MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 2 कालज्ञो वराहमिहिरः

In this article, we will share MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 2 कालज्ञो वराहमिहिरः Pdf, Sanskrit Class 8 Chapter 2 Mp Board, these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 2 कालज्ञो वराहमिहिरः

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 2 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 2 Mp Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत(एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) वराहमिहिरस्य जन्म कुत्र अभवत्? (वराहमिहिर का जन्म कहाँ हुआ?)
उत्तर:
कपित्थग्रामे। (कपित्थ गाँव में)

(ख) वराहमिहिरस्य पितुः नाम किम्? (वराहमिहिर के पिता का नाम क्या था?)
उत्तर:
आदित्यदासः। (आदित्यदास)

MP Board Solutions

(ग) वराहमिहिरः कस्मात् ज्यौतिषं पठितवान्? (वराहमिहिर ने किससे ज्योतिष पढ़ी?)
उत्तर:
स्वकीयजनकात्। (अपने पिता से)

(घ) वराहमिहिरः खगोलशास्त्रं कस्मात् पठितवान्? (वराहमिहिर ने खगोलशास्त्र किससे पढ़ा?)
उत्तर:
आर्यभट्टात्। (आर्यभट्ट से)

(ङ) वराहमिहिरः अध्ययनं समाप्य कुत्र अगच्छत्? (वराहमिहिर अध्ययन समाप्त करके कहाँ गये?)
उत्तर:
उज्जयिनीम्। ( उज्जयिनी)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 2 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) वराहमिहिरस्य जन्म कदा अभवत्? (वराहमिहिर का जन्म कब हुआ?)
उत्तर:
वराहमिहिरस्य जन्म ४९९ ख्रिस्ताब्दे सजातम्। (वराहमिहिर का जन्म चार सौ निन्यानवे ईस्वी में हुआ।)

(ख) वराहमिहिरः कदा दिवङ्गतः? (वराहमिहिर कब स्वर्गवासी हुए?)
उत्तर:
वराहमिहिरः ५८७ ख्रिस्ताब्दे दिवङ्गतः। (वराहमिहिर पांच सौ सतासी ईस्वी में स्वर्गवासी हुए।)

(ग) भारते फलितज्यौतिषस्य प्रथमः आचार्यः कः। अभवत्? (भारत में फलितज्योतिष के प्रथम आचार्य कौन हुए?)
उत्तर:
भारते फलितज्योतिषस्य प्रथमः आचार्यः वराहमिहिरः अभवत्। (भारत में फलितज्योतिष के प्रथम आचार्य वराहमिहिर हुए)

(घ) वराहमिहिरेण के ग्रन्थाः विरचिताः। (वराहमिहिर ने कौन से ग्रन्थ रचे?)
उत्तर:
वराहमिहिरेण बृहत्संहिता-बृहज्जातकम्पञ्च सिद्धान्तिका ग्रन्थाः विरचिताः। (वराहमिहिर ने वृहत्संहिता, बृहज्जातकम् पंञ्चसिद्धान्तिका ग्रन्थ रचे।)

(ङ) पादपाः वल्मीकाश्च किं प्रदर्शयन्ति? (वृक्ष और दीमक क्या प्रकट करते हैं?)
उत्तर:
पादपाः वल्मीकाश्च अधोभौमिकजलस्थिति प्रदर्शयन्ति। (वृक्ष और दीमक भूमि के नीचे जल होना प्रकट करते हैं।)

Class 8th Sanskrit Chapter 2 Mp Board प्रश्न 3.
उचितशब्देन रिक्तस्थानं पूरयत(उचित शब्द द्वारा खाली स्थान भरो-)
(क) वराहमिहिरः अध्ययनं समाप्य ………… आगतः। (उज्जयिनीम्/पाटलीपुत्र नगरम्)
(ख) आर्यभट्टः ……….. आसीत्। (खगोलशास्त्री/साहित्यशास्त्री)
(ग) बृहज्जातकम् नाम ग्रन्थः ………… विरचितः। (आर्यभटेन/वराहमिहिरेण)
(घ) कपित्थग्रामः ………… निकटे अस्ति। (पाटलिपुत्रनगरस्य/उज्जयिन्याः)
(ङ) गुरुवाकर्षणस्य सिद्धान्तं ……….. प्रतिपादितम्।। (आदित्यदासेन/वराहमिहिरेण)
उत्तर:
(क) उज्जयिनीम्
(ख) खगोलशास्त्री
(ग) वराहमिहिरेण
(घ) उज्जयिन्याः
(ङ) वराहमिहिरेण।

MP Board Solutions

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 2 प्रश्न 4.
उचितं योजयत(सही को मिलाओ-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 2 कालज्ञो वराहमिहिरः 1
उत्तर:
(क) → (iii)
(ख) → (iv)
(ग) → (i)
(घ) → (v)
(ङ) → (ii)

Class 8 Sanskrit Chapter 2 Kalagyo Varahmihir प्रश्न 5.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षं’न’ इति लिखत (शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ (हाँ) एवं अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न”नहीं) लिखो-)
(क) “पञ्चसिद्धान्तिका” इत्यस्य ग्रन्थस्य रचयिता वराहमिहिरः अस्ति।
(ख) बृहज्जातकम् ग्रन्थस्य रचयिता आर्यभट्टः अस्ति।
(ग) आर्यभट्टः खगोलशास्त्री आसीत्।
(घ) वराहमिहिरस्य कृता कालगणना प्रामाणिकी अस्ति।
(ङ) वराहमिहिरस्य जन्म वर्तमानमध्यप्रदेशराज्ये अभवत्।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) आम्
(घ) आम्
(ङ) आम्।

Sanskrit Chapter 2 Class 8 Mp Board प्रश्न 6.
नामोल्लेखपूर्वकं सन्धिविच्छेदं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए सन्धि विच्छेद करो-)
(क) आदित्योपासकः
(ख) अस्मिन्नेव
(ग) समाप्याध्ययनम्
(घ) बालकोऽजायत
(ङ) वर्द्धिताश्च
(च) खगोलशास्त्रस्याध्ययनम्।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 2 कालज्ञो वराहमिहिरः 2

कालज्ञो वराहमिहिरः हिन्दी अनुवाद

अस्ति उज्जयिन्याः निकटे ‘कपित्थ’ (कायथा) नामाख्यो ग्रामः। तत्र आदित्योपासकः ‘आदित्यदासः नामा कश्चित् विप्रः प्रतिवसति स्म। तस्य गृहे ‘वराहमिहिरः नामः बालकोऽजायत। वराहमिहिरम्य जन्म ४९९ (नवनवत्यधिक चतुश्शतके), ख्रिस्ताब्दे सञ्जातम्।।

अनुवाद :
उज्जयिनी के पास ‘कपित्थ’ (कायथा) नामक गाँव है। वहाँ सूर्य का भक्त ‘आदित्यदास’ नामक कोई ब्राह्मण रहता था। उसके घर में ‘वराहमिहिर’ नामक बालक ने जन्म लिया। वराहमिहिर का जन्म 499 (चार सौ निन्यानवे) ईस्वी में हुआ।

बालकः वराहमिहिरः स्वकीयपित्रा एक ज्यौतिष-विद्यामध्यगच्छत्। ततः सः पाटिलपुत्रनगरं गन्या प्रसिद्धखगोलशास्त्रज्ञात् आर्यभट्टात् खगोलशास्त्रस्याध्ययनं कृतवान्।

अनुवाद :
बालक वराहमिहिर ने अपने पिता से ही ज्योतिष विद्या का अध्ययन किया। उसके पश्चात् उन्होंने पाटलिपुत्र (पटना) नगर जाकर प्रसिद्ध खगोलशास्त्री आर्यभट्ट से खगोलशास्त्र (आकाश मण्डल का शास्त्र) का अध्ययन किया।

MP Board Solutions

तदानीम् उज्जयिनी विद्यायाः प्रमुखकेन्द्रमासीत्। उज्जयिन्यां गुप्तवंशस्य संरक्षणे बहुविधकला-विज्ञान-सांस्कृतिककेन्द्रादीनि संरक्षितानि वर्द्धितानि चासन्। अत्र नानादिग्देशेभ्यः विद्वज्जनानां समागमः भवतिस्म अत एव वराहमिहिरोऽपि समाप्याध्ययनम् अस्मिन्नेव नगरे समागतः।

अनुवाद :
उस समय उज्जयिनी विद्या का प्रमुख केन्द्र थी। उज्जयिनी में गुप्तवंश के संरक्षण (देखरेख) में अनेक प्रकार के कला, विज्ञान और सांस्कृतिक केन्द्र आदि संरक्षित और विकसित थे। यहाँ विभिन्न दिशाओं और देशों से विद्वान् लोगों का मेल होता था। इसीलिए वराहमिहिर भी अध्ययन समाप्त करके इसी नगर में आ गये।

वराहमिहिरः देवज्ञः वैज्ञानिकश्चासीत्। सः। गतानुगतिकताया: स्थाने वैज्ञानिकदृष्टिकोणस्य महत्वं प्रतिपादिलवान्। ग्रहनक्षत्रप्रभावाश्रितं फलित-ज्यौतिषं नाम शास्त्रं तस्दा प्रियपतिपााविषयोऽभवत्। तेन कृता कालगणना प्रामाणिकी अस्ति। भारते फलितज्यौतिषस्य प्रथमः आचार्य: वराहमिहिरः एव अस्ति न तत्पूर्वं फलितज्योतिषस्य शास्त्रं प्राप्यते भारते। एष एवं सर्वप्रथमं प्रतिपादितवान् यत् चन्द्रस्त्र प्रकाश: स्वीकीयः नास्ति, अपितु सः सूर्यस्य प्रकाशेन प्रकाशते।

अनुवाद :
वराहमिहिर वेदों के ज्ञाता और वैज्ञानिक थे। उन्होंने गतानुगतिकता (अन्धानुकरण या दूसरों की नकल करना) के स्थान पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण का महत्त्व समझाया। ग्रह नक्षत्रों के प्रभाव पर आधारित फलित-ज्योतिष (नक्षत्र ग्रहों के अनुसार फल बताने वाली विद्या) नामक शास्त्र उनका प्रिय प्रतिपादन (विचार) किये जाने योग्य विषय हुआ। उनके द्वारा की गयी काल की गणना प्रामाणिक है। भारत में फलितज्योतिष के प्रथम आचार्य वराहमिहिर ही हैं। उनसे पहले भारत में फलितज्योतिष का शास्त्र प्राप्त नहीं होता। इन्होंने ही सबसे पहले समझाया कि चन्द्रमा का प्रकाश अपना नहीं है, बल्कि वह सूर्य के प्रकाश से चमकता है।

वराहमिहिरेण बृहत्संहिता-बृहज्जातकम्-पञ्चसिद्धान्तिका ग्रन्थाः विरचिताः। एतेषु ग्रन्थेषु खगोलविद्यायाः गूढ़तत्त्वानां प्रतिपादनमस्ति। अनेन न केवल खगोलतत्त्वानां निरूपणं कृतम् अपितु पृथिव्याः गोलकत्वम्, गुरुत्वाकर्षणस्य सिद्धान्तम्, पर्यावरणविज्ञानम्, जलविज्ञानम्, भूविज्ञानमपि विस्तरेण विवेचितम्। “पादपाः वल्मीकाश्च अधोभौमिकजलस्थितिं प्रदर्शयन्ति।” इति तस्य कथनमासीत्। आधुनिकवैज्ञानिकाः अपि तानवलम्ब्य अन्वेषणं कुर्वन्ति।

अनुवाद :
वराहमिहिर ने ‘वृहत्संहिता,’ बृहज्जातकम्’ और ‘पञ्चसिद्धान्तिका’ ग्रन्थ रचे। इन ग्रन्थों में आकाशमण्डल की विद्या के गहन तत्वों को समझाया गया है। इन्होंने न केवल खगोल तत्त्वों का निरूपण किया बल्कि पृथ्वी के गोल होने का, गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का, पर्यावरण विज्ञान का जलविज्ञान का और भू-विज्ञान का भी विस्तार से वर्णन किया। “वृक्ष और दीमक भूमि के नीचे जल होना प्रकट करते हैं।” यह उनका कहना था। आधुनिक वैज्ञानिक भी उनका सहारा लेकर खोज करते हैं।

नानादेशेषु परिभ्रमन् स्वकीयज्ञानदीप्त्या दीप्यमानः ५८७ (सप्तशीत्यधिकं पञ्चशतम्) ख्रिस्ताब्दे सः दिवङ्गतः। स्वकीयविस्तृतज्ञानेन खगोलसदृशं गहनविषयमपि सरलं प्रस्तुतवान्। ज्यौतिषविद्यामहार्णवं तर्तुं तस्य ग्रन्थाः नौकाः इव सन्ति। सः महान् कालज्ञः आसीत्। ज्योतिर्विद्यायां तु वराहमिहिरः तिमिरनाशकः सूर्य इव आसीत्।

अनुवाद :
अनेक देशों में घूमते हुए अपनी ज्ञान की ज्योति से प्रकाशमान वह 587 (पाँच सौ सतासी) ईस्वी में स्वर्गवासी हो गये। अपने विस्तृत ज्ञान से खगोल जैसे गहन विषय को भी सरल कर दिया। ज्योतिष विद्या के महासागर को पार करने के लिए उनके ‘ग्रन्थ नाव के समान हैं। वह महान ज्योतिषी थे। ज्योतिर्विद्या में तो वराहमिहिर अन्धकार का विनाश करने वाले सूर्य के समान थे।

कालज्ञो वराहमिहिरः शब्दार्थाः

कालज्ञः = ज्योतिषी। अजायत = जन्म लिया। वल्मीकाः = दीमक। महार्णवम् = महासागर को। गतानुगतिकताया: = अन्धानुकरण। तिमिरनाशकः = अन्धकार विनाशक। खगोल = आकाशमण्डल। फलितज्यौतिषम् = नक्षत्र ग्रहों के अनुसार फल बताने वाली विद्या।

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1

In this article, we will share MP Board Class 8th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1 Pdf, Mp Board Class 8 Sanskrit Solutions, these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi विविधप्रश्नावलिः 1

Class 8 Sanskrit Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 1.
प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत(प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखो-)
(क) मनसा किं करणीयम्? (मन से क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
स्मरणीयम्। (स्मरण करना चाहिए।)

(ख) वराहमिहिरस्य पितुः नाम किम्? (वराहमिहिर के पिता का नाम क्या था?)
उत्तर:
आदित्यदासः। (आदित्यदास)

(ग) कस्मिन् मासे गणतन्त्रदिवसः भवति? (किस महीने में गणतन्त्र दिवस होता है।)
उत्तर:
जनवरिमासे। (जनवरी महीने में।)

(घ) विद्या कीदृशी भवेत्? (विद्या कैसी होनी चाहिए?)
उत्तर:
अर्थकरी। (धन का संग्रह कराने वाली।)

MP Board Solutions

(ङ) ओरछानगरस्य स्थापना केन कृता? (ओरछा नगर की स्थापना किसके द्वारा की गयी?)
उत्तर:
रुद्रप्रतापेन। (रुद्रप्रताप के द्वारा)

(च) नरेन्द्रनाथस्य पितुः नाम किम् आसीत्? (नरेन्द्रनाथ के पिता का नाम क्या था?)
उत्तर:
विश्वनाथदत्तः। (विश्वनाथदत्त)

(छ) गजः कां नाशितवान्? (हाथी ने किसको नष्ट किया?)
उत्तर:
अण्डानि। (अण्डों को)

(ज) मित्रं कदा जानीयात्? (मित्र को कब जानना चाहिए?)
उत्तर:
आपत्सु। (आपत्तियों में)

MP Board Class 8 Sanskrit Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 2.
प्रश्नानाम् एकवाक्येन उत्तरं लिखत(प्रश्नों के एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) कुत्र चरणीयम्? (कहाँ चढ़ना चाहिए?)
उत्तर:
कष्टपर्वते चरणीयम्। (कष्टरूपी पर्वत पर चढ़ना चाहिए।)

(ख) वराहमिहिरेण के ग्रन्थाः विरचिताः? (वराहमिहिर ने कौन से ग्रन्थ रचे?)
उत्तर:
वराहमिहिरेण बृहत्संहिता-बृहज्जातकम्-पञ्च सिद्धान्तिका ग्रन्थाः विरचिताः। (वराहमिहिर ने बृहत्संहिता, बृहज्जातकम्, पसिद्धान्तिका ग्रन्थ रचे।)

(ग) राष्ट्रभक्तैः का प्रतिज्ञा कृता? (राष्ट्रभक्तों द्वारा क्या प्रतिज्ञा की गयी?)
उत्तर:
राष्ट्रभक्तैः ‘सर्वैः राष्ट्रनायकैः सार्वभौमतन्त्रं रचयामः’ इति प्रतिज्ञा कृता। (राष्ट्रभक्तों द्वारा ‘सभी राष्ट्र के नायकों द्वारा सार्वभौमतन्त्र बनाना है’ ऐसी प्रतिज्ञा की गयी।)

(घ) अनभ्यासे किं विषम्? (अभ्यास न करने पर क्या विष है?)
उत्तर:
अनभ्यासे शास्त्रम् विषम्। (अभ्यास न करने पर शास्त्र विष है।)

(ङ) हरदौलमहाराजः किमर्थं विषपानं कृतवान्? (हरदौल महाराज ने किसलिये विषपान किया?)
उत्तर:
हरदौल महाराजः महाराज्याः सम्मानरक्षणाय राज्ञः सन्देहनिवारणाय च विषपानं कृतवान्। (हरदौल महाराज ने महारानी के सम्मान की रक्षा के लिए और राजा के सन्देह को दूर करने के लिए विषपान किया।)

(च) शिकागोनगरे विश्वधर्मसम्मेलने भारतस्य प्रतिनिधिः कः अभवत्? (शिकागो नगर में विश्वधर्म सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधि कौन हुए?)
उत्तर:
शिकागोनगरे विश्वधर्मसम्मेलने भारतस्य प्रतिनिधि स्वामी विवेकानन्दः अभवत्। (शिकागो नगर में विश्वधर्म सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधि स्वामी विवेकानन्द हुए?)

