MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 12 प्रजातन्त्र

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता लोकतन्त्र की नहीं है?
(i) निर्वाचित प्रतिनिधियों की सरकार
(ii) अधिकारों का सम्मान
(iii) शक्तियों का एक व्यक्ति में केन्द्रीयकरण
(iv) स्वतन्त्रता और निष्पक्ष चुनाव।
उत्तर:
(iii) शक्तियों का एक व्यक्ति में केन्द्रीयकरण

प्रश्न 2.
कौन-सी अवधारणा प्रजातन्त्र की है?
(2016)
(i) स्वतन्त्रता
(ii) शोषण
(iii) असमानता
(iv) व्यक्तिवादिता।
उत्तर:
(i) स्वतन्त्रता

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित में कौन-सा प्रजातन्त्र का दोष नहीं है?
(i) सार्वजनिक धन व समय का अपव्यय
(i) धनिकों का वर्चस्व
(iii) दलीय गुटबन्दी
(iv) लोक कल्याण।
उत्तर:
(iv) लोक कल्याण।

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र, जनता का जनता के लिये जनता द्वारा संचालित शासन है
(2008, 14, 15)
(i) मैकियावली
(ii) रूसो
(iii) लिंकन
(iv) हाट्स।
उत्तर:
(iii) लिंकन

रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए

  1. अरस्तु ने प्रजातन्त्र को ………… का शासन कहा है। (2009, 10, 18)
  2. साम्यवाद के प्रवर्तक ………… और ………… थे।
  3. सफल प्रजातन्त्र के लिए संविधान का …………. होना आवश्यक है।
  4. निर्बल प्रजातन्त्र ………….. और …………. के समय प्रभावहीन सिद्ध होता है।

उत्तर:

  1. ‘बहुतों का शासन’
  2. कार्ल मार्क्स और लेनिन
  3. लिखित
  4. युद्ध और संकट।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उत्तर वैदिक काल में प्रजातान्त्रिक सन्दर्भ में उसका उल्लेख पाया जाता है?
उत्तर :
उत्तर वैदिककाल में शासन का गणतान्त्रिक रूप एवं स्थानीय स्वशासन की संस्थाएँ विद्यमान थीं। ऋग्वेद में सभा और समिति का उल्लेख मिलता है।

प्रश्न 2.
प्राचीन भारत में शासन की मूल इकाई के रूप में किस प्रकार की व्यवस्था थी?
उत्तर:
प्राचीन भारत में भारतीय समाज कृषि प्रधान था जिसकी मूल इकाई स्वशासित एवं स्वतन्त्र ग्राम थे।

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र का मार्क्सवादी सिद्धान्त किस अधिकार पर बल देता है?
उत्तर:
प्रजातन्त्र का मार्क्सवादी सिद्धान्त राजनीतिक एवं नागरिक समानताओं की अपेक्षा आर्थिक समानता पर अधिक बल देता है।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र का अर्थ समझाते हुए कोई दो परिभाषा लिखिए। (2009, 13, 15)
उत्तर:
प्रजातन्त्र का अर्थ-प्रजातन्त्र का अर्थ एक ऐसी शासन व्यवस्था से है जिसमें जनहित सर्वोपरि है। प्रजातन्त्र का अर्थ केवल एक शासन प्रणाली तक सीमित नहीं है। यह राज्य व समाज का रूप भी है। अर्थात् इसमें राज्य, समाज व शासन तीनों का समावेश होता है। राज्य के रूप में प्रजातन्त्र, जनता को शासन करने, उस पर नियन्त्रण करने एवं उसे हटाने की शक्ति है। समाज के रूप में प्रजातन्त्र इस प्रकार की सामाजिक व्यवस्था है जिसमें समानता का विचार और व्यवहार सर्वोपरि हो। व्यक्तित्व की गरिमा का समान मूल्य हो एवं विकास के समान अवसर सभी को प्राप्त हों। यह सम्पूर्ण जीवन का एक मार्ग है। यह मूल्यों की एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें व्यक्ति साध्य है और व्यक्तित्व का विकास इसका उद्देश्य है। यह स्वतन्त्रता एवं समरसता की पूर्व कल्पना पर आधारित है।

परिभाषाएँ :
अरस्तू ने प्रजातन्त्र को बहुतों का शासन’ कहा है। डायसी के अनुसार, “प्रजातन्त्र शासन .. का वह रूप है जिसमें शासन व्यवस्था की शक्ति सम्पूर्ण राष्ट्र में विस्तृत हो।”

प्रश्न 2.
अप्रत्यक्ष अथवा प्रतिनिधि प्रजातन्त्र से आप क्या समझते हैं? (2009, 16)
उत्तर:
अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र :
जब जनता निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से विधि निर्माण तथा शासन के कार्यों पर नियन्त्रण रखने का कार्य करती है तो उसे अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कहते हैं। वर्तमान समय में अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र ही प्रचलित है। इसमें जनता निश्चित अवधि के लिए अपने प्रतिनिधि चुनती है, जो व्यवस्थापिका का गठन करते हैं और कानूनों का निर्माण करते हैं। अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में जनता की इच्छा की अभिव्यक्ति, निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम होती है।

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र में राजनीतिक शिक्षण कैसे होता है?
उत्तर:
प्रजातन्त्र राजनीतिक शिक्षण का श्रेष्ठ साधन है। मताधिकार और राजनीतिक पद प्राप्त करने की स्वतन्त्रता के कारण जनता स्वाभाविक रूप से राजनीतिक क्षेत्र में रुचि लेने लगती है। भाषण अभिव्यक्ति एवं संचार माध्यमों के उपयोग की स्वतन्त्रता, जनता में विचारों के आदान-प्रदान करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है। उनमें उत्तरदायित्व तथा आत्म-निर्भरता की भावना का विकास होता है। सभी राजनीतिक दल निरन्तर प्रचार द्वारा जनता को राजनीतिक शिक्षा प्रदान करते हैं। अतः प्रजातन्त्र में नागरिकों को प्रशासनिक, राजनीतिक व सामाजिक सभी प्रकार का शिक्षण प्राप्त होता है।

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र के लिये संविधान क्यों आवश्यक है? इस पर टिप्पणी लिखिए। (2009, 10, 16)
उत्तर:
शासन संगठन के मूलभूत सिद्धान्त तथा प्रक्रिया निश्चित होना प्रजातन्त्र का महत्त्वपूर्ण लक्षण है, जिसमें कोई भी सत्तारूढ़ दल अपने बहुमत के आधार पर इसे जैसा चाहे वैसा परिभाषित या परिवर्तित न कर सके। शासन के अंगों का गठन, शासन की शक्तियाँ एवं कार्य, प्रक्रिया आदि संविधान में स्पष्ट हों, इसलिए लिखित संविधान का होना अनिवार्य माना गया है। प्रजातन्त्र नागरिकों की समानता एवं स्वतन्त्रता पर आधारित है। वास्तव में संविधान प्रजातन्त्र का प्राण होता है। बिना संविधान के कोई भी प्रजातन्त्र सफल नहीं हो सकता। इस प्रकार प्रजातन्त्र के लिए संविधान परम आवश्यक है।

प्रश्न 5.
वर्तमान में भारतीय प्रजातन्त्र किन-किन चुनौतियों से गुजर रहा है? लिखिए।
उत्तर:
भारत में प्रजातन्त्र के समक्ष चुनौतियाँ-भारत में प्रजातन्त्र के समक्ष कुछ चुनौतियाँ भी हैं। भारतीय प्रजातन्त्र आज निरक्षरता, जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, पृथक्तावाद, साम्प्रदायिकता, राजनीतिक हिंसा, सामाजिक-आर्थिक असमानता, धन व बाहुबल के वर्चस्व, भ्रष्टाचार और वोट बैंक की राजनीति की समस्याओं से प्रभावित हो रहा है।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र से क्या आशय है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ बताइए। (2008, 09)
अथवा
प्रजातन्त्र की कोई पाँच विशेषताएँ बताइए और किसी एक विशेषता के बारे में वर्णन कीजिए। (2010)
अथवा
प्रजातन्त्र का क्या अर्थ है? प्रजातन्त्र की प्रमुख दो परिभाषाएँ लिखिए। (2008)
अथवा
प्रजातन्त्र की चार विशेषताएँ लिखिए। (2017, 18)
उत्तर:
प्रजातन्त्र का आशय-प्रजातन्त्र को अंग्रेजी भाषा में डेमोक्रेसी (Democracy) कहते हैं। प्रजातन्त्र का अंग्रेजी पर्याय डेमोक्रेसी दो यूनानी शब्दों से मिलकर बना है-‘डेमो’ (Demo) यानी ‘जनता’ तथा ‘क्रेटिया’ (Kratia) अर्थ है-शक्ति। इस प्रकार डेमोक्रेसी या प्रजातन्त्र का अर्थ हुआ जनता की शक्ति’ । अन्य शब्दों में कहा जाए तो ऐसी शासन प्रणाली जिसमें सर्वोच्च सत्ता जनता के पास रहती है और उसका उपयोग वह प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में करती है। इसे लोकतन्त्र या जनतन्त्र भी कहा जाता है।

परिभाषाएँ :
प्रजातन्त्र का अर्थ-प्रजातन्त्र का अर्थ एक ऐसी शासन व्यवस्था से है जिसमें जनहित सर्वोपरि है। प्रजातन्त्र का अर्थ केवल एक शासन प्रणाली तक सीमित नहीं है। यह राज्य व समाज का रूप भी है। अर्थात् इसमें राज्य, समाज व शासन तीनों का समावेश होता है। राज्य के रूप में प्रजातन्त्र, जनता को शासन करने, उस पर नियन्त्रण करने एवं उसे हटाने की शक्ति है। समाज के रूप में प्रजातन्त्र इस प्रकार की सामाजिक व्यवस्था है जिसमें समानता का विचार और व्यवहार सर्वोपरि हो। व्यक्तित्व की गरिमा का समान मूल्य हो एवं विकास के समान अवसर सभी को प्राप्त हों। यह सम्पूर्ण जीवन का एक मार्ग है। यह मूल्यों की एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें व्यक्ति साध्य है और व्यक्तित्व का विकास इसका उद्देश्य है। यह स्वतन्त्रता एवं समरसता की पूर्व कल्पना पर आधारित है।

आशय यह है कि प्रजातन्त्रात्मक शासन व्यवस्था लोक कल्याणकारी राज्य से सम्बन्धित है। इसमें व्यक्ति की महत्ता और उसकी स्वतन्त्रता पर बल दिया गया है तथा सम्प्रभुता जनता में निहित होना माना गया है।

प्रजातन्त्र की विशेषताएँ :
प्रजातन्त्र एकमात्र ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें सभी को अपने सर्वांगीण विकास के लिए बिना किसी भेदभाव के समान अवसर प्राप्त होते हैं प्रजातान्त्रिक व्यवस्था नागरिकों की गरिमा तथा समानता, स्वतन्त्रता, मातृत्व और न्याय के सिद्धान्तों पर आधारित है। प्रजातन्त्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • जनता प्रभुसत्ता की स्वामी :
    प्रजातन्त्र में सत्ता का अन्तिम स्रोत राज्य की सम्पूर्ण जनता होती है।
  • शासन का संचालन जन प्रतिनिधियों द्वारा :
    प्रजातन्त्रात्मक व्यवस्था में शासन का संचालन जनता के प्रतिनिधि करते हैं।
  • राजनीतिक दलों के गठन की व्यवस्था :
    प्रजातन्त्र में राजनीतिक दलों का गठन अनिवार्य रूप से किया जाता है। दो या अधिक राजनीतिक दल होते हैं। जिस दल को सर्वाधिक बहुमत प्राप्त होता है, वही शासन का संचालन करता है।
  • चुनावों की व्यवस्था :
    प्रजातन्त्र में संविधान द्वारा निर्धारित तिथि पर चुनाव होते हैं। चुनाव का आधार वयस्क मताधिकार होता है।
  • नागरिकों को अधिकार व स्वतन्त्रताएँ प्रदान करना :
    नागरिक अपने मतों का उचित ढंग से प्रयोग कर सकें तथा अपने व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास कर सकें। इसके लिए उन्हें यथा सम्भव अधिकार व स्वतन्त्रताएँ प्रदान की जाती हैं।
  • शासन जनता के प्रति उत्तरदायी :
    प्रजातन्त्रीय शासन जनता के प्रति उत्तरदायी होता है। जनहित की अवहेलना करने पर उसे पदच्युत किया जा सकता है।
  • लोक या जन कल्याणकारी राज्य का आदर्श :
    प्रजातन्त्र का प्रमुख आदर्श जनहित होता है। अत: इस शासन व्यवस्था में यथासम्भव लोक कल्याणकारी कार्यों को महत्त्व दिया जाता है।
  • स्वतन्त्र व निष्पक्ष न्यायपालिका :
    संविधान की समस्त व्यवस्थाएँ व्यवहार में लागू की जा सकें, इसलिए प्रजातन्त्र में स्वतन्त्र व निष्पक्ष न्यायपालिका का होना एक अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण लक्षण है।

प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र के गुण-दोषों का वर्णन कीजिए।
अथवा
प्रजातन्त्र के कोई चार गुण लिखिए। (2017)
अथवा
प्रजातन्त्र के दो-दो गुण-दोषों का वर्णन कीजिए। (2008, 14, 18)
अथवा
प्रजातन्त्र के दोषों का वर्णन कीजिए। (2008, 09)
उत्तर :
प्रजातन्त्र के गुण-प्रजातन्त्र के निम्नलिखित गुण हैं –

1. जन-कल्याण की भावना :
प्रजातन्त्र की सबसे बड़ी अच्छाई यह है कि इसमें शासक गण जन-कल्याण के प्रति विशेष रूप से सजग तथा क्रियाशील रहते हैं। प्रजातन्त्र में जनता के चुने हुए प्रतिनिधि ही शासन करते हैं। अतः वे जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं। ऐसी दशा में उनके लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे जनता के हित में ही शासन करें।

2. व्यक्तित्व के विकास के अवसर :
प्रजातन्त्र शासन में नागरिकों के प्रतिनिधि ही शासन में भाग लेते हैं। अतः इस प्रकार की प्रणाली में प्रत्येक नागरिक को अपने व्यक्तित्व के विकास के समान अवसर प्राप्त होते हैं।

3. देश-भक्ति की भावना का विकास :
प्रजातन्त्र में नागरिकों के हृदय में राज्य के प्रति निष्ठा तथा भक्ति की भावना उत्पन्न होती है। नागरिक यह अनुभव करते हैं कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि ही शासन का संचालन कर रहे हैं और वे जो कुछ भी करेंगे वह उनके हित में ही होगा। अतः प्रजातन्त्र में प्रत्येक नागरिक के हृदय में अपने देश के प्रति अगाध प्रेम होता है। मिल के अनुसार “प्रजातन्त्र लोगों में देश-भक्ति की भावना का विकास करता है, क्योंकि नागरिक यह अनुभव करते हैं कि सरकार उन्हीं की बनाई हुई है और अधिकारी उनके स्वामी न होकर, सेवक हैं।”

4. नैतिकता तथा उत्तरदायित्व की भावनाओं का विकास :
प्रजातन्त्रात्मक शासन-प्रणाली नागरिकों में उत्तरदायित्व की भावना का विकास करती है। इस सम्बन्ध में मिल का कहना है कि “सत्यता, नैतिकता, साहस, आत्मविश्वास तथा उद्योगशीलता आदि गुणों का किसी अन्य शासन-प्रणाली की अपेक्षा लोकतन्त्र में अधिक विकास होता है।

5. क्रान्ति से सुरक्षा :
प्रजातन्त्र में नागरिकों की इच्छा के अनुसार ही शासन होता है। नागरिक जानते हैं कि वे इच्छानुसार अपने मत द्वारा अत्याचारी शासकों को अपदस्थ कर सकते हैं। अतः सरकार बदलने के लिए क्रान्ति की आवश्यकता नहीं पड़ती।

6. सार्वजनिक शिक्षण :
प्रजातन्त्रात्मक शासन में समस्त व्यक्तियों को सार्वजनिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। वे मतदान द्वारा तथा चुनाव में खड़े होकर राजनीति की शिक्षा प्राप्त करते हैं। उनमें उत्तरदायित्व तथा आत्मनिर्भरता की भावना का विकास होता है। बर्क के शब्दों में “सभी शासन शिक्षा के साधन होते हैं और सबसे अच्छी शिक्षा स्वशिक्षा है। इस प्रकार सबसे अच्छा शासन स्वशासन है, जिसे लोकतन्त्र कहते हैं।

7. स्वतन्त्रता व समानता की प्राप्ति :
प्रजातन्त्र का मूल आधार स्वतन्त्रता और समानता है। इस कारण प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेद-भाव के समान रूप से राजनीतिक अधिकार प्रदान किये जाते हैं। जाति, धर्म, नस्ल, रंग, सम्पत्ति आदि के आधार पर उनमें भेद-भाव नहीं किया जाता। यही ऐसा शासन है जिसमें सभी को अपना विकास करने के समान अवसर प्राप्त होते हैं।

प्रजातन्त्र के दोष :
प्रजातन्त्र के प्रमुख दोष निम्न प्रकार हैं –

  • योग्यता और गुण की अपेक्षा बहुमत का महत्त्व :
    प्रजातन्त्रात्मक शासन में योग्यता और गुण के स्थान पर संख्या और बहुमत को अधिक महत्त्व दिया जाता है। प्रत्येक बात का निर्णय बहुमत के आधार पर होता है, चाहे वह गलत ही क्यों न हो।
  • दल प्रणाली और गुटबन्दी के प्रभाव :
    प्रजातन्त्र शासन में दल प्रणाली और गुटबन्दी के दोष उत्पन्न हो जाते हैं। विभिन्न राजनीतिक दल चुनाव जीतने के प्रयास में जनता को भ्रामक प्रचार द्वारा गुमराह करने का प्रयास करते हैं। एक दल दूसरे दल की कटु आलोचना करता है। योग्य व्यक्ति दलबन्दी से दूर भागते हैं तथा अयोग्य व्यक्ति राजनीति में सफलता प्राप्त कर लेते हैं।
  • अनुत्तरदायी शासन :
    इसे (प्रजातन्त्र को) जनता का शासन कहा जाता है क्योंकि सैद्धान्तिक रूप से उसे जनता के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए परन्तु व्यवहार में ऐसा नहीं होता। प्रजातन्त्र में केवल चुने हुए प्रतिनिधि जो शासन के स्वामी हो जाते हैं, मन्त्रिमण्डल आदि के चुनाव के पश्चात् सर्वसाधारण की आवश्यकताओं, हितों तथा उनकी कठिनाइयों के प्रति तनिक भी चिन्ता नहीं करते। इस प्रकार प्रजातन्त्र अनुत्तरदायी शसान है।
  • समय की बर्बादी-प्रजातन्त्रात्मक शासन :
    प्रणाली में अनावश्यक रूप से समय का अपव्यय होता है। चुनाव तथा नीति निर्धारण आदि में ही काफी समय बर्बाद हो जाता है। किसी भी निर्णय पर पहुँचने से पूर्व वाद-विवाद में भी समय व्यर्थ ही नष्ट होता है तथा निर्णय लेने में देर लगती है।
  • धन का अत्यधिक अपव्यय :
    इस प्रणाली में व्यवस्थापिका सभाओं के सदस्यों तथा मन्त्रिमण्डलं आदि पर पर्याप्त धन व्यय किया जाता है। चुनाव के समय भी पैसा आवश्यक रूप से खर्च होता है। व्यर्थ में कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ जाती है।
  • पूँजीपतियों का शासन :
    प्रजातन्त्र में शासन तथा सरकार पूँजीपतियों के हाथ की कठपुतली बन जाती है। धनवान व्यक्ति दलों को चन्दा देते हैं तथा पैसे की सहायता देकर अपने उम्मीदवारों को चुनाव में खड़ा करके उन्हें विजयी बनाते हैं। पूँजीपतियों द्वारा खड़े किये गये उम्मीदवार चुने जाने के पश्चात् उनके ही हित-साधन में जुट जाते हैं तथा जनसाधारण की उपेक्षा करते हैं। इस प्रकार प्रजातन्त्र में पूँजीवाद का पोषण ‘ होता है और जनसाधारण की उपेक्षा होती है।
  • युद्ध और संकट के समय दुर्बल :
    प्रजातन्त्रात्मक सरकार युद्ध और संकट के समय प्रायः दुर्बल सिद्ध होती है। युद्ध के समय शीघ्र निर्णय लेने की आवश्यकता होती है, परन्तु इस प्रणाली की गति अत्यन्त मन्द होती है। इसीलिए शीघ्र निर्णय नहीं हो पाते।
  • पक्षपात और भ्रष्टाचार का बोलबाला :
    इस शासन-प्रणाली में शासन भ्रष्ट और शिथिल हो जाता है। जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि जनसाधारण के हितों की उपेक्षा कर भाई-भतीजे तथा सगे-सम्बन्धियों के हितों का ही ध्यान रखते हैं। इससे भाई-भतीजेवाद और भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन मिलता है।

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र के आधारभूत सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए। (2009, 14)
उत्तर:
प्रजातन्त्र के आधारभूत सिद्धान्त-प्रजातन्त्र के प्रमुख सिद्धान्त निम्न प्रकार हैं –
(1) प्रजातन्त्र का अभिजनवादी सिद्धान्त :
बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में प्रतिपादित यह सिद्धान्त मानव की प्राकृतिक असमानता के सिद्धान्त पर जोर देते हुए यह मानता है कि प्रत्येक राजनीतिक व्यवस्था में शासक और शासित दो वर्ग होते है। शासक वर्ग हमेशा अल्पसंख्यक होते हुए भी सत्ता के केन्द्र में विशिष्ट वर्ग होता है। शासन की शक्ति इसी विशिष्ट वर्ग के हाथ में केन्द्रित होती है। सामान्यत: व्यक्ति यह सोचते हैं कि वे राजनीतिक प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं, लेकिन वास्तव में उनका प्रभाव चुनाव तक सीमित होता है। अभिजन का आधार है-श्रेष्ठता के आधार पर चयन। प्रकृति, विचार, आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक पृष्ठभूमि आदि किसी भी आधार पर इनकी श्रेष्ठता निर्भर हो सकती है, जो इन्हें आम लोगों से अलग बनाती है।

अभिजन भी स्वयं को आम लोगों से भिन्न एवं श्रेष्ठ समझते हैं, परन्तु जनसाधारण के साथ इनकी क्रिया-प्रतिक्रिया होती रहती है। इस प्रकार जन सम्प्रभुता का समन्वय हो जाता है। समाज की धन सम्पदा एवं नीति निर्धारण में अभिजन की प्रभावशाली भूमिका होती है, परन्तु प्रजातन्त्र में इस वर्ग में प्रवेश के सभी को समान अवसर प्राप्त होते हैं। दूसरी ओर नियमित एवं खुली निर्वाचन प्रक्रिया अभिजन को जनहित में कार्य करने हेतु बाध्य करती है।

(2) बहुलवादी सिद्धान्त :
यह सिद्धान्त इस मान्यता पर आधारित है कि प्रजातन्त्र में व्यक्ति को अपने विभिन्न हितों की पूर्ति के लिये समूह में संगठित होने की स्वतन्त्रता है। ये समूह अपने-अपने क्षेत्र में स्वायत्त भी होते हैं और अपनी हितपूर्ति के लिये शासन पर दबाव भी डालते हैं। इस प्रकार सभी समूहों को अपनी हितपूर्ति की सीमा तक सत्ता में भागीदारी मिलती है। अतः सत्ता का विकेन्द्रीकरण इस सिद्धान्त की मूल धारणा है। अर्थात् राज्य ही सर्वोच्च सत्ता का अधिकारी नहीं अपितु प्रजातन्त्र में समाज के सभी समूहों की राजनीतिक शक्ति एवं शासन की सत्ता में भागीदारी होती है।

(3) प्रजातन्त्र का उदारवादी या शास्त्रीय सिद्धान्त :
इस सिद्धान्त में व्यक्ति की स्वतन्त्रता एवं समाज की सर्वोपरिता पर बल दिया गया है। इस सिद्धान्त के अनुसार शासन का आधार जनता की सहमति है, लेकिन सरकार यदि जनता की कसौटी पर खरी नहीं उतरती है, तो जनता निर्वाचन के माध्यम से सरकार को हटा सकती है। जनहित साधना उसका उद्देश्य है।

(4) मार्क्सवादी सिद्धान्त :
साम्यवाद की विचारधारा के आधुनिक प्रवर्त्तक कार्ल मार्क्स व लेनिन के विचारों पर आधारित प्रजातन्त्र का एक नवीन सिद्धान्त 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में सामने आया। इस सिद्धान्त के अनुसार उदारवादी प्रजातान्त्रिक व्यवस्था में वास्तविक प्रजातन्त्र सम्भव नहीं है, क्योंकि इसमें शासन पर एक छोटे साधन सम्पन्न वर्ग का नियन्त्रण हो जाता है, जबकि प्रजातन्त्र जन कल्याण व उनकी समानता पर आधारित है। इस सिद्धान्त के अनुसार वास्तविक प्रजातन्त्र के लिये एक वर्ग विहीन तथा राज्यविहीन समाज की स्थापना होनी चाहिए। प्रजातन्त्र का यह सिद्धान्त राजनीतिक एवं नागरिक समानताओं की अपेक्षा आर्थिक समानता पर अधिक जोर देता है। इसकी मान्यता है कि यदि व्यक्ति के पास रोटी, कपड़ा, मकान नहीं है तो उसके पास मतदान या निर्वाचित होने का अधिकार कोई अर्थ नहीं रखता है। मार्क्सवाद वास्तविक प्रजातन्त्र की स्थापना हेतु निम्नलिखित सुझाव देता है –

  1. सम्पत्ति का समान वितरण तथा सभी की मूलभूत आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति होना।
  2. उत्पादन एवं वितरण के साधनों पर सामाजिक स्वामित्व देना।
  3. सभी के आर्थिक हित समान होने से इनके प्रतिनिधित्व के लिए एक दल-साम्यवाद दल के हाथ में शासन संचालन की सम्पूर्ण शक्ति देना।

प्रश्न 4.
भारत में प्रजातन्त्र के महत्त्व तथा स्वरूप का वर्णन कीजिए। (2009)
उत्तर:
प्रजातन्त्र का महत्त्व :
अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र-जब जनता निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से विधि निर्माण तथा शासन के कार्यों पर नियन्त्रण रखने का कार्य करती है तो उसे अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कहते हैं। वर्तमान समय में अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र ही प्रचलित है। इसमें जनता निश्चित अवधि के लिए अपने प्रतिनिधि चुनती है, जो व्यवस्थापिका का गठन करते हैं और कानूनों का निर्माण करते हैं। अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में जनता की इच्छा की अभिव्यक्ति, निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम होती है।

भारत में प्रजातन्त्र का स्वरूप :
भारत के लिए प्रजातन्त्र व प्रजातान्त्रिक संस्थाओं के विचार नवीन नहीं है। ऐसा कहा जाता है कि लगभग 3000 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्व के वैदिक काल में भारत की जनता के मध्य प्रतिनिधिक विचार-विमर्श की परम्परा थी। उत्तर वैदिककाल में शासन का गणतान्त्रिक रूप एवं स्थानीय स्वशासन की संस्थाएँ मौजूद थीं। ऋग्वेद व अथर्ववेद में सभा और समिति का वर्णन मिलता है। महाभारत के युद्ध के बाद बड़े साम्राज्य लुप्त होने लगे और कई गणतान्त्रिक राज्यों का उदय हुआ। महाजनपद काल में सोलह महाजनपद जन्मे जिनमें काशी, कोशल, मगध, कुरु, अंग, अवंति, गन्धार, वैशाली, मत्स्य इत्यादि शामिल थे।

इनमें से कुछ महाजनपदों में राजतन्त्र व अन्य में गणतन्त्र थे। महावीर और गौतम बुद्ध दोनों ही गणतन्त्र से आये थे। बौद्ध भिक्षुओं के कई नियम आधुनिक संसदीय शासन प्रणाली के नियमों से मिलते हैं। उदाहरण के लिए बैठक व्यवस्था, विभिन्न प्रकार के प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण, गणपूर्ति (कोरम) हिप, वोटों की गिनती, रोक प्रस्ताव, न्याय सम्बन्धी विचार आदि। बज्जि संघ में तो सभी लोग एक साथ एकत्रित होकर अपनी-अपनी सभाएँ करते थे। यह प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र का स्वरूप था। यह संघ छ: गणराज्यों से मिलकर बना था। मौर्यकालीन भारत में ग्रामों और नगरों में स्वशासन की व्यापक व्यवस्था थी। भारत कृषि प्रधान था जिसकी मूल इकाई स्वशासित एवं स्वतन्त्र ग्राम थे। राजनीतिक संरचना इन ग्राम समुदायों की इकाईयों पर आधारित थी। चुनी हुई पंचायत गाँव का शासन चलाती थी। गाँव के मध्य में पंचायत हुआ करती थी, जहाँ बुजुर्ग परस्पर मिला करते थे। प्रत्येक वर्ष गाँव में पंचायत का चुनाव हुआ करता था। इन पंचायतों को न्याय करने का अधिकार प्राप्त था।

पंचायत ही भूमि का बँटवारा करती थी और कर एकत्रित करके गाँव की ओर से सरकार को भी देती थी। पंचायत के चुने हुए सदस्यों से कुछ समितियों का निर्माण किया जाता था और प्रत्येक समिति एक वर्ष के लिए बनाई जाती थी। यदि कोई सदस्य विपरीत व्यवहार करे तो उसे हटाया जा सकता था। यदि कोई सदस्य जन कोष का उचित लेखा-जोखा पेश न करे तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाता था। केन्द्रीय स्तर पर राजा शासक था। यदि राजा दुर्व्यवहार करे तो उसे हटाने का प्रजा को भी अधिकार था। राजा को सलाह देने के लिए राज्य परिषद हुआ करती थी। राजा प्रजा की इच्छा के अनुसार कार्य करता था और राजा के सलाहकार (मन्त्री) स्थानीय स्तर के पंचों का सम्मान करते थे। अर्थात् प्राचीन समय में राजा के शासन का आशय प्रजा की सेवा करना था।

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प्रश्न 5.
प्रजातन्त्र की अवधारणा क्या है? वर्तमान भारतीय प्रजातन्त्र के स्वरूप का वर्णन कीजिए। (2008)
अथवा
वर्तमान भारतीय प्रजातन्त्र के स्वरूप का वर्णन कीजिए। (2013)
उत्तर:
प्रजातन्त्र की अवधारणा-राजनीतिक विकास में जो विभिन्न प्रकार की शासन व्यवस्थाएँ रहीं उनमें प्रजातन्त्र संसार की प्रमुख शासन प्रणाली मानी जाती है। इसकी प्रमुख अवधारणा यह है कि राज्य की सम्पूर्ण शक्ति की स्वामी जनता है, कोई व्यक्ति, समूह या कोई वंश नहीं। अतः जनता की सहभागिता प्रजातन्त्र का मूल आधार है। जिन निर्णयों या कार्यों का प्रभाव सभी पर पड़ता है, उन निर्णयों में सभी की भूमिका होनी चाहिए।

प्रजातन्त्र के प्रारम्भिक काल में सीमित जनसंख्या एवं सीमित क्षेत्रफल वाले छोटे राज्य होने से सारी जनता शासन संचालन सम्बन्धी निर्णयों में सहभागी होती थी। अतः सीमित क्षेत्रफल एवं सीमित जनसंख्या वाले छोटे-छोटे राज्यों में इसका व्यवहार होने लगा। यूनान के नगर राज्यों में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की शुरूआत मानी जाती है। वर्तमान राज्यों में उनके विस्तार एवं जनसंख्या की दृष्टि से बड़े होने से जनता द्वारा प्रत्यक्ष शासन सम्भव नहीं था। अत: जनता अप्रत्यक्ष रूप से अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन की शक्ति का उपयोग करती है। अतः वर्तमान में प्रजातन्त्र अप्रत्यक्ष रूप से जन प्रतिनिधियों के माध्यम से संचालित प्रजातन्त्र कहलाता है।

वर्तमान भारतीय प्रजातन्त्र-स्वतन्त्रता प्राप्त होने के कुछ समय पूर्व ही भारत में एक संविधान सभा की स्थापना की गयी थी, जिसने 26 नवम्बर, 1949 को संविधान निर्माण का कार्य पूर्ण किया और 26 जनवरी, 1950 से यह संविधान लागू किया गया। संविधान के द्वारा भारत में एक प्रजातन्त्रात्मक गणराज्य की स्थापना की गयी है और प्रजातन्त्र के आधारभूत सिद्धान्त ‘वयस्क मताधिकार’ को स्वीकार किया गया है। संविधान के द्वारा एक धर्म निरपेक्ष राज्य की स्थापना की गयी और नागरिकों को शासन के हस्तक्षेप से स्वतन्त्र रूप में मौलिक अधिकार प्रदान किये गये हैं। व्यवहार में भी भारतीय नागरिक इन स्वतन्त्रताओं का पूर्ण उपभोग कर रहे हैं। इस प्रकार यह कहा जाता है कि भारतीय संविधान आदर्श रूप में एक लोकतन्त्रात्मक संविधान है।

आज तक सम्पन्न हुए विभिन्न लोकसभा और विधान सभा चुनावों में भारतीय नागरिकों के द्वारा सक्रिय सहभागिता एवं परिपक्वता का परिचय दिया है। आपातकाल के अपवाद को छोड़कर समय से एवं निष्पक्ष चुनावों का होना, भारतीय प्रजातन्त्र की निरन्तरता का सूचक है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पन्न होने वाले पंचायतों एवं नगरीय क्षेत्रों में नगरीय निकायों के चुनाव भी भारतीय प्रजातन्त्र की व्यापकता का प्रमाण है।

भारतीय जनता लोकतन्त्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध है और भविष्य में किसी भी शासक वर्ग के द्वारा लोकतन्त्र की अवहेलना का दुस्साहस नहीं किया जा सकेगा। लेकिन लोकतन्त्रीय शासन के ढाँचे को बनाये रखना ही पर्याप्त नहीं है; लोकतन्त्र की सफलता के लिए आवश्यक है कि लोकतन्त्र के लक्ष्य को प्राप्त किया जाए और वह लक्ष्य है-सामाजिक एवं आर्थिक न्याय। हम इस लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाये हैं और दुःखद तथ्य यह है कि हम इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भी आगे नहीं बढ़ रहे हैं। भारत और भारतीय मनोभूमि में लोकतन्त्र गहरा बैठ गया है और यही भविष्य में इसकी सफलता का सबसे बड़ा आधार है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की शुरूआत मानी जाती है (2008)
(i) ब्रिटिश के नगर राज्यों से
(ii) यूनान के नगर राज्यों से
(iii) फ्रांस के नगर राज्यों से
(iv) जर्मनी के राज्यों से।
उत्तर:
(ii) यूनान के नगर राज्यों से

प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र को ‘बहुतों का शासन’ कहा है (2008)
(i) डायसी,
(ii) अब्राहम लिंकन
(iii) अरस्तू
(iv) लेनिन।
उत्तर:
(iii) अरस्तू

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र का अभिजनवादी सिद्धान्त किस शताब्दी के प्रारम्भ में प्रतिपादित हुआ?
(i) 18वीं शताब्दी के प्रारम्भ में
(ii) 19वीं शताब्दी के प्रारम्भ में
(iii) 20वीं शताब्दी के प्रारम्भ में
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(iii) 20वीं शताब्दी के प्रारम्भ में

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र का शास्त्रीय सिद्धान्त
(i) बहुलवादी सिद्धान्त भी कहलाता है
(ii) प्रजातन्त्र का विशिष्ट वर्गीय सिद्धान्त भी कहलाता है
(iii) उदारवादी सिद्धान्त भी कहलाता है
(iv) अभिजनवादी सिद्धान्त भी कहलाता है।
उत्तर:
(iii) उदारवादी सिद्धान्त भी कहलाता है

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प्रश्न 5.
प्रथम महायुद्ध के पश्चात् 1990 तक साम्यवाद की विचारधारा का प्रयोग हुआ
(i) स्विट्जरलैण्ड में
(ii) ब्रिटेन में
(iii) सोवियत संघ में
(iv) फ्रांस में।
उत्तर:
(iii) सोवियत संघ में

प्रश्न 6.
भारत में आपातकाल लागू हुआ
(i) 1970-1972
(ii) 1972-1974
(iii) 1975-1977
(iv) 1978-1980
उत्तर:
(iii) 1975-1977

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. ………. जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा संचालित शासन है। (2017)
  2. निश्चित भू-भाग, जनसंख्या, सरकार और सम्प्रभुता से निर्मित समूह ………… कहलाता है। (2011)
  3. वर्तमान में भारत विश्व का सबसे बड़ा ……….. देश है। (2012)
  4. स्वतन्त्रता प्राप्ति के उपरान्त भारतीय संविधान ………. में लागू हुआ। (2009)

उत्तर:

  1. प्रजातन्त्र
  2. राज्य
  3. प्रजातांत्रिक
  4. 26 जनवरी, 1950।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
शोषण की अवधारणा प्रजातन्त्र की है। (2017)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 2.
वर्तमान समय में अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र ही प्रचलित है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र में स्वतन्त्र व निष्पक्ष चुनाव होना चाहिए। (2015)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र में उत्तरदायी शासन व्यवस्था नहीं होती। (2009)
उत्तर:
असत्य

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प्रश्न 5.
डायसी ने प्रजातन्त्र को ‘बहुतों का शासन’ कहा है। (2014)
उत्तर:
असत्य।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 12 प्रजातन्त्र - 1

उत्तर:

  1. → (घ)
  2. → (ग)
  3. → (ख)
  4. → (ङ)
  5. → (क)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
राज्य की. सर्वोच्च सत्ता। (2016)
उत्तर:
सम्प्रभुता

प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र का मार्क्सवादी सिद्धान्त किस अधिकार पर बल देता है?
उत्तर:
आर्थिक समानता

प्रश्न 3.
‘प्रजातन्त्र, जनता का, जनता के लिये, जनता द्वारा संचालित शासन है’ यह कथन किसका है? (2009)
उत्तर:
अब्राहम लिंकन का

प्रश्न 4.
स्विट्जरलैण्ड के राजनैतिक प्रशासनिक प्रान्त/इकाई। (2016)
उत्तर:
कैण्टन

प्रश्न 5.
कौन-सी अवधारणा प्रजातन्त्र की है? (2013)
उत्तर:
स्वतन्त्रता।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र आरम्भिक काल में किन निर्णयों में सहभागी होती थी ?
उत्तर:
प्रजातन्त्र के आरम्भिक काल में सीमित जनसंख्या एवं सीमित क्षेत्रफल वाले छोटे राज्य होने से सारी जनता शासन संचालन सम्बन्धी निर्णयों में सहभागी होती थी।

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प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रजातन्त्र एक ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें शासन की शक्ति जनता के पास होती है और शासन . संचालन जनता स्वयं प्रत्यक्ष रूप से या अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से करती है।

प्रश्न 3.
प्रजातन्त्र के बहुलवादी सिद्धान्त की मूल धारणा क्या है?
उत्तर:
सत्ता का विकेन्द्रीकरण इस सिद्धान्त की मूल धारणा है।

प्रश्न 4.
प्रजातन्त्र के मार्क्सवादी सिद्धान्त के अनुसार किस प्रकार के समाज की स्थापना होनी चाहिए?
उत्तर:
प्रजातन्त्र के मार्क्सवादी सिद्धान्त के अनुसार सच्चे प्रजातन्त्र के लिये एक वर्ग विहीन तथा राज्य विहीन समाज की स्थापना होनी चाहिए।

प्रश्न 5.
प्रजातन्त्र के प्रमुख प्रकार लिखिए।
उत्तर:
साधारणतः प्रजातन्त्र दो प्रकार का होता है-प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र और अप्रत्यक्ष या प्रतिनिधि मूलक प्रजातन्त्र।

प्रश्न 6.
प्रजातन्त्र की रक्षा के लिए किस प्रकार का संविधान होना आवश्यक है?
उत्तर:
प्रजातन्त्र की रक्षा के लिए लिखित संविधान का होना आवश्यक है।

प्रश्न 7.
भारतीय प्रजातन्त्र की आंशिक पूर्वपीठिका किसे कहा गया?
उत्तर:
ब्रिटिश संसद द्वारा पारित अधिनियम एवं भारत में ब्रिटिश शासन द्वारा बनाये गये कानून, वर्तमान भारतीय प्रजातन्त्र की आंशिक पूर्वपीठिका कही जा सकती है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र :
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में राज्य की प्रभुता सम्पन्न जनता प्रत्यक्ष रूप से शासन के कार्यों में भाग लेती है, नीति निर्धारित करती है, कानून बनाती है और प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त कर उन पर नियन्त्रण रखती है।

प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कम जनसंख्या वाले एवं छोटे आकार वाले राज्यों में ही सम्भव है। वर्तमान में बड़े आकार वाले राष्ट्रों में जहाँ नागरिकों की संख्या करोड़ों में होती है, प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र सम्भव नहीं है। वर्तमान में स्विट्जरलैण्ड के कुछ कैंटनों एवं भारत में पंचायत राज व्यवस्था के अन्तर्गत ग्रामसभाओं में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की व्यवस्था है।

प्रश्न 2.
प्रजातन्त्र का महत्त्व स्पष्ट कीजिए। (2008, 09, 11)
उत्तर:
प्रजातन्त्र का महत्त्व :
प्रजातन्त्र स्वतन्त्रता, समानता, सहभागिता और भाई-चारे की भावना पर आधारित शासन व्यवस्था है। इसे हम एक सामाजिक व्यवस्था भी कह सकते हैं। इसके अन्तर्गत मानव का सम्पूर्ण जीवन इस लोकतन्त्रीय मान्यता पर आधारित होता है कि प्रत्येक व्यक्ति को समाज में समान महत्त्व एवं व्यक्तित्व की गरिमा प्राप्त है। व्यक्ति के महत्त्व की यह स्थिति यदि जीवन के केवल राजनीतिक क्षेत्र में ही हो, तो प्रजातन्त्र अधूरा रहता है। प्रजातन्त्र की पूर्णता के लिए यह अनिवार्य है कि जीवन के राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक तीनों ही क्षेत्रों में सभी व्यक्तियों को अपने विकास के समान अवसर प्राप्त हों।

मानव जीवन के राजनीतिक क्षेत्र में प्रजातन्त्र से आशय ऐसी राजनीतिक व्यवस्था से है जिसमें निर्णय लेने की शक्ति किसी एक व्यक्ति में न होकर जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों में निहित होती है। सामाजिक क्षेत्र में प्रजातन्त्र से आशय इस प्रकार के समाज से है, जिसमें जाति, धर्म, रंग, लिंग, नस्ल, मूलवंश व सम्पत्ति के आधार पर भेद-भाव न हो।

आर्थिक क्षेत्र में प्रजातन्त्र से आशय इस प्रकार की व्यवस्था से है जिसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आजीविका चुनने या व्यवसाय करने की स्वतन्त्रता प्राप्त हो। अर्थात् व्यक्ति को रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य, शिक्षा रोजगार आदि की सुविधाएँ प्रजातन्त्र के आधार हैं। अतः प्रजातन्त्र न केवल शासन का एक विशेष प्रकार है बल्कि यह जीवन के प्रति एक विशिष्ट दृष्टिकोण है।

प्रश्न 3.
“स्वतन्त्रता प्रजातंत्र की आत्मा है।” कथन की पुष्टि कीजिए। (2015)
उत्तर:
प्रजातंत्र में नागरिकों के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक प्रकार की स्वतन्त्रताएँ प्राप्त होती हैं। राजनैतिक स्वतन्त्रता के अतिरिक्त नागरिकों को अनेक प्रकार की धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतन्त्रताओं के अधिकार भी प्राप्त होते हैं। प्रजातंत्र में नागरिकों को मत देने, निर्वाचित होने, सार्वजनिक पद ग्रहण करने, भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता सूचना प्राप्त करने का अधिकार सम्मेलन सभा करने, समूह बनाने, व्यापार व्यवसाय करने आदि की स्वतन्त्रताएँ प्राप्त होती हैं। नागरिक यदि शासन की नीतियों से असहमत हों, तो संयमित विरोध की स्वतन्त्रता भी उन्हें प्राप्त है। स्वतन्त्रता प्रजातंत्र की आत्मा है। बिना स्वतन्त्रता प्रजातंत्र सम्भव नहीं है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 12 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रजातन्त्र के प्रकारों का वर्णन कीजिए।(2011)
अथवा
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में अन्तर लिखिए। (2012)
उत्तर:
साधारणतः प्रजातन्त्र दो प्रकार का होता है –
(1) प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र :
प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में राज्य की प्रभुता सम्पन्न जनता प्रत्यक्ष रूप से शासन के कार्यों में भाग लेती है, नीति निर्धारित करती है, कानून बनाती है और प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त कर उन पर नियन्त्रण रखती है।

प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कम जनसंख्या वाले एवं छोटे आकार वाले राज्यों में ही सम्भव है। वर्तमान में बड़े आकार वाले राष्ट्रों में जहाँ नागरिकों की संख्या करोड़ों में होती है, प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र सम्भव नहीं है। वर्तमान में स्विट्जरलैण्ड के कुछ कैंटनों एवं भारत में पंचायत राज व्यवस्था के अन्तर्गत ग्रामसभाओं में प्रत्यक्ष प्रजातन्त्र की व्यवस्था है।

(2) अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र :
जब जनता निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से विधि निर्माण तथा शासन के कार्यों पर नियन्त्रण रखने का कार्य करती है तो उसे अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र कहते हैं। वर्तमान समय में अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र ही प्रचलित है। इसमें जनता निश्चित अवधि के लिए अपने प्रतिनिधि चुनती है, जो व्यवस्थापिका का गठन करते हैं और कानूनों का निर्माण करते हैं। अप्रत्यक्ष प्रजातन्त्र में जनता की इच्छा की अभिव्यक्ति, निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम होती है।

MP Board Class 9th Social Science Solutions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Chapter 13 अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Maths Chapter 13 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दोनों ओर से खली एक बेलनाकार टयूब एक लोहे की चादर की बनी है, जिसकी मोटाई 2 cm है। यदि इसका व्यास 16 cm और लम्बाई 100 cm है, तो ज्ञात कीजिए कि इस को
बनाने में कितने cm³ लोहे का प्रयोग किया गया ?
हल :
दिया है: एक बेलनाकार ट्यूब के आधार का बाह्य व्यास d = 16 cm
⇒ त्रिज्या r1 = 16/2 = 8 cm
और लम्बाई (लम्बाई) h = 100 cm तथा धातु की मोटाई = 2 cm.
⇒ आधार की आन्तरिक त्रिज्या r2 = 8 – 2 = 6 cm
लोहे का आयतन = π(r12 – r22) h = \(\frac { 22 }{ 7 }\) [(8)² – (6)²] x 100
= \(\frac { 22 }{ 7 }\) (64 – 36) x 100
= \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 28 x 100
= 8800 cm³
अत: लोहे का अभीष्ट आयतन = 8800 cm³.

