MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 12 सल्तनतकालीन प्रशासन एवं जनजीवन

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 12 सल्तनतकालीन प्रशासन एवं जनजीवन

MP Board Class 7th Social Science Chapter 12 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) सल्तनतकाल की प्रशासनिक व्यवस्था में प्रमुख विभाग कितने थे?
(अ) दो
(ब) पाँच
(स) चार
(द) सात।
उत्तर:
(स) चार

(2) व्यापार का प्रमुख केन्द्र कौन-सा था, जहाँ देश के विभिन्न भागों से सामान आता था ?
(अ) दिल्ली
(ब) बंगाल
(स) गुजरात
(द) मुल्तान।
उत्तर:
(2) (अ) दिल्ली

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए(कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से सही शब्द चुनकर भरें) –
(1) हिन्दी और फारसी के सम्मिश्रिण से इस काल में एक नई भाषा …………. का जन्म हुआ। (तमिल, उर्दू, कन्नड़)
(2) इस काल के प्रसिद्ध दार्शनिक व साहित्यकार ………. ने अपनी रचनाओं में उर्दू, फारसी व हिन्दी भाषा का प्रयोग किया। (अमीर खुसरो, कबीरदास,नानक, मुइनुद्दीन चिश्ती)
(3) शल्य चिकित्सा के लिए वैद्य ………… व ……………. का नाम प्रसिद्ध था। (सदुद्दीन व अजीमुद्दीन, मच्छेन्द्र व जोग, बद्रुद्दीन व बर्नी)
उत्तर:
(1) उर्दू,
(2) अमीर खुसरो
(3) मच्छेन्द्र व जोग।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए
MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 12 सल्तनतकालीन प्रशासन एवं जनजीवन`
उत्तर:
1. (b) दिल्ली
2. (a) बीजापुर
3. (d) हिन्दू, मुसलमानों के भेद भावों
4. (c) सिख सम्प्रदाय की स्थापना की थी

MP Board Class 7th Social Science Chapter 12 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) सल्तनत काल की सामाजिक व्यवस्था के कोई दो मुख्य बिन्दु लिखिए।
उत्तर:
सल्तनत काल की सामाजिक व्यवस्था के दो मुख्य बिन्दु निम्न हैं –

  • समाज में मुख्यतः हिन्दू और मुस्लिम जनसंख्या निवास करती थी। समाज में उच्च वर्ग के लोग विलासिता का जीवन व्यतीत करते थे।
  • समाज में बाल विवाह, बहु-विवाह, सती प्रथा का प्रचलन था।

(2) सल्तनत काल में राज्य की आय के प्रमुख साधन क्याथे ?
उत्तर:
सल्तनत काल में भूमिकर, चुंगीकर, खनिज सम्पत्ति कर, सिंचाई कर, मकान कर, तीर्थयात्रा कर आदि राज्य की आय के प्रमुख साधन थे।

(3) सल्तनतकालीन वास्तुकला की दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर:
सल्तनतकालीन वास्तुकला की दो विशेषताएँ निम्न –

  • नुकीले महराब और गुम्बद तथा ऊँची सँकरी मीनारें इस काल की वास्तुकला की महत्वपूर्ण विशेषता थी, जैसे-तुगलकाबाद का किला, अलाई दरवाजा।
  • खपरैलों का प्रयोग, जैसे-लोदी सल्तानों के रंग-बिरंगे खपरैलों की डिजाइनों से सजे मकबरे।

(4) भक्ति आन्दोलन के सन्तों द्वारा दी गई प्रमुख शिक्षाएँ क्या थीं?
उत्तर:
भक्ति आन्दोलन के सन्तों द्वारा दी गई प्रमुख शिक्षाएँ निम्न हैं –

    • ईश्वर के प्रति भक्ति व प्रेम, ईश्वर के निकट पहुँचने का मार्ग है।
    • सभी धर्म समान हैं।
    • कर्मकाण्ड, आडम्बर व धार्मिक कट्टरता का विरोध करना।
    •  समाज की सेवा करना।
    • अन्य धर्मों के प्रति उदार दृष्टिकोण रखना।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 12 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 5.
(1) सल्तनतकालीन भाषा एवं साहित्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भाषा एवं साहित्य –

  • प्राथमिक शिक्षा केन्द्र मन्दिर व मस्जिद होते थे। कुछ स्थानों पर प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना की गई।
  • उच्च शिक्षा के लिए टोल (महाविद्यालय) व मदरसों की व्यवस्था थी।
  • केन्द्रीय स्तर पर फारसी भाषा का प्रयोग होता था।
  • हिन्दी और फारसी के सम्मिश्रण से ‘उर्दू भाषा का जन्म हुआ।
  • उर्दू भाषा के शब्दकोष में फारसी व हिन्दी भाषाओं के शब्दों का प्रयोग किया।
  • इस काल में क्षेत्रीय भाषाओं का विकास हुआ, जिनमें उत्तम साहित्य की रचना हुई।
  • कुछ हिन्दू राज्यों (विजयनगर आदि) के राज दरबार में संस्कृत भाषा का प्रयोग किया जाता था। संस्कृत ग्रन्थों के अनुवाद भारतीय भाषाओं के साथ-साथ अरबी व फारसी में भी किए गए।
  •  कागज के प्रचलन से अनेक प्राचीन ग्रन्थों का पुनः लेखन हुआ।

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2

प्रश्न 1.
(a) से (d) तक के रेखाचित्रों में निम्नलिखित को कौन दर्शाता है :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 1
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 1a
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 1b
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 1c
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 1d
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 1e
उत्तर:
(i) → (d),
(ii) → (b),
(iii) →(a),
(iv) → (c).

प्रश्न 2.
(a) से (c) तक कुछ चित्र दिए हुए हैं। बताइए उनमें से कौन निम्नलिखित को दर्शाता है ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 2
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 2a
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 2b
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 2c
हल:
(i) ∵ \(\frac{1}{5}=\frac{1}{5}+\frac{1}{5}+\frac{1}{5}=\frac{3}{5}\)
(ii) ∵ \( \frac{1}{3}=\frac{1}{3}+\frac{1}{3}=\frac{2}{3}\)
(iii) ∵ \(\frac{3}{4}=\frac{3}{4}+\frac{3}{4}+\frac{3}{4}=\frac{9}{4}\)
उत्तर:
(i) → (c),
(ii) → (a),
(iii) → (b).

प्रश्न 3.
गुणा करके न्यूनतम रूप में लिखिए और मिश्रित भिन्न में व्यक्त कीजिए-
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 3
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 3a
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 3b

प्रश्न 4.
छायांकित कीजिए-
(i) बक्सा (a) के वृत्तों का \(\frac { 1 }{ 2 }\) भाग
(ii) बक्सा (b) के त्रिभुजों का \(\frac { 2 }{ 3 }\) भाग
(iii) बक्सा (c) के वर्गों का \(\frac { 3 }{ 5 }\) भाग
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 4
हल:
(i) वृत्तों का \(\frac { 1 }{ 2 }\) भाग
∵ वृत्तों की संख्या = 12
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 4a
∴ वृत्तों का \(\frac { 1 }{ 2 }\) भाग = \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 12 = 6
अतः हमें 6 वृत्तों को छायांकित करना है।

(ii) त्रिभुजों का \(\frac { 2 }{ 3 }\) भाग
∵ त्रिभुजों की संख्या = 9
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 4b
∴ त्रिभुजों का \(\frac { 2 }{ 3 }\) भाग = \(\frac { 2 }{ 3 }\) x 9 = 6
अतः हमें 6 त्रिभुजों को छायांकित करना है।

(iii) वर्गों का में भाग \(\frac { 3 }{ 5 }\) वर्गों की संख्या = 15
∵ वर्गों का 1 भाग = 1 x 15 = 9
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 4c
∴ त्रिभुजों का \(\frac { 3 }{ 5 }\) भाग = \(\frac { 3 }{ 5 }\) x 15 = 6
अतः हमें 9 वर्गों को छायांकित करना है।

प्रश्न 5.
ज्ञात कीजिए-
(a)
(i) 24 का 1/2
(ii) 46 का 1/2

(b)
(i) 18 का 2/3
(ii) 27 का 2/3

(c)
(i) 16 का 3/4
(ii) 36 का 3/4

(d)
(i) 20 का 4/5
(ii) 35 का 4/5
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 5
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 5a

प्रश्न 6.
गुणा कीजिए और मिश्रित भिन्न के रूप में व्यक्त कीजिए-
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 6
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 6a

प्रश्न 7.
ज्ञात कीजिए-
(a)
(i) 2\(\frac { 3 }{ 4 }\) का \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(ii) 4\(\frac { 2 }{ 9 }\) का \(\frac { 1 }{ 2 }\)

(b) (i) 3\(\frac { 5 }{ 6 }\) का \(\frac { 5 }{ 8 }\)
(ii) 9\(\frac { 2 }{ 3 }\) का \(\frac { 5 }{ 8 }\)
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 7
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 7a

प्रश्न 8.
विद्या और प्रताप पिकनिक पर गए। उनकी माँ ने उन्हें 5 लीटर पानी वाली एक बोतल दी। विद्या ने कुल पानी का उपयोग किया। शेष पानी प्रताप ने पिया। . (i) विद्या ने कुल कितना पानी पिया ?
(ii) पानी की कुल मात्रा का कितना भिन्न (fraction) प्रताप ने पिया ?
हल:
(i) पानी की कुल मात्रा = 5 लीटर
विद्या द्वारा पानी की उपयोग की गई मात्रा = 5 लीटर का \(\frac { 2 }{ 5 }\) = \(\frac { 2 }{ 5 }\) x 5 लीटर = 2 लीटर
(ii) शेष पानी की मात्रा = प्रताप द्वारा उपयोग की गई पानी की मात्रा
प्रताप द्वारा उपयोग की गई पानी की मात्रा = 5 लीटर – 2 लीटर = 3 लीटर
अतः प्रताप द्वारा उपयोग की गई पानी की मात्रा
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 8

