MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 17 गुरुभक्तः आरुणिः

MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 17 गुरुभक्तः आरुणिः (संवादः)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 17 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) आरुणेः गुरोः नाम किम्? (आरुणि के गुरु का क्या नाम था?)
उत्तर:
धौम्य आयोदः ।(धौम्य आयोद)।

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(ख) गुरुपूर्णिमायां किम् भवति? (गुरु पूर्णिमा को क्या होता है?)
उत्तर:
गुरुजनानां पूजनं सम्मानञ्च। (गुरुजनों का पूजन एवं सम्मान होता है।)

(ग) धौम्यः आरुणिं कुत्र प्रेषयति? (धौम्य ने आरुणि को कहाँ भेजा?)
उत्तर:
केदारखण्ड बधान इति। (खेत की क्यारी को बाँधने।)

(घ) आरुणिः केदारखण्डे किमकरोत? (आरुणि ने खेत के खण्ड में क्या किया?)
उत्तर:
तत्केदारखण्डे संविवेश। (तब वह खेत की क्यारी में लेट गया।)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) गुरुः आरुणिं पाञ्चाल्यं किमर्थम् प्रेषयति स्म? (गुरु ने आरुणि को पाञ्चाल किसलिए भेजा?)
उत्तर:
गुरुः आरुणिं पाञ्चाल्यं केदारखण्डे बधान इति प्रेषयति स्म। (गुरु ने आरुणि को पाञ्चाल खेत की क्यारी को बाँधने के लिए भेजा।)

(ख) गुरोः आदेशेन आरुणिः किमकरोत? (गुरु के आदेश से आरुणि ने क्या किया?)
उत्तर:
गुरोः आदेशेन आरुणिः तत्केदारखण्डे संविवेश। (गुरु के आदेश से आरुणि खेत की क्यारी में लेट गया।)

(ग) आरुणिः गुरोः शब्दं श्रुत्वा किं कृतवान्? (आरुणि गुरु के शब्दों को सुनकर क्या किया?)
उत्तर:
आरुणिः गुरोः शब्द श्रुत्वा केदारखण्डात् सहसेत्थाय ऋषि समीपं प्रत्यागच्छत् कृतवान्। (आरुणि गुरु के शब्द को सुनकर खेत की क्यारी को छोड़कर पास में आकर नमस्कार किया।)

(घ) धौम्यः शिष्याय कमाशीर्वादम् अददात्? (आचार्य धौम्य ने शिष्य को क्या आशीर्वाद दिया?)
उत्तर:
धौम्यः शिष्याय ते सर्वे वेदाः प्रतिभाष्यन्ति सर्वाणि च शास्त्राणीति आशीर्वादम् अददात्। (धौम्य ने शिष्य को सभी वेद तथा शास्त्रों के ज्ञाता होने का आशीर्वाद दिया।)

प्रश्न 3.
उचितशब्देन रिक्तस्थानानि पूरयत
(क) तस्य शिष्यः आरुणिः आसीत्।
(ख) उपाध्यायः धौम्यः शिष्यान् अपृच्छत्।
(ग) भवान् उद्दालक इति नाम्ना भविष्यति।
(घ) अहमभिवादये भवन्तम्।
(ङ) ते सर्वे वेदाः प्रतियास्यन्ति।

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प्रश्न 4.
शुद्धकथनानां समक्षम् “आम्” अशुद्धकथनानां समक्षं “न” इति लिखत
(क) आरुणिः महान् पितृभक्तः आसीत्।
(ख) धौम्यः आरुणिम् आह्वनाय शब्दं चकार।
(ग) आरुणिः गुरोः आज्ञया केदारखण्डम् प्रति गतवान्।
(घ) आरुणिः उद्दालक नाम्ना प्रसिद्धः।
उत्तर:
(क) न
(ख) आम्
(ग) आम्
(घ) आम्

प्रश्न 5.
निम्नलिखितैः अव्ययशब्दैः वाक्यानि रचयत्
(क) श्वः – श्वः गुरुपूर्णिमा पर्व अस्ति।
(ख) तत्र – तत्र आरुणि आसीत्।
(ग) यत्र – यत्र केदारखण्डं आसीत्।
(घ) बाढम् – उपाध्यायः बाढम् कथित्वा अगच्छत्।
(ङ) क्व – क्व आरुणि पाञ्चाल्य।

प्रश्न 6.
क्रियापदानां धातुं लकारं पुरुषं वचनं च लिखत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 17 गुरुभक्तः आरुणि img-1

प्रश्न 7.
निम्नलिखितशब्दानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धेः नाम लिखत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 17 गुरुभक्तः आरुणि img-2

प्रश्न 8.
निम्नलिखित शब्दानां धातुं प्रत्ययं च विभज्य लिखत
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 17 गुरुभक्तः आरुणि img-3

प्रश्न 9.
निम्नलिखितशब्दानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनं लिङ्गं च लिखत
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 17 गुरुभक्तः आरुणि img-4

पश्न 10.
निम्नलिखितवाक्यानि कथानुसारेण क्रमेण लिखत
(क) शयाने तस्मिन् प्रवाहं विरराम।
(ख) स तत्र संविवेश केदारखण्डे।
(ग) तदभिवादये भवन्तम्।
(घ) गुरुजनानामाज्ञा पालनीया।
(ङ) तस्य शिष्यः आमीत आरुणिरिति
उत्तर:
(ङ) तस्य शिष्यः आसीत् आरुणिरिति।
(घ) गुरुजनानामाज्ञा पालनीया।
(ख) स तत्र संविवेश केदारखण्डे।
(क) शयाने तस्मिन् प्रवाहं विरराम।
(ग) तद्भिवादये भवन्तम्।

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गुरुभक्तः आरुणिः पाठ-सन्दर्भ/प्रतिपाद्य

‘श्रद्धागन को ही ज्ञान लाभ होता है’ इस कथन के अनुसार श्रद्धालु शिष्य ही गुरु से ज्ञान प्राप्त करते हैं। न केवल बुद्धि अपितु आसक्ति (गुरु के प्रति) भी ज्ञान प्राप्त करने हेतु आवश्यक होता है। उपनिषदों में अनेक उदाहरण श्रद्धा के महत्त्व को सिद्ध करते हैं। आरुणि का चरित्र भी गुरु-भक्ति का एक उदाहरण है।

गुरुभक्तः आरुणिः पाठ का हिन्दी अर्थ

1. शिक्षक-(छात्रान प्रति) श्वः किम् पर्व अस्ति?
रुचिरा-महोदय! श्वः गुरुपूर्णिमा-पर्व अस्ति।
प्रसून-गुरुपूर्णिमा पर्वणि किम् भवति?

शिक्षक :
अस्मिन् पर्वणि गुरुजनानां पूजनं सम्मानञ्च भवति। लोके आरुणिः, एकलव्यः, उपमन्युः इत्यादयः गुरुभक्तिं कृत्वा प्रसिद्धिं गताः।

अक्षत :
गुरुवर्य! आरुणिः कः आसीत?

शिक्षक :
शोभनम्, शृणोतु! आसीत् कश्चिद् ऋषिः धाम्यो नाम आयोदः। तस्य शिष्यः आसीत् आरुणिरिति।

प्रज्ञा :
तेन गुरोः कीदृशी सेवा कृता?

शिक्षक :
शृणोतु, ऋषि धौम्यः आरुणिं पाञ्चाल्यं प्रेषयति स्म-गच्छ, केदारखण्डं बधान इति। उपाध्यायेन आदिष्टः आरुणिः तत्र गतवान् परञ्च केदारखण्डं बर्बु नाशक्नोत्। मयङ्क-तदनन्तरं स किमकरोत्?

शब्दार्थः :
श्वः-कल (आने वाला)-tomorrow; भवति-होता है-happens; अस्मिन्-हमारे-our; सम्मानञ्च-सम्मान-Honour; शोभनम्-सुन्दर-beautiful; शृणोतु-सुनाए-to listen;कीदृशी-किस तरह-How;कृता-किया-did;धाम्मो-भेजा-to sent; केदारखण्ड वधान-आचार्य धौम्य-Acharaya Dhoumya. उपाध्यायेन-शिक्षक के द्वारा-By teacher; नाशक्नोत्-असमर्थ-not capable.

हिन्दी अर्थ :
शिक्षक :
(छात्रों से) आज कौन-सा पर्व है? रुचिरा-महोदय! आज गुरु पूर्णिमा का पर्व है। प्रसून-गुरु पूर्णिमा का पर्व क्या होता है?

शिक्षक :
इस पर्व के दिन गुरु जनों का पूजन एवं सम्मान किया जाता है। संसार में आरुणि एकलव्य उपमन्यु इत्यादि गुरु-भक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं।

अक्षत :
गुरुवर! आरुणि कौन थे?

शिक्षक :
बहुत सुंदर, सुनो! कोई धौम्य आयादि नामक ऋषि थे। उन्हीं के शिष्य का नाम आरुणि था।

प्रज्ञा :
उन्होंने गुरु की किस प्रकार सेवा की?

शिक्षक :
सुनो, ऋषि धौम्य आरुणि पाञ्चाल को कहा-जाओ, खेत की मेड़ को बांधो। गुरु के इस तरह के ओदश को सुनकर आरूणि वहाँ गया किन्तु खेत के उस मेड़ को बाँधने में असमर्थ हो गया।

मयंक :
तब उसने क्या किया?

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2. शिक्षक-कष्टमनुभवन् स अचिन्तयदुपायम्-भवतु एवमहं करिष्यामीति। इति विचिन्त्य स तत्केदारखण्डे संविवेश। शयाने तस्मिन् तदुदकप्रवाहं विरराम। ततः परम्। बहुकालानन्तरमुपाध्यायः आयोदो धौम्यः शिष्यानपृच्छत्-“क्व आरुणिः पाञ्चाल्य गत इति।” ते प्रत्यवदन् भगवतैव प्रेषितः। बहुकालगतेऽपि स न प्रत्यागतः।

अक्षत :
तदा धौम्यः आरुणेः अन्वेषणाय प्रयत्नं न कृतवान् किम्?

शिक्षक :
अवश्यमेव, यदा आरुणिः न प्रत्यागच्छत् तदा चिन्तितः सशिष्यैः ऋषिः तत्र गतवान् यत्र स आरुणिः गतः। तत्र तमाह्वनाय उच्चैः शब्दं चकार-भो आरुणि! क्वासि वत्स? क्वासि? एतच्छ्रुत्वा स तस्मात् केदारखण्डात् सहसोत्थाय ऋषिसमीप प्रत्यागच्छत्। प्रत्यवदच्चैनम् अयमस्मि अत्र केदारखण्डे, अहं निस्सरदकमवारणीयं संरोद्धं संविष्टः। भवच्छब्दं श्रुत्वा केदारखण्ड विदार्य समुपस्थितः। तदभिवादये भवन्तम्। आज्ञापयतु भवान् किमिदानीं करवाणीति।

रुचिरा :
स गुरुणां पुरस्कृतः किम्?

शिक्षक :
शृणोतु! तमुपाध्यायोऽब्रबीत्-“यं केदारखण्डमवदार्य त्वमुपस्थितः, तस्मात् त्वमुद्दालक इति नाम्ना भविष्यतीति।” यस्मात् त्वया मद्वचनं अनुष्ठितं तस्मात् श्रेयोऽवाप्स्यसीति! ते सर्वे वेदाः प्रतिभवन्ति, सर्वाणि च शास्त्राणीति । अनेन स गुरुभक्तः आरुणिः उद्दालक नाम्ना प्रसिद्धो विद्वान शास्त्रज्ञो यशस्वी दीर्घायुश्चाजायतः।

प्रसून :
आस्मभिरपि गुरुजनानामाज्ञा पालनीया। शिक्षक-आम्, अवश्यमेव।

शब्दार्थः :
संविवेश-लेट गया-laid; क्लिश्यमानः-दुखीः होते हुए-being distressed; प्रेषितः-भेज दिया गया-has been sent; प्रत्युवाच-उत्तर भेजा-replied; उत्थाय उठकर-raising; प्रत्यागच्छत्-पास लौट आया-came near; उकम्-पानी को-water; संरोद्धम्-रोकने के लिए-for stop; संविष्टः-लेट गया-laid down; विदार्य-तोड़करbreaking; समुपस्थितः-पहुँचा हूँ-reached; आज्ञापयतु-आज्ञा दीजिए-grant me permission; अनुगृहीत-कृपा किया गया-was blessed; अनुष्ठितम्-किया गया-was done;अवाप्स्यसि-प्राप्त करोगे-will get;प्रतिभास्यन्ति -ज्ञात हो जाएँगे-will be known.

हिन्दी अर्थ :
शिक्षक :
कष्ट का अनुभव करते हुए उसने एक उपाय सोचा-ठीक है, इस तरह ही मैं करूँगा-ऐसा सोच वह स्वयं उस खेत की मेड़ पर लेट गया। उसके लेटने से पानी का वह प्रवाह रुक गया। कुछ समय बीतने पर आचार्य आयोद धौम्य के शिष्यों से पूछा-आरुणि पाञ्चाल कहाँ गया है? वे बोले-आपने ही उसे भेजा है। बहुत समय व्यतीत हो जाने पर भी अभी तक नहीं लौटा है।

अक्षत :
तब धौम्य ने आरुणि को खोजने के लिए प्रयत्न नहीं किया?

