MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी

MP Board Class 6th Social Science Chapter 5 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

(अ) पाठ्य पुस्तक पृष्ठ संख्या 21 – 22 पर दी गई तालिका का अध्ययन कर लिखिए:
1. सौर परिवार का मुखिया …………… है।
2. ग्रह जिस पर पूर्ण जीवन है …………….. है।
3. सूर्य के सबसे निकट वाला ग्रह …………. है।
4. पीले रंग का सबसे बड़ा ग्रह ……………….. है।
5. पृथ्वी ग्रह का उपग्रह
उत्तर:
1. सूर्य
2. पृथ्वी
3. बुध
4. बृहस्पति
5. चन्द्रमा।

(ब) नीचे दी गई सारणी में उपयुक्त जानकारी भरें:
उत्तर:
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी

MP Board Class 6th Social Science Chapter 5 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(अ) सूर्य में ऊर्जा कैसे पैदा होती है ?
उत्तर:
सूर्य कई ज्वलनशील गैसों का जलता हुआ पिण्ड है जिसमें हाइड्रोजन, हीलियम आदि प्रमुख हैं जो निरन्तर जलती रहती है। इनसे ही सूर्य में ऊर्जा उत्पन्न होती है।

(ब) पृथ्वी के तीन परिमण्डल कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
पृथ्वी के तीन परिमण्डल हैं-वायुमण्डल, जलमण्डल और स्थलमण्डल।

(स) सूर्य के महत्त्व को समझाइए।
उत्तर:
सूर्य ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत है। यह सभी ग्रहों और उपग्रहों का प्रमुख है। सभी इसकी परिक्रमा करते हैं और इसके ही प्रकाश से प्रकाशित होते हैं। यदि सूर्य न हो तो हम किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना नहीं कर सकते।

(द) सौरमण्डल के ग्रहों के नाम लिखिए।
उत्तर:
ग्रह संख्या में आठ हैं जिनके नाम निम्नलिखित हैं-बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस (अरुण), और नेपच्यून (वरुण)।

(य) ग्रह एवं तारे में क्या अन्तर है ? लिखिए।
उत्तर:
तारा और ग्रह में अन्तर:

  • तारों की अपनी ऊष्मा होती है और वे अपने ही प्रकाश से चमकते हैं, जबकि ग्रह सूर्य के प्रकाश से चमकते हैं।
  • तारों की चमक स्थिर नहीं होती, जबकि ग्रहों की चमक स्थिर रहती है।
  • आकाश में तारे स्थिर रहते हैं, जबकि ग्रह अपना स्थान बदलते रहते हैं।

(र) कौन-सी गैस हमारी जीवन रक्षक है ?
उत्तर:
ओजोन गैस हमारी जीवन रक्षक है। वायुमण्डल में स्थित ओजोन गैस की परत सूर्य की पराबैंगनी जैसी घातक किरणों से हमारी रक्षा करती है। यदि ओजोन परत नहीं होती तो सारे जीव और वनस्पति नष्ट हो जाते।

(ल) पृथ्वी पर पाई जाने वाली तीन महत्त्वपूर्ण गैसों के नाम लिखिए। इनमें जीवनदायिनी गैस कौन-कौन सी है ?
उत्तर:
पृथ्वी पर पाई जाने वाली तीन महत्त्वपूर्ण गैसें हैं-ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और कार्बन डाइ-ऑक्साइड। इनमें से ऑक्सीजन गैस जीवनदायिनी है।

(व) ग्रह एवं उपग्रह में अन्तर बताइए।
उत्तर:
ग्रह और उपग्रह में अन्तर –

  • ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं, जबकि उपग्रह अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं।
  • सौरमण्डल में ग्रहों की संख्या आठ है, जबकि उपग्रह संख्या में 44 हैं।
  • उपग्रहों की तुलना में ग्रह आकार में बड़े होते हैं।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) सौरमण्डल किसे कहते हैं ? सौरमण्डल के ग्रहों को चित्र सहित नामांकित कीजिए।
उत्तर:
सूर्य, सभी ग्रहों और उपग्रहों से मिलकर सौरमण्डल बना होता है। इसी ‘सौरमण्डल’ को सौर परिवार भी कहते हैं।

सौरमण्डल के ग्रहों का चित्र सहित वर्णन –
(1) सूर्य-सूर्य का अपना ही प्रकाश और गर्मी होती है। यह एक तारा है। सभी ग्रह सूर्य की ही आकर्षण शक्ति से एक-दूसरे से बँधे रहते हैं और सूर्य की परिक्रमा करते हैं। सभी ग्रहों तथा उपग्रहों को ऊष्मा व प्रकाश सूर्य से ही मिलता है।

(2) ग्रह – ग्रह संख्या में आठ होते हैं, जो निम्नलिखित हैं –

  • बुध – बुध सूर्य के सबसे अधिक पास का ग्रह है। इसका कोई उपग्रह नहीं है। सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 88 दिन का समय लगता है।
  • शुक्र – इसका कोई उपग्रह नहीं होता तथा आकार में पृथ्वी के बराबर होता है। यह 225 दिन में सूर्य की परिक्रमा करता है।
  • पृथ्वी – इसका उपग्रह चन्द्रमा होता है। सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में इसे 365 7 दिन का समय लगता है। इस ग्रह पर जीवन पाए जाने के कारण इसे जीवित ग्रह भी कहते हैं।
  • मंगल – इसके दो उपग्रह हैं। यह 687 दिन में सूर्य की परिक्रमा पूरी कर लेता है।
  • बृहस्पति – यह सभी ग्रहों में बड़ा है। इसके 12 उपग्रह हैं। सूर्य की परिक्रमा यह 11 वर्ष 9 महीने में पूरी करता है।
  • शनि – इसके 20 उपग्रह हैं। सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में इसे 29 वर्ष 5 माह का समय लगता है। यह सौरमण्डल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
  • अरुण (यूरेनस) – यह सूर्य की परिक्रमा 84 वर्ष में पूरी करता है।
  • वरुण (नेपच्यून) – इसके 8 उपग्रह हैं। यह 165 वर्ष में सूर्य की परिक्रमा करता है।

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी img 2

(ब) पृथ्वी एक अनोखा व जीवित ग्रह कैसे है ? समझाइए।
उत्तर:
पृथ्वी सौरमण्डल का एक महत्त्वपूर्ण सदस्य है। सौर मण्डल ही नहीं बल्कि पूरे ब्रह्माण्ड में केवल पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन पाया जाता है। इसलिए इसे अनोखा और जीवित ग्रह कहते हैं।

निम्नलिखित कारणों से भी यह अनोखा व जीवित ग्रह है –

  • पृथ्वी पर जल ठोस, तरल और गैसीय अवस्था में मिलता है। यहाँ जल की उपलब्धता से जीवन का विकास हुआ है।
  • पृथ्वी पर जीवनदायिनी गैस ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में पाई जाती है जो किसी भी प्रकार के जीवन के लिए आवश्यक है।
  • पृथ्वी पर वायुमण्डल, जलमण्डल और स्थलमण्डल का विस्तार है, तीनों का आपस में उचित सन्तुलन बना हुआ है। इसके अलावा पृथ्वी पर 12-12 घण्टे वाले दिन रात की आदर्श अवधि भी यहाँ जीवन के विकास में सहायक है।

(स) प्राकृतिक व कृत्रिम उपग्रह किसे कहते हैं ? पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वे आकाशीय पिण्ड जो अपने ग्रहों की परिक्रमा करने के साथ सूर्य की परिक्रमा भी करते हैं प्राकृतिक उपग्रह कहलाते हैं जबकि मानव द्वारा निर्मित छोटे और अस्थायी ग्रह कृत्रिम उपग्रह कहलाते हैं। पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह चन्द्रमा है। यह आकार में पृथ्वी का 1 / 4 है। पृथ्वी से इसकी औसत दूरी 3 लाख 84 हजार किलोमीटर है। यह पृथ्वी की परिक्रमा 30 दिनों में पूरी करता है। यह सूर्य से प्रकाशित होता है।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य का एक-एक पारिभाषिक शब्द बताइए
(अ) सारे पदार्थों, सारी आकाशगंगाओं, सारी ऊर्जा तथा अन्तरिक्ष का अन्तहीन समूह।
उत्तर:
ब्रह्माण्ड

(ब) वह दूरी जिसे प्रकाश तीन लाख किमी प्रति सेकण्ड के वेग से एक वर्ष में तय करता है।
उत्तर:
प्रकाश वर्ष

(स) तारों भरे आकाश में बादलों जैसी दूधिया पट्टी।
उत्तर:
आकाश गंगा

(द) मंगल और बृहस्पति के बीच सौरमण्डल में छोटे-छोटे असंख्य पिण्डों की पट्टी।
उत्तर:
क्षुद्र ग्रह।

प्रश्न 4.
सही जोड़ी बनाइएअ –
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी img 3
उत्तर:
(अ) (iv) प्रोक्सिमा सेन्चुरी
(ब) (v) बृहस्पति
(स) (ii) चन्द्रमा
(द) (iii) वरुण
(य) (i) बुध

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3

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प्रश्न 1.
निम्न समीकरणों को हल कीजिए और अपने उत्तर की जाँच कीजिए –
1. 3x = 2x + 18
2. 5t – 3 = 3t – 5
3. 5x + 9 = 5 + 3x
4. 4z + 3 = 6 + 2z
5. 2x – 1 = 14 – x
6. 8x + 4 = 3(x – 1) + 7
7. x = \(\frac{4}{5}\) (x + 10)
8. \(\frac{2x}{3}\) + 1 = \(\frac{7x}{15}\) +3
9. 2y + \(\frac{5}{3}\) = – y
10. 3m = 5m – \(\frac{8}{5}\)
हल:
1. 3x = 2x + 18
⇒ 3x – 2x = 18
(2x को बायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
⇒ x = 18
जाँच: समीकरण में x = 18 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 3x = 3 x 18 = 54
दायाँ पक्ष = 2x + 18 = 2 x 18 + 18
= 36 + 18 = 24
अतः x = 18 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

