भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 17 और भी दूँ प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 17 Aur Bhi Dun Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 17 Aur Bhi Dun Questions and Answers

बोध प्रश्न

Samarpan Kavita Class 7 Question Answer प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) कवि मातृभूमि को क्या-क्या समर्पित करना चाहता है?
उत्तर
कवि मातृभूमि के लिए तन-मन-प्राण सब कुछ समर्पित करना चाहता है। वह अपने मस्तक, गीत तथा रक्त का एक-एक कण भी अपने देश की धरती के लिए अर्पित कर देना चाहता है। उसके मन में उठने वाली कल्पनाएँ तथा प्रश्न तथा सम्पूर्ण आयु (उम्र) भी मातृभूमि के लिए अर्पित करना चाहता है। सम्पूर्ण बाग-बगीचे, उनके फूल आदि मातृभूमि के लिए समर्पित हैं।

(ख) कवि अपने सर्वस्व समर्पण के बाद भी सन्तुष्ट क्यों नहीं है ?
उत्तर
कवि अपनी मातृभूमि की सेवा में सर्वस्व न्योछावर कर देना चाहता है। वह फिर भी सन्तुष्ट नहीं दिखता है। इसका कारण यह है कि वह इस सबके अतिरिक्त भी जो कुछ उसके पास है, उसे भी अर्पित कर देने की कामना करता है। कामनाएँ कभी भी शान्त नहीं हुआ करती।

(ग) कवि क्षमा-याचना क्यों कर रहा है?
उत्तर
कवि अपने गाँव, द्वार-घर-आँगन आदि सभी के प्रति अपने लगाव को छोड़कर मातृभूमि के लिए सर्वस्व प्रदान करना चाहता है। इसलिए वह इन सभी से क्षमा याचना करता है। इनकी अपेक्षा मातृभूमि के प्रति दायित्व महत्वपूर्ण है।

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(घ) कविता का मुख्य सन्देश क्या है ?
उत्तर
कविता का मुख्य सन्देश है कि हम सभी अपनी मातृभूमि के लिए सर्वस्व त्यागकर उसकी सेवा करें। मोहरहित होकर तन-मन-प्राण से मातृभूमि की रक्षा के लिए तैयार रहें।

Aur Bhi Du Hindi Poem Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित भाव कविता की जिन पंक्तियों से प्रकट होते हैं, उन पंक्तियों को लिखिए
(क) मोहमाया के बन्धन को तोड़ना।
(ख) सम्पूर्ण आयु को समर्पण करना।
(ग) बलिदान के लिए तत्परता।
उत्तर
(क) तोड़ता हूँ मोह का बन्धन।
(ख) आयु का क्षण-क्षण समर्पित।
(ग) मन समर्पित, तन समर्पित, और यह जीवन समर्पित। चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी हूँ।

Kavi Mathrubhumi Ke Liye Kya Karna Chahta Hai प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर दीजिए

(क) प्रस्तुत कविता का मुख्य भाव क्या है?
(1) मातृभूमि के प्रति आदर।
(2) मातृभूमि के लिए सर्वस्व समर्पण की चाह।
(3) मातृभूमि की महानता का गुणगान।
(4) मातृभूमि से क्षमा याचना।
उत्तर
(2) मातृभूमि के लिए सर्वस्व समर्पण की चाह।

(ख) कवि अपने जीवन, घर-परिवार और गाँव से क्षमा याचना करता है, क्योंकि वह
(1) इनके प्रति दायित्व निर्वाह नहीं करना चाहता।
(2) इनकी अपेक्षा देश के प्रति दायित्व निर्वाह को महत्वपूर्ण मानता है।
(3) इनके प्रति दायित्व निभाने में स्वयं को असमर्थ पाता है।
(4) इनसे छुटकारा पाना चाहता है।
उत्तर
(2) इनकी अपेक्षा देश के प्रति दायित्व निर्वाह को महत्त्वपूर्ण मानता है।

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भाषा अध्ययन

Kavi Matrabhoomi Ke Liye Kya Karna Chahta Hai प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध उच्चारण कीजिए
ऋण, स्वीकार, माँज, बाँध, शीश, आशीष, तृण।
उत्तर
उल्लिखित शब्दों को बार-बार पढ़िए और विशेष सावधानी से शुद्ध रूप में उच्चारण कीजिए। कठिनता के लिए अपने आचार्य महोदय की सहायता ले सकते हो।

Kabhi Matrabhoomi Ke Liye Kya Karna Chahte The प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण एवं लेखन कीजिए
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 17 और भी दूँ 1
उत्तर
छात्र/छात्राएँ स्वयं करें।

Class 7th Hindi Chapter 17 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए- .
समर्पित, आँगन, ध्वज, आशीष।
उत्तर

  1. मैं अपनी मातृभूमि के लिए सर्वस्व समर्पित करता हूँ।
  2. मेरे आँगन में फलदार पेड़ों के झुरमुट खड़े हैं।
  3. अपने हाथ में राष्ट्रीय ध्वज लिए हुए वीर सैनिक मातृभूमि की रक्षा के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
  4. माँ का आशीष सदैव फलदायक होता है।

Chahta Hun Kis Prakar Ki Kavita Hai प्रश्न 4.
इस कविता से अनुप्रास अलंकार वाली पंक्तियाँ छाँटकर लिखिए।
उत्तर

  1. मन समर्पित, तन समर्पित।
  2. गान अर्पित, प्राण अर्पित, रक्त का कण-कण समर्पित।
  3. शीश पर आशीष की छाया घनेरी।
  4. रक्त का कण-कण समर्पित।
  5. आयु का क्षण-क्षण समर्पित।
  6. नीड़ का तृण-तृण समर्पित।

और भी दूँ कविता का प्रश्न उत्तर प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) माँ तुम्हारा ……..
(ख) ……………. फिर भी निवेदन
(ग) थाल में लाऊँ ……….
(घ) कर दया ………वह समर्पण।
उत्तर
(क) ऋण बहुत है, मैं अकिंचन,
(ख) किन्तु इतना कर रहा
(ग) सजाकर भाल जब भी
(घ) स्वीकार लेना।

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 17 प्रश्न 6.
नीचे लिखे शब्दों के पर्यायवाची दी गई वर्ग पहेली से छाँटकर लिखिए
फूल, पृथ्वी, माथा, खून, गृह।
वर्ग पहेली
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 17 और भी दूँ 2
उत्तर
फूल-प्रसून, पुष्प, सुमन । पृथ्वी-वसुधा, धारिणी, धरा, धरती। माथा-मस्तक, भाल, कपाल। खून-रक्त, रुधिर, लहू। गृह-घर, आवास, वास।

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और भी दूँ सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. मन समर्पित, तन समर्पित,
और यह जीवन समर्पित।
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी हूँ।

शब्दार्थ-समर्पित = अर्पित किया हुआ, सौंपा हुआ; तन = शरीर; जीवन = प्राण या जिन्दगी।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ “और भी ढूँ”, नामक कविता से अवतरित हैं। इसके रचयिता ‘रामावतार त्यागी’ हैं।

प्रसंग-कवि अपने प्रिय देश के लिए अपना सर्वस्व त्याग देने को तैयार है।

व्याख्या-कवि कहता है कि हे मेरे देश की धरती! तेरी सेवा के लिए मैं स्वयं तन-मन तथा अपने प्राण (सम्पूर्ण जिन्दगी) अर्पित करता हूँ। इस सब के अलावा दूसरी वस्तुएँ भी यदि मेरे पास है, तो उन्हें भी तेरे लिए अर्पित करने (त्यागने) के लिए तैयार हूँ।

2. माँ तुम्हारा ऋण बहुत है, मैं अकिञ्चन,
किन्तु इतना कर रहा, फिर भी निवेदन।
थाल में लाऊँ सजाकर भाल जब भी,
कर दया स्वीकार लेना वह समर्पण।

गान अर्पित, प्राण अर्पित,
रक्त का कण-कण समर्पित।
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी हूँ।

शब्दार्थ-अकिञ्चन = दीन; भाल = मस्तक; समर्पण = अर्पित की हुई वस्तु; अर्पित = न्योछावर किया हुआ।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि के अनुसार देशभक्त सर्वस्व अर्पित करने के बाद जो भी दूसरी वस्तु यदि उसके पास है तो वह उसे भी देश की सेवा में अर्पित कर देने को तैयार है।

व्याख्या-हे मातृभूमि, मुझ पर तेरे ऋण (कर्ज) का बोझ बहुत है। मैं दीन हूँ (उस कर्ज के बोझ को मैं किस तरह उठा सकूँगा)। फिर भी मैं यह निवेदन कर रहा हूँ कि जब भी अपने इस मस्तक को थाल में सजाकर लेकर आऊँ, तो मेरे इस समर्पण को (सेवा में दी गई इस वस्तु को) स्वीकार करने की कृपा करना। भक्ति भरा मेरा गीत भी तुम्हें अर्पित है, मेरे प्राण भी अर्पित हैं। साथ ही मेरे रक्त की (खून की) एक-एक बूंद भी तुम्हारे लिए अर्पित है। इस प्रकार हे मेरे देश की धरती ! मैं इसके अलावा भी कुछ और अर्पित करना चाहता हूँ।

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3. माँज दो तलवार को, लाओ न देरी,
बाँध दो कसकर, कमर पर ढाल मेरी,
भाल पर मल दो, चरण की धूल थोड़ी,
शीश पर आशीष की छाया घनेरी,

स्वप्न अर्पित, प्रश्न अर्पित,
आयु का क्षण-क्षण समर्पित।
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी हूँ।

शब्दार्थ-भाल = मस्तक; मल दो = लगा दो; आशीष = आशीर्वाद; घनेरी- घनी; स्वप्न- कल्पनाएँ, विचार; आयु = उम्र ; चरण = पैर।

मन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि अपनी मातृभूमि के आशीर्वाद को प्राप्त करके अपनी उम्र के प्रत्येक क्षण को देश की सेवा में अर्पित करना चाहता है।

व्याख्या-हे मातृभूमि-मेरी माँ! बिना किसी देर किए हुए तुम मुझे तलवार (युद्ध के लिए) दे दो। उसको और ढाल को-दोनों ही कसकर कमर में बाँध दो। साथ ही, मेरे मस्तक पर अपने चरणों (पैरों) की थोड़ी-सी धूल लगा दो तथा मेरे सिर पर अपने आशीर्वाद की घनी छाया कर दो (आशीर्वाद दीजिए)। मेरी कल्पनाएँ तथा मेरे प्रश्न सभी तेरी सेवा में अर्पित हैं। यहाँ तक कि मेरी उम्र का प्रत्येक क्षण भी तुम्हारी सेवा में अर्पित है। इस तरह, हे मेरे देश की धरती, मैं तुझे कुछ अन्य भी अर्पित कर देना चाहता हूँ।

4. तोड़ता हूँ मोह का बन्धन, क्षमा दो,
गाँव मेरे, द्वार घर-आँगन क्षमा दो;
आज सीधे हाथ में तलवार दे दो।
और बाएँ हाथ में ध्वज को थमा दो।

ये सुमन लो, यह चमन लो,
नीड़ का तृण-तृण समर्पित,
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी हूँ।

शब्दार्थ-ध्वज पताका, झण्डा; थमा दो = पकड़ा दो सुमन = फूल; चमन = बगीचा; नीड़ = घोंसला; मोह = प्रेम।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग- कवि अपने देश की सेवा के लिए सम्पूर्ण बन्धनों को समाप्त करके सब कुछ देश की सेवा में अर्पित कर देना चाहता है।

व्याख्या-हे मेरे देश ! तेरे लिए मैं मोह के (प्रेम के) जितने भी बन्धन है, उन सबको तोड़ देना चाहता हूँ। उसके लिए हे मेरे गाँव, तू मुझे क्षमा करना। मेरे घर-आँगन तथा द्वार, तुम सभी मुझे क्षमा करना। आज (अब समय आ गया है तब) तुम सभी मेरे सीधे हाथ में तलवार पकड़ा दो। इस तरह, हे मेरे देश ! ये सभी फूल, तथा बगीचा तथा मेरे घोंसले का तिनका-तिनका भी तेरी सेवा में अर्पित करता हूँ। इस प्रकार, मेरे पास जो भी अन्य वस्तु (यदि मेरे पास है) तो वह भी मैं, हे मेरे देश की धरती ! तेरी सेवा में अर्पित करता हूँ।

और भी दूँ शब्दकोश

समर्पित = त्यागा हुआ, अर्पित किया हुआ निवेदन = प्रार्थना; माँज = धोकर साफ कर दो, युद्ध के लिए; मोह = प्रेम; ध्वज – पताका, झण्डा; ऋण = कर्ज; भाल = मस्तक, माथा;आशीष = आशीर्वाद; सुमन = फूल, पुष्प; नीड़ = घोसा; अकिंचन = दीन; शीश = सिर; घनेरी-घनी; चमन – बगीचा; तृण = तिनका।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 16 नरबदी प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 16 Narbadi Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 16 Narbadi Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 16 MP Board प्रश्न 1.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) नरबदी कौन थी ? वह किसके साथ रहती थी?
उत्तर
मैकल पर्वत के घने जंगलों के एक गाँव में दुग्गन रहता था। नरबदी उसकी बेटी थी। नरबदी अपने पिता के साथ रहती थी।

(ख) पिता के साथ नरबदी कहाँ रहती थी?
उत्तर
नरबदी अपने पिता के साथ जनजातियों के एक गाँव में रहती थी। यह गाँव आठ-दस झोपड़ियों का गाँव था।

(ग) दुग्गन सुबह-सुबह पहाड़ की दिशा में क्यों चल पड़ा?
उत्तर
बरसात आने वाली थी। दुग्गन को झोंपड़ी की मरम्मत के लिए बाँस की जरूरत थी। बाँस लेने के लिए दुग्गन सुबह-सुबह पहाड़ की दिशा में चल पड़ा।

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(घ) नरबदी झरना क्यों बन गई?
उत्तर
नरबदी अपनी प्यास के कष्ट को भूल गई। उसकी आँखों के सामने परेशान पिता का चेहरा आ गया। उसकी आँखों से आँसुओं की झड़ी लग गई। वह अपने देवता से मन ही मन प्रार्थना करने लगी कि वे उसके पिता की रक्षा करें, क्योंकि उनका प्यास से बुरा हाल है। तुम मेरे प्राण ले लो, लेकिन मेरे प्यारे बाबा को बचा लो। इसके साथ ही नरबदी वहाँ से अदृश्य हो गयी और झरने के रूप में वहाँ से प्रकट हो गई।

(ङ) लोक कथा के अनुसार नरबदी के कारण किस नदी का जन्म हुआ ?
उत्तर
लोक कथा के अनुसार नरबदी के कारण ‘नर्मदा’ नदी का जन्म अमरकण्टक से हुआ।

MP Board Class 7th Hindi Chapter 16 प्रश्न 2.
निम्नांकित कथनों का आशय स्पष्ट कीजिए

(क) उसकी आँखों के सामने पिता का परेशान चेहरा घूम गया।
आशय-नरबदी को उसके पिता दुग्गन का चेहरा स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था। उसके चेहरे से दुग्गन की परेशानी भी झलक रही थी, क्योंकि वह लगातार ही अपनी प्यासी पुत्री के लिए पानी की तलाश कर रहा था। .

(ख) मैं तुम्हारी प्यास बुझाने के लिए झरना बन गई हूँ।
आशय- नरबदी ने अपने परेशान और प्यासे पिता दुग्णन के लिए जल प्राप्त कराने वाले झरने का रूप धारण कर लिया।

Class 7 Hindi Chapter 16 Question Answer प्रश्न 3.