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शिक्षक :
अवश्य किया। जब आरुणि नहीं लौटा तब चिंतित ऋषि शिष्यों सहित गए जहां आरुणि को भेजा था। वहाँ उन्होंने आरुणि का नाम लेकर जोर-जोर से पुकारा-हे आरुणि! तुम कहाँ हो, कहाँ हो। अपने को पुकारता सुन वह मेड़ से उठ गुरु के समीप आ गया और बोला-मैं यहाँ हूँ। यहाँ खेत की मेड़ से बहते हुए पानी को रोकने के लिए मैं यहाँ लेट गया था। आपके शब्दों को सुनकर खेत की मेड़ को छोड़कर यहाँ उपस्थित हुआ हूँ। हे श्रीमान! मैं आपका अभिवादन करता हूँ। आप आज्ञा दें-अब मैं क्या करूँ।

रुचिरा :
उसे गुरु ने क्या पुरस्कार दिया?

शिक्षक ;
सुनो, आचार्य उससे बोले-जिस तरह खेत के इस खण्ड को तोड़ कर तुम उपस्थित हुए, इससे तुम्हारा नाम उद्दालक होगा और जिस तरह तुमने मेरे वचन का ज्ञान होगा। बाद में, वही गुरु भक्त आरुणि उद्दालक के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वह विद्वान शास्त्रों का ज्ञाता एवं यशस्वी व दीर्घायु हुआ।

प्रसून :
हमें भी गुरु की आज्ञा का पालन करना चाहिए।

शिक्षक :
हाँ, अवश्य ही।

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.2

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.2

प्रश्न 1.
दी गई भिन्न संख्याओं को प्रतिशत में बदलो :
(a) \(\frac { 1 }{ 8 } \)
(b) \(\frac { 5 }{ 4 } \)
(c) \(\frac { 3 }{ 40 } \)
(d) \(\frac { 2 }{ 7 } \)
हल:
(a) \(\frac { 1 }{ 8 } \) = \(\frac { 1 }{ 8 } \) × \(\frac { 100 }{ 100 } \) = \(\frac { 100 }{ 8 } \) % = \(\frac { 25 }{ 2 } \) % = 12.5%

(b) \(\frac { 5 }{ 4 } \) = \(\frac { 5 }{ 4 } \) × \(\frac { 100 }{ 100 } \) = \(\frac{5 \times 100}{4}\)% = 125%

(c) \(\frac { 3 }{ 40 } \) = \(\frac { 3 }{ 40 } \) × \(\frac { 100 }{ 100 } \) = \(\frac{3 \times 100}{40}\)% = 7.5%

(d) \(\frac { 2 }{ 7 } \) = \(\frac { 2 }{ 7 } \) × \(\frac { 100 }{ 100 } \) = \(\frac { 200 }{ 7 } \)% = 28\(\frac { 4 }{ 7 } \)%

प्रश्न 2.
दी गई दशमलव भिन्नों को प्रतिशत में बदलो:
(a) 0.65
(b) 2.1
(c) 0.02
(d) 12.35
हल:
(a) 0.65 = \(\frac { 65 }{ 100 } \) = \(\frac { 65 }{ 100 } \) × 100% = 65%
(b) 2.1 = \(\frac { 21 }{ 10 } \) = \(\frac { 21 }{ 10 } \) × 100% = 210%
(c) 0.02 = \(\frac { 2 }{ 100 } \) = \(\frac { 2 }{ 100 } \) × 100% = 2%
(d) 12.35 = \(\frac { 1235 }{ 100 } \) = \(\frac { 1235 }{ 100 } \) × 100% = 1235%

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प्रश्न 3.
अनुमान लगाइए कि आकृति का कितना भाग रंग दिया गया है और इस प्रकार ज्ञात कीजिए कि कितने प्रतिशत रंगीन है।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.1 image 1
हल:
(i) ∵ रंगीन भाग = \(\frac { 1 }{ 4 } \)
∴ रंगे भाग का प्रतिशत = \(\frac { 1 }{ 4 } \) × 100% = 25%
अतः रंगीन भाग 25% है।

(ii) ∵ रंगीन भाग = \(\frac { 3 }{ 5 } \)
∴ रंगे भाग का प्रतिशत = \(\frac { 3 }{ 5 } \) × 100% = 60%
अतः रंगीन भाग 60% है।

(iii) यहाँ 8 में से 3 भाग रंगीन हैं।
∴ रंगीन भाग = \(\frac { 3 }{ 8 } \)
∴ रंगे भाग का प्रतिशत = \(\frac { 3 }{ 8 } \) × 100% = \(\frac { 75 }{ 2 } \) %
= 37.5%
अत: रंगीन भाग 37.5% है।

प्रश्न 4.
ज्ञात कीजिए:
(a) 250 का 15%
(b) 1 घण्टे का 1%
(c) 2500 का 20%
(d) 1 किग्रा का 75%
हल:
(a) 250 का 15% = \(\frac { 15 }{ 100 } \) × 250
= \(\frac { 75 }{ 2 } \) = 37.5%

(b) 1 घण्टे का 1% = \(\frac { 1 }{ 100 } \) × 1 घण्टे
= \(\frac { 1 }{ 100 } \) × 60 मिनट
= \(\frac { 3 }{ 5 } \) मिनट
= \(\frac { 3 }{ 5 } \) × 60 सेकण्ड
= 36 सेकण्ड

(c) 2500 का 20% = \(\frac { 20 }{ 100 } \) × 2500 = 500

(d) 1 किग्रा का 75% = \(\frac { 75 }{ 100 } \) × 1 किग्रा
= 0.75 किग्रा
= 0.75 × 1000 ग्राम = 750 ग्राम

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प्रश्न 5.
सम्पूर्ण राशि ज्ञात कीजिए, यदि
(a) इसका 5%, 600 है।
(b) इसका 12%, 1080 है।
(c) इसका 40%,500 km है।
(d) इसका 70%, 14 मिनट है।
(e) इसका 8%, 40 लीटर है।
हल:
(a) माना कि सम्पूर्ण राशि x है।
∴ x का 5% = 600
या \(\frac { 5 }{ 100 } \) × x = 600
या x = \(\frac{600 \times 100}{5}\) = 12000
अत: अभीष्ट राशि 12000 है।

(b) मानाकि सम्पूर्ण राशि x है।
∴ x का 12% = 1080
या \(\frac { 12 }{ 100 } \) × x = 1080
या x = \(\frac{1080 \times 100}{12}\) = 9000
अतः अभीष्ट राशि 9000 है।

(c) मानाकि सम्पूर्ण राशि x है।
∴ x का 40% = 500 km
या \(\frac { 40 }{ 100 } \) × x = 500 km
या x = \(\frac{500 \times 100}{40}\) km = 1250 km
अतः अभीष्ट राशि 1250 km है।

(d) मानाकि सम्पूर्ण राशि x है।
∴ x का 70% = 14 मिनट या \(\frac { 70 }{ 100 } \) × x = 14 मिनट
या x = \(\frac{14 \times 100}{70}\) मिनट = 20 मिनट
अतः अभीष्ट राशि 20 मिनट है।

(e) मानाकि सम्पूर्ण राशि x है।
∴ x का 8% = 40 लीटर
या \(\frac { 8 }{ 100 } \) × x = 40 लीटर
या x = \(\frac{40 \times 100}{8}\) लीटर = 500 लीटर
अतः अभीष्ट राशि 500 लीटर है।

प्रश्न 6.
दिए गए प्रतिशतों को साधारण व दशमलव भिन्नों में बदलो और अपने उत्तर को सरलतम रूप में लिखो :
(a) 25%
(b) 150%
(c) 20%
(d) 5%
हल:
(a) साधारण भिन्न – 25% = \(\frac { 25 }{ 100 } \) = \(\frac { 1 }{ 4 } \)
दशमलव भिन्न = \(\frac { 1 }{ 4 } \) = 0.25

(b) साधारण भिन्न – 150% = \(\frac { 150% }{ 100 } \) = \(\frac { 3 }{ 2 } \)
दशमलव भिन्न – \(\frac { 3 }{ 2 } \) = 1.5

(c) साधारण भिन्न – 20% = \(\frac { 20 }{ 100 } \) = \(\frac { 1 }{ 5 } \)
दशमलव भिन्न- \(\frac { 1 }{ 5 } \) = 0.20

(d) साधारण भिन्न – 5% = \(\frac { 5 }{ 100 } \) = \(\frac { 1 }{ 20 } \)
दशमलव भिन्न – \(\frac { 1 }{ 20 } \) = 0.05

प्रश्न 7.
एक नगर में 30% महिलाएं, 40% पुरुष तथा शेष बच्चे हैं। बच्चों का प्रतिशत कितना है ?
हल:
∴ महिलाएँ = 30% तथा पुरुष = 40%
∴ बच्चों का प्रतिशत = 100% – (30% + 40%)
= 100% – 70% = 30%

प्रश्न 8.
किसी क्षेत्र के 15,000 मतदाताओं में से 60% ने मतदान में भाग लिया। ज्ञात कीजिए कि कितने प्रतिशत ने मतदान में भाग नहीं लिया। क्या अब ज्ञात कर सकते हैं कि वास्तव में कितने मतदाताओं ने मतदान नहीं किया ?
हल:
कुल मतदाता = 15,000
मतदान करने वाले मतदाताओं का प्रतिशत = 60%
∴ मतदान न करने वाले मतदाताओं का प्रतिशत
= 100% – 60% = 40%
मतदान न करने वाले मतदाताओं की संख्या
= 15000 का 40%
= \(\frac { 40 }{ 100 } \) × 15000 = 6000
अत: 6000 मतदाताओं ने मतदान नहीं किया।

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प्रश्न 9.
मीता अपने वेतन में से ₹ 4000 बचाती है। यदि यह उसके वेतन का 10% है, तब उसका वेतन कितना है ?
हल:
माना कि उसका वेतन ₹ है।
उसकी बचत = वेतन का 10%
∴ x का 10% = ₹4000
या \(\frac { 10 }{ 100 } \) × x = ₹4000
या x = ₹ \(\frac{4000 \times 100}{10}\) = ₹40000
अत: उसका वेतन ₹40000 है।

प्रश्न 10.
एक स्थानीय क्रिकेट टीम ने, एक सत्र (Season) में 20 मैच खेले। इनमें से उस टीम ने 25% मैच जीते। जीते गए मैचों की संख्या कितनी थी ?
हल:
कुल खेले गये मैचों की संख्या = 20
टीम द्वारा जीते गए मैच = 25%
∴ जीते गए मैचों की संख्या = 20 का 25%
= \(\frac { 25 }{ 100 } \) × 20 = 5
अत: टीम ने 5 मैच जीते।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 179

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
15 मिठाइयों को मनु तथा सोनू में इस प्रकार बाँटिए कि उन्हें कुल का क्रमशः 20% तथा 80% मिले।
हल:
कुल मिठाइयों की संख्या = 15
मनु का हिस्सा = 15 का 20%
= \(\frac { 20 }{ 100 } \) × 15
= 3 मिठाइयाँ
सोनू का हिस्सा = 15 का 80%
= \(\frac { 80 }{ 100 } \) × 15
= 12 मिठाइयाँ

प्रश्न 2.
यदि किसी त्रिभुज के कोणों में अनुपात 2:3:4 है तब उसके प्रत्येक कोण की माप क्या होगी?
हल:
∵ त्रिभुज के तीनों अन्त:कोणों का योग = 180°
त्रिभुज के कोणों का अनुपात = 2:3:4
अनुपात का योग = 2 + 3 + 4 = 9
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अतः अभीष्ट कोण 40°, 60° और 80° हैं।

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 180

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
बढ़ने या घटने का प्रतिशत ज्ञात कीजिए :
(i) कमीज का मूल्य ₹ 80 से घटकर 60 हो गया।
(ii) किसी परीक्षा में प्राप्तांक बढ़कर 20 से 30 हो गए।
हल:
(i) कमीज का वास्तविक मूल्य = ₹ 80
कमीज का नया मूल्य = ₹60
कमीज के मूल्य में कमी = ₹80 – ₹60 = ₹20
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(ii) मूल प्राप्तांक = 20
नये प्राप्तांक = 30
प्राप्तांक में वृद्धि = 30 – 20 = 10
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प्रश्न 2.
मेरी माताजी कहती हैं कि उनके बचपन, के समय पैट्रोल की दर ₹ 1 प्रति लीटर थी और आजकल यह ₹52 प्रति लीटर है। पैट्रोल की दर में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई ?
हल:
पैट्रोल का पहले का मूल्य = ₹ 1 प्रति लीटर
पैट्रोल का नया मूल्य = ₹52 प्रति लीटर
पैट्रोल के मूल्य में वृद्धि =₹52 – ₹ 1 = ₹51
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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 183

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
एक दुकानदार ने एक कुर्सी ₹ 375 में खरीदी तथा ₹ 400 में बेच दी। उसका लाभ प्रतिशत ज्ञात कीजिए।
हल:
कुर्सी का क्रय मूल्य = ₹ 375
कुर्सी का विक्रय मूल्य = ₹ 400
∴ विक्रय मूल्य > क्रय मूल्य
∴ लाभ = ₹400 – ₹375 = ₹25
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प्रश्न 2.
एक वस्तु ₹50 में क्रय की गई तथा 12 प्रतिशत लाभ पर बेच दी गई। उसका विक्रय मूल्य ज्ञात कीजिए।
हल:
वस्तु का क्रय मूल्य = ₹50, लाभ = 12%
∴ ₹50 पर लाभ = ₹50 का 12%
= \(\frac { 12 }{ 100 } \) × ₹50 = ₹6
अत: वस्तु का विक्रय मूल्य = ₹50 + ₹6 = ₹56

