MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1

MP Board Class 8 Maths Chapter 3 Exercise 3.1 प्रश्न 1.
यहाँ पर कुछ आकृतियाँ दी गई हैं।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1 img-1
प्रत्येक का वर्गीकरण निम्नलिखित आधार पर कीजिए –
(a) साधारण वक्र
(b) साधारण बन्द वक्र
(c) बहुभुज
(d) उत्तल बहुभुज
(e) अवतल बहुभुज।
उत्तर:
(a) साधारण वक्र – (i), (ii), (v), (vi) और (vii)
(b) साधारण बन्द वक्र – (i), (ii), (v), (vi) और (vii)
(c) बहुभुज – (i), (ii) और (iv)
(d) उत्तल बहुभुज – (ii)
(e) अवतल बहुभुज – (i) और (iv)

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MP Board Class 8 Maths Chapter 3 प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रत्येक में कितने विकर्ण हैं?
(a) एक उत्तल चतुर्भुज
(b) एक समषड्भुज
(c) एक त्रिभुज।
उत्तर:
(a) 2, (b) 9, (c) 0 (कोई विकर्ण नहीं)।

Prashnavali 3.1 Class 8 प्रश्न 3
उत्तल चतुर्भुज के कोणों के मापों का योगफल क्या है? यदि चतुर्भुज, उत्तल न हो तो क्या यह गुण लागू होगा? (एक चतुर्भुज बनाइए जो उत्तल न हो और प्रयास कीजिए।)
उत्तर:
उत्तल चतुर्भुज के कोणों के मापों का योगफल 360° है। हाँ, यह गुण लागू होगा यदि चतुर्भुज उत्तल न हो।

Class 8 Maths Chapter 3 Exercise 3.1 Solutions In Hindi प्रश्न 4.
तालिका की जाँच कीजिए (प्रत्येक आकृति को त्रिभुजों में बाँटिए और कोणों का योगफल ज्ञात कीजिए):
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एक बहुभुज के कोणों के योग के बारे में आप क्या कह सकते हैं जिसकी भुजाओं की संख्या निम्नलिखित हो?
(a) 7
(b) 8
(c) 10
(d) n.
हल:
दी हुई तालिका से स्पष्ट है कि n भुजा वाले बहुभुज के कोणों का योग (n – 2) x 180° होगा।
(a) n = 7
∴ 7 भुजाओं वाले बहुभुज के कोणों का योग
= (7 – 2) x 180°
= 5 x 180° = 900°

(b) n = 8
∴ 8 भुजाओं वाले बहुभुज के कोणों का योग
= (8 – 2) x 180°
= 6 x 180° = 1080°

(c) n = 10
∴ 10 भुजाओं वाले बहुभुज के कोणों का योग = (10 – 2) x 180°
= 8 x 180° = 1440°

(d) यदि किसी बहुभुज में n भुजाएँ हों तो बनने वाले त्रिभुजों की संख्या (n – 2) होगी।
∴ त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग = 180°
∴ n भुजा वाले बहुभुज के कोणों का योग = (n – 2) x 180°

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Class 8 Maths 3.1 In Hindi प्रश्न 5.
समबहुभुज क्या है? एक समबहुभुज का नाम बताइए जिसमें –

  1. 3 भुजाएँ
  2. 4 भुजाएँ
  3. 6 भुजाएँ हों।

उत्तर:
समबहुभुज:
एक ऐसा बहुभुज जिसकी भुजाएँ बराबर हों तथा अन्त:कोणों के माप भी समान हों, समबहुभुज कहलाता है। समबहुभुज के बहिष्कोण भी समान होते हैं।

समबहुभुज जिसमें –

  1. 3 भुजाएँ हैं-समबाहु त्रिभुज
  2. 4 भुजाएँ हैं-वर्ग
  3. 6 भुजाएँ हैं-समषड्भुज।

Exercise 3.1 Class 8 प्रश्न 6.
निम्नलिखित आकृतियों में x (कोण की माप) ज्ञात कीजिए –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1 img-3
हल:
(a) चूँकि चतुर्भुज के चारों अन्त:कोणों का योग 360° होता है।
∴ x + 120° + 130° + 50° = 360°
या x + 300° = 360°
या x = 360° – 300° = 60°

(b) चूँकि चतुर्भुज के चारों अन्तःकोणों का योग 360° होता है।
∴ x + 70° + 60° + 90° = 360°
या x + 220° = 360°
या x = 360° – 220° = 140°

(c) दी हुई आकृति में पाँच भुजाएँ हैं। अर्थात् n = 5
∴ आकृति में, कोणों का योग = (x – 2) x 180°
= (5 – 2) x 180°
= 3 x 180° = 540°
अतः आकृति से स्पष्ट है,
m∠1+ 60° = 180°
m∠1 = 180° – 60° = 120° (सरल कोण)
और m∠2 + 70° = 180° (रेखीय युग्म)
या m∠2 = 180° – 70° = 110°
∴ m∠1 + m∠2 + x + 30° + x = 540°
या 120° + 110° + 2x + 30° = 540°
या 2x + 260° = 540°
या 2x = 540° – 260° = 280°
या x = \(\frac{280°}{2}\) = 140°

(d) चूँकि आकृति में 5 भुजाएँ हैं अर्थात् n = 5
∴ आकृति के कोणों का योग = (n – 2) x 180°
= (5 – 2) x 180°
= 3 x 180° = 540°
∴ x + x + x + x + x = 540°
या 5x = 540°
या x= \(\frac{540°}{5}\) = 108° उत्तर

Class 8 Math 3.1 In Hindi प्रश्न 7.
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(a) x + y + z ज्ञात कीजिए।
(b) x + y + z + w ज्ञात कीजिए।
हल:
(a) ∵ त्रिभुज के तीनों अन्त:कोणों के योग की माप = 180°
∴ m∠1 + 30° + 90° = 180°
या m∠1 + 120° = 180°
या m∠1 = 180° – 120° = 60°
तथा x + 90° = 180° (रेखीय युग्म)
x = 180° – 90° = 90° ……(1)
y + m∠1 = 180° (रेखीय युग्म)
या y + 60° = 180°
या y= 180° – 60° = 120°……(2)
तथा z + 30° = 180° (रेखीय युग्म)
या z = 180° – 30° = 150° ……(3)
समीकरण (1), (2) व (3) को जोड़ने पर,
x + y + z = 90° + 120° + 150°
= 360°

(b) ∵ चतुर्भुज के अन्त:कोणों का योग = 360°
∴ m∠1 + 120° + 80° + 60° = 360°
या m∠1 + 260° = 360°
या m∠1 = 360° – 260° = 100°
या x + 120° = 180° (रेखीय युग्म)
∴ x = 180° – 120° = 60° ……(1)
y+ 80° = 180° (रेखीय युग्म)
या y = 180° – 80° = 100° …….(2)
z + 60° = 180° (रेखीय युग्म)
या z = 180° – 60° = 120° …….(3)
m∠1 + w= 180° (रेखीय युग्म)
w= 180° – m∠1
= 180° – 100° = 80° …(4)
समीकरण (1), (2), (3) व (4) को जोड़ने पर, हम प्राप्त करते हैं।
x + y + z + w= 60° + 100° + 120° + 80°
या x + y + z + w= 360°

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 47

प्रयास कीजिए (क्रमांक 3.1)

8th Maths MP Board प्रश्न 1.
एक समषड्भुज लीजिए (आकृति 3.15):
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(i) बाह्य कोणों x, y, z, p, q तथा r के मापों का योग क्या है?
(ii) क्या x = y = z = p = q = r हैं? क्यों?
(iii) प्रत्येक का माप क्या है?

(a) बाह्य कोण
(b) अन्तःकोण।
(iv) इस क्रियाकलाप को निम्नलिखित के लिए दोहराएँ –
(a) एक समअष्टभुज
(b) एक सम 20 भुज।
हल:
(i) माना कि समषड्भुज ABCDEF की भुजाओं को क्रमशः बढ़ाया गया है जिससे कि बाह्य कोण x, y, z, p, q तथा r बनते हैं।
क्योंकि बाह्य कोण x और अन्त: कोण ∠a रेखीय युग्म बनाते हैं। रेखीय युग्म के कोणों का योग = 180°
x + ∠a = 180°
इसी प्रकार, y + ∠a= 180°
z + ∠a= 180°
p + ∠a = 180°
q + ∠a = 180°
r + ∠a = 180°
दोनों ओर के कोणों को जोड़ने पर, हम प्राप्त करते हैं –
x + y + z + p + q + r + ∠a + ∠a + ∠a + ∠a + ∠a + ∠a = 1080°
या x + y + z + p + q + r + (6 – 2) x 180° = 1080°
∴ x + y + z + p +q+r + 720° = 1080°
या x + y + z + p + q + r = 1080 – 720 = 360°
अतः बाह्य कोणों के मापों का योग = 360°

(ii) हाँ, x = y=z = p = q = r क्योंकि प्रत्येक (180° – a) के बराबर है।

(iii) समषड्भुज के लिए –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1 img-6
(iv) (a) सम अष्टभुज की स्थिति में, n = 8, तब
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MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 8 दशपुरीया अष्टमूर्तिः

MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 8 दशपुरीया अष्टमूर्तिः (वर्णनात्मकः)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 8 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक पद में उत्तर लिखो)
(क) अष्टमूर्तिः कुत्र प्रतिष्ठापिता अस्ति। (अष्टमूर्ति कहाँ स्थित है?)
उत्तर:
दसपुर (दसपुर (मंदसौर))

(ख) कति शैवप्रतिमाः प्रसिद्धाः सन्ति। (कितनी शिव प्रतिमा प्रसिद्ध हैं?)
उत्तर:
त्रिनः। (तीन)

(ग) पूर्वमुखे कः रसः विद्यते? (पूर्व दिशा के मुख में कौन-सा रस विद्यमान है?)
उत्तर:
शान्तरसः। (शान्त रस)

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(घ) कस्यमुखस्य शिला लोहितवर्णा वर्तते? (किस मुख वाली शिला लाल रंग की है?)
उत्तर:
पश्चिमुखस्य। (पश्चिम मुख की)।

(ङ) कश्मिन मुखे शिवः अट्टहासं कुर्वन इव प्रतिभाति? (किस मुख में शिव अट्टहास करते दिखाई देते हैं?)
उत्तर:
उत्तरदिशः। (उत्तर दिशा)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) अष्टमूर्तिः भक्तैः कस्मिन ईशवीये दृष्टा? (अष्टमूर्ति भक्तों ने किस ईशवी में देखी?)
उत्तर:
अष्टमूर्तिः भक्तैः 1940 ईशवीये दृष्टा। (अष्टमूर्ति भक्तों ने 1940 ईशवी में देखी।)

