MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti विविध प्रश्नावली 1

MP Board Class 7th Hindi Sugam Bharti Solutions विविध प्रश्नावली 1

Class 7 Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 1.
सही जोड़ी बनाइए
1. अमृत = (क) क्षमता
2. मनुष्य = (ख) महल
3. कार्य = (ग) घट
4. राज = (घ) समाज
उत्तर-
1. (ग),
2. (घ),
3. (क),
4. (ख)

Class 7th Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 2.
उपयुक्त शब्द से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) जिन-जज भूखों की ………………………… दीनू ने बुझाई है, उनकी दुआएँ भी वह राजकुमार के लिए लाया है। (भूख/प्यास)
(ख) दुश्मन का मुख ………………………… करता, जन-जन की पीड़ा को हरता। (काला/पीला)
(ग) यदि एक तिहाई उम्र बिना कोई ………………………… गुजर भी जाए तो क्या फर्क पड़ेगा। (देखे/सोचे).
(घ) चक्रवात ………………………… दबाव में आकस्मिक पविर्तन के कारण होता है। (वायुमण्डलीय/ जैव.मण्डलीय)
उत्तर-
1. भूख
2. काला
3. देखे
4. वायुमण्डलीय।

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MP Board Class 7th Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए-
(अ) सिक्के की विश्वसनीयता और पहचान के लिए प्राचनी काल से राजा लोग क्या करते आए हैं।
उत्तर-
सिक्के की विश्वसनीयता और पहचान के लिए प्राचीन समय से ही राजाओं ने इसके एक ओर अपने राज्य की मुद्रा तथा दूसरी तरफ इसका मूल्य अंकित कर ढाला।

(ब) ‘महूरत न सोचो, मचलते चलो’ में ‘मचलते चलो’ का अर्थ क्या है?
उत्तर-
मचलते चलो = जिद करके अपनी धुन में बढ़े चलो।

(स) बाढ़ों के लिए कौन जिम्मेदार है?
उत्तर-
प्रकृति और मनुष्य बाढ़ो के लिए जिम्मेदार है।

(द) दीनू ने क्या सोचकर भिखारी को रोटियाँ दी?
उत्तर-
दीने के पास जो रोटियाँ थी उनमें से चार इसको दे दूंगा तो क्या फर्क पड़ जाएगा, उसने यह सोच कर चार रोटियाँ भिखारी को दी।

(इ) कर्मों के संकीर्तन में सबसे ऊँचा स्वर किसका है?
उत्तर-
कर्मों के संकीर्तन में सबसे ऊँचा स्वर उसका होता है जो समाज की सच्ची सेवा करता है।

MP Board Class 7th Hindi प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन से पाँच वाक्यों में लिखिए-
(अ) मनुष्य समाज के उन्नतिशील होने के कारण लिखिए।
उत्तर-
मनुष्य समाज के उन्नतिशील होने में सिक्के का महत्त्वपूर्ण योगदान है। पहले मनुष्य कुछ भी उत्पादित करता था, वह अपने उपयोग पर खर्च कर डालता था, परंतु सिक्कों के आने से वह अल्पबचत कर सकता है तथा भविष्य में उत्पन्न सभी समस्याओं से लड़ सकता

(ब) अविचल खड़ा हिमालय कौन-कौन से दायित्व निभा रहा है।
उत्तर-
प्रारंभिककाल से ही हिमालय भारत की रक्षा कर रहा है। हिमालय के उस पार कई बार दुश्मनों ने घुसपैठ करने की कोशिश की किंतु हिमालय ने अडिग रहकर हमारी मदद की। इसके अलावा हिमालय उत्तर दिशा में आने वाली बर्फ की आंधियों से हमारी रक्षा करता है। आज संपूर्ण विश्व में हिमालय ही हमारी पहचान है।

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(स) ‘बहुमत के आधार पर दाँत सर्वोपरि है’ सिद्ध करो।
उत्तर-
बहुमत के आधार पर भी दाँत सर्वोपरि है। शरीर के अधिकतर अंग इकलौते हैं या फिर उनकी संख्या दो तक हो सकती है, पर दाँत संख्या में सर्वाधिक है।

(द) जल के बहाव को काम करने के लिए कौन-कौन से उपाय किए जाते हैं?
उत्तर-
जल के बहाव को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए गए जल के बहाव में कमी करने के लिए वन लगवाना। -जल प्रवाह मार्ग में नहरी तंत्र का विकास करना। -बाढ़ की भविष्यवाणी करना।

(इ) आर्थिक उन्नति में सिक्के की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
किसी भी समाज की आर्थिक उन्नति में सिक्कों का सबसे अधिक योगदान होता है। सिक्कों से व्यापार में उन्नति होती है। समाज की सभी छोटी-बड़ी आर्थिक इकाइयों में सिक्कों का लेनदेन होता है। सिक्कों का सबसे अधिक लाभ ‘अल्पबचत’ करना होता है। बचत से समाज का भविष्य सुरक्षित बना रहता है।

Class 7th Vividh Prashnavali 1 Hindi प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए-
स्वतंत्रता, बहुमत, हानि, दुश्मन, गरीब, उन्नति, ऊंचा, यश, उपेक्षा, आवश्यक, समर्थ
उत्तर-
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MP Board Class 7 Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 6.
निम्नलिखित तत्सम, तद्भव और आगत शब्दों को छाँटकर लिखिए-
प्यासा, जन, धड़ा, रास्ता, काम, जरूरत, कोशिश,। प्रयत्न, जड़ा, मुकाबला, मुस्कान, आँख, खिसकाना, किटकिट, गड़गड़ाहट, टकसाल, सिक्का, मुद्रा, बैंक, पेंसिल, अयस्क, दुआएँ, शताब्दी, जहान॥
उत्तर-
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Sugam Bharti Class 7 प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यावाची लिखिएपथ, पग, शरीर, चेष्टा, हलचल, परहित, पीड़ा।
उत्तर-
शब्द – पर्यायवाची
पथ – मार्ग, रास्ता।
पग – पैर, कदम।
शरीर – तन, काया।
चेष्टा – प्रयत्न, कोशिश।
हलचल – कंपन
परहित – हितेषी।
पीड़ा – दुख, शोक।

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Class 7th Hindi Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 8.
निम्नलिखित अवतरण में से संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया शब्द छाँटिए-
उसके झोले में तीन रोटियाँ ही बची थी। कुछ दूर चलने पर उसे एक गाय मिली। एक बछड़ा भी साथ था जो लगातार गौ के थन खींच रहा था। उनमें दूध नहीं था। दीनू गाय को हमेशा ही श्रद्धा से गो-माता के रूप में देखता था। उसने गो-माता को नमस्कार किया। एक रोटी उसे खिला दी। एक रोटी बछड़े को भी दे दी। सोचा-एक रोटी है मेरे पास। कौन ये मेरी रोटी खा ही – लेंगे। उपहार के लिए एक ही रोटी काफी है।
उत्तर-
संज्ञा शब्द : झोले, रोटियाँ, गाय, बछड़ा, गौ, दूध, दीनू।
सर्वनाम शब्द : उसके, कुछ, उसे, जो, उनमें आदि।
विशेषण : तीन, एक आदि।
क्रिया : बची, मिली, खींच, देखता नमस्कार करना, खिला, देना, खा लेना।

Class 7th Hindi MP Board प्रश्न 9.
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्य में प्रयोग कीजिए-
आँख फेरना, बन्दर धुड़की देना, मुँह में अँगुली दबाना, दाँत किट किटाना, जेब गर्म होना, हाथों-हाथ उठाना, फिसड्डी होना, खिल उठना।
उत्तर-
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Class 7th MP Board Hindi प्रश्न 10.
निम्नलिखित शब्दों में ग्रस्त, हीन और रहित शब्द जोड़कर नए सार्थक शब्द बनाइए-
बुद्धि, भेद-भाव, स्वार्थ, पंख, विचार, मर्यादा, अंग, रोग, शोक, मोह, लकवा, शर्म।
उत्तर-
शब्द = सार्थक शब्द
बुद्धि = बुद्धिहीन
भेदभाव = भेदभावरहित
स्वार्थ = स्वार्थरहित
पंख = पंखरहित
विचार = विचारहीन
मर्यादा = मर्यादाहीन
अंग = अंगहीन
रोग = रोगग्रस्त
शोक = शोकग्रस्त
मोह = मोहरहित
लकवा = लकवाग्रस्त
शर्म = शर्मरहित

Class 7 Sanskrit Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 11.
निम्नलिखित अवतरण में संयुक्त क्रियाओं को रेखांकित कीजिए-
मेरे सर्वेक्षण में आँखों को इतना महत्त्व नहीं दिया जा सकता। आँखें सिर्फ देखने के काम आती हैं। मैंने दो-तिहाई उम्र इनसे काम ले लिया और इनमें जो-जो चीजें या हालात देखे, उन्हें देखकर इस निर्णय पर पहुँचा हूँ कि अब और कुछ देखने को जी नहीं चाहता॥
उत्तर-
मेरे सर्वेक्षण में आँखों को इतना महत्त्व नहीं दिया जा सकता। आँखें सिर्फ देखने के काम आती हैं। मैंने दो-तिहाई उम्र इनसे काम ले लिया और इनमें जो-जो चीजें या हालात देखे, उन्हें देखकर इस निर्णय पर पहुँचा हूँ कि अब और कुछ देखने को जी नहीं चाहता।

MP Board Class 7 Hindi प्रश्न 12.
निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए कहानी लिखिए-
बालक हलवाई की दुकान पर है। ललचाई आँखों से जलेबी को देखता है। कमीज-पेण्ट की जेबों में हाथ डालता है। कुछ भी न होने का भाव प्रकट करता है। हताश लौटने लगता है। हलवाई उसे जलेबियाँ देता है। बालक मुफ्त की चीज नहीं लूँगा। हलवाई मेहनत कर खाना अच्छी बात है। बालक-कमाकर लाऊँगा, तब खाऊँगा।
उत्तर-

“मेहनत ही इज्जत है”

सारे दिन कनिष्क शहर में इधर-उधर घूमता रहा। कभी इस गली से उस गली, कभी टूटी चप्पल से खाली प्लास्टिक की बोतल को लात मारता है। तभी बोतल पास के नत्थु हलवाई की दुकान के आगे लुढ़कती है। कनिष्क बोतल तक पहुँचता है। तभी उसकी नजर गर्म-गर्म जलेबी पर पड़ती है, उसके मुँह में पानी आ रहा है। वह नत्थु हलवाई की ओर देखते हुए अपनी जेबे टटोलता है। लेकिन उसके पास तो चवन्नी भी नहीं है। हलवाई उसकी ओर देखता है। कनिष्क हताश और अधूरे मन से वहाँ से लौटने के लिए मुड़ता है। नत्थु को बालक पर तरस आ जाता है, वह उसे रोककर दो जलेबी के टुकड़े देता है लेकिन कनिष्क अचानक जलेबी लेने से मना कर देता है, वह नत्थु से कहता है कि वह मुफ्त की चीज नहीं लेगा। हलवाई को बालक की खुद्दारी अच्छी लगती है। वह उसके सिर पर हाथ रखकर बोलता है-शाबाश बेटा, जिंदगी में कभी कोई चीज माँग कर मत लेना। खुद पैसा कमाकर चीजे खरीदना गर्व की बात है। बालक मुस्कराते हुए नत्थु से कहता है-ठीक है बाबा, अब तो ये जलेबियाँ तभी लूँगा जब मैं पैसे कमा कर लाऊँगा।

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Class 7 Hindi MP Board प्रश्न 13.
निम्नलिखित अवतरण में विराम लगाइए-
मैं जानता हूँ सभी बातें झटपट सिखाते नहीं बनती फिर भी हो सके तो उसके मन में जगाइए पसीना बहाकर कमाया हुआ एक पैसा भी फोकट में मिले खजाने से ज्यादा मूल्यवान है सिखाइए उसे कैसे झेलते हैं हार और सिखाकर जीत की खुशी में संयम बरतना अगर आपमें सामर्थ्य हो तो सिखाइए उसे ईर्ष्या द्वेष से दूर रहना
उत्तर-
मैं जानता हूँ सभी बातें झटपट सिखाते नहीं बनती फिर भी हो सके तो उसके मन में जगाइए। पसीना बहाकर कमाया हुआ एक पैसा भी फोकट में मिले खजाने से ज्यादा मूल्यवान है। सिखाइए उसे कैसे झेलते हैं हार और सिखाकर जीत की खुशी में संयम बरतना अगर आपमें सामर्थ्य हो तो सिखाइए उसे ईर्ष्या द्वेष से दूर रहना।

Class 7 Hindi Sugam Bharti प्रश्न 14.
निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर वर्षाऋतु पर निबंध लिखिए-
ऋतुएँ कितने प्रकार की होती हैं। ग्रीष्मकाल के बाद किस ऋतु का आगमन होता है। बादलों के बनने की प्रक्रिया क्या है। हिन्द महासागर तथा अरब सागर से उठने वाले बहाव कि दिशा में जाते हैं। मानसून से क्या आशय है। भारत वर्ष में मानसून की वर्षा का समय जुलाई से सितम्बर तक का है। वर्षा पर भारत वर्ष में कृषि की निर्भरता का उल्लेख कीजिए। यदि वर्णन हो तो देश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है।

Class 7th Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 15.
पत्र लेखन अपने मित्र को पत्र लिखिए जिससे उसे पर्वतों की रानी पचमढ़ी घूमने का निमंत्रण दीजिए।
परीक्षा भवन,
9 जून 2009
प्रिय रोहित
सप्रेम नमस्कार

हम सब कुशल से हैं। आशा है कि तुम भी ठीक से होंगे। तुम्हारा पत्र आज ही मिला है। इसे पढ़कर मैं बाग-बाग हो गया। जैसे कि तुम जानते हो कि हम हर वर्ष किसी पहाड़ी क्षेत्र की यात्रा करते हैं। इस वर्ष हम पर्वतों की रानी पंचमढ़ी घूमने गए। वहाँ के प्राकृतिक दृश्य देखने लायक थे। पर्वत को चोटी पर जब धूप पड़ रही थी, उस समय सोने की-सी छटा प्रतीत हो रही थी। यहाँ के लोग बड़े ही भोले और मासूम होते हैं। यहाँ परं एक झील भी है। जिसमें नाव का विशेष प्रबंध है। हमने वहाँ पर घुड़सवारी भी की। वहाँ पर खाने-पीने और ठहरने का विशेष प्रबंध है। सात दिन के टूर में हमने वहाँ बहुत लुत्क और ज्ञान अर्जित किया। मैं चाहता हूँ तुम भी अगली बार हमारे साथ पर्वतों की रानी पंचमढ़ी आओ!

अनेक शुभकामनाओं सहित,
तुम्हारा मित्र
क ख ग।

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MP Board Class 11th Special Hindi गद्य साहित्य : विविध विधाएँ

MP Board Class 11th Special Hindi गद्य साहित्य : विविध विधाएँ

1. निबन्ध

निबन्ध गद्य रचना का एक प्रधान भेद है। गद्य साहित्य का सबसे परिष्कृत और प्रौढ़ रूप निबन्ध में ही उभरता है।

परिभाषा-निबन्ध वह रचना है जिसमें किसी गहन विषय पर विस्तार और पाण्डित्यपूर्ण विचार किया जाता है। वास्तव में, निबन्ध शब्द का अर्थ है-बन्धन। यह बन्धन विविध विचारों का होता है, जो एक-दूसरे से गुंथे होते हैं और किसी विषय की व्याख्या करते हैं।

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आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के शब्दों में, “यदि गद्य कवियों या लेखकों की कसौटी है, तो निबन्ध गद्य की कसौटी है।”

जयनाथ नलिन के शब्दों में, “निबन्ध स्वाधीन चिन्तन और निश्छल अनुभूतियों का सरस, सजीव और मर्यादित गद्यात्मक प्रकाशन है।”

भाषा की पूर्ण शक्ति भी निबन्धों में ही दिखाई पड़ती है। साहित्य के अन्य विविध क्षेत्रों के विषय में गहन जानकारी भी निबन्धों द्वारा ही प्राप्त होती है। निबन्ध ही मनुष्य के मस्तिष्क का सारा ज्ञानकोश उभारकर रख देते हैं। वह गद्य साहित्य का ऐसा अंग है जो अपने में अत्यधिक पूर्ण और उपयोगी है। निबन्ध साहित्य की एक ऐसी रचना है जो पाठक के मन में आनन्द और अनुभूति उत्पन्न करने में साहित्य की अन्य विधाओं से अधिक सक्षम है।

  • निबन्ध के तत्त्व

निबन्ध को समझने और उसका रसास्वादन करने के लिए निम्नलिखित तीन बातों पर ध्यान देना आवश्यक है

  1. निबन्ध की विषय-वस्तु,
  2. विषय-वस्तु को प्रस्तुत करने का उद्देश्य,
  3. निबन्ध की शैली।

निबन्ध के लिए स्वीकृत विषयों की कोई सीमा नहीं है। अभिव्यक्त विषय में किसी भाव, दृश्य आदि का चित्रण है अथवा किसी घटना मात्र का वर्णन है, किसी मनोविकार आदि का निरूपण विश्लेषण हुआ है या किसी प्रसंग का भावात्मक विवरण है।

इसके पश्चात् उद्देश्य की ओर. ध्यान देना चाहिए। लेखक कभी कुछ तथ्यों, दृश्यों या क्रिया-कलापों का विवरण देकर पाठक का ज्ञानवर्द्धन करना चाहता है तो कभी किसी दृश्य या अतीत की स्मृति को भावात्मक शैली से रमाना चाहता है; कभी वह पाठकों को कुछ प्रेरणा देना चाहता है तो कभी किसी सीख या निष्कर्ष तक ले चलना उसका उद्देश्य होता है। इस प्रकार विषय-वस्तु और उद्देश्य निबन्ध के दो ऐसे तत्त्व हैं जिनसे निबन्ध को समझने में सहायता मिलती है।

निबन्ध में लेखक का दृष्टिकोण सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण होता है। वस्तुतः इसी आधार भूमि पर अवस्थित होकर निबन्ध के विवरणों का सर्वेक्षण किया जाता है। अतः निबन्ध में जो मूल्य, तथ्य, आवेश-संवेग, स्मृतियाँ अथवा पूर्वाग्रह आते हैं वे इसी पर आश्रित होते हैं, इसी के द्वारा उन्हें जाना जा सकता है। रामचन्द्र शुक्ल ने जिन संस्मरणों का संकेत अपने विचार प्रधान निबन्धों में किया है वे उनके विषय सम्बन्धी दृष्टिकोण को ही सचित करते हैं। निबन्ध में आत्मपरकता का समावेश इसी के द्वारा होता है।

निबन्धकार का कौशल उसकी अभिव्यंजना शैली में निहित होता है। निबन्ध को समझने और सराहने के लिए मुख्य रूप से यह देखना होगा कि विषय-वस्तु को अभिप्रेत उद्देश्य के लिए किस ढंग से प्रस्तुत किया गया है। किसी भी विषय के सम्बन्ध में अनेक छोटे-बड़े विवरण हो सकते हैं। लेखक अपने उद्देश्य के लिए उनमें से आवश्यक का चयन कर लेता है। अत: निबन्ध के अर्थबोध के लिए चयन और नियोजन को ध्यान रखना आवश्यक है।

भाषा के विविध स्तर भी मूल आशय का प्रतिपादन करने में सहायक होते हैं। भाषा की प्रांजलता और समृद्धि केवल शब्द चयन पर ही निर्भर नहीं है। विचारों को सुस्पष्ट वाक्यों और स्वाभाविक शैली में उपस्थित करना और भी अधिक महत्त्वपूर्ण है। इसके लिए मुहावरों,लोकोक्तियों आदि का समीचीन प्रयोग निबन्ध को अर्थवत्ता प्रदान करता है। निबन्ध में गृहीत बिम्बों, उदाहरणों एवं सन्दर्भो को भी प्रतिपाद्य विषय से सम्बद्ध करके देखना चाहिए।

  • निबन्धों के भेद [2008]

विद्वानों ने प्रमुख रूप से निबन्धों को चार कोटियों में विभाजित किया है, जो निम्न प्रकार हैं
(1) भावात्मक,
(2) विचारात्मक,
(3) वर्णनात्मक,
(4) विवरणात्मक।

(1) भावात्मक निबन्ध-उसे कहते हैं जो किसी विषय का भावना प्रधान चित्र प्रस्तुत करते हैं तथा उसमें विषय की गम्भीर विवेचना नहीं की जाती। इनमें कल्पना का स्थान महत्त्वपूर्ण होता है। निबन्धकार के हृदय से भाव स्वतः कल्पना का रंगीन आवरण ओढ़े अबाध गति से निःसृत होते हैं। विषय के चित्र की रेखाएँ उभरती चलती हैं और निबन्ध की समाप्ति पर एक आकर्षक एवं मार्मिक चित्र उपस्थित हो जाता है। इसमें गहन अनुभूतियों की अभिव्यक्ति होती है।

(2) विचारात्मक निबन्ध-इनमें भावों की अपेक्षा विचारों की प्रधानता रहती है। उनका सम्बन्ध हदय से न होकर मस्तिष्क से होता है। उनमें विषय की व्याख्या, विवेचन और विश्लेषण सभी कुछ बुद्धि-प्रसूत रहता है। स्वाभाविक है कि ऐसे निबन्धों में विचारों की गहनता होती है। विचारात्मक निबन्धों का क्षेत्र जीवन की प्रत्येक समस्या से सम्बन्धित होता है। विचारात्मक निबन्धों में भी भावों का अस्तित्व होता है किन्तु प्रधानता विचारों की रहती है। विचारात्मक निबन्ध मस्तिष्क-प्रधान होते हैं जबकि भावात्मक निबन्ध हदय-प्रधान होते हैं।

(3) वर्णनात्मक निबन्ध-ये भावात्मक निबन्धों से बहुत कुछ मिलते-जुलते हैं। इसमें विषय का वर्णन आकर्षक ढंग से किया जाता है। किसी भी ऐतिहासिक स्थान, किसी भी कलाकृति, किसी भी प्रकृति के उपादान या वस्तु विशेष को लेकर निबन्धकार सुन्दर भाषा में उसका वर्णन करता है। भारत की सांस्कृतिक एकता इसका उदाहरण है।

(4) विवरणात्मक निबन्ध-इन निबन्धों में किसी वस्तु, घटना या स्थान आदि का विवरण उपस्थित किया जाता है। उदाहरण के लिए, हम किसी यात्रा या नौका विहार को या किसी मेले, उत्सव को लें। उसका विवरण निबन्धकार इतने आकर्षक ढंग से देता चलेगा और अन्त तक वह अपने प्रभाव की छाप हमारे हृदय पर छोड़ देगा। इनमें सारा ध्यान निबन्धकार का प्रमुख विषय पर होता है।

  • निबन्ध रचना की शैली के प्रकार

निबन्धों की विषय-वस्तु को सजाने के तरीके का नाम शैली है। शैली से आशय है भाषागत शैली, जिसमें भाषा के बाह्य और आन्तरिक रूपों का समावेश होता है। प्रायः निबन्ध में निम्नांकित शैली रूपों का ही अधिक प्रयोग होता है

  1. व्यास शैली-इसमें भाव व विचार का विस्तार अत्यन्त सरल और रोचक ढंग से किया जाता है। सरलता, स्पष्टता और स्वाभाविकता इस शैली की विशेषताएँ हैं। कथात्मक (विवरणात्मक) और वर्णनात्मक निबन्ध इसी शैली में लिखे जाते हैं। इसे प्रसाद शैली भी कहते हैं।
  2. समास शैली-समास का अर्थ है-संक्षिप्त। कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक कहना इस शैली की विशेषता है। इस शैली का उपयोग विचारात्मक निबन्धों में अधिक होता है।
  3. विवेचना शैली-इसमें लेखक तर्क-वितर्क, प्रमाण, पुष्टि, व्याख्या एवं निर्णय आदि का सहारा लेते हुए विषय का प्रतिपादन करता है। गहन अध्ययन, मनन और चिन्तन के आधार पर लेखक अपनी बात समझाता है। इसमें कभी-कभी क्लिष्टता आ जाती है। विचारात्मक निबन्ध इसी शैली में आते हैं। शुक्लजी के निबन्ध इस शैली के श्रेष्ठ उदाहरण हैं।
  4. व्यंग्य शैली-इसमें व्यंग्य-विनोद के माध्यम से महत्त्वपूर्ण तत्त्वों का उदघाटन किया जाता है। इसमें कभी-कभी मनोरंजन, कभी तीखी चुभन और कभी गुदगुदी-सी होती है।
  5. आवेश शैली-इसमें लेखक भावावेश में विचारों की अभिव्यक्ति करता है। भाव प्रवाह अनुकूल भाषा और शब्द नियोजन के माध्यम से निबन्ध अपने आप आगे बढ़ता है। इसी को धारा शैली या प्रवाह शैली भी कहते हैं।
  6. संलाप शैली-संलाप शैली का अर्थ है-वार्तालाप । इसमें भावनाओं और विचारों की अभिव्यक्ति संवादों के माध्यम से होती है।
  7. प्रलापशैली-कभी-कभी लेखक आन्तरिक आवेश के कारण भावों पर नियन्त्रण न रख सकने के कारण आवेश की सी मानसिक स्थिति से गुजरता हुआ लिखता है। इसमें भावाभिव्यक्ति अस्त-व्यस्त हो जाती है।
    कभी-कभी विषय के प्रतिपादन की दृष्टि से व्याख्या की दो शैलियों का उपयोग होता है।
  8. निगमन शैली-इसमें पहले विचारों को सूत्र रूप में रखकर फिर उसकी विस्तृत व्याख्या करके समझाया जाता है जिसमें उदाहरणों का भी उपयोग होता है।
  9. आगमन शैली-इसमें विचारों को पहले विस्तारपूर्वक व्याख्या करके बाद में उसका सारांश सूत्र या सिद्धान्त रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
  • निबन्ध का विकास

