MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 19 उपभोक्ता जागरूकता

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 19 उपभोक्ता जागरूकता

MP Board Class 10th Social Science Chapter 19 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 10th Social Science Chapter 19 वैस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
उपभोक्ता संरक्षण नियम कब लागू किया ? (2009)
(i) 1986 में
(ii) 1996 में
(iii) 1968 में
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) 1986 में

प्रश्न 2.
उपभोक्ता जागरूकता का अर्थ है –
(i) अपने अधिकारों के प्रति सतर्कता
(ii) अपने कर्तव्यों के प्रति सतर्कता
(iii) अपने अधिकारों एवं कर्त्तव्यों दोनों के प्रति सतर्कता
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(iii) अपने अधिकारों एवं कर्त्तव्यों दोनों के प्रति सतर्कता

प्रश्न 3.
उपभोक्ता जागरूकता आवश्यक है –
(i) शोषण से बचाव के लिए
(ii) उच्च जीवन-स्तर के लिए
(iii) हानिकारक उपभोग रोकने के लिए
(iv) उक्त सभी।
उत्तर:
(iv) उक्त सभी।

प्रश्न 4.
उत्पादक वस्तु की गुणवत्ता एवं कीमत के सम्बन्ध में मनमानी कर सकते हैं –
(i) प्रतियोगी बाजार में
(ii) एकाधिकार में
(iii) कृषि उत्पादों में
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ii) एकाधिकार में

प्रश्न 5.
एगमार्क सुरक्षा चिन्ह है (2018)
(i) आभूषणों के लिए
(ii) कृषि उत्पादों के लिए
(iii) ऊनी वस्त्रों के लिए
(iv) बिजली के उपकरणों के लिए।
उत्तर:
(ii) कृषि उत्पादों के लिए

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. आई. एस. आई ………….” स्तर का मानक है। (2014)
  2. बिजली के उपकरणों पर ……….. का चिन्ह रहता है।
  3. मिलावटी खाद्य पदार्थ के विरुद्ध उपभोक्ताओं को……………” अधिकार प्राप्त है।
  4. वस्तु की पूर्ति होते हुए उसका अभाव बताना ……….. कहलाता है।
  5. एगमार्क ……………’ सम्बन्धी उत्पादों पर लगाया जाता है।

उत्तर:

  1. गुणवत्ता
  2. आई. एस. आई.
  3. वस्तुओं और सेवाओं की जानकारी
  4. कृत्रिम अभाव, कालाबाजारी
  5. कृषि।

सही जोड़ी मिलाइए

उत्तर:

  1. → (ग)
  2. → (क)
  3. → (घ)
  4. → (ङ)
  5. → (ख)

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 19 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वस्तु या सेवा के खरीदार को क्या कहते हैं ? (2016)
उत्तर:
उपभोक्ता।

प्रश्न 2.
उपभोक्ता शोषण से क्या आशय है ? (2014, 15, 17)
उत्तर:
उपभोक्ता शोषण से आशय है कि उपभोक्ताओं को कम वजन तोलना, अधिक कीमत वसूलना, मिलावटी एवं दोषपूर्ण वस्तुएँ बेचना, भ्रमित विज्ञापन देकर उपभोक्ताओं को गुमराह करना आदि।

प्रश्न 3.
उपभोक्ता शोषण के दो प्रकार बताइए। (2016, 18)
उत्तर:

  1. ऊँची कीमतें – प्रायः दुकानदार निर्धारित फुटकर कीमत से अधिक मनमानी कीमत ले लेते हैं।
  2. मिलावट एवं अशुद्धता – मिलावट का आशय है वस्तु में कुछ सस्ती वस्तु को मिला देना। इससे कई बार उपभोक्ता के स्वास्थ्य को हानि होती है।

प्रश्न 4.
सिनेमा की टिकट को उसकी निर्धारित कीमत से अधिक कीमत पर बेचना क्या कहलाता है ?
उत्तर:
टिकट की कालाबाजारी द्वारा उपभोक्ता का शोषण।

प्रश्न 5.
वस्तु के सम्बन्ध में सीमित जानकारी प्राप्त होने का क्या परिणाम होता है ?
उत्तर:
वैश्वीकरण के इस युग में बाजार अनेक प्रकार के उत्पादों से भरा पड़ा है। उत्पादक उत्पादन करने हेतु स्वतन्त्र है। गुणवत्ता एवं मूल्य निर्धारण के कोई निश्चित नियम नहीं हैं। वस्तु के अनेक पहलुओं; जैसे-मूल्य, गुण, संरचना, प्रयोग की शर्ते, क्रय के नियम आदि की उपयुक्त एवं पूर्ण जानकारी का अभाव होता है। अतः उपभोक्ता गलत चुनाव करके अपना आर्थिक नुकसान कर बैठते हैं।

प्रश्न 6.
एकाधिकार क्या है ? (2018)
उत्तर:
एकाधिकार – एकाधिकार का आशय है किसी वस्तु के उत्पादन एवं वितरण पर किसी एक उत्पादक या एक उत्पादक समूह का अधिकार होना। एकाधिकार की स्थिति में उत्पादक कीमतों एवं वस्तु की गुणवत्ता तथा उपलब्धता के सम्बन्ध में मनमानी करते हैं। फलत: वे उपभोक्ताओं का शोषण करने में सफल हो जाते हैं।

प्रश्न 7.
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस कब मनाया जाता है ?
उत्तर:
24 दिसम्बर को भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 19 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उपभोक्ता जागरूकता का आशय उदाहरणों द्वारा स्पष्ट कीजिए। (2010)
उत्तर:
पूँजीवाद एवं वैश्वीकरण के इस युग में प्रत्येक उत्पादक का प्रमुख उद्देश्य अपने लाभ को अधिकतम करना होता है। उत्पादक हर सम्भव तरीके से अपने उत्पाद की बिक्री बढ़ाने में लगे हुए हैं। अतः अपने उद्देश्य की पूर्ति करते हुए वे उपभोक्ताओं के पक्ष को भूल जाते हैं और उनका शोषण करते हैं। उदाहरण के लिए-कम वजन तोलना, अधिक कीमत वसूलना, मिलावटी एवं दोषपूर्ण वस्तुएँ बेचना, भ्रमित विज्ञापन देकर उपभोक्ताओं को गुमराह करना आदि। इस प्रकार उपभोक्ता बाजार में ठगा न जा सके इसके लिए उसे जागरूक बनाना आवश्यक है। इस प्रकार उपभोक्ता जागरूकता से आशय उपभोक्ता को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने से है।

प्रश्न 2.
उपभोक्ता जागरूकता अराजकता तथा हानिकारक उपभोग पर रोक लगाने में किस प्रकार सहायक है ? (2013)
उत्तर:
उपभोक्ता की जागरूकता हानिकारक उपभोग तथा अराजकता पर नियन्त्रण लगाने में निम्न प्रकार सहायक है –

  1. हानिकारक वस्तुओं के उपभोग पर रोक-बाजार में अनेक ऐसी वस्तुएँ भी उपलब्ध रहती हैं जो कुछ उपभोक्ताओं को हानि पहुँचाती हैं। उदाहरण के लिए, सिगरेट, तम्बाकू, शराब आदि को लिया जा सकता है। उपभोक्ता शिक्षा एवं जागरूकता ऐसी वस्तुओं को न खरीदने की प्रेरणा देती है।
  2. अराजकता पर नियन्त्रण-समाज में प्रत्येक व्यक्ति उपभोक्ता होता है। अत: यदि उपभोक्ता, जागरूक एवं विवेकशील है तब सम्पूर्ण समाज भी स्वस्थ और अपने अधिकारों के प्रति सचेत हो जाता है। ऐसी स्थिति में समाज में अराजकता पर नियन्त्रण रहता है।

प्रश्न 3.
आई. एस. आई. क्या है ? (2016)
उत्तर:
आई. एस. आई. – भारत सरकार ने कुछ ऐसी संस्थाओं का गठन किया है जो वस्तुओं की गुणवत्ता को प्रमाणित करती हैं। औद्योगिक तथा उपभोक्ता वस्तुओं के लिए आई. एस. आई. चिन्ह दिया गया है। धोखाधड़ी से बचने के लिए उपभोक्ताओं को इस चिन्ह वाली वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 4.
उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम क्या है ? लिखिए।
उत्तर:
उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम – देश के उपभोक्ता आन्दोलन में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 का बनाया जाना एक मील का पत्थर है। यह अधिनियम कोपरा (COPRA) के नाम से प्रसिद्ध है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ता की शिकायतों को तुरन्त निपटाने तथा कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाना है। कोपरा के अन्तर्गत उपभोक्ता विवादों के निपटारे के लिए जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तरों पर एक त्रिस्तरीय न्यायिक तन्त्र स्थापित किया गया है। जिला स्तर का न्यायालय ₹20 लाख तक के दावों के सम्बन्धित मुकदमों पर विचार करता है राज्य स्तरीय अदालतों में ₹20 लाख से ₹ एक करोड़ तक के मामलों की सुनवाई की जाती है। राष्ट्रीय स्तर की अदालतें एक करोड़ से ऊपर की दावेदारी से सम्बन्धित मुकदमों को देखती हैं।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 19 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता एवं महत्व बताइए। (2009)
अथवा
उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता के किन्हीं पाँच बिन्दुओं का वर्णन कीजिए। (2012)
उत्तर:
उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता एवं महत्व

अधिकांशत उपभोक्ता को बाजार में सही वस्तुएँ एवं सेवाएँ प्राप्त नहीं होती हैं। उससे बहुत ही अधिक कीमत ले ली जाती है या मिलावटी तथा कम गुणवत्ता वाली वस्तुएँ बेच दी जाती हैं। परिणामस्वरूप यह आवश्यक है कि उसे जागरूक किया जाए। उपभोक्ता को जागरूक बनाने की आवश्यकता एवं महत्व निम्नलिखित बातों से स्पष्ट हो जाते हैं –

(1) अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त करना – प्रत्येक व्यक्ति की आय सीमित होती है। वह अपनी आय से अधिक वस्तुएँ व सेवाएँ खरीदना चाहता है। इससे ही उसे पूर्ण सन्तुष्टि प्राप्त होती है। अत: यह आवश्यक है कि उसे वस्तुएँ सही माप-तोल के अनुसार प्राप्त हों और उसके साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी न हो। इसके लिए उसे जागरूक बनाना आवश्यक है।

(2) उत्पादकों के शोषण से बचाव – उत्पादक एवं विक्रेता उपभोक्ताओं का कई प्रकार से शोषण करते हैं; जैसे-कम तोलना, अधिक कीमत लेना, बिल न देना, मिलावट करना, नकली वस्तु देना आदि । बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ भी अपने विज्ञापनों से उपभोक्ताओं को भ्रमित करती हैं। उपभोक्ता जागरूकता ही उन्हें उत्पादकों विक्रेताओं के शोषण से बचाती है।

(3) बचत को प्रोत्साहन – जागरूकता व्यक्तियों को फिजूलखर्ची तथा अपव्यय से रोकती है और उसे सही निर्णय लेने की प्रेरणा देती है। ऐसे उपभोक्ता सेल, छूट, मुफ्त उपहार, आकर्षक पैकिंग आदि के लालच में नहीं फँसते। इससे वे अपनी आय का सही उपयोग करने एवं अधिक बचत करने में सफल रहते हैं।

(4) समस्याओं को हल करने की जानकारी – अशिक्षा, अज्ञानता एवं जानकारी के अभाव में उपभोक्ता वर्ग धोखा खा जाता है। अतः आवश्यक है कि उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों की जानकारी दी जाए जिससे वे उत्पादकों एवं विक्रेताओं द्वारा ठगे न जाएँ। उपभोक्ता जागृति के द्वारा उन्हें कानूनी प्रक्रिया से भी अवगत कराया जाता है जिससे वे अपनी समस्याओं को हल कर सकें।

(5) हानिकारक वस्तुओं के उपयोग पर रोक – बाजार में अनेक ऐसी वस्तुएँ भी उपलब्ध रहती हैं जो कुछ उपभोक्ताओं को हानि पहुँचाती हैं। उदाहरण के लिए सिगरेट, शराब, तम्बाकू आदि को लिया जा सकता है। उपभोक्ता की जागरूकता एवं शिक्षा ऐसी वस्तुओं को न खरीदने की प्रेरणा देती है। इससे उन्हें बहुत लाभ होता है।

प्रश्न 2.
उत्पादक एवं व्यापारी उपभोक्ताओं का शोषण किस प्रकार करते हैं ? व्याख्या कीजिए। (2013)
अथवा
उपभोक्ता शोषण के किन्हीं पाँच प्रकारों का वर्णन कीजिए। (2009, 12)
उत्तर:
सामान्यतः उत्पादक एवं व्यापारी उपभोक्ताओं का शोषण निम्नलिखित प्रकार से करते हैं –
(1) मिलावट एवं अशुद्धता – मिलावट का आशय है वस्तु में कुछ सस्ती वस्तु का मिला देना। इससे कई बार उपभोक्ता के स्वास्थ्य को हानि होती है। चावल में सफेद कंकड़, मसालों में रंग, तुअर दाल में खेसरी दाल तथा अन्य महँगे खाद्य पदार्थ में हानिकारक वस्तुओं की मिलावट अधिक लाभ अर्जन के उद्देश्य से की जाती है।

(2) अधिक मूल्य – प्रायः दुकानदार निर्धारित फुटकर कीमत से अधिक मनमानी कीमत ले लेते हैं। अक्सर देखा गया है कि जब हम एक दुकान से महँगी वस्तु खरीद लेते हैं और वही वस्तु दूसरी किसी दुकान में कम कीमत में मिल जाती है। यदि हम अंकित मूल्य दिखाते हैं तो वह कोई कारण बता देता है; जैसे – स्थानीय कर आदि।

झूटी अथवा अधूरी जानकारी – उत्पादक एवं विक्रेता कई बार ग्राहकों को गलत या अधूरी जानकारी देते हैं। इससे ग्राहक गलत वस्तु खरीदकर फंस जाते हैं और उनका पैसा बेकार चला जाता है। वस्तु की कीमत, गुणवत्ता, अन्तिम तिथि, पर्यावरण पर प्रभाव, क्रय की शर्ते आदि के विषय में सम्पूर्ण जानकारी नहीं दी जाती है। वस्तु को खरीदने के बाद उपभोक्ता परेशान होता रहता है।

(4) घटिया गुणवत्ता – जब कुछ वस्तुएँ बाजार में चल जाती हैं तो कुछ बेईमान उत्पादक जल्दी धन कमाने की लालसा में उनकी बिल्कुल नकल उतारकर बाजार में नकली माल चला देते हैं। ऐसे में दुकानदार भी ग्राहक को घटिया सामान दे देते हैं क्योंकि ऐसी वस्तुएँ बेचने में उन्हें अधिक लाभ रहता है। इस प्रकार उपभोक्ता ठगा जाता है और उसका शोषण होता है।

(5) माप-तौल में गड़बड़ी – माप-तोल में विक्रेता कई प्रकार से गड़बड़ियाँ करते हैं; जैसे-बाँट के तले को खोखला करना, उसका वजन वांछित से कम होना, बाँट के स्थान पर पत्थर का उपयोग करना, लीटर के पैमाने का तला नीचे से मोटा या ऊपर की ओर उठा हुआ होना, तराजू के पलड़े के नीचे चुम्बक लगा देना आदि। इस प्रकार उपभोक्ता जितना भुगतान करता है उसके बदले में उसे वस्तु उचित मात्रा में प्राप्त नहीं होती है।

(6) बिक्री के पश्चात् असन्तोषजनक सेवा – जब तक उपभोक्ता वस्तु खरीद नहीं लेता, उसे तरह-तरह के लालच एवं बाद में प्रदान की जाने वाली सेवाओं का आकर्षण दिया जाता है किन्तु बाद में सेवाएँ उचित समय में प्रदान नहीं की जाती हैं तथा उपभोक्ताओं की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। परिणामस्वरूप उपभोक्ता परेशान होता रहता है।

(7) अनावश्यक शर्ते – बैंक, ऋण देने वाली संस्थाएँ आदि उपभोक्ता को वित्तीय सेवाएँ देती हैं परन्तु जमाकर्ताओं एवं ऋणदाताओं के साथ बैंक स्टाफ सहयोग नहीं करता। इसी प्रकार गैस कनेक्शन, नई टेलीफोन लाइन, लाइसेन्सशुदा सामान आदि प्राप्त करते समय विक्रेता अनावश्यक शर्ते लगाकर उपभोक्ताओं को परेशान करते हैं।

(8) कृत्रिम अभाव – कभी-कभी त्योहार, पर्व आदि के समय व्यापारी अनुचित लाभ अर्जित करने के लिए वस्तुओं की जमाखोरी कर वस्तु का कृत्रिम अभाव उत्पन्न कर देते हैं और फिर कालाबाजारी के द्वारा अधिक कीमतें वसूलते हैं।

प्रश्न 3.
उपभोक्ता का शोषण क्यों होता है ? कारणों की व्याख्या कीजिए। (2009, 11)
उत्तर:
उपभोक्ता शोषण के कारण

बाजार में उपभोक्ता क्यों ठगा जाता है, क्यों वह शोषण का शिकार हो जाता है, यह एक गम्भीर प्रश्न है। हमारा शोषण न हो सके, इसके लिए यह जानना आवश्यक हो जाता है कि शोषण के कारण क्या हैं ? इन कारणों की जानकारी के बाद ही हम उनसे बचने का तरीका ढूँढ़ सकते हैं। उपभोक्ता शोषण के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

(1) अज्ञानता – यह उपभोक्ताओं के शोषण का प्रमुख कारण है। कई उपभोक्ताओं को वस्तु की कीमत, गुणवत्ता, उससे सम्बन्धित सेवा आदि के विषय में जानकारी ही नहीं होती है और वे विक्रेताओं की बताई बातों पर विश्वास कर वस्तु खरीदकर फंस जाते हैं और शोषित होते हैं।

(2) उदासीनता – उपभोक्ताओं की एक बड़ी संख्या ऐसी भी होती है जो खरीदारी के प्रति उदासीनता बरतते हैं; जैसे-क्या करना है, सब ठीक है, रसीद लेकर क्या करना है, दुकानदार ने जो दिया है वह अच्छा ही होगा, वस्तु सस्ती सुन्दर टिकाऊ होनी चाहिए, आई. एस. आई. और एगमार्क जैसे चिन्ह की क्या आवश्यकता है, आदि कुछ ऐसी बातें हैं जो उपभोक्ता की उदासीनता को प्रदर्शित करते हैं। इसका पूरा लाभ विक्रेता उठाते हैं और उपभोक्ताओं का शोषण करने में सफल हो जाते हैं।

(3) टेली मार्केटिंग – वैश्वीकरण के युग में टेली मार्केटिंग और ई-कॉमर्स का चलन हो गया है। टी. वी. पर कई प्रकार के विज्ञापन आते हैं। वस्तु के विषय में जानकारी देकर कीमत भी बता दी जाती है। उपभोक्ता पैसे भेजकर पार्सल द्वारा वस्तु प्राप्त करता है परन्तु कई बार इस सौदे से उपभोक्ता स्वयं को ठगा महसूस करता है। महँगे-महँगे उत्पाद वह झाँसे में आकर मँगा लेता है परन्तु उसका उसे उचित लाभ नहीं मिल पाता है।

(4) सीमित जानकारी – वैश्वीकरण के इस युग में बाजार अनेक प्रकार के उत्पादों से भरा पड़ा है। उत्पादक उत्पादन करने हेतु स्वतन्त्र है। गुणवत्ता एवं मूल्य निर्धारण के कोई निश्चित नियम नहीं हैं। वस्तु के अनेक पहलुओं; जैसे-मूल्य, गुण, संरचना, प्रयोग की शर्ते, क्रय के नियम आदि की उपयुक्त एवं पूर्ण जानकारी का अभाव होता है। अतः उपभोक्ता गलत चुनाव करके अपना आर्थिक नुकसान कर बैठते हैं।

(5) एकाधिकार – एकाधिकार का आशय है किसी वस्तु के उत्पादन एवं वितरण पर किसी एक उत्पादक या एक उत्पादक समूह का अधिकार होना। एकाधिकार की स्थिति में उत्पादक कीमतों एवं वस्तु की गुणवत्ता तथा उपलब्धता के सम्बन्ध में मनमानी करते हैं। फलत: वे उपभोक्ताओं का शोषण करने में सफल हो जाते हैं।

(6) अशिक्षा – जब उपभोक्ता अशिक्षित होते हैं तो उन्हें विक्रेता बहुत सरलता से ठग लेते हैं। मिलते-जुलते शब्दों को ब्राण्डेड बताकर दुकानदार हल्की वस्तुओं को बेच देते हैं, जैसे सोनी के स्थान पर सोनिवा लिखा हो तो स्थानीय उत्पादक उसे सोनी की कीमत पर बेच देते हैं। उपभोक्ता भी कई बार सन्तोषी होते हैं कि हो गया नुकसान तो हो गया या भाग्य में यही था अब कौन झगड़ा मोल ले। इस सोच से भी उपभोक्ता शोषण का शिकार बनते हैं।

प्रश्न 4.
वस्तुओं के मानकीकरण का क्या अर्थ है ? विभिन्न उत्पादों के मानकीकरण बताइए। (2009, 10)
उत्तर:
मानकीकरण का अर्थ – उत्पादों की गुणवत्ता देखकर उनके लिए मानक निर्धारित करना वस्तुओं का मानकीकरण कहलाता है। बाजार में अनेक प्रकार की वस्तुएँ उपलब्ध रहती हैं किन्तु शोषण से बचने के लिए उपभोक्ता को सदैव मानकीकृत वस्तुएँ ही खरीदना चाहिए। भारत सरकार ने कुछ ऐसी संस्थाओं का गठन किया है जो वस्तुओं की गुणवत्ता को प्रमाणित करती है। विभिन्न उत्पादों के मानकीकरण चिन्ह निम्न प्रकार हैं –

  • एगमार्क – कृषि उत्पादों की गुणवत्ता को प्रमाणित करने वाला चिन्ह।
  • आई. एस. आई. – औद्योगिक एवं उपभोक्ता वस्तुओं की गुणवत्ता को प्रमाणित करने वाला चिन्ह।
  • वूल मार्क – ऊन या ऊनी वस्त्रों की गुणवत्ता को प्रमाणित करने वाला चिन्ह
  • हॉल मार्क – स्वर्ण आभूषणों की गुणवत्ता को प्रमाणित करने वाला चिन्ह।

प्रश्न 5.
एक उपभोक्ता होने के नाते आप बाजार में ठगे न जाएँ इस हेतु क्या उपाय अपनाएँगे, साथ ही संरक्षण हेतु कानूनी उपायों की भी चर्चा कीजिए। (2011)
अथवा
उपभोक्ता को शोषण से बचाने के लिए कोई पाँच उपाय लिखिए। (2009)
उत्तर:
एक उपभोक्ता होने के नाते हम बाजार में ठगे न जाएँ इसके लिए निम्नलिखित उपाय अपनाने चाहिए –

(1) रसीद प्राप्त करना – किसी वस्तु को खरीदने के साथ ही उसका कैश मेमो लेना बहुत आवश्यक है। इससे वस्तु खराब निकलने या घटिया होने या निर्धारित समय के पूर्व ही खराब हो जाने की स्थिति में कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।

(2) मानकीकृत वस्तुओं का क्रय – बाजार में अनेक प्रकार की वस्तुएँ उपलब्ध रहती हैं किन्तु शोषण से बचने के लिए उपभोक्ताओं को हमेशा मानकीकृत वस्तुएँ ही खरीदनी चाहिए। आई. एस. आई., एगमार्क एवं हॉलमार्क वाले चिन्हों की वस्तुएँ मानकीकृत होती हैं।

(3) उपभोक्ता शिक्षा – शोषण में निदान का सबसे महत्वपूर्ण उपाय उपभोक्ता शिक्षा एवं जागरूकता है सरकार ने उपभोक्ताओं के संरक्षण के अनेक कानून बनाये हैं। किन्तु यह देखा गया है कि जन-सामान्य को इनकी जानकारी नहीं होती है। अतः उपभोक्ताओं को इन अधिकारों की शिक्षा दी जानी चाहिए।

(4) विज्ञापनों के बहकावे में न आना – बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ अपने उत्पादों का दूरदर्शन एवं अन्य माध्यमों से आकर्षक विज्ञापन करते हैं। इसका उपभोक्ता पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है और वे वस्तुएँ खरीदने के लिए तैयार हो जाते हैं, परन्तु उपभोक्ताओं को विज्ञापनों से सावधान रहना चाहिए। वस्तु खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता, कीमत, मात्रा आदि की जाँच कर लेनी चाहिए।

(5) खराब होने की तिथि की जाँच – हमें सदैव वस्तु की निर्माण तिथि एवं खराब होने की तिथि अवश्य देख लेनी चाहिए, क्योंकि इस तिथि के बाद वह वस्तु प्रभावी नहीं रहती है और उसके बुरे प्रभाव होने की सम्भावना रहती है। उदाहरणार्थ-दवाएँ, डिब्बाबन्द पदार्थ, खाद्य-सामग्री आदि।

(6) सामूहिक रूप से शिकायत करना-एक अकेला उपभोक्ता, उत्पादक या विक्रेता के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकता है, परन्तु यदि सामूहिक रूप से शिकायत की जाती है तो वह प्रभावी होती है।

संरक्षण हेतु कानूनी उपाय

उपभोक्ताओं के संरक्षण हेतु सन् 1955 में आवश्यक वस्तु अधिनियम’ पारित किया गया। इसके पश्चात् सन् 1976 में नाप-तोल को व्यवस्थित करने के लिए ‘बाँट एवं माप मानक अधिनियम’ पारित किया गया।

सन् 1986 में भारत सरकार द्वारा ‘उपभोक्ताओं सुरक्षा अधिनियम’ पारित किया गया। इस कानून का प्रमुख उद्देश्य उपभोक्ता की शिकायतों को तुरन्त निपटाने तथा कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाने से है। इसके अन्तर्गत उपभोक्ता विवादों के निपटारे के लिये जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तरों पर एक त्रिस्तरीय न्यायिक तन्त्र स्थापित किया गया है।

भारत सरकार ने ‘उपभोक्ता मामलों के विभाग’ ने भी उपभोक्ता को जागरूक बनाने के लिए अनेक योजनाएँ चलाई हैं। जैसे देश के प्रत्येक जिले में उपभोक्ता संगठन एवं स्कूलों में उपभोक्ता क्लबों की स्थापना करना। उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के लिए विभिन्न स्तरों पर जागृति शिखरों का भी आयोजन किया जाता है। 24 दिसम्बर भारत में ‘राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। आज देश में 700 से अधिक उपभोक्ता संगठन कार्यरत् हैं।

प्रश्न 6.
उपभोक्ताओं के अधिकार कौन-कौनसे हैं एवं उन्हें ये अधिकार क्यों दिये गये हैं ? व्याख्या कीजिए।
अथवा
उपभोक्ताओं के अधिकार संक्षेप में लिखिए। (2009)
उत्तर:
उपभोक्ताओं के अधिकार

उपभोक्ताओं को बाजार से श्रेष्ठ वस्तु एवं सेवाएँ क्रय करने का अधिकार है। उत्पादक या विक्रेता उसे किसी भी प्रकार का धोखा न दे सके, इसके लिए उसे कानून द्वारा संरक्षण दिया गया है। सामान्यतः उपभोक्ता को निम्नलिखित अधिकार प्राप्त हैं –

(1) सुरक्षा का अधिकार – उत्पादकों के लिए यह आवश्यक है कि वे उपभोक्ताओं की सुरक्षा से सम्ब. न्धित नियमों का पालन करें। कारण यह है कि यदि उत्पादक इन नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उपभोक्ता को भारी जोखिम उठाना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, प्रेशर कुकर में एक सेफ्टी वॉल्व होता है जो यदि खराब हों तो भयंकर दुर्घटना हो सकती है सेफ्टी वॉल्व के निर्माता को इसकी उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करनी चाहिए। यदि निर्माता ऐसा नहीं करते हैं तो उपभोक्ता कानून का सहारा ले सकते हैं।

(2) चयन का अधिकार – जब कोई उपभोक्ता किसी वस्तु या सेवा को खरीदता है तो उसे चुनने का अधिकार होता है। उदाहरण के लिए, यदि हम गैस कनेक्शन लेते हैं और गैस डीलर साथ में चूल्हा खरीदने के लिए दबाव डालता है किन्तु हम केवल गैस कनेक्शन लेना चाहते हैं और चूल्हे की हमें आवश्यकता नहीं है। इस स्थिति में हमारे चुनने के अधिकार का उल्लंघन होता है। कारण यह है कि जो वस्तु खरीदना नहीं चाहते, उसे खरीदने के लिए विक्रेता या डीलर हमको विवश करता है। ऐसी स्थिति में हम विक्रेता के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही कर सकते हैं।

(3) जानकारी का अधिकार – जब हम कोई वस्तु खरीदते हैं तब यह पाते हैं कि उसकी पैकिंग पर कुछ खास जानकारियाँ लिखी हुई होती हैं; जैसे-उस वस्तु की बैच संख्या, निर्माण की तारीख, उपयोग करने की अन्तिम तिथि और उसके निर्माण स्थल का पता आदि। जब हम कपड़े खरीदते हैं, तब हमें धुलाई से सम्ब. न्धित निर्देश उल्लेखित होने चाहिए। जब हम कोई दवा खरीदते हैं तो उस दवा के अन्य प्रभावों और खतरों से सम्बन्धित निर्देश भी प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार उपभोक्ता जिन वस्तुओं को खरीदता है, उसके बारे में जानकारी पाने का अधिकार है।

(4) सूचना का अधिकार – भारत सरकार ने वर्ष 2005 को सूचना प्रदान करने का अधिकार (राइट टू इनफॉरमेशन) के नाम से कानून बनाया है। यह कानूनं सरकारी विभागों के कार्य कलापों की सभी सूचनाएँ पाने का अधिकार सुनिश्चित करता है। उपभोक्ताओं को उपभोक्ता शिक्षा प्राप्त करने का भी अधिकार है।

(5) क्षतिपूर्ति का अधिकार – अन्य परीक्षोपयोगी लघु उत्तरीय प्रश्न 1 का उत्तर देखें।

प्रश्न 7.
भारत में उपभोक्ता आन्दोलन की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
भारत में उपभोक्ता आन्दोलन

उपभोक्ता आन्दोलन का प्रारम्भ उपभोक्ताओं के असन्तोष के कारण हुआ है। उपभोक्ताओं में असन्तोष के अनेक कारण थे; जैसे-खाद्य पदार्थों की कमी, जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावट आदि। इन समस्याओं से निपटने के लिए सबसे पहले सन् 1955 में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ पारित किया गया। इस अधिनियम के द्वारा आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, वितरण, मूल्य एवं आपूर्ति को नियन्त्रित करने का प्रयास किया गया। इसके बाद वस्तुओं की नाप-तौल को व्यवस्थित करने के लिए सन् 1976 में बाँट एवं माप मानक अधिनियम पारित किया गया। सन् 1986 में ‘उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम’ पारित किया गया।

“उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम”1 ने भारत में उपभोक्ता आन्दोलन को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ये अदालतें उपभोक्ताओं के विवादों को निपटाने के साथ-साथ उनका मार्गदर्शन भी करती हैं। भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग’ ने भी उपभोक्ता को जागरूक बनाने के लिए अनेक योजनाएँ चलाई हैं।

भारत में उपभोक्ता आन्दोलन के परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं में अपने अधिकारों के प्रति काफी जागृति आई है। आज राष्ट्र में 700 से अधिक उपभोक्ता संगठन कार्यरत् हैं, किन्तु उपभोक्ताओं की उदासीनता के कारण प्रभावी एवं मान्यता प्राप्त संगठनों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।

भारत जैसे विकासशील राष्ट्र में उपभोक्ताओं को शोषण से बचाने में सरकार के साथ-साथ स्वयंसेवी संगठनों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने की दिशा में ये संस्थाएँ महत्त्वपूर्ण कार्य कर सकती हैं। इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि उपभोक्ता स्वयं अपने अधिकारों को समझे और उपभोक्ता आन्दोलन में अपना सक्रिय योगदान देने के लिए आगे आए।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 19 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 10th Social Science Chapter 19 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आवश्यक वस्तु अधिनियम किस वर्ष में पारित किया गया ?
(i) सन् 1949 में
(ii) सन् 1952 में
(iii) सन् 1955 में
(iv) सन् 1960 में।
उत्तर:
(iii) सन् 1955 में