(ख) वरस्य शृङ्गार मनोरमत्वं कस्मिन मुखे उल्लिखितम्? (वर के श्रृंगार का मनोहर वर्णन किस मुख में उल्लिखित है।)
उत्तर:
वरस्य शृंगार मनोरम भावं दक्षिण मुखे उल्लिखितम्। (वर के श्रृंगार का मनोहर वर्णन दक्षिण मुखे उल्लिखित है।)

(ग) ऐतिहासिकैः अर्धनारीश्वरस्य कः कालः निर्धारितः? (ऐतिहासिकों द्वारा अर्धनारीश्वर का कौन-सा काल निर्धारित किया गया है?)
उत्तर:
ऐतिहासिकैः अर्धनारीश्वरस्य चतुर्थदशः शताब्दे कालः निर्धारितः।। (ऐतिहासिकों ने अर्धनारीश्वर का काल चौदहवीं शताब्दी निर्धारित की है।)

(घ) अष्टमूर्तिः इदानीं केन नाम्ना प्रख्याता? (अष्टमूर्ति इस समय किस नाम से प्रसिद्ध हैं?)
उत्तर:
अष्टमूर्तिः इदानी पशुपतिनाथः नाम्ना प्रख्याता। (अष्टमूर्ति इस समय पशुपतिनाथ इस नाम से प्रसिद्ध है।)

प्रश्न 3.
अधोलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत। (नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर लिखो)
(क) मूर्तेः पश्चिमे मुखे वैशिष्ट्यं किम्? (मूर्ति के पश्चिम मुख की क्या विशेषता है?)
उत्तर:
मूर्तेः पश्चिम मुखे वैशिष्ट्यं प्रलयंकारी शिव।। (मूर्ति के पश्चिम मुख में प्रलंयकारी शिव को दिखाया गया है)

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(ख) काः तिस्रः शैव प्रतिमाः प्रसिद्धः? (कौन-सी तीन शिव प्रतिमा प्रसिद्ध हैं?)
उत्तर:
अर्धनारीश्वरः, ऐलीफैण्टायाः त्रिमूर्ति, चिदम्बरस्य नटराज तिस्रः शैवप्रतिमाः प्रसिद्धाः। (अर्धनारीश्वर, ऐलीफैण्टा की त्रिमूर्ति, व चिदम्बर की नटराज मूर्ति ये तीन शिव प्रतिमा प्रसिद्ध हैं।)

(ग) दशपुर कुत्र अस्ति? अधुना केन नाम्ना प्रसिद्धम्? (दशपुर कहाँ स्थित है? वर्तमान में यह किस नाम से प्रसिद्ध है?)
उत्तर:
दशपुरं मध्यप्रदेशस्य पश्चिम भागे मालवाञ्चले शिवनानधास्तीरे अस्ति। अधुना मंदसौर नाम्ना प्रसिद्धम्। (दशपुर मध्य प्रदेश के पश्चिम भाग में मालवाञ्चल में शिवना नदी के किनारे स्थित है। वर्तमान में यह मंदसौर नाम से प्रसिद्ध है।)

(घ) अष्टमूर्तेः उत्तर मुखे कीदृशं वैशिष्ट्यं विद्यते? (अष्टमूर्ति का उत्तर मुख क्या विशेषता बतलाता है।)
उत्तर:
अष्टमूर्तेः उत्तर मुखे आनंदतत्त्व युक्ता वैशिष्ट्यं विद्यते। (अष्टमूर्ति का उत्तर मुख आनंद तत्त्व से युक्त होने की विशेषता बताता है।)

प्रश्न 4.
रिक्तस्थानानि पूरयत
(क) पूर्वमुखे शान्तरसविशिष्टः शिवसमाधिः विद्यते।
(ख) अष्टमुखाङ्कितं लिङ्गम् अष्टमूर्तिः इति नाम्ना ज्ञायते।।
(ग) अद्यावधि शैवप्रतिमाः केवलं तिस्रः प्रसिद्धाः।
(घ) लघु सर्पद्वयं प्रतीकरूपेण उत्कीर्णीतम्।

प्रश्न 5.
युग्ममेलनं कुरुत-
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प्रश्न 6.
अवायैः वाक्यनिर्माणं कुरुत-
अधुना – दशपुरम् अधुना मन्दसौरम् इति नाम्ना प्रख्यातम् अस्ति।
इदानीम् – इदानीः सः विद्यालयं गच्छति।
यथा – सः यथा एव आगच्छतिर्तदा अहं गमिष्यामि।
तथा – यथा नृपः तथा प्रजाः।
तत्र – तत्र कोऽपि न विद्यते।
अपि – सः अपि गमिष्यसि।
अत्र – अत्र वृक्षाः सन्ति।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दानां संधिविच्छेद कृत्वा सन्धेः नाम लिखत
उदाहरणम् :
विद्यार्थी-विद्या+अर्थी = विद्यार्थी।
(क) उभावपि
उत्तर:
उभौ+अपि = अयादि स्वर

(ख) अत्रैव
उत्तर:
अत्र+एव = वृद्धि स्वर

(ग) सर्वे
उत्तर:
सः+एव – विसर्ग = वृद्धि स्वर संधि

(घ) नास्ति
उत्तर:
न+अस्ति = दीर्घ स्वर

(ङ) अत्रास्ति
उत्तर:
अत्र+अस्ति = दीर्घ स्वर।

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प्रश्न 8.
उदाहरणानुसारं क्रियापदानां वचन परिवर्तनं कुरुत
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प्रश्न 9.
निम्नलिखितपदानां समास विग्रहं कृत्वा। समासस्य नाम लिखत
उदाहरणं यथा
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प्रश्न 10.
निम्नलिखित मूलशब्दं विभक्तिं वचनं च लिखत
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प्रश्न 11.
निम्नलिखितानां शब्दानां धातुं प्रत्ययं च पृथक् कुरुत
उदाहरणं यथा
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दशपुरीया अष्टमूर्तिः पाठ-सन्दर्भ/प्रतिपाद्य

मध्य प्रदेश के मालव अंचल में स्थित मंदसौर नगर के पुरातात्त्विक महत्त्व से हम लोग पूर्ण भिज्ञ हैं। यहाँ स्थित आठ मुखों वाली भगवान शिव की लिंग प्रतिमा अद्भुत एवं अनुपम है। प्रस्तुत पाठ डॉ. रामचन्द्र तिवारी द्वारा प्रणीत है। धर्म, दर्शन एवं पुरातत्त्व में इनका अभिनिवेश होने के कारण ‘अद्वितीय अष्टमूर्ति’ नामक पुस्तक आपने लिखी। इसकी मूर्तियाँ ही पाठ की विशेषता हैं।

दशपुरीया अष्टमूर्तिः पाठ का हिन्दी अर्थ

मध्यप्रदेशस्य पश्चिमे भागे मालवाञ्चले शिवनानद्यास्तीरे दशपुरं नाम नगरमस्ति। दशपुरम् अधुना मन्दसौरम इति नाम्मा प्रख्यातमस्ति। एतस्य दशपुरस्य वर्णनम् महाकविकालिदासेनापि स्वकीये ग्रन्थे मेघदूते कृतम्। अत्रैव शिवनानयास्तीरे भगवतः शिवस्य विशालमन्दिरमस्ति। अत्र स्थितम् अष्टमुखाकितं शिव लिङ्गम् अष्टमूर्तिः इति लिखितम् । इदानीं सैव पशुपतिनाथः इति नाम्ना दशपुरे प्रख्यातः।

शब्दार्थ :
अधुना-इस समय-This time; स्वकीये-स्वयं के-by self; इसका-its; लिखतम्-लिखित-Written; इदानीं-इस समय-this time.

हिन्दी अर्थ :
मध्य प्रदेश के पश्चिम भाग मालवांचल में शिवना नदी के किनारे स्थिति दशपुर नामक नगर है। दशपुर का आधुनिक नाम मन्दसौर प्रसिद्ध है। इस दशपुर का वर्णन महाकवि कालिदास ने भी स्वरचित ग्रन्थ मेघदूत में किया है। यहीं पर शिवना नदी के किनारे भगवान शिव का विशाल मन्दिर है। इसमें स्थित अष्टमुखी लिंग प्रतिमा है-ऐसा लिखा गया है। इस समय वही मन्दिर पशुपति नाथ नाम से प्रसिद्ध है।

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2. शैवदर्शनदृष्ट्या शैवकलादृष्ट्या च दशपुरीया अष्टमूर्तिः शैवमूर्तिषु अद्वितीया अस्ति। अद्यावधि शैवप्रतिमाः केवलं तिस्रः प्रसिद्धाः सन्ति। प्रथमा-प्रथमशताब्धाः मथुरायाः अर्धनारीश्वरः, द्वितीया अष्टमशताब्धाः, एलीफैण्टायाः त्रिमूर्ति। तृतीया दशमशताब्याः, चिदम्बरस्य नटराजः। शेषाणि लिङ्गानि। तामु तादृशी कला, दर्शनं वा नास्ति यथा दशपुरे वर्तमानायाः अष्टमूर्ती। वस्तुतः सा अनुपमा, अतिशायिनी शैव प्रतिमा अस्ति। अष्ट मुखानि प्रायः ‘सप्त फिट’ मानात्मके उत्तुङ्गे विशाले नीललोहिते पाषाणलिङ्गे उट्टङ्कितानि सन्ति।

शब्दार्थ :
अष्टमुखाङ्कितम्-उत्कीर्ण आठ मुख वाली-Carve of eight mouth; नीललोहिते-नीले व रक्तवर्ण से युक्त-with blue & Red Colour; पाषाणलिङ्गे-पत्थर के लिङ्ग पर-on the stone statue; अर्धनारीश्वर-अर्धनारीश्वर-(शिव पार्वती का रूप)-the fame of Shiva and Parvati.

