MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 11 जनपदों और महाजनपदों का युग

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 11 जनपदों और महाजनपदों का युग

MP Board Class 6th Social Science Chapter 11 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न
पाठ्य पुस्तक पृष्ठ संख्या 64 पर दिये गये मानचित्र को ध्यान से देखें और प्राप्त जानकारी से दी गई तालिका को पूरा करें।
उत्तर:
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 11 जनपदों और महाजनपदों का युग img 1

MP Board Class 6th Social Science Chapter 11 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(अ) जनपद किसे कहते हैं ?
उत्तर:
जनपद से आशय है ‘मनुष्य के बसने का एक क्षेत्र’।

(ब) दो गणसंघों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • मिथिला के वज्जि
  • कपिलवस्तु के शाक्य।

(स) मगध साम्राज्य की स्थापना किसने की थी ?
उत्तर:
मगध साम्राज्य की स्थापना बिम्बिसार ने की थी।

(द) महाजनपद काल के चार प्रमुख नगरों के नाम लिखिए।
उत्तर:
उज्जयनी, श्रावस्ती, अयोध्या, काशी, कौशाम्बी आदि।

(य) अजातशत्रु कौन था ?
उत्तर:
अजातशत्रु बिम्बिसार का पुत्र था।

(र) महाजनपद किसे कहते हैं ?
उत्तर:
बड़े एवं शक्तिशाली जनपदों को महाजनपद कहा जाता था। महाजनपदों में से एक ‘अवंति’ मध्य प्रदेश में था।

(ल) आहत सिक्के किसे कहते हैं ?
उत्तर:
महाजनपद काल के जो सिक्के प्राप्त हुए हैं वे ताँबे या चाँदी के होते थे। इन्हें ही आहत या ठप्पे लगे (पंचमार्क) सिक्के कहते हैं।

(व) गणसंघ तथा जनपद क्या हैं ?
उत्तर:
गणसंघ-ऐसे राज्य जहाँ वंशागत राजा नहीं होते थे ‘गणसंघ’ कहलाते थे। गणसंघ के राजा को जनता चुनती थी। मिथिला के वज्जि, कपिलवस्तु के शाक्य प्रमुख गणसंघ थे।

जनपद:
उत्तर:
जनपद से आशय है ‘मनुष्य के बसने का एक क्षेत्र’।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) बिम्बिसार कौन था ? उसने अपना साम्राज्य विस्तार कैसे किया ?
उत्तर:
बिम्बिसार लगभग 544 ई. पू. में मगध का राजा बना।
उसने अपने राज्य को शक्तिशाली बनाने के लिए निम्नलिखित उपाय किये –

  • उसने पड़ोसी राज्यों को अपना मित्र बनाया।
  • पड़ोसी राजघराने में विवाह सम्बन्ध स्थापित किए।
  • उसने गंगा नदी पर अधिकार कर लिया। यहाँ से नावों द्वारा व्यापार करने में सुविधा हो गई।
  • उसने अंग राज्य को जीता तथा गंगा तट के प्रमुख बन्दरगाह चम्पा पर अधिकार कर लिया। इससे मगध का दक्षिण भारत के साथ मसाले और मणि-माणिक का व्यापार होने लगा।
  • मगध में लोहे के भण्डारों का उपयोग करके बिम्बिसार ने हथियारों तथा औजारों का निर्माण कराया। इन उपायों से मगध अत्यन्त शक्तिशाली राज्य बन गया।

(ब) मगध साम्राज्य के विस्तार के प्रमुख कारण लिखिए।
उत्तर:
मगध साम्राज्य के विस्तार के कारण निम्नलिखित हैं –

  • मगध क्षेत्र की भूमि उपजाऊ थी।
  • मगध क्षेत्र में लोह के पर्याप्त भण्डार थे, इससे सेना को हथियार बनाने में मदद मिली।
  • गंगा नदी में नौकाओं से व्यापार होता था। अत: व्यापारी भी दूर-दूर तक आते-जाते थे।

(स) गौतम बुद्ध का जीवन परिचय लिखते हुए उनके प्रमुख उपदेश लिखिए।
उत्तर:
गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। नेपाल के तराई क्षेत्र में लुंबिनी वन नामक स्थान पर 563 ई. पू. इनका जन्म हुआ था। बचपन से ही गौतम का मन ध्यान और आध्यात्मिक चिन्तन की ओर था। 29 वर्ष की आयु में आप ज्ञान प्राप्त करने के लिए घर से निकल पड़े। सात वर्षों तक भ्रमण करने के पश्चात् बोध गया स्थान में एक पीपल के वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। तभी से आप ‘बुद्ध’ कहे जाने लगे। ज्ञान प्राप्त करने के बाद बुद्ध ने अनेक वर्षों तक अपने ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया। 483 ई. पू. वैशाख पूर्णिमा को कुशीनगर में बुद्ध का देहावसान हुआ।

बुद्ध के उपदेशों का सार उनके चार आर्य सत्य हैं जो निम्न प्रकार हैं –

  • संसार दुःख से भरा है-बुद्ध के अनुसार संसार दुःख से भरा है। सब कुछ दुःखमय है।
  • दुःख का कारण-सब दुःखों का कारण मनुष्य की इच्छाएँ हैं।
  • दुःख का निरोध-मनुष्य दुःख से छुटकारा पा सकता है। जन्म-मरण के बंधनों से छुटकारा पाना ही जीवन का उद्देश्य है।
  • दुःख से छुटकारा पाने के साधन-दुःख से छुटकारा पाने का साधन ‘अष्टांगिक’ मार्ग-शुद्ध विचार, शुद्ध संकल्प, शुद्ध वाणी, शुद्धध्यवहार, शुद्ध जीवन, शुद्ध ध्यान, शुद्ध समाधि का पालन करना है।

(द) महावीर स्वामी का जीवन परिचय लिखते हुए उनकी प्रमुख शिक्षाओं को लिखिए।
उत्तर:
महावीर स्वामी का जन्म वैशाली नामक गणराज्य में हुआ था। इनके बचपन का नाम वर्धमान था। सत्य की खोज के लिए वे 30 वर्ष की उम्र में ही घर छोड़ गए। 12 वर्ष तक भटकने के बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। इन्होंने जैन धर्म चलाया।
महावीर स्वामी की शिक्षाएँ निम्नलिखित थी –

  • हिंसा (जीव हत्या) कभी नहीं करनी चाहिए।
  • सत्य का पालन करो।
  • चोरी मत करो।
  • धन का संचय नहीं करना चाहिए।
  • ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

(य) महाजनपदयुगीन प्रशासन व जीवन शैली के बारे में लिखिए।
उत्तर:
महाजनपदयुगीन प्रशासन-महाजनपद युग में राजा का पद बहुत शक्तिशाली था। वह राज्य का प्रशासन आमान्य (मंत्री), पुरोहित (धर्मगुरु), संग्रत्री (कोषाध्यक्ष), बलि साधक (कर वसूलने वाले),शौल्किक (चुंगी वसूलने वाला), सेनापति, ग्रामीण आदि के द्वारा चलाता था। राजा का परामर्श ‘परिषद’ देती थी। किसानों को कर देना पड़ता था। जीवन शैली-महाजनपद युग में समाज में चार वर्ण थे। कुछ जातियों का भी जन्म हो गया था। जैसे बढ़ई, सुनार, लुहार आदि। एक व्यवसाय से जुड़े लोगों को ‘श्रेणी’ कहा गया। इस काल में बौद्ध धर्म व जैन धर्म का उदय हुआ।

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प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(अ) नन्दवंश के शासन काल में …………. का भारत पर आक्रमण हुआ।
(ब) शिशुनाग …………… का शासक था।
(स) महावीर का जन्म …………. में हुआ था।
उत्तर:
(अ) सिकन्दर
(ब) काशी
(स) वैशाली गणराज्य।

प्रश्न 4.
कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
(अ) बिम्बिसार वंश का था। (हर्यंक / मौर्य)
(ब) चण्डप्रद्योत महाजनपद का शासक था। (अवन्ति / अंग)
(स) बुद्ध का जन्म नामक स्थान पर हुआ था। (लुंबिनी / वज्जि)
उत्तर:
(अ) मौर्य
(ब) अवन्ति
(स) लुंबिनी

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 9 हड़प्पा सभ्यता

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 9 हड़प्पा सभ्यता

MP Board Class 6th Social Science Chapter 9 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न:
पाठ्य पुस्तक पृष्ठ संख्या 50 पर दिये गये मानचित्र को देखकर पता लगाओ कि कौन-सी सभ्यता किन-किन नदियों के किनारे पर विकसित हुई ? जानकारी को नीचे लिखिए
उत्तर:
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 9 हड़प्पा सभ्यता

MP Board Class 6th Social Science Chapter 9 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(अ) हड़प्पा सभ्यता में किस पेड़ की पूजा के प्रमाण मिले हैं ?
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता में पीपल के वृक्ष की पूजा के प्रमाण मिले हैं।

(ब) हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख चार स्थलों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • मोहनजोदड़ो
  • हड़प्पा
  • रोपड़
  • लोथल।

(स) नदी घाटी सभ्यता नदियों के किनारे ही क्यों विकसित हुई ?
उत्तर:
आदि मानव हमेशा वहीं बसते थे जहाँ पीने के लिए स्वच्छ जल, खाने के लिए भरपूर भोजन और निवास के लिए सुरक्षित स्थान आसानी से उपलब्ध हो। नदियों के किनारे इन तीनों आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से होने के कारण विश्व की प्राचीनतम सभ्यताएँ नदियों के किनारे ही विकसित हुईं।

(द) हड़प्पा सभ्यता के शिल्प व तकनीकी ज्ञान के बारे में लिखिए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता कांस्य युग की सभ्यता थी। हड़प्पा सभ्यता के लोग कांसा बनाना जानते थे। खुदाई से प्राप्त वस्तुओं के आधार पर पता चलता है कि इस सभ्यता के लोगों ने धातुओं के गलाने, ढालने और सम्मिश्रण की कला में विशेष उन्नति की थी। बर्तन बनाने, खिलौने बनाने और मोहरों के निर्माण में ये लोग पारंगत थे। खुदाई में मिली कांसे की नर्तकी उनकी मूर्तिकला का सुन्दर नमूना है। स्पष्ट है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग शिल्प व तकनीकी ज्ञान में बहुत आगे थे।

(य) हड़प्पा सभ्यता में कौन-कौन सी फसलें उगाई जाती थीं?
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता में गेहूँ, जौ, सरसों, कपास, मटर, तिल की फसलें उगाई जाती थीं।

(र) सिन्धु घाटी सभ्यता की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं ?
उत्तर:
सिन्धु घाटी सभ्यता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  • सिन्धु घाटी की सभ्यता एक शहरी सभ्यता थी।
  • इस सभ्यता की प्रमुख विशेषता उसकी नगर योजना प्रणाली थी।
  • सिन्धु घाटी की जल निकास प्रणाली अद्वितीय थी।
  • मोहनजोदड़ो में सार्वजनिक विशाल स्नानागार था जो उस सभ्यता का महत्त्वपूर्ण निर्माण माना जाता है।
  • इस सभ्यता के लोग गेहूँ, जौ, सरसों, कपास व तिल आदि की फसलें उगाते थे।
  • इस सभ्यता में धातुओं के गलाने, ढालने और सम्मिश्रण की कला उन्नत थी।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) हड़प्पावासियों की नगर रचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता की सबसे प्रमुख विशेषता उसकी – नगर योजना प्रणाली थी। नगर अधिकतर दो अथवा तीन भागों में बँटे थे। सबसे सुरक्षित स्थान किला या दुर्ग कहलाता था। यहाँ उच्च वर्ग का परिवार रहता होगा। मध्यम व निचले भाग में मध्यम वर्ग व निम्न वर्ग का निवास था। इन नगरों में सड़कें पूरी सीधी थीं जो एक-दूसरे को लम्बवत् काटती थीं। हड़प्पा सभ्यता के नगरों में कोठार (अनाज भरने के गोदाम) का महत्वपूर्ण स्थान था।

मोहनजोदड़ो का सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल विशाल स्नानागार है। यह 11 88 मीटर लम्बा, 7.01 मी चौड़ा और 2.43 मीटर गहरा है। इसके दोनों सिरों पर तल तक सीढ़ियाँ बनी हैं। पास में कपड़े बदलने के कक्ष हैं। स्नानागार का फर्श पक्की ईंटों का बना है। पास के एक कमरे में बड़ा-सा कुआँ बना है। सम्भवतः यह स्नानागार किसी धार्मिक अनुष्ठान सम्बन्धी स्नान के लिए बना होगा। इसके अलावा भी हर छोटे-बड़े मकान में आँगन (प्रांगण) और स्नानागार होता था।

(ब) हड़प्यावासियों के धार्मिक विश्वासों के बारे में आप क्या जानते हैं ? लिखिए।
उत्तर:
हड़प्पावासी देवी उपासना करते थे। कुछ पुराविदों ने पशुपति (शिव) की उपासना करने की बात भी कही है। हड़प्पा में पक्की मिट्टी व पत्थर पर बने लिंग और योनि के अनेक प्रतीक मिले हैं। इसके अलावा कमण्डल, यज्ञवेदी, स्वास्तिक आदि के अवशेष हड़प्पा सभ्यता के लोगों के धार्मिक विचारों व क्रिया – कलापों की जानकारी प्रदान करते हैं। कूबड़ वाले साँड़ की मृणमूर्ति तथा अंकन कई मुहरों पर मिलता है। उत्खनन में ताबीज बड़ी संख्या में मिले हैं। शायद हड़प्पावासी भूत-प्रेतों में विश्वास कर उनसे रक्षा के लिये ताबीज पहनते थे। हड़प्पा सभ्यता में पीपल के वृक्ष की पूजा के प्रमाण मृणमुहरों तथा पात्रों पर मिलते हैं।

(स) हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों को लिखिए।
उत्तर:
हड़प्पा के पतन के कारण निम्नलिखित हैं –

  • भूकम्प आने के कारण सम्भवतः सिंधु नदी का मार्ग बदल गया होगा और हड़प्पा सभ्यता के नगर भूस्खलन से जमीन में दब गये होंगे।
  • सम्भवतया आर्यों के आक्रमण ने इस सभ्यता को नष्ट कर दिया होगा।
  • बढ़ते हुए रेगिस्तान के कारण इस सभ्यता का पतन हो गया होगा।
  • सिंधु नदी की बाढ़ से इस सभ्यता का अन्त हो गया होगा।