(छ) मण्डूकः मक्षिकां किम् उपायम् उक्तवान्? (मेंढक ने मक्खी को क्या उपाय कहा?)
उत्तर:
मण्डूकः मक्षिकां एकीभूता दुर्बलाः अपि सबलं शत्रु हन्तुं शक्नुवन्ति इति उपायम् उक्तवान्। (मेंढक ने मक्खी से एक होकर दुर्बल भी सबल शत्रु को मार सकते हैं, इस उपाय को कहा।)

MP Board Solutions

Sanskrit Class 8 Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 3.
कोष्ठकात् उचितानिपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत (कोष्ठक से उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थान भरो-)
(क) वराहमिहिरः अध्ययनं समाप्य ………… आगतः। (उज्जयिनीम्/पाटलिपुत्रनगरम्)
(ख) प्रतिग्रहणस्य कामना ………….. । (कुरु/मा कुरु)
(ग) उद्योगे ………… दारिद्रयम्। (अस्ति/नास्ति)
(घ) केशवदासः ………….. कविः आसीत्। (संस्कृत भाषायाः/हिन्दीभाषायाः)
(ङ) राज्येषु ………….. प्रातिनिध्यं वहन्ति। (भोपालम्/राज्यपाला:)
(च) लोकहितं …………..। (वदनीयम्/करणीयम्)
(छ) मत्तगजः…………..पतितः। (अङ्के/पड़े)
उत्तर:
(क) उज्जयिनीम्
(ख) मा कुरु
(ग) नास्ति
(घ) हिन्दी भाषायाः
(ङ) राज्यपालाः
(च) करणीयम्
(छ) पड़े।

Class 8th Sanskrit Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 4.
अधोलिखितपदानां विलोमानि लिखत(नीचे लिखे शब्दों के विलोम शब्द लिखो-)
(क) सततम्
(ख) तिमिरः
(ग) उत्कर्षस्य
(घ) अमृतम्
(ङ) गुणेषु
(च) मित्रम्।
उत्तर:
(क) असततम्
(ख) प्रकाशः
(ग) अपकर्षस्य
(घ) विषम्
(ङ) दोषेषु
(च) शत्रुः।

MP Board Solution Class 8 Sanskrit Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 5.
पदानां समानार्थकम् पदं लिखत(शब्दों के समान अर्थ वाले शब्द लिखो-)
(क) बुद्धिः
(ख) मार्गदर्शनम्
(ग) पुष्पाणि
(घ) वीरः
(ङ) नृपः
(च) महार्णवम्।
उत्तर:
(क) मतिः
(ख) पथप्रदर्शनम्
(ग) कुसुमानि
(घ) शूरः
(ङ) राजा
(च) महासागरम्।

MP Board Solutions

Class 8 Sanskrit Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 6.
नामोल्लेखपूर्वकं सन्धिविच्छेदं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए सन्धि विच्छेद करो-)
(क) बालकोऽजायत
(ख) वर्द्धिताश्च
(ग) अत्रैव
(घ) अद्यावधि
(ङ) एवाकर्म।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1 Q6

Vividh Prashnavali 1 Class 8 Sanskrit प्रश्न 7.
नामोल्लेखपूर्वकं समासविग्रहं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए समास विग्रह करो-)
(क) परोपकारः
(ख) पर्यावरणविज्ञानम्
(ग) धनाभावेन
(घ) क्षीरविवर्जिताः
(ङ) शिल्पकार्यम्
(च) गणतन्त्रदिवसः।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1 Q7

Vividh Prashnavali 1 Sanskrit प्रश्न 8.
उचितं मेलयत (उचित को जोड़ो-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1 Q8
उत्तर:
(क) → (v)
(ख) → (i)
(ग) → (iv)
(घ) → (ii)
(ङ) → (iii)

Sanskrit Vividh Prashnavali 1 Class 8 प्रश्न 9.
धातुरूपाणांसमक्षंधातु-लंकार-पुरुष-वचनानि च लिखत (धातु रूपों के सामने धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखो-)
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1 Q9
MP Board Class 8 Sanskrit प्रश्न 10.
शब्दरूपाणां समक्षं मूलशब्द-विभक्तिलिङ्ग-वचनानि च लिखत (शब्द रूपों के सामने मूल शब्द, विभक्ति, लिङ्ग और वचन लिखो-)
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions विविधप्रश्नावलिः 1 Q10
MP Board Solutions

Class 8 Sanskrit Prashnavali 1 प्रश्न 11.
अधोलिखितगद्यांशंपठित्वा उत्तराणि लिखत (नीचे लिखे हुए गद्यांश को पढ़कर उत्तर लिखो-)
(I) ममपरिसरे एकम् पुष्पोद्यानं वर्तते। तत्रविविधवर्णानि पुष्पाणि पर्यटकानां चित्तं मोदयन्ते। उद्यानस्य नातिदूरे हिन्दीभाषायाः प्रसिद्धकवेः केशवदासस्य स्थानमास्ति। षोडशशताब्दात् आरभ्य मम निर्माणम् अद्यावधि चलति एवं। परं सर्वाधिकं निर्माणकार्यम् महाराजवीरसिंहप्रथमस्य शासने अभवत्।

अनुवाद :
मेरे परिसर में एक फूलों का बाग है। वहाँ विभिन्न रंगों के फूल पर्यटकों के मन को प्रसन्न करते हैं। उद्यान के पास में हिन्दी भाषा के प्रसिद्ध कवि केशवदास का स्थान है। सोलहवीं शताब्दी से लेकर मेरा निर्माण आज भी चल ही रहा है। परन्तु सबसे अधिक निर्माण कार्य महाराज वीरसिंह प्रथम के शासन में हुआ। मेरा इतिहास रोचक और कौतूहलपूर्ण है। मध्यकाल में मेरा विशिष्ट स्थान और महत्त्व था। आज भी रामराजा वहीं विराजते हैं। अब भी लोग प्रतिवर्ष आते हैं (और) मुझे देखकर प्रसन्न होते हैं। लक्ष्मीनारायण मन्दिर, फूलबाग, दीवान, हरदौल भवन, सुन्दर भवन, शहीद स्मारक आदि अन्य स्थल भी देखने योग्य हैं। प्रतिदिन यात्री आकर मेरे ऐतिहासिक स्वरूप को देखकर प्रसन्न होते हैं तथा उनको देखकर मैं भी प्रसन्न होता हूँ।

(क) मम परिसरे किं वर्तते? (मेरे परिसर में क्या है?)
उत्तर:
मम परिसरे एकम् पुष्पोद्यानं वर्तते। (मेरे परिसर में एक फूलों का बगीचा है।)

(ख) पर्यटकानां चित्तं कानि मोदयन्ति? (पर्यटकों के मन को कौन प्रसन्न करते हैं?)
उत्तर:
पर्यटकानां चित्तं विविधवर्णानि पुष्पाणि मोदयन्ति। (पर्यटकों के मन को अनेक रंगों के फूल प्रसन्न करते हैं।)

(ग) सर्वाधिक निर्माणकार्य कस्य शासने अभवत्? (सबसे अधिक निर्माणकार्य किसके शासन में हुआ?)
उत्तर:
सर्वाधिकं निर्माणकार्य महाराजवीरसिंह प्रथमस्य शासने अभवत्। (सबसे अधिक निर्माण कार्य महाराज वीरसिंह प्रथम के शासन में हुआ।)

(घ) केशवदासः कस्याः भाषायाः कविः आसीत्? (केशवदास किस भाषा के कवि थे?)
उत्तर:
केशवदासः हिन्दी भाषायाः कविः आसीत्। (केशवदासः हिन्दी भाषा के कवि थे।)
अथवा
(II) अस्ति उज्जयिन्याः निकटे ‘कपित्थ’ (कायथा) नामाख्यो ग्रामः। तत्र आदित्योपासकः आदित्यदासः’ नामा कश्चित् विप्रः प्रसिवसति स्म। तस्य गृहे वराहमिहिरः नामा बालकोऽजायत। वराहमिहिरस्य जन्म ४९९ (नवनवत्यधिक चतुश्शतके) ख्रिस्ताब्दे सञ्जातम्।।

बालकः वराहमिहिरः स्वकीयपित्रा एक ज्यौतिषविद्यामध्यगच्छत्। ततः सः पाटलिपुत्रनगरं गत्वा प्रसिद्ध-खगोलशास्त्रज्ञात् आर्यभट्टात् खगोलशास्त्रस्याध्ययन कृतवान्।

MP Board Solutions

अनुवाद :
उज्जयिनी के पास ‘कपित्थ’ (कायथा) नामक गाँव है। वहाँ सूर्य का भक्त ‘आदित्यदास’ नामक कोई ब्राह्मण रहता था। उसके घर में ‘वराहमिहिर’ नामक बालक ने जन्म लिया। वराहमिहिर का जन्म 499 (चार सौ निन्यानवे) ईस्वी में हुआ।

बालक वराहमिहिर ने अपने पिता से ही ज्योतिष विद्या का अध्ययन किया। उसके पश्चात् उन्होंने पाटलिपुत्र (पटना) नगर जाकर प्रसिद्ध खगोलशास्त्री आर्यभट्ट से खगोलशास्त्र (आकाश मण्डल का शास्त्र) का अध्ययन किया।

(क) ‘कपित्थ’ नामाख्यो ग्रामः कस्याः निकटे अस्ति? (‘कपित्थ’ नामक ग्राम किसके पास है?)
उत्तर:
‘कपित्थ’ नामाख्यो ग्रामः उज्जयिन्याः निकटे अस्ति। (‘कपित्थ’ नामक ग्राम उज्जयिनी के पास है।)

(ख) आदित्यदासस्य पुत्रस्य नाम किम्? (आदित्यदास के पुत्र का नाम क्या था?)
उत्तर:
आदित्यदासस्य पुत्रस्य नाम ‘वराहमिहिरः। (आदित्यदास के पुत्र का नाम ‘वराहमिहिर’ था।)

(ग) वराहमिहिरस्य जन्म कदा अभवत्? (वराहमिहिर का जन्म कब हुआ?)
उत्तर:
वराहमिहिरस्य जन्म ४९९ (नवनवत्यधिक चतुश्ततके) ख्रिस्ताब्दे अभवत्। (वराहमिहिर का जन्म 499 (चार सौ निन्नानवे) ईस्वी सन् में हुआ।)

(घ) वराहमिहिरः कस्मात् खगोलशास्त्रस्याध्ययनं कृतवान्? (वराहमिहिर ने किससे खगोलशास्त्र का अध्ययन किया?)
उत्तर:
वराहमिहिरः आर्यभट्टात् खगोलशास्त्रस्याध्ययनं कृतवान्। (वराहमिहिर ने आर्यभट्ट से खगोलशास्त्र का अध्ययन किया।)

MP Board Sanskrit Class 8 प्रश्न 12.
अधोलिखितं पद्यं पठित्वा उत्तराणि लिखत (नीचे लिखे हुए पद्य को पढ़कर उत्तर लिखो-)
(I) उद्योग नास्ति दारिद्रयं जपतः नास्ति पातकम्।
मौने च कलहो नास्ति नास्ति जागरिते भयम्॥

MP Board Solutions

अनुवाद :
परिश्रम करने से दरिद्रता (गरीबी) नहीं रहती – है, भगवान् का नाम लेने से पाप नहीं रहते हैं। मौन (चुप) रहने। से लड़ाई-झगड़ा नहीं होता है और जागते रहने से (चोर आदि का) भय नहीं होता है।

(क) दारिद्रयं केन नष्टम्? (दरिद्रता किससे नष्ट होती है?)
उत्तर:
दारिद्र्यं उद्योगेन नष्टम्। (दरिद्रता परिश्रम से नष्ट होती है।)

(ख) कस्य पातकं नास्ति? (किसके पाप नहीं होते हैं?)
उत्तर:
जपतः पातकं नास्ति। (भगवान् का नाम लेने वाले के पाप नहीं होते हैं।)

(ग) कलहः कुत्र नास्ति? (लड़ाई-झगड़ा कहाँ नहीं होता है?)
उत्तर:
कलहः मौने नास्ति। (लड़ाई-झगड़ा चुप रहने में नहीं होता है।)

(घ) जागरिते किं नास्ति? (जागते रहने से क्या नहीं होता?)
उत्तर:
जागरिते भयं नास्ति। (जागते रहने से भय नहीं होता।)
अथवा
(II) न भोंगभवने रमणीयम्,नच सुखशयने शयनीयम्।
अहर्निशं जागरणीयम्, लोकहितं मम करणीयम्?

अनुवाद :
(मुझे) न सुख देने वाले घर में रहना चाहिए और न सुख देने वाले बिस्तर पर सोना चाहिए। (मुझे) दिन-रात जागना चाहिए (और) संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए।

(क) कुत्र न रमणीयम्? (कहाँ नहीं रहना चाहिए?)
उत्तर:
भोगभवने न रमणीयम्। (सुख देने वाले घर में नहीं रहना चाहिए।)

(ख) कुत्र न शयनीयम्? (कहाँ नहीं सोना चाहिए?)
उत्तर:
सुखशयने न शयनीयम्। (सुख देने वाले बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए।)

MP Board Solutions

(ग) अहर्निशं किं करणीयम्? (दिन-रात क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
अहर्निशं जागरणीयम्। (दिन-रात जागना चाहिए।)

(घ) मम किं करणीयम्? (मुझे क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
मम लोकहितम् करणीयम् (मुझे संसार का कल्याण करना चाहिए।)

Sanskrit Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 13.
कोष्ठकात् उचितशब्दं चित्वा लिखत (कोष्ठक से उचित शब्द चुनकर लिखो-)
(क) स्वामीविवेकानन्दस्य गुरु ……….. आसीत्? (रामकृष्णपरमहंस/वेदव्यासः/रामः कृष्णः)
(ख) वराहमिहिरः ……….. आसीत्। (अज्ञः/विज्ञः/कालज्ञः/नीतिज्ञः)
(ग) मनसा सततम् ……….. (वदनीयम्/करणीयम्/स्मरणीयम्/रमणीयम्)
(घ) ……….. निर्धनस्य विषमस्ति। (रोगः/भोग:/योगः/नियोगः)
(ङ) ओरछानगरम् ……….. अस्ति। (भोपालमण्डले/टीकमगढ़मण्डले/रायसेनमण्डले/मन्दसौर मण्डले)
उत्तर:
(क) रामकृष्णपरमहंसः
(ख) कालज्ञः
(ग) स्मरणीयम्
(घ) भोगः
(ङ) टीकमगढ़मण्डले।

MP Board Class 8 Sanskrit Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 14.
भिन्नप्रकृतिकं शब्दं चिनुत(भिन्न स्वभाव के शब्द को चुनो-)
(क) जम्बूफलम्, कदलीफलम्, परीक्षाफलम्, श्रीफलम्।
(ख) गच्छति, धावति, हरिः, खेलति।
(ग) पाटलम्, चम्पकम्, दाडिमम्, कमलम्।
(घ) पितामहः, मातामहः, अतुलः, मातुलः।
(ङ) अद्य, श्वः, अश्वः, परश्वः।
उत्तर:
(क) परीक्षाफलम्
(ख) हरिः
(ग) दाडिमम्
(घ) अतुलः
(ङ) अश्वः

Sanskrit Mp Board Class 8 प्रश्न 15.
उचितविकल्पं चित्वा लिखत्(उचित विकल्प चुनकर लिखो-)
(क) स्वामीविवेकानन्दस्य बाल्यकालस्य नाम आसीत्? (गोरखनाथ:/नरेन्द्रनाथ:/केदारनाथ:/मत्स्येन्द्रनाथः)
(ख) शङ्करस्य भूषणम् अस्ति। (सर्प:/चन्द्र:/गङ्गा/विषम्)
(ग) आर्यभट्टः आसीत्। (खगोलशास्त्री/रसायनशास्त्री/शास्त्री/समाजशास्त्री)
(घ) दुःखसागरे। (त्वरणीयम्/करणीयम्/तरणीयम्/चरणीयम्)
उत्तर:
(क) नरेन्द्रनाथः
(ख) विषम्
(ग) खगोलशास्त्री
(घ) तरणीयम्।