प्रश्न 2.
28 cm व्यास वाली एक अर्द्धवृताकार धातु की चादर को मोड़कर एक शंकु के आकार का खुला कप बनाया गया है। इस कप की धारिता ज्ञात कीजिए।
हल :
ज्ञात है : 28 cm व्यास वाले एक अर्द्धवृताकार धातु की चादर को मोड़कर एक शंकु के आकार में मोड़ा गया है जिसकी तिर्यक ऊँचाई l = \(\frac { 28 }{ 2 }\) = 14 cm तथा आधार की परिधि
2πr’ = π x 14 cm
⇒ r’ = 14/2 = 7 cm
शंकु की ऊँचाई \(h=\sqrt{l^{2}-\left(r^{\prime}\right)^{2}}\)
\(=\sqrt{(14)^{2}-(7)^{2}}\)
\(=\sqrt{196-49}\)
= √147
= 7√3 cm
कप की धारिता = शंकु का आयतन = \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h\)
⇒ \(V=\frac{1}{3} \times \frac{22}{7} \times(7)^{2} \times 7 \sqrt{3}\)
= 622.38 cm³ (लगभग)
अतः कप की अभीष्ट धारिता = 622.38 cm³. (लगभग)

प्रश्न 3.
165 m² क्षेत्रफल वाले एक कपड़े को 5 m त्रिज्या वाले एक शंक्वाकार तम्बू के रूप में बनाया जाता है।
(i) इस तम्बू में कितने विद्यार्थी बैठ सकते हैं, यदि औसतन एक विद्यार्थी भूमि पर \(\frac { 5 }{ 7 }\) m² स्थान घेरता है ?
(ii) इस शंकु का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
∵ शंक्वाकार तम्बू का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = कपड़े का क्षेत्रफल
πrl = \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 5 x l= 165
\(l=\frac{165 \times 7}{22 \times 5}=\frac{21}{2}=10 \cdot 5 \mathrm{m}\)
शंकु की ऊँचाई \(h=\sqrt{l^{2}-r^{2}}\)
\(=\sqrt{(10 \cdot 5)^{2}-(5)^{2}}\)
\(h=\sqrt{110 \cdot 25-25}=\sqrt{85 \cdot 25}\)
= 9.233 m

(i) वृत्ताकार आधार का क्षेत्रफल = πr² = \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (5)² = \(\frac { 550 }{ 7 }\) m²
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 1
\(=\frac{550 / 7}{5 / 7}\)
= 110
अतः विद्यार्थियों की अभीष्ट संख्या = 110.

(ii) तम्बू का आयतन \(V=\frac{1}{3} \pi r^{2} h=\frac{1}{3} \times \frac{22}{7} \times 5^{2} \times 9 \cdot 233\)
= 241.81
अतः शंकु का अभीष्ट आयतन = 241.81 m³.

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
किसी फैक्ट्री के लिए पानी एक अर्द्धगोलाकर टंकी से संचरित किया जाता है जिसका आन्तरिक व्यास 14 m है। इस टंकी में 50 किलोलीटर पानी है। इस टंकी को पूरा भरने के लिए पम्प द्वारा भरा जाता है। टंकी में पम्प द्वारा भरे गए पानी का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : अर्द्धगोलाकार टंकी का आन्तरिक व्यास d = 14 m
त्रिज्या R = d/2 = 14/2 = 7 cm टंकी में पानी 50 किलोलीटर
टंकी की धारिता \(V=\frac{2}{3} \pi R^{3}=\frac{2}{3} \times \frac{22}{7} \times(7)^{3}\)
= \(\frac { 2156 }{ 3 }\)
= 718.67 m³
= 718.67 kL
पम्प द्वारा भरा गया पानी = 718.67 – 50
= 668.67 kL
अतः पम्प द्वारा भरे गए पानी का आयतन = 668.67 kL.

प्रश्न 5.
दो गोलों के आयतनों का अनुपात 64 : 27 है, उनके पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल :
मान लीजिए गोलों के आयतन V1 एवं V2, पृष्ठीय क्षेत्रफल S1 और S2 तथा त्रिज्याएँ R1 और R2 हैं। दिया है : V1 : V2 = 64 : 27
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 2
अत: गोलों के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात = 16 : 9.

प्रश्न 6.
4 cm भुजा वाले एक घन के अन्दर एक गोला जो उसके तलों को स्पर्श करता है। इन दोनों के बीच में रिक्त स्थान का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : घन की प्रत्येक भुजा 4 cm, घन के अन्दर एक गोला उसके तलों को स्पर्श करता हुआ अतः गोले कां व्यास = धन की भुजा
d = 4 cm
R = \(\frac { 4 }{ 2 }\) = 2 cm,
गोले का आयतन = \(=\frac{4}{3} \pi R^{3}=\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(2)^{3}\)
\(=\frac{22 \times 32}{21}=\frac{704}{21}\)
= 33.52 cm³
एवं घन का आयतन = (a)³ = (4)³ = 64 cm³
रिक्त स्थान का आयतन = 64 – 33.52
= 30.48 cm³
अतः अभीष्ट रिक्त स्थान का आयतन = 30.48 cm³.

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प्रश्न 7.
एक ही त्रिज्या वाले एक गोले और एक लम्बवृत्तीय बेलन के आयतन बराबर हैं। बेलन का व्यास उसकी ऊँचाई से कितने प्रतिशत अधिक है ?
हल :
दिया है : बेलन की त्रिज्या = गोले की त्रिज्या = R मात्रक
मान लीजिए बेलन की ऊँचाई = h मात्रक, बेलन का आयतन = गोले का आयतन (दिया है)
πR²h = \(\frac { 4 }{ 3 }\)πR³
बेलन की ऊँचाई h = \(\frac { 4 }{ 3 }\)R
बेलन का व्यास d = 2R
बेलन का व्यास – बेलन की ऊँचाई \(=2 R-\frac{4}{3} R=\frac{6 R-4 R}{3}=\frac{2}{3} R\)
प्रतिशत अधिकता \(=\frac{2 / 3 R}{4 / 3 R} \times 100\)
= 50%
अतः बेलन का व्यास बेलन की ऊँचाई से 50% अधिक है।

प्रश्न 8.
30 वृत्ताकार प्लेटों को जिनमें से प्रत्येक की त्रिज्या 14 cm है और मोटाई 3 cm है, एक के ऊपर एक रखकर एक बेलनाकार ठोस बनाया गया है। इस प्रकार बने बेलन का ज्ञात कीजिए
(i) कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल
(ii) आयतन।
हल :
ज्ञात है : बने बेलन की त्रिज्या = वृत्ताकार प्लेट की त्रिज्या = 14 cm,
बने बेलन की ऊँचाई h = प्लेटों की संख्या x मोटाई = 30 x 3 = 90 cm
(i) बेलन का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr (h + r)
= 2 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 14(90 + 14)
= 88 x 104
= 9152 cm²
अतः बेलन का अभीष्ट कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 9152 cm².

(ii) बेलन का आयतन = πr²h = \(\frac { 22 }{ 7 }\) x (14)² x 90
= 55440 cm³
अतः बेलन का अभीष्ट आयतन = 55440 cm³.

MP Board Class 9th Maths Chapter 13 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक 16 cm x 8 cm x 8 cm आन्तरिक विमाओं वाले आयताकार पेटी में, धातु के गोले पैक किए जाते हैं जिनमें से प्रत्येक की त्रिज्या 2 सेमी है। 16 गोले पैक किए (रखे) जाने पर पेटी को एक परिरक्षक द्रव से भर दिया जाता है। इस द्रव का आयतन ज्ञात कीजिए। अपना उत्तर निकटतम पूर्णांक तक दीजिए। (π = 3.14 का प्रयोग कीजिए।)
हल :
पेटी की धारिता = 16 x 8 x 8 = 1024 cm³
1 गोले का आयतन \(=\frac{4}{3} \pi R^{3}=\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(2)^{3}\)
\(=\frac{32 \times 22}{21}=\frac{704}{21}\)
= 33.524 cm
गोलों का आयतन V2 = 16 x 33.524
= 536.384 cm³
= 536 cm³
(निकटतम पूर्णांक से) द्रव का आयतन = पेटी का आयतन – 16 गोलों का आयतन
= 1024 – 536
= 488 cm³
अतः द्रव का अभीष्ट आयतन = 488 cm³.

प्रश्न 2.
पानी को संचरित करने वाली एक टंकी एक घन के आकार की है। इसे पूरा भरने पर इसमें पानी का आयतन 15.625 m³ है। यदि इस टंकी में पानी की गहराई 1.3 m है, तो इस टंकी
में से पहले से प्रयुक्त किए गए पानी का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
माना घनाकार टंकी की एक भुजा = a m है, तो टंकी का आयतन = a³ = 15.625 (दिया गया है)
a³ = (2.5)³ = a = 2.5 m
प्रयुक्त पानी का ऊँचाई h = 2.5 – 1.3 = 1.2 m
प्रयुक्त पानी का आयतन V = 2.5 x 2.5 x 1.2 = 7.5 m³
अतः पहले से प्रयुक्त पानी का अभीष्ट आयतन = 7.5 m³.

प्रश्न 3.
यदि 4.2 cm व्यास वाली एक गोलाकार गेंद को पूर्णतः पानी में डुबो दिया जाए तो उसके द्वारा विस्थापित पानी का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : गोलाकार गेंद का व्यास d = 4.2 cm ⇒ त्रिज्या R = 2.1 cm
चूँकि हटाए गए पानी का आयतन = गोलाकार गेंद का आयतन
⇒ हटाए गए पानी का आयतन = \(\frac{4}{3} \pi R^{3}=\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(2 \cdot 1)^{3} \cdot \mathrm{cm}^{3}\)
= 88 x 2.1 x 2.1 x 0.1
= 38.808 cm³
अतः गेंद द्वारा हटाए गए पानी का अभीष्ट आयतन = 38:808 cm³.

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प्रश्न 4.
उस शंक्वाकार तम्बूको बनाने में लगे कैनवासका क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए जिसकी ऊँचाई 3.5m है तथा आधार की त्रिज्या 12 m है।
हल :
शंकु की ऊँचाई h = 3.5 m एवं त्रिज्या 12 मीटर दी गई है।
शंक्वाकार तम्बू की तिर्यक ऊँचाई
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 3
कैनवास का क्षेत्रफल = शंक्वाकार तम्बू का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल
= πrl
= \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 12 x 12.5
= \(\frac { 3300 }{ 7 }\)
= 471.43 m²
अतः कैनवास का अभीष्ट क्षेत्रफल = 471.43 m².

प्रश्न 5.
एक ही धातु के बने दो ठोस गोलों का भार 5920g और 740g है। यदि छोटे गोले का व्यास 5 cm है तो बड़े गोले की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : बड़े गोले का द्रव्यमान m1 = 5920 g एवं छोटे गोले का द्रव्यमान m2 = 740g
छोटे गोले का व्यास d1 = 5 cm ⇒ उसकी त्रिज्या r2 = 5/2 cm
मान लीजिए बड़े गोले की त्रिज्या r1 तथा धातु का घनत्व d है, तो
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 4
अत: बड़े गोले की अभीष्ट त्रिज्या = 5 cm.

प्रश्न 6.
कोई स्कूल अपने विद्यार्थियों को प्रतिदिन 7 cm व्यास वाले बेलनाकार गिलासों में दूध देता है। यदि गिलास दूध से 12 cm ऊँचाई तक भरा जाता है, तो ज्ञात कीजिए कि 1600 विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन कितने लीटर दूध की आवश्यकता होगी ?
हल :
दिया है : बेलनाकार गिलास का व्यास d = 7 cm ⇒ त्रिज्या r = 7/2 cm
गिलास में दूध स्तम्भ की ऊँचाई h = 12 cm तथा स्कूल में छात्रों की संख्या = 1600
1 गिलास में दूध का आयतन = πr²h
= \(\frac{22}{7} \times\left(\frac{7}{2}\right)^{2} \times 12 \mathrm{cm}^{3}\)
= 462 cm³
1600 विद्यार्थियों के लिए आवश्यक दूध = 1600 x 462 cm³
= 739200 cm³
= 739.2 लीटर
अतः आवश्यक अभीष्ट दूध = 739.2 लीटर।

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प्रश्न 7.
2.5 m लम्बे और 1.75m त्रिज्या वाले एक बेलनाकार रोलर (roller) को जब सड़क पर रोल किया गया, तो पाया गया कि उसने 5500 m² के क्षेत्रफल को तय कर लिया। रोलर ने कितने चक्कर लगाए ?
हल :
रोलर की लम्बाई l = 2.5 m एवं त्रिज्या r = 1.75 m
तय किया गया कुल क्षेत्रफल = 5500 m²
रोलर का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
= 2 x \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 1.75 x 2.5 m³
= 44 x 0.25 x 2.5
= 27.5 m²
चूँकि रोलर द्वारा लगाए गए चक्करों की संख्या
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 5
अतः रोलर द्वारा लगाए गए अभीष्ट चक्कर = 200.

प्रश्न 8.
5000 जनसंख्या वाले एक छोटे गाँव में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 75 लीटर पानी की आवश्यकता है। इस गाँव में 40 m x 25 m x 15 m मापन की एक उपरि टंकी हैं। इस टंकी का पानी कितने दिन तक पर्याप्त रहेगा?
हल :
टंकी का आयतन V = 40 x 25 x 15
= 15,000 m³
= 15,000 x 1000
= 1,50,00,000 लीटर
एक दिन में गाँव में पानी की आवश्यकता = 5000 x 75 लीटर
= 3,75,000 लीटर
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 6
अतः टंकी का पानी अभीष्ट 40 दिन तक पर्याप्त होगा।

प्रश्न 9.
एक दुकानदार के पास 5 cm त्रिज्या का एक लड्डू है। इतनी ही सामग्री से 2.5 cm त्रिज्या वाले कितने लड्डू बनाए जा सकते हैं ?
हल :
दिया है : बड़े लड्डू की त्रिज्या r1 = 5 cm और छोटे की त्रिज्या r2 = 2.5 cm
मान लीजिए छोटे लड्डुओं की संख्या n है, तो
बड़े लड्डू का आयतन = n छोटे लड्डुओं का आयतन
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 7
अतः 8 नए लड्डू बनाए जा सकते हैं।

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प्रश्न 10.
6 cm, 8 cm और 10 cm वाले एक समकोण त्रिभुज को 8 cm वाली भुजा के परितः घुमाया जाता है। इस प्रकार बनने वाले ठोस का आयतन और वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है : 6 cm, 8 cm एवं 10 cm भुजाओं वाले एक समकोण त्रिभुज को 8 सेमी वाली भुजा के परितः घुमाने पर बना ठोस एक लम्बवृत्तीय शंकु है जिसके आधार की त्रिज्या r = 6 cm, ऊँचाई h = 8 cm एवं तिर्यक ऊँचाई l = 10 cm है।
शंक्वाकार ठोस शंकु का आयतन = \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h=\frac{1}{3} \times \frac{22}{7} \times(6)^{2} \times 8\)
ठोस का आयतन = \(\frac { 6336 }{ 21 }\)
= 301.7 cm³ (लगभग)
शंक्वाकार ठोस का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = πrl = \(\frac { 22 }{ 7 }\) x 6 x 10
= \(\frac { 1320 }{ 7 }\)
= 188.6 cm² (लगभग)
अतः ठोस का अभीष्ट आयतन = 301.7 cm³ (लगभग)
एवं वक्र पृष्ठीय अभीष्ट क्षेत्रफल = 188.6 cm² (लगभग)।।

प्रश्न 11.
यदि घन की कोर 12 cm है, तो घन का आयतन ज्ञात कीजिए। (2019)
हल :
दिया है : घन की कोर a = 12 cm
∵ घन का आयतन V = a³
⇒ घन का आयतन V= (12)³
= 1728 cm³
अतः घन का अभीष्ट आयतन = 1728 cm³.

प्रश्न 12.
एक घन की भुजा 4 cm है, तो उसका सम्पूर्ण पृष्ठ ज्ञात कीजिए। (2019)
हल :
दिया है : घन की भुजा a = 4 cm
∵ घन का सम्पूर्ण पृष्ठ Sw = 6a²
⇒ घन का सम्पूर्ण पृष्ठ = 6 x (4)²
= 96 cm²
अतः घन का अभीष्ट सम्पूर्ण पृष्ठ = 96 cm².

MP Board Class 9th Maths Chapter 13 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

निम्नलिखित में से प्रत्येक में सत्य या असत्य लिखिए और अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।

प्रश्न 1.
एक गोले का आयतन उस बेलन के आयतन का \(\frac { 2 }{ 3 }\) होता है जिसकी ऊँचाई और व्यास गोले के व्यास के बराबर हैं।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि गोले का आयतन = \(\frac{4}{3} \pi r^{3}=\frac{2}{3} \pi r^{2}(2 r)\) = बेलन का आयतन।

प्रश्न 2.
यदि एक लम्बवृत्तीय शंकु की त्रिज्या आधी कर दी जाए और ऊँचाई दो गुनी कर दी जाए, तो उसके आयतन में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
उत्तर-
कथन असत्य है, क्योंकि नया आयतन प्रारम्भिक आयतन का आधा है।

प्रश्न 3.
एक लम्बवृत्तीय शंकु की ऊँचाई, त्रिज्या और तिर्यक ऊँचाई सदैव एक समकोण त्रिभुज की भुजाएँ नहीं होती हैं।
उत्तर-
कथन असत्य है, क्योंकि r² + h² = l² समकोण त्रिभुज की सदैव भुजाएँ होती हैं।

प्रश्न 4.
यदि एक बेलन की त्रिज्या दुगनी कर दी जाए तथा उसके वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल में कोई परिवर्तन न किया जाए तो उसकी ऊँचाई अवश्य ही आधी हो जाएगी।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि 2πrh = 2π (2r) x h/2

प्रश्न 5.
किनारे 2r वाले एक घन में समावेशित किए जा सकने वाले सबसे बड़े लम्बवृत्तीय शंकु का आयतन त्रिज्या r वाले अर्द्धगोले के आयतन के बराबर होता है।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि शंकु का आयतन = \(\frac { 1 }{ 3 }\)πr²(2r)
= \(\frac { 2 }{ 3 }\)πr³ = अर्द्धगोले का आयतन।

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प्रश्न 6.
एक बेलन और एक लम्बवृत्तीय शंकु के समान आधार और समान ऊँचाई है। बेलन का आयतन शंकु के आयतन का तीन गुना होगा।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि बेलन का आयतन = πr²h
= 3 x \(\frac { 1 }{ 3 }\) πr²h
= 3 x शंकु का आयतन।

प्रश्न 7.
एक शंकु, अर्द्धगोला और बेलन समान आधार और समान ऊँचाई के हैं। इनके आयतनों में अनुपात 1 : 2 : 3 है।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि शंकु का आयतन : अर्द्धगोले का आयतन : बेलन का आयतन
= \(\frac{1}{3} \pi r^{2} r : \frac{2}{3} \pi r^{3} : \pi r^{2} . r\)
= 1 : 2 : 3.

प्रश्न 8.
यदि किसी घन के विकर्ण की लम्बाई 6√3 है तो इसके किनारे की लम्बाई 3 cm है।
उत्तर-
कथन असत्य है, क्योंकि a√3 = 6√3
= a = 6 cm होगी।

प्रश्न 9.
यदि एक गोला एक घन के अन्तर्गत हैं तो घन के आयतन का गोले के आयतन में अनुपात 6 : π है।
उत्तर-
कथन सत्य है क्योंकि घन का आयतन a³ : गोले का आयतन , \(\frac { 4 }{ 3 }\)π(a/2)³
= a³ : π/6 a³ ⇒ 6 : π.

प्रश्न 10.
यदि एक बेलन की त्रिज्या दुगनी कर दी जाए और उसकी ऊँचाई आधी कर दी जाए तो उसका आयतन दो गुना हो जाएगा।
उत्तर-
कथन सत्य है, क्योंकि नया आयतन = π(2r)² h/2 = 2πr²h
⇒ नया आयतन = 2 x पुराना आयतन।

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MP Board Class 9th Maths Chapter 13 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यदि एक गोले की त्रिज्या 2r है, तो उसका आयतन होगा :
(a) \(\frac{4}{3} \pi r^{3}\)
(b) \(4 \pi r^{2}\)
(c) \(\frac{8 \pi r^{3}}{3}\)
(d) \(\frac{32 \pi r^{3}}{3}\)
उत्तर:
(d) \(\frac{32 \pi r^{3}}{3}\)

प्रश्न 2.
एक घन का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल 96 cm है। घन का आयतन है :
(a) 8 cm³
(b) 512 cm³
(c) 64 cm³
(d) 27 cm³.
उत्तर:
(c) 64 cm³

प्रश्न 3.
एक शंकु की ऊँचाई 8.4 cm है। और उसके आधार की त्रिज्या 2.1 cm है। इसे पिघलाकार एक गोले के रूप में ढाला जाता है। गोले की त्रिज्या है :
(a) 4.2 cm
(b) 2.1 cm
(c) 2.4 cm
(d) 1.6 cm.
उत्तर:
(b) 2.1 cm

प्रश्न 4.
यदि एक बेलन की त्रिज्या दो गुनी कर दी जाए और ऊँचाई आधी कर दी जाए तो उसका वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल :
(a) आधा हो जायेगा
(b) दो गुना हो जायेगा
(c) वही रहेगा
(d) चार गुना हो जायेगा।
उत्तर:
(c) वही रहेगा

प्रश्न 5.
एक शंकु जिसकी त्रिज्या r/2 है और तिर्यक ऊँचाई 2l है का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा :
(a) 2πr (1 + r)
(b) πr (1 + r/4)
(c) πr (1 + r)
(d) 2πrl.
उत्तर:
(b) πr (1 + r/4)

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प्रश्न 6.
दो बेलनों की त्रिज्याएँ 2 : 3 के अनुपात में हैं तथा उनकी ऊँचाइयों का अनुपात 5 : 3 है। इनके आयतनों का अनुपात है :
(a) 10 : 17
(b) 20 : 27
(c) 17 : 27
(d) 20 : 37.
उत्तर:
(b) 20 : 27

प्रश्न 7.
एक घन का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल 256 m² है। घन का आयतन है :
(a) 512 m³
(b) 64 m³
(c) 216 m³
(d) 256 m³.
उत्तर:
(a) 512 m³

प्रश्न 8.
16 m लम्बे, 12 m चौड़े तथा 4 m गहरे एक गड्ढे में रखे जा सकने वाले 4 m x 50 cm x 20 cm विमाओं वाले बॉक्सों की संख्या :
(a) 1900
(b) 1920
(c) 1800
(d) 1840.
उत्तर:
(b) 1920

प्रश्न 9.
10 m x 10 m x 5 m विमाओं वाले एक कमरे में रखे जा सकने वाले सबसे लम्बे डण्डे की लम्बाई
(a) 15 m
(b) 16 m
(c) 10 m
(d) 12 m.
उत्तर:
(a) 15 m

प्रश्न 10.
एक अर्द्धगोलाकार गुब्बारे में हवा भरने पर उसकी त्रिज्या 6 cm से बढ़कर 12 cm हो जाती है। दोनों स्थितियों में गुब्बारे के पृष्ठीय क्षेत्रफल का अनुपात है :
(a) 1 : 4
(b) 1 : 3
(c) 2 : 3
(d) 2 : 1.
उत्तर:
(a) 1 :4

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प्रश्न 11.
बेलन का वक्र पृष्ठ है :
(a) πr²h
(b) πr (r + h)
(c) 2πrh
(d) \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h\)
उत्तर:
(c) 2πrh

प्रश्न 12.
शंकु का आयतन है:
(a) πr²h1
(b) \(\frac{4}{3} \pi r^{2} h\)
(c) \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h\)
(d) 4a²h
उत्तर:
(c) \(\frac{1}{3} \pi r^{2} h\)

प्रश्न 13.
एक बेलन का व्यास 14 cm है तथा इसकी ऊँचाई 7 cm है, तब इस बेलन का आयतन है :
(a) 7π cm³
(b) 49π cm³
(c) 343π cm³
(d) 443π cm³.
उत्तर:
(c) 343π cm³

प्रश्न 14.
एक घन के विकर्ण की लम्बाई 15√3 cm है तो घन की भुजा की लम्बाई होगी :
(a) 30√2 cm
(b) 15 cm
(c) 5√2 cm
(d) 30 cm.
उत्तर:
(b) 15 cm

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प्रश्न 15.
एक शंकु की तिर्यक ऊँचाई 13 cm है तथा त्रिज्या 5 cm है तो इसकी ऊँचाई है:
(a) 5 cm
(b) 22 cm
(c) 12 cm
(d) 18 cm.
उत्तर:
(c) 12 cm

प्रश्न 16.
अर्द्ध गोले का आयतन होगा : (2019)
(a) \(\frac{4}{3} \pi r^{3}\)
(b) \(\frac{2}{3} \pi r^{3}\)
(c) 2πr²
(d) 4πr²
उत्तर:
(b) \(\frac{2}{3} \pi r^{3}\)

प्रश्न 17.
यदि घन की भुजा 3 cm है, तो उसका आयतन होगा : (2019)
(a) 3 cm³
(b) 9 cm³
(c) 54 cm³
(d) 27 cm³
उत्तर:
(d) 27 cm³

प्रश्न 18.
घन के सम्पूर्ण पृष्ठ का सूत्र है : (2019)
(a) 6a²
(b) 4a²
(c) a³
(d) abc.
उत्तर:
(a) 6a²

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. एक घनाभ की कोरों की लम्बाइयाँ 3 cm, 4 cm एवं 5 cm हों तो उनके विकर्ण की लम्बाई ………… होगी।
2. किसी घन की कोर 2a हो, तो इसके विकर्ण की लम्बाई ………. होगी।
3. घनाभ के विकर्ण की लम्बाई का सूत्र ………. है। (2018)
4. एक घनाभ में कुल फलकों (तलों) की संख्या ………….. होती है।
5. एक ही केन्द्र के दो भिन्न त्रिज्याओं के गोलों से घिरे ठोस भाग को ………… कहते हैं।
6. बेलन का आयतन ………… होता है। (2019)
उत्तर-
1. 5√2 cm,
2. 2√3a,
3. \(d=\sqrt{l^{2}+b^{2}+h^{2}}\)
4. छ:
5. गोलीय कोश,
6. πr²h

जोड़ी मिलान

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Additional Questions image 8
उत्तर-
1. →(c),
2. →(d),
3. →(e),
4. →(a),
5. →(b).

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सत्य/असत्य कथन

1. बेलन के सम्पूर्ण पृष्ठ का क्षेत्रफल = 2πrh
2. शंकु के पार्श्व पृष्ठ का क्षेत्रफल = πrl
3. गोले का पार्श्व पृष्ठ = 4/3 πR²
4. घनाभ का सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2 (lb + bh + hl)
5. घन का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6a²
6. बेलन का आधार वृत्ताकार होता है।
उत्तर-
1. असत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य,
6. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. वह समान्तर षट्फलक जिसका प्रत्येक फलक आयत हो, क्या कहलाता है?
2. वह समान्तर षट्फलक जिसका प्रत्येक फलक एक वर्ग हो, क्या कहलाता है?
3. किसी आयत को उसकी एक भुजा के परितः घुमाने पर बना ठोस क्या कहलाता है?
4. किसी अर्द्धवृत्त को उसके व्यास के परितः घुमाने पर बना ठोस क्या कहलाता है?
5. एक ही त्रिज्या और एक ही ऊँचाई वाले बेलन और शंकु के आयतनों में क्या अनुपात होगा?
6. बेलन के सम्पूर्ण पृष्ठ का क्षेत्रफल होता है। (2018)
7. गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल लिखिए। (2019)
उत्तर-
1. घनाभ,
2. घन,
3. बेलन,
4. गोला,
5. 3 : 1,
6. 2πr(r + h),
7. 4πr².

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 11 प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 11 प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
रथ-चालक कांस्य प्रतिमा कहाँ से प्राप्त है?
(i) दैमाबाद
(ii) मोहनजोदड़ो
(iii) कालीबंगा
(iv) पंजाब।
उत्तर:
(ii) मोहनजोदड़ो

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प्रश्न 2.
प्रथम नगरीकरण कब हुआ?
(i). नव पाषाण काल में
(ii) सिन्धु सभ्यता में
(iii) मौर्य काल में
(iv) गुप्तकाल में।
उत्तर:
(ii) सिन्धु सभ्यता में

प्रश्न 3.
चित्रकला में वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन-अध्यापन की बात गुप्तकाल में किसने कही?
(i) वात्सायन ने
(ii) अशोक ने
(iii) समुद्रगुप्त ने
(iv) कुमारगुप्त ने।
उत्तर:
(iii) समुद्रगुप्त ने

प्रश्न 4.
वीणाधारी सिक्कों का चलन किस राजवंश ने किया? (2014)
(i) मौर्य राजवंश
(ii) गुप्त राजवंश
(iii) वर्धन वंश
(iv) राजपूत वंश।
उत्तर:
(ii) गुप्त राजवंश

प्रश्न 5.
कव्वाली का जनक था (2008,09)
(i) अकबर
(ii) शाहजहाँ
(iii) तानसेन
(iv) अमीर खुसरो।
उत्तर:
(iv) अमीर खुसरो।

सही जोड़ी बनाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 11 प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ - 1
उत्तर:

  1. → (घ)
  2. → (क)
  3. → (ख)
  4. → (ग)
  5. → (च)
  6. → (ङ)।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सिन्धु सभ्यता के सबसे लम्बे अभिलेख में कितने अक्षर हैं?
उत्तर:
सिन्धु सभ्यता में अब तक लगभग 2500 से अधिक अभिलेख प्राप्त हैं। सबसे लम्बे अभिलेख में 17 अक्षर हैं।

प्रश्न 2.
दीपवंश, महावंश, दिव्यावदान किस साहित्य से सम्बन्धित हैं?
उत्तर:
दीपवंश, महावंश, दिव्यावदान बौद्ध साहित्य से सम्बन्धित हैं।

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प्रश्न 3.
कल्पसूत्र और परिशिष्ट पर्व किस धर्म की साहित्यिक कृति है?
उत्तर:
भद्रबाहु का कल्पसूत्र और हेमचन्द्र का परिशिष्ट पर्व जैन धर्म की साहित्यिक कृति है।

प्रश्न 4.
तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई, रसखान किस भक्ति मार्ग के उपासक थे?
उत्तर:
तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई, रसखान सगुण भक्ति मार्ग के उपासक थे।

प्रश्न 5.
एलोरा के मन्दिरों का निर्माण किस काल में हुआ? (2008,09)
उत्तर:
एलोरा के मन्दिरों का निर्माण गुप्तकाल में हुआ।

प्रश्न 6.
ताजमहल किसने बनवाया था? (2018)
उत्तर:
ताजमहल मुगल सम्राट शाहजहाँ ने बनवाया था। यह 313 फुट ऊँचा चौकोर संगमरमर का मकबरा है। जो 22 फुट ऊँचे चबूतरे पर बना है। चबूतरे के चारों कोनों पर एक-एक मीनार है और शीर्ष भाग पर एक गुम्बद है।

प्रश्न 7.
तानसेन कौन थे?
उत्तर:
अकबर के दरबार में नवरत्नों में से एक रत्न तानसेन उस युग का सर्वश्रेष्ठ संगीतज्ञ था। वृन्दावन के बाबा हरिदास तानसेन के गुरु थे।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गुप्तकालीन चित्रकला की विशेषताएँ लिखिए। (2008, 09, 10, 14, 16, 18)
उत्तर:
गुप्तकाल में चित्रकला वैज्ञानिक सिद्धान्तों पर आधारित थी। चित्रकला के सर्वोत्कृष्ट उदाहरण अजन्ता की गुफाओं के चित्र हैं इसे विश्व धरोहर के रूप में शामिल किया गया है। ये चित्र मुख्यतः धार्मिक विषयों पर आधारित हैं। इसमें बुद्ध और बोधिसत्व के चित्र हैं। जातक ग्रन्थों के वर्णनात्मक दृश्य हैं। यह चित्र वास्तविक, सजीव तथा प्रभावोत्पादक हैं। इस काल की चित्रकला बाघ (म. प्र. में धार जिले में) की गुफाओं में भी देखी जा सकती है। इन गुफाओं के चित्रों के विषय लौकिक हैं। इस काल में चित्रकारी में सुन्दर रंगों का प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 2.
सिन्धु सभ्यता की वास्तुशिल्प की विशेषताएँ लिखिए। (2008, 09, 12, 16)
उत्तर:
सिन्धु घाटी के मोहनजोदड़ो व हड़प्पा नगर की खुदाई से तत्कालीन वास्तुशिल्प की जानकारी मिलती है। इस काल में लोग भवन निर्माण कला में दक्ष थे। विशाल अन्नागार, मकान, सुनियोजित नगर, बड़े प्रासाद, बन्दरगाह, स्नानागार आदि तत्कालीन वास्तुशिल्प पर पर्याप्त प्रकाश डालते हैं। तत्कालीन अवशेषों को देखकर किसी आधुनिक विकसित नगर से इनकी तुलना की जा सकती है। पक्की ढुकी हुई नालियाँ, भवनों के खिड़की-दरवाजे मुख्य मार्ग से विपरीत बनाना, भवनों में रसोईघर, स्नानागार, रोशनदान की पर्याप्त व्यवस्था, साधारण व राजकीय भवनों का निर्माण आदि तत्कालीन वास्तुशिल्प के अनुपम उदाहरण हैं। सिन्धु सभ्यता के नगर में प्रथम नगरीकरण के प्रमाण हैं।

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प्रश्न 3.
अशोक के स्तम्भ पर टिप्पणी लिखिए। (2008, 09, 10, 14, 15, 18)
उत्तर:
मौर्य वास्तुकला के सर्वोत्तम नमूने अशोक के स्तम्भ हैं। जो कि उसने धम्म के प्रचार हेतु बनवाये थे। ये स्तम्भ संख्या में लगभग 20 हैं। ये स्तम्भ देश के विभिन्न भागों में स्थित हैं। उत्तर प्रदेश में सारनाथ, प्रयाग, कौशाम्बी, नेपाल की तराई में लुम्बनी व निग्लिवा में अशोक के स्तम्भ मिले हैं। इन स्थानों के अतिरिक्त साँची, लोरिया, नन्दगढ़ आदि स्थानों में भी अशोक के स्तम्भ मिले हैं। स्तम्भों में शीर्ष अत्यधिक कलापूर्ण बनाये जाते थे। मौर्यकालीन स्थापत्य कला के प्रसिद्ध स्तम्भ लेख-साँची (म. प्र.), सारनाथ (उ. प्र.), गुहालेख-बाराबर, नागार्जुनी (बिहार) एवं स्तूप-साँची (म. प्र.) बोधगया (बिहार) में हैं।

प्रश्न 4.
गुप्तकालीन मन्दिरों की विशेषताएँ बताइए। (2008, 09, 12, 13, 15, 17)
अथवा
गुप्तकालीन वास्तुशिल्प की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
गुप्तकाल में वास्तुशिल्प चर्मोत्कर्ष पर थी। इस काल की विशेष उपलब्धि मन्दिर निर्माण रही है। मन्दिर ईंट तथा पत्थरों आदि से बनाये जाते थे। गुप्तकाल में बने मन्दिरों की छतें सपाट थीं। सबसे पहले देवगढ़ (झाँसी, उ. प्र.) के दशावतार मन्दिर में शिखर का निर्माण हुआ था, इसके बाद ही मन्दिरों में शिखर बनने शुरू हो गये। इनमें से अनेक मन्दिर आज भी अबस्थित हैं; जैसे-म. प्र. में विदिशा जिले में साँची का मन्दिर उत्तर प्रदेश में झाँसी तथा भीतरगाँव (महाराष्ट्र) के देवगढ़ के मन्दिर इसके उदाहरण हैं। अजन्ता की 16, 17, 19 नम्बर की गुफा गुप्तकालीन मानी जाती है। उदयगिरि (विदिश म. प्र.), बाघ (धार म. प्र.) आदि गुफाओं का निर्माण गुप्तकाल में हुआ था। गुप्तकाल के शिल्पकार लोहे तथा काँसे के काम में कुशल थे। नई दिल्ली में महरौली में स्थित लौह स्तम्भ लौह प्रौद्योगिकी का एक अनुपम उदाहरण है जिसे ईसा की चौथी शताब्दी में बनाया गया था और आज तक इसमें जंग नहीं लगा।

प्रश्न 5.
नागर शैली व द्राविड़ शैली के मन्दिर में क्या अन्तर है? लिखिए।(2009, 14, 16, 18)
उत्तर:
उत्तर भारत के अतिरिक्त दक्षिण भारत व पूर्वी भारत में भी अनेक मन्दिरों का निर्माण हुआ। इस काल में बने मन्दिरों को मुख्यतः दो शैलियों में विभाजित कर सकते हैं-नागर शैली व द्राविड़ शैली। इन दोनों शैलियों में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं –
नागर व द्राविड़ शैली में अन्तर

नागर शैली द्राविड़ शैली
1. नागर शैली के मन्दिर प्रमुखतया उत्तर भारत में पाये जाते हैं। 1. द्रविड़ शैली के मन्दिर प्रमुखतया दक्षिण भारत में पाये जाते हैं।
2. नागर शैली में मन्दिरों के शिखर लगभग वक्राकार होते हैं। 2. द्राविड़ शैली में मन्दिरों के शिखर आयताकार होते हैं।
3. नागर शैली में मन्दिरों के शिखर पर गोलाकार आमलक और कलश पाया जाता है। 3. द्राविड़ शैली में मन्दिरों के शिखर आयताकार खण्डों की सहायता से बनते हैं।

प्रश्न 6.
मथुरा व गांधार कला में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2008, 09, 11, 13, 14, 16, 18)
उत्तर:
मथुरा व गांधार कला में अन्तर

