MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण

MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण

संज्ञा

परिभाषा–किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, भाव, गुण, दशा आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं। संज्ञा के तीन भेद होते हैं

  1. जातिवाचक संज्ञा–एक ही जाति का बोध कराने वाले शब्द जातिवाचक संज्ञा कहलाते हैं; जैसे–पुस्तक, विद्यालय, घोड़ा, मनुष्य, लड़का आदि।
  2. व्यक्तिवाचक संज्ञा–जिस शब्द से किसी एक ही विशेष व्यक्ति का बोध हो, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे–राम, सीता, भोपाल, नर्मदा, गंगा आदि।
  3. भाववाचक संज्ञा–जिस संज्ञा से किसी पदार्थ के गुण–दोष, स्वभाव, अवस्था आदि का ज्ञान हो उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे–सुन्दरता, बचपन, बुढ़ापा आदि।

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लिङ्ग

परिभाषा–संज्ञा शब्द के जिस रूप से स्त्री अथवा पुरुष जाति का बोध होता है, उसे लिङ्ग कहते हैं। लिङ्ग दो प्रकार के होते हैं
(क) पुल्लिङ्ग,
(ख) स्त्रीलिङ्ग।

(क) पुल्लिङ्ग से किसी पुरुष जाति का बोध होता है; जैसे–राम, घोड़ा, बालक आदमी आदि।
(ख) स्त्रीलिङ्ग से किसी स्त्री जाति का बोध होता है; जैसे–लड़की, नारी, सीता आदि।।

वचन वचन दो प्रकार के होते हैं–
(क) एकवचन,
(ख) बहुवचन।

(क) जिन शब्दों से एक संख्या का बोध हो, एकवचन कहलाते हैं; जैसे–घर, दिन, पुस्तक आदि।
(ख) जिन शब्दों से एक से अधिक संख्या का बोध होता है, उन्हें बहुवचन कहते हैं; जैसे–पुस्तकें, लड़कियाँ आदि।

सर्वनाम

परिभाषा–जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं, उन्हें सर्वनाम कहते हैं; जैसे–वह, हम, तुम, वे, मैं, यहाँ, वहाँ आदि।

सर्वनाम के भेद–सर्वनाम निम्नलिखित छः प्रकार के होते हैं–

  • पुरुषवाचक सर्वनाम,
  • निश्चयवाचक सर्वनाम,
  • अनिश्चयवाचक सर्वनाम,
  • सम्बन्धवाचक सर्वनाम,
  • प्रश्नवाचक सर्वनाम,
  • निजवाचक सर्वनाम।

विशेषण

परिभाषा–संज्ञा तथा सर्वनाम की विशेषता प्रकट करने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं; जैसे–सुन्दर बालक, मीठा फल, काला घोड़ा आदि। इनमें सुन्दर, मीठा, काला शब्द विशेषण हैं। वे क्रमशः बालक, फल, घोड़ा शब्दों (संज्ञा) की विशेषता बताते हैं।

विशेषण के प्रकार–विशेषण छः प्रकार के होते हैं-

  • गुणवाचक विशेषण,
  • संख्यावाचक विशेषण,
  • परिमाणवाचक विशेषण,
  • संकेतवाचक विशेषण,
  • व्यक्तिवाचक विशेषण,
  • प्रश्नवाचक विशेषण।

क्रिया

परिभाषा–जिन शब्दों से किसी वाक्य में कार्य का करना या होना पाया जाता है, उन्हें क्रिया कहते हैं; जैसे–जाना, खाना, पीना, उठना, बैठना. पढना आदि।

क्रिया के भेद–क्रिया दो प्रकार की होती है–

  1. अभिकर्मक (अकर्मक) क्रिया–जिस क्रिया में कर्म न होकर केवल कर्ता ही होता है, वह अकर्मक (अभिकर्मक)। क्रिया कहलाती है; जैसे–मोहन गया। वे हँसते हैं।
  2. सकर्मक क्रिया–जिस क्रिया में कर्म होता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे–मोहन किताब लिखता है। इस वाक्य में लिखता है’ क्रिया का कर्म, ‘किताब’ है।

काल

परिभाषा–किसी भी क्रिया के होने या करने के समय को काल कहते हैं। काल तीन प्रकार के होते हैं

  • भूतकाल–जैसे–मोहन शहर गया।
  • वर्तमानकाल–जैसे–सीता गाना गा रही है।
  • भविष्यत्काल–जैसे–मैं पत्र लिखूगा।

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क्रिया–विशेषण

परिभाषा–किसी भी क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्दों को क्रिया–विशेषण कहते हैं; जैसे–घोड़ा तेज दौड़ता। है। इस वाक्य में ‘तेज’ शब्द क्रिया विशेषण है। इसमें ‘दौड़ता। है’ क्रिया की विशेषता बतायी जा रही है। अतः ‘तेज’ शब्द क्रिया–विशेषण हुआ।

सम्बन्ध बोधक परिभाषा–दो शब्दों में सम्बन्ध स्थापित करने वाले अव्ययों को सम्बन्धबोधक अव्यय कहते हैं; जैसे–छत के ऊपर चोर है। इस वाक्य में छत और चोर का सम्बन्ध ‘ऊपर’ के द्वारा बताया गया है अतः ऊपर’ शब्द सम्बन्धबोधक अव्यय है।

समुच्चय बोधक

परिभाषा–दो शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों को मिलाने वाले शब्द समुच्चयबोधक अव्यय कहलाते हैं; जैसे– राम और श्याम भाई–भाई हैं। राम श्याम को मिलाने वाला ‘और’ शब्द समुच्चयबोधक अव्यय है।

विस्मयादिबोधक

परिभाषा–विस्मय, हर्ष, विषाद, तिरस्कार, लज्जा, उत्साह, चिन्ता, घृणा आदि मनोभावों को प्रकट करने वाले अव्यय विस्मयबोधक कहलाते हैं;
जैसे–
हे ! हो ! हरे ! आदि।
मुहावरे तथा लोकोक्तियाँ

और उनके वाक्य प्रयोग
1. अक्ल का दुश्मन–मुर्ख।
प्रयोग–वह तो अक्ल का दुश्मन है, किसी की भी राय नहीं मानेगा।

2. अपना उल्लू सीधा करना–स्वार्थ सिद्ध करना।
प्रयोग–तुम्हें भले–बुरे से क्या मतलब ? तुम तो अपना उल्लू सीधा करो।

3. अंगूठा दिखाना–निराश कर देना।
प्रयोग–उसने रुपये लौटाने का वायदा किया था, फिर भी अँगूठा दिखा दिया।

4. आँखों का तारा–बहुत प्यारा।
प्रयोग–मोहन अपने माता–पिता की आँखों का तारा है।

5. आँख का अन्धा–मूर्ख।
प्रयोग–प्रत्येक व्यापारी चाहता है कि कोई आँख का अन्धा व्यक्ति ही उसके हाथ लगे।

6. अपमान के चूंट पीना–अपमान सहन करना।
प्रयोग–चुनाव में हार होने पर मुखिया अपमान का घूट पिये बैठा है। .

7. अन्धे की लकड़ी–एकमात्र सहारा।
प्रयोग–श्रवण कुमार अपने माता–पिता के लिए अन्धे की लकड़ी था।

8. आँखों में धूल झोंकना–धोखा देना।
प्रयोग–बाजार में ठग दुकानदार की आँखों में धूल झोंककर माल ले गये।

9. आँख दिखाना–डराना, धमकाना।
प्रयोग–छोटे बच्चों को कभी भी आँखें नहीं दिखानी चाहिए।

10. आँखें चुराना–छिपना।
प्रयोग–पहले तो सोचा नहीं, अब आँखें चुराते फिरते हो।

11. आँखों में खून उतरना–बहुत क्रोधित होना।
प्रयोग–अपराधी को देखते ही, मेरी आँखों में खून उतर आया।

12. आँखें बिछाना–स्वागत करना।
प्रयोग–राष्ट्रपति के आने पर जनता ने उनके सामने अपनी आँखे बिछा दीं।

13. ईंट से ईंट बजाना–सर्वनाश करना।
प्रयोग–भारत के वीरों ने अंग्रेजी राज्य की ईंट से ईंट बजा दी।

14.ईद का चाँद होना–बहुत कम दर्शन होना।
प्रयोग–दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी लोगों के लिए ईद का चाँद हो जाता है।

15. काम तमाम करना–मार डालना।
प्रयोग–शिकारी ने अपनी एक ही गोली से शेर का काम तमाम कर दिया।

16. काफूर होना–नष्ट होना।
प्रयोग–हामिद की बात सुनकर उसकी दादी का क्रोध काफूर हो गया।

17. गले न उतरना–समझ में न आना।
प्रयोग–आपकी कोई भी बात मेरे गले नहीं उतर रही है।

18. गंध भी न मिलना–कोई पता न चलना।
प्रयोग–मेरा मित्र जब से गया है, तब से अभी तक उसकी गंध भी नहीं मिल रही है।

19. टेढ़ी खीर–कठिन कार्य।
प्रयोग–भारत का प्रधानमंत्री बनना टेढ़ी खीर है।

20. छक्के छुड़ाना–घबरा देना।
प्रयोग–सन् 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिये।

21. ठण्डा होना–मर जाना।
प्रयोग–शिकारी की गोली लगते ही शेर ठण्डा पड़ गया।

22. नौ दो ग्यारह होना–भाग जाना।
प्रयोग–पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारहे हो गये।

23. दंग रह जाना–आश्चर्यचकित होना।
प्रयोग–ताजमहल की कारीगरी देखकर विदेशी दंग रह जाते हैं।

24. पीठ दिखाना–भाग जाना।
प्रयोग–वीर पुरुष कभी भी युद्ध के मैदान से पीठ दिखाकर नहीं भागते।

25. धोबी का कुत्ता घर का न घाट का–कहीं का न रहना।
प्रयोग–मोहन ने चपरासी की नौकरी छोड़ दी, यह सोचकर कि अब अच्छी नौकरी करेगा। नौकरी तो उसे मिलती नहीं अतः उसकी दशा धोबी के कुत्ते जैसी है, जो न तो घर का है और न घाट का।

26. काला अक्षर भैंस बराबर–अनपढ़।
प्रयोग–मोहन के लिए काला अक्षर भैंस बराबर है।

27. एक पंथ दो काज–एक ही रास्ते से दो काम।
प्रयोग–वह 26 जनवरी का उत्सव देखने दिल्ली गया। लौटते हुए वह अपने भाई से भी मिल लिया। इस तरह उसने एक पंथ दो काज कर लिए।

28. आम के आम गुठलियों के दाम–एक वस्तु से दो लाभ लेना।
प्रयोग–अखबार पढ़ लेते हैं तथा उसे बेचकर पैसे भी प्राप्त कर लेते हैं, इस प्रकार आम के आम गुठलियों के दाम हो जाते हैं।

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तत्सम तथा तद्भव शब्द

MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण 1
MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण 2

विलोम शब्द

MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण 3
MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण 4
MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण 5

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पर्यायवाची शब्द।

  • अग्नि–पावक, अनल, आग, ज्वाला, दहन, कृशानु, वैशांदुर।
  • अमृत–सोम, अमीय, सुधा, पीयूष, सुरभोग।
  • आँख–लोचन, नयन, नेत्र, चक्षु, द्रग।
  • असुर–दानव, दैत्य, राक्षस, निशाचर, दनुज, तमोचर।
  • आकाश–व्योम, गगन, अम्बर, शून्य, अनन्त, अन्तरिक्ष।
  • घोड़ा–अश्व, तुरंग, वाजि, हय, घोटक, रवि–सुत।
  • इन्द्र–पुरन्दर, मघवा, सुरेन्द्र, सुरेश, सुरपति, देवराज।
  • पानी–जल, वारि, अम्बु, तोय, नीर, पय, सलिल।
  • कमल–जलज, वारिज, अम्बुज, तोयज, नीरज, पंकज, सरोज।
  • बादल–जलद, वारिद, अम्बुद, नीरद, तोयद, जलधर, मेघ।
  • समुद्र–जलधि, वारिधि, अम्बुधि, नीरधि, तोयधि, पयोधि, नदीश।
  • सूर्य–दिवाकर, दिनेश, भानु, भाष्कर, रवि, दिवाकर, प्रभातकर, पतंग।
  • चन्द्रमा–मयंक, शशि, राकेश, राकापति, सोम, हिमकर, रजनीश, निशाकर।
  • पृथ्वी–भू, भूमि, धरती, धरा, वसुधा, अवनि, मही, वसुन्धरा।
  • कोयल–कोकिला, पिक, वनप्रिय, परमृत, वसन्तदूत।
  • कामदेव–मदन, अनंग, मन्मथ, मनोज, मार।
  • गंगा–सुरनदि, देवसरि, देवपगा, त्रिपथगा, भागीरथी, देवनदी, जाह्नवी।
  • घर–धाम, गृह, सदन, भवन, मन्दिर, निकेतन।
  • तालाब–सर, तड़ाग, सरोवर, ताल, जलाशय, पुष्कर।
  • दिन–दिवस, वासर, दिवा, अह्न, द्यौस, दिवा।
  • नदी–सरिता, आपगा, तरंगिणी, नद, तटनी, सरि।
  • फूल–पुष्प, सुमन, कुसुम, प्रसून, पुहुप।
  • पक्षी–खग, पतंग, पखेरू, परिंदा, द्विज।
  • हवा–वायु, पवन, समीर, अनिल, मारूति, ब्यार।
  • पेड़–तरु, विटप, वृक्ष, पादप, द्रुम।
  • धनुष–चाप, कोदण्ड, धनु, सरासन, कमान।
  • नाव–नौका, नैया, तरिणी, तरी।
  • पत्थर–पाहन, पाषाण, प्रस्तर, उपल, अश्म।
  • पर्वत–अचल, नग, गिरि, भूधर, शैल।
  • पुत्र–तनय, सुत, आत्मज, नन्दन, तात।
  • बिजली–विद्युत, दामिनी, चपला, तड़ित, चंचला।
  • भौंरा–अलि, मधुकर, भ्रमर, मधुप, भुंग।
  • मोर–केकी, शिखी, मयूर, नीलकंठ, शिखण्डी।
  • यमुना–कालिन्दी, अर्कजा, रवितनया, कृष्णा, तरणि तनूजा।
  • राजा–नृप, भूप, महीप, नृपति, नरेश।
  • रात्रि–रजनी, निशा, यामिनी, विभावरी, रैन।
  • लक्ष्मी–रमा, श्री, चंचला, पद्मा, हरिप्रिया, कमला।
  • विष्णु–नारायण, हरि, श्रीपति, चतुर्भुज, उपेन्द्र।
  • सिंह–मृगराज, केहरि, केसरी, पंचानन।
  • सोना–स्वर्ण, कनक, हेम, कंचन, कुन्दन।
  • स्वर्ग–देवलोक, विष्णुलोक, सुरपुर, ब्रह्मलोक, बैकुण्ठ।
  • साँप–सर्प, नाग, भुजंग, विषधर, व्याल।
  • स्त्री–नारी, तिय, अबला, कामिनी, रमणी।
  • सरस्वती–शारदा, भारती, वीणावादिनि, हंस वाहिनी वागेश्वरी।
  • हाथी–गज, हस्ती, कुंजर, नयन्द, दन्ती।
  • मृग–सारंग, कुरंग, मृणीक, हिरण।