हिन्दी अर्थ :
शैव दर्शन की दृष्टि से, शैव कला की दृष्टि से दशपुर की अष्टमूर्ति शिव मूर्ति अद्वितीय है। आज तक शिव की केवल तीन ही प्रतिमाएँ प्रसिद्ध हैं। मथुरा स्थित प्रथम शताब्दी की अर्धनारीश्वर की मूर्ति, आठवीं शताब्दी की एलीटो की त्रिमूर्ति और तीसरी, दशम शताब्दी की चिदम्बरम् की नटराज मूर्ति। शेष सभी शिवलिंग हैं। उनमें वेसी कला दृष्टिगोचर नहीं होती जैसी दशपुर की वर्तमान अष्टमूर्ति में। वस्तुतः यह शिव की मूर्ति अनुपम एवं अद्वितीय है। यह अष्टमुख लिंग मूर्ति सात फुट ऊँचे विशाल गुलाबी-नीले पाषाण खण्ड पर उकेरा गया है।

3. अस्याः मूर्तेः केवलं चतुर्मुखानि एव पूर्णतया लिङ्गमथ्ये निर्मितानि सन्ति, ततोऽधः चतुर्मुखानि केवलम् अशित एव निर्मितानि सन्ति। वैदेशिकानाम् आक्रमणवशात् एषा मूर्तिः रक्षणार्थम् अर्धनिर्मिता एव शिवनागर्भे (ईशवीये चतुर्दशाब्दे) गोपिता, कालेन नदी प्रवाहात् प्रकटिता एषा मूर्तिः 1940 ईशवीये वर्षे भक्तैः दृष्टा, तटे प्रतिष्ठापिता च। अस्या निर्मितानि मुखानि अतीव सुन्दराणि जीवनतत्त्वस्य व्यञ्जकानि च सन्ति।

शब्दार्थ :
ततोऽध-इससे नीचे-below its; गोपिता-छिपा दी गई-is hidden; प्रकटिता-प्रकट हुआ-appeared; जीवनतत्त्वस्य-जीवन के तत्त्व का-factor of life.

हिन्दी अर्थ :
इस मूर्ति के मात्र चार मुख ही पूर्णरूपेण लिंग के मध्य ही निर्मित हैं। उसके नीचे चारमुख केवल अर्धांश में ही निर्मित है। विदेशियों के आक्रमण के कारण इस मूर्ति की रक्षा के लिए अर्धमूर्ति शिवना के गर्भ में चौदहवीं शताब्दी में द्विपादी गई। समायानुसार नदी के प्रवाह के कारण यह मूर्ति बाहर निकल आई। सन् 1940 ई. में भक्तों ने इसे देखकर नदी के तट पर स्थापित कर दिया। इस मूर्ति के मुख बहुत सुंदर हैं जो जीवन के तथ्य को व्यक्त करते हैं।

4. दक्षिणमुखशिल्पे विवाहमण्डपस्थस्य वरस्य शृङ्गारमनोरमत्वं दृश्यते। तत्रैव शीर्षे केशकलापे षोडशीचन्द्र कला शोभते च। अत्रैवमुखे शुचिस्मितत्वं मधुरस्मितत्वं च अवलोकनीयम् । अत्र भयङ्कराः सर्पाः न उत्कीर्णाः, केवलं लघु सर्पद्वयं प्रतीकरूपेण उत्कीर्णितं वर्तते। पूर्व मुखे शान्तरस विशिष्टः शिवसमाधिः व्यज्यते। अस्मिन् केशकिरीटे रुद्राक्षमालयोः रेखाद्वयं निबद्धम् अस्य! मध्यमणिः तिलक रूपेण उपनिबद्धः। अत्र ग्रीवायां सर्पमाला, मन्दारमाला च शोभते।

शब्दार्थ :
स्मितत्वम्-मुस्कुराहट-Smile; मध्यमणि-बीच की मणि-between very precious stone; दृश्यते-दिखाई देता है-Looks; तत्रैव-वहाँ-there; अवलोकनीयम्-देखने को-for Look; उत्कीर्ण-उत्कीर्ण-Carve, scratch; तिलक रूपेण-तिलक के रूप में-in the form of auspious mark; उपनिबद्ध-बंधी हुई-to tie on for head;

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हिन्दी अर्थ :
मूर्ति की दक्षिण मुख की रचना विवाह मण्डप में बैठे श्रृंगार युक्त दूल्हे जैसी दिखाई देती है। उमसें सबसे ऊपर बालों के मध्य चन्द्रमा की सोलहवीं कला सुशोभित हो रही है। इस मुख की पवित्र मुस्कान ही देखने योग्य है। इस मूर्ति में भयंकर सर्प उत्कीर्ण नहीं किए गए हैं। केवल दो छोटे सर्प ही प्रतीक रूप में उत्कीर्ण हैं। मूर्ति के पूर्व मुख से शान्ति रस की विशिष्टता से युक्त शिव के समाधिस्थ होने का भाव व्यक्त होता है। इस मूर्ति में बालों की जटा में रुद्राक्ष की दो मालाएँ दो रेखाओं के रूप में दर्शित होती हैं। इसके बीच की मणि तिलक के समान दृष्टिगोचर होती है। इस मूर्ति में गले के साँप की माला और मंदार की माला शोभित हो रही है।

5. पश्चिममुखे प्रलयङ्करः शिवः रुद्ररूपेण व्यज्यते। अस्यैव मुखस्य सम्पूर्णा शिला केवलं लोहितवर्णा वर्तते। अत्र तादृशी नीलिमा श्वेतधारा वा न दृश्यते यादृशी मुखान्तरेषु। सुखे तृतीयनेत्रं सुस्पष्टम् अवलोक्यते। उग्रक्रोधेन मुखं विकृतम् उत्कीर्णम् । अस्मिन्नेव मुखे ऊँकार उल्लिखितः। ॐकारादेव उदयः, प्रलयश्च उभावपि भवतः इति शिल्पस्य दर्शनम्। उत्तरमुखे आनन्दतत्त्वस्य व्यञ्जना विद्यते। अस्मिन् भगवान विजयामत्त अट्टहासं कुर्वन इव प्रतिभाति। अत्र कपोलौ उत्फुल्लौ, अधरोष्ठौ स्फुटौ, नेत्रौ निमीलिते, शिथिलाः विकीर्णाः मूर्धजाः च सुस्पष्टं दृश्यन्ते। अर्धनिर्मितेषु अधोऽङ्कितेषुमुखेणु प्रथमे विद्यार्विभावःद्वितीये उद्योगार्थिभावः चतुर्थे च अर्थार्थभावः च विद्भिः सम्भाव्यन्ते। वस्तुतः दशपुरीया अष्टमूर्तिः कलासौन्दर्यदृष्ट्या दार्शनिकदृष्ट्या च सर्वासु शैवप्रतिमासु अद्वितीय उत्कृष्टा दर्शनीया च अस्ति।

शब्दार्थ :
प्रलयङ्कर-प्रलय करने वाला-disasterer; लोहितवर्णा-लाल रंग की-Red coloured; निलिमाश्वेतधारा-नीली अथवा सफेद धारा-Blue or white stream; उदयः प्रलयश्च-रचना एवं विनाश-Creation & disaster; उभावपि-दोनों ही-both; विजयामत्त-भांग के नशे में मस्त-to become fortic some with Bhang (hemp leaves); अट्टहासम-जोरों से हँसना-Laughing in a loud voice; विकिर्णाः-फैले हुए-Spread; रुद्ररूपेण-क्रोध के रूप में-in the form of Anger.

हिन्दी अर्थ :
मूर्ति के पश्चिम मुख से शिव का प्रलयंकर रुद्र रूप प्रकट होता है। इस मुख की सम्पूर्ण शिला लोहित वर्ण की है। यहाँ नील-श्वेत वर्ण की धारा नहीं दिखाई देती जैसी दूसरे मुख से। इस मूर्ति में शिव की तीसरी आँख स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। अत्यधिक क्रोध को व्यक्त करने के लिए मूर्ति के मुख को विकृत रूप में उत्कीर्ण किया गया है। इसी मूर्ति के मुख में ओंकार लिखा गया है। इसी ओंकार से ही उदय और प्रलय दोनों होता है-ऐसा शिल्पकारों ने इस मूर्ति में दिखाने का प्रयत्न किया है।

मूर्ति के उत्तर मुख में आनन्द तत्त्व की अभिव्यंजना की गई है। इसमें भगवान शिव भाँग के नशे में मत्त अट्टहास करते दिखाई देते हैं। यहाँ उनका गाल फूला हुआ दिखाई देता है, ओठ विकसित एवं आँखें मुंदी (अलसाई हई), सिर के बाल ढीले बिखरे हुए साफ-साफ दिखाई देते हैं। अर्ध निर्मित नीचे के मुखों में पहले मुँह पर ब्रह्मचारी (विद्यार्थी) का भाव, दूसरे में धर्मशील होने का भाव, तीसरे में उद्योगी होने का भाव एवं चौथे मुखसे अर्थार्थी होने का भाव दिखाई देता है।

वास्तव में दशपुर की यह अष्टमूर्ति कला, सौन्दर्य एवं दार्शनिक दृष्टि से सभी शैव मूर्तियों में उत्कृष्ट एवं दर्शनीय है।

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Ex 7.2

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Ex 7.2

Mp Board Class 8 Maths Chapter 7 Exercise 7.2 प्रश्न 1.
अभाज्य गुणनखण्डन विधि द्वारा निम्नलिखित में से प्रत्येक संख्या का घनमूल ज्ञात कीजिए –

  1. 64
  2. 512
  3. 10648
  4. 27000
  5. 15625
  6. 13824
  7. 110592
  8. 46656
  9. 175616
  10. 91125

हल:
1.
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2.
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3.
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4.
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5.
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6.
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7.
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8.
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9.
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10.
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Mp Board Class 8 Maths Chapter 7.2 प्रश्न 2.
बताइए सत्य है या असत्य –

  1. किसी भी विषम संख्या का घन सम होता है।
  2. एक पूर्ण घन दो शून्यों पर समाप्त नहीं होता है।
  3. यदि किसी संख्या का वर्ग 5 पर समाप्त होता है, तो उसका घन 25 पर समाप्त होता है।
  4. ऐसा कोई पूर्ण घन नहीं है जो 8 पर समाप्त होता है।
  5. दो अंकों की संख्या का घन तीन अंकों वाली संख्या हो सकती है।
  6. दो अंकों की संख्या के घन में सात या अधिक अंक हो सकते हैं।
  7. एक अंक वाली संख्या का घन एक अंक वाली संख्या हो सकती है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. असत्य
  5. असत्य
  6. असत्य
  7. सत्य।