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 39

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
निम्नलिखित बक्सों को भरिए-
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 9
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 9a
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 9b

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 40
प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए – \(\frac{2}{3} \times \frac{4}{5} ; \frac{2}{3} \times \frac{1}{5}\)
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 10

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए – \(\frac{8}{3} \times \frac{4}{7} ; \frac{3}{4} \times \frac{2}{3}\)
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 10a

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 41

हम पाते हैं
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 11
अतः दो उचित भिन्नों का गुणनफल दोनों भिन्नों में से प्रत्येक से छोटा होता है।

पाँच और उदाहरण बनाकर इसकी जाँच कीजिए।
उदाहरण:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 11a
आइए अब हम दो विषम भिन्नों का गुणा करते हैं।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 12
अतः दो विषम भिन्नों का गुणनफल उनमें से प्रत्येक भिन्न से बड़ा होता है।

ऐसे पाँच और उदाहरण बनाइए और उपर्युक्त कथन को सत्यापित कीजिए।
उदाहरण:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.2 13

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MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा

MP Board Class 9th Science Chapter 14 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

प्रश्न श्रृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 217

प्रश्न 1.
शुक्र और मंगल ग्रहों के वायुमण्डल से हमारा वायुमण्डल कैसे भिन्न है?
उत्तर:
शुक्र एवं मंगल ग्रह के वायुमण्डल में प्राणवायु ऑक्सीजन का अभाव है तथा हानिकारक कार्बन डाइ-ऑक्साइड लगभग 95% से 97% तक है। हमारे वायुमण्डल में प्राणवायु ऑक्सीजन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है तथा हानिकारक कार्बन डाइ-ऑक्साइड अत्यल्प मात्रा में।

प्रश्न 2.
वायुमण्डल एक कम्बल की तरह कैसे कार्य करता है? (2018)
उत्तर:
वायु ऊष्मा की कुचालक होती है। इसलिए वायुमण्डल पृथ्वी के औसत तापमान को लगभग नियत रखता है। यह दिन में तापमान को बढ़ने से रोकता है तथा रात के समय ऊष्मा को बाहरी अन्तरिक्ष में जाने से रोकता है। इस तरह वायुमण्डल एक कम्बल की तरह कार्य करता है।

प्रश्न 3.
वायु प्रवाह (पवन) के क्या कारण हैं?
उत्तर:
वायुमण्डल के विभिन्न क्षेत्रों में तापमान एवं दाब में होने वाले अन्तर के कारण वायु प्रवाह (पवन) होता है।

प्रश्न 4.
बादलों का निर्माण कैसे होता है? (2018)
उत्तर:
बादलों के निर्माण की प्रक्रिया-सूर्य के ताप के कारण जलाशयों (तालाब, झील, नदियाँ एवं समुद्र आदि) का जल वाष्पीकृत हो जाता है। यह जलवाष्प गर्म वायु के साथ ऊपर उठती है और फैलने के कारण ठंडी हो जाती है तथा छोटी-छोटी बूंदों के रूप में संघनित हो जाती है। जलवाष्प का यह संघनित रूप ही बादल होता है।

प्रश्न 5.
मनुष्य के तीन क्रियाकलापों को लिखिए जो वायु प्रदूषण में सहायक हैं। (2018)
उत्तर:
वायु प्रदूषण में सहायक मनुष्य के क्रियाकलाप:

  1. जीवाश्म ईंधन का अत्यधिक उपयोग जिससे कार्बन मोनोक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन एवं सल्फर के ऑक्साइडों का उत्सर्जन।
  2. रेफ्रिजरेटरों एवं एयरकण्डीशनरों का उपयोग जिससे हानिकारक ऐरोसॉल (क्लोरोफ्लोरोकार्बन) का रिसाव।
  3. वनों, वृक्षों का अत्यधिक कटान।

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प्रश्न श्रृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 219

प्रश्न 1.
जीवों को जल की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर:
जीवों को जल की आवश्यकता:

  1. सभी कोशिकीय प्रक्रियाएँ जलीय माध्यम में होती हैं।
  2. पदार्थों का संवहन जल के माध्यम से होता है। इसलिए जीवों को जीवित रहने के लिए जल की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 2.
जिस गाँव/शहर/नगर में आप रहते हैं, वहाँ पर उपलब्ध शुद्ध जल का मुख्य स्रोत क्या है?
उत्तर:
उपलब्ध जल का मुख्य स्रोत जलाशय (कुएँ, तालाब, झील एवं नदियाँ)। (निर्देश-छात्र अपने गाँव/शहर/नगर के जल स्रोत का स्वयं उल्लेख करें।)

प्रश्न 3.
क्या आप किसी क्रियाकलाप के बारे में जानते हैं जो इस जल के स्रोत को प्रदूषित कर रहा है?
उत्तर:
हम अनेक क्रियाकलापों को जानते हैं जिनसे जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं –

  1. पशुओं एवं जानवरों को जलाशयों में नहलाना तथा कपड़े धोना।
  2. शवों, घरेलू अपशिष्टों आदि को जलाशयों में बहाना।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 222

प्रश्न 1.
मृदा (मिट्टी) का निर्माण किस प्रकार होता है?
उत्तर:
मृदा (मिट्टी) के निर्माण की प्रक्रिया:

  1. सूर्य की गर्मी से पत्थर गर्म होकर फैलते हैं तथा रात्रि को ठंडे होकर सिकुड़ते हैं। इसलिए पत्थर छोटे-छोटे टुकड़ों में विभक्त हो जाते हैं।
  2. पत्थरों की दरार में जल भर जाता है जो ठंडा होने पर बर्फ बनकर फैलता है जिससे पत्थर दबाव के कारण टूटते हैं। इसके अतिरिक्त बहता हुआ जल पत्थरों से टकराकर उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में परिवर्तित कर देता है।

ये पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े जल के बहाव के साथ-साथ बहते रहते हैं तथा आपस में टकरा-टकराकर मृदा में बदल जाते हैं। इसके अतिरिक्त हवाएँ भी पत्थरों को तोड़ने में सहायक होती हैं।

प्रश्न 2.
मृदा अपरदन क्या है?
उत्तर:
मृदा अपरदन:
“आँधी, तूफान, तेज हवा, तीव्र जल प्रवाह एवं बाढ़ के कारण खेत की उपजाऊ मिट्टी (मृदा) का बहकर नष्ट हो जाना मृदा अपरदन कहलाता है।”

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प्रश्न 3.
मृदा अपरदन को रोकने और कम करने के कोई तीन तरीके लिखिए। (2018)
उत्तर:
मृदा अपरदन को रोकने एवं कम करने के उपाय –

  1. वनों के काटने पर पूर्णतया प्रतिबन्ध लगाकर तथा वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करके।
  2. पहाड़ों एवं ढलवाँ स्थानों पर सीढ़ीनुमा खेती करके।
  3. खेतों की मेंढ़ बनाकर तथा उस पर विभिन्न पेड़-पौधे उगाकर।

प्रश्न श्रृंखला-4 # पृष्ठ संख्या 226

प्रश्न 1.
जल चक्र के क्रम में जल की कौन-कौन सी अवस्थाएँ पाई जाती हैं?
उत्तर:
जल चक्र के क्रम में जल की निम्न अवस्थाएँ पाई जाती हैं –

  1. ठोस अवस्था (बर्फ)
  2. द्रव अवस्था (पानी)
  3. गैसीय अवस्था (जलवाष्प, बादल, कोहरा आदि)।

प्रश्न 2.
जैविक रूप से महत्वपूर्ण दो यौगिकों के नाम दीजिए जिनमें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन दोनों पाये जाते हैं।
उत्तर:

  1. प्रोटीन्स
  2. न्यूक्लिक अम्ल।

प्रश्न 3.
मनुष्य की किन्हीं तीन गतिविधियों को पहचानें जिनसे वायु में कार्बन डाइ-ऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है।
उत्तर:

  1. औद्योगिक इकाइयों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन।
  2. ऑटोमोबाइलों एवं घरेलू चूल्हों में प्रयुक्त जीवाश्म ईंधन का दहन।
  3. श्वसन क्रिया।

प्रश्न 4.
ग्रीन हाउस प्रभाव क्या है? (2019)
उत्तर:
ग्रीन हाउस प्रभाव (Green House Effect):
ठण्डे प्रदेशों में पौधों को ठण्ड से बचाने के लिए काँच या फाइबर ग्लास के बने पौधाघरों में रखा जाता है।

सूर्य से निकलने वाली छोटी तरंगदैर्घ्य की विकिरण काँच से होकर इसमें प्रवेश कर जाती है तथा वहाँ ये बड़ी तरंगदैर्घ्य की विकिरणों में बदल जाती है जिनको काँच बाहर आने से रोकता है। इस प्रकार पौधाघर का ताप वायुमण्डल के ताप से अधिक रहता है। इस घटना को पौधाघर प्रभाव या ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 5.
वायुमण्डल में पायी जाने वाली ऑक्सीजन के दो रूप कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. ऑक्सीजन गैस (O2)
  2. ओजोन गैस (O3)।

