MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 13 निर्वाचन

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 13 निर्वाचन

MP Board Class 9th Social Science Chapter 13 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 13 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
निम्न में से किसे मताधिकार प्रदान किया जा सकता है?
(i) अवयस्क पुरुष तथा महिलाओं को
(i) केवल पुरुषों को,
(iii) वयस्क पुरुष तथा महिलाओं को
(iv) केवल महिलाओं को।
उत्तर:
(iii) वयस्क पुरुष तथा महिलाओं को

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प्रश्न 2.
किसे वोट देने का अधिकार नहीं है? (2016, 18)
(i) पागल या मानसिक विकलांगों को
(ii) नाबालिगों को
(iii) न्यायालय द्वारा दिवालिया घोषित
(iv) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(iv) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 3.
भारत में निम्नलिखित में से किसके बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू मानी जाती है?
(i) प्रत्याशी के नामांकन पत्र जमा करने के बाद
(ii) चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद
(iii) प्रचार कार्य प्रारम्भ होने के बाद
(iv) चुनाव सभा होने से।
उत्तर:
(ii) चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. हमारे देश के सभी स्त्री-पुरुष जिनकी उम्र …………. वर्ष है, वोट डालने के अधिकारी हैं। (2018)
  2. कई दल मिलकर जब सरकार बनाते हैं, तब वह …………. सरकार कहलाती है। (2017)
  3. राजनीतिक दलों को मान्यता देने के लिए ………… आयोग बनाया गया है।
  4. देश के प्रत्येक वयस्क महिला-पुरुष को बिना किसी भेदभाव के मत देने का अधिकार ……….. मताधिकार कहलाता है।

उत्तर:

  1. 18 वर्ष
  2. साझा
  3. निर्वाचन
  4. सार्वभौमिक वयस्क।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 13 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राजनीतिक दल किसे कहते हैं ? लिखिए।
उत्तर:
राजनीतिक दल उन नागरिकों के संगठित समूह का नाम है जो एक ही राजनीतिक सिद्धान्तों को मानते और एक राजनीतिक इकाई के रूप में काम करते और सरकार पर अपना अधिकार जमाने का प्रयत्न करते हैं।

प्रश्न 2.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कौन नियुक्त करता है? (2008, 15, 17)
उत्तर:
निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

प्रश्न 3.
भारत के निर्वाचन आयोग का कार्यालय कहाँ स्थित है?
उत्तर:
भारत के निर्वाचन आयोग का कार्यालय नई दिल्ली में है।

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प्रश्न 4.
साझा सरकार किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी एक दल का बहुमत न आने पर जब कई दल मिलकर सरकार बनाते हैं, तब वह सरकार साझा सरकार कहलाती है। इसे गठबन्धन सरकार भी कहते हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 13 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राजनीतिक दलों की विशेषताएँ बताइए। (2014)
अथवा
राजनीतिक दल किसे कहते हैं? उसकी चार विशेषताएँ बताइए। (2008)
उत्तर:
राजनीतिक दल उन नागरिकों के संगठित समूह का नाम है जो एक ही राजनीतिक सिद्धान्तों को मानते और एक राजनीतिक इकाई के रूप में काम करते और सरकार पर अपना अधिकार जमाने का प्रयत्न करते हैं।

राजनीतिक दलों की विशेषताएँ –

  1. अपने विचारों के समर्थन में निरन्तर जनमत बनाना।
  2. एक विधान द्वारा संगठित और संचालित होना।
  3. निर्वाचन आयोग में पंजीकृत होना।
  4. पहचान हेतु एक चुनाव चिह्न होना।
  5. प्रमुख उद्देश्य निर्वाचन में विजय प्राप्त कर सत्ता प्राप्त करना।
  6. शासक दल पर निगाह रखते हुए जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध जनमत तैयार करना।

प्रश्न 2.
मध्यावधि निर्वाचन किसे कहते हैं? (2016)
उत्तर:
मध्यावधि निर्वाचन-यदि लोकसभा अथवा राज्य विधानसभा को उसके कार्यकाल पूरा होने से पहले ही भंग कर दिया जाता है तो होने वाले चुनाव मध्यावधि चुनाव कहलाते हैं।

प्रश्न 3.
निर्वाचन आयोग के कार्य लिखिए। (2008, 09, 10, 14, 16, 18)
अथवा
चुनाव आयोग के कार्यों को लिखिए। (2012)
उत्तर:
निर्वाचन आयोग के कार्य-निर्वाचन आयोग या चुनाव आयोग के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं –

  • चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन :
    चुनाव आयोग का महत्त्वपूर्ण कार्य चुनाव क्षेत्रों की सीमाएँ निश्चित करना है। प्रत्येक 10 वर्ष बाद जनगणना के आधार पर चुनाव क्षेत्रों की सीमाएँ निश्चित की जाती हैं।
  • मतदाता सूची तैयार करना :
    चुनाव आयोग चुनाव से पूर्व चुनाव क्षेत्र के आधार पर मतदाता सूची तैयार करवाता है, जिसके लिए यथासम्भव उन सभी वयस्क नागरिकों को मतदाता सूची में अंकित करने का प्रयास किया जाता है जो मतदाता बनने की योग्यता रखते हैं।
  • चुनाव-चिह्न देना :
    निर्वाचन आयोग ही सभी राजनीतिक दलों को उनके चुनाव चिह्न प्रदान करता है या उनके द्वारा सुझाव प्रदान करता है या उनके द्वारा सुझाये गये चुनाव-चिह्नों पर स्वीकृति देता है। जो प्रत्याशी किसी राजनीतिक दल की टिकट से नहीं बल्कि स्वतन्त्र रूप से चुनाव लड़ते हैं, तो उनके चुनाव-चिह्न निर्वाचन आयोग द्वारा ही निश्चित किये जाते हैं।
  • राजनीतिक दलों को मान्यता देना :
    राजनीतिक दलों को मान्यता निर्वाचन आयोग ही देता है। प्रत्येक चुनाव के बाद मतों के निश्चित प्रतिशत के आधार पर राष्ट्रीय दलों व क्षेत्रीय दलों को मान्यता देने का कार्य निर्वाचन आयोग करता है।
  • निष्पक्ष चुनाव करवाना :
    निष्पक्ष तथा स्वतन्त्र चुनाव कराना चुनाव आयोग का एक प्रमुख कार्य है। चुनाव का समय, तिथि, मोहर लगाना, मतपत्रों पर चिह्न, गणना, परिणाम घोषित करना आदि के निर्देश आयोग ही देता है।

प्रश्न 4.
निर्वाचक नामावली क्या है? इसका उपयोग बताइए। (2009)
उत्तर:
चुनाव आयोग का एक महत्त्वपूर्ण कार्य निर्वाचक नामावली तैयार कराना है। इस प्रक्रिया के अन्तर्गत प्रत्येक निर्वाचन से पूर्व वह मतदान केन्द्र के अनुसार मत देने के योग्य नागरिकों की सूची तैयार करवाता है। इसे निर्वाचन नामावली कहते हैं। नवीन सूची में 18 वर्ष के नागरिकों के नाम जोड़े जाते हैं और मृत्यु या अन्य कारण से अन्यत्र स्थानों पर चले गये नागरिकों के नाम हटाये जाते हैं। निर्वाचक नामावली को मतदाता सूची के नाम से भी जाना जाता है।

प्रश्न 5.
विपक्षी दल की भूमिका का वर्णन कीजिए। (2008, 09, 13)
अथवा
भारतीय राजनीति में विपक्षी दलों की भूमिका बताइए। (2008)
उत्तर:
विपक्षी दल की भूमिका-लोकतन्त्र के सफलतापूर्वक संचालन और सत्तारूढ़ पार्टी पर अंकुश रखने के लिए विपक्षी दल का अत्यधिक महत्त्व है। हमारे देश में प्रजातन्त्र है और उसमें सरकार के प्रत्येक कार्य, उसकी प्रत्येक नीति की समालोचना किया जाना अनिवार्य है। यह कार्य विपक्षी दल ही कर सकते हैं। सरकार को तानाशाह बनने से रोकना और नागरिकों के अधिकारों का हनन न होने देना, यह सभी कार्य विपक्ष करता है विपक्ष की उपस्थिति से सरकार जनता के प्रति अधिक सजगता से अपने दायित्वों का निर्वहन करती है। विधायिका में कोई भी कानून पारित होने से पूर्व उस पर विचार-विमर्श और चर्चा होती है।

विपक्ष के सहयोग से कानून के दोषों को दूर किया जा सकता है। विधान मण्डल और संसद की बैठकों के समय विपक्ष की भूमिका और बढ़ जाती है। विपक्ष सदन में प्रश्न पूछकर, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव या स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार पर दबाव बनाता है। इस प्रकार विपक्ष जनता के सामने अपनी योग्यता को स्थापित करता है, विपक्ष सरकार की त्रुटियों को जनता के सामने लाता है, सरकार की नीतियों और कार्यों की आलोचना करके सरकार को भूल सुधार के लिए बाध्य किया जाता है। विपक्ष द्वारा अपने दायित्व का सही प्रकार से पालन करने से सरकार प्रभावित होती है।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 13 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मताधिकार किसे कहते हैं? मताधिकार के सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
नागरिकों का प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मताधिकार कहलाता है। यह अधिकार महत्त्वपूर्ण राजनीतिक अधिकार है।

मताधिकार के सिद्धान्त
प्रजातान्त्रिक व्यवस्थाओं के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न है कि मताधिकार का आधार क्या हो? क्या यह अधिकार राज्य के सभी नागरिकों को दिया जाए या कुछ चुने हुए व्यक्तियों को? इस सन्दर्भ में मताधिकार के प्रमुख सिद्धान्त अग्र प्रकार हैं –

  • जनजातीय सिद्धान्त :
    इस सिद्धान्त के अनुसार राज्य के प्रत्येक नागरिक को मताधिकार प्राप्त होना चाहिए। क्योंकि यह कोई विशेष अधिकार या सुविधा नहीं है वरन् यह प्रत्येक नागरिक के जीवन को प्रभावित करने वाला स्वाभाविक एवं महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। यह अवधारणा प्राचीन यूनान, रोम तथा अन्य छोटे राष्ट्रों की सभाओं में प्रचलित था, जहाँ हाथ उठाकर मतदान किया जाता था। आधुनिक युग में मताधिकार के लिए नागरिकता की अनिवार्यता सम्भवतः इसी का प्रारूप है।
  • नैतिक सिद्धान्त :
    यह सिद्धान्त इस अवधारणा पर आधारित है कि मानव के व्यक्तित्व के विकास के लिए यह अनिवार्य है कि उसे मताधिकार के माध्यम से यह निश्चित करने का अधिकार हो कि उनका शासन कौन करे। मताधिकार व्यक्ति में संवेदनशीलता को जन्म देता है तथा उसे सरकारी नीतियों तथा कार्यक्रमों के प्रति सजग बनाता है।
  • वैधानिक अधिकार :
    मताधिकार एक प्राकृतिक अधिकार नहीं वरन् राजनीतिक अधिकार है। यह निर्धारण करना राज्य का कार्य है कि किसे मताधिकार मिलना चाहिए। प्रत्येक शासन अपनी परिस्थितियों और सामाजिक स्थिति के आधार पर इसका निर्धारण करता है।
  • प्राकृतिक सिद्धान्त :
    17वीं तथा 18वीं शताब्दी में यह सिद्धान्त विशेष लोकप्रिय हुआ। इस सिद्धान्त के अनुसार सरकार मानव निर्मित संयन्त्र है। इसका आधार जनता की सहमति है। अर्थात् शासक को चुनने का अधिकार जनता का प्राकृतिक अधिकार है।
  • सर्वव्यापी वयस्क मताधिकार का सिद्धान्त :
    यह सिद्धान्त लोकतान्त्रिक राज्यों में सर्वाधिक प्रचलित सिद्धान्त है। इस सिद्धान्त के अनुसार राज्य के प्रत्येक वयस्क नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मत देने का अधिकार होता है। 17वीं तथा 18वीं शताब्दी में प्राकृतिक अधिकारों और जनसम्प्रभुता के वातावरण में सर्वव्यापक मताधिकार की माँग ने जोर पकड़ा। इसमें वयस्कता का अधिकार सम्मिलित किया गया।
  • भारीकृत मताधिकार का सिद्धान्त :
    इस सिद्धान्त के अनुसार मतों को गिना नहीं जाता है वरन् उनका भार दिया जाता है। भार का आशय यहाँ महत्त्व से है अर्थात् सरकार के चयन में किसी प्रकार की विशिष्टता जैसे शिक्षा, धन या सम्पत्ति से विभूषित व्यक्ति के मत का भार एक आम आदमी से अधिक होना चाहिए।
  • बहुल मताधिकार का सिद्धान्त :
    मताधिकार के इस सिद्धान्त की मूल अवधारणा में यह आग्रह है कि व्यक्तियों के मतों की संख्या कुछ आधारों पर कम या अधिक होनी चाहिए। आधुनिक लोकतान्त्रिक व्यवस्थाओं में ‘एक व्यक्ति एक मत’ का सिद्धान्त सर्व स्वीकृत है, परन्तु विगत वर्षों में बहुल मताधिकार की व्यवस्था भी अनेक राज्यों में प्रचलित रही है।

प्रश्न 2.
निर्वाचन से क्या आशय है? निर्वाचन आयोग के कार्यों को लिखिए।
उत्तर:
निर्वाचन एक महत्वपूर्ण कार्य है। यह एक निर्धारित विधि से होता है। देश में होने वाले सामान्य निर्वाचन, मध्यावधि निर्वाचन या उपचुनाव या निर्वाचन, सभी में समान प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रिया के प्रमुख बिन्दु हैं-

  1. मतदाता सूची तैयार करना
  2. चुनाव की घोषणा
  3. निर्वाचन हेतु नामांकन
  4. चुनाव चिह्न
  5. चुनाव अभियान
  6. मतदान
  7. मतगणना।

निर्वाचन आयोग के कार्य :
निर्वाचन आयोग के कार्य-निर्वाचन आयोग या चुनाव आयोग के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं’

  • चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन :
    चुनाव आयोग का महत्त्वपूर्ण कार्य चुनाव क्षेत्रों की सीमाएँ निश्चित करना है। प्रत्येक 10 वर्ष बाद जनगणना के आधार पर चुनाव क्षेत्रों की सीमाएँ निश्चित की जाती हैं।
  • मतदाता सूची तैयार करना :
    चुनाव आयोग चुनाव से पूर्व चुनाव क्षेत्र के आधार पर मतदाता सूची तैयार करवाता है, जिसके लिए यथासम्भव उन सभी वयस्क नागरिकों को मतदाता सूची में अंकित करने का प्रयास किया जाता है जो मतदाता बनने की योग्यता रखते हैं।
  • चुनाव-चिह्न देना :
    निर्वाचन आयोग ही सभी राजनीतिक दलों को उनके चुनाव चिह्न प्रदान करता है या उनके द्वारा सुझाव प्रदान करता है या उनके द्वारा सुझाये गये चुनाव-चिह्नों पर स्वीकृति देता है। जो प्रत्याशी किसी राजनीतिक दल की टिकट से नहीं बल्कि स्वतन्त्र रूप से चुनाव लड़ते हैं, तो उनके चुनाव-चिह्न निर्वाचन आयोग द्वारा ही निश्चित किये जाते हैं।
  • राजनीतिक दलों को मान्यता देना :
    राजनीतिक दलों को मान्यता निर्वाचन आयोग ही देता है। प्रत्येक चुनाव के बाद मतों के निश्चित प्रतिशत के आधार पर राष्ट्रीय दलों व क्षेत्रीय दलों को मान्यता देने का कार्य निर्वाचन आयोग करता है।
  • निष्पक्ष चुनाव करवाना :
    निष्पक्ष तथा स्वतन्त्र चुनाव कराना चुनाव आयोग का एक प्रमुख कार्य है। चुनाव का समय, तिथि, मोहर लगाना, मतपत्रों पर चिह्न, गणना, परिणाम घोषित करना आदि के निर्देश आयोग ही देता है।

प्रश्न 3.
राजनीतिक दलों की संख्या के आधार पर राजनीतिक दलों के प्रकार लिखिए।(2013)
उत्तर:
दलीय व्यवस्था के प्रकार-किसी राष्ट्र में राजनीतिक दलों की संख्या के आधार पर दल व्यवस्था को तीन वर्गों में बाँटा जाता है –

  • एकल दल (एक दलीय) प्रणाली :
    एक दलीय पद्धति या व्यवस्था उसे कहते हैं जिसमें केवल एक राजनीतिक दल होता है और वही समस्त राजनीतिक गतिविधियों का संचालन करता है, जैसे-जनवादी चीन में एक दलीय प्रणाली है, वहाँ केवल साम्यवादी दल को ही मान्यता है। अन्य राजनैतिक विचार रखने वालों पर पाबन्दी है।
  • द्वि-दलीय प्रणाली :
    इस प्रणाली में केवल दो दल या दो प्रमुख दल होते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में द्वि-दलीय प्रणाली प्रचलित है। इस राष्ट्र के दो प्रमुख दल हैं-डेमोक्रेटिक दल तथा रिपब्लिकन दल। इस प्रकार संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन की शासन व्यवस्था में द्वि-दलीय प्रणाली प्रचलित है।
  • बहुदलीय प्रणाली :
    बहुदलीय प्रणाली में अनेक राजनीतिक दल होते हैं, किन्तु सभी दलों की स्थिति समान नहीं होती। हमारे देश में बहुदलीय राजनीतिक प्रणाली है। निर्वाचन में किसी एक दल का बहुमत में आना आवश्यक नहीं है।

जब किसी एक दल का बहुमत नहीं आता है, तो देश या प्रान्त में साझा सरकार बनाई जाती है। साझा या गठबन्धन सरकार में दो या अधिक दल शामिल होते हैं।

बहुदलीय प्रणाली का सबसे बड़ा दोष दल-बदल है। चुनावों के समय अनेक प्रकार की कठिनाइयाँ आती हैं। इस प्रणाली में राजनीतिक दलों की नीतियों में स्पष्ट अन्तर करना कठिन हो जाता है। बहुदलीय प्रणाली में व्यक्तिनिष्ठ दलों की संख्या बढ़ जाती है। आये दिन उनका विघटन और पतन होता रहता है।

प्रश्न 4.
दल व्यवस्था क्या है? उसका महत्त्व बताइए।
अथवा
राजनैतिक दल व्यवस्था क्या है? उसका महत्त्व बताइए। (2009)
उत्तर:
संसदीय लोकतन्त्र के लिए विभिन्न राजनीतिक दल आवश्यक हैं। राजनीतिक दल नागरिकों के संगठित समूह हैं, जो एक-सी विचारधारा रखते हैं। ये अपनी नीतियों और कार्यक्रमों के लिए प्रतिबद्ध होते हैं। राजनीतिक दल एक शक्ति के रूप में कार्य करते हैं और सदैव शक्ति प्राप्त करने और उसे बनाये रखने का प्रयास करते रहते हैं।

दलीय व्यवस्था का महत्त्व :
दलीय व्यवस्था लोकतान्त्रिक शासन को सम्भव बनाती है। आधुनिक युग में शासन कार्य राजनीतिक दलों के सहयोग से होता है। यह शासन के नीति निर्धारण में सहयोग करते हैं और इनके सहयोग से नीतियों में परिवर्तन आसान होता है। दल-व्यवस्था के प्रभाव से सरकार जनोन्मुखी होती है व लोकहित में कार्य करती है। राजनैतिक दल शासन के निरंकुशता पर नियन्त्रण करते हैं। इनके माध्यम से जनता की आशाएँ और अपेक्षाएँ सरकार तक पहुँचती हैं। यह जनता को राजनीतिक प्रशिक्षण देते हैं। इनके . . माध्यम से जनता को शासन में भाग लेने का अवसर प्राप्त होता है। राजनीतिक दल नागरिक स्वतन्त्रताओं के रक्षक होते हैं। इनके द्वारा राष्ट्र की एकता स्थापित होती है। लॉर्ड ब्राइस का मत है कि, “दल राष्ट्र के मस्तिष्क को उसी प्रकार क्रियाशील रखते हैं, जैसे कि लहरों की हलचल से समुद्र की खाड़ी का जल स्वच्छ रहता है।”

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प्रश्न 5.
भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया व भारतीय चुनाव प्रणाली के प्रमुख दोषों का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया को लिखिए। (2008, 09)
अथवा
भारतीय चुनाव प्रणाली के कोई चार दोष लिखिए। (2017, 18)
उत्तर:
भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया-निर्वाचन एक महत्त्वपूर्ण कार्य है। यह एक निर्धारित विधि से होता है। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-
(1) मतदाता सूची तैयारी करना :
निर्वाचन का यह पहला चरण है। जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार प्रत्येक निर्वाचन से पूर्व मतदाता सूची को तैयार करता है। कोई भी भारतीय नागरिक जिसकी आयु 18 वर्ष है इसमें अपना नाम सम्मिलित करवा सकता है। मतदाता पहचान पत्र भी जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा बनवाये जाते हैं। मतदाता पहचान पत्र के अभाव में नागरिक को अपनी पहचान के लिए अन्य कागजात लाने होते हैं।

(2) चुनाव की घोषणा :
प्रत्येक निर्वाचन प्रक्रिया का प्रारम्भ अधिसूचना जारी होने से होता है। लोकसभा के सामान्य अथवा मध्यावधि या उपचुनाव की अधिसूचना राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। विधान सभाओं के लिए अधिसूचना राज्यपाल द्वारा की जाती है। अधिसूचना का प्रकाशन चुनाव आयोग से विचार-विमर्श के बाद राजपत्र में किया जाता है।

अधिसूचना जारी होने के पश्चात् निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाता है। इसके साथ ही राजनीतिक दलों के लिए आचार संहिता लागू हो जाती है।

(3) नामांकन पत्र :
चुनाव सूचना जारी होने के बाद चुनाव आयोग चुनावों की तिथि घोषित करता है जिसके अन्तर्गत एक निश्चित तिथि एक प्रत्याशी अपना नामांकन पत्र भरते हैं। नामांकन पत्र मतदाताओं द्वारा प्रस्तावित व अनुमोदित होना चाहिए तथा प्रत्याशी का नाम मतदाता सूची में अवश्य होना चाहिए। नामांकन पत्र के साथ प्रत्याशी एक निश्चित धनराशि जमानत के रूप में जमा करवाता है। नामांकन पत्र भरे जाने की तिथि के बाद एक निश्चित तिथि में सभी नामांकन पत्रों की जाँच की जाती है और जिन प्रत्याशियों के नामांकन पत्र सही पाये जाते हैं उन्हें प्रत्याशी घोषित कर दिया जाता है। इसके पश्चात् एक निश्चित तिथि तक प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकते हैं।

(4) चुनाव-चिह्न-चुनाव :
चिह्न ऐसे चिह्नों को कहते हैं जिन्हें कोई राजनीतिक दल या उम्मीदवार चुनाव के समय अपने चिह्न के रूप में प्रयोग करता है। चिह्न की पहचान से ही मतदाता अपना मत सही उम्मीदवार को दे सकता है।

(5) चुनाव अभियान :
चुनाव अभियान समस्त चुनावी प्रक्रिया का सबसे निर्णायक भाग है। वैसे ही आज के विज्ञापन के युग में चुनाव प्रचार का अत्यधिक महत्त्व है। चुनाव प्रचार के लिए चुनाव घोषणा-पत्र के साथ-साथ आम सभाएँ भी आयोजित की जाती हैं। चुनाव प्रचार की दृष्टि से आकर्षक नारे गढ़े व प्रचारित किये जाते हैं। नारे छपे पोस्टर जगह-जगह दीवारों पर चिपकाये जाते हैं। परम्परागत तरीकों से रिक्शा व लाउडस्पीकर का भी चुनाव प्रचार में भरपूर प्रयोग किया जाता है। प्रत्येक दल को दूरदर्शन व आकाशवाणी द्वारा अपना प्रचार-प्रसार करने का एक निश्चित समय दिया जाता है।

(6) मतदान-निश्चित तिथि पर मतदाता चुनाव बूथ पर जाकर मत डालते हैं। मतदान के लिए सार्वजनिक छुट्टी रहती है व एक निश्चित समय तक ही मतदाता अपना वोट डाल सकते हैं। मतदान अधिकारी व विभिन्न प्रत्याशियों के प्रतिनिधियों द्वारा यह पहचान किये जाने के पश्चात् कि मतदाता सही है, कोई धोखा नहीं है, उस मतदाता को मतपत्र दे दिया जाता है जो बूथ में जाकर गुप्त रूप से अपना मत डालता है। मत-पत्र दिये जाने के पूर्व चुनाव अधिकारी एक अमिट स्याही का निशान मतदाता की उँगली पर लगाता है, ताकि वह मतदाता दुबारा गलत ढंग से मत न डाल सके।

(7) मतगणना व परिणाम :
मतदान पूरा हो जाने के बाद चुनाव अधिकारी प्रत्याशियों के प्रतिनिधियों के सामने मतपेटियों को सीलबन्द कर देते हैं। प्रत्येक मतदान केन्द्र से मतपेटियाँ एक स्थान पर एकत्र कर ली जाती हैं जहाँ एक निश्चित तिथि पर प्रत्याशी व उनके प्रतिनिधियों के समक्ष मतपेटियों को खोला जाता है। उनके ही सामने मतों की गिनती चुनाव कर्मचारी करते हैं। सर्वाधिक मत प्राप्त करने वाले प्रत्याशी को निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है।