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Class 8 Maths Chapter 7 Exercise 7.2 In Hindi प्रश्न 3.
आपको यह बताया जाता है कि 1331 एक पूर्ण घन है। क्या बिना गुणनखण्ड किए आप यह अनुमान लगा सकते हैं कि इसका घनमूल क्या है? इसी प्रकार 4913, 12167 और 32768 के घनमूलों के अनुमान लगाइए।
हल:
1331 के लिए इस संख्या के दो समूह 1 और 331 हैं।
331 का इकाई अंक 1 है। अतः घनमूल का इकाई अंक 1 होगा।
दूसरे समूह का अंक 1 है।
∴ 13 = 1, अतः घनमूल का दहाई का अंक 1 होगा।
\(\sqrt[3]{1331}\) = 11
4913 के लिए
4913 के दो समूह बनाए 4 और 913
प्रथम समूह 913 का इकाई अंक 3 है। 3 किसी संख्या के स्थान पर तब आता है जब उसके घनमूल के इकाई का अंक 7 हो।
अतः घनमूल का इकाई अंक = 7
दूसरे समूह 4 के लिए
13 = 1 और 23 = 8
अतः 13 < 4 < 23
अतः घनमूल का दहाई अंक = 1
∴ \(\sqrt[3]{4913}\) = 17
12167 के लिए
12167 के दो समूह बनाए 12 और 167
प्रथम समूह 167 में इकाई का अंक 7 है, 7 पर समाप्त होने वाली संख्या का घनमूल = 3
अतः घनमूल का इकाई अंक = 3.
दूसरे समूह 12 के लिए
23 = 8 और 33 = 27
23 < 12 < 33 अतः घनमूल का दहाई का अंक = 2
∴ \(\sqrt[3]{12167}\) = 23
32768 के लिए
संख्या का प्रथम समूह 768 तथा दूसरा समूह 32.
प्रथम समूह की संख्या का इकाई अंक 8 है। 8 किसी संख्या के स्थान पर तब आता है जब उसके घनमूल का इकाई अंक 2 हो।
अतः घनमूल का इकाई अंक = 2
दूसरे समूह 32 के लिए
33 = 27 और 43 = 64
इसलिए 33 < 32 < 43 अतः घनमूल का दहाई का अंक = 3
∴ \(\sqrt[3]{32768}\) = 32

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 17 चाणक्यनीतिः (पद्यम्) (चाणक्यनीतितः)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 17 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) रविः केन तपते? (सूर्य को कौन तपाता है?)
उत्तर:
सत्येन (सत्य के द्वारा)

(ख) दरिद्रता कया विरानंते? (दरिद्रता किससे सुशोभित होती हैं?)
उत्तर:
धीरतया (धैर्य धारण करने के द्वारा)

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(ग) कर्मानुसारिणी का? (कर्म का अनुसरण कौन करती है?)
उत्तर:
बुद्धिः (बुद्धि)

(घ) केन शर्वरी आह्लादिता? (किससे रात खुश होती है?)
उत्तर:
चन्द्रेण (चन्द्रमा से)

(ङ) कुरूपता कया विराजते? (कुरूपता किससे सुशोभित होती है?)
उत्तर:
शीलतया (सदाचरण से)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए)
(क) वाचा किं न प्रकाशयेत्? (वाणी से क्या प्रकट नहीं करना चाहिए?)
उत्तर:
मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा न प्रकाशयेत्। (मन से सोचे हुए काम को वाणी से प्रकट नहीं करना चाहिए।)

(ख) कैः पुत्राः विविधैः शीलैः नियोज्याः? (किसके द्वारा पुत्रों को विभिन्न सदाचरणों द्वारा लगाना चाहिए?)
उत्तर:
बुधैः पुत्राः विविधैः शीलैः नियोज्याः।। (विद्वानों के द्वारा पुत्र को विभिन्न सदाचरणों द्वारा लगाना चाहिए!)

(ग) कः सर्ववस्तुषु हीनः? (कौन सब वस्तुओं में हीन है?)
उत्तर:
विद्यारत्नेन हीनः सर्ववस्तुषु हीनः। (विद्या रूपी रत्न से हीन सब वस्तुओं में हीन है।)

(घ) कुलीनः दीनोऽपि कान् न त्यजति? (दीन होते हुए भी कुलीन क्या नहीं छोड़ता है?)
उत्तर:
कुलीनः दीनोऽपि शीलगुणान् न त्यजति। (दीन होते हुए भी कुलीन शीलगुणों को नहीं छोड़ते।)

(ङ) छिन्नोऽपि चन्दनतरुः किं न जहाति? (कटने पर भी चन्दन का पेड़ क्या नहीं छोड़ता?)
उत्तर:
छिन्नोऽपि चन्दनतरुः गन्धं न जहाति। (कटने पर भी चन्दन का पेड़ खुशबू नहीं छोड़ता है।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिर-)
(क) सत्येन सर्वं कथं प्रतिष्ठितम् ? (सत्य से सब कैसे स्थित है?)
उत्तर:
पृथ्वी सत्येन धार्यते, रविः सत्येन तपते, वायुः सत्येन वाति। अनेन प्रकारेण सर्वं सत्येन प्रतिष्ठितम्। (सत्य के द्वारा पृथ्वी धारण की जाती है, सूर्य उष्णता प्रदान करता है, वायु बहती है। इस प्रकार सब सत्य के द्वारा ही स्थित है।)

(ख) किमर्थं बुधैः पुत्राः विविधैः शीलैः नियोज्याः? (किसलिए विद्वानों के द्वारा पुत्रों को शील आचरण में लगाना चाहिए?)
उत्तर:
बुधैः पुत्राः विविधैः शीलैः नियोज्या यतो हि शीलसम्पन्नाः नीतिज्ञाः कुलपूजिताः भवन्ति। (विद्वानों के द्वारा पुत्रों को विभिन्न सदाचरणों द्वारा लगाना चाहिए क्योंकि सदाचार से युक्त नीतिशास्त्र के ज्ञाता कुल में पूजे जाते हैं।)

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(ग) पदे-पदे केषां सम्पदः सुः? (कदम-कदम पर किन को खुशियाँ होती हैं?)
उत्तर:
येषां सतां हृदये परोपकरणं जागति, तेषां पदे-पदे सम्पदः स्युः। (जिन सज्जनों के मन में परोपकार की भावना जागृत रहती है, उनके कदम-कदम पर खुशियाँ होती हैं।)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत (दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(गूढम्, सत्ये, धनहीनो, लीलाम्, सविद्यानाम्)
(क) सर्वं …………….. प्रतिष्ठितम्।
मन्त्रेण रक्षयेद् ……………..।
(ग) को विदेशः ……………..।
(घ) …………….. न हीनश्च।
(ङ) वृद्धोऽपि वारणपतिर्न जहाति ………….
उत्तर:
(क) सत्ये
(ख) गूढम्
(ग) सविद्यानाम्
(घ) धनहीनो
(ङ) लीलाम्

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से जोडिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 1
उत्तर:
(क) 3
(ख) 4
(ग) 2
(ड) 1

प्रश्न 6.
शुन्द्रवाक्यानां समक्षम् जाम् अशुद्धवाक्यानां समक्षम् “न” इति तिखत-)
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए)
(क) सत्येन वायुः वाति।
(ख) प्रियवादिना कोऽपि न परः।
(ग) कदन्नता उष्णतया न विराजते।
(घ) कर्मायत्तं पुंसां फलम्।
(ड) छिन्नः चन्दनतरुः गन्धं जहाति।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) आम्
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न।

प्रश्न 7.
अधोलिखितशब्दानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनञ्च लिखत
(नीचे लिखे शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति और वचन लिखिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 9

प्रश्न 8.
निम्नलिखितक्रियापदानां धातुं लकारं पुरुषं ववनं च लिखत
(नीचे लिखे क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 3
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 4

प्रश्न 9.
अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के सन्धि-विच्छेद करके सन्धि का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 5
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 6

प्रश्न 10.
अधोलिखितसमासानां विग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत
(नीचे लिखे समासों को विग्रह कर समास का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 7
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 8

प्रश्न 11.
प्रदत्तश्लोकान्वयस्य पूर्तिं कुरुत
(दिए गए श्लोक का अन्वय पूरा कीजिए-)
बुधैः …………….. विविधैः शीलैः
(यतो हि) …………….. नीतिज्ञाः ……………..भवन्ति।
उत्तर:
बुधैः पुत्रा. विविधैः शीलैः सततं नियोज्याः।
(यतो हि) शीलसम्पन्नाः नीतिज्ञाः कुलपूजिताः भवन्ति।

योग्यताविस्तार –

पाटे समागतान् श्लोकान् कण्ठस्थं कुरुत।
पाठ में आए श्लोकों को कण्ठस्थ करो।

“चाणक्यनीति” इत्यस्मात् पुस्तकात् चित्वा (पाठे समागतान् श्लोकान् विहाय) अन्यान् दशश्लोकान् लिखत।
‘चाणक्यनीति’ पुस्तक से चुनकर अन्य दस श्लोक लिखो।

चाणक्येन विरचितानि अन्यानि पुस्तकानि पठत।
चाणक्य द्वारा रचित अन्य पुस्तकें पढ़ो।

चाणक्येतरदशनीतिश्लोकान् लिखत।।
चाणक्य से अलग दस नीति श्लोक लिखो।

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चाणक्यनीतिः पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में ‘चाणक्य’ द्वारा रचित नीति से सम्बन्धित कुछ श्लोक दिए गए हैं, जिससे छात्रों को नीति का सम्यक् ज्ञान हो सके। ये श्लोक चाणक्य द्वारा रचित ‘चाणक्यनीतिः’ नामक ग्रन्थ से लिए गए हैं।

चाणक्यनीतिः पाठ का अनुवाद

1. सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।
सत्येन वाति वायुश्च सर्वं सत्ये प्रतिष्टितम्॥1॥

अन्वयः :
पृथ्वी सत्येन धार्यते, रविः सत्येन तपते, वायुः सत्येन वाति, सर्वं च सत्ये प्रतिष्ठितम् (अस्ति)।

शब्दार्थाः :
धार्यते-धारण की जाती है-is born (propped); तपते-उष्णता प्रदान करता है-gives heat; वाति-बहता है-blows; प्रतष्ठितम्-स्थित है-is established.

अनुवाद :
धरती सत्य से धारण की जाती है। सूर्य सत्य से तपता है, वायु सत्य से बहती है, सब सत्य में स्थित है। Englisit-The earth, the sun, the wind-all of their props in truth.

2. मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा नैव प्रकाशयेत्।
मन्त्रेण रक्षयेद् गूढं कार्थे चाऽपि नियोजयेत्॥2॥

अन्वयः :
मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा न एव प्रकाशयेत्, गूढं मन्त्रेण रक्षयेत्। कार्ये च अपि नियोजयेत्।

शब्दार्थाः :
वाचा-वाणी के द्वारा-through speech; प्रकाशयेत्-प्रकट करना चाहिए-should beexpressed;गूढम्-गोपनीय-secret;मन्त्रेण-विचारपूर्वक- thoughtfully; नियोजयेत्-लगाना चाहिए-put.

अनुवाद :
मन से सोचे हुए कार्य को वाणी से प्रकट नहीं करना चाहिए। गुप्त को विचारपूर्वक रखना चाहिए। और कार्य में भी लगाना चाहिए।

English :
Don’t express your thoughts with speech. A secret must be preserved and put into action.

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3. पुत्राश्च विविधैः शीलैर्नियोज्याः सततं बुधैः।
नीतिज्ञाः शीलसम्पन्ना भवन्ति कुलपूजिताः॥3॥

अन्वयः :
बुधैः पुत्राः विविधैः शीलैः सततं नियोज्याः। (यतो हि) शीलसम्पन्नाः नीतिज्ञाः कुलपूजिताः भवन्ति।

शब्दार्थाः :
बुधैः-विद्वानों के द्वारा-by the learned; शीलैः-सदाचरणों के द्वारा-through good conduct; कुलपूजिताः-कुल में सम्मानित/जनसाह में पूजित-honoured in family and society.

अनुवाद :
विद्वानों के द्वारा पुत्रों को विभिन्न सदाचरणों के द्वारा निरंतर लगाना चाहिए। क्योंकि सदाचार युक्त नीतिशास्त्र के ज्ञाता कुल में पूजे जाते हैं।

English :
Engage sons in noble conduct. A man of good moral conduct earns respect in family.

4. को हि भारः समर्थानां किं दूरं व्यवसायिनाम्।
को विदेशः सविद्यानांकः परः प्रियवादिनाम्।।4॥

अन्वयः :
हि समर्थानां कः भारः? व्यवसायिनां कि दूरम्? सविद्यानां कः विदेशः? प्रियवादिनां कः पारः? (अर्थात् कोऽपि नास्ति ।)

शब्दार्थाः :
समर्थानाम्-सक्षम लोगों के लिए-for the capable; व्यवसायिनाम्-उद्यमशील लोगों के लिए-for the industrious; परः-शत्रु पराया-enemy.

अनुवाद :
सक्षम लोगों के लिए भार क्या है? उद्यमशील (परिश्रमी) लोगों के लिए दूर क्या है? विद्या से युक्त लोगों के लिए विदेश क्या है ? प्रिय बोलने वालों के लिए कौन पराया है? (अर्थात् कोई भी नहीं।)

English :
The capable, industrious, learned and sweet talkers know no burden, distance, foreign country or enemy respectively.

5. दरिद्रता धीरतया विराजते, कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते।
कदन्नता चोष्णतया विराजते, कुरूपता शीलतया विराजते।।5॥

अन्वयः :
दरिद्रता धीरतया विराजते, कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते, कदन्नता उष्णतया विराजते, कुरुपता च शीलतया विराजते।

शब्दार्थाः :
धीरतया-धैर्य धारण करने से-through patience, forbearance; कदन्नता-निम्न कोटी का अन्न-third-rate foodstuff; विराजते-सुशोभित होता होती है-is adorned.

अनुवाद :
दरिद्रता धैर्य धारण करने से सुशोभित होती है, बुरे वस्त्र स्वच्छता से सुशोभित होते हैं, निम्न कोटि का अन्न ताप से सुशोभित होता है और कुरुपता शील स्वभाव से सुशोभित होती है।

English :
Misery, poverty, cheap clothes, third-rate food items and vulgarity are adorned by forbearance, cleanliness, heat (warmth) and noble conduct respectively.

6. धनहीनो न हीनश्च धनिकः सः सुनिश्चयः।
विद्यारत्नेन यो हीनः सः हीनः सर्ववस्तुषु॥6॥

अन्वयः :
यः धनहीनः सः हीनः न, (अपितु) सः सुनिश्चयः धनिकः, विद्यारत्नेन हीनः सः सर्ववस्तुषु हीनः (अस्ति)।

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शब्दार्था: :
धनहीनः-धन से रहित – one who lacks money; सुनिश्चयः-निश्चयपूर्वक-definitely-by all means; सर्ववस्तुषु-सभी वस्तुओं में-in everything.

अनुवाद :
जो धन से रहित है, वह हीन नहीं है, बल्कि वह निश्चयपूर्वक धनी है। विद्या रूपी रत्न से जो हीन है वह सब वस्तुओं से हीन होता है।

English :
One who is without money is not a destitute. He is otherwise wealthy. He alone is a pauper who is deprived of learning.

7. कर्मायत्तं फलं पुंसां बुद्धिः कर्मानुसारिणी।
तथापि सुधियश्चार्याः सुविचार्यैव कुर्वते॥7॥

अन्वयः :
पुंसां कर्मायत्तं फलम्, बुद्धि, कर्मानुसारिणी, तथापि सुधियः आर्याः च सुविचार्य एव कुर्वते।

शब्दार्थाः :
पुंसाम्-मनुष्यों का-of men; कर्मायत्तम्-कर्म के अनुसार-according to action; सुधियः-विद्वान् लोग-learned people; आर्याः-श्रेष्ठ लोग-noble persons; कुर्वते-करते हैं-do.

अनुवाद :
मनुष्यों को कर्म के अनुसार फल मिलता है, बुद्धि कर्म का अनुसरण करती है। इसीलिए विद्वान और श्रेष्ठ लोग अच्छी प्रकार से विचार करके ही कार्य करते हैं।

English :
Actions are result-oriented-wisdom follows actionwise and noble persons should act thoughtfully.

8. छिन्नोऽपि चन्दनतरुन जहाति गन्धं, वृद्धोऽपि वारणपतिर्न जहाति लीलाम् ।
यन्त्रार्पितो मधुरतां न जहाति चेक्षुः, दीनोऽपि न त्यजति शीलगुणान् कुलीनः॥8॥

अन्वयः :
छिन्नः चन्दनतरुः अपि गन्धं न जहाति, वृद्धः वारणपतिः अपि लीलां न जहाति, यन्त्रार्पितः इक्षुः मधुरतां न जहाति, कुलीनः च दीनः अपि शीलगुणान् न त्यजति।

शब्दार्थाः :
छिन्नः-कटा हुआ-which is cut; जहाति-छोड़ता है-leaves, deserts; यन्त्रार्पितः-यन्त्र (कोल्ह) में डाला गया-put insugar crasher; इक्षुः-गन्ना-sugarcane; शीलगुणान्-सच्चरित्रादि गुणों को-qualities like noble conduct; त्यजति-छोड़ता है-leaves, quits.

अनुवाद :
कटा हुआ चन्दन का वृक्ष भी अपनी सुगन्ध नहीं छोड़ता है। बूढ़ा हाथियों का स्वामी भी खेल नहीं छोड़ता है, यन्त्र (कोल्हू) में डाला गया गन्ना अपनी मधुरता को नहीं छोड़ता। कुलीन और दीन भी अपने सच्चरित्रादि गुणों को नहीं छोड़ता है।

English :
Acut out sandal tree, an old lord of elephants-a sugarcanea noble born and poor fellow do not forsake their fragrance, sportive nature, sweetness and noble qualities respectively.

9. एकेनाऽपि सुपुत्रेण विद्यायुक्तेन साधुना।
आह्लादितं कुलं सर्वं यथा चन्द्रेण शर्वरी॥9॥

अन्वयः :
एकेन सुपुत्रेण विद्यायुक्तेन साधुना अपि सर्वं कुलम् आह्लादितं, यथा चन्द्रेण शर्वरी (आहलाद्यते)।

शब्दार्थाः :
सुपुत्रेण-सद्गुणी पुत्र के द्वारा-by son of noble qualities; आहुलादितम्-प्रसन्न किया गया-delighted; शर्वरी-रात्रि-night.

अनुवाद :
एक सुपुत्र के द्वारा, विद्या से युक्त के द्वारा तथा सज्जन के द्वारा भी पूरा कुल आनन्दिा किया जाता है, जैसे चन्द्रमा के द्वारा रात को।

English :
A worthy, educated and noble son delights the entire family-The moon also does the same by lighting the night.

10. परोपकरणं येषां जागर्ति हृदये सताम्।
नश्यन्ति विपदस्तेषां सम्पदः स्युः पदे पदे।।10॥

अन्वयः :
येषां सतां हृदये परोपकरणं जागर्ति तेषां विपदः नश्यन्ति, पदे पदे सम्पदः स्युः।

शब्दार्थाः :
परोपकरणम्-दूसरों का भला करना-doing good to others; विपदः-विपत्तियाँ-difficulties; पदे-पदे-कदम-कदम पर-at every step; स्युः-हों-be.

अनुवाद :
जिन सज्जनों के हृदय में दूसरों का भला करने की भावना जागृत रहती है, उनकी विपत्तियाँ नष्ट हो जाती हैं और कदम-कदम पर खुशियाँ होती हैं।

English :
The gentlemen who have a feeling of others’ welfare are rid of difficulties and seek pleasure at every step.