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MP Board Class 9th Science Chapter 14 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
जीवन के लिए वायुमण्डल क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
जीवन के लिए वायुमण्डल की आवश्यकता-जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन गैस (प्राणवायु) अत्यन्त आवश्यक है। इसके बिना जीवन असम्भव है और ऑक्सीजन वायुमण्डल का ही एक घटक है। इसलिए जीवन के लिए वायुमण्डल की आवश्यकता है।

प्रश्न 2.
जीवन के लिए जल क्यों अनिवार्य है? (2019)
उत्तर:
जीवन के लिए जल की अनिवार्यता –

  1. सभी कोशिकीय प्रक्रियाएँ जलीय माध्यम में होती हैं।
  2. पदार्थों का संवहन जल के माध्यम से होता है। इसलिए जीवों को जीवित रहने के लिए जल की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 3.
जीवित प्राणी मृदा पर कैसे निर्भर हैं? क्या जल में रहने वाले जीव सम्पदा के रूप में मृदा से पूरी तरह स्वतन्त्र हैं?
उत्तर:
जीवित प्राणी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पोषक तत्व एवं खनिज मृदा से ही प्राप्त करते हैं। इसलिए जीवित प्राणी मृदा पर निर्भर करते हैं। जलीय जीव भी पूर्णरूप से सम्पदा के रूप में मृदा से स्वतन्त्र नहीं

प्रश्न 4.
आपने टेलीविजन पर और समाचार-पत्रों में मौसम सम्बन्धी रिपोर्ट को देखा होगा। क्या आप सोचते हैं कि हम मौसम के पूर्वानुमान में सक्षम हैं?
उत्तर:
हाँ ! हम मौसम के पूर्वानुमान में काफी हद तक सक्षम हैं।

प्रश्न 5.
हम जानते हैं कि बहुत-सी मानवीय गतिविधियाँ वायु, जल एवं मृदा के प्रदूषण स्तर को बढ़ा रही हैं। क्या आप सोचते हैं कि इन गतिविधियों को कुछ विशेष क्षेत्रों में सीमित कर देने से प्रदूषण के स्तर को घटाने में सहायता मिलेगी?
उत्तर:
हाँ ! प्रदूषण के स्तर का घटाने में सहायता अवश्य मिलेगी।

प्रश्न 6.
जंगल वायु, मृदा तथा जलीय स्रोत की गुणवत्ता को कैसे प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
जंगल प्रकाश-संश्लेषण द्वारा वायु को प्रदूषण मुक्त करते हैं। वर्षा को प्रोत्साहित करते हैं, मृदा अपरदन को रोकते हैं। इस प्रकार जंगल वायु, मृदा एवं जलस्रोतों की गुणवत्ता को सुधारने में सहायक होते हैं।

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MP Board Class 9th Science Chapter 14 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 9th Science Chapter 14 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पृथ्वी का वायुमण्डल जिन विकिरणों द्वारा गर्म होता है वह मुख्यत: है –
(a) सूर्य से आने वाला विकिरण
(b) पृथ्वी से वापस होने वाला विकिरण
(c) जल से बाहर विकिरण
(d) पृथ्वी तथा जल में विकिरण
उत्तर:
(d) पृथ्वी तथा जल में विकिरण

प्रश्न 2.
यदि पृथ्वी के चारों ओर वायुमण्डल नहीं होता तो पृथ्वी का तापमान –
(a) बढ़ता
(b) घटता
(c) दिन के समय बढ़ता तथा रात के समय घटता
(d) अप्रभावित रहता
उत्तर:
(c) दिन के समय बढ़ता तथा रात के समय घटता

प्रश्न 3.
यदि पर्यावरण में उपस्थित सभी ऑक्सीजन ओजोन में परिवर्तित हो जाये, तो क्या होगा?
(a) हम अधिक सुरक्षित होंगे
(b) यह विषाक्त हो जायेगी तथा जीवों को नष्ट करेगी
(c) ओजोन स्थिर नहीं है अतः आविषालु हो जाएगी
(d) यह हानिकारक सूर्य विकिरणों को पृथ्वी पर पहुँचने में मदद करेगी तथा कई प्रकार के जीवों को नष्ट कर देगी।
उत्तर:
(b) यह विषाक्त हो जायेगी तथा जीवों को नष्ट करेगी

प्रश्न 4.
निम्न कारकों में से कौन-सा एक कारक प्रकृति में मृदा बनावट में पहल नहीं करता?
(a) सूर्य
(b) जल
(c) पवन
(d) पॉलिथीन के थैले
उत्तर:
(d) पॉलिथीन के थैले

प्रश्न 5.
वायुमण्डल में मिलने वाली ऑक्सीजन के दो रूप कौन से हैं?
(a) जल तथा ओजोन
(b) जल तथा ऑक्सीजन
(c) ओजोन तथा ऑक्सीजन
(d) जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर:
(c) ओजोन तथा ऑक्सीजन

प्रश्न 6.
जीवाणु द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण की क्रिया निम्नलिखित में से किसकी उपस्थिति में नहीं होती है?
(a) हाइड्रोजन का आण्विक रूप
(b) ऑक्सीजन का तत्व रूप
(c) जल
(d) नाइट्रोजन का तत्व रूप
उत्तर:
(b) ऑक्सीजन का तत्व रूप

प्रश्न 7.
वर्षा प्रतिमान किस पर निर्भर करता है?
(a) भूमिगत जल स्तर
(b) किसी क्षेत्र में जलाशयों की संख्या
(c) किसी क्षेत्र की मानव समष्टि का घनत्व प्रतिमान
(d) किसी क्षेत्र का प्रमुख मौसम
उत्तर:
(b) किसी क्षेत्र में जलाशयों की संख्या

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प्रश्न 8.
उर्वरक और पीड़कनाशी की अधिक मात्रा के उपयोग की सलाह नहीं दी जाती क्योंकि –
(a) वे पारि हितैषी हैं
(b) कुछ समय बाद खेत को बंजर कर देते हैं
(c) वे मृदा के लाभदायक अवयवों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं
(d) वे मृदा की उर्वरकता को नष्ट कर देते हैं
उत्तर:
(a) वे पारि हितैषी हैं

प्रश्न 9.
वायु में उपस्थित नाइट्रोजन के अणु निम्नलिखित के कारण नाइट्रेट अथवा नाइदाइट में परिवर्तित हो जाते हैं –
(a) मृदा में पाये जाने वाले नाइट्रोजन स्थिरकारी जीवाणुओं की जैविक प्रक्रिया द्वारा
(b) मृदा में पाई जाने वाले कार्बन स्थिरकारी कारक की जैविक प्रक्रिया द्वारा
(c) नाइट्रोजन यौगिक बनाने वाले किसी उद्योग के द्वारा
(d) उन पौधों के द्वारा जिन्हें खेत में अनाज फसलों के लिए उगाया जाता है
उत्तर:
(a) मृदा में पाये जाने वाले नाइट्रोजन स्थिरकारी जीवाणुओं की जैविक प्रक्रिया द्वारा

प्रश्न 10.
प्रकृति में चल रहे जल चक्र में निम्नलिखित में से कौन-सी एक क्रिया सम्मिलित नहीं है?
(a) वाष्पन
(b) वाष्पोत्सर्जन
(c) अवक्षेपण
(d) प्रकाश-संश्लेषण
उत्तर:
(d) प्रकाश-संश्लेषण

प्रश्न 11.
‘जल प्रदूषण’ शब्द की परिभाषा कई प्रकार से दी जा सकती है। निम्नलिखित में से किस कथन में उचित परिभाषा नहीं है?
(a) जलाशयों में अवांछित पदार्थों का मिलाया जाना
(b) जलाशयों से वांछनीय पदार्थों का निकाला जाना
(c) जलाशयों के दाब में परिवर्तन
(d) जलाशयों के ताप में परिवर्तन
उत्तर:
(c) जलाशयों के दाब में परिवर्तन

प्रश्न 12.
निम्नलिखित में से कौन-सी ग्रीन हाउस गैस नहीं है? (2019)
(a) मीथेन
(b) कार्बन डाइऑक्साइड
(c) कार्बन मोनोक्साइड
(d) अमोनिया
उत्तर:
(d) अमोनिया

प्रश्न 13.
कार्बन चक्र में कौन-सा चरण सम्मिलित नहीं है?
(a) प्रकाश-संश्लेषण
(b) वाष्पोत्सर्जन
(c) श्वसन
(d) जीवाश्म ईंधन को जलाना
उत्तर:
(b) वाष्पोत्सर्जन

प्रश्न 14.
ओजोन छिद्र का अर्थ है –
(a) ओजोन पर्त में एक बड़े आकार का छिद्र
(b) ओजोन पर्त का पतला होना
(c) ओजोन पर्त में छितरे हुए छोटे छिद्र
(d) ओजोन पर्त में ओजोन का मोटा होना।
उत्तर:
(b) ओजोन पर्त का पतला होना

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प्रश्न 15.
ओजोन पर्त का ह्रास हो रहा है क्योंकि –
(a) मोटरगाड़ियों का अत्यधिक उपयोग
(b) औद्योगिक इकाइयों का अत्यधिक निर्माण
(c) मनुष्य निर्मित यौगिकों जिनमें क्लोरीन और फ्लोरीन दोनों शामिल हैं, का अत्यधिक उपयोग होना
(d) वनों की अत्यधिक कटाई।
उत्तर:
(c) मनुष्य निर्मित यौगिकों जिनमें क्लोरीन और फ्लोरीन दोनों शामिल हैं, का अत्यधिक उपयोग होना