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) …………. तब घने जंगलों से घिरा था।
(ख) दुग्गन ने उसे ………….की तरह पाला पोसा था।
(ग) दुग्गन के हाथ अपने आप ………….. में उठकर जुड़ गए।
(घ) मैं तुम्हारी प्यास बुझाने के लिए ……… बन गई हूँ।
(ङ) इस जंगल में अब कभी कोई आदमी … से अपनी जान नहीं देगा।
उत्तर
(क) मैकल पर्वत
(ख) माँ
(ग) प्रार्थना
(घ) झरना
(ङ) प्यास।

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भाषा अध्ययन

Class 7 Hindi Chapter 16 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के सामने कुछ शब्द लिखे हुए हैं। इनमें प्रत्येक के साथ दो-दो पर्यायवाची शब्द हैं, आप उन्हें छाँटकर लिखिए
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 नरबदी 1

Hindi Class 7 Chapter 16 प्रश्न 2.
निम्नलिखित गद्यांश में यथास्थान विराम चिह्नों का प्रयोग कीजिए
वह मन ही मन बड़े देव को मनाने लगी है बड़े देव मेरे बाबा को बचा लेना उनका प्यास के मारे बुरा हाल है पानी नहीं मिला तो वे मर जाएंगे
उत्तर
वह, मन ही मन, बड़े देव को मनाने लगी है। बड़े देव ! मेरे बाबा को बचा लेना। उनका प्यास के मारे बुरा हाल है। पानी नहीं मिला, तो वे मर जाएँगे।

Class 7 Chapter 16 Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का सही क्रम करके सार्थक वाक्य बनाइए
(क) मुस्कुराने की कोशिश नरबदी की ने।
(ख) चुकी थी थक वह तरह बुरी।
(ग) थी वाली बरसात आने।
(घ) वह हो चिन्तित उठा न नरबदी को वहाँ पाकर।
(ङ) रही थी बह नरबदी।
उत्तर
(क) नरबदी ने मुस्कुराने की कोशिश की।
(ख) वह बुरी तरह थक चुकी थी।
(ग) बरसात आने वाली थी।
(घ) नरबदी को वहाँ न पाकर वह चिन्तित हो उठा।
(ङ) नरबदी बह रही थी।

प्रश्न – दिए गए संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, अव्यय शब्दों से उदाहरण के अनुसार विशेषण बनाइए
(क) संज्ञा-(1) धन, (2) सुख, (3) ज्ञान, (4) दान, (5) बल, (6) गुण।
उत्तर
विशेषण-(1) धनी, (2) सुखी, (3) ज्ञानी, (4) दानी, (5) बली, (6) गुणी।

(ख) सर्वनाम-(1) यह, (2) वह, (3) कौन, (4) जो।
उत्तर
विशेषण-(1) ऐसा, (2) वैसा, (3) कैसा, (4) जैसा।

(ग) क्रिया-(1) पढ़ना, (2) लड़ना, (3) झगड़ना, (4) बेचना।
उत्तर
विशेषण-(1) पढ़ाकू, (2) लड़ाकू, (3) झगड़ालू, (4) विकबाल।

(घ) अव्यय-(1) आगे, (2) पीछे, (3) बाहर, (4) ऊपर।
उत्तर
विशेषण-(1) अगला, (2) पिछला, (3) बाहरी, (4) ऊपरी।

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Hindi Class 7 Ch 16 प्रश्न 5.
नीचे बनी तालिकाओं में दिए गए उदाहरणों के अनुसार रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 नरबदी 2

नरबदी परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

1. मैकल के शिखर पर घने-ऊँचे पेड़ तो थे, लेकिन झरने की कोई आवाज सुनाई नहीं दे रही थी, दुग्गन भटकता रहा। उसका भी प्यास के मारे बुरा हाल था। वह सोच रहा था-जब प्यास के कारण मेरी यह दशा हैतो नहीं जान नरबदी का क्या हाल होगा? उसने सिर उठाकर आसमान की तरफ देखा। सूरज तमतमाया हुआ था। दुग्गन के हाथ अपने आप प्रार्थना में उठकर जुड़ गए। वह लगभग रुआंसा होकर गिड़गिड़ाया, “हे प्रभु ! मेरी लाडली की रक्षा कर। वह बिना माँ की बच्ची है। उसे कुछ हो गया तो मैं जीवित नहीं रह पाऊँगा।”

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘नरबदी’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस लोककथा के लेखक लक्ष्मीनारायण ‘पयोधि हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत गोंडी लोक कथा में लेखक ने नर्मदा नदी के उद्गम की कल्पना प्रस्तुत की है।

व्याख्या-मैकल पर्वत (अमरकण्टक पहाड़) की सबसे ऊँची चोटी पर बहुत ऊँचे-ऊँचे पेड़ थे। वहाँ कोई झरना नहीं था, क्योंकि झरने के बहने की आवाज सुनाई नहीं पड़ रही थी। दुग्गन अपनी प्यासी बेटी नरबदी के लिए पानी लाने के लिए चारों और भटकता रहा। वह भी प्यास से पीड़ित था। उसने विचार किया कि जब प्यास से मेरी यह दशा है तो अति छोटी-सी मेरी पुत्री नरबदी का हाल तो प्यास से बहुत बुरा हो रहा होगा। उसने आसमान की ओर देखा। सूरज अपनी रोशनी से तप रहा था। उसने हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना की। वह प्रार्थना करते समय रो रहा था। दयनीय अवस्था में कहने लगा “हे ईश्वर ! तू, मेरी प्यारी पुत्री नरबदी की रक्षा करना। वह बिना माँ की बेटी है। उसको कुछ भी नहीं होना चाहिए, नहीं तो मैं अपना जीवन समाप्त कर दूंगा।”

नरबदी शब्दकोश

शिखर = चोटी; तूम्बा = विशेष प्रकार की लौकी से बना पात्र, बर्तन; लस्त-पस्त = थका हारा ; प्रतिध्वनि = गूंज;झुरमुट = झाड़ियों का समूह।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 21 माँ! कह एक कहानी प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 21 Maa Keh Ek Kahani Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 21 Maa Keh Ek Kahani Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 21 Question Answer प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) पुत्र अपनी माँ से किस बात की हठ कर रहा है?
उत्तर
पुत्र अपनी माँ से हठपूर्वक कह रहा है कि वह उसे किसी राजा या रानी की कहानी सुनायें।

(ख) बड़े सबेरे उपवन में कौन भ्रमण कर रहा था? उत्तर-उपवन में बड़े ही सबेरे सिद्धार्थ भ्रमण कर रहा था। (ग) उपवन में सहसा हंस नीचे क्यों गिरा?
उत्तर
उपवन में सहसा ही हंस गिर पड़ा, क्योंकि शिकारी ने उसे बाण मारा। तेज बाण के प्रहार से उसका पंख आहत हो गया और वह घायल होकर गिर पड़ा।

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(घ) सिद्धार्थ और आखेटक के बीच क्या विवाद हुआ?
उत्तर
सिद्धार्थ और आखेटक के बीच यह विवाद हुआ कि सिद्धार्थ उस घायल हंस पर अपना अधिकार बता रहा था और उधर आखेटक भी कहता है कि इस हंस पर मेरा अधिकार है क्योंकि मैंने इसे मारा है। इस तरह रक्षक और भक्षक के मध्य अधिकार का विवाद हुआ।

(ङ) माँ ने राहुल से किस विवाद का निर्णय करने को कहा ?
उत्तर
माँ ने राहुल से उस विवाद का निर्णय करने को कहा जो रक्षक (उसके पिता सिद्धार्थ) और आखेटक के मध्य घायल हुए हंस पर अधिकार किसका हो सकता है को लेकर था।

(च) सदा किसकी विजय होती है?
उत्तर
सत्य एवं न्याय के मार्ग पर चलने वाले दयावान व्यक्ति की सदा विजय होती है।

Class 7 Hindi Chapter 21 प्रश्न 2.
निम्नलिखित पंक्तियों को पूरा कीजिए

(क) वर्ण वर्ण के फूल खिले थे
……………..
……………..
लहराता था पानी।

(ख) कोई निरपराध को मारे
………………….
…………………..
न्याय दया का दानी।
उत्तर
(क) झलमलकर हिम-बिन्दु झिले थे।
हलके झोंके हिले-मिले थे।

(ख) तो क्यों अन्य न उसे उबारे,
रक्षक को भक्षक पर वारे;

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Ma Kah Ek Kahani Question Answer प्रश्न 3.
निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए

(क) हुई पक्ष की हानी
(ख) जहाँ सुरभि मनमानी
(ग) लक्ष्य सिद्धि का मानी
(घ) न्याय दया का दानी।
उत्तर
(क) तेज बाण का प्रहार जब आखेटक ने किया तो उस हंस का एक पंख कट गया।
(ख) उस उद्यान में सुगन्धित हवा अपने मनमाने ढंग से – बह रही थी।
(ग) आखेटक को अपना अचूक निशाना लगाने से मिली सफलता पर घमण्ड था।
(घ) राजा ने दया युक्त न्याय प्रदान किया।

Maa Kah Ek Kahani Poem Question Answer प्रश्न 4.
किसने किससे कहा

(क) “माँ ! कह एक कहानी।”
(ख) “तू है हठी मान-धन मेरे।”
(ग) “लक्ष्य सिद्धि का मानी, कोमल कठिन कहानी।”
(घ) “सुन लूँ तेरी बानी।”
उत्तर
(क) राहुल ने अपनी माँ यशोधरा से कहा।
(ख) यशोधरा ने राहुल से कहा।
(ग) राहुल ने यशोधरा से कहा।
(घ) यशोधरा ने राहुल से कहा।

भाषा अध्ययन

Maa Kah Ek Kahani Question Answer प्रश्न 1.
‘ई’ प्रत्यय लगाकर निम्नलिखित शब्दों से नए शब्द बनाइए
दान, डाल, ज्ञान, ध्यान, ठान, पान, भार, ताल।
उत्तर
दानी, डाली, ज्ञानी, ध्यानी, ठानी, पानी, भारी, ताली।

Maa Keh Ek Kahani Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
(क) राजा, (ख) न्याय, (ग) मान, (घ) जन्म, (ङ) कोमल।
उत्तर
(क) रानी,(ख) अन्याय, (ग) अपमान,(घ) मरण, (ङ) कठोर।

Ma Kah Ek Kahani Summary In Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए
(क) उपवन, (ख) पानी, (ग) खग, (घ) शर।
उत्तर
(क) उद्यान, (ख) जल, (ग) पक्षी, (घ) बाण।

MP Board Solutions

Maa Keh Ek Kahani Summary प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए
(क) वानी, (ख) सूरज, (ग) घी, (घ) कान, (ङ) हाथ, (च) जीभ।
उत्तर
(क) वाणी, (ख) सूर्य, (ग) घृत, (घ) कर्ण, (छ) हस्त, (च) जिह्वा।

माँ! कह एक कहानी सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. माँ !”कह एक कहानी।
राजा था या रानी।”
माँ !”कह एक कहानी।”
“तू है हठी मान-धन मेरे,
सुन उपवन में बड़े सबेरे,
तात्, भ्रमण करते थे तेरे,
जहाँ सुरभि मनमानी।”
“जहाँ सुरभि मनमानी”
हाँ! माँ यही कहानी॥

शब्दार्थ-हठी = जिद्दी; मान-धन = सम्मान की पूँजी; उपवन = बगीचे में बड़े सवेरे = बहुत जल्दी सुबह; तात् = पिता; सुरभि = सुगन्धित हवा;  मनमानी = अपनी इच्छा के अनुसार।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश ‘माँ ! कह एक कहानी’ नामक कविता से लिया गया है। इसके रचयिता राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त हैं।

प्रसंग-सिद्धार्थ वन को निकल जाते हैं। उनका पुत्र राहुल अपनी माँ यशोधरा से कहानी बताने के लिए कहता है।

व्याख्या-यशोधरा से राहुल कहते हैं कि हे माँ तू मुझे एक कहानी कह। यह कहानी किसी राजा अथवा रानी की हो। इस तरह हे माँ तू एक कहानी कह। यशोधरा कहती है कि हे मेरे पुत्र ! तू बड़ा जिद्दी है। तू ही मेरे सम्मान की पूँजी है। तू अब कहानी सुन ! तेरे पिता बहुत प्रात: बगीचे में घूमते रहते थे। वहाँ, उस उपवन में मन के अनुकूल सुगन्धित हवा बहती थी। राहुल कहते हैं कि हाँ, मेरी माँ ! मन को अच्छी लगने वाली सुगन्धित हवा बह रही थी। बस, हाँ ! यही कहानी ! तू बता।

2. “वर्ण-वर्ण के फूल खिले थे,
झलमलकर हिम बिन्दु झिले थे,
हलके झोंके हिले मिले थे,
लहराता था पानी।”
“लहराता था पानी।
‘हाँ, हाँ यही कहानी।”

शब्दार्थ-वर्ण-वर्ण के – रंग-बिरंगे; हिम बिन्दु = जमी हुई ओस, पाला, तुषार; झलमलकर = झिलमिलाते हुए; झिले थे = चमक रहे थे; हिले मिले थे = (हवा के झोंके) ओस की बूंदों से मिश्रित थे;
लहराता था पानी = पानी लहरा रहा था।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-यशोधरा कहानी के रूप में उस बगीचे की सुन्दरता का वर्णन करती है जिसमें सिद्धार्थ घूमने जाते थे।

व्याख्या – उस बगीचे में रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। जमी हुई ओस की बूंदै उषाकालीन किरणों के स्पर्श से झिलमिला रही थीं। प्रातः कालीन हवा के हल्के झोंके ओस बिन्दुओं से मिश्रित होकर बह रहे थे। हवा के इन कोमल झोंकों से तालाब के पानी में लहरें उठ रही थीं। राहुल कहने लगा कि हे माँ ! यही कहानी ! तू कह।

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3. “गाते थे खग कल-कल स्वर से,
सहसा एक हंस ऊपर से,
गिरा बिद्ध होकर खर-शर से,
हुई पक्ष की हानी।”
“हुई पक्ष की हानी।
करुणा भरी कहानी।”

शब्दार्थ-खग = पक्षी; कल-कल = मधुर; सहसा = अचानक; खर = तेज; शर = बाण; बिद्ध होकर = (बाण से) घायल होकर; गिरा = गिर पड़ा; पक्ष की पंख की; हानीहानि; करुणा = दयालुता।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-शिकारी के बाण से घायल एक हंस नीचे गिर पड़ा। इसको बड़े ही मार्मिक ढंग से वर्णित किया है।

व्याख्या – उस प्रातः काल में आकाश में उड़ते हुए पक्षी अत्यन्त मधुर स्वर में कूज रहे थे। उस समय, अचानक ही ऊपर से एक हंस नीचे आ गिरा। वह हंस पैने बाण से बिंध गया था। उसकी एक पंख भी कट गया था। इसे सुनते ही बालक राहुल कह उठा-“उसकी एक पंख कट गई ! यह कहानी तो करुणा (दयालुता) से भरी हुई है।”

4. “चौंक उन्होंने उसे उठाया,
नया जन्म सा उसने पाया,
इतने में आखेटक आया,
लक्ष्य सिद्धि का मानी।”
“लक्ष्य सिद्धि का मानी।
कोमल कठिन कहानी।”

शब्दार्थ-चौंक = अचम्भित होकर; उन्होंने – सिद्धार्थ ने; सा – मानो; आखेटक- शिकारी लक्ष्यसिद्धि- निशाना साधने में मिली सफलता पर; मानी = घमण्ड करने वाला; कोमल कठिन = कोमल और कठोर भाव से परिपूर्ण।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-सिद्धार्थ ने उस घायल हंस को उठा लिया। इसी बीच शिकारी के आ जाने की बात यशोधरा बालक राहुल को बताती है।

व्याख्या-अचम्भित हुए सिद्धार्थ ने घायल हंस पक्षी को (अपनी गोद में) उठा लिया। मानो उसने फिर से नया जन्म प्राप्त किया हो। इसी बीच वह शिकारी वहाँ आ गया जिसने उसे घायल किया था। उसे अपने निशाना लगाने की सफलता पर घमण्ड था। राहुलं कहने लगा कि उसे अपने लक्ष्य सिद्धि (निशाना लगाने की सफलता) पर अभिमान था। निश्चय ही यह कहानी तो कोमल भी है और अति कठोर भी।

5. “माँगा उसने आहत पक्षी,
तेरे तात् किन्तु थे रक्षी,
तब उसने जो था खगभक्षी,
हठ करने की ठानी।”
“हठ करने की ठानी।
अब बढ़ चली कहानी।”

शब्दार्थ-आहत = घायल; तेरे तात् = तेरे पिता; रक्षी – रक्षक या रक्षा करने वाला; खगभक्षी = पक्षियों को खाने वाला;
हठ करने की जिद्द करने की ठानी = निश्चय कर लिया।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-शिकारी ने जिद्दपूर्वक उस घायल पक्षी को माँगा। इसका वर्णन किया जा रहा है।

व्याख्या-उस शिकारी ने घायल हुए पक्षी की माँग की जबकि तेरे पिता उसके रक्षक थे अर्थात् उसकी रक्षा की (वे उसको देना नहीं चाहते थे) तब उसने उस घायल हुए पक्षी को हठपूर्वक प्राप्त करने का निश्चय कर लिया था, क्योंकि वह तो पक्षियों को खाने वाला था। राहुल कहने लगा-“ऐं ! उसने उस घायल पक्षी को रक्षक से हठपूर्वक प्राप्त करने का निश्चय कर लिया। अब तो यह कहानी बहुत बढ़ चली है।”

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6. “हुआ विवाद सदय निर्दय में,
उभय आग्रही थे स्व विषय में,
गई बात तब न्यायालय में,
सुनी सभी ने जानी।”
“सुनी सभी ने जानी।
व्यापक हुई कहानी।”

शब्दार्थ-विवाद = वाद-विवाद: सदय = निर्दय में = दयावान में और दया से रहित व्यक्ति में; उभय = दोनों ही; आग्रही = आग्रह करने वाले, अडिग रहने वाले स्व विषय में = अपने विषय में; व्यापक हुई = फैल गई।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-रक्षक और भक्षक के मध्य विवाद बढ़ा तो इस विवाद को न्यायालय में ले जाया गया।

व्याख्या-दयावान सिद्धार्थ और निर्दयी शिकारी के बीच विवाद बढ़ने लगा। दोनों ही अपने-अपने विषय पर अडिग थे। तब यह विवाद न्यायालय में चला गया। सभी ने इस विवाद के बारे में सुना और जान लिया। राहुल ने इसी विषय को दुहराते हुए कहा कि तब तो यह कहानी (बात/समाचार) सभी जगह फैल गयी होगी।