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 9 वसन्तोत्सवः

In this article, we will share MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 9 वसन्तोत्सवः Pdf, Class 8 Sanskrit Chapter 9 Vasant Utsav, these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 9 वसन्तोत्सवः

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 9 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 9 Mp Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत(एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) वसन्तपञ्चमी कस्य आगमनं सूचयति? (वसन्त पञ्चमी किसके आगमन को सूचित करती है?)
उत्तर:
ऋतुराजवसन्तस्य (ऋतुराज वसन्त के)

(ख) केषु नूतनकिसलयरागः राजते? (किन पर नये पत्तों की शोभा सुशोभित होती है?)
उत्तर:
वृक्षेषु। (पेड़ों पर)

(ग) केकिलानां मधुरस्वरः किम् आकर्षित? (कोयलों का मधुर स्वर किसको आकर्षित करता है?)
उत्तर:
चित्तम्। (मन को)

MP Board Solutions

(घ) वसन्तोत्सवे कस्याः पूजनम् भवति? (वसन्त उत्सव में किसका पूजन होता है।)
उत्तर:
सरस्वत्याः। (सरस्वती का)

(ङ) ज्ञानस्य अधिष्ठात्री देवी का? (ज्ञान की मुख्य देवी कौन है?)
उत्तर:
शारदा। (सरस्वती)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 9 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) ऋतुराजवसन्तस्य आगमन-सूचना कदा भवति? (ऋतुराज वसन्त के आगमन की सूचना कब होती है?)
उत्तर:
ऋतुराजवसन्तस्य आगमन-सूचना माघमासस्य शुक्लपक्षस्य पञ्चम्यां तिथौ भवति। (ऋतुराज वसन्त के आगमन की सूचना माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होती है।)

(ख) आमेषु कीदृशाःभ्रमराः दृश्यन्ते? (आमों पर कैसे भंवरे दिखाई देते है?)
उत्तर:
आनेषु भ्रमन्तः भ्रमराः दृश्यन्ते? (आमों पर घूमते हुए भंवरे दिखाई देते हैं।)

(ग) तमिलनाडुराज्ये जनाः शारदां कथम् अर्चयन्ति। (तमिलनाडु राज्य में लोग शारदा को कैसे पूजते हैं?)
उत्तर:
तमिलनाडुराज्ये जनाः प्रकाशितान् हस्तलिखितान् ग्रन्थान् एकस्याम् पीठिकायां संस्थाप्य विविधैः उपचारैः शारदां अर्चयन्ति। (तमिलनाडु राज्य में लोग प्रकाशित हस्तलिखित ग्रन्थों को एक चौकी पर रखकर विभिन्न पूजा की विधियों से शारदा की पूजा करते हैं।)

(घ) वसन्तोत्सवः किं किं द्योतयति? (वसन्तोत्सव क्या-क्या प्रकट करता है।)
उत्तर:
वसन्तोत्सवः भारतीयानां उत्सवप्रियतायाः शास्त्रीयं, सामाजिक तथा वैज्ञानिक चिन्तनं अपि द्योतयति। (वसन्तोत्सव भारतीयों की उत्सव प्रियता की शास्त्रीय, सामाजिक तथा वैज्ञानिक सोच को भी प्रकट करता है।)

(ङ) उत्तरभारते कुत्र-कुत्र सरस्वतीपूजनं बहुमान्यम् अस्ति? (उत्तरभारत में कहाँ-कहाँ सरस्वती पूजा बहुत मान्य है?)
उत्तर:
उत्तर भारते बिहार प्रान्ते, बङ्गालप्रान्ते तथा काश्मीर प्रदेशे सरस्वतीपूजनं बहुमान्यम् अस्ति। (उत्तर भारत में बिहार प्रान्त में, बंगाल प्रान्त में तथा कश्मीर प्रदेश में सरस्वती पूजा बहुत मान्य है।)

Sanskrit Class 8 Chapter 9 Vasant Utsav प्रश्न 3.
प्रश्ननिर्माणं कुरुत (रेखांकितपदम् आधृत्य) [प्रश्न निर्माण करो (रेखांकित शब्द के आधार पर])
(क) विविधैः पुष्पैः ऋतुराजस्य स्वागतम् भवति। (विविध पुष्पों के द्वारा ऋतुराज का स्वागत होता है।)
उत्तर:
विविधैः पुष्पैः कस्य स्वागतम् भवति? (विविध पुष्पों के द्वारा किसका स्वागत होता है?)

(ख) पुस्तकानाम् अपि पूजनम् भवति। (पुस्तकों का भी पूजन होता है।)
उत्तर:
केषाम् अपि पूजनम् भवति? (किनका पूजन भी होता है?)

(ग) शारदाम् अर्चयन्ति। (शारदा की अर्चना करते हैं।)
उत्तर:
काम् अर्चयन्ति? (किसकी अर्चना करते हैं?)

MP Board Solutions

(घ) सौन्दर्य कामयिंतु वसन्तपूजनम् भवति। (सुन्दरता की कामना के लिए वसन्त पूजा होती
उत्तर :
सौन्दर्य कामयितु किम् भवति? (सुन्दरता की कामना के लिए क्या होती है?)

(ङ) श्रीपञ्चमीनाम्ना वसन्तपञ्चमी ज्ञायते। (श्रीपंचमी नाम से वसन्तपंचमी जानी जाती है।)
उत्तर:
श्री पञ्चमीनाम्ना का ज्ञायते? (श्रीपंचमी नाम से क्या जानी जाती है।)

Sanskrit Chapter 9 Class 8 Mp Board प्रश्न 4.
अर्थानुसारं युग्मानि योजयत (अर्थ के अनुसार जोड़े मिलाओ-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 9 वसन्तोत्सवः 1
उत्तर:
(क) → (iii)
(ख) → (v)
(ग) → (i)
(घ) → (ii)
(ङ) → (iv)

Class 8th Sanskrit Chapter 9 Mp Board प्रश्न 5.
नामोल्लेखपूर्वकं समासविग्रह कुरुत (नाम का उल्लेख करते हुए समास विग्रह करो-)
(क) सरस्वतीपूजनम्
(ख) वसन्तसमये
(ग) प्राचीनकाले
(घ) वसन्तोत्सवः।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 9 वसन्तोत्सवः 2

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 9 प्रश्न 6.
नामोल्लेखपूर्वकं सन्धिविच्छेदं कुरुत (नाम का उल्लेख करते हुए सन्धि-विच्छेद करो-)
(क) चरमोत्कर्षम्
(ख) पुराणेष्वपि
(ग) पूजनमपि
(घ) सममेव।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 9 वसन्तोत्सवः 3

Sanskrit Class 8 Chapter 9 Mp Board प्रश्न 7.
पाठात् पञ्च अव्ययानि चित्वा लिखत। (पाठ में से पाँच अव्यय चुनकर लिखो।)
उत्तर:
(क) अपि:
(ख) सर्वत्र
(ग) च
(घ) अधुना
(ङ) एव।

वसन्तोत्सवः हिन्दी अनुवाद

माघमासस्य शुक्लपक्षस्य पञ्चम्यां तिथौ ऋतुराजवसन्तस्य आगमनसूचना भवति। वसन्तपञ्चमी श्रीपञ्चमी नाम्ना अपि. ज्ञायते। अस्मिन् समये प्रकृतेः सौन्दर्यं चरमोत्कर्ष प्राप्नोति। सर्वत्र रमणीयतायाः दर्शनं भवति। वृक्षेषु नूतनकिसलयरागः राजते। क्षेत्रेषु सर्षपपुष्याणां सुषमा पीतिमा च मनोहारिणी दृश्यते। आनेषु मञ्जरीम् परितः भ्रमन्तः भ्रमराः दृश्यन्ते। कोकिलानां मधुरस्वरः चित्तम् आकर्षति। वसन्तसमये सर्वत्र रमणीयतायाः दर्शनम् भवति। वसन्तोत्सवे शीतकालस्य अनन्तरम् परम्परया सौन्दर्यस्य पूजनं क्रियते। विविधैः पुष्पैः, नवान्नैः, फलैः च ऋतुराजस्य वसन्तस्य स्वागतम् भवति। एषः उत्सवः सौन्दर्यस्य रमणीयतायाः पुष्याणां, किसलयानां मधुरागमनस्य च उत्सवः अस्ति।

MP Board Solutions

अनुवाद :
माघ के महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋतुओं के राजा वसन्त के आगमन की सूचना होती है वसन्त पंचमी को ‘श्री पंचमी’ के नाम से भी जाना जाता है। इस समय प्रकृति की सुन्दरता अत्यधिक उन्नति को प्राप्त करती है। सब जगह सुन्दरता के दर्शन होते हैं। पेड़ों पर नवीन पत्तों की शोभा सुशोभित होती है। खेतों में सरसों के फूलों की अत्यधिक शोभा और पीलापन मन को हरने वाला दिखाई देता है। आम के पेड़ों पर बौरों के चारों ओर घूमते हुए भँवरे दिखाई देते हैं। कोयलों का मधुर स्वर मन को आकर्षित करता है। वसन्त के समय में सब जगह सुन्दरता के दर्शन होते हैं। वसन्त के उत्सव में शीतकाल के बाद परम्परा से सुन्दरता का पूजन किया जाता है। अनेक फूलों, नये अन्नों और फलों से ऋतुओं के राजा वसन्त का स्वागत होता है। यह उत्सव सुन्दरता मनोहरता फूलों और पल्लवों के मधुर आगमन का उत्सव होता है।

वसन्तोत्सवस्य द्वितीयपक्षः अधिकः महनीयः अस्ति। भारते वसन्तवेलायां भगवत्याः सरस्वत्याः आराधनस्य अपि परम्परा विद्यते। वसन्तपञ्चमी ज्ञानस्य उपासनायाः आराधनायाः उत्सवः अस्ति। प्राचीनकाले वसन्तपञ्चम्यां ज्ञानयज्ञतपस्वरूपां सरस्वतीं जनाः पूजयन्ति स्म। अधुना अपि सम्पूर्णे देशे आध्यात्मिकजिज्ञासया अस्मिन् दिने जनाः ज्ञानस्य अधिष्ठात्रीं शारदां पूजयन्ति।

अनुवाद :
वसन्त उत्सव का द्वितीय पक्ष अधिक सम्मान के योग्य होता है। भारत में वसन्त की बेला में देवी सरस्वती की आराधना भी परम्परा है। वसन्त पंचमी ज्ञान की उपासना। (और) आराधना का उत्सव है। प्राचीन समय में वसन्त पंचमी पर ज्ञानयज्ञ (और) तप स्वरूप सरस्वती को लोग पूजते थे। अब भी सम्पूर्ण देश में आध्यात्मिक जिज्ञासा से इस दिन लोग ज्ञान की मुख्य देवी शारदा (सरस्वती) को पूजते हैं।

वसन्तोत्सवः वस्तुतः सांस्कृतिकः उत्सवः अस्ति। वैदिककालात् एव अस्मिन् दिने सरस्वत्याः उपासना भवति। महाभारते पुराणेष्वपि वसन्तोत्सवः सरस्वत्याः उपासनायाः उत्सवरूपेण दर्शितः। वसन्तपञ्चम्यां आगमविधिना महाशक्त्याः सरस्वत्याः वार्षिकपूजायाः विधानम् भवति।

अनुवाद :
वसन्त उत्सव वास्तव में सांस्कृतिक उत्सव है। वैदिक काल से ही इस दिन सरस्वती की उपासना होती है। महाभारत में पुराणों में भी वसन्त उत्सव सरस्वती की उपासना के उत्सव के रूप में दिखाया गया है। वसन्त पंचमी पर शास्त्र में वर्णित विधि से महाशक्ति सरस्वती की वार्षिक पूजा का विधान होता है।

विशेषतः उत्तरभारते बिहारप्रान्ते, बङ्गालप्रान्ते तथा काश्मीरप्रदेशे सरस्वतीपूजनं बहुमान्यम् अस्ति। दक्षिणे तमिलनाडुक्षेत्रे अपि एतस्य महत्त्वं विद्यते। तत्र आबालवृद्धपरिजनाः प्रकाशितान् हस्तलिखितान् ग्रन्थान् एकस्याम् पीठिकायां संस्थाप्य विविधैः उपचारैः शारदाम् अर्चयन्ति। एतेन सममेव वाद्ययन्त्राणां वीणादीनाम् पूजनमपि भवति। कुत्रचित् दक्षिणभारते शिल्पिनः स्वयन्त्राणाम् अपि अस्मिन् दिने पूजनं कुर्वन्ति।

अनुवाद :
विशेष रूप से उत्तर भारत में बिहार 7 में, बंगाल प्रान्त में तथा कश्मीर प्रदेश में सरस्वती पूजन ब न्य है। दक्षिण में तमिलनाडु क्षेत्र में भी इसका महत्त्व है. वहाँ बच्चों से लेकर वृद्ध तक (सभी) परिवार के लोग प्रकाशित (छपे) हाथ से लिखे ग्रन्थों को एक चौकी पर रखकर विविध पूजा की विधियों से शारदा की पूजा करते हैं। इसी समय वाद्य यन्त्र वीणा आदि का पूजन भी होती है। वहीं दक्षिण भारत में शिल्पी (कारीगर) अपने यन्त्रों (औजारों) का भी इसी दिन पूजन करते हैं।

सरस्वतीपूजनस्य वेदाध्ययन सत्रं श्रावणीपूर्णिमातः आरभ्य वसन्तपञ्चमी यावत् भवति। सरस्वती पूजयित्वा ऋतुपरिवर्तनस्यारम्भे जीवने हर्षोल्लासं, सौन्दर्य, शृंङ्गारं च कामयितु वसन्तस्य, कामदेवस्य अपि पूजनं परम्परा भवति। वस्तुतः भारतीयपरम्परायां वसन्तोत्सवः सौन्दर्यस्य, उल्लासस्य, ज्ञानस्य उपासनायाः उत्सवः। एषः भारतीयानां उत्सवप्रियतायाः शास्त्रीय, सामाजिक तथा वैज्ञानिक चिन्तनम् अपि द्योतयति।

MP Board Solutions

अनुवाद :
सरस्वती की पूजा वेद के अध्ययन की अवधि श्रावणी पूर्णिमा से आरम्भ होकर वसन्तपंचमी तक होती है। सरस्वती को पूजकर ऋतु परिवर्तन के आरम्भ में जीवन में हर्षोल्लास, सौन्दर्य और श्रृंगार की कामना के लिए वसन्त का (और) कामदेव का भी पूजन परम्परा से होता है। वस्तुतः भारतीय परम्परा में वसन्तोत्सव सौन्दर्य की, उल्लास की (और) ज्ञान की उपासना का उत्सव है। यह भारतीयों की उत्सव प्रियता की शास्त्रीय, सामाजिक तथा वैज्ञानिक सोच को भी प्रकट करता है।

वसन्तोत्सवः शब्दार्थाः

चरमोत्कर्षम् = अत्यधिक उन्नत। उल्लासः = हर्ष। नूतनकिसलयरागः = नवीन पत्तों की शोभा। आबालवृद्धाः = बच्चों से लेकर वृद्ध तक। मञ्जरी = बौर (आम के बौर)। अधिष्ठात्रीम्=मुख्यदेवीको।पीठिका-चौकी।वाद्ययन्त्राणाम् – (वाद्योपकरणानाम्) = बजाये जाने वाले यन्त्रों का (वीणा आदि। विधानम् = विधि। उपचारैः = पूजा विधि से। महनीयः = महत्तर। वेदाध्ययनसत्रम् = वेद की अध्ययन की अवधि। आगमविधिना = शास्त्रवर्णित विधि से।

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 1 लोकहितं मम करणीयम्

In this article, we will share MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 1 लोकहितं मम करणीयम् Pdf, Class 8 Mp Board Sanskrit Chapter 1, these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 1 लोकहितं मम करणीयम्

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 1 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 1 लोकहितं मम करणीयम् प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) मनसा किं करणीयम्? (मन से क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
स्मरणीयम्। (स्मरण करना चाहिए।)

(ख) वचसा किं करणीयम्? (वाणी से क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
वदनीयम्। (बोलना चाहिए।)

MP Board Solutions

(ग) कस्मिन् न रमणीयम्? (किसमें नहीं रहना चाहिए?)
उत्तर:
भोगभवने। (सुख देने वाले घर में।)

(घ) किंन गणनीयम्? (क्या नहीं ध्यान रखना चाहिए?)
उत्तर:
दुःखम्। (दुःख को।)

(ङ) किंन मननीयम्? (क्या नहीं सोचना चाहिए?)
उत्तर:
निजसौख्यम्। (अपने सुख को।)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 1 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) कुत्र त्वरणीयम्? (कहाँ शीघ्रता करनी चाहिए?)
उत्तर:
कार्यक्षेत्रे त्वरणीयम्। (कार्य के क्षेत्र में शीघ्रता करनी चाहिए।)