2. 2t – 3 = 3t – 5 – 3 को दायीं ओर तथा
-3 को बायीं ओर पक्षान्तर करने पर,
∴ 5t – 3t = – 5 + 3
2t = – 2
दोनों ओर 2 से भाग करने पर,
\(\frac{2t}{2}\) = \(\frac{-2}{2}\)
या t = – 1
जाँच: समीकरण में t = – 1 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 5t – 3 = 5(-1) – 3 = – 5 – 3 = – 8
दायाँ पक्ष = 3t – 5 = 3(-1) – 5 = – 3 – 5 = – 8
अतः t = – 1 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष

3. 5x + 9 = 5 + 3x
या 5x – 3x = 5 – 9
(3x को बायीं ओर 9 को दायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
या 2x = – 4
या \(\frac{2x}{2}\) = \(\frac{-4}{2}\)
(दोनों पक्षों को 2 से भाग करने पर)
या x = – 2
जाँच: समीकरण में x = – 2 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 5x + 9= 5 (-2) +9 = – 10 + 9 = – 1
दायाँ पक्ष = 5 + 3x = 5 + 3 x (-2)= 5 – 6 = – 1
अतः x = – 2 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

4. 4z + 3 = 6 + 2z
या 4z – 2z = 6 – 3
(3 को दायीं ओर और 6 को बायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
या 2z = 3
या \(\frac{2z}{2}\) = \(\frac{3}{2}\)
(दोनों पक्षों को 2 से भाग करने पर)
या x = \(\frac{3}{2}\)
जाँच: समीकरण में z = 3/2 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 4z + 3 = 4 x \(\frac{3}{2}\) + 3 = 6 + 3 = 9
दायाँ पक्ष = 6 + 2x = 6 + 2 x \(\frac{3}{2}\) = 6 + 3 = 9.
अतः z = 3/2 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

5. 2x – 1 = 14 – x
2x + x = 14+1
(-1 को दायीं ओर तथा –x को बायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
या 3x = 15
या \(\frac{3x}{3}\) = \(\frac{15}{3}\)
(दोनों पक्षों को 3 से भाग करने पर)
या x = 5
जाँच: समीकरण में x = 5 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 2x – 1 = 2 x 5 – 1 = 10 – 1 = 9
दायाँ पक्ष = 14 – x = 14 – 5 = 9
अतः x = 5 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

6. 8x+ 4 = 3(x – 1) + 7
या 8x + 4 = 3x – 3 + 7
या 8x + 4 = 3x + 4
या 8x – 3x = 4 – 4
(3x को बायीं ओर और 4 को दायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
या 5x = 0 ⇒ \(\frac{5x}{5}\) = \(\frac{0}{5}\)
(दोनों ओर 5 से भाग करने पर)
या x = 0
जाँच: समीकरण में x = 0 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 8x + 4 = 0 = 8 x 0 + 4 = 0 + 4 =4
दायाँ पक्ष = 3(x – 1) + 7 = 3(0 – 1) + 7 = – 3 + 7 = 4
अतः x = 0 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

7. x = \(\frac{4}{5}\) (x + 10)
या 5x = 4(x + 10)
(दोनों ओर 5 से गुणा करने पर)
या 5x = 4x + 40
या 5x – 4x = 40
(4x का पक्षान्तर करने पर)
या x = 40
जाँच: समीकरण में x = 40 रखने पर,
बायाँ पक्ष = x = 40
दायाँ पक्ष = \(\frac{4}{5}\) (x + 10) = \(\frac{4}{5}\)(40 + 10) = \(\frac{4×5}{+5}\) = 40
अतः x = 40 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

8. \(\frac{2x}{3}\) + 1 = \(\frac{7x}{15}\) + 3
दोनों पक्षों को 15 से गुणा करने पर,
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-1
या 10x + 15 = 7x + 45
या 10x – 7x = 45 – 15
(7x तथा 15 को पक्षान्तर करने पर)
या 3x = 30
या \(\frac{3x}{3}\) = \(\frac{30}{3}\)
(दोनों ओर 3 से भाग करने पर)
या x = 10
जाँच: समीकरण में x = 10 रखने पर,
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-2
अत: x = 10 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

9. 2y + \(\frac{5}{3}\) = \(\frac{26}{3}\) – y
या 2y + y = \(\frac{26}{3}\) – \(\frac{5}{3}\)
(\(\frac{5}{3}\) तथा – y को पक्षान्तर करने पर)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-3
(दोनों ओर 3 से भाग करने पर)
या y = \(\frac{7}{3}\)
जाँच: समीकरण में y = \(\frac{7}{3}\) रखने पर
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-4
अतः y = \(\frac{7}{3}\) के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

10. 3m = 5 – \(\frac{8}{5}\)
या 3m – 5m = \(-\frac{8}{5}\)
(5m को पक्षान्तर करने पर) – 2m = – 3
या – 2m = \(-\frac{8}{5}\)
या \(\frac{-2m}{-2}\) = \(\frac{-8}{5(-2)}\)
(दोनों ओर – 2 भाग करने पर)
या m = \(\frac{4}{5}\)
जाँच: समीकरण में m = \(\frac{4}{5}\) रखने पर,
बायाँ पक्ष = 3m = 3 x \(\frac{4}{5}\) = \(\frac{12}{5}\)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-5
अतः m = \(\frac{4}{5}\) के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 4 पारस्परिक निर्भरता

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 4 पारस्परिक निर्भरता

MP Board Class 6th Social Science Chapter 4 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गाँव और शहरों द्वारा उत्पादित / तैयार वस्तुओं की सूची बनाइए।
उत्तर
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 4 पारस्परिक निर्भरता img 1

MP Board Class 6th Social Science Chapter 4 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
(1) प्राचीन काल में मनुष्य की आवश्यकताएँ कैसी थीं?
उत्तर:
प्राचीन काल में मनुष्य की आवश्यकताएँ बहुत सीमित थीं। इनकी पूर्ति वह स्वयं कर लेता था।

(2) मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएँ क्या हैं ?
उत्तर:
भोजन, कपड़ा, आवास मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएँ हैं।

(3) अनाज, सब्जी व फल कहाँ उत्पादित होते हैं ?
उत्तर:
अनाज, सब्जी व फल अधिकतर गाँवों में उत्पादित होते हैं।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) पारस्परिक निर्भरता किसे कहते हैं ? बताइए।
उत्तर:
किसी कार्य अथवा आवश्यकता के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होना पारस्परिक निर्भरता कहलाता है। जैसे-शहर के लोग गाँव के लोगों द्वारा उत्पादित वस्तुएँ (अनाज, सब्जियाँ, फल आदि) के लिए गाँवों पर निर्भर रहते हैं, इसी प्रकार गाँव के लोग भी शहर में स्थापित कारखानों में बनी वस्तुओं के लिए उन पर निर्भर रहते हैं।

(ब) पारस्परिक निर्भरता की आवश्यकता क्यों पड़ती है ? दो देशों के मध्य पारस्परिक निर्भरता को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
अपनी आवश्यकताओं एवं रुचियों की पूर्ति के लिए व्यक्ति को पारस्परिक निर्भरता की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार किसी एक देश में सभी आवश्यकता की चीजें उपलब्ध नहीं होती या कम मात्रा में होती हैं, इसलिए उन्हें दूसरे देशों से मँगाना पड़ता है। हम भारत का ही उदाहरण लें तो यहाँ पेट्रोलियम पदार्थ (पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल), सेना के उपयोग के लिए आधुनिक उपकरण, हथियार आदि दूसरे देशों से मँगाये जाते हैं। भारत से मसाले, चाय, सीमेण्ट, तैयार कपड़े आदि दूसरे देशों को भेजे जाते हैं।

(स) नागरिक जीवन में परस्पर निर्भरता का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
सामाजिक जीवन आपसी सहयोग पर निर्भर करता है। सभी नागरिक एक साथ मिलकर रहते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं। इससे सामाजिक जीवन बेहतर और सुविधाजनक हो जाता है। यही नागरिक जीवन में परस्पर निर्भरता का महत्त्व है।

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प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(अ) हमारा नागरिक जीवन परस्पर ………….. और …………. पर निर्भर करता है।
(ब) एक क्षेत्र में सभी तरह की ………… नहीं उगायी जातीं।
उत्तर:
(अ) सहयोग, कर्त्तव्य पालन
(ब) फसलें।

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 2 आदिमानव

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 2 आदिमानव

MP Board Class 6th Social Science Chapter 2 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पाठ्य पुस्तक पृष्ठ संख्या 6 पर दिये गये देखो और नीचे बनी तालिका को भरो।
उत्तर:
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 2 आदिमानव img 1

MP Board Class 6th Social Science Chapter 2 अभ्यास प्रश्न

1. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप में उत्तर लिखिए –
(अ) आदिमानव अपने औजार किससे बनाता था ?
उत्तर:
आदिमानव पत्थरों, लकड़ी तथा जानवरों की हड्डियों और सींगों से हथियार बनाता था। पत्थरों के हथियार अधिकतर चकमक पत्थरों से बनाए जाते थे। इन हथियारों में पत्थरों से बने हथौड़े, कुल्हाड़ियाँ तथा वसूले प्रमुख थे। आरम्भ में हथियार को बिना मूठ तथा हत्थे के ही काम में लाया जाता था। बाद में लकड़ी के हत्थों में बाँधकर इनका प्रयोग किया जाने लगा। आगे चलकर जब मनुष्य ने धातु की खोज कर ली तो वह धातु के हथियार बनाना भी सीख गया।