हिन्दी निबन्ध साहित्य का विकास आधुनिक काल की देन है। इसके विकास क्रमाको निम्नवत् चार युगों में विभाजित किया जा सकता है

  1. भारतेन्दु युग,
  2. द्विवेदी युग,
  3. शुक्ल युग एवं
  4. शुक्लोत्तर युग (वर्तमान युग)।

प्रारम्भ में पत्र सम्पादक स्वयं निबन्ध लिखने की कला में प्रवीण थे। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, बालकृष्ण भट्ट, प्रतापनारायण मिश्र इसके ज्वलन्त उदाहरण हैं। उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द ने निबन्ध लिखने का कार्य भी बड़े ही कौशल से किया है। भारतेन्दु युग में अनेक गद्य रूपों का विकास हुआ है।

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(1) भारतेन्दु युग-भारतेन्दु युग हिन्दी गद्य का शैशवकाल है। भारतेन्दु आधुनिक काल के जन्मदाता हैं उनके युग को भारतेन्दु युग के नाम से सम्बोधित किया जाता है। भारतेन्दु युग को ऐसी मजबूत नींव के समान माना जाता है, जिस पर आगे चलकर क्रमशः एक-एक मंजिल बनती चली गई थी।

  • विशेषताएँ
  1. निबन्धों के कलेवर में पत्रकारिता का युग समाविष्ट है।
  2. सड़ी-गली मान्यताओं एवं रूढ़ियों का प्रबल विरोध है।
  3. निबन्धकारों के मस्त एवं मनमौजी व्यक्तित्व की निबन्धों में छाप है।
  4. निबन्धों में राजनैतिक चेतना, समाज सुधार की आकांक्षा के फलस्वरूप यत्र-तत्र भाषा में शिथिलता अवलोकनीय है।
  5. शैली सरस, हदयस्पर्शी एवं मनभावन है।
  6. हास्य व्यंग्य के छोटे निबन्ध की दुरूहता को कुछ कम कर देते हैं। चुभते हुए व्यंग्य एवं विनोदप्रियता के दर्शन होते हैं।
  7. भाषा, भाव एवं शैली में नवीनता का समावेश है। संस्कृत तद्भव एवं तत्सम शब्दों की भरमार है।
  8. निबन्धकार अंधानुकरण के घोर विरोधी थे।
  9. साहित्यिक रूपों की विवेचना इसी युग में प्रारम्भ हुई।
  10. पाश्चात्य शैली के अध्ययन के माध्यम से नए आदर्श अवलोकनीय हैं।
  • प्रमुख निबन्धकार

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, प्रतापनारायण मिश्र, बालकृष्ण भट्ट, बालमुकुन्द गुप्त एवं बद्रीनारायण चौधरी आदि प्रमुख निबन्धकार हुए।
निष्कर्ष-भारतेन्दु युग हिन्दी साहित्य का प्रवेश द्वार है। इस युग को हम ‘सन्धि युग’ भी कह सकते हैं।

(2) द्विवेदी युग (सन् 1900 से 1920 तक)-
भारतेन्दु युग के पश्चात् आधुनिक काल का द्वितीय चरण द्विवेदी युग के नाम से जाना जाता है। सरस्वती पत्रिका का सम्पादन करके द्विवेदी जी ने हिन्दी गद्य को उन्नत एवं व्यवस्थित किया। हिन्दी साहित्य सम्मेलन, काशी नागरी प्रचारिणी सभा का गद्य साहित्य के विकास में विशेष योगदान है। द्विवेदी जी के कुशल निर्देशन में न जाने कितने कलाकार साहित्य जगत में उजागर हुए जिनकी सफल कीर्ति आज भी फैली है। द्विवेदी युग तैयारी का युग था जिसमें आधुनिक साहित्य-शैली का निर्माण हो रहा था।

  • प्रमुख निबन्धकार [2008]

महावीर प्रसाद द्विवेदी, पद्मसिंह शर्मा, सरदार पूर्णसिंह, बालमुकुन्द गुप्त, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी इस युग के प्रमुख निबन्धकार हैं।

  • विशेषताएँ [2008]
  1. भाषा को व्यवस्थित एवं सुगठित किया गया। भाषा में अभिव्यंजना शक्ति का भी पर्याप्त विकास हुआ।
  2. जीवनोपयोगी विषयों पर निबन्ध लिखे गये हैं।
  3. निबन्धों में गम्भीरता का समावेश है।
  4. साहित्य समालोचना, संस्कृति इतिहास एवं विभिन्न विषयों पर सफल निबन्ध लिखे गये हैं।
  5. निबन्धों में यत्र-तत्र दुरूहता का समावेश है।
  6. निबन्धों की भाषा प्रांजल एवं परिमार्जित है। विभक्तियों का उचित प्रयोग है।
  7. हिन्दी में समालोचना शैली का सूत्रपात भी इस युग में हुआ।
  8. सरल तथा प्रचलित शब्दावली में कहीं-कहीं करारा व्यंग्य है।

निष्कर्ष-द्विवेदी जैसा साहित्य का प्रहरी निरन्तर हिन्दी भाषा एवं साहित्य को परिष्कार कर, उसे आदर्श की ओर उन्मुख करने में दत्त-चित्त रहा। गद्य साहित्य सर्वांगीण तथा बहुमुखी बन गया।

(3) शुक्ल युग (सन् 1920 से 1945 तक)-
द्विवेदी युग के बाद आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का नाम हिन्दी निबन्धकारों में विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इन्होंने हिन्दी को महत्त्वपूर्ण मौलिक कृतियाँ दी, इसी हेतु इस युग को शुक्ल युग के नाम से जाना जाता है।

  • प्रमुख निबन्धकार

श्यामसुन्दर दास, गुलाबराय, वियोगी हरि, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, जयशंकर प्रसाद, रायकृष्ण दास, सियाराम शरण गुप्त, डॉ. रघुवीर सिंह।
विशेषताएँ

  1. भाषा शक्ति सम्पन्न एवं कलात्मक बनी।
  2. विविध प्रकार के साहित्य की रचना हुई।
  3. भाषा भावों की अनुगामिनी है।
  4. भारतीय एवं पाश्चात्य समीक्षा का तर्कसंगत समन्वय है।
  5. समसामयिक समस्याओं का निरूपण है।
  6. नाटक के क्षेत्र में जयशंकर प्रसाद का अपूर्व योगदान है।
  7. प्रेमचन्द्र ने कहानी एवं उपन्यास के क्षेत्र में व्यावहारिक एवं सरल शैली का प्रयोग किया है।
  8. मार्क्सवाद के प्रभाव के फलस्वरूप जनवादी चेतना पर आधारित निबन्ध लिखे गए हैं।
  9. स्वतंत्रता संग्राम एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़े मनोभावों को निबन्धों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।
  10. छायावाद के संदर्भ में तर्कपूर्ण विवेचना है।
  11. निबन्धों की शैली परिमार्जित एवं विषयों के अनुरूप है।
  12. यत्र-तत्र गाँधीवाद का प्रभाव भी अवलोकनीय है।
  13. द्विवेदी युगीन व्यास प्रधान शैली के स्थान पर समास प्रधान शैली का प्रचलन हुआ।

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि शुक्ल जी ने सरल एवं मिश्रित गद्य का ऐसा स्वरूप उपस्थित किया जो जन साधारण की भाषा का रूप था।

(4) शुक्लोत्तर युग (सन् 1945 से आज तक)-
शुक्ल युग के पश्चात् का युग शुक्लोत्तर युग के नाम से सम्बोधित किया जाता है। इसे वर्तमान युग’ भी कहा जाता है।

  • प्रमुख निबन्धकार

आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, बाबू गुलाबराय, डॉ. रामविलास शर्मा, डॉ. नगेन्द्र, नन्ददुलारे वाजपेयी, रामवृक्ष बेनीपुरी, हरिशंकर परसाई,शान्तिप्रिय द्विवेदी, वासुदेवशरण अग्रवाल,रामधारीसिंह ‘दिनकर’, शिवदान सिंह चौहान, महादेवी वर्मा, भगवतशरण उपाध्याय, विजयमोहन शर्मा,धर्मवीर भारती, प्रभाकर माचवे आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।

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विशेषताएँ

  1. इस युग के समस्त निबन्धों में चिन्तन के साथ-साथ गहराई का पुट है।
  2. भाषा शैली प्रौढ़ एवं प्रांजल है।
  3. भाषा व्यावहारिक है।
  4. निबन्धों में यत्र-तत्र व्यंग्य का पुट भी अवलोकनीय है।
  5. ‘खरगोश के सींग’ नामक निबन्ध जिसके लेखक प्रभाकर माचवे हैं,व्यंग्य का सजीव उदाहरण है।
  6. हरिशंकर परसाई एवं के. वी. सक्सेना ने भी व्यंग्यात्मक लेख लिखे हैं।
  7. निबन्धों में प्रगतिवादी विचारधारा भी परिलक्षित है।
  8. महादेवी वर्मा के संस्मरणात्मक निबन्ध भी बहुत ही सरस एवं सराहनीय हैं।
  9. जनेन्द्र कुमार ने गाँधीवादी विचारधारा को अपने निबन्धों में अभिव्यक्त किया है।
  10. सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरातल पर आधारित निबन्धों की रचना भी की गयी है।

प्रमुख निबन्धकार एवं उनकी रचनाएँ

भारतेन्दु युग
द्विवेदी युग

2. कहानी

संसार के सभी लिखित-अलिखित साहित्य में कहानी सबसे प्राचीनतम रूप है। कहानी पढ़ने या सुनने की प्रवृत्ति केवल बच्चों में ही नहीं, वयस्कों में भी होती है। आज के व्यस्त जीवन में कहानी की लोकप्रियता का कारण है उसका छोटा होना।

परिभाषा-“कहानी वास्तविक जीवन की ऐसी काल्पनिक कथा है जो छोटी होते हए भी स्वतः पूर्ण और सुसंगठित होती है।”
“कहानी में मानव जीवन की किसी एक घटना अथवा व्यक्तित्व के किसी एक पक्ष का मनोरम चित्रण रहता है। उसका उद्देश्य केवल एक भी प्रभाव को उत्पन्न करना होता है।”
डॉ. श्यामसुन्दर दास के शब्दों में, “आख्यायिका एक निश्चित लक्ष्य के प्रभाव को लेकर नाटकीय आख्यान है।”

“कहानी ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उनका कथा-विन्यास सभी उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं।

“कहानी ऐसा रमणीक उद्यान नहीं है जिसमें भाँति-भाँति के फूल, बेलबूटे सजे हों, बल्कि वह एक गमला है जिसमें एक ही पौधे का माधुर्य और सौन्दर्य अपने समुचित रूप में दृष्टिगोचर होता है।”

कहानी के तत्त्च [2008]

  1. कथावस्तु,
  2. चरित्र-चित्रण अथवा पात्र,
  3. कथोपकथन या संवाद,
  4. देशकाल व परिस्थिति,
  5. उद्देश्य,
  6. शैली और शिल्प।

(1) कथावस्तु-कहानी में कथावस्तु या कथानक कहानी का मुख्य ढाँचा होता है। विषय की दृष्टि से कहानी में सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक आदि में से किसी भी प्रकार का कथानक अपनाया जा सकता है। किन्तु यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि कहानी में जीवन की बाह्य घटनाओं की ही अभिव्यक्ति नहीं होती, मानव हृदय का भी उद्घाटन होता है। उदाहरण के लिए ‘संवदिया’ कहानी में घटनाओं का वर्णन कम, पर बड़ी बहू और संवदिया के मन का रहस्योद्घाटन करने की सफल चेष्टा की गयी है।

मानव जीवन के सुख-दुःख दोनों पक्षों की चर्चा के लिए कहानीकार के केवल घटनाओं का आयोजन ही नहीं करता, वह व्यक्ति के हृदय और मन की भावना और अन्तर्द्वन्द्व को पर्याप्त प्रमुखता देता है। कहानी की घटनाएँ अनायास ही घटित नहीं होती, कथा का विकास धीरे-धीरे होता है। इस कथा विकास की निम्नलिखित चार स्थितियाँ होती हैं

(अ) आरम्भ-कहानी के शीर्षक और प्रारम्भ में कथासूत्रों से अवगत करा दिया जाता है। कहानी आरम्भ करने के लिए अनेक विधियाँ हो सकती हैं-किसी पात्र के परिचय से, पात्रों के पारस्परिक वार्तालाप से अथवा वातावरण विशेष के चित्रण से। यदि कथा के आरम्भ में ही पाठक के मन में कौतूहल अथवा जिज्ञासा उत्पन्न हो जाय तो ‘आरम्भ’ सफल कहा जायेगा।

(आ) आरोह-सामान्य जानकारी के बाद आरोह की अथवा विकास की ओर ध्यान दिया जाता है। कथावस्तु के प्रवाह की दृष्टि से यह स्थिति अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। यह कहानी का मध्य भाग होता है।

(इ) चरम स्थिति-कथानक के जिस स्थल द्वारा पाठक के मन में कौतूहल अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच जाय, उसे चरम स्थिति कहते हैं। इसमें पाठक उत्सुकता, आशा और आशंका के बीच उलझता हुआ कथानक के अन्तिम मोड़ के लिए लालायित हो उठता है।

(ई) अवरोह-अवरोह अथवा अन्त सबसे महत्त्वपूर्ण होता है क्योंकि कहानी का मूल उद्देश्य या भाव यहीं प्रतिफलित होता है। इस ओर उचित ध्यान न देने पर कहानी शिथिल हो जाती है और अपूर्ण प्रतीत होती है। कहानी के अवरोह में संक्षिप्तता और मार्मिकता पर विशेष बल रहता है।

(2) चरित्र-चित्रण एवं पात्र-योजना-कथा का विकास पात्रों द्वारा ही होता है। चरित्र-चित्रण के लिए अनेक प्रणालियाँ अपनायी जाती हैं, लेखक के द्वारा पात्र का प्रत्यक्ष वर्णन करके या पात्र के क्रिया-कलापों द्वारा। कभी-कभी कथोपकथन के माध्यम से भी पात्रों के व्यक्तित्व का उद्घाटन किया जाता है। पात्रों की परस्पर तुलना, प्रासंगिक घटनाओं के माध्यम से चरित्र की व्यंजना, अन्तर्द्वन्द्व की अवतरणा आदि चरित्र-चित्रण की प्रचलित शैलियाँ हैं। पात्रों के व्यक्तित्व की संक्षिप्त, स्पष्ट और संकेतात्मक अभिव्यक्ति कहानी का गुण है।

(3) कथोपकथन अथवा संवाद-कथा-सौन्दर्य की संवृद्धि में और पात्रों के निरूपण के लिए कथोपकथन का निश्चित योग है। संवाद रहित कहानियाँ अथवा. कम संवाद वाली कहानियों में उपयुक्त प्रभाव उत्पन्न नहीं हो पाता। संवादों में रोचकता, सजीवता और स्वाभाविकता का होना आवश्यक है। संवादों की गरिमा के लिए उन्हें पात्र, वातावरण, स्थान और समय के अनुकूल रखा जाता है। संवादों में पात्र के मानसिक अन्तर्द्वन्द्व अथवा अन्य मनोभावों को प्रकट करने की शक्ति होनी चाहिए और यह भी आवश्यक है कि वे संक्षिप्त हों क्योंकि बड़े-बड़े संवाद प्रापः बोझिल और कृत्रिम प्रतीत होने लगते हैं।

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(4) देशकाल और परिस्थिति, वातावरण-कहानी का कथानक और उसके पात्र किसी न किसी देश और काल से जुड़े रहते हैं। प्रभाव वृद्धि के लिए आवश्यक है कि कहानी का अपना एक वातावरण भी हो। वातावरण के उपयुक्त चित्रण से कथात्मक रचनाओं में रस निष्पत्ति और मनोवैज्ञानिक प्रभाव की सृष्टि में विशेष सुविधा रहती है। कहानीकार घटनाओं, प्रकृति सौन्दर्य एवं पात्रों से सम्बद्ध स्थानों आदि का युगानुरूप चित्रण करते हैं। कुछ लेखक कहानी का आरम्भ ही वातावरण के चित्रण से करते हैं। जैसे “उसने कहा था” कहानी के प्रारम्भ में ही अमृतसर के बाजार का, वहाँ के वातावरण का बड़ा ही सजीव चित्रण है।

(5) उद्देश्य-आधुनिक कहानी का उद्देश्य केवल मनोरंजन ही नहीं। वह हमें कोई सन्देश भी देती है। उसमें कुछ उद्देश्य भी निहित रहता है। कहानी के उद्देश्य से हमारा तात्पर्य कहानीकार के दृष्टिकोण से है। कहानी में जीवन की मार्मिक अनुभूतियों की सहज व्याख्या बड़े ही उद्देश्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत की जाती है। प्रगतिवादी, सुधारवादी आदि विभिन्न कहानियाँ विभिन्न उद्देश्यों के परिणामस्वरूप लिखी जाती हैं। कहानी में उद्देश्य को उपदेश रूप से प्रस्तुत नहीं किया जाता। प्रत्यक्ष स्थापना न करके उसका संकेत भर दिया जाता है।

(6) शैली और शिल्प-शैली से तात्पर्य लेखक द्वारा कथा वर्णन के लिए अपनायी गयी विशिष्ट पद्धति है। कहानी लेखन की अनेक शैलियाँ हो सकती हैं–लेखक अपनी सुविधा अनुसार वर्णनात्मक, आत्मकथात्मक, संवादात्मक, पत्रात्मक और डायरी शैली अपना सकता है। कला की दृष्टि से कहानी के सौन्दर्य का विधान शैली के माध्यम से ही होता है। शैली सौष्ठव के लिए लेखक अलंकार, लोकोक्ति, प्रतीक आदि उपकरणों की सहायता लेता है। कभी-कभी ग्रामीण पात्रों के लिए या तुतलाते बच्चों के लिए, आंचलिकता में सजीवता लाने के लिए वह उन्हीं की बोली का उपयोग भी करता है। यदि भाषा भाव के अनुसार न हो तो उपयुक्त प्रभाव का संचार नहीं हो पाता। इसी प्रकार हास्य, व्यंग्य, चित्रोपमता, प्रकृति के मानवीकरण से कहानी के सौन्दर्य में वृद्धि होती है।

कहानी के विविध रूप [2008]
विभिन्न तत्त्वों की प्रधानता की दृष्टि से कहानी के चार प्रमुख भेद किये जा सकते हैं-

  1. घटना प्रधान कहानी,
  2. चरित्र प्रधान कहानी,
  3. वातावरण प्रधान कहानी,
  4. भाव प्रधान कहानी।

(1) घटना प्रधान कहानी-इसमें क्रमशः अनेक घटनाओं को एक सूत्र में पिरोते हुए कथानक का विकास किया जाता है।
(2) चरित्र प्रधान कहानी-इसमें लेखक का ध्यान पात्रों के चरित्र-निरूपण की ओर ही अधिक रहता है। इसमें मनोविज्ञान की पृष्ठभूमि में चरित्र की विभिन्न सूक्ष्मताओं का उद्घाटन लेखक या पात्र स्वयं करता है। कभी-कभी दूसरे पात्रों के माध्यम से भी मुख्य पात्र की चरित्रगत विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं।
(3) वातावरण प्रधान कहानी-इन कहानियों में वातावरण पर अधिक ध्यान दिया जाता है। विशेषतः ऐतिहासिक कहानियों में वातावरण को विशेष रूप से चित्रित किया जाता है क्योंकि यहाँ किसी युग विशेष का, उसकी संस्कृति, सभ्यता आदि का आभास वर्णन और संवाद द्वारा करना होता है।
(4) भाव प्रधान कहानी-इन कहानियों में एक भाव या विचार के आधार पर कथानक का विकास किया जाता है। इस कोटि में गद्य काव्य से मिलती-जुलती लघु कथाएँ, प्रेम कहानियाँ और प्रतीक कथाएँ आती हैं। ये प्रायः दृष्टांत के रूप में होती हैं और इनका अध्ययन जीवन के लिए प्रेरणादायक होता है। इस तरह कहानियाँ विचारों को प्रबुद्ध करती हैं और चिरकाल तक हृदय पर अमिट छाप छोड़ती हैं। इन कथाओं को लिखने में चित्र शैली को अपनाया जाता है।

  • हिन्दी कहानी का विकासक्रम

कहानी का अभ्युदय भारतेन्दु युग में हुआ। इसके विकास को निम्न प्रकार चार युगों में विभक्त कर सकते हैं

  1. प्रारम्भिक प्रयोगकाल – (सन् 1900 से 1910)
  2. विकास काल (पूर्वार्द्ध) – (सन् 1910 से 1936)
  3. विकास काल (उत्तरार्द्ध) – (सन् 1936 से 1947)
  4. स्वातन्त्रोतर काल – (सन् 1947 से अब तक)

1. प्रारम्भिक काल इस युग की कहानियों में कथावस्तु, देशकाल, उद्देश्य आदि तत्त्वों का समावेश है। कहानी के शिल्प विधान को भी महत्व दिया गया है।
प्रमुख कहानीकार – कहानियाँ [2008]

  1. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल – ग्यारह वर्ष का समय
  2. गिरिजा दत्त बाजपेयी – पंडित और पंडिताइन
  3. श्री किशोरीलाल गोस्वामी – इन्दुमती
  4. माधव राव सप्रे – टोकरी भर मिट्टी
  5. बंग महिला – दुलाई वाली

2. विकास काल (पूर्वाद्ध) इस युग में हिन्दी कहानी के क्षेत्र में एक नवीन युग का शुभारम्भ हुआ। चरित्र-चित्रण एवं कथा संगठन पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया है। कहानी के कलेवर में आदर्श एवं यथार्थ के समन्वय के साथ ही इतिहास एवं कल्पना के समन्वय का प्रशंसनीय प्रयास है।

कहानियाँ
प्रमुख कहानीकार

  1. पं. चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ – उसने कहा था, बुद्ध का कांटा, सुखमय जीवन।
  2. जयशंकर प्रसाद – गुण्डा, पुरस्कार, आकाशदीप।
  3. भगवती प्रसाद बाजपेयी – सूखी लगड़ी, मिठाई वाला।
  4. प्रेमचन्द – बड़े घर की बेटी, पंच परमेश्वर, पूस की रात, कफन, शतरंज के खिलाड़ी।
  5. विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक’ – चित्रशाला, रक्षाबन्धन, ताई।

अन्य कहानीकार-सियाराम शरण गुप्त, विनोद शंकर व्यास, निराला, वृन्दावनलाल शर्मा, चण्डीप्रसाद हृदयेश, सुदर्शन।

3. विकास काल (उत्तराद्ध)

इस काल की कहानियों के कलेवर में प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक फ्रायड की मनोविज्ञान विषयक मान्यताओं एवं धारणाओं का विशेष प्रभाव परिलक्षित है। हास्य एवं व्यंग्य के छींटे कहानी को एक नया रूप प्रदान करते हैं। इस युग की कहानियों का विवरण निम्नवत् है

  1. अज्ञेय – कोठरी की बात, रोज, अमर वल्लरी।
  2. भगवती चरण वर्मा – दो बाँके, प्रायश्चित।
  3. जैनेन्द्र कुमार – पाजेब, अपना-अपना भाग्य।
  4. इलाचन्द्र जोशी – दीवाली, छाया, आहुति।
  5. यशपाल – दुःख, पराया सुख, परदा।