समास

परिभाषा–किन्हीं दो पदों (शब्दों) के योग को समास कहते हैं। समास का अर्थ संक्षिप्त होता है।
जैसे–

  • दिन–रात, माता–पिता आदि।

समास के भेद–समास छः प्रकार के होते हैं-
1. द्वन्द्व समास–इस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं। बीच में ‘और’ शब्द का लोप होता है।
जैसे–

  • माता–पिता = माता और पिता।
  • भाई–बहन = भाई और बहन।
  • दिन–रात = दिन और रात।

2. द्विगु समास–जिस समास में पहला पद संख्यावाची विशेषण हो, वह द्विगु समास होता है।
जैसे–

  • त्रिभुवन = तीन भुवनों का समूह,
  • नवरत्न = नौ रत्नों का समूह।

3. कर्मधारय समास–जिसमें पहला पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य हो, तो वहाँ कर्मधारय समास होता है।
जैसे–

  • नीलकमल = नीला है जो कमल।
  • महादेव = महान है जो देव।
  • घनश्याम = घन के समान श्याम।

4. तत्पुरुष समास–जिस समास में उत्तर पद प्रधान होता है तथा बीच में विभक्तियों का लोप होता है, वह तत्पुष समास कहलाता है,
जैसे–

  • राम–भजन = राम का भजन।
  • राजपुत्र = राजा का पुत्र।
  • विद्याहीन = विद्या से हीन।

5. अव्ययीभाव समास–जिस समास में पहला पद अव्यय तथा दूसरा पद प्रधान होता है, वहाँ अव्ययीभाव समास होता है।
जैसे–
यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार, (यथा + शक्ति)।

  • यथोचित = यथा + उचित।
  • प्रतिदिन = प्रति + दिन।
  • अनुदिन = अनु + दिन।

6. बहुब्रीहि समास–जिस समास में किसी भी पद की प्रधानता न होते हुए अन्य तीसरे पद की प्रधानता होती है वहाँ बहुब्रीहि समास होता है।
जैसे–

  • दशानन = दस हैं आनन जिसके अर्थात् रावण।
  • नीलकंठ = नीला है कंठ जिसका अर्थात् महादेव।
  • लम्बोदर = लम्बा है उदर जिसका अर्थात् गणेशजी।

उदाहरण–
निम्नलिखित शब्दों के पद–विग्रह सहित समास लिखो-
MP Board Class 7th Special Hindi व्याकरण 6

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अलंकार

परिभाषा–जिस प्रकार किसी सुन्दरी की शोभा बढ़ाने के लिए कुछ आभूषणों का प्रयोग किया जाता है। उसी प्रकार भाषा रूपी सुन्दरी को सजाने के लिए कुछ शब्दों का प्रयोग करते हैं। उन्हें अलंकार कहते हैं।

अलंकार के भेद–अलंकार दो प्रकार के होते हैं
(1) शब्दालंकार,
(2) अर्थालंकार।
शब्दालंकार से शब्द में चमत्कार पैदा होता है। अर्थालंकार से अर्थ में चमत्कार पैदा होता है।

(क) शब्दालंकारों में अनुप्रास, यमक और श्लेष मुख्य
1. अनुप्रास अलंकार–जब एक ही अक्षर दो या दो से अधिक बार प्रयोग हो रहा हो, तो वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
जैसे-
तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।
इस वाक्य में ‘त’ वर्ण कई बार आया है।
अत: यहाँ अनुप्रास अलंकार है।

2. यमक अलंकार–जिस वाक्य में एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आये तथा उनके अर्थ अलग–अलग हों, तो वहाँ यमक अलंकार होता है।
जैसे–
‘कनक–कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय’ में कनक शब्द दो बार प्रयुक्त हुआ है। पहले ‘कनक’ का अर्थ स्वर्ण (सोना) है तथा दूसरे ‘कनक’ का अर्थ है ‘धतूरा’। इसलिए यहाँ यमक अंलकार है।

3. श्लेष अलंकार–श्लेष शब्द का अर्थ है चिपका हुआ। जहाँ किसी एक शब्द का एक ही बार प्रयोग हो तथा उसके अर्थ अनेक हों, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।
जैसे–
रहिमन पानी राखिये बिनु पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरे, मोती मानुस चून॥
इस पद्यांश में प्रयुक्त ‘पानी’ शब्द का अर्थ–चमक, प्रतिष्ठा, तथा जल है अतः यहाँ श्लेष अलंकार है।

(ख) अर्थालंकारों में उपमा, रूपक तथा उत्प्रेक्षा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं-
1. उपमा–जहाँ एक वस्तु की समानता किसी दूसरी वस्तु से दिखायी जाती है, वहाँ उपमा अलंकार होता है। उपमां के चार भेद होते हैं– उपमेय, उपमान, धर्म, वाचक।
उदाहरण–
‘हरि पद कोमल कमल से।’ इस वाक्य में हरिपद उपमेय है, ‘कमल’ उपमान है ‘से’ वाचक है तथा ‘कोमल’ साधारण धर्म है।

2. रूपक–जहाँ उपमेय और उपमान को एक ही रूप दे दिया जाता है, तो वहाँ रूपक अलंकार होता है।
जैसे–
“चरण कमल बन्दी हरि राई।” – यहाँ पर ‘चरण’ उपमेय है, और ‘कमल’ उपमान है। दोनों को ही एक रूप दे दिया गया है, अतः यहाँ रूपक अलंकार है।

3. उत्प्रेक्षा–जहाँ उपमेय में उपमान की कल्पना की जाये, तो वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। इसमें जनु, मनु, जानहु, मानहु, आदि शब्द ‘वाचक’ होते हैं।
उदाहरण–
सोहत ओढ़े पीत पट श्याम सलोने गात।
मनहु नीलमणि शैल पर आतप पर्यो प्रभात ॥
यहाँ श्रीकृष्ण के श्याम सलोने शरीर की समानता नीलमणि के पर्वत से की है, शरीर पर पीलावस्त्र नीलमणि के पर्वतरूपी श्यामवर्ण शरीर पर पड़ी हुई प्रातःकालीन धूप है।

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शब्दसमूह के लिए एक शब्द
शब्दसमूह   –         एक शब्द
1. कभी निष्फल न होने वाला – अमोघ
2. सम्पूर्ण संसार का स्वामी – अखिलेश
3. जो ईश्वर को नहीं मानता हो – नास्तिक
4. जो कभी न मरे – अमर
5. दूसरों का एहसान न मानता हो कृतघ्न या – अकृतज्ञ
6. जिसके माता–पिता हैं – सनाथ
7. जिसके माता–पिता न हों – अनाथ
8. बहुत अधिक बोलने वाला – वाचाल
9. बुराई करने वाला – निन्दक
10. दूसरों की भलाई करने वाला – परोपकारी
11. भ्रमण करने वाला – पर्यटक
12. दूसरे देश का रहने वाला – विदेशी
13. घोड़े बाँधने का स्थान – अस्तबल
14. गोद लिया पुत्र – दत्तक पुत्र
15. भाषण देने वाला – वक्ता
16. जो लिखना पढ़ना जानता हो – साक्षर
17. क्षणभर में नष्ट होने वाला – क्षणभंगुर
18. वह स्त्री जिसका पति मर चुका हो – विधवा
19. वह आदमी जिसकी स्त्री मर विधुर – चुकी हो
20. जो बिना बुद्धि का हो – निर्बुद्धि
21. जो बिना चरित्र का हो – चरित्रहीन
22. मांस खाने वाला – मांसाहारी
23. दूर तक की सोचने वाला। – दूरदर्शी
24. नीति का ज्ञाता – नीतिज्ञ
25. जिसे जीता न जा सके – अजेय
26. घृणा के योग्य – घृणित
27. जिसे सभी कामों में सफलता। सफल – मिली हो
28. ईश्वर में विश्वास करने वाला – आस्तिक
29. जो बूढ़ा न हो – अजर
30. सौ वर्ष का समय – शताब्दी
31. शरण में आया हुआ – शरणागत
32. आज्ञा मानने वाला – आज्ञाकारी
33. बहुत कम जानने वाला – अल्पज्ञ
34. दोपहर का समय – मध्याह्न
35. आकाश को छूने वाला – गगनचुम्बी
36. कम बोलने वाला – मितभाषी
37. दोपहर के बाद का समय – अपराह्न
38. पूजा के योग्य – पूज्य
39. सम्पूर्ण दिन का कार्यक्रम – दिनचर्या
40. जिसका जन्म पहले हुआ हो। – अग्रज
41. मांस न खाने वाला – शाकाहारी
42. जिसका कोई शत्रु न हो – अजातशत्रु
43. पति तथा पत्नी – दम्पत्ति
44. निष्फल न होने वाली – अचूक
45. जिसका आकार न हो – निराकार

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MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.6

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.6

Question 1.
From the figure, identify:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.6 1
(a) the centre of circle
(b) three radii
(c) a diameter
(d) a chord
(e) two points in the interior
(f) a point in the exterior
(g) a sector
(h) a segment
Solution:
(a) O is the centre of circle.
(b) Three radii: \(\overline{O A}\), \(\overline{O B}\) and \(\overline{O C}\)
(c) A diameter : \(\overline{A C}\)
(d) A chord : \(\overline{E D}\)
(e) Two interior points : O and P
(f) Exterior point: Q
(g) A sector : OAB (shaded part)
(h) A segment: ED (shaded part)

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.6

Question 2.
(a) Is every diameter of a circle also a chord?
(b) Is every chord of a circle also a diameter?
Solution:
(a) Yes, every diameter of a circle is also a chord. It is the largest chord of a circle.
(b) No, every chord of a circle is not a diameter.

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.6

Question 3.
Draw any circle and mark
(a) its centre
(b) a radius
(c) a diameter
(d) a sector
(e) a segment
(f) a point in its interior
(g) a point in its exterior
Solution:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.6 2
(a) O is the centre of the circle.
(b) \(\overline{O A}\) is the radius
(c) \(\overline{A B}\) is the diameter.
(d) OAC is the sector, (shaded part)
(e) EF is the segment, (shaded part)
(f) Q is a point in its interior.
(g) R is a point in its exterior.
(h) \(\widehat{A C}\) is an arc.

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.6

Question 4.
Say true or false:
(a) Two diameters of a circle will necessarily intersect.
(b) The centre of a circle is always in its interior.
Solution:
(a) True
(b) True

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MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.5

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.5

Question 1.
Draw a rough sketch of a quadrilateral PQRS. Draw its diagonals. Name them. Is the meeting point of the diagonals in the interior or exterior of the quadrilateral?
Solution:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.5 1
Diagonal PR and diagonal SQ meet at point O, which is in the interior of the quadrilateral PQRS.

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.5

Question 2.
Draw a rough sketch of a quadrilateral KLMN. State,
(a) two pairs of opposite sides,
(b) two pairs of opposite angles,
Solution:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.5 2
(a) Two pairs of opposite sides :
\(\overline{K L}\) and \(\overline{N M}\), \(\overline{K N}\) and \(\overline{L M}\)

(b) Two pairs of opposite angles :
∠K and ∠M, ∠L and ∠N

(c) Two pairs of adjacent sides :
\(\overline{K N}\) and \(\overline{N M}\) , \(\overline{K L}\) and \(\overline{L M}\)

(d) Two pairs of adjacent angles :
∠K and ∠N, ∠L and ∠M

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.5

Question 3.
Investigate :
Use strips and fasteners to make a triangle and a quadrilateral.
Try to push inward at any one vertex of the triangle. Do the same to the quadrilateral.
Is the triangle distorted? Is the quadrilateral distorted? Is the triangle rigid?
Why is it that structures like electric towers make use of triangular shapes and not quadrilaterals?
Solution:
No, the triangle is not distorted but the quadrilateral is distorted and also the triangle is rigid.
Structures like electric towers make use of triangular shape so that they could not be distorted and they could be rigid.

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MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.2

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.2

Question 1.
Classify the following curves as
(i) Open or
(ii) Closed.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.2 1
Solution:
(a) Open curve
(b) Closed curve
(c) Open curve
(d) Closed curve
(e) Closed curve

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.2

Question 2.
Draw rough diagrams to illustrate the following:
(a) Open curve
(b) Closed curve.
Solution:
(a) Open curves :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.2 2

(b) Closed curves :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.2 7

Question 3.
Draw any polygon and shade its interior.
Solution:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.2 3
ABCDEF is the required polygon.

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.2

Question 4.
Consider the given figure and answer the questions:
(a) Is it a curve?
(b) Is it closed?
Solution:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.2 6
(a) Yes, it is a curve.
(b) Yes, it is closed.

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.2

Question 5.
Illustrate, if possible, each one of the following with a rough diagram:
(a) A closed curve that is not a polygon.
(b) An open curve made up entirely of line segments.
(c) A polygon with two sides.
Solution:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.2 5
(c) Polygon with two sides cannot be drawn.