(ब) आदिमानव पत्थर के औजार किस-किस काम में लाते थे ?
उत्तर:
आदिमानव पत्थरों के औजारों का उपयोग जानवरों का शिकार करने, माँस काटने, लकड़ी काटने, कन्दमूल खोदने आदि के लिए करता था।

(स) मध्यप्रदेश के किन-किन जिलों में शैलचित्र मिलते हैं ?
उत्तर:
मध्यप्रदेश के रायसेन, होशंगाबाद, मन्दसौर आदि जिलों में शैलचित्र मिलते हैं।

(द) आदिमानव जानवरों से अपनी रक्षा किस तरह करता था ?
उत्तर:
सर्वप्रथम आदिमानव जानवरों से अपनी रक्षा करने के लिए पेड़ों पर रहता था। जब आदिमानव ने आग जलाना सीख लिया तब वह आग जलाकर जानवरों से रक्षा करने लगा। क्योंकि उसने जान लिया था कि जानवर आग से डरते हैं।

(य) आग की खोज कैसे हुई ? इससे आदिमानव को क्या लाभ हुए ?
उत्तर:
अनुमान है कि दो चकमक पत्थरों के आपस में टकराने से आग की चिंगारियाँ निकलीं जिससे पास ही पड़ी हुई पत्तियाँ जलने लगीं। इससे आदिमानव आग जलाना सीख गया। इस प्रकार आग की खोज संयोग से हुई। आदिमानव ने जब चकमक पत्थर की सहायता से आग जलाना सीख लिया तो वह रात के समय गुफा में आग जलाकर जंगली जानवरों से अपनी रक्षा करने लगा। उसने उजाला करना सीख लिया। आग में वह माँस भूनकर खाने लगा। इस प्रकार आग से उसे अनेक लाभ हुए।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से दीजिए –
(अ) मानव का क्रमिक विकास बताइए।
उत्तर:
लाखों साल पहले इस पृथ्वी पर मानव का जन्म हुआ था। पहले मानव दोनों हाथों और दोनों पैरों पर चलता था और जंगलों में रहता था। वह पेड़ों की जड़ और फूल-पत्तियाँ खाता था। कुछ छोटे जानवरों को मारकर भी वह खा जाता था। धीरे-धीरे यह वानर जैसा मानव विकास करता गया और वह अपने शरीर को सन्तुलित कर दो पैरों पर चलने लगा।

अपने दोनों हाथों से उसने खोदने, पकड़ने और उठाने का काम सीख लिया। शारीरिक परिवर्तनों के साथ उसके सोचने-समझने की शक्ति भी विकसित होने लगी। वह अपनी मूलभूत जरूरतों जैसे भोजन, आवास और सुरक्षा के बारे में सोचने लगा। वह भोजन इकट्ठा करने लगा और उसने पत्थर के औजार भी बना लिए। इस प्रकार मानव का विकास होता गया। यहाँ तक का उसके विकास का युग पुरा पाषाण युग कहलाता है।

आगे चलकर उसने आग जलाना सीख लिया। वह माँस को भूनकर खाने लगा और आग से ही प्रकाश प्राप्त करने लगा। आदिमानव के विकास का यह युग मध्य पाषाण युग कहलाता है। धीरे-धीरे आदि मानव ने पशुपालन और कृषि करना सीख लिया। इससे उसका भोजन के लिए भटकना बन्द हो गया। उसने पहिये की खोज की और वह निरन्तर प्रगति करता गया। उसका यह विकास का युग नव पाषाण युग कहलाता है। यही मानव का क्रमिक विकास है।

(ब) मानव खेती करना और पशुपालन करना कैसे सीखा ? विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
नव पाषाण युग से पहले आदिमानव भोजन की तलाश में यहाँ-वहाँ घूमता रहता था। नव पाषाण काल में उसने पशुपालन और खेती करने के प्रारम्भिक तरीकों की खोज कर ली थी। इसी कारण आदिमानव का भोजन की तलाश में यहाँ-वहाँ घूमना कम हो गया था। आदिमानव को यह समझ में आ गया था कि मानव और पशु – पक्षियों द्वारा फेंके हुए फलों के बीजों से नए पौधे उग आते हैं, यही खेती करने की कला उसकी एक महत्वपूर्ण खोज थी।

वह यह भी जान गया था कि शिकार के साथ – साथ पशुपालन उसके लिए महत्वपूर्ण है। वह अनेक पशुओं को पालने लगा था और उनसे काम भी लेने लगा था। शिकार करने में कुत्ते, खेती करने में बैल, दूध प्राप्त करने के लिए गाय, भैंस, बकरी, माँस प्राप्त करने के लिए बकरा, सवारी के लिए बैल, भैंसा, ऊँट, घोड़े का वह उपयोग करना सीख गया था।

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टिप्पणी लिखिए
प्रश्न 3.
(अ) आग की खोज।
उत्तर:
आग के बारे में मनुष्य को पहले कोई जानकारी नहीं थी। यद्यपि यह कहना कठिन है कि आग की खोज किस प्रकार हुई किन्तु यह अनुमान लगाया जाता है कि जब उसने पहली बार जंगल में सूखी लकड़ियों को आपस में तेज रगड़ खाकर आग लगते हुए एवं पत्थरों के औजारों के निर्माण के दौरान दो पत्थरों के आपस में टकराने से चिंगारियों को निकलते देखा होगा तो उसे आग का ज्ञान हुआ होगा। तब पहली बार मानव ने पत्थरों को आपस में टकराकर आग उत्पन्न की होगी। आग की खोज मनुष्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

(ब) पहिए की खोज एवं उपयोग
उत्तर:
मानव की उन्नति में पहिए की खोज का महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसा अनुमान है कि पेड़ के तने को लुढ़कते हुए देखकर आदिमानव के मन में पहिए के निर्माण का विचार आया होगा। यह खोज उसके जीवनयापन के लिए वरदान साबित हुई। पहिए का उपयोग उसने निम्नलिखित कार्यों के लिए किया –

  • चाक से मिट्टी के बर्तन बनाने में।
  • भारी चीज को एक जगह से दूसरी जगह लाने ले जाने में।
  • गहराई से पानी खींचने में।
  • पशुओं द्वारा खींची जाने वाली गाड़ी के निर्माण में।

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 3 परिवार एवं समाज

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 3 परिवार एवं समाज

MP Board Class 6th Social Science Chapter 3 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(अ) परिवार की इकाई क्या है?
उत्तर:
व्यक्ति परिवार की इकाई है।

(ब) समाज में व्यक्ति अपनी पहचान कैसे बनाता है?
उत्तर:
समाज में रहकर व्यक्ति राजनेता, धर्म प्रचारक, शिक्षक, डॉक्टर, जज, कृषक, श्रमिक आदि पदों पर रहकर विभिन्न कार्य करता है और समाज में अपनी पहचान बनाता है।

(स) बच्चे का प्रथम गुरु किसे माना गया है?
उत्तर:
बच्चे को प्रथम शिक्षा परिवार में माता से ही प्राप्त होती है इसलिए माता को प्रथम गुरु माना गया है।

(द) आपके परिवार में कितने सदस्य हैं ?
उत्तर:
इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी स्वयं लिखें।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) एकल परिवार और संयुक्त परिवार से आप क्या समझते हैं? आपका परिवार आपकी कौन-कौन सी आवश्यकताएँ पूरी करता है? सूची बनाइए।
उत्तर:
जिस परिवार में पति-पत्नी उनके पुत्र-पुत्रियाँ होते हैं वे एकल परिवार कहलाते हैं जबकि संयुक्त परिवार में पति-पत्नी, पुत्र-पुत्रियों के अलावा दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताई आदि भी शामिल होते हैं। परिवार में रहकर व्यक्ति अपनी समस्त मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करता है जिनमें प्रमुख हैं भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा।

(ब) समाज कैसे बनता है ? आप समाज की किन-किन बुराइयों पर नियन्त्रण लगाना चाहते हैं ? लिखिए।
उत्तर:
समाजशास्त्रियों ने समाज को सामाजिक सम्बन्धों का जाल माना है। कई परिवारों से मिलकर समाज का निर्माण होता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। इसलिए वह परिवार और समाज दोनों से जुड़कर रहता है। हम समाज की कम आयु में विवाह, अधिक बच्चों का जन्म, बच्चों को प्रारम्भिक एवं अनिवार्य  शिक्षा न दिलाना जैसी बुराइयों पर नियन्त्रण लगाना चाहते हैं।

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प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(अ) अपने शिशुओं की जिम्मेदारी …………… सहज रूप से स्वीकारते हैं।
(ब) छोटे परिवारों को ………… माना गया है।
(स) परिवार की इकाई ………… होती है।
(द) समाज की इकाई ……….. होती है।
उत्तर:
(अ) माता – पिता
(ब) आदर्श परिवार
(स) व्यक्ति
(द) परिवार

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 1 इतिहास जानने के स्रोत

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 1 इतिहास जानने के स्रोत

MP Board Class 6th Social Science Chapter 11 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(अ) इतिहास जानने के मुख्य स्रोत कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
इतिहास जानने के मुख्य स्रोत हैं – पाषाण उपकरण, जीवाश्म, मिट्टी के बर्तन, शिलालेख, सिक्के, हथियार, मन्दिर, महल, मस्जिद, भोजपत्र, ताम्रपत्र, ताड़पत्र, पुरातत्त्व तथा इतिहास की पुस्तकें आदि।