अन्य कहानीकार- महादेवी वर्मा, अमृतराय, विष्णु प्रभाकर, धर्मवीर भारती, अमृतलाल नागर, रांगेय राघव, उपेन्द्रनाथ अश्क’, चन्द्रगुप्त विद्यालंकार।

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4. स्वातंत्रोत्तर काल कहानी के क्षेत्र में अल्पजीवी आन्दोलन के फलस्वरूप सचेतन कहानी,समानान्तर कहानी, अकहानी एवं नयी कहानी आदि नामों से अस्तित्व में आयीं।

  1. राजेन्द्र यादव – छोटे-छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक।
  2. मोहन राकेश – एक और जिन्दगी, सौदा।
  3. फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ – लाल पान की बेगम, संवदिया, ठेस।
  4. कमलेश्वर – खोई हुई दिशाएँ, साँप।
  5. मन्नू भण्डारी – यही है जिन्दगी, सजा।

अन्य कहानीकार-निर्मल वर्मा, हरिशंकर परसाई, भीष्म साहनी, श्रीकान्त वर्मा, शिवानी, कृष्णा सोबती, उषा प्रियंवदा आदि।

आज की कहानियों में कलात्मकता अवलोकनीय है। भाषा-भाव का सुन्दर समन्वय है। प्रेम तथा साहस का मनभावन सामंजस्य है।

3. एकांकी

यह गद्य की प्रमुख विधा है। विद्वानों के मत में इसकी परिभाषा अवलोकनीय है।

परिभाषा-डॉ. नगेन्द्र के अनुसार, “एकांकी में हमें जीवन का क्रमबद्ध विवेचन मिलकर उसके एक पहल, एक महत्त्वपूर्ण घटना, एक विशेष परिस्थिति अथवा एक उद्दीप्त क्षण का चित्रण मिलेगा। अत: उसके लिए एकता अनिवार्य है।”

एकांकी नाटक का एक प्रकार है। एकांकी और नाटक में वही अन्तर है जो कहानी और उपन्यास में होता है। एकांकी में जीवन का खण्ड-दृश्य अंकित किया जाता है जो अपने में पूर्ण होता है।

एकांकीकार अपनी रचना द्वारा एक ही उद्देश्य को व्यक्त करता है। विचार की अभिव्यक्ति, कथावस्तु, पात्र, संवाद आदि के माध्यम से होती है और एक विशेष उद्देश्य की अभिव्यक्ति करते हुए केवल एक ही प्रभाव की सृष्टि की जाती है।

  • एकांकी के तत्त्व

एकांकी के छः तत्त्व होते हैं

  1. कथावस्तु,
  2. पात्र,
  3. संवाद,
  4. वातावरण,
  5. भाषा-शैली,
  6. अभिनेयता।

(1) कथावस्तु-कथा और कथावस्तु में अन्तर होता है। केवल क्रमबद्ध कथा लिखने से उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो सकती। लेखक के मन में सर्वप्रथम कोई भाव आता है जिससे कथा बनती है। कभी-कभी किसी कथा से ही भाव स्फर्त होता है। एकांकीकार कथा के क्रम में आवश्यक परिवर्तन करता है, एक घटना को दूसरी घटना या क्रिया से जोड़ता है, अन्तर्द्वन्द्व की सृष्टि करता है, किसी पात्र का चमत्कारपूर्ण ढंग से प्रवेश कराता है। नयी-नयी नाटकीय परिस्थितियों की योजना करता है। यही रचनात्मक तन्त्र कथावस्तु है।

एकांकी की कथावस्तु को तीन भागों में विभाजित किया जाता है-

  1. प्रारम्भ,
  2. विकास,
  3. चर्मोत्कर्ष।

सामान्यतः पात्रों का परिचय, उनके पारस्परिक सम्बन्धों के निर्देश प्रारम्भ में होते हैं। विकास या कार्य-व्यापार से संघर्ष आरम्भ होता है। संघर्ष दो विरोधी स्थितियों, सिद्धान्तों, आदर्शों आदि में होता है। एकांकी देखते या पढ़ते समय कथानक के विकास के उपरान्त दर्शक के मन में एक स्थिति ऐसी आती है, जब उसका कौतूहल चरम बिन्दु तक पहुँच जाता है। इस स्थिति को चर्मोत्कर्ष की स्थिति कहते हैं। एकांकी में जब कौतूहल चरम सीमा पर पहुँच जाये तब उसे समाप्त हो जाना चाहिए।

(2) पात्र-एकांकी में पात्रों की संख्या जितनी सीमित होती है, परिस्थिति का रंग उतना ही उभरकर सामने आता है। एकांकी का प्रमुख पात्र नाटक के प्रारम्भ से अन्त तक प्राणवन्त बनाता है। एकांकी की मूल भावना को उद्दीप्त करने के लिए एक दो गौण पात्रों की भी योजना की जाती है। गौण पात्रों के चयन में यह ध्यान रखा जाता है कि उनके चरित्र में विशेषता हो। नाटक में नायक और उसके सहायक पात्रों का चरित्र-चित्रण मूलत: घटनाओं के माध्यम से किया जाता है। किन्तु एकांकी में पात्रों का चरित्र नाटकीय परिस्थितियों और भीतर-बाहर के संघर्षों के सहारे चलता है। एकांकी में चरित्र के किसी एक पहलू का ही चित्र प्रस्तुत किया जाता है।

(3) संवाद-संवाद के माध्यम से ही एकांकी प्रस्तुत होता है। संवाद से कथावस्तु में गतिशीलता आती है और पात्रों की चरित्रगत विशेषताओं का उद्घाटन होता है। एक पात्र जो कुछ कहता है, वह अर्थपूर्ण होता है। इस तरह कथा आगे बढ़ती और दर्शकों या पाठकों के मन में जिज्ञासा पैदा करती है। एकांकी का विस्तार बहुत कम होता है, इसलिए थोड़े शब्दों में अधिक
भाव की अभिव्यक्ति की चेष्टा रहती है।।

(4) वातावरण-कहा जाता है कि जिस एकांकी में देश-काल और वातावरण की अन्विति पूर्ण रूप से पायी जाती है, वही एकांकी सर्वाधिक सफल माना जाता है। देश की अन्विति का अर्थ है सम्पूर्ण घटना एक ही स्थान पर घटित हो और उसमें दृश्य परिवर्तन कम से कम हों।

(5) भाषा-शैली-सभी विधाओं की भाषा-शैली अलग-अलग होती है। एकांकी की भाषा-शैली में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि भाषा का प्रयोग पात्र की शिक्षा, संस्कृति, वातावरण, परिस्थिति के अनुरूप होना चाहिए। यदि पात्र का सांस्कृतिक स्तर ऊँचा है तो उसकी

भाषा शिष्ट और शैली परिष्कृत होगी। यदि उसका वातावरण दूषित है, सांस्कृतिक परिवेश भी उच्च स्तर का नहीं है तो भाषा में निखार और शैली में परिष्कार दिखायी नहीं देगा। इसलिए एकांकीकार अशिक्षित या अर्द्ध-शिक्षित पात्रों के मुँह से प्रायः भाषा का अनगढ़ रूपाचा स्थानीय बोली का रूप ही प्रस्तुत करता है।

(6) अभिनेयता-एकांकी वस्तुतः अभिनीत करने के लिए लिखा जाता है। रंगमंच पर अभिनय करने के लिए एकांकीकार को रंगमंच की विशेषताओं की जानकारी अवश्य होनी चाहिए। एकांकी के सफल अभिनय के लिए उपयुक्त मंचसज्जा और कुशल अभिनेताओं का होना अनिवार्य है। इन सबके अतिरिक्त ध्वनि और प्रकाश का संयोजन भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। यथा अवसर वाद्य-यन्त्र और संगीत का समायोजन होना चाहिए।

प्रकार-एकांकी कई प्रकार के होते हैं। विषय की दृष्टि से ऐतिहासिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं पौराणिक-ये भेद किये जा सकते हैं।
शैली की दृष्टि से एकांकी को कई श्रेणियों में बाँटा जा सकता है-

  1. स्वप्नरूप,
  2. प्रहसन,
  3. काव्य-एकांकी,
  4. रेडियो रूपक,
  5. ध्वनि-रूपक,
  6. वृत्त रूपक।
  • एकांकी का विकासक्रम

एकांकी का विकास आधुनिक युग में माना गया है। पश्चिमी देशों से प्रभावित होकर हमारे राष्ट्र में भी एकांकी का पल्लवन एवं विकास हुआ।

  • हिन्दी का प्रथम एकांकी

कुछ मनीषियों ने जयशंकर प्रसाद द्वारा लिखित ‘एक घुट’ को हिन्दी का प्रथम एकांकी ठहराया है। इसकी रचना लगभग सन् 1930 में हुई थी।

प्रसाद के बाद एकांकी के क्षेत्र में डॉ. रामकुमार वर्मा का पदार्पण हुआ। ‘बादल की मृत्यु नामक एकांकी, ‘एक बूंट’ ‘नामक एकांकी के समकक्ष माना जाता है।
कतिपय विद्वान भुवनेश्वर प्रसाद का सन् 1935 में कारवाँ’ नामक एकांकी संग्रह प्रकाशित हुआ। इस पर पाश्चात्य तकनीक का प्रभाव परिलक्षित है। शिल्प की दृष्टि से कुछ आलोचक इसे भी हिन्दी के प्रथम एकांकी की श्रेणी में रखते हैं।

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विगत अनेक सालों से हिन्दी का एकांकी कलेवर अपने युग के अनुरूप परिवर्तित होता रहा है। साठ-पैंसठ वर्षों में एकांकीकारों ने पारिवारिक, राजनीतिक, मनोवैज्ञानिक, धार्मिक तथा व्यक्तिगत समस्याओं को यथार्थ के धरातल पर अंकित किया है। रेडियो रूपक के रूप में भी एकांकी को अनेक नवीन दिशा प्राप्त हुई है।

  • प्रमुख एकांकीकार

एकांकीकार – प्रसिद्ध एकांकी

  1. उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’ – अधिकार का रक्षक, सूखी डाली, पापी।
  2. डॉ. रामकुमार वर्मा – रेशमी टाई, पृथ्वीराज की आँखें, दीपदान, चारुमित्रा।
  3. उदयशंकर भट्ट – नये मेहमान, नकली और असली।
  4. सेठ गोविन्द दास – केरल का सुदामा।
  5. भगवती चरण वर्मा – सबसे बड़ा आदमी, दो कलाकार।
  6. विष्णु प्रभाकर – वापसी, हब्बा के बाद।
  7. जगदीश चन्द्र माथुर – रीढ़ की हड्डी, भोर का तारा।
  8. भुवनेश्वर प्रसाद – ऊसर, कारवाँ।।

अन्य एकांकीकार-लक्ष्मीनारायण मिश्र, वृन्दावनलाल वर्मा, विनोद रस्तोगी, गिरिजा कुमार माथुर, धर्मवीर भारती, लक्ष्मीनारायण लाल, हरिकृष्ण प्रेमी।

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के एक अंक वाले नाटक ‘अंधेर नगरी’, ‘भारत दुर्दशा’ इनको आधुनिक प्रकार का एकांकी नहीं माना जा सकता। एकांकी आधुनिक युग की ही उपज है।

4. आलोचना

आलोचना भी गद्य की एक सशक्त विधा है। इसे समालोचना, समीक्षा, विवेचना, मीमांसा और अनुशीलन भी कहा जाता है। समालोचना में किसी विषय के गम्भीर अध्ययनपूर्ण विवेचना का भाव होता है। आलोचना सामान्य विवेचन का ही संकेत करती है। अत: हम कह सकते हैं कि किसी विषय की पूर्ण जानकारी प्राप्त कर उस पर विचार-विमर्श करना, उसको स्पष्ट करना, उसके गुण-दोषों की विवेचना कर उन पर अपना मंतव्य प्रकट करना आलोचना कहलाती है।

आलोचना साहित्य की किसी भी विधा की, की जा सकती है।

आलोचना के प्रकार-आलोचना के दो भेद किये जाते हैं-
(1) सैद्धान्तिक,
(2) प्रयोगात्मक। सैद्धान्तिक समीक्षा में अनेक सिद्धान्तों पर प्रकाश डाला जाता है। प्रयोगात्मक समीक्षा पश्चिम की देन है। रचनाओं की पूर्ण विवेचना के साथ ही साहित्य सम्बन्धी धारणाओं के निर्माण का प्रयास पाश्चात्य साहित्य में ही अधिक दिखाई देता है। हिन्दी में भी यह प्रभाव अब स्पष्टतः दिखाई देने लगा है।

5. पत्र

पत्र-साहित्य भी गद्य की एक सशक्त विधा है। उर्दू में ‘गुबारे खातिर’ (आजाद का पत्र संग्रह) और रूसी भाषा में ‘टालस्टॉय की डायरी’ स्थायी साहित्य की निधि हैं। पत्र के द्वारा आत्म-प्रदर्शन, विचारों की अभिव्यक्ति को अच्छी दिशा प्राप्त होती है। हिन्दी में द्विवेदी पत्रावली, द्विवेदी युग के साहित्यकारों के पत्र, पिता के पत्र पुत्री के नाम आदि रचनाएँ उल्लेखनीय हैं। इस विधा के प्रवर्तन में बैजनाथ सिंह, विनोद, बनारसीदास चतुर्वेदी , जवाहरलाल नेहरू आदि का योगदान महत्त्वपूर्ण है।

6. रिपोर्ताज

यह गद्य की एक नई विधा है। द्वितीय महायुद्ध के समय इस विधा का प्रचलन हुआ।
रिपोर्ताज शब्द का विकास रिपोर्ट शब्द से स्वीकारा गया है। रिपोर्ट का आशय है घटना का यथार्थ अंकन। युद्ध की विभीषिका का अनुभव कराने के लिए युद्ध का जो आँखों देखा हाल लिखा जाता था उसे रिपोर्ताज नाम दिया गया। इसमें घटना, दृश्य या वस्तु का चित्रण होता है। उसकी भाषा अत्यन्त ही सजीव और रोचक होती है। आँखों देखी कानों सुनी घटनाओं पर ही रिपोर्ताज लिखी जाती है। इस विधा का शुभारम्भ शिवदान सिंह चौहान की लक्ष्मीपुरा’ से हुआ। साहित्य के इस क्षेत्र में रांगेय राघव, वेद राही, प्रभाकर माचवे, कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’, अमृतराय, उपेन्द्रनाथ अश्क आदि का महत्त्वपूर्ण स्थान है।

7. रेखाचित्र

इसे अंग्रेजी में स्कैच कहा जाता है। चित्रकार जिस प्रकार अपनी तूलिका से चित्र बनाता है उसी प्रकार लेखक अपने शब्दों के रंगों के द्वारा ऐसे चित्र उपस्थित करता है जिससे वर्णन योग्य वस्तु की आकृति का चित्र हमारी आँखों के सामने घूमने लगे। चित्रकार की सफलता उसके रेखांकन तथा रंगों के तालमेल पर निर्भर करती है, जबकि रेखाचित्र के लेखक की उसके शब्दों को गूंथने की कला पर। रेखाचित्र का लेखक अपने शब्दों से ऐसा चित्र बनाता है जो हमारे मानस पटल पर उभरकर मूर्त रूप धारण कर लेता है। इस विधा के प्रमुख लेखक हैं श्रीराम शर्मा, बनारसीदास चतुर्वेदी, रामवृक्ष बेनीपुरी, कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’, निराला तथा महादेवी वर्मा।

8. संस्मरण

संस्मरण आत्मकथा के ही क्षेत्र से निकली हुई विधा है, किन्तु आत्मकथा और संस्मरण में गहरा अन्तर होता है। आत्मकथा का प्रमुख पात्र लेखक स्वयं होता है, किन्तु संस्मरण के अन्तर्गत लेखक जो कुछ देखता है, अनुभव करता है, उसे भावात्मक प्रणाली के द्वारा प्रकट करता है। ऐसे लेखन में सम्पूर्ण जीवन का चित्र न होकर किसी एक या एकाधिकार घटनाओं का रोचक वर्णन रहता है। स्मृति पटल पर आने वाले का अंकन करते हुए वह खुद ही अंकित हो जाता है। संस्मरण का क्षेत्र अन्तर्जगत न होकर बहिर्जगत का होता है। संस्मरण लेखकों में पद्मसिंह शर्मा ‘कमलेश’, महादेवी वर्मा, बनारसीदास चतुर्वेदी, रामवृक्ष बेनीपुरी तथा शान्तिप्रिय द्विवेदी, देवेन्द्र सत्यार्थी आदि प्रमुख हैं। हिन्दी में आदर्श संस्मरण की रचना छायावादोत्तर युग में हुई।

9. जीवनी या आत्मकथा

जीवन चरित्र और आत्मकथा के रूप परस्पर भिन्न होते हैं। आत्मकथा स्वयं लिखी जाती है, जीवनी कोई दूसरा लिखता है। हिन्दी में जीवन चरित्र के लेखक अनेक हैं। आत्मकथाओं में गाँधीजी के ‘सत्य के प्रयोग’, नेहरूजी की ‘मेरी कहानी’ तथा राजेन्द्र प्रसाद बाबू की आत्मकथा’ प्रसिद्ध हैं।

10. डायरी

अपने जीवन के दैनिक प्रसंगों को या किसी प्रसंग विशेष को डायरी के रूप में लिखा जाता है। इनमें जीवन की यथार्थ घटनाओं का वर्णन संक्षेप में रहता है। व्यंजना, व्यंग्य और वर्णन डायरी
की विशेषताएँ हैं।

नित्यप्रति के जीवन की कुछ विशिष्ट घटनाओं के सुख-दुःखात्मक रूपों की मार्मिक स्थितियों को लेखक अपनी प्रतिक्रिया के साथ कलात्मक ढंग से प्रस्तुत करता है तो डायरी साहित्य की रचना होती है। इसमें तिथि, स्थान आदि का सत्य उल्लेख होता है। इसका आकार लघु अथवा विशद दोनों प्रकार का हो सकता है। धीरेन्द्र वर्मा, प्रभाकर माचवे, घनश्याम दास बिड़ला, सुन्दरलाल त्रिपाठी हिन्दी के श्रेष्ठ डायरी लेखक हैं।

11. इण्टरव्यू (साक्षात्कार)

इण्टरव्यू वह रचना है जिसमें लेखक किसी व्यक्ति विशेष से साक्षात्कार करके उसके सम्बन्ध में कतिपय जानकारियों को तथा उसके सम्बन्ध में अपनी क्रिया-प्रतिक्रियाओं को अपनी पूर्व धारणाओं, आस्थाओं और रुचियों से रंजित कर सरस एवं भावपूर्ण शैली में व्यक्त करता है। यह एक प्रकार से संस्मरण का ही रूप है।

12. उपन्यास

उपन्यास में कल्पना का पूरा संयम और व्यायाम रहता है। उपन्यासकार विश्वामित्र की सी सृष्टि बनाता है, किन्तु ब्रह्मा की सृष्टि के नियमों में भी बँधा रहता है। उपन्यास में सुख-दुःख, प्रेम, ईर्ष्या-द्वेष, आशा, अभिलाषा, महत्त्वाकांक्षा, चरित्रों के उत्थान-पतन आदि जीवन के सभी दृश्यों का समावेश रहता है। उपन्यास में नाटक की अपेक्षा अधिक स्वतन्त्रता है, किन्तु नाटक के मूर्त साधनों के अभाव में उपन्यासकार इस कमी को शब्दचित्रों द्वारा पूरा करता है। उपन्यासकार को जीवन का सजीव चित्र अंकित करना पड़ता है। उपन्यास एक प्रकार का जेबी थियेटर बन जाता है। उसके लिए घर से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं। घर, वन, उपवन सब कहीं उसका आनन्द लिया जा सकता है किन्तु इस आनन्द दान के लिए उपन्यासकार को शुद्ध चित्रों का सहारा लेना पड़ता है। डॉ. श्यामसुन्दर दास ने उपन्यास को मानव के वास्तविक जीवन की काल्पनिक कथा कहा है।

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उपन्यास जीवन का चित्र है, प्रतिबिम्ब नहीं। प्रतिबिम्ब कभी-कभी पूरा नहीं होता। उपन्यासकार जीवन के निकट-से-निकट आता है, किन्तु उसे जीवन में से बहुत कुछ छोड़ना पड़ता है और अपनी तरफ से जोड़ना भी पड़ता है। उपन्यास में व्यक्ति की अधिक प्रधानता होती है। वह सत्य का आदर करता हुआ भी अपने आदर्शों की पूर्ति करने तथा कथा को अधिक रोचक तथा प्रभावशाली बनाने के लिए कल्पना से काम लेता है। उसमें सत्य को सुन्दर और रोचक रूप में देखने की प्रवृत्ति रहती है। उपन्यास एक ओर इतिहास या जीवनी की तरह वास्तविकता का अनुकरण करता है। दूसरी ओर उसमें काव्य का कल्पना का-सा पुट, भावों का परिपोषण और शैली का सौन्दर्य रहता है। एक ओर उसमें दार्शनिक-सी जीवन मीमांसा और तथ्य उद्घाटन की प्रवृत्ति रहती है तो दूसरी ओर समाचार-पत्रों की-सी कौतूहल वृत्ति और वाचालता भी रहती है।

  • उपन्यास के तत्त्व

कथावस्तु, पात्र और चरित्र-चित्रण, कथोपकथन, वातावरण, विचार और उद्देश्य, रस और भाव तथा शैली।

(1) कथानक-यह उपन्यास का मूल तत्व है। कथानक कार्यकारण श्रृंखला में बँधा हुआ होना चाहिए। उसका उचित विन्यास हो ताकि वह पाठकों की रुचि के अनुकूल हो सके। अच्छे कथानक में मौलिकता, कौशल, सम्भवता, सुसंगठितता और रोचकता की आवश्यकता है।

(2) पात्र और चरित्र-चित्रण-उपन्यास का विषय मनुष्य है। अत: चरित्र-चित्रण उपन्यास का महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। चरित्र के द्वारा मनुष्य के व्यक्तित्व को प्रकाश में लाया जाता है। यह व्यक्तित्व दो प्रकार का होता है-बाहरी और आन्तरिक। बाहरी व्यक्तित्व में मनुष्य का आकार-प्रकार, वेश-भूषा, आचार-विचार, रहन-सहन, चाल-ढाल, बातचीत के विशेष ढंग और कार्यकलाप आ जाते हैं। आन्तरिक व्यक्तित्व में बाहरी परिस्थितियों के प्रति संवेदनशीलता, उसके राग-विराग, महत्त्वाकांक्षाएँ, अन्धविश्वास, पक्षपात, मानसिक संघर्ष, दया, करुणा, उदारता आदि मानवीय गुण तथा नृशंसता, क्रूरता, अनुदारता आदि सभी दुर्गुणों का चित्रण रहता है।

(3) विचार और उद्देश्य-उपन्यास कहानी मात्र नहीं है, उसमें पात्रों के भाव और विचार भी रहते हैं। पात्रों के विचार लेखक के विचारों की प्रतिध्वनि होते हैं। लेखक का जीवन के प्रति एक विशेष दृष्टिकोण होता है। उसी दृष्टिकोण से वह जीवन की व्याख्या करता है। उसमें जीवन तथ्य सूक्ति रूप में बिखरे रह सकते हैं, किन्तु उपन्यासकार को उपदेशक नहीं बन जाना चाहिए। उपन्यासकार के विचार, परोक्ष रूप से व्यंजित होने चाहिए जिससे उपन्यास की स्वाभाविकता में किसी प्रकार की बाधा न पड़े।

(4) भाव या रस-हमारे विचार जीवन के प्रति रागात्मक या विरागात्मक दृष्टिकोण के ही फल-फूल होते हैं। उपन्यासों में भी महाकाव्य का-सा शृंगार, वीर, हास्य, करुण रस का समावेश होना चाहिए।

(5) शैली-उपन्यास की शैली का प्रमुख गुण है प्रसाद, ओज और माधुर्य का भी विषयानुकूल समावेश उसमें होना चाहिए। भाषा मुहावरेदार हो। उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा आदि का चमत्कार शैली को उचित मात्रा में आकर्षक बनाता है।

13. नाटक

नाटक के मुख्य तत्त्व हैं-कथावस्तु, नायक और रस। वैसे तो नाटक के भी वे ही तत्व होते हैं जो कहानी, उपन्यास आदि के होते हैं, किन्तु नाटकों में रस की प्रधानता होती है। नाटक काव्य की वह विधा है जिसमें लोक-परलोक की घटित-अपघटित घटनाओं का दृश्य दिखाने का आयोजन किया जाता है। इस कार्य के लिए अभिनय की सहायता ली जाती है। शास्त्रीय परिभाषा में नाटक को रूपक कहा जाता है। सफल नाटक का रूप और आकार, दृश्यों और अंकों का उपयुक्त विभाजन, रस का साधारणीकरण, क्रिया व्यापार, प्रवेग तथा प्रवाह, अनुभावों और सात्विक भावों का निदर्शन, संवादों की कसावट, नृत्य और गीत, भाव, भाषा और साहित्यिक अलंकरण, वर्जित दृश्यों का अप्रदर्शन, सुरुचिपूर्ण प्रदर्शन, आलेखन, अलंकरण तथा परिधान
और प्रकाश की व्यवस्था आवश्यक होती है।