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प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(अ) मोहनजोदड़ो का सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल विशाल …….है। (गोदाम/स्नानागार)
(ब) हड़प्पा सभ्यता ………….. सभ्यता है। (नगरीय/ग्रामीण)
(स) कांसे की नर्तकी हड़प्पा सभ्यता की …………’ का सर्वश्रेष्ठ नमूना है। (मूर्तिकला/वास्तुकला)
(द) कूबड़ वाले साँड का अंकन कई ………….. पर मिलता है। (भवनों/मुहरों)
(य) हड़प्पावासियों की लिपि …………. लिपि थी। (देवनागरी/चित्र)
(र) हड़प्पा सभ्यता में …………. व पर्यावरण शुद्धि पर अधिक ध्यान दिया गया था। (गंदगी/साफ-सफाई)
उत्तर:
(अ) स्नानागार
(ब) नगरीय
(स) मूर्तिकला
(द) मुहरों
(य) चित्र
(र) साफ-सफाई

प्रश्न 4.
नदी घाटी और उनमें विकसित सभ्यताओं की सही जोड़ी मिलाओ –
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 9 हड़प्पा सभ्यता img 2

उत्तर:
(अ) (ii) मिश्र की सभ्यता
(ब) (iv) मेसोपोटामिया की सभ्यता।
(स) (i) मोहनजोदड़ो व हड़प्पा सभ्यता
(द) (iii) चीन की सभ्यता

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प्रश्न 5.
सही विकल्प चुनिए –
1. हड़प्पा सभ्यता में कौन-सी विशेषता नहीं पाई गयी?
(i) सुनियोजित नगरीय व्यवस्था
(ii) धातु गलाने व ढालने की कला
(iii) पेड़ों व गुफाओं में रहना
(iv) पशुपालन व कृषि
उत्तर:
(iii) पेड़ों व गुफाओं में रहना

2. हड़प्पावासी कौन-सी धातु का उपयोग अधिक करते थे?
(i) लोहा
(ii) ताँबा
(iii) सोना
(iv) चाँदी
उत्तर:
(ii) ताँबा

3. हड़प्पा सभ्यता के पतन के सम्भावित कारणों में से नहीं था –
(i) आग लगना
(ii) आर्यों का आक्रमण
(iii) मुगलों का आक्रमण
(iv) तेज वर्षा
उत्तर:
(iii) मुगलों का आक्रमण

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.6

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.6

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प्रश्न 1.
निम्न समीकरणों को हल कीजिए –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.6 img-1
हल:
1. \(\frac{8x-3}{3x}\) = 2
दोनों पक्षों को 3x से गुणा करने पर,
\(\frac{8x-3}{3x}\) x 3x = 2 x 3x
या 8x – 3 = 6x
या 8x – 6x = 3
या 2x = 3
या x = \(\frac{3}{2}\)

2. \(\frac{9x}{7-6x}\) = 15
दोनों पक्षों को (7 – 6x) से गुणा करने पर,
\(\frac{9x}{7-6x}\) x (7 – 6x) = 15 x (7 – 6x)
या 9x = 105 – 90x
या 9x + 90x = 105
या 99x = 105
या x = \(\frac{105}{99}\) = \(\frac{35}{33}\)

3. \(\frac{z}{z+15}\) – \(\frac{4}{9}\)
दोनों पक्षों को 9 (x + 15) से गुणा करने पर,
9 (z + 15) x \(\frac{z}{z+15}\) = \(\frac{4}{9}\) – 9 (z + 15)
या 9z = 4 (z + 15)
या 9z = 4z + 60
या 9z – 4z = 60
या 5z = 60
या z = \(\frac{60}{5}\)
z = 12

4. \(\frac{3y+4}{2-6y}\) = \(\frac{-2}{5}\)
दोनों पक्षों को 5 (2 – 6y) से गुणा करने पर,
5 (2 – 6y) x \(\frac{3y+4}{2-6y}\) = \(\frac{-2}{5}\) x 5 (2 – 6y)
या 5 (3y+4) = – 2 (2 – 6y)
या 15y + 20 = – 4 + 12y
या 15y – 12y = – 4 – 20
या 3y = – 24
या y = \(\frac{-24}{3}\)
y = – 8

5. \(\frac{7y+4}{y+2}\) = \(\frac{-4}{3}\)
दोनों पक्षों को 3 (y + 2) से गुणा करने पर,
3 (y+2) x \(\frac{7y+4}{y+2}\) = \(\frac{-4}{3}\) x 3 (y + 2)
या 3 x (7y + 4) = – 4 (y + 2)
या 21y + 12 = – 4y – 8
या 21y + 4y = – 8 – 12
या 25y = – 20
या y = \(\frac{-20}{25}\) = \(\frac{-4}{5}\)

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प्रश्न 2.
हरी और हैरी की वर्तमान आयु का अनुपात 15 : 7 है। अब से 4 वर्ष बाद उनकी आयु का अनुपात 3 : 4 हो जाएगा। उनकी वर्तमान आयु ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि हरी और हैरी की वर्तमान आयु क्रमशः 5x व 7x वर्ष है।
5 वर्ष बाद हरी की आयु = (5x + 4) वर्ष
तथा हैरी की आयु = (7x + 4) वर्ष
अब, प्रश्नानुसार,
\(\frac{5x+4}{7x+4}\) = \(\frac{3}{4}\)
या 4 x (5x + 4) = 3 (7x + 4)
या 20x + 16 = 21x + 12
या 20x – 21x = 12 – 16
या -x = – 4 ⇒ x = 4
∴ हरी की वर्तमान आयु = 5 x 4 वर्ष = 20 वर्ष तथा हैरी की वर्तमान आयु = 7 x 4 = 28 वर्ष

प्रश्न 3.
एक परिमेय संख्या का हर उसके अंश से 8 अधिक है। यदि अंश में 17 जोड़ दिया जाए तथा हर में से 1 घटा दिया जाए तब हमें \(\frac{3}{2}\) प्राप्त होता है। वह परिमेय संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि संख्या का अंश = x है,
हर = x = 8
अब, प्रश्नानुसार,
या \(\frac{x+17}{(x+8)-1}\) = \(\frac{3}{2}\)
या \(\frac{x+17}{x+7}\) = \(\frac{3}{2}\)
या 2 (x + 17) = 3 (x + 7)
या 2x + 34 = 3x + 21
या 2x – 3x = 21 – 34
या – x = – 13
या x = – 13
\(\frac{x}{x+8}\) = \(\frac{13}{13+8}\) = \(\frac{13}{21}\)
∴ अभीष्ट परिमेय संख्या= \(\frac{13}{21}\)

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 19 गुरुदक्षिणा (पद्यम्) (रघुवंशात्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 19 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) वरन्तन्तुशिष्यः कः आसीत्? (वरतन्तु का शिष्य कौन था?)
उत्तर:
कौत्सः (कौत्स)

(ख) अनर्घशीलः कः? (निश्छल व्यवहार किसका था?)
उत्तर:
रघुः (रघु का)

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(ग) वरतन्तुशिष्यः स्वार्थोपपत्तिं प्रति कीदृशः सञ्जातः? (वरतन्तु शिष्य अपने कार्य की सिद्धि के लिए कैसा हो गया?)
उत्तर:
दुर्बलाशः (निराश)

(घ) गुरुणा किम् अचिन्तयित्वा उक्तः? (गुरु ने क्या विचार न करके कहा?)
उत्तर:
अर्थकार्यम् (गरीबी को)

(ङ) रघुः कस्मात् धनं प्राप्तुम् इष्टवान्? (रघु ने किससे धन लेने की इच्छा की?)
उत्तर:
कुबेरात् (कुबेर से)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) रघुः कस्मात् हेमराशिम् लब्धवान्? (रघु ने किससे सुवर्ण राशि प्राप्त की?)
उत्तर:
रघुः कुबेरात् हेमराशिम् लब्धवान्। (ग्घु ने कुबेर से स्वर्ण राशि प्राप्त की।)

(ख) वरतन्तुः कौत्सं कियत् धनं याचितवान्? (वरतन्तु ने कौत्स से कितना धन माँगा?)
उत्तर:
वरतन्तुः कौत्सं चतुर्दशः कोटीः धनं याचितवान्। (वरतन्तु ने कौत्स से 14 करोड़ स्वर्ण मुद्राएं माँगी।)

(ग) विश्वजिति अध्वरे रघुः कीदृशः सञ्जातः? (विश्वजित् यज्ञ में रघु कैसा हो गया?)
उत्तर:
विश्वजिति अध्वरे रघुः निःशेषविश्राणितकोष जातम्। (विश्वजित् यज्ञ की दक्षिणा में रघु रिक्त खजाने वाला हो गया।)

(घ) रघुः गां कीदृशीम् अमन्यत्? (रघु ने पृथ्वी को कैसा माना?)
उत्तर:
रघुः गाम् आन्तसाराम् अमन्यत्। (रघु ने पृथ्वी को सारहीन माना।)

(ङ) तौ द्वौ कस्य अभिनन्द्यसत्वौ अभूताम्? (वे दोनों किसके अभिनन्दन के पात्र हुए?)
उत्तर:
तौ द्वौ साकेतनिवासिनः जनस्य अभिनन्धसत्वौ अभूताम्। (वे दोनों साकेत (अयोध्या) में रहने वाले लोगों के अभिनन्दन का पात्र बने।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत। (नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) रघोः समीपं कः किमर्थम् आगतः? (रघु के पास कौन और क्यों आया?)
उत्तर:
रघोः समीपं कौत्सः गुरुदक्षिणाय चतुदर्शः कोटीः सुवर्णराशिः ग्रहीतुम् आगतः। (रघु के पास कौत्स गुरु दक्षिणा के लिए 14 करोड़ स्वर्ण राशि लेने के लिए आया था।)

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(ख) कीदृशः रघुः कस्मिन् पात्रे अर्घ्यं निघाय अतिथिं प्रत्युज्जगाम? (कैसा रघु किस पात्र में अर्घ्य लेकर अतिथि के पास आया?)
उत्तर:
अनर्घशीलः यशस्वी आतिथेयः च रघुः मृण्मये पात्रे अर्घ्य निधाय अतिथिं प्रत्युजंगाम। (निश्छल व्यवहार वाला, यशस्वी और अतिथि सेवी रघु मिट्टी के पात्र में अर्घ्य लेकर अतिथि के पास गया।)

(ग) वारं-वारं प्रार्थयन्तं कौत्सं गुरुः किमुक्तवान्? (बार-बार प्रार्थना करने पर कौत्स को गुरु ने क्या कहा?)
उत्तर:
वारं-वारं प्रार्थयन्तं कौत्सं गुरुः उक्तवान् यत्-‘वित्तस्य चतस्रः दश च कोटीः मे आहर’ इति। (वार-बार प्रार्थना करने पर कौत्स को गुरु ने कहा-’14 करोड़ (स्वर्ण राशि) का धन मुझे दो।’)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत-(दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(मनः, द्वावपि, मा, अर्थम्, मृण्मये)
(क) रघुः ………….. पाने अर्घ्य दत्तवान्।
(ख) तव अभिगमेन मे…………..न तृप्तम्।
(ग) ………….. अभूताम् अभिनन्यसत्वौ।
(घ) मे परिवादनवावतारः ………….. भूत्।
(ङ) रघुः कुबेरात् ………….. निष्कष्टुम् चकमे।
उत्तर:
(क) मृण्मये
(ख) मनः
(ग) द्वावपि
(घ) मा
(ङ) अर्थम्

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत्-(उचित क्रम से जोडिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 1
उत्तर:
(क) 4
(ख) 5
(ग) 1
(घ) 3
(ङ) 2

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘न’ इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘त्र’ लिखिए-)
(क) कुबेरः रघु धनं दत्तवान्।
(ख) रघुः हिरण्मयपात्रे कौत्साय अर्घ्यं दत्तवान्।
(ग) कौत्सः धनं स्बीकर्तुं गुरुसमीपं गतवान्।
(घ) कौत्सः गुरुदक्षिणार्थी आसीत्।
(ङ) रघुः वरतन्तुशिष्यः आसीत्।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न।

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प्रश्न 7.
अधोलिखितशब्दानां विभक्तिं वचनं च लिखत
(नीचे लिखे शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 3

प्रश्न 8.
अधोलिखितशब्दानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत।
(नीचे लिखे शब्दों के सन्धि-विच्छेद कर सन्धि का नाम लिखिए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 19 गुरुदक्षिणा img 5

प्रश्न 9.
अधोलिखितशब्दानां पर्यायशब्दान् लिखत
(नीचे लिखे शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए-)
यथा- वित्तम् – धनम्
(क) अध्वरः
(ख) क्षितीशः
(ग) गुरुः
(घ) याचकः
उत्तर:
(क) अध्वरः – यज्ञः
(ख) क्षितीशः – भूपतिः
(ग) गुरुः – आचर्थ
(घ) याचकः – दक्षिणार्थी

प्रश्न 10.
अव्ययः वाक्यनिर्माणं कुरुत (अव्ययों से वाक्य बनाइए-)
यथा- अपि – अहम् अपि पठामि।
(क) इति
(ख) न
(ग) प्रति
(घ) इव
उत्तर:
(क) इति – सः कथयति-‘अहं न गच्छामि’ इति। (वह कहता है-मैं नहीं जा रहा हूँ।)
(ख) न – रामः भेजनं न खादति। (राम भोजन नहीं खाता है।)
(ग) प्रति – विद्यार्थी ग्रहं प्रति गच्छति। (विद्यार्थी घर की ओर जाता है।)
(घ) इव – सा मयूरः इव नृत्यति। (वह मोर की तरह नाचती है।)

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प्रश्न 11.
प्रदत्तश्लोकान्वयस्य पूर्ति कुरुत-(दिए श्लोक का अन्वय पूरा कीजिए)
निर्बन्धसञ्जातरुषा ………..अर्थकार्यम्………….अहं वित्तस्य चतस्रः
दश च कोटीः मे………….इति……….उक्तः
उत्तर:
निर्बन्धसञ्जातरुषा गुरुणा अर्थकाय॑म् अचिन्तयित्वा अहं वित्तस्य चतस्रः
दश च कोटीः मे आहर इति विद्यापरिसङ्खयया उक्तः। योग्यताविस्तारः

पाठे आगतानां श्लोकानां सस्वरगायनं कुरुत।
(पाठ में आए श्लोकों को सस्वर गाइए।)

रघोः अन्यान् आदर्शगुणान् अन्विष्य लिखत।
(रघु के अन्य आदर्श गुणों को ढूंढ़ कर लिखो।)

गुरुदक्षिणा पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में ‘गुरुदक्षिणा’ पर आधारित कछ श्लोक दिए गए हैं, जिन्हें महाकवि कालिदास जी द्वारा रचित महाकाव्य ‘रघुवंश’ से लिया गया है। इनमें गुरु दक्षिणा के लिए आए कौत्स और देने वाले महाराज रघु के उदात्तभाव को दर्शाया गया। याचक आवश्यकता से अधिक नहीं लेना चाहता, पर दातां सब कुछ देना चाहता है। न लेने वाले का उदात्त भाव महाकवि द्वारा इन श्लोकों में सुन्दरता से वर्णित किया गया है।

गुरुदक्षिणा पाठ का अनुवाद

1. तमध्वरे विश्वनिति क्षितीशं निःशेषविश्राणितकोष जातम्।
उपात्तविद्यो गुरुदक्षिणार्थी कौत्सः प्रपेदे वरतन्तुशिष्यः॥२॥

अन्वयः :
विश्वजिति अध्वरे निःशेषविश्राणितकोषजातम् तं क्षितीशम् उपात्तविधिः गुरुदक्षिणार्थी वरतन्तुशिष्यः कौत्स प्रपेदे।

शब्दार्थाः :
विश्वजिति अध्वरे-विश्वजित् यज्ञ की दक्षिणा में-as offerings in world winning sacrifice; निःशेषविश्राणितकोषजातम्-दान में दिए जाने के कारण जिसका खजाना रिक्त हो गया है।-exchequer empty on being given in charity; तं क्षितीशम्-उस रघु के पास-to that lord of earth Raghu; उपात्तविद्यः-विद्या पढ़करhaving sought education; वरतन्तुशिष्यः कौत्सः-वरतन्तु के शिष्य कौत्स-Kautsa, the disciple of Vartantu; प्रपेदे-आए-approached.