मथुरा कला गांधार कला
1. मथुरा कला राजस्थान व उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में विकसित हुई। 1. गांधार कला पुष्कलरावती, तक्षशिला, पुरूषपुर  (पेशावर) के आस-पास विकसित हुई।
2. मथुरा कला की मूर्तियों के लिये बिंदीदार लाल पत्थर का प्रयोग किया गया है। 2. गांधार कला में मूर्तियाँ चूने, सीमेण्ट, पकी हुई मिट्टी और चिकनी मिट्टी तथा पत्थर की है।
3. मथुरा कलाकारों ने शारीरिक सुन्दरता के स्थान पर स्थलाकृतियों को आध्यात्मिक आकर्षण देने का प्रयास किया है। 3. मूर्तियों को अधिक आकर्षक और सुन्दर बनाने का प्रयास किया गया है। इसके लिये वस्त्रों और आभूषणों का खूब प्रयोग किया गया।
4. इस कला के विषय, विचार और भाव भारतीय हैं। परन्तु मूर्तियाँ बनाने का ढंग भी भारतीय है। 4. इस कला के विषय, विचार और भाव ही भारतीय नहीं थे वरन् बनाने के ढंग यूनानी है।
5. इस कला में बुद्ध और बोधिसत्वों के अतिरिक्त अनेक हिन्दू और जैन देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बनायी गयीं। 5. इस कला में महात्मा बुद्ध और बोधिसत्वों की आदमकद मूर्तियों का निर्माण किया गया है।

प्रश्न 7.
मध्यकालीन चित्रकला की विशेषताएँ लिखिए। (2017)
उत्तर:
सल्तनत काल में चित्रकला का पतन हुआ। फिर भी गुजरात, राजस्थान, मालवा के क्षेत्रों में चित्रकला जीवित रही। मध्यकालीन चित्रकला की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं –

  1. यहाँ धार्मिक जनजीवन से सम्बन्धित चित्र प्रस्तुत किये।
  2. मालवा और राजस्थानी चित्रकला शैलियों का विकास हुआ।
  3. गुजरात में जैन मुनियों द्वारा ताड़पत्र पर लिखे हुए ग्रन्थों में उच्चकोटि के छोटे-छोटे चित्र बनाये गये।
  4. मुगलकालीन चित्रों की विशेषता है-विदेशी पेड़-पौधों और उनके फूल-पत्तों, स्थापत्य अलंकरण की बारीकियाँ साज समान के साथ स्त्री आकृतियाँ, अलंकारिक तत्वों के रूप में विशिष्ट राजस्थानी चित्रकला।
  5. जहाँगीर के काल में छवि चित्र (व्यक्तिगत चित्र) प्राकृतिक दृश्यों एवं व्यक्तियों के सम्बन्धित चित्रण की पद्धति आरम्भ हुई।
  6. शाहजहाँ के काल में चित्रों में रेखांकन और बॉर्डर बनाने में विशेष प्रगति हुई।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ कौन-सी हैं? किसी एक का प्राचीनकाल एवं मध्यकाल के सन्दर्भ में तुलनात्मक विवरण लिखिए।
उत्तर:
सांस्कृतिक प्रवृत्तियों से आशय यहाँ की भारतीय संस्कृति के स्वरूप से है। भारत की प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ साहित्य, चित्रकला, वास्तुकला, मूर्तिकला, नृत्य एवं संगीत एवं अन्य ललित कलाएँ हैं।

वास्तुकला :
वास्तुकला मानव जीवन के रीति-रिवाजों और तत्कालीन समय की सभ्यता व समाज व्यवस्था पर प्रकाश डालती है। किसी भी युग के इतिहास का अनुमान उस युग की निर्मित इमारतों से लगाया जा सकता है। वास्तुशिल्प तत्कालीन समय के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनैतिक व सांस्कृतिक इतिहास की जानकारी देने में सक्षम होता है।

प्राचीनकाल व मध्यकाल की वास्तुकला का तुलनात्मक अध्ययन
प्राचीनकाल में वास्तुकला :
प्राचीन काल में लोग भवन निर्माण कला में दक्ष थे। विशाल अन्नागार, मकान, सुनियोजित नगर, बड़े प्रासाद, बन्दरगाह, स्नानागार, पक्की ढंकी हुई नालियाँ, भवनों के खिड़की-दरवाजे मुख्य मार्ग से विपरीत बनाना, भवनों में रसोई घर, स्नानागार, रोशनदान की पर्याप्त व्यवस्था, साधारण व राजकीय भवनों के निर्माण आदि तत्कालीन वास्तु शिल्प के उदाहरण हैं। सिन्धु सभ्यता के नगर भारत में प्रथम नगरीकरण के प्रमाण हैं।

वैदिककाल में यज्ञवेदियों, हवनकुण्डों, यज्ञ शालाओं, पाषाण-प्रासादों, खम्बों व द्वारों वाले भवनों, आश्रमों का उल्लेख मिलता है। इस काल में बड़े-बड़े राजप्रसादों व भवनों का उल्लेख मिलता है। मौर्य वास्तुकला के सर्वोत्तम नमूने अशोक के स्तम्भ, अशोक द्वारा निर्मित बौद्ध स्तूप, पाटलिपुत्र स्थित राज प्रसाद, गया में बारांबर तथा नागार्जुनी पहाड़ियों के पहाड़ों को काटकर तैयार किये गये चैत्य गृह-आवास आदि हैं।

गुप्तकाल में वास्तुकला चर्मोत्कर्ष पर थी। इस काल की विशेष उपलब्धि मन्दिर निर्माण रही है। मन्दिर ईंट तथा पत्थरों से बनाये जाते थे इनकी छतें सपाट होती थीं। सबसे पहले देवगढ़ (झाँसी, उ. प्र.) के दशावतार मन्दिर में शिखर का निर्माण हुआ, इसके पश्चात् ही मन्दिरों में शिखर का निर्माण होने लगा। गुप्तकाल में शिल्पकार लोहे तथा कांसे का काम करने में कुशल थे। नई दिल्ली में महरौली स्थित लौह स्तम्भ लौह प्रौद्योगिकी का अनुपम उदाहरण है। यह ईसा की चौथी शताब्दी में बना था इसमें अभी तक जंग नहीं लगी है।

पूर्व मध्यकाल में शासक अपने वैभव को प्रदर्शित करने के लिये विशाल मन्दिरों का निर्माण करवाते थे। इस काल में बने मन्दिरों में खजुराहो का मन्दिर समूह, ओसिया में ब्राह्मण तथा जैन मन्दिर, चित्तौड़गढ़ में कालिका देवी का मन्दिर व आबू में जैन मन्दिर इस काल की वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

मध्यकाल की वास्तुकला :
भारत में मध्यकालीन वास्तुशिल्प पर इस्लाम प्रभाव दिखायी देता है। विभिन्न सुल्तानों व मुगलों के समय बनी हुई इमारतों में भारतीय वास्तुकला का समन्वय ईरानी तुर्की व अन्य इस्लामी देशों में प्रचलित वास्तुकला व शैलियों के साथ हुआ। इस्लामी वास्तुकला में मुख्यतः मस्जिद, मकबरे, महल तोरण, गुम्बद, मेहराब तथा मीनारों का निर्माण किया गया। महरौली की कुब्बतुल इस्लाम मस्जिद, कुतुबमीनार, कुतुबी मस्जिद, अलाई दरवाजा, गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा, फिरोजशाह कोटला आदि भवनों का निर्माण सल्तनत काल में हुआ। इसी प्रकार हुमायूँ का मकबरा, आगरा का किला, फतेहपुर सीकरी के अगणित भवनों (विशेषकर बुलन्द दरवाजा, शेख चिश्ती का मकबरा, पंचमहल) मोती मस्जिद, लाल किला, जामा मस्जिद, ताजमहल आदि अद्वितीय भवनों का निर्माण मुगलकाल में हुआ।

मुगलकालीन भवन अपने रंग-बिरंगे टाइलों, महराबों, गुम्बद, ऊँची मीनारों, फूल-पत्तियों व ज्यामितीय के नमूनों के कारण प्रसिद्ध हैं। ये भवन सुन्दर, सफेद संगमरमर से निर्मित होने, बगीचों, दोहरे गुम्बदों, ऊँचे द्वार पथी, शानदार विशाल हॉलों के कारण विश्व प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 2.
प्राचीनकाल से लेकर मध्यकाल तक साहित्य का विकास किस प्रकार हुआ? लिखिए। (2009, 12)
उत्तर:
साहित्य समाज का दर्पण माना जाता है। भारत का इतिहास जितना गौरवशाली है, उतना ही उसका साहित्य समृद्धशाली है। भारतीय साहित्य के केन्द्र में संस्कृत साहित्य का अपार भण्डार है।

प्राचीन भारत में साहित्य का अपूर्व विकास हुआ। जिस समय अमेरिका, इंग्लैण्ड तथा पश्चिम के अनेक देशों में लोग पशुवत् असभ्यता का जीवन व्यतीत कर रहे थे, उसी समय भारत में वेदों की रचना हुई थी। वेदों की संख्या चार है-ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद। इसके अतिरिक्त आरण्यक व उपनिषदों की रचना हुई। वैदिक काल के पश्चात् रामायण, महाभारत तथा भगवद्गीता जैसे महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ लिखे गये। गुप्तकाल में साहित्य का सर्वाधिक विकास हुआ। इस काल में धर्मशास्त्र पर अनेक ग्रन्थ लिखे गये जिसमें स्मृति साहित्य, याज्ञवलक्य स्मृति, नारद स्मृति, काव्यायन स्मृति प्रमुख हैं।

कालिदास इस काल के प्रमुख साहित्यकार थे, उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं-अभिज्ञान शाकुन्तलम्, मालविकाग्निमित्रं, मेघदूत, विक्रमोर्वशीयम्, कुमारसंभव, रघुवंश, ऋतुसंहार। इसके अतिरिक्त इस काल के प्रमुख साहित्यकार विशाखदत्त, शूद्रक, विष्णु शर्मा व आर्यभट्ट थे। हर्षवर्धन काल के प्रमुख विद्वान् बाणभट्ट थे जिन्होंने कादम्बरी की रचना की। राजपूत काल में भी साहित्य के सृजन का कार्य उन्नति की ओर अग्रसर था। राजा मुंज, भोज, अमोघवर्ष आदि प्रमुख साहित्यकार थे। इस समय चिकित्सा, ज्योतिष, व्याकरण, वास्तुकला आदि विषयों पर ग्रन्थ लिखे गये।

मध्यकाल में साहित्य का विकास क्रम चलता रहा। इस काल का साहित्य सल्तनत एवं मुगलकालीन व्यवस्थाओं पर प्रकाश डालता है। तत्काली समय में व्यक्तिवादी इतिहास में लेखन कार्य प्रारम्भ हो चुका था। सल्तनत काल में धार्मिक एवं धर्म निरपेक्ष साहित्य का सृजन किया गया। अमीर खुसरो द्वारा रचित दोहे और पहेलियाँ आज भी लोकप्रिय हैं। मुगलकाल में कई भाषाओं का विकास हुआ। हिन्दी भाषा में कबीर, जायसी, सूरदास, तुलसीदास की रचनाओं का विशेष महत्त्व है। जबकि मीराबाई ने राजस्थानी व मैथिली भाषा का प्रयोग किया है। बंगाल में रामायण और महाभारत का संस्कृत से बंगाली भाषा में अनुवाद किया गया।

इस काल में फारसी तथा तुर्की भाषा में भी रचनाएँ लिखी गयीं। मुगलकाल में ही उर्दू साहित्य का विकास हुआ। प्रारम्भ में उर्दू को ‘जबान-ए-हिन्दर्वा’ कहा जाता था। अकबर द्वारा संस्कृत भाषा के अनेक ग्रन्थों का अनुवाद फारसी भाषा में करवाया गया था। इस प्रकार मध्यकाल में साहित्य का विकास विभिन्न प्रकार से होता रहा।

प्रश्न 3.
प्राचीनकाल से लेकर मध्यकाल तक की चित्रकला की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
चित्रकला का विकास मानव के विचारों की अभिव्यक्ति के चित्रात्मक स्वरूप पर आधारित है। विभिन्न कालों में चित्रकला का अंकन तत्कालीन समाज के चित्रकारों द्वारा किया गया।

सिन्धु सभ्यता में चित्रकला के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं। इस काल में प्राप्त बर्तनों एवं मोहरों पर अनेक चित्र मिलते हैं। भवनों पर चित्रकारी और रंगों का प्रयोग भी किया जाता था। वैदिक काल में मन की अभिव्यक्ति को दीवारों के साथ-साथ बर्तनों तथा कपड़ों पर कढ़ाई के रूप में अंकित किया जाता था। मौर्यकाल में चित्रकला का विकास लोककला के रूप में हुआ। मौर्यकालीन भवनों एवं प्रासादों के स्तम्भों पर चित्रकारी की जाती थी। अजन्ता की गुफाओं के कुछ चित्र ई. पू. प्रथम शताब्दी के हैं। यहाँ स्थित गुफा संख्या 10 में छद्दत जातक का चित्रांकन विशेष है। चित्रकला के सर्वोत्कृष्ट उदाहरण हमें गुप्तकाल में दिखाई देते हैं।

अजन्ता की गुफाओं के चित्र मुख्यतः धार्मिक विषयों पर आधारित हैं। इनमें बुद्ध और बोधिसत्व के चित्र हैं। इस काल की चित्रकला बाघ (म. प्र. में धार जिले में) की गुफाओं में दिखाई देती है। हर्ष के समय में कपड़ों पर चित्रकारी की जाती थी। विवाह कार्यों में मांगलिक दृश्यों का अंकन किया जाता था व महिलाओं द्वारा कच्ची मिट्टी के बर्तन को अलंकृत किया जाता था। राजपूत काल में चित्रकला पूर्णतः विकसित हो चुकी थी। इस काल में गुजरात शैली और राजपूताना शैली विकसित हो गयी थीं। मन्दिरों और राजमहलों को सजाने के लिये भित्ति चित्र बनाये जाते थे। लघु चित्रों को बनाने की कला भी इसी काल से शुरू हुई थी।

मध्यकालीन चित्रकला :

  1. यहाँ धार्मिक जनजीवन से सम्बन्धित चित्र प्रस्तुत किये।
  2. मालवा और राजस्थानी चित्रकला शैलियों का विकास हुआ।
  3. गुजरात में जैन मुनियों द्वारा ताड़पत्र पर लिखे हुए ग्रन्थों में उच्चकोटि के छोटे-छोटे चित्र बनाये गये।
  4. मुगलकालीन चित्रों की विशेषता है-विदेशी पेड़-पौधों और उनके फूल-पत्तों, स्थापत्य अलंकरण की बारीकियाँ साज समान के साथ स्त्री आकृतियाँ, अलंकारिक तत्वों के रूप में विशिष्ट राजस्थानी चित्रकला।
  5. जहाँगीर के काल में छवि चित्र (व्यक्तिगत चित्र) प्राकृतिक दृश्यों एवं व्यक्तियों के सम्बन्धित चित्रण की पद्धति आरम्भ हुई।
  6. शाहजहाँ के काल में चित्रों में रेखांकन और बॉर्डर बनाने में विशेष प्रगति हुई।

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प्रश्न 4.
मुगलकालीन स्थापत्य कला का वर्णन कीजिए।(2008, 09, 13, 17)
उत्तर:
मुगलकालीन स्थापत्य कला के अनेक प्रमाण उपलब्ध हैं। मुगलकालीन स्थापत्य कला की प्रमुख विशेषताएँ हैं-गोल गुम्बद, पतले स्तम्भ तथा विशाल खुले प्रवेश द्वार।

बाबर द्वारा भवन निर्माण :
बाबर का अधिकांश समय युद्ध करने में ही व्यतीत हुआ। उसे भवन बनवाने का समय नहीं मिला। जो भवन उसने बनवाये हैं, उनमें से मात्र दो ही भवन शेष हैं –

  1. पानीपत के काबुली बाग में स्थित मस्जिद
  2. रुहेलखण्ड में स्थित मस्जिद।

हुमायूँ द्वार भवन निर्माण :
हुमायूँ का शासनकाल स्थापत्य कला की दृष्टि से साधारण है। उसे भी नवीन इमारतें बनवाने का समय नहीं मिल सका। दिल्ली में उसने दीनपनाह नामक महल का निर्माण करवाया था जो शेरशाह द्वारा नष्ट कर दिया गया। आगरा और फतेहाबाद (हिसार) में दो मस्जिदों का निर्माण भी करवाया था।

शेरशाहकालीन स्थापत्य कला :
शेरशाह महान् प्रशासक होने के साथ-साथ एक महान् निर्माता भी था। उसके शासन काल की प्रमुख इमारते हैं –

  1. दिल्ली के समीप पुराने किले की मस्जिद
  2. सहसराम का मकबरा। इसमें सहसराम का मकबरा प्रसिद्ध है।

इसका निर्माण बड़े आकर्षक और प्रभावशाली ढंग से किया गया है।

अकबरकालीन स्थापत्य कला :
मुगलकालीन स्थापत्य कला का वास्तविक प्रारम्भ अकबर के शासन से होता है। इसके शासनकाल में अनेक विशाल और भव्य इमारतों का निर्माण हुआ। अकबरकालीन भवनों में हिन्दू स्थापत्य कला का प्रभाव अत्यधिक दृष्टिगोचर होता है। अकबर द्वारा निर्मित प्रमुख भवन निम्न हैं-हुमायूँ का मकबरा, आगरे का लाल किला, जहाँगीरी महल, अकबरी महल, फतेहपुर सीकरी (दीवाने-आम, दीवाने-खांस, बीरबल का महल, मरियम भवन, जामा मस्जिद, बुलन्द दरवाजा, सलीम चिश्ती का मकबरा) आदि। फतेहपुर सीकरी का बुलन्द दरवाजा स्थापत्य कला का एक भव्य तथा आश्चर्यजनक उदाहरण है। यह दरवाजा सड़क से 176 फीट ऊँचा है तथा सीढ़ियों से इसकी ऊँचाई 134 फीट है।

जहाँगीरकालीन स्थापत्य कला :
जहाँगीर को स्थापत्य कला की अपेक्षा चित्रकला से अधिक प्रेम था, अतः उसके शासन काल में अधिक भवनों का निर्माण नहीं हुआ। परन्तु जो भवन बने वे सुन्दर और आकर्षक हैं। ये निम्न हैं-अकबर का मकबरा सिकन्दरा, मरियम की समाधि, एत्माद्उद्दौला का मकबरा। इनमें एत्मादद्दौला का मकबरा सबसे आकर्षक है।

शाहजहाँकालीन स्थापत्य कला :
मुगलकालीन स्थापत्य कला का चरम विकास शाहजहाँकालीन इमारतों में झलकता है। शाहजहाँ की सर्वश्रेष्ठ कृति ताजमहल है। इसका निर्माण उसने अपनी प्रिय बेगम मुमताज महल की यादगार में किया था। इसके बनने में लगभग 22 वर्ष लगे तथा 50 लाख रुपये खर्च हुये। शाहजहाँ के काल को मुगल स्थापत्य कला का स्वर्ण युग कहा जाता है। इस काल की प्रमुख विशेषताएँ थीं-नक्काशी युक्त मेहराबें, बंगाली शैली में मुड़े हुए कंगूरे तथा जंगले के खम्भे। शाहजहाँ की अन्य प्रसिद्ध इमारतें दिल्ली का लाल किला, दीवाने खास और जामा मस्जिद।

औरंगजेबकालीन स्थापत्य कला :
औरंगजेब शुष्क और नीरस स्वभाव का था। उसे स्थापत्य कला से विशेष प्रेम नहीं था। अत: उसके शासनकाल में बहुत कम इमारतें बनीं और जो भी बनीं वे अत्यन्त घटिया किस्म की थीं।

प्रश्न 5.
मध्यकाल में मूर्तिकला का विकास किस प्रकार हुआ? लिखिए। (2008, 09, 12)
उत्तर:
मध्यकाल में दक्षिण भारत में मूर्तिकला का अभूतपूर्व विकास हुआ। मन्दिरों के बाह्य व अंतरंग भागों को अलंकृत करने के लिए तक्षण शिल्प व मूर्तिशिल्प का उपयोग किया गया। इस्लाम धर्म मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करता था। ऐसे में मध्यकालीन मूर्तिकला पर उसका प्रभाव पड़ा। मुगलकाल में इस कला की विशेष उन्नति नहीं हुई। अकबर के समय मूर्ति निर्माण की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। उसने चित्तौड़ के जयमल और पत्ता की हाथियों पर सवार मूर्तियाँ बनवायीं और उन्हें आगरा के किले के फाटक पर रखवा दिया। जहाँगीर शासनकाल में भी मूर्तिकला को प्रोत्साहित किया गया। आगरा किले में झरोखा दर्शन के नीचे अमरसिंह व कर्णसिंह की मूर्तियाँ लगायी गयीं। फतेहपुर सीकरी में महल के हाथी द्वार पर दो विशालकाय हाथियों की टूटी हुई मूर्तियाँ अब भी विद्यमान हैं।

जहाँगीर ने उदयपुर के राणा अमरसिंह एवं उनके पुत्र कर्णसिंह की मूर्तियाँ आगरा के महलों के बाग में रखवायीं। शाहजहाँ के समय मूर्तिकला को प्रोत्साहन नहीं दिया। औरंगजेब शुष्क और नीरस स्वभाव का था उसे मूर्तिकला से विशेष प्रेम नहीं था। इसलिये उसके शासनकाल में मूर्तिकला के विकास में उदासीनता आ गई। कुल मिलाकर मध्यकाल में मूर्ति के विकास को प्रोत्साहन नहीं मिला जिसके चलते मूर्तिकला प्रभावित हुई।

प्रश्न 6.
मध्यकाल में नृत्य व संगीत के विकास व उसके प्रभाव का समीक्षात्मक विवरण दीजिए।
उत्तर:
संगीत के विषय में मध्ययुगीन हिन्दू शासकों की विशेष रुचि रही है। नृत्य संगीत से सम्बन्धित कुछ ग्रन्थ लिपिबद्ध हो चुके थे, इससे भोज, सोमेश्वर और सारंगदेव का संगीत रत्नाकर बहुत प्रसिद्ध ग्रन्थ है। बाद में संगीत के कई अन्य ग्रन्थ भी रचे गये। तेरहवीं सदी में जयदेव द्वारा रचित ‘गीत गोविन्द’ इसी दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। मध्यकाल में भक्ति संगीत को अधिक महत्त्व प्राप्त हुआ। मीराबाई, तुलसीदास, कबीरदास और सूरदास के भजनों को लोग मन लगाकर गाते थे।

सल्तनत काल में नये रागों एवं वाद्य यन्त्रों से हिन्दुस्तानी संगीत का परिचय हुआ। यद्यपि मुस्लिमों के प्रसिद्ध ग्रन्थ कुरान में संगीत को वर्जित माना जाता है। परन्तु समय-समय पर सुल्तानों, सामन्तों व खलीफाओं ने नृत्य-संगीत को प्रोत्साहन दिया। सल्तनत काल का प्रसिद्ध संगीतकार अमीर खुसरो था जिसने अपनी पुस्तक ‘नूरह सिपहर’ में संगीत की व्याख्या की है। इस पुस्तक में उन्होंने लिखा है कि भारतीय संगीत केवल मनुष्य मात्र को ही प्रभावित नहीं करता वरन् यह पशुओं तक को मन्त्रमुग्ध कर देता है। अमीर खुसरो ने भारतीय-ईरानी संगीत सिद्धान्तों के मिश्रण से कुछ नवीन रागों का आविष्कार किया। अमीर खुसरो को ‘कब्बाली का जनक’ माना जाता है। उस काल में ख्याल तराना आदि संगीत की नवीन विधाओं के कारण संगीत का रूप परिवर्तित हो गया। नृत्य-संगीत उस काल में मनोरंजन का प्रमुख साधन था।

मुगलकाल में नृत्य संगीत कला फली-फूली। मुगल बादशाह संगीत प्रेमी होते थे। प्रत्येक राजकुमार को संगीत को विधिवत् शिक्षा दी जाती थी। बाबर स्वयं संगीत प्रेमी था। वह स्वयं गीतों का रचयिता था। उसके बनाये हुए गीत बहुत समय तक प्रचलित रहे। हुमायूँ व शेरशाह सूरी को भी संगीत का बड़ा शौक था। मुगल सम्राट अकबर ने अपने दरबार में संगीतज्ञों को प्रश्रय दिया। अकबर स्वयं नक्कारा बजाने में माहिर था। संगीतशास्त्र में उसकी बहुत रुचि थी। अकबर के दरबार में नवरत्नों में से एक रत्न तानसेन था जो उस काल का सर्वश्रेष्ठ संगीतकार था। अबुल फजल के अनुसार उस जैसा गायक न तो है और न ही होगा।

तानसेन के गुरु बाबा हरिदास थे। तानसेन के अतिरिक्त 36 अन्य गायकों को भी अकबर के दरबार में संरक्षण मिला हुआ था। तत्कालीन समय में संगीत के संस्कृत ग्रन्थों का फारसी में अनुवाद किया गया। अकबर के काल में ध्रुपद गायन की चार शैलियाँ प्रचलन में थीं। मुगलकाल में जहाँगीर के दरबार में खुर्रमदाद, मक्खू, चतुरखाँ और हमजा आदि संगीतज्ञ थे। इसी प्रकार शाहजहाँ के दरबार में रामदास, जगन्नाथ, सुखसैन और लाल खाँ आदि प्रमुख संगीतज्ञ थे। औरंगजेब संगीत कला का विरोधी था। अत: मुगलकालीन संगीत का विकास शाहजहाँ के पश्चात् रुक गया।

मध्यकाल में भारतीय नृत्य की शास्त्रीय शैलियाँ दिखाई देती रहीं। इनमें भरतनाट्यम्, कुचीपुड़ी, कत्थकली आदि शास्त्रीय शैलियों के नृत्य दक्षिण भारतीय क्षेत्रों में प्रचलित रहे हैं। भरतनाट्यम् व कुचीपुड़ी नृत्य कृष्णलीला पर आधारित होते थे। जबकि कत्थक नृत्य उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब व मध्य प्रदेश तक सीमित था। इसमें कृष्ण लीलाओं तथा अन्य पौराणिक कथाओं पर आधारित नृत्य किये जाते थे। दरबारों में नृत्य संगीत चलता था जो कि मनोरंजन का प्रमुख साधन था।

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प्रश्न 7.
ललित कलाओं का विकास प्राचीनकाल से मध्यकाल तक किस प्रकार हुआ ? लिखिए।
उत्तर:
अन्य ललित कलाओं में नाट्य, रंगोली व वनवासी कलाओं को शामिल किया जाता है। भारतीय परम्पराओं में इसका प्रचलन अत्यन्त प्राचीन काल से है।
सिन्धु सभ्यता में ललित कला :
सिन्धु सभ्यता में ललित कलाएँ प्रचलन में थीं। सिन्धु सभ्यता के राखीगढ़ी से प्राप्त ऊँचे चबूतरे पर बनायी गयी अग्निवेदिकाएँ, कालीबंगा के फर्श की अलंकृत ईंटें, पक्की मिट्टी की जालियाँ, मूर्तियाँ, अलंकृत आभूषण, बर्तनों पर चमकदार लेप, पशु-पक्षियों का अंकन, मंगल चिह्न स्वास्तिक, सूर्य आकृति आदि से ललित कलाओं के प्रचलन की जानकारी प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त उस काल में थियेटर की जानकारी भी मिलती है। जिसका उपयोग मुख्यतः नाट्य व नृत्य संगीत के लिये किया जाता होगा।

वैदिक काल में ललित कला :
वैदिक काल में भी ललित कलाओं का उल्लेख प्राप्त होता है। वैदिक काल में लौकिक धर्म के विकास के साथ-साथ लोक संस्कृति का भी विकास हुआ। इस काल में प्रमुखतया मंगल चिह्नों, भवनों की सजावट, जादू कला, यज्ञ वेदिकाओं आदि के उल्लेख मिलते हैं।

मौर्यकाल में ललित कला :
मौर्यकाल में लोक कलाओं का प्रचलन था। तमाशे दिखाकर लोग जनता का मनोरंजन करते थे। यह काल नट (मदारी), विभिन्न प्रकार की बोलियाँ बोलकर मनोरंजन करने वालों, रस्सी पर नाचने वालों और रंगमंच पर अभिनय कर जीवन-यापन करने वालों का था।

गुप्तकाल में ललित कला :
गुप्तकाल में ललित कलाओं का प्रचलन रहा। गुप्तकालीन सिक्कों पर सुन्दर चित्रण इस कला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। काष्ठ शिल्प, पाषाण शिल्प, धातु शिल्प, ताबीज, हाथी दाँत शिल्प, आभूषण आदि तत्कालीन ललित कलाओं के परिचायक हैं। गुहा मन्दिरों में अलंकरण, दीवारों पर चित्रकारी, प्रेक्षणिकाएँ, चमर दुलाते द्वारपाल, मूर्तियों में केश सज्जा, यक्ष, पशु-पक्षी, नदी, झरनों का अंकन आदि ललित कलाओं के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। तत्कालीन समय में नाट्यशालाओं के लिये प्रेक्षागृह तथा रंगशाला जैसे शब्दों का उल्लेख मिलता है।

पूर्वमध्यकाल में ललित कला :
पूर्वमध्यकाल में नट, जादूगर, हाथी दाँत के कारीगर आदि का उल्लेख कला सौन्दर्य के सन्दर्भ में मिलता है। मन्दिरों की दीवारें पर बनी मूर्तियाँ राग-रागिनी, नायक-नायिकाओं का चित्रण, पादप-पत्रों, पुष्पों व पशुओं का चित्रण, लोक चित्रण आदि इस काल की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ हैं। पूर्व मध्यकाल में विभिन्न ऐतिहासिक व पौराणिक नृत्य नाटिकाएँ भी ललित कला में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

मध्यकाल में ललितकला :
मध्यकाल में ललितकलाओं का अभूतपूर्व विकास हुआ। वृन्दावन, मथुरा आदि में रासलीलाओं का मंचन किया जाता था। इस समय महाकाव्यों के अतिरिक्त ऐतिहासिक पात्रों पर भी नाटिकाओं का मंचन किया जाता था। विजय नगर के शासक हरिहर द्वितीय के पुत्र वीरू दादा ने ‘नारायण विलास’ नामक नाटक की रचना की, साथ ही उन्मत्तराघव एकांकी भी लिखा। महाकवि बाणभट्ट ने ‘कुमार संभव’ तथा रामचन्द्र ने ‘जगन्नाथवल्लभ’ की रचना की। मध्यकाल में नाटकों के मंचन में सामाजिक व धार्मिक नाटकों को प्राथमिकता प्रदान की जाती थी। उस काल में सुलेख कला भी विकसित हुई। इसके अतिरिक्त अलंकृत बर्तन, अलंकृत दीवारें, महल, मीनारें, मकबरे आदि पर नक्काशीदार जालियाँ, जरी के कपड़े, कशीदाकारी, पच्चीकारी कला, नक्काशीदार फब्बारे आदि तत्कालीन ललित कलाओं के अभूतपूर्व उदाहरण हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रामायण की रचना किसने की थी?
(i) महर्षि वाल्मिकी
(ii) महर्षि वेद व्यास
(iii) महर्षि पतंजलि
(iv) महर्षि कालिदास।
उत्तर:
(i) महर्षि वाल्मिकी

प्रश्न 2.
नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना किस काल में हुई थी?
(i) गुप्तकाल
(ii) मौर्यकाल
(iii) वैदिक काल
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) गुप्तकाल

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना ………… काल में हुई थी।
  2. भोपाल के निकट ………… शैलाश्रय है। (2012)
  3. माउण्ट आबू का …………. मन्दिर बहुत प्रसिद्ध है।
  4. बौद्ध ग्रन्थ ‘मिलिन्द के प्रश्न’ की रचना ………… ने की।
  5. आर्यभट्टीयम् पुस्तक गुप्तकाल में …………. के द्वारा लिखी गयी। (2009)
  6. रामायण और महाभारत भारतवर्ष के दो ………… हैं। (2013)

उत्तर:

  1. गुप्तकाल
  2. भीमबेटका
  3. दिलवाड़ा
  4. नागसेन
  5. आर्यभट्ट
  6. महाकाव्य।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
सामवेद विश्व का प्राचीनतम ग्रन्थ है। (2008)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 2.
प्रथम नगरीकरण गुप्तकाल में हुआ था। (2008)
उत्तर:
असत्य

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प्रश्न 3.
प्रारम्भ में उर्दू को जबान-ए-हिन्द कहा जाता था। (2011)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
कब्बाली का जनक अमीर खुसरो था। (2010)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना मौर्य काल में हुई। (2009)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 6.
कम्बन नामक कवि ने तमिल ‘रामायण’ की रचना की। (2014)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 7.
सिंधु सभ्यता में लिपि का ज्ञान था। (2015)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 8.
वैदिक काल साहित्य सृजन की दृष्टि से समृद्ध है। (2017)
उत्तर:
सत्य।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 11 प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ - 2

उत्तर:

  1. → (ग)
  2. → (घ)
  3. → (क)
  4. → (ख)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
भिक्षुओं के रहने के मठ।
उत्तर:
बिहार

प्रश्न 2.
अशोक के अभिलेख किन प्रमुख लिपियों में हैं?
उत्तर:
ब्राह्मी एवं खरोष्ठि लिपि

प्रश्न 3.
पाली और संस्कृत भाषा का विकास किस धर्म में हुआ?
उत्तर:
बौद्ध धर्म

प्रश्न 4.
श्रोतसूत्र का विषय क्या है? (2016)
उत्तर:
यज्ञ

प्रश्न 5.
मौर्यकालीन सामूहिक पूजा के मन्दिर। (2008)
उत्तर:
चैत्य।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सांस्कृतिक प्रवृत्तियों से क्या आशय है?
उत्तर:
सांस्कृतिक प्रवृत्तियों से आशय भारतीय संस्कृति के स्वरूप से है। जिसमें साहित्य, चित्रकला, वास्तुकला, मूर्तिकला, नृत्य एवं संगीत तथा अन्य ललित कलाएँ शामिल हैं।

प्रश्न 2.
साहित्य क्या है?
उत्तर:
साहित्य समाज का दर्पण है। भारत का इतिहास जितना गौरवशाली है उतना ही साहित्य समृद्धशाली है। भारतीय साहित्य के केन्द्र में संस्कृत साहित्य का अक्षय भण्डार है।

प्रश्न 3.
महाकाव्य कालीन काल में किन ग्रन्थों की रचना की गयी थी?
उत्तर:
महाकाव्य कालीन काल में रामायण एवं महाभारत ग्रन्थों की रचना की गयी थी।

प्रश्न 4.
मौर्यकालीन साहित्य में कौन-सी दो लिपियाँ प्रयोग में लायी जाती थीं?
उत्तर:
मौर्यकालीन साहित्य में ब्राह्मी एवं खरोष्ठि लिपियाँ प्रयोग में लायी जाती थीं।

प्रश्न 5.
पतंजलि कौन थे?
उत्तर:
शुंग सातवाहन के काल में पतंजलि जैसे विद्वान हुए, इन्होंने पाणिनी की अष्टाध्यायी पर महाभाष्य लिखा व संस्कृत भाषा के नियमों को संशोधित रूप में प्रस्तुत किया।

प्रश्न 6.
गुप्तकाल में शिक्षा के प्रमुख केन्द्र कौन से थे?
उत्तर:
गुप्तकाल में शिक्षा के प्रमुख केन्द्र काशी, मथुरा, अयोध्या, पाटलिपुत्र आदि थे।

प्रश्न 7.
शून्य के सिद्धान्त का प्रारम्भ और दशमलव प्रणाली के विकास का श्रेय किस युग के गणितज्ञों को है?
उत्तर:
शून्य के सिद्धान्त का प्रारम्भ और दशमलव प्रणाली के विकास का श्रेय गुप्त युग के गणितज्ञों को है।

प्रश्न 8.
बाणभट्ट ने किन दो महान् ग्रन्थों की रचना की?
उत्तर:
बाणभट्ट ने दो महान् ग्रन्थों-

  1. हर्षचरित्र, तथा
  2. कादम्बरी की रचना की।

प्रश्न 9.
कुषाण काल में मूर्तिकला की किन दो शैलियों का विकास हुआ ?
उत्तर:
कुषाण काल में मूर्तिकला की दो प्रमुख शैलियों का विकास हुआ-गान्धार शैली और मथुरा शैली।

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प्रश्न 10.
अकबरकालीन स्थापत्य कला की प्रमुख इमारतें कौन-सी हैं?
उत्तर:
फतेहपुर सीकरी का दीवाने आम, दीवाने खास, आगरा का किला, जोधाबाई का महल, पंचमहल, जामा मस्जिद, बुलन्द दरवाजा आदि अकबरकालीन स्थापत्य कला की प्रमुख इमारतें हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सांस्कृतिक प्रवृत्तियों से क्या आशय है? (2008)
उत्तर:
सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ हमें प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर से परिचित कराती हैं। किसी भी देश का इतिहास तभी महत्त्वपूर्ण होता है जब उसके सांस्कृतिक प्रतिमानों का अध्ययन वैज्ञानिक आधार पर किया जाए। भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है। भारत प्राचीनकाल से विश्व भर में अपनी समृद्ध संस्कृति के लिये जाना जाता रहा है। इसकी प्रमुख विशेषता निरन्तरता के साथ पुरातनता, अध्यात्मवाद, एकीकरण व समन्वय की शक्ति आदि है। भारतीय संस्कृति मानव समाज की अमूल्य निधि है।

प्रश्न 2.
“वैदिक काल साहित्य सृजन की दृष्टि से समृद्ध है।” व्याख्या करें। (2008)
उत्तर:
वैदिक काल साहित्य सृजन की दृष्टि से समृद्ध है। इस काल की साहित्यिक रचनाओं में प्राचीन जीवन मूल्यों का सजीव वर्णन किया गया है। वैदिक साहित्य में वेद, ब्राह्मण ग्रन्थ, आरण्यक, उपनिषद्, वेदांग, सूत्र, महाकाव्य स्मृति ग्रन्थ, पुराण आदि आते हैं। वेदों की संख्या चार हैं-ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। वैदिक साहित्य का सबसे प्राचीनतम ग्रन्थ ऋग्वेद हैं।

महाकाव्य कालीन समय में रामायण एवं महाभारत जैसे ग्रन्थों की रचना की गई जिसमें उस समय का सामाजिक एवं राजनीतिक चित्रण मिलता है। रामायण की रचना महर्षि वाल्मिकी द्वारा एवं महाभारत की रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी।

प्रश्न 3.
बौद्ध साहित्य के बारे में वर्णन कीजिए।
अथवा
बौद्ध धर्म में ‘त्रिपिटकाएँ यानि तीन टोकरियाँ’ का क्या आशय है ?
उत्तर:
बौद्ध धर्म में पाली और संस्कृत भाषाओं को अत्यधिक समृद्ध किया है। बौद्ध धर्म ने त्रिपिटकाएँ यानि तीन टोकरियाँ-विनयपटिक, सूतपिटक और अभिधम्मपिटक। विनय-पिटक में दैनिक जीवन के नियम व उपनियम हैं। सूतपिटक में नैतिकता और चार महासत्यों पर बुद्ध के संवाद और संभाषण संग्रहीत हैं। अभिधम्मपिटक में दर्शन और तत्व संग्रहीत हैं। बौद्ध साहित्य में दीपवंश, महावंश, दिव्यावदान, मिलिन्द पन्हों, महोबोधि वंश, महावंश टीका, आर्य मंजूश्री मूलकल्प आदि शामिल हैं।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित साहित्यकारों की एक-एक मुख्य रचना का नाम लिखिएभारवि, माघ, कल्हण, विल्हण, परिमल, बल्लाल, हरिषेण, वज्जिका, वराहमिहिर।
उत्तर:
साहित्यकार – रचना
1. भारवि – किरातार्जुनीय
2. माघ – शिशुपाल वध
3. कल्हण – राज तरंगिणी
4. विल्हण – विक्रमांक चरित्र
5. परिमल – नवसाहसांक चरित्र
6. बल्लाल – भोज प्रबन्ध
7. हरिषेण – प्रयाग प्रशस्ति लेख
8. वज्जिका – कौमुदी महोत्सव
9. वराहमिहिर – वृहत्संहिता

प्रश्न 5.
कालिदास की प्रमुख रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
कालिदास की प्रमुख रचनाएँ अभिज्ञान शाकुन्तलम्, मालविकाग्निमित्र, मेघदूत, विक्रमोर्वशीयम, कुमारसम्भव, रघुवंश, ऋतुसंहार आदि हैं।

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प्रश्न 6.
राजपूतकालीन चित्रकला की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (2008)
उत्तर:
राजपूत काल में चित्रकला पूर्ण विकसित स्वरूप में आ चुकी थी। इस काल में चित्रकला की अनेक क्षेत्रीय शैलियाँ विकसित हो चुकी थीं; जैसे-गुजरात शैली, राजपूताना शैली। गुजरात शैली में जैन जीवन पद्धति एवं धर्म से सम्बन्धित चित्र हैं। राजपूताना शैली में राधाकृष्ण की रास लीला व नायक-नायिका के भेद सम्बन्धित चित्र हैं। मन्दिरों और राजमहलों को सजाने के लिये भित्ति चित्र बनाये जाते थे। लघु चित्रों को बनाने की कला भी इसी काल से प्रारम्भ हुई। पुस्तकों को आकर्षक बनाने के लिये यह चित्र बनाये जाते थे।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित राजपूतकालीन प्रमुख मन्दिर कहाँ स्थित हैं?
कन्दरिया महादेव, दिलवाड़ा मन्दिर, लिंगराज मन्दिर, मुक्तेश्वर मन्दिर, सूर्य मन्दिर, महाबलिपुरम् और वृहदीश्वर मन्दिर।
अथवा
राजपूतकालीन किन्हीं चार मन्दिरों के नाम एवं उनके स्थान बताइए। (2010, 15)
उत्तर:
राजपूतकालीन प्रमुख मन्दिर
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 11 प्रमुख सांस्कृतिक प्रवृत्तियाँ - 3

प्रश्न 8.
सिन्धु सभ्यता में मूर्ति शिल्प की विशेषताएँ बताइए। (2011)
उत्तर:
सिन्धु सभ्यता में धातु की मूर्तियों का चलन शुरू हो चुका था। मोहनजोदड़ो से एक नर्तकी की कांस्य मूर्ति मिली है। इसी सभ्यता का एक कांस्य रथ मूर्ति के रूप में मिला है। दो पहिए वाले रथ को दो बैल खींच रहे हैं। इसी समय की अन्य मूर्तियों में हाथी, गैंडा, कूबड़दार बैल सर्वाधिक प्राप्त हैं। अन्य पशु-मूर्तियों में कुत्ता, भेड़, सुअर, बन्दर और अन्य पशु-पक्षियों का अंकन मोहरों पर मिलता है। सिन्धु सभ्यता में मृणमूर्तियाँ बहुत मिलती हैं। सिन्धु सभ्यता की मोहरें वर्गाकार, आयतकार व बटन के आकार की हैं। ये गोमेद, चर्ट और मिट्ठी की हैं। लोथल के देसलपुर से ताँबे की मोहर भी प्राप्त हुई हैं। इसमें एक चौकी पर पशुपति शिव आसीन हैं जिनके आस-पास हाथी, चीता, गैंडा, भैंस आदि का अंकन मिलता है।