भारतीय चुनाव प्रणाली के दोष :
भारतीय चुनाव प्रणाली के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं –
(1) मतदान में पूर्ण भागीदारी का अभाव :
सार्वभौम वयस्क मताधिकार प्रणाली का उद्देश्य सभी नागरिकों को शासन में अप्रत्यक्ष भागीदार बनाना है। बड़े क्षेत्रों में लोकसभा तथा राज्य विधानसभा चुनावों में एक बड़ी संख्या में मतदाता अपना वोट डालने नहीं जाते हैं। इस कारण मतदाताओं के बहुमत से निर्वाचित उम्मीदवार जनता का प्रतिनिधि नहीं होता है। अतः यह अपेक्षित है कि, सभी नागरिकों को मतदान में भाग लेना चाहिए।

(2) बाहुबल का प्रभाव :
कई बार कुछ प्रत्याशी हर तरीके से चुनाव में विजय हासिल करना चाहते हैं और वे चुनाव में अपराधियों की सहायता भी लेते हैं। हिंसा और शक्ति का प्रयोग कर लोगों को डरा-धमका कर वोट देने से रोकना, मतदान केन्द्र पर कब्जा करना, अवैध मत डलवाने का प्रयास करते हैं।

(3) सरकारी साधनों का दुरुपयोग :
चुनाव होने से पहले कुछ शासक दल. जनता को आकर्षित करने वाले वायदे करने लगते हैं, शासकीय कर्मचारियों/अधिकारियों की अपने हितों के अनुकूल पदस्थापना करते हैं तथा शासकीय धन और वाहनों व अन्य साधनों का दुरुपयोग करते हैं। इससे चुनावों की निष्पक्षता प्रभावित होती है।

(4) फर्जी मतदान :
यह भी हमारी चुनाव प्रणाली की बड़ी समस्या है। कुछ व्यक्ति दूसरे के नाम पर वोट डालने चले जाते हैं। एक से अधिक स्थान पर मतदाता सूची में नाम लिखना, नाम न होते हुए भी वोट देने जाना आदि फर्जी मतदान है।

(5) चुनाव में धन का प्रयोग :
चुनाव में बढ़ता खर्च एक बड़ी समस्या है। प्रत्येक चुनाव में व्यय की सीमा निर्धारित है, परन्तु चुनाव में भाग लेने वाले अनेक प्रत्याशी बहुत अधिक धन व्यय करते हैं। धन व बल के अभाव में कई बार कुछ अच्छे और ईमानदार व्यक्ति चुनाव लड़ने में असमर्थ होते हैं। चुनाव में धन का दुरुपयोग व्यक्ति की अनैतिक भूमिका को दर्शाता है, जो चुनाव व्यवस्था में सुधार की दृष्टि से गम्भीर समस्या है।

(6) निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या :
निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या कभी-कभी बहुत अधिक होती है इससे चुनाव प्रबन्ध में कठिनाई आती है। अधिक प्रत्याशियों के कारण मतदाता भी भ्रमित होता है।

(7) अन्य दोष :
वोट देने के लिए नागरिकों का मतदाता सूची में नाम होना आवश्यक है। प्रायः यह देखने में आता है कि अनेक लोगों के नाम मतदाता सूची से छूट जाते हैं। दूसरी ओर जिनकी मृत्यु हो गयी है या वे दूसरे स्थान पर चले गये हैं, तब भी उनके नाम मतदाता सूची में होते हैं। एक मतदान केन्द्र पर मतदाताओं की संख्या अधिक होने से भी कठिनाई आती है। एक प्रत्याशी कई बार दो या अधिक जगह पर चुनाव में खड़ा हो जाता है। दोनों स्थानों पर जीत होने की स्थिति में उसको एक स्थान को त्यागपत्र देना पड़ता है। जिसके कारण पुनः उपचुनाव होते हैं। इसमें शासकीय और प्रत्याशी के धन का अपव्यय होता है। ये सभी हमारी चुनाव प्रणाली के दोष हैं।

प्रश्न 6.
राजनीतिक दलों के कार्य और महत्त्व बताइए।
अथवा
राजनीतिक दलों के कार्य बताइए। (2008, 12)
अथवा
‘राजनीतिक दलों के कोई चार महत्त्व लिखिए। (2017)
उत्तर:
राजनीतिक दलों के कार्य-राजनीतिक दल अनेक कार्य करते हैं। इनमें प्रमुख कार्य निम्नलिखित :

  • जनमत तैयार करना :
    राजनीतिक दल देश की समस्याओं को स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखकर जनमत तैयार करते हैं। वे पत्र-पत्रिकाओं तथा सभाओं में इन समस्याओं को सरल ढंग से जनता के सामने रखते हैं और फिर इस लोकमत को तथा जनता की कठिनाइयों को संसद में रखते हैं।
  • मध्यस्थता :
    राजनीतिक दल जनता और सरकार के बीच मध्यस्थता का कार्य करते हैं। सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों को जनता के सामने तथा जनता की इच्छाओं को सरकार के सामने रखते हैं।
  • आलोचना :
    प्रजातन्त्रीय शासन में बहुमत प्राप्त दल अपनी सरकार बनाता है और अल्पमत दल विरोधी दल का कार्य करता है। विरोधी दलों की आलोचना के भय से सत्तारूढ़ दल गलत कार्य व नीतियाँ नहीं अपनाता।
  • राजनीतिक शिक्षा :
    राजनीतिक दल साधारण नागरिकों को राजनीतिक शिक्षा देने का कार्य भी करते हैं। चुनाव के दिनों में राजनीतिक दल प्रेस, रेडियो, टी. वी. व सभाओं के माध्यम से अपनी नीतियों व जनता के अधिकारों का वर्णन करते हैं। इससे नागरिकों को राजनीतिक शिक्षा मिलती हैं।
  • शासन पर अधिकार करना :
    राजनीतिक दलों का अन्तिम उद्देश्य शासन पर अधिकार करना होता है। वे प्रचार साधनों के द्वारा जनमत को अपने पक्ष में करते हैं और सत्ता पर अधिकार करने का प्रयास करते हैं।

राजनीतिक दलों का महत्त्व :
राजनैतिक दल आधुनिक लोकतन्त्रीय शासन प्रणाली की देन है। आधुनिक राजनैतिक जीवन में इनका निम्नलिखित महत्त्व है –

  • लोकमत के निर्माण में सहायक :
    राजनीतिक दल जनता को सार्वजनिक समस्याओं से परिचित कराते हैं तथा उनकी अच्छाइयों और बुराइयों की जानकारी देते हैं। इनसे जनता सार्वजनिक समस्याओं पर अपना मत बनाती है और इस प्रकार लोकमत का निर्माण होता है।
  • जनता में जागृति उत्पन्न करने में सहायक :
    राजनीतिक दलों के माध्यम से जनता को देश की आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक समस्याओं का ज्ञान होता है।
  • संसदीय सरकार के लिए अनिवार्य :
    संसदीय शासन-व्यवस्था में सरकार का निर्माण दलों के आधार पर होता है। संसद के निम्न सदन में जिस दल का बहुमत होता है, वह सरकार बनाता है।
  • लोकतन्त्र के लिए अनिवार्य :
    लोकतन्त्रात्मक प्रशासन में राजनीतिक दल अनिवार्य होता है। उनके बिना निर्वाचन की व्यवस्था करना कठिन है। दलों से ही सरकार बनती है और वही उस पर नियन्त्रण रखते हैं। उनके माध्यम से सरकार व जनता के बीच सम्पर्क स्थापित होता है और जनता की कठिनाइयों से सरकार अवगत होती है।
  • मतदान में सहायक :
    राजनीतिक दलों के सहयोग से नागरिकों को निर्वाचन के समय यह निर्णय लेने में कठिनाई नहीं होती कि उन्हें अपना मत किस उम्मीदवार को देना है। वह जिस दल के कार्यक्रम व नीति को पसन्द करता है, उसी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर देता है।
  • सरकार की निरंकुशता पर रोक :
    प्रजातन्त्र में बहुमत प्राप्त दलों की सरकार बनती है, इसलिए उसके निरंकुश बन जाने की सम्भावना रहती है। विरोधी दल उसकी स्वेच्छाचारिता पर रोक लगाकर उस पर नियन्त्रण रखते हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 13 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 13 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मतदज समाप्त होने के कितने घण्टे पूर्व चुनाव प्रचार बन्द कर दिया जाता है?
(i) 24 घण्टे
(ii) 36 घण्ट
(iii) 48 घण्टे
(iv) 72 घण्टे।
उत्तर:
(iii) 48 घण्टे

प्रश्न 2.
निर्वाचन आयुक्तों का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?
(2009)
(i) 3 वर्ष
(ii) 4 वर्ष
(iii) 5 वर्ष
(iv) 6 वर्ष।
उत्तर:
(iv) 6 वर्ष।

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रिक्त स्थान पूर्ति

  1. नागरिकों का प्रतिनिधि चुनने का अधिकार ……….. कहलाता है। (2008, 09, 14, 15)
  2. भारत के निर्वाचन आयोग का कार्यालय …………. में है। (2010)
  3. नागरिकों द्वारा अपने देश के प्रतिनिधि निर्वाचित करने की प्रक्रिया ………… कहलाती है।
  4. जन-जन की शासन में सहभागिता ही लोकतन्त्र की …………है।
  5. निर्वाचन आयुक्तों की नियक्ति …………. करता है। (2008)

उत्तर:

  1. मताधिकार
  2. नई दिल्ली
  3. निर्वाचन
  4. प्राण शक्ति
  5. राष्ट्रपति।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रधानमन्त्री करता है। (2008, 09)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 2.
निर्वाचन आयोग में 750 से अधिक दल पंजीकृत हैं। (2008)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
आम चुनाव की तिथियाँ चुनाव आयोग निर्धारित करता है। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
बहुमत प्राप्त न करने वाले दल विपक्षी दल कहलाते हैं। (2013)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
भारत के निर्वाचन आयोग का कार्यालय मुम्बई में है। (2009)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 6.
प्रत्येक व्यक्ति के मत को समान महत्त्व मिलता है। (2014)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 7.
हमारे देश में वे सभी स्त्री-पुरुष जिनकी उम्र 18 वर्ष है वोट डालने के अधिकारी है। (2016)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 8.
राजनीतिक दलों को मान्यता देने के लिए चुनाव आयोग बनाया गया है। (2018)
उत्तर:
सत्य

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 13 निर्वाचन - 1

उत्तर:

  1. → (ङ)
  2. → (ग)
  3. → (ख)
  4. → (क)
  5. → (घ)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
बहुमत प्राप्त न करने वाले राजनैतिक दल? (2011)
उत्तर:
विपक्षी दल

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प्रश्न 2.
निर्वाचन आयुक्तों का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है? (2009)
उत्तर:
6 वर्ष

प्रश्न 3.
नागरिकों द्वारा अपने प्रतिनिधि निर्वाचित करने की प्रक्रिया कहलाती हैं। (2009)
अथवा
लोकतांत्रिक देशों में जनता द्वारा एक निश्चित अवधि के लिए प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया को कहते हैं। (2016)
उत्तर:
निर्वाचन

प्रश्न 4.
हमारे देश में वोट डालने की निम्नतम आयु कितनी है?
उत्तर:
18 वर्ष

प्रश्न 5.
अपने निर्धारित समय पर होने वाला निर्वाचन। (2009)
उत्तर:
सामान्य निर्वाचन अथवा आम चुनाव

प्रश्न 6.
चुनाव के समय पार्टियों और उम्मीदवारों द्वारा माने जाने वाले कायदे-कानून और दिशा-निर्देश (2010)
उत्तर:
आचार संहिता

प्रश्न 7.
नागरिकों का प्रतिनिधि चुनने का अधिकार क्या कहलाता है? (2013)
उत्तर:
मताधिकार।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 13 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निर्वाचन से क्या आशय है? लिखिए।
उत्तर:
लोकतान्त्रिक राष्ट्रों में जनता द्वारा एक निश्चित अवधि के लिए प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया को निर्वाचन कहा जाता है।

प्रश्न 2.
मताधिकार किसे कहते हैं?
उत्तर:
नागरिकों का प्रतिनिधि चुनने का अधिकार, मताधिकार कहलाता है।

प्रश्न 3.
किन व्यक्तियों को मताधिकार से वंचित रखा जाता है?
उत्तर:
मानसिक रूप से विकलांग या पागल या ऐसे व्यक्ति जो न्यायालय द्वारा दिवालिया घोषित हैं या ऐसे व्यक्ति जो भारत देश के नागरिक नहीं हैं, मत देने के अधिकारी नहीं होते।

प्रश्न 4.
भारत के राजनीतिक दल कितने भागों में विभक्त हैं? उनके नाम लिखिए।
अथवा
भारत के सर्वाधिक सदस्य संख्या वाले चार राजनीतिक दलों के नाम लिखिए।
उत्तर:
भारत के राजनीतिक दल दो भागों में विभक्त हैं। इनमें कुछ राष्ट्रीय दल और शेष क्षेत्रीय दल हैं।
भारत के सर्वाधिक सदस्य संख्या वाले राजनीतिक दल हैं –

  1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  2. भारतीय जनता पार्टी
  3. समाजवादी पार्टी तथा
  4. भारतीय साम्यवादी दल।

प्रश्न 5.
‘आम चुनाव’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
आम चुनाव का आशय-हमारे देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर किये जाते हैं। इन चुनावों को आम चुनाव कहते हैं।

प्रश्न 6.
आम चुनाव की अधिघोषणा किसके द्वारा की जाती है?
उत्तर:
लोकसभा व राज्यसभा के लिए राष्ट्रपति तथा विधानसभाओं के लिए राज्यपाल मतदाताओं को चुनाव के बारे में सूचना देते हैं। इस अधिसूचना का प्रकाशन चुनाव आयोग से विचार-विमर्श करने के बाद सरकारी गजट में होता है।

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प्रश्न 7.
‘नामांकन-पत्र’ से क्या आशय है? समझाइए।
उत्तर:
चुनाव से पहले उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र दाखिल किये जाते हैं। कोई भी व्यक्ति जिसका नाम मतदाताओं की सूची में है और जो निश्चित योग्यताएँ रखता हो, चुनाव में खड़ा हो सकता है।

प्रश्न 8.
चुनाव में राजनीतिक दलों को चुनाव चिह्न क्यों आबंटित किये जाते हैं?
उत्तर:
चुनावों में अनेक राजनीतिक दल तथा निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ते हैं। उनकी पहचान के लिए तथा मतदान की सुविधा के लिए प्रत्येक प्रत्याशी तथा राजनीतिक दल को चुनाव आयोग चिह्न देता है।

प्रश्न 9.
निर्वाचन आयोग में कितने सदस्य होते हैं?
उत्तर:
निर्वाचन आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त तथा दो चुनाव आयुक्त होते हैं। इन दोनों चुनाव आयुक्तों को भी मुख्य चुनाव आयुक्त के समान अधिकार प्राप्त हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 13 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निर्वाचन से आप क्या समझते हैं? हमारे देश में इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
अथवा
हमारे देश में कौन-सी शासन प्रणाली है? इस प्रणाली में निर्वाचन की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
निर्वाचन से आशय एवं आवश्यकता-भारत में संसदीय शासन प्रणाली है। इस शासन प्रणाली में देश के निर्वाचित प्रतिनिधियों से सरकार बनाई जाती है। निर्वाचन के द्वारा नागरिकों की शासन में भागीदारी होती है। नागरिकों द्वारा अपने प्रतिनिधि निर्वाचित करने की प्रक्रिया निर्वाचन कहलाती है। निर्वाचन के द्वारा एक निश्चित समय के लिए जन-प्रतिनिधियों का चयन किया जाता है। हमारे राष्ट्र के नागरिक निर्वाचन में भाग लेकर अपने राजनीतिक अधिकार का प्रयोग करते हैं। भारत एक विशाल और बहुभाषी राष्ट्र है। हमारे यहाँ सभी नागरिकों को समान रूप से प्रतिनिधियों के चुनाव में भाग लेने का अधिकार है। मताधिकार की यह प्रणाली सार्वजनिक वयस्क मताधिकार प्रणाली कहलाती है। भारत में मतदान की गोपनीय प्रणाली को अपनाया गया है। भारत में स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न कराने के लिए, निर्वाचन आयोग का गठन किया गया है।

प्रश्न 2.
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार से क्या आशय है? (2009, 15)
उत्तर:
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार-नागरिकों का प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मताधिकार कहलाता है। यह अधिकार महत्त्वपूर्ण राजनीतिक अधिकार है। भारत के प्रत्येक वयस्क महिला व पुरुष को बिना किसी भेदभाव के मत देने का अधिकार सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार कहलाता है। इस प्रणाली में एक निर्धारित आयु पूरा करने के उपरान्त देश के सभी पात्र नागरिकों को वोट देने का अधिकार प्राप्त हो जाता है। हमारे देश में वे सभी स्त्री-पुरुष जिनकी आयु 18 वर्ष है, वोट डालने के अधिकारी हैं।

प्रश्न 3.
मताधिकार की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मताधिकार की विशेषताएँ :
मताधिकार की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं –

  1. देश के सभी नागरिकों की शासन में हिस्सेदारी होती है।
  2. प्रत्येक नागरिक के मत को समान महत्त्व मिलता है।
  3. जन प्रतिनिधियों का शान्तिपूर्वक परिवर्तन सम्भव है।
  4. नागरिकों को राजनीतिक शिक्षा मिलती है।
  5. नागरिकों में आत्म-सम्मान की भावना उत्पन्न होती है।
  6. यह प्रणाली समानता के सिद्धान्त के अनुकूल है।

प्रश्न 4.
राष्ट्रीय राजनीतिक दल किसे कहते हैं? लिखिए। (2011)
उत्तर:
राष्ट्रीय राजनीतिक दल वे हैं जिनका प्रभाव सम्पूर्ण देश में होता है। इसका आशय यह नहीं है कि उनकी लोकप्रियता सभी राज्यों में एक जैसी है। उनका प्रभाव और इनकी शक्ति विभिन्न राज्यों में अलग-अलग है। किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय दल की मान्यता प्राप्त होने के लिए निम्न शर्त में से कोई एक का होना अनिवार्य है-जो दल एक या एक से अधिक राज्यों में लोकसभा या विधानसभा के चुनावों में डाले गये मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे अथवा यदि कोई दल लोकसभा के सदस्यों का कम से कम 2 प्रतिशत स्थान प्राप्त करे और यह स्थान न्यूनतम तीन राज्यों में होना चाहिए।

प्रश्न 5.
राजनीतिक दल के चार कार्य लिखिए।
उत्तर:

  1. ये देश के हित में अनुकूल जनमत बनाते हैं।
  2. निर्वाचन में विजय प्राप्त करना और सरकार बनानो इनका प्रमुख कार्य है।
  3. ये सरकार और जनता के मध्य सेतु का कार्य करते हैं।
  4. शासक दल की निरंकुशता पर नियन्त्रण लगाने का प्रयास करते हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 13 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सर्वव्यापी वयस्क मताधिकार सिद्धान्त के गुण-दोष बताइए।
‘उत्तर:
गुण :

  1. चूँकि प्रजातन्त्र का आशय प्रत्येक व्यक्ति की शासन में सहभागिता है, तो यह वांछनीय है कि मताधिकार सर्वव्यापक हो। जन-जन की शासन में सहभागिता ही प्रजातन्त्र की प्राणशक्ति है।
  2. जिसका सम्बन्ध सबसे हो, ऐसे व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि बनाने में सबका हाथ होना चाहिए।
  3. मताधिकार समानता के सिद्धान्त के अनुरूप है, जो प्रजातन्त्र का मूलरूप है।
  4. जब तक मताधिकार सर्वव्यापी नहीं होगा तब तक यह आशा नहीं की जा सकती कि शासन का उद्देश्य सार्वजनिक हितों की प्राप्ति है।

दोष :

  1. यह कहा जाता है कि जनता के बड़े भाग को मताधिकार प्राप्त नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है।
  2. मैकाले व हेनरीसेन जैसे विचारकों का कथन है कि इसमें निरक्षर और नासमझ लोगों को भी मताधिकार प्राप्त हो जाता है।

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.4

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1.4

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से प्रत्येक का मान ज्ञात कीजिए
(a) (-30) ÷ 10
(b) 50 ÷ (-5)
(c) (-36) ÷ (-9)
(d) (-49) ÷ 49
(e) 13 ÷ [(-2)+1]
(f) 0 ÷ (-12)
(g) (-31) ÷ [(-30) + (-1)]
(h) [(-36) ÷ 12] ÷ 3 (i) [(-6)+5] ÷ [(-2) +1]
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1. 4

प्रश्न 2.
a, b और c के निम्नलिखित मानों में से प्रत्येक के लिए a ÷ (b + c) ≠ (a ÷ b) + (a ÷ c) को सत्यापित कीजिए :
(a) a = 12, b = -4, c = 2.
(b) a = -10, b = 1, c = 1.
हल:
(a) यहाँ a = 12, b = – 4, c = 2
L.H.S = a ÷ (b + c) = 12 ÷ [(-4) + 2]
= 12 ÷ (-2)= – 6
R.H.S. = a ÷ b + a ÷ c = 12 + (-4) + 12 ÷ 2
= (-3) + 6 = 3
∵ -6 ≠ 3
अतएव, a ÷ (b + c) ≠ (a ÷ b) + (a ÷ c)

(b) यहाँ a = -10, b = 1, c = 1
L.H.S. = a ÷ (b + c) = (- 10) ÷ (1 + 1)
= – 10 ÷ 2 = -5
R.H.S. = (a ÷ b) + (a ÷ c)
= [(-10) ÷ 1] + [(-10) ÷ 1]
= (-10) + (-10) = (-20)
∵ -5 ≠ – 20
∴ L.H.S. ≠ R.H.S.
अतएव, a ÷ (b + c) ≠ (a ÷ b) + (a ÷ c)

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प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
हल:
(a) 369 ÷ 1 = 369 [∵ a ÷ 1 = a]
(b) (-75) ÷ 75 = -1 [∵ (-a) ÷ a = – 1]
(c) (-206) ÷ (-206) = 1 [∵ (-a) ÷ (-a) = 1]
(d) – 87 ÷ (-1)= 87 [∵ (-a) ÷(-1) = a]
(e) (-87) ÷ 1 =-87 [∵ (-a) ÷ 1 = -a]
(f) (-48) ÷ 48 = – 1
(g) 20 ÷ (-10) = – 2
(h) (-12) ÷ 4 = -3

प्रश्न 4.
पाँच ऐसे पूर्णांक युग्म (a, b) लिखिए ताकि a ÷ b = – 3 हो। ऐसा एक युग्म (6, – 2) है। क्योंकि 6 ÷ (-2) = – 3 है।
हल:
(i) ∵ [(-3) ÷ 1] = -3 ÷ 1 = -3
a ÷ b = – 3 से तुलना करने पर, a = -3, b = 1
अतः अभीष्ट पूर्णांक युग्म = (-3, 1)

(ii) ∵ 9 ÷ (-3) = -3
a ÷ b = – 3 से तुलना करने पर, a = 9, b = – 3
अतः अभीष्ट पूर्णांक युग्म = (9, -3)

(iii) ∵ (-15) ÷ 5 = – 3
a ÷ b = -3 से तुलना करने पर, a = – 15, b = 5
अत: अभीष्ट पूर्णांक युग्म = (-15, 5)

(iv) ∵ 12 ÷ (-4) = -3
a ÷ b = – 3 से तुलना करने पर, a = 12, b = -4
अतः अभीष्ट पूर्णांक युग्म = (12, -4)

(v) ∵ (-21) ÷ 7 = -3
a ÷ b = – 3 से तुलना करने पर, a = – 21, b = 7
अत: अभीष्ट पूर्णांक युग्म = (-21, 7)

प्रश्न 5.
दोपहर 12 बजे तापमान शून्य से 10°C ऊपर था। यदि यह आधी रात तक 2°C प्रति घण्टे की दर से कम होता है, तो किस समय तापमान शून्य से 8°C नीचे होगा? आधी रात को तापमान क्या होगा?
हल:
दोपहर 12 बजे तापमान = 10°C
तापमान कम होने की दर = -2°C प्रति घण्टा
दोपहर 12 बजे से आधी रात तक का समय = 12
घण्टे 12 घण्टे में तापमान में परिवर्तन = 12 x (-2) °C
= – 24°C
अतः आधी रात को तापमान = + 10°C + (-24°C)
= -14°C
अब 10°C और -8°C के मध्य तापमान का अन्तर = 10°C – (-8°C) = 18°C
∴ तापमान 0°C से 8°C नीचे तक जाने में लगा समय
= कुल कमी/1 घण्टे में तापमान में अन्तर = 18/2 = 9 घण्टे
उत्तर अतः 18°C तापमान में अन्तर दोपहर 12 बजे से 9 घण्टे में होगा।
अतः दोपहर 12 बजे के बाद 9 घण्टे = रात्रि 9 बजे
अतएव, 9 बजे रात्रि को तापमान शून्य से 8°C नीचे होगा।

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प्रश्न 6.
एक कक्षा टेस्ट में प्रत्येक सही उत्तर के लिए (+ 3) अंक दिए जाते हैं और प्रत्येक गलत उत्तर के लिए (-2) अंक दिए जाते हैं। और किसी प्रश्न को हल करने का प्रयत्न नहीं करने पर कोई अंक नहीं दिया जाता है।
(i) राधिका ने 20 अंक प्राप्त किए। यदि उसके 12 उत्तर सही पाए जाते हैं, तो उसने कितने प्रश्नों का उत्तर गलत दिया है ?
(ii) मोहिनी टेस्ट में (-5) अंक प्राप्त करती है, जबकि उसके 7 उत्तर सही पाए जाते हैं। उसने कितने प्रश्नों का उत्तर गलत दिया है ?
हल:
प्रत्येक सही उत्तर के लिए अंक = +3
प्रत्येक गलत उत्तर के लिए अंक = – 2
(i) राधिका द्वारा प्राप्त कुल अंक = 20
सही उत्तर के लिए प्राप्त अंक = 12 x 3 = 36
∴ गलत उत्तर के लिए प्राप्त अंक = 20 – 36 = – 16
∴ गलत उत्तरों की संख्या = (-16) ÷ (-2)
अतः राधिका ने 8 प्रश्नों के उत्तर गलत दिए।

