजकल तो ऐसे अनेक सरकारी पदाधिकारी हैं जो पद का दुरुपयोग … कर रहे हैं। जिन्हें आए दिन विरोधी बंदर के हाथ में मोतियों की माला होने का उदाहरण देते रहते हैं।

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अभ्यास के लिए मुहावरे व लोकोक्तियाँ
1. हवा खाना।
2. फूंक – फूंककर कदम रखना।
3. पेट में चूहे कूटना।
4. एक थैली के चट्टे – बट्टे होना।
5. अमरौती खा के आना।
6. गट्टा – सी सुना देना।
7. कब्र में पाँव लटकाए होना।
8. चार दिन के पाहुन।
9. टेढ़ी – सीधी सुनाना।
10. सिर पटक लेना।
11. कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली।
12. कहे खेत की सुने खलिहान की।
13. लंकाकाण्ड।
14. हजारों हथौड़े सहकर मूर्ति बनती है।
15. देखो ऊँट किस करवट बैठता है।
16. मूंछों पर ताव देना।
17. करवटें बदलना।
18. गाजर – मूली समझना।
19. कान में तेल डालना।
20. आटे – दाल का भाव मालूम होना।
21. कीचड़ उछालना।
22. जिधर बोले बम उधर हम।

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MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

प्रत्यावर्ती धारा NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
एक 1000 का प्रतिरोधक 220 वोल्ट, 50 हर्ट्स आपूर्ति से संयोजित है। (a) परिपथ में धारा का rms मान कितना है? (b) एक पूरे चक्र में कितनी नेट शक्ति व्यय होती है?
हल :
दिया है : Vrms = 220 वोल्ट, R= 100 Ω, v = 50 हर्ट्स
(a) परिपथ में धारा का rms मान irms =\(\frac{V_{r m s}}{R}=\frac{220}{100}\) = 2.2 ऐम्पियर
(b) ∵ परिपथ में केवल शुद्ध प्रतिरोध जुड़ा है। अतः
शक्ति-गुणांक cos Φ = cos 0° = 1 [∴ Φ = 0°]
∴ पूरे एक चक्र में नेट शक्ति क्षय P = Vrms × irms × cosΦ .
= 220 × 2.2 × 1 = 484 वाट।

प्रश्न 2.
(a) ac आपूर्ति का शिखर मान 300 वोल्ट है। rms वोल्टता कितनी है?
(b) ac परिपथ में धारा का rms मान 10 ऐम्पियर है। शिखर धारा कितनी है?
हल :
(a) दिया है : Vo = 300 वोल्ट, Vrms = ?
rms वोल्टता Vrms = \(\frac{V_{0}}{\sqrt{2}}=\frac{300}{1.414}\) = 212 वोल्ट।
(b) दिया है : irms = 10 ऐम्पियर, io = ?
धारा का शिखर मान io = irms√2 = 14.14 ऐम्पियर।

प्रश्न 3.
एक 44 मिलीहेनरी का प्रेरित्र 220 वोल्ट, 50 हर्ट्स आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : L= 44 मिलीहेनरी = 44 × 10-3 हेनरी, v = 50 हर्ट्स, Vrms = 220 वोल्ट
प्रेरित्र में rms धारा irms = \(\frac{V_{r m s}}{X_{L}}\)
प्रेरित्र का प्रेरण प्रतिघात XL = 2πvL = 2 × \(\frac{22}{7}\) × 50 × 44 × 10-3 = 13.83Ω
irms= \(\frac{V_{r m s}}{X_{L}}\) =\(\frac{220}{13.83}[latex] = 15.90 ऐम्पियर।

प्रश्न 4.
एक 60 μF का संधारित्र 110 वोल्ट, 60 हर्ट्स ac आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : C = 60 μF = 60 × 10-6F, Vrms = 110 वोल्ट, v = 60 हर्ट्स
संधारित्र में rms धारा irms = [latex]\frac{V_{r m s}}{X_{C}}\)
जबकि संधारित्र का धारितीय प्रतिघात
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प्रश्न 5.
प्रश्न 3 व 4 में एक पूरे चक्र की अवधि में प्रत्येक परिपथ में कितनी नेट शक्ति अवशोषित होती है? अपने उत्तर का विवरण दीजिए।
हल :
प्रश्न 3 व 4 दोनों में ही पूरे चक्र में नेट शून्य शक्ति व्यय होती है।
विवरण-शुद्ध प्रेरित्र तथा शुद्ध धारिता दोनों में धारा तथा विभवान्तर के बीच 90° का कलान्तर होता है।
∴ शक्ति गुणांक cos Φ = cos 90° = 0
∴ प्रत्येक में नेट शक्ति व्यय P = Vrms × irms × cos Φ = 0.

प्रश्न 6.
एक LCR परिपथ की, जिसमें L = 2.0 हेनरी, C = 32 μF तथा R = 10Ω अनुनाद आवृत्ति ωr परिकलित कीजिए। इस परिपथ के लिए Q का क्या मान है?
हल :
दिया है : L= 2.0 हेनरी, C = 32 × 10-6F, R= 10Ω
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 2

प्रश्न 7.
30 μF का एक आवेशित संधारित्र 27 मिलीहेनरी के प्रेरित्र से जोड़ा गया है। परिपथ के मुक्त दोलनों की कोणीय आवृत्ति कितनी है?
हल :
दिया है : C = 30 × 10-6F, L= 27 × 10-3 हेनरी
मुक्त दोलनों की कोणीय आवृत्ति \(\omega_{r}=\frac{1}{\sqrt{L C}}=\frac{1}{\sqrt{27 \times 10^{-3} \times 30 \times 10^{-6}}}\)
= 1.1 × 103 रेडियन सेकण्ड-1

प्रश्न 8.
कल्पना कीजिए कि प्रश्न 7 में संधारित्र पर प्रारम्भिक आवेश 6 मिलीकूलॉम है। प्रारम्भ में परिपथ में कुल कितनी ऊर्जा संचित होती है। बाद में कुल ऊर्जा कितनी होगी?
हल
दिया है : C= 30 × 10-6F, Qo = 6 × 10-3 कूलॉम
∴ प्रारम्भ में परिपथ में संचित ऊर्जा
E = संधारित्र की ऊर्जा + प्रेरित्र की ऊर्जा
=\(\frac{1}{2} \frac{Q_{0}^{2}}{C}+\frac{1}{2} L i_{0}^{2}=\frac{1}{2} \times \frac{6 \times 10^{-3} \times 6 \times 10^{-3}}{30 \times 10^{-6}}\)
= 0.6 जूल।   [∵io = 0]
∵ परिपथ में कोई प्रतिरोध नहीं जुड़ा है तथा शुद्ध धारिता तथा शुद्ध प्रेरक में ऊर्जा-हानि नहीं होती है। अत: बाद में परिपथ में कुल 0.6 जूल ऊर्जा ही बनी रहेगी।

प्रश्न 9.
एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ को, जिसमें R= 20 Ω, L= 1.5 हेनरी तथा C = 35μF, एक परिवर्ती आवृत्ति को 200 वोल्ट ac आपूर्ति से जोड़ा गया है। जब आपूर्ति की आवृत्ति परिपथ की मूल आवृत्ति के बराबर होती है तो एक पूरे चक्र में परिपथ को स्थानान्तरित की गई माध्य शक्ति कितनी होगी?
हल :
दिया है : R = 20Ω, L = 1.5 हेनरी, C = 35μF, Vrms = 200 वोल्ट
जब आपूर्ति की आवृत्ति, परिपथ की मूल आवृत्ति के बराबर है तो
परिपथ की प्रतिबाधा Z = R = 20Ω (अनुनाद की स्थिति)
∴ परिपथ में धारा irms = \(\frac{V_{r m s}}{Z}=\frac{200}{20}\)= 10 ऐम्पियर
जबकि शक्ति गुणांक cos Φ = cos 0° = 1
∴पूरे चक्र में परिपथ को स्थानान्तरित शक्ति
P= Vrms × irms × cos Φ = 200 × 10 × 1 = 2000 वाट।

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प्रश्न 10.
एक रेडियो को मेगावाट प्रसारण बैण्ड के एक खण्ड के आवृत्ति परास के एक ओर से दूसरी ओर (800 किलोहर्ट्स से 1200 किलोहर्ट्स) तक समस्वरित किया जा सकता है। यदि इसके LC परिपथ का प्रभावकारी प्रेरकत्व 200 माइक्रोहेनरी हो तो उसके परिवर्ती संधारित्र की परास कितनी होनी चाहिए?
हल :
दिया है : प्रसारण बैण्ड की आवृत्ति v = 800 किलोहर्ट्स-1200 किलोहर्ट्स
∴ vmin in = 800 × 103 हर्ट्स, vmax = 1200 × 103 हर्ट्स, L= 200 माइक्रोहेनरी = 200 × 10-6 हेनरी
रेडियो को प्रसारण बैण्ड के साथ समस्वरित करने हेतु LC परिपथ की मूल आवृत्ति, प्रसारण की आवृत्ति के बराबर होनी चाहिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 3
अतः परिवर्ती संधारित्र की परास 88 pF से 198 pF होनी चाहिए।

प्रश्न 11.
चित्र-7.1 में एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ दिखलाया गया है जिसे परिवर्ती आवृत्ति के 230 वोल्ट के स्त्रोत से जोड़ा गया है। L = 5.0 हेनरी, C = 80 μF, R = 40 Ω
(a) स्रोत की आवृत्ति निकालिए जो परिपथ में अनुनाद उत्पन्न करे।
(b) परिपथ की प्रतिबाधा तथा अनुनादी आवृत्ति पर धारा का आयाम निकालिए।
(c) परिपथ के तीनों अवयवों के सिरों पर विभवपात के rms मानों को निकालिए। दिखलाइए कि अनुनादी आवृत्ति पर LC संयोग के सिरों पर विभवपात शून्य है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 4
हल :
दिया है : L = 5.0 हेनरी, C = 80 × 10-6F, R= 40Ω, Vrms= 230 वोल्ट
(a) अनुनाद के लिए स्रोत की कोणीय आवृत्ति
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 5
= 50 रेडियन सेकण्ड-1

(b) अनुनाद की स्थिति में XL = Xc
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 6

(c) R के सिरों का rms विभवपात
VR = irms × R = 5.75 × 40 = 230 वोल्ट।
XL= ωrL = 50 × 5.0 = 250Ω
तथा
∵ XC = XL = 250Ω.
∴ प्रेरक के सिरों पर rms विभवपात
VL = irms × XL
= 5.75 x 250 = 1437.5 वोल्ट।
इसी प्रकार,
VC = irms × XC
= 5.75 × 250 = 1437.5 वोल्ट।
∵ VLतथा VC विपरीत कला में है, अत: LC संयोग के
सिरों पर विभवपात V = VL – VC
= 1437.5-1437.5= 0 वोल्ट।

प्रश्न 12.
किसी LC परिपथ में 20 मिलीहेनरी का एक प्रेरक तथा 50 μF का एक संधारित्र है जिस पर प्रारम्भिक आवेश 10 मिलीकूलॉम है। परिपथ का प्रतिरोध नगण्य है। मान लीजिए कि वह क्षण जिस पर परिपथ बन्द किया जाता है t= 0 है।
(a) प्रारम्भ में कुल कितनी ऊर्जा संचित है? क्या यह LC दोलनों की अवधि में संरक्षित है?
(b) परिपथ की मूल आवृत्ति क्या है?
(c) किसी समय पर संचित ऊर्जा?
(i) पूरी तरह से विद्युत है ( अर्थात् वह संधारित्र में संचित है)?
(ii) पूरी तरह से चुम्बकीय है (अर्थात् प्रेरक में संचित है)?
(d) किन समयों पर सम्पूर्ण ऊर्जा प्रेरक एवं संधारित्र के मध्य समान रूप से विभाजित है?
(e) यदि एक प्रतिरोधक को परिपथ में लगाया जाए तो कितनी ऊर्जा अन्ततः ऊष्मा के रूप में क्षयित होगी?
हल :
दिया है : L = 20 × 10-3 हेनरी, C = 50 × 10-6F, Qo = 10 × 10-3 कूलॉम
(a) प्रारम्भ में कुल संचित ऊर्जा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 7
∵ परिपथ में शुद्ध प्रतिरोध नहीं लगा है; अत: परिपथ की कुल ऊर्जा संरक्षित है।

(b) परिपथ की कोणीय आवृत्ति
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(c) संधारित्र के निरावेशन समीकरण Q= Qo cos ωt से,
आवेश Q महत्तम अर्थात् Qmax = ± Qo होगा, जबकि t = 0, \(\frac{T}{2}\), T,
\(\frac{3T}{2}\),….. आदि। (∵ cos ωt = ± 1)
इन क्षणों पर धारा i शून्य होगी।
इसके विपरीत आवेश Q शून्य होगा, यदि
cos ωt = t = 0, \(\frac{T}{4}\), T,
\(\frac{3T}{4}\), \(\frac{5T}{4}\)…..
इन क्षणों पर धारा i महत्तम होगी।
अत: (i) क्षणों t = 0, \(\frac{T}{2}\), T,
\(\frac{3T}{2}\),….. आदि पर कुल ऊर्जा विद्युतीय होगी अर्थात् संधारित्र में संचित होगी।
(ii) क्षणों t = 0, \(\frac{T}{4}\), T,
\(\frac{3T}{4}\),….. आदि पर कुल ऊर्जा चुम्बकीय होगी अर्थात् प्रेरक में संचित होगी।
जहाँ T = \(\frac{1}{v}\) = \(\frac{1}{159}\)= 0.0063 सेकण्ड।

(d) प्रारम्भ में परिपथ की कुल ऊर्जा E = \(\frac{Q_{0}^{2}}{2 C}\)
यदि किसी समय t पर संधारित्र पर आवेश Q है तथा कुल ऊर्जा संधारित्र व प्रेरक में आधी-आधी बँटी है, तब
इस क्षण संधारित्र की ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\)E.
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अतः व्यापक रूप में,
t = 0, \(\frac{T}{8}\), T,
\(\frac{3T}{8}\), \(\frac{5T}{8}\), \(\frac{7T}{8}\),…….. आदि समयों पर कुल ऊर्जा संधारित्र व प्रेरक में बराबर-बराबर बँटी होगी।
(e) यदि परिपथ में प्रतिरोध जोड़ दिया जाए तो धीरे-धीरे परिपथ की सम्पूर्ण ऊर्जा प्रतिरोधक में ऊष्मा के रूप में व्यय हो जाएगी।

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प्रश्न 13.
एक कुंडली को जिसका प्रेरण 0.50 हेनरी तथा प्रतिरोध 1002 है, 240 वोल्ट व 50 हर्ट्स की एक आपूर्ति से जोड़ा गया है।
(a) कुंडली में अधिकतम धारा कितनी है?
(b) वोल्टेज शीर्ष व धारा शीर्ष के बीच समय-पश्चता (time lag) कितनी है?
हल :
दिया है : L= 0.5 हेनरी, R= 100Ω, Vrms = 240 वोल्ट, v = 50 हर्ट्स
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प्रश्न 14.
यदि परिपथ को उच्च आवृत्ति की आपूर्ति (240 वोल्ट, 10 किलोहर्ट्स) से जोड़ा जाता है तो प्रश्न 13 (a) तथा (b) के उत्तर निकालिए। इससे इस कथन की व्याख्या कीजिए कि अति उच्च आवृत्ति पर किसी परिपथ में प्रेरक लगभग खुले परिपथ के तुल्य होता है। स्थिर अवस्था के पश्चात् किसी dc परिपथ में प्रेरक किस प्रकार का व्यवहार करता है?
हल :
दिया है : Vrms = 240 वोल्ट, v = 10 किलोहर्ट्स = 10000 हर्ट्स, L= 0.5 हेनरी, R = 100Ω
(a) प्रेरक का प्रतिघात XL = 2 πVL
= 2 × 3.14 × 10000 × 0.5 = 31400Ω
∴ प्रतिबाधा \(Z=\sqrt{R^{2}+X_{L}^{2}} \approx 31400 \Omega\) [∵ R<<XL]
∴ परिपथ में महत्तम धारा io = \(\frac{V_{r m s} \sqrt{2}}{Z}=\frac{240 \sqrt{2}}{31400} \approx\) ऐम्पियर।
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महत्तम धारा i0 का मान अत्यन्त कम है इससे यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि अति उच्च आवृत्ति की धाराओं के लिए प्रेरक खुले परिपथ की भाँति व्यवहार करता है।
∵ दिष्ट धारा के लिए v = 0.
अत: दिष्ट धारा परिपथ में XL = 2πvL = 0
अत: दिष्ट धारा परिपथ में प्रेरक साधारण चालक की भाँति व्यवहार करता है।

प्रश्न 15.
40Ω प्रतिरोध के श्रेणीक्रम में एक 100 µ F के संधारित्र को 110 वोल्ट, 60 हर्ट्स की आपूर्ति से जोड़ा गया है।
(a) परिपथ में अधिकतम धारा कितनी है?
(b) धारा शीर्ष व वोल्टेज शीर्ष के बीच समय-पश्चता कितनी है?
हल :
दिया है : R = 40Ω, C = 100 × 10-6 F, Vrms = 110 वोल्ट, v = 60 हर्ट्स
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प्रश्न 16.
यदि परिपथ को 110 वोल्ट, 12 किलोहर्ट्स आपूर्ति से जोड़ा जाए तो प्रश्न 15 (a) व (b) का उत्तर निकालिए। इससे इस कथन की व्याख्या कीजिए कि अति उच्च आवृत्तियों पर एक संधारित्र चालक होता है। इसकी तुलना उस व्यवहार से कीजिए जो किसी dc परिपथ में एक संधारित्र प्रदर्शित करता है।
हल :
दिया है : R= 40Ω, C= 100 × 10-6 F, Vrms = 110 वोल्ट, v = 12 × 103 हर्ट्स
(a)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 13
भाग (a) के उत्तर से हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि अति उच्च आवृत्ति की धारा के लिए संधारित्र का प्रतिघात नगण्य होता है, अर्थात् यह एक शुद्ध चालक की भाँति व्यवहार करता है।
स्थायी दिष्ट धारा हेतु v = 0, अत: धारितीय प्रतिघात XC = \(\frac{1}{2 \pi \nu C}\)= ∞
इस दिष्ट धारा के लिए संधारित्र खुले परिपथ की भाँति व्यवहार करता है।