प्रश्न 2.
बाँट एवं माप मानक अधिनियम कब पारित किया गया ?
(i) सन् 1976 में
(ii) सन् 1980 में
(iii) सन् 1985 में
(iv) सन् 1987 में।
उत्तर:
(i) सन् 1976 में

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. प्रायः दुकानदार निर्धारित फुटकर कीमत से …………… मनमानी कीमत ले लेते हैं।
  2. आज ………….. के युग में टेली-मार्केटिंग का चलन हो गया है।
  3. उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम …………… के नाम से प्रसिद्ध है।

उत्तर:

  1. अधिक
  2. कम्प्यूटर
  3. कोपरा।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
24 दिसम्बर को भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है। (2015)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
‘एगमार्क’ कृषि उत्पादों के लिए सुरक्षा चिन्ह है। (2015)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
स्वर्ण आभूषणों की गुणवत्ता को प्रमाणित करने वाला चिन्ह हॉलमार्क कहलाता है। (2014)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1955 में पारित किया। (2015)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 5.
उपभोक्ता संरक्षण नियम वर्ष 1986 में लागू हुआ। (2016,18)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 6.
उपभोक्ता प्रत्येक व्यक्ति नहीं होता है। (2017)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 7.
औद्योगिक तथा उपभोक्ता वस्तुओं के लिए हॉलमार्क चिन्ह दिया जाता है। (2017)
उत्तर:
असत्य

जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 19 उपभोक्ता जागरूकता 2
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (ग)
  3. → (क)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस कब मनाया जाता है ? (2014, 16)
उत्तर:
24 दिसम्बर

प्रश्न 2.
बाँट एवं माप मानक अधिनियम किस वर्ष में पारित किया गया।
उत्तर:
सन् 1976 में

प्रश्न 3.
सूचना प्राप्त करने का अधिकार (राइट टू इनफॉरमेशन) किस वर्ष में पारित किया गया ?
उत्तर:
वर्ष 2005 में

प्रश्न 4.
हॉलमार्क के द्वारा किसकी गुणवत्ता प्रमाणित किया जाता है ? (2018)
उत्तर:
स्वर्ण आभूषण

प्रश्न 5.
वूलमार्क किसकी गुणवत्ता को प्रमाणित करता है ?
उत्तर:
ऊन एवं ऊनी वस्त्रों की।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 19 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कालाबाजारी किसे कहते हैं ? (2017)
उत्तर:
जब उत्पादक एवं व्यापारी आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी कर लेते हैं तो इन वस्तुओं का मूल्य बाजार में बढ़ जाता है। विवशतापूर्ण उपभोक्ताओं को इन्हीं ऊँचे मूल्यों पर वस्तुओं को खरीदना पड़ता है और यदि सरकार इन वस्तुओं की राशनिंग कर देती है तो यही वस्तुएँ काले बाजार में बिकने के लिए आ जाती हैं, इसे ही कालाबाजारी कहते हैं।

प्रश्न 2.
उपभोक्ता शिक्षा से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
उपभोक्ता अपनी सीमित आय से अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त कर सके और बाजार में व्याप्त बुराइयों से अपने आपको शोषण से बचा सके। उपभोक्ता शिक्षा से उन्हें ऐसा ज्ञान प्राप्त होगा जिससे उनमें वस्तुओं को गुण-दोषों के आधार पर परखने की क्षमता पैदा होगी और इस ज्ञान से वे उचित समय पर उचित वस्तुएँ क्रय कर सकेंगे।

प्रश्न 3.
सूचना का अधिकार क्या है ? (2015)
उत्तर:
भारत सरकार ने वर्ष 2005 को सूचना प्राप्त करने का अधिकार (राइट टू इनफॉरमेशन) के नाम से जाने जाना वाला कानून बनाया है। यह कानून सरकारी विभागों के कार्यकलापों की सभी सूचनाएँ पाने के अधिकार को सुनिश्चित करता है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 19 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्षतिपूर्ति का अधिकार क्या है ? उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
क्षतिपूर्ति का अधिकार- उपभोक्ता को अनुचित सौदेबाजी और शोषण के विरुद्ध क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार है। इसे एक उदाहरण के द्वारा सरलता से समझा जा सकता है। एक व्यक्ति केरल के एक निजी चिकित्सालय में टॉन्सिल निकलवाने के लिए भर्ती हुआ। एक ई. एन. टी. सर्जन ने सामान्य बेहोशी की दवा देकर टॉन्सिल निकालने के लिए ऑपरेशन किया। अनुचित बेहोशी के कारण व्यक्ति में दिमागी असामान्यता के लक्षण आ गए, जिसके कारण वह जीवनभर के लिए अपंग हो गया। उपभोक्ता निवारण समिति ने अस्पताल को चिकित्सा में लापरवाही का दोषी पाया और क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया। इस प्रकार स्पष्ट है कि यदि एक उपभोक्ता को कोई क्षति पहुँचाई जाती है तो उसे क्षति की मात्रा के आधार पर क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार होता है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 19 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक उपभोक्ता शोषित होने से स्वयं का किस प्रकार बचाव कर सकता है ?
अथवा
उपभोक्ता के कर्त्तव्य लिखिए। (कोई दो) (2009, 14)
उत्तर:
शासन के प्रयासों के अतिरिक्त उपभोक्ता को स्वयं भी कुछ कर्त्तव्यों का पालन करना चाहिए। उपभोक्ताओं के निम्न कर्त्तव्य हैं –

  1. बिल, रसीद, गारण्टी कार्ड आदि लेना एवं उन्हें सुरक्षित रखना।
  2. वस्तु की पूर्ति के अनुसार ही उपभोग में वृद्धि या कमी करना।
  3. उपभोक्ता संरक्षक नियमों की जानकारी रखना।
  4. कालाबाजारी एवं तस्करी को हतोत्साहित करना।
  5. वास्तविक समस्या की शिकायत अवश्य करनी चाहिए चाहे वस्तु कितने ही कम मूल्य की क्यों न हो ? इससे विक्रेताओं के ठगने की प्रवृत्ति हतोत्साहित होती है।
  6. आई. एस. आई., एफ. पी. ओ., एगमार्क एवं वूलमार्क जैसे चिन्हों को देखकर वस्तुएँ खरीदना।

MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 15 आर्थिक विकास और नियोजन

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 15 आर्थिक विकास और नियोजन

MP Board Class 10th Social Science Chapter 15 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 10th Social Science Chapter 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
आर्थिक विकास का परिणाम है – (2014)
(i) जीवन-स्तर में सुधार का
(ii) आर्थिक कल्याण में वृद्धि का
(iii) जीवन प्रत्याशा में वृद्धि का
(iv) उक्त सभी का।
उत्तर:
(iv) उक्त सभी का।

प्रश्न 2.
देश की प्रतिव्यक्ति आय की गणना किस आधार पर की जाती है ?
(i) उस देश की जनसंख्या
(ii) विश्व की जनसंख्या से
(iii) राज्यों की जनसंख्या से
(iv) अन्य देश की जनसंख्या से।
उत्तर:
(i) उस देश की जनसंख्या

प्रश्न 3.
प्रो. अमर्त्य सेन ने विकास का आधार क्या माना है ? (2009, 13)
(i) सम्पन्नता
(ii) आत्मनिर्भरता
(iii) जन-कल्याण
(iv) विदेशी व्यापार।
उत्तर:
(iii) जन-कल्याण

प्रश्न 4.
विकसित देशों में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होता है –
(i) अतिअल्प
(ii) बिल्कुल नहीं
(iii) थोड़ा-बहुत
(iv) बहुत अधिक।
उत्तर:
(iv) बहुत अधिक।

प्रश्न 5.
अब तक भारत में कितनी पंचवर्षीय योजनाएँ पूर्ण हुई हैं ? (2010)
(i) 5
(ii) 10
(iii) 15
(iv) 11
उत्तर:
(iv) 11

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. आर्थिक विकास से जनता के …………………….. स्तर में वृद्धि होती है।
  2. इण्डिया विजन-2020 का प्रकाशन वर्ष …………………….. में हुआ था। (2011)
  3. जीवन की भौतिक गुणवत्ता सूचक का निर्माण …………………….. ने किया है। (2016)
  4. विश्व बैंक के अनुसार विकसित राष्ट्र वह है जिसकी प्रति व्यक्ति आय …………………….. प्रति वर्ष या उससे अधिक है।
  5. दसवीं योजना का कार्यकाल …………………….. से …………………….. तक था।

उत्तर:

  1. जीवन
  2. जनवरी 2003
  3. प्रो. मौरिस
  4. ₹4,53,000
  5. 1 अप्रैल, 2002, 31 मार्च, 2007

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 15 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वणिकवाद के अनुसार आर्थिक विकास का क्या अर्थ है ? लिखिए।
उत्तर:
जर्मनी एवं फ्रांस के वणिकवादी विचारक’ सोने एवं चाँदी की प्राप्ति को विकास का आधार मानते थे। विलियम पैटी ने लिखा है, “व्यापार का अन्तिम और महान् परिणाम धन नहीं बल्कि सोना-चाँदी और जवाहरात की प्रमुखता है जो नष्ट नहीं होते। इनको प्रत्येक समय और स्थान में प्रयुक्त किया जा सकता है।”

प्रश्न 2.
राष्ट्रीय आय की गणना किस समय अवधि में की जाती है ? लिखिए। (2017, 18)
उत्तर:
राष्ट्रीय आय की गणना देश में एक वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) में उत्पादित वस्तुओं तथा सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को जोड़कर ज्ञात की जाती है।

प्रश्न 3.
मानव विकास सूचकांक की गणना किसके आधार पर की जाती है ? लिखिए।
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक के निर्माण में जीवन के तीन आवश्यक मूलभूत घटकों का प्रयोग किया जाता है। ये घटक हैं –

  1. एक लम्बे और स्वस्थ जीवन के मापन हेतु जन्म के समय जीवन प्रत्याशा।
  2. वयस्क साक्षरता दर तथा कुल नामांकन अनुपात।
  3. प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद।

प्रश्न 4.
विश्व बैंक के अनुसार विकसित देशों की प्रति व्यक्ति आय कितनी होनी चाहिए ? लिखिए।
उत्तर:
विश्व बैंक ने अपनी विकास रिपोर्ट 2006 में विकसित एवं विकासशील राष्ट्रों के मध्य अन्तर करने के लिए प्रति व्यक्ति आय मापदण्ड का प्रयोग किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वे राष्ट्र जिनकी वर्ष 2004 में प्रति व्यक्ति आय 4,53,000 रु. प्रतिवर्ष या उससे अधिक है, उसे विकसित राष्ट्र तथा वे राष्ट्र जिनकी प्रति व्यक्ति आय 37,000 रु. प्रतिवर्ष या उससे कम है, उन्हें विकासशील (निम्न आय) राष्ट्र माना गया है।

प्रश्न 5.
आर्थिक विकास की माप के प्रमुख मापदण्ड कौन-कौनसे हैं ? लिखिए।
उत्तर:
आधुनिक अर्थशास्त्रियों ने आर्थिक विकास के कई मापदण्ड बताये हैं, जिनमें मुख्य निम्नलिखित हैं –

  1. राष्ट्रीय आय
  2. प्रति व्यक्ति आय
  3. आर्थिक कल्याण, तथा
  4. सामाजिक अभिसूचक।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राष्ट्रीय आय क्या है व इसे कैसे ज्ञात किया जाता है ? लिखिए। (2009, 11, 15)
उत्तर:
राष्ट्रीय आय – किसी देश के श्रम एवं पूँजी उसके प्राकृतिक साधनों के साथ मिलकर एक वर्ष में जिन वस्तुओं और सेवाओं का शुद्ध वास्तविक उत्पादन करते हैं, के मौद्रिक मूल्य को राष्ट्रीय आय कहा जाता है। प्रो. मार्शल के अनुसार, “देश का श्रम एवं पूँजी उसके प्राकृतिक साधनों पर क्रियाशील होकर प्रतिवर्ष भौतिक एवं अभौतिक वस्तुओं के शुद्ध योग, जिसमें सभी प्रकार की सेवाएँ सम्मिलित होती हैं, का उत्पादन करते हैं। यही देश की वास्तविक शुद्ध आय या राष्ट्रीय लाभांश कहलाता है।”
राष्ट्रीय आय की गणना के सम्बन्ध में निम्न बातें महत्वपूर्ण हैं –

  1. राष्ट्रीय आय का सम्बन्ध किसी अवधि विशेष या एक वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) में उत्पादित समस्त वस्तुओं एवं सेवाओं की मात्रा से है।
  2. राष्ट्रीय आय में सभी प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं की बाजार कीमतें सम्मिलित की जाती हैं, इसमें एक वस्तु की कीमत को एक ही बार गिना जाता है।
  3. इसमें विदेशों से प्राप्त आय को जोड़ा जाता है तथा विदेशियों द्वारा देश से प्राप्त आय को घटाया जाता है।

प्रश्न 2.
प्रति व्यक्ति आय क्या है ? इसकी गणना का सूत्र लिखिए। (2010, 14, 16)
उत्तर:
प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) – एक देश की किसी वर्ष विशेष में औसत आय को ही प्रति व्यक्ति आय कहते हैं। इसे ज्ञात करने के लिए किसी एक वर्ष को राष्ट्रीय आय में वर्ष की जनसंख्या से भाग दे दिया जाता है।
संक्षेप में,
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 15 आर्थिक विकास और नियोजन 1
स्पष्ट है कि राष्ट्रीय आय में वृद्धि की दर जनसंख्या वृद्धि दर से अधिक होने पर ही प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी अन्यथा इसमें कमी हो जायेगी।
प्रति व्यक्ति आय हमें उस देश के निवासियों के जीवन-स्तर की जानकारी प्रदान करती है। यदि किसी राष्ट्र में प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोत्तरी हो रही है तो इसका आशय है कि उस देश के निवासियों के जीवन-स्तर में सुधार हो रहा है।

प्रश्न 3.
मानव विकास के संकेतक बनाने के मुख्य उद्देश्य लिखिए। (2009)
उत्तर:
विकास के अन्तर्गत जनसामान्य को प्राप्त होने वाली स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, पोषक आहार, पेयजल जैसी सुविधाओं की उपलब्धता का भी समावेश होना चाहिए। फलतः आर्थिक विकास को मापने के लिए राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय के विकल्प के रूप में मानव विकास संकेतक’ को महत्व दिया गया।

मानव विकास संकेतकों में भौतिक एवं अभौतिक दोनों प्रकार के घटकों को सम्मिलित किया गया है। इनमें भौतिक घटक के रूप में सकल घरेलू उत्पाद और अभौतिक घटक के रूप में शिशु मृत्यु दर, जीवन की सम्भाव्यता और शैक्षणिक प्राप्तियाँ आदि को लिया गया है।

प्रश्न 4.
भारत के विकसित एवं विकासशील राज्य कौन-कौनसे हैं ? लिखिए।
उत्तर:
प्रति व्यक्ति आय मापदण्ड के आधार पर हम भारत के 15 बड़े राज्यों को दो वर्गों में बाँट सकते हैं-विकसित राज्य तथा विकासशील राज्य। इन 15 राज्यों में 2001 की जनगणना के अनुसार देश की कुल आबादी का 90 प्रतिशत हिस्सा निवास करता है। इसमें से 48 प्रतिशत जनसंख्या तुलनात्मक रूप से विकसित राज्यों में निवास करती है और 42 प्रतिशत आबादी विकासशील या पिछड़े राज्यों में रहती है। तुलनात्मक रूप से विकसित और विकासशील राज्यों को निम्न तालिका में दिखाया गया है।

भारत के विकसित एवं विकासशील राज्य

राज्यानुसार प्रति व्यक्ति निबल घरेलू उत्पाद 2014-15 (वर्तमान कीमतों पर)
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 15 आर्थिक विकास और नियोजन 2
+ : 2012 – 13 के आँकड़े
स्रोत : आर्थिक समीक्षा-2015-16; A – 25

उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट है कि भारत में तुलनात्मक रूप से विकसित राज्य वे हैं जिनकी प्रति व्यक्ति आय उस वर्ष की सम्पूर्ण भारत की प्रति व्यक्ति आय से अधिक है, जबकि विकासशील या पिछड़े राज्य वे हैं, जिनकी प्रति व्यक्ति आय सम्पूर्ण भारत की प्रति व्यक्ति आय की तुलना में कम है। 2014-15 में प्रति व्यक्ति आय के आधार पर विकसित राज्यों में हरियाणा का स्थान सबसे ऊपर है, जबकि विकासशील राज्यों में सबसे कम प्रति व्यक्ति आय बिहार राज्य की है।

प्रश्न 5.
इण्डिया विजन-2020 क्या है ? लिखिए। (2009, 11, 13, 14)
उत्तर:
इण्डिया विजन-2020-आने वाले दो दशकों में अर्थव्यवस्था की प्रगति का पूर्वाकलन करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज ‘इण्डिया विजन-2020’ योजना आयोग ने 23 जनवरी, 2003 को जारी किया। योजना आयोग के इस दस्तावेज में यह दर्शाने का प्रयत्न किया गया है कि दो दशकों के बाद क्या कुछ प्राप्त किया जा सकता है ? दस्तावेज के अनुसार 2020 तक देश की 1.35 अरब जनसंख्या बेहतर पोषित अच्छे रहन-सहन के स्तर वाली, अधिक शिक्षित व स्वस्थ तथा अधिक औसत आयु वाली होगी। निरक्षरता व प्रमुख संक्रामक रोगों का तब तक अन्त हो चुका होगा तथा 6-14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का स्कूली पंजीकरण लगभग शत-प्रतिशत होगा। 2 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि की दर से रोजगार के 20 करोड़ अतिरिक्त अवसर सृजित किए जा सकेंगे।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आर्थिक विकास की प्राचीन एवं नवीन अवधारणा को समझाइए। (2009)
उत्तर:
आर्थिक विकास की प्राचीन अवधारणा

प्राचीन काल में आर्थिक विकास के अन्तर्गत भौतिक सुख-सुविधाओं के साथ-साथ मानव मूल्यों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया था। महान् विचारक कौटिल्य ने अपनी पुस्तक ‘अर्थशास्त्र’ में इन विचारों की विस्तार से व्याख्या की है। भारत के प्राचीनतम ग्रन्थ वेदों में सबकी समृद्धि और बाहुल्यता की धारणा बताई गई है।

प्राचीनकाल में वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास के अन्तर्गत भौतिक सम्पन्नता को विशेष स्थान प्राप्त था। जर्मनी एवं फ्रांस के ‘वणिकवादी विचारक’ सोने एवं चाँदी की प्राप्ति को विकास का आधार मानते थे। समय के साथ-साथ विकास की अवधारणा भी बदलती रही। एडम स्मिथ का विचार था कि किसी राष्ट्र में वस्तुओं तथा सेवाओं की वृद्धि ही आर्थिक विकास है। कार्ल मार्क्स ने समाजवाद की स्थापना को आर्थिक विकास माना है परन्तु जे. एस. मिल ने लोककल्याण व आर्थिक विकास के लिए सहकारिता के सिद्धान्त को अपनाने को आर्थिक विकास माना।

आर्थिक विकास की नवीन अवधारणा

नवीन अर्थशास्त्रियों में पॉल एलबर्ट राष्ट्र के उत्पादन के साधनों के कुशलतम प्रयोग द्वारा राष्ट्रीय आय में वृद्धि को आर्थिक विकास मानते हैं जबकि विलियमसन और बॉडिक का विचार है कि राष्ट्र के निवासियों की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि आर्थिक विकास है। इनसे भिन्न डी. ब्राइट सिंह का विचार है कि यदि आय में वृद्धि के साथ-साथ समाज कल्याण में भी वृद्धि होती है तो वह आर्थिक विकास है। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित ‘प्रो. अमर्त्य सेन’ ने भी आर्थिक कल्याण को विशेष महत्व दिया है।

आर्थिक विकास को परिभाषित करते हुए मेयर एवं बाल्डविन ने कहा है, “आर्थिक विकास एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था की वास्तविक राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है।”

प्रश्न 2.
मानव विकास संकेतक का अर्थ बताते हुए इसके घटकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास संकेतक (या सूचक)
[Human Development Index-HDI]

मानव विकास ही मानव का साध्य है तथा आर्थिक विकास का श्रेष्ठ मापक है, क्योंकि राष्ट्रीय आय सम्बन्धी आँकड़े अनेक दृष्टियों से उपयोगी होने के बावजूद राष्ट्रीय आय की संरचना व उससे वास्तव में लाभान्वित होने वाले निवासियों पर प्रकाश नहीं डालते। मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार, ‘मानव विकास लोगों की पसन्दगी को व्यापक करने की एक प्रक्रिया है।’ ये पसन्दगियाँ अनेक हो सकती हैं और इन पसन्दगियों में समय के साथ परिवर्तन हो सकता है।

इस दिशा में प्रो. मौरिस ने जीवन के भौतिक गुणों के सूचकांक (Physical Quality of Life Index या POLI) का विकास किया। इसी प्रकार प्रो. पॉल स्ट्रीटन (Paul Streetan) के मूल आवश्यकता दृष्टिकोण को अपनाने पर जोर दिया। इन विचारों को मूर्त रूप देते हुए सन् 1990 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानव विकास संकेतक या सूचकांक (HDI) प्रकाशित किये। इसके बाद आर्थिक विकास के ये संकेतक प्रति वर्ष मानव विकास संकेतक रिपोर्ट में प्रकाशित किये जा रहे हैं।

मानव विकास सूचक की गणना करने के लिए सबसे पहले उपरोक्त तीनों घटकों के अलग-अलग सूचक तैयार किये जाते हैं। तदोपरान्त उनका औसत ज्ञात करके उनके मूल्य को 0 से 1 के मध्य प्रदर्शित किया जाता है। सबसे अधिक विकसित राष्ट्र का सूचक एक तथा सबसे अधिक पिछड़े राष्ट्र का सूचक शून्य के निकट होता है। इस आधार पर विश्व के सभी राष्ट्रों को उनके विकास के स्तर के अनुसार निम्नलिखित तीन वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है –

  1. उच्च मानवीय विकास वाले राष्ट्र-जिन राष्ट्रों के सूचक का माप 0.8 का या इससे अधिक होता है, उन्हें उच्च मानवीय विकास वाले राष्ट्र कहा जाता है।
  2. मध्यम मानवीय विकास वाले राष्ट्र-जिन राष्ट्रों के सूचक का माप 0.5 से 0.8 होता है उन्हें मध्यम मानवीय विकास वाले राष्ट्र माना जाता है।
  3. निम्न मानवीय विकास वाले राष्ट्र-जिन राष्ट्रों के सूचक का मान 0-5 से कम होता है उन्हें निम्न मानवीय विकास वाले राष्ट्र माना जाता है।

प्रश्न 3.
विकसित एवं विकासशील अर्थव्यवस्था में अन्तर बताइए।
उत्तर:
विकसित अर्थव्यवस्था – विकसित अर्थव्यवस्था में वे राष्ट्र आते हैं, जहाँ नागरिक अपनी भोजन, कपड़ा व मानवं की आवश्यकताएँ सरलतापूर्वक पूरी कर रहे हैं। इन राष्ट्रों में निर्धनता व बेरोजगारी नियन्त्रण में है। विकसित राष्ट्रों में जापान, अमेरिका, इंग्लैण्ड आदि देश आते हैं।

विकासशील राष्ट्र – ऐसे राष्ट्र जहाँ नागरिकों को भरपेट भोजन भी प्राप्त नहीं होता, पहनने को सीमित मात्रा में कपड़े मिलते हैं, नागरिकों का जीवन-स्तर बहुत निम्न है-इन राष्ट्रों में व्यापक बेरोजगारी व अशिक्षा पायी जाती है। इन राष्ट्रों को अल्पविकसित या विकासशील राष्ट्र कहा जाता है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका तथा म्यांमार आदि को इस श्रेणी में रखा जाता है।

विकसित तथा विकासशील (अर्द्धविकसित) राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं –
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 15 आर्थिक विकास और नियोजन 3

प्रश्न 4.
आर्थिक नियोजन का अर्थ बताते हुए भारत में नियोजन के प्रमुख उद्देश्य बताइए।
उत्तर
आर्थिक नियोजन का आशय

आर्थिक नियोजन का आशय एक केन्द्रीय सत्ता द्वारा देश में उपलब्ध प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों का सन्तुलित ढंग से, एक निश्चित अवधि के अन्तर्गत निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति करना है जिससे देश का तीव्र गति से आर्थिक विकास किया जा सके। इस प्रकार आर्थिक नियोजन के लिए दो बातें होनी चाहिए-(1) निर्धारित लक्ष्य, जिन्हें प्राप्त करना है तथा (2) इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उपलब्ध संसाधन तथा उनके उपयोग के ढाँचे का विवरण।

आर्थिक नियोजन में सरकार द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि किस प्रकार समाज की अधिकतम सन्तुष्टि के लिए देश के संसाधनों का प्रयोग किया जाता है। नियोजन से पूर्व देश के आर्थिक संसाधनों का आकलन किया जाता है। इसमें घरेलू संसाधनों के साथ-साथ विदेशों से प्राप्त होने वाले साधनों को भी शामिल किया जाता है। इसके बाद आर्थिक लक्ष्यों का निर्धारण कर, देश में उपलब्ध संसाधनों को श्रेष्ठतम प्रयोग करते हुए लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है।

भारत में आर्थिक नियोजन के उद्देश्य

भारत में आर्थिक नियोजन के प्रमुख उद्देश्य निम्न प्रकार हैं –

(1) आर्थिक संवृद्धि या विकास – भारत की सभी पंचवर्षीय योजनाओं का मुख्य उद्देश्य आर्थिक संवद्धि रहा है। आर्थिक विकास की गति को तेज करके ही आत्मनिर्भरता की स्थिति को प्राप्त किया जा सकता है तथा गरीबी और बेरोजगारी जैसी आधारभूत समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

(2) आत्मनिर्भरता – आत्मनिर्भरता प्राप्त करना आर्थिक नियोजन का प्रमुख उद्देश्य है। तीसरी योजना के बाद से इस उद्देश्य पर विशेष बल दिया गया। छठी योजना में तो इस लक्ष्य की प्राप्ति पर अधिक जोर दिया गया। इस योजना में निम्नलिखित बातें इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु कही गई

  • विदेशी सहायता पर निर्भरता में कमी,
  • घरेलू उत्पादन में विविधता और इसके परिणामस्वरूप कुछ महत्त्वपूर्ण वस्तुओं के आयात में कमी, तथा
  • निर्यात को प्रोत्साहित करना ताकि हम अपने साधनों से आयातों का भुगतान कर सकें।

(3) रोजगार के अवसरों में वृद्धि करना – सभी को रोजगार प्रदान करना आर्थिक नियोजन का महत्त्वपूर्ण लक्ष्य है। इसलिए प्रत्येक योजना में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने तथा अर्द्ध-बेरोजगारी को दूर करने के कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

(4) आर्थिक असमानताओं में कमी – आयोजन का एक अन्य महत्त्वपूर्ण उद्देश्य आर्थिक समानता है ताकि देश में सामाजिक न्याय की स्थापना की जा सके। धन व आय की असमानताएँ सामान्य जीवन-स्तर को ऊपर उठाने में बाधक होती हैं। स्वस्थ आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है कि इन असमानताओं को दूर किया जाये। आयोजन का मुख्य उद्देश्य देश में समाजवादी ढंग के समाज की स्थापना है।।

(5) आर्थिक स्थिरता – आर्थिक आयोजन का एक अन्य महत्त्वपूर्ण उद्देश्य अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाना और उसे बनाये रखना है।आर्थिक स्थिरता से अभिप्राय है कि अर्थव्यवस्था में होने वाले अनियमित उतार-चढ़ाव को समाप्त किया जाए जिससे अर्थव्यवस्था ठीक ढंग से आगे बढ़ सके और जनसाधारण के जीवन-स्तर में समय के साथ सुनिश्चित सुधार लाए जा सकें।

प्रश्न 5.
भारत में नियोजन की सफलताएँ और असफलताएँ लिखिए।
अथवा
भारत के नियोजन की सफलताओं की संक्षिप्त वर्णन कीजिए। (2010)
उत्तर:
भारत में नियोजन की सफलताएँ एवं असफलताएँ

भारत में आर्थिक नियोजन 1 अप्रैल, 1951 से प्रारम्भ हुआ। अभी तक 10 पंचवर्षीय योजनाएँ पूर्ण हो गई हैं। इस अवधि में देश का औद्योगिक ढाँचा सुदृढ़ हुआ और कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त हुई। शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य सामाजिक क्षेत्रों में तेजी से विस्तार हुआ। भारत में नियोजन से प्राप्त प्रमुख सफलताएँ निम्न प्रकार रहीं –

(1) राष्ट्रीय एवं प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि – भारत की राष्ट्रीय आय वर्ष 1950-51 में वर्तमान कीमतों पर केवल 10,360 करोड़ रुपये थी जो वर्ष 2015-16 में बढ़कर 1,34,09,892 करोड़ रुपये हो गई। इसी प्रकार प्रति व्यक्ति आय इस अवधि में 274 रुपये से बढ़कर 93,231 रुपये हो गई। इस प्रकार स्पष्ट है कि नियोजन की अवधि में राष्ट्रीय एवं प्रति व्यक्ति आय में तेजी से वृद्धि हुई है।

(2) पूँजी निर्माण की दर – अर्थव्यवस्था में योजनाकाल के प्रारम्भिक वर्षों में पूँजी निर्माण की दर कम रही है, परन्तु अब पूँजी निर्माण की दर में सुधार है। वर्ष 1950-51 में पूँजी निर्माण की दर सकल घरेलू उत्पाद का 9:3% थी जो वर्ष 2014-15 में बढ़कर 34-2% हो गई।2

(3) कृषि क्षेत्र – नियोजन काल में कृषि के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। खाद्यान्न उत्पादन जो वर्ष 1950-51 में 508 लाख टन था, वह वर्ष 2014-15 में बढ़कर 2,527 लाख टन हो गया।

(4) विद्युत उत्पादन – योजना काल के दौरान विद्युत का उत्पादन तेजी से बढ़ा है। अनेक नई विद्युत परियोजनाओं का निर्माण किया गया। ताप-विद्युत और अणु शक्ति के विकास का प्रयत्न किया गया। विद्युत उत्पादन वर्ष 1950-51 में 5.1 बिलियन किलोवाट था जो वर्ष 2014-15 में 1105-2 बिलियन किलोवाट हो गया।

(5) औद्योगिक क्षेत्र – योजनावधियों में औद्योगिक प्रगति संतोषजनक रही। औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि को हम सूचकांक की सहायता से मापते हैं। भारत में औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक जो 1950-51 में मात्र 7.9 (आधार वर्ष 2004-5) था, वह 2014-15 में बढ़कर 176.9 हो गया जो इस बात का सूचक है कि औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में भारत ने तेजी से प्रगति की है। स्वतन्त्रता के समय भारत सुई से लेकर वायुयान तक विदेशों से आयात करता था। आज भारत न केवल सभी तरह की औद्योगिक वस्तुओं का उत्पादन अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करता है, बल्कि इनका विदेशों को निर्यात भी करता है।

(6) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण योजना काल के दौरान देश में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण की सुविधाओं में विस्तार हुआ है। देश भर में अस्पतालों और ग्रामीण डिस्पेन्सरियों की संख्या में वृद्धि हुई है।

  1. आर्थिक समीक्षा, 2015-16
  2. पुनः वही।

मृत्यु-दर में कमी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का परिणाम है। वर्ष 1950-51 में मृत्यु-दर 27.4 प्रति हजार थी जो वर्ष 2013 में 7 प्रति हजार हो गयी।

(7) शिक्षा – शिक्षा के क्षेत्र में योजना काल में पर्याप्त प्रगति हुई है। नए स्कूलों, कॉलेजों, प्रशिक्षण केन्द्रों, विश्वविद्यालय और छात्रों की बढ़ती हुई संख्या से इस प्रगति का आभास होता है। वर्ष 1950-51 में केवल 30 विश्वविद्यालय एवं 700 महाविद्यालय थे जिनमें लगभग 2.50 लाख छात्र अध्ययन कर रहे थे, जबकि इस समय 757 विश्वविद्यालयों में लगभग 296 लाख छात्र पंजीकृत हैं। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद से उच्चतर शिक्षा प्रणाली में विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों की संख्या में 38 गुना वृद्धि हई है।

(8) बैंकिंग क्षेत्र में प्रगति – देश ने बैंकिंग क्षेत्र में भी पर्याप्त प्रगति की है। 30 जून, 1969 को वाणिज्य बैंकों की संख्या 8,262 थी जो 30 जून, 2015 को बढ़कर 1,31,750 तक पहुँच गई।

भारत में आर्थिक नियोजन की असफलता के कारण

भारत में आयोजन की सीमित सफलता के अनेक कारण हैं, जिनमें प्रमुख निम्न प्रकार हैं –

(1) प्राकृतिक कारण – भारत में प्राकृतिक दुर्घटनाएँ समय-समय पर अपना प्रभाव दिखाती रही हैं। कभी देश को बाढ़ की मुसीबत झेलनी पड़ती है, कभी सूखे की। कृषि पर इसका विशेष रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कृषि उत्पादन में कमी अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों को प्रभावित करती है। इसलिए देश में आयोजन को पूरी सफलता नहीं मिलती है।

(2) जनसंख्या में भारी वृद्धि – सन् 1951 से 2011 तक भारत की जनसंख्या में 85 करोड़ की वृद्धि हुई अर्थात जनसंख्या तीन गुना हो गई। इस अवधि में उत्पादन में जो वृद्धि हुई उसे बढ़ी हुई जनसंख्या खा गई जो नियोजन काल में बाधक रही।

(3) सार्वजनिक क्षेत्र की अकुशलता – भारत में आयोजन की सफलता बहुत कुछ सार्वजनिक क्षेत्र की कुशलता पर निर्भर थी। भारत के लोकतान्त्रिक राजनैतिक ढाँचे में सार्वजनिक क्षेत्र की योजनाओं को बनाना, उन पर लोकसभा में विचार होना, उसमें बार-बार काँट-छाँट होना आदि में समय की हानि हुई। अधिकारियों में आपसी तालमेल का अभाव रहा। कभी-कभी विभिन्न परस्पर विरोधी नीतियों को अपनाते रहे। इन सबका संयुक्त परिणाम हुआ आर्थिक आयोजन की सीमित सफलता।

(4) प्रतिरक्षा का भारी बोझ – शान्तिप्रिय राष्ट्र होने के बावजूद भारत पर युद्ध के बादल सदा मँडराते रहे हैं जिससे निपटने के लिए आवश्यक है कि भारत अपनी प्रतिरक्षा व्यवस्था मजबूत करे। साथ ही, युद्ध की आधुनिक तकनीक में अनेक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन होते जा रहे हैं। फलस्वरूप, प्रतिरक्षा की व्यवस्था पर होने वाले व्यय की राशि निरन्तर बढ़ती जा रही है।

(5) अन्य आर्थिक कारण – किसी राष्ट्र के तीव्र आर्थिक विकास के लिए कुछ मौलिक सुविधाओं की आवश्यकता होती है; जैसे-यातायात एवं संचार के विकसित साधन, शक्ति के साधनों की उपलब्धि, प्रशिक्षित कारीगर, इन्जीनियर, तकनीशियन और वैज्ञानिक, उन्नत बैंकिंग व्यवस्था और पर्याप्त मात्रा में पूँजी निर्माण। स्वतन्त्रता के समय देश में इन मौलिक आवश्यकताओं का अभाव था। पूँजी निर्माण की दर केवल 5% वार्षिक थी, जबकि विकास के लिए कम-से-कम 25 प्रतिशत होनी चाहिए। प्रशिक्षित कारीगर तथा इन्जीनियर नहीं थे। बहुत-सा समय और साधन इन मौलिक आवश्यकताओं के निर्माण में व्यय हो गए। इस प्रकार आर्थिक विकास की गति धीमी रही और योजनाओं में सफलता भी सीमित ही रही।

उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि नियोजनकाल में कृषि, उद्योग, शिक्षा आदि के क्षेत्रों में जहाँ विकास हुआ है वहीं बेरोजगारी, निर्धनता तथा असमानताओं आदि के क्षेत्र में असफलता रही है। अतः नियोजनकाल की सफलताएँ सीमित रही हैं।

  1. आर्थिक समीक्षा 2015-16; A – 155.
  2. आर्थिक समीक्षा 2015-16; A – 69.