प्रश्न 9.
गुप्तकाल साहित्य का स्वर्ण युग था। कारण बताइए। (2009)
उत्तर:
गुप्तकाल साहित्य का स्वर्ण युग-गुप्त शासकों के शासन काल में साहित्य जिस रूप में पुष्पित-फलित हुआ, वह अद्वितीय है। इस काल में ज्ञान-विज्ञान की अनेक विधाओं में साहित्य सृजन किया गया। स्मृति साहित्य का सृजन इसी काल में किया गया। याज्ञवल्क्य स्मृति, नारद स्मृति, कात्यायन स्मृति आदि प्रमुख हैं। रामायण तथा महाभारत को गुप्तकाल में लिपिबद्ध किया गया। बौद्ध दार्शनिक असंग ने महायानसूत्रानंकार व योगाचार भूमिशास्त्र, वसुबंध ने अभिधर्म कोष की रचना की। जैन लेखकों में जिनचन्द्र, सिद्धसेन, देवनन्दिन आदि प्रमुख हैं। गुप्तकालीन साहित्य को देखकर प्रतीत होता है कि उस युग में प्रचलित शिक्षा पद्धति उत्तम रही होगी। नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना इसी काल में हुई थी। इसीलिए गुप्तकाल साहित्य का स्वर्ण युग था।

प्रश्न 10.
“सिन्धु सभ्यता में नृत्य संगीत की परम्परा थी।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में नृत्य संगीत की परम्परा अत्यन्त प्राचीन है। नृत्य के माध्यम से कलाकार अपनी कला को प्रकट करता है। जबकि संगीत का उपयोग मनोरंजन के साथ-साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक अवसरों पर किया जाता है।

सिन्धु सभ्यता में नृत्य संगीत की परम्परा थी, इसके स्पष्ट प्रमाण भी उपलब्ध हैं। मोहनजोदड़ो से प्राप्त कांस्य नर्तकी की प्रतिमा इस बात की पुष्टि करती है कि तत्कालीन समय में नृत्यकला, मनोरंजन आदि भाव एवं मोहरों पर ढोलक का अंकन प्राप्त होता है, जो उस समय संगीत के होने का प्रमाण देती है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि सिन्धु सभ्यता में नृत्य तथा संगीत कला लोकप्रिय रही होगी।

प्रश्न 11.
गुप्तकाल में नृत्य-संगीत कला का वर्णन कीजिए। (2008, 09)
उत्तर:
गुप्तकाल में नृत्य-संगीत विधा का बहुत विकास हुआ। तत्कालीन समय में वसन्तोत्सव, कौमुदी महोत्सव, दीपोत्सव आदि पर नृत्य-संगीत का प्रचलन था। उस काल में गणिकाओं का उल्लेख मिलता है जिनका प्रमुख कार्य नृत्य और गायन था। गुप्त शासकों द्वारा कलाकारों को प्रश्रय देने की जानकारी भी मिलती है। समुद्रगुप्त स्वयं एक श्रेष्ठ वीणावादक थे इसलिये अपनी स्मृति को जीवित रखने के लिये उन्होंने वीणाधारी प्रकार के सिक्कों को चलवाया। गुप्तकालीन वाघ की गुफाओं में नृत्य-संगीत का एक महत्त्वपूर्ण चित्र मिलता है जो तत्कालीन समय में नृत्य-संगीत के वैभव के परिचायक हैं। मालविकाग्निमित्र से स्पष्ट होता है कि नगरों में संगीत की शिक्षा के लिये कलाभवन और आचार्य भी होते थे। इस प्रकार गुप्तकाल में नृत्य-संगीत के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं।

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प्रश्न 12.
मुगलकाल में किन-किन भाषाओं का विकास हुआ?
उत्तर:
मुगलकाल में, वर्तमान में प्रचलित भाषाओं में से कई भाषाओं का विकास हुआ। कबीर, जायसी, सूरदास, तुलसीदास आदि की रचनाओं का हिन्दी भाषा में विशेष महत्त्व है। मीरा ने राजस्थानी भाषा व मैथली शब्दों का प्रयोग किया। बंगाल में रामायण और महाभारत का संस्कृत से बंगाली भाषा में अनुवाद किया गया। महाराष्ट्र में नामदेव तथा एकनाथ मराठी के प्रसिद्ध सन्त और साहित्यकार हुए। मुगलकाल में शासक साहित्य प्रेमी थे। सभी ने विद्वानों को संरक्षण प्रदान किया था। इस काल में फारसी और तुर्की भाषा में रचनाएँ लिखी गईं। मुगलकाल में उर्दू साहित्य का सबसे अधिक विकास हुआ। प्रारम्भ में उर्दू को ‘जबान-ए-हिन्दर्वा’ कहा जाता था। अकबर ने संस्कृत भाषा के अनेक ग्रन्थों का अनुवाद फारसी भाषा में करवाया था।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित लेखकों की रचनाएँ लिखिएबाबर, गुलाबदत्त, अब्बास खान, अबुल फजल, मलिक मोहम्मद जायसी, सूरदास, तुलसीदास।
उत्तर:

प्रश्न 14.
जैन साहित्य के बारे में वर्णन कीजिए। (2010, 15)
अथवा
जैन साहित्य के बारे में कोई चार बिन्दु लिखिए। (2017)
उत्तर:
जैन साहित्य-इस साहित्य की तीन शाखाएँ हैं –

  1. धार्मिक ग्रन्थ, दर्शन और धर्म निरपेक्ष लेखन।
  2. इनमें मुख्यतः काव्य, दन्त कथाएँ, व्याकरण एवं नाटक हैं। इनमें से अधिकार रचनाएँ अभी तक पाण्डुलिपि के रूप में है और गुजरात तथा राजस्थान के चैत्यों में मिलती हैं। रचनाएँ हैं-अंग, पंग, प्रकीर्ण, छेद, सूत्र और मलसूत्र।
  3. अन्तिम चरण में आख्यान एवं दन्तकथाएँ लिखने के लिए उन्होंने प्राकृत के स्थान पर संस्कृत भाषा का प्रयोग किया। व्याकरण और काव्यशास्त्र पर उनके कार्य से संस्कृत की वृद्धि में काफी योगदान हुआ।
  4. जैन साहित्य में भद्रबाहु का कथसूत्र, हेमचन्द्र का परिशिष्ट पर्वन प्रमुख ग्रन्थ हैं।

प्रश्न 15.
सल्तनतकालीन नृत्य-संगीत का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सल्तनत काल में नवीन रागों एवं वाद्य यन्त्रों से हिन्दुस्तानी संगीत का परिचय हुआ। यद्यपि कुरान में संगीत को वर्जित माना गया है। किन्तु समय-समय पर सुल्तानों, सामन्तों आदि खलीफाओं ने इसे प्रोत्साहित किया। इस समय का प्रसिद्ध संगीतकार अमीर खुसरो था जिसने संगीत का वर्णन अपनी पुस्तक ‘नूरह सिपहर’ (नव आकाश) में किया है। इस पुस्तक में लिखा है कि ‘भारतीय संगीत से हृदय और आत्मा उद्वेलित हो जाते हैं। भारतीय संगीत मात्र मनुष्य को ही प्रभावित नहीं करता वरन् यह पशुओं तक को मन्त्र मुग्ध कर देता है। हिरन संगीत सुनकर अवाक खड़े रह जाते हैं और उनका आसानी से शिकार कर लिया जाता है।’ अमीर खुसरो ने भारतीय ईरानी संगीत सिद्धान्तों के मिश्रण से कुछ नवीन रागों को ईजाद किया। कब्बाली का जनक अमीर खुसरो था। तत्कालीन समय में ख्याल तराना जैसी संगीत की नई विधाओं के कारण संगीत के रूप में परिवर्तन आया।

प्रश्न 16.
अमृतसर के हरिमन्दिर की प्रसिद्धि का क्या कारण है?
उत्तर:
गुरुद्वारों में अमृतसर का हरिमन्दिर तत्कालीन समय की अनुपम कृति है। इसका निर्माण 1588 से 1601 ई. के बीच किया गया। यह स्वर्ण मन्दिर अमृतसर नामक सरोवर के मध्य बना हुआ। यह 20 मीटर लम्बे और 20 मीटर चौड़े चार कोनों में चार बुर्जियाँ और बीच में मुख्य गुम्बद है। बाद में इस गुम्बद को महाराजा रणजीत सिंह ने सोने की प्लेटों से सुसज्जित कर दिया। इसलिए यह हरिमन्दिर स्वर्ण मन्दिर के नाम से पुकारा जाने लगा। इसकी चारों दिशाओं में चार चाँदी की दीवारों से मढ़े हुए द्वार हैं। इसकी दीवारें सफेद संगमरमर से बनी हुई हैं।

प्रश्न 17.
मुगलकालीन नृत्य-संगीत कला का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मुगलकालीन में नृत्य-संगीत कला फली-फूली। बाबर स्वयं संगीत प्रेमी था। हुमायूँ व शेरशाह सूरी को भी संगीत का शौक था। मुगल सम्राट अकबर ने संगीतज्ञों को आश्रय दिया। अकबर के दरबार में नवरत्नों में से तानसेन उस युग का सर्वश्रेष्ठ संगीतज्ञ था। उस जैसा गायक हजारों वर्षों से नहीं हुआ है। तानसेन की शिक्षा ग्वालियर में हुई थी। तानसेन के अतिरिक्त 36 गायकों को अकबर के दरबार में संरक्षण प्राप्त था। अकबर के समय ध्रुपद गायन की चार शैलियाँ चलन में थीं। मुगलकाल में संगीत के संस्कृत ग्रन्थों का फारसी में अनुवाद किया गया। मुगलकाल में जहाँगीर के समय खुर्रम दाद, मक्खू, चतुरखाँ और हमजा आदि संगीतज्ञ थे। इसी तरह शाहजहाँ के समय रामदास, जगन्नाथ, सुखसैन और लाल खाँ आदि प्रमुख संगीतज्ञ थे। औरंगजेब संगीत कला का विरोधी था। अत: मुगलकालीन नृत्य-संगीत कला शाहजहाँ के बाद पतन की ओर बढ़ने लगी।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 11 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राचीन भारतीय इतिहास जानने के साहित्यिक स्रोतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्राचीन भारतीय इतिहास जानने के प्रमुख साहित्यिक स्रोत निम्नलिखित हैं –
(1) वैदिक साहित्य :
आर्यों के प्राचीनतम ग्रन्थ वेद हैं, जिनकी संख्या चार है। ये वेद हैं-ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद तथा अथर्ववेद। इनमें सबसे प्राचीनतम ऋग्वेद है। ऋग्वेद में वैदिककालीन आर्यों के सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक जीवन का विवरण मिलता है तो सामवेद, यजुर्वेद तथा अथर्ववेद में उत्तर वैदिक कालीन सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन की विवेचना की गयी है। ऋग्वेद में आर्यों और अनार्यों के मध्य होने वाले संघर्षों तथा आर्यों के राजनीतिक संगठन का भी उल्लेख है।

(2) ब्राह्मण ग्रन्थ तथा उपनिषद् :
ब्राह्मण ग्रन्थों की रचना यज्ञ तथा कर्मकाण्डों के विधान को समझने के लिए की गयी थी। प्रमुख ब्राह्मण ग्रन्थ-ऐतरेय, शतपथ तथा पंचविश थे। उपनिषदों से तत्कालीन दार्शनिक, सामाजिक तथा धार्मिक चिन्तन का ज्ञान प्राप्त होता है।

(3) पुराण :
पुराणों की संख्या अठारह है परन्तु इनमें वायु, विष्णु, मत्स्य, भविष्य तथा भागवत पुराण सर्वाधिक महत्त्व के हैं। यद्यपि ये सभी धार्मिक ग्रन्थ हैं परन्तु इनका सावधानी से अध्ययन करने पर तत्कालीन इतिहास की पर्याप्त जानकारी हो जाती है।

(4) रामायण तथा महाभारत :
रामायण तथा महाभारत वेदों के पश्चात् सर्वाधिक महत्त्व के ग्रन्थ हैं। रामायण के लेखक महाकवि वाल्मीकि थे तथा महाभारत के मुनि व्यास थे। इन दोनों काव्य ग्रन्थों से हमें उस काल के सामाजिक, थार्मिक तथा आर्थिक जीवन की पर्याप्त जानकारी होती है।

(5) बौद्ध तथा जैन ग्रन्थ :
उपर्युक्त धर्मग्रन्थों के समान ही बौद्ध तथा जैन धर्म के ग्रन्थों का भी अपना विशेष महत्त्व है। प्रमुख बौद्ध ग्रन्थ हैं-विनयपिटक, अभिधम्मपिटक तथा सूतपिटक। इन तीनों ग्रन्थों में भगवान बुद्ध के उपदेशों का उल्लेख करने के साथ-साथ तत्कालीन राजनीतिक घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। मौर्यकालीन सामाजिक तथा राजनीतिक दशा का ज्ञान कराने में दीपवंश व महावंश नामक अन्य बौद्ध ग्रन्थ सहायक होते हैं।

बौद्ध ग्रन्थों के समान जैन ग्रन्थ भी ऐतिहासिक जानकारी कराने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं। जैन ग्रन्थों में तत्कालीन भारत के राजतन्त्रों तथा गणतन्त्रों की व्यवस्था पर प्रकाश डाला गया है। आचार्य हेमचन्द्र द्वारा लिखित ‘परिशिष्ट पर्व’ नामक ग्रन्थ का विशेष महत्त्व है।

(6) साहित्यिक ग्रन्थ :
प्राचीन काल में धार्मिक ग्रन्थों के अतिरिक्त अनेक साहित्यिक ग्रन्थों की भी रचना हुई थी जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं-पाणिनी का अष्टाध्यायी, पतंजलि का महाभाष्य, कालिदास का अभिज्ञानशाकुन्तलम्, विशाखदत्त का मुद्राराक्षस तथा कल्हण की राजतरंगिणी। इन ग्रन्थों के अध्ययन से तत्कालीन भारत की सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक दशा का भी ज्ञान होता है। जयद्रथ की पृथ्वीराज विजय तथा जयचन्द,का हमीर काव्य भी महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ हैं। तमिल साहित्य में संगम साहित्य का भी अपना विशेष महत्त्व है। संगम साहित्य का अध्ययन करने से हमें दक्षिण भारत के तत्कालीन सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक जीवन का ज्ञान होता है।

प्रश्न 2.
शाहजहाँ द्वारा बनाई गई इमारतें कौन-कौन-सी हैं? वर्णन कीजिए। (2008)
उत्तर:
स्थापत्य कला की दृष्टि से शाहजहाँ के काल को स्वर्ण युग कहते हैं। उसकी अधिकांश इमारतें संगमरमर के पत्थरों की बनी हुई हैं। शाहजहाँ की इमारतों का विवरण निम्न प्रकार है –

(1) ताजमहल :
ताजमहल विश्व की सबसे सुन्दर तथा कला का उच्चकोटि का नमूना है। इसका निर्माण शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल की यादगार में कराया था। इसका निर्माण आगरा नगर के दक्षिण में यमुना के किनारे पर राजा जयसिंह के बगीचे में किया गया था। ताजमहल का नमूना उस्ताद अहमद लाहौरी ने तैयार किया था। वह शाहजहाँ का प्रधान कारीगर था। ताजमहल के निर्माण में 22 वर्ष लगे थे और उसमें 50 लाख रुपये खर्च हुए थे। ताजमहल कला का अद्भुत नमूना माना जाता है।

(2) दीवान-ए-आम :
दीवान-ए-आम का निर्माण शाहजहाँ ने 1628 ई. में आगरा के किले में कराया था। यहाँ पर सम्राट का दरबार लगता था। इसमें दोहरे खम्भों की 40 कतारें हैं। यह हॉल तीनों ओर से खुला हुआ है। उसके खम्भे सुन्दर संगमरमर के बने हुए हैं।

(3) जामा मस्जिद :
यह मस्जिद आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन (मीटरगेज) के सामने स्थित है। इसका निर्माण शाहजहाँ की पुत्री जहाँआरा बेगम ने कराया था। इसकी मुख्य इमारत 103 फुट लम्बी तथा 10 फुट चौड़ी है। इसके निर्माण पर 5 लाख रुपये व्यय हुए थे।

(4) दिल्ली का लाल किला :
इस किले का निर्माण शाहजहाँ ने यमुना के किनारे कराया था। इसकी चौड़ाई 1,600 फुट तथा लम्बाई 3,200 फुट है। इसके भीतर दरबार-ए-आम तथा दरबार-ए-खास का भी निर्माण कराया गया। इस किले में स्थित मोती महल, हीरामहल और रंग महल अधिक प्रसिद्ध हैं।

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.2

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.2

प्रश्न 1.
ऐसा पूर्णांक युग्म लिखिए जिसका
(a) योग -7 है
(b) अन्तर – 10 है
(c) योग 0 है।
हल:
(a) हम लेते हैं योग (-3) + (- 4) = – 7
∴ अभीष्ट पूर्णांक युग्म = -3 और -4
(b) हम लेते हैं अन्तर -15 – (-5) = – 10
∴अभीष्ट पूर्णांक युग्म = – 15 और -5
(c) हम लेते हैं योग – 25 + 25 = 0
∴ अभीष्ट पूर्णांक युग्म = – 25 और 25

प्रश्न 2.
(a) एक ऐसा ऋणात्मक पूर्णांक युग्म लिखिए जिसका अन्तर 8 है।
(b) एक ऋणात्मक पूर्णांक और एक धनात्मक पूर्णांक लिखिए जिनका योग-5 है।
(c) एक ऋणात्मक पूर्णांक और एक धनात्मक पूर्णांक लिखिए जिनका अन्तर – 3 है।
हल:
(a) चूँकि -2 – (-10) = – 2 + 10 = 8
अतः -2 और – 10 एक ऐसा ऋणात्मक पूर्णांक युग्म है जिनका अन्तर 8 है।

(b) चूँकि – 6 + 1 = -5
अतः -6 और 1 पूर्णांक युग्म है जिनका योग – 5 है और इनमें से एक पूर्णांक ऋणात्मक और एक धनात्मक है।

(c) चूँकि (-1) – (2) = – 1 – 2 = -3
अतः -1 और 2 पूर्णांक युग्म ऐसा है जिनका अन्तर – 3 है और इनमें से एक पूर्णांक ऋणात्मक और एक धनात्मक है।

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प्रश्न 3.
किसी प्रश्नोत्तरी के तीन उत्तरोतर चक्करों (rounds) में टीम A द्वारा प्राप्त किए गए अंक -40, 10, 0 थे और टीम B द्वारा प्राप्त किए गए अंक 10, 0, – 40 थे। किस टीम ने अधिक अंक प्राप्त किए ? क्या हम कह सकते हैं कि पूर्णांकों को किसी भी क्रम में जोड़ा जा सकता है ?
हल:
टीम A के द्वारा प्राप्त किए गए अंकों का योग = (-40) + 10 + 0 = – 40 + 10 = – 30
टीम B के द्वारा प्राप्त किए गए अंकों का योग
= 10 + 0+ (-40) = 10 – 40 = -30
अतएव दोनों टीमों ने बराबर अंक प्राप्त किए हैं अर्थात् – 30
हाँ, हम कह सकते हैं कि पूर्णांकों को किसी भी क्रम में जोड़ा जा सकता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित कथनों को सत्य बनाने के लिए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(i) (-5) + (-8) = (-8) + (….)
(ii) -53 + …. = – 53
(iii) 17+ …. = 0
(iv) [13 + (-12)] + (….)= 13 + [(-12) + (-7)]
(v) (-4)+ [15 + (-3)] = [-4+ 15] + ….
हल:
(i) चूँकि पूर्णांकों को किसी भी क्रम में जोड़ा जा सकता है,
∴ (-5) + (-8) = (-8) + (-5)
(ii) किसी पूर्णांक में शून्य जोड़ने पर वही संख्या प्राप्त होती है,
∴ -53 + 0 = -53
(iii) चूँकि किसी पूर्णांक और उसके योज्य प्रतिलोम का योग शून्य होता है,
∴ 17 + (-17) = 0
(iv) चूँकि पूर्णांकों के लिए योग सहचारी होता है, अर्थात् a+ (b + c) = (a + b) + c .
∴ [13 + (- 12)] + (-7) = 13 + [(- 12) + (-7)]

(v) ∴ (-4) + [15 + (-3)] = [(-4) + 15] + (-3)

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प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
संख्या रेखा का उपयोग करते हुए ज्ञात कीजिए-
(i) 4 x (-8)
(ii) 8 x (-2)
(iii)3 x (-7)
(iv) 10 x (-1).
हल:
(i) 4 x (-8); इसे हम संख्या रेखा पर निम्नलिखित रूप में निरूपित कर सकते हैं,
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.2
अतः संख्या रेखा से, हम प्राप्त करते हैं :
(-8) + (-8) + (-8) + (-8) = -32
4 x (-8) = – 32

(ii) 8 x (-2); इसे हम संख्या रेखा पर निम्नलिखित रूप में निरूपित कर सकते हैं,
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.2
अब संख्या रेखा से, हम प्राप्त करते हैं
(-2) + (-2) + (-2) + (-2) + (-2) + (-2) + (-2) + (-2) = – 16
∴ 8 x (-2) = -16

(iii) 3 x (-7); इसे हम संख्या रेखा पर निम्नलिखित रूप में निरूपित कर सकते हैं,
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.2
अब संख्या रेखा से, हम प्राप्त करते हैं :
(-7) + (-7) + (-7) = – 21
∴ 3 x (-7) = -21

(iv) 10 x (- 1); इसे संख्या रेखा पर हम निम्नलिखित रूप में निरूपित कर सकते हैं,
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.2
अब संख्या रेखा से, हम प्राप्त करते हैं :
(-1) + (-1) + (-1) + (-1) + (-1) + (-1) + (-1) + (-1) + (-1) + (-1) = – 10
∴ 10x (-1) = -10

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 11

निम्नलिखित को ज्ञात कीजिएहल :
(i) 4 x (-8)= – (4 x 8) = -32
(ii) 3 x (-7) = – (3 x 7) = – 21
(iii) 6 x (-5) = – (6 x 5) = -30
(iv) 2 – (-9) = – (2 x 9) = -18
प्रयास कीजिए
ज्ञात कीजिए-
(i) 6 x (-19)
(ii) 12 x (-32)
(iii) 7 x (-22)
हल:
(i) 6 x (-19) = – (6 x 19) = -114
(ii) 12 x (-32)= – (12 x 32) = – 384
(iii) 7x (-22) = – (7 x 22) = -154

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 12
प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए-
(a) 15 x (-16)
(b) 21 x (-32)
(c) (-42) x 12
(d) (-55) x 15
हल:
एक धन पूर्णांक और एक ऋण पूर्णांक का गुणा करने के लिए पहले पूर्णांकों का गुणा करते हैं और तत्पश्चात् गुणनफल से पहले (-) का चिह्न लगा देते हैं।
(a) 15 x (-16) = -(15 x 16) = -240
(b) 21 x (-32) = – (21 x 32) =-672
(c) (-42) x 12 = – (42 x 12) = – 504
(d) (-55) x 15 = – (55 x 15) = – 825

प्रश्न 2.
जाँच कीजिए कि क्या
(a) 25 x (-21)=(-25) x 21 है।
(b) (-23) x 20 = 23 x (-20) है।
इस प्रकार के पाँच और उदाहरण लिखिए।
हल:
(a) L.H.S. = 25 x (-21) = – (25 x 21) = -525
R.H.S. = (-25) x 21 = – (25 x 21) = -525
∵ L.H.S. = R.H.S.
∴ 25 x (-21) = (-25) x 21.

(b) L.H.S. = (-23) x 20 = – (23 x 20) = – 460
R.H.S. = 23 x (-20) = – (23 x 20) = – 460
∵ L.H.S. = R.H.S.
∴ (-23) x 20 = 23 x (-20)

अन्य उदाहरण-
(i) (-13) x 20 = 13 – (-20)
(ii) 25 x (-17) = (-25) x 17
(iii) 50x (-40) = (-50) x 40
(iv) 75 x (- 12) = (-75) x 12
(v) 91 x (-25) = (-91) x 25

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 13

प्रेक्षणों के आधार पर निम्नलिखित को पूरा कीजिए-
(i) -3 x – 3 = …,
(ii) -3x – 4 = …..
हल:
(i) – 3 x 4 = – 12
-3 x 3 = -9 = – 12 – (-3) = – 12 + 3
– 3 x 2 = – 6 = -9 – (-3) = -9 + 3
– 3 x 1 = -3 = – 6 -(-3) = – 6 + 3
-3 x 0 = 0 = -3 -(-3)= – 3 +3
-3x – 1 = 0 – (-3) = 0 + 3 = 3
-3x -2 = 3 – (-3) = 3 + 3 = 6
– 3 x -3 = 6 – (-3) = 6 + 3 = 9
अतएव, -3 x -3 = 9

(ii) -3 x – 4.
– 3 x 4 = – 12
– 3 x 3 = – 9 = – 12 -(-3) = – 12 + 3
– 3 x 2 = – 6 = – 9 – (-3)= – 9 +3
– 3 x 1 = -3 = -6 – (-3)= – 6 + 3
– 3 x 0 = 0 = -3 – (-3)= -3 + 3
– 3 x – 1 = 0 – (-3) = 0 + 3 = 3
– 3 x – 2 = 3-(-3)= 3 + 3 = 6
– 3 x -3 = 6-(-3)= 6 + 3 = 9
– 3 x – 4 = 9 – (-3) = 9 + 3 = 12
अतएव, – 3 x -4 = 12
इन गुणनफलों को देखिए और रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
– 4 x 4 = – 16
– 4 x 3 = – 12 = – 16 + 4
– 4 x 2 = -8 = – 12 +4
– 4 x 1 = -4 = -8 + 4
– 4 x 0 = 0 = -4 + 4
– 4 x (-1) = 4 = 0 + 4
– 4 x (-2) = 8 = 4 + 4
– 4 x (-3) = 12 = 8 + 4
अतएव,
(-4) x (-2) = 4 x 2 = 8
(-4) x (-3) = 4 x 3 = 12

प्रयास कीजिए
(i) (-5) x 4, से शुरू करते हुए (-5) x (-6) ज्ञात कीजिए।
(ii) (-6) x 3, से शुरू करते हुए (-6) x (-7) ज्ञात कीजिए।
हल:
(i) (-5) x 4 = -(5 x 4) = -20
(-5) x 3 = -(5 x 3) = -15 = -20 + 5
(-5) x 2 = -(5 x 2)= -10 = – 15 + 5
(-5) x 1 = -(5 x 1) = -5 = -10 + 5
(-5) x 0 = – (5 x 0)= 0 = -5 + 5
इस पैटर्न से, हम प्राप्त करते हैं :
(-5) x (-1) = 0 + 5 = 5
(-5) x (-2) = 5 + 5 = 10
(-5) x (-3) = 10 + 5 = 15
(-5) x (-4) = 15 + 5 = 20
(-5) x (-5) = 20+ 5 = 25
(-5) x (-6) = 25+ 5 = 30
अतएव, (-5) x (-6) = 30

(ii) (-6) x 3 – (6 x 3) = -18
(-6) x 2 = -(6 x 2)= – 12 = – 18 + 6
(-6) x 1 = -(6 x 1) -6 = -12 + 6
(-6) x 0 = -(6 x 0) = 0 = – 6 + 6
इस पैटर्न से, हम प्राप्त करते हैं :
(-6) x (-1) = 0 + 6 = 6
(-6) x (-2) = 6 + 6 = 12
(-6) x (-3) = 12 + 6 = 18
(-6) x (-4) = 18 + 6 = 24
(-6) x (-5) = 24 + 6 = 30
(-6) x (-6) = 30+6 = 36
(-6) x (-7) = 36+ 6 = 42

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प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए-
(-31) x (-100), (-25) x (-72), (-83) x (-28)
हल:
(-31) (-100) = + (31 x 100)= 3100
(-25) x (-72) = + (25 x 72)= 1800
(-83) x (-28) = + (83 x 28) = 2324

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 15

तीन अथवा अधिक ऋणात्मक पूर्णांकों का गुणनफल

प्रश्न (d) में पाँच ऋणात्मक पूर्णांकों का गुणनफल क्या है ? 6 ऋणात्मक पूर्णांकों का गुणनफल क्या होगा ?
हल:
(d) में पाँच ऋणात्मक पूर्णांकों का गुणनफल ऋणात्मक होगा।
6 ऋणात्मक पूर्णांकों का गुणनफल धनात्मक होगा।

नोट: यदि गुणा किये जाने वाले ऋणात्मक पूर्णांकों की संख्या सम हो, तो गुणनफल धनात्मक होगा और यदि गुणा किए जाने वाले ऋणात्मक पूर्णांकों की संख्या विषम है, तो गुणनफल ऋणात्मक पूर्णांक होगा।

प्रत्येक प्रकार के पाँच और उदाहरण देकर इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उदाहरण 1.
जबकि ऋणात्मक पूर्णांकों की संख्या सम है-
(i) (-3) x (-4) = 12
(ii) (-1) (-5) x (-3) (-2) = {(-1)x (-5)} x {(-3) x (-2)} = 5 x 6 = 30
(iii) (-2) x (-3) x (-4) x (-5) x (-6) x (-7) = {(-2)x (-3)}x {(-4) x (-5)} x {(-6) x (-7)}
= 6 x 20 x 42 = 5040
(iv) (-3) x 5 x (-6) = (-3) x (-6) x 5 = 18 x 5 = 90
(v) (-2) – (-4) x (-5) x (-5) x 7
= {(-2)x (-4)} x {(-5)x (-5)} x 7 = 8 x 25 x 7 = 1400

उदाहरण 2.
जबकि ऋणात्मक पूर्णांकों की संख्या विषम है-
(i) (-2)x (-3) x (-5) = [(-2) x (-3)] x (-5) = 6 x (-5) = -30
(ii)(-4) x (-5) x (-3) x (-4) x (-6)
=[(-4)x (-5)] x [(-3)x (-4)] x (-6)
= 20 x 12 x (-6) = -1440
(iii)(-6) (-7) x 8 x (-5)
= [(-6) x (-7)] x 8x (-5) = 42 x 8 x (-5) = -1680
(iv) 3x (-10) x (-5)x (-8)
= 3 x (-10)x [(-5)x (-8)]
= -30 x 40 = -1200
(v) (-2) (-3) x (-4)x – 5x (-8)
= [(-2) (-3)] x [(-4) x (-8)] x -5
= 6 x 32 x (-5) = – 960
सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए

MP Board Solutions

प्रश्न (i).
गुणनफल (-9) x (-5) x (-6) (-3) धनात्मक है, जबकि गुणनफल (-9) x (-5) x 6 x (-3) ऋणात्मक है। क्यों ?
(ii) गुणनफल का चिह्न क्या होगा, यदि हम निम्नलिखित को एक साथ गुणा करते हैं ?
(a) आठ ऋणात्मक पूर्णांक एवं तीन धनात्मक पूर्णांक
(b) पाँच ऋणात्मक पूर्णांक और चार धनात्मक पूर्णांक
(c) (-1) को बारह बार
(d) (-1) को 2 m बार, जहाँ m एक प्राकृतिक संख्या है।
हल:
(i) गुणनफल (-9) x (-5) – (-6) x (-3) धनात्मक है क्योंकि यहाँ सम ऋणात्मक पूर्णांकों का गुणा किया गया है।
गुणनफल (-9) x (-5) x 6 x (-3) ऋणात्मक है क्योंकि यहाँ विषम ऋणात्मक पूर्णांकों का गुणा किया गया है।
(ii) (a) धनात्मक, ∵ आठ ऋणात्मक पूर्णांकों का गुणनफल धनात्मक है।
(b) ऋणात्मक, ∵ पाँच ऋणात्मक पूर्णांकों का गुणनफल ऋणात्मक है।
(c) धनात्मक,∵ 12 सम संख्या है अतः (-1) का बारह बार गुणनफल धनात्मक होगा।
(d) धनात्मक,∵ 2m राशि सम संख्या है। अतः (-1) 2m बार गुणा करने पर धन संख्या प्राप्त होगी। उत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 16

गुणन के अन्तर्गत संवृत
निम्नलिखित सारणी को देखिए और इसे पूरा कीजिए।
हल:
कथन निष्कर्ष
(-20) x (-5) = 100 गुणनफल एक पूर्णांक है
(-15) x 17 = – 255 गुणनफल एक पूर्णांक है
(-30) x 12 = – 360 गुणनफल एक पूर्णांक है
(-15) x (-23)= 345 गुणनफल एक पूर्णांक है
(-14) x (-13) = 182 गुणनफल एक पूर्णांक है
12 x (-30) = – 360 गुणनफल एक पूर्णांक है

पाँच और पूर्णांक युग्मों के गुणनफल ज्ञात कीजिए और उपर्युक्त कथन (सभी पूर्णांकों a तथा b के लिए a x b एक पूर्णांक होता है) को सत्यापित कीजिए।
उदाहरण:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.2

गुणन के क्रम-विनिमेयता

निम्नलिखित सारणी को देखिए और इसे पूरा कीजिए :

कथन 2
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.2
हम यहाँ देखते हैं कि दो पूर्णांकों का गुणनफल सदैव एक पूर्णांक होता है।

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 17

इस प्रकार के पाँच और उदाहरण लिखिए एवं सत्यापन कीजिए।
उदाहरण:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.2
शून्य से गुणन -5 x 0 = 0
0 x (-6) = 0

गुणात्मक तत्समक

जाँच कीजिए कि 1 पूर्णांकों के लिए भी गुणनात्मक तत्समक है। 1 के साथ पूर्णांकों के निम्नलिखित गुणनफलों को देखिए :
(-3) x 1 = -3 1 x 5 = 5
(-4) x 1 = -4 1 x 8 = 8
1 x (-5) = -5 3 x 1 = 3
1 x (-6) = -6 7 x 1 = 7
यदि किसी भी पूर्णांक को – 1 से गुणा किया जाए, तो क्या होता है? निम्नलिखित को पूरा कीजिए :
(-3) x (-1) = 3
3 x (-1) = -3
(-6) x (-1) = 6
(-1) x 13 = – 13
(-1) x 25 = -25
18 x (-1) = -18

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 18

गुणन साहचर्य गुण
निम्नलिखित पर विचार कीजिए और गुणनफलों को पूरा कीजिए :
हल:
[7x (-6)] x 4 = -42 x 4 = -168
7 x [(-6) x 4] = 7 x (-24) = -168
क्या [7 x (-6)] x 4 = 7x [(-6) x 4] है?
हल:
L.H.S. = [7 x (-6)] x 4 = (-42) x 4=- 168
R.H.S. = 7 x [(-6) x 4] = 7 x (-24) = – 168
∴ L.H.S. = R.H.S.
अतः [7 x (-6)] x 4 = 7x [(-6) x 4]
अतएव किन्हीं तीन पूर्णांक a, b, c के लिए
[a x b] x c = a x [b x c]
a, b और c में से प्रत्येक के लिए पाँच मान लीजिए और इस गुण का सत्यापन कीजिए।
(a x b) x c = a x (bx c) का सत्यापन

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.2
अतएव तीन पूर्णांकों का गुणन सहचारी है। अर्थात् (a x b) x c = a x (b x c)

वितरण गुण
a,b और c में से प्रत्येक के लिए कम-से-कम पाँच मान लीजिए और वितरण गुण [a x (b + c)] = [a x b + a x c] को सत्यापित कीजिए।
उदाहरण:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.2
अतः a x (b + c) = ax b + ax c के मान समान हैं।

प्रयास कीजिए

प्रश्न (i) क्या 10 x [6 + (-2)] = 10 x 6 + 10 x (-2) है ?
(ii) क्या (-15) x [(-7) + (-1) = (-15) x (-7) + (-15) x (-1) है ?
हल:
(i) हाँ, [∵ a x (b + c) = a x b + a x c]
(ii) हाँ, [∵ a x (b + c) = a x b + a x c]

किन्हीं तीन पूर्णांकों a, b और c के लिए
a x (b – c) = a x b – a x c
a, b और c के लिए कम-से-कम पाँच मान लीजिए और इस गुण को सत्यापित कीजिए।
उदाहरण:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.2
अतः a x (b – c) = a x b – a x c के मान समान हैं।

MP Board Solutions

प्रयास कीजिए

प्रश्न
(i) क्या 10 x [6 – (-2)] = 10 x 6 – 10 x (-2) हैं?
(ii) क्या (-15) x [(-7) – (-1)] = (-15) x (-7) -(-15) x (-1) है ?
हल:
(i) हाँ, [∵ a x (b – c) = a x b – a x c]
(ii) हाँ, [∵ a x (b – c) = a x b – a x c]

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 20
प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
वितरण गुण का उपयोग करते हुए (-49) x 18; (-25) x (-31) ; 70 x (-19) + (-1) x 70 के मान ज्ञात कीजिए।
हल:
(i) (-49) x 18 :
∵ 18 = 10 + 8
∴ (-49) x 18 = (-49) x (10 + 8)
= (-49) x 10 + (-49) x 8
= -490 + (-49) (10 – 2) (∵ 8 = 10 – 2)
= – 490 + (-49) x 10 – (-49) x 2
= – 490 + (-490) + 98
= -980 + 98 = -882

(ii) (-25) x (-31):
∴ -31 = (-30) + (-1)
∴ (-25) x (-31)
= (-25) x [(-30) + (-1)]
= (-25) – (-30) + (-25) x (-1)
= 25 x 30 + 25 x 1
= 750 + 25 = 775

(iii) 70 x (-19) + (-1) x 70 :
= 70 x [(- 19) + (-1)]
[∵ a x b + a x c = a x (b + c) से]
= 70 x (-20)
= – (70 x 20) = -1400

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MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण

MP Board Class 9th Science Chapter 10 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

प्रश्न शृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 149

प्रश्न 1.
गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम बताइए। (2018, 19)
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम-“विश्व का प्रत्येक पिण्ड प्रत्येक अन्य पिण्ड को एक बल से आकर्षित करता है, जो दोनों पिण्डों के द्रव्यमान के समानुपाती होता है तथा दोनों के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है।” यह बल गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता है तथा दोनों पिण्डों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में लगता है।

प्रश्न 2.
पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी वस्तु के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिमाण ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण बल (F) = \(\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{\mathrm{R}^{2}}\)
जहाँ M = पृथ्वी का द्रव्यमान
m = वस्तु का द्रव्यमान
R = पृथ्वी की त्रिज्या एवं
G = गुरुत्वाकर्षण नियतांक है।

प्रश्न शृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 152

प्रश्न 1.
मुक्त पतन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मुक्त पतन-“जब वस्तुएँ पृथ्वी की ओर उस पर लगने वाले केवल गुरुत्वीय बल के कारण गिरती हैं तो उनका इस प्रकार गिरना मुक्त पतन कहलाता है।”

प्रश्न 2.
गुरुत्वीय त्वरण से आप क्या समझते हैं? (2019)
उत्तर:
गुरुत्वीय त्वरण-“पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण किसी गिरते हुए पिण्ड में उत्पन्न त्वरण गुरुत्वीय त्वरण कहलाता है।” इसे g से प्रदर्शित करते हैं।

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प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 153

प्रश्न 1.
किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा भार में क्या अन्तर है?
उत्तर:
किसी वस्तु के द्रव्यमान एवं उसके भार में अन्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 1

प्रश्न 2.
किसी वस्तु का चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर इसके भार का \(\frac{1}{6}\) गुना क्यों होता है?
उत्तर:
चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण के मान का \(\frac{1}{6}\) होता है और किसी वस्तु का भार उसके द्रव्यमान एवं गुरुत्वीय त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है इसलिए किसी वस्तु का चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर इसके भार का \(\frac{1}{6}\) गुना होता है।

प्रश्न श्रृंखला-4 # पृष्ठ संख्या 157

प्रश्न 1.
एक पतली तथा मजबूत डोरी से बने पट्टे की सहायता से स्कूल बैग को उठाना कठिन होता है, क्यों?
उत्तर:
पतली डोरी से बना पट्टा कम सम्पर्क क्षेत्रफल घेरता है अतः बैग अधिक दाब डालता है। इसलिए इसकी सहायता से स्कूल बैग को उठाना कठिन होता है।

प्रश्न 2.
उत्प्लावकता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
उत्प्लावकता-“जब किसी वस्तु को किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो वह द्रव उस वस्तु के ऊपर एक उत्प्लावन बल लगाता है। द्रव की इस प्रवृत्ति या गुण को उत्प्लावकता कहते हैं।”

प्रश्न 3.
पानी की सतह पर रखने पर कोई वस्तु क्यों तैरती या डूबती है?
उत्तर:
जब किसी वस्तु को पानी के पृष्ठ पर रखते हैं तो उस पर दो बल कार्य करते हैं। एक वस्तु का भार नीचे की ओर दूसरा उस पर लगा उत्प्लावन बल ऊपर की ओर। यह उत्प्लावन बल उस वस्तु द्वारा हटाए गए पानी के भार के बराबर होता है। जब वस्तु का भार उत्प्लावन बल से अधिक होता है तो वस्तु डूब जाती है और जब यह कम या बराबर होता है तो वस्तु तैरती है।

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प्रश्न श्रृंखला-5 # पृष्ठ संख्या 158

प्रश्न 1.
एक तुला (Weighing machine) पर आप अपना द्रव्यमान 42 kg नोट करते हैं? क्या आपका द्रव्यमान 42 kg से अधिक है या कम?
उत्तर:
हमारा वास्तविक द्रव्यमान 42 kg से अत्यन्त सूक्ष्म मात्रा में अधिक होगा।

प्रश्न 2.
आपके पास एक रुई का बोरा तथा एक लोहे की छड़ है। तुला पर मापने पर दोनों 100 kg द्रव्यमान दर्शाते हैं। वास्तविकता में एक दूसरे से भारी है। क्या आप बता सकते हैं कि कौन-सा भारी है और क्यों?
उत्तर:
वास्तविकता में रुई का बोरा, लोहे की छड़ से अधिक भारी है क्योंकि रुई के बोरे का आयतन लोहे की छड़ से अधिक है, इसलिए बोरे पर वायु द्वारा आरोपित उत्प्लावन बल छड़ पर लगे उत्प्लावन बल से अधिक है।

MP Board Class 9th Science Chapter 10 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाय, तो उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल किस प्रकार बदलेगा?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण बल चौथाई रह जायेगा क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

प्रश्न 2.
सभी वस्तुओं पर लगने वाला गुरुत्वीय बल उनके द्रव्यमान के समानुपाती होता है। फिर एक भारी वस्तु हल्की वस्तु के मुकाबले तेजी से क्यों नहीं गिरती ?
उत्तर:
गिरती हुई वस्तुओं का वेग गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भर करता है, वस्तु के भार पर नहीं और गुरुत्वीय त्वरण सभी वस्तुओं पर समान लगता है। इसलिए भारी वस्तु हल्की वस्तु के मुकाबले तेजी से नहीं गिरती।

प्रश्न 3.
पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी 1 kg की वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल का परिमाण क्या होगा? (पृथ्वी का द्रव्यमान 6 x 1024 kg तथा पृथ्वी की त्रिज्या 6.4 x 106 m है।)
हल:
ज्ञात है:
पृथ्वी का द्रव्यमान M = 6 x 1024kg
पृथ्वी की त्रिज्या R = 6.4x 106 m
वस्तु का द्रव्यमान m = 1 kg
सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक G = 6.7 x 10-11
Nm2kg-2
हम जानते हैं कि पृथ्वी तल पर
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 2
= 9:814N.
अतः अभीष्ट गुरुत्वीय बल = 9.814 N.