7. “राहुल तू निर्णय कर इसका,
न्याय पक्ष लेता है किसका,
कह दे निर्भय जय हो जिसका,
सुन लूँ तेरी बानी।”
“सुन लूं तेरी बानी।
माँ मेरी क्या बानी।”

शब्दार्थ-निर्णय = हल, समाधान निर्भय = निडर होकर; बानी = बोली, वचन, कथन।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

सन्दर्भ-इस घटना के निर्णय के विषय में यशोधरा राहुल से पूछती है।

व्याख्या-यशोधरा कहती है कि हे राहुल तू ही इस घटना का निर्णय करके बता कि न्याय किसका पक्ष लिया करता है-रक्षक का या भक्षक का। तू बिना किसी भय के ही कह दे कि इस विवाद में किसकी विजय होगी। उस विषय में तेरी बोली मैं सुन लेना चाहती हूँ। राहुल कहने लगा कि तेरी वाणी मैं (यशोधरा) सुन लूँ, इस विषय में मेरी वाणी (मेरी राय) क्या हो सकती है।

8. “कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य न उसे उबारे,
रक्षक को भक्षक पर वारे,
न्याय दया का दानी।”
“न्याय दया का दानी।
तूने गुनी कहानी।”

शब्दार्थ-निरपराध = अपराध न करने वाले को; उबारे = रक्षा करे; वारे = निछावर किया जा सकता है; दानी = देने वाला; गुनी = समझ ली।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-रक्षक ही वस्तुत: भक्षक से बढ़कर होता है।

व्याख्या-यशोधरा कहानी को अन्त तक ले जाती हुई : कहती है कि जब कोई व्यक्ति किसी निरपराध (निर्दोष) को मार रहा हो, तो कोई अन्य व्यक्ति उसके बचाव में क्यों नहीं आयेगा। अर्थात् उसकी रक्षा अवश्य ही करेगा। इस तरह ऐसे रक्षक के ऊपर अनेक भक्षकों को निछावर किया जा सकता है। – अर्थात् भक्षक से रक्षक अच्छा (श्रेष्ठ) होता है। दयापूर्ण न्याय देने वाला भी श्रेष्ठ होता है। राहुल ने यह सब सुना कि दयापूर्ण न्याय श्रेष्ठ होता है। तब उसकी माँ यशोधरा कहने लगी कि अब तो निश्चय ही तूने कहानी के वास्तविक अर्थ को ठीक तरह से समझ लिया है।

माँ! कह एक कहानी शब्दकोश

हठी = जिद्दी; उपवन = बगीचा; हिमबिन्दु = जमी हुई ओस की बूंदें: शर = बाण; रक्षी = रक्षक, रक्षा करने वाला; व्यापक = चारों ओर फैल जाना, विस्तृत; निर्भय = निडर; उबारे = बचाना, रक्षा करना; मान-धन = सम्मान की पूँजी; तात् = पिता; आखेटक = शिकारी पक्ष = पंख; खग = पक्षी;
सदय = दयावान; निरपराध = अपराध से रहित सुरभि = सुगन्धित हवा; विद्ध-विध कर, घायल होकर, आहत = घायल होना, चुटैल होकर, उभय = दोनों, निर्दय- दयाहीन, आग्रही = अडिग रहने, अड़े रहना।

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भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 4 दो कविताएँ प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 4 Do Kavitayen Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 4 Do Kavitayen Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 4 Do Kavita प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) ‘मेघ बजने’ से कवि का क्या आशय है ?
उत्तर-
‘मेघ बजने’ से कवि का आशय बादलों के तेज आवाज के साथ गरजने से है।

(ख) ‘पंक’ किस प्रकार से हरिचन्दन लगने लगता है ?
उत्तर-
बरसात में सब ओर पानी भर जाता है जिससे मिट्टी कीचड़ का रूप धारण कर लेती है और तब वह हरिचन्दन सी दिखाई देती है।

(ग) वर्षा के आगमन से क्या-क्या परिवर्तन होने लगते हैं ?
उत्तर-
वर्षा के आगमन व बिजली चमकने से मेंढक टर्र-टर्र करने लगते हैं, पृथ्वी साफ-स्वच्छ हो जाती है, मिट्टी-पानी के मिलने से बनी कीचड़ भगवान के चन्दन जैसी लगती है जिससे किसान अपने हलों के स्वागत में तिलक लगाते हैं।

(घ) ‘कदम्ब’ किसके समान झूलता दिखाई दे रहा है ?
उत्तर-
कदम्ब गेंद के समान झूलता दिखाई दे रहा है।

(ङ) धरती का हृदय किस प्रकार धुला लगने लगा है ?
उत्तर-
धूल व मिट्टी से अटी पड़ी पृथ्वी पर जब बरसात ‘ की बूंदें पड़ती हैं, तो सारी गन्दगी साफ हो जाती है और धरती – स्वच्छ दिखाई देने लगती है।

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MP Board Class 7th Hindi Chapter 4 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(क) ……………………….” का कण्ठ खुला।
(ख) धरती का ………………………. धुला।
(ग) ………………………. मेघ बजे।
उत्तर-
(क) दादुर,
(ख) हृदय,
(ग) धिन-धिन-धा धमक-धमक।

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 4 प्रश्न 3.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए
(क) हल का है अभिनन्दन।
(ख) “टहनी-टहनी में कन्दुक सम झूले कदम्ब”
उत्तर-
पद्यांशों की व्याख्या देखें।

भाषा अध्ययन

Class 7 Hindi Chapter 4 Mp Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के तुकान्त शब्द लिखिए
उत्तर-
चन्दन – वन्दन;
चमक – दमक;
रीता – बीता;
बरस – तरस।

MP Board Class 7 Hindi Chapter 4 प्रश्न 2.
धिन-धिन शब्द युग्म में ध्वन्यात्मकता है। इसी प्रकार के अन्य ध्वन्यात्मक शब्द लिखिए।
उत्तर-
धमक-धमक, टहनी-टहनी।

Class 7th Hindi Chapter 4 Mp Board प्रश्न 3.
इस कविता की जिन पंक्तियों में अनुप्रास अलंकार है, उन्हें छाँटकर लिखिए
उत्तर-
(क) “धिन-धिन-धा धमक-धमक”
(ख) “दामिनी यह गयी दमक”
(ग) “टहनी-टहनी में कन्दुक सम झूले कदम्ब”
(घ) “फूले कदम्ब, फूले कदम्ब।”

Class 7th Hindi Chapter 4 Do Kavitayen प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों में से प्रयुक्त उपसर्ग को अलग कीजिए-
अभिनन्दन, अभिवादन, विराग, प्रवचन, अभियोग, वियोग, प्रयोग।
उत्तर-
अभि, अभि, वि, प्र, अभि, वि, प्र।

Class 7 Hindi Bhasha Bharti Chapter 4 प्रश्न 5.
सही विकल्प चुनिए
(क) कल सरिता ……….. समारोह में गई थी।
(1) अभिवन्दन
(2) अभिवादन
(3) अभिनन्दन
(4) अभिचन्दन।
उत्तर-
(3) अभिनन्दन,

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(ख) लिखाई, ललचाई, पढ़ाई इन शब्दों में प्रत्यय ……………………….” है।
(1) खाई
(2) आई
(3) अई
उत्तर-
(2) आई।

दो कविताएँ सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. मेघ बजे
धिन-धिन-धा धमक-धमक
मेघ बजे
दामिनी यह गयी दमक
मेघ बजे दादुर का कंठ खुला
मेघ बजे
धरती का हृदय धुला
मेघ बजे
पंक बना हरिचन्दन
मेघ बजे
हल का है अभिनन्दन
मेघ बजे।
धिन-धिन

शब्दार्थ-मेघ = बादल; दामिनी = बिजली; दादुर = मेंढक; कंठ = गला; पंक = कीचड़; अभिनन्दन = सम्मान।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा भारती’ के ‘दो कविताएँ’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस कविता का शीर्षक है-‘मेघ बजे’ तथा इसके रचयिता सुप्रसिद्ध कवि नागार्जुन हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने बादलों के घिर आने एवं। वर्षाकाल का मनोहारी वर्णन किया है।

व्याख्या-तेज गर्मी व लू के पश्चात् मौसम में आने वाले। परिवर्तन के संकेत मिल चुके हैं। आसमान में अपने सिर पर। जल का अथाह भण्डार रखे बादल घुमड़-घुमड़कर घिरने लगे हैं। बादलों की गड़गड़ाहट से पृथ्वी का प्रत्येक जीव-जन्तु व वनस्पति रोमांचित है। बादलों के झरोखों में से रह-रहकर। बिजली की चमक दिख रही है। बादलों के यूँ घिरने और वर्षा

के आगमन की प्रतीक्षा में तालाबों में मेंढक टर्र-टर्र करने लगे हैं। बरसात के होने से गर्मी से व्याकुल और गंदली हुई धरा भी। सन्तुष्ट और साफ हो गयी है। वर्षा के कारण उत्पन्न हुई धरती की कीचड़ भी हरिचन्दन के समान हो गई है जिससे किसानों। ने अपने हल के स्वागत का तिलक लगाया है। बादल गर्जना करते हुए धिन-धिन-धा की विशेष संगीत-ध्वनि उत्पन्न कर रहे हैं। वास्तव में, बादलों के यूँ गरजने-बरसने से प्रकृति और भी अधिक मनोहारी हो गयी है।

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♦ फूले कदम्ब

2. फूले कदम्ब
टहनी-टहनी में कन्दुक सम झूले कदम्ब
फूले कदम्ब।
सावन बीता
बादल का कोप नहीं रीता
जाने कब से वो बरस रहा
ललचाई आँखों से नाहक
जाने कब से तू तरस रहा
मन कहता है, छू ले कदम्ब
फूले कदम्ब फूले कदम्ब।

शब्दार्थ-कदम्ब = एक वृक्ष; कन्दक = गेंद; कोप = क्रोध; रीता = खाली; नाहक = अधिकार रहित; तरस = पाने की ललक।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा भारती’ के दो कविताएँ नामक पाठ से ली गई हैं। इस कविता का नाम है ‘फूले कदम्ब’ तथा इसके रचयिता सुप्रसिद्ध कवि नागार्जुन हैं।

प्रसंग-इन पंक्तियों में बरसात के मौसम में प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-कवि कहता है कि वर्षाकाल में जीव-जन्तुओं के साथ-साथ वनस्पतियों में भी मानो नई जान आ गयी है। कदम्ब परिवर्तित मौसम में मदमस्त हो फलने-फूलने लगा है। वृक्ष की असंख्य शाखाओं के हिलने से ऐसा प्रतीत होता है मानो कदम्ब का पेड़ एक गेंद के समान झूल रहा है। अब सावन का माह भी गुजर चुका है, किन्तु ऐसा लगता है कि बादल का गुस्सा अभी भी थमा नहीं है। वह लगातार अपनी पूरी शक्ति से अब भी जल-वर्षा के लिए तैयार खड़ा है।

कवि आगे कहता है कि तू (बादल) बिना किसी अधिकार के, लालच भरी आँखों से जाने कब से उसे (कदम्ब) देखने के लिए तरस रहा है। तेरा मन कहता है कि तू कदम्ब को स्पर्श करके अपनी इच्छा को पूर्ण कर ले। कदम्ब तो फल-फूल रहा है।

दो कविताएँ शब्दकोश

तरस = अभाव का अनुभव, दया पाने की ललक; कन्दुक = गेंद; टहनी = डाली, छोटी शाखा; कोप = क्रोध, गुस्सा; रीता = रिक्त, खाली; ललचाई = लालच से भरी; कदम्ब = एक पेड़; नाहक = बिना हक के, अधिकार रहित; दामिनी = बिजली; दादुर = मेंढक; कण्ठ = गला; पंक = कीचड़; अभिनन्दन = सम्मान; दमक = चमक, कौंध; मेघ = बादल।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 6 राखी का मूल्य प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 6 Rakhi Ka Mulya Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 6 Rakhi Ka Mulya Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 6 Rakhi Ka Mulya प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए
(क) कर्मवती कौन थी?
उत्तर
कर्मवती मेवाड़ की महारानी थी।

(ख) कर्मवती ने वीरों से कौन-सी प्रतिज्ञा करने को कहा?
उत्तर
कर्मवती ने वीरों से मरते दम तक मेवाड़ की पताका को झुकने न देने की प्रतिज्ञा करने को कहा।

(ग) रानी कर्मवती ने हुमायूँ को राखी क्यों भेजी ?
उत्तर
रानी कर्मवती ने हुमायूँ से बैरभाव समाप्त कर उसे भाई बनाने के लिए राखी भेजी।

(घ) राखी पाकर हुमायूँ ने क्या निर्णय लिया ?
उत्तर
राखी पाकर हुमायूँ ने मेवाड़ की रक्षा के लिए अपनी सेना भेजने का सेनापति को आदेश दिया।

(ङ) हमारे देश में राखी का क्या महत्व है ?
उत्तर
हमारे देश में राखी को भाई-बहन के स्नेह बन्धन का प्रतीक माना गया है। सुरक्षा सूत्र को पहनकर भाई, बहन की रक्षा का संकल्प करता है।

Rakhi Ka Mulya Class 7 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित पंक्तियों का अर्थ अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए

(क) जिन्हें प्राण देने का चाव हो, वे ही ये राखियाँ स्वीकार करें।
(ख) राखी वह शीतल प्रलेप है, जो सारे घाव भर देती
(ग) बहन का रिश्ता दुनिया के सारे सुखों, दौलतों, ताकतों और सल्तनतों से बढ़कर है।
उत्तर
(क) रानी कर्मवती मेवाड़ के वीर सपूतों को मेवाड़ की रक्षा के लिए ललकारते हुए राखियाँ आगे बढ़ाती है और कहती है कि वे ही लोग राखियों को लें जो देश-रक्षा के यज्ञ में स्वयं की आहुति देने को तत्पर हों।
(ख) व
(ग) गद्यांश 3 व 4 की व्याख्या देखें।

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MP Board Class 7th Hindi Chapter 6 प्रश्न 3.
सही उत्तर चुनकर लिखिए

(क) इस पाठ का मुख्य उद्देश्य है
(1) राजपूतों के बारे में बताना।
(2) बहन द्वारा भाई को राखी बांधना।
(3) मुसीबत के समय बहन की मदद न करना।
(4) सांस्कृतिक एवं साम्प्रदायिक सदभावना का विकास करना।
उत्तर
(4) सांस्कृतिक एवं साम्प्रदायिक सदभावना का विकास करना।

(ख) कर्मवती कहाँ की रानी थी?
(1) झाँसी
(2) कालपी
(3) मेवाड़
(4) इन्दौर।
उत्तर
(3) मेवाड़।

भाषा अध्ययन

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 6 प्रश्न 1.
‘भ्रातृ’ शब्द तथा ‘त्व’ प्रत्यय मिलाकर ‘भ्रातृत्व’ बना है। इसी प्रकार निम्नलिखित तालिका के शब्दों में ‘त्व’ प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए
पितृ, मातृ, लघु, गुरु, मनुष्य, प्रभु।
उत्तर
पितृ + त्व- पितृत्व; मातृ + त्व- मातृत्व;
लघु + त्व-लघुत्व; गुरु + त्व = गुरुत्व;
मनुष्य + त्व= मनुष्यत्व, प्रभु + त्व = प्रभुत्व।

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Class 7 Hindi Chapter 6 Mp Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित सामासिक पदों का विग्रह कीजिए
रणभूमि, राजपुत्र, देशभक्ति, रसोईघर, देशनिकाला, सेनापति।
उत्तर
रणभूमि = रण की भूमि
राजपुत्र = राजा का पुत्र
देशभक्ति = देश की भक्ति
रसोईघर = रसोई का घर
देशनिकाला = देश से निकाला
सेनापति = सेना का पति।

MP Board Class 7 Hindi Chapter 6 प्रश्न 3.
पाँचों प्रकार के योजक चिह्नों के दो-दो उदाहरण लिखिए
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 राखी का मूल्य 1

Class 7 Hindi Rakhi Ka Mulya Question Answer प्रश्न 4.
इस पाठ के चारों प्रकार के (और के प्रयोग वाले) वाक्य छाँटकर लिखिए।
उत्तर
(क) जाओ रणभूमि तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है और बहनो, तुम घर जाकर वीरव्रत की तैयारी करो। (उपवाक्य योजक)
(ख) हम हँसते-हँसते मरेंगे और बहुतों को मारकर मरेंगे। (उपवाक्य योजक)
(ग) किन्तु और भी तो बाधाएँ हैं। (विशेषण)
(घ) इस विकट अवसर पर मेवाड़, की रक्षा का और कोई उपाय है भी तो नहीं। (विशेषण)
(ङ) भ्रातृत्व और मनुष्यत्व पर विश्वास करके हुमायूँ की परीक्षा ली जाए। (शब्द योजक)
(च) लीजिए यह राखी और यह पत्र। (शब्द योजक)
(छ) हम भी देखेंगे कि कौन कितने पानी में है ? और यह भी प्रकट हो जाएगा कि एक राजपूतानी की राखी में कितनी ताकत है?
(उपवाक्य योजक)
(ज) मेवाड़ की रानी कर्मवती ने कुछ और सोचा। (क्रिया विशेषण)