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MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1

Question 1.
Use the figure to name :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1 1
(a) Five points
(b) A line
(c) Four rays
(d) Five line segments
Solution:
(a) Five points : O, B, C, D, E
(b) A line \(\overleftrightarrow { DB }\)
(c) Four rays \(\overrightarrow{O D}\), \(\overrightarrow{O E}\), \(\overrightarrow{O C}\), \(\overrightarrow{O B}\)
(d) Five line segments :
\(\overline{D E}\), \(\overline{O E}\), \(\overline{O C }\), \(\overline{O B}\), \(\overline{O D}\).

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1

Question 2.
Name the line given in all possible (twelve) ways, choosing only two letters at a time from the four given.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1 2
Solution:
Possible lines are \(\overleftrightarrow { AB }\), \(\overleftrightarrow { AC }\), \(\overleftrightarrow { AD }\), \(\overleftrightarrow { BC }\), \(\overleftrightarrow { BD }\), \(\overleftrightarrow { CD }\), \(\overleftrightarrow { BA }\), \(\overleftrightarrow { CA }\), \(\overleftrightarrow { DA }\), \(\overleftrightarrow { CB }\), \(\overleftrightarrow { DB }\), \(\overleftrightarrow { DC }\).

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1

Question 3.
Use the figure to name :
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1 3
(a) Line containing point E.
(b) Line passing through A.
(c) Line on which O lies
(d) Two pairs of intersecting lines.
Solution:
(a) A line containing point E is \(\overleftrightarrow { AE }\).
(b) A line passing through A is \(\overleftrightarrow { AE }\).
(c) A line on which O lies is \(\overleftrightarrow { CO }\) or \(\overleftrightarrow { OC }\).
(d) Two pairs of intersecting lines are \(\overleftrightarrow { AD }\), \(\overleftrightarrow { CO }\) and \(\overleftrightarrow { AE }\), \(\overleftrightarrow { FE }\).

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1

Question 4.
How many lines can pass through
(a) one given point?
(b) two given points?
Solution:
(a) Infinite number of lines can pass through one given point.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1 4
(b) Only one line can pass through two given points.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1 5

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1

Question 5.
Draw a rough figure and label suitably in each of the following cases:
(a) Point Plies on \(\overline{A B}\).
(b) \(\overleftrightarrow { XY }\) and \(\overleftrightarrow { PQ }\) intersect at M.
(c) Line l contains E and F but not D.
(d) \(\overleftrightarrow { OP }\) and \(\overleftrightarrow { OQ }\) meet at O.
Solution:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1 6
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1 7

Question 6.
Consider the following figure of line \(\overleftrightarrow { MN }\). Say whether following statements are true or false in context of the given figure.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 4 Basic Geometrical Ideas Ex 4.1 8
(a) Q, M, O, N, P are points on the line \(\overleftrightarrow { MN }\).
(b) M, O, N are points on a line segment \(\overline{M N}\).
(c) M and N are end points of line segment \(\overline{M N}\).
(d) O and N are end points of line segment \(\overline{O P}\).
(e) M is one of the end points of line segment \(\overline{Q O}\).
(f) M is point on ray \(\overrightarrow { OP }\)
(g) Ray \(\overrightarrow { OP }\) is different from ray \(\overrightarrow { OP }\).
(h) Ray OP is same as ray \(\overrightarrow { OM }\).
(i) Ray \(\overrightarrow { OM }\) is not opposite to ray \(\overrightarrow { OP }\).
(j) O is not an initial point of \(\overrightarrow { OP }\).
(k) N is the initial point of \(\overrightarrow { NP }\) and \(\overrightarrow { NM }\).
Solution:
(a) True
(b) True
(c) True
(d) False
(e) False
(f) False
(g) True
(h) False
(i) False
(j) False
(k) True

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti विविध प्रश्नावली 3

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions विविध प्रश्नावली 3

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए
(क) छोटा जादूगर के पिता कहाँ थे और क्यों?
उत्तर-
छोटा जादूगर के पिता जेल में थे। वे देश की आजादी के लिए जेल में गये हुए थे।

(ख) ‘नरबदी’ कहानी आपको कैसी लगी?
उत्तर-
‘नरबदी’ कहानी सबसे अधिक प्रभावित करने वाली, लोक मान्यताओं पर आधारित लोक कथा है। इसका विषय सामान्य जन-जीवन से जुड़ा होने से अधिक प्रभाव छोड़ता है। भाषा सरल, सरस और भाव को समझने में सहायक है। पात्र केवल दो ही हैं। प्रकृति का चित्रण अपने आप ही होता गया है। भारतीय संस्कृति के महान अंग आदिवासियों के जीवन की दिव्य झाँकी प्रस्तुत करती हुई यह कहानी वास्तविकता को दर्शाने वाली है। शैली-स्वरूप में वाक्य विन्यास छोटा है। घटना प्रधान होने से पाठकों को प्रभावित करती है।

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(ग) राज्य पर आक्रमण होने पर अहिल्याबाई ने राघोवा का षड्यन्त्र कैसे विफल किया?
उत्तर-
राज्य पर आक्रमण होने पर अहिल्याबाई ने राघोवा का षड्यन्त्र विफल कर दिया। अहिल्याबाई ने राघोवा को पत्र लिखकर बताया कि वह नारी सेना लेकर उनसे युद्ध करेंगी। युद्ध में यदि उनकी (राघोवा की) हार होती है, तो उन्हें एक नारी से पराजित होने का अपयश मिलेगा। यदि उन्हें जीत मिल भी गई तो एक पुत्र के वियोग में व्यथित विधवा के राज्य को अकारण हड़प लेने की कालिख उनके मुख पर लगेगी। यह सब अहिल्याबाई ने अपनी सूझ-बूझ और राजनैतिक चतुराई से किया।

(घ) कवि देश को तन, मन, धन क्यों समर्पित करना चाहता है?
उत्तर-
कवि देश को तन, मन, धन समर्पित करना चाहता है, क्योंकि उसके ऊपर मातृभूमि का बड़ा भारी ऋण है जो तन, मन, धन तथा जीवन समर्पित कर देने पर भी पूरा नहीं हो सकता।

(ङ) ज्ञानदा कहाँ और क्यों जा रही थी?
उत्तर-
ज्ञानदा टीकमगढ़ जा रही थी। वहाँ वह राज्य स्तरीय शालेय हॉकी प्रतियोगिता में खेलने जा रही थी।

(च) खिलाड़ी-भावना से क्या आशय है?
उत्तर –
खिलाड़ी की भावना का आशय यह है कि हम खेल में अनुशासित रहें। हमारे अन्दर धैर्य, सहिष्णुता, उदारता बनी रहे और हार-जीत को समान भाव से लें। खेल तो मिल-जुलकर खेला जाता है।

(छ) ब्रिटिश सरकार ने रमण को किस उपाधि से विभूषित किया और क्यों?
उत्तर-
ब्रिटिश सरकार ने ‘रमण प्रभाव’ की खोज के लिए सन् 1929 में रमण को ‘सर’ की उपाधि से विभूषित किया।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) जादूगर तो बिल्कुल ……………………………………… है।
(ख) माँ तुम्हारा ……………………………………… बहुत है।
(ग) तुम मेरे ……………………………………… ले लो मेरे बाबा को बचा दो।
(घ) खाण्डेराव युद्ध का संचालन करते हुए ……………………………………… को प्राप्त हो गए।
(ङ) व्यक्तिगत ……………………………………… से अधिक टीम का हित सर्वोपरि होता है।
(च) निर्भीक किसी ……………………………………… के सामने अपना सिर नहीं झुकाते।
(छ) रमण पहली बार सन् ……………………………………… में विदेश गए।
(ज) भक्षक से ……………………………………… बड़ा होता है।
उत्तर-
(क) निकम्मा,
(ख) ऋण,
(ग) प्राण,
(घ) वीरगति,
(ङ) उपलब्धि,
(च) आततायी,
(छ) 1921 (उन्नीस सौ इक्कीस),
(ज) रक्षक।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित पंक्तियों के भावार्थ लिखिए
(क) मन समर्पित, तन समर्पित, और यह जीवन समर्पित।
(ख) मैं हूँ उनके साथ खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़।
(ग) कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य न उसे उबारे।
(घ) खेल मिल-जुलकर ही खेला जाता है। व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक टीम का हित सर्वोपरि होता
उत्तर-
(क) हे मातृभूमि, तेरी सेवा में मेरा मन, तन, तथा यह सारा जीवन समर्पित है।
(ख) मैं (सफलता) उनके साथ ही सदैव खड़ी रहती हूँ जो अपने दायित्व को निभाने के लिए तत्पर हैं।
(ग) कोई व्यक्ति किसी निर्दोष को मार रहा है, तो फिर क्या अन्य व्यक्ति उसका उद्धार नहीं करेगा अर्थात् अवश्य करेगा।
(घ) खेल में प्रत्येक खिलाड़ी का मिश्रित उत्तरदायित्व होता है। प्रत्येक खिलाड़ी को अपनी टीम के हित में ही खेल खेलना है। व्यक्तिगत लाभ निकृष्ट होता है।

प्रश्न 4.
वाक्यों में प्रयोग कीजिए- .
(क) मुहावरे-
(1) नाक में दम करना,
(2) नाकों चने चबाना,
(3) आँख दिखाना,
(4) पीठ दिखाना,
(5) गाल फुलाना।

(ख) शब्द-
(1) जीविका,
(2) प्रतिध्वनि,
(3) समर्पण,
(4) दूरदर्शिता,
(5) न्यायोचित।
उत्तर-
(क)
(1) रवि के सहायक ने उसकी नाक में दम कर रखा है।
(2) अपने पुत्र के आई. टी. आई. में प्रवेश के लिए उसे नाकों चने चबाने पड़े।
(3) तुम्हें अपने कार्य पर समय से आ जाना चाहिए, मुझे आँखें मत दिखाओ।
(4) पाकिस्तानी सेना के अनेक सैनिक युद्ध क्षेत्र से पीठ दिखा गये।
(5) आज तो तुम्हें खुशमिजाज होना चाहिए, क्योंकि तुम परीक्षा में सफल हो गये हो, अचानक गाल फुलाये क्यों बैठे हो?

(ख) (1) जीविका के लिए अनेक भारतीय युवक विदेशों में जा बसे हैं।
(2) शिव मन्दिर के गुम्मद के नीचे कीर्तन की ध्वनि पूरे मन्दिर परिसर में प्रतिध्वनित हो रही है।
(3) मातृभूमि के लिए मैं अपना सर्वस्व समर्पण करने के लिए तैयार हूँ।
(4) भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों ने अपनी दूरदर्शिता से काम नहीं लिया और विण्डीज की टीम से मैच हार गये।
(5) एक सुशिक्षित अच्छा नागरिक अपने न्यायोचित अधिकारों को प्राप्त करने के लिए सही मार्ग अपनाता है।

प्रश्न 5.
सही विकल्प चुनिए
(क) चौमासा शब्द में समास है द्वन्द्व, द्विगु, अव्ययीभाव।
(ख) ‘दुकानवाला’ शब्द में प्रत्यय है दु, दुका, वाला।
(ग) अभिमान शब्द में उपसर्ग है अभि, अ, मान
(घ) ‘लाभ’ शब्द का विलोम है फायदा, नुकसान, हानि।
उत्तर-
(क) द्विगु,
(ख) वाला,
(ग) अभि,
(घ) हानि।

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प्रश्न 6.
(क) निम्नांकित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए
स्तबध, प्रगलभता, अतातायियों, चूनोती, स्परधा, प्रतीबिब, विज्ञानिक।
उत्तर-
(क) स्तब्ध, प्रगल्भता, आततायियों, चुनौती, स्पर्धा, प्रतिबिम्ब, वैज्ञानिक।

(ख) निम्नलिखित शब्दों के दो-दो अर्थ लिखिएअंक, कर, उत्तर, कनक, पानी।
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti विविध प्रश्नावली 3 1

प्रश्न 7.
उपसर्ग लगाकर नए शब्द बनाइए
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti विविध प्रश्नावली 3 2
उत्तर-
(क) लाजवाब, लावारिस, लापरवाह, लापता।
(ख) गैरहाजिर, गैरकानूनी, गैरसरकारी, गैरवाजिब।
(ग) सुकर्म, सुदूर, सुयश, सुवास।
(घ) पराजय, पराक्रम, पराभूत, पराभव।

प्रश्न 8.
निर्देशानुसार हल कीजिए
(क) निम्नलिखित शब्दों को दो अलग-अलग अर्थों में प्रयोग कीजिए पता, डूबना, बढ़ना, खराब।
उत्तर-
पता-
(1) उसके निवास का हमारे पास पता नहीं है।
(2) मुझे पता नहीं वह कब आयेगा।

डूबना-
(1) गहरे जल की नदी में नहाते समय बहुत से लोग डूब चुके हैं।
(2) इस सट्टेबाजी के चक्कर में वह अपने धन को डुबा चुका है।

बढ़ना-
(1) दुश्मन की फौज का आगे बढ़ना जारी है।
(2) परीक्षा में अंक बढ़ाने के काम में कई लोग लगे हैं।

खराब-
(1) हॉकी में खराब प्रदर्शन से उसकी इज्जत चली गई।
(2) मेरी मोटर का इंजन खराब हो गया है।

(ख) निम्नांकित के विलोम शब्द लिखिए
(1) रात,
(2) सुखद,
(3) सफलता,
(4) संयोग,
(5) साक्षर।
उत्तर-
(1) दिन,
(2) दुखद,
(3) असफलता,
(4) वियोग,
(5) निरक्षर।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए-
कमल, पर्वत, सूर्य, पृथ्वी, हवा, पानी।
उत्तर-
कमल-सरोज, पंकज, अम्बुज, नीरज। पर्वत-अचल, शैल, गिरि। सूर्य-सूरज, भानु, दिनकर, दिनमणि। पृथ्वी-धरा, अचला, धरती, वसुन्धरा। हवा-समीर, वायु, पवन। पानी-जल, नीर, तोय, वारि।

प्रश्न 10.
सही जोड़ी बनाइए
(क) हॉकी का गढ़ – (1) नोबल पुरस्कार
(ख) अहिल्याबाई – (2) भोपाल
(ग) माँ – (3) इन्दौर
(घ) डॉ. चन्द्रशेखर वेंकट रमण – (4) राहुल
उत्तर-
(क) → (2),
(ख) → (3),
(ग) → (4),
(घ) → (1)