(ब) शैलचित्र क्या होते हैं व मध्यप्रदेश में वे कहाँ मिलते हैं?
उत्तर:
बहुत पहले लोग जब लिखना-पढ़ना नहीं जानते थे तब वे अपनी बात चित्र बनाकर कहते थे। खोज करने पर पता चला है कि ऐसे चित्र आदिमानव बनाया करते थे। आदि मानव काल में चित्र पहाड़ों की गुफाओं में बनाए जाते थे। इसलिए इस काल के चित्रों को शैलचित्र कहते हैं। मध्यप्रदेश में भोपाल के पास भीमबेटका के शैलचित्र आदिमानव काल के ही हैं। भीमबेटका विश्व का सबसे बड़ा शैलचित्र स्थल है।

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(स) भोजपत्र किसे कहते हैं ?
उत्तर:
भोजपत्र एक विशेष प्रकार के वृक्ष की छाल होती है जिस पर प्राचीन काल में लिखा जाता था।

(द) इतिहास का अध्ययन क्यों आवश्यक है ?
उत्तर:
इतिहास से हमें पुरानी बातों की जानकारी मिलती है। पहले लोगों का जीवन कैसा था तथा वे किस प्रकार रहते थे, उन्होंने आग जलाना कैसे सीखा, पहिए की खोज कब हुई ? ये सब बातें हम इतिहास से ही सीख सकते हैं। इतिहास को पढ़ने से हमें अपनी सभ्यता व संस्कृति की जानकारी मिलती है। इतिहास हमें राजा-महाराजा से लेकर जन-साधारण तक की जानकारी देता है। इतिहास से अनेक बातें सीखकर ही हम लगातार उन्नति कर सकते हैं।

(य) ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा हमें क्यों करनी चाहिए?
उत्तर:
ऐतिहासिक धरोहर हमें अपने अतीत, अपनी सभ्यता तथा संस्कृति की जानकारी देती है, इसलिए हमें इसकी सुरक्षा करनी चाहिए।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(अ) ह्वेनसांग और फाह्यान …………….. यात्री थे।
(ब) भीमबेटका की खोज ……………… ने की थी।
(स) पुरानी वस्तुओं / स्थलों की खोज करने व उनके बारे में सही तथ्यों का पता लगाने वाले को ………….. कहते हैं।
उत्तर:
(अ) चीनी,
(ब) पद्मश्री डॉ. वि. श्री. वाकणकर
(स) पुरातत्त्ववेत्ता।

प्रश्न 3.
सही विकल्प चुनकर लिखिए।
(अ) ताम्रपत्र लिखे जाते हैं –
(i) पत्थरों पर,
(ii) ताँबे के पत्तरों पर
(iii) वृक्ष की छाल पर।
उत्तर:
(ii) ताँबे के पत्तरों पर

(ब) शिलालेख कहा जाता है –
(i) पत्थरों पर खोद कर लिखी जानकारी
(ii) किताबों में लिखी जानकारी
(iii) भोजपत्र पर लिखी जानकारी
उत्तर:
(i) पत्थरों पर खोद कर लिखी जानकारी

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(स) स्थापत्य कला से हमें ज्ञान होता है –
(i) भवनों का
(ii) चित्रों का
(iii) औजारों का।
उत्तर:
(i) भवनों का

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 11 जनपदों और महाजनपदों का युग

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 11 जनपदों और महाजनपदों का युग

MP Board Class 6th Social Science Chapter 11 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न
पाठ्य पुस्तक पृष्ठ संख्या 64 पर दिये गये मानचित्र को ध्यान से देखें और प्राप्त जानकारी से दी गई तालिका को पूरा करें।
उत्तर:
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 11 जनपदों और महाजनपदों का युग img 1

MP Board Class 6th Social Science Chapter 11 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(अ) जनपद किसे कहते हैं ?
उत्तर:
जनपद से आशय है ‘मनुष्य के बसने का एक क्षेत्र’।

(ब) दो गणसंघों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • मिथिला के वज्जि
  • कपिलवस्तु के शाक्य।

(स) मगध साम्राज्य की स्थापना किसने की थी ?
उत्तर:
मगध साम्राज्य की स्थापना बिम्बिसार ने की थी।

(द) महाजनपद काल के चार प्रमुख नगरों के नाम लिखिए।
उत्तर:
उज्जयनी, श्रावस्ती, अयोध्या, काशी, कौशाम्बी आदि।

(य) अजातशत्रु कौन था ?
उत्तर:
अजातशत्रु बिम्बिसार का पुत्र था।

(र) महाजनपद किसे कहते हैं ?
उत्तर:
बड़े एवं शक्तिशाली जनपदों को महाजनपद कहा जाता था। महाजनपदों में से एक ‘अवंति’ मध्य प्रदेश में था।

(ल) आहत सिक्के किसे कहते हैं ?
उत्तर:
महाजनपद काल के जो सिक्के प्राप्त हुए हैं वे ताँबे या चाँदी के होते थे। इन्हें ही आहत या ठप्पे लगे (पंचमार्क) सिक्के कहते हैं।

(व) गणसंघ तथा जनपद क्या हैं ?
उत्तर:
गणसंघ-ऐसे राज्य जहाँ वंशागत राजा नहीं होते थे ‘गणसंघ’ कहलाते थे। गणसंघ के राजा को जनता चुनती थी। मिथिला के वज्जि, कपिलवस्तु के शाक्य प्रमुख गणसंघ थे।

जनपद:
उत्तर:
जनपद से आशय है ‘मनुष्य के बसने का एक क्षेत्र’।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) बिम्बिसार कौन था ? उसने अपना साम्राज्य विस्तार कैसे किया ?
उत्तर:
बिम्बिसार लगभग 544 ई. पू. में मगध का राजा बना।
उसने अपने राज्य को शक्तिशाली बनाने के लिए निम्नलिखित उपाय किये –

  • उसने पड़ोसी राज्यों को अपना मित्र बनाया।
  • पड़ोसी राजघराने में विवाह सम्बन्ध स्थापित किए।
  • उसने गंगा नदी पर अधिकार कर लिया। यहाँ से नावों द्वारा व्यापार करने में सुविधा हो गई।
  • उसने अंग राज्य को जीता तथा गंगा तट के प्रमुख बन्दरगाह चम्पा पर अधिकार कर लिया। इससे मगध का दक्षिण भारत के साथ मसाले और मणि-माणिक का व्यापार होने लगा।
  • मगध में लोहे के भण्डारों का उपयोग करके बिम्बिसार ने हथियारों तथा औजारों का निर्माण कराया। इन उपायों से मगध अत्यन्त शक्तिशाली राज्य बन गया।

(ब) मगध साम्राज्य के विस्तार के प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर:
मगध साम्राज्य के विस्तार के कारण निम्नलिखित हैं –

  • मगध क्षेत्र की भूमि उपजाऊ थी।
  • मगध क्षेत्र में लोह के पर्याप्त भण्डार थे, इससे सेना को हथियार बनाने में मदद मिली।
  • गंगा नदी में नौकाओं से व्यापार होता था। अत: व्यापारी भी दूर-दूर तक आते-जाते थे।

(स) गौतम बुद्ध का जीवन परिचय लिखते हुए उनके प्रमुख उपदेश लिखिए।
उत्तर:
गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। नेपाल के तराई क्षेत्र में लुंबिनी वन नामक स्थान पर 563 ई. पू. इनका जन्म हुआ था। बचपन से ही गौतम का मन ध्यान और आध्यात्मिक चिन्तन की ओर था। 29 वर्ष की आयु में आप ज्ञान प्राप्त करने के लिए घर से निकल पड़े। सात वर्षों तक भ्रमण करने के पश्चात् बोध गया स्थान में एक पीपल के वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। तभी से आप ‘बुद्ध’ कहे जाने लगे। ज्ञान प्राप्त करने के बाद बुद्ध ने अनेक वर्षों तक अपने ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया। 483 ई. पू. वैशाख पूर्णिमा को कुशीनगर में बुद्ध का देहावसान हुआ।

बुद्ध के उपदेशों का सार उनके चार आर्य सत्य हैं जो निम्न प्रकार हैं –

  • संसार दुःख से भरा है-बुद्ध के अनुसार संसार दुःख से भरा है। सब कुछ दुःखमय है।
  • दुःख का कारण-सब दुःखों का कारण मनुष्य की इच्छाएँ हैं।
  • दुःख का निरोध-मनुष्य दुःख से छुटकारा पा सकता है। जन्म-मरण के बंधनों से छुटकारा पाना ही जीवन का उद्देश्य है।
  • दुःख से छुटकारा पाने के साधन-दुःख से छुटकारा पाने का साधन ‘अष्टांगिक’ मार्ग-शुद्ध विचार, शुद्ध संकल्प, शुद्ध वाणी, शुद्धध्यवहार, शुद्ध जीवन, शुद्ध ध्यान, शुद्ध समाधि का पालन करना है।

(द) महावीर स्वामी का जीवन परिचय लिखते हुए उनकी प्रमुख शिक्षाओं को लिखिए।
उत्तर:
महावीर स्वामी का जन्म वैशाली नामक गणराज्य में हुआ था। इनके बचपन का नाम वर्धमान था। सत्य की खोज के लिए वे 30 वर्ष की उम्र में ही घर छोड़ गए। 12 वर्ष तक भटकने के बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। इन्होंने जैन धर्म चलाया।
महावीर स्वामी की शिक्षाएँ निम्नलिखित थी –

  • हिंसा (जीव हत्या) कभी नहीं करनी चाहिए।
  • सत्य का पालन करो।
  • चोरी मत करो।
  • धन का संचय नहीं करना चाहिए।
  • ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