Class 7th Hindi Chapter 6 Rakhi Ka Mulya प्रश्न 5.
‘तो’ के प्रयोग वाले वाक्य पाठ में से छाँटकर लिखिए।
उत्तर
विद्यार्थी स्वयं ऐसे वाक्यों को छाँटकर लिखें।

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Class 7th Hindi Chapter 6 Mp Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन लिखिए
थाली, जाली, भाई, दुश्मन, गाड़ी, साड़ी, धागा।
उत्तर
शब्द – बहुवचन
थाली – थालियाँ
जाली – जालियाँ
भाई – भाइयों
दुश्मन – दुश्मनों
गाड़ी – गाड़ियाँ
साड़ी – साड़ियाँ
धागा – धागे

Rakhi Ka Mulya Question Answer Class 7 प्रश्न 7.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करते हुए अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए
हँसते-हँसते प्राण देना, आग उगलना, प्राण कॉपना, खौफ खाना, जादू का पिटारा,
आग में कूदना, घाव भरना, आँख उठाना, कयामत का पैगाम, तिरछी नजर करना।
उत्तर
(क) हँसते-हँसते प्राण देना-सदैव बलिदान हेतु तत्पर रहना।
वाक्य प्रयोग-मेवाड़ की रक्षा के लिए वीर राजपूतों ने हँसते-हँसते अपने प्राण दे दिये।

(ख) आग उगलना-बुराई करना।
वाक्य प्रयोग-पाकिस्तान व्यर्थ ही भारत के विरुद्ध आग – उगलता रहता है।

(ग) प्राण काँपना-अत्यधिक डर जाना।
वाक्य प्रयोग-तूफान की तीव्रगति को देख नगरवासियों के प्राण काँप गये।

(घ) खौफ खाना-डरना।
वाक्य प्रयोग-चन्द्रशेखर आजाद के व्यक्तित्व से अंग्रेज भी खौफ खाते थे।

(ङ) जादू का पिटारा-करामात की थैली।
वाक्य प्रयोग-शिक्षक के पास कोई जादू का पिटारा तो है नहीं जो उसे खोले और विद्यार्थी बिना पढ़े परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाए।

(च) आग में कूदना-कठिन रास्ता चुनना।
वाक्य प्रयोग-कानून के विरुद्ध कार्य करना आग में कूदने के समान है।

(छ) घाव भरना-दुःख कम होना।
वाक्य प्रयोग-जहाँ तक सम्भव हो हमें दूसरों के घाव । भरने चाहिए।

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(ज) आँख उठाना-चुनौती देना।
वाक्य प्रयोग-रानी लम्मीबाई ने अंग्रेजों के समक्ष आँख उठाने का साहस किया।

(झ) कयामत का प्रैगाम-प्रलय की सूचना।
वाक्य प्रयोग-पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को संरक्षण देना स्वयं उसके लिए एक दिन कयामत का पैगाम लेकर आयेगा।

(ज) तिरछी नजर करना-नाराज होना।
वाक्य प्रयोग-मेरे द्वारा सच बोलने पर तुमने अपनी नजर तिरछी क्यों कर ली?

राखी का मूल्य परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. हम लोग सदियों से हँसते-हँसते प्राण देते आए हैं। हमारी इस अजेय शक्ति का स्रोत आप बहनों की राखियों के धागे ही तो हैं। यही तो हमें बल देते आए हैं।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा-भारती’ के ‘राखी का मूल्य’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक हरिकृष्ण प्रेमी हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में एक वीर राजपूत अपने उद्गारों को रानी कर्मवती के समक्ष प्रकट कर रहा है।

व्याख्या-हम लोग युद्धभूमि में सैकड़ों वर्षों से हँसते-हँसते न्योछावर होते आये हैं। हममें यह जो शक्ति है जिसे कोई हरा नहीं सकता, वह आप जैसी बहनों की राखियों के धागों से ही प्राप्त होती आयी है। इनसे हमें एक नया बल और उत्साह प्राप्त होता रहा है।

2. मेवाड़ के सपूतो, तुम्हीं मेवाड़ के अभिमान हो, तुम्हारी कीर्ति अमर है। जाओ रणभूमि तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-मेवाड़ के वीर सपूतों को सम्बोधित करते हुए रानी कर्मवती कहती हैं

व्याख्या-हे मेवाड़ के बहादुर पुत्रों ! तुमसे मेवाड़ स्वयं स्वाभिमान महसूस कर रहा है। तुम्हारा यश संसार में अमर है। युद्ध भूमि को तुम जैसे वीर पुत्रों की आवश्यकता है। वह तुम्हारा इन्तजार कर रही है।

3. हमारी राखी वह शीतल प्रलेप है जो सारे घाव भर देती है। राखी वह वरदान है, जो सारे बैर-भावों को जलाकर भस्म कर देती है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में रानी कर्मवती के राखी के महत्त्व को प्रदर्शित किया गया है।

व्याख्या-राखी बैर-भाव रूपी घावों को भरने के लिए मरहम का कार्य करती है। राखी एक वरदान के समान है। इससे सारे बैर-भाव जल जाते हैं तथा प्रेम और सद्भावना का वातावरण उत्पन्न होता है।

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4. “मैं दुनिया को बता देना चाहता हूँ कि हिन्दुओं के रस्मों-रिवाज मुसलमान के लिए भी उतने ही प्यारे और पाक हैं जितने उनके लिए। तुम भूलते हो कि हम सब एक परवरदिगार की औलाद हैं।”

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में हुमायूँ ने हिन्दुओं और मुसलमानों को एक ही ईश्वर ही सन्तान बताया है।

व्याख्या-हुमायूँ अपने सेनापति को सम्बोधित करते हुए कहता है कि हिन्दुओं और मुसलमानों में कोई अन्तर नहीं है। सब के सब उस एक मालिक की सन्तान हैं जिसने उन्हें बनाया है। आज मैं इस पूरे संसार के सामने यह सिद्ध करना चाहता हूँ कि हिन्दुओं के सभी रीति-रिवाज और परम्पराएँ एक मुसलमान के लिए भी समान रूप से प्रिय और पवित्र हैं।

5. बहन का रिश्ता दुनिया के सारे सुखों, दौलतों, ताकतों और सल्तनतों से बढ़कर है। मैं इस रिश्ते की इज्जत सल्तनत कुर्बान करके भी रखूगा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में हुमायूँ कर्मवती की राखी को स्वीकार करते हुए उसके प्रति सम्मान और बलिदान की भावना प्रकट करता है।

व्याख्या-हुमायूँ का कथन है कि बहन का रिश्ता संसार में सभी वस्तुओं से बढ़कर है। राखी भेजकर रानी कर्मवती ने उसे | भाई बनाया है तो वह इस रिश्ते का सम्मान रखने के लिए सब कुछ बलिदान करने को भी सहर्ष तैयार है।

राखी का मूल्य शब्दकोश

सर्वस्व = सब कुछ; अजेय = जिसे जीता न जा सके; मर्यादा = लोकनीति, रिवाज, सीमा; कीर्ति = यश;
आन = गौरव; वैमनस्य = बैर, दुश्मनी, मनमुटाव; पश्चाताप =पछतावा; भ्रातृत्व = भाई-भाई से अपनापन; मनुष्यत्व = मानवता; लफ़्ज = शब्द; प्रलेप = विशेष प्रकार का मरहम।

राखी का मूल्य उर्दू शब्दों के हिन्दी रूप

सल्तनत = साम्राज्य; खाक = धूल; पैगाम = सन्देश, खबर, सूचना; हिफाजत = सुरक्षा;
तरजीह = प्राथमिकता,वरीयता; मुताबिक = अनुसार; कुर्बानी – बलिदान; फौलाद = इस्पात, मजबूत लोहा; सौगात = भेंट, कयामत = प्रलय; खौफ = डर; परवरदिगार = खुदा, ईश्वर ।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 10 सुभाषचन्द्र बोस का पत्र प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 10 Subhash Chandra Bose ka Patra Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 10 Subhash Chandra Bose ka Patra Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 10 MP Board प्रश्न 1.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(अ) सुभाष चन्द्र बोस को किस जेल से किस जेल के लिए स्थानान्तरण आदेश मिला?
उत्त
सुभाषचन्द्र बोस को बहरामपुर जेल (बंगाल) से माण्डले सेन्ट्रल जेल के लिए स्थानान्तरण आदेश मिला था।

(ब) सुभाषचन्द्र बोस ने माण्डले जेल को तीर्थ स्थल क्यों कहा है?
उत्तर
सुभाषचन्द्र बोस ने माण्डले जेल को तीर्थ स्थल, इसलिए कहा है, क्योंकि वह जेल एक ऐसी जेल थी जहाँ भारत का एक महानतम् सपूत (लोकमान्य तिलक) लगातार छः वर्ष तक रहा था।

(स) माण्डले जेल में लोकमान्य तिलक के साथ कैसा व्यवहार किया जाता था ?
‘उत्तर
माण्डले जेल में लोकमान्य तिलक को छ: वर्ष तक शारीरिक और मानसिक यन्त्रणाओं से गुजरना पड़ा था। वे वहाँ अकेले रहे। उन्हें बौद्धिक स्तर का कोई साथी नहीं मिला। किसी अन्य बन्दी से उन्हें मिलने-जुलने नहीं दिया जाता था। जेल और पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में ही इतने वर्षों में दो या तीन भेंट से अधिक का मौका नहीं दिया था।

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(द) सुभाषचन्द्र बोस के अनुसार अपने आपको बन्दी जीवन के अनुकूल बनाने के लिए स्वयं में क्या-क्या परिवर्तन लाने पड़ते हैं?
उत्तर
सुभाषचन्द्र बोस के अनुसार अपने आपको बन्दी जीवन के अनुकूल बनाने के लिए हमें स्वयं ही पिछली आदतों का त्याग करना होता है। स्वयं को पूर्ण स्वस्थ और फुर्तीला बनाना पड़ता है। प्रत्येक नियम को सिर झुकाकर मानना पड़ता है। आन्तरिक प्रसन्नता बनाये रखनी होती है।
मानसिक सन्तुलन स्थिर रखना होता है।

(य) सुभाषचन्द्र बोस ने लोकमान्य तिलक को विश्व के महापुरुषों की प्रथम पंक्ति में स्थान मिलने की सिफारिश क्यों की है ?
उत्तर
सुभाषचन्द्र बोस ने सिफारिश की है कि लोकमान्य तिलक को विश्व के महापुरुषों की प्रथम पंक्ति में स्थान मिले क्योंकि लोकमान्य तिलक प्रतिकूल और शक्तिहारी वातावरण में भी ‘गीता-भाष्य’ जैसे महान दर्शन की रचना कर सके। उनमें प्रकाण्ड पाण्डित्य था, प्रबल इच्छाशक्ति थी। उनमें साधना की गहराई और सहनशीलता थी। वे बौद्धिक क्षमतावान एवं संघर्ष शक्ति से संयुक्त थे। उन्होंने बन्दीगृह के अन्धकारमय दिनों में अपनी मातृभूमि के लिए ‘गीता-भाष्य’ जैसे अतुलनीय ग्रन्थ की रचना भेंट स्वरूप प्रस्तुत की।

MP Board Class 7th Hindi Chapter 10 प्रश्न 2.
सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(अ) लोकमान्य तिलक ने जेल में सुप्रसिद्ध ………. ग्रन्थ का प्रणयन किया था। (भारत की खोज/गीता भाष्य)
(ब) जेल में लोकमान्य तिलक अपना समय ………. बिताते थे। (किताबें पढ़कर/चित्र देखकर)
(स) सुभाषचन्द्र बोस ने अपने पत्र में माण्डले जेल को………..माना। (तीर्थस्थल/यातनास्थल)
उत्तर
(अ) गीताभाष्य
(ब) किताबें पढ़कर
(स) तीर्थस्थल।

भाषा अध्ययन

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 10 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों को अपने वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए___ अदम्य, प्रणयन, कृतित्व, सुदीर्घ, यन्त्रणा।
उत्तर
अदम्य-भारतीय स्वतन्त्रता के योद्धाओं में अदम्य साहस था।
प्रणयन-गीता भाष्य का प्रणयन लोकमान्य तिलक ने माण्डले सेन्ट्रल जेल में छ: वर्ष के बन्दी काल में किया।
कृतित्व-भारतीय मनीषियों को उनके कृतित्व के लिए आज भी स्मरण किया जाता है।
सुदीर्घ-भारतीय आजादी की लड़ाई सुदीर्घ काल तक चली।
यन्त्रणा-स्वतन्त्रता सैनिकों को बन्दीगृहों में विविध यन्त्रणाएँ दी गई।

MP Board Class 7 Hindi Chapter 10 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में ‘दुर- उपसर्ग तथा तम’ प्रत्यय जोड़कर शब्द बनाइए.
(क) भाग्य, गम, गति, जन, गुण। (‘दुर’ उपसर्ग जोड़कर)
उत्तर
दुर्भाग्य, दुर्गम, दुर्गति, दुर्जन, दुर्गुण।

(ख) महान, अधिक, सरल, कठिन। (‘तम’ प्रत्यय जोड़कर)
उत्तर
महानतम, अधिकतम, सरलतम, कठिनतम।

Class 7th Hindi Chapter 10 MP Board प्रश्न 3.
इस पाठ में से इक प्रत्यय से बने शब्द छांटकर लिखिए।
उत्तर
शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, राजनैतिक, दार्शनिक।

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Class 7th Hindi Chapter 10 Subhash Chandra Bose प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से उपसर्ग और मूल शब्द छाँटकर लिखिए
सपूत, परिवेश, सशरीर, आदेश, अनुपस्थित, स्वदेश प्रकाण्ड, सुप्रसिद्ध।
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 10 सुभाषचन्द्र बोस का पत्र 1
Class 7th Hindi Chapter 10 प्रश्न 5.
(क) निम्नलिखित शब्दों को पढ़िए और समझकर उनका विग्रह कीजिए
कर्मयोगी, चहारदीवारी, गीताभाष्य, शीतऋतु, धूलभरी, देशवासी. तीर्थस्थल, मन्दगति, युगनिर्माण, दशानन, दिन-रात।
उत्तर
कर्म का योगी, चहार से दीवार, गीता का भाष्य, शीत की ऋतु, धूल से भरी, देश के वासी, तीर्थ का स्थल, मन्द है जो गति, युग का निर्माण, दश हैं आनन जिसके, दिन और रात।

(ख) अपने प्रधानाध्यापक को शुल्क मुक्ति हेतु एक प्रार्थना-पत्र लिखिए।
उत्तर
‘प्रार्थना-पत्र’ अध्याय में देखिए।

सुभाषचन्द्र बोस का पत्र परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

1. यह विश्व भगवान की कृति है, लेकिन जेलें मानवb के कृतित्व की निशानी हैं। उनकी अपनी एक अलग ही दुनिया है और सभ्य समाज ने जिन विचारों और संस्कारों को प्रतिबद्ध होकर स्वीकार किया है, वो जेलों में लागू नहीं होते। अपनी आत्मा के ह्रास के बिना बन्दी जीवन के प्रति अपने आपको अनुकूल बना पाना आसान काम नहीं है। इसके लिए हमें पिछली आदतें छोड़नी होती हैं और फिर भी स्वास्थ्य और स्फूर्ति बनाए रखनी होती है, सभी तरह के नियमों के आगे नत होना होता है और फिर भी आन्तरिक प्रफुल्लता अक्षुण्ण रखनी होती है।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश ‘सुभाष चन्द्र बोस का पत्र’ शीर्षक से अवतरित है। इसके लेखक नेताजी सुभाषचन्द्र बोस है।

प्रसंग-सुभाषचन्द्र बोस ने इस पत्र को एन. सी. केलकर के नाम उस समय लिखा, जब वे माण्डले सेन्ट्रल जेल, बर्मा में थे। यह पत्र उन्होंने दिनांक 20-08-1925 को लिखा था।

व्याख्या-यह संसार ईश्वर ने बनाया है। अत: यह मनुष्यों के अनुकूल ही है, परन्तु इस संसार में जेलों की रचना मनुष्य ने की है जो आदमी के द्वारा किए गये कर्मों की निशानी है। इन जेलों की दुनिया अलग ही प्रकार की होती है। मनुष्य ने सभ्यता | का विकास किया। उसके विचारों और संस्कारों को मजबूती से समाज ने स्वीकार किया और अपनी एक सभ्यता कायम की। इस सभ्यता के पीछे मानव द्वारा विचारित नियम और संस्कार होते हैं जिससे मनुष्य समाज सभ्य कहलाया।