प्रश्न 3.
एक वस्तु ₹ 250 में बेचने पर 5 प्रतिशत लाभ प्राप्त हुआ। उसका क्रय मूल्य क्या था?
हल:
वस्तु का विक्रय मूल्य = ₹250, लाभ = 5%
माना कि क्रय मूल्य x रूपया है।
लाभ = x का 5%
= \(\frac { 5 }{ 100 } \) × x = ₹ \(\frac { x }{ 20 } \)
∴ विक्रय मूल्य = क्रय मूल्य + लाभ
∴ ₹ 250 = ₹x + ₹\(\frac { x }{ 20 } \)
या ₹250 = ₹ \(\frac { 21x }{ 20 } \)
या x = ₹ \(\frac{250 \times 20}{21}\) = ₹ 238 \(\frac { 2 }{ 21 } \)
अत: वस्तु का क्रय मूल्य = ₹ 238 \(\frac { 2 }{ 21 } \)

प्रश्न 4.
एक वस्तु 5 प्रतिशत हानि उठाकर ₹ 540 में बेची गई। उसका क्रय मूल्य क्या था ?
हल:
वस्तु का विक्रय मूल्य = ₹ 540, हानि = 5%
माना कि वस्तु का क्रय मूल्य = ₹ x
हानि = ₹ x का 5% = \(\frac { 5 }{ 100 } \) × x = ₹ \(\frac { x }{ 20 } \)
∴ विक्रय मूल्य = क्रय मूल्य – हानि
∴ ₹540 = ₹x – ₹\(\frac { x }{ 20 } \) = ₹ \(\frac { 19 }{ 20 } \)x
या x = ₹ \(\frac{540 \times 20}{19}\) = ₹ 568 \(\frac { 8 }{ 19 } \)
अत: वस्तु का क्रय मूल्य = 568 \(\frac { 8 }{ 19 } \)

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 185

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
₹ 10000, 5 प्रतिशत वार्षिक दर से जमा किए जाते हैं। एक वर्ष बाद कितना ब्याज प्राप्त होगा?
हल:
मूलधन (P) = ₹10000, दर R = 5%,
समय (T) = 1 वर्ष
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.1 image 7

प्रश्न 2.
₹ 3500, 7 प्रतिशत वार्षिक दर से उधार दिए जाते हैं। दो वर्ष बाद कितना साधारण ब्याज देय होगा?
हल:
मूलधन (P) = ₹ 3500, दर (R) = 7%, समय (T) = 2 वर्ष
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.1 image 8

प्रश्न 3.
₹ 6,050, 6.5 प्रतिशत वार्षिक दर से उधार लिए जाते हैं। 3 वर्ष बाद कितना ब्याज तथा कितना मिश्रधन देय होगा?
हल:
मूलधन (P) = ₹ 6050, दर (R) = 6.5%, समय (T) = 3 वर्ष
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.1 image 9
∴ मिश्रधन = मूलधन + ब्याज
∴ मिश्रधन = ₹6050 + ₹ 1179.75
= ₹7229.75

प्रश्न 4.
₹ 7000, 3.5 प्रतिशत वार्षिक दर से दो वर्ष के लिए उधार लिए जाते हैं। दो वर्ष बाद कितना मिश्रधन देय होगा?
हल:
मूलधन (P) = ₹ 7000, दर (R) = 3.5%, समय (T) = 2 वर्ष
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.1 image 10
∴ मिश्रधन = मूलधन + ब्याज
∴ मिश्रधन = ₹7,000 + ₹490
= ₹7,490

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 186

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
आपके बैंक खाते में ₹ 2,400 जमा हैं तथा ब्याज की दर 5 प्रतिशत वार्षिक है। कितने वर्षों बाद ब्याज की राशि ₹ 240 होगी?
हल:
यहाँ, मूलधन (P) = ₹ 2,400, दर (R) = 5%, ब्याज (S.I.) = ₹240, समय (T) = ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.1 image 11

प्रश्न 2.
किसी धन का 5 प्रतिशत वार्षिक दर से 3 वर्ष का ब्याज ₹ 450 होता है। वह धन ज्ञात कीजिए।
हल:
यहाँ, दर (R) = 5%, समय (T) = 3 वर्ष, साधारण ब्याज (S.I.) = ₹ 450, मूलधन (P) = ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 8 राशियों की तुलना Ex 8.1 image 12

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MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 5 हमारे राष्ट्रीय लक्ष्य (अ) राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति (ब) लोकतन्त्र एवं नागरिक

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 5 हमारे राष्ट्रीय लक्ष्य (अ) राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति (ब) लोकतन्त्र एवं नागरिक

MP Board Class 8th Social Science Chapter 5 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है –
(क) लोकतन्त्र
(ख) राजतन्त्र
(ग) साम्राज्यवाद
(घ) तानाशाही
उत्तर:
(क) लोकतन्त्र

(2) “हम विश्व में सर्वत्र शान्ति चाहते हैं” किसने कहा था?
(क) सरदार वल्लभ भाई पटेल
(ख) पंडित जवाहर लाल नेहरू
(ग) लाल बहादुर शास्त्री
(घ) महात्मा गाँधी
उत्तर:
(ख) पंडित जवाहरलाल नेहरू

(3) निशस्त्रीकरण क्यों आवश्यक है?
(क) विश्व शान्ति की स्थापना के लिए
(ख) युद्ध के लिए
(ग) सरकार बनाने के लिए
(घ) परमाणु शस्त्रों के लिए
उत्तर:
(क) विश्व शान्ति की स्थापना के लिए

(4) जाति व धर्म के आधार पर मतदान लोकतन्त्र को –
(क) शक्तिशाली बनाता है
(ख) कमजोर बनाता है,
(ग) हमारे अधिकार सुरक्षित करता है
(घ) उपर्युक्त तीनों
उत्तर:
(ख) कमजोर बनाता है

(5) वयस्क मताधिकार के लिए आयु निर्धारित है –
(क) 14 वर्ष
(ख) 18 वर्ष
(ग) 21 वर्ष
(घ) 25 वर्ष
उत्तर:
(ख) 18 वर्ष

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) संविधान में कुल ……….. मौलिक अधिकारों की व्यवस्था की गई है।
(2) लोकतन्त्र ……… का शासन होता है।
(3) पंथ निरपेक्षता में ……….. की स्वतन्त्रता रहती है।
(4) गुट निरपेक्षता का अर्थ है सैनिक संगठनों से ………. रहना।
(5) लोकतन्त्र का मुख्य तत्व …………. समानता और है।
उत्तर:
(1) 6
(2) जनता
(3) अपने पंथ और उपासना
(4) अलग
(5) स्वतन्त्रता, बन्धुत्व

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) स्वतन्त्रता के प्रकार बताइए।
उत्तर:
व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, नागरिक स्वतन्त्रता, राजनीतिक स्वतन्त्रता, आर्थिक एवं सामाजिक स्वतन्त्रता और धार्मिक स्वतन्त्रता आदि स्वतन्त्रता के प्रकार हैं।

(2) समानता का अर्थ लिखिए।
उत्तर:
नागरिकों के सम्पूर्ण विकास के लिए राज्य द्वारा समान अवसर उपलब्ध करवाना समानता है।

(3) अप्रत्यक्ष लोकतन्त्र किसे कहते हैं ?
उत्तर:
ऐसा लोकतन्त्र जहाँ जनता अपने प्रतिनिधि निर्वाचित करके भेजती है, उसे अप्रत्यक्ष लोकतन्त्र कहते हैं। भारत में अप्रत्यक्ष लोकतन्त्र है।

(4) लोकतन्त्र में प्रत्येक नागरिक को साक्षर क्यों होना चाहिए?
उत्तर:
लोकतन्त्र में प्रत्येक नागरिक जागरूक और साक्षर होना चाहिए ताकि वह अपने मत का उचित प्रयोग कर सके।

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 5 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) वयस्क मताधिकार का अर्थ लिखिए
उत्तर:
जहाँ पर वयस्क व्यक्ति को मत देने का अधिकार प्राप्त हो उसे वयस्क मताधिकार कहते हैं। हमारे देश में 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर लेने वाले हर नागरिक को मत देने का अधिकार प्राप्त है। यह मताधिकार का सबसे अधिक प्रचलित सिद्धान्त है।

(2) हमारे राष्ट्रीय लक्ष्य कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
हमारा देश प्रजातान्त्रिक देश है। अतः हमारे लक्ष्य हैं-लोकतन्त्र, पंथनिरपेक्षता, राष्ट्रीय एकता, स्वतन्त्रता, समानता, । सामाजिक समरसता, अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सहयोग।

(3) न्याय का वास्तविक अर्थ लिखिए।
उत्तर:
न्याय उस सामाजिक स्थिति को कहते हैं जिसमें व्यक्ति के पारस्परिक सम्बन्धों की उचित व्यवस्था की जाती है, जिससे समाज में व्यक्ति के अधिकार सुरक्षित रहें। न्याय की धारणा सत्य और नैतिकता के रूप में भी समझी जाती है।

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 5.
(1) हमें अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सहयोगकी आवश्यकता क्यों है ?
उत्तर:
विज्ञान ने संसार को आज समेटकर रख दिया है। विश्व के किसी भी कोने में होने वाली घटना का प्रभाव आज सम्पूर्ण विश्व के लोगों पर पड़ता है। अतः हम भी केवल तभी शान्ति से रह सकेंगे जब विश्व भर में शान्ति होगी और हम अपने सम्पूर्ण संसाधनों को तभी जनता के हित एवं विकास में लगा सकेंगे जब देश में शान्ति रहने का विश्वास हो। विश्व का लगभग हर एक भाग दूसरे से भौगोलिक रूप से भिन्न है तथा उसकी अपनी विशेषताएँ हैं। अतः विश्व के प्रायः सभी देशों को अपनी आवश्यकताएँ पूरी करने के लिये किसी न किसी तरह एक-दूसरे पर निर्भर करना पड़ता है और इस प्रकार हम आपसी सहयोग द्वारा ही अपने जीवन का आनन्द उठा पाते हैं।

(2) लोकतन्त्र की सफलता के लिए आवश्यक शर्ते कौन-सी हैं ?
उत्तर:
लोकतन्त्र की सफलता निम्नलिखित बातों पर निर्भर करती है –
1. शिक्षित जनता:
लोकतन्त्र में जनसामान्य राजनीतिक प्रक्रिया में सहभागी रहता है। जब तक जनसामान्य राजनीतिक प्रश्नों को भलीभाँति नहीं समझेगा। तब तक उसकी सहभागिता न तो प्रभावशाली होगी और न अर्थपूर्ण रहेगी। इसके लिये जनता का शिक्षित होना बहुत आवश्यक है। अत: जनता का शिक्षित होना लोकतन्त्र की पहली आवश्यकता है।

2. राजनैतिक जागरूकता:
लोकतन्त्र में नागरिकों में राजनीतिक प्रश्नों और मुद्दों की जानकारी होनी चाहिए तथा उन मुद्दों पर राजनीतिक दृष्टि से विचार करने की क्षमता होनी चाहिए। नागरिकों की विवेकशीलता के अभाव में प्रजातन्त्र, भीड़तन्त्र में बदल जाता है।

3. स्वतन्त्र प्रेस:
लोकतन्त्र की सफलता के लिए स्वतन्त्र प्रेस का होना आवश्यक है। नागरिकों की स्वतन्त्रता का सरकार द्वारा अतिक्रमण न हो इसके लिये स्वतन्त्र प्रेस का होना अनिवार्य है। स्वतन्त्र प्रेस सरकार के दबाव में आये बिना जनता की माँगों को सरकार के सामने रखती है। अतः प्रेस को प्रजातन्त्र का चौथा स्तम्भ कहा गया है।

4. सामाजिक और आर्थिक समानता:
समाज में जब तक ऊँच-नीच, गरीब-अमीर और छुआछूत आदि के भेदभाव रहेंगे, लोकतन्त्र अच्छी तरह से कार्य नहीं कर सकता। इसी प्रकार, धनिकों का धन और गरीबों की गरीबी लोकतन्त्र को नष्ट कर देगी। अतः लोकतन्त्र की सफलता के लिए सामाजिक और आर्थिक समानता आवश्यक है।

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MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 13 उत्तर अमेरिका का भौगोलिक स्वरूप

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 13 उत्तर अमेरिका का भौगोलिक स्वरूप

MP Board Class 8th Social Science Chapter 13 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) किन धाराओं के मिलने से न्यूफाउन्डलैण्ड के निकट घना कोहरा छा जाता है ?
(क) गल्फस्ट्रीम और अलास्का जलधारा
(ख) गल्फस्ट्रीम और कैलीफोर्निया की धारा
(ग) गल्फस्ट्रीम और लेब्रेडोर जलधारा
(घ) लेब्रेडोर और अलास्का की जलधारा।
उत्तर:
(ग) गल्फस्ट्रीम और लेब्रेडोर जलधारा

(2) निम्न में से किस प्रकार की जलवायु प्रदेश में शीत ऋतु में वर्षा होती है ?
(क) उष्ण मरुस्थलीय जलवायु
(ख) भूमध्य सागरीय जलवायु
(ग) टुण्ड्रा जलवायु प्रदेश
(घ) भूमध्य रेखीय जलवायु प्रदेश।
उत्तर:
(ख) भूमध्य सागरीय जलवायु।

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 13 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 2.
(1) उत्तर अमेरिका का अक्षांशीय और देशान्तरीय विस्तार लिखिए।
उत्तर:
इसका अक्षांशीय विस्तार 10 डिग्री उत्तरी अक्षांश से 80 डिग्री उत्तरी अक्षांश तक तथा देशान्तरीय विस्तार 20 डिग्री पश्चिम देशान्तर से 170 डिग्री पश्चिमी देशान्तर तक है। –

(2) उत्तर अमेरिका का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर कौन-सा है ?
उत्तर:
उत्तर अमेरिका का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर माउन्ट मैकिन्ले है जो अलास्का में है।