प्रश्न 17.
स्त्रोत की आवृत्ति को एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ की अनुनादी आवृत्ति के बराबर रखते हुए तीन अवयवों L, C तथा R को समान्तर क्रम में लगाते हैं। यह दशाइए कि समान्तर LCR परिपथ में इस आवृत्ति पर कुल धारा न्यूनतम है। इस आवृत्ति के लिए प्रश्न 11 में निर्दिष्ट स्रोत तथा अवयवों के लिए परिपथ की हर शाखा में धारा के rms मान को परिकलित कीजिए।
हल :
समान्तर LCR परिपथ की प्रतिबाधा Z निम्नलिखित सूत्र द्वारा प्राप्त होती है –
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 14
अनुनादी आवृत्ति के लिए, XC = XC
अत: इस स्थिति में \(\frac { 1 }{ z }\) न्यूनतम होगी अतः प्रतिबाधा Z अधिकतम होगी।
∴ परिपथ में प्रवाहित कुल धारा न्यूनतम होगी।
प्रश्न 11 से, Vrms = 230 वोल्ट, R = 40Ω, L= 5.0 हेनरी, C = 80 × 10-6F, ω = 50 रेडियन सेकण्ड-1
(अनुनादी आवृत्ति)
∵ L, C व R तीनों समान्तर क्रम में जुड़े हैं।
अतः तीनों के सिरों का विभवान्तर समान (प्रत्येक Vrms = 230 वोल्ट) होगा।
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प्रश्न 18.
एक परिपथ को जिसमें 80 मिलीहेनरी का एक प्रेरक तथा 60 uF का संधारित्र श्रेणीक्रम में है 230 वोल्ट, 50 हर्ट्स की आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ का प्रतिरोध नगण्य है।
(a) धारा का आयाम तथा rms मानों को निकालिए।
(b) हर अवयव के सिरों पर विभवपात के rms मानों को निकालिए।
(c) प्रेरक में स्थानान्तरित माध्य शक्ति कितनी है?
(d) संधारित्र में स्थानान्तरित माध्य शक्ति कितनी है?
(e) परिपथ द्वारा अवशोषित कुल माध्य शक्ति कितनी है? [माध्य में यह समाविष्ट है कि इसे ‘पूरे चक्र’ के लिए लिया गया है।]
हल :
दिया है : L = 80 × 10-3 हेनरी, C = 60 × 10-6 F, Vrms = 230 वोल्ट, v = 50 हर्ट्स
(a) प्रेरण प्रतिघात XL = 2 πvL = 2 × 3.14 × 50 × 80 × 10-3 = 25.12Ω
धारितीय प्रतिघात XL =\(\frac{1}{2 \pi v C}=\frac{1}{2 \times 3.14 \times 50 \times 60 \times 10^{-6}}=53.07 \Omega\)
∴ परिपथ की प्रतिबाधा Z = XC – XL = 53.07 – 25.12 = 27.95 ≈ 28Ω
∴ परिपथ में धारा irms= \(\frac{V_{r m s}}{Z}=\frac{230}{28}\) = 8.21ऐम्पियर।

धारा का शिखर मान io = irms√2 = 8.21 × 1.414 = 11.60 ऐम्पियर।

(b) प्रेरक के सिरों पर विभवपात VL = irms x XL = 8.21 × 25.12 = 206 वोल्ट।
∴ संधारित्र के सिरों पर विभवपात VC = irms x XC= 8.21 × 53.07 = 436 वोल्ट।

(c) प्रेरक के लिए धारा तथा विभवान्तर के बीच कलान्तर Φ = \(\frac { π }{ 2 }\)
प्रेरक में माध्य शक्ति PL = Vrms × irms × cos \(\frac { π }{ 2 }\) = 0

(d) संधारित्र के लिए धारा तथा विभवान्तर के बीच कलान्तर क Φ = \(\frac { π }{ 2 }\)
∴ संधारित्र में माध्य शक्ति PC = Vrms × irms × cos\(\frac { π }{ 2 }\)
(e) परिपथ द्वारा अवशोषित माध्य शक्ति भी शून्य होगी।

प्रश्न 19.
कल्पना कीजिए कि प्रश्न 18 में प्रतिरोध 15Ω है। परिपथ के हर अवयव को स्थानान्तरित माध्य शक्ति तथा सम्पूर्ण अवशोषित शक्ति को परिकलित कीजिए।
हल :
प्रश्न 18 से,XL = 25.12 2, XC = 53.07Ω तथा
R = 15Ω, Vrms = 230 वोल्ट
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 16
प्रेरक तथा संधारित्र दोनों को स्थानान्तरित माध्य शक्ति शून्य है।
प्रतिरोध को स्थानान्तरित माध्य शक्ति PR = (irms)2 × R= (7.26)2 × 15 = 791 वाट।
परिपथ द्वारा अवशोषित सम्पूर्ण माध्य शक्ति = 791 वाट।

प्रश्न 20.
एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ को जिसमें L = 0.12 हेनरी, C = 480 µF, R = 23Ω, 230 वोल्ट परिवर्ती आवृत्ति वाले स्रोत से जोड़ा गया है।।
(a) स्त्रोत की वह आवृत्ति कितनी है जिस पर धारा आयाम अधिकतम है। इस अधिकतम मान को निकालिए।
(b) स्रोत की वह आवृत्ति कितनी है जिसके लिए परिपथ द्वारा अवशोषित माध्य शक्ति अधिकतम है।
(c) स्त्रोत की किस आवृत्ति के लिए परिपथ को स्थानान्तरित शक्ति अनुनादी आवृत्ति की शक्ति की आधी है।
(d) दिए गए परिपथ के लिए Q कारक कितना है?
हल :
(a) अधिकतम धारा के लिए XL = XC
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 17

(b) ∵ प्रेरक व संधारित्र द्वारा अवशोषित माध्य शक्तियाँ शून्य हैं।
∴ परिपथ द्वारा अवशोषित माध्य शक्ति P= i2rms × R ⇒ P ∝ i2rms
स्पष्ट है कि शक्ति P महत्तम होगी यदि प्रवाहित धारा महत्तम हो।
इसके लिए XL = XC
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 18

प्रश्न 21.
एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ के लिए जिसमें L = 3.0 हेनरी, C = 27 µ F तथा R = 7.4Ω अनुनादी आवृत्ति तथा Q कारक निकालिए। परिपथ के अनुनाद की तीक्ष्णता को सुधारने की इच्छा से “अर्ध उच्चिष्ठ पर पूर्ण चौड़ाई” को 2 गुणक द्वारा घटा दिया जाता है। इसके लिए उचित उपाय सुझाइए।
हल :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 19
अर्ध उच्चिष्ठ पर पूर्ण चौड़ाई को आधा करने अथवा समान आवृत्ति के लिए Q को दोगुना करने हेतु प्रतिरोध R का आधा कर देना चाहिए।

प्रश्न 22.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(a) क्या किसी ae परिपथ में प्रयुक्त ताक्षणिक वोल्टता परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़े गए अवयवों के सिरों पर तात्क्षणिक वोल्टताओं के बीजगणितीय योग के बराबर होता है? क्या यही बात rms वोल्टताओं में भी लागू होती है?
(b) प्रेरण कुंडली के प्राथमिक परिपथ में एक संधारित्र का उपयोग करते हैं।
(c) एक प्रयुक्त वोल्टता संकेत एक dc वोल्टता तथ उच्च आवृत्ति के एक ac वोल्टता के अध्यारोपण से निर्मित है। परिपथ एक श्रेणीबद्ध प्रेरक तथा संधारित्र से निर्मित है। दर्शाइए कि dc संकेत C तथा ac संकेत के सिरे पर प्रकट होगा।
(d) एक लैम्प में श्रेणीक्रम में जुड़ी चोक को एक dc लाइन से जोड़ा गया है। लैम्प तेजी से चमकता है। चोक में लोहे के क्रोड को प्रवेश कराने पर लैम्प की दीप्ति में कोई अन्तर नहीं पड़ता है। यदि एक ac लाइन से लैम्प का संयोजन किया जाए तो तद्नुसार प्रेक्षणों की प्रागुक्ति कीजिए।
(e) ac मेंस के साथ कार्य करने वाली फ्लोरोसेंट ट्यूब में प्रयुक्त चोक कुंडली की आवश्यकता क्यों होती है? चोक कुंडली के स्थान पर सामान्य प्रतिरोधक का उपयोग क्यों नहीं होता?
उत्तर :
(a) हाँ, परन्तु यह तथ्य rms वोल्टताओं के लिए सत्य नहीं है क्योंकि विभिन्न अवयवों की rms वोल्टताएँ समान कला में नहीं होती।
(b) संधारित्र को जोड़ने से, परिपथ को तोड़ते समय चिनगारी देने वाली धारा संधारित्र को आवेशित करती है, अत: चिनगारी नहीं निकल पाती।
(c) संधारित्र dc सिग्नल को रोक देता है, अत: dc सिग्नल वोल्टता संधारित्र के सिरों पर प्रकट होगा जबकि ac सिग्नल प्रेरक के सिरों पर प्रकट होगा।
(d) dc लाइन के लिए v = 0.
अत: चोक की प्रतिबाधा XL = 2πvL = 0
अतः चोक दिष्ट धारा के मार्ग में कोई रुकावट नहीं डालती, इससे लैम्प तेज चमकता है।
ac लाइन में चोक उच्च प्रतिघात उत्पन्न करती है (L का मान अधिक होने के कारण), अत: लैम्प में धारा घट जाती है और उसकी चमक मद्धिम पड़ जाती है।
(e) चोक कुंडली एक प्रेरक का कार्य करती है और बिना शक्ति खर्च किए ही धारा को कम कर देती है। यदि चोक के स्थान पर प्रतिरोधक का प्रयोग करें तो वह धारा को कम तो कर देगा परन्तु इसमें वैद्युत शक्ति ऊष्मा के रूप में व्यय होती रहेगी।

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प्रश्न 23.
एक शक्ति संप्रेषण लाइन अपचायी ट्रांसफॉर्मर में जिसकी प्राथमिक कुंडली में 4000 फेरे हैं, 2300 वोल्ट पर शक्ति निवेशित करती है। 230 वोल्ट की निर्गत शक्ति प्राप्त करने के लिए द्वितीयक में कितने फेरे होने चाहिए?
हल :
दिया है : Np = 4000, VP = 2300 वोल्ट, VS = 230 वोल्ट, NS = ?
सूत्र \(\frac{V_{S}}{V_{P}}=\frac{N_{S}}{N_{P}}\) से.
द्वितीयक कुंडली में फेरों की संख्या \(N_{S}=\frac{V_{S}}{V_{P}} \times N_{P}=\frac{230}{2300} \times 4000=400\)

प्रश्न 24.
एक जल विद्युत शक्ति संयंत्र में जल दाब शीर्ष 300 मीटर की ऊँचाई पर है तथा उपलब्ध जल प्रवाह 100 मीटर3 सेकण्ड -1 है। यदि टरबाइन जनित्र की दक्षता 60% हो तो संयंत्र से उपलब्ध विद्युत शक्ति का आकलन कीजिए, g= 9.8 मीटर सेकण्ड-2.
हल :
दिया है : h = 300 मीटर, g= 9.8 मीटर/सेकण्ड2, जल का आयतन V = 100 मीटर3,
समय t = 1 सेकण्ड, जनित्र की दक्षता = 60%
जल विद्युत शक्ति = जल-स्तम्भ का दाब × प्रति सेकण्ड प्रवाहित जल का आयतन
. = hρg × V = 300 x 103 × 9.8 × 100 = 29.4 x 107 वाट
∴ जनित्र द्वारा उत्पन्न वैद्युत शक्ति = कुल शक्ति × दक्षता
= 29.4 × 107 × \(\frac { 60 }{ 100 }\) = 176.4 × 106 वाट = 176. 4 मेगावाट।

प्रश्न 25.
440 वोल्ट पर शक्ति उत्पादन करने वाले किसी विद्युत संयंत्र से 15 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटे से कस्बे में 220 वोल्ट पर 800 किलोवाट शक्ति की आवश्यकता है। वैद्युत शक्ति ले जाने वाली दोनों तार की लाइनों का प्रतिरोध 0.5Ω प्रति किलोमीटर है। कस्बे को उप-स्टेशन में लगे 4000-220 वोल्ट अपचायी ट्रांसफॉर्मर से लाइन द्वारा शक्ति पहुँचती है।
(a) ऊष्मा के रूप में लाइन से होने वाली शक्ति के क्षय का आकलन कीजिए।
(b) संयंत्र से कितनी शक्ति की आपूर्ति की जानी चाहिए, यदि क्षरण द्वारा शक्ति का क्षय नगण्य है।
(c) संयंत्र के उच्चायी ट्रांसफॉर्मर की विशेषता बताइए।
हल :
(a) तार की लाइनों का प्रतिरोध R= 30 किमी × 0.5 ओम किमी-1 = 150
उप-स्टेशन पर लगे ट्रांसफॉर्मर के लिए VP = 4000 वोल्ट, VS = 220 वोल्ट
माना प्राथमिक परिपथ में धारा = ip व द्वितीयक परिपथ में धारा = is
ट्रांसफॉर्मर द्वारा द्वितीयक परिपथ में दी गई शक्ति
VS × iS = 800 किलोवाट = 800 × 103 वाट
VP × iP = VS × iS से,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 20
यह धारा सप्लाई लाइन से होकर गुजरती है।
∴ लाइन में होने वाला शक्ति क्षय
P= i2p × R= (200)2 × 15 वाट = 600 किलोवाट।

(b) संयंत्र द्वारा आपूर्ति की जाने वाली शक्ति
= 800 किलोवाट + 600 किलोवाट = 1400 किलोवाट।

(c) सप्लाई लाइन पर विभवपात ।
V= ip × R = 200 × 15 = 3000 वोल्ट
∴ उप-स्टेशन पर लगा अपचायी ट्रांसफॉर्मर 4000 वोल्ट-220 वोल्ट प्रकार का है, अतः इस ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुंडली पर विभवपात = 4000 वोल्ट
∴ संयंत्र पर लगे उच्चायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा प्रदान की जाने वाली वोल्टता = 3000 + 4000 = 7000 वोल्ट
अत: यह ट्रांसफॉर्मर 440 V – 7000 V प्रकार का होना चाहिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 21

प्रश्न 26.
प्रश्न 25 को पुनः कीजिए। इसमें पहले के ट्रांसफॉर्मर के स्थान पर 40000-220 वोल्ट की अपचायी ट्रांसफॉर्मर है। [पूर्व की भाँति क्षरण के कारण हानियों को नगण्य मानिए। यद्यपि अब यह सन्निकटन उचित नहीं है । क्योंकि इसमें उच्च वोल्टता पर संप्रेषण होता है। अतः समझाइए कि क्यों उच्च वोल्टता संप्रेषण अधिक वरीय है।
हल :
(a) पूर्व प्रश्न की भाँति
VS × iS = 800 × 103
∴\(i_{P}=\frac{V_{S} \times i_{S}}{V_{P}}=\frac{800 \times 10^{3}}{40000}\) = 20 ऐम्पियर [∵ इस बार Vp= 40000 वोल्ट]
∴ लाइन में होने वाला शक्ति व्यय P = i2 S × R
P = (20)2 × 15 = 6000 वाट = 6 किलोवाट।

(b) ∴ संयंत्र द्वारा प्रदान की जाने वाली शक्ति = 800 किलावाट + 6 किलावाट = 806 किलावाट।

(c) सप्लाई लाइन पर विभवपात V = Ip × R
= 20 × 15 = 300 वोल्ट ::
∵ उप-स्टेशन पर लगा ट्रांसफॉर्मर 40000 वोल्ट – 220 वोल्ट प्रकार का है, अत: इसकी
प्राथमिक कुंडली पर विभवपात = 40000 वोल्ट.
∴ संयंत्र पर लगे उच्चायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा प्रदान की जाने वाली वोल्टता = 40000 वोल्ट + 300 वोल्ट
= 40300 वोल्ट
∴ संयंत्र पर लगा ट्रांसफॉर्मर 440 वोल्ट – 40300 वोल्ट प्रकार का होना चाहिए।
सप्लाई लाइन में प्रतिशत शक्ति क्षय = \(\frac{6}{806} \times 100\) = 0.74%

प्रश्न 25 व 26 के हलों से स्पष्ट है कि वैद्युत शक्ति उच्च वोल्टता पर सम्प्रेषित करने से सप्लाई लाइन में होने वाला शक्ति क्षय बहुत घट जाता है। यही कारण है कि वैद्युत उत्पादन संयंत्रों से वैद्युत शक्ति का सम्प्रेषण उच्च वोल्टता पर किया जाता है।

प्रत्यावर्ती धारा NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

प्रत्यावर्ती धारा बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसी वोल्टता मापक युक्ति को ac मेंस से जोड़ने पर यह युक्ति 220V स्थिर निवेश वोल्टता दर्शाती है। इसका अर्थ
यह है कि
(a) निवेश वोल्टता ac वोल्टता नहीं हो सकती, परन्तु यह dc वोल्टता है
(b) अधिकतम निवेश वोल्टता 220V है
(c) मापक युक्ति υ का पाठ्यांक नहीं देती अपितु < υ2 > का पाठ्यांक देती है और इसका अंशांकन \(\sqrt{<v^{2}>}\) का पाठ्यांक लेने के लिए किया गया है
(d) किसी यान्त्रिक दोष के कारण मापक युक्ति का संकेतक अटक जाता है।
उत्तर :
(c) मापक युक्ति υ का पाठ्यांक नहीं देती अपितु < υ2 > का पाठ्यांक देती है और इसका अंशांकन \(\sqrt{<v^{2}>}\) का पाठ्यांक लेने के लिए किया गया है

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प्रश्न 2.
किसी जनित्र से श्रेणीक्रम से जुड़े LCR परिपथ की अनुनादी आवृत्ति कम करने के लिए –
(a) जनित्र की आवृत्ति कम करनी चाहिए।
(b) परिपथ में लगे संधारित्र के पार्श्व क्रम में एक अन्य संधारित्र जोड़ना चाहिए।
(c) प्रेरक के लोह-क्रोड को हटा देना चाहिए
(d) संधारित्र के परावैद्युत को हटा देना चाहिए।
उत्तर :
(b) परिपथ में लगे संधारित्र के पार्श्व क्रम में एक अन्य संधारित्र जोड़ना चाहिए।

प्रश्न 3.
संचार में प्रयुक्त LCR परिपथ के अधिक अच्छे समस्वरण के लिए निम्नलिखित में किस संयोजन का चयन करना
चाहिए?
(a) R = 20 Ω, L = 1.5 H, C = 35μF
(b) R = 25 Ω, L= 2.5 H, C = 45μF
(c) R = 15 Ω, L= 3.5 H, C = 30μF
(d) R = 25 Ω, L= 1.5 H, C = 45μF.
उत्तर :
(c) R = 15 Ω, L= 3.5 H, C = 30μF

प्रश्न 4.
1Ω प्रतिबाधा के किसी प्रेरक तथा 2Ω प्रतिरोध के किसी प्रतिरोधक को 6 V (rms) के ac स्रोत से श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। परिपथ में क्षयित शक्ति का मान है
(a) 8w
(b) 12w
(c) 14.4W
(d) 18 W.
उत्तर :
(c) 14.4W

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प्रश्न 5.
किसी अपचायी ट्रांसफार्मर का निर्गम 12W के प्रकाश बल्ब को संयोजित करने पर 24V मापा जाता है। शिखर धारा का मान है –
(a) \(\frac{1}{\sqrt{2}} \mathrm{A}\)
(b) √2 A
(c) 2 A
(d) 2√2 A.
उत्तर :
(a) \(\frac{1}{\sqrt{2}} \mathrm{A}\)

प्रत्यावर्ती धारा अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
यदि किसी LC परिपथ को आवर्ती दोलनकारी स्प्रिंग-ब्लॉक प्रणाली के तुल्य समझा जाता है तब इस LC परिपथ की कौन-सी ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा के और कौन-सी गतिज ऊर्जा के तुल्य होगी?
उत्तर :
LC परिपथ की चुम्बकीय ऊर्जा, गतिज ऊर्जा के तुल्य एवं वैद्युत ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा के तुल्य होगी।

प्रश्न 2.
अत्युच्च आवृत्ति पर चित्र 7.2 में दर्शाए गए परिपथ का प्रभावी तुल्य परिपथ बनाइए और इसकी प्रभावी प्रतिबाधा ज्ञात कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 22
उत्तर :
अति उच्च आवृत्ति पर संधारित्र का प्रतिघात (\(X_{c}=\frac{1}{\omega_{C}}=\frac{1}{2.7 f c}\)) बहुत निम्न होगा तथा प्रेरक का प्रतिघात (XL = ωL = 2 πfL) बहुत उच्च होगा। अतः प्रेरक खुले प्रतिरोध की भाँति कार्य करेगा।
अत: दिए गए परिपथ का प्रभावी तुल्य परिपथ, चित्र में दर्शाया गया है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 23
इस परिपथ की प्रभावी प्रतिबाधा (Z) = R1 + R3

प्रश्न 3.
चित्र 7.4 (a) एवं (b) में दर्शाए गए परिपथों का अध्ययन कीजिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(a) किन दशाओं में दोनों परिपथों में rms धारा समान होगी?
(b) क्या परिपथ (a) से परिपथ (b) में rms धारा अधिक हो सकती है?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 24
उत्तर :
(a) यदि दोनों परिपथों में लगाए गए प्रत्यावर्ती स्रोत की rms वोल्टता समान है तब अनुनाद की स्थिति में LCR परिपथ में rms धारा, केवल R वाले परिपथ में rms धारा के बराबर होगी।
(b) नहीं, परिपथ (b) में rms धारा परिपथ (a) में rms धारा से अधिक नहीं हो सकती है क्योंकि LCR परिपथ की प्रतिबाधा Z ≥ R, अतः Ia ≥ Ib.