परन्तु मनुष्य के इन विचारों और संस्कारों को जेल-जीवन और जेल-जगत् पर लागू नहीं किया जा सकता। वहाँ अपनी आत्मा मर जाती है। इसलिए मनुष्य बन्दी जीवन के प्रति स्वयं को ढाल पाने में कठिनता अनुभव करता है। जेल का जीवन बहुत ही कठिन होता है। मनुष्य को जेल जीवन की आदतें ढालनी पड़ती हैं। पुरानी आदतों को त्यागना होता है। सब कुछ विपरीत होने पर भी जेल के बन्दियों को अपना स्वास्थ्य ठीक रखना पड़ता है तथा शरीर में तरो-ताजगी बनाये रखना अनिवार्य होता है। जेल के सभी नियमों का पालन करना पड़ता है। उन नियमों को सिर झुकाकर मानना होता है और कार्य करने के लिए विवश होना पड़ता है। हदय के अन्दर प्रसन्नता सदा बनाये रखनी पड़ती है।

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2. दासवृत्ति ठुकरानी होती है और फिर भी मानसिक सन्तुलन अडिग बनाये रखना होता है। केवल लोकमान्य जैसा दार्शनिक ही, जिसे अदम्य इच्छाशक्ति का वरदान मिला था, उस बन्दी जीवन के शक्ति हननकारी प्रभावों से बच सकता था, उस यन्त्रणा और दासता के बीच मानसिक सन्तुलन बना रख सकता था और ‘गीता-भाष्य’ जैसे विशाल एवं युगनिर्माणकारी ग्रन्थ का प्रणयन कर सकता था।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-सुभाषचन्द्र बोस ने बन्दी जीवन के प्रभावों का
वर्णन किया है जिसके कारण शारीरिक शक्ति एवं मानसिक सन्तुलन समाप्त सा होने लगता है।
व्याख्या-जेल के जीवन का प्रभाव ऐसा होता है, कि कारागार में रहने वाले व्यक्ति के मन मस्तिष्क से दासता की भावना तो विलीन होती ही है। उसके साथ ही मानसिक सन्तुलन स्थिर बनाये रखना होता है। बन्दी विचारशील बना रहता है। लोकमान्य तिलक भी इसी माण्डले सेन्ट्रल जेल में बन्दी रहे। उन्होंने यहाँ छः वर्ष का कठोर कारावास सहा। वे उच्चकोटि के दर्शनशास्त्री थे।

उनके अन्दर अदमनीय दृढ़ इच्छा शक्ति थी जिसे उन्होंने ईश्वर से वरदान के रूप में प्राप्त किया था। उनके ऊपर जेल जीवन का प्रभाव नहीं पड़ सकता था यद्यपि जेल का जीवन मनुष्य के अन्दर की शक्तियों को प्रभावित करता है। लोकमान्य तिलक जैसा पक्के इरादे वाला मनुष्य जेल के कष्टों और दासता के बीच रहकर भी अपने मानसिक सन्तुलन को बनाये रख सकता था और उन्होंने अपनी चिन्तन शक्ति को स्थिरता दी; तभी तो वे ‘गीता-भाष्य’ जैसे महान ग्रन्थ की रचना कर सके। यह ग्रन्थ नये युग का निर्माण करने वाला ग्रन्थ है।

3. अगर किसी को प्रत्यक्ष अनुभव पाना है कि इतने प्रतिकूल, शक्तिहारी और दुर्बल बना लेने वाले वातावरण में लोकमान्य के ‘गीता-भाष्य’ जैसे प्रकाण्ड पाण्डित्यपूर्ण एवं महान ग्रन्थ की रचना करने के लिए कितनी प्रबल इच्छाशक्ति, साधना की गहराई एवं सहनशीलता अपेक्षित है, तो जेल में आकर रहना चाहिए।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग- नेताजी सुभाषचन्द्र बोस बताते हैं कि अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति एवं विशिष्ट सहनशीलता के गुण के कारण ही लोकमान्य तिलक माण्डले की सेन्ट्रल जेल में गीता भाष्य की रचना कर सके।

व्याख्या-सुभाषचन्द्र बोस कहते हैं कि जेल का वातावरण अपने अनुकूल नहीं होता, परन्तु मनुष्य अपने अन्दर पक्की इच्छाशक्ति, साधना की गहराई तथा सहनशीलता पैदा कर लेता है। लोकमान्य ने अपने अन्दर इन्हीं गुणों को पैदा कर लिया था और गीता का भाष्य लिखा जो उनकी विद्वता पाण्डित्य को दर्शाता है। तिलक के ऊपर भी जेल के वातावरण का प्रभाव पड़ा। इससे मनुष्य में जीवन शक्ति कमजोर पड़ती है। शरीर दुर्बल हो जाता है। माण्डले की सेन्ट्रल जेल में रहते हुए तिलक ने अपनी आत्मिक शक्ति पैदा कर ली थी, जिससे वे गीता के भाष्य की रचना कर सके। यह रचना अद्वितीय है।

सुभाषचन्द्र बोस का पत्र शब्दकोश

दिलचस्पी = रुचि, शौक; निष्कासन हटाना, निकालना; यन्त्रणा = पीड़ा, यातना, अतिकष्ट; ह्रास = गिरावट; स्नेहभाजन = प्रेम पात्र। भाष्यकार = टीकाकार; प्रकाण्ड – उत्तम, सर्वश्रेष्ठ; बलात् = बलपूर्वक; कारावास = बन्दी होना, जेल की सजा; प्रफल्लता = प्रसन्नता; सुदीर्घ = बहुत लम्बा; दण्डसंहिता = सजा देने के नियमों की पुस्तक प्रणयन = रचना; प्रेरणा = उत्साह, किसी के प्रति उत्साहित करने की क्रिया; यातना = कष्ट, पीड़ा; अक्षुण्ण = अखण्डित हननकारीचोट पहुँचाने वाला, अडिग = न डिगने वाला, स्थिर, पक्का, दृढ़ शरीरान्त= मृत्यु: मन्दाग्नि = भूख कम लगने का रोग प्रतिबद्ध = बँधा हुआ, किसी कार्य के लिए संकल्पित; अदम्य – जिसका दमन न किया जा सके; अपेक्षित = जिसकी इच्छा की गई हो।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 2 दादी की घड़ी प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 2 Dadi ki Ghadi Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 2 Dadi ki Ghadi Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 2 Dadi Ki Ghadi प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) दीपू को दीदी और भैया की तरह कौन-कौन सी सुविधाएँ नहीं मिल पाती थीं?
उत्तर-
दीपू को दीदी और भैया की अपेक्षा कई प्रकार की सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता था। उसके पास पढ़ने के लिए न तो घड़ी थी, न ही डेस्क। जब वह सुबह जल्दी उठना चाहता तो उसके पास अलार्म घड़ी भी नहीं होती थी।

(ख) बिना अलार्म घड़ी के दादी सुबह कैसे उठ जाती थीं?
उत्तर-
दादी सुबह जल्दी उठने के लिए रात को सोते समय अपने सिरहाने रखे तकिए से सुबह उठने का समय कहकर सोती थीं। आश्चर्यजनक रूप से ठीक उसी समय पर प्रातः उनकी आँख स्वयं ही खुल जाती थी।

(ग) पिकनिक पर जाने के लिए दीपू समय पर कैसे जाग गया ?
उत्तर-
पिकनिक पर जाने वाले दिन से पूर्व रात को दीपू अपने तकिए से उसे सुबह 5 बजे जगा देने की बात कहकर सोया और अगले दिन ठीक 5 बजे उसकी आँख अपने आप खुल गयी।

(घ) दादी ने अनोखी घड़ी का क्या राज बताया ?
उत्तर-
दादी ने अनोखी घड़ी का राज बताते हुए दीपू से कहा, “भला तकिया भी कहीं बोलता है। असली अलार्म तो हमारे दिल में होता है। जब हमें जरूरी उठना होता है, तो यह हमें जगा देता है।”

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Class 7th Hindi Chapter 2 Dadi Ki Ghadi प्रश्न 2.
दादी ने दीपू को सुबह समय पर उठने के लिए क्या तरकीब सुझाई ? (सही विकल्प चुनिए-)
(क) दीदी से सुबह जगाने के लिए कहो,
(ख) मुर्गे की आवाज सुनकर उठो,
(ग) तकिए से कहो “तकियाराम सुबह चार बजे जगा देना”
(घ) अलार्म घड़ी रखकर सो जाना।
उत्तर-
(ग) तकिए से कहो, “तकियाराम सुबह चार बजे जगा देना।”

भाषा अध्ययन

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 2 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और लिखिए-
ईर्ष्या, खूटी, चिट्ठियाँ, ताज्जुब, इंस्पेक्टर, अलार्म, चिरौरी, कार्तिक, नुस्खा, ट्रंक।
उत्तर-
प्रत्येक शब्द को ठीक-ठीक उच्चारित कर बिना देखे लिखने का अभ्यास करें।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्यों में से मुहावरे छाँटकर लिखिए
(क) दीपू को हर तरह की बेगार ढोनी पड़ती थी।
(ख) दीपू बेचारा मम्मी के ट्रंक पर ही गुजारा कर लेता था।
(ग) घड़ी तो राजा भैया पहले ही परलोक सिधार गई।
(घ) डर के मारे दीपू दम साधे पड़ा रहा।
उत्तर-
(क) बेगार ढोना,
(ख) गुजारा करना,
(ग) परलोक सिधारना,
(घ) दम साधना।

Dadi Ki Ghadi Question Answer प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में से हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू के शब्द छाँटकर लिखिए
चॉक, एवज, मुसीबत, रौब, क्लास, खबर, ख्याल, मॉनीटर, अन्याय, दखल, डेस्क, सुर, बाकायदा, अलार्म, ताज्जुब, परीक्षा, इंस्पेक्टर, टर्मिनल, दया, लैम्प, परलोक।
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 2 आत्मविश्वास 1

Class 7 Hindi Bhasha Bharti Chapter 2 प्रश्न 4.
‘भी’ और ‘पर’ निपात वाले वाक्य पाठ से छाँटकर लिखिए।
उत्तर-
(i) मान लिया कि बड़ी-बड़ी क्लासों में पढ़ते हैं, पर इसका मतलब यह तो नहीं कि लोग निरे बुद्ध हैं।
(ii) दीपू चौथी कक्षा में पढ़ता है और तो और अपनी कक्षा का मॉनीटर भी है।
(iii) दीपू के दोस्त दिनभर आते-जाते रहते। कोई उन्हें बैठने तक को नहीं कहता पर दीदी या भैया के पास कोई आता तो उसे बाकायदा नमस्ते करनी पड़ती।
(iv) उसे तो खुद चाबी भरने की इच्छा थी, पर दीदी का चेहरा देखकर चुप कर गया।

MP Board Class 7th Hindi Chapter 2 Dadi Ki Ghadi प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों को छोटा करके लिखिए
(अ) सोते में मुझसे घड़ी टूट गई और सबके सब मुझे डाँटने लगे।
(ब) वह तो समझा अभी रात है और डर के मारे दम साधे चुपचाप पड़ा रहा।
उत्तर-
(अ) सोते समय घड़ी टूटने पर सबके सब मुझे डाँटने लगे।
(ब) वह रात समझकर डर के मारे दम साधे चुपचाप पड़ा रहा।

Class 7 Hindi Chapter 2 Dadi Ki Ghadi Question Answer प्रश्न 6.
वाक्य बदलिए
(क) पता है, कल हमने मलाई खाई थी।
(ख) पता है, कल आसमान में गुब्बारे उड़े थे।
(ग) पता है, तकिया मुझे जगाएगा।
(घ) पता है, पापा-मम्मी मुझे समझ पाएँगे।
उत्तर-
(क) न जाने कब हमने मलाई खाई थी।
(ख) न जाने कब आसमान में गुब्बारे उड़े थे।
(ग) न जाने कब तकिया मुझे जगाएगा।
(घ) न जाने कब पापा-मम्मी मुझे समझ पाएँगे।

MP Board Solutions

Dadi Ki Ghadi Class 7 प्रश्न 7.
निम्नलिखित वाक्यों में शब्दों को सही क्रम में लिखिए
(क) है अपनी भी मॉनीटर का कक्षा दीपू।
(ख) गई सिधार घड़ी राजा परलोक भैया।
(ग) टाइमपीस था अलार्म ही एक घर में।
(घ) अलार्म तो दिल है होता असली में हमारे।
उत्तर-
(क) दीपू अपनी कक्षा का मॉनीटर भी है।
(ख) घड़ी राजा भैया परलोक सिधार गई।
(ग) घर में एक ही टाइमपीस अलार्म था।
(घ) असली अलार्म तो हमारे दिल में होता है।

Bhasha Bharti Class 7 प्रश्न 8. सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति। कीजिए-
(क) दीपू से सभी ……………………………. करते थे।
(i) ईर्ष्या
(ii) घृणा
(iii) द्वेष
(iv) लड़ाई।
उत्तर-
(i) ईर्ष्या

(ख) दीपू की ……………………………. तो पापा के पास बैठने पर ही निकल जाती थी।
(i) पूरी जान
(ii) जान
(iii) दम
(iv) आधी जान।
उत्तर-
(iv) आधी जान।

(ग) ‘स्टूल’ शब्द ……………………………. है।
(i) तद्भव
(ii) तत्सम
(iii) देशज
(iv) विदेशी।
उत्तर-
(iv) विदेशी।

(घ) दीपू पिकनिक के लिए ……………………………. जा रहा था।
(i) साँची
(ii) भोपाल
(iii) विदिशा
(iv) पचमढ़ी।
उत्तर-
(i) साँची।

दादी की घड़ी परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. घर में एक ही अलार्म टाइमपीस था और वह बारी बारी से दीदी या भैया के सिरहाने रखा रहता। दीपू की बड़ी साध थी कि हम भी सिरहाने घड़ी रखकर सोएँ और उसकी सुरीली आवाज के साथ दिन की शुरुआत करें। उसके भाग्य में तो सुबह आठ बजे पापा की डाँट खाकर उठना ही लिखा था।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा भारती’ के ‘दादी की घड़ी’ नामक पाठ से अवतरित है। इसकी लेखिका श्रीमती मालती जोशी हैं। –

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखिका ने बालसुलभ मन का सजीव चित्रण किया है।

व्याख्या-घर में सबसे छोटा होने के कारण दीपू की छोटी-छोटी इच्छाएँ भी पूरी न हो पाती थीं। दीपू के घर में एक ही अलार्म घड़ी थी। वह चाहता था कि अलार्म घड़ी को वह अपने बिस्तर के पास रखकर सोए जिससे सुबह समय पर उठ सके, किन्तु छोटा होने के कारण उसकी बारी ही न आ पाती। घड़ी पर तो उसके भैया व दीदी का ही कब्जा रहता। उसे बहुत बुरा लगता जब सुबह उसकी नींद न खुलती और प्रतिदिन पापा की डाँट-फटकार से दिन की शुरुआत होती।

2. मम्मी की सिफारिश काम कर गई। रात को घड़ी वाला स्टूल उसके सिरहाने था। उसे तो खुद चाबी भरने की इच्छा थी, पर दीदी का चेहरा देखकर चुप कर गया। घड़ी मिल रही थी, यही बहुत था।

रात भर उसे अलार्म के सपने आते रहे। उसने अपनी सारी किताबें तकिये के नीचे रख ली थीं। टेबल लैंप लगाने की भी सोच रहा था, पर डर के मारे चुप रहना पड़ा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में बाल-हठ द्वारा घड़ी पास रखकर सोने के सुखद सपने का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-दीपू के जिद करने पर मम्मी को दया आ गयी और उन्होंने दीदी और भैया से घड़ी को दीपू के पास रखने के लिए कहा। मम्मी की सिफारिश से प्राप्त अलार्म घड़ी को अपने पास रखकर सोने के विचार मात्र से दीपू खासा उत्साहित हो गया। वह घड़ी में खुद ही चाबी भरना चाहता था, किन्तु दीदी के चेहरे के भावों को पढ़कर वह चुप ही रहा। प्रातः जल्दी पढ़ने के लिए उसने सारी तैयारियाँ रात में ही कर ली थीं। रातभर उसे घड़ी के बजते अलार्म के सपने आते रहे थे।

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3. दीपू ने तरकीब सुनी, तो आश्चर्य से उसकी आँखें फैल गईं। दिन भर यही इन्तजार रहा कि कब रात हो तो वह तकिये का करिश्मा देखे। रात को उसने सबकी नजर बचाकर तकिये से अपनी बात कही और इत्मीनान से सो गया। सुबह उठा तो वही आठ बज रहे थे। दूसरे दिन भी यही हाल रहा, फिर तीसरे-चौथे दिन भी। फिर उसने यह नुस्खा ही मन से निकाल दिया। समझ गया दादी की भूत-प्रेतों और परियों की कहानियों की तरह यह तरकीब भी निरी गप्प ही थी।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में दादी द्वारा दीपू को सुबह जल्दी उठने के लिए सुझाई गई तरकीब के क्रियान्वयन का वर्णन किया। गया है।