(ii) मोहिनी द्वारा प्राप्त अंक = -5
7 सही उत्तरों के लिए प्राप्त अंक = 7 x 3 = 21
∴ गलत उत्तरों के लिए प्राप्त अंक =-5-21 = -26
∴ गलत उत्तरों की संख्या = (-26) (-2) = 13
अतः मोहिनी ने 13 प्रश्नों का उत्तर गलत दिया है।

प्रश्न 7.
एक उत्थापक किसी खान कूपक में 6 m प्रति मिनट की दर से नीचे जाता है। यदि नीचे जाना भूमि तल से 10 मीटर ऊपर से शुरू होता है, तो – 350 m पहुँचने में कितना समय लगेगा?
हल:
उत्थापक की वर्तमान स्थिति भूमि तल से 10 मीटर ऊपर है।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 1 पूर्णांक Ex 1. 4
अतः उत्थापक को नीचे पहुँचने में 60 मिनट (या एक घण्टा) लगेंगे।

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 17 भारत में उद्योगों की स्थिति

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 17 भारत में उद्योगों की स्थिति

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
लघु औद्योगिक इकाइयों की अधिकतम विनियोग सीमा है
(i) 1 करोड़ रुपये
(ii) 5 करोड़ रुपये
(iii) 3 करोड़ रुपये
(iv) 7 करोड़ रुपये।
उत्तर:
(ii) 5 करोड़ रुपये

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प्रश्न 2.
विश्व में कुल जूट उत्पादन का भारत में पैदा होता है
(i) 25 प्रतिशत
(ii) 10 प्रतिशत
(iii) 50 प्रतिशत
(iv) 35 प्रतिशत।
उत्तर:
(iii) 50 प्रतिशत

प्रश्न 3.
इनमें से किसका सम्बन्ध सूचना प्रौद्योगिकी से है?
(i) मोटर कार
(ii) सुन्दर कपड़े
(iii) कम्प्यू टर
(iv) सोना चाँदी।
उत्तर:
(iii) कम्प्यू टर

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में काँच निर्मित वस्तुओं का निर्यात किन देशों में किया जाता है?
उत्तर:
भारत में निर्मित काँच से बनी वस्तुओं का निर्यात पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान, कुवैत, ईरान, इराक, सऊदी अरब, म्यांमार व मलेशिया आदि देशों में किया जाता है।

प्रश्न 2.
भारत में असली रेशम उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र कौन से हैं?
उत्तर:

  1. कश्मीर घाटी
  2. पूर्वी कर्नाटक व तमिलनाडु के पठारी व पहाड़ी क्षेत्र
  3. पश्चिमी बंगाल का हुगली क्षेत्र
  4. असम का पर्वतीय भू-भाग।

प्रश्न 3.
भारत में उत्पादित लाख के.प्रमुख ग्राहक देश कौन से हैं?
उत्तर:
भारत की लाख के प्रमुख ग्राहक चीन, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन हैं। इसके अलावा जर्मनी, ब्राजील, इटली, फ्रांस तथा जापान हैं।

प्रश्न 4.
कृषि आधारित उद्योग कौन से हैं? (2008, 13)
उत्तर:
वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग, कागज उद्योग, पटसन उद्योग, वनस्पति उद्योग कृषि पर आधारित उद्योग हैं।

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प्रश्न 5.
देश में स्थापित सीमेण्ट कारखानों की उत्पादन क्षमता कितनी है?
उत्तर:
वर्तमान में देश में 190 बड़े सीमेण्ट कारखाने हैं जिनकी उत्पादन क्षमता 324.5 मिलियन टन है। इसके अलावा देश में 360 लघु सीमेण्ट कारखाने हैं जिनकी उत्पादन क्षमता 11.10 मिलियन टन है।

प्रश्न 6.
भारत में रेशम उत्पादन की दृष्टि से कौन से राज्य महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
भारत में असली रेशम उत्पादन के चार प्रमुख क्षेत्र हैं-

  1. कश्मीर घाटी
  2. पूर्वी कर्नाटक व तमिलनाडु के पठारी व पहाड़ी क्षेत्र
  3. पश्चिमी बंगाल का हुगली क्षेत्र
  4. असम का पर्वतीय भू-भाग।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में विभिन्न उद्योगों को किन-किन आधारों पर वर्गीकृत किया गया है? समझाइए।
उत्तर:
उद्योगों को हम उनके स्वामित्व, उपयोगिता, आकार, माल की प्रकृति एवं कच्चे माल की उपलब्धता के आधार पर विभिन्न भागों में बाँट सकते हैं। जैसा कि नीचे दिये गये चार्ट से स्पष्ट है –
उद्योगों का वर्गीकरण
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 17 भारत में उद्योगों की स्थिति - 1
प्रश्न 2.
भारत के प्रमुख कुटीर उद्योगों की स्थिति का विवरण दीजिए। (2009, 14)
उत्तर:
भारत के प्रमुख कुटीर उद्योग
रेशम उद्योग :
रेशम एक कृषि आधारित उद्योग है और भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह एक उपयुक्त उद्योग है। यह गाँव एवं श्रम आधारित उद्योग है, जो न्यूनतम निवेश पर अधिकतम लाभ की वापसी देता है। विश्व में भारत दूसरा बड़ा रेशम उत्पादक है और विश्व के कुल कच्चे रेशम उत्पादन का 18 प्रतिशत पूरा करता है। इस उद्योग में 78.50 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है, जिसमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। इस उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए सन् 1949 में केन्द्रीय रेशम बोर्ड की स्थापना की गई।

लाख उद्योग :
भारत लाख का प्रमुख उत्पादक राष्ट्र है। सन् 1950 से पहले केवल भारत में ही लाख साफ की जाती थी, परन्तु अब थाईलैण्ड में भी यह काम होता है। इसका भारत के लाख उद्योग पर प्रभाव पड़ा है। पहले विश्व की 85 प्रतिशत लाख भारत में तैयार होती थी, जो वर्तमान में घटकर 50 प्रतिशत रह गई है। भारत में लाख का सबसे अधिक उत्पादन छोटा नागपुर पठार में होता है। यहाँ देश का 50 प्रतिशत उत्पादन होता है। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उड़ीसा, गुजरात व उत्तर प्रदेश का मिर्जापुर जिला लाख के प्रमुख उत्पादक केन्द्र हैं। इस उद्योग से लगभग 10,000 लोगों को रोजगार प्राप्त है।

काँच उद्योग :
कुटीर उद्योग के रूप में यह उद्योग प्रमुख रूप से फिरोजाबाद व बेलगाँव में केन्द्रित हैं। फिरोजाबाद में काँच के 225 से भी अधिक छोटे-बड़े कारखाने हैं काँच की विभिन्न प्रकार की चूड़ियाँ बनाई जाती हैं। एटा, शिकोहाबाद, फतेहाबाद व हाथरस में भी यह उद्योग कुटीर उद्योग के रूप में संचालित हैं।

प्रश्न 3.
भारत में चर्म उद्योग में किन वस्तुओं का निर्माण होता है?
उत्तर:
यह एक पारम्परिक उद्योग है। चमड़े से कई प्रकार की वस्तुएँ; जैसे-कोट, जर्सी, पर्स, बटुए, थैले, खेल का सामान, खिलौने, कनटोपं, बेल्ट, दस्ताने, जूते व चप्पल आदि बनाये जाते हैं। देश में चमड़े की वस्तुओं का सर्वाधिक उत्पादन तमिलनाडु, कोलकाता, कानपुर, मुम्बई, औरंगाबाद, कोल्हापुर, देवास, जालंधर और आगरा में होता है। चमड़े की वस्तुओं के उत्पादन का 75 प्रतिशत भाग लघु और कुटीर उद्योगों द्वारा उत्पादित किया जाता है।

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प्रश्न 4.
भारत में कागज उद्योग की स्थिति समझाइए।
उत्तर:
कागज उद्योग-भारत में कुटीर उद्योग के अन्तर्गत कागज-निर्माण का इतिहास पुराना है। भारत में आधुनिक ढंग की पहली कागज मिल बालीगंज (कोलकाता) में 1870 में स्थापित की गयी। देश में पहला अखबारी कागज उद्योग मध्य प्रदेश के नेपानगर में 1947 में स्थापित किया गया था। कागज बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में लकड़ी की लुग्दी, घास, बाँस, कपड़े व चिथड़े, जूट आदि का प्रयोग होता है। भारत के कागज उद्योग को विश्व के 20 बड़े कागज उद्योगों में से गिना जाता है। यहाँ 16,000 करोड़ रुपये का उत्पादन होता है, प्रत्यक्ष रूप से 3 लाख और परोक्ष रूप से 10 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। भारत में प्रति व्यक्ति कागज की खपत सिर्फ 7-2 किलोग्राम है जोकि विश्व औसत (50 किग्रा) से बहुत कम है।

भारत में कागज के प्रमुख उत्पादक राज्य आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा केरल हैं।

प्रश्न 5.
भारत में काँच उद्योग पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
काँच उद्योग-काँच उद्योग भारत का प्राचीन उद्योग है, किन्तु भारत में विकसित काँच उद्योग की शुरूआत द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् ही सम्भव हो सकी। वर्तमान में इस उद्योग में आधुनिक एवं नवीनतम तकनीकों से काँच का उत्पादन किया जा रहा है। देश में इस समय काँच के 56 बड़े कारखानों में से 15 ऐसे आधुनिक कारखाने हैं, जो उत्तम किस्म के काँच के सामान का निर्माण पूर्णतः मशीनों द्वारा करते हैं।

आधुनिक उद्योग के रूप में यह उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिमी बंगाल, पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु व ओडिशा में केन्द्रित हैं। देश में काँच बनाने के सबसे अधिक कारखाने पश्चिम बंगाल में हैं। कुटीर उद्योग के रूप में यह उद्योग प्रमुख रूप से फिरोजाबाद व बेलगाँव में केन्द्रित है।

प्रश्न 6.
सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग भारत का सबसे तेज बढ़ता हुआ उद्योग है। समझाइए। (2008, 09, 13, 14)
उत्तर:
सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग :
सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग से आशय उस उद्योग से है, जिसमें कम्प्यूटर और उसके सहायक उपकरणों की सहायता से ज्ञान का प्रसार किया जाता है। इसके अन्तर्गत कम्प्यूटर, संचार, प्रौद्योगिकी और सम्बन्धित सॉफ्टवेयर को शामिल किया जाता है। इसके अन्तर्गत उस सम्पूर्ण व्यवस्था को शामिल किया जाता है, जिसके द्वारा संचार माध्यम और उपकरणों की सहायता से सूचना पहुँचाई जाती है। यह ज्ञान आधारित उद्योग है। वर्ष 2000-01 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 33,138 करोड़ रुपये था जो 2008-09 में बढ़कर 2,35,300 करोड़ रुपये पहुँच गया। भारत में सकल घरेलू उत्पाद में उद्योग का योगदान वर्ष 1999-2000 में 1.2 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2013 में 8 प्रतिशत हो गया है। इससे ज्ञात होता है कि यह उद्योग भारत का सबसे तेज गति से बढ़ता हुआ उद्योग है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में वृहद् उद्योगों की स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में वृहद् उद्योग
सूती वस्त्र उद्योग :
भारत में सूती वस्त्रों की अत्यन्त पुरानी परम्परा है। देश की प्रथम सूती कपड़ा मिल सन् 1818 में कोलकाता में स्थापित की गई थी। देश की सूती कपड़ा मिलें मुख्य रूप से महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात में हैं। यह उद्योग भारत का सबसे बड़ा एवं व्यापक उद्योग है। देश के औद्योगिक उत्पादन में इसका योगदान 14 प्रतिशत है, जबकि देश के कुल निर्यात आय में इसका हिस्सा 19 प्रतिशत है। आयात में इसका हिस्सा 3 प्रतिशत है। यह उद्योग लगभग 9 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर रहा है। इस उद्योग में लगभग 5,000 करोड़ रुपये की पूँजी लगी है। सरकार ने कपड़ा आदेश (विकास एवं विनिमय)1993 के माध्यम से कपड़ा उद्योग को लाइसेन्स मुक्त कर दिया।

लोहा तथा इस्पात उद्योग :
लोहा-इस्पात उद्योग देश का एक आधारभूत उद्योग है। विनियोग की दृष्टि से यह संगठित क्षेत्र के सबसे महत्त्वपूर्ण एवं विशालतम उद्योगों में से एक है।

भारत में यह उद्योग अति प्राचीन है लेकिन आधुनिक तरीके से लोहे का उत्पादन 1875 में आरम्भ हुआ, जब बंगाल आयरन वर्क्स कम्पनी ने कुल्टी (पश्चिम बंगाल) में अपने संयन्त्र की स्थापना की। परन्तु बड़े पैमाने पर उत्पादन 1907 में जमशेदपुर में टाटा आयरन इण्डस्ट्रीज कम्पनी (टिस्को) की स्थापना के साथ आरम्भ हुआ। भारत में कुल 10 कारखाने हैं जिसमें से 9 सार्वजनिक क्षेत्र में एवं केवल एक निजी क्षेत्र (टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी, जमशेदपुर, पश्चिमी बंगाल) में है। सार्वजनिक क्षेत्र के कारखाने भिलाई, दुर्गापुर, राउरकेला, बोकारो, विशाखापट्टनम् एवं सलेम में है।

इस समय देश में 196 लघु इस्पात संयन्त्र हैं। इनमें से 179 इकाइयाँ चालू हैं तथा शेष बन्द हैं। वर्तमान में इस उद्योग में 90,000 करोड़ रुपये की पूँजी लगी है तथा इसमें 5 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त है।

जूट उद्योग :
वर्ष 1859 में कलकत्ता के निकट पहली जूट मिल स्थापित हुई थी। इस उद्योग में करीब – 4 लाख श्रमिकों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है। भारत की 90% जूट मिलें पश्चिम बंगाल में कोलकाता के समीप हुगली नदी के किनारे स्थित हैं। इस राज्य की जलवायु तथा उपजाऊ भूमि जूट-उत्पादन के अनुकूल है। देश में 83 पटसन मिलें हैं जिनमें से 6 कपड़ा मन्त्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम राष्ट्रीय पटसन उत्पाद निगम की हैं। पटसन उत्पादनों का वार्षिक निर्यात 1400-1500 करोड़ रुपये के बीच है। घरेलू खपत और निर्यात का अनुपात 80 : 20 हैं।

चीनी उद्योग :
चीनी उद्योग के विकास का प्रारम्भ 1903 से होता है और 1931 में भारत में चीनी बनाने के 29 कारखाने स्थापित हो गये थे 1950-51 में इनकी संख्या बढ़कर 139 हो गयी थी 1995 में भारत में 435 कारखाने थे जिनकी स्थापना मुख्यतः गन्ना उत्पादक क्षेत्रों या उसके समीपवर्ती क्षेत्रों में ही की गयी थी। चूंकि गन्ना शीघ्र ही सूख जाता है, इसलिए इसको शीघ्रता से कारखानों तक पहुंचाने एक अनिवार्यता होती है।

सीमेण्ट उद्योग :
भारत में संगठित रूप से समुद्री सीपियों से सीमेण्ट तैयार करने का प्रथम कारखाना सन् 1904 में मद्रास में स्थापित किया गया था, लेकिन वह असफल हो गया। इसके पश्चात् 1913 में टाटा एण्ड सन्स कम्पनी के निर्देशन में पोरबन्दर (गुजरात) में इण्डियन सीमेण्ट कम्पनी लिमिटेड की स्थापना की गयी जिसकी सफलता से प्रेरित होकर सन् 1914 तक देश में 5 सीमेण्ट कारखाने स्थापित किये गये, जिनका कुल उत्पादन 76 हजार टन वार्षिक था।

वर्तमान स्थिति-वर्तमान में 190 बड़े सीमेण्ट संयन्त्र हैं, जिनकी संस्थापित क्षमता करीब 324.5 मिलियन टन है। इसके अलावा देश में करीब 360 लघु सीमेण्ट संयन्त्र भी हैं जिनकी अनुमानित क्षमता 11-10 मिलियन टन है। वर्तमान समय में सीमेण्ट उद्योग में 800 करोड़ रुपये से भी अधिक पूँजी विनियोजित है तथा तीन लाख लोगों को रोजगार प्राप्त है। मार्च 1989 से सीमेण्ट उद्योग को मूल्य तथा विक्रय से नियन्त्रण मुक्त करने और उदार नीतियाँ अपनाये जाने के कारण इसमें उत्पादन वृद्धि के साथ-साथ तकनीक क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग :
सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग से आशय उस उद्योग से है, जिसमें कम्प्यूटर और उसके सहायक उपकरणों की सहायता से ज्ञान का प्रसार किया जाता है। इसके अन्तर्गत कम्प्यूटर, संचार, प्रौद्योगिकी और सम्बन्धित सॉफ्टवेयर को शामिल किया जाता है। इसके अन्तर्गत उस सम्पूर्ण व्यवस्था को शामिल किया जाता है, जिसके द्वारा संचार माध्यम और उपकरणों की सहायता से सूचना पहुँचाई जाती है। यह ज्ञान आधारित उद्योग है। वर्ष 2000-01 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 33,138 करोड़ रुपये था जो 2008-09 में बढ़कर 2,35,300 करोड़ रुपये पहुँच गया। भारत में सकल घरेलू उत्पाद में उद्योग का योगदान वर्ष 1999-2000 में 1.2 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2013 में 8 प्रतिशत हो गया है। इससे ज्ञात होता है कि यह उद्योग भारत का सबसे तेज गति से बढ़ता हुआ उद्योग है।

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प्रश्न 2.
लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा क्या-क्या प्रयास किये गये हैं? लिखिए। (2008)
उत्तर:
लघु उद्योगों के विकास के लिए किये गये सरकारी प्रयास
(1) निगमों एवं मण्डलों की स्थापना केन्द्रीय सरकार ने विभिन्न निगमों एवं मण्डलों की स्थापना की है। इनसे कुटीर व लघु उद्योगों के विकास को बहुत प्रोत्साहन मिला है। इनमें –

  • अखिल भारतीय कुटीर उद्योग मण्डल, 1948
  • केन्द्रीय सिल्क बोर्ड 1950
  • अखिल भारतीय हस्तकला बोर्ड 1952
  • अखिल भारतीय हथकरघा बोर्ड, 1952
  • अखिल भारतीय खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, 1953
  • लघु उद्योग मण्डल, 1954
  • नारियल-जूट मण्डल, 1954
  • राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम, 1955, तथा
  • भारतीय दस्तकारी विकास निगम, 1958 आदि प्रमुख हैं। ये अखिल भारतीय संस्थाएँ अपने-अपने क्षेत्रों में उद्योगों के विकास हेतु राज्य सरकारों एवं उद्योग संगठनों के सहयोग से तकनीकी शिक्षा, विपणन सुविधाओं तथा वस्तुओं के प्रमापीकरण की व्यवस्था कर रही है।

(2) वित्तीय सहायता :
लघु कुटीर उद्योगों को पूँजी तथा अन्य आर्थिक सहायता प्रदान करने के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार द्वारा जिन साधनों से लघु एवं कुटीर उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान कराई गई है, वे निम्न हैं –

  • स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया द्वारा ऋण योजना चालू करना।
  • रिजर्व बैंक द्वारा गारण्टी की योजना चालू करना।
  • राज्य वित्त निगमों द्वारा ऋण प्रदान करना।
  • राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा किराया क्रय पद्धति के आधार पर यन्त्रों के खरीदने की सुविधाएँ प्रदान किया जाना।
  • सहकारी बैंकों और अनुसूचित बैंकों द्वारा ऋण की सहायता प्रदान करना।
  • राज्य सरकारों द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान करना।

(3) व्यापक सहायता कार्यक्रम :
भारत सरकार ने छोटे उद्यमियों की सहायतार्थ हेतु एक व्यापक सहायता कार्यक्रम बनाया है। लघु उद्योग विकास संगठन (SIDO) के अन्तर्गत लघु उद्योग सेवा संस्थान, शाखा संस्थान एवं विस्तार केन्द्र हैं, जिनके द्वारा आर्थिक, तकनीकी व प्रबन्धकीय सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। राज्यों के उद्योग निदेशालय भूमि या फैक्ट्री शेड आबंटित करते हैं तथा इनके लिए कच्चा माल तथा पूँजी उपलब्ध कराने में सहायता देते हैं।

(4) सरकार द्वारा क्रय में प्राथमिकता :
सरकार ने स्वयं भी लघु उद्योगों से अधिक मात्रा में वस्तुएँ क्रय करके उनके विकास में सहायता दी है। सरकार कुछ वस्तुओं का क्रय पूर्ण रूप से लघु उद्योगों से करती है।

(5) दुर्लभ कच्चे माल का आबंटन :
सरकार दुर्लभ देशी तथा विदेशी कच्चे माल के आबंटन में लघु उद्योगों के हितों का विशेष ध्यान रखती है और उन्हें प्राथमिकता देती है। 1991 की नई आयात नीति में सरकार द्वारा लघु इकाइयों को आयात लाइसेंस देने में अधिक उदारता बरती गई थी। अब इन्हें 5 लाख रुपये तक के आयात के लाइसेंस स्वतन्त्र विदेशी मुद्रा से प्राप्त हो सकेंगे।

(6) सम्मिलित उत्पादन कार्यक्रम :
सरकार ने बड़े तथा लघु एवं कुटीर उद्योगों के लिए एक सम्मिलित उत्पादन कार्यक्रम की योजना बनाई है। इस योजना के अनुसार लघु उद्योगों का उत्पादन क्षेत्र सीमित रखा गया है। बड़े उद्योगों की उत्पादन क्षमता में विस्तार पर रोक लगाने की व्यवस्था है। बड़े उद्योगों पर उत्पादन कर लगाया जाता है जबकि, लघु व कुटीर उद्योगों के उत्पादन को कर-मुक्त रखा गया है। बड़े उद्योगों से प्राप्त उत्पादन कर को लघु व कुटीर उद्योगों के विकास पर खर्च किया जाता है तथा अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण में आदान-प्रदान का समन्वय स्थापित किया जाता है।

(7) विपणन सम्बन्धी सुविधाएँ :
केन्द्र सरकार ने एक केन्द्रीय कुटीर उद्योग एम्पोरियम की स्थापना की है जो देश-विदेश में कुटीर उद्योगों द्वारा निर्मित वस्तुओं के विक्रय की व्यवस्था करता है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, असम, जम्मू कश्मीर तथा तमिलनाडु आदि राज्यों में भी कुटीर उद्योग एम्पोरियम स्थापित किये गये हैं। औद्योगिक सहकारी संस्थाओं द्वारा निर्यात एवं थोक बाजार में इसकी विक्रय व्यवस्था करने के लिए सन् 1966 में औद्योगिक सहकारी संस्थाओं का महासंघ स्थापित किया गया था।

(8) तकनीकी सहायता :
लघु उद्योगों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए केन्द्रीय सरकार ने केन्द्रीय लघु उद्योग संगठन के अधीन एक औद्योगिक विस्तार सेवा प्रारम्भ की है। इस योजना के अन्तर्गत 28 लघु उद्योगशालाएँ, 31 प्रादेशिक सेवाशालाएँ और 37 प्रसार उत्पादन प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये गये हैं। लघु उद्योगों को तकनीकी परामर्श देने के लिए विदेशी विशेषज्ञ बुलाये जाते हैं तथा फोर्ड फाउण्डेशन ऑफ इण्डिया की सहायता से भारतीय विशेषज्ञ प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजे जाते हैं।

(9) औद्योगिक बस्तियों का निर्माण :
लघु उद्योगों के विकास हेतु देश के विभिन्न भागों में औद्योगिक बस्तियाँ स्थापित की गयी हैं। इसके लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा राज्य सरकारों को ऋण दिया जाता है। इनका प्रमुख उद्देश्य उद्योगों को शहरी क्षेत्रों से हटाकर उचित स्थान पर ले जाना है।

(10) जिला उद्योग केन्द्र :
इन केन्द्रों की स्थापना मई, 1978 में प्रारम्भ की गयी। इनकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण तथा अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैले छोटे और अत्यन्त छोटे ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तर पर एक केन्द्र स्थापना करना है। इसका एक अन्य उद्देश्य पूँजी निवेश के दौरान तथा पूँजी निवेश के पश्चात् जहाँ तक सम्भव हो सभी अनिवार्य सेवाएँ और सहयोग जिला स्तर पर भी उपलब्ध कराना है। इस कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों में ऐसे उद्योगों की स्थापना पर अधिक जोर दिया जाता है जिनसे इन इलाकों में रोजगार के ज्यादा अवसर उपलब्ध कराये जा सकें।