(य) महाजनपदयुगीन प्रशासन व जीवन शैली के बारे में लिखिए।
उत्तर:
महाजनपदयुगीन प्रशासन-महाजनपद युग में राजा का पद बहुत शक्तिशाली था। वह राज्य का प्रशासन आमान्य (मंत्री), पुरोहित (धर्मगुरु), संग्रत्री (कोषाध्यक्ष), बलि साधक (कर वसूलने वाले),शौल्किक (चुंगी वसूलने वाला), सेनापति, ग्रामीण आदि के द्वारा चलाता था। राजा का परामर्श ‘परिषद’ देती थी। किसानों को कर देना पड़ता था। जीवन शैली-महाजनपद युग में समाज में चार वर्ण थे। कुछ जातियों का भी जन्म हो गया था। जैसे बढ़ई, सुनार, लुहार आदि। एक व्यवसाय से जुड़े लोगों को ‘श्रेणी’ कहा गया। इस काल में बौद्ध धर्म व जैन धर्म का उदय हुआ।

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प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(अ) नन्दवंश के शासन काल में …………. का भारत पर आक्रमण हुआ।
(ब) शिशुनाग …………… का शासक था।
(स) महावीर का जन्म …………. में हुआ था।
उत्तर:
(अ) सिकन्दर
(ब) काशी
(स) वैशाली गणराज्य।

प्रश्न 4.
कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(अ) बिम्बिसार वंश का था। (हर्यंक / मौर्य)
(ब) चण्डप्रद्योत महाजनपद का शासक था। (अवन्ति / अंग)
(स) बुद्ध का जन्म नामक स्थान पर हुआ था। (लुंबिनी / वज्जि)
उत्तर:
(अ) मौर्य
(ब) अवन्ति
(स) लुंबिनी

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 9 हड़प्पा सभ्यता

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 9 हड़प्पा सभ्यता

MP Board Class 6th Social Science Chapter 9 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न:
पाठ्य पुस्तक पृष्ठ संख्या 50 पर दिये गये मानचित्र को देखकर पता लगाओ कि कौन-सी सभ्यता किन-किन नदियों के किनारे पर विकसित हुई ? जानकारी को नीचे लिखिए
उत्तर:
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 9 हड़प्पा सभ्यता

MP Board Class 6th Social Science Chapter 9 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(अ) हड़प्पा सभ्यता में किस पेड़ की पूजा के प्रमाण मिले हैं ?
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता में पीपल के वृक्ष की पूजा के प्रमाण मिले हैं।

(ब) हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख चार स्थलों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • मोहनजोदड़ो
  • हड़प्पा
  • रोपड़
  • लोथल।

(स) नदी घाटी सभ्यता नदियों के किनारे ही क्यों विकसित हुई ?
उत्तर:
आदि मानव हमेशा वहीं बसते थे जहाँ पीने के लिए स्वच्छ जल, खाने के लिए भरपूर भोजन और निवास के लिए सुरक्षित स्थान आसानी से उपलब्ध हो। नदियों के किनारे इन तीनों आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से होने के कारण विश्व की प्राचीनतम सभ्यताएँ नदियों के किनारे ही विकसित हुईं।

(द) हड़प्पा सभ्यता के शिल्प व तकनीकी ज्ञान के बारे में लिखिए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता कांस्य युग की सभ्यता थी। हड़प्पा सभ्यता के लोग कांसा बनाना जानते थे। खुदाई से प्राप्त वस्तुओं के आधार पर पता चलता है कि इस सभ्यता के लोगों ने धातुओं के गलाने, ढालने और सम्मिश्रण की कला में विशेष उन्नति की थी। बर्तन बनाने, खिलौने बनाने और मोहरों के निर्माण में ये लोग पारंगत थे। खुदाई में मिली कांसे की नर्तकी उनकी मूर्तिकला का सुन्दर नमूना है। स्पष्ट है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग शिल्प व तकनीकी ज्ञान में बहुत आगे थे।

(य) हड़प्पा सभ्यता में कौन-कौन सी फसलें उगाई जाती थीं?
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता में गेहूँ, जौ, सरसों, कपास, मटर, तिल की फसलें उगाई जाती थीं।

(र) सिन्धु घाटी सभ्यता की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं ?
उत्तर:
सिन्धु घाटी सभ्यता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  • सिन्धु घाटी की सभ्यता एक शहरी सभ्यता थी।
  • इस सभ्यता की प्रमुख विशेषता उसकी नगर योजना प्रणाली थी।
  • सिन्धु घाटी की जल निकास प्रणाली अद्वितीय थी।
  • मोहनजोदड़ो में सार्वजनिक विशाल स्नानागार था जो उस सभ्यता का महत्त्वपूर्ण निर्माण माना जाता है।
  • इस सभ्यता के लोग गेहूँ, जौ, सरसों, कपास व तिल आदि की फसलें उगाते थे।
  • इस सभ्यता में धातुओं के गलाने, ढालने और सम्मिश्रण की कला उन्नत थी।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) हड़प्पावासियों की नगर रचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता की सबसे प्रमुख विशेषता उसकी – नगर योजना प्रणाली थी। नगर अधिकतर दो अथवा तीन भागों में बँटे थे। सबसे सुरक्षित स्थान किला या दुर्ग कहलाता था। यहाँ उच्च वर्ग का परिवार रहता होगा। मध्यम व निचले भाग में मध्यम वर्ग व निम्न वर्ग का निवास था। इन नगरों में सड़कें पूरी सीधी थीं जो एक-दूसरे को लम्बवत् काटती थीं। हड़प्पा सभ्यता के नगरों में कोठार (अनाज भरने के गोदाम) का महत्वपूर्ण स्थान था।

मोहनजोदड़ो का सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल विशाल स्नानागार है। यह 11 88 मीटर लम्बा, 7.01 मी चौड़ा और 2.43 मीटर गहरा है। इसके दोनों सिरों पर तल तक सीढ़ियाँ बनी हैं। पास में कपड़े बदलने के कक्ष हैं। स्नानागार का फर्श पक्की ईंटों का बना है। पास के एक कमरे में बड़ा-सा कुआँ बना है। सम्भवतः यह स्नानागार किसी धार्मिक अनुष्ठान सम्बन्धी स्नान के लिए बना होगा। इसके अलावा भी हर छोटे-बड़े मकान में आँगन (प्रांगण) और स्नानागार होता था।

(ब) हड़प्यावासियों के धार्मिक विश्वासों के बारे में आप क्या जानते हैं ? लिखिए।
उत्तर:
हड़प्पावासी देवी उपासना करते थे। कुछ पुराविदों ने पशुपति (शिव) की उपासना करने की बात भी कही है। हड़प्पा में पक्की मिट्टी व पत्थर पर बने लिंग और योनि के अनेक प्रतीक मिले हैं। इसके अलावा कमण्डल, यज्ञवेदी, स्वास्तिक आदि के अवशेष हड़प्पा सभ्यता के लोगों के धार्मिक विचारों व क्रिया – कलापों की जानकारी प्रदान करते हैं। कूबड़ वाले साँड़ की मृणमूर्ति तथा अंकन कई मुहरों पर मिलता है। उत्खनन में ताबीज बड़ी संख्या में मिले हैं। शायद हड़प्पावासी भूत-प्रेतों में विश्वास कर उनसे रक्षा के लिये ताबीज पहनते थे। हड़प्पा सभ्यता में पीपल के वृक्ष की पूजा के प्रमाण मृणमुहरों तथा पात्रों पर मिलते हैं।

(स) हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों को लिखिए।
उत्तर:
हड़प्पा के पतन के कारण निम्नलिखित हैं –

  • भूकम्प आने के कारण सम्भवतः सिंधु नदी का मार्ग बदल गया होगा और हड़प्पा सभ्यता के नगर भूस्खलन से जमीन में दब गये होंगे।
  • सम्भवतया आर्यों के आक्रमण ने इस सभ्यता को नष्ट कर दिया होगा।
  • बढ़ते हुए रेगिस्तान के कारण इस सभ्यता का पतन हो गया होगा।
  • सिंधु नदी की बाढ़ से इस सभ्यता का अन्त हो गया होगा।

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प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(अ) मोहनजोदड़ो का सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल विशाल …….है। (गोदाम/स्नानागार)
(ब) हड़प्पा सभ्यता ………….. सभ्यता है। (नगरीय/ग्रामीण)
(स) कांसे की नर्तकी हड़प्पा सभ्यता की …………’ का सर्वश्रेष्ठ नमूना है। (मूर्तिकला/वास्तुकला)
(द) कूबड़ वाले साँड का अंकन कई ………….. पर मिलता है। (भवनों/मुहरों)
(य) हड़प्पावासियों की लिपि …………. लिपि थी। (देवनागरी/चित्र)
(र) हड़प्पा सभ्यता में …………. व पर्यावरण शुद्धि पर अधिक ध्यान दिया गया था। (गंदगी/साफ-सफाई)
उत्तर:
(अ) स्नानागार
(ब) नगरीय
(स) मूर्तिकला
(द) मुहरों
(य) चित्र
(र) साफ-सफाई

प्रश्न 4.
नदी घाटी और उनमें विकसित सभ्यताओं की सही जोड़ी मिलाओ –
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 9 हड़प्पा सभ्यता img 2

उत्तर:
(अ) (ii) मिश्र की सभ्यता
(ब) (iv) मेसोपोटामिया की सभ्यता।
(स) (i) मोहनजोदड़ो व हड़प्पा सभ्यता
(द) (iii) चीन की सभ्यता

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प्रश्न 5.
सही विकल्प चुनिए –
1. हड़प्पा सभ्यता में कौन-सी विशेषता नहीं पाई गयी?
(i) सुनियोजित नगरीय व्यवस्था
(ii) धातु गलाने व ढालने की कला
(iii) पेड़ों व गुफाओं में रहना
(iv) पशुपालन व कृषि
उत्तर:
(iii) पेड़ों व गुफाओं में रहना