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प्रश्न 4.
कोई युक्ति र किसी ac स्रोत से जुड़ी है। एक पूर्ण चक्र में वोल्टता, धारा एवं शक्ति के परिवर्तन चित्र 7.5 में दर्शाए गए हैं –
(a) कौन-सा वक्र एक पूर्ण वक्र में शक्ति-क्षय दर्शाता है?
(b) एक पूर्ण चक्र में औसत उपमुक्त शक्ति कितनी है?
(c) युक्ति ‘X’ की पहचान कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 25
उत्तर :
(a) वक्र A शक्ति-क्षय दर्शाता है।
(b) एक पूर्ण चक्र में औसत उपमुक्त शक्ति शून्य है।
(c) युक्ति ‘X’, L अथवा C अथवा LC है।

प्रश्न 5.
स्पष्ट कीजिए कि संधारित्र द्वारा प्रदत्त प्रतिघात प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति में वृद्धि करने पर कम क्यों हो जाता है?
उत्तर :
संधारित्र द्वारा प्रदत्त प्रतिघात \(\left(X_{C}\right)=\frac{1}{\omega_{C}}=\frac{1}{2 \pi f C}\)
अतः संधारित्र द्वारा प्रदत्त प्रतिघात, प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति में वृद्धि करने पर कम हो जाता है।

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प्रश्न 6.
स्पष्ट कीजिए कि किसी प्रेरक द्वारा प्रदत्त प्रतिघात प्रत्यावर्ती वोल्टता की आवृत्ति में वृद्धि करने पर क्यों बढ़ता है?
उत्तर :
प्रेरक द्वारा प्रदत्त प्रतिघात (XL) = ωL= 2 πfL
अर्थात् XL∝ f
अतः प्रेरक द्वारा प्रतिघात, प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति में वृद्धि करने पर बढ़ता है।

प्रत्यावर्ती धारा आंकिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
0.01 हेनरी प्रेरकत्व तथा 1 ओम प्रतिरोध की कोई कुंडली 200 वोल्ट, 50 हर्ट्स के ac शक्ति प्रदाय से जोड़ी गई है। परिपथ की प्रतिबाधा तथा अधिकतम प्रत्यावर्ती वोल्टता एवं धारा के बीच काल-पश्चता परिकलित कीजिए।
हल :
दिया है, L= 0.01 हेनरी, R = 1 ओम, Vrms = 200 वोल्ट, f = 50 हर्ट्स।
प्रेरण प्रतिघात XL = ωL = 2πfL = 2 x 3.14 x 50 x 0.01= 3.14Ω
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 26

प्रश्न 2.
किसी शक्ति केन्द्र से 1 MW शक्ति 10 किमी दूर स्थित किसी शहर को प्रदान की जानी है। कोई व्यक्ति इस उद्देश्य के लिए 0.5 सेमी त्रिज्या के ताँबे के तारों के जोड़े का उपयोग करता है। संचरित शक्ति की ओमीय क्षति के अंश का परिकलन कीजिए जबकि –
(i) शक्ति प्रेषण 220 वोल्ट पर किया जाता है। इस स्थिति की व्यवहार्यता पर टिप्पणी कीजिए।
(ii) किसी उच्चायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा वोल्टता 11000 वोल्ट तक बढ़ाकर शक्ति संचरण किया जाता है और फिर अपचायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा वोल्टता को 220 वोल्ट किया जाता है।
(ρcu = 1.7 × 10-8 SI)
उत्तर :
दिया है, शक्ति (P) = 1 MW = 106 वाट
r = 0.5 सेमी = 0.5 × 10-2 मीटर
l = 10 किमी = 10000 मीटर .
(i)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 27
अत: 220 वोल्ट पर शक्ति प्रेषण पर समस्त ऊर्जा दूर स्थित शहर तक पहुँचने से पहले ही ऊष्मा के रूप में क्षय हो जाएगी। अत: यह विधि शक्ति प्रेषण के लिए उपयुक्त नहीं है।

(ii) उच्चायी ट्रांसफॉर्मर द्वारा वोल्टता बढ़ाने पर,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा img 28
इस प्रकार शक्ति प्रेषण में केवल 3.3% ऊर्जा क्षय हो रहा है। अत: यह विधि शक्ति प्रेषण के लिए उपयुक्त है।

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MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

परीक्षा में कभी–कभी वाक्यांश देकर उनके लिए एक शब्द पूछे जाते हैं। कुछ शब्द तथा अर्थ नीचे दिए जा रहे हैं–
1. जो क्षमा न किया जा सके – अक्षम्य
2. जहाँ पहुँचा न जा सके – अगम्य
3. जिसे पहले गिनना उचित हो – अग्रगण्य
4. जिसका जन्म न हो। – अजन्मा
5. ऐसी वस्तु जिसका कोई मूल्य न हो – अमूल्य
6. जो दूर की बात सोचे। – दूरदर्शी
7. जो दूर की बात न सोचे – अदूरदर्शी
8. जिसका पार न हो – अपार
9. जो दिखाई न दे। – अदृश्य
10. जिसके समान कोई न हो – अद्वितीय

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11. जिसका पता न हो – अज्ञात
12. जो थोड़ा जानता हो। – अल्पज्ञ
13. जो सब कुछ जानता हो – सर्वज्ञ
14. जो सब कुछ नहीं जानता हो – अज्ञ
15. जो कभी बूढ़ा न हो – अजर
16. जो वेतन पर काम करे – वैतनिक
17. जो ऊपर कहा गया हो – उपर्युक्त
18. जो आशा से कहीं बढ़कर हो – आशातीत
19. जिसका कोई आधार न हो – निराधार
20. जो नष्ट न हो सके – अक्षय
21. चारों ओर चक्कर काटना – परिक्रमा
22. जो उचित समय पर न हो – असामयिक
23. जिसका पति मर चुका हो – विधवा
24. जिसकी पत्नी मर चुकी हो – विधुर
25. काँसे का बर्तन बनाने वाला – कसेरा
26. जिसे कर्त्तव्य नहीं सूझ रहा हो – किंकर्तव्यविमूढ़
27. जो उपकार को माने – कृतज्ञ
28. जो उपकार को न माने – कृतघ्न
29. जो आँखों के सामने हो – प्रत्यक्ष
30. जो आँखों के सामने न हो – परोक्ष.

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MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अनेकार्थक शब्द

MP Board Class 12th General Hindi व्याकरण अनेकार्थक शब्द

प्रश्न 1.
अनेकार्थक शब्द की परिभाषा सोदाहरण दीजिए।
उत्तर –
प्रसंगानुसार भिन्न अर्थों में प्रयुक्त होने वाले अनेकार्थक शब्द कहलाते हैं;

जैसे –
काम – कामदेव, इच्छा, कार्य।
अम्बर – आकाश, वस्त्र।
उत्तर – हल, उत्तर दिशा, जवाब, बाद में।

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महत्त्वपूर्ण अनेकार्थ शब्द

1. अंक – गोद, चिह्न, नाटक का अंक, संध्या, पुण्य, अध्याय।
2. अंग – भाग, एक देश, शरीर का होई हिस्सा।
3. अनंत – अंतहीन, आकाश, विष्णु।
4. अर्क – सूर्य, काढ़ा या तत्त्व, आक का पौधा।
5. अर्थ – धन, मतलब, कारण, लिए, प्रयोजन।
6. अक्ष – आँख, सर्प, शान, धुरी, रथ, आत्मा, कील, मण्डल।
7. अज – बकरा, मेष राशि, दशरथ के पिता, ब्रह्मा, शिव, जीव।
8. अहि – सूर्य, साँप, कष्ट।
9. अक्षर – ब्रह्मा, विष्णु ‘अ’ आदि अक्षर, शिव, धर्म, मोक्ष ।
10. अच्युत – अविनाशी, स्थिर, कृष्ण, विष्णु।
11. आम – आम का फल, सर्वसाधारण, सामान्य।
12. अंतर – अवधि, आकाश, अवसर, मध्य, छिद्र।
13. अरुण – लाल, सूर्य, सूर्य का सारथि, सिन्दूर, वृक्ष, संध्या, राग।
14. अमृत – जल, दूध, अन्न, पारा।
15. अतिथि – मेहमान, साधु, यात्री, अपरिचित, राम का पोता या कुश का बेटा।
16. अपवाद – नियम के विरुद्ध, कलंक।
17. आपत्ति – मुसीबत, एतराज।
18. अलि – भौ .., पंक्ति, सखी।
19. अशोक – शोकरहित, एक प्रसिद्ध राजा, एक वृक्ष ।
20. अयन – घर, मार्ग, स्थान, आधा वर्ष ।
21. आराम – बाग, विश्राम, शांति।
22. आली – पंक्ति, सखी।
23. अर्थी – इच्छुक, मुर्दा रखने का तख्ता, याचक
24. अचल – पर्वत, स्थिर।
25. अवस्था – आयु, दशा।
26. ईश्वर – मालिक, धनी, परमात्मा।
27. इन्दु – चन्द्र, कपूर, नाम।
28. उत्तर – एक दिशा, जवाब, हल।
29. कंद – मिश्री, वह जड़ जो गुद्देदार और बिना रेशे के हो।
30. कनक – धतूरा, सोना।

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31. कला – किसी कार्य को करने की कुलशता, अंश, चन्द्र का सोलहवाँ भाग, शिल्प आदि विद्या।
32. कटाक्ष – तिरछी नजर, व्यथा, आक्षेप।
33. कसरत – व्यायाम, अधिकता।
34. काम – कामदेव, इच्छा, कार्य।
35. केतु – पताका या ध्वजा, एक ग्रह, पुच्छल तारा।
36. कृष्ण – काला, भगवान कृष्ण, वेद व्यास।
37. केवल – एकमात्र, विशुद्ध नाम।
38. कर – हाथ, लँड, किरण, टैक्स, करने की आज्ञा।
39. कोट – किला, पहनने का कोट ।
40. कोटि – करोड़, धनुष का सिरा, श्रेणी।
41. कषाय – कसैला, गेरू के रंग का।
42. कौरव – गीदड़, धृतराष्ट्र।
43. कुशल – खैरियत, चतुर ।
44. कबंध – एक राक्षस विशेष, पेटी (कमरबंध), राहु, धड़।
45. कल – कल आने वाला, दूसरा दिन, बीता हुआ दूसरा दिन, मशीन, सुंदर, चैन, ध्वनि।
46. काल – समय मृत्यु, यम, शिव, अकाल ।
47. केश – बाल, बादल, शुण्ड, बृहस्पति का बेटा।
48. कुम्भ – हाथी का मस्तक, राक्षस का नाम, तीर्थस्थल।
49. खर – गधा, दुष्ट, तीक्ष्ण, तिनका।
50. खल – दुष्ट, धतूरा, दवा आदि कूटने का खल।
51. गुण – रस्सी, विशेषता, तमोगुण, रजोगुण और सतोगुण।
52. गौ – भूमि, दिशा, वाणी, नेत्र, स्वर्ग, आकाश, शब्द

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53. गुरु – आचार्य, बड़ा, भारी, दो मात्राओं का अक्षर, देवताओं के गुरु बृहस्पति।
54. गण – समूह, भूत – प्रेतादि, शिव के सेवक।
55. गति – चाल, हालत, मोक्ष।

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MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Sounds in English

MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Sounds in English

1.1 Sounds in English

See Workbook Page-2

Exercises

A. The vowel sounds in English

See Workbook Page-2

Question 1.
Listen and repeat the following words in pairs.
MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Sounds in English 1
Answer:
For self attempt

Question 2.
Listen and repeat the following words in triplets and pairs.
MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Sounds in English 2
Answer:
For self attempt

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Question 3.
Listen and repeat the given words in pairs.
MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Sounds in English 3
Answer:
For self attempt

Question 4.
Listen and repeat the following words in pairs:
MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Sounds in English 4
Answer:
For self attempt

B. The Consonant Sounds.

See Workbook Page-3

Exercises

Question 1.
Listen and repeat the following words in pairs:
MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Sounds in English 5
Answer:
For self attempt

Question 2.
Given below are words which have different sounds. Listen carefully and repeat them.
MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 1 Sounds in English 6
Answer:
For self attempt

Question 3.
Repeat the following more than once. These are tongue twisters that will help you in making your pronunciation better.
1. Red lorry, yellow lorry, red lorry, yellow lorry
2. Mr. Smith’s fish sauce shop
3. Shy Shelly says she shall sew sheets.
4. Fat frogs flying past fast
5. Which-witch wished which wicked wish?

6. Swim, Swam, Swin!
Swan swam back again
Well swum, swan.

7. Once one was a race horse
two-two was one, too.
When one-one won one race
Two-Two won one too.

8. Betty Botter bought some butter.
But the butter was too bitter.
So Betty Botter bought some better butter
To make the bitter butter better.
Answer:
For self attempt

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Reductions :

See Workbook Page-6

Exercises

Question 1.
Now read the following sentences aloud as instructed.
A- Which one you want? This one?
(pronounce ‘do’ reduced)
B : No.
A- Well, Which one you want?
(Pronounce ‘do’ strong)
B : one (Pronounce ‘that’ strong)
A : Which one?
B- The one I’m pointing to?
(Pronounce ‘that’ strong)
C- Why don’t you try rm stop? (reduced ‘to’)
D- I’ve tried rm (strong ‘to’)
E- I’m surprised find driving so difficult.
(reduced ‘you’)
F- Well, how did stop? (strong ‘you’)
When structure words begin with “h” e.g. her, his, him etc. the initial “h” often disappears.
Answer:
For self attempt

Question 2.
Practice saying the following without pronouncing “h”

  1. Did ( )e go?
  2. Give (f)im the pen.
  3. Is (h)e there?
  4. Leave (f)er alone.
  5. When did (f)e go there?
  6. Who did (f)e talk to?
  7. Have you talked to (f)im yet?
  8. Did you ask (f)im?
  9. “What did (f)e say?
  10. Did you ask (f)im who (f)e was with?

Answer:
For self attempt

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Question 3.
Read aloud and learn these rhyming proverbs.

Haste makes waste.
Love many, trust few always paddle your own canoe.
If you snooze you lose.
A stitch in time saves nine.
Two in distress make trouble less.
Birds of a feather flock together.
Finders, keepers; losers, weepers.
Early to bed, early to rise makes a person healthy, wealthy and wise.
A friend in need is a friend indeed.
Trouble comes double.
A friend in words and not in deeds is like a garden full of weeds.
When money talks nobody walks.
When the cat’s away the mice will play
No pain no gain
Answer:
For self attempt

1.2 Word Stress

See Workbook Page-9

Exercises

Point out the number of syllables in the following words.
Take the help of a dictionary.

  1. register – three
  2. degree – two
  3. vitamin – three
  4. attempt – three
  5. exercise – four
  6. sudden – two
  7. vocabulary – five
  8. twelfth – three
  9. gypsy – three
  10. universal – three
  11. exchange – three
  12. bottle – two
  13. collective – four
  14. ask – two

Stress in words

See Workbook Page-9

Exercises

Question 1.
Look up a dictionary and mark the stress and pronounce the words aloud.
airport, ship wreck, selfish, appointment, economy, economical, beginning, aimless, exposure, introduce, introduction, celebrate development, beautiful, answer, careless, remember, credit, realize, realization, reply, waiting, lazy, laziness, perhaps.
Answer:
For self attempt

Question 2.
Mark the stress and pronounce the following words as nouns/ adjectives with accent on the first able and as verb with accent on the second syllable.

  1. absent – accent
  2. addict – conduct
  3. content – contract
  4. convict – decrease
  5. desert – export
  6. frequent – increase
  7. perfect – present
  8. record – import

Answer:
For self attempt

1.3 Intonation

See Workbook Pages-11-13

Exercises

Question 1.
Try and say the following utterances in a falling tone:

  1. ‘Sit ‘down.
  2. ‘Thanks.
  3. ‘Tell him a ‘story.
  4. ‘Do it ‘now.
  5. It’s ‘nine.
  6. ‘What are you ‘doing?
  7. ’She is ’beautiful.

Answer:
For self attempt

Question 2.
Try and say the following utterances in a rising tone :

  1. ’What is his, name?
  2. Good, morning.
  3. ‘Are you, going?
  4. ’When shall we, meet?
  5. ‘Go and, do it.
  6. ‘Will you answer the call?