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी

MP Board Class 6th Social Science Chapter 5 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

(अ) पाठ्य पुस्तक पृष्ठ संख्या 21 – 22 पर दी गई तालिका का अध्ययन कर लिखिए:
1. सौर परिवार का मुखिया …………… है।
2. ग्रह जिस पर पूर्ण जीवन है …………….. है।
3. सूर्य के सबसे निकट वाला ग्रह …………. है।
4. पीले रंग का सबसे बड़ा ग्रह ……………….. है।
5. पृथ्वी ग्रह का उपग्रह
उत्तर:
1. सूर्य
2. पृथ्वी
3. बुध
4. बृहस्पति
5. चन्द्रमा।

(ब) नीचे दी गई सारणी में उपयुक्त जानकारी भरें:
उत्तर:
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी

MP Board Class 6th Social Science Chapter 5 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(अ) सूर्य में ऊर्जा कैसे पैदा होती है ?
उत्तर:
सूर्य कई ज्वलनशील गैसों का जलता हुआ पिण्ड है जिसमें हाइड्रोजन, हीलियम आदि प्रमुख हैं जो निरन्तर जलती रहती है। इनसे ही सूर्य में ऊर्जा उत्पन्न होती है।

(ब) पृथ्वी के तीन परिमण्डल कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
पृथ्वी के तीन परिमण्डल हैं-वायुमण्डल, जलमण्डल और स्थलमण्डल।

(स) सूर्य के महत्त्व को समझाइए।
उत्तर:
सूर्य ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत है। यह सभी ग्रहों और उपग्रहों का प्रमुख है। सभी इसकी परिक्रमा करते हैं और इसके ही प्रकाश से प्रकाशित होते हैं। यदि सूर्य न हो तो हम किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना नहीं कर सकते।

(द) सौरमण्डल के ग्रहों के नाम लिखिए।
उत्तर:
ग्रह संख्या में आठ हैं जिनके नाम निम्नलिखित हैं-बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस (अरुण), और नेपच्यून (वरुण)।

(य) ग्रह एवं तारे में क्या अन्तर है ? लिखिए।
उत्तर:
तारा और ग्रह में अन्तर:

  • तारों की अपनी ऊष्मा होती है और वे अपने ही प्रकाश से चमकते हैं, जबकि ग्रह सूर्य के प्रकाश से चमकते हैं।
  • तारों की चमक स्थिर नहीं होती, जबकि ग्रहों की चमक स्थिर रहती है।
  • आकाश में तारे स्थिर रहते हैं, जबकि ग्रह अपना स्थान बदलते रहते हैं।

(र) कौन-सी गैस हमारी जीवन रक्षक है ?
उत्तर:
ओजोन गैस हमारी जीवन रक्षक है। वायुमण्डल में स्थित ओजोन गैस की परत सूर्य की पराबैंगनी जैसी घातक किरणों से हमारी रक्षा करती है। यदि ओजोन परत नहीं होती तो सारे जीव और वनस्पति नष्ट हो जाते।

(ल) पृथ्वी पर पाई जाने वाली तीन महत्त्वपूर्ण गैसों के नाम लिखिए। इनमें जीवनदायिनी गैस कौन-कौन सी है ?
उत्तर:
पृथ्वी पर पाई जाने वाली तीन महत्त्वपूर्ण गैसें हैं-ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और कार्बन डाइ-ऑक्साइड। इनमें से ऑक्सीजन गैस जीवनदायिनी है।

(व) ग्रह एवं उपग्रह में अन्तर बताइए।
उत्तर:
ग्रह और उपग्रह में अन्तर –

  • ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं, जबकि उपग्रह अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं।
  • सौरमण्डल में ग्रहों की संख्या आठ है, जबकि उपग्रह संख्या में 44 हैं।
  • उपग्रहों की तुलना में ग्रह आकार में बड़े होते हैं।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) सौरमण्डल किसे कहते हैं ? सौरमण्डल के ग्रहों को चित्र सहित नामांकित कीजिए।
उत्तर:
सूर्य, सभी ग्रहों और उपग्रहों से मिलकर सौरमण्डल बना होता है। इसी ‘सौरमण्डल’ को सौर परिवार भी कहते हैं।

सौरमण्डल के ग्रहों का चित्र सहित वर्णन –
(1) सूर्य-सूर्य का अपना ही प्रकाश और गर्मी होती है। यह एक तारा है। सभी ग्रह सूर्य की ही आकर्षण शक्ति से एक-दूसरे से बँधे रहते हैं और सूर्य की परिक्रमा करते हैं। सभी ग्रहों तथा उपग्रहों को ऊष्मा व प्रकाश सूर्य से ही मिलता है।

(2) ग्रह – ग्रह संख्या में आठ होते हैं, जो निम्नलिखित हैं –

  • बुध – बुध सूर्य के सबसे अधिक पास का ग्रह है। इसका कोई उपग्रह नहीं है। सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 88 दिन का समय लगता है।
  • शुक्र – इसका कोई उपग्रह नहीं होता तथा आकार में पृथ्वी के बराबर होता है। यह 225 दिन में सूर्य की परिक्रमा करता है।
  • पृथ्वी – इसका उपग्रह चन्द्रमा होता है। सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में इसे 365 7 दिन का समय लगता है। इस ग्रह पर जीवन पाए जाने के कारण इसे जीवित ग्रह भी कहते हैं।
  • मंगल – इसके दो उपग्रह हैं। यह 687 दिन में सूर्य की परिक्रमा पूरी कर लेता है।
  • बृहस्पति – यह सभी ग्रहों में बड़ा है। इसके 12 उपग्रह हैं। सूर्य की परिक्रमा यह 11 वर्ष 9 महीने में पूरी करता है।
  • शनि – इसके 20 उपग्रह हैं। सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में इसे 29 वर्ष 5 माह का समय लगता है। यह सौरमण्डल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
  • अरुण (यूरेनस) – यह सूर्य की परिक्रमा 84 वर्ष में पूरी करता है।
  • वरुण (नेपच्यून) – इसके 8 उपग्रह हैं। यह 165 वर्ष में सूर्य की परिक्रमा करता है।

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी img 2

(ब) पृथ्वी एक अनोखा व जीवित ग्रह कैसे है ? समझाइए।
उत्तर:
पृथ्वी सौरमण्डल का एक महत्त्वपूर्ण सदस्य है। सौर मण्डल ही नहीं बल्कि पूरे ब्रह्माण्ड में केवल पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन पाया जाता है। इसलिए इसे अनोखा और जीवित ग्रह कहते हैं।

निम्नलिखित कारणों से भी यह अनोखा व जीवित ग्रह है –

  • पृथ्वी पर जल ठोस, तरल और गैसीय अवस्था में मिलता है। यहाँ जल की उपलब्धता से जीवन का विकास हुआ है।
  • पृथ्वी पर जीवनदायिनी गैस ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में पाई जाती है जो किसी भी प्रकार के जीवन के लिए आवश्यक है।
  • पृथ्वी पर वायुमण्डल, जलमण्डल और स्थलमण्डल का विस्तार है, तीनों का आपस में उचित सन्तुलन बना हुआ है। इसके अलावा पृथ्वी पर 12-12 घण्टे वाले दिन रात की आदर्श अवधि भी यहाँ जीवन के विकास में सहायक है।

(स) प्राकृतिक व कृत्रिम उपग्रह किसे कहते हैं ? पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वे आकाशीय पिण्ड जो अपने ग्रहों की परिक्रमा करने के साथ सूर्य की परिक्रमा भी करते हैं प्राकृतिक उपग्रह कहलाते हैं जबकि मानव द्वारा निर्मित छोटे और अस्थायी ग्रह कृत्रिम उपग्रह कहलाते हैं। पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह चन्द्रमा है। यह आकार में पृथ्वी का 1 / 4 है। पृथ्वी से इसकी औसत दूरी 3 लाख 84 हजार किलोमीटर है। यह पृथ्वी की परिक्रमा 30 दिनों में पूरी करता है। यह सूर्य से प्रकाशित होता है।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य का एक-एक पारिभाषिक शब्द बताइए
(अ) सारे पदार्थों, सारी आकाशगंगाओं, सारी ऊर्जा तथा अन्तरिक्ष का अन्तहीन समूह।
उत्तर:
ब्रह्माण्ड

(ब) वह दूरी जिसे प्रकाश तीन लाख किमी प्रति सेकण्ड के वेग से एक वर्ष में तय करता है।
उत्तर:
प्रकाश वर्ष

(स) तारों भरे आकाश में बादलों जैसी दूधिया पट्टी।
उत्तर:
आकाश गंगा

(द) मंगल और बृहस्पति के बीच सौरमण्डल में छोटे-छोटे असंख्य पिण्डों की पट्टी।
उत्तर:
क्षुद्र ग्रह।

प्रश्न 4.
सही जोड़ी बनाइएअ –
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 5 सौरमण्डल में हमारी पृथ्वी img 3
उत्तर:
(अ) (iv) प्रोक्सिमा सेन्चुरी
(ब) (v) बृहस्पति
(स) (ii) चन्द्रमा
(द) (iii) वरुण
(य) (i) बुध

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3

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प्रश्न 1.
निम्न समीकरणों को हल कीजिए और अपने उत्तर की जाँच कीजिए –
1. 3x = 2x + 18
2. 5t – 3 = 3t – 5
3. 5x + 9 = 5 + 3x
4. 4z + 3 = 6 + 2z
5. 2x – 1 = 14 – x
6. 8x + 4 = 3(x – 1) + 7
7. x = \(\frac{4}{5}\) (x + 10)
8. \(\frac{2x}{3}\) + 1 = \(\frac{7x}{15}\) +3
9. 2y + \(\frac{5}{3}\) = – y
10. 3m = 5m – \(\frac{8}{5}\)
हल:
1. 3x = 2x + 18
⇒ 3x – 2x = 18
(2x को बायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
⇒ x = 18
जाँच: समीकरण में x = 18 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 3x = 3 x 18 = 54
दायाँ पक्ष = 2x + 18 = 2 x 18 + 18
= 36 + 18 = 24
अतः x = 18 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

2. 2t – 3 = 3t – 5 – 3 को दायीं ओर तथा
-3 को बायीं ओर पक्षान्तर करने पर,
∴ 5t – 3t = – 5 + 3
2t = – 2
दोनों ओर 2 से भाग करने पर,
\(\frac{2t}{2}\) = \(\frac{-2}{2}\)
या t = – 1
जाँच: समीकरण में t = – 1 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 5t – 3 = 5(-1) – 3 = – 5 – 3 = – 8
दायाँ पक्ष = 3t – 5 = 3(-1) – 5 = – 3 – 5 = – 8
अतः t = – 1 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष

3. 5x + 9 = 5 + 3x
या 5x – 3x = 5 – 9
(3x को बायीं ओर 9 को दायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
या 2x = – 4
या \(\frac{2x}{2}\) = \(\frac{-4}{2}\)
(दोनों पक्षों को 2 से भाग करने पर)
या x = – 2
जाँच: समीकरण में x = – 2 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 5x + 9= 5 (-2) +9 = – 10 + 9 = – 1
दायाँ पक्ष = 5 + 3x = 5 + 3 x (-2)= 5 – 6 = – 1
अतः x = – 2 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