अनुवाद :
विश्वजित् यज्ञ की दक्षिणा में दिए जाने के कारण जिसका खजाना रिक्त हो गया है, उस रघु के पास विद्या पढ़कर गुरुदक्षिणा के लिए वरतन्तुशिष्य कौत्स आए।

English : Kautsa, the son of Vartantu approached Raghu who had offered every thing in charity.

2. स मृण्मये वीतहिरण्मयत्वात्पात्रे निधायार्थ्यमनर्घशीलः।
श्रुतप्रकाशं यशसा प्रकाशः प्रत्युज्जगामातिथिमातिथेयः॥२॥

अन्वययः :
अनर्घशीलः यशसा प्रकाशः आतिथेयः सः वीतहिरण्मयत्वात् मृण्मये पात्रे अर्ध्यम् निधाय श्रुतप्रकाशम् अतिथिम् प्रत्युज्जगाम्।।

शब्दार्थाः :
अनर्घशीलः-निश्छल व्यवहार/असाधारण स्वभाव वाला- fraudless conduct of extra-ordinary nature; यशसा प्रकाशः-यशस्वी-illustrious, reputed; सः-वह (रघु)-he (Raghu) वीतहिरण्मयत्वात्-सुवर्ण पात्रों के अभाव में-in the absence of golden utensils; मृण्मये पात्रे-मिट्टी के पात्र में-in earthen-wares; श्रुतप्रकाशम्-वेदाध्ययन से देदीप्यमान (कौत्स के)-illumined with the studyofvedas of Kautsa; प्रत्युज्जगाम-पास आए-approached.

अनुवाद :
निश्छल व्यवहार वाले, यशस्वी और अतिथिसेवी वह सुवर्ण पात्रों के अभाव में मिट्टी के पात्र में अर्ध्य लेकर वेदाध्ययन से देदीप्यमान् अतिथि के पास आए।

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English :
The deceitless, illustrious and hospitable king offered ‘Arghya’ in earthenwares and approached the learned guest.

3. तवाहतो नाभिगमेन तृप्तं मनो नियोगक्रिययोत्सुकं मे।।
अप्याज्ञया शासितुरात्मना वा प्राप्तोऽसि सम्भावयितुं वनान्माम्॥३॥

अन्वयः :
अर्हतः तव अभिगमेन मे मनः न, तृप्तम्, किन्तु नियोगक्रियया उत्सुकम् शासितुः आज्ञया अपि आत्मना वा माम् सम्भावयितुम् वनात् प्राप्तोऽसि।

शब्दार्थाः :
अर्हतः -पूज्य के (आपके)-worthy of worship; अभिगमेन-आगमन मात्र से-by merevisit; तृप्तम्-सन्तुष्ट-satisfied; नियोगक्रियया-दान की क्रिया से-by the action of charity; उत्सुकम्-उत्सुक को (मुझ रघु को)-me who am curious, शासितुः-गुरु को-of the guru, आत्मना-स्वेच्छा से-with own desire (of your own will), सम्भावयितुम्-कृतार्थ करने के लिए-to oblige.

अनुवाद :
आप जैसे पूज्य के आने मात्र से मेरा मन सन्तुष्ट नहीं हुआ है। मैं दान का काम करने के लिए उत्सुक हूँ। क्या आप वन से अपने गुरु की आज्ञा से मुझे कृतार्थ करने आए हैं या स्वयं अपनी इच्छा से?

English :
Your visit alone has not gratified me. I have a desire to serve you with an act of charity. Have you came to oblige with your preceptors permission or of your own free will?

4. इत्यर्थ्यपात्रानुमितव्ययस्य रघोरुदारामपि गां निशम्य।
स्वार्थोपपत्ति प्रति दुर्बलाशस्तमित्यवोचद्वरतन्तुशिष्यः॥4॥

अन्वयः :
अर्घ्यपात्रानुमितव्ययस्य रघोः इति उदारम् अपि गाम् निशम्य वरतन्तुशिष्यः स्वार्थोपपत्तिम् प्रति दुर्बलाशः सन् तम् इति अवोचत्।

शब्दार्थाः :
अर्घ्यपात्रानुभितव्ययस्य–अर्घ्यपात्र से (यज्ञ में हुए) व्यय को व्यक्त करने act-expressing the expenditure incurred on sacrifice through Arghya vessels.; गाम्-वाणी को-speech, voice; स्वार्थोपपत्तिम्-अपनी कार्य सिद्धि में-in fulfilment of own desire. दुर्बलाशः सन्-निराश होते हुए-getting desperate, तम्-उस रघु से-him (Raghu), अवोचत्-कहा-said.

अनुवाद :
इस प्रकार अर्घ्य पात्र से (यज्ञ में हुए) खर्च का अनुमान लगाए हुए तथा रघु की उदार वाणी को सुनने पर भी अपने मनोरथ की सिद्धि की दुर्बल आशा रखते हुए, वरतन्तु का शिष्य (कौत्स) उनसे इस प्रकार बोला।

English :
Kautsa calculated the expenditure on sacrifice but heard Raghu’s generous talk-Got desperate about the fulfilment of his wish.

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5. समाप्तविद्येन मया महर्षिवैिज्ञापितोऽभूद्गुरुदक्षिणायै।
स मे चिरायस्खलितोपचारां तां भक्तिमेवागणयत्पुरस्तात्॥5॥

अन्वय :
समाप्तविद्येन मया महर्षिः गुरुदक्षिणायै विज्ञापितः अभूद् स च चिराय अस्खलितोपचारां ताम् भक्तिम् एव पुरस्तात् अगणयत्।

शब्दार्थाः :
समाप्तविद्येन मया-समस्त विद्याओं को पढ़ने के बाद मैंने-after learning all education,गुरुदक्षिणायैः-गुरुदक्षिणा के लिए-for fee topreceptor; विज्ञापितः-प्रार्थना की-requested; चिराय-बहुत दिनों तक-foralong time; अस्खलितोपचाराम्-नियमपूर्वक की गई-done regularly, तां भक्तिम्-उस गुरु सेवा को-that service to guru, पुरस्तात्-श्रेष्ठ दक्षिणा-spureme (excellent) fee. अगणयत्-गिना/माना-considered.

अनुवाद :
समस्त विद्याओं को पढ़ने के बाद मैंने महर्षि से गुरुदक्षिणा देने के लिए प्रार्थना की और उन्होंने (गुरु ने) बहुत दिनों तक नियमपूर्वक की गई उनकी भक्ति को ही श्रेष्ठ दक्षिणा माना।

English :
Kausta finished his education-requested the Maharishi to name the fee. The Maharishi considered his (Kautsa’s) services with devotion as supreme fee.

6. निर्बन्धसञ्जातरुषाऽर्थकाय॑मचिन्तयित्वा गुरुणाऽहमुक्तः।
वित्तस्य विद्यापरिसङ्घयया मे कोटीश्चतस्रो दश चाहरेति।।6।

अन्वय :
निर्बन्धसञ्जातरुषा गुरुणा अर्थकार्यम् अचिन्तयित्वा अहम् ‘वित्तस्य चतस्रः दश च कोटीः मे आहर’ इति विद्यापरिसङ्ख्यया उक्तः।

शब्दार्थाः :
निर्बन्धसञ्जातरुषा-वार-बार (गुरुदक्षिणा के लिए) आग्रह करने पर क्रोध #-on account of anger aroused by repeated insistence for offer of fee, अर्थकार्यम्-दरिद्रता/गरीबी को-poverty; अचिन्तयित्वा-विचार न करके-not considering; वित्तस्य-धन की/मुद्रा की-of money; चतस्रः दश च कोटी:-चौदह करोड़-fourteen crores, आहर-दो-bring, विद्यापरिसङ्ख्यया-चौदह विद्याओं की सङ्ख्या के मान से-in exchange of fourteen types of education.

अनुवाद :
बार-बार आग्रह करने पर क्रोध से गुरु के द्वारा मेरी गरीबी का विचार न करके मुझे कहा गया कि चौदह विद्याओं की सङ्ख्या के मान (हिसाब) से ’14 करोड़ स्वर्ण मुद्राएँ मुझे दो।’

English :
Kautssa’s repeated insistence for fee aroused guru’s anger. Asked him to bring fourteen crores.

7. गुर्वर्थमर्थी श्रुतपारदृश्वा रघोः सकाशादनवाप्य कामम्।
गतो वदान्यान्तरमित्ययं मे मा भूत्परिवादनवावतारः॥7॥

अन्वय :
‘श्रुतपारदृश्वा गुर्वर्थम् अर्थी रघोः सकाशात् कामम् अनवाप्य वदान्यान्तरम् गतः’ इति अयम् मे परिवादनवावतारः मा भूत्।

शब्दार्थाः :
श्रुतपारदृश्वा-शास्त्रों में पारङ्गत-learned in seriptures, गुर्वर्थम्-गुरु के लिए-for his guru; अर्थी-गुरुदक्षिणायाचक-asking for offering fee to guru; सकाशात्-पास से-from; कामम्-मनोरथ को-heart’s desire, longing, अनवाप्य-पूर्ण न होने पर-not getting fulfilled, वदान्यान्तरम्-अधिक दान देने वाले दूसरे दानी के पास-to another more generous fellow, परिवादनवावतारः-निन्दा का नया अवतार-object of censure.

अनुवाद :
शास्त्रों में पारंगत एक विद्यार्थी की गुरु के लिए दक्षिणा देने की इच्छा रघु के पास पूरी नहीं होने के कारण उसे किसी दूसरे अधिक दानवीर के पास जाना पड़ा। इस प्रकार की निन्दा का मैं पात्र नहीं बनूं।

English :
A learned scholar was asking from Raghu about fee for his teacher. He had to go to another generous fellow when his desire was not fulfilled there. It was a matter of censure for Raghu.

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8. तथेति तस्थावितथं प्रतीतः प्रत्यग्रहीत्सङ्गरमग्रजन्मा।
गामान्तसारां रघुरप्यवेक्ष्य निष्क्रष्टुमर्थं चकमे कुबेरात्॥8॥

अन्वय :
अग्रजन्मा प्रतीतः सन् तस्य अवितथम् सङ्गरम् इति प्रत्यग्रहीता, तथा रघु अपि गाम् आन्तसाराम् अवेक्ष्य कुबेरात् अर्थम् निष्क्रष्टुम चकमे।

शब्दार्थाः :
अग्रजन्मा-ब्राह्मण (कौत्स)-Brahman (Kautsa), प्रतीतः सन्-प्रसन्न होते हुए-being pleased; अवितथम्-सत्य-true; सङ्गरम्-प्रतिज्ञा को-promise; गाम्-पृथिवी को-earth, आन्तसाराम्-सारहीन-meaningless, अवेक्ष्य-समझकर-thinking, अर्थम्-धन-money, निष्क्रष्टुम-लेने की इच्छा-desire to take, चकमे-किया-showed.

अनुवाद :
ब्राह्मण ने प्रसन्न होते हुए उसकी सत्य प्रतिज्ञा को स्वीकार किया और रघु ने भी पृथ्वी को सारहीन समझकर कुबेर से धन लेने की इच्छा की।

English :
The brahmin (Kautsa) got pleased, accepted his promise-Raghu desired to get money from Kuber.

9. तं भूपतिर्भासुरहेमराशिं लब्धं कुबेरादभियास्यमानात्।
दिदेश कौत्साय समस्तमेव पादं सुमेरोरिव वज्रभिन्नम्॥9॥

अन्वय :
भूपतिः अभियास्यमानात् कुबेरात् लब्धम् वज्रभिन्नम् सुमेरोः पादम् इव स्थितम् तम् भासुरहेमराशिम् समस्तम् एव कौत्साय दिदेश।

शब्दार्थाः :
भूपतिः-रघुः-king, अभियास्यमानात्-युद्ध के लिए चढ़ाई किए जाने वाले (से)-from object of invasion for battle; कुबेरात्-कुबेर से (धन के देवता)-from kuber (god of wealth); वज्रभिन्नम्-वज्र से काटकर गिराये हुए-being severed and felled; सुमेरोः-सुमेरु के-of sumeru, पादम् इव-टुकड़े के समान-like a piece, भासुरहेमराशिम्-चमकती हुई सुवर्ण राशि (को)-shining heap of gold, दिदेश-दे दी-gave.

अनुवाद :
रघु ने युद्ध के लिए चढ़ाई किए जाने वाले (से) अर्थात् युद्ध कर के कुबेर से प्राप्त वज्र से काटकर गिराये हुए सुमेरु के टुकड़े के समान चमकती हुई सुवर्ण राशि पूरी ही कौत्स को दे दी।

English :
Raghu got money from Kuber like a piece of Sumeru mountain severed with the trident gave all to Kautsa.