प्रश्न 11.
किसने किससे कहा
(क) हाँ, मैं सच कहता हूँ बाबूजी ! माँ बीमार है, इसलिए मैं नहीं गया।
(ख) तू है हठी मान-धन मेरे।
(ग) माँ मेरी क्या बानी।
(घ) बहन ! मैं तो आपके पुत्र की मृत्यु पर आपसे सम्वेदना व्यक्त करने आया हूँ, युद्ध करने नहीं।
(ङ) तब भी तुम खेल दिखाने चले आए।
उत्तर-
(क) छोटा जादूगर ने लेखक (कहानीकार) से कहा।
(ख) यशोधरा ने अपने पुत्र राहुल से कहा।
(ग) राहुल ने अपनी माँ यशोधरा से कहा।
(घ) राघोवा ने महारानी अहिल्याबाई से पत्र के माध्यम से कहा।
(ङ) लेखक (कहानीकार) ने छोटा जादूगर से कहा।

प्रश्न 12.
निर्देशानुसार हल कीजिए
(क) राम अपनी पुस्तक पढ़ता है। (उद्देश्य और विधेय अलग कीजिए)
(ख) मोहन है बॉलीबाल जाता खेलने। (पदक्रम सही कीजिए)
(ग) राधा गाना गाती है। (भविष्यकाल)
(घ) वह बहुत अच्छा लड़का है। (प्रश्नवाचक)
(ङ) माता-पिता की आज्ञा माननी चाहिए। (आज्ञासूचक)
(च) राजू कल दिल्ली गया। (विस्मयादिबोधक)
(छ) तुम बहुत खुश हो। (भूतकाल)
उत्तर-
(क) (1) राम (उद्देश्य)
(2) अपनी पुस्तक पढ़ता है। (विधेय)
(ख) मोहन बॉलीबाल खेलने जाता है।
(ग) राधा गाना गायेगी।
(घ) वह कैसा लड़का है?
माता-पिता की आज्ञा मानो।
(च) राजू कल दिल्ली गया ! या (अरे ! राजू कल दिल्ली गया।)
(छ) तुम बहुत खुश थे।

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प्रश्न 13.
निम्नलिखित वाक्यों में से विशेषण और विशेष्य छाँटकर अलग कीजिए
(क) राजा के पास सफेद घोड़ा है।
(ख) नर्मदा का जल मीठा है।
(ग) राधा सुन्दर लड़की है।
(घ) सीमा के पास चार सन्तरे हैं।
(ङ) म. प्र. के उद्यान रमणीय हैं।
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti विविध प्रश्नावली 3 3

प्रश्न 14.
सही जोड़ी बनाइए
(क) दादी की घड़ी – 1. एकांकी
(ख) मध्यप्रदेश का वैभव – 2. जीवनी
(ग) राखी का मूल्य – 3. कहानी
(घ) गौरैया – 4. वार्तालाप
(ङ) मध्यप्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान – 5. निबन्ध
(च) लोकमाता अहिल्याबाई – 6. कविता
(छ) अगर नाक न होती – 7. डायरी
(ज) ज्ञानदा की डायरी – 8. व्यंग्य
उत्तर-
(क) → (3),
(ख) → (5),
(ग) → (1),
(घ) → (6),
(ङ)→ (4),
(च) → (2),
(छ) → (8),
(ज) → (7)।

प्रश्न 15.
अपने शब्दों में लिखिए
(क) अहिल्याबाई के जीवन की मुख्य विशेषताएँ।
(ख) अपनी दिनचर्या डायरी के रूप में लिखिए।
(ग) एक छोटी लोक-कथा लिखिए।
(घ) किसी रोचक खेल का वर्णन कीजिए।
(ङ) महाराजा अग्रसेन के जीवन से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर-
(क)

  1. इन्दौर की महारानी अहिल्याबाई ने यात्रियों की सुविधा हेतु धर्मशालाएँ, मन्दिर, कुएँ और बावड़ियाँ बनवाईं।
  2. उनके शासनकाल में प्रजा में सुख, शान्ति और समृद्धि
  3. अहिल्याबाई का प्रेमपूर्ण व्यवहार सबको प्रभावित करता था।
  4. वह राजनीति, युद्धकला, घुड़सवारी में कौशल प्राप्त थीं।
  5. उन्होंने अपनी सेना को प्रशिक्षित और सगठित किया।
  6. उनमें रणकौशल और बुद्धिमत्ता थी। अपने दुश्मनों का वीरता से सामना करती थीं।
  7. युद्ध संचालन में कौशल प्राप्त था।
  8. प्रजा के सुख-दुःख में सहभागी थीं।
  9. उन्होंने साहित्यकारों, ज्योतिषयों, कलाकारों, विद्वानों को पुरस्कृत किया।
  10. जरूरतमन्दों को उन्होंने कभी भी निराश नहीं किया।

(ख) दिनांक 6 मई, 20…
मैं आज 4:30 बजे उठ गया। अपना मुख धोकर लेखन कार्य में जुट गया। आजकल मुझे इधर-उधर आने-जाने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। मैं प्रायः सारा दिन घर पर ही रहता हूँ। मुझे अपने प्रकाशन के सभी कार्य देखने होते हैं, क्योंकि मेरे पास कोई भी सहायक नहीं है।

यही समय है, जबकि पूरे वर्ष के कार्य की रूपरेखा तैयार | की जा सकती है। मैं प्रातः से सायं तक इसी धुन में लगा रहता हूँ। योजनाबद्ध कार्य पूरा करने का प्रयास प्रतिदिन ही करता हूँ।

प्रातः से सायं तक किये गये कार्यों का ब्यौरा स्वयं सायंकाल को तैयार करता हूँ। जो कार्य पूरा नहीं होता है, उसकी उचित सूचना लेकर सम्बन्धित व्यक्ति से पूछताछ करता हूँ और अगले दिन की ब्यौरेवार डायरी तैयार करके ऑफिस बन्द कर | घर चला जाता हूँ। गर्म पेय लेकर, थोड़ मनोरंजन के बाद रात का भोजन करके, अपने शयनकक्ष में चला जाता हूँ। मुझे थोड़ा आलस आ रहा होता है, इस प्रकार मैं सोने लगता हूँ। ज्ञानेन्द्र।

(ग) एक घटना बहुत पुरानी है। बरसात के दिन थे। मेरे गाँव के चारों ओर पानी ही पानी था। मुझे अपने भाई के पास खेतों पर जाना था। भाई को भोजन भी पहुँचाना था। घर के पालतू पशु भी गाँव से बाहर खेतों के ऊँचे स्थानों पर बाँधे हुए थे। पानी की बहुलता से जंगल के पशु भी परेशान थे। वहीं न जाने कहाँ से पालतू पशुओं के बीच एक हिरन का बच्चा आ गया। वह भाई ने अपनी झोपड़ी में बाँध लिया था। अंधकार था। खेत की ऊँची मेढ़ की वामी में पानी चला गया, वहाँ से एक साँप निकला। वह पानी की वजह से व्याकुल हो, तेज गति से भागा और वह भी झोंपड़ी में आने लगा। अँधेरे में उसकी फुफकार से डरकर टार्च से रोशनी मारी तो वह फन उठाकर सिर उठाने लगा। हम दोनों भाइयों ने उससे कुछ भी नहीं कहा। भाई ने कहा कि यह नाग भयानक और जहरीला है। इसे यहीं रहने दो। हम अपनी चारपाई पर बैठ गये। भाई ने कोई मंत्र पढ़ना शुरू किया। नाग देवता शान्त दिखाई पड़े, थोड़ी देर बाद कहीं भी नहीं दिखा। उसके जाने के साथ ‘सर-सर’ की आवाज उठी। नाग देवता पुनः उसी बाँबी में प्रविष्ट हो गये। भाई ने बताया कि यह नाग पूरे गाँव का पूज्य है। नाग पंचमी को यहाँ सभी लोग आते हैं और वामी पर दूध रखते हैं। नाग देवता बाहर आकर सबको दर्शन देते हैं। सभी लोग प्रणामपूर्वक शीश झुकाकर चले जाते हैं। कहा जाता है कि यह नाग गाँव का कोई अनिष्ट नहीं होने देता।

(घ) ‘किसी रोचक खेल का वर्णन’ को ‘निबन्ध’ शीर्षक में पढ़ें।

(ङ) महाराजा अग्रसेन के जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि व्यक्ति को शास्त्रों का ज्ञाता, शूरवीर, परोपकारी, जनहित एवं लोककल्याण के लिए सदैव तैयार रहने वाला, अपनी शक्ति का सृजनात्मक उपयोग करने वाला, समाजवाद का समर्थक, शासन चलाने में निपुण, धार्मिक कुप्रथाओं का विरोधी, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक एवं श्रेष्ठ आदर्शों की स्थापना के प्रति सदैव आतुर रहने वाला होना चाहिए।

MP Board Class 7th Hindi Solutions

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 9 Rational Numbers Ex 9.2

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 9 Rational Numbers Ex 9.2

Question 1.
Find the sum:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 9 Rational Numbers Ex 9.2 1
Solution:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 9 Rational Numbers Ex 9.2 2
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 9 Rational Numbers Ex 9.2 3
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 9 Rational Numbers Ex 9.2 4

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Question 2
Find
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 9 Rational Numbers Ex 9.2 5
Solution:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 9 Rational Numbers Ex 9.2 6
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 9 Rational Numbers Ex 9.2 7

Question 3.
Find the product
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 9 Rational Numbers Ex 9.2 8
Solution:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 9 Rational Numbers Ex 9.2 9

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Question 4.
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 9 Rational Numbers Ex 9.2 10
Solution:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 9 Rational Numbers Ex 9.2 11

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MP Board Class 8th Special Hindi पत्र-लेखन

MP Board Class 8th Special Hindi पत्र-लेखन

(1) मित्र को सफलता के लिए बधाई-पत्र

24, गाँधी नगर,
ग्वालियर
23 मई,..

प्रिय कनिष्क,
कल दैनिक ‘अमर उजाला’ में तुम्हारा परीक्षाफल देखने पर ज्ञात हुआ कि तुम परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हो। तुम्हारी सफलता पर मुझे अत्यधिक प्रसन्नता का अनुभव हुआ। सबसे प्रथम अपनी इस सफलता पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करो। आशा है कि तुम भविष्य में भी इसी प्रकार सफलता की डगर पर अग्रसर होते रहोगे।

शुभकामनाओं सहित
अक्षय कुलश्रेष्ठ

(2) अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
शासकीय उ. मा. विद्यालय,
भोपाल (म. प्र.)
विषय-अस्वस्थ होने पर अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र। मान्यवर !
मैं रात से तीव्र ज्वर से पीड़ित हूँ, शरीर में अत्यधिक दर्द भी है। इसलिए मैं पाठशाला में उपस्थित होने में असमर्थ हूँ।
अतः श्रीमान् जी से विनम्र निवेदन है कि मुझे दिनांक 8 अगस्त से 14 अगस्त, 20 …..” तक अवकाश प्रदान कर अनुग्रहीत करें।

सधन्यवाद
दिनांक ………………….

प्रार्थी
रजनीकान्त
कक्षा 8(ब)

(3) पिता को वार्षिक परीक्षा की
जानकारी देने हेतु पत्र

छात्रावास,  मिशन उ. मा. विद्यालय,
जबलपुर (म.प्र.)
28 मार्च, ……

आदरणीय पिताजी,
सादर चरण स्पर्श।
कल प्रातः आपका पत्र मिला। मैं यहाँ पर स्वस्थ एवं सानन्द हूँ, आशा है कि भगवान की कृपा से आप सब भी सकुशल होंगे।
मैं यहाँ पर अपनी वार्षिक परीक्षा की तैयारी करने में जुटा हुआ हूँ। इसलिए पत्र देने में विलम्ब हुआ। वार्षिक परीक्षा सम्भवतः 10 अप्रैल, 20….. से शुरू होगी।
मैं साल के प्रारम्भ से ही पूर्ण मनोयोग से पढ़ाई कर रहा हूँ। अत: मुझे अपनी परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने की पूर्ण आशा है। आपका आशीर्वाद ही इस दिशा में मेरे लिए आशा का सम्बल सिद्ध होगा।
माताजी को चरण स्पर्श तथा छोटे भाई-बहनों को मेरा ढेर सारा प्यार।

पत्रोचार की प्रतीक्षा में
आपका प्रिय पुत्र
कनिष्क

(4) स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र हेतु
आवेदन-पत्र

सेवा में,
प्रधानाचार्य,
उ. मा. विद्यालय, जबलपुर (म. प्र.)
विषय-स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र हेतु आवेदन। मान्यवर !
सेवा में विनम्र प्रार्थना है कि मैं आपकी पाठशाला का कक्षा 8वीं (स) का छात्र हूँ।।
मेरे पिताजी का स्थानान्तरण नहर विभाग में ग्वालियर हो गया है। ऐसी दशा में मैं भविष्य में ग्वालियर के ही किसी विद्यालय में अध्ययन करूँगा।
‘अतः आपसे सानुरोध प्रार्थना है कि मुझे स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र प्रदान करने की कृपा करें। मेरे पास पाठशाला की कोई सामग्री नहीं है तथा शुल्क भी अदा कर दिया है।

सधन्यवाद
दिनांक …..

प्रार्थी आपका आज्ञाकारी शिष्य
अक्षय कुमार,
कक्षा 8 (स)

(5) अपने क्षेत्र में लाउडस्पीकर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को
रोकने के लिए एक शिकायती पत्र जिला कलेक्टर को लिखिए।

श्रीमान्,
जिलाधीश महोदय,
ग्वालियर (म. प्र.)
विषय-लाउडस्पीकर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को रोकने के सम्बन्ध में। महोदय,
मैं दानाओली क्षेत्र का निवासी हूँ। यहाँ आस-पास लाइट एण्ड साउण्ड की बहुत-सी दुकानें हैं। साथ ही अनेक बैण्ड वाले हैं। ये सभी दिन-रात लाउडस्पीकर से तेज ध्वनि से रिकार्डिंग करते रहते हैं। पास में ही एक अस्पताल भी है जिससे वहाँ मरीज परेशान रहते हैं। कृपया इस तेज ध्वनि से उत्पन्न होने वाले ध्वनि प्रदूषण को रोकने के आदेश सम्बन्धित थाने के स्टाफ को करने का कष्ट करें।

मैं आपका आभारी रहूँगा।
दिनांक …….