(ख) कस्मिन् तरणीयम्? (किसमें तैरना चाहिए?)
उत्तर:
दुःखसागरे तरणीयम्। (दुःख रूपी सागर में तैरना चाहिए।)

(ग) कुत्र चरणीयम्? (कहाँ चढ़ना चाहिए?)
उत्तर:
कष्टपर्वते चरणीयम्। (कष्टरूपी पर्वत पर चढ़ना चाहिए।)

(घ) विपत्ति-विपिने किं करणीयम्? (संकट रूपी वन में क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
विपत्ति-विपिने भ्रमणीयम्। (संकट रूपी वन में घूमना चाहिए।)

(ङ) मम किं करणीयम्? (मुझे क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
मम लोकहितं करणीयम्। (मुझे संसार का कल्याण करना चाहिए।)

Class 8 Sanskrit Chapter 1 Mp Board प्रश्न 3.
उचितं योजयत (उचित को जोड़ो-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 1 लोकहितं मम करणीयम् 1
उत्तर:
(क) → (ii)
(ख) → (i)
(ग) → (iv)
(घ) → (v)
(ङ) → (iii)

MP Board Solutions

Class 8 Sanskrit Chapter 1 Lokhitam Mam Karniyam प्रश्न 4.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षं’न’ इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ (हाँ) तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ (नहीं) लिखो-)
(क) कष्टपर्वते चरणीयम्।
(ख) दु:खसागरे न तरणीयम्।
(ग) न जातु दुःखं गणनीयम्।
(घ) विपत्ति-विपिने न भ्रमणीयम्।
(ङ) अहर्निशं जागरणीयम्।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) आम्
(घ) न
(ङ) आम्।

Class 8th Sanskrit Chapter 1 Mp Board प्रश्न 5.
उचितपदेन रिक्तस्थानं पूरयत(उचित शब्द द्वारा रिक्त स्थानों को भरो-)
(क) बन्धुजना ये स्थिता ……………..। (सागरे/गह्वरे)
(ख) लोकहितं ……………। (वदनीयम्।करणीयम्)
(ग) भोगभवने …………… । (रमणीयम्/न रमणीयम्)
(घ) कार्यक्षेत्रे ……………। (तरणीयम्/त्वरणीयम्)
(ङ) कष्टपर्वते …………….। (करणीयम्/चरणीयम्)
उत्तर:
(क) गह्वरे
(ख) करणीयम्
(ग) न रमणीयम्
(घ) त्वरणीयम्
(ङ) चरणीयम्।

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 1 प्रश्न 6.
नामोल्लेखपूर्वक समासविग्रहं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए समास विग्रह करो-)
(क) लोकहितम्
(ख) भोगभवने
(ग) कार्यक्षेत्रे
(घ) दुःख-सागरे
(ङ) कष्टपर्वते।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 1 लोकहितं मम करणीयम् 2

Sanskrit Chapter 1 Class 8 Mp Board प्रश्न 7.
रिक्तस्थानम् पूरयत (खाली जगह भरो-)
उत्तर:
(क) न जातु दुःखं गणनीयम्, न च निज सौख्यं मननीयम्।
कार्यक्षेत्रे त्वरणीयम्, लोकहितम् मम करणीयम्

(ख) दुःख सागरे तरणीयम्, कष्टपर्वते चरणीयम्
विपत्ति-विपिने भ्रमणीयम्, लोकहितम्मम करणीयम्॥

Class 8 Sanskrit Chapter 1 प्रश्न 8.
उदाहरणानुसारं धातुं प्रत्ययं च पृथक्कुरुत(उदाहरण के अनुसार धातु और प्रत्यय अलग करो-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 1 लोकहितं मम करणीयम् 3

Sanskrit Class 8 Chapter 1 Mp Board प्रश्न 9.
“मम कर्त्तव्यम्” इति विषयमवलम्ब्य संस्कृते दशवाक्यानि लिखत।
(“मेरा कर्तव्य” इस विषय पर संस्कृत में दस वाक्य लिखो।)
उत्तर:
व्याकरण भाग में निबन्ध रचना देखें।

MP Board Solutions

Sanskrit Class 8 Chapter 1 Lokhitam Mam Karniyam प्रश्न 10.
“लोकहितं मम करणीयम्” इत्यस्मिन् पाठे आगतानि अव्ययानि चित्वा लिखत।
(“लोकहितं मम करणीयम्” इस पाठ में आये हुए अव्ययों को चुनकर लिखो।)
उत्तर:
(क) सततम्
(ख) न
(ग) च
(घ) अहर्निशम्
(ङ) जातु
(च) दुःखम्
(छ) निज
(ज) तत्र।

लोकहितं मम करणीयम् हिन्दी अनुवाद 

मनसा सततं स्मरणीयम्, वचसा सततं वदनीयम्।
लोकहितमम करणीयम्, लोकहितं मम करणीयम्॥१॥

अनुवाद :
मन से सदा (मुझे) स्मरण (सोचना) करना चाहिए, वाणी (मुँह) से सदा (मुझे) बोलना चाहिए (कि) संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए, संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए।

न भोगभवने रमणीयम, न च सखशयने शयनीयम।
अहर्निशं जागरणीयम्, लोकहितं मम करणीयम्॥२॥

अनुवाद :
(मुझे) न सुख देने वाले घर में रहना चाहिए और न सुख देने वाले बिस्तर पर सोना चाहिए। (मुझे) दिन-रात जागना चाहिए (और) संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए।

न जातु दुःखंगणनीयम्, न च निज सौख्यम् मननीयम्।
कार्यक्षेत्रे त्वरणीयम्, लोकहितं मम करणीयम्॥३॥

अनुवाद :
(मुझे) कभी भी दुःख का ध्यान नहीं रखना चाहिए और न अपने सुख को सोचना चाहिए। (अपने) कार्य के क्षेत्र में शीघ्रता करनी चाहिए, (और) संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए।

MP Board Solutions

दुःखसागरे तरणीयम्, कष्टपर्वते चरणीयम्।
विपत्ति-विपिने भ्रमणीयम्, लोकहितंमम करणीयम्॥४॥

अनुवाद :
(मुझे) दुःख रूपी सागर में तैरना चाहिए, कष्ट रूपी पर्वत पर चढ़ना चाहिए, संकट रूपी वन में घूमना चाहिए (और) संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए।

गहनारण्ये घनान्धकारे, बन्धुजना ये स्थिता गह्वरे।
तंत्र मया सञ्चरणीयम् लोकहितं मम करणीयम्॥५॥

अनुवाद :
जो भाई-बन्धु घने अन्धकार में, गहन वन में गुफाओं में रहते हैं, वहाँ मुझे जाना चाहिए (और) संसार का कल्याण मुझे करना चाहिए।

लोकहितं मम करणीयम् शब्दार्याः

करणीयम् = करना चाहिए। त्वरणीयम् = शीघ्रता करनी चाहिए। दुःखसागरे = दुःख रूपी सागर में। कष्टपर्वते = कष्ट रूपी पर्वत पर। गहनारण्ये = गहन वन में। गह्वरे = गुफा में।

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 7 ऐक्यबलम्

In this article, we will share MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 7 ऐक्यबलम् Pdf, Sanskrit Class 8 Chapter 7 Mp Board, these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 7 ऐक्यबलम्

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 7 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 7 Mp Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत(शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) चटकायुगलं कुत्र निवसति स्म? (चिड़ियों का जोड़ा कहाँ रहता था।)
उत्तर:
निम्बवृक्षे। (नीम के पेड़ पर)

(ख) गजः कां नाशितवान्? (हाथी ने किसको नष्ट किया?)
उत्तर:
अण्डानि। (अण्डों को)

(ग) चटकायुगलस्य रोदनं श्रुत्वा कः आगतः? (चिड़ियों के जोड़े का रोना सुनकर कौन आया ?)
उत्तर:
काष्ठभेदकः। (कठफोड़वा)

MP Board Solutions

(घ) काष्ठभेदकः काम् आनीतवान्? (कठफोड़वा किसको लाया?)
उत्तर-मक्षिकाम्। (मक्खी को)

(ङ) जलं पातुं गजं कः आकर्षितवान्? (पानी पीने के लिए हाथी को किसने आकर्षित किया?)
उत्तर:
मण्डूकः। (मेंढक ने)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 7 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) बुद्धिमान् कः अस्ति? (बुद्धिमान् कौन है?)
उत्तर:
यः मृतं गतं च न चिन्तयति। (जो मरे हुए और गये हुए की नहीं सोचता है।)

(ख) मित्रस्य कार्य कः साधयति? (मित्र के कार्य को कौन पूरा करता है?)
उत्तर:
मित्रस्य कार्यं मित्रं साधयति। (मित्र के काम को मित्र पूरा करता है।)

(ग) मण्डूकः मक्षिकां किम् उपायम् उक्तवान्? (मेंढक ने मक्खी को क्या उपाय कहा?)
उत्तर:
मण्डूकः मक्षिका एकीभूता दुर्बलाः अपि सबलं शत्रु हन्तुं शक्नुवन्ति इति उपायम् उक्तवान्। (मेंढक ने मक्खी से एक होकर दुर्बल भी सबल शत्रु को मार सकते हैं, इस उपाय को कहा।)

(घ) मक्षिका गजस्य कर्णयोः किं कृतवती? (मक्खी ने हाथी के कानों में क्या किया?)
उत्तर:
मक्षिका गजस्य कर्णयों वीणावादनं कृतवती। (मक्खी ने हाथी के कानों में वीणा वादन किया।)

(ङ) तैः मत्तगजं केन बलेन मारितः? (उन्होंने मतवाले हाथी को किस शक्ति से मारा?)
उत्तर:
तैः मत्तगजं ऐक्यबलेन मारितः। (उन्होंने मतवाले हाथी को एकता की शक्ति से मारा।)

Sanskrit Chapter 7 Class 8 Mp Board प्रश्न 3.
युग्मनिर्माणं कुरुत(जोड़े बनाओ-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 7 ऐक्यबलम् 1
उत्तर:
(क) → (iv)
(ख) → (v)
(ग) → (i)
(घ) → (ii)
(ङ) → (iii)

Class 8th Sanskrit Chapter 7 Mp Board प्रश्न 4.
रिक्तस्थानानि पूरयत(रिक्त स्थान भरो-)
(क) निम्बवृक्षे एकं ……… प्रतिवसति स्म।
(ख) चटकायुगलं ………….. आरब्धवत्।
(ग) मक्षिका स्वमित्रम् ……….. पृष्टवती।
(घ) मत्तगजः ………….. पतितः।
(ङ) ते ………….. मत्तगजं मारितवन्तः।
उत्तर:
(क) चटकायुगलम्
(ख) कातरक्रन्दनम्
(ग) उपायम्
(घ) पङ्के
(ङ) ऐक्येन।

MP Board Solutions

Class 8 Sanskrit Chapter 7 प्रश्न 5.
एकताविषये पञ्चवाक्यानि लिखत(एकता के विषय पर पाँच वाक्य लिखो-)
उत्तर:
(क) ऐक्यबलेन दुर्बलाः अपि सबलं शत्रु हन्तुं शक्नुवन्ति।
(ख) एकतया सर्वाणि कार्याणि सिद्धयन्ति।
(ग) एकतया तैः मत्तगजः मारितः।
(घ) वर्तमानसमये एकतायाः महती आवश्यकता अस्ति।
(ङ) मानवजीवने एकतायाः विशेषमहत्वं वर्तते।

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 7 प्रश्न 6.
पाठे आगतानां जीवानां नामानि परस्परं सम्बन्धं च लिखत (पाठ में आये हुए जीवों के नाम और आपस में सम्बन्ध लिखो-)
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 7 ऐक्यबलम् 2

ऐक्यबलम् हिन्दी अनुवाद

कस्मिञ्चित् वने निम्बवृक्षे एकं चटकायुगलं प्रतिवसति स्म। समये चटकया अण्डानि दत्तानि, युगलम् अति प्रसन्नम् आसीत्। एकस्मिन् दिने आतपपीडितः एकः मदमत्त: गजः तत्र आगतः। मदेन सः तस्य वृक्षस्य तां शाखां नाशितवान् यस्यां शाखायां चटकायाः अण्डानि आसन्। अतः अण्डानि अपि नष्टानि। चटकायुगलं कातरक्रन्दनम् आरब्धवत्। रोदनं श्रुत्वा तयोः मित्रं काष्ठभेदकः पक्षी आगतः। सः उक्तवान् रोदनेन अलम्। तेन उक्तं सः एव बुद्धिमान् यः मृतं गतं च न चिन्तयति। चटका तम् अवदत्, “एषः मत्तगजः हन्तव्यः अन्यथा एषः सर्वान् पशुपक्षिपादपान् नाशयिष्यति।” काष्ठभेदकः अवदत्-अहं स्वमित्रम् मक्षिकाम् आनयामि कदाचित् सा गजं हन्तुम् उपायं चिन्तयेत्।

अनुवाद:
किसी वन में नीम के पेड़ पर एक चिड़ियों का जोड़ा (नर-मादा) रहता था। समय पर चिड़िया द्वारा अण्डे दिये गये, जोड़ा बहुत प्रसन्न था। एक दिन धूप से दुःखी एक मतवाला हाथी वहाँ आया। मस्ती में उसने उस पेड़ की उस डाल को तोड़ दिया जिसमें चिड़िया के अण्डे थे। इसलिए अण्डे भी नष्ट हो गये। चिड़ियों के जोड़े ने करुण रोदन प्रारम्भ कर दिया। रोना सुनकर उन दोनों का मित्र कठफोड़वा नामक पक्षी आ गया। उसने कहा रोना बस करो। उसने कहा वह ही बुद्धिमान है जो मरे हुए और गये हुए की चिन्ता नहीं करता। चिड़िया ने उससे कहा, “यह मतवाला हाथी मारा जाना चाहिए अन्यथा यह सभी पशु-पक्षी और पेड़ों को नष्ट कर देगा।” कठफोड़वा बोला-मैं अपनी मित्र मक्खी को लाता हूँ शायद वह हाथी को मारने के लिए उपाय सोचे।

सः गत्वा मक्षिकां न्यवेदयत् यत्-मम चटकामित्रस्य गृहम् एकेन मत्तगजेन विनष्टम्। तस्य वधाय सहायतां करोतु। मक्षिका अवदत-“यत् मित्रम् एव मित्रस्य कार्य साधयति।” मक्षिका तदा स्वमित्रं चतुरमण्डूकम् उपायं पृष्टवती। मण्डूकः उक्तवान्-‘एकीभूता दुर्बलाः अपि सबलं शत्रु हन्तुं शक्नुवन्ति।’ तैः सर्वेः मिलित्वा एका योजना निश्चिता। सर्वेषां दायित्वं वितरितम्। तदनुसारं मध्याह्ने मक्षिकया गजस्य कर्णयोः वीणावादनं कृत्रम्। एतेन गजः नयने निमील्य वीणावादनेनमुग्धः अभवत्। तावत् एव काष्ठभेदकः तस्य नयने च प्रहारेण व्यनाशयत्। अनन्तरं यत्र महान् पङ्कः आसीत् तत्र मण्डूकः ध्वनिना तं जलं पातुम् आकर्षितवान्। अन्ध: गजः तस्मिन् पङ्के पतितः मृतश्च। एवं तैः तीक्ष्णबुद्धया ऐक्येन सः मत्तगजः मारितः। आत्मनो वनस्य च रक्षणं कृतम्।

MP Board Solutions

अनुवाद :
उसने जाकर मक्खी से कहा कि-मेरी चिड़िया। मित्र का घर एक मतवाले हाथी ने नष्ट कर दिया है। उसके वध। (मारने) करने में सहायता करो। मक्खी ने कहा कि “मित्र ही। मित्र का कार्य पूरा करता है।” मक्खी ने तब अपने मित्र मेंढक से उपाय पूछा। मेंढक ने कहा-‘एकत्र होकर कमजोर भी बलशाली। शत्रु को मार सकते हैं।’ उन सबने मिलकर एक योजना निश्चित। की। सभी का दायित्व बाँट दिया गया। उसके अनुसार मध्यान्ह। में मक्खी ने हाथी के कानों में वीणा वादन किया। इससे हाथी। आँखें बन्द कर वीणा वादन से मोहित हो गया। तभी कठफोड़वे ने उसकी आँखें चोंच के प्रहार से फोड़ दी। इसके बाद जहाँ बहुत दलदल था वहाँ मेंढक ने आवाज से उसको पानी पीने केलिए आकर्षित किया। अन्धा हाथी उस दलदल में गिर गया और मर गया।

इस प्रकार, उन सबके द्वारा तेज बुद्धि के द्वारा एकता से वह मतवाला हाथी मारा गया। उन्होंने अपनी और वन की रक्षा की।