14. लोक साहित्य

लोक साहित्य अंचल विशेष में रचा गया साहित्य है। यह अंचल विशेष वह भूखंड होता है, जो एक सांस्कृतिक इकाई के रूप में विकसित होकर, अपनी बोली और जीवन-पद्धति को अपनी लोकपरक चेतना में ढालता है। इस साहित्य में प्रकृति सम्बन्धी उक्तियों की अधिकता है। इसके अन्तर्गत लोकगीत, लोककथाओं, लोकोक्तियों और कहावतों को शामिल किया जा सकता है। लोक साहित्य हमारी परम्पराओं और मूल्यवान धरोहरों को अपनी विषय वस्तु में समेटे है।

प्रश्नोत्तर

  • लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निबन्ध किसे कहते हैं? बाबू गुलाबराय के अनुसार निबन्ध की परिभाषा
अथवा [2009]
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने निबन्ध की क्या परिभाषा दी है?
उल्लेख कीजिए तथा निबन्ध के प्रमुख भेद बताइए।
अथवा [2011]
निबन्ध की परिभाषा एवं निबन्ध के प्रकारों का वर्णन कीजिए। [2017]
अथवा
निबन्ध के कितने भेद होते हैं? नाम लिखिए। [2008, 15]
अथवा
निबन्ध के प्रमुख भेद कौन-से हैं? नाम सहित लिखें। भावात्मक निबन्ध किसे कहते हैं?
उदाहरणस्वरूप एक भावात्मक निबंध का नाम लेखक के नाम सहित लिखिए। [2012]
उत्तर-
निबन्ध हिन्दी साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण विधा है। अंग्रेजी में निबन्ध को ऐसे’ (Essay) कहते हैं। निबन्ध का अर्थ है-“विधिवत् कसा हुआ अथवा बँधा हुआ।”

परिभाषा-बाबू गुलाबराय के अनुसार, “निबन्ध गद्य रचना को कहते हैं जिसमें एक सीमित आकार के भीतर किसी विषय का वर्णन या प्रतिपादन एक विशेष निजीपन, स्वच्छन्दता, सौष्ठव और सजीवता व आवश्यक संगति और सम्बद्धता के साथ किया गया हो।” . परिभाषा-आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार, “यदि गद्य कवियों या लेखकों की कसौटी है, तो निबन्ध गद्य की कसौटी है।”

निबन्ध के भेद-निबन्ध-लेखक के व्यक्तित्व के अनुसार निबन्ध रचना के अनेक प्रकार हो सकते हैं। सुविधा की दृष्टि से मोटे तौर पर इसे चार भागों में विभाजित किया जा सकता

(1) वर्णनात्मक-यह निबन्ध का प्रमुख प्रकार है। निबन्ध किसी दर्शनीय स्थल, मेले, तीर्थस्थान तथा प्राकृतिक दृश्य से सम्बन्धित होते हैं। इनमें भाषा में सरसता, सजीवता तथा चित्रात्मकता होती है।
(2) विवरणात्मक निबन्ध-इन निबन्धों में यात्रा, युद्ध घटनाओं, आत्मकथा अथवा काल्पनिक घटनाक्रम का विवरण दिया जाता है। मन की माँग में भी ये निबन्ध लिखे जाते हैं।
(3) विचारात्मक निबन्ध-इस निबन्ध में किसी विषय पर सुव्यवस्थित प्रस्तुति होती है। इनमें तर्क, चिन्तन की प्रधानता होती है। बुद्धि तत्व भी प्रदान होता है। शुक्ल जी का ‘कविता क्या है’ इसी प्रकार का निबन्ध है।
(4) भावात्मक निबन्ध-ये निबन्ध भाव, काव्यतत्व, कल्पनाप्रधान होते हैं। कभी-कभी लेखक इतना भावुक हो जाता है कि वह मूल विषय से भी भटक जाता है। सरदार पूर्णसिंह का ‘सच्ची वीरता’ श्रेष्ठ भावात्मक निबन्ध है।

प्रश्न 2.
निबन्ध का स्वरूप स्पष्ट करते हुए हिन्दी निबन्ध के विकास पर संक्षिप्त प्रकाश डालिए। [2013]
उत्तर-
स्वरूप-किसी विषय को व्यवस्थित ढंग से क्रमबद्ध रूप में सुगठित भाषा में प्रस्तुत करने वाली गद्य रचना निबन्ध कहलाती है। निबन्ध किसी भी विषय पर लिखा जा सकता है। इसमें लेखक का व्यक्तित्व प्रतिबिम्बित होता है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल मानते हैं कि “यदि गद्य काव्य की कसौटी है तो निबन्ध गद्य की कसौटी है।”

विकाश-हिन्दी निबन्ध का विकास आधुनिक काल में इस प्रकार हुआ है-

  1. भारतेन्दु युग-भारतेन्दु युग से ही हिन्दी निबन्ध लेखन प्रारम्भ हुआ। इस युग में धर्म, समाज, राजनीति, शिक्षा, प्रकृति आदि सभी विषयों पर निबन्ध लिखे गये। बालकृष्ण भट्ट, प्रतापनारायण मिश्र, बालमुकुंद गुप्त आदि श्रेष्ठ निबन्धकार हुए।
  2. द्विवेदी युग-द्विवेदी युग में विषय तथा भाषा के परिमार्जन का उल्लेखनीय कार्य हुआ। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने ‘सरस्वती’ पत्रिका के द्वारा लेखकों का मार्गदर्शन किया। श्यामसुन्दर दास, सरदार पूर्णसिंह, माधव प्रसाद मिश्र आदि इस युग के प्रमुख निबन्धकार हैं।
  3. शुक्ल युग-आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी निबन्ध को चरम उत्कर्ष पर पहुँचाने का सराहनीय कार्य किया । विषय तथा भाषा-शैली की प्रौढ़ता उस युग के निबन्धों में देखी जा सकती है। बाबू गुलाब राय, वियोगी हरि, वासुदेव शरण अग्रवाल आदि इस युग के निबन्धकार
  4. शुक्लोत्तर युग-इस युग में इस विधा को व्यापक रूप प्राप्त हुआ है। मनोविज्ञान, विज्ञान, राजनीति, समीक्षा आदि विषयों पर निबन्ध लिखे गये हैं। हजारी प्रसाद द्विवेदी, रामविलास शर्मा, विद्यानिवास मिश्र आदि इस युग के प्रमुख मिबन्धकार हैं।

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प्रश्न 3.
भारतेन्दु युग के निबन्ध की किन्हीं चार विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-

  1. निबन्धों के कलेवर में पत्रकारिता का पुट समाविष्ट है।
  2. सड़ी-गली मान्यताओं एवं रूढ़ियों का प्रबल विरोध है।
  3. शैली सरस, हदयस्पर्शी एवं मनभावन है।
  4. निबन्धकार अंधानुकरण के घोर विरोधी थे।

प्रश्न 4.
भारतेन्दु युग के प्रमुख चार निबन्धकारों के नामों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-

  1. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,
  2. प्रताप नारायण मिश्र,
  3. बाल मुकुन्द गुप्त,
  4. बद्रीनारायण चौधरी।

प्रश्न 5.
द्विवेदी युग का सामान्य परिचय दीजिए।
उत्तर-
भारतेन्दु युग के पश्चात् आधुनिक काल का द्वितीय चरण द्विवेदी युग के नाम से जाना जाता है। द्विवेदी जी के कुशल निर्देशन में न जाने कितने कलाकार साहित्य जगत् में उजागर हुए जिनकी सफल कीर्ति आज भी फैली है।

प्रश्न 6.
द्विवेदी युग के निबन्धों की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-

  1. निबन्धों में गम्भीरता का समावेश है।
  2. निबन्धों की भाषा प्रांजल एवं परिमार्जित है।
  3. हिन्दी में समालोचना शैली का सूत्रपात भी इसी युग में हुआ।
  4. सरल एवं प्रचलित शब्दावली में कहीं-कहीं करारा व्यंग्य है।

प्रश्न 7.
शुक्ल युग के निबन्धों की किन्हीं पाँच विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-

  1. भाषा शक्ति सम्पन्न एवं कलात्मक बनी।
  2. भारतीय एवं पाश्चात्य समीक्षा का तर्कसंगत समन्वय है।
  3. छायावाद के संदर्भ में तर्कपूर्ण विवेचना है।
  4. निबन्धों की शैली परिमार्जित एवं विषयों के अनुरूप है।
  5. यत्र-तत्र गाँधीवाद का प्रभाव भी अवलोकनीय है।

प्रश्न 8.
शुक्लोत्तर युग का सामान्य परिचय एवं प्रमुख निबन्धकारों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
सामान्य परिचय-शुक्ल युग के पश्चात् का युग शुक्लोत्तर युग के नाम से जाना जाता है। इसे ‘वर्तमान युग’ भी कहा जाता है।
प्रमुख निबन्धकार-आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, बाबू गुलाबराय, डॉ. मगेन्द्र, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, शिवदानसिंह चौहान, महादेवी वर्मा, धर्मवीर भारती, भगवतशरण उपाध्याय, प्रभाकर माचवे आदि।

प्रश्न 9.
कहानी की परिभाषा देते हुए उसके तत्त्व बताइए। (2008, 10)
अथवा
कहानी के तत्त्व लिखते हुए। किन्हीं दो कहानीकारों के नाम एवं उनकी एक-एक रचना लिखिए। [2013]
उत्तर-
परिभाषा-कहानी वास्तविक जीवन की ऐसी काल्पनिक कथा है जो छोटी होते हुए भी स्वतः पूर्ण और सुसंगठित होती है। कहानी के छः तत्त्व स्वीकार किये गये हैं जो निम्न प्रकार हैं
(1) कथानक-कथानक कहानी का मूल आधार होता है। कहानी की कथावस्तु ऐतिहासिक, पौराणिक, राजनीतिक, पारिवारिक, मनोवैज्ञानिक, काल्पनिक हो सकती है। कथानक में भी तीन चरण होते हैं-आरम्भ, मध्य और अन्त । कथानक का आरम्भ आकर्षक होना चाहिए जिसमें जिज्ञासा का भाव होना चाहिए और उसका अन्त प्रभावी होना चाहिए।

(2) पात्र और चरित्र-चित्रण-कहानी पात्रों के चरित्र-चित्रण के आधार पर ही आगे बढ़ती है। जब हमारे चरित्र इतने सजीव और आकर्षक होते हैं कि पाठक स्वयं को उनके स्थान पर समझ लेता है तो पाठक को कहानी में आनन्द आता है। जब कहानीकार इस तरह की सहानुभूति उपस्थित कर देता है, तो उसे अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त होती है। कहानी में पात्रों की संख्या सीमित होनी चाहिए।

(3) कथोपकथन या संवाद-पात्र अपने संवादों के माध्यम से कहानी को गति प्रदान करते हैं। संवादों के माध्यम से पात्र जीवन्त होते हैं। कहानी में कथोपकथन पात्रों के अनुकूल, संक्षिप्त, सरल और कौतूहलपूर्ण होने चाहिए।

(4) देशकाल या वातावरण-कहानी में देशकाल या वातावरण जीवंतता लाता है। वेश-भूषा, रीति-रिवाज, बिचार एवं भाषा-शैली युग के अनुरूप होनी चाहिए। ऐतिहासिक कहानियों, ग्रामीण परिवेश की कहानियों या विदेशी कहानियों में वातावरण का विशेष ध्यान रखा जाता है।

(5) भाषा-शैली-कहानी में भाषा-शैली का विशेष महत्त्व है। सहज एवं सुगठित भाषा वातावरण को चित्रित करने में सहयोगी होती है। कहानी में उस भाषा का प्रयोग होना चाहिए जो जनजीवन के निकट हो। भाषा देशकाल एवं वातावरण के अनुकूल होनी चाहिए। कहानी में चार प्रकार की शैलियाँ प्रचलित हैं-

  • ऐतिहासिक शैली,
  • आत्म चरित्र शैली,
  • डायरी शैली,
  • पत्रात्मक शैली।

(6) उद्देश्य-वैसे तो कथा साहित्य का उद्देश्य मनोरंजन माना जाता है, किन्तु मनोरंजन ही साहित्य की सार्थकता को नष्ट कर देता है। कहानी में ऐसी मूल संवेदना होती है जिसका अनुभव करके पाठक उसके बारे में सोचता है। उद्देश्य कहानी का प्राणतत्त्व है।

दो कहानीकार मुंशी प्रेमचन्द (कफन) एवं जयशंकर प्रसाद (आकाशदीप) हैं।

प्रश्न 10.
कहानी में कथावस्तु का क्या महत्त्व है?
उत्तर-
कहानी में कथावस्तु या कथानक मुख्य ढाँचा होता है। विषय की दृष्टि से कहानी में सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक आदि में से किसी भी प्रकार का कथानक अपनाया जा सकता है, किन्तु यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि कहानी में जीवन की बाहरी घटना का प्रकाशन न होकर मानव हृदय का भी उद्घाटन होता है।

प्रश्न 11.
एकांकी की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
परिभाषा-डॉ. नगेन्द्र के अनुसार, “एकांकी में हमें जीवन का क्रमबद्ध विवेचन मिलकर उसके एक पहलू, एक महत्त्वपूर्ण घटना, एक विशेष परिस्थिति अथवा एक उद्दीप्त क्षण का चित्रण मिलेगा। अतः उसके लिए एकता अनिवार्य है।”

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प्रश्न 12.
रेखाचित्र से क्या आशय है?
उत्तर-
इसे अंग्रेजी में स्कैच कहा जाता है। चित्रकार जिस प्रकार अपनी तूलिका से चित्र बनाता है उसी प्रकार लेखक अपने शब्दों के रंगों के द्वारा ऐसे चित्र उपस्थित करता है जिससे वर्णन योग्य वस्तु की आकृति का चित्र हमारी आँखों के सामने घूमने लगे।

प्रश्न 13.
संस्मरण की परिभाषा दीजिए। दो प्रमुख रचनाकारों के नाम लिखिए। [2009]
उत्तर-
संस्मरण आत्मकथा के क्षेत्र से निकली हुई विधा है, किन्तु आत्मकथा एवं संस्मरण में गहरा अन्तर होता है। आत्मकथा का प्रमुख पात्र लेखक स्वयं होता है, किन्तु संस्मरण के अंतर्गत लेखक जो कुछ भी देखता है उसे भावात्मक प्रणाली के द्वारा व्यक्त करता है। इसके अन्तर्गत सम्पूर्ण जीवन का चित्र न होकर किसी एक या एकाधिक घटनाओं का रोचक वर्णन रहता है। महादेवी वर्मा, रामवृक्ष बेनीपुरी प्रमुख रचनाकार हैं।

प्रश्न 14.
रेखाचित्र एवं संस्मरण में अन्तर बताइए। [2010, 16]
उत्तर-
रेखाचित्र एवं संस्मरण निकट होते हुए भी दो अलग-अलग गद्य रूप हैं। रेखाचित्र में किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना का कलात्मक प्रस्तुतीकरण किया जाता है जबकि संस्मरण में किसी महान व्यक्ति के प्रत्यक्ष संसर्ग को यथार्थ के सहारे अंकित किया जाता है।

श्रीराम शर्मा, कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’, महादेवी वर्मा, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ आदि प्रमुख रेखाचित्रकार हैं तथा पद्म सिंह शर्मा, रामवृक्ष बेनीपुरी, महादेवी वर्मा, बनारसीदास चतुर्वेदी आदि प्रमुख संस्मरण लेखक हैं।

प्रश्न 15.
उपन्यास की परिभाषा देते हुए उपन्यास के तत्त्वों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
उपन्यास जीवन का चित्र है, प्रतिबिम्ब नहीं । कथा मात्र को उपन्यास नहीं माना जा सकता है। उपन्यास लेखन की एक विशिष्ट शैली होती है। उपन्यास के प्रमुख तत्त्व इस प्रकार हैं-

  • कथानक,
  • पात्र एवं चरित्र-चित्रण,
  • उद्देश्य,
  • शैली,
  • भाव या रस।

प्रश्न 16.
जीवनी और आत्मकथा में क्या अन्तर है? तीन जीवनी लेखकों के नाम लिखिए।
अथवा [2008]
आत्मकथा और जीवनी में अन्तर समझाते हुए किन्हीं दो आत्मकथाकारों के नाम लिखिए।
अथवा [2009, 14]
नीवनी और आत्मकथा में अंतर लिखते हुए एक-एक रचना एवं रचनाकारों के नाम लिखिए। [2017]
उत्तर-
‘जीवनी’ तथा ‘आत्मकथा’ गद्य की प्रमुख विधाएँ हैं। किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के जीवनवृत्त को रोचक साहित्यिक ढंग से प्रस्तुत किया जाए तो वह जीवनी कहलायेगी एवं जब लेखक अपने जीवनवृत को स्वयं ही प्रस्तुत करे तब वह आत्मकथा मानी जाएगी।

जीवनी में विवरण एवं तथ्यों पर ध्यान रहता है, जबकि आत्मकथा में अनुभूति की गहराई अधिक होती है।

हिन्दी के जीवनी लेखकों में डॉ. रामविलास शर्मा, (निराला की साहित्य साधना),अमृतराय (कलम का सिपाही) तथा विष्णु प्रभाकर (आवारा मसीहा) के नाम प्रमुख हैं। आत्मकथा लेखकों में वियोगी हरि ( मेरा जीवन प्रवाह), गुलाबराय ( मेरी असफलताएँ) तथा हरिवंश राय ‘बच्चन’ (क्या भूलूँ क्या याद करूँ) प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 17.
नाटक एवं एकांकी में अन्तर बताते हुए प्रमुख लेखकों के नाम लिखिए। [2009]
उत्तर-
नाटक एवं एकांकी दोनों का सम्बन्ध रंगमंच से है किन्तु दोनों में पर्याप्त अन्तर है

  1. नाटक का आकार विस्तृत होता है। उसमें कई अंक तथा अंकों के दृश्य होते हैं जबकि एकांकी का आकार छोटा होता है तथा इसमें मात्र एक अंक होता है।
  2. नाटक की तीन या इससे भी अधिक घण्टे की समय सीमा होती है जबकि एकांकी आधा घण्टे की समयावधि में समाप्त हो जाता है।
  3. नाटक में अधिक पात्र तथा विस्तृत मंच सज्जा होती है जबकि एकांकी में सीमित पात्र तथा सीमित मंच सज्जा होती है। वस्तुतः नाटक का लघु रूप एकांकी है। प्रमुख लेखकों में जयशंकर प्रसाद, हरिकृष्ण प्रेमी, राजकुमार वर्मा, उदयशंकर भट्ट, उपेन्द्रनाथ अश्क, मोहन राकेश, विष्णु प्रभाकर, धर्मवीर भारती आदि हैं।

प्रश्न 18.
कहानी और नाटक में कोई चार अन्तर लिखिए। (2015)
उत्तर-
कहानी और नाटक में चार अन्तर इस प्रकार हैं-
(1) कहानी श्रव्य साहित्य है जबकि नाटक दृश्य साहित्य के अन्तर्गत आता है।
(2) कहानी को पाठक पढ़कर आनन्द लेता है जबकि नाटक अभिनय के द्वारा प्रस्तुत होता है। (3) कहानी का आकार छोटा होता है जबकि नाटक बड़े होते हैं। (4) कहानी किसी शैली में लिखी जा सकती है जबकि नाटक में संवाद शैली का प्रयोग होता है।

प्रश्न 19.
रिपोर्ताज किसे कहते हैं? कोई दो विशेषताएँ लिखिए। (2015)
उत्तर-
रिपोर्ताज में किसी आँखों देखी घटना, स्थिति, प्रकृति आदि का सरस, स्वाभाविक, वास्तविक एवं रोचक वर्णन किया जाता है। रिपोर्ताज की दो विशेषताएँ इस प्रकार हैं (1) रिपोर्ताज में किसी आँखों देखी घटना, स्थिति आदि का वर्णन होता है। (2) यह वर्णन सत्य होता है, इसमें कल्पना का प्रयोग नहीं किया जाता है।

प्रश्न 20.
गद्य की विधाओं में से आपको कौन-सी विधा अच्छी लगती है और क्यों? [2008]
उत्तर-
हिन्दी साहित्य की विविध विधाएँ समृद्धशाली हैं-नाटक, एकांकी, उपन्यास, कहानी, आलोचना, निबन्ध, जीवनी, आत्मकथा, यात्रावृत्त, गद्य काव्य, संस्मरण, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, डायरी तथा रेडियो रूपक आदि।

मुझे इन विधाओं में से कहानी अच्छी लगती है। यह गद्य विधा जीवन के किसी एक संक्षिप्त प्रसंग को उद्देश्य सहित प्रस्तुत करती है। लेखक कल्पना के सहारे उसे पाठकों के समक्ष रखता है। कहानी में आदर्श और यथार्थ का सुन्दर समन्वय होता है। इसमें कम-से-कम घटनाओं और प्रसंगों के माध्यम से अधिक-से-अधिक प्रभाव की सृष्टि करता है। कहानी में मानवीय संवेदनाओं को बड़ी ही बारीकी से उजागर किया जाता है। मानवीय मूल्यों को स्थापित करना कहानीकार का मूल उद्देश्य होता है। यद्यपि साहित्य की सभी विधाएँ सौद्देश्य होती हैं तथापि कहानी अल्प समय में पाठकों को उसके उद्देश्य से अवगत करा देती है। जीवन की किसी घटना या चरित्र का रोचक एवं प्रभावशाली चित्रण होता है। कहानी में चरित्र अत्यन्त ही सजीव और आकर्षक होते हैं। पाठक चरित्रों के माध्यम से उद्देश्य को समझने में तत्पर रहता है। पात्रों की सहानुभूति पाठकों को प्राप्त होती है।

कहानी का शुभारम्भ आकर्षक तथा जिज्ञासापूर्ण होता है। जिसमें विषय की विषयवस्तु समायी रहती है। ऐतिहासिक कहानी में वातावरण या घटनाओं का महत्त्व होता है। ऐतिहासिक कहानी हमें अतीत के गौरव का स्मरण कराती है जिससे देशभक्ति की भावना जाग्रत होती है। बालक के कोमल मन पर कहानी अपना अमिट प्रभाव छोड़ती है। पाठक कहानी के उद्देश्य के विषय में सोचने को विवश होता है।

प्रश्न 21.
उपन्यास और कहानी में अन्तर स्पष्ट कीजिए। [2011, 16]
उत्तर-
(1) उपन्यास का आकार बड़ा होता है जबकि कहानी छोटे आकार की होती है।
(2) उपन्यास में समस्त जीवन का अंकन होता है जबकि कहानी में जीवन का खण्ड चित्रण होता है।
(3) उपन्यास की अपेक्षा कहानी में पात्र कम होते हैं।
(4) उपन्यास में कई कथाएँ जुड़ जाती हैं जबकि कहानी में एक ही कथा होती है।

प्रश्न 22.
लोक साहित्य किसे कहते हैं? लोकगीत अथवा लोककथा का परिचय दीजिए। [2012, 14]
उत्तर-
लोक भाषा के माध्यम से जनसामान्य की अनुभूति को प्रस्तुत करने वाला साहित्य लोक साहित्य कहलाता है।

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लोकगीत-सामान्य समाज की अनुभूति को उन्हीं की भाषा में गेय रूप में व्यक्त करने वाला साहित्य लोकगीत कहलाता है। इसमें जीवन के यथार्थ का अनुभव भरा होता है।

लोकगाथा-जनसाधारण के अनुभवों पर आधारित वे कथाएँ जो जनभाषा में होती हैं वे लोकगाथा कही जाती हैं। ये समाज के मनोरंजन का श्रेष्ठ माध्यम होती हैं।

  • अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एकांकी में संवाद का क्या महत्त्व है?
उत्तर-
संवाद से कथावस्तु में गतिशीलता आती है और पात्रों की चरित्रगत विशेषताओं का उद्घाटन होता है।

प्रश्न 2. एकांकी कितने प्रकार की होती है?
उत्तर-
एकांकी निम्न प्रकार की होती है-

  1. स्वप्नरूप,
  2. प्रहसन,
  3. काव्य एकांकी,
  4. रेडियो रूपक,
  5. ध्वनि रूपक,
  6. वृत्त रूपक।