10. जनस्य साकेतनिवासिनस्तौ द्वावप्यभूतामाभिनन्द्यसत्त्वौ
गुरुप्रदेयाधिकनिःस्पृहोऽर्थी नृपोऽत्रिकामादधिकप्रदश्च॥10॥

अन्वय :
तौ द्वौ अपि साकेतनिवासिनः जनस्य अभिनन्धसत्वौ अभूताम्। गुरुप्रदेयाधिकनिःस्पृहः अर्थी, अर्थिकामात् अधिकप्रदः नृपः च।

शब्दार्थाः :
तौ द्वौ-वे दोनों (दाता और याचक)-Both the donor and the aspirant, साकेतनिवासिनः जनस्य-अयोध्या निवासी लोगों का-of residents of Ayodhya; अभिनन्धसत्वौ-अभिनन्दन के पात्र-object of praise (felicitation); अभूताम्-हो गए -became; गुरुप्रदेयाधिकनिः स्पृहः-गुरुदक्षिणा से अधिक न लेने का इच्छुक-not desiring to accept more than fee for guru, अर्थी-याचक (कौत्स)-aspirant (Kautsa), अर्थिकामात्-याचक की कामना से-the desire of aspirant, अधिकप्रदः-अधिक देने वाला-donor of more, नृपः-राजा (रघु)-King (Raghu).

अनुवाद :
वे दोनों (दाता और याचक) ही अयोध्या निवासी लोगों के अभिनन्दन के पात्र बन गए। गुरुदक्षिणा से अधिक न लेने का इच्छुक (संतोषी) याचक कौत्स और याचक की कामना से अधिक देने वाला (दाता) राजा रघु।।

English :
Raghu desired to give more than what Kautsa had desired. Kautsa was not willing to accept more than fee for Guru. Both became praiseworthy in the eyes of residents of Ayodhya.

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 8 पृथ्वी के परिमण्डल

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 8 पृथ्वी के परिमण्डल

MP Board Class 6th Social Science Chapter 8 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(अ) पृथ्वी पर कितने परिमण्डल हैं ?
उत्तर:
पृथ्वी पर तीन परिमण्डल हैं – स्थलमण्डल, जलमण्डल और वायुमण्डल।

(ब) स्थलमण्डल का अर्थ बताइए।
उत्तर:
पृथ्वी का वह समस्त भू-भाग जो कठोर और नरम शैलों से बना है, स्थलमण्डल कहलाता है।

(स) पर्वत किसे कहते हैं ?
उत्तर:
ऊँची पहाड़ियों के समूह को पर्वत कहते हैं।

(द) जैवमण्डल की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
जीवों का वह मण्डल जो स्थल, जल और वायुमण्डल में पाया जाता है, जैवमण्डल कहलाता है।

(य) मैदान और पठार में अन्तर बताइए।
उत्तर:
हमारी पृथ्वी पर के वे निचले भाग जो समतल और सपाट हैं, मैदान कहलाते हैं। जबकि सामान्य रूप से ऊँचे उठे हुए वे भू-भाग जिनकी ऊपरी सतह लगभग समतल अथवा हल्की ऊँची-नीची होती है, पठार कहलाते हैं।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) स्थलमण्डल क्या है? उसके विभिन्न भू-स्वरूपों का वर्णन करिए।
उत्तर:
पृथ्वी का वह समस्त भू-भाग जो कठोर और नरम शैलों से बना है, स्थलमण्डल कहलाता है।
इसके प्रमुख भू-स्वरूप निम्नलिखित हैं –

  • पर्वत – ऊँची पहाड़ियों के समूह को पर्वत कहते हैं। पर्वत सैकड़ों किमी लम्बाई तक श्रेणियों के रूप में फैले रहते हैं। सबसे ऊँचा पर्वत हिमालय पर्वत है।
  • पठार – सामान्य रूप से ऊँचे उठे हुए वे भू-भाग जिनकी ऊपरी सतह लगभग समतल होती है, पठार कहलाते हैं। हमारे देश में दक्कन का पठार प्रसिद्ध है।
  • मैदान – पृथ्वी के वे निचले भाग जो समतल और सपाट हैं, मैदान कहलाते हैं। गंगा-यमुना का मैदान व उत्तर का विशाल मैदान इनमें प्रमुख हैं।

(ब) जैवमण्डल क्या है ? विभिन्न जीव किस प्रकार से पारिस्थितिक तंत्र में एक-दूसरे पर निर्भर हैं ? बताइए।
उत्तर:
जीवों का वह मण्डल जो स्थल, जल और वायुमण्डल में पाया जाता है, जैवमण्डल कहलाता है। जैवमण्डल के सभी जीव एक-दूसरे पर निर्भर हैं तथा वे अपने आस-पास के प्राकृतिक वातावरण से प्रभावित होते हैं। प्राकृतिक वातावरण तथा जैवमण्डल की यह पारस्परिक निर्भरता की व्यवस्था पारिस्थितिक तंत्र कहलाती है।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य के लिए एक पारिभाषिक शब्द लिखिए –
(अ) गैसों का मिश्रण जो पृथ्वी को चारों ओर से घेरे हुए है।
उत्तर:
वायुमण्डल

(ब) पृथ्वी पर बहुत बड़े जल भण्डार को कहते हैं।
उत्तर:
जलमण्डल

(स) वह भूखण्ड जो आस – पास के क्षेत्र से बहुत ऊँचा हो।
उत्तर:
पर्वत

(द) आसपास की नीची भूमि से एकदम सीधा उठा हुआ। विस्तृत भू-भाग।
उत्तर:
पठार

(य) स्थल के निचले, विस्तृत एवं समतल भू – भाग।
उत्तर:
मैदान

(र) पृथ्वी के तीनों परिमण्डल-स्थलमण्डल, जल – मण्डल और वायुमण्डल से मिलकर बना मण्डल।
उत्तर:
जैवमण्डल

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प्रश्न 4.
सही जोड़ी बनाइए –
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 8 पृथ्वी के परिमण्डल img 1
उत्तर:
1. (द) एशिया
2. (स) दक्कन
3. (य) हिमालय
4. (ब) वायुमण्डल
5. (अ) प्रशान्त

प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. पृथ्वी के भूमि वाले भाग को ……….. कहते हैं।
2. में स्थल मण्डल, जलमण्डल ………….. और …………. वायुमण्डल समाहीत हैं।
3. वायुमण्डल में सबसे कम ………… गैस पाई जाती है।
4. प्रकृति द्वारा दिये गये पदार्थों का …………. में सदपयोग करें।
उत्तर:
1. स्थलमण्डल
2. जैवमण्डल
3. कार्बन डाइऑक्साइड
4. मानव कल्याण।

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.5

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.5

प्रश्न 1.
निम्न रैखिक समीकरणों को हल कीजिए –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.5 img-1
हल:
1. \(\frac{x}{2}\) – \(\frac{1}{5}\) = \(\frac{x}{3}\) + \(\frac{1}{4}\)
2, 3, 4 व 5 का ल. स. = 60
दोनों पक्षों को 60 से गुणा करने पर,
60 x (\(\frac{x}{2}\) – \(\frac{1}{5}\)) = 60 x (\(\frac{x}{3}\) + \(\frac{1}{4}\))
या 30x – 12 = 20x + 15
या 30x – 20x = 15 + 12
या 10x = 27
या x = \(\frac{27}{10}\)

2. \(\frac{n}{2}\) – \(\frac{3n}{4}\) + \(\frac{5n}{6}\) = 21
2, 4 व 6 का ल. स. = 12
दोनों पक्षों को 12 से गुणा करने पर,
12 x (\(\frac{n}{2}\) – \(\frac{3n}{4}\) + \(\frac{5n}{6}\)) = 12 x 21
या 6n – 9n + 10n = 252
या 7n = 252
या n = \(\frac{252}{7}\)
n = 36

3. x + 7 – \(\frac{8x}{3}\) = \(\frac{17}{6}\) – \(\frac{5x}{2}\)
2, 3 व 6 का ल. स. = 12
दोनों पक्षों को 12 से गुणा करने पर,
12 x (x + 7 – \(\frac{8}{3}\)) = 12 x (\(\frac{17}{6}\) – \(\frac{5x}{2}\))
या 12x + 84 – 32x = 34 – 30x
या 12x – 32x + 30x = 34 – 84
या 10x = – 50
x = \(\frac{-50}{10}\)
x = – 5

4. \(\frac{x-5}{3}\) = \(\frac{x-3}{5}\)
5 (x – 5) = 3 (x – 3)
या 15x – 25 = 3x – 9
या 5x – 3x = – 9 + 25
या 2x = 16
या x = \(\frac{16}{2}\)
या x = 8

5. \(\frac{3t-2}{4}\) – \(\frac{2t+3}{3}\) = \(\frac{2}{3}\) – t
ल. स. = 3 x 4 = 12
दोनों पक्षों को 12 से गुणा करने पर,
12 x (\(\frac{3t-2}{4}\) – \(\frac{2t+3}{3}\)) = 12 x (\(\frac{2}{3}\) – t)
या 9t – 6 – 81 – 12 = 8 – 12t
या 9t – 8t + 12t = 8+ 6 + 12
या 13t = 26
या t = \(\frac{26}{13}\) = 2

6. m – \(\frac{m-1}{2}\) = 1 – \(\frac{m-2}{3}\)
2 व 3 का ल. स. = 2 x 3 = 6
दोनों पक्षों को 6 से गुणा करने पर
6 (m – \(\frac{m-1}{2}\)) = 6 (1 – \(\frac{m-2}{3}\))
या 6m – 3 (m – 1) = 6 – 2 (m – 2)
या 6m – 3m + 3 = 6 – 2m + 4
या 6m – 3m + 2m = 6 + 4 – 3
या 5m = 7
या m = \(\frac{7}{5}\)

प्रश्न 2.
निम्न समीकरणों को सरल रूप में बदलते हुए हल कीजिए –
7. 3 (t – 3) = 5 (2t + 1)
8. 15 (y – 4) – 2 (7 – 9) + 5 (v + 6) = 0
9. 3 (5z – 7) – 2 (9z – 11)= 4 (8z – 13) – 17
10. 0.25 (4f – 3) = 0.05 (10f – 9)
हल:
7. 3 (t – 3) = 5 (2t + 1)
3t – 9 = 10t + 5
या 3t – 10t = 5 + 9
या 7t = -14
या t= \(\frac{-14}{7}\) = – 2

8. 15 (y – 4) – 2 (y – 9) + 5 (y + 6) = 0
15y – 60 – 2y + 18 + 5y + 30 = 0
या 15y – 2y + 5y = 60 – 18 – 30
या 18y = 12
या y = \(\frac{12}{18}\) = \(\frac{2}{3}\)

9. 3 (5z – 7) – 2 (9z – 11)= 4 (8z – 13) – 17
15z – 21 – 18z + 22 = 32z – 52 – 17
या 15z – 18z – 32z = – 52 – 7 + 21 – 22
या – 35z = – 70
या z = \(\frac{-70}{-35}\)
z = 2

10. 0.25 (4f – 3) = 0.05 (10f – 9)
f – 0.75 = 0.5f – 0.45
या f – 0.5f = – 0.45 + 0.75
या 0.5f = 0.30
या f= \(\frac{0.30}{0.5}\)
या f= 0.6

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1

प्रश्न 1.
∆PQR में भुजा \(\overline{Q R}\) का मध्य-बिन्दु D है
\(\overline{P M}\) ….है।
PD….है।
क्या QM= MR ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 1
हल:
\(\overline{P M}\), शीर्षलम्ब है।
\(\overline{P D}\), माध्यिका है।
नहीं, QM ≠ MR, क्योंकि QR का मध्य-बिन्दु M नहीं है।

प्रश्न 2.
निम्न के लिए अनुमान से आकृति खींचिए :
(a) ∆ABC में, BE एक माध्यिका है।
(b) ∆PQR में, PQ और PR त्रिभुज के शीर्षलम्ब हैं।
(c) ∆XYZ में, YL एक शीर्षलम्ब उसके बहिर्भाग में है।
हल:
(a) संलग्न चित्र में, BE,∆ABC की माध्यिका है।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 2

(b) समकोण ∆PQR में, PQ तथा PR त्रिभुज के शीर्षलम्ब हैं।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 3

(c) संलग्न चित्र में, YL, ∆XYZ का शीर्षलम्ब है।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 4

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प्रश्न 3.
आकृति खींचकर पुष्टि कीजिए कि एक समद्विबाहु त्रिभुज में शीर्षलम्ब व माध्यिकाएँ एक ही रेखाखण्ड हो सकता है।
हल:
माना कि ∆ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसकी भुजा AB = AC
त्रिभुज की माध्यिका AM खींची। अब चाँद की सहायता से ∠AMC को मापते हैं।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 5
मापने पर, ∠AMC = 90°
∴ AM ⊥ BC
अत: ∆ABC की, अत: \(\overline{A M}\) माध्यिका और शीर्षलम्ब दोनों ही है।

इन्हें कीजिए

प्रश्न 1.
एक त्रिभुज ABC खींचिए और इसकी एक भुजा \(\overline{B C}\) को एक ओर बढ़ाइए चित्र (i)]। शीर्ष C पर बने कोण ACD पर ध्यान दीजिए। यह कोण ∆ABC के बर्हिभाग में स्थित है। हम इसे ∆ABC के शीर्ष पर बना एक बाह्य कोण कहते हैं।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 6
स्पष्ट है कि ∠BCA तथा ∠ACD परस्पर संलग्न कोण हैं। त्रिभुज के शेष दो कोण, ∠A तथा ∠B बाह्य कोण ACD के दो सम्मुख अन्त:कोण या दूरस्थ अन्तःकोण कहलाते हैं। अब काटकर या अक्स (Trace copy) लेकर ∠A तथा ∠B एक-दूसरे के संलग्न मिलाकर ∠ACD पर रखिए जैसा कि चित्र (ii) में दिखाया गया है। क्या वे दोनों कोण ACD को पूर्णतया आच्छादित करते हैं ? क्या आप कह सकते हैं,
m∠ACD = m∠A + m∠B?
हल:
हाँ, वे दोनों कोण ACD को पूर्णतया आच्छादित करते हैं।
हाँ, m∠ACD = m∠A + m∠B

प्रश्न 2.
छात्र इस क्रियाकलाप को स्वयं करें।
पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 130

सोचिए, चर्चा कीजिए एवं लिखिए

प्रश्न 1.
एक त्रिभुज के लिए बाह्य कोण भिन्न-भिन्न प्रकार से बनाये जा सकते हैं। इनमें से तीन भिन्न प्रकार के दिखाए गए हैं।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 7