ऐक्यबलम् शब्दार्थाः

आतपपीडितः = धूप से दुःखित। निम्बवृक्षे = नीम के पेड़ पर। चटकायुगलम् = चिड़ियों का जोड़ा (नर-मादा)। काष्ठभेदकः = कठफोड़वा नाम का पक्षी। मत्तगजः = मतवाला हाथी। चतुरमण्डूकम् = होशियार मेंढक। कातरक्रन्दनम् = करुण रोदन। मक्षिका = मक्खी। एकीभूताः = एकत्र होकर। सबलम् = बलशाली को। निमील्य = बन्दकर। तीक्ष्णबुद्धया = तेज बुद्धि के द्वारा। वीणावादनमुग्धः = वीणा वादन से मोहित हुआ।

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 3 गणतन्त्रदिवसः

In this article, we will share MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 3 गणतन्त्रदिवसः Pdf, Class 8 Mp Board Sanskrit Chapter 3, these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 3 गणतन्त्रदिवसः

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 3 अभ्यासः

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 3 प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत(एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) कस्मिन् मासे गणतन्त्रदिवसः भवति? (किस महीने गणतन्त्र दिवस होता है?)
उत्तर:
जनवरिमासे। (जनवरी माह में)

(ख) सेनानायकानाम् अभिवन्दनं कः स्वीकरोति? (सेनानायकों द्वारा अभिवन्दन (सलामी) को कौन लेता है?)
उत्तर:
भारतराष्ट्रपतिः। (भारत के राष्ट्रपति)

MP Board Solutions

(ग) राज्येषु/राज्यराजधानीषु अभिवन्दनं के स्वीकुर्वन्ति? (राज्यों में/राज्यों की राजधानियों में अभिवन्दन कौन लेते हैं?)
उत्तर:
राज्यपालाः। (सभी राज्यपाल)

(घ) प्रथमं कस्मिन् अधिवेशने त्रिवर्णध्वजारोहणं कृतम्? (पहले किस बैठक में तिरंगा फहराया गया?)
उत्तर:
काङ्ग्रेससंस्थायाः। (कांग्रेस संस्था में)

(ङ) प्रतिज्ञास्वप्नः कस्मिन् वर्षे साक्षात्कृतः? (प्रतिज्ञा रूपी स्वप्न किस वर्ष में साकार हुआ?)
उत्तर:
१९४७ तमे। (1947 में)

Class 8 Sanskrit Chapter 3 Mp Board प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) सभाकक्षे कस्य गीतस्य पूर्वाभ्यासः प्रचलित? (सभाकक्ष में किस गीत का पूर्वाभ्यास चलता है?)
उत्तर:
सभाकक्षे ‘वन्दे मातरम्’ इति राष्ट्रियगीतस्य पूर्वाभ्यासः प्रचलित। (सभाकक्ष में ‘वन्दे मातरम्’ राष्ट्रीय गीत का पूर्वाभ्यास चलता है।)

(ख) भारतस्य राष्ट्रियपर्वणी के? (भारत के राष्ट्रीय पर्व कौन से हैं?)
उत्तर:
भारतस्य राष्ट्रियपर्वणी गणतन्त्रदिवसः स्वतन्त्रतादिवसः च। (भारत के राष्ट्रीय पर्व गणतन्त्र दिवस और स्वतन्त्रता दिवस हैं।)

(ग) कस्मिन् दिनाङ्के वयं स्वतन्त्रतादिवसं आयोजयामः? (किस दिनांक को हम स्वतन्त्रता दिवस आयोजित करते हैं?)
उत्तर:
१५ अगस्तदिनाङ्के वयं स्वतन्त्रतादिवसं आयोजयामः। (15 अगस्त को हम स्वतन्त्रता दिवस आयोजित करते हैं।)

(घ) राष्ट्रभक्तैः का प्रतिज्ञा कृता? (राष्ट्रभक्तों द्वारा क्या प्रतिज्ञा की गयी?)
उत्तर:
राष्ट्रभक्तः ‘सर्वेः राष्ट्रनायकैः सार्वभौमतन्त्र रचयामः’ इति प्रतिज्ञा कृता। (राष्ट्रभक्तों द्वारा सभी राष्ट्र के नायकों द्वारा सार्वभौम तन्त्र बनाना है’ ऐसी प्रतिज्ञा की गयी।)

(ङ) कलाकाराः किं कुर्वन्ति? (कलाकार क्या करते हैं?)
उत्तर:
कलाकाराः सांस्कृतिककार्यक्रमैः जानपदनृत्यैः च जनमनांसि रञ्जयन्ति। (कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम से और लोक नृत्यों से लोगों के मनों को प्रसन्न करते हैं।)

Class 8 Sanskrit Chapter 3 Gantantra Diwas प्रश्न 3.
प्रदत्तैः शब्दैः प्रश्ननिर्माणं कुरुत (दिये हुए शब्दों से प्रश्न का निर्माण करो-)
किम्, कथम्, कः, कैः, कुत्र। (क्या, कैसे, कौन, किसके द्वारा, कहाँ।)

यथा- जनवरिमासस्य षड्विंशे दिनाङ्के गणतन्त्रदिवसम् आचरामः। (जनवरी महीने की छब्बीस दिनांक को गणतन्त्र दिवस मनाते हैं।)
उत्तर:
जनवरिमासस्य कस्मिन् दिनाङ्के गणतन्त्रदिवसम् आचरामः? (जनवरी महीने की किस दिनांक को गणतन्त्र दिवस मनाते हैं?)

(क) गणतन्त्रदिवसः राष्ट्रिय पर्वं वर्तते। (गणतन्त्र दिवस राष्ट्रीय पर्व है।)
उत्तर:
गणतन्त्रदिवसः किं वर्तते? (गणतन्त्र दिवस क्या है?)

MP Board Solutions

(ख) भू-जल वायुसेनानां प्रदर्शनं चित्ताकर्षकम् भवति। (भू-जल और वायु सेनाओं का प्रदर्शन मन को आकर्षित करने वाला होता है।)
उत्तर:
भू-जल वायुसेनानां प्रदर्शनं कथम् भवति? (भू-जल और वायु सेनाओं का प्रदर्शन कैसा होता है?)

(ग) दिल्लीनगरे राष्ट्रपतिः सेनानायकानाम् अभिवन्दनं स्वीकरोति। (दिल्ली नगर में राष्ट्रपति सेना के नायकों की सलामी लेते हैं।)
उत्तर:
दिल्ली नगरे कः सेनानायकानाम् अभिवन्दनं स्वीकरोति? (दिल्ली नगर में कौन सेना के नायकों की सलामी लेता है?)

(घ) कलाकाराः नृत्यैः जनमनांसि रञ्जयन्ति। (कलाकार नृत्यों द्वारा लोगों के मनों को प्रसन्न करते हैं।)
उत्तर:
कलाकाराः कैः जनमनांसि रञ्यन्ति? (कलाकार किनके द्वारा लोगों के मनों को प्रसन्न करते हैं?)

(ङ) लाहौराधिवेशने प्रथमवारं त्रिवर्णध्वजारोहणं जातम्। (लाहौर के अधिवेशन में प्रथम बार तिरंगा फहराया गया।)
उत्तर:
कुत्र प्रथमवारं त्रिवर्णध्वजारोहणं जातम्? (कहाँ प्रथम बार तिरंगा फहराया गया।)

Class 8th Sanskrit Chapter 3 Mp Board प्रश्न 4.
रिक्तस्थानानि पूरयत(खाली जगह भरो-)
(रञ्जयन्ति, सेनानायकैः, गणतन्त्रदिवसः राज्यपालाः, स्वशासनाधारण)
(क) राष्ट्रपतिः …………… अभिवन्दनं स्वीकरोति।
(ख) कलाकाराः जनमानांसि ……………..।
(ग) जनवरिमासस्य षड्विंशे दिनाङ्के ………… भवति।
(घ) भारतं …………….. रचितानां राज्यानां गणरूपं वर्तते।
(ङ) राज्येषु …………….. प्रतिनिध्यिं वहन्ति।
उत्तर:
(क) सेनानायकैः
(ख) रञ्जयन्ति
(ग) गणतन्त्रदिवसः
(घ) स्वशासनाधारेण
(ङ) राज्यपालाः।

Class 8 Sanskrit Chapter 3 प्रश्न 5.
उचितं योजयत(उचित को जोड़ो-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 3 गणतन्त्रदिवसः 1
उत्तर:
(क) → (iii)
(ख) → (iv)
(ग) → (v)
(घ) → (ii)
(ङ) → (i)

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 3 प्रश्न 6.
विशेषणपदानि उपयुज्य दश वाक्यानि लिखत(विशेषण पद लगाकर दस वाक्य लिखो-)
मातरं वन्दे
यथा- सुखदां मातरं वन्दे।
उत्तर:
(1) सुजलां मातरं वन्दे।
(2) सुफलां मातरं वन्दे।
(3) मलयजशीतला मातरं वन्दे।
(4) शस्यश्यामलां मातरं वन्दे।
(5) वरदां मातरं वन्दे।
(6) शुभ्रज्योत्स्नां मातरं वन्दे।
(7) पुलकितयामिनी मातरं वन्दे।
(8) शोभिनीं मातरं वन्दे।
(9) सुहासिनी मातरं वन्दे।
(10) तारिणी मातरं वन्दे।

Sanskrit Chapter 3 Class 8 Mp Board प्रश्न 7.
सन्धिम् अथवा सन्धिविच्छेदं कुरुत(सन्धि अथवा सन्धि-विच्छेद करो-)
उत्तर:
(क) स्वतन्त्रतादिवस इव – स्वतन्त्रता + दिवसेव।
(ख) निस्सारयन्तीति – निस्सारयन्ति + इति।
(ग) इत्यस्य – इति + अस्य।
(घ) सोऽयम् – सः + अयम्।
(ङ) अधुनावगतम् – अधुना + अवगतम्।

Sanskrit Class 8 Chapter 3 Mp Board प्रश्न 8.
अव्ययानि चित्वा लिखत(अव्यय चुनकर लिखो-)
(क) कथं चलति पूर्वाभ्यासः।
(ख) राष्ट्रगानं राष्ट्रगीतं च अभ्यसामः।
(ग) अत्र महोत्सवे पथचलनम् भवति।
(घ) त्रिवर्णध्वजारोहणम् अपि कृतम्।
(ङ) अधुना अवगतम् अस्माभिः।
उत्तर:
(क) कथम्
(ख) च
(ग) अत्र
(घ) अपि
(ङ) अधुना।

MP Board Solutions

गणतन्त्रदिवसः हिन्दी अनुवाद

शिक्षकः :
सुप्रभातम्! छात्रा: कथं चलति पूर्वाभ्यास:?

सर्वे :
गुरवे नमः सम्यक प्रचलति। गणतन्त्रदिवसार्थं राष्ट्रगानं राष्ट्रगीतं च ताललयबद्धम् अभ्यस्यामः।

शिक्षकः :
उत्तमम्! देशभक्तिपराणि अन्यान्यगीतानि अघि प्रस्तोतुं प्रभवन्ति।

श्यामला :
गुरो! भाषणार्थं भवत: मार्गदर्शनम् आवश्यकम्।

उग्नुवाद :
शिक्षक-सुप्रभात (सुबह की नमस्ते)। छात्रो पूर्वाभ्यास कैसा चल रहा है?

सभी :
गुरुजी को नमस्कार, ठीक चल रहा है। गणतन्त्र दिवस के लिये हम राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत का ताल और लय से युक्त अभ्यास कर रहे हैं।

शिक्षक :
उत्तम! देशभक्ति से युक्त अन्य गीतों को भी प्रस्तुत कर सकते हैं।

श्यामला :
गुरुजी! भाषण के लिए आपका मार्गदर्शन आवश्यक है।

शिक्षकः :
निस्सङ्कोचम् पृच्छतु। यदहं जानामि तत्कथयामि।

ज्योत्सना :
गणतन्त्रदिवसः स्वतन्त्रता दिवस इव राष्ट्रियं-पर्व किल?

शिक्षकः :
आम्, जनवरिमासस्य षड्विंशे दिनाङ्के (२६ जनवरी) भारतीयाः वयं गणतन्त्रदिवसम् उत्साहेन आयोजयाम्।

राजेशः :
अस्मिन् पर्वणि दिल्लीनगरे स्थलसेना जलसेना-वायुसेनानां पथचलनादिकम् अद्भुतं चित्ताकर्षकं च भवतीति श्रुतम् मया।

सुहासिनी :
गुरो! अत्र महोत्सवे वायुसेनायाः जेटविमानानि उड्डयन्ते, वर्णरञ्जितधूमं च निस्सारयन्ति इति श्रुतम् मया।

अनुवाद :
शिक्षक-निस्संकोच (बिना किसी संकोच के या बेधड़क) पूछो। जो मैं जानता हूँ वह कहूँगा।

ज्योत्सना :
गणतन्त्र दिवस स्वतन्त्रता दिवस के समान राष्ट्रीय पर्व है ना?

शिक्षक :
हाँ, जनवरी महीने की छब्बीस तारीख (26 जनवरी) को हम भारतीय गणतन्त्र दिवस को उत्साह से आयोजित करते हैं।

राजेश :
इस पर्व पर दिल्ली नगर में थल सेना, जल सेना और वायु सेना की परेड आदि अद्भुत और मन को आकर्षित करने वाली होती है, ऐसा मैंने सुना है।

सुहासिनी :
गुरुजी। यहाँ महोत्सव में वायु सेना के जेट विमान उड़ते हैं और रंग से भरे धुएँ को छोड़ते हैं, ऐसा मैंने सुना है।

शिक्षकः :
सत्यम्। गणतन्त्रदिवसे भारतराष्ट्रपतिः स्थल-जल-वायुसेनानायकानाम् अभिवन्दनं स्वीकरोति एवं विभिन्नराज्येषु ततद्राज्यपाला: प्रतिनिधित्वं वहन्ति। विविध प्रान्तेभ्यः समागता: कलाकाराः सांस्कृतिककार्यक्रमैः जानपदनृत्यैः च जनमांसि रञ्जयन्ति।

नरेश: :
गुरो! गणतन्त्रम् इत्यस्य कोऽर्थः?

शिक्षकः :
समुचितः प्रश्नः, भारतं स्वशासनाधारण रचिताना राज्यानां गणरूपं वर्तते। राज्यस्तरे प्रादेशिक शासनं, राष्ट्रियस्तरे गणतन्त्रम् एकरूपं प्रवर्तते।

MP Board Solutions

अनुवाद :
शिक्षक-सच है। गणतन्त्र दिवस पर भारत के राष्ट्रपति थल, जल और वायु सेना के नायकों की सलामी लेते हैं, इसी प्रकार विभिन्न राज्यों में वहाँ के राज्यपाल प्रतिनिधित्व करते हैं। अनेक प्रान्तों से आये कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों से और लोक नृत्यों से लोगों के मन को प्रसन्न करते हैं।

नरेश :
गुरुजी! गणतन्त्र इस (शब्द) का क्या अर्थ है?