प्रश्न 3.
आलोचना के कितने भेद किये जा सकते हैं?
उत्तर-
आलोचना के प्रमुख दो भेद हैं
(1) सैद्धान्तिक आलोचना,
(2) प्रयोगात्मक आलोचना।

प्रश्न 4.
पत्र विधा के प्रमुख लेखकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
बैजनाथ सिंह, विनोद, बनारसीदास चतुर्वेदी, जवाहरलाल नेहरू आदि।

सम्पूर्ण अध्याय पर आधारित महत्त्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  • बहु-विकल्पीय प्रश्न

1. आधुनिक काल की सबसे लोकप्रिय विधा है
(i) कहानी, (ii) निबन्ध, (iii) उपन्यास,

2. भारतेन्दुयुगीन निबन्धों की विशेषता नहीं है [2012]
(i) हास्य व्यंग्य, (ii) समाज सुधार, (iii) मनमौजीपन, (iv) ज्ञान-विज्ञान युक्त विषय।

3. लेखक के स्वयं के जीवन-वृत्त को प्रस्तुत करने वाली रचना कहलाती है
(i) संस्मरण, (ii) उपन्यास, (iii) रेखाचित्र, (iv) आत्मकथा।

4. ‘भोलासम का जीव’ किस विधा की रचना है?
(i) संस्मरण, (ii) व्यंग्य, (iii) जीवनी, (iv) आत्मकथा।

5. खड़ी बोली गद्य का प्रारम्भ किस युग से माना जाता है?
(i) भारतेन्दु युग, (ii) द्विवेदी युग, (iii) शुक्ल युग, (iv) प्रगतिवादी युग।

6. ‘रेखाचित्रों की सिद्ध लेखिका हैं [2008]
(i) मालती जोशी, (ii) शिवानी, (ii) महादेवी वर्मा, (iv) महाश्वेता देवी।

7. पाठक को झकझोरने तथा सोचने के लिए बाध्य करने वाली विधा है- [2008]
(i) हास्य, (ii) व्यंग्य, (iii) नाटक, (iv) एकांकी।

8. ‘पूस की रात’ कहानी के लेखक हैं
(i) यशपाल, (ii) भगवतीचरण वर्मा, (ii) प्रेमचन्द, (iv) अमृतलाल नागर।
उत्तर-
1. (i), 2. (iv), 3. (iv), 4. (ii), 5. (i), 6. (ii), 7.(ii), 8. (iii)।

  • रिक्त स्थान पूर्ति

1. ‘भोर का तारा’ प्रसिद्ध ………….. है। [2009]
2. ……. नाटक सम्राट कहलाते हैं।
3. ‘इन्दुमती’ कहानी के लेखक ………… हैं।
4. कहानी के तत्वों की संख्या ………..” मानी जाती है। [2009]
5. ‘असफलता दिखाती है नयी राह, ……….. विधा की रचना है।
6. ‘सवा सेर गेहूँ’ के लेखक ………..” हैं।
7. उपन्यास शब्द का शाब्दिक अर्थ ………….[2012]
8. परीक्षा नामक निबन्ध …………. ने लिखा है।
9. ‘कवि वचन सुधा’ पत्रिका के सम्पादक का नाम …………. है।
उत्तर-
1. एकांकी,
2. जयशंकर प्रसाद,
3. किशोरीलाल गोस्वामी, 4. छ:,
5. आत्मकथा,
6. प्रेमचन्द,
7. समीप रखना,
8. प्रतापनारायण मिश्र,
9. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र।

  • सत्य/असत्य

1. हजारीप्रसाद द्विवेदी ‘द्विवेदी युग’ के लेखक हैं। [2009, 10]
2. विद्यानिवास मिश्र ललित निबन्धकार हैं।
3. प्रेमचन्द ने मात्र नगरीय जीवन पर कहानियाँ लिखी हैं।
4. ‘मैला आँचल’ आंचलिक उपन्यास है।
5. आत्मकथा लेखक स्वयं लिखता है। [2009]
6. ‘उसने कहा था’ कहानी के लेखक प्रेमचन्द हैं।
7. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल एक कवि थे। [2009]
उत्तर-
1. असत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. सत्य,
6. असत्य,
7. असत्य।

  • जोड़ी मिलाइए

I.
1. गद्य का प्रथम उत्थान काल [2008] – (क) महादेवी वर्मा
2. रेखाचित्र [2010] – (ख) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
3. ‘सत्य के प्रयोग’ आत्मकथा के लेखक हैं [2009] – (ग) मुंशी प्रेमचन्द
4. उपन्यास सम्राट [2008] – (घ) महात्मा गाँधी
5. आत्मकथा [2012] – (ङ) मेरे बचपन के दिन
6. संस्मरण [2013] – (च) हरिवंश राय बच्चन’
उत्तर-
1. → (ख),
2.→ (क),
3.→ (घ),
4.→ (ग),
5.→ (च),
6.→
(ङ)।

II.
1. ‘सरस्वती’ पत्रिका के प्रथम सम्पादक [2009] – (क) सरदार पूर्णसिंह
2. द्विवेदी युग के प्रसिद्ध निबन्धकार हैं [2008] – (ख) महावीर प्रसाद द्विवेदी
3. व्यंग्य – (ग) मोहन राकेश
4. ‘एक और जिन्दगी’ [2009] – (घ) हरिशंकर परसाई
उत्तर-
1. → (ख),
2. → (क),
3.→ (घ),
4. → (ग)।

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  • एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. खड़ी बोली हिन्दी गद्य का प्रारम्भ किस काल में हुआ?
2. उत्साह किस प्रकार का निबन्ध है?
3. ‘गोदान’ के लेखक कौन हैं?
4. ‘कोणार्क’ के लेखक का नाम बताइए।
5. गद्य में रचित किसी विशिष्ट व्यक्ति का साक्षात्कार किस विधा में आता है?
6. हिन्दी की प्रथम कहानी कौन-सी मानी गई है? [2009]
7. एक अंक वाली नाट्य कृति क्या कहलाती है?
8. ‘कर्त्तव्य और सत्यता’ नामक निबन्ध के लेखक कौन हैं?
9. ‘आकाशदीप’ कहानी किसने लिखी है?
10. कहानी (गद्य विधा) के कितने तत्व होते हैं? [2015]
उत्तर-
1. ‘आधुनिक काल’,
2. मनोविकार सम्बन्धी,
3. प्रेमचन्द,
4. गिरिजाकुमार माथुर,
5. भेंटवार्ता,
6. इन्दुमती,
7. एकांकी,
8. श्यामसुन्दर दास,
9. जयशंकर प्रसाद,
10. छः।

MP Board Class 11th Hindi Solutions

MP Board Class 12th Special Hindi मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ

MP Board Class 12th Special Hindi मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ

1. मुहावरे

ये ऐसे छोटे-छोटे वाक्यांश हैं जिनके प्रयोग से भाषा में सौन्दर्य, प्रभाव, चमत्कार और विलक्षणता आती है। मुहावरा वाक्यांश होता है, अतः इसका स्वतन्त्र प्रयोग न होकर वाक्य के बीच में उपयोग किया जाता है। मुहावरे के वास्तविक अर्थ का ज्ञान होने पर ही इसका सही उपयोग हो सकता है। इसका सामान्य अर्थ न लेकर इसके गूढ़ अर्थ या व्यंजना से अर्थ समझना चाहिए। इसका उपयोग करने में इन बातों का ध्यान रखना चाहिए-

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(1) मुहावरे को पढ़कर उसमें छिपे अर्थ को समझने का प्रयास करना चाहिए।
(2) उसी के अर्थ से मिलती-जुलती घटना या बात को चुनकर संक्षेप में लिखना चाहिए।
(3) मुहावरे को उसी वाक्य में मिलाकर उसी काल की क्रिया में रख देना चाहिए।
(4) यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि मुहावरा प्रयोग करने से अनेक रूप ले सकता है,क्योंकि उसमें थोड़ा परिवर्तन हो जाता है।
(5) मुहावरे के मूल अर्थ में ही उसका प्रयोग नहीं होता। जैसे-अंगारों पर पैर रखना = संकट में पड़ जाना। आई.ए. एस. की परीक्षा में बैठना और सफलता पाना अंगारे पर पैर रखने जैसा है। अंगारे पर पैर रखने में जितना कष्ट होता है,उतना ही प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी और परीक्षा उत्तीर्ण करने में होता है।

यहाँ कुछ मुहावरे,उनके अर्थ और प्रयोग क्रमशः दिये जा रहे हैं-
(1) अपना उल्ल सीधा करना (अपना मतलब सिद्ध करना)-ममता मेरी हिन्दी की कॉपी ले गयी, अपना उल्लू तो सीधा कर लिया, पर मैंने इतिहास की किताब माँगी तो मना कर दिया।
(2) अक्ल पर पत्थर पड़ना (बुद्धि भ्रष्ट हो जाना) परीक्षा के समय वह रोजाना दिन में सो जाती थी,मानो उसकी अक्ल पर पत्थर पड़ गये हों।
(3) अन्धे की लाठी (एकमात्र आश्रय)-राकेश अपने बूढ़े बाप की अन्धे की लाठी है। [2009]
(4) अन्धेरे घर का उजाला (एकमात्र पुत्र) दीपक शर्माजी के अन्धेरे घर का उजाला है।
(5) अक्ल चकराना (विस्मित होना, बात समझ में न आना)-रामबाबू के निधन का समाचार सुनकर तो अक्ल चकरा गयी।
(6) अलग-अलग खिचड़ी पकाना (सबसे अलग-अलग) संगीता और अनुराधा दिन भर न जाने क्या अपनी अलग-अलग खिचड़ी पकाती रहती हैं।
(7) अंगार उगलना (कटु वचन बोलना)-जीजी या तो बोलती नहीं, जब बोलेंगी तो अंगार उगलेंगी।
(8) अगर-मगर करना (टालने का प्रयत्न करना)-भाभी से जब भी कमला की शादी की बात करो, वे अगर-मगर करने लगती हैं।
(9) अंग-अंग ढीला हो जाना (थक जाना) आपरेशन होने के बाद से तो ऐसा लगता है कि अंग-अंग ढीले हो गये।
(10) अंकुश देना (वश में रखना)-पिताजी तीनों लड़कों पर सदैव अंकुश दिये रहते हैं।

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(11) अपने मुँह मियाँ मिट्ट बनना (अपनी प्रशंसा स्वयं करना)-अरुण हमेशा अपने मुँह मियाँ मिट्ट बना रहता है। [2017]
(12) अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना (स्वयं की हानि करना) रश्मि पढ़ाई अधूरी छोड़कर चली गयी, उसने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली।
(13) अपना गला फँसाना (स्वयं को संकट में डालना)-मंजु की सगाई करके मैंने अपना गला फँसा दिया।
(14) अन्धे को दिया दिखाना (मूर्ख को उपदेश देना)-गाँव वालों से प्रौढ़ शिक्षा की बात करना अन्धे को दिया दिखाने जैसा है।
(15) अंगद का पैर होना (दृढ़ निश्चय से जम जाना) राजीव तो अंगद के पैर की तरह जम गये हैं।
(16) अँगूठा दिखाना (साफ मना करना)-रानी से काम करने को कहा तो वह अँगूठा दिखाकर भाग गयी।
(17) अक्ल के घोड़े दौड़ाना (अटकलें लगाना) जब माला से पूछा कि सप्तर्षि कहाँ हैं तो वह अक्ल के घोड़े दौड़ाने लगी।
(18) अक्लमन्द की दुम बनना (मूर्ख होकर बुद्धिमानी की बात करना)-कमल व्यवसाय के बारे में कुछ समझता तो है नहीं, फिर भी अक्लमन्द की दुम बना रहता है।
(19) अपना-सा मुँह लेकर रहना (असफल होकर लज्जित होना) जब मीनू निकी को छोड़कर सिनेमा चली गयी तो निकी अपना-सा मुँह लेकर रह गयी।
(20) अरण्यरोदन करना (निरर्थक बात करना)–नेताओं के वक्तव्य अरण्यरोदन की तरह हो गये हैं।

(21) आँखों का तारा (अत्यन्त प्रिय) रुचि अपनी मम्मी की आँख का तारा है। [2009]
(22) आँख का किरकिरा होना (सदा खटकते रहना)-सुधीर की जब से पदोन्नति हुई है, वह सबकी आँख का किरकिरा हो गया।
(23) आँखों में पानी न रहना (बेशर्म हो जाना)—वह दिन भर व्यर्थ ही घूमता रहता है, उसकी आँखों में पानी ही नहीं रहा।
(24) आँख मूंद लेना (उदासीन होना)-अपना मकान बन जाने के बाद बड़े भैया ने हम सबकी तरफ से आँखें मूंद लीं।
(25) आड़े हाथ लेना (भर्त्सना करना, फटकारना) इस बार जब सन्तोष फिर उपदेश देने लगा तो मैंने उसे आड़े हाथों लिया।
(26) आठ आँसू रोना (अधिक दुःखी होना)-शास्त्रीजी के निधन से देशवासी आठ आँसू रोये।
(27) आपे से बाहर होना (क्रोधित होना)-बिहारी छोटी-सी बात पर भी आपे से बाहर हो जाता है।
(28) आटा-दाल का भाव मालूम होना (विषम परिस्थितियों में यथार्थ ज्ञान मिलना)-सुरेशजी,शादी होने दो, फिर मालूम होगा आटे-दाल का भाव।
(29) आकाश के तारे तोड़ना (असम्भव कार्य करना) वह प्रीति को इतना प्यार करता है कि उसके लिए आकाश के तारे भी तोड़ सकता है।

(30) आसमान सिर पर उठाना (बहुत अधिक शोर) निष्ठा गुड़िया लेकर भागी तो जमाते ने रो-रोकर आसमान सिर पर उठा लिया।
(31) आकाश से बातें करना (बहुत ऊँचा होना) सौरभ की पतंग आकाश से बातें करने लगी तो वह बहुत खुश हो गया।
(32) आँखें लाल-पीली करना (क्रोध करना) उत्सव के मन की न हो तो वह प्रायः आँखें लाल-पीली करने लगता है।
(33) आँखें बिछाना (प्यार से स्वागत करना)-दीपावली पर सुधा ने लिखा; आओ, हम आँखें बिछाये बैठे हैं। .
(34) आँख का काजल निकालना (ठग लेना) प्रफुल्ल इतना चतुर है कि वह आँख का काजल निकाल ले और पता ही न चले।
(35) आग में घी डालना (क्रोध को और बढ़ाना)-जब माताजी को राजू समझाने लगा तो पिताजी बोले-अरे,क्यों आग में घी डालता है?
(36) आकाश-पाताल का अन्तर (अत्यधिक पार्क होना)-नीता और गीता की आदत में आकाश-पाताल का अन्तर है।
(37) उड़ती चिड़िया पकड़ना (मन की बात जानना)-शास्त्रीजी के पास जाओ, वे उड़ती चिड़िया पकड़ लेते हैं।
(38) कान का कच्चा (अफवाहों पर विश्वास करना) श्रीवास्तवजी कान के कच्चे हैं, तभी तो रावत की बातों को सत्य मान लेते हैं।
(39) कान में तेल डालना (अनसुनी करना) क्यों विमला, आज कान में तेल डालकर बैठी हो क्या?

(40) चेहरे पर हवाइयाँ उड़ना (घबरा जाना) जब जयकुमार से पूछा-कहाँ से आ रहे हो तो उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं।
(41) हाथों के तोते उड़ जाना (होश उड़ना) विष्णु घर से क्या गया, नीलिमा के हाथों के तोते उड़ गये।
(42) न तीन में न तेरह में (अप्रासंगिक होना) विभाग की कार्यवाही में कितनी ही गड़बड़ हुई,पर रमेश को क्या वह न तीन में न तेरह में।
(43) सूरज को दीपक दिखाना (ज्ञानवान को ज्ञान देना) सन्ध्या जब हॉस्टल से घर आई तो नई-नई बातें बताकर सूरज को दीपक दिखा रही थी।
(44) पहाड़ टूट पड़ना (मुसीबत आ जाना)—पेट्रोल के दाम क्या बढ़े, जनता पर पहाड़ टूट पड़ा।
(45) ईद का चाँद होना (बहुत दिनों बाद दिखाई देना) स्वाति जब छुट्टियाँ मनाकर आई तो नीलम बोली, अरे ! वाह तुम तो ईद का चाँद हो गयी।’
(46) हाथ कंगन को आरसी क्या? (प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं) रेखा की चित्रकला के लिए हाथ कंगन को आरसी क्या? पूरा घर चित्रों से भरा है।
(47) चोली-दामन का साथ (घनिष्ठ सम्बन्ध)-प्रूफ रीडर और प्रकाशक का तो चोली दामन का साथ है।
(48) जी चुराना (काम न करना,काम से डरना) काशीराम हमेशा काम से जी चुराता है।
(49) कलम तोड़ना (अच्छी रचना करना)-आकाश जी जब कविता लिखते हैं, कलम तोड़ देते हैं।

(50) धूप में बाल सफेद होना (अनुभवहीन ज्ञान)-दादी ने रोहन को डाँटकर कहा, तुम मेरी बात मानने को तैयार नहीं हो,क्या धूप में मेरे बाल सफेद हुए हैं?
(51) बाल-बाँका न होना (हानि न होना)-विपत्ति में पड़ने पर धैर्य नहीं खोना चाहिये, धैर्यवान व्यक्ति का कभी बाल-बाँका न होगा।
(52) सिर धुनना (पछताना) दीपक ने अपनी सारी आमदनी जुये में गँवा दी अब सिर धुन रहा है।
(53) सिर पर कफन बाँधना (मरने से न डरना)-देश के वीर सिपाही युद्ध के लिये सिर पर कफन बाँधकर चलते हैं। [2012]
(54) आँखों में धूल झोंकना (धोखा देना) आजकल ठग आँखों में धूल झोंककर किसी भी व्यक्ति को आसानी से लूट लेते हैं।
(55) कान खड़े करना (सतर्क रहना) युद्ध स्थल में सैनिकों को सदैव कान खड़े रखना चाहिये।
(56) नाकों चने चबाना (तंग करना)-सीमा ने उधार के रुपये लौटाने में मुझे नाकों चने चबा दिये।
(57) मुँह की खाना (पराजित होना)–भारत को क्रिकेट विश्व कप में मुँह की खानी पड़ी।
(58) दाँत खट्टे करना (हरा देना) भारतीय सैनिकों ने कारगिल के युद्ध में पाकिस्तानी सेना के दाँत खट्टे कर दिये। [2013, 17]
(59) छाती पर मूंग दलना (जान-बूझकर तंग करना)-सुरेश ने रमेश से कहा-तुम अपना काम देखो, व्यर्थ में मेरी छाती पर क्यों मूंग दल रहे हो?

(60) छाती पर साँप लोटना (ईर्ष्या करना) पड़ोसी की सम्पन्नता को देखकर उसकी छाती पर साँप लोट गया।
(61) पेट में चूहे दौड़ना (बहुत भूख लगना) रमेश ने गुरुजी से कहा, अब आप मुझे छुट्टी दे दें, मेरे तो पेट में चूहे दौड़ रहे हैं।
(62) हथेली पर सरसों उगाना (जल्दी करना) देवेन्द्र तुम कुछ देर प्रतीक्षा करो हथेली पर सरसों उगाने से क्या लाभ?
(63) हाथ पीले करना (विवाह सम्पन्न करना)-आधुनिक युग में दहेज प्रथा के कारण बेटी के हाथ पीले करना पिता के लिये कठिन समस्या है।
(64) हाथ धोकर पीछे पड़ना (बुरी तरह पीछे लगना) बहुत से लोगों की आदत होती है कि वे अपनी स्वार्थपूर्ति के लिये व्यर्थ ही हाथ धोकर पीछे पड़ जाते हैं।
(65) होम करते हाथ जलना (अच्छे काम में बदनामी) समाज सेवा ऐसा कार्य है जिसमें होम करते हाथ जलने की सम्भावना बनी रहती है।
(66) मुट्ठी गरम करना (भेंट देना/रिश्वत देना)-आजकल मुट्ठी गर्म किये बिना कोई भी कार्य नहीं होता है।
(67) टेढ़ी अँगुली से घी निकालना (सीधे काम नहीं बनता)-दुष्ट व्यक्ति से कोई भी कार्य टेढी अंगुली से घी निकालने के समान है।
(68) पाँचों अँगुलियाँ घी में (सब प्रकार से सुख)-लॉटरी निकलने के बाद रमेश की पाँचों अँगुलियाँ घी में हैं।
(69) कमर टूटना (थक जाना) श्रमिकों की घोर परिश्रम के कारण कमर टूट जाती है।

(70) फूंक-फूंककर पैर रखना (सावधानी से चलना)-आज की स्पर्धा के युग में व्यापारी को अपनी उन्नति के लिये फूंक-फूंककर पैर रखना चाहिये।
(71) आँख लगना (झपकी आना) टी. वी.देखते-देखते अचानक मेरी आँख लग गयी और चोर चोरी कर ले गये।
(72) आँखें दिखाना (क्रोध करना)-तुम मुझे आँखें दिखाकर भयभीत नहीं कर सकते।
(73) आँखों से गिर जाना (सम्मान खो देना) लोग झूठ बोलने के कारण दूसरों की आँखों से गिर जाते हैं।
(74) आग लगाना (भड़काना) कुछ लोगों की आदत आग लगाकर तमाशा देखने की होती है।
(75) आँसू पीना (दुःख में विवशता का अनुभव करना)-पुत्र की मृत्यु के बाद पिता को आँसू पीकर मौन रहना पड़ा।
(76) आँसू पोंछना (धीरज देना)-हमारा कर्तव्य है कि दुःख पड़ने पर सदैव दूसरों के आँसू पोंछने का प्रयास करें।
(77) आकाश कुसुम (अनहोनी, असम्भव बात) सीमा के लिये पूरे उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करना आकाश कुसुम के समान प्रमाणित हुआ।
(78) आस्तीन का साँप (विश्वासघाती)-आज के युग में प्रत्येक क्षेत्र में आस्तीन के साँप विद्यमान हैं। अतः उनसे सतर्क रहने की आवश्यकता है। [2013]
(79) आब उतरना (इज्जत चली जाना) चोरी करने के फलस्वरूप मोहन की आब उतर गयी।

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(80) उल्टी गंगा बहना (विपरीत काम करना) यह कार्य मेरे वश के बाहर है, तुम तो सदैव उल्टी गंगा बहाते हो। [2009]
(81) उधेड़-बुन में पड़ना (दुविधा में पड़ना) कार्य का अत्यधिक बोझ होने के कारण दीपक उधेड़-बुन में पड़ा है कि कौन-सा कार्य पहले पूरा करे।
(82) उल्लू बनाना (मूर्ख बनाना)-सोहन ने मोहन से कहा तुम कैसे धोखा खा गये, तुम तो सबको उल्लू बनाने में माहिर हो।
(83) ऊँच-नीच समझना (भले-बुरे का विवेक होना) बुद्धिमान व्यक्ति ऊँच-नीच समझकर अपना कार्य सम्पन्न करते हैं।
(84) एक आँख से देखना (समदर्शी)–माता-पिता को पुत्र एवं पुत्री को एक आँख से देखना चाहिये।
(85) एक लाठी से हाँकना (अच्छे-बुरे का अन्तर न करना)-सज्जन एवं दुर्जन को एक लाठी से हाँकना अनुचित है।
(86) कगार पर खड़े होना (मृत्यु के समीप) व्यक्ति को कगार पर खड़े होने के समय ईश्वर याद आता है।
(87) कचूमर निकालना (अत्यधिक पिटाई करना)-पुलिस ने चोर को इतना प्रताड़ित किया कि उसका कचूमर निकल गया।
(88) कच्चा चिट्टा खोलना (पोल खोलना) हत्यारे को पकड़ लिये जाने पर उसने अपने अपराध का कच्चा चिट्ठा खोल दिया।
(89) कदम चूमना (खुशामद करना) आजकल लोग आगे बढ़ने के लिये अधिकारियों के कदम चूमते हैं।