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 15 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 10th Social Science Chapter 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय

प्रश्न 1.
ग्यारहवीं योजना प्रारम्भ हुई
(i) 1 अप्रैल, 2005 से
(ii) 1 अप्रैल, 2006 से
(iii) 1 अप्रैल, 2007 से
(iv) 1 अप्रैल, 2008 से।
उत्तर:
(iii) 1 अप्रैल, 2007 से

प्रश्न 2.
प्राचीन काल में भारत को कहा जाता था -(2009)
(i) सोने का घड़ा
(ii) सोने की चिड़िया
(iii) सोने का देश
(iv) सोने का घर।
उत्तर:
(ii) सोने की चिड़िया

प्रश्न 3.
भारत में आर्थिक नियोजन प्रारम्भ किया गया है
(i) 1 अप्रैल, 1948 से
(ii) 1अप्रैल, 1949 से
(iii) 1 अप्रैल, 1951 से
(iv) 1 अप्रैल, 1955 से।
उत्तर:
(iii) 1 अप्रैल, 1951 से

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. आर्थिक विकास एक ………….. प्रक्रिया है।
  2. व्यक्ति के जीवित रहने की औसत आयु को ………….. कहते हैं।
  3. वस्तुओं के थोक बाजार में पाए जाने वाले मूल्य को ………….. कहा जाता है।

उत्तर:

  1. सतत्
  2. जीवन प्रत्याशा
  3. थोक मूल्य।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
जे. एस. मिल ने सहकारिता की स्थापना को आर्थिक विकास का मापदण्ड माना है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
उत्पादक कार्यों में पूँजी लगाने को विनियोग कहा जाता है। (2014)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
कार्ल मार्क्स ने पूँजी की स्थापना को आर्थिक विकास माना है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
आर्थिक विकास एक सतत् एवं निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। (2017)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
भारत में आर्थिक नियोजन के अन्तर्गत अब तक दस पंचवर्षीय योजनाओं को पूरा किया जा चुका है।
उत्तर:
सत्य

जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 15 आर्थिक विकास और नियोजन 4
उत्तर:

  1. → (ग)
  2. → (क)
  3. → (ख)
  4. → (ङ)
  5. → (घ)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
कौटिल्य द्वारा लिखी गई पुस्तक का क्या नाम है ?
उत्तर:
अर्थशास्त्र

प्रश्न 2.
भारतीय योजना आयोग का गठन कब किया गया था ? (2017)
उत्तर:
15 मार्च, 1950 को

प्रश्न 3.
मानवीय विकास सूचकांक की गणना किसके आधार पर की जाती है ? कोई एक लिखिए। (2014)
उत्तर:
जीवन प्रत्याशा

प्रश्न 4.
मानव विकास सूचकांक किस अन्तर्राष्ट्रीय संस्था ने तैयार किया है ?
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र संघ ने

प्रश्न 5.
PQLI का पूरा नाम बताइए।
उत्तर:
जीवन का भौतिक गुणवत्ता सूचक

प्रश्न 6.
विश्व बैंक के अनुसार विकासशील राष्ट्रों की प्रति व्यक्ति आय कितनी होनी चाहिए?
उत्तर:
37,000 रुपये प्रतिवर्ष या उससे कम है

प्रश्न 7.
वर्ष 2004-05 में प्रति व्यक्ति आय के आधार पर विकसित राज्यों में किस राज्य का स्थान सबसे ऊपर है ?
उत्तर:
हरियाणा

प्रश्न 8.
देश में सार्वजनिक क्षेत्र में उद्यमों की संख्या कितनी है ?
उत्तर:
242

प्रश्न 9.
भारत में प्रथम पंचवर्षीय योजना कब लागू की गयी है ? (2015)
उत्तर:
1 अप्रैल 1951

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 15 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वणिकवाद से क्या आशय है ?
उत्तर:
वणिकवाद से आशय उस आर्थिक विचारधारा से है जो 16वीं शताब्दी से लेकर 18वीं शताब्दी के मध्य तक यूरोप के राष्ट्रों में लोकप्रिय रही।

प्रश्न 2.
आर्थिक कल्याण क्या है ?
उत्तर:
आर्थिक कल्याण, सामाजिक कल्याण का वह भाग है, जिसे मुद्रा के मापदण्ड से प्रत्यक्ष रूप से मापा जा सके।

प्रश्न 3.
नियोजन किसे कहा जाता है ?
उत्तर:
एक निश्चित अवधि में राष्ट्र में उपलब्ध संसाधनों के द्वारा निर्धारित लक्ष्यों का प्राप्त करने की प्रक्रिया को नियोजन कहा जाता है।

प्रश्न 4.
शिशु मृत्यु दर क्या है ?
उत्तर:
एक वर्ष की आयु से पहले हुई मृत्यु, शिशु मृत्यु दर कहलाती है। शिशु मृत्यु दर प्रतिवर्ष हजार जीवित जन्मे शिशुओं में से मृत शिशुओं की संख्या है।

प्रश्न 5.
क्षेत्रीय असन्तुलन से क्या आशय है ?
उत्तर:
जब कुछ क्षेत्रों में उद्योग-धन्धों का केन्द्रीयकरण हो जाता है तथा अन्य क्षेत्र पिछड़े रह जाते हैं तो उसे क्षेत्रीय असन्तुलन कहा जाता है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आर्थिक विकास की प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक विकास की विशेषताएँ

आर्थिक विकास के प्रमुख लक्षण (या विशेषताएँ) निम्नलिखित हैं –

  1. सतत् प्रक्रिया – आर्थिक विकास एक सतत एवं निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय आय में क्रमशः वृद्धि होती रहती है। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में वस्तुओं की माँग और पूर्ति में निरन्तरता बनी रहती है।
  2. राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि – आर्थिक विकास के परिणामस्वरूप राष्ट्रीय आय व प्रति व्यक्ति आय में निरन्तर वृद्धि होती है।
  3. दीर्घकालीन प्रक्रिया – आर्थिक विकास की निरन्तर प्रक्रिया में वास्तविक राष्ट्रीय आय में निरन्तर वृद्धि होनी चाहिए। इस वृद्धि का सम्बन्ध दीर्घकाल से है जिसमें कम-से-कम 15-20 वर्षों का समय लगता है। आर्थिक विकास का सम्बन्ध अल्पकाल या एक या दो वर्षों में होने वाले परिवर्तनों से नहीं है। इसलिए अगर किसी अर्थव्यवस्था में किन्हीं अस्थायी कारणों से देश की आर्थिक स्थिति में सुधार हो जाता है; जैसे-अच्छी फसल, अप्रत्याशित निर्यात आदि का होना तो इसे आर्थिक विकास नहीं समझना चाहिए।
  4. संसाधनों का समुचित विदोहन – आर्थिक विकास में देश में उपलब्ध संसाधनों का कुशलतापूर्वक विदोहन किया जाता है।
  5. उच्च जीवन स्तर की प्राप्ति – आर्थिक विकास के दौरान प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के फलस्वरूप जनसाधारण के जीवन-स्तर में सुधार आता है। आर्थिक विषमता में कमी आती है तथा सरकार द्वारा शिक्षा सार्वजनिक स्वास्थ्य आदि जनकल्याण कार्यक्रमों में वृद्धि की जाती है। इससे लोगों के रहन-सहन का स्तर ऊँचा उठता है। आर्थिक विकास के परिणामस्वरूप राष्ट्र की आय एवं उसमें रहने वाले लोगों की आय में वृद्धि होती है जिसे हम राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय के रूप में जानते हैं।

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 18 महाराजः छत्रसालः

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 18 महाराजः छत्रसालः (गद्यम्) (सङ्कलितम्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 18 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) छत्रसालस्य पितुः नाम किम्? (छत्रसाल के पिता का क्या नाम था?)
उत्तर:
श्रीचम्पतरायः (श्री चम्पतराय जी)

(ख) छत्रसालस्य जन्म कस्मिन् ग्रामे अभवत्? (छत्रसाल का जन्म किस गाँव में हुआ था?)
उत्तर:
ककरकचनयग्रामे (ककरकचनय गाँव में)

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(ग) ‘बुन्देलकेसरी’ इति नाम्ना कः प्रसिद्धः? (‘बुन्देलकेसरी’ नाम से कौन प्रसिद्ध था?)
उत्तर:
छत्रसालः (छत्रसाल)

(घ) शिववीरः छत्रसालाय किं नामक कृपाणम् अयच्छत्? (शिववीर ने छत्रसाल को किस नाम की कृपाण दी?)
उत्तर:
‘भवानीति’ (भवानी)

(ङ) भूषणः कस्याः भाषायाः महाकविः आसीत्? (भूषण किस भाषा का महाकवि था?)
उत्तर:
हिन्दीभाषायाः (हिन्दी भाषा का)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) योद्धारः किमर्थं सर्वस्वं हुतवन्तः? (योद्धाओं ने किसलिए अपना सब कुछ जला दिया?)
उत्तर:
योद्धारः मातृभूमि पराधीनतापाशात् विमुक्तये सर्वस्वं हुतवन्तः। (योद्धाओं ने मातृभूमि को गुलामी के जाल से मुक्त करने के लिए अपना सब कुछ जला (बलिदान कर) दिया।

(ख) छत्रसालस्य जन्म कस्मिन् जनपदे अभवत्? (छत्रसाल का जन्म किस जनपद में हुआ?)
उत्तर:
छत्रसालस्य जन्म ‘टीकमगढ़’ जनपदे अभवत्। (छत्रसाल का जन्म टीकमगढ़ जनपद में हुआ।)

(ग) छत्रसालः कस्य शिष्यः आसीत्? (छत्रसाल किसका शिष्य था?)
उत्तर:
छत्रसालः स्वामिप्राणनाथस्य शिष्यः आसीत्।। (छत्रसाल स्वामीप्राणनाथ का शिष्य था।)

(घ) कान् पराजित्य छत्रसालः पन्नानगरं राजधानीम् अकरोत्? (किनको हराकर छत्रसाल ने पन्नानगर को राजधानी बनाया?)
उत्तर:
पन्नाजनपदस्य गोंडजातीयान् राज्ञः पराजित्य छत्रसालः पन्नानगरं राजधानीम् अकरोत्। (पन्नाजनपद की गोंड जाति के राजा को हराकर छत्रसाल ने पन्नानगर को राजधानी बनाया।)

(ङ) गुरुणा छत्रसालः केन उपाधिना विभूषितः? (गुरु के द्वारा छत्रसाल को किस उपाधि से विभूषित किया गया?)
उत्तर:
गुरुणा छत्रसालः ‘महाराज’ इत्युपाधिना विभूषितः (गुरु के द्वारा छत्रसालः “महाराज” नामक उपाधि से विभूषित किया गया।)

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प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) के के वीराः भारतस्वतन्त्रतायै मुगलैः सह अयुध्यन्? (कौन से वीरों ने भारत की स्वतन्त्रता के लिए मुगलों से युद्ध किया?)
उत्तर:
महाराजशिववीरः, महाराणाप्रतापः, राज्ञी लक्ष्मीबाई, वीरपुङ्गवा छत्रसालः प्रभृतयः अनेकाः वीराः भारतस्वतन्त्रतायै मुगलै, सह अयुध्यन्। (महाराज शिववीर, महाराणाप्रताप, रानी लक्ष्मीबाई, वीरश्रेष्ठ छत्रसाल आदि अनेक वीरों ने भारत की स्वतन्त्रता के लिए मुगलों से युद्ध किया।)

(ख) बाल्यकालादेव छत्रसालः किमर्थं प्रयतते स्म? (बचपन से ही छत्रसाल किसके लिए प्रयास कर रहा था?)
उत्तर:
बाल्यकालादेव छत्रसालः भारतमातरं मुगलशासनात् विमोक्तुं प्रयतते स्म। (बचपन से ही छत्रसाल भारतमाता को मुगल शासन से मुक्त करने का प्रयास कर रहे थे।)

(ग) छत्रसालस्य साहित्यिकं प्रेम कथं ज्ञायते? (छत्रसाल का साहित्यिक प्रेम कैसे पता चलता है?)
उत्तर:
छत्रसालः काव्यसाहित्यशास्त्रसम्मानार्थ भूषणमहाकवेः शिविकाम् अपि उतोलयत्। एतेन तस्य साहित्यिकं प्रेम ज्ञायते। (छत्रसाल ने काव्यसाहित्यशास्त्र के सम्मान के लिए महाकवि भूषण की पालकी को भी उठाया। इससे उनके साहित्यिक प्रेम का पता चलता है।)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत (दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(छत्रसालदशक, द्वयशीतिः, छत्रसालः, सूबेदारी, भवानी)
(क) मुगल शासकः इमं …………….. इति दातुम् ऐच्छत्।
(ख) शिववीरः तस्मै …………….. इति नामकं कृपाणं समर्पितवान्।
(ग) भूषणः …………….. इति काव्यरचनाम् अकरोत्।
(घ) भारतमातृभूः संरक्षकः …………….. आसीत्।
(ङ) छत्रसालः …………… वर्षपर्यन्तम् अजीवत्।
उत्तर:
(क) सूबेदारी
(ख) भवानी
(ग) छत्रसालदशक
(घ) छत्रसालः
(ङ) द्वयशीतिः।

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत्-(उचित क्रम से जोड़िए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 18 महाराजः छत्रसालः img 1
उत्तर:
(क) 3
(ख) 1
(ग) 2
(घ) 5
(ङ) 4

प्रश्न 6.
निम्नलिखितक्रियापदानां धातुं, लकारं, पुरुष, वचनं च लिखत
(नीचे लिखे क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 18 महाराजः छत्रसालः img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 18 महाराजः छत्रसालः img 3

प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के संधिविच्छेद करके सन्धिनाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 18 महाराजः छत्रसालः img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 18 महाराजः छत्रसालः img 5

प्रश्न 8.
अधोलिखितपदानां समासविग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के विग्रह कर समास का नाम लिखिए-)
(क) महाराजः
(ख) क्षेत्रपतिः
(ग) वीरपुरुषः
(घ) राष्ट्रभक्तिः
(ङ) यशः शरीरम्
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 18 महाराजः छत्रसालः img 6

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प्रश्न 9.
उदाहरणानुसारं पर्यायशब्दान् लिखत
(उदाहरणानुसार पर्यायवाची शब्द लिखिए-.)
उदाहरणम् – केसरी (रिन्) – सिंहः
(क) स्वतन्त्रः
(ख) कृपाणः
(ग) युद्धम्
(घ) तनयः
(ङ) जन्मभूमिः
उत्तर:
(क) स्वतन्त्रः मुक्तिः
(ख) कृपाणः – खड्गः
(ग) युद्धम् – समीरः, संग्रामम्
(घ) तनयः – पुत्रः
(ङ) जन्मभूमिः – मातृभूमिः

प्रश्न 10.
रेखांकितपदान्याधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न बनाइए-)
(क) स्वातन्त्र्यनायकाः स्वकीयं सर्वस्वं हुतवन्तः। (स्वतन्त्रता के नायकों ने अपना सब कुछ जला दिया।)
उत्तर:
के स्वकीयं सर्वस्वं हुतवन्तः? (किन्होंने अपना सब कुछ जला दिया?)

(ख) छत्रसालः शिववीरं महाराजं मिलितवान्। (छत्रसाल शिववीर महाराज से मिला।)
उत्तर:
छत्रसालः कं महाजं मिलितवान्। (छत्रसाल किस महाराज से मिला?)

(ग) अयं बाल्यकालात एव भारतमातरं विमोक्तुं प्रयतते स्म। (यह बचपन से ही भारतमाता को मुक्त करने का प्रयास कर रहा था।)
उत्तर:
अयं कस्मात् एवं भारतमातरं विमोक्तुं प्रयतते स्म? (यह कब से ही भारत माता को मुक्त करने के प्रयास कर रहा था?)

(घ) छत्रसालः भूषणस्य शिविकाम् उत्तोलयत्। (छत्रसाल ने भूषण की पालकी उठाई।)
उत्तर:
छत्रसालः कस्य शिविकाम् उत्तोलयत्? (छत्रसाल ने किसकी पालकी उठाई?)

(ङ) ‘मऊसहानिया’ स्थले सः प्राणान् अत्यजत्। (‘मऊसहानिया स्थल’ पर उसने प्राण त्याग दिए।)
उत्तर:
कस्मिन् स्थले सः प्राणान् अत्यजत्? (किस जगह पर उसने प्राण छोड़े?)

योग्यताविस्तारः –

महाराजछत्रसालसादृशाः येऽन्ये स्वातन्त्र्यनायकाः मध्यप्रदेशे अभवत् तेषां नामानि लिखत।
महाराज छत्रसाल जैसे अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के जो मध्यप्रदेश में हुए, नाम लिखो।

महाराजः छत्रसालः पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में ‘महाराज छत्रसाल’ का जीवन-चरित्र वर्णित किया गया है, जिससे छात्रों को बलिदान, पराक्रम और राष्ट्र-भक्ति की सीख मिल सके तथा वे भी ऐसे वीरों की भाँति अपने देश के लिए बलिदान की भावना उत्पन्न कर सकें।

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महाराजः छत्रसालः पाठ का अनुवाद

1. सम्प्रति अस्माकं देशोऽयं स्वतन्त्रोऽस्ति। किन्तु स्वतन्त्रताप्राप्त्यै परतन्त्रताकालादेव समये-समये राष्ट्रभक्तैः अनेकैः वीरपुरुषैः स्वस्य जीवनस्य आहुतिरपि प्रदत्तेति। गौराङ्गवैदेशिकेश्यः पूर्वं यदा भारतदेशः मुगलैः आक्रान्तः आसीत् तदा मुमलैः सह ये पराक्रमशालिनः युद्धं कृतवन्तः तेषु महाराजशिववीरः, महाराणाप्रतापः, राज्ञीलक्ष्मीबाई, वीरः वाः छत्रसालप्रभृतयः अप्रतिमाः योद्धारः आसन्। एते मातृभूमिं पराधीनतापाशात् विमुक्तये स्वीयं सर्वस्वं हुतवन्तः।।

शब्दार्थाः :
सम्प्रति-इस समय-now;आक्रान्तः-अधिकार में किया हुआ-control; वीरपुङ्गवाः-वीरों में श्रेष्ठ-bravest; पाशात्-जाल में-snare, clutches.

अनुवाद :
इस समय हमारा यह देश आजाद है। किन्तु स्वतन्त्रता प्राप्त करने के लिए गुलामी के समय से ही समय-समय पर अनेक राष्ट्रभक्त वीर-पुरुषों के द्वारा अपने जीवन की आहुति भी दी गई। विदेशी अंग्रेजों से पहले जब भारत देश पर मुगलों का अधिकार था तब मुगलों के साथ जिन पराक्रमशालियों ने युद्ध किए, उनमें से महाराज शिववीर, महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मीबाई, वीरों में श्रेष्ठ महाराज छत्रसाल आदि अनेक अद्वितीय योद्धा थे। इन्होंने मातृभूमि को गुलामी के जाल से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व जला दिया ‘समर्पित कर दिया।

English :
Brave patriots made sacrifices to liberate India during Mughal rule-heroic persons like Maharaja Shiv Veer, Maharana Pratap, Rani Laxmi Bai, bravest emperor Chhatrasala were unique soldiers- Sacrificed their all to seek freedom for country.

2. “बुन्देलकेसरी” इति विख्यातस्य छत्रसालस्य जन्म (1649) एकोनपञ्चाशदुत्तरषोडशशततमे ईस्वीये मध्यप्रदेशस्य ‘टीकमगढ़’ जनपदस्य मयूरपर्वतीयक्षेत्रे वर्तमानलिधौराविकासखण्डे “ककरकचनयग्रामे” अभवत्। छत्रसालस्य मातुर्नाम सारन्धादेवी पितु म च श्रीचम्पतरायः इत्यासीत्। अयं वीरः बाल्यकालादेव भारतमातरं मुगलशासनात् विमोक्तुं प्रयतते स्म। यथासमये एतदर्थम् एव छत्रसालः शिववीरमहाराजम् अपि मिलितवान्। तस्मै शिववीरोऽपि सर्वविधं साहाय्यं कर्तुं वचनम् अयच्छत्। तथा च स्वतन्त्रतायै योद्धं स्वाशीर्वादस्वरूपं “भवानीति” नामकं कृपाणम् अपि दत्तवान्।

शब्दार्थाः :
विमोक्तुम्-मुक्त करने के लिए-to liberate;प्रयतते-प्रयास कर रहा है-making efforts; सर्वविधम्-सब प्रकार की-of all sorts.

अनुवाद :
‘बुन्देलकेसरी’ नाम से विख्यात छत्रसाल का जन्म 1649 ई. में मट यप्रदेश के ‘टीकमगढ़’ जनपद के मयूर पर्वतीय क्षेत्र में वर्तमान में लिधौरा विकास खण्ड में “ककरकचनयग्राम में हुआ। छत्रसाल की माता का नाम सारन्धादेवी और पिता का नाम श्री चम्पतराय था। यह वीर बचपन से ही भारतमाता को मुगलों से मुक्त करने (कराने) के लिए प्रयास कर रहा था। उचित समय आने पर इसके लिए ही छत्रसाल, शिववीर महाराज से भी मिला। उसे शिववीर ने भी हर तरह की सहायता करने के लिए वचन दिया। और आजादी के लिए युद्ध करने के लिए अपने आशीर्वाद के रूप में ‘भवानी’ नाम की कृपाण भी दी।

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English :
Chhatrasala was known as Lion of Bundel–made efforts to liberate India from the trammels of the Mughals since childhood-met emperor Shiv Vira for the same and sought promise of help-Shiv Vira gave him a sword along with his blessings.

3. औरङ्गजेबस्य, अन्येषां राज्ञां च शक्ति अविगणय्य जनसहयोगेन छत्रसालः युद्धं कृतवान् विजयश्रियम् अपि अवाप्तवान्। असौ सेनानी सर्वप्रथमं युद्धे चित्रकूटात् गोपाचलनगरं (ग्वालियरम्) यावत् तथा च कालपीतः गढ़ाकोटा यावत् निजं प्रभुत्वं संस्थापयामास। अनन्तरं सः पन्नाजनपदस्य गोंडजातीयान् राज्ञः पराजित्य पन्नानगर राजधानीम् अकरोत्।

प्रसिद्धः स्वामिप्राणनाथः अस्य गुरुः आसीत्। प्रसन्नः गुरुः छत्रसालं “महाराज” इत्युपाधिना विभूष्य आशीर्वादं प्रदत्तवान्, यत्

राज्ये त्वदीये नृप! छत्रसाल! क्षोणिस्सदा कम्पमयी विभातु।

अश्वः त्वदीयः समियात् तु यत्र, भोस्तत्र साफल्यमवाप्नुहि त्वम्।।

शब्दार्थाः :
अविगणय्य-बिना गणना करके-not caring (ignoring); अवाप्तवान्-प्राप्त किया-obtained; प्रभुत्वम्-शासक त्व-lordship; संस्थापयामास-स्थापित किया-established; विभूष्य-विभूषित करके- embellishing; क्षोणिः-पृथ्वी-earth; विभातु-प्रकाशित हो-shine; त्वदीयः-तुम्हारा-yours; समियात्-जाये-proceed, so; अवाप्नुहि-प्राप्त करो-ohtain.

अनुवाद :
औरङ्गजेब के और अन्य राजाओं की शक्ति की बिना गणना किए, जन सहयोग से छत्रसाल ने युद्ध किया और विजय भी प्राप्त की। इस सेनानी ने सबसे पहले युद्ध में चित्रकूट से गोपालनगर (ग्वालियर) तक तथा कालपीत गढ़ाकोटा तक अपना शासनत्व स्थापित किया। इसके बाद उसने पन्ना जनपद की गोंडीय जाति के राजा को हराकर पन्नानगर को राजधानी बनाया।

प्रसिद्ध स्वामीप्राणनाथ इनके गुरु थे। खुश होकर गुरु ने छत्रसाल को ‘महाराज’ की उपाधि से विभूषित कर आशीर्वाद दिया कि-“हे राजा छत्रसाल! तुम्हारे राज्य में कांपती हुई धरती सदा प्रकाशित हो। तुम्हारा घोड़ा जहाँ भी जाए, वहीं तुम सफलता प्राप्त करो।”

English :
Ignored strength of Aurangzeb and others fought and won victory-Set up his rule from Chitrakoot to Gwalior and Kalpita Garhakata-defeated king of Pannagarh and made it his kingdom.

His guru Swami Pran Natl. embellished him with the title “Maharaja’ and blessed him to win victory wherever his horse happened to go.

4. यदा औरङ्गजेबः दक्षिणभारते व्यापृतः आसीत् तदा युद्धकौशलेन असौ बघेलखण्ड-मालव-राजस्थान-पञ्चाम्बुप्रदेशपर्यन्तं क्षेत्रं स्वाधिपत्ये कृतवान्। मुगलशासकः इमं मानिनं प्रान्ताधिपतित्वं “सूबेदारी” इति दातुम् ऐच्छत् तदा अयं न्यषेधयत्। एकदा महोबा-“जैतपुरनगरयोः मुगलशासने जाते सत्ययं पेशवाबाजीरावाय सहायतार्थम् एकं पत्रं प्रेषितवान्। बाजीरावसाहाय्येन सः पराजितं भूभागं विजितवान्। विजयेन आह्लादितोऽयं पेशवाबाजीरावम् औरसपुत्रमिव मत्वा विजितराज्यस्य तृतीयभागं तस्मै सहर्ष प्रदात्।”

शब्दार्थाः :
व्यापृतः-व्यस्त-busy; न्यषेधयत्-मना कर दिया- refused; ऐच्छत्-इच्छा की-desired.

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अनुवाद :
जब औरङ्गजेब दक्षिण भारत में व्यस्त था, तब युद्ध कौशल से इन्होंने बधेलखण्ड मालव, राजस्थान, पांच अम्बु प्रदेश तक के क्षेत्र पर अपना अधिकार किया। मुगलशासक ने इनका मान करने के लिए पान्तों का अधिपतित्व ‘सूबेदारी’ देनी चाही तो इन्होंने मना कर दिया। एक बार महोबा ने- “जैतपुरनगर से मुगलशासन होने पर सत्यय को पेशवा-बाजीराव की सहायता के लिए एक पत्र भेजा। बाजीराव की सहायता से उन्होंने हारा हुआ क्षेत्र जीत लिया। विजय से खुश होकर इन्होंने पेशवा बाजीराव को औरसपुत्र के समान मानकर जीते हुए राज्य का तीसरा भाग उसे खुशी से दे दिया।

English :
Won victory over many regions when Aurangzeb was busy in Southern India–Mughal emperor offered him ‘Subedari’ of certain provinces. He declined the offer.

Recaptured lost regions with the help of Bajirao offered one-third of won over kingdom of Bajirao, considering him as adopted son.

5. छत्रसालस्य शौर्यण, राष्ट्रभक्त्या, उदारतया च प्रभावितो हिन्दीभाषायाः महाकविः भूषणः “छत्रसालदशक” इति वीररसनिबद्धां काव्यरचनाम् अकरोत्। छत्रसालः काव्यसाहित्यशास्त्रसम्मानार्थं भूषणमहाकवेः शिविकाम् अपि उत्तोलयत्। द्वयशीतिवर्षस्य अवस्थायाम् एकत्रिंशदुत्तरसप्तदशशततमे (1731) खीस्ताब्दे दिसम्बरमासस्य चतुः तारिकायां “मऊसहानिया” इत्यस्य तालपरिसरे एषः क्षणभङ्गनिष्ठं शरीरम् अत्यजत्। अधुना सः पाञ्चभौतिकशरीरेण नास्ति परन्तु यशः शरीरेण सर्वदा अस्मान् भारतीयान् प्रेरयन् राष्ट्रभक्तिभावंच शिक्षयन् तिष्ठति एव। अयं देशः जन्मभूमिसंरक्षक्स्य महापराक्रमशालिनः छत्रसालस्य सदैव ऋणी अस्ति। विजयतेतरां महाराजः छत्रसालः।

शब्दार्थाः :
शिविकाम्-पालकी को-palanquin; उत्तोलयत्-उठाया-raised; क्षणभङ्गनिष्ठम्-क्षण भर में नष्ट होने वाला-transitory, fragile; शिक्षयन्-सिखाते हुए-teaching.

