MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम्

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 6 यशः शरीरम् (कथा) (सङ्कलिता)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 6 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए-)।
(क) मार्कण्डेयः नाम ऋषिः कुत्र वसति स्म? (मार्कण्डेय ऋषि कहाँ रहते थे?)
उत्तर:
गङ्गातीरे (गङ्गा के किनारे)

(ख) वासुदेवः कस्य प्रियशिष्यः आसीत्? (वासुदेव किसका प्रिय शिष्य था?)
उत्तर:
मार्कण्डेयस्य (मार्कण्डेय का)।

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(ग) वासुदेवः प्रथमं कस्य गृहं प्रति प्रस्थितः? (वासुदेव पहले किसके घर गया?)
उत्तर:
देवराजस्य (देवराज के)

(घ) रामदेवः कस्मिन् ग्रामे वसति स्म? (रामदेव किस गाँव में रहता था?)
उत्तर:
रामनाथपुरे (रामनाथ पुर में)

(ङ) जनाः प्रतिदिनं कं स्मरन्ति स्म? (लोग प्रतिदिन किसको याद करते थे?)
उत्तर:
रामदेवम् (रामदेव को)

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प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत- (एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) कः मृतोऽपि जीवति? (कौन मरकर भी जीवित है?)
उत्तर:
यः समाजहितं चिन्तयति सः मृतोऽपि जीवति।।
(जो समाज के हित की सोचता है, वह मरकर भी जीवित है।)

(ख) कः जीवन्नपि मृतः एव? (कौन जीते हुए भी मृत है?)
उत्तर:
यः स्वार्थमात्रं चिन्तयति सः जीवन्नपि मृतः एव।
(जो केवल अपने विषय में सोचता है, वह जीवित होकर भी मृत है।)

(ग) देवालये किं प्रचलति स्म? (मंदिर में क्या चल रहा था?)
उत्तर:
देवालये प्रसादत्वेन भोजनवितरणं प्रचलति स्म। (मंदिर में प्रसाद के रूप में भोजन बँट रहा था।)

(घ) जलं दत्वा माता किम् अपृच्छत? (जल देकर माता ने क्या पूछा?)
उत्तर:
जलं दत्वा माता अपृच्छत्-भवता कुत्र गम्यते?” इति। (जल देकर माता ने पूछा- “आप कहाँ जा रहे हैं?)

(ङ) भोजनपरिवेषकाः किं कृतवन्तः? (भोजन परोसने वालों ने क्या किया?)
उत्तर:
भोजनपरिवेषकाः वासुदेवाय अन्नं पायसादिकं न परिविष्टवन्तः। (भोजन परोसने वालों ने वासुदेव के लिए अन्न-खीर आदि नहीं परोसा।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए।)
(क) कोपेन देवराजः किम् उक्तवान् ? (क्रोध में देवराज ने त्म्या कहा?)
उत्तर:
कोपेन देवराजः उक्तवान्–“किं धनं याचयितुम् आगतं भवता? मया कस्मैचित् किमपि न दीयते। मम विश्रान्तिः नाशिता भवता। निर्गम्यताम इतः” इति।

(क्रोध में देवराज ने कहा-“क्या तुम धन माँगने आए हो? मैं किसी को कुछ नहीं दूंगा। मेरा आराम भंग कर दिया तुमने। चले जाओ यहाँ से।”)

(ख) पुत्रः वासुदेवं विषादेन किमुक्तवान् ? (पुत्र ने वासुदेव को दुख से क्या कहा?)
उत्तर:
पुत्रः वासुदेवं विषादेन उक्तवान्-“मम पिता विंशति वर्षेभ्यः पूर्वम् एव दिवं गतः। इदानीं लोके तस्य स्मृतिमात्रम् अस्ति।” इति।

(पुत्र ने वासुदेव को दुख से कहा-“मेरे पिता 20 वर्ष पहले ही स्वर्ग चले गए। अब संसार में उनकी केवल याद ही है।”)

(ग) यदा वासुदेवस्य अध्ययनं समाप्तं तदा गुरुः तमाहूय किमवदत्? (जब वासुदेव का अध्ययन समाप्त हो गया, तब गुरु ने उसे बुलाकर क्या कहा?)
उत्तर:
यदा वासुदेवस्य अध्ययनं समाप्तं तदा गुरुः तमाहूय अवदत्-“शिष्य! अधुना भवान सर्वविद्यापारङ्गतः अस्ति। अतः इतः परं स्वग्रामं गन्तुम् अर्हति भवान्। गमनात् पूर्वं भवता द्वारकापुरस्य देवराजस्य गृहं दृष्ट्वा आगन्तव्यम्। किन्तु गृहस्यान्तः न गन्तव्यम्’ इति।

(जब वासुदेव का अध्ययन समाप्त हुआ तब गुरु ने उसे बुलाकर कहा, शिष्य! अब तुम समस्त विद्याओं में निपुण हो। अब तुम यहाँ से अपने गाँव जाने योग्य हो। जाने से पूर्व तुम द्वारकापुर के देवराज के घर जाकर देखकर आओ। पर घर के अन्दर नहीं जाना।”)

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प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूयरत
(दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(बहवः, भोजनम्, मध्येमार्गम्, रामदेवस्य, देवालयम्)
(क) तत्र प्रसादत्वेन ………………. प्रचलति स्म।
(ख) वासुदेवः कञ्चित्………………. अपश्यत।
(ग) मया……………….जीवनम् एव अनुसरणीयम्।
(घ) गुरुकुले……………….शिष्याः आसन्।
(ङ) …………….तेन सोमपुरं प्राप्तम्।
उत्तर:
(क) भोजनम्
(ख) देवालयम्
(ग) रामदेवस्य
(घ) बहवः
(ङ) मध्येमार्गम्।

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से मिलाइए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 1
उत्तर:
(क) 3
(ख) 5
(ग) 4
(घ) 1
(ङ) 2

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्धवाक्यानां समक्ष “न” इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) गुरुकुले बहवः शिष्याः आसन्।
(ख) मध्येमागं तेन रत्नपुर प्राप्तम्।।
(ग) ग्रामे सर्वे देवराजं सगौरवं स्मरन्ति स्म।
(घ) रामदेवः प्रातः स्मरणीयः आसीत्।
(ङ) रामदेवस्य गृहं वैभवोपेतम् आसीत्।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न।।

प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानां विभक्तिं वचनं च लिखत
(नीचे लिखे पदों की विभक्ति व वचन लिखिए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 3

प्रश्न 8.
उदाहरणानुसारं पदानां प्रकृतिं प्रत्ययं च पृथक्कुरुत
(उदाहरणानुसार पदों की प्रकृति व प्रत्यय अलग करके लिखिए-)
(क) गन्तव्यम्
(ख) प्रस्थितवान्
(ग) प्राप्तवान्
(घ) उक्त्वा
(ङ) सत्कृत्व
(च) आगत्य
(छ) यात्विा
(ज) वदन्दः
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 4

प्रश्न 9.
अधोलिखितशब्दानां पर्यायशब्दान् लिखत।
(नीचे लिखे शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए।)
(क) मुनिः
(ख) युक्कः
(ग) अम्ब
(घ) बुभुक्षितः।
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 7

प्रश्न 10.
अधोलिखितवाक्यानां कथानुसारेण क्रमसंयोजनं कुरुत
(नीचे लिखे वाक्यों को कथा के अनुसार क्रम से लिखिए।)
(क) ततः वासुदेवः रामनाथपुरं प्राप्य रामदेवस्य गृहम् अगच्छत्।
(ख) गङ्गातीरे मार्कण्डेयः नाम कश्चन मुनिः वसति स्म।
(ग) मया रामदेवस्य जीवनम् एव अनुसरणीयम्
(घ) किञ्चिदने गतः वासुदेवः किञ्चित् देवालयम् अपश्यत्।
(ङ) शिष्यः अनन्तरं रामनाथपुरं प्रति प्रस्थितवान्।
(च) वासुदेवः तस्य प्रियशिष्यः आसीत्।
उत्तर:
(क) गङ्गातीरे मार्कण्डेयः नाम कश्चन मुनिः वसति स्म।
(ख) वासुदेवः तस्य प्रियशिष्यः आसीत्।
(ग) किञ्चिदग्रे गतः वासुदेवः किञ्चित् देवालयम् अपश्यत्।
(घ) शिष्यः अनन्तरं रामनाथपुरं प्रति प्रस्थितवान्।
(ङ) ततः वासुदेवः रामनाथपुरं प्राप्य रामदेवस्य गृहम् अगच्छत्।
(च) मया रामदेवस्य जीवनम् एव अनुसरणीयम्।

प्रश्न 11.
प्रदत्तं चित्रम् अवलम्ब्य पञ्चवाक्यानि रचयत।
(दिए गए चित्र को देखकर पाँच वाक्य बनाइए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 6
उत्तर:
(क) अस्मिन् चित्रे द्वे स्त्रियौ स्तः।
(ख) ते वार्तालापं कुरुतः।
(ग) गवेषणेन बालकः पश्यति।
(घ) आकाशे वायुयानं गच्छति।।
(ङ) द्वे स्त्रियौ गृहात् बहिः तिष्ठतः।

योग्यताविस्तार –

संस्कृतसाहित्यस्य अन्याः कथाः अन्विष्य पठत।
(संस्कृत साहित्य की अन्य कथाएँ ढूँढ़कर पढ़ो।)

अन्ये ये महापुरुषाः यशः शरीरेण ख्याताः सन्ति तेषां जीवनवृत्तान्तं कथारूपेण लिखत।
(अन्य जो महापुरुष यशरूपी शरीर से प्रसिद्ध हैं, उनके जीवन-वृत्तान्त को कथा रूप में लिखो।)

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यशः शरीरम् पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में यश की महत्ता को एक कथा के माध्यम से सिद्ध किया गया है। इस पाठ में दो विशेष पात्रो का वर्णन है जिनमें से एक धनी होते हुए भी जीवित होने पर अपयश के कारण मृत के समान व घृणित है, तथा दूसरा जीवित न होने पर भी यश रूप शरीर से लोगों के हृदयों में जीवित है। अतः मनुष्य को सदा यश-प्राप्ति के लिए अच्छे कार्य करने चाहिएं।

यशः शरीरम् पाठ का अनुवाद

1. गङ्गातीरे मार्कण्डेयः नाम कश्चन मुनिः वसति स्म। तस्य गुरुकुले बहवः शिष्याः आसन्। वासुदेवः तस्य प्रिय शिष्यः। तस्य द्वादशवर्षात्मकम् अध्ययनं यदा समाप्तं तदा गुरुः तम् आहूय अवदत्-“शिष्य! अधुना भवान् सर्वविद्यापारङ्गतः अस्ति। अतः इतः परं स्वग्रामं गन्तुम् अर्हति भवान्। गमनात् पूर्वं भवता द्वारकापुरस्य देवराजस्य गृहं दृष्ट्वा आगन्तव्यम्। किन्तु गृहस्यान्तः न गन्तव्यम्” इति।।

वासुदेवः तस्मिन् एव दिने द्वारकापुरं प्रति प्रस्थितवान्। दिनत्रयात्मकस्य प्रयाणस्य अनन्तरं तं ग्रामं प्राप्य सः ग्रामद्वारे स्थितान् जनान् अपृच्छत्-“देवराजस्य गृहं कुत्र?” इति। “वृथा किमर्थं गम्यते तत्र?” इति उपेक्षया वदन्तः ते देवराजगृहस्थलं सूचितवन्तः। अग्रे गतः सः कूपात् जलम् उद्धरन्तीं महिला याचित्वा जलं प्राप्य तत् पिबन् ताम् अपृच्छत्-“देवराजगृहं कुत्र?” “तस्य पापिनः नाम किमर्थं मम पुरतः उच्चारयति भवान्?” इति वदन्ती सा महिला ततः निरगच्छत् एव।

शब्दार्था :
आहूय-बुलाकर-caling; सर्वविद्यापारङ्गतः-समस्त विद्याओं में निपुण-skilled in all types of learning; प्रस्थितवान्-गया-started, वृथा-व्यर्थ में-in vain, वदन्तः-बोलते हुए-speaking, उद्धरन्तीम्-निकालती हुई को-drawing.

अनुवाद :
गङ्गा के किनारे मार्कण्डेय नाम के कोई मुनि रहते थे। उनके गुरुकुल में बहुत सारे शिष्य थे। वासुदेव उनका प्रिय शिष्य था। उसका बारह वर्ष तक का अध्ययन जब समाप्त हुआ, तब गुरु ने उसको बुलाकर कहा-“शिष्य! अब आप समस्त विद्याओं में निपुण हो गए हो। इसलिए यहाँ से दूर अपने गाँव में जाने योग्य हो गए हो । जाने से पहले तुम्हारे द्वारा द्वारकापुर के देवराज के घर को देखकर आना होगा। पर घर के अन्दर मत जाना।”

वासुदेव उसी दिन ही द्वारकापुर की ओर चला गया। तीन दिन की यात्रा के बाद उस गाँव में पहुँचकर उस गाँव के द्वार पर खड़े लोगों से पूछा-“देवराज का घर कहाँ है?” “व्यर्थ में वहाँ क्यों जा रहे हो?” इस प्रकार गुस्से में बोलते हुए उन्होंने देवराज का घर बता दिया। आगे जाते हुए उसने कुएँ से जल निकालती हुई महिला से माँगकर जल लेकर व पीकर उससे पूछा-“देवराज का घर कहाँ है?” “उस पापी का नाम मेरे सामने क्यों बोला, आपने?” ऐसा कहते हुए वह महिला वहाँ से चली ही गई।

English :
Vasudev learnt all subjects. Directed by Guru Markandeya to locate the house of Devraj at Dwakrapur-went to the village and learnt that Devraj was an evil-minded person.

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2. किञ्चिदग्रेगतः वासुदेवः कञ्चित् देवालयम् अपश्यत्। तत्र प्रसादत्वेन भोजनवितरणं प्रचलति स्म। नितरां बुभुक्षितः वासुदेवः जनानां पङ्क्तौ उपाविशत्। भोजनसमये स्वपार्श्वे उपविष्टवन्तं कञ्चित् जनम् अपृच्छत् वासुदेवः-“देवराजः किं धनिक?” इति। तदा सः पार्श्वस्थः जनः-“धिक् भवन्तम्। भोजनकाले तस्य पापिनः नाम स्मारितम्” इति वदन् भोजनं परित्यज्य उत्थितः एव। एतत् दृष्ट्वा परिवेषकाः वासुदेवाय अन्नं पायसादिकं न परिविष्टवन्तः एव। अपूर्णोदरः एव सः ततः उत्थितवान्।

शब्दार्था :
प्रसादत्वेन–प्रसाद के रूप में-as; नितराम्-बहुत अधिक-excessively, extremely; बुभुक्षितः-भूखा-hungry,स्वपार्श्वे अपने पास में-near him, उपविष्टवन्तः-बैठे हुए-sitting, धिक-धिक्कार है-fie, वदन-बोलते हुए-saying,परित्यज्य-छोड़कर-leaving, परिवेषकाः-खाना परोसने वाले-servers of food, पायसादिकम्-खीर इत्यादि-porridge etc, परिविष्टवन्तः-परोसा-served, अपूर्णोदरः-खाली पेट-empty bellied.

अनुवाद :
कुछ आगे जाने पर वासुदेव ने एक मन्दिर देखा। वहाँ प्रसाद के रूप में भोजन बँट रहा था। बहुत अधिक भूखा वासुदेव लोगों की पंक्ति में बैठ गया। भोजन के समय अपने पास में बैठे किसी व्यक्ति से वासुदेव ने पूछा-“देवराज क्या धनी है?’ तब पास में बैठा वह व्यक्ति बोला, “आपको धिक्कार है। भोजन के समय उस पापी का नाम याद किया।” ऐसा कहते हुए भोजन छोड़कर उठ ही गया। यह देखकर खाना परोसने वालों ने वासुदेव के लिए अन्न खीर आदि परोसा ही नहीं। खाली पेट ही वह वहाँ से उठ गया।

English :
Vasudev reached a temple-sat in the line to receive ‘Prasad’-asked somebody about Devraj-The fellow cursed him and stood up ‘Vasudev also remained hungry-Prasad was net served to him.”