4. 4z + 3 = 6 + 2z
या 4z – 2z = 6 – 3
(3 को दायीं ओर और 6 को बायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
या 2z = 3
या \(\frac{2z}{2}\) = \(\frac{3}{2}\)
(दोनों पक्षों को 2 से भाग करने पर)
या x = \(\frac{3}{2}\)
जाँच: समीकरण में z = 3/2 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 4z + 3 = 4 x \(\frac{3}{2}\) + 3 = 6 + 3 = 9
दायाँ पक्ष = 6 + 2x = 6 + 2 x \(\frac{3}{2}\) = 6 + 3 = 9.
अतः z = 3/2 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

5. 2x – 1 = 14 – x
2x + x = 14+1
(-1 को दायीं ओर तथा –x को बायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
या 3x = 15
या \(\frac{3x}{3}\) = \(\frac{15}{3}\)
(दोनों पक्षों को 3 से भाग करने पर)
या x = 5
जाँच: समीकरण में x = 5 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 2x – 1 = 2 x 5 – 1 = 10 – 1 = 9
दायाँ पक्ष = 14 – x = 14 – 5 = 9
अतः x = 5 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

6. 8x+ 4 = 3(x – 1) + 7
या 8x + 4 = 3x – 3 + 7
या 8x + 4 = 3x + 4
या 8x – 3x = 4 – 4
(3x को बायीं ओर और 4 को दायीं ओर पक्षान्तर करने पर)
या 5x = 0 ⇒ \(\frac{5x}{5}\) = \(\frac{0}{5}\)
(दोनों ओर 5 से भाग करने पर)
या x = 0
जाँच: समीकरण में x = 0 रखने पर,
बायाँ पक्ष = 8x + 4 = 0 = 8 x 0 + 4 = 0 + 4 =4
दायाँ पक्ष = 3(x – 1) + 7 = 3(0 – 1) + 7 = – 3 + 7 = 4
अतः x = 0 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

7. x = \(\frac{4}{5}\) (x + 10)
या 5x = 4(x + 10)
(दोनों ओर 5 से गुणा करने पर)
या 5x = 4x + 40
या 5x – 4x = 40
(4x का पक्षान्तर करने पर)
या x = 40
जाँच: समीकरण में x = 40 रखने पर,
बायाँ पक्ष = x = 40
दायाँ पक्ष = \(\frac{4}{5}\) (x + 10) = \(\frac{4}{5}\)(40 + 10) = \(\frac{4×5}{+5}\) = 40
अतः x = 40 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

8. \(\frac{2x}{3}\) + 1 = \(\frac{7x}{15}\) + 3
दोनों पक्षों को 15 से गुणा करने पर,
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-1
या 10x + 15 = 7x + 45
या 10x – 7x = 45 – 15
(7x तथा 15 को पक्षान्तर करने पर)
या 3x = 30
या \(\frac{3x}{3}\) = \(\frac{30}{3}\)
(दोनों ओर 3 से भाग करने पर)
या x = 10
जाँच: समीकरण में x = 10 रखने पर,
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-2
अत: x = 10 के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

9. 2y + \(\frac{5}{3}\) = \(\frac{26}{3}\) – y
या 2y + y = \(\frac{26}{3}\) – \(\frac{5}{3}\)
(\(\frac{5}{3}\) तथा – y को पक्षान्तर करने पर)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-3
(दोनों ओर 3 से भाग करने पर)
या y = \(\frac{7}{3}\)
जाँच: समीकरण में y = \(\frac{7}{3}\) रखने पर
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-4
अतः y = \(\frac{7}{3}\) के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

10. 3m = 5 – \(\frac{8}{5}\)
या 3m – 5m = \(-\frac{8}{5}\)
(5m को पक्षान्तर करने पर) – 2m = – 3
या – 2m = \(-\frac{8}{5}\)
या \(\frac{-2m}{-2}\) = \(\frac{-8}{5(-2)}\)
(दोनों ओर – 2 भाग करने पर)
या m = \(\frac{4}{5}\)
जाँच: समीकरण में m = \(\frac{4}{5}\) रखने पर,
बायाँ पक्ष = 3m = 3 x \(\frac{4}{5}\) = \(\frac{12}{5}\)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.3 img-5
अतः m = \(\frac{4}{5}\) के लिए, बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष।

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 4 पारस्परिक निर्भरता

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 4 पारस्परिक निर्भरता

MP Board Class 6th Social Science Chapter 4 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गाँव और शहरों द्वारा उत्पादित / तैयार वस्तुओं की सूची बनाइए।
उत्तर
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 4 पारस्परिक निर्भरता img 1

MP Board Class 6th Social Science Chapter 4 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
(1) प्राचीन काल में मनुष्य की आवश्यकताएँ कैसी थीं?
उत्तर:
प्राचीन काल में मनुष्य की आवश्यकताएँ बहुत सीमित थीं। इनकी पूर्ति वह स्वयं कर लेता था।

(2) मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएँ क्या हैं ?
उत्तर:
भोजन, कपड़ा, आवास मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएँ हैं।

(3) अनाज, सब्जी व फल कहाँ उत्पादित होते हैं ?
उत्तर:
अनाज, सब्जी व फल अधिकतर गाँवों में उत्पादित होते हैं।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) पारस्परिक निर्भरता किसे कहते हैं ? बताइए।
उत्तर:
किसी कार्य अथवा आवश्यकता के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होना पारस्परिक निर्भरता कहलाता है। जैसे-शहर के लोग गाँव के लोगों द्वारा उत्पादित वस्तुएँ (अनाज, सब्जियाँ, फल आदि) के लिए गाँवों पर निर्भर रहते हैं, इसी प्रकार गाँव के लोग भी शहर में स्थापित कारखानों में बनी वस्तुओं के लिए उन पर निर्भर रहते हैं।

(ब) पारस्परिक निर्भरता की आवश्यकता क्यों पड़ती है ? दो देशों के मध्य पारस्परिक निर्भरता को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
अपनी आवश्यकताओं एवं रुचियों की पूर्ति के लिए व्यक्ति को पारस्परिक निर्भरता की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार किसी एक देश में सभी आवश्यकता की चीजें उपलब्ध नहीं होती या कम मात्रा में होती हैं, इसलिए उन्हें दूसरे देशों से मँगाना पड़ता है। हम भारत का ही उदाहरण लें तो यहाँ पेट्रोलियम पदार्थ (पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल), सेना के उपयोग के लिए आधुनिक उपकरण, हथियार आदि दूसरे देशों से मँगाये जाते हैं। भारत से मसाले, चाय, सीमेण्ट, तैयार कपड़े आदि दूसरे देशों को भेजे जाते हैं।

(स) नागरिक जीवन में परस्पर निर्भरता का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
सामाजिक जीवन आपसी सहयोग पर निर्भर करता है। सभी नागरिक एक साथ मिलकर रहते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं। इससे सामाजिक जीवन बेहतर और सुविधाजनक हो जाता है। यही नागरिक जीवन में परस्पर निर्भरता का महत्त्व है।

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प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(अ) हमारा नागरिक जीवन परस्पर ………….. और …………. पर निर्भर करता है।
(ब) एक क्षेत्र में सभी तरह की ………… नहीं उगायी जातीं।
उत्तर:
(अ) सहयोग, कर्त्तव्य पालन
(ब) फसलें।

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 2 आदिमानव

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 2 आदिमानव

MP Board Class 6th Social Science Chapter 2 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पाठ्य पुस्तक पृष्ठ संख्या 6 पर दिये गये देखो और नीचे बनी तालिका को भरो।
उत्तर:
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 2 आदिमानव img 1

MP Board Class 6th Social Science Chapter 2 अभ्यास प्रश्न

1. निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप में उत्तर लिखिए –
(अ) आदिमानव अपने औजार किससे बनाता था ?
उत्तर:
आदिमानव पत्थरों, लकड़ी तथा जानवरों की हड्डियों और सींगों से हथियार बनाता था। पत्थरों के हथियार अधिकतर चकमक पत्थरों से बनाए जाते थे। इन हथियारों में पत्थरों से बने हथौड़े, कुल्हाड़ियाँ तथा वसूले प्रमुख थे। आरम्भ में हथियार को बिना मूठ तथा हत्थे के ही काम में लाया जाता था। बाद में लकड़ी के हत्थों में बाँधकर इनका प्रयोग किया जाने लगा। आगे चलकर जब मनुष्य ने धातु की खोज कर ली तो वह धातु के हथियार बनाना भी सीख गया।

(ब) आदिमानव पत्थर के औजार किस-किस काम में लाते थे ?
उत्तर:
आदिमानव पत्थरों के औजारों का उपयोग जानवरों का शिकार करने, माँस काटने, लकड़ी काटने, कन्दमूल खोदने आदि के लिए करता था।

(स) मध्यप्रदेश के किन-किन जिलों में शैलचित्र मिलते हैं ?
उत्तर:
मध्यप्रदेश के रायसेन, होशंगाबाद, मन्दसौर आदि जिलों में शैलचित्र मिलते हैं।

(द) आदिमानव जानवरों से अपनी रक्षा किस तरह करता था ?
उत्तर:
सर्वप्रथम आदिमानव जानवरों से अपनी रक्षा करने के लिए पेड़ों पर रहता था। जब आदिमानव ने आग जलाना सीख लिया तब वह आग जलाकर जानवरों से रक्षा करने लगा। क्योंकि उसने जान लिया था कि जानवर आग से डरते हैं।

(य) आग की खोज कैसे हुई ? इससे आदिमानव को क्या लाभ हुए ?
उत्तर:
अनुमान है कि दो चकमक पत्थरों के आपस में टकराने से आग की चिंगारियाँ निकलीं जिससे पास ही पड़ी हुई पत्तियाँ जलने लगीं। इससे आदिमानव आग जलाना सीख गया। इस प्रकार आग की खोज संयोग से हुई। आदिमानव ने जब चकमक पत्थर की सहायता से आग जलाना सीख लिया तो वह रात के समय गुफा में आग जलाकर जंगली जानवरों से अपनी रक्षा करने लगा। उसने उजाला करना सीख लिया। आग में वह माँस भूनकर खाने लगा। इस प्रकार आग से उसे अनेक लाभ हुए।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से दीजिए –
(अ) मानव का क्रमिक विकास बताइए।
उत्तर:
लाखों साल पहले इस पृथ्वी पर मानव का जन्म हुआ था। पहले मानव दोनों हाथों और दोनों पैरों पर चलता था और जंगलों में रहता था। वह पेड़ों की जड़ और फूल-पत्तियाँ खाता था। कुछ छोटे जानवरों को मारकर भी वह खा जाता था। धीरे-धीरे यह वानर जैसा मानव विकास करता गया और वह अपने शरीर को सन्तुलित कर दो पैरों पर चलने लगा।