व्याख्या-दादी ने सुबह जल्दी उठने के लिए दीपू से कहा कि वह रात को सोते समय अपने तकिए से अभीष्ट समय पर जगाने के लिए बोलकर सोए। दीपू ने अचरज और उत्सुकता के
साथ रात होने की प्रतीक्षा की ओर फिर रात को तकिए से अपने। मन की बात कहकर निश्चित हो सो गया, परन्तु सुबह जब वह। सोकर उठा तो हमेशा की तरह आठ बज रहे थे। दीपू ने दूसरे दिन फिर से इस तरकीब को आजमाया, परिणाम इस बार भी जस का तस निकला। तीसरे और चौथे दिन भी तरकीब को सफल न होतें देख वह निराश हो उठा और दादी की भूत-प्रेतों तथा परियों की काल्पनिक कहानियों की तरह इस तरकीब को भी गप्प मानकर वह भूल गया।

4. दादी ने उसे और भी पास सटाते हुए कहा, “दीपू बेटा, तू तो पागल हो गया है। तकिया भी कहीं बोलता है।” असली अलार्म तो हमारे दिल में होता है। जब हमें जरूरी उठना होता है, तो यह हमें जगा देता है। घड़ी की आवाज तो तू बन्द भी कर सकता है, पर इसकी आवाज बन्द नहीं होती, जगाकर ही छोड़ती है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में दिल को ही वास्तविक अलार्म घड़ी बताया गया है।

व्याख्या-दादी ने दीपू को अपने और करीब लाते हुए प्यार से समझाया कि भला तकिया भी कहीं बोलता है जो दूसरों को जगा देगा ? वास्तव में असली अलार्म तो मनुष्य का दिल होता है। जब कभी हमें अवश्य एवं निश्चित समय पर सुबह उठना होता है, तो वह हमारा दिल ही है, जो हमें अभीष्ट समय पर अपने आप उठा देता है। अलार्म घड़ी की आवाज को तो हम चाहें तो बन्द भी कर सकते हैं, किन्तु दिल की आवाज को बन्द नहीं किया जा सकता है। यह तो हमें उठाकर ही शान्त होती है। दिलरूपी घड़ी का रहस्य जानकर दीपू प्रसन्न हुआ।

शब्दकोश
लाड़ला = प्यारा; अन्याय = न्याय न होना; हताश = निराश; निरे = बिल्कुल; सुर में सुर मिलाना = साथ-साथ गाना, समर्थन करना; चौतरफा = चारों तरफ।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 13 अगर नाक न होती प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 13 Agar Naak Na Hoti Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 13 Agar Naak Na Hoti Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 13 MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) नाक को किस बात का प्रतीक माना जाता है?
उत्तर
नाक को इज्जत व प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता

(ख) आदमी सामान्यतः नाक रगड़ने को कब मजबूर हो जाता है?
उत्तर
जब आदमी का बुरा वक्त आता है या उसे किसी से कोई काम करवाना होता है, तब वह सारा अक्खड़पन भूल जाता है और वह हजार बार नाक रगड़ने को मजबूर हो जाता है।

(ग) असली हींग और देशी घी की पहचान में नाक का क्या उपयोग है?
उत्तर
नाक से ही असली हींग और देशी घी की पहचान कर सकते हैं। नाक की सहायता से सँघकर असली और नकली की पहचान करते हैं। इसलिए नाक का सूंघने की अपनी इसी विशेषता के कारण बड़ा महत्व है, उपयोग है।

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(घ) नाक हीटर का काम कैसे करती है ?
उत्तर
बाहर की ठण्डी हवा को नाक गरम करती है और तब उसे अन्दर जाने देती है। हवाओं को गरम करने के कारण ही नाक हीटर का काम करती है।

(ङ) नाक में कौन-से आभूषण पहने जाते हैं ?
उत्तर
नाक में सोने की हीरे-मोती जड़ी नथ, नथुनी, लौंग, बुलाक, आदि आभूषण पहने जाते हैं।

(च) नाक के लिए कोई चार उपमाएँ लिखिए
उत्तर
नाक को प्रायः निम्नलिखित चार उपमाएँ देकर वर्णित किया गया है

  1. सारस जैसी लम्बी
  2. चिलगोजे जैसी छोटी
  3. चोथ जैसी चपटी
  4. पकौड़ा जैसी मोटी।

MP Board Class 7th Hindi Chapter 13 प्रश्न 2.
इन कर्मेन्द्रियों को उनके कामों (कार्यों से मिलाओ और सामने लिखो

(1) सूंघना – (क) आँख
(2) छूना – (ख) कान
(3) देखना – (ग) नाक
(4) सुनना – घ) मुँह
(5) चखना – (ङ) त्वचा
उत्तर
(क)→ (3),(ख)→(4),(ग)→(1),(घ)→ (5),(ङ) → (2)

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भाषा अध्ययन

ग्रान 1.
इस पाठ में आये हुए-तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी शब्द छाँटकर लिखिए
उत्तर
तत्सम् = मनोवैज्ञानिक, मृत्यु, उच्छ्वास, प्रदूषण, पर्यावरण।
तद्भव = ब्याह, रूठ, सहेली, हेकड़ी, शिख, नख, पाँव।
देशज = छोछक, नकटा, नथुनी, बुलाक, असली, नकसुरा, छन्ना।
विदेशी = कूलर, टी.वी., फ्रिज, प्लास्टिक सर्जरी, कटलेट।

Class 7th Hindi Chapter 13 MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित सम्बन्ध बोधक अव्ययों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए
के सामने, के बिना, के नीचे, के ऊपर, की ओर, के बदले की अपेक्षा, के साथ।
उत्तर
मेरे घर के सामने स्थित पेड़ के नीचे वे बैठते हैं। उस पेड़ के ऊपर पक्षी रहते हैं।
बालक माता-पिता के बिना सुस्त दिखते हैं।
रवीन्द्र के बदले उसके साथ मोहन खेत की ओर गया,
क्योंकि उसकी अपेक्षा मोहन ताकतवर है।

MP Board Class 5 Hindi Bhasha Bharti Solution Chapter 13 प्रश्न 3.
‘नाक’ शब्द से अनेक मुहावरे बनते हैं। निम्नलिखित तालिका में ‘नाक’ शब्द जोड़कर मुहावरे बनाइए
रखना, कटना, ऊंची रखना, फुलाना, रहना, के नीचे, चने चबाना।
उत्तर
नाक रखना। नाक कटना। नाक ऊँची रखना। नाक फुलाना। नाक रहना। नाक के नीचे। नाकों चने चबाना।
मुहावरों का अर्थ-इज्जत का बचाव करना। इज्जत चली जाना। सम्मान बनाये रखना। गुस्सा हो जाना। इज्जत या सम्मान का बना रहना। उपस्थिति में परेशान करना।

Hindi Chapter 13 Class 7 प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के पीछे ‘दिखाना’ शब्द जोड़ने से बने मुहावरों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए
आँख, अँगूठा, दाँत, पीठ, जीभ, आईना।
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 13 अगर नाक न होती 1

Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 13 प्रश्न 5.
‘कितना’ और ‘अगर’ शब्द लगाकर पाँच वाक्य बनाओ।
उत्तर

  1. ‘कितना’ अच्छा होता ‘अगर’ वह परीक्षा में पास हो जाता।
  2. ‘कितना अच्छा होता ‘अगर’ मेरा मित्र आज यहाँ आ जाता।
  3. ‘कितना’ अच्छा होता ‘अगर’ वह मेरी सहायता कर देता।
  4. ‘कितना अच्छा होता ‘अगर’ वह मेरे साथ यात्रा में होता।
  5. ‘कितना’ अच्छा होता ‘अगर’ वह मेरे विद्यालय में प्रवेश लेता।

Class 7th Hindi Chapter 13 Question Answer प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों को दिए गये उदाहरण के अनुसार बदलिए
(क) वे मौके की तलाश में रहते हैं कि कब, कैसे, किसी की नाक रगड़ दें।
(ख) यह कोशिश रहती है कि उसकी नाक न कटे।
(ग) आज तुम्हें अच्छा गाना सुनाती हूँ।
(घ) सेठ जी अपने बच्चे के जन्म दिन पर सभी को दावत खिलाते हैं।
उत्तर
(क) वे मौके की तलाश में रहते हैं कि कब, कैसे, किसी की नाक रगड़वा दें।
(ख) यह कोशिश रहती है कि उसकी नाक न कटवा दें। (ग) आज तुम्हें अच्छा गाना सुनवाती हूँ।
(घ) सेठ जी अपने बच्चे के जन्मदिन पर सभी को दावत खिलवाते हैं।

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Class 7 Chapter 13 Hindi प्रश्न 7.
उदाहरण के अनुसार क्रियारूप परिवर्तन करके लिखिए
खाना, जाना, गाना, पढ़ना, हँसना, रोना, सोना, धोना।
उत्तर

  1. खाकर, खाया
  2. जाकर, गया
  3. गाकर, गाया
  4. पढकर, पढ़ा
  5. हँसकर, हंसा
  6. रोकर, रोया
  7. सोकर, सोया
  8. धोकर, धोया।

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 13 प्रश्न 8.
नीचे उर्दू के शब्द दिए गये हैं, उनके हिन्दी शब्द लिखिए
औकात, आदमी, खानदान, इल्जाम, वक्त, तलाश, जिन्दगी, मर्द।
उत्तर

  1. क्षमता
  2. मनुष्य
  3. कुटुम्ब
  4. दोष
  5. समय
  6. अन्वेषण
  7. जीवन
  8. पुरुष।

अगर नाक न होती परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. नाक की चिन्ता में आदमी का जीना मुहाल हो गया है। नाक रखने की खातिर लोग मुकदमेबाजी में बरबाद हो जाते हैं, कर्ज लेकर भी व्याह-शादी, भात-छोछक आदि में अन्धाधुन्ध खर्च करते हैं। जन्म पर ही नहीं, मृत्यु पर भी दावत खिलाते हैं। खरीदने की औकात न होने पर भी महंगी किश्त देकर टी.वी., फ्रिज या कूलर आदि ले आते हैं, क्योंकि नाक नीची होने से डरते हैं। लोग अपनी धाक जमाने के लिए नाक ऊँची रखते हैं।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘अगर नाक न होती’ नामक पाठ से अवतरित हैं। इसके लेखक ‘गोपाल बाबू शर्मा हैं।

प्रसंग-इस पाठ में लेखक ने अपनी व्यंग्य शैली में नाक के रखने या नाक के कट जाने जैसे मुहावरों का प्रयोग करके बताया है, कि आदमी इस खातिर न जाने कितने आडम्बर युक्त कार्य करता है।

व्याख्या-लेखक कहता है कि आज आदमी अपनी इज्जत रखने की चिन्ता में बड़ी कठिनाई से जीवन जी रहा है। अपनी नाक रखने की (इज्जत रखने की) चिन्ता लगी रहती है, अतः वह मुकदमेबाजी में धन खर्च कर देता है और नष्ट हो जाता है। चाहे उसे ऋण (कर्ज) लेना पड़े. फिर भी विवाह, भात-छोछक जैसे कामों के ऊपर आँख बन्द करके व्यय करता है। लोग बच्चे के जन्म की खुशी पर दावत देते हैं, साथ ही वे मृत्युभोज देकर भी अपना नाम कमा लेने की बात करते हैं। उनकी उतनी हैसियत न हो, पर कितना भी महँगा टी. वी. हो, फ्रिज हो या कूलर हो, इन सबको वे खरीदते हैं। किश्त का ऋण चुकाने के लिए वे परेशान हो सकते हैं, परन्तु उन्हें अपनी नाक नीची होने का भय सताता रहता है। अपनी नाक रखने के लिए (इज्जत बचाने के लिए) वे गलत और अनुचित काम करने से भी पीछे नहीं हटते हैं।

2. नाक के कारण आदमी को नाकों चने चबाने पड़ते हैं। नाक बड़ी जल्दी कटती है और प्रायः बिना किसी हथियार के ही कट जाती है। आदमी की अपनी नाक के साथ खानदान की नाक भी जुड़ी रहती है। कभी कोई ऐसी-वैसी बात हो जाए, लड़का घर से रूठकर भाग जाए, कोई झूठ-मूठा इलजाम जान को लग जाए, तो अपनी ही नहीं, पूरे खानदान की नाक कट जाती है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-अपनी इज्जत रखने के लिए (नाक रखने के लिए) आदमी अनेक तरह की कोशिश करता है।

व्याख्या-आदमी यदि अपनी इज्जत बचाना चाहता है, तो उसे अच्छा खासा परिश्रम करना पड़ता है। आज आदमी की नाक (इज्जत) बड़ी जल्दी ही चली जाती है (कट जाती है), इस काम के लिए उसे किसी हथियार आदि का प्रयोग भी नहीं करना पड़ता। अकेले उस आदमी की ही नहीं, उसके परिवार के, उसके सम्बन्धी लोगों की भी नाक चट से कट जाती है। उनकी इज्जत चली जाती है। छोटी-मोटी घटना के घट जाने से उस आदमी के सम्बन्धियों आदि की भी इज्जत समाप्त हो जाती है। चाहे उनके घर-परिवार में छोटी-से-छोटी घटना ही क्यों न घट जाए-वह भी बहुत महत्वपूर्ण बात मानी जाती है।

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3. जब आदमी का बुरा वक्त आता है, या उसे किसी सेकोई काम करवाना होता है, तब वह सारी हेकड़ी भूल जाता है। एक बार क्या हजार बार नाक रगड़ता है। जब कोई गलती हो जाती है, तब भी आदमी को अपनी नाक रगड़नी पड़ती है। जिन लोगों में बदले या ईर्ष्या की भावना होती है, वे भी मौके की तलाश में रहते हैं कि कब, कैसे किसी की नाक रगड़वा दें।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-आदमी के ऊपर बुरे समय के आने पर भी उसे अपनी इज्जत बचाने के लाले पड़ सकते हैं।

व्याख्या-आदमी के जब खराब दिन आते हैं, तो वह अपना सारा अक्खड़पन भूल जाता है। उसे अपने काम करवाने के लिए अनेक बार अपनी इज्जत की परवाह न करते हुए भी नीचे दर्जे का व्यवहार करने पर उतारू रहना पड़ता है। अपनी गलती के लिए भी आदमी को अपनी आत्मा के विरुद्ध आचरण अपनाना पड़ता है। ऐसी विपरीत दशा में, कुछ लोग जो जलनशील स्वभाव के होते हैं अथवा जो बदला लेना चाहते हैं, वे भी अपने ऐसे मौके की तलाश जारी रखते हैं, जिसमें वे अपने विरोधी की नाक काटना चाहते हैं। वे उसे नीचा दिखाना चाहते हैं।

4. गुस्सा भी बहुत से लोगों की नाक पर रखा रहता है। उनसे जरा कुछ कहा नहीं कि बिना बात नाक फुला लेते हैं। नाक में जितनी कमियाँ या बुराइयाँ हैं, उससे ज्यादा अच्छाइयाँ हैं इसलिए जिनकी नाक नहीं होती है, वे भी नाक लगाते हैं, भले ही इस बात पर कोई दूसरा नाक भौंह सिकोड़े तो सिकोड़ता रहे।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-बहुत जल्दी ही नाराज हो जाने वाले आदमियों पर – व्यंग्य कसा जा रहा है।

व्याख्या-लेखक कहता है कि कुछ लोग इस तरह के होते हैं कि वे छोटी-छोटी बातों पर नाराज हो जाते हैं। उनसे चाहे, उनके फायदे की ही बात क्यों न कही जायें, परन्तु फिर भी वे अपनी नाक फुला लेते हैं अर्थात् अपना क्रोध प्रकट कर बैठते हैं। इस तरह नाक से सम्बन्धी अनेक बुराइयाँ हो सकती हैं, अनेक कमियाँ हो सकती हैं, परन्तु हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि नाक से अनेक लाभ भी हैं, क्योंकि शरीर के एक अंग होने की दशा में नाक अपना अलग ही महत्व रखती है जिसे कटने से – बचाये रखने के लिए अति खर्चीले काम भी करने पड़ते हैं।

अगर नाक न होती शब्दकोश

मुहाल = कठिन औकात = हैसियत; हेकड़ी = अकड़, अड़ना; फ्रन्ट = मुकाबला या सामना; नक्कूशाह- अपने आपको बड़ा समझने वाला; निःश्वास = श्वास निकाल देना, बिना सांस लिए; नाक नीची होना – अपमानित होना; नाक बचाना = सम्मान की रक्षा करना; भात-छोछक = विवाह अथवा बच्चे के जन्म के समय पर मामा के द्वारा दिया जाने वाला । भेंट; फुरेरी = सींक व तिनके के सिरे पर लिपटी हुई रुई जिस पर इत्र, तेल आदि चुपड़ा जाता है; चोथ = गाय, भैंस का गोबर,सुतवाँ = लम्बी, पतली; उच्छ्वास = लम्बी साँसें, गहरी साँसे; नाक रखना = सम्मान रखना; नाक जमाना = प्रभाव छोड़ना; नाकों चने चबाना = बहुत कष्ट सहना; असम्मानित होना = अनादरित होना; मान न मान मैं तेरा मेहमान = जबरदस्ती करना; नाक फुलाना = रूठ जाना; हाथ के तोते उड़ जाना = घबरा जाना; नानी याद आना = बड़े संकट में पड़ जाना; न बैठने देना = चैन न लेने देना; नाक नचाना = परेशान करना; सिर खाना = परेशान करना; नाक का बाल बनना बहुत प्रिय होना; आँख दिखाना = हीनता प्रकट करना; पीठ दिखाना =घर के लिए भाग जाना; नाक रगड़ना-मिन्नतें करना; गुस्सा नाक पर रखा होना – जल्दी नाराज हो जाना; सोने में सुहागा – अच्छी वस्तु में और अधिक अच्छाई; चार चाँद लगाना – सुन्दरता बढ़ जाना नाक पर मक्खी तक न बैठने देना- अपने विरुद्ध कुछ भी न सुनना; नाक के नीचे होना = उपस्थिति में, मौजूदगी में, नाक रहना = सम्मान बचे रहना; मुँह की खाना = घर जाना, अपमानित होना; सिंगट्टा दिखाना = बेवकूफ बना देना, प्रार्थना न सुनना; दाँत दिखाना = हीनता प्रकट करना।