3. दूरात् एव देवराजस्य गृहं दृष्ट्वा प्रत्यागतः सः दिनद्वयस्य अनन्तरं गुरुकुलं प्राप्तवान्। गुरुः तं पुनः अवदत्-‘रामनाथपुरं गत्वा रामदेवस्य गृहं ज्ञात्वा आगन्तव्यम्” इति। शिष्यः अनन्तरदिने एव रामनाथपुरं प्रति प्रस्थितवान्। मध्येमागं तेन सोमपुरं प्राप्तम्। तत्र स्वगृहस्य पुरतः उपविष्टां काञ्चित् मातरम् अवदत् सः-“अम्ब! किञ्चित् जल ददातु” इति।

जलं दत्वा माता अपृच्छत्-“भवता कुत्र गम्यते?” इति।
‘रामदेवस्य गृहं प्रति’ इति अवदत् वासुदेवः।

“अहो, प्रातः स्मरणीयः सः” इति उक्त्वा सा माता वासुदेवं सस्नेहम् अन्तः नीत्वा भोजनादिकं दत्वा सत्कृतवती। ततः निर्गतः वासुदेवः रामनाथपुरं प्राप्य ‘रामदेवस्य गृहं कुत्र?’ इति कञ्चित् अपृच्छत् । सः अपि सत्कृत्य स्वयम् आगत्य रामदेवगृहं प्रादर्शयत् । दूरात् एव तत् दृष्टवा वासुदेवः गुरुकुलं प्रत्यगच्छत्।

शब्दार्था :
प्रत्यागतः-लौट आया-returned, ज्ञात्वा-जानकर-knowing; मध्येमार्गम्-रास्ते के बीच में-on the way; पुरतः-सामने-in front of; नीत्वा-ले जाकर-taking; सत्कृत्य-सत्कार करके-honouring, welcoming, प्रादर्शयत्-दिखाया-showed.

अनुवाद :
दूर से ही देवराज का घर देखकर वह लौट आया। वह दो दिन बाद गुरुकुल पहुँचा। गुरु ने उसे फिर कहा-रामनाथपुर जाकर रामदेव का घर जानकर आओ।” शिष्य दूसरे दिन ही रामनाथपुर की ओर चला गया। रास्ते के बीच में वह सोमपुर पहुंचा। वह अपने घर के सामने बैठी हुई किसी माता (वृद्ध स्त्री) से बोला-“माता! थोड़ा जल दे दो।”
जल देकर माता ने पूछा-“आप कहाँ जा रहे हो?
“रामदेव के घर की ओर।” वासुदेव बोला।

“वाह, वह प्रातः याद करने योग्य है।” ऐसा कहकर उस माता ने वासुदेव को प्रेम से अन्दर ले जाकर भोजन आदि देकर सत्कार किया ! वहाँ से निकल कर वासुदेव रामनाथ पुर पहुँचकर ‘रामदेव का घर कहाँ है?” किसी से पूछा। उसने भी सत्कार करके स्वयं आकर रामदेव का घर दिखाया। दूर से ही वह देखकर वासुदेव गुरुकुल लौट आया।

English :
Vasudev was again directed to learn about Ramdev’s house at Ramnathpur. Vasudev left for the place-Reached Sompur on the way. Asked a woman about Ramdev. She welcomed him-Reached Ramnathpur-Somebody greeted him and showed Ramdev’s house-Viewing the house from a distance Vasudev returned to the Gurukul.

5. दिनद्वयस्य अनन्तरं गुरुः अकथयत्-‘वासुदेव! भवान् इतः स्वगृह गन्तुम् अर्हति। गमनात् पूर्वं भवता देवराज-रामदेवयोः पूर्णः परिचयः प्राप्तव्यः” इति। एतम् आदेशं पालयन् वासुदेवः पुनरपि द्वारकापुरं प्राप्य देवराजस्य गृहम् अगच्छत्। वैभवोपेतं गृहं तत्। द्वाररक्षकः तस्य प्रवेशं निषिद्धवान्। बहुधा प्रार्थना यदा कृता तदा सः अन्तः गत्वा देवराजं वासुदेवागमनं निवेदितवान्। कोपेन एव बहिः आगत्य देवराजः-“किं धनं याचितुम् आगतं भवता? मया कस्मैचित् किमपि न दीयते । मम विश्रान्तिः नाशिता भवता। निर्गम्यताम् इतः” इति तर्जयित्वा तं प्रेषितवान्।

शब्दार्था :
वैभवोपेतम्-वैभव, विशालता से युक्त को-grand, splendid, निषिद्धवान्-रोका-refused, checked; निर्गम्यताम्-निकल जाओ-go away, तर्जयित्वा-डाँटकर-scolding, snubbing.

अनुवाद :
दो दिन बाद गुरु ने कहा-“वासुदेव! तुम यहाँ से अपने घर जाने योग्य हो.। जाने से पहले तुम देवराज व रामदेव का पूरा परिचय प्राप्त करना।”

इस आदेश को पालते हुए वासुदेव फिर द्वारकापुर पहुँचकर देवराज के घर गया। उसका घर विशालता से युक्त था। द्वारपाल ने उसे अन्दर जाने से रोका। बहुत प्रार्थना जब की तब उसने अन्दर जाकर देवराज को वासुदेव के आने की बात बताई। क्रोध में ही बाहर आकर देवराज ने-“क्या तुम धन माँगने आए हो? मैं किसी को कुछ नहीं दूंगा। मेरे आराम को भंग कर दिया तुमने। यहाँ से चले जाओ।” डाँटकर उसे निकाल (भेज) दिया।

English :
Guru asked Vasudev to gather detailed information about Devraj and Ramdev. Vasudev was not allowed to enter Devraj’s building. Devraj came out-called him a beggar-turned him awaysnubbed him also for robbing him of his rest.

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7. ततः वासुदेवः रामनाथपुरं प्राप्य रामदेवस्य गृहम् अगच्छत्। पर्णेः निर्मितं प्राचीनं गृहं तत्। कश्चन् युवकः तं सादरं स्वागतीकृत्य पानीयभोजनादिभिः तं सत्कृत्य विश्रान्त्यर्थं व्यवस्थाम् अकरोत्। विश्रान्तेः अनन्तरं सः ‘अहं रामदेवस्य पुत्रः’ इति स्वपरिचयम् उक्त्वा आगमनकारणम् अपृच्छत्। यदा वासुदेवः रामदेवस्य दर्शनेच्छा प्राकटयत् तदा पुत्रः एक भावचित्रं प्रदर्श्य-“मम पिता विंशति वर्षेभ्यः पूर्वम् एव दिवं गतः। इदानीं तस्य स्मृतिमात्रम् अस्ति लोके” इति विषादेन अवदत्। रामदेवः ग्रामस्य विकासाय देवालय-चिकित्सालय-विद्यालय-ग्रन्थालय-धर्मशालोद्यानानि यानि कारितवान तत्सर्वम अपश्यत् वासुदेवः। ग्रामे सर्वे रामदेवं सगौरवं स्मरन्ति स्म।

‘देवराजे जीवति सति अपि कोऽपि तस्मिन् आदरवान् न । रामदेवः तु विंशतिवर्षेभ्यः पूर्वम् एव दिवं गतः चेदपि जनाः प्रतिदिनं तं स्मरन्ति । यः समाजहितं चिन्तयति सः मृतोऽपि जीवति। यः स्वार्धमात्रं चिन्तयति सः तु जीवन्नपि मृतः एव’ इति अवगतवान् वासुदेवःमया रामदेवस्य जीवनम् एव अनुसरणीयम्’ इति सङ्कल्प्य स्वग्रामम् अगच्छत्।

शब्दार्था :
पर्णैः-पत्तों से-leaves, दर्शनेच्छाम्-देखने की इच्छा को-adesire to see, भावचित्रम्-छायाचित्र को-photo, प्रदर्श्य-दिखाकर-showing, विषादेन-दुःख से-with grief.

अनुवाद :
तब वासुदेव रामनाथपुर पहुँचकर रामदेव के घर गया। वह पत्तों का बना पुराना घर था। किसी युवक ने उसका आदर सहित स्वागत कर, पानी भोजन आदि से उसका सत्कार कर आराम करने की व्यवस्था की। आराम करने के बाद उसने, “मैं रामदेव का पुत्र हूँ।” ऐसा अपना परिचय देकर आने का कारण पूछा। जब वसुदेव ने रामदेव को देखने की इच्छा प्रकट की तब पुत्र ने एक छायाचित्र दिखाकर– “मेरे पिता बीस वर्ष पहले ही स्वर्ग चले गए। अब इस संसार में उनकी केवल स्मृति ही रह गई है।” दुःख से कहा। रामदेव ने गाँव के विकास के लिए जो मंदिर-चिकित्सालयविद्यालय-ग्रन्थालय-धर्मशाला, उद्यान आदि बनवाये, वह सब वासुदेव ने देखे। गाँव में रामदेव को गर्व से याद करते थे।

“देवराज जीवित होते हुए भी कोई उसका आदर नहीं करता। रामदेव तो बीस वर्ष पूर्व ही स्वर्ग चले गए, फिर भी लोग उन्हें प्रतिदिन याद करते हैं। जो समाज के हित की सोचता है, वह मरकर भी जीवित है। जो स्वार्थ की ही सोचता है, वह तो जीवित होते हुए भी मृत ही है।” यह जानकर वासुदेव, “मेरे द्वारा रामदेव के जीवन का ही अनुसरण करना चाहिए,” यह सङ्कल्प कर अपने गाँव को चला गया।

English :
Vasudev then reached Ramnathpur. Ramdev’s son greeted him-served food and drink Ramdev had built a temple, a dispensary, a school, a library and an inn before his death. All the villagers remembered him with honour, Vasudev learnt the difference between a selfish and egoistic richman and a poor social workerVasudev resolved to follow Ramdev’s path of social service.

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 24 सिक्ख एवं मराठा शक्ति का उत्कर्ष

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 24 सिक्ख एवं मराठा शक्ति का उत्कर्ष

MP Board Class 7th Social Science Chapter 24 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) ‘खालसा’ समूह का निर्माण किया
(अ) गुरु गोविन्द सिंह ने
(ब) गुरु तेगबहादुर ने
(स) बंदा बहादुर ने
(द) गुरु हरगोविन्द ने।
उत्तर:
(अ) गुरु गोविन्द सिंह ने

(2) मराठा शक्ति के संगठन का श्रेय है –
(अ) सम्भाजी को
(ब) शाहजी को
(स) शिवाजी को
(द) पेशवा को।
उत्तर:
(स) शिवाजी को

(3) शिवाजी की बढ़ती शक्ति को देखकर बीजापुर के सुल्तान ने शिवाजी का दमन करने के लिए किसे भेजा था ?
(अ) अफजल खाँ को
(ब) आदिल खाँ को
(स) शाइस्ता खाँ को
(द) हसनशाह को।
उत्तर:
(अ) अफजल खाँ को

(4) शिवाजी के अष्टप्रधान में सर्वोच्च स्थान था –
(अ) अमात्य का
(ब) सचिव का
(स) पण्डित राव का
(द) पेशवा का।
उत्तर:
(द) पेशवा का।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) “सच्चा पादशाह” की उपाधि …………. को दी गई।
(2) सिक्खों के प्रथम गुरु …………… थे।
(3) शिवाजी ने अपना राज्याभिषेक कराकर …………. की उपाधि धारण की।
(4) शिवाजी के राज्य की आय का साधन ………….. था।
उत्तर:
(1) बन्दा बहादुर
(2) गुरुनानक
(3) छत्रपति
(4) भूमि कर।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 24 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) गुरु गोविन्द सिंह ने सिक्ख शक्ति को मजबूत करने के लिए क्या प्रयास किये थे ?
उत्तर:
गुरु गोविन्द सिंह ने सिक्ख शक्ति को मजबूत करने के लिए राजकीय चिन्ह और सैनिक वेशभूषा धारण की। उन्होंने सिक्खों से भेट में घोड़े और शस्त्र लेना प्रारम्भ किया तथा समस्त सिक्खों को शस्त्र रखने को कहा।

(2) शिवाजी को प्रारम्भिक जीवन में किस प्रकार की शिक्षा मिली?
उत्तर:
शिवाजी को प्रारम्भिक जीवन में स्वतन्त्रता और सदाचार की शिक्षा मिली।

(3) शिवाजी ने अफजल खाँ का वध क्यों किया ?
उत्तर:
अफजल खाँ ने शिवाजी को षड्यन्त्र से मारने की योजना बनाई, शिवाजी को इस षड्यन्त्र का पता चल गया। उन्होंने अपनी रक्षा के लिए अफजल खाँ का वध कर दिया।

(4) टिप्पणी लिखिए –
(अ) अष्ट प्रधान
(ब) शिवाजी की सैनिक व्यवस्था।
उत्तर:
(अ) अष्ट प्रधान-शिवाजी ने शासन प्रबन्ध में सहायता और परामर्श के लिए आठ मन्त्रियों की एक परिषद् बनाई, जिसे अष्ट प्रधान कहा जाता है। इस परिषद् में प्रत्येक व्यक्ति अपने विभाग का प्रमुख होता था, परन्तु सभी शिवाजी की अध्यक्षता में काम करते थे। ये अष्ट प्रधान इस प्रकार थे –

  • पेशवा (प्रधानमन्त्री)
  • अमात्य (वित्तमन्त्री)
  • सुमंत (विदेश मन्त्री)
  • मन्त्री
  • सचिव
  • पंडितराव (पुरोहित)
  • सेनापति
  • न्यायाधीश।

(ब) शिवाजी की सैनिक व्यवस्था-शिवाजी ने नियमित एवं स्थायी सेना की व्यवस्था की थी। उनकी सेना में पैदल, अश्वारोही और जल सेना थी। सैनिकों पर कठोर अनुशासन व नियन्त्रण रहता था। पवित्र ग्रन्थों रामायण, गीता, कुरान आदि की रक्षा करना व बच्चों, वृद्धों तथा स्त्रियों का अपमान न होने देना, यह सैनिकों का प्रमुख कर्त्तव्य था।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 24 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) मुगल तथा सिक्ख सम्बन्धों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मुगल तथा सिक्खों के बीच सम्बन्ध अच्छे नहीं थे। वे जीवनभर मुगल सम्राटों के धार्मिक अत्याचारों और धर्मान्धता की नीति के विरुद्ध संघर्ष करते रहे। जहाँगीर ने अपने विद्रोही पुत्र खुसरो को सहायता देने के आरोप में गुरु अर्जुनदेव का वध कर दिया। गुरु गोविन्दसिंह के शक्तिशाली संगठन को देखकर उनके दो पुत्रों को जीवित चुनवाकर मार डाला तथा औरंगजेब के उत्तराधिकारी फर्रुखसियर ने बंदा बहादुर को यातना देकर मरवा दिया। सन् 1764 में अमृतसर में सिक्खों ने इकट्ठे होकर देग, तेग, फतेह चिन्हों वाले चाँदी के सिक्के जारी करके सिक्ख सम्प्रभुता की प्रथम घोषणा की।