प्रार्थी
राजीव कुमार

(6) अपने प्रधानाध्यापक को शुल्क मुक्ति
हेतु प्रार्थना-पत्र लिखिए।

सेवा में,
प्रधानाध्यापक महोदय,
शासकीय उ. मा. विद्यालय,
मुरैना (म. प्र.)
विषय-शुल्क मुक्ति हेतु प्रार्थना-पत्र। महोदय,
विनम्र निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा 8 (अ) का छात्र हूँ। मेरे दो और भाई भी आपके विद्यालय में अध्ययनरत्
प्रार्थी
मेरे पिताजी की आर्थिक स्थिति इतनी इच्छी नहीं है कि वे हम तीनों भाइयों के विद्यालय शुल्क का भुगतान कर सकें।
अतः श्रीमान् जी से प्रार्थना है कि मेरा शुल्क माफ कर मुझे
शुल्क-मुक्ति प्रदान करने का कष्ट करें।
आपकी अति कृपा होगी।
सधन्यवाद
दिनांक …………….

प्रार्थी
राजकुमार गाँधी
कक्षा 8 (अ)

(7) विद्यालय में बाल दिवस के आयोजन की जानकारी देते हुए
माताजी को पत्र लिखिए।

कक्ष संख्या-24
बालक हॉस्टल, राजकीय विद्यालय
मुरैना (म. प्र.)
दिनांक 16-11-20….

पूजनीया माता जी,
सादर चरण स्पर्श।
मैं कुशलतापूर्वक हूँ। आपकी कुशलक्षेम की कामना करता हूँ। त्रैमासिक परीक्षा हो चुकी है। परीक्षाफल अच्छा रहा है। परिश्रम करता रहूँगा।

इस वर्ष 14 नवम्बर को विद्यालय में बाल दिवस पर अनेक कार्यक्रम हुए। यह बाल दिवस वास्तव में चाचा नेहरू का जन्मदिन है। चाचा नेहरू बच्चों से बहुत प्रेम करते थे। अत: बच्चों का सम्पूर्ण विकास करने के उद्देश्य से अपने जन्मदिन को उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया।

बालकों ने कविताएँ, भाषण और नेहरू जी पर आधारित नाटक प्रस्तुत किए। आचार्यों ने श्री नेहरू जी के जीवन, शिक्षा व देशभक्ति पर भाषण दिए। पं. नेहरू हमारे देश के पहले प्रधानमन्त्री थे। वे भारत माता से बहुत प्रेम करते थे। वे कहते थे कि भारत की उन्नति बालकों के विकास पर निर्भर है। अन्त में सभी विद्यार्थियों को मिठाई वितरित की गई।

अन्त में, मैं चाहता हूँ कि आप अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देती रहें। मुझे अपना आशीर्वाद दें जिससे मैं पढ़-लिखकर स्वयं को देश का अच्छा नागरिक सिद्ध कर सकूँ। पिताजी को प्रणाम। रिंकू को प्यार।

आपका प्रिय बेटा
राहुल पाठक

(8) साँची घूमने जाने के लिए प्रधानाचार्य को
अनुमति/ अवकाश हेतु आवेदन-पत्र लिखिए।

सेवा में,

प्रधानाचार्य महोदय,
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय
खजूरी बाजार, इन्दौर (म. प्र.)

मान्यवर,

नम्र निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा-8 का छात्र हूँ। मैं अपनी कक्षा का नायक हूँ मेरे अन्य दस सहपाठियों
ने निश्चय किया है कि हम साँची के स्तूपों का अवलोकन करने | जाएँ। हम सभी ने वहाँ पहुँचने के लिए जैन ट्रैवल्स की बस भी
भाड़े पर ले ली है। हम लोग कल दि. 20.8.20…. को अपनी यात्रा पर चल देंगे। अतः आपसे प्रार्थना है कि मुझे व मेरे अन्य नौ सहपाठियों को वहाँ जाने की अनुमति व कम से कम तीन दिन का अवकाश देने की कृपा करें।
अवकाश 20.08.20…. से 22.08.20…. तक मंजूर कर कृतार्थ करें।

आपके आज्ञाकारी शिष्य
मोहन व अन्य छात्र
कक्षा 8

MP Board Class 8th Hindi Solutions

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3

Question 1.
Find the number of lines of symmetry in each of the following shapes. How will you check your answers?
content/uploads/2020/10/MP-Board-Class-6th-Maths-Solutions-Chapter-13-Symmetry-Ex-13.3-1.png” alt=”MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3 1″ width=”305″ height=”256″ />
Solution:
(a) Number of lines of symmetry = 4.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3 2

(b) Number of lines of symmetry = 1.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3 3

(c) Number of lines of symmetry = 2.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3 4

(d) Number of lines of symmetry = 2.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3 5

(e) Number of lines of symmetry = 1.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3 6

(f) Number of lines of symmetry = 2.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3 7

Question 2.
Copy the following drawing on squared paper. Complete each one of them such that the resulting figure has two dotted lines as two lines of symmetry.
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3 8
Solution:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3 9

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3

Question 3.
In each figure alongside, a letter of the alphabet is shown along with a vertical line. Take the mirror image of the letter in the given line. Find which letters look the same after reflection (i.e. which letters look the same in the image) and which do not. Can you guess why?
Try for O E M N P H L T S V X
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3 10
Solution:
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3 11
MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 13 Symmetry Ex 13.3 12
Letters which look the same after reflection are A, O, M, H, T, V, X and which do not look the same after reflection are B, E, N, P, L, S.

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MP Board Class 8th Special Hindi निबन्ध लेखन

MP Board Class 8th Special Hindi निबन्ध लेखन

1. विज्ञान के चमत्कार

रूपरेखा

  • प्रस्तावना
  • विज्ञान के आविष्कार
  • विज्ञान से लाभ-हानि
  • उपसंहार।

1. प्रस्तावना-
आकाश में चमकने वाली बिजली, चमचमाता हुआ सूर्य तथा तारों का टिमटिमाना, बर्फीली पर्वत शृंखलाएँ इत्यादि को देखकर मानव मन में इन्हें जानने एवं समझने की जिज्ञासा उत्पन्न होती है। यही जिज्ञासा विज्ञान को जन्म देती है।

2. विज्ञान के आविष्कार-
आज विज्ञान के बल पर व्यक्ति चन्द्रमा पर पहुँच चुका है, समुद्र की गहराइयों को नाप चुका है, हिमालय की चोटी पर पहुँच चुका है। आज वैज्ञानिक खोजों ने व्यक्ति के जीवन में अभूतपूर्व चमत्कार ला दिया है। जो यात्रा पहले हम महीनों-सालों में पूर्ण करते थे, वही अब घण्टों में पूर्ण हो जाती है। आज हमारे पास यात्रा के लिए रेलगाड़ी, बसें तथा हवाई जहाज उपलब्ध हैं। इनसे हमारे समय की बचत हुई है तथा यात्रा सुगम एवं आरामदायक हो गयी है। विज्ञान ने लंगड़े को पैर एवं अन्धों को आँखें प्रदान की हैं। विभिन्न प्रकार की मशीनों का आविष्कार करके भूखों को रोटी दी है।

आज टेलीफोन से हम हजारों मील दूर बैठे हुए व्यक्ति से आसानी से बातचीत कर सकते हैं। टेलीविजन द्वारा पर्वतों एवं देश-विदेश के विभिन्न दृश्यों का अवलोकन करते हैं। ज्ञानवर्द्धक प्रोग्राम देखकर हम अपने ज्ञान में वृद्धि करते हैं। आज चन्द्रमा के दृश्य एवं ध्वनियाँ पृथ्वी पर लायी जा चुकी हैं। अन्य नक्षत्रों से भी सम्बन्ध स्थापित हो चुका है। बिजली के आविष्कार ने मानव को बहुत-सी सुविधाएँ प्रदान की हैं। जैसे-ए. सी. से गर्मियों में भी सर्दियों जैसी ठण्डक मिल जाती है, वाशिंग मशीन से बिना श्रम के मिनटों में कपड़े धुल जाते हैं, रूम हीटर से सर्दियों में कमरा गर्म हो जाता है, बड़े-बड़े कारखाने भी इसी बिजली से चलते हैं। विभिन्न प्रकार की औषधियों की खोज करके अनेक असाध्य बीमारियों का इलाज सम्भव हो गया है। शल्य चिकित्सा से ऑपरेशन करने में मदद मिली है। प्लास्टिक सर्जरी से व्यक्ति को सुन्दरता प्रदान की जा सकती है।

छापेखानों से हजारों पुस्तके छपकर निकलती हैं जो हमें विभिन्न प्रकार का ज्ञान प्रदान करती हैं। विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री एवं वस्त्र कारखानों द्वारा उत्पादित किए जा रहे हैं। कृषि क्षेत्र में विभिन्न रासायनिक खादों ने पैदावार में वृद्धि की है तथा खेती करने के अनेक नये तरीके विज्ञान ने ईजाद किए हैं। अब बैलों एवं हल से खेत न जोतकर, ट्रैक्टर से जोते जाते हैं। कीटनाशक औषधियाँ भी खेत की रक्षा करने बहुत लाभप्रद सिद्ध हुई हैं। परमाणु शक्ति की खोज से इस धरा पर स्वर्गीय सुख लाया जा सकता है; उसका प्रयोग सृजन के लिए किया जाए। यदि विध्वंस के लिए किया जाएगा तो महाविनाश का कारण बन जाएगा। मिसाइलों, टैंकों, लड़ाकू विमान तथा हाइड्रोजन बमों ने दुनिया को विनाश के तट पर लाकर खड़ा कर दिया है।

3. विज्ञान से हानि-
लाभ-विज्ञान से उद्योग-धन्धों में विकास हुआ है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। यातायात के साधनों से दूरियाँ समाप्त हो गयी हैं। नवीन औषधियों ने मानव को दीर्घ जीवन प्रदान किया है। मनोरंजन के विभिन्न साधनों ने मानव को नवीन उत्साह एवं उमंग प्रदान करके उनके जीवन में व्याप्त नीरसता को समाप्त किया है।

विज्ञान ने दूसरी ओर व्यक्ति को अकर्मण्य बना दिया है। मशीनों के निर्माण ने बेरोजगारी की समस्या को उत्पन्न कर दिया है। विस्फोटक पदार्थों एवं कल-कारखानों ने वायु को प्रदूषित कर दिया है। मनुष्य अधिक स्वार्थी हो गया है तथा वह आलसी होकर अकर्मण्य हो गया है। वह तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित होकर धन प्राप्ति के लिए छटपटा रहा है।

4. उपसंहार-
विज्ञान मानव के लिए महान् वरदान सिद्ध हो सकता है यदि हम उसका सृजनात्मक कार्यों के लिए प्रयोग करें। भगवान् हमें सद्बुद्धि दे कि हम विज्ञान के आविष्कारों का प्रयोग मानव के हित के लिए करें। तभी विश्व के कण-कण से सुख-शान्ति एवं मंगल की ऐसी धारा प्रवाहित होगी, जिसमें स्नान करके सम्पूर्ण मानव जाति सुख-चैन तथा सन्तोष का अनुभव करेगी।

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2. कोई महापुरुष (महात्मा गाँधी) 

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना
  • जीवन परिचय
  • बैरिस्टरी पास करने का निर्णय
  • दक्षिण अफ्रीका में जाना
  • नेटाल इण्डियन कांग्रेस की स्थापना
  • राजनीति में प्रवेश
  • जनता का आन्दोलन
  • दूसरा विश्व युद्ध
  • भयानक उपद्रव
  • गाँधी जी के चारित्रिक गुण
  • कुशल लेखक
  • मृत्यु,
  • उपसंहार।

1. प्रस्तावना-
पृथ्वी पर जब अनाचार, अत्याचार एवं अन्याय का दौर प्रारम्भ होता है तब पृथ्वी के भार को हल्का करने
के लिए एवं मानव कल्याण के लिए महापुरुषों का आविर्भाव होता है। बीसीं शताब्दी में जिन महापुरुषों ने भारत के गौरव में चार चाँद लगाए: उनमें महात्मा गाँधी एवं रवीन्द्रनाथ ठाकुर के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। राजनीति के क्षेत्र में ही नहीं अपितु नैतिक एवं धार्मिक क्षेत्र में भी गाँधी जी की अपूर्व देन है।

2. जीवन परिचय-
महात्मा गाँधी का पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गाँधी था। इनके पिता करमचन्द थे। इनकी जाति गाँधी थी। इन्होंने अपनी बचपन की आँखें 2 अक्टूबर, 1869 को पोरबन्दर में खोली थीं। शुरू की शिक्षा-दीक्षा पोरबन्दर में ही ग्रहण की। गाँधी जी की माता बहुत ही साधु स्वभाव 1 की धर्मपरायण महिला थीं जिसका गाँधी जी के जीवन पर । व्यापक प्रभाव पड़ा। इनके पिता राजकोट रियासत के दीवान । पद पर प्रतिष्ठित थे। पिता की यह इच्छा थी कि उनका पुत्र ! पढ़-लिखकर एक योग्य व्यक्ति बने।

3.बैरिस्टरी पास करने का निर्णय-
उन दिनों में बैरिस्टरी पास करके वकालत करना एक उत्तम व्यवसाय माना जाता था। माता पुत्र को विदेश में भेजने के पक्ष में नहीं थी। गाँधी जी ने माता से आज्ञा लेने के लिए प्रतिज्ञा ली, “विदेश में शराब, माँस
और अनाचार से दूर रहूँगा।” गाँधी जी ने इस प्रतिज्ञा का अक्षरश: पालन किया। वकालत का व्यवसाय प्रारम्भ-इंग्लैण्ड से बैरिस्टर की उपाधि ग्रहण करके गाँधी जी ने भारत भूमि पर पदार्पण किया तथा वकालत का व्यवसाय करना प्रारम्भ कर दिया। इस पेशे में झूठ बोले बिना काम नहीं चल सकता, गाँधी जी सत्य पथ के राही थे अत: इस पेशे में वह असफल ही सिद्ध हुए।

4. दक्षिणी अफ्रीका में जाना-
एक बार गाँधी जी को । एक मुकदमे की पैरवी की वजह से दक्षिणी अफ्रीका जाना पड़ा। दक्षिणी अफ्रीका में रहने वाले भारतीयों के साथ बहुत – ही अमानवीय व्यवहार किया जाता था। वे उस बुरे व्यवहार
को कर्मगति समझकर सहन कर लेते थे। एक बार गाँधी जी से अदालत में पगड़ी उतारने को कहा। गाँधी जी ने अदालत से बाहर आना स्वीकार किया परन्तु पगड़ी को सिर से नहीं उतारा।

5. नेटाल इण्डियन कांग्रेस की स्थापना-
गाँधी जी ने 1894 में इण्डियन नेटाल कांग्रेस की स्थापना की। इस संस्था ने भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। देशवासियों को दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले भारतीयों की दुर्दशा से अवगत कराया। दक्षिण अफ्रीका में रहकर गाँधी जी ने सत्याग्रह एवं असहयोग की नवीन नीति से सरकार का विरोध करना प्रारम्भ कर दिया। गाँधी जी तथा जनरल स्मट्स में समझौते के आधार पर भारतीयों को बहुत से अधिकार मिले। इससे उनके मन-मानस में आशा का संचार हुआ।

6. राजनीति में प्रवेश-
सन् 1915 में गाँधी जी ने भारत की राजनीति में भाग लेना प्रारम्भ कर दिया। भारत को स्वतन्त्र कराने के लिए उन्होंने सत्य एवं अहिंसा को अस्त्र-शस्त्र के रूप में प्रयोग किया। इसी मध्य चौरी-चौरा नामक गाँव में सत्याग्रह के मध्य हिंसक घटना घटित हो गई। अहिंसा के उपासक गाँधी जी ने सत्याग्रह को तब तक के लिए स्थगित कर दिया जब तक अहिंसा का अनुपालन न हो। 1930 में पुनः सत्याग्रह प्रारम्भ हुआ जिससे गोरी सरकार को गाँधी जी के समक्ष घुटने टेकने पड़े। लन्दन में समझौते के निमित्त एक गोलमेज सभा आमन्त्रित की गई किन्तु यह व्यर्थ प्रमाणित हुई। गाँधी जी को गिरफ्तार कर लिया गया। ..