इनके अतिरिक्त तीन और प्रकार से भी बाह्य कोण बबनाये जा सकते हैं। इन्हें भी अनुमान से बनाइए।
हल:
तीन अन्य प्रकार से बने बाह्य कोण –
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 8

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प्रश्न 2.
किसी त्रिभुज के एक शीर्ष पर बने दोनों बाह्य कोण क्या परस्पर समान होते हैं ?
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 9
हाँ ∆ABC की भुजा AC व BC को आगे बढ़ाने पर हमें क्रमश: ∠BCP व ∠ACQ प्राप्त होते हैं जो कि शीर्षाभिमुख हैं।
∴ ∠BCP = ∠ACQ
∴ त्रिभुज के प्रत्येक शीर्ष पर एक बाह्य कोणों का एक युग्म होगा जो आपस में समान होंगे।

प्रश्न 3.
किसी त्रिभुज के एक बाह्य कोण और उसके संलग्न अन्तःकोण के योग के बारे में आप क्या कह सकते हैं?
हल:
एक त्रिभुज के एक बाह्य कोण और उसका संलग्न कोण रैखिक युग्म बनाते हैं।
∴ बाह्य कोण + अन्त: कोण = 180°

सोचिए, चर्चा कीजिए एवं लिखिए

प्रश्न 1.
प्रत्येक दशा में अन्तः सम्मुख कोणों के बारे में आप क्या कह सकते हैं, जबकि बाह्य कोण है –
(i) एक समकोण
(ii) एक अधिककोण
(iii) एक न्यूनकोण।
हल:
(i) प्रत्येक अन्तः सम्मुख कोण न्यून कोण होगा।
(ii) कम-से-कम एक अन्तः सम्मुख कोण न्यूनकोण होना चाहिए।
(iii) प्रत्येक अन्तः सम्मुख कोण न्यून कोण होगा।

प्रश्न 2.
क्या किसी त्रिभुज का कोई बाह्य कोण एक सरल कोण भी हो सकता है?
हल:
नहीं, किसी त्रिभुज का कोई बाह्य कोण सरल कोण नहीं हो सकता, क्योंकि अन्तः कोण शून्य नहीं हो सकते हैं।

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
किसी त्रिभुज में एक बाह्य कोण की माप 70° है और उसके अन्तः सम्मुख कोणों में से एक की माप 25° है। दूसरे अन्तः सम्मुख कोण की माप ज्ञात कीजिए।
हल:
बाह्य कोण = 70°, अन्तः सम्मुख कोण = 25°
माना कि दूसरा अन्तः सम्मुख कोण = x°

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 131

अत: दोनों अन्तः सम्मुख कोणों का योग = बाह्य कोण
∴ x° + 250 = 70°
या x° = 70° – 25° = 45°

प्रश्न 2.
किसी त्रिभुज के दो अन्तः सम्मुख कोणों की माप 60° तथा 80° है। उसके बाह्य कोण की माप ज्ञात कीजिए।
हल:
अन्तः सम्मुख कोण = 60° व 80°
∵ बाह्य कोण = दो सम्मुख अन्त:कोणों का योग
∴ बाह्य कोण = 60° + 80° = 140°

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प्रश्न 3.
क्या इस चित्र में कोई त्रुटि है? टिप्पणी करें।
हल:
हम जानते हैं कि किसी त्रिभुज का बाह्य कोण अपने दोनों सम्मुख अन्त:कोणों के योग के बराबर होता है।
यहाँ प्रत्येक अन्त:कोण 50° है और बाह्य कोण भी 50° है।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 10
∴ इन मापों से त्रिभुज नहीं बन सकता है।
(∵ 50° ≠ 50° + 50°)

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions

MP Board Class 8th Maths Chapter 3 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 41

प्रश्न 1.
निम्न आकृतियों का सुमेलन कीजिए (ध्यान रखिए! एक आकृति का एक से अधिक आकृतियों से सुमेलन हो सकता है):
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-1
अपने मित्रों से इस मिलान की तुलना कीजिए। क्या वे सहमत हैं?
उत्तर:

  1. → (c)
  2. → (b)
  3. → (a)
  4. → (b)

हाँ, वे सहमत हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 42

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प्रश्न 1.
कुछ और बहुभुजों के उदाहरण देने का प्रयास कीजिए तथा कुछ और ऐसे उदाहरण दीजिए जो बहुभुज न हों।
उत्तर:
(i) बहुभुज
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-2
(ii) बहुभुज नहीं हैं –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-3

प्रश्न 2.
एक बहुभुज की एक कच्ची (Rough) आकृति खींचिए और उसकी भुजाओं और शीर्षों की पहचान कीजिए।
हल:
रेखाखण्ड जो बहुभुज बनाते हैं, बहुभुज की भुजाएँ कहलाती हैं तथा रेखाखण्ड परस्पर जहाँ मिलते हैं, बहुभुज के शीर्ष कहलाते हैं। संलग्न आकृति में, AB, BC, CD, DE, EF, तथा FA बहुभुज की भुजाएँ हैं तथा A, B, C, D, E और F शीर्ष हैं।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-4

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 42-43

विकर्ण

प्रश्न 1.
क्या आप संलग्न आकृतियों में प्रत्येक विकर्ण का नाम दे सकते हैं? क्या PQ एक विकर्ण है? LN के बारे में आप क्या कह सकते हैं?
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-5
हल:
किसी बहुभुज का विकर्ण उसके किन्हीं दो शीर्षों को जोड़ने से प्राप्त होता है।
चित्र (i) में, विकर्ण PR तथा QS हैं।
चित्र (ii) में, विकर्ण AC, AD, BD, BE और CE हैं।
चित्र (iii) में, विकर्ण KM और LN हैं। उत्तर
चित्र (i) में PQ विकर्ण नहीं है।
चित्र में (iii) LN विकर्ण है।

प्रश्न 2.
क्या बहिर्भाग की परिसीमा होती है?
उत्तर:
नहीं, बहिर्भाग की कोई परिसीमा नहीं होती है।

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उत्तल और अवतल बहुभुज

प्रश्न 1.
क्या आप बता सकते हैं कि इस प्रकार के बहुभुज एक-दूसरे से अलग क्यों हैं? जो बहुभुज उत्तल होते हैं उनके विकर्णों का कोई भी भाग बहिर्भाग में नहीं होता है। क्या यह अवतल बहुभुजों के लिए भी सत्य होता है? दी गई आकृतियों का अध्ययन कीजिए। तदुपरान्त अपने शब्दों में उत्तल बहुभुज तथा अवतल बहुभुज समझाने का प्रयास कीजिए। प्रत्येक प्रकार की दो आकृतियाँ बनाइए।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-6
उत्तर:
इस प्रकार के बहुभुज एक-दूसरे से अलग इसलिए हैं क्योंकि इन बहुभुजों में कुछ उत्तल बहुभुज हैं ([आकृति (i)] तथा कुछ अवतल बहुभुज हैं [आकृति (ii)]। उत्तल बहुभुजों में उनके विकर्णों का कोई भाग बहिर्भाग में नहीं होता है। यह अवतल बहुभुजों के लिए सत्य नहीं हैं। उत्तल बहुभुज वे बहुभुज होते हैं जिनके शीर्ष बाहर की ओर होते हैं तथा उनके विकर्ण अभ्यंतर में होते हैं। अवतल बहुभुज के शीर्ष अन्दर की ओर होते हैं तथा उनके विकर्ण बहिर्भाग में हो सकते हैं।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-7

सम तथा विषम बहुभुज

प्रश्न 1.
क्या एक आयत एक समबहुभुज है?
उत्तर:
नहीं, एक आयत एक समबहुभुज नहीं है। क्योंकि यह समकोणिक तो है परन्तु समभुज नहीं है।

प्रश्न 2.
क्या एक समबाहुत्रिभुज समबहुभुज है? क्यों?
उत्तर:
हाँ, एक समबाहु त्रिभुज समबहुभुज है। क्योंकि समबाहु त्रिभुज में भुजाएँ तथा कोण बराबर माप के होते हैं।

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 44

प्रश्न 1.
क्या आपने किसी ऐसे चतुर्भुज के बारे में पढ़ा है जो समभुज तो हो परन्तु समकोणिक न हो?
उत्तर:
हाँ, ऐसा चतुर्भुज सम चतुर्भुज है।

प्रश्न 2.
क्या कोई ऐसा त्रिभुज है जो समभुज तो हो परन्तु समकोणिक न हो?
उत्तर:
नहीं, ऐसा कोई त्रिभुज नहीं है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 44-45

इन्हें कीजिए

प्रश्न 1.
कोई एक चतुर्भुज, माना ABCD लीजिए (संलग्न चित्र 3.7)। एक विकर्ण खींचकर इसे दो त्रिभुजों में बाँटिए। आप छः कोण 1, 2, 3, 4, 5 और 6 प्राप्त करते हैं।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-8
त्रिभुज के कोण-योग वाले गुणधर्म का उपयोग कीजिए और तर्क कीजिए कि कैसे ∠A, ∠B, ∠C तथा ZD के मापों का योगफल 180° + 180° = 360° हो जाता है।
हल:
माना कि ABCD एक चतुर्भुज है और AC इसका एक विकर्ण है।
स्पष्ट है कि
∠1 + ∠4 = ∠A
तथा ∠2 + ∠5 = ∠C
∴ त्रिभुज के तीनों कोणों के मापों का योग 180° होता है। अत: ∆ABC से,
∠4 + ∠5 + ∠B = 180° …..(1)
∆ACD से,
∠1 + ∠2 + ∠D = 180° …..(2)
समीकरण (1) व (2) को जोड़ने पर, हम प्राप्त करते हैं।
∠4 + ∠5 + ∠B + ∠1 + ∠2 + ∠D = 180° + 180°
या (∠1 + ∠4) + ∠B + (∠2 + ∠5) + ∠D = 360°
या ∠A+ ∠B + ∠C+ ∠D = 360°
अतः ∠A+ ∠B + ∠C+ ∠D = 360°

प्रश्न 2.
किसी चतुर्भुज ABCD, की गत्ते वाली चार सर्वांगसम प्रतिलिपियाँ लीजिए जिनके कोण दर्शाए गए हैं। [आकृति 3.8 (i)]। इन प्रतिलिपियों को इस प्रकार से व्यवस्थित कीजिए जिसमें ∠1, ∠2, ∠3, ∠4 एक ही बिन्दु पर मिलें जैसा कि आकृति 3.8 (ii) में है।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-9
आप ∠1, ∠2, ∠3 तथा ∠4 के योगफल के बारे में क्या कह सकते हैं?
हल:
किसी चतुर्भुज ABCD के लिए,
m∠1 + m∠2 + m∠3 + m∠4 = 360°
अतः एक चतुर्भुज के चारों कोणों के मापों का योगफल 360° होता है।

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प्रश्न 3.
चतुर्भुज ABCD पर पुनः विचार कीजिए (चित्र 3.9)। माना इसके अभ्यंतर में कोई बिन्दु P स्थित है। P को शीर्षों A, B, C तथा D से जोड़िए। आकृति में ∆PAB पर विचार कीजिए। हम देखते हैं कि x=180° – m∠2 – m∠3 ; इसी प्रकार APBC, से y = 180° – m∠4 – m∠5;
∆PCD से z = 180° – m∠6 – m∠7; और
∆PDA से w = 180° – m∠8 – m∠1.
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-10
इसका उपयोग करके कुल माप m∠1 + m∠2 + …… + m∠8 ज्ञात कीजिए। क्या यह आपको परिणाम तक पहुँचाने में सहायता करता है? याद रखिए ∠x + ∠y + ∠z + ∠w = 360° है।
हल:
क्योंकि त्रिभुज के तीनों कोणों के मापों का योग 180° होता है;
अतः x = 180° – m∠2 – m∠3 …… (1)
y = 180° – m∠4 – m∠5 ….. (2)
z = 180° – m∠6 – m∠7 …… (3)
w = 180° – m∠8 – m∠1 …… (4)
समीकरण (1), (2), (3) एवं (4) को जोड़ने पर, हम प्राप्त करते हैं –
x + y + z + w = 720° – ∠1 + ∠2 + ∠3 + ∠4 + ∠5 + ∠6 + ∠7 + ∠8
लेकिन x + y + z +w = 360°
360° = 720° – ∠1 + ∠2 + ∠3 + ∠4 + ∠5 + ∠6 + ∠7+ ∠8
= 720° – (∠A + ∠B + ∠C + ∠D)
या ∠1 + ∠2 + ∠3 + ∠4 + ∠5 + ∠6 + ∠7 + ∠8 = 720° – 360° = 360°
हाँ, यह हमें सहायता करता है कि चतुर्भुज के कोणों के मापों का योग 360° होता है।

प्रश्न 4.
ये सभी चतुर्भुज उत्तल (convex) चतुर्भुज थे। यदि चतुर्भुज उत्तल नहीं होते तो क्या होता ? चतुर्भुज ABCD पर विचार कीजिए।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-11
इसे दो त्रिभुजों में बाँटिए और अन्तःकोणों का योगफल ज्ञात कीजिए (चित्र : 3.10)।
हल:
चतुर्भुज ABCD के विकर्ण BD को मिलाया।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-12
त्रिभुज के कोण-योग गुणधर्म से,
∆ABD से, m∠1 + m∠2 + m∠3 = 180° …(1)
∆BCD से, m∠4 + m∠5 + m∠6 = 180° …(2)
समीकरण (1) व (2) को जोड़ने पर,
m∠1 + m∠2 + m∠3 + m∠4 + m∠5 + m∠6 = 180° + 180°
या m∠1 + (m∠2 + m∠6) + m∠5 + m∠3 + m∠4 = 360°
या ∠A + ∠B + ∠C + ∠D = 360°
अतः चतुर्भुज के अन्त:कोणों का योग = 360°

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम्

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् (नाट्यांशः) (वाल्मीकिरामायणतः)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 11 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) का रूपं नाशयिष्यति? (कौन रूप को नष्ट करेगा?)
उत्तर:
जरा। (बुढ़ापा ।)

(ख) सिद्धार्थः कस्य पुत्रः आसीत्? (सिद्धार्थ किसका पुत्र था?)
उत्तर:
शुद्धोदनस्य। (शुद्धोदन का)

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(ग) धरा कस्य पत्नी आसीत? (यशोधरा किसकी पत्नी थी?)
उत्तर:
सिद्धार्थस्य। (सिद्धार्थ की)

(घ) सिद्धार्थस्य पुत्रः कः आसीत्? (सिद्धार्थ का पुत्र कौन था?)
उत्तर:
राहुलः। (राहुल)