प्रश्न 3.
लघु एवं कुटीर उद्योगों का महत्त्व लिखिए। (2009)
अथवा
भारतीय अर्थव्यवस्था में लघु उद्योगों का महत्त्व लिखिए। (2017)
उत्तर:
भारतीय अर्थव्यवस्था में कुटीर एवं लघु उद्योगों का महत्त्व :
महात्मा गाँधी के अनुसार, “भारत का कल्याण उसके कुटीर उद्योगों में निहित है।” भारतीय योजना आयोग के अनुसार, “लघु एवं कुटीर उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था के महत्त्वपूर्ण अंग हैं जिनकी कभी उपेक्षा नहीं की जा सकती।” भारतीय अर्थव्यवस्था में लघु एवं कुटीर उद्योगों का महत्त्व निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट किया जा सकता है-

  • रोजगार का सृजन :
    इन उद्योगों का सबसे महत्त्वपूर्ण लाभ यह है कि इनसे रोजगार के अधिक अवसर विकसित होते हैं, क्योंकि इन उद्योगों में प्रायः श्रम प्रधान तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इन उद्योगों में कम पूँजी लगाकर अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं।
  • कलात्मक वस्तुओं का निर्माण :
    कुटीर उद्योगों में अधिकांश कार्य हाथों द्वारा किया जाता है जो कलात्मक वस्तुओं को सम्भव बनाते हैं; जैसे-ऊनी, रेशमी वस्त्रों पर कढ़ाई, कालीन व गलीचों का निर्माण, हाथी दाँत का सामान आदि ऐसे कुटीर उद्योग हैं जिनसे काफी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित की जाती है। इस प्रकार का उत्पादन वृहत् उद्योगों में सम्भव नहीं है।
  • शीघ्र उत्पादक उद्योग :
    लघु एवं कुटीर उद्योग शीघ्र उत्पादक उद्योग होते हैं आशय यह है कि इन उद्योगों में विनियोग करने और उत्पादन आरम्भ होने में अधिक समयान्तर नहीं होता।
  • आयातों में कमी :
    लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास प्रायः श्रम प्रधान तकनीक के आधार पर किया जाता है। इस कारण इन उद्योगों के विकास के लिए आयातों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है और राष्ट्र के मूल्यवान विदेशी विनिमय-भण्डारों की बचत होती है।
  • उद्योगों का विकेन्द्रीकरण :
    इन उद्योगों से देश में उद्योगों के विकेन्द्रीकरण में सहायता मिलती है। बड़े उद्योग कुछ विशेष कारणों से एक ही स्थान पर केन्द्रित हो जाते हैं, लेकिन लघु एवं कुटीर उद्योगों को गाँवों और छोटे कस्बों में भी स्थापित किया जा सकता है।
  • कम पूँजी व अधिक श्रम की स्थिति में उपयुक्त :
    भारत में पूँजी का अभाव है जबकि श्रम शक्ति का बाहुल्य है। चूँकि कुटीर उद्योग में कम पूँजी से ही काम चल जाता है और अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध हो जाता है, इसलिए भारत में कुटीर उद्योगों का विकास किया जाए तो स्त्री-श्रम का भी उपयोग हो सकेगा तथा देश की सम्पत्ति में भी वृद्धि होगी।
  • कृषकों के खाली समय का सदुपयोग :
    देश में कृषि द्वारा केवल विशेष मौसम के लिए रोजगार मिल पाता है। वर्ष में 3-4 महीने तक कृषक लोग बेकार बैठे रहते हैं। यदि कुटीर एवं लघु उद्योगों का विकास हो जाए तो इससे न केवल कृषकों के खाली समय का सदुपयोग होगा वरन् उनकी आय में वृद्धि होगी।।
  • सरल कार्य-प्रणाली :
    कुटीर उद्योगों की स्थापना तथा कार्य-प्रणाली बहुत ही सरल होती है। इनके लिए उच्च कोटि के तकनीकी विशेषज्ञों, प्रबन्धकों, विशाल भवन, विशेष प्रशिक्षण तथा विस्तृत हिसाब-किताब की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
  • बड़े पैमाने के उद्योगों के पूरक :
    लघु एवं कुटीर उद्योग बड़े पैमाने के उद्योगों को कच्ची सामग्री एवं अर्द्ध-निर्मित माल उपलब्ध कराते हैं। इस प्रकार इन उद्योगों का विकास बड़े पैमाने के उद्योगों के विकास .. के लिए भी आवश्यक है।
  • निर्यात व्यापार में महत्त्व :
    विगत वर्षों में हथकरघा वस्त्र, हाथी दाँत की वस्तुएँ, ताँबे व पीतल की कलात्मक बर्तन, दरियाँ, कालीन तथा गलीचे, चमड़े के जूते, सिलाई की मशीनें, बिजली के पंखे, साइकिलें आदि कुटीर व लघु उद्योगों द्वारा उत्पादित माल के निर्यात में काफी वृद्धि हुई है। वर्ष 2005-06 में इन उद्योगों का निर्यात में योगदान 1,50,242 करोड़ रुपये रहा है।
  • आर्थिक विकास में योगदान :
    लघु उद्यम क्षेत्र का देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान है। औद्योगिक उत्पादन में 39 प्रतिशत से अधिक और राष्ट्रीय निर्यात से 33 प्रतिशत से अधिक योगदान करके इस क्षेत्र ने राष्ट्र के आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण भागीदारी निभाई है। अनुमान है कि इस क्षेत्र में 3 करोड़ 10 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

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प्रश्न 4.
टिप्पणी लिखिए

  1. चमड़ा उद्योग
  2. लोहा इस्पात उद्योग(2009)
  3. सूती वस्त्र उद्योग, (2008, 09)
  4. सूचना एवं प्रौद्योगिकी।

उत्तर:
1. चमड़ा उद्योग :
यह एक पारम्परिक उद्योग है। चमड़े से कई प्रकार की वस्तुएँ; जैसे-कोट, जर्सी, पर्स, बटुए, थैले, खेल का सामान, खिलौने, कनटोपं, बेल्ट, दस्ताने, जूते व चप्पल आदि बनाये जाते हैं। देश में चमड़े की वस्तुओं का सर्वाधिक उत्पादन तमिलनाडु, कोलकाता, कानपुर, मुम्बई, औरंगाबाद, कोल्हापुर, देवास, जालंधर और आगरा में होता है। चमड़े की वस्तुओं के उत्पादन का 75 प्रतिशत भाग लघु और कुटीर उद्योगों द्वारा उत्पादित किया जाता है।

2. लोहा तथा इस्पात उद्योग एवं :
लोहा-इस्पात उद्योग देश का एक आधारभूत उद्योग है। विनियोग की दृष्टि से यह संगठित क्षेत्र के सबसे महत्त्वपूर्ण एवं विशालतम उद्योगों में से एक है।
भारत में यह उद्योग अति प्राचीन है लेकिन आधुनिक तरीके से लोहे का उत्पादन 1875 में आरम्भ हुआ, जब बंगाल आयरन वर्क्स कम्पनी ने कुल्टी (पश्चिम बंगाल) में अपने संयन्त्र की स्थापना की। परन्तु बड़े पैमाने पर उत्पादन 1907 में जमशेदपुर में टाटा आयरन इण्डस्ट्रीज कम्पनी (टिस्को) की स्थापना के साथ आरम्भ हुआ। भारत में कुल 10 कारखाने हैं जिसमें से 9 सार्वजनिक क्षेत्र में एवं केवल एक निजी क्षेत्र (टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी, जमशेदपुर, पश्चिमी बंगाल) में है। सार्वजनिक क्षेत्र के कारखाने भिलाई, दुर्गापुर, राउरकेला, बोकारो, विशाखापट्टनम् एवं सलेम में है।

इस समय देश में 196 लघु इस्पात संयन्त्र हैं। इनमें से 179 इकाइयाँ चालू हैं तथा शेष बन्द हैं। वर्तमान में इस उद्योग में 90,000 करोड़ रुपये की पूँजी लगी है तथा इसमें 5 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त है।

3. सूती वस्त्र उद्योग :
भारत में सूती वस्त्रों की अत्यन्त पुरानी परम्परा है। देश की प्रथम सूती कपड़ा मिल सन् 1818 में कोलकाता में स्थापित की गई थी। देश की सूती कपड़ा मिलें मुख्य रूप से महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात में हैं। यह उद्योग भारत का सबसे बड़ा एवं व्यापक उद्योग है। देश के औद्योगिक उत्पादन में इसका योगदान 14 प्रतिशत है, जबकि देश के कुल निर्यात आय में इसका हिस्सा 19 प्रतिशत है। आयात में इसका हिस्सा 3 प्रतिशत है। यह उद्योग लगभग 9 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर रहा है। इस उद्योग में लगभग 5,000 करोड़ रुपये की पूँजी लगी है। सरकार ने कपड़ा आदेश (विकास एवं विनिमय)1993 के माध्यम से कपड़ा उद्योग को लाइसेन्स मुक्त कर दिया।

4. सूचना एवं प्रौद्योगिकी :
सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग से आशय उस उद्योग से है, जिसमें कम्प्यूटर और उसके सहायक उपकरणों की सहायता से ज्ञान का प्रसार किया जाता है। इसके अन्तर्गत कम्प्यूटर, संचार, प्रौद्योगिकी और सम्बन्धित सॉफ्टवेयर को शामिल किया जाता है। इसके अन्तर्गत उस सम्पूर्ण व्यवस्था को शामिल किया जाता है, जिसके द्वारा संचार माध्यम और उपकरणों की सहायता से सूचना पहुँचाई जाती है। यह ज्ञान आधारित उद्योग है। वर्ष 2000-01 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 33,138 करोड़ रुपये था जो 2008-09 में बढ़कर 2,35,300 करोड़ रुपये पहुँच गया। भारत में सकल घरेलू उत्पाद में उद्योग का योगदान वर्ष 1999-2000 में 1.2 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2013 में 8 प्रतिशत हो गया है। इससे ज्ञात होता है कि यह उद्योग भारत का सबसे तेज गति से बढ़ता हुआ उद्योग है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अति लघु उद्योग इकाइयों की अधिकतम विनियोग सीमा है
(i) 5 लाख रुपये
(ii) 15 लाख रुपये
(iii) 20 लाख रुपये
(iv) 25 लाख रुपये
उत्तर:
(iv) 25 लाख रुपये

प्रश्न 2.
वर्तमान में चीनी उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
(i) पहला
(ii) दूसरा
(iii) तीसरा
(iv) चौथा।
उत्तर:
(ii) दूसरा

प्रश्न 3.
विश्व में सीमेण्ट उत्पादन में भारत का कौन-सा स्थान है?
(i) तीसरा
(ii) चौथा
(iii) पाँचवाँ
(iv) छठा।
उत्तर:
(iii) पाँचवाँ

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रिक्त स्थान की पूर्ति

  1. कुटीर उद्योग सिर्फ …………. में चलाये जाते हैं।
  2. ………. उद्योग भारत का सबसे प्राचीन और प्रमुख उद्योग है।
  3. जूट के उत्पादन में भारत का विश्व में ………… स्थान है।
  4. भारत की लगभग …………. प्रतिशत कार्यशील जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।
  5. वर्तमान में लघु उद्योगों की वस्तुओं का देश के कुल निर्यात में ……… प्रतिशत हिस्सा है।

उत्तर:

  1. ग्रामों
  2. सूती वस्त्र
  3. पहला
  4. 58.4
  5. 35

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
देश की प्रथम सूती कपड़ा मिल सन् 1818 में कोलकाता में स्थापित की गई थी। (2014)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
जिन औद्योगिक इकाइयों में 50 लाख रुपये तक की पूँजी लगी हो उन्हें अति उद्योग की श्रेणी में रखा जाता है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
नेशनल न्यूज प्रिण्ट एण्ड पेपर मिल लिमिटेड नेपानगर (म. प्र.) में है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
भारत में लाख का सबसे अधिक उत्पादन छोटा नागपुर पठार में होता है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
अनुमान है कि विश्व के चमड़े की कुल आपूर्ति का 20 प्रतिशत चमड़ा भारत में तैयार होता है।
उत्तर:
असत्य

सही.जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 17 भारत में उद्योगों की स्थिति - 2
उत्तर:

  1. →(घ)
  2. →(ग)
  3. →(क)
  4. →(ङ)
  5. →(ख)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
लोहा इस्पात उद्योग को किस वर्ष में लाइसेंस मुक्त कर दिया?
उत्तर:
1991 में

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प्रश्न 2.
चीनी उत्पादन में किन दो राज्यों का महत्त्वपूर्ण स्थान है?
उत्तर:
उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र

प्रश्न 3.
हथकरघा, खादी उद्योग तथा रेशम उद्योग को किस उद्योग की श्रेणी में रखा गया है?
उत्तर:
ग्राम उद्योग

प्रश्न 4.
देश में काँच बनाने के कारखाने किस राज्य में हैं?
उत्तर:
पश्चिम बंगाल

प्रश्न 5.
भारत में लाख का उत्पादन सबसे अधिक कहाँ होता है?
उत्तर:
छोटा नागपुर का पठार।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उद्योगों का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
किसी देश के आर्थिक विकास में उद्योगों की भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होती है। उद्योग देश के तीव्र आर्थिक विकास में सहायक होते हैं। उद्योगों के विकास के बिना कोई राष्ट्र समृद्ध नहीं हो सकता है।

प्रश्न 2.
वृहत् उद्योग किसे कहते हैं?
अथवा
बडे पैमाने के उद्योग से क्या आशय है?
उत्तर:
जिन उद्योगों में कारखाना अधिनियम लागू होता है अर्थात् जहाँ अधिक संख्या में श्रमिक कार्य करते हैं व अधिक मात्रा में पूँजी लगी होती है वे उद्योग वृहत् (या बड़े) उद्योग कहलाते हैं।

प्रश्न 3.
मध्यम उद्योगों से क्या आशय है?
उत्तर:
जिन औद्योगिक इकाइयों में प्लाण्ट एवं मशीनरी में पाँच से दस करोड़ रुपये तक की पूँजी लगी होती है, वे औद्योगिक इकाइयाँ मध्यम उद्योगों की श्रेणी में आती हैं। सेवा क्षेत्र वाली इकाइयों के लिए यह सीमा 5 करोड़ रुपये तक रखी गयी है। उदाहरणार्थ-चमड़ा उद्योग, रेशम उद्योग।

प्रश्न 4.
लघु उद्योग किसे कहते हैं?
उत्तर:
वर्तमान में वे सभी औद्योगिक इकाइयाँ लघु उद्योग के अन्तर्गत आती हैं जिनकी अचल सम्पत्ति, संयन्त्र एवं मशीनरी में सीमित तथा सरकार द्वारा स्वीकृत से अधिक पूँजी न लगी हो, साथ ही जिनमें कारखाना अधिनियम लागू नहीं होता।

प्रश्न 5.
कुटीर उद्योगों से क्या आशय है?
उत्तर:
कुटीर उद्योग से आशय ऐसे उद्योगों से है जो पूर्णतया या मुख्यतया परिवार के सदस्यों की सहायता से पूर्णकालिक या अंशकालिक व्यवसाय के रूप में चलाये जाते हैं। ये प्रायः ग्रामीण एवं अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थापित होते हैं तथा अंशकालीन रोजगार प्रदान करते हैं।

प्रश्न 6.
ग्राम उद्योग से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ये उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किये जाते हैं। ग्रामीण उद्योग दो श्रेणियों में विभाजित किये जा सकते हैं-एक वे हैं जो किसानों द्वारा सहायक धन्धे के रूप में चलाये जाते हैं; जैसे-मुर्गी पालन, करघों पर बुनाई, गाय-भैंस पालन, टोकरियाँ बनाना, रेशम के कीड़े पालना, मधुमक्खियाँ पालना आदि। दूसरे वे हैं जो ग्रामीण कौशल से सम्बन्धित होते हैं; जैसे-मिट्टी के बर्तन बनाना, चमड़े के जूते बनाना, हथकरघा पर कपड़े बुनना आदि।

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प्रश्न 7.
देश की प्रथम सूती कपड़ा मिल कब और कहाँ स्थापित की गयी थी?
उत्तर:
देश की प्रथम सूती कपड़ा मिल 1818 में कोलकाता में स्थापित की गई थी।

प्रश्न 8.
सार्वजनिक क्षेत्र में स्थापित भारत के चार लौह-इस्पात केन्द्र कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:

  1. भिलाई (मध्य प्रदेश)
  2. दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल)
  3. राउरकेला (उड़ीसा)
  4. बोकारो (बिहार)।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उद्योग से क्या आशय है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उद्योगों से आशय-जब किसी एक जैसी वस्तु या सेवा का उत्पादन अनेक फर्मों के द्वारा किया जाता है तब ये सभी फर्म मिलकर उद्योग कहलाते हैं; जैसे-लोहा-इस्पात उद्योग के अन्तर्गत दुर्गापुर, राउरकेला, बोकारो तथा टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी सभी शामिल हैं।

‘उद्योग’ की परिधि में वे समस्त उपक्रम आते हैं जिनमें नियोजकों एवं नियोजितों के सहयोग से मानवीय आवश्यकताओं तथा आकांक्षाओं की सन्तुष्टि के लिए एक व्यवस्थित गतिविधि के रूप में वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन का कार्य सम्पन्न किया जाता है।

प्रश्न 2.
भारत में चीनी उद्योग का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चीनी उद्योग-भारत विश्व में गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। चीनी के उत्पादन में भी भारत का दूसरा स्थान है। 30 जून, 2016 तक देश में 719 चीनी कारखाने स्थापित हो चुके थे, जबकि वर्ष 1950-51 में इनकी संख्या मात्र 138 थी। स्थापित चीनी मिलों में 326 सहकारी क्षेत्र के अन्तर्गत हैं। चीनी उत्पादन जो 1950-51 में 11.3 लाख टन था, वर्ष 2016-17 में 225-21 लाख टन पहुँच गया। यह मौसमी उद्योग है, अत: इसके लिए सहकारी क्षेत्र उपयुक्त है। देश में चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र का महत्त्वपूर्ण स्थान है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 17 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उद्योग से क्या आशय है? देश के आर्थिक विकास में उद्योगों की भूमिका क्या है?
उत्तर:
उद्योगों से आशय :
उद्योगों से आशय-जब किसी एक जैसी वस्तु या सेवा का उत्पादन अनेक फर्मों के द्वारा किया जाता है तब ये सभी फर्म मिलकर उद्योग कहलाते हैं; जैसे-लोहा-इस्पात उद्योग के अन्तर्गत दुर्गापुर, राउरकेला, बोकारो तथा टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी सभी शामिल हैं।

‘उद्योग’ की परिधि में वे समस्त उपक्रम आते हैं जिनमें नियोजकों एवं नियोजितों के सहयोग से मानवीय आवश्यकताओं तथा आकांक्षाओं की सन्तुष्टि के लिए एक व्यवस्थित गतिविधि के रूप में वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन का कार्य सम्पन्न किया जाता है।

आर्थिक विकास में उद्योगों की भूमिका :
किसी देश के आर्थिक विकास में उद्योगों की भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होती है। उद्योग देश के तीव्र आर्थिक विकास में सहायक होते हैं। बी.एच.येमे के अनुसार, “औद्योगीकरण व्यापक रूप में आर्थिक विकास तथा रहन-सहन की कुंजी माना जाता है। निर्माणी उद्योगों के रूप में, प्रचलित विचारधारा के अनुसार औद्योगीकरण को आर्थिक अस्थिरता एवं निर्धनता को दूर करने की संजीवनी माना गया है।” प्रो. बाइस ने कहा है, “विकास के किसी भी सुदृढ़ कार्यक्रम में औद्योगिक विकास को आवश्यक और अन्तिम रूप से एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है।” अर्थात् उद्योगों के विकास के बिना कोई देश समृद्ध नहीं हो सकता।

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 1
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 1a

प्रश्न 2.
निम्नलिखित भिन्नों में से प्रत्येक का व्युत्क्रम ज्ञात कीजिए। व्युत्क्रमों को उचित भिन्न, विषम भिन्न एवं पूर्ण संख्या के रूप में वर्गीकृत कीजिए :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 2
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 2a
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 2b

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प्रश्न 3.
ज्ञात कीजिए:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 3
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 3a

प्रश्न 4.
ज्ञात कीजिए:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 4
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 4a

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 47

दशमलव संख्याएँ

निम्नलिखित सारणी को देखिए और रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 5

संख्याओं की तुलना

प्रश्न 1.
अब 35.63 और 35.67; 20.1 और 20.01; 19 : 36 और 29 : 36 की तुलना कीजिए।
हल:
(i) 35.63 और 35.67
इन संख्याओं में पूर्णांश वाले भाग समान हैं।
इनके दशांश भाग भी समान हैं।
इन संख्याओं में दूसरी का शतांश भाग पहली के शतांश भाग से बड़ा है। 3 < 7
∴ 35.63 < 35.67 (ii) 20.1 और 20.01 इन संख्याओं में पूर्णाश समान हैं। इनके दशांश भागों में पहली संख्या का दशांश भाग दूसरी संख्या के दशांश भाग से बड़ा है। 1 > 0
∴ संख्या 20-1> 20.01.

(ii) 19.36 और 29.36
इन संख्याओं में पहली संख्या का पूर्णांश दूसरी संख्या के पूर्णांश से छोटा है। 1 < 2
∴ 19 : 36 < 29 : 36

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प्रश्न 2.
75 पैसे = ₹ ………….. , 250 g = …. kg, 85 cm = …. m लिखिए।
उत्तर:
75 पैसे = ₹0.75, 250g = 0.250 kg, 85 cm = 0.85 m.

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 48

प्रश्न 1.
0.19 + 2.3 का मान क्या है ?
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 6
अतः 0.19 + 2.3 = 2.49

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प्रश्न 2.
39.87 – 21:98 का मान क्या है ?
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2. 4 6a
अत: 39.87 – 21.98 = 17.89

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MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि

MP Board Class 9th Science Chapter 12 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

प्रश्न श्रृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 182

प्रश्न 1.
किसी माध्यम में ध्वनि द्वारा उत्पन्न विक्षोभ आपके कानों तक कैसे पहुँचता है?
उत्तर:
ध्वनि द्वारा उत्पन्न विक्षोभ माध्यम (वायु) के सम्पीडनों एवं विरलनों के द्वारा हमारे कानों तक पहुँचता है।

प्रश्न श्रृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 182

प्रश्न 1.
आपके विद्यालय की घण्टी, ध्वनि कैसे उत्पन्न करती है?
उत्तर:
जब हम विद्यालय की घण्टी पर हथौड़े से चोट मारते हैं तो वह कम्पन करने लगता है जिससे विक्षोभ उत्पन्न होता है। इस प्रकार ध्वनि उत्पन्न होती है।

प्रश्न 2.
ध्वनि तरंगों को यान्त्रिक तरंगें क्यों कहते हैं?
उत्तर:
ध्वनि तरंगों को यान्त्रिक तरंगें कहते हैं क्योंकि इसके संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 3.
मान लीजिए आप अपने मित्र के साथ चन्द्रमा पर गए हुए हैं? क्या आप अपने मित्र द्वारा उत्पन्न ध्वनि को सुन पायेंगे?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 186

प्रश्न 1.
तरंग का कौन-सा गुण निम्नलिखित को निर्धारित करता है?
1. प्रबलता
2. तारत्व
उत्तर:

  1. आयाम
  2. आवृत्ति।

प्रश्न 2.
अनुमान लगाइए कि निम्न में से किस ध्वनि का तारत्व अधिक है?
(a) गिटार
(b) कार का हॉर्न।
उत्तर:
(a) गिटार का।

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प्रश्न श्रृंखला-4 # पृष्ठ संख्या 186

प्रश्न 1.
किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति, आवर्तकाल तथा आयाम से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
तरंगदैर्घ्य:
“दो क्रमागत सम्पीडनों अथवा दो क्रमागत विरलनों के मध्य की दूरी तरंग की तरंगदैर्घ्य कहलाती है।” इसे लैम्डा (λ) से निरूपित करते हैं।

आवृत्ति:
“प्रति एकांक समय में पूर्ण किए गए दोलनों (अर्थात् गुजरने वाले संपीडनों तथा विरलनों) की संख्या को तरंग की आवृत्ति कहते हैं।” इसे न्यू (ν) से प्रदर्शित करते हैं।”

आवर्तकाल:
“दो क्रमागत संपीडनों या दो क्रमागत विरलनों को किसी निश्चित बिन्दु से गुजरने में लगे समय को तरंग का आवर्तकाल कहते हैं।” इसे T से प्रदर्शित करते हैं।

आयाम:
“किसी माध्यम में मूल स्थिति के दोनों ओर अधिकतम विक्षोभ को तरंग का आयाम कहते हैं।” इसे a से प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 2.
किसी ध्वनि तरंग की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति उसके वेग से किस प्रकार सम्बन्धित है?
उत्तर:
ध्वनि तरंग का वेग (v) = तरंग की आवृत्ति (ν) x तरंगदैर्घ्य (λ)।

प्रश्न 3.
किसी दिए हुए माध्यम में एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 220 Hz तथा वेग 440 ms-1 है। इस तरंग की तरंगदैर्घ्य का परिकलन कीजिए।
हल:
∵ ज्ञात है:
आवृत्ति ν = 220
वेग v = 440 m s-1
ज्ञात करना है:
तरंगदैर्घ्य λ = ?
v = νλ
⇒ 440 = 220 λ
λ = \(\frac{440}{220}\) = 2 m
अतः अभीष्ट तरंगदैर्घ्य = 2 m.