7. जनता का आन्दोलन-
गाँधी जी ने आजादी के आन्दोलन को जनता के आन्दोलन का रूप दे दिया। उनके नेतृत्व में मजदूर एवं कृषक स्वाधीनता के संघर्ष में भाग लेने के लिए सहर्ष तैयार हो गए। अंग्रेजों ने अपनी कूटनीति से अछूतों को चुनाव से अलग कर दिया। गाँधी जी का सन् 1930 से 1939 तक का समय रचनात्मक कार्यों में व्यतीत हुआ।

8. दूसरा विश्व युद्ध-
सन् 1939 में दूसरा विश्व युद्ध छिड़ गया। गाँधी जी ने प्रथम विश्व युद्ध में कुछ आशा लेकर अंग्रेजों की भरपूर सहायता की लेकिन युद्ध के बाद अंग्रेजों का भारतीयों के प्रति रुख और भी कठोर हो गया। इसी हेत द्वितीय विश्व युद्ध में अंग्रेजों की तब तक सहायता न करने की ठान ली जब तक वे अपने बोरी-बिस्तर बाँधकर देश को आजाद नहीं कर देते।

9. भयानक उपद्रव-
देश के बँटवारे के फलस्वरूप भयानक उपद्रव हुए। हिंसा तथा मारकाट का दौर चला। गाँधी जी ने शान्ति स्थापना का भरसक प्रयास किया। दंगा रोकने के लिए आमरण अनशन का व्रत लिया।

10. गाँधी जी के चारित्रिक गुण-
गाँधी जी का मनोबल असाधारण था। वे प्राणों की कीमत पर भी सत्य की रक्षा करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। वे सत्य तथा अहिंसा के पुजारी थे। वे व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ राजनीति में भी सत्य एवं अहिंसा के प्रयोग के प्रबल समर्थक थे। वे जीवन एवं राजनीति को जुड़ा हुआ स्वीकारते थे। राजनीति के अलावा गाँधी जी ने देशवासियों का सभी क्षेत्रों में मार्गदर्शन किया। कंगाल एवं रोगियों की सेवा में उनका अधिकांश समय व्यतीत होता था।

11. कुशल लेखक-
गाँधी जी एक कुशल लेखक भी थे। उन्होंने ‘हरिजन एवं हरिजन सेवक’ नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन किया। ‘यंग इण्डिया’ नामक पत्र भी निकाला। 12. मृत्यु-साम्प्रदायिकता मानव को विकारग्रस्त कर देती है। ऐसे ही एक विकृत नाथूराम विनायक गोडसे ने 30 जनवरी, सन् 1948 की शाम को प्रार्थना सभा में आते ही गाँधी जी पर गोलियाँ चला दी। हत्यारे को हाथ जोड़कर नमस्ते करते हुए गाँधी पंच’ – में विलीन हो गए।

13. उपसंहार-
महात्मा गाँधी युगपुरुष थे। धर्म, नैतिकता, राजनीति एवं आध्यात्मिकता के क्षेत्र में उनकी देनों
को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। गाँधी जी ने अन्धकार में भटकते हुए भारतीयों को प्रकाश के दर्शन कराए। सत्य एवं अहिंसा का एक ऐसा अमोघ अस्त्र उन्होंने समस्त विश्व को प्रदान किया जिसकी आज के हिंसा एवं मारकाट के दौर से गुजर रहे विश्व को महान् आवश्यकता है।महादेवी वर्मा की गाँधी जी के प्रति कही गई निम्नलिखित पंक्तियाँ देखिए

“हे धरा के अमर सुत ! तुमको अशेष प्रणाम।
जीवन के सहस्त्र प्रणाम, मानव के अनन्त प्रणाम।।”

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3. पुस्तकालय का महत्व

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना,
  • पुस्तकालय से अभिप्राय
  • भारत में पुस्तकालयों की परम्परा
  • पुस्तकालयों के प्रकार
  • पुस्तकालय से लाभ
  • उपसंहार।

1. प्रस्तावना-
मानव स्वभाव से ही जिज्ञासु प्रवृत्ति का होता है। बाल्यावस्था से ही उसकी यह प्रवृत्ति हमें देखने को मिलती है। उदाहरणस्वरूप बच्चा किसी भी खिलौने को लेता है, तो उसे तोड़कर यह जानना चाहता है कि इसके अन्दर क्या छिपा है ? यह कैसे बनाया गया है ? हर व्यक्ति की इतनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ नहीं होती कि वह अपनी ज्ञान पिपासा शान्त करने के लिए मनचाही पुस्तक ले सके। पुस्तकालय एक ऐसा स्थान है, जहाँ पहुँचकर व्यक्ति अपनी ज्ञान-पिपासा को विभिन्न पुस्तकें पढ़कर शान्त कर सकता है।

2. पुस्तकालय से अभिप्राय-
जहाँ पुस्तकों को विषयानुसार सुव्यवस्थित ढंग से रखा जाता है। उस स्थान को पुस्तकालय कहते हैं। यहाँ पाठकों के पढ़ने के लिए बैठने की अच्छी व्यवस्था होती है।

3. भारत में पुस्तकालयों की परम्परा-
भारत का इतिहास इस बात का साक्षी है कि पुस्तकालय भारत में प्राचीन समय से चले आ रहे हैं। तक्षशिला और नालन्दा विश्वविद्यालयों में उच्चकोटि के शासकों ने भी कई उच्चस्तरीय पुस्तकालयों की स्थापना की।

4. पुस्तकालयों के प्रकार-
पुस्तकालय अनेक प्रकार के होते हैं। कुछ पुस्तकालय स्कूल व कॉलेजों में  होते हैं, जहाँ विद्यार्थियों को उपयोगी पुस्तकें तथा अन्य पुस्तकें भी उपलब्ध होती हैं। दूसरे प्रकार के पुस्तकालय निजी पुस्तकालय होते हैं, जहाँ व्यक्ति अपनी रुचि के अनुकूल पुस्तकें इकट्ठी करता है। विदेशों में अपेक्षाकृत हमारे देश से अधिक निजी पुस्तकालय हैं। तीसरी प्रकार के पुस्तकालय सार्वजनिक पुस्तकालय हैं।

इनमें पुस्तकें अधिक संख्या में रहती हैं। इनकी संख्या अधिक है। इसके साथ ही वाचनालय होते हैं जहाँ छात्रोपयोगी पुस्तकें संग्रहीत रहती हैं। यहाँ विदेशी उच्चस्तरीय पत्र-पत्रिकाएँ भी उपलब्ध रहती हैं। एक निश्चित धनराशि देकर इसका सदस्य बना जा सकता है एवं इससे लाभ ग्रहण किया जा सकता है। ये पुस्तकालय सामाजिक संस्थाओं और शासन द्वारा चलाये जाते

5. पुस्तकालय से लाभ-
मानव मस्तिष्क की भूख मिटाने के लिए पुस्तकें ही भोजन का कार्य करती हैं। पुस्तकें ही हमें इतिहास, धर्म, समाज एवं दर्शन इत्यादि का ज्ञान कराती हैं। पुस्तकालय से हमें अतीतकाल एवं वर्तमान काल का ज्ञान मिलता है तथा भविष्य में उन्नति के शिखर पर पहुँचने का मार्ग भी प्रशस्त होता है। खाली दिमाग शैतान का घर होता है। इससे बचने के लिए पुस्तकालय ही सर्वश्रेष्ठ मनोरंजन का साधन है।

6. उपसंहार-
पुस्तकालय का देश के विकास एवं समृद्धि में बहुत बड़ा योगदान होता है। इसलिए इमें पुस्तकालय एवं पुस्तकों की तन-मन-धन से रक्षा करना चाहिए। पुस्तकालय ज्ञान का उद्गम स्रोत है। यह एक ज्ञान रूपी मन्दिर है, जहाँ पहुँचकर व्यक्ति को निर्मल ज्ञान की प्राप्ति होती है। पुस्तकालय एक ऐसी ज्ञान की गंगा है, जिसमें अवगाहन करके व्यक्ति का हृदय निर्मल एवं बुद्धि विकसित होती है।

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4. किसी मेले का वर्णन

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना
  • भारत मेला प्रधान देश
  • मेला जाने का प्रस्ताव पारित
  • मेले में पहुँचना
  • घाट तथा मन्दिरों का मनोहारी दृश्य
  • मेले की चहल-पहल
  • एक आयोजन
  • मेले की व्यवस्था
  • उपसंहार।

1. प्रस्तावना-
विश्व के हर देश में मेलों का आर्योजन किया जाता रहा है। मेला मनुष्य को शारीरिक एवं मानसिक थकान को मिटाकर एक नवीन उत्साह एवं आनन्द प्रदान करता है। हजारों की संख्या में लोग यहाँ एकत्रित होते हैं। इसलिए यह एक-दूसरे से मिलने एवं पारस्परिक स्नेह एवं सौहार्द्र प्रकट करने का अति उत्तम स्थल है।

2. भारत मेला प्रधान देश-
भारत एक धर्म प्रधान देश है। यहाँ विभिन्न तीर्थ स्थलों पर समय-समय पर मेलों का आयोजन होता रहता है। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् राष्ट्रीय मेले भी लगने लगे हैं। त्यौहारों पर भी मेले लगते रहते हैं।

3. मेला जाने का प्रस्ताव पारित-
यमुना के किनारे आगरा से करीब तीस मील दूर बटेश्वर है। यहाँ हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा को बहुत बड़ा मेला आयोजित होता है। प्रमुख रूप से यह पशुओं को खरीदने एवं बेचने का मेला है। साथ ही मनुष्य को आकर्षित करने के लिए भी इसमें अनेक झूले एवं मनोहारी आयोजन किए जाते हैं। मैंने भी अपने मित्रों के साथ दीपावली के पश्चात् बटेश्वर जाने का मन बना लिया।

4. मेले में पहुँचना-
हम आगरा से टैक्सी करके बटेश्वर के लिए रवाना हो गये। मार्ग में खेतों एवं गाँवों की हरियाली एवं प्राकृतिक सौन्दर्य को देखकर हृदय खुशी से भर गया और एक नवीन ताजगी एवं स्फूर्ति का हमारे भीतर संचार हुआ। हमें सीधे टैक्सी वाले ने मेले पर छोड़ दिया। यह बटेश्वर भगवान शिव का पवित्र तीर्थ है। यहाँ पहुँचकर तीर्थ के प्रभाव से हमारा हृदय पावन भावों से ओत-प्रोत हो गया और हमने प्रतिदिन एक अच्छा कार्य करने का संकल्प लिया।

5. घाट तथा मन्दिरों का मनोहारी दृश्य-
शाम को मित्र के घर पर भोजन करके यमुना किनारे टहलने गये। पूर्णिमा के – चाँद का प्रतिबिम्ब पानी में बहुत सुन्दर छटा बिखेर रहा था। चारों ओर दूधिया उजाला फैल रहा था तथा यमुना शान्त भाव से । कल-कल करती हुई आगे बहती जा रही थी।

चन्द्रमा की चाँदनी पड़ने से सभी मन्दिर संगमरमर जैसे श्वेत दिखाई पड़ रहे थे जिन्हें देखकर मन में एक अलौकिक शान्ति – की अनुभूति हो रही थी तथा सात्विक भावनाएँ मन में हिलोरें ले रही थीं। वास्तव में, जिस अभूतपूर्व आनन्द की उपलब्धि तीर्थों 1 में होती है, वैसी आनन्दानुभूति अन्यत्र कहाँ।।

6. मेले की चहल-पहल-
सभी लोगों ने सर्वप्रथम यमुना । में ब्रह्म मुहूर्त से ही कार्तिक पूर्णिमा का पुण्य-लाभ लेने के लिए स्नान करना आरम्भ कर दिया। बच्चों एवं किशोरों को पानी में किलोल करना बहुत ही अच्छा लग रहा था। स्नानोपरान्त सभी 1 ने भगवान शंकर के मन्दिर में जाकर पूजा-अर्चना की। चारों ओर का वातावरण भगवान की स्तुति एवं घण्टों की आवाज से आपूरित हो गया।