(ङ) सिद्धार्थ : कस्मिन् वंशे उत्पन्नः अभूत्? (सिद्धार्थ किस वंश में पैदा हुआ था?)
उत्तर:
शाक्यवंशे। (शाक्यवंश में)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए)
(क) कस्य अभिनिष्क्रमणसंस्कारः अस्ति: (किसका अभिनिष्क्रमण संस्कार है?)
उत्तर:
कुमार राहुलस्य अभिनिष्क्रमणसंस्कारः अस्ति। (कुमार राहुल का अभिनिष्क्रमण संस्कार है।)

(ख) सिद्धार्थः अनुज्ञां प्राप्तुं कस्य समीपं गतः? (सिद्धार्थ आज्ञा गप्त करने किसके पास गए थे?)
उत्तर:
सिद्धार्थः अनुज्ञां प्राप्तुं शुद्धोदनस्य समीपं गतः। (सिद्धार्थ आज्ञा लेने के लिए शुद्धोदन के पास गया था।)

(ग) सिद्धार्थः केषु नानुरञ्ज्यति? (सिद्धार्थ किससे खुश नहीं हो रहा था?)
उत्तर:
सिद्धार्थः नृत्यसङ्गीत-वादित्रेषु नानुरञ्जयति। (सिद्धार्थ नृत्य-संगीत-वाद्य आदि में खुश नहीं हो रहा था।)

(घ) वयं मनुष्याः कां जानन्तोऽपि न शोचामः? (हम लोग किसको जानते हुए भी नहीं सोचते?)
उत्तर:
वयं मनुष्याः प्रतिदिनं ग्रसन्ती मृत्युराक्षसीं जानन्तोऽपि न शोचामः। (हम लोग प्रतिदिन खाती हुई मृत्यु रूपी राक्षसी को जानते हुए भी नहीं सोचते हैं।)

(ङ) मनुष्यस्य यौवनं विलासश्च कदा शोभते? (मनुष्य का यौवन और विलास कब शोभा देते हैं?)
उत्तर:
जरां व्याधिं मृत्युं च विजित्यैव मनुष्यस्य यौवनं विलासश्च शोभते। (बुढ़ापा, रोग और मृत्यु को जीतकर ही मनुष्य का यौवन और विलास शोभा पाते हैं।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) यशोधरा तारस्वरेण सिद्धार्थं किम् उक्तवती? (यशोधरा ने ऊँचे स्वर में सिद्धार्थ को क्या कहा?)
उत्तर:
यशोधरा तारस्वरेण सिद्धार्थं उक्तवती यत्-“कुत्र प्रयातिः कुमारः?” इति। (यशोधरा ने ऊँचे स्वर से सिद्धार्थ को कहा कि-कुमार, आप कहाँ जा रहे हैं।”)

(ख) सिद्धार्थः किमर्थं लोकयात्रातः व्यरञ्ज्यत? (सिद्धार्थ क्यों लोकयात्रा पर जाना चाहता था?)
उत्तर:
सिद्धार्थः संसारस्य निःसारता, जनन-मरण-चक्रस्य बन्धनं, मानुषी गतिः, सर्वमिदं विचिन्त्य लोकयात्रातः व्यरज्यत।

(सिद्धार्थ, संसार की सारहीनता, जन्म-मरण के चक्र का बन्धन, मानुषी गति, इन सब को सोचकर लोकयात्रा पर जाना चाहता था।)

(ग) मनोज्ञेषु विषयेषु रतिविषये सिद्धार्थः शुद्धोदनं किम् अकथयत्? (मन के विषयों पर रति के विषय में शुद्धोदन ने क्या कहा?)
उत्तर:
मनोज्ञेषु विषयेषु रतिविषये सिद्धार्थः शुद्धोदनं अकथयत् यत्-“जरा व्याधिश्च मृत्युश्च यदि न स्युः तर्हि मम मनोज्ञेषु विषयेषु रतिर्भवेत्? (मन के विषयों पर रति के विषय में सिद्धार्थ ने शुद्धोदन से कहा कि-“बुढ़ापा, रोग और मृत्यु यदि न हों तो मेरे मन में विषयों पर रति होगी

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प्रश्न 4.
शुद्धवाक्याना समक्षम् ‘आम्’ अशुद्ध वाक्यानां समक्षम् ‘न’ इति लिखत- (शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) शुद्धोदनः राहुलस्य पिता असीत्।
(ख) यशोधरा राहुलस्य माता आसीत्।
(ग) सिद्धार्थः प्रव्रज्यार्थम् इच्छति।
(घ) सिद्धार्थः यशोधरायाः अनुज्ञां प्राप्तं गतः।
(ङ) शुद्धोदनः शाक्यवंशीयः न आसीत्।
उत्तर:
(क) न
(ख) आम्
(ग) आम्
(घ) न
(ङ) न।

प्रश्न 5.
अधोलिखितशब्दानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनं च लिखत-(नीचे लिखे शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 1
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 2

प्रश्न 6.
अघोलिखितपदानां धातुं लकारं च लिखत (नीचे लिखे पदों के धातु और लकार लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 3
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 4

प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानां धातुं प्रत्ययञ्च पृथक्कुरुत (नीचे लिखे पदों के धातु और प्रत्यय अलग कीजिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 5
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 6

प्रश्न 8.
अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत (नीचे लिखे पदों के संधिविच्छेद करके संधि का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 7
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 8

प्रश्न 9.
अधोलिखितपदानां समासविग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत (नीचे लिखे पदों के विग्रह कर समास का नाम लिखिए)
(क) धर्मचर्या
(ख) क्रीडोद्यानम्
(ग) विनोदसामग्री
(घ) लोकयात्रा
(ङ) महाराजः
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 9

प्रश्न 10.
रेखाङ्कितसंज्ञाशब्दानां स्थाने सर्वनामशब्दानां प्रयोगं कुरुत (रखाङ्कित शब्दों के स्थान पर सर्वनाम शब्दों का प्रयोग कीजिए-)
(क) राहुलः शाक्यवंशधरः आसीत्। (राहुल शाक्यवंशधर था।)
उत्तर:
कः शाक्यवंशधरः आसीत्? (कौन शाक्यवंशधर था?)

(ख) यशोधरा सिद्धार्थस्य पत्नी आसीत्। (यशोधरा सिद्धार्थ की पत्नी थी।)
उत्तर:
का सिद्धार्थस्य पत्नी आसीत्? (कौन सिद्धार्थ की पत्नी थी?)

(ग) सिद्धार्थस्य पिता शुद्धोदनः आसीत्। (सिद्धार्थ के पिता शुद्धोदन थे।)
उत्तर:
कस्य पिता शुद्धोदनः आसीत्? (किसके पिता शुद्धोदन थे?)

(घ) सिद्धार्थः परिव्राजकः अभवत्। (सिद्धार्थ संन्यासी बना।)
उत्तर:
कः परिव्राजकः अभवत्? (कौन संन्यासी बना?)

(ङ) सिद्धार्थः राहुलस्व जनकः आसीत्। (सिद्धार्थ राहल के पिता थे।)
उत्तर:
सिद्धार्थः कस्य जनकः आसीत्? (सिद्धार्थ किसका पिता था?)

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योग्यताविस्तार –

सिद्धार्थस्य विस्तृतजीवनचरितम् अन्विष्य लिखत।
(सिद्धार्थ का विस्तृत जीवन चरित्र ढूँढकर लिखिए

अस्य नाट्यांशस्य सामूहिकम् अभिनयं कुरुत।
(इस नाट्यांश का सामूहिक अभिनय कीजिए।)

महाभिनिष्क्रमणम् पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ सिद्धार्थ के जीवन का अंश है। इस पाठ में उनके संन्यास लेने से पूर्व की कथा है। जब उन्होंने शरीर की विभिन्न अवस्थाएँ-जरा, रोग व मृत्यु-देखी तो उन्हें इस संसार से विरक्ति हो गई और उन्होंने गृहत्याग कर संन्यास ले लिया था। इससे पूर्व उनकी जो मानसिक स्थिति थी, उसका वर्णन इस पाठ में किया गया है।

महाभिनिष्क्रमणम् पाठ का अनुवाद

1. सिद्धार्थः-(स्वगतं चिन्तयन्) हन्त। कियती विडम्बना मानवशरीरस्य। वासन्तिकं यौवनं, कुसुमसुकुमारमनोहरा देहसम्पत्, किमिदं सर्वं स्थिरम्? किं यशोधरायाः यौवनमचलम्? किं जरा व्याधिर्मत्युश्य मदीया अन्तः पुरपरिचारिकाः कदापि नाक्रमिष्यन्ति? किमेता न जानन्ति यद्यौवनं चपलम्? जरा रूपं नाशयिष्यति?
यशोधरा-कुमार! कुमार, किं चिन्तयति भवान्?

सिद्धार्थः :
न किमपि यशोधरे! उद्विग्नमिव मे चेतः। इत एहि अत्रोपविश। इदमेव विलोक्य आश्चर्यम् अनुभवामि यशोधरे यत् वयं मनुष्याः प्रतिदिनं ग्रसन्ती मृत्युराक्षसीं जानन्तोऽपि न शोचामः । अद्य न जाने मदीये हृदये कश्चन् वक्ति यत् जरां व्याधि मृत्यु च विजित्यैव मनुष्यस्य यौवनं विलासश्च शोभते। नृत्यसङ्गीत-वादिषु नानुरञ्ज्यामि, न च तुष्यामि क्रीडाद्यानद्रमः, प्रेक्षागृहपञ्जरैः, स्नानगृहनिर्झरैः।

यशोधरा-तर्हि कुमार! किं व्यवसीयते भवता?

सिद्धार्थः :
इदभेव वाञ्छामि यशोधरे, यदधुना परिवाजको भूत्वा मृत्योर्निग्रहाय तपश्चरेयम्।

शब्दार्थाः :
स्वगतम्-मन में-Inward, in heart; उद्विग्नम् -दुखी-grieved; ग्रसन्तीम्-खाती हुई-swallowing; शोचामः-(हम) सोचते हैं-feel sorrowful; नदीये-मेरे-mine; विजित्यैव-जीतकर ही-on getting victory; नानुरज्यामि-प्रसन्न नहीं होता हूँ-do not feel delighted; प्रेक्षागृहपज्जरैः-नाट्यशाला के पात्रों को-actors of theatre.

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अनुवाद :
सिद्धार्थ-(मन में सोचते हुए) आह! मानव शरीर की यह कैसी विडंबना है। वसन्त की तरह जवानी, फूल की तरह कोमल और सुन्दर शरीर क्या ये सब स्थिर हैं? क्या यशोधरा का यौवन अचल है? क्या बुढ़ापा, रोग और मृत्यु मेरे अन्तःपुर की सेविकाओं पर कभी आक्रमण नहीं करेंगे? क्या ये नहीं जानती हैं कि यौवन चंचल है? बुढ़ापा रूप को नष्ट कर देगा?

यशोधरा-कुमार! कुमार, आप क्या सोच रहे हैं?

सिद्धार्थ :
यशोधरा! कुछ नहीं। मेरा मन दुखी सा हो रहा है। यहाँ आजो, यहाँ बैठो। यशोधरा, यही देखकर मुझे आश्चर्य हो रहा है कि हम मनुष्य प्रतिदिन खाती हुई मृत्यु रूपी राक्षसी को जानते हुए भी नहीं सोचते हैं। आज न जाने मेरे मन में कोई कह रहा है कि बुढ़ापा, रोग और मृत्यु को जीतकर ही मनुष्य का यौवन और विलास शोभा पाता है। नृत्य-सङ्गति, बाजे आदि मुझे प्रसन्न नहीं कर रहे और न ही उद्यान, पेड़ों से नाट्यशाला के पात्रों से और स्नानगृह के झरनों के खेल से मैं खुश हूँ।

यशोधरा ;
तो कुमार। आपको क्या चाहिए?

सिद्धार्थ :
यशोधरा! मैं यही चाहता हूँ कि अब संन्यासी बनकर मृत्यु को पराजित करने के लिए तप करूँ!

English :
Old age, diseases and death bring about decay in beauty and youth-youth is flickering-old age disfigures beauty-nothing appeals an aggrieved soul-wish to get sanyasa (liberation) to defeat death through penance.

2. यशोधरा-किमिदं भाषते भवान्? परिव्रज्यायाः नायं समयः। कतिपयमासेभ्यः पूर्वमेव तु भवान शाक्यवंशधरस्य कुमार-राहुलस्य जनकः सञ्जातोऽस्ति। आगच्छतु भवान् अद्य कुमार-राहुलस्य अभिनिष्क्रमणसंस्कारः।

सिद्धार्थः :
न किमपि इच्छामि यशोधरे। अद्यैव प्रव्रज्यायै अनुमतिं ग्रहीतुं महाराजस्य सौधमुपसमि। अथैव प्रव्रज्यायै अनु। यशोधरा-(तारस्वरेण) कुत्र प्रयाति कुमारः? कुमार! कुमार!
(दृश्यपरिवर्तनम्) सिद्धार्थः-आर्य! अभिवादये। शुद्धोदनः-सिद्धार्थ! शाक्यवंशधरो भव।

सिद्धार्थः :
आर्य! अद्य एकामनुज्ञां ग्रहीतुं समुपस्थितोऽस्मि। अहं जानामि यदाजन्म महाराजस्य मह्यं किमप्यदेयं नास्ति।

शुद्धोदनः :
नि:शङ्कं ब्रूहि सिद्धार्थ! मम प्राणा अपि त्वदधीनाः कुमार।।

शब्दार्था: :
प्रव्रज्यायै-संन्यास के लिए-for assuming sanyasa; सौधमुपसमि-महल में जाऊँगा-.go to the palace; तारस्वरेण-ऊँचे स्वर में-loudly;प्रयाति-जाता है-goes; त्वदधीनाः-तुम्हारे अधीन-render under control.

अनुवाद :
सिद्धार्थः-यह आप क्या कह रहे हैं? यह समय संन्यास का नहीं है। कुछ महीने पूर्व ही तो आप शाक्यंवशधर कुमार राहुल के पिता बने हैं। आप आइए, आज कुमार राहुल का अभिनिष्क्रमण संस्कार है।

सिद्धार्थ :
यशोधरा! कुछ भी इच्छा नहीं है। आज ही संन्यास के लिए अनुमति लेने महाराज के महल में जाऊँगा। आज ही संन्यास के लिए। यशोधरा-(ऊँचे स्वर से) कुमार आप कहाँ जा रहे हैं? कुमार! कुमार!