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भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 5 मध्यप्रदेश का वैभव प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 5 Madhya Pradesh ka Vaibhav Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 5 Madhya Pradesh ka Vaibhav Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 5 Madhya Pradesh Ka Vaibhav प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए
(क) नर्मदा नदी को मध्यप्रदेश की जीवनरेखा क्यों कहा गया है ?
उत्तर-
नर्मदा नदी मध्यप्रदेश के एक बड़े भू-भाग से होकर गुजरती है। मध्य प्रदेश के कई छोटे-बड़े शहर इसके किनारे बसे हैं। अपने उद्गम स्रोत अमरकंटक से लेकर खम्भात की खाड़ी (गुजरात) तक के मार्ग में यह नदी मध्यप्रदेश की धरती को अपने जीवनदायक जल से अभिसिंचित करती है। फलस्वरूप इसे मध्यप्रदेश की जीवनरेखा कहा गया है।

(ख) पचमढ़ी में कौन-कौन से दर्शनीय स्थल हैं ?
उत्तर-
पचमढ़ी में अनेक दर्शनीय स्थल, जैसे धूपगढ़, चौरागढ़, महादेव मन्दिर एवं सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुपम दृश्य इत्यादि हैं। यहाँ पर स्थित पाँच गुफाएँ पौराणिक महत्त्व रखती

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(ग) चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य इतिहास में क्यों अमर हैं ?
उत्तर-
विक्रम संवत् को प्रारम्भ करने वाले प्रख्यात सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य अवन्तिका (उज्जैन) के राजा थे। वे अपनी न्यायप्रियता, बुद्धिमत्ता, विवेकपूर्ण निर्णय और प्रजापालन आदि के लिए इतिहास में अमर हैं।

(घ) अवन्तिका का वर्तमान नाम क्या है ? तथा यह क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर-
अवन्तिका का वर्तमान नाम उज्जैन है। उज्जैन में प्रसिद्ध ज्योतिर्लिङ्ग महाकाल का मन्दिर है जो भारत के बारह ज्योतिर्लिङ्गों में से एक है। श्रीकृष्ण की शिक्षा से जुड़ा पौराणिक महत्व का सांदीपनी आश्रम भी यहीं पर है। प्रत्येक बारह वर्ष के अन्तराल पर उज्जैन में कुम्भ मेला आयोजित होता है। इसे सिंहस्थ पर्व भी कहते हैं।

(ङ) मध्यप्रदेश के मुख्य लोकनृत्य, लोकनाट्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर-
मध्यप्रदेश के मुख्य लोकनृत्य राई, सैरी, बधावा, ढिमरहाई इत्यादि हैं तथा ढोलामारू, माच और स्वांग इत्यादि यहाँ के प्रमुख लोक नाट्य हैं।

(च) मध्यप्रदेश की मुख्य बोलियाँ कौन-कौन सी हैं ?
उत्तर-
मध्यप्रदेश में प्रमुख रूप से हिन्दी बोली जाती है, – किन्तु अन्य बोलियों के रूप में बुन्देली, मालवी, भीली, बघेली, निमाड़ी इत्यादि बोलियों को बोलने वाले लोगों की संख्या भी काफी है।

(छ) मध्यप्रदेश को लघु भारत क्यों कहा गया है ?
उत्तर-
मध्यप्रदेश में विभिन्न धर्मों, रीति-रिवाजों व मान्यताओं के लोग परस्पर भाईचारे और सद्भाव से निवास करते हैं। प्रदेश में महाराष्ट्र का गणेश उत्सव, बंगाल की दुर्गा पूजा तथा उत्तर भारत की विजयादशमी और दीपावली के साथ-साथ होली, ईद, क्रिसमस जैसे त्यौहार भी उत्साहपूर्वक मनाये जाते हैं। वास्तव में, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से सम्पन्न मध्यप्रदेश, लघु भारत जैसा ही है।

MP Board Class 7th Hindi Chapter 5 प्रश्न 2.
खाली स्थान भरिए
(क) मैहर में ………………………………” का मन्दिर है।
(ख) कवि केशव की प्रसिद्ध कृति ……………………………… है।
(ग) झाबुआ का भाभरा ग्राम ……………………………… की जन्म स्थली है।
(घ) प्राचीनतम स्तूपों के लिए ……………………………… विख्यात है।

14 शिवलाल दिग्दर्शिका सम्पूर्ण विषय : कक्षा

(ङ) रीवा में स्थित ……………………………… जलप्रपात दर्शनीय है।
उत्तर-
(क) माँ शारदा,
(ख) रामचन्द्रिका,
(ग) चन्द्रशेखर आजाद,
(घ) साँची,
(ङ) चचाई।

Madhya Pradesh Ka Vaibhav प्रश्न 3.
निम्नलिखित विकल्प वाले प्रश्नों के सही उत्तर छाँटकर लिखिए
(क) इन्दौर शहर के राजवाड़ा में राजभवन है
(1) लोकमाता अहिल्याबाई का
(2) लक्ष्मीबाई का
(3) सुभद्रा कुमारी का
(4) दुर्गावती का।

(ख) बुंदेली के पितृपुरुष हैं
(1) डॉ. सर हरिसिंह गौर
(2) ईसुरी।
(3) भूषण
(4) पद्माकर।

(ग) भारत-भवन स्थित है
(1) इन्दौर में
(2) जबलपुर में :
(3) दिल्ली में
(4) भोपाल में।

(घ) दतिया प्रसिद्ध है
(1) शारदा देवी मन्दिर के लिए
(2) पीताम्बरा पीठ के लिए
(3) बाबनगज प्रतिमा के लिए
(4) शालभंजिका के लिए।
उत्तर-
(क) (1) लोकमाता अहिल्याबाई का,
(ख) (3) भूषण,
(ग) (4) भोपाल में,
(घ) (2) पीताम्बरा पीठ के लिए।

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Bhasha Bharti Class 7 Chapter 5 प्रश्न 4.
निम्नलिखित दर्शनीय स्थलों और नगरों की सही जोड़ी बनाइए
(क) कामदगिरी। – (i) विदिशा
(ख) उदयगिरी – (ii) माँडवगढ़
(ग) माण्डू – (iii) साँची
(घ) हीरों की खान – (iv) चित्रकूट
(ङ) बौद्ध-स्तूप – (v) पन्ना
उत्तर-
(क) → (iv)
(ख) → (i)
(ग) → (ii)
(घ) → (v)
(ङ) → (iii)

भाषा अध्ययन

Class 7 Hindi Chapter 5 Mp Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के दो अर्थ लिखिए-
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 5 श्री मुफ्तानन्दजी से मिलिए 1

Class 7th Hindi Chapter 5 Madhya Pradesh Ka Vaibhav प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
तोरण-द्वार, पाषाण-कालीन, हृदय-स्थली, जीवन-रेखा, | भरत-मिलाप, प्रस्तर-प्रतिमा
उत्तर-
(क) तोरण-द्वार-श्रीराम के वनवास से वापस लौटने पर कई तोरण-द्वार बनाये गये।
(ख) पाषाण-कालीन-हड़प्पा की खुदाई से कई पाषाण-कालीन तथ्य उजागर हुए हैं।
(ग) हृदय-स्थली-मध्यप्रदेश, भारत की हृदय-स्थली है।
(घ) जीवन-रेखा-गंगा नदी भारत की जीवन रेखा है।
(ङ) भरत-मिलाप-रामलीला के दौरान भरत-मिलाप की लीला देखकर दर्शकों की आँखें भर आईं।
(च) प्रस्तर-प्रतिमा-पास के मन्दिर में गणेश की एक भव्य प्रस्तर-प्रतिमा स्थापित की गई है।

MP Board Class 7 Hindi Chapter 5 प्रश्न 3.
शब्दों के अन्त में ‘ता’, ‘तम’ तथा ‘कार’ प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए।
उत्तर-
‘ता’ प्रत्यय-सम + ता = समता; नीच + ता = नीचता; हीन + ता = हीनता।
“तम’ प्रत्यय-सरल + तम = सरलतम; कठिन + तम = कठिनतम; विशाल + तम = विशालतम!
‘कार’ प्रत्यय-उप + कार = उपकार; सर + कार = सरकार, कला + कार = कलाकार।

Class 7th Hindi Chapter 5 Mp Board प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों में शब्दों को सही क्रम में लिखिए
(क) शान हैं अहिल्याबाई मालवा की।
उत्तर-
अहिल्याबाई मालवा की शान हैं।

(ख) भारत की हृदयस्थली है मध्यप्रदेश।
उत्तर-
मध्यप्रदेश भारत की हृदयस्थली है।

(ग) पवित्र नदियों क्षिप्रा में से मध्यप्रदेश की एक है।
उत्तर-
क्षिप्रा मध्यप्रदेश की पवित्र नदियों में से एक है।

(घ) उदाहरण हैं खजुराहो के मन्दिर स्थापत्य कला के।
उत्तर-
खजुराहो के मन्दिर स्थापत्य कला के उदाहरण हैं।

Class 7 Hindi Bhasha Bharti Chapter 5 प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों में से संयुक्त क्रियाएँ छाँटकर लिखिए
(क) कवि बिहारी का सम्बन्ध भी ओरछा से जुड़ा हुआ
(ख) भोपाल झीलों की नगरी के रूप में जाना जाता है।
(ग) भीमबेटका की गुफाएँ मध्य पाषाणकालीन मानव इतिहास का वैभव संजोए हैं।
(घ) किले अपनी भव्यता की कथा कहते रहते हैं।
(ङ) माण्डू के भग्नावशेष राजा बाजबहादुर और रानी रूपमती की कथा कहते प्रतीत होते हैं।
उत्तर-
(क) जुड़ा हुआ है,
(ख) जाना जाता है,
(ग) संजोए है,
(घ) कहते रहते हैं,
(ङ) कहते प्रतीत होते हैं।

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मध्यप्रदेश का वैभव परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है। पुराणों में इसे मोक्षदायिनी कहा गया है। अमरकंटक से चलकर पश्चिम की ओर बहती हुई खम्भात की खाड़ी (गुजरात) में मिलती है। भेड़ाघाट पर नर्मदा का जल-प्रपात संगमरमर की चट्टानों के बीच ‘धुआँधार’ के रूप में विख्यात है। इसके तट पर बसे नगर महेश्वर और ओंकारेश्वर तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध हैं।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘मध्यप्रदेश का वैभव’ नामक पाठ से अवतरित है। यह एक संकलित रचना है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में मध्यप्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली नर्मदा नदी का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-नर्मदा नदी को मध्यप्रदेश की जीवनरेखा कहा जाता है। हमारे पुराणों में तो इसके महत्त्व पर प्रकाश डालते “हुए इसे मोक्षदायिनी, अर्थात् मोक्ष प्रदान करने वाली कहा गया है। नर्मदा का उद्गम अमरकंटक नामक स्थान से हुआ है। वहाँ से अपनी यात्रा प्रारम्भ करके यह पश्चिम की ओर बहती हुई गुजरात में खम्भात की खाड़ी में पहुँचकर विश्राम करती है। इस। यात्रा के दौरान यह मध्यप्रदेश के कई नगरों व कस्बों को अपने जीवनदायक जल द्वारा अभिसिंचित करती है। नर्मदा नदी का अत्यन्त सुन्दर स्वरूप भेड़ाघाट में देखा जा सकता है, जहाँ यह जल-प्रपात के रूप में संगमरमर की ऊँची व विशालकाय चट्टानों के बीच से निकलती है। इस स्थान को ‘धुआँधार’ के नाम से जाना जाता है। अन्य अनेकों नगरों के अतिरिक्त इसके किनारे पर महेश्वर और ओंकारेश्वर नामक दो ऐतिहासिक नगर बसे हैं। जो तीर्थस्थान के रूप में विख्यात हैं।

2. “सांस्कृतिक, ऐतिहासिक दृष्टि से सम्पन्न हमारा मध्यप्रदेश, लघु भारत ही है। मध्यप्रदेश के वैभव की मिठास यहाँ के निवासियों के हृदय में रची-बसी है।”

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में मध्यप्रदेश को लघु भारत की संज्ञा दी गई है।

व्याख्या-मध्यप्रदेश में विभिन्न धर्मों, रीति-रिवाजों व मान्यताओं के लोग परस्पर भाईचारे और सद्भाव से निवास करते हैं। यहाँ भारत के अन्य सभी प्रदेशों में मनाये जाने वाले पारम्परिक तीज-त्यौहार मनाये जाते हैं। अतः सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक रूप से समृद्ध मध्य प्रदेश को लघु भारत कहना ठीक ही है। मध्यप्रदेश के गौरवशाली अतीत की मिठास इस प्रदेश के निवासियों के मन में आज भी विद्यमान है तथा जिसे उनके व्यवहार से महसूस किया जा सकता है।

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मध्यप्रदेश का वैभव शब्दकाश

दर्शनीय = दर्शन के योग्य; मनोरम = सुन्दर, मन में रमने वाला; वैभव = सम्पत्ति, सम्पन्नता; पाषाण = पत्थर; मनोहारी = मन को अच्छा लगने वाला, मन को हरने वाला; सैलानी = पर्यटक, घूमने वाला; पुरा वैभव = प्राचीन-वैभव; नैसर्गिक = प्रकृति से सम्बन्धित; प्रतीक = चिह्न, संकेत; प्रस्तर = पत्थर; सृजन = रचना, किसी वस्तु का निर्माण करना; मोक्षदायिनी = मोक्ष देने वाली; अलंकृत = सजी हुई; भव्यता = सुन्दरता, विशालता; प्रतिस्पर्धा = टक्कर, मुकाबला; निसर्ग = प्रकृति; शैलाश्रय = पर्वतों में आदिम मनुष्यों के आवास स्थल, गुफाएँ; नक्काशी = बेलबूटे, चित्र बनाना; समाधि = मृत्यु के बाद बना हुआ स्मृति स्थल; उक्ति = कही गई बात, कहावत; जिजीविषा = जीने की इच्छा, जीवटता; शालभंजिका = विश्वप्रसिद्ध प्रतिमा।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 7 नीति के दोहे प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 7 Niti ke Dohe Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 7 Niti ke Dohe Questions and Answers

नीति के दोहे बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 7 Niti Ke Dohe प्रश्न 1.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर लिखिए
(क) कवि के अनुसार अति कहाँ-कहाँ वर्जित है ?
उत्तर
कवि के अनुसार अति हर जगह वर्जित है।

(ख) कबीर के अनुसार निन्दक को निकट रखने से क्या लाभ हैं?
उत्तर
कबीर के अनुसार निन्दक को पास रखने से हमारे सभी दोष दूर हो जाते हैं।

(ग) ‘एकै साधे सब सधे से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर
‘एकै साधे सब सधे’ से तात्पर्य है कि किसी एक की मानने से सभी मन जाते हैं अर्थात् किसी आधार को साधकर रखने से सभी आधार स्वयं ही सध जाते हैं।

(घ) कवि तुलसीदास ने ‘काया’ और ‘मन’ की तुलना किससे की है?
उत्तर
कवि तुलसीदास ने ‘काया’ की तुलना खेत से और ‘मन’ की तुलना किसान से की है ?