प्रश्न 4.
पृथ्वी तथा चन्द्रमा एक-दूसरे को गुरुत्वीय बल से आकर्षित करते हैं। क्या पृथ्वी जिस बल से चन्द्रमा को आकर्षित करती है वह बल, उस बल से जिससे चन्द्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है, बड़ा है या छोटा है या बराबर है? बताइए क्यों?
उत्तर:
गुरुत्वीय बल परस्पर आकर्षण बल है। यह पृथ्वी द्वारा चन्द्रमा पर या चन्द्रमा द्वारा पृथ्वी पर समान रूप से लगता है तथा बीच की दूरी के अनुदिश होता है। इसलिए यह बराबर है।

प्रश्न 5.
यदि चन्द्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है तो पृथ्वी चन्द्रमा की ओर गति क्यों नहीं करती?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण बल परस्पर होता है अर्थात् जिस बल से चन्द्रमा पृथ्वी को अपनी ओर आकर्षित करता है उसी बल से पृथ्वी चन्द्रमा को अपनी ओर आकर्षित करती है। इसलिए पृथ्वी चन्द्रमा की ओर गति नहीं करती।

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प्रश्न 6.
दो वस्तुओं के बीच लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का क्या होगा? यदि –
(i) एक वस्तु का द्रव्यमान दो गुना कर दिया जाए।
(ii) वस्तुओं के बीच की दूरी दो गुनी अथवा तीन गुनी कर दी जाए।
(iii) दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान दो गुने कर दिए जाएँ।
दो वस्तुओं के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल \(\mathrm{F}=\frac{\mathrm{G} m_{1} m_{2}}{r^{2}}\) होता है।
उत्तर:
(i)
जब किसी एक वस्तु का द्रव्यमान दो गुना कर दिया जाये तो बल
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 3
अर्थात् गुरुत्वाकर्षण बल दो गुना हो जाएगा।

(ii)
जब दूरी दो गुनी कर दी जाएगी, तो
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 4
अर्थात् बल \(\frac{1}{4}\) गुना हो जाएगा। इसी प्रकार जब दूरी तीन गुनी कर दी जाएगी तो बल – गुना हो जाएगा।

(iii)
जब दोनों वस्तुओं का द्रव्यमान दो गुना कर दिया जाए तो
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 5
अर्थात् गुरुत्वाकर्षण चार गुना हो जाएगा।

प्रश्न 7.
गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के क्या महत्व हैं? (2018, 19)
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के महत्व-गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम अनेक ऐसी परिघटनाओं की सफलतापूर्वक व्याख्या करता है जो असम्बद्ध मानी जाती थीं –

  1. हमें पृथ्वी से बाँधे रखने वाला बल।
  2. पृथ्वी के चारों ओर चन्द्रमा की गति।
  3. सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति।
  4. चन्द्रमा तथा सूर्य के कारण ज्वार-भाटा।

प्रश्न 8.
मुक्त पतन का त्वरण क्या है?
उत्तर:
मुक्त पतन का त्वरण गुरुत्वीय त्वरण ‘g’ है। इसका मान सामान्यत: 9.8 m s-2 होता है।

प्रश्न 9.
पृथ्वी तथा किसी वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल को हम क्या कहेंगे?
उत्तर:
उस वस्तु का भार।

प्रश्न 10.
एक व्यक्ति ‘A’ अपने एक मित्र के निर्देश पर ध्रुवों पर कुछ ग्राम सोना खरीदता है। वह इस सोने को विषुवत् वृत्त पर अपने मित्र को देता है। क्या उसका मित्र खरीदे हुए सोने के भार से सन्तुष्ट होगा? यदि नहीं तो क्यों? (संकेत: ध्रुवों पर g का मान विषुवत् वृत्त की अपेक्षा अधिक है।)
उत्तर:
चूँकि ध्रुवों पर g का मान विषुवत् वृत्त की अपेक्षा अधिक है। इसलिए सोने का भार ध्रुवों पर अधिक होगा तथा विषुवत् वृत्त पर कम होगा। इसलिए उसका मित्र सन्तुष्ट नहीं होगा।
[नोट: यदि सोने के द्रव्यमान का मापन किया गया है तो कोई अन्तर नहीं होगा।]

प्रश्न 11.
एक कागज की शीट, उसी प्रकार की शीट को मरोड़कर बनाई गई गेंद से धीमी क्यों गिरती है?
उत्तर:
कागज की शीट का आयतन गेंद के आयतन से अधिक होगा। इस कारण हवा का उत्प्लावन बल उस पर अधिक होगा। इसलिए वह शीट धीमी गिरेगी।

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प्रश्न 12.
चन्द्रमा की सतह पर गुरुत्वीय बल, पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय बल की अपेक्षा \(\frac{1}{6}\) गुना है। एक 10 kg की वस्तु का चन्द्रमा पर तथा पृथ्वी पर न्यूटन में भार क्या होगा?
हल:
ज्ञात है:
वस्तु का द्रव्यमान m = 10 kg
गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी पर ge = 9.8 m s-2
गुरुत्वीय त्वरण चन्द्रमा पर gm = \(\frac{1}{6}\) ge
= \(\frac{1}{2}\) x 9.8 = 1.63 m s-2
वस्तु का भार w = mg
⇒ वस्तु का पृथ्वी पर भार we = mge
⇒ 10 x 9.8 = 98 N
एवं वस्तु का चन्द्रमा पर भार wm = m gm
= 10 x 1.63 = 16.3 N
अतः वस्तु का अभीष्ट भार पृथ्वी पर= 98 N एवं चन्द्रमा पर = 16.3 N

प्रश्न 13.
एक गेंद ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 49 m/s के वेग से फेंकी जाती है। परिकलन कीजिए –
(i) अधिकतम ऊँचाई जहाँ तक कि गेंद पहुँचती है
(ii) पृथ्वी की सतह पर वापस लौटने में लिया गया कुल समय।
हल:
(i)
हम जानते हैं कि
ज्ञात है:
गेंद का प्रारम्भिक वेग u = 49 m s-1
गेंद का अन्तिम वेग v = 0 m s-1
त्वरण (गुरुत्वीय)g = – 9.8 m s-2
ज्ञात करना है:

  1. अधिकतम ऊँचाई h = ?
  2. वापस आने में कुल समय = 2t = ?

2gh = v2 – u2
⇒ 2 x (-9.8)h = (0)2 – (49)2
⇒ – 2 x 9.8h = – 49 x 49
⇒ \(h=\frac{49 \times 49}{2 \times 9.8}\)
⇒ h = 122.5m.

(ii)
v = u + gt
⇒ 0 = 49 – 9.8t
⇒ t = \(\frac{49}{9.8}\) = 5s
चूँकि जाने एवं आने में समय बराबर लगता है।
इसलिए वापस आने में कुल समय = 2 x 5 = 10 s
अतः अभीष्ट

  1. ऊँचाई = 122.5 m एवं
  2. अभीष्ट समय = 10 s.

प्रश्न 14.
19.6 m ऊँची एक मीनार की चोटी से एक पत्थर छोड़ा जाता है। पृथ्वी पर पहुँचने से पहले इसका अन्तिम वेग ज्ञात कीजिए।
हल:
हम जानते हैं कि
ज्ञात है:
पत्थर का प्रारम्भिक वेग ५ = 0 m s-1
पत्थर की ऊँचाई h = 19.6 m
त्वरण (गुरुत्वीय) g = 9.8 m s-2
v2 – u2 = 2gh
v2 – (0)2 = 2 (9.8) x 19.6
v2 = 19.6 x 19.6
v = \(\sqrt{19 \cdot 6 \times 19 \cdot 6}\) = 19.6 m s-1
अतः अभीष्ट वेग = 19.6 m s-1.

प्रश्न 15.
कोई पत्थर ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर 40 m s-1 के प्रारम्भिक वेग से फेंका गया है। g= 10 m s-2 लेते हुए पत्थर द्वारा पहुँची हुई अधिकतम ऊँचाई ज्ञात कीजिए। नेट विस्थापन तथा पत्थर द्वारा चली गयी कुल दूरी कितनी होगी?
हल:
हम जानते हैं कि
ज्ञात है:
पत्थर का प्रारम्भिक वेग u = 40 m s-1
पत्थर का अन्तिम वेग v = 0 m s-1
गुरुत्वीय त्वरण g = – 10 m s-2
2gh = v2 – u2
2 (-10) h = (0)2 – (40)2
– 20 h = 0 – 1600
h = \(\frac{1600}{20}\) = 80 m
चूँकि पत्थर लौटकर वापस अपनी पूर्वावस्था में आ जाता है। इसलिए नेट विस्थापन शून्य होगा।
कुल दूरी (चली गई) = 2h = 2 x 80 = 160 m
अभीष्ट अधिकतम ऊँचाई = 80 m
नेट विस्थापन = 0 (शून्य)
कुल चली गई दूरी = 160 m.

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प्रश्न 16.
पृथ्वी तथा सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण बल का परिकलन कीजिए। दिया है-पृथ्वी का द्रव्यमान =6x 1024 kg तथा सूर्य का द्रव्यमान =2 x 1030 kg, दोनों के बीच औसत दूरी = 1.5 x 10lm.
हल:
ज्ञात है:
पृथ्वी का द्रव्यमान ma = 6 x 1024 kg
सूर्य का द्रव्यमान m2 = 2 x 1030 kg
दोनों के बीच की औसत दूरी d= 1.5 x 1011m
गुरुत्वीय स्थिरांक G = 6.7 x 10-11N m2 kg-2
गुरुत्वाकर्षण के नियम से
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 6
= 3.573 x 1022N
अतः अभीष्ट गुरुत्वाकर्षण बल = 3.573 x 1022 N

प्रश्न 17.
कोई पत्थर 100 m ऊँची किसी मीनार की चोटी से गिराया गया और उसी समय कोई दूसरा पत्थर 25 m/s के वेग से ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंका गया। परिकलन कीजिए कि दोनों पत्थर कब और कहाँ मिलेंगे?
हल:
माना दोनों यात्रा प्रारम्भ के t s बाद पृथ्वी तल से hm ऊँचाई पर मिलेंगे।
पहले पत्थर द्वारा तय की गयी दूरी
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 7
चूँकि
h1 + h2 =h
4.9t2 + 25t – 4.9t2 = 100
25t = 100
t = \(\frac{100}{25}\) = 4 s
h = ut + \(\frac{1}{2}\)gt2
= 25 x 4+ \(\frac{1}{2}\) (-9.8) (4)2
= 100 – 78.4 = 21.6 m
अतः दोनों पत्थर पृथ्वी तल से 21.6 m की ऊँचाई पर 4 s बाद मिलेंगे।

प्रश्न 18.
ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर फेंकी गई एक गेंद 6 s पश्चात् फेंकने वाले के पास लौट आती है। ज्ञात कीजिए –
(a) यह किस वेग से ऊपर फेंकी गई।
(b) गेंद द्वारा पहुँची गयी अधिकतम ऊँचाई।
(c) 4 s पश्चात् गेंद की स्थिति।
हल:
चूँकि गेंद ऊपर जाने और वापस आने में 6 s का समय लेती है।
इसलिए ऊपर जाने में लगा समय t = \(\frac{6}{2}\) = 3 s एवं
अन्तिम वेग v = 0 m s-1
माना गेंद का प्रारम्भिक वेग = u m s-1 तथा गुरुत्वीय त्वरण g = – 9.8 m s-2
(a)
v = u + gt
0 = u – 9.8 x 3
⇒ u = 29.4 m s-1
अत: गेंद अभीष्ट वेग 29.4 m s-1 से ऊपर फेंकी गयी।

(b)
⇒ h = ut + \(\frac{1}{2}\) gt2
⇒ h = 29.4 x 3 + \(\frac{1}{2}\) + (-9.8) (3)2
h = 88.2 – 44.1 = 44.1 m.
अत: गेंद द्वारा पहुँची गयी अभीष्ट m = अधिकतम ऊँचाई = 44.1 m.

(c)
प्रथम 3 सेकण्ड में गेंद अधिकतम ऊँचाई 44.1 m पर पहुँचकर लौटना प्रारम्भ कर देगी तथा अगले 1 s में माना वह उच्चतम बिन्दु से h1m नीचे आती है, तो
h1 = u1t + gt2
= 0 x 1 + \(\frac{1}{2}\)(9.8)(1)2 = 0 + 4.9 m
इस प्रकार 4 s बाद गेंद की पृथ्वी तल से ऊँचाई
= 44.1 – 4.9 = 39.2 m.
अत: 4s पश्चात् गेंद की अभीष्ट स्थिति 39.2 m पृथ्वी तल से ऊपर।

प्रश्न 19.
किसी द्रव में डुबोई गई वस्तु पर उत्प्लावन बल किस दिशा में कार्य करता है?
उत्तर:
ऊपर की ओर।

प्रश्न 20.
पानी के भीतर किसी प्लास्टिक के टुकड़े को छोड़ने पर यह पानी के पृष्ठ पर क्यों आ जाता है?
उत्तर:
पानी के अन्दर डूबे प्लास्टिक के टुकड़े पर जल द्वारा आरोपित उप्लावन बल उसके गुरुत्व बल (भार) से अधिक होता है। इसलिए वह प्लास्टिक का टुकड़ा जल के पृष्ठ पर आ जाता है।

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प्रश्न 21.
50 g के किसी पदार्थ का आयतन 20 cm3 है। यदि पानी का घनत्व 1 g cm-3 हो, तो पदार्थ तैरेगा या डूबेगा।
हल:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 8
चूँकि पदार्थ का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक है इसलिए पदार्थ पानी में डूब जाएगा।

प्रश्न 22.
500g के एक मोहरबन्द पैकेट का आयतन 350 cm3 है। पैकेट 1 g cm-3 घनत्व वाले पानी में तैरेगा या डूबेगा। इस पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान कितना होगा?
हल:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 9
चूँकि पैकेट का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक है। इसलिए पैकेट डूब जाएगा।
पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान = पैकेट का आयतन x पानी का घनत्व
= 350 cm3 x 1g cm-3 = 350 g
अतः पैकेट पानी में डूब जाएगा तथा पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान = 350 g.

MP Board Class 9th Science Chapter 10 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 9th Science Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चन्द्रमा के पृष्ठ के निकट मुक्त रूप से गिरते विभिन्न द्रव्यमानों के दो पिण्डों –
(a) के वेग किसी भी क्षण समान होंगे
(b) के विभिन्न त्वरण होंगे
(c) पर समान परिमाण के बल कार्य करेंगे
(d) के जड़त्वों में परिवर्तन हो जायेंगे।
उत्तर:
(a) के वेग किसी भी क्षण समान होंगे

प्रश्न 2.
गुरुत्वीय त्वरण का मान
(a) विषुवत् वृत्त तथा ध्रुवों पर समान होता है
(b) ध्रुवों पर न्यूनतम होता है
(c) विषुवत् वृत्त पर न्यूनतम होता है
(d) ध्रुवों से विषुवत् वृत्तों की ओर बढ़ता है।
उत्तर:
(c) विषुवत् वृत्त पर न्यूनतम होता है

प्रश्न 3.
दो पिण्डों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल F है। यदि दोनों पिण्डों के द्रव्यमान उनके बीच की दूरी को समान रखते हुए आधे कर दिए जायें, तो गुरुत्वाकर्षण बल हो जायेगा –
(a) F/4
(b) F/2
(c) F
(d) 2 F
उत्तर:
(a) F/4

प्रश्न 4.
कोई लड़का डोरी से बँधे पत्थर को किसी क्षैतिज वृत्ताकार पथ पर घुमा रहा है। यदि डोरी टूट जाये तो वह पत्थर –
(a) वृत्ताकार पथ में गति करेगा
(b) वृत्ताकार पथ के केन्द्र की ओर सरल रेखा के अनुदिश गति करेगा।
(c) वृत्ताकार पथ पर किसी सरल रेखीय स्पर्शी के अनुदिश गति करेगा
(d) लड़के से दूर वृत्ताकार पथ के अभिलम्बवत् सरल रेखा के अनुदिश गति करेगा।
उत्तर:
(c) वृत्ताकार पथ पर किसी सरल रेखीय स्पर्शी के अनुदिश गति करेगा

प्रश्न 5.
किसी पिण्ड को बारी-बारी से विभिन्न घनत्वों के तीन द्रवों में रखा जाता है। वह पिण्ड d2, d2 तथा d3 घनत्वों के द्रवों में क्रमशः \(\frac{1}{9}\), \(\frac{2}{11}\) तथा \(\frac{1}{2}\) भाग को द्रव के बाहर रखते हुए तैरता है। घनत्वों के विषय में कौन-सा कथन सही है?
(a) d1 > d2 > d3
(b) d1 > d2 < d3
(c) d1 < d2 > d3
(d) d1 < d2 < d3
उत्तर:
(d) d1 < d2 < d3

प्रश्न 6.
कथन F = \(\frac{\mathrm{GMm}}{d^{2}}\) में राशि G –
(a) परीक्षण स्थल पर g के मान पर निर्भर करता है
(b) का उपयोग दो द्रव्यमानों में से एक पृथ्वी होने पर ही किया जाता है
(c) पृथ्वी की सतह पर अधिक होता है
(d) प्रकृति का सार्वत्रिक नियतांक है
उत्तर:
(d) प्रकृति का सार्वत्रिक नियतांक है

प्रश्न 7.
गुरुत्वाकर्षण के नियम में गुरुत्वाकर्षण बल –
(a) केवल पृथ्वी तथा बिन्दु द्रव्यमान के बीच होता है
(b) केवल सूर्य तथा पृथ्वी के बीच होता है
(c) द्रव्यमान रखने वाले किन्हीं भी दो पिण्डों के बीच होता है
(d) केवल दो आवेशित पिण्डों के बीच होता है
उत्तर:
(c) द्रव्यमान रखने वाले किन्हीं भी दो पिण्डों के बीच होता है

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प्रश्न 8.
गुरुत्वाकर्षण के नियम से राशि G का मान –
(a) केवल पृथ्वी के द्रव्यमान पर निर्भर करता है
(b) केवल पृथ्वी की त्रिज्या पर निर्भर करता है
(c) पृथ्वी के द्रव्यमान एवं त्रिज्या दोनों पर निर्भर करता है
(d) पृथ्वी के द्रव्यमान एवं त्रिज्या पर निर्भर नहीं करता है
उत्तर:
(d) पृथ्वी के द्रव्यमान एवं त्रिज्या पर निर्भर नहीं करता है

प्रश्न 9.
दो कण कुछ दूरी पर रखे हैं। यदि दोनों कणों के द्रव्यमान दो गुने कर दिए जाएँ तथा इनके बीच की दूरी अपरिवर्तित रखें, तो इनके बीच का गुरुत्वाकर्षण बल –
(a) = गुना हो जाएगा
(b) 4 गुना हो जाएगा
(c) गुना हो जाएगा
(d) अपरिवर्तित रहेगा
उत्तर:
(b) 4 गुना हो जाएगा

प्रश्न 10.
वायुमण्डल पृथ्वी से जकड़ा हुआ है –
(a) गुरुत्वीय बल द्वारा
(b) पवन द्वारा
(c) बादलों द्वारा
(d) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा
उत्तर:
(a) गुरुत्वीय बल द्वारा

प्रश्न 11.
एकांक दूरी पर स्थित दो एकांक द्रव्यमानों के बीच आकर्षण बल कहलाता है –
(a) गुरुत्वीय विभव
(b) गुरुत्वीय त्वरण
(c) गुरुत्वीय क्षेत्र
(d) सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक
उत्तर:
(d) सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक

प्रश्न 12.
R त्रिज्या की पृथ्वी के केन्द्र पर किसी पिण्ड का भार –
(a) शून्य होता है
(b) अनन्त होता है
(c) पृथ्वी के पृष्ठ पर भार का R गुना होता है
(d) पृथ्वी के पृष्ठ पर भार का 7 गुना होता है
उत्तर:
(a) शून्य होता है

प्रश्न 13.
किसी पिण्ड का वायु में भार 10 N है। जल में पूरा डुबाने पर इसका भार केवल 8 N है। पिण्ड द्वारा विस्थापित जल का भार होगा –
(a) 2 N
(b) 8 N
(c) 10 N
(d) 12 N
उत्तर:
(a) 2 N

प्रश्न 14.
कोई लड़की 60 cm लम्बे, 40 cm चौड़े तथा 20 cm ऊँचे किसी बॉक्स पर तीन ढंग से खड़ी होती है। बॉक्स द्वारा लगाया गया दाब –
(a) तब अधिकतम होगा जब आधार लम्बाई एवं चौड़ाई से बना है
(b) तब अधिकतम होगा जब आधार चौड़ाई एवं ऊँचाई से बना है
(c) तब अधिकतम होगा जब आधार ऊँचाई एवं लम्बाई से बना है
(d) उपर्युक्त तीनों प्रकरणों में समान होगा
उत्तर:
(b) तब अधिकतम होगा जब आधार चौड़ाई एवं ऊँचाई से बना है

प्रश्न 15.
कोई सेब किसी वृक्ष से पृथ्वी पर पृथ्वी एवं सेब के बीच गुरुत्वाकर्षण बल के कारण गिरता है। यदि पृथ्वी द्वारा सेब पर आरोपित बल का परिमाण F1 है तथा सेब द्वारा पृथ्वी पर आरोपित बल का परिमाण F2 है, तो –
(a) F2 की तुलना में F1 बहुत अधिक होता है
(b) F1 की तुलना में F2 बहुत अधिक होता है
(c) F2 की तुलना में F1 केवल थोड़ा अधिक होता है
(d) F1 एवं F2 बराबर होते हैं
उत्तर:
(d) F1 एवं F2 बराबर होते हैं

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प्रश्न 16.
आकाशीय पिण्डों के बीच लगता है –
(a) चुम्बकीय बल
(b) विद्युत बल
(c) गुरुत्वीय बल
(d) घर्षण बल
उत्तर:
(c) गुरुत्वीय बल

प्रश्न 17.
चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण (gm) होता है –
(a) 6g
(b) g/6
(c) 10g
(d) शून्य
उत्तर:
(b) g/6

प्रश्न 18.
g का मान होता है सामान्यतः
(a) 9.8 m s
(b) 9.8 m s-1
(c) 9.8 m s
(d) 9.8 m s-2
उत्तर:
(b) 9.8 m s-1

प्रश्न 19.
g और G में सम्बन्ध होता है –
(a) gR2 = GM
(b) G = MgR2
(c) g = MGR2
(d) M = GgR2
उत्तर:
(a) gR2 = GM

प्रश्न 20.
g का सर्वाधिक मान होता है – (2019)
(a) ध्रुवों पर
(b) भूमध्य रेखा पर
(c) पृथ्वी के केन्द्र पर
(d) आकाश में।
उत्तर:
(a) ध्रुवों पर

प्रश्न 21.
गुरुत्वीय नियतांक को किस संकेत से व्यक्त करते हैं?
(a)g
(b) m
(c) G
(d) K
उत्तर:
(c) G

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. ……………… ने गुरुत्वाकर्षण का नियम दिया था। (2019)
2. दो पिण्डों के बीच ………….. बल लगता है।
3. गुरुत्वाकर्षण के कारण पेड़ से टूटा फल ……………. आता है।
4. एक किलोग्राम भार ……………. न्यूटन के बराबर होता है। (2019)
5. G का S.I. का मात्रक …………….. होता हैं।
6. दाब का S.I. का मात्रक ………….. होता है।
7. घनत्व का SI मात्रक …………. है। (2019)
उत्तर:

  1. न्यूटन
  2. गुरुत्वाकर्षण
  3. नीचे
  4. 9.8
  5. N m2 kg-2
  6. N m-2
  7. kg m-3

सही जोड़ी बनाना
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 10
उत्तर:

  1. → (iii)
  2. → (iv)
  3. → (v)
  4. → (vi)
  5. → (i)
  6. → (ii)

सत्य/असत्य कथन

1. G का मान हैनरी केवेण्डिश ने ज्ञात किया।
2. गुरुत्वाकर्षण का नियम गैलीलियो ने दिया।
3. गुरुत्वाकर्षण को केन्द्रीय बल कहा जाता है।
4. सभी वस्तुओं पर गुरुत्वाकर्षण बल समान होता है।
5. चन्द्रमा पर वस्तुओं के भार पृथ्वी की अपेक्षा कम होते हैं।
उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम का गणितीय सूत्र लिखिए।
उत्तर:
F = \(\mathrm{G} \frac{m_{1} m_{2}}{d^{2}}\)

प्रश्न 2.
पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी वस्तु के मध्य लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का परिमाण ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
F = \(\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{\mathrm{R}^{2}}\)

प्रश्न 3.
‘G’ का S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर:
N m2 kg-2

प्रश्न 4.
‘G’ का मान लिखिए।
उत्तर:
6.673 x 10-11 N m2 kg-2

प्रश्न 5.
‘G’ का मान किस वैज्ञानिक ने ज्ञात किया?
उत्तर:
हेनरी कैवेण्डिशने

प्रश्न 6.
गुरुत्वीय त्वरण ‘g’ का S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर:
ms-2

प्रश्न 7.
‘g’ एवं ‘G’ में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
g = \(\mathrm{G} \frac{\mathrm{M}}{\mathrm{R}^{2}}\) अथवा gR2 = GM

प्रश्न 8.
सामान्यतः g का मान क्या लिखा जाता है?
उत्तर:
9.8 m s-2

प्रश्न 9.
चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण का मान कितना होता है?
उत्तर:
g/6 या 1.63 m s-2

प्रश्न 10.
किसी वस्तु के भार (w) एवं द्रव्यमान (m) में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
w = mg

प्रश्न 11.
भार के विभिन्न मात्रकों में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
1 किग्रा भार = 1 किग्रा बल = 9.8 न्यूटन

प्रश्न 12.
बल (F), दाब (P) एवं क्षेत्रफल (A) में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 11

प्रश्न 13.
दाब का S.I. मात्रक लिखिए। (2018)
उत्तर:
N m-2

प्रश्न 14.
घनत्व के लिए व्यंजक (सूत्र) लिखिए।
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 12

प्रश्न 15.
आपेक्षिक घनत्व के लिए व्यंजक (सूत्र) लिखिए।
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 13

प्रश्न 16.
घनत्व का S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर:
kg m-3

प्रश्न 17.
आपेक्षिक घनत्व का S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर:
कोई मात्रक नहीं

प्रश्न 18.
दाब सदिश राशि है या अदिश?
उत्तर:
अदिश

प्रश्न 19.
घनत्व सदिश राशि है या अदिश?
उत्तर:
अदिश

प्रश्न 20.
आपेक्षिक घनत्व सदिश राशि है या अदिश?
उत्तर:
अदिश।

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MP Board Class 9th Science Chapter 10 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘गुरुत्वाकर्षण बल’ से क्या समझते हो?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational force):
“वह बल जिससे दो पिण्ड एक-दूसरे से आकर्षित होते हैं, गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता है।”

प्रश्न 2.
द्रव्यमान केन्द्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
द्रव्यमान केन्द्र:
“वह बिन्दु जहाँ पर पिण्ड का सम्पूर्ण द्रव्यमान केन्द्रित माना जाता है, उस पिण्ड का द्रव्यमान केन्द्र कहलाता है।”

प्रश्न 3.
दो पिण्डों के मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उनके मध्य दूरी के अनुसार किस प्रकार बदलता है?
उत्तर:
दो पिण्डों के मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल F उनके मध्य दूरी d के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात्
\(\mathrm{F} \propto \frac{1}{d^{2}}\)

प्रश्न 4.
दो वस्तुओं के बीच गुरुत्वीय बल उनके द्रव्यमान पर किस प्रकार निर्भर करता है?
उत्तर:
दो वस्तुओं के मध्य गुरुत्वीय बल उन वस्तुओं के द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती होता है। अर्थात्
F = m1m2

प्रश्न 5.
गुरुत्वाकर्षण बल को केन्द्रीय बल क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण बल को केन्द्रीय बल कहा जाता है, क्योंकि इसकी माप पिण्ड के द्रव्यमान केन्द्र से की जाती है।

प्रश्न 6.
‘न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम’ में सार्वत्रिक से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सार्वत्रिक (Universal) से यहाँ अभिप्राय यह है कि वह सभी पिण्डों (वस्तुओं) पर लागू होता है चाहे वे छोटे हों या बड़े, खगोलीय हों या पार्थिव।

प्रश्न 7.
सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक से क्या समझते हो?
उत्तर:
सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (Universal Gravitational Constant):
“गुरुत्वाकर्षण बल की वह मात्रा जो एकांक द्रव्यमान के दो समान पिण्डों के बीच आरोपित होता है जबकि उनके द्रव्यमान केन्द्रों के बीच एकांक दूरी हो, सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहलाता है।” इसे G से प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 8.
गुरुत्वीय त्वरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
गुरुत्वीय त्वरण:
“पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण पिण्ड में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं।” इसे ‘g’ से प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 9.
द्रव्यमान से क्या समझते हो? इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर:
द्रव्यमान (Mass):
“किसी पिण्ड का द्रव्यमान वह भौतिक राशि है जो यह प्रदर्शित करती है कि उस पिण्ड में पदार्थ की कितनी मात्रा समाहित है।” इसे संकेत m से व्यक्त करते हैं।

द्रव्यात्मक का मात्रक:
S.I. पद्धति में द्रव्यमान का मात्रक kg है।

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प्रश्न 10.
भार से आप क्या समझते हो? इसका S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर:
भार (Weight):
“किसी पिण्ड का पृथ्वी पर भार उस बल के बराबर होता है जिससे पृथ्वी उस पिण्ड को अपनी ओर आकर्षित करती है।” इसे W से प्रदर्शित करते हैं।

भार का S.I. मात्रक:
न्यूटन (N)

प्रश्न 11.
यदि चन्द्रमा पृथ्वी को आकर्षित करता है तो पृथ्वी चन्द्रमा की ओर गति क्यों नहीं करती?
उत्तर:
चन्द्रमा पृथ्वी के चारों ओर वृत्ताकार मार्ग पर सदैव गतिमान रहता है जिसके कारण उस पर एक अपकेन्द्र बल आरोपित होता है जो दोनों के मध्य लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल को सन्तुलित कर देता है इसलिए न तो चन्द्रमा पृथ्वी की ओर गति करता है और न पृथ्वी चन्द्रमा की ओर गति करती है।

प्रश्न 12.
सभी वस्तुओं पर लगने वाला गुरुत्वीय बल उनके द्रव्यमान के समानुपाती होता है फिर भी एक भारी वस्तु एक हल्की वस्तु की तुलना में तेजी से क्यों नहीं गिरती ?
उत्तर:
गिरती हुई वस्तुओं के वेग को गुरुत्वीय त्वरण प्रभावित करता है उन पर लगने वाला गुरुत्वीय बल नहीं और गुरुत्वीय त्वरण भारी एवं हल्की सभी वस्तुओं पर समान होता है इसलिए एक भारी वस्तु एक हल्की वस्तु की तुलना में तेजी से नहीं गिरती बल्कि समान रूप से गिरती है।

प्रश्न 13.
वस्तु के द्रव्यमान एवं भार में एक मुख्य अन्तर बताइए।
उत्तर:
किसी वस्तु का द्रव्यमान उस वस्तु में निहित पदार्थ की मात्रा का मापन है जबकि उस वस्तु का भार उस वस्तु पर पृथ्वी द्वारा आरोपित बल है।

प्रश्न 14.
हम चन्द्रमा पर भारहीनता का अनुभव क्यों करते हैं?
उत्तर:
चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का भाग होता है इसलिए चन्द्रमा पर हमारे शरीर का भार पृथ्वी पर हमारे शरीर के भार से बहुत कम अर्थात् 1/6 भाग होता है इसलिए हमको चन्द्रमा पर भारहीनता का अनुभव होता है।

प्रश्न 15.
प्रणोद किसे कहते हैं? इसका मात्रक लिखिए। (2019)
उत्तर:
प्रणोद (Thrust):
“किसी वस्तु की सतह पर लम्बवत् लगने वाले बल को प्रणोद कहते हैं।” प्रणोद का मात्रक-न्यूटन।

प्रश्न 16.
दाब से क्या समझते हो? इसका मात्रक लिखिए।
अथवा
दाब को परिभाषित कीजिए एवं इसका S.I. मात्रक लिखिए।
उत्तर:
दाब (Pressure):
“एकांक क्षेत्रफल पर आरोपित प्रणोद को दाब कहते हैं। दूसरे शब्दों में, “एकांक क्षेत्रफल पर आरोपित लम्बवत् बल को दाब कहते हैं।” इसे P से निरूपित करते हैं। अर्थात्
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 14
दाब का मात्रक:
न्यूटन/मीटर2 या पास्कल।

प्रश्न 17.
दाब एवं क्षेत्रफल में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर:
दाब एवं क्षेत्रफल में सम्बन्ध-दाब क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात्
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 15

प्रश्न 18.
भारी सामान ढोने वाले वाहन में अतिरिक्त पहिए क्यों लगाए जाते हैं?
उत्तर:
भारी सामान होने वाले वाहन में अतिरिक्त पहिए लगाने से वाहन का पृथ्वी तल से सम्पर्क क्षेत्रफल बढ़ जाता है इससे उसके द्वारा पृथ्वी पर आरोपित दाब कम हो जाता है। इसलिए उसमें अतिरिक्त पहिए लगाए जाते हैं।

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प्रश्न 19.
चाकू या कुल्हाड़ी धारदार क्यों बनाये जाते हैं?
अथवा
पिन या कील नुकीली क्यों बनाई जाती है?
उत्तर:
चाकू या कुल्हाड़ी धारदार एवं पिन या कील नुकीली इसलिए बनाई जाती है जिससे सम्पर्क क्षेत्र कम हो जाता है। इससे दाब बढ़ जाता है जिसके कारण चाकू या कुल्हाड़ी द्वारा वस्तुओं को काटने एवं पिन या कील को गाढ़ने में आसानी होती है।

प्रश्न 20.
उत्प्लावन बल एवं उत्प्लावकता से क्या समझते हो?
उत्तर:
उत्प्लावन बल एवं उत्प्लावकता:
“किसी द्रव द्वारा उसमें आंशिक या पूर्णरूप से डूबी हुई वस्तु पर ऊपर की ओर आरोपित बल, उत्प्लावन बल कहलाता है एवं द्रव के इस गुण को उत्प्लावकता कहते हैं।”

प्रश्न 21.
आर्किमिडीज के सिद्धान्त से क्या समझते हो? (2018, 19)
उत्तर:
आर्किमिडीज का सिद्धान्त:
“जब किसी वस्तु को आंशिक या पूर्णरूप से किसी तरल में डुबाया जाता है तो उस पर ऊपर की ओर एक बल (उत्प्लावक बल) कार्य करता है जिसके कारण उस वस्तु के भार में कमी आ जाती है। भार में यह कमी उस वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होती है।”

प्रश्न 22.
किसी वस्तु के घनत्व से क्या तात्पर्य है? इसका S.I. मात्रक लिखिए। (2019)
उत्तर:
घनत्व (Density):
“किसी वस्तु के एकांक आयतन के द्रव्यमान को उस वस्तु का घनत्व कहते हैं।” अर्थात्
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 16
घनत्व का S.I. मात्रक किग्रा प्रति मीटर (Kg m-3)

प्रश्न 23.
किसी पदार्थ के आपेक्षित घनत्व से क्या समझते हो? इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर:
आपेक्षिक घनत्व (Relative Density):
“किसी पदार्थ के घनत्व एवं 4°C तापमान के शुद्ध पानी के घनत्व के अनुपात को उस पदार्थ का आपेक्षिक धनत्व कहते हैं।” अर्थात्
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 17
आपेक्षिक घनत्व का कोई मात्रक नहीं होता, क्योंकि यह एक अनुपात है।

प्रश्न 24.
सूर्य के चारों ओर किसी गृह की परिक्रमा करने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल का स्रोत क्या है? यह बल किन कारकों पर निर्भर करेगा?
उत्तर:
आवश्यक स्रोत है गुरुत्वाकर्षण बल। यह बल सूर्य तथा ग्रह के द्रव्यमानों के गुणनफल एवं उनके बीच की दूरी के वर्ग पर निर्भर करता है।

प्रश्न 25.
पृथ्वी पर किसी ऊँचाई से कोई पत्थर पृथ्वी के पृष्ठ के समानान्तर फेंका जाता है तथा उसी समय (क्षण) कोई अन्य पत्थर उसी ऊँचाई से ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर गिराया जाता है। इनमें से कौन-सा पत्थर पृथ्वी पर पहले पहुँचेगा और क्यों ?
उत्तर:
दोनों पत्थर पृथ्वी पर एक साथ पहुंचेंगे क्योंकि दोनों पत्थर समान ऊँचाई से ऊर्ध्वाधर शून्य वेग से गिरते हैं तथा दोनों पर समान गुरुत्वीय त्वरण लग रहा है।

प्रश्न 26.
मान लीजिए पृथ्वी का गुरुत्व बल अचानक शून्य हो जाता है, तो चन्द्रमा किस दिशा में गति करना प्रारम्भ कर देगा। (यदि उसे अन्य आकाशीय पिण्ड प्रभावित न करें।)
उत्तर:
चन्द्रमा सरल रेखीय पथ पर उसी दिशा में गति करना प्रारम्भ कर देगा जिस दिशा में वह उस क्षण था क्योंकि चन्द्रमा की वर्तुल गति पृथ्वी के गुरुत्व बल के द्वारा प्रदान किए गए अभिकेन्द्र बल के कारण थी।

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प्रश्न 27.
दो वायुयानों जिनमें एक विषुवत् वृत्त के ऊपर तथा दूसरा उत्तरी ध्रुव के ऊपर है, से h ऊँचाई से सर्वसम पैकेट गिराये जाते हैं। यह मानते हुए कि सभी स्थितियाँ सर्वसम हैं, क्या सभी पैकेट पृथ्वी के पृष्ठ पर एक ही समय पहुँचेंगे ? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
विषुवत् वृत्त पर ‘g’ का मान ध्रुवों पर ‘g’ के मान से कम होता है। अतः पैकेट ध्रुवों की तुलना में विषुवत् वृत्त पर धीरे से गिरेगा तथा वह वायु में अधिक समय तक रहेगा।

प्रश्न 28.
पृथ्वी पर सूर्य का गुरुत्व बल कार्य करता है तथापि पृथ्वी सूर्य में नहीं गिरती है, क्यों?
उत्तर:
गुरुत्वाकर्षण बल आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करने के लिए उत्तरदायी है। इसलिए पृथ्वी पर सूर्य का गुरुत्व बल कार्य करते हुए भी पृथ्वी सूर्य में नहीं गिरती है।

MP Board Class 9th Science Chapter 10 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पृथ्वी के तल पर रखी किसी वस्तु एवं पृथ्वी के मध्य लगने वाले गुरुत्वीय बल के परिमाण के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
हम जानते हैं कि d दूरी पर रखी m1 एवं m2 द्रव्यमान को दो वस्तुओं के मध्य लगने वाला गुरुत्वीय बल F होता है –
\(\mathrm{F}=\mathrm{G} \frac{m_{1} m_{2}}{d^{2}}\)
(न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के आधार पर) इसलिए M द्रव्यमान की पृथ्वी एवं m द्रव्यमान की वस्तु के मध्य लगने वाला गुरुत्वीय बल F होगा –
\(\mathrm{F}=\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{d^{2}}\)
लेकिन जब वस्तु पृथ्वी की सतह (तल) पर रखी हो तो पृथ्वी एवं वस्तु के मध्य दूरी पृथ्वी की त्रिज्या R के बराबर होगी अर्थात् d = R, तब
\(\mathrm{F}=\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{\mathrm{R}^{2}}\)
अतः अभीष्ट व्यंजक होगा
\(\mathrm{F}=\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{\mathrm{R}^{2}}\)

प्रश्न 2.
गुरुत्वीय त्वरण (g) एवं गुरुत्वीय नियतांक (G) के मध्य सम्बन्ध स्थापित कीजिए। (2019)
उत्तर:
गुरुत्वीय नियतांक (G) एवं गुरुत्वीय त्वरण (g) के मध्य सम्बन्ध ज्ञात करनाहम जानते हैं कि पृथ्वी तल पर रखी हुई m द्रव्यमान की वस्तु पर लगने वाला गुरुत्वीय बल F होता है –
\(\mathrm{F}=\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{\mathrm{R}^{2}}\) ….(1)
यदि यह बल वस्तु पर a त्वरण उत्पन्न करता है तो न्यूटन के गति के द्वितीय नियमानुसार हम पाते हैं कि –
F = mg …(2)
समीकरण (1) एवं समीकरण (2) से हम पाते हैं कि
\(m g=\mathrm{G} \frac{\mathrm{M} m}{\mathrm{R}^{2}}\)
अर्थात् \(g=\mathrm{G} \frac{\mathrm{M}}{\mathrm{R}^{2}}\)
अतः यही g एवं G के मध्य अभीष्ट सम्बन्ध है।

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प्रश्न 3.
किसी व्यक्ति का चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर भार का 1/6 गुना है। वह पृथ्वी पर 15 kg द्रव्यमान उठा सकता है। चन्द्रमा पर उतना ही बल लगाकर वह व्यक्ति कितना अधिकतम द्रव्यमान उठा सकेगा?
हल:
माना पृथ्वी पर गुरुत्वीय त्वरण ge = g है तो चन्द्रमा पर गुरुत्वीय त्वरण gm = g/6 होगा क्योंकि चन्द्रमा पर भार पृथ्वी पर भार का 1/6 है।
पृथ्वी पर 15 kg द्रव्यमान उठाने के लिए अनुप्रयुक्त बल
F = mge = 15 g N
उसी बल से चन्द्रमा पर मान लीजिए अधिकतम m kg द्रव्यमान उठा सकता है तो
m x gm = 15 ge
m x g/6 = 15 g
m = 15 x 6 = 90 kg
अतः अभीष्ट अधिकतम द्रव्यमान = 90 kg.