अनुवाद :
छत्रसाल के शौर्य, राष्ट्रभक्ति और उदारता से प्रभावित होकर हिन्दी भाषा के कवि भूषण ने ‘छत्रसालदशक’ नामक वीररस से युक्त काव्य की रचना की। छत्रसाल ने काव्यसाहित्यशास्त्र के सम्मान के लिए महाकवि भूषण की पालकी को भी उठाया। बयासी (82) वर्ष की आयु में सन् 1731 ई. में दिसम्बर मास की चार तारीख को ‘मऊसहानिया’ तालाब के परिसर में इन्होंने क्षणभर में नष्ट होने वाले शरीर को त्याग दिया। अब वह पञ्चभूत रूपी शरीर से नहीं हैं पर यश रूपी शरीर से हमेशा हम भारतीयों को प्रेरित करते हुए और राष्ट्रभक्ति का भाव सिखाते हुए रहेंगे। यह देश जन्मभूमि की रक्षा करने वाले महापराक्रमी छत्रसाल का हमेशा ऋणी रहेगा। महाराजा छत्रसाल विजयी हो।

English :
Bhushar composed a literary piece named ‘Chhatrasala Dashak’. Chhatrasala raised Bhushan’s palanquin to honour him.

Died at the age of 82. His heroic death will go on inspiring us with his patriotic feelings. The country will ever remain indebted to Chhatrasala.

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 4 परिवहन, संचार एवं विदेशी व्यापार

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 4 परिवहन, संचार एवं विदेशी व्यापार

MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
भारत में रेलवे जोन की कुल संख्या है
(i) 9
(ii) 16
(iii) 14
(iv) 15
उत्तर:
(ii) 16

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प्रश्न 2.
बड़ी रेलवे लाइन में रेल की दोनों पटरियों के मध्य की दूरी होती है
(i) 1,676 मिमी
(ii) 1000 मिमी
(iii) 792 मिमी
(iv) 1,560 मिमी।
उत्तर:
(i) 1,676 मिमी

प्रश्न 3.
भूमिगत रेलपथ (मेट्रो रेल) से सम्बन्धित है –
(i) बंगलूरू
(ii) कोलकाता
(iii) अहमदाबाद
(iv) भोपाल।
उत्तर:
(ii) कोलकाता

प्रश्न 4.
गैस लाइन है
(i) बरौनी-हल्दिया
(ii) बरौनी-जालंधर
(iii) नाहरकटिया-बरौनी
(iv) हजीरा-जगदीशपुर।
उत्तर:
(iv) हजीरा-जगदीशपुर।

प्रश्न 5.
मुम्बई बन्दरगाह के दबाव को कम करने हेतु विकसित बन्दरगाह है (2017)
(i) पाराद्वीप
(ii) हल्दिया
(iii) न्हावाशेवा
(iv) काण्डला।
उत्तर:
(iii) न्हावाशेवा

प्रश्न 6.
विदेशों में रह रहे लोगों से बात करने हेतु भारत में उपलब्ध दूरसंचार सेवा है (2016)
(i) बी. पी. टी.
(ii) आई. एस. डी.
(iii) एस. टी. डी.
(iv) डब्ल्यु. एल. एल.
उत्तर:
(ii) आई. एस. डी.

प्रश्न 7.
जिन उपभोक्ताओं के पास कम्प्यूटर या इन्टरनेट उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें प्रारम्भ की गई दूरसंचार सेवा
(i) व्यापारिक चैनल
(ii) स्पीड पोस्ट
(iii) ई-पोस्ट
(iv) ई-बिलपोस्ट।
उत्तर:
(iii) ई-पोस्ट

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रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

प्रश्न 1.
आन्ध्र प्रदेश के कोरोमण्डल तट पर सर्वाधिक सुरक्षित व गहरा बन्दरगाह ……. है।
उत्तर:
विशाखापट्टनम

प्रश्न 2.
स्थानीय पत्रों के प्रेषण हेतु बड़े शहरों में लगाई गई पत्र पेटियाँ ……” कहलाती हैं।
उत्तर:
ग्रीन चैनल

प्रश्न 3.
सभी राज्यों की राजधानियों में डाक छाँटने व प्रेषण हेतु उपयोगी चैनल ……. है।
उत्तर:
राजधानी चैनल

प्रश्न 4.
इन्टरनेशनल नेटवर्क का संक्षिप्त नाम है। (2009, 11, 13)
उत्तर:
इण्टरनेट

प्रश्न 5.
विदेशी व्यापार से आशय एक देश का अन्य देशों से वस्तुओं के …….. से है। (2010)
उत्तर:
आदान-प्रदान

प्रश्न 6.
स्वतन्त्रता प्राप्ति के समय भारत का विदेशी व्यापार ……का स्वरूप लिये हुआ था।
उत्तर:
औपनिवेशिक व्यापार

प्रश्न 7.
1992 की घोषित आयात-निर्यात नीति में ……. को काफी उदार बना दिया गया है।
उत्तर:
लाइसेंस प्रणाली।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 4 परिवहन, संचार एवं विदेशी व्यापार 1
उत्तर:

  1. → (ङ)
  2. → (क)
  3. → (ख)
  4. → (ग)
  5. → (घ)

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कोलकाता से 125 किमी. दूर कौन-सा बन्दरगाह विकसित किया गया है ?
उत्तर:
हल्दिया बन्दरगाह।

प्रश्न 2.
इण्डियन एयरलाइन्स का मुख्यालय कहाँ हैं ?
उत्तर:
दिल्ली में।

प्रश्न 3.
भारत में प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना का प्रमुख उद्देश्य क्या है ?
उत्तर:
प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य 500 तक की आबादी वाले सभी गाँवों को बारहमासी सड़कों से जोड़ना है।

प्रश्न 4.
परिवहन व संचार से क्या आशय है ?
उत्तर:
व्यक्तियों या जीव-जन्तुओं को किसी माध्यम द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाने ले जाने की प्रक्रिया परिवहन कहलाती है।
संचार तन्त्र के अन्तर्गत सूचनाओं का आदान-प्रदान या प्रसारण सम्मिलित है।

प्रश्न 5.
दूरदर्शन में विज्ञापन सेवा कब प्रारम्भ की गई थी ?
उत्तर:
1976 में विज्ञापन सेवा प्रारम्भ की गई।

प्रश्न 6.
अन्तर्राष्ट्रीय दर्शकों को भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक क्षेत्रों की जानकारी किस चैनल द्वारा प्रदान की जाती है ?
उत्तर:
डी. डी. इण्डिया चैनल द्वारा।

प्रश्न 7.
वर्तमान में रेडियो प्रसारण सेवा का नाम क्या है ?
उत्तर:
आकाशवाणी।

प्रश्न 8.
भारत में दूरदर्शन के शैक्षिक चैनल को प्रमुखतया किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर:
डी. डी. ज्ञानदर्शन शैक्षिक चैनल नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 9.
भारत के प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय जलमार्गों के नाम बताइए।
उत्तर:
भारत वर्ष से गुजरने वाले प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय जलमार्ग निम्नलिखित हैं –

  1. सिंगापुर मार्ग-कोलकाता से जापान होते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका के तटों तक।
  2. ऑस्ट्रेलिया मार्ग-चेन्नई से सिंगापुर होते हा ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैण्ड तक।
  3. स्वेज मार्ग-मुम्बई से पोर्टसईद तथा लन्दन तक।
  4. उत्तमाशा अन्तरीप मार्ग-मुम्बई, मोम्बासा से यूरोप व अमेरिका तक।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मैट्रो रेल सेवा से क्या तात्पर्य है ? (2009)
उत्तर:
मैट्रो रेल सेवा – जनसंख्या के महानगरों में केन्द्रित होने से घने बसे क्षेत्रों में रेलमार्गों के विकास की सम्भावनाएँ सीमित हैं। इसलिए महानगरों में भूमिगत रेल पथ (मैट्रो रेल) विकसित करने की योजना है। कोलकाता, मुम्बई एवं दिल्ली में यह कार्य पूरा किया जा चुका है।

प्रश्न 2.
आन्तरिक जल परिवहन की प्रमुख बाधाएँ कौन-कौनसी हैं ? (2014)
उत्तर:
आन्तरिक जल परिवहन की प्रमुख बाधाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. देश की अधिकांश नदियाँ मौसमी हैं। कुछ नदियाँ तो शुष्क मौसम में बिल्कुल सूख जाती हैं और कुछ में जलधारा इतनी पतली और उथली होती है कि उसमें नावें या स्टीमर नहीं चलाये जा सकते।
  2. वर्षा ऋतु में जल की अधिकता, विकराल गति एवं बाढ़ की स्थिति के कारण वर्षा ऋतु में नाव्य नदियों का परिवहन के लिए उपभोग नहीं हो पाता।
  3. सदा नीरा नदियों से सिंचाई के लिए जगह-जगह से नहरें निकाली गई हैं, जिससे नदियों में जलस्तर तो कम हो ही जाता है, मार्ग में द्वार या बन्द बनाने से मार्ग बाधायुक्त हो जाता है। अतः जो नदियाँ पहले नौ संचालन के योग्य थीं, अब उपयोगी नहीं रहीं।।
  4. दक्षिण भारत की नदियाँ पथरीले भागों से बहती हुई प्रपात बनाती हैं। प्रपाती नदियों में गति तो तीव्र होती है, साथ ही प्रपातों के साथ-साथ स्वाभाविक रूप से नावों या स्टीमरों को नहीं चलाया जा सकता।

प्रश्न 3.
बन्दरगाह व पत्तन में क्या अन्तर है ? (2013)
उत्तर:
बन्दरगाह व पत्तन में निम्नलिखित अन्तर हैं –

बन्दरगाह

  1. जलयानों व जहाजों के तट पर आने-जाने, ठहरने,विश्राम करने के स्थान को बन्दरगाह कहते हैं।
  2. बन्दरगाह पर सामान्य सुविधाएँ ही होती हैं। नगर जैसी सुविधाएँ नहीं होती हैं।

पत्तन

  1. समुद्रतट का वह अन्त:स्थल जहाँ जहाज में माल लादने एवं उतारने का कार्य होता है, पत्तन कहलाता है।
  2. पत्तन में नगर जैसी सुविधाएँ; जैसे-यात्रियों को ठहरने तथा माल को सुरक्षित रखने की सुविधाएँ होती हैं।

प्रश्न 4.
सेल्युलर फोन क्या है ?
उत्तर:
सेल्युलर फोन या मोबाइल फोन-यह बेतार का तार जैसा फोन है जिसे सेल्युलर फोन या मोबाइल फोन कहते हैं। इस फोन को हम कहीं भी जेब में रखकर ले जा सकते हैं वहीं से फोन कर सकते हैं एवं बाहर से फोन प्राप्त (रिसीव) कर सकते हैं। 2007 तक देश में इस सेवा का उपयोग करने वालों की संख्या 165.09 मिलियन थी जो वर्तमान में बढ़कर 969.54 मिलियन हो गई है।

प्रश्न 5.
तार व फैक्स में क्या अन्तर है ? (2013)
उत्तर:
तार – अमेरिकी वैज्ञानिक थॉमस एडिसन ने टेलीग्राफ का आविष्कार किया। इससे सन्देश शीघ्र भेजे जाने लगे। इसके लिए खम्भों पर टेलीग्राफ के तार स्थाई रूप से बाँधा जाना जरूरी था। इन तारों द्वारा बिजली के माध्यम से सन्देश एक स्थान से दूसरे स्थान तक कोडेंसी मशीन द्वारा भेजे जाते हैं। सभी देश तार भेजने के लिए मोर्सकोड नामक सांकेतिक भाषा का प्रयोग करते हैं।

फैक्स – फैक्स एक प्रकार से लिखित सन्देश प्राप्त करने या भेजने का साधन है। इसके लिए एक मशीन की आवश्यकता होती है जिसे फैक्स मशीन कहते हैं। इस मशीन को टेलीफोन नम्बर से जोड़ देते हैं एवं सन्देश लगा देते हैं। यह मशीन उस सन्देश को कागज पर छाप देती है। साथ ही भेजने वाले का टेलीफोन नम्बर, पता एवं समय लिख देती है।

प्रश्न 6.
इण्टरनेट से क्या तात्पर्य है ? (2009, 11, 14)
उत्तर:
इण्टरनेट-इण्टरनेट इण्टरनेशनल नेटवर्क का संक्षिप्त नाम है। इण्टरनेट कम्प्यूटरों को जोड़ने की सर्वाधिक सक्षम अन्तर्राष्ट्रीय सूचना प्रणाली है जिसने वर्तमान में करोड़ों उपयोगकर्ताओं को आपस में जोड़ रखा है। इस सेवा से कोई भी व्यक्ति घर बैठे देश-विदेश की प्रत्येक घटना को देख सकता है व सम्पर्क कर सकता है। सामान्यतः इण्टरनेट का उपयोग संवादों से सम्बन्धित आँकड़ों के संग्रह या प्रकाशन कार्य के लिए भी होता है। इण्टरनेट के द्वारा व्यक्ति अपने-अपने संवादों को तुरन्त एक-दूसरे के कम्प्यूटर स्क्रीन पर पढ़ और जान सकता है तथा अतिशीघ्र जवाब दे सकता है। जून 2015 तक प्राप्त सूचना के अनुसार भारत में करीब 302 मिलियन इण्टरनेट ग्राहक थे।

प्रश्न 7.
भारतीय दूरदर्शन सेवा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारतीय दूरदर्शन
भारत में टेलीविजन सेवा का नियमित प्रसारण 1965 से प्रारम्भ हुआ। सन् 1976 में इसे आकाशवाणी से पृथक् कर दूरदर्शन नामक अलग संगठन बनाया गया। अब देश की लगभग 87 प्रतिशत से अधिक जनता, 1,402 स्थल ट्रान्समीटरों के माध्यम से दूरदर्शन के कार्यक्रम देख सकती है। कार्यक्रम तैयार करने वाले केन्द्रों की संख्या 20 है। 1976 में विज्ञापन सेवा प्रारम्भ की गई। 1982 से दूरदर्शन ने रंगीन कार्यक्रमों का प्रसारण प्रारम्भ कर दिया। डी. डी. 1 एवं डी. डी. 2 दिल्ली से प्रारम्भ किये गये। तत्पश्चात् 11 क्षेत्रीय भाषाओं के उपग्रह चैनल शुरू किये। फरवरी 1987 से दूरदर्शन की प्रात:कालीन सेवा प्रारम्भ हुई। 26 जनवरी, 1989 से दोपहर की सेवा प्रारम्भ की गई। इस प्रकार दूरदर्शन की तीनों सभाएँ संचालित करके सभी वर्गों के लिए कार्यक्रम प्रसारित हो रहे हैं। खेल सम्बन्धी गतिविधियों के लिए डी. डी. स्पोर्ट्स चैनल, गुणवत्तायुक्त शिक्षा तक पहुँच बनाने हेतु सन् 2000 में डी. डी. ज्ञान दर्शन शैक्षिक चैनल आरम्भ किया गया। दूरदर्शन के अनेक निजी चैनल भी हैं।

प्रश्न 8.
उपग्रह संचार सेवा से क्या आशय है ? (2010)
उत्तर:
उपग्रह संचार-वैज्ञानिकों ने मानव हितों की पूर्ति के लिए मशीनीकृत उपग्रह तैयार कर रॉकेटों की सहायता से अन्तरिक्ष में स्थापित किया है। ये कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए मौसम, प्राकृतिक संसाधनों, सैनिक गतिविधियों आदि की जानकारी चित्र और मानचित्र के माध्यम से पृथ्वी पर भेजते हैं। आर्यभट्ट, एप्पल, इन्सेट, आई. आर. एस. कृत्रिम उपग्रह इसी दिशा में किये गये प्रयास हैं।

प्रश्न 9.
विदेशी या अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से क्या तात्पर्य है ? (2010, 11)
उत्तर:
विदेशी या अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार-प्रत्येक राष्ट्र अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विदेशों से वस्तुएँ खरीदता है और बदले में अपने देश की वस्तुओं को बेचता है। वस्तुओं के इस पारस्परिक विनिमय को ही व्यापार कहा जाता है। दो या अधिक राष्ट्रों के बीच होने वाले विनिमय को अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं। एक देश दूसरे देशों के साथ जो क्रय-विक्रय करता है वह उसका विदेशी व्यापार कहलाता है। उदाहरण के लिए, बांग्लादेश तथा भारत के बीच होने वाला व्यापार विदेशी व्यापार कहलायेगा।

प्रश्न 10.
सांस्कृतिक भिन्नता व्यापार को किस प्रकार प्रभावित करती है ?
उत्तर:
विश्व के सभी राष्ट्र सांस्कृतिक रूप से समान नहीं हैं। विभिन्न राष्ट्रों में सामाजिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण, रहन-सहन, रीति-रिवाज, रुचियाँ भिन्न-भिन्न हैं। इस सांस्कृतिक भिन्नता के कारण उत्पादन एवं माँग भी भिन्न-भिन्न है। इस भिन्नता का प्रभाव अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है।

प्रश्न 11.
विदेशी व्यापार संरचना से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
विदेशी व्यापार संरचना-विदेशी व्यापार की संरचना से आशय आयात-निर्यात के स्वरूप से होता है। दूसरों शब्दों में, इसका आशय इस बात से होता है कि कोई राष्ट्र किस प्रकार की वस्तुओं का आयात-निर्यात करता है। जब एक राष्ट्र से वस्तुओं को दूसरे राष्ट्र को भेजा जाता है तो उसे निर्यात कहते हैं। इसके विपरीत जब अन्य राष्ट्र से वस्तुओं को मँगाया जाता है तो इसे आयात कहते हैं।

प्रश्न 12.
निर्यात संवर्द्धन एवं आयात प्रतिस्थापन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
निर्यात संवर्द्धन – यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें निर्यात वृद्धि के लिए पुराने निर्यातकर्ताओं को तथा नवीन व्यक्तियों को निर्यात में वृद्धि करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
आयात प्रतिस्थापन – यह ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें विदेशों से आयात की जाने वाली वस्तुओं के स्थान पर उन्हें कोई निकट स्थानापन्न देश में ही उत्पादित किया जाता है।

प्रश्न 13.
भारत की पाँच प्रमुख आयात एवं निर्यात वस्तुओं के नाम बताइए। (2009)
उत्तर:
भारत के आयात-भारत के आयात को प्रमुख रूप से तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है –

  1. पूँजीगत वस्तुएँ-इसमें मशीनें, धातुएँ, अलौह धातुएँ एवं परिवहन के सामान शामिल होते हैं।
  2. कच्चा माल-इसमें खनिज तेल, कपास, जूट तथा रासायनिक वस्तुओं का समावेश होता है।
  3. उपभोक्ता वस्तुएँ-इसमें खाद्यान्न, विद्युत उपकरण, औषधियाँ, वस्त्र, कागज इत्यादि का समावेश होता है।

भारत के निर्यात – भारत से निर्यात की जाने वाली वस्तुओं को चार श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है –

  1. खाद्यान्न समूह (या कृषिजन्य वस्तुएँ)- इसमें अनाज, चाय, तम्बाकू, कॉफी, काजू, मसाले आदि का समावेश होता है।
  2. कच्चा माल-इसमें खाल, चमड़ा, ऊन, रुई, कच्चा लोहा, मैंगनीज, खनिज पदार्थ आदि शामिल किये जाते हैं।
  3. निर्मित वस्तुएँ-इसमें जूट का सामान, कपड़े, चमड़े का सामान, सीमेण्ट, खेल का सामान, जूते आदि शामिल होते हैं।
  4. पूँजीगत सामान-इसमें मशीनें, परिवहन उपकरण, लोहा-इस्पात, इन्जीनियरिंग वस्तुएँ सॉफ्टवेयर एवं सिलाई मशीनें आदि को शामिल किया जाता है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
परिवहन के साधन मानव सभ्यता की प्रगति के पथ प्रदर्शक कैसे हैं ? लिखिए। (2016)
उत्तर:
परिवहन का महत्त्व एवं उपयोगिता

आधुनिक औद्योगिक समाज के लिए परिवहन व संचार के साधन आवश्यक आवश्यकता बन गये हैं। जैसे-जैसे मानव सभ्यता की ओर अग्रसर होता गया, परिवहन का इतिहास मानव सभ्यता का इतिहास बनता गया। अत: परिवहन के साधन मानव सभ्यता की प्रगति के पथ प्रदर्शक बन गये हैं जैसा कि निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट है –

  1. दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति-परिवहन के साधन; जैसे-सड़कें, रेलें, जलमार्ग, वायुमार्ग आदि मण्डी के लिए कृषि उपजें, उद्योगों के लिए कच्चा माल, उपभोक्ताओं के लिए तैयार माल तथा व्यापारियों के लिए दूरस्थ माल आदि को सुलभ कराते हैं। हमारी छोटी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति इन साधनों से ही सम्भव होती है।
  2. राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्रदान करना-परिवहन के साधन भारतीय राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्रदान करते हुए सद्भाव एवं भाईचारे को जाग्रत कर देश को एकता के सूत्र में बाँधने का कार्य करते हैं।
  3. वैचारिक व भौगोलिक दूरियों को सीमित करना- भारत के विस्तृत विस्तार, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक बहुलता एवं विविधता, भाषायी, सांस्कृतिक तथा वैचारिक एवं भौगोलिक दूरी से राष्ट्रीय एकता को खण्डित होने का खतरा लगातार बना रहता है। परिवहन के साधन वैचारिक व भौगोलिक दूरियों को सीमित करके राष्ट्रीय एकता को विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  4. राष्ट्रीय प्रगति के सूचक-परिवहन के साधन राष्ट्रीय प्रगति व समृद्धि के सूचक हैं। इनसे ही माल व यात्री ढुलाई नियमित, विश्वसनीय व तीव्रगामी होती है।
  5. विश्वव्यापीकरण को बढ़ावा-परिवहन व संचार के द्रुतगामी व सक्षम साधनों के द्वारा दुनियाँ बहुत छोटी हो गयी है। किसी एक देश के बाजारों में हुए परिवर्तन का प्रभाव अन्य देशों के बाजारों पर अवश्य पड़ता है। दुनिया के लोगों की परस्पर निर्भरता को परिवहन के साधन सुलभ बना देते हैं।
  6. प्राकृतिक आपदाओं के समय मददगार-परिवहन के साधन प्राकृतिक आपदाओं; जैसे-अकाल, बाढ़, महामारी, अतिवृष्टि, अनावृष्टि आदि के समय समाज के मददगार होते हैं।

प्रश्न 2.
भारत के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय राजमार्ग
राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रख-रखाव की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की है। सभी राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रख-रखाव का कार्य परिवहन मन्त्रालय, राज्यों के लोक निर्माण विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और सीमा संगठन के माध्यम से करती हैं। ये पक्की सड़कें राष्ट्र के राज्यों की राजधानियों, बड़े औद्योगिक एवं व्यापारिक नगरों, प्रमुख बन्दरगाहों तथा पड़ोसी राष्ट्रों की सड़कों से मिलती है। “भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लम्बाई 1,03,933 किलोमीटर है जो सड़कों की कुल लम्बाई का मात्र 2 प्रतिशत है लेकिन यातायात का 40 प्रतिशत इन्हीं राष्ट्रीय राजमार्गों से गुजरता है।”

देश में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना’ 1999 तैयार की गयी जिसके अनुसार सन् 2007 तक करीब 14 हजार किमी. लम्बे 4/6 लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का लक्ष्य है। देश के कुछ राष्ट्रीय राजमार्ग अनलिखित हैं –
1 भारत 2018; पृष्ठ 499.

राष्ट्रीय राजमार्ग
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 4 परिवहन, संचार एवं विदेशी व्यापार 2

प्रश्न 3.
“रेलमार्गों का वितरण भारत में असमान है।” स्पष्ट कीजिए। (2017)
उत्तर:
भारत में रेलमार्गों का वितरण
भारत में रेलमार्गों का विकास उन्हीं क्षेत्रों में हुआ है जो आर्थिक दृष्टि से अधिक विकसित हैं। यह वितरण अत्यधिक असमान है।

(1) अधिक सघन रेलमार्ग क्षेत्र – यह क्षेत्र उत्तर भारत में सतलज-गंगा के मैदान में पंजाब से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है। इस रेल क्षेत्र के प्रमुख स्टेशन लुधियाना, दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, आसनसोल, हावड़ा आदि हैं।

(2) मध्य सघन रेलमार्ग क्षेत्र-इस मार्ग में प्रायद्वीपीय मैदान एवं दक्षिण के पठार सम्मिलित हैं। अहमदाबाद, बड़ोदरा, चेन्नई प्रमुख स्टेशन हैं।

(3) कम सघन रेलमार्ग क्षेत्र-देश के पर्वतीय, पठारी, मरुस्थलीय, दलदली, जंगली तथा पिछड़ी अर्थव्यवस्था एवं विरल जनसंख्या वाले भूभाग जहाँ परिवहन की सुविधाएँ नगण्य हैं, रेलमार्गों का विकास नहीं हो पाया है। इनमें कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालैण्ड, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, छत्तीसगढ़ का बस्तर एवं उड़ीसा के अधिकांश भाग सम्मिलित हैं।

भारतवर्ष के पर्वी एवं पश्चिमी तटीय भागों में समद्र तट के कटा-फटा व सँकरे होने तथा पहाड़ियों के किनारे के साथ रेलमार्ग पर्याप्त विकसित नहीं हो सके हैं। पूर्वी तट पर समुद्र तट के कन्याकुमारी से हावड़ा तक रेलमार्ग विकसित है। पश्चिमी तटीय क्षेत्र में कोंकण रेल निगम की स्थापना के साथ 837 किमी. का रेलमार्ग विकसित हुआ है।

जनसंख्या के महानगरों में केन्द्रित होने से घने बसे क्षेत्रों में रेलमार्गों के विकास की सम्भावनाएँ सीमित हैं। महानगरों में भमिगत रेल पथ (मैट्रो रेल) विकसित करने की योजना है। भारत में कोलकाता, मुम्बई एवं दिल्ली में यह कार्य पूरा किया जा चुका है।

प्रश्न 4.
संचार के साधन वर्तमान युग में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण व उपयोगी कैसे हैं ? वर्णन कीजिए। (2009)
उत्तर:
संचार के साधनों का महत्त्व

संचार तन्त्र के अन्तर्गत सूचनाओं का आदान-प्रदान या प्रसारण सम्मिलित है। मानव एक सामाजिक प्राणी है। अतः उसे अपने व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में संचार की अत्यन्त आवश्यकता पड़ती है। प्रारम्भ में मानव स्वयं सूचनाओं व सन्देशों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाता था बाद में घोड़ों या ऊँटों की पीठ पर बैठकर वह दूर तक सन्देशों को ले जाता था। इस कार्य के लिए कबूतरों का भी उपयोग होता था। संचार के साधन आज अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हो गये हैं। इसके महत्वपूर्ण होने के निम्नलिखित आधार हैं

  1. राष्ट्र के विकास कार्यक्रम और नीतियों के बारे में जनता में जागरूकता विकसित करने के लिए एवं राष्ट्रनिर्माण में इन साधनों का महत्वपूर्ण योगदान है।
  2. ये विभिन्न राष्ट्रों को परस्पर सम्पर्क सूत्र द्वारा एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य करते हैं तथा सद्भावना बढ़ाते हैं।
  3. संचार के साधनों द्वारा किसी क्षेत्र में माल की आवश्यकता उसकी पूर्ति, वस्तुओं की कीमत आदि सूचनाएँ दूसरे क्षेत्रों को प्राप्त होती हैं।
  4. प्रशासन को अपना कार्य सुचारु रूप से चलाने के लिए संचार के साधनों की बहुत उपयोगिता है।
  5. संचार के साधनों द्वारा परिवहन व्यवस्था को भी द्रुतगामी एवं सुचारु बनाया गया है। यात्रा करने एवं माल भेजने की व्यवस्था के पहले से ही सूचना भेजी जा सकती है।
  6. युद्ध, दुर्घटना, भूकम्प एवं आपातकाल आदि घटनाओं के समय स्थिति का समाचार देना और शीघ्र राहत सामग्री भेजने में मदद करना।
  7. विश्व के किसी भी कोने में अपने मित्र व परिवार वालों से बातचीत करना।
  8. ये साधन देश के आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा ये प्रगति के प्रेरक बन गये हैं।

प्रश्न 5.
“दूरदर्शन संचार का सबसे उपयुक्त माध्यम है।” स्पष्ट कीजिए। (2009)
उत्तर:

  1. दूरदर्शन में ध्वनि एवं चित्रों का साथ-साथ प्रसारण होता है। यह अधिक लोकप्रिय और प्रभावशाली साधन है।
  2. दूरदर्शन द्वारा विश्व में कहीं भी घटित घटनाओं का सजीव चित्रण प्रस्तुत होता है।
  3. दूरदर्शन से समाचारों के अतिरिक्त मौसम, कृषि, उद्योग, विज्ञान, खेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोरंजन, घर-परिवार, बालक, महिलाओं आदि सम्बन्धी विविध जानकारी का प्रसारण होता है।
  4. ज्ञानवर्द्धन के साधनों के रूप में इसकी बहुत विशिष्ट भूमिका है। विश्व के अनेक राष्ट्रों में दूरदर्शन, शिक्षा पद्धति का अभिन्न अंग है।
  5. दूरदर्शन के माध्यम से छात्रों को विभिन्न देशों के महत्वपूर्ण स्थलों को देखने का अवसर मिलता है तथा विभिन्न कलात्मक तथा ऐतिहासिक भवन घर पर ही देखने को मिल जाते हैं।
  6. दूरदर्शन द्वारा जनता को राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं को समझने में भी सरलता रहती है।
  7. इसके माध्यम से लोगों को राष्ट्र की सामाजिक व सांस्कृतिक घटना तथा धार्मिक सद्भाव देखने के अवसर प्राप्त होते हैं। इससे राष्ट्र में जागरूकता उत्पन्न होती है।

इस प्रकार दूरदर्शन संचार का सबसे उपयुक्त माध्यम है।

प्रश्न 6.
विदेशी व्यापार का आर्थिक विकास में योगदान बताते हुए अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
विदेशी व्यापार का आर्थिक विकास में योगदान बताइए। (2016)
अथवा
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाले कौनसे कारक हैं ? कोई चार लिखिए। (2009, 12, 15)
उत्तर:
विदेशी व्यापार का आर्थिक विकास में योगदान
वर्तमान समय में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का बड़ा महत्त्व है। कोई भी राष्ट्र बिना विदेशी व्यापार को बढ़ाये प्रगति नहीं कर सकता। वस्तुतः अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार आज किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति का मापदण्ड है। विदेशी व्यापार का आर्थिक विकास में योगदान अग्रलिखित बातों से स्पष्ट है –

  1. कृषि व उद्योगों का विकास-अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से कृषि व उद्योगों का विकास सम्भव हो सकता है। एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र से आधुनिक मशीनों व यन्त्रों आदि का आयात करके राष्ट्र में उद्योगों का विकास कर सकता है। कृषि क्षेत्र में भी कृषि के उपकरण, उर्वरक तथा उन्नत बीजों का आयात कर कृषि का विकास किया जा सकता है।
  2. विदेशी मुद्रा की प्राप्ति-अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है जिसका उपयोग राष्ट्र के आर्थिक विकास में किया जा सकता है।
  3. रोजगार के अवसर-इससे उद्योग एवं कृषि में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
  4. उपभोक्ता को लाभ-इससे बाहर में वस्तुओं की विविधता देखने को मिलती है। उपभोक्ता अपने जीवनस्तर को उन्नत कर सकता है।
  5. परिवहन व संचार साधनों का विकास-अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण ही यातायात और संचार के साधनों की प्रगति हुई है। व्यापार से परिवहन व संचार साधनों का घनिष्ठ सम्बन्ध है। आयात-निर्यात हेतु परिवहन व संचार साधनों की आवश्यकता पड़ती है।
  6. श्रम विभाजन-इससे श्रम विभाजन को बढ़ावा मिलता है, जो आर्थिक विकास का परिचायक है।

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाले कारक

व्यापार पर अनेक प्राकृतिक, आर्थिक, राजनैतिक एवं सामाजिक परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता है। इसे प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं –

  1. स्थिति-जो राष्ट्र विश्व के व्यापारिक मार्गों पर स्थित होते हैं, उनकी व्यापारिक प्रगति शीघ्र होती है।
  2. प्राकृतिक संसाधन-किसी राष्ट्र का व्यापार वहाँ के प्राकृतिक संसाधनों की भिन्नता से प्रभावित होता है। प्राकृतिक संसाधनों में देश की जलवायु, वन, कृषि योग्य भूमि, कृषि उपजें, खनिज आदि सम्मिलित किये जाते हैं। इन्हीं साधनों पर उत्पादन निर्भर करता है।
  3. समुद्र तट-जिन राष्ट्रों का समुद्र तट बहुत कटा-फटा होता है वहाँ उन्नत बन्दरगाह विकसित होते हैं, लोग साहसी और अच्छे नाविक होते हैं।
  4. आर्थिक विकास-सभी राष्ट्रों के आर्थिक विकास की स्थिति एकसमान नहीं होती। जो राष्ट्र आर्थिक प्रगति में आगे हैं उनका व्यापार अधिक विकसित होगा।
  5. जनसंख्या की भिन्नता-जनसंख्या का असमान वितरण व्यापार को प्रभावित करता है। अधिक जनसंख्या वाले राष्ट्रों में माँग अधिक रहती है।
  6. शान्ति-अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का विकास शान्ति के समय ही हो सकता है। युद्ध एवं अशान्ति से व्यापार में हानि होती है।

प्रश्न 7.
भारत में निर्यात संवर्द्धन के लिए किए गए प्रयासों का वर्णन कीजिए। (2017)
उत्तर:
निर्यात संवर्द्धन वह प्रक्रिया है जिसमें निर्यात वृद्धि के लिए पुराने निर्यातकर्ताओं को तथा नवीन व्यक्तियों को निर्यात में वृद्धि करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

निर्यात संवर्द्धन के प्रयास

निर्यात संवर्द्धन हेतु निम्नलिखित उपाय किये गये हैं –

  1. विभिन्न संगठनों की स्थापना-भारत सरकार ने निर्यात के लिए बाजार खोजने, घरेलू माल का विदेशों में प्रचार करने तथा निर्यातकों को सुविधा देने के लिए विदेशी व्यापार संस्थान, आयात-निर्यात सलाहकार परिषद, राजकीय व्यापार निगम, निर्यात संवर्द्धन परिषद्, सूती वस्त्र निगम, जूट निगम, निर्यात-आयात बैंक की स्थापना की है।
  2. व्यापार विकास संस्था-निर्यात संवर्द्धन के क्षेत्र में कार्यरत् विभिन्न संस्थाओं में समन्वय स्थापित कर आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराने हेतु व्यापार विकास संस्था की स्थापना की गयी।
  3. राजकीय व्यापार निगम की स्थापना-1956 में स्थापित इस निगम को स्थापित करने का उद्देश्य था-निर्यात का विविधीकरण करना, विद्यमान बाजारों का विस्तार करना, निर्यातों को प्रोत्साहन देना तथा आयातित वस्तुओं के वितरण की व्यवस्था करना।
  4. निर्यात गृहों की स्थापना-मान्यता प्राप्त संस्थाओं को निर्यात संवर्द्धन के लिए विपणन विकास विधि से आर्थिक सहायता प्रदान कराने हेतु इसकी स्थापना की गई। भारत में सात निर्यात संसाधन क्षेत्र हैं-काण्डला (गुजरात), सान्ताक्रुज (महाराष्ट्र), कोच्चि (केरल), चेन्नई (तमिलनाडु), नोएडा (उत्तर प्रदेश), फाल्टा (पश्चिम बंगाल), विशाखापट्टनम (आन्ध्र प्रदेश)। यहाँ कस्टम क्लीयरेंस की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।
  5. भारतीय निर्यात-आयात बैंक की स्थापना-1 जनवरी, 1982 को सरकार ने इस बैंक की स्थापना की, जिसके संचालक मण्डल में ‘रिजर्व बैंक’, ‘औद्योगिक विकास बैंक’ एवं ‘निर्यात साख व गारण्टी निगम’ के प्रतिनिधि हैं। इस बैंक का कार्य मुख्यतः निर्यात व्यापार को बढ़ावा देना है।
  6. ग्रीन कार्ड-सरकार ने निर्यात तेजी से बढ़ाने के उद्देश्य से शत-प्रतिशत निर्यात करने वाली संस्थाओं को ‘ग्रीन कार्ड’ जारी किया है, जो उत्पादन से विपणन तक सभी मामलों में ‘ग्रीन कार्ड धारक संस्था’ को उच्च प्राथमिकता प्रदान करता है।
  7. उदार लाइसेंस प्रणाली-सरकार ने 1992 में नई आयात-निर्यात नीति की घोषणा करके लाइसेंस प्रणाली को काफी उदार बना दिया और देश का निर्यात बढ़ाने के लिए मुक्त व्यापार को बढ़ावा दिया है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना’ को किस वर्ष में तैयार किया गया ?
(i) 1991
(ii) 1994
(iii) 1996
(iv) 1999.
उत्तर:
(iv) 1999.