शिक्षक :
उचित प्रश्न है, भारत अपने शासन के आधार पर बनाये गये राज्यों का गण (समूह) रूप है। राज्य स्तर पर प्रादेशिक शासन एवं राष्ट्रीय स्तर पर गणतन्त्र एक रूप होता है।

श्यामला :
गुरो! अस्य पर्वणः ऐतिहासिक महत्त्वं ज्ञातुम्। इच्छामि।

शिक्षक: :
अहं विस्तरेण वदामि। परतन्त्रताकाले ३१-१२-१९२९दिनाङ्कतः ०१-०१-१९३० यावत्तात्कालिक काङ्ग्रेससंस्थायाः लाहौरनगरे अधिवेशनं अभवत्। तस्मिन्
अधिवेशने ‘सर्वैः राष्ट्रनायकैः सार्वभौमतन्त्रं रचयामः’ इति। प्रतिज्ञा कृता। तत्रैव अधिवेशने राष्ट्रभक्तैः त्रिवर्णध्वजारोहण अपि कृतम्। भारतीयानाम् अयं प्रतिज्ञास्वप्नः १९४७ तमे वर्षे अगस्तमासस्य पञ्चदश दिनाङ्के पूर्णतां गतः। देश: स्वतन्त्रः अभवत्। तदारभ्य प्रतिवर्ष १५ अगस्तदिने वयं स्वतन्त्रतादिवसं आयोजयामः। अनन्तरं २६ जनवरी १९५० तमे वर्षे अस्माकं संविधानम् प्रारब्धम् इति कारणल: प्रतिवर्ष-अस्मिन् दिने समग्रे राष्ट्रे वयं गणतन्त्रदिवसम् आचरामः। सर्वे-धन्यवादाः, अस्माभिः स्वतन्त्रतादिवसस्य, गणतन्त्रदिवसस्य च महत्त्वं ज्ञाताम्।

शिक्षकः :
स्वस्ति! सर्वेभ्यः।

अनुवाद :
श्यामला-गुरुजी। इस पर्व का ऐतिहासिक महत्त्व जानना चाहती हूँ।

शिक्षक :
मैं विस्तार से बताता हूँ। परतन्त्रता (गुलामी) के समय में 31-12-1929 दिनांक से 01-01-1930 तक उस समय की कांग्रेस संस्था (पार्टी) की लाहौर नगर में बैठक हुई। उस बैठक में ‘सभी राष्ट्र के नायकों द्वारा सार्वभौमतन्त्र (भारत की सम्पूर्ण भूमि पर अपना शासन) बनाना है’ ऐसी प्रतिज्ञा की। वहीं बैठक में राष्ट्रभक्तों द्वारा तिरंगा भी फहराया गया। भारतीयों का। यह प्रतिज्ञारूपी स्वप्न 1947वें वर्ष में अगस्त महीने की पन्द्रह (15) तारीख को पूरा हुआ। देश स्वतन्त्र हो गया। तब से लेकर, प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त के दिन हम स्वतन्त्रता दिवस आयोजित करते हैं। उसके बाद 26 जनवरी, 1950वें वर्ष में हमारा संविधान प्रारम्भ हुआ इस कारण से प्रत्येक वर्ष इस दिन सम्पूर्ण राष्ट्र में हम गणतन्त्र दिवस मनाते हैं।

सभी :
धन्यवाद, हम सबके द्वारा स्वतन्त्रता दिवस और गणतन्त्र दिवस का महत्व जाना गया।

शिक्षक :
सभी का कल्याण हो।

गणतन्त्रदिवसः शब्दार्थाः

सुप्रभातम् = सुबह का नमस्कार। मार्गदर्शनम् = निर्देश। ताल-लयबद्धम् = गाने की धुन से युक्त/ताल और लय से युक्त। अभ्यस्यामः = हम अभ्यास करते हैं। देशभक्तिपराणि = देशभक्ति से युक्त। प्रस्तोतुम् = प्रस्तुत करने के लिए। चित्ताकर्षकम् = मन को आकर्षित करने वाला। भाषाधारण = भाषा के आधार से। त्रिवर्ण ध्वजारोहणम् = तीन रंग के झण्डे का फहराना। सार्वभौमतन्त्रम् = भारत की सम्पूर्ण भूमि पर अपना शासन। प्रतिज्ञास्वप्नः = प्रतिज्ञा रूपी स्वप्न। कार्यगतमभवत् = लागू हुआ। स्वस्ति = कल्याण हो।

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 6 स्वामी विवेकानन्दः

In this article, we will share MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 6 स्वामी विवेकानन्दः Pdf, Sanskrit Class 8 Chapter 6, these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 6 स्वामी विवेकानन्दः

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 6 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 6 Mp Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत(एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) स्वामी विवेकानन्दस्य बाल्यकालस्य नाम किम् आसीत्? (स्वामी विवेकानन्द के बचपन का नाम क्या था?)
उत्तर:
नरेन्द्रनाथः। (नरेन्द्रनाथ)

(ख) स्वामी विवेकानन्दस्य मातुः नाम किम् आसीत्? (स्वामी विवेकानन्द की माता का नाम क्या था?)
उत्तर:
भुवनेश्वरी देवी। (भुवनेश्वरी देवी)

(ग) नरेन्द्रनाथस्य पितुः नाम किम् आसीत्? (नरेन्द्रनाथ के पिता का नाम क्या था?)
उत्तर:
विश्वनाथदत्तः। (विश्वनाथदत्त)

MP Board Solutions

(घ) नरेन्द्रनाथस्य जन्म कस्मिन् नगरे अभवत्? (नरेन्द्रनाथ का जन्म किस नगर में हुआ?)
उत्तर:
कोलकातानगरे। (कोलकाता नगर में)

(ङ) नरेन्द्रनाथस्य गुरोः नाम किम् अस्ति? (नरेन्द्रनाथ के गुरु का नाम क्या है?)
उत्तर:
रामकृष्णपरमहंसः। (रामकृष्णपरमहंस)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 6 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) नरेन्द्रनाथस्य जन्म कदा अभवत्? (नरेन्द्रनाथ का जन्म कब हुआ?)
उत्तर:
नरेन्द्रनाथस्य जन्म जनवरी मासस्य द्वादशे दिनांके १८६३ खिस्ताब्दे (१२ जनरवरी, १८६३)अभवत्। (नरेन्द्रनाथ का जन्म जनवरी महीने की बारह तारीख को 1863 ईस्वी (12 जनवरी, 1863) में हुआ।)

(ख) शिकागोनगरे विश्वधर्मसम्मेलने भारतस्य प्रतिनिधिः कः अभवत्? (शिकागो नगर में विश्वधर्म सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधि कौन हुए?)
उत्तर:
शिकागोनगरे विश्वधर्मसम्मेलने भारतस्य प्रतिनिधिः स्वामी विवेकानन्दः अभवत्। (शिकागो नगर में विश्वधर्म सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधि स्वामी विवेकानन्द हुए।)

(ग) स्वामी विवेकानन्दः कदा ब्रह्मलीनोऽभवत्? (स्वामी विवेकानन्द कब ब्रह्मलीन हुए?)
उत्तर:
स्वामी विवेकानन्दः जुलाई मासस्य चतुर्थे दिनांके १८०२ खिस्ताब्दे (४ जुलाई, १९०२) ब्रह्मलीनोऽभवत्। (स्वामी विवेकानन्द जुलाई महीने की चार तारीख 1902 ईस्वी (4 जुलाई, 1902) में ब्रह्मलीन हुए।)

(घ) रवीन्द्रनाथटैगोर किम् कथनम् अस्ति? (रवीन्द्रनाथ टैगोर का क्या कहना है?)
उत्तर:
रवीन्द्रनाथटैगोरस्य कथनम् अस्ति यत् कोऽपि भारतीयसंस्कृतिं ज्ञातुमिच्छति तर्हि प्रथमः तेन स्वामी विवेकानन्दविषये पठितव्यः। (रवीन्द्रनाथ टैगोर का कहना है कि कोई भी भारतीय संस्कृति को जानना चाहता है तो पहले उसे स्वामी विवेकानन्द के विषय में पढ़ना चाहिए।)

(ङ) यूनाम् प्रेरकः पथप्रदर्शकश्च कः? (युवाओं के प्रेरक और पथ-प्रदर्शक कौन हैं?)
उत्तर:
यूनाम् प्रेरकः पथप्रदर्शकश्च स्वामी विवेकानन्दः। (युवाओं के प्रेरक और पथ-प्रदर्शक स्वामी विवेकानन्द हैं।)

Class 8th Sanskrit Chapter 6 Mp Board प्रश्न 3.
उचितं योजयत(उचित को जोड़ो-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 6 स्वामी विवेकानन्दः 1
उत्तर:
(क) → (ii)
(ख) → (v)
(ग) → (i)
(घ) → (iii)
(ङ) → (iv)

Sanskrit Chapter 6 Class 8 Mp Board प्रश्न 4.
शुद्धवाक्यानां समक्षम आम्’ अशुद्ध वाक्यानां समक्षं’न’ इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ (हाँ) तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ (नहीं) लिखो-)
(क) पौरुषं कुरु।
(ख) आत्मभावस्य विकासः एव कर्म।
(ग) जीवनस्यार्थः उन्नतिः नास्ति।
(घ) स्वार्थभावः एव मृत्युः।
(ङ) परोपकारः अपवित्रम् कार्यमस्ति।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) आम्
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न।

MP Board Solutions

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 6 प्रश्न 5.
उचितपदेन रिक्तस्थानं पूरयत(उचित शब्द द्वारा रिक्त स्थान भरो-)
(क) प्रतिग्रहणस्य कामना …………..। (कुरु/मा कुरु)
(ख) चारित्र्यबलं…………..। (वारयत/धारयत)
(ग) नरेन्द्रनाथस्य पिता ………….. आसीत्। (भाषक:/अभिभाषक:)
(घ) अनात्मभावस्य विकासः एव …………. । (कर्म/अकर्म)
(ङ) स्वामीविवेकानन्दस्य जन्म ………….. अभवत्। (कोलकातानगरे/मुम्बईनगरे)
उत्तर:
(क) मा कुरु
(ख) धारयत
(ग) अभिभाषकः
(घ) अकर्म
(ङ) कोलकातानगरे।

Class 8 Sanskrit Chapter 6 प्रश्न 6.
नामोल्लेखपूर्वकं सन्धि विच्छेदं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए सन्धि-विच्छेद करो-)
(क) दीक्षानन्तरम्
(ख) प्रसिद्धोऽभवत्
(ग) एवाकर्म
(घ) तस्यावधारणा
(ङ) अनेनैव
(च) कार्यमस्ति।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 6 स्वामी विवेकानन्दः 2

Sanskrit Class 8 Chapter 6 Mp Board प्रश्न 7.
नामोल्लेखपूर्वकं समासविग्रहं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए समास-विग्रह करो-)
(क) लोकसेवकः
(ख) परोपकारः
(ग) परिव्राजकदीक्षाम्
(घ) जीवनगतिः
(ङ) ईश्वर प्राप्तिः।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 6 स्वामी विवेकानन्दः 3

Class 8 Mp Board Sanskrit Chapter 6 प्रश्न 8.
मूलशब्दं, लिङ्ग, विभक्तिं, वचनं च लिखत(मूल शब्द, लिंग, विभक्ति और वचन लिखो-)
(क) ज्ञानम्
(ख) कार्यम्
(ग) अनेन
(घ) ईश्वरः
(ङ) दीनः
(च) क्रीडासु
(छ) एतेषाम्
(ज) सः।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 6 स्वामी विवेकानन्दः 4

MP Board Sanskrit Class 8 Chapter 6 प्रश्न 9.
अव्ययानां वाक्य प्रयोगं कुरुत(अव्ययों का वाक्यों में प्रयोग करो-)
(क) च
(ख) एवम्
(ग) मा
(घ) तदा
(ङ) यदि।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 6 स्वामी विवेकानन्दः 5

MP Board Class 8 Sanskrit Solutions Chapter 6 प्रश्न 10.
‘स्वामी विवेकानन्दः’ इति विषयमवलम्ब्य संस्कृते दशवाक्यानि लिखत
(‘स्वामी विवेकानन्द’ इस विषय के आधार पर संस्कृति में दस वाक्य लिखो-)
उत्तर:

  1. स्वामी विवेकानन्दस्य बाल्यकालस्य नाम ‘नरेन्द्रनाथः’ आसीत्।
  2. स्वामी विवेकानन्दस्य जन्म कोलकातानगरे अभवत्।
  3. स्वामी विवेकानन्दस्य पिता ‘विश्वनाथदत्तः’ आसीत्।
  4. स्वामी विवेकानन्दस्य माता ‘भुवनेश्वरी देवी’ आसीत्।
  5. स्वामी विवेकानन्दस्य गुरुः ‘रामकृष्णपरमहंसः’ आसीत्।
  6. स्वामी विवेकानन्दस्य शिष्या ‘भगिनी निवेदिता’ आसीत्।
  7. स्वामी विवेकानन्दः यूनां कृते पथप्रदर्शकः आसीत्।
  8. स्वामी विवेकानन्दः संस्कृतानुरागी आसीत्।
  9. नरेन्द्रनाथः ‘स्वामी विवेकानन्दः’ इति नाम्ना प्रसिद्धोऽभवत्।
  10. स्वामी विवेकानन्दस्य बहवः शिष्याः अभवन्।

MP Board Solutions

स्वामी विवेकानन्दः हिन्दी अनुवाद

‘बहुजनहिताय, बहुजन सुखाय’ इत्यमका रोलानस्थ स्वामी विवेकानन्दस्य बाल्यकालस्य नार नरेन्द्रनाथ:’ आसीत्। तस्य जन्म जनवरीमासस्य द्वादशे दिनांक १८६३ ख्रिस्ताब्दे (१२ जनवरी, १८६३) कोलकातानगरे अभवत्। तस्य मातुः नाम ‘भुवनेश्वरी देवी’ आसीत्। तस्य पिता विश्वनाथदत्तः लब्धप्रतिष्ठः, अभिभाषकः आसीत्। नरेन्द्रनाथः बाल्यकालादेव संस्कृतानुरागी, कुशाग्रबुद्धि, मल्लविद्यादिसु क्रीडासु पारङ्गतः धार्मिकश्चासीत्।

अनुवाद :
‘बहुत लोगों के हित के लिए, बहुत लोगों के सुख के लिए’ इस कार्य में लगे हुए स्वामी विवेकानन्द का बचपन का नाम ‘नरेन्द्रनाथ’ था। उनका जन्म जनवरी महीने की बारह तारीख को 1863 ईस्वी में (12 जनवरी, 1863) कोलकाता (कलकत्ता) नगर में हुआ। उनकी माता का नाम ‘भुवनेश्वरी देवी’ था। उनके पिता विश्वनाथदत्त ख्याति प्राप्त वकील थे। नरेन्द्रनाथ बचपन से ही संस्कृत के प्रेमी, तीव्र, बुद्धि वाले, मल्ल (कुश्ती) विद्या आदि खेलों में पारंगत और धार्मिक थे।

तस्मिन् काले रामकृष्ण परमहंसः अद्वितीयाध्यात्मिक-ज्ञानपुञ्जस्य स्रोतः आसीत्। तस्य प्रभावेण प्रभावितः नरेन्द्रनाथः तेनैव परिव्राजकदीक्षा प्राप्नोत्। दीक्षानन्तरं सः स्वामी विवेकानन्दः इति नाम्ना प्रसिद्धोऽभवत्। ततः सः स्वकीयज्ञानदीप्त्या सदुपेदेशः जनान् अध्यात्मपरायणमकरोत्। तस्वावधारणा आसीत् यत् प्रम्णा, सत्येन, पराक्रमेण च कार्याणि सिद्धयन्ति। तत्कुरु पौरुषम्। आत्मभावस्य विकासः एव कर्म। अनात्मभावस्य विकासः एवाकर्म। दौर्बल्येन किमपि न भवति। अतः सबलो भव।

अनुवाद :
उस समय रामकृष्ण परमहंस अद्वितीय आध्यात्मिक ज्ञान पुंज के स्रोत थे। उनके प्रभाव से प्रभावित नरेन्द्रनाथ ने उनसे ही संन्यास की दीक्षा प्राप्त की। दीक्षा के बाद वह ‘स्वामी विवेकानन्द’ के नाम से प्रसिद्ध हुए। उसके बाद उन्होंने अपनी ज्ञान की ज्योति द्वारा सद् उपदेशों से लोगों को अध्यात्म की ओर अभिमुख किया। उनकी अवधारणा (निश्चय) थी कि प्रेम, सत्य और पराक्रम से कार्य पूरे होते हैं। उसका प्रयत्न करो। आत्म भाव का विकास ही कर्म है। अनात्म भाव का विकास ही अकर्म है। दुर्बलता से कुछ भी नहीं होता। इसलिए बलवान होओ।

जीवनस्यार्थः उन्नतिरस्ति। उन्नतेः तात्पर्य हृदयस्यौदार्यमास्ति। परोपकारः एव जीवनगतिः। स्वार्थभावः एव मृत्युः। प्रेमभावः एव जीवनम्। द्वेषभाव एवं मृत्युः। प्रेमभावः एव भक्तिः ज्ञानं मुक्तिश्चास्ति। प्रेम बिना नेदं यदिदमुपासते।

अनुवाद :
जीवन का अर्थ उन्नति है। उन्नति का तात्पर्य हृदय का औदार्य (उदारता का गुण) है। परोपकार ही जीवन की गति (चाल) है। स्वार्थभाव ही मृत्यु है। प्रेमभाव ही जीवन है। द्वेषभाव ही मृत्यु है। प्रेमभाव ही भक्ति, ज्ञान और मुक्ति है। प्रेम के बिना वह नहीं है जिसकी उपासना करते हैं।

सर्वथा दरिद्रनारायणो सेवितव्यः। यतोहि बुभुक्षितः, दीनः, उपेक्षितः, विकलाङ्गजनः, दुर्बलः एव साक्षादीश्वरः। अतः एतेषामुपासना एव ईश्वरस्याराधना अस्ति।

अनुवाद :
हमेशा दरिद्रनारायण (गरीब) की सेवा करनी चाहिए। क्योंकि भूखा, दीन, उपेक्षित, विकलांग, दुर्बल व्यक्ति ही साक्षात् ईश्वर हैं। इसलिए ऐसों की उपासना ही ईश्वर की आराधना है।

चारित्र्यबलं धारयत। अनेनैव सर्वत्र विजयो भविष्यति। दाता भव। प्रतिग्रहणस्य कामनां मा कुरु। वसन्तवल्लोकहितं चरत। परोपकारः परमपवित्रं कार्यमस्ति। परोपकारेण चित्तं शुद्धयति। अनेनैव ईश्वरप्राप्तिः सम्भवा।

अनुवाद :
चरित्र की शक्ति को धारण करो। इससे ही सब। जगह विजय होगी। दाता होओ। प्रतिग्रहण (दान के बदले ग्रहण) की कामना मत करो। बसन्त के समान संसार का कल्याण करो। परोपकार परम पवित्र कार्य है। परोपकार से मन शुद्ध होता है। इससे ही ईश्वर की प्राप्ति सम्भव है।