प्रश्न 4.
‘g’, ‘G’ तथा ‘R’ के पदों में पृथ्वी का औसत घनत्व परिकलित कीजिए।
हल:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 18
अतः पृथ्वी का अभीष्ट घनत्व \(\mathbf{D}=\frac{3 \mathbf{g}}{4 \pi \mathbf{G} \mathbf{R}}\)

प्रश्न 5.
किसी पिण्ड के भार में पृथ्वी के द्रव्यमान तथा त्रिज्या के सापेक्ष किस प्रकार परिवर्तन होता है? किसी परिकल्पित प्रकरण में यदि पृथ्वी का व्यास अपने वर्तमान व्यास का आधा तथा इसका द्रव्यमान अपने वर्तमान मान का चार गुना हो जाये तो पृथ्वी के पृष्ठ पर रखे किसी पिण्ड के भार पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
किसी पिण्ड का भार पृथ्वी के द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती एवं उसकी त्रिज्या के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है अर्थात्
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 19
अर्थात् पिण्ड का नवीन भार उसके मूल भार का 16 गुना हो जाएगा।

प्रश्न 6.
दो पिण्डों के बीच आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों तथा उनके बीच की दूरी पर किस प्रकार निर्भर करता है? किसी छात्र ने यह सोचा कि एक-दूसरे से बँधी दो ईंटें, एक ईंट की तुलना में, गुरुत्व बल के अधीन अधिक तेजी से गिरेंगी। क्या आप उसकी इस परिकल्पना से सहमत हैं अथवा नहीं? कारण लिखिए।
उत्तर:
दो पिण्डों के बीच आकर्षण बल उसके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है। अर्थात्
F ∝ m1m2
तथा उन दोनों पिण्डों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात्
\(\mathrm{F} \propto \frac{1}{d^{2}}\)
उस छात्र की परिकल्पना से हम सहमत नहीं हैं। उसकी परिकल्पना गलत है क्योंकि बँधी हुई दो ईंटें एक पिण्ड की तरह व्यवहार करेंगी तथा मुक्त पतन के प्रकरण में समान त्वरण से गिरकर समान समय में पृथ्वी पर गिरेंगी। इसका कारण यह है कि गुरुत्वीय त्वरण गिरते पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।

प्रश्न 7.
समान साइज तथा m एवं m2 द्रव्यमान के दो पिण्ड h1 एवं h2 ऊँचाइयों से एक ही क्षण गिराये जाते हैं। उनके द्वारा पृथ्वी तक पहुँचने में लिए गए समयों का अनुपात ज्ञात कीजिए। क्या यह अनुपात यही रहेगा यदि –
(i) एक पिण्ड खोखला तथा दूसरा ठोस हो, तथा
(ii) दोनों पिण्ड खोखले हों तथा प्रत्येक प्रकरण में उनके साइज समान रहें, कारण लिखिए।
हल:
मान लीजिए कि दोनों पिण्डों के पृथ्वी तक पहुँचने में लिए गए समय क्रमशः t1 एवं t2 हैं तो
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 20
अतः पिण्डों द्वारा लिए गए समयों में अनुपात = \(\sqrt{\frac{h_{1}}{h_{2}}}\)
चूँकि त्वरण समान हैं अतः दोनों प्रकरणों में अनुपात में कोई परिवर्तन नहीं होगा। मुक्त पतन के प्रकरण में त्वरण द्रव्यमान एवं साइज पर निर्भर नहीं करता है।

प्रश्न 8.
आर्किमिडीज के सिद्धान्त के अनुप्रयोग लिखिए। (2018, 19)
उत्तर:
आर्किमिडीज के सिद्धान्त के अनुप्रयोग:

  1. विभिन्न पदार्थों के आपेक्षिक घनत्व की गणना करना।
  2. स्वर्ण आदि धातुओं में मिलावट की जाँच करना।
  3. दुग्धमापी की क्रियाविधि।
  4. गुब्बारों का उड़ान भरना आदि।

प्रश्न 9.
एक वस्तु का भार पृथ्वी की सतह पर मापने पर 10 N आता है। इसका चन्द्रमा की सतह पर मापने पर कितना भार होगा? (2019)
हल:
हम जानते हैं कि
∵ चन्द्रमा की सतह पर किसी वस्तु का भार = \(\frac{1}{6}\) पृथ्वी की सतह पर उस वस्तु का भार
⇒ चन्द्रमा की सतह पर उस वस्तु का भार = \(\frac{1}{6}\) x 10 N = \(\frac{5}{3}\)N
= 1.7 N (लगभग)
अतः दी हुई वस्तु का चन्द्रमा की सतह पर अभीष्ट भार = 1.7N (लगभग)।

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MP Board Class 9th Science Chapter 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम’ की व्याख्या कीजिए।
अथवा
“न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण के नियम” को समझाते हुए नियम के सूत्र की व्युत्पत्ति कीजिए। (2019)
उत्तर:
न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम (Newton’s UniversalGravitational Law):
न्यूटन ने दो पिण्डों के मध्य लगने वाले आकर्षण बल की गणना के लिए एक नियम का प्रतिपादन किया जिसे ‘न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम’ नाम से जाना जाता है। इसके अनुसार-“ब्रह्माण्ड में प्रत्येक पिण्ड अन्य पिण्ड को एक निश्चित बल से आकर्षित करता है, यह बल पिण्डों के द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उन दोनों पिण्डों के मध्य की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।”
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 21
मान लीजिए कि दो पिण्ड A एवं B हैं जिनके द्रव्यमान m1 एवं m2 हैं तथा जिनके केन्द्रों के बीच की दूरी d है और यदि उनके बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल F हो तो उस नियमानुसार
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 22
जहाँ, G एक समानुपाती नियतांक है जिसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक कहते हैं।

प्रश्न 2.
(a) 5 cm भुजा के किसी घन को पहले जल में तथा फिर नमक के संतृप्त विलयन में डुबोया गया है। किस प्रकरण में यह अधिक उछाल बल अनुभव करेगा ? यदि इस घन की प्रत्येक भुजा घटाकर 4 cm कर दी जाये और फिर इसे जल में डुबोया जाये तो जल के लिए पहले प्रकरण की तुलना में अब घन द्वारा अनुभव किए जाने वाले उछाल बल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

(b) 4 kg भार की 4,000 kg m-3 घनत्व की किसी गेंद को 103kg m-3 घनत्व के जल में पूरा डुबाया जाता है। इस पर उछाल बल ज्ञात कीजिए। (दिया है: g= 10 m s-2)
उत्तर:
(a) नमक के संतृप्त घोल में डुबोने पर अधिक उछाल बल का अनुभव करेगा क्योंकि नमक के संतृप्त घोल का घनत्व जल के घनत्व से अधिक है।

चूँकि छोटे घन का आयतन प्रारम्भिक घन से कम है अतः यह कम आयतन का जल विस्थापित करेगा। इसलिए इस प्रकरण में कम उछाल का अनुभव करेगा।

(b) संख्यात्मक भाग का हल:
ज्ञात है:
गेंद का द्रव्यमान m = 4 kg
गेंद का घनत्व d = 4,000 kg m-3
जल का घनत्व dw = 103 kg m-3
गुरुत्वीय त्वरण = 10 m s-2
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 गुरुत्वाकर्षण image 23
विस्थापित जल का आयतन = गेंद का आयतन = 10-3ms
जल का द्रव्यमान = जल का आयतन x जल का घनत्व
= 10-3 x 103 = 1 kg
उछाल बल = जल का द्रव्यमान x गुरुत्वीय त्वरण
F = 1 x 10 = 10 N
अतः अभीष्ट उछाल बल = 10 N.

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 10 मध्यकालीन भारत

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
महमूद गजनवी कहाँ का शासक था?
(i) मुल्तान
(ii) मुहम्मद गौरी
(iii) बहमनी
(iv) मुहम्मद तुगलक।
उत्तर:
(ii) मुहम्मद गौरी

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प्रश्न 2.
गुलाम वंश का संस्थापक कौन था? (2008,09)
(i) इल्तुतमिश
(ii) गजनी
(iii) कुतुबुद्दीन ऐबक
(iv) ईराक।
उत्तर:
(iii) कुतुबुद्दीन ऐबक

प्रश्न 3.
सन् 1266 ई. में दिल्ली सल्तनत की सत्ता किसने सँभाली?
(i) इल्तुतमिश
(ii) रजिया
(iii) कुतुबुद्दीन ऐबक
(iv) बलबन।
उत्तर:
(iv) बलबन।

प्रश्न 4.
तराइन के प्रथम युद्ध में गौरी को किसने घायल किया?
(i) पृथ्वीराज
(ii) कृष्णराय
(iii) गोविन्दराज
(iv) दीपकराज।
उत्तर:
(i) पृथ्वीराज

प्रश्न 5.
हरिहर-बुक्का ने किस नगर की स्थापना की?
(i) बहमनी साम्राज्य
(ii) विजय नगर साम्राज्य
(iii) दिल्ली सल्तनत
(iv) मोहम्मद नगर।
उत्तर:
(ii) विजय नगर साम्राज्य

प्रश्न 6.
अफजल खाँ का वध किसने किया?
(i) शिवाजी
(ii) राजाराम
(iii) शाहू
(iv) ताराबाई।
उत्तर:
(i) शिवाजी

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. प्राचीन चोल शासकों का वर्णन …………. में किया गया है।
  2. परमार वंश का संस्थापक …………. था। (2018)
  3. महमूद गजनवी ने भारत पर कुल ………… बार आक्रमण किये।
  4. बलवन ने शासन संचालन के लिये ……….. नीति का अनुसरण किया था।

उत्तर:

  1. संगम साहित्य
  2. उपेन्द्रराज
  3. 17
  4. लौह और रक्त।

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सत्य असत्य

प्रश्न 1.
शिवाजी की माता का नाम जीजाबाई था।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
हल्दीघाटी का युद्ध अकबर और रानी दुर्गावती के बीच हुआ था।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
जहाँगीर के बाद शाहजहाँ सम्राट बना।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
हुमायूँ बाबर का बड़ा पुत्र था।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
कृष्णदेव राय ने जांबवती कल्याण ग्रन्थ की रचना की थी।
उत्तर:
सत्य।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
महमूद गजनवी ने भारत पर कितने आक्रमण किये?
उत्तर:
महमूद गजनवी ने भारत पर कुल 17 बार आक्रमण किये।

प्रश्न 2.
भारत में मुगल साम्राज्य की नींव किसने डाली थी?
अथवा
भारत में मुगल साम्राज्य की नींव किसने और किस परिस्थिति में डाली ? (2010)
उत्तर:
भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखने वाला बाबर था जो मध्य एशिया के राज्य फरगाना के शासक का पुत्र एवं तैमूर का वंशज था। बाबर के आक्रमण के समय उत्तरी-दक्षिणी भारत में राजनीतिक अस्थिरता थी। आपसी फूट, संघर्ष एवं षडयंत्र का बोलबाला था। इस राजनीतिक अव्यवस्था का बाबर ने पूरा लाभ उठाया।

प्रश्न 3.
विजयनगर की स्थापना किसने की थी?
उत्तर:
विजयनगर की स्थापना का श्रेय हरिहर तथा बुक्का नामक दो भाइयों को दिया जाता है।

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प्रश्न 4.
बहमनी साम्राज्य का संस्थापक कौन था?
उत्तर:
बहमनी राज्य की स्थापना हसन जफर खाँ (बहमनशाह) ने 1347 ई. में की थी।

प्रश्न 5.
दीन-ए-इलाही धर्म किसने चलाया था?
उत्तर:
अकबर ने ‘दीन-ए-इलाही’ नामक धर्म का प्रचलन किया था। ‘दीन’ का अर्थ है-धर्म तथा ‘इलाही’ का अर्थ है-ईश्वर। इस प्रकार दीन-ए-इलाही का अर्थ हुआ ‘ईश्वर का धर्म’।

प्रश्न 6.
गुरु गोविन्दसिंह कौन थे?
उत्तर:
गुरु गोविन्दसिंह सिक्खों के दसवें एवं अन्तिम गुरु थे। इन्होंने 1699 ई. में खालसा नामक एक संगठन की स्थापना की थी।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इल्तुतमिश कौन था? उसने कठिनाइयों पर कैसे विजय प्राप्त की ? (2008, 09)
उत्तर:
इल्तुतमिश इलबारी कबीले का तुर्क था। बाल्यकाल में ही उसके ईर्ष्यालु भाइयों ने उसे दास के रूप में जमालुद्दीन नामक व्यापारी के हाथ बेच दिया था। जमालुद्दीन उसको गजनी से दिल्ली लाया। इल्तुतमिश के गुणों से प्रभावित होकर कुतुबुद्दीन ऐबक ने उसे जमालुद्दीन से खरीद लिया। पहले उसे ऐबक ने ग्वालियर का गवर्नर नियुक्त किया तथा कुछ काल के पश्चात् ‘बरन’ का शासक बनाया गया। कुतुबुद्दीन उसके गुणों से पहले ही बहुत प्रभावित हो चुका था। अतः अपनी पुत्री का विवाह उसके साथ कर उसे बदायूँ का सूबेदार नियुक्त कर दिया। कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के पश्चात् इल्तुतमिश आरामशाह को पराजित कर 1211 ई. में दिल्ली का सुल्तान बना। अपनी प्रतिभा तथा योग्यता से उसने लगभग 25 वर्षों तक शासन कर दिल्ली सल्तनत को शक्तिशाली बनाया।

इल्तुतमिश ने अपनी कठिनाइयों का समाधान निम्न प्रकार से किया –

  • चालीस मण्डल का गठन :
    इल्तुतमिश ने अपने विरोधियों का दमन करने के लिए तथा अपनी स्थिति को दृढ़ करने के लिए अपने प्रति निष्ठावान् चालीस अमीरों का दल बनाया तथा उन्हें प्रशासन के मुख्य पदों पर नियुक्त किया।
  • यल्दौज का दमन :
    यल्दौज गजनी का सुल्तान था। इल्तुतमिश ने तराइन के मैदान में यल्दौज से युद्ध कर उसे पराजित किया।
  • कुबाचा का दमन :
    इल्तुतमिश ने 1227 ई. में कुबाचा पर आक्रमण किया तथा उसे पराजित कर अपनी अधीनता में किया।

प्रश्न 2.
अलाउद्दीन खिलजी की बाजार व्यवस्था क्या थी ? (2008, 09, 13, 15, 18)
उत्तर:
अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियन्त्रण व्यवस्था सैनिक सुधारों से सम्बन्धित थी। इस नीति का प्रमुख उद्देश्य था ऐसी बाजार व्यवस्था करना जिससे कम वेतन पर भी सैनिक सुखमय जीवन व्यतीत कर सकें। इस व्यवस्था का लाभ दिल्ली की जनता को भी मिला। अलाउद्दीन ने राशनिंग व्यवस्था भी क्रियान्वित की थी। मौसम के अचानक परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए उसने शासकीय अन्न भण्डार बनाये थे। उसने वस्तुओं के मूल्यों का निर्धारण मनमाने ढंग से न कर उत्पादन लागत के अनुसार करवाया था। बरनी ने अपने ग्रन्थ ‘तारीख-ए-फिरोजशाही’ में बाजार नियन्त्रण व्यवस्था का विस्तृत विवरण व वस्तुओं के मूल्य की सूची दी है।

प्रश्न 3.
तुगलक वंश ने दिल्ली सल्तनत पर कैसे सत्ता स्थापित की ? विवेचना कीजिए। (2009)
उत्तर:
गयासुद्दीन तुगलक, तुगलक वंश का संस्थापक था। अलाउद्दीन खिलजी को मृत्यु के पश्चात् जो अशान्ति फैली इसे वह सह न कर सका। 1320 ई. में वह सिंहासन छीनने वाले नेता नासिरुद्दीन खुसरो को हटाकर दिल्ली का सुल्तान बना। सुल्तान बनने के बाद उसने वारंगल, उड़ीसा और बंगाल के लिए सैनिक अभियान चलाये।

प्रश्न 4.
शेरशाह की शासन व्यवस्था का भारतीय इतिहास में क्या योगदान है? (2009, 10, 12, 16, 18)
उत्तर:
शेरशाह सूरी-शेरशाह सूरी मध्यकालीन भारतीय शासकों में अपना विशेष महत्त्व रखता है। उसने केवल पाँच वर्ष ही शासन किया था, परन्तु इस अल्पकाल में उसने साम्राज्य का विस्तार करने के साथ-साथ उच्चकोटि की प्रशासन व्यवस्था को भी कुशलतापूर्वक लागू किया था। शेरशाह ने जनता के हितों को सर्वोपरि रखा तथा कुशल प्रशासन की नींव रखी जिसका लाभ मुगलों को मिला। उसके प्रमुख कार्य निम्न प्रकार हैं –

  1. सैनिक प्रशासन, न्याय व्यवस्था एवं भू-राजस्व के क्षेत्र में अनेक कार्य प्रारम्भ किये जिनका अनुसरण बाद में अकबर ने किया।
  2. शेरशाह ने अपने साम्राज्य को ‘सरकारों’ एवं सरकारों को ‘परगनों’ में विभाजित किया।
  3. जनसाधारण की सुविधा के लिए शेरशाह ने चार प्रमुख सड़कों का निर्माण करवाया-ग्राण्ड ट्रंक रोड, आगरा-बुरहानपुर, आगरा-चित्तौड़-जोधपुर तथा लाहौर-मुल्तान।
  4. शेरशाह ने सड़कों के दोनों और छायादार वृक्ष लगवाये तथा दो-दो कोस की दूरी पर सरायों का निर्माण करवाया।
  5. शेरशाह ने शिक्षा के प्रसार के लिए मकतब तथा मदरसों की स्थापना करवायी।
  6. अनाथ तथा निर्धनों के लिए नि:शुल्क भोजन हेतु लंगर खोले गये।

प्रश्न 5.
पृथ्वीराज चौहान का भारतीय इतिहास में क्या योगदान रहा? लिखिए। (2008, 09, 12, 13, 14, 16, 18)
उत्तर:
पृथ्वीराज चौहान-पृथ्वीराज चौहान दिल्ली और अजमेर का योग्य, वीर, प्रतिभावान शक्तिशाली सम्राट था। उसके पास उत्तम सेना व सेनापति थे। पृथ्वीराज का समकालीन कवि ‘चंदवरदाई’ था। इस कवि ने ‘पृथ्वीराज रासो’ नामक ग्रन्थ की रचना की जिसमें पृथ्वीराज की यश गाथा का बड़ा ओजस्वी वर्णन है। पृथ्वीराज का 1191 ई. में मुहम्मद गौरी के साथ तराइन का प्रथम युद्ध हुआ। इस युद्ध में पृथ्वीराज ने मोहम्मद गौरी को बुरी तरह पराजित किया। गौरी अपनी अपमानजनक पराजय को भूल न सका और उसने पुनः तैयारी के साथ तराइन के मैदान में 1192 ई. में पृथ्वीराज से दूसरा युद्ध किया जो तराइन का द्वितीय युद्ध कहलाता है। इस युद्ध में पृथ्वीराज पराजित हुआ तथा मुहम्मद गौरी विजयी हुआ।

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प्रश्न 6.
महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास में क्यों प्रसिद्ध है? (2008, 14, 15, 17)
अथवा
महाराणा प्रताप पर टिप्पणी लिखिए। (2009, 11).
उत्तर:
महाराणा प्रताप मेवाड़ का वीर साहसी राजपूत राजा था। वह राणा उदयसिंह का पुत्र था तथा राणा सांगा का वंशज था। उसने अपनी राजधानी कुम्भलनेर को बनाया था। अकबर ने उससे सम्बन्ध स्थापित करने के लिए सन्धि के प्रयास किये पर उसे सफलता नहीं मिली तो उसने 18 जून, 1576 ई. में हल्दीघाटी के मैदान में मानसिंह की अध्यक्षता में शक्तिशाली सेना मेवाड़ पर आक्रमण करने के लिए भेजी। दोनों की सेनाओं में विकट संग्राम हुआ। मानसिंह युद्ध में विजयी हुआ। महाराणा प्रताप की सेना युद्ध में पराजित होकर भाग गयी। हल्दीघाटी की पराजय के पश्चात् महाराणा प्रताप ने वनों तथा पर्वतों को अपना निवास बनाया तथा मुगलों के साथ अनवरत संघर्ष जारी रखा तथा उनके आगे नतमस्तक नहीं हुआ। 1597 ई. में महारणा प्रताप का स्वर्गवास हो गया।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मोहम्मद गौरी व महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण किस उद्देश्य से किए थे व उन्हें सफलता मिलने के क्या कारण थे? लिखिए।
अथवा
महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण किस उद्देश्य से किये थे? (2008)
अथवा
मोहम्मद गौरी ने भारत पर आक्रमण किस उद्देश्य से किये थे? (2008)
उत्तर:
महमूद गजनवी के भारत पर आक्रमण करने के निम्नलिखित उद्देश्य थे –

  1. भारत की अपार धन-सम्पदा को लूटना महमूद गजनवी का प्रमुख उद्देश्य था।
  2. महमूद गजनवी का अन्य प्रमुख उद्देश्य भारत में इस्लाम धर्म का प्रसार करना था।
  3. महमूद गजनवी एक महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति था। वह भारत पर आक्रमण कर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना करना चाहता था।
  4. कुछ इतिहासकारों का मत है खलीफा के आदेश से ही उसने भारत पर आक्रमण किया था। परन्तु कुछ इतिहासकार उस मत का खण्डन करते हैं।
  5. महमूद गजनवी मूर्तियों तथा मूर्ति पूजकों को भी नष्ट करना चाहता था।

मुहम्मद गौरी के भारत पर आक्रमण के उद्देश्य :
मुहम्मद गौरी के भारत पर आक्रमण के निम्नलिखित उद्देश्य थे –

  1. मुहम्मद गौरी एक विशाल साम्राज्य का निर्माण करना चाहता था। अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने भारत पर आक्रमण किया।
  2. गौरी एक धर्मप्रिय मुसलमान था अतः वह भारत में मूर्ति-पूजा का विनाश करने तथा इस्लाम का प्रसार करना चाहता था।
  3. गौरी का अन्य उद्देश्य भारत की अपार धनराशि को लूटना भी था।
  4. गौरी पंजाब के गजनवी वंश का भी अन्त करना चाहता था।
  5. इस युग में सैनिक यश को बहुत महत्त्व दिया जाता था। अत: गौरी ने विजय और यश की कामना से प्रेरित होकर भी भारत पर आक्रमण किया था।

प्रश्न 2.
राजा कृष्णदेव राय की शासन व्यवस्था व जनता पर उसके प्रभाव का वर्णन कीजिए। (2009, 16)
अथवा
विजयनगर की शासन व्यवस्था का वर्णन कीजिए। (2009)
उत्तर:
कृष्ण देव राय विजयनगर का महानतम् शासक था। उसने अपने शासन काल में विजय नगर को चरम सीमा पर पहुँचा दिया।

विजय नगर की शासन व्यवस्था की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं –
(1) केन्द्रीय शासन :

  • राजा :
    राजा राज्य का सबसे बड़ा अधिकारी होता था। शासन की सम्पूर्ण शक्ति उसी में निहित थी, उसका आदेश ही कानून था। शासन, न्याय तथा सेना आदि की शक्तियाँ उसके हाथों में रहती थीं। राजा निरंकुश होते हुए भी अत्याचारी नहीं था। वह जन-कल्याण को ध्यान में रखकर शासन करता था।
  • मन्त्रिपरिषद् :
    राजा को शासन कार्यों में परामर्श देने के लिए एक मन्त्रिपरिषद् होती थी, परन्तु राजा मन्त्रिपरिषद् का परामर्श मानने के लिए बाध्य नहीं था। मन्त्रियों की नियुक्ति राजा द्वारा होती थी।
  • राजदरबार :
    विजयनगर के शासक मुस्लिम शासकों के समान राजदरबार की शोभा पर विशेष ध्यान देते थे। शासन की समस्त कार्यवाही राजदरबार में ही होती थी। दरबार के मन्त्रियों, सामन्तों, पुरोहितों तथा कवियों को सम्मान दिया जाता था।
  • वित्त व्यवस्था :
    विजयनगर में राजकीय आय का प्रमुख साधन भूमि-राजस्व था। किसानों से उनके उत्पादन का 1/3, 1/4 तथा 1/6 भाग राजस्व के रूप में वसूल किया जाता था।
  • न्याय व्यवस्था :
    विजयनगर साम्राज्य में मुख्य न्यायाधीश राजा होता था तथा उसका निर्णय ही अन्तिम माना जाता था। हिन्दू परम्पराओं तथा नियमों के आधार पर न्याय विधान बनाया हुआ था। दण्ड व्यवस्था अत्यधिक कठोर थी। गाँवों में ग्राम पंचायतों द्वारा न्याय प्रदान किया जाता था।
  • सैनिक व्यवस्था :
    विजयनगर की सैनिक व्यवस्था जागीरदारी प्रथा पर आधारित थी। सेना दो प्रकार की थी-एक केन्द्रीय या सम्राट की सेना, दूसरी प्रान्तपतियों की सेना। आवश्यकता पड़ने पर प्रान्तपति अपनी सेना राजा के पास सहायता के लिए भी भेजते थे।

(2) प्रान्तीय शासन :
सम्पूर्ण विजयनगर साम्राज्य 6 प्रान्तों में विभाजित था। प्रत्येक प्रान्त में एक प्रान्तपति या सूबेदार नियुक्त किया जाता था। सूबेदार राज-परिवार का सदस्य अथवा प्रभावशाली सामन्त होता था। सूबेदारों की अपनी-अपनी सेनाएँ होती थीं। आवश्यकता पड़ने पर सूबेदारों को राजा की सैनिक सहायता भी करनी पड़ती थी।

(3) स्थानीय शासन :
विजयनगर राज्य के प्रान्त अनेक ‘नाडुओं’ (जिलों) में विभाजित थे। प्रत्येक ‘नाडु’ अनेक नगरों तथा ग्रामों में विभाजित था। इस प्रकार ग्राम शासन की सबसे छोटी इकाई थी। गाँवों का प्रबन्ध ग्राम सभाओं द्वारा किया जाता था। ग्राम सभा में गाँव प्रमुख भाग लेते थे। ‘महानापकाचार्य’ नामक राजकर्मचारी स्थानीय शासन का निरीक्षण करता था।

प्रश्न 3.
अकबर की राजपूत व धार्मिक नीतियों की विवेचना कीजिए। (2008, 12, 15, 17)
अथवा
अकबर की राजपूत नीति की विवेचना कीजिए। (2009, 13, 14)
अथवा
अकबर की राजपूत नीति के क्या परिणाम निकले? समझाइए। (2008)
अथवा
अकबर की धार्मिक नीति बताइए। (2010) [संकेत- ‘धार्मिक नीति’ शीर्षक देखें।]
अथवा
अकबर की धार्मिक नीति के क्या परिणाम निकले? समझाइए। (2008) [संकेत- ‘अकबर की धार्मिक नीति व परिणाम’ शीर्षक देखें।]
उत्तर:
अकबर की राजपूत नीति-अकबर की राजपूत नीति की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं –

  1. अकबर ने राजपूतों को मुगल प्रशासन में उच्च पद प्रदान किये।
  2. राजपूतों के प्रति मित्रता भावना व सहयोग भावना की नीति रखी।
  3. अकबर ने राजपूत राजकुमारियों से विवाह भी किया।
  4. पराजित राजपूत राजाओं को सम्मान दिया तथा उन्हें आन्तरिक प्रशासन की स्वतन्त्रता दी।
  5. जिन राजपूत राजाओं ने अकबर की अधीनता नहीं स्वीकार की उनसे उसने युद्ध करने की नीति अपनायी।

अकबर की राजपूत नीति के निम्नलिखित परिणाम निकले :

  1. राजपूत मुगलों के मित्र तथा स्वामी भक्त बन गये।
  2. राजपूत मुगल साम्राज्य के विस्तार में सहायक हुए।
  3. मानसिंह, भगवानदास तथा राजपूत मनसबदारों ने मुगल शत्रुओं को पराजित करने में सहयोग दिया।
  4. अकबर द्वारा राजपूतों के प्रति जो सहयोग व प्रेम भावना का प्रदर्शन हुआ उससे हिन्दू और मुसलमानों के मध्य कटुता की भावना समाप्त हो गयी।
  5. अकबर को राजपूतों में से अनेक सुयोग्य सेनापति, कुशल प्रशासक तथा महान् कूटनीतिज्ञ मिले।

अकबर की धार्मिक नीति :
विभिन्न धर्मों के वाद-विवाद सुनने के पश्चात् अकबर ने अनुभव किया प्रत्येक धर्म में अच्छाई है, परन्तु संकीर्ण विचारों के धर्मान्ध व्यक्तियों द्वारा की गयी जटिल टीकाओं तथा रूढ़िवादी विचारों के कारण धर्म का भ्रमपूर्ण अर्थ किया जाता है। अतः इस विद्वेष तथा धर्म की अनुचित धारणा को समाप्त करने के लिए उसने सभी धर्मों की अच्छाइयों का समन्वय करके एक नवीन धर्म ‘दीन-ए-इलाही’ की स्थापना की।

धार्मिक नीति के परिणाम :
अकबर द्वारा प्रतिपादित धार्मिक नीति के निम्नलिखित परिणाम निकले –

  1. हिन्दू और मुसलमानों के मध्य दीर्घकाल से चली आ रही कटुता की भावना समाप्त हुई तथा वे एक-दूसरे के निकट आये।
  2. कला, साहित्य तथा संस्कृति के क्षेत्र में भी हिन्दू-मुस्लिम संस्कृतियों में समन्वय हुआ।
  3. अकबर की धार्मिक नीति के कारण राजपूत मुगल साम्राज्य के सहायक बन गये तथा विस्तार में भी उन्होंने अपूर्व सहयोग दिया।
  4. भारत की बहुसंख्यक जनता हिन्दू थी जो अकबर की धार्मिक नीति से प्रभावित होकर मुगल साम्राज्य की सहयोगी हो गयी। इस प्रकार अकबर की धार्मिक नीति ने उसे एक राष्ट्रीय शासक बना दिया।
  5. धार्मिक नीति के कारण गैर-मुस्लिम जनता में से अकबर को कुशल, योग्य प्रशासक तथा वीर रण-कुशल सैनिक भी प्राप्त हुए जिससे मुगल साम्राज्य को दृढ़ता मिली।

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प्रश्न 4.
भारत में मुगल सत्ता का प्रतिरोध करने में किन-किन भारतीय राजाओं एवं शासकों की भूमिका रही? उसका वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में मुगल सत्ता का प्रतिरोध :
भारत में मुगल सत्ता का प्रतिरोध करने में मेवाड़ के शासक राणा सांगा, महाराणा प्रताप, गोंडवाना की रानी दुर्गावती तथा मराठा शासक शिवाजी, सिक्ख गुरु गोविन्द सिंह प्रमुख थे।

राणा सांगा :
मेवाड़ के शासक राणा सांगा ने बाबर को खानवा के मैदान में कड़ी टक्कर दी। दुर्भाग्य से राणा सांगा पराजित हुए मगर जब तक वह जीवित रहे उन्होंने हार नहीं मानी। 1528 ई. को राणा सांगा की मृत्यु हो गई। राणा सांगा की मृत्यु के बाद मुगल सत्ता का प्रतिरोध महाराणा उदयसिंह (1537-1572 ई.) ने किया।

महाराणा प्रताप :
उदयसिंह की 1572 ई. में मृत्यु के पश्चात् उनका पुत्र महाराणा प्रताप मेवाड़ का शासक बना। महाराणा प्रताप ने जीवित रहने तक, मुगल सत्ता के प्रमुख शासक अकबर को कड़ी चुनौतियाँ दी। मुगल सत्ता को टक्कर देने के लिए महाराणा प्रताप ने मेवाड़ को संगठित किया। उन्होंने जनसम्पर्क द्वारा राज्य में मुगल सत्ता के विरुद्ध व्यापक जागरण चलाया। इन उपायों से मेवाड़ में एक सूत्रता आई और सम्पूर्ण मेवाड़ मुगल सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ा हुआ। राणा प्रताप को अपने राज्य के कुछ भागों को खोना पड़ा मगर हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार मुगलों से युद्ध जारी रखा और अपने खोये हुए प्रदेशों के अनेक भागों को प्राप्त कर लिया। इस प्रकार महाराणा प्रताप ने अपने देश के प्रति मरते दम तक वीरता और साहस का परिचय दिया।

रानी दुर्गावती:
रानी दुर्गावती महोला की चंदेल राजकुमारी थी। अपने पति दलपति शाह की मृत्यु के बाद उसने अपने अवयस्क पुत्र वीरनारायण की संरक्षिका के रूप में राज्य का कार्यभार ग्रहण किया। दिल्ली के सम्राट अकबर ने गढ़ा राज्य की विशालता और धन सम्पन्नता के बारे में सुना तो उसने अपनी साम्राज्य लिप्सा की पूर्ति के लिए अपने सेनापति आसफ खाँ को विशाल सेना के साथ गढ़ा पर आक्रमण करने के लिए भेज दिया। रानी दुर्गावती ने अकबर की अधीनता के स्थान पर उसकी सेनाओं से युद्ध करने का निश्चय किया। रानी ने अत्यन्त वीरता के साथ आसफ खाँ की सेनाओं के साथ युद्ध किया, वह लड़ते-लड़ते गम्भीर रूप से घायल हो गई। घायलावस्था में दुर्गावती आगे युद्ध जारी रखने में असमर्थ हो गईं किन्तु वह नहीं चाहती थीं कि अकबर के सैनिक उसको बन्दी बनाकर अपमानित करें। इसलिए उसने स्वयं को कटार मारकर अपना बलिदान कर दिया। पुत्र वीरनारायण भी युद्ध करता हुआ वीरगति को प्राप्त हुआ।

छत्रपति शिवाजी :
शिवाजी का मध्यकालीन भारतीय इतिहास में महत्त्व इस कारण है क्योंकि उनका राजनीतिक आदर्श तथा लक्ष्य हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना था। उन्होंने बड़ी वीरता के साथ मुगल सम्राट औरंगजेब से संघर्ष किया तथा कभी भी सिर नहीं झुकाया। कट्टर हिन्दू होते हुए भी वे मुसलमानों को सम्मान देते थे। खफीखाँ के शब्दों में, “शिवाजी ने यह नियम बनाया था कि लूट के समय उसके सैनिक मस्जिदों, कुरान तथा स्त्रियों को किसी प्रकार नुकसान न पहुँचाएँ।”

गुरुगोविन्द सिंह :
मुगल प्रशासन ने 1675 ई. में गुरु तेगबहादुर को फाँसी का हुक्म दिया जिससे सिक्ख समुदाय औरंगजेब से बहुत नाराज हो गया। दसवें गुरु गोविन्दसिंह ने सिक्खों को सैनिक के रूप में संगठित कर मुगल सेनाओं के विरुद्ध युद्ध करने के लिए तैयार किया। गुरु गोविन्दसिंह ने 1699 ई. में खालसा नामक एक संगठन की स्थापना की। यह एक जाति विहीन सैनिक संगठन था जिसमें सभी लोगों को बिना जाति भेद के शामिल करने की व्यवस्था थी। सिक्ख समुदाय ने मुगल साम्राज्य के समक्ष चुनौतियाँ खड़ी कर दीं।

इन भारतीय राजाओं व शासकों ने मुगल शासकों से अपनी स्वतन्त्रता के बदले न तो मित्रता की और न ही समर्पण किया, बल्कि वीरता के साथ मुगलों को हर मोड़ पर कड़ी चुनौतियाँ दीं।

प्रश्न 5.
मुगल साम्राज्य के पतन के कारण लिखिए। (2008,09, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18)
अथवा
मुगल साम्राज्य के पतन के कोई पाँच कारण लिखिए और किसी एक कारण को विस्तार से लिखिए। (2011)
उत्तर:
मुगल साम्राज्य के पतन के निम्नलिखित कारण थे –
(1) निरंकुश तथा केन्द्रीभूत शासन :
मुगलकालीन शासन व्यवस्था पूर्णतया निरंकुश तथा केन्द्रीभूत थी। निरंकुश तथा केन्द्रीभूत शासन में शासन की समस्त शक्तियाँ सम्राट के हाथों में केन्द्रित रहती हैं। ऐसी शासन व्यवस्था उस समय ही दृढ़ रहती है, जबकि सम्राट योग्य तथा कुशल हो। औरंगजेब के पश्चात् मुगल वंश के शासक अपने पूर्वज शासकों की तरह योग्य तथा कुशल नहीं थे। अत: वे मुगल साम्राज्य को सुरक्षित तथा संगठित नहीं रख सके। अतः ऐसी दशा में मुगल साम्राज्य का पतन होना अनिवार्य था।

(2) औरंगजेब की धार्मिक नीति :
अकबर ने जिस धार्मिक सहिष्णुता तथा सुलहकुल की नीति को अपनाया था उसे औरंगजेब ने पूर्णतया त्याग दिया था। उसने हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया तथा हिन्दूओं को बलपूर्वक मुसलमान बनाने का प्रयास किया था। उसकी इस धार्मिक नीति के कारण ही हिन्दू तथा सिक्ख मुगल साम्राज्य के विरोधी हो गये। साथ ही बुन्देलों, जाटों, मराठों तथा राजपूतों ने विद्रोह कर मुगल साम्राज्य को हिला दिया।

(3) साम्राज्य की विशालता :
औरंगजेब के शासनकाल तक मुगल साम्राज्य इतना विशाल हो गया था कि उस पर व्यवस्थित ढंग से शासन करना तथा शान्ति की व्यवस्था करना एक जटिल समस्या थी। साम्राज्य की विशालता के कारण ही दूर के प्रान्तों पर भी नियन्त्रण रखना कठिन हो गया था।

(4) औरंगजेब के अयोग्य उत्तराधिकारी :
औरंगजेब के समस्त उत्तराधिकारी अयोग्य थे। वे सब नाममात्र के सम्राट थे। वे परस्पर अपनी समस्याओं में ही उलझे रहते थे तथा शासन की सुरक्षा की ओर तनिक भी ध्यान नहीं देते थे।

(5) औरंगजेब द्वारा दीर्घकाल तक युद्ध करना :
औरंगजेब ने अपने शासन के पहले पच्चीस वर्ष उत्तरी भारत में विद्रोहों को दबाने में व्यतीत किये। इसी प्रकार दक्षिण के अभियान में भी उसका पर्याप्त समय लगा जिससे उसकी शक्ति पर्याप्त दुर्बल हो गयी। परिणामस्वरूप औरंगजेब के कुछ काल के बाद ही मुगल साम्राज्य का पतन हो गया।

(6) उत्तराधिकार के नियमों का अभाव :
मुगलों में उत्तराधिकार के कोई निश्चित नियम नहीं थे। परिणामस्वरूप सम्राट की मृत्यु के पश्चात् राजपुत्रों में सिंहासन प्राप्त करने के लिये परस्पर संघर्ष छिड़ जाता था। इस प्रकार के संघर्षों ने मुगल साम्राज्य को छिन्न-भिन्न कर दिया।

(7) औरंगजेब की दक्षिण की नीति :
औरंगजेब की दक्षिण की नीति भी मुगल साम्राज्य के पतन का कारण सिद्ध हुई। उसने अपने शासन के 25 वर्ष दक्षिण में संघर्ष करने में ही व्यतीत किये। परिणामस्वरूप वह उत्तरी भारत की ओर ध्यान ही नहीं दे पाया जिससे स्थान-स्थान पर विद्रोह होने लगे तथा मुगल साम्राज्य सैनिक, प्रशासनिक तथा आर्थिक दृष्टि से खोखला हो गया।

(8) मराठों का उत्थान :
मराठों के उत्थान ने भी मुगल साम्राज्य पर आघात किया। शिवाजी से संघर्ष करने से मुगल सेना अत्यन्त दुर्बल हो गयी तथा औरंगजेब के लिए मराठे जीवन-पर्यन्त सिरदर्द बने रहे। औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात् भी मराठे मुगलों से संघर्ष करते रहे।

(9) आर्थिक दुर्बलता :
अकबर के पश्चात् समस्त मुगल शासकों ने अपना समय साम्राज्य विस्तार तथा युद्धों के करने में लगाया, जिससे साम्राज्य की आर्थिक व्यवस्था जर्जर हो गयी।

इस प्रकार निरन्तर युद्ध, स्वेच्छाचारी शासन, अयोग्य उत्तराधिकारी, धर्म आधारित शासन, सैन्य शक्ति में ह्रास, गुटबन्दी आदि मुगल साम्राज्य के पतन में सहायक हुए।

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प्रश्न 1.
(1) महाराणा प्रताप
(2) रानी दुर्गावती
(3) छत्रपति शिवाजी। (2008)
अथवा
शिवाजी भारतीय इतिहास में क्यों प्रसिद्ध हैं? वर्णन कीजिए। (2009, 17)
उत्तर:
छत्रपति शिवाजी-शिवाजी का जन्म 20 अप्रैल, 1627 ई. में शिवनेर के किले में हुआ था। उनके पिता का नाम शाहजी भोंसले तथा माता का नाम जीजाबाई था। जीजाबाई एक धर्मात्मा, सदाचारिणी तथा बुद्धिमान स्त्री थीं। उन्होंने शिवाजी को धर्म नेताओं तथा साधु-सन्तों की शिक्षा का ज्ञान कराकर उनमें धर्मनिष्ठा का विकास किया। रामदास तथा तुकाराम ने उनमें हिन्दू धर्म तथा राष्ट्र प्रेम की भावना का विकास किया। शिवाजी के प्रारम्भ के नौ वर्ष शिवनेर, बैजपुर, शिवपुर आदि में व्यतीत हुए। शाहजी भोंसले ने दादा कोणदेव को शिवाजी का संरक्षक नियुक्त किया था। कोणदेव ने उन्हें प्रशासनिक तथा सैनिक शिक्षा दी। 18 वर्ष की अल्प आयु में ही शिवाजी ने पूना के आस-पास रायगढ़, कोंकण तथा तोरण के किलों पर अधिकार जमा लिया था। दादा कोणदेव की मृत्यु के पश्चात् शिवाजी ने अपनी जागीर का विस्तार किया तथा मराठों को संगठित कर मराठा राज्य की स्थापना की।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इतिहासकारों के अनुसार ईसा की कौन-सी शताब्दी को मध्यकाल का आरम्भ माना जाता है?
(i) ईसा की छठी शताब्दी
(ii) ईसा की सातवीं शताब्दी
(iii) ईसा की आठवीं शताब्दी
(iv) ईसा की दसवीं शताब्दी।
उत्तर:
(iii) ईसा की आठवीं शताब्दी