Answer:
For self attempt

Question 3.
Listen carefully and mark each sentence with correct stress and intonation.

  1. Don’t ask foolish questions.
  2. What a marvelous idea!
  3. Where are you going?
  4. It’s impossible.
  5. You must learn how to do it.
  6. Place it on the table.
  7. Wasn’t that gracious of him?
  8. How extraordinary!
  9. Take it back.
  10. He is wearing a cap.

Answer:
For self attempt

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Question 4.
Listen carefully and mark each sentence with correct stress and intonation.

  1. Good morning.
  2. You are a scientist, aren’t you?
  3. Is he present?
  4. I can buy you the gift (if I get the money)
  5. Put it on the desk.
  6. Where can we meet?
  7. Don’t disturb the child.
  8. How old are you?
  9. It was my mistake.
  10. Pass the salt please!

Answer:
For self attempt

Question 5.
Listen carefully and mark with correct stress and intonation. (Combined tones.)

  1. I think it’s quite clear, on the whole.
  2. Will you be staying there for long?
  3. What he meant by it, I can’t imagine.
  4. He was right nevertheless.
  5. I’d buy a new one, if I could afford it.

Answer:
For self attempt

Question 6.
Try to say these sentences in a falling rising tone.

  1. You are slow (though I understand your point of view).
  2. It’d be better to try (even if you don’t succeed).
  3. I would love to go (If I can get the permission).
  4. It is very short (we like tall shapes).
  5. I like playing (but I don’t get the occasion).
  6. I love knitting, (but I can’t sew).

Answer:
For self attempt

Verb with Prepositions

See Workbook Page-23-24

Exercises

(a) Fill in the blanks with suitable prepositions:

  1. You must concentrate on your studies.
  2. The teacher said. “Boys, listen to me”
  3. I was marveled at his sense of humour.
  4. The hakim cured him of his disease.
  5. The workers are protesting against the cut in their wages.
  6. I am waiting for your reply.
  7. She invited me to dinner.
  8. Don’t compare me with my brother.
  9. Refrain him from taking any rash action.
  10. We take pride of our heritage.

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(b) Fill in the blanks in this story :

Shravan is an orphan who came to Delhi from his village in Bihar in search of work. His father kept a shop, but was tricked of it by a deceitful uncle. Despair drove him to alcohol and gambling, and he died of a stroke soon after.

Shravan worked in a tea shop in his village for a while. He moved for the more lucrative environs in Delhi, where his elder brother Gopal had preceded him. Following a brief spell of unemployment and a short shell as an assistant in a car park, he joined a tea shop.

c) Put an appropriate preposition after the verb in each sentence.
Then use your own ideas to complete each sentence. One is done for you.

  1. I broke her glasses and she made me pay
  2. I am excited because I am going to play
  3. He was not paying attention and crashed
  4. I have to stay home tonight and prepare
  5. All the furniture in the room belongs
  6. Whether or not we go out depends
  7. There was so much noise that I could not concentrate rm
  8. In my opinion, an ideal breakfast consists of
  9. It was an awful hotel and we complained
  10. We only had one sandwich, so it was divided

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MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक

नाभिक NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

• अभ्यास के प्रश्न हल करने में निम्नलिखित आँकड़े आपके लिए उपयोगी सिद्ध होंगे :

e = 1.6×10-19 कूलॉम,
N = 6.023x 1023 प्रति मोल,
\(\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}}\) = 9 x 109 न्यूटन-मीटर2/कूलॉम’2,
k= 1.381 x 1023 जूल/केल्विन,
1 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट = 1.6 x 10-13 जूल
1u = 931 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट,
1 year = 3.154 x 107 सेकण्ड,
mp = 1.007825
mH = 1.007823u
mn = 1.008665 u,
m(_{2}^{4} \mathrm{He}) = 4.002603u,
me = 0.000548u.

प्रश्न 1.
(a) लीथियम के दो स्थायी समस्थानिकों को \(_{3}^{6} \mathbf{L i}\) एवं \(_{3}^{7} \mathbf{L i}\) की बहुलता का प्रतिशत क्रमशः 7.5 एवं 92.5 है। इन समस्थानिकों के द्रव्यमान क्रमशः 6.01512 u एवं 7.01600 u हैं। लीथियम का परमाणु द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
(b) बोरॉन के दो स्थायी समस्थानिक \(\begin{array}{c}{10} \\ {5}\end{array}\)B एवं \(\begin{array}{l}{11} \\ {5}\end{array}\)B हैं। उनके द्रव्यमान क्रमशः 10.01294u एवं 11.00931u एवं बोरॉन का परमाणु भार 10.811u है। Bएवं VB की बहुलता ज्ञात कीजिए।
हल
(a) माना लीथियम के किसी नमूने में 100 परमाणु लिए गए हैं, तब इनमें 7.5 परमाणु \(_{3}^{6} \mathbf{L i}\) के तथा 92.5 परमाणु \(_{3}^{7} \mathbf{L i}\) के होंगे। .
∴ 100 परमाणुओं का द्रव्यमान = (7.5 x 6.01512+ 92.5 x 7.01600)u
= (45.1134 + 648.98)u= 694.0934u
∴ लीथियम का औसत परमाणु द्रव्यमान =
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 1
\(\frac { 694.0934 }{ 100 }\) = 6.940934u
≈ 6.941u

(b) माना बोरॉन के दो समस्थानिकों की बहुलता क्रमश: x% तथा y% है, तब
x+ y= 100
यदि बोरॉन के 100 परमाणु लिए जाएँ तो इनमें x परमाणु \(\begin{array}{c}{10} \\ {5}\end{array}\)B के तथा y परमाणु \(\begin{array}{l}{11} \\ {5}\end{array}\)B के होंगे।
∴ बोरॉन का परमाणु द्रव्यमान =
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 2
⇒ 10.811 = \(\frac { x×10.01294 + y × 11.00931 }{ 100 }\)
था 10.811×100 = 10.01294x + 11.00931 (100-x) [∵ x+ y = 100]
⇒ 1081.1-1100.931 = 10.01294x – 11.00931x
⇒  -19.831= – 0.99637x
∴ x = \(\frac { -19.831 }{ -0.99637 }\) = 19.9 .
∴ y = 100-x= 100 – 19.9 = 80.1
अत: बोरॉन में \(\begin{array}{c}{10} \\ {5}\end{array}\)B तथा \(\begin{array}{l}{11} \\ {5}\end{array}\)B समस्थानिकों की बहुलता प्रतिशत क्रमश: 19.9 तथा 80.1 हैं।

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प्रश्न 2.
नियॉन के तीन स्थायी समस्थानिकों की बहुलता क्रमशः 90.51%, 0.27% एवं 9.22% है। इन समस्थानिकों के परमाणु द्रव्यमान क्रमशः 19.99u, 20.99u एवं 21.99u हैं। नियॉन का औसत परमाणु द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
हल
यदि नियॉन के 100 परमाणु लिए जाएँ तो उनमें नियॉन के तीन समस्थानिकों के क्रमश: 90.51 परमाणु, 0.27 परमाणु तथा 9.22 परमाणु होंगे।
∴ नियॉन का औसत परमाणु द्रव्यमान = \(\frac { (90.51 × 19.99 + 0.27 × 20.99+9.22 × 21.99)u }{ 100 }\)
= \(\frac { (1809.2949+ 5.6673+ 202.7478)u }{ 100 }\) = \(\frac { 2017.71 }{ 100 }\)
= 20.177u ≈ 20. 18u

प्रश्न 3.
नाइट्रोजन नाभिक (\(_{7}^{14} \mathrm{N}\)) की बन्धन ऊर्जा मिलियन इलेक्ट्रॉन-ऊर्जा में ज्ञात कीजिए। mr = 14.00307u
हल
दिया है : न्यूट्रॉन का द्रव्यमान mn = 1.00867u, प्रोटॉन का द्रव्यमान mp = 1.00783u
\(_{7}^{14} \mathrm{N}\) नाभिक का द्रव्यमान mN = 14.00307u
∴ \(_{7}^{14} \mathrm{N}\) नाभिक 7 प्रोटॉनों तथा 7 न्यूट्रॉनों से मिलकर बना है।
∴ \(_{7}^{14} \mathrm{N}\) नाभिक में उपस्थित न्यूक्लिऑनों का द्रव्यमान
= 7mp + 7mn
= 7 × 1.00783 + 7 × 1.00867
= 14.1155u
∴ \(_{7}^{14} \mathrm{N}\) की द्रव्यमान क्षति Δ m = न्यूक्लिऑनों का द्रव्यमान — नाभिक का द्रव्यमान
= 14.11550- 14.00307 = 0.11243u
1u = 931 MeV
∴ \(_{7}^{14} \mathrm{N}\) नाभिक की बन्धन ऊर्जा = Δ m × 931 = 0.11243 × 931
= 104.67
≈ 104.7 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर \(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array} \mathbf{F} \mathbf{e}\) एवं \(\begin{array}{l}{209} \\ {83}\end{array}\)Bi नाभिकों की बन्धन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट में ज्ञात कीजिए। m (\(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array} \mathbf{F} \mathbf{e}\)) = 55.934939u, m (\(\begin{array}{l}{209} \\ {83}\end{array}\)Bi) = 208.980388u.
हल
दिया है, प्रोटॉन का द्रव्यमान mp = 1.007825u
न्यूट्रॉन का द्रव्यमान mn = 1.008665u
(i) \(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array} \mathbf{F} \mathbf{e}\) नाभिक का द्रव्यमान mFe = 55.934939u
इस नाभिक में 26 प्रोटॉन तथा (56- 26) = 30 न्यूट्रॉन हैं।
∴ न्यूक्लिऑनों का द्रव्यमान = 26mp + 30mn
= 26 x 1.007825+ 30 x 1.008665
= 26.20345 + 30.25995 = 56.4634u
द्रव्यमान क्षति Δm = न्यूक्लिऑनों का द्रव्यमान – नाभिक का द्रव्यमान
= 56.4634 – 55.934939 = 0.528461u
∴\(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array} \mathbf{F} \mathbf{e}\) नाभिक की बन्धन ऊर्जा = Δm x 931
= 0.528461x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 492.26 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ बन्धन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन = \(\frac { 496.26 }{ 56 }\)
= 8.79 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट/न्यूक्लिऑन।

(ii) \(\begin{array}{l}{209} \\ {83}\end{array}\)Bi नाभिक का द्रव्यमान mBi = 208.980388u
इस नाभिक में 83 प्रोटॉन तथा 126 न्यूट्रॉन हैं। .
∴ न्यूक्लिऑनों का द्रव्यमान = 83mp + 126mn
= 83×1.007825+ 126×1.008665
= 83.649475+127.091790
= 210.741260 u
∴ नाभिक की द्रव्यमान क्षति Δm = 210.741260 – 208.980388
= 1.760872 u
∴ नाभिक की बन्धन ऊर्जा = Δm x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 1.760872 x 931.5
= 1640.26 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ बन्धन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन = \(\frac { 1640.26 }{ 209 }\)
= 7.85 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट/न्यूक्लिऑन।

प्रश्न 5.
एक दिए गए सिक्के का द्रव्यमान 3.0 ग्राम है। उस ऊर्जा की गणना कीजिए जो इस सिक्के के सभी न्यूट्रॉनों एवं प्रोटॉनों को एक-दूसरे से अलग करने के लिए आवश्यक हो। सरलता के लिए मान लीजिए कि सिक्का पूर्णत: \(\begin{array}{l}{63} \\ {29}\end{array} \mathbf{C u}\) परमाणुओं का बना है। ( \(\begin{array}{l}{63} \\ {29}\end{array} \mathbf{C u}\) का द्रव्यमान = 62.9260u)
हल
दिया है, न्यूट्रॉन का द्रव्यमान mn = 1.008665u
प्रोटॉन का द्रव्यमान mp = 1.007825u 68
\(\begin{array}{l}{63} \\ {29}\end{array} \mathbf{C u}\) नाभिक का द्रव्यमान m = 62.9260u
\(\begin{array}{l}{63} \\ {29}\end{array} \mathbf{C u}\) का ग्राम परमाणु द्रव्यमान = 63 ग्राम
∴ 63 ग्राम कॉपर में परमाणुओं की संख्या
N = 6.02 x 1023
∴ 3 ग्राम कॉपर में परमाणुओं की संख्या = \(\frac{6.02 \times 10^{23}}{63}\) × 3
= 2.868x 1022 परमाणु
\(\begin{array}{l}{63} \\ {29}\end{array} \mathbf{C u}\) के एक नाभिक में 29 प्रोटॉन तथा 63-29 = 34 न्यूट्रॉन हैं।
∴ एक नाभिक के न्यूक्लिऑनों का द्रव्यमान = 29mp + 34 mn
= 29 x 1.007825+ 34×1.008665
= 29.226925+ 34.294610
= 63.521535u
∴ एक नाभिक पर द्रव्यमान क्षति = 63.521535 – 62.9260 = 0.595535u
∴ 3 ग्राम कॉपर के लिए कुल द्रव्यमान क्षति
Δm = 0.595635 x 2.868 x 1022
= 1.70x 1022u
∴ 3 ग्राम कॉपर की बन्धन ऊर्जा = Δm x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 1.70 x 1022 x 931.5
= 1583.5 x 1022 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
=1.584 x 1025 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
अथवा
बन्धन ऊर्जा = 1.584 x 1025 x 1.6 x 10-13 जूल
= 2.535 x 1012 जूल ।
अतः सभी न्यूट्रॉनों एवं प्रोटॉनों को अलग करने के लिए आवश्यक ऊर्जा
= 1.584 x 1025 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 2.535 x 1012 जूल।

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित के लिए नाभिकीय समीकरण लिखिए-
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 3
उत्तर
दी गई अभिक्रियाओं के लिए नाभिकीय समीकरण निम्नलिखित हैं
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 4

प्रश्न 7.
एक रेडियोऐक्टिव समस्थानिक की अर्द्ध-आयु T वर्ष है। कितने समय के बाद इसकी ऐक्टिवता, प्रारम्भिक ऐक्टिवता की
(a) 3. 125%, तथा
(b) 1% रह जाएगी? ।
हल
(a) माना समस्थानिक की प्रारम्भिक रेडियोऐक्टिवता = R0
माना समयान्तराल n अर्धायुकालों के पश्चात् शेष रेडियोऐक्टिवता = R
प्रश्नानुसार, R= R0 का 3.125%
⇒ R = \(\frac{3.125}{100} R_{0}\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 5
अभीष्ट समयान्तराल = n × एक अर्द्ध-आयु
= 5T वर्ष।

(b) इस बार R = R0 का 1% = \(\frac { 1 }{ 100 }\) Ro
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 6
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प्रश्न 8.
जीवित कार्बनयुक्त द्रव्य की सामान्य ऐक्टिवता, प्रति ग्राम कार्बन के लिए 15 क्षय प्रति मिनट है यह ऐक्टिवता, स्थायी समस्थानिक \(_{6}^{14} \mathbf{c}\) के साथ-साथ अल्प मात्रा में विद्यमान रेडियोऐक्टिव \(_{6}^{12} \mathbf{C}\) के कारण होती है। जीव की मृत्यु होने पर वायुमण्डल के साथ इसकी अन्योन्य क्रिया (जो उपर्युक्त सन्तुलित ऐक्टिवता को बनाए रखती है) समाप्त हो जाती है तथा इसकी ऐक्टिवता कम होनी शुरू हो जाती है। \(_{6}^{14} \mathbf{c}\) की ज्ञात अर्द्ध-आयु (5730 वर्ष) और नमूने की मापी गई ऐक्टिवता के आधार पर इसकी सन्निकट आयु की गणना की जा सकती है। यही पुरातत्व विज्ञान में प्रयुक्त होने वाली \(_{6}^{14} \mathbf{c}\) कालनिर्धारण (dating) पद्धति का सिद्धान्त है। यह मानकर कि मोहनजोदड़ो से प्राप्त किसी नमूने की ऐक्टिवता 9 क्षय प्रति मिनट प्रति ग्राम कार्बन है। सिन्धु घाटी सभ्यता की सन्निकट आयु का आकलन कीजिए।
हल
दिया है, R0 = 15 क्षय प्रति मिनट, R= 9 क्षय प्रति मिनट, T1/2 = 5730 वर्ष
सूत्र R = R0e-λt से, 9= 15e-λt
⇒ \(\frac { 5 }{ 3 }\) eλt या 1.6667 = eλt
दोनों पक्षों का log लेने पर,
loge(1.6667) = λt logee
या 2.303 log10 1.6667 = λt
⇒ λt = 2.3025×0.22185 = 0.5108
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 8
= 4224 वर्ष।

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प्रश्न 9.
8.0 मिलीक्यूरी सक्रियता का रेडियोऐक्टिव स्रोत प्राप्त करने के लिए \(\begin{array}{l}{60} \\ {27}\end{array}\)Co की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी? \(\begin{array}{l}{60} \\ {27}\end{array}\)Co की अर्द्ध-आयु 5.3 वर्ष है।
हल
दिया है, सक्रियता R= 8.0 मिलीक्यूरी = 8.0×10-3 x 3.7 x 1010 विघटन/सेकण्ड
= 29.6 x 107 विघटन/सेकण्ड
तथा T1/2 = 5.3 वर्ष (∵ 1 क्यूरी = 3.7×1010 विघटन/सेकण्ड)
= 5.3 x 365 x 24 x 60 x 60 सेकण्ड .
सक्रियता R=-\(\frac { dN }{ dt }\) = – \(\frac { d }{ dt }\) (N0e-λt) [:: N = N0e-λt]
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 9
∴ आवश्यक परमाणुओं की संख्या N= \(\frac{29.6 \times 10^{7} \times 5.3 \times 365 \times 24 \times 60 \times 60}{0.693}\)
= 7.133 x 1016 परमाणु
∵ \(\begin{array}{l}{60} \\ {27}\end{array}\)Co का ग्राम परमाणु द्रव्यमान = 60
∴ 60 ग्राम Co में परमाणुओं की संख्या = NA = 6.02 x 1023
∴ 7.133 x 1016 परमाणु ओं का द्रव्यमान = \(\frac{60}{6.02 \times 10^{23}} \times 7.133 \times 10^{16}\)
= 7.109 x 10-6 ग्राम
= 7.11 माइक्रोग्राम।

प्रश्न 10.
\(\begin{array}{l}{90} \\ {38}\end{array} \mathbf{S} \mathbf{r}\) की अर्द्ध-आयु 28 वर्ष है। इस समस्थानिक के 15 मिलीग्राम की विघटन दर क्या है?
हल
दिया है : पदार्थ का द्रव्यमान = 15 × 10-3 ग्राम तथा
T1/2 = 28 वर्ष
= 28 × 365 × 24 × 60 × 60 सेकण्ड
= 88.3 × 107 सेकण्ड