(2) शिवाजी में उच्चकोटि की प्रशासनिक क्षमता थी।स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिवाजी के शासन प्रबन्ध का मुख्य उद्देश्य प्रजा की सुख-समृद्धि तथा मातृभूमि की रक्षा के लिए श्रेष्ठ सेना का गठन करना था। शिवाजी राज्य के सर्वेसर्वा थे। असीम निरंकुश शक्तियों के होते हुए भी शिवाजी ने उनका उपयोग जन-कल्याण के कार्यों के लिए किया। वे वीर सेनानायक, कूटनीतिज्ञ व उत्तम शासक थे। धार्मिक सहिष्णुता, उच्चकोटि का चरित्र, न्यायप्रियता और कुशल प्रशासन के कारण, वे महान शासक के रूप में प्रसिद्ध हुए। उच्चकोटि की प्रशासनिक क्षमता के कारण शिवाजी ने अपना शासन सुचारु रूप से चलाया। अतः हम कह सकते हैं कि शिवाजी में उच्चकोटि की प्रशासनिक क्षमता थी।

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MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 1

MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 1

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) भारत में मध्यकाल का आरम्भ माना जाता है –
(अ) तेरहवीं शताब्दी से
(ब) सातवीं शताब्दी से
(स) आठवीं शताब्दी से
(द) बारहवीं शताब्दी से।
उत्तर:
(स) आठवीं शताब्दी से

(2) तंजौर के प्रसिद्ध राजराजेश्वर मन्दिर का निर्माण करवाया था –
(अ) राजराज प्रथम
(ब) राजेन्द्र प्रथम
(स) कृष्ण प्रथम
(द) कृष्ण द्वितीय।
उत्तर:
(अ) राजराज प्रथम

(3) संविधान निर्माण सभा के अध्यक्ष थे –
(अ) डा. हरीसिंह गौर
(ब) डा. भीमराव अम्बेडक
(स) डा. राजेन्द्र प्रसाद
(द) पं. जवाहरलाल नेहरू
उत्तर:
(स) डा. राजेन्द्र प्रसाद,

(4) राज्यसभा में सदस्यों की कुल संख्या है –
(अ) 238
(ब) 250
(स) 230
(द) 260
उत्तर:
(ब) 250

(5) दिन और रात बराबर होते हैं –
(अ) 21 मार्च व 25 सितम्बर को
(ब) 21 जून व 22 दिसम्बर को
(स) 25 दिसम्बर व 25 जून को
(द) इनमें से किसी तिथि पर नहीं
उत्तर:
(द) इनमें से किसी तिथि पर नहीं

(6) वायुमण्डल में कितने प्रतिशत ऑक्सीजन गैस पाई जाती है?
(अ) 78%
(ब) 21%
(स) 28%
(द) 71%
उत्तर:
(ब) 21%

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) व्यापार के माध्यम से भारत का ………….. निरन्तर सम्पर्क बना रहा।
(2) ……………. ने प्रसिद्ध ग्रन्थ रामायण की रचना तमिल भाषा में की।
(3) मध्य प्रदेश की राजधानी का प्राचीन नाम …………… था।
(4) भारतीय संविधान लिखित एवं …………. संविधान
(5) पृथ्वी का अक्ष अपने तल से ……………. अंश का कोण बनाता है।
उत्तर:
(1) अरबों
(2) कंबन
(3) भोजपाल
(4) निर्मित
(5) 66,00

प्रश्न 3.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए –
MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 1
उत्तर:
(1) (b) उत्तर रामचरित
(2) (a) गीत गोविन्द
(3) (d) सिद्धान्त शिरोमणि
(4) (c) जीवन रक्षक गैस

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प्रश्न 4.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(1) चौहान वंश के प्रमुख शासकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
चौहान वंश के प्रमुख शासक अजयराज चौहान एवं पृथ्वीराज चौहान थे।

(2) चोलकालीन आर्थिक व्यवस्था की कोई तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
चोलकालीन आर्थिक व्यवस्था की तीन विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  • चोल साम्राज्य में जन-जीवन बहुत सम्पन्न था।
  • कृषि तथा व्यापार उन्नत अवस्था में थे।
  • राज्य की आय के प्रमुख स्रोत भूमिकर तथा व्यापार कर थे।

(3) “पंथ निरपेक्षता” से क्या आशय है ? लिखिए।
उत्तर:
‘पंथ निरपेक्षता’ भारतीय संविधान की एक प्रमुख विशेषता है। इसके अनुसार राज्य की दृष्टि से सभी धर्म समान हैं और राज्य के द्वारा विभिन्न धर्मावलम्बियों में कोई मतभेद नहीं किया जाता है। राज्य किसी भी धर्म के लिए पक्षपातपूर्ण कार्य व हस्तक्षेप नहीं करेगा।

(4) राज्यसभा सदस्य होने के लिए कोई तीन आवश्यक अर्हताएँ लिखिए।
उत्तर:
राज्यसभा सदस्य होने के लिए तीन आवश्यक अर्हताएँ निम्न हैं –

  • उसकी आयु 30 वर्ष या उससे अधिक हो।
  • वह भारत का नागरिक हो तथा मतदाता सूची में उसका नाम हो।
  • वह न्यायालय द्वारा पागल, दिवालिया घोषित न हो।

(5) क्षोभ अथवा परिवर्तन मण्डल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
क्षोभमण्डल, वायुमण्डल की एक परत है। ध्रुवों पर। इसकी ऊँचाई 8 किमी तथा विषुवत् वृत्त पर 18 किमी तक है। इस परत में जल वाष्प व धूल के कण पाए जाते हैं। इसमें मौसम सम्बन्धी सभी घटनाएँ घटित होती हैं। इस परत में सभी प्रकार का जीवन पाया जाता है। इसमें ऊँचाई बढ़ने पर प्रति 165 मीटर ऊँचाई के साथ 1°C की दर से तापमान घटता है।

(6) पृथ्वी के अक्ष से क्या आशय है ?
उत्तर:
पृथ्वी के मध्य में उत्तरीय ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव से गुजरने वाली धुरी पृथ्वी का अक्ष कहलाती है। पृथ्वी अपने अक्ष पर 23 ° झुकी हुई है।

(7) ऋतु परिवर्तन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
वर्ष की वह अवधि जिसमें मौसम सम्बन्धी दशाएँ लगभग समान होती हैं और जो पृथ्वी अक्ष पर झुकाव और उसके द्वारा सूर्य की परिक्रमा करने के परिणामस्वरूप बनती हैं, उसे ऋतु कहते हैं। ऋतुओं का क्रम से बदलना ऋतु परिवर्तन कहलाता है। इसका मूल आधार ताप है।

(8) सूर्य जब मकर रेखा पर होता है तो भारत में कौन-सी ऋतु होती है ?
उत्तर:
सूर्य जब मकर रेखा पर होता है तब उत्तरी गोलार्द्ध में सूर्य की किरणें पड़ती हैं जिससे वहाँ का तापमान कम रहता है। भारत उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है, इसलिए भारत में शीत ऋतु होती है।

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(1) पूर्व मध्यकाल के आरम्भ में भारत की राजनैतिक स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पूर्व मध्यकाल के आरम्भ में भारत अनेक छोटे:
छोटे राज्यों में बँटा हुआ था, जिनमें राज्य विस्तार के लिए संघर्ष चलते रहते थे। दक्षिण भारत में सबसे शक्तिशाली चोल राज्य था। आरम्भ में इनका राज्य कोरोमण्डल और मद्रास (चैन्नई) तक था। नवीं शताब्दी में चोल नरेशों ने पांड्य राजाओं से तंजौर जीतकर उसे अपनी राजधानी बनाया।

इन्होंने व्यवस्थित शासन प्रबन्ध के लिए साम्राज्य को कई इकाइयों में विभाजित किया, आर्थिक व्यवस्था सुदृढ़ की और साहित्य तथा स्थापत्य कला को संरक्षण दिया। उनकी सामुद्रिक शक्ति बहुत बढ़ी हुई थी। चोल नरेश राजेन्द्र प्रथम ने सन् 1025 ई. में मलाया तथा सुमात्रा द्वीपों पर विजय प्राप्त की। चोल राज्य के व्यापारिक सम्बन्ध चीन तथा दक्षिण एशिया के अन्य देशों से थे।

(2) पल्लव वंश की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
पल्लव वंश की प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं –

  • पल्लवों का शासन प्रबन्ध सुव्यवस्थित था।
  • इनके शासन काल में शिक्षा, साहित्य एवं कला की उन्नति हुई।
  • यहाँ की स्थानीय भाषा तमिल थी, जिसमें उत्तम साहित्य की रचना हुई।
  • अधिकांश पल्लव राजा भगवान शिव के भक्त थे तथा हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार अधिक था।
  • पल्लवों ने काँची के धर्मराज व कैलाशनाथ मन्दिर तथा महाबलीपुरम् में समुद्र तट पर चट्टान को काटकर रथ मन्दिर बनवाया।

(3) स्वतन्त्रता का अधिकार के अन्तर्गत हमें प्राप्त स्वतन्त्रताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्वतन्त्रता के अधिकार के अन्तर्गत हमें निम्न स्वतन्त्रताएँ प्राप्त हैं –

  • विचार व्यक्त करने की स्वतन्त्रता – भारत के सभी नागरिकों को विचार व्यक्त करने, भाषण देने, अपने तथा दूसरे व्यक्तियों के विचारों को जानने और प्रचार करने, समाचार-पत्र में लेख आदि लिखने की स्वतन्त्रता है।
  • सम्मेलन करने की स्वतन्त्रता – हमें अपने विचारों को समझाने के लिए सभा करने तथा जुलूस निकालने की स्वतन्त्रता है। लेकिन जुलूस शान्तिपूर्ण होना चाहिए। वे सभी व्यक्ति जो किसी बात पर एक समान विचार रखते हों, अपने अधिकारों के लिए इकट्ठे होकर संगठन बना सकते हैं।
  • भ्रमण की स्वतन्त्रता – भारत के सभी नागरिकों को बिना किसी विशेष अधिकार पत्र के देश में कहीं भी आने-जाने की स्वतन्त्रता है।
  • निवास एवं बसने की स्वतन्त्रता – भारत के सभी नागरिकों को अपनी इच्छानुसार अस्थायी या स्थायी रूप से भारत के किसी भी स्थान पर बसने एवं निवास करने की स्वतन्त्रता एवं अधिकार है।
  • व्यापार एवं व्यवसाय की स्वतन्त्रता – प्रत्येक नागरिक को कानूनी सीमा में रहकर अपनी इच्छानुसार कार्य तथा व्यवसाय करने की स्वतन्त्रता है।
  • जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतन्त्रता-समस्त अधिकारों का महत्व केवल तब तक है जब तक कि व्यक्ति सुरक्षित एवं जीवित है। संविधान के अनुसार व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध कहीं नहीं ले जाया जा सकता है। संविधान जीवन व सुरक्षा का अधिकार प्रदान करता है।

(4) कानून निर्माण की प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर:
किसी विषय पर कानून बनाने से पूर्व मन्त्रिपरिषद् एक प्रस्ताव तैयार करती है जिसे विधेयक कहते हैं। यह दो प्रकार के होते हैं –

  • साधारण विधेयक
  •  वित्त विधेयक।

1. विधेयक का प्रथम वाचन – सभापति की अनुमति से मन्त्रिपरिषद् का कोई सदस्य या सांसद सदन में विधेयक प्रस्तुत करता है। इस विधेयक का शीर्षक विधेयक प्रस्तुत करने वाले सदस्य द्वारा पढ़ा जाता है। इस प्रस्ताव की प्रति सभी सदस्यों को दे दी जाती है। इस प्रस्ताव का केन्द्रीय सरकार के शासकीय गजट में प्रकाशन होता है। इस विधेयक पर बहस नहीं होती है।

2. विधेयक का दूसरा वाचन – इस समय विधेयक पर विचार – विमर्श होता है। सरकार एवं विपक्ष द्वारा इस विधेयक की उपयोगिता या अनुपयोगिता पर बहस होती है। विधेयक के प्रत्येक बिन्दु एवं मुद्दों तथा निहित सिद्धान्तों पर परिचर्चा होती है। विधेयक में संशोधन के प्रस्ताव रखे जाते हैं। विधेयक में संशोधन हेतु बहुमत के आधार पर निर्णय होता है।

3. विधेयक का तृतीय वाचन – द्वितीय वाचन के बाद विधेयक का प्रारूप निश्चित हो जाता है। इस वाचन के समय संशोधन सहित तैयार विधेयक को स्वीकृत किए जाने हेतु एक प्रस्ताव विधेयक के प्रस्तावक द्वारा सदन में रखा जाता है। इस समय विधेयक में संशोधन नहीं किए जाते। सदन विधेयक को स्वीकार अथवा अस्वीकार भी कर सकता है। विधेयक पर मतदान के बाद यह क्रिया पूर्ण हो जाती है।

4. विधेयक के स्वीकृत हो जाने पर इसे दूसरे सदन में स्वीकृति हेतु भेजा जाता है। दूसरे सदन में भी विधेयक का प्रथम, द्वितीय  एवं तृतीय वाचन होता है। यदि विधेयक दूसरे सदन में स्वीकृत हो जाता है तो इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक कानून बन जाता है। इस कानून का सरकार के राजकीय गजट में प्रकाशन किया जाता है।

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(5) वायुमण्डल के संघटन को समझाइए।
उत्तर:
पृथ्वी के चारों ओर फैली हुई वायु अनेक गैसों का मिश्रण है। इनमें नाइट्रोजन 78%, ऑक्सीजन 21% तथा 1% आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन, हीलियम तथा ओजोन गैसें पाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त कुछ मात्रा में जल वाष्प, धुआँ, धूल के कण आदि मौजूद रहते हैं। ऑक्सीजन ‘जीवनदायिनी’ तथा | ओजोन ‘जीवनरक्षक’ गैस है। नाइट्रोजन वनस्पति के विकास में सहायक है। हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन से पानी बनता है। कार्बन डाइऑक्साइड और जल पेड़-पौधों के लिए आवश्यक है।

(6) स्थायी पवनों के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्थायी पवनें तीन प्रकार की होती हैं –

(i) व्यापारिक पवनें – प्राचीन काल में व्यापारी पालयुक्त जलयानों के संचालन में इन पवनों का उपयोग करते थे। ये पवनें ! पृथ्वी के दोनों गोलार्डों में पूरे वर्ष नियमित रूप से चलती हैं। उत्तरी। गोलार्द्ध में ये पवनें उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर चलती हैं।

(ii) पछुवा पवनें – ये पवनें दोनों गोलार्डों में वर्ष भर निश्चित दिशा में उच्च वायुदाब से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब की ओर चलती। हैं। ये उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर – पूर्व की ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर चलती हैं।

(iii) ध्रुवीय पवनें – ये पवनें दोनों गोलार्डों में ध्रुवीय उच्च दाब की पेटियों से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब की पेटियों की ओर चलती हैं। उत्तरी गोलार्डों में ये उत्तर-पूर्व से दक्षिण – पश्चिम की ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर होती हैं। ध्रुवों से चलने के कारण ये हवाएँ ठण्डी और शुष्क होती हैं।

(7) पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन किस प्रकार होता है ? चित्र द्वारा समझाइए।
उत्तर:
ऋतुओं का क्रम से बदलना ऋतु परिवर्तन कहलाता है। ऋतु परिवर्तन का मूल आधार ताप है। पृथ्वी को ताप सूर्य से प्राप्त होता है। सूर्य की परिक्रमा और अपने अक्ष पर 23, झुकी होने के कारण पृथ्वी को मिलने वाली ताप की मात्रा बदलती रहती है। इससे पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन होता है।
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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम्

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 10 आह्वानम् (गीतम्) (सङ्कलितम्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 10 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) भारतस्य पुरातनः सखा कः विद्यते? (भारत का पुराना मित्र कौन है?)
उत्तर:
चीनः (चीन)

(ख) कस्मिन् प्रवर्तितुं कदापि न खिद्यते? (किसमें प्रवृत्त होने के लिए दुख नहीं होता?)
उत्तर:
स्वकर्मणि (अपने कर्म में)

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(ग) पापसिन्धवः शत्रवः का प्रयान्तु? (पापरूपी समुद्र/शत्रु किसको प्राप्त हो?)
उत्तर:
अशेषताम् (समाप्ति को)