(3) उत्तर अमेरिका की महान झीलों के नाम लिखिए।
उत्तर:
इनके नाम हैं –

  • सुपीरियर झील
  • मिशीगन झील
  • ह्यूरन झील
  • दूरी झील और
  • ओन्टेरियो झील।

(4) वे कौन-सी चार महासागरीय धाराएँ हैं, जो उत्तर अमेरिका की जलवायु को प्रभावित करती हैं।
उत्तर:

  • गल्फस्ट्रीम
  • अलास्का की गर्म धारा
  • लेब्रेडोर की ठंडी धारा व
  • कैलिफोर्निया की ठंडी धारा उत्तर अमेरिका की जलवायु को प्रभावित करती हैं।

(5) कोणधारी वनों की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
कोणधारी वनों के वृक्षों की शाखाएँ नीचे की ओर झुकी हुई होती हैं तथा इन वृक्षों की पत्तियाँ भी नुकीली होती हैं।

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 13 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) उत्तर अमेरिका के किन्हीं तीन पठारों के नाम उनकी स्थिति सहित लिखिए।
उत्तर:
कार्डिलेरा के पश्चिमी भाग में अन्तर पर्वतीय पठार ‘ग्रेट बेसिन’ का विस्तार है। पूर्वोत्तर में लेब्रेडोर का पठार तथा दक्षिण पूर्व में अप्लेशियन का पठार शामिल है।

(2) उत्तर अमेरिका की वनस्पति में विविधता के कारण लिखिए।
उत्तर:
उत्तर अमेरिका एक ऐसा महाद्वीप है जहाँ विश्व में पाई जाने वाली लगभग सभी प्रकार की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। जलवायु की विविधता तथा वर्षा के असमान वितरण के कारण वनस्पति में भी विविधता दृष्टिगोचर होती है।

(3) भूमध्य सागरीय वनस्पति की तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
यहाँ रसदार फलों के वृक्ष बहुतायत में विकसित होते हैं। वृक्षों की छाल मोटी, पत्तियाँ चिकनी व मोटी होती हैं।

(4) केनियन और कार्डिलेरा में क्या अन्तर है ?
उत्तर:
उत्तर अमेरिका के शुष्क तथा अर्द्धशुष्क प्रदेशों में पाया जाने वाला, खड़े ढालों से निर्मित अपेक्षाकृत संकीर्ण किन्तु बड़े आकार का एक गहरा गॉर्ज जिसकी तली में ऐसी नदी बहती है जो मृदु शैलों का अपरदन करती है, ‘ग्रेट केनियन’ के नाम से विख्यात है। जबकि ऐसी पर्वत श्रृंखला जिसमें अनेक पर्वत श्रेणियाँ एक-दूसरे के समान्तर दूर-दूर तक फैली हुई होती हैं। उत्तर अमेरिका में इनके सम्मिलित रूप को ‘कार्डिलेरा’ कहा जाता है।

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 13 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) उत्तर अमेरिका के भौतिक विभागों के नाम लिखते हुए प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
धरातलीय उच्चावच के आधार पर उत्तर अमेरिका को निम्न तीन प्रमुख भागों में बाँटा जा सकता है –

1. पश्चिमी पर्वतीय प्रदेश या कार्डिलेरा-पश्चिमी पर्वतीय प्रदेश को ही कार्डिलेरा कहा जाता है। कार्डिलेरा का विस्तार महाद्वीप के पश्चिमी भाग में उत्तर में अलास्का से लेकर दक्षिण में मैक्सिको तक है। कार्डिलेरा के पश्चिमी भाग में अनेक पर्वत श्रेणियाँ समानान्तर उत्तर दक्षिण फैली हुई हैं। पूर्व में रॉकी पर्वतमाला, मध्य में सियेरानिवेदा तथा पश्चिम में तटीय श्रेणी है। इन पर्वत श्रेणियों के बीच में अन्तर पर्वतीय पठार ‘ग्रेट बेसिन’ का विस्तार है।

2. पूर्वी उच्च भूमि-महाद्वीप के पूर्वी भाग में प्राचीन संरचना वाले अपरदित पठार फैले हैं। पूर्वोत्तर में लेब्रेडोर का पठार तथा दक्षिण पूर्व में अप्लेशियन का पठार सम्मिलित है। इनकी ऊँचाई 450 से 2000 मीटर तक है। ये प्राचीन खनिजों के भण्डार हैं। इनमें अनेकों खनिज बड़ी मात्रा में पाये जाते हैं।

3. मध्यवर्ती निम्न भूमि-पश्चिमी कार्डिलेरा और पूर्वी उच्च भूमि के मध्य निम्न भूमि का विस्तार है। इसका आकार बड़े त्रिभुज जैसा है। इस त्रिभुजाकार मैदान को ‘प्रेयरी का मैदान’ कहा जाता है। इस भाग में विश्व प्रसिद्ध सुपीरियर झील, मिशीगन झील, घुरन झील, इरी झील और ओन्टेरियो झील हैं।

(2) कोणधारी वन तथा उनमें पाये जाने वाले वन्य प्राणियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
टुण्ड्रा के दक्षिण में पूर्व से पश्चिम तक इस सम्पूर्ण चौड़ी पट्टी में नुकीली पत्ती वाले कोणधारी वन पाये जाते हैं। इन वनों के वृक्षों की शाखाएँ नीचे झुकी हुई होने से ऊपरी सिरे का आकार कोण जैसा दिखाई देता है। इस प्रकार के वृक्षों वाले वन को कोणधारी वन कहते हैं। इन वनों में समूर (मुलायम बाल) वाले जीव, जैसे-बीवर, सफेद भालू, लोमड़ी, भेड़िये, खरगोश तथा बारहसिंगा आदि पाये जाते हैं।

(3) उत्तर अमेरिका की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों को विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
उत्तर अमेरिका की जलवायु को मुख्य रूप से निम्नलिखित चार कारक प्रभावित करते हैं –

1. महाद्वीप का अक्षांशीय विस्तार – उत्तर अमेरिका का दक्षिणी भाग उष्ण कटिबन्ध में, मध्य भाग शीतोष्ण कटिबन्ध में और उत्तरी भाग ध्रुवीय शीत कटिबन्ध में आता है। अतः दक्षिणी भाग अधिक गर्म, मध्य भाग समान रूप से गर्म और ठंडा तथा उत्तरी भाग अत्यधिक ठंडा रहता है।

2. धरातलीय विविधता का प्रभाव – पश्चिम में कार्डिलेरा पछुआ पवनों को रोककर अधिक वर्षा प्राप्त करता है, जबकि पूर्वी ढाल पूर्णतः वृष्टि छाया में आने से बहुत कम वर्षा प्राप्त करता है। जैसे-जैसे हम पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व की ओर के पठारों व पर्वतों की ओर बढ़ते हैं, वर्षा की मात्रा भी बढ़ती जाती है। महाद्वीप के उत्तरी भाग में वर्षा हिमपात के रूप में और कम मात्रा में होती है।

3. स्थाई पवनों का प्रभाव – पश्चिम में कार्डिलेरा और पूर्व में उच्च भूमि, दोनों उत्तर से दक्षिण तक फैली हैं, इन दोनों के बीच विशाल मैदान है। शीतकाल में उत्तर से आने वाली ठंडी ध्रुवीय पवनें तथा ग्रीष्म में दक्षिण से चलने वाली पवनें सम्पूर्ण मैदानी भाग को प्रभावित करती हैं। इसलिए यह शीतकाल में ठंडा व ग्रीष्म में गर्म रहता है।

4. जलधाराओं का प्रभाव – महाद्वीप के दक्षिणी-पूर्वी तट पर गल्फ स्ट्रीम और उत्तरी पश्चिमी तट पर अलास्का की गर्म धाराएँ बहती हैं। इसके प्रभाव से तटीय भागों का तापमान सदैव ऊँचा रहता है। हवाएँ इनसे गर्म होकर नमी ग्रहण कर वर्षा करती हैं। लेब्रेडोर की ठंडी धारा उत्तर-पूर्वी भाग तथा कैलिफोर्निया की ठंडी धारा दक्षिणी-पश्चिमी भाग के निकट बहती हैं। इससे तटीय क्षेत्रों की जलवायु अधिक ठंडी हो जाती है।

प्रश्न 5.
उत्तर अमेरिका के रेखा मानचित्र में निम्नांकित को दर्शाइएं –

  1. अप्लेशियन पर्वत, रॉकी पर्वत।
  2. मिसीसिपी, सेंट लारेंस, कोलोरेडो नदियाँ।
  3. महान झील क्षेत्र तथा विनिपेग।
  4. मैक्सिको, हडसन और कैलिफोर्निया की खाड़ी।
  5.  प्रेयरी, का मैदान।
  6. एरीजोना मरुस्थल।
  7. लेब्रेडोर का पठार।
  8. गल्फस्ट्रीम, लेब्रेडोर जलधारा।
  9. कर्क रेखा।
  10. पश्चिमी द्वीप समूह, ग्रीनलैण्ड, न्यूफाउण्डलैण्ड।

उत्तर:

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 13 उत्तर अमेरिका का भौगोलिक स्वरूप img 1

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MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 16 अध्ययने प्रत्यूहः

MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 16 अध्ययने प्रत्यूहः (नाट्यांशः)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 16 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एक पदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) सद्भिः सङ्गः केन भवति? (सज्जनों के साथ सम्पर्क किससे होता है?)
उत्तर:
पुण्येना। (पुण्य से)

(ख) दण्डकारण्यप्रदेशे के प्रमुखाः वसन्ति? (दण्डकारण्य प्रदेश में प्रमुख रूप से कौन रहता है?)
उत्तर:
अगस्त्यादयः। (अगस्तादि प्रमुख ऋषि रहते हैं)

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(ग) देवताविशेषेण अद्भुतं किम् उपनीतम्? (देवता गण किस अद्भुत विशेषण को बताते हैं?)
उत्तर:
जृम्भकास्त्राणि। (जृम्भकास्त्र।)

(घ) दारको केन पोषितौ रक्षितौ च? (दोनों किसके द्वारा रक्षित पोषित हुए?)
उत्तर:
वल्मीकिना। (वाल्मीकि के द्वारा)।

(ङ) तयोः कानि जन्मसिद्धानि? (उन दोनों को क्या जन्म सिद्ध था?)
उत्तर:
जृम्भकास्त्र। (जृम्भकास्त्र।)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) आत्रेयी दण्डकारण्ये किमर्थं भ्रमति स्म? (आत्रेयी दण्डकारण्य वन में क्यों घूमते थे?)
उत्तर:
आत्रेयी दण्डकारण्ये महानध्ययनप्रत्यूह भ्रमति स्मः। (आत्रेयी दण्डकारण्य में पढ़ाई में विघ्न आ जाने के कारण घूमते थे।)

(ख) वाल्मीकिना तयोः कां विद्याम् अध्यापितौ? (वाल्मीकि के द्वारा उन दोनों को कौन-सी विद्या पढ़ाई जाती थी?)
उत्तर:
वाल्मीकिना तयोः त्रयीवर्जमितरास्तिस्त्रो विद्याम् अध्यापितौ। (वाल्मीकि के द्वारा उन दोनों को वेद को छोड़कर और तीनों (आन्वीक्षिकी, वार्ता और दण्डनीति) विद्याओं का अध्ययन कराया जाता था।)

(ग) गुरुः विद्या कथं वितरति? (गुरु विद्या कैसे देते हैं?)
उत्तर:
गुरुः विद्या प्राज्ञे विद्यां यथैव तथा जड़े वितरति। (गुरु जिस तरह बुद्धिमान छात्र को उसी तरह मन्द बुद्धि छात्र को भी विद्या देता है।)

(घ) ब्रह्मर्षिः किमर्थं तमसामनुप्रपन्नः? (बह्मर्षि तमसा नदी के किनारे किसलिए गए?)
उत्तर:
बह्मर्षिः माध्यन्दिनसवनाय नदीं तमसामनुप्रपन्नः। (ब्रह्मर्षि तमसा नदी के किनारे मध्याह्न (दोपहर की संध्या) वन्दन करने के लिए तमसा नदी के किनारे गए।)

(ङ) क्रौञ्चयोः एकं कः हतवान्? (क्रौञ्च में से एक को किसने मारा?)
उत्तर:
क्रौञ्चयोरेकं एक व्याधेन हतवान्। (क्रौञ्च में से एक को बहेलिया ने मारा।)

प्रश्न 3.
अधोलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत
(क) वनदेवता वनस्य सौन्दर्य विषये तापसी किं वदति? (वनदेता वन के सौन्दर्य के विषय में तापसी से क्या कहता है?)
उत्तर:
वनदेवता वनस्य सौन्दर्य विषये तापसी यथेच्छा भोग्यं दो वदति। (वनदेवता वन के सौन्दर्य के विषय में तापसी से कहता है कि यह वन आपकी इच्छा के अनुसार उपभोग योग्य है।)

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(ख) पद्मयोनिः वाल्मीकि किमवोचत्? (ब्रह्मा ने वाल्मीकि से क्या कहा?)
उत्तर:
पद्मयोनिरवोचत्-ऋषेः प्रबुद्धोऽसि वागात्मनि ब्रह्ममणि। तदृ ब्रहि रामचरितम्। (ब्रह्मा ने वाल्मीकि से कहा कि ऋषि जी! तुम शब्द रूप ब्रह्म में ज्ञान सम्पन्न हो गए हो, इस कारण रामचरित का वर्णन करो।)

(ग) साधूनां चरित कीदृशमस्ति? (सज्जनों का चरित किस तरह का होता है?)
उत्तर:
साधूनां चरितं सतां सद्भिः सङ्गः कथमपि हि पुण्येन भवति। (सज्जनों की संगति सज्जनों द्वारा कष्टमय पुण्य से होती है।)