प्रश्न 4.
किसी ध्वनि स्त्रोत से 450 m दूरी पर बैठा हुआ कोई मनुष्य 500 Hz की ध्वनि सुनता है। स्रोत से मनुष्य के पास तक पहुँचने वाले दो क्रमागत संपीडनों में कितना समय अन्तराल होगा?
उत्तर:
मान लीजिए दो क्रमागत संपीडनों के मध्य समय अन्तराल (आवर्तकाल) = T
ध्वनि की आवृत्ति ν = 500 (दिया है)
अब T = \(\frac{1}{ν}\) = \(\frac{1}{500}\) = 0.002 s
अत: अभीष्ट समय 0.002 s लगेगा।

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प्रश्न शृंखला-5 # पृष्ठ संख्या 187

प्रश्न 1.
ध्वनि की प्रबलता तथा तीव्रता में अन्तर बताइए।
उत्तर:
प्रबलता ध्वनि के लिए कानों की संवेदनशीलता की माप है, जबकि तीव्रता एकांक क्षेत्रफल से प्रति सेकण्ड गुजरने वाली ध्वनि ऊर्जा है। दो ध्वनियों की समान तीव्रता होते हुए भी उनकी प्रबलता अलग-अलग हो सकती है।

प्रश्न शृंखला-6 # पृष्ठ संख्या 188

प्रश्न 1.
वायु, जल या लोहे में से किस माध्यम में ध्वनि सबसे तेज चलती है?
उत्तर:
लोहे में।

प्रश्न श्रृंखला-7 # पृष्ठ संख्या 189

प्रश्न 1.
कोई प्रतिध्वनि 3 s पश्चात् सुनाई देती है। यदि ध्वनि की चाल 342 m s-1 हो तो स्रोत तथा परावर्तन पृष्ठ के बीच कितनी दूरी होगी?
हल:
ज्ञात है:
ध्वनि की चाल v = 342 m s-1
समय-अन्तराल t = 3 s
माना स्रोत एवं परावर्तक तल के बीच की ध्वनि = x m
तो ध्वनि द्वारा चली गई कुल दूरी s = 2x
तो 2x = चली दूरी (S) = वेग (v) x समय अन्तराल (t)
⇒ 2x = 342 x 3 = 1026
⇒ x = 1026/2 = 513 m
अत: अभीष्ट दूरी = 513 m.

प्रश्न श्रृंखला-8 # पृष्ठ संख्या 190

प्रश्न 1.
कंसर्ट हॉल की छतें वक्राकार क्यों होती है?
उत्तर:
कंसर्ट हॉल की छतें वक्राकार बनाई जाती हैं जिससे कि परावर्तन के पश्चात् ध्वनि हॉल के सभी भागों में पहुँच जाय।

प्रश्न श्रृंखला-9 # पृष्ठ संख्या 191

प्रश्न 1.
सामान्य मनुष्य के कानों के लिए श्रव्यता परिसर (सीमा) क्या है?
उत्तर:
20 Hz से लेकर 20 हजार Hz तक।

प्रश्न 2.
निम्न से सम्बन्धित आवृत्तियों का परिसर क्या है?
1. अवश्रव्य ध्वनि
2. पराश्रव्य ध्वनि।
उत्तर:

  1. 20 Hz से कम
  2. 20 हजार Hz से अधिक।

प्रश्न श्रृंखला-10 # पृष्ठ संख्या 193

प्रश्न 1.
एक पनडुब्बी सोनार स्पन्द उत्सर्जित करती है, जो पानी के अन्दर एक खड़ी चट्टान से टकराकर 1.02 5 के पश्चात् वापस लौटता है। यदि खारे पानी में ध्वनि की चाल 1531 m s-1 हो, तो चट्टान की दूरी ज्ञात कीजिए।
हल:
ज्ञात है:
ध्वनि की चाल y = 1531 m s-1
एवं समय अन्तराल t = 1.02 s
माना चट्टान की दूरी = x m
तो चली गई कुल दूरी = 2x m
दूरी 2x = वेग (v) x समय अन्तराल (t)
⇒ 2x = 1531 x 1.02
⇒ \(x=\frac{1531 \times 1 \cdot 02}{2}\)
⇒ 780.81 m
अतः चट्टान की अभीष्ट दूरी = 780.81 m.

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MP Board Class 9th Science Chapter 12 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ध्वनि क्या है? यह कैसे उत्पन्न होती है?
उत्तर:
ध्वनि:
“ऊर्जा का एक रूप जो हमारे कानों में श्रवण का संवेदन उत्पन्न करती है, ध्वनि कहलाती है।” ध्वनि स्रोत के कम्पन करने से उत्पन्न होती है।

प्रश्न 2.
एक चित्र की सहायता से वर्णन कीजिए कि ध्वनि के स्रोत के निकट वायु में सम्पीडन एवं विरलन कैसे उत्पन्न होते हैं?
उत्तर:
जब कोई ध्वनि स्रोत कम्पन करता है तो वह अपने सामने की वायु को धक्का देकर सम्पीडित करती है और एक उच्च दाब का क्षेत्र उत्पन्न होता है। इस क्षेत्र को सम्पीडन (C) कहते हैं। यह सम्पीडन कम्पमान वस्तु से आगे की ओर गति करता है। जब स्रोत पीछे की ओर कम्पन करता है तो एक निम्न दाब का क्षेत्र उत्पन्न होता है जिसे विरलन (R) कहते हैं। इस प्रकार स्रोत के निकट वायु में सम्पीडन एवं विरलन उत्पन्न होते हैं।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 1

प्रश्न 3.
किस प्रयोग से यह दर्शाया जा सकता है कि ध्वनि संचरण के लिए एक द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
“ध्वनि संचरण के लिए द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता होती है” दर्शाने हेतु प्रयोग:
प्रयोग:
एक बेलजार लेकर चित्रानुसार उसका सम्पर्क निर्वात पम्प से कर देते हैं तथा कॉर्क की सहायता से उसमें एक विद्युत घण्टी लटका देते हैं।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 2
जब हम घण्टी का स्विच दबाते हैं तो घण्टे के बजने की स्पष्ट आवाज सुनाई देती है। अब पम्प द्वारा धीरे-धीरे वायु निकालते हैं तो देखते हैं कि स्विच दबाने पर आवाज धीमी होती जाती है और जब बेलजार में पूर्ण निर्वात हो जाता है तब घण्टी की आवाज सुनाई देना बन्द हो जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 4.
ध्वनि तरंगों की प्रकृति अनुदैर्घ्य क्यों होती है?
उत्तर:
ध्वनि तरंगों का संचरण सम्पीडनों एवं विरलनों के माध्यम से होता है तथा संचरण माध्यम में दाब तथा घनत्व में परिवर्तन होता है और ये अनुदैर्घ्य तरंगों के अभिलक्षण (प्रगुण) हैं। इसलिए ध्वनि तरंगों की प्रकृति अनुदैर्घ्य होती है।

प्रश्न 5.
ध्वनि का कौन-सा अभिलक्षण किसी अन्य अंधेरे कमरे में बैठे आपके मित्र की आवाज पहचानने में आपकी सहायता करता है?
उत्तर:
ध्वनि की गुणता वह अभिलक्षण है जो मित्र की आवाज को पहचानने में हमारी मदद करता है।

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प्रश्न 6.
तड़ित की चमक तथा गर्जन साथ-साथ उत्पन्न होते हैं लेकिन चमक दिखाई देने के कुछ सेकण्ड पश्चात् गर्जन सुनाई देती है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:
चमक (प्रकाश) का वेग गर्जन (ध्वनि) के वेग से पर्याप्त मात्रा में अधिक होता है। इसलिए चमक (प्रकाश) हम तक पहले पहुँच जाती है तथा गर्जन (ध्वनि) को पहुँचने में कुछ समय अधिक लग जाता है।

प्रश्न 7.
किसी व्यक्ति का औसत श्रव्य परिसर 20 Hz से 20 kHz है। इन दो आवृत्तियों के लिए ध्वनि तरंगों की तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए। वायु में ध्वनि का वेग 344 m s-1 लीजिए।
हल:
ज्ञात है:
निम्न परिसर की आवृत्ति ν(l) 20 Hz
उच्च परिसर की आवृत्ति νu = 20 kHz
ध्वनि का वेग v = 344 m s-1
हम जानते हैं कि
v = νλ
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 3
अतः अभीष्ट तरंगदैर्घ्य क्रमशः 17.2 m एवं 17.2 x 10-3m है।

प्रश्न 8.
दो बालक किसी ऐलुमिनियम पाइप के दो सिरों पर हैं। एक बालक पाइप के एक सिरे पर पत्थर से आघात करता है। दूसरे सिरे पर स्थित बालक तक वायु तथा ऐलुमिनियम से होकर जाने वाली ध्वनि तरंगों द्वारा लिए गए समय का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल:
ऐलुमिनियम में ध्वनि का वेग v(Al) = 6420 m s-1 एवं
वायु में ध्वनि का वेग v(a) = 346 m s-1
मान लीजिए कि ऐलुमिनियम के पाइप की लम्बाई x m है तथा ध्वनि द्वारा वायु एवं ऐलुमिनियम में लिया गया समय क्रमशः t(a) एवं t(Al) है तो
दूरी x = वेग x समय = v x t
v(a) x t(a) = v(Al) x t(Al)
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 4
अतः लिए गए समयों में अभीष्ट अनुपात 18.55 : 1 है।

प्रश्न 9.
किसी ध्वनि स्रोत की आवृत्ति 100 Hz है। एक मिनट में यह कितनी बार कम्पन करेगा?
हल:
कम्पनों की कुल संख्या = आवृत्ति x समय (सेकण्ड में)
= 100 x 60 = 6000 कम्पन
अतः अभीष्ट कम्पनों की संख्या = 6000.

प्रश्न 10.
क्या ध्वनि परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जिनका पालन प्रकाश की तरंगें करती हैं? इन नियमों को बताइए।
उत्तर:
हाँ, ध्वनि तरंगें भी परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती हैं जिनका पालन प्रकाश की तरंगें करती हैं।
परावर्तन के नियम:

  1. आपतन कोण = परावर्तन कोण
  2. आपाती किरण, परावर्तित किरण एवं अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।

प्रश्न 11.
ध्वनि का एक स्रोत किसी परावर्तक पृष्ठ के सामने रखने पर उसके द्वारा प्रदत्त ध्वनि तरंग की प्रति ध्वनि सुनाई देती है। यदि स्रोत तथा परावर्तक पृष्ठ की दूरी पर स्थिर रहे तो किस दिन प्रतिध्वनि अधिक शीघ्र सुनाई देगी –
1. जिस दिन ताप अधिक हो,
2. जिस दिन ताप कम हो।
उत्तर:
1. जिस दिन ताप अधिक हो।

प्रश्न 12.
ध्वनि तरंगों के परावर्तन के दो व्यावहारिक उपयोग लिखिए।
उत्तर:
ध्वनि तरंगों के परावर्तन के व्यावहारिक उपयोग –

  1. मेगाफोन, लाउडस्पीकर आदि द्वारा ध्वनि विस्तारण में।
  2. स्टेथोस्कोप द्वारा हृदय की धड़कनों को डॉक्टर के कानों तक पहुँचाने में।

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प्रश्न 13.
500 मीटर ऊँची किसी मीनार की चोटी से एक पत्थर मीनार के आधार पर स्थित एक पानी के तालाब में गिराया जाता है। पानी में उसके गिरने की ध्वनि चोटी पर कब सुनाई देगी? (g = 10 m s-1 तथा ध्वनि की चाल = 340 m s-1)
हल:
ज्ञात है:
मीनार की ऊँचाई h = 500 m
पत्थर का प्रारम्भिक वेग u = 0 m s-1
गुरुत्वीय त्वरण g = 10 m s-2
ध्वनि की चाल v = 340 m s-1
पत्थर को जल तक पहुँचने में लगा समय = t1 है तो पत्थर के मुक्त पतन में,
h = ut1 + 2gt12
500 = 0 (t1) + \(\frac{1}{2}\) x 10 x t12
⇒ t12 = 100 ⇒ t1 = \(\sqrt{100}\) = 10 s
माना ध्वनि को चोटी तक पहुँचने में लगा समय t2 है तो
दूरी = वेग x समय
500 = 340 x t2
⇒ t2 = 500/340 = 1.47 s
कुल समय t = t1 + t2 = 10 s + 1-47 s = 11.47 s
अत: अभीष्ट ध्वनि 11.47 5 बाद सुनाई देगी।

प्रश्न 14.
एक ध्वनि तरंग 339 m s-1 की चाल से चलती है। यदि इसकी तरंगदैर्घ्य 1.5 cm हो, तो तरंग की आवृत्ति कितनी होगी? क्या यह श्रव्य होगी?
हल:
ज्ञात है:
ध्वनि की चाल v = 339 m s-1
तरंगदैर्घ्य λ = 1.5 cm
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 5
अतः तरंग की अभीष्ट आवृत्ति = 22,600 Hz होगी तथा यह श्रव्य नहीं पराश्रव्य होगी।

प्रश्न 15.
अनुरणन क्या है ? इसे कैसे कम किया जा सकता है? (2018)
उत्तर:
अनुरणन:
“किसी बड़े हॉल की दीवारों से ध्वनि के बार-बार परावर्तन के कारण ध्वनि काफी समय तक बनी रहती है। इस प्रकार क्रमिक परावर्तनों के फलस्वरूप सुनी गयी ध्वनि अर्थात् ध्वनि, निर्बन्ध अनुरणन कहलाता है।”

अनुरणन को कम करने के उपाय:
इसे कम करने के लिए हॉल की दीवारों एवं छतों पर ध्वनि अवशोषक लगाये जाते हैं।

प्रश्न 16.
ध्वनि की प्रबलता से क्या अभिप्राय है? यह किन कारकों पर निर्भर करती है?
उत्तर:
ध्वनि की प्रबलता:
“अधिक ऊर्जा युक्त ध्वनि तरंगें अधिक दूरी तक जाती हैं। ध्वनि के इस गुण को ध्वनि की प्रबलता कहते हैं।” ध्वनि की प्रबलता इसके आयाम पर निर्भर करती है।

प्रश्न 17.
चमगादड़ अपना शिकार पकड़ने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे करते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चमगादड़ द्वारा अन्धकार में अपना शिकार ढूँढ़ने की युक्ति:
चमगादड़ अन्धकार में अपना शिकार ढूँढ़ने के लिए सोनार युक्ति का उपयोग करते हैं। वे उड़ते समय पराध्वनि तरंगें उत्सर्जित करते हैं जो उच्च आवृत्ति के कारण अवरोधों एवं कीटों से परावर्तित होकर चमगादड़ के कानों तक पहुँचती हैं जिनका चमगादड़ संसूचन करते हैं। इन परावर्तित स्पन्दों की प्रकृति से चमगादड़ को पता चल जाता है कि उसका शिकार कहाँ है तथा किस प्रकार का है।

प्रश्न 18.
वस्तुओं को साफ करने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे करते हैं?
उत्तर:
वस्तुओं को साफ करने के लिए पराध्वनि का उपयोग:
पराध्वनि प्रायः उन भागों को साफ करने में उपयोग में लाई जाती है जिन तक पहुँचना बहुत कठिन होता है। जिन वस्तुओं की सफाई करनी होती है उन्हें साफ करने वाले विलयन में रखकर उसमें पराध्वनि प्रेषित की जाती है। उच्च आवृत्ति के विक्षोभ के कारण चिकनाई, धूल कण एवं गन्दगी के कण अलग होकर विलयन में आ जाते हैं और इस प्रकार वस्तु पूर्णतया साफ हो जाती है। इस विधि का उपयोग प्रायः विषम आकार के पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक अवयव आदि को साफ करने में किया जाता है।

प्रश्न 19.
सोनार की कार्यविधि तथा उपयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सोनार की कार्यविधि:
सोनार में एक प्रेषित्र एवं एक संसूचक लगा होता है। जहाज पर लगे प्रेषित्रों द्वारा नियमित समय अन्तरालों पर पराश्रव्य ध्वनि के शक्तिशाली स्पन्दों अर्थात् सिग्नलों को लक्ष्य तक भेजा जाता है। ये तरंगें जल में गति करती हैं तथा लक्ष्य से टकराने के बाद परावर्तित होकर संसूचक द्वारा ग्रहण कर ली जाती हैं। संसूचक पराध्वनि को विद्युत संकेतों में बदल देता है जिनकी व्याख्या कर ली जाती है। जल में ध्वनि की चाल तथा पराध्वनि के प्रेषण एवं अधिग्रहण के समय को ज्ञात करके लक्ष्य की दूरी की गणना कर ली जाती है।

सोनार के उपयोग:
सोनार के निम्नांकित प्रमुख उपयोग हैं –

  1. चमगादड़ द्वारा अन्धकार में अपना शिकार ढूँढ़ने में।
  2. चमगादड़ का रात्रि में उड़ते समय अवरोधों से टकराने से बचाव करने में।
  3. पॉरपॉइस मछलियों द्वारा अंधेरे में अपने भोजन की खोज करने में।
  4. समुद्र में डूबे हुए जहाज एवं पनडुब्बियों का पता लगाने में तथा समुद्र की गहराई ज्ञात करने में।
  5. समुद्र के अन्दर स्थित चट्टानों, घाटियाँ, हिम शैलों एवं अन्य अवरोधों की स्थिति पता करने में।

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प्रश्न 20.
एक पनडुब्बी पर लगी सोनार युक्ति, संकेत भेजती है और उनकी प्रतिध्वनि 5 s पश्चात् ग्रहण करती है। यदि पनडुब्बी से वस्तु की दूरी 3625 m हो तो ध्वनि की चाल की गणना कीजिए।
हल:
ज्ञात है:
पनडुब्बी से वस्तु की दूरी d=3625 m
प्रतिध्वनि में लगा समय t=5 s
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 6
अतः ध्वनि की अभीष्ट चाल = 1450 m s-1.

प्रश्न 21.
किसी धातु के ब्लॉक में दोषों का पता लगाने के लिए पराध्वनि का उपयोग कैसे किया जाता है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
धातु के ब्लॉक में दोषों का पता लगाने में पराध्वनि का उपयोग-पराध्वनि तरंगों को धातु ब्लॉक से प्रेषित किया जाता है और प्रेषित तरंगों का पता लगाने के लिए संसूचकों का उपयोग किया जाता है। दोष होने पर पराध्वनि परावर्तित होकर दोष की उपस्थिति को दर्शाती है।

प्रश्न 22.
मनुष्य का कान किस प्रकार कार्य करता है? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
निर्देश:
परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 3 देखिए।

MP Board Class 9th Science Chapter 12 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 9th Science Chapter 12 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
स्वर एक ऐसी ध्वनि है –
(a) जिसमें कई आवृत्तियाँ होती हैं
(b) जिसमें केवल दो आवृत्तियाँ होती हैं
(c) जिसमें एकल आवृत्ति होती है
(d) जिसको सुनना सदैव दुखद होता है
उत्तर:
(c) जिसमें एकल आवृत्ति होती है

प्रश्न 2.
यान्त्रिक पियानो की किसी कुंजी को पहले धीरे से और फिर जोर से दबाया गया। दूसरी बार उत्पन्न ध्वनि –
(a) पहली ध्वनि से प्रबल होगी लेकिन इसका तारत्व भिन्न नहीं होगा
(b) पहली ध्वनि से प्रबल होगी और इसका तारत्व भी अपेक्षाकृत उच्च होगा
(c) पहली ध्वनि से प्रबल होगी परन्तु इसका तारत्व अपेक्षाकृत निम्न होगा
(d) प्रबलता और तारत्व दोनों ही प्रभावित नहीं होंगे
उत्तर:
(a) पहली ध्वनि से प्रबल होगी लेकिन इसका तारत्व भिन्न नहीं होगा

प्रश्न 3.
सोनार (SONAR) में हम उपयोग करते हैं –
(a) पराश्रव्य तरंगें
(b) अवश्रव्य तरंगें
(c) रेडियो तरंगें
(d) श्रव्य तरंगें
उत्तर:
(a) पराश्रव्य तरंगें

प्रश्न 4.
ध्वनि वायु में गमन करती है यदि –
(a) माध्यम के कण एक स्थान से दूसरे स्थान पर गमन कर रहे हों
(b) वायुमण्डल में आर्द्रता न हो
(c) विक्षोभ गमन करे
(d) कण एवं विक्षोभ दोनों ही एक स्थान से दूसरे स्थान को गमन करें
उत्तर:
(c) विक्षोभ गमन करे

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प्रश्न 5.
किसी क्षीण ध्वनि को प्रबल ध्वनि में परिवर्तित करने के लिए किसमें वृद्धि करनी होगी?
(a) आवृत्ति
(b) आयाम
(c) वेग
(d) तरंगदैर्घ्य
उत्तर:
(b) आयाम

प्रश्न 6.
दर्शाए गए वक्र में आधी तरंगदैर्घ्य है –
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 7
(a) AB
(b) BD
(c) DE
(d)AE
उत्तर:
(b) BD

प्रश्न 7.
भूकम्प मुख्य प्रघाती तरंगों से पहले किस प्रकार की ध्वनि उत्पन्न करते हैं?
(a) पराश्रव्य तरंगें
(b) अवश्रव्य तरंगें
(c) श्रव्य ध्वनि
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) अवश्रव्य तरंगें

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से कौन अवश्रव्य ध्वनि सुन सकता है?
(a) कुत्ता
(b) चमगादड़
(c) राइनोसेरस (गैंडा)
(d) मनुष्य
उत्तर:
(c) राइनोसेरस (गैंडा)

प्रश्न 9.
किसी संगीत समारोह में वृंद वाद्य बजाने से पूर्व कोई सितार वादक तनाव को समायोजित करते हुए डोरी को उचित प्रकार से झंकृत करने का प्रयास करता है। ऐसा करके वह क्या समायोजित करता है?
(a) केवल ध्वनि की तीव्रता
(b) केवल ध्वनि का आयाम
(c) सितार की डोरी की आवृत्ति को अन्य वाद्य यन्त्रों की आवृत्ति के साथ
(d) ध्वनि की प्रबलता
उत्तर:
(c) सितार की डोरी की आवृत्ति को अन्य वाद्य यन्त्रों की आवृत्ति के साथ

प्रश्न 10.
v, ν एवं 2 में सम्बन्ध है –
(a) v = νλ
(b) ν = vλ
(c) λ = vλ
(d) v νλ = 1
उत्तर:
(a) v = νλ

प्रश्न 11.
चमगादड़ द्वारा उत्सर्जित तरंग होती है – (2018, 19)
(a) अवश्रव्य
(b) श्रव्य
(c) पराध्वनि
(d) प्रतिध्वनि
उत्तर:
(c) पराध्वनि

प्रश्न 12.
सोनार तकनीक में किस प्रकार की ध्वनि तरंगों को प्रयोग में लाया जाता है?
(a) श्रव्य
(b) अवश्रव्य
(c) पराश्रव्य
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) पराश्रव्य

प्रश्न 13.
पराश्रव्य तरंगों की आवृत्ति होती है –
(a) 20 Hz से कम
(b) 20 से 20,000 Hz के बीच
(c) 20,000 Hz से अधिक
(d) शून्य
उत्तर:
(c) 20,000 Hz से अधिक

प्रश्न 14.
ध्वनि तरंगें होती हैं – (2018, 19)
(a) चुम्बकीय तरंगें
(b) विद्युत तरंगें
(c) विद्युत चुम्बकीय तरंगें
(d) यान्त्रिक तरंगें
उत्तर:
(d) यान्त्रिक तरंगें

प्रश्न 15.
अधिकतम सहनीय ध्वनि है –
(a) 0 db
(b) 10 db
(c) 60 db
(d) 120 db
उत्तर:
(d) 120 db

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प्रश्न 16.
ध्वनि का वेग सबसे अधिक होता है – (2019)
(a) ठोस में
(b) द्रव में
(c) गैस में
(d) इन सभी में
उत्तर:
(a) ठोस में

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. ध्वनि तरंगें ……………. तरंगें होती हैं।
2. एक दोलन में लिया गया समय …………….. कहलाता है।
3. एक सेकण्ड में पूर्ण दोलनों की संख्या ……………. कहलाती है।
4. ……………. तरंगें श्रृंग एवं गर्त के द्वारा आगे बढ़ती हैं।
5. …………….. तरंगें सम्पीडन एवं विरलन के द्वारा आगे बढ़ती हैं।
6. प्रतिध्वनि, अवरोधक पृष्ठों से ध्वनि के …………… के कारण होती है।
7. ध्वनि मापन की …………… इकाई है। (2019)
8. श्रव्य तरंगों की परास …………….. होती है। (2019)
उत्तर:

  1. यान्त्रिक
  2. दोलन काल
  3. आवृत्ति
  4. अनुप्रस्थ
  5. अनुदैर्घ्य
  6. परावर्तन
  7. डेसीबल
  8. 20 Hz से 20,000 Hz.

सही जोड़ी बनाना
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 8
उत्तर:

  1. → (iii)
  2. → (vi)
  3. → (v)
  4. → (i)
  5. → (ii)
  6. → (iv).

सत्य/असत्य कथन

1. पराश्रव्य तरंगों को कुत्ते सुन लेते हैं।
2. चमगादड़ अवश्रव्य तरंगें उत्पन्न करती है तथा सुनती है।
3. यान्त्रिक तरंगों के संचरण के लिए माध्यम आवश्यक है।
4. वायु में अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्घ्य दोनों प्रकार की तरंगें संचरित होती हैं।
5. किसी द्रव्यात्मक माध्यम में उत्पन्न विक्षोभ को तरंग कहते हैं।
6. अनुप्रस्थ व अनुदैर्घ्य तरंगों को प्रगामी तरंग कहते हैं।
उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य
  6. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
ध्वनि तरंगें किस प्रकार की तरंगें होती हैं?
उत्तर:
अनुदैर्घ्य यान्त्रिक तरंगें।

प्रश्न 2.
ठोस, द्रव एवं गैस किसमें ध्वनि वेग सर्वाधिक होता है?
उत्तर:
ठोस में।

प्रश्न 3.
आवर्तकाल (T) एवं आवृत्ति (ν) में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
Tν = 1.