अपने दोनों हाथों से उसने खोदने, पकड़ने और उठाने का काम सीख लिया। शारीरिक परिवर्तनों के साथ उसके सोचने-समझने की शक्ति भी विकसित होने लगी। वह अपनी मूलभूत जरूरतों जैसे भोजन, आवास और सुरक्षा के बारे में सोचने लगा। वह भोजन इकट्ठा करने लगा और उसने पत्थर के औजार भी बना लिए। इस प्रकार मानव का विकास होता गया। यहाँ तक का उसके विकास का युग पुरा पाषाण युग कहलाता है।

आगे चलकर उसने आग जलाना सीख लिया। वह माँस को भूनकर खाने लगा और आग से ही प्रकाश प्राप्त करने लगा। आदिमानव के विकास का यह युग मध्य पाषाण युग कहलाता है। धीरे-धीरे आदि मानव ने पशुपालन और कृषि करना सीख लिया। इससे उसका भोजन के लिए भटकना बन्द हो गया। उसने पहिये की खोज की और वह निरन्तर प्रगति करता गया। उसका यह विकास का युग नव पाषाण युग कहलाता है। यही मानव का क्रमिक विकास है।

(ब) मानव खेती करना और पशुपालन करना कैसे सीखा ? विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
नव पाषाण युग से पहले आदिमानव भोजन की तलाश में यहाँ-वहाँ घूमता रहता था। नव पाषाण काल में उसने पशुपालन और खेती करने के प्रारम्भिक तरीकों की खोज कर ली थी। इसी कारण आदिमानव का भोजन की तलाश में यहाँ-वहाँ घूमना कम हो गया था। आदिमानव को यह समझ में आ गया था कि मानव और पशु – पक्षियों द्वारा फेंके हुए फलों के बीजों से नए पौधे उग आते हैं, यही खेती करने की कला उसकी एक महत्वपूर्ण खोज थी।

वह यह भी जान गया था कि शिकार के साथ – साथ पशुपालन उसके लिए महत्वपूर्ण है। वह अनेक पशुओं को पालने लगा था और उनसे काम भी लेने लगा था। शिकार करने में कुत्ते, खेती करने में बैल, दूध प्राप्त करने के लिए गाय, भैंस, बकरी, माँस प्राप्त करने के लिए बकरा, सवारी के लिए बैल, भैंसा, ऊँट, घोड़े का वह उपयोग करना सीख गया था।

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टिप्पणी लिखिए
प्रश्न 3.
(अ) आग की खोज।
उत्तर:
आग के बारे में मनुष्य को पहले कोई जानकारी नहीं थी। यद्यपि यह कहना कठिन है कि आग की खोज किस प्रकार हुई किन्तु यह अनुमान लगाया जाता है कि जब उसने पहली बार जंगल में सूखी लकड़ियों को आपस में तेज रगड़ खाकर आग लगते हुए एवं पत्थरों के औजारों के निर्माण के दौरान दो पत्थरों के आपस में टकराने से चिंगारियों को निकलते देखा होगा तो उसे आग का ज्ञान हुआ होगा। तब पहली बार मानव ने पत्थरों को आपस में टकराकर आग उत्पन्न की होगी। आग की खोज मनुष्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

(ब) पहिए की खोज एवं उपयोग
उत्तर:
मानव की उन्नति में पहिए की खोज का महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसा अनुमान है कि पेड़ के तने को लुढ़कते हुए देखकर आदिमानव के मन में पहिए के निर्माण का विचार आया होगा। यह खोज उसके जीवनयापन के लिए वरदान साबित हुई। पहिए का उपयोग उसने निम्नलिखित कार्यों के लिए किया –

  • चाक से मिट्टी के बर्तन बनाने में।
  • भारी चीज को एक जगह से दूसरी जगह लाने ले जाने में।
  • गहराई से पानी खींचने में।
  • पशुओं द्वारा खींची जाने वाली गाड़ी के निर्माण में।

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 3 परिवार एवं समाज

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 3 परिवार एवं समाज

MP Board Class 6th Social Science Chapter 3 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(अ) परिवार की इकाई क्या है?
उत्तर:
व्यक्ति परिवार की इकाई है।

(ब) समाज में व्यक्ति अपनी पहचान कैसे बनाता है?
उत्तर:
समाज में रहकर व्यक्ति राजनेता, धर्म प्रचारक, शिक्षक, डॉक्टर, जज, कृषक, श्रमिक आदि पदों पर रहकर विभिन्न कार्य करता है और समाज में अपनी पहचान बनाता है।

(स) बच्चे का प्रथम गुरु किसे माना गया है?
उत्तर:
बच्चे को प्रथम शिक्षा परिवार में माता से ही प्राप्त होती है इसलिए माता को प्रथम गुरु माना गया है।

(द) आपके परिवार में कितने सदस्य हैं ?
उत्तर:
इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी स्वयं लिखें।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) एकल परिवार और संयुक्त परिवार से आप क्या समझते हैं? आपका परिवार आपकी कौन-कौन सी आवश्यकताएँ पूरी करता है? सूची बनाइए।
उत्तर:
जिस परिवार में पति-पत्नी उनके पुत्र-पुत्रियाँ होते हैं वे एकल परिवार कहलाते हैं जबकि संयुक्त परिवार में पति-पत्नी, पुत्र-पुत्रियों के अलावा दादा-दादी, चाचा-चाची, ताऊ-ताई आदि भी शामिल होते हैं। परिवार में रहकर व्यक्ति अपनी समस्त मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करता है जिनमें प्रमुख हैं भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा।

(ब) समाज कैसे बनता है ? आप समाज की किन-किन बुराइयों पर नियन्त्रण लगाना चाहते हैं ? लिखिए।
उत्तर:
समाजशास्त्रियों ने समाज को सामाजिक सम्बन्धों का जाल माना है। कई परिवारों से मिलकर समाज का निर्माण होता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। इसलिए वह परिवार और समाज दोनों से जुड़कर रहता है। हम समाज की कम आयु में विवाह, अधिक बच्चों का जन्म, बच्चों को प्रारम्भिक एवं अनिवार्य  शिक्षा न दिलाना जैसी बुराइयों पर नियन्त्रण लगाना चाहते हैं।

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प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(अ) अपने शिशुओं की जिम्मेदारी …………… सहज रूप से स्वीकारते हैं।
(ब) छोटे परिवारों को ………… माना गया है।
(स) परिवार की इकाई ………… होती है।
(द) समाज की इकाई ……….. होती है।
उत्तर:
(अ) माता – पिता
(ब) आदर्श परिवार
(स) व्यक्ति
(द) परिवार

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 1 इतिहास जानने के स्रोत

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 1 इतिहास जानने के स्रोत

MP Board Class 6th Social Science Chapter 11 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(अ) इतिहास जानने के मुख्य स्रोत कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
इतिहास जानने के मुख्य स्रोत हैं – पाषाण उपकरण, जीवाश्म, मिट्टी के बर्तन, शिलालेख, सिक्के, हथियार, मन्दिर, महल, मस्जिद, भोजपत्र, ताम्रपत्र, ताड़पत्र, पुरातत्त्व तथा इतिहास की पुस्तकें आदि।

(ब) शैलचित्र क्या होते हैं व मध्यप्रदेश में वे कहाँ मिलते हैं?
उत्तर:
बहुत पहले लोग जब लिखना-पढ़ना नहीं जानते थे तब वे अपनी बात चित्र बनाकर कहते थे। खोज करने पर पता चला है कि ऐसे चित्र आदिमानव बनाया करते थे। आदि मानव काल में चित्र पहाड़ों की गुफाओं में बनाए जाते थे। इसलिए इस काल के चित्रों को शैलचित्र कहते हैं। मध्यप्रदेश में भोपाल के पास भीमबेटका के शैलचित्र आदिमानव काल के ही हैं। भीमबेटका विश्व का सबसे बड़ा शैलचित्र स्थल है।

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(स) भोजपत्र किसे कहते हैं ?
उत्तर:
भोजपत्र एक विशेष प्रकार के वृक्ष की छाल होती है जिस पर प्राचीन काल में लिखा जाता था।

(द) इतिहास का अध्ययन क्यों आवश्यक है ?
उत्तर:
इतिहास से हमें पुरानी बातों की जानकारी मिलती है। पहले लोगों का जीवन कैसा था तथा वे किस प्रकार रहते थे, उन्होंने आग जलाना कैसे सीखा, पहिए की खोज कब हुई ? ये सब बातें हम इतिहास से ही सीख सकते हैं। इतिहास को पढ़ने से हमें अपनी सभ्यता व संस्कृति की जानकारी मिलती है। इतिहास हमें राजा-महाराजा से लेकर जन-साधारण तक की जानकारी देता है। इतिहास से अनेक बातें सीखकर ही हम लगातार उन्नति कर सकते हैं।

(य) ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा हमें क्यों करनी चाहिए?
उत्तर:
ऐतिहासिक धरोहर हमें अपने अतीत, अपनी सभ्यता तथा संस्कृति की जानकारी देती है, इसलिए हमें इसकी सुरक्षा करनी चाहिए।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(अ) ह्वेनसांग और फाह्यान …………….. यात्री थे।
(ब) भीमबेटका की खोज ……………… ने की थी।
(स) पुरानी वस्तुओं / स्थलों की खोज करने व उनके बारे में सही तथ्यों का पता लगाने वाले को ………….. कहते हैं।
उत्तर:
(अ) चीनी,
(ब) पद्मश्री डॉ. वि. श्री. वाकणकर
(स) पुरातत्त्ववेत्ता।

प्रश्न 3.
सही विकल्प चुनकर लिखिए।
(अ) ताम्रपत्र लिखे जाते हैं –
(i) पत्थरों पर,
(ii) ताँबे के पत्तरों पर
(iii) वृक्ष की छाल पर।
उत्तर:
(ii) ताँबे के पत्तरों पर

(ब) शिलालेख कहा जाता है –
(i) पत्थरों पर खोद कर लिखी जानकारी
(ii) किताबों में लिखी जानकारी
(iii) भोजपत्र पर लिखी जानकारी
उत्तर:
(i) पत्थरों पर खोद कर लिखी जानकारी

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(स) स्थापत्य कला से हमें ज्ञान होता है –
(i) भवनों का
(ii) चित्रों का
(iii) औजारों का।
उत्तर:
(i) भवनों का

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