2. हड़प्पावासी कौन-सी धातु का उपयोग अधिक करते थे?
(i) लोहा
(ii) ताँबा
(iii) सोना
(iv) चाँदी
उत्तर:
(ii) ताँबा

3. हड़प्पा सभ्यता के पतन के सम्भावित कारणों में से नहीं था –
(i) आग लगना
(ii) आर्यों का आक्रमण
(iii) मुगलों का आक्रमण
(iv) तेज वर्षा
उत्तर:
(iii) मुगलों का आक्रमण

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.6

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.6

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प्रश्न 1.
निम्न समीकरणों को हल कीजिए –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.6 img-1
हल:
1. \(\frac{8x-3}{3x}\) = 2
दोनों पक्षों को 3x से गुणा करने पर,
\(\frac{8x-3}{3x}\) x 3x = 2 x 3x
या 8x – 3 = 6x
या 8x – 6x = 3
या 2x = 3
या x = \(\frac{3}{2}\)

2. \(\frac{9x}{7-6x}\) = 15
दोनों पक्षों को (7 – 6x) से गुणा करने पर,
\(\frac{9x}{7-6x}\) x (7 – 6x) = 15 x (7 – 6x)
या 9x = 105 – 90x
या 9x + 90x = 105
या 99x = 105
या x = \(\frac{105}{99}\) = \(\frac{35}{33}\)

3. \(\frac{z}{z+15}\) – \(\frac{4}{9}\)
दोनों पक्षों को 9 (x + 15) से गुणा करने पर,
9 (z + 15) x \(\frac{z}{z+15}\) = \(\frac{4}{9}\) – 9 (z + 15)
या 9z = 4 (z + 15)
या 9z = 4z + 60
या 9z – 4z = 60
या 5z = 60
या z = \(\frac{60}{5}\)
z = 12

4. \(\frac{3y+4}{2-6y}\) = \(\frac{-2}{5}\)
दोनों पक्षों को 5 (2 – 6y) से गुणा करने पर,
5 (2 – 6y) x \(\frac{3y+4}{2-6y}\) = \(\frac{-2}{5}\) x 5 (2 – 6y)
या 5 (3y+4) = – 2 (2 – 6y)
या 15y + 20 = – 4 + 12y
या 15y – 12y = – 4 – 20
या 3y = – 24
या y = \(\frac{-24}{3}\)
y = – 8

5. \(\frac{7y+4}{y+2}\) = \(\frac{-4}{3}\)
दोनों पक्षों को 3 (y + 2) से गुणा करने पर,
3 (y+2) x \(\frac{7y+4}{y+2}\) = \(\frac{-4}{3}\) x 3 (y + 2)
या 3 x (7y + 4) = – 4 (y + 2)
या 21y + 12 = – 4y – 8
या 21y + 4y = – 8 – 12
या 25y = – 20
या y = \(\frac{-20}{25}\) = \(\frac{-4}{5}\)

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प्रश्न 2.
हरी और हैरी की वर्तमान आयु का अनुपात 15 : 7 है। अब से 4 वर्ष बाद उनकी आयु का अनुपात 3 : 4 हो जाएगा। उनकी वर्तमान आयु ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि हरी और हैरी की वर्तमान आयु क्रमशः 5x व 7x वर्ष है।
5 वर्ष बाद हरी की आयु = (5x + 4) वर्ष
तथा हैरी की आयु = (7x + 4) वर्ष
अब, प्रश्नानुसार,
\(\frac{5x+4}{7x+4}\) = \(\frac{3}{4}\)
या 4 x (5x + 4) = 3 (7x + 4)
या 20x + 16 = 21x + 12
या 20x – 21x = 12 – 16
या -x = – 4 ⇒ x = 4
∴ हरी की वर्तमान आयु = 5 x 4 वर्ष = 20 वर्ष तथा हैरी की वर्तमान आयु = 7 x 4 = 28 वर्ष

प्रश्न 3.
एक परिमेय संख्या का हर उसके अंश से 8 अधिक है। यदि अंश में 17 जोड़ दिया जाए तथा हर में से 1 घटा दिया जाए तब हमें \(\frac{3}{2}\) प्राप्त होता है। वह परिमेय संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि संख्या का अंश = x है,
हर = x = 8
अब, प्रश्नानुसार,
या \(\frac{x+17}{(x+8)-1}\) = \(\frac{3}{2}\)
या \(\frac{x+17}{x+7}\) = \(\frac{3}{2}\)
या 2 (x + 17) = 3 (x + 7)
या 2x + 34 = 3x + 21
या 2x – 3x = 21 – 34
या – x = – 13
या x = – 13
\(\frac{x}{x+8}\) = \(\frac{13}{13+8}\) = \(\frac{13}{21}\)
∴ अभीष्ट परिमेय संख्या= \(\frac{13}{21}\)

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 19 गुरुदक्षिणा (पद्यम्) (रघुवंशात्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 19 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) वरन्तन्तुशिष्यः कः आसीत्? (वरतन्तु का शिष्य कौन था?)
उत्तर:
कौत्सः (कौत्स)

(ख) अनर्घशीलः कः? (निश्छल व्यवहार किसका था?)
उत्तर:
रघुः (रघु का)

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(ग) वरतन्तुशिष्यः स्वार्थोपपत्तिं प्रति कीदृशः सञ्जातः? (वरतन्तु शिष्य अपने कार्य की सिद्धि के लिए कैसा हो गया?)
उत्तर:
दुर्बलाशः (निराश)

(घ) गुरुणा किम् अचिन्तयित्वा उक्तः? (गुरु ने क्या विचार न करके कहा?)
उत्तर:
अर्थकार्यम् (गरीबी को)

(ङ) रघुः कस्मात् धनं प्राप्तुम् इष्टवान्? (रघु ने किससे धन लेने की इच्छा की?)
उत्तर:
कुबेरात् (कुबेर से)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) रघुः कस्मात् हेमराशिम् लब्धवान्? (रघु ने किससे सुवर्ण राशि प्राप्त की?)
उत्तर:
रघुः कुबेरात् हेमराशिम् लब्धवान्। (ग्घु ने कुबेर से स्वर्ण राशि प्राप्त की।)

(ख) वरतन्तुः कौत्सं कियत् धनं याचितवान्? (वरतन्तु ने कौत्स से कितना धन माँगा?)
उत्तर:
वरतन्तुः कौत्सं चतुर्दशः कोटीः धनं याचितवान्। (वरतन्तु ने कौत्स से 14 करोड़ स्वर्ण मुद्राएं माँगी।)

(ग) विश्वजिति अध्वरे रघुः कीदृशः सञ्जातः? (विश्वजित् यज्ञ में रघु कैसा हो गया?)
उत्तर:
विश्वजिति अध्वरे रघुः निःशेषविश्राणितकोष जातम्। (विश्वजित् यज्ञ की दक्षिणा में रघु रिक्त खजाने वाला हो गया।)

(घ) रघुः गां कीदृशीम् अमन्यत्? (रघु ने पृथ्वी को कैसा माना?)
उत्तर:
रघुः गाम् आन्तसाराम् अमन्यत्। (रघु ने पृथ्वी को सारहीन माना।)

(ङ) तौ द्वौ कस्य अभिनन्द्यसत्वौ अभूताम्? (वे दोनों किसके अभिनन्दन के पात्र हुए?)
उत्तर:
तौ द्वौ साकेतनिवासिनः जनस्य अभिनन्धसत्वौ अभूताम्। (वे दोनों साकेत (अयोध्या) में रहने वाले लोगों के अभिनन्दन का पात्र बने।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत। (नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) रघोः समीपं कः किमर्थम् आगतः? (रघु के पास कौन और क्यों आया?)
उत्तर:
रघोः समीपं कौत्सः गुरुदक्षिणाय चतुदर्शः कोटीः सुवर्णराशिः ग्रहीतुम् आगतः। (रघु के पास कौत्स गुरु दक्षिणा के लिए 14 करोड़ स्वर्ण राशि लेने के लिए आया था।)

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(ख) कीदृशः रघुः कस्मिन् पात्रे अर्घ्यं निघाय अतिथिं प्रत्युज्जगाम? (कैसा रघु किस पात्र में अर्घ्य लेकर अतिथि के पास आया?)
उत्तर:
अनर्घशीलः यशस्वी आतिथेयः च रघुः मृण्मये पात्रे अर्घ्य निधाय अतिथिं प्रत्युजंगाम। (निश्छल व्यवहार वाला, यशस्वी और अतिथि सेवी रघु मिट्टी के पात्र में अर्घ्य लेकर अतिथि के पास गया।)

(ग) वारं-वारं प्रार्थयन्तं कौत्सं गुरुः किमुक्तवान्? (बार-बार प्रार्थना करने पर कौत्स को गुरु ने क्या कहा?)
उत्तर:
वारं-वारं प्रार्थयन्तं कौत्सं गुरुः उक्तवान् यत्-‘वित्तस्य चतस्रः दश च कोटीः मे आहर’ इति। (वार-बार प्रार्थना करने पर कौत्स को गुरु ने कहा-’14 करोड़ (स्वर्ण राशि) का धन मुझे दो।’)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत-(दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(मनः, द्वावपि, मा, अर्थम्, मृण्मये)
(क) रघुः ………….. पाने अर्घ्य दत्तवान्।
(ख) तव अभिगमेन मे…………..न तृप्तम्।
(ग) ………….. अभूताम् अभिनन्यसत्वौ।
(घ) मे परिवादनवावतारः ………….. भूत्।
(ङ) रघुः कुबेरात् ………….. निष्कष्टुम् चकमे।
उत्तर:
(क) मृण्मये
(ख) मनः
(ग) द्वावपि
(घ) मा
(ङ) अर्थम्