प्रश्न 4.
तरंग वेग (v), आवृत्ति (ν) एवं तरंगदैर्घ्य (λ) में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
v = νλ.

प्रश्न 5.
तरंग वेग (v), आवर्तकाल (T) एवं तरंगदैर्घ्य (λ) में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
vT = 2.

प्रश्न 6.
प्रतिध्वनि के लिए ध्वनि उत्पादक एवं परावर्तक तल के बीच न्यूनतम कितनी दूरी होगी?
उत्तर:
17.2 m.

प्रश्न 7.
अवश्रव्य तरंगों को सुनने वाले जन्तु का नाम लिखिए।
उत्तर:
गेंडा।

प्रश्न 8.
पराश्रव्य (पराध्वनि) को सुनने वाले जन्तु का नाम लिखिए।
उत्तर:
चमगादड़ अथवा कुत्ता।

प्रश्न 9.
श्रव्य तरंगों की परास लिखिए।
उत्तर:
20 Hz से 20 हजार Hz।

प्रश्न 10.
अवश्रव्य तरंगों की परास लिखिए।
उत्तर:
20 Hz से कम।

प्रश्न 11.
पराश्रव्य तरंगों की परास लिखिए।
उत्तर:
20 हजार Hz से अधिक।

प्रश्न 12.
SONAR का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर:
Sound Navigation And Ranging.

प्रश्न 13.
SONAR में किस प्रकार की तरंगें प्रयोग की जाती हैं?
उत्तर:
पराश्रव्य (पराध्वनिक)।

प्रश्न 14.
कौन-सी तरंगें दाब तरंगें कहलाती हैं?
उत्तर:
ध्वनि तरंगें।

प्रश्न 15.
निर्वात में ध्वनि की चाल कितनी होती है?
उत्तर:
शून्य (0)।

प्रश्न 16.
यदि किसी झील की तली में कोई विस्फोट हो तो जल में किस प्रकार की प्रघात तरंगें उत्पन्न होंगी?
उत्तर:
अनुदैर्घ्य तरंगें।

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MP Board Class 9th Science Chapter 12 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यान्त्रिक तरंगें किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
यान्त्रिक तरंगें:
“जो तरंगें किसी द्रव्यात्मक माध्यम में उसके कणों के दोलन करने के कारण उत्पन्न होती हैं, वे यान्त्रिक तरंगें कहलाती हैं।

प्रश्न 2.
अनुदैर्घ्य तरंगें किसे कहते हैं?
उत्तर:
अनुदैर्घ्य तरंगें:
“वे तरंगें जिनमें माध्यम के कणों के दोलन की दिशा एवं तरंगों के संचरण की दिशा एक ही होती है, अनुदैर्घ्य तरंगें कहलाती हैं।

प्रश्न 3.
अनुप्रस्थ तरंगें किसे कहते हैं?
उत्तर:
अनुप्रस्थ तरंगें:
“वे तरंगें जिनमें माध्यम के कणों के दोलन की दिशा तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होती है, अनुप्रस्थ तरंगें कहलाती हैं।”

प्रश्न 4.
पराश्रव्य ध्वनि या पराध्वनि क्या है?
उत्तर:
पराश्रव्य ध्वनि या पराध्वनि:
“जिन ध्वनियों की आवृत्ति 20 हजार Hz से अधिक होती है, वे पराश्रव्य ध्वनि या पराध्वनि कहलाती हैं।”

प्रश्न 5.
अवश्रव्य ध्वनि क्या है?
उत्तर:
अवश्रव्य ध्वनि:
वह ध्वनि जिसकी आवृत्ति परिसर 20 Hz से कम होती है, अवश्रव्य ध्वनि कहलाती है।”

प्रश्न 6.
श्रव्य ध्वनि किसे कहते हैं?
उत्तर:
श्रव्य ध्वनि:
“वह ध्वनि जिसको सुनने के लिए हमारे कान संवेदनशील होते हैं तथा जिनकी आवृत्ति परिसर 20 Hz से 20 हजार Hz होती है, श्रव्य ध्वनि कहलाती है।”

प्रश्न 7.
ध्वनि के परावर्तन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ध्वनि का परावर्तन:
“जब कोई ध्वनि तरंग एक माध्यम में संचरण करते हुए किसी पृष्ठ से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट आती है तो इस घटना को ध्वनि का परावर्तन कहते हैं।”

प्रश्न 8.
प्रतिध्वनि किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रतिध्वनि:
“ध्वनि के परावर्तन के कारण ध्वनि के बार-बार सुनाई देने की घटना प्रतिध्वनि ‘कहलाती है।”

प्रश्न 9.
पराध्वनिक से क्या समझते हो?
उत्तर:
पराध्वनिक:
“जब कोई पिण्ड ध्वनि की चाल से अधिक चाल से चलता है तो उस पिण्ड को पराध्वनिक कहते हैं।”

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प्रश्न 10.
ध्वनि बूम से क्या तात्पर्य है? (2019)
उत्तर:
ध्वनि बूम:
“जब कोई पिण्ड पराध्वनिक चाल से चलता है तो प्रघाती तरंगें उत्पन्न होती हैं। इन तरंगों के कारण वायुदाब में अत्यधिक परिवर्तन के कारण एक प्रकार का विस्फोट या कड़क ध्वनि उत्पन्न होती है, जिसे ध्वनि बूम कहते हैं।”

प्रश्न 11.
ध्वनि बूम के क्या परिणाम हैं? (2019)
उत्तर:
ध्वनि बूम के परिणाम:
ध्वनि बूम के कारण आस-पास रखी काँच की वस्तुएँ एवं खिड़कियों के शीशे टूट जाते हैं।

प्रश्न 12.
सोनार (SONAR) क्या है?
उत्तर:
“एक ऐसी औद्योगिक युक्ति जिसमें ध्वनि की पराश्रव्य तरंगों का उपयोग करके जल में स्थित पिण्डों की दूरी, दिशा तथा स्थिति का पता लगाया जाता है, सोनार कहलाती है।”

प्रश्न 13.
ध्वनि को दाब तरंगें क्यों कहते हैं?
उत्तर:
ध्वनि के संचरण से माध्यम में दाब विभिन्नता उत्पन्न हो जाती है इसलिए ध्वनि को दाब तरंगें कहते हैं।

प्रश्न 14.
संलग्न ग्राफ चित्र में 1500 m s-1 वेग से गतिमान किसी विक्षोभ का विस्थापन-समय सम्बन्ध दर्शाया गया है। इस विक्षोभ की तरंगदैर्घ्य परिकलित कीजिए।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 9
हल:
ग्राफ से,
दिया है:
आवर्तकाल T = 2 x 10-6 s
ध्वनि का वेग v = 1500 m s-1
हम जानते हैं कि
तरंगदैर्घ्य (λ) = वेग (v) x आवर्तकाल (T)
= 1500 x 2 x 10-6 = 3 x 10-3 m
अतः अभीष्ट तरंगदैर्घ्य = 3 x 10-3 m.

प्रश्न 15.
संलग्न चित्र में दर्शाए गए दो ग्राफों (a) अथवा (b) में निरूपित मानव ध्वनियों में से कौन-सी ध्वनि पुरुष की हो सकती है? अपने उत्तर का कारण दीजिए।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 10
हल:
ग्राफ से प्रकट हो रहा है कि ग्राफ a का आवर्तकाल b से अधिक है। अत: a की आवृत्ति b से कम है। इसलिए ग्राफ a की ध्वनि पुरुष की है। क्योंकि पुरुष के स्वर का तारत्व (आवृत्ति) स्त्रियों के स्वर के तारत्व (आवृत्ति) से कम होता है।

प्रश्न 16.
हम भिनभिनाती मधुमक्खी की ध्वनि सुन लेते हैं, जबकि हमें लोलक के दोलन की ध्वनि सुनाई नहीं देती। क्यों?
उत्तर:
भिनभिनाती मधुमक्खियाँ अपने पंखों को फड़फड़ाकर जो ध्वनि उत्पन्न करती है वह श्रव्य ध्वनि की परिसर में होती हैं। इसलिए हम उसे सुन लेते हैं जबकि लोलक के दोलन की आवृत्ति अवश्रव्य ध्वनि की परिसर में आती है अर्थात् उसकी आवृत्ति 20 Hz से कम होती है इसलिए हमें सुनाई नहीं देती।

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प्रश्न 17.
किसी तड़ित झंझा द्वारा उत्पन्न ध्वनि तड़ित दिखाई देने के 10 s बाद सुनाई देती है। गर्जन मेघ की सन्निकट दूरी परिकलित कीजिए। दिया है-ध्वनि की चाल = 340 m s-1
हल:
ज्ञात है:
ध्वनि की चाल v =340 m s-1
समय अन्तराल t = 10 s
गर्जन मेघ की दूरी
S = ध्वनि की चाल v x समय t
= दूरी S = 340 m s-1 x 10 s
= 3400 m = 3.4 km
अत: गर्जन मेघ की सन्निकट अभीष्ट दूरी = 3400 m अर्थात् 3.4 km.

प्रश्न 18.
संलग्न चित्र में कान द्वारा घड़ी की टिक-टिक की प्रबलतम ध्वनि सुनने के लिए कोण r ज्ञात कीजिए।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 11
हल:
परावर्तन के नियम से
कोण r = कोण i
⇒ ∠r = 90° – 50° (चित्रानुसार)
= 40°
अतः r का अभीष्ट मान = 40°.

प्रश्न 19.
अच्छे सम्मेलन कक्षों अथवा कंसर्ट हॉलों की छत तथा मंच के पीछे की दीवारें वक्राकार क्यों बनाई जाती हैं?
उत्तर:
अच्छे सम्मेलन कक्षों अथवा कंसर्ट हॉलों की छत तथा मंच के पीछे की दीवारें वक्राकार इसलिए बनाई जाती हैं ताकि इनसे परावर्तन के पश्चात् ध्वनि हॉल में बैठे सभी दर्शकों तक सुस्पष्ट रूप से पहुँच सके।

MP Board Class 9th Science Chapter 12 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी तरंग की गुणधर्म लिखिए।
उत्तर:
किसी तरंग के गुणधर्म-किसी तरंग के गुणधर्म निम्न हैं –

  1. तरंग, कम्पन करते स्रोत द्वारा आवर्ती (Periodic) विक्षोभ के कारण होता है।
  2. तरंग के कारण ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है, न कि पदार्थ का।
  3. तरंग के माध्यम के कण संचरित नहीं होते, वे अपनी मूल स्थिति में ही कम्पन करते हैं एवं अपने आस-पास के कणों में ऊर्जा का स्थानान्तरण करते हैं।
  4. तरंग की गति माध्यम की प्रकृति पर निर्भर करती है, तरंग स्रोत की गति या कम्पन पर नहीं।
  5. यदि तरंग स्रोत के चारों तरफ का माध्यम एकसमान (समांगी) है तो तरंग गति भी सभी दिशाओं में समान रहती है।

प्रश्न 2.
अनुप्रस्थ तरंग को रेखाचित्र बनाकर समझाइए।
उत्तर:
अनुप्रस्थ तरंगें:
“वे तरंगें जिनमें माध्यम के कणों की गति की दिशा तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होती है, अनुप्रस्थ तरंगें कहलाती हैं।” ये तरंगें श्रृंग और गर्त के रूप में संचरण करती हैं।

किसी रस्सी का एक सिरा किसी जगह बाँध कर उसके दूसरे सिरे को हाथ से ऊपर नीचे हिलाने पर रस्सी में अनुप्रस्थ तरंगें उत्पन्न होती हैं।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 12

प्रश्न 3.
अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य तरंगों में अन्तर लिखिए। (2019)
उत्तर:
अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्घ्य तरंगों में अन्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 13

प्रश्न 4.
ध्वनि के परावर्तन के व्यावहारिक उपयोग लिखिए। (2019)
उत्तर:
ध्वनि के परावर्तन के व्यावहारिक उपयोग-ध्वनि के परावर्तन के प्रमुख व्यावहारिक उपयोग अग्रलिखित हैं –

  1. मेगाफोन, लाउडस्पीकर, हॉर्न, तुरही तथा शहनाई जैसे वाद्ययन्त्रों द्वारा ध्वनि विस्तार में।
  2. स्टेथोस्कोप द्वारा हृदय की धड़कनों को डॉक्टर के कानों तक पहुँचाने में।
  3. बड़े हॉलों एवं सभाकक्षों में वक्राकार छठों द्वारा ध्वनि को परावर्तित करके कक्षों के प्रत्येक हिस्से में ध्वनि को प्रेषित करने में।
  4. कर्ण, तुरही जैसी श्रवण सहाय युक्तियों के कार्य करने में।

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प्रश्न 5.
ध्वनि का वेग या चाल v, आवृत्ति ν एवं तरंगदैर्घ्य 2 में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
∵ 1 कम्पन में तरंग चली दूरी = λ
ν कम्पन में तरंग द्वारा चली दूरी = νλ
चूँकि ν आवृत्ति है अत: यह 1 सेकण्ड में कम्पनी की संख्या है।
इसलिए 1 सेकण्ड में तरंग द्वारा चली गई दूरी = νλ
चूँकि 1 सेकण्ड में चली गई दूरी को वेग कहते हैं।
अतः v = νλ

प्रश्न 6.
यदि ध्वनि का वायु में वेग 340 m s-1 हो, तो
(a) 256 Hz आवृत्ति के लिए तरंगदैर्घ्य तथा
(b) 0.85 m तरंगदैर्घ्य के लिए आवृत्ति परिकलित कीजिए।
हल:
ज्ञात है:
ध्वनि का वेग = 340 m s-1
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 14
अत: अभीष्ट आवृत्ति = 400 Hz.

प्रश्न 7.
12 m x 12 m साइज के किसी पार्क के मध्य में कोई लड़की बैठी है। इस पार्क के दाहिनी ओर लगा हुआ भवन है तथा पार्क के बाँई ओर एक सड़क है। सड़क पर पटाखा फटने की ध्वनि होती है। क्या लड़की इस ध्वनि की प्रतिध्वनि सुन सकती है? अपना उत्तर स्पष्ट कीजिए।
हल:
भवन से टकराकर लड़की तक पहुँचने के लिए ध्वनि द्वारा चली कुल अतिरिक्त दूरी = 6 m + 6 m = 12 m.
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 15
चूँकि प्रतिध्वनि सुनने के लिए आवश्यक है कि मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के मध्य आवश्यक समय अन्तराल = 0.1 s हो। इसलिए प्रतिध्वनि निर्मित होने के लिए परावर्तित ध्वनि तरंग द्वारा चली गई आवश्यक न्यूनतम दूरी –
= ध्वनि वेग x समय अन्तराल
= 344 x 0.1 = 34.4 मीटर
इस प्रकरण में परावर्तित ध्वनि तरंग द्वारा चली गई कुल दूरी 12 मीटर है जो आवश्यक दूरी से बहुत कम है। अतः प्रतिध्वनि सुनाई नहीं देगी।

प्रश्न 8.
ध्वनि द्वारा उत्पन्न विक्षोभ के लिए दूरी के सन्दर्भ में दाब या घनत्व के परिवर्तनों को दर्शाने के लिए कोई वक्र खींचिए। इस वक्र पर संपीडन एवं विरलन की स्थितियाँ दर्शाइए। इस वक्र का उपयोग करके तरंगदैर्घ्य एवं आवर्तकाल की परिभाषा दीजिए।
हल:
दूरी के सन्दर्भ में दाब या घनत्व परिवर्तन दर्शाने के लिए ग्राफ:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 16
तरंगदैर्घ्य:
“दो क्रमागत सम्पीडनों अथवा दो क्रमागत विरलनों के बीच की दूरी तरंगदैर्घ्य होती है।”

आवर्तकाल:
“दो क्रमागत सम्पीडनों अथवा दो क्रमागत विरलनों के बीच की दूरी को तय करने में लगने वाला समय आवर्तकाल होता है।

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MP Board Class 9th Science Chapter 12 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ध्वनि संचरण की सचित्र व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
ध्वनि के संचरण की व्याख्या-ध्वनि के संचरण के लिए वायु अच्छा माध्यम है। जब कोई कम्पायमान वस्तु आगे की ओर कम्पन करती है तो वह अपने सामने की वायु को संपीडित करती है और इस
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 17
प्रकार एक उच्च वायुदाब का क्षेत्र उत्पन्न होता है। इस क्षेत्र को सम्पीडन (Compression) कहते हैं। यह सम्पीडन कम्पायमान वस्तु के आगे की ओर गति करता है। जब कम्पायमान वस्तु पीछे की ओर कम्पन करती है तो आगे की ओर एक निम्न दाब का क्षेत्र उत्पन्न होता है जिसे विरलन (Rarefaction) कहते हैं। ये संपीडन और विरलन ही तरंग बनाते हैं जो वायु (माध्यम) से होकर हमारे कानों तक पहुँचते हैं। इस प्रकार संचरण से माध्यम में दाब विभिन्नता उत्पन्न हो जाती है।

प्रश्न 2.
पराध्वनि (पराश्रव्य ध्वनि) के कोई चार अनुप्रयोग लिखिए। (2018, 19)
उत्तर:
पराध्वनि (पराश्रव्य ध्वनि) के अनुप्रयोग-पराध्वनि (पराश्रव्य ध्वनि) के प्रमुख अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं –

  1. विषम आकार के पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक अवयव आदि की सफाई करने में इनका उपयोग किया जाता है।
  2. चमगादड़ इनका उपयोग रात्रि विचरण में अपने को अवरोधों से टकराने से बचाने में करता है।
  3. अन्धकार में चमगादड़ एवं पॉरपॉइस मछलियाँ अपना भोजन या शिकार की खोज करने में इन ध्वनियों का उपयोग करती है।
  4. इन ध्वनियों का उपयोग समुद्र में डूब जहाजों, चट्टानों, पनडुब्बियों का पता लगाने में किया जाता है।
  5. समुद्र की गहराई ज्ञात करने में इनका उपयोग होता है।
  6. इन तरंगों का उपयोग हृदय रोगी की जाँच के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी नामक तकनीक में किया जाता है।
  7. अल्ट्रासोनोग्राफी का उपयोग यकृत, पित्ताशय, गुर्दे, गर्भाशय आदि की जाँच में तथा गर्भकाल में भ्रूण की जाँच करने में किया जाता है।
  8. चिमनियों की सफाई करने में इनका उपयोग होता है।
  9. जासूसी के कार्यों में इनका उपयोग गुप्त संकेत भेजने में किया जाता है।
  10. भवनों, पुलों, बाँधों, मशीनों, वैज्ञानिक उपकरणों के दोषों का पता लगाने में इनका उपयोग किया जाता है।
  11. बहुमूल्य धातुओं, रत्नों, जवाहरातों के दोषों का पता लगाने में इनका उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 3.
मानव कर्ण की संरचना एवं क्रियाविधि का सचित्र वर्णन कीजिए। (2019)
उत्तर:
मानव कर्ण की संरचना एवं क्रियाविधि-मानव कर्ण (कान) श्रवणेन्द्रिय है। इसको प्रमुखतः निम्नलिखित तीन भागों में विभाजित किया जाता है –

1. बाहरी कर्ण (External Ear):
बाहरी कर्ण को कर्ण पल्लव या पिन्ना (Ear Flap) कहते हैं जो परिवेश से ध्वनि को एकत्रित करने का कार्य करता है। एकत्रित ध्वनि श्रवण नलिका (Auditory Canal or Ear Canal) से होती हुई कर्ण पट्ट से टकराती है जिससे कर्णपट्ट (Diaphragm) कम्पन करने लगता है।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 18
2. मध्य कर्ण (Mid Ear):
मध्य कर्ण में तीन अस्थियाँ होती हैं जिन्हें मेलियस (Malleus), इन्कस (Incus) एवं स्टैप्स (Stapes) कहते हैं। ये अस्थियाँ ध्वनि कम्पनों को कई गुना बढ़ा देती है। मध्य कर्ण इन तरंगों को आन्तरिक कर्ण तक पहुँचा देता है।

3. आन्तरिक कर्ण (Internal Ear):
आन्तरिक कर्ण में कर्णावर्त (Cochlea) द्वारा दाब परिवर्तनों को विद्युत संकेतों से परिवर्तित कर दिया जाता है। ये संकेत श्रवण तन्त्रिकाओं (Auditory nerves) द्वारा मस्तिष्क को प्रेषित कर दिये जाते हैं। इस प्रकार मस्तिष्क के द्वारा ध्वनि का अनुभव होता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रकरणों को दो पृथक् आरेखों द्वारा ग्राफीय रूप में निरूपित कीजिए –
1. दो ध्वनि तरंगें जिनके आयाम समान परन्तु आवृत्तियाँ भिन्न हों।
2. दो ध्वनि तरंगें जिनकी आवृत्तियाँ समान परन्तु आयाम भिन्न हों।
3. दो ध्वनि तरंगें जिनके आयाम एवं तरंगदैर्घ्य दोनों भिन्न हों।
हल:
1. समान आयाम तथा भिन्न आवृत्ति:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 19
2. समान आवृत्ति तथा भिन्न आयाम:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 20
3. भिन्न आयाम एवं भिन्न तरंगदैर्घ्य (आवृत्ति):
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 12 ध्वनि image 20

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 14 वैभव एवं विलासिता का युग

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 14 वैभव एवं विलासिता का युग

MP Board Class 7th Social Science Chapter 14 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) अपने शासन काल के आरम्भ में जहाँगीर को किसके विद्रोह का सामना करना पड़ा?
(अ) खुसरो
(ब) खुर्रम
(स) सलीम
(द) शुजा।
उत्तर:
(अ) खुसरो

(2) ताजमहल का निर्माण कराया था –
(अ) अकबर ने
(ब) जहाँगीर ने
(स) शाहजहाँ ने
(द) औरंगजेब ने।
उत्तर:
(2) (स) शाहजहाँ ने।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) सर टॉमस रो और कैप्टन हाकिन्स ………. के शासनकाल में भारत आए थे।
(2) मयूर सिंहासन में ………….. जड़ा हुआ था।
(3) ………….. व्यापारी समुद्री डकैती किया करते थे।
(4) ………….. अहमदनगर राज्य का प्रसिद्ध योद्धा और कुशल प्रशासक था।
उत्तर:
(1) जहाँगीर
(2) कोहिनूर हीरा
(3) पुर्तगाली
(4) मलिक अम्बर।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 14 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) जहाँगीर ने गुरु अर्जुन देव का वध क्यों करवाया था ?
उत्तर:
गुरु अर्जुन देव से जहाँगीर क्रोधित था क्योंकि उन्होंने विद्रोह के समय खुसरो की आर्थिक सहायता की थी। जहाँगीर ने उन पर आर्थिक दण्ड लगाया जिसे देने से इंकार करने पर जहाँगीर ने उनका वध करा दिया।

(2) सामान्य जनता को सही न्याय मिल सके, इस उद्देश्य से जहाँगीर ने क्या व्यवस्था की थी ?
उत्तर:
सामान्य जनता को सही न्याय मिल सके, इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए जहाँगीर ने अपने राजमहल की दीवार पर सोने की जंजीर वाली घण्टी लगवा दी थी।

(3) नूरजहाँ का शासन पर क्या प्रभाव था ?
उत्तर:
नूरजहाँ सुन्दर और बुद्धिमान स्त्री थी। नूरजहाँ में राज्य का शासन चलाने की अपूर्व क्षमता थी। जहाँगीर उससे इतना अधिक प्रभावित था कि शासन सम्बन्धी महत्वपूर्ण कार्यों में उसकी सलाह लेने लगा। धीरे-धीरे शासन पर नूरजहाँ का प्रभाव बढ़ता ही चला गया। वह शासन में हस्तक्षेप करने लगी। उसने दरबार के नियम निर्धारित कर दिए। सिक्कों पर जहाँगीर के साथ उसका नाम भी लिखा जाने लगा।

(4) शाहजहाँ द्वारा निर्मित प्रमुख इमारतों के नाम लिखिए।
उत्तर:
शाहजहाँ द्वारा निर्मित प्रमुख इमारतें निम्न हैं –

  • दिल्ली का लाल किला तथा दीवान-ए-आम। दीवान-ए-खास।
  • दिल्ली की जामा मस्जिद।
  • आगरा का ताजमहल।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 14 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) जहाँगीर और शाहजहाँ के काल को वैभव एवं विलासिता का युग क्यों कहा जाता है ?
उत्तर:
जहाँगीर और शाहजहाँ के दरबार का जीवन अत्यन्त वैभवशाली एवं विलासितापूर्ण था। इस काल में जहाँगीर तथा शाहजहाँ ने साहित्य तथा कला के विकास को प्रोत्साहित किया। अनेक सुन्दर तथा वैभवशाली इमारतों का निर्माण हुआ। राजपरिवार तथा सामन्त वर्ग में विलासिता बढ़ी। इसलिए भारतीय इतिहास में। उनका शासनकाल वैभव एवं विलासिता का युग कहा जाता है।

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 2 दक्षिण भारत के राज्य (800 ई. से 1200 ई. तक)

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 2 दक्षिण भारत के राज्य (800 ई. से 1200 ई. तक)

MP Board Class 7th Social Science Chapter 2 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) पल्लव वंश के किस शासक ने राजा पुलकेशिन द्वितीय को हराकर वातापीकोंड’ की उपाधि धारण की थी?
(अ) महेन्द्र वर्मन
(ब) नरसिंह वर्मन प्रथम
(स) अपराजित वर्मन
(द) यशोवर्मन।
उत्तर:
(ब) नरसिंह वर्मन प्रथम