(घ) वयं कया स्वदेशरक्षणोद्यताः? (हम किससे अपने देश की रक्षा के लिए तैयार हों?)
उत्तर:
सत्यनिष्ठया (सत्य निष्ठा से)

(ङ) भारतीयकेतवः कां वृत्तिं स्फुरन्तु? (भारतीय झण्डे किस वृत्ति को स्फुरित करें?)
उत्तर:
अरातिनीवृतिम् (शत्रु को सब ओर से पकड़कर मारने के भाव को)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तर लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) कृषीबलैः काः समेधिताः भवन्तु? (किसानों के द्वारा वया वृद्धि को प्राप्त हो?
उत्तर:
कृषीबलैः धान्यवृद्धयः समेधिताः भवन्तु। (किसानों के द्वारा धानअदि वृद्धि को प्राप्त हों।)

(ख) ऊर्जितं यशः कैः अर्जितम्? (तेजस्वितापूर्ण यश किसके द्वारा अर्जित किया गया?)
उत्तर:
ऊर्जितं यशः पूर्वपुरुषैः अर्जितम्। (तेजस्वितापूर्ण यश पूर्वजों द्वारा अर्जित किया गया।)

(ग) अखर्वगर्ववृत्तिना केन वीक्षितम्? (बड़े घमण्डी आचरण वाले किराको देखा गया?)
उत्तर:
अखर्वगर्ववृत्तिना अरिणा वीक्षितम्।
(बड़े धमण्डी आचरण वाले शत्रु के द्वारा देखा गया।)

(घ) भारतीयाः केषां वंशजाः सन्ति? (भारतीय किसके वंशज हैं?)
उत्तर:
भारतीयाः वसिष्ठ-याज्ञवल्क्य-गौतम-अत्रि एतेषाम् वंशजाः सन्ति। (भारतीय वसिष्ठ-याज्ञवल्क्य-गौतम व अत्रि के वंशज हैं।)

(ङ) शत्रवः द्रुतं किं फलं प्राप्नुवन्तु? (शत्रु शीघ्र किस फल को प्राप्त हों?)
उत्तर:
शत्रवः द्रुतं निजप्रवञ्चनाफलं प्राप्नुवन्तु। (शत्रु शीघ्र अपने उगी रूपी कर्म के फल को प्राप्त हों।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) वीरबन्धवः किं कुर्वन्तु? (वीर बन्धु क्या करें?)
उत्तर:
वीरबन्धवः पापसिन्धवः शत्रवः अशेषतां प्रयान्तु।। (वीरबन्धु पाप रूपी समुद्र जैसे शत्रुओं को समाप्त करें।)

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(ख) अद्य कं स्मरन्तु? (आज किसको याद करें?)
उत्तर:
अद्य पूर्वपुरुषैः समस्तदिक्षुविश्रुतं अर्जितम् ऊर्जितम् यशः स्मरन्तु। (आज पूर्वजों के द्वारा, सारी दिशाओं में विख्यात, अर्जित तेजस्वीपूर्ण यश को स्मरण करें।)

(ग) भवत्सु जीवितेषु के नदन्ति? (आप सब में जीवित रहते हुए कौन अस्पष्ट बोल रहे हैं?)
उत्तर:
भवत्सु जीवितेषु दस्यवः नदन्ति। (आप सब में जीवित रहते हुए लुटेरे अस्पष्ट बोल रहे हैं।)

प्रश्न 4.
उचितशब्देन रिक्तस्थानानि पूरयत (उचित शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(क) स्वकर्मणि प्रवर्तितुं ………………. नैव खिद्यते। (अद्यापि/कदापि)
(ख) पुरातनं स्वपौरुष ………………. वीरबन्धवः। (विस्मरन्तु/स्मरन्तु)
(ग) यथा विहाय ………………. आचरन्तु तेऽद्भुतम् ।(कूटनीतिम्/राजनीतिम्)
(घ) समस्तदिक्षु ………………. तदद्य यावदूर्जितम्। (श्रुतं/विश्रुत)
(ङ) कदा प्रदर्शयिष्यते द्विषां ………………. बलस्य वः। (बलं/फल)
उत्तर:
(क) कदापि
(ख) स्मरन्तु
(ग) कूटनीतिम्
(घ) विश्रुतं
(ङ) फलं

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से जोड़िए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 1
उत्तर:
(क) 2
(ख) 1
(ग) 4
(घ) 5
(ङ) 3

प्रश्न 6.
अधोलिखितपदानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनञ्च लिखत (नीचे लिखे पदों के मूलशब्द विभक्ति और वचन लिखिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 3

प्रश्न 7.
अघोलिखितक्रियापदानां धातुं लकारं पुरुषं वचनञ्च लिखत (नीचे लिखे क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष व वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 5

प्रश्न 8.
विलोमशब्दान् लिखत-(विलोम शब्द लिखिए)
यथा – स्वदेशः – विदेशः
(क) स्मरन्तु
(ख) पुरातनम्
(ग) अशेषताम्
(घ) सत्यनिष्ठया
उत्तर:
(क) स्मरन्तु – विस्मरन्तु
(ख) पुरातनम् – नवीनम्
(ग) अशेषताम् – शेषताम्
(घ) सत्यनिष्ठया – असत्यनिष्ठया

प्रश्न 9.
पर्यायशब्दान् लिखत-(पर्यायशब्द लिखिए)
यथा – सूर्य दिवाकरः, भास्करः
(क) कालः
(ख) क्षितौ
(ग) शत्रवः
(घ) जगत्सु
उत्तर:
(क) कालः – समयः
(ख) क्षितौ – पृथिव्याम्, धरायाम्
(ग) शत्रवः – रिपवः, अरयः
(घ) जगत्सु – संसारेषु, विश्वेषु

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प्रश्न 10.
रेखाङ्कितपदान्याधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत (रखाङ्कित पदों के आधार पर प्रश्न बनाइए)
(क) दस्यवः नदन्ति
(लुटेरे अस्पष्ट बोल रहे हैं।)
उत्तर:
के नदन्ति? (कौन अस्पष्ट बोल रहे हैं?)

(ख) वयं हिमालयस्य रक्षणे समुद्यताः। (हम सब हिमालय की रक्षा के लिए तैयार हों।)
उत्तर:
वयं कस्य रक्षणे समुद्यताः? (हम किसकी रक्षा के लिए तैयार हों?)

(ग) पापसिन्धवः शत्रवः अशेषतां प्रयान्तु। (पाप रूपी समुद्र शत्रु समाप्ति को प्राप्त हों।)
उत्तर:
के शत्रवः अशेषतां प्रयान्तु? (कौन से शत्रु समाप्ति को प्राप्त हों?)

(घ) ते कूटनीतिं विहाय आचरन्तु। (वे कुटनीति को छोड़कर आचरण करें।)
उत्तर:
ते किं विहाय आचरन्तु? (वे किसको छोड़कर आचरण करें?)

(ङ) नदीषु यन्त्रयानलौहमार्गसेतवः सन्तु। (नदियों पर मशीनों द्वारा चलने वाले वाहन, लोहे की पटरी वाले रास्ते तथा पुल हों।)
उत्तर:
केषु यन्त्रयान लौह मार्ग सेतवः सन्तु?
(किन पर मशीनों द्वारा चलने वाले वाहन, लौहे की पटरी वाले रास्ते तथा पुल हों।)

योग्यताविस्तार –

पाठे आगतं गीतं लयबद्धं गायत।
(पाठ में आए गीत को लयबद्ध करके गाओ।)

अन्यदेशभक्तिविषयकं संस्कृतगीतम् अन्विष्य गायत।
(अन्य देश भक्ति के संस्कृत गीत ढूंट कर गाओ।)

आह्वानम् पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ एक गीत है जो श्री दयाशङ्कर वाजपेयी के द्वारा रचा गया है, जिसमें भारत और चीन के मध्य हुए युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों के साथ प्रत्यक्ष चर्चा करके लिखा गया है।

आह्वानम् पाठ का अनुवाद

1. युवान एष वः परीक्षणस्य काल आगतः हिमालयस्य रक्षणे समुद्यताः स्थ सर्वतः।
अयं सखा पुरातनोऽस्य भातरस्य विद्यते स्वकर्मणि प्रवर्तितुं कदापि नैव खिद्यते॥1॥

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अन्वयः :
युवान! एषः कालः वः परीक्षणस्य आगतः (अस्ति), सर्वतः, हिमालयस्य रक्षणे समुद्यताः स्थ। अयम् अस्य भारतस्थ पुरातनः सखा विद्यते स्वकर्मणि प्रवर्तितुं कदापि न एव खिद्यते।

शब्दार्थाः :
युवान!-हे युवको!-oh young men; वः-तुम्हारा-yours; समुद्यताःतैयार-ready; स्थ-हों-be; खिद्यते-दुखी होता है-is aggrieved.

अनुवाद :
हे युवको! यह समय तुम्हारी परीक्षा का है, सब ओर से हिमालय की रक्षा के लिए तैयार हो। यह इस भारत का पुराना मित्र है। अपने कर्म में प्रवृत्त होने के लिए कभी भी दुखी नहीं होता है।

English :
Young men, be ready to defend Himalaya-India’s oldest friend never aggrieved in getting inclined to self duties.

2. अखर्वगर्ववृत्तिनारिणात्र येन वीक्षितं सहेक्षणेन तत्क्षणन्तु तच्छिरः क्षितौ धृतम्।
यथा क्षमावशा वयं तथैव रोषपूरिताः यथैव शीलसंस्कृतास्तथा प्रसिद्धशूरताः॥2॥

अन्वयः :
अत्र येन अखर्वगर्ववृत्तिना अरिणा वीक्षितम् (तदा) तत् क्षणं तु ईक्षणेन सह तच्छिरः क्षितौ धृतम्, वयं यथा क्षमावशाः (स्मः) तथैव वयं रोषपूरिता (अपि स्मः), (एवमेव) यथा शील-संस्कृता एव तथा प्रसिद्धशूरताः (स्मः)।

शब्दार्थाः :
अखर्वगर्ववृत्तिना-बड़े घमण्डी आचरण वाले के द्वारा-of proud conduct (arrogant);अरिणा-शत्रु के द्वारा-by enemy; वीक्षितम्-देखा गया-seen; सहेक्षणेन-देखने के साथ ही-at the very sight; धृतम्-रख दिया-placed.

अनुवाद :
यहाँ जिस, बड़े घमण्डी आचरण वाले शत्रु के द्वारा देखा गया, तब उस क्षण तो देखने के साथ ही पृथ्वी पर गिरा दिया, हम जितने क्षमाशील हैं, उतने ही क्रोध से भरे हुए भी हैं। इस प्रकार जैसे हमारी शील संस्कृति प्रसिद्ध है वैसे ही वीरता भी।

English :
We beheaded the proud enemy for his evil intentions-We are both forgiving and equally brave.

3.पुरातनं स्वपौरुषं स्मरन्तु वीरबन्धवः अशेषतां प्रयान्तु शत्रवोऽद्य पापसिन्धव। – निजप्रवञ्चनाफलं समाप्नुवन्तु ते द्रुतं यथा विहाय कूटनीतिमाचरन्तु तेऽद्भुतम्॥3॥

अन्वयः :
वीरबन्धवः! पुरातनं स्वपौरुषं स्मरन्तु अद्य पापसिन्धवः शत्रवः अशेषतां प्रयान्तु। ते द्रुतं निजप्रवञ्चनाफलं समाप्नुवन्तु, यथा ते अद्भुतं कूटनीतिं विहाय आचरन्तु।।

शब्दार्थाः :
स्वपौरुषम्-अपने पुरुषत्व को-own valour; पापसिन्धवः-पापरूपी समुद्र-ocean in the form of sin; अशेषताम्-समाप्ति का-completion; निजप्रवञ्चनाफलम्-अपने ठगी रूपी कर्म के फल को-fruitof their trickery;समाप्नुवन्तु-प्राप्त करें-obtain; विहाय-छोड़कर-leaving.

अनुवाद :
हे वीर बन्धुओ! अपने पुराने पुरुषत्व को याद करो, आज पापरूपी समुद्र से शत्रु समाप्ति को प्राप्त हो। वे शीघ्र अपने ठगी रूपी कर्म के फल को प्राप्त करें, जिससे वे अपनी अजीब सी कूटनीति को छोड़कर अच्छा आचरण करें।

English :
Remember your chivalry-Bring an end to sinful enemies-tell them suffer the fruit of their trickery and leave diplomacy.

4. कृषीबलैः समेधिता भवन्तु धान्यवृद्धयः श्रमेण सन्तु साधितास्तु वीरसाहसर्द्धयः।
स्मरन्तु पूर्वपूरुषैर्जगत्सु यद् यशोऽर्जितम् समस्तदिक्षु विश्रुतं तदद्य यावदूर्जितम्॥4॥

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अन्वयः :
कृषीबलैः धान्यवृद्धयः समेधिताः भवन्तु श्रमेण साधिताः तु वीरसहासर्द्धयः सन्तु। पूर्वपुरुषैः जगत्सु, समस्तदिक्षुविश्रुतं यावद् ऊर्जितं यशः अर्जितं, तद् अद्य स्मरन्तु।

शब्दार्थाः :
कृषीवलैः-किसानों के द्वारा-By farmers; समेधिताः-वृद्धि को प्राप्त-attain propserity; वीरसाहसर्द्धय-पराक्रम-उत्साह की वृद्धि-increase invalour and courage; दिक्षु-दिशाओं में-indirections; विश्रुतम्-विख्यात-famous; अर्जितम्-तेजस्विता पूर्ण-full of bu’stre; स्मरन्तु-स्मरण करें-remember.

अनुवाद :
किसानों के द्वारा धान्य-वृद्धि से वृद्धि को प्राप्त हो, परिश्रम से प्राप्त । पराक्रम व उत्साह की वृद्धि हो। संसार में पूर्वजों के द्वारा समस्त दिशाओं में विख्यात, जो तेजस्वितापूर्ण यश प्राप्त किया है, उसे आज याद करो।

English :
Let farmers flourish-let there be advancement in courage-remember the renown of your ancestors through the world.

5. वयं तु सत्यनिष्ठया स्वदेशरक्षणोधताः प्रवञ्चनैकदक्षशत्रुपक्षतक्षणव्रताः।
नदीषु सन्तु यन्त्रयानलौहमार्गसेतवः अरातिनीवृतिं स्फुरन्तु भारतीयकेतवः॥5॥

अन्वयः :
वयं तु सत्यनिष्ठया स्वदेशरक्षणोद्यताः प्रवञ्चनैकदक्षशत्रुपक्षतक्षणव्रताः (स्मः), नदीषु यन्त्रयानलौहमार्गसेतवः भारतीय केतवः अरातिनीवृत्तिं स्फुरन्तु।

शब्दार्थाः :
सत्यनिष्ठया-सत्यनिष्ठा से-with sincere loyalty; उद्यताः-तैयार -ready; केतवः-झण्डे-flags; अरातिनीवृत्तिम्-शत्रु को सब ओर से पकड़कर मारने के भाव को-enemies by grabbing them all over.

अनुवाद :
हम सब तो सत्यनिष्ठा से अपने देश की रक्षा के लिए तैयार हैं, एकमात्र छल-कपट में निपुण शत्रुओं के पक्ष को काटने का वृत धारण करने वाले हैं, नदियों पर मशीनों द्वारा चलने वाले वाहन, लोहे की पटरी वाले रास्ते तथा पुल हों, भारतीय पताकाएँ शत्रु को सब ओर से पकड़कर मारने के भाव को स्फुरित करें।

English :
We are ready to serve our country honestly. We will sever the heads of deceitful enemies-let there be machines and iron rails. Let the Indian flags be unfurled around the enemies.