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत्-(उचित क्रम से जोडिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 1
उत्तर:
(क) 4
(ख) 5
(ग) 1
(घ) 3
(ङ) 2

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘न’ इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘त्र’ लिखिए-)
(क) कुबेरः रघु धनं दत्तवान्।
(ख) रघुः हिरण्मयपात्रे कौत्साय अर्घ्यं दत्तवान्।
(ग) कौत्सः धनं स्बीकर्तुं गुरुसमीपं गतवान्।
(घ) कौत्सः गुरुदक्षिणार्थी आसीत्।
(ङ) रघुः वरतन्तुशिष्यः आसीत्।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न।

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प्रश्न 7.
अधोलिखितशब्दानां विभक्तिं वचनं च लिखत
(नीचे लिखे शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 3

प्रश्न 8.
अधोलिखितशब्दानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत।
(नीचे लिखे शब्दों के सन्धि-विच्छेद कर सन्धि का नाम लिखिए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 5

प्रश्न 9.
अधोलिखितशब्दानां पर्यायशब्दान् लिखत
(नीचे लिखे शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए-)
यथा- वित्तम् – धनम्
(क) अध्वरः
(ख) क्षितीशः
(ग) गुरुः
(घ) याचकः
उत्तर:
(क) अध्वरः – यज्ञः
(ख) क्षितीशः – भूपतिः
(ग) गुरुः – आचर्थ
(घ) याचकः – दक्षिणार्थी

प्रश्न 10.
अव्ययः वाक्यनिर्माणं कुरुत (अव्ययों से वाक्य बनाइए-)
यथा- अपि – अहम् अपि पठामि।
(क) इति
(ख) न
(ग) प्रति
(घ) इव
उत्तर:
(क) इति – सः कथयति-‘अहं न गच्छामि’ इति। (वह कहता है-मैं नहीं जा रहा हूँ।)
(ख) न – रामः भेजनं न खादति। (राम भोजन नहीं खाता है।)
(ग) प्रति – विद्यार्थी ग्रहं प्रति गच्छति। (विद्यार्थी घर की ओर जाता है।)
(घ) इव – सा मयूरः इव नृत्यति। (वह मोर की तरह नाचती है।)

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प्रश्न 11.
प्रदत्तश्लोकान्वयस्य पूर्ति कुरुत-(दिए श्लोक का अन्वय पूरा कीजिए)
निर्बन्धसञ्जातरुषा ………..अर्थकार्यम्………….अहं वित्तस्य चतस्रः
दश च कोटीः मे………….इति……….उक्तः
उत्तर:
निर्बन्धसञ्जातरुषा गुरुणा अर्थकाय॑म् अचिन्तयित्वा अहं वित्तस्य चतस्रः
दश च कोटीः मे आहर इति विद्यापरिसङ्खयया उक्तः। योग्यताविस्तारः

पाठे आगतानां श्लोकानां सस्वरगायनं कुरुत।
(पाठ में आए श्लोकों को सस्वर गाइए।)

रघोः अन्यान् आदर्शगुणान् अन्विष्य लिखत।
(रघु के अन्य आदर्श गुणों को ढूंढ़ कर लिखो।)

गुरुदक्षिणा पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में ‘गुरुदक्षिणा’ पर आधारित कछ श्लोक दिए गए हैं, जिन्हें महाकवि कालिदास जी द्वारा रचित महाकाव्य ‘रघुवंश’ से लिया गया है। इनमें गुरु दक्षिणा के लिए आए कौत्स और देने वाले महाराज रघु के उदात्तभाव को दर्शाया गया। याचक आवश्यकता से अधिक नहीं लेना चाहता, पर दातां सब कुछ देना चाहता है। न लेने वाले का उदात्त भाव महाकवि द्वारा इन श्लोकों में सुन्दरता से वर्णित किया गया है।

गुरुदक्षिणा पाठ का अनुवाद

1. तमध्वरे विश्वनिति क्षितीशं निःशेषविश्राणितकोष जातम्।
उपात्तविद्यो गुरुदक्षिणार्थी कौत्सः प्रपेदे वरतन्तुशिष्यः॥२॥

अन्वयः :
विश्वजिति अध्वरे निःशेषविश्राणितकोषजातम् तं क्षितीशम् उपात्तविधिः गुरुदक्षिणार्थी वरतन्तुशिष्यः कौत्स प्रपेदे।

शब्दार्थाः :
विश्वजिति अध्वरे-विश्वजित् यज्ञ की दक्षिणा में-as offerings in world winning sacrifice; निःशेषविश्राणितकोषजातम्-दान में दिए जाने के कारण जिसका खजाना रिक्त हो गया है।-exchequer empty on being given in charity; तं क्षितीशम्-उस रघु के पास-to that lord of earth Raghu; उपात्तविद्यः-विद्या पढ़करhaving sought education; वरतन्तुशिष्यः कौत्सः-वरतन्तु के शिष्य कौत्स-Kautsa, the disciple of Vartantu; प्रपेदे-आए-approached.

अनुवाद :
विश्वजित् यज्ञ की दक्षिणा में दिए जाने के कारण जिसका खजाना रिक्त हो गया है, उस रघु के पास विद्या पढ़कर गुरुदक्षिणा के लिए वरतन्तुशिष्य कौत्स आए।

English : Kautsa, the son of Vartantu approached Raghu who had offered every thing in charity.

2. स मृण्मये वीतहिरण्मयत्वात्पात्रे निधायार्थ्यमनर्घशीलः।
श्रुतप्रकाशं यशसा प्रकाशः प्रत्युज्जगामातिथिमातिथेयः॥२॥

अन्वययः :
अनर्घशीलः यशसा प्रकाशः आतिथेयः सः वीतहिरण्मयत्वात् मृण्मये पात्रे अर्ध्यम् निधाय श्रुतप्रकाशम् अतिथिम् प्रत्युज्जगाम्।।

शब्दार्थाः :
अनर्घशीलः-निश्छल व्यवहार/असाधारण स्वभाव वाला- fraudless conduct of extra-ordinary nature; यशसा प्रकाशः-यशस्वी-illustrious, reputed; सः-वह (रघु)-he (Raghu) वीतहिरण्मयत्वात्-सुवर्ण पात्रों के अभाव में-in the absence of golden utensils; मृण्मये पात्रे-मिट्टी के पात्र में-in earthen-wares; श्रुतप्रकाशम्-वेदाध्ययन से देदीप्यमान (कौत्स के)-illumined with the studyofvedas of Kautsa; प्रत्युज्जगाम-पास आए-approached.

अनुवाद :
निश्छल व्यवहार वाले, यशस्वी और अतिथिसेवी वह सुवर्ण पात्रों के अभाव में मिट्टी के पात्र में अर्ध्य लेकर वेदाध्ययन से देदीप्यमान् अतिथि के पास आए।

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English :
The deceitless, illustrious and hospitable king offered ‘Arghya’ in earthenwares and approached the learned guest.

3. तवाहतो नाभिगमेन तृप्तं मनो नियोगक्रिययोत्सुकं मे।।
अप्याज्ञया शासितुरात्मना वा प्राप्तोऽसि सम्भावयितुं वनान्माम्॥३॥

अन्वयः :
अर्हतः तव अभिगमेन मे मनः न, तृप्तम्, किन्तु नियोगक्रियया उत्सुकम् शासितुः आज्ञया अपि आत्मना वा माम् सम्भावयितुम् वनात् प्राप्तोऽसि।

शब्दार्थाः :
अर्हतः -पूज्य के (आपके)-worthy of worship; अभिगमेन-आगमन मात्र से-by merevisit; तृप्तम्-सन्तुष्ट-satisfied; नियोगक्रियया-दान की क्रिया से-by the action of charity; उत्सुकम्-उत्सुक को (मुझ रघु को)-me who am curious, शासितुः-गुरु को-of the guru, आत्मना-स्वेच्छा से-with own desire (of your own will), सम्भावयितुम्-कृतार्थ करने के लिए-to oblige.

अनुवाद :
आप जैसे पूज्य के आने मात्र से मेरा मन सन्तुष्ट नहीं हुआ है। मैं दान का काम करने के लिए उत्सुक हूँ। क्या आप वन से अपने गुरु की आज्ञा से मुझे कृतार्थ करने आए हैं या स्वयं अपनी इच्छा से?

English :
Your visit alone has not gratified me. I have a desire to serve you with an act of charity. Have you came to oblige with your preceptors permission or of your own free will?

4. इत्यर्थ्यपात्रानुमितव्ययस्य रघोरुदारामपि गां निशम्य।
स्वार्थोपपत्ति प्रति दुर्बलाशस्तमित्यवोचद्वरतन्तुशिष्यः॥4॥

अन्वयः :
अर्घ्यपात्रानुमितव्ययस्य रघोः इति उदारम् अपि गाम् निशम्य वरतन्तुशिष्यः स्वार्थोपपत्तिम् प्रति दुर्बलाशः सन् तम् इति अवोचत्।

शब्दार्थाः :
अर्घ्यपात्रानुभितव्ययस्य–अर्घ्यपात्र से (यज्ञ में हुए) व्यय को व्यक्त करने act-expressing the expenditure incurred on sacrifice through Arghya vessels.; गाम्-वाणी को-speech, voice; स्वार्थोपपत्तिम्-अपनी कार्य सिद्धि में-in fulfilment of own desire. दुर्बलाशः सन्-निराश होते हुए-getting desperate, तम्-उस रघु से-him (Raghu), अवोचत्-कहा-said.

अनुवाद :
इस प्रकार अर्घ्य पात्र से (यज्ञ में हुए) खर्च का अनुमान लगाए हुए तथा रघु की उदार वाणी को सुनने पर भी अपने मनोरथ की सिद्धि की दुर्बल आशा रखते हुए, वरतन्तु का शिष्य (कौत्स) उनसे इस प्रकार बोला।

English :
Kautsa calculated the expenditure on sacrifice but heard Raghu’s generous talk-Got desperate about the fulfilment of his wish.