(घ) क्रौञ्चवधानन्तरं वाल्मीकिमुखात् का वाणी निर्गता? (क्रौञ्च के वध के अनन्तर वाल्मीकि के मुख से कौन-सी वाणी निकली?)
उत्तर:
क्रौञ्चवधानन्तरं वाल्मीकि किं मुखात् वाणी निर्गता-मा निषाद्। प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः। (क्रौंच के वध के अनन्तर वाल्मीकि के मुख से वाणी निकली कि-हे व्याध! जो कि तूने एक का वध कर दिया है इसलिए तू बहुत समय तक प्रतिष्ठा प्राप्त न कर सकेगा)

प्रश्न 4.
यथायोग्यं योजयत
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 16 अध्ययने प्रत्यूह img-1

प्रश्न 5.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्धवाक्यानां समक्षं “न” इति लिखत
उदाहरणम् :
तापसी अध्वगवेषा अस्ति। – आम्
व्याधः क्रौञ्च न हतवान्। – न
(क) गुरुः यथा प्राज्ञे तथैव जड़े विद्यां वितरति।
(ख) जृम्भकास्त्राणि जन्मसिद्धानि आसन्।
(ग) लवकुशौ त्रयी विद्यां न अधीतवन्तौ।
(घ) वाल्मीकिः आदिकविः अस्ति।
(ङ) वाल्मीकिः रामायणं न लिखितवान्
उत्तर:
(क) आम्
(ख) आम्
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न

प्रश्न 6.
उचितैः पदैः रिक्तस्थानानि पूरयत
(निगमान्तविद्याम्, पुण्येन, प्रतिष्ठाम, विशुद्धम्, माध्यन्दिनसवनाय)
(क) सतां सद्भिः सङ्गः पुण्येन भवति।
(ख) आत्रेयी निगमान्तविद्याम् अध्येतुम् पर्यटति।
(ग) महर्षि माध्यन्दिनसवनाय तमसामनुप्रपन्नः।
(घ) मा! निषाद प्रतिष्ठाम् त्वमगमः शाश्वतीः समाः।
(ङ) रहस्यं साधूनामनुपधि विशुद्धं विजयते।

प्रश्न 7.
सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धेः नाम लिखत
उदाहरणम् :
केनापि- केन + अपि = दीर्घस्वरसन्धिः।
(क) अथापरः – अथ + अपर = दीर्घस्वरसंधिः।
(ख) यथेच्छा – यथा इच्छा – गुणस्वरसंधिः।
(ग) यथैव – यथा + एव = वृद्धिस्वरसंधिः।
(घ) आत्रेय्यस्मि – आत्रेयी + अस्मि = यणस्वरसंधिः।
(ङ) अन्येऽपि – अन्ये + अपि = पूर्ण रूप।

प्रश्न 8.
अव्ययैः वाक्य निर्माण कुरुत
उदाहरणं यथाः
तत्र महर्षिः वाल्मीकिः वसति स्म।
(क) अपि – रामः अपि फलं खादति।
(ख) यदा – यदा मोहितः आगच्छति तदा अन्शुलः, राशिन्तश्च गच्छति।
(ग) किल – रामचन्द्रः किल पितृभक्तिः आसीत्।
(घ) खलु – पासः प्रधानं खलु योग्यतायाः।
(ङ) एकदा – एकदा अहं भेड़ाघट्टम्अवश्यमेव गमिष्यामि।

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अध्ययने प्रत्यूहः पाठ-सन्दर्भ/प्रतिपाद्य

महाकवि भवभूति रचित ‘उत्तर रामचरितम्’ नामक नाटक ग्रन्थ से उद्धृत यह अंश संस्कृत भाषा के नाट्य परम्परा का परिचय प्रस्तुत करने में सक्षम है। बुद्धि कौशल युक्त गुरु का छात्रों के प्रति समान रूप से समदर्शिता का भाव यहाँ प्रस्तुत किया गया है।

अध्ययने प्रत्यूहः पाठ का हिन्दी अर्थ
(ततः प्रविशत्यध्वगवेषा तापसी)

1. तापसी-अये, वनदेवता फलकुसुमगर्भेण पल्लवायेण दूरान्मामुपतिष्ठते। (प्रविश्य) वनदेवता-(अर्घ्य विकीय)
यथेच्छाभोग्यं वो वनमिदमयं मे सुदिवसः
सतां सद्भिः सङ्गः कथमपि हि पुण्येन भवति।
तरुच्छाया तोयं यदपि तपसां योग्यमशनं
फलं वा मूलं वा तदपि न पराधीनमिह वः॥

तापसी :
किमत्रोच्यते?
प्रियप्राया वृत्तिर्विनयमधुरो वाचि नियमः
प्रकृत्या कल्याणी मतिरनवगीतः परिचयः।
पुरो वा पश्चाद् वा तदिदमविपर्यासितरसं
रहस्यं साधूनामनुपधि विशुद्धं विजयते॥
(उपविशतः)

शब्दार्थः :
वनदेवता-वनदेवता-forest God;फलकुसुमगर्भेण-फल और फलो से भरे-full of fruits and flowers; पल्लवादंण-पल्लवसहित-with new leaves; दूरान्मामुपतिष्ठते-दूर से ही मेरा सत्कार करती है-salute me from long distance; अर्घ्य विकीर्य-अर्घ्य देखकर-water give by hands; यथेच्छायोग्य इच्छा के अनुसार योग्य-like desire consumation; कथमपि-किसी तरह से-any how; पुण्येन-पुण्य के द्वारा-By good work; तरुछाया-वृक्ष की छाया-shade of tree; तदापि-वह भी-he also; किमत्रोक्यते-क्या कहा जाए-what do say; पुरो-पहले-first; पश्चाद्-बाद में-after; विनयमूर्धरा-विनय के कारण हृदयाकर्षक-to reason of attration by heart; अनवगीतः-अनिन्दित-not criticise; प्रियाप्रायव्रति-अतिशय प्रियकारी व्यवहार-lovely behavioure.

हिन्दी अर्थः :
(तब पथिक रूप में तपस्विनी का प्रवेश)

तापसी :
अरे! वन देवता पुष्प-फलों से पूर्ण, पल्लव फपी अर्घ्य के द्वारा दूर से ही मेरा स्वागत करते हैं। (प्रवेश करके)

वन देवता :
(अर्घ्य देकर) यह वन इच्छानुरूप भोग के लिए आप को अर्पित है क्योंकि सज्जनों का सज्जन पुरुष से संयोग बड़े पुण्य से होता है। वृद्धा की छाया, जल और तप के योग्य जो भी पदार्थ-फल मूल है वह आपकी सेवा में है, पराधीन नहीं है।

तापसी :
इस पर क्या कहा जाए?

व्यवहार अत्यधिक प्रीतियुक्त, हृदय को आकर्षित करने वाली नम्रता, स्वभाव से ही मंगल रूप बुद्धि, न बदलने वाला, व अनिंदित प्रेम, छल-कपट से रहित और विशुद्ध-ऐसा उत्कृष्ट रूप साधुओं का होता है। (दोनों बैठते हैं)

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2. वनदेवता-काम् पुनरत्रभवतीमवगच्छामि?

तापसी :
आत्रेय्यस्मि।

वनदेवता :
आर्ये आत्रेयि! कुतःपुनरिहागम्यते? किम् प्रयोजनो दण्डकारण्योपवनप्रचारः?

आत्रेयी :
अस्मिन्नगस्त्यप्रमुखाः प्रदेशे भूयांस उद्गीथविदो वदन्ति।
तेभ्योऽधिगन्तुं निगमान्तविद्यां वाल्मीकिपादिह पर्यटामि॥

वनदेवता :
यदा तावदन्येऽपि मुनयस्तमेव हि पुराणब्रह्मवादिनम् प्राचेतसमृषिम् ब्रह्मपारायणायोपासते, तत्कोऽयमार्यायाः प्रवासः?

आत्रेयी :
तस्मिन् हि महानध्ययनप्रत्यूह इत्येष दीर्घप्रवासोऽङ्गीकृतः। वनदेवता-कीदृशः?

आत्रेयी :
तत्र भगवतः केनापि देवताविशेषेण सर्वप्रकाराद्भुतं स्तन्यत्यागमात्रके वयसि धर्तमानं दारकद्वयमुपनीतम्। तत्खलु न केवलं तस्य, अपितु तिरश्चामप्यन्तः करणानि तत्त्वान्युपस्नेहयति।

शब्दार्थः :
आत्रेयरिम-मैं आत्रेयी हूं-I am Aitreyi. कुत्रः-कहां से-from where; प्रयोजना-प्रयोजन है -is pland. अगस्त्यप्रमुखाः -अगस्त्य आदि प्रमुख-Augustya and main; प्रदेशे-क्षेत्र में-In area; पर्यटामि-घूमते हुए आ रहा हूं-coming into wonderd; वदन्ति-कहते हैं-says; ब्रह्मवादिनाम्ब्रह्मवादी-of Bramha; उपासते-उपासना करते हैं-prayers; आर्याया-आर्यों का-Aryar; प्रवासः-प्रवास-migration; तस्मिनः-वहां-there; प्रत्यूह- विघ्न-disturbe; दीर्घ प्रवासो-दीर्घप्रवास को-lang bravery; अंगीकृता-स्वीकृत किया है-expect; कीदृशः-कैसा-how, सर्वेकारात-सभी प्रकार से-all types; वयस्वीउम्र में-In age; तस्य-उसके-his; अधिगतुम्-जानने के लिए-for knowing,

हिन्दी अर्थ :
वन देवता-आपको मैं क्या समझू?

तापसी :
मैं आत्रेयी हूँ।

वनदेवता :
आर्ये आत्रेयी! आप कहाँ से आ रही हैं? किस प्रयोजन से आप दण्डकारण्य में घूम रही हैं?

आत्रेयी :
इस स्थान में अगस्त्य आदि प्रमुख ऋषि रहते हैं। उनसे वेदान्त की शिक्षा प्राप्त करने के लिए ऋषि वाल्मीकि के आश्रम से आ रही हूँ।

वनदेवता :
जब अनेक ऋषि मुनि एवं अनुभवी ब्रह्मवेत्ता मुनि महर्षि वाल्मीकि के यहाँ वेदांत शिक्षा ग्रहण करते हैं, तब आर्या के यहाँ आकर प्रवास का क्या कारण है?

आत्रेयी :
वहाँ पढ़ने में व्यवधान उत्पन्न हो जाने के कारण मैंने दीर्घ प्रवास को स्वीकार किया।

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3. वनदेवता-तयैव किल देवतया तयोः कुशलवाविति नामनी प्रभावश्चाख्यातः।

वनदेता :
कीदृशः प्रभावः?

आत्रेयी :
तयोः किल सरहस्यानि जृम्भकास्त्राणि जन्मसिद्धनीति।

वनदेवता :
अहो नु भोश्चित्रमेतत्।

आत्रेयी :
तौ च भगवता वाल्मीकिना धात्रीकर्मतः परिगृह्य पोषितौ रक्षितौ च, निर्वृत्तचौलकर्मणोस्तयोस्त्रयी-वर्जमितरास्तिस्रो विद्याः सावधानेन परिनिष्ठापिताः। तदनन्तरं भगवतैकादशे वर्षे क्षात्रेण कल्पेनोपनीय त्रयीविद्यामध्यापितौ न त्वेताभ्यामतिदीप्तिप्रज्ञाभ्यामस्मदादेः सहाध्ययनयोगोऽस्ति यतः
वितरति गुरुः प्राज्ञे विद्यां यथैव तथा जडे
न तु खलु तयोाने शक्तिं करोत्यपहन्ति वा।
भवति हि पुनर्भूयान् भेदः फलम् प्रति, तद्यथा
प्रभवति शुचिबिम्बग्राहे मणिनं मृदादयः॥

वनदेवता :
अयमध्ययनप्रत्यूहः?

आत्रेयी :
अन्यश्च।

वनदेवता :
अथापरः कः?

शब्दार्थः :
कीदृशः-किस तरह-How type; वितरति-वितरित करती है-Distributes; प्राज्ञे-शास्त्र विषय-Knowledge of book; प्रभवति-प्रभावित करती है-to affect; सुचि-पवित्रता-holyness; प्रत्यूहः-बाध्य-trouble.

हिन्दी अर्थः :
वनदेवता-कैसा विघ्न?

आत्रेयी :
वहाँ भगवान वाल्मीकि के निकट किसी देवता ने सभी प्रकार से अद्भुत एवं स्तन त्याग करने की अवस्था के दो बच्चों को छोड़ दिया है। वे बालक केवल उन्हीं के नहीं वरन् पशु-पक्षियों के हृदय में भी स्नेह का संचार करते हैं।

वनदेवता :
क्या आप उन दोनों बालकों का नाम जानती हैं?

आत्रेयी :
उसी देवता ने उन दोनों का नाम लव एवं कुश यह नाम व प्रभाव बताया है।

वनदेवता :
कैसा प्रभाव? आत्रेयी-उन दोनों को मन्त्रपूरित जृम्भका नामक अस्त्र सिद्ध है। वनदेवता-यह आश्चर्य है।

आत्रेयी :
उन दोनों को भगवान वाल्मीकि ने धात्री के समान पालन-पोषण व रक्षित किया है। चूडाकर्म से निवृत्त होने के बाद बहुत कुशलतापूर्वक उन्हें वेदाध्ययन के अतिरिक्त अन्य तीन विद्याओं (आन्वीक्षिकी, वार्ता एवं दण्डनीति) का अध्ययन कराया। पुनः उनकी ग्यारहवीं साल की उम्र में क्षत्रिय विधि से उपनयन संस्कार कर उन्हें वेद की शिक्षा प्रदान की। अत्यंत प्रतिभा के धनी उन दोनों बालकों के साथ हम लोगों का पढ़ना बहुत कठिन है क्योंकि गुरु तीव्र बद्धि एवं मंद बुद्धि वाले दोनों तरह के छात्रों को एक समान शिक्षा प्रदान करता है। दोनों में से किसी को न अलग से समझने की सामर्थ्य प्रदान करता है और न ही किसी को बोध-शक्ति को नष्ट ही करता है। ऐसा होने पर भी परिणाम में बहुत भिन्नता होती है, जैसे कि हीरा, स्फटिक मणि आदि सभी प्रतिबिम्ब ग्रहण करने में समर्थ होते हैं किन्तु मिट्टी आदि पदार्थ प्रतिबिम्ब धारण नहीं कर सकते।

वन देवता :
पढ़ने में यही विघ्न है?