(90) कलेजा जलना (असन्तोष से दुःख होना)-दूसरों की प्रगति देखकर अपना कलेजा जलना मूर्खता है।
(91) कलेजा फटना (दुःखी होना) पति की मृत्यु के बाद सीमा का कलेजा फट गया।
(92) कलेजे पर पत्थर रखना (दु.ख में धैर्य रखना) व्यापार में घाटा आने पर मोहन ने कलेजे पर पत्थर रखकर नौकरी करना शुरू कर दी।
(93) कान कतरना (किसी से बढ़कर काम दिखाना)-प्रवीण की पुत्र-वधू इतनी निपुण है कि वह अच्छे-अच्छे के कान कतरती है।
(94) कान भरना (चुगली करना)-पड़ोसियों के कान भरना रीमा की पुरानी आदत है।
(95) कानाफूसी करना (आपस में चुपचाप सलाह करना)-विवाह में व्यवधान आने पर रोहित ने अपने सम्बन्धियों से कानाफूसी करना प्रारम्भ कर दी।
(96) कानों कान खबर न लगना (पता न लग पाना) जनता पार्टी के चुनाव में जीत जाने की किसी को कानों कान खबर न थी।
(97) कान पर जूं न रेंगना (तनिक भी प्रभाव न पड़ना) मालिक ने नौकर से कहा कि मैं तुम्हें इतनी देर से बुता रहा हूँ, पर तुम्हारे कान पर जूं नहीं रेंगती।
(98) कुत्ते की मौत मरना (बुरी मौत मरना)-पुलिस मुठभेड़ में दुर्दान्त डाकू कुत्ते की मौत मारा गया।
(99) कोरा जवाब देना (स्पष्ट मना करना) विपत्ति के समय किसी को कोरा जवाब देना अच्छा नहीं है।

(100) काबैल (दिन-रात परिश्रम करना)-पिता ने पुत्र से कहा तुम इस नौकरी को छोड़ दो, दिन-रात कोल्हू के बैल की तरह पिले रहते हो फिर भी कुछ नहीं मिलता।
(101) कौड़ी का न पूछना (तनिक भी सम्मान न करना)-आजकल के पुत्र वृद्ध होने पर माता-पिता को कौड़ी का भी नहीं पूछते हैं।
(102) कौड़ी-कौड़ी को मुहताज होना (अत्यधिक गरीब) मोहन के घर चोरी हो जाने पर वह कौड़ी-कौड़ी को मुहताज हो गया।
(103) खटाई में पड़ना (काम रुक जाना) चुनाव के कारण सड़क निर्माण का कार्य खटाई में पड़ गया।
(104) खाने को दौड़ना (क्रोध करना) राम ने अपने पड़ोसी से कहा तुम व्यर्थ ही खाने को दौड रहे हो मैंने तुमसे क्या कहा है
(105) खून खौलना (अत्यधिक क्रोधित होना)-पुत्र की शरारत को देखकर पिता का खून खौल गया।
(106) खयाली पुलाव पकाना (मन ही मन कल्पना करना)-खयाली पुलाव पकाने से कोई भी काम नहीं होता, परिश्रम सफलता की कुंजी है।
(107) गरम होना (क्रोध आना) आजकल के नवयुवकों में बात-बात पर गर्म होने की आदत है।
(108) गऊ होना (अत्यन्त सीधा होना)-रोहन का स्वभाव गऊ के समान है।
(109) गागर में सागर भरना (थोड़े में बहुत कहना) बिहारी ने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया है।
(110) गाल बजाना (बकवास करना)-परिश्रम करने से फल मिलेगा. गाल बजाने से नहीं।

(111) गाल फुलाना (गुस्से में चुप होना)-सीमा ने गीता से कहा तुम तो हर समय गाल फुलाये रहती हो, तुमसे कौन बात करेगा?
(112) गूलर का फूल होना (दर्शन न होना)-आज के युग में आदर्श व्यक्ति एक प्रकार से गूलर के फूल के समान हो गये हैं।
(113) गुड़ गोबर करना (बना बनाया काम बिगाड़ देना) कार्य पूर्ण होने से पहले ही विनोद ने सब गुड़ गोबर कर दिया।
(114) गुल छर्रे उड़ाना (मौज मस्ती मारना) सोहन अपने पिता की मृत्यु के बाद उनकी सम्पत्ति से गुल छरें उड़ा रहा है।
(115) गोल-माल करना (घपला करना)-आजकल समाचार पत्रों में अधिकांश गोल-माल के समाचार निकलते रहते हैं।
(116) गुल खिलना (रहस्य पता चलना)-पुलिस द्वारा पकड़े जाने पर पता चला कि देवेन्द्र ने कौन-कौन से गुल खिलाये थे।
(117) घड़ों पानी पड़ना (लज्जित होना)-अपने पुत्र की करतूतों को सुनकर सोहन के पिता पर घड़ों पानी पड़ गया।
(118) घर फँक तमाशा देखना (अपनी परिस्थिति से अधिक व्यय करना)-घर फॅक तमाशा देखने वाले कभी जीवन में सफल नहीं होते।
(119) घाव पर नमक छिड़कना (दुःख में और दुःखी करना)-राम ने मोहन से कहा मैं तो खुद ही परेशान हूँ। तुम मेरे घावों पर नमक क्यों छिड़क रहे हो?
(120) घास खोदना (व्यर्थ समय गँवाना) अध्यापक ने छात्र से कहा कि इतने सरल प्रश्न भी नहीं कर पा रहे हो,साल भर क्या घास खोदते रहे?

(121) चम्पत हो जाना (गायब हो जाना)-पुलिस को देखकर अपराधी चम्पत हो जाते हैं।
(122) चिकना घड़ा होना (किसी बात का असर न होना)–श्याम को कितना ही समझाओ लेकिन वह तो चिकना घड़ा हो गया है। किसी की बात सुनता ही नहीं।
(123) चिकनी-चुपड़ी बातें करना (बनावटी प्रेम दिखाना)-आजकल का युग चिकनी-चुपड़ी बातें करके काम बनाने का हो गया है। [2016]
(124) चित्त कर देना (हराना) हॉकी के खेल में सेन्ट पीटर्स स्कूल के छात्रों ने राधा बल्लभ स्कूल के छात्रों को चित्त कर दिया।
(125) चुल्लू भर पानी में डूब मरना (अत्यन्त लज्जित होना)-परीक्षा में बार-बार अनुत्तीर्ण होने पर पिता ने पुत्र से कहा तुम चुल्लू भर पानी में डूब मरो।।
(126) चेहरे का रंग उतरना (उदास होना)-चोरी पकड़े जाने पर सुरेश के चेहरे का रंग उतर गया।
(127) चैन की बंशी बजाना (सुखपूर्वक रहना) लॉटरी निकल आने पर महेश चैन की बंशी बजा रहा है।
(128) छक्के छूटना (पराजित होना) भारतीय सैनिकों के समक्ष पाकिस्तान की सेना के छक्के छूट गये।
(129) छक्के छुड़ाना (निरुत्साहित कर देना) लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिये।
(130) छक्के पंजे करना (मौज मनाना)-पूँजीपति बिना श्रम के छक्के पंजे करते रहते

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(131) छठी का दूध याद आना (अत्यधिक परेशानी का अनुभव करना) पर्वतारोहियों को दुर्गम चढ़ाई चढ़ने में छठी का दूध याद आ गया।
(132) छिद्रान्वेषण करना (दोष ढूँढ़ना)-मित्रों का छिद्रान्वेषण करना उचित नहीं होता है।
(133) छापा मारना (छिपकर आक्रमण करना) विद्युत विभाग ने बड़े-बड़े व्यापारियों पर छापा मारना शुरू कर दिया।
(134) छींटाकशी करना (व्यंग्य करना) बहुत-से लोगों की प्रवृत्ति दूसरों पर छींटाकशी करके प्रसन्न होने की होती है।
(135) छाया करना (संरक्षण देना)-पिता पुत्र के निमित्त सदैव छाया बनकर रहता है।
(136) जबान में लगाम रखना (सम्भल कर बात करना)-बड़ों के समक्ष हमेशा जबान में लगाम रखकर बात करनी चाहिये।
(137) जबान चलाना (जरूरत से ज्यादा बोलना)- तुम चुप क्यों नहीं रहते व्यर्थ में जबान चला रहे हो।
(138) जबानी जमा खर्च (व्यर्थ की बातें विकास कार्य की योजनाएँ आजकल जबानी जमा खर्च तक सीमित रह गयी हैं।
(139) जमीन-आसमान एक करना (सीमा से अधिक कर गुजरना)-परीक्षा के समय विद्यार्थी जमीन-आसमान एक कर देते हैं।
(140) जमीन पर पाँव न रखना (अभिमान करना) अचानक धन प्राप्त होने पर महेश के पाँव जमीन पर नहीं पड़ते।

(141) जली-कटी सुनाना (भली-बुरी कहना) नौकर के उचित प्रकार काम न करने पर मालिक ने उसे जली-कटी सुनाना प्रारम्भ कर दिया।
(142) जड़ खोदना (समूल नष्ट करना) चाणक्य ने अपनी कूटनीति से नन्दवंश की जड़ खोद दी।
(143) जड़ तक पहुँचना (कारण का पता लगा लेना) हमें बात की जड़ तक पहुँचे बिना किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहिये।
(144) जहर बोना (दूसरे के लिये संकट उत्पन्न करना) बहुत से लोगों का स्वभाव जहर बोकर दूसरों को कष्ट पहुँचाने का होता है।
(145) जहर उगलना (उग्र बातें करना)-पाकिस्तानी शासक भारत के विरुद्ध जहर उगलते रहते हैं।
(146) जहर का यूंट पीना (क्रोध रोके रहना)-झगड़ा हो जाने पर रमेश जहर का घुट पीकर रह गया।
(147) जान पर खेलना (जोखिम का काम करना)-सुरेश ने अपनी जान पर खेलकर डूबते बच्चे की जान बचायी।
(148) जान में जान आना (भय टल जाना)—भूकम्प समाप्त होने पर लोगों की जान में जान आ गयी।
(149) जान के लाले पड़ना (संकट पड़ना)-अकालग्रस्त क्षेत्र में अन्न के अभाव के कारण जान के लाले पड़ जाते हैं।
(150) आपे से बाहर होना (क्रोध में होश खो बैठना) जगदीश ने श्याम से कहा मेरी जरा-सी भूल पर तुम आपे से बाहर क्यों हो रहे हो?

(151) जी हल्का होना (शान्ति प्राप्त होना)—पुत्र को रोग से मुक्त देखकर माँ का जी हल्का हो गया।
(152) जी छोटा करना (निराश होना)-रमेश ने मोहन से कहा मैं तुम्हारी सहायता के लिये तैयार हूँ, तुम जी छोटा क्यों करते हो?
(153) जी खट्टा होना (स्नेह कम होना)—पैतृक सम्पत्ति में विधिवत् विभाजन न होने पर भाइयों का आपस में जी खट्टा हो गया।
(154) जी का जंजाल (परेशानी का कारण) दुष्ट का संग जी का जंजाल होता है।
(155) जीती बाजी हारना (काम बनते-बनते बिगड़ जाना) सचिन के चोट लगने के कारण भारतीय टीम जीती बाजी हार गयी।
(156) झाँसा देना (धोखा देना)-अपराधी पुलिस वाले को झांसा देकर भाग गया।
(157) टकटकी बाँधना (लगातार देखना)-पपीहा स्वाति नक्षत्र के बादलों को टकटकी लगाकर देखता रहता है।
(158) टस से मस न होना (अड़े रहना)-रावण विभीषण के लाख समझाने पर भी टस से मस नहीं हुआ।
(159) टाँग अडाना (बाधा डालना)-पिता ने पुत्र को समझाते हुए कहा, बड़ों के बीच में टाँग अड़ाना अनुचित है।
(160) टाँग पसार कर सोना (निश्चिन्त होना) बेटी का विवाह सम्पन्न होने पर माता-पिता टॉग पसार कर सोते हैं।

(161) टोपी उछालना/पगड़ी उछालना (अपमान करना) बरात को लौटाकर वर पक्ष ने कन्या के पिता की टोपी उछालकर अच्छा नहीं किया। [2009]
(162) ठोकना बजाना (पूर्णतः परख के देखना)-आधुनिक युग में नौकरों को ठोक बजाकर ही काम पर रखना चाहिये।
(163) डंके की चोट पर कहना (निर्भीकतापूर्वक कहना)-निर्भीक लोग अधिकारियों की काली करतूतों को डंके की चोट पर उजागर करते हैं।
(164) डींग हाँकना (झूठी शेखी बघारना) बहुत से लोगों की व्यर्थ में ही डींग मारने की आदत होती है।
(165) ढिंढोरा पीटना (व्यर्थ प्रचार करना)–नौकरी मिलने से पूर्व ही मोहन ने ढिंढोरा पीटना प्रारम्भ कर दिया कि वह एक उच्च अधिकारी बन गया है।
(166) ढोल में पोल होना (सारहीन सिद्ध होना)-आजकल के नेताओं के कथन ढोल में पोल सिद्ध होते हैं।
(167) ढाल बनना (सहारा बनना)-पत्नी के लिये पति ढाल के समान होता है।
(168) ढुलमुल होना (अनिश्चय) व्यक्ति को जीवन में सफलता प्राप्त करनी हो तो ढुलमुल नीति से नहीं चलना चाहिये।
(169) ढील देना (छूट देना)-माता-पिता द्वारा बच्चों को अधिक ढील देना हानिकारक
(170) तलवे चाटना (खुशामद करना) आजकल बहुत से लोग दूसरों के तलवे चाटकर अपना काम बना लेते हैं।

(171) तारे गिनना (नींद न आना)-सीताजी राम के विरह में तारे गिन-गिन कर अपना समय व्यतीत करती थीं।
(172) तिल का ताड़ बनाना (छोटी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना) राम ने मोहन से कहा तुमने तिल का ताड़ बनाकर बने बनाये काम को बिगाड़ दिया।
(173) तिलांजलि देना (पूरी तरह त्याग देना) झूठ को तिलांजलि देना सफलता का द्योतक है।
(174) तितर-बितर होना (अलग-अलग होना)-पुलिस को देखकर जुआरी तितर-बितर हो गये।
(175) तीन तेरह होना (तितर-बितर होना)-पिता की मृत्यु के उपरान्त सम्पूर्ण परिवार तीन तेरह हो गया।
(176) तूती बोलना (अधिक प्रभावशाली होना)-आजकल देश में आतंकवादियों की तूती बोल रही है। [2009]
(177) थूक कर चाटना (बात कहकर मुकर जाना)-पाकिस्तानी शासकों का स्वभाव थूक कर चाटने जैसा है।
(178) दम मारना (थोड़ा विश्राम करना)-परीक्षा समाप्त होने के उपरान्त विद्यार्थियों को दम मारने की फुरसत मिली।
(179) माथा ठनकना (पहले से ही विपरीत बात होने की आशंका)-पिता को अत्यधिक रोगग्रस्त देखकर मृत्यु की आशंका से पुत्र का माथा ठनक गया। [2014]
(180) कपाल क्रिया करना (मार डालना)-वीर युद्धभूमि में शत्रुओं की कपाल क्रिया करके ही चैन की साँस लेते हैं।

(181) भाग्य फूटना (दुर्भाग्य का आना)-एकमात्र पुत्र का निधन होने पर उसकी माँ के भाग्य ही फूट गये।
(182) नमक हलाली करना (ईमानदारी बरतना)-स्वामिभक्त सेवक नमक हलाली करके अपनी वफादारी का परिचय देते हैं।
(183) बाल-बाल बचना (परेशानी आने से बचना)-ट्रक की चपेट में आने पर वह बाल-बाल बच गया।
(184) नाक भौं सिकोड़ना (अप्रसन्नता प्रकट करना) जरा-जरा-सी बात पर नाक भौं सिकोड़ना उचित नहीं है।
(185) छोटे मुँह बड़ी बात (सीमा से अधिक कहना)-स्वामी ने नौकर से कहा छोटे मुँह बड़ी बात अच्छी नहीं होती।
(186) दाँतों तले उँगली दबाना (चकित होना) ताजमहल के सौन्दर्य को देखकर विदेशी दाँतों तले उँगली दबाते हैं। [2014]
(187) अँगुली उठाना (दोषारोपण करना) बिना सोचे-समझे दूसरों पर अंगुली उठाकर लोग अपने दोषों पर पर्दा डालते हैं।
(188) ऐड़ी-चोटी का पसीना एक करना (भरपूर परिश्रम करना) परीक्षा के समय छात्र ऐड़ी-चोटी का पसीना एक करके ही दम लेते हैं।
(189) गड़े मुर्दे उखाड़ना (बीती बातें याद करना) बहुत से लोगों का स्वभाव गढ़े मुर्दे उखाड़ना होता है।
(190) अंधेर मचाना (खुला अन्याय करना)-आजकल आतंकवादियों ने अंधेर मचा रखा है। [2009, 14]

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(191) अन्धा धुन्ध (बिना रोक-टोक के) अन्धाधुन्ध वाहन चलाने के कारण दुर्घटनाएँ घटित हो रही हैं।
(192) अपनी पड़ना (अपनी चिन्ता) भूकम्प आने पर सबको अपनी-अपनी पड़ रही थी।
(193) अचकचाना (भ्रमित होना)-मानसिक दृष्टि से दुर्बल व्यक्ति प्रत्येक कार्य में अचकचाते रहते हैं।
(194) उखाड़-पछाड़ करना (आगे-पीछे की बातों को याद करके संघर्ष करना)-उखाड़-पछाड़ करने से झगड़ा शान्त होने के बजाय और बढ़ जाता है।
(195) उठान रखना (पूर्ण प्रया स करना)-विपत्ति के समय उठान रखकर ही व्यक्ति को विपत्ति से मुक्ति मिलती है।
(196) कलेजा मुँह को आना (अत्यधिक दुःखी होना) श्रवण कुमार की मृत्यु का समाचार सुनकर उसके माँ-बाप का कलेजा मुँह को आ गया।
(197) कलेजे पर हाथ रखना (अपने, आप विचार करना)-विपत्ति पड़ने पर मोहन ने सोहन से कहा कि तुम अपने कलेजे पर हाथ रखकर देखो तब पता चलेगा।
(198) कान खड़े होना (सतर्क होना)—पुलिस के आने पर चोरों के कान खड़े हो गये।
(199) काम आना (युद्ध में वीर गति को प्राप्त होना)-देश के वीर युद्धभूमि में काम आकर अमर हो जाते हैं।
(200) गुदड़ी का लाल (निर्धन परन्तु गुणवान व्यक्ति)–भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री गुदड़ी के लाल थे। [2009]
(201) पलकें बिछाना (आतुर होकर प्रतीक्षा करना) विश्व विजेता भारतीय क्रिकेट दल के सदस्यों की अगवानी हेतु उनके शहरवासी पलकें बिछाये बैठे थे। [2012]
(202) खून का यूंट पीना (चुपचाप अपमान सहन करना) सास द्वारा बहू को गलती न होने के बावजूद डाँटे जाने पर भी वह खून का यूंट पीकर रह गई। [2016]

2. लोकोक्तियाँ (कहावतें)

मनुष्य का जीवन अनुभवों से भरा है। कभी-कभी एक ही अनुभव कई लोगों को होता है और उनके मुँह से जो बातें निकलती हैं वे प्रचलित होकर कहावत बन जाती हैं। लोक + उक्ति = लोकोक्ति, लोगों द्वारा कहा गया कथन है। ये लोकोक्तियाँ प्रायः नीति, व्यंग्य, चेतावनी, उपालम्भ आदि से सम्बन्धित होती हैं। अपनी बात की पुष्टि के लिए लोग लोकोक्ति का सहारा लेते हैं। कभी-कभी बिना असली बात कहे हुए भी लोग लोकोक्ति बोल देते हैं और वास्तविक अर्थ प्रसंग से समझ लिया जाता है।

लोकोक्तियाँ मुहावरे की अपेक्षा विस्तृत होती हैं। ये क्रियार्थक नहीं होतीं। ये अविकारी होती हैं, इन्हें लिंग, वचन के अनुसार बदलते नहीं हैं। इन्हें वाक्यों में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता। ये वाक्यरूप में ही अपने आप में पूर्ण होती हैं। लोकोक्तियाँ लेखकों के लेखन या भाषणकर्ताओं से निसृत होकर प्रचलित होती हैं। लोकोक्ति साहित्य का गौरव है। इन्हें समझने के लिए इनका सही अर्थ जानना आवश्यक है, तभी इनका प्रयोग सफल होगा।

लोकोक्ति का प्रयोग करते समय इन बातों को ध्यान में रखना चाहिए
(1) लोकोक्ति पढ़ते-पढ़ते ऐसे विस्तृत अनुभव को पकड़ने का प्रयास करना चाहिए, जिसका प्रतिनिधि बनकर लोकोक्ति का शब्द और अर्थ प्रयोग में लाया जाये।
(2) उस अनुभव वाले अर्थ को संक्षिप्त में एक वाक्य में स्पष्ट कर देना चाहिए।
(3) वर्तमान परिस्थिति में उस अनुभव को घटित करने वाली घटना और लोकोक्ति के अनुभव वाले अर्थ को फिर देख लेना चाहिए कि दोनों समानता रखते हों।।
(4) अब उक्त घटना को एक या दो वाक्यों में लिखकर उसके अन्त में समर्थन रूप में लोकोक्ति लिखनी चाहिए।

कुछ लोकोक्तियाँ,उनके अर्थ और वाक्य प्रयोग इस प्रकार हैं-
(1) अपना हाथ जगन्नाथ (अपने हाथ से किया गया काम सबसे अच्छा होता है। माँ ने कहा इससे अच्छे आपके कपड़े में नहीं धो सकती। बेहतर हो आप स्वयं साफ करें। सुना है न-अपना हाथ जगन्नाथ।
(2) अपने मरे सरग दिखता है (स्वयं कार्य करने से ही काम बनता है)-सेठजी ने नौकर को जरूरी काम से बाजार भेजा परन्तु दो बार जाने के बाद भी वह उस काम को नहीं कर पाया। इस पर सेठजी ने कहा-अपने मरे ही सरग दिखता है।
(3) अपने लड़के को काना कौन कहता है (अपनी वस्तु सभी को सुन्दर लगती है। रोहित अपनी हर चीज की बहुत तारीफ करता है परन्तु दूसरों की चीजों में नुक्स निकालता है। सच ही कहा गया है-अपने लड़के को काना कौन कहता है।
(4) अपना दाम खोटा तो परखैया क्या करे (जब स्वयं में दोष हो तो दूसरे भी बुरा कहेंगे) रीना का छोटा बेटा बड़ा ही उद्दण्ड है, जब पड़ौसी से उसका झगड़ा हुआ तो रीना बोली-अपना दाम खोटा तो परखैया क्या करे।
(5) अपनी करनी पार उतरनी (अपने ही परिश्रम से सफलता मिलती है) नरेश नकल की उम्मीद में रहकर परीक्षा में फेल हो गया तो उसकी माँ ने उसे समझाते हुए कहा-अपनी करनी पार उतरनी। [2009]
(6) अपनी-अपनी ढपली अपना राग (अपनी ही बातों को महत्ता देना)-आजकल तो सभी लोग अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग अलापते हैं।
(7) अपने ही शालिग्राम डिब्बे में नहीं समाते (जो अपना ही काम पूरी तरह नहीं कर पाता, वह दूसरों की क्या मदद करेगा) नन्दू बड़ा ही कामचोर है,एक बार जब वह पड़ौसी की मदद के लिये गया तो पड़ौसी ने कहा-रहने दो, तुम्हारे तो अपने ही शालिग्राम डिब्बे में नहीं समाते।
(8) अन्या पीसे कुत्ता खाय (नासमझ के कामों का लाभ चतुर उठाते हैं) महेश बहुत ही नासमझ है, हर कोई उसे बेवकूफ बनाकर अपना काम निकाल लेता है, उसका तो वही हिसाब है-अन्धा पीसे कुत्ता खाए।
(9) अतिसय रगर करे जो कोई, अनल प्रकट चन्दन ते होई (अधिक परिश्रम से कठिन काम भी सिद्ध होते हैं या अधिक छेड़ने से शान्त पुरुष भी गरम हो जाता है) विकास ने रात-दिन मेहनत करके आई. ए. एस. की परीक्षा उत्तीर्ण की तो उसकी दादी ने कहा-अतिशय रगर करे जो कोई, अनल प्रकट चन्दन ते होई।