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 10
∴ \(\begin{array}{l}{90} \\ {38}\end{array} \mathbf{S} \mathbf{r}\) का ग्राम परमाणु द्रव्यमान = 90 ग्राम ∴ 90 ग्राम Sr में परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 15 × 10-3 ग्राम में परमाणुओं की संख्या .
\(=\frac{6.02 \times 10^{23}}{90} \times 15 \times 10^{-3}\)
= 1.004 × 1020
∴ पदार्थ की विघटन दर (सक्रियता) R= λN (देखें प्रश्न 9)
⇒ \(R=\frac{0.693}{88.3 \times 10^{7}} \times 1.004 \times 10^{20}\)
= 7.879 x 1010 विघटन/सेकण्ड
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 11
= 2.13 क्यूरी।

प्रश्न 11.
स्वर्ण के समस्थानिक \(\begin{array}{l}{197} \\ {79}\end{array}\)Au एवं रजत के समस्थानिक \(\begin{array}{l}{107} \\ {47}\end{array}\)Ag की नाभिकीय त्रिज्या के अनुपात का सन्निकट मान ज्ञात कीजिए।
हल
किसी नाभिक की त्रिज्या निम्नलिखित सूत्र द्वारा प्राप्त होती है
R= R0A1/3
जहाँ A= परमाणु द्रव्यमान जबकि R0 = नियतांक
यहाँ \(\begin{array}{l}{197} \\ {79}\end{array}\)Au के लिए, A1 = 197
तथा \(\begin{array}{l}{107} \\ {47}\end{array}\)Ag के लिए, A2 = 107
∴\(\frac{R_{1}}{R_{2}}=\frac{\left(A_{1}\right)^{1 / 3}}{\left(A_{2}\right)^{1 / 3}}=\left(\frac{A_{1}}{A_{2}}\right)^{1 / 3}=\left(\frac{197}{107}\right)^{1 / 3}\)
⇒ \(\frac{R_{1}}{R_{2}}=(1.84)^{1 / 3}=1.23\)
∴ त्रिज्याओं का अनुपात R1: R2 = 1. 23 : 1

प्रश्न 12.
(a) \(\begin{array}{l}{226} \\ {88}\end{array}\)Ra एवं
(b) \(\begin{array}{l}{220} \\ {86}\end{array}\)Rn नाभिकों के -क्षय में उत्सर्जित -कणों का Q-मान एवं गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए। दिया है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 12
हल
(a) \(\begin{array}{l}{226} \\ {88}\end{array}\)Ra नाभिक के α-क्षय का समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 13
जहाँ Q अभिक्रिया में उत्पन्न ऊर्जा है।
उक्त अभिक्रिया में द्रव्यमान क्षति Δm = [बाएँ पक्ष का द्रव्यमान – दाएँ पक्ष का द्रव्यमान]
= [226.02540- (222.01750+ 4.002603)]u [दिया है, mα = 4.002603u]
= 0.005297u
∴ अभिक्रिया का Q मान = Δ m × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 0.005297 × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 4.9342 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
मूल नाभिक का परमाणु द्रव्यमान Z = 226
Rn का परमाणु द्रव्यमान = Z-4
α – कण का परमाणु द्रव्यमान = 4.
माना विघटन के बाद उक्त कणों के संवेग क्रमश: pR व pα हैं।
तब संवेग संरक्षण से, Pα + PR = 0  (∵ मूल परमाणु का संवेग = 0)
⇒ PR = -Pα
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 14
Kα= 4.85 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्टा.

(b) \(\begin{array}{l}{226} \\ {88}\end{array}\)Ra के -क्षय का समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 15
द्रव्यमान क्षति Δm = [बाएँ पक्ष का द्रव्यमान – दाएँ पक्ष का द्रव्यमान]
= [220.01137- (216.00189+ 4.002603)]u
= 0.006877u
∴ अभिक्रिया का Q मान = Δm × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 0.006877 × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 6.41 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।
भाग (a) के अनुसार,
α- कण की गतिज ऊर्जा Kα = \(\frac{m_{P_{0}}}{m_{\alpha}+m_{P_{0}}} Q\)
= \(\frac { Z-4 }{ Z }\) Q = \(\frac { 220-4 }{ 220 }\) × 0.641
Kα= 0.629 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

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प्रश्न 13.
रेडियोन्यूक्लाइड 11c का क्षय निम्नलिखित समीकरण के अनुसार होता है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 16
उत्सर्जित पॉजिट्रॉन की अधिकतम ऊर्जा 0.960 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है। द्रव्यमानों के निम्नलिखित मान दिए गए हैं
तथा MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 17
Q-मान की गणना कीजिए एवं उत्सर्जित पॉजिट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा के मान से इसकी तुलना कीजिए।
हल
दिया गया समीकरण :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 18
∴ Δm
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 19
= 11.011434 – 11.009305-2 × 0.000548
= 0.001033u
∴ Q=Δm × 931 = 0.001033 × 931
= 0.961मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।
उत्सर्जित पॉजिट्रॉन की महत्तम गतिज ऊर्जा 0.960 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है जो कि Q-मान के तुल्य है।
∴ उत्पाद नाभिक पॉजिट्रॉन की तुलना में अत्यधिक भारी है, अतः इसकी गतिज ऊर्जा लगभग शून्य होगी, पुनः चूँकि पॉजिट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा २-मान के तुल्य है, अत: न्यूट्रिनो भी लगभग शून्य ऊर्जा के साथ उत्सर्जित होगा।

प्रश्न 14.
\(\begin{array}{l}{23} \\ {10}\end{array} \mathrm{Ne}\) का नाभिक, β उत्सर्जन के साथ क्षयित होता है। इस β -क्षय के लिए समीकरण लिखिए और उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
(m\(\begin{array}{l}{23} \\ {10}\end{array} \mathrm{Ne}\)) = 22.994466u, (m\(\begin{array}{l}{23} \\ {11}\end{array} \mathrm{Na}\)) = 22.989770u
हल
\(\begin{array}{l}{23} \\ {10}\end{array} \mathrm{Ne}\) नाभिक के β-क्षय का समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 20
द्रव्यमान क्षति Δm
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 21
= [22.994466 – 22.989770] u= 0.004696u
∴ Q-मान = Δm × 931 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 0.04696×931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
Q= 4.37 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∵ \(\begin{array}{l}{23} \\ {10}\end{array} \mathrm{Na}\) नाभिक, \(\begin{array}{c}{0} \\ {-1}\end{array} \beta\) तथा ऐन्टिन्यूट्रिनो की तुलना में अत्यधिक भारी है, अतः इसकी गतिज ऊर्जा लगभग शून्य होगी। β-कण की ऊर्जा अधिकतम होगी यदि ऐन्टिन्यूट्रिनो शून्य ऊर्जा के साथ उत्सर्जित हो। इस दशा में β-कण की ऊर्जा अधिकतम होगी यदि ऐन्टिन्यूट्रिनो शून्य ऊर्जा के साथ उत्सर्जित हो। इस दशा में β-कण की अधिकतम ऊर्जा Q-मान के बराबर अर्थात् 4.37 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट होगी।

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प्रश्न 15.
किसी नाभिकीय अभिक्रिया A+ b → C+d का Q-मान निम्नलिखित समीकरण द्वारा परिभाषित होता है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 22
जहाँ दिए गए द्रव्यमान, नाभिकीय विराम द्रव्यमान (rest mass) हैं। दिए गए आँकड़ों के आधार पर बताइए कि निम्नलिखित अभिक्रियाएँ ऊष्माक्षेपी हैं या ऊष्माशोषी।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 23
उत्तर
(i) दी गई अभिक्रिया निम्नलिखित है
\(_{1}^{1} \mathrm{H}+_{1}^{3} \mathrm{H} \longrightarrow_{1}^{2} \mathrm{H}+_{1}^{2} \mathrm{H}\)
इस अभिक्रिया का Q-मान निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 24
= 1.007825 + 3.016049- 2.014102 – 2.014102
= – 0.004339u
= – 0.004339x 1.66×10-27 किग्रा ।
[∵ m \(\left(_{1}^{1} \mathrm{H}\right)\) = 1.007825u व 1u = 1.66 x 10-27 किग्रा]
Q= – 0.004339×1.66×10-27x (3×108)2 जूल
= – 6.46 x 10-13 जूल
∵ इस अभिक्रिया का Q-मान ऋणात्मक है, अत: यह ऊष्माशोषी अभिक्रिया है।

(ii)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 25
= 2 × 12.000000 -19.992439 – 4.002603  [∵ m \(\left(_{2}^{4} \mathrm{He}\right)\) = 4.002603]
= 0.004958u= 0.004958×1.66 × 10-27 किग्रा
∴ Q = 0.004958 × 1.66 x 10-27 × (3 × 108)2 जूल
= 7.41 × 10-13 जूल
∴ Qमान धनात्मक है, अतः यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है।

प्रश्न 16.
माना कि हम \(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array}\)Fe नाभिक के दो समान अवयवों \(\begin{array}{l}{28} \\ {13}\end{array} \mathbf{A} \mathbf{l}\) में विखण्डन पर विचार करें। क्या ऊर्जा की दृष्टि से यह विखण्डन सम्भव है? इस प्रक्रम का Q-मान ज्ञात करके अपना तर्क प्रस्तुत करें।
दिया है : m (\(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array}\)Fe) = 55.93494u एवं m(\(\begin{array}{l}{28} \\ {13}\end{array} \mathbf{A} \mathbf{l}\)) = 27.98191u
उत्तर
सम्भावित अभिक्रिया का समीकरण निम्नलिखित है- .
\(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array}\)Fe→ m\(\begin{array}{l}{28} \\ {13}\end{array} \mathbf{A} \mathbf{l}\)+ m\(\begin{array}{l}{28} \\ {13}\end{array} \mathbf{A} \mathbf{l}\)+Q
इस अभिक्रिया का Q-मान निम्नलिखित है
Q= [m(\(\begin{array}{l}{56} \\ {26}\end{array}\)Fe)- 2 × m(m(\(\begin{array}{l}{28} \\ {13}\end{array} \mathbf{A} \mathbf{l}\))] × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= [55.93494 – 2 × 27.98191] × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= – 0.02888×931.5
= – 26.90 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।
∵ अभिक्रिया का Q-मान ऋणात्मक है, अतः यह अभिक्रिया सम्भव नहीं है।

प्रश्न 17.
\(\begin{array}{l}{239} \\ {94}\end{array} \mathbf{P} \mathbf{u}\) के विखण्डन गुण बहुत कुछ \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array}\)U से मिलते-जुलते हैं। प्रति विखण्डन विमुक्त औसत ऊर्जा 180 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है। यदि 1 किग्रा शुद्ध \(\begin{array}{l}{239} \\ {94}\end{array} \mathbf{P} \mathbf{u}\)के सभी परमाणु विखण्डित हों तो कितनी मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ऊर्जा विमुक्त होगी? ।
हल
यहाँ \(\begin{array}{l}{239} \\ {94}\end{array} \mathbf{P} \mathbf{u}\) के विखण्डन से मुक्त ऊर्जा = 180 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∵ \(\begin{array}{l}{239} \\ {94}\end{array} \mathbf{P} \mathbf{u}\) का ग्राम परमाणु द्रव्यमान = 239 ग्राम
∴ 239 ग्राम प्लूटोनियम में उपस्थित परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 1 किग्रा (= 1000 ग्राम) में उपस्थित परमाणुओं की संख्या = \(\frac{6.02 \times 10^{23}}{239} \times 1000\)
= 2.52 × 1024
∵ 1 परमाणु के विखण्डन से मुक्त ऊर्जा = 180 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ 1 किग्रा अर्थात् 2.52 × 1024 परमाणुओं के विखण्डन से मुक्त ऊर्जा
= 180 × 2.52 × 1024
= 4.536 × 1026 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

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प्रश्न 18.
किसी 1000 मेगावाट विखण्डन रिऐक्टर के आधे ईंधन का 5.00 वर्ष में व्यय हो जाता है। प्रारम्भ में इसमें कितना \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array}\)U था? मान लीजिए कि रिऐक्टर 80% समय कार्यरत रहता है, इसकी सम्पूर्ण ऊर्जा \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array}\)U के विखण्डन से ही उत्पन्न हुई है तथा \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array}\)U न्यूक्लाइड केवल विखण्डन प्रक्रिया में ही व्यय होता है।
हल
रिऐक्टर की शक्ति P= 1000 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 1000 × 106 जूल/सेकण्ड
= 109 जूल/सेकण्ड
समय t = 5.00 वर्ष
= 5 × 365 × 24x 60 × 60 सेकण्ड = 1.577 × 108 सेकण्ड
∴ 5 वर्ष में रिऐक्टर में उत्पन्न ऊर्जा (जबकि यह 80% समय ही कार्य करता है)
E = 80% t × P
= \(\frac { 80 }{ 100 }\) × 1.577×108 × 109
= 1.2616×1017 जूल
235U के एक परमाणु के विखण्डन से औसतन 200 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ऊर्जा उत्पन्न होती है।
∴ 100 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ऊर्जा उत्पन्न होती है = 1 परमाणु से
या 200 × 1.6×10-13 जूल ऊर्जा उत्पन्न होती है = 1 परमाणु से
1 जूल ऊर्जा उत्पन्न होगी = \(\frac{1}{200 \times 1.6 \times 10^{-13}}\) परमाणु से
∴ 1.2616 × 1017 जूल ऊर्जा उत्पन्न होगी = \(\frac{1.2616 \times 10^{17}}{200 \times 1.6 \times 10^{-13}}\) परमाणु से
= 3.94 × 1027
∴ 5.0 वर्ष में विखण्डित नाभिकों की संख्या n= 3.94 × 1027 6.0 × 1023 परमाणु उपस्थित हैं
= 235 ग्राम यूरेनियम में ।
∴ 3.94 × 1027 परमाण उपस्थित होंगे = \(\frac{235 \times 3.94 \times 10^{27}}{6.0 \times 10^{23}}\) ग्राम में …
= 1.544 x 106 ग्राम में = 1.544 x 103 किग्रा
= 1544 किग्रा .
∵ 5.0 वर्ष में आधी माग विघटित होती है,
∴ रिऐक्टर में \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array}\)U की प्रारम्भिक मात्रा = 2x 1544 = 3088 किग्रा।

प्रश्न 19.
2.0 किग्रा ड्यूटीरियम के संलयन से एक 100 वाट का विद्युत लैम्प कितनी देर प्रकाशित रखा जा सकता है? संलयन अभिक्रिया निम्नवत् ली जा सकती है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 26
हल
लैम्प की शक्ति P = 100W, ड्यूटीरियम का द्रव्यमान m= 2.0 किग्रा
दी गई समीकरण- image 28
इस समीकरण से स्पष्ट है कि इस अभिक्रिया में \(_{1}^{2} \mathrm{H}\) के दो नाभिकों के संलयन से 3.27 मिलियन इलेक्ट्रॉन वोल्ट ऊर्जा उत्पन्न होती है।
∵ 2 ग्राम ड्यूटीरियम में उपस्थित नाभिकों की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 2.0 किग्रा (= 2000 ग्राम) में उपस्थित नाभिकों की संख्या \(\begin{array}{l}{=\frac{6.02 \times 10^{23} \times 2000}{2}} \\ {=6.02 \times 10^{26}}\end{array}\)
दो नाभिकों के संलयन से उत्पन्न ऊर्जा = 3.27 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 3.27 × 1.6 × 10-13 जूल
∴ 2 किग्रा अथवा 6.02 × 1026 नाभिकों के संलयन से उत्पन्न ऊर्जा
= 3.27 ×1.6 × 10-13 × 6.02  × 1026 जल
= 3.27 × 1.6 × 6.02 × 1013 जूल
माना इस ऊर्जा से लैम्प को t सेकण्ड तक प्रकाशित रखा जा सकता है, तब
लैम्प द्वारा व्यय ऊर्जा = 100 वाट × t सेकण्ड
= 100 t जूल
100 t = 3.27 × 1.6 × 6.02 × 1013
t = 3.27 × 1.6 × 6.02 × 1011
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 27
= 4.9 × 104 वर्ष
अर्थात् लैम्प को 4.9 × 104 वर्ष तक प्रकाशित रखा जा सकता है।

प्रश्न 20.
दो ड्यूट्रॉनों के आमने-सामने की टक्कर के लिए कूलॉम अवरोध की ऊँचाई ज्ञात कीजिए। (संकेत-कूलॉम अवरोध वह न्यूनतम गतिज ऊर्जा है जिसके द्वारा उन्हें एक-दूसरे की ओर भेजे जाने पर वे कूलॉमीय बल के विरुद्ध परस्पर संलयित हो सकें। यह मान सकते हैं कि ड्यूट्रॉन 2.0 फैम्टो मीटर प्रभावी त्रिज्या वाले दृढ़ गोले हैं।)
हल
प्रत्येक ड्यूट्रॉन पर आवेश q1= q2 = + 1.6 × 10-19 कूलॉम
ऊर्जा के पदों में कूलॉम अवरोध (विभव प्राचीर)
माना प्रारम्भ में प्रत्येक ड्यूट्रॉन की गतिज ऊर्जा K है। जब ये दोनों एक-दूसरे के सम्पर्क में आते हैं तो सम्पूर्ण ऊर्जा विद्युत स्थितिज ऊर्जा में बदल जाती है। ∴ ऊर्जा संरक्षण से, U= 2K ⇒ \(\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \cdot \frac{q_{1} q_{2}}{r}=2 K\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 28
= 5.76x 10-14 जुल
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 29
= 3.6 × 105 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
विभव प्राचीर K = 360 किलो इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

प्रश्न 21.
समीकरण R = \(\boldsymbol{R}_{0} \boldsymbol{A}^{1 / 3}\) के आधार पर, दर्शाइए कि नाभिकीय द्रव्य का घनत्व लगभग अचर है (अर्थात् A पर निर्भर नहीं करता है)। यहाँ R. एक नियतांक है एवं A नाभिक की द्रव्यमान संख्या है।
उत्तर
∵ नाभिक की द्रव्यमान संख्या = A
∴ नाभिक का द्रव्यमान m = Au = A × 1.66 × 10-27 किग्रा
पुन: नाभिक का आयतन V \(\begin{array}{l}{=\frac{4}{3} \pi R^{3}=\frac{4}{3} \pi\left(R_{0} A^{1 / 3}\right)^{3}} \\ {=\frac{4}{3} \pi R_{0}^{3} A}\end{array}\)
∴ नाभिक का घनत्व p \(\begin{aligned}=& \frac{m}{V}=\frac{A \times 1.66 \times 10^{-27}}{\frac{4}{3} \times \pi R_{0}^{3} A} \\=& \frac{3 \times 1.66 \times 10^{-27}}{4 \pi R_{0}^{3}} \end{aligned}\)
∵ यह घनत्व नाभिक की द्रव्यमान संख्या A से मुक्त है, अत: हम कह सकते हैं कि नाभिकीय द्रव्य का घनत्व लगभग अचर है।