आत्रेयी :
और दूसरा भी

वन देवता :
और दूसरा विघ्न क्या है?

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4. आयेत्री-अथ स ब्रह्मर्षिरेकदा माध्यन्दिनसवनाय नदीं तमसामनुप्रपन्नः। तत्र युग्मचारिणोः क्रौञ्चयोरेकं व्याधेन वध्यमानं ददर्श। आकस्मिकप्रत्यवभासां देवीं वाचमानुष्टुभेन छन्दसा परिणतामभ्युदैरयत्-
मा निषाद! प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।
वनदेवता-चित्रम्? भग्नायादन्यत्र नूतनश्छन्दसामवतारः।

आत्रेयी :
तेन हि पुनः समयेन तं भगवन्तमाविर्भूतशब्दप्रकाशमृषिमुपसङ्गम्य भगवान् भूतभावनः-पद्मयोनिरवोचत् ऋषे प्रबुद्धोऽसि वागात्मनि ब्रह्माणि। तब्रूहि रामचरितम्। अव्याहतज्योतिरार्षं ते चक्षुः प्रतिभातु। आयः कविरसि इत्युक्त्वान्तर्हितः। अथ स भगवान् प्राचेतसः प्रथमम् मनुष्येषु शब्दब्रह्मणस्तादृशं विवर्तमितिहासं रामायणम् प्रणिनाय।

वनदेवता :
हन्त! पण्डितः संसारः।

आत्रेयी :
तस्मादेव हि ब्रवीमि ‘तत्र महानध्ययनप्रत्यूह’ इति।

वनदेवता :
युज्यते। आत्रेयी-विश्रान्तास्मि भद्रे! संप्रत्यगस्त्याश्रमस्य पन्थानम् ब्रूहि।

वनदेवता :
इतः पञ्चवटीमनुप्रविश्य गम्यतामनेन गोदावरी तीरेण।
(इति निष्क्रान्तः)।

शब्दार्थः :
व्याधेन-बहेलिया ने-Hunter. पद्मयोनि-ब्रह्म-Brahma; प्रबुद्धोऽसि-प्रबुद्ध है-wise man; तादृशं-उस तरह-this type; तस्मादेव-इसी कारण से-for this reason; ब्रवीमि-कहती हूँ-says.

हिन्दी अर्थ :
एक दिन ब्रह्मर्षि दोपहर स्नान के लिए तमसा नदी के तट पर गए। वहाँ प्रेमरत नर-मादा क्रौंच पक्षियों में से एक नर को बहेलिए द्वारा मारे जाते हुए देखा। तब उन्होंने एकाएक उत्पन्न हुए छन्दबद्ध श्लोक के रूप में कहा-हे बहेलिए तुमने काम मोहित क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को मार दिया, इस कारण तुम बहुत समय तक प्रतिष्ठा नहीं प्राप्त कर सकोगे।।

वनदेवता :
आश्चर्य है! वेद के अतिरिक्त भी छन्द का नया जन्म हुआ।

आत्रेयी :
जिनको छन्द रूपी प्रकाश का दर्शन हो गया है एवं भगवान वाल्मीकि के पास आकर लोक के जन्मदाता ब्रह्मा ने आकर कहा-ऋषि! तुम शब्द रूप ब्रह्मा से अभिभूत हो गए हो। अब तुम रामचरित का वर्णन करो। न क्षीण होने वाला प्रकाश रूपी आर्य ज्ञान तुम्हें प्रकाशित करे। तुम आदि कवि हो। ऐसा कहकर ब्रह्मा अंतर्धान हो गए। तब भगवान वाल्मीकि ने मनुष्यों में सर्वप्रथम शब्द ब्रह्म का रूपान्तर कर रामायण नामक इतिहास की रचना की।

वनदेवता :
हाय! तब तो सांसारिक लोग भी पण्डित हो जाएँगे। आत्रेयी-इसी कारण वहाँ पढ़ने में विघ्न है-ऐसा मैं कहती हूँ। वनदेवता-ठीक है।

आत्रेयी :
हे भद्र! मैं विश्राम कर चुकी। अब मुझे भगवान अगस्त्य के आश्रम का मार्ग बताएँ।

वनदेवता :
वहाँ से पंचवटी में प्रवेश कर गोदावरी के किनारे से जाइए। इस तरह जाते हैं।

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MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 12 भारत की रक्षा व्यवस्था

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 12 भारत की रक्षा व्यवस्था

MP Board Class 8th Social Science Chapter 12 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) नौ सेना की दक्षिणी कमान का मुख्यालय कहाँ –
(क) मुम्बई
(ख) कोच्चि
(ग) विशाखापट्टनम
(घ) बंगलौर।
उत्तर:
(ख) कोच्चि

(2) थल सेना का मुख्यालय स्थित है –
(क) बंगलौर
(ख) मुम्बई
(ग) विशाखापट्टनम
(घ) नई दिल्ली।
उत्तर:
(घ) नई दिल्ली

(3) तारापुर परमाणु संयन्त्र किस राज्य में स्थित है ?
(क) मध्य प्रदेश
(ख) महाराष्ट्र
(ग) तमिलनाडु
(घ) कर्नाटक
उत्तर:
(ख) महाराष्ट्र।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) वायु सेना का अध्यक्ष ………….. होता है।
(2) विंग कमाण्डर का पद: सेना में होता है।
(3) शान्ति काल में सेना के कार्य करती है।
(4) भारत में परमाणु बम का परीक्षण में किया गया।
उत्तर:

  1. एयर चीफ मार्शल
  2. वायु
  3. समाज, सेवा
  4. 1974, 1998

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 12 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) नौ सेना अध्यक्ष के पद (रैंक) का नाम लिखिए।
उत्तर:
नौ सेना अध्यक्ष के पद (रैंक) का नाम ‘एडमिरल’ होता है।

(2) भारतीय सेना के अंगों के नाम बताइए।
उत्तर:
भारतीय सेना के अंग थल सेना, नौसेना व वायुसेना

(3) सन् 2001 में तीनों सेनाओं के संयुक्त कमान की स्थापना कहाँ की गई?
उत्तर:
सन् 2001 में तीनो सेनाओं के संयुक्त कमान की स्थापना अण्डमान निकोबार द्वीप समूह में की गई है।

(4) नेशनल कैडेट कोर की स्थापना क्यों की गई ? .
उत्तर:
विद्यालय के छात्र-छात्राओं में अनुशासन व सैन्य अभिरुचि जगाने हेतु नेशनल कैडेट कोर की स्थापना की गई।

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 12 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) भारतीय सेना के प्रमुख अंगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारतीय सेना के प्रमुख तीन अंग निम्नवत् हैं –
1. थल सेना – इस सेना का मुख्यालय नई दिल्ली में है। इसका सर्वोच्च अधिकारी थल सेना अध्यक्ष होता है जिसका पद जनरलक्के समकक्ष होता है। थल सेना को पाँच क्षेत्रों (कमान) में संगठित किया गया – है-केन्द्रीय, पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी तथा दक्षिणी कमान।

2. नौसेना – नौसेना का मुख्य कार्यालय नई दिल्ली में है। इसका सर्वोच्च अधिकारी नौसेना अध्यक्ष (एडमिरल) होता है। नौसेना को पूर्वी नौसेना कमान विशाखापट्टनम, पश्चिमी नौसेना कमान मुम्बई एवं दक्षिणी नौसेना कमान कोच्चि (कोचीन) में संगठित किया गया है।

3. वायुसेना – वायुसेना का मुख्य कार्यालय भी नई दिल्ली में है। इसका सर्वोच्च अधिकारी एयर चीफ मार्शल (रैक) का होता है। इसके छः प्रमुख कमान (क्षेत्र) इस प्रकार हैं-पूर्वी, पश्चिमी, मध्य, दक्षिणी, दक्षिणी-पश्चिमी व प्रशिक्षण।

(2) भारत की जल सीमा का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारत एक प्रायद्वीप है। इसकी सीमाएँ तीन दिशाओं से जल को स्पर्श करती हैं। भारत की जल सीमा काफी विस्तृत है। पूर्व दिशा में बंगाल की खाड़ी, पश्चिमी दिशा में अरब सागर तथा दक्षिणी में हिन्द महासागर का क्षेत्र स्थित है। अतः विशाल जल सीमा की रक्षा हेतु एक सुगठित व शक्तिशाली नौसेना है।

(3) भारत के प्रमुख प्रक्षेपास्त्रों (मिसाइल) के नाम बताइए।
उत्तर:
अग्नि, पृथ्वी, त्रिशूल, नाग, आकाश, अस्त्र व ब्रह्मोस आदि भारत के प्रमुख प्रक्षेपास्त्रों (मिसाइलों) के नाम हैं जो रक्षा पंक्ति को मजबूती प्रदान करते हैं।

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 12 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 5.
(1) शान्तिकाल में रक्षा सेनाओं की भूमिका पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
रक्षा सेना शान्तिकाल में समाज सेवा के अनेक प्रकार के कार्य करती है, जैसे-बाढ़, भूकम्प, अन्य प्राकृतिक प्रकोपों व बड़ी दुर्घटनाओं के समय पर राहत कार्य करना। संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व के विभिन्न देशों में शान्ति स्थापित करने के कार्यों में भी भारतीय सेना ने सहायता की है। हमारी सेनाओं द्वारा कोरिया, गाजा पट्टी, लेबनान, कांगो, यमन आदि स्थानों में किये गये कार्यों की सराहना की गई है। इसके अलावा देश में हो रही विघटनकारी एवं आतंकवादी गतिविधियों का सामना करने में भी सेना का विशेष योगदान रहा है।

(2) वायु सेना के प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
किसी भी राष्ट्र की रक्षा व्यवस्था में वायु सेना की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। युद्धकाल में आक्रमणकारी देश के प्रमुख सैनिक ठिकानों पर बमबारी करना एवं उनका यातायात, संचार तन्त्र नष्ट करना वायु सेना का प्रमुख कार्य है। थल सेना को युद्ध भूमि में शस्त्र एवं अन्य युद्ध सामग्री तथा खाद्य सामग्री पहुँचाना भी वायु सेना का कार्य है। वायु सेना नभ से देश की सीमाओं की निगरानी करती है जिसके लिए भारतीय सेना में 1000 से अधिक हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर हैं।

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 4 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 4.5

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 4 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 4.5

निम्नलिखित की रचना कीजिए –

प्रश्न 1.
एक वर्ग READ जिसमें RE = 5.1 cm है।
हल:
रचना के चरण –

  1. एक सर्वप्रथम एक रेखाखण्ड RE = 5.1 cm बनाया।
  2. रेखाखण्ड RE के R के बिन्दु पर ∠XRE = 90° बनाया।
  3. किरण RX से 5.1 cm लम्बा रेखाखण्ड काट लिया।
  4. D तथा E बिन्दुओं के केन्द्र मानकर और 4 cm त्रिज्या लेकर दो चाप लगाए जो एक-दूसरे को A पर काटते हैं।
  5. DA तथा EA को मिलाया। इस प्रकार प्राप्त आकृति READ अभीष्ट वर्ग है।

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 4 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 4.5 img-1

प्रश्न 2.
एक समचतुर्भुज जिनके विकर्णों की लम्बाई 5.2 cm और 6-4 cm है।
हल:
रचना के चरण –

  1. माना कि विकर्ण AC = 5.2 cm तथा BD = 6.4 cm है।
  2. रेखाखण्ड AC = 5.2 cm बनाया।
  3. AC का लम्ब समद्विभाजक खींचा जो AC को O बिन्दु पर काटता है।
    MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 4 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 4.5 img-2
  4. O बिन्दु को केन्द्र मानकर तथा \(\frac{BD}{2}\) = \(\frac{6.4}{2}\) cm = 3.2 cm त्रिज्या लेकर दो चाप लगाए जो OX को D पर तथा OY को B पर काटता है।
  5. AD, CD, CB और AB को मिलाया।
  6. प्राप्त आकृति ABCD अभीष्ट समचतुर्भुज है।

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प्रश्न 3.
एक आयत जिसकी आसन्न भुजाओं की लम्बाइयाँ 5 cm और 4 cm हैं।
हल:
रचना के चरण –

  1. सर्वप्रथम रेखाखण्ड PQ = 5 cm बनाया।
  2. P बिन्दु पर ZQPX = 90° बनाया।
  3. बिन्दु K को केन्द्र मानकर तथा 4 cm त्रिज्या लेकर चाप लगाया जो XP सेवा को S पर प्रतिच्छेद करता है।
  4. अब S को केन्द्र मानकर तथा 5 cm त्रिज्या लेकर एक चाप लगाया।
  5. Q बिन्दु को केन्द्र मानकर तथा 4 cm त्रिज्या लेकर एक चाप लगाया। ये दोनों चाप एक दूसरे को बिन्दु R पर प्रतिच्छेद करते हैं।
  6. SR तथा QR को मिलाया। इस प्रकार प्राप्त आकृति PQRS एक अभीष्ट आयत है।