प्रश्न 16.
निम्नलिखित में से पर्यावरण की कौन-सी समस्या हाल ही में उत्पन्न हुई है?
(a) ओजोन पर्त का ह्रास
(b) ग्रीन हाउस का प्रभाव
(c) वैश्विक ऊष्मन
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 17.
जब हम साँस लेते समय वायु अन्दर लेते हैं तो ऑक्सीजन के साथ नाइट्रोजन भी अन्दर जाती है। इस नाइट्रोजन का क्या होता है?
(a) यह ऑक्सीजन के साथ कोशिकाओं में भ्रमण करती है
(b) यह साँस छोड़ते समय कार्बन डाइऑक्साइड के साथ बाहर आ जाती है
(c) यह केवल नासिका कोशिकाओं द्वारा अवशोषित हो जाती है
(d) कोशिकाओं में नाइट्रोजन का सान्द्रण पहले ही इतना अधिक है कि यह अवशोषित नहीं हो पाती।
उत्तर:
(b) यह साँस छोड़ते समय कार्बन डाइऑक्साइड के साथ बाहर आ जाती है

प्रश्न 18.
उपरि मृदा में निम्नलिखित में से विद्यमान होता है –
(a) केवल ह्यूमस तथा सजीव
(b) केवल ह्यूमस तथा मृदा कणिकाएँ
(c) ह्यूमस सजीव तथा पादप
(d) ह्यूमस सजीव तथा मृदा कणिकाएँ
उत्तर:
(d) ह्यूमस सजीव तथा मृदा कणिकाएँ

प्रश्न 19.
सही क्रम का चयन कीजिए –
(a) वायुमण्डल में CO2 → अपघटक → जन्तुओं में जैव कार्बन → पादपों में जैव कार्बन
(b) वायुमण्डल में CO2 → पादपों में जैव कार्बन → जन्तुओं में जैव कार्बन → मृदा में अकार्बनिक कार्बन
(c) जल में अकार्बनिक कार्बोनेट → पादपों में जैव कार्बन → जन्तुओं में जैव कार्बन → अपमार्जक
(d) जन्तुओं में जैव कार्बन → अपघटक → वायुमण्डल में CO2 → पादपों में जैव कार्बन
उत्तर:
(b) वायुमण्डल में CO2 → पादपों में जैव कार्बन → जन्तुओं में जैव कार्बन → मृदा में अकार्बनिक कार्बन

प्रश्न 20.
मृदा में खनिज का मुख्य स्रोत कौन-सा है?
(a) जनक शैल जिससे मृदा बनती है
(b) पादप
(c) जन्तु
(d) जीवाणु
उत्तर:
(a) जनक शैल जिससे मृदा बनती है

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प्रश्न 21.
पृथ्वी के कुल धरातल का कितना भाग जल से ढका है?
(a) 75%
(b) 60%
(c) 85%
(d) 50%
उत्तर:
(a) 75%

प्रश्न 22.
जैवमण्डल के जैविक घटक का निर्माण किसके द्वारा नहीं होता है?
(a) उत्पादक
(b) उपभोक्ता
(c) अपघटक
(d) वायु
उत्तर:
(d) वायु

प्रश्न 23.
वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि से क्या नहीं होगा?
(a) पर्यावरण में अधिक ऊष्मा को रोका जा सकता है
(b) पौधों में प्रकाश-संश्लेषण की वृद्धि
(c) वैश्विक ऊष्मन
(d) मरुस्थली पादपों की प्रचुरता
उत्तर:
(d) मरुस्थली पादपों की प्रचुरता

प्रश्न 24.
ऑक्सीजन मुख्यतः किसके द्वारा वायुमण्डल में वापस आती है?
(a) जीवाश्म ईंधन के जलने से
(b) श्वसन से
(c) प्रकाश-संश्लेषण से
(d) कवक से।
उत्तर:
(c) प्रकाश-संश्लेषण से

प्रश्न 25.
ठंडे मौसम में कम दृश्यता का कारण –
(a) जीवाश्म ईंधन का निर्माण
(b) बिना दहन हुए कार्बन कण या वायु में निलम्बित हाइड्रोकार्बन
(c) पर्याप्त विद्युत आपूर्ति में कमी
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) बिना दहन हुए कार्बन कण या वायु में निलम्बित हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 26.
बंजर शैल पर लाइकेन की वृद्धि के बाद किसकी वृद्धि होती है?
(a) मॉस
(b) फर्न
(c) जिम्नोस्पर्म
(d) शैवाल
उत्तर:
(a) मॉस

प्रश्न 27.
जलीय पर्यावरण में विशेष तापक्रम परिवर्तन प्रभावित कर सकता है –
(a) जन्तुओं में प्रजनन
(b) जलीय पौधों में अधिक वृद्धि
(c) जन्तुओं में पाचन की प्रक्रिया
(d) पोषकों की उपलब्धता
उत्तर:
(a) जन्तुओं में प्रजनन

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प्रश्न 28.
मृदा अपरदन इसके द्वारा रोका जा सकता है –
(a) वनों का विकास करके
(b) वनों की कटाई
(c) उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग
(d) जन्तुओं द्वारा अति चारण
उत्तर:
(a) वनों का विकास करके

प्रश्न 29.
वनस्पति रहित मृदा पर जब वर्षा होती है तो क्या होता है?
(a) वर्षा का जल मृदा के भीतर भली-भाँति रिस जाता है
(b) वर्षा का जल मृदा की सतह को हानि पहुँचाता है
(c) वर्षा का जल मृदा की उर्वरकता को बढ़ाता है
(d) वर्षा का जल मृदा में कोई परिवर्तन नहीं करता है
उत्तर:
(b) वर्षा का जल मृदा की सतह को हानि पहुँचाता है

प्रश्न 30.
ऑक्सीजन निम्नलिखित में से किसके लिए हानिकारक है?
(a) फर्न
(b) नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणु
(c) चारा
(d) आम का वृक्ष।
उत्तर:
(b) नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणु

प्रश्न 31.
वायु प्रदूषक है –
(a) गैसीय अपशिष्ट
(b) वाहित मल
(c) कृषि अपशिष्ट
(d) शोर
उत्तर:
(a) गैसीय अपशिष्ट

प्रश्न 32.
जल प्रदूषक है –
(a) गैसीय अपशिष्ट
(b) रेडियोधर्मी विकिरण
(c) वाहित मल
(d) शोर
उत्तर:
(c) वाहित मल

प्रश्न 33.
नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु का नाम है –
(a) स्यूडोमोनास
(b) नाइट्रोसोमोनास
(c) राइजोबियम
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) राइजोबियम

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. पृथ्वी के चारों ओर गैसीय आवरण …………… कहलाता है।
2. पृथ्वी पर जो भाग जल से ढका है वह ………… कहलाता है।
3. समस्त जीवों से मिलकर बने तन्त्र को …………… कहते हैं।
4. अजैविक एवं जैविक घटकों को …………… कहते हैं। (2019)
अथवा
जैविक एवं अजैविक घटक मिलकर …………… बनाते हैं। (2019)
5. प्रदूषकों का वायु में मिलना ………….. प्रदूषण कहलाता है।
6. प्रदूषकों का जल में मिलना …………… प्रदूषण कहलाता है।
7. कीटनाशकों से ………… प्रदूषण फैलता है।
8. शोर से ……….. प्रदूषण होता है।
9. ध्वनि मापन की इकाई ……………. है।
10. CFC का पूरा नाम ………. है। (2019)
11. जीवाश्म ईंधन …………… है। (2019)
उत्तर:

  1. वायुमण्डल
  2. जलमण्डल
  3. जैव तन्त्र
  4. पारिस्थितिक तन्त्र
  5. वायु
  6. जल
  7. मृदा
  8. ध्वनि
  9. डेसीबल
  10. क्लोरोफ्लोरोकार्बन
  11. L.P.G. एवं कोयला।

सही जोड़ी बनाना
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा image 1
उत्तर:

  1. → (iii)
  2. → (iv)
  3. → (v)
  4. → (i)
  5. → (ii)
  6. → (vii)
  7. → (vi)

सत्य/असत्य कथन

1. खनिज ईंधन के जलने से प्रदूषण नहीं फैलता।
2. 60 डेसीबल से ऊपर की ध्वनि ध्वनि-प्रदूषण पैदा करती है।
3. प्रदूषित जल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
4. क्लोरोफ्लोरोकार्बन ओजोन परत में छेद कर रहे हैं।
5. ताप पारितन्त्र का अजैव घटक है।
6. जैवमण्डल की क्रियात्मक इकाई पारितन्त्र है।
7. वायुमण्डल में नाइट्रोजन 28% होती है।
उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. सत्य
  6. असत्य
  7. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
ऐरोसॉल का रासायनिक नाम क्या है?
उत्तर:
क्लोरोफ्लोरोकार्बन।

प्रश्न 2.
क्लोरोफ्लोरोकार्बन का रासायनिक सूत्र क्या है?
उत्तर:
CCl2F2.