(2) राष्ट्रकूट वंश के किस शासक ने एलोरा की गुफा में कैलाश मंदिर का निर्माण करवाया ?
(अ) कृष्ण प्रथम
(ब) राजा ध्रुव
(स) कृष्ण द्वितीय
(द) राजेन्द्र प्रथम।
उत्तर:
(अ) कृष्ण प्रथम

(3) तमिल भाषा में रामायण के रचयिता कौन थे ?
(अ) वाल्मीकि
(ब) तुलसीदास
(स) कंबन
(द) आदि शंकराचार्य।
उत्तर:
(स) कंबन।

प्रश्न 2.
कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से सही शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) पल्लव राज्य की राजधानी ……………… थी। (तिरुअनंतपुरम, तंजौर, कांचीपुरम्)
(2) चोल शासकों द्वारा बनवाया गया राजराजेश्वर (वृहदेश्वर) मन्दिर …………….. में स्थित है। (तिरुअनंतपुरम, तंजौर, कांचीपुरम्)
(3) चोल प्रशासन में प्रांत को ……….. कहा जाता है। (उर, मंडलम्, नगरम्)
उत्तर:
(1) कांचीपुरम्
(2) तंजौर
(3) मंडलम्।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 2 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) उत्तर भारत व दक्षिण भारत के बीच निकटता बढ़ने का एक प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर:
उत्तर भारत व दक्षिण भारत के बीच निकटता बढ़ने का एक प्रमुख कारण दक्षिण भारत के विभिन्न शासकों द्वारा धार्मिक कर्मकाण्डों और अध्ययन – अध्यापन के लिए उत्तर भारत के ब्राह्मण वर्ग को दक्षिण भारत में बसने के लिए आमंत्रित करना था।

(2) ‘मुम्मादी चोल मंडलम’ चोल साम्राज्य के किस प्रांत का नाम था ?
उत्तर:
चोल साम्राज्य के केरल, मदुरै तथा श्रीलंका के उत्तरी भाग का नाम ‘मुम्मादी चोल मंडलम’ था।

(3) चोलकालीन स्थापत्य कला के दो प्रमुख उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
चोलकालीन स्थापत्य कला के उदाहरण

  • राजराजेश्वर मन्दिर के अहाते में ‘गोपुरम’ नामक विशाल प्रवेश द्वार का निर्माण कराना।
  • तंजौर में राजराजेश्वर मन्दिर तथा गंगेकोंड चोलपुरम में अनेक भव्य मन्दिरों का निर्माण कराना।

(4) राष्ट्रकूट वंश के किन्हीं तीन शासकों के नाम बताइए।
उत्तर:
राष्ट्रकूट वंश के तीन शासक कृष्ण प्रथम, राजा ध्रुव व अमोघवर्ष थे।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) चोल प्रशासन की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चोल प्रशासन की विशेषताएँ –

  1. चोल प्रशासन की प्रशासनिक व्यवस्था में राजा ही राज्य की सर्वोच्च शक्ति होता था। वह मन्त्रिपरिषद् की सहायता से शासन चलाता था।
  2. सम्पूर्ण साम्राज्य प्रान्तों (मंडलम) में विभक्त था तथा प्रान्त जिलों (वलनाडुओं) में विभक्त थे।
  3. प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम होते थे। प्रत्येक ग्राम की ग्राम सभा होती थी। ये ग्राम सभाएँ तीन भागों में विभक्त थीं।
    • उर – ये ग्राम के आम लोगों की सभा होती थी।
    • सभा या महासभा – इस सभा में विद्वान ब्राह्मण होते थे।
    • नगरम् – इसमें व्यापारी, दुकानदार और शिल्पी प्रमुख रूप से होते थे।
  4. गाँव की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अनेक समितियों का गठन किया जाता था, जो न्याय, शिक्षा, संचार साधन, जलाशय, धार्मिक समारोहों, मन्दिर तथा दान आदि की देखभाल का कार्य करती थीं।

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 13 मुगल साम्राज्य की स्थापना एवं उत्कर्ष

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 13 मुगल साम्राज्य की स्थापना एवं उत्कर्ष

MP Board Class 7th Social Science Chapter 13 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) पानीपत का प्रथम युद्ध किसके बीच हुआ था ?
(अ) अकबर और शेरशाह के बीच
(ब) बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच
(स) हुमायूँ और शेरशाह के बीच
(द) बैरम खाँ और हेम् के बीच।
उत्तर:
(ब) बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच

(2) मुगल साम्राज्य का संस्थापक किसे माना जाता
(अ) हुमायूँ
(ब) अकबर
(स) शेरशाह
(द) बाबर।
उत्तर:
(द) बाबर

(3) खानवा का युद्ध हुआ था
(अ) 1526 ई. में
(ब) 1556 ई. में
(स) 1527 ई. में
(द) 1529 ई. में।
उत्तर:
(स) 1527 ई. में।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(1) बाबर द्वारा लिखी आत्मकथा का नाम ……………. है।
(2) पानीपत का द्वितीय युद्ध सन् ………. में हुआ था।
(3) अकबर का संरक्षक ………. को बनाया गया था।
(4) शेरशाह के बचपन का नाम ………था।
(5) घाघरा का युद्ध बाबर व ………. के बीच हुआ था।
उत्तर:
(1) तुजुक-ए-बाबरी (बाबरनामा)
(2) 1556 ई.
(3) बैरमखौं
(4) फरीद
(5) अफगानों।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 13 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) शेरशाह द्वारा जीर्णोद्धार की गई सड़क का नाम लिखिए।
उत्तर:
शेरशाह ने कलकत्ता से पेशावर को जोड़ने वाले राजमार्ग ग्रॉन्ड ट्रंक रोड का जीर्णोद्धार कराया।

(2) हुमायूँ को पुत्ररत्न की प्राप्ति कब और कहाँ हुई ?
उत्तर:
हुमायूँ को पुत्ररत्न की प्राप्ति सन् 1542 ई. में अमरकोट (सिंध) के हिन्दू राजा वीरसाल के महल में हुई।

(3) हल्दीघाटी का युद्ध कब और किसके मध्य हुआ ?
उत्तर:
हल्दीघाटी का युद्ध सन् 1576 ई. में मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच हुआ।

(4) अकबर के राज्य में आय के प्रमुख साधन क्या थे?
उत्तर:
अकबर के राज्य में आय के दो प्रमुख साधन थे –

  • भूमि का लगान, और
  • व्यापार पर कर।

(5) अकबर के नौ रत्नों के नाम लिखिए।
उत्तर:
अकबर के नौ रत्न –

  • अबुल फजल (विद्वान व सलाहकार)
  • राजा मानसिंह (अनुभवी सेनापति)
  • राजा टोडरमल (प्रसिद्ध भूमि सुधारक)
  • तानसेन (संगीतकार)
  • बीरबल (चतुर विद्वान)
  • हकीम हुक्काम (राजवैद्य)
  • अब्दुल रहीम खानखाना (कवि)
  • फैजी (कवि और दार्शनिक), और
  • मुल्ला दो प्याजा (मनोरंजनकर्ता) थे।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 13 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) शेरशाह की शासन व्यवस्था का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शेरशाह की शासन व्यवस्था –
1. केन्द्रीय शासन-केन्द्रीय शासन का सबसे बड़ा अधिकारी स्वयं सम्राट था। उसकी सहायता के लिए अनेक अधिकारी व कर्मचारी होते थे। वह एक उदार शासक था। उसकी दण्ड व्यवस्था कठोर थी। हिन्दुओं के साथ उसका व्यवहार अच्छा था।

2. जिले का शासन – शासन की सुविधा के लिए शेरशाह ने अपने समस्त साम्राज्य को अनेक सरकारों (जिलों) में विभाजित किया, जिन्हें पुनः परगनों में विभाजित किया गया। सरकारों और परगनों के अधिकारियों को समय-समय पर स्थानान्तरित किया जाता था।

3. सैनिक प्रशासन – शेरशाह ने एक विशाल एवं शक्तिशाली सेना का संगठन किया जिसमें पैदल सिपाही, घुड़सवार, तोपखाना व हाथी चार विभाग थे। सैनिकों को नकद वेतन दिया जाता था तथा उनका हुलिया एक रजिस्टर में दर्ज किया जाता था। घोड़ों को दागने की प्रथा प्रचलित थी।

4. भूमि प्रबन्ध – शेरशाह ने भूमि की नाप कराकर उसे उपज के अनुसार बाँट दिया गया था। किसानों से उपज का चौथाई भाग लगान के रूप में वसूल किया जाता था।

5. न्यायव्यवस्था – सम्राट न्याय विभाग का सर्वोच्च अधिकारी था। वह न्याय में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करता था। साम्राज्य के विभिन्न भागों में काजियों की नियुक्ति की गई।

6. जनता की भलाई के कार्य-शिक्षा के क्षेत्र में उसने मदरसों का निर्माण कराया। उसने यात्रियों की सुविधा के लिए कुँओं और सरायों की व्यवस्था की। अनेक सड़कें बनवाईं तथा उनके किनारे छायादार वृक्ष लगवाए। आज की ग्राण्ड ट्रंक रोड (शेरशाह सूरी मार्ग) उसी की देन है।

(2) अकबर द्वारा निर्मित इमारतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अकबर के काल में फारसी और ईरानी शैलियों के समन्वय से भवन बनाए गए। अकबर ने इलाहाबाद, आगरा तथा लाहौर में किले बनवाए तथा आगरा के निकट फतेहपुर सीकरी नामक शहर बसाया तथा वहाँ सुन्दर इमारतें बनवाई गईं जिनमें दीवान-ए-आम, दीवान – ए – खास, जोधाबाई का महल, बीरबल का महल, जामा मस्जिद, शेख सलीम चिश्ती की दरगाह व बुलन्द दरवाजा उल्लेखनीय हैं।

(3) अकबर की राजपूत नीति को विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
अकबर ने साम्राज्य का विस्तार करने के प्रयत्नों से यह समझ लिया कि हिन्दुओं के सहयोग से ही साम्राज्य को स्थिरता प्राप्त होगी। अतः उसने राजपूतों की ओर मित्रता का हाथ बढ़ाया, उनसे वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किया। अपने अधीन राजपूत राजाओं से उसने उदारतापूर्ण व्यवहार किया और उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाई। राज्य के उच्च पदों पर राजपूतों की नियुक्ति की। अकबर की इस नीति से कुछ राजा आश्वस्त होकर मुगलों की सेवा में आ गए। परिणामस्वरूप मुगल शासन को अनेक वीर राजपूत मिल गए।

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 16 गरीबी, भारत के समक्ष एक आर्थिक चुनौती

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 16 गरीबी, भारत के समक्ष एक आर्थिक चुनौती

MP Board Class 9th Social Science Chapter 16 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 16 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
आय स्तर की तुलना का आधार निर्धारण होता है-
(i) निरपेक्ष गरीबी
(ii) सापेक्ष गरीबी
(iii) पूर्ण गरीबी,
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ii) सापेक्ष गरीबी

प्रश्न 2.
भारत में सर्वाधिक गरीबी जनसंख्या वाला राज्य है –
(i) मेघालय
(ii) असम
(iii) बिहार
(iv) मध्य प्रदेश।
उत्तर:
(iii) बिहार

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प्रश्न 3.
रोजगार गारण्टी कानून, 2005 में कम से कम कितने दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है? (2014, 16)
(i) 25 दिन
(ii) 50 दिन
(iii) 75 दिन
(iv) 100 दिन।
उत्तर:
(iv) 100 दिन।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. एक व्यक्ति द्वारा एक वित्तीय वर्ष में प्राप्त औसत आय ……… कहलाती है।
  2. …………. गरीबी से अभिप्राय आय की असमानता से है।
  3. भारतीय अर्थशास्त्री दाण्डेकर ने सर्वप्रथम …………. का विचार दिया।(2018)
  4. मध्य प्रदेश का सबसे गरीब जिला …………. है।
  5. भारत में गरीबी मापने हेतु सापेक्ष और ………… गरीबी है।

उत्तर:

  1. प्रति व्यक्ति आय
  2. सापेक्ष
  3. गरीबी रेखा
  4. झाबुआ
  5. निरपेक्ष।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
जनसंख्या वृद्धि गरीबी को बढ़ाती है। (2016)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
भारत का सबसे गरीब राज्य पंजाब है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
रोजगार गारण्टी अधिनियम के अन्तर्गत 5 किलो अनाज एवं न्यूनतम 20 प्रतिशत मजदूरी दी जाती है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
भारत में शहरी क्षेत्र में 2,100 कैलोरी प्रतिदिन का पोषण प्राप्त न करने वाला व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे माना जाता है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
2005 की रिपोर्ट के अनुसार भारत का सबसे गरीब जिला झाबुआ, मध्य प्रदेश है।
उत्तर:
असत्य

MP Board Class 9th Social Science Chapter 16 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत के समक्ष उपस्थित प्रमुख आर्थिक समस्याएँ कौन-कौन सी हैं? (2011, 14)
उत्तर:
भारत के समक्ष गरीबी, तीव्र गति से बढ़ती हुई जनसंख्या, बेरोजगारी, तेजी से बढ़ती हुई कीमतें अर्थात् महँगाई की समस्या, क्षेत्रीय असन्तुलन एवं बढ़ती हुई आर्थिक असमानताएँ, बुनियादी सुविधाओं की कमी तथा खाद्यान्न असुरक्षा आदि प्रमुख समस्याएँ हैं।

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प्रश्न 2.
गरीबी रेखा से क्या आशय है? (2016, 18)
उत्तर:
भारतीय योजना आयोग के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2400 कैलोरी तथा शहरी क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2100 कैलोरी निर्धारित की गयी है। कोई भी व्यक्ति जो इससे कम पा रहा है, उसे गरीबी रेखा से नीचे माना गया है।

प्रश्न 3.
भारत में सर्वाधिक गरीब जनसंख्या वाले तीन राज्यों के नाम लिखिए। (2014)
उत्तर:
भारत में बिहार, ओडिशा व सिक्किम राज्य में गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वालों की संख्या सबसे अधिक है।

प्रश्न 4.
गरीबी के लिए उत्तरदायी सामाजिक कारण लिखिए। (2010, 13, 16)
उत्तर:
भारत में विद्यमान सामाजिक व्यवस्थाएँ गरीबी का कारण बनी रही हैं। इसमें जन्म, मरण और शादी इत्यादि पर अनावश्यक व्यय और उनके फलस्वरूप ऋण का भार गरीबों को निरन्तर गरीब बनाये रखता है।

भारत में व्याप्त भाग्यवादी दृष्टिकोण में गरीबी को भी किस्मत का खेल’ मान लिया जाता है और उससे बाहर निकलने के लिए अधिक सक्रिय प्रयासों पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 16 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या वृद्धि किस प्रकार गरीबी बढ़ाती है? समझाइए। (2009, 13, 15)
अथवा
जनसंख्या वृद्धि किस प्रकार गरीबी को बढ़ाती है? भारत के सर्वाधिक गरीब जनसंख्या वाले तीन राज्यों के नाम लिखिए। (2008)
उत्तर:
जनसंख्या में तीव्र गति से होने वाली वृद्धि भी गरीबी की स्थिति को गम्भीर बनाने में सहायक होती है। जनसंख्या वृद्धि से गरीबों के उपभोग स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो जाती है। इनकी आय का लगभग सम्पूर्ण भाग परिवार के पालन-पोषण पर व्यय हो जाता है और इस प्रकार बचत और निवेश के लिए इनके पास कुछ नहीं बचता। इससे पूँजी निर्माण और आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ जाती है। परिणामस्वरूप गरीबी की समस्या और उलझ जाती है। सर्वाधिक गरीब जनसंख्या वाले तीन राज्यों के नाम हैं-बिहार, उड़ीसा, सिक्किम।

प्रश्न 2.
विगत वर्षों में भारत में गरीबी की स्थिति में क्या परिवर्तन आया है? लिखिए।
उत्तर:
भारत में गरीबी की स्थिति-भारत में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली जनसंख्या में निरन्तर कमी आई है। वर्ष 1973-74 में 54.9 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रहे थे। वर्ष 1983 में गरीबी दर घटकर 44.8 प्रतिशत तथा 1993-94 में 36 प्रतिशत एवं 1999-2000 में देश में गरीबी की दर 26:10 प्रतिशत हो गयी। वर्ष 2007 में 19.3 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है।
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 16 गरीबी, भारत के समक्ष एक आर्थिक चुनौती 1

भारत में लगभग 22 करोड़ लोग, गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करते हैं, लेकिन गरीबों की संख्या की तालिका को देखने से पता चलता है कि भारत में गरीबी का प्रतिशत निरन्तर घटता जा रहा है।

प्रश्न 3.
भारत में राज्यवार गरीबी की क्या स्थिति है? समझाइए। (2016)
उत्तर:
भारत में राज्यवार गरीबी :
भारत में विभिन्न राज्यों में गरीबी की व्यापकता समान नहीं है। योजना आयोग द्वारा सितम्बर 2005 को जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत का सबसे गरीब जिला डांग (गुजरात) है। दूसरे स्थान पर राजस्थान का बाँसवाड़ा जिला व तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश का झाबुआ जिला है। भिन्न-भिन्न राज्यों में गरीबी की 2011-12 की अनुमानित स्थिति को निम्न तालिका में दर्शाया गया है –

प्रमुख राज्यों में गरीबी रेखा के नीचे जनसंख्या प्रतिशत

राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश 2011-12
आन्ध्र प्रदेश 9.20
बिहार 33.7
गुजरात 16.6
हरियाणा 11.2
कर्नाटक 20.9
केरल 7.1
मध्य प्रदेश 31.7
महाराष्ट्र 17.4
ओडिशा 32.6
पंजाब 8.3
राजस्थान 14.7
तमिलनाडु 11.3
उत्तर प्रदेश 29.4
प. बंगाल 20.0
सम्पूर्ण भारत 21.9

उपर्युक्त तालिका के अनुसार भारत में बिहार, ओडिशा व मध्य प्रदेश राज्य में गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वालों की संख्या सबसे अधिक है।

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प्रश्न 4.
रोजगार गारण्टी कार्यक्रम, 2005 की प्रमुख विशेषताएँ बताइए। (2009, 11, 12, 15, 18)
उत्तर:
रोजगार गारण्टी कार्यक्रम, 2005 की प्रमुख विशेषताएँ –

  1. यह अधिनियम केवल एक कार्यक्रम ही नहीं है, अपितु एक कानून है जिसके अन्तर्गत रोजगार हासिल करने की कानूनी गारण्टी दी गई है।
  2. इसके नियोजन तथा क्रियान्वयन में पंचायती राज संस्थाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी।
  3. इसका प्रमुख उद्देश्य हर वर्ष प्रत्येक ग्रामीण एवं शहरी गरीब तथा निम्न मध्यम वर्ग के परिवार के एक वयस्क व्यक्ति को कम से कम 100 दिन रोजगार उपलब्ध कराना है।
  4. इसके अन्तर्गत माँग करने पर 15 दिन के अन्दर कार्य उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
  5. यदि निश्चित समय में काम उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, तो सम्बन्धित व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता प्रदान किया जाएगा।

प्रश्न 5.
गरीबी को मापने हेतु कौन से मानदण्ड हैं? बताइए। (2008, 09, 16)
अथवा
निरपेक्ष गरीबी और सापेक्ष गरीबी में क्या अन्तर है? (2011, 12)
अथवा
गरीबी की रेखा से क्या आशय है? गरीबी को मापने हेतु कौन से मापदण्ड हैं? (2008, 09)
उत्तर:
गरीबी की माप-सामान्यतः गरीबी को मापने के लिए दो मानदण्डों का प्रयोग किया जाता है। प्रथम-निरपेक्ष गरीबी; दूसरी-सापेक्ष गरीबी।

  • निरपेक्ष गरीबी :
    निरपेक्ष निर्धनता से आशय किसी राष्ट्र की आर्थिक अवस्था को ध्यान में रखते हुए निर्धनता के माप से है। यह सामान्य जीवन की आवश्यकताएँ जुटाने के लिए संसाधनों के अभाव को इंगित करता है। अन्य शब्दों में मानव की आधारभूत आवयकताओं-खाना, कपड़ा, सामान्य निवास, स्वास्थ्य सहायता आदि की पूर्ति हेतु पर्याप्त वस्तुओं एवं सेवाओं को जुटा पाने की असमर्थता से है।
  • सापेक्ष गरीबी :
    सापेक्ष गरीबी आय की असमानताओं के आधार पर पारिभाषित की जाती है। सापेक्ष गरीबी अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक असमानता या क्षेत्रीय आर्थिक असमानताओं का बोध कराती है। इसका आकलन समय-समय पर (सामान्यतः प्रतिदर्श हर पाँच वर्ष पर) भारतवर्ष में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली जनसंख्या का राष्ट्रीय सर्वेक्षण संगठन (एन. एस. ओ) द्वारा करवाया जाता है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 16 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में गरीबी के लिए उत्तरदायी कारण कौन से हैं? (2008)
अथवा
भारत में निर्धनता के क्या कारण हैं? (2018)
उत्तर:
भारत में गरीबी के कारण-भारत में गरीबी के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारण निम्नलिखित
(1) तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या :
इस समय जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। बढ़ती हुई जनसंख्या का अर्थ है, वस्तुओं की माँग में अपार वृद्धि होना। देश की सम्पत्ति का एक बड़ा भाग अपनी जनसंख्या के पालन में व्यय हो जाता है, जिससे विकास कार्यों को पूँजी नहीं मिल पाती है।

(2) पूँजी निर्माण का अभाव :
पूँजी निर्माण आर्थिक विकास की आधारशिला है, परन्तु पूँजी निर्माण की दर भारत में अपेक्षाकृत कम है।

(3) बेरोजगारी :
निर्धनता का एक प्रमुख कारण बेरोजगारी है। देश में बेरोजगारी की समस्या व्यापक और भीषण है। एक अनुमान के अनुसार भारत में लगभग 5 करोड़ लोग बेरोजगार हैं। बेरोजगारों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है, जो निर्धनता के लिए एक उत्तरदायी कारण है।

(4) कीमत स्तर में वृद्धि :
कीमतों में वृद्धि परिणामस्वरूप मुद्रा की क्रय-शक्ति कम हो जाने के कारण वास्तविक आय कम हो जाती है जबकि भारत में आय वृद्धि की दर कीमत वृद्धि दर से कम रही है। अतः लोगों के पास उपलब्ध क्रय-शक्ति का ह्रास हुआ है।

(5) असमान वितरण :
उत्पादन के साधनों तथा आय का असमान वितरण भी निर्धनता के लिए उत्तरदायी है। सम्पत्ति का चन्द हाथों में केन्द्रीयकरण हो गया है। स्वभावतः इन्हें अपार आय प्राप्त होती है जबकि अधिकांश लोगों को गरीबी की रेखा से नीचे रहना पड़ता है।

(6) प्रति व्यक्ति निम्न आय ;
भारत में प्रति व्यक्ति आय कम होने से यहाँ गरीबी व्याप्त है। विश्व के विकसित देशों की तुलना में प्रति व्यक्ति आय का स्तर भारत में बहुत कम है। विश्व बैंक की वर्ष 2014 की रिपोर्ट के अनुसार भारत की प्रति व्यक्ति आय मात्र 5,497 डॉलर है, जबकि भारत की तुलना में प्रति व्यक्ति आय अमेरिका में 52, 947, जर्मनी में 43,919 तथा ब्राजील में 15,175 डालर है।

(7) दोषपूर्ण विकास :
रणनीति-भारत में निर्धनता तथा आय की विषमताओं के लिए विकास की दोषपूर्ण रणनीति भी बहुत सीमा तक उत्तरदायी है क्योंकि अर्थव्यवस्था के विकास का लाभ कुछ व्यक्तियों तक ही सीमित हो गया है। परिणामस्वरूप निर्धन और निर्धन हो रहा है और अमीर और अधिक अमीर हो रहे हैं। शिक्षित व सुविधा सम्पन्न व्यक्तियों के पास आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हैं, जबकि धनाभाव के कारण निर्धन व्यक्ति उच्च व तकनीक शिक्षा भी प्राप्त नहीं कर पाते हैं। शासन द्वारा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये गये हैं लेकिन रोजगार के अवसरों में बहुत ही धीमी वृद्धि हुई है।

(8) सामाजिक कारण :
भारत में प्रचलित सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाएँ निर्धनता बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। समाज में व्याप्त जाति प्रथा, उत्तराधिकार का नियम, निरक्षरता, भाग्यवादिता तथा धार्मिक रूढ़िवादिता, लोगों को नये विचार तथा तकनीकों को अपनाने से रोकता है। सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने और झूठी प्रतिष्ठा को प्राप्त करने हेतु लोग फिलूजखर्ची करते हैं और निर्धन बने रहते हैं।

प्रश्न 2.
भारत में गरीबी निवारण के प्रमुख कार्यक्रमों को संक्षेप में लिखिए। (2009)
अथवा
‘स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार’ को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
अन्त्योदय अन्न योजना क्या है? स्पष्ट कीजिए। (2009, 15, 17)
अथवा
भारत में गरीबी निवारण के कौन-कौन से प्रमुख कार्यक्रम हैं? (कोई चार) (2010, 17)
अथवा
जनश्री योजना क्या है? (2018) [संकेतः जनश्री योजना शीर्षक देखें।]
उत्तर:
भारत में गरीबी निवारण के प्रमुख कार्यक्रम-गरीबी निवारण के प्रमुख कार्यक्रम निम्नलिखित
(1) प्रधानमन्त्री रोजगार योजना :
यह योजना 2 अक्टूबर, 1993 से प्रारम्भ की गई। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों तथा छोटे शहरों के 18 से 35 वर्ष के शिक्षित बेरोजगारों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