प्रश्न 2.
भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है
(i) ब्रिटेन
(ii) जापान
(iii) संयुक्त राज्य अमेरिका
(iv) रूस।
उत्तर:
(iii) संयुक्त राज्य अमेरिका

प्रश्न 3.
भारत की प्रमुखतम् आयात वस्तु है
(i) खनिज तेल
(ii) मशीनरी
(iii) कम्प्यू टर
(iv) रसायन।
उत्तर:
(i) खनिज तेल

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. दूरदर्शन ने रंगीन कार्यक्रमों का प्रसारण वर्ष …………… में प्रारम्भ किया।
  2. अमृतसर-अम्बाला-जालंधर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग की लम्बाई …………… किमी. है।

उत्तर:

  1. 1982
  2. 456

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
भारत में रेलवे प्रणाली का प्रारम्भ 1837 में हुआ।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 2.
भारतीय रेलमार्गों की लम्बाई एशिया में सबसे अधिक है। (2012)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
विशाखापट्टनम कर्नाटक के समुद्र तट पर स्थित है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
बन्दरगाह जल व थल के मिलन स्थल होते हैं।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
भारत में टेलीविजन सेवा का नियमित प्रसारण 1965 से प्रारम्भ हुआ।
उत्तर:
सत्य।

जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 4 परिवहन, संचार एवं विदेशी व्यापार 3
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (क)
  3. → (घ)
  4. → (ग)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
भारत में रेलमार्गों का विकास किस वर्ष में हुआ ? (2009)
उत्तर:
1853

प्रश्न 2.
पवनहंस की स्थापना कब की गई ?
उत्तर:
15 अक्टूबर, 1985

प्रश्न 3.
सभी देश तार भेजने के लिए कौन-सी सांकेतिक भाषा का प्रयोग करते हैं ?
उत्तर:
मोर्स कोड

प्रश्न 4.
किसी राष्ट्र द्वारा निर्यात से प्राप्त माल को किसी अन्य राष्ट्र के लिए निर्यात को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
पुनः निर्यात

प्रश्न 5.
जब कोई राष्ट्र अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ विदेशों से मँगाता है, तो उसे क्या कहते हैं ?
उत्तर:
आयात।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भीतरी व्यापार क्या है ?
उत्तर:
एक ही तटीय खण्ड में उपस्थित पत्तनों के मध्य परस्पर व्यापार को भीतरी व्यापार कहा जाता है।

प्रश्न 2.
ई-बिल पोस्ट क्या है ?
उत्तर:
जहाँ विभिन्न सेवाओं के भुगतान की सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध होती है, ई-बिल पोस्ट कहलाती है।

प्रश्न 3.
ट्रेम्प किसे कहते हैं ?
उत्तर:
माल वाहक जहाज को ट्रेम्प कहते हैं।

प्रश्न 4.
आयात-निर्यात से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
आयात – जब कोई राष्ट्र अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ विदेशों से मँगाता है, तो उसे आयात कहते हैं।
निर्यात – जब कोई राष्ट्र अपनी आवश्यकता से अधिक की वस्तुओं को अपने देश से बाहर भेजता है, तो उसे निर्यात कहते हैं।

MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पुनः निर्यात व्यापार से क्या आशय है ?
उत्तर:
पुनः निर्यात-विदेशों से वस्तुओं का आयात करके उन्हें पड़ोसी राष्ट्रों को निर्यात करना पुनः निर्यात व्यापार कहलाता है। दसरे शब्दों में, किसी राष्ट द्वारा निर्यात से प्राप्त माल को किसी अन्य रा निर्यात करने को पुनः निर्यात कहा जाता है। उदाहरण के लिए-ब्रिटेन भारत से चाय का आयात करता है तथा विश्व के अन्य राष्ट्रों को निर्यात करता है, यह पुनः निर्यात कहा जायेगा।

प्रश्न 2.
पाइप लाइन परिवहन के महत्त्व बताइए।
उत्तर:
पाइप लाइन परिवहन का महत्व
जिस प्रकार मोटर, रेल, जल, जहाज एवं हवाई जहाज से तरल, ठोस, शुष्क माल का परिवहन होता है उसी प्रकार तरल और गैसीय पदार्थों का परिवहन पाइप लाइनों द्वारा किया जाता है। कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद एवं गैसीय पदार्थों का परिवहन करने के लिए पाइप लाइनों का जाल बिछाया गया है। इसके प्रमुख महत्त्व निम्नलिखित हैं-

  1. पाइप लाइन परिवहन को कठिन एवं ऊबड़-खाबड़ भू-भागों, दुर्गम स्थानों, मरुस्थलों, पर्वतों में एवं पानी के भीतर बिछाया जा सकता है।
  2. इसके संचालन और रख-रखाव की लागत बहुत कम होती है। केवल पाइप लाइन डालने में ही पहले खर्चा हो जाता है।
  3. इसमें माल की पूर्ति निरन्तर होती रहती है तथा दूर-दूर के स्थानों पर खनिज तेल व गैस पहुँचाई जाती है।
  4. पाइप लाइन परिवहन के विकास से गैस आधारित ताप विद्युत संयन्त्रों की स्थापना दूर-दराज़ के क्षेत्रों में भी सम्भव हो सकी है।

प्रश्न 3.
भारत के पश्चिमी तट पर स्थित प्रमुख पत्तनों के नाम बताइए। वहाँ से परिवहन की जाने वाली वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
पश्चिमी भारत के प्रमुख पत्तन निम्नलिखित हैं –
काण्डला – यह गुजरात में स्थित है। यहाँ से कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक, नमक, कपास, सीमेण्ट, चीनी, खाद्य तेल का परिवहन होता है।
मुम्बई – यह एक प्राकृतिक पोताश्रय है तथा भारत का सबसे बड़ा पत्तन है। यहाँ से पेट्रोलियम उत्पाद तथा शुष्क माल का परिवहन होता है।
न्हावाशेवा – नई मुम्बई के पश्चिमी तट पर यह बन्दरगाह विकसित किया गया है। यह भारत का आधुनिकतम बन्दरगाह है जिसका नाम जवाहरलाल नेहरू बन्दरगाह रखा गया है। यह मुम्बई बन्दरगाह के दबाव को कम करने के लिए विकसित किया गया है।
मार्मुगाओ – यह गोवा में स्थित प्रमुख पत्तन है। यहाँ से मुख्यतः लौह-अयस्क निर्यात होता है।
न्यूमंगलौर – यह कर्नाटक राज्य में है। इस पत्तन से उर्वरक, पेट्रोलियम पदार्थ, खाद्य तेल, ग्रेनाइट पत्थर, शीरा तथा सामान्य माल का परिवहन होता है।
कोच्चि – यह पत्तन केरल में स्थित है। इस पत्तन से पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक तथा अन्य कच्चे माल का व्यापार होता है।

प्रश्न 4.
परिवहन के साधन तथा संचार के साधनों में क्या अन्तर है ?
अथवा
यातायात और संचार में कोई दो अन्तर लिखिए।
उत्तर:
परिवहन के साधन तथा संचार के साधनों में अन्तर

परिवहन के साधन

  1. एक स्थान से दूसरे स्थान को माल का लाना व ले जाना तथा सवारियों का आना-जाना परिवहन के साधनों द्वारा होता है।
  2. परिवहन के साधन स्थल मार्ग, जल मार्ग तथा वायु मार्ग हैं। इनमें कार, बस, रेल, जलयान,वायुयान आदि वाहनों का प्रयोग किया जाता है।

संचार के साधन

  1. सन्देश एवं सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान को पहुँचाना संचार कहलाता है।
  2. संचार के साधनों में डाक, तार, टेलीफोन, बे-तार का तार, मोबाइल, रेडियो, दूरदर्शन आदि का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 5.
भारत के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की कोई चार विशेषताएँ लिखिए। (2009)
अथवा
भारत के विदेशी व्यापार की विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर:
भारत के विदेशी व्यापार की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. भारत के विदेशी व्यापार का लगभग 90% समुद्री मार्ग द्वारा और शेष 10% में वायु परिवहन एवं सड़क परिवहन का योगदान रहता है।
  2. भारत का 50% विदेशी व्यापार ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा जापान के साथ होता है।
  3. भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार केवल छः पत्तनों से होता है-कोलकाता, विशाखापट्टनम्, कोच्चि, मुम्बई, काँदला व चेन्नई।
  4. भारत अधिकतर उन वस्तुओं का आयात करता है जो देश के औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक हैं।
  5. भारत में खनिज तेल की माँग निरन्तर बढ़ रही है, अतः आयातित खनिज तेल की मात्रा निरन्तर बढ़ती जा रही है। भारत के सम्पूर्ण आयात का लगभग एक-चौथाई भाग खनिज तेल का होता है।

प्रश्न 6.
उन देशों के नाम लिखिए जिनसे भारत का विदेशी व्यापार होता है।
उत्तर:
भारत के 11 प्रमुख व्यापारिक भागीदार देश निम्नलिखित हैं, जिनसे भारत का 48 प्रतिशत व्यापार होता है-संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, बेल्जियम, जर्मनी, जापान, स्विट्जरलैण्ड, हांगकांग, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, सिंगापुर एवं मलेशिया। संयुक्त राज्य अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है। वर्ष 2005-06 में चीन दूसरे व्यापारिक भागीदार के रूप में उभरा है। चीन के साथ व्यापार में प्रभावशाली वृद्धि अयस्क, धातुएँ एवं इस्पात, जैव-रसायन के निर्यात एवं मशीनरी, रसायन के आयात से हुई है। संयुक्त अरब अमीरात व सिंगापुर अगले प्रमुख भागीदार राष्ट्र हैं।

प्रश्न 7.
आयात प्रतिस्थापन का देश के आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
भारतीय अर्थव्यवस्था विकासशील है। भारत में आयात की जाने वाली वस्तुओं का देशी विकल्प ढूँढ़कर विदेशों पर निर्भरता कम करने के प्रयास किये गये हैं जिससे आयात बिल कम होता है, आयात बिल की कमी से विदेशी मुद्रा की बचत होती है, औद्योगीकरण को बल मिलता है, रोजगार के अवसरों का सृजन होता है एवं बेरोजगारी का दबाव घटता है। इस प्रक्रिया से देश का आर्थिक विकास आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ता है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 4 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
“परिवहन तथा संचार के साधन किसी राष्ट्र की जीवन रेखाएँ हैं।” इस कथन की पुष्टि कीजिए। (2009)
उत्तर:
किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति में परिवहन व संचार साधनों का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। परिवहन में रेल परिवहन, सड़क परिवहन, जहाजरानी, जलयान एवं वायुयान आते हैं। संचार के अन्तर्गत डाक सेवाएँ तथा दूरसंचार, तार, टेलीफोन, दूरदर्शन आते हैं।

परिवहन व संचार साधनों के निम्नलिखित महत्त्व हैं –

  1. परिवहन व संचार के साधन उत्पादन के सभी साधनों को गतिशीलता प्रदान करते हैं। इससे न केवल देश में उपलब्ध साधनों का उचित प्रयोग सम्भव हो जाता है बल्कि देश में व्याप्त क्षेत्र विषमताएँ भी कम हो जाती हैं।
  2. परिवहन और संचार के साधन उद्योगों द्वारा निर्मित वस्तुओं को देश के कोने-कोने में पहुँचाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
  3. विकसित तथा सस्ते परिवहन और संचार के साधन उपलब्ध होने पर उत्पादक को अपने पास वस्तुओं के अनावश्यक स्टॉक रखने की आवश्यकता नहीं होती, अपितु वस्तुओं को जल्दी बेचकर उत्पादक अपनी पूँजी का पुनः निवेश कर वस्तुओं का उत्पादन कर सकता है।
  4. इन साधनों द्वारा आर्थिक विकास में योगदान देने वाले सभी साधनों को अधिक से अधिक मात्रा में जुटाया जा सकता है।
  5. इन सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि परिवहन व संचार के साधन परस्पर सम्पर्क स्थापित करने में सहायक होते हैं।

प्रश्न 2.
संचार से क्या आशय है ? इसके साधनों को संक्षेप में समझाइए। (2018)
[संकेत : संचार से आशय अति लघु उत्तरीय प्रश्न 4 देखें।]
अथवा
किन्हीं चार संचार साधनों के बारे में लिखिए। (2012, 15)
उत्तर:
सेल्युलर फोन या मोबाइल फोन-यह बेतार का तार जैसा फोन है जिसे सेल्युलर फोन या मोबाइल फोन कहते हैं। इस फोन को हम कहीं भी जेब में रखकर ले जा सकते हैं वहीं से फोन कर सकते हैं एवं बाहर से फोन प्राप्त (रिसीव) कर सकते हैं। 2007 तक देश में इस सेवा का उपयोग करने वालों की संख्या 165.09 मिलियन थी जो वर्तमान में बढ़कर 969.54 मिलियन हो गई है।

तार – अमेरिकी वैज्ञानिक थॉमस एडिसन ने टेलीग्राफ का आविष्कार किया। इससे सन्देश शीघ्र भेजे जाने लगे। इसके लिए खम्भों पर टेलीग्राफ के तार स्थाई रूप से बाँधा जाना जरूरी था। इन तारों द्वारा बिजली के माध्यम से सन्देश एक स्थान से दूसरे स्थान तक कोडेंसी मशीन द्वारा भेजे जाते हैं। सभी देश तार भेजने के लिए मोर्सकोड नामक सांकेतिक भाषा का प्रयोग करते हैं।

फैक्स – फैक्स एक प्रकार से लिखित सन्देश प्राप्त करने या भेजने का साधन है। इसके लिए एक मशीन की आवश्यकता होती है जिसे फैक्स मशीन कहते हैं। इस मशीन को टेलीफोन नम्बर से जोड़ देते हैं एवं सन्देश लगा देते हैं। यह मशीन उस सन्देश को कागज पर छाप देती है। साथ ही भेजने वाले का टेलीफोन नम्बर, पता एवं समय लिख देती है।

इण्टरनेट-इण्टरनेट इण्टरनेशनल नेटवर्क का संक्षिप्त नाम है। इण्टरनेट कम्प्यूटरों को जोड़ने की सर्वाधिक सक्षम अन्तर्राष्ट्रीय सूचना प्रणाली है जिसने वर्तमान में करोड़ों उपयोगकर्ताओं को आपस में जोड़ रखा है। इस सेवा से कोई भी व्यक्ति घर बैठे देश-विदेश की प्रत्येक घटना को देख सकता है व सम्पर्क कर सकता है। सामान्यतः इण्टरनेट का उपयोग संवादों से सम्बन्धित आँकड़ों के संग्रह या प्रकाशन कार्य के लिए भी होता है। इण्टरनेट के द्वारा व्यक्ति अपने-अपने संवादों को तुरन्त एक-दूसरे के कम्प्यूटर स्क्रीन पर पढ़ और जान सकता है तथा अतिशीघ्र जवाब दे सकता है। जून 2015 तक प्राप्त सूचना के अनुसार भारत में करीब 302 मिलियन इण्टरनेट ग्राहक थे।

उपग्रह संचार-वैज्ञानिकों ने मानव हितों की पूर्ति के लिए मशीनीकृत उपग्रह तैयार कर रॉकेटों की सहायता से अन्तरिक्ष में स्थापित किया है। ये कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए मौसम, प्राकृतिक संसाधनों, सैनिक गतिविधियों आदि की जानकारी चित्र और मानचित्र के माध्यम से पृथ्वी पर भेजते हैं। आर्यभट्ट, एप्पल, इन्सेट, आई. आर. एस. कृत्रिम उपग्रह इसी दिशा में किये गये प्रयास हैं।

प्रश्न 3.
परिवहन से क्या आशय है ? इसके साधनों को संक्षेप में समझाइए। (2018)
उत्तर:
व्यक्तियों या जीव-जन्तुओं को किसी माध्यम द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाने ले जाने की प्रक्रिया परिवहन कहलाती है।
संचार तन्त्र के अन्तर्गत सूचनाओं का आदान-प्रदान या प्रसारण सम्मिलित है।

प्रश्न 4.
भारत में रेल परिवहन के महत्त्व को स्पष्ट करते हुए प्रमुख भारतीय रेलवे जोन व उनके मुख्यालयों के नाम लिखिए।
उत्तर:
रेल परिवहन का महत्त्व

देश में माल ढोने और यात्री परिवहन का मख्य साधन रेलें हैं। देश के कोने-कोने तक के लोगों को आपस में जोड़ने के अलावा इसने कारोबार, देशाटन, तीर्थयात्रा और शिक्षा को सुलभ बनाया है। रेले राष्ट्रीय एकता स्थापित करने की प्रमुख कड़ी साबित हुई हैं। इसने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को एक सूत्र में पिरोया है और साथ ही कृषि तथा औद्योगिक विकास को तीव्र गति प्रदान की है।

भारत में रेलमार्गों का विकास सन् 1853 में आरम्भ हुआ। उस समय मुम्बई से थाणे तक देश में 34 किमी. लम्बी रेल लाइन विकसित की गई थी। आज देश में रेलों का व्यापक जाल बिछा हुआ है। भारतीय रेल नेटवर्क को 17 जोन्स (क्षेत्रों) में बाँटा गया है। इन 17 जोन्स और उनके मुख्यालयों का ब्यौरा नीचे दिया गया है –
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 4 परिवहन, संचार एवं विदेशी व्यापार 4

MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 8 अशोक का हृदय-परिवर्तन

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MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 8 अशोक का हृदय-परिवर्तन (यशपाल)

अशोक का हृदय-परिवर्तन पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

अशोक का हृदय-परिवर्तन लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कलिंग की महारानी कौन थी? वह जंजीरों से किसे बाँधना चाहती थी?
उत्तर-
कलिंग की महारानी अमिता थी। वह जंजीरों से सम्राट अशोक को बाँधना चाहती थी।

प्रश्न 2.
सम्राट अशोक के सेनापति का नाम क्या था? उसने सम्राट से क्या कहा?
उत्तर-
अशोक के सेनापति का नाम गोपाल था। उसने सम्राट से कहा कि “सम्राट अभयदान दें। प्रसाद में भय है। सम्राट प्रतीक्षा करें।”

प्रश्न 3.
अशोक क्या प्राप्त करना चाहते थे?
उत्तर-
अशोक कलिंग का सिंहासन प्राप्त करना चाहते थे।

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प्रश्न 4. अशोक की राजसिंहासन.की इच्छा सुनकर अमिता सोच में क्यों पड़ गई?
उत्तर-
अशोक की राजसिंहासन की इच्छा सुनकर अमिता इसलिए सोच में पड़ गई कि इतना बड़ा सम्राट होकर भी कितना बड़ा स्वार्थी और निर्लज है।

प्रश्न 5.
अमिता के किस उत्तर ने अशोक का हृदय परिवर्तित कर दिया।
उत्तर-
“अच्छा, तुम माँगते हो तो ले जाओ।” क्या तुम्हारे पास सिंहासन नहीं है?… अच्छा, तुम इसे ले जाओ, हम दूसरा ले लेंगे। अमिता के इस उत्तर ने अशोक का हृदय परिवर्तित कर दिया।

अशोक का हृदय-परिवर्तन दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अशोक के बारे में अमिता के क्या विचार थे?
उत्तर-
अशोक के बारे में अमिता के विचार थे-अशोक दुष्ट है। अशोक प्रजा से छीनता है। प्रजा को डराता है। प्रजा को मारता है।।

प्रश्न 2.
अमिता ने धन की ओर संकेत करते हुए अशोक से क्या कहा?
उत्तर-
अमिता ने धन की ओर संकेत करते हुए अशोक से कहा, “बोलो, तुम्हें क्या चाहिए? फल चाहिए, मिष्ठान चाहिए या खिलौने चाहिए। जो चाहिए लो। यहाँ सब कुछ है। हम तुम्हें सब कुछ देंगे। तुम किसी से छीनो मत। किसी को डराओ मत। किसी को मारो मत। तुम्हें क्या चाहिए बोलो।”

प्रश्न 3.
अमिता ने अशोक को क्या आदेश दिया?
उत्तर-
अमिता ने अशोक को आदेश दिया कि किसी से छीनो मत। किसी को डराओ मत। किसी को मारो मत।

प्रश्न 4.
अशोक ने क्या प्रतिज्ञा की?
उत्तर-
अशोक ने प्रतिज्ञा की कि वह किसी से छीनेगा नहीं, किसी को डराएगा नहीं किसी को मारेगा नहीं। वह हिंसा और युद्ध से विजय की कामना नहीं करेगा। वह कलिंग की विजयी महारानी की भाँति निश्छल प्रेम से संसार के हृदयों पर विजय करेगा।

प्रश्न 5.
सम्राट अशोक के चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
सम्राट अशोक के चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
1. वह परम वीर और परमयोद्धा था।
2. वह गुणग्राही था।
3. वह स्त्री का सम्मानकर्ता था।
4. वह विनम्र और उदार था।
5. वह दृढ़ निश्चयी था।

अशोक का हृदय-परिवर्तन भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
उत्तर-
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 8 अशोक का हृदय-परिवर्तन img-1

प्रश्न 2.
विलोम शब्द लिखिएस्वीकृति, विजय, भय, प्रवेश।
उत्तर-
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 8 अशोक का हृदय-परिवर्तन img-2

प्रश्न 3.
संधि-विच्छेद कर प्रकार बताइए
निश्चल, निरुत्तर, सम्मोहन, अहंकार
उत्तर-
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 8 अशोक का हृदय-परिवर्तन img-3

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों में से तत्सम् और तद्भव शब्द छाँटिएस्नेह, पत्थर, अप्रतिम, निर्वाक, पाषाण, पूँछ, गज, निषेध, धर्म, दर्प।
उत्तर-
तत्सम शब्द-स्नेह, अप्रतिम, निर्वाक, पाषाण, निषेध तद्भव शब्द-पत्थर, पूँछ, गज, धर्म, दर्प

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखिए
जिसे जीता न जा सके, जिसे कोई शोक न हो, कठिनाई से दमन करने योग्य, चारों ओर से ढका हुआ।
उत्तर-
MP Board Class 10th Hindi Vasanti Solutions Chapter 8 अशोक का हृदय-परिवर्तन img-4
प्रश्न 6.
नीचे दिए वाक्यों को ध्यान से पढ़िए और निर्देशानुसार परिवर्तन कीजिए-
(क) मगध सेनापति गोपाल सतर्क हो गया वह अपने सैनिकों को द्वार पर छोड़ उलटे पाँव लौट पड़ा। (संयुक्त वाक्य में)
(ख) अशोक ने पुकार सुनी। वह विस्मय से मौन खड़ा हो गया। (मिश्र वाक्य में)
(ग) कलिंग की महारानी सम्राट अशोक बँध गया और वह तुम्हारा बंदी है। (सरल वाक्य में)
उत्तर-
(क) मगध सेनापति गोपाल सतर्क हो गया और वह अपने सैनिकों को द्वार पर छोड़ उलटे पाँव लौट पड़ा।
(ख) अशोक की पुकार सुनकर विस्मय से मौन खड़ा हो गया।
(ग) कलिंग की महारानी से सम्राट अशोक बँध गया। वह तुम्हारा बंदी है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित वाक्यों के प्रकार लिखिए
(क) क्या अभी कलिंग की रानी का अहंकार शेष है?
(ख) अशोक किसी से छीनेगा नहीं।
(ग) सम्राट अभयदान नहीं दें।
(घ) यदि किसी को मारोगे तो हम तुम्हें बभ्र की भाँति बाँधकर रखेंगे।
उत्तर-
(क) प्रश्नवाचक वाक्य,
(ख) सरल वाक्य,
(ग) नकारात्मक वाक्य,
(घ) आज्ञासूचक वाक्य,
(ङ) शर्तसूचक वाक्य।

अशोक का हृदय-परिवर्तन योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
अपने देश के प्रसिद्ध शासकों के नाम लिखिए तथा यथासंभव उनके चित्र एकत्रित कीजिए।
प्रश्न 2.
हृदय परिवर्तित करने वाली अन्य घटनाएँ पढ़िए और कक्षा में सुनाइए।
उत्तर-
उपर्युक्त प्रश्नों का छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

अशोक का हृदय-परिवर्तन परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

अशोक का हृदय-परिवर्तन अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘अशोक का हृदय-परिवर्तन’ का केंद्रीय भाव लिखिए।
उत्तर-
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर लिखे गए इस उपन्यास में कलिंग विजय के उन्माद से ग्रस्त सम्राट अशोक की हिंसक वृत्ति को दर्शाया गया है। बालिका द्वारा किए गए अबोध तथा मर्मस्पर्शी प्रश्न अशोक को उद्वेलित कर देते हैं जिससे अंततः वह अहिंसक . होने का संकल्प लेता है। कलिंग की रानी अमिता की सरलता सम्राट अशोक का हृदय परिवर्तन कर देती है।

प्रश्न 2.
अशोक ने तिरस्कार के स्वर में क्या प्रश्न किया?
उत्तर-
अशोक ने तिरस्कार के स्वर में प्रश्न किया- “क्या अभी कलिंग की रानी का अहंकार शेष है? अजेय अशोक ऐसी दुस्साहसी रानी का दर्प अपने पाँव तले रौंद कर चूर्ण करेगा।”

प्रश्न 3.
अमिता ने खिन्नतापूर्वक अशोक से क्या कहा?
उत्तर-
अमिता ने खिन्नतापूर्वक अशोक से कहा, “तुम हमारा आदेश नहीं मानोगे? हमारा आदेश सबको मानना चाहिए। हम कलिंग की राजेश्वरी हैं। हम प्रजा की माता हैं। तुम हमारे साथ आओ, हम अशोक को बाँधकर लाएँ!”