प्रश्न 3.
सम्पूर्ण विश्व में मनुष्य के क्रियाकलापों से वातावरण का तापमान बढ़ने की घटना क्या कहलाती है?
उत्तर:
ग्लोबल वार्मिंग।

प्रश्न 4.
ध्वनि की इकाई क्या है?
उत्तर:
डेसीबल।

प्रश्न 5.
नाइट्रोजन चक्र में नाइट्रोजन स्थिरीकरण में भाग लेने वाले जीवाणु का नाम लिखिए।
उत्तर:
ऐजोटोबैक्टर एवं राइजोबियम।

प्रश्न 6.
नाइट्रोजन चक्र में अमोनीकरण में भाग लेने वाले जीवाणु का नाम लिखिए।
उत्तर:
नाइट्रोसोमोनास।

प्रश्न 7.
नाइट्रोजन चक्र में नाइट्रीकारक बैक्टीरिया का नाम लिखिए।
उत्तर:
नाइट्रोबैक्टर।

प्रश्न 8.
नाइट्रोजन चक्र में विनाइट्रीकारक जीवाणु का नाम लिखिए। (2019)
उत्तर:
स्यूडोमोनास।

प्रश्न 9.
किस वैज्ञानिक ने सर्वप्रथम ‘पारितन्त्र’ शब्द का प्रयोग किया?
उत्तर:
टेन्सले।

प्रश्न 10.
ऐरोसॉल वायुमण्डल की किस परत का क्षरण करने के लिए उत्तरदायी है?
उत्तर:
ओजोन परत का।

प्रश्न 11.
शुष्क बर्फ किसे कहते हैं? (2019)
उत्तर:
ठोस कार्बन डाइऑक्साइड।

प्रश्न 12.
ओजोन का रासायनिक सूत्र लिखिए। (2019)
उत्तर:
O3.

प्रश्न 13.
ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न करने वाली प्रमुख गैस का नाम लिखिए। (2019)
उत्तर:
कार्बन डाइऑक्साइड।

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MP Board Class 9th Science Chapter 14 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ओजोन परत क्या है? इसके क्या लाभ हैं? (2019)
उत्तर:
ओजोन परत:
“हमारे वायुमण्डल में समुद्र की सतह से 32 से 80 किमी की दूरी तक ओजोन गैस की एक मोटी परत पाई जाती है जिसे ओजोन परत कहते हैं।

ओजोन परत का लाभ:
ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है।

प्रश्न 2.
वैश्विक ऊष्मीकरण (ग्लोबल वार्मिंग) से क्या समझते हो? (2019)
उत्तर:
वैश्विक ऊष्मीकरण (ग्लोबल वार्मिंग):
मनुष्यों के क्रियाकलापों के फलस्वरूप ग्रीन हाउस प्रभाव से सम्पूर्ण पृथ्वी का तापमान बढ़कर सामान्य तापमान से अधिक हो रहा है। इस घटना को वैश्विक ऊष्मीकरण (ग्लोबल वार्मिंग) कहते हैं।”

प्रश्न 3.
नदियाँ खनिजों को भूमि से लेकर समुद्री जल तक ले जाती हैं। चर्चा कीजिए।
उत्तर:
जल एक अच्छा विलायक है इसलिए अनेक खनिजों को घोलने में सक्षम होता है। जब नदियों का जल पहाड़ों से प्रवाहित होता है तो अपने रास्ते में पड़ने वाली मृदा से अनेक खनिजों को घोलकर समुद्र तक ले जाता है।

प्रश्न 4.
जल के प्रदूषित हो जाने पर जल में रहने वाले जीव का जीवन कैसे प्रभावित होता है?
उत्तर:
पीड़कनाशी, उर्वरक, घरेलू एवं औद्योगिक कचरा एवं अन्य विषैले पदार्थ जल में घुलकर उसे विषैला और प्रदूषित कर देते हैं। इसके साथ ही जल में घुली ऑक्सीजन की मात्रा भी कम कर देते हैं। इससे जलीय जीवों का जीवन दूभर हो जाता है और अधिकतर जीव मर जाते हैं।

प्रश्न 5.
यदि गर्मियों में आप झील के निकट जाएँ तो आप गर्मी से राहत महसूस करेंगे, क्यों?
उत्तर:
चूँकि जलाशयों (झील) के निकट की वायु उसके जल के वाष्पीकरण के कारण ठंडी हो जायेगी। इसलिए उसके निकट जाने पर गर्मी में राहत महसूस होगी।

प्रश्न 6.
तटीय क्षेत्रों में, दिन में पवन धाराएँ समुद्र से भूमि की ओर, लेकिन रात में भूमि से समुद्र की ओर चलती हैं। कारण बताइए।
उत्तर:
दिन के समय भूमि के ऊपर की हवा जल्दी गर्म होने से हल्की होकर ऊपर उठ जाती है और नीचे दाब कम हो जाता है। इससे समुद्र के ऊपर की हवा भूमि की ओर प्रवाहित होती है। रात्रि के समय भूमि की हवा जल्दी ठंडी होती है और समुद्र के ऊपर की हवा अपेक्षाकृत गर्म रहती है और ऊपर उठती है तथा नीचे दाब कम हो जाता है। इसलिए भूमि से समुद्र की ओर पवन धाराएँ चलती हैं।

प्रश्न 7.
नीचे कुछ जीव दिए गए हैं –
(a) लाइकेन
(b) मॉस
(c) आम का वृक्ष
(d) कैक्टस।
उपर्युक्त में से पत्थर पर कौन उग सकता है और मृदा निर्माण में भी सहायता करता है? मृदा बनाने की इसकी क्रिया पद्धति पर लेख लिखिए।
उत्तर:
(a) लाइकेन एवं
(b) मॉस ऐसे पौधे हैं जो पत्थर पर उग सकते हैं तथा ऐसे रासायनिक पदार्थों का स्रावण करते हैं जो पत्थर को तोड़कर छोटे-छोटे कणों में बदल देते हैं। यही कण मृदा का निर्माण करते हैं।

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प्रश्न 8.
मृदा का निर्माण जैव तथा अजैव दोनों प्रकार के कारक करते हैं। अजैव तथा जैव के रूप में वर्गीकरण करते हुए कारकों के नाम की सूची बनाइए।
उत्तर:
मृदा निर्माण के जैव कारक-लाइकेन, मॉस एवं वृक्ष। मृदा निर्माण के अजैव कारक-सूर्य, जल एवं पवन।

प्रश्न 9.
सभी जीव मूलरूप से C, N, S, P, H तथा O से बने होते हैं। ये तत्व जीवों में किस प्रकार प्रवेश करते हैं? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पेड़-पौधे अपनी जड़ों के माध्यम से जल एवं लवण अवशोषित करते हैं तथा प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं। जन्तु पेड़-पौधों से भोजन ग्रहण करते हैं। इस तरह ये सभी तत्व सभी जीवों में प्रवेश करते हैं।

प्रश्न 10.
ऑक्सीजन, नाइट्रोजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसों का प्रतिशत वायुमण्डल में सदैव एक जैसा क्यों रहता है?
उत्तर:
इन गैसों का वायुमण्डल में सदैव एक जैसा प्रतिशत बना रहता है क्योंकि इन गैसों के चक्रों में आपस में संगतता बनी रहती है।

प्रश्न 11.
चन्द्रमा के तापक्रम में बहुत सर्द और बहुत गर्म तापमान की विविधताएँ पाई जाती हैं। उदाहरण के लिए-190°C से 110°C तक, हालांकि सूर्य से इसकी दूरी पृथ्वी के ही बराबर है। ऐसा क्यों होता है ?
उत्तर:
चन्द्रमा पर वायु एवं जल का अभाव होता है जो तापक्रम नियन्त्रण में सहायक हो सकते थे इसलिए जब यह सूर्य की ओर आता है तो तापक्रम 110°C तक पहुँच जाता है और उससे दूर होने पर -190°C तक गिर जाता है।

प्रश्न 12.
समुद्र तट के निकट लोग पतंग उड़ाना क्यों पसन्द करते हैं?
उत्तर:
समुद्र के पास दिन में पवन का निर्माण होता है जो पतंग उड़ाने के लिए आवश्यक है इसलिए लोग समुद्र के किनारे पतंग उड़ाना पसन्द करते हैं।

प्रश्न 13.
मथुरा रिफाइनरी ताजमहल के लिए क्यों एक समस्या बनी हुई है?
उत्तर:
मथुरा रिफाइनरी विषाक्त गैसें जैसे सल्फर डाइ-ऑक्साइड आदि छोड़ती है जो वर्षा के जल से मिलकर एसिड (अम्ल) बनाती है और अम्ल वर्षा (एसिड रेन) करने का कारण बनती है जो ताजमहल के संगमरमर का क्षरण करती है।

प्रश्न 14.
दिल्ली में लाइकेन क्यों नहीं मिलते हैं जबकि मनाली या दार्जिलिंग में आमतौर पर उगते हैं?
उत्तर:
लाइकेन एक जैव संकेतक है तथा SO2 आदि प्रदूषकों के लिए अति संवेदनशील होता है। दिल्ली में स्वचालित वाहनों की अत्यधिक संख्या एवं औद्योगिक संस्थानों के कारण यहाँ की वायु अति प्रदूषित होती है जबकि मनाली एवं दार्जिलिंग प्रायः प्रदूषण रहित हैं इसलिए लाइकेन दिल्ली में नहीं पाया जाता जबकि मनाली एवं दार्जिलिंग में खूब उगता है।

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प्रश्न 15.
जल संरक्षण की क्यों आवश्यकता है जबकि भूखण्डों को विशाल समुद्र घेरे हुए है?
उत्तर:
लवणयुक्त समुद्री जल मनुष्य और पादपों के लिए प्रत्यक्ष रूप से लाभदायक नहीं होता तथा लवण विहीन जल के संसाधन सीमित हैं तथा माँग अधिक। इसलिए माँग की आपूर्ति हेतु जल संरक्षण की आवश्यकता है।