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(ङ) ‘संत हंस गुन गहहि पय’ से कवि का क्या आशय
उत्तर
उपर्युक्त सुक्ति में कवि यह बताना चाहता है कि संत उस हंस के समान है जो जल (दोष) को छोड़कर दूध (गुण) को ग्रहण कर लेता है।

(च) कवि वृन्द ने सज्जन पुरुष के स्वभाव की क्या विशेषता बताई है ?
उत्तर
कवि वृन्द के अनुसार सज्जन पुरुष कभी भी, किन्हीं भी परिस्थितियों में अपनी सज्जनता का त्याग नहीं करते

(छ) भरपूर वर्षा कब होती है?
उत्तर
जब कलसे (कलश) का पानी गर्म हो, चिड़िया धूल में नहाए तथा चींटी अण्डा लेकर चले तो भरपूर वर्षा होने की सम्भावना होती है।

(ज) चने की अच्छी खेती किस प्रकार की मिट्टी में होती है ?
उत्तर
चने की अच्छी खेती ढेलेदार मिट्टी में होती है।

नीति के दोहे Class 7 प्रश्न 2. नीचे लिखे चार-चार विकल्पों में से सही विकल्प को छाँटकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(क) कवि के अनुसार कुल्हाड़ी को ……. सुगन्धित करता है।
(1) फूल
(2) चन्दन
(3) हवा
(4) भौरा।
उत्तर
(2) चन्दन

(ख) रहिमन ……. कब कहै, लाख टका मेरो मोल।
(1) चाँदी
(2) लोहा
(3) सोना
(4) हीरा।
उत्तर
(4) हीरा।

(ग) तुलसीदास ने सन्त को….. के समान कहा है।
(1) कौआ
(2) हंस
(3) बगुला
(4) कोयल।
उत्तर
(2) हंस

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(घ) कवि के अनुसार …….. बिना साबुन के स्वभाव को साफ करता है।
(1) रिश्तेदार
(2) पड़ोसी
(3) मित्र
(4) निंदक।
उत्तर
(4) निंदक

(ङ) घाघ और भड्डरी की कहावतों के अनुसार धूल में ………. नहाती है।
(1) चिड़िया
(2) मोरनी
(3) कोयल
(4) मुर्गी।
उत्तर
(1) चिड़िया

(च) गेहूँ की अच्छी खेती ……… होती है।
(1) पीली मिट्टी में
(2) काली मिट्टी में
(3) ढेले वाली मिट्टी में
(4) मैदे के समान बारीक मिट्टी में।
उत्तर
(4) मैदे के समान बारीक मिट्टी में।

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Bhasha Bharti Class 7 Chapter 7 प्रश्न 3.
निम्नांकित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए
(क) करता था सो क्यों किया, अब करि क्यों पछताय।
बोया पेड़ बबूल का, अम्ब कहाँ से खाय॥

(ख) करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत-जात तें, सिल पर परत निसान।
उत्तर
‘परीक्षोपयोगी पद्यांशों की व्याख्या’ नामक शीर्षक देखें।

Class 7th Hindi Chapter 7 Niti Ke Dohe प्रश्न 4. निम्नांकित भावों के लिए दोहों में से उचित पंक्ति छाँटकर लिखिए
(क) महान पुरुष अपनी प्रशंसा स्वयं नहीं करते।
उत्तर
बड़े बड़ाई ना करें, बड़े न बोलें बोल॥

(ख) अधिक बोलना व अधिक चुप रहना अच्छा नहीं होता।
उत्तर
अति का भला न बोलना अति की भली न चूप॥

भाषा अध्ययन

MP Board Class 7th Hindi Chapter 7 प्रश्न 1.निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए
पछताय, सुभाय, चूप, काज, पोहिये, मोल, आस, नास, पौन, रसरी, निसान, सजनता, बरखा, घर, खेत।
उत्तर
शब्द
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 7 नीति के दोहे 1

Neeti Ke Dohe Class 7 प्रश्न 2.
निम्नलिखित के दो-दो पर्यायवाची शब्द लखिए
पेड़, पवन, पानी, सरोवर, फूल, नदी, पक्षी।
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 7 नीति के दोहे 2

Class 7 Hindi Chapter 7 Mp Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के सामने दिए गए उनके अर्थ मिलाइए
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 7 नीति के दोहे 3
उत्तर
(1)→ (घ), (2)→ (ङ), (3)→ (क), (4)→ (ख), (5)→ (ग)

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नीति के दोहे कबीर

1. यह ऐसा संसार है, जैसा सेमल फूल।
दिन दस के ब्यौहार को, झूठे रंगि न भूल॥

शब्दार्थ-व्यौहार = व्यवहार; रंगि = रंग।

सन्दर्भ-प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘नीति के दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता कबीर हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में कबीर ने मनुष्य को नाशवान संसार से सावधान किया है।

व्याख्या-कबीर मनुष्य को समझाते हुए कहते हैं कि यह संसार सेमल के फूल के समान क्षणिक है। जिस प्रकार सेमल का फूल देखने में तो सुन्दर लगता है, किन्तु सारहीन होता है, शीघ्र ही नष्ट हो जाता है; उसी प्रकार यह संसार सुहावना लगता है, किन्तु उसका यह आकर्षक रूप क्षणिक है। इसलिए मनुष्य को संसार के थोड़े दिन के इस चमत्कार की चकाचौंध के भ्रम से बचना चाहिए।

2. करता था सो क्यों किया, अब करि क्यों पछताय।
बोया पेड़ बबूल का, अम्ब कहाँ से खाय।।

शब्दार्थ-पछताय- पछताना; अम्ब-आम। सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में कबीर ने करने से पूर्व सोचने के लिए कहा है।

व्याख्या-कबीर कहते हैं कि मनुष्य को किसी के प्रति कोई भी काम करने से पहले अच्छी तरह विचार कर लेना चाहिए। गलत काम करने पर प्राप्त परिणाम को देखकर बाद में पछताना मूर्खता है। वे कहते हैं कि यदि तुम कड़वा बबूल बोओगे तो बदले में कड़वा फल ही पैदा होगा। आम की कल्पना अथवा उम्मीद भी करना बेमानी है। अर्थात् प्रत्येक मनुष्य अपनी करनी के अनुसार ही फल प्राप्त करता है।

3. निन्दक नियरे राखिए, आँगन कुटी छबाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय॥

शब्दार्थ-निन्दक- निन्दा करने वाला; नियरे = पास में; कुटी = कुटिया; निर्मल = साफ, स्वच्छ; सुभाय = स्वभाव।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में निन्दा करने वाले को मित्र बनाने की बात कही गई है।

व्याख्या-कबीर कहते हैं कि मनुष्य को सदैव अपनी निन्दा करने वाले का स्वागत करना चाहिए और उसे अपने पास रखना चाहिए। वास्तव में, निन्दा करने वाला व्यक्ति बिना पानी और साबुन के तुम्हारे व्यवहार में से तुम्हारे दोषों को दूर कर तुम्हारे स्वभाव को स्वच्छ और कोमल बना सकता है।

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4. अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।

शब्दार्थ-अति = अधिक; चूप = चुप।। सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में कबीर ने किसी भी चीज की अति को गलत बताया है।

व्याख्या-कबीर कहते हैं कि मनुष्य को सामान्य एवं सन्तुलित व्यवहार करना चाहिए। जिस प्रकार पानी की आवश्यकता प्रत्येक जीवधारी को होती है, किन्तु आवश्यकता से अधिक अथवा अत्यधिक वर्षा से प्रलयकारी बाढ़ आ जाती है, जरूरत से ज्यादा धूप भी मनुष्य और पेड़-पौधों को झुलसाने लगती है, ज्यादा बोलना भी मूर्खता की निशानी माना जाता है तथा समय पर न बोलना अर्थात् अत्यधिक चुप्पी भी नुकसानदेह होती है। ठीक इसी प्रकार मनुष्य को किसी भी कार्य में ‘अति’ से बचना चाहिए।

नीति के दोहे रहीम

1. तरुवर फल नहीं खात हैं, सरवर पियहिन पान।
कहि रहीम परकाज हित, सम्पत्ति संचहि सुजान।॥

शब्दार्थ-तरुवर = वृक्ष; सरवर = तालाब; पान = जल; परकाज-दूसरों का कार्य संचहि- इकट्ठा करना।

सन्दर्भ-प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘नीति के दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता रहीम हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने सज्जन पुरुषों की तुलना । वृक्ष व तालाब से की है।

व्याख्या-रहीम कहते हैं कि असंख्य मीठे व सरस फलों से लदे वृक्ष अपने फल को स्वयं नहीं खाते हैं और न ही अथाह जल को स्वयं में समेटे तालाब अपना पानी स्वयं पीता है। वे सदैव औरों का ही भला करते हैं। ठीक उसी प्रकार, सज्जन लोग दूसरों के कार्यों को पूरा करने के लिए अर्थात् परोपकार हेतु धन एकत्रित करते हैं।

2. एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहिं सीचिबो फूले फलै अघाय॥

शब्दार्थ-मूलहिं – जड़ को; सींचिबो = सींचना।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने ‘मूल’ की महत्ता पर प्रकाश डाला है।

व्याख्या-रहीम कहते हैं कि जिस प्रकार वृक्ष के मात्र एक स्थान-मूल (जड़) को सींचने से पूरा पेड़ फलता-फूलता है, ठीक उसी प्रकार मनुष्य को किसी एक मूल (आधार) को साधना चाहिए। एक मूल के साधने पर सब अपने आप ही सध जाते हैं अर्थात् सब कुछ प्राप्त हो जाता है। इसके विपरीत सबको साधने की हालत में सब कुछ चला जाता है अर्थात् कोई भी कार्य नहीं बनता।

3. बड़े बड़ाई ना करें, बड़े न बोलैं बोल।
रहिमन हीरा कब कहैं, लाख टका मेरो मोल॥

शब्दार्थ-बडाई प्रशंसा: टका-मद्रा। सन्दर्भ-पूर्व की तरह। ।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में रहीम ने मनुष्य को बड़बोलेपन से बचने की सलाह दी है।

व्याख्या-रहीम कहते हैं कि जिस प्रकार हीरा अमूल्य रल होते हुए भी अपने मूल्य का आकलन स्वयं नहीं करता, बल्कि सामान्य पत्थरों की भाँति पड़ा रहता है, ठीक उसी प्रकार महान् व्यक्ति भी कभी भी ऊँचे बोल नहीं बोलता और न ही स्वयं ही अपनी प्रशंसा में ऊँची-ऊँची बातें बनाता है।

नीति के दोहे तुलसीदास

1. तुलसी काया खेत है, मनसा भयो किसान।
पाप, पुण्य दोऊ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥

शब्दार्थ-काया = शरीर; दोऊ = दोनों।

सन्दर्थ-प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा भारती’ के ‘नीति के दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता तुलसीदास हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में तुलसीदास ने ‘जैसा बोओगे वैसा काटोंगे’ कहावत पर बल दिया है।

व्याख्या-तुलसीदास जी कहते हैं कि मानव का शरीर किसान की उपजाऊ भूमि अर्थात् खेत के समान है तथा उसका मन स्वयं एक मेहनतकश किसान है। पाप और पुण्य दो बीज है जिन्हें अपने विवेक के अनुसार किसान को अपने खेत में बोना । है। यदि वह पाप का बीज बोयेगा तो प्राप्त होने वाली फसल
अनिष्टकारी होगी किन्तु यदि वह पुण्य के बीज अपने खेत में बोयेगा तो कड़े परिश्रम से प्राप्त फसल अत्यन्त शुभकारी होगी। अब यह मनुष्य के स्वयं के हाथ में है कि वह कैसा फल प्राप्त करना चाहता है।

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2. मिथ्या माहुर सज्जनहि, खलहि गरल सम साँच।
तुलसी छुअत पराइ ज्यों, पारद पावक आँच॥

शब्दार्थ-मिथ्या = असत्य; माहुर = विष, गरल = विष; पारद = पारा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में तुलसीदास जी ने सज्जन और दर्जन ‘ के स्वभाव का वर्णन किया है।

व्याख्या-तुलसीदास जी कहते हैं कि सज्जन लोगों के लिए असत्य विष के समान है, जबकि दुर्जन व्यक्ति के लिए । सत्य विष के समान कष्टदायक है। ये दोनों इनके स्पर्श मात्र से ठीक वैसे ही दूर हो जाते हैं जिस प्रकार आग की ऊष्मा पाकर | पारा हो जाता है। कहने का ताल्पर्य यह है कि सज्जन से झूठ और
दुर्जन से सत्य सदैव दूर ही रहते हैं।

3. जड़ चेतन गुन दोष मय, बिस्व कीन्ह करतार।
संत हंस गुन गहहिं पय, परिहरि वारि विकार।

शब्दार्थ-गुन = गुण। पय = दूध।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में तुलसीदास जी ने भगवान द्वारा रचित संसार को गुणों और दोषों से युक्त बताया है।

व्याख्या-तुलसीदास जी कहते हैं कि ईश्वर द्वारा रचित इस संसार में गुण और दोष समान रूप से व्याप्त हैं। यहाँ के जड़ और चेतन जीव गुणों और दोषों दोनों से युक्त हैं, परन्तु सज्जन – लोग हंस की तरह जलरूपी बुराई को छोड़कर, दूध (गुण) को ग्रहण कर लेते हैं।

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नीति के दोहे वृनीति के दोहे

1. विद्या-धन उद्यम बिना, कहाँ जु पावै कौन।
बिना डुलाए ना मिले, ज्यों पंखा को पौन॥

शब्दार्थ-उद्यम – परिश्रम; पौन – पवन।

सन्दर्भ-प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘नीति के दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता कविवर वृन्द हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में परिश्रम के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है।

व्याख्या-वृन्द कहते हैं कि जिस प्रकार गर्मी के समय में बिना पंखे को घुमाये (परिश्रम किए) उसकी हवा का आनन्द नहीं लिया जा सकता है, ठीक उसी प्रकार विद्या रूपी धन को बिना परिश्रम किये प्राप्त नहीं किया जा सकता है। अर्थात् प्रत्येक मनुष्य को अभीष्ट की प्राप्ति हेतु अथक मेहनत करनी चाहिए।

2. करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रंसरी आवत-जात तें, सिल पर परत निसान।।

शब्दार्थ-जड़मति = मूर्ख; सुजान = चतुर; रसरी = रस्सी; सिल- पत्थर।
सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में कवि ने निरन्तर अभ्यास के चमत्कारिक परिणामों के बारे में बताया है।

व्याख्या-कविवर वृन्द कहते हैं कि जिस प्रकार मामूली रस्सी के कुएँ के पत्थर पर निरन्तर आने-जाने (ऊपर-नीचे होने) से पत्थर तक घिसने लगता है अर्थात् उस पर निशान पड़ जाते हैं, ठीक उसी प्रकार लगातार अभ्यास करने से मूर्ख से मूर्ख मनुष्य भी चतुर व गुणी बन सकता है। अतः मनुष्य को किसी भी कार्य में वांछित सफलता की प्राप्ति के लिए सतत् प्रयास और निरन्तर अभ्यास करते रहना चाहिए।

3. सज्जन तजत न सजनता, कीन्हेषु दोष अपार।
ज्यों चन्दन छेदै तऊ सुरभित करै कुठार॥

शब्दार्थ-तजत = छोड़ना; कुठार = कुल्हाड़ी।

सन्दर्भ- पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत दोहे में कवि ने सज्जन लोगों के सज्जनता न छोड़ने के गुण का वर्णन किया है।

व्याख्या-कविवर वृन्द कहते हैं कि सज्जन लोग कभी भी अपनी सज्जनता नहीं त्यागते चाहे उनके प्रति कैसा भी कठोरतम् व्यवहार ही क्यूँ न किया जाए। ऐसे लोगों का स्वभाव चन्दन के उस वृक्ष के समान होता है जो उसको काटने वाली कुल्हाड़ी के दोषों को क्षमा करके उसे भी अपनी सुगन्ध से सुगन्धित कर देता है।

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नीति के दोहे घाघ और भड्डरी
(मौसम और कृषि सम्बन्धी कहावतें)

1. कलसे पानी गरम हो, चिड़िया न्हावें धूर।
अण्डा लै चींटी चले, तो बरखा भरपूर॥

शब्दार्थ-कलसे = पानी भरने का पात्र, कलशा; न्हावै – नहाना; धूर-धूल;, बरखा – वर्षा।

सन्दर्भ-प्रस्तुत कहावत हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘नीति के दोहे’ नामक पाठ से ली गई है। इसके रचयिता घाघ और भड्डरी हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों को भौंपकर भविष्य के मौसम की सम्भावना को आंका जा सकता है।

व्याख्या-प्रस्तुत कहावत में कहा गया है कि जब कल्से का पानी गरम हो, चिड़िया धूल में नहाए और चीटी अण्डा लेकर चले तो भरपूर वर्षा होने की सम्भावना रहती है।

2. मैदे गेहूँ, ढेले चना।

शब्दार्थ-ठेले – ढेलेदार मिट्टी।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-किस प्रकार की मिट्टी में कौन-सी फसल बोई जाए, इसका वर्णन अत्यन्त सरल शब्दों में किया गया है।

व्याख्या-इस कहावत में कहा गया है कि मैदे की तरह बारीक मिट्टी में गेहूँ और ढेलेदार मिट्टी में चने की फसल बोने से पैदावार अच्छी होती है।

नीति के दोहे शब्दकोश

मिथ्या = झूठा, असत्य; करि = करना; अति = अधिक, ज्यादा; निंदक = बुराई करने वाला; निर्मल = स्वच्छ, साफ; तरुवर = पेड़; सरवर = सरोवर, तालाब; पान = पीना, एक विशेष प्रकार का पत्ता या बेल; पर दूसरा, पंख; संचहि – इकट्ठा करना; पोहिए = पिरोना; सुजान = समझदार, सज्जन, सयाना; गरल = विष, जहर; वशीकरण = वश में करना; तज – त्यागना; पातक = पाप, अपराध; पौन = पवन, तीन-चौथाई; उद्यम = उद्योग, परिश्रम; डुलाए = झूला झुलाना; जड़मति = मूर्ख, बुद्धिहीन; सिल = पत्थर; सुरभित – सुगन्धित; कुठार = कुल्हाड़ी; वारि = जल; पय = दूध; गहहिं = ग्रहण करना।

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