प्रश्न 22.
किसी नाभिक से β+ (पॉजिट्रॉन) उत्सर्जन की एक अन्य प्रतियोगी प्रक्रिया है जिसे इलेक्ट्रॉन परिग्रहण (Capture) कहते हैं (इसमें परमाणु की आन्तरिक कक्षा, जैसे कि K-कक्षा, से नाभिक एक इलेक्ट्रॉन परिगृहीत कर लेता है और एक न्यूट्रिनो, v उत्सर्जित करता है)।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 30
दर्शाइए कि यदि β+ उत्सर्जन ऊर्जा विचार से अनुमत है कि इलेक्ट्रॉन परिग्रहण भी आवश्यक रूप से अनुमत है, परन्तु इसका विलोम अनुमत नहीं है।
उत्तर
पॉजिट्रॉन उत्सर्जन की अभिक्रिया का समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 31
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 32
समीकरण (3) व (4) से स्पष्ट है कि Q1 < Q2
यदि पॉजिट्रॉन उत्सर्जन [अभिक्रिया (1)] ऊर्जा दृष्टि से अनुमत है तो इस अभिक्रिया का Q-मान अर्थात् Q1 धनात्मक होगा।
अर्थात् Q1>0
∵ Q2>Q1, अतः Q1>0 ⇒ Q2>0
अर्थात् तब अभिक्रिया (2) का Q-मान भी धनात्मक होगा अर्थात् ऊर्जा दृष्टि से इलेक्ट्रॉन परिग्रहण भी अनुमत है। अब इस अभिक्रिया के विलोम पर विचार कीजिए,
स्पष्ट है कि इस अभिक्रिया का Q-मान – Q2 के बराबर होगा।
∴ Q20, अतः Q3 = -Q2 < 0
∵ इस अभिक्रिया का Q-मान ऋणात्मक है, अत: यह अभिक्रिया ऊर्जा दृष्टि से अनुमत नहीं है।

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प्रश्न 23.
आवर्त सारणी में मैग्नीशियम का औसत परमाणु द्रव्यमान 24.312u दिया गया है। यह औसत मान, पृथ्वी पर इसके समस्थानिकों की सापेक्ष बहुलता के आधार पर दिया गया है। मैग्नीशियम के तीनों समस्थानिक तथा उनके द्रव्यमान इस प्रकार हैं –\(\begin{array}{l}{24} \\ {12}\end{array} Mg\)(23. 98504u), \(\begin{array}{l}{25} \\ {12}\end{array} Mg\)(24.98584) एवं \(\begin{array}{l}{26} \\ {12}\end{array} Mg\) (25.98259u)। प्रकृति में प्राप्त मैग्नीशियम में \(\begin{array}{l}{24} \\ {12}\end{array} Mg\) की (द्रव्यमान के अनुसार) बहुलता 78.99% है। अन्य दोनों समस्थानिकों की बहुलता का परिकलन कीजिए।
हल
दिया है, मैग्नीशियम का औसत परमाणु द्रव्यमान = 24.312u
\(\begin{array}{l}{24} \\ {12}\end{array} Mg\) समस्थानिक की बहुलता = 78.99%
माना समस्थानिक \(\begin{array}{l}{25} \\ {12}\end{array} Mg\) की बहुलता α% है।
तब \(\begin{array}{l}{26} \\ {12}\end{array} Mg\) समस्थानिक की बहुलता
= 100 – 78.99 – α = (21.01-a) %
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 33
तथा 21.01 – a = 21.01- 9.30 = 11.70
अत: \(\begin{array}{l}{25} \\ {12}\end{array} Mg\) की बहुलता 9. 30% तथा \(\begin{array}{l}{26} \\ {12}\end{array} Mg\) की बहुलता 11.70% है।

प्रश्न 24.
न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा (Separation energy), परिभाषा के अनुसार वह ऊर्जा है, जो किसी नाभिक से एक न्यूट्रॉन को निकालने के लिए आवश्यक होती है। नीचे दिए गए आँकड़ों का इस्तेमाल करके \(_{20}^{41} \mathrm{Ca}\) एवं \(_{13}^{27} \mathrm{Al}\) नाभिकों की न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
m(\(_{20}^{40} \mathrm{Ca}\)) = 39.962591u
m (\(_{20}^{41} \mathrm{Ca}\)) = 40.962278u
(\(\begin{array}{l}{26} \\ {13}\end{array} \mathrm{Al}\)) = 25. 98689
m(\(_{13}^{27} \mathrm{Al}\)) = 26.981541u
हल
(i) \(_{20}^{41} \mathrm{Ca}\) की न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा
न्यूट्रॉन पृथक्करण अभिक्रिया का समीकरण निम्नलिखित है
\(_{20}^{41} \mathrm{Ca} \longrightarrow_{20}^{40} \mathrm{Ca}+_{0}^{1} n+Q\)
Q = [m(\(_{20}^{41} \mathrm{Ca}\))- m(\(_{20}^{40} \mathrm{Ca}\))- mn ] x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= [40.962278- 39.962591-1.008665] x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट [∵mn = 1.008665u]
= – 0.008978×931.5
= – 8.36 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∵ Q का मान ऋणात्मक है अर्थात् उक्त अभिक्रिया ऊष्माशोषी है।
∴ न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा 8. 36 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है।

(ii) \(_{13}^{27} \mathrm{Al}\) की न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जाTAI की न्यूट्रॉन पृथक्करण समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 34
Q = [m(\(_{13}^{27} \mathrm{Al}\)Al) – mn (\(\begin{array}{l}{26} \\ {13}\end{array} \mathrm{Al}\))- mn ] x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= [26.981541- 25.986895-1.008665] x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= -0.014019 x 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट .
= – 13.06 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∵ Q का मान ऋणात्मक है, अतः उक्त अभिक्रिया ऊष्माशोषी है।
∴ \(_{13}^{27} \mathrm{Al}\) की न्यूट्रॉन पृथक्करण ऊर्जा 13.06 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है।

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प्रश्न 25.
किसी स्रोत में फॉस्फोरस के दो रेडियो न्यूक्लाइड निहित हैं \(\begin{array}{l}{32}\\{15}\end{array}\)P(T1/2 = 14.3 दिन) एवं \(\begin{array}{l}{32}\\{15}\end{array}\)P(T1/2 = 25.3 दिन)। प्रारम्भ में \(\begin{array}{l}{32}\\{15}\end{array}\)P से 10% क्षय प्राप्त होता है। इससे 90% क्षय प्राप्त करने के लिए कितने समय प्रतीक्षा करनी होगी?
हल
माना प्रारम्भ में \(\begin{array}{l}{33}\\{15}\end{array}\) तथा \(\begin{array}{l}{32}\\{15}\end{array}\) की रेडियोऐक्टिवताएँ R01 व R02 हैं तथा + समय पश्चात् इनकी रेडियोऐक्टिवताएँ R1 व R2 हैं।
तब प्रारम्भ में, पदार्थ की कुल सक्रियता = R01 + R02
परन्तु R01 = 10% प्रारम्भिक सक्रियता = \(\frac { 10 }{100 }\)(R01 + R02)
⇒ 10 R01 = R01 + R02
या 9R01 = R02 ….(1)
पुनः t समय पश्चात् कुल सक्रियता = R1 + R2
परन्तु R1 = 90% कुल सक्रियता = \(\frac { 90 }{100 }\)(R1 + R2)
10R1 = 9R1 + 9R2
R1 = 9R2 ….(2)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 35
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 36

प्रश्न 26.
कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में एक नाभिक, -कण से अधिक द्रव्यमान वाला एक कण उत्सर्जित करके क्षयित होता है। निम्नलिखित क्षय-प्रक्रियाओं पर विचार कीजिए|
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 37
इन दोनों क्षय प्रक्रियाओं के लिए Q-मान की गणना कीजिए और दर्शाइए कि दोनों प्रक्रियाएँ ऊर्जा की दृष्टि से सम्भव हैं। \
उत्तर
दी गई पहली समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 38
= [223.01850- 208.98107-14.00324] × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 0.03419 × 931.5
= 31.85 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।
दूसरी समीकरण निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 39
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 41
= [223.01850- 219.00948- 4.00260] × 931.5 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
या Q= 0.00642 × 931.5
= 5.98 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।
∵ दोनों अभिक्रियाओं के Q-मान धनात्मक हैं, अत: ऊर्जा दृष्टि से दोनों अभिक्रियाएँ सम्भव हैं।

प्रश्न 27.
तीव्र न्यूट्रॉनों द्वारा \(\begin{array}{c}{238} \\ {92}\end{array} \mathbf{U}\) के विखण्डन पर विचार कीजिए। किसी विखण्डन प्रक्रिया में प्राथमिक अंशों (Primary fragments) के बीटा-क्षय के पश्चात् कोई न्यूट्रॉन उत्सर्जित नहीं होता तथा \(\begin{array}{c}{140} \\ {58}\end{array} \mathbf{C} \mathbf{e}\) तथा । \(\begin{array}{l}{99} \\ {34}\end{array} \mathbf{R} \mathbf{u}\) अन्तिम उत्पाद प्राप्त होते हैं। विखण्डन प्रक्रिया के लिए Q के मान का परिकलन कीजिए। आवश्यक आँकड़े इस प्रकार हैं
m(\(\begin{array}{c}{238} \\ {92}\end{array} \mathbf{U}\)) = 238.05079u
m(\(\begin{array}{c}{140} \\ {58}\end{array} \mathbf{C} \mathbf{e}\)) = 139.90543u
m(\(\begin{array}{l}{99} \\ {34}\end{array} \mathbf{R} \mathbf{u}\)) = 98.90594u
हल
\(\begin{array}{c}{238} \\ {92}\end{array} \mathbf{U}\) की विखण्डन अभिक्रिया का समीकरण निम्नलिखित है
\(_{92}^{238} \mathrm{U}+\frac{1}{0} n \longrightarrow_{58}^{140} \mathrm{Ce}+_{34}^{99} \mathrm{Ru}+Q\)
इस समीकरण का Q-मान निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 42
= [238.05079+1.00867- 139.90543- 98.90594] x 931.5मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 0.24809 x 931.5
= 231 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

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प्रश्न 28.
D-T अभिक्रिया (ड्यूटीरियम- ट्राइटियम संलयन),\(_{1}^{2} H+_{1}^{3} H \rightarrow \begin{array}{l}{4} \\ {2}\end{array} H e+n\) पर विचार कीजिए। .
(a) नीचे दिए गए आँकड़ों के आधार पर अभिक्रिया में विमुक्त ऊर्जा का मान मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट में ज्ञात कीजिए
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 43
(b) ड्यूटीरियम एवं ट्राइटियम दोनों की त्रिज्या लगभग 1.5 फैमटोमीटर मान लीजिए। इस अभिक्रिया में, दोनों नाभिकों के मध्य कूलॉम प्रतिकर्षण से पार पाने के लिए कितनी गतिज ऊर्जा की आवश्यकता है? अभिक्रिया प्रारम्भ करने के लिए गैसों (D तथा T गैसें) को किस ताप तक ऊष्मित किया जाना चाहिए?
(संकेत : किसी संलयन क्रिया के लिए आवश्यक गतिज ऊर्जा = संलयन क्रिया में संलग्न कणों की औसत तापीय गतिज ऊर्जा = \(\mathbf{2}\left(\frac{3 \boldsymbol{k} \boldsymbol{T}}{\mathbf{2}}\right) ; \boldsymbol{k}:\) बोल्ट्जमान नियतांक तथा T = परम ताप)
हल
(a) दी गई अभिक्रिया का समीकरण निम्नलिखित है
\(_{1}^{2} \mathrm{H}+_{1}^{3} \mathrm{H} \longrightarrow_{2}^{4} \mathrm{He}+_{0}^{1} n+Q\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 44
= [2.014102 + 3.016049- 4.002603-1.008665] x 931.5
= 0.018883x 931.5
= 17.59 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

(b) ड्यूटीरियम तथा ट्राइटियम प्रत्येक पर आवेश.
q1 + q2 = + 1.6 x 10-19 कूलॉम .
प्रत्येक की त्रिज्या r = 1.5 फैमटोमीटर
= 1.5×10-15 मीटर
दोनों के बीच कूलॉम अवरोध U = निकाय की विद्युत स्थितिज ऊर्जा जबकि दोनों परस्पर सम्पर्क में हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 45
माना उक्त कूलॉम अवरोध को पार करने के लिए प्रत्येक कण को K गतिज ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
तब K+ K=U
⇒ 2K =U
अतः कुल गतिज ऊर्जा \(=\frac{7.68 \times 10^{-14}}{1: 6 \times 10^{-19}}\) इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 480.0 किलो इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।
परन्तु कण की तापीय गतिज ऊर्जा
K = \(\frac{3}{2} k T\)
\(\frac{3}{2} k T=\frac{1}{2} U \quad \Rightarrow \quad T=\frac{U}{3 k}\)
अभीष्ट परम ताप T = \(\frac{7.68 \times 10^{-14}}{3 \times 1.38 \times 10^{-23}}\)
= 1.85x 109K

प्रश्न 29.
नीचे दी गई क्षय-योजना में, १-क्षयों की विकिरण आवृत्तियाँ एवं -कणों की अधिकतम गतिज ऊर्जाएँ ज्ञात कीजिए। दिया है :
m (198Au) = 197.968233u
m (198Hg) = 197.966760u
हल
चित्र से, E1 = \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Hg}\) की निम्नतम अवस्था में ऊर्जा = 0 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
E2 = \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Hg}\) की प्रथम उत्तेजित अवस्था में ऊर्जा = 0.412 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
E3 = \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Hg}\) की द्वितीय उत्तेजित अवस्था में ऊर्जा = 1.088 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
माना उत्सर्जित γ फोटॉनों (γ12 व γ3) की आवृत्तियाँ क्रमशः ν12 व ν3 हैं। –
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 46
तब
ν1 = \(\frac { ΔE }{ h }\) = \(\frac{E_{3}-E_{1}}{h}\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 47
= 2.63 x 1020 हर्ट्स।

ν2 = \(\frac{E_{2}-E_{1}}{h}\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 48
= 9.96 x 1019 हर्ट्स।

ν3 = \(\frac{E_{3}-E_{2}}{h}\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 49
6.62x 10-34
= 1.63x 1020 हर्ट्स।

जबकि इन फोटॉनों की ऊर्जाएँ निम्नलिखित हैं –
E(γ1) = E3 – E1
= 1.088 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ।

E(γ2)= E2 – E1
= 0.412 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट

E(γ3) = E3 – E2= 1.088-0.412 .
= 0.676 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट

\(\begin{array}{l}{198} \\ {79}\end{array} \mathrm{Au}\) के β1-क्षय में Au नाभिक पहले एक β कण उत्सर्जित करता है तत्पश्चात् 11-फोटॉन को उत्सर्जित करके \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Hg}\) नाभिक में बदल जाता है, अत: \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Au}\) के E(β1) -क्षय का समीकरण निम्नलिखित है
\(_{79}^{198} \mathrm{Au} \longrightarrow_{80}^{198} \mathrm{Hg}+_{-1}^{0} e+\cdot E\left(\beta_{1}^{-}\right)+E\left(y_{1}\right)\)
यहाँ E(β1) तथा E(γ1) इन कणों की ऊर्जाएँ हैं। स्पष्ट है कि E(β1) का मान अधिकतम होमा यदि \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Hg}\) की गतिज ऊर्जा शून्य हो। अर्थात् अभिक्रिया की सम्पूर्ण ऊर्जा केवल 8-कण तथा y-फोटॉन की ऊर्जा के रूप में निकले।
β-कण की महत्तम गतिज ऊर्जा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 50
\(\begin{array}{l}{198} \\ {79}\end{array} \mathrm{Au}\) के β2-क्षय में Au नाभिक पहले β-कण उत्सर्जित करता है तत्पश्चात् γ2 फोटॉन उत्सर्जित करता हुआ \(\begin{array}{l}{198} \\ {80}\end{array} \mathrm{Hg}\) नाभिक में बदल जाता है।

इस क्षय का समीकरण निम्नलिखित है-
\(_{79}^{198} \mathrm{Au} \longrightarrow_{80}^{198} \mathrm{Hg}+_{-1}^{0} e+E\left(\beta_{2}^{-}\right)+E\left(\gamma_{2}\right)\)
∴ उत्सर्जित β2 -कण की महत्तम गतिज ऊर्जा .
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 51

प्रश्न 30.
सूर्य के अभ्यन्तर में (a) 1 किग्रा हाइड्रोजन के संलयन के समय विमुक्त ऊर्जा का परिकलन कीजिए। (b) विखण्डन रिऐक्टर में 1.0 किग्रा 235U के विखण्डन में विमुक्त ऊर्जा का परिकलन कीजिए। (c) प्रश्न के खण्ड (a) तथा (b) में विमुक्त ऊर्जाओं की तुलना कीजिए।
हल :
(a) सूर्य के अभ्यन्तर में हाइड्रोजन के 4 परमाणु निम्नलिखित अभिक्रिया के अनुसार संलयित होकर . हीलियम परमाणु का निर्माण करते हैं तथा लगभग 26 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ऊर्जा उत्पन्न होती है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 52
∵ हाइड्रोजन का ग्राम परमाणु द्रव्यमान = 1 ग्राम
∴ 1 ग्राम हाइड्रोजन में उपस्थित परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 1 किग्रा (= 1000 ग्राम) में उपस्थित परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1026
∵ हाइड्रोजन के 4 परमाणुओं से उत्पन्न ऊर्जा = 26 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ 1 परमाणु से उत्पन्न ऊर्जा = \(\frac { 26 }{4 }\) मिलियन. इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ 6.02 × 1026 परमाणुओं से उत्पन्न ऊर्जा = \(\frac{26 \times 6.02 \times 10^{26}}{4}\)
= 39.13 × 1026 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ सूर्य के अभ्यन्तर में ‘1 किग्रा हाइड्रोजन के संलयन से उत्पन्न ऊर्जा
.. = 39.13 × 1026 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट। .