प्रश्न 16.
लाइकेन वनस्पतिहीन चट्टानों पर सबसे पहले आने वाले जीव कहलाते हैं। ये मृदा बनाने में किस प्रकार सहायक होते हैं?
उत्तर:
लाइकेन चट्टानों पर उगने वाले सबसे पहले जीव हैं। लाइकेन रासायनिक पदार्थ छोड़ते हैं जो पत्थरों को छोटे-छोटे कणों में बदलकर मृदा का निर्माण करते हैं। उसके बाद में मॉस जैसे छोटे-छोटे पौधे उगते हैं जो पत्थरों को तोड़ने में सक्षम होते हैं। इस तरह से चट्टानों को मृदा में बदल देते हैं।

प्रश्न 17.
उर्वरक मृदा में ह्यूमस बड़ी मात्रा में होती है, क्यों?
उत्तर:
उर्वरक मृदा में अनेक प्रकार के जीव मौजूद होते हैं जो मृत कार्बनिक पदार्थों को विघटित करके ह्यूमस बना देते हैं। ह्यूमस खनिज प्रदान करती है, जल का अवशोषण करती है और मृदा को छिदिल बनाकर उर्वरक मृदा बना देती है।

प्रश्न 18.
पहाड़ों पर सोपानी कृषि (Step farming) आमतौर पर क्यों पाई जाती है?
उत्तर:
ढलान पर जलधारा द्वारा मृदा अपरदन होता है। उसे रोकने के लिए पहाड़ों पर सोपानी कृषि आमतौर पर पाई जाती है।

प्रश्न 19.
जड़ों में पायी जाने वाली मूल ग्रन्थिकाएँ पौधों के लिए क्यों लाभदायक होती हैं?
उत्तर:
जड़ों में पायी जाने वाली मूल ग्रन्थिकाओं में नाइट्रोजन स्थिरकारी जीवाणु राइजोबियम होते हैं जो वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को नाइट्रोजन के लवणों में बदल देते हैं जिससे मृदा की उर्वरकता बढ़ जाती है।

प्रश्न 20.
“धूल एक प्रदूषक है।” इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
वायु में उपस्थित धूल निलम्बित कणों के रूप में एलर्जी या दूसरे श्वसन रोग पैदा करती है। पौधों की पत्तियों पर एकत्रित होकर उसके रन्ध्रों को बन्द कर पादप वृद्धि में व्यवधान डालती है। इसलिए यह एक प्रदूषक है।

प्रश्न 21.
मृदा के बनने में सूर्य की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सूर्य शैलों को गरम करता है और इस प्रकार दिन में ये फैलती हैं तथा रात्रि में ठण्ड पड़ने पर सिकुड़ती हैं। परिणामस्वरूप शैल टूट जाते हैं और छोटे-छोटे कणों में विभक्त होकर मृदा का निर्माण करते हैं।

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प्रश्न 22.
कार्बन डाइऑक्साइड पौधों के लिए आवश्यक है। हम इसे प्रदूषक क्यों मानते हैं?
उत्तर:
कार्बन डाइऑक्साइड पौधों के लिए प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा भोजन बनाने में सहयोग प्रदान करती है इसलिए पौधों के लिए अति आवश्यक है। लेकिन अधिक मात्रा में इसका सान्द्रण वायु प्रदूषण पैदा करता है इसलिए हम इसे प्रदूषक मानते हैं।

प्रश्न 23.
ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक ऊष्मीकरण) के प्रमुख कारण लिखिए। (2019)
उत्तर:
वैश्विकऊष्मीकरण (ग्लोबल वार्मिंग) के प्रमुख कारण-विभिन्न निम्न मानवीय क्रियाकलापों के कारण वायुमण्डल का तापमान निरन्तर बढ़ता जा रहा है –

  1. शहरीकरण एवं औद्योगीकरण के कारण वृक्षों का अत्यधिक कटान।
  2. जीवाश्म ईंधन का अत्यधिक उपयोग।

प्रश्न 24.
अम्ल वर्षा क्या है? (2019)
उत्तर:
अम्ल वर्षा-“जीवाश्म ईंधन के जलने से वायुमण्डल में विभिन्न प्रकार की अम्लीय गैसें; जैसे-कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइड वायुमण्डल में एकत्रित होते हैं जो जलवाष्प से मिलकर अम्ल बनाकर वर्षा के साथ बरसते हैं। इस वर्षा को अम्ल वर्षा कहते हैं।”

MP Board Class 9th Science Chapter 14  लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वायु प्रदूषण के कारण लिखिए।
अथवा
वायु प्रदूषण के मानव निर्मित स्रोतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वायु प्रदूषण के कारण अथवा वायु प्रदूषकों के मानव निर्मित स्रोत –

  1. घर, कल-कारखानों एवं वाहनों में ईंधन के दहन से उत्पन्न प्रदूषक गैसें वायुमण्डल में मिल जाती हैं।
  2. रेफ्रिजरेटरों एवं एयर कण्डीशनरों में प्रयुक्त क्लोरोफ्लोरोकार्बन (ऐरोसॉल) रिसाव के कारण वायुमण्डल में मिल जाती है।
  3. कृषि रसायनों (कीटनाशक, फंगसनाशक, खरपतवारनाशक, पीड़कनाशक) के छिड़काव के कारण उनसे निकले गैसीय रसायन वायुमण्डल में मिल जाते हैं।
  4. वनों की कटाई, बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण एवं खनन आदि के कारण भी वायु प्रदूषक वायुमण्डल में मिलकर उसे प्रदूषित करते हैं।

प्रश्न 2.
वायु प्रदूषण के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वायु प्रदूषण के प्रभाव-मानव जीवन पर विभिन्न वायु प्रदूषकों के निम्न प्रभाव पड़ते हैं –

1. नाइट्रोजन ऑक्साइड के प्रभाव:
फेफड़ों के ऊतकों में सूजन आना, न्यूमोनिया होना, ऑक्सीजन परिवहन क्षमता में कमी होना, फेफड़ों का कैंसर होना, आँखों में जलन होना एवं प्रतिरोधक क्षमता में कमी होना।

2. सल्फर डाइ:
ऑक्साइड के प्रभाव-कफ, खाँसी, सिरदर्द एवं आँखों में जलन होना।

3. कार्बन मोनो:
ऑक्साइड के प्रभाव-सिरदर्द एवं उल्टी होना, साँस लेने में कठिनाई होना, उल्टी आना, ऑक्सीजन की परिवहन क्षमता में कमी, पेशीय कमजोरी होना।

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प्रश्न 3.
वायु प्रदूषण के नियन्त्रण के उपाय लिखिए।
उत्तर:
वायु प्रदूषण के नियन्त्रण के उपाय –

  1. उद्योगों एवं कल-कारखानों को आवासीय क्षेत्रों से दूर स्थापित करना चाहिए।
  2. कारखानों की चिमनियों को काफी ऊँचा बनाना चाहिए।
  3. वाहनों के धुआँ निकलने वाले पाइप (साइलेंसर) के मुँह पर फिल्टर लगाना चाहिए।
  4. धूम्रपान से बचना चाहिए।
  5. प्रदूषण रहित ईंधन का उपयोग करना चाहिए तथा सस्ते ईंधन से बचना चाहिए।

प्रश्न 4.
जल प्रदूषण के प्रभाव लिखिए।
उत्तर:
जल प्रदूषण के प्रभाव:
जीवों पर जल प्रदूषण के निम्न प्रभाव पड़ते हैं –

1. मानव पर प्रभाव:
प्रदूषित जल से मानव में विभिन्न घातक बीमारियाँ; जैसे हैजा, टायफाइड, डायरिया, पेचिश, पीलिया एवं हेपेटाइटिस आदि हो जाती हैं। जल प्रदूषण मानव अंगों; जैसे-मस्तिष्क, यकृत, फेफड़े एवं वृक्क आदि पर घातक प्रभाव डालते हैं।

2. प्राणियों पर प्रभाव:
प्रदूषित जल के कारण प्राणियों के अण्डे, लार्वा आदि नष्ट हो जाते हैं। प्राणियों का जीवन खतरे में आ जाता है। प्रदूषित जल में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, फलस्वरूप मछलियाँ आदि जलीय जीवों की मृत्यु हो जाती है।

3. वनस्पति पर प्रभाव:
प्रकाश-संश्लेषण की दर में कमी आ जाती है। पेस्टीसाइड एवं कीटनाशकों के कारण नील-हरित शैवाल मर जाते हैं। जल में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।

प्रश्न 5.
जल प्रदूषण के कारणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जल प्रदूषण के कारण:

  1. घरेलू अपशिष्ट एवं वाहित मल का जलस्रोतों में मिलना।
  2. औद्योगिक जलीय अवशिष्टों का जलस्रोतों में मिलना।
  3. अपमार्जक एवं साबुन युक्त (नहाने एवं कपड़े धोने के कारण प्रदूषित) जल का जलाशयों में मिलना।
  4. कृषि रसायनों (उर्वरक, खरपतवारनाशी, कीटनाशी, फंगसनाशी, पीड़कनाशी आदि) का वर्षा जल के साथ बहकर जलस्रोतों में मिलना।
  5. रेडियोधर्मी पदार्थों का जलस्रोतों में मिलना।

प्रश्न 6.
जल प्रदूषण के नियन्त्रण (रोकने) के उपाय लिखिए। (2019)
उत्तर:
जल प्रदूषण के नियन्त्रण के उपाय:

  1. वाहित मल को जल में प्रवाहित करने से पहले उसे उपचारित कर लेना चाहिए।
  2. औद्योगिक अपशिष्टों को जलाशयों में मिलाने से पहले उपचारित करके हानिरहित बना लेना चाहिए।
  3. ठोस अपशिष्टों को जलाशयों में नहीं फेंकना चाहिए।
  4. जैविक अपशिष्टों को जलाशयों में नहीं फेंकना चाहिए।
  5. जलाशयों में जानवरों के नहाने एवं कपड़े धोने पर प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए।