6. अये वशिष्ठ-याज्ञवल्क्य-गौतमात्रिवंशजाः तथैव सूर्यचन्द्रपावकान्ववायतल्लजाः। – भवत्सु जीवितेषु हन्त! किं नदन्ति दस्यवः? कदा प्रदर्शयिष्यते द्विषां फलं बलस्य वः॥6॥

अन्वयः :
हन्त! अये वसिष्ठ-याज्ञवल्क्य-गौतम-अत्रि वंशजा (सन्ति), तथैव सूर्यचन्द्रपावकान्ववायतल्लजाः भवत्सु जीवितेषु दस्यवः किंनदन्ति? वः बलस्य फलं द्विषां (कृते) कदा प्रदर्शयिष्यते।

शब्दार्थाः :
हन्त!-खेद है-Alas! fie; अन्ववायतल्लजाः-कुल में सर्वश्रेष्ठ-of noblest family; भवत्सु-आप सब में-in you all; जीवितेषु-जीवित रहते हुए-while living; दस्यवः-लुटेरे-robbers; नदन्ति-अस्पष्ट बोल रहे हैं -speaking vaguely; वः-तुम्हारे-yours; द्विषाभ्-शत्रुओं के-of enemies.

अनुवाद :
खेद है। अरे, वसिष्ठ, याज्ञवल्क्य, गौतम अत्रि के वंश में आप उत्पन्न हुए हैं। वैसे ही, सूर्य और चन्द्र से पवित्र, कुल में सर्वश्रेष्ठ आप सब के जीवित रहते हुए लुटेरे अस्पष्ट बोल रहे हैं। तुम्हारे बल का फल शत्रुओं को कब दिखाओगे।

English :
You are the descendants of rishis and of noble birth show your valour to let down robberr.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 29 एशिया महाद्वीप : आर्थिक स्वरूप

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 29 एशिया महाद्वीप : आर्थिक स्वरूप

MP Board Class 7th Social Science Chapter 29 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) एशिया महाद्वीप में सबसे अधिक कोयला मिलता
(अ) रूस
(ब) मलेशिया
(स) जावा
(द) पाकिस्तान।
उत्तर:
(अ) रूस

(2) ‘रेशम मार्ग’ किस देश से सम्बन्धित है ?
(अ) भारत
(ब) श्रीलंका
(स) चीन
(द) जापान।
उत्तर:
(स) चीन

(3) प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादक देश है –
(अ) कुवैत
(ब) भारत
(स) चीन
(द) श्रीलंका।
उत्तर:
(अ) कुवैत

(4) ‘ग्राण्ड ट्रंक मार्ग’ किस देश में है ?
(अ) श्रीलंका
(ब) भारत
(स) चीन
(द) मंगोलिया।
उत्तर:
(ब) भारत

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) एशिया महाद्वीप की अधिकांश जनसंख्या ……….. पर निर्भर है।
(2) एशिया महाद्वीप में टिन का उत्पादन सबसे अधिक …………….. देश में होता है।
(3) विश्व का सबसे बड़ा रेलमार्ग …………… है।
(4) स्वेज एक ……………. है जो लाल सागर और ……………. को जोड़ती है।
उत्तर:
(1) कृषि
(2) मलेशिया
(3) ट्रान्स साइबेरियन
(4) नहर, भूमध्यसागर।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 29 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) एशिया महाद्वीप में लोहा किन देशों में पाया जाता है?
उत्तर:
एशिया महाद्वीप में लोहा भारत, चीन और रूस में पाया जाता है।

(2) एशिया महाद्वीप की प्रमुख फसलें कौन-कौन सी हैं?
उत्तर:
एशिया महाद्वीप की प्रमुख फसलें चावल, गेहूँ, मक्का, गन्ना, चाय, कपास, रेशम, जूट, रबर, तम्बाकू, मसाले एवं फल हैं।

(3) ट्रान्स साइबेरियन रेलमार्ग पर पड़ने वाले प्रमुख शहरों के नाम लिखिए।
उत्तर:
ट्रान्स साइबेरियन रेलमार्ग पर पड़ने वाले प्रमुख शहर मास्को, ओमस्क, इर्कुटस्क, चीता एवं ब्लाडीबोस्टक हैं।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 29 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) एशिया महाद्वीप के आर्थिक संसाधन के रूप में कृषि का क्या महत्त्व है ?
उत्तर:
नदियों द्वारा निर्मित मैदानों में उपजाऊ कछारी मिट्टी होने से बड़ी मात्रा में कृषि की जाती है। इस महाद्वीप की चावल, गेहूँ, मक्का , गन्ना, चाय, कपास, रेशम, जूट, रबर, तम्बाकू, मसाले एवं फल, चाय, रेशम, जूट, रबर मुख्य फसलें हैं, जो विभिन्न देशों की आर्थिक स्थिति को मजबूत आधार प्रदान करती हैं।

(2) खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों ने एशिया महाद्वीप के आर्थिक विकास में कैसे सहयोग किया है ?
उत्तर:
खनिज एवं ऊर्जा के संसाधन किसी भी देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत आधार प्रदान करते हैं, क्योंकि खनिज एवं ऊर्जा के साधन ही उद्योगों के मुख्य आधार होते हैं। चीन, जापान, रूस और भारत में कोयला, ईरान, ईराक, कुवैत, और संयुक्त अरब अमीरात में पेट्रोलियम पदार्थ इन देशों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं। टिन का उत्पादन मलेशिया का मुख्य आर्थिक स्तम्भ है। लोहा भारत, चीन और रूस की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करने में सहायक है। इसके अतिरिक्त ताँबा, अभ्रक, सीसा, सोना, मैंगनीज आदि विभिन्न देशों की आर्थिक स्थिति को मजबूत आधार प्रदान करती है।

(3) एशिया महाद्वीप में यातायात के साधन आर्थिक विकास में किस तरह सहायक हैं ?
उत्तर:
एशिया महाद्वीप में सड़कों के विकास के साथ-साथ यातायात के साधनों का अच्छा विकास हुआ है। चीन का ‘रेशम मार्ग’ भारत का ‘ग्राण्ड ट्रंक रोड’ प्राचीन काल से प्रसिद्ध हैं। इन मार्गों से इन देशों के उद्योगों और व्यापार में बहुत उन्नति होने से, वहाँ की आर्थिक दशा प्रभावित हुई है। ‘ट्रान्स साइबेरियन रेलमार्ग’ जो रूस की राजधानी मास्को ने से ब्लाडीबोस्टक तक है, यहाँ के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। जलमार्गों में स्वेज नहर का अत्यधिक महत्त्व है, जो भूमध्य सागर और लालसागर को जोड़ती है, एशिया महाद्वीप में इसका व्यापारिक महत्व है। इससे एशिया के देश तथा विश्व के अन्य औद्योगिक देश आपस में नजदीक आए हैं। इसी प्रकार एशिया महाद्वीप के सभी महत्वपूर्ण शहर वायुमार्गों से जुड़े हैं।

मानचित्र कार्य:
निम्नांकित को एशिया के रेखा मानचित्र में दर्शाइए –

  • चावल उत्पादक क्षेत्र
  • रबर उत्पादक देश
  • कोयला उत्पादक देश
  • पेट्रोलियम उत्पादक देश
  • स्वेज नहर
  • ट्रान्स साइबेरियन रेलमार्ग।
    MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 29 एशिया महाद्वीप - आर्थिक स्वरूप

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.1

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.1

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प्रश्न 1.
निम्न समीकरणों को हल कीजिए –
1. x – 2 = 7
2. y + 3 = 0
3. 6 = z + 2
4. 1 + x = 17
5. 6x = 12
6. \(\frac{t}{5}\) = 10
7. \(\frac{2x}{3}\) = 18
8. 1.6 = \(\frac{y}{1.5}\)
9. 7x – 9 = 16
10. 14y – 8 = 13
11. 17 + 6p = 9
12. \(\frac{x}{3}\) +1 = 1
हल:
1. x – 2 = 7
दोनों पक्षों में 2 जोड़ने पर हम प्राप्त करते हैं,
x – 2 + 2 = 7 + 2
या x = 9
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: x = 9 होगा

2. y + 3 = 10
दोनों पक्षों में से 3 घटाने पर,
y + 3 – 3 = 10 – 3
या y = 7
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: y=7

3. 6 = z + 2
दोनों पक्षों का पक्षान्तर करने पर,
z + 2 = 6
दोनों पक्षों में से 2 घटाने पर,
z + 2 – 2 = 6 – 2
या z = 4
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: z = 4

4. \(\frac{3}{7}\) + x = \(\frac{17}{7}\)
x = \(\frac{17}{7}\) – \(\frac{3}{7}\)
(\(\frac{3}{7}\) को दाएँ पक्ष में पक्षान्तर करने पर)
x = \(\frac{17-3}{7}\) = \(\frac{14}{7}\)
या x = 2
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: x = 2

5. 6x = 12
दोनों पक्षों को 6 से भाग देने पर,
\(\frac{6x}{6}\) = \(\frac{12}{6}\)
या x=2
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: x = 2

6. \(\frac{t}{5}\) = 10
दोनों पक्षों को 5 से गुणा करने पर,
\(\frac{t}{5}\) x 5 = 10 x 5
या t=50
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: t = 50

7. \(\frac{2x}{3}\) = 18
दोनों पक्षों को 3 से गुणा करने पर,
∴ \(\frac{2x}{3}\) x 3 = 18 x 3
या 2x = 54
दोनों पक्षों को 2 से भाग करने पर,
\(\frac{2x}{2}\) = \(\frac{54}{2}\)
या x = 27
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: x = 27

8. 1.6 = \(\frac{y}{1.5}\)
दोनों पक्षों का पंक्षातर करने पर
\(\frac{y}{1.5}\) x 1.5 = 1.6 x 1.5
दोनों पक्षों को 1.5 से गुणा करने पर
या y = 2.4
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: y = 2.4

9. 7x – 9 = 16.
दोनों पक्षों में 9 जोड़ने पर,
7x – 9 + 9 = 16 + 9
या 7x = 25
दोनों पक्षों को 7 से भाग करने पर,
\(\frac{7x}{7}\) = \(\frac{25}{7}\)
या x = \(\frac{25}{7}\)
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: x = \(\frac{25}{7}\)

10. 14y – 8 = 13
दोनों पक्षों में 8 जोड़ने पर,
∴ 14y – 8 + 8 = 13 + 8
या 14y = 21
\(\frac{14y}{14}\) = \(\frac{21}{14}\)
दोनों पक्षों में 14 से भाग करने पर,
y = \(\frac{3}{2}\)
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: y = \(\frac{3}{2}\)

11. 17 + 6p = 9
दोनों पक्षों से 17 घटाने पर,
∴ 17 – 17 + 6p = 9 – 17
या 6p = – 8
दोनों पक्षों को 6 से भाग करने पर,
∴ \(\frac{6p}{6}\) = \(\frac{-8}{6}\)
या p = \(\frac{-4}{3}\)
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: p = \(\frac{-4}{3}\)

12. \(\frac{x}{3}\) + 1 = 13
दोनों पक्षों से 1 घटाने पर,
∴ \(\frac{x}{3}\) + 1 – 1 = 13 – 1
या  \(\frac{x}{3}\) = \(\frac{7-15}{15}\) = \(\frac{-8}{15}\)
दोनों पक्षों को 3 से गुणा करने पर,
\(\frac{x}{3}\) x 3 = \(\frac{-8}{15}\) x 3
या  x = \(\frac{-8}{5}\)
∴ समीकरण का अभीष्ट हल: x = \(\frac{-8}{5}\)

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MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 2

MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 2

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) गुलाम वंश का संस्थापक था
(अ) मोहम्मद गौरी
(ब) इल्तुतमिश
(स) कुतुबुद्दीन ऐबक
(द) अलाउद्दीन खिलजी।
उत्तर:
(स) कुतुबुद्दीन ऐबक

(2) राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है ?
(अ) प्रधानमन्त्री
(ब) राष्ट्रपति
(स) राज्यपाल
(द) मुख्यमन्त्री।
उत्तर:
(ब) राष्ट्रपति

(3) पानीपत का प्रथम युद्ध हुआ था –
(अ) 1526 ई. में
(ब) 1556 ई. में
(स) 1529 ई. में
(द) 1527 ई. में।
उत्तर:
(अ) 1526 ई. में

(4) हमारी पृथ्वी के कितने प्रतिशत भाग पर थलमण्डल –
(अ) 71%
(ब) 72%
(स) 28%
(द) 29%
उत्तर:
(द) 29%

(5) दीर्घ ज्वार आता है –
(अ) पंचमी को
(ब) पूर्णिमा को
(स) अष्टमी को
(द) चतुर्थी को।
उत्तर:
(ब) पूर्णिमा को।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) खिलजी वंश का संस्थापक …………. था।
(2) गुरुनानक देव का जन्म …………… गाँव में हुआ था।
(3) भारत के उपराष्ट्रपति का कार्यकाल ………….. वर्ष का होता है।
(4) वर्षा मापने वाले यन्त्र को ………… कहते हैं।
(5) भारत में ऋतुओं की संख्या …………..’ हैं।
उत्तर:
(1) जलालुद्दीन खिलजी
(2) तलवण्डी
(3) 5
(4) वर्षा मापक
(5) तीन।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए
MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 2
उत्तर:
(1) (b) ताँबे की मुद्रा का प्रचलन
(2) (c) पहेलियाँ-मुकरियाँ
(3) (a) इक्ता प्रणाली तुगलक
(4) (e) चतुर, वाकपटु, सलाहकार
(5) (d) लहरें

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(1) अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियन्त्रण व्यवस्था को समझाइए।
उत्तर:
धन की पूर्ति हेतु उसने बाजार नियन्त्रण नीति को लागू किया था। उसने वस्तुओं की कीमतें निश्चित कर दी। व्यापारियों पर नियन्त्रण रखने के लिए उसने कुशल तथा ईमानदार कर्मचारियों की नियुक्ति की। दुकानदारों द्वारा बाजार के नियमों का पालन न करने पर उन्हें कठोर दण्ड दिया जाता था। बाजार भावों पर गुप्तचरों द्वारा निगरानी रखी जाती थी। अकाल पड़ने पर सरकारी गोदामों से खाद्यान्नों की पूर्ति की जाती थी।

(2) ज्वार – भाटे से कौन-कौन से लाभ हैं, लिखिए।
उत्तर:
ज्वार-भाटे से निम्नलिखित लाभ हैं –

  •  ज्वारीय शक्ति से जल विद्युत उत्पन्न की जा सकती है।
  • अनेक प्रकार की सीमें, शंख, मोती आदि वस्तुएँ किनारों पर आ जाती हैं।
  • नदियों के मुहानों की गंदगी साफ हो जाती है तथा नौकायन में सहायता मिलती है।
  • ज्वार के समय उथले बन्दरगाहों की गहराई बढ़ जाती है, जिससे बड़े-बड़े जलयान बन्दरगाह तक पहुँच जाते हैं और भाटे के साथ लौट आते हैं। इससे व्यापारिक माल ढोने में सहायता मिलती है।

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(3) अध्यादेश से क्या आशय है ?
उत्तर:
जब विधानसभा की बैठकें नहीं चल रही हों और किसी कानून की तुरन्त आवश्यकता हो तो राज्यपाल द्वारा जारी आदेश अध्यादेश कहलाता है। अध्यादेश कानून के ही समान होते हैं।

(4) शाहजहाँ के शासनकाल में स्थापत्य कला की प्रगति को लिखिए।
उत्तर:
शाहजहाँ ने अपने शासन काल में दिल्ली का लाल किला, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, जामा मस्जिद, ताजमहल आदि का निर्माण कराया। उसकी शान-शौकत और ऐश्वर्य का प्रतीक मयूर सिंहासन भी है जिसमें विख्यात कोहिनूर हीरा भी जड़ा हुआ था।