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से चुनकर कीजिए।
1. अशोक ………. का सम्राट था। (कलिंग, मगध)
2. अमिता कलिंग की ……………. थी। (राजकुमारी, महारानी)
3. अशोक का हृदय-परिवर्तन के लेखक हैं। (उपेंद्रनाथ ‘अश्क’, यशपाल)
4. अमिता ने कहा कि अशोक …………… है। (नीच, दुष्ट)
5. अशोक ने झुककर अमिता को ………….. में उठा लिया। (बाहों, गोद)
उत्तर-
1. मगध,
2. महारानी,
3. यशपाल,
4. दुष्ट,
5. गोद।

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प्रश्न 3.
दिए गए कथनों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. यशपाल का बहुचर्चित उपन्यास है-
1. दीवारें,
2. पर्दे की रानी,
3. कामदेव,
4. दादा कॉमरेड।
उत्तर-
4. दादा कॉमरेड,

2. यशपाल का जन्म हुआ था-
1. 1903 में,
2. 1900 में,
3. 1902 में,
4. 1901 में।
उत्तर-
1. 1903 में,

3. यशपाल के साहित्य में चित्रण है-
1. मध्यवर्गीय,
2. निम्नवर्गीय,
3. निम्नमध्यवर्गीय,
4. उच्चवर्गीय।
उत्तर-
1. मध्यवर्गीय,

4. अशोक ने विजय प्राप्त की थी-
1. मगध पर,
2. उज्जैन पर,
3. पाटलीपुत्र पर,
4. कलिंग पर।
उत्तर-
4. कलिंग पर।

5. यशपाल का निधन हुआ
1. 1980 में,
2. 1976 में,
3. 1990 में,
4. 1986 में।
उत्तर-
2. 1976 में,

प्रश्न 4.
सही जोड़े मिलाइए-
पर्दे की रानी – कबीरदास
गोदान – ‘निराला’
सूरसागर – प्रेमचंद्र
जूही की कली – सूरदास
सबद – उपेंद्रनाथ ‘अश्क’।
उत्तर-
पर्दे की रानी – उपेंद्रनाथ ‘अश्क’
गोदान – प्रेमचंद
सूरसागर – सूरदास
जूही की कली – ‘निराला’
सबद – कबीरदास।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य? वाक्य के आगे लिखिए।
1. सैनिकों के सबसे पहले दल के साथ सेनापति गोपाल था।
2. मगध के सैनिकों ने जयघोष किया।
3. सैनिकों ने पूछा, “तुम कौन हो?”
4. अमिता ने कहा, “हमें कलिंग का सिंहासन चाहिए।”
5. अशोक ने अमिता को आदेश दिया।
उत्तर-
1. सत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. असत्य,
5. असत्य।

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित कथनों के उत्तर एक शब्द में दीजिए-
1. अशोक का सेनापित कौन था?
2. “अजेय सम्राट अशोक के लिए भय है?” यह किसने कहा?
3. “देवानां प्रिय मगध सम्राट की जय।” यह किसने जयघोष किया?
4. “तुम कलिंग की महारानी हो?” किसने पूछा?।
5. “किसी से छीनो मत। किसी को डराओ मत। किसी को मारो मत।” यह किसका आदेश था?
उत्तर-
1. गोपा,
2. अशोक ने,
3. मगध के सैनिकों ने,
4. अशोक ने,
5. अमिता का

अशोक का हृदय-परिवर्तन लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अमिता कौन थी?
उत्तर-
अमिता कलिंग की महारानी थी।

प्रश्न 2.
गोपाल ने छत से क्या सुना?
उत्तर-
गोपाल ने छत से सुना”महारानी जंजीर लेकर अशोक को बाँधने जा रही है।”

प्रश्न 3.
अशोक ने अपनी पराजय स्वीकारते क्या कहा?
उत्तर-
अशोक ने अपनी पराजय स्वीकारते हुए कहा

“कलिंग की महारानी सम्राट अशोक हार गया। तुमने विजय पायी। तुम अशोक को बाँधने जा रही थी।”

प्रश्न 4.
अमिता ने अशोक को चेतावनी देते हुए क्या कहा?
उत्तर-
अमिता ने अशोक को चेतावनी देते हुए कहा, “यदि तुम पुनः किसी से छीनोगे, किसी को डराओगे, किसी को मारोगे तो हम तुम्हें बभ्रु की भाँति बाँधकर रखेंगे।”

अशोक का हृदय-परिवर्तन कवि-परिचय

जीवन-परिचय-प्रसिद्ध कहानीकार यशपाल का जन्म सन् 1903 में फिरोजपुर छावनी-(पंजाब) में हुआ था। उनकी आरंभिक शिक्षा-दीक्षा गाँव में हुई थी। उन्होंने लाहौर के नेशनल कॉलेज से बी.ए. किया। कॉलेज शिक्षा के दौरान ही उनका परिचय क्रांतिकारी सरदार भगतसिंह और सुखदेव से हुआ और वे क्रांतिकारी बन गए। राजनीतिक कार्यों में सक्रिय भाग लेने लगे। वे मार्क्सवाद से प्रभावित थे। सन् 1976 ई. आपका देहांत हो गया।

साहित्यिक-परिचय-यशपाल के कथा-साहित्य में जीवन के यथार्थ का चित्रण दिखाई देता है। उन्होंने सामाजिक, आर्थिक रूढ़ियों पर तीखे व्यंग्य किए। उनका मार्क्सवादी दृष्टिकोण उनके साहित्य में दिखाई देता है। उनकी दृष्टि में समाज को उन्नत बनाने के लिए सामाजिक समानता के साथ आर्थिक समानता भी परम आवश्यक है। पात्रों के चरित्र-चित्रण में उन्होंने मनोवैज्ञानिकता को अपनाया, इसलिए कहानियों में स्वाभाविक और सजीवता आ गई।

रचनाएँ-उपन्यास-देशद्रोही, पार्टी कॉमरेड, दादा कॉमरेड, दिव्या, मनुष्य के रूप, झूठ सच आदि।

कहानी-संग्रह-ज्ञानदान, तर्क का तूफान, पिंजड़े की उड़ान, वो दुनिया, फूलों का कुर्ता, धर्म, युद्ध, उत्तराधिकारी आदि।

निबंध-संग्रह-चक्कर क्लब, बात-बात में बात, न्याय का संघर्ष। यात्रा-वृत्तांत-राह-बीती, लोहे की दीवारों के दोनों ओर। आत्मकथा-सिंहावलोकन (तीन भागों में)।

भाषा-शैली-उनकी कहानियों की भाषा-शैली में स्वाभाविकता दिखाई देती है। हिंदी, उर्दू तथा अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग भी अपने साहित्य में बिना झिझक किया है। मुहावरों ने भाषा को अलंकृत किया है। आपकी शैली प्रसाद गुण संपन्न है।

साहित्य में स्थान-यशपाल का साहित्य संपन्न साहित्य है। उनके साहित्य में विविधता है। इस प्रकार की रचनाओं से हिंदी साहित्य की श्रीवृद्धि हुई है। इसके साथ ही आने वाली पीढ़ी इससे लाभान्वित होकर लेखन-क्षेत्र में समर्थ हुई है। इस आधार पर यशपाल निःसंदेह एक महान साहित्यकार के रूप में प्रतिष्ठित-स्थापित हैं।

अशोक का हृदय-परिवर्तन पाठ का सारांश

‘अशोक का हृदय-परिवर्तन’ प्रस्तुत पाठ में महान हिंदू सम्राट अशोक द्वारा किए गए ऐतिहासिक कलिंग युद्ध के विजय का उल्लेख है। इसके साथ ही उस कलिंग युद्ध में प्राप्त हुई विजय ने अशोक के हृदय में कैसी सनक भर दी और वह पूर्वापेक्षा कितना अधिक हिंसक वृत्ति का बन गया, इसका भी उल्लेख यहाँ किया गया है। इस स्थिति में अशोक को देखकर एक अबोध बालिका उससे जो अबोध और हृदय छू लेने वाले प्रश्न करती है, उससे वह विचलित होकर गंभीर सोच में डूब जाता है। फिर वह अपनी हिंसक वृत्ति का परित्याग कर लेने का दृढ़ संकल्प ले लेता है। इस प्रकार कलिंग की रानी की सरलता, सहजता, सरसता, निश्छलता और स्पष्टता से अशोक का हृदय-परिवर्तन अहिंसक रूप में हो जाता है।

अशोक का हृदय-परिवर्तन संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

1. मगध का सम्राट निश्चल, निर्वाक था। सोने मढ़े लोहे के कवच से आवृत्त उसका पाषाण हृदय, जो एक लाख से अधिक सैनिकों के रक्त से न भीग सका था, छलछला गया। सम्राट ने अपने हाथ में थमा खड्ग भूमि पर डाल दिया। उसने झुककर अमिता को गोद में उठा लिया।

शब्दार्थ-सम्राट राजा। निश्चल-स्थिर, अटल। निर्वाक-मौन। आवृत्त=ढका हुआ। पाषाणपत्थर, कठोर। रक्त खून। खड्ग तलवार।।

संदर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिंदी सामान्य’ में संकलित यशपाल लिखित ‘अशोक का हृदय-परिवर्तन’ पाठ से है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने कलिंग की रानी अमिता की उदारतापूर्ण बातों से सम्राट अशोक के प्रभावित होने का उल्लेख करते हुए कहा है कि

व्याख्या-कलिंग की रानी अमिता ने सम्राट अशोक को उदार होने की सीख देते हुए उसे अपनी सब कुछ धन-वैभव देने के लिए कहा तो उसे सुनकर वह चुप हो गया। वह वहाँ से टसमस नहीं हुआ। वह कुछ बोल न सका। उसका स्वर्ण जड़ित और लोहे के कवच से ढका हुआ पत्थर पिघलने लगा, जो लाखों सैनिकों को मौत के घाट उतारने पर नहीं पिघला था। इस दशा को प्राप्त करके उसने हाथ में लिए तलवार को जमीन पर आत्मसमर्पण की भावना से रख दिया। इसके बाद उसने झुक करके कलिंग की बालिका रानी अमिता को प्रेम-पूर्वक अपनी गोद में ले लिया।

विशेष-
1. सम्राट अशोक के हृदय-परिवर्तन का उल्लेख है।
2. तत्सम शब्दों की प्रधानता है।

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अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अमिता की बातों से अशोक पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
अमिता की बातों से अशोक का हृदय-परिवर्तन हो गया।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश में कलिंग की रानी अमिता की उदारपूर्ण बातों से सम्राट अशोक के हृदय-परिवर्तन का उल्लेख है। इसके माध्यम से सरलता, सहजता, निःस्वार्थता और दयालुता से कठोरता, निर्ममता, स्वार्थपरता और पशता से पराजित होने के सष्ट स्वरूप को सामने लाने का प्रयास किया गया है।

2. “सम्राट अशोक प्रतिज्ञा करता है, वह किसी से छिनेगा नहीं, किसी को डराएगा नहीं, किसी को मारेगा नहीं। अब अशोक हिंसा और युद्ध से विजय की कामना नहीं करेगा। वह कलिंग की विजयी महारानी की भाँति निश्छल प्रेम से संसार के हृदयों को विजय करेगा।”

शब्दार्थ-हिंसा मारकाट, हाय-हत्या। कामना इच्छा। निश्छल पवित्र, शुद्ध।

संदर्भ-पूर्ववत्।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने कलिंग की महारानी अमिता के द्वारा दिए गए उच्च विचारों से सम्राट अशोक प्रभावित होकर क्या दृढ़ संकल्प करता है। इसका उल्लेख करते हुए कहा है कि

व्याख्या-कलिंग की महारानी अमिता सम्राट अशोक को स्पष्ट रूप से कहा कि यदि वह फिर कभी किसी से कुछ छिनेगा, किसी को डराएगा और किसी को मारेगा तो वह प्रभु के समान अपने पास बाँधकर रख लेगी। इसे सुनकर सम्राट अशोक ने प्रतिज्ञा की कि वह आज के बाद किसी से कुछ भी नहीं छिनेगा। वह किसी को न डराएगा-धमकाएगा और न किसी को मारेगा-पीटेगा इस प्रकार वह किसी प्रकार की हिंसा से दूर रहेगा। फिर युद्ध का तो नाम ही नहीं लेगा। इसके साथ ही वह भी दृढ़ प्रतिज्ञा करता है। कि आज से वह कलिंग की विजयी महारानी की तरह पवित्र प्रेम से संसार के लोगों के दिलों को जीत लेगा।

विशेष-
1. प्रस्तुत अंश भाववर्द्धक है।
2. वाक्य-गठन अर्थपूर्ण है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
उपर्युक्त गद्यांश में क्या उल्लेख किया गया है?
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश में सम्राट अशोक की दृढ़ प्रतिज्ञा का उल्लेख किया गया है।

विषय-वस्तु पर आधारित बोध प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. उपर्युक्त गद्यांश का आशय लिखिए। .
उत्तर-
उपर्युक्त गद्यांश में सम्राट अशोक के संकल्पों का उल्लेख किया गया है। इसके द्वारा लेखक ने यह स्पष्ट करना चाहा है कि त्यागशीलता, उदारता, परोपकारिता और दया-दयालुता के भावों के सामने कठोर हृदय झुककर निश्छल प्रेम की धारा से संसार के लोगों को शांति और सुख पहुँचाने के लिए कमर कस लेता है।

MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण

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MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण

‘समसनं समासः’ अर्थात् संक्षेपीकरण को समास कहते हैं। दो या दो से अधिक शब्दों की विभिक्ति हटाकर और उन्हें एक साथ जोड़कर एक शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं। इस प्रकार मिला हुआ पद ‘समस्त पद’ अथवा ‘सामासिक पद’ कहलाता है। जब दो या दो से अधिक शब्दों को इस प्रकार रख दिया जाता है कि उनके आकार (स्वरूप) में कुछ कमी हो जाये और अर्थ पूरा – पूरा निकले तो उसे ‘समास’ कहते हैं।

जैसे –
रामस्य मन्दिरम् = राममन्दिरम्।
(राम का मन्दिर) = (राममन्दिर)

समास के भेद – समास के छः भेद होते हैं –
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 1

संस्कृत के एक याचक की उक्ति में इन सभी समासों के नाम आ जाते हैं। यह उक्ति बहुत प्रसिद्ध है –

द्वन्द्वो द्विगुरपि चाहं मद्गेहे नित्यमव्ययीभावः।
तत्पुरुष कर्मधारय येनाहं स्यां बहुब्रीहिः॥

१. अव्ययीभाव समास
परिभाषा – पूर्वपदार्थाप्रधानोऽव्ययीभावः।

जहाँ प्रथम पद प्रधान तथा अव्यय होता है और द्वितीय पद संज्ञावाचक होता है, वहाँ अव्ययीभाव समास होता है।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 2

२. तत्पुरुष समास
परिभाषा – प्रायेण उत्तरपदप्रधानस्तत्पुरुषः।

जिस समास में पूर्वपद द्वितीया विभक्ति से सप्तमी विभक्ति का होता है और उत्तर पद प्रथमा विभक्ति का होता है, वह तत्पुरुष समास होता है।

द्वितीया तत्पुरुष – इसमें पहला पद द्वितीया विभक्ति का होता है और समासावस्था में उसका लोप हो जाता है।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 3

तृतीया तत्पुरुष – इसमें पहला पद तृतीया विभक्ति का होता है और समासावस्था में उसका लोप हो जाता है।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 4

चतुर्थी तत्पुरुष – इसमें पहला पद चतुर्थी विभक्ति का होता है तथा समासावस्था में उसका लोप होता है।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 5

पञ्चमी तत्पुरुष – इसमें पहला पद पंचमी विभक्ति का होता है तथा समासावस्था में उसका लोप होता है।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 6

षष्ठी तत्पुरुष – इसमें पहला पद षष्ठी विभक्ति का होता है तथा समासावस्था में उसका लोप होता है।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 16
सप्तमी तत्पुरुष – इसमें पहला पद सप्तमी विभक्ति का होता है तथा समासावस्था में उसका लोप होता है।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 7

नञ् तत्पुरुष – इस समास में निषेधवाचक शब्द (न) का अर्थ प्रकट करने के लिए प्रारम्भ में “अ” अथवा “अन्” जोड़ा जाता है।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 9

उपपद तत्पुरुष – तत्पुरुष समास में उत्तर पद (अन्तिम शब्द) किसी क्रिया द्वारा बना हुआ (कृदन्त पद) हो तो उसे उपपद तत्पुरुष समास कहते हैं।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 10

३. कर्मधारय समास
परिभाषा – प्रायेण स चासौ कर्मधारयः।

जहाँ प्रथम पद विशेषण या उपमान होता है तथा दूसरा पद विशेष या उपमेय होता है, वहाँ कर्मधारय समास होता है।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 11

४. द्विगु समास
परिभाषा – संख्यापूर्वो द्विगुः।

जहाँ प्रथम पद संख्यावाची होता है तथा उत्तर पद की विशेषता को प्रकट करता है, वह द्विगु समास होता है।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 12

५. बहुव्रीहि समास
परिभाषा – अनन्यपदार्थप्रधानो बहुब्रीहिः।

जहाँ सामासिक पदों से किसी अन्य का बोध होता है, वहाँ बहुब्रीहि समास होता है।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 13

६. द्वन्द्व समास
परिभाषा – उभयपदार्थप्रधानो द्वन्द्वः।

इस समास में सभी पद प्रधान होते हैं और दो या दो से अधिक संज्ञा शब्द विग्रह की दशा में ‘च’ शब्द से जुड़े रहते है।
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 17
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 14

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु – विकल्पीय प्रश्न

१. ‘वाणहतः’ में समास है
(अ) अव्ययीभाव,
(ब) द्विगु,
(स) बहुब्रीहि,
(द) तत्पुरुष।

२. ‘पितरौ’ में समास है-
(अ) द्विगु,
(ब) द्वन्द्व,
(स) तत्पुरुष,
(द) कर्मधारय।

३. ‘राजपुरुषः’ का विग्रह होगा
(अ) राजा पुरुषः,
(ब) राज पुरुषः
(स) राज्ञः पुरुषः,
(द) राज्ञि पुरुषः।

४. ‘अनादरः’ का विग्रह होगा
(अ) न आदरः,
(ब) अन आदरः,
(स), अ नादरः,
(द) अना दरः

५. जिस समास में पूर्व पद संख्या वाचक हो, उसे कहते हैं
(अ) द्वन्द्व,
(ब) द्विगु,
(स) अव्ययीभाव,
(द) कर्मधारय।
उत्तर –
१. → (द),
२. → (ब),
३. → (स),
४. → (अ),
५. → (ब)

रिक्त स्थान पूर्ति
१. वृक्षपतितः = ………………………….।
२. विद्यालयः = ………………………….।
३. घनश्यामः = ………………………….।
४. रामलक्ष्मणौ = ………………………….।
५. पीताम्बरः = ………………………….।
उत्तर –
१. वृक्षात् पतितः,
२. विद्यायाः आलयः,
३. घन इव श्यामः,
४. रामश्च लक्ष्मणश्च,
५. पीतम् अम्बरं यस्य सः।

सत्य/असत्य
१. बाणहतः में अव्ययीभाव समास है।
२. पञ्चपात्रम् में द्विगु समास है।
३. महापुरुषः में कर्मधारय समास है।
४. असत्यम् में द्विगु समास है।
५. पितरौ में तत्पुरुष समास है।
उत्तर –
१. असत्य,
२. सत्य,
३. सत्य,
४. असत्य,
५. असत्य

♦ जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Sanskrit व्याकरण समास-प्रकरण img 15
उत्तर-
१. → (v)
२. → (i)
३. → (ii)
४. → (iii)
५. → (iv)

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तयः

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 21 सूक्तयः (स्फुट) (सङ्कलिताः)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 21 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

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प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) पठतो किं नास्ति? (पढ़ते हुए का क्या नहीं है?)
उत्तर:
मूर्खत्वम् (मूर्खता)

(ख) देवतानां दैवतं का? (देवताओं का देवता कौन है?)
उत्तर:
माता (माता)

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(ग) नभसि क्षिप्तः पङ्क कुत्र पतति? (आकाश पर फेंका हुआ कीचड़ कहाँ गिरता है?)
उत्तर:
मूर्द्धनि (सिर पर)

(घ) प्राणैः कण्ठगतैरपि किं कर्त्तव्यः? (प्राणों के कण्ठ में पहुंचने पर भी क्या करना चाहिए?)
उत्तर:
परोपकारः (परोपकार)

(ङ) केन सर्वं जगद्विजीयते? (किसके द्वारा सारा जगत जीता जाता है।)
उत्तर:
जितक्रोधेन (क्रोध को जीतने वाले के द्वारा)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) कः धीरः? (कौन धीर है?)
उत्तर:
यस्य प्रज्ञा आपदि स्फुरति सः एव धीरः। (जिसकी बुद्धि आपत्ति में सर्जित (कार्यशील) होती है, वही धीर है।)

(ख) वाग्मिता का? (वाक्पटुता क्या है?)
उत्तर:
मितं च सारं च वयः हि वाग्मिता। (थोड़ा और संक्षेप में बोलना वाक्पटुता है।)

(ग) जनाः कदा शिष्टाः भवन्ति? (लोग कब शिष्ट होते हैं?)
उत्तर:
परोपदेशवेलायां जनाः शिष्टाः भवन्ति। (दूसरों के उपदेश के समय लोग शिष्ट होते हैं।)

(घ) सन्तः किं कुर्वाणाः प्रतिक्रियां न अवेक्षन्ते? (सज्जन लोग क्या करते हुए बदला नहीं देखते?)
उत्तर:
सन्तः परार्थं कुर्वाणाः प्रतिक्रियां न अवेक्षन्ते। (सज्जन लोग परोपकार करते हुए बदला नहीं देखते।)

(ङ) मानी किं सहते? (सम्मान वाले लोग क्या सहन करते हैं?)
उत्तर:
मानी विपत्सहस्रं सहते।। (सम्मान वाले लोग हजारों मुश्किलें सह सकते हैं।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) कः स्वयं भ्रमति? (कौन स्वयं घूमता है?)
उत्तर:
यस्य निश्चयः स्वधियः नास्ति सः स्वयं भ्रमति। (जिसका फैंसला अपनी बुद्धि का नहीं होता वह खुद घूमता है।)

(ख) कः कस्मात् क्रूरतरः? (कौन किससे अधिक क्रूर है?)
उत्तर:
खलः सात् क्रूरतरः। (दुष्ट व्यक्ति साँप से अधिक भयंकर है।)

(ग) मतिमान नरः किं करोति? (बुद्धिमान व्यक्ति क्या करता है?)
उत्तर:
मतिमान् नरः स्वल्पस्य कृते भूरिं न नाशयेत्। (बुद्धिमान् लोग थोड़े के लिए अधिक को नष्ट नहीं करते।)

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प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः सूक्तिपूर्तिं कुरुत (दिए गए शब्दों से सूक्ति की पूर्ति करो।)
(लघुत्वं, स्वल्पस्य, जितक्रोधेन, स्फुरति, निश्चयो)
(क) न …………… कृते भूरि नाशयेन्मतिमान् नरः।
(ख) …………… सर्वं हि जगदेतद्विजीयते।
(ग) परसदननिविष्टः को …………… न याति।
(घ) स्वधियो …………… नास्ति यस्य स भ्रमति स्वयम्।
(ङ) आपदि …………… प्रज्ञा यस्य धीरः स एव हि।
उत्तर:
(क) स्वल्पस्य
(ख) जितक्रोधेन
(ग) लघुत्वं
(घ) निश्चयो
(ङ) स्फुरति।

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत (उचित क्रम से जोडिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तयः img 1
उत्तर:
(क) 5
(ख) 4
(ग) 2
(घ) 1
(ङ) 3

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘न’ इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) धीरपुरुषाणां प्रज्ञा आपदि स्फुरति।
(ख) स्वर्णकांस्ययोः ध्वनिः सममेव भवति।
(ग) खलसर्पयोः मध्ये सर्पः क्रूरतरः अस्ति।
(घ) माता देवतानां दैवतम् नास्ति।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) न

प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानां समासविग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के समास विग्रह करके समास का नाम लिखिए-)
(क) परोपकारः
(ख) जितक्रोधेन
(ग) कण्ठगतैः
(घ) स्वधियः
(ङ) परार्थम्
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तयः img 2

प्रश्न 8.
उदाहरणानुसारं पर्यायशब्दान् लिखत
(उदाहरण के अनुसार पर्यायवाची शब्द लिखिए-)
यथा- मितम् – स्वल्पम्
(क) सुवर्णे
(ख) देवतानाम्
(ग) प्रज्ञा
(घ) सर्पः
(ङ) सन्तः
उत्तर:
(क) सवर्णे – कनके
(ख) देवतानाम् – सुराणाम्
(ग) प्रज्ञा – धीः
(घ) सर्पः – भुजङ्गः
(ङ) सन्तः – सज्जनाः

प्रश्न 9.
विलोमशब्दान् लिखत- (विलोमशब्द लिखिए)
यथा- खलः – साधुः
(क) धीरः
(ख) सारम्
(ग) शिष्टाः
(घ) स्वल्पस्य
(ङ) क्रूरः
उत्तर:
(क) धीरः – अधीरः
(ख) सारम् – विस्तारम्
(ग) शिष्टाः – अशिष्टाः
(घ) स्वल्पस्य – अधिकस्य
(ङ) क्रूर – अक्रूरः, नम्रः, सौम्यः

प्रश्न 10.
रेखाकितपदान्याधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत (रखाङ्कित पदों के आधार पर प्रश्न बनाइए-)
(क) सर्वे शिष्टाः भवन्ति। (सब शिष्ट होते हैं।)
(ख) पङ्क पतति। (कीचड़ गिरता है।)
(ग) सर्पः क्रूरः भवति। (साँप क्रूर होता है।)
(घ) माता देवतानां दैवतम् भवति। (माता देवताओं का देवता होती है।)
(ङ) खलः सात् क्रूरतरः भवति? (दुष्ट व्यक्ति किससे अधिक क्रूर है?)
उत्तर:
(क) के शिष्टाः भवन्ति? (कौन शिष्ट होते हैं?)
(ख) कः पतति? (क्या गिरता है?)
(ग) कः क्रूरः भवति? (कौन भयानव. होता है?)
(घ) का देवतानां दैवतम् भवति? (कौन देवताओं का देवता है?)
(ङ) खलः कस्मात् क्रूरतरः भवति? (दुष्ट व्यक्ति किससे अधिक क्रूर है?)

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योग्यताविस्तार –

पाठे आगताः सूक्तीः विहाय दशसूक्तीः चित्वा लिखत।
(पाठ में आई सूक्तियों को छोड़कर दरा सूक्तियाँ चुनकर लिखिए।)

सूक्तीः कण्ठस्थं कुरुत।
सूक्तियों को कण्ठस्थ कीजिए।

सूक्तयः पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में कुछ सूक्तियाँ दी गई हैं, जिनसे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों का ज्ञान तथा सदाचारण की प्रेरणा प्राप्त होती है। इन सूक्तियों में कम अक्षरों के द्वारा रहस्थमय और गंभीर विषय सरल रूप में समझाए गए हैं। थोड़े प्रयत्न से तत्त्व को बोध कराने में इनका अनुपम योगदान है। इसलिए हमें इन्हें पढ़ना चाहिए और उनका अनुसरण करना चाहिए।

सूक्तयः पाठ का अनुवाद

1. पठतो नास्ति मूर्खत्वम

शब्दार्थाः :
नास्ति (न + अस्ति)-नहीं हैं- does not exist; मूर्खत्वम्-मूर्खत्वfoolishness.

अनुवाद :
पढ़ने वाले का मूर्खत्व नहीं है।

English :
A studious fellow does not remain foolish.

2. मितं च सारं च वचो हि वग्मिता

शब्दार्थाः :
मितम्-थोड़ा- little; सारम्:-संक्षेप-brief; वाग्मिता-बोलने की चतुरता/वाक्पटुता-wisdom in speech.

अनुवाद :
थोड़ा और संक्षेप में बोलना ही वाक्पटुता है।

English :
Brevity (Brief expression) is the soul of wit (sign of wisdom.)

3. न सुवर्णे ध्वनिस्तादृग् यादृक्कांस्ये प्रजायते।

शब्दार्थाः :
सुवर्णे-सोने में-in Gold; तादृक्-वैसी-such; यादृक्-जैसी- as; प्रजायते-होती है-is produced.

अनुवाद :
सोने (स्वर्ण) में वैसी आवाज़ नहीं होती, जैसी कांसे में होती है।

English :
Gold is not as resounding (resonant) as bronze.

4. परसदननिविष्टः को लघुत्वं न याति।

शब्दार्थाः :
परसदननिविष्ट-दूसरे के सदन (घर)-Sitting in others’ house; लघुत्वम्-छोटेपन का-lowliness; याति-जाता (प्राप्त होता) है।

अनुवाद :
दूसरे के घर में बैठा हुआ (वैठने पर) कौन छोटा नहीं हो जाता। दूसरे के घर पर गया हुआ अथवा कौन घटिया नहीं समझा जाता है।

English :
One loses dignity by visiting others’ places or who does not become low on entering others’ houses?

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5. परोपदेशवेलायां शिष्टाः सर्वे भवन्ति वै।

शब्दार्थाः :
वेलायाम्-समय पर-at the time of; वैः-निश्चयपूर्वक-really; शिष्टाः-अच्छे आचरण वाला-of noble conduct (supreme).

अनुवाद :
दूसरों के उपदेश के समय हम सब सदाचरण वाले बन जाते हैं।

English :
Everyone is a good adviser while advising others.

6. माता किल मनुष्याणां देवतानां च दैवतम्।

शब्दार्थाः :
किल-निश्चयपूर्वक-virtually; दैवतम्-देवता-god.

अनुवाद :
मनुष्यों की माता निश्चित रूप से देवताओं के देवता के समान है।

English :
One’s mother is the supreme god/goddess (like the mother of gods/goddesses)

7. आपदि स्फुरति प्रज्ञा यस्य धीरः स एवहि

शब्दार्थाः :
आपदि-मुसीबत में-introuble; स्फुरति-फड़कती है/सर्जित होती (क्रियाशील होती) है- throbs; प्रज्ञाः-बुद्धि, ज्ञान-Wisdom (cool).

अनुवाद :
आपत्ति में जिसका ज्ञान सर्जित होता (दमकता) है, वही धैर्यवान् है।

English :
One who (does not lose) wisdom/during troubles alone is considered forbearing retains contentment is more than a kingdom.

8. पको हि नभसि क्षिप्तः क्षेप्तुः पतति मूर्द्धनि।

शब्दार्थाः :
पक-कीचड़-mud; नभसि-आकाश पर-towards the sky; क्षिप्तः-फेंका गया-thrown; क्षेप्तु-फेंकने वाले के-thrower’s; मूर्द्धनि-सिर पर-on the head.

अनुवाद :
आकाश पर फेंका गया कीचड़ सिर पर ही गिरता है।

English :
Puff not against the wind.

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9. परोपकारः कर्त्तव्य प्राणैः कण्ठगतैरपि।

शब्दार्थाः :
प्राणैः-प्राणों से-with life (breath); कण्टगतैः-कण्ठ में अटके हुए (मरते दम तक)-sticking in the throat.

अनुवाद :
कण्ठ में पहुँचे हुए प्राणों से भी परोपकार करना चाहिए। (मरते दम तक परोपकार करना चाहिए।)

English :
Do good until there is the last breath.

10. न स्वल्पस्य कृते भूरि नाशयेन्मतिमान् नरः।

शब्दार्थाः :
स्वल्पस्य-थोड़े का-of little; भूरि-अधिक-much; नाशयेत्ः-नष्ट करें-sacrifice.

अनुवाद :
बुद्धिमान लोग थोड़े के लिए अधिक को नष्ट न करें।

English :
Quit not certainty for hope.

11. जितक्रोधेन सर्वं हि जगदेतद्विजीयते।

शब्दार्थाः :
जितक्रोधेन-क्रोध को जीतने से-To conquer anger; विजीयते-जीता जाता है-is conquered.

अनुवाद :
क्रोध को जीतने से इस संसार में सबको जीता जाता है।

English :
Control anger and you will control the entire world.

12. सन्तः परार्थं कुर्वाणा नावेक्षन्ते प्रतिक्रियाम्।

शब्दार्थाः :
परार्थम्-दूसरों की भलाई-welfare of others; कुर्वाणा-करते हुए-doing; नावेक्षन्तेः-नहीं देखते हैं-do not count; प्रतिक्रिया-बदला-reaction.

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अनुवाद :
सज्जन लोग दूसरों के लिए भलाई का कार्य करते हुए उसकी प्रतिक्रिया (बदला) नहीं देखते हैं।

English :
Do good and forget.

13. सहते विपत्सहस्त्रं मानी नैवापमानलेशमपि।

शब्दार्थाः :
सहते-सहन करते हैं-bears; विपत्सहस्त्रम्-हजारो मुश्किलें-thousands of troubles; लेशमपिः-थोड़ा-सा भी-evena bit;मानी-सम्मानीय लोग-Menof honour (respectable persons).

अनुवाद :
सम्मानीय लोग हजारों मुश्किलें सहन करते हैं। पर थोड़ा-सा भी अपमान नहीं (सह सकते हैं)।

English :
Men of honour might undergo a series of troubles. However, they do not tolerate even a bit of insult.

14. सर्पः क्रूरः खलः क्रूरः सात्क्रूरतरः खलः।

शब्दार्थाः :
क्रूरः-भयंकर-crooked, fearful;खलः-दुष्ट व्यक्ति-wicked (vicious) fellow.

अनुवाद :
साँप भयंकर होता है, दुष्ट व्यक्ति भी भयंकर होता है। साँप से दुष्ट व्यक्ति अधिक भयंकर होता है।

English :
Both of the serpent and the wicked person are dreadful. However, the wicked person is more dreadful than the serpent.

15. स्वधियो निश्चयो नास्ति यस्य स भ्रमति स्वयम्।

शब्दार्थाः :
स्वधियः-अपनी बुद्धि का-of own mind; भ्रमति-घूमता है-wanders.