प्रश्न 7.
ध्वनि प्रदूषण किसे कहते हैं? इसके क्या प्रभाव पड़ते हैं?
उत्तर:
ध्वनि प्रदूषण:
“विभिन्न प्रकार की अवांछित तीव्र ध्वनियों द्वारा पर्यावरण में उत्पन्न अशान्ति, ध्वनि प्रदूषण कहलाती है।”

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव:

  1. श्रव्य क्षमता कम हो जाती है तथा व्यक्ति बहरा तक हो जाता है।
  2. सिरदर्द होने लगता है तथा चिड़चिड़ापन आ जाता है।
  3. इससे दौरे पड़ने लगते हैं।
  4. गर्भस्थ शिशु पर कुप्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 8.
ध्वनि प्रदूषण को नियन्त्रित करने के उपाय बताइए।
उत्तर:
ध्वनि प्रदूषण को नियन्त्रित करने के उपाय:

  1. उद्योग व कारखानों को शहर से दूर स्थापित करना चाहिए।
  2. वाहनों में गुणवत्ता वाले ईंधन का उपयोग करना चाहिए।
  3. वाहनों एवं जनरेटरों में साइलेंसर का उपयोग करना चाहिए।
  4. कारखानों के कलपुर्जी का उचित रख-रखाव करना चाहिए।
  5. रेडियो, टेलीविजन आदि को धीमी आवाज में बजाना चाहिए।
  6. लाउडस्पीकर एवं डीजे आदि पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए।

प्रश्न 9.
मृदा प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मृदा प्रदूषण के स्त्रोत:

1. औद्योगिक कार्य:
उद्योगों से निकले त्याज्यों को मृदा में मिला दिया जाता है।

2. शहरी अपशिष्ट:
शहर से निकलने वाला घरेलू एवं व्यावसायिक अपशिष्ट, सूखा, कीचड़, कूड़ा-करकट, ईंधन अवशेष, गले, कागज, पॉलीथीन की थैलियाँ, फल-सब्जियों के छिलके आदि मृदा में डाल दिए जाते हैं।

3. कृषि कार्य:
कृषि कार्य में प्रयुक्त उर्वरक, कीटनाशक, फंगीनाशक, खरपतवार नाशक, पीड़कनाशक आदि रासायनिक पदार्थ मृदा की उर्वरक शक्ति को नष्ट करते हैं तथा उसे विषैला एवं प्रदूषित करते हैं।

4. मृदा अवसाद:
आँधी, तूफान, तेज हवा एवं बाढ़ के कारण खेत की उपजाऊ मिट्टी (मृदा) अपरदन द्वारा नष्ट हो जाती है तथा गन्दगी भरे दलदली पदार्थ मृदा में एकत्रित हो जाते हैं।

प्रश्न 10.
मृदा प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों पर प्रकाश डालिए। (2019)
उत्तर:
मृदा प्रदूषण के हानिकारक प्रभाव:

  1. ठोस अपशिष्ट (कूड़ा-करकट) में मच्छर एवं मक्खियाँ पनपती हैं जो रोगवाहक होते हैं।
  2. उद्योगों से निकला अपशिष्ट मृदा की उर्वरक शक्ति को क्षीण करता है तथा उसकी अम्लीयता एवं क्षारीयता के सन्तुलन को बिगाड़ देता है। इससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है।
  3. अम्ल वर्षा से पृथ्वी की उर्वरा शक्ति क्षीण होती है तथा फसल उत्पादन प्रभावित होता है।
  4. मृदा अपरदन से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।
  5. रासायनिक उर्वरकों, कृषि रसायन (जैसे-कीटनाशक, पीड़कनाशक, फंगीनाशक एवं खरपतवारनाशक) खाद्य श्रृंखला के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते हैं।
  6. वाहित मल और कचरा, पर्यावरण को बदबूदार बनाता है।

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प्रश्न 11.
मृदा प्रदूषण रोकने के उपाय लिखिए।
उत्तर:
मृदा प्रदूषण रोकने के उपाय:

  1. कार्बनिक खाद का उपयोग करके।
  2. फसल चक्रण का उपयोग करके।
  3. वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करके तथा वृक्षों को अत्यधिक कटान को प्रतिबन्धित करके।
  4. ढलानों पर सीढ़ीदार आकार बनाकर।
  5. कृषि रसायनों (उर्वरक एवं अन्य) का कम से कम उपयोग करके।

प्रश्न 12.
नाइट्रोजन चक्र में जीवों की भूमिका क्या है?
उत्तर:
नाइट्रोजन चक्र में जीवों की भूमिका अथवा जीवों द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण के प्रमुख चरण (Biotic Role in Nitrogen Cycle or Nitrogen Fixation by Organism):
“नाइट्रोजन चक्र में जीवों की भूमिका अथवा जीनों द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण को विभिन्न चरणों में निम्नांकित तालिका से समझ सकते हैं –
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प्रश्न 13.
प्रकृति में ऑक्सीजन चक्र समझाइए।
अथवा
ऑक्सीजन चक्र का रेखीय चित्र बनाकर वर्णन कीजिए। (2019)
उत्तर:
प्रकृति में ऑक्सीजन चक्र (Oxygen Cycle in Nature):
श्वसन हेतु वायुमण्डलीय ऑक्सीजन का उपयोग स्थलीय जन्तुओं द्वारा तथा जल में घुली हुई ऑक्सीजन का उपयोग जलीय जन्तु द्वारा किया जाता है तथा कोशिकीय श्वसन के फलस्वरूप कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल बनता है। जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड हरे पेड़-पौधों द्वारा ग्रहण की जाती है तथा प्रकाश-संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन मुक्त होती है जो वायुमण्डल में चली जाती है। मृत जीवों के अपघटन से भी ऑक्सीजन मुक्त होती है। इस प्रकार ऑक्सीजन चक्र चलता रहता है।
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प्रश्न 14.
पदार्थों के चक्रण में अपघटकों की भूमिका संक्षेप में बताइए।
अथवा
जीवमण्डल में अपघटकों की अनुपस्थिति के क्या परिणाम हो सकते हैं?
अथवा
पारितन्त्र में अपघटकों की भूमिका समझाइए।
उत्तर:
पदार्थों के चक्रण में अपघटकों की भूमिका (Role of Decomposers in Cycling of Materials):
अपघटक जीवाणु, कवक तथा फंगस आदि सूक्ष्मजीव होते हैं जो मृत पेड़-पौधों (उत्पादकों) एवं मृत जन्तुओं (उपभोक्ताओं) का अपघटन करते हैं। वे उन जीवों में उपस्थित जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदल देते हैं। इन सरल अकार्बनिक पदार्थों का पुन: उपयोग उत्पादकों द्वारा कर लिया जाता है तथा जटिल कार्बनिक पदार्थों में रूपान्तरित कर दिया जाता है।
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इन जटिल कार्बनिक पदार्थों का उपयोग पुनः उपभोक्ताओं द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कर लिया जाता है। यदि जीवमण्डल में अपघटक अनुपस्थित जड़ों द्वारा हो जाएँ तो पदार्थों के चक्रण की सभी प्रक्रियाएँ बन्द हो जाएँगी और मृत पेड़-पौधों और जन्तुओं की भरमार से पर्यावरण असन्तुलित हो जाने से भयंकर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। इस प्रकार के पदार्थों के चक्रण में अपघटकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

प्रश्न 15.
प्रकृति में जल-चक्र को सचित्र समझाइए।
अथवा
जलीय चक्र किसे कहते हैं ? इसके चरण एवं प्रकृति में जलीय चक्र को चित्र द्वारा समझाइए।
उत्तर:
प्रकृति में जल-चक्र (Water Cycle or Hydrological Cycles in Nature):
पौधे जड़ों द्वारा मृदा से जल ग्रहण करते हैं तथा जन्तु भोजन के साथ। पौधों से जल वाष्पोत्सर्जन की क्रिया द्वारा जलवाष्प के रूप में तथा जन्तुओं में पसीने के द्वारा जलवाष्प के रूप में वायुमण्डल में चला जाता है। जन्तु मूत्र विसर्जन में भी जल त्यागते हैं जो मृदा में मिल जाता है। तालाबों, झीलों, नदियों और समुद्रों का जल वाष्पन द्वारा वायुमण्डल में पहुँचता है। वायुमण्डल में बादल बनते हैं जो निम्न ताप पर वर्षा या हिम के रूप में बरसते हैं। इस प्रकार जल पृथ्वी पर वापस आ जाता है।

प्रश्न 16.
उपरिमृदा की हानि को हम कैसे रोक सकते हैं?
उत्तर:
उपरिमृदा की हानि को रोकने के उपाय:
उपरिमृदा की हानि को रोकने के लिए हम निम्न उपाय करेंगे –

  1. अधिकाधिक वानस्पतिक वृद्धि करके अर्थात् वृक्षारोपण द्वारा।
  2. वृक्षों के कटान पर प्रतिबन्ध लगाकर।
  3. पशुचारण एवं वनस्पति काटने पर प्रतिबन्ध लगाकर।
  4. ढलानों पर सोपानी कृषि (सीढ़ीदार कृषि) करके।

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प्रश्न 17.
एक तालाब में मछलियाँ बड़ी संख्या में मरी पाई गईं। क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
एक तालाब में बड़ी संख्या में मछलियाँ मरी पाई गईं। इसके मुख्य कारण निम्न हैं –