(5) चक्रवातीय वर्षा पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
चक्रवातीय वर्षा – गर्म और ठण्डी हवाओं के मिलने पर गर्म हवाएँ ऊपर की ओर उठती हैं और ठण्डी हवाएँ तेजी से कम दबाव की ओर आती हैं। पृथ्वी की गति के कारण ये हवाएँ चक्र की भाँति घूमने लगती हैं जिन्हें चक्रवात कहते हैं। चक्रवात के मध्य की हवाएँ ठण्डी होने पर वर्षा करती हैं। इसे चक्रवाती वर्षा कहते हैं।

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 18 आर्द्रता एवं वर्षा-3

(6) अकबर की मनसबदारी व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
अकबर की मनसबदारी व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  • गुप्तचर व डाक व्यवस्था में सुधार करना।
  • प्रशासनिक तन्त्र को सैन्य स्तर पर संगठित करना।
  • सरकारी सेवारत अधिकारियों को सैन्य पद (मनसबदार) पर नियुक्त करना।
  • मनसबदारों को नकद वेतन देना तथा सेना के रख-रखाव के लिए भूमि (जागीर) देना।

(7) भक्ति आन्दोलन का जनजीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:

  • भक्ति आन्दोलन ने धर्म व समाज में व्याप्त आडम्बर और कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया।
  • समाज में हिन्दू व मुसलमानों के भेद व अलगाव को दूर कर दोनों को निकट लाने का प्रयास किया।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(1) समुद्री धाराओं का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है ? लिखिए।
उत्तर:
जल धाराओं के उत्पन्न होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

  1. स्थायी पवनों का प्रभाव-स्थायी पवनों के प्रभाव से जलधाराएँ उत्पन्न होकर इन हवाओं की दिशा की ओर बहने लगती हैं।
  2. तापमान में भिन्नता का प्रभाव-विषुवत रेखा के आस-पास तापमान अधिक रहने के कारण समुद्री जल गर्मी पाकर फैलता है और जलधाराएँ ध्रुवों की ओर बढ़ने लगती हैं।विषुवत रेखा के समीप खाली स्थान को भरने के लिए ध्रुवों की ओर से ठण्डी जलधाराएँ विषुवत रेखा की ओर बहने लगती हैं। इस प्रकार तापमान की भिन्नता जलधाराओं को उत्पन्न करती हैं।
  3. पृथ्वी की दैनिक परिभ्रमण गति का प्रभाव-पृथ्वी। अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर 24 घण्टे में घूर्णन गति द्वारा एक चक्कर पूरा करती है जिससे जलधाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में। अपने दायीं ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती हैं।
  4. स्थल भू-भाग का प्रभाव-बहती हुई धारा के सामने जब कोई विशाल स्थल भाग आ जाता है, तो वह अपनी दिशा। स्थल के अनुरूप बदल लेती हैं।
  5. समुद्र की लवणता का प्रभाव-कुछ धाराएँ जल के घनत्व में अन्तर होने से भी उत्पन्न होती हैं। जलधाराओं का मानव जीवन पर प्रभाव – इन धाराओं का जलवायु, आवागमन, वर्षा और मत्स्य उद्योग पर प्रभाव पड़ता है –
    • गर्म जलधाराएँ अपने तटवर्ती स्थानों का तापमान बढ़ा देती हैं तथा ठण्डी धाराएँ निकटवर्ती क्षेत्रों का सामान्य तापमान कम कर देती हैं।
    • समुद्रों में जहाँ गर्म और ठण्डी धाराएँ मिलती हैं, तो वहाँ घना कोहरा उत्पन्न हो जाता है।
    • गर्म जलधारा के कारण ऊँचे अक्षांशों में स्थित बन्दरगाह वर्षभर खुले रहते हैं। गर्म धाराओं के ऊपर बहने वाली हवाएँ गर्म होकर
      आर्द्रता ग्रहण कर लेती हैं और निकटवर्ती क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा । कर देती हैं।

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(2) शेरशाह के शासन प्रबन्ध का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शेरशाह की शासन व्यवस्था –

  • केन्द्रीय शासन-केन्द्रीय शासन का सबसे बड़ा अधिकारी स्वयं सम्राट था। उसकी सहायता के लिए अनेक अधिकारी व कर्मचारी होते थे। वह एक उदार शासक था। उसकी दण्ड व्यवस्था कठोर थी। हिन्दुओं के साथ उसका व्यवहार अच्छा था।
  • जिले का शासन – शासन की सुविधा के लिए शेरशाह ने अपने समस्त साम्राज्य को अनेक सरकारों (जिलों) में विभाजित किया, जिन्हें पुनः परगनों में विभाजित किया गया। सरकारों और परगनों के अधिकारियों को समय-समय पर स्थानान्तरित किया जाता था।
  •  सैनिक प्रशासन – शेरशाह ने एक विशाल एवं शक्तिशाली सेना का संगठन किया जिसमें पैदल सिपाही, घुड़सवार, तोपखाना व हाथी चार विभाग थे। सैनिकों को नकद वेतन दिया जाता था तथा उनका हुलिया एक रजिस्टर में दर्ज किया जाता था। घोड़ों को दागने की प्रथा प्रचलित थी।
  • भूमि प्रबन्ध – शेरशाह ने भूमि की नाप कराकर उसे उपज के अनुसार बाँट दिया गया था। किसानों से उपज का चौथाई भाग लगान के रूप में वसूल किया जाता था।
  • न्यायव्यवस्था – सम्राट न्याय विभाग का सर्वोच्च अधिकारी था। वह न्याय में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करता था। साम्राज्य के विभिन्न भागों में काजियों की नियुक्ति की गई।
  • जनता की भलाई के कार्य-शिक्षा के क्षेत्र में उसने मदरसों का निर्माण कराया। उसने यात्रियों की सुविधा के लिए कुँओं और सरायों की व्यवस्था की। अनेक सड़कें बनवाईं तथा उनके किनारे छायादार वृक्ष लगवाए। आज की ग्राण्ड ट्रंक रोड (शेरशाह सूरी मार्ग) उसी की देन है।

(3) विधानसभा के गठन की प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर:
वित्तीय कार्य:
विधानसभा राज्य की वित्तीय व्यवस्था पर नियंत्रण रखती है। प्रतिवर्ष विधान सभा में वित्तमन्त्री द्वारा राज्य का आय-व्यय विधेयक (बजट) प्रस्तुत होता है। विधानसभा द्वारा बजट पारित होने पर इसे राज्यपाल के हस्ताक्षर हेतु भेजा जाता है। राज्यपाल के हस्ताक्षर होने के बाद सभी वित्तीय कार्य संचालित होते हैं। इसके अतिरिक्त विधान सभा कार्य विभिन्न माध्यमों से जनहित के कार्यों, सरकारी योजनाओं, विभागीय कार्यवाहियों आदि के सम्बन्ध में जानकारियाँ प्राप्त करना है।

विधानसभा की शक्तियाँ:
विधान सभा सरकारी विभागों द्वारा किए गए कार्यों पर नियन्त्रण रखती है। यह कार्य विधानसभा सदस्य विभिन्न प्रस्तावों के माध्यमों से करते हैं। ऐसे प्रस्ताव काम रोको प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण, प्रश्न पूछना, बजट में कटौती प्रस्ताव आदि हैं। गम्भीर स्थिति उत्पन्न होने पर सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव भी पेश किया जा सकता है।

(4) महासागरों से कौन-कौन से लाभ हैं ? लिखिए।
उत्तर:
महासागरों से निम्नलिखित लाभ हैं –

  • भूमि पर वर्षा – भूमि पर समस्त वर्षा समुद्र के पानी के वाष्पन से उत्पन्न भाप से होती है, जो वनस्पति, जीव-जन्तु एवं मानव जीवन के लिए उपयोगी है।
  • तापमान का सन्तुलन – महासागर धरातल पर तापमान का सन्तुलन बनाने में उपयोगी हैं।
  • आवागमन के साधन – महासागर विभिन्न महाद्वीपों को जोड़ते हैं जो अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में सहायक हैं।
  • अन्य – इसके अतिरिक्त महासागर खनिजों के भण्डार, सुरक्षा के उत्तम साधन, मछलियों के भण्डार एवं प्राकृतिक सौन्दर्य से भी परिपूर्ण हैं।

(5) सल्तनतकालीन वास्तुकला की प्रमुख विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर:
सल्तनतकालीन वास्तुकला की प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं –

  • नुकीले मेहराब और गुम्बद तथा ऊँची सँकरी मीनारें इस काल की वास्तुकला की महत्वपूर्ण विशेषता थी।
  • इस काल के अनेक शासकों ने उल्लेखनीय निर्माण कार्य करवाए। दिल्ली की कुतुबमीनार, फिरोजशाह का दुर्ग, अलाई दरवाजा, लाल महल, तुगलकाबाद का किला, लोदी सुल्तानों के रंग-बिरंगे खपरैलों की डिजाइनों से सजे मकबरे आदि का निर्माण कराया।
  • दक्षिण के शासकों ने किले के अन्दर शानदार – इमारतें बनवायीं। दौलताबाद एवं गोलकुण्डा के किले इनमें प्रमु ख हैं।
  • सुदूर दक्षिण में विजयनगर के शासकों द्वारा मन्दिरों का निर्माण व जीर्णोद्धार कराया गया। इनके द्वारा

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MP Board Class 7th Social Science आदर्श प्रश्न-पत्र

MP Board Class 7th Social Science Solutions आदर्श प्रश्न-पत्र

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
1. इब्नबतूता किसके शासनकाल में आया था?
(अ) मोहम्मद बिन तुगलक
(ब) रजिया
(स) अलाउद्दीन खिलजी
(द) इब्राहिम लोदी।
उत्तर:
(अ) मोहम्मद बिन तुगलक

2. मुगलकाल में लोगों का प्रमुख व्यवसाय था –
(अ) कृषि
(ब) काष्ठ उद्योग
(स) विदेशी व्यापार
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(अ) कृषि

3. मध्य प्रदेश में मानव संग्रहालय स्थित है –
(अ) इन्दौर
(ब) जबलपुर
(स) भोपाल
(द) उज्जैन।
उत्तर:
(स) भोपाल

4. वायुदाब को मापने वाली इकाई कहलाती है –
(अ) मिलीमीटर
(ब) मिलीबार
(स) मिलीग्राम
(द) सेण्टीमीटर।
उत्तर:
(ब) मिलीबार।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए –
(अ)                                                   (ब)
(1) नुकीली पत्ती वाले वन          (a) गोमतेश्वर की जैन मूर्ति
(2) श्रवणबेलगोला                    (b) राष्ट्रपति
(3) सहारा                               (c) टैगा
(4) क्षमादान का अधिकार          (d) मरुस्थल
उत्तर:
(1) (c) टैगा
(2) (a) गोमतेश्वर की जैन मूर्ति
(3) (d) मरुस्थल
(4) (b) राष्ट्रपति

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) समुद्र तली के ………….. में मछलियाँ सर्वाधिक पाई जाती हैं।
(2) मध्य प्रदेश की विधानसभा में सदस्यों की कुल संख्या …………. है।
(3) बाबर द्वारा लिखी आत्मकथा का नाम …………. है।
उत्तर:
(1) महाद्वीपीय निमग्न तट
(2) 230
(3) तुजुकए-बाबरी (बाबरनामा)

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निर्देश : निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर लगभग 10-20 शब्दों में लिखिए। प्रत्येक के लिए 3-3 अंक निर्धारित हैं।
प्रश्न 4.
मध्यकालीन इतिहास के साहित्यिक स्त्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मध्यकाल के साहित्यिक स्रोत ताड़पत्रों और भोज पत्रों पर लिखा विवरण था।

प्रश्न 5.
भारतीय संविधान सभा के किन्हीं तीन सदस्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
भारतीय संविधान सभा के तीन सदस्य डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, पं. जवाहरलाल नेहरू एवं सरदार वल्लभ भाई पटेल थे।

प्रश्न 6.
पृथ्वी की कौन-कौन सी गतियाँ हैं ?
उत्तर:
पृथ्वी अन्तरिक्ष में अपने अक्ष पर घूमने के साथ – साथ अण्डाकार मार्ग पर सूर्य की परिक्रमा करती है। इस प्रकार पृथ्वी की दो गतियाँ होती हैं-

  • घूर्णन अथवा दैनिक गति
  • परिक्रमण अथवा वार्षिक गति।

घूर्णन गति:
पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमते हुए 24 घण्टे में एक चक्कर पूर्ण कर लेती है। पृथ्वी की इस गति को घूर्णन गति कहते हैं –

MP Board Class 7th Social Science आदर्श प्रश्न-पत्र - 1
पृथ्वी की घूर्णन गति

निर्देश : निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30-40 शब्दों में लिखिए। प्रत्येक के लिए 5-5 अंक निर्धारित हैं।
प्रश्न 7.
चोलकालीन स्थापत्य कला के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
चोलकालीन स्थापत्य कला के उदाहरण:

  • राजराजेश्वर मन्दिर के अहाते में ‘गोपुरम’ नामक विशाल प्रवेश द्वार का निर्माण कराना।
  • तंजौर में राजराजेश्वर मन्दिर तथा गंगेकोंड चोलपुरम में अनेक भव्य मन्दिरों का निर्माण कराना।

प्रश्न 8.
अकबर की धार्मिक नीति का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मुगल सम्राट इस्लाम धर्म के कट्टर अनुयायी थे। विभिन्न धर्मों के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर उसने दीन-ए-इलाही नामक पंथ चलाया। औरंगजेब ने जजिया तथा तीर्थयात्रा कर लगाए। हिन्दुओं में वैष्णव, शैव मत अधिक प्रचलित थे। जैन धर्म का समाज में अधिक महत्व था। जैन और हिन्दुओं में तीर्थयात्रा का प्रचलन था। बौद्ध धर्म का लगभग ह्रास हो चुका था।

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प्रश्न 9.
प्रमुख बाल अधिकारों को लिखिए।
उत्तर:
मनुष्यों को निम्नलिखित मानव अधिकार प्राप्त हैं –

  • जीवन की स्वतन्त्रता का अधिकार।
  • समानता का अधिकार।
  • सम्पत्ति का अधिकार।
  • देश के शासन में भाग लेने तथा सरकारी सेवाओं में चयन हेतु समानता का अधिकार।
  • अपराध प्रमाणित न होने तक निर्दोष समझे जाने का अधिकार।
  • बिना किसी जाँच के बन्दी बनाए जाने, नजरबन्द करने, देश से निकालने से स्वतन्त्रता का अधिकार।
  • स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका द्वारा सुनवाई का अधिकार।
  • मत व अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का अधिकार।
  • शान्तिपूर्वक सभा आयोजित करने का अधिकार।
  • दासता, विवेक और धर्म की स्वतन्त्रता का अधिकार।
  • उत्पीड़न अथवा क्रूर अमानुषिक या अपमानजनक व्यवहार या दण्ड से स्वतन्त्रता का अधिकार।।
  • उचित व अनुकूल व्यवस्थाओं के अन्तर्गत काम करने का अधिकार।
  • समान कार्य के लिए समान वेतन का अधिकार।
  • अवकाश व विश्राम का अधिकार।
  • शिक्षा का अधिकार व समाज के सांस्कृतिक जीवन में भाग लेने का अधिकार।

इन अधिकारों की भावनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की आर्थिक व सामाजिक परिषद् कार्य करती है।

प्रश्न 10.
मौसम और जलवायु में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मौसम और जलवायु में अन्तर –
MP Board Class 7th Social Science आदर्श प्रश्न-पत्र - 2
प्रश्न 11.
मिश्रित खेती किसे कहते हैं ?
उत्तर:
खेती का वह प्रणाली जिसमें विभिन्न फसलों के साथ-साथ पशुपालन भी किया जाता है, मिश्रित खेती कहलाती है।