MP Board Solutions

सः वेदान्तप्रचाराय स्वीकायाखिलं जीवनं समर्पयामास। तेन हिन्दुधर्मः संस्कृतिश्च प्रसारिते। सः न केवलं परिव्राजकः अपतुि परोपकारी, दाता, लोकसेवकः महान् देशभक्तश्चासीत्। शिकागोनगरे विश्वधर्मसम्मेलने सः भारतस्य प्रतिनिधिः अभवत्। देशविदेशेषु तस्य बहवः शिष्याः अभवन्। आङ्ग्लदेशीय “कुमारी नोबल” या अनन्तर ‘भगिनी निवेदिता’ इति नाम्ना प्रसिद्धा, तस्य प्रिया शिष्या अभवत्। सः यूनां कृते विशिष्टप्रेरकः पथप्रदर्शकश्चासीत्। भारतीयस्वतन्त्रतासंग्रामेऽपि तस्य ऊर्जस्वलानि भाषणानि स्वाधीनतासैनिकानां कृते प्रेरणास्पदानि। ‘उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत’ इत्युपनिषदः ध्येयवाक्यं सः जीवनेऽधारयत्।

अनुवाद :
उन्होंने वेदान्त प्रचार के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उनके द्वारा हिन्दू धर्म और संस्कृति का प्रसार किया गया। वह न केवल संन्यासी, अपितु परोपकारी, दाता, लोक सेवक और महान देशभक्त थे। शिकागो नगर में विश्वधर्म सम्मेलन में वह भारत के प्रतिनिधि हुए। देश-विदेशों में उनके बहुत से शिष्य हुए। इंग्लैण्ड देश की “कुमारी नोबल” जो बाद में बहन निवेदिता’ के नाम से प्रसिद्ध हुई, उनकी प्रिय शिष्या हुई। वह युवाओं के लिये विशेष प्रेरक और मार्ग-प्रदर्शक थे। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में भी उनके तेजस्वी भाषण स्वाधीनता के सैनिकों के लिए प्रेरणादायक थे। ‘उठो, जागो और श्रेष्ठ (मनुष्यों) को पाकर (उनसे) ज्ञान प्राप्त करो।’ इस उपनिषद् के ध्येय वाक्य को उन्होंने जीवन में धारण किया।

अहर्निशं ब्रह्मकर्मसाधनां साध्यमानः एव जुलाई मासस्य चतुर्थे दिनांके १९०२ ख्रिस्ताब्दे(४ जुलाई,१९०२) सः ब्रह्मलीनो जातः। सः न केवलं भारते अपितु, विदेशेष्वपि प्रसिद्धः। तेन भारतस्य प्राचीनगौरवं विदेशेषु स्थापितम्। रवीन्द्रनाथटैगोरः कथयति यत् यदि कोऽपि भारतीयसंस्कृतिं ज्ञातुमिच्छति तहिं प्रथमः तेन स्वामी विवेकानन्दविषये पठितव्यः।

अनुवाद :
दिन-रात ब्रह्म कर्म साधना को करते हुए जुलाई महीने की चार तारीख 1902 ईसवी (4 जुलाई, 1902) में वह ब्रह्म में लीन हो गये। वह न केवल भारत में अपितु विदेशों में भी प्रसिद्ध थे। उनके द्वारा भारत का प्राचीन गौरव विदेशों में स्थापित किया गया। रवीन्द्रनाथ टैगोर कहते हैं कि यदि कोई भी भारतीय संस्कृति को जानना चाहता है तो पहले उसे स्वामी विवेकानन्द के विषय में पढ़ना चाहिए।

स्वामी विवेकानन्दः शब्दार्थाः

लब्धप्रतिष्ठः = ख्याति प्राप्त। अभिभाषक = वकील। कुशाग्रबुद्धिः = तीव्र बुद्धि। मल्लविद्यादिषु = कुश्ती आदि विद्याओं में। परिव्राजकदीक्षाम् = संन्यास की दीक्षा को। स्वकीयज्ञानदीप्त्या=अपनेज्ञान के प्रकाशसे।अध्यात्मपरायणम् = अध्यात्म की ओर अभिमुख। प्राप्य वशन्निबोधत = श्रेयस्कर लक्ष्य को प्राप्त कर शान्त हो। बुभुक्षिताः = भूखे। औदार्यम् = उदारता का गुण। प्रतिग्रहणस्य = दान के बदले ग्रहण करने की/का। ऊर्जस्वलानि = तेजस्वी। ब्रह्मलीनः = ब्रह्म में लीन । वसन्तवल्लोकहितं = वसन्त के समान लोक कल्याणकारी।

स्वामी विवेकानन्दः व्याकरणम्

(क) धार्मिकश्चासीत् = धार्मिकः + च + आसीत्।
(ख) अध्यात्मपरायणमकरोत् = अध्यात्मपरायणम् + अकरोत्।
(ग) हृदयस्यौदार्यमस्ति = हृदयस्य + औदार्यम् + अस्ति।
(घ) मुक्तिश्चास्ति = मुक्तिः + च + अस्ति।
(ङ) यदिदमुपासते = यत् + इदम् + उपासते।
(च) वसन्तवल्लोकहितम् = वसन्तवत् + लोकहितम्।

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 5 अहम् ओरछा अस्मि

In this article, we will share MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 5 अहम् ओरछा अस्मि Pdf, Sanskrit Class 8 Chapter 5 Mp Board these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 5 अहम् ओरछा अस्मि

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 5 अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 5 Mp Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत(एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) ओरछानगरं कस्मिन् मण्डले अस्ति? (ओरछा नगर विकास मण्डल में है?)
उत्तर:
टीकमगढ़मण्डले। (टीकमगढ़ मण्डल में)

(ख) ओच्छानगरस्य स्थापना कदा अभवत्? (ओरछा नगर की स्थापना कब हुई?)
उत्तर:
षोडशशताब्दे। (सोलहवीं शताब्दी में)

MP Board Solutions

(ग) ओरछानगरस्य स्थापना केन कृता? (ओरछा नगर की स्थापना किसके द्वारा की गयी?)
उत्तर:
रुद्रप्रतापेन। (रुद्रप्रताप के द्वारा)

(घ) विषपानस्थलं कुत्र वर्तते? (विषपान स्थल कहाँ है?)
उत्तर:
रामराजामन्दिरे। (रामराजा मन्दिर में)

(ङ) विषपानं कः कृतवान्? (विषपान किसने किया?)
उत्तर:
हरदौलः। (हरदौल ने)

(च) ओरछानगरं परितः किम्? (ओरछा नगर के चारों ओर क्या है?)
उत्तर:
वनम्। (जंगल)

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 5 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) ओरछानगरस्य परिक्षेत्रस्य प्रमुखदीनां नामानि लिखत। (ओरछा नगर के परिक्षेत्र में प्रमुख नदियों के नाम लिखो।)
उत्तर:
धसान-जामिनी-जतारा-बेतवाः। (धसान, जामिनी, जतारा और बेतवा)

(ख) दुर्गस्य किं वैशिष्टयम्? (किले की क्या विशेषता है?)
उत्तर:
दरबारभवनम्, शीशभवनम् च दुर्गस्य वैशिष्टयम्। (दरबार भवन और शीश भवन किले की विशेषता हैं।)

(ग) भवनानां गवाक्षेषु किं विद्यते? (भवनों की खिड़कियों में क्या है?)
उत्तर:
भवनानां गवाक्षेषु प्रस्तरपट्टिकासु सूक्ष्मं शिल्पकार्य विद्यते? (भवनों की खिड़कियों में पत्थर की पट्टियों में सूक्ष्म शिल्पकार्य है।)

(घ) हरदौलमहाराजः किमर्थं विषपानं कृतवान्? (हरदौल महाराज ने किसलिये विषपान किया?)
उत्तर:
हरदौलमहाराजः महाराज्याः सम्मानरक्षणाय राज्ञः सन्देहनिवारणाय च विषपानं कृतवान्। (हरदौल महाराज ने महारानी के सम्मान की रक्षा के लिए और राजा के सन्देह को दूर करने के लिये विषपान किया।)

MP Board Solutions

(ङ) प्रसिद्धकवेः केशवदासस्य स्थानं कुत्र अस्ति? (प्रसिद्ध कवि केशवदास का स्थान कहाँ है?)
उत्तर:
प्रसिद्धकवेः केशवदासस्य स्थानं उद्यानस्य नातिदूरे अस्ति? (प्रसिद्ध कवि केशवदास का स्थान उद्यान के पास है।)

(च) ओरछानगरे कानि द्रष्टव्यानि स्थलानि सन्ति? (ओरछा नगर में कौन-से देखने योग्य स्थल हैं?)
उत्तर:
ओरछानगरे लक्ष्मीनारायणमन्दिर-फूलबाग-दीवान हरदौलभवन-सुन्दरभवन- शहीदस्मारक प्रभृतीनि द्रष्टव्यानि स्थलानि सन्ति। (ओरछा नगर में लक्ष्मीनारायण मन्दिर, फूलबाग, दीवान, हरदौल भवन, सुन्दर भवन, शहीद स्मारक आदि देखने योग्य स्थल हैं।)

Class 8 Sanskrit Chapter 5 Aham Orchha Asmi प्रश्न 3.
उचितं मेलयत(उचित को मिलाओ-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 5 अहम् ओरछा अस्मि 1
उत्तर:
(क) → (iii)
(ख) → (i)
(ग) → (ii)
(घ) → (v)
(ङ) → (iv)

Class 8th Sanskrit Chapter 5 Mp Board प्रश्न 4.
उचितपदेन रिक्तस्थानं पूरयत(उचित शब्द द्वारा रिक्त स्थान भरो-)
(क) विषपानस्थलं ………… वर्तते। (उद्यानस्य मध्ये/मन्दिरस्य प्राङ्गणे)
(ख) दरबारभवनं ………… अस्ति। (दुर्गे/मार्गे)
(ग) केशवदासः ………… कविः आसीत्। (संस्कृतभाषायाः/हिन्दीभाषायाः)
(घ) ओरछानगरस्य इतिहासः ………. अस्ति। (मोचक:/रोचक:)
(ङ) जामिनीनद्याः तीरे ………… अधिकाः भवन्ति। (दाडिमवृक्षाः/जम्बूवृक्षाः)
उत्तर:
(क) उद्यानस्य मध्ये
(ख) दुर्गे
(ग) हिन्दीभाषायाः
(घ) रोचकः
(ङ) जम्बूवृक्षाः।

MP Board Solutions

Sanskrit Chapter 5 Class 8 Mp Board प्रश्न 5.
नामोल्लेखपूर्वकं समासविग्रहं कुरुत(नाम का उल्लेख करते हुए समास-विग्रह करो-)
(क) शिल्पकार्यम्
(ख) काव्यकलाविदग्धायाः
(ग) विषपानस्थलम्
(घ) विवाहावसरे
(ङ) चतुर्भुजमन्दिरम्।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 5 अहम् ओरछा अस्मि 2

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 5 प्रश्न 6.
नामोल्लेखपूर्वकं सन्धि विच्छेदं कुरुत (नाम का उल्लेख करते हुए सन्धि-विच्छेद करो-)
(क) अत्रैव
(ख) महत्त्वञ्च
(ग) अद्यावधि
(घ)सर्वाधिकम्
(ङ) भवनमपि।
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 5 अहम् ओरछा अस्मि 3

Class 8 Sanskrit Chapter 5 प्रश्न 7.
समीचीनं चिनुत (आम्/न)
(ठीक को चुनो, ठीक के आगे ‘आम्’ (हाँ) और गलत के आगे ‘न’ (नहीं) लिखो-)
(क) ओरछानगरस्य दुर्गः सुदृढ़ः कलात्मकः च नास्ति।
(ख) अभयारण्यं वन्यपशूनां रक्षणाय भवति।।
(ग) ओरछानगरे भित्तिकासु मनोहराणि चित्राणि वर्तन्ते।
(घ) ओरछानगरस्य निकटे सप्तधाराः सन्ति।
(ङ) रामराजामन्दिरे परशुरामस्य प्रतिमा अस्ति।
उत्तर:
(क) न
(ख) आम
(ग) आम
(घ) आम्
(ङ) न।

अहम् ओरछा अस्मि हिन्दी अनुवाद

अहम् ओरछा। अहं टीकमगढ़मण्डले स्थितं प्राचीन नगरम् अस्मि! पूर्व स्वतन्त्रराज्यरूपेण मम परिचयः आसीत्। मम स्थापना षोडशशताब्दे बुन्देलाराजपूतेन रुद्रप्रतापेन कृता। माम् परितः सधनं वनम् अस्ति। अस्मिन् वने सागौनवृक्षाः अधिकाः भवन्ति। सागौनकाष्ठं बहुमूल्यं भवति। मम वने सिंहाः, व्याघ्राः, हरिणाः, नीलगावः, वानराः स्वच्छन्दं विचरन्ति। अन्येऽपि वन्यपशवः निर्भयाः वसन्ति। एतेषां वन्यपशूनां रक्षणाय शासनेन इदानीम् अभयारण्यं निर्मितम्।

अनुवाद :
मैं ओरछा हूँ। मैं टीकमगढ़ मण्डल में स्थित प्राचीन नगर हूँ। पहले स्वतन्त्र राज्य के रूप में मेरा परिचय था। मेरी स्थापना सोलहवीं शताब्दी में बुन्देलराजपूत रुद्रप्रताप द्वारा की गई। मेरे चारों ओर घना जंगल है। इस जंगल में सागौन के पेड़ अधिक होते हैं। सागौन की लकड़ी बहुत कीमती होती हैं। मेरे जंगल में शेर, चीते, हिरण, नील गायें और बन्दर स्वछन्द घूमते हैं और भी जंगली पशु बिना भय के रहते हैं। इन जंगली पशुओं की रक्षा के लिए सरकार ने अब अभयारण्य का निर्माण कर दिया है।

MP Board Solutions

मम परिक्षेत्रे चतस्रः प्रमुखाः ‘नद्यः प्रवहन्ति। धसान-जामिनी-जतारा-बेतवा नाम्न्यः नद्याः जलस्य आवश्यक्तां पूरयन्ति, कृषि, वनं, भूमिं च सिञ्चन्ति। जामिनीनद्याः तीरे जम्बुवृक्षाः अधिकाः भवन्ति। मम दक्षिणभागे जामिनीवेत्रवत्योः संगमः अस्ति। तत्र संगमात् जलस्य सप्तधाराः भवन्ति। अतएव जना लोकभाषायां तं स्थलं ‘सप्तधारा’ इति वदन्ति। वेत्रवत्याः तटे: मम पुरातनः ऐतिहासिकः दुर्गः अस्ति। बहूनि मन्दिराणि अपि सन्ति। तत्रैव राज्ञा समाधयः अपि सन्ति।

अनुवाद :
मेरे परिक्षेत्र में चार प्रमुख नदियाँ बहती हैं। धसान, जामिनी, जतारा और बेतवा नाम की नदियाँ जल की आवश्यकता को पूरा करती हैं और खेती, वन एवं भूमि को सींचती हैं। जामिनी नदी के किनारे जामुन के वृक्ष अधिक होते हैं। मेरे दक्षिण भाग में जामिनी और वेत्रवती का संगम है। वहाँ संगम से जल की सात धाराएँ हो जाती हैं। इसलिए लोग लोकभाषा (सामान्य भाषा) में उस स्थल को ‘सप्तधारा’ कहते हैं। वेत्रवती के किनारे पर मेरा पुराना ऐतिहासिक किला है। बहुत से मन्दिर भी हैं। वहाँ राजाओं की समाधियाँ भी हैं।

तटे एकम् भव्यं रामराजामन्दिरं विद्यते। एतद् कलात्मकम् ऐतिहासिकम् मन्दिरम् अस्ति। मन्दिरे रामस्य, लक्ष्मणस्य,सीतायाश्च भव्याः, मनोरमाः प्रतिमाः प्रतिष्ठताः। मन्दिरस्य उद्याने विषपानस्थलं वर्तते। अत्रैव वीरः हरदौल: विषपानं कृतवान्। मम भूमौ अनेके वीराः धीराः, श्रेष्ठाः पुरुषाः अभवन्। तेषु हरदौल: मम अतिप्रियः आसीत्। सः राज्ञः जुझारसिंहस्य प्रियः अनुजः आसीत्। परं चाटुकारैः, धूर्तेः राज्ञः मनसि राज्ञीहरदौलसम्बन्धे सन्देहः उत्पादितः। हरदौलः महाराज्याः सम्मानरक्षणाय राज्ञः सन्देहनिवारणाय च विषपानं कृतवान्। अद्यापि तस्य बलिदानस्य स्मृतिः समस्ते क्षेत्रे सजीवा इव भवति। विवाहावसरे महिलाः तं प्रथमं पूजयन्ति।