(2) ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम :
अप्रैल 1995 में यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों तथा छोटे कस्बों में परियोजनाएँ लगाने और रोजगार के अवसर उत्पन्न करने के लिए आरम्भ की गई।

(3) स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY) :
यह योजना 1 अप्रैल, 1999 को आरम्भ की गई थी। इस योजना में पूर्व की अनेक स्वरोजगार तथा सम्बद्ध कार्यक्रमों की योजनाओं; जैसे IRDP, TRYSEM, DWACRA आदि का विलय कर दिया गया है। इस योजना में ग्रामीण क्षेत्र के निर्धनों को रोजगार देने के उद्देश्य से सूक्ष्म तथा लघु उद्योग की स्थापना की जाती है। इन उद्योगों में कार्य करने वाले लोगों को स्वरोजगारी कहा जाता है। इस योजना का प्रारम्भिक लक्ष्य सहायता प्राप्त परिवारों को 3 वर्ष की अवधि में गरीबी की रेखा से ऊपर उठाना था।

(4) जवाहर ग्राम समृद्धि योजना (1999) :
यह योजना भी सन् 1999 में पुरानी जवाहर रोजगार योजना को पुनर्गठित करके आरम्भ की गई थी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों का जीवन-स्तर सुधारना तथा उन्हें लाभप्रद रोजगार के अवसर प्रदान करना है। इसके अन्तर्गत सरकार द्वारा ग्रामीण गरीबों को ग्राम पंचायतों द्वारा शुरू किये निर्माण कार्यों अथवा परियोजना में रोजगार दिया जाता है।

(5) सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (एस. जी. आर. वाई.) :
सुनिश्चित रोजगार योजना और जवाहर ग्राम समृद्धि योजना, दोनों का 25 सितम्बर, 2001 को सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में विलय कर दिया गया। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्यान्न सुरक्षा के साथ-साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए स्थायी सामुदायिक परिसम्पत्तियों का निर्माण करना है। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों विशेषकर महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व खतरनाक व्यवसायों से हटाये गये बच्चों के अभिभावकों को विशेष सुरक्षा प्रदान करना है।

(6) स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना :
स्वतन्त्रता के स्वर्ण जयन्ती वर्ष में केन्द्र सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों में निर्धनता निवारण की एक नई योजना 1 दिसम्बर, 1997 से लागू की गई। इस योजना का उद्देश्य शहरी निर्धनों को स्वरोजगार उपक्रम स्थापित करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना तथा सवेतन रोजगार सृजन हेतु उत्पादक परिसम्पत्तियों का निर्माण करना है।

(7) जनश्री योजना :
निर्धन वर्ग को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से अगस्त 2000 में इस योजना को प्रारम्भ किया गया। योजना में लाभार्थी को स्वाभाविक मृत्यु की दशा में 20,000 रुपये, दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर 50,000 रुपये तथा आंशिक विकलांगता पर 25,000 रुपये दिये जाते हैं।

(8) अंत्योदय अन्न योजना :
यह योजना 25 दिसम्बर, 2000 को प्रारम्भ की गई। इस योजना का उद्देश्य लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत शामिल निर्धनता रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वालों को खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। इस योजना में देश के 1.50 करोड़ निर्धन परिवारों को प्रतिमाह 35 किग्रा. अनाज विशेष रियायती कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है।

(9) रोजगार गारण्टी अधिनियम, 2005 :
2 फरवरी, 2006 से प्रारम्भ इस योजना के अन्तर्गत देश के 200 चयनित जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार के वयस्क सदस्य को वर्ष में न्यूनतम 100 दिन अकुशल श्रम वाले रोजगार प्राप्त करने का कानूनी अधिकार है। योजना का 33 प्रतिशत लाभ महिलाओं को मिलेगा। यह योजना रोजगार के अन्य कार्यक्रमों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि यह मात्र एक योजना नहीं, बल्कि एक कानून है जो रोजगार की वैधानिक गारण्टी प्रदान करता है। योजना के अन्तर्गत रोजगार के इच्छुक एवं पात्र व्यक्ति द्वारा पंजीकरण कराने के 15 दिन के भीतर रोजगार नहीं दिये जाने पर निर्धारित दर से बेरोजगारी भत्ता केन्द्र सरकार द्वारा दिये जाने का प्रावधान है।

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प्रश्न 3.
“भारत एक सम्पन्न देश है, किन्तु इसके निवासी निर्धन हैं।” इस कथन को समझाइए। (2008, 09)
उत्तर:
भारत एक धनी देश है, परन्तु यहाँ के निवासी निर्धन हैं –
भारत में प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों की प्रचुर उपलब्धता एवं समृद्धता इस तथ्य को स्पष्ट करती है कि भारत एक धनी देश है, जबकि देश की अधिकांश जनता की निर्धनता और निम्न जीवन-स्तर की स्थिति इस बात का संकेत है कि भारतवासी निर्धन हैं। अतः इस विरोधाभास को स्पष्ट करने के लिए यह आवश्यक है कि कथन के दोनों पहलुओं-प्रथम भारत एक धनी देश है तथा द्वितीय यहाँ के निवासी निर्धन हैं-का अध्ययन करना होगा।

भारत एक धनी देश है :
प्राचीन काल से ही भारत की गणना एक धनी देश के रूप में होती रही है। प्राकृतिक एवं अन्य संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता के आधार पर इस देश को ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था। भारत को धनी देश कहने के मुख्य आधार निम्नलिखित हैं –

(1) भौगोलिक स्थिति :
देश के उत्तर में स्थित हिमालय पर्वत की उच्च शृंखलाएँ उत्तरी ठण्डी हवाओं से देश की रक्षा करती हैं तथा हिन्द महासागर से चलने वाली जलवायु हवाओं को रोककर देश में वर्षा कराने से सहायक होती हैं। हिन्द महासागर पर स्थित होने के कारण भारत अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों का संगम है। वायु मार्ग की दृष्टि से भारत की स्थिति काफी लाभप्रद है। यह विश्व का सातवाँ बड़ा देश है जिसका क्षेत्र 32.87 लाख वर्ग किलोमीटर है जो विश्व के क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत हैं।

(2) जलवायु :
जलवायु की विषमताओं के कारण भी भारत एक धनी देश है। ब्लैण्ड फोर्ड के शब्दों में-“सम्पूर्ण विश्व में जलवायु की इतनी अधिक विषमताएँ कहीं नहीं मिलती जितनी की भारत में। भारत में अनेक प्रकार की वनस्पति, पशु तथा खनिज सम्पत्तियाँ मिलती हैं।” मार्सडेन ने लिखा है कि “विश्व की समस्त जलवायु भारत में मिल जाती है।”

(3) जल भण्डार :
भारत में जल के विपुल स्रोत हैं। यहाँ बारहमासी बहने वाली नदियाँ हैं जिनमें अपार जल है। इस जल को रोककर फसलों की सिंचाई तथा विद्युत् उत्पादन के काम में लाया जा सकता है। इस विषय में किये गये प्रयास से भारत में सिंचाई की सुविधाओं में वृद्धि हुई है, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ा है। विद्युत् उत्पादन में वृद्धि से औद्योगीकरण में सहायता मिली है।

(4) वन सम्पदा :
भारत के प्राकृतिक साधनों में वन सम्पदा का महत्त्वपूर्ण स्थान है। भारत में वनों का क्षेत्रफल लगभग 6.70 करोड़ हेक्टेअर है। जलवायु और प्राकृतिक रचना के अनुसार देश में विभिन्न प्रकार के वन पाये जाते हैं। इन वनों से हमें चीड़, देवदार, शीशम, साल, सागौन, आबनूस आदि की उपयोगी लकड़ियाँ प्राप्त होती हैं जिनका उपयोग इमारती सामान, फर्नीचर, रेलों के स्लीपर आदि बनाने में किया जाता है। इसके अतिरिक्त कई महत्त्वपूर्ण उद्योगों; जैसे-कागज या दियासलाई उद्योग आदि के लिए कच्चा माल भी हमें वनों से ही प्राप्त होता है।

(5) अपार जन-शक्ति :
जन-शक्ति की दृष्टि से भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है। क्योंकि भारत में जनसंख्या 121.07 करोड़ है। यदि इस अपार जन-शक्ति को काम में लाया जाए तो देश उन्नति के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच सकता है और राष्ट्र के भाग्य को बदल सकता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि, “प्राकृतिक साधनों की दृष्टि से भारत एक धनी देश है, परन्तु यहाँ के निवासी निर्धन हैं।” भारत में प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक आय विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है। नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 19:3 प्रतिशत जनसंख्या निर्धनता की रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रही है। वर्तमान में 5 करोड़ व्यक्ति बेरोजगार हैं। बेरोजगारी तथा कम आय के कारण भारतीय लोगों का जीवन स्तर भी बहुत नीचा है।

भारतवासी निर्धन हैं –

1. तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या :
इस समय जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। बढ़ती हुई जनसंख्या का अर्थ है, वस्तुओं की माँग में अपार वृद्धि होना। देश की सम्पत्ति का एक बड़ा भाग अपनी जनसंख्या के पालन में व्यय हो जाता है, जिससे विकास कार्यों को पूँजी नहीं मिल पाती है।

2. पूँजी निर्माण का अभाव :
पूँजी निर्माण आर्थिक विकास की आधारशिला है, परन्तु पूँजी निर्माण की दर भारत में अपेक्षाकृत कम है।

3. बेरोजगारी :
निर्धनता का एक प्रमुख कारण बेरोजगारी है। देश में बेरोजगारी की समस्या व्यापक और भीषण है। एक अनुमान के अनुसार भारत में लगभग 5 करोड़ लोग बेरोजगार हैं। बेरोजगारों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है, जो निर्धनता के लिए एक उत्तरदायी कारण है।

4. कीमत स्तर में वृद्धि :
कीमतों में वृद्धि परिणामस्वरूप मुद्रा की क्रय-शक्ति कम हो जाने के कारण वास्तविक आय कम हो जाती है जबकि भारत में आय वृद्धि की दर कीमत वृद्धि दर से कम रही है। अतः लोगों के पास उपलब्ध क्रय-शक्ति का ह्रास हुआ है।

5. असमान वितरण :
उत्पादन के साधनों तथा आय का असमान वितरण भी निर्धनता के लिए उत्तरदायी है। सम्पत्ति का चन्द हाथों में केन्द्रीयकरण हो गया है। स्वभावतः इन्हें अपार आय प्राप्त होती है जबकि अधिकांश लोगों को गरीबी की रेखा से नीचे रहना पड़ता है।

6. प्रति व्यक्ति निम्न आय ;
भारत में प्रति व्यक्ति आय कम होने से यहाँ गरीबी व्याप्त है। विश्व के विकसित देशों की तुलना में प्रति व्यक्ति आय का स्तर भारत में बहुत कम है। विश्व बैंक की वर्ष 2014 की रिपोर्ट के अनुसार भारत की प्रति व्यक्ति आय मात्र 5,497 डॉलर है, जबकि भारत की तुलना में प्रति व्यक्ति आय अमेरिका में 52, 947, जर्मनी में 43,919 तथा ब्राजील में 15,175 डालर है।

7. दोषपूर्ण विकास :
रणनीति-भारत में निर्धनता तथा आय की विषमताओं के लिए विकास की दोषपूर्ण रणनीति भी बहुत सीमा तक उत्तरदायी है क्योंकि अर्थव्यवस्था के विकास का लाभ कुछ व्यक्तियों तक ही सीमित हो गया है। परिणामस्वरूप निर्धन और निर्धन हो रहा है और अमीर और अधिक अमीर हो रहे हैं। शिक्षित व सुविधा सम्पन्न व्यक्तियों के पास आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हैं, जबकि धनाभाव के कारण निर्धन व्यक्ति उच्च व तकनीक शिक्षा भी प्राप्त नहीं कर पाते हैं। शासन द्वारा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये गये हैं लेकिन रोजगार के अवसरों में बहुत ही धीमी वृद्धि हुई है।

8. सामाजिक कारण :
भारत में प्रचलित सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाएँ निर्धनता बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। समाज में व्याप्त जाति प्रथा, उत्तराधिकार का नियम, निरक्षरता, भाग्यवादिता तथा धार्मिक रूढ़िवादिता, लोगों को नये विचार तथा तकनीकों को अपनाने से रोकता है। सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने और झूठी प्रतिष्ठा को प्राप्त करने हेतु लोग फिलूजखर्ची करते हैं और निर्धन बने रहते हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 16 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 16 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत किस प्रकार की अर्थव्यवस्था वाला राष्ट्र है?
(i) विकसित अर्थव्यवस्था
(ii) विकासशील अर्थव्यवस्था
(iii) अल्पविकसित अर्थव्यवस्था
(iv) नियन्त्रित अर्थव्यवस्था।
उत्तर:
(ii) विकासशील अर्थव्यवस्था

प्रश्न 2.
ग्रामीण भारत में निवास कर रहे एक व्यक्ति को निर्धन कहा जाएगा यदि इसका दैनिक कैलोरी उपभोग निम्नलिखित से कम है
(i) 2600 कैलोरी
(ii) 2500 कैलोरी
(iii) 2400 कैलोरी
(iv) 2800 कैलोरी।
उत्तर:
(iii) 2400 कैलोरी

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प्रश्न 3.
भारत में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली जनसंख्या का आंकलन किसके द्वारा किया जाता है?
(i) भारतीय रिजर्व बैंक
(ii) केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन
(iii) राष्ट्रीय सर्वेक्षण संगठन
(iv) वित्त मन्त्रालय।
उत्तर:
(iii) राष्ट्रीय सर्वेक्षण संगठन

प्रश्न 4.
भारत का सबसे गरीब जिला है
(i) बाँसवाड़ा
(ii) झाबुआ
(iii) डांग
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(iii) डांग

प्रश्न 5.
नवीनतम आँकड़ों के अनुसार कुल जनसंख्या का कितना भाग गरीबी रेखा के नीचे रहता है?
(i) 24 प्रतिशत
(ii) 22.5 प्रतिशत
(iii) 20.8 प्रतिशत
(iv) 21.8 प्रतिशत।
उत्तर:
(iv) 21.8 प्रतिशत।

प्रश्न 6.
‘गरीबी रेखा’ का विचार सर्वप्रथम दिया
(i) लकड़वाला
(ii) दाण्डेकर
(iii) एम. एन. राय
(iv) एम. विश्वेश्वरैया।
उत्तर:
(ii) दाण्डेकर

प्रश्न 7.
प्रधानमन्त्री रोजगार योजना प्रारम्भ हुई
(i) 2 अक्टूबर, 1993
(ii) 2 अक्टूबर 1995
(iii) 2 अक्टूबर, 1997
(iv) 2 अक्टूबर, 2000
उत्तर:
(i) 2 अक्टूबर, 1993

सत्य/ असत्य

प्रश्न 1.
अन्त्योदय अन्न योजना के अन्तर्गत 5 किग्रा. खाद्यान्न दिया जाता है। (2008)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 2.
भारतवर्ष में अर्थव्यवस्था मूलतः कृषि पर आधारित है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
भारत की भौगोलिक स्थिति विकास की दृष्टि से अनुकूल नहीं है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
पूँजी निर्माण आर्थिक विकास की आधारशिला है। (2015)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
भारत का सबसे गरीब राज्य पंजाब है। (2017, 18)
उत्तर:
असत्य।

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सही जोड़ी मिलाइए

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 16 गरीबी, भारत के समक्ष एक आर्थिक चुनौती - 1
उत्तर:

  1. →(ङ)
  2. →(घ)
  3. →(ख)
  4. →(ग)
  5. →(क)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
व्यापार चक्र की मन्दी के समय उत्पन्न बेरोजगारी क्या कहलाती है?
उत्तर:
चक्रीय बेरोजगारी

प्रश्न 2.
भारत का सबसे गरीब जिला कौन-सा है?
उत्तर:
डांग

प्रश्न 3.
ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम कब प्रारम्भ किया गया?
उत्तर:
अप्रैल 1995

प्रश्न 4.
किसी फर्म के उत्पादन के मूल्य तथा अन्य फर्मों से खरीदे गये आदानों की लागत का अन्तर कहलाता है।
उत्तर:
मूल्य वृद्धि

प्रश्न 5.
प्रकृति द्वारा मनुष्य को प्रदान किये गये वे निःशुल्क उपहार जो आर्थिक विकास में सहायक होते हैं।
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधन।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 16 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अल्प रोजगार से आप क्या समझते हैं? (2010)
उत्तर:
अल्प रोजगार-जब व्यक्ति अपनी कार्यक्षमता के अनुसार कार्य न पाकर अपनी योग्यता एवं क्षमता से कम स्तर वाला कार्य करता है, तब अल्प रोजगार की श्रेणी में आता है।

प्रश्न 2.
योजना आयोग की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश का सबसे गरीब जिला कौन-सा है?
उत्तर:
मध्य प्रदेश का झाबुआ सबसे गरीब जिला है।

प्रश्न 3.
नवीनतम आँकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश की कुल जनसंख्या का कितना भाग गरीबी रेखा के नीचे रहता है?
उत्तर:
मध्य प्रदेश का 29.52 प्रतिशत भाग गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रहा है।

प्रश्न 4.
भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में किस प्रकार की बेरोजगारी विद्यमान है?
उत्तर:
भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में अल्प रोजगार के साथ अदृश्य बेरोजगारी विद्यमान है।

प्रश्न 5.
अदृश्य बेरोजगारी से आप क्या समझते हैं? (2015)
उत्तर:
अदृश्य बेरोजगारी-कृषि क्षेत्र में पाई जाने वाली यह बेरोजगारी उस स्थिति का सूचक है जब श्रमिकों की सीमान्त उत्पादकता शून्य होती है, अर्थात् इन व्यक्तियों को कृषि क्षेत्रों से हटाकर अन्यत्र भेजे जाने पर कृषि क्षेत्र की उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

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प्रश्न 6.
मुद्रा प्रसार क्या है?
उत्तर:
मुद्रा प्रसार या मुद्रा स्फीति वह अवस्था है, जिसमें मुद्रा का मूल्य गिर जाता है और कीमतें बढ़ जाती हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 16 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गरीबी से क्या आशय है? (2010)
उत्तर:
गरीबी का अर्थ-धन का अभाव निर्धनता को जन्म देता है। केवल कुछ व्यक्तियों की निम्न आर्थिक स्थिति ही गरीबी को जन्म नहीं देती है, बल्कि किसी समाज में व्यक्तियों का बहुत बड़ा भाग जब जीवन की न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ रहता है, तब इस स्थिति को ‘गरीबी’ के नाम से जाना जाता है। आशय यह है कि समाज में अधिकांश व्यक्तियों को रहने, खाने और पहनने की अति आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध न हों तो इस प्रकार की स्थिति को ‘गरीबी’ के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 2.
गरीबी की पहचान किस प्रकार कर सकते हैं?
उत्तर:
गरीबी की पहचान तो बहुत सरल है, किन्तु इसको परिभाषित करना कठिन है। जब हम अपने आस-पास टूटे झोंपड़ों एवं झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों, रेलवे स्टेशनों और चौराहों पर भीख माँगते भिखारियों, खेतों में काम करने वाले श्रमिकों को देखते हैं तो उनके अभावग्रस्त जीवन को देखकर गरीबी को पहचान सकते हैं। गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले व्यक्ति ‘गरीबी’ की परिभाषा में आते हैं। ‘गरीबी रेखा’ से आशय नागरिकों के उस न्यूनतम आर्थिक स्तर से है, जो उसके जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक होता है।

प्रश्न 3.
अन्नपूर्णा योजना क्या है? संक्षिप्त विवरण दीजिए। (2009)
उत्तर:
अन्नपूर्णा योजना-यह योजना ग्रामीण विकास मन्त्रालय द्वारा 1 अप्रैल, 2000 से प्रारम्भ की गई है। इसके अन्तर्गत 65 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के ऐसे असाध्य वृद्ध नागरिक आते हैं, जो राष्ट्रीय पेंशन योजना के पात्र तो हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इस योजना में प्रति व्यक्ति प्रतिमाह 10 किग्रा. खाद्यान्न निःशुल्क दिया जाता है। वर्ष 2002-03 में राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को इस योजना में मिला दिया गया।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 16 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
“निर्धनता सभी बुराइयों की जड़ है।” विवेचना कीजिए।
अथवा
निर्धनता के दुश्चक्र से आप क्या समझते हैं? (2008, 11)
उत्तर:
निर्धनता के दुश्चक्र से आशय-निर्धनता का दुश्चक्र एक ऐसी वृत्ताकार प्रक्रिया है, जिसका प्रारम्भ भी निर्धनता से होता है और अन्त भी निर्धनता के रूप में होता है।

प्रो. नर्कसे (Nurkse) के शब्दों में, “निर्धनता के दुश्चक्र का आशय नक्षत्र मण्डल के समान वृत्ताकार ढंग से घूमती हुई ऐसी शक्तियों से है जो एक-दूसरे पर इस प्रकार क्रिया-प्रतिक्रिया करती हैं कि एक निर्धन देश निर्धनता की अवस्था में ही बना रहता है।”

निर्धनता के दुश्चक्र की विशेषताएँ –

  1. निर्धनता का कारण व परिणाम स्वयं निर्धनता है।
  2. निर्धनता अपने प्रारम्भिक बिन्दु से अन्तिम बिन्दु तक वृत्ताकार ढंग से क्रिया व प्रतिक्रिया करती हुई बढ़ती है।
  3. इनका प्रभाव संचयी (Cumulative) होता है अर्थात् एक स्तर पर पायी जाने वाली निर्धनता अगले स्तर पर और भी अधिक हानिकारक होने लगती है।
  4. यह एक ऐसी निरन्तर प्रक्रिया है जो सम्बन्धित घटकों को सदैव नीचे की ओर धकेलती है।

प्रो. नर्कसे का कहना है कि इस सम्बन्ध में ध्यान रखने योग्य बात यह है कि वास्तविक आय का निम्न स्तर, वस्तुओं की माँग व पूर्ति के निम्न स्तर का कारण व परिणाम दोनों हैं। वास्तविक आय के कम होने का प्रभाव, एक ओर वस्तुओं की माँग पर पड़ता है और दूसरी ओर लोगों द्वारा की जाने वाली बातों पर पड़ता है जैसा कि निम्न चित्र द्वारा स्पष्ट किया गया है –
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 16 गरीबी, भारत के समक्ष एक आर्थिक चुनौती - 2

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 1 भारत और विश्व

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 1 भारत और विश्व

MP Board Class 7th Social Science Chapter 1 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(1) भारत में मध्यकाल का आरम्भ …………..से माना जाता है।
(2) चोल राज्य के व्यापारिक सम्बन्ध …………. देशों से थे।
(3) कुतुबनुमा (कम्पास) का आविष्कार …………… में हुआ था।
उत्तर:
(1) आठवीं शताब्दी
(2) चीन तथा दक्षिण एशिया के अन्य
(3) चीन।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए
MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 1 भारत और विश्व-1
उत्तर:
(1) (d) तेरहवीं से अठारहवीं
(2) (c) राजेंद्र प्रथम
(3) (b) चीन
(4) (a) वंशानुगत दास

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 1 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) भारतीय इतिहास के मध्यकाल को कितने भागों में विभाजित गया है ? उनके नाम और काल लिखिए।
उत्तर:
भारतीय इतिहास के मध्यकाल को दो भागों में विभाजित किया गया है –

  • पूर्व मध्यकाल – आठवीं से बारहवीं शताब्दी तक।
  • उत्तर मध्यकाल – तेरहवीं से अठारहवीं शताब्दी तक।

(2)  मध्यकाल के साहित्यिक स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मध्यकाल के साहित्यिक स्रोत ताड़पत्रों और भोज पत्रों पर लिखा विवरण था।

(3) यूरोप के मध्यकाल में सामन्तों की जीवन शैली कैसी थी?
उत्तर:
यूरोप के मध्यकाल में सामन्त विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत करते थे और किसानों पर अत्याचार करते थे। गरीब किसान वंशानुगत दास (सर्फ) बने रहते थे।

(4)  संगठित होकर अरबों ने अपने राज्य का विस्तार कहाँ तक किया ?
उत्तर:
संगठित होकर अरबों ने अपने राज्य का विस्तार भारत की उत्तर – पश्चिमी सीमा तक किया।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 1 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.

(1) मध्यकालीन सभ्यता के विकास में अरब व्यापारियों के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अरब लोग कुशल व्यापारी थे। राजनैतिक सत्ता स्थापित करने के साथ – साथ उन्होंने भारत, चीन, यूरोप तथा पूर्व से पश्चिम अफ्रीका तक व्यापार किया। उन्होंने व्यापार से धन कमा कर उसका उपयोग कला, साहित्य और विज्ञान को प्रोत्साहन देने में किया। अरबों ने विभिन्न देशों के साथ अपने व्यापारिक संपर्क बढ़ाकर वहाँ के ज्ञान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया।

उन्होंने प्राचीन ग्रीक तथा भारतीय वैज्ञानिक ग्रन्थों का अरबी में अनुवाद कराया। खगोलशास्त्र तथा गणित का उच्चकोटि का ज्ञान पश्चिमी देशों तक पहुँचाया। अरबों ने ही चीन के बारूद, कागज, कुतुबनुमा आदि आविष्कारों का ज्ञान यूरोप के देशों में पहँचाया। यहाँ की सम्पन्नता और उच्च संस्कृति उत्तर – पश्चिम के शासकों के लिए आकर्षण का केन्द्र थी।

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