प्रश्न 12.
विधान सभा सदस्य बनने के लिए निर्धारित अर्हताओं को लिखिए।
उत्तर:
विधानसभा सदस्य बनने के लिए निर्धारित अर्हताएँ निम्नलिखित हैं –

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • वह 25 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
  • वह दिवालिया अथवा पागल न हो।
  • वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन लाभ के पद पर न हो।

निर्देश : निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर लगभग 80-100 शब्दों में लिखिए। प्रत्येक के लिए 10-10 अंक निर्धारित हैं।
प्रश्न 13.
शिवाजी में उच्चकोटि की प्रशासनिक क्षमताएँ थीं।’ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिवाजी के शासन प्रबन्ध का मुख्य उद्देश्य प्रजा की सुख-समृद्धि तथा मातृभूमि की रक्षा के लिए श्रेष्ठ सेना का गठन करना था। शिवाजी राज्य के सर्वेसर्वा थे। असीम निरंकुश शक्तियों के होते हुए भी शिवाजी ने उनका उपयोग जन-कल्याण के कार्यों के लिए किया। वे वीर सेनानायक, कूटनीतिज्ञ व उत्तम शासक थे। धार्मिक सहिष्णुता, उच्चकोटि का चरित्र, न्यायप्रियता और कुशल प्रशासन के कारण, वे महान शासक के रूप में प्रसिद्ध हुए। उच्चकोटि की प्रशासनिक क्षमता के कारण शिवाजी ने अपना शासन सुचारु रूप से चलाया। अतः हम कह सकते हैं कि शिवाजी में उच्चकोटि की प्रशासनिक क्षमता थी।

अथवा
सल्तनतकालीन भाषा, साहित्य एवं विज्ञान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भाषा एवं साहित्य –

  • प्राथमिक शिक्षा केन्द्र मन्दिर व मस्जिद होते थे। कुछ स्थानों पर प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना की गई।
  • उच्च शिक्षा के लिए टोल (महाविद्यालय) व मदरसों की व्यवस्था थी।
  • केन्द्रीय स्तर पर फारसी भाषा का प्रयोग होता था।
  • हिन्दी और फारसी के सम्मिश्रण से ‘उर्दू भाषा का जन्म हुआ।
  • उर्दू भाषा के शब्दकोष में फारसी व हिन्दी भाषाओं के शब्दों का प्रयोग किया।
  • इस काल में क्षेत्रीय भाषाओं का विकास हुआ, जिनमें उत्तम साहित्य की रचना हुई।
  • कुछ हिन्दू राज्यों (विजयनगर आदि) के राज दरबार में संस्कृत भाषा का प्रयोग किया जाता था। संस्कृत ग्रन्थों के अनुवाद भारतीय
  • भाषाओं के साथ-साथ अरबी व फारसी में भी किए गए।
  • कागज के प्रचलन से अनेक प्राचीन ग्रन्थों का पुनः लेखन हुआ।

प्रश्न 14.
भारत के राष्ट्रपति को प्राप्त शक्तियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राष्ट्रपति को निम्नलिखित शक्तियाँ प्राप्त हैं –

  • राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री की नियुक्ति करते हैं तथा प्रधानमन्त्री के सुझाव पर अन्य मन्त्रियों की भी नियुक्ति करते हैं।
  • राष्ट्रपति राज्यों के राज्यपाल, सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं।
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है।
  • राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने का अधिकार है। ऐसे अध्यादेशों को कानून के ही समान मान्यता प्राप्त है।
  • राष्ट्रपति को क्षमादान का अधिकार प्राप्त है। न्यायालय द्वारा दिए गए किसी व्यक्ति के मृत्युदण्ड को राष्ट्रपति चाहे तो माफ कर सकते हैं या सजा को आजीवन कारावास में बदल सकते हैं।

अथवा

भारत के नागरिकों को प्राप्त स्वतन्त्रताओं को लिखिए।
उत्तर:
स्वतन्त्रता के अधिकार के अन्तर्गत हमें निम्न स्वतन्त्रताएँ प्राप्त हैं –

  • विचार व्यक्त करने की स्वतन्त्रता – भारत के सभी नागरिकों को विचार व्यक्त करने, भाषण देने, अपने तथा दूसरे व्यक्तियों के विचारों को जानने और प्रचार करने, समाचार-पत्र में लेख आदि लिखने की स्वतन्त्रता है।
  • सम्मेलन करने की स्वतन्त्रता – हमें अपने विचारों को समझाने के लिए सभा करने तथा जुलूस निकालने की स्वतन्त्रता है। लेकिन जुलूस शान्तिपूर्ण होना चाहिए। वे सभी व्यक्ति जो किसी बात पर एक समान विचार रखते हों, अपने अधिकारों के लिए इकट्ठे होकर संगठन बना सकते हैं।
  • भ्रमण की स्वतन्त्रता – भारत के सभी नागरिकों को बिना किसी विशेष अधिकार पत्र के देश में कहीं भी आने-जाने की स्वतन्त्रता है।
    निवास एवं बसने की स्वतन्त्रता – भारत के सभी नागरिकों को अपनी इच्छानुसार अस्थायी या स्थायी रूप से भारत के किसी भी स्थान पर बसने एवं निवास करने की स्वतन्त्रता एवं अधिकार है।
  • व्यापार एवं व्यवसाय की स्वतन्त्रता – प्रत्येक नागरिक को कानूनी सीमा में रहकर अपनी इच्छानुसार कार्य तथा व्यवसाय करने की स्वतन्त्रता है।
  • जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतन्त्रता-समस्त अधिकारों का महत्व केवल तब तक है जब तक कि व्यक्ति सुरक्षित एवं जीवित है। संविधान के अनुसार व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध कहीं नहीं ले जाया जा सकता है। संविधान जीवन व सुरक्षा का अधिकार प्रदान करता है।

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प्रश्न 15.
अफ्रीका महाद्वीप के धरातलीय स्वरूप का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अफ्रीका महाद्वीप का अधिकांश भाग पठारी होने के कारण इसे पठारों का महाद्वीप कहा जाता है। उत्तर-पश्चिम में पठार । कुछ नीचा तथा दक्षिण-पूर्व में ऊँचा है। यह महाद्वीप प्राचीन कठोर। शैलों से बना है। इसके तटीय भागों में सँकरे मैदान मिलते हैं। पूर्वी भाग में भूमध्य रेखा के समीप वर्ष भर बर्फ से ढका रहने वाला ज्वालामुखी पर्वत किलिमंजारो है। उत्तर-पश्चिम की ओर लम्बी एटलस पर्वत श्रृंखला है जो नवीन वलित पर्वत है। दक्षिण – पूर्व में ड्रेकेन्सबर्ग पर्वत श्रृंखला है।

सहारा मरुभूमि में होगर पर्वत व तिबेस्ती पठार हैं। पश्चिम में कांगो और नाइजर नदी के बीच अदामावा का पठार है। इसका सबसे ऊंचा शिखर केमरून है। उत्तरी-पूर्वी भाग में अबीसीनिया का पठार है। यहाँ की भ्रंश घाटी अफ्रीका के पूर्व में न्यास झील से तुरकाना झील होती हुई लाल सागर और जॉर्डन घाटी तक फैली है। इस घाटी में विक्टोरिया, न्यास, अलबर्ट, टैगानिका झीलें हैं। अफ्रीका के उत्तरी मैदानी भाग में सहारा तथा दक्षिणी भाग में कालाहारी मरुस्थल हैं।

अथवा

यूरोप की जलवायु तथा वनस्पति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
यूरोप की जलवायु – यूरोप शीतोष्ण जलवायु वाला महाद्वीप है। इसका अधिकांश भाग शीतोष्ण कटिबन्ध में है। यहाँ की जलवायु पर समुद्र की समीपता, पर्वतों, पठारों, उत्तरी अटलांटिक प्रवाह तथा पछुआ हवाओं का गहरा प्रभाव पड़ता है। साल भर चलने वाली पछुआ हवाओं और समुद्री धाराओं के प्रभाव से पश्चिम में पर्याप्त वर्षा होती है। पश्चिम से पूर्व की ओर जाने वाली वर्षा कम होती जाती है तथा ठण्ड बढ़ती जाती है। इस प्रकार की जलवायु महाद्वीपीय जलवायु कहलाती है।

यहाँ गर्मियों में अधिक गर्मी तथा जाड़ों में अधिक ठण्ड पड़ती है। पर्वतीय भागों में वर्षा 100 से 200 सेमी तक होती है। दक्षिणी यूरोप भूमध्यसागरीय जलवायु वाला क्षेत्र है। यहाँ गर्मी प्रायः सूखी निकल जाती है तथा जाड़ों में वर्षा होती है। यूरोप का उत्तरी भाग आर्कटिक वृत्त में आ जाने से यहाँ ठण्ड अधिक पड़ती है और वर्षा बहुत कम होती है। रूस और नार्वे के उत्तरी भाग में तेज ठण्डी हवाओं के कारण लगभग साल भर बर्फ जमी रहती है। इसे टुण्ड्रा की जलवायु कहते हैं।

वनस्पति – यूरोप के लगभग एक चौथाई भाग में वन हैं –

  • टुण्ड्रा के वन – महाद्वीप के सबसे उत्तरी भाग में नार्वे देश के उत्तर में टुण्ड्रा प्रदेश है। यहाँ साल भर बर्फ जमे रहने के कारण वनों का अभाव है। गर्मियों में बर्फ पिघलने पर लिचेन, काई तथा मॉस नामक छोटी झाडियाँ उग आती हैं।
  • टैगा के वन – टुण्ड्रा के दक्षिण में कोणधारी पेड़ों के वन पाए जाते हैं, जिन्हें टैगा कहते हैं। यहाँ के पेड़ों की आकृति कोण के समान तथा पत्तियाँ नुकीली होती हैं। मुख्य वृक्ष फर,। पाइन, स्यूस, लार्च आदि हैं।
  • मिश्रित वन – यूरोप के मध्यवर्ती व पश्चिमी भाग में कोणधारी व चौड़ी पत्ती वाले मिश्रित वन हैं। यह वन टैगा वनों के दक्षिण में पाए जाते हैं जिनमें ओक, ऐस, पोपलर आदि वृक्ष मुख्य हैं।
  • स्टेप्स के घास के मैदान – यूरोप के दक्षिणी-पूर्वी भाग में कम वर्षा के क्षेत्र में छोटी घास विशेष रूप से पैदा होती है।
  • भूमध्यसागरीय वनस्पति – यूरोप के दक्षिण में भूमध्य सागर के पास विशेष प्रकार की भूमध्य सागरीय वनस्पति पाई जाती है। गहरी जड़ों वाले छोटे पौधे इस जलवायु में विशेष रूप से पैदा होते हैं। ये छोटी, मोटी और चमकीली पत्तियों वाले वृक्ष होते हैं।

प्रश्न 16.
निम्नांकित को एशिया महाद्वीप के रेखा मानचित्र में दर्शाइए

(1) हिमालय पर्वत
(2) साइबेरिया का मैदान
(3) रबर उत्पादक देश
(4) ट्रान्स साइबेरियन रेलमार्ग
(5) स्वेज नहर।
उत्तर:

MP Board Class 7th Social Science आदर्श प्रश्न-पत्र - 3

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MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 3

MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 3

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) पानीपत का तृतीय युद्ध किस-किस के मध्य हुआ था ?
(अ) मराठों और अहमदशाह अब्दाली
(ब) औरंगजेब और तुर्कों
(स) सिक्खों और अहमदशाह अब्दाली
(द) सिक्खों और मराठों।
उत्तर:
(अ) मराठों और अहमदशाह अब्दाली

(2) अकबर के शासनकाल में साम्राज्य कितने सूबों में विभक्त था ?
(अ) 20
(ब) 22
(स) 18
(द) 11
उत्तर:
(स) 18

(3) आन्ध्र प्रदेश की प्रमुख जनजाति है –
(अ) कहार
(ब) चंचुस
(स) भील
(द) सहरिया।
उत्तर:
(ब) चेंचुस

(4) वियना में मानव अधिकारों पर विश्व सम्मेलन किस वर्ष में हुआ था ?
(अ) 1997
(ब) 1991
(स) 1993
(द) 2001
उत्तर:
(स) 1993

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) क्षेत्रफल की दृष्टि से यूरोप का विश्व में स्थान है।
(2) अफ्रीका में जनसंख्या का घनत्व …………. व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।
(3) सिक्ख धर्म के प्रणेता …………… थे।
(4) छिन्दवाड़ा के तामिया में ………. दर्शनीय स्थल है।
(5) उच्चतम न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश तथा ……….” अन्य न्यायाधीश होते हैं।
उत्तर:
(1) छटवाँ
(2) 21
(3) गुरुनानक
(4) पातालकोट
(5) 30

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए –
MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 3
उत्तर:
(1) (b) कम आबादी
(2) (a) मरुस्थल
(3) (d) सूरसागर
(4) (e) बुलन्द दरवाजा
(5) (c) टोडा जनजाति

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MP Board Class 7th Social Science विविध प्रश्नावली 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) एशिया महाद्वीप के अक्षांशीय व देशान्तरीय विस्तार को लिखिए।
उत्तर:
एशिया महाद्वीप को पाँच धरातलीय भागों में विभाजित किया जाता है –

1. उत्तरी निम्न मैदान – इसे साइबेरिया का मैदान भी कहते हैं। यह पश्चिम में यूराल पर्वत, पूर्व में लीना नदी तथा दक्षिण में मध्यवर्ती पर्वतों के बीच फैला हुआ है। इस मैदान की ओब, लीना और येनीसी प्रमुख नदियाँ हैं।

2. मध्यवर्ती पर्वतीय क्षेत्र – उत्तरी मैदान के दक्षिण में तथा महाद्वीप के मध्यवर्ती भाग में कई पर्वत श्रृंखलाएँ हैं जो एक पठारी भू-भाग से बँधी हुई दिखाई देती हैं। यह ऊँचा पठारी भाग ‘पामीर के पठार’ के नाम से जाना जाता है, इसे “दुनिया की छत” भी कहते हैं। पामीर के पठार के पूर्व में तिब्बत का पठार है। यहाँ हिमालय पर्वत की सबसे ऊँची चोटी माउण्ट एवरेस्ट है, जिसे सागरमाथा भी कहते हैं। थ्यानश्यान और अल्ताई पर्वतमाला के मध्य ‘गोबी का मरुस्थल’ है।

3. दक्षिणी पठार – मध्यवर्ती पर्वतमालाओं के दक्षिण में दक्षिण दिशा की ओर फैले हुए प्राचीन शैलों से बने कुछ पठार हैं, ये तीन ओर से पानी से घिरे होने के कारण ‘प्रायद्वीप’ कहलाते हैं। इनमें अरब का पठार, दक्षिण-भारत का पठार, ईरान का पठार मुख्य हैं।

4. नदियों के मैदान-नदियों द्वारा लाकर जमा की गई मिट्टियों से बने मैदान प्रायः पूर्वी एवं दक्षिणी एशिया में पाए जाते हैं। पश्चिम एशिया में ये मैदान अरब, ईरान और इराक में दजला-फरात नदियों द्वारा बनाए गए हैं। दक्षिण एवं दक्षिण पूर्व एशिया में सिन्धु, गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदान, इरावदी, साल्विन नदियों के मैदान, याँगटिसीक्यांग और ह्वांगहो, मीनांग-मीकांग, अमूर-सर दरिया नदी मैदान प्रमुख मैदान हैं।

5. द्वीप समूह-एशिया महाद्वीप के पूर्व तथा दक्षिण – पूर्व में तीन प्रमुख द्वीप समूह इण्डोनेशिया, फिलीपींस और जापान द्वीप समूह हैं। इनका मध्यवर्ती भाग पर्वतीय है, जिनके चारों ओर सँकरे तटीय मैदान हैं। इण्डोनेशिया द्वीप समूह, महाद्वीप का सबसे बड़ा द्वीप समूह है।