अनुवाद :
जिसका निश्चय (फैसला) अपनी बुद्धि का नहीं होता, वह खुद घूमता (भटकता) रहता है।

English-One who lacks independent decision, wavers around.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 15 भगीरथः

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 15 भगीरथः (कथा) (सङ्कलिता)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 15 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) सूर्यवंशस्य राजा कः आसीत्? (सूर्यवंश के राजा कौन थे?)
उत्तर:
सगरः (सगर)

(ख) यागस्य विध्नं कर्तुं कः मार्ग चिन्तितवान्? (यज्ञ का विध्न करने के लिए किसने तरीका सोचा था?)
उत्तर:
देवेन्द्रः (देवराज इन्द्र)

(ग) सगरपुत्राः कस्य पुरतः अश्वं दृष्टवन्तः? (सगरपुत्रों ने किसके सामने अश्व देखा?)
उत्तर:
कपिलमुनेः (कपिल मुनि के)

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(घ) कस्य वंशे भगीरथस्य जननम् अभवत्? (भगीरथ का जन्म किस वंश में हुआ?)
उत्तर:
सगरस्य (सगर के)

(ङ) आकाशगङ्गां शिवः कुत्र निक्षिप्तवान्? (आकाश गङ्गा को शिव ने कहाँ छिपा लिया?)
उत्तर:
जटासु (जटाओं में)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए)
(क) भगीरथः कान स्वर्गं नेतुं निश्चितवान्? (भगीरथ ने किनको स्वर्ग ले जाने का निश्चय किया?)
उत्तर:
भगीरथः स्वपूर्वजान् स्वर्ग/नेतुं निश्चितवान्। (भगीरथ ने अपने पूर्वजों को स्वर्ग में ले जाने का निश्चय किया।)

(ख) कं ध्यात्वा भगीरथः तपः कृतवान्? (किसको ध्यान कर भगीरथ तप कर रहे थे?)
उत्तर:
ईश्वरं ध्यात्वा भगीरथः तपः कृतवान्। (ईश्वर को ध्यान करके भगीरथ ने तप किया।)

(ग) भगीरथः नदी भूमितः कुत्र नीतवान्? (भगीरथ नदी को भूमि से कहाँ ले गया)
उत्तर:
भगीरथः नदी भूमितः पातालं नीतवान्। (भगीरथ नदी को भूमि से पाताल को ले गया।)

(घ) कस्याः अपरं नाम भागीरथी? (किसका दूसरा नाम भागीरथी है?)
उत्तर:
गङ्गायाः अपरं नाम भागीरथी। (गंगा का दूसरा नाम भागीरथी है।)

(ङ) के कार्य प्रारभ्य न परित्यजन्ति? (कौन कार्य को शुरू करके नहीं छोड़ते?)
उत्तर:
उत्तमजनाः कार्य प्रारम्भ न परित्यजन्ति। (उत्तम लोग कार्य प्रारम्भ कर के नहीं छोड़ते।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए-)
(क) देवेन्द्रः किमर्थं सगराय असूयति स्म? (देवेन्द्र किसलिए सगर से घृणा करता था?)
उत्तर:
‘अश्वमेधं कृत्वा सगरः स्वयम् इन्द्रः भविष्यति’ इत्यर्थे देवेन्द्र। सगराय असूयति स्म। (“अश्वमेध करके ग्ग्गर स्वयं इन्द्र बन जाएगा’ इसलिए देवेन्द्र सगर से घृणा करता था।)

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(ख) भगीरथः किं निश्चयं कृतवान्? (भगीरथ ने क्या निश्चय किया?)
उत्तर:
यदा गङ्गायाः जलं भस्म स्प्रक्ष्यति तदा एव सगरपुत्राणां पापस्य नाशः अपि भविष्यति इति भगीरथः निश्चयं कृतवान्। (जब गङ्गा का जल भस्म को स्पर्श करेगा तभी सगर पुत्रों के पाप का नाश भी होगा, यह निश्चय भगीरथ ने किया।)

(ग) नीचमध्यमोत्तमजनामां लक्षणं किम्? (नीच, मध्यम और उत्तम लोगों के लक्षण क्या हैं?)
उत्तर:
नीचैः विध्नभयेन न प्रारभ्यते कार्ग, मध्यमाः प्रारभ्य विधनविहता विरमन्ति, उत्तमजनाः प्रारम्भ विध्नौ पुनः-पुनः अपि प्रतिहन्यमानाः न परित्यजन्ति। (नीच लोग विध्नों के भय से कार्य को शुरू नहीं करते, मध्यम लोग शुरू करके विध्न आने पर बीच में छोड़ देते हैं और उत्तम लोग शुरू करके विध्नों के बार-बार आने पर भी डर कर कार्य नहीं छोड़ते।)

प्रश्न 4.
उचितशब्देन रिक्तस्थानानि पूरयत-(उचित शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(क) सगरः ………… कृतवान्। (गोमेधयागं/अश्वमेधयाग)
(ख) कार्य प्रारम्भ ………… विरमन्ति। (मध्याः /नीचाः)
(ग) भगीरथः पुनः ………… कृतवान्। (जपः/तपः)
(घ) गङ्गा सगरपुत्राणां ………… स्पृष्टवती। (शरीराणि/भस्मानि)
(ङ) भगीरथः ………… भूमौ आनीतवान् (गजां यमुना)
उत्तर:
(क) अश्वमेधयागं
(ख) मध्याः
(ग) तपः
(घ) भस्मानि
(ङ) गङ्गां

प्रश्न 5.
यथायोम्यं योजयत-(उचित क्रम से जोड़िए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 15 भगीरथः img 1
उत्तर:
(क) 2
(ख) 4
(ग) 1
(घ) 5
(ङ) 3

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘न’ इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) सगरः अश्वमेधयागं न कृतवान्।
(ख) कपिलमुनिः ध्याने आसीत्।
(ग) सगरपुत्राः अश्वम् अन्वेष्टुं न गतवन्तः।
(घ) सगरस्य पुत्राः भस्मीभूताः जाताः।
(ङ) भगीरथः गङ्गां भूमौ न आनीतवान्।
उत्तर:
(क) न
(ख) आम्
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) आम्

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प्रश्न 7.
उदाहरणानुसारं शब्दानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनं च लिखत
(उदाहरण के अनुसार शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति और वचन लिखिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 15 भगीरथः img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 15 भगीरथः img 3

प्रश्न 8.
उदाहरणानुसारं धातुं प्रत्ययं च पृथक् कुरुत
(उदाहरण के अनुसार धातु और प्रत्यय अलग कीजिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 15 भगीरथः img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 15 भगीरथः img 5

प्रश्न 9.
अधोलिखितशब्दानां समानार्थशब्दान् लिखत
(नीचे लिखे शब्दों के समानार्थक शब्द लिखिए-)
यथा- शक्तः – समर्थः
(क) राजा
(ख) मुनिः
(ग) गङ्गा
(घ) भूमिः
(ङ) शिवः
उत्तर:
(क) राजा – नृपः
(ख) मुनिः – साधुः
(ग) गङ्गा – भागीरथी
(घ) भूमिः – धरा
(ङ) शिवः – रूद्रः

प्रश्न 10.
निम्नलिखित-अव्ययानि प्रयुज्य वाक्यनिर्माणं कुरुत
(नीचे लिखे अव्ययों को प्रयुक्त कर वाक्य बनाइए)
यथा- एकदा – नृपः एकदा यागं कृतवान्
(क) तत्र
(ख) एव
(ग) यदा
(घ) पुरतः
(ङ) अपि
उत्तर:
(क) तत्र एकम् पुस्तकम् अस्ति। (वहाँ एक पुस्तक है।)
(ख) राहुलः फलम् एव खादति। (राहुल फल ही खाता है।)
(ग) यदा अहम् गमिष्यामि तदैव सः पठिष्यति। (जब मैं जाऊँगा, तभी वह पढ़ेगा।)
(घ) गृहस्य पुरतः उद्यानम् अस्ति। (घर के सामने बगीचा है।)
(ङ) त्वम् अपि चल। (तुम भी चलो।)

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योग्यताविस्तार –

गङ्गायाः विषये अन्याः कथाः अन्विष्य लिखत पठत च।
(गङ्गा के विषय में अन्य कथाएँ ढूंढकर लिखें और पढ़ें!)

एवम् अन्याः अपि शिक्षाप्रदाः कथाः पठत; तथा च निम्नलिखितौ श्लोको
कण्ठस्थं कुरुत(ऐसी अन्य शिक्षाप्रद कथा पढ़िए व निम्नलिखित श्लोकों को कण्ठस्थ करो।

“गङ्गा गङ्गेति यो ब्रूयाद योजनानां शतैरपि।
मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति॥”

मातर्गङगे तरलतरङ्गे सततं वारिधिवारिणि सङगे।
मम तव तीरे पिबतो नीरं ‘हरि हरि’ जपतः पततु शरीरम्॥

भगीरथः पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में गङ्गा नदी के स्वर्ग से धरती पर आने की कथा का वर्णन किया गया है, जिससे धरती के लोगों को मुक्ति प्राप्त हो सके। इसके लिए ‘सगर’ के वंशज’ भगीरथ ने कठिन तप किया जिसके फलस्वरूप गङ्गा धरती पर रूकी।

भगीरथः पाठ का अनुवाद

1. सूर्यवंशस्य राजा सगरः आसीत्। सः एकदा अश्वमेधयागं कृतवान्। यागस्य अन्ते यागस्य अश्वः यत्र तत्र सञ्चारं कृतवान्। अश्वमेधं कृत्वा सगरः स्वयम् इन्द्रः भविष्यति इति देवेन्द्रस्य असूया आसीत्। तस्मात् सः यागस्य विघ्नं कर्तुं मार्ग चिन्तितवान्। ततः अश्वं गृहीत्वा पाताललोके कपिलमुनेः पुरतः स्थापितवान्। तदा मुनिः तपः कुर्वन् ध्याने
आसीत्। अतः सः किमपि न ज्ञातवान्।

शब्दार्थ :
असूया-घृणा, ईर्ष्या-hatred, envy; यागम्-यज्ञ- sacrifice; पुरतःसामने-in front of.

अनुवाद :
सूर्यवंशी राजा सगर थे। उन्होंने एक बार अश्वमेध यज्ञ किया। यज्ञ के अन्त में यज्ञ का घोड़ा यहाँ-वहाँ घूमने लगा। अश्वमेध-यज्ञ करके सगर स्वयं इन्द्र बन जाएगा, ऐसी इन्द्र की घृणा (ईष्या) थी। वहाँ से वह यज्ञ को ध्वंस करने की मार्ग में (युक्ति) सोचने लगा। फिर अश्व लेकर पातललोक में कपिलमुनि के सामने रख दिया। तब मुनि तप करते हुए ध्यान में थे। इसलिए उन्हें कुछ पता नहीं चला।

English :
King Sagar performed a sacrifice-Lord Indra became envious because he would grab Indra’s throne. Left the sacrificial horse in front of Kapil Muni in Patal Lok (hades)

2. सगरस्य षष्टिसहस्त्रपुत्राः अश्वम् अन्वेष्टुं सर्वत्र गतवन्तः। अन्ते ते पातालं गतवन्तः। तत्र मुनेः पुरतः ते अश्वं दृष्टवन्तः। मुनिः एव चोरः इति चिन्तयित्वा ते तं निन्दितवन्तः। कुपितः मुनिः तान् सगरपुत्रान् क्रोधाग्निना दग्धवान्। ते भस्मरूपेण तत्र पाताललोके स्थितवन्तः। तेषां सद्गतिः न अभवत्। एतेषां मुक्तिः कथं भवेत्? पूर्वजानां मुक्तिः वंशजप्रयत्नैः एव सम्भाव्यते इति शास्त्रमतम्।

सगरस्य वंशे भगीरथस्य जननम् अभवत्। सः स्वपूर्वजान् स्वर्गं नेतुं निश्चितवान्। यदा गङ्गायाः जलं भस्मं स्प्रत्यति तदा एव सगरपुत्राणां पापस्य नाशः अपि भविष्यति इति भगीरथस्य निश्चयः।

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शब्दार्थाः-षष्टिसहस्त्राः :
साठ हजार-sixty thousand; अन्चेष्टुम्-ढूँढ़ने के लिए-to search; दग्धवान्-जला दिया-burnt.

अनुवाद :
सगर के साठ हजार पुत्र घोड़े को ढूँढ़ने के लिए सब तरफ गए। अन्त में वे पाताल गए। उन्होंने वहाँ मुनि के सामने घोड़ा देखा। मुनि ही चोर है वह सोचकर उन्होंने उसकी निन्दा की। क्रोधित मुनि ने उन सगर के पुत्रों को क्रोध की अग्नि में जला दिया। वे भस्म रूप में वहाँ पाताल लोक में पड़े रहे। उनकी सद्गति नहीं हुई। इनकी मुक्ति कैसे हो? पूर्वजों की मुक्ति वंशजों के प्रयत्नों से सम्भव है यह शास्त्र का विचार है।

सगर के वंश में भगीरथ का जन्म हुआ। उसने अपने पूर्वजों को स्वर्ग ले जाने का निश्चय किया। जब गङ्गा का जल भस्म को स्पर्श करेगा, तभी सगर पुत्रों के पाप का नाश भी होगा, ऐसा भगीरथ ने सोचा।

English :
Sagar’s son blamed the muni for the theft, the muni burnt them to death in the fire of anger-Bhagiratha was born in Sagar’s family. His ancestors could reach heaven only if the water of the Ganges touched the ashes.

3. तस्मिन् काले भूलोके गङ्गा न आसीत्। आकाशमार्गे तस्याः प्रवाहं सोढं भूमिः शक्ता न आसीत्। तां प्रथमतः गृहीतुं परमेश्वरः एव शक्तः आसीत्। तस्मात् ईश्वरं ध्यात्वा भगीरथः तपः कृतवान्। सहस्त्रवर्षानन्तरम् एव ईश्वरः आकाशगङ्गां स्वजटासु ग्रहीतुम् अङ्गीकारं दत्तवान्। एवं सा नदी ईश्वरस्य जटामु प्रथमं पतितवती। आकाशगङ्गा तदा गर्विता आसीत्। “कथम् एषः ईश्वरः मां धारयितुं शक्तः?” इति चिन्तितवती सा। नद्याः गर्वं ज्ञात्वा शिवः तां जटासु एव निक्षिप्तवान्। अतः नद्याः एकः जलबिन्दुः अपि बहिः भूमौ न पतितः।

शब्दार्थाः :
सोढ़म्-सहन करने के लिए-to bear; शक्ता-समर्थ/शक्ति-able,strong; अङ्गीकारम्-स्वीकृति दी-consented; गर्विता-घमण्ड युक्त-proud; निक्षिप्तवान्-फेंक दिया-threw.

अनुवाद :
उस सनय धरती पर गङ्गा नहीं थी। आकाश मार्ग में उसके बहाव को सहने की शक्ति नहीं थी। उसे सबसे पहले पकड़ने में परमेश्वर ही समर्थ थे। इसलिए भगवान का ध्यान कर भगीरथ ने तप किया। हजार वर्षों के बाद ही ईश्वर ने आकश-गङ्गा को अपनी जटाओं में बाँधने की स्वीकृति दी। इससे वह नदी भगवान की जटाओं से पहली बार गिरी। तब आकाशगंगा घमण्ड युक्त हो गयी। “कैसे इस ईश्वर ने मुझे धारण किया?” उसने यह सोचा। नदी के घमण्ड को जानकर शिव ने उसे जटाओं में ही छिपा लिया। इससे नदी के जल की एक बूंद भी बाहर नहीं गिरी।

English :
Ganga could not flow in the sky. God gave consent to preserve the Garga in his locks of hair. Aerial Ganga became proud. Shiva retained the Ganga in his lock of hair.

4. भगीरथः दुःखितः अभवत्। सः पुनः तपः कृतवान्। शिवः तस्य पुरतः प्रत्यक्षः अभवत्। “हे ईश! नदीं भूभौ विसृजतु” इति भगीरथः प्रार्थितवान्। तां प्रार्थनाम् अङ्गीकृत्य शिवः नद्याः जल भूमौ विसृष्टवान्। भगीरथः नदी भूमितः पातालं नीतवान्। पाताले प्रवहन्ती गङ्गा सगरपुत्राणां भस्मानि स्पृष्टवती। सगरपुत्राः स्वर्गलोक गतवन्तः।

इत्थं भगीरथस्य प्रयत्नाः अपूर्वाः। सः गङ्गां भूमौ आनीतवान्। अनेन कारणेन एव तस्याः नद्याः भागीरथी इति अन्यत् नाम अस्ति। प्रयत्नविषये उक्तञ्च-

प्रारभ्यते न खुल विध्नभयेन नीचैः, प्रारभ्य विधनविहता विरमन्ति मध्याः। विप्नैः पुनः पुनरपि प्रतिहन्यमानाः, प्रारभ्यचोत्तमजनाः न परित्यजन्ति॥

शब्दार्थाः :
प्रत्यक्ष-देह रूप में प्रगट-appeared in person; विसृजतु-भेजो/ विसर्जित करो-release; विसृष्टवान्-भेजा विसर्जित किया।-sent, released.

अनुवाद :
भगीरथ दुखी हो गया। उसने फिर तप किया। शिवजी उसके सामने प्रकट हुए। “हे प्रभु!” नदी को भूमि पर भेजो” भगीरथ ने प्रार्थना की। उसकी प्रार्थना को स्वीकार कर शिव ने नदी का जल भूमि पर भेज दिया। भगीरथ नदी को भूमि से पाताल ले गया। पाताल में बहती हुई गङ्गा ने सगरपुत्रों की भस्म को स्पर्श किया। सगरपुत्र स्वर्गलोक को चले गये।

इस प्रकार भगीरथ के प्रयत्न अपूर्व विलक्षण थे। वह गङ्गा को भूपि पर लाया। इस कारण ही नदी का ‘भागीरथी’ दूसरा नाम है। प्रयत्न के विषय में कहा भी है

“नीच लोग विध्नों के भय से कार्य को प्रारम्भ नहीं करते। मध्यम लोग प्रारम्भ कर विध्न आने पर बीच में छोड़ देते हैं। परन्तु उत्तम लोग बार-बार विध्न पड़ने पर परेशान होकर भी प्रारम्भ करके कार्य को नहीं छोड़ते अर्थात् पूरा करते हैं।”

English :
Bhagiratha performed penance-Shiva appeareddropped water of Ganges on the earth Bhagiratha took the river to Patal-The water touched the ashes-Sagar’s son transported to heaven-Noble persons finish their assigned activities, heedless of obstructions.

MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 12 भारतीय संविधान

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 12 भारतीय संविधान

MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
संविधान है –
(i) सरकार का गठन
(ii) देश का शासन
(iii) नियम व कानूनों का संकलित प्रलेख
(iv) मौलिक अधिकार।
उत्तर:
(iii) नियम व कानूनों का संकलित प्रलेख

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन-सी विशेषता भारतीय संविधान की नहीं है ?
(i) संसदीय शासन प्रणाली
(ii) संघात्मक शासन
(iii) स्वतन्त्र व निष्पक्ष न्यायपालिका
(iv) अलिखित संविधान।
उत्तर:
(iv) अलिखित संविधान।

प्रश्न 3.
संविधान में कितने मौलिक कर्तव्य बताये गये हैं ?
(i) 6
(ii) 14
(iii) 18
(iv) 111
उत्तर:
(iv) 111

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष ……………….. थे। (2011, 13)
  2. डॉ. बी. आर. आम्बेडकर संविधान की ……………….. के अध्यक्ष थे। (2015)
  3. भारत का नवनिर्मित संविधान, संविधान सभा द्वारा ……………….. को अंगीकृत किया गया। (2018)
  4. समानता का अधिकार संविधान में वर्णित ……………….. में से एक है। (2017)

उत्तर:

  1. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
  2. प्रारूप समिति
  3. 26 नवम्बर, 1949
  4. मौलिक अधिकारों।

सही जोड़ी बनाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 12 भारतीय संविधान 1
उत्तर:

  1. → (घ)
  2. → (ख)
  3. → (ङ)
  4. → (क)
  5. → (ग)

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संविधान क्या है ?
उत्तर:
किसी देश का शासन जिन मूलभूत नियमों एवं कानूनों के अनुसार चलाया जाता है उनके संकलित प्रलेख को संविधान कहते हैं।

प्रश्न 2.
भारत में मौलिक अधिकारों का संरक्षक किसे बनाया गया है ?
उत्तर:
सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों का संरक्षक है।

प्रश्न 3.
संविधान में मौलिक कर्तव्य कब जोड़े गये?
उत्तर:
संविधान के 42वें संशोधन (1976) के द्वारा संविधान में एक नया प्रावधान ‘मौलिक कर्त्तव्य’ जोड़ा गया है। उसके द्वारा नागरिकों के 10 कर्तव्य निश्चित किए गये हैं।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संविधान का क्या महत्त्व है ? लिखिए। (2010)
उत्तर:
संविधान का महत्त्व – किसी देश का संविधान, उस राष्ट्र की राजनीतिक व्यवस्था का बुनियादी ढाँचा निर्धारित करता है। संविधान में शासन के सभी अंगों (व्यवस्थापिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) की रचना, शक्तियों, कार्यों और दायित्वों का उल्लेख होता है। संविधान शासन के अंगों और नागरिकों के मध्य सम्बन्धों को भी विनियमित करता है।

संविधान देश के आदर्शों को भी प्रकट करता है। संविधान जनता की सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक प्रकृति, आस्था एवं आकांक्षाओं पर आधारित होता है।

प्रश्न 2.
संविधान सभा का परिचय दीजिए। (2009)
उत्तर:
संविधान सभा – वह सभा जिसे किसी देश का संविधान बनाने का कार्य सौंपा जाए उसे संविधान सभा के नाम से जाना जाता है।

भारत का संविधान एक संविधान सभा द्वारा निर्मित किया गया। संविधान सभा का गठन ब्रिटिश शासन तथा भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के नेतृत्वकर्ताओं के मध्य परस्पर सहमति से किया गया। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर, 1946 को हुई जिसमें डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा को संविधान सभा का अस्थाई अध्यक्ष चुना गया। संविधान सभा की दूसरी बैठक 11 दिसम्बर, 1946 को हुई, जिसमें डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष चुना गया। संविधान सभा की 2 वर्ष, 11 माह एवं 18 दिन की कार्य अवधि में कुल 11 अधिवेशनों में 166 बैठकें हुईं।

प्रश्न 3.
मध्य प्रदेश से सम्बन्धित संविधान सभा के प्रमुख सदस्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
तत्कालीन मध्य प्रान्त और बरार, मध्य भारत राज्य समूह (भोपाल, ग्वालियर, इन्दौर एवं रीवा) से संविधान सभा में जो सदस्य थे उनमें पण्डित रविशंकर शुक्ल, सेठ गोविन्द दास, डॉ. हरिसिंह गौर और हरिविष्णु कामथ आदि प्रमुख थे।

प्रश्न 4.
राज्य के नीति निदेशक तत्वों से क्या आशय है ? (2009)
उत्तर:
राज्य के नीति निदेशक तत्व-भारतीय संविधान के चौथे भाग में शासन संचालन के लिए मूलभूत सिद्धान्तों का वर्णन किया गया है। इन्हें राज्य के नीति निर्धारण करने वाले निदेशक तत्व कहा गया है। ये तत्व आधुनिक प्रजातन्त्र के लिए राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। नीति निदेशक तत्वों को किसी न्यायालय द्वारा परिवर्तित नहीं कराया जा सकता किन्तु ये तत्व देश के शासन में मूलभूत स्थान रखते हैं। इन तत्वों के माध्यम से भारत में एक लोककल्याणकारी राज्य की स्थापना का प्रयास किया गया है।

प्रश्न 5.
संविधान में प्रस्तावना का क्या महत्त्व है ?
उत्तर:
संविधान की प्रस्तावना में संविधान निर्माताओं ने संविधान निर्माण के लक्ष्यों, मूल्यों एवं विचारों का समोवश किया है। इसे संविधान की आत्मा या कुंजी भी कहा जाता है। प्रस्तावना संविधान निर्माताओं की मनोभावना एवं संकल्प का प्रतीक है।

प्रस्तावना के प्रारम्भिक शब्दों में ही यह भाव निहित है कि संविधान का निर्माण जनता की इच्छा से ही हुआ है व अन्तिम सत्ता जनता में निहित है। प्रस्तावना में संविधान सभा के इस संकल्प की घोषणा है कि भारत सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न गणराज्य होगा। सन् 1976 में 42वें संविधान संशोधन द्वारा भारत को समाजवादी एवं पंथनिरपेक्ष राज्य घोषित किया गया है। देश की एकता और अखण्डता की रक्षा करना केवल राज्य का ही नहीं वरन् प्रत्येक नागरिक का कर्त्तव्य है।

प्रश्न 6.
समाजवादी एवं पंथनिरपेक्षता का आशय समझाइए। (2009, 13, 18)
उत्तर:
समाजवादी राज्य का आशय – समाजवादी राज्य से आशय है कि भारतीय व्यवस्था ‘समाज के समतावादी ढाँचे’ पर आधारित होगी। प्रत्येक भारतीय की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी। भारतीय परिस्थिति के अनुसार समाजवादी को अपनाया जाएगा।

पंथनिरपेक्षता से आशय – संविधान में पंथनिरपेक्ष राज्य का आदर्श रखा गया है। इसका आशय है कि राज्य सभी पंथों की समान रूप से रक्षा करेगा और स्वयं किसी भी पंथ को राज्य के धर्म के रूप में नहीं मानेगा। सरकार द्वारा नागरिकों के मध्य पंथ के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति को अपने विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतन्त्रता है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान की विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (2009, 11, 13, 16)
अथवा
संसदीय शासन प्रणाली की पाँच विशेषताएँ लिखिए। (2012, 15)
अथवा
इकहरी नागरिकता किसे कहते हैं ? (2012)
[संकेत : ‘इकहरी नागरिकता’ शीर्षक देखें।
उत्तर:
भारतीय संविधान की विशेषताएँ भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताएँ अग्रलिखित हैं –

  1. लिखित और निर्मित संविधान – भारत का संविधान लिखित और निर्मित है। यह ब्रिटेन के संविधान की भाँति अलिखित नहीं है।
  2. सम्पूर्ण प्रभुत्व – सम्पन्न लोकतान्त्रिक गणराज्य-सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न का अर्थ है कि भारत अपने आन्तरिक एवं बाह्य मामलों में सर्वोच्च शक्ति रखता है। लोकतन्त्रात्मक का आशय है कि भारत में राजसत्ता का स्रोत जनता है। भारत गणराज्य भी है, क्योंकि राज्य का प्रधान जनता के प्रतिनिधियों द्वारा निर्वाचित व्यक्ति होता है।
  3. संसदीय शासन प्रणाली – भारतीय संविधान में शासन की संसदीय प्रणाली अपनायी गयी है। देश का संवैधानिक प्रधान राष्ट्रपति होता है, जबकि वास्तविक सत्ता मन्त्रिपरिषद् के अधीन होती है।
  4. अंशतः लचीला एवं अंशतः कठोर – भारतीय संविधान न तो पूर्ण रूप से लचीला है न पूर्ण रूप से कठोर। यह अंशत: लचीला तथा अंशत: कठोर है।
  5. मूल अधिकारों की व्यवस्था – मूल अधिकार नागरिकों के व्यक्तित्व के विकास के लिए अनिवार्य होते हैं। अतः भारतीय संविधान में नागरिकों के लिए मूल अधिकारों की व्यवस्था की गयी है। सरकार इनमें हस्तक्षेप नहीं करती।
  6. संघात्मक शासन व्यवस्था – भारतीय संविधान के प्रथम अनुच्छेद के अनुसार भारत राज्यों का एक संघ है। इस प्रकार भारत में संघात्मक शासन की स्थापना की गई है। संविधान ने शासन की शक्ति को एक स्थान पर केन्द्रित न कर केन्द्र और राज्य सरकारों में विभाजित किया है।
  7. स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका – नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा और संविधान की व्याख्या करने का अधिकार होने के कारण न्यायपालिका को स्वतन्त्र घोषित किया गया है। संविधान न्यायपालिका को न्यायिक पुनर्विलोकन का अधिकार देता है। संविधान द्वारा न्यायपालिका को निष्पक्ष बनाये रखने के लिए समुचित प्रावधान किये गये हैं।
  8. राज्य के नीति निदेशक तत्व – लघु उत्तरीय प्रश्न नं. 4 का उत्तर देखें।
  9. सार्वभौम वयस्क मताधिकार – संविधान द्वारा भारतीय नागरिकों को सार्वभौम वयस्क मताधिकार प्रदान किया गया है। हमारे संविधान में यह मताधिकार 18 वर्ष की आयु प्राप्त सभी नागरिकों को किसी धर्म, वंश, जाति, वर्ण, लिंग, जन्मस्थान के भेदभाव के बिना समान रूप से दिया गया है।
  10. इकहरी नागरिकता – भारतीय संविधान ने इकहरी नागरिकता को अपनाया है अर्थात् प्रत्येक व्यकि भारत का नागरिक है चाहे वह किसी भी स्थान पर निवास करता हो। भारत के सभी नागरिक देश में कहीं भी रोजगार प्राप्त कर सकते हैं तथा देश के सभी भागों में समान अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं।

प्रश्न 2.
भारत का संविधान लिखित एवं विस्तृत क्यों है ? वर्णन कीजिए। (2014)
उत्तर:
लिखित संविधान

भारत का संविधान एक संविधान सभा ने एक निश्चय समय तथा योजना के अनुसार बनाया था इसलिए यह निर्मित संविधान है। इसमें सरकार के संगठन के सिद्धान्त, कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका आदि की रचना व कार्य, नागरिकों के साथ उनके सम्बन्ध, नागरिकों के अधिकार तथा कर्त्तव्य आदि के विषय में स्पष्ट रूप से लिख दिया गया है। इसलिए हमारा संविधान लिखित है।

विस्तृत या विशाल संविधान

भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है। भारत के वर्तमान संविधान में 395 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ हैं जो 22 भागों में विभाजित हैं जबकि अमेरिका के संविधान में 7, कनाडा के संविधान में 147 और ऑस्ट्रेलिया के संविधान में 128 अनुच्छेद ही हैं। भारतीय संविधान के विस्तृत होने के निम्नलिखित कारण हैं –

(1) भारतीय संविधान में शासन सम्बन्धी बातों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
(2) संघीय शासन प्रणाली की व्यवस्था की गई है जिसमें शक्तियों के विभाजन की तीनों सूचियों –

  • संघीय सूची
  • राज्य सूची
  • समवर्ती सूची को विस्तार से लिखा गया है।

(3) मौलिक अधिकारों तथा नीति निदेशक सिद्धान्तों को संविधान में शामिल करने से भी संविधान लम्बा हो गया है।
(4) अनुसूचित जातियों तथा अन्य पिछड़ी जातियों की सुरक्षा के लिए संविधान में व्यवस्था की गई है। यह विश्व के अन्य किसी भी संविधान में नहीं है।
(5) नागरिकता, राष्ट्रभाषा, सार्वजनिक सेवाओं तथा न्याय व्यवस्था के बारे में विशेष उपबन्ध हैं। इसी कारण संविधान इतना विस्तृत हो गया है।

प्रश्न 3.
संघात्मक व संसदीय शासन व्यवस्था का वर्णन कीजिए। (2009, 17)
उत्तर:
संघात्मक शासन व्यवस्था

भारतीय संविधान के प्रथम अनुच्छेद के अनुसार भारत राज्यों का एक संघ है। इस प्रकार भारत में संघात्मक शासन की स्थापना की गई है। संविधान ने शासन की शक्ति को एक स्थान पर केन्द्रित न कर केन्द्र और राज्य सरकारों में विभाजित किया है और दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र में स्वतन्त्र हैं। संविधान लिखित और बहुत सीमा तक कठोर है और इसे सर्वोच्च स्थिति प्रदान की गई है। सर्वोच्च न्यायालय संविधान का रक्षक है, जिसे संविधान की व्याख्या करने और केन्द्र व राज्यों के बीच उत्पन्न संवैधानिक विवादों के निर्णय का अधिकार है।

संसदीय शासन व्यवस्था

भारतीय संविधान द्वारा देश में संसदीय शासन प्रणाली की स्थापना की गई है। संसदीय शासन प्रणाली उस शासन प्रणाली को कहते हैं जिसमें राज्य का अध्यक्ष नाममात्र का अध्यक्ष होता है। वास्तविक शासन प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद् द्वारा चलाया जाता है। मन्त्रिमण्डल का निर्माण संसद में किया जाता है।

इस प्रशासन प्रणाली में कार्यपालिका की वास्तविक शक्तियाँ मन्त्रिपरिषद् में निहित होती हैं तथा राष्ट्रपति नाममात्र का शासक होता है। इस प्रणाली में मन्त्रिपरिषद् सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धान्त का अनुसरण करती है। लोकसभा में सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर मन्त्रिपरिषद् को त्यागपत्र देना होता है।

प्रश्न 4.
संविधान में वर्णित मौलिक अधिकार एवं कर्तव्यों का वर्णन कीजिए। (2011)
अथवा
भारत के नागरिकों के मूल कर्त्तव्यों का वर्णन कीजिए। (2009)
अथवा
भारतीय संविधान में वर्णित नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख कीजिए। (2010, 15, 18)
अथवा
भारत के नागरिकों के मौलिक अधिकार कौन-कौनसे हैं ? (2009, 14, 17)
उत्तर:
मौलिक अधिकार

नागरिकों के सर्वांगीण विकास हेतु मौलिक अधिकार आवश्यक हैं। भारत के संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का प्रावधान है। ये ऐसे अधिकार हैं जो न्याय योग्य हैं अर्थात् जिनका उल्लंघन होने पर नागरिक उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय की शरण ले सकता है। ये अधिकार निम्नवत् हैं –