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 4 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 4.5 img-3

प्रश्न 4.
एक समान्तर चतुर्भुज OKAY जहाँ OK = 5.5 cm और KA = 4.2 cm है। क्या यह अद्वितीय है?
हल:
किसी चतुर्भुज की रचना के लिए पाँच मापों का होना आवश्यक है।

यहाँ समान्तर चतुर्भुज की रचना के लिए दो आसन्न भुजाएँ दी गई हैं। अर्थात् चार भुजाएँ दी गई हैं। सम्मुख भुजाएँ बराबर हैं। अतः चतुर्भुज की रचना के लिए एक और माप आवश्यक है। यह माप दो आसन्न भुजाओं के बीच का कोण हो सकता है या अद्वितीय चतुर्भुज के लिए यह एक विकर्ण हो सकता है।

अतः दी गई चार मापों से अभीष्ट समान्तर चतुर्भुज की रचना नहीं हो सकती है।

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MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 7 सुविज्ञातमेव विश्वसेत्

MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 7 सुविज्ञातमेव विश्वसेत् (कथा)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 7 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एक पदेन उत्तरं लिखत् (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) पर्कटीवृक्षः कुत्र अस्ति? (पाकर का वृक्ष कहां पर है?)
उत्तर:
पर्कटीवृक्षः गृध्रकूटनामि अस्ति। (गृध्रकूट नामक स्थान में)

(ख) पक्षिशावकं भक्षितुं कः आगतः? (पक्षी के बच्चे को खाने के लिए कौन आया?)
उत्तर:
पक्षिशावकं भक्षितुं मार्जारः आगतः। (बिल्ली)

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(ग) विश्वासस्य मार्जारः कुत्र स्थितः? (विश्वास की बिल्ली कहां थी?)
उत्तर:
विश्वासस्य मार्जारः तस्फूटते स्थितः। (उसके कोटर में)

(घ) पक्षिशावकान् खादित्वा मार्जारः कुत्र गतः? (पक्षी के बच्चे को खाकर बिलाव कहां गया?)
उत्तर:
पक्षिशावकान् खादित्वा मार्जारः कोटरान्नि सृत्य बहिः प्रलायतिः। (कोटर से बाहर चला गया।)

(ङ) गृध्रः केः हतः? (गिद्ध ने किनको मारा?)
उत्तर:
गृधः पक्षिभि हतः। (पक्षियों को)

(च) कस्यदोषेण गृध्रः हतः? (किसके दोष के कारण गिद्ध मारा गया?)
उत्तर:
मार्जारस्य हि दोषेण। (बिल्ली के दोष के कारण)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखिए)
(क) जरद्गवनामा गृध्रः कुत्र वसति? (जदर्गव नाम का गिद्ध कहां रहता था?)
उत्तर:
जरद्गवनामा गृध्रः पर्कटीवृक्षः वसति। (जरद्गव नाम का गिद्ध पाकर के वृक्ष में रहता था।)

(ख) जनः वध्यः पूज्यः वा कथं भवति? (लोगों का वध व पूजा कैसे होती थी?)
उत्तर:
जनः वध्यः पूज्यः वा कर्मणा भवति। (लोगों का वध व पूजा कर्म से होती थी।)।

(ग) कस्मै वासो न देयः? (किसको निवास करने नहीं देना चाहिए?)
उत्तर:
आज्ञात् कुलशीलस्य वासो न देयः। (अज्ञात और जिसके कुल का ज्ञान न हो ऐसे लोगों को निवास नहीं देना चाहिए।)

(घ) पञ्चतन्त्रस्य रचनाकारः कः? (पञ्चतन्त्र के रचनाकार कौन हैं?)
उत्तर:
पञ्चतन्त्रस्य रचनाकार विष्णु शर्मा आसीत। (पंचतन्त्र के रचयिता विष्णु शर्मा थे।)

प्रश्न 3.
अधोलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत
(क) पंचतन्त्र कानि पञ्चतन्त्राणि? (पंचतन्त्र में कौन-कौन से पांच तंत्र हैं?)
उत्तर:
पञ्चतंत्रे लब्धप्राणभः, मित्रभेद, मित्रलाभः, काकोलकी अपरिक्षित कारक इति पंचतन्त्राणि। (पंचतंत्र में लब्ध प्राणसा, मित्र-भेद, मित्र-प्राप्ति, काकोलुकीयम अपरिक्षित कारक नाम के पांच तंत्र हैं, (पुस्तकें हैं)

(ख) मार्जारः गृधं कथं विश्वासस्य तरुकोटरे स्थितः? (बिल्ली ने गिद्ध को किस विश्वास के साथ वृक्ष के कोटर में रहने दिया?)
उत्तर:
मार्जारः गृधं अहिंसा परमो धर्मः विश्वासस्य तरु कोटरे स्थितः। (बिल्ली ने गिद्ध को अहिंसा परम धर्म है-इस विश्वास के साथ रहने दिया।)

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(ग) कोटरे निवसन मार्जारः किं करोति स्म? (कोटर में निवास करते हुए बिल्ली क्या करती थी?)
उत्तर:
कोटरे पक्षीशावकामअभक्षयत करोति स्म? (कोटरे में निवास करते हुए बिल्ली पक्षियों के बच्चों को खाती थी।)

(घ) अस्या कथायाः सारः कः? (इस कथा का सार क्या है?)
उत्तर:
अस्या कथायाः सारः अस्ति-अज्ञात् कुलशीलस्य वासो न देयः। (इस कथा का सार है-अज्ञात एवं जिनके कुल का ज्ञान न हो ऐसे व्यक्ति को आश्रय नहीं देना चाहिए।)

प्रश्न 4.
प्रदत्तैः शब्देः रिक्तस्थानानि पूरयत
(क) गृध्रकूटनाम्नि पर्वते पर्कटीवृक्षः अस्ति। (पर्वते/गृहे)
(ख) वृक्षस्य कोटरे जरद्गवनामा गृध्रः प्रतिवसित। (सिद्धः/गृध्रः)
(ग) मार्जारः प्रतिदिनम् पक्षिशावकम् खादति। (पशुशावकम् पक्षिशावकम्)
(घ) गृध्रः पक्षिशावकान् रक्षति। (रक्षति/भक्षति)
(ङ) पक्षिभिः गृध्रः हतः। (मार्जारः/गृध्रः)

प्रश्न 5.
युग्मेलनं कुरुत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 7 सुविज्ञातमेव विश्वसेत् img-1

प्रश्न 6.
कोष्ठकात् उचितपदं चित्वा रेखाङ्गितपदै प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(कैः, कस्य, के, कम्, केन)
उदाहरणं यथा :
अज्ञातः अविश्वसनीयः भवति।
कः अविश्वसनीयः भवति?
(अ) मार्जारस्य दोषेण गृध्रः हतः।
उत्तर:
कस्य दोषेण गृध्रः हतः?

(ब) पक्षिभिः जरद्गवः हतः।
उत्तर:
कैः जरद्गवः हतः?

(स) व्यवहारेण जनः पूज्यः भवति।
उत्तर:
केन जनः पूज्यः भवति?

(द) गृध्रः मार्जारम् उक्तवान्।
उत्तर:
गृध्रः कम् उक्तवान्?

(ङ) पक्षिणः दुःखेन विलापं कृतवन्तः।
उत्तर:
के दुःखेन विलापं कृतवन्तः?

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प्रश्न 7.
विपरीतार्थशब्दानां मेलनं कुरुत
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 7 सुविज्ञातमेव विश्वसेत् img-2

प्रश्न 8.
उदाहरणानुसारं धातुं प्रत्ययं च पृथक कुरुत
उदाहरण-
दृष्ट्वा – दृश + क्त्वा
(क) हन्तव्यः
(ख) हतः
(ग) भक्षितुम्
(स) परिज्ञाय
(द) श्रोतुम्
(ङ) श्रुत्वा
उत्तर:
(क) हन्तव्यः – हन् + तव्यत्
(ख) हतः – हन् + क्त
(ग) भक्षितुम् – भक्ष् + तुमुन्
(स) परिज्ञाय – परि + ज्ञा + ल्यप्
(द) श्रोतुम् – श्रु + तुमुन्
(ङ) श्रुत्वा – श्रु + क्त्वा

प्रश्न 9.
उदाहरणानुसारं वर्तमानकालिक क्रियापदानां कालपरिवर्तनं कुरुत
उत्तर:
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 7 सुविज्ञातमेव विश्वसेत् img-3

प्रश्न 10.
निम्नलिखितानि अव्ययानि प्रयुज्य वाक्यानि स्वयत
यदि-यदि पुस्तकम् अस्ति तर्हि पठतु।
उत्तर:
सदा – सदा भूपेन्द्र पटेलः पठति तदा दुर्गेशः लिखति।
कदा – त्वम् कदा विद्यालयं गच्छसि।
अथ – अथ राम कथा श्रावयामि।
एव – अहम् एव गच्छामि।
इति – इति सः भोपालुपरम् अगच्छत्।
अपि – अहम् अपि छात्रः अस्मि।
अत्र – अत्र उत्कृष्ट विद्यालयः अस्ति।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित शब्दानां द्विवचन बहुवचनं च लिखत
उदाहरणं यथा
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 7 सुविज्ञातमेव विश्वसेत् img-4

सुविज्ञातमेव विश्वसेत् पाठ-सन्दर्भ/प्रतिपाद्य

कथाएँ प्रायः उपदेशपरक होती हैं। इनमें सरल, रोचक एवं विनोदप्रिय शैली में जीवनोपयोगी विचार व्यक्त किए गए हैं। संस्कृत साहित्य में कथा साहित्य की बहुत दीर्घ परंपरा रही है। संस्कृत कथाकारों में मूर्धन्य नारायण पंडित ने बालकों को शिक्षा के उद्देश्य से हितोपदेश की रचना की। प्रस्तुत पाठ भी हितोपदेश से ही संकलित किया गया है।

सुविज्ञातमेव विश्वसेत् पाठ का हिन्दी अर्थ

1. अस्ति भागीरथीतीरे गृध्रकूटनाम्नि पर्वते महान पर्कटीवृक्षः। तस्य कोटरे दैवदुर्विपाकाद्गलितनस्व-नयने जरद्गवनामा गृध्रः प्रतिवसति। अथ कृपया तज्जीवनाय तवृक्षवासिनः पक्षिणः स्वाहारात् किञ्चित्-किञ्चिदुद्धृत्य ददति। तेन असौ जीवति। अथ कदाचिद् दीर्घकर्णनामा मार्जारः पक्षिशावकान्भक्षितुं तत्रागतः। ततस्तमायान्तं दृष्ट्रवा पक्षिशावकैर्भयार्तेः कोलाहलः कृतः। तच्छ्रुत्वा जरद्गवेनोक्तम्-कोऽयमायाति! दीर्घकर्णो गृध्रमवलोक्य सभयमाह-“हा हतोऽस्मि’ अधुनास्य सन्निधाने पलायितुमक्षमः।

तद्यथा भवितव्यं तद्भवतु। तावविश्वासमुत्पाद्यास्य समीपं गच्छामि। इत्यालोच्योपसृत्याब्रवीत-आर्य! त्वामभिवन्दे। गृध्रोऽवदत्-कस्त्वम्? सोऽवदत्-मार्जारोऽहम्। गृध्रो ब्रूते-दूरमपसर। नो चेत् हन्तव्योऽसि मया। मार्जारोऽवदत्-श्रूयतां तावद्स्मद्वचनम्। ततो यद्यहं व ध्यस्तदा हन्तव्यः यतः

जातिमात्रेण किं कश्चित् हन्यते पूज्यते क्वचित्।
व्यवहारं परिज्ञाय वध्यः पूज्योऽथवा भवेत् ॥

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शब्दार्थ :
पर्कटीवृक्षः-पाकड़ का वृक्ष-Tree of Pakar; दैवदुर्विपाकात्-दुर्भाग्य से-Unfortunatly; किञ्चिदुधृत्य-थोड़ा-थोड़ा निकालकर-To take out of few; निरामिषाशी-मांस का भक्षण न करने वाला-Vegitarian; विद्यावयोवृद्धभ्यो-विद्या और अवस्था में बड़ी से-Knowledge and age an old; वीतरागेणेदम्-विषय वासना को छोड़ने के बाद-After living enjoyment of object of sense; चान्द्रायणव्रतम्-एक प्रकार का व्रत-The fast of karvachouth; कोलाहलः-कलरव-Noise; श्रूयतां-सुनिए-Hello; हन्तव्य-मारना चाहिए-Should kill; निते-गानना चाहिए-Should agree; परिज्ञाय-जानकार-Knowledge.

हिन्दी का अर्थ :
भागीरथी नदी के तट पर स्थित गृद्धकूट नामक पर्वत पर एक विशाल पाकड़ का वृक्ष है। उस (वृक्ष) के कोटर में जरद्गव नामक एक गृद्ध रहता था जिसके दैव गति से नख आदि गल गए थे और आँखों से अंधा था। अतः उसके जीवन के रक्षार्थ उस वृक्ष पर रहने वाले पशु-पक्षी दया वश अपने आहार से थोड़ा-थोड़ा बचाकर उसे भी दे देते थे जिससे वह जीवित था। एक बार दीर्घकर्णनामक बिलाव पक्षियों के भक्षण के उद्देश्य से वहाँ आया। उस बिलाव को वहां आया देख पक्षि-शावकों ने भयभीत होकर कोलाहल किया। उसे सुन जरद्गव बोला-यह कौन आ रहा है? दीर्घकर्ण गद्ध को देख भयभीत होकर बोला-हा!