(दृश्य बदलता है)

सिद्धार्थ :
आर्य! अभिवादन करता हूँ। शुद्धोदन-सिद्धार्थ! शाक्यवंश के धारक (रक्षक) हो।

सिद्धार्थ :
आर्य! आज एक आता लेने के लिएपस्थित हुआ हूँ। मैं जानता हूँ कि जब मेरा जन्म हुआ है, महाराज का मेरे लिए कुछ भी अदेय नहीं है।

शुद्धोदन :
निःसंकोच होकर कहो सिद्धार्थ! मेरे प्राण भी तुम्हारे अधीन हैं, कुमार!

English :
Yashodhra advises him not to take the drastic step Siddhartha is adamant. Siddhartha approaches his father to seek his permission.

3. सिद्धार्थः-महाराज! सुबहु मया विचारितं प्रजानां लोकयात्रार्थम्। अधुना शोकमृत्युभयानां निग्रहाय तपश्चिकीर्षामि। प्रव्रज्यायै अनुज्ञातुमर्हति मां महाराजः।

(कोलाहलो वर्धते, आश्रचर्यम्, आश्चर्यम् इति ध्वनयश्च) शुद्धोदनः-कुमार सिद्धार्थ! किमिदं व्यवसितं त्वया? न हि कालस्ते प्रव्रज्यां ग्रहीतुम्। प्रथमे वयसि चलायां मतौ धर्मचर्या बहु दोषा भवति। मया हि तव कुतूहलार्थं क्रीडोद्याने सर्वापि विनोदसामग्री समुदपस्थापिता। चित्रं मनोज्ञेऽपि विषये तव रतिर्न जायते।

सिद्धार्थ :
आर्य! जरा व्याधिश्च मृत्युश्च यदि न स्युस्तर्हि मम मनोज्ञेषु विषयेषु रतिर्भवत्। असंशयं मृत्युरिति जानतोऽपि यस्प हृदि रागो जायते तस्य चेतना लोहमयीमेव उत्प्रेक्षे।

शब्दार्थाः :
सुबहु-अच्छी तरह से-from all angles; चिकीर्षामि-इच्छा करता हूँ-wish for; व्यवसितम्-संङ्कल्प-resolve.

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अनुवाद :
सिद्धार्थः-महाराज! अच्छी तरह से मेरे द्वारा प्रजा की लोकयात्रा का विचार किया गया। अब शोक व मृत्यु के भय पराजित करने के लिए तप की इच्छा करता हूँ। महाराज, जाप मुझे संन्यास की आज्ञा दे, (शोर बढ़ जाता है, आश्चर्य है, आश्चर्य है, ऐसी ध्वनि होती है।)

शुद्धोदन :
कुमार सिद्धार्थ! क्या वह तुम्हारा सङ्कल्प है? यह समरः तुम्हारे संन्यास लेने का नहीं है। प्रथम आयु में चलते हुए विचार में धर्माचरण बहुत दोषपूर्ण होता है। मेरे द्वारा ही तुम्हारे मनोरंजन के लिए क्रीड़ास्थल में सभी मनोरंजन की सामग्री लाई गयी थी। चित्र भी तुम्हारे मन और बुद्धि के विषयों पर अनुराग उत्पन्न नहीं कर सके।

सिद्धार्थ :
आर्य! बुढ़ापा, रोग और मृत्यु यदि न होते तो मेरे मन-मस्तिष्क के विषयों पर अनुराग होता। संशय रहित, मृत्यु है, यह जानकर भी जिसके मन में राग उत्पन हो, उसका भन लोहे के समान होगा।

English :
Siddhartha expressed his desire to perform penances. The king advised him against his decision. He had arranged recreational facilities in his son’s palace. Siddhartha is hell bent on encountering old age, diseases and death.

4. शुद्धोदनः-कुमार! कस्त्वामेदं दोधितवान्? तवदं सुकुमारं वयः प्रसन्नसुन्दरं च वपुः किं प्रव्रज्यायै भगवता सृष्टम्? नायं कालस्तव तपोवनाश्रयस्य। गच्छ क्रीडोपवनम्। अनुभव नृत्यवादित्रविनोदम्।

सिद्धार्थः :
कथमहं चेतनां वञ्चयेयमार्य। यदि भवान्मे प्रतिभूर्भवति यन्मम जीवनं मरणाय न सृष्टमस्ति, मम शरीरं रोगेभ्यः सर्वदा मुक्तं स्यात्, मम यौदलं च जरा न कदाप्याक्षिपेत, तर्हि अहं तपोवनं न श्रयिष्ये।

सूत्रधारः :
संसारस्य निःसारता, जनन-मरण-चक्रस्य वन्धनं, मानुषी गतिः, र्वमिदं विचिन्त्य सिद्धार्थों व्यरञ्ज्यत लोकयात्रातः। सकृन्निशीथ तेन व्यवगितं यत्सर्वमिदं प्रपञ्चं परित्यजय जननमरणयोः पारं द्रष्टुं स तपस्तप्स्यति, साधनां विधास्यति, जीवनरहस्यं बोद्धं प्रयतिष्यते। (इति निष्क्रान्तः सर्वे)

शब्दार्थाः :
सष्टम-बनाया है-Created; वञ्चयेयम्-धोखा दूँगाँ-deceive; आक्षिपेक्-चढ़े-overrule; श्रयिष्ये-आश्रय ग्रहण करूँगा-seekshelter; निशीथे-अधी-रात में-at midnight; व्यवसितम्-निर्धारित कर-resolved;बोद्धम्-जानने के लिए-toknow; प्रतिभूः-जमानत, प्रमाण-evidence.

अनुवाद :
शुद्धोदन-कुमार! यह तुम्हें किसने बताया? तुम्हारी यह कोमल आयु और प्रसन्न व सुन्दर शरीर क्या संन्यास के लिए भगवान द्वारा बनाई गई है? यह समय तुम्हारे वन में आश्रय लेने का नहीं है। अपने क्रीडाग्रह में जाओ। नृत्य-संगीत आदि से मनोरञ्जन करो।

सिद्धार्थ :
आर्य! मैं अपने मन को कैसे धोखा दूं? यदि आप मुझे प्रमाण देते हैं कि मेरा जीवन मरने के लिए नहीं बना है, मेरा शरीर रोग से सदा मुक्त रहेगा, मेरी जवानी पर कभी बुढ़ापा नहीं चढ़ेगा, तो मैं तपोवन का आश्रय नहीं लूँगा।

सूत्रधार :
संसार की सारहीनता, जन्म-मरण के चक्र का बन्धन मनुष्य की गति, यह सब सोचकर सिद्धार्थ विरक्त हो कर लोकयात्रा को चला गया। ठीक आधी रात में उसके द्वारा निर्धारित करके कि यह सब दिखावा त्याग कर जन्म-मरण के पार देखने के लिए, वह तप करेगा, साधना करेगा और जीवन रहस्य जानने का प्रयास करेगा। (सब निकल जाते हैं।)

English :
The king asked the prince to return to the palace and enjoy himself.

The Prince rejected the king’s advice-he realised the futility of earthly pleasures.

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions

MP Board Class 8th Maths Chapter 1 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 02

संवृत

प्रश्न 1.
प्राकृत संख्याओं के लिए सभी चार संक्रियाओं के अन्तर्गत संवृत गुण की जाँच कीजिए।

1. योग:
यदि a और b दो पूर्ण संख्याएँ हैं तो a + b भी एक पूर्ण संख्या होगी।

प्रश्न 1.
4 + 7 = …… क्या यह एक पूर्ण संख्या
हल:
4 + 7 = 11; हाँ, यह एक पूर्ण संख्या है।
जाँच:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-1
अतः पूर्ण संख्याएँ योग के अन्तर्गत संवृत हैं उत्तर

2. व्यवकलन:
यदि a और b दो प्राकृत संख्याएँ इस प्रकार हैं कि a > b, तब a – b = प्राकृत संख्या होगी। यदि a < b या a = b, तो a-b प्राकृत संख्या नहीं होगी।
जाँच:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-2
अतः पूर्ण संख्याएँ व्यवकलन के अन्तर्गत संवृत नहीं हैं।

3. गुणन:
यदि a तथा b कोई दो पूर्ण संख्याएँ हैं, तो उनका गुणनफल भी एक पूर्ण संख्या होती है।

MP Board Solutions

प्रश्न 1.
3 x 7 = …. क्या यह एक पूर्ण संख्या है?
हल:
3 x 7 = 21 ; हाँ, यह एक पूर्ण संख्या है।
जाँच:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-3
अतः पूर्ण संख्याएँ गुणन के अन्तर्गत संवृत हैं।

4. भाग:
यदि a तथा b दो प्राकृत संख्याएँ हैं, तो यह आवश्यक नहीं कि a ÷ b प्राकृत संख्या होगी।
जाँच:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-4
अतः पूर्ण संख्याएँ भाग के अन्तर्गत संवृत नहीं हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 02-03

पूर्णांक

1. योग
प्रश्न 1.
क्या – 7 + (-5) एक-पूर्णांक है?
हल:
– 7 + (-5) = – 7 – 5 = – 12; हाँ, यह एक पूर्णांक।

प्रश्न 2.
क्या 8 + 5 एक पूर्णांक है?
हल:
8 + 5 = 13; हाँ, यह एक पूर्णांक है। अतः पूर्णांक योग के अन्तर्गत संवृत हैं।

2. व्यवकलन

MP Board Solutions

प्रश्न 1.
क्या 5 – 7 एक पूर्णांक है?
हल:
5 – 7 = – 2; हाँ, यह एक पूर्णांक हैं।

प्रश्न 2.
क्या 8 – (-6) एक पूर्णांक है?
हल:
8 – (-6) = 8 + 6 = 4; हाँ, यह एक पूर्णांक है।

प्रश्न 3.
जाँच कीजिए कि क्या b – a भी एक पूर्णांक है?
हल:
हाँ, (b – a) भी एक पूर्णांक है। अतः पूर्णांक व्यवकलन के अन्तर्गत संवृत है।

3. गुणन

प्रश्न 1.
क्या – 5 x 8 एक पूर्णांक है?
हल:
– 5 x 8 = – 40; हाँ, यह एक पूर्णांक है। अतः पूर्णांक गुणन के अन्तर्गत संवृत है।

4. भाग

प्रश्न 1.
क्या 5 + 8 एक पूर्णांक है?
हल:
5 + 8 = है, यह एक पूर्णांक नहीं है। अतः पूर्णांक भाग के अन्तर्गत संवृत नहीं है।

परिमेय संख्याएँ

(a) क्या आप जानते हैं कि परिमेय संख्याओं को कैसे जोड़ा जाता है?

प्रश्न 1.
\(\frac{-3}{8}\) + \(\frac{-4}{5}\) =\(\frac { -15+(-32) }{ 40 } \) = …… क्या यह एक परिमेय संख्या है?
हल:
\(\frac{-3}{8}\) + \(\frac { (-4) }{ 5 } \) = \(\frac { -15+(-32) }{ 40 } \)
= \(\frac{-47}{40}\); हाँ, यह एक परिमेय संख्या है।

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प्रश्न 2.
\(\frac{4}{7}\) + \(\frac{6}{11}\) = . . . . ; क्या यह एक परिमेय संख्या है?
हल:
\(\frac{4}{7}\) + \(\frac{6}{11}\) = \(\frac { 44+22 }{ 77 }\) = \(\frac{86}{77}\); हाँ, यह एक परिमेय संख्या है। अतः परिमेय संख्याएँ योग के अन्तर्गत संवृत हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 04

प्रश्न 1.
दो परिमेय संख्याओं का योग भी एक परिमेय संख्या है। कुछ और परिमेय संख्याओं के युग्म लेकर इसकी जाँच कीजिए।
हल:
(i) \(\frac{2}{3}+\frac{1}{5}=\frac{10}{15}+\frac{3}{15}=\frac{10+3}{15}=\frac{13}{15}\); एक परिमेय संख्या है।
(ii) \(\frac{-3}{4}+\frac{5}{7}=\frac{-21}{28}+\frac{20}{28}=\frac{-21+20}{28}=\frac{-1}{28}\); एक परिमेय संख्या है।
(iii) \(\frac{-9}{4}+\frac{-2}{12}=\frac{-27}{12}+\frac{-2}{12}=\frac{-27-2}{12}=\frac{-29}{12}\); एक परिमेय संख्या है।
अतः किन्हीं दो परिमेय संख्याओं a तथा b के लिए a+b भी एक परिमेय संख्या है।

(b)
प्रश्न 1.
क्या दो परिमेय संख्याओं का अन्तर भी एक परिमेय संख्या होगा?
उत्तर:
हाँ, दो परिमेय संख्याओं का अन्तर भी एक परिमेय संख्या होगा।

प्रश्न 2.
\(\frac{5}{8}-\frac{4}{5}=\frac{25-32}{40}\) = …… क्या यह एक परिमेय संख्या है?
उत्तर:
\(\frac{5}{8}-\frac{4}{5}=\frac{25-32}{40}\) = \(\frac{-7}{40}\) यह एक परिमेय संख्या है।

प्रश्न 3.
\(\frac{3}{7}-\left(\frac{-8}{5}\right)\) = …… क्या यह एक परिमेय संख्या है।
उत्तर:
\(\frac{3}{7}-\left(\frac{-8}{5}\right)=\frac{3}{7}+\frac{8}{5}=\frac{15+56}{35}=\frac{71}{35}\) ; यह एक परिमेय संख्या है।

प्रश्न 4.
परिमेय संख्याओं के कुछ और युग्मों के लिए इसकी जाँच कीजिए?
उत्तर:
(i)
\(\frac{7}{9}-\frac{2}{5}=\frac{7 \times 5-2 \times 9}{45}=\frac{35-18}{45}=\frac{17}{45}\) यह एक परिमेय संख्या है।
(ii)
\(=\frac{33+5}{15}=\frac{38}{15}\) ; यह एक परिमेय संख्या है।
अतः परिमेय संख्याएँ व्यवकलन के अन्तर्गत संवृत हैं। अर्थात् किन्हीं दो परिमेय संख्याओं a तथा b के लिए a-b भी एक परिमेय संख्या होगी।

(c) दो परिमेय संख्याओं के गुणनफल

प्रश्न 1.
\(\frac{-4}{5}\)x\(\frac{-6}{11}\) = …… ; क्या यह एक परिमेय संख्या है?
उत्तर:
\(\frac{-4}{5}\)x\(\frac{-6}{11}\) = \(\frac { (-4)x(-6) }{ 5×11 } \) = \(\frac{24}{55}\) हाँ, यह एक परिमेय संख्या है।