(b) हम जानते हैं कि विखण्डन रिऐक्टर में निम्न अभिक्रिया के अनुसार \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array} \mathrm{u}\) के एक परमाणु के विखण्डन से. लगभग 200 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ऊर्जा उत्पन्न होती है।
\(_{92}^{235} \mathrm{U}+_{0}^{1} n \longrightarrow_{56}^{141} \mathrm{Ba}+_{36}^{92} \mathrm{Kr}+3_{0}^{1} n+200\) मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट ऊर्जा
∵ 235 ग्राम यूरेनियम में परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 1 ग्राम यरेनियम में परमाणओं की संख्या = \(\frac{6.02 \times 10^{23}}{235}\)
∴ 1 किग्रा (= 1000 ग्राम) यूरेनियम में परमाणुओं की संख्या = \(\frac{6.02 \times 10^{23} \times 1000}{235}\)
= 25.62 × 1023
1 परमाणु के विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा = 200 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ 25.62 × 1023 परमाणुओं से प्राप्त ऊर्जा = 200 × 25.62 × 1023
= 5.124 × 1026 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
या 1 किग्रा \(\begin{array}{l}{235} \\ {92}\end{array} \mathrm{u}\) के विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा = 5.12 × 1026 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट।

(c)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 53
= 7.64≈8
अर्थात् 1 किग्रा हाइड्रोजन के संलयन से प्राप्त ऊर्जा, 1 किग्रा 235U के विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा की लगभग 8 गुनी है।

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प्रश्न 31.
मान लीजिए कि भारत का लक्ष्य 2020 तक 200,000 मेगावाट विद्युत शक्ति जनन का है। इसका 10% नाभिकीय शक्ति संयंत्रों से प्राप्त होना है। माना कि रिऐक्टर की औसत उपयोग दक्षता (ऊष्मा को विद्युत में परिवर्तन करने की क्षमता) 25% है। 2020 के अन्त तक हमारे देश को प्रति वर्ष कितने विखण्डनीय यूरेनियम की आवश्यकता होगी? 2350 प्रति विखण्डन उत्सर्जित ऊर्जा 200 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है। ..
हल
कुल ऊर्जा लक्ष्य = 200,000 मिलियन/वाट
∴ नाभिकीय संयंत्रों से प्राप्त शक्ति = 10% × 200,000 मेगावाट
= \(\frac { 10 }{100 }\) × 200,000 × 106 वाट = 2 × 1010 वाट
∴ प्रतिवर्ष नाभिकीय संयंत्रों से प्राप्त ऊर्जा
= 2x 1010 जूल/सेकण्ड × 1 × 365 × 24 × 60 × 60 सेकण्ड
= 6.31x 1017 जूल
माना संयंत्रों में विखण्डन हेतु – किग्रा 235U की प्रतिवर्ष आवश्यकता होती है।
∵ 235 ग्राम 235U में परमाणुओं की संख्या = 6.02 × 1023
∴ 1 ग्राम 235U में परमाणुओं की संख्या = \(\frac{6.02 \times 10^{23}}{235}\)
∴ x किग्रा (= x × 1000 ग्राम) यूरेनियम में परमाणुओं की संख्य = \(\frac{6.02 \times 10^{23} \times x \times 10^{3}}{235}\)
= 25.62 x × x 1023
235U के एक परमाणु के विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा = 200 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
∴ x किग्रा 235U के परमाणुओं के विखण्डन से प्राप्त ऊर्जा
= 25.62 x × x 1023 × 200 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 51.24 x × x 1025 मिलियन इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
= 51.24 x × x 1025 × 1.6 × 10-13 जूल
= 81.98 x × x 1012 जूल
∵ संयंत्रों की दक्षता 25% है, अत: संयंत्रों से प्राप्त उपयोगी ऊर्जा
= η x 81.98 x × x 1012
= \(\frac { 25 }{100 }\) × 81.98 x × x 1012 जूल
∴ \(\frac { 25 }{100 }\) × 81.98 x × x 1012 = 6.31 x 1017
\( x=\frac{6.31 \times 10^{17} \times 100}{25 \times 81.98 \times 10^{12}}\)
= 3.078x 104 किग्रा।

नाभिक NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar LO Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

नाभिक बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मान लीजिए हम ऐसे बहुत से पात्रों पर विचार करते हैं जिनमें प्रत्येक में प्रारम्भ में 1 वर्ष अर्द्ध-आयु वाले रेडियोऐक्टिव पदार्थ के 10000 परमाणु हैं। 1 वर्ष के पश्चात्
(a) सभी पात्रों में इस पदार्थ के 5000 परमाणु होंगे ।
(b) सभी पात्रों में इस पदार्थ के परमाणुओं की संख्या समान होगी, परन्तु यह लगभग 5000 होगी
(c) सामान्य तौर पर इन पात्रों में इस पदार्थ के परमाणुओं की संख्या समान होगी, परन्तु इनका औसत 5000 के निकट होगा
(d) किसी भी पात्र में इस पदार्थ के 5000 परमाणुओं से अधिक नहीं होंगे।
उत्तर
(c) सामान्य तौर पर इन पात्रों में इस पदार्थ के परमाणुओं की संख्या समान होगी, परन्तु इनका औसत 5000 के निकट होगा

प्रश्न 2.
किसी हाइड्रोजन परमाणु तथा m द्रव्यमान के किसी अन्य कण के मध्य गुरुत्वीय बल को न्यूटन के नियम द्वारा निरूपित किया जाएगा
\(\boldsymbol{F}=\boldsymbol{G} \frac{\boldsymbol{M} \cdot \boldsymbol{m}}{\boldsymbol{r}^{2}}\) यहाँ r किलोमीटर में है तथा
(a) M = mप्रोटॉन + mइलेक्ट्रॉन
(b) M = mप्रोटॉन + mइलेक्ट्रॉन \(-\frac{B}{c^{2}}\)(B= 18.6ev)
(c) M हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान से सम्बन्धित नहीं है
(d) M = mप्रोटॉन + mइलेक्टॉन \(-\frac{|V|}{c^{2}}\) (V = H-परमाणु में इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा का परिमाण)।
उत्तर
(b) M = mप्रोटॉन + mइलेक्ट्रॉन \(-\frac{B}{c^{2}}\)(B= 18.6ev)

प्रश्न 3.
जब किसी परमाणु के नाभिक का रेडियोऐक्टिव विघटन होता है तो परमाणु के इलेक्ट्रॉनिक ऊर्जा स्तरों में
(a) किसी भी प्रकार की रेडियोऐक्टिवता के लिए कोई परिवर्तन नहीं होता
(b) α एवं β रेडियोऐक्टिवता के लिए परिवर्तन होते हैं, परन्तु γ रेडियोऐक्टिवता के लिए कोई परिवर्तन नहीं होते .
(c) α रेडियोऐक्टिवता के लिए परिवर्तन होते हैं, परन्तु अन्य के लिए नहीं
(d) β रेडियोऐक्टिवता के लिए परिवर्तन होते हैं, परन्तु अन्य के लिए नहीं।
उत्तर
(b) α एवं β रेडियोऐक्टिवता के लिए परिवर्तन होते हैं, परन्तु γ रेडियोऐक्टिवता के लिए कोई परिवर्तन नहीं होते .

प्रश्न 4.
ट्राइटियम हाइड्रोजन का एक समस्थानिक है जिसके नाभिक टाइटॉन में दो न्यूट्रॉन और एक प्रोटॉन है। मुक्त न्यूट्रॉन \(p+\bar{e}+\bar{v}\) में विघटित हो जाते हैं। यदि ट्राइटॉन के दो न्यूट्रॉनों में किसी एक न्यूट्रॉन का विघटन होता है, तो यह He3 नाभिक में रूपान्तरित हो जाता, परन्तु ऐसा नहीं होता क्योंकि
(a) ट्राइटॉन की ऊर्जा He3 नाभिक की ऊर्जा से कम होती है
(b) β-विघटन प्रक्रिया में उत्पन्न इलेक्ट्रॉन नाभिक के भीतर नहीं रह सकता
(c) ट्राइटॉन में दोनों न्यूट्रॉन साथ-साथ विघटित होते हैं, जिसके फलस्वरूप तीन प्रोटॉनों का एक नाभिक बनता है . जो He3 नाभिक नहीं होता
(d) क्योंकि मुक्त न्यूट्रॉन बाह्म क्षोभ के कारण विघटित होते हैं और ट्राइटॉन नाभिक में मुक्त न्यूट्रॉन नहीं होते।
उत्तर
(a) ट्राइटॉन की ऊर्जा He3 नाभिक की ऊर्जा से कम होती है

प्रश्न 5.
स्थायी भारी नाभिकों में न्यूट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों से अधिक होती है। इसका कारण यह है कि
(a) न्यूट्रॉन, प्रोटॉन से अधिक भारी होते हैं।
(b) प्रोटॉनों के बीच स्थिर विद्युत बल प्रतिकर्षणात्मक होता है
(c) β विघटन द्वारा न्यूट्रॉन, प्रोटॉनों में विघटित हो जाते हैं
(d) न्यूट्रॉनों के बीच नाभिकीय बल प्रोटॉन के बीच नाभिकीय बल की अपेक्षा दुर्बल होता है।
उत्तर
(b) प्रोटॉनों के बीच स्थिर विद्युत बल प्रतिकर्षणात्मक होता है

प्रश्न 6.
किसी नाभिकीय रिऐक्टर में अवमन्दक विखण्डन प्रक्रिया में मुक्त न्यूट्रॉनों की गति को मन्द कर देते हैं। अवमन्दक के रूप में हल्के नाभिकों का प्रयोग किया जाता है। भारी नाभिक यह उद्देश्य पूरा नहीं कर सकते, क्योंकि
(a) वे टूट जाएँगे
(b) भारी नाभिकों के साथ न्यूट्रॉनों का प्रत्यास्थ संघट्ट उन्हें धीमा नहीं करेगा
(c) रिऐक्टर का नेट भार अत्यधिक हो जाएगा
(d) भारी नाभिकों वाले पदार्थ कक्ष-ताप पर द्रव अथवा गैसीय अवस्था में नहीं पाए जाते।
उत्तर
(b) भारी नाभिकों के साथ न्यूट्रॉनों का प्रत्यास्थ संघट्ट उन्हें धीमा नहीं करेगा

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नाभिक अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
\(\begin{array}{l}{3} \\ {2}\end{array} \mathbf{H} \mathbf{e}\) तथा \(\begin{array}{l}{3} \\ {1}\end{array} \mathbf{H} \mathbf{e}\) नाभिकों की द्रव्यमान संख्याएँ समान हैं। क्या इनकी बन्धन ऊर्जाएँ भी समान हैं?
उत्तर
नहीं, \(\begin{array}{l}{3} \\ {2}\end{array} \mathbf{H} \mathbf{e}\) नाभिक की बन्धन ऊर्जाएँ तुलनात्मक रूप में अधिक होंगी।

प्रश्न 2.
सक्रिय नाभिकों की संख्या में परिवर्तन के साथ विघटन की दर में परिवर्तन । दर्शाने वाला ग्राफ खींचिए।
उत्तर :
सक्रिय नाभिकों की संख्या में विघटन की \(\left(-\frac{d N}{d t}\right) \propto N\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 54

प्रश्न 3.
चित्र-13.4 में दर्शाए दो नमूनों A तथा B में किसकी औसत आयु कम
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 55
उत्तर
नमूने B के विघटन की दर अधिक है, अत: B की औसत आयु A की | तुलना में कम है।

प्रश्न 4.
निम्न में से कौन -विकिरण उत्सर्जित नहीं कर सकता और क्योंउत्तेजित नाभिक, उत्तेजित इलेक्ट्रॉन?
उत्तर
उत्तेजित इलेक्ट्रॉन γ-विकिरण उत्सर्जित नहीं कर सकता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक ऊर्जा-स्तरों का ऊर्जा परास eV कोटि का होता है जबकि γ-विकिरण की ऊर्जा MeV कोटि की होती है।

प्रश्न 5.
युग्म विलोपन में एक इलेक्ट्रॉन तथा एक पॉजिट्रॉन एक-दूसरे का अस्तित्व समाप्त कर गामा विकिरण उत्पन्न करते हैं। इसमें संवेग संरक्षण कैसे होता है?
उत्तर
युग्म विलोपन में एक इलेक्ट्रॉन तथा एक पॉजिट्रॉन एक-दूसरे का अस्तित्व समाप्त कर दो गामा फोटॉन उत्पन्न करते हैं जो संवेग संरक्षण के लिए परस्पर विपरीत दिशाओं में गति करते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
स्थायी नाभिकों में प्रोटॉनों की संख्या न्यूट्रॉनों की संख्या से कदापि अधिक नहीं हो सकती, क्यों?
उत्तर
नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों के बीच वैद्युत प्रतिकर्षण बल कार्य करता है। 10 से अधिक प्रोटॉन वाले नाभिक में यह प्रतिकर्षण बल इतना अधिक हो जाता है कि नाभिक के स्थायित्व के लिए न्यूट्रॉनों की संख्या, प्रोटॉनों की संख्या से अधिक होनी चाहिए।

प्रश्न 2.
यदि Z1 = N2 तथा Z2 = N1 हो तो किसी नाभिक को किसी दूसरे नाभिक का दर्पण समभारिक कहा जाता है।
(a) \(_{11}^{23} \mathrm{Na}\) का दर्पण समभारिक नाभिक क्या है?
(b) दो दर्पण समभारिकों में से किस नाभिक की बन्धन ऊर्जा अधिक है और क्यों? .
उत्तर
(a) \(_{11}^{23} \mathrm{Na}\) का दर्पण समभारिक नाभिक \(_{12}^{23} \mathrm{Na}\) है।
(b) यहाँ Z2 > Z1, अतः Mg नाभिक की बन्धन ऊर्जा Na नाभिक से अधिक है।

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नाभिक आंकिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसी प्राचीन इमारत के खण्डहर से प्राप्त लकड़ी के एक टुकड़े में 14C की सक्रियता इसके कार्बन अंश की 12 विघटन प्रति मिनट प्रति ग्राम पायी जाती है। किसी सजीव लकड़ी की 14C की सक्रियता 16 विघटन प्रति मिनट प्रति ग्राम होती है। कितने समय से पूर्व वह वृक्ष जिसकी लकड़ी का यह प्राप्त नमूना है, काटा गया था?
14C की अर्द्ध-आयु 5760 वर्ष है।
हल
दिया है, R= 12 विघटन प्रति मिनट प्रति ग्राम
R0 = 16 विघटन प्रति मिनट प्रति ग्राम .
अर्द्ध-आयु (T) = 5760 वर्ष ।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 13 नाभिक img 57

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MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 3 Reading

MP Board Class 11th English A Voyage Workbook Solutions Unit 3 Reading

3.1 Passages-1

See Workbook Page-119

Exercises

Read the following passages carefully and answer the question given below each passage :

A. Answer these questions :

  1. Why did the man wander all over the world?
    Man wandered all over the world in search of riches.
  2. What and where did he find what he wanted?
    He found precious stones in the backyerd of his house.
  3. What principle should one follow to maintain peace of mind? To maintain peace of mind those must be minimum distance between one another to avoid provocation and yet not so much distance as to experience a feeling a cold isolation.
  4. List the best things of life which are free.
    Beauties of nature and of the animal kingdom sunrise and sunset and some of the best things of life which are free.
  5. Give a suitable, title to the above passage.
    Life’s Glory

B. (i) Pick out the words from the passage that mean the same as :

  • unimportant vain
  • unreasonable dislikes or preferences for a person-or a group prejudice
  • rewards bounties
  • rich affluent

(ii) Fill in the blanks with suitable words :

  • For peace of mind it is necessary to be physically mentally and spiritually well tuned.
  • Petty irritations, prejudices and ideas should not’dog the mind.

Passage 2

See Workbook Page-120-121

An Answer these questions :

  1. Why did India lose her glory?
    The never-ending onslaught of invasions and infishting led India lose her glory.
  2. How has the country been transformed during the last 50 years?
    The country has been transformed from being servivors to thought leaders.
  3. What kind of growth does the author envisage for the country?
    The author envisages the balanced inclusive growth rather than a skewed development.
  4. What are our policy makers emphasizing on for economic growth?
    Our policy makes are emphasizing agriculture and rural development along side information technology and biotechnology and other high tech sectors.
  5. What is needed to sustain growth in the economy? Generating knowledge and managing it effectively is needed to sustain growth in the economy.
  6. Why does the author say “Economic development by itself means’ nothing”?
    Because more than that India needs to invest and commit to social responsibility and cultural development which will contribute to a larger picture.
  7. What is meant by “surviving community” in the passage? It means the people of India.
  8. Give a suitable title to the passage.
    India and its prospects.

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(B) Find out words or phrases in the passage which mean :

  • Development directed towards a particular group in a way that may. not be fair Skewed
  • Making use of an opportunity to get an advantage for oneself Survive
  • Start to do something new or difficult Embark
  • Provide enough of what is needed to survive or exist contribute

Passage-3

See Workbook Page-122-123

A. Give brief answers to the following questions :

  1. What should be the relationship between means and end? Means justifies the end.
  2. What is the secret of success?
    The secret of success in to pay much attention to the means as _ to the end.
  3. Who is more blessed, the giver or the receiver or both? Both are equally blessed.
  4. Why should we be thankful to God?
    Because we have been allowed to exercise our power of benevolence and mercy in the world and thus become pure and perfect.
  5. What is the ultimate result of all actions?
    Finally truth presents over falsehood and good prevails over evil.
  6. What is the ideal condition of human life?
    Doing good or being good is the ideal condition of human life.
  7. Who can serve humanity in the best possible manner? One who works is a selfless manner without notice or desire for name fame or wealth can serve humanity in the best possible manner.
  8. How would you characterize a great man if he makes ’sacrifices for his own good?
    He is a selfish and mean fellow.
  9. What is the impact of the great deeds performed by great men?
    Mankind gets benefited from it.
  10. Give a suitable title to the above passage.
    Virtue of humanity.

B. i. Make sentences with the following words in the context of their meaning in the passage :
Means, end, key, blessed, renounce Means-He has no proper means to live a happy life. End-The end of an evil way is always tragic. Key-Honesty is the key feature of his personality. Blessed-God has blessed us with all super characteristics. Renounce-We must renounce the good virtues.

ii. Locate the synonyms of the following words in the passage :
Kindnesses, untruth, accepted, recollect, recipient, incidents Benevolence, foul, adopted, Senitinze, Benefited, Events.

iii. Locate the antonyms of the followings words in the passage:
evil, failures, malevolence, locally, forget, Good, Rewards, Benevolence, universally withhold.

iv. Find the odd words in the following groups of words:

  • success, achievement, acquisition, rspkmgj turmoil
  • means, resources, income unwell
  • doing, performing, pcj vgle argle relaxing
  • own, jgcl private, personal alien.

Passage-4

See Workbook Page-124-125

A. Answer these question :

  1. How did the young girl react to the admiration of the relatives? She become even more boastful.
  2. How did the young girl’s heart differ from that of the woman?
    The young girl’s heart was pretty but not a beautiful one as that of the woman.
  3. Why did the old woman say that the young girl’s heart was pretty but not beautiful?
    The old woman said this because she had sacrificed her life for others.
  4. What did the open wounds on the old woman’s heart signify? The open wounds signified that people couldn’t give her a piece ‘ of their heart in return of her sacrifice.
  5. How did the girl make her own heart beautiful?
    She cut a piece of her heart and filled up one of the empty spaces of the old woman’s heart.