कहीं मिठाइयों की तो कहीं चाट-पकौड़ी की दुकानें थीं। जहाँ लोग अपनी रुचिनुसार चीजें खाकर अपनी जिह्वा का आनन्द ले रहे थे। कहीं बच्चे गुब्बारे एवं खिलौने के लिए हठ कर रहे थे। स्त्रियों की टोलियाँ भजन गाती हुई जा रही थीं। सुबह दस बजे से पशु भी बिकने के लिये लाये जाने लगे; जैसे-गाय, भैंस, बकरी, ऊँट तथा बैल इत्यादि।

दूसरी तरफ चरखी तथा विभिन्न प्रकार के झूले थे जो बच्चों तथा बड़ों सभी को समान रूप से आकर्षित कर रहे थे। कहीं जोकर नाना प्रकार की क्रिया-कलापों द्वारा सबको हँसा रहे थे। पुरुष स्त्री का वेश बनाकर नाच दिखाकर पैसे अर्जित कर रहे थे।

7.एक आयोजन-
एक तरफ मुशायरा तथा कवि सम्मेलन का आयोजन चल रहा था। कवि नीरज प्रेम रस की कविताओं का गान कर रहे थे जिससे हृदय में प्रेम भावना उद्वेलित हो रही थी। काका हाथरसी अपनी कविताओं से चारों ओर हास्य रस की पिचकारी चला रहे थे, जिसमें भीगकर सभी श्रोता हँस रहे थे। कहीं वीर रस में देश-प्रेम की कविताएँ हो रही थीं जो हृदय में देश-प्रेम की भावनाओं को पुष्ट एवं सुदृढ़ कर रही थीं।

8. मेले की व्यवस्था-
मेले में पुलिस का अच्छा प्रबन्ध था जिससे जेबकतरे किसी को हानि नहीं पहुँचा सकें। मेले में एक तरफ उद्घोषणा का प्रबन्ध था जिससे अगर कोई बच्चा मेले में अपने परिवारीजनों से बिछुड़ जाता है, तो वहाँ माइक पर आवाज लगाकर कह दिया जाता था कि अमुक का बच्चा यहाँ है उसके घर वाले आकर ले जायें। मेले में सफाई की व्यवस्था अच्छी थी तथा खाने की चीजों के अच्छे स्तर का विशेष ध्यान रखा गया था।

9. उपसंहार-
मेले सभी प्रियजनों एवं मित्रों को एक स्थान पर मिलाने का कार्य करते हैं जिससे सब एक-दूसरे के हाल-चाल से अवगत हो जाते हैं। आयोजकों को मेले से आर्थिक लाभ भी होता है, ये सभी का मनोरंजन करते हैं। ये हमारी संस्कृति का परिचय कराते हैं। इसलिए जिला परिषद् को इसकी उत्तम व्यवस्था का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सरकार को भी विभिन्न मेलों का आयोजन करके सभी का उत्साहवर्धन करना चाहिए।

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5. राष्ट्रीय पर्व : स्वतन्त्रता दिवस

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना
  • स्वतन्त्रता दिवस की महत्ता
  • नाना प्रकार के आयोजन
  • उपसंहार।

1. प्रस्तावना
भारत उत्सव प्रधान देश है। हमारे देश में अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन होते रहते हैं किन्तु ये त्यौहार प्रान्त, धर्म एवं जाति तक के दायरे में रहते हैं

जिस त्यौहार को समस्त राष्ट्र द्वारा मनाया जाता है उसे राष्ट्रीय पर्व कहते हैं। सन् 1947 में हमारे देश ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर आजादी की स्वच्छन्द हवा में पहली साँस ली थी। इतनी कुर्बानियों एवं संघर्षों से मिली आजादी के परम हर्षोल्लास के दिवस पर हमारा देश 15 अगस्त के दिन राष्ट्रीय पर्व का आयोजन करता है।

2. स्वतन्त्रता दिवस की महत्ता-
इस स्वतन्त्रता दिवस की प्राप्ति के लिए हमारे देश के न जाने कितने सपूतों ने अंग्रेजों के कोड़े खाए। कारागार में बन्दी रहे तथा न जाने कितने वीर शहीद अपनी माँ की गोद सूनी करके, अपनी पत्नी की माँग का सिन्दूर पोंछकर अपनी बहन एवं भाइयों एवं बच्चों को रोता-बिलखता छोड़कर भारत माता को स्वतन्त्र कराने के लिए हँसते-हंसते फाँसी के तख्ते पर झूल गये। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने अहिंसा आन्दोलन

चलाकर अंग्रेज सरकार के छक्के छुड़ा दिए। दूसरी ओर गरम दल के सुभाषचन्द्र बोस, चन्द्रशेखर आजाद, शहीद भगतसिंह इत्यादि द्वारा देश की स्वतन्त्रता के लिए किया गया बलिदान अमिट एवं अविस्मरणीय है। 14 अगस्त, 1947 की आधी रात को देश के स्वतन्त्र होने की घोषणा कर दी गयी थी। 15 अगस्त, 1947 को हमारे देश की आजादी का तिरंगा दिल्ली के लाल किले पर फहराया गया था। समस्त देश एवं देशवासी प्रसन्नता से झूम उठे थे।

3. नाना प्रकार के आयोजन-
इस दिन सभी कॉलेज, कार्यालय इत्यादि में छुट्टी रहती है। सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है। बहुत से लोग अपने घरों के ऊपर भी तिरंगा फहरा देते हैं। जुलूस आदि निकलते हैं। सार्वजनिक सभाओं का आयोजन किया जाता है। रात में रोशनी की सजावट की जाती है। प्रत्येक वर्ष प्रधानमन्त्री दिल्ली के लाल किले पर ध्वजारोहण करते हैं। तीनों (जल, थल, नभ) सेनाएँ एवं स्कूली छात्र-छात्राएँ एवं एन. सी. सी. कैडेट राष्ट्रीय ध्वज को अपनी सलामी देते हैं। तत्पश्चात् प्रधानमन्त्री राष्ट्र के नाम सन्देश देते

स्कूल, विद्यालय एवं कॉलेजों में ध्वजारोहण के पश्चात् प्रधानाचार्य अपने भाषण द्वारा छात्र-छात्राओं को हृदय में देश प्रेम एवं उसके प्रति उनके कर्तव्यों का ज्ञान कराते हैं। उसके पश्चात् मिठाई बाँटी जाती है। प्रभातकालीन फेरी लगायी जाती है। स्कूलों में बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं।

4. उपसंहार-
इस प्रकार शहीदों की शहादत से मिली स्वतन्त्रता का हमें दुरुपयोग न करके उसे सदैव स्थायी बनाये रखने का प्रयास करना चाहिए। देश में भाई-चारे एवं प्रेम की भावना को विकसित एवं कायम रखते हुए, देश की अखण्डता एवं स्वतन्त्रता को सुरक्षित बनाये रखते हुए, सत्य, प्रेम, अहिंसा की त्रिवेणी प्रवाहित करनी चाहिए जिससे हमारी भारत माता एवं उसके सभी निवासी सुख, प्रेम एवं शान्ति के सागर में अवगाहन करते हुए देश को विकास के मार्ग पर अग्रसर करते हुए विश्व के समक्ष एक मिसाल प्रस्तुत कर सके।

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6. दीपावली

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना
  • दीपावली का इतिहास एवं महत्ता
  • मनाने का तरीका
  • लाभ-हानि
  • उपसंहार।

1. प्रस्तावना-
आज व्यक्ति दैनिक कार्यों में इतना व्यस्त है कि सारे दिन के परिश्रम के फलस्वरूप वह कुछ स्वस्थ मनोरंजन की अपेक्षा करता है। इसलिए हमारे यहाँ त्यौहारों को धूमधाम से मनाने की परम्परा चली आ रही है। जैसे-दशहरा, रक्षाबन्धन, होली एवं दीपावली। इनमें से प्रमुख त्यौहार है-दीपावली। ये अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है। यह अन्धकार पर प्रकाश की विजय है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। यह कार्तिक अमावस्या के दिन मनायी जाती है। दीपक प्रकाश एवं ज्ञान का प्रतीक माना गया है। यह अन्धकार में प्रकाश फैलाता है। इस दिन सभी लोग अपने घरों के अन्दर एवं बाहर दीपक जलाते हैं।

2. दीपावली का इतिहास एवं महत्ता-
इसी दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्ष पश्चात् अयोध्या में लंका पर विजय प्राप्त करके आये थे। अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी यादगार में दीपावली का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ प्रतिवर्ष मनाया जाता है। दीपावली से पहले विजयादशमी के दिन राम ने रावण का वध करके विजयश्री प्राप्त की थी। इसी प्रकार एक दूसरी कथा है द्वापर युग की। इस युग में नरकासुर नामक राजा ने अनेक राजाओं को पराजित करके उनकी कन्याओं को बन्दी बना लिया था। उनकी करुण पुकार सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन कार्तिक अमावस्या को उन कन्याओं को बन्दीगृह से मुक्त कराया था। एक और कथा राजा बलि से सम्बन्धित है कि भगवान राजा बलि की परीक्षा लेने के लिए बामन अवतार लेकर आये थे।

राजा बलि की दानशीलता देखकर भगवान विष्णु ने सभी को यह आदेश दिया कि दीप जलाकर उत्सव मनाया करो। इसी दिन समुद्र मन्थन से माँ लक्ष्मी उत्पन्न हुई थीं। इसके अलावा माँ महाकाली ने रक्त बीज का वध करके एवं राक्षसों का खून पीने के उपरान्त जब माँ रोष में आ गईं तो दीपक प्रज्ज्वलित करके उनकी पूजा की गयी थी। तब से ही बंगाली लोग माता महाकाली की पूजा धूमधाम से करते हैं। जैनियों के भगवान महावीर स्वामी का महानिर्वाण भी इसी दिन का है। स्वामी दयानन्द भी आज ही के दिन ब्रह्मलीन हुए थे। स्वामी रामतीर्थ का जन्म एवं मरण भी इसी दिन का है। पुराने समय से व्यापारी विदेशों में व्यापार कर धन अर्जित

करके इसी दिन घर लौटकर अत्यन्त हर्षोल्लास सहित इस उत्सव को मनाकर लक्ष्मी पूजन करते थे।
दीपावली हमारा सांस्कृतिक त्यौहार है। वर्षा के उपरान्त सब जगह मच्छर एवं गन्दगी हो जाती है। दीपावली के बहाने घरों में पुताई हो जाती है। सफाई से मच्छर भाग जाते हैं। दीपकों के जलने से वातावरण शुद्ध हो जाता है। नयी फसल बोने की खुशी में कृषक इसे उल्लासपूर्वक मनाते हैं।

3. मनाने का तरीका-
दीपावली का प्रारम्भ धनतेरस से हो जाता है। इसी दिन सभी हिन्दू चाहे वे धनी हों अथवा निर्धन अपनी सामर्थ्य के अनुसार बर्तन खरीदते हैं। दूसरे दिन नरक चौदस होती है। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था। इसे छोटी दीपावली भी कहते हैं। बड़ी दीपावली के दिन रात्रि को धन की लक्ष्मी एवं विघ्न विनाशक भगवान गणेश का पूजन किया जाता है।

मान्यता है कि पूरी रात श्री लक्ष्मी गणेश के सामने दीप जलते रहने से खूब धन घर में आता है। रात्रि को सब अपने घरों में दीप जलाकर प्रकाश करते हैं। रात को बच्चे-बड़े पटाखे एवं आतिशबाजी जलाते हैं तथा बच्चे फुलझड़ियाँ छुड़ाकर खुशी मनाते हैं। दूसरे दिन पड़वा को गोवर्धन की पूजा होती है। अन्नकूट की सब्जी बनायी जाती है। द्वितीया को भैया दौज मनायी जाती है। इस दिन सभी बहनें अपने भाइयों को टीका करती हैं और भाई उन्हें भेंट देते हैं। इस दिन सभी नये कपड़े पहनते हैं।

4. लाभ-हानि-
बरसात की सारी गन्दगी एवं प्रदूषण का सफाया हो जाता है। सफाई होने से रोग के कीटाणु समाप्त हो जाते हैं लेकिन कुछ लोग इस दिन जुआ खेलते हैं। यह सारे संकटों का कारण है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को इससे बचकर रहना चाहिए।

5. उपसंहार-
यह त्यौहार अच्छाई की बुराई पर विजय है। भगवान राम ने स्वयं अपने श्रीमुख से कहा है कि
“सखा धर्ममय रस रथ जाके, जीतन सकै न कतहुँ रिपु
ताके॥”
इसी आधार पर सैन्य बल रहित, रथ रहित एवं शस्त्र रहित भगवान राम ने सर्वशक्तिसम्पन्न रावण पर विजय प्राप्त की थी। इन बातों से हमें यह शिक्षा लेनी चाहिए कि हमें कर्तव्यों का पालन करते हुए सही मार्ग पर चलते रहना चाहिए।

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7. विद्यालय का वार्षिकोत्सव 

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना
  • तैयारियाँ
  • उत्सव के कार्यक्रम
  • उपसंहार

1. प्रस्तावना-
उत्सव मनुष्य के हृदय की खुशी को व्यक्त करते हैं। आज मानव दैनिक कार्यों में बुरी तरह जुटा हुआ है।उसे जीवन बोझ स्वरूप लगने लगता है। मानव उत्सवों में भाग लेकर जिन्दगी की परेशानियों से कुछ समय के लिए छुटकारा प्राप्त कर सकता है। जीवन में रस का संचार होता है।

2. तैयारियाँ-
हमारे विद्यालय में वार्षिकोत्सव की तैयारियाँ करीब एक सप्ताह पूर्व प्रारम्भ हो जाती हैं। विद्यालय भवन को रंग-रोगन तथा पुताई करके बहुत ही आकर्षक बनाया गया। मुख्य द्वार को रंग-बिरंगी झण्डियों तथा झालरों से सजाया गया। कहीं ऊँची कूद का अभ्यास हो रहा था तो कहीं दौड़ का। नाटक, कविता तथा वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेने वाले जी जान से तैयारियों में जुटे हुए थे। अध्यापकगण भी छात्रों के उत्साह को बढ़ा रहे थे।