प्रश्न 2.
तराइन का प्रथम युद्ध हुआ
(i) 1030 ई. में
(ii) 1150 ई. में
(iii) 1170 ई. में
(iv) 1191 ई. में।
उत्तर:
(iv) 1191 ई. में।

प्रश्न 3.
मुहम्मद गौरी के आक्रमण के समय कन्नौज का शासक था
(i) मिहिर भोज
(ii) पृथ्वीराज चौहान
(iii) जयचन्द
(iv) धर्मपाल।
उत्तर:
(iii) जयचन्द

प्रश्न 4.
तालीकोट का युद्ध हुआ
(i) 1565 ई. में
(ii) 1585 ई. में
(iii) 1505 ई. में
(iv) 1525 ई. में।
उत्तर:
(i) 1565 ई. में

प्रश्न 5.
अकबर का जन्म हुआ
(i) 1505 ई. में
(ii) 1530 ई. में
(iii) 1542 ई. में
(iv) 1545 ई. में।
उत्तर:
(iii) 1542 ई. में

प्रश्न 6.
नूरजहाँ पत्नी थी
(i) अकबर की
(ii) हुमायूँ की
(iii) बाबर की
(iv) जहाँगीर की।
उत्तर:
(iv) जहाँगीर की।

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प्रश्न 7.
पानीपत का द्वितीय युद्ध हुआ था
(i) अकबर और आदिल शाह में
(ii) अकबर और हेमू में
(iii) अकबर और उजवेको में
(iv) अकबर और अधमखाँ में।
उत्तर:
(ii) अकबर और हेमू में

प्रश्न 8.
महाराणा प्रताप के घोड़े का नाम था
(i) मेवाड़
(ii) पूजा
(iii) रामशाह
(iv) चेतक।
उत्तर:
(iv) चेतक।

प्रश्न 9.
रानी दुर्गावती का विवाह हुआ था
(i) दलपति शाह से
(ii) बाजबहादुर से
(iii) आसफ से
(iv) मानसिंह से।
उत्तर:
(i) दलपति शाह से

प्रश्न 10.
पुरन्दर की सन्धि की गई
(i) 1605 ई. में
(ii) 1645 ई. में
(iii) 1665 ई. में
(iv) 1685 ई. में।
उत्तर:
(iii) 1665 ई. में

प्रश्न 11.
खालसा नामक संगठन की स्थापना की
(i) गुरुनानक ने
(ii) गुरु तेगबहादुर ने
(iii) गुरु गोविन्दसिंह ने
(iv) उपर्युक्त में कोई नहीं।
उत्तर:
(iii) गुरु गोविन्दसिंह ने

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. मुगल शासनकाल में सही ढंग से भू-मापन …………. ने कराया। (2008)
  2. ताजमहल का निर्माण मुगल शासक …………. ने कराया। (2008, 09)
  3. शिवाजी की माता का नाम …………. था। (2016)
  4. मेवाड़ का शासक ………… था। (2012)

उत्तर:

  1. शेरशाह सूरी
  2. शाहजहाँ
  3. जीजाबाई
  4. महाराणा प्रताप।

सत्य असत्य

प्रश्न 1.
गुलाम वंश का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक था। (2010)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
हुमायूँ बाबर का बड़ा पुत्र था।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
कुतुबमीनार आगरा में है। (2009)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
जजिया हिन्दुओं पर लगाया गया कर था। (2011)
उत्तर:
सत्य।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 10 मध्यकालीन भारत - 1
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (घ)
  3. → (ङ)
  4. → (क)
  5. → (ग)
  6. → (च)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
खजुराहो के मन्दिरों का निर्माण किसने किया? (2008)
उत्तर:
चन्देल वंश के शासकों ने

प्रश्न 2.
महमूद गजनवी ने भारत पर कितने बार आक्रमण किए? (2017)
उत्तर:
17 बार

प्रश्न 3.
अफजल खाँ का वध किया था। (2008)
उत्तर:
छत्रपति शिवाजी

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प्रश्न 4.
एलोरा के मन्दिरों का निर्माण किस काल में हुआ? (2017)
उत्तर:
गुप्तकाल में

प्रश्न 5.
अकबर द्वारा चलायी गयी धार्मिक नीति। (2009)
उत्तर:
दीन-ए-इलाही।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अध्ययन की दृष्टि से मध्यकाल को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर:
मध्यकाल को अध्ययन की दृष्टि से दो भागों में बाँटा गया है। आठवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक के काल को पूर्व मध्यकाल कहते हैं। तेरहवीं शताब्दी से अठारहवीं शताब्दी तक का काल उत्तर मध्यकाल के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 2.
प्रसिद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना किसने की थी?
उत्तर:
विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना धर्मपाल ने की थी। यह बौद्ध धर्म की शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था।

प्रश्न 3.
प्रसिद्ध भोजपुर मन्दिर एवं भोपाल का बड़ा तालाब किस राजा ने बनवाये?
उत्तर:
प्रसिद्ध भोजपुर मन्दिर एवं भोपाल का बड़ा तालाब राजा भोज के काल के बने हैं।

प्रश्न 4.
चौहान वंश का सर्वाधिक प्रतापी शासक कौन था?
उत्तर:
चौहान वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली और अन्तिम शासक पृथ्वीराज चौहान था।

प्रश्न 5.
मुहम्मद गौरी कहाँ का शासक था? उसने भारत पर कब और कहाँ आक्रमण किया था?
उत्तर:
मुहम्मद गौरी गजनी का शासक था, उसने भारत पर प्रथम आक्रमण 1175 ई. में मुल्तान पर किया था।

प्रश्न 6.
तराइन का प्रथम युद्ध कब और किसके मध्य हुआ था?
उत्तर:
तराइन का प्रथम युद्ध 1191 ई. में मुहम्मद गौरी तथा पृथ्वीराज चौहान के मध्य हुआ था।

प्रश्न 7.
तराइन का द्वितीय युद्ध कब और किसके मध्य हुआ था? इस युद्ध का क्या परिणाम निकला?
उत्तर:
तराइन का द्वितीय युद्ध 1192 ई. में मुहम्मद गौरी तथा पृथ्वीराज चौहान के मध्य हुआ था। इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान पराजित हुआ तथा उसकी हत्या कर दी गयी।

प्रश्न 8.
कुतुबुद्दीन ऐबक कौन था? उसने कौन-सी इमारत बनवायी थी?
उत्तर:
कुतुबुद्दीन ऐबक मुहम्मद गौरी का प्रमुख गुलाम था। तराइन के द्वितीय युद्ध के पश्चात् मुहम्मद गौरी ने उसे अपने भारतीय साम्राज्य का शासक नियुक्त किया था। दिल्ली स्थित कुतुबमीनार को बनवाने का श्रेय उसी को दिया जाता है।

प्रश्न 9.
रजिया सुल्तान कौन थी?
उत्तर:
रजिया सुल्तान इल्तुतमिश की पुत्री थी तथा दिल्ली सल्तनत की प्रथम महिला सुल्तान थी।

प्रश्न 10.
चालीस गुलामों के दल का गठन किस सुल्तान ने किया था?
उत्तर:
इल्तुतमिश ने चालीस गुलामों के दल का गठन किया था।

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प्रश्न 11.
पागल बादशाह तुगलक वंश के किस शासक को माना जाता है?
उत्तर:
मुहम्मद तुगलक को।

प्रश्न 12.
पानीपत का प्रथम युद्ध कब हुआ था ? इस युद्ध के क्या परिणाम निकले?
उत्तर:
पानीपत का प्रथम युद्ध 1526 ई. में हुआ था। इस युद्ध में बाबर की विजय के साथ मुगल साम्राज्य की स्थापना हुई।

प्रश्न 13.
चौसा का युद्ध कब और किसके मध्य हुआ था?
उत्तर:
चौसा का युद्ध 1539 ई. में हुमायूँ और शेरखाँ के मध्य हुआ था।

प्रश्न 14.
हुमायूँ की मृत्यु कब और कैसे हुई?
उत्तर:
1556 ई. को पुस्तकालय की छत से उतरते समय पैर फिसलने से हुमायूँ की मृत्यु हो गई।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मध्यकाल से क्या आशय है? इसका अन्त कौन-सी शताब्दी में माना जाता है?
उत्तर:
मध्यकाल का आशय :
मध्यकाल से आशय उस काल से लिया जाता है, जो प्राचीन काल और आधुनिक काल के मध्य का समय था। इतिहासकारों ने ईसा की आठवीं शताब्दी को मध्यकाल का प्रारम्भ तथा अठारहवीं शताब्दी को उसका अन्त माना है। मध्यकाल का प्रारम्भ आठवीं शताब्दी को इसलिए माना जाता है क्योंकि इस समय भारत के सामाजिक जीवन में अनेक परिवर्तन हो रहे थे और इन परिवर्तनों ने भारत के सामाजिक जीवन के अनेक पक्षों को प्रभावित किया था। जीवन के राजनीतिक और आर्थिक पक्षों पर उनका प्रभाव पड़ा जैसे सामाजिक जीवन, धर्म, भाषा, कला आदि सभी क्षेत्रों को इन परिवर्तनों ने प्रभावित किया। इसलिए आठवीं शताब्दी को मध्यकाल का प्रारम्भ माना जाता है। इसी प्रकार अठारहवीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य के पतन और अंग्रेजों के आने से भी अनेक परिवर्तन हुए। इसीलिए मध्यकाल का अन्त अठारहवीं शताब्दी को माना जाता है।

प्रश्न 2.
मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत
मध्यकालीन भारतीय इतिहास को जानने के लिए हमारे पास पुरातात्विक व साहित्यिक स्रोत उपलब्ध हैं, जो निम्न प्रकार हैं

  • पुरातात्विक स्रोत :
    इसमें स्मारक, मूर्तियाँ, मन्दिर, मस्जिद, मीनारें, किले, दीवारों पर कलाकृति, चित्रकला, मुद्राएँ, धातु पत्रक आदि।
  • साहित्यिक स्रोत :
    इसमें राजतंरगिणी, तुज्क-ए-बाबरी, पृथ्वीराज रासो, पद्यावत तथा अकबरनामा आदि प्रमुख हैं।

प्रश्न 3.
हर्ष के पश्चात् भारत की राजनैतिक स्थिति में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर:
हर्षवर्धन की मृत्यु के पश्चात् भारत में राजनैतिक रिक्तता की स्थिति निर्मित हो गई और विकेन्द्रीकरण की प्रवृत्ति के कारण सामन्ती शक्तियों ने देश की राजनैतिक एकता को छिन्न-भिन्न कर दिया। इसी दौरान भारत में अनेक राजवंश उत्पन्न हो गये। जैसे उत्तर भारत में गुर्जर प्रतिहार, पालवंश, चालुक्य, परमार, चौहान मुख्य राजवंश थे। दक्षिण भारत में पल्लव, राष्ट्रकूट, कल्याणी के चालुक्य, चेर, पाण्ड्य, चोल प्रमुख साम्राज्य थे।

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प्रश्न 4.
पल्लव कौन थे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पल्लव :
पल्लवों का उदय कृष्णा नदी के दक्षिण प्रदेश (आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडु) में हुआ। नरसिंह वर्मन प्रथम और नरसिंह वर्मन द्वितीय इस वंश के प्रतापी शासक हुए। कालान्तर में चालुक्य, पाण्ड्य और राष्ट्रकूटों से पल्लवों के संघर्ष चलते रहे। लगभग 899 ई. में इस वंश के अन्तिम शासक अपराजित वर्मन को चोलों ने हराकर इस राज्य पर अपना अधिकार कर लिया। पल्लव राजाओं ने लगभग 500 वर्षों तक शासन किया।

प्रश्न 5.
चालुक्य कौन थे? चालुक्य प्रशासन की प्रमुख विशेषताएँ बताइए। (2008, 11)
उत्तर:
चालुक्य :
चालुक्य वंश ने दक्षिण भारत में छठी शताब्दी ई. के मध्य से आठवीं शताब्दी के मध्य शासन किया। इसकी राजधानी कर्नाटक (वातापी) थी, तथा यहीं से इस वंश का राजनैतिक उत्कर्ष हुआ, इसलिए इन चालुक्यों को बादायी (वातापी) के चालुक्य कहा जाता है। चालुक्य राजाओं ने दक्षिण भारत को राजनीतिक एकता के सूत्र में एकीकृत करने का प्रयास किया। इनके प्रशासन की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार थीं –

  1. राजतन्त्र शासन प्रणाली प्रचलित थी। सम्राट प्रशासन तन्त्र का केन्द्र बिन्दु होता था।
  2. अपने विजय करे हुए प्रदेशों पर सामन्तों को शासन करने का अधिकार प्रदान किया।
  3. ग्राम, शासन की सबसे छोटी इकाई थी।
  4. चालुक्यों ने लगभग दो सौ वर्षों तक शासन किया।

प्रश्न 6.
चोल प्रशासन की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। (2008, 09, 10)
उत्तर:
दक्षिण भारत का प्राचीनतम शक्तिशाली राजवंश चोल था। प्राचीन चोल शासकों का वर्णन संगम साहित्य में किया गया है। चोल राजवंश अपने प्रशासनिक सुधार कार्यों के लिए इतिहास में जाना जाता है।

चोल प्रशासन की विशेषताएँ –

  1. चोल शासन का स्वरूप राजतन्त्रात्मक था। राजा ही शासन का प्रमुख संचालक था।
  2. साम्राज्य प्रान्तों में जो मण्डलम कहलाते थे, बँटा हुआ था। मण्डलम को वलनाडुओं (जिलों) में विभाजित किया गया था।
  3. शासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम थी व महत्त्वपूर्ण इकाई ग्राम सभा तीन भागों में अर्थात् उर (आम लोगों की सभा), सभा (विद्वान, ब्राह्मण), नगरम् (व्यापारी, दुकानदार, शिल्पी) में विभाजित थी।
  4. ग्राम की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अनेक समितियाँ गठित थीं।
  5. राज्य की आय का मुख्य स्रोत भूमि तथा व्यापार कर थे।

प्रश्न 7.
नीचे दिये गये राजवंशों पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए
(i) राष्ट्रकूट
(ii) चेर राज्य
(iii) पाण्डय राज्य।
उत्तर:
(i) राष्ट्रकूट :
इस वंश के प्रारम्भिक नरेश का नाम नन्नराज था। इस वंश के द्वितीय शासक (650 से 665 ई.) ने साम्राज्य विस्तार के लिए अनेक कार्य किये। राष्ट्रकूट शासक दक्षिण भारत में अपनी शक्ति का साम्राज्य विस्तार के लिये जाने जाते हैं। कन्नौज तथा उत्तर भारत पर अधिकार करने के लिये राष्ट्रकूटों को गुर्जर प्रतिहार व पाल वंश से सतत् संघर्ष करना पड़ा। जिससे इनकी शक्ति कमजोर हो गई। लगभग 973 ई. में चालुक्य शासक तैलप द्वितीय ने अन्तिम राष्ट्रकूट शासक कर्क द्वितीय को पराजित कर उसके राज्यों पर अपना अधिकार कर लिया।

(ii) चेर राज्य :
चेर वंश की स्थापना प्राचीन काल में हुई थी इसका उल्लेख अशोक के शिलालेखों में मिलता है। इनके राज्य में मलाबार, त्रावणकोर और कोचीन सम्मिलित थे। चेर राज्य के बन्दरगाह व्यापार के बड़े केन्द्र थे। ये अधिक समय तक शासन नहीं कर सके। आठवीं शताब्दी में पल्लवों ने, दसवीं शताब्दी में चोलों ने तथा तेरहवीं शताब्दी में पाण्डयों ने चेर राज्य पर अधिकार किया।

(iii) पाण्डय राज्य :
पाण्डय राज्य प्राचीन तमिल राज्यों में प्रमुख था। जिसकी राजधानी मदुरै थी। पाण्डय राजाओं में अतिकेशरी भारवर्मन प्रसिद्ध शासक रहा।

प्रश्न 8.
गुर्जर प्रतिहार वंश का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
गुर्जर प्रतिहार :
प्रतिहार वंश का संस्थापक नागभट्ट प्रथम था। इसने सम्पूर्ण मालवा तथा पूर्वी राजस्थान को अपने अधीन कर लिया था। नागभट्ट के पश्चात् दो छोटे-छोटे शासक हुए जिनके शासन का विशेष उल्लेख नहीं है। इनके पश्चात् चौथा महत्त्वपूर्ण शासक वत्सराज हुआ जिसने साम्राज्य विस्तार के प्रयास किये। वत्सराज के पश्चात् क्रमश: नागभट्ट द्वितीय, रामचन्द्र, मिहिर भोज, महेन्द्र पाल, भोज द्वितीय तथा महिपाल आदि शासक हुए। महिपाल के पश्चात् प्रतिहार वंश का पतन हो गया। गुर्जर प्रतिहार राजवंश ने आठवीं शताब्दी से ग्यारहवीं शताब्दी तक शासन किया।

प्रश्न 9.
पाल वंश और चालुक्य वंश पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
पालवंश :
इस वंश का संस्थापक गोपाल था। इस वंश के प्रमुख शासक धर्मपाल व देवपाल थे। कन्नौज पर अधिकार को लेकर पाल शासकों का प्रतिहारों और राष्ट्रकूटों से संघर्ष होता रहा। बंगाल के पालवंश के शासकों ने आठवीं शताब्दी के मध्य में उत्तर भारत में एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया।

चालुक्य वंश :
गुजरात के सोलंकी (चालुक्य वंश) का संस्थापक मूलराज था। यह राजवंश दो शाखाओं बादामी के चालुक्य और कल्याणी के चालुक्य के नाम से प्रसिद्ध हुआ। पुलकेशिन इस राजवंश का महान् राजा था। इस वंश के शासक भीम प्रथम के समय महमूद गजनवी ने गुजरात पर आक्रमण किया था, जिसमें भीम प्रथम पराजित हुआ था।

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प्रश्न 10.
राजा भोज कौन था? उसकी उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
राजा भोज परमार वंश का एक महान् तथा प्रतिभाशाली शासक था। वह सिन्धुराज का पुत्र था। वह महान् विजेता, उच्चकोटि का लेखक, कवि विद्यानुरागी और विद्वान् था। उसकी राजसभा में अनेक विद्वान् और कवि आश्रय पाते थे। उसके अनेक मन्दिर, राज प्रासाद, तालाब निर्मित कराये। प्रसिद्ध भोजपुर मन्दिर एवं भोपाल का बड़ा तालाब राजा भोज के काल में बने हैं। उसके समय में धारा नगरी (वर्तमान मध्य प्रदेश का धार जिला) साहित्य और संस्कृति का संगम केन्द्र थी। डॉ. डी. जी. गांगुली के अनुसार, “जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हुई भोज की ये सभी उपलब्धियाँ, उसे मध्ययुगीन भारत के महानतम् शासकों में एक स्थान प्रदान करती है।

प्रश्न 11.
नीचे दिये गये राजवंशों के बारे समझाइए
(i) चाहमान (चौहान) वंश
(ii) चंदेल वंश।
उत्तर:
(i) चाहमान (चौहान) वंश :
इस वंश का प्रथम स्वतन्त्र शासक विग्रहराज द्वितीय था। इस वंश का राज्य जोधपुर और जयपुर के मध्यवर्ती सांभर प्रदेश तक विस्तृत था। इस वंश के अजयराज ने अजयमेरु (अजमेर) नगर की नींव डाली। चौहान वंश का सबसे शक्तिशाली और अन्तिम शासक पृथ्वीराज चौहान था।

(ii) चंदेल वंश :
चन्देल वंश की स्थापना नवीं शताब्दी के प्रारम्भ में हुई थी। बुन्देलखण्ड में चंदेल शासकों का प्रभुत्व था। इस राज्य की राजधानी खुजराहो थी। इस वंश के प्रमुख शासक नन्नुक, यशोवर्मन, धंग, विद्याधर, कीर्तिवर्मन, परमार्दिदेव थे। चन्देल राजाओं का शासनकाल प्रगति की दृष्टि से सुविख्यात है।

प्रश्न 12.
उत्तर मध्यकाल के विषय में क्या जानते हैं?
उत्तर:
उत्तर मध्यकाल-तेरहवीं शताब्दी से अठारहवीं शताब्दी का काल उत्तर मध्यकाल के रूप में जाना जाता है। इस काल में भारत में एक के बाद एक विदेशी आक्रमणकारियों ने अपनी विध्वंसक गतिविधियों को जारी रखा जिसका समय-समय पर भारतीयों ने कड़ा प्रतिरोध किया। कठिन संघर्ष के बाद आक्रमणकारी भारत में अपना शासन स्थापित कर सके।

प्रश्न 13.
महमूद गजनवी के आक्रमणों का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
महमूद गजनवी के आक्रमणों से भारत पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े –

  1. पंजाब गजनवी साम्राज्य का अंग बन गया।
  2. राजपूत राजाओं की सैनिक शक्ति को गहरा आघात लगा।
  3. महमूद के आक्रमण से तुर्कों को भारत की राजनीतिक दुर्बलता का ज्ञान हुआ, जिससे अन्य आक्रमणकारियों को प्रोत्साहन मिला।
  4. भारत की अपार धन-सम्पदा को महमूद लूट कर ले गया तथा लाखों लोगों की हत्या हुई।
  5. महमूद गजनवी के आक्रमणों से भारतीय स्थापत्य-कला तथा मूर्ति-कला को गहरा आघात लगा क्योंकि उसने मथुरा, कन्नौज, नगरकोट तथा सोमनाथ के मन्दिरों तथा उनकी मूर्तियों को पूर्णतया नष्ट कर दिया।

प्रश्न 14.
रजिया सुल्तान कौन थी? उसने किस प्रकार से विद्रोहों का दमन किया?
अथवा
रजिया सुल्तान पर टिप्पणी लिखिए। (2009)
उत्तर:
सुल्तान रजिया इल्तुतमिश की होनहार तथा विदुषी व प्रतिभाशाली पुत्री थी। 1236 ई. में इल्तुतमिश के पुत्र की मृत्यु के पश्चात् रजिया दिल्ली की शासिका बनी। इल्तुतमिश रजिया की योग्यता तथा प्रतिभा से विशेष प्रभावित था। मिन्हाज ने लिखा है कि इल्तुतमिश से जब उसके उत्तराधिकारी के विषय में पूछा गया तो उसका कहना था-“मेरे पुत्रों में कोई भी सुल्तान बनने योग्य नहीं है। मेरी मृत्यु के पश्चात् आप देखेंगे कि कोई भी इतना योग्य नहीं है जो इस देश पर शासन कर सके।” इल्तुतमिश ने रजिया को समुचित शिक्षा भी प्रदान की थी।

रजिया ने तत्कालीन विद्रोहों का दमन बड़ी कुशलता तथा रणनीति से किया। बदायूँ, झाँसी, मुल्तान तथा लाहौर के प्रान्तपतियों ने अपनी सेनाओं को लेकर दिल्ली को घेर लिया था। रजिया अत्यन्त साहसी महिला होने के साथ-साथ कूटनीतिज्ञ भी थी। उसने बड़ी चतुरता और कूटनीति से विद्रोही प्रान्तपतियों में फूट डलवा कर लोगों ने विद्रोह किया जिसका रजिया ने शक्तिशाली सेना भेजकर दमन कर दिया।

प्रश्न 15.
अलाउद्दीन खिलजी के ऊपर टिप्पणी लिखिए। (2011)
उत्तर:
अलाउद्दीन महत्त्वाकांक्षी था। उसकी इच्छा सम्पूर्ण भारत का सुल्तान बनने की थी। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने उत्तर भारत में सिन्ध, मुल्तान, गुजरात, जालौर, जैसलमेर, रणथम्भौर, चित्तौड़, उज्जैन एवं चंदेरी पर आक्रमण किया और उन पर विजय प्राप्त की। उसने एक विशाल सेना तथा गुप्तचर विभाग का गठन किया। उसने विद्रोही सरदारों तथा अमीरों की शक्ति को कुचल दिया। 1316 ई. में अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु के साथ ही खिलजी वंश का पतन आरम्भ हो गया।

प्रश्न 16.
मुहम्मद बिन तुगलक की प्रमुख योजनाओं को संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
मुहम्मद बिन तुगलक की योजनाएँ-मुहम्मद तुगलक अत्यन्त महत्त्वाकांक्षी सुल्तान था। वह अपनी महत्त्वाकांक्षी योजनाओं के कारण विश्व इतिहास में प्रसिद्ध हो गया। दोआब कर वृद्धि, दिल्ली के स्थान पर दौलताबाद (देवगिरि) को राजधानी बनाने की योजना, सोना-चाँदी के सिक्कों के स्थान पर ताँबे के सिक्के (सांकेतिक मुद्रा) का चलन, विजयों की कथित योजना बनाना आदि ऐसी योजनाएँ थीं जिनको कार्य रूप में परिणत किया गया और फिर वापस भी ले लिया गया। योजनाओं को बनाना, लागू करना और वापस लेना, धन और समय की बर्बादी थी।

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प्रश्न 17.
तैमूर कौन था? उसके भारत पर आक्रमण करने के क्या उद्देश्य थे?
उत्तर:
समरकन्द का शासक तैमूर अत्यधिक साहसी, वीर और महत्त्वाकांक्षी था। भारत की अपार धन-सम्पत्ति उसे भारत पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित कर रही थी। साथ ही उसके भारत में आक्रमण का उद्देश्य धार्मिक भी था। 1398 ई. में एक विशाल सेना के साथ भारत में प्रवेश किया और शीघ्र ही दिल्ली पर अधिकार कर लिया। तैमूर की भारत पर शासन की इच्छा नहीं थी। अत: लूट-पाट, भीषण नरसंहार एवं कृषि को अपार हानि पहुँचाकर वह वापस समरकन्द चला गया।

प्रश्न 18.
इब्राहीम लोदी का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
सिकन्दर लोदी की मृत्यु के पश्चात् अफगान अमीरों ने सर्वसम्मति से उसके पुत्र इब्राहीम लोदी को 1517 ई. में सिंहासन पर बैठाया। उसने ‘इब्राहीम शाह’ की उपाधि धारण की। उसकी विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य अपने पिता द्वारा प्रारम्भ किये गये विजय कार्य को पूरा करना था। सर्वप्रथम उसने ग्वालियर पर आक्रमण किया तथा ग्वालियर के राजा विक्रमाजीत को पराजित कर अपना सामन्त बना लिया। इब्राहीम ने मेवाड़ के राणा सांगा पर भी आक्रमण किया परन्तु इब्राहीम लोदी इस युद्ध में पराजित हुआ। इब्राहीम लोदी का पंजाब के सूबेदार दौलत खाँ से मतभेद हो गया था। दौलत खाँ ने काबुल के शासक बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए निमन्त्रित किया। 1526 ई. में बाबर ने भारत पर आक्रमण कर दिया। पानीपत के मैदान में इब्राहीम लोदी की भयंकर पराजय हुई। इस युद्ध में ही दिल्ली सल्तनत का अन्त हो गया तथा भारत में मुगल वंश की नींव पड़ी।

प्रश्न 19.
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना का विवरण दीजिए।
उत्तर:
मुहम्मद तुगलक के शासनकाल में विजयनगर राज्य की स्थापना हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने 1336 ई. में की थी। ये दोनों भाई वारंगल के शासक प्रताप रुद्रदेव काकतीय के कोषागार में कार्य करते थे। जब वारंगल पर मुसलमानों का अधिकार स्थापित हो गया तो बन्दी बनाकर उन्हें दिल्ली भेज दिया गया। परन्तु मुहम्मद तुगलक ने उन्हें मुक्त कर अनगोड़ी का प्रदेश उनको दे दिया। इस प्रदेश में दोनों भाइयों ने विजयनगर राज्य की स्थापना की। हरिहर इस प्रदेश का प्रथम शासक हुआ तथा उसकी मृत्यु के पश्चात् उसका भाई बुक्का शासक हुआ।

प्रश्न 20.
तालीकोट के युद्ध के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
तालीकोट का युद्ध मुस्लिम राज्यों की संयुक्त सेना तथा विजयनगर के मन्त्री रामराय के मध्य 1565 ई. में कृष्णा नदी के तट पर हुआ था। रामराय ने अहमदनगर पर आक्रमण करके उसे तहत-नहस कर दिया था तथा मस्जिदों को तोड़ा तथा कुरान का अपमान किया। रामराय के अत्याचारों से मुस्लिम राज्यों में रोष फैल गया। अत: बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुण्डा तथा बीदर की सम्मिलित सेनाओं ने विजयनगर पर आक्रमण किया। 1565 ई. में तालीकोट के युद्ध में रामराय को भयंकर पराजय मिली, वह पकड़ा गया तथा अहमदनगर के सुल्तान ने उसकी हत्या कर दी।

प्रश्न 21.
नरसिंह सालुव कौन था? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
नरसिंह सालुव :
नरसिंह सालुव वीर, शक्तिशाली और योग्य शासक था। उसने साम्राज्य में हो रहे विद्रोहों को दबाया और बहमनी राज्य द्वारा जीते गये प्रदेशों पर पुनः अधिकार किया। उसने शक्तिशाली सेना के गठन के लिए अरब व्यापारियों से श्रेष्ठ घोड़े क्रय किये। वह साहित्यानुरागी था। इसके काल में प्रसिद्ध ग्रन्थ जेमनी भारतम् लिखा गया। नरसिंह सालुव की 1490 ई. में मृत्यु हो गई।

प्रश्न 22.
बहमनी राज्य की स्थापना किस प्रकार हुई?
उत्तर:
बहमनी राज्य की स्थापना दक्षिण भारत में मुहम्मद तुगलक के विरुद्ध विद्रोह की भावना से हुई थी। इस राज्य की नींव रखने वाला हसन गंगू था जो अमीर उमरा की सहायता से 1347 ई. में अलाउद्दीन बहमनशाह के नाम से स्वतन्त्र शासक बन बैठा। इस प्रकार दक्षिण भारत में मुस्लिम राज्य की स्थापना बहमनी राज्य के नाम से हुई। बहमनशाह, मुहम्मदशाह, फिरोजशाह, अहमदशाह तथा अलाउद्दीन द्वितीय आदि प्रमुख बहमनी शासक थे। अलाउद्दीन बहमनशाह ने गुलबर्गा में अपनी राजधानी स्थापित की तथा उसका नाम अहसनाबाद रखा। इस काल में मुहम्मद तुगलक उत्तरी भारत की समस्याओं में उलझा हुआ था। अत: दक्षिण भारत में बहमनी राज्य को फलने-फूलने का पर्याप्त अवसर मिला।

प्रश्न 23.
मध्यकालीन भारतीय सम्राटों में अकबर का नाम विशेष उल्लेखनीय है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अकबर :
मध्यकालीन भारतीय सम्राटों में अकबर का नाम विशेष उल्लेखनीय है। उसे भारत का एक राष्ट्रीय शासक कहा जाता है। हुमायूँ की मृत्यु के पश्चात् 1556 ई. में वह मुगल सम्राट बना। जब वह सम्राट बना उस समय मुगल साम्राज्य की सीमा अत्यन्त सीमित थी। अकबर ने अनेक युद्ध कर विजय प्राप्त की तथा एक विशाल साम्राज्य की नींव डाली। अकबर ने धार्मिक सहिष्णुता की नीति का पालन दिया तथा राजपूतों को अपना मित्र बनाया। समस्त धर्मों के उत्तम सिद्धान्तों का समन्वय करके उसने दीन-ए-इलाही धर्म चलाया। हिन्दुओं को उसने योग्यता के आधार पर उच्च पदों पर भी नियुक्त किया। उसके शासन काल में कला और साहित्य का भी विकास हुआ। इन कारणों से ही अकबर को एक राष्ट्रीय शासक कहते हैं।

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प्रश्न 24.
जहाँगीर का संक्षिप्त जीवन परिचय दीजिए।
उत्तर:
जहाँगीर :
जहाँगीर का जन्म 30 अगस्त, 1569 ई. में हुआ था। उसका बचपन का नाम सलीम था। अकबर की मृत्यु के बाद 1605 ई. मुगल सिंहासन पर आसीन हुआ। जहाँगीर ने अनेक विवाह किये थे जिनमें शेर अफगान की विधवा नूरजहाँ से किया गया विवाह प्रमुख था। जहाँगीर नूरजहाँ से इतना प्रभावित था कि उसने सम्पूर्ण राज्य का भार उसी पर छोड़ दिया। जिसके परिणामस्वरूप उसका अन्तिम समय कष्ट में व्यतीत हुआ। जहाँगीर के एक पुत्र खुर्रम (शाहजहाँ) ने विद्रोह कर दिया जिसके कारण राज्य की स्थिति चिन्ताजनक हो गई। 1627 ई. में जहाँगीर की मृत्यु हो गयी।

प्रश्न 25.
शाहजहाँ कौन था? उसके मुगल साम्राज्य के विस्तार का वर्णन संक्षेप में कीजिए।
उत्तर:
शाहजहाँ :
शाहजहाँ जहाँगीर का पुत्र था। वह एक योग्य, प्रतिभाशाली तथा साहसी शहजादा था। जहाँगीर के शासन काल में वह दक्षिण का सूबेदार रह चुका था तथा अनेक सैनिक सफलताएँ भी प्राप्त की थीं। 1628 ई. में वह मुगल सिंहासन पर बैठा। शासक बनते ही उसके खानजहाँ लोदी का विद्रोह, बुन्देलखण्ड तथा नुरपूर के जमींदार जगतसिंह के विद्रोहों का दमन किया। पुर्तगालियों से युद्ध कर उन्हें खदेड़ दिया। उसने अपने राज्य को मजबूत बनाने के उद्देश्य से दक्षिण भारत के अहमदनगर, गोलकुण्डा, बीजापुर पर आक्रमण किये। मराठों के साथ भी मुगल सेना का संघर्ष हुआ। शाहजहाँ के चार पुत्र दाराशिकोह, शाहशुजा, औरंगजेब तथा मुराद थे। शाहजहाँ के जीवनकाल में ही सिंहासन के लिए संघर्ष प्रारम्भ हो गया था जिसमें औरंगजेब को सफलता मिली।

प्रश्न 26.
औरंगजेब के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
औरंगजेब :
शाहजहाँ 1657 ई. में बीमार पड़ा। उसके पुत्रों में उत्तराधिकार का युद्ध छिड़ गया। औरंगजेब ने अपने सभी भाइयों व सम्बन्धियों का रक्त बहाकर 1658 ई. में सिंहासन पर अधिकार कर लिया। उसने अपने पिता शाहजहाँ को आगरा के लाल किले में बन्दी बना दिया। 1666 ई. में शाहजहाँ की बन्दी के रूप में मृत्यु हुई।

औरंगजेब ने राजपूतों, जाटों, सिक्खों और मराठों को भी अपना विरोधी बना लिया जिसके कारण राज्य में निरन्तर विद्रोह हुए। शिवाजी ने उसकी हिन्दू विरोधी नीति के कारण उसका सामना किया और एक स्वतन्त्र मराठा राज्य की नींव डाली। सिक्खों के नवें गुरु तेगबहादुर ने विद्रोह किया जिनका औरंगजेब ने वध करवा दिया। तब गुरु गोविन्दसिंह ने सिक्ख सेना (खालसा) को तैयार किया। दुर्गादास राठौड़ जैसे राजपूतों ने औरंगजेब को चुनौतियाँ दीं। 1707 ई. में औरंगजेब की मृत्यु हो गयी और उसी के साथ ही मुगल साम्राज्य का पतन भी प्रारम्भ हो गया।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आठवीं शताब्दी में उत्तरी भारत के पाँच प्रमुख राजवंशों के नाम लिखिए और किसी एक राजवंश का वर्णन कीजिए। (2011)
उत्तर:
आठवीं शताब्दी में उत्तरी भारत के प्रमुख राजवंश निम्नलिखित हैं-

  1. गुर्जर प्रतिहार
  2. पालवंश
  3. चालुक्य वंश (सोलंकी)
  4. परमार वंश
  5. चंदेल वंश।

गुर्जर प्रतिहार :
प्रतिहार वंश का संस्थापक नागभट्ट प्रथम था। इसने सम्पूर्ण मालवा तथा पूर्वी राजस्थान को अपने अधीन कर लिया था। नागभट्ट के पश्चात् दो छोटे-छोटे शासक हुए जिनके शासन का विशेष उल्लेख नहीं है। इनके पश्चात् चौथा महत्त्वपूर्ण शासक वत्सराज हुआ जिसने साम्राज्य विस्तार के प्रयास किये। वत्सराज के पश्चात् क्रमश: नागभट्ट द्वितीय, रामचन्द्र, मिहिर भोज, महेन्द्र पाल, भोज द्वितीय तथा महिपाल आदि शासक हुए। महिपाल के पश्चात् प्रतिहार वंश का पतन हो गया। गुर्जर प्रतिहार राजवंश ने आठवीं शताब्दी से ग्यारहवीं शताब्दी तक शासन किया।

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए:
(i) 0.4 ÷ 2
(ii) 0.35 ÷ 5
(iii) 2.48 ÷ 4
(iv) 65.4 ÷ 6
(v) 651.2 ÷ 4
(vi) 14.49 ÷ 7
(vii) 3.96 ÷ 4
(viii) 0.80 ÷ 5
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7 1

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प्रश्न 2.
ज्ञात कीजिए:
(i) 4.8 ÷ 10
(ii) 52.5 ÷10
(iii) 0.7 ÷ 10
(iv) 33.1 ÷ 10
(v) 272.23 ÷ 10
(vi) 0.56 ÷ 10
(vii) 3.97 ÷ 10.
हल:
(i) 4.8 ÷ 10 = 0.48
(ii) 52.5 ÷ 10 = 5.25
(iii) 0.7 ÷ 10 = 0.07
(iv) 33.1 ÷ 10 = 3.31
(v) 272.23 ÷ 10 = 27.223
(vi) 0.56 ÷ 10 = 0.056
(vii) 3.97 ÷ 10 = 0.397

प्रश्न 3.
ज्ञात कीजिए :
(i) 2.7 ÷ 100
(ii) 0.3 ÷ 100
(ii) 0.78 ÷ 100
(iv) 432.6 ÷ 100
(v) 23.6 ÷ 100
(vi) 98.53 ÷ 100
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7 3

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प्रश्न 4.
ज्ञात कीजिए :
(i) 7.9 ÷ 1000
(ii) 26.3 ÷ 1000
(iii) 38.53 ÷ 1000
(iv) 128.9 ÷1000
(v) 0.5 ÷ 1000
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7 4
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7 4a

प्रश्न 5.
ज्ञात कीजिए:
(i) 7 ÷ 3.5
(ii) 36 ÷ 0.2
(iii) 3.25 ÷ 0.5
(iv) 30.947 ÷ 0.7
(v) 0.5 ÷ 0.25
(vi) 7.75 ÷ 0.25
(vii) 76.5 ÷ 0.15
(viii) 37.8 ÷ 1.4
(ix) 2.73 ÷ 1.3.
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7 5
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7 5a

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प्रश्न 6.
एक गाड़ी 2.4 लीटर पैट्रोल में 43.2 km की दूरी तय करती है। यह गाड़ी 1 लीटर पैट्रोल में कितनी दूरी तय करेगी?
हल:
∵2.4 लीटर पैट्रोल में तय की गई दूरी = 43.2 km
∴ 1 लीटर पैट्रोल में तय की गई दूरी
= 432 ÷ 2.4 km
\(=\frac{432}{10} \div \frac{24}{10}=\frac{432}{10} \times \frac{10}{24}=18 \mathrm{km}\)
अतः गाड़ी द्वारा 1 लीटर पैट्रोल में तय की गई दूरी = 18 km.

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 1 शिवसङ्कल्पमस्तु

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 1 शिवसङ्कल्पमस्तु (पद्यम्) (यजुर्वेदात्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 1 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखो)
(क) मनः जाग्रतः कुत्र उदैति? (जाग्रत पुरुष का मन कहाँ जाता है?)
उत्तर:
मनः जाग्रतः दूरम उदैति। (जाग्रत पुरुष का मन दूर जाता है।)

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(ख) प्रजानाम् अन्तः स्थितं किम्? (प्राणियों के अन्दर क्या स्थित है?)
उत्तर:
प्रजानाम् अन्तः मनः स्थितः। (प्राणियों में (के भीतर) मन स्थित है।)

(ग) मनसः ऋते किंचन किं न क्रियते? (मन के बिना क्या कुछ नहीं किया जाता है?)
उत्तर:
मनसः ऋते किंचन कर्म न क्रियते। (मन के बिना कुछ भी कर्म नहीं किया जाता।)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) मे मनः किम् अस्तु? (मेरा मन कैसा हो?)
उत्तर:
में मनः शिवसङ्कल्पम् अस्तु। (मेरा मन कल्याणकारी सङ्कल्प वाला हो।)

(ख) मनसा सप्तहोता कः तायते? (मन से सात होताओं वाला क्या सम्पादित किया जाता है।)
उत्तर:
मनसा सप्तहोता यज्ञः तायते। (मन से सात होताओं वाला यज्ञ सम्पादित किया जाता है।)

(ग) मनसि प्रजानां सर्वं किम् ओतम्? (मन में प्राणियों का सारा क्या भरा है?)
उत्तर:
मनसि प्रजानां सर्वं चित्तम् ओतम्। (मन में प्राणियों का सारा ज्ञान भरा है।)

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प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत (नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए-)
(क) मनसा के यज्ञे विदथेषु कर्माणि कृण्वन्ति? (मन से कौन यज्ञ व ज्ञान-उपासनाओं में कर्म करते हैं?)
उत्तर:
मनसा अपसः धीराः मनीषणः यज्ञे विदथेषु कर्माणि कुर्वन्ति। (मन से कर्मवान्, धैर्यवान् और बुद्धिमान, पुरुष यज्ञ में व ज्ञान-उपासनाओं में कर्म करते हैं।)

(ख) अमृतेन किं परिगृहीतम्? (अमृत से क्या माना जाता है?)
उत्तर:
अमृतेन इंद भूतं भुवनं भविष्यत् सर्वम् परिगृहीतम्। (अमृत से भूतकाल, वर्तमान काल तथा भविष्यकाल की सांसारिक सारी वस्तुएँ मानी जाती हैं।

(ग) मनसि ऋचः साम यजूंषि कथं प्रतिष्ठिताः? (मन में ऋचाएँ, साममन्त्र व यजुर्मन्त्र कैसे स्थित हैं?)
उत्तर:
मनसि ऋचः सामः यजूंषि रथनाभौ अराः इव प्रतिष्ठिताः। (मन में ऋचाएँ, साममन्त्र व यजुर्मन्त्र, रथ चक्र की नाभि में तिल्लियों के समान स्थित हैं।)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत (दिए हुए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(सप्तहोता, मनः ऋते)

(क) तन्मे ……………. शिवसङ्कल्पमस्तु।
उत्तर:
तन्मे मनः शिवङ्कल्पमस्तु।

(ख) यस्मान्न ……………. किंचन कर्म क्रियते।
उत्तर:
यस्मान्न ऋते किंचन कर्म क्रियते।

(ग) येन यज्ञस्तायते …………….
उत्तर:
येन यज्ञस्तायते सप्तहोताः।

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(योग्यतानुसार (उचित रूप में) जोड़िए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 1 शिवसङ्कल्पमस्तु img 1
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 1 शिवसङ्कल्पमस्तु img 2
प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम् अशुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘न’ इति लिखत –
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) मनः दूरङ्गमम् अस्ति।
(ख) मे मनः शिवसङ्कल्पं न अस्तु।
(ग) मनः अपूर्वम् अस्ति।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) आम्।

प्रश्न 7.
एकवचनतः बहुवचने परिवर्तयत-(एकवचन से बहुवचन में बदलिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 1 शिवसङ्कल्पमस्तु img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 1 शिवसङ्कल्पमस्तु img 3

पश्न 8.
रेखाङ्कितपदान्याधृत्य प्रदत्तशब्दैः प्रश्ननिर्माणं कुरुत –
(रेखांकितपदों के आधार पर दिए गए शब्दों से प्रश्न बनाइए-)।
(केन, कस्मिन्, कस्य)
(क) मनः सुप्तस्य यथा एव एति। (सोए हुए पुरुष का मन वैसे ही लौट आता है।)
उत्तर:
मनः कस्य तथा एव एति? (मन किसका वैसे ही लौट आता है?)