(1) समानता का अधिकार – इस अधिकार के द्वारा प्रत्येक नागरिक को कानून के समक्ष समानता तथा भेदभाव, अस्पृश्यता और उपाधियों का अन्त कर दिया गया है। सरकारी नौकरियों में बिना धर्म, जाति, लिंग आदि को भेदभाव किये समानता है।

(2) स्वतन्त्रता का अधिकार – स्वतन्त्रता के अन्तर्गत नागरिकों को भाषण देने तथा विचार प्रकट करने, शान्तिपूर्ण सभा करने, संघ बनाने, देश में किसी भी स्थान पर घूमने-फिरने की स्वतन्त्रता, देश के किसी भी भाग में व्यवसाय की स्वतन्त्रता, देश में कहीं भी रहने की स्वतन्त्रता आदि प्राप्त हैं।

(3) शोषण के विरुद्ध अधिकार – प्रत्येक नागरिक को शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने का अधिकार है। इस अधिकार के अनुसार मानव के क्रय-विक्रय, किसी से बेगार लेने तथा 14 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों को कारखानों, खानों या किसी खतरनाक धन्धे में लगाने पर रोक लगा दी गयी है।

(4) धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार – भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है अतः प्रत्येक नागरिक को किसी भी धर्म का अनुसरण करने का अधिकार है। प्रत्येक धर्म के अनुयायियों को अपनी धार्मिक संस्थाएँ स्थापित करने तथा उनका प्रबन्ध करने का अधिकार है।

(5) सांस्कतिक तथा शिक्षा सम्बन्धी अधिकार – इस अधिकार के अन्तर्गत भारत के नागरिकों को अपनी भाषा, लिपि तथा संस्कृति को सुरक्षित रखने तथा उसका विकास करने का अधिकार है।

(6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार – इस अधिकार के अनुसार प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार दिया गया है कि यदि उपरिवर्णित पाँच अधिकारों में से किसी भी अधिकार पर आक्षेप किया जाए या उससे छीना जाए, चाहे वह सरकार की ओर से ही क्यों न हो, तो वह सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय से न्याय की माँग कर सकता है।

इन अधिकारों को संकटकाल में प्रतिबन्धित किया जाता है।

मौलिक कर्त्तव्य

संविधान के 42वें संशोधन (1976) के द्वारा संविधान में एक नया प्रावधान “मूल कर्त्तव्य” जोड़ा गया है। उसके द्वारा नागरिकों के 11 कर्त्तव्य निश्चित किए गए हैं –

  1. भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे।
  2. भारत की प्रभुसत्ता, एकता और अखण्डता की रक्षा करे और उसे बनाये रखे।
  3. भारतीय राष्ट्रीय संग्राम के आदर्शों को सँजोए रखे तथा उनका अनुसरण करे।
  4. देश की रक्षा करे तथा आवश्यकतानुसार राष्ट्रीय सेवा करे।
  5. भारत के सभी लोगों में सामान्य भाईचारे को बढ़ावा दे तथा महिलाओं की मर्यादा के विरुद्ध अपमानजनक व्यवहार न करे।
  6. राष्ट्र की समृद्ध विरासत को सुरक्षित रखे।
  7. प्राकृतिक वातावरण को संरक्षित रखे तथा अधिक अच्छा बनाए एवं सभी प्राणियों के प्रति दयाभाव रखे।
  8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे।
  9. सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा करे व हिंसा से दूर रहे।
  10. सभी व्यक्तिगत एवं सामूहिक क्रिया-कलाप में विशिष्टता के लिए प्रयास करे।
  11. यदि माता-पिता या संरक्षक है, छह वर्ष तक की आयु वाले अपने, यथास्थिति, बालक या प्रतिपाल्य को शिक्षा के अवसर प्रदान करे।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत का संविधान कब लागू हुआ?
(i) 26 जनवरी, 1948 को
(ii) 26 जनवरी, 1950 को
(iii) 26 जनवरी, 1930 को
(iv) 15 अगस्त, 1947 को
उत्तर:
(ii) 26 जनवरी, 1950 को

प्रश्न 2.
भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषता निम्न में से क्या है ?
(i) भारतीय संविधान का प्रमुख स्रोत अमेरिका का संविधान है
(ii) भारतीय संविधान पूर्ण लोकतान्त्रिक गणराज्य है
(iii) भारतीय संविधान संघात्मक है
(iv) भारतीय संविधान एकात्मक है।
उत्तर:
(ii) भारतीय संविधान पूर्ण लोकतान्त्रिक गणराज्य है

प्रश्न 3.
भारत के संविधान में कितने अनुच्छेद हैं ?
(i) 320
(ii) 345
(iii) 370
(iv) 395
उत्तर:
(iv) 395

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. हमारे संविधान ने नागरिकों को ………………… प्रकार के मौलिक अधिकार प्रदान किये हैं।
  2. वह सभा जिसे किसी देश का संविधान बनाने का कार्य सौंपा जाए उसे ………………… के नाम से जाना जाता है।
  3. भारत का संविधान भारत की सांस्कृतिक और ………………… को अपने अन्दर समेटे हुए है।

उत्तर:

  1. 6
  2. संविधान सभा
  3. राष्ट्रीय अस्मिता।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है। (2016)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
संविधान सभा की पहली बैठक 8 दिसम्बर, 1945 को हुई।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद हैं। (2010)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
मौलिक अधिकारों को संकटकाल में प्रतिबन्धित किया जा सकता है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
संविधान न्यायपालिका को न्यायिक पुनर्विलोकन करने का अधिकार देता है।
उत्तर:
सत्य।

जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 12 भारतीय संविधान 2
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (ग)
  3. → (क)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान का आधार कौन-सी योजना रही ?
उत्तर:
कैबिनेट मिशन योजना

प्रश्न 2.
संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई थी ? (2009)
उत्तर:
9 दिसम्बर, 1946

प्रश्न 3.
भाषा, लिपि और संस्कृति के लिए कौन-सा मौलिक अधिकार रखा गया है ?
उत्तर:
संस्कृति एवं शिक्षा का अधिकार

प्रश्न 4.
किस स्थिति में मौलिक अधिकार स्थगित किये जाते हैं ?
उत्तर:
संकटकाल

प्रश्न 5.
कौन-से संशोधन द्वारा संविधान में ‘मूल कर्त्तव्य’ जोड़ा गया है ? (2017)
उत्तर:
42वें संशोधन (1976) के द्वारा,

प्रश्न 6.
संविधान में नागरिकों को कितने मूल अधिकार प्रदान किये गये हैं ? (2015)
उत्तर:
6.

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हम कर्त्तव्य का पालन क्यों करते हैं ?
उत्तर:
भारतीय नागरिक होने के नाते हमारा कर्त्तव्य है कि हम संविधान का पालन करें, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गीत का सम्मान करें अर्थात् देश की एकता और अखण्डता की रक्षा के लिए हमें कर्त्तव्य का पालन करना चाहिए।

प्रश्न 2.
भारत के संविधान में संशोधन की कितनी प्रक्रियाओं का उल्लेख है ?
उत्तर:
भारत के संविधान में संशोधन की तीन प्रक्रियाओं का उल्लेख है जिसके अनुसार संविधान के कुछ प्रावधान संसद के साधारण बहुमत से, कुछ प्रावधानों में विशिष्ट बहुमत से तथा महत्वपूर्ण शेष प्रावधानों में संसद के विशिष्ट बहुमत के साथ-साथ आधे राज्यों के अनुसमर्थन से बदले जा सकते हैं।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 लघु उत्तराय प्रश्न

प्रश्न 1.
संविधान की अवधारणा और आवश्यकता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
संविधान की अवधारणा और आवश्यकता – शासन व्यवस्था के सुचारु संचालन हेतु व्यवस्थापिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका का गठन एवं उसके कार्यों और अधिकारों की सीमाओं के निर्धारण के लिए संविधान की आवश्यकता होती है। संविधान के अभाव में शासन का सुचारु रूप से संचालित होना कठिन है और अराजकता की स्थिति निर्मित होने की प्रबल सम्भावना रहती है। संविधान में नागरिकों के मूल अधिकार एवं कर्त्तव्यों का भी विवरण होता है। संविधान शासन व्यवस्था का आधार है।

प्रश्न 2.
“भारत के संविधान में विश्व के विद्यमान संविधानों के सर्वोत्तम लक्षणों का समावेश है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत का संविधान बनाते समय संविधान निर्माताओं ने विश्व के विद्यमान संविधानों के सर्वोत्तम लक्षणों को एकत्र किया और उन्हें अपने राष्ट्र की आवश्यकता और विद्यमान दशाओं के अनुसार अंगीकृत किया। आयरलैण्ड के संविधान से नीति-निदेशक तत्वों को लिया गया है। अमेरिका के संविधान से मूल अधिकारों के विचार को ग्रहण किया है। संघात्मक शासन व्यवस्था कनाडा के संविधान से ली है। भारतीय संविधान पर स्वतन्त्रता संघर्ष के दिनों हुए भारत के संवैधानिक विकास का भी बहुत प्रभाव पड़ा है। इसके साथ ही इंग्लैण्ड की संवैधानिक परम्पराएँ, न्यायिक निर्णय, संवैधानिक टीकाएँ और संविधान विशेषज्ञों की राय आदि का भी प्रभाव झलकता है।

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MP Board Class 10th Social Science Chapter 12 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान की प्रारूप समिति का गठन क्यों और किस प्रकार हुआ था ?
उत्तर:
प्रारूप समिति का निर्माण- भारत के संविधान का निर्माण कार्य सरल नहीं था, अतः संविधान निर्माण को सरल बनाने के लिए विभिन्न समितियाँ बनाई गईं। प्रक्रियागत मामलों से सम्बन्धित 10 समितियाँ एवं तथ्यगत मामलों की 8 समितियाँ गठित की गयी थीं। इन समितियों के प्रतिवेदनों एवं सुझावों के अनुसार संविधान को अन्तिम स्वरूप देने हेतु एक प्रारूप समिति गठित की गई। इस समिति का अध्यक्ष डॉ. भीमराव आम्बेडकर को बनाया गया। इस समिति में एन. गोपालस्वामी, अल्लादि कृष्ण स्वामी, मोहम्मद सादुल्ला, के. मुन्शी, बी. एल. मित्तल और डी. पी. खेतान थे। बाद में पी. एल. मित्तल तथा डी. पी. खेतान की मृत्यु के बाद उनके स्थान पर क्रमशः एम. माधवन तथा टी. टी. कृष्णामाचारी उसके सदस्य हुए। संविधान का लिखित प्रारूप 21 फरवरी, 1948 को संविधान सभा के अध्यक्ष को सौंपा गया।

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 9 मदपरिणामः

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 9 मदपरिणामः (कथा) (पञ्चतन्त्रात्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 9 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) रथकारस्य नाम किम् आसीत्? (रथकार का क्या नाम था?)
उत्तर:
उज्ज्वलकः (उज्जवलक)

(ख) रथकारः वने काम् अपश्यत्? (रथकार ने वन में किसे देखा?)
उत्तर:
उष्ट्रीम् (ऊँटनी को)

(ग) महतीघण्टा केन प्रतिबद्धा? (बड़ा घण्टा किसके बँधा था?)
उत्तर:
दासेरकेन (ऊँट के बच्चे के)

(घ) कः महानुष्ट्राः सञ्जातः? (कौन बड़ा ऊँट बन गया?)
उत्तर:
दासेरकः (ऊँट का बच्चा)

(ङ) रक्षापुरुषस्य प्रतिवर्ष का वृत्तिः? (रक्षा पुरुष का प्रतिवर्ष क्या वेतन था?)
उत्तर:
करभमेकम् (एक ऊँट)

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प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) उज्ज्वलकः कां गृहीत्वा स्वस्थानाभिमुखः प्रस्थितः? (उज्ज्वलक किसे लेकर अपने घर की ओर चला था?)
उत्तर:
उज्ज्वलकः दासेरकयुक्तामुष्ट्रीं गृहीत्वा स्वस्थानाभिमुखः प्रस्थितः। (उज्ज्वलक ऊँट के बच्चे के साथ ऊँटनी को लेकर अपने घर की ओर चला था)

(ख) रथकारः पर्वतदेशे किमर्थं गतः? (रथकार पर्वतदेश में किसलिए गया?)
उत्तर:
रथकारः पल्लवानयनार्थं पर्वतदेशे गतः। (रथकार पत्तियाँ लाने के लिए पर्वतदेश में गया था।)

(ग) दासेरकाः आहारार्थं कुत्र गच्छन्ति? (ऊँट के बच्चे भोजन के लिए कहाँ जाते थे?)
उत्तर:
दासेरकाः आहारार्थं अधिष्ठानोपवनम् गच्छन्ति। (ऊँट के बच्चे भोजन के लिए नगर के बगीचे में जाते थे।)

(घ) दासेरकाः कस्मिन् समये गहमागच्छन्ति? (ऊँट के बच्चे किस समय घर आते थे?)
उत्तर:
दासरेकाः सायंतनसमये गृहमागच्छन्ति। (ऊँट के बच्चे शाम के समय घर आते थे।)

(ङ) उष्ट्रकथायाः सारः कः? (ऊँट की कथा का सार क्या है?)
उत्तर:
उष्ट्रकथायाः सारः अस्ति यत्-“यः सतां वचनादिष्टं मदेन न करोति सः घण्टोष्ट्र इव सत्वरम् विनश्यति।”

(ऊँट की कथा का सार यह है कि जो सज्जनों के वचनों को घमण्ड के कारण नहीं मानता है वह इस ऊँट के समान शीघ्र नष्ट हो जाता है।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए-)
(क) उष्ट्री पीवरतनुः कथं सजाता? (ऊँटनी स्थूलशरीर वाली कैसे हुई?)
उत्तर:
उष्ट्री पल्लव भक्षणप्रभावाद् अहर्निशं पीवरतनुः सञ्जाता। (ऊँटनी पत्ते खाने के प्रभाव से दिन रात स्थूल शरीर वाली हो गई।)

(ख) रथकारः किमर्थं गुर्जरदेशं गतवान्? (रथकार किसलिए गुर्जरदेश में गया?)
उत्तर:
रथकारः कलभग्रहणाय गुर्जरदेशं गतवान्। (रथकार ऊँटनी लेने के लिए गुर्जर देश में गया।)

(ग) कः व्यापारः समीचीनः? (कौन सा व्यापार ठीक था?)
उत्तर:
उष्ट्रपरिपालनः व्यापारः समीचीनः। (ऊँट पालने का व्यापार ठीक था।)

प्रश्न 4.
यथायोग्यं योजयत- (उचित क्रम से जोडिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 9 मदपरिणामः img 1
उत्तर:
(क) 5
(ख) 1
(ग) 2
(घ) 3
(ङ) 4

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प्रश्न 5.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्धवाक्यानां समक्षं “न” इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामाने ‘न’ लिखिए-)
(क) पल्लवभक्षणप्रभावात् पीवरतनुरुष्ट्री सजाता।
(ख) उज्ज्वलकः नित्यमेव दुग्धं गृहीत्वा स्वकुटुम्बं परिपालयति।
(ग) उज्ज्वलकेन महदुष्ट्रयूथं कृत्वा रक्षापुरुषो धृतः।
(घ) यूथाद् भ्रष्टः दासेरकः घण्टां वादयन्नागच्छति।
(ङ) कश्चित्सिंहो घण्टारवमाकर्ण्य समायातः।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) आम्
(ग) आम्
(घ) आम्
(ङ) आम्

प्रश्न 6.
अघोलिखितक्रियापदानां धातुं लकारं पुरुषं वचनञ्च लिखत
(नीचे लिखे क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष व वचन लिखिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 9 मदपरिणामः img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 9 मदपरिणामः img 3

प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के सन्धि-विच्छेद करके सन्धि का नाम लिखिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 9 मदपरिणामः img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 9 मदपरिणामः img 5

प्रश्न 8.
समासविग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत (समास का विग्रह कर समास का नाम लिखिए)
(क) प्रतिवर्षम्
(ख) दारिद्रयोपहतः
(ग) प्रसववेदनया
(घ) पीवरतनुः
(ङ) रथकारः
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 9 मदपरिणामः img 6

प्रश्न 9.
रेखाङ्कितपदान्याधृत्व प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (रेखाङ्कित पदों के आधार पर प्रश्न बनाइए-)
(क) रथकारः प्रतिवसति स्म। (रथकार रहता था।)
उत्तर:
कः प्रतिवसति स्मः? (कौन रहता था?)

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(ख) मम गृहे उष्ट्रः अस्ति। (मेरे घर में ऊँट है।)
उत्तर:
कस्थ गृहे उष्ट्रः अस्ति? (किसके घर में ऊँट है?)

(ग) स दुग्धं गृहीत्वा स्वकुटुम्बं परिपातयति। (वह दूध लेकर अपना परिवार पालता था।)
उत्तर:
सः किं गृहीत्वा स्वकुटुम्बं परिपालयति? (वह क्या लेकर अपना परिवार पालता था?)

(घ) सः यूथाद् भ्रष्टोऽभवत्। (वह झुण्ड से भटक गया।)
उत्तर:
सः कस्मात् भ्रष्टोऽभवत्? (वह किससे भटक गया?)

(ङ) कलभैः अभिहितम्। (ऊँटों के द्वारा कहा गया।)
उत्तर:
कैः अभिहितम्? (किनके द्वारा कहा गया?)

प्रश्न 10.
कथाक्रम संयोजयत-(क्रम से कथा बनाइए)।
(क) उष्ट्रः यूथाद् भ्रष्टोऽभवत्?
उत्तर:
रथकारः दारिद्र्योपहतः देशान्निष्क्रान्तः।

(ख) सिंहेन उष्ट्रः मारितः?
उत्तर:
वने प्रसववेदनया पीड्यमानाम् उष्ट्रीम् अपश्यत्।

(ग) रथकारः गुर्जरदेशं गत्वोष्ट्रीं गृहीत्वा स्वगृहमागतः?
उत्तर:
रथकारः गुर्जरदेशं गत्वोष्ट्रीं गृहीत्वा स्वगृहमागतः।

(घ) तेन प्रचुरा उष्ट्राः करभाश्च सम्मिलिताः?
उत्तर:
तेन प्रचुरा उष्ट्राः करभाश्च सम्मिलिताः।

(ङ) वने प्रसवेदनया पीड्यमानाम् उष्ट्रीम् अपश्यत्?
उत्तर:
उष्ट्रः यूथाद् भ्रष्टोऽभवत्।

(च) रथकारः दारिद्र्योपहतः देशान्निष्क्रान्तः।
उत्तर:
सिंहेन उष्ट्रः मारितः।

योग्यताविस्तार –

“मदपरिणामः” इत्यस्य पाठस्य कलेवरमाधृत्य सरलसंस्कृतसंवादरीत्या पाठविषयकचर्चा कुरुत। (‘मदपरिणामः’ इस पाठ पर आधारित सरल संस्कृत संवाद में पाठ विषयक चर्चा करो।) पञ्चतन्त्रस्य अन्याः कथाः पठत। (पञ्चतंत्र की अन्य कथाएँ पढ़िए।) संस्कृतसाहित्यस्य अन्याः कथाः पठत। (संस्कृतसाहित्य की अन्य कथाएँ पढ़िए।)

मदपरिणामः पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ ‘विष्णुशर्मा’ द्वारा रचित ‘पंचतन्त्र’ से लिया गया है। इस पाठ में घमण्ड के कारण प्राप्त फल का वर्णन किया गया है कि घमण्ड के कारण वह ऊँट सिंह द्वारा मार दिया गया। अतः व्यक्ति को कभी घमण्ड नहीं करना चाहिए, अन्यथा परिणाम भयङ्कर होता है।

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मदपरिणामः पाठ का अनुवाद

1. कस्मिंश्चिदधिष्ठाने उज्ज्ालको नाम रथकारः प्रतिवसति स्म। स चातीव दारिद्रयोपहतश्चिन्तितवान्-‘अहो! धिगियं दरिद्रता मद्गृहे। यतः सर्वेऽपि जनः स्वकर्मणैव रतस्तिष्ठति। अस्मदीयः पुनापारो नानाधिष्ठानेऽर्हति। यतः सर्वलोकानां चिरन्तनाश्चतुर्भूमिका गृहाः सन्ति। मभ च नात्र। तत्किं मदीयेन रथकारत्वेन प्रयोजनम्।’ इति चिन्तयित्वा देशनिष्क्रान्तः। यात्कञ्चिद्वनं गच्छति तावद्गहराकारवनगहनमध्ये सूर्यास्तपनवेलायां स्वयूद् भ्रष्टां प्रसववेदनया पीड्यमानामुष्ट्रीमपश्यत्। स च दासेरकयुक्तामुष्ट्रीं गृहीत्वा स्वस्थानाभिमुखः प्रस्थितः। गृहमासाद्य रज्जु गृहीत्वा तामुष्ट्रिकां पबन्ध। ततश्य तीक्ष्णं परशुमादाय तस्याः पल्लवानयनार्थ पर्वतैकदेशे गतः। तत्र च नूतनानि कोमलानि बहूनि पल्ल्वानि छित्वा शिरसि समारोप्य तस्याग्रे निचिक्षेप। तया च तानि शनैः शनैर्भक्षितानि। पश्चात्पल्लवभक्षणप्रभावादहर्निशं पीवरतनुरुष्ट्री सजाता। सोऽपि दासेरको महानुष्ट्रः सञ्जातः।

शब्दार्थाः :
अधिष्ठाने-नगर में-town/city; दारिद्रयोपहतः-गरीबी से परेशान होकर-being disgusted with poverty; चतुर्भूमिकाः-चौमंजिला-four storeyed; गहाराकार-गुफा के आकार के-cave-shaped, cavern; स्वयूथाद्-अपने झुण्ड से-from own herd; दासेरक-ऊँट का बच्चा-young one of a camel; आसाद्य-पहुँचकर -reaching; रज्जुम्-रस्सी-rope; परशुमादाय-कुल्हाड़ी लेकर-taking an axe; समारोप्य-उठाकर-picking up; पीवरतनु-स्थूल शरीर-bulky, fatty.

अनुवाद :
किसी नगर में उज्जवलक नाम का रथकार रहता था। और वह बहुत अधिक गरीबी से परेशान होकर सोचने लगा-“आह! मेरे घर की इस गरीबी को धिक्कार है। क्योंकि सभी लोग अपने कर्म में लगे हुए हैं। फिर मेरा काम ही इस नगर के योग्य नहीं है। क्योंकि सब लोगों के बहुत समय से चौमंजिला घर हैं। और मेरा यहाँ नहीं है। तो मेरा रथ बनाने का क्या प्रयोजन? यह सोचकर देश से चला गया। जब वह एक वन में गया तब गुफा के आकार के घने जंगल के बीच में सूर्यास्त के समय अपने झुण्ड से भटकी प्रसव पीड़ा से पीड़ित एक ऊँटनी को देखा। और वह ऊँट के बच्चे से युक्त ऊँटनी को लेकर अपने घर की ओर चल पड़ा। घर पहुँच कर रस्सी लेकर उस ऊँटनी को बाँध दिया। और फिर तीखी कुल्हाड़ी लेकर उसके लिए पत्ते लाने के लिए एक पर्वतीय प्रदेश में गया और वहाँ से बहुत से नये व कोमल पत्ते काटकर सिर पर उठाकर लाकर उसके आगे फेंक दिए। उस ऊँटनी के द्वारा उनको धीरे-धीरे खाया गया। पत्ते खाने के बाद उसके प्रभाव से रात दिन वह ऊँटनी स्थूल शरीर वाली होती गई। उसका बच्चा भी बड़ा ऊँट बन गया।

English :
Ujjwalak-a maker of chariots-fed up with acute poverty-leaves town-reached a forest-saw a she camel in labour pains-delivered a young one-Ujjwalak brought both home-fed them on tender leaves-became fatty-young one alse grew up.

2. ततः स नित्यमेव दुग्धं गृहीत्वा स्वकुटुम्वं परिपालयति। अथ रथकारेण वल्लभत्वाद्दासेरकग्रीवायां महतीघण्टा प्रतिबद्धा। पश्चाद्रथकारो व्यचिन्तयत्- ‘अहो! किमन्यैर्दुष्कृतकर्मभिः, यावन्ममैतस्मादेवोष्ट्रपरिपालनादस्य कुटुम्बस्य भव्यं सजातम् । तत्किमन्येन व्यापारेण ।’ एवं विचिन्त्य गहमागत्य प्रियामाह-‘भद्रे! समीचीनोऽयं व्यापारः। तव सम्मतिश्चेत्कुतोऽपि धनिकात्किञ्चिद् द्रव्यमादाय मया गुर्जरदेशे गन्तव्यं कलभग्रहणाय। तावत्वयैतौ यत्नेन रक्षणीयौ। यावदहमपरामुष्ट्री नीत्वा समागच्छामि।’

शब्दार्थाः :
वल्लभत्वात्-प्रेमवश-outofaffection; ग्रीवायाम्-गर्दन में-ontheneck; दृष्कृत-कठिनाई से करने वाले-difficult, arduous; भव्यम्-समृद्ध-progressive, weil off; कलभग्रहणाय-ऊँटों को लेने के लिए-to fetch camels; समीचीन-ठीक/रचित है-proper.

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अनुवाद :
तब से वह प्रतिदिन दूध लेकर अपने परिवार का पालता है। बाद में रथकार के द्वारा प्रेमवश ऊँट के बच्चे के गले में बड़ा घण्टा बाँध दिया गया। उसके बाद रथकार ने सोचा-“अरे! अन्य दुष्कृत कर्मों से क्या लाभ, जब मेरे इस ऊँट को पालने से ही परिवार समृद्ध हो गया। तब अन्य किसी व्यापार से क्या।’ ऐसा सोचकर घर आकर पत्नी से कहा-‘प्रिय! यह व्यापार/काम ठीक है। यदि तुम्हारी सम्मति हो तो किसी भी धनिक से कुछ धन लेकर मेरे द्वारा गुर्जरप्रदेश में ऊँटों को लाने के लि जाना चाहिए। तब तक तुम इन दोनों की रक्षा करने का प्रयास करो। जब तक मैं दूसरी ऊँटनी लेकर आता हूँ।”

English :
Feeds family on milk-tied bell around young-one of camel-thought of borrowing money and camel rearing as sole profession-went to Gujjar region to bring another she camel.

3. ततश्च गुर्जरदेशं गत्वोष्ट्रीं गृहीत्वा स्वगृहमागतः। किंबहुना? तेन तथा कृतं यथा तस्य प्रचुरा उष्ट्राः करभाश्च सम्मिलिताः। ततस्तेन महदुष्ट्रयूथं कृत्वा रक्षापुरुषो धृतः। तस्य प्रतिवर्षं वृत्या करभमेकं प्रयच्छति। प्रतिवर्षं अन्यच्चाहर्निशं दुग्धपानं तस्य निरूपितम् । एवं रथकारोऽपि नित्यमेवोष्ट्रीकरभव्यापारं कुर्वन्सुखेन तिष्ठति। अथ ते दासेरका अधिष्ठानोपवनाहारार्थ गच्छन्ति। कोमलवल्लीर्यथेच्छया भक्षयित्वा महति सरसि पानीयं पीत्वा सायंतनसमये मन्दं मन्दं लीलया गृहमागच्छन्ति। स च पूर्वदासेरको मदातिरेकात्पृष्ठे आगत्य मिलति।

शब्दार्थ :
किं बहुना-और अधिक क्या-What more; करभाः-बहुत से ऊँट-many youngones of camels; वृत्या-वेतन में-in salary; निरुपितम्-निर्धारित किया-fixed; मदातिरेकात्-अधिक घमण्ड के कारण-due to excessive pride; पृष्ठे-बाद में-afterwards.

अनुवाद :
और वहाँ से गुर्जर देश जाकर ऊँटनी लेकर अपने घर आ गया। और अधिक क्या? उसने ऐसा किया जिससे उसके पास बहुत से ऊँट ऊँटनी इकट्ठे हो गए। तब उसने इतने बड़े ऊँट के झुण्ड बनाकर एक पहरेदार रखा। उसको हर. वर्ष वेतन में एक ऊँट दे देता। हर वर्ष बाकियों से दिन-रात दूध पीना उसने.निर्धारित किया। इस प्रकार रथकार भी सदा ही ऊँट-ऊँटनी के व्यापार को करते हुए सुख से रहने लगा। फिर वे सारे ऊँट के बच्चे नगर के उपवन में आहार के लिए जाते। कोमल पत्तियों को इच्छानुसार खाकर बहुत सारा सरोवर का जल पीकर सांयकाल में धीरे-धीरे खेलते हुए घर आ जाते। और वह पहले वाला ऊँट का बच्चा अत्यधिक घमण्ड से युक्त बाद में आकर मिलता।

English :
Brought a she camel from gujjar region a flock of camels grew up–engaged a guard-sought pleasure in their service-the herd went to graze in the grove of the town-returned after feeding on leaves and drinking of river water-previous young one of camels joined last of all.

4. ततस्तैः कलभैरभिहितम्- ‘अहो मन्दमतिरयं दासेरको यथा यूथाद् भ्रष्टः पृष्ठे स्थित्वा घण्टा वादयन्नागच्छति। यदि कस्यापि दुष्टसत्त्वस्य मुखे पतिष्यति, तन्नूनं मृत्युमवाप्स्यति। अथ तस्य तद्वनं गाहमानस्य कश्चित्सिहो घण्टारवमाकर्ण्य समायातः। यावदवलाकयति, तावदुष्ट्रीदासेरकाणां यूथं गच्छति। एकस्तु पुनः पृष्ठे क्रीड़ां कुर्वन्दल्लरीश्चरन्यावत्तिष्ठति, तावदन्ये दासेरकाः पानीयं पीत्वा स्वगृहे गताः।

सोऽपि वनान्निष्क्रम्य यावद्दिशोऽवलोकयति, तावन्नकञ्चिन्मार्गं पश्यति वेत्ति च। यूथाद् भ्रष्टो मन्दं मन्दं बृहच्छब्दं कुर्वन्यावत्कियदूरं गच्छति तावत्तच्छब्दानुसारी सिंहोऽपि क्रमं कृत्वा निर्भतोऽग्रे व्यवस्थितः। ततो यावदुष्ट्रः समीपमागतः, तावत्सिंहेन लम्भयित्वा ग्रीवायां गृहीतो मारितश्च। अतोऽहं ब्रवीमि –
सतां वचनमादिष्टं मदेन न करोति यः।
स विनाशमवाप्नोति घण्टोष्ट्र इव सत्वरम्॥

शब्दार्था :
अभिहितम्-कहा-said; गाहमानस्य-विचरण करता हुआ-wandering; समायात-आ गया-came; आकर्ण्य-सुनकर-hearing; निभृतः-चुपचाप-silently; लम्भयित्वा-छलाँग लगाकर-jumping; व्यवस्थितः-खड़ा हुआ था-stood; अवाप्नोति-प्राप्त होता है-seeks, is subject to, meets.

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अनुवाद :
तब उन ऊँटों के द्वारा कहा गया-“अरे! यह तो मन्दबुद्धि बच्चा है, जो झुण्ड से अलग होकर पीछे खड़े होकर घण्टा बजाता हुआ आता है। यदि किसी दुष्ट प्राणी के मुँह में पड़ गया तो निश्चय ही मृत्यु को प्राप्त हो जाएगा। फिर उस वन में विचरण करते हुए कोई शेर घण्टे की आवाज सुनकर आ गया। जब उसने देखा, तब ऊँटनी के बच्चों का झुण्ड जा रहा था। एक तो फिर पीछे खेलता हुआ पत्तियाँ खाता हुआ वहीं खड़ा हो गया, तब तक बाकी बच्चे पानी पीकर अपने घर चले गए।

वह भी वन से निकलकर जब उस दिशा में देखता है, तब कोई रास्ता न देखता है और न ही पहचानता है। झुण्ड से अलग धीरे-धीरे आवाज करता. हुआ जब कुछ दूर जाता है, तब शब्द का अनुसरण करता हुआ शेर भी पीछा करके चुपचाप आगे खड़ा हो जाता है। तब जैसे ही ऊँट पास आता है, वैसे ही वह शेर के द्वारा छलाँग लगाकर गर्दन से पकड़ा जाता है और मार दिया जाता है। इसलिए मैं कहता हूँ

जो सज्जनों के कहे वचनों का घमण्ड के कारण पालन नहीं करता वह इस घण्टे वाले ऊँट के समान शीघ्र विनाश को प्राप्त हो जाता है।

English :
The flock of camels predicted-dull witted camel will be killed-A lion-heard sound of bell-stands on the way-catches by the neck-killed at once. Moral-Pride hath a fall.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions