MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था

 संचार व्यवस्था  NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
व्योम तरंगों के उपयोग द्वारा क्षितिज के पार संचार के लिए निम्नलिखित आवृत्तियों में से कौन-सी आवृत्ति उपयुक्त रहेगी?
(a) 10 किलोहर्ट्स
(b) 10 मेगाहर्ट्स
(c) 1 गीगाहर्ट्स
(d) 1000 गीगाहर्ट्स।
उत्तर
(b) 10 मेगाहर्ट्स।
3 मेगाहर्ट्स से 30 मेगाहर्ट्स आवृत्ति तक की तरंगें व्योम तरंगों की श्रेणी में आती हैं। इससे उच्च आवृत्ति की तरंगें (जैसे-1 गीगाहर्ट्स, 1000 गीगाहर्ट्स) आयन-मण्डल को भेदकर पार निकल जाती हैं, जबकि 10 किलोहर्ट्स आवृत्ति की तरंगें ऐन्टिना की ऊँचाई अधिक होने के कारण उपयोगी नहीं हैं।

प्रश्न 2.
UHF परिसर की आवृत्तियों का प्रसारण प्रायः किसके द्वारा होता है?
(a) भू-तरंगें
(b) व्योम तरंगें
(c) पृष्ठीय तरंगें
(d) आकाश तरंगें।
उत्तर
(d) आकाश तरंगें।
UHF परिसर में प्रसारण आकाश तरंगों द्वारा ही होता है।

प्रश्न 3.
अंकीय सिग्नल :
(i) मानों का संतत समुच्चय प्रदान नहीं करते
(ii) मानों को विविक्त चरणों के रूप में निरूपित करते हैं
(iii) द्विआधारी पद्धति का उपयोग करते हैं ।
(iv) दशमलव के साथ द्विआधारी पद्धति का भी उपयोग करते हैं।
उपर्युक्त प्रकथनों में कौन-से सत्य हैं?
(a) केवल (i) तथा (ii)
(b) केवल (ii) तथा (iii)
(c) (i), (ii) तथा (iii) परन्तु (iv) नहीं
(d) (i), (ii), (iii) तथा (iv) सभी।
उत्तर
(c).
अंकीय सिग्नल द्विआधारी पद्धति (अंकों 0 तथा 1) का उपयोग करते हैं। अत: मानों का सतत समुच्चय प्रदान करने के स्थान पर उन्हें विविक्त चरणों में निरूपित करते हैं।

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प्रश्न 4.
दृष्टिरेखीय संचार के लिए क्या यह आवश्यक है कि प्रेषक ऐन्टीना की ऊँचाई अभिग्राही ऐन्टीना की ऊँचाई के बराबर हो? कोई TV प्रेषक ऐन्टीना 81 मीटर ऊँचा है। यदि अभिग्राही ऐन्टिना भूस्तर पर है तो यह कितने क्षेत्र में सेवाएँ प्रदान करेगा?
उत्तर
नहीं, दृष्टिरेखीय संचार हेतु प्रेषक ऐन्टिना की ऊँचाई अभिग्राही ऐन्टिना की ऊँचाई के बराबर होना आवश्यक नहीं है। दिया है,
प्रेषक ऐन्टिना की ऊँचाई hT = 81 मीटर .
अभिग्राही ऐन्टिना की ऊँचाई hR = 0
पृथ्वी की त्रिज्या R= 6.4×106 मीटर
माना इस ऐन्टिना से d त्रिज्या के वृत्त में सेवाएँ प्राप्त की जा सकती हैं, तब
d = \(d=\sqrt{2 h_{T} R}+\sqrt{2 h_{R} R}=\sqrt{2 \times 81 \times 6.4 \times 10^{6}}+0\)
यदि ऐन्टिना A क्षेत्रफल में सेवाएँ प्रदान कर सकता है तो
A= πd2 = 3.14 × 2 x 81 × 6.4 × 106 मीटर 2
= 3255.55 किमी2

प्रश्न 5.
12 वोल्ट शिखर वोल्टता की वाहक तरंग का उपयोग किसी संदेश सिग्नल के प्रेषण के लिए किया गया है। मॉडुलन सूचकांक 75% के लिए मॉडुलक सिग्नल की शिखर वोल्टता कितनी होनी चाहिए?
हल :
वाहक तरंग की शिखर वोल्टता Ec = 12 वोल्ट
मॉडुलन सूचकांक μ = 75%
यदि मॉडुलक सिग्नल की शिखर वोल्टता Em है तो
मॉडुलन सूचकांक \(\frac{E_{m}}{E_{c}}\) x 100 = 75
Em = \(\frac { 75 }{ 100 }\)xEc = \(\frac { 3 }{ 4 }\) x 12 = 9 वोल्ट
अत: मॉडुलक सिग्नल की शिखर वोल्टता = 9 वोल्ट।

प्रश्न 6.
चित्र-15.1 में दर्शाए अनुसार कोई मॉडुलक सिग्नलं वर्ग तरंग है। .
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 1
दिया गया है कि वाहक तरंग c(t) = 2sin (8 π t) वोल्ट

  1. आयाम मॉडुलित तरंग रूप आलेखित कीजिए।
  2. मॉडुलन सूचकांक क्या है?

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हल
1. चित्र से स्पष्ट है कि 0 ≤ t ≤ 0.5 सेकण्ड
m(t) = 1 वोल्ट
cm(t) = [Ac + m(t)] sin (8 π t)= 3 sin 8 π t [∵Ac = 2 वोल्ट]
0.5 सेकण्ड ≤ t ≤ 1.0 सेकण्ड
m(t) = – 1 वोल्ट
cm (t) = [Ac + m (t)] sin (8 π t) = 1 sin (8 π t)
1.0 सेकण्ड ≤ t ≤ 1.5 सेकण्ड
m(t) = 1
cm (t) = [Ac + m(t)] sin(8 π t)= 3 sin (8 π t)
तथा इसी प्रकार 1.5 सेकण्ड ≤ t ≤ 2.0 सेकण्ड
cm (t) = 1 sin (8 π t)
अत: मॉडुलित तरंग को निम्न प्रकार से लिखा जा सकता है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 2
वाहक तरंग की कोणीय आवृत्ति ωc= 8π
∵ \(T_{c}=\frac{2 \pi}{\omega_{c}}=\frac{1}{4}\) 1 सेकण्ड
∵ 1 सेकण्ड में वाहक तरंग के चार दोलन पूरे होंगे।
इनमें से प्रथम 2 दोलन (t= 0 से t = 0.5 सेकण्ड तक) तरंग cm (t) = 3 sin 8 π t के होंगे तथा अगले दो दोलन Cm (t) = 1 sin 8 π t के होंगे।
इसी प्रकार के दोलन अगले 1 सेकण्ड में होंगे।

इस आधार पर मॉडुलित तरंग रूप निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 3

2. वाहक तरंग की शिखर वोल्टता Ec = 2 वोल्ट
मॉडुलक तरंग की शिखर वोल्टता Em = 1 वोल्ट
मॉडुलन सूचकांक μ = \(\frac { Em }{ Em }\) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) = 0.5
अथवा
μ = \(\frac { Em }{ Em }\) x 100% = 0.5 x 100% = 50%

प्रश्न 7.
किसी मॉडुलित तरंग का अधिकतम आयाम 10 वोल्ट तथा न्यूनतम आयाम 2 वोल्ट पाया जाता है। मॉडुलन । सूचकांक u का मान निश्चित कीजिए।
यदि न्यूनतम आयाम शून्य वोल्ट हो तो मॉडुलन सूचकांक क्या होगा?
हल :
दिया है, मॉडुलित तरंग का अधिकतम आयाम Emax = 10 वोल्ट, न्यूनतम आयाम Emin = 2 वोल्ट
यदि वाहक तरंग तथा मॉडुलक तरंग के आयाम क्रमश: Ec व Em हैं तो
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 4

प्रश्न 8.
आर्थिक कारणों से किसी AM तरंग का केवल ऊपरी पार्श्व बैण्ड ही प्रेषित किया जाता है, परन्तु ग्राही स्टेशन पर वाहक तरंग उत्पन्न करने की सुविधा होती है। यह दर्शाइए कि यदि कोई ऐसी युक्ति उपलब्ध हो जो दो सिग्नलों की गुणा कर सके तो ग्राही स्टेशन पर मॉडुलक सिग्नल की पुनःप्राप्ति सम्भव है।
उत्तर
माना उच्च आवृत्ति वाहक तरंग निम्नलिखित है
c(t)= Ac cos ωct
माना आयाम मॉडुलित तरंग का केवल उच्च पार्श्व बैण्ड ही प्रेषित किया जाता है तब संसूचन के बाद अभिग्राही पर उपलब्ध सिग्नल
m(t) = A1 cos (ωc + ωm)t
उक्त दोनों की गुणा करने पर,
cm (t) = AcA1 cos ωc t cos (ωc + ωm)t
= \(\frac{A_{c} A_{1}}{2}\) [cos (2ωc + ωm) t+ cos ωmt]

इस सिग्नल को निम्न आवृत्ति फिल्टर से पास करने पर यह फिल्टर उच्च आवृत्ति घटक = \(\frac{A_{c} A_{1}}{2}\) cos (2ωc + ωm) t को रोक देगा तथा निम्न आवृत्ति घटक \(\frac{A_{c} A_{1}}{2}\) cosωmt को गुजरने देगा। इस प्रकार हमें मॉडुलक सिग्नल पुनः प्राप्त हो जाएगा।

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संचार व्यवस्था बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
तीन तरंगें A, B और C जिनकी आवृत्तियाँ क्रमशः 1600 किलोहर्ट्स, 5 मेगाहर्ट्स और 60 मेगाहर्ट्स हैं, एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजी जानी हैं। निम्न में से कौन-सा संचार का सर्वोपयुक्त ढंग है
(a) A को आकाश तरंग के रूप में तथा B और C को व्योम तरंगों के रूप में भेजा जाए
(b) A को भू तरंग, B को व्योम तरंग तथा C को आकाश तरंग के रूप में भेजा जाए
(c) B और C को भू तरंग, तथा A को व्योम तरंग के रूप में भेजा जाए
(d) B को भू तरंग तथा A और C को आकाश तरंग के रूप में भेजा जाए।
उत्तर
(b) A को भू तरंग, B को व्योम तरंग तथा C को आकाश तरंग के रूप में भेजा जाए

प्रश्न 2.
एक 100 मीटर लम्बा एन्टेना 500 मीटर ऊँची इमारत पर लगा है। यह संयोजन 2 तरंगदैर्घ्य की तरंगों के लिए एक संचरण टावर (transmission tower) बन जाएगा जहाँ 2 है
(a) ~ 400 मीटर
(b) ~ 25 मीटर
(c) ~150 मीटर
(d) ~ 2400 मीटर।
उत्तर
(a) ~ 400 मीटर

प्रश्न 3.
3 किलोहर्ट्स आवृत्ति का एक वाक् सिग्नल, 1 मेगाहर्ट्स आवृत्ति के एक वाहक सिग्नल को आयाम मॉडुलीकरण द्वारा मॉडुलित करने के लिए प्रयुक्त किया गया है। पार्श्व बैण्डों की आवृत्तियाँ होंगी
(a) 1.003 मेगाहर्ट्स व 0:997 मेगाहर्ट्स
(b) 3001 किलोहर्ट्स व 2997 किलोह
(c) 1003 किलोहर्ट्स व 1000 किलोहर्ट्स
(d) 1 मेगाहर्ट्स व 0.997 मेगाहर्ट्स।
उत्तर
(a) 1.003 मेगाहर्ट्स व 0:997 मेगाहर्ट्स

प्रश्न 4.
cm आवृत्ति के एक सन्देश सिग्नल को, आयाम मॉडुलित (AM) तरंग प्राप्त करने के लिए, आवृत्ति की एक वाहक तरंग पर आरोपित (superposed) किया गया है। AM तरंग की आवृत्ति होगी
(a) ωm
(b) ωc
(c) \(\frac{\omega_{c}+\omega_{m}}{2}\)
(d) \(\frac{\omega_{c}-\omega_{m}}{2}\)
उत्तर
(b) ωc

प्रश्न 5.
एक पुरुष की वाणी, मॉडुलीकरण व प्रेषण के पश्चात्, ग्राही को महिला की वाणी की भाँति सुनाई देती (प्रतीत होती) …… है। इसका कारण है
(a) अनुपयुक्त मॉडुलन सूचकांक का चुनाव(0 < m < 1 चुना गया)
(b) आवर्धकों के लिए अनुपयुक्त बैण्ड-चौड़ाई का चुनाव
(c) वाहक तरंगों की आवृत्ति का अनुपयुक्त चुनाव
(d) संचरण में ऊर्जा ह्रास।
उत्तर
(b) आवर्धकों के लिए अनुपयुक्त बैण्ड-चौड़ाई का चुनाव

प्रश्न 6.
एक मूल संचार प्रक्रम में होता है
(A) प्रेषक
(B) सूचना स्रोत
(C) सूचना का उपयोग करने वाला
(D) चैनल
(E) ग्राही।
निम्नलिखित में कौन वह सही क्रम प्रदान करता है जिसमें ये एक मूल संचार प्रक्रम में व्यवस्थित होते हैं
(a) ABCDE
(b) BADEC
(c) BDACE
(d) BEADC.
उत्तर
(b) BADEC .

प्रश्न 7.
आयाम मॉडुलित तरंगों के गणितीय व्यंजक की पहचान कीजिए
(a) Ac sin [{ωc + k1Vm (t)} t + Φ]
(b) Ac sin {ωct + Φ + k2Vm (t)}
(c) { Ac + k2Vm (t)} sin (ωct+Φ)
(d) AcVm(t) sin (ωct+Φ).
उत्तर
(c) { Ac + k2Vm (t)} sin (ωct+Φ)

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संचार व्यवस्था अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में किसमें अनुरूप (analog) सिग्नल तथा किसमें अंकीय (digital) सिग्नल उत्पन्न होते हैं?

  1. एक कम्पित स्वरित्र द्विभुज
  2. सितार के कम्पित तार की सुस्वर ध्वनि
  3. प्रकाश स्पन्द
  4. NAND गेट (द्वार) का निर्गत।

उत्तर

  1. अनुरूप (analog)
  2. अनुरूप (analog)
  3. अंकीय (digital)
  4. अंकीय (digital)।

प्रश्न 2.
क्या व्योम तरंगें, 60 मेगाहर्ट्स आवृत्ति के (टी०वी०) सिग्नलों को प्रेषित करने के लिए उपयुक्त होंगी?
उत्तर
नहीं, क्योंकि 30 मेगाह से अधिक आवृत्ति की तरंगें, आयनमण्डल द्वारा परावर्तित न होकर पारगमित हो जाती हैं।

प्रश्न 3.
दो तरंगें तथा B जिनकी आवृत्तियाँ 2 मेगाहर्ट्स और 3 मेगाहर्ट हैं, एक ही दिशा में, व्योम तरंग के द्वारा संचरित करने के लिए विकीर्णित की जाती हैं। इनमें से कौन-सी आयनमण्डल से पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के पूर्व अधिक दूरी तय कर सकती है?
उत्तर
3 मेगाहर्ट्स की अधिक आवृत्ति की तरंग के लिए वायुमण्डल का अपवर्तनांक अधिक होता है। अत: अधिक आवृत्ति की तरंग के लिए अपवर्तन कोण कम होगा अर्थात् यह तरंग अपने मार्ग से कम मुड़ेगी और पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से पूर्व अधिक दूरी तय करेगी।

प्रश्न 4.
आयाम मॉडुलन हेतु, 1 मेगाहर्ट्स आवृत्ति की वाहक तरंगों का उत्पादन करने के लिए आवश्यक, एक समस्वरित आवर्धक परिपथ के LC गुणनफल की गणना कीजिए। · हल :
समस्वरित आवर्धक परिपथ के लिए f= \(\frac{1}{2 \pi \sqrt{L C}}\)
\(\begin{aligned} 1 \times 10^{6} &=\frac{1}{2 \pi \sqrt{L C}} \\ \sqrt{L C} &=\frac{1}{2 \pi \times 10^{6}} \end{aligned}\)
\(L C=\frac{1}{4 \pi^{2} \times 10^{12}}\)

प्रश्न 5.
किसी चैनल से संचरण पर, आयाम मॉडुलित (AM) सिग्नल में, आवृत्ति मॉडुलित सिग्नल (FM) से अधिक रव क्यों होता है?
उत्तर
आयाम मॉडुलन में, वाहक तरंगों के तात्कालिक विभव मान में मॉडुलक तरंग विभव के अनुरूप परिवर्तन किया जाता है। सम्प्रेषण में नॉयज सिग्नल (रव) भी जुड़ जाते हैं तथा ग्राही के लिए मॉडुलेटिंग सिग्नल के एक भाग की भाँति ही कार्य करता है। आवृत्ति मॉडुलन में वाहक तरंगों की आवृत्ति में मॉडुलक तरंग विभव के तात्कालिक मान के अनुरूप परिवर्तन किया जाता है। यह प्रक्रम केवल मॉडुलन स्तर पर होता है; सिग्नल के संचरण के समय नहीं। अत: आवृत्ति मॉडुलित सिग्नल में अधिक नॉयज सिग्नल (रव) नहीं होता है।

संचार व्यवस्था आंकिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
एक दूरदर्शन संचरण टावर ऐन्टिना 20 मीटर की ऊँचाई पर है। इससे कितने क्षेत्र में संकेत प्राप्त हो सकेंगेयदिग्राही एन्टिना

  1. भूतल पर ही,
  2. भूतल से 25 मीटर ऊँचाई पर हो
  3. प्रथम स्थिति के सापेक्ष द्वितीय स्थिति में इसमें होने वाली प्रतिशत वृद्धि का परिकलन कीजिए।

हल
1. h = 20 मीटर
संकेत प्राप्त करने वाले क्षेत्र की त्रिज्या
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 5
संकेत से आच्छादित क्षेत्रफल (A) = πd2
= 3.14x (16)2 किमी2= 3.14×256
= 803.84 किमी2

2.

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 6
= (16+17.9) किमी  33.9 किमी
संकेत से आच्छादित क्षेत्रफल (A’) = πd2= 3.14 × (33.9)2 किमी2
= 3608.52 किमी2

3.  क्षेत्रफल में % वृद्धि = \(\frac { A’ – A }{ A }\)x100%
\(\frac { 3608.52 – 803.84 }{ 803.84 }\) x100 = 348.9%

प्रश्न 2.
आयनमण्डल की एक विशेष परत से परिवर्तित होने वाली व्योम तरंगों की अधिकतम आवृत्ति fmax = 9(Nmax)1/2 पायी जाती है, जहाँ Nmax उस आयनमण्डल की परत में अधिकतम इलेक्ट्रॉन घनत्व है। किसी दिन यह प्रेक्षण किया गया 5 मेगाहर्ट्स से अधिक आवृत्ति के सिग्नल आयनमण्डल को F, परत से परावर्तित होकर प्राप्त नहीं होते हैं जबकि 8 मेगाहर्ट्स से अधिक आवृत्ति के सिग्नल आयनमण्डल को F2 परत से परावर्तन के द्वारा प्राप्त नहीं होते हैं। उस दिन F1 तथा Fपरतों के अधिकतम इलेक्ट्रॉन घनत्व की गणना कीजिए।
हल :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 15 संचार व्यवस्था img 7

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MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

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वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
वायु में एक-दूसरे से 30 सेमी दूरी पर रखे दो छोटे आवेशित गोलों पर क्रमशः 2 × 10-7 कूलॉम तथा 3 × 10-7 कूलॉम आवेश हैं। उनके बीच कितना बल है?
हल :
दिया है, गोलों पर आवेश q1 = 2 × 10-7 कूलॉम, q2 = 3 × 10-7 कूलॉम
तथा दूरी r = 30 सेमी = 0.3 मीटर
कूलॉम के नियम से,
गोलों के बीच कार्यरत वैद्यत बल F = \(\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \frac{q_{1} q_{2}}{r^{2}}=9 \times 10^{9} \times \frac{2 \times 10^{2} \times 8 \times 10^{7}}{(0.3)^{2}}\)
= 6 × 10-3 न्यूटन।

प्रश्न 2.
0.4माइक्रोकूलॉम आवेश के किसी छोटे गोले पर अन्य छोटे आवेशित गोले के कारण वायु में 0.2 न्यूटन बल लगता है। यदि दूसरे गोले पर 0.8माइक्रोकूलॉम आवेश हो तो
(a) दोनों गोलों के बीच कितनी दूरी है?
(b) दूसरे गोले पर पहले गोले के कारण कितना बल लगता है?
हल :
(a) दिया है, गोलों पर आवेश q1 = 0.4 माइक्रोकूलॉम = 4 × 10-7 कूलॉम,
q2 = 0.8 माइक्रोकूलॉम = 8 × 10-7 कूलॉम
पहले गोले पर दूसरे गोले के कारण बल F12 = 0.2 न्यूटन
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 1
⇒ r = 3 x 4 x 10-2 मीटर = 12 सेमी ·
∴ गोलों के बीच दूरी = 12 सेमी।

(b) क्रिया-प्रतिक्रिया के नियम से, दूसरे गोले पर पहले के कारण बल F21 = F12 = 0.2 न्यूटन।

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प्रश्न 3.
जाँच द्वारा सुनिश्चित कीजिए कि \(\frac{k e^{2}}{G m_{e} m_{p}}\) विमाहीन है। भौतिक नियतांकों की सारणी देखकर इस अनुपात का मान ज्ञात कीजिए। यह अनुपात क्या बताता है?
हल :
k की विमाएँ = [ML3A-2T-4] तथा G की विमाएँ = [M-1L3T-2]
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 2
अतः राशि \(\frac{k e^{2}}{G m_{e} m_{p}}\) विमाहीन है।

आंकिक भाग का हल :
k = 9 x 109 न्यूटन-मीटर 2 /कूलॉम2
e = 1.6 x 10-19 कूलॉम
G = 6.67 x 10-11 न्यूटन-मीटर/किग्रा,
me = 9.1 x 10-31 किग्रा तथा mp = 1.66 x 10-27 किग्रा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 3
अत: यह राशि एक इलेक्ट्रॉन तथा एक प्रोटॉन के बीच लगने वाले स्थिर विद्युत बल तथा गुरुत्वीय बल के अनुपात को प्रदर्शित करती है। ___यह अनुपात बताता है कि इलेक्ट्रॉन व प्रोटॉन के बीच विद्युत बल गुरुत्वाकर्षण बल की तुलना में अधिक शक्तिशाली है।

प्रश्न 4.
(a) “किसी वस्तु का विद्युत आवेश क्वाण्टीकृत है।” इस प्रकथन से क्या तात्पर्य है?
(b) स्थूल अथवा बड़े पैमाने पर विद्युत आवेशों से व्यवहार करते समय हम विद्युत आवेश के क्वाण्टमीकरण की उपेक्षा कैसे कर सकते हैं?
उत्तर :
(a) किसी वस्तु का आवेश क्वाण्टीकृत है, इस कथन का तात्पर्य यह है कि हम किसी वस्तु पर आवेश एक न्यूनतम आवेश (इलेक्ट्रॉनिक आवेश e) के सरल गुणक के रूप में ही हो सकता है। अत: किसी आवेशित वस्तु पर आवेश
q= ± ne
जहाँ n = 1, 2, 3, ……….. तथा e = 1.6x 10-19 कूलॉम

(b) स्थूल अथवा बड़े पैमाने पर आवेशों से व्यवहार करते समय आवेश के क्वाण्टीकरण का कोई महत्त्व नहीं होता और इसकी उपेक्षा की जा सकती है। इसका कारण यह है कि बड़े पैमाने पर व्यवहार में आने वाले आवेश मूल आवेश की तुलना में बहुत बड़े होते हैं। उदाहरण के लिए, 1 माइक्रोकूलॉम आवेश में लगभग 1013 मूल आवेश सम्मिलित हैं। ऐसी अवस्था में आवेश को सतत मानकर व्यवहार किया जा सकता है।

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प्रश्न 5.
जब काँच की छड़ को रेशम के टुकड़े से रगड़ते हैं तो दोनों पर आवेश आ जाता है। इसी प्रकार की परिघटना का वस्तुओं के अन्य युग्मों में भी प्रेक्षण किया जाता है। स्पष्ट कीजिए कि यह प्रेक्षण आवेश संरक्षण नियम से किस प्रकार सामंजस्य रखता है?
उत्तर :
घर्षण द्वारा आवेशन की घटनाएँ आवेश संरक्षण नियम के साथ पूर्ण सामंजस्य रखती हैं। जब इस प्रकार की किसी घटना में दो उदासीन वस्तुओं को रगड़ा जाता है तो दोनों वस्तुएँ आवेशित हो जाती हैं। घर्षण से पूर्व दोनों वस्तुएँ उदासीन होती हैं अर्थात् उनका कुल आवेश शून्य होता है। इस प्रकार के सभी प्रेक्षणों में सदैव यह पाया गया है कि एक वस्तु पर जितना धनावेश आता है, दूसरी वस्तु पर उतना ही ऋणावेश आता है। इस प्रकार घर्षण द्वारा आवेशन के बाद भी दोनों वस्तुओं का नेट आवेश शून्य ही बना रहता है।

प्रश्न 6.
चार बिन्दु आवेश qA = 2 माइक्रोकूलॉम, qB = – 5 माइक्रोकूलॉम, qC = 2 माइक्रोकूलॉम तथा qD = – 5माइक्रोकूलॉम, 10 सेमी भुजा के किसी वर्ग ABCD के शीर्षों पर अवस्थित हैं। वर्ग के केन्द्र पर रखे 1 माइक्रोकूलॉम आवेश पर लगने वाला बल कितना है?
हल :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 4
शीर्षों A व C पर रखे आवेश बराबर तथा सजातीय हैं अतः इनके कारण केन्द्र पर रखे आवेश पर लगे
बल \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{O A}\) व \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{O C}\) परिमाण में बराबर व दिशा में विपरीत हैं। अत: एक-दूसरे को निरस्त करेंगे।
अर्थात् \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{O A}+\overrightarrow{\mathrm{F}}_{O C}=0\)

इसी प्रकार शीर्षों B व D पर रखे आवेश बराबर व सजातीय हैं। अत: +2 माइक्रो इनके कारण केन्द्र पर रखे आवेश पर बल \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{O B}\) तथा \(\overrightarrow{\mathrm{F}}_{O D}\) परिमाण में कलाम बराबर व दिशा में विपरीत हैं। अत: ये भी एक-दूसरे को निरस्त करेंगे।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 5
अर्थात् परिणामी बल शून्य है।

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प्रश्न 7.
(a) स्थिर विद्युत क्षेत्र रेखा एक सतत वक्र होती है अर्थात् कोई क्षेत्र रेखा एकाएक नहीं टूट सकती। क्यों?
(b) स्पष्ट कीजिए कि दो क्षेत्र रेखाएँ कभी-भी एक-दूसरे का प्रतिच्छेदन क्यों नहीं करतीं?
उत्तर :
(a) विद्युत क्षेत्र रेखा वह वक्र है जिसके प्रत्येक बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती है। ये क्षेत्र रेखाएँ सतत वक्र होती हैं अर्थात् किसी बिन्दु पर एकाएक नहीं टूट सकतीं, अन्यथा उस बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की कोई दिशा ही नहीं होगी, जो असम्भव है।
(b) दो विद्युत क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेदित नहीं कर सकतीं; क्योंकि इस स्थिति में कटान बिन्दु पर दो स्पर्श रेखाएँ खींची जाएँगी जो उस बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की दो दिशाएँ प्रदर्शित करेंगी जो असम्भव है।

प्रश्न 8.
दो बिन्दु आवेश qA = 3 माइक्रोकूलॉम तथा qB = -3 माइक्रोकूलॉम निर्वात में एक-दूसरे से 20 सेमी दूरी पर स्थित हैं।
(a) दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा AB के मध्य-बिन्दु O पर विद्युत क्षेत्र कितना है?
(b) यदि 1.5 ×10-9 कूलॉम परिमाण का कोई ऋणात्मक परीक्षण आवेश इस बिन्दु पर रखा जाए तो यह परीक्षण आवेश कितने बल का अनुभव करेगा?
हल :
(a) आवेश qA धनात्मक तथा qB ऋणात्मक है; अत: मध्य-बिन्दु O पर qA व qB दोनों के कारण विद्युत क्षेत्र की दिशा O से B की ओर होगी।
अत: मध्य-बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता
E = EA + EB = 9 × 109 × \(\frac{q}{(O A)^{2}}\)
+ 9 × 109 × \(\frac{q}{(O B)^{2}}\) [जहाँ q = | qA| = | qB|]
= 9 × 109 \(\left[\frac{3 \times 10^{-6}}{0.1}+\frac{3 \times 10^{-6}}{0.1}\right]\)
= 5.4 × 105 न्यूटन/कूलॉम। (AB दिशा में)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 6

(b) मध्य-बिन्दु O पर रखे गए Q = – 1.5 × 10-9 कूलॉम के आवेश पर बल
F = QE = 1.5 × 10-9 × 5.4 × 10-9
= 8.1- 10-4 न्यूटन। (OA दिशा में)

प्रश्न 9.
किसी निकाय में दो आवेश qA = 2.5 x 10-7 कूलॉम तथा qB = – 2.5 x 10-7 कूलॉम क्रमशः दो बिन्दुओं A (0, 0, – 15 सेमी) तथा B (0, 0, + 15 सेमी) पर अवस्थित हैं। निकाय का कुल आवेश तथा विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण क्या है?
हल :
निकाय का कुल आवेश
q = qA + qB = 0
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 7
(∴ दोनों आवेश परिमाण में बराबर व विपरीत चिह्न के हैं)
आवेशों के बीच की दूरी 2 a = AB = \(\sqrt{\left[(0-0)^{2}+(0-0)^{2}+(15+15)^{2}\right]}\)= 30 सेमी
ya  2a = 0.3 मीटर
∴ विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण p= qA × 2 a = 2.5 × 10-7Cx 0.3 मीटर
= 7.5 × 10-8 कूलॉम-मीटर।
इसकी दिशा बिन्दु B से A की ओर है।

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प्रश्न 10.
4 × 10-9 कूलॉम-मीटर द्विध्रुव आघूर्ण का कोई विद्युत द्विध्रुव 5 × 104 न्यूटन कूलॉम-1 परिमाण के किसी एकसमान विद्युत क्षेत्र की दिशा से 30° पर संरेखित है। द्विध्रुव पर कार्यरत बल आघूर्ण का परिमाण परिकलित कीजिए।
हल :
दिया है, द्विध्रुव आघूर्ण p = 4 × 10-9 कूलॉम-मीटर, विद्युत क्षेत्र E= 5 × 104 न्यूटन कूलॉम-1, θ = 30° द्विध्रुव पर कार्यरत बल आघूर्ण t = pE sin θ = 4 × 10-9 × 5 × 104 × \(\frac{1}{2}\) = = 10-4 न्यूटन-मीटर।

प्रश्न 11.
ऊन से रगड़े जाने पर कोई पॉलीथीन का टुकड़ा 3 × 10-7 कूलॉम के ऋणावेश से आवेशित पाया
गया।
(a) स्थानान्तरित (किस पदार्थ से किस पदार्थ में ) इलेक्ट्रॉनों की संख्या आकलित कीजिए। (b) क्या ऊन से पॉलीथीन में संहति का स्थानान्तरण भी होता है?
हल :
(a) टुकड़े पर आवेश q = 3 × 10-7 कूलॉम
q = ne से,
n = \(\frac{q}{e}=\frac{3 \times 10^{-7}}{1.6 \times 10^{-19}} \)
= 1.875 × 1012
∵ पॉलीथीन का टुकड़ा ऋणावेशित है। अत: 1.875 × 1012 इलेक्ट्रॉन ऊन से पॉलीथीन पर स्थानान्तरित हुए हैं।

(b) हाँ, संहति का भी स्थानान्तरण होता है।
∵ एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान me = 9.1 × 10-31 किग्रा
∴ ऊन से पॉलीथीन में स्थानान्तरित संहति m = nme = 1.875 × 1012 × 9.1 × 10-31
= 1.7 × 10-18 किग्रा।

प्रश्न 12.
(a) दो विद्युतरोधी आवेशित ताँबे के गोलों A तथा B के केन्द्रों के बीच की दूरी 50 सेमी है। यदि दोनों गोलों पर पृथक्-पृथक् आवेश 6.5 × 10-7कूलॉम हैं तो इनमें पारस्परिक स्थिर विद्युत प्रतिकर्षण बल कितना है? गोलों के बीच की दूरी की तुलना में गोलों A तथा B की त्रिज्याएँ नगण्य हैं।
(b) यदि प्रत्येक गोले पर आवेश की मात्रा दो गुनी तथा गोलों के बीच की दूरी आधी कर दी जाए तो प्रत्येक गोले पर कितना बल लगेगा?
हल :
(a) दिया है, गोलों पर आवेश q1 = q2 = 6.5 x 10-7 कूलॉम
∵ बीच की दूरी r = 50 सेमी = 0.5 मीटर
∴ बीच की दूरी की तुलना में गोलों की त्रिज्याएँ नगण्य हैं। अत: गोले बिन्दु आवेश की भाँति व्यवहार करेंगे।
गोलों के बीच प्रतिकर्षण बल F = \(\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \frac{q_{1} q_{2}}{r^{2}}\)
= 9 × 109 × \(\frac{6.5 \times 10^{-7} \times 6.5 \times 10^{-7}}{(0.5)^{2}}\)
= 1.521 × 10-2 न्यूटन।

(b)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 8
अतः प्रत्येक गोले पर बल = 16 × 1.521 × 10-2
= 0.24 न्यूटन।

प्रश्न 13.
मान लीजिए प्रश्न 12 में गोले A तथा B साइज में सर्वसम हैं तथा इसी साइज का कोई तीसरा अनावेशित गोला पहले तो पहले गोले के सम्पर्क, तत्पश्चात् दूसरे गोले के सम्पर्क में लाकर, अन्त में दोनों से ही हटा लिया जाता है। अब A तथा B के बीच नया प्रतिकर्षण बल कितना है?
हल :
माना प्रारम्भ में प्रत्येक गोले ‘A’ व ‘B’ पर अलग-अलग q आवेश है। (q = 6.5 × 10-7 कूलॉम)
माना तीसरा अनावेशित गोला C है।
∵ गोले A व C समान आकार के हैं। अतः परस्पर स्पर्श कराने पर ये कुल आवेश (qA + qC = q+ 0) को आधा-आधा बाँट लेंगे।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 9

प्रश्न 14.
चित्र 1.4 में किसी ,एकसमान स्थिर विद्युत क्षेत्र में तीन आवेशित कणों के पथचिह्न (tracks) दर्शाए गए हैं। तीनों आवेशों के चिह्न लिखिए। इनमें से किस कण का आवेश-संहति अनुपात (\(\frac{\boldsymbol{q}}{m}\)) अधिकतम है?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 10
उत्तर :
किसी विद्युत क्षेत्र में क्षेत्र के लम्बवत् गतिमान आवेशित कण का पाश्विक विस्थापन
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 11
जहाँ x कणों द्वारा विद्युत क्षेत्र के लम्ब दिशा में तय दूरी तथा Vx, X-अक्ष की दिशा में वेग है। यदि सभी कण विद्युत क्षेत्र में समान वेग Vx से प्रवेश करते हैं तो
y ∝ \(\frac{\boldsymbol{q}}{m}\)
(∵ विद्युत क्षेत्र की लम्बाई x सबके लिए समान है)
∵कण (3) का विक्षेप सर्वाधिक है। अत: इसके लिए \(\frac{\boldsymbol{q}}{m}\) का मान सर्वाधिक होगा।

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प्रश्न 15.
एकसमान विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathbf{E}}=3 \times 10^{3} \hat{\mathbf{i}}\) न्यूटन कूलॉम पर विचार कीजिए।
(a) इस क्षेत्र का 10 सेमी भुजा के वर्ग के उस पार्श्व से जिसका तल y-z तल के समान्तर है, गुजरने वाला फ्लक्स क्या है?
(b) इसी वर्ग से गुजरने वाला फ्लक्स कितना है यदि इसके तल का अभिलम्ब X-अक्ष से 60° का कोण बनाता है?
हल :
दिया है, \(\overrightarrow{\mathbf{E}}=3 \times 10^{3} \hat{\mathbf{i}}\) न्यूटन/कूलॉम
(a) वर्ग की भुजा = 10 सेमी = 0.1 मीटर
∴ वर्ग का क्षेत्रफल ΔS = (0.1)2 मीटर2 ⇒ ∆S = 0.01 मीटर2
∵ वर्ग का तल Y-z समतल के समान्तर है।
अत: इस पर अभिलम्ब इकाई सदिश \(\hat{n}=\hat{i}\) होगा।
∴ \(\Delta \overrightarrow{\mathrm{S}}=0.01 \hat{\mathrm{i}}\) मीटर 2
∴ वर्ग के फलक से गुजरने वाला फ्लक्स \(\phi_{E}=\overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot \Delta \overrightarrow{\mathrm{S}}=\left(3 \times 10^{3} \hat{\mathrm{i}}\right) \cdot(0.01 \hat{\mathrm{i}})\)
= 30 न्यूटन-मीटर/कूलॉम।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 12

(b) ∵ विद्युत-क्षेत्र X-अक्ष के अनुदिश है तथा वर्ग पर अभिलम्ब X-अक्ष से 60° का कोण बनाता है,
∴ \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) व \(\overrightarrow{\mathrm{n}}\) के बीच का कोण 60° होगा।
∴ वर्ग से गुजरने वाला फ्लक्स \(\phi_{E}=\overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot \Delta \overrightarrow{\mathrm{S}}=E \Delta S \cos 60^{\circ}\)
= (3 x 103न्यूटन/कूलॉम) × (0.01 मीटर) × \(\frac{1}{2}\)
= 15 न्यूटन-मीटर2 / कूलॉम।

प्रश्न 16.
प्रश्न 15 में दिए गए एकसमान विद्युत क्षेत्र का 20 सेमी भुजा के किसी घन से (जो इस प्रकार अभिविन्यासित है कि उसके फलक निर्देशांक तलों के समान्तर हैं) कितना नेट फ्लक्स गुजरेगा?
हल :
एक घन के 6 फलक होंगे। इनमें से दो फलक Y-Z समतल के, दो Z-X समतल के तथा दो X-Y समतल के समान्तर होंगे।
∵ विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}=3 \times 10^{3} \hat{\mathrm{i}}\) न्यूटन/कूलॉम X-अक्ष के अनुदिश है। अतः यह Z-X तथा X-Y समतलों के समान्तर फलकों के समान्तर होगा।
∴ इन चारों फलकों से गुजरने वाला फ्लक्स शून्य होगा।
∴ विद्युत क्षेत्र एकसमान है। अत: Y-Z समतल के समान्तर फलकों में से जितना फ्लक्स एक फलक से अन्दर प्रविष्ट होगा उतना ही फ्लक्स दूसरे फलक से बाहर आएगा।
अत: घन से गुजरने वाला नेट फ्लक्स शून्य होगा।

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प्रश्न 17.
किसी काले बॉक्स के पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र की सावधानीपूर्वक ली गई माप यह संकेत देती है कि बॉक्स के पृष्ठ से गुजरने वाला नेट फ्लक्स 8.0 x 103 न्यूटन-मीटर2/कूलॉम है।
(a) बॉक्स के भीतर नेट आवेश कितना है?
(b) यदि बॉक्स के पृष्ठ से नेट बहिर्मुखी फ्लक्स शून्य है तो आप यह निष्कर्ष निकालेंगे कि बॉक्स के भीतर . कोई आवेश नहीं है? क्यों अथवा क्यों नहीं?
हल :
(a) गाउस प्रमेय से, \(\phi_{E}=\frac{q}{\varepsilon_{0}}\)
∴ \(q=\varepsilon_{0} \phi_{E}\) = 8.854 x 10-12 x 8.0 x 103 = 7.08 x 10-8 कूलॉम
∴ बॉक्स के भीतर स्थित आवेश 0.071 माइक्रोकूलॉम है।

(b) गाउस प्रमेय से, \(\phi_{E}=\frac{q}{\varepsilon_{0}}\)
⇒ \(q=\varepsilon_{0} \phi_{E}\)
∵ \(\phi_{E}=0\) (∴ बॉक्स के भीतर नेट आवेश q= 0)
अतः इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि बॉक्स के भीतर नेट आवेश शून्य है यद्यपि उसके भीतर विभिन्न आवेश हो सकते हैं।

प्रश्न 18.
चित्र 1.6 में दर्शाए अनुसार 10 सेमी भुजा के किसी वर्ग के केन्द्र से ठीक 5 सेमी ऊँचाई पर कोई + 10 माइक्रोकूलॉम का आवेश रखा है। इस वर्ग से गुजरने वाले 5 सेमी विद्युत फ्लक्स का परिमाण क्या है?
हल :
एक ऐसे घन की कल्पना कीजिए, जिसका केन्द्र वह बिन्दु है, जिस पर आवेश रखा है तथा जिसका एक फलक. दिया गया वर्ग है।
गाउस के प्रमेय से,
घन के पृष्ठ से गुजरने वाला फ्लक्स
= \(\frac{1}{\varepsilon_{0}}\) x घन के भीतर कुल आवेश = \(\frac{q}{\varepsilon_{0}}\)
∵ घन के सभी 6 फलक केन्द्र के सापेक्ष समान स्थिति में हैं,
∴ प्रत्येक फलक से गुजरने वाला फ्लक्स
ΦE = \(\frac{1}{6} \times \frac{q}{\varepsilon_{0}}=\frac{10 \times 10^{-6}}{6 \times 8.854 \times 10^{-12}}\)
= 1.88 x 105 न्यूटन-मीटर2/कलॉम।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 13

प्रश्न 19.
2.0 माइक्रोकूलॉम का कोई बिन्दु आवेश किसी किनारे पर 9.0 सेमी किनारे वाले किसी घनीय गाउसीय पृष्ठ के केन्द्र पर स्थित है। पृष्ठ से गुजरने वाला नेट फ्लक्स क्या है?
हल :
गाउस के प्रमेय से,
घन के पृष्ठ से गुजरने वाला फ्लक्स ΦE= \(\frac{1}{\varepsilon_{0}}\) घन के भीतर स्थित कुल आवेश
∵ यहाँ घन के भीतर स्थित आवेश q = 2.0 माइक्रोकूलॉम
ΦE = \(\frac{1}{8.854 \times 10^{-12}} \) x 2.0 x 10-6
= 2. 26 x 105 न्यूटन-मीटर2 / कूलॉम।

प्रश्न 20.
किसी बिन्दु आवेश के कारण, उस बिन्दु को केन्द्र मानकर खींचे गए 10 सेमी त्रिज्या के गोलीय गाउसीय पृष्ठ पर विद्युत फ्लक्स -1.0 x 103 न्यूटन-मीटर2/कूलॉम है। (a) यदि गाउसीय पृष्ठ की त्रिज्या दो गुनी कर दी जाए तो पृष्ठ से कितना फ्लक्स गुजरेगा? (b) बिन्दु आवेश का मान क्या है?
हल : (a) गाउस प्रमेय के अनुसार किसी बन्द पृष्ठ से गुजरने वाला फ्लक्स, पृष्ठ के भीतर स्थित नेट आवेश पर निर्भर करता है न कि पृष्ठ के आकार पर।
∵ त्रिज्या दोगुनी करने पर भी पृष्ठ के भीतर स्थित नेट आवेश वही बना रहता है। अतः पृष्ठ से अभी भी उतना ही फ्लक्स – 1.0 x 103 न्यूटन मीटर2/कूलॉम गुजरेगा।

(b) सूत्र \(\phi_{E}=\frac{q}{\varepsilon_{0}} \) से,
गोलीय पृष्ठ के केन्द्र पर रखा बिन्दु आवेश \(q=\varepsilon_{0} \phi_{E}\)
= 8.854 x 10-12 x (-1.0 x 103)
= – 8.854 x 10-9 कूलॉम।

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प्रश्न 21.
10 सेमी त्रिज्या के चालक गोले पर अज्ञात परिमाण का आवेश है। यदि गोले के केन्द्र से 20 सेमी दूरी पर विद्युत क्षेत्र 1.5 × 103 न्यूटन/कूलॉम त्रिज्यतः अन्तर्मुखी (radially inward) है तो गोले पर नेट आवेश कितना है?
हल :
गोले के केन्द्र को केन्द्र मानते हुए 20 सेमी त्रिज्या का गाउसीय गोलीय पृष्ठ खींचा। इस पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र E = 1.5 × 103 न्यूटन/कूलॉम (अन्तर्मुखी है)

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 14
माना इस पृष्ठ के किसी बिन्दु पर एक सूक्ष्म अल्पांश \(\overrightarrow{d \mathrm{A}}=d A \hat{\mathrm{n}} \) लिया।
तब \(\overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot d \overrightarrow{\mathrm{A}}\) = E.dA cos 180° = – E.dA
∴ पृष्ठ से गुजरने वाला कुल फ्लक्स
\(\phi_{E}=\oint_{A} \overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot d \overrightarrow{\mathrm{A}}=-\oint_{A} E \cdot d A=-E \oint_{A} d A\)
= – EA = – E [4π × (0.2)2] [∵ A = 4 πr2]
परन्तु गाउस प्रमेय से, कई = \(\phi_{E}=\frac{q}{\varepsilon_{0}}\)
जहाँ q = गाउसीय पृष्ठ के भीतर नेट आवेश = चालक गोले पर कुल आवेश
∴ \(\frac{q}{\varepsilon_{0}}\) = – E [4 π × (0.2)2]
∴ चालक गोले पर आवेश q = – ε0E × 4π × (0.2)2
= – 8.854 × 10-12 × 1.5×103 × 4 × 3.14 × (0.2)2
= – 6.67 × 10-9 कूलॉम
= – 6.67 नैनोकूलॉम।

प्रश्न, 22.
2.4 मीटर व्यास के एकसमान आवेशित चालक गोले का पृष्ठीय आवेश घनत्व 80.0 माइक्रोकूलॉम/मीटर है।
(a) गोले पर आवेश ज्ञात कीजिए।
(b) गोले के पृष्ठ से निर्गत कुल विद्युत फ्लक्स क्या है?
हल :
(a) ∵ गोला एकसमान रूप से आवेशित है,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 15
∴ गोले पर आवेश q = 4πr2σ
= 4 × 3.14 × (1.2 मीटर)2 × 80.0 माइक्रो कूलॉम/मीटर2
= 1447 माइक्रोकूलॉम
= 1.45 × 10-3 कूलॉम।

(b) गोले के पृष्ठ से निर्गत फ्लक्स
\(\phi_{E}=\frac{q}{\varepsilon_{0}}=\frac{1.45 \times 10^{-3}}{8.854 \times 10^{-12}}\)
= 1.6 × 108 न्यूटन-मीटर2/कूलॉम।

प्रश्न 23.
कोई अनन्त रैखिक आवेश 2 सेमी दूरी पर 9 × 104 न्यूटन/कूलॉम विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। रैखिक आवेश घनत्व ज्ञात कीजिए।
हल :
रैखिक आवेश घनत्व 2 के कारण दूरी पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
\(E=\frac{\lambda}{2 \pi \varepsilon_{0} r}\) [∴= 2πε0rE]
यहाँ r = 2 सेमी = 2 × 10-2 मीटर, E = 9 × 104 न्यूटन/कूलॉम
∴ रेखीय आवेश घनत्व λ= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 8.854 × 10-12 × 2 × 10-2 × 9 × 104
= 1.0 × 10-7 कूलॉम-मीटर-1
= 10 माइक्रोकुलॉम/मीटर।

प्रश्न 24.
दो बड़ी, पतली धातु की प्लेटें एक-दूसरे के समानान्तर एवं निकट हैं। इनके भीतरी फलकों पर, प्लेटों के पृष्ठीय आवेश घनत्वों के चिह्न विपरीत हैं तथा इनका परिमाण 17.0 × 10-22 कूलॉम/मीटर है। (a) पहली प्लेट के बाह्य क्षेत्र में, (b) दूसरी प्लेट के बाह्य क्षेत्र में तथा (e) प्लेटों के बीच में विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathbf{E}}\) का परिमाण परिकलित कीजिए।
हल :
दिया है, प्रत्येक प्लेट पर पृष्ठीय आवेश घनत्व
σ = 17.0x 10-22 कूलॉम/मीटर2
प्रत्येक एकल प्लेट के कारण प्लेट के समीप किसी बिन्दु पर क्षेत्र E = E2 =
(a) व (b) प्लेटों के बाह्य क्षेत्रों में E1 व E2 परस्पर विपरीत हैं (देखें चित्र)। अत: बाह्य क्षेत्रों में नेट विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता E = E1 – E2 = 0 शून्य होगी।
(c) प्लेटों के बीच के स्थान में E1 व E2 दोनों एक ही दिशा में होंगे।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 16
∴ नेट विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E = E1 + E2 = \(\frac{\sigma}{2 \varepsilon_{0}}+\frac{\sigma}{2 \varepsilon_{0}}\)
E = \(\frac{\sigma}{\varepsilon_{0}}=\frac{17.0 \times 10^{-22}}{8.854 \times 10^{-12}}\)
= 1.92 x 10-10 न्यूटन/कूलॉम।
विद्युत क्षेत्र की दिशा प्लेटों के लम्बवत् धन से ऋण प्लेट की ओर होगी।

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प्रश्न 25.
मिलिकन तेल बूंद प्रयोग में 2.55 x 104 न्यूटन/कूलॉम के नियत विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में 12 इलेक्ट्रॉन ‘ आधिक्य की कोई तेल बूंद स्थिर रखी जाती है। तेल का घनत्व 1. 26 ग्राम सेमी-3 है। बूँद की त्रिज्या का आकलन कीजिए। (g= 9.81 मीटर सेकण्ड-2,e = 1.6 x 10-19 कूलॉम)।
हल :
माना बूंद की त्रिज्या r है, तब
बूंद का द्रव्यमान \(m=\frac{4}{3} \pi r^{3} \rho\)
तथा बूंद पर आवेश q = ne
सन्तुलन की अवस्था में, द का भार (mg) = विद्युत बल (qE)
या \(\frac{4}{3} \pi r^{3} \rho \times g=n e E\)
∴ \(r^{3}=\frac{3 n e E}{4 \pi \rho g}\)
यहाँ n = 12,p = 1.26 ग्राम सेमी-3 = 1.26 x 103 किग्रा-मीटर-3, e = 1.6 x 10-19 कूलॉम
E = 2.55 x 104 न्यूटन/कूलॉम, g = 9.81 मीटर/सेकण्ड2
∴ \(r^{3}=\frac{3 \times 12 \times 1.6 \times 10^{-19} \times 2.55 \times 10^{4}}{4 \times 3.14 \times 1.26 \times 10^{3} \times 9.81}\)
= 946 x 10 -21मीटर3
∴ बूंद की त्रिज्या r = (946 x 10-21 मीटर 3)1/3 = 9.81 x 10-7 मीटर = 9.81 x 10-4 मिमी।

प्रश्न 26.
चित्र-1.9 में दर्शाए गए वक्रों में से कौन सम्भावित स्थिर विद्युत क्षेत्र रेखाएँ निरूपित नहीं करते?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 17
उत्तर :
केवल चित्र (c) सम्भावित स्थिर विद्युत क्षेत्र रेखाएँ निरूपित करता है।
(a) विद्युत क्षेत्र रेखाएँ सदैव चालक पृष्ठ के लम्बवत् होती हैं, इस चित्र में रेखाएँ चालक पृष्ठ के लम्बवत् नहीं
(b) क्षेत्र रेखाओं को ऋणावेश से धनावेश की ओर जाते दिखाया गया है जो कि सही नहीं है।
(d) क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को काट रही हैं जो कि सही नहीं है।
(e) क्षेत्र रेखाएँ बन्द वक्रों के रूप में प्रदर्शित की गई हैं जो कि सही नहीं है।

EXTRA SHOTS

  • वैद्युत बल रेखाएँ किसी चालक के पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर लम्बवत् होती हैं।
  • वैद्युत बल रेखाएँ धनावेश से प्रारम्भ होकर ऋणावेश पर समाप्त होती हैं। |
  • वैद्युत बल रेखाएँ कभी बन्द वक्र नहीं बनाती हैं।

प्रश्न 27.
दिकस्थान के किसी क्षेत्र में, विद्युत क्षेत्र सभी जगह Zदिशा के अनुदिश है। परन्तु विद्युत क्षेत्र का परिमाण नियत नहीं है, इसमें एकसमान रूप से Z-दिशा के अनुदिश 105 न्यूटन कूलॉम-1 प्रति मीटर की दर से वृद्धि होती है। वह निकाय जिसका ऋणात्मक Z-दिशा में कुल द्विध्रुव आघूर्ण 10-7 कूलॉम-मीटर के बराबर है, कितना बल तथा बल-आघूर्ण अनुभव करता है?
हल :
प्रश्नानुसार, द्विध्रुव-Z-अक्ष के अनुदिश संरेखित है;
अतः
Px = 0, Py = 0, pz = – 10-7 कूलॉम-मीटर
\(\frac{\partial E}{\partial x}\)=0,\(\frac{\partial E}{\partial y}\)= 0,\(\frac{\partial E}{\partial z}\)=105न्यूटन कूलॉम-1 मीटर-1
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 18
= 0+ 0+ (-10-7) x 105
→ F = – 0.01 न्यूटन।  (ऋण Z-अक्ष की दिशा में)
∵ विद्युत क्षेत्र Z-अक्ष के अनुदिश है तथा \(\overrightarrow{\mathrm{p}}\), -Z-अक्ष के अनुदिश है; अत: θ = 180°
∴ बल-आघूर्ण t = pE sin 180° = 0

प्रश्न 28.
(a) किसी चालक A, जिसमें चित्र 1.10 (a) में दर्शाए अनुसार कोई कोटर/गुहा (Cavity) है, को Q आवेश दिया गया है। यह दर्शाइए कि समस्त आवेश चालक के बाह्य पृष्ठ पर प्रतीत होना चाहिए।
(b) कोई अन्य चालक B जिस पर आवेश q है, को कोटर/गुहा (Cavity) में इस प्रकार धंसा दिया जाता है कि चालक B चालक A से विद्युतरोधी रहे। यह दर्शाइए कि चालक A के बाह्य पृष्ठ पर कुल आवेश Q+ q है चित्र-1.10 है [चित्र 1.10 (b)]।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 19
(c) किसी सुग्राही उपकरण को उसके पर्यावरण के प्रबल स्थिर विद्युत क्षेत्रों से परिरक्षित किया जाना है। सम्भावित उपाय लिखिए।
उत्तर :
(a) हम एक ऐसी गाउसीय सतह की कल्पना करते हैं जो पूर्णतया चालक के भीतर स्थित है तथा चालक के बाह्य पृष्ठ के अत्यन्त समीप है।
∵ चालक के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है; अत: इस गाउसीय सतह से गुजरने वाला नेट विद्युत फ्लक्स शून्य होगा।
तब गाउस प्रमेय से, q= ६0Φ = ६00 = 0
अर्थात् सतह के भीतर आवेश शून्य होगा।
अतः चालक का सम्पूर्ण आवेश उसके बाह्य पृष्ठ पर होगा।

(b) दिया है, चालक A पर कुल आवेश = Q
चालक B पर कुल आवेश = q
माना चालक A में बनी कोटर के पृष्ठ पर q1 आवेश है तथा चालक A के बाह्य पृष्ठ पर Q1 आवेश है। अब चालक A पर कुल आवेश
Q1 + q1 = Q……………….(1)
पुनः एक ऐसे गाउसीय पृष्ठ की कल्पना कीजिए जो पूर्णतः चालक ‘A’ के भीतर स्थित है परन्तु इसके बाह्य पृष्ठ . अत्यन्त समीप है।
∵ चालक के भीतर विद्युत-क्षेत्र शून्य होता है; अत: इस पृष्ठ से गुजरने वाला कुल फ्लक्स शून्य होगा। अत: इस गाउसीय पृष्ठ के भीतर कुल आवेश = 0
अर्थात्
q1 + q = 0 ⇒ q1 = – q
∴ समीकरण (1) से, Q1 – q= Q
∴ चालक A के बाह्य पृष्ठ पर कुल आवेश Q1 = Q + q होगा।

(c) खोखले बन्द चालक के भीतर विद्युत-क्षेत्र शून्य होता है। अत: किसी सुग्राही उपकरण को पर्यावरण के प्रबल स्थिर विद्युत-क्षेत्रों से परिरक्षित करने के लिए उसे खोखले बन्द चालक के भीतर रखना चाहिए।

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प्रश्न 29.
किसी खोखले आवेशित चालक में उसके पृष्ठ पर कोई छिद्र बनाया गया है। यह दर्शाइए कि छिद्र में विद्युत क्षेत्र \(\left(\frac{\sigma}{2 \varepsilon_{0}}\right) \hat{\mathbf{n}}\) है, जहाँ \(\hat{\mathbf{n}}\) अभिलम्बवत् दिशा में बहिर्मुखी एकांक सदिश है तथा छिद्र के निकट पृष्ठीय आवेश घनत्व है।
उत्तर :
माना किसी खोखले चालक को कुछ धनावेश दिया गया है, जो तुरन्त ही उसके पृष्ठ पर समान रूप से वितरित हो जाता है। माना आवेश का पृष्ठ घनत्व σ है।
चालक के पृष्ठ के किसी अवयव dA पर विचार कीजिए। स्पष्ट है कि इस क्षेत्रफल अवयव पर उपस्थित आवेश की मात्रा q = σdA होगी। माना इस क्षेत्रफल अवयव के अत्यन्त समीप चालक के पृष्ठ के बाहर तथा अन्दर दो बिन्दु क्रमशः P तथा Q हैं। चूँकि बिन्दु P पृष्ठ के समीप है; अत: चालक के कारण बिन्दु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E = \(\frac{\sigma}{\varepsilon_{0}}\) पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की ओर होगी। माना बिन्दु P पर अवयव dA तथा शेष चालक के कारण विद्युत-क्षेत्र की तीव्रताएँ क्रमश: E1 व E2 हैं, तब स्पष्टतया E1 व E2 दोनों पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की ओर होंगी तथा परिणामी तीव्रता E, E1 व E2 के योग के बराबर होगी।
अतः E1 + E2 = \(\frac{\sigma}{\varepsilon_{0}}\)

चूँकि बिन्दु Q क्षेत्रफल अवयव dA के अत्यन्त समीप परन्तु P के विपरीत ओर है; अत: इस अवयव के कारण बिन्दु Q पर क्षेत्र की तीव्रता E1 के बराबर परन्तु दिशा में विपरीत होगी, जबकि शेष चालक के कारण Q पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E2 के बराबर तथा उसी की दिशा में होगी। चूँकि बिन्दु Q चालक के अन्दर है; अतः बिन्दु Q पर परिणामी तीव्रता शून्य होगी।

अतः बिन्दु Q पर परिणामी तीव्रता E2 – E1 = 0 अथवा E1 = E2 [∵ बिन्दु Q पर E1 व E2 के विपरीत हैं।
समीकरण (1) से,
E1 = E2 = \(\frac{\sigma}{2 \varepsilon_{0}}\)
अतः शेष चालक के कारण बिन्दु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
E2 = \(\frac{\sigma}{2 \varepsilon_{0}}\)

अब यदि बिन्दु P पर एक छिद्र (Hole) कर दिया जाए तो क्षेत्र अवयव dA तथा इसके कारण आन्तरिक बिन्दु Q पर विद्युत क्षेत्र E1 दोनों समाप्त हो जाएंगे।
तब विद्युत क्षेत्र E2 छिद्र के किसी बिन्दु पर केवल शेष चालक के कारण शेष रहेगा।
अतः छिद्र पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
\(\overrightarrow{\mathrm{E}}=\frac{\sigma}{2 \varepsilon_{0}} \hat{\mathrm{n}}\)
जहाँ \(\hat{\mathbf{n}}\) छिद्र पर बहिर्मुखी दिशा में एकांक सदिश है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 20

प्रश्न 30.
गाउस नियम का उपयोग किए बिना किसी एकसमान रैखिक आवेश घनत्व 2 के लम्बे पतले तार के कारण विद्युत क्षेत्र के लिए सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर :
एकसमान रैखिक आवेश घनत्व वाले लम्बे पतले तार के कारण विद्युत क्षेत्र — माना एक लम्बे सीधे धनावेशित तार का एकसमान रैखिक आवेश घनत्व λ है। हमें इस तार के कारण किसी बिन्दु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 21
बिन्दु P से तार पर लम्ब PO खींचा। तार पर बिन्दु O से x दूरी पर एक O सूक्ष्म अवयव AB= dx लिया।
∵ रैखिक आवेश घनत्व = λ
∴ अवयव dx पर आवेश की मात्रा dq = λdx
इस अवयव dx के कारण बिन्दु P पर
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता dE =\(\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \cdot \frac{d q}{(A P)^{2}}\) (AP दिशा में)
माना ∠OPA = θ तथा OP=r
विद्युत क्षेत्र dE को OP के अनुदिश तथा OP के लम्बवत् दिशा में वियोजित करने पर,
OP के लम्बवत् दिशा में वियोजित घटक = dE sin θ व OP के अनुदिश दिशा में वियोजित घटक = dE cos θ
∴ तार लम्बा है तथा बिन्दु 0 के दोनों ओर जाता है। अतः एक ओर के प्रत्येक अवयव dx के संगत दूसरी ओर भी एक अन्य अवयव dx अवश्य ही ऐसा होगा कि इन दोनों के कारण OP के लम्ब दिशा में विद्युत-क्षेत्र के वियोजित घटक परस्पर निरस्त करेंगे जबकि OP की दिशा में वियोजित घटक परस्पर जुड़ जाएंगे।

अतः पूरे तार के कारण बिन्दु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
E = Σ dE cos θ
परन्तु cos θ = \(\frac{O P}{A P}\)
तथा AP2 = OP2 + 0A2
⇒ AP = (r2 + x2)1/2
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 22

x= r tan θ रखने पर,
dx = r. sec2 θ dθ
x = -∞ ⇒ θ = \(-\frac{\pi}{2}\)
व x = +∞ ⇒ θ = \(\frac{\pi}{2}\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 23

क्षेत्र की दिशा तार के लम्बवत् तथा तार से परे होगी। यदि तार ऋणावेशित है तो क्षेत्र की दिशा तार की ओर होगी।

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प्रश्न 31.
अब ऐसा विश्वास किया जाता है कि स्वयं प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन (जो सामान्य द्रव्य के नाभिकों का निर्माण करते हैं) और अधिक मूल इकाइयों जिन्हें क्वार्क कहते हैं, के बने हैं। प्रत्येक प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन तीन क्वार्को से मिलकर बनता है। दो प्रकार के क्वार्क होते हैं : ‘अप’ क्वार्क (u द्वारा निर्दिष्ट) जिन पर (+\(\frac{2}{3}\)) e आवेश तथा ‘डाउन’ क्वार्क (d द्वारा निर्दिष्ट) जिन पर (-\(\frac{1}{3}\)) आवेश होता है, इलेक्ट्रॉन से मिलकर सामान्य द्रव्य बनाते हैं। (कुछ अन्य प्रकार के क्वार्क भी पाए गए हैं जो भिन्न असामान्य प्रकार का द्रव्य बनाते हैं।) प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन के सम्भावित क्वार्क संघटन सुझाइए।
उत्तर :
दिया है, u = +\(\frac{2}{3}\)e तथा d =-\(\frac{1}{3}\)e
∵ प्रोटॉन पर आवेश = +e
⇒+\(\frac{2}{3}\)e + \(\frac{2}{3}\)e – \(\frac{1}{e}\)= +e
या u + u + d = +e
अतः प्रोटॉन 2u क्वार्क तथा 1d क्वार्क से मिलकर बना है।

COMMON ERRORS

• आवेश के क्वाण्टीकरण के अनुसार किसी वस्तु पर न्यूनतम आवेश इलेक्ट्रॉनिक आवेश (e) है। परन्तु प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन; क्वार्क से मिलकर बने होते हैं। अत: यह स्पष्ट समझ लेना आवश्यक है कि क्वार्क स्वतन्त्र रूप में नहीं पाया जाता है। अत: किसी वस्तु पर न्यूनतम आवेश में ही हो सकता है।

∵ न्यूट्रॉन पर आवेश = 0
⇒ +\(\frac{2}{3}\)e+\(\frac{1}{3}\)e-\(\frac{1}{3}\)e = 0
या u+u+d = 0
अत: न्यूट्रॉन एक u क्वार्क तथा 2d क्वार्क से मिलकर बना है।

प्रश्न 32.
(a) किसी यादृच्छिक स्थिर विद्युत क्षेत्र विन्यास पर विचार कीजिए। इस विन्यास की किसी शून्य-विक्षेप स्थिति (null-point अर्थात् जहाँ \(\overrightarrow{\mathbf{E}}=0\)) पर कोई छोटा परीक्षण आवेश रखा गया है। यह दर्शाइए कि परीक्षण आवेश का सन्तुलन आवश्यक रूप से अस्थायी है।
(b) इस परिणाम का समान परिमाण तथा चिह्नों के दो आवेशों (जो एक-दूसरे से किसी दूरी पर रखे हैं) के सरल विन्यास के लिए सत्यापन कीजिए।
उत्तर :
(a) माना शून्य विक्षेप स्थिति में रखे परीक्षण आवेश का सन्तुलन स्थायी है। अब यदि परीक्षण आवेश को सन्तुलन की स्थिति से थोड़ा-सा विस्थापित किया जाए तो आवेश पर एक प्रत्यानयन बल लगना चाहिए जो आवेश को वापस सन्तुलन की ओर ले जाए। इसका यह अर्थ हुआ कि उस स्थान पर शून्य विक्षेप बिन्दु की ओर जाने वाली क्षेत्र रेखाएँ होनी चाहिए। जबकि स्थिर विद्युत क्षेत्र रेखाएँ कभी भी शून्य विक्षेप बिन्दु तक नहीं पहुँचतीं। अत: हमारी यह परिकल्पना कि परीक्षण आवेश का सन्तुलन स्थायी है, गलत है। यह निश्चित रूप से अस्थायी सन्तुलन है।

(b) माना दो बिन्दु आवेश (प्रत्येक + q) परस्पर 2a दूरी पर रखे हैं। एक बिन्दु आवेश – Q इनके मध्य-बिन्दु पर रखा है।
बिन्दु आवेशों + q,+q के कारण – Q पर कार्यरत बल बराबर तथा विपरीत होने के कारण बिन्दु आवेश – Q सन्तुलन की स्थिति में रहेगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 24
अब यदि – Q आवेश को x दूरी B की ओर विस्थापित कर दें तो इस पर कार्यरत बल
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 25

स्पष्ट है कि FPB > FPA अतः कण पर नेट बल PB दिशा में लगेगा जो कण को सन्तुलन की स्थिति से दूर ले जाएगा। अतः कण का मध्य-बिन्दु C पर सन्तुलन अस्थायी है।

प्रश्न 33.
प्रारम्भ में X-अक्ष के अनुदिश υx चाल से गति करता हुआ, दो आवेशित प्लेटों के मध्य क्षेत्र में m द्रव्यमान तथा -q आवेश का एक कण प्रवेश करता है (चित्र-1.14 में कण 1 के समान)। प्लेटों की लम्बाई L है। इन दोनों प्लेटों के बीच एकसमान विद्युत क्षेत्र E बनाए रखा जाता है। दर्शाइए कि प्लेट के अन्तिम किनारे पर कण का ऊर्ध्वाधर विक्षेप \(\frac{q E L^{2}}{\left(2 m v_{x}^{2}\right)}\) है।
अथवा एक आवेशित कण किसी एकसमान विद्युत क्षेत्र में, क्षेत्र के लम्बवत् दिशा में गति करता हुआ प्रवेश करता है। दिखाइए कि क्षेत्र के भीतर इस कण का गमन पथ परवलयाकार होगा।
उत्तर :
एकसमान विद्युत क्षेत्र में आवेशित कण (इलेक्ट्रॉन) का गमन-पथ-जब कण का प्रारम्भिक वेग विद्युत क्षेत्र की दिशा के लम्बवत् है-माना धातु की दो समान्तर प्लेटें जिन पर विपरीत आवेश हैं, एक-दूसरे से कुछ दूरी पर स्थित हैं। इन प्लेटों के बीच के स्थान में विद्युत-क्षेत्र एकसमान है। माना ऊपरी प्लेट धनावेशित है, जबकि नीचे की ।। प्लेट ऋणावेशित है। अतः विद्युत क्षेत्र E कागज के तल में नीचे की ओर दिष्ट होगा [चित्र-1.14]।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 26
माना कोई कण जिस पर आवेश -q है तथा जो X-अक्ष के अनुदिश गतिमान है, υx वेग से विद्युत क्षेत्र E में प्रवेश करता है। चूँकि विद्युत क्षेत्र Y-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में नीचे की ओर है। अतः कण पर Y-अक्ष के अनुदिश लगने वाला बल Fy= qE
कण पर X-अक्ष के अनुदिश कोई बल कार्य नहीं करेगा।
माना कण का द्रव्यमान m है, तब इस बल के कारण कण की गति में उत्पन्न त्वरण \(a_{y}=\frac{F_{y}}{m}=\frac{q E}{m}\)
चूँकि कण का X-अक्ष के अनुदिश प्रारम्भिक वेग υx तथा त्वरण शून्य है। अत: X-अक्ष के अनुदिश t सेकण्ड में चली गई दूरी
x = υxt ………….(1)
चूँकि कण का Y-अक्ष के अनुदिश प्रारम्भिक वेग शून्य तथा त्वरण ay है। अत: Y-अक्ष के अनुदिश t सेकण्ड में चली गई दूरी
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 27
यह समीकरण y = cx2 के समरूप है तथा परवलय को प्रकट करती है। अत: विद्युत क्षेत्र में अभिलम्बवत् प्रवेश करने वाले आवेशित कण का गमन-पथ परवलयाकार होता है।
माना कण प्लेटों के बीच के क्षेत्र को बिन्दु A(x, y) पर छोड़ता है, तब
बिन्दु A के लिए x = L (∵ प्लेटों की लम्बाई = L)
पथ के समीकरण में मान रखने पर,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 28

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प्रश्न 34.
प्रश्न 33 में वर्णित कण की इलेक्ट्रॉन के रूप में कल्पना कीजिए जिसको υx = 2.0 x 106 मीटर सेकण्ड-1 के साथ प्रक्षेपित किया गया है। यदि 0.5 सेमी की दूरी पर रखी प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र E का मान 9.1x 102 न्यूटन/कूलॉम हो तो ऊपरी प्लेट पर इलेक्ट्रॉन कहाँ टकराएगा?
(|e|= 1.6 x 10-19 कूलॉम, me = 9.1 x 10-31 किग्रा)
हल :
सूत्र y = \(\frac{q E}{2 m v_{x}^{2}})\)x2 से, x2 =(\(\frac{2 m v_{x}^{2}}{q E})\)y
यहाँ E = 9.1 x 102 न्यूटन/कूलॉम, q = e = 1.6x 10-19 कूलॉम,
m= me = 9.1 x 10-31 किग्रा
υx = 2.0 x 106 मीटर सेकण्ड-1
तथा y = \(\frac{0.5}{2}\) सेमी =\(\frac{0.005}{2}\) मीटर
मान रखने पर,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 29
∴ x = 1.12 x 10-2 मीटर = 1.12 सेमी
अत: इलेक्ट्रॉन ऊपरी प्लेट से 1.12 सेमी दूरी पर टकराएगा।
यहाँ यह माना गया है कि इलेक्ट्रॉन प्लेटों के बीच के स्थान में ठीक बीच में प्रवेश करता है। अतः प्लेट से टकराते समय इसका ऊर्ध्वाधर विक्षेप y = \(\frac{0.5}{2}\) सेमी लिया गया है।

वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar LQ Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र  बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

1. एक बिन्दु आवेश +q किसी वियुक्तं चालक तल से d दूरी पर स्थित है। तल के दूसरी ओर के बिन्दु P पर क्षेत्र की दिशा –
(a) तल के लम्बवत् तथा तल से दूर की ओर है
(b) तल के लम्बवत् परन्तु तल की ओर है
(c) बिन्दु आवेश से दूर की ओर दिष्ट है ।
(d) अरीयतः बिन्दु आवेश की ओर है।
उत्तर :
(a) तल के लम्बवत् तथा तल से दूर की ओर है

2. कोई अर्धगोला एकसमान धनावेशित है। गोले के केन्द्र से परे इसके किसी व्यास पर स्थित बिन्दु पर जो केन्द्र से दूर है, विद्युत क्षेत्र की दिशा –
(a) इस व्यास के लम्बवत् है
(b) इस व्यास के समान्तर है
(c) इस व्यास की ओर किसी कोण पर झुकी है
(d) इस व्यास से दूर किसी कोण पर झुकी है।
उत्तर :
(a) इस व्यास के लम्बवत् है

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3. चित्र में विद्यत क्षेत्र रेखाएँ दर्शायी गई हैं जिनमें एक वैद्युत द्विध्रुव P चित्र में दर्शाए अनुसार रखा है। निम्नलिखित प्रकथनों में कौन-सा सही है –
(a) द्विध्रुव किसी बल का अनुभव नहीं करेगा
(b) द्विध्रुव दायीं ओर किसी बल का अनुभव करेगा
(c) द्विध्रुव बायीं ओर किसी बल का अनुभव करेगा
(d) द्विध्रुव ऊपर की ओर किसी बल का अनुभव करेगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 30
उत्तर :
(c) द्विध्रुव बायीं ओर किसी बल का अनुभव करेगा

4. नीचे दिए गए चित्रों में पृष्ठ से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स –
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 31

(a) चित्र (iv) में सर्वाधिक है
(b) चित्र (iii) में सर्वाधिक है
(c) चित्र (ii) में चित्र (iii) के समान है, परन्तु चित्र (iv) से कम है
(d) सभी चित्रों में समान है।
उत्तर :
(d) सभी चित्रों में समान है।

वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसी यादृच्छिक पृष्ठ में कोई द्विध्रुव परिबद्ध है। इस पृष्ठ से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स कितना है?
उत्तर :
यादृच्छिक पृष्ठ द्वारा घिरा कुल आवेश (Σq) = q + (-q) = 0, अत: पृष्ठ से गुजरने वाला विद्युत फलक्स + Φ = \(\frac{1}{\varepsilon_{0}} \Sigma q\) = 0

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प्रश्न 2.
किसी धातु के गोलीय खोल की भीतरी त्रिज्या R, तथा बाहरी त्रिज्या R, है। इस खोल की गोलीय गुहिका के केन्द्र पर कोई आवेश Q रखा है। खोल के (i) भीतरी पृष्ठ तथा (ii) बाहरी पृष्ठ पर, पृष्ठीय आवेश-घनत्व क्या होगा?
उत्तर :
गोलीय गुहिका के केन्द्र पर रखे आवेश Q के कारण गोलीय खोल के भीतरी पृष्ठ पर – Q आवेश तथा बाहरी पृष्ठ पर +Q आवेश प्रेरित होगा।
(i) भीतरी पृष्ठ पर पृष्ठीय आवेश घनत्व = –\(\frac{Q}{4 \pi R_{1}^{2}}\)
(ii) बाहरी पृष्ठ पर पृष्ठीय आवेश घनत्व = +\(\frac{Q}{4 \pi R_{2}^{2}}\)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 32

प्रश्न 3.
किसी एकसमान आवेशित खोखले सिलिण्डर के लिए विद्युत क्षेत्र रेखाएँ खींचिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 33
उत्तर :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 34

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प्रश्न 4.
किसी a लम्बाई के घन के फलकों से गुजरने वाला फ्लक्स कितना होगा यदि आवेश स्थित हो –
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 35
(a) A पर जो घन का एक कोना है।
(b) B पर जो किसी कोर का मध्य-बिन्दु है।
(c) C पर जो धन के किसी फलक का केन्द्र है।।
(d) D पर जो B तथा C का मध्य-बिन्दु है।
उत्तर :
(a) यदि 4-4 घन के ब्लॉक ऊपर नीचे रखे हों तथा आवेश q उनके मध्य शीर्ष A पर हो तब दिए गए घन के फलकों से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स = \(\phi_{E}=\frac{1}{8} \cdot \frac{q}{\varepsilon_{0}}\)

(b) बिन्दु B, चार घनों के ब्लॉक में सममित रूप से स्थित होगा। अतः दिए गए घन के फलकों से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स \(\phi_{E}=\frac{1}{4} \cdot \frac{q}{\varepsilon_{0}}\)

(c) बिन्दु C, दो घनों के ब्लॉक में सममित रूप से स्थित होगा। अतः दिए गए घन के फलकों से गुजरने वाला
फ्लक्स = \(\phi_{E}=\frac{1}{2} \cdot \frac{q}{\varepsilon_{0}}\)

(d) बिन्दु D भी दो घनों के ब्लॉक में सममित रूप से स्थित होगा अतः दिए गए घन के फलकों से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स = \(\phi_{E}=\frac{1}{2} \cdot \frac{q}{\varepsilon_{0}}\)

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वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र आंकिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
दो आवेशों q तथा -3q को X-अक्ष पर ‘d’ दूरी के पृथकन के साथ रखा गया है। तीसरे आवेश 2q को कहाँ रखा जाए ताकि यह कोई बल अनुभव न करे?
हल : माना 2q आवेश को X-अक्ष पर q आवेश से x दूरी पर, आवेशों से बाहर रखने पर वह कोई बल अनुभव नहीं करता है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 36
अत: 2q आवेश के लिए,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 37

प्रश्न 2.
पाँच आवेश, जिनमें प्रत्येक q है, ‘a’ भुजा के किसी नियमित पंचभुज के कोनों पर रखे गए हैं –
(a) इस पंचभुज के केन्द्र O पर विद्युत क्षेत्र कितना होगा?
(b) यदि किसी एक कोने (जैसे A) से आवेश को हटा दिया जाए तो O पर विद्युत क्षेत्र कितना होगा?
(c) यदि A पर आवेश को – १ द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया जाए तो O पर विद्युत क्षेत्र कितना होगा?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 38
उत्तर :
(a) सममिति के कारण पंचभुज के केन्द्र O पर परिणामी विद्युत क्षेत्र शून्य होगा।

(b) केन्द्र 0 पर परिणामी विद्युत क्षेत्र E = 0
∴ कोने A पर स्थित आवेश q के कारण विद्युत क्षेत्र + शेष चार कोनों पर स्थित आवेशों के कारण विद्युत क्षेत्र = 0
अथवा शेष चार कोनों पर स्थित आवेशों के कारण विद्युत क्षेत्र = – (कोने A पर स्थित आवेश q के कारण विद्युत क्षेत्र)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 39

(c) बिन्दु A पर आवेश को – q द्वारा प्रतिस्थापित कर देने पर केन्द्र O पर विद्युत क्षेत्र = (-q आवेश के कारण केन्द्र 0 पर विद्युत क्षेत्र) + (शेष चार कोनों पर स्थित आवेशों के कारण केन्द्र O पर विद्युत क्षेत्र)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र img 40

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MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 3 प्रबंध एवं व्यावसायिक वातावरण

MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 3 प्रबंध एवं व्यावसायिक वातावरण

प्रबंध एवं व्यावसायिक वातावरण Important Questions

प्रबंध एवं व्यावसायिक वातावरण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए-

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन -सी व्यावसायिक पर्यावरण की विशेषता नहीं है –
(a) शहरीकरण
(b) कर्मचारी
(c) तुलनात्मकता
(d) अनिवार्यता।
उत्तर:
(b) कर्मचारी

प्रश्न 2.
निम्न में कौन -व्यावसायिक पर्यावरण का सर्वश्रेष्ठ द्योतक है –
(a) पहचान करना
(b) निष्पादन में सुधार
(c) हो रहे परिवर्तनों का सामना
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 3.
निम्न में कौन -सा सामाजिक पर्यावरण का उदाहरण है –
(a) अर्थव्यवस्था में धन की आपूर्ति
(b) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम
(c) देश की संरचना
(d) परिवार का गठन
उत्तर:
(d) परिवार का गठन

प्रश्न 4.
उदारीकरण का अर्थ है –
(a) अर्थव्यवस्थाओं के बीच एकात्मकता
(b) सरकारी बाध्यता एवं संशोधन में कमी
(c) योजनाबद्ध विनिवेश नीति
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) सरकारी बाध्यता एवं संशोधन में कमी

प्रश्न 5.
जनसंख्या के आकार एवं वितरण को माना जाता है –
(a) टेक्नॉलॉजीकल परिवेश का अंग
(b) कानूनी परिवेश का अंग
(c) राजनैतिक परिवेश का अंग
(d) सामाजिक परिवेश का अंग
उत्तर:
(d) सामाजिक परिवेश का अंग

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. आधुनिक टेक्नॉलॉजी अर्थव्यवस्था के शीघ्र विकास में …………. होती है।
  2. प्रथम पंचवर्षीय योजना …………. से प्रारंभ की गई थी।
  3. भारत में नये आर्थिक सुधारों का प्रारंभ …………… से किया गया।
  4. व्यवसाय के ……………………. घटक नियंत्रणीय होते हैं।
  5. भारत में …………………..आर्थिक प्रणाली को अपनाया गया है।
  6. अंतर्राष्ट्रीय परिवेश सदैव ………….. रहता है।
  7. कानूनी परिवेश का संबंध सरकार द्वारा पारित ………. से होता है।

उत्तर:

  1. सहायक
  2. 1 अप्रैल 1951
  3. सन् 1991
  4. आंतरिक
  5. मिश्रित
  6. परिवर्तनशील
  7. अधिनियम।

प्रश्न 3.
एक शब्द या वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. वैश्वीकरण का क्या अर्थ है ?
  2. लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई नीति को क्या कहते हैं ?
  3. विदेश नीति, किस व्यावसायिक वातावरण का घटक है ?
  4. EPCG स्कीम का पूरा नाम क्या है ?
  5. निर्यात को प्रोत्साहित करने हेतु स्थापित व्यावसायिक क्षेत्र को क्या कहते हैं ?

उत्तर:

  1. विश्व की अर्थव्यवस्थाओं का एकीकरण
  2. रोजगार नीति
  3. राजनैतिक
  4. निर्यात संवर्द्धन सामान योजना
  5. निर्यात संवर्द्धन नीति।

प्रश्न 4.
सत्य या असत्य बताइये-

  1. उदारीकरण भारत में व्यवसाय तथा उद्योग को प्रभावित करने में असफल रहा है।
  2. आर्थिक सामाजिक तथा राजनीतिक परिस्थितियाँ व्यावसायिक वातावरण का निर्माण करती हैं।
  3. वैश्वीकरण ने भारत में व्यवसाय तथा उद्योग को प्रभावित किया है। ।
  4. बाहरी घटक व्यावसायिक वातावरण को प्रभावित नहीं करते।
  5. सरकारी नीति में परिवर्तनों का व्यवसाय तथा उद्योग पर प्रभाव नहीं पड़ता है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. असत्य।

प्रश्न 5.
सही जोड़ी बनाइये-
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 3 प्रबंध एवं व्यावसायिक वातावरण - 1

प्रबंध एवं व्यावसायिक वातावरण अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यावसायिक वातावरण के संदर्भ में LPG का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
L- Liberalisation उदारीकरण
P- Privatisation निजीकरण
G- Globalisation वैश्वीकरण

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प्रश्न 2.
फेरा (FERA) तथा फेमा (FEMA) का पूरा नाम लिखिए।भारत में नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत किस नियम को समाप्त करके FEMA लागू किया गया ?
उत्तर:
FERA – Foreign Exchange Regulation Act
FEMA – Foreign Exchange Management Act.
भारत में नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत FERA को समाप्त करके FEMA लागू किया गया।

प्रश्न 3.
व्यष्टि (सूक्ष्म) तथा समष्टि (व्यापक) वातावरण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
व्यष्टि (सूक्ष्म) वातावरण-इसका अभिप्राय उस पर्यावरण या वातावरण से है जिसके अंतर्गत उन घटकों को सम्मिलित किया जाता है जिनका व्यवसाय के साथ नजदीकी संबंध होता है।

समष्टि (व्यापक) वातावरण-इसका अभिप्राय उस वातावरण से है जिसके अंतर्गत उन घटकों को सम्मिलत किया जाता है जिनका व्यवसाय के साथ दूर का संबंध होता है।

प्रश्न 4.
सामान्य तथा विशिष्ट पर्यावरण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सामान्य तथा विशिष्ट पर्यावरण में अंतर-

सामान्य पर्यावरण

  1. सामान्य पर्यावरण वह है जो फर्मों को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है।
  2. इसमें सामान्य शक्तियाँ शामिल होती हैं।
  3. इसके घटक हैं-सामाजिक पर्यावरण, राजनैतिक पर्यावरण l

विशिष्ट पर्यावरण

  1. विशिष्ट पर्यावरण उस पर्यावरण को कहते हैं। जो फर्मों को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है।
  2. इसमें विशिष्ट शक्तियाँ शामिल होती हैं।
  3. इसके घटक हैं-ग्राहक, जनता, पूर्तिकर्ता,विपणन मध्यस्थ आदि।

प्रश्न 5.
भारत सरकार को नई आर्थिक नीति किन कारणों से अपनानी पड़ी?
उत्तर:
भारत को नई आर्थिक नीति को अपनाने के निम्न कारण थे –

  1. राजकोषीय संकट
  2. आंतरिक ऋण में वृद्धि
  3. मुद्रा स्फीति में वृद्धि
  4. विदेशी विनिमय संचय में गिरावट
  5. रुपये के मूल्य में कमी
  6. नकारात्मक भुगतान संतुलन
  7. भारतीय रिजर्व बैंक तथा भारतीय स्टेट बैंक द्वारा सोना बंधक रखना।

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प्रश्न 6.
भारतीय कानूनी पर्यावरण के कोई तीन उदाहरण दीजिए जिन्होंने व्यवसाय को प्रभावित किया है।
उत्तर:
भारतीय कानूनी पर्यावरण ने व्यवसाय को निम्न प्रकार से प्रभावित किया है

  1. नशा संबंधी उत्पाद का विज्ञापन करना प्रतिबंधित है।
  2. उद्योगों की लाइसेंस से मुक्ति की नीति।
  3. तम्बाकू उत्पादों पर वैधानिक चेतावनी होना आवश्यक है।

प्रश्न 7.
उन्नत तकनीकी में किन-किन बातों पर जोर दिया जाता है ?
उत्तर:
उन्नत तकनीकी में निम्न बातों पर जोर दिया जाता है

  1. वैज्ञानिक शोध
  2. नव-प्रवर्तन
  3. आविष्कार
  4. सुधार
  5. नव-प्रवर्तन का प्रसार।

प्रश्न 8.
सन् 1991 के पश्चात् भारत के आर्थिक परिवेश में जो परिवर्तन हुए उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
सन् 1991 के पश्चात् भारत के आर्थिक परिवेश में जो परिवर्तन हुए उनके नाम निम्न हैं

  1. आधुनिकीकरण
  2. निजीकरण
  3. वैश्वीकरण
  4. उदारीकरण।

प्रश्न 9.
भारत में नई आर्थिक नीति को अपनाये जाने के क्या कारण थे?
उत्तर:
भारत में नई आर्थिक नीति को अपनाये जाने के निम्न कारण थे

  1. विदेशी विनिमय की कमी
  2. उच्च सरकारी घाटा
  3. बढ़ती हुई कीमतें
  4. आन्तरिक ऋण में वृद्धि
  5. विदेशी व्यापार में गिरावट।

प्रश्न 10.
1956 की औद्योगिक नीति में उद्योगों का वर्गीकरण किस प्रकार किया गया था ?
उत्तर:
1956 की औद्योगिक नीति को तीन वर्गों में बाँटा गया था

  1. प्रथम वर्ग-प्रथम वर्ग में वे उद्योग रखे गये थे, जिनका विकास केवल राज्य द्वारा होता है।
  2. द्वितीय वर्ग-इस वर्ग में वे उद्योग रखे गये थे जो राज्यों के स्वामित्व में चले जाएँगे तथा भविष्य में नये कारखानों की स्थापना राज्य द्वारा ही की जायेगी।-
  3. तृतीय वर्ग-तृतीय वर्ग में शेष उद्योग रखे गये थे। ये उद्योग मुख्य रूप से उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन करने वाले उद्योग थे।

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प्रश्न 11.
नई आर्थिक नीति में किन-किन उद्योगों के लिये लाइसेंस लेना अनिवार्य है ?
उत्तर:
नई आर्थिक नीति में, वर्तमान में छः उद्योगों के लिये लाइसेंस लेना अनिवार्य है जो कि निम्नांकित हैं-

  1. खतरनाक रसायन
  2. सिगरेट
  3. ड्रग्स एवं फार्मास्युटिकल्स
  4. एल्कोहॉलिक पेय
  5. प्रतिरक्षा उपकरण
  6. औद्योगिक विस्फोटक।

प्रश्न 12.
भारत की चार आर्थिक नीतियों के नाम बताइये।
उत्तर:
भारत की चार आर्थिक नीतियाँ निम्न हैं

  1. आयात-निर्यात नीति
  2. रोजगार नीति
  3. औद्योगिक नीति
  4. कृषि नीति
  5. विदेशी विनियोग नीति
  6. कर नीति।

प्रश्न 13.
सन् 1991 के पश्चात् भारत के आर्थिक परिवेश की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
सन् 1991 के पश्चात्, भारत के आर्थिक परिवेश में अनेक क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। सरकार ने व्यवसाय तथा उद्योग से संबंधित नीतियों में अनेक परिवर्तन किये, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं

  1. नई औद्योगिक नीति की घोषणा- उद्योगों को लाइसेंस मुक्त कर विभिन्न उद्योगों के लिए पूँजी की सीमा समाप्त कर दी गई।
  2. नई व्यापार नीति-व्यापार में न्यूनतम प्रतिबंध, न्यूनतम प्रशासनिक नियम नियंत्रण सुनिश्चित किया गया।
  3. पूँजी बाजार में सुधार-भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड की स्थापना।
  4. राजकोषीय नीति में सुधार-सार्वजनिक व्ययों पर नियंत्रण तथा सभी राज्यों में ‘वैट ‘ योजना लागू करना।

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प्रश्न 14.
नवीन मौद्रिक नीति पर प्रकाश डालिये।
उत्तर:
उदारीकरण करने तथा अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार बढ़ाने के लिये सरकार द्वारा मौद्रिक नीति में सुधार करने हेतु नरसिंहम समिति गठित की गई जिसमें निम्न सिफारिशें पेश की गई

  1. ब्याज दरों का निर्धारण स्वतंत्र रूप से किया जाये अर्थात् इसमें रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप न हो।
  2. बैंकिंग पद्धति की संरचना नये ढंग से की जाये।
  3. बैंकों को अधिक स्वतंत्रता प्रदान की जाये।

प्रश्न 15.
व्यावसायिक वातावरण से आपका क्या आशय है ?
उत्तर:
व्यावसायिक वातावरण दो शब्दों का संयोजन है। व्यावसायिक शब्द का अर्थ है व्यवसाय से संबंधित तथा वातावरण का अर्थ है वे समस्त बाह्य शक्तियाँ जिनका प्रभाव व्यवसाय के संचालन पर पड़ता है। व्यावसायिक वातावरण सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, कानूनी तथा तकनीकी घटकों का मिश्रण है।

प्रश्न 16.
व्यावसायिक उद्यमों के लिए अपने पर्यावरण को समझना क्यों महत्वपूर्ण है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
व्यावसायिक पर्यावरण से आशय सभी व्यक्ति, संस्थाओं तथा अन्य शक्तियों से है जो व्यावसायिक संगठन को प्रभावित करते हैं। जैसे-सरकारी नीतियाँ, तकनीकी परिवर्तन, सामाजिक तथा राजनैतिक परिस्थितियाँ। व्यवसाय के प्रबंधकों को अपने पर्यावरण को समझना इसलिए आवश्यक है क्योंकि वे बाहरी शक्तियों को पहचानकर उनसे अपना बचाव कर सकें। निम्नलिखित कारणों से भी व्यावसायिक उपक्रम के लिए अपने आसपास के पर्यावरण को समझना आवश्यक होता है

  1. भविष्य के लिए मार्ग को निर्धारित करने में सहायक
  2. प्रतियोगिता का सामना करने के लिए,
  3. तेजी से हो रहे परिवर्तनों से सुरक्षा के लिए
  4. अवसरों की पहचान करना।

प्रश्न 17.
व्यावसायिक वातावरण के विभिन्न आयाम लिखिए।
उत्तर:
व्यावसायिक वातावरण के आयाम निम्न हैं

  1. जनसंख्या संबंधी परिवेश
  2. भौतिक परिवेश
  3. आर्थिक परिवेश
  4. सामाजिक परिवेश।

प्रश्न 18.
वैश्वीकरण के कोई दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
वैश्वीकरण के दो उद्देश्य निम्न हैं

  1. अकुशलता को दूर करना-उद्योगों तथा फर्मों की अकुशलता को दूर करना वैश्वीकरण का प्रमुख उद्देश्य है।
  2. उत्पादकता में वृद्धि-अल्पविकसित राष्ट्रों में संसाधनों के आबंटन में सुधार लाना है, इसमें पूँजी उत्पाद अनुपात कम होगा और श्रम की उत्पादकता बढ़ेगी।

प्रश्न 19.
व्यवसाय के आंतरिक वातावरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
व्यावसायिक वातावरण के वे घटक जिनका निर्धारण संस्था द्वारा होता है उसे आंतरिक घटक (वातावरण) कहते हैं। ये घटक नियंत्रणीय होते हैं जिनका व्यवसाय पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है एवं इनमें आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सकता है। ये घटक इस प्रकार हैं

  1. व्यवसाय की नीतियाँ, नियम व योजनाएँ
  2. व्यवसाय के उद्देश्य, लक्ष्य एवं दृष्टिकोण
  3. व्यवसाय की उत्पादन प्रणाली
  4. व्यवसाय के साधन, संसाधन ।

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प्रश्न 20.
व्यवसाय के सामाजिक वातावरण को समझाइये।
उत्तर:
सामाजिक वातावरण का आशय समाज में होने वाली समस्त गतिविधियों से है। इन गतिविधियों में सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी सम्मिलित हैं। व्यवसाय की समस्त गतिविधियाँ व क्रियायें समाज के अन्दर ही की जाती है अर्थात् व्यवसाय भी एक सामाजिक कार्य है। समाज में जाति, धर्म, लिंग, परिवार, समूह आदि से सम्बन्धित क्रियायें होती हैं। इन समस्त क्रियाओं का प्रभाव व्यवसाय पर पड़ता है। अर्थात् सामाजिक वातावरण का प्रभाव व्यावसायिक परिस्थितियों पर अवश्य पड़ता है। सामाजिक वातावरण के प्रमुख घटक निम्न हैं जिनसे व्यावसायिक वातावरण प्रभावित होता है

  1. परिवार की संरचना एवं भूमिका
  2. समाज में जाति एवं वर्ग व्यवस्था

प्रश्न 21.
व्यवसाय के वैधानिक नियामक पर प्रकाश डालिये।
उत्तर:
कानून विधान या नियमावली सर्वशक्तिमान होते हैं इनके अनुसार कार्य न करने पर व्यक्ति दण्ड का भागी होता है। इसलिये वैधानिक नियमों का व्यवसाय पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। व्यवसाय के संचालन के लिये सुरक्षा व अधिकारों से रक्षा आवश्यक है जो केवल वैधानिक नियमों से ही हो सकती है। वैधानिक वातावरण से व्यवसाय को संरक्षण मिलता है । वैधानिक वातावरण का क्षेत्र काफी विस्तृत हो रहा है तथा सम्पूर्ण आर्थिक जगत पर इससे नियन्त्रण रखा जा सकता है। वैधानिक वातावरण का निर्माण करने वाले या घटक जो व्यवसाय को प्रभावित करते हैं, वे निम्नानुसार हैं

  1. संवैधानिक प्रावधान
  2. व्यापारिक सन्नियम
  3. आर्थिक सन्नियम
  4. श्रम सन्नियम।

प्रश्न 22.
बाह्य वातावरण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
किसी वातावरण में ऐसे घटक या तत्त्व जिनका अर्थ (मुद्रा) से सम्बन्ध नहीं रहता है और वे व्यवसाय के बाहर की परिस्थितियाँ निर्मित करते हैं, उन्हें अनार्थिक बाह्य वातावरण के नाम से जाना जाता है। ये अनार्थिक या गैर आर्थिक घटक निम्न होते हैं

  1. राजनैतिक वातावरण
  2. सामाजिक वातावरण
  3. वैधानिक वातावरण
  4. भौतिक वातावरण
  5. शैक्षिक वातावरण
  6. नैतिक वातावरण
  7. सांस्कृतिक वातावरण
  8. अन्तर्राष्ट्रीय वातावरण
  9. ऐतिहासिक वातावरण
  10. तकनीकी वातावरण।

MP Board Class 12 Business Studies Important Questions

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ

अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
किसी n-प्रकार के सिलिकॉन में निम्नलिखित में से कौन-सा प्रकथन सत्य है?
(a) इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक हैं और त्रिसंयोजी परमाणु अपमिश्रक हैं ।
(b) इलेक्ट्रॉन अल्पसंख्यक वाहक हैं और पंचसंयोजी परमाणु अपमिश्रक हैं
(c) होल (विवर) अल्पसंख्यक वाहक हैं और पंचसंयोजी परमाणु अपमिश्रक हैं
(d) होल (विवर) बहुसंख्यक वाहक हैं और त्रिसंयोजी परमाणु अपमिश्रक हैं।
उत्तर
(c) प्रकथन सत्य है।

प्रश्न 2.
प्रश्न 1 में दिए गए कथनों में से कौन-सा प्रकार के अर्द्धचालकों के लिए सत्य है?
उत्तर :
(d) प्रकथन सत्य है।

प्रश्न 3.
कार्बन, सिलिकॉन और जर्मेनियम, प्रत्येक में चार संयोजक इलेक्ट्रॉन हैं। इनकी विशेषता ऊर्जा बैण्ड अन्तराल द्वारा पृथक्कृत संयोजकता और चालन बैण्ड द्वारा दी गई हैं, जो क्रमशः (Eg)c, (Eg)si तथा (Eg)Ge के बराबर हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा प्रकथन सत्य है?
(a) (Eg)si < (Eg)Ge < (Eg)c
(b) (Eg)c < (E g)Ge > (Eg)si
(c) (Eg)c > (Eg)si > (Eg)Ge .
(d) (Eg)c = (Eg)si = (Eg)Ge
उत्तर
चालन बैण्ड तथा संयोजकता बैण्ड के बीच ऊर्जा अन्तराल कार्बन के लिए सबसे अधिक, सिलिकॉन के लिए उससे कम तथा जर्मेनियम के लिए सबसे कम होता है, अत: (c) प्रकथन सत्य है।

प्रश्न 4.
बिना बायस p-n सन्धि में, होल क्षेत्र में n-क्षेत्र की ओर विसरित होते हैं, क्योंकि
(a) n-क्षेत्र में मुक्त इलेक्ट्रॉन उन्हें आकर्षित करते हैं
(b) ये विभवान्तर के कारण सन्धि के पार गति करते हैं।
(c) P-क्षेत्र में होल-सान्द्रता, n-क्षेत्र में उनकी सान्द्रता से अधिक है
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर
(c) प्रकथन सत्य है।

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प्रश्न 5.
जब p-n सन्धि पर अग्रदिशिक बायस अनुप्रयुक्त किया जाता है, तब यह
(a) विभव रोधक बढ़ाता है
(b) बहुसंख्यक वाहक धारा को शून्य कर देता है
(c) विभव रोधक को कम कर देता है
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर
(c) प्रकथन सत्य है।

प्रश्न 6.
ट्रांजिस्टर की क्रिया हेतु निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं
(a) आधार, उत्सर्जक और संग्राहक क्षेत्रों की आमाप और अपमिश्रण सान्द्रता समान होनी चाहिए
(b) आधार क्षेत्र बहुत बारीक और कम अपमिश्रित होना चाहिए
(c) उत्सर्जक सन्धि अग्रदिशिक बायस है और संग्राहक सन्धि पश्चदिशिक बायस है
(d) उत्सर्जक सन्धि संग्राहक सन्धि दोनों ही अग्रदिशिक बायस हैं।
उत्तर
(b) तथा (c) प्रकथन सही है।

प्रश्न 7.
किसी ट्रांजिस्टर प्रवर्धक के लिए वोल्टता लब्धि
(a) सभी आवृत्तियों के लिए समान रहती है
(b) उच्च और निम्न आवृत्तियों पर उच्च होती है तथा मध्य आवृत्ति परिसर में अचर रहती है ।
(c) उच्च और निम्न आवृत्तियों पर कम होती है और मध्य आवृत्तियों पर अचर रहती है
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर
(c) प्रकथन सत्य है।

प्रश्न 8.
अर्द्ध तरंग दिष्टकरण में, यदि निवेश आवृत्ति 50 हर्ट है तो निर्गम आवृत्ति क्या है? समान निवेश आवृत्ति हेतु पूर्ण तरंग दिष्टकारी की निर्गम आवृत्ति क्या है?
उत्तर
अर्द्ध तरंग दिष्टकारी के लिए निर्गम आवृत्ति 50 हर्ट्स ही रहेगी परन्तु पूर्ण तरंग दिष्टकारी के लिए निर्गम आवृत्ति दोगुनी अर्थात् 100 हर्ट्स होगी।

प्रश्न 9.
उभयनिष्ठ उत्सर्जक (CE-ट्रांजिस्टर) प्रवर्धक हेतु, 2kΩ के संग्राहक प्रतिरोध के सिरों पर ध्वनि वोल्टता 2 वोल्ट है। मान लीजिए कि ट्रांजिस्टर का धारा प्रवर्धन गुणक 100 है। यदि आधार प्रतिरोध 1kΩ है तो निवेश संकेत (signal) वोल्टता और आधार धारा परिकलित कीजिए।
हल
दिया है, CE – प्रवर्धक हेतु, धारा प्रवर्धन गुणांक β = 100
निवेशी प्रतिरोध Ri = 1kΩ= 103
निर्गम प्रतिरोध Ro = 2kΩ = 2 × 103
निर्गम वोल्टता Vo = 2 वोल्ट
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 1

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प्रश्न 10.
एक के पश्चात् एक श्रेणीक्रम सोपानित में दो प्रवर्धक संयोजित किए गए हैं। प्रथम प्रवर्धक की वोल्टता लब्धि 10 और द्वितीय की वोल्टता लब्धि 20 है। यदि निवेश संकेत 0.01 वोल्ट है तो निर्गम प्रत्यावर्ती संकेत का परिकलन कीजिए।
हल
निवेश संकेत वोल्टता Vi = 0.01 वोल्ट
प्रथम प्रवर्धक की वोल्टता लब्धि = 10
द्वितीय प्रवर्धक की वोल्टता लब्धि = 20.
श्रेणी संयोजन की कुल वोल्टता लब्धि \(\frac{V_{o}}{V_{i}}\) = 20 × 10= 200
निर्गम वोल्टता Vo = 200Vi = 200 × 0.01 = 2 वोल्ट।

प्रश्न 11.
कोई p-n फोटो डायोड 2.8 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट बैण्ड अन्तराल वाले अर्द्धचालक से संविरचित है। क्या यह 6000 नैनोमीटर की तरंगदैर्घ्य का संसूचन कर सकता है?
हल
बैण्ड अन्तराल Eg = 2.8 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
प्रकाश की तरंगदैर्घ्य λ = 6000 नैनोमीटर = 6000×10-9 मीटर
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 2
∵ आपतित प्रकाश के फोटॉन की ऊर्जा, बैण्ड अन्तराल से कम है, अत: फोटो डायोड इस प्रकाश का संसूचन नहीं कर पाएगा।

प्रश्न 12.
सिलिकॉन परमाणुओं की संख्या 5x 1028 प्रति मीटर है। यह साथ ही साथ आर्सेनिक के 5×1022 परमाणु प्रति मीटर3 और इंडियम के 5×1020 परमाणु प्रति मीटर3 से अपमिश्रित किया गया है। इलेक्ट्रॉन और होल की संख्या का परिकलन कीजिए। दिया. है कि ni = 1.5 × 1016 प्रति मीटर3 । दिया गया पदार्थ n-प्रकार का है या p-प्रकार का?
हल
यहाँ दाता परमाणुओं की सान्द्रता ND = 5 ×1022 परमाणु प्रति मीटर3
ग्राही परमाणुओं की सान्द्रता NA = 5 ×1020 परमाणु प्रति मीटर3
= 0.05 x 1022 परमाणु प्रति मीटर3
नैज वाहक सान्द्रता ni = 1.5 × 1016 प्रति मीटर3
नैज परमाणु सान्द्रता N= 5 × 1028 प्रति मीटर3 .
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 3

प्रश्न 13.
किसी नैज अर्द्धचालक में ऊर्जा अन्तराल Eg का मान 1.2 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट है। इसकी होल गतिशीलता इलेक्ट्रॉन गतिशीलता की तुलना में काफी कम है तथा ताप पर निर्भर नहीं है। इसकी 600 K तथा 300 K पर चालकताओं का क्या अनुपात है? यह मानिए की नैज वाहक सान्द्रता ni की ताप निर्भरता इस प्रकार व्यक्त होती है- \(\boldsymbol{n}_{\boldsymbol{i}}=\boldsymbol{n}_{0} \exp \left(-\frac{\boldsymbol{E}_{\boldsymbol{g}}}{\boldsymbol{2} \boldsymbol{k}_{\boldsymbol{B}} \boldsymbol{T}}\right)\)
जहाँ n0 एक स्थिरांक है।
हल
नैज अर्द्धचालक का ऊर्जा अन्तराल Eg = 1.2 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट
तथा परम ताप T1 = 600K व T2 = 300K
माना उक्त तापों पर अर्द्धचालक की चालकताएँ क्रमश: σ1व σ2 हैं।
अर्द्धचालक की चालकता निम्नलिखित सूत्र द्वारा प्राप्त होती है-
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 4

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प्रश्न 14.
किसी p-n सन्धि डायोड में धारा I को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है
I=Io\(\left[\exp \left(\frac{e V}{2 k_{B} T}\right)-1\right]\)
जहाँ I0 को उत्क्रमित संतृप्त धारा कहते हैं, V डायोड के सिरों पर वोल्टता है तथा यह अग्रदिशिक बायस के लिए धनात्मक तथा पश्चदिशिक बायस के लिए ऋणात्मक है। I डायोड से प्रवाहित धारा है, kB बोल्ट्समान नियतांक (8.6x 10-5 इलेक्ट्रॉन-वोल्ट-K-1) है तथा T परम ताप है। यदि किसी दिए गए डायोड के लिए I0 = 5x 10-12 ऐम्पियर तथा T= 300K है, तब
(a) 0.6 वोल्ट अग्रदिशिक वोल्टता के लिए अग्रदिशिकधारा क्या होगी?
(b) यदि डायोड के सिरों पर वोल्टता को बढ़ाकर 0.7 वोल्ट कर दें तो धारा में कितनी वृद्धि हो जाएगी?
(c) गतिक प्रतिरोध कितना है?
(d) यदि पश्चदिशिक वोल्टता को 1 वोल्ट से 2 वोल्ट कर दें तो धारा का मान क्या होगा?
हल
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 5

(b) माना अग्र बायस वोल्टता को V = + 0.7 वोल्ट करने पर धारा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 6

(c) डायोड का गतिक प्रतिरोध Rd =\(\frac{\Delta V}{\Delta I}\) = \(\frac { 0.7-0.6 }{ 2.957 }\) =0.033Ω

(d) पश्चदिशिक वोल्टता 1V (V = -1V) के लिए
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MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 8
इसी प्रकार V = – 2 वोल्ट हेतु, I = -5×10-12 ऐम्पियर।
अत: उत्क्रम वोल्टता के लिए धारा उत्क्रमित. संतृप्त धारा के बराबर बनी रहती है।
इससे ज्ञात होता है कि पश्चदिशिक बायस के लिए डायोड का गतिक प्रतिरोध अनन्त होता है।

प्रश्न 15.
आपको चित्र-14.1 में दो परिपथ दिए गए हैं। यह दर्शाइए कि परिपथ
(a) OR गेट की भाँति व्यवहार करता है जबकि परिपथ
(b) AND गेट की भाँति कार्य करता है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 9
हल
(a) दिया गया परिपथ NOR गेट तथा NOT गेट का श्रेणी संयोजन है। .
माना NOR गेट का निर्गम 1 है जो कि NOT गेट का निवेश है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 10
स्पष्ट है कि Y, OR गेट के निर्गम के समान है, अत: दिया गया परिपथ एक OR गेट की भाँति व्यवहार करता है। इसी तथ्य को इस गेट की सत्यमान सारणी से भी सत्यापित किया जा सकता है जो कि निम्नवत् हैA .
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 11
इस सारणी से स्पष्ट है कि हम देख सकते हैं कि इस परिपथ् का निर्गम केवल तभी निम्न है जबकि दोनों निवेश निम्न हैं, अन्यथा निर्गम उच्च है। यही OR गेट की भी विशेषता है। अतः दिया गया परिपथ एक OR गेट की भाँति व्यवहार करता है।

(b) दिए गए परिपथ में NOR गेट के दो निवेश दो NOT गेटों के निर्गमों से प्राप्त किए गए हैं। माना NOR गेट के ये दो निवेश क्रमश: y1 तथा y2 हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 12
परन्तु यह एक AND गेट का निर्गम हैं, अत: इससे स्पष्ट है कि दिया गया परिपथ एक AND गेट की भाँति व्यवहार करता है। इस तथ्य को परिपथ की सत्यमान सारणी से भी सत्यापित किया जा सकता है जो कि निम्नवत है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 13
सारणी से स्पष्ट है कि इस परिपथ का निर्गम तभी उच्च है जबकि इसके दोनों निवेश उच्च हैं। अन्यथा निर्गम निम्न है। यही AND गेट की विशेषता है।
अतः यह परिपथ एक AND गेट की भाँति व्यवहार करता है।

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प्रश्न 16.
नीचे दिए गए चित्र-14.2 में संयोजित NAND गेट संयोजित परिपथ.. की सत्यमान सारणी बनाइए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 14
अतः इस परिपथ द्वारा की जाने वाली यथार्थ तर्क संक्रिया का अभिनिर्धारण चित्र-14.2 कीजिए।
हल
चित्र-14.2 में प्रदर्शित गेट एक NAND गेट है जिसके दोनों निवेशों को लघुपथित (short circuit) करके एक कर दिया गया है।
इस परिपथ की सत्यमान सारणी निम्नवत् है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 15
∵ दोनों निवेश एक ही हैं, अतः उक्त सारणी को निम्नवत् बनाया जा सकता है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 16
इस सारणी से स्पष्ट है कि यह परिपथ NOT गेट की भाँति व्यवहार करता है।
इसकी तर्क संक्रिया निम्नलिखित है- \(Y=\bar{A}\)

प्रश्न 17.
आपको निम्न चित्र-14.3 में दर्शाए अनुसार परिपथ दिए गए हैं जिनमें NAND गेट जुड़े हैं। इन दोनों परिपथों द्वारा की जाने वाली तर्क संक्रियाओं का अभिनिर्धारण कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 17
हल
(a) माना पहले NAND गेट का निर्गम Y1 है, तब
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 18
पहले NAND गेट का निर्गम Y1 दूसरे NAND गेट का निवेश है। अत:
पूर्ण परिपथ का निर्गम
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 19
अतः दिया गया परिपथ AND गेट की भाँति व्यवहार करेगा।
इसकी तर्क संक्रिया Y = A AND B या A. B है।

(b) माना प्रथम दो NAND गेटों के निर्गम क्रमश: Y1 तथा Y2 हैं तथा ये दोनों निर्गम अन्तिम NAND. गेट के निवेश हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 20
यही इस परिपथ की तर्क संक्रिया है। इससे स्पष्ट है कि यह परिपथ एक OR गेट की भाँति व्यवहार करेगा।

प्रश्न 18.
चित्र-14.4 में दिए गए NOR गेट युक्त परिपथ की सत्यमान सारणी लिखिए और इस परिपथ द्वारा अनुपालित तर्क संक्रियाओं (OR, AND, NOT) को अभिनिर्धारित कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 21
हल
माना प्रथम NOR गेट का निर्गम 71 है तब यह निर्गम Y, दूसरे NOR गेट के लिए निवेश है।
तब \(y_{1}=\overline{A+B}\) तथा पूर्ण परिपथ का निर्गम Y = \(\overline{y_{1}}\)
इस परिपथ की सत्यमान सारणी निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 22
सारणी से स्पष्ट है कि इस परिपथ का निर्गम केवल तभी निम्न है जबकि इसके दोनों निवेश निम्न हैं, अत: यह परिपथ एक OR गेट की भाँति व्यवहार करता है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 23

प्रश्न 19.
चित्र-14.5 में दर्शाए गए केवल NOR गेटों से बने परिपथ की सत्यमान सारणी बनाइए। दोनों परिपथों द्वारा अनुपालित तर्क संक्रियाओं (OR, AND, NOT) को अभिनिर्धारित कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 24
(a) दिया गया परिपथ एक NOR गेट को प्रदर्शित करता है जिसके दो निवेशों को लघुपथित कर दिया गया है।
इस परिपथ का निर्गम निम्नलिखित है Y = \(\bar{A}\)= NOTA
इसकी सत्यमान सारणी निम्नलिखित है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 25
स्पष्ट है कि यह परिपथ एक NOT गेट की भाँति व्यवहार करता है जिसकी तर्क संक्रिया Y = \(\bar{A}\) है।

(b) दिए गए परिपथ में दो NOR गेटों के निर्गम \(\bar{A}\) तथा \(\bar{B}\) तीसरे NOR गेट के निवेश हैं।
एक NOR. गेट का निर्गम केवल तभी उच्च होता है जबकि उसके सभी निवेश निम्न हों अन्यथा निर्गम निम्न होता है। उक्त परिपथ की सत्यमान सारणी निम्नवत् है
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 26
इस परिपथ का निर्गम है \(Y=\overline{\bar{A}+\bar{B}}=\overline{\bar{A}} \cdot \overline{\bar{B}}\) (डि-मोर्गन नियम से)
⇒ Y = A. B
यही इस परिपथ की तर्क संक्रिया है। तर्क संक्रिया से स्पष्ट है कि यह परिपथ एक AND गेट की भाँति व्यवहार करता है।

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अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar LQ Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ताप में वृद्धि से किसी अर्द्धचालक की चालकता में वृद्धि का कारण यह है कि मुक्त धारावाहकों का
(a) संख्या घनत्व बढ़ जाता है ।
(b) विश्रांति काल बढ़ जाता है
(c) संख्या घनत्व तथा विश्रांति काल दोनों बढ़ जाते हैं
(d) संख्या घनत्व बढ़ जाता है और विश्रांति काल घट जाता है।
उत्तर
(d) संख्या घनत्व बढ़ जाता है और विश्रांति काल घट जाता है।

प्रश्न 2.
चित्र-14.6 में किसी सन्धि डायोड के लिए सन्धि केन्द्र से दूर जाने पर दूरी के साथ सन्धि के सिरों पर विभव प्राचीर में अन्तर को दर्शाया गया है। इसमें V. सन्धि के सिरों पर वह विभव प्राचीर है जो तब प्रभावी होती है जब सन्धि के सिरों के बीच कोई बैटरी न जुड़ी 1 हो
(a) 1 तथा 3 दोनों अग्र बायसित सन्धि के संगत हैं
(b) 3 अग्र बायसित सन्धि के संगत और 1 पश्च बायसित सन्धि के संगत है
(c) 1 अग्र बायसित सन्धि के संगत और 3 पश्च बायसित सन्धि के संगत है
(d) 3 तथा 1 दोनों पश्च बायसित सन्धि के संगत हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 27
उत्तर
(b) 3 अग्र बायसित सन्धि के संगत और 1 पश्च बायसित सन्धि के संगत है

प्रश्न 3.
चित्र-14.7 में डायोडों को आदर्श मानें तो
(a) D1 अग्र बायसित है और D2 अतः धारा A से B की ओर प्रवाहित होती है
(b) D2 अग्र. बायसित और D1 पश्च बायसित है, अत: B से A की ओर अथवा A से B की ओर कोई धारा प्रवाहित नहीं होती
(c) D1 तथा D2 दोनों अग्र बायसित हैं, अतः धारा A से B की ओर अथवा B से की ओर प्रवाहित होती है .
(d) D1 तथा D2 दोनों पश्च बायसित हैं, अत: A से B की ओर अथवा B से A की ओर कोई धारा प्रवाहित नहीं होती।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 28
उत्तर
(b) D2 अग्र. बायसित और D1 पश्च बायसित है, अत: B से A की ओर अथवा A से B की ओर कोई धारा प्रवाहित नहीं होती

प्रश्न 4.
220 V ac विद्युत प्रदाय बिन्दुओं A और B के बीच जुड़ा है (चित्र-14.8) A_ संधारित्र के सिरों पर विभवान्तर V कितना होगा
(a) 220V
(b) 110V
(c) शून्य
(d) 220/2V.
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 29
उत्तर
(d) 220/2V.

प्रश्न 5.
होल होता है
(a) इलेक्ट्रॉन का प्रतिकण
(b) सहसंयोजी आबन्ध से एक इलेक्ट्रॉन दूर छिटक जाने पर उत्पन्न रिक्ति
(c) मुक्त इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति
(d) कृत्रिम रूप से सृजित कोई कण।
उत्तर
(b) सहसंयोजी आबन्ध से एक इलेक्ट्रॉन दूर छिटक जाने पर उत्पन्न रिक्ति

प्रश्न 6.
चित्र-14.9 में दिए गए परिपथ का निर्गम होगा
(a) हर समय शून्य
(b) किसी अर्द्ध तरंग दिष्टकारी की भाँति निर्गम में धनात्मक अर्द्ध चक्र होंगे
(c) किसी अर्द्ध तरंग दिष्टकारी की भाँति निर्गम में ऋणात्मक अर्द्ध चक्र होंगे
(d) किसी पूर्ण तरंग दिष्टकारी के निर्गम जैसा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 30
उत्तर
(c) किसी अर्द्ध तरंग दिष्टकारी की भाँति निर्गम में ऋणात्मक अर्द्ध चक्र होंगे

प्रश्न 7.
चित्र-14.10 में दर्शाए परिपथ में यदि डायोड का अग्रदिश वोल्टता-पात 0.3V है, तो A एवं B के बीच विभवान्तर है
(a) 1.3V
(b) 2.3V
(c) शून्य
(d) 0.5V.
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 31
उत्तर
(b) 2.3V

प्रश्न 8.
दिए गए परिपथ (चित्र-14.11) के लिए सत्यापन सारणी है
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उत्तर
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अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सिलिकन या जर्मेनियम के मादन के लिए तात्विक मादकों का चयन प्रायः या तो समूह XIII अथवा समूह ‘xv के तत्वों में से ही क्यों किया जाता है?
उत्तर
सिलिकन या जर्मेनियम के मादन के लिए XIII अथवा XV समूह के तत्वों का चयन इसलिए किया जाता है क्योंकि इन तत्वों के परमाणुओं का आकार ऐसा होता है कि ये अर्द्धचालक क्रिस्टल जालक की संरचना को विकृत किए बिना ही सिलिकन या जर्मेनियम के साथ सहसंयोजी बन्ध बनाकर एक आवेश वाहक का क्रिस्टल में योगदान कर देते हैं।

प्रश्न 2.
Sn, C तथा Ge, Si सभी समूह XIV के तत्व हैं। फिर भी Sn चालक है, C विद्युतरोधी है जबकि Si एवं Ge अर्द्धचालक हैं। ऐसा क्यों है?
उत्तर
परमाणु आकार के अनुसार Sn के लिए ऊर्जा अन्तराल 0 eV,C के लिए 5.4eV, Si के लिए 1.1eV तथा Ge के लिए 0.7eV होता है। अत: Sn चालक, C विद्युतरोधी जबकि Si व Ge अर्द्धचालक हैं।

प्रश्न 3.
क्या p-n सन्धि के सिरों पर विभव प्राचीर की माप केवल सन्धि पर वोल्टतामापी जोड़ कर की जा सकती है?
उत्तर
नहीं, p-n सन्धि के सिरों पर वोल्टतामापी जोड़कर विभव प्राचीर की माप नहीं की जा सकती है। क्योंकि इसके लिए सन्धि प्रतिरोध की तुलना में वोल्टतामापी का प्रतिरोध बहुत अधिक होना चाहिए जबकि सन्धि प्रतिरोध लगभग अनन्त होता है।

प्रश्न 4.
प्रवर्धकों X, Y एवं Z को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। यदि x, Y एवं Z की वोल्टता लब्धि क्रमश: 10, 20 एवं 30 और निवेश सिग्नल का शिखर मान 1 मिलीवोल्ट है, तो निर्गत सिग्नल वोल्टता का शिखर मान क्या होगा, जबकि

  1. dc प्रदान वोल्टता 10 वोल्ट है?
  2. dc प्रदाय वोल्टता 5 वोल्ट है?

हल
1. परिणामी वोल्टता लब्धि = 10x20x 30 = 6000 .
∴ निर्गत सिग्नल वोल्टता का शिखर मान (V0) = 6000×1 मिलीवोल्ट = 6000×10-3 वोल्ट = 6 वोल्ट।

2. यहाँ dc प्रदाय वोल्टता 5 वोल्ट है तो निर्गत सिग्नल वोल्टता का शिखर मान. भी 5 वोल्ट से अधिक नहीं हो सकता।
∴ V0 = 5 वोल्ट।

प्रश्न 5.
किसी उभयनिष्ठ उत्सर्जक ट्रांजिस्टर प्रवर्धक परिपथ से कोई धारा और वोल्टता लब्धि सम्बद्ध है। दसरे शब्दों में, कोई शक्ति-लब्धि होती है? शक्ति को ऊर्जा की माप मानते हुए क्या इस परिपथ में ऊर्जा संरक्षण का उल्लंघन होता है?
उत्तर
नहीं, इस परिपथ में ऊर्जा संरक्षण का उल्लंघन नहीं हुआ है। इस प्रक्रिया में आवश्यक अतिरिक्त शक्ति प्रयुक्त D.C. स्रोत द्वारा प्रदान की जाती है।

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अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
(i) उस डायोड के प्रकार का नाम लिखिए जिसके अभिलक्षणिक uil चित्र-14.12
(a) एवं
(b) में दर्शाए गए हैं।
(ii) चित्र-14.12 (a) में बिन्दु P क्या निरूपित करता है?
(iii) चित्र-14.12 (b) में बिन्दु P एवं Q क्या निरूपित करते हैं?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 38
उत्तर

  1. चित्र-14.12 (a) जेनर डायोड के व चित्र-14.12 (5) सौर सेल के अभिलक्षिक वक्र को प्रदर्शित करता है।
  2. चित्र-14.12 (a) में बिन्दु P, जेनर भंजक वोल्टता को निरूपित करता है।
  3. चित्र-14.12 (b) में बिन्दु P, खुले परिपथ की वोल्टता को तथा बिन्दु Q, लघु पथन धारा को निरूपित करता है।

प्रश्न 2.
तीन फोटो डायोड D1, D2 एवं D3 ऐसे अर्द्धचालकों से बनाया गए हैं जिनके बैण्ड अन्तराल क्रमशः 2.5eV;2eV एवं 3eV हैं। इनमें से कौन-सा डायोड 6000 A तरंगदैर्घ्य के प्रकाश का संसूचन करने योग्य होगा?
उत्तर
6000A तरंगदैर्घ्य के प्रकाश फोटॉन की कर्ज (E) = \(\frac { hc }{ λ }\) = \(\frac{6.6 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^{8}}{6 \times 10^{-7}}\)
=\(\frac{3.3 \times 10^{-19}}{1.6 \times 10^{-19}}\) eV = 2.06eV
किसी फोटो डायोड द्वारा विकिरण के संसूचन के लिए आवश्यक है कि विकिरण फोटॉनों की ऊर्जा, बैण्ड अन्तराल से अधिक हो। यह शर्त केवल फोटो डायोड D2 के लिए पूरी होती है। अत: फोटो डायोड D2 ही आपतित विकिरण को संसूचित करेगा।

प्रश्न 3.
यदि प्रतिरोध R1 बढ़ाया जाता है (चित्र-14.13) तो अमीटर तथा वोल्टमीटर के पाठ्यांकों में क्या परिवर्तन होंगे?
उत्तर
प्रतिरोध R1 का मान बढ़ाने पर आधार धारा IB\(\left(I_{B}=\frac{V_{B B}-V_{B E}}{R_{1}}\right)\) का मान कम होगा, जिसके परिणामस्वरूप संग्राहक काम धारा Ic का मान भी कम होगा। अत: अमीटर तथा वोल्टमीटर का पाठ्यांक कम होगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 39

प्रश्न 4.
स्पष्ट कीजिए कि तात्विक अर्द्धचालकों का उपयोग दृश्य LEDs बनाने में क्यों नहीं किया जा सकता?
उत्तर
तात्विक अर्द्धचालकों का उपयोग दृश्य LED बनाने में नहीं किया जा सकता क्योंकि तात्विक अर्द्धचालकों के ऊर्जा-अन्तराल इस प्रकार के होते हैं कि उनसे उत्सर्जन अवरक्त क्षेत्र में होता है।

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अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी : पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ आंकिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
यदि चित्र-14.14 में दर्शाए गए प्रत्येक डायोड का अग्र बायस प्रतिरोध _ 252 तथा पश्च बायस प्रतिरोध अनन्त हो, तो धारा 11, 12, I एवं I के मान क्या । होंगे?
हल
C व D के बीच लगा डायोड पश्च बायस है।
अतः I3 = 0
शाखा AB व EF का समान प्रतिरोध = 25+ 125 = 150Ω
शाखा AB व EF का तुल्य प्रतिरोध R’= \(\frac { 150 }{ 2 }\) = 750Ω
परिपथ का कुल प्रतिरोष्ट R = 75+ 25 = 100Ω
परिपथ में धारा I1= \(\frac { V }{ R }\) = \(\frac { 5 }{ 100 }\) = 0.05 ऐम्पियर
तथा धारा I2 = I4 = \(\frac { 0.05 }{ 2 }\)= 0.025 ऐम्पियर।

प्रश्न 2.
चित्र-14.15 में द्वारों के दिए गए संयोजनों के निर्गम सिग्नलों C एवं C को आरेखित कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 40
हल
NAND गेटों से पहला प्राप्त संयोजन NOR गेट की भाँति कार्य करेगा [चित्र-14.15 (b)]|
NOR गेटों से प्राप्त दूसरा संयोजन AND गेट की भाँति कार्य करेगा [चित्र-14.15 (c)]।
C1 व C2 निर्गम सिग्नलों को चित्र-14.16 में दर्शाया गया है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ img 41

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MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 10 भुगतान संतुलन

MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 10 भुगतान संतुलन

भुगतान संतुलन Important Questions

भुगतान संतुलन वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न (a)
भुगतान शेष की संरचना में निम्नलिखित में कौन – से खाते सम्मिलित होते हैं –
(a) चालू खाता
(b) पूँजी खाता
(c) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) और (b) दोनों

प्रश्न (b)
व्यापार सन्तुलन का अर्थ होता है –
(a) पूँजी के लेन – देन से
(b) वस्तुओं के आयात व निर्यात से
(c) कुल क्रेडिट तथा डेबिट से
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(b) वस्तुओं के आयात व निर्यात से

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प्रश्न (c)
भुगतान शेष की संरचना में निम्नलिखित में कौन – से खाते सम्मिलित होते हैं –
(a) चालू खाता
(b) पूँजी खाता
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) (a) और (b) दोनों

प्रश्न (d)
प्रतिकूल भुगतान सन्तुलन में सुधार का उपाय है –
(a) मुद्रा अवमूल्यन
(b) आयात प्रतिस्थापन
(c) विनिमय नियंत्रण
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न (e)
विदेशी विनिमय दर का निर्धारण होता है –
(a) विदेशी करेंसी की माँग द्वारा
(b) विदेशी करेंसी की पूर्ति द्वारा
(c) विदेशी विनिमय बाजार में माँग एवं पूर्ति द्वारा
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) विदेशी विनिमय बाजार में माँग एवं पूर्ति द्वारा

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प्रश्न (f)
विदेशी विनिमय बाजार के रूप हैं –
(a) हाजिर या चालू बाजार
(b) वायदा बाजार
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) (a) और (b) दोनों

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. ब्रेटन वुड्स प्रणाली को ……………………….. सीमा प्रणाली भी कहा जाता है।
  2. विदेशी विनिमय दर एवं विदेशी विनिमय की पूर्ति में ………………………….. संबंध होता है।
  3. अवमूल्यन से देश की मुद्रा की विनिमय क्रयशक्ति ………………………….. हो जाती है।
  4. व्यापार संतुलन में केवल …………………………… मदों को शामिल किया जाता है।
  5. भुगतान – संतुलन सदैव ………………………….. में रहता है।
  6. एक देश की मुद्रा का दूसरे देश की मुद्रा में व्यक्ति मूल्य ………………………….. कहलाता है।

उत्तर:

  1. समंजनीय
  2. सीधा
  3. कम
  4. दृश्य
  5. संतुलन
  6. विनिमय दर।

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प्रश्न 3.
सत्य /असत्य बताइये –

  1. व्यापार संतुलन में दृश्य मदों तथा अदृश्य मदों दोनों का समावेश किया जाता है।
  2. व्यापार संतुलन भुगतान संतुलन का एक अंग है।
  3. अवमूल्यन की घोषणा सरकार द्वारा की जाती है।
  4. भुगतान संतुलन सदैव सन्तुलित रहता है।
  5. निर्यात प्रोत्साहन हेतु अवमूल्यन का सहारा लिया जाता है।
  6. विकासशील देशों में तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या का आर्थिक विकास पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।
  7. भुगतान संतुलन करने का एक उपाय निर्यात प्रोत्साहन भी है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. सत्य
  5. सत्य
  6. असत्य
  7. असत्य।

प्रश्न 4.
सही जोड़ियाँ बनाइये –

उत्तर:

  1. (b)
  2. (c)
  3. (a)
  4. (e)
  5. (d).

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प्रश्न 5.
एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिये –

  1. नई व्यापार नीति की घोषणा किस सन में की गई?
  2. भारतीय रुपये के अवमूल्यन से भारतीयों के आयात कैसे हो जायेंगे?
  3. दीर्घकाल में आयात किसका भुगतान करते हैं?
  4. पूँजी खाते से किस बात का ज्ञान होता है?
  5. एक देश की मुद्रा का दूसरे देश की मुद्रा में व्यक्त मूल्य क्या कहलाता है?

उत्तर:

  1. 1991
  2. महँगे
  3. निर्यात का
  4. अंतर्राष्ट्रीय विनियोग व ऋणग्रस्तता का
  5. विनिमय दर।

भुगतान संतुलन लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
स्थिर विनिमय दर से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
स्थिर विनिमय दर से तात्पर्य उस दर से है जो अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में स्थिर बनी रहती है। सन् 1944 में अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना के साथ एवं विश्वव्यापी मंदी एवं स्वर्णमान, के पतन के परिणामस्वरूप विनिमय दरों में स्थिरता की प्रवृत्ति बढ़ी। इस दर को अधिकीलित दर भी कहा जाता है। इसे निम्न चित्र से स्पष्ट किया जा सकता हैइस विनिमय दर व्यवस्था में दर का निर्धारण सरकार के द्वारा किया जाता है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 10 भुगतान संतुलन img 2

प्रश्न 2.
लोचपूर्ण विनिमय दर क्या है?
उत्तर:
लोचपूर्ण विनिमय दर वह दर है जो केन्द्रीय बैंक के हस्तक्षेप के बिना विदेशी विनिमय की माँग और पूर्ति में साम्य स्थापित करती है। जिस बिन्दु पर विदेशी विनिमय की माँग एवं पूर्ति की शक्तियों के द्वारा दर निर्धारित हो वह साम्य या लोचपूर्ण विनिमय दर कहलाती है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 10 भुगतान संतुलन img 3
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 10 भुगतान संतुलन img 4

प्रश्न 3.
भुगतान संतुलन से क्या आशय है? भारत के भुगतान संतुलन की प्रतिकूलता के तीन कारण लिखिए?
अथवा
भुगतान शेष में असंतुलन का कारण लिखिए?
उत्तर:
भुगतान संतुलन का अर्थ:
भुगतान संतुलन से आशय, किसी देश – विशेष की वस्तुओं के आयातों एवं निर्यातों तथा उनके मूल्यों के संपूर्ण विवरण से होता है। सामान्यतः विभिन्न देशों के बीच विभिन्न वस्तुओं के आयात – निर्यात के अतिरिक्त अन्य प्रकार के भी लेन – देन होते हैं, जैसे – बीमा, जहाजी किराया, बैंकों का शुल्क, ब्याज, लाभ, पूँजी का स्थानांतरण सेवाओं का पुरस्कार इत्यादि। भारत में भुगतान संतुलन की प्रतिकूलता के कारण-भारत में भुगतान संतुलन के प्रतिकूल होने के तीन कारण निम्नलिखित हैं –

1. पेट्रोलियम पदार्थों के आयात में वृद्धि:
तेल उत्पादक देश अपने पेट्रोलियम पदार्थों के मल्य प्रतिवर्ष बढ़ाते रहते हैं। साथ – ही – साथ देश में पेट्रोलियम पदार्थों की खपत बढ़ी है जिससे भारी मात्रा में इनका आयात किया गया है।

2. आशा के अनुरूप निर्यातों में वृद्धि न होना:
भारत में भुगतान संतुलन के प्रतिकूल होने का एक कारण निर्यातों का आशानुरूप न बढ़ना है।

3. बढ़ती हुई जनसंख्या:
भारत की जनसंख्या वृद्धि के कारण आयातों में वृद्धि हुई है। तथा घरेलू उपभोग के बढ़ जाने के कारण निर्यातों में कमी आई है जिससे भारत की भुगतान संतुलन में प्रतिकूलता आई है।

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प्रश्न 4.
भारत में भुगतान संतुलन को सुधारने हेतु चार उपाय बताइए?
उत्तर:
भारत में भुगतान संतुलन को सुधारने के उपाय इस प्रकार हैं –

1. निर्यात को प्रोत्साहन:
सरकार को निर्यात को प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि निर्यात बढ़ सके इसके लिए –

  1. निर्यात करों में कमी की जानी चाहिए
  2. देश में उद्योगों को आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए
  3. विदेशों में वस्तुओं के लिए प्रचार व विज्ञापन किया जाना चाहिए।

2. आयात में कमी:
भारत को अपने आयात में कमी लानी चाहिए। इसके लिए आयात करों में वृद्धि की जानी चाहिए)जिससे आयातिक वस्तु महँगी हो जाए और माँग में कमी आए।

3. विदेशी ऋणों का प्रयोग:
भुगतान संतुलन की प्रतिकूलता को दूर करने के लिए विदेशी ऋणों का भी प्रयोग किया जा सकता है)। वास्तव में यह कुछ समय के लिए इस समस्या का समाधान तो कर देता है लेकिन बाद में भुगतानों को अदा करते समय कठिनाई होती है।

4. विनिमय नियंत्रण:
भुगतान संतुलन को ठीक करने के लिए विनिमय नियंत्रण भी एक अच्छा मार्ग है। इससे आयात घटते हैं एवं निर्यात बढ़ते हैं।

प्रश्न 5.
स्थिर विनिमय – दर के पक्ष – विपक्ष में दो – दो तर्क दीजिए?
उत्तर:
स्थिर विनिमय दर से आशय:
जब विनिमय – दर का निर्धारण सरकार के द्वारा किया जाता है तो उसे स्थिर विनिमय दर कहते हैं।

स्थिर विनिमय – दर के पक्ष में तर्क:
स्थिर विनिमय – दर के पक्ष में निम्नांकित तर्क दिये जा सकते हैं –

1. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रोत्साहन:
स्थिर विनिमयदर के अंतर्गत आयातकर्ता एवं निर्यातकर्ता को इस बात की जानकारी रहती है कि कितना भुगतान करना है तथा कितना भुगतान प्राप्त होगा।

2. विनिमय व्यवस्था:
यदि देश में विनिमय – दर स्थिर है तो सट्टेबाजी जैसी प्रवृत्तियों को प्रोत्साहन नहीं मिलता है तथा सरकार विनिमय नियंत्रण तथा प्रबंध व्यवस्थाओं से मुक्त हो जाती है।

3. निर्यातक देशों के लिए आवश्यक जिन देशों को राष्ट्रीय आय का अधिकांश भाग निर्यातों से ही प्राप्त होता है उनके लिये विनिमय दर में स्थायित्व अत्यधिक आवश्यक है।

4. पूँजी निर्माण:
विदेशी विनिमय दर में स्थिरता के फलस्वरूप देश में आंतरिक कीमत स्तर पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है। पूँजी निर्माण की दर बढ़ती है तथा देश का आर्थिक विकास होता है।

स्थिर विनिमय – दर के विपक्ष में तर्क:
स्थिर विनिमय – दर के विपक्ष में निम्नांकित तर्क दिए जाते हैं –

1. आर्थिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव:
स्थिर विनिमय – दर का प्राथमिक उद्देश्य इसमें स्थिरता को बनाये रखना होता है और राष्ट्रीय आय, रोजगार नीति, मूल्य – स्तर जैसे राष्ट्रीय उद्देश्यों को गौण मान लिया जाता है।

2. भ्रष्टाचार:
स्थिर विनिमय – दर को बनाये रखने के लिए देश में अनेक नियंत्रण लगाये जाते हैं। नियंत्रण अधिक होने पर भ्रष्टाचार फैलने के अवसर बढ़ जाते हैं।

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प्रश्न 6.
व्यापार संतुलन एवं भुगतान संतुलन में अन्तर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
व्यापार संतुलन एवं भुगतान संतुलन में अन्तर –

व्यापार संतुलन

  1. व्यापार संतुलन में आयात – निर्यात की जाने वाली दृश्य मदों को ही शामिल किया जाता है।
  2. व्यापार संतुलन, भुगतान संतुलन का एक भाग है।
  3. किसी देश का व्यापार संतुलन पक्ष में न होना कोई अधिक चिन्ता का विषय नहीं है।
  4. व्यापार संतुलन अनुकूल या प्रतिकूल हो सकता है।
  5. व्यापार की दृष्टि से व्यापार संतुलन का महत्व कम होता है।

भुगतान संतुलन:

  1. भुगतान संतुलन में दृश्य मदों के साथ – साथ अदृश्य मदों को ही शामिल किया जाता है।
  2. भुगतान संतुलन की धारणा अधिक व्यापक होती है।
  3. यदि भुगतान संतुलन पक्ष में नहीं है तो यह चिन्ता का विषय है।
  4. भुगतान संतुलन सदा ही संतुलित रहता है।
  5. भुगतान संतुलन का महत्व अधिक होता है।

प्रश्न 7.
अवमूल्यन और मूल्यह्रास में अंतर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
अधिकीलित विनिमय प्रणाली में जब सरकार के द्वारा विनिमय दर में वृद्धि की जाती है तो इसे मुद्रा का अवमूल्यन कहा जाता है। अवमूल्यन तब होता है जब देश स्थिर विनिमय दर प्रणाली को ग्रहण करता है। दूसरी ओर, बाजार माँग एवं पूर्ति शक्तियों के प्रभाव से बिना किसी सरकारी हस्तक्षेप के देश की मुद्रा का मूल्य कम हो जाता है तो इसे मूल्यह्रास कहते हैं, मूल्यह्रास तब होता है जब देश नम्य विनिमय दर प्रणाली अथवा तिरती विनियम दर प्रणाली को ग्रहण करता है।

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प्रश्न 8.
जब M = 60 + 0.06 Y हो, तो आयात की सीमांत प्रवृत्ति क्या होगी? आयात की सीमांत प्रवृत्ति और समस्त माँग फलन में क्या संबंध है?
उत्तर:
दिया है,
M = 60 + 0. 60 Y
∵ M = \(\bar { M } \) + mY
∴ m = 0.06
\(\bar { M } \) > 0 स्वायत्त घटक है। 0 < m < 1
यहाँ m आयात की सीमांत प्रवृत्ति है। सीमांत प्रवृत्ति का मान 1 से कम तथा शून्य से अधिक होता है। आय का एक अतिरिक्त रुपया आयात खर्च करने से प्राप्त अनुपात है। यह सीमांत प्रवृत्ति के सादृश्य होता है। आयात की सीमांत प्रवृत्ति और समस्त माँग में धनात्मक संबंध पाया जाता है।

प्रश्न 9.
व्याख्या कीजिए कि – G – T = (Sg – I) – (X – M)?
उत्तर:
G – T = (Sg – I) – (X – M)
यहाँ, G = सरकारी व्यय, T = कर, G – T = निवल सरकारी व्यय, Sg = सरकार की बचत, I = निवेश, Sg – I = निवल बचतें, x = निर्यात, M= आयात, X – M = व्यापार संतुलन। यह दिया गया समीकरण सही है, चूँकि यह स्पष्ट करता है कि निवल सरकारी व्यय, निवल सरकारी बचतों और व्यापार संतुलन के समान है।

प्रश्न 10.
क्या चालू पूँजीगत घाटा खतरे का संकेत होगा? व्याख्या कीजिए?
उत्तर:
चालू पूँजीगत घाटा खतरे का संकेत होगा या नहीं। इस संदर्भ में तर्क दिया जाता है कि जब किसी देश में चालू पूँजीगत घाटा होता है तो बचत कम हो रही होती है, निवेश बढ़ोत्तरी हो रही होती है अथवा बजट घाटे में वृद्धि हो रही होती है। देश के दीर्घकालीन परिप्रेक्ष्य के बारे में चिन्ता का कारण तब होता है जब चालू पूँजीगत घाटे से बचत कम होती है और बजटीय घाटा अधिक होता है। घाटे से उच्च निजी उपभोग अथवा सरकारी उपभोग प्रतिबिंबित होता है।

इन स्थितियों में देश के पूँजी स्टॉक में तेजी से वृद्धि नहीं होगी जिससे पर्याप्त संवृद्धि हो सके और ऋण अदायगी की जा सके। परंतु यदि चालू पूँजीगत घाटे से निवेश में वृद्धि प्रतिबिंबित हो तो चिन्ता का कोई कारण नहीं होता है क्योंकि इससे पूँजी स्टॉक का अधिक तीव्रता से निर्माण होगा और भविष्य में निर्गत में वृद्धि होगी। अतः संक्षेप में हम यह कह सकते हैं कि यदि किसी देश में ऋण की नई निधि से ब्याज दर की अपेक्षा विकास दर अधिक होती है तो चालू पूँजीगत घाटे से किसी प्रकार के खतरे का संकेत नहीं होता।

प्रश्न 11.
संतुलित व्यापार शेष और चालू खाता संतुलन में अंतर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
संतुलित व्यापार शेष:

  1. आयात एवं निर्यात के संतुलन को संतुलित व्यापार व्यापार शेष कहा जाता है।
  2. यह एक संकुचित धारणा है।
  3. इमसें केवल भौतिक वस्तुओं के आयात निर्यात को ही शामिल किया जाता है।

चालू खाता संतुलन:

  1. व्यापार शेष, सेवाओं के आयात व निर्यात शेष तथा हस्तांतरण भुगतान शेष के योग को चालू खाता संतुलन कहते हैं।
  2. यह एक संकुचित धारणा है।
  3. भौतिक वस्तुओं के निर्यात – आयात के साथ – साथ सेवाओं व हस्तांतरण भुगतान के लेन – देन को भी इसमें शामिल किया जाता है।

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प्रश्न 12.
यदि देश B से देश A में मुदा स्फीति ऊँची हो और दोनों देशों में विनिमय दर स्थिर हो, तो दोनों देशों के व्यापार शेष का क्या होगा?
उत्तर:
यदि देश ‘B’ से देश ‘A’ में मुद्रा स्फीति की दर ऊँची हो और दोनों देशों में विनिमय दर स्थिर हो, तो देश ‘A’ में व्यापार शेष घाटा होगा और देश B में व्यापार शेष आधिक्य होगा। ऐसी स्थिति में देश B से देश A को वस्तुओं का आयात करना लाभप्रद होगा। परिणामस्वरूप देश A अधिक वस्तुओं का अधिक मात्रा में आयात करेगा और देश B को कम मात्रा में वस्तुओं का निर्यात करेगा।अत: देश A के सामने व्यापार शेष घाटे की समस्या उत्पन्न होगी। दूसरी ओर देश B देश A से कम मात्रा में वस्तुओं का आयात करेगा। अतः देश B का व्यापार शेष धनात्मक होगा।

भुगतान संतुलन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भुगतान संतुलन की मदों का उल्लेख कीजिए?
उत्तर:
किसी देश का भुगतान संतुलन उसके समस्त विदेशी लेन – देन तथा लेनदारियों – देनदारियों का विवरण होता है। इसके बाँयी ओर सभी लेनदारियाँ तथा दाँयी ओर देनदारियाँ प्रदर्शित की जाती हैं बाँयी ओर की मदों एवं दाँयी ओर के मदों के अंदर के स्वरूप से भुगतान संतुलन का स्वरूप स्पष्ट हो जाता है। भुगतान संतुलन के विवरण में सम्मिलित विभिन्न मदों का वर्गीकरण लीग ऑफ नेशन्स ने दो मुख्य शीर्षकों के अंतर्गत किया था और अधिकांश देश इसी आधार पर भुगतान संतुलन का विवरण तैयार करते हैं। भुगतान संतुलन का प्रथम शीर्षक चालू खाता होता है और दूसरा शीर्षक पूँजी खाता होता है।

  1. चालू खाता: चालू खाते में दृश्य और अदृश्य मदें सम्मिलित होती हैं।
  2. पूँजी खाता: इसमें विदेशी पूँजी के विनियोग तथा ऋण की राशियों को दिखाया जाता है।

प्रश्न 2.
पूँजी खाते में शामिल मदों को बताइए?
उत्तर:
पूँजी खाते में शामिल प्रमुख मदें निम्नलिखित हैं –

  1. बैंकिंग पूँजी का प्रवाह: बैंकिंग पूँजी का अंतरप्रवाह देश के लिए प्राप्ति पक्ष तथा बाह्य प्रवाह भुगतान पक्ष में गिना जाता है, लेकिन बैंकिंग पूँजी में केन्द्रीय बैंक को शामिल नहीं किया जाता हैं।
  2. निजी ऋण: देश के निजी क्षेत्र द्वारा विदेशों से प्राप्त ऋण, भुगतान संतुलन खाते के लेनदारी पक्ष तथा उनके ऋण भुगतानों को लेनदारी पक्ष में गिना जाता है।
  3. विदेशी निवेश: विदेशी निवेश में दो प्रकार के निवेश आते हैं –
    • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश:
    • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से तात्पर्य विदेशों में परिसम्पत्तियाँ खरीदना है तथा उन पर नियंत्रण रखना है।
    • पोर्टफोलियो निवेश:
  4. इस निवेश में विदेशों में परिसम्पत्तियाँ खरीदी जाती हैं परन्तु उस पर नियंत्रण नहीं होता है।
  5. सरकारी पूँजी का लेन – देन:

इसमें निम्नलिखित मदें शामिल हैं –

  1. ऋण
  2. ऋणों का भुगतान
  3. मिश्रित
  4. कोष एवं मौद्रिक सोना।

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प्रश्न 3.
विदेशी विनिमय – दर को प्रभावित करने वाले तत्वों को लिखिए?(कोई चार)
अथवा
विदेशी विनिमय – दर के उतार – चढ़ाव के पाँच कारण समझाइए?
उत्तर:
विदेशी विनिमय – दर को प्रभावित करने वाले प्रमुख तत्व निम्न हैं –

1. आयात एवं निर्यात में परिवर्तन:
यदि देश के निर्यात, आयात से अधिक हैं तो देश की मुद्रा की माँग बढ़ेगी और विदेशी विनिमय:
दर देश के पक्ष में होगा इसके विपरीत देश में आयात, निर्यात की तुलना में अधिक है तो विदेशी मुद्रा की माँग बढ़ेगी और विदेशी विनिमय दर देश के विपक्ष में होगा या प्रतिकूल होगा।

2. बैंकिंग संबंधी प्रभाव:
यदि व्यापारिक बैंक विदेशी बैंक पर बड़ी मात्रा में बैंकर्स ड्रॉफ्ट तथा अन्य प्रकार के साख-पत्र जारी करता है, तो इससे विदेशी विनिमय की मांग बढ़ जायेगी इसके विपरीत अगर विदेशी बैंक देश के बैंकों पर साख – पत्र जारी करती है तो देशी मुद्रा की मांग बढ़ेगी और विनिमय-दर देश के पक्ष में हो जाती है।

3. कीमतों में परिवर्तन:
दो देशों में किसी एक देश में सापेक्षिक दृष्टि से कीमत के परिवर्तन के परिणामस्वरूप विनिमय-दर परिवर्तित हो जाती है। जैसे – भारत में कीमत बढ़ जाती है, जबकि जर्मनी में कीमत में परिवर्तन नहीं होता है। अतः जर्मनी को भारत की वस्तुएँ महँगी पड़ने लगेंगी और वे यहाँ से कम वस्तुएँ मँगायेंगे। इसके विपरीत भारत को जर्मनी की वस्तुएँ सस्ती पड़ेंगी और वहाँ से आयात करने लगेंगी।

4. पूँजी का आगमन:
जिस देश में विदेशी पूँजी आती है उस देश की मुद्रा की मांग बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप विदेशी विनिमय दर उस देश के पक्ष में हो जाती है। इसके विपरीत पूँजी देश से विदेश में जाती है तो विदेशी मुद्रा की माँग बढ़ जाती है। जिससे विनिमय दर देश के विपक्ष में हो जाती है।

प्रश्न 4
दृश्य आयात – निर्यात तथा अदृश्य आयात – निर्यात को समझाइये?
उत्तर:
दृश्य आयात – निर्यात:
दृश्य आयात – निर्यात के अंतर्गत उन वस्तुओं के आयात – निर्यात को शामिल किया जाता है जिनका बंदरगाह में रखे गये रजिस्टर में लेखा – जोखा रखा जाता है। इसे देखकर वर्षभर में किए गए आयातों एवं निर्यातों के मूल्य प्राप्त किये जा सकते हैं। इसलिए इसे दृश्य मदें कहा जाता है। इसमें केवल वस्तुओं के आयात – निर्यात को ही शामिल किया जाता है।

अदृश्य आयात – निर्यात:
अदृश्य आयात – निर्यात के अंतर्गत सेवाओं के आदान – प्रदान को शामिल किया जाता है। ये सेवाएँ हैं – बैंकिंग, बीमा, शिपिंग आदि जिनका बंदरगाहों पर लेखा – जोखा नहीं रखा जाता है। इस प्रकार अदृश्य मदों में सेवाओं एवं पूँजी के आयात – निर्यात को शामिल किया जाता है।

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प्रश्न 5.
लोचपूर्ण विनिमय – दर किसे कहते हैं? इसके पक्ष – विपक्ष में दो – दो तर्क दीजिए?
उत्तर:
लोचपूर्ण विनिमय – दर का अर्थ:
जब विनिमय दर का निर्धारण विदेशी मुद्रा बाजार में करेंसियों की माँग एवं पूर्ति के द्वारा निर्धारित किया जाता है तो उसे लोचपूर्ण विनिमय – दर कहते हैं।

लोचपूर्ण विनिमय – दर के पक्ष में तर्क:
लोचपूर्ण विनिमय दर के पक्ष में निम्नलिखित तर्क दिये जाते हैं –

1. भुगतान संतुलन में साम्य:
लोचपूर्ण विनिमय दर की दशा में अन्य राष्ट्रीय हितों, जैसे-राष्ट्रीय आय, मूल्य स्तर आदि की उपेक्षा किये बिना भुगतान-संतुलन में साम्य स्थापित करना संभव होता है।

2. अधिमूल्यन एवं अवमूल्यन:
लोचपूर्ण विनिमय दर होने पर अपने देश की मुद्रा को विदेशी मुद्रा की तुलना में आसानी से बढ़ाया या घटाया जा सकता है। इससे अर्थव्यवस्था में साम्य बनाये रखना संभव होता है।

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प्रश्न 6.
मान लीजिए C = 100 + 0.75 YD, I = 500, G = 750, कर आय का 20 प्रतिशत है, x = 150, M = 100 + 0.2Y तो संतुलन आय, बजट घाटा अथवा आधिक्य और व्यापार घाटा अथवा आधिक्य की गणना कीजिए?
उत्तर:
C = 100 + 0.75 YD जहाँ C = 100, C = 0.75, I = 500, G = 750, X = 150, M = 100 + 0.2Y
कर आय (t) = 20%
आय
(Y) = C + C (1 – 1) Y + l + G + (X – M)
Y = 100 + 0.75 (1 – 0.2) Y + 500 +750 + (150 – 100 – 0 – 2Y)
Y = 100 + 0.75(0.8) Y+ 500 + 750 + 150 – 100 – 0 – 2Y
Y = 100 + 0.6 Y + 1300 – 0.2 Y = 1400 + 0.4 Y
Y – 0.4 Y = 1400
0.6 Y = 1400
Y = \(\frac{1400}{0.6}\)
= 2333
बजट घाटा = सरकारी व्यय कर (G) – कर
= 750 – 2333 का 20% = 750 – 467 = 283
M = 100 + 0.2 Y = 100 + 0.2(2333)
= 100 + 467 = 567
व्यापार घाटा = M – X = 567 – 150 = 417.

MP Board Class 12th Economics Important Questions

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता NCERT पाठ्यपुस्तक के अध्याय में पाठ्यनिहित प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 1.
5 × 10-8 कूलॉम तथा – 3× 10-8 कूलॉम के दो आवेश 16 सेमी दूरी पर स्थित हैं। दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के किस बिन्दु पर विद्युत विभव शून्य होगा? अनन्त पर विभव शून्य लीजिए।

COMMON ERRORS

दो विपरीत प्रकृति के आवेशों के कारण वैद्युत विभव केवल एक बिन्दु पर शून्य न होकर दो बिन्दुओं पर शून्य
होता है। पहला बिन्दु दोनों आवेशों के बीच में होगा तथा दूसरा बिन्दु आवेशों से बाहर छोटे परिमाण के आवेश के निकट होगा।

हल :
प्रथम दशा : माना बिन्दु आवेश qA = 5 × 10-8 कूलॉम से दूसरे आवेश की ओर दूरी पर 0 बिन्दु पर विद्युत विभव शून्य है,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 1

अत: प्रथम आवेश से दूसरे आवेश की ओर 10 सेमी दूरी पर विद्युत विभव शून्य है।
द्वितीय दशा : माना प्रथम आवेश से दूसरे आवेश की ओर r दूरी पर (दूसरे आवेश से बाहर r > 0.16 मीटर) विद्युत विभव शून्य है।
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प्रश्न 2.
10 सेमी भुजा वाले एक सम-षट्भुज के प्रत्येक शीर्ष पर 5 माइक्रोकूलॉम का आवेश है। षट्भुज के केन्द्र पर विभव परिकलित कीजिए।
हल :
प्रत्येक आवेश q = 5 माइक्रोकूलॉम
प्रत्येक आवेश की केन्द्र O से दूरी r = 0.1 मीटर
∴ केन्द्र O पर परिणामी विभव V =\(\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}}\) = 9 × 109 × 6 × \(\frac{q}{r}\)
= 9 × 109 × 6 × \(\frac{5 \times 10^{-6}}{0.1}\)
= 2.7 × 106 वोल्ट।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 3

प्रश्न 3.
6 सेमी की दूरी पर अवस्थित दो बिन्दुओं A एवं B पर दो आवेश 2 माइक्रोकूलॉम तथा – 2माइक्रोकूलॉम रखे हैं।
(a) निकाय के सम विभव पृष्ठ की पहचान कीजिए।
(b) इस पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा क्या है?
हल :
(a) चूँकि दोनों वेश समान परिमाण के परन्तु विपरीत चिह्न के हैं। अतः समविभव पृष्ठ दोना आवेशों को मिलाने वाली रेखा AB के लम्बवत् होगा तथा उसके मध्य-बिन्दु से जाएगा।
(b) विद्युत क्षेत्र की दिशा समविभव पृष्ठ के लम्बवत् धनावेश से ऋणावेश की ओर (AB की दिशा में) होगी।

प्रश्न 4.
12 सेमी त्रिज्या वाले एक गोलीय चालक के पृष्ठ पर 1.6 × 10-7कूलॉम पर आवेश एकसमान रूप से वितरित है।
(a) गोले के अन्दर
(b) गोले के ठीक बाहर
(c) गोले के केन्द्र से 18 सेमी पर अवस्थित, किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र क्या होगा?
हल :
(a) ∵ आवेश चालक के पृष्ठ पर वितरित है; अतः गोले के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य होगा।

(b) दिया है : गोले की त्रिज्या R= 0.12 मीटर
गोले. पर आवेश q= 1.6 × 10-7 कूलॉम
∴ गोले के पृष्ठ के ठीक बाहर विद्यत क्षेत्र \(E=\frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \frac{q}{R^{2}}=9 \times 10^{9} \times \frac{1.6 \times 10^{-7}}{0.12 \times 0.12}\)
= 105 न्यूटन कूलॉम-1

(c) बिन्दु की गोले के केन्द्र से दूरी r = 0.18 मीटर
∵ r > R; अतः बिन्दु गोले के पृष्ठ के बाहर है।
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प्रश्न 5.
एक समान्तर पट्टिका संधारित्र, जिसकी पट्टिकाओं के बीच वायु है, की धारिता 8 pF (1 pF = 10-12 फैरड) है। यदि पट्टिकाओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए और इनके बीच के स्थान में 6 पराविद्युतांक का एक पदार्थ भर दिया जाए तो इसकी धारिता क्या होगी?
हल :
दिया है : वायु संधारित्र की धारिता Co = 8 pF = \(\frac{\varepsilon_{0} A}{d}\)
पदार्थ का पराविद्युतांक K = 6
∴ पराविद्युत पदार्थ भरने पर संधारित्र की धारिता
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प्रश्न 6.
9 pF धारिता वाले तीन संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है।
(a) संयोजन की कुल धारिता क्या है?
(b) यदि संयोजन को 120 वोल्ट के संभरण (सप्लाई) से जोड़ दिया जाए, तो प्रत्येक संधारित्र पर क्या विभवान्तर होगा?
स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता । 69
हल :
दिया है : C1 = C2 = C3 = 9 pF
श्रेणी संयोजन का विभवान्तर V = 120 वोल्ट
कुल धारिता = ?
प्रत्येक संधारित्र का विभवान्तर = ?
(a) श्रेणी संयोजन के सूत्र से,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 6

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(b) संयोजन पर कुल आवेश q = CV = 3 × 10-12 × 120 = 360 × 10-12 कूलॉम
श्रेणी संयोजन में प्रत्येक संधारित्र पर इतना ही आवेश होगा।
∴ प्रत्येक संधारित्र का विभवान्तर V1 = V2 = V3 = \(\frac{q}{C_{1}}\)
(∵ सब की धारिताएँ समान हैं)
=\(\frac{360 \times 10^{-12}}{9 \times 10^{-12}}\) = 40 वोल्ट।

अन्य विधि : माना तीनों के विभवान्तर क्रमश: V1, V2 व V3 हैं।
तब, V1+ V2 + V3 = 120
∵ श्रेणी संयोजन में विभवान्तर धारिताओं के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।
∵ तीनों की धारिताएँ समान हैं। अत: विभवान्तर भी समान होंगे।
V3 = V2 = V1
अतः
3V1= 120 ⇒ V1 = 40 वोल्ट
अतः प्रत्येक संधारित्र का विभवान्तर 40 वोल्ट है।

प्रश्न 7.
2 pF, 3 pF और 4 pF धारिता वाले तीन संधारित्र पार्श्वक्रम में जोड़े गए हैं।
(a) संयोजन की कुल धारिता क्या है?
(b) यदि संयोजन को 100 वोल्ट के संभरण से जोड़ दें तो प्रत्येक संधारित्र पर आवेश ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : C1 = 2 pF, C2 = 3 pF, C3 = 4 pF
पार्श्वक्रम का विभवान्तर V = 100 वोल्ट
कुल धारिता = ?, प्रत्येक संधारित्र पर आवेश = ?
(a) पार्श्वक्रम में कुल धारिता C = C1 + C2 + C3 = 2+ 3+ 4 = 9 pF
(b) पार्श्वक्रम में सभी का विभवान्तर संयोजन के विभवान्तर के बराबर होता है।
∴ V1 = V2 = V3 = 100 वोल्ट
प्रथम संधारित्र पर आवेश q1 = C1V1 = 2 × 10-12 × 100 = 2 × 10-10 कूलॉम।
दूसरे संधारित्र पर आवेश q2 = C2V2 = 3 × 10-12 × 100 = 3 × 10-10 कूलॉम।
तीसरे संधारित्र पर आवेश q3 = C3V3 = 4 × 10-12 × 100 = 4 × 10-10 कूलॉम।

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प्रश्न 8.
पट्टिकाओं के बीच वायु वाले समान्तर पट्टिका संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका का क्षेत्रफल 6x 10-3 मीटर तथा उनके बीच की दूरी 3 मिमी है। संधारित्र की धारिता को परिकलित कीजिए। यदि इस संधारित्र को 100 वोल्ट के संभरण से जोड़ दिया जाए तो संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका पर कितना आवेश होगा?
हल :
दिया है : प्लेट क्षेत्रफल A = 6 × 10-3 मीटर2, V = 100 वोल्ट,
बीच की दूरी d = 3 मिमी = 3 × 10-3 मीटर
धारिता C = ?, प्रत्येक पट्टी पर आवेश = ?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 7
संधारित्र पर आवेश q = CV = 17.7 × 10-12 x 100 = 17.7 × 10-10 कूलॉम
∴ एक पट्टी पर आवेश = + 17.7 × 10-10 कूलॉम।
दूसरी पट्टी पर आवेश = – 17.7 × 10-10 कूलॉम।

प्रश्न 9.
प्रश्न 8 में दिए गए संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच यदि 3 मिमी मोटी अभ्रक की एक शीट (पत्तर) (पराविद्युतांक = 6) रख दी जाती है तो स्पष्ट कीजिए कि क्या होगा जब
(a) विभव (वोल्टेज) संभरण जुड़ा ही रहेगा?
(b) संभरण को हटा लिया जाएगा?
हल :
प्रश्न 8 के परिणाम से, V = 100 वोल्ट, q = 18 × 10-10 कूलॉम ।
अब माध्यम का पराविद्युतांक K = 6
पराविद्युत की मोटाई t = 3 मिमी = 3 × 10-3 मीटर
t= d; अतः संधारित्र पूर्णतः परावैद्युत द्वारा भरा है।

EXTRA SHOTS

  • संधारित्र के आवेशित हो जाने के बाद, उसे आवेशित करने वाली बैटरी हटा लेने पर उसकी प्लेटों पर आवेश अपरिवर्तित रहता है।
  • संधारित्र के आवेशित हो जाने के बाद भी बैटरी, संधारित्र से जुड़ी रहे तब उसकी प्लेटों के बीच विभवान्तर नियत रहता है।

∴ संधारित्र की नई धारिता C = KC = 6 × 18 pF [∵ Co = 18pF]
= 108pF

(a) ∵ विभव संभरण जुड़ा हुआ है। अत: संधारित्र का विभवान्तर नियत अर्थात् 100 वोल्ट रहेगा।
संधारित्र पर नया आवेश q = CV = 108 × 10-12 × 100
= 1.08 × 10-8 कूलॉम
अतः इस स्थिति में, C = 108 pF, V = 100 वोल्ट,
q= 1.08 × 10-8 कूलॉम ।

(b) ∵ विभव संभरण हटा लिया गया है। अत: संधारित्र पर आवेश q= 18 × 10-10 कूलॉम नियत रहेगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 8
अतः C = 108 pF, \(V=\frac{50}{3}\) वोल्ट = 16.6 वोल्ट,
q= 1.8 × 10-9 कूलॉम।।

प्रश्न 10.
12 pF का एक संधारित्र 50 वोल्ट की बैटरी से जुड़ा है। संधारित्र में कितनी स्थिर विद्युत ऊर्जा . संचित होगी?
हल :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 9

प्रश्न 11.
200 वोल्ट संभरण (सप्लाई) से एक 600 pF से संधारित्र को आवेशित किया जाता है। फिर इसको संभरण से वियोजित कर देते हैं तथा एक अन्य 600 pF वाले अनावेशित संधारित्र से जोड़ देते हैं। इस प्रक्रिया में कितनी ऊर्जा का ह्रास होता है?
हल :
दिया है : धारिताएँ C1 = 600 × 10-12F, C2 = 600 × 10-12F
विभवान्तर V1 = 200 वोल्ट, V2 = 0 वोल्ट
प्रक्रिया में ऊर्जा का ह्रास ∆U = ?
∵ आवेश के बाद संभरण को हटा दिया जाता है; अत: निकाय पर कुल आवेश नियत रहेगा।(Note)
माना संधारित्रों को जोड़ने पर उनका उभयनिष्ठ विभव V है,.
q= C1V1+ C2V2 = (C1 + C2)V
600 × 10-12 × 200 + 0 = [600+ 600] × 10-12 × v
∴ \(V=\frac{600 \times 200}{1200}\) वोल्ट
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 10

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प्रश्न 12.
मूलबिन्दु पर एक 8 माइक्रोकूलॉम का आवेश अवस्थित है। – 2x 10-9 कूलॉम के एक छोटे से आवेश को बिन्दु P(0, 0, 3 सेमी) से, बिन्दु R (0, 6 सेमी, 9 सेमी) से होकर, बिन्दु Q (0, 4 सेमी, 0) तक ले जाने में किया गया कार्य परिकलित कीजिए।
हल :
मूलबिन्दु पर आवेश Q = 8 × 10-3 कूलॉम
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 11
दूसरा आवेश q= – 2 × 10-9 कूलॉम
∵ स्थिर विद्युत क्षेत्र में किसी आवेश को एक बिन्दु से दूसरी बिन्दु तक ले जाने में | किया जाने वाला कार्य मार्ग के स्थान पर अन्त्य बिन्दुओं पर निर्भर करता है।
∴ आवेश q को बिन्दु P से Q तक ले जाने में किया गया कार्य
w = q (VQO – VP)
यहाँ बिन्दु Q की मूलबिन्दु से दूरी rQ = OQ = 0.04 मीटर
Q(0,4,0) तथा बिन्दु P की मूलबिन्दु से दूरी rP = OP = 0.03 मीटर
∴ मूलबिन्दु पर स्थित आवेश Q के कारण Q व P के बीच विभवान्तर
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 12

प्रश्न 13.
b भुजा वाले एक घन के प्रत्येक शीर्ष पर 4 आवेश है। इस आवेश विन्यास के कारण घन के केन्द्र पर विद्युत विभव तथा विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
हल :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 14
(b) ∵ सभी शीर्षों पर आवेश समान हैं। अत: विपरीत शीर्षों के कारण केन्द्र पर उत्पन्न विद्युत क्षेत्र परिमाण में बराबर तथा दिशा में विपरीत होंगे।
अतः केन्द्र पर नैट विद्युत क्षेत्र शून्य होगा।

प्रश्न 14.
1.5 माइक्रोकूलॉम और 2.5 माइक्रोकूलॉम आवेश वाले दो सूक्ष्म गोले 30 सेमी दूर स्थित हैं। (a) दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के मध्य-बिन्दु पर और
(b) मध्य-बिन्दु से होकर जाने वाली रेखा के अभिलम्ब तल में मध्य बिन्दु से 10 सेमी दूर स्थित किसी बिन्दु पर विभव और विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
हल :
(a) मध्य-बिन्दु की प्रत्येक आवेश से दूरी rA = rB = 0.15 मीटर
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 15
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 63
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 16
प्रश्न 15.
आन्तरिक त्रिज्या r1 तथा बाह्य त्रिज्या r2 वाले एक गोलीय चालक खोल (कोश) पर Q आवेश है।
(a) खोल के केन्द्र पर एक आवेश q रखा जाता है। खोल के भीतरी और बाहरी पृष्ठों पर पृष्ठ आवेश घनत्व क्या है?
(b) क्या किसी कोटर (जो आवेशविहीन है) में विद्युत क्षेत्र शून्य होता है, चाहे खोल गोलीय न होकर किसी भी अनियमित आकार का हो? स्पष्ट कीजिए।
हल :
(a) जब चालक को केवल Q आवेश दिया गया है तो यह पूर्णत: चालक के बाह्य पृष्ठ पर रहता है।
हम जानते हैं कि एक चालक के भीतर नैट आवेश शून्य रहता है। अत: खोल के केन्द्र पर 4 आवेश रखने पर, q खोल की भीतरी सतह पर – q आवेश प्रेरित हो जाता है तथा बाहरी सतह पर अतिरिक्त + q आवेश आ जाता है।
अतः भीतरी सतह पर आवेश = – q
बाहरी सतह पर आवेश = Q+q
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 17

(b) हाँ, यदि कोटर आवेशविहीन है तो उसके अन्दर विद्युत क्षेत्र शून्य होगा।
इसके विपरीत कल्पना करें कि किसी चालक के भीतर एक अनियमित आकृति का आवेशविहीन कोटर है जिसके भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य नहीं है। अब एक ऐसे बन्द लूप पर विचार करें जिसका कुछ भाग कोटर के भीतर क्षेत्र रेखाओं के समान्तर है तथा शेष भाग कोटर से बाहर परन्तु चालक के भीतर है। चूँकि चालक के भीतर विद्युत-क्षेत्र शून्य है। अत: यदि एकांक आवेश को इस बन्द लूप के अनुदिश ले जाया जाए तो क्षेत्र द्वारा किया गया नैट कार्य प्राप्त होगा। परन्तु यह स्थिति स्थिर विद्युत क्षेत्र के लिए सत्य नहीं है (बन्द लूप पर नैट कार्य शून्य होता है)। अत: हमारी परिकल्पना कि कोटर के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य नहीं है, गलत है।
अर्थात् चालक के भीतर आवेशविहीन कोटर के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य होगा।

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प्रश्न 16.
(a) दर्शाइए कि आवेशित पृष्ठ के एक पार्श्व से दूसरे पार्श्व पर स्थिर विद्युत क्षेत्र के अभिलम्ब घटक में असांतत्य होता है, जिसे \(\left(\overrightarrow{\mathrm{E}}_{2}-\overrightarrow{\mathrm{E}}_{1}\right) \cdot \hat{\mathrm{n}}=\frac{\sigma}{\varepsilon_{0}}\) द्वारा व्यक्त किया जाता है। जहाँ \(\hat{\mathbf{n}}\) एक बिन्दु पर पृष्ठ के
अभिलम्ब एकांक सदिश है तथा σ उस बिन्दु पर पृष्ठ आवेश घनत्व है \(\hat{\mathbf{n}}\) की दिशा पार्श्व 1 से पार्श्व 2 की ओर
है)। अतः दर्शाइए कि चालक के ठीक बाहर विद्युत क्षेत्र \(\frac{\sigma \hat{\mathbf{n}}}{\varepsilon_{0}}\) है।
(b) दर्शाइए कि आवेशित पृष्ठ के एक पार्श्व से दूसरे पार्श्व पर स्थिर विद्युत क्षेत्र का स्पर्शीय घटक संतत है।
उत्तर :
(a) माना AB एक आवेशित पृष्ठ है जिस पर पृष्ठीय आवेश घनत्व σ है। पृष्ठ के समीप प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) समान तथा पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की ओर है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 18
चित्र में एक बेलनाकार गाउसीय पृष्ठ को प्रदर्शित किया गया है। इस पृष्ठ 2 के वृत्ताकार परिच्छेदों पर अभिलम्ब सदिश \(\hat{\mathbf{n}}_{1} व 1\hat{\mathbf{n}}_{2}\) क्रमशः क्षेत्रों \(\overrightarrow{\mathrm{E}}_{1}\) व \(\overrightarrow{\mathrm{E}}_{2}\) के समदिश हैं जबकि वक्र पृष्ठ पर अभिलम्ब संगत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}_{3}\) के लम्बवत् हैं। ..
माना प्रत्येक वृत्तीय परिच्छेद का क्षेत्रफल Δ A है तब गाउसीय पृष्ठ से -गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 19
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 64
उपर्युक्त समीकरण (2) किसी आवेशित सतह के दोनों ओर स्थित विद्युत क्षेत्रों के बीच सम्बन्ध को व्यक्त करता है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 20
अब संलग्न चित्र में प्रदर्शित अनियमित आकृति के आवेशित चालक पर विचार के कीजिए। चालक का सम्पूर्ण आवेश उसकी बाह्य सतह पर फैला है। अत: चालक की। बाह्य सतह एक समविभव पृष्ठ है। आइए हम समीकरण (2) को इस चालक के बाहर विद्युत-क्षेत्र ज्ञात करने के लिए प्रयुक्त करते हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 21

(b) आवेशित पृष्ठ के एक ओर से दूसरी ओर जाने पर स्थिर विद्युत क्षेत्र का स्पर्श रेखीय घटक सतत (सर्वथा शून्य) होता है, अन्यथा पृष्ठ के विभिन्न बिन्दु अलग-अलग विभवों पर होंगे तथा धनावेश पृष्ठ के अनुदिश उच्च विभव से निम्न विभव के बिन्दुओं की ओर गति करता रहेगा।

प्रश्न 17.
रैखिक आवेश घनत्व λ वाला एक लम्बा आवेशित बेलन एक खोखले समाक्षीय चालक बेलन द्वारा घिरा है। दोनों बेलनों के बीच के स्थान में विद्युत क्षेत्र कितना है?
हल :
दोनों बेलनों के बीच r त्रिज्या तथा l लम्बाई के समाक्षीय बेलनाकार गाउसीय पृष्ठ पर विचार कीजिए।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 22
सममिति के कारण इस बेलन के वक्र पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) सर्वत्र । समान तथा पृष्ठीय अल्पांश \(d \overrightarrow{\mathrm{A}}\) के समान्तर है जबकि वृत्तीय पृष्ठों पर \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) अल्पांश \(d \overrightarrow{\mathrm{A}}\) के लम्बवत् है। अतः
गाउसीय पृष्ठ से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 23

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प्रश्न 18.
एक हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन लगभग 0.53 Å दूरी पर परिबद्ध हैं :
(a) निकाय की स्थितिज ऊर्जा का ev में परिकलन कीजिए, जबकि प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन के मध्य से अनन्त दूरी पर स्थितिज ऊर्जा को शून्य माना गया है।
(b) इलेक्ट्रॉन को स्वतन्त्र करने में कितना न्यूनतम कार्य करना पड़ेगा, यदि यह दिया गया है कि इसकी कक्षा में गतिज ऊर्जा (a) में प्राप्त स्थितिज ऊर्जा के परिमाण की आधी है?
(c) यदि स्थितिज ऊर्जा को 1.06 Å पृथक्करण पर शून्य ले लिया जाए तो, उपर्युक्त (a) और (b) के उत्तर
क्या होंगे?
हल : यहाँ q1 = – 1.6 x 10-19 कूलॉम,
q2= + 1.6 x 10-19 कूलॉम
r = 0.53Å = 5.3 x 10-11 मीटर
(a) इलेक्ट्रॉन-प्रोटॉन के निकाय की विद्युत स्थितिज ऊर्जा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 24

(b) इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा U = – 27.17 ev
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 25
U’ को शून्य मानने पर r = 0.53 Å दूरी पर स्थितिज ऊर्जा
U” = U – U’ = – 27.2 + 13.6 = – 13.6 ev
जबकि K = 13.6ev
∴ हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा
E= K +U” = 0
अतः इलेक्ट्रॉन को मुक्त करने के लिए आवश्यक कार्य
W = E – U’ = 0- (- 13.6) = 13.6 ev

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प्रश्न 19.
यदि H2 अणु के दो में से एक इलेक्ट्रॉन को हटा दिया जाए तो हमें हाइड्रोजन आण्विक आयन : (H2+) प्राप्त होगा। (H2+) की निम्नतम अवस्था (ground state) में दो प्रोटॉन के बीच दूरी लगभग 1.5A है
और इलेक्ट्रॉन प्रत्येक प्रोटॉन से लगभग 1Å की दूरी पर है। निकाय की स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए। स्थितिज ऊर्जा की शून्य स्थिति के चयन का उल्लेख कीजिए।
हल :
प्रत्येक प्रोटॉन का आवेश q1 = q2 = + 1.6 x 10-19 कूलॉम
दोनों के बीच की दूरी r12 = 1.5 Å = 1.5 x 10-10 मीटर
इलेक्ट्रॉन का आवेश q3 = – 1.6 x 10-19 कूलॉम ।
r23 = r31 = 1A = 10-10 मीटर,
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 26
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 27
स्थितिज ऊर्जा का शून्य अनन्त पर लिया गया है।

प्रश्न 20.
a और । त्रिज्याओं वाले दो आवेशित चालक गोले एक तार द्वारा एक-दूसरे से जोड़े गए हैं। दोनों गोलों के पृष्ठों पर विद्युत क्षेत्रों में क्या अनुपात है? प्राप्त परिणाम को, यह समझाने में प्रयुक्त कीजिए कि किसी चालक के तीक्ष्ण और नुकीले सिरों पर आवेश घनत्व, चपटे भागों की अपेक्षा अधिक क्यों होता है?
हल :
माना इन गोलों पर आवेश क्रमशः 41 तथा 42 हैं।
:: दोनों गोले चालक तार द्वारा जुड़े हैं। अत: दोनों के पृष्ठीय विभव बराबर होंगे।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 28
माना किसी आवेशित चालक के दो अलग-अलग भागों की वक्रता त्रिज्याएँ a तथा b हैं। माना चालक का प्रथम भाग दूसरे की तुलना में अधिक नुकीला है तब a यदि इन भागों पर q1 व q2 आवेश संचित हैं तो
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 29
अर्थात् कम वक्रता त्रिज्या वाले भाग (नुकीले भाग) का पृष्ठीय घनत्व अधिक वक्रता त्रिज्या वाले भाग की तुलना में अधिक होगा।

प्रश्न 21.
बिन्दु (0, 0, – a) तथा (0, 0, a) पर दो आवेश क्रमशः -q और +q स्थित हैं।
(a) बिन्दुओं (0, 0, z) और (x, y, 0) पर स्थिर विद्युत विभव क्या है?
(b) मूल बिन्दु से किसी बिन्दु की दूरी r पर विभव की निर्भरता ज्ञात कीजिए, जबकि \(\frac{r}{a}\) >> 1 है।
(c) X-अक्ष पर बिन्दु (5, 0, 0) से बिन्दु (- 7, 0,0) तक एक परीक्षण आवेश को ले जाने में कितना कार्य । करना होगा? यदि परीक्षण आवेश को उन्हीं बिन्दुओं के बीच X-अक्ष से होकर न ले जाएँ तो क्या उत्तर बदल जाएगा?
हल :
दिए गए बिन्दु आवेश एक विद्युत द्विध्रुव बनाते हैं।
आवेशों के बीच की दूरी = 2a
∴ विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण \(\overrightarrow{\mathrm{p}}=q \times 2 \overrightarrow{\mathrm{a}}=2 q \overrightarrow{\mathrm{a}}\)
(a) बिन्दु (0, 0, z) द्विध्रुव की अक्ष पर स्थित है,
∴ इस बिन्दु पर विद्युत विभव \(V=\pm \frac{1}{4 \pi \varepsilon_{0}} \cdot \frac{p}{\left(z^{2}-a^{2}\right)}\)
बिन्दु (x, y, 0) द्विध्रुव के विषुवत तल में स्थित है; अतः इस बिन्दु पर विद्युत विभव शून्य होगा।

(b) द्विध्रुव के कारण किसी बिन्दु पर विद्युत विभव :
माना कोई बिन्दु P, द्विध्रुव के केन्द्र (मूल बिन्दु) से 7 दूरी पर स्थित है। इस बिन्दु की बिन्दु आवेशों +q तथा । q से दूरियाँ क्रमश: r1 तथा r2 हैं।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 30
तब बिन्दु P पर द्विध्रुव के कारण विद्युत विभव
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 31
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 32

(c) बिन्दु P(5, 0, 0) तथा Q(- 7, 0, 0) द्विध्रुव के विषुवत तल में स्थित हैं। अत: इन दोनों बिन्दुओं पर विभव शून्य होगा।
∴ परीक्षण आवेश qo को बिन्दु P से Q तक ले जाने में किया गया कार्य
W = qo [V (Q)- V (P)] = 0 [∵ V (P) = V(Q)= 0]
विद्युत-क्षेत्र एक संरक्षी क्षेत्र है जिसमें किया गया कार्य केवल अन्त्य बिन्दुओं पर निर्भर करता है, न कि मार्ग पर। (Note)
अतः उत्तर में कोई परिवर्तन नहीं आएगा।

प्रश्न 22.
नीचे दिए गए चित्र-2.12 में एक आवेश विन्यास जिसे विद्युत चतुर्युवी कहा जाता है, दर्शाया गया है। चतुर्भुवी के अक्ष पर स्थित किसी बिन्दु के लिए r पर विभव की. a a . निर्भरता प्राप्त कीजिए जहाँ \(\frac{r}{a}\)>>11 अपने परिणाम की तुलना एक विद्युत द्विध्रुव व विद्युत एकल ध्रुव (अर्थात् किसी एकल आवेश) के लिए प्राप्त परिणामों से कीजिए।
हल :
माना P की विभिन्न आवेशों से दूरियाँ निम्नलिखित हैं –
r-a, r, r+a
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 65
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 34
विद्युत द्विध्रुव के कारण अक्ष पर विभव दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती (\(V \propto \frac{1}{r^{2}}\) ) होता है। एकल ध्रुव के कारण यह दूरी के व्युत्क्रमानुपाती (\(V \propto \frac{1}{r}\) ) होता है। अतः चतुर्भुवी के कारण विभव, विद्युत द्विध्रुव तथा एकल ध्रुव की तुलना में अधिक तेजी से घटता है।

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प्रश्न 23.
एक विद्युत टैक्नीशियन को 1 किलोवोल्ट विभवान्तर के परिपथ में 2 μF संधारित्र की आवश्यकता है। 1 μF के संधारित्र उसे प्रचुर संख्या में उपलब्ध हैं जो 400 वोल्ट से अधिक का विभवान्तर वहन नहीं कर सकते। कोई सम्भव विन्यास सुझाइए जिसमें न्यूनतम संधारित्रों की आवश्यकता हो।
हल :
माना हम प्रत्येक पंक्ति में n संधारित्र जोड़ते हैं तथा ऐसी m पंक्तियों को समान्तर क्रम में जोड़ते हैं। श्रेणीक्रम में, 1 kV = 1000 वोल्ट का विभवान्तर n संधारित्रों में बराबर बॅट जाएगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 35
∵ n न्यूनतम पूर्णांक है। अत: n = 3
प्रत्येक पंक्ति की धारिता = \(\frac{1}{n}\) माइक्रोफैरड होगी।
समान्तर क्रम में जुड़ी ऐसी m पंक्तियों की धारिता
\(\frac{1}{n} +\frac{1}{n} + \frac{1}{n}\) + m पद – = 2μF
⇒ \(\frac{m}{n}\) = 2μF
⇒ m = 2n = 2×3 = 6 ,

∵ हमें 3-3 संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़कर इस प्रकार की 6 पंक्तियाँ बनानी होंगी। अब इन 6 पंक्तियों को समान्तर क्रम में जोड़ना होगा।

प्रश्न 24.
2F वाले एक समान्तर पट्टिका संधारित्र की पट्टिका का क्षेत्रफल क्या है, जबकि पट्टिकाओं का पृथकन 0.5 सेमी है?
हल :
दिया है : d = 0.5 सेमी = 5 x 10 -3मीटर, C = 2F, A = ?
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 36
∴ पट्टिका का क्षेत्रफल 1.13x 10° मीटर’ या 1130 किमी है।

प्रश्न 25.
चित्र 2.13 के नेटवर्क (जाल) की तुल्य धारिता प्राप्त कीजिए। 300 वोल्ट संभरण (सप्लाई) के साथ प्रत्येक संधारित्र का आवेश व उसकी वोल्टता ज्ञात कीजिए।
हल :
दिए गए नेटवर्क को चित्र 2.14 की भाँति व्यवस्थित किया जा सकता है

MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 37
सर्वप्रथम C2 व C3 श्रेणीक्रम में जुड़े हैं, इनकी तुल्य धारिता
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 66
अब यह 100 pF की धारिता C1 के साथ समान्तर क्रम में जुड़ी है,
अतः तुल्य धारिता = 100 + 100 = 200 pF
पुन: यह 200 pF, C4 के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 39
∵ C4 शेष संयोजन (धारिता 200 pF) के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है,
अत: C4तथा शेष संयोजन, दोनों पर यही आवेश होगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 40
∴ शेष संयोजन का विभवान्तर V = 300 वोल्ट – 200 वोल्ट = 100 वोल्ट
∵ C1,C2 व C3 के श्रेणी संयोजन से समान्तर क्रम में जुड़ा है,
∴ C1 का विभवान्तर = 100 वोल्ट
तथा C2 व C3 के श्रेणी संयोजन का विभवान्तर = 100 वोल्ट
C1 पर आवेश q1 = C1V1= 100 x 10-12 फैरड x100 वोल्ट
= 10-8 कूलॉम.
∴ C = C3; अतः कुल विभवान्तर 100 V इन पर बराबर-बराबर बंटेगा।
प्रत्येक का विभवान्तर = 50 वोल्ट
प्रत्येक पर आवेश q2 = C2V2= 200 x 10-12
F x 50 वोल्ट = 10-8c

अतः संयोजन की धारिता \(C=\frac{200}{3}\) pF
C1 का विभवान्तर = 100 वोल्ट।
तथा आवेश = 10-8 कूलॉम
C2 का विभवान्तर = 50 वोल्ट ।
तथा आवेश = 10-8 कूलॉम
C3 का विभवान्तर = 50वोल्ट
तथा आवेश = 10-8 कूलॉम
C4 का विभवान्तर = 200 वोल्ट
तथा आवेश = 2 x 10-8 कूलॉम

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प्रश्न 26.
किसी समान्तर पट्टिका संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका का क्षेत्रफल 90 सेमी2 है और उनके बीच पृथक्न 2.5 मिमी है। 400 वोल्ट संभरण से संधारित्र को आवेशित किया गया है।
(a) संधारित्र कितना स्थिर विद्युत ऊर्जा संचित करता है?
(b) इस ऊर्जा को पट्टिकाओं के बीच स्थिर विद्युत क्षेत्र में संचित समझकर प्रति एकांक आयतन ऊर्जा u ज्ञात कीजिए। इस प्रकार, पट्टिकाओं के बीच विद्युत क्षेत्र E के परिमाण और u में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
हल :
दिया है : A = 90 सेमी2 = 9 x 10-3 मीटर2, d = 2.5 मिमी = 2.5 x 10-3 मीटर V= 400 वोल्ट, U = ?, एकांक आयतन में ऊर्जा u = ?
u व E के बीच सम्बन्ध = ?
(a)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 41
(b)
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 42

प्रश्न 27.
एक 4 माइक्रोफैरड के संधारित्र को 200 वोल्ट संभरण (सप्लाई) से आवेशित किया गया है। फिर संभरण से हटाकर इसे एक अन्य अनावेशित 2 माइक्रोफैरड के संधारित्र से जोड़ा जाता है। पहले संधारित्र की कितनी स्थिर विद्युत ऊर्जा का ऊष्मा और विद्युत चुम्बकीय विकिरण के रूप में ह्रास होता है ?
हल :
दिया है : C1 = 4 x 10-6 फैरड, V1 = 200 वोल्ट,
C2= 2 x 10-6 फैरड, V2 = 0 वोल्ट
माना जोड़ने के पश्चात् दोनों का उभयनिष्ठ विभव V है।
∵ जोड़ने से पूर्व संभरण को हटा लिया गया है। अत: कुल आवेश स्थिर रहेगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 43
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 44

प्रश्न 28.
दर्शाइए कि एक समान्तर पट्टिका संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका पर बल का परिमाण \(\frac{1}{2}\)QE है, जहाँ Q.संधारित्र पर आवेश है और E पट्टिकाओं के बीच विद्युत क्षेत्र का परिमाण है। घटक 1/2 के मूल को समझाइए।
हल :
माना दोनों पट्टिकाओं के बीच लगने वाला पारस्परिक आकर्षण बल F है तथा प्लेटों के बीच की दूरी x है। दूरी x में dx की वृद्धि करने पर आकर्षण बल F के विरुद्ध कृत कार्य
dW = F dx         ………………….(1)
∵ प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र E है। अत: संधारित्र के एकांक आयतन में संचित ऊर्जा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 45
∵ प्लेटों का क्षेत्रफल A व बीच की दूरी x है। अत: संधारित्र की कुल ऊर्जा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 46
∵ दूरी x में dx की वृद्धि करने पर ऊर्जा में वृद्धि
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घटक \(\frac{1}{2}\) का मूल इस तथ्य में निहित है कि चालक प्लेट के बाहर विद्युत क्षेत्र E तथा प्लेट के भीतर शून्य होता है। अत: औसत विद्युत क्षेत्र \(\frac{E}{2}\) होता है, जिसके विरुद्ध प्लेट को खिसकाया जाता है।

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प्रश्न 29.
दो संकेन्द्री गोलीय चालकों जिनको उपयुक्त विद्युतरोधी आवेश (+q) आलम्बों से उनकी स्थिति में रोका गया है, से मिलकर एक गोलीय संधारित्र बना है (चित्र 2.15)। दर्शाइए कि गोलीय संधारित्र की धारिता C इस प्रकार व्यक्त की जाती है :
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यहाँ r1 और r2 क्रमशः बाहरी तथा भीतरी गोलों की त्रिज्याएँ हैं।
हल :
गोलीय अथवा गोलाकार संधारित्र की धारिता (Capacitance . of Spherical Capacitor) का व्यंजक-माजा गोलीय संधारित्र धातु के आवेश (-q) दो समकेन्द्रीय खोखले गोलों A व B का बना है, जो एक-दूसरे को कहीं भी स्पर्श नहीं करते (चित्र 2.15)। जब गोले A को -q आवेश दिया जाता है तो प्रेरण द्वारा गोले B पर +q आवेश उत्पन्न हो जाता है। चूंकि गोले B का बाहरी तल पृथ्वी से जुड़ा है; अत: गोले B के बाहरी तल पर उत्पन्न -q आवेश पृथ्वी से आने वाले इलेक्ट्रॉनों से निरावेशित हो जाता है। इस प्रकार गोले B के आन्तरिक पृष्ठ पर + q आवेश रह जाता है। माना गोले A की त्रिज्या r2 तथा गोले B की त्रिज्या r1 है।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 49
चूँकि गोले के भीतर प्रत्येक बिन्दु पर वही विभव होता है जो कि उसके पृष्ठ पर होता है।
अत: गोले B के अन्दर, +q आवेश के कारण विभव
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 50
चूँकि विभव अदिश राशि है; अत: गोले A पर परिणामी विभव
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 51
गोला B पृथ्वी से जुड़ा होने के कारण इस पर विभव शून्य है। अत: गोले A व B के बीच विभवान्तर
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 52

प्रश्न 30.
एक गोलीय संधारित्र के भीतरी गोले की त्रिज्या 12 सेमी है तथा बाहरी गोले की त्रिज्या 13 सेमी है। बाहरी गोला भू-सम्पर्कित है तथा भीतरी गोले पर 2.5 माइक्रोकूलॉम का आवेश दिया गया है। संकेन्द्री गोलों के बीच के स्थान में 32 पराविधुतांक का द्रव भरा है।
(a) संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए।
(b) भीतरी गोले का विभव क्या है?
(c) इस संधारित्र की धारिता की तुलना एक 12 सेमी त्रिज्या वाले किसी वियुक्त गोले की धारिता से कीजिए। व्याख्या कीजिए कि गोले की धारिता इतनी कम क्यों है?
हल :
दिया है : r1 = 13 सेमी = 0.13 मीटर, r2 = 12 सेमी = 0.12 मीटर, K = 32, Q = 2.5x 10-6 कूलॉम
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 53

अर्थात् गोलीय संधारित्र की धारिता एकल गोले की धारिता से 416 गुनी अधिक है। इससे यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि एकल चालक के समीप एक अन्य भू-सम्पर्कित चालक रखकर उनके बीच के स्थान में पराविद्युत भरने से धारिता बहुत अधिक बढ़ जाती है।

प्रश्न 31.
सावधानीपूर्वक उत्तर दीजिए :
(a) दो बड़े चालक गोले जिन पर आवेश Q1 और Q2 हैं, एक-दूसरे के समीप लाए जाते हैं। क्या इनके बीच स्थिर विद्युत बल का परिमाण तथ्यत –
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 54
द्वारा दर्शाया जाता है, जहाँ r इनके केन्द्रों के बीच की दूरी है।
(b) यदि कूलॉम के नियम में \(\frac{1}{r^{3}}\) निर्भरता का समावेश (1/r2 के स्थान पर) हो तो क्या गाउस का नियम अभी भी सत्य होगा?
(c) स्थिर विद्युत क्षेत्र विन्यास में एक छोटा परीक्षण आवेश किसी बिन्दु पर विराम में छोड़ा जाता है। क्या यह उस बिन्दु से होकर जाने वाली क्षेत्र रेखा के अनुदिश चलेगा?
(d) इलेक्ट्रॉन द्वारा एक वृत्तीय कक्षा पूरी करने में नाभिक के क्षेत्र द्वारा कितना कार्य किया जाता है? यदि कक्षा दीर्घवृत्ताकार हो तो क्या होगा?
(e) हमें ज्ञात है कि एक आवेशित चालक के पृष्ठ के आर-पार विद्युत क्षेत्र असंतत होता है। क्या वहाँ विद्युत विभव भी असंतत होगा?
(f) किसी एकल चालक की धारिता से आपका क्या अभिप्राय है?
(g) एक सम्भावित उत्तर की कल्पना कीजिए कि पानी का पराविद्युतांक (= 80), अभ्रक के पराविद्युतांक (= 6) से अधिक क्यों होता है?
हल :
(a) यदि दोनों गोले एक-दूसरे से बहुत अधिक दूरी पर होंगे तभी वे बिन्दु आवेशों की भाँति कार्य करेंगे। कूलॉम का नियम केवल बिन्दु आवेशों के लिए सत्य है। अत: गोलों को समीप लाने पर कूलॉम का नियम लागू नहीं होगा।
(b) नहीं, गाउस का नियम केवल तभी तक सत्य है जब तक कि कूलॉम के नियम में निर्भरता (\(\frac{1}{r^{2}}\)) है; अतः कूलॉम के नियम में निर्भरता (\frac{1}{r^{3}}) होने पर गाउस का नियम लागू नहीं होगा।
(c) नहीं, यदि क्षेत्र रेखा एक सरल रेखा है, केवल तभी परीक्षण आवेश क्षेत्र रेखा के अनुदिश चलेगा।
(d) शून्य, स्थिर विद्युत क्षेत्र में बिन्दु आवेश के बन्द वक्र पर चलाने में किया गया कार्य शून्य होता है। यदि वक्र दीर्घवृत्ताकार है तो भी कार्य शून्य होगा।
(e) नहीं, चालकं की पूरी सतह पर विद्युत विभव सतत होता है। (1) एकल चालक की धारिता एक ऐसे संधारित्र की धारिता है, जिसकी दूसरी प्लेट अनन्त पर है।
(g) जल के अणुओं का अपना स्थायी द्विध्रुव आघूर्ण होता है। अत: जल का पराविद्युतांक उच्च होता है, इसके विपरीत अभ्रक के अणुओं का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है; अत: इसका पराविद्युतांक निम्न होता है।

प्रश्न 32.
एक बेलनाकार संधारित्र में 15 सेमी लम्बाई एवं त्रिज्याएँ 1.5 सेमी तथा 1.4 सेमी के दो समाक्ष बेलन हैं। बाहरी बेलन भू-सम्पर्कित है और भीतरी बेलन को 3.5 माइक्रोकूलॉम का आवेश दिया गया है। निकाय की धारिता और भीतरी बेलन का विभव ज्ञात कीजिए। अन्त्य प्रभाव (अर्थात् सिरों पर क्षेत्र रेखाओं का मुड़ना) की उपेक्षा कर सकते हैं।
हल :
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 55

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प्रश्न 33.
पराविधुतांक तथा 107 वोल्ट मीटर-1 की पराविद्युत सामर्थ्य वाले एक पदार्थ से 1 किलोवोल्ट वोल्टता अनुमतांक के समान्तर पट्टिका संधारित्र की अभिकल्पना करनी है। [पराविद्युत सामर्थ्य वह अधिकतम विद्युत क्षेत्र है जिसे कोई पदार्थ बिना भंग हुए अर्थात् आंशिक आयनन द्वारा बिना विद्युत संचरण आरम्भ किए सहन कर सकता है। सुरक्षा की दृष्टि से क्षेत्र को कभी भी पराविद्युत सामर्थ्य के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।] 50pF धारिता के लिए पट्टिकाओं का कितना न्यूनतम क्षेत्रफल होना चाहिए?
हल :
दिया है : K = 3, पराविद्युत सामर्थ्य = 107 वोल्ट/मीटर,
C = 50 pF, न्यूनतम क्षेत्रफल A = ? V = 1000 वोल्ट
प्लेटों के बीच अधिकतम क्षेत्र Emax = पराविद्युत सामर्थ्य का 10%
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 56

प्रश्न 34.
व्यवस्थात्मकतः निम्नलिखित में संगत समविभव पृष्ठ का वर्णन कीजिए :
(a) Z-दिशा में अचर विद्युत क्षेत्र
(b) एक क्षेत्र जो एकसमान रूप से बढ़ता है, परन्तु एक ही दिशा (मान लीजिए 2-दिशा) में रहता है।
(c) मूलबिन्दु पर कोई एकल धनावेश और
(d) एक समतल में समान दूरी पर समान्तर लम्बे आवेशित तारों से बने एकसमान जाल।
उत्तर :
(a) x-y समतल के समान्तर समतल।
(b) समविभव पृष्ठ x-y समतल के समान्तर होंगे, परन्तु बढ़ते क्षेत्र के साथ, भिन्न-भिन्न नियत विभव वाले समतल एक-दूसरे के समीप होते जाएँगे।
(c) संकेन्द्रीय गोले जिनके केन्द्र मूलबिन्दु पर हैं।
(d) ग्रिड के समीप, समविभव पृष्ठों की आकृति समय के साथ बदलेगी परन्तु ग्रिड से दूर जाने पर समविभव . पृष्ठ ग्रिड (जाल) के अधिकाधिक समान्तर होते जाएँगे।

प्रश्न 35.
किसी वान डे ग्राफ प्रकार के जनित्र में एक गोलीय धातु कोश 15 x 106 वोल्ट का एक इलेक्ट्रोड बनाना है। इलेक्ट्रोड के परिवेश की गैस की पराविद्युत सामर्थ्य 5 x 107 वोल्ट मीटर-1 है। गोलीय कोश की आवश्यक न्यूनतम त्रिज्या क्या है?
हल :
दिया है : गोलीय कोश का विभव V = 15 x 106 वोल्ट
गैस की पराविद्युत सामर्थ्य Emax = 5 x 107 वोल्ट मीटर-1
माना कोश की न्यूनतम त्रिज्या r है, तब
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 57

प्रश्न 36.
r1 त्रिज्या तथा q1 आवेश वाला एक छोटा गोला r2 त्रिज्या और q2 आवेश के गोलीय खोल (कोश) से घिरा है। दर्शाइए यदि q1 धनात्मक है तो (जब दोनों को एक तार द्वारा जोड़ दिया जाता है) आवश्यक रूप से आवेश, गोले से खोल की तरफ ही प्रवाहित होगा, चाहे खोल पर आवेश q2 कुछ भी हो।
हल :
हम जानते हैं कि किसी चालक का सम्पूर्ण आवेश उसके बाह्य पृष्ठ पर रहता है; अत: जैसे ही दोनों गोलों को चालक तार द्वारा जोड़ा जाएगा वैसे ही अन्दर वाले छोटे गोले का सम्पूर्ण आवेश तार से होकर बाहरी खोल की ओर प्रवाहित हो जाएगा, चाहे खोल पर आवेश q2 कुछ भी क्यों न हो।

प्रश्न 37.
निम्न का उत्तर दीजिए :
(a) पृथ्वी के पृष्ठ के सापेक्ष वायुमण्डल की ऊपर परत लगभग 400 किलोवोल्ट पर है, जिसके संगत विद्युतक्षेत्र ऊँचाई बढ़ने के साथ कम होता है। पृथ्वी के पृष्ठ के सापेक्ष विद्युत क्षेत्र लगभग 100 वोल्ट मीटर-1 है। तब फिर जब हम घर से बाहर खुले में जाते हैं तो हमें विद्युत आघात क्यों नहीं लगता? (घर को लोहे का पिंजरा मान लीजिए; अतः उसके अन्दर कोई विद्युत क्षेत्र नहीं है।)
(b) एक व्यक्ति शाम के समय अपने घर के बाहर 2 मीटर ऊँचा अवरोधी पट्ट रखता है जिसके शिखर पर एक 1 मीटर क्षेत्रफल की बड़ी ऐलुमिनियम की चादर है। अगली सुबह वह यदि धातु की चादर को छूता है तो क्या उसे विद्युत आघात लगेगा?
(c) वायु की थोड़ी-सी चालकता के कारण सारे संसार में औसतन वायुमण्डल में विसर्जन धारा 1800 ऐम्पियर मानी जाती है। तब यथासमय वातावरण स्वयं पूर्णतः निरावेशित होकर विद्युत उदासीन क्यों नहीं हो जाता? दूसरे शब्दों में, वातावरण को कौन आवेशित रखता है?
(d) तड़ित के दौरान वातावरण की विद्युत ऊर्जा, ऊर्जा के किन रूपों में क्षयित होती है?
हल :
(a) हमारा शरीर तथा पृथ्वी के समान विभव पर रहने के कारण हमारे शरीर से होकर कोई विद्युत धारा प्रवाहित नहीं होती इसीलिए हमें कोई विद्युत आघात नहीं लगता।
(b) हाँ, पृथ्वी तथा ऐलुमिनियम की चादर मिलकर एक संधारित्र बनाती हैं तथा अवरोधी पट्ट पराविद्युत का कार्य करता है। ऐलुमिनियम की चादर वायुमण्डलीय आवेश के लगातार गिरते रहने से आवेशित होती रहती है और उच्च विभव प्राप्त कर लेती है; अतः जब व्यक्ति इस चादर को छूता है तो उसके शरीर से होकर एक विद्युत धारा प्रवाहित होती है और इस कारण उस व्यक्ति को विद्युत आघात लगेगा।
(c) यद्यपि वायुमण्डल 1800 ऐम्पियर की औसत विसर्जन धारा के कारण लगातार निरावेशित होता रहता है परन्तु साथ ही यह तड़ित तथा झंझावात के कारण यह लगातार आवेशित भी होता रहता है और इन दोनों के बीच एक सन्तुलन बना रहता है जिससे कि वायुमण्डल कभी भी पूर्णत: निरावेशित नहीं हो पाता।
(d) तड़ित के दौरान वातावरण की विद्युत ऊर्जा, प्रकाश उर्जा, ध्वनि ऊर्जा तथा ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में क्षयित होती है।

NCERT भौतिक विज्ञान प्रश्न प्रदर्शिका (Physics Exemplar LQ Problems) पुस्तक से चयनित महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के हल

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
चित्र में दर्शाए अनुसार परिपथ में 4 μF का संधारित्र संयोजित है। बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध 0.5Ω है। संधारित्र की प्लेटों पर आवेश की मात्रा होगी –
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 58
(a) 0
(b) 4 μc
(c) 16 μc
(d) 8 μc
उत्तर :
(d) 8 μc

प्रश्न 2.
किसी एक समान विद्युत क्षेत्र में किसी धनावेशित कण को मुक्त किया जाता है। आवेश की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा
(a) नियत रहती है क्योंकि विद्युत क्षेत्र एकसमान है
(b) बढ़ जाती है क्योंकि आवेश विद्युत क्षेत्र के अनुदिश गति करता है
(c) घट जाती है क्योंकि आवेश विद्युत क्षेत्र के अनुदिश गति करता है
(d) घट जाती है क्योंकि आवेश विद्युत क्षेत्र के विपरीत गति करता है।
उत्तर :
(c) घट जाती है क्योंकि आवेश विद्युत क्षेत्र के अनुदिश गति करता है

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प्रश्न 3.
कुछ आवेशों के एक समूह का कुल योग शून्य नहीं है। इससे अधिक दूरी पर बनने वाले समविभव पृष्ठ होंगे –
(a) गोले
(b) समतल
(c) परवलयज
(d) दीर्घवृत्तज।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 59
उत्तर :
(a) गोले

प्रश्न 4.
कोई समान्तर पट्टिका संधारित्र दो श्रेणीबद्ध परावैद्युत गुटकों से बना है। इनमें चित्र में दर्शाए अनुसार एक गुटके की मोटाई d1 तथा परावैद्युतांक K1 तथा दूसरे गुटके की मोटाई d25 तथा परावैद्युतांक K2 है।* इस व्यवस्था को एक ऐसा परावैद्युत गुटका माना जा सकता है जिसकी d) मोटाई d = (d1 + d2) तथा प्रभावी परावैद्युतांक K है। तब K का मान है –
(a)\(\frac{K_{1} d_{1}+K_{2} d_{2}}{d_{1}+d_{2}}\)
(b)\(\frac{K_{1} d_{1}+K_{2} d_{2}}{K_{1}+K_{2}}\)
(c)\(\frac{K_{1} K_{2}\left(d_{1}+d_{2}\right)}{\left(K_{1} d_{2}+K_{2} d_{1}\right)}\)
(d)\(\frac{2 K_{1} K_{2}}{\left(K_{1}+K_{2}\right)}\)
उत्तर :
(c)\(\frac{K_{1} K_{2}\left(d_{1}+d_{2}\right)}{\left(K_{1} d_{2}+K_{2} d_{1}\right)}\)

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता अति लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
R1 तथा R2 त्रिज्याओं (R1 > R2) के दो चालक गोलों पर विचार कीजिए। यदि दोनों गोले समान विभव पर हैं तो छोटे गोले की अपेक्षा बड़े गोले पर अधिक आवेश होता है। उल्लेख कीजिए, छोटे गोले का आवेश घनत्व बड़े गोले की तुलना में अधिक होगा अथवा कम?
उत्तर :
दोनों गोले समान विभव पर हैं। अत: V1 = V2 अथवा
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 60
अत: छोटे गोले (R2 त्रिज्या का) का आवेश पृष्ठ घनत्व, बड़े गोले की तुलना में अधिक होगा।

प्रश्न 2.
मुक्त इलेक्ट्रॉन उच्च विभव के क्षेत्र की ओर गमन करते हैं अथवा निम्न विभव के क्षेत्र की ओर?
उत्तर :
मुक्त इलेक्ट्रॉन उच्च विभव के क्षेत्र की ओर गमन करते हैं। .

प्रश्न 3.
समान आवेश वाले दो निकटवर्ती चालकों के बीच क्या कोई विभवान्तर हो सकता है?
उत्तर :
हाँ, यदि चालकों का आमाप भिन्न-भिन्न हों तब समान आवेश होते हुए भी उनके बीच विभवान्तर हो सकता है।

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प्रश्न 4.
कोई परीक्षण आवेश q किसी बिन्दु आवेश Q के विद्युत क्षेत्र में दो भिन्न बन्द पथों पर गमन करता है (चित्रानुसार )। पहला पथ विद्युत क्षेत्र की रेखाओं के अनुदिश तथा लम्बवत् कोई भाग है। दूसरा पथ एक आयताकार पाश है जिसका क्षेत्रफल पहले पाश के बराबर है। इन दोनों प्रकरणों में किए गए कार्य की तुलना कीजिए।
उत्तर :
वैद्युत बल एक संरक्षी बल है, अत: इसके अन्तर्गत बन्द पथ में किया है गया कार्य दोनों स्थितियों में शून्य होगा।
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 61

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
किसी संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच कोई परावैद्युत है तथा यह संधारित्र किसी दिष्ट स्रोत से संयोजित है। अब बैटरी को हटाया जाता है और फिर परावैद्युत को हटा दिया जाता है। यह उल्लेख कीजिए कि ऐसा करने पर संधारित्र की धारिता उसमें संचित ऊर्जा, विद्युत क्षेत्र, संचित आवेश तथा वोल्टता में वृद्धि होगी, कमी होगी अथवा नियत रहेगी?
उत्तर :
संधारित्र की पट्टिकाओं से संयोजित दिष्ट स्रोत (बैटरी) को हटा लेने पर संधारित्र की प्लेटों पर आवेश नियत रहेगा।
संधारित्र की प्लेटों के बीच से परावैद्युत को हटा लेने पर उसकी धारिता कम हो जाएगी।
संधारित्र में संचित ऊर्जा \(E=\frac{\sigma}{\varepsilon_{0} K}\), धारिता C घट जाने के कारण अधिक हो जाएगी।
प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र \(V=\frac{q}{C}\), परावैद्युत हटा लेने पर बढ़ जाएगा।
प्लेटों के बीच वोल्टता \(V=\frac{q}{C}\), धारिता कम हो जाने के कारण (या V = E.d के अनुसार) बढ़ जाएगी।

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता विस्तृत उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
R तथा 2R त्रिज्याओं के दो धातु के गोलों के पृष्ठीय आवेश घनत्व समान हैं। इन्हें सम्पर्क में लाकर पृथक कर दिया जाता है। इन दोनों पर नए पृष्ठीय आवेश घनत्व क्या होंगे?
हल :
धातु के गोलों पर आवेश q1 = σ 4πR2 तथा
q2 = σ4π(2R2)
4(σ4πR2) = 4q1
MP Board Class 12th Physics Solutions Chapter 2 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता img 62
चालकों को परस्पर सम्पर्क में रखने पर, उन पर आवेशों का पुनर्वितरण उनकी धारिताओं के अनुपात में होता है। अतः

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines

Amines NCERT Intext Exercises

Question 1.
Classify the following amines as primary, secondary or tertiary:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 1
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 1-1
(iii) (C2H5)2CHNH2
(iv) (C2H5)2NH.
Answer:
(i) Primary
(ii) Tertiary
(iii) Primary
(iv) Secondary

Question 2.
(i) Write structures of different isomeric amines corresponding to the molecular formula, C4H11N.
(ii) Write IUPAC names of all the isomers.
(iii) What type of isomerism is exhibited by different pairs of amines ?
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 2

Isomerism:
(i)-(iv) and (vi)-(vii) are Position isomers, (v)-(vi) and (v)-(vii) are Metamers, (i)-(ii), (iii)-(iv) and (i)-(iii) are Chain isomers.

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Question 3.
How will you convert:
(i) Benzene into aniline,
(ii) Benzene into N, N-dimethylaniline,
(iii) Cl – (CH2)4 – Cl into hexane -1, 6 – diamine.
Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 3

Question 4.
Arrange the following in increasing order of their basic strength:

  1. C2H5NH2, C62H5NH2,NH3, C6H5CH2NH2 and (C2H5)2NH
  2. C2H5NH2, (C2H2)2NH, (C2H5)3N, C6H5NH2
  3. CH3NH2, (CH3 )2NH, (CH3 )3N, C6H5NH2 , C6H5CH2NH2.

Answer:

  1. C6H5NH2 < NH3 < C6H5CH2NH2 < C2H5NH2 < (C2H5)2NH
  2. C6H5NH2 < C2H5NH2 < (C2H5)3N < (C2H5)2NH 
  3. C6H5NH2 < C6H5CH2NH2 < (CH3)2N < CH3NH2 < (CH3)2NH

Question 5.
Complete the following acid-base reactions and name the products :
(i) CH3CH2CH2NH2 + HCl → ?
(ii) (C2HCl)3N + HCl → ?
Ans.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 4

Question 6.
Write reactions of the final alkylation product of aniline with excess of methyl iodide in the presence of sodium carbonate solution.
Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 5

Question 7.
Write the chemical reaction of aniline with benzoyl chloride and write the name of the product obtained.
Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 6

Question 8.
Write structures of different isomers corresponding to the molecular formula, C3H9N. Write IUPAC names of the isomers which will liberate nitrogen gas on treatment with nitrous acid.
Answer:
(a) C3H9N has four structural isomers.
These are:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 7

Question 9.
Convert:
(i) 3-Methylaniline into 3 – nitrotoIuene
(ii) Aniline into 1,3, 5 – tribromobenzene
Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 8

Amines NCERT Text Book Exercises

Question 1.
Write IUPAC names of the following compounds and classify them into primary, secondary, and tertiary amines:

  1. (CH3)2CHNH3
  2. CH3 (CH2 )2 NH 2
  3. CH3NHCH(CH3)2
  4. (CH3)3CNH2
  5. C6H5NHCH3
  6. (CH3CH2)3NCH3
  7. m – BrC6H4NH3.

Answer:

  1. Propan – 2 – amine (1°)
  2. Propan – 1 – amine (1 °)
  3. N – Methylpropan – 2 – amine (2°)
  4. 2 – MethyIpropan – 2 – amine (3°)
  5. N – Methylbenzenamine or A’-Methylaniline (2°)
  6. N – Ethyl – A – Methylethanamine (3°)
  7. 3 – Bromobenzenamine or 3-Bromoaniline (1°).

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Question 2.
Give one chemical test to distinguish between the following pairs of compounds:

  1. Methylamine and dimethylamine,
  2. Secondary and tertiary amines,
  3. Ethylamine and aniline
  4. Aniline and benzylamine
  5. Aniline and N- methylaniline.

Answer:
(i) By Carbylamine test:
Methylamine is a primary amine, therefore, it gives carbylamine test. In contrast, diethylamine is a secondary amine and hence does not give this test.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 9

(ii) By Libermann Nitrosoamine test:
2° Amines on treatment with HNO2(generates in situ by the action of HCl on NaNO2) give yellow coloured oily N-nitrosoamine. For Example
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 10

N-Nitrosodiethylamine on warming with phenol and cone. H2SO2 gives a green solu-tion which when made alkaline with aqueous NaOH turns deep blue and then red on dilu-tion. Tertiary amines do not give this test.

(iii) Azodye test:
It involves the reaction of any aromatic primary amine with HNO2 (NaNO2 + dil. HCl) at 273 – 278 K followed by treatment with an alkaline solution of ( β – naphthol) when a brilliant yellow, orange or red coloured dye is obtained
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 11
Aliphate primary amines under these conditions give a brisk evolution of N2 gas with the formation of priamary alcohols i.e. the solution remains clear.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 30-12
(iv) Aniline gives dye test (see, iii):
Benzyl amine reacts with nitrous acid to form benzyl alcohol and nitrogen gas (seen as bubbles).
C6H5CH2NH2 + NaOH → C6H5CH2OH + N2+ H2O

(v) These can be distinguished by carbylamine test:
Aniline being primary amines gives carbylamine test i.e. when heated with an alcoholic solution of KOH and CHCl2, it gives foul smell of phenylisocyanide.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 13

Methylaniline forms nitrosoamine (yellow oily liquid) on treatment with nitrous acid, which is stable at room temperature. However, on reaction with HCl in ether and alcohol, the nitroso (- NO) group migrates to para position.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 14

Question 3.
Account for the following:

  1. pKb of aniline is more than that of methylamine.
  2. Ethylamine is soluble in water whereas aniline is not.
  3. Methylamine in water reacts with ferric chloride to precipitate hydrated ferric oxide.
  4. Although amino group is O – and p – directing in aromatic electrophilic substitution reactions, aniline on nitration gives a substantial amount of m-nitroaniline.
  5. Aniline does not undergo Friedel- Crafts reaction.
  6. Diazonium salts of aromatic amines are more stable than those of aliphatic amines.
  7. Gabriel phthalimide synthesis is preferred for synthesizing primary amines.

Answer:

(i) In aniline, the lone pair electrons on the N-atoms are delocalized over the benzene ring thereby decreasing the electron density on the N – atom. In contrast, in CH3NH2, + 1 effect of CH3 increases the electron density on the N-atom. Therefore, aniline is a weaker base than methylamine and hence its pKb value is higher than that of methylamine.

(ii) Ethylamine dissolves in water due to inter molecular H-bonding. In aniline, due to the large hydrophobic part, i.e. hydrocarbon part, the extent of H – bonding decreases considerably and hence, aniline is insoluble in water.

(iii) Methylamine being more basic than water, accepts a proton from water liberating OH ions,
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 15
These OH ions combine with Fe+3 ions present in H2O to form brown ppt. of hydrated ferric oxide.
FeCl3 → Fe+3+ 3Cl
2Fe+3+ 6OH→ 2Fe(OH)3 or Fe2O3.3H2O
Hydrates ferric oxide (Brown ppt.)

(iv) In strongly acidic medium (cone. HNO3/conc. H2SO4), most of the aniline gets protonated to form anilinium ion \(\left(\stackrel{\ominus}{\mathrm{N}} \mathrm{H}_{3}\right)\) which is m – directing and deactivating while – NH2 group in aniline is o, p – directing and activating. That is why besides the o, p – deriva- tives, significant amount of meta derivative is also formed.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 16

(v) Aniline being a Lewis base reacts with Lewis acid AlCl3 to form a salt.
C6H5NH2+AlCl3 → C6H5 N H2 AlCl3
Lewis base    Lewis acid

Consequently, N of aniline acquires positive charge and thus acts a strong deactivating group for electrophilic substitution reaction. As a result, aniline does not undergo Friedel – Crafts reaction.

(vi) The diazonium salts of aromatic amines are more stable than those of aliphatic amines due to delocalization of the positive charge on the benzene ring.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 17

(vii) Gabriel phthalimide reaction gives pure 1° amines without any contamination of 2° and 3° amines. Therefore, it is preferred for synthesizing 1° amines.

Question 4.
Arrange the following:
(i) In decreasing order of the pKb values:
C6H5NH2, C6H5NHCH3, (C2H5)2NH and C6H5NH2

(ii) In increasing order of basic strength:
C6H5NH2, C6H5N(CH3)2 ,(C2H5)2NH and CH3NH2

(iii) In increasing order of basic strength:
(a) Aniline, p-nitroaniline and p – toluidine
(b) C6H5NH2, C6H5NHCH3, C6H5CH2NH2

(iv) In decreasing order of basic strength in gas phase:
C2H5NH2, (C2H5)2NH, (C2H5)3N and NH3

(v) In increasing order of boiling point:
C6H5OH, (CH3)2NH, C2H5NH2

(vi) In increasing order of solubility in water:
C6H5NH2, (C2H5)2NH, C2H5NH2.

Answer:
(i) Due to delocalization of lone pair of electrons of the N-atom over the benzene ring, C6H5NH2 and C6H5NHCH3 are for less basic than C2H5NH2 and (C2H5)2 NH. Further, due to + I effect of the CH3 group, C6H5NHCH3 is slightly more basic than C6H5NH2.

Among C2H5NH2 and (C2H5)2NH, (C2H5)2NH is more basic than C2H5NH2 due to greater + 1 effect of the two C2H5groups. Combining all these facts, the relative basic strength of these four amines decreases in the order.(C2H2)2NH > C2H2NH2 > C6H5NHCH2> C2H5NH2

Since, a stronger base has lower pKb value, therefore pKb values decreases in the reverse order:
C6H5 NH2 > C6H5NHCH3 > C2H5NH2 > (C2H2)2NH

(ii) As explained in –
Answer:
(a) the relative basic strength of the amines decreases in the order:
(C2H5)2NH > C6H5NHCH3 > C6H5NH2

Among CH3NH2 and (C2H5)2NH, due to the greater + I effect of the two C2H5 groups, (C2H5)2 is more basic than CH3NH2. Thus, the basic strength of the four amines decreases in the order: (C2H5)2NH > CH3NH2> C6H5NHCH3 > C6H5NH2

(iii) (a) The electron-donating groups increases the basic strength of amines while the electron-withdrawing groups decreases the basic strength. Therefore, basicity increases in the order:
p-nitroaniline < aniline < p – toludine.

(b) In C6H5NH2 and C6H5NHCH3, N is directly attached to the benzene ring and thus the lone pair of electrons on the N-atom is delocalized over the benzene ring. Therefore, both C6H5NH2 and C6H5NHCH3 are weaker bases than C6H5C H2NH2. Furthers due to + I effect of CH3 group. C6H5NHCH3 is a stronger base than C6H5NH2.

The basic strength increases in the order:
C6H5NH2 < C6H5NHCH3 < C6H5CH2NH2

(iv) Solvent effects, i.e. stabilization of the conjugate acids due to H-bonding are absent in the gas phase. In the gas phase, basic strength mainly depends upon the + I effect of the alkyl groups. Thus, basic strength in the gas phase decreases in the order:
(C6H5)3N > (C2H5)2NH > C2H5NH2> NH3

(v) Since, the electronegativity of ‘O’ is higher than that of N, alcohols form stronger H-bonds than amines. Further, the extent of H-bonding depends upon the number of H – atoms on the N-atoms. Thus, the inter molecular forces are in the order C2H5 – OH > C5H5NH2 > (CH3)2NH. Therefore, the b.pts of the given three compounds increases in the order:
(CH3)2NH < C2H5NH2 < C2H5OH

(vi) Solubility decreases with:
(a) Increase in molecular mass of amines due to increase in the size of the hydrophobic hydrocarbon part, and.
(b) Decrease in the number of H – atoms on the N-atom which undergo H-bonding.

Among the given compounds, C6H5NH2has the highest molecular mass of 93 followed by (C2H5)5NH with molecular mass of 73 while C2H5NH2 has the lowest molecular mass of 45. Thus, the solubility increases in the order in which molecular mass decreases i.e.,
C6H5NH2 < (C2H5)2NH < C2H5NH2

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Question 5.
How will you convert:

  1. Ethanoic acid into methanamine
  2. Hexanenitrile into 1 – aminopentane
  3. Methanol to ethanoic acid
  4. Ethanamine into methanamine
  5. Ethanoic acid into propanoic acid
  6. Methanamine into ethanamine
  7. Nitromethane into dimethylamine
  8. Propanoic acid into ethanoic acid.

Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 18

Question 6.
Describe a method for the identification of primary, secondary and tertiary amines. Also write chemical equations of the reactions involved.
Answer:
Heinsberg’s test:
This is a excellent test for distinguishing between primary, secondary and tertiary amines. The amine is treated with benzene sulphonyl chloride (Hinsberg’s reagent) in presence of excess of aqueous potassium hydroxide solution. (Refer text for details)

Question 7.
Write short notes on the following:

  1. Carbylamine reaction
  2. Diazotisation
  3. Hofmann’s bromamide reaction
  4. Coupling reaction,
  5. Ammonolysis
  6. Acetylation
  7. Gabriel phthalimide synthesis.

Answer:

(i) Carbylamine reaction:
Primary aliphatic amine or aniline, when warmed with chloroform in presence of alcoholic KOH, gives iso cyanide or carbylamine, a compound with disagreeable odour. This reaction is known as Carbylamine reaction.
C6H5NH2 (aniline)+ CHCl3 + 3KOH → C6H5N \(\overrightarrow{=}\) C + 3KCl + H2O aniline phenyl isocyanide

(ii) Diazotisation:
By action of NaNO2 solution in ice cooled solution of aromatic amine formed inorganic acid, diazonium salts are obtained.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 22

Diazonium salt contains diazo group (- N \(=\) N-) therefore, this process is called diazotization.

(iii) Hofmann’s bromamide reaction:
Primary aliphatic and aromatic amines can be prepared from amides by treatment with Br2 and KOH. The amine formed contains one carbon atom less than the parent amide. Therefore, this method is used for stepping down the series in organic conversion. Due to this reason it is also known as Hofmann degradation.
RCONH2 (Alkanamide ) + Br2 + 3NaOH > RNH2 (Alkanamine)+ 2NaBr+NaHCO3 + H2O
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 23

(iv) Coupling reaction:
Aniline reacts with diazonium chloride at ice cold temperature to give bright orange-red dye.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 24

(v) Ammonoiysis:
It is a process of replacement of either halogen atom in alkyl halids (or aryl halides) or hydroxyl group in alcohols (or phenols) by amino group. The reagent used for ammonoiysis is alcoholic ammonia. Generally, a mixture of primary, secondary and tertiary Amine is fromed
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 25

(vi) Acetylation:
Aliphatic and aromatic primary and secondary amines react with acid chlorides, anhydrides and esters by nucleophilic substitution reaction. This reaction is amine is formed. considered as replacement of hydrogen atom of — NH2 or >NH group by acyl group. This reaction is known as acylation.

The reaction is carried out in the presence of a base stronger than amine like pyridine, which removes HCl so formed and shift the equilibrium towards right hand side. The product obtained by acylation reaction is known as amides.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 26

(vii) Gabriel phthalimide synthesis:
In this reaction, potassium phthalimide react with alkyl halide to form N-methyl phthalimide which on hydrolysis give primary amine
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 27

Question 8.
Accomplish the following conversions:

  1. Nitrobenzene to benzoic acid
  2. Benzene to m – bromophenol
  3. Benzoic acid to aniline
  4. Aniline to 2,4,6 – tribromofluorobenzene
  5. Benzyl chloride to 2 – phenylethanamine
  6. Chlorobenzene to p – chloroaniline
  7. Aniline to p – bromoaniline
  8. Benzamide to toluene
  9. Aniline to benzyl alcohol.

Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 28

Question 9.
Give the structures of A, B and C in the following reactions:

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 29
Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 30-10

Question 10.
An aromatic compound ‘A’ on treatment with aqueous ammonia and heating forms compound ‘B’ which on heating with Br2 and KOH forms a compound ‘C’ of molecular formula C6H7N. Write the structures and IUPAC names of compounds A, B and C.
Answer:
Structures of compounds ‘B’ and ‘C’:
(i) Since, ‘C’ is formed from ‘B’ on treatment with Br2 + KOH (i.e., Hofmann bromamide reaction), ‘B’ must be an amide and ‘C’ must be an amine. The only amine having the molecular formula C6H5NH2 benzene amine or aniline).

(ii) Since, ‘C’ is aniline, the amide from which it is formed must be benzamide (C6H5CONH2). Thus, compound ‘B’ is benzamide. The chemical equation showing the conversion of‘B’ to ‘C’ is,

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 29-4
Structure of compound ‘A’:
Since, ‘A’ on treatment with aqueous ammonia and heating forms benzamide ‘A’ must be benzoic acid.

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 29-5

Question 11.
Complete the following reactions:

(i) C6H5NH2 + CHCl3 + (afc.)KOH →
(ii) C6H5N2Cl + H3PO2+H2O →
(iii) C6H5NH2+H2SO4(Conc.) →
(iv) C6H5N2C1 + C2H5OH →
(v) C6H5NH2 + Br2 →
(vi) C6H5NH2+ (CH3CO)2O →
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 30
Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 30-1

Question 12.
Why cannot aromatic primary amines be prepared by Gabriel phthalimide synthesis ?
Answer:
In this reaction, potassium phthalimide gives phthalimide anion which acts as a nucleophile and attacks electrophilic carbon of alkyl halide.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 30-4

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 30-5

But due to much less reactivity of aryl halide (nucleophilic substitution reaction), 1° aromatic amines can’t be prepared.

Question 13.
Write the reactions of:

  1. Aromatic
  2. Aliphatic primary amines with nitrous acid.

Answer:
(i) Aromatic primary amines react HNO2 at 273 – 278 K to form aromatic diazonium salts.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 30-6

(ii) Aliphatic primary amines also react with HNO2 at 273-278 K to form aliphatic diazonium salt. But these are unstable even at this low temperature and thus decompose readily to form a mixture of compounds consisting of alkyl chlorides, alkenes, and alcohols, out of which alcohols generally predominate.

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 30-7

Question 14.
Give a plausible explanation for each of the following:

  1. Why are amines less acidic than alcohols of comparable molecular masses?
  2. Why do primary amines have a higher boiling point than tertiary amines?
  3. Why are aliphatic amines stronger bases than aromatic amines?

Answer:
(i) Amines lose a proton to form an amide ion while alcohol lose a proton to give an alkoxide ion.

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 30-8

Since ‘O’ is more electronegative than N, RO can accommodate the -ve charge more easily than the RNH ion. In
other words, RO- is more stable than RNH Thus, alcohols are more acidic than amines or amines are less acidic than alcohols.

(ii) Primary amines (R—NH2) have two hydrogen atoms on the N atom and so, they undergo extensive intermolecular H-bonding.

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 30-9

Tertiary amines (R3N) do not have hydrogen atoms on the N-atom and therefore, they do not undergo H-bonding. As a result, primary amines have a higher boiling point than tertiary amines of comparable molecular mass. For example, the Boiling point of H-butylamine (35 IK) is much higher than that of tertiary butylamine (b.p. 319 K).

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Amines Other Important Exercises

Amines Objective Type Questions

Choose the correct answer:

Question 1.
Aniline reacts with cold nitrous acid (NaNO2 + HCl) and gives:
(a) C6H5OH
(b) C6H5N2Cl
(C) C6H5NO2
(d) C6H5Cl.
Answer:
(b) C6H5N2Cl

Question 2.
A nitrogen-containing compound, on heating with chloroform and alcoholic KOH give vapours of disagreeable odour. The compound can be:
(a) Nitrobenzene
(b) Benzamide
(c) N-N, dimethylaniline
(d) Aniline.
Answer:
(d) Aniline.

Question 3.
Ethylamine reacts with nitrous acid to form:
(a) Ammonia
(b) Nitrous oxide
(c) Ethane
(d) Nitrogen.
Answer:
(d) Nitrogen.

Question 4.
A compound which gives oily nitrosoamine with nitrous acid at low temperature:
(a) Methyl amine
(b) Dimethyl amine
(c) Trimethyl amine
(d) Triethyl amine.
Answer:
(b) Dimethyl amine

Question 5.
Which of the following has strongest basic character:
(a) C6H5NH2
(b) (CH3)2NH
(C) (CH3)3N
(d) NH3.
Answer:
(b) (CH3)2NH

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Question 6.
Benzene diazonium chloride gives on hydrolysis:
(a) Chlorobenzene
(b) Phenol
(c) Alcohol
(d) Benzene.
Answer:
(b) Phenol

Question 7.
In the reaction C6H5CHO + C6H5NH2 → C6H5N = CHC6H5 + H2O + C6H5N = CHC6H5 is known as:
(a) Aldol
(b) Schiff’s reagent
(c) Schiffs base
(d) Benedict reagent.
Answer:
(c) Schiffs base

Question 8.
Nitrobenzene gives N-phenyl hydroxyl amine when it reacts with:
(a) Sn/HCl
(b) C6H5CH2NH-CH3
(c) Zn / NaOH
(d) Zn / NH4Cl.
Answer:
(c) Zn / NaOH

Question 9.
Which of the mixture when reacts with ale. KOH known as Carbyl amine reaction:
(a) Chloroform and Ag powder
(b) Trihalogenated methane and primary amine
(c) Alkyl trihalide and primary amine
(d) Alkyl cyanide and primary amine.
Answer:
(b) Trihalogenated methane and primary amine

Question 10.
Which of the following gas is responsible for Bhopal gas tragedy in 1984:
(a) CH3 – N = C = O
(b) CH3-C=N = S
(c) CHCl3
(d) C6H5COCl.
Answer:
(a) CH3 – N = C = O

Question 11.
Oil of Mirbane is:
(a) Aniline
(b) Nitrobenzene
(c) p-nitroaniline
(d) p-aminoazobenzene.
Answer:
(b) Nitrobenzene

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Question 12.
The product of mustard oil reaction is:
(a) Alkyl isothiocyanate
(b) Dithiocarbonamide
(c) Dithioethyl acetate
(d) Thioether.
Answer:
(a) Alkyl isothiocyanate

Question 13.
Aniline is purified by:
(a) Steam distillation
(b) Vacuum distillation
(b) Simple distillation
(d) Solvent extraction.
Answer:
(a) Steam distillation

Question 14.
Amine which will not react with Acetyl chloride, is:
(a) CH3NH2
(b) (CH3)2NH
(c) (CH3)2N
(d) None of these.
Answer:
(c) (CH3)2N

Question 15.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 41
(a) Gattermann’s reaction
(b) Sandmayer’s reaction
(c) Wurtz’s reaction
(d) Frankland’s reaction.
Answer:
(b) Sandmayer’s reaction

Question 2.
Fill in the blanks:

  1. Aromatic amines are …………… in water.
  2. Amines are benzolyate in presence of NaOH. This reaction is called ……………
  3. By reacting with nitrous acid 1° amine form alcohol and 2° amine form ……………
  4. Reaction of 2° amine with nitrous acid represent ……………
  5. Aniline on sulphonation with sulphuric acid forms ……………
  6. With metal (Transition metals) ions amine establish co-ordination and form ……………
  7. By reduction, cyanide forms …………… and isocyanide forms ……………
  8. Benzoic acid reacts with hydrozoic acid to form ……………
  9. All aliphatic amines are more …………… than ammonia.
  10. 1° and 2° amine react with Grignard reagent to form ……………
  11. Basic nature of amine is due to the presence of …………… on nitrogen atom.
  12. Primary amines on heating with …………… and …………… form alkyl isocyanides.
  13. C6H5-COOH + …………… C6H5NH2 + N2 + CO2.
  14. Mixture of T.N.T. and ammonium nitrate is known as ……………
  15. On reacting aniline with HCl and NaNO2 at 0°C temperature benzene diazoniu chloride is formed. This is called…………… reaction.
  16. Ethyl amine is a …………… base than ammonia.
  17. Trinitrotoluene is an …………… compound.
  18. On heating alkyl isocyanide to 250°C …………… is formed.

Answer:

  1. Insoluble
  2. Schotten Baumann
  3. Nitrosamine
  4. Libermann nitroso test
  5. Sulphanilic acid
  6. Complex ion
  7. Primary amine, secondary amine
  8. Aniline
  9. Basic
  10. Alkane
  11. lone electron pair
  12. Chloroform and caustic soda
  13. N3H
  14. amytoi
  15. diazotisation
  16. stronger
  17. explosive
  18. Alkyl cyanide.

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Question 3.
Match the followings:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 42

  1. (c) Nitrosoamine
  2. (d) SchifFs base
  3. (b) Chloropicrin
  4. (e) Heinsberg reagent
  5. (a) Aromatic primary amine
  6. (g) Explosive.
  7. (f) Smell of mustard oil

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 43
Answer:

  1. (e) C6H5SO2Cl
  2. (d) Explosive
  3. (a) Chloropicrin
  4. (c) C6H5N2Cl
  5. (b) Alcohol

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 44
Answer:

  1. (d) Phenyl methyl amine
  2. (e) N-Methyl Benzenamine
  3. (a) N-Phenyl Benzenamine
  4. (c) N-Methyl Ethanamine
  5. (f) Prop-2-en-nitrile.
  6. (b) 2-Ethyl propan-nitrile

Question 4.
Answer in one word/sentence:

  1. Why aniline turns blackish brown in the open air?
  2. Tertiary amine does not acetanilised, why?
  3. Which isomer of C3H9N is least basic and having lowest b.p.?
  4. Which amine gives a diazotization reaction?
  5. The compound obtained when primary aromatic amine when heated with CHCl3 and ale. KOH.
  6. Secondary amine can be identified by.
  7. What is nitrating mixture ?
  8. Nitrobenzene is known as.
  9. MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 45
  10. Write the nature of amine.
  11. Primary nitroalkane reacts with nitrous acid to form which compound.
  12. Reagent used for the separation of Primary Secondary and Tertiary amine.
  13. What do 1° and 2° amine form on reacting with phosgene ?
  14. MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 46
  15. What is obtained by reacting amines with chloroform?
  16. In which form is amine used in organic synthesis ?
  17. What does Ethylamine form on oxidation in the presence of KMnO ?
  18. On adding Br2 water in aqueous solution of C6H5NH2which precipitate is obtained ?
  19. Which amine is obtained by the reduction of cyanide in the presence of Pt or Ni ?
  20. Write the formula of X:
    MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 47
  21. Write the name of reaction:
  22. MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 48
  23. What is the name of reaction for preparation of methyl isocyanide ?

Answer:

  1. Aniline oxidizes by air
  2. Active hydrogen is absent
  3. Tertiary amine
  4. All primary aromatic amine
  5. Phenyl isocyanide
  6. By Libermann test
  7. Cone. HNO3 and cone. H2SO4
  8. Oil of Mirbane
  9. Diazotisation
  10. Nitrolic acid
  11. Basic
  12. Heinsberg reagent
  13. Substituted urea
  14. Carbylamine reaction
  15. Alkyl isocyanide
  16. Reagent
  17. Aldehyde
  18. Symmetrical tribromoaniline
  19. 1° amine
  20. C6H5NH2 (Aniline)
  21. Schmidt reaction
  22. Carbylamine reaction.

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Amines  Short Answer Type Questions

Question 1.
Lower aliphatic amines are soluble in water while aromatic amines are not. Give reason.
Answer:
Lower aliphatic amines are soluble in water because of their tendency to form intermolecular hydrogen bonding with water. While aromatic amines because of high molar mass and steric effect are unable to form intermolecular hydrogen bonding and are insoluble in water.

Question 2.
Write a short note on Schotten Baumann reaction.
Answer:
Aromatic acid chloride reacts with phenol and aniline in presence of aqueous NaOH or pyridine. The reaction is known as Schotten Baumann reaction.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 31

Question 3.
What is ‘aniline black’ ? Write its two uses.
Answer:
When aniline is oxidised by acidic KMnO4, a black substance is formed which is known as aniline black.
Uses:

  • In manufacturing of black colour.
  • In manufacturing of useful compounds.

Question 5.
Explain the relative base strength of methylamine, dimethylamine, and trimethylamine.
Answer:
Amines have a lone pair of electrons on the nitrogen atom. This lone pair is available for being shared with a proton (or a Lewis acid). Therefore, amines are fairly strong bases. Amines com¬bine with water to form alkyl ammonium hydroxide.
R – NH2 + H2O\(\rightleftharpoons\)RNH3+OH \(\rightleftharpoons\) RNH3+ + OH

Alkylamines are stronger bases than ammonia. This is because the alkyl groups have an electron releasing effect (-I effect), i.e., the alkyl groups increase the availability of the lone pair of electrons for protonation. The greater the number of electrons releasing alkyl groups, the lone pairs will become more available for protonation.

The introduction of one methyl group strengthens the base. The second methyl group further strengthens the base. However, the third methyl group decreases the strength of the base due to its steric effect (over-crowding) which retards the protonation of amines. Thus, the base strength is in the order (CH3)2NH > CH3NH2 > (CH3)3N > NH3

Question 5.
Complete the following reactions:
(a) C2H5I + H2N – C2H5
(b)CH2NH2 + (NaNO2 + HC1) →

Answer:
(a) This reaction is alkylation and ultimate product quartemary ammonium salt is formed
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 32

(b) CH3NH2 + (NaNO2 + HCl) → CH3OH + N2 + H2O

Question 6.
Ethyl amine is more basic than ammonia, why ?
Answer:
The value of Ka = 4.5 x 10-4 for ethyl amine and for ammonia it is 1.8 x 10-5. Larger is the Kb value, more basic is the amine and vice-versa. In ethyl amine the availabil-ity of lone pair of electrons on nitrogen atom increases due to the +1 inductive effect of the ethyl group. Hence, this lone pair of electrons can easily accept a proton. This explains why ethyl amine is more basic than ammonia.

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Question 7.
Write short notes on:

  1. Schmidt reaction
  2. Mustard oil reaction.

Answer:
(i) Schmidt reaction:
When hydrazoic acid dissolved in chloroform or benzene, react with mono carboxylic acid in presence of H2SO4 at 55°C, primary amine is obtained.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 33

(ii) Mustard oil reaction:
When aliphatic primary amine is heated with carbon
disulphide and HgCl2 alkyl isothiocyanate is formed, which has smell like mustard oil. Therefore, this reaction is called mustard oil reaction.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 34

Question 9.
Give a Heinsberg method to identify primary, secondary and tertiary amines.
Answer:
Heinsberg method:
This method is capable to differentiate primary, secondary and tertiary amines. Amines are heated with benzene sulphonyl chloride (Heinsberg reagent) and various product are obtained.

1. Primary amine:
These form sulphonamide which are soluble in KOH.
C6H5SO2Cl + R – NH2 → C6H5SO2(NHRN – alkyl benzene sulphonamide) + HCl

2. Secondary amine:
Secondary amine also form sulphonamide which are insoluble in KOH.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 35

3. Tertiary amine : Tertiary amine does not react.
C6H5SO2Cl + R3N → No reaction

Question 9.
What is the difference between Alkyl nitrite and nitroalkane ?
Answer:
Nitrous acid exist in two isomeric forms:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 36

Thus, two alkyl derivatives of nitrous acid are formed.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 37

Thus, it is clear that in nitroalkane, alkyl radical is linked to nitrogen, whereas in alkylnitrite alkyl radical is linked to oxygen atom. Alkyl nitrite is ester whereas nitroalkane is the derivative of paraffin.

Question 10.
Write only chemical equation for the following conversions:
(i) Conversion of methyl cyanide into C6H5NH2.
(ii) Conversion of C6H5NH2 into chlorobenzene.
Answer:

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 38

Question 11.
Differentiate between primary, secondary and tertiary nitroalkane.
Answer:
Primary, secondary and tertiary nitroalkanes can be differentiated on the basis of following reaction:
(i) Primary nitroalkanes react with nitrous acid forming nitrolic acid which is soluble in NaOH or KOH forming red colour.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 39

(ii) Secondary nitroalkane reacts with nitrous acid forming pseudonitrole which gives blue colour with NaOH.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 40
(iii) Tertiary nitroalkane does not react with nitrous acid because it does not have hydrogen atom.

Question 12.
Write the points of difference between Ethyl amine and Aniline.
Answer:
Differences between Ethyl amine and Aniline:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 49

Question 13.
Why can aromatic primary amine not be synthesized by Gabriel phthalimide synthesis.
Answer:
In Gabriel Phthalimide reaction potassium salt of phthalimide is formed. It easily reacts with alkyl halide and forms the related alkyl derivative.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 50

But aryl halide do not react with potassium phthalimide because in haloarene (aryl halide) due to partial double bond character breaking of C – X bond is difficult. Thus, aromatic amine can not be prepared by Gabriel Phthalimide synthesis.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 51

Question 14.
Write any four points to differentiate between Ethyl nitrite and nitro ethane.
Answer:
Difference between nitro ethane and ethyl nitrite.
1. Structure:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 52

2. Boiling Point:
Boiling point of nitroethane is higher than Ethyl nitrite.

3. Reduction:
Nitroethane forms primary amine and ethyl nitrite forms ammonia.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 53

4. Hydrolysis:
Nitroethane does not form alcohol with NaOH whereas Ethyl nitrite forms alcohol with NaOH.
C2H5 – O – N + NaOH → C2H5OH + NaNO2

Question 15.
What is Mendius reaction ?
Ans. Reduction of alkyl cyanides by sodium and alcohols yield primary amine. This reaction is called Mendius reaction.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 54

Question 16.
How will you obtain:

  1. Ethyl amine from methyl cyanide
  2. Methyl amine from acid amide
  3. Ethyl amine from ethyl alcohol
  4. Ethyl amine from methyl amine.

Answer:
1. Ethyl amine from methyl cyanide:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 55

2. Methyl amine from acid-amide:
CH3CONH2 + Br2 + 4KOH → CH3 – NH2 + 2KBr + K2CO3 + 2H2O

3. Ethyl amine from ethylimg
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 56

4. Ethyl amine from methyl amine:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 57

Question 17.
Write any four difference between ethyl cyanide and ethyl iso cyanide.
Answer:
Difference between ethyl cyanide and ethyl iso cyanide:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 58

Question 18.
Give reaction of ethyl amine with following:
(a) HNO2
(b) C6H5COCl
(C) CS2.
Answer:
(a) HNO2
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 59

(b) N-ethyl acetamide is formed
C2H5NH2 + CH3COCl → CH3CONHC2H5 + HCl

(c) Ethyl isothiocyanate is formed. This reaction is also known as mustard oil reaction.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 60

Question 19.
Why aniline is less basic than ethyl amine ?
Answer:
Aniline is less basic than ethyl amine as due to resonance of benzene nucleus, the lone pair of electron of nitrogen atom is attracted towards nucleus and gets delocalised in the ring. Thus, electron pair is liberated with difficulty in aniline than ethyl amine. Hence, its basic property is less than ethyl amine. The delocalisation of electron as a result of resonance is shown as follows:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 61

Question 20.
Boiling point of aniline is higher than the hydrocarbons of comparable molecular masses, but lower than corresponding alcohols and carboxylic acids. Clarify the statement
Answer:
Primary amines are polar and in them dipolar [Nδ- – Nδ+] bond is present, in which molecules of amines are associated by hydrogen bond. That is why their boiling point is higher than alkanes of comparable molecular masses.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 62

Due to lesser electronegativity of nitrogen than oxygen, association in alcohols and carboxylic acids occur due to strong H – bonds. Whereas in amines association is due to weak H — bond. Therefore, boiling and melting point of amines is lower than corresponding alcohols and carboxylic acids.

Question 21.
Explain nitration of Aniline.
Answer:
Direct nitration of aniline is not possible because NH3 group gets oxidized by HNO3 but on nitrating under
controlled conditions instead of o- and p- place m – nitroderivative is formed. In acidic medium due to protonation
of — NH2 group, electron attracting tendency of NH3+ formed increases by which instead of o- or p- directing Anilinium ion acts as m — directing.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 63

Question 22.
Why is aniline acetylated before nitration ? Give necessary equation.
Or,
Direct nitration of aniline is not possible. Explain and how it is nitrated?
Answer:
Direct nitration of aniline is not possible because amino group of aniline is oxidised by nitric acid. So for nitration of aniline firstly amino group (- NH2) is protected by acetylation and then nitrated.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 64

Question 23.
How will you obtain: (Give only equations)

  1. Methyl amine from Ethyl amine.
  2. Phenol from Aniline.
  3. Ethyl amine from methyl amine.

Answer:
1. Methyl amine from Ethyl amine:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 65
2. Phenol from Aniline:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 66

3. Ethyl amine from methyl amine:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 67

Question 24.
Explain the following:

  1. Preparation of pure amine is difficult by the ammonolysis of alkyl halide.
  2. Methyl amine reacts with FeCl3 in water to give precipitate of ferric hydroxide.
  3. AgCl is soluble in methyl amine.

Answer:
1. By the ammonolysis of alkyl halide a mixture of primary, secondary and tertiary amine is obtained.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 68

Separation of these amines is difficult; therefore it is difficult to obtain pure amine by ammonolysis of alkyl halide.

2. Methyl amine releases OH ion in water which reacts with FeCl3 as follows to give precipitate of Fe(OH)3.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 69

3. Methyl amine forms a soluble complex with AgCl and this way AgCl is soluble in methyl amine.
AgCl + 2CH3NH2 → [Ag(CH3NH2 )2 ]+ ClSoluble complex

Amines Long Answer Type Questions

Question 1.
Write reduction reactions of nitro-benzene:
(a) In acid medium
(b) Neutral medium
(c) In basic medium.

Or,
Describe reduction reactions of nitro-benzene in different conditions.
Answer:
Reduction of Nitro-benzene:
Nitro-benzene is readily reduced. This gives different compounds under different conditions depending upon the pH of the medium and the nature of the reducing agent. The reduction takes place in three steps:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 70

(a) Acidic medium:
When reduced with Sn + HCl or Fe + HCl, gives aniline.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 71

(b) Neutral medium:
When reduced with aluminium mercury couple or zinc dust and ammonium chloride, phenyl hydroxyl amine is formed.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 72

(c) In basic medium (Alkaline medium):
(i) Reduction with alkaline sodium arsenite:
Azoxy benzene is formed.

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 73

(ii) Reduction with zinc dust and caustic soda:
Hydrozo benzene is formed.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 74

Question 2.
How will you obtain the following from aniline ? Give only chemical equation:
(a) Phenol
(b) Methane
(c) Tribromoaniline
(d) Phenylisocvanide.
Answer:
(a) Phenol:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 76
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 77

(b) Methane:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 78

(c) Tribromoaniline:
By treating aniline with bromine water, yellow coloured 2,4,6 – tribromoaniline is formed.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 79

(d) Phenylisocyanide:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 80

Question 3.
An organic compound [A] having molecular formula C2H5O2 on reduction gives compound [B] which react with HNO2 and form compound [C]. Compound [B] on reaction with chloroform alcoholic KOH, change into bad smelling compound [D]. Which on reduction forms amine [E]. Which formula will you assign for compound [A], [B], [C], [D] and [E] ? Explain reactions also.
Answer:
[A] → C2H5NO2 (Nitro ethane)
[B] → C2H5NH2(Ethyl amine)
[C] → C2H5OH (Ethanol)
[D] → C2H5N = C (Ethyl iso cyanide)
[E] → C2H5NHCH3(N-methyl amino ethane)
Reactions:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 81

Question 4.
How will you obtain the following:
(i) Sulphanilic acid from Aniline
(ii) p-amino azo benzene from aniline.
Answer:
(i) Sulphanilic acid from Aniline
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 82
(ii) p-amino azo benzene from aniline.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 83

Question 5.
What happens when:
(a) Ammonium acetate is made to react with alumina at 500°C.
(b) Methyl cyanide is subjected to alkaline hydrolysis.
(c) Benzamide is treated with P2Os.
(d) H2 gas is passed through phenyl isocyanide in presence of Ni.
(e) Methyl isocyanide is heated at 250°C.
Answer:
(a) Methyl cyanide is formed.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 84
(b) Ammonia gas is formed.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 85
(c) Phenyl cyanide is formed.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 86
(d) N-methyl aniline is formed.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 87
(e) Methyl cyanide is formed.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 88

Question 6.
How is primary amine obtained from nitro-alkane ? Give equation.
(ii) How is primary alcohol obtained from primary amine ? Give equation.
(iii) Among N-propyl amine and isopropyl amine which is more basic ?
Answer:
(i) Nitro-alkane is reduced by LiAlH4 or by H2 in presence of Ni or Pt to obtain primary amine.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 89
(ii) Primary aliphatic amine react with nitrous acid to form primary alcohol.
C2H5NH2 + HONO → C2H5OH + N2 + H2O
(iii) Normal propyl amine is more basic.

Question 7.
How will you obtain the following (Give only equation):
(a) Ethyl amine from nitroethane,
(b) N-methyl hydroxyl amine from nitroethane,
(c) Chloropicrin from nitromethane,
(d) Nitrobenzene from benzene diazonium chloride,
(e) Trinitrobenzene (T.N.B.)from nitrobenzene.
Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 90

Question 8.
Explain the laboratory method of preparation of ethyl amine under the following heads:
(a) Procedure
(b) Equation of reaction
(c) Diagram
(d) Physical properties.
Answer:
Laboratory method of preparation of ethyl amine: In laboratory ethyl amine is prepared by Hofmann Bromoamide reaction. In this process reaction of propanamide with bromine and caustic potash solution takes place. All steps in the process are following:
C2H5CONH2 + Br2 → C2H5CONHBr + HBr
KOH + HBr → KBr + H2O
C2H5CONHBr + KOH → C2H5NCO + KBr + H2O KOH-
C2 H5NCO + 2KOH → C2H5NH2+K2CO3
C2 H5 CONH2 + Br2 + 4KOH → C2H5NH2 + 2KBr + K2CO3 + 2H2O
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 91

Procedure:
In a round bottom distillation flask equivalent quantities of bromine and propanamide is taken and 10% KOH solution is added in it. Now 50% KOH solution is added in excess and the flask is heated on water both up to 57-67°C. When the solution becomes colourless, ethyl amine starts to be distilled which is absorbed in dil. HCl.

Physical properties:
It is a colourless liquid with an odour like ammonia which is soluble in water and organic solvent. It is a combustible substance. Its boiling point is 19°C.

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Question 9.
Write laboratory method of preparation of aniline. Give all chemical equations of this process.
Or
Describe commercial method of preparation of aniline.
Answer:
Laboratory Method for the Preparation of Aniline:
Aniline is prepared in the laboratory by the reduction of nitro-benzene with tin and hydrochloric acid.
C6H5NO2 +6[H] C6H5NH2 + 2H2O

Experiment:
Nitro-benzene (20 g) and granulated tin (40 g) are taken in a round-bottom flask and a reflux condenser is fitted. Now hydrochloric acid (100 ml) is added in small amounts (10 ml at a time). The flask is shaken after each addition of acid and the temperature is not allowed to rise above 90° C. The flask is heated on a water bath till the smell of nitro-benzene disappears. On cooling the flask, a solid mass of molecular formula (C6H5 NH2 .HCl)2 .SnCl4 separates out.
Sn + 4HCI → SnCI4 + 4H
C6H5NO2 + 6[H] ) → C6H5NH2 + 2H2O
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 103
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 92
The solid mass is treated with concentrated NaOH solution. So that a clear alkaline solution is obtained. Aniline is liberated and floats as a dark brown coloured oil.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 104
From this aniline is obtained by steam distillation.
Commercially aniline is manufactured by reduction of nitrobenzene. This is done in presence of Fe water and cone. HCl.
Fe + 2HCl → FeCl2 + 2H
C6H5 NO2 + 6H → C6H5NH2 + 2H2O

Question 10.
Distinguish among p, s and t amines under the following points:

  1. Reaction with HNO2
  2. Carbyl amine reaction
  3. Mustard oil reaction
  4. Reaction with acid halide
  5. Reaction with alkyl halide
  6. Reaction with C6H5SO2Cl.

Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 93

Question 11.
Write down the chemical equation representing preparation of nitrobenzene in laboratory and give the following chemical reaction of nitrobenzene:
(a) Nitration
(b) Sulphonation.
Answer:
Preparation of nitrobenzene in laboratory: Nitrobenzene is prepared in laboratory by treating benzene with a mixture of cone. HNO3 and cone. H2SO4 at 60°C.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 94
Reaction of nitrobenzene:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 95

(a) Nitration:
Nitrobenzene forms m – dinitrobenzene when heated with fuming HNO3 and cone. H2SO4 .

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 96
(b) Sulphonation:
Nitrobenzene forms m -nitrobenzene sulphonic acid on heating with fuming H2SO4 .

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 97

Question 12.
Write the possible isomers of C4H11N.
Answer:
(i) Position isomerism:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 98

(ii) Chain isomerism:

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 99

(iii) Metamerism:

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 100

Question 13.
Write the type of possible isomers of C3H9N.
Answer:
(i) Functional group isomerism:
CH3—CH2—CH2—NH2
n-propyl amine (1°)

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 101

All functional group are isomers.
(ii) Position Isomerism:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 13 Amines - 102
All are position isomers.

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MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 Finance Market

MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 Finance Market

Finance market Important Questions

Finance market Objective Type Questions

Question 1.
Choose the correct answer :

Question 1.
Primary and Secondary market:
(a) Compete with each other
(b) Complement to each other
(c) Functions independently
(d) Control each other
Answer:
(b) Complement to each other

Question 2.
The number of stock exchange in India was :
(a) 20
(b) 21
(c) 24
(d) 23
Answer:
(c) 24

Question 3.
REPO is:
(a) Repurchase agreement
(b) Reliance petroleum
(c) Read and process
(d) None of these
Answer:
(a) Repurchase agreement

Question 4.
NSEI commenced future trading in the year:
(a) 1999
(b) 2000
(c) 2001
(d) 2002
Answer:
(b) 2000

Question 5.
The settlement cycle in NSEI is :
(a) T + 5
(b) T + 3
(c) T + 2
(d) T + 1
Answer:
(c) T + 2

Question 6.
Liquidity is formed by :
(a) Organised market
(b) unorganized market
(c) Primary market
(d) Secondary market
Answer:
(c) Primary market

Question 7.
The headquarter of SEBI is :
(a) Delhi
(b) Mumbai
(c) kolkata
(d) Chennai
Answer:
(b) Mumbai

Question 8.
The foremost stock exchange was established in :
(a) Delhi
(b) London
(c) Tokyo
(d) New york
Answer:
(b) London

Question 9.
In India the main organ of unorganised market is :
(a) Desi banker
(b) Mahajan and Sahukar
(c) Both ‘(a)’ and ‘(b)’
(d) None of these.
Answer:
(c) Both ‘(a)’ and ‘(b)’

Question 10.
The axis of central bank is :
(a) Reserve bank
(b) Commercial bank
(c) Co-operative bank
(d) Desi bank.
Answer:
(a) Reserve bank

Question 11.
NSEI was established in :
(a) 1900
(b) 1991
(c) 1992
(d) 1994.
Answer:
(c) 1992

Question 12.
These are not securities of capital market:
(a) Equity share
(b) Preferential shares
(c) Debentures
(d) Commercial bill.
Answer:
(d) Commercial bill.

Question 13.
The first stock exchange of India was established in the year:
(a) 1857
(b) 1877
(c) 1887
(d) 1987.
Answer:
(c) 1887

Question 14.
Treasury bills are :
(a) Instrument of short term borrowings ‘
(b) Long term borrowings
(c) Both (a) and (b)
(d) None of these.
Answer:
(a) Instrument of short term borrowings

Question 15.
For stock exchange the servies of SEBI is :
(a) Volantary
(b) Essential
(c) Not essential
(d) Compulsory.
Answer:
(d) Compulsory.

Question 16.
In 2004 the number of stock exchange in India was :
(a) 25
(b) 21
(c) 23
(d) 24
Answer:
(d) 24

Question 17.
Only buying security takes place in :
(a) Stock exchange
(b) Primary market
(c) Capital market
(d) Money market.
Answer:
(b) Primary market

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Question 2.
Fill in the blanks:

  1. The paid up capital of NSEI is ……………..
  2. OTCEI maintains the liquidity in the securities of…………….. companies.
  3. OTCEI was established in ……………..
  4. NSEI was established in ……………..
  5. Stock exchange which provides nation wide investor base to small companies is ……………..

Answer:

  1. Rs. 3 crores
  2. Small
  3. 1990
  4. 1992
  5. OTCEI.

Question 3.
Write the answer in one word/sentence :

  1. Which market deals with long-term funds ?
  2. Where is the purchase and sale of securities take place ?
  3. In which market dealings of short-term funds take place ?
  4. Which organization is formed to protect and safeguard the interest of investors ?
  5. Write the name of one all India level stock exchange.
  6. Which instrument is issue at discount ?
  7. Which market is regulated and developed by SEBI ?
  8. Which capital market is related with new issues ?
  9. Which Stock Exchange is the greatest stock Exchange of the country ?
  10. What are the two parts of capital market ?

Answer:

  1. Capital market
  2. Stock exchange
  3. Money market
  4. SEBI
  5. NSEI
  6. Treasury bill
  7. Stock exchange
  8. Primary market
  9. Bombay Stock Exchange
  10. Primary, Secondary.

Question 4.
Write true or false :

  1. Sebi is established to protect and safeguard the interest of investors.
  2. In India there are 24 stock exchanges.
  3. Headquarter of SEBI is in Mumbai.
  4. Full form of SEBI is securities and exchange board of India.
  5. In stock exchange transaction of new securities take place.
  6. There is no control of SEBI on Mutual fund.
  7. Money market deals long-term funds.
  8. Money market is controlled by SEBI.
  9. For industrial development healthy capital market is must.
  10. There is difference between the primary market and secondary market.

Answer:

  1. True
  2. True
  3. True
  4. True
  5. True
  6. False
  7. False
  8. False
  9. True
  10. True

Question 5.
Match the columns :
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 Finance Market image - 1
Answer:
1. (d)
2. (e)
3. (b)
4. (a)
5. (c)
6. (g)
7. (f)
8. (i)
9. (h)

Finance Market Very Short Answer Type Questions

Question 1.
Define capital market.
Answer:
“An individual or private firm receiving deposits and dealing in hundies or lending money. Those who do not accept deposits were to be treated as money lenders.”

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Question 2.
Write the names of two parts capital market ?
Answer:
There are two parts of capital market:

  1. Capital market.
  2. Money market.

Question 3.
What do you mean by stock exchange ?
Answer:
A stock exchange is a place for the purchase and sale of its industrial and financial curities Shares, debentures, funds etc.) take place.

Question 4.
What is the full form of SEBI ?
Answer:
Full form of SEBI is : Securities and Exchange board of India.

Question 5.
Mfiatdo you mean by money market ?
Answer:
Money market refers to that market where transaction of lending and borrowing of short term funds take place.

Question 6.
What do you mean by Treasery bill ?
Answer:
A treasury bill is basically an instrument of short-term borrowing by the government of India maturing in less than one year.

Question 7.
Write the elements of money market.
Answer:

  1. Central bank.
  2. Commercial banks.
  3. Co-operative banks.
  4. Saving bank.
  5. Acceptance house.

Question 8.
Write two characteristics of Debentures.
Answer:
The characteristics of Debentures are :
(1) Debenture holder has the right to get interest.
(2) Debenture is merely a written instrument signed by the company under its common seal acknowledging the debt due by it to its holders.

Question 9.
Write three characteristics of capital market.
Answer:
The characteristics of capital market are :

  1. SEBI controls the capital market.
  2. In it, transactions in long-term funds take place.
  3. Capital market arranges capital in large scale.

Question 10.
What do you mean by secondary market ?
Answer:
Under secondary market capital is formed or received, from various sources. Generally it is called Stocks Exchange.

Question 11.
Whatis SEBI.
Answer:
SEBI was constituted by government of India in April 1988 as administrative body. It was aseparate body for orderly functioning of capital market.

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Question 12.
What do you mean by RAPO rate ?
Answer:
The rate at which reserve bank of India. Repurchase the government securities is  RAPO rate.

Question 13.
Write the name of index of NSE ?
Answer:
The name of index is called NIFTY.

Question 14.
“Blue Chip” shares are of which company ?
Answer:
Shares of a big prosperous company is called “Blue chip”.

Question 15.
In India how many stock exchanges are there ? Which is the oldest one ?
Answer:
There are total 24 stock exchanges in India. Mumbai stock exchange is the oldest one.

Question 16.
When preference shareholders can vote ?
Answer:
Preference shareholders generally don’t have the voting rights but the preference shareholders can use voting rights only in matters pertaining to their interest and not other matters.

Question 17.
What is debenture ?
Answer:
Money received as a loan is called ‘Borrowed capital’. The documents issued to the lender for money borrowed from him by the company is called debenture.
Debenture is merely a written instrument signed by the company under its common seal acknowledging in debt due by it to its holders.

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Question 18.
What do you mean by commercial bill ?
Answer:
Commercial bill is a bill of exchange used to finance the working capital requirements of business firms. It is a short term negotiable self liquidating instrument. Which is used to finance the credit sales of firms.

Question 19.
How is value determined in securities in share bazar ?
Answer:
Share market provides a platform for securities here forces of demand and supply work together. Thus value is fixed by securities.

Question 20.
What do you mean by Boli price ?
Answer:
The price which a customer is willing to play for securities is called Boli price.

Question 21.
Write the elements of capital market.
Answer:

  1. Development bank.
  2. Commercial banks
  3. Stock exchange.

Question 22.
Write the objectives of SEBI.
Answer:
The objectives of the establishment of SEBI are as follows :

  1. The main objective of SEBI is to provide security to the investors.
  2. To attract the savings of the people to the capital market.
  3. To keep an eye on activities of the brokers in order to control the capital market.
  4. To promote development of securities market.
  5. To provide efficient services to all the parties operating in the capital market.

Question 23.
What do you mean by Financial assets ?
Answer:
Debentures, Shares, Bills etc. are included into Financial assets.

Finance Market Short Answer Type Questions

Question 1.
Explain the importance of money market.
Answer:
Money market provides important functions and’ services which increases the importance of money market. The importance of money market are as follows :

1. Provides funds: Money market helps financial institutions, business enterprises to meet their short term funds requirement. This ensures smooth operations and functioning of business enterprises.

2. Use of surplus funds: If the capital of any enterprise remains unused that it will lead to business losses. Thus, through capital market the surplus funds are utilised time to time.

3. Helps in financial mobility : By sending the securities from one area to another and by investing money market helps in financial mobility. For the industrial and economical development of a nation financial mobility is essential.

4. Equilibrium between demand and supply : Necessary steps and initiatives are taken by money market time to time for maintaining equilibrium between demand and supply.

5. Economy in the use of cash : The use of cash is properly performed through money market. The procedure of this market is not complex that’s why unnecessary expenses are not incurred for the use of cash funds.

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Question 2.
Write the types of capital market.
Answer:
Capital market is two types :

1. Organized capital market: In organised capital market there remain banks and different financial institutions in Indian capital market, Reserve Bank of India, State Bank of India, different nationalized banks, financial institutions, post office, savings bank, stock exchange etc. are included.

2. Unorganized capital market: In an unorganized capital market, indigenous bankers, merchants, personal investment, institutions as chit funds etc. are included.

Question 3.
What do you mean by Treasury bill ?
Answer:
Treasury Bill: A Treasury bill is basically an instrument  on mg by the Government of India maturing in less than one year. They are also known as Zero Coupon Bonds issued by the Reserve Bank of India on behalf of the Central Government to meet its short-term requirement of funds. Treasury bills are issued in the form of a promissory note. They are highly liquid and have assured yield and negligible risk of default. They are issued at a price which is lower than their face value and repaid at par.

The difference between the price at which the treasury bills are issued and their redemption value is the interest receivable on them and is called discount. Treasury bills are available for a minimum amount of Rs 25,000 and in multiples therefore. Example: Suppose an investor purchases a 91 days Treasury bill with a face value of Rs. 1,00,000 for Rs. 96,000. By holding the bill until the maturity date, the investor receives Rs. 1,00,000. The difference of Rs. 4,000 between the proceeds received at maturity and the amount paid to purchase the bill represents the interest received by him.

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Question 4.
What do you mean by RAPO and Reverse RAPO Rate.
Answer:
RAPO Rate : RAPO rate is that rate at which RBI gives loans to bank for a particular period of time. A bank repurchase go  securities and is exchange receives wealth. Due to discount in RAPO rate the bank gets money at low rate whereas due to increase in RAPO rate the loan from RBI becomes expensive. If it makes loan cheper to bank it reduces the RAPO rate.
Reverse RAPO rate : It is a rate of transaction of short term loan, at which Reserve Bank of India takes loan from commercial bank within our country.

Question 5.
What do you mean by CD ? or certificate of deposit ?
Answer:
Certificate of deposit: Certificates of deposit (CD) are unsecured, negotiable, short-term instruments in bearer form, issued by commercial banks and development financial institutions. They can be issued to individuals, corporations and companies during periods of tight liquidity when the deposit growth of banks is slow but the demand for credit is high. They help to mobilize a large amount of money for short periods.

Question 6.
Differentiate between NSEI and OTCEI.
Answer:
Differences between NSEI and OTCEI:
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 Finance Market image - 2
Question 7.
What is the difference between Primary and Secondary Market.
Answer:
Differences between Primary and Secondary Market:
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 Finance Market image - 5
Question 8.
How many stock exchanges are there in India ?
Answer:

Recognized Stock Exchange in India :

  1. The Stock Exchange—Bombay (Mumbai)
  2. The Stock Exchange—Ahmedabad
  3. Madras Exchange Ltd.—Madras (Chennai)
  4. The Calcutta Stock Exchange Association Ltd.—Calcutta (Kolkata)
  5. The Delhi Stock Exchange Association Ltd.—New Delhi
  6. The Madhya Pradesh Stock Exchange—Indore
  7. The Hyderabad Stock Exchange Ltd.—Hyderabad
  8. Bangalore Stock Exchange Ltd.—Bangalore
  9. U.P. Stock Exchange Association—Kanpur
  10. Cochin Stock Exchange Ltd.—Cochin
  11. Pune Stock Exchange Ltd.—Pune
  12. The Ludhiana Stock Exchange Ltd.—Ludhiana
  13. Mangalore Stock Exchange Ltd.—Mangalore
  14. The Magadh Stock Exchange Ltd.—Patna (Bihar)
  15. Jaipur Stock Exchange Ltd.—Jaipur (Rajasthan)
  16. The Gohati Stock Exchange Ltd.—Gohati
  17. The Vadodara Stock Exchange Ltd.—Vadodara
  18. Saurashtra Stock Exchange—Rajkot (Gujarat)
  19. Bhubane ishwar Stock Exchange Association Ltd.—Bhubaneshwar
  20. Thiruva nanthapuram Stock Exchange Ltd.—Kerala.

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Question 9.
What do you mean by NSEI ? What are its objectives ?
Answer:
The I National Stock Exchange of India (N.S.E.I.) was established in the form of a public limit’ »d company in 30th November 1992 with a paid up capital of Rs. 25 crore. On its recognition as a stock exchange under the securities contracts act 1956 in April 1993 NSEI comment Jed operations in the wholesale debt market segment in June 1994. The capital market segrpent commenced operations in November 1994 and operations in derivatives segment commenced in June 2000.

It is an e exchange where business is carried on in the securities of the medium and large sized compar lies and the government securities. On the basis of the transactions of securities done on NSJ 31, it can be divided into two parts :

(i)Whole sale debt market

(ii) Capital market segment.
NSE i has removed the short comings of traditional share markets. It has attempted to provide be  facilities to investors.

Objectives of NSEI: NSEI is established for the following objectives :

  1. To reduce the transaction costs.
  2. To promote trading facilities for equities and debt instrument throughout the nation
  3. To reform Indian securities market in terms of market practices.
  4. To establish a stock exchange of international level.
  5. It aims at the settlement of securities, deals within short period through easy and quick process.
  6. To set up the agenda for useful and effective change in the securities market.

Question 10.
Write the importance of capital market ?
Answer:
The various characteristics of market

  1. Here transactions in long-term funds take place.
  2. In capital market, shares, debentures and securities are bought and sold.
  3. Capital market is emerging and well-organized.
  4. Capital market consists of different institutions having their own interest and limits dons.
  5. It is a Barometer of national growth and dynamic economy.

Question 11.
Write the importance of capital market ?
Answer:
Following are the importance of capital market:

  1. Capital market assist in national capital formation and development.
  2. Capital market plays important role in capital investors and money savers.
  3. Capital market provides liquidity to investors to invest securities.
  4. A number of financial intermediaries work in capital market such as banks, merchants exchanges etc.
  5. Capital market helps to generate savings in the country channelizing the same into small investments in different fields.
  6. It helps in the mobilization of capital.
  7. The goods- are found in market in the same way long term, medium term and short term loans can be found in capital market.
  8. It creates saving tendency among the public.
  9. The head of capital market is the Reserve Bank of India which is the Banker’s bank, it helps in controlling the credit.
  10. Capital market helps in the agricultural, industrial and commercial development of the nation.
  11. In various areas of business organisation capital is needed and it is fulfilled through capital market.
  12. Interest rates remain same due to organised capital market.
  13. Directors and managers of company also give loans when need
  14. Capital market fulfills the need of capital.

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Question 12.
Discuss some characteristics of primary market.
Answer:
The features/characteristics are :

  1. New securities : It deals with new securities only.
  2. Direct issue: Securities can be issued directly by issues on through intermediaries.
  3. Direct promotion of capital market: It promotes capital formatic m by use this funds is investment in plants machinery etc.
  4. Price determination : Prices of securities, generally, are determined by the management of the respective company.
  5. Place : There is no fixed place for primary market.

Question 13.

Explain the functions of Share Market or Stock Exchange.
Answer:
The functions of stock exchange are as follows :

1. Establishing fixed market: Stock exchange establishes a fixed place or market for securities because for the purchase and sale of securities a fixed market is necessary which is provided by stock exchanges.

2. Liquidity of capital : Stock exchange is completely a capital market. Different types of securities are purchased and sold here. That’s why an owner of securities can re convert this investment into cash. In this way stock exchange enhances the liquidity of cap

3. Evaluation: Stock exchange is totally a market of shares. Here there are experts to evaluate the shares and other securities. Correct evaluation of all the secretes are do  by the experts is possible through stock exchanges. Thus investors can safely invest with the help of stock exchanges.

4. Helps in capital formation for new companies : All the new companies need capital, which is difficult for these new companies to form. Thus, through stock exchange it becomes easy to form capital for such type of new firms.

5. Provides business information : Stock exchanges provide necessary information on about securities and capital market to all its members. These information are very useful ft or the member in knowing the general business trends.

6. Contribution to economic growth: Stock exchange encourage the people to their money is securities. This money is invested in industries which helps in the economic development of the nation. Stock exchange acts as a barometer of nation’s economic development and progress.

7. Protection of securities: Various types of securities are transacted in stock exchange. Every transaction takes place under securities contracts (Regulation) Act 1956. The interests of the investors are fully protected. The members of the stock exchange must follows the rules and regulation of stock exchange.

8. Publication : Stock exchange publishes different types of information useful in business. It publishes information in magazines, daily news papers, directories etc. related with stock exchange to common people.

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Question 14.
Explain the concepts of primary and secondary markets.
Answer:

1. Primary market : The place from where the public directly receives the capital first time as called primary market. Though this system the company issues new shares and debentures to public and forms capital. The ownership is transferred from company to the buyer. There is no fixed location of primary market. During the establishment of company the shares are issued and capital.is formed which is called primary capital. The capital which is received first time from the public through any medium is called primary capital

2. Secondary market: Under secondary market capital is formed or received from various sources and again it is invested this process is called secondary market. Generally it is known as stocks exchange where shares, securities etc. are bought and sold. Secondary market is located at a specified place. The secondary market creates a cluster of shares and stock brokers, underwriters and other well versed in financial matters.

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Question 15.
What services are provided by SEBI investors ?
Answer:
The following services are provided by SEBI to its investors :

1. Liquidity of Investment: A stock exchange ensures liquidity of investment by ready marketability of securities. Investors can avail of services of expert professionals who operate on the stock exchange.

2. Collateral Security : As the securities dealt in stock exchanges are negotiable they can be pledged as ‘collateral security’ for raising loans.

3. Safe and Fair Dealings : A stock exchange ensures safe and fair dealings in securities. It makes scrutiny before listing.

4. Educate the Public : Wide publicity of working of a stock exchange helps to educate the public. Investors are able to find out the market value of their investment. They can make a rational choice among various securities. Some stock exchanges publish data and reports. They serve as clearing house of business information and provide advice and guidance to investors.

5. Quick Disposal: Facility for quick disposal of securities at the stock exchanges helps to minimize the risk of investment in securities. It becomes possibility to diversify investments and risks.

Question 16.
What are its trading process of NSEI ?
Answer:

1. Placing the order : In this the seller or purchaser gives information about securities like name of company, price, number, time etc.

2. Conveying the message to computer : The terminal operator after receiving the order feeds it in the computer. NSEI established in all parts of our country continuous feeds the orders in computer.

3. Starting of matching process : As soon as the computer receives messages or orders, it starts the matching process. While matching orders, the best matching order is sought to be found.

4. Accepting orders : After selecting the best matching of buying and selling orders, its list is obtained on computer screen immediately. It tells us at what rate, time and to whom order has been transacted.

5. Delivery and Payment: The delivery and payment are made according to the rules of NSEI after the transaction has been settled.

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Question 17
What do you mean by OTCEI ? What are its objectives ?
Answer:
The OTCEI was established under section 25 of the companies act 1956 in October 1990. Industrial Credit and Investment Corporation of India (ICICI), Unit Trust of India (UTI), Industrial Development Bank of India (IDBI), Industrial Finance Corporation of India (IFCI), General Insurance Corporation of India (GIC), Life Insurance Corporation of India (LIC), SBI capital market limited and Canbank financial services limited are the promoters of OTCEI, The need of OTCEI was felt due to the existance of large number of new and small companies which remain unnoticed and consequently their shares remain largely untraded. The OTCEI is a completely computerised in which buying and selling of securities is absolutely transparent.
Control: The functions and activities of OTCEI is under the supervision of government of India and SEBI.
Objectives : The objects of the establishment of the OTCEI are as follows :

  1. To maintain the liquidity in the securities of small companies.
  2. To provide speedy solution to the problems of investors.
  3. To maintain the transparency of transactions.
  4. To bring the stock exchange within the reach of an ordinary man.
  5. To provide facilities for listing of small companies.

Question 18.
Write the special features of secondary market.
Answer:
Following are the characteristics of secondary market:

1. It creates liquidity: It creates liquidity in securities. By liquidity we mean changing of securities in cash very soon. This work is done by secondary market.

2. It comes after primary market: Under secondary market public do not get the capital first time, under secondary market capital is formed or received from various sources and again it is invested this securities are first sold in primary market and then in secondary market.

3. It has a particular place : Secondary market is located at a particular place which is called an exchanges. It is not compulsory that selling and buying of shares should be done through exchange also. Two persons can do it directly.

4. It encourages new investments : In share market the rates of shares goes on changing. To take advantage of this situation new investors enters this market which encourages industrial sectors.

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Question 19.
What is meant by money market ? Discuss its characteristics.
Answer:
Money market refers to that market where transaction of lending and borrowing of short term funds take place. It is divided into two sectors i.e., organised market and unorganised market. Organised market consists of Reserve Bank of India on the other hand unorganised market consist of indigenous bankers and money lender.
The characteristics of money market:

  1. Dealing in short term fund: Money market provides short term funds for use. By short term use means four period up to one year.
  2. Meeting short term financial needs : Money market focuses on meeting the short term financial requirement.
  3. Safety : The securities of money market and normally safe. They have minimum risk of default due to shorter term and financial soundness of the issuers.
  4. High liquidity: These are highly liquid because they can be changed into cash very easily.
  5. Types of Securities : Treasury bills, certificates of deposits, commercial bills etc. are issued for raising capitals.
  6. Control: Reserve Bank of India controls this type of market.

Question 20.
Write the characteristics of Treasury Bill.
Answer:
Following are the characteristics of Treasury Bill :

(1) Treasury bill is basically an instrument of short term borrowing by the government of India maturing in less than one year.

(2) They are also known as zero coupon bonds issued by Reserve Bank of India. On behalf of the central government to meet its short-term requirement of funds.

(3) Treasury bills are issued in the form of promissory note. They are highly liquid and have assured yield and negligible risk of default.

(4) They are issued at a price which is lower than their face value and rapid at par. The difference between the price at which the treasury bills are issued and their redemption value is the interest receivable on them and is called discount.

Question 21.
Write the features of call money.
Answer:
Following are the features of call money :

(1) Call money is short term finance repayable on demand, with a maturity period of
one day to fifteen days, used for inter-bank transactions. .

(2) Commercial banks have to maintain a minimum cash balance known as cash reserve ratio.

(3) The Reserve Bank of India changes the cash reserves ratio from time to time which in turn affects the amount of funds available to be given as loans by commercial bank.

(4) Call money is a method by which banks borrow from each other to maintain the cash reserve ratio. The interest rate paid on call money loans is known as the call rate. It is a highly volatile rate that varies from day to day and sometimes even hour to hour.

(5) There is an inverse relationship between call rates and other short term money market instruments such as certificates of deposits and other commercial papers.

Question 22.
Describe the function of Securities and Exchange Board of India (SEBI).
Answer:
The functions of SEBI are as follows :

  1. To protect the interests of investors in the security market and to properly develops the security market.
  2. 10 regulate the business being done in the security market. .
  3. To check the function of stock brokers, share transfer agents, trustees, sub-brokers etc. and register them.
  4. To register and regulate investment schemes like mutual food.
  5. To carry on research work related with security market.
  6. To restrict and prohibit unfair and fraudster of trade practices related with security market.
  7. To promote and control self regulatory organization.
  8. To provide education to the investors related with securities.
  9. To check insiders trading in securities.

Finance Market Long Answer Type Questions

Question 1.
Discuss the importance of financial management.
Or
“Finance is the life-blood of business.” Explain in any five points.
Answer:

1. Basis of success of enterprise : Irrespective of the size of organization, financial management paves the way for success of any enterprise, as proper management of funds is assured

2. Increases efficiency: Financial management ensures smooth running of enterprise, as it is essential in every stage of business. Finance is not only essential for promotion but marketing and winding-up.

3. Essential for determination of capital sources : Financial management helps identify proper sources of capital and raise appropriate funds required. Hence, it is very essential.

4. Determination of capital structure: Capital structure refers to the combination of various sources, or the ‘mixes’ of various sources of capital. It is the composition of various sources. Financial management helps in deciding the appropriate capital structure.

5. Best utilization of available funds: Financial management ensures best utilization of existing funds. Financial management consists of estimation of capital, raising of capital and use of it in a judicious way. Hence, the available funds are used in the best possible way.

6. Importance to the Shareholders and Investors : Shareholders and other investors always expect the safety of their money. They invest their small savings in shares and other investment channels and they should be informed of the rate of return they will get on their investments. This is possible through financial management only. In the absence proper knowledge about the return on their investments, the investors may suffer loss at the hands of brokers or middlemen.

7. Importance to the Financial Institutes : The fundamental function of financial institutes is finance only. Therefore, these institutes should possess the required knowledge about financial management so that there is a proper balance between the safety of their money (capital) and its liquidity.

8. Importance to the Employees : Finance management leads to growth of an enterprise and it earns more profit. With growth in profit of the enterprise, the employees will be benefited. Therefore, financial management has both direct and indirect importance for the employees.

9. National Importance : Every developed or developing nation must possess the knowledge of proper financial management. This is the reason why a person having financial expertise is chosen as the finance ministry of the country. The importance of financial management becomes even more important in countries like India which have shortage of finance.

10. Importance to other Persons : Knowledge of financial management is also important for other persons like economists, mercantile experts, brokers, middlemen, politicians because every person in a society has to deal with finance. A person may hurt his financial planning in the absence of knowledge of financial management. Therefore, knowledge of financial management is necessary for every member of the society.

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Questions 2.
Write the importance of personnel management.
Answer:
The importance of personnel management can be stated as follows :

1. To achieve targets: Targets of an enterprise can be achieved only if the personnel working in any enterprise are fully satisfied. This is possible if there exists a department to look after the requirements and pacify the grievances of personnel.

2. To face competition : In today’s cut throat competition, it is very hard to be ‘the best’. Mentally satisfied and physically strong personnel ensures that the targets are achieved on time and this work is done by personnel management.

3. Overall personality development: Under the guidance of personnel management, the employees live together and work with full cooperation and under proper discipline. It results in the overall development of the employees.

4. Universal need: For proper development of an enterprise and its success, a personnel management is essential. It is also essential for industries, profession, etc.

5. Increase in efficiency of employees: Proper training, good working environment, appraisals, rewards, etc. done by personnel management increases the efficiency of employees which ultimately helps the organization to achieve its predetermined objects.

Question 3.
Discuss the factors determine working capital requirements of a business enterprises.
Answer:
The capital invested in current assets such as stock of material and finished goods, bills receivable, short-term securities and cash at hand and cash at bank. The two senses of working capital are “Gross Working Capital” and “Net Working Capital”.
The factors which govern the amounts of working capital in a business are :

1. Nature of Business : Public utilities and service organizations require little working capital as sales are on cash basis. There is little time gap between production and sales and these enterprises do not maintain large stock of goods. In trading and manufacturing concerns, on the other hand large amount of working capital is needed to maintain stocks.

2. Size of the Business : The volume of business has a direct influence on working capital requirements. Large firms require greater working capital for investment in current assets and to pay current liabilities.

3. Production Cycle : The length or duration or production process also affects working capital requirement. Where production takes longer time, More working capital is required because more funds are needed for raw material, labour and other expenses. On the other hand, smaller production cycle need less working capital.

4. Turnover of Working Capital: Turnover implies the speed with which the working capital circulates in business. The rate of turnover of working capital is measured by the ratio of sales to current assets. More rapid is the flow of working capital, lesser is the need for working capital.

Question 4.
What is the meaning of financial management ? Give one definition of it. Write the main objectives of it.
Answer:
Meaning : Financial management is a functional activity of business management and it is a part of management. Financial management is responsible for the financial activities of a business. This is a group which deals with the finance, decision-making and formulating policies for the finance related activities of an enterprise. Financial management represents the wider interests of an enterprise and in this sense it is a watchdog of the enterprise. Financial management maintains coordination between sources of finance and their uses so that optimum utilization of the available finance could be made. Financial management includes cash flow, budget, credit, profit and loss, income etc.
Definitions : Different experts have defined financial management as under:

1. E.F.L. Breach says, “Financial management is that aspect of management which makes optimum and effective utilization of financial resources.”
According to a narrow view, the immediate objectives of financial management are to arrange for a suitable system for the organization’s liquidity, and profitability. But in a wider perspective, the objectives of financial management are to arrange for maximum financial facilities for the enterprise so that owners of the enterprise get the maximum benefit. Thus, main objectives of financial management have been proposed as under :

I. Profit Maximization : Traditionally, business is considered to be a profit-earning entity and profit has been considered to be the basis of measuring the efficiency and standard of an enterprise. Therefore, the primary objective every business is to earn the maximum profit. No limit has been demarcated as to what is ‘maximum profit’. Therefore, the following points should be kept in mind :

  1. Profit should be rational and justified;
  2. Social welfare should be kept in mind while earning profit;
  3. There should be a standard or decisive policy for earning profit;
  4. The profit earned should be used for social welfare also;
  5. Higher profit is a motivating factor for better business.

II. Maximization of wealth : It is a novel concept that value of wealth be maximized instead of maximizing profit. This will ensure growth of the business thereby benefiting the shareholders, managers, employees etc. With the increase in the value of the wealth of an enterprise, it will enjoy goodwill and will be stronger. Therefore, the objective of financial management should be to maximize the value of wealth.

III. Mobilizing adequate finance at minimum cost: The main objective of financial management is to arrange finance at minimum cost for the business because if cost increases than profit margin will reduce in business.

IV. Maximum rate of return : The objective of financial management is to get maxi¬mum returns on the invested capital so that shareholders can get maximum dividend and more interest can be given on debentures and apart from that various allowances can be given to employees.

Question 5.
What are the steps involves in trading procedure ?
Answer:
The Trading procedure involves the following steps :

1. Selection of a broker : The buying and selling of securities can only be done through SEBI registered brokers who are members of the Stock Exchange. The broker can be an individual, partnership firms or corporate bodies. So the first step is to select a broker who will buy/sell securities on behalf of the investor or speculator.

2. Opening D’mat Account with Depository : D’ mat (Dermaterialized) account refer to an account which an Indian citizen must open with the depository participant (banks or stock brokers) to trade in listed securities in electronic form. Second step in trading procedure is to open a D’mat account.

The securities are held in the electronic form by a depository. Depository is an institution or an organization which holds securities (e.g., Shares, Debentures, Bonds, Mutual Funds etc.). At present in India there are two depositories : NSDL (National securities Depository Ltd.) and CDSL (Central Depository Services Ltd.). There is no direct contact between depository and investor. Depository interacts with investors through depository participants only.
Depository participant will maintain securities account balances of investor and intimate investor about the status of their holdings from time to time.

3. Placing the Order : After opening the D’mat Account, the investor can place the order. The order can be placed to the broker either (DP) personally or through phone, email, etc. Investor must place the order very clearly specifying the range of price at which securities can be bought or sold, e.g., “Buy 100 equity shares of Reliance for not more than Rs 500 per share.

4. Executing the Order : As per the Instructions of the investor, the broker executes the order, i.e., he buys or sells the securities. Broker prepares a contract note for the order executed. The contract note contains the name and the price of securities, name of parties and brokerage (commission) charged by him. Contract note is signed by the broker.

5. Settlement: This means actual transfer of securities. This is the last stage in the trading of securities done by the broker on behalf of their clients. There can be two types of settlement.

(a) On the spot settlement : It means settlement is done immediately and on spot settlement follows. T + 2 rolling settlement’ This means any trade taking place on Monday gets settled by Wednesday :

(b) Forward settlement: It means settlement will take place on some future date. It can be T 5 or T + 7 etc. All trading in stock exchanges takes place between 9-55 am. and 3-30 pm. Monday to Friday.

Question 6.
Explain the various documents or instruments of money market.
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 Finance Market image - 6
1. Treasury BUI: Treasury Bill: A Treasury bill is basically an instrument  on mg by the Government of India maturing in less than one year. They are also known as Zero Coupon Bonds issued by the Reserve Bank of India on behalf of the Central Government to meet its short-term requirement of funds. Treasury bills are issued in the form of a promissory note. They are highly liquid and have assured yield and negligible risk of default. They are issued at a price which is lower than their face value and repaid at par. The difference between the price at which the treasury bills are issued and their redemption value is the interest receivable on them and is called discount.

Treasury bills are available for a minimum amount of Rs 25,000 and in multiples therefore. Example: Suppose an investor purchases a 91 days Treasury bill with a face value of Rs. 1,00,000 for Rs. 96,000. By holding the bill until the maturity date, the investor receives Rs. 1,00,000. The difference of Rs. 4,000 between the proceeds received at maturity and the amount paid to purchase the bill represents the interest received by him. ,

2. Commercial paper: Commercial paper is a short-term unsecured promissory note, negotiable and transferable by endorsement and delivery with a fixed maturity period. It is issued by large and creditworthy companies to raise short-term funds at lower rates of interest than market rates. It usually has a maturity period of 15 days to one year. The issuance of commercial paper is an alternative to bank borrowing for large companies that are generally considered to be financially strong. It is sold at a discount and redeemed at par. The original purpose of commercial paper was to provide short-terms funds for seasonal and working capital needs.

For example, companies use this instrument for purposes such as bridge financing. Example : Suppose a company needs long-term finance to buy some machinery. In order to raise the long term funds in the capital market the company will have to incur flotation costs (costs associated with floating of an issue are brokerage, commission, printing of applications and advertising etc.). Funds raised through commercial paper are used to meet the flotation costs. This is known as Bridge Financing.

3. Call money : Call money is short term finance repayable on demand, with a maturity period of one day to fifteen days, used for inter-bank transactions. Commercial banks have to maintain a minimum cash balance known as cash reserve ratio. The Reserve Bank of India changes the cash reserve ratio from time to time which in turn affects the amount of funds available to be given as loans by commercial banks. Call money is a method by which banks borrow from each other to be able to maintain the cash reserve ratio. The interest rate paid on call money loans is known as the call rate. It is a highly volatile rate that varies from day-to-day and sometimes even from hour-to-hour.

There is an inverse relationship between call rates and other short-term money market instruments such as certificates of deposit and commercial paper. A rise in call money rates makes other sources of finance such as commercial paper and certificates of deposit cheaper in comparison for banks raise funds from these sources.

4. Certificate of deposit:Certificate of deposit: Certificates of deposit (CD) are unsecured, negotiable, short-term instruments in bearer form, issued by commercial banks and development financial institutions. They can be issued to individuals, corporations and companies during periods of tight liquidity when the deposit growth of banks is slow but the demand for credit is high. They help to mobilize a large amount of money for short periods.

5. Commercial bill : A commercial bill is a bill of exchange used to finance the working capital requirements of business firms. It is a short-term, negotiable, self-liquidating instrument-which is used to finance the credit sales of firms. When goods are sold on credit, the buyer becomes liable to make payment on a specific date in future. The seller could wait till the specified date or make use of a bill of exchange. The seller (drawer) of the goods draws the bill and the buyer (drawer) accepts it.

On being accepted, the bill becomes a marketable instrument and is called a trade bill. These bills can be discounted with a bank if the seller needs funds before the bill matures. When a trade bill is accepted by a commercial bank, it is known as a commercial bill.

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Question 7.
Write the objectives and functions of SEBI.
Answer:
Objectives : The objectives of the establishment of SEBI are as follows:

  1. The main objective of SEBI is to provide security to the investors.
  2. To attract the savings of the people to the capital market.
  3. To keep an eye on activities of the brokers in order to control the capital market.
  4. To promote development of securities market.
  5. To provide efficient services to all the parties operating in the capital market.

Functions of SEBI: The functions of SEBI are as follows :

  1. To protect the interests of investors in the security market and to properly develops the security market.
  2. To regulate the business being done in the security market.
  3. To check the function of stock brokers, share transfer agents, trustees, sub-brokers etc. and register them.
  4. To register and regulate investment schemes like mutual food.
  5. To carry on research work related with security market.
  6. To restrict and prohibit unfair and fraudster of trade practises related with security market.
  7. To promote and control self regulatory organization.
  8. To provide education to the investors related with securities.
  9. To check insiders trading in securities.

Question 8.
Differentiate between money market and capital market.
Answer;
Differences between Money Market and Capital Market:
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 Finance Market image - 3
Question 9.
What are the factors affecting fixed capital ?
Answer:
The various factors affecting fixed capital are :

1. Nature of industry : Fixed capital requirement largely depends on the nature of industry. When there is a need of land, building, machinery etc. in industry, the need of capital increases.

2. Nature of production : The requirement of fixed capital also depends on the nature of production, whether it is capital based or labour based.

3. Scope of business : If business is only a buyer or only a seller the capital requirement is less and if it is both the capital needed is comparatively more.

4. Expansion of business : If business is to be expanded in future then fixed capital is required in great sum. Due to modem machines and management the expenses increases. So capital requirement increases.

5. Preliminary expenses : The need of fixed capital will increase if the promoters at the time of establishment of company speed more on salary of promoters, establishment expenses, purchase of patent etc.

6. Attitude of management: If the manger wants to enter in the market as a major producer from. The very beginning than more fixed capital will be needed.

Question 10.
Describe the establishment, objects and advantages of Unit Trust of
India (UTI)
Answer:
Unit Trust of India (UTI):
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 10 Finance Market image - 4
The basic idea underlying the creation of the unit trust, as with similar trusts in other [ countries is to afford the small savers, a means of acquiring a share in the widening prosperity
based on steady industrial growth of the country through providing facilities for investment j which combines the benefit of wide diversification, a reasonable return and expert services I of management talent. The trust commenced its operations with affect from July, 1964.
Objectives of UTI

(i) It mobilizes savings of the community and channelizes them into productive investment. By promising savers triple benefits of safety, liquidity and profitability of investments, the trust encourages individual savings.

(ii) It gives everyone a chance to indirectly own shares and debentures in a large number of select companies and thus enables the investor to share in the widening prosperity of industrial growth.

Management

The trust is managed by a board of trustees consisting of 11 persons including some of the distinguished men in finance and business. The chairman of the board is appointed by the central Govt, in consultation with IDBI. The executive trustee and four other members : are appointed by IDBI. The remaining members are appointed by Reserve bank of India,Life Insurance Corporation and Commercial Banks.

Performance of Unit Trust in the Field of Investment of Funds

Investment of funds constitutes another aspect of operations of UTI. During the past 33 years of its life, the trust has been able to build up sizeable funds. As on 30th June, 1984 aggregating Rs. 1261-33 crores is collected. During the year 1983-84, the investable funds recorded funds recorded a marked rise of Rs. 391 -09 crore.

The cardinal feature of the trust’s investment activity has been to build a balanced flexible investment portfolio composed of corporate securities, Govt, securities and other investments representing fixed deposits with companies, advance deposits for shares and debentures, bridging finance, application money and money at call and short notice so as to ensure reasonable return with safety of capital and capital appreciation.

Units are gaining popularity because they are highly liquid in the sense that an investor can sell them whenever he wants.
Uses of resource : The fund of UTI has been invested in so many ways.
The percentage of investment is as follows :

  1. On shares and debentures of companies 55%
  2. On fixed deposits and other deposits in the bank 45%

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Question 11
What is the functions of finance management ?
Answer:
Finance is required in every field like business, industry, commerce, professional service etc. All persons working in these fields need knowledge of financial management. In each field, the person who manages and plans the financial resources is called the finance manager. A finance manager performs the following functions :

(A) Administrative Functions : All these functions relate to decision-making and the finance manager has to perform all these functions as the general functions. These are :

  1. To make prior financial estimates;
  2. To make financial planning;
  3. To organize the financial activities;
  4. To maintain coordination between different departments.

(B) Executive Functions: “The finance manager performs certain executive functions which are as under:

1. Arrange/Organize Finance: A finance manager has to find and arrange the various sources of finance required for the enterprise sd that, on the basis of the finance available, the operations of the enterprise may be carried on.

2. Allotment of Available Funds : The funds available with the finance manager are meant for requirements of the entire enterprise. Therefore, it is the responsibility of the finance manager to allot funds as and where needed in the enterprise.

3. Management of Assets : Under these are covered activities like purchase of current and fixed assets, arrangements for their safety, maintenance etc. Which are carried on under the instructions of the finance manager. The finance manager has also to consider, before allotting funds, the use and justification for the funds in different departments.

4. To Organize Expenditure : The finance manager should prepare budget estimates for expenditure required in the entire enterprise and invest the same in a planned manner. For this, the finance manager has to consider the expenditure on pay, interest, taxes, development activities etc.

5. Profit Planning : The finance manager makes proper planning for increasing the profits. He takes necessary steps to increase the profitability e.g., to fix proper prices, to control the costs, to control the expenditure, to exercise control on unproductive expenditure.

6. To Submit Reports: The finance managers submits various a few important reports from time to time which include report on availability of funds, monthly income and expenditure statement, position of balance of cash, a note indicating the financial position of the enterprise etc.

7. To Maintain Records : The finance manage has to prepare records of the various documents relating to finance and preserve them so that they may be used for future planning.

MP Board Class 12 Business Studies Important Questions

MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण

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MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण

बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण Important Questions

बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न (a)
पूर्ण प्रतिस्पर्धा बाजार की मुख्य विशेषता है –
(a) वस्तु की समान कीमत
(b) समरूप वस्तुएँ
(c) अत्यधिक क्रेता और विक्रेता
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न (b)
जिस बाजार में स्वतंत्र प्रवेश तथा बहिर्गमन हो, उसका नाम है –
(a) एकाधिकारात्मक प्रतियोगिता बाजार
(b) अपूर्ण प्रतियोगिता का बाजार
(c) पूर्ण प्रतियोगिता का बाजार
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) पूर्ण प्रतियोगिता का बाजार

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प्रश्न (c)
वस्तु की कीमत एवं माँग के बीच प्रतिलोम संबंध पाया जाता है –
(a) केवल एकाधिकार का
(b) केवल एकाधिकारी प्रतियोगिता
(c) और (b) दोनों में
(d) केवल पूर्ण प्रतियोगिता।
उत्तर:
(c) और (b) दोनों में

प्रश्न (d)
निम्नलिखित में से किसके अनुसार, “किसी वस्तु की कीमत, माँग और पूर्ति की शक्तियों द्वारा निर्धारित होती है” –
(a) जेवन्स
(b) वालरस
(c) मार्शल
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) मार्शल

प्रश्न (e)
एकाधिकार फर्म के संतुलन की शर्त नहीं है –
(a) औसत आय = सीमांत आगम
(b) सीमांत आय = सीमांत लागत
(c) सीमान्त लागत वक्र सीमांत आय वक्र को नीचे से काटे
(d) (b) एवं (c) दोनों।
उत्तर:
(a) औसत आय = सीमांत आगम

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प्रश्न (f)
बाजार मूल्य पाया जाता है –
(a) अल्पकालीन बाजार में
(b) दीर्घकालीन बाजार में
(c) अति दीर्घकालीन बाजार में
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) अल्पकालीन बाजार में

प्रश्न (g)
एक फर्म का माँग वक्र पूर्ण लोचदार होता है –
(a) पूर्ण प्रतियोगिता
(b) एकाधिकार
(c) एकाधिकारी प्रतियोगिता
(d) अल्पाधिकार।
उत्तर:
(a) पूर्ण प्रतियोगिता

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. जिस कीमत पर माँग एवं पूर्ति बराबर होते हैं, उसे ……………………………. कीमत कहते हैं।
  2. कीमत विभेद की सम्भावना …………………………………. बाजार में उत्पन्न होती है।
  3. एक अतिरिक्त इकाई का विक्रय करने पर कुल आगम में वृद्धि को …………………………….. कहते हैं।
  4. यदि किसी वस्तु की आपूर्ति अपरिवर्तित रहती है तो माँग में वृद्धि होने पर उस वस्तु की साम्य कीमत …………………………. जायेगी।
  5. पूर्ण प्रतियोगी बाजार में एक फर्म …………………….. होती है।
  6. कीमत सीलिंग ………………………… द्वारा किया जाता है।
  7. ……………………….. काल में माँग की शक्ति प्रभावशाली होती है।
  8. दो से अधिक फर्म का होना ……………………………. बाजार में आवश्यक है।
  9. फर्मों के समूह को ………………………………. कहते हैं।
  10. पेट्रोल का बाजार …………………………….. होता है।

उत्तर:

  1. सामान्य
  2. एकाधिकारी
  3. सीमान्त आगम
  4. बढ़
  5. कीमत स्वीकारक
  6. सरकार
  7. अल्प
  8. अल्पाधिकार
  9. उद्योग
  10. अंतर्राष्ट्रीय।

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प्रश्न 3.
सत्य/असत्य का चयन कीजिए –

  1. ईटों का बाजार प्रादेशिक होता है।
  2. सामान्य मूल्य काल्पनिक होता है।
  3. अपूर्ण प्रतियोगिता एक व्यावहारिक दशा है।
  4. माँग तथा पूर्ति की शक्तियाँ लम्बी अवधि तक स्थायी साम्य की अवस्था में रहती हैं।
  5. माँग तथा पूर्ति दोनों में से किसी एक शक्ति द्वारा किसी वस्तु का मूल्य निर्धारित होता है।
  6. पूर्ण प्रतियोगिता में फर्म स्वयं मूल्य निर्धारित करती है।
  7. एकाधिकृत प्रतियोगिता का माँग वक्र अनिश्चित होता है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. असत्य
  6. असत्य
  7. सत्य।

प्रश्न 4.
सही जोड़ी बनाइए –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 1
उत्तर:

  1. (c)
  2. (a)
  3. (e)
  4. (d)
  5. (b).

प्रश्न 5.
एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. टमाटर का बाजार मुख्य रूप से किस प्रकार का बाजार होता है?
  2. बाजार मूल्य किसके चारों ओर घमता है?
  3. दीर्घकाल में पूर्ण प्रतियोगी फर्म को कौन – सा लाभ प्राप्त होता है?
  4. कीमत निर्धारण में समय तत्व का महत्व किस अर्थशास्त्री ने बताया था?
  5. असामान्य लाभ या हानि किस प्रतियोगिता में होती है?
  6. व्यावहारिक जगत में किस प्रतियोगिता की स्थिति नहीं पाई जाती है?

उत्तर:

  1. अति अल्पकालीन
  2. सामान्य मूल्य
  3. सामान्य लाभ
  4. प्रो. मार्शल ने
  5. अपूर्ण प्रतियोगिता,
  6. पूर्ण प्रतियोगिता की स्थिति।

बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण लघु उत्तरोष प्रश्न

प्रश्न 1.
बाजार मूल्य तथा सामान्य मूल्य में अन्तर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
बाजार मूल्य तथा सामान्य मूल्य में अन्तर –

बाजार मूल्य:

  1. सामान्य मूल्य बाजार मूल्य अल्पकालीन मूल्य होता है। सामान्य मूल्य दीर्घकालीन मूल्य होता है।
  2. बाजार मूल्य वास्तविक मूल्य होता है। सामान्य मूल्य एक काल्पनिक मूल्य होता है।
  3. बाजार मूल्य का निर्धारण माँग एवं पूर्ति के अस्थायी संतुलन द्वारा होता है।
  4. बाजार मूल्य के निर्धारण में पूर्ति की अपेक्षा माँग सामान्य मूल्य के निर्धारण में माँग की अपेक्षा अधिक प्रभावी होती है।
  5. बाजार मूल्य पुनरुत्पादनीय तथा गैरपुनरुत्पादनीय दोनों ही प्रकार की वस्तुओं का होता है।

सामान्य मूल्य:

  1. सामान्य मूल्य दीर्घकालीन मूल्य होता है।
  2. सामान्य मूल्य एक काल्पनिक मूल्य होता है।
  3. सामान्य मूल्य का निर्धारण माँग और पूर्ति के अस्थायी संतुलन द्वारा होता है।
  4. पूर्ति अधिक प्रभावशाली होती है।
  5. सामान्य मूल्य केवल पुनरुत्पादनीय वस्तुओं का ही होता है गैर – पुनरुत्पादनीय वस्तुओं का नहीं।

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प्रश्न 2.
बाजार मूल्य की विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर:
बाजार मूल्य की प्रमुख विशेषताएँ हैं –

  1. बाजार मूल्य एक अल्पकालीन मूल्य होता है। यह किसी समय माँग और पूर्ति के अस्थायी संतुलन द्वारा निर्धारित होता है।
  2. बाजार मूल्य वह मूल्य होता है जिस पर वास्तव में बाजार में वस्तु खरीदी एवं बेची जाती है।
  3. बाजार मूल्य सदैव सामान्य मूल्य के इर्द – गिर्द चक्कर लगाता रहता है। यह अधिक समय तक सामान्य मूल्य से बहुत ऊँचा या नीचा नहीं रह सकता।
  4. बाजार मूल्य सभी प्रकार की वस्तुओं का होता है चाहे वे निरुत्पादनीय हों अथवा पुनरुत्पादनीय।
  5. बाजार मूल्य के निर्धारण में पूर्ति की अपेक्षा माँग अधिक प्रभावशाली होती है। जब माँग बढ़ती है तो बाजार मूल्य भी बढ़ जाता है और जब माँग घटती है तो बाजार मूल्य भी घट जाता है।

प्रश्न 3.
सामान्य मूल्य की विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर:
सामान्य मूल्य की प्रमुख विशेषताएँ निम्नांकित हैं –

  1. सामान्य मूल्य दीर्घकालीन मूल्य होता है। अत: सामान्य मूल्य माँग और पूर्ति के स्थायी संतुलन द्वारा निर्धारित होता है।
  2. सामान्य मूल्य उत्पादन व्यय के बराबर होता है। यह उत्पादन व्यय से बहुत ऊँचा या नीचा स्थायी रूप से नहीं रह सकता।
  3. सामान्य मूल्य एक स्थायी मूल्य होता है, क्योंकि यह माँग तथा पूर्ति की स्थायी शक्तियों द्वारा निर्धारित होता है।
  4. सामान्य मूल्य उन्हीं वस्तुओं का होता है, जिन्हें पुनः उत्पन्न किया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर जिन वस्तुओं को पुन: उत्पन्न नहीं किया जा सकता, उनका सामान्य मूल्य नहीं होता।
  5. सामान्य मूल्य के निर्धारण में माँग की अपेक्षा पूर्ति का अधिक प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 4.
एक वस्तु का बाजार संतुलन में है, यदि कीमत –

  1. संतुलन कीमत से अधिक और
  2. संतुलन कीमत से कम होगी तो बाजार में क्या प्रतिक्रियाएँ होंगी? समझाइए?

उत्तर:

1. यदि बाजार कीमत संतुलन कीमत से अधिक हो:
इस दशा में बाजार माँग, बाजार पूर्ति से कम होगी अतः पूर्ति की अधिकता की स्थिति निर्मित हो जाएगी। प्रतिस्पर्धा विक्रेताओं में बढ़ेगी जिसके कारण विक्रेता कम कीमत भी स्वीकार कर लेगा। कीमत कम होने से माँग बढ़ जाएगी एवं पूर्ति संकुचित हो जाएगी। ऐसा होने से बाजार कीमत संतुलन कीमत के बराबर आ जाएगी।

2. यदि बाजार कीमत संतुलन कीमत से कम हो:
इस परिस्थिति में बाजार माँग, पूर्ति से अधिक हो जाएगी तथा माँग की अधिकता हो जाएगी। इसके कारण क्रेताओं में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इस प्रतिस्पर्धा के कारण क्रेता अधिक मूल्य देने को तैयार हो जाते हैं। इस मूल्य का प्रभाव यह पड़ता है कि माँग कम या संकुचित हो जाती है तथा पूर्ति का विस्तार हो जाता है यह तब तक होता है जब तक कि बाजार कीमत, संतुलन कीमत के बराबर न आ जाए। इन दोनों परिस्थितियों को निम्न चित्रों की सहायता से अधिक स्पष्ट किया जा सकता है
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 2
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 3

प्रश्न 5.
पूर्ति में परिवर्तन का संतुलन मूल्य पर क्या प्रभाव पड़ता है? रेखाचित्र द्वारा समझाइए?
उत्तर:
माँग स्थिर रहने पर पूर्ति में परिवर्तन का मूल्य पर Y प्रभाव पड़ना आवश्यक है। पूर्ति परिवर्तन की दो स्थितियाँ हो सकती हैं –

1. पूर्ति में वृद्धि का प्रभाव:
यदि किसी वस्तु की पूर्ति में वृद्धि होती है तो उसका पूर्ति वक्र बायीं ओर खिसकेगा। पूर्ति वृद्धि का आशय है कि उसके उत्पादक एवं विक्रेता वस्तु के निश्चित मूल्य पर उसकी अधिक मात्रा उत्पादित करने एवं विक्रय करने को तत्पर रहेंगे।

रेखाचित्र के आधार पर DD माँग रेखा और SS पूर्ति वक्र के मध्य E बिन्दु संतुलन बिन्दु है। इस आधार पर OQ वस्तु की मात्रा का निर्धारण होता है। अब पूर्ति में वृद्धि के कारण पूर्ति वक्र दायीं तरफ खिसक कर S1S1, हो जाता है । इस नये S1S1, वक्र DD माँग वक्र का E सन्तुलन होता है। अत: मात्रा बढ़कर OQ1, हो जाता है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 4

2. पूर्ति में कमी का प्रभाव:
यदि किसी वस्तु की पूर्ति कम होती है, तो इसका आशय यह है कि उसके उत्पादक एवं विक्रेता वस्तु के निश्चित मूल्य पर उसकी कम मात्रा ही उत्पादित करने एवं विक्रय को तैयार होंगे। रेखाचित्र द्वारा DD रेखा माँग रेखा तथा SS रेखा पूर्ति रेखा है। E बिन्दु सन्तुलन बिन्दु है। यदि पूर्ति में कमी होती है तो पूर्ति रेखा बायीं ओर खिसक कर S1S1, हो जाता है और नयी सन्तुलन बिन्दु E1, प्राप्त होता है। अतः सन्तुलन मूल्य बढ़कर OP1, हो जाती है और सन्तुलन मात्रा घटकर OQ1 हो जाता है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 5

प्रश्न 6.
जब एक वस्तु का संतुलन मूल्य उसके बाजार मूल्य से कम हो जाता है तो विक्रेताओं में प्रतिस्पर्धा होगी? इस कथन के संदर्भ में कारण सहित उत्तर दीजिए?
उत्तर:
उक्त कथन सही है क्योंकि जब संतुलन मूल्य, बाजार मूल्य से कम होता है तो बाजार पूर्ति अधिक एवं बाजार माँग कम हो जाती है। इससे पूर्ति की अधिकता उत्पन्न होती है। दूसरे शब्दों में वस्तु के क्रेता कम एवं विक्रेता अधिक होते हैं इसके कारण विक्रेताओं में स्वाभाविक रूप से प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है।

प्रश्न 7.
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में दीर्घकाल में किसी फर्म का संतुलन शून्य लाभ पर होने का क्या कारण है?
उत्तर:
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा बाजार में नए फर्मों का प्रवेश दीर्घकाल में निर्बाध रूप से होता है। यदि कोई उद्योग या फर्म अल्पकाल में धनात्मक अर्जित कर रही है तो इससे नवीन फर्मों का उद्योग में प्रवेश का आकर्षण बढ़ेगा ऐसा तब तक होगा जब तक लाभ शून्य न हो जाए। यदि अल्पकाल में ही फर्मों को हानि हो रही हो तो कुछ फर्मे या तो उत्पादन बंद कर देंगी या उद्योग को छोड़कर बाजार से बहिर्गमन कर जाएँगी। पूर्ति में कमी आ जाएगी एवं इसके कारण संतुलन मूल्य बढ़ेगा एवं ऐसा तब तक होगा जब तक लाभ शून्य की स्थिति में न आ जाए।

प्रश्न 8.
एक फर्म को मूल्य स्वीकारक फर्म कब कहा जाता है?
उत्तर:
एक फर्म को मूल्य स्वीकारक फर्म तभी माना जाएगा जब वस्तु की कीमत बाजार माँग और बाजार पर्ति की शक्तियों द्वारा निर्धारित होती है और फर्मों द्वारा इस मूल्य पर कितनी भी वस्तुओं का विक्रय किया जा सकता है एवं कोई भी फर्म कीमत को प्रभावित नहीं कर सकती है। इसके कारण हैं –

  1. विक्रेताओं एवं क्रेताओं की बड़ी संख्या जो बाजार की पूर्ति को प्रभावित नहीं कर सकते।
  2. वस्तुएँ समरूप होती हैं। इसलिए कोई भी फर्म प्रचलित मूल्य से अधिक मूल्य वसूल करेगी तो क्रेता एक फर्म को छोड़कर दूसरे फर्म की ओर चले जाएँगे।
  3. क्रेता एवं विक्रेता को बाजार का पूर्ण ज्ञान होता है। अतः प्रत्येक फर्म मूल्य स्वीकारक होती है।

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प्रश्न 9.
पूर्ण प्रतियोगिता में फर्मों के स्वतंत्र प्रवेश एवं बहिर्गमन का क्या प्रभाव होता है? समझाइए?
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता में प्रत्येक फर्म स्वतंत्रतापूर्वक उद्योग में प्रवेश कर सकती है एवं इच्छानुसार बहिर्गमन कर सकती है। जब फर्मे अधिलाभ अर्जित करती हैं तो नई फर्मे लाभ की आशा में उद्योग में प्रवेश करेंगी एवं इससे बाजार की पूर्ति में वृद्धि हो जाएगी। इससे वस्तु की बाजार कीमत कम हो जाएगी, लाभ कम हो जाएगा एवं फर्मे उद्योग को छोड़कर जाने लगेंगी। जब सामान्य हानि की दशा रहेगी तो फर्ने उद्योग को छोड़कर जाने लगेंगी परिणामस्वरूप बाजार की पूर्ति में कमी आ जाएगी। बाजार की पूर्ति कम होने से बाजार मूल्य बढ़ जाएगा एवं सामान्य हानि समाप्त होने लगेगी।

प्रश्न 10.
एक कीमत – स्वीकारक फर्म की बाजार कीमत तथा सीमान्त सम्प्राप्ति में क्या संबंध है?
उत्तर:
एक इकाई के कम या अधिक उत्पादन करने से। कुल सम्प्राप्ति में जो परिवर्तन आता है। उसे सीमान्त सम्प्राप्ति। कहते हैं। सूत्र –
MR = TRN – TRN – 1

एक कीमत स्वीकारक फर्म बाजार कीमत को ही स्वीकार करती है। अत: उसके लिए औसत सम्प्राप्ति, सीमान्त सम्प्राप्ति की तथा बाजार कीमत तीनों बराबर होते हैं। एक कीमत स्वीकारक फर्म के लिए सभी सीमान्त सम्प्राप्तियों को जोड़कर कुल सम्प्राप्ति – उत्पादन की गणना की जा सकती है।

प्रश्न 11.
किसी आगत की कीमत में वृद्धि एक फर्म के पूर्ति वक्र को किस प्रकार प्रभावित करती है?
उत्तर:
जब उत्पादन की एक आगत की कीमत (जैसे – भूमि की लगान दर) में वृद्धि होती है, तो इसके परिणामस्वरूप निर्गत की उत्पादन लागत में भी वृद्धि होती है। जिससे निर्गत के किसी भी स्तर पर फर्म की औसत लागत तथा सीमान्त लागत में भी वृद्धि हो जाती है। सीमान्त लागत वक्र ऊपर/बायीं ओर खिसक जाता है। अतः साधनों की कीमत/लागत बढ़ने से आपूर्ति वक्र ऊपर/बायीं ओर खिसक जाता है।

प्रश्न 12.
मूल्य निर्धारण में समय तत्व के महत्व की व्याख्या कीजिये?
उत्तर:
किसी भी वस्तु के मूल्य निर्धारण में समय तत्व का विशेष महत्व होता है। वस्तु का मूल्य हमेशा माँग और पूर्ति की सापेक्षिक शक्तियों के द्वारा निर्धारित होता है। बाजार में माँग और पूर्ति की सापेक्षिक शक्तियों के बीच रस्साकशी होती है। कभी माँग, पूर्ति से ज्यादा हो जाती है तो कभी पूर्ति, माँग से ज्यादा हो जाती है किन्तु इन दोनों शक्तियों को पूर्ण संतुलन बिन्दु तक पहुँचने में समय लगता है। तब तक बाजार में अस्थायी साम्य बना रहता है। वस्तु के मूल्य निर्धारण में समय तत्व का प्रभाव निम्न प्रकार पड़ता है –

1. अति अल्पकाल:
यह वह समयावधि होती है जब वस्तु की पूर्ति स्थिर रहती है। यदि माँग बढ़ जाती है तो वस्तु का मूल्य बढ़ जायेगा एवं माँग घट जाती है तो मूल्य घट जायेगा। इसका कारण यह है कि मूल्य पर माँग का ही प्रभाव अधिक एवं पूर्ति का प्रभाव कम देखने में आता है। माँग अनुसार पूर्ति समायोजित नहीं की जा सकती।

2. अल्पकाल:
इस समयावधि में भी वस्तु की पूर्ति लगभग स्थिर रहती है। इसमें स्टॉक में रखी गई मात्रा तक ही माँग को पूरा किया जा सकता है। इस काल में भी मूल्य पर माँग का ही प्रभाव अधिक देखने में आता है। यहाँ भी माँग के अनुसार पूर्ति को पूर्णतः समायोजित नहीं किया जा सकता है।

3. दीर्घकाल:
यह वह समयावधि होती है जिसमें वस्तु की कीमत पर पूर्ति का प्रभाव अधिक पड़ता है। समय इतना अधिक होता है कि माँग के अनुसार पूर्ति को समायोजित किया जा सकता है।

4. अति दीर्घकाल:
यह वह समयावधि है जिसमें न केवल उत्पादकों को माँग के अनुसार पूर्ति को समायोजित करने का पूरा समय मिल जाता है, यहाँ तक पूर्ति पक्ष में उत्पादन की मात्रा, तकनीक, संयंत्र के आकार – प्रकार एवं माँग पक्ष में जनसंख्या, रुचि, फैशन, आय आदि में परिवर्तन दिखाई देता है।

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प्रश्न 13.
मान.लीजिए, एक पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार में वस्तुx की माँग तथा पूर्ति वक्र निम्न प्रकार दिये गये हैं –
qD = 700 – P
qS = 500 + 3p क्योंकि p ≥ 15
= 0 क्योंकि 0 ≤ p < 15
मान लीजिए कि बाजार में समरूपी फर्मे हैं। ₹15 से कम किसी भी कीमत पर वस्तु x की बाजार पूर्ति के शून्य होने के कारण की पहचान कीजिए। इस वस्तु के लिए सन्तुलन कीमत क्या होगी? संतुलन की स्थिति में x की कितनी मात्रा का उत्पादन होगा?
उत्तर:
माना कि बाजार में समरूपी फर्मों की संख्या स्थिर है, तब दिया है –
qD = 700 – p
qS = 500 + 3 p के लिए p ≥ 15
qS = 0 के लिए p < 15
यहाँ qD = माँग, qS= पूर्ति, p = कीमत।
क्योंकि सन्तुलन कीमत पर बाजार रिक्त हो जाता है।
अतः हम बाजार माँग और बाजार पूर्ति को बराबर करके संतुलन कीमत निम्न प्रकार ज्ञात कर सकते हैं –
qD = qS
700 – p = 500 + 3p
3P + P = 700 – 500
4P = 200
P = 50
अतः संतुलन कीमत = 50 प्रति इकाई।
अतः सन्तुलन की स्थिति में वस्तु x की मात्रा qD= 700 – 50 = 650
पूर्ति qS = 500 + 3(50) = 650
इस प्रकार सन्तुलन मात्रा 650 इकाई होगी तथा ₹ 5 से कम किसी भी कीमत पर फर्म उत्पादन नहीं करेगी क्योंकि उसे हानि उठानी पड़ेगी।

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प्रश्न 14.
मान लीजिए कि नमक की माँग तथा पूर्ति वक्र को इस प्रकार दिया गया है?
qD = 1000 – p
qS = 700 + 2p

(a) संतुलन कीमत तथा मात्रा ज्ञात कीजिए।
(b) अब मान लीजिए कि नमक के उत्पादन के लिए प्रयुक्त एक आगत की कीमत में वृद्धि हो जाती है और नया पूर्ति वक्र है –

qS = 400 + 2p
सन्तुलन कीमत तथा मात्रा किस प्रकार परिवर्तित होती है? क्या परिवर्तन आपकी अपेक्षा के अनुकूल है?

(c) मान लीजिए, सरकार नमक की बिक्री पर ₹ 3 प्रति इकाई कर लगा देती है। यह संतुलन कीमत तथा मात्रा को किस प्रकार प्रभावित करेगा?
उत्तर:

(a) दिया है –

qD = 1000 – P
qS = 700 + 2 p
संतुलन कीमत की गणना निम्न प्रकार कर सकते हैं –
qD = qS
1000 – p = 700 + 2p
1000 – 700 = 2p + p
3p = 300
p= 100
अतः संतुलन कीमत = 100 होगी।
अब हम संतुलन मात्रा की गणना निम्न प्रकार कर सकते हैं –
qD = 1000 – 100 = 900
तथा
qS = 700 + 2 (100) = 900
अतः सन्तुलन मात्रा 900 किग्रा होगी।

(b) संतुलन वक्र में परिवर्तन होने पर –
qS = 400 + 2p
तथा
qD = 100 – p
संतुलन कीमत की गणना –
q = 1000 – p = 400 + 2p
qD = 100 – p
संतुलन कीमत की गणना –
qD = qS
= 1000 – p = 400 + 2p
= 1000 – 400 = 2p + p
3p = 600
p = 200
अतः संतुलन कीमत की गणना –
qD = 1000 – 200 = 800
qS = 400 + 2 (200) = 800.

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प्रश्न 15.
क्या प्रतिस्पर्धी बाजार में लाभ – अधिकतमीकरण फर्म, जिसकी बाजार कीमत सीमान्त लागत के बराबर नहीं है, उसका निर्गत का स्तर सकारात्मक हो सकता है? व्याख्या कीजिए?
उत्तर:
प्रतिस्पर्धी बाजार में लाभ अधिकतमीकरण फर्म जिसकी बाजार कीमत, सीमान्त लागत से कम या अधिक है अर्थात् बराबर नहीं है। उसका निर्गत स्तर सकारात्मक नहीं हो सकता है। निर्गत सतर के सकारात्मक होने के लिए प्रतिस्पर्धी बाजार में लाभ – अधिकतमीकरण फर्म की बाजार कीमत तथा सीमान्त लागत का बराबर होना आवश्यक है। प्रश्नानुसार, व्याख्या करने के लिए निर्गत स्तर के सकारात्मक न होने की दो स्थितियाँ हो सकती हैं –

  • बाजार कीमत सीमान्त लागत से अधिक होने पर, (MR > MC)
  • बाजार कीमत सीमान्त लागत से कम होने पर, (MR < MC)

इस रेखाचित्र में Y1, के उत्पादन स्तर पर उत्पादन किया जाता है। इससे कम उत्पादन करने का तात्पर्य होगा कि कीमत सीमान्त लागत से कम (MR < MC) है। जिसके फलस्वरूप फर्म को हानि होगी। इसलिए कोई भी फर्म ऐसा नहीं करेगी कि Y1, से कम उत्पादन करे। इसका तात्पर्य यह है कि फर्म सकारात्मक उत्पादन करने के लिए Y1 से अधिक उत्पादन को बढ़ाने का प्रयत्न करेगी। ऐसा करने पर यदि कीमत सीमान्त लागत से अधिक हो जाती है, (MR > MC) तो फर्म उत्पादन बढ़ाने का लाभ प्राप्त करेगी। फर्म अपने लाभ को अधिकतम करने के लिए तब तक उत्पादन बढ़ाएगी जब तक कीमत सीमान्त लागत के बराबर नहीं आ जाती है। (MR = MC)। चित्र में Y2 आ जाती है। (MR = MC)।

चित्र में Y2, उत्पादन के बाद भी उत्पादन बढ़ाना जारी रखती है, तो Y3 उत्पादन स्तर पर सीमान्त लागत कीमत से कम हो जाएगा अर्थात् MR < MC और फर्म के लाभ कम हो जाएँगे। इसलिए फर्म Y3, उत्पादन स्तर से पुन: Y2, उत्पादन के स्तर पर आएगी तथा E बिन्दु जो कि अधिकतम लाभ का बिन्दु है पर पहुँच जाएँगी। यही फर्म का सकारात्मक स्तर है। इस प्रकार से एक पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार में फर्म Y2, स्तर से न कम और न ज्यादा उत्पादन करना चाहेगी। क्योंकि इस स्तर पर उसे अधिकतम लाभ मिल रहे हैं।

प्रश्न 16.
क्या एक प्रतिस्पर्धी बाजार में कोई लाभ – अधिकतमीकरण फर्म सकारात्मक निर्गत स्तर पर उत्पादन कर सकती है, जब सीमान्त लागत घट रही हो। व्याख्या कीजिए?
उत्तर:
प्रस्तुत रेखाचित्र से स्पष्ट है कि यदि फर्म निर्गत की q1, मात्रा का उत्पादन करती है, तो सीमान्त लागत, सीमान्त सम्प्राप्ति से अधिक होगी। जिससे फर्म को हानि Y उठानी पड़ेगी। फर्म उत्पादन मात्रा को तब तक बढ़ाएगी। जब तक MC = MR न हो जाए। बिन्दु B पर MC = MR है। फर्म का सकारात्मक निर्गत स्तर है। q1 से q2 निर्गत स्तरों के बीच सीमान्त लागत कम होती जा रही है। इसलिए इनके बीच का कोई भी निर्गत स्तर सकारात्मक निर्गत स्तर नहीं हो सकता है। अतः पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार में कोई लाभ अधिकतमीकरण फर्म सकारात्मक निर्गत स्तर पर उत्पादन नहीं कर सकती है, जब सीमान्त लागत घट रही हो।

बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पूर्ण प्रतियोगिता की विशेषताएँ बताइये?
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नांकित हैं –

1. क्रेताओं और विक्रेताओं की बाजार में अधिक संख्या:
पूर्ण प्रतियोगिता की सबसे पहली विशेषता यह है कि बाजार में क्रेताओं एवं विक्रेताओं की संख्या इतनी अधिक होनी चाहिए कि कोई भी क्रेता या विक्रेता अकेले वस्तु की कीमत को प्रभावित करने की दशा में न हो।

2. वस्तुओं का समरूप होना:
पूर्ण प्रतियोगिता की दूसरी विशेषता यह है कि विभिन्न फर्मों द्वारा उत्पादित वस्तुओं में समरूपता का गुण होता है। उत्पादन में समरूपता होने के कारण विक्रेता बाजार में प्रचलित मूल्य से अधिक कीमत नहीं ले सकता।

3. फर्मों का स्वतंत्र प्रवेश तथा बहिर्गमन:
पूर्ण प्रतियोगिता की तीसरी विशेषता यह है कि विभिन्न फर्मों को उद्योग में प्रवेश करने तथा उद्योग को छोड़ने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।

4. उत्पत्ति के साधनों में पूर्ण गतिशीलता:
पूर्ण प्रतियोगिता में उत्पत्ति के साधनों को एक व्यवसाय को छोड़कर दूसरे व्यवसाय में जाने की पूरी स्वतंत्रता रहती है। इसलिए उत्पत्ति के साधन पूर्णरूपेण गतिशील होते है।

5. विक्रय एवं परिवहन लागतों का अभाव:
पूर्ण प्रतियोगिता में सभी उत्पादक एवं क्रेता एक – दूसरे के इतने अधिक निकट होते हैं कि इनमें विक्रय एवं परिवहन लागतों का अभाव पाया जाता है।

प्रश्न 2.
संतुलन मूल्य का निर्धारण उदाहरण सहित समझाइए?
उत्तर:
संतुलन मूल्य:
पूर्ण प्रतियोगिता में वस्तु की कीमत का निर्धारण माँग और पूर्ति की सापेक्षिक क्रियाओं के द्वारा होता है। माँग और पूर्ति की शक्तियाँ ही इस कीमत का निर्धारण करती हैं। जिस कीमत पर क्रेता, और विक्रेता दोनों संतुष्ट हो जाते हैं। यह मूल्य संतुलन मूल्य कहलाता है। इस कीमत पर वस्तु की माँग और पूर्ति दोनों बराबर होते हैं तथा बाजार साफ हो जाता है अर्थात् न तो कोई अतिरिक्त माँग होती है और न ही कोई अतिरिक्त पूर्ति।
तालिका – संतुलन – मूल्य वस्तु का मूल्य:

उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट है कि जब कीमत ₹ 1 है तब माँग 500 और पूर्ति 100 किलोग्राम है अर्थात् माँग पूर्ति से अधिक है, अत: कीमत में बढ़ने की प्रवृत्ति होगी। कीमत बढ़ते – बढ़ते जब ₹ 3 पर पहुँचती है तब वस्तु की माँग और पूर्ति दोनों ही 300 किलोग्राम हो जाती है। यहीं पर संतुलन होगा। यदि कीमत ₹ 5 हो जाती है तो वस्तु की माँग 100 किलोग्राम तथा पूर्ति 500 किलोग्राम की होगी। इस स्थिति में माँग की तुलना में पूर्ति अधिक होगी, अतः कीमत में घटने की प्रवृत्ति प्रारंभ हो जायेगी और पुनः कीमत ₹ 3 पर जा पहुँचती है इस प्रकार उपर्युक्त तालिका के अनुसार माँग और पूर्ति में संतुलन ₹ 3 कीमत पर होता है, अतः कीमत ₹ 3 निर्धारित होती है चूँकि ₹ 3 की इस कीमत पर वस्तु की माँग और वस्तु की पूर्ति दोनों ही बराबर है अतः कीमत में परिवर्तन होने की कोई प्रवृत्ति नहीं होगी और संतुलन हो जायेगा!

प्रश्न 3.
बाजार मूल्य का अर्थ लिखिए। अति अल्पकाल के बाजार का मूल्य निर्धारण पर क्या प्रभाव पड़ता है? समझाइए?
उत्तर:
बाजार मूल्य का अर्थ:
बाजार मूल्य वह मूल्य होता है जिस पर अल्पकाल में माँग और पूर्ति के बीच अस्थायी संतुलन होता है। अल्पकाल से तात्पर्य, समय की उस अवधि से है जिनमें वस्तु की पूर्ति को उसकी माँगों के अनुसार समायोजित नहीं किया जा सकता है। बाजार मूल्य का निर्धारण वस्तु की माँग एवं पूर्ति के अस्थायी संतुलन द्वारा होता है। अल्पकाल में जिस मूल्य पर वस्तुओं का क्रय – विक्रय होता है, वही बाजार मूल्य कहलाता है।

MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 11
अति अल्पकाल में मूल्य – निर्धारण:
अति अल्पकाल वह अवधि होती है जिसमें कुल पूर्ति स्थिर रहती है। अति अल्पकाल में समय इतना कम होता है कि उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन करना सम्भव नहीं होता। इस दृष्टि। से नाशवान वस्तुओं में अति अल्पकाल या बाजार अवधि प्रायः एक दिन तथा टिकाऊ वस्तुओं की बाजार अवधि कुछ दिन या कुछ सप्ताह होती है।

चित्र द्वारा स्पष्टीकरण:
प्रस्तुत रेखाचित्र में पूर्ति स्थिर होने के कारण पूर्ति रेखा SQ को एक खड़ी रेखा के रूप में प्रदर्शित किया गया है। OQ पूर्ति स्थिर है। माँग रेखा DD है। माँग तथा पूर्ति रेखा एक – दूसरे को P बिन्दु पर काट रही है। अत: वस्तु की कीमत PQ निर्धारित होती है। यदि माँग बढ़ाकर D1,D1, हो जाती है तो कीमत बढ़कर PQ हो जाती है। यदि माँग घटकर D2,D2, हो जाती है तो कीमत घटकर P1Q हो जाती है।

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प्रश्न 4.
पूर्ण प्रतियोगिता में मूल्य निर्धारण कैसे होता है? रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए?
अथवा
पूर्ण प्रतियोगिता में मूल्य निर्धारण को निम्नांकित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट कीजिए?

  1. वस्तु की माँग
  2. वस्तु की पूर्ति
  3. माँग व पूर्ति का संतुलन।

उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता में मूल्य निर्धारण:
पूर्ण प्रतियोगिता में मूल्य निर्धारण किस प्रकार का होता है, इस संबंध में प्राचीन अर्थशास्त्रियों में काफी मतभेद रहा, मुख्यत: दो विचारधाराएँ प्रचलित थीं। एक विचार के समर्थक एडम स्मिथ, रिकार्डो आदि थे, जिनके अनुसार किसी वस्तु का मूल्य उसकी उत्पादन लागत द्वारा निर्धारित होता है। इसके विपरीत, दूसरी विचारधारा के समर्थकों वालरस, जेवेन्स आदि के अनुसार किसी वस्तु का मूल्य उसकी उत्पादन लागत पर नहीं बल्कि उसकी उपयोगिता अर्थात् सीमान्त उपयोगिता पर निर्भर करता है।

1. वस्तु की माँग:
किसी वस्तु की माँग उपभोक्ताओं द्वारा की जाती है। उपभोक्ता किसी वस्तु की माँग उस वस्तु में निहित उपयोगिता के कारण करता है। उपभोक्ता वस्तु का कितना मूल्य देगा, यह वस्तु की सीमान्त उपयोगिता पर निर्भर करता है। उपभोक्ता किसी भी दशा में वस्तु की सीमान्त उपयोगिता में अधिक मूल्य नहीं देगा। इस प्रकार उपभोक्ता के लिए वस्तु की सीमान्त उपयोगिता वस्तु के मूल्य की अधिकतम सीमा निर्धारित करती है।

2. वस्तु की पूर्ति:
किसी वस्तु की पूर्ति उत्पादकों द्वारा की जाती है। वस्तु के उत्पादन में चूँकि उत्पादकों को कुछ लागतें वहन करनी पड़ती हैं, इसलिए वह अपनी वस्तु का मूल्य कम से कम सीमान्त लागत के बराबर अवश्य प्राप्त करना चाहेंगे। इस प्रकार सीमान्त लागत किसी वस्तु के मूल्य की निम्नतम सीमा को बताती है।

3. माँग व पूर्ति का संतुलन:
उपभोक्ता वस्तु की कीमत उसकी सीमान्त उपयोगिता से अधिक नहीं देगा तथा उत्पादक वस्तु की कीमत उसकी सीमान्त लागत से कम नहीं लेगा। अतः वस्तु की कीमत इन दोनों सीमाओं के बीच में कहीं निर्धारित होगी। प्रत्येक क्रेता इस बात का प्रयास करता है कि उसे वस्तु की कम से कम कीमत चुकानी पड़े। प्रत्येक विक्रेता इस बात का प्रयास करता है कि वह वस्तु की अधिक से अधिक कीमत प्राप्त कर ले। ऐसी स्थिति में क्रेता एवं विक्रेता में – सौदेबाजी चलती रहती है तथा माँग एवं पूर्ति की शक्तियाँ एकदूसरे के विपरीत दिशा में कार्य करती हैं। अन्त में वस्तु की कीमत है| उस बिन्दु पर निर्धारित होती है, जहाँ पर कि वस्तु की माँगी जाने वाली मात्रा तथा वस्तु की पूर्ति मात्रा आपस में बराबर हो जाती है। इसी को साम्य मूल्य कहते हैं।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 12

चित्र द्वारा स्पष्टीकरण:
प्रस्तुत चित्र में OX आधार रेखा पर वस्तु की माँग व पूर्ति तथा OY लम्ब रेखा पर वस्तु की कीमत को प्रदर्शित किया गया है। चित्र में DD माँग वक्र तथा SS पूर्ति वक्र हैं । ये दोनों एक – दूसरे को E बिन्दु पर काटते हैं। यह साम्य बिन्दु है। इस बिन्दु पर मूल्य OP या OE होगा तथा मात्रा OQ होगी। इस प्रकार पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत मूल्य का निर्धारण माँग व पूर्ति की सापेक्षिक शक्तियों द्वारा साम्य बिन्दु पर किया जाता है।

प्रश्न 5.
पूर्ण प्रतियोगिता को परिभाषित कीजिए। क्या पूर्ण प्रतियोगिता काल्पनिक है?
अथवा
“पूर्ण प्रतियोगिता एक कोरी कल्पना है।” स्पष्ट कीजिये?
अथवा क्या पूर्ण प्रतियोगिता कल्पना मात्र है? मुख्य कारण बताइये?
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता की परिभाषा:
श्रीमती जॉन रॉबिन्सन के अनुसार, “पूर्ण प्रतियोगिता तब पायी जाती है, जब प्रत्येक उत्पादक के उत्पादन के लिए माँग पूर्णतया लोचदार होती है। इसका अर्थ यह है कि प्रथम, विक्रेताओं की संख्या अधिक होती है जिससे किसी एक विक्रेता को उत्पादक का उत्पादन उस वस्तु के कुल उत्पादन का एक बहुत ही थोड़ा – सा भाग प्राप्त होता है तथा दूसरे सभी क्रेता प्रतियोगी विक्रेताओं के बीच चुनाव कराने की दृष्टि से समान होते हैं, जिससे कि बाजार पूर्ण हो जाता है।”

क्या पूर्ण प्रतियोगिता काल्पनिक है:
पूर्ण प्रतियोगिता बाजार की एक काल्पनिक दशा है, क्योंकि

1. क्रेताओं एवं विक्रेताओं का बड़ी संख्या में न होना:
पूर्ण प्रतियोगिता बाजार की एक ऐसी दशा है जिसमें क्रेताओं एवं विक्रेताओं की संख्या अधिक होती है, लेकिन व्यावहारिक जगत में यह बात सही नहीं है, क्योंकि कुछ वस्तुओं के उत्पादक सीमित होते हैं जबकि उपभोक्ताओं की संख्या अधिक होती है।”

2. वस्तु का समरूप न होना:
पूर्ण प्रतियोगिता के लिए यह आवश्यक शर्त है कि वस्तुएँ समरूप होनी चाहिए, लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं होता। प्राय: हम जिन वस्तुओं का उपभोग करते हैं वे सब वस्तुएँ आकारप्रकार तथा गुणों में एक – दूसरे के समान नहीं होती हैं।

3. फर्मों का स्वतंत्र प्रवेश तथा बहिर्गमन न होना:
पूर्ण प्रतियोगिता बाजार में यह शर्त रहती है कि कोई भी फर्म, उद्योग में प्रवेश कर सकती है तथा उद्योग से बहिर्गमन कर सकती हैं लेकिन व्यवहार में सरकारी हस्तक्षेप के कारण ऐसा नहीं होता है।

4. बाजार का पूर्ण ज्ञान न होना:
पूर्ण प्रतियोगिता बाजार में यह शर्त रहती है कि क्रेताओं एवं विक्रेताओं में निकट का सम्पर्क होता है, लेकिन व्यावहारिक जगत में क्रेताओं एवं विक्रेताओं को इस बात की जानकारी नहीं रहती कि कौन – सी वस्तु कहाँ तथा किस कीमत में बेची या खरीदी जा सकती है।

5. उत्पत्ति के साधनों में पूर्ण गतिशीलता न होना:
उत्पत्ति के साधन पूर्ण प्रतियोगिता में पूर्ण गतिशील होते हैं, यह मान्यता भी गलत है।

6. परिवहन लागतों का शून्य होना संभव नहीं:
वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने ले जाने में परिवहन व्यय भी होते हैं। अतः परिवहन लागतों का शून्य होना संभव नहीं है।

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प्रश्न 6.
पूर्ण प्रतियोगिता की दशा में दीर्घकाल में किसी वस्तु का मूल्य कैसे निश्चित होता है? समझाइये?
उत्तर:
दीर्घकाल (Long Period) दीर्घकाल वह समयावधि है जिसमें उत्पादन के सभी साधन परिवर्तनशील होते हैं तथा जिनका माँग के अनुरूप ४ पूर्ति में समायोजन किया जा सकता है। इस समयावधि में अन्य फर्मे उद्योग में प्रवेश कर सकती हैं एवं वर्तमान फर्मे उद्योग से बहिर्गमन कर सकती हैं तथा सभी फर्मे अपने उत्पादन की क्षमता को आवश्यकतानुसार परिवर्तित कर सकती हैं। दीर्घकाल में वस्तु के मूल्य निर्धारण में उसके उत्पादन की लागत का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है। इस समयावधि में वस्तु का मूल्य उसकी औसत न्यूनतम लागत के बराबर होगा।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 13
रेखाचित्र द्वारा स्पष्टीकरण:
प्रस्तुत रेखाचित्र में उद्योग की माँग व पूर्ति की शक्तियाँ E वस्तु की मात्रा – साम्य बिन्दु पर OP कीमत का निर्धारण करती हैं तथा उद्योग में कुल OQ मात्रा तक वस्तुओं का क्रय – विक्रय किया जाता है। यही OP कीमत फ़र्म के द्वारा स्वीकार कर ली जाती है। यह कीमत दीर्घकालीन औसत लागत (LAC) तथा दीर्घकालीन सीमांत लागत (LMC) के बराबर है। फर्म का संतुलन P बिन्दु पर होता है। फर्म OK मात्रा बेचकर न्यूनतम औसत लागत OR पर उत्पादन करती है। फर्म को यहाँ सामान्य लाभ प्राप्त होता है। अर्थात् यहाँ P = LAC = LMC = LAR = LMR है। इस काल में कीमत, उत्पादन लागत पर निर्भर करेगी, जो स्वयं उत्पत्ति के नियमों पर आधारित है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 14

प्रश्न 7.
माँग में परिवर्तन का संतुलन मूल्य पर क्या प्रभाव पड़ता है? रेखाचित्र द्वारा समझाइए?
उत्तर:
वस्तु विशेष के मूल्य स्थिर रहने पर भी दूसरी वस्तुओं के मूल्य में परिवर्तन, उपभोक्ताओं की आय में परिवर्तन अथवा फैशन, रुचि आदि परिवर्तित होने से माँग घट-बढ़ सकती है। दूसरे शब्दों में माँग वक्र खिसक सकता है।

1. माँग में वृद्धि का प्रभाव:
यदि किसी वस्तु की माँग में वृद्धि होती है तथा पूर्ति यथावत् रहती है, तो बाजार में इस वस्तु का मूल्य बढ़ जायेगा क्योंकि इस दशा में उत्पादक या विक्रेता अपनी वस्तु को अधिक मूल्य पर विक्रय कर सकेगा और मात्रा अधिक होने। पर माँग में भी वृद्धि होगा। रेखाचित्र में DD माँग रेखा और SS पूर्ति रेखा बिन्दु E पर काटती है। वस्तु की कीमत OP तथा वस्तु की मात्रा। OQ निर्धारित होता है। माँग में वृद्धि के कारण माँग रेखा खिसक कर D1D1, हो जाता है। नये माँग रेखा पूर्ति वक्र को E1, बिन्दु पर संतुलन करता है, जब संतुलन मूल्य बढ़कर E1Q1 और संतुलन मात्रा OQ1, हो। जाती है। अर्थात् माँग बढ़ने से मूल्य भी बढ़ता है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 15
2. माँग में कमी का प्रभाव:
पूर्ति वक्र यथावत् रहने पर जब माँग में कमी या माँग वक्र बायीं ओर खिसकता है तो संतुलन मूल्य और संतुलन की मात्रा दोनों में कमी हो जाती है। रेखाचित्र में DD माँग रेखा तथा SS पूर्ति रेखा है, E संतुलन बिन्दु है और OQ1 संतुलन की मात्रा है। माँग में कमी के कारण माँग वक्र बायीं ओर खिसक कर D1D1 और मात्रा OQ, रह जाती है। अतः जब वस्तु विशेष पर माँग में कमी आती है, तो उसका मूल्य भी गिर जाता है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 16

प्रश्न 8.
निम्न तालिका में प्रतिस्पर्धी फर्म की कुल लागत सारणी को दर्शाया गया है। वस्तु की कीमत ₹ 10 दी हुई है। प्रत्येक उत्पादक स्तर पर लाभ की गणना कीजिए। लाभ – अधिकतमीकरण निर्गत स्तर ज्ञात कीजिए?
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 17
उत्तर:
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img t
लाभ:
अधिकतमीकरण निर्गत स्तर 5 इकाइयाँ हैं।

प्रश्न 9.
दो फर्मों वाले एक बाजार को लीजिए। निम्न तालिका दोनों फर्मों की पूर्ति सारणियों को दर्शाती है – SS1, कॉलम में फर्म -1 की पूर्ति सारणी, कॉलम SS2, में फर्म – 2 की पूर्ति सारणी का परिकलन कीजिए?
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 19
उत्तर:
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 19

प्रश्न 10.
एक दो फर्मों वाले बाजार को लीजिए। निम्न तालिका में कॉलम SS1, तथा कॉलम SS2, क्रमशः फर्म -1 तथा फर्म – 2 के पूर्ति सारणियों को दर्शाते हैं। बाजार पूर्ति सारणी का परिकलन कीजिए?
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उत्तर:
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 4 बाजार के स्वरूप (प्रकार) एवं मूल्य निर्धारण img 22

प्रश्न 11.
₹ 10 प्रति इकाई बाजार कीमत पर एक फर्म की सम्प्राप्ति ₹ 50 है। बाजार कीमत बढ़कर ₹ 15 हो जाती है और अब फर्म को ₹ 150 की सम्प्राप्ति होती है। पूर्ति वक्र की कीमत लोच क्या है?
हल: कीमत स्तर ₹ 10 प्रति इकाई बाजार कीमत पर
कुल आगम (TR) = ₹ 50
पूर्ति की गई इकाइयाँ (q0) = \(\frac { TR }{ P }\)
= \(\frac { 50 }{ 10 }\)
= 5 इकाइयाँ
कीमत स्तर ₹ 15 प्रति इकाई बाजार कीमत पर
कुल आगम (TR) = ₹ 150
पूर्ति की गई इकाइयाँ (q1) = \(\frac { TR }{ P }\)
= \(\frac { 150 }{ 15 }\)
= 10 इकाइयाँ
P0 = 10, P1 = 15
कीमत में परिवर्तन ∆p = P1 – P0
= 15 – 10 = ₹5
मात्रा में परिवर्तन ∆q = q1 – q0
= 10 – 5 = 5 इकाइयाँ
es = \(\frac { Δ_{ p } }{ Δ_{ q } } \) x \(\frac { p_{ 0 } }{ q_{ 0 } } \)
= \(\frac { 5 }{ 5 }\) x \(\frac { 10 }{ 5 }\) = 2
पूर्ति की लोच = 2

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल

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ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर |

प्रश्न 1.
निम्न यौगिकों की संरचना लिखिये

  1. a -मेथॉक्सीप्रोपिऑनैल्डिहाइड
  2. 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल
  3. 2-हाइड्रॉक्सीसाइक्लोपेन्टेन का.ल्डिहाइड
  4. 4-ऑक्जोपेन्टेनल
  5. डाइ-द्वितीयक ब्यूटिल कीटोन
  6. 4-फ्लुओरो एसीटोफीनोन

उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 1

प्रश्न 2.
निम्न अभिक्रियाओं के उत्पादों की संरचना लिखिये
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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 3
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 4
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प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिकों को उनके क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिये
CH3CHO, CH3CH2OH, CH3ÓCH3, CH3CH2CH3.
उत्तर
CH3CH2CH3 < CH3OCH3 < CH3CHO < CH3CH2OH
इस क्रम की भविष्यवाणी इनके बीच कार्य कर रहे अन्तः आण्विक आकर्षण बल के आधार पर की जा सकती है। जैसा इसमें तुलनात्मक अणुभार होता है। एल्कोहॉल में प्रबल H-बंध होता है। CH3OCH3 तथा CH3CHO में द्विध्रुव-द्विध्रुव अन्त:आण्विक आकर्षण बल होता है। जबकि CH3CHO,CH3OCH3 से ज्यादा ध्रुवीय होता है। इसलिये, इनके क्वथनांक CH3OCH3 से ज्यादा होते हैं। प्रोपेन अध्रुवीय होता है । इसलिये इसमें दुर्बल वाण्डरवाल्स बल कार्य करता है।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रियाओं में उनकी बढ़ती हुई अभिक्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिये

  1. एथेनल, प्रोपेनल, प्रोपेनोन, ब्यूटेनोन
  2. बेन्जैल्डिहाइड, p-टॉलूऐल्डिहाइड, p-नाइट्रो-बेन्जैल्डिहाइड, एसीटोफिनोन।

उत्तर
1. ब्यूटेनोन < प्रोपेनोन < प्रोपेनल < एथेनल
इस क्रम की भविष्यवाणी दो कारकों के आधार पर की जा सकती है-

  • +I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी प्रभाव) तथा
  • त्रिविम प्रभाव।

2. एसीटोफिनोन <p-टॉलूऐल्डिहाइड < बेन्जैल्डिहाइड <p-नाइट्रो बेन्जैल्डिहाइड
इस क्रम की भविष्यवाणी (पूर्वानुमान) प्रेरणिक प्रभाव अनुनाद तथा अतिसंयुग्मन प्रभाव द्वारा की जा सकती है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पादों को पहचानिये
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 6
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 7

प्रश्न 6.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम दीजिये- .
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उत्तर

  1. 3-फेनिलप्रोपेनोइक अम्ल
  2. 3-मेंथिलब्यूट-2-ईन-1-ओइक अम्ल
  3. 2-मेथिलसाइक्लोपेन्टेनकार्बोक्सिलिक अम्ल
  4. 2, 4, 6-ट्राइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल या 2, 4, 6-ट्राइनाइ-ट्रोबेन्जीनकार्बोक्सिलिक अम्ल।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित यौगिकों को बेन्जोइक अम्ल में कैसे परिवर्तित किया जा सकता है

  1. एथिलबेंजीन
  2. एसीटोफिनोन
  3. ब्रोमोबेन्जीन
  4. फेनिलएथीन (स्टाइरीन)।

उत्तर
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प्रश्न 8.
नीचे प्रदर्शित अम्लों के प्रत्येक युग्म में कौन-सा अम्ल अधिक प्रबल हैं

1. CHCO,H अथवा CH,FCO,H
2. CH,FCO,H अथवा CH,CICO,H
3. CH,FCH,CH,CO,H अथवा CH,CHFCH,COH
4.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 12
उत्तर
1. FCHCOOH (F को -[ प्रभाव के कारण)
2. FCH,CO,H (F पर CIसे ज्यादा – प्रभाव के कारण)
3. CH, CHFCH,COOH (प्रेरणिक प्रभाव दूरी बढ़ने के साथ घटता है। अर्थात् 3-फ्लुओरोब्यूटेनोइक अम्ल, 4-क्लोरोब्यूटेनोइक अम्ल से ज्यादा प्रबल होगा।
4.
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ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पदों (शब्दों) से आप क्या समझते हैं, प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिये

  1. सायनोहाइड्रिन
  2. एसीटल
  3. सेमीकार्बेजोन
  4. ऐल्डॉल
  5. हेमीऐसीटल
  6. ऑक्सिम
  7. कीटल
  8. इमीन
  9. 2, 4-DNP व्युत्पन्न
  10. शिफ-क्षारक।

उत्तर
1. सायनोहाइड्रिन-ये कार्बनिक यौगिक हैं, जिसका सूत्र । RR’C(OH)CN होता है, जहाँ R एवं R’ एल्किल समूह हो सकते हैं।
ऐल्डिहाइड और कीटोन, हाइड्रोजन सायनाइड के साथ सोडियम सायनाइड की उपस्थिति में अभिक्रिया करते हैं | NaCN यह एक उत्प्रेरक के रूप में होते हैं। ये अभिक्रियाएँ सायनोहाइड्रीन अभिक्रिया कहलाती है।
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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 13
सायनोहाइड्रीन सायनोहाइड्रीन का उपयोग संश्लेषित मध्यवर्ती क्रिया में करते हैं। ,,

2. एसीटल-एसीटल, जेम-डाइ एल्कॉक्सी ऐल्केन है, जिसमें दो एल्कॉक्सी समूह, कार्बन परमाणु के टर्मिनल पर उपस्थित होते हैं। इसके एक बंध एल्किल समूह से जुड़े होते हैं जबकि दूसरा बंध हाइड्रोजन परमाणु से जुड़े होते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 14
जब ऐल्डिहाइड, शुष्क HCI गैस की उपस्थिति में मोनोहाइड्रीक एल्कोहॉल OR’ दो समतुल्य के जैसे व्यवहार करते हैं, हेमीएसीटल बनाते हैं। जो आगे एल्कोहॉल के एसीटल की सामान्य संरचना अधिकता के साथ क्रिया करके एसीटल बनाते हैं।
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3. सेमीकार्बेजोन-सेमीकार्बेजोन, ऐल्डिहाइड और कीटोन के व्युत्पन्न है, जो कीटोन या ऐल्डिहाइड और सेमीकार्बेजाइड के मध्य संघनन से बनते हैं।
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4. ऐल्डॉल संघनन-वह अभिक्रिया जिसमें दो समान या विभिन्न कार्बोनिल यौगिकों के अणु जिनमें ‘a-हाइड्रोजन परमाणु उपस्थित हो तनु क्षार जैसे—NaOH, Ba(OH)2 आदि की उपस्थिति में संयुक्त होकर एक नया यौगिक बनाते हैं जो ऐल्कोहॉल और ऐल्डिहाइड या ऐल्कोहॉल और कीटोन दोनों के गुण प्रदर्शित करता है, ऐल्डॉल संघनन कहलाती है।
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तनु सोडियम हाइड्रॉक्साइड पोटैशियम कार्बोनेट की उपस्थिति में । ऐसीटैल्डिहाइड से दो अणु संघनित होकर β-हाइड्रॉक्सी ब्यूटैरेल्डिहाइड (ऐल्डॉल) का एक अणु बनाते हैं।

5. हेमीऐसीटल- ये α-एल्कॉक्सी ऐल्कोहॉल होते हैं। ऐल्डिहाइड्स जब शुष्क HCL गैस की उपस्थिति में मोनोहाइड्रिक / 2 एल्कोहॉल के एक अणु से क्रिया करते हैं, तो हेमीएसीटल बनता है। हेमीऐसीटल की सामान्य संरचना
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6. ऑक्सिम-ऑक्सिम कार्बनिक यौगिकों की ही एक श्रेणी होती है, जिसका सूत्र RR’CNOH होता है, जहाँ R एक कार्बनिक पार्श्व शृंखला होती है तथा R’ मोनोहाइड्रोजन या एक कार्बनिक पार्श्व श्रृंखला – N होती है। यदि R’H है तब यह एल्डोऑक्सिम और यदि R’ एक कार्बनिक पार्श्व श्रृंखला है, तब यह एक कीटोक्सिम के नाम से जाना जाता है।
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हाइड्रोक्सील एमीन की दुर्बल अम्लीय माध्यम में ऐल्डिहाइड या Aldorime कीटोन से क्रिया कराने पर ऑक्सीम का निर्माण होता है।
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7. कीटल-कीटल्स जेम-डाइएल्कॉक्सीएल्केन्स होते हैं, जिनमें दो एल्कॉक्सी समूह समान कार्बन अणु पर श्रृंखला के रूप में उपस्थित होते हैं। कार्बन R-C-OR’ के अन्य दो बंध दो एल्किल समूहों से संबद्ध होते हैं।
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कीटोन, एथिलीन ग्लाइकॉल से शुष्क HCI गैस की उपस्थिति में क्रिया करके कोलकाता चक्रीय उत्पाद बनाता है, जिसे एथिलीन ग्लाइकॉल कोटल कहते है। R CH,OH
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8. इमीन-इमीन वे रासायनिक यौगिक हैं, जिनमें काबन-नाइट्रोजन द्विबंध पाए जाते हैं।
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ये तब प्राप्त किये जाते हैं, जब ऐल्डिहाइड व कीटोनों की क्रिया अमोनिया व उसके व्युत्पन्नों से कराई जाती है।
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9. 2,4-DNP व्युत्पन्न-2,4-डाइनाइट्रोफिनाइल हाइड्राजोन, 2, 4-DNP का व्युत्पन्न है, जो 2,4डाइफिनाइलहाइड्राजीन के साथ ऐल्डिहाइड या कीटोनों के साथ दुर्बल अम्लीय माध्यम में क्रिया से बनते हैं।
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10. शिफ-क्षारक-शिफ क्षार (एजोमेथीन) वह रासायनिक यौगिक है, जिसमें एक कार्बन-नाइट्रोजन द्विबंध पाया जाता है । जहाँ नाइट्रोजन अणु से एक एरील या एल्किल समूह जुड़ा होता है। इसका सामान्य सूत्र R,R,C=NR, है। . N इस प्रकार यह एक इमीन है। इसका नाम ह्यूगो शिफ वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया है।
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इसका उपयोग ऐल्डिहाइड व कीटोन में विलेय करने के लिए किया जाता है।
शिफ-क्षार की सामान्य संरचना

प्रश्न 2.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नामपद्धति में नाम लिखिए,

  1. CH3CH(CH3)CH2CH2CHO
  2. CH3CH2COCH(C2H5)CH2CH2CI
  3. CH3CH = CHCHO
  4. CH3COCH2COCH3
  5. CH3CH(CH3)CH2C(CH3)2COCH3
  6. (CH3)3CCH2COOH
  7. OHCC6H4CHO-p.

उत्तर

  1. 4-मेथिलपेन्टेनल
  2. 6-क्लोरो-4-एथिलहेक्सेन-3 ऑन
  3. ब्यूट-2-ईन-1-अल
  4. पेन्टेन-2, 4, डाइऑन
  5. 3, 3, 5 ट्राइमेथिलहेक्सेन-2-ओन
  6. 3, 3-डाइमेथिलब्यूटेनोइक अम्ल
  7. बेन्जीन-1, 4-डाइकार्बेल्डिहाइड।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिकों की संरचना बनाइए

  1. 3-मेथिलब्यूटेनल
  2. p-नाइट्रोप्रोपिओफीनोन
  3. p-मेथिलबेन्जैल्डिहाइड
  4. 4-मेथिलपेन्ट-3-ईन-2-ओन
  5. 4-क्लोरोपेन्टेन-2-ओन
  6. 3-ब्रोमो-4-फेनिलपेन्टेनॉइक अम्ल
  7. p,p’-डाइहाइड्रॉक्सीबेन्जोफीनोन
  8. हेक्स-2-ईन-4-इनोइक अम्ल

उत्तर
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित ऐल्डिहाइडों एवं कीटोनों के IUPAC नाम लिखिए और जहाँ संभव हो सके साधारण नाम भी दीजिए
1. CH3CO(CH2)4CH3
2. CH3CH2CHBrCH2CH(CH3) CHO
3. CH3(CH2)5CHO
4. Ph-CH = CH-CHO
5.

6. PhCOPh
उत्तर
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित व्युत्पन्नों की संरचना बनाइए

  1. बेन्जैल्डिहाइड का 2, 4-डाइनाइट्रोफेनिलहाइड्रेजोन
  2. साइक्लोप्रोपेनोन ऑक्जिम
  3. ऐसीटैल्डिहाइड डाइमेथिल ऐसीटल
  4. साइक्लोब्यूटेनोन का सेमीकार्बेजोन
  5. हेक्सेन-3-ओन का एथिलीन कीटल
  6. फॉर्मेल्डिहाइड का मेथिल हेमीऐसीटेल।

उत्तर
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प्रश्न 6.
साइक्लोहेक्सेनकार्बेल्डिहाइड की निम्नलिखित अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया से बनने वाले उत्पादों को पहचानिए

  1. PhMgBr एवं तत्पश्चात् H3O+
  2. टॉलेन अभिकर्मक
  3. सेमीकार्बेजाइड एवं दुर्बल अम्ल
  4. एथेनॉल का आधिक्य तथा अम्ल
  5. जिंक अमलगम एवं तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल।

उत्तर
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प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-से यौगिकों में ऐल्डॉल संघनन होगा, किसमें कैनिजारो अभिक्रिया होगी और किसमें उपरोक्त में से कोई क्रिया नहीं होगी? ऐल्डॉल संघनन तथा कैनिजारो अभिक्रिया में संभावित उत्पादों की संरचना लिखिए

  1. मेथेनल
  2. 2-मेथिलपेन्टेनल
  3. बेन्जैल्डिहाइड
  4. बेन्जोफीनोन
  5. साइक्लोहेक्सेनोन
  6. 1-फेनिलप्रोपेनोन
  7. फेनिलऐसीटैल्डिहाइड
  8. ब्यूटेन-1-ऑल
  9. 2, 2-डाइमेथिलब्यूटेनल।

उत्तर
[A] (ii) 2-मेथिल पेन्टेनल, (v) साइक्लोहेक्सेनोन, (vi) 1-फेनिल-प्रोपेनोन, (vii) फेनिलऐसी टैल्डिहाइड।
इनमें एक या एक से ज्यादा a-हाइड्रोजन परमाणु है अतः इनमें एल्डोल संघनन होगा। उदाहरण के लिये
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[B] (i) मेथेनल, (ii) बेन्जैल्डिहाइड, (ix)2, 2 डाइमेथिल-ब्यूटेन में a -हाइड्रोजन नहीं होता है, अतः ये कैनिजारो अभिक्रिया देते हैं।
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[C] (iv) बेन्जोफिनोन एक कीटोन है, इसमें a -H नहीं है।
(viii) ब्यूटेन-1-ऑल एक एल्कोहॉल है।
ये दोनों न तो एल्डोल संघनन देते हैं और न ही कैनिजारो अभिक्रिया देते हैं।

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प्रश्न 8.
एथेनल को निम्नलिखित यौगिकों में कैसे परिवर्तित करेंगे

  1. ब्यूटेन-1, 3-डाइऑल
  2. ब्यूट-2-ईनल,
  3. ब्यूट-2-इनोइक अम्ल

उत्तर
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प्रश्न 9.
प्रोपेनल एवं ब्यूटेनल के एल्डॉल संघनन से बनने वाले चार संभावित उत्पादों के नाम एवं संरचना सूत्र लिखिए। प्रत्येक में बताइए कि कौन-सा ऐल्डिहाइड नाभिकस्नेही और कौन-सा इलेक्ट्रॉनस्नेही होगा?
उत्तर
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प्रश्न 10.
एक कार्बनिक यौगिक जिसका अणुसूत्र C,H100 है 2, 4-DNP व्युत्पन्न बनाता है, टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है तथा कैनिजारो अभिक्रिया देता है, प्रबल ऑक्सीकरण पर वह 1,2-बेन्जीनडाइ-कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाता है। यौगिक को पहचानिए।
उत्तर
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प्रश्न 11.
एक कार्बनिक यौगिक (AI (आण्विक सूत्र C8H16O2) को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ जल-अपघटित करने के उपरांत एक कार्बोक्सिलिक अम्ल [B] एवं एक ऐल्कोहॉल [C] प्राप्त हुई। C| को क्रोमिक अम्ल के साथ ऑक्सीकृत करने पर [B] उत्पन्न होता है। C|निर्जलीकरण पर ब्यूट1-ईन देता है। अभिक्रियाओं में प्रयुक्त होने वाली सभी रासायनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर
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प्रश्न 12.
निम्नलिखित यौगिकों को उनसे संबंधित गुणधर्मों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए

  1. ऐसीटैल्डिहाइड, ऐसीटोन, डाइ-तृतीयक-ब्यूटिल-कीटोन, मेथिल तृतीयक-ब्यूटिल कीटोन (HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता)।
  2. CH3CH2CH(Br)COOH, CH3CH(Br)CH2COOH, (CH3)2CHCOOH, CH3CH2CH2COOH (अम्लता के क्रम में)
  3. वेन्जोइक अम्ल; 4-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल; 3, 4-डाइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल; 4-मेथॉक्सीबेन्जोइक अम्ल (अम्लता की सामर्थ्य के क्रम में)

उत्तर
1. जैसे-जैसे एल्किल समूह का +I प्रभाव बढ़ता है उनकी HCN योग के प्रति क्रियाशीलता घटती जाती है।

डाइ-तृतीयक ब्यूटिल कीटोन < मेथिल तृतीयक-ब्यूटिल कीटोन < एसीटोन < एसीटैल्डिहाइड।

2. -COOH समूह की अम्लीय प्रबलता को +1 प्रभाव घटाता है तथा – प्रभाव को बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त -1 प्रभाव दूरी के साथ घटता है
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3. इलेक्ट्रॉन दाता समूह अम्लीय प्रबलता को घटाता है जबकि इलेक्ट्रॉन आकर्षी प्रभाव अम्लीय प्रबलता को बढ़ाता है

4-मेथॉक्सीबेन्जोइक अम्ल < बेन्जोइक अम्ल < 4-नाइट्रो-बेन्जोइक अम्ल < 3, 4-डाइनाइट्रोबेंजोइक अम्ल

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प्रश्न 13.
निम्नलिखित यौगिक युगलों में विभेद करने के लिए सरल रासायनिक परीक्षणों को दीजिए

  1. प्रोपेनल एवं प्रोपेनोन
  2. एसीटोफीनोन एवं बेन्जोफीनोन
  3. फीनॉल एवं बेन्जोइक अम्ल
  4. बेन्जोइक अम्ल एवं एथिल बेन्जोएट
  5. पेन्टेन-2-ओन एवं पेन्टेन-3-ओन
  6. बेन्जैल्डिहाइड एवं एसीटोफीनोन
  7. एथेनल एवं प्रोपेनल।

उत्तर
1. टॉलेन अभिकर्मक मिलाकर प्रोपेनल को गर्म करने पर रजत दर्पण बनाता है जबकि प्रोपेनोन क्रिया नहीं करता है।

वैकल्पिक विधि – I2 तथा NaOH मिलाने पर प्रोपेनोन, आयोडोफॉर्म बनने के कारण पीला अवक्षेप देता है, जबकि प्रोपेनल क्रिया नहीं करता है।

2. I2 तथा NaOH मिलाने पर एसीटोफिनोन CHI3 का पीला अवक्षेप देता है जबकि बेन्जोफिनोन नहीं देता है।

3. दोनों में अलग-अलग उदासीन FeCI3 मिलाने पर फीनॉल बैंगनी रंग देता है, जबकि बेन्जोइक अम्ल की कोई क्रिया नहीं होती है।

वैकल्पिक विधि -दोनों के जलीय विलयन में अलग-अलग NaHCO3 मिलाने पर बेन्जोइक अम्ल तीव्र बुदबुदाहट के साथ CO2 गैस देता है, जबकि फीनॉल की कोई क्रिया नहीं होता है।

4. दोनों में अलग-अलग NaHCO3 विलयन मिलाने पर बेन्जोइक अम्ल CO2 गैस के कारण तीव्र बुदबुदाहट देता है, जबकि एथिल बेन्जोएट कोई क्रिया नहीं करता है।

5. दोनों में अलग-अलग I2 तथा NaOH मिलाने पर पेन्टेन-2-ओन CHI3 का पीला अवक्षेप देता है जबकि पेन्टेन-3-ओन नहीं देता है।

6. टॉलेन अभिकर्मक मिलाने पर बेन्जैल्डिहाइड गर्म करने पर रजत दर्पण देता है जबकि एसीटोफिनोन क्रिया नहीं करता है।

7. I2 तथा NaOH मिलाने पर एथेनल आयोडोफॉर्म का पीला अवक्षेप देता है, जबकि प्रोपेनल क्रिया नहीं करता है।

प्रश्न 14.
बेन्जीन से निम्नलिखित यौगिकों का विरचन आप किस प्रकार करेंगे ? आप कोई भी अकार्बनिक अभिकर्मक एवं ऊर्जा भी कार्बनिक अभिकर्मक, जिसमें एक से अधिक कार्बन न हो, को उपयोग कर सकते हैं।

  1. मेथिल बेन्जोएट
  2. m-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
  3. p-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
  4. फेनिल ऐसीटिक अम्ल
  5. p-नाइट्रोबेन्जैल्डिहाइड

उत्तर
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प्रश्न 15.
आप निम्नलिखित रूपांतरणों को अधिकतम दो चरणों में किस प्रकार से सम्पन्न करेंगे

  1. प्रोपेनोन से प्रोपीन
  2. बेन्जोइक अम्ल से बेन्जैल्डिहाइड
  3. ऐथेनॉल से 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल
  4. बेन्जीन से m-नाइट्रोऐसीटोफीनोन
  5. बेन्जल्डिहाइड से बेन्जोफीनोन
  6. ब्रोमोबेन्जीन से 1-फेनिलएथेनॉल
  7. बेन्जैल्डिहाइड से ३-फेनिलप्रोपेन-1-ऑल
  8. बेन्जैल्डिहाइड से a – हाइड्रॉक्सीफेनिलऐसीटिक अम्ल
  9. बेन्जोइक अम्ल से m-नाइट्रोबेन्जिल ऐल्कोहॉल।

उत्तर
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प्रश्न 16.
निम्नलिखित पदों (शब्दों) का वर्णन कीजिए

  1. ऐसीटिलीकरण
  2. कैनिजारो अभिक्रिया
  3. क्रॉस ऐल्डॉल संघनन
  4. विकार्बोक्सिलिकरण

उत्तर
1. ऐसीटिलिकरण- किसी कार्बनिक यौगिक के साथ किसी एसीटिल क्रियात्मक-समूह का होना एसीटिलीकरण (Acetylation) कहलाता है। सक्रिय हाइड्रोजन परमाणु के लिए इस विधि में एक एसिटिल समूह का प्रतिस्थापी समाहित होता है। एसीटिलेटिंग एजेण्ट के रूप में सामान्यतः एसीटिल क्लोराइड या एसीटिक एन्हाइड्राइड प्रयुक्त किया जाता है। उदाहरण के रूप में एथेनॉल के एसीटिलीकरण के द्वारा एथिल एसीटेट का निर्माण होता है।
CH3CH2OH + CH3COCI → CH3COOC2H5+ HCI

2. कैनिजारो अभिक्रिया- α-हाइड्रोजन विहीन ऐल्डिहाइडों (जैसे -HCHO, C6H5CHO आदि) पर 50% NaOH विलयन की क्रिया कराने पर ऐल्डिहाइड का एक अणु अम्ल में ऑक्सीकृत होता है और दूसरा अणु ऐल्कोहॉल में अपचयित होता है। इसे कैनिजारो अभिक्रिया कहते हैं।
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3. क्रॉस-ऐल्डॉल संघनन-कार्बोनिल यौगिकों के दो एकसमान अणुओं के बीच संघनन न कराके अलग-अलग अणुओं के बीच संघनन कराया जाए तो उसे मिश्रित या क्रॉस-ऐल्डॉल संघनन कहते हैं। सामान्यतः जब एक अणु -हाइड्रोजन विहीन हो तो ऐसा संघनन महत्त्वपूर्ण होता है। फॉर्मेल्डिहाइड तथा एसिटैल्डिहाइड के बीच
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चूँकि इस यौगिक में अभी भी दो a-हाइड्रोजन परमाणु है अतः पुनः दो फॉर्मेल्डिहाइड अणु से यह क्रिया कर सकता है।
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4. विकार्बोक्सिलीकरण-कार्बोक्सिलिक समूह का निकलना विकार्बोक्सिलीकरण कहलाता है। सोडालाइम के साथ गर्म करने पर अम्ल का विकार्बोक्सिलीकरण होता है तथा ऐल्केन बनता है (ड्यूमा विधि)।
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प्रश्न 17.
निम्नलिखित प्रत्येक संश्लेषण में छूटे हुए प्रारम्भिक पदार्थ, अभिकर्मक अथवा उत्पादों को लिखकर पूर्ण कीजिए
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उत्तर
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प्रश्न 18.
निम्नलिखित के संभावित कारण दीजिए

  1. साइक्लोहेक्सेनोन अच्छी लब्धि में सायनोहाइड्रिन बनाता है परन्तु 2,2, 6-ट्राइमेथिलसाइक्लोहेक्सेनोन ऐसा नहीं करता।
  2. सेमीकार्बेजाइड में दो -NH2 समूह होते हैं, परन्तु केवल एक -NH2 समूह ही सेमीकार्बेजोन विरचन में प्रयुक्त होता है।
  3. कार्बोक्सिलिक अम्ल एवं ऐल्कोहॉल से, अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में एस्टर के विरचन के समय जल अथवा एस्टर जैसे ही निर्मित होता है उसको निकाल दिया जाना चाहिए।

उत्तर
1. 2,2, 6-ट्राइमेथिलसाइक्लोहेक्सेनोन में 3-मेथिल समूह की त्रिविम बाधा होती है। इसलिये ये साइक्लोहेक्सेनोन जिसमें त्रिविम बाधा नहीं होती है की तुलना में लब्धि प्रचुर मात्रा में सायनोहाइड्रीन नहीं बनाता है।

2. कार्बोनिल समूह से जुड़े NH, के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म अनुनाद में शामिल होते हैं, इसलिये दान करने के लिये उपलब्ध नहीं होते हैं।
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3. ऐसा इसलिये किया जाता है जिससे बना हुआ एस्टर जल-अपघटित न हो।

प्रश्न 19.
एक कार्बनिक यौगिक में 69.77% कार्बन, 11-63% हाइड्रोजन तथा शेष ऑक्सीजन है। यौगिक का आण्विक द्रव्यमान 86 है। यह टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता परन्तु सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट के साथ योगज यौगिक देता है तथा आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है। प्रबल ऑक्सीकरण पर एथेनोइक तथा प्रोपेनोइक अम्ल देता है। यौगिक की संभावित संरचना लिखिए।
उत्तर
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मूलानुपाती सूत्र = C5H10O, मूलानुपाती सूत्रभार = 86
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अणुसूत्र = C5H10O
ये टॉलेन अभिकर्मक से क्रिया नहीं करता है, अत: ये एक ऐल्डिहाइड नहीं है। ये NaHSO, के साथ योगात्मक यौगिक बनाता है इसलिये यह एक कीटोन है, तथा ये आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है इसलिये ये एक मेथिल कीटोन है। उपरोक्त आधार पर यौगिक की संभावित संरचना होगी –
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तीव्र ऑक्सीकरण पर ये ऐथेनोइक अम्ल तथा प्रोपेनोइक अम्ल देता है। अतः यौगिक पेन्टेन-2-ओन होगा, 3-मेथिल- ब्यूटेन-2-ओन नहीं होगा।
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प्रश्न 20.
यद्यपि फोनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ कार्बोक्सिलेट आयन की तुलना में अधिक है परन्तु कार्बोक्सिलिक अम्ल, फीनॉल की अपेक्षा प्रबल अम्ल है, क्यों ?
उत्तर
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फीनॉक्साइड आयन कार्बोक्सिलेट आयन कार्बोक्सिलेट आयन पर ऋणात्मक आवेश दोनों ऑक्सीजन पर विस्थानीकृत होता है, जो बहत विद्युतऋणी है। जबकि फीनॉक्साइड आयन पर ऋणात्मक आवेश केवल एक ऑक्सीजन परमाणु पर विस्थानीकृत होता है। कार्बोक्सिलेट आयन, फीनॉक्साइड आयन से ज्यादा स्थायी होता है। इसी कारण कार्बोक्सिलिक अम्ल, फीनॉल की तुलना में ज्यादा अम्लीय होता है।

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ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए। कीटोन से सायनो हाइड्रिन का बनना एक उदाहरण है
(a) इलेक्ट्रोफिलिक योगात्मक
(b) न्यूक्लियोफिलिक योगात्मक
(c) न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन
(d) इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन।
उत्तर
(b) न्यूक्लियोफिलिक योगात्मक

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा ऐल्डिहाइड सान्द्र क्षार विलयन के साथ कैनीजारो अभिक्रिया देता
(a) बेंजेल्डिहाइड
(b) ऐसीटेल्डिहाइड
(c) प्रोपेन ऐल्डिहाइड
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर
(a) बेंजेल्डिहाइड

प्रश्न 3.
ऐल्डिहाइड और कीटोन निम्न में से किस पदार्थ से क्रिया करके ऑक्सीम बनाते हैं
(a) NH3
(b) NH2 – NH2
(c) NH2OH
(4) NH2CONH.NH2
उत्तर
(c) NH2OH

प्रश्न 4.
ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड प्राथमिक एमीन के साथ क्रिया करके देते हैं
(a) यूरिया
(b) ऐमाइड
(c) शिफलेस
(d) ऑक्सीम।
उत्तर
(c) शिफलेस

प्रश्न 5.
क्षारीय माध्यम में ऐसीटेल्डिहाइड जो अभिक्रिया करता है, वह है
(a) बेंजोइन संघनन
(b) एल्डोल संघनने
(c) बहुलीकरण
(d) कैनीजारो अभिक्रिया।
उत्तर
(b) एल्डोल संघनने

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में कौन-सा I, तथा NaOH के साथ पीला अवक्षेप नहीं देता है –
(a) C2H5OH
(b) CH3-CHO
(c) CH3-CO-CH3
(d) HCHO.
उत्तर
(d) HCHO.

प्रश्न 7.
Cl3-C-CH2-CHO सूत्र वाले यौगिक का IUPAC नाम है
(a) 3,3,3 ट्राइक्लोरोप्रोपेनॉल
(b) 1,1,1 ट्राइक्लोरोप्रोपेनॉल
(c) 2,2,2 ट्राइक्लोरोप्रोपेनल
(d) क्लोरल।
उत्तर
(a) 3,3,3 ट्राइक्लोरोप्रोपेनॉल

प्रश्न 8.
फेहलिंग विलयन की एथेनल से प्रतिक्रिया स्वरूप निम्नलिखित अवक्षेप प्राप्त होता है-
(a) Cu
(b) CHO
(c) Cu2O
(d) Cu2O+Cu2O3.
उत्तर
(c) Cu2O

प्रश्न 9.
किसकी उपस्थिति में ऐल्डिहाइडों और कीटोन का हाइड्रोकार्बन में अपचयन होता है.
(a) Zn /Hg एवं HCI
(b) Pd / BasO4
(c) निर्जल AlCl3
(d) Ni / Pt.
उत्तर
(a) Zn /Hg एवं HCI

प्रश्न 10.
निम्नलिखित में कौन-सा यौगिक HgCl के साथ सफेद अवक्षेप उत्पन्न करता है
(a) HCOOH
(b) CH3COOH
(c) C2H5COOH
(d) C3H7COOH.
उत्तर
(a) HCOOH

प्रश्न 11.
फॉर्मिक अम्ल
(a) जल के साथ अमिश्रणीय है।
(b) अमोनिकल सिल्वर नाइट्रेट का अपचयन करता है।
(c) एसीटिक अम्ल से साढ़े तीन गुना दुर्बल अम्ल है।
(d) KOH को गर्म करने पर प्राप्त होता है।
उत्तर
(b) अमोनिकल सिल्वर नाइट्रेट का अपचयन करता है।

प्रश्न 12.
अम्ल की प्रबलता का सही क्रम है
(a) CH3COOH > CH2CICOOH > CHCI2-COOH
(b) CHCl2-COOH > CH2CICOOH >CH3-COOH
(c) CHCl2-COOH > CH3-COOH > CH2CICOOH
(d) CH2-CICOOH > CH3-COOH > CHCl2-COOH.
उत्तर
(b) CHCl2-COOH > CH2CICOOH >CH3-COOH

प्रश्न 13.
बेंजेल्डिहाइड को ऐल्कोहॉलीय KCN के साथ गर्म करने पर देता है –
(a) बेंजायन
(b) बेंजील ऐल्कोहॉल
(c) सोडियम बेंजोएट
(d) सिन्नेमिक अम्ल।
उत्तर
(a) बेंजायन

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में से कौन-सा अमोनियामय AgNO3 के साथ रजत दर्पण नहीं देता –
(a) HCHO
(b) CH3-CHO
(c) CH3-COOH
(d) HCOOH.
उत्तर
(c) CH3-COOH

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प्रश्न 15.
वह अभिकर्मक यौगिक जो एसीटेल्डिहाइड तथा ऐसीटोन दोनों से आसानी से अभिक्रिया करता
(a) फेहलिंग विलयन
(b) ग्रिगनार्ड अभिकर्मक
(c) शिफ अभिकर्मक
(d) टॉलेन अभिकर्मक।
उत्तर
(b) ग्रिगनार्ड अभिकर्मक

प्रश्न 16.
मेथिल कीटोन की पहचान की जाती है
(a) टॉलेन अभिकर्मक से
(b) आयोडोफार्म परीक्षण से
(c) शिफ परीक्षण से
(d) बेनेडिक्ट विलयन से।
उत्तर
(b) आयोडोफार्म परीक्षण से

प्रश्न 17.
ऐल्डिहाइड तथा कीटोन का विभेद किस अभिकर्मक द्वारा होता है
(a) फेहलिंग विलयन
(b) H2SO4 विलयन
(c) NaHSO.3 विलयन
(d) NH3.
उत्तर
(a) फेहलिंग विलयन

प्रश्न 18.
कौन-सा यौगिक कैनिजारो अभिक्रिया देगा
(a) प्रोपिएनोएल्डिहाइड
(b) बेंजेल्डिहाइड
(c) ब्रोमोबेंजीन .
(d) एसीटैल्डिहाइड।
उत्तर
(b) बेंजेल्डिहाइड

प्रश्न 19.
टॉलेन अभिकर्मक है
(a) अमोनियामय क्यूप्रस क्लोराइड
(b) अमोनियामय क्यूप्रस फ्लुओराइड
(c) अमोनियामय सिल्वर ब्रोमाइड
(d) अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट ।
उत्तर
(d) अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट ।

प्रश्न 20.
फार्मेल्डिहाइड की KOH की क्रिया से मेथेनॉल तथा पोटैशियम फोमेट बनता है इस अभिक्रिया को कहते हैं
(a) पर्किन अभिक्रिया
(b) क्लेज़न अभिक्रिया
(c) कैनिजारो अभिक्रिया
(d) नोवेनजेल अभिक्रिया।
उत्तर
(c) कैनिजारो अभिक्रिया

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. पोटैशियम एसीटेट के विद्युत् अपघटन से ………… प्राप्त होता है।
  2. जिंक अमलगम और सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का मिश्रण ………… कहलाता है।
  3. बेकेलाइट, फीनॉल और ………… का बहुलक है।
  4. बेंजेल्डिहाइड को ……….. भी कहते हैं।
  5. कीटोन टॉलेन अभिकर्मक को …………नहीं करते हैं।
  6. फॉर्मिक अम्ल का 40% जलीय विलयन …………कहलाता है। .
  7. ऐल्डिहाइड फेहलिंग विलयन के साथ …………अवक्षेप देता है।
  8. ऐसीटिक अम्ल को फॉस्फोरस पेन्टा ऑक्साइड के साथ गर्म करने पर . ………. बनता है।
  9. पैराऐल्डिहाइड का उपयोग ………… औषधि के रूप में किया जाता है।
  10. रोजेन्डमुण्ड अपचयन में BaSOa, Pd के लिए ………… का कार्य करता है और ऐल्डिहाइड को ………… अपचयित होने से रोकता है।
  11. क्रोमिल क्लोराइड द्वारा टालुइन का बेंजेल्डिहाइड में ऑक्सीकरण ……….. क्रिया कहलाता है।
  12. अम्ल क्लोराइड का Pd/Baso, द्वारा अपचयन करने पर ………. यौगिक बनता है।
  13. α हाइड्रोजन युक्त ऐल्डिहाइड की तनु NaOH के साथ क्रिया से ………… बनता है।
  14. कैल्सियम एसीटेट के शुष्क आसवन से ………… प्राप्त होता है।

उत्तर

  1. एथेन
  2. क्लीमेन्शन अपचयन
  3. HCHO
  4. कड़वे बादाम का तेल
  5. अपचयित
  6. फॉर्मेलीन
  7. लाल
  8. ऐसीटिक एनहाइड्राइड
  9. निद्राकारी
  10. विष ऐल्कोहॉल
  11. इटार्ड अभिक्रिया
  12. ऐल्डिहाइड
  13. एल्डॉल
  14. एसीटोन।

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3. उचित संबंध जोडिए

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 63
उत्तर

  1. (e)
  2. (a)
  3. (c)
  4. (b)
  5. (d).

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उत्तर

  1. (c)
  2. (d)
  3. (e)
  4. (b)
  5. (a).

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल - 65
उत्तर

  1. (e)
  2. (c)
  3. (a)
  4. (b)
  5. (d).

4. एक शब्द / वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. शिफ अभिकर्मक बेंजेल्डिहाइड के साथ कौन-सा रंग देता है ?
  2. ग्लैशियल ऐसीटिक अम्ल का IUPAC नाम लिखिए।
  3. सोडियम पोटैशियम टाटरेट से संकुलित क्षारीय कॉपर सल्फेट का विलयन कहलाता है।
  4. कार्बोक्सिलिक अम्ल चक्रीय द्विलक के रूप में क्यों होते हैं ?
  5. एरोमैटिक ऐल्डिहाइड को सोडियम कार्बोक्सिलेट की उपस्थिति में एसिड एनहाइड्राइड के साथ गर्म करने पर कौन-सा यौगिक प्राप्त होगा?
  6. बेन्जेल्डिहाइड में KCN मिलाकर संघनन की क्रिया का नाम लिखिए।
  7. फॉर्मिक अम्ल के निर्जलीकरण से कौन-सी गैस प्राप्त होती है ?
  8. उस अभिकर्मक का नाम बताइए जो बिना एल्कोहॉल के प्रयोग से अम्ल को एस्टर में परिवर्तित कर देता

उत्तर

  1. गुलाबी,
  2. एथेनोइक अम्ल,
  3. फेहलिंग विलयन,
  4. अन्तर आण्विक हाइड्रोजन बन्ध के कारण,
  5. असंतृप्त एरोमैटिक कार्बोक्सिलिक अम्ल (सिन्नेमिक अम्ल),
  6. बेन्जोइन संघनन,
  7. कार्बन मोनोऑक्साइड,
  8. 8. CH2N2.

ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित अम्लों को बढ़ती हुई प्रबलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए
1. HCOOH, CH3-COOH, C6H5COOH.
2.
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3. HCOH CHCHO और CH, COCH को बढ़ती हुई क्रियाशीलता के क्रम में लिखिए।
उत्तर
1. बढ़ती प्रबलता का क्रम
CH3-COOH < C6H5COOH < HCOOH

2. IUPAC नाम-2 मेथिल, प्रोपेनल ।
प्रचलित नाम-आइसो प्रोपिल ऐल्डिहाइड।

3. बढ़ती हुई क्रियाशीलता का क्रम
CH3-COCH3 < CH3-CHO < HCHO.

प्रश्न 2.

  1. हेल-वोल्हाड़ जेलेन्स्की (HVZ) अभिक्रिया क्या है ?
  2. फॉर्मिक अम्ल को गर्म करने पर क्या होता है ?

उत्तर
1. कार्बोक्सिलिक अम्लों की फॉस्फोरस की उपस्थिति में क्लोरीन या ब्रोमीन की अभिक्रिया से a हैलोजनीकृत अम्ल प्राप्त होते हैं यह अभिक्रिया हेल-वोल्हार्ड जेलेन्स्की अभिक्रिया कहलाती है।
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2. फॉर्मिक अम्ल को 160°C तक गर्म करने पर Co और H2O बनता है।
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प्रश्न 3.

  1. कीटोन ऐल्डिहाइड से कम क्रियाशील होते हैं, क्यों?
  2. बेन्जेल्डिहाइड, ऐसीटेल्डिहाइड से कम क्रियाशील है, क्यों?

उत्तर
1. कीटोन की ऐल्डिहाइड की तुलना में, कम क्रियाशीलता उसमें उपस्थित दो ऐल्किल समूह द्वारा उत्पन्न धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव (+I) के कारण होती है जो कार्बोनिल कार्बन के धन आवेश में कमी कर देती है; फलतः इसकी नाभिकस्नेही अभिकर्मक के प्रति सुग्राहिता घट जाती है।
ऐल्डिहाइड में केवल एक ऐल्किल समूह होता है। अतः ये कीटोन की अपेक्षा अधिक क्रियाशील होते हैं।

2. बेंजेल्डिहाइड का – CHO समूह के बेंजीन चक्र में साथ अनुनाद द्वारा स्थायी हो जाता है जबकि ऐसीटेल्डिहाइड में अनुनाद नहीं पाया जाता है। बेंजेल्डिहाइड एरोमेटिक होता है व ऐल्डिहाइड एलीफैटिक होता है।

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प्रश्न 4.
फॉर्मेल्डिहाइड से यूरोट्रोपीन कैसे प्राप्त करोगें ? यूरोट्रोपीन का संरचना सूत्र लिखिये।
उत्तर
फॉर्मऐल्डिहाइड और अमोनिया की क्रिया से यूरोट्रोपीन बनता है।
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प्रश्न 5.
यद्यपि फीनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ कार्बोक्सिलेट आयन की तुलना में अधिक है। परन्तु कार्बोक्सिलिक अम्ल CH, फीनॉल की तुलना में प्रबल अम्ल हैं। क्यों ?
यूरोट्रोपीन का संरचना सूत्र
उत्तर
कार्बोक्सिलेट आयन तथा फीनॉक्साइड आयन दोनों अनुनाद द्वारा स्थायित्व प्राप्त करते है। किन्तु कार्बोक्सिलेट आयन फीनॉक्साइड आयन की तुलना में अधिक स्थायित्व प्राप्त करता है। क्योंकि इसमे ऋणावेश दो अधिक विद्युत ऋणात्मक आक्सीजन परमाणुओं पर विस्थानीकृत होता है जबकि फोनॉक्साइड आयन की संरचना II, III तथा IV में ऋणावेश का विस्थापन कम विद्युत ऋणात्मक कार्बन पर होता है। इस कारण कार्बोक्सिलिक अम्ल फोनॉल से अधिक अम्लीय होता है।
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प्रश्न 6.
टॉलेन अभिक्रिया पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। अथवा, टॉलेन अभिकर्मक क्या है ? इसकी ऐसिटैल्डिहाइड के साथ अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर
टॉलेन अभिक्रिया-अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट का विलयन टॉलेन अभिकर्मक कहलाता है। जब टॉलेन अभिकर्मक को ऐल्डिहाइड के साथ गरम किया जाता है, तो ऐल्डिहाइड Ag+ आयन को Ag में ‘अपचयित कर देता है और परखनली की दीवार पर चमकदार रजत दर्पण बनाता है।
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प्रश्न 7.
कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक समान अणुभार वाले ऐल्कोहॉलों की अपेक्षा ऊँचे होते हैं। क्यों?
उत्तर
कार्बोक्सिलिक अम्ल चक्रीय द्वितीयाणु (Cyclic dimer) के रूप में होते हैं। यह अणुओं के मध्य अन्तराण्विक हाइड्रोजन बन्ध बनने के कारण होता है।
अम्लों के हाइड्रोजन बन्ध ऐल्कोहॉलों के हाइड्रोजन बन्ध की तुलना में अधिक प्रबल होते हैं, इसी कारण कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक समान अणुभार के ऐल्कोहॉलों से उच्च होते हैं।
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प्रश्न 8.
फेहलिंग अभिक्रिया को समीकरण सहित समझाइये।
उत्तर
फेहलिंग अभिक्रिया-सोडियम पोटैशियम टाटरेट से संकुलित क्षारीय Cuso4 का विलयन फेहलिंग विलयन कहलाता है। जब ऐल्डिहाइड को फेहलिंग विलयन के साथ गर्म करते हैं, तो ऐल्डिहाइड का ऑक्सीकरण हो जाता है तथा क्यूप्रस ऑक्साइड का लाल अवक्षेप प्राप्त होता है। यह फेहलिंग परीक्षण कहलाता
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प्रश्न 9.
कीटोन का क्वथनांक संगत समावयवी ऐल्डिहाइड की अपेक्षा कुछ अधिक क्यों होता है ?
उत्तर
कीटोन अपने संगत समावयवी ऐल्डिहाइड की तुलना में अधिक ध्रुवीय होते हैं, क्योंकि कीटोन में > C = 0 समूह के पास दो इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी ऐल्किल समूह उपस्थित होते हैं। अतः कीटोन में द्विध्रुव आकर्षण बल ऐल्डिहाइड की अपेक्षा अधिक होता है। यही कारण है कि कीटोन का क्वथनांक संगत समावयवी ऐल्डिहाइडों की तुलना में अधिक होता है।

प्रश्न 10.
फॉर्मेल्डिहाइड, ऐसीटैल्डिहाइड और ऐसीटोन में से कौन-सा यौगिक सबसे अधिक क्रियाशील है और क्यों?
उत्तर
HCHO, CH3CHO और CH3COCH3 की क्रियाशीलता का निर्धारण कार्बोनिल समूहों के साथ जुड़े हुए समूहों की प्रकृति के आधार पर होता है। कार्बोनिल समूहों के कार्बन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन की कमी होने के कारण यौगिक अत्यधिक क्रियाशील होते हैं। यदि>c= 0 समूह के साथ इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले– प्रभाव वाले समूह जुड़े होंगे तो वे कार्बोनिल समूह वाले कार्बन की इलेक्ट्रॉन न्यूनता को और बढ़ा देंगे जिससे यौगिक बहुत अधिक क्रियाशील हो जायेगा। इसके विपरीत यदि कार्बोनिल समूह के साथ इलेक्ट्रॉन देने वाले (+ I प्रभाव वाले) समूह जुड़े हों तो वे कार्बोनिल समूह की क्रियाशीलता को कम कर देंगे।CH, समूह का +I प्रभाव होता है। अतः उपर्युक्त तीन यौगिकों की क्रियाशीलता का क्रम नीचे दिये अनुसार होगा
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प्रश्न 11.
एसीटिक अम्ल, फॉर्मिक अम्ल तथा क्लोरोऐसीटिक अम्ल की अम्लीय शक्ति की तुलना कीजिए।
उत्तर
एसीटिक अम्ल में उपस्थित एक ऐल्किल समूह के धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव के कारण हाइड्रॉक्सिल ऑक्सीजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है, जो अम्ल की प्रबलता को कम करता है। फॉर्मिक अम्ल में एक भी ऐल्किल समूह नहीं होता। फॉर्मिक अम्ल में ऑक्सीजन पर धन आवेश होने के कारण O-H बंध का इलेक्ट्रॉन युग्म ऑक्सीजन की ओर विस्थापित होता जाता है, फलस्वरूप O-H बंध का हाइड्रोजन प्रोटॉन के रूप में सरलता से अलग हो जाता है और फॉर्मिक अम्ल एक अम्ल के समान कार्य करता है, जबकि क्लोरोऐसीटिक अम्ल में उपस्थित क्लोरीन परमाणु प्रबल ऋणात्मक प्रेरणिक प्रभाव प्रदर्शित करता है, जिससे अम्ल में 0-H बंध बनाने वाले इलेक्ट्रॉन ऑक्सीजन की ओर सरलता से विस्थापित हो जाते हैं, जिससे सरलता से H* आयन मुक्त होता है। अतः क्लोरोऐसीटिक अम्ल फॉर्मिक अम्ल और ऐसीटिक अम्ल से अधिक प्रबल होता है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित अभिक्रिया में A, B तथा C यौगिकों को पहचानिए
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उत्तर
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प्रश्न 13.
निम्नलिखित क्रियाओं के रासायनिक समीकरण लिखिये
(a) ऐसीटैल्डिहाइड की 0°C पर H3SO4 से क्रिया। ।
(b) फॉर्मेल्डिहाइड की अमोनियामय AgNO3 से क्रिया।
(c) एसीटिक ऐसिड को P2O5 के साथ गर्म करने पर।
उत्तर
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प्रश्न 14.
ऐसीटैल्डिहाइड के बहुलीकरण का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर
1.साधारण ताप पर ऐसीटैल्डिहाइड सान्द्र H2SO4 की कुछ बूंदों के साथ अभिकृत किये जाने पर पैराऐल्डिहाइड में बहुलीकृत हो जाता हैं। जिसका उपयोग निद्राकारी औषधि के रूप में होता हैं।
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2. 0°C पर ऐसीटैल्डिहाइड में HCI गैस प्रवाहित करने पर मेटा ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है।
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प्रश्न 15
निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत फॉर्मिक अम्ल और ऐसीटिक अम्ल में अन्तर लिखिए

  1. गर्म करने पर ,
  2. अम्लीय KMnO4 से क्रिया,
  3. Ca लवण का आसवन करने पर,
  4. अमोनियामय AgNO3 विलयन के साथ क्रिया,
  5. PCL5 से क्रिया।

उत्तर
फॉर्मिक एसिड और ऐसिटिक एसिड में अंतर|
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प्रश्न 16.
स्टीफन अभिक्रिया और बेंजोइन संघनन के उदाहरण एवं समीकरण द्वारा समझाइए।
उत्तर
स्टीफन अभिक्रिया-ऐल्किल सायनाइड को ईथर या एथिल ऐसीटेट में विलेय कर उसका SnCl2 व HCl द्वारा अपचयन करके भाप आसवन करने पर ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है। यह स्टीफन अभिक्रिया कहलाती है।
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प्रश्न 17.

  1. पर्किन अभिक्रिया पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  2. क्या होता है जब ऐसीटोन को H2SO, के साथ गर्म करते हैं ?

उत्तर
1. पर्किन अभिक्रिया-ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड को किसी ऐलिफैटिक अम्ल के सोडियम लवण की उपस्थिति में उस अम्ल के ऐनहाइड्राइड के साथ गर्म करते हैं तो a,B असन्तृप्त अम्ल बनता है। जैसे
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2. H2SO4 की उपस्थिति में ऐसीटोन के तीन अणु संघनित होकर मेसिटिलीन बनाते हैं।

प्रश्न 18.
सिरका किसे कहते हैं ? इसके दो उपयोग लिखिये। (अति महत्वपूर्ण)
उत्तर
एसीटिक एसिड का 6 से 10% जलीय विलयन सिरका कहलाता है।
उपयोग-

  1. अचार, चटनी, मुरब्बा के परिरक्षण में।
  2. बेसिक कॉपर एसीटेट बनाने में।

प्रश्न 19.
फार्मेलीन किसे कहते हैं ? इसके दो उपयोग लिखिए।
उत्तर
फार्मेलीन-ऐल्डिहाइड (H-CHO) को 40%, जलीय विलयन फार्मेलीन कहलाता है।
उपयोग-

  1. रोगियों के कमरे धोने में।
  2. मृत शरीरों के परिरक्षण में।

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प्रश्न 20.
क्या होता है जब (केवल समीकरण दीजिए)

  1. कैल्सियम फॉर्मेट को अकेले गर्म करते हैं।
  2. कैल्सियम बेंजोएट को अकेले गर्म करते हैं।
  3. कैल्सियम फार्मेट को कैल्सियम एसीटेट के साथ गर्म करते हैं।
  4. कैल्सियम बेंजोएट को कैल्सियम फार्मेट का मिश्रण का शुष्क आसवन करते हैं।

उत्तर
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प्रश्न 21.
क्या होता है जब (केवल समीकरण दीजिए)

  1. फॉर्मेल्डिहाइड अमोनिया के साथ क्रिया करता है।
  2. कैल्सियम फॉर्मेट को कैल्सियम एसीटेट के साथ गर्म करते हैं ?
  3. एसीटोन निगनार्ड अभिकर्मक से क्रिया करता है।
  4. एसीटिलीन जल साथ Hgso4 व H2SO4 की उपस्थिति में क्रिया करता है।

उत्तर
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प्रश्न 22.
ऐल्डिहाइड और कीटोन समूहों के यौगिक में प्रमुख अन्तर लिखिए।
उत्तर
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प्रश्न 23.
एक कार्बनिक यौगिक A (अणुसूत्र C8H80), धनात्मक 2,4-DNP परीक्षण देता है। यह आयोडीन तथा सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन के साथ क्रिया कराने पर यौगिक Bका एक पीला अवक्षेप देता है। यौगिक A टॉलेन अथवा फेहलिंग परीक्षण नहीं देता है। पोटैशियम परमैंगनेट के साथ प्रबल ऑक्सीकरण कराने पर यह एक कार्बोक्सिलिक अम्ल C (अणुसूत्र C7H6O2) बनाता है जो उपरोक्त अभिक्रिया में पीले यौगिक के साथ भी बनता है। A, B तथा C को पहचानिए तथा सम्बन्धित सभी अभिक्रियाओं को लिखिए।
उत्तर
यौगिक A टॉलेन अथवा फेहलिंग परीक्षण नहीं देता है। अंत: यह एक कीटोन है, ऐल्डिहाइड नहीं।
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प्रश्न 24.
ट्राइ क्लोरो ऐसीटिक अम्ल अकार्बनिक अम्लों की भाँति प्रबल क्यों है ? बेंजोइक अम्ल ठोस है जबकि प्रारम्भिक ऐलीफैटिक अम्ल द्रव है। कारण दीजिए।
उत्तर
ट्राइ क्लोरो ऐसीटिक अम्ल में Cl परमाणु एक शक्तिशाली ऋणात्मक प्रेरणिक प्रभाव (-I प्रभाव) डालते हैं। इसके कारण O-H बंध का इलेक्ट्रॉन जोड़ा ऑक्सीजन की ओर विस्थापित हो जाता है। इस अणु में हाइड्रोजन परमाणु ऑक्सीजन के साथ शिथिलता से जुड़ा रहता है तथा उसका आयनन सरलता से हो जाता है। अतः ट्राइक्लोरो ऐसीटिक अम्ल अकार्बनिक अम्ल की भाँति प्रबल है।
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बेंजोइक अम्ल अपनी ध्रुवीय प्रकृति एवं उच्च आण्विक द्रव्यमान के कारण ठोस है जबकि निम्न
ऐलिफैटिक अम्ल उनमें उपस्थित MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक Q24समूह के कारण आपस में अन्तर आण्विक हाइड्रोजन बंध द्वारा संगुणित होकर द्विलकीकृत हो जाते हैं। इस कारण ये द्रव अवस्था में पाये जाते हैं।
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प्रश्न 25.
बहुलीकरण एवं संघनन में क्या अन्तर है ? (कोई चार)
उत्तर
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प्रश्न 26.
ऐसीटिक अम्ल का फॉर्मिक अम्ल में और फॉर्मिक अम्ल का ऐसीटिक अम्ल में परिवर्तन की क्रियाएँ लिखिए।
उत्तर
1. एसीटिक अम्ल का फॉर्मिक अम्ल में परिवर्तन
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2. फॉर्मिक अम्ल का ऐसीटिक अम्ल में परिवर्तन
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प्रश्न 27.
निम्न को कैसे प्राप्त करेंगे

  1. एसीटिल क्लोराइड से ऐसीटैल्डिहाइड
  2. कैल्सियम ऐसीटेट से ऐसीटोन
  3. एथिल ऐसीटेट से एसीटिक अम्ल।

उत्तर
1. एसीटिल क्लोराइड में Pd युक्त BaSO4 की उपस्थिति H2 गैस प्रवाहित करने पर ऐसीटैल्डिहाइड बनता है।
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2. कैल्सियम ऐसीटेट का शुष्क आसवन करने पर एसीटोन बनता है।
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3. एथिल एसीटेट से एसीटिक अम्ल प्राप्त करने हेतु अम्लीय माध्यम में जल अपघटन किया जाता है।
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प्रश्न 28.
जब द्रव A की एक ताजे बने हुए अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन के साथ क्रिया करते हैं, तो यह चमकदार रजत दर्पण देता है। यह द्रव सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट के साथ अभिकृत करने पर एक सफेद क्रिस्टलीय ठोस बनाता है। द्रव B भी सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट के साथ एक सफेद क्रिस्टलीय ठोस बनाता है किन्तु यह अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट के साथ परीक्षण नहीं देता है। दोनों द्रवों में से कौन-सा ऐल्डिहाइड है ? इन अभिक्रियाओं की रासायनिक समीकरणे लिखिए।
उत्तर
चूँकि द्रव A अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट (टॉलेन अभिकर्मक) को अपचयित करता है, अतः, A ऐल्डिहाइड है।
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प्रश्न 29.
प्रयोगशाला में फॉर्मिक अम्ल बनाने की विधि और दो उपयोग बताइये।
उत्तर
प्रयोगशाला में फॉर्मिक अम्ल बनाने के लिए 100-110°C पर ऑक्सेलिक अम्ल तथा ग्लिसरॉल की अभिक्रिया करायी जाती है। अभिक्रिया इस प्रकार है
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उपयोग-

  1. सूती तथा ऊनी कपड़ों की रंगाई में,
  2. चमड़ा तथा रबर उद्योग में,
  3. विद्युत् लेपन में,
  4. फलों के रसों के परिरक्षण में।

ऐल्डिहाइड्स, कीटोन्स तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रयोगशाला में ऐसीटोन बनाने की विधि का वर्णन कीजिए। नामांकित चित्र एवं रासायनिक समीकरण भी दीजिए।
उत्तर
ऐसीटोन बनाने की प्रयोगशाला विधि (Laboratory Method)-प्रयोगशाला में ऐसीटोन निर्जल कैल्सियम ऐसीटेट के शुष्क आसवन से बनाया जाता है।
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चित्रानुसार उपकरण तैयार करके काँच या धातु के रिटॉर्ट में निर्जल कैल्सियम ऐसीटेट लेकर गर्म करते हैं। ऐसीटोन की वाष्प बनती है, जो संघनित्र में संघनित होकर ग्राही में एकत्रित हो जाती है। यह ऐसीटोन अशुद्ध होता है। इसे सन्तृप्त NaHSO3 विलयन के साथ हिलाकर 4-5 घण्टे के लिए रख देते हैं, जिससे ऐसीटोन सोडियम बाइसल्फाइट के क्रिस्टल बनते हैं। इन्हें पृथक् करके Na2CO3 विलयन के साथ मिलाकर आसवन करते हैं। शुद्ध ऐसीटोन प्राप्त होता है। इसमें थोड़ा जल अभी भी होता है। इसलिए इसे निर्जल CaCl2 से सुखाकर पुनः आसवन करते हैं। 56°C पर शुष्क ऐसीटोन आसवित होता है।
(CH3)2C=0+ NaHSO3→(CH3)2C(OH)SO3Na
2(CH3)2C(OH)SO3Na+ Na2CO3→2(CH3)2C=0+2Na2SO3 + H2O + CO2

प्रश्न 2.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को उदाहरण देकर समीकरण सहित लिखिए

  1. आयोडोफॉर्म अभिक्रिया,
  2. टिशेन्को अभिक्रिया,
  3. गाटरमानकोच अभिक्रिया,
  4. रोजेनमुण्ड अभिक्रिया।

उत्तर
1. आयोडोफॉर्म (हैलोफॉर्म) अभिक्रिया-ऐसीटैल्डिहाइड या मेथिल कीटोन को आयोडीन तथा क्षार के साथ अभिक्रिया कराने पर पीले रंग का आयोडोफॉर्म (CHI3) का अवक्षेप आता है, इसे आयोडोफॉर्म परीक्षण कहते हैं।
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सम्पूर्ण अभिक्रियाएँ
CH3-CO-CH3+ 312 + 4NaOH →CHI3+ CH3COONa + 3Nal + 3H20

2. टिशेन्को अभिक्रिया (Tischencko reaction)-CH3-CHO या C6H5CHO को ऐल्युमिनियम आइसो प्रोपॉक्साइड और निर्जल AICI3 या ZnCI2 के साथ गर्म करने से एस्टर बनते हैं।
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3. गाटरमैन कोच ऐल्डिहाइड संश्लेषण-CO और HCI के मिश्रण को निर्जल AICI3 और CuCl (अल्प भाग) की उपस्थिति में उच्च दाब पर बेंजीन ईथर विलयन में प्रवाहित करने पर C6H5CHO बनता है।
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4. रोजेनमुण्ड अभिक्रिया–ऐसिड क्लोराइड के उबले जाइलीन में बने विलयन का पैलेडियमयुक्त बेरियम सल्फेट की उपस्थिति में हाइड्रोजन द्वारा अपचयन करने पर ऐल्डिहाइड बनता है। यह अभिक्रिया रोजेनमुण्ड अभिक्रिया कहलाती है ।
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BaSO5 अभिक्रिया में Pd उत्प्रेरक के लिए विष का कार्य करता है। इसकी उपस्थिति ऐल्डिहाइड का ऐल्कोहॉल में अपचयन रोकती है।

प्रश्न 3.
शीघ्र सिरका विधि से ऐसीटिक अम्ल कैसे बनाते हैं? ऐसीटिक अम्ल की क्लोरीन तथा फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड से अभिक्रिया रासायनिक समीकरण देकर समझाइये।
अथवा, ऐसीटिक अम्ल बनाने की शीघ्र सिरका विधि को सचित्र समझाइये। इसके दो प्रमुख गुण और उपयोग बताइये।
उत्तर
शीघ्र सिरका विधि- इस विधि में ऐल्कोहॉल के तनु विलयन का ऑक्सीकरण वायु के द्वारा माइकोडर्मा ऐसीटी बैक्टीरिया की उपस्थिति में किया जाता है।
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इस विधि में एक बाल्टीनुमा पात्र में जिसके निचले भाग में कई छेद हों पुराने सिरके से भीगी लकड़ी की छीलन भरकर ऊपर से एथिल ऐल्कोहॉल का 10% विलयन (जिसमें थोड़ा अमोनियम सल्फेट मिला हो) धीरेधीरे नीचे गिराते हैं। इसमें अमोनियम सल्फेट बैक्टीरिया के भोजन के रूप में कार्य करता है। तब नीचे तनु ऐसीटिक अम्ल या सिरका एकत्रित हो जाता है। इस तरह प्राप्त अम्ल को तब तक कई बार ऊपर से डालते हैं जब तक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण पूर्ण न हो जाये। इस प्रकार ऐसीटिक अम्ल का सान्द्रण भी हो जाता है।
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रासायनिक गुण-
1. Cl2 से क्रिया-ऐसीटिक अम्ल क्लोरीन, सूर्य प्रकाश या उच्च ताप पर लाल फॉस्फोरस की उपस्थिति में क्रिया करके मोनो, डाइ एवं ट्राइक्लोरो ऐसीटिक अम्ल बनाते हैं।
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2. PCI से क्रिया
CH3COOH + PCl5 → CH3COCI+ POCl3 + HCI

उपयोग-

  • प्रयोगशाला में अभिकर्मक व विलायक के रूप में।
  • सिरके के रूप में अचार, चटनी आदि बनाने में।
  • मेथिल ऐसीटेट, एथिल ऐसीटेट तथा अन्य एस्टर बनाने में।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए

  1. क्लेजन संघनन,
  2. बेंजोइन संघनन।

उत्तर
1. क्लेजन संघनन—ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड, तनु क्षार की उपस्थिति में जब α -हाइड्रोजन युक्त ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइड अथवा कीटोन के साथ संघनित होता है तो α , β असंतृप्त ऐल्डिहाइड या कीटोन बनाता
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2. बेंजोइन संघनन–बेंजैल्डिहाइड को जब ऐल्कोहॉली पोटैशियम सायनाइड के साथ गर्म किया जाता है, तो इसके दो अणु संघनित होकर बेंजोइक (a – हाइड्रॉक्सी कीटोन) बनाते हैं।
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प्रश्न 5.
ऐसीटिक अम्ल से आप निम्नलिखित कैसे प्राप्त करोगे ? (केवल समीकरण दीजिए)

  1. ऐसीटेमाइड,
  2. एथिल ऐसीटेट,
  3. ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड,
  4. ट्राइक्लोरो ऐसीटिक अम्ल।

उत्तर
1. ऐसीटेमाइड
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2. एथिल ऐसीटेट
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3. ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड
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4. ट्राइक्लोरो ऐसीटिक अम्ल-
CH3 – COOH +3Cl2 →CCl3COOH+3HCI.

प्रश्न 6.
क्या होता है जब (केवल समीकरण दीजिए)

  1. एसीटोन की क्लोरोफर्म से क्रिया,
  2. बेन्जैल्डिहाइड की ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड से क्रिया।

उत्तर
1. ऐसीटोन की क्लोरोफॉर्म से क्रिया-
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2. बेन्जेल्डिहाइड की एसीटिक एनहाइड्राइड से क्रिया-
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प्रश्न 7.
निम्नलिखित अभिक्रिया पर टिप्पणी लिखिए

  1. स्टीफन अभिक्रिया
  2. नोवेनजेल अभिक्रिया
  3. इटार्ड अभिक्रिया।

उत्तर
1. स्टीफन अभिक्रिया- स्टीफन अभिक्रिया-ऐल्किल सायनाइड को ईथर या एथिल ऐसीटेट में विलेय कर उसका SnCl2 व HCl द्वारा अपचयन करके भाप आसवन करने पर ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है। यह स्टीफन अभिक्रिया कहलाती है।
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2. नोवेनजेल अभिक्रिया- जब बेंजैल्डिहाइड को पिरीडीन या ग्लेश्यिल ऐसीटिक अम्ल की उपस्थिति में डाइ एथिल मैलोनेट (मैलोनिक एस्टर) से क्रिया करके α,β अंसतृप्त एरोमैटिक कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाता है।
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3. इटार्ड अभिक्रिया- कार्बन टेट्रा क्लोराइड में विलेय टालुईन को क्रोमिल क्लोराइड के साथ क्रिया कराने पर जटिल यौगिक बनता है जो जल-अपघटन पर बेंजेएल्डिहाइड देता है।
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प्रश्न 8.
क्या होता है जब (केवल समीकरण)

  1. ऐसीटोन को ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया कराने पर
  2. ऐसीटोन को KOH की उपस्थिति में क्लोरोफार्म के साथ
  3. बेंजेल्डिहाइड को एनिलीन के साथ ।
  4. कार्बोक्सिलिक अम्ल के सोडियम लवण को सोडा लाइम के साथ गर्म करने पर
  5. बेंजीन को एसीटिल क्लोराइड के साथ निर्जल AlCl3 की उपस्थिति में।

उत्तर
1. ऐसीटोन को ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया
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2. ऐसीटोन की CHCI3 के साथ अभिक्रिया
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3. बेंजेल्डिहाइड की एनिलीन के साथ अभिक्रिया
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4. कार्बोक्सिलिक अम्ल के सोडियम लवण (शिफ क्षार) से सोडा लाइम के साथ
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5. बेंजीन की CH3COCI के साथ अभिक्रिया
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प्रश्न 9.
कैसे प्राप्त करोगे
(a) ऐसीटिलीन से ऐसीटेल्डिहाइड
(b) प्रोपाइन से प्रोपेनोन।
उत्तर
(a) ऐसीटिलीन से ऐसीटेल्डिहाइड
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प्रश्न 10.
ऐसीटिक अम्ल से निम्न कैसे प्राप्त करोगे
(a) एथिल ऐल्कोहॉल,
(b) एथिल ऐसीटेट,
(c) मेथिल ब्रोमाइड,
(d) ऐसीटोन
(e) ऐसीटेमाइड,
(f) एसीटिक एनहाइड्राइड,
(g) ट्राईक्लोरो ऐसीटिक अम्ल।
उत्तर
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प्रश्न 11.
कैसे प्राप्त करोगे (समीकरण दीजिए)
(a) टॉलुईन से बेन्जोइक अम्ल,
(b) प्रोपेनोइक अम्ल से ऐसीटिक अम्ल,
(c) प्रोपेनोइक अम्ल से प्रोपेनॉल,
(d) ऐसीटिक अम्ल से फॉर्मिक अम्ल।
उत्तर
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प्रश्न 12.
कैसे परिवर्तित करोगे

  1. फॉर्मेल्डिहाइड से ऐसीटेल्डिहाइड ( मेथेनल से एथेनल)
  2. ऐसीटेल्डिहाइड से फॉर्मेल्डिहाइड (एथेनल से मेथेनल)
  3. फॉर्मिक अम्ल से ऐसीटिक अम्ल।

उत्तर
1. फॉर्मेल्डिहाइड से ऐसीटेल्डिहाइड
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2. ऐसीटेल्डिहाइड से फॉर्मेल्डिहाइड
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3. फॉर्मिक अम्ल से ऐसीटिक अम्ल
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प्रश्न 13.
निम्नलिखित की ग्रिगनार्ड अभिकर्मक से अभिक्रिया का समीकरण दीजिए
(a) CO
(b) HCN
(c) HCOOC2H5
d) CH3CN.
उत्तर
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प्रश्न 14.
क्या होता है जब (केवल समीकरण दीजिए)

  1. एसीटिक अम्ल की एथिल एल्कोहॉल से क्रिया
  2. एसीटिक अम्ल की अमोनिया से क्रिया
  3. एसीटोन की क्लोरोफॉर्म से क्रिया
  4. बेन्जैल्डिहाइड की एसीटिक एनहाइड्राइड से क्रिया।

उत्तर
1. एसीटिक अम्ल की एथिल एल्कोहॉल से क्रिया
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2. एसीटिक अम्ल की अमोनिया से क्रिया
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3. एसीटोन की क्लोरोफॉर्म से क्रिया
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4. बेन्जेल्डिहाइड की एसीटिक एनहाइड्राइड से क्रिया
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प्रश्न 15.
समझाइए

  1. ऐल्डिहाइड और कीटोन के क्वथनांक संगत ऐल्कोहॉल व अम्ल से भिन्न होते हैं।
  2. अम्लों के क्वथनांक उतने ही अणु भार वाले ऐल्कोहॉलों से उच्च होते हैं।

उत्तर
1. ऐल्डिहाइड एवं कीटोन ध्रुवीय यौगिक हैं इसलिए इनके क्वथनांक अध्रुवीं हाइड्रोकार्बन से अधिक होते हैं जबकि इनके क्वथनांक समान अणुभार वाले ऐल्कोहॉलों और कार्बोक्सिलिक अम्लों की तुलना में कम होते हैं । इसका कारण यह है कि ऐल्कोहॉल एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल अन्तर-अणुक (intermolecular) H-बन्ध बनाकर संगुणित अणु बनाते हैं। ऐल्डिहाइड एवं कीटोन में हाइड्रोजन बन्ध बनाना सम्भव नहीं है, क्योंकि अम्ल एवं ऐल्कोहॉल की तरह H-परमाणु; विद्युत् ऋणात्मक ऑक्सीजन परमाणु से आबन्धित नहीं होता है। इस प्रकार हाइड्रोजन बन्ध के कारण ऐल्कोहॉल एवं अम्ल के क्वथनांक उच्च होते हैं।

2. कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक लगभग समान अणुभार वाले ऐल्कोहॉलों से अधिक होते हैं, क्योंकि अम्लों में ऐल्कोहॉलों की तुलना में प्रबल हाइड्रोजन बन्ध होता है। परिणामस्वरूप कार्बोक्सिलिक अम्ल के अणु आपस में दो हाइड्रोजन बन्ध से जुड़े होते हैं और अधिक आकर्षण बल होता है जिससे इनके क्वथनांक उच्च होते हैं।
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