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(10) अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गईं खेत (हानि होने से पहले रक्षा का प्रबन्ध करना चाहिए)-सेठ करोड़ीमल ने कंजूसी के कारण अपने जर्जर हुए मकान की मरम्मत नहीं कराई। जब बरसात में उनका मकान गिर पड़ा तो उनकी पत्नी ने कहा-अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गईं खेत।
(11) अन्या क्या चाहे दो आँखें (मनचाही वस्तु देने वाले से और कुछ नहीं चाहिए) रामकिशन ने जब भिखारी को भोजन और कपड़ा दिया तो वह खुश हो गया। भई, अन्धा क्या चाहे दो आँखें।
(12) अकल बड़ी कि भैंस (वयस = उम्र) (उम्र के बड़प्पन से बुद्धि की श्रेष्ठता अधिक अच्छी है) घण्टों से साइकिल ठीक करने में जुटे रमेश के पन्द्रह वर्षीय भतीजे ने पलक झपकते ही साइकिल की खराबी दूर कर दी। किसी ने ठीक ही कहा है-अकल बड़ी या भैंस।
(13) आए थे हरिभजन को ओटन लगे कपास (ऊँचे उद्देश्य की तैयारी करके साधारण काम में जुट जाना)-सुरेश गाँव छोड़कर शहर में डॉक्टर बनने के सपने लेकर आया था परन्तु बमुश्किल उसे छोटी सी नौकरी ही मिल सकी। किसी ने ठीक ही कहा है-आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास।
(14) आम के आम गुठलियों के दाम (किसी वस्तु से दुहरा लाभ होना)-ट्रॉली वाले मलबा उठाने तथा मलबा डालने,दोनों के पैसे लेते हैं। उनके तो आम के आम गुठलियों के दाम
(15) आँख का अन्धा गाँठ का पूरा (नासमझ धनी पुरुष जो ठगी में पड़कर हानि उठाता है) जीवन ने परिणाम जानते हुए भी रेल में बेटिकट यात्रा की और पकड़ा गया। इसे कहते हैं-आँख का अन्धा गाँठ का पूरा।
(16) आँख के अन्धे नाम नयनसुख (नाम के विपरीत गुण होना)-ताले ठीक करने वाले से एक साधारण से ताले की चाबी भी न बन सकी तब ऐसा लगा मानो आँख के अन्धे नाम नयनसुख वाली कहावत चरितार्थ हो रही हो।।
(17) आधी रात खाँसी आए, शाम से मुँह फैलाये (काम का समय आने के बहुत पहले ही चिन्ता करने लगना)-मुनिया की शादी में अभी पूरे छः माह पड़े हैं परन्तु रामलाल ने अभी से पूरे घर में हाय-तौबा मचा रखी है। ऐसा लगता है मानो आधी रात खाँसी आये, शाम से मुँह फैलाये।
(18) आधा तेल आधा पानी (ऐसी मिलावट जो अनुपयोगी हो)-दुकानदार ने अधिक मुनाफा कमाने की जुगत में देशी घी में डालडा घी मिलाकर बेचना चाहा परन्तु सफल न हो सका। इसे कहते हैं-आधा तेल आधा पानी।
(19) इधर कआँ उधर खाई (दविधा की स्थिति या दोनों तरफ से हानि की सम्भावना) चोटिल सचिन को फाइनल मैच में खिलाएँ अथवा नहीं, पूरी टीम यह सोचती रही क्योंकि सभी खिलाड़ी जानते थे कि इधर कुआँ है और उधर खाई।।
(20) ईश्वर देता है तो छप्पर फाड़ के (अकस्मात् अत्यधिक लाभ हो जाना)-सब्जी बेचने वाली की लॉटरी क्या लगी उसकी तो किस्मत ही बदल गई। किसी ने ठीक ही कहा है-ईश्वर देता है तो छप्पर फाड़के।

नोट-आगे कुछ लोकोक्तियों के मात्र अर्थ दिये जा रहे हैं। विद्यार्थियों से अपेक्षा है कि वे अर्थ को भली-भाँति समझकर इन लोकोक्तियों को वाक्यों में प्रयोग करने का अभ्यास करेंगे।
(1) उल्टा चोर कोतवाल को डॉट-अनुचित काम करके भी न दबना।
(2) ऊखल में सिर देकर मूसलों का क्या डर–एक बार किसी मार्ग पर चल पड़ो तो फिर संकटों से घबराना नहीं चाहिए।
(3) ऊसर में मसर-व्यर्थ ही बीच में अड़ना।
(4) एक साथै, सब सधै, सब साधै सब जाय-एक हो काम मन लगाकर करना चाहिए, यदि निश्चय डिग गया तो सब नष्ट हो जायेगा।
(5) एक चना क्या भाड़ फोड़ेगा-अकेला व्यक्ति बड़ी योजना सफल नहीं बना पाता।
(6) एक हाथ से ताली नहीं बजती-लड़ाई या मित्रता अकेले सम्भव नहीं।
(7) एक मछली तालाब को गन्दा करती है-एक के दुष्कर्म से सहकर्मी बदनाम होते हैं।
(8) ओछे की प्रीति बालू की भीति-तुच्छ व्यक्ति की मित्रता स्थायी नहीं होती।
(9) आधी छोड़ सबको धावै, आधी जाय न सबरी पावै-लालच व्यक्ति के हाथ छ नहीं आता।
(10) काठ के उल्लू-निकम्मा आदमी। किसी काम का नहीं ;

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(11) कर नहीं तो डर नहीं-बुरा न किया तो किसी से डरना कैसा।।
(12) कड़वा करेला नीम चढ़ा-दुष्ट व्यक्ति को दुष्ट की संगति मिल जाये तो वह और अधिक दुष्ट हो जाता है।
(13) कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा इधर-उधर की वस्तुओं से काम चलाना।
(14) काम परै कछु और है, काम सरै कुछ और-स्वार्थ पूरा होने पर आदमी बदल जाता है।
(15) काजी घर के चूहे सयाने–चतुर लोगों की संगति में छोटे लोग भी चतुराई सीख जाते हैं।
(16) काजर की कोठरी में कैसहू सयानो जाय, एक लीक काजर की लागि है सो लागि है कुसंगति से कुछ न कुछ हानि अवश्य होती है।
(17) कभी गाड़ी नाव पर, कभी नाव गाड़ी पर सभी को सभी से काम पड़ता है।
(18) खोदा पहाड़ निकली चुहिया–बड़े श्रम से थोड़ा लाभ।
(19) खरगोश के सींग असम्भव बात,जो न देखी न सुनी।
(20) गुरु गुड़ हो रहे चेला शक्कर हो गये जिससे कोई गुण सीखा हो, उसकी अपेक्षा अधिक चतुराई दिखाना।।
(21) घर का जोगी जोगना, आन गाँव का सिद्ध-समीप रहने वाले गुणी को लोग महत्त्व नहीं देते, दूर वाले को सम्मान करते हैं।
(22) गिलोय और नीम चढ़ी-दुर्गुणों में और वृद्धि हो जाना,दो-दो दुर्गुण।

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MP Board Class 9th Special English Grammar Type III

MP Board Class 9th Special English Grammar Type III

1. Look at the words and phrases below. Rearrange them to form meaningful sentences. The first one has been done as an example. Write the correct sentence in your answer sh^bt against, the correct blank number. (1/2 x 6 = 3 marks)
Gopal Bhar asked / so upset / he was / the minister / why Gopal Bhar asked the minister why he was so upset.

(a) The minister told / that the Nawab / had set / Gopal / task / him an impossible
(b) Then Gopal / to ask the Nawab / to give him / this difficult task / and one year / a minion rupees / to complete / told the minister
(c) Gopal promised / after one year / that he would / with the results / the minister / go to the Nawab.
(d) themes / timeless / such / this / because / are / is /
(e) stories / a / all / nave been / animal / favourite / groups / with / age /
(f) young / very / humanised / the / stories / animal / like /
Answer:
(a) The minister told Gopal that the Nawab had set him an impossible task.
(b) Then Gopal told the minister to ask the Nawab to give him a million rupees and one year to complete this difficult task.
(c) Gopal promised the minister that he would go to the Nawab after one year with the results.
(d) This is because such themes are timeless.
(e) Animal stories have been a favorite with all age groups.
(f) The young like very humanised animal stories.

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2. Look at the words and phrases below. Rearrange them to form meaningful sentences. The first one has been done as an example. Write the correct sentence in your answer sheet against the correct blank number. (1/2 x 6 = 3 Marks)

The minister / an impossible task / he was upset / had set him / told Gopal / because the Nawab. The minister told Gopal he was upset because the Nawab had set him an impossible task.

(a) Gopal told / this difficult task / to tell tire Nawab / to complete / one year / the minister / that it would take
(b) He also asked / a lot of work / for a million rupees / as there was / to be done / the minister to ask / for expenses
(c) Gopal promised / after one year / that he would / with the results / the minister / go to the Nawab.
(d) holidays / their / children / this / the / is / refrain / hear / during /
(e) one / since / in / summer / worse / are / things / play / cannot / sun / in / the /
(f) hands / condemned / on / their / the / to / indoors / a lot of time / children / rest / are / with /
Answer:
(a) Gopal told the minister to tell the Nawab that it would take one year to complete this difficult task.
(b) He also asked the minister to ask for a million rupees for expenses as there was a lot of work to be done.
(c) Gopal promised the minister that he would go to the Nawab with the results after one year.
(d) This is the refrain children hear during their holidays.
(e) In summer things are worse since one cannot play in the sun.
(f) The children are condemned to rest indoors with a lot of time on their hands.

3. Look at the words and phrases below. Rearrange them to form meaningful sentences. The first one has been done as an example. Write the correct answers in your answer sheet against the correct blank numbers. (1/2 x 6 = 3 Marks)

thought / very good advice / the holy man / Rama’s mother / her / had given. Rama’s mother thought the holy man had given her very good advice.
(a) his last chance / him / it was / after telling / to the temple / Rama’s mother sent / him off
(b) Kali / in her most / before him / took pity / on him and / awe-inspiring form / appeared
(c) burst / at the frightening form / into laughter / took one look / and / Rama
(d) can kill / electric shock / as
(e) in / every year / people / this way / die ;
(f) can kill / even / of current / a small / amount
Answer:
(a) Rama’s mother sent him off to the temple after telling him it was his last chance.
(b) Kali took pity on him and appeared before him in her most awe inspiring form.
(c) Rama took one look at the frightening form and burst into laughter.
(d) As electric shock can kill.
(e) Every year people die in this way.
(f) Even a small amount of current can kill.

4. Look at the words and phrases below. Rearrange them to form meaningful sentences. The first one has been done as an example. Write the correct sentence in your answer sheet against the correct blank number. (1/2 x 6 = 3 Marks)
Gopal Bhar asked / so upset / he was / the minister / why Gopal Bhar asked the minister why he was so upset.
(a) The minister told / that the Nawab / had let / Gopal / task / him an impossible
(b) Then Gopal / to ask the Nawab / to give him / this difficult task / and one year / a million rupees / to complete / told the minister
(c) Gopal promised / after one year / that he would / with the results / the minister / go to the Nawab.
(d) themes / timeless / such / this / because / are / is /
(e) stories / a / all / have been / animal / favourite / groups / with / age /
(f) young / very / humanised / the / stories / animal / like /
Answer:
(a) The minister told Gopal that the Nawab had set him an impossible task.
(b) Then Gopal told the minister to ask the Nawab to give him a million rupees and one year to complete this difficult task.
(c) Gopal promised the minister that he would go to the Nawab after one year with the results.
(d) This is because such themes are timeless.
(e) Animal stories have beep, a favourite with all age groups.
(f) The young like very humanised animal stories.

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5. Look at the words and phrases below. Rearrange them to form meaningful sentences. The first one has been done as an example. Write the correct sehtences in your answer sheet against the correct blank numbers. (1/2 x 6 = 3 Marks)
Rama’s / advice / decided / mother / the Guru’s / to follow / and sent him / to pray / to the temple Rama’s mother decided to follow the Guru’s advice and sent him to the temple to pray.

(a) to obey / Rama decided / his mother / this time / very hard / for a long time, / and prayed
(b) about a week / Kali appeared / after / before him and / many heads / she looked awe-inspiring / with her / and hands
(c) of feeling frightened / saw her / instead / he burst / when Rama / into laughter
(d) became / Anna Sewell / and / an / lived / invalid / life / of / the / same as a child /
(e) “Black Beauty” / of / the / end / written / was / towards / life / her /
(f) to introduce / was / an / horse / of / aim / understanding treatment /
Answer:
(a) Rama decided to obey his mother this time and prayed very hard for a long time.
(b) After about a week Kali appeared before him and she looked aweinspiring with her many heads and hands.
(c) When Rama saw her instead of feeling frightened he burst into laughter.
(d) Anna Sewell became an invalid and lived the life same as a child.
(e) “Black Beauty “ was written towards the end of her life.
(f) Aim was to introduce horse of an understanding treatment.

6. Look at the words and phrases below. Rearrange them to form meaningful sentences. The first one has been done as an example. Write the correct sentence in your answer sheet against the correct blank numbers. (1/2 x 6 = 3 marks)
Rama’s / seriously / to the temple / to pray / spoke to him / mother / and sent him Rama’s mother spoke to him seriously and sent him to the temple to pray.

(a) this time / to heart / mother’s words / made / something / Rama / take his
(b) her glory / sincere prayers / Kali heard / and appeared / in all / Rama’s / before him
(c) unexpectedly, / instead of / laugh uncontrollably. / inspiring awe / made Rama / her form
(d) and see / I’ve made / come / what
(e) Please / a picture / fell me / you’ve made / who it is / oh I see
(f) this man / He lives / recognise / house / in our / can’t ! you \
Answer:
(a) Something made Rama take his mother’s words to heart this time.
(b) Kali heard Rama’s sincere prayers and appeared before him in all her glory.
(c) Unexpectedly, her form instead of inspiring awe made Rama, laugh uncontrollably.
(d) Come and see what I’ve made.
(e) Oh, I see, You’ve made a picture. Please tell me who it is.
(f) Can’t-you recognise this man. He lives in our house.

7. Look at the words and phrases below. Rearrange them to form meaningful sentences to complete the description given. The first one has been done as an example for you. Write the correct sentences in your answer sheet against the correct blank numbers. (3 marks)

Thomas Nuttall / a / successfully / botanist / studied / pioneer / of / N.W. America / the flora. Thomas Nuttal a pioneer botanist studied the flora of N.W. America successfully.

(a) in the world / he / least / the / successful / perhaps / however / explorer / was
(b) on his / almost / he spent / all / expeditions / his time / lost / permanently
(c) one night / to return / was / a search party / when / sent out / failed / he
(d) as / approached / the party / him / they / were / Indians / Nuttal / assumed
(e) tried / annoyed his / to escape / bush and river / he / over / rescuers
(f) he / wandered / the camp / into / accidentally / three days / finally / after
Answer:
(a) However he was perhaps the least successful explorer in the world.
(b) Permanently, he spe+ t all his time on his lost expeditions.
(c) One night when he failed to return a search party was sent out.
(d) As the party approached him Nuttal assumed they were IndiAnswer:
(e) He tried to escape over bush and river annoyed his rescuers.
(f) Finally after three days he wandered into the camp accidentally.

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8. Look at the words and phrases below. Rearrange them to form meaningful sentences. Write the correct sentences in your answer sheet against the correct blank number. The first one has been done as an example. (2 Marks)
spent / trying / years / to perfect / Elias Howe / a sewing machine. Elias Howe spent years trying to perfect a sewing machine.

(a) he / that / had been / by / captured / one night / a tribe / dreamed / he
(b) told / would have / he / he / to produce / was / in a day / the sewing machine
(c) speared / could not / if / he / would be / he / by / the tribe
(d) failed / when / the tribesmen / he / surrounded / with raised spears / him / that had / at fhe tips / holes
(e) suddenly / he / Howe / as / woke up / to / the / solution / saw / his / problem
(f) the hole / the tip / at / of / had / to work / the needle / to be / the machine / for
Answer:
(a) One night he dreamed that he had been captured by a tribe.
(b) He was told he would have to produce the sewing machine in a day.
(c) If he could not, he would be speared by the tribe.
(d) When he failed the tribesmen surrounded him with raised spears that had holes at the tips.
(e) As he woke up suddenly Howe saw the solution to his problem.
(f) The hole had to be at the tip of the needle for the machine to work.

9. Look at the words and phrases below. Rearrange them to form meaningful sentences. The first one has been done as an example. Write the correct sentence in your answer sheet against the correct blank number. (1/2 x 6 = 3 Marks)
Gopal Bhar / was / the matter / the minister / what / asked Gopal Bhar asked the minister what the matter was.
(a) The minister told / the Nawab’s / Gopal about / demands / im-possible
(b) Then Gopal / asked the minister / to give him / this difficult task / and one year / a million rupees / to finish / to request the Nawab
(c) Gopal promised / after one year / to the Nawab / himself / to go / with die results
(d) is heard / is dialled / when / the dial tone / required number / the
(e) at the other end / , / picked / when / into / the / the receiver / a / one rupee coin / is / is / dropped / slit / provided.
(f) go / the / can / on / conversation / three minutes / for
Answer:
(a) The minister told Gopal about the Nawqb’s impossible demands.
(b) Then Gopal asked the minister to request the Nawab to give him a million rupees and one year to finish this difficult task.
(c) Gopal promised to go to the Nawab himself with the results after one year.
(d) When the dial tone is heard the required number is dialled. ,
(e) When the receiver is picked at the other end, a one rupee coin is dropped into the slit provided.
(j) The conversation can go on for three minutes.

10. Look at the words and phrases below. Rearrange them to form meaningful sentences. The first one has been done for you as an example. Write the correct answers in your answer sheet against the correct blank numbers. (1/2 x 6 = 3 Marks)
are / eating / birds / small / wagtails / insect Wagtails are small insect eating birds.
(a) to / are closely / they / related / pipits.
(b) needle like / bill / is / its / are / the / and / feet / with / developed / well / toes / long ?
(c) eight / of / wagtail / there / about / are / species
(d) shrunk / vast lands / father / explained / her / that / olive trees / family’s / one / the / had / to / to / square kilometre / of /
(e) his / slipped into / the driver / highway / the / blue truck / on / headed / and /
(f) his / swirling / moments / snow / was / within / around / vehicle /
Answer:
(a) They are closely related to pipits.
(b) Its / eef and toes are well developed with the bill long needle like,
(c) T / zere are about eight species of wagtails.
(d) Father explained to her that family’s vast lands of the olive trees had shrunk to one square kilometre.
(e) The driver slipped into his blue truck and headed on the highway,
(f) His vehicle was swirling around snow within moments.

11. Look at the words and phrases below. Rearrange them to form meaningful sentences. The first one has been done as an example. Write the correct sentences in your answer sheet against the correct blank number. (1/2 x 6 = 3 Marks)

retailer/ice-cream / to tell / the Swad / has a story The Swad ice-cream retailer has a story to tell.
(a) is a / ice-cream / that / tough business / selling / he feels
(b) now-a-days / in the market / there are just / selling / too many brands / ice-creams / of
(cl there were / varieties / just two or three / different / a decade ago / to choose from
(d) try / some people / a new brand / who / come back / again and again / for it
(e) it’s the King cones / hot cakes / sell like / that
(f) some brands / customers / favoured by / there are / which are not / however
Answer:
(a) He feels that selling ice-cream is a tough business.
(b) Now-a-days there are just too many brands of ice-creams selling market.
(c) A decade ago there were just two or three different varieties to choose from.
(d) Some people who try a new brand come back again and again for it.
(e) It’s the King cones that sell like hot cakes.
(f) However there are some brands which are not favored by customers.

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12. Look at the words and phrases below. Rearrange them to form meaningful sentences. The first one has been done as an example. Write the sentence in your answer sheet against the correct blank number. (1/2 x 6 = 3 Marks)

the / oil plight / Tanzanians / would / like / know / the / you / about / to. Would you like to know about the plight of the Tanzanians?
(a) Africa / in / Tanzanians / literacy rate / the / have / highest
(b) read / hardly / have / to A they / anything / but
(c) the / and / are / costs / soaring / paper / the / the / interest rates / reasons / of
(d) have / they / standstill / the / to / a / brought / publishing industry
(e) is heard / is dialled / when / the dial tone / required number / the
(f) at the other end / picked / when / into / the / the receiver / a / bne rupee coin / is / is / dropped / slit / provided.
Answer:
(a) In Africa, Tanzanians have the highest literacy rate.
(b) But they hardly have anything to read.
(c) The reasons are the soaring costs of the paper and the interest rates.
(d) They have brought the publishing industry to a standstill.
(e) When the dial tone is heard the required number is dialed.
(f) When the receiver is picked at the other end, a one rupee coin is dropped into the provided slot.

MP Board Class 9th English Solutions

MP Board Class 9th Special English Grammar Type I

MP Board Class 9th Special English Grammar Type I

A variety of short questions involving the use of particular structures within a context (i.e. not in isolated sentences) Test type used will include, for example, gap-filling, cloze (gap filling exercise with blanks at regular intervals) sentence completion, sentence-reordering, editing, dialogue. Completion and sentence transformation, Not all elements in the grammar syllabus can be included in the question paper every year.

However, questions will be distributed over the following three broad areas: verb forms, sentence structure and others.

1. The following paragraph has not been edited. There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the s correct blank number. Remember to underline the word you have supplied. (1/2 x 8 = 4 marks)

Lila’s favourite subject in school was maths. She enjoys e.g. enjoy …………… enjoyed
solving problems, and was enthusiastic
for new problems (a)
done in class. But a lot many of her
friends found maths (b)
extremely difficult, and until they
thought it was a (c)
difficult subject they saw no point to work at it. (d)
Maths was the very least popular
subject in class. (e)
Then Lila decided to help three of her friend. She was (f)
patient and good in explaining things.
Her friends realised (g)
that maths is easy if they paid attention. (h)
Answer:
(a) for ………………… about
(b) lot many ………………… lot
(c) until ………………… till
(d) at ………………… on
(e) very least ………………… least
(f) friend ………………… friends
(g) in ………………… at
(f) is ………………… was

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2. The following paragraph has not been edited. There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word you have supplied. (4 marks)

The Band-Aid was invented in New Jersey. e.g. enjoy ………… invented
Dickson was fretted as his wife
Josephine, cut (a)
herself again and again on
working in the (b)
kitchen. One day while he
was wrapping his (c)
wound once again on a bulky
bandage of gauze (d)
and tape, he was struck by a idea.
He put some (e)
gauze on a strip of the medical
tape and a (f)
Band-Aid was born. Billion of cuts
and scrapes (g)
later the Band-Aid is celebrating
it’s 75th birthday. (h)
Answer:
(a) fretted ………………… fretting
(b) on ………………… while
(c) his ………………… her
(d) on ………………… with
(ie) a ………………… an
(f) a ………………… the
(g) Billion ………………… Billions
(h) it’s ………………… its

3. The following passage has not been edited. There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word you have have supplied. (1/2 x 8 = 4 marks)

Longer before Newton. Aristotle and Galileo e.g. Longer ………… Long
have done a lot of research on the subject (a)
of gravity, Aristotle stating that a (b)
heavier object need fall to the Earth (c)
fastest than a lighter one. Legend has (d)
it that Galileo disproved those theories by (e)
throwing down objects with different weights (f)
from a Leaning tower of Pisa and (g)
proved that it took practically the (h)
same time to hit the ground.
Answer:
(a) have ……………….. had
(b) stating ……………….. stated
(c) need ……………….. needn’t
(d) fastest ……………….. fluster
(e) those ……………….. this
(f) with ……………….. Of
(g) a ……………….. the
(h) it ……………….. they

4. The following passage has not been edited. There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word that you have supplied.

Tests and examination are not
confined to school alone, e.g. examination …………………….. examinations
They are widely used at various (a)
Government and non-Government
level, (b)
Business and industry to is
using tests, (c)
Tests are used of the selection of
candidates (d)
and in some case they are one of
the criteria of (e)
s’ction. The success of a doctor is
tested àt his skill (f)
in diagnosis and cure. If he pass
this test (g)
his patient are extremely happy
aboutit. (h)
Answer:
(a) use …………………….. used
(b) level …………………….. levels
(c) is …………………….. are
(d) of …………………….. for
(e) case …………………….. cases
(f) lat …………………….. by
(g) pass …………………….. passes
(h) patient …………………….. patients

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5. The following passage has not been edited. There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word you have supplied.

Mahatma Gandhi did not set out as evolve a e.g., as ……….. to
philosophy of life or formulate a system (a)
of beliefs or ideals. He had either the (b)
inclination nor the time for do so. (c)
He had, however, firm faith about truth (d)
and ahimsa and its practical application (e)
to life. They are said to be the (f)
constitute of his (g)
teachings and philosophies, (h)
Answer:
(a) of ………………………… for
(b) either ………………………… neither
(c) for ………………………… to
(d) about ………………………… in
(e) its ………………………… their
(f) They ………………………… These
(g) constitute ………………………… constituents
(h) philosophies ………………………… philosophy

6. The following passage has not been edited. There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word you have supplied.

More of the fun and excitement in your life comes e.g, More ………… Much
from use your senses. Senses open up a (a)
world who is full of sights, sounds, smells, (b)
tastes and dungs to touch. The
sharp your senses and the (c)
more you use it, more enjoyable each (d)
of this world’s become for you. (e)
For instant, a painter can see shades (f)
and shapes which little gifted (g)
people could not see. (h)
Answer:
(a) use ……………………… using
(c)the ……………………… that
(e) become ……………………… becomes
(g) little ……………………… less
(b) who ……………………… which
(d) i ……………………… them
(f) instant ……………………… instance
(h) could ……………………… can

7. The following passage has not been edited. There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the cor¬rection in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word your have supplied.