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प्रश्न 2.
परिमेय संख्याओं के कुछ और युग्म लीजिए और जाँच कीजिए कि उनका गुणनफल भी एक परिमेय संख्या है।
हल:
(i) \(\frac{-3}{5} \times 7=\frac{(-3) \times 7}{5}=\frac{-21}{5}\) यह एक परिमेय संख्या है।
(ii) \(\frac{-3}{4} \times \frac{1}{7}=\frac{(-3) \times 1}{4 \times 7}=\frac{-3}{28}\) यह एक परिमेय संख्या है।
(iii) \(\frac{2}{3} \times \frac{5}{9}=\frac{2 \times 5}{3 \times 9}=\frac{10}{27}\) यह एक परिमेय संख्या है।
अतः स्पष्ट है कि परिमेय संख्याएँ गुणन के अन्तर्गत संवृत हैं। अर्थात् किन्हीं दो परिमेय संख्याओं a तथा b के लिए ax b भी एक परिमेय संख्या होगी।

(d)
प्रश्न 1.
\(\frac{2}{7}\) ÷ \(\frac{5}{3}\) ; क्या यह एक परिमेय संख्या है?
उत्तर:
\(\frac{2}{7} \div \frac{5}{3}=\frac{2}{7} \times \frac{3}{5}=\frac{2 \times 3}{7 \times 5}=\frac{6}{35}\) ; हाँ, यह एक परिमेय संख्या है।

प्रश्न 2.
\(\frac{-3}{8}\) ÷ \(\frac{5}{3}\) ; क्या यह एक परिमेय संख्या है?
उत्तर:
\(\frac{-3}{8} \div \frac{-2}{9}=\frac{-3}{8} \times \frac{9}{-2}=\frac{-27}{-16}=\frac{27}{16}\) हाँ, यह एक परिमेय संख्या है।

प्रश्न 3.
क्या आप कह सकते हैं कि परिमेय संख्याएँ भाग के अन्तर्गत संवृत हैं?
उत्तर:
किसी संख्या a के लिए a ÷ 0 परिभाषित नहीं है। अतः परिमेय संख्याएँ भाग के अन्तर्गत संवृत नहीं हैं। तथापि, यदि हम शून्य को शामिल न करें तो दूसरी सभी परिमेय संख्याओं का समूह, भाग के अन्तर्गत संवत है।

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 05

प्रयास कीजिए (क्रमांक 1.1)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सारणी में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-5

क्रमविनिमेयता

(i) पूर्ण संख्याएँ

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सारणी के रिक्त स्थानों को भरते हुए विभिन्न संक्रियाओं के अन्तर्गत पूर्ण संख्याओं की क्रमविनिमेयता का स्मरण कीजिए।
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-6

प्रश्न 2.
जाँच कीजिए कि क्या प्राकृतिक संख्याओं के – लिए भी ये संक्रियाएँ क्रमविनिमेय हैं?
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-7

(ii) पूर्णांक

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सारणी के रिक्त स्थानों को भरिए और पूर्णांकों के लिए विभिन्न संक्रियाओं की क्रमविनिमेयता जाँचिए।
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-8

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 06

(iii) परिमेय संख्याएँ

(a) योग:

प्रश्न 1.
(i) क्या \(\frac{-6}{5}+\left(\frac{-8}{3}\right)=\left(-\frac{8}{3}\right)+\left(\frac{-6}{5}\right)\) है?
(ii) क्या \(\frac{-3}{8}+\frac{1}{7}=\frac{1}{7}+\left(\frac{-3}{8}\right)\) है?
हल:
(i)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-9
(ii)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-10
अतः परिमेय संख्याओं के लिए योग क्रम- विनिमेय है।

(b) व्यवकलन:

प्रश्न 1.
(i) क्या \(\frac{2}{3}-\frac{5}{4}=\frac{5}{4}-\frac{2}{3}\) है?
(ii) क्या \(\frac{1}{2}-\frac{3}{5}=\frac{3}{5}-\frac{1}{2}\) है?
हल:
(i)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-11
(ii)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-12
स्पष्ट है कि परिमेय संख्याओं के लिए व्यवकलन क्रमविनिमेय नहीं है।

(c) गुणन:
हम पाते हैं कि \(\frac{-7}{3} \times \frac{6}{5}=\frac{-42}{15}=\frac{6}{5} \times \frac{(-7)}{3}\)

प्रश्न 1.
क्या \(\frac{-8}{9} \times\left(\frac{-4}{7}\right)=\left(\frac{-4}{7}\right) \times\left(\frac{-8}{9}\right)\) है?
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-13

प्रश्न 2.
कुछ और गुणनफलों के लिए जाँच कीजिए।
हल:
(i)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-14
(ii)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-15
अतः परिमेय संख्याओं के लिए गुणन क्रमविनिमेय है।

(d) भाग:

प्रश्न 1.
क्या \(\frac{-5}{4} \div \frac{3}{7}=\frac{3}{7} \div\left(\frac{-5}{4}\right)\) है?
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-16
हम पाते हैं कि दोनों पक्षों के व्यंजक समान नहीं हैं। अतः परिमेय संख्याओं के लिए भाग क्रमविनिमेय नहीं है।

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 07

प्रयास कीजिए (क्रमांक 1.2)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सारणी को पूरा कीजिए –
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-17

(i) पूर्ण संख्याएँ –

प्रश्न 1.
इस सारणी को भरिए और अन्तिम स्तम्भ में दी गई टिप्पणियों को सत्यापित कीजिए।
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-18

प्रश्न 2.
प्राकृत संख्याओं के लिए विभिन्न संक्रियाओं की साहचर्यता की स्वयं जाँच कीजिए।
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-19

(ii) पूर्णांक

प्रश्न 1.
पूर्णांकों के लिए चार संक्रियाओं की साहचर्यता निम्नलिखित सारणी से देखी जा सकती है –
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-20

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 08

(iii) परिमेय संख्याएँ

(a) योग

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए \(\frac{-1}{2}+\left[\frac{3}{7}+\left(\frac{-4}{3}\right)\right]\) और \(\left[\frac{-1}{2}+\frac{3}{7}\right]+\left(\frac{-4}{3}\right)\) क्या ये दोनों योग समान हैं?
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-21

प्रश्न 2.
कुछ और परिमेय संख्याएँ लीजिए। उपर्युक्त उदाहरणों की तरह उन्हें जोड़िए और देखिए कि क्या दोनों योग समान हैं?
(i) \(\left[\frac{-1}{3}+\frac{3}{4}\right]+\left(\frac{-5}{6}\right)\) और \(\left(\frac{-1}{3}\right)+\left[\frac{3}{4}+\left(\frac{-5}{6}\right)\right]\)
(ii) \(\left[\frac{-6}{7}+\left(\frac{-7}{14}\right)\right]+7\) और \(\frac{-6}{7}+\left[\left(\frac{-7}{14}\right)+7\right]\)
हल:
(i)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-22
(ii)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-23
हम पाते हैं कि दोनों योग समान हैं। अतः परिमेय संख्याओं के लिए योग साहचर्य है।
अर्थात् किन्हीं तीन परिमेय संख्याओं a, b तथा c के लिए a + (b + c) = (a + b) + c.

(b) व्यवकलन

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प्रश्न 1.
क्या \(\frac{-2}{3}-\left[\frac{-4}{5}-\frac{1}{2}\right]=\left[\frac{-2}{3}-\left(\frac{-4}{5}\right)\right]-\frac{1}{2}\) है? स्वयं जाँच कीजिए।
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-24
अतः परिमेय संख्याओं के लिए व्यवकलन साहचर्य नहीं है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 09

(c) गुणन

प्रश्न 1.
क्या \(\frac{2}{3} \times\left(\frac{-6}{7} \times \frac{4}{5}\right)=\left(\frac{2}{3} \times \frac{-6}{7}\right) \times \frac{4}{5}\) है?
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-25

प्रश्न 2.
कुछ और परिमेय संख्याएँ लीजिए और स्वयं जाँच कीजिए। क्या \(\left(\frac{-5}{3} \times \frac{3}{-7}\right) \times \frac{3}{2}=\frac{-5}{3} \times\left(\frac{3}{-7} \times \frac{3}{2}\right)\) है?
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-26
हम पाते हैं कि परिमेय संख्याओं के लिए गुणन साहचर्य है। अर्थात् किन्हीं तीन परिमेय संख्याओं a, b तथा c के लिए ax (bx c)= (ax b) x c.

(d) भाग

प्रश्न 1.
आइए, देखते हैं कि यदि \(\frac{1}{2} \div\left[\frac{-1}{3} \div \frac{2}{5}\right]=\left[\frac{1}{2} \div\left(\frac{-1}{3}\right)\right] \div \frac{2}{5}\) है? क्या L.H.S. = R.H.S. है?
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-27
अतः बायाँ पक्ष ≠ दायाँ पक्ष
स्पष्ट है कि परिमेय संख्याओं के लिए भाग साहचर्य नहीं है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 10

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प्रयास कीजिए (क्रमांक 1.3)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सारणी को पूरा कीजिए
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-28

प्रश्न 2.
क्या आप सोचते हैं कि क्रमविनिमेयता और साहचर्यता के गुणधर्मों की सहायता से परिकलन आसान हो गया है?
उत्तर:
हाँ, वास्तव में क्रमविनिमेयता और साहचर्यता के गुणधर्मों की सहायता से परिकलन आसान हो गया है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 11

शून्य (0) की भूमिका

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पर विचार कीजिए –
2 + 0 = 0 + 2 = 2 (शून्य को पूर्ण संख्या में जोड़ना)
– 5+ 0 = …+… = – 5(शून्य को पूर्णांक में जोड़ना)
\(\frac{-2}{7}\) + ……. = 0 + \(\left(\frac{-2}{7}\right)\) = \(\frac{-2}{7}\) (शून्य को परिमेय संख्या में जोड़ना)
हल:
– 5 + 0 = 0 + (-5) = – 5
\(\frac{-2}{7}\) + 0 = 0 + \(\left(\frac{-2}{7}\right)\) = \(\frac{-2}{7}\)

प्रश्न 2.
ऐसे कुछ और योग ज्ञात कीजिए। आप क्या देखते हैं?
हल:
(i) 7 + 0 = 0 + 7 = 7
(ii) 121 + 0 = 0 + 121 = 121
(iii) – 11 + 0 = 0 + (-11) = – 11
(iv) – 150 + 0 = 0 + (-150) = -150
(v) \(\frac{2}{11}\) + 0 = 0 + \(\frac{2}{11}\) = \(\frac{2}{11}\)
(vi) \(\frac{-3}{17}\) = + 0 = 0 + \(\left(\frac{-3}{17}\right)\) = \(\frac{-3}{17}\)
हम देखते हैं कि किसी पूर्ण संख्या अथवा पूर्णांक अथवा परिमेय संख्याओं में शून्य जोड़ा जाता है तो वही संख्या प्राप्त होती है।
अतः पूर्ण संख्याओं, पूर्णांकों और परिमेय संख्याओं के योग के लिए शून्य योज्य तत्समक है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 12

1 की भूमिका

प्रश्न 1.
हम पाते हैं कि 5 x 1 = 5 = 1 x 5 (पूर्ण संख्या के साथ 1 का गुणन) –
\(\frac{-2}{7}\) x 1 =……. x ….. \(\frac{-2}{7}\)
\(\frac{3}{8}\) x …….. = 1 x \(\frac{1}{8}\) = \(\frac{3}{8}\)
आप क्या पाते हैं? कुछ और परिमेय संख्याओं के लिए इसकी जाँच कीजिए।
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-29
कुछ और गुणनफल इस प्रकार है –
(i) – 11 x 1 = 1 x (-11) = – 11
(ii) \(\frac{3}{13}\) x 1 = 1 x \(\frac{3}{13}\) = \(\frac{3}{13}\)
(iii) \(\frac{-11}{29}\) x 1 = 1 x \(\left(\frac{-11}{29}\right)\) = \(\frac{-11}{29}\)
हम पाते हैं कि किसी परिमेय संख्या a के लिए 1 गुणनात्मक तत्समक है।
a x 1 = 1 x a = a

प्रश्न 2.
क्या 1 पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए भी गुणनात्मक तत्समक है?
उत्तर:
हाँ, 1 पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए भी गुणनात्मक तत्समक है।

सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए –

प्रश्न 1.
यदि कोई गुणधर्म परिमेय संख्याओं के लिए सत्य है तो क्या वह गुणधर्म पूर्णांकों, पूर्ण संख्याओं के लिए भी सत्य होगा? कौन-से गुणधर्म इनके लिए सत्य होंगे और कौन-से सत्य नहीं होंगे?
उत्तर:
हाँ, वे गुणधर्म जो परिमेय संख्याओं के लिए सत्य हैं, तो वे गुणधर्म पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए भी सत्य हैं।

  1. पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए व्यवकलन और भाग साहचर्य नहीं हैं।
  2. पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए व्यवकलन और भाग संवृत नहीं हैं।
  3. पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए व्यवकलन और भाग क्रमविनिमेय नहीं हैं।

एक संख्या का ऋणात्मक

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प्रश्न 1.
किसी परिमेय संख्या \(\frac{2}{3}\) के लिए हम पाते हैं, \(\frac{2}{3}+\left(-\frac{2}{3}\right)=\frac{2+(-2)}{3}=0\) इसके अतिरिक्त \(\left(-\frac{2}{3}\right)+\frac{2}{3}=0\) कैसे? इसी प्रकार \(\frac{-8}{9}\) + …. ….. +\(\left(\frac{-8}{9}\right)\) = 0 ….. + \(\left(\frac{-11}{7}\right)\) = \(\left(\frac{-11}{7}\right)\) + …… = 0
हुल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-30
अत: \(\frac{a}{b}\) का योज्य प्रतिलोम –\(\frac{a}{b}\) तथा \(-\left(\frac{a}{b}\right)\) का योज्य प्रतिलोम है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 14

प्रयास कीजिए (क्रमांक 1.4)

प्रश्न 1.
वितरकता के उपयोग से निम्नलिखित का मान ज्ञात कीजिए –
(i) \(\left\{\frac{7}{5} \times\left(\frac{-3}{12}\right)+\frac{7}{5} \times \frac{5}{12}\right\}\)
(ii) \(\left\{\frac{9}{16} \times \frac{4}{12}\right\}+\left\{\frac{9}{16} \times \frac{-3}{9}\right\}\)
हल:
वितरकता के अन्तर्गत हम एक गुणनफल को दो गुणनफलों के योग अथवा अन्तर के रूप में विभक्त करते हैं।
(i)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-31
(ii)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-32

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