अनुवाद :
किनारे पर एक भव्य रामराजा मन्दिर है। यह कलात्मक ऐतिहासिक मन्दिर है। मन्दिर में राम, लक्ष्मण और सीता की भव्य मनोरम मूर्ति स्थापित हैं। मन्दिर के उद्यान में विषपान स्थल है। यहीं पर वीर हरदौल ने विषपान किया। मेरी भूमि पर अनेक वीर, धीर, श्रेष्ठ पुरुष हुए। उनमें हरदौल मेरा अति प्रिय था। वह राजा जुझार सिंह का प्रिय छोटा भाई था। परन्तु चुगलखोर धूर्तों के द्वारा राजा के मन में रानी और हरदौल के सम्बन्ध में सन्देह उत्पन्न कर दिया। हरदौल ने महारानी के सम्मान की रक्षा के लिए और राजा के सन्देह को दूर करने के लिए विषपान किया। आज भी उसके बलिदान की स्मृति समस्त क्षेत्र में सजीव-सी सुशोभित होती है। विवाह के अवसर पर महिलाएँ उसको पहले पूजती हैं।

मम दुर्गम् अपि सुदृढं कलात्मकं चास्ति। दरबारभवन, शीशभवनम् च दुर्गस्य वैशिष्ट्यम् अस्ति। सर्वेषु भवनेषु स्थापत्यकलायाः सुन्दराणि चित्राणि मनांसि रञ्जयन्ति: भवनानां गवाक्षेषु अपि प्रस्तरपट्टिकासु सूक्ष्म शिल्पकार्ड विद्यते। भित्तिकासु अपि मनोहराणि चित्राणि वर्तन्ते। दुर्गस्य अधस्तले काव्यकलाविदग्धायाः नर्तक्या: रायप्रवीमाया: आकर्षकम् भवनमपि स्थितम्। वामे दर्शनीयं चतुर्भजम्म विद्यते। अत्रादि प्रस्तरेषु कलाया: चित्रणम् अद्भुतम् भाति। पुरतः सावन-भादौनामको स्तम्भौ प्रसिद्धौ।

अनुवाद :
मेरा किला भी मजबूत और कलात्मक है। दरबार भवन और शीश भवन किले की विशेषता हैं। सभी भवनों में स्थापत्य कला के सुन्दर चित्र मनों को प्रसन्न करते हैं। भवनों की खिड़कियों में भी पत्थर की पट्टियों में सूक्ष्म शिल्पकार्य है। दीवारों पर भी मनोहर चित्र हैं। किले के नीचे काव्य कला में चतुर नर्तकी रायप्रवीणा का आकर्षक भवन भी स्थित है। बायें भाग में दर्शनीय चतुर्भुज मन्दिर है। यहाँ भी पत्थरों पर अद्भुत कला का चित्रण सुशोभित होता है। सामने सावन-भादों नामक दो खम्भे प्रसिद्ध हैं।

MP Board Solutions

मम परिसरे एकम् पुष्पोद्यानं वर्तते। तत्र विविधवर्णानि पुष्पाणि पर्यटकानां चित्तं मोदयन्ति। उद्यानस्य नातिदुरे हिन्दी भाषायाः प्रसिद्धकवेः केशवदासस्य स्थानमस्ति। षोडशशताब्दात् आरभ्य मम निर्माणम् अद्यावधि चलति एव। परं सर्वाधिक निर्माण कार्य महाराजवीरसिंहप्रथमस्य शासने अभवत्। मम इतिहासः रोचकः, कुतूहलपूर्ण: अस्ति। मध्यकाले मम विशिष्टं स्थानं महत्त्वञ्च आसीत् । अधुनाऽपि रामराजा तथैव विराजते। इदानीमपि जनाः प्रतिवर्षम् आगच्छन्ति माम् दृष्ट्वा मुदिताः भवन्ति । अन्यानि अपि लक्ष्मीनारायणमन्दिर-फूलबाग-दीवान-हरदौल भवन-सुन्दर भवन-शहीदस्मारक प्रभृतीनि द्रष्टव्यानि स्थलानि सन्ति। प्रतिदिनं यात्रिणः आगत्य ममेतिहासिक स्वरूपं दृष्ट्वां प्रसन्नाः भवन्ति तथा च तान् विलोक्य अहमपि प्रसन्नः भवामि।

अनुवाद :
मेरे परिसर में एक फूलों का बाग है। वहाँ विभिन्न रंगों के फूल पर्यटकों के मन को प्रसन्न करते हैं। उद्यान के पास में हिन्दी भाषा के प्रसिद्ध कवि केशवदास का स्थान है। सोलहवीं शताब्दी से लेकर मेरा निर्माण आज भी चल ही रहा है। परन्तु सबसे अधिक निर्माण कार्य महाराज वीरसिंह प्रथम के शासन में हुआ। मेरा इतिहास रोचक और कौतूहलपूर्ण है। मध्यकाल में मेरा विशिष्ट स्थान और महत्त्व था। आज भी रामराजा वहीं विराजते हैं। अब भी लोग प्रतिवर्ष आते हैं (और) मुझे देखकर प्रसन्न होते हैं। लक्ष्मीनारायण मन्दिर, फूलबाग, दीवान, हरदौल भवन, सुन्दर भवन, शहीद स्मारक आदि अन्य स्थल भी देखने योग्य हैं। प्रतिदिन यात्री आकर मेरे ऐतिहासिक स्वरूप को देखकर प्रसन्न होते हैं तथा उनको देखकर मैं भी प्रसन्न होता हूँ।

अहम् ओरछा अस्मि शब्दार्थाः

परितः = चारों ओर। गवाक्षेषु = खिड़कियों में। सङ्गमः = नदियों के पारस्परिक मिलन स्थल। वन्यपशवः = जंगली पशु। दुर्गमः = किला। भाति = सुशोभित होता है।

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 4 नीतिश्लोकाः

In this article, we will share MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 4 नीतिश्लोकाः Pdf, Class 8 Sanskrit Chapter 4 these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 4 नीतिश्लोकाः

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 4 अभ्यासः

MP Board Class 8 Sanskrit Chapter 4 प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत(एक शब्द में उत्तर लिखो-)
(क) भार्या कीदृशी भवेत्? (पत्नी कैसी होनी चाहिए?)
उत्तर:
प्रियवादिनी। (प्रिय बोलने वाली)

(ख) विद्या कीदृशी भवेत्? (विद्या कैसी होनी चाहिए?)
उत्तर :
अर्थकरी। (धन का संग्रह कराने वाली)

MP Board Solutions

(ग) युक्तं नीचस्य किं भवति? (उचित असमर्थ के लिए क्या हो जाता है?)
उत्तर:
दूषणम्। (अनुचित)

(घ) मनुष्यः मृत्यु कथम् आपद्यते? (मनुष्य मृत्यु कैसे प्राप्त करता है?)
उत्तर:
मोहात्। (मोह से)

(ङ) मित्रं कदा जानीयात्? (मित्र को कब जानना चाहिए?)
उत्तर:
आपत्सु। (आपत्तियों में)

Class 8 Sanskrit Chapter 4 Mp Board प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो-)
(क) अजीर्णे विषं किम्? (अपच में विष क्या है?)
उत्तर:
अजीर्णे भोजनं विषम्। (अपच में भोजन विष है।)

(ख) दारिद्रयं कुत्र नास्ति? (दरिद्रता कहाँ नहीं है?)
उत्तर:
दारिद्रयं उद्योगे नास्ति। (दरिद्रता परिश्रम में नहीं है।)

(ग) मानवः नित्यं किं विचिन्तयेत्? (मनुष्य को सदा क्या सोचना चाहिए?)
उत्तर:
मानवः नित्यं मे किं छिद्रं को सङ्गो किम् अविनिपातितम् कुतः दोषः ममाश्रयेद् इति विचिन्तयेत्। (मनुष्य को सदा मुझमें क्या बुराई है, क्या आसक्ति है, वह कौन-सी वस्तु है जो पतनशील नहीं है। मुझमें दोष कहाँ से आते हैं, यह सोचना चाहिए।)

(घ) गुणेषु कः करणीयः करणीयम्? (गुणों के उपार्जन हेतु क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
गुणेषु यत्नः करणीयः। (गुणों के उपार्जन हेतु प्रयास करना चाहिए।)

(ङ) अनभ्यासे किं विषम्? (अभ्यास न करने पर क्या विष है?)
उत्तर:
अनभ्यासे शास्त्रम् विषम्। (अभ्यास न करने पर शास्त्र विष है।)

MP Board Solutions

Class 8 Sanskrit Chapter 4 Niti Sloka प्रश्न 3.
श्लोकांशान् यथायोग्यं योजयत(श्लोक के अंशों को ठीक-ठीक जोड़ो-)
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 4 नीतिश्लोकाः 1
उत्तर:
(क) → (ii)
(ख) → (iv)
(ग) → (v)
(घ) → (i)
(ङ) → (iii)

Class 8th Sanskrit Chapter 4 Mp Board प्रश्न 4.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां। समक्षं’न’ इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ (हाँ) तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ (नहीं) लिखो-)
(क) नित्यम् अर्थागमः अरोगिता च इति द्वयं भवेत्।
(ख) अमृतं विषं च द्वयं देहे प्रतिष्ठितम्।
(ग) उद्योगे दारिद्र्यम् अस्ति।
(घ) व्यसनेषु बान्धवान् जानीयात्।
(ङ) सत्येन अमृतम् आपद्यते।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) आम्
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) आम्।

MP Board Class 8th Sanskrit Chapter 4 प्रश्न 5.
पदानां विभक्तिं वचनं च लिखत(शब्दों के विभक्ति और वचन लिखो-)
उत्तर:
MP Board Class 8th Sanskrit Solutions Chapter 4 नीतिश्लोकाः 2

(नीति के श्लोकों में नीति होती है। जीवन के विषय में, समाज के विषय में, राष्ट्र के विषय में, धर्म, वैराग्य, संस्कार और परोपकार आदि के विषय में प्रामाणिक, अच्छा चिन्तन और वैज्ञानिक चिन्तन नीति के श्लोकों में पाया जाता है। संस्कृत में नीति को आधार बनाकर श्लोक रचना करने की और शतक (सौ श्लोकों का संग्रह) रचना करने की परम्परा अति प्राचीन है। वस्तुतः थोड़े शब्दों के द्वारा प्रतिष्ठित भावों का, उदात्त विचारों का और श्रेष्ठ विषयों का महत्वपूर्ण विवरण नीति के श्लोकों में पाया जाता है।

नीतिश्लोकाः हिन्दी अनुवाद

अर्थागमोनित्यमरोगिता च प्रिया च भार्या प्रियवादिनी च।
वश्यश्च पुत्रोऽर्थकरी च विद्या षड् जीवलोकस्य सुखानि राजन्॥१॥

अनुवाद :
हे राजन्! नित्य धन का आगम हो, निरोगता हो, पत्नी प्यारी हो और प्रिय बोलने वाली हो, आज्ञा का पालन करने वाला पुत्र हो और धन का संग्रह कराने वाली विद्या हो, ये छह संसार के सुख हैं।

अयुक्तं स्वामिनो युक्तं युक्तं नीचस्य दूषणम्।
अमृतं राहवे मृत्युः विषं शङ्करभूषणम्॥२॥

MP Board Solutions

अनुवाद :
समर्थ (शक्तिशाली) व्यक्ति के लिए अनुचित भी उचित हो जाता है और नीचे स्तर के (असमर्थ) व्यक्ति के लिए उचित भी अनुचित हो जाता है। जैसे राहु को अमृत पीने से भी मृत्यु मिली और विषपान करना शंकरजी के लिए भूषण हो गया।

अमृतं चैव मृत्युश्च द्वयं देहे प्रतिष्ठितम्।
मृत्युमापद्यते मोहात् सत्येनापद्यतेऽमृतम्॥ ३॥

अनुवाद :
अमरता और मृत्यु दोनों शरीर में स्थित हैं। मोह में फंसे रहने से मृत्यु प्राप्त होती है और सत्य को जानने से अमरता प्राप्त होती है।

आपत्सु मित्रं जानीयाद् युद्धे शूरं धने शुचिम्।
भार्या क्षीणेषु वित्तेषु व्यसनेषु च बान्धवान्।॥४॥

अनुवाद :
मित्र को आपत्तियों में, शूरवीर को युद्ध में, पवित्रता को धन में, पत्नी को धन नष्ट हो जाने पर और भाई-बन्धुओं को संकटों में जानना (पहचानना) चाहिए।

आरोप्यते शिला शैले यत्नेन महता यथा।
निपात्यते क्षणेनाधः तथात्मा गुणदोषयोः॥५॥

अनुवाद :
जैसे पर्वत पर शिला बहुत ही कठिनाई से चढ़ाई जाती है और एक क्षण में ही नीचे गिरा दी जाती है वैसे ही प्राणी गुण और दोष ग्रहण करता है। (अर्थात् गुण कठिनता से एवं दोष सरलता से ग्रहण करता है।)

उद्योगे नास्ति दारिद्रयं जपतो नास्ति पातकम्।
मौने च कलहो नास्ति नास्ति जागरिते भयम्॥६॥

अनुवाद :
परिश्रम करने से दरिद्रता (गरीबी) नहीं रहती – है, भगवान् का नाम लेने से पाप नहीं रहते हैं। मौन (चुप) रहने। से लड़ाई-झगड़ा नहीं होता है और जागते रहने से (चोर आदि का) भय नहीं होता है।

MP Board Solutions

किं छिद्रं को नु सङ्को मे किं वास्त्यविनिपातितम।
कुतो ममाश्रयेद् दोषः इति नित्यं विचिन्तयेत्॥७॥

अनुवाद :
मुझमें क्या बुराई है, क्या आसक्ति है अथवा वह कौन-सी वस्तु है जो पतनशील (नष्ट होने वाली) नहीं है। मुझमें दोष (बुराइयाँ) कहाँ से आते हैं, इनके विषय में सदा। सोचना चाहिए।

गुणेषु क्रियतां यत्नः किमाटोपैः प्रयोजनम्।
विक्रीयन्ते न घण्टाभिर्गावः क्षीरविवर्जिताः॥ ८॥

अनुवाद :
गुणों के उपार्जन में प्रयास करना चाहिए, बाहरी – आडम्बरों (दिखावों) से क्या लाभ है। क्योंकि घण्टे लटकाने से दूध न देने वाली गायें नहीं बिकती हैं।

निर्धनस्य विषं भोगो निस्सत्त्वस्य विषं रणम्।
अनभ्यासे विषं शास्त्रम् अजीर्णे भोजनं विषम्॥९॥

अनुवाद :
निर्धन के लिए भोग-विलास विष है, अशक्त। (शक्तिहीन) के लिए युद्ध विष है, अभ्यास न करने के लिए। शास्त्र विष हैं (और) अपच होने पर भोजन विष है।

नीतिश्लोकाः शब्दार्थाः

अर्थागमः = धन का आगम। अरोगिता = निरोगता। वश्यः = आज्ञापालक। अर्थकरी = धन संग्रह कराने वाली। अयुक्तम् = अनुचित, अयोग्य। स्वामिनः = समर्थ जन का। युक्तम् = उचित वस्तु या उपयोगी वस्तु। अमृतम् = अमृत, अमरता। मृत्युमापद्यते = मृत्यु को पाता है। आपत्सु = आपत्तियों में। व्यसनेषु = संकटों के समय। जानीयात् = जानना चाहिए। आरोप्यते = चढ़ाई जाती है। निपात्यते = गिराई जाती है। तथात्मा = वैसे ही प्राणी, व्यक्ति। अधः = नीचे। उद्योगे = उद्यम करने पर। दारिद्रयम् = गरीबी। जपतः = भगवान् का नाम लेने वाले का। कलहः = लड़ाई-झगड़ा। छिद्रम् = दुर्बलता, गलती, बुराई। सङ्ग = आसक्ति। अविनिपातितम् = वह कौन-सी वस्तु जो पतनशील नहीं है। ममाश्रयेत् = मुझ में आते हैं। विचिन्तयेत् = चिन्तन करना चाहिए। गुणेषु = गुण के उपार्जन में। किमाटोपैः = बाहरी आडम्बरों से क्या। घण्टाभिः = घण्टे लटकाने से। क्षीरविवर्जिताः = दूध से रहित। भोगः = भोग-विलास। निस्सत्वस्य = अशक्त के लिए। अनभ्यासे = अभ्यास न करने पर। अजीर्णे = अपच में।

MP Board Class 8th Sanskrit Solutions

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 11 Conic Sections Miscellaneous Exercise

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 11 Conic Sections Miscellaneous Exercise

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 11 Conic Sections Miscellaneous Exercise 1
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 11 Conic Sections Miscellaneous Exercise 2
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 11 Conic Sections Miscellaneous Exercise 3
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 11 Conic Sections Miscellaneous Exercise 4
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 11 Conic Sections Miscellaneous Exercise 5

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 11 Conic Sections Miscellaneous Exercise 6
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 11 Conic Sections Miscellaneous Exercise 7
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 11 Conic Sections Miscellaneous Exercise 8
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 11 Conic Sections Miscellaneous Exercise 9
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 11 Conic Sections Miscellaneous Exercise 10

MP Board Class 11th Maths Solutions