Ha’nophilia arc one of the several e.g., is ………… are
sex linked genetic disorders which effects (a)
only males. This is because the disorders is (b)
caused with a.defective gene of the
X-chromosome. (c)
As the result, blood does not dot and
there is a (d)
risk for heavy bleeding even from
minor cuts (e)
and ihjuries. The disease is not affect
females, (f)
becatbe, from the two X-chromosomes
if one has (g)
the defective gene, then the other
do produce (h)
enough clotting factor.
Answer:
(a) effects …………………………. affects
(b) disorders …………………………. disorder
(c) with …………………………. by
(d) the …………………………. a
(e) for …………………………. of
(f) is …………………………. does
(g) from …………………………. between
(h) do …………………………. an

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8. The following passage has not been edited. There is one error in each lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word that you have supplied. (½ x 8 = 4 Marks)

Even if Indians have a long history e.g. if ……… though
on them, they have a poor (a)
knowledge in maintaining homes, (b)
toilets, draperies on fridges. (c)
Modern detergents and soaps is (d)
very common in shelves, but (e)
people does not use them regularly, (j)
This cause the increase (g)
in a life of bacteria and viruses, (h)
Answer:
(a) on ……………………… behind
(b) in ……………………… about/of
(c) on ……………………… and
(d) is ……………………… are
(e) in ……………………… on
(f) does ……………………… do
(g) cause ……………………… causes
(h) a ……………………… the

9. The following passage has not been edited. There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word you supplied.

All life on earth can ultimately is e./g.. is ……… be
traced back on the sea. Creatures (a)
‘with limbs or fingers rather than (b)
Fins has evolved from fishes (c)
about 335 million years before, (d)
which remain a mystery. The new (e)
fossil find in a rock formation
near Scotland (j)
provides one of the few clues to
what has been (g)
happening on these 30 million years, (h)
Answer:
(a) on ………………………….. to
(b) or ………………………….. and
(c) has ………………………….. have
(d) before ………………………….. ago
(e) remain ………………………….. remains
(f) find ………………………….. found
(g) clue ………………………….. clues
(h) on ………………………….. over

10. The following passage has not been edited. There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word your have supplied.

Life was not as it seems to be. e.g., was …….. is
It is full of- up and downs, (a)
The grass always looks greener on the other side. (b)
We have a habit to grumbling, (c)
We are ever satisfied, (d)
We make our lives misery (e)
by expecting too much from everyone, (f)
This is what we face disappointment, (g)
So never expect anything and be happy, (h)
Answer:
(a) up ………………………… ups
(b) look ………………………… looks
(c) to ………………………… of
(d) ever ………………………… never
(e) misery ………………………… miserable
(f) expect ………………………… expecting
(g) what ………………………… why
(h) nothing ………………………… anything

11. The following passage has not been edited. There is one error in each line. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word you have supplied. (4 marks)
Ì’hanks to the current interest -for fitness e.g. for …………. in
and health that peoples are taking. (a)
In each locality, we find this da’s (b)
some centres and clubs is springing (c)
up and they are doing well in their (d)
new venture. But fortunately they (e)
are not within easy reach for all. (f)
Their fee are high and the centres (g)
suffer from lack in equipment and
many other essential services (h)
Answer:
(a) peoples ……………………. people
(b) this ……………………. these
(c) is ……………………. are
(d) do ……………………. doing
(e) fortunately ……………………. unfortunately
(f) all ……………………. many
(g) fee ……………………. fees
(h) in ……………………. of

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12. That following passage has not been edited. There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word you have supplied. (½ x 8 = 4 Marks)

Rama was the boy from Tenali. 1-. e.g. the ……… a
loves to play pranks and didn’t take (a)
nothing seriously. His mother didn’t (b)
know what to do on him. She was sure (c)
he could be unable to do well in life. (d)
She hear that there was a wise man (e)
at the village. She told an holy man (f)
she was fed up with her son. She ask (g)
him to din any sense into Rama. (h)
Ans.
(a) loves …………………… loved
(b) nothing …………………… anything
(c) on …………………… with
(d) could …………………… would
(e) hear had …………………… heard
(f)an …………………… the
(g) ask …………………… asked
(h) any …………………… some

13. The following paragraph has not been edited. There is one mistake in each lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank numbei. Remember to underline the word you have supplied.

Rama lived in a village of Tenali. He loved e.g. a ……….. the
to play pranks and was always jokes. He (a)
refused to study but take anything seriously, (b)
His mother didn’t not know what to do (c)
with him. She feel he never would be (d)
enable to make something of himself. (e)
One day she take him to see a guru. She (f)
told the guru that he had had enough (g)
of her son. She asked him to get the
sense into Rama. (h)
Answer:
(a) jokes …………………….. joking
(b) but …………………….. or
(c) didn’t …………………….. did
(d) feel …………………….. felt
(e) enable …………………….. able
(f) take …………………….. took
(g) he …………………….. she
(h) the …………………….. some

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14. The following passage has not been edited: There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word you have supplied. (½ x 8 = 4 Marks)

Rama was a naughty boy that lived e.g. that ……… who
in the village of Tenali. Her mother (a)
did not know what to do at him (b)
since he refused to study or did any (c)
work One day she take him to see (d)
a guru. She told an holy man (e)
that she were washing her hands (f)
off her son since he should (g)
make something about him. (h)
Answer:
(a) Her ………………………. his
(b) at ………………………. with
(c) did ………………………. do
(d) take ………………………. took
(e) an ………………………. the
(f) were ………………………. was
(e) since ………………………. and
(h) about ………………………. of

15. The following paragraph has not been edited. Thre is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word you have supplied. (4 marks)

One day, the Nawab sent to his e.g. to ………. for
minister and asking him to (a)
measure the length into (b)
breadth of an entire earth (c)
from end to end but side to (d)
side. He also wished that a (e)
minister shoüld count all the (f)
star in the sky. The minister (g)
felt the Nawab was being too unfair to him. (h)
Answer:
(a) asking ……………………. asked
(b) into ……………………. and
(a) an ……………………. the
(d) but ……………………. and
(e) a ……………………. the
(f) should ……………………. could
(g) star ……………………. stars
(h) felt ……………………. feels

16. The following passage has not been edited. There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word that you

One moing, the Nawab call e.g. call …….. called
his minister and said to him (a)
that I wanted the length and (b)
breadth from the whole earth (c)
measured. He also to feel the (d)
need to have the stars in whole (e)
sky counted. The minister says (f)
that the task he have been (g)
set being impossible. (h)
Answer:
(a) said ……………………. told
(b) I ……………………. he
(c)from ……………………. of
(d) to ……………………. feel
(e) whole ……………………. the
(f) says ……………………. said
(g) have ……………………. had
(h) being ……………………. was

17. The ìillowing paragraph has not been edited. There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in ýour answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word you have supplied. (½ x 8 = 4 Marks)

When our earth was cover with water,
all creatures had to e.g. cover ……… cyere
swim on it. When the water subsided
and land appeared (a)
the sea creatures crawled out and
learnt to breathe (b)
and walk on land. When there are not
enough plants left to (c)
eat, they learnt to hunt and kill for the
food. Things are still (d)
changing and if one want to survive,
you will have to change (e)
too. Look even Mumbai has changed.
Fifty years past there (f)
were hill, gardens, beautiful villas where
now you see shops, (g)
traffics, crowds and slums, (h)
Answer:
(a) on ……………………. in
(b) breathing ……………………. to breathe
(c) are ……………………. were
(d) the ……………………. their
(e) one ……………………. you
(f) past ……………………. ago
(g) hill ……………………. hills
(h) traffics, crowds ……………………. traffic, crowd

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18. The following passage has not been edited. There is one error in each of the lines. Write the incorrect word and the correction in your answer sheet as given below against the correct blank number. Remember to underline the word that you have supplied. (1/2 x 8 = 4 Marks)

One day, the Nawab sent words e.g. words ……… word
to his minister that I wanted (a)
entire earth measured from (b)
side to side and of end to end. (c)
He would also great appreciate (d)
it, if the minister count the (e)
stars and the sky as well. The (f)
minister say it was impossible, (g)
no one will do such a thing. (h)
Answer:
(a) I …………………….. He
(b) a …………………….. the
(c) of …………………….. from
(d) great …………………….. greatly
(e) of …………………….. from
(f) great …………………….. greatly
(g) of …………………….. from
(h) great …………………….. greatly

MP Board Class 9th English Solutions

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3

प्रश्न 1.
गुणोत्तर श्रेणी \(\frac{5}{2}, \frac{5}{4}, \frac{5}{8} \dots\) का 20वाँ तथा nवाँ पद ज्ञात कीजिए।
हल:
गुणोत्तर श्रेणी का पहला पद, a = \(\frac{5}{2}\)
दूसरा पद = \(\frac{5}{4}\), सार्व अनुपात = \(\frac{1}{2}\)
n वाँ पद = \(a r^{n-1}=\frac{5}{2}\left(\frac{1}{2}\right)^{n-1}\) = \(\frac{5}{2^{n}}\).
n = 20 रखने पर,
20 वाँ पद = \(\frac{5}{2^{20}}\)

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प्रश्न 2.
उस गुणोत्तर श्रेणी का 12वाँ पद ज्ञात कीजिए, जिसका 8वाँ पद 192 तथा सार्व अनुपात 2 है।
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेणी का पहला पद = a
सार्व अनुपात = 2
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-1

प्रश्न 3.
किसी गुणोत्तर श्रेणी का 5वाँ, 8वाँ तथा 11 वाँ पद क्रमशः p, q तथा s हैं, तो दिखाइए कि q2 = ps.
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेणी का पहला पद = a
सार्व तथा अनुपात =r
5वाँ पद = ar5 – 1 = ar4 = p
8वाँ पद = ar8 – 1 = ar7 = q
11वाँ पद = ar11 – 1= ar10 = s
बायाँ पक्ष = q2 = (ar7)2 = a2 . r14
दायाँ पक्ष = ps = ar4 ar10= a2 . r14
अतः q2 = ps.

प्रश्न 4.
किसी गुणोत्तर श्रेणी का चौथा पद उसके दूसरे पद का वर्ग है तथा प्रथम पद – 3 है, तो 7 वाँ पद ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेणी का पहला पद, a = – 3
तथा सार्व-अनुपात = r
चौथा पद = ar4 – 1 = ar3 = – 3r3
दूसरा पद = ar = – 3r
दिया है : चौथा पद = (दूसरे पद)2
⇒ – 3r3 = (-3r)2 = 9r2
r= – 3
7वाँ पद = \(a r^{7-1}=a r^{6}=(-3)(-3)^{6}\)
= (- 3)7 = – 2187.

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प्रश्न 5.
अनुक्रमों का कौन सा पद :
(a) 2, 2\(\sqrt{2}\), 4, … ; 128 है ?
(b) \(\sqrt{3}\), 3, 3, …. ; 729 है ?
(c) \(\frac{1}{3}, \frac{1}{9}, \frac{1}{27}\), ….; 19683 है?
हल:
(a) गुणोत्तर श्रेणी का पहला व दूसरा पद क्रमशः 2 और 2\(\sqrt{2}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-2
∴ \(\frac{n-1}{2}\) = 6, n – 1 = 12 या n = 13.
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-3
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-4

प्रश्न 6.
x के किस मान के लिए संख्याएँ –\(\frac{2}{7}\), x, – \(\frac{7}{2}\) गुणोत्तर श्रेणी में हैं ?
हल:
संख्याएँ a, b और c गुणोत्तर श्रेणी में है यदि b2 = ac
∴ –\(\frac{2}{7}\), x, – \(\frac{7}{2}\) गुणोत्तर श्रेणी में हैं
\(x^{2}=\left(-\frac{2}{7}\right)\left(-\frac{7}{2}\right)\) = 1
x = ± 1.

प्रश्न 7 से 10 तक प्रत्येक गुणोत्तर श्रेणी का योगफल निर्दिष्ट पदों तक ज्ञात कीजिए।
प्रश्न 7.
0.15, 0.015, 0.0015,…..20 पदों तक।
हल:
गुणोत्तर श्रेणी 0.15, 0.015, 0.0015
पहला पद, a = 0.15
सार्व अनुपात, r = \(\frac{0.015}{0.15}\) = 0.1
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-5

प्रश्न 8.
\(\sqrt{7}, \sqrt{21}, 3 \sqrt{7}\),…..n पदों तक।
हल:
गुणोत्तर श्रेणी \(\sqrt{7}, \sqrt{21}, 3 \sqrt{7}\), …….
पहला पद, a = \(\sqrt{7}\) , सार्व अनुपात, r = \(\frac{\sqrt{21}}{\sqrt{7}}=\sqrt{3}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-6

प्रश्न 9.
1, – a, a2, – a3,…. पदों तक (यदि a ≠ – 1).
हल:
गुणोत्तर श्रेणी 1, – a, a, 2, – a3,…..
पहला पद, a = 1, सार्व अनुपात, r = \(\frac{-a}{1}\) = – a
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-7

प्रश्न 10.
x3, x5, x7, …..n पदों तक (यदि x ≠ ± 1).
हल:
गुणोत्तर श्रेणी x3, x5, x7, …..
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-8

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प्रश्न 11.
मान ज्ञात कीजिए \(\sum_{k=1}^{11}\left(2+3^{k}\right)\).
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-9

प्रश्न 12.
एक गुणोत्तर श्रेणी के तीन पदों का योगफल \(\frac{39}{10}\) है तथा उनका गुणनफल 1 है। सार्व अनुपात तथा पदों को ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेणी के तीन पद \(\frac{a}{r}\), a तथा ar हैं।
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-10

प्रश्न 13.
गुणोत्तर श्रेणी 3,32, 33,… के कितने पद आवश्यक हैं ताकि उनका योगफल 120 हो जाए।
हल:
मान लो गुणोत्तर श्रेणी के कुल पद = n
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-11
या 3(3n – 1) = 120 × 2 = 240
3 से भाग देने पर
3n – 1 = \(\frac{240}{3}\) = 80
या 3n = 80 + 1 = 81 = 34
अत:
n = 4.

प्रश्न 14.
किसी गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम तीन पदों का योगफल 16 है तथा अगले 3 पदों का योग 128 है तो गुणोत्तरं श्रेणी का प्रथम पद, सार्व अनुपात तथा n पदों का योगफल ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेणी a, ar, ar2,…. है।
पहला पद = a, सार्व अनुपात = r
तीन पदों का योगफल = \(\frac{a\left(1-r^{3}\right)}{1-r}\) = 16 …(1)
चौथा पद = a × rn – 1 = ar4 – 1 = ar3
अगले तीन पदों का योगफल = \(\frac{a r^{3}\left(1-r^{3}\right)}{1-r}\) = 128
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-12

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प्रश्न 15.
एक गुणोत्तर श्रेणी का प्रथम पद a = 729 तथा 7वाँ पद 64 है, तो S7 ज्ञात कीजिए।
हल:
गुणोत्तर श्रेणी का पहला पद, a = 729
मान लीजिए सार्व अनुपात = r
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-13

प्रश्न 16.
एक गुणोत्तर श्रेणी को ज्ञात कीजिए, जिसके प्रथम दो पदों का योगफल – 4 है तथा 5 वाँ पद तृतीय पद का 4 गुना है।
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेणी का पहला पद = a
सार्व अनुपात = r
पहले दो पदों का योग = a + ar = – 4 ……(1)
5 वाँ पद = ar4, तीसरा पद = ar2
5 वाँ पद = 4 × तीसरा पद
ar4 = 4 × ar2
∴ r2 = 4 या r = ± 2
समी (1) में r = 2 रखने पर
a (1 + 2) = – 4
∴ a = – latex]\frac{4}{3}[/latex]
∴ गुणोत्तर श्रेणी – 5, 3…. है
और जब r = – 2, ∴ a (1 – 2) = – 4, या a = 4
गुणोत्तर श्रेणी है: 4, – 8, 16, – 32,….

प्रश्न 17.
यदि किसी गुणोत्तर का 4वाँ, 10वाँ तथा 16वाँ पद क्रमशः x, y तथा z हैं, तो सिद्ध कीजिए कि x, y, z गुणोत्तर श्रेणी में हैं।
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेणी का पहला पद = a,
सार्व अनुपात =r
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-14

प्रश्न 18.
अनुक्रम 8, 88, 888, …. के n पदों का योग ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए S = 8 + 88 + 888 + … पदों तक
= 8 [1 + 11 + 111 + … n पदों तक]
= \(\frac{8}{9}\)[9 + 99 + 999 +…. पदों तक]
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-15

प्रश्न 19.
अनुक्रम 2, 4, 8, 16, 32, तथा 128, 32, 8, 2, \(\frac{1}{2}\) के संगत पदों के गुणनफल से बने अनुक्रम का योगफल ज्ञात कीजिए।
हल:
अनुक्रम 2, 4, 8, 16, 32 तथा 128, 32, 8, 2,\(\frac{1}{2}\) के संगत पदों के गुणनफल 2 × 128, 4 × 32, 8 × 8, 16 × 2, 32 × \(\frac{1}{2}\) या 256, 128, 64, 32, 16.
गुणोत्तर श्रेणी का पहला पद, a = 256
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-16

प्रश्न 20.
दिखाइए कि अनुक्रम a, ar, ar2,… arn – 1 तथा A, AR, Ar2,…. ARn – 1 के संगत पदों के गुणनफल से बना अनुक्रम गुणोत्तर श्रेणी होती है तथा सार्व अनुपात ज्ञात कीजिए। .
हल:
%अनुक्रम a, ar, ar2,….arn – 1 तथा A, AR, AR2,… ARn – 1 के संगत पदों के गुणनफल से बना अनुक्रम
या aA, arAR, ar2. AR2, ….
या aA, aArR, aAr2 R2, ….
स्पष्ट है कि यह पद गुणोत्तर श्रेणी में है।
इसका पहला पद = aA
सार्व अनुपात = \(\frac{a A r R}{a A}\) = rR.

प्रश्न 21.
ऐसे चार पद ज्ञात कीजिए जो गुणोत्तर श्रेणी में हो, जिसका तीसरा पद प्रथम पद से 9 अधिक हो, तथा दूसरा पद चौथे पद से 18 अधिक हो।
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेणी a, ar, ar2, ar3,… है
तीसरा पद = ar2, प्रथम पद = a
∴ ar2 – a = 9 …(1)
दूसरा पद = ar, चौथा पद = ar3
ar – ar3 = 18 …(2)
समी (1) को (2) से भाग देने पर,
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-17

प्रश्न 22.
यदि किसी गुणोत्तर श्रेणी का p वाँ, q वाँ तथा वा पद क्रमशः a, b, तथा c हो, तो सिद्ध कीजिए कि \(a^{q-r} \cdot b^{r-p}-c^{p-q}\) = 1.
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेणी का पहला पद A और सार्व अनुपात R है
p वाँ पद = ARp – 1 = a ….(1)
q वाँ पद = ARq – 1 = b ….(2)
r वाँ पद = ARr – 1 = c …..(3)
समी. (1) की q – 7, समी (2) की r – p, समी (3) की p – q घात का प्रयोग करने पर,
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-18

प्रश्न 23.
यदि किसी गुणोत्तर श्रेणी का प्रथम तथा nवाँ पद a तथा b हैं, एवं P, n पदों का गुणनफल हो, तो सिद्ध कीजिए कि P2 = (ab)n.
हल:
मान लो गुणोत्तर श्रेणी का सार्व अनुपात है।
पहला पद = a, n वाँ पद = ar n – 1 = b
P = n पदों का गुणनफल
= a. ar. ar2. ar3 ….arn – 1
= a n. r 1 + 2 + 3 +…+ (n – 1) = \(a^{n} r^{\frac{n(n-1)}{2}}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-19

प्रश्न 24.
दिखाइए कि एक गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम n पदों का योगफल तथा (n + 1) वें पद से (2n)वें पद तक के पदों के योगफल का अनुपात में है।
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेणी का पहला पद a और सार्व अनुपात = \(\frac{1}{r^{n}}\) हों, तब
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-20

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प्रश्न 25.
यदि a, b, c तथा d गुणोत्तर श्रेणी में हैं तो दिखाइए कि \(\left(a^{2}+b^{2}+c^{2}\right)\left(b^{2}+c^{2}+d^{2}\right)=(a b+b c+c d)^{2}\).
हल:
मान लीजिए गुणोत्तर श्रेणी का सार्व अनुपात 7 है।
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-21

प्रश्न 26.
ऐसी दो संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनको 3 और 81 के बीच रखने पर प्राप्त अनुक्रम एक गुणोत्तर श्रेणी बन जाए।
हल:
मान लीजिए G1, G2 ऐसी दो संख्याएँ हैं जिससे 3, G1, G2, 81 गुणोत्तर श्रेणी बनाते हैं।
यह कुल चार पद हैं। यदि r सार्व अनुपात हो तो
∴ 81 = 3.r4 – 1 = 3 . r3
⇒ r=3
G1 = 3r = 3 . 3 = 9
G2 = 3r2 = 3.32 = 27
अतः संख्याएँ 9 और 27 हैं।

प्रश्न 27.
n का मान ज्ञात कीजिए ताकि \(\frac{a^{n+1}+b^{n+1}}{a^{n}+b^{n}}\), a तथा b के बीच गुणोत्तर माध्य हो।
हल:
a और b के बीच गुणोत्तर माध्य = \(\sqrt{a b}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-22
या \(\left(\frac{a}{b}\right)^{n+\frac{1}{2}}\) = 1 = \(\left(\frac{a}{b}\right)^{0}\)
⇒ n+ \(\frac{1}{2}\) = 0 या n = – \(\frac{1}{2}\).

प्रश्न 28.
दो संख्याओं का योगफल उनके गुणोत्तर माध्य का 6 गुना है तो दिखाइए कि संख्याएँ (3 + 2\(\sqrt{2}\)) : (3 – 2\(\sqrt{2}\)) के अनुपात में हैं। .
हल:
मान लीजिए संख्याएँ a और b हों, तब
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-23
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-24

प्रश्न 29.
यदि A तथा G दो धनात्मक संख्याओं के बीच क्रमशः समांतर तथा गुणोत्तर माध्य हों, तो सिद्ध करो कि संख्याएँ \(\mathbf{A} \neq \sqrt{(A+G)(A-G)}\) हैं।
हल:
मान लीजिए संख्याएँ a और b हैं।
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 9 अनुक्रम तथा श्रेणी Ex 9.3 img-25

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प्रश्न 30.
किसी कल्चर में बैक्टीरिया की संख्या प्रत्येक घण्टे के पश्चात् दुगुनी हो जाती है। यदि प्रारंभ में उसमें 30 बैक्टीरिया उपस्थित थे, तो बैक्टीरिया की संख्या दूसरे, चौथे तथा nवें घण्टों बाद क्या होगी ?
हल:
प्रारम्भ में बैक्टीरिया की संख्या a = 30
प्रत्येक घण्टे बाद बैक्टीरिया की संख्या दुगुनी हो जाती है
∴ सार्व अनुपात = 2.
दूसरे घण्टे बाद बैक्टीरिया संख्या = ar2 = 30 × 22 = 120
चौथे घण्टे बाद बैक्टीरिया संख्या = ar4 = 30 × 24 = 480
n वें घण्टे बाद बैक्टीरिया संख्या = arn = 30 × 2n.

प्रश्न 31.
500 रुपए धनराशि 10% वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज पर 10 वर्षों बाद क्या हो जाएगी, ज्ञात कीजिए ?
हल:
माना A मिश्रधन, P मूलधन, r% प्रतिवर्ष ब्याज की दर तथा n वर्ष का समय हो, तो
A = \(P\left(1+\frac{r}{100}\right)^{n}\)
दिया है: P = 500, r = 10%, n = 10 वर्ष
A = 500 \(\left(1+\frac{10}{100}\right)\)
= 500 × (1.1)10.

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प्रश्न 32.
यदि किसी द्विघात समीकरण के मूलों के समांतर माध्य एवं गुणोत्तर माध्य क्रमशः 8 तथा 5 हैं, तो द्विघातीय समीकरण ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए द्विघात समीकरण के मूल α और β हों, तब
\(\frac{\alpha+\beta}{2}\) = 8 ∴ α + β = 16
तथा \(\sqrt{\alpha \beta}\) = 5 ∴ αβ = 25
∴ द्विघातीय समीकरण.
x 2 – (α + β) x + αβ = 0
⇒ x 2 – 16x + 25 = 0..

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