(2) यूरोप महाद्वीप की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
यूरोप महाद्वीप की प्रमुख विशेषताएँ –

  • यूरोप महाद्वीप अफ्रीका, एशिया, उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका महाद्वीपों के मध्य स्थित है। अतः यहाँ से इन महाद्वीपों को जाने के लिए समुद्री मार्ग की सुविधा है
  • यहाँ का अधिकांश भाग शीतोष्ण कटिबन्ध में है अतः यहाँ की जलवायु जनजीवन के लिए अनुकूल है।
  • यूरोप महाद्वीप के बहुत कटे-फटे समुद्री तट आन्तरिक जल यातायात की सुविधा प्रदान करते हैं तथा मछलियाँ पकड़ने | के लिए आदर्श स्थान प्रदान करते हैं।

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(3) अफ्रीका महाद्वीप की प्रमुख जलवायु विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर:
अफ्रीका महाद्वीप की प्रमुख जलवायु विशेषताएँ निम्न हैं –

  • इस महाद्वीप का अधिकांश विस्तार उष्ण कटिबन्ध है। यहाँ वर्ष भर ऊँचा तापमान रहता है तथा पर्वतीय भागों में । साधारण तापमान रहता है।
  • पठारी भागों में दिन का तापमान अधिक और रात का तापमान कम हो जाता है।
  • भूमध्य रेखा के निकट दोनों ओर फैले क्षेत्रों में उष्ण और आर्द्र जलवायु पाई जाती है।
  • भूमध्यरेखीय जलवायु प्रदेश के उत्तर व दक्षिण में ग्रीष्म ऋतु उष्ण तथा शीत ऋतु सामान्य रहती है। वर्षा ग्रीष्म ऋतु में  होती है। इस जलवायु के कारण इस क्षेत्र में लम्बी-लम्बी ‘हाथी घास’ उग आती है।

(4) पुरन्दर की सन्धि किस-किस के मध्य हुई थी ? लिखिए।
उत्तर:
पुरन्दर की सन्धि शिवाजी और राजा जयसिंह के मध्य हुई थी।

(5) किन्हीं तीन बाल अधिकारों को लिखिए।
उत्तर:
बाल अधिकार –

  • जीवन जीने का अधिकार,
  •  शिक्षा का अधिकार,
  • शोषण से सुरक्षा का अधिकार।

(6) अफ्रीका महाद्वीप में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
महाद्वीप के विभिन्न भागों में जलवायु की भिन्नता के कारण अफ्रीका महाद्वीप में निम्नांकित फसलें मुख्य रूप से उगाई जाती हैं –

  • गेहूँ तथा जौ – मिस्र, अल्जीरिया और मोरक्को में।
  • मकई (मक्का) – बेल्जियम, कांगो, अंगोला, केनिया, मोरक्को में।
  • कपास – मिस्र, युगांडा, केन्या और नाइजीरिया में।
  • मूंगफली – नाइजर, सूडान और नाइजीरिया में।
  • कोको – घाना, नाइजीरिया और अंगोला में।
  • चावल – मलागासी, सेनेगल और नाइजीरिया में।
  • लौंग – जंजीबार तथा पेंबा द्वीपों में।

MP Board Class 7th Social Science विविध प्रश्नावली 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 5.
(1) एशिया महाद्वीप के भौतिक भू-भागों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
एशिया महाद्वीप को पाँच धरातलीय भागों में विभाजित किया जाता है –
1. उत्तरी निम्न मैदान – इसे साइबेरिया का मैदान भी कहते हैं। यह पश्चिम में यूराल पर्वत, पूर्व में लीना नदी तथा दक्षिण में मध्यवर्ती पर्वतों के बीच फैला हुआ है। इस मैदान की ओब, लीना और येनीसी प्रमुख नदियाँ हैं।

2. मध्यवर्ती पर्वतीय क्षेत्र – उत्तरी मैदान के दक्षिण में तथा महाद्वीप के मध्यवर्ती भाग में कई पर्वत श्रृंखलाएँ हैं जो एक पठारी भू-भाग से बँधी हुई दिखाई देती हैं। यह ऊँचा पठारी भाग ‘पामीर के पठार’ के नाम से जाना जाता है, इसे “दुनिया की छत” भी कहते हैं। पामीर के पठार के पूर्व में तिब्बत का पठार है। यहाँ हिमालय पर्वत की सबसे ऊँची चोटी माउण्ट एवरेस्ट है, जिसे सागरमाथा भी कहते हैं। थ्यानश्यान और अल्ताई पर्वतमाला के मध्य ‘गोबी का मरुस्थल’ है।

3. दक्षिणी पठार – मध्यवर्ती पर्वतमालाओं के दक्षिण में दक्षिण दिशा की ओर फैले हुए प्राचीन शैलों से बने कुछ पठार हैं, ये तीन ओर से पानी से घिरे होने के कारण ‘प्रायद्वीप’ कहलाते हैं। इनमें अरब का पठार, दक्षिण-भारत का पठार, ईरान का पठार मुख्य हैं।

4.  नदियों के मैदान – नदियों द्वारा लाकर जमा की गई मिट्टियों से बने मैदान प्रायः पूर्वी एवं दक्षिणी एशिया में पाए जाते हैं। पश्चिम एशिया में ये मैदान अरब, ईरान और इराक में दजला-फरात नदियों द्वारा बनाए गए हैं। दक्षिण एवं दक्षिण पूर्व एशिया में सिन्धु, गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदान, इरावदी, साल्विन नदियों के मैदान, याँगटिसीक्यांग और ह्वांगहो, मीनांग-मीकांग, अमूर-सर दरिया नदी मैदान प्रमुख मैदान हैं।

5. द्वीप समूह – एशिया महाद्वीप के पूर्व तथा दक्षिण – पूर्व में तीन प्रमुख द्वीप समूह इण्डोनेशिया, फिलीपींस और जापान द्वीप समूह हैं। इनका मध्यवर्ती भाग पर्वतीय है, जिनके चारों ओर सँकरे तटीय मैदान हैं। इण्डोनेशिया द्वीप समूह, महाद्वीप का सबसे बड़ा द्वीप समूह है।

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(2) प्रमुख मानव अधिकारों को लिखिए।
उत्तर:
मनुष्यों को निम्नलिखित मानव अधिकार प्राप्त हैं –

  • जीवन की स्वतन्त्रता का अधिकार।
  • समानता का अधिकार।
  • सम्पत्ति का अधिकार।
  • देश के शासन में भाग लेने तथा सरकारी सेवाओं में चयन हेतु समानता का अधिकार।
  • अपराध प्रमाणित न होने तक निर्दोष समझे जाने का अधिकार।
  • बिना किसी जाँच के बन्दी बनाए जाने, नजरबन्द करने, देश से निकालने से स्वतन्त्रता का अधिकार।
  • स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका द्वारा सुनवाई का अधिकार।
  • मत व अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का अधिकार।
  • शान्तिपूर्वक सभा आयोजित करने का अधिकार।
  • दासता, विवेक और धर्म की स्वतन्त्रता का अधिकार।
  • उत्पीड़न अथवा क्रूर अमानुषिक या अपमानजनक व्यवहार या दण्ड से स्वतन्त्रता का अधिकार।।
  • उचित व अनुकूल व्यवस्थाओं के अन्तर्गत काम करने का अधिकार।
  • समान कार्य के लिए समान वेतन का अधिकार।
  • अवकाश व विश्राम का अधिकार।
  • शिक्षा का अधिकार व समाज के सांस्कृतिक जीवन में भाग लेने का अधिकार।

इन अधिकारों की भावनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की आर्थिक व सामाजिक परिषद् कार्य करती है।

(3) यूरोप महाद्वीप के प्राकृतिक भागों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
यूरोप को चार भागों में बाँटा जा सकता है –

1.  उत्तरी – पश्चिमी उच्च भूमि – महाद्वीप के उत्तरीपश्चिमी भाग में पर्वत और पठार हैं। इनका विस्तार नार्वे तथा स्वीडन देशों में अधिक है। अतः इन्हें नार्वे और स्वीडन के पर्वत और पठार भी कहते। इन्हें स्केन्डिनेवियन पर्वत भी कहा जाता है। नार्वे के समुद्री तट बहुत कटे-फटे, सँकरे और अधिक ढालू हैं, जिन्हें फियोर्ड तट कहते हैं।

2. मध्य के विशाल मैदान-ये मैदान पश्चिम में अटलांटिक महासागर के तट पर फ्रांस से लेकर पूर्व में यूराल पर्वत तक यूरोपीय रूस में फैले हुए हैं। मैदानों की चौड़ाई रूस में सबसे अधिक है और ये पश्चिम की ओर क्रमश: सँकरे होते गए हैं। उत्तर में श्वेत सागर से लेकर दक्षिणी पर्वतमाला तक इन मैदानों का विस्तार सामाणिकपशाग है। नदियों के कछार बनने के कारण यहाँ की मिट्टी उपजाऊ है। मैदान के पूर्वी भाग में वोल्गा नदी तथा पश्चिम में डेन्यूब नदी है जो क्रमशः कैस्पियन सागर तथा काला सागर में गिरती हैं।

3. मध्यवर्ती पठार – यूरोप के मैदानी भाग के दक्षिण में पठारों और कम ऊँचे पर्वतों की श्रृंखला फैली हुई है। इनमें फ्रांस का मैसिफ, ब्लैक फॉरेस्ट और बोहेमियाँ के पठार हैं। पुर्तगाल व स्पेन में भी पठारों का विस्तार है। अधिकांश भाग चट्टानी तथा अनुपजाऊ है।

4.  दक्षिणी अल्पाइन पर्वतमाला – दक्षिण में ऊँचे नवीन पर्वतों की श्रृंखला भी है। यह श्रृंखला पश्चिम में अटलांटिक महासागर से पूर्व में कैस्पियन सागर तक फैली है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण आल्पस पर्वत की श्रृंखला है, जिसकी सबसे ऊँची चोटी माउण्ट ब्लैक है। अन्य पर्वत श्रेणियों में पेरेनीज, एपीनाइन, डिनारिक, कार्पेशियन और कॉकेशस हैं। कॉकेशस की सबसे ऊँची चोटी एलब्रुस चोटी है।

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(4) शिवाजी के शासन प्रबन्ध की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
शिवाजी के शासन प्रबन्ध की प्रमुख विशेषताएँ अग्रलिखित हैं –

  • शिवाजी के शासन प्रबन्ध का मुख्य उद्देश्य प्रजा की सुख-समृद्धि तथा मातृभूमि की रक्षा के लिए श्रेष्ठ सेना का गठन करना था।
  • शिवाजी अत्यन्त कल्याणकारी शासक थे। उन्होंने अपनी शक्तियों का उपयोग जन-कल्याण के कार्यों के लिए किया।
  • शासन का प्रबन्ध उनके द्वारा बनाई गई आठ मन्त्रियों की परिषद् के परामर्श से होता था।
  •  सैनिकों पर कठोर अनुशासन व नियन्त्रण रहता था।
  • रामायण, गीता, कुरान आदि पवित्र ग्रन्थों की रक्षा करना सैनिकों का प्रमुख कर्त्तव्य था।
  • स्त्रियों, बच्चों एवं वृद्धों का अत्यन्त सम्मान किया। जाता था।
  • आक्रमण के समय कृषि को हानि नहीं पहुँचायी जाती थी।

(5) मुगल साम्राज्य के पतन के लिए औरंगजेब को दोषी ठहराना कहाँ तक उचित है ? समझाइए।
उत्तर:
औरंगजेब इस्लाम धर्म का कट्टर अनुयायी तथा अविश्वासी स्वभाव का व्यक्ति था। उसकी अनुदार व असहिष्णुतापूर्ण धार्मिक नीति के कारण सिक्खों, जाटों, सतनामियों, राजपूतों तथा मराठों आदि से अपने धर्म की रक्षा के लिए उसके निरन्तर संघर्ष होते रहे। इन संघर्षों के प्रयास में युद्ध होते रहे, इसके परिणामस्वरूप मुगल साम्राज्य का पतन हुआ।

औरंगजेब के अन्तिम समय में लगभग 25 वर्षों तक दक्षिण भारत में युद्ध होता रहा, जिसके परिणामस्वरूप उत्तर भारत में प्रशासन पर मुगलों की पकड़ ढीली हो गई। अनेक युद्धों के कारण राजकोष भी खाली हो गया। औरंगजेब अन्तिम समय तक अपने विरुद्ध होते विद्रोह का दमन न कर सका। फलस्वरूप मुगल साम्राज्य का पतन हुआ। अत: मुगल साम्राज्य के पतन में औरंगजेब की गलत नीतियाँ प्रमुख कारण हैं।

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(6) मुगलकालीन सामाजिक स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  • मुगलकाल में समाज हिन्दू व मुस्लिम दो प्रमुख समाजों में बँटा हुआ था। समाज में सामंत, अमीर वर्ग तथा जागीरदारों का वर्चस्व था।
  • मध्यम वर्ग में शासकीय कर्मचारी, शिल्पकार, छोटे-छोटे दुकानदार, सामान्य व्यापारी तथा निम्न वर्ग में कृषक, श्रमिक व दैनिक मजदूरी के कारीगर व सेवक आदि सम्मिलित थे।
  • हिन्दू समाज जाति-प्रथा पर आधारित था। ब्राह्मण व क्षत्रियों का समाज में ऊँचा स्थान था। मुसलमानों में शिया व सुन्नी मतभेद बढ़ रहे थे।
  • समाज में स्त्रियों की दशा में गिरावट आई। पर्दा प्रथा, सती प्रथा, बहु-विवाह, बाल-विवाह, जौहर प्रथा जैसी बुराइयाँ समाज में व्याप्त थीं। उच्च कुल की लड़कियाँ ही अपने घरों में शिक्षा पाती थीं।
  • समाज में शाकाहारी तथा माँसाहारी दोनों प्रकार का भोजन प्रचलित था।
  • सूती, ऊनी, रेशमी, रंगीन व सफेद कपड़ों का प्रचलन था। नुकीली जूतियाँ तथा खड़ाऊँ का उपयोग किया जाता था।
  • पोलो, शिकार, घुड़सवारी, पशुदौड़, शतरंज, चौपड़, ताश, मेले व त्यौहार आदि मनोरंजन के प्रमुख साधन थे।

(7) लोक रुचिवाद पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
सामान्य जन की भलाई के लिए हमारी सरकार । प्रतिबद्ध है। यदि अनजाने में किसी का उत्पीड़न होता है अथवा । किसी व्यक्ति अथवा समूह को किसी कारणवश कोई क्षति होती । है तो ऐसे लोगों को न्याय दिलाने और उनकी रक्षा के लिए हमारी न्यायपालिका प्रतिबद्ध है। ऐसे लोगों की पीड़ा को कोई व्यक्ति अथवा समाजसेवी संगठन पत्र लिखकर न्यायालय तक पहुँचा सकता है। न्यायपालिका ऐसे लोगों की सुनवाई करती है। इसे लोक रुचिवाद कहते हैं।

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Intext Questions

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Intext Questions

MP Board Class 8th Maths Chapter 2 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 26

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प्रश्न 1.
किसी समीकरण का हल केसे ज्ञात करें?
उत्तर:
किसी बीजीय समीकरण में चरों का प्रयोग करते हुए समता ‘=’ का चिह्न होता है। समता चिह्न के बायीं ओर वाला बायाँ पक्ष (L.H.S.) और दाहिनी ओर वाला दायाँ पक्ष (R.H.S.) कहलाता है। हम समीकरण के दोनों पक्षों पर एक जैसी ही गणितीय संख्याएँ करते हैं, जिससे कि समीकरण का सन्तुलन न बिगड़े। तत्पश्चात् समीकरण का अभीष्ट हल प्राप्त करते हैं।

समीकरण 2x – 3 = 7 में,
चर = x
बायाँ पक्ष = 2x – 3,
दायाँ पक्ष = 7

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