B. Give one word each for the following from the passage.

  1. The feeling of liking or loving admiring
  2. To change the shape, appearance or sound distort
  3. The act of giving up sacrifice
  4. To keep a pleasant feeling in mind for a long time memoir.
  5. Become aware of a fact or situation realize

C. Complete the following forms :

Noun Verb Adjective Adverb
Beauty beautify beautiful beautifully
Representation represent representative ……….
Strength ……… strong Strongly
Love love lovable lovingly
Realization realize realized ……….

Passage-5

See Workbook Page -126 -127

A. Answer the Questions :

1. Why does the author call India as “many countries rolled into one?”
Because it provides an infinite variety in every sphere of life.
2. What, according to the author, is the serious problem India is facing at present?
The division of people on the lines of caste and religion and popula¬tion explosion are the serious problems India is facing at present.
3. What stimulates thinkers and sociologists to write about India? The contrasts, contradictions, and ironies in Indian society stimulate them to write about India.
4. Our young men and women writers are moving to western countries because-

  • They find those countries interesting.
  • They find better prospects there.
  • They find a lot of subjects to write there.
  • They don’t want to stay in India.

5. What sort of India does the author dream of?
He dreams of a casteless secular society and adequate space for trees to flourish.
6. What made India less clean after seventies?
The implanned industrialization and continuous discharge of wastes in the rivers have made India less deam after serventies.
7. What attracted Western philosopheres to India?
The intellectual atmosphere of India had attracted philsophers to India. They came here in search of spiritual knowledged.
8. What, according to the author, is the most striking feature of India?
Its warmth and fellow feeling that people have for one another Is, the most striking feature of India.
9. Give a suitable title to the passage.
India’s Glory,

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B. Find out the words in the passage, which mean the following:

  1. Left in its original condition pristine
  2. A description that makes something larger, better, worse or more important than it really is exaggeration
  3. An aggressive and unreasonable belief that your caste or religion is better than others mind-blowing
  4. Make somebody interested and excited about something fascinate

Passage-6

See Workbook Page-128-129

A. Encircle the correct spellings of the following words :

  1. advicor, advisar, advisir, btgqcp
  2. dmpk jjw. formelly, formaly, farmally
  3. pleij, njcbec. plej, plege
  4. setilite, satelite, q rcjjgrc satilite

B. Fill in the blanks with one word each :

  1. Dr. Kalam taught Just for a year at Annamalai University.
  2. The largest gathering Dr.Kalam addressed was 50,000 students in Adichunchanagiri, Karnataka.
  3. Dr. Kalam has set out with the task of Teaching with a million students.
  4. Dr. Kalam especially interacts with students belonging to the underprivileged sections of the society.
  5. Dr. Kalam makes children pledge to achieve global peace.
  6. ‘Penguin India’ says that Dr. Kalam’s books are runaway bestsellers.
  7. Dr. Kalam wants that the textbooks should be relevant to the 21st century.
  8. Dr. Kalam sharply focuses on the utility of education and its developmental values.
  9. The translations of Dr. Kalam’s books in regional languages .have brisk sales.
  10. Dr. Kalam’s gift to Africa was a satellite, which would link 53 countries and provide distance education.

C. Find the words for the following meanings in the text :

  1. to communicate with somebody while you work interact
  2. to give attention to one particular subject focus
  3. an important moral, social or political idea target
  4. a serious promise pledge
  5. usefulness utility

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D. On the basis of your reading the passage answer the following questions :

  1. What task did Dr. Kalam take-up after his retirement as Chief Scientific Adviser to the government of India?
    Dr. Kalam took up the task of interesting with a millions of students.
  2. Students from which sections of the society does Dr. Kalam especially address?
    Dr. Kalam especially addresses the students from under priviledges sections of the society.
  3. What is the ambition towards which Dr. Kalam wants students to work?
    Dr. Kalam wants student to work towards the ambition to achieve glabol peace.
  4. Who does Dr. Kalam admire as a universal teacher?
    Dr. Kalam admires St. Augustine as a universal teacher.
  5. What is the opinion of Penguin India about Dr. Kalam’s books?
    Penguin India says that Dr. Kalam’s books are runaway bestsellers.
  6. What does Dr. Kalam expect from educationists, Principals . and teachers?
    Dr. Kalam expects from them to produce books relevant to 21st- century to reach to the poor in slums and to adopt modern technology to teach children
  7. What was the purpose of gifting a satellite to Africa? The purpose was to link 53 countries and provide distance education.
  8. Give a suitable title to the passage.
    Dr. Kalam : A visionary Man.

Passage-7

See Workbook Page-131-132

A. On the basis of your reading the passage answer the following:

  1. Which is the most important aspect of our constitution? Secularism is the most important aspect of our constitution.
  2. What, according to the author, is secularism?
    Secularism, as per the author is the belief that one’s religion should not intrude in matters which are public or political unit.
  3. How is equality spelt out in our constitution?
    In our country everyone enjoys the same equal constitutional right and privilege despite any difference of class, caste, religion or anything else.
  4. How can we achieve the objective of a secular state?
    We ought to have secular spirit and secular outlook in order to promote secularism
  5. What, according to the author, is true religion?
    True religion is that when you are dealing with public affairs with civic matters and with questions of policy, your approach should be as an Indian and not as a member of a particular community.
  6. Why did the author’s friend say “there were so few Indians in this country?
    Because he was too harsh in his criticism.

B. Look for words or phrases in the test which are similar in meaning to the expressions given below :

  1. an area of a city where many people of the same race or religion liVe, separately from the rest of the population ghettos
  2. not connected with spiritual or religious matters secular
  3. connected with the people living in towns or cities intimate
  4. without considering some or being influenced by it irrespective.

Passage-8

See Workbook Fase-133-134

A. On the basis of your reading the passage, answer the following questions:

  1. What did the man, carrying the cattle, expect to get by sacrificing the cattle?
    The man would be blessed with a sqn by sacrificing the cattle.
  2. Who was the man to question the man,taking the cattle to sacrifice?
    Swami Dayanand was the man to question the man taking the cattle to sacrifice.
  3. What did Swami Dayanand begin after acquiring the knowledge contained in the Vedas?
    Swarjti Dayanand began his erusade against-those who were fooling the illiterate masses in the name of religion, What was the orthodox view regarding the study of the Vedas ’ before Swami
  4. Dayanand discovered the knowledge of Vedas? The orthodox view was that the study of the vedas by women and the debts was not allowed.
  5. What was the condition of women before Swami Dayanad revealed the true knowledge of the Vedas?
    The condition of women was deplorable. They were not given any right to education or public life.

B. Given below are the meanings of some words in the text. Find those words.

  1. to forbid or prevent prohibit.
  2. in the way of a straight line passing through a circle diamerically.
  3. exceeding bad deplorable.
  4. fundamental truth or personal code of conduct Scriptures
  5. to go beyond the range of human experience transcend
  6. lofty or noble tutelage
  7. following the tradition in the matters of life, religion and morals crusade.
  8. religious songs in praise of God hymns.

C. Say whether the following statements are true or false :

  1. Dayanand Saraswati invented the Vedas. false
  2. The guru of the man, carrying the cattle, was a scholar of
    the Vedas. false
  3. Dayanand Saraswati taught Vedas to Swami Virjanand. false
  4. The Vedas prohibit their study to women and dalits. false
  5. The Vedas permit equal status to all irrespective of caste, faith or geography. True

Passage-9

See Workbook Page-135-136

A. On the basis of your reading the passage, answer the following questions :

  1. When were the first modern Olympic Games held.?
    The first modern Olympic games were held 15,000 years ago.
  2. Who pioneered the idea of modem Olympic Games?
    Baron Pierrede coubertin pioneered the idea of modern Olympic Games.
  3. Who was persuaded to fund first modem Olympic Games? George Averoff a wealthy Greek philanthropist was persuaded to fund it.
  4. Which stadium was repaired to host the first Onympic Games? What was its capacity?
    The Pan-Athenaic stadium of Herodis was repaired to host the first Olympic games. Its capacity was 70,000 spectators.
  5. When did Greece become independent from Turkey? Greece become independent from Tukey on April 16, 1822.
  6. How many nations particpated in the first modern Olympic Games?
    13 nations particpated in the first modern Olympic games.
  7. Where and when was a congress of nations convened to organize the first modern Olympics?
    A congress of nations was convened in 1894 at sorbanne is paris to organize the first modern Olympics.
  8. Why did the first modern Olympic Games have periods of sheer farce.?
    Because theme was no considesable achievenment now were the participants well equipped.

B. Look for the words or phrases in the text, similar in meaning to the expressions given below :

  1. an event so badly organized that it becomes ridiculous force
  2. the fact of being more interested in money than in the quality of things dapper
  3. a person who takes part in sports or other activities for enjoyment, not as a job or career amateur
  4. a date that is exact number of years after the date of an important event anniversary

Match the words in column A with their meanings in column B as used in the text.

Column A – Column B

  1. epic – (a) currency of Greece
  2. commemorative – (b) a Sunday in March/April when Christians remember the death of Christ and his return to life.
  3. track – (c) honouring an important person or remembering an event in the past
  4. Drachmas – (d) very great and impressive
  5. Easter – (e) a piece of ground with a special surface for running.
  6. Philanthropist – (f) a rich person who helps’ by donating money.

Answer :
1 (c), 2. (d), 3. (e), 4. (a) 5. (b), 6. (f)

Passage-10

See Workbook Page-137

A. On the basis of your reading the passage answer these questions :

  1. How did Vishwanath Dutt provide for his family? Vishwanath Dutt commanded a very good practice and prodigally spent all that he earned to surround his wife and children with every kind of comfort and luxury.
  2. What qualities does the author attribute to Swami Vivekanand as a child?
    Swami Vivekanand was extremely naughty child yet very loving and devoted.
  3. Give some examples to prove that Narendranath was generous. Narendranath gave whatever he had be it a dhotitor a gold ornament-to wandering Sadhus.
  4. What was Narendranath’s favourite pastime in this childhood?
    Narendranath’s favourite pastime was to worship the clay images of Rama and Krishna, Shiva and Kali.
  5. Which God did he like in the beginning? Which God became his favourite later on and why?
    In the beginning Rama was his favourite but later he was replaced by Shiva.
  6. Which sentence in the passage proves that Narendranath believed in palmistry?
    Narendranath used to ask his friends “See this line of my palm”

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B. Find out the words in the passage which have the following meanings :

  1. extravagantly – prodigally
  2. feeling of ease – comfort
  3. of religious worship – ascetic
  4. God or Goddess – deify
  5. a thing experienced in mind and not in reality – imagination

C. Say whether the following statements are true or false :

  1. Swami Vivekanand’s father was not a rich man. – false
  2. Narendranath was headstrong in his childhood. – false
  3. He disliked sadhus. – false
  4. He was extremely generous. – true

3.2 Poems-1

Read the poems given below and answer the questions:

A. Answer these Questions

  1. What lines in the poem show the poet’s sensitiveness towards the feeling of frogs?
    The Lines are—”Be kind and tender to the frog”/”No animal will more repay”
  2. Pick four names from the poem that describe the frog and write the explanation pointing out why the poet says that we should not call the frog by these names.
    The names are “Slimy Skin”, “Polly wog”, “ugly James”, “gap a grin “, The poet says so because there names show insensitiveness and harshness.
  3. Why does the poet say that the frog will repay more than any other animal and how does he do this?
    Because he finds the frog justly sensitive.
  4. According to the poet what type of people are extremely rare? The people who keep a frog are extremely rare.
  5. What qualities of frogs are most appealing to you and why? Write at least two.
    Its colour and its jump appeal me for they are very funny but attractive.

B. Use the Following expression in sentences of your own:

  1. be kind We should be kind to all animals.
  2. tended have a tender feeling for small birds.
  3. justly sensitive He is justly sensitive to dogs.
  4. kind and fair Be kind and fair in your treatment with animals.

Poem 2

See Workbook Page-140-141

A. On the basis of your reading the poem answer these question

  1. In the first stanza of the poem there are two asides. What do they refer to?
    They refer to a garden full of flowers and a mango tree laden with richness of fruit. One dry out before they bloom while the other were eaten up by parasite long ago.
  2. The poet describes flowers is the first two stanzas. Write about the flower mentioned there in. Why does the poet refer to them as ‘crossbred sweetpeas’ and ‘grafted roses’? The flowers dry up before they bloom. They cluster together patches of colours splashed all over, They are crossbred sweetpeas and grafted roses.
  3. What does the poet say about the fruit tree?
    The bark of the mango tree is peeled. One a few remain. Sun shines through the Layers of the tree.
  4. What are the things that the poet can see from his backyard window?
    The poet can see a garden of flowers and a mango tree laden with fruits.

B. Explain the following two expressions:

  1. man made fetters on God made land fetters are men made artificial while land is god gifted man makes alterations
  2. The temptation of killing time in sight seeing.
    As nature has provided a lot of beautiful sights for us to enjoy we can’t resist our temptation for sight seeing.

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C. Note the use of words.’web’ and ‘water’ as verbs in the following lines:
‘Spider web over thorny bushes’ ‘who waters it all’
Now write sentences using following words as verbs and nouns: people, dust, stare, gutter

  1. People (V) The auditorium was peopled by men from all over the world.
    People (N) We are proud to be people of India
  2. Dust : (V) Dusting is necessary once a week.
    Dust : (N) Dust is the main course of allergy in big cities.
  3. Stare (V) Don’t stare at me like this.
    Stare (N): His stare was very ferocious.
  4. Gutter : (N) He has guttered all his old works.
    gutter : (N) most of the gutter are open in our town.

D. Write the central idea of the poem.
there the pot focuses on the ways how and what god has given to us and what do we do with them, man distorts the gifts of god, his own self. It makes the world troublesome

Poem 3

See Workbook Page-142-143

A. On the basis for your reading the poem answer the questions given below:

  1. Who is “We” referred to in the first line of the poem? “We” refer to the palanquin bearers.
  2. What is ‘palanquin’ compared to in the poem? Find at least four comparisons (Similies).
    Palanquin is compared with foam of stream, laughs from the lips of a dream a pearl on an string, brow of the tide.
  3. The poetess says ‘ in the wind of our songs’ Here ‘winds’ and ‘song’ are compared without using the word like. Find four such expressions form the poem. Other such expressions are on the foam of a stream, the lips of a dream, in the dew of our song, on the brow of the tide.
  4. Question No. 2 and 3 are based on two figures of speech Simile and Metaphor. Read the explanation for these and write two examples of each one.
    Simile: He fights like a tiger. I was hanging like a swing.
    Metaphor: He was a ball of fire with anger, our soldiers where hunger lions is the battlefield.

B. Use the following words in sentences of your own to bring out their meaning as used in the poem.
sway, skim, float, glide, hang, spring

  1. Sway—My kite swayed in the air.
  2. Skim—She skimmed in her bed.
  3. Float—My boat was floating on water.
  4. Glide—He won a medal for gliding.
  5. Hang—Don’t hang like this on this beam.
  6. Spring—The baby was springing on the bed of foam.

Poem 4

See Workbook Page-145

A. Now on the basis of your reading the poem answer the questions:

  1. What are the cloths of heaven referred to by the poet? The night and light and the half light are referred to as the cloths of heaven.
  2. What does golden and silver light refer to?
    The golden and silver light refers the bright and dim light.
  3. Why does the poet think that he is poor?
    Because he has no such cloths.
  4. Why does the poet say ‘tread softly on’.?
    Because dreams are extremely tender.
  5. What do you think are the poets dreams?
    The poets dreams are his wishes to comfort his beloved.

B. (i) Write sentences using the following words.
enwrought His clothes are enronght. with lightened pearls, enrich He was enriched by some hidden treasures, enthrall I was enthralled by my sons success, encourage Encourage your child always. engulf Our city was engulfed by a sudden flood, encircle The is always encircled by his psychophants.

(ii)find out the difference in the meaning of these pairs of words and use them in separate sentences:

  • cloths/clothes
  • breath/breathe
  • teeth/teethe

1. cloths—These cloths are sold 50 Rs per metre.
clothes—My clothes are dirty now.
2. Breath—Hold yours breath for a few seconds.
Breathe—Now breathe easy.
3. Teeth—My front teeth were damaged.
Teethe—Teethe them out.

Poem 5

See Workbook Page-146-147

A. Now on the basis of your reading the poem answer the question that follow:

  1. What ‘baby show’ is the poet referring to?
    ‘Baby show’ refers to the kittens of a cat.
  2. How is the fall to leaves described?
    Withered leaves fall one by one from the old lofty fifty tree.
  3. Write out the stages of die kitten’s movement as described by the poet. The cat crouches, stretches and paws and darts. It attacks is prey like a tiger. I work hard. It shout and stare. It is playful and enjoys all happiness.

B. (i) Explain the following expressions in your own words.

  • Tiger leap tiger leap indicates the cat’s attack on its prey like a tiger.
  • Indian conjuror It indicates the India labour
  • feats of Art variety of action.
  • standers-by one who works
  • Withered leaves the leaves that are faded anyway.

(ii) For which words does the poet use the phrases given below and why?
lofty elder, calm and frost, bright and fair.

  • lofty elder — trees,
  • calm and first — air
  • bright and fair — morning

Poem 6

See Workbook Page-148-149

A. One the basis of your reading the poem, answer the questions given below:
(a) Why does the poet call the poem ‘encroachment’?
Because sprig, twigs and eggs are spread inside his mailbox a bird has occupied it. So it is a case encroachment.
(b) Why does the bird encroach the mailbox?
Because its is not in regular case. Its is an abandoned place.
(c) Does the poet think that human beings are responsible for this encroachment? Support your answer by quoting the relevant lines from the poem.
A nos one drops or sends any message from anywhere to the poet the poet feels them responsible for this encroachment. The line is messages and letters from now where.
(i) The following words have been used as verbs by the poet. They can be used as nouns also, use them in sentences of your own as nouns.

  • nest The bird has built nest in my courtyard.
  • balance try to maintain a balance between your income and expenditure.
  • wreck This wreck did our ship to an unknown island.
  • nail His nails are very dirty.
  • head he has a head injury.
  • encounter A dreaded animal” was killed in this encounter.

(ii) Choose the words from the poem that match with the.meanings given below:
search for groping graceless incongnious.
vague Clumsy displeasure Annoyed

(iii) The poet says ‘balancing in its yellow beak’. The word yellow describes the word beak. Can you find some more phrases like this from the poem, incongnious nest, Slender sticks, heavy showers escaped prosecution, slow prosecution.

C. Read the poem and fill in the gaps to bring out the central idea of the poem.
Answer:
The poet was groping in the mailbox. He found some sprig twigs and eggs. He was annoyed at this and cleared it all. Later in the day there was a maina in the garden and the poet saw the bird trying to rebuild the nest. This conveyed’ the message that we have encroached the habital of birds leaving for them to nest except in wooden mailboxes.

MP Board Class 11th English Solutions