3. उत्सव के कार्यक्रम-
पहले दिन मुख्य अतिथि के पधारने पर प्रधानाचार्य ने उनका जोशीला स्वागत किया। सम्मानपूर्वक उन्हें मंच पर ले जाकर फूलमाला पहनाई गई। सभी ने ताली बजाकर प्रसन्नता प्रकट की। छात्रों ने नाटक, कविता, भाषण तथा खेलकूद में अपने करतब दिखाए। डॉक्टर रामकुमार द्वारा लिखित एकांकी ‘दीपदान’ अभिनीत किया गया। इसको छात्रों ने इतनी कुशलता के साथ प्रदर्शित किया कि पन्ना धाय के बलिदान के प्रति करुणा तथा बलिदान का सागर हिलोरें लेने लगा।

मुख्य अतिथि ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच पुरस्कार वितरित किए। प्रधानाचार्य ने विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट पढ़कर सुनाई। सभी ने विद्यालय की उन्नति पर गौरव का अनुभव किया। अन्त में मुख्य अतिथि ने भाषण दिया। उन्होंने विद्यालय की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

4. उपसंहार-
विद्यालय के वार्षिकोत्सव के चार दिन बहुत ही जोश तथा खुशी से बीते। अब जब कभी उन दिनों की याद आती है तो मन आनन्द तथा उमंग से भर जाता है। वास्तव में, विद्यालय के वार्षिकोत्सव छात्रों में हेल-मेल तथा भाईचारे का बीज बोते हैं तथा प्रेम का विस्तार करते हैं। इससे विद्यालय का गौरव बढ़ता है।

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8. गणतन्त्र दिवस (राष्ट्रीय पर्व)

रूपरेखा

  • प्रस्तावना
  • गणतन्त्र दिवस का इतिहास
  • भारतीय गणतन्त्र दिवस
  • गणतन्त्र दिवस का महत्त्व व उपयोगिता
  • गणतन्त्र दिवस का सन्देश
  • उपसंहार

1. प्रस्तावना-
एक पक्षी सोने के पिंजरे में सम्पूर्ण खानपान की सुविधाओं से युक्त होकर भी पराधीनता का जीवन बिताने को बेबस होता है। अपने अन्नदाता के संकेतों पर वह विविध कार्य करता है। स्वच्छन्द उड़ान का सपना देखता है। उसकी आत्मा में एक अजीब पीड़ादायक तड़प उठती है। यही तड़पन थी जो सन् 1857 ई. में प्रथम स्वतन्त्रता संघर्ष में परिवर्तित हो गई थी।

2. गणतन्त्र दिवस का इतिहास-
प्रथम स्वतन्त्रता संघर्ष सन् 1857 ई. में बर्बर अंग्रेज शासकों ने कुचल दिया। यह दबी हुई आग सुलगती हुई बाल गंगाधर तिलक की सिंह गर्जना में ‘स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ फूट पड़ी। महात्मा गाँधी राजनैतिक रंगमंच पर प्रकट हुए। जवाहरलाल नेहरू ने राजसी

वैभव त्यागा और स्वतन्त्रता की साधना की धूनी रमा ली। कांग्रेस |दल ने रावी तट पर एक सभा में पूर्ण स्वराज की माँग करडाली। जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में 26 जनवरी, 1930 की अन्धेरी रात्रि में तिरंगे तले कांग्रेस का अधिवेशन सम्पन्न हआ। नेहरू के साथ सभी सदस्यों ने अपने लक्ष्य की घोषणा की कि

“आज से हमारा लक्ष्य है-पूर्ण स्वराज।” सत्याग्रह चले, बर्बर विदेशी शासकों के हौसले पस्त होने लगे। हमारे क्रान्तिकारियों के बलिदानों से परन्तु विजय हुई सत्य की, अहिंसा की, स्वतन्त्रता के दीवारों की ओर अमर बलिदानियों की और 15 अगस्त, सन् 1947 ई. को भारत ने स्वतन्त्र वायुमण्डल में साँस ली। लाल किले के लहराते तिरंगे ने प्रेरणा दी अभी संघर्ष बाकी है। संविधान बना। भारत को सार्वभौम सत्ता सम्पन्न गणराज्य घोषित करते हुए 26 जनवरी, सन् 1950 ई. के पवित्र दिन हमारा संविधान लागू हुआ।

3. भारतीय गणतन्त्र दिवस-
भारत ने 26 जनवरी, 1950 ई. को अपने द्वारा निर्मित संविधान के अनुरूप शासन चलाने की स्वतन्त्रता प्राप्त की। संविधान में जनता के द्वारा चुने प्रतिनिधियों द्वारा देश का शासन चलाने की व्यवस्था की गयी। विभिन्न राज्यों में जनता के प्रतिनिधियों की सरकार होगी और उन राज्यों का समूह भारत राष्ट्र निर्माण करेगा। 26 जनवरी को भारत में गणतन्त्रात्मक शासन व्यवस्था लागू हुई थी, इसलिए इस पवित्र दिन को गणतन्त्र दिवस कहा जाता है।

4. गणतन्त्र दिवस का महत्त्व व उपयोगिता-
यह दिवस भारतीय स्वतन्त्रता के दीवाने अमर शहीदों की स्मृति दिलाता है। राष्ट्र की प्रगति को प्रदर्शित करती विभिन्न झाँकियाँ जन-जन के मन को स्पर्श करती हैं। राष्ट्रपति का सन्देश राष्ट्र निर्माण में लगे रहने की प्रेरणा देता है। प्रत्येक नगर, प्रत्येक गाँव में यह दिवस धूमधाम से मनाया जाता है। प्रभात फेरियाँ निकलती हैं। ध्वजारोहण होता है। भाषण होते हैं। भारतीय स्वतन्त्रता और उसकी अखण्डता की शपथ दिलायी जाती है।

5. गणतन्त्र दिवस का सन्देश-हमारा गणतन्त्र दिवस प्रत्येक वर्ष प्रगति का नया सन्देश लेकर आता है। इसके सन्देश को 26 जनवरी के उदित होते सूर्य की प्रथम किरण के साथ ही लहरों पर थिरकते, तैरते सभी के द्वारा जल, थल और नभ में सर्वत्र स्वर लहरियों में सुना जाता है। भारत के प्रत्येक नागरिक की अन्तरात्मा में भारत की रक्षा का सन्देश, उसकी अखण्डता का सन्देश और उसकी स्वाधीनता का सन्देश सुनायी पड़ता है।

6. उपसंहार-
गणतन्त्र दिवस का पवित्र राष्ट्रीय पर्व हमें देश पर अपने प्राण न्यौछावर करने की प्रेरणा देता है। यह प्रतिज्ञा का दिवस है। हमारे हृदय में इस दिन एक ही स्वर गूंजता रहता
“जिएँ तो सदा इसी के लिए यही अभिमान रहे यह हर्ष। निछावर कर दें हम सर्वस्व, हमारा प्यारा भारतवर्ष।”

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9. खेलों का महत्व

रूपरेखा-

  • प्रस्तावना
  • मन और मस्तिष्क से खेल का सम्बन्ध
  • खेल का महत्त्व
  • उपसंहार।

1. प्रस्तावना-
कहा जाता है कि “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है।” यदि मनुष्य अपना सम्पूर्ण विकास करना चाहता है तो उसके शरीर का स्वस्थ होना अति आवश्यक है। शरीर को स्वस्थ बनाने में खेलों का विशेष योगदान है। खेल स्वास्थ्य का सर्वोत्तम साधन हैं। उत्तम स्वास्थ्य की कुंजी है।

2. मन और मस्तिष्क से खेल का सम्बन्ध-
खेल का सम्बन्ध मनुष्य के मन और मस्तिष्क से होता है। खिलाड़ी अपनी रुचि के अनुसार ही खेल चुनता है। रुचि जब तृप्त होती है, रुचि के अनुकूल जब मनुष्य को कार्य करने का अवसर प्राप्त होता है, तब ये रुचियाँ उसके आत्मविकास में सहायक होती हैं। इसी प्रकार खेल का सम्बन्ध आत्मा से होता है।

दिनभर के मानसिक श्रम के बाद खेलना मनुष्य के लिए आवश्यक है। केवल एक ही प्रकार का कार्य करते रहने से, मानसिक श्रम करते रहने से मस्तिष्क रुक जाता है। शरीर भी थकान और उदासीनता अनुभव करता है। यदि व्यक्ति खेल के मैदान पर नहीं उतरता है तो वह व्यक्ति भोजन के बाद केवल निद्रा में निमग्न हो जायेगा। मानसिक कार्य करने की क्षमता समाप्त होती जायेगी। प्रात:काल जब वह सोकर उठेगा तो नई ताजगी और उत्साह का अभाव ही पाएगा।

वास्तविकता यह है कि खेल में जिसकी रुचि नहीं है, उस व्यक्ति का जीवन उदासीन और निराश रहता है। इसके विपरीत जिस व्यक्ति की खेल में रुचि है, वह सदैव प्रसन्न रहता है। वह जीवन में आने वाले संघर्षों तथा उतार-चढ़ावों से भयभीत न होकर उनका डटकर सामना करता है।

3. खेल का महत्त्व-
खेल एक ओर मनोरंजन का अच्छा साधन है तो दूसरी ओर समय के सदुपयोग का सबसे उत्तम तरीका। मनोरंजन का जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान है। मनोरंजन से मनुष्य की थकान और उदासीनता दूर होती है। इसलिए मनुष्य मनोविनोद को जीवन में अपनाता है। खेल के मैदान में खिलाड़ी, दिनभर की थकान, चिन्ता इत्यादि को भूल जाता है। खेल के मैदान पर उसका मन निर्मल हो जाता है।

इसके विपरीत जिन व्यक्तियों को खेल में रुचि नहीं है, वे अपना अमूल्य समय, व्यर्थ में ही नष्ट करते हैं। खेल के मैदान में मनुष्य अपने समय का सदुपयोग करता है। खेल के मैदान पर व्यक्ति में सहयोग और मित्रता की सामाजिक भावना का उदय होता है, जिसकी जीवन में पग-पग पर आवश्यकता पड़ती है और जिससे जीवन सजता है, सँवरता है और निखरता है।

इसे ही खिलाड़ी भावना’ कहा गया है। खेल के मैदान पर व्यक्ति एक-दूसरे के शत्रु रहकर भी मित्रता का व्यवहार करते हैं। आपस में उनमें प्रेम और सद्भाव रहता है। उनमें सहयोग और सहानुभूति की भावना कूट-कूटकर भरी होती है। खेलने से अनुशासन का गुण विकसित होता है। खेल से जीवन में संघर्ष करने की भावना पैदा हो जाती है जिसे हम ‘खिलाड़ी प्रवृत्ति’ कहते हैं। इस प्रकार,खेलों से अनुशासन, एकता, साहस तथा धैर्य की शिक्षा मिलती है। खिलाड़ी के ये गुण ही, उसके भावी जीवन का निर्माण करते हैं।

व्यावहारिक जीवन में भी खेल का बहुत महत्त्व है। छात्र जीवन में खेल के कारण छात्र लोकप्रिय हो जाता है। सभी लोगों के प्रेम का पात्र बन जाता है। शिक्षा के पूर्ण होने पर वह जीवन क्षेत्र में उतरता है और किसी पद का प्रत्याशी बनता है। तब खेल उसके निर्वाचन की कसौटी सिद्ध होता है। खिलाड़ी जहाँ भी जाते हैं, सफलता पाते हैं और नौकरियों में उन्हें प्राथमिकता मिलती है।

4. उपसंहार-
खेल और ज्ञान का उचित सम्बन्ध होने पर ही व्यक्तित्व का सन्तुलित विकास हो सकेगा और वह अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकेगा।

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10. शिक्षक

रूपरेखा

  • प्रस्तावना
  • आदर्श शिक्षक
  • उपसंहार।

1. प्रस्तावना-
प्राचीनकाल से ही शिक्षक को राष्ट्रनिर्माता के रूप में सम्मान प्राप्त होता रहा है। शिक्षकों के शब्द विद्यार्थियों के लिए कानून के समान होते थे। वे उनके कथन का पालन हर स्थिति में किया करते थे। शिक्षक भी अपने सारे जीवन को शिष्यों, समाज और राष्ट्र के सनिर्माण में लगा देते थे। आज शिक्षा पद्धति ने शिक्षक को वेतनभोगी बना दिया है। वह एक कर्मचारी है। शिक्षक विद्यादानी न होकर नौकरी करने वाला साधारण व्यक्ति बन गया है। वह राजनीति की गन्दगी में फंस गया है। उसमें बुरी प्रवृत्तियाँ पनप गयी हैं। वह आदर्शों और । यथार्थ से दूर भटक गया है।

2. आदर्श शिक्षक-
शिक्षक समाज की बुद्धि है। वह अपने ज्ञान से समाजगत अन्धकार को मिटाता है। वह अपने विषय का ज्ञाता होता है। वह स्वयं अध्ययन और अध्यापन में व्यस्त रहता है। आदर्श शिक्षक नवीनतम् खोजों और शोधों की जानकारी अपने शिष्यों को देता है। उन्हें राष्ट्रीयता के मन्त्र से प्रभावित करता है। वह समयबद्ध कार्यों को पूरा करता है। समय का पालन करके समय को व्यर्थ नहीं गंवाता। वह सदैव ध्यान रखता है कि समय बहुत कीमती धन है जिसकी बचत करके नए ज्ञान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
एक शिक्षक का उद्देश्य अपने अन्दर निर्मलता और निष्पक्षता लाकर सभी छात्रों की भलाई करना होता है। एक अच्छा शिक्षक कभी भी धनवान और सामर्थ्यवान शिष्यों के प्रति पक्षपात नहीं करता। उनका रहन-सहन सादा होता है। सादा जीवन और उच्च विचार ही उसकी जीवन शैली होती है।”

3. उपसंहार-
आदर्श शिक्षक अपनी धनराशि को अच्छे | साहित्य और पुस्तकों पर खर्च करता है। उसकी बोली में मिठास होती है। वेशभूषा सादा होती है। सही अर्थों में ऐसा शिक्षक राष्ट्रनिर्माता होता है। वह भावी पीढ़ी का निर्माण करता है। वह मानवता का रक्षक व पालक कहा जा सकता है। मानव हित ही उसका सिद्धान्त होता है। वह परमब्रह्म के पद से पुकारा जाने वाला गुरु सबके कल्याण का काम करता हुआ यशस्वी जीवन जीता है।

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