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5. समाप्तविद्येन मया महर्षिवैिज्ञापितोऽभूद्गुरुदक्षिणायै।
स मे चिरायस्खलितोपचारां तां भक्तिमेवागणयत्पुरस्तात्॥5॥

अन्वय :
समाप्तविद्येन मया महर्षिः गुरुदक्षिणायै विज्ञापितः अभूद् स च चिराय अस्खलितोपचारां ताम् भक्तिम् एव पुरस्तात् अगणयत्।

शब्दार्थाः :
समाप्तविद्येन मया-समस्त विद्याओं को पढ़ने के बाद मैंने-after learning all education,गुरुदक्षिणायैः-गुरुदक्षिणा के लिए-for fee topreceptor; विज्ञापितः-प्रार्थना की-requested; चिराय-बहुत दिनों तक-foralong time; अस्खलितोपचाराम्-नियमपूर्वक की गई-done regularly, तां भक्तिम्-उस गुरु सेवा को-that service to guru, पुरस्तात्-श्रेष्ठ दक्षिणा-spureme (excellent) fee. अगणयत्-गिना/माना-considered.

अनुवाद :
समस्त विद्याओं को पढ़ने के बाद मैंने महर्षि से गुरुदक्षिणा देने के लिए प्रार्थना की और उन्होंने (गुरु ने) बहुत दिनों तक नियमपूर्वक की गई उनकी भक्ति को ही श्रेष्ठ दक्षिणा माना।

English :
Kausta finished his education-requested the Maharishi to name the fee. The Maharishi considered his (Kautsa’s) services with devotion as supreme fee.

6. निर्बन्धसञ्जातरुषाऽर्थकाय॑मचिन्तयित्वा गुरुणाऽहमुक्तः।
वित्तस्य विद्यापरिसङ्घयया मे कोटीश्चतस्रो दश चाहरेति।।6।

अन्वय :
निर्बन्धसञ्जातरुषा गुरुणा अर्थकार्यम् अचिन्तयित्वा अहम् ‘वित्तस्य चतस्रः दश च कोटीः मे आहर’ इति विद्यापरिसङ्ख्यया उक्तः।

शब्दार्थाः :
निर्बन्धसञ्जातरुषा-वार-बार (गुरुदक्षिणा के लिए) आग्रह करने पर क्रोध #-on account of anger aroused by repeated insistence for offer of fee, अर्थकार्यम्-दरिद्रता/गरीबी को-poverty; अचिन्तयित्वा-विचार न करके-not considering; वित्तस्य-धन की/मुद्रा की-of money; चतस्रः दश च कोटी:-चौदह करोड़-fourteen crores, आहर-दो-bring, विद्यापरिसङ्ख्यया-चौदह विद्याओं की सङ्ख्या के मान से-in exchange of fourteen types of education.

अनुवाद :
बार-बार आग्रह करने पर क्रोध से गुरु के द्वारा मेरी गरीबी का विचार न करके मुझे कहा गया कि चौदह विद्याओं की सङ्ख्या के मान (हिसाब) से ’14 करोड़ स्वर्ण मुद्राएँ मुझे दो।’

English :
Kautssa’s repeated insistence for fee aroused guru’s anger. Asked him to bring fourteen crores.

7. गुर्वर्थमर्थी श्रुतपारदृश्वा रघोः सकाशादनवाप्य कामम्।
गतो वदान्यान्तरमित्ययं मे मा भूत्परिवादनवावतारः॥7॥

अन्वय :
‘श्रुतपारदृश्वा गुर्वर्थम् अर्थी रघोः सकाशात् कामम् अनवाप्य वदान्यान्तरम् गतः’ इति अयम् मे परिवादनवावतारः मा भूत्।

शब्दार्थाः :
श्रुतपारदृश्वा-शास्त्रों में पारङ्गत-learned in seriptures, गुर्वर्थम्-गुरु के लिए-for his guru; अर्थी-गुरुदक्षिणायाचक-asking for offering fee to guru; सकाशात्-पास से-from; कामम्-मनोरथ को-heart’s desire, longing, अनवाप्य-पूर्ण न होने पर-not getting fulfilled, वदान्यान्तरम्-अधिक दान देने वाले दूसरे दानी के पास-to another more generous fellow, परिवादनवावतारः-निन्दा का नया अवतार-object of censure.

अनुवाद :
शास्त्रों में पारंगत एक विद्यार्थी की गुरु के लिए दक्षिणा देने की इच्छा रघु के पास पूरी नहीं होने के कारण उसे किसी दूसरे अधिक दानवीर के पास जाना पड़ा। इस प्रकार की निन्दा का मैं पात्र नहीं बनूं।

English :
A learned scholar was asking from Raghu about fee for his teacher. He had to go to another generous fellow when his desire was not fulfilled there. It was a matter of censure for Raghu.

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8. तथेति तस्थावितथं प्रतीतः प्रत्यग्रहीत्सङ्गरमग्रजन्मा।
गामान्तसारां रघुरप्यवेक्ष्य निष्क्रष्टुमर्थं चकमे कुबेरात्॥8॥

अन्वय :
अग्रजन्मा प्रतीतः सन् तस्य अवितथम् सङ्गरम् इति प्रत्यग्रहीता, तथा रघु अपि गाम् आन्तसाराम् अवेक्ष्य कुबेरात् अर्थम् निष्क्रष्टुम चकमे।

शब्दार्थाः :
अग्रजन्मा-ब्राह्मण (कौत्स)-Brahman (Kautsa), प्रतीतः सन्-प्रसन्न होते हुए-being pleased; अवितथम्-सत्य-true; सङ्गरम्-प्रतिज्ञा को-promise; गाम्-पृथिवी को-earth, आन्तसाराम्-सारहीन-meaningless, अवेक्ष्य-समझकर-thinking, अर्थम्-धन-money, निष्क्रष्टुम-लेने की इच्छा-desire to take, चकमे-किया-showed.

अनुवाद :
ब्राह्मण ने प्रसन्न होते हुए उसकी सत्य प्रतिज्ञा को स्वीकार किया और रघु ने भी पृथ्वी को सारहीन समझकर कुबेर से धन लेने की इच्छा की।

English :
The brahmin (Kautsa) got pleased, accepted his promise-Raghu desired to get money from Kuber.

9. तं भूपतिर्भासुरहेमराशिं लब्धं कुबेरादभियास्यमानात्।
दिदेश कौत्साय समस्तमेव पादं सुमेरोरिव वज्रभिन्नम्॥9॥

अन्वय :
भूपतिः अभियास्यमानात् कुबेरात् लब्धम् वज्रभिन्नम् सुमेरोः पादम् इव स्थितम् तम् भासुरहेमराशिम् समस्तम् एव कौत्साय दिदेश।

शब्दार्थाः :
भूपतिः-रघुः-king, अभियास्यमानात्-युद्ध के लिए चढ़ाई किए जाने वाले (से)-from object of invasion for battle; कुबेरात्-कुबेर से (धन के देवता)-from kuber (god of wealth); वज्रभिन्नम्-वज्र से काटकर गिराये हुए-being severed and felled; सुमेरोः-सुमेरु के-of sumeru, पादम् इव-टुकड़े के समान-like a piece, भासुरहेमराशिम्-चमकती हुई सुवर्ण राशि (को)-shining heap of gold, दिदेश-दे दी-gave.

अनुवाद :
रघु ने युद्ध के लिए चढ़ाई किए जाने वाले (से) अर्थात् युद्ध कर के कुबेर से प्राप्त वज्र से काटकर गिराये हुए सुमेरु के टुकड़े के समान चमकती हुई सुवर्ण राशि पूरी ही कौत्स को दे दी।

English :
Raghu got money from Kuber like a piece of Sumeru mountain severed with the trident gave all to Kautsa.

10. जनस्य साकेतनिवासिनस्तौ द्वावप्यभूतामाभिनन्द्यसत्त्वौ
गुरुप्रदेयाधिकनिःस्पृहोऽर्थी नृपोऽत्रिकामादधिकप्रदश्च॥10॥

अन्वय :
तौ द्वौ अपि साकेतनिवासिनः जनस्य अभिनन्धसत्वौ अभूताम्। गुरुप्रदेयाधिकनिःस्पृहः अर्थी, अर्थिकामात् अधिकप्रदः नृपः च।

शब्दार्थाः :
तौ द्वौ-वे दोनों (दाता और याचक)-Both the donor and the aspirant, साकेतनिवासिनः जनस्य-अयोध्या निवासी लोगों का-of residents of Ayodhya; अभिनन्धसत्वौ-अभिनन्दन के पात्र-object of praise (felicitation); अभूताम्-हो गए -became; गुरुप्रदेयाधिकनिः स्पृहः-गुरुदक्षिणा से अधिक न लेने का इच्छुक-not desiring to accept more than fee for guru, अर्थी-याचक (कौत्स)-aspirant (Kautsa), अर्थिकामात्-याचक की कामना से-the desire of aspirant, अधिकप्रदः-अधिक देने वाला-donor of more, नृपः-राजा (रघु)-King (Raghu).

अनुवाद :
वे दोनों (दाता और याचक) ही अयोध्या निवासी लोगों के अभिनन्दन के पात्र बन गए। गुरुदक्षिणा से अधिक न लेने का इच्छुक (संतोषी) याचक कौत्स और याचक की कामना से अधिक देने वाला (दाता) राजा रघु।।

English :
Raghu desired to give more than what Kautsa had desired. Kautsa was not willing to accept more than fee for Guru. Both became praiseworthy in the eyes of residents of Ayodhya.

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