(ख) येन धीराः कर्माणि कृण्वन्ति। (जिसके द्वारा धैर्यवान् कर्म करते हैं।)
उत्तर:
केन धीराः कर्माणि कृण्वन्ति? (किसके द्वारा धैर्यवान् कर्म करते हैं?)

(ग) यस्मिन् वेदाः प्रतिष्ठिताः। (जिसमें वेद स्थित हैं।)
उत्तर:
कस्मिन् वेदाः प्रतिष्ठिताः? (किसमें वेद स्थित हैं?)

योग्यताविस्तार –

पाठे आगतान् मन्त्रान् कण्ठस्थ कुरुत।
(पाठ में आए हुए मन्त्रों को कण्ठस्थ करो।)

समूहे एकाकी वा मन्त्राणां पाठं कुरुत।।
(समूह में या अकेले मन्त्रों का पाठ (जप) करो।

शिवसङ्कल्पमस्तु पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में ‘यजुर्वेद’ से संकलित कुछ मंत्र हैं, जिनमें मन को पवित्र तथा कल्याणकारी सङ्कल्प वाला होने की प्रार्थना प्रभु से की गई है, जिससे प्राणियों के सभी इच्छित कार्य सम्पन्न हो सकें।

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शिवसङ्कल्पमस्तु पाठ का अनुवाद

1. ॐयज्जायाग्रतो दूरमुदति दैवं तद् सुप्तस्य तथैवैति।
दूरङ्गमं ज्योतिषां ज्योतिरेकं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥1॥
अन्वय:
यत् जाग्रतः दूरम् उदैति, यत् दैवम्, तत् सुप्तस्य तथा एव एति, यत् दूरङ्गमम्, यत् ज्योतिषाम् एकं ज्योतिः, तत् मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु।।

शब्दार्था :
यत्-जो (मन)-The mind which; जाग्रतः-जाग्रत पुरुष का-of the waking person; उदैति-जाता है-goes; दैवम्-आत्मद्रष्टा-The viewer of self; सुप्तस्य-सोए हुए पुरुष का-of the sleeping person; एति-लौट आता है-returns, retreats; दूरङ्गमम्-भूत, भविष्य, वर्तमान सबको जानने वाला/दूर जाने वाला- one who goes far, one who knows the past, future and present; ज्योतिषाम्-इन्द्रियों का-of the senses; शिवसङ्कल्पम्-कल्याणकारी सङ्कल्प वाला-with resolve of welfare; अस्तु-हो-may be.

अनुवाद :
हे प्रभु! जाग्रत पुरुष का जो मन दूर जाता है, जो आत्मद्रष्टा (स्वयं को देखने वाला) है, और वह सोए हुए पुरुष का वैसे ही लौट आता है, जो भूत, भविष्य व वर्तमान सबको जानने वाला है, जो सब इन्द्रियों की एक ज्योति (प्रकाशक) है, वह मेरा मन कल्याणकारी सङ्कल्प वाला हो।

English :
Mind of waking person goes far-views self-mind of sleeping person retreats. Mind knows all times-enlightens the senses. May it prove to be of beneficial and auspicious resolve.

2. ॐयेन कर्माण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदधेषु धीरा।
यदपूर्वं यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥2॥
अन्वय :
येन अपसः धीराः मनीषिणः यज्ञे विदथेषु कर्माणि कृण्वन्ति यत् अपूर्वम्, यक्षम्, प्रजानामन्तः, तत् से मनः शिवसङ्कल्पमस्तु।

शब्दार्था :
येन-जिस मन के द्वारा-Through which (mind); अपसः-कर्मवान् पुरुष-the person who performs actions; विदधेषु-ज्ञान या उपासनाओं में-in knowledge or worshipperform; कृण्वन्ति-करते हैं, यत्-जो मन-which (mind); अपूर्वम्-सर्वप्रथम उत्पन्न-primordial; यक्षम्-यज्ञ सम्पादन में समर्थ या पूज्य-capable of performing a sacrifice or adorable (venerable).

अनुवाद :
हे प्रभु! जिसके द्वारा कर्मवान्, धैर्यवान् तथा बुद्धिमान, पुरुष यज्ञ में, ज्ञान या उपासनाओं में कर्म करते हैं, जो सर्वप्रथम उत्पन्न है, यज्ञ सम्पादन में समर्थ है तथा जीवों के अन्दर है, वह मेरा मन कल्याणकारी सङ्कल्प वाला हो।

English :
Mind inspires dutiful, forbearing and intelligent persons for performing sacrifices, seeking knowledge and doing worship. Primordial, capable of performing sacrifice and existing in all creatures.

3. ॐ यत्प्रज्ञानमुत चेतो धृतिश्च यज्जयोतिरन्तरमृतं प्रजासु।
यस्मान्न ऋते किंचन कर्म क्रियते तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥3॥
अन्वय :
यत् प्रज्ञानम्, उत चेतः, धृतिः च यत् प्रजासु अन्तः अमृतं ज्योतिः, यस्मात् ऋते किंचन कर्म न क्रियते, तत् मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु।

शब्दार्था :
प्रज्ञानम्-प्रकर्ष ज्ञान का साधन-Source of supreme knowledge; चेतः-सामान्य-विशेष ज्ञान कराने वाला-One who bestows general and special knowledge; धृतिः-धैर्य स्वरूप-forbearing; प्रजासु-जीवों में-among creatures; ज्योतिः-प्रकाशक है-Light (giver of light); किंचन-कुछ भी-nothing.

अनुवाद :
हे प्रभु! जो प्रकर्ष ज्ञान का साधन तथा सामान्य विशेष ज्ञान कराने वाला है, धैर्य स्वरूप है और जो जीवों के अन्दर अमर प्रकाशक है, जिसके बिना कोई भी कर्म नहीं किया जाता, ऐसा मेरा मन कल्याणकारी सङ्कल्प वाला हो।

English :
Mind-source of supreme knowledge, be tower of knowledge, forbearing-immortal light among creatures-promoter of all activities.

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4. ॐ येनेदं भूतं भुवनं भविष्यत्परिगृहीतममृतेन सर्वम् ।
येन यज्ञस्तायते सप्तहोता तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥4॥
अन्वय :
येन अमृतेन इदं भूतं भविष्यत् सर्वम् परिगृहीतम्, येन सप्तहोता यज्ञः तायते, तत् मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु।

शब्दार्था :
अमृतेन-अमर मन के द्वारा-Through immortal mind; भुवनम्-वर्तमान काल का-of the present; सर्वम्-सांसारिक सारी वस्तुएँ-all the worldly objects; परिगृहीतम्-माना जाता है-is considered (known as); सप्तहोता-सात होताओं वाला-by seven priests; तायते-सम्पादित किया जाता है-is performed.

अनुवाद :
हे प्रभु! जिसके अमृत मन के द्वारा भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्यत काल की सारी सांसारिक वस्तुओं का ग्रहण किया जाता है, जिसके द्वारा सात होताओं वाला यज्ञ सम्पादित किया जाता है, वह मेरा मन कल्याणकारी सङ्कल्प वाला हो।

English-The mind-attains everything in all ages (past, present and future. Which causes the completion of seven-priestly sacrifices.

5. ॐयस्मिन्नृचः साम यजूंषि यस्मिन् प्रतिष्ठिताः रथनाभाविवार ।
यस्मिंश्चित्तं सर्वमोतं प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु॥5॥

शब्दार्था :
यस्मिन्-जिस मन में-in which (mind); साम-साम मन्त्र-hymns of Sama Veda; यजूंषि-यजुर्मन्त्र-hymns of Yajur Veda; रथनाभौ-रथ चक्र की नाभि में-in the axle (hub)of the wheel of the chariot; अराः इव-तिल्लियों की तरह-like the spokes; प्रज्ञानाम्-प्राणियों का-of the animate beings; चित्तम्-ज्ञान -knowledge; ओतभ-भरा है-is full (replete).

अनुवाद :
हे प्रभु! जिस मन में ऋचाएँ, साम मन्त्र, यजुर्मन्त्र रथ चक्र की नाभि में तिल्लियों की तरह विराजमान हैं, जिस में प्राणियों का सारा ज्ञान भरा है, वह मेरा मन कल्याणकारी सङ्कल्प वाला हो।

English :
Mind-The container of Vedic hymns-full of all knowledge related to animate beings.

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए-
(i) 0.2 x 6
(ii) 8 x 4.6
(iii) 2.71 x 5
(iv) 20.1 x 4
(v) 0.05 x 7
(vi) 211.02 x 4
(vii)2 x 0.86
यहाँ सादा गुणा करने के पश्चात् दोनों संख्याओं में दशमलव बिन्दु के दाहिनी ओर अंक गिनकर दशमलव बिन्दु लगाएँगे।
हल:
(i) 0.2 x 6
∵ 2 x 6 = 12,
∴ 0.2 x 6 = 1.2

(ii) 8 x 4.6 ,
∵ 8 x 46 = 368
∴ 8 x 46 = 36.8

(iii) 2.71 x 5
∵ 271 x 5 = 1355;
∴ 2.71 x 5 = 13.55

(iv) 20.1 x 4
∵ 201 x 4 = 804
∴ 20.1 x 4 = 80.4

(v) 0.05 x 7
∵ 5 x 7 = 35
∴ 0.05 x 7 = 0.35

(vi) 211.02 x 4
∵ 21102 x 4 = 84408
∴ 211.02 x 4 = 844.08

(vii) 2 x 0.86
∵ 2 x 86 = 172
∴ 2 x 0.86 = 1.72

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प्रश्न 2.
एक आयत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए जिसकी लम्बाई 5.7 cm और चौड़ाई 3 cm है।
हल:
लम्बाई = 5.7 cm, चौड़ाई = 3 cm.
आयत का क्षेत्रफल = लम्बाई x चौड़ाई
= 5.7 x 3 = 17.1 cm2

प्रश्न 3.
ज्ञात कीजिए-
(i) 1.3 x 10
(ii) 36.8 x 10
(iii) 153.7 x 10
(iv) 168.07 x 10
(v) 31.1 x 100
(vi) 156.1 x 100
(vii) 3.62 x 100
(viii) 43.07 x 100
(ix) 0.5 x 10
(x) 0.08 x 10
(xi) 0.9 x 100
(xii) 0.03 x 1000
हल:
(i) 1.3 x 10 = 13
(ii) 36.8 x 10 = 368
(iii) 153.7 x 10 = 1537
168 : 07 x 10 = 1680.7
31.1 x 100 = 3110
(vi) 156.1 x 100 = 15610
(vii) 3.62 x 100 = 362
(viii) 43.07 x 100 = 4307
(ix) 0.5 x 10 = 5
(x) 0.08 x 10 = 0.8
(xi) 0.9 x 100 = 90
(xii) 0.03 x 1000 = 30
नोट – किसी संख्या को 10, 100 व 1000 से गुणा करने के लिए उसी संख्या को लिखकर दशमलव बिन्दु को दायीं ओर उतने ही अंक विस्थापित करते हैं जितने शून्य होते है।

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प्रश्न 4.
एक दुपहिया वाहन एक लीटर पैट्रोल में 55.3 km की दूरी तय करता है। 10 लीटर पैट्रोल में वह कितनी दूरी तय करेगा ?
हल:
∵ 1 लीटर पैट्रोल में तय की गई दूरी = 55.3 km
∴ 10 लीटर पैट्रोल में तय की गई दूरी = 55.3 x 10 km = 553 km

प्रश्न 5.
ज्ञात कीजिए-
(i) 2.5 x 0.3
(ii) 0.1 x 51.7
(iii) 0.2 x 316.8
(iv) 1.3 x 3.1
(v) 0.5 x 0.05
(vi) 11.2 x 0.15
(vii) 1.07 x 0.02
(viii) 10.05 x 1.05
(ix) 101.01 x 0.01
(x) 100.01 x 1.1
हल:
(i) 2.5 x 0.3
∵25 x 3 = 75
∴2.5 x 0.3 = 0.75
10, 100 और 1000 से भाग

(ii) 0.1 x 51.7
∵1 x 517 = 517
∴0.1 x 51.7 = 5.17

(iii) 0.2 x 316.8
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 1
∴ 0.2 x 316.8 = 63.36

(iv) 13 x 3.1
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 1a
∴ 1.3 x 3.1 = 4.03

(v) ∵5 x 5 = 25
∴0.5 x 0.05 = 0.025

(vi) 11:2 x 0.15
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 1b
∴ 11:2 x 0.15 = 1.68

(vii) 107 x 2 = 214
∴ 1.07 x 0.02 = 0.0214

(viii) 10.05 x 1.05
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 1c
∴1005 x 1.05 = 10.5525

(ix) ∵ 10101 x 1 = 10101
∴ 101.01 x 0.01 = 1:0101

(x) ∵ 10001 x 11 = 110011
∴100.01 x 1.1 = 110.011

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 53

प्रश्न
टुकड़ों की संख्या \(\frac { 9.5 }{ 1.9 }\) होगी। क्या यह सही है ?
उत्तर:
हाँ, यह सही है।

निम्न सारणी को पूरा कीजिए-
231.5 ÷ 10 = 23.15
231.5 ÷ 100 = 2:315
231.5 : 1000 = 0.2315

1.5 ÷ 10 = 0.15
1.5 ÷ 100 = 0.015
1.5 ÷ 1000 = 0.0015

29.36 ÷ 100 = 0:2936
29.36 ÷ 1000 = 0.02936
29.36 ÷ 10 = 2.936
नोट – किसी संख्या को 10, 100 व 1000 से भाग देने पर भागफल में दशमलव बिन्दु बायीं ओर उतने स्थान ही विस्थापित हो जाता है जितने 1 के साथ शून्य होते हैं।

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प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए-
(i) 235.4 ÷ 10
(ii) 235.4 ÷ 100
(iii) 235.4 ÷ 1000
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 2

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 54
प्रयास कीजिए

प्रश्न
(i) 35.7 ÷ 3 = ?
(ii) 25.5 ÷ 3= ?
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 2a

प्रयास कीजिए

प्रश्न
(i) 43.15 ÷ 5 = ?
(ii) 82.44 ÷ 6 ?
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 3

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 55

प्रयास कीजिए
(i) 15.55 ÷ 5
(ii) 126.35 ÷ 7
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 4

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 56
प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए-
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 5
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 5a

MP Board Class 7th Maths Solutions

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 2 पर्यावरण संरक्षण के प्रयास व सफलताएँ

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 2 पर्यावरण संरक्षण के प्रयास व सफलताएँ

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
आधुनिक कृषि में प्रोत्साहन दिया जा रहा है – (2016)
(i) जैविक खेती को
(ii) जैव उर्वरकों के उपयोग को
(iii) जैव कीटनाशकों के उपयोग को
(iv) उपर्युक्त सभी को।
उत्तर:
(iv) उपर्युक्त सभी को।

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प्रश्न 2.
पर्यावरण प्रभाव के निर्धारण का अन्तिम स्तर है
(i) विस्तृत प्रभाव निर्धारण
(ii) आलोचनात्मक पहलुओं का अध्ययन,
(iii) तीव्र प्रभाव निर्धारण
(iv) जोखिम का विश्लेषण।
उत्तर:
(i) विस्तृत प्रभाव निर्धारण

प्रश्न 3.
भारत में पर्यावरण प्रभाव के निर्धारण की जिम्मेदारी है
(i) पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की
(ii) रक्षा मंत्रालय की
(iii) पर्यटन एवं शहरी मंत्रालय की
(iv) कृषि मंत्रालय की।
उत्तर:
(i) पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की

प्रश्न 4.
चिपको आन्दोलन का प्रारम्भ हुआ (2008)
(i) कर्नाटक में
(ii) पूर्वोत्तर भारत में
(iii) उत्तराखण्ड में
(iv) केरल में।
उत्तर:
(iii) उत्तराखण्ड में

प्रश्न 5.
भारत में सी. एन. जी. का उपयोग सबसे पहले प्रारम्भ हुआ (2009, 12)
(i) मुम्बई में
(ii) दिल्ली में
(iii) कोलकाता में
(iv) चेन्नई में।
उत्तर:
(ii) दिल्ली में

रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए

  1. साइलेण्ट वेली …………. राज्य का एक छोटा-सा वन क्षेत्र है।
  2. चिपको आन्दोलन की शुरूआत वर्ष ………… में हुई।

उत्तर:

  1. केरल,
  2. 19741

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण संरक्षण से क्या आशय है? समझाइए। (2008)
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण और संसाधन को नष्ट होने से बचाने के लिए आयोजित प्रबन्धन को पर्यावरण संरक्षण कहते हैं।

प्रश्न 2.
पर्यावरण प्रभाव निर्धारण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
पर्यावरण प्रभाव निर्धारण पर्यावरणीय गुणवत्ता को बनाए रखने की महत्त्वपूर्ण तकनीक है।

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प्रश्न 3.
पर्यावरण प्रभाव का निर्धारण भारत में किस मंत्रालय की जिम्मेदारी है?
उत्तर:
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की।

प्रश्न 4.
जैविक खेती से आप क्या समझते हैं? (2017, 18)
उत्तर:
जैविक खेती वह खेती है जिसमें कृत्रिम रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया जाता है, वरन् जैविक खाद (गोबर या पेड़-पौधों की पत्तियों से बनी हरी खाद) का उपयोग होता है।

प्रश्न 5.
पर्यावरण प्रभाव निर्धारण के तीन प्रमुख स्तर कौन-कौन-से हैं?
उत्तर:

  1. प्रथम स्तर-प्रारम्भिक जाँच;
  2. द्वितीय स्तर-तीव्र प्रभाव निर्धारण;
  3. तृतीय स्तर-विस्तृत प्रभाव निर्धारण।

प्रश्न 6.
हमें पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता क्यों है? (2008)
उत्तर:
भावी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मानव, वनस्पति, जीव-जन्तु एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों (जल, वायु, खनिज) को संरक्षित किया जाना आवश्यक है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चिपको आन्दोलन क्या है एवं इसके आधारभूत तत्व कौन-कौन-से हैं?
उत्तर:
चिपको आन्दोलन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए एक कारगर उपाय है। यह केवल वृक्षों को बचाने का आन्दोलन ही नहीं है, अपितु भूमि नीति में आमूल परिवर्तन की माँग कर स्थायी कल्याणकारी आर्थिक पक्ष (अनाज, चारा, ईंधन, खाद, उर्वरक, कपड़ा) के लिए एक आधार प्रस्तुत करता है। इस आन्दोलन में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय है। इस आन्दोलन की सफलता ने सिद्ध कर दिया है कि गहन समस्याओं का निदान केवल नियम कानून बनाने से ही सम्भव नहीं होता। इसके लिए जनचेतना और अधिकारों की समझ होना भी आवश्यक है।

प्रश्न 2.
पर्यावरण संरक्षण किन महत्त्वपूर्ण उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आवश्यक है ? समझाइए।
उत्तर:
पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता :
पृथ्वी पर विविध प्रकार के पेड़-पौधे और जन्तु निवास करते हैं। मनुष्य पृथ्वी का सबसे बुद्धिमान और शक्तिशाली जीव है, पर प्रकृति ने मनुष्य को यह अधिकार नहीं दिया है कि वह यहाँ के संसाधनों को नष्ट करें। आवश्यकता इस बात की है कि हम इन संसाधनों को सजगता के साथ उपयोग करें। आज पर्यावरण असन्तुलन विश्व की सबसे बड़ी समस्या है। दूसरी ओर भावी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मानव, वनस्पति, जीव-जन्तु एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों (जल, वायु, खनिज) को संरक्षित किया जाना आवश्यक है।

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प्रश्न 3.
ई.आई.ए. की क्या भूमिका है? किन तत्वों को आधार मानकर ई. आई. ए. तैयार किया जाता है, वर्णन कीजिए।
(2009)
उत्तर:
पर्यावरणीय प्रभाव अनुमानक (ई.आई.ए.)-वर्तमान में पर्यावरण प्रदूषण और विघटन उच्च स्तर तक पहुंच चुका है। पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे, इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए पर्यावरणीय प्रभाव अनुमानक या ई.आई.ए. (Environment Impact Assessment) महत्त्वपूर्ण हो जाता है। पर्यावरणीय प्रभाव का निर्धारण अपनी परियोजनाओं से पर्यावरण पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव को शामिल करता है। पर्यावरण प्रभाव अनुमानक परियोजना से होने वाले लाभकारी और नुकसानदेह प्रभाव का मूल्यांकन गुणात्मक और संख्यात्मक दोनों प्रकार से करता है। ई.आई.ए. का लक्ष्य इस बात का ध्यान रखना होता है कि पर्यावरण का विघटन कम से कम हो।

पर्यावरणीय प्रभाव अनुमानक (ई.आई.ए.) के तत्व –

  1. भूमि पर प्रभाव-भूमि विघटन
  2. भूकम्प की सम्भावना
  3. मिट्टी एवं वायु की गुणवत्ता, धरातलीय एवं भूगर्भिक जल
  4. पौधों एवं वन्य जीवों की खतरे में पड़ी किस्मों की जानकारी
  5. ध्वनि प्रदूषण की स्थिति का आकलन
  6. सामाजिक आर्थिक प्रभाव
  7. अवशिष्ट व बचे पदार्थों का पर्याप्त उपयोग तथा
  8. जोखिम विश्लेषण व आपदा प्रबन्धन।

प्रश्न 4.
सी.एन.जी. से क्या आशय है? (2018) भारत में इसका सर्वाधिक उपयोग किस रूप में किया जा रहा है?
उत्तर:
सी.एन.जी. यानी कम्प्रैस्ड नेचुरल गैस धरती के भीतर पाए जाने वाले हाइड्रोकार्बन का मिश्रण है और इसमें 80 से 90 प्रतिशत मात्रा मीथेन गैस की होती है। सी.एन.जी. को वाहनों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने के लिए 200 से 250 किग्रा. प्रति वर्ग सेमी. तक दबाया यानी कम्प्रैस किया जाता है। यह गैस रंगहीन, गंधहीन, हवा से हल्की तथा पर्यावरण की दृष्टि से सबसे कम प्रदूषण उत्पन्न करती है। सी.एन.जी. को जलाने के लिए एल.पी.जी. की अपेक्षा ऊँचे तापमान की आवश्यकता पड़ती है इसलिए आसानी से आग पकड़ने का खतरा भी नहीं रहता। इसका उपयोग आज बिजलीघरों, खाद-कारखानों, इस्पात कारखानों, घरेलू ईंधन तथा वाहन के ईंधन के रूप में हो रहा है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चिपको आन्दोलन से क्या आशय है? इसका प्रारम्भ कैसे हुआ तथा इसकी अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के क्या कारण थे? (2008, 15)
अथवा
चिपको आन्दोलन से क्या आशय है? समझाइए। (2013, 17)
उत्तर:
विश्व प्रसिद्ध ‘चिपको आन्दोलन’ गढ़वाल की महिलाओं द्वारा चलाया गया था। आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य वनों की कटाई पर रोक लगाना था। इस आन्दोलन के प्रणेता सुन्दरलाल बहुगुणा हैं। इनके द्वारा प्रारम्भ किया गया चिपको आन्दोलन जंगल बचाने का एक पर्यायवाची शब्द बन चुका है।

यह केवल वृक्षों को बचाने का आन्दोलन ही नहीं है, अपितु भूमि नीति में आमूल परिवर्तन की माँग कर स्थायी कल्याणकारी आर्थिक पक्ष (अनाज, चारा, ईंधन, खाद, उर्वरक, कपड़ा) के लिए एक आधार. प्रस्तुत करता है। इस आन्दोलन का कर्म क्षेत्र, अब केवल भारतवर्ष में न होकर स्विट्जरलैण्ड जर्मनी और हॉलैण्ड भी है। यह आन्दोलन 1974 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश (वर्तमान में उत्तराखण्ड) सरकार द्वारा जंगलों को काटने का ठेका देने के विरोध में एक गांधीवादी संस्था ‘दशोली ग्राम स्वराज मण्डल’ ने चमोली जिले के गोपेश्वर में रेनी नामक ग्राम में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् बहुगुणा के नेतृत्व में प्रारम्भ किया गया।

इस आन्दोलन के तहत् महिलाएँ पेड़ों से चिपककर पेड़ को काटने से रक्षा करती थीं। पुरुषों की अनुपस्थिति में रेनी गाँव की एक साधारण महिला गौरा देवी श्रमिकों द्वारा वृक्षों को काटने से रोकने के लिए आगे आई। गौरा देवी ने गाँव में घर-घर जाकर लड़कियों और स्त्रियों को प्रतिरोध करने के लिए प्रेरित किया। गौरा देवी के नेतृत्व में वृक्षों को बचाने के लिए अहिंसक तकनीक चिपको का प्रयोग किया गया। स्त्रियों का कहना था कि ये जंगल हमारा मायका है, इसे हम किसी भी कीमत पर कटने नहीं देंगे। महिलाओं ने निरन्तर 48 घण्टे दिन-रात जंगल को घेरे रखा और ठेकेदार व वनकर्मियों की बन्दूक का भय भी इनकी हिम्मत को कम न कर पाया। इस घटना के बाद पूरे उत्तराखण्ड में वन संरक्षण हेतु जनता में नवीन उत्साह का संचार हुआ। इस आन्दोलन को गति प्रदान करने के लिए सुन्दरलाल बहुगुणा ने 2800 किमी की पदयात्रा की।

इस आन्दोलन के फलस्वरूप हिमालय क्षेत्र के वनों को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की माँग स्वीकार की गई। इस क्षेत्र के वनों के हरे वृक्षों को अगले 15 वर्षों तक काटने पर रोक लगा दी गयी। परिणामस्वरूप जंगलों का संवर्द्धन, भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि एवं वन्य प्राणियों के शिकार पर नियन्त्रण सम्भव हुआ।

प्रश्न 2.
साइलेण्ट वैली पर टिप्पणी कीजिए। (2008, 09, 10, 12)
उत्तर:
साइलेण्ट वैली (शान्त घाटी)-साइलेण्ट वैली केरल का एक छोटा वन क्षेत्र है। यह पश्चिमी घाट पर नीलगिरि के दक्षिण-पश्चिमी ढाल पर स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल 90 वर्ग किमी है। यह क्षेत्र चारों ओर से ऊँची पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह जनसंख्याविहीन, क्षेत्र है। कुन्तीपूजा नदी साइलेण्ट वैली के बीच से होकर बहती है। इस घाटी में दुर्लभ एवं मूल्यवान वनस्पति एवं जन्तुओं का भण्डार है।

केरल राज्य विद्युत् बोर्ड कुन्तीपूजा नदी पर बाँध बनाकर जल विद्युत् पैदा करना चाहता है। इसी प्रस्ताव के कारण पर्यावरणीय विवाद प्रारम्भ हुआ। केन्द्र सरकार के पर्यावरण विभाग ने केरल सरकार को बाँध निर्माण पर पुनः विचार करने को कहा। उक्त कार्य हेतु एक समिति गठित की गयी। एम. जी. के. मेनन की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने बाँध निर्माण को पर्यावरण की अपूरणीय क्षति बताकर बाँध न बनाने की सिफारिश की। समिति की जाँच रिपोर्ट के अनुसार शान्त घाटी कुछ विशिष्ट प्रकार की वनस्पतियों एवं वन्य प्राणियों का आश्रय स्थल है। यहाँ के भूमध्यरेखीय वर्षा वन बिना मानवीय हस्तक्षेप की स्थिति में ही सुरक्षित है। 1985 में साइलेण्ट वैली ‘राष्ट्रीय आरक्षित वन क्षेत्र’ घोषित करना पड़ा। इस प्रकार जन आन्दोलन के कारण ही बहुमूल्य वर्षा वन, दुर्लभ वनस्पति एवं जीव-जन्तुओं को सुरक्षित किया जा सका।

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प्रश्न 3.
जल संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए मध्य प्रदेश में कौन-कौन-से प्रयास किये गये हैं ? विस्तार से वर्णन कीजिए। (2008,09)
उत्तर:
मध्य प्रदेश में जल संरक्षण संवर्द्धन हेतु किये गए प्रयास पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में मील के पत्थर हैं। प्रमुख प्रयास निम्न प्रकार हैं –
(1) राजीव गांधी जल संग्रहण मिशन :
वर्ष 1994 में सूखा, अकाल एवं वन विनाश की समस्याओं के समाधान के लिए राजीव गांधी जल संग्रहण मिशन का कार्य प्रारम्भ हुआ। यह मिशन अन्तिम उपभोक्ता को भूमि और जल संरक्षण कार्यक्रम से जोड़कर उसके क्रियाकलाप और रख-रखाव पर बल देता है। मिशन के तहत जल संग्रहण हेतु स्थानीय समुदाय की माँग पर स्टाप डेम और तालाब बनाये गये। इन स्टाप डेमों और तालाबों में जल संग्रहण से जल की मात्रा में वृद्धि हुई। मृदा का कटाव रुका, सिंचाई हेतु जल मिला, पेड़-पौधे हरे-भरे हुए तथा जल संकट से मुक्ति हुई एवं पशुओं को सरलता से जल उपलब्ध होने लगा जिससे पशुधन व कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई।

(2) एक पंच एक तालाब योजना :
वर्ष 1999 में राज्य सरकार ने इस योजना के अन्तर्गत पंचायत के प्रत्येक सरपंच को अपने पाँच वर्ष के कार्यकाल में कम से कम एक तालाब के निर्माण को व पुराने तालाब के सुधार को अनिवार्य कर दिया। इनकी लागत का एक-चौथाई व्यय जनता द्वारा वहन किया।

(3) मिट्टी बचाओ अभियान :
मध्य प्रदेश में तवा बाँध के कारण अत्यन्त जल-जमाव एवं खारेपन को रोकने तथा किसानों को उसके लिए मुआवजा दिलाने हेतु वर्ष 1977 में मिट्टी बचाओ आन्दोलन प्रारम्भ किया गया।

(4) पानी रोको अभियान :
वर्ष 2000 में पानी रोको अभियान के अन्तर्गत छोटे-छोटे बाँध बनाकर पानी के संग्रहण को बढ़ाया गया, इससे लगभग 7 लाख जल संग्रहण क्षेत्र विकसित हुए।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चिपको आन्दोलन के प्रणोता कौन थे? (2009)
(i) नारायण दत्त तिवारी
(ii) सुन्दरलाल बहुगुणा
(iii) उमा भारती,
(iv) चौधरी देवीलाल।
उत्तर:
(ii) सुन्दरलाल बहुगुणा

प्रश्न 2.
साइलेण्ट वैली को राष्ट्रीय उद्यान कब घोषित किया गया?
(i) 1980
(ii) 1985
(iii) 1975
(iv) 1995
उत्तर:
(ii) 1985

प्रश्न 3.
सी. एन. जी. (C.N.G) का पूरा नाम है
(i) Compressed Natural Gas
(ii) Computerised Natural Gas
(iii) Common Natural Gas
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) Compressed Natural Gas

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. मनुष्य प्रकृति का सर्जक ही नहीं, एक …………. भी है।
  2. चिपको आन्दोलन …………. के संरक्षण के लिए एक कारगर उपाय है।
  3. वर्ष 2000 में पानी रोको अभियान के अन्तर्गत ……….. बनाकर पानी के संग्रहण को बढ़ाया गया।

उत्तर:

  1. घटक
  2. प्राकृतिक संसाधनों
  3. छोटे-छोटे बाँध

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सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
कुन्तीपूजा नदी साइलेण्ट वैली के बीच से होकर गुजरती है। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
भारत में पर्यावरणीय प्रभाव निर्धारण का कार्य कृषि मन्त्रालय द्वारा किया जाता है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
भारत में सी. एन. जी का उपयोग सबसे पहले दिल्ली में प्रारम्भ हुआ। (2008)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
सन् 1999 में राज्य सरकार ने एक पंच एक तालाब योजना लागू की।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
चिपको आन्दोलन को राष्ट्रीय समर्थन व लोकप्रियता मिली।
उत्तर:
सत्य

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 2 पर्यावरण संरक्षण के प्रयास व सफलताएँ - 1

उत्तर:

  1. → (ग)
  2. → (घ)
  3. → (ङ)
  4. → (क)
  5. → (ख)

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एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
राजीव गांधी जल संग्रहण मिशन कब प्रारम्भ किया गया? (2009)
उत्तर:
1994

प्रश्न 2.
एक सस्ता, अच्छा और कम प्रदूषण फैलाने वाला ऊर्जा संसाधन, जो वाहनों के लिए उपयोगी है, क्या है?
उत्तर:
सी. एन. जी. (Compressed Natural Gas)

प्रश्न 3.
मृदा को उपजाऊ बनाने के लिए खेतों में मौसम के अनुसार बदल-बदलकर पैदावार की व्यवस्था को क्या कहते हैं?
उत्तर:
फसल चक्र

प्रश्न 4.
वे जीव जो मृदा में पौष्टिक तत्व उत्पन्न करते हैं। (2008)
उत्तर:
जैव उर्वरक

प्रश्न 5.
चिपको आन्दोलन का प्रारम्भ किस राज्य में हुआ? (2018)
उत्तर:
उत्तराखण्ड।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
फसल चक्र से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिये खेतों में मौसम के अनुसार बदल-बदलकर पैदावार की व्यवस्था करना ही फसल चक्र कहलाता है।

प्रश्न 2.
जैव उर्वरक किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे जीव जो मिट्टी में पौष्टिक तत्व पैदा करते हैं; जैसे-जीवाणु, वर्मी, फफूंद आदि जैव उर्वरक कहलाते हैं।

प्रश्न 3.
पुनः चक्रण से क्या आशय है?
उत्तर:
ऐसी वस्तुओं या उत्पादों जिनका वास्तविक मूल्य उपयोग के कारण खत्म हो गया हो, को पुनः उपयोगी बनाना पुनः चक्रण कहलाता है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण प्रभाव अनुमानक के प्रमुख उद्देश्य बताइए। (2008)
उत्तर:
पर्यावरण प्रभाव निर्धारण पर्यावरणीय गुणवत्ता को बनाए रखने की महत्त्वपूर्ण तकनीक है। इसके मुख्य उद्देश्य निम्न हैं –

  1. पर्यावरण की गुणवत्ता बनी रहे।
  2. पर्यावरण को विघटन से बचाया जाए ताकि उपचार किया जा सके।
  3. पर्यावरण को क्षति पहुँचाए बिना प्रगति हो।

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प्रश्न 2.
एक उदाहरण देकर समझाइए कि मनुष्य ने प्राकृतिक पर्यावरण की आपदाओं पर विजय कैसे प्राप्त की है?
उत्तर:
मनुष्य पहले पर्यावरण का दास था। ऐसा माना जाता है कि मानव के क्रिया-कलाप पर्यावरण के प्रतिबन्धों से प्रभावित होते हैं अर्थात् मनुष्य जिस प्रकार के पर्यावरण में रहता है, उसके क्रिया-कलाप उसी पर्यावरण के अनुसार होते हैं। परन्तु आज मनुष्य ने विज्ञान और तकनीक के विकास द्वारा पर्यावरण की आपदाओं पर विजय प्राप्त कर ली है। उसने पर्यावरण प्रतिबन्धों को हटाना सीख लिया है। उदाहरण के लिए-अब उष्ण कटिबन्धीय मरुस्थलों की भयानक गर्मी मनुष्य के लिए कोई समस्या नहीं है।

उसने इस भीषण गर्मी से बचाव के लिए वातानुकूलित (एयरकंडीशन) निवास स्थान बना लिए हैं। मनुष्य ने समुद्र के खारे जल को मीठे जल में परिवर्तित करना सीख लिया है। मनुष्य ने बाढ़ जैसी आपदाओं से बचाव हेतु नदियों पर बाँध बना लिये हैं, इन बाँधों से वह सिंचाई हेतु जल तथा विद्युत् भी प्राप्त करने लगा है। इस प्रकार स्पष्ट है कि मनुष्य ने प्राकृतिक पर्यावरण की आपदाओं पर विजय प्राप्त कर उन्हें अपनी आवश्यकतानुसार परिवर्तित कर लिया है।

प्रश्न 3.
कोई विकासात्मक परियोजना प्रारम्भ करने के पूर्व परियोजनाकर्ता एवं प्रबन्धक को किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है, वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कोई विकासात्मक परियोजना प्रारम्भ करने के पूर्व परियोजनाकर्ता एवं प्रबन्धक को यह जानना आवश्यक हो जाता है कि उस योजना का उस स्थान विशेष की जलवायु, वनस्पति, जीव-जन्तु एवं समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा। विकास की इन योजनाओं; जैसे-विद्युत् संयन्त्र, बाँध, इस्पात एवं लौह कारखाने का पर्यावरण पर क्या प्रभाव होगा। खाद्यान्न तेल, कागज, सीमेण्ट उद्योग में यह और भी अधिक आवश्यक हो जाता है। अत: इन योजनाओं को प्रारम्भ से पूर्व पर्यावरण मसौदा तैयार किया जाता है। इस प्रकार विकास योजना के पूर्व पर्यावरण प्रभाव वक्तव्य तैयार किया जाता है, इसमें भूमि, धरातल, मिट्टी, जीव-जन्तु, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, प्रदूषण एवं आपदा प्रबन्धन से सम्बन्धित जानकारियाँ होती हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण संरक्षण से क्या अभिप्राय है? इसके लिए सुझाव दीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण संरक्षण का अर्थ विकास ही समझा जाना चाहिए और इस कार्य में ग्रामीण तथा शहरी सभी लोगों को सक्रिय होकर हिस्सा लेना चाहिए। बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए रचनात्मक कदम उठाने होंगे जिससे न तो पर्यावरण प्रदूषित हो और न ही आर्थिक, सामाजिक विकास अवरुद्ध हो। इस सम्बन्ध में यहाँ कुछ सकारात्मक सुझाव दिए जा रहे हैं –

  1. जनसाधारण को प्रदूषण से उत्पन्न खतरों से अवगत कराया जाय जिससे प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर प्रदूषण कम करने का हर सम्भव प्रयास ईमानदारी से करे।
  2. पर्यावरण की सुरक्षा के लिए औद्योगिक विकास अवरुद्ध न किया जाय बल्कि औद्योगिक विकास नियोजित ढंग से हो, जिससे कि पर्यावरण में किसी भी प्रकार का असन्तुलन उत्पन्न न हो। क्योंकि देखा गया है कि जिस ढंग से औद्योगिक विकास के लिए पेड़-पौधों को काटा जा रहा है वह आज की पर्यावरण सम्बन्धी सबसे बड़ी समस्या है।
  3. यातायात के साधनों से होने वाले प्रदूषण से बचने के लिए मोटर वाहन सम्बन्धी नियमों व कानून को सख्ती से लागू किया जाय। अत्यधिक धुआँ छोड़ने वाले तथा तीव्र ध्वनि के हॉर्न वाले वाहनों पर प्रतिबन्ध लगाया जाए।
  4. उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषित जल, जोकि नदियों व कृषि भूमि में पहुँचता है, इस पर भी प्रतिबन्ध लगाया जाना चाहिए। सभी उद्योगों में जल उपचार संयन्त्र स्थापित किये जाने चाहिए जिससे प्रदूषित जल को शुद्ध किया जा सके।
  5. जनसंख्या वृद्धि पर नियन्त्रण कर प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
  6. वनों की अन्धाधुन्ध कटाई पर सरकार को सख्ती बरतनी चाहिए, भूमि को बंजर होने से बचाने, पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने तथा वन रोपने हेतु सिंचाई की व्यवस्था में सुधार के लिए सघन वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया जाना चाहिए।
  7. योजना आयोग, पर्यावरण और वन विभाग और परम्परागत ऊर्जा विभाग, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभागों के बीच ऐसा समन्वय हो कि ये तीनों विभाग पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कृत संकल्प होकर कार्य करें।

प्रश्न 2.
वाटर हार्वेस्टिंग से क्या आशय है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वाटर हार्वेस्टिंग का आशय है पानी को रोकना, सहेजना, जमा करना और बाद में उसे पृथ्वी के ऊपर या नीचे जलस्रोतों में डालना। यह तकनीक बहुत सरल, सुगम और सस्ती है। अनुमान है कि 2000 वर्ग फुट की छत पर एक सेण्टीमीटर वर्षा होने पर वहाँ से लगभग 2000 लीटर पानी बहकर निकल जाता है। किसी क्षेत्र में अगर 100 सेण्टीमीटर वर्षा हो तो 100 वर्ग फुट की छत से वर्षाकाल में लगभग एक लाख लीटर पानी नलकूप, हैण्डपम्प, कुएँ, बावड़ी या जलाशय जैसे जलस्रोतों तक पहुँचाया जा सकता है। इस तरह इन जलस्रोतों की हर वर्ष भरपाई होते रहने से क्षेत्रों को सूखने से बचाया जा सकता है।

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