अब तो मैं मारा गया? अब तो इसके सामने से भागने में भी अक्षम हूँ। तब भी जो होगा देखा जाएगा-ऐसा विश्वास मन में भरकर उसके समीप गया और बोला-आर्य! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ। गृद्ध ने कहा-तुम कौन हो? वह बोला-में बिलाव हूँ। गिद्ध बोला-दूर हटो अन्यथा तुम मेरे द्वारा मारे जाओगे। बिलाव बोला-मेरी दो बातें सुन लीजिए। उसके बाद यदि मैं मारने योग्य हूँ तो मार डालिए क्योंकि जाति मात्र से ही कोई मारने या पूजने योग्य नहीं हो जाता बल्कि व्यवहार के कारण मारने या पूजने योग्य होता है।

2. गृध्रो ब्रूते-ब्रूहि किमर्थमागतोऽसि? सोऽवदत्-अहमत्र गङ्गतीरे नित्यस्नायी निरामिषाशी ब्रह्मचारी चान्द्रायण व्रतमाचरंस्तिष्ठामि। “यूयं धर्मज्ञानरता विश्वासभूमयः” इति पक्षिणः सर्वे सर्वदा ममाग्रे प्रस्तुवन्ति। अतो भवद्भ्यो विद्यावयोवृद्धेभ्यो धर्म श्रोतुमिहागतः। भवन्तश्चैतादृशा धर्मज्ञा यन्मामतिथि हन्तुमुद्यताः। गृहस्थ धर्मश्चैषःयदि वा धजं नास्ति तदा प्रीतिवचसात्यतिथिः पूज्य एव।

शब्दार्थ :
किमर्थं-किस लिए-For what; अहम् अत्र-मैं यहाँ-I here; तिष्ठामि-करूँगा-Will do; हन्तुमुद्यताः-मारने के लिए तैयार-Ready to kill.

हिन्दी अर्थ :
गृद्ध बोला-बोलो, किस अर्थ से यहाँ आए हो? तब वह बोला-यहाँ मैं गंगा के तट पर आकर नित्य स्नान करता हूँ, निरामिष हूँ और ब्रह्मचर्य धारण किए हुए चान्द्रायण व्रत का अनुष्ठान करता हूँ। आप धर्म के ज्ञान से परिपूर्ण हो और विश्वास करने योग्य हो-ऐसा सभी पक्षी मेरे समक्ष आकर बोलते हैं। आप विद्या में पारंगत एवं आयु में भी बड़े हैं, धर्म-चर्चा सुनने आपके यहाँ आया हूँ। किन्तु इतना धर्म मर्मज्ञ होने पर भी मुझे मार डालने के लिए उद्यत हैं। गृहस्थ धर्म तो यह है कि अतिथि सेवा करने के लिए धन न होने पर प्रेम पूर्ण वचन से भी अतिथि की सेवा होती है।

3. गृध्रोऽवदत्-“मार्जारो हि मांसरुचिः।” पक्षिशावकाश्चात्र निवसन्ति तेनाहत्मेवं ब्रवीमि। तत्छ्रुत्वा मार्जारो भूमिं स्पृष्ट्वा कर्णौ स्पृशति ब्रूते च-मया धर्मशास्त्रं श्रुत्वा वीतरागेणेदं दुष्करं व्रतं चान्द्रायणमध्यवसितम्। परस्परं विवदमानानामपि धर्मशास्त्राणाम् “अहिंसा परमो धर्मः!” इत्यत्रैकमत्यम्।

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शब्दार्थ :
अवदत्-बोले-Spoke; तेनाहमेवं-इससे मैं इस प्रकार-I am for this, that; वीतरागेणेदं-राग आदि चले गए हों-Attachtment and aversion has gone; चान्द्रायणमध्यवसितम्-चन्द्रायण व्रत का अनुष्ठान-worship of Chandrayan fast; इत्यत्रैकमत्यम्-एक मत है-For one aim.

हिन्दी अर्थ :
तब गृद्ध बोला-बिलाव की रुचि मांस में होती है और यहाँ पक्षियों के बच्चे रहते हैं इसलिए मैंने ऐसा कहा। यह सुनकर बिलाव पृथ्वी का स्पर्श कर कानों को पकड़ता हुआ बोला-मैं धर्मशास्त्र का श्रवण करते हुए वीतराग होकर इस दुष्कर चान्द्रायण व्रत का अनुष्ठान कर रहा हूँ। परस्पर विवाद मानने वालों में भी धर्मशास्त्र कहते हैं-अहिंसा ही परम धर्म है।

4. एवं विश्वास्य स मार्जारस्तरुकोटरे स्थितः। ततो दिनेषु गच्छत्सु पक्षिशावकानाक्रम्य कोटरमानीय प्रत्यहं खादति। येषामपत्यानि खादितानि तैः शोकातैर्विलपद्भिरितस्ततो जिज्ञासा समारब्धा। तत्परिज्ञाय मार्जारः कोटरान्निः सृत्य बहिः पलायितः। पश्चात्पक्षिभिरितस्ततो निरूपयद्भिः तत्र तरु कोतरे शावकास्थीति प्राप्तानि। अनन्तरं ते ऊचुः-“अनेनैव जरद्गवेनास्माकं शावकाः खादिताः” इति सर्वैः पक्षिभिनिश्चित्य गृध्रो व्यापादितः अतोऽहं ब्रीवीमि –
अज्ञातकुलशीलस्य वासो देयो न कस्यचित्।
मार्जारस्य हि दोषेण हतो गृध्रो जरद्गवः॥

शब्दार्थ :
मार्जारस्तकोटरे-विलाव वृक्ष की कोटर में-Cat in the hole of tree; गच्छसु-जाने लगा-To going; निसृत्य-बाहर निकलकर-After get out; पलायितः-भागा-Run; प्राप्तानि-प्राप्त किया-Received; अनेनैव-एक तरह-Like that; व्यापादितः-मर गए-Death; अज्ञातकुलशीलस्य-जिसका कुल व शील ज्ञात नहीं-Who has no knowledge of family & nature; जरद्गवः-जरद्गव ने-Jaradgavaney.

हिन्दी अर्थ :
इस तरह गृद्ध को विश्वास में लेकर वह बिलाव वृक्ष के कोटर में रहने लगा। फिर कुछ दिन बीतने पर पक्षि शावकों को बिलाव खा गया था वे पक्षी शोक के कारण विलाप करते हुए अपने बच्चों को ढूँढ़ने लगे। यह जान बिलाव कोटर से निकलकर भाग गया। पक्षियों द्वारा इधर-उधर अच्छी तरह ढूँढ़े जाने पर उस वृक्ष के कोटर में शावकों की अस्थियां मिलीं तब वे बोले-इस गृद्ध ने ही हमारे बच्चों को खाया-ऐसा निश्चय कर सभी पक्षियों ने गृद्ध को मार डाला। इसीलिए मैं कहता

जिसके चरित्र एवं कुल की जानकारी न हो, उसे कभी भी अपने पास नहीं रखना चाहिए क्योंकि इसी भूल के कारण बिलाव के कर्मों का फल जरद्गव को भोगना पड़ा।

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 28 भारत की जनसंख्या एवं वितरण

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 28 भारत की जनसंख्या एवं वितरण

MP Board Class 6th Social Science Chapter 28 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए
(अ) भारत में जनसंख्या की कौन-कौन-सी विशेषताएँ हैं ? नाम बताते हुए किसी एक को विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित –

  • व्यावसायिक भिन्नता
  • स्त्री-पुरुष अनुपात में अन्तर
  • आयु संरचना
  • साक्षरता स्तर,
  • ग्रामीण व नगरीय विभिन्नता,
  • सांस्कृतिक भिन्नता।

ग्रामीण व नगरीय विभिन्नता-भारत गाँवों का देश है यहाँ लगभग 5 लाख गाँव हैं और कुल आबादी का तीन चौथाई भाग अर्थात् 68.8 प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में रहती है। 31-2 प्रतिशत जनसंख्या नगरों में बसती है जहाँ के अधिकतर व्यक्ति कृषि के अतिरिक्त सेवा कार्य, उद्योग, व्यापार, परिवहन आदि से जीविका चलाते हैं।

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(ब) भारत में अधिक जनसंख्या वाले राज्य बताइए।
उत्तर:
भारत में अधिक जनसंख्या वाले राज्य हैं – उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखण्ड, बिहार, कर्नाटक।

(स) भारत की प्रमुख जनजातियों का वितरण बताइए।
उत्तर:
भारत में सर्वाधिक जनजाति वाले राज्य हैंनागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, असम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार आदिवासी जनसंख्या के मध्यवर्ती क्षेत्र हैं।

(द) मध्य प्रदेश में कौन-कौन-सी जनजातियाँ रहती हैं ? किन्हीं तीन के नाम लिखिए।
उत्तर:
भील, कोल और कोरकू।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति करिए
(अ) भारत की ………… प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में रहती है।
(ब) मध्य प्रदेश की साक्षरता दर ………….. है।
(स) स्त्री व पुरुष जनसंख्या के संख्यात्मक अनुपात को ………… कहते हैं।
(द) भारत की लगभग दो तिहाई जनसंख्या …………. पर निर्भर है।
उत्तर:
(अ) 68.8
(ब) 64.3%
(स) स्त्री-पुरुष अनुपात
(द) कृषि।

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प्रश्न 3.
सही जोड़ी बनाइए –
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 28 भारत की जनसंख्या एवं वितरण img 1
उत्तर:
(अ) (iii) बिहार
(ब) (i) केरल वाला राज्य
(स) (iv) असम
(द) (ii) मध्य प्रदेश

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 4 प्रायोगिक ज्यामिती Intext Questions

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 4 प्रायोगिक ज्यामिती Intext Questions

MP Board Class 8th Maths Chapter 4 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 64

इन्हें कीजिए

प्रश्न 1.
क्या एक अद्वितीय चतुर्भुज की रचना के लिए कोई भी पाँच माप (भुजाओं और कोणों की) पर्याप्त हैं?
उत्तर:
हाँ, किसी भी अद्वितीय चतुर्भुज की रचना के लिए कोई भी पाँच माप पर्याप्त हो सकती हैं।

सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए (क्रमांक 4.1) –

प्रश्न 1.
अरशद के पास एक चतुर्भुज ABCD की पाँच माप हैं। ये माप AB = 5 cm, ∠A = 50°, AC = 4 cm, BD = 5 cm और AD = 6 cm हैं। क्या वह इन मापों से एक अद्वितीय चतुर्भुज बना सकता है? अपने उत्तर के कारण दीजिए।
उत्तर:
दी गई मापों से चतुर्भुज ABCD नहीं बन सकता है। कारण निम्न हैं –

  1. विकर्ण AC =4 cm लेने पर ∆ABC की रचना सम्भव है परन्तु ∆ACD की रचना सम्भव नहीं है। अतः चतुर्भुज ABCD नहीं बन सकता है।
  2. विकर्ण BD = 5 cm लेने पर AABD एवं ABCD सम्भव नहीं है। अतः चतुर्भुज ABCD बनना असम्भव है।

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 66

सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए (क्रमांक 4.2) –

प्रश्न 1.
हमने देखा कि एक चतुर्भुज की पाँच मापों से एक अद्वितीय चतुर्भुज की रचना की जा सकती है। क्या आप सोचते हैं कि चतुर्भुज की किन्हीं पाँच मापों से ऐसी रचना की जा सकती है?
उत्तर:
हाँ, एक अद्वितीय चतुर्भुज की रचना करने के लिए पाँच मापों का होना आवश्यक है। परन्तु इन मापों का अद्वितीय होना भी आवश्यक है। अद्वितीय चतुर्भुज की रचना के लिए निम्न मापों का होना आवश्यक है –

  1. चारों भुजाएँ और एक विकर्ण।
  2. दो विकर्ण और तीन भुजाएँ।
  3. दो आसन्न भुजाएँ और तीन कोण।
  4. तीन भुजाएँ और उनके बीच के दो कोण।
  5. अन्य विशिष्ट गुण।

प्रश्न 2.
क्या आप एक समान्तर चतुर्भुज BATS की रचना कर सकते हैं जिसमें BA = 5 cm, AT = 6 cm और AS = 6.5 cm हो? क्यों?
उत्तर:
हाँ, इन मापों से समान्तर चतुर्भुज BATS की रचना की जा सकती है। इन मापों से ∆BAS और ∆SAT की रचना करके समान्तर चतुर्भुज BATS की रचना की जा सकती है।

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प्रश्न 3.
क्या आप एक समचतुर्भुज (Rhombus) ZEAL की रचना कर सकते हैं जिसमें ZE = 3.5 cm विकर्ण EL= 5 cm है ? क्यों ?
उत्तर:
हाँ, दी गई मापों से सम-चतुर्भुज ZEAL की रचना कर सकते हैं। समचतुर्भुज की रचना ∆ZEL तथा ∆LEA की रचना करके की जा सकती है।

प्रश्न 4.
एक विद्यार्थी चतुर्भुज PLAY की रचना करने का प्रयास करता है जिसमें PL = 3 cm, LA = 4 cm, AY = 4.5 cm, PY = 2 cm और LY = 6 cm है, परन्तु वह इसकी रचना नहीं कर सका। कारण बताइए।
हल:
चतुर्भुज PLAY की रचना करने के लिए इसे दो त्रिभुजों ∆PLY तथा ∆LAY में विभाजित किया। दी हुई मापों से ∆LAY की रचना की। ∆PLY की रचना दी गई मापों से असम्भव है, क्योंकि PL + PY < LY अर्थात् 3 + 2 < 6 अतः ∆PLY की रचना सम्भव नहीं है। अत: चतुर्भुज PLAY को दो त्रिभुजों में विभाजित नहीं किया जा सकता। इसलिए चतुर्भुज PLAY की रचना नहीं की जा सकती है।
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