  1. जलाशयों में अनैच्छिक विषैले पदार्थों का मिलना। ये पदार्थ औद्योगिक अपशिष्ट, वाहित मल, पीड़कनाशक आदि हो सकते हैं।
  2. जलाशयों में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा में कमी आना जिससे श्वसन बाधित होना।
  3. जलाशयों में पोषक तत्वों की कमी होना।
  4. जलाशय के तापमान में परिवर्तन होना अर्थात् ऊष्मीय प्रदूषण।
  5. प्रदूषकों के कारण क्लोमों का अवरुद्ध होना।

प्रश्न 18.
“मृदा जल से बनती है” यदि आप इस कथन से सहमत हैं तो कारण बताइए।
उत्तर:
मृदा जल से बनती है क्योंकि जल पत्थरों से निम्न प्रकार मृदा बनाने में सहायक होता है –

  1. दीर्घकाल तक पत्थरों की घिसाई करता है।
  2. पत्थरों को एक-दूसरे से टकराने एवं रगड़ने में सहायता करता है।
  3. पत्थरों की विदरिकाओं (झिर्रियों) में जल भर जाता है जो जमने के कारण फैलता है तो पत्थरों को तोड़कर टुकड़े-टुकड़े करता है।
  4. जल के बहाव के साथ पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े आपस में टकराते, रगड़ते और घिसते हैं।

प्रश्न 19.
जीवाश्म ईंधन किस प्रकार वायु प्रदूषण फैलाता है?
उत्तर:
जीवाश्म ईंधन से वायु प्रदूषण का फैलना:
जब जीवाश्म ईंधन स्वचालित वाहनों, औद्योगिक इकाइयों, भट्टियों तथा चूल्हों में जलता है तो कार्बन डाइ-ऑक्साइड, कार्बन मोनो-ऑक्साइड, लैड के ऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड आदि बनते हैं जो वायुमण्डल में प्रवेश करके उसे प्रदूषित करते हैं। इसके अतिरिक्त अधजले कार्बन के कण एवं धुआँ भी वायुमण्डल में प्रवेश करता है। ये सभी अवांछित एवं विषैले होते हैं। इस प्रकार जीवाश्म ईंधन वायु प्रदूषण फैलाता है। इसके अतिरिक्त निलम्बित कणों की उपस्थिति के कारण दृश्यता कम हो जाती है।

प्रश्न 20.
मोटर कार जिसके शीशे पूरी तरह से बन्द किए हुए हैं, धूप में पार्क कर दी जाती है। कार के अन्दर का तापक्रम तेजी से बढ़ता है। समझाइए, क्यों?
उत्तर:
सूर्य के प्रकाश की अवरक्त विकिरण काँच से प्रवेश कर जाती है तथा कार के अन्दर का तापमान बढ़ा देती है क्योंकि काँच सूर्य से आने वाली कम तरंगदैर्घ्य वाली अवरक्त किरणों के लिए पारगम्य है, जबकि कार के अन्दर से बाहर आने वाली अवरक्त किरणों जिनकी तरंगदैर्घ्य अपेक्षाकृत अधिक होती है के लिए पारगम्य नहीं होता। इस प्रकार कार के शीशे सूर्य से आने वाली ऊष्मीय विवरण को अन्दर तो जाने देते हैं लेकिन अन्दर की ऊष्मीय विकिरण को बाहर नहीं आने देते इसलिए कार के अन्दर का तापक्रम तेजी से बढ़ता है।

MP Board Class 9th Science Chapter 14  दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जल प्रदूषण के क्या कारण हैं? आप जल प्रदूषण को कम करने में किस प्रकार योगदान कर सकते हैं?
उत्तर:
जल प्रदूषण के कारण:

  1. घरेलू अपशिष्ट एवं वाहित मल का जलस्रोतों में मिलना।
  2. औद्योगिक जलीय अवशिष्टों का जलस्रोतों में मिलना।
  3. अपमार्जक एवं साबुन युक्त (नहाने एवं कपड़े धोने के कारण प्रदूषित) जल का जलाशयों में मिलना।
  4. कृषि रसायनों (उर्वरक, खरपतवारनाशी, कीटनाशी, फंगसनाशी, पीड़कनाशी आदि) का वर्षा जल के साथ बहकर जलस्रोतों में मिलना।
  5. रेडियोधर्मी पदार्थों का जलस्रोतों में मिलना।

जल प्रदूषण के नियन्त्रण के उपाय:

  1. वाहित मल को जल में प्रवाहित करने से पहले उसे उपचारित कर लेना चाहिए।
  2. औद्योगिक अपशिष्टों को जलाशयों में मिलाने से पहले उपचारित करके हानिरहित बना लेना चाहिए।
  3. ठोस अपशिष्टों को जलाशयों में नहीं फेंकना चाहिए।
  4. जैविक अपशिष्टों को जलाशयों में नहीं फेंकना चाहिए।
  5. जलाशयों में जानवरों के नहाने एवं कपड़े धोने पर प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए।

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प्रश्न 2.
प्रकृति में नाइट्रोजन चक्र को चित्र की सहायता से समझाइए।
अथवा
नाइट्रोजन चक्र कैसे पूरा होता है? समझाइए।
उत्तर:
नाइट्रोजन चक्र के विभिन्न चरण (Different Steps of Nitrogen Cycle):
नाइट्रोजन चक्र निम्नांकित चरणों में पूर्ण होता है –

1. नाइट्रोजन का स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation):
इसमें वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को उपयुक्त सरल नाइट्रोजन लवणों में बदला जाता है जिनका उपयोग पौधे कर सकें। यह प्रक्रिया कई प्रकार से होती है –
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा image 5
(i) तड़ित द्वारा (By Thundering):
वायुमण्डल की नाइट्रोजन वायु को ऑक्सीजन से तड़ित की उपस्थिति में क्रिया करके नाइट्रोजन के ऑक्साइड बनाती है। ये ऑक्साइड वर्षा के जल में घुलकर नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं जो मृदा से क्रिया करके नाइट्रेट बनाते हैं।

(ii) सहजीवी जीवाणुओं द्वारा (By Symbiotic Bacteria):
द्वि-दलीय पौधों की जड़ में कुछ गाँठें होती हैं जिनमें उपस्थित जीवाणु वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके नाइट्रेट में बदल देते हैं।

(iii) कृत्रिम विधि द्वारा (ByArtificial Method):
कृत्रिम रूप से वायुमण्डल की नाइट्रोजन को हैबर विधि से अमोनिया में फिर अमोनिया लवण में बदला जाता है जो उर्वरक के रूप में पौधों को उपलब्ध कराया जाता है।

2. जन्तु एवं पौधों में नाइट्रोजन का प्रोटीन के रूप में संग्रहण (Storage of Nitrogen in Animals and Plants in the Form of Protein):
पौधों में यह नाइट्रोजन जटिल कार्बनिक पदार्थों (प्रोटीनों) में बदल जाता है। पेड़-पौधों को शाकाहारी जन्तु खाते हैं। शाकाहारी जन्तुओं को माँसाहारी जन्तु खाते हैं। इस प्रकार प्रोटीन के रूप में नाइट्रोजन पौधों और जन्तुओं में उपस्थित होती है।

3. अमोनीकरण (Ammonification):
मृत पेड़-पौधों एवं जन्तुओं के मल-मूत्र के अपघटन द्वारा प्रोटीन यूरिया तथा यूरिक अम्ल अमोनिया में परिवर्तित होता है। यह प्रक्रिया नाइट्रोसोमोनास जीवाणुओं द्वारा होती है।

4. नाइट्रीकरण (Nitrification):
नाइट्रोबैक्टर द्वारा अमोनिया को नाइट्रेट में बदला जाता है जिसका कुछ भाग पौधों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है।

5. विनाइट्रीकरण (Denitrification):
शेष नाइट्रेट को स्यूडोमोनास जीवाणुओं द्वारा नाइट्रोजन से मुक्त कर दिया जाता है जो वायुमण्डल को वापस मिल जाता है। इस प्रकार नाइट्रोजन चक्र पूर्ण होता है।

प्रश्न 3.
जीवमण्डल में कार्बन चक्र (कार्बन डाइऑक्साइड चक्र) किस प्रकार है ? विवरण रेखाचित्र सहित दीजिए।
अथवा
प्रकृति में कार्बन डाइऑक्साइड चक्र को चित्र की सहायता से समझाइए।
अथवा
कार्बन चक्र को समझाइए।
उत्तर:
जीवमण्डल में कार्बन-चक्र अथवा कार्बन डाइऑक्साइड चक्र (Carbon Cycle or Carbon Dioxide Cycle in Biosphere):

  1. वायुमण्डल की कार्बन डाइऑक्साइड का कुछ भाग जल में घुल जाता है जिसका उपयोग जलीय पौधे एवं वायुमण्डल की शेष CO2 का उपयोग स्थलीय पौधे प्रकाश-संश्लेषण में करते हैं। इस प्रकार CO2 के रूप में उपस्थित कार्बन भोजन के रूप में पौधों में एकत्रित हो जाता है।
  2. पौधों से यह कार्बन शाकाहारी जन्तुओं और फिर उनसे माँसाहारी जन्तुओं में भोजन के रूप में पहुँचता है।
  3. पौधों एवं जन्तुओं के श्वसन से तथा मृतजीवों (पौधे एवं जन्तुओं) के अपघटन से CO2 बनती है जो वायुमण्डल में वापस चली जाती है।
  4. पौधों से कोयला बनता है तथा पौधों और जन्तुओं से पृथ्वी के गर्त में पेट्रोलियम बनता है।
  5. कोयले के जलने तथा पेट्रोलियम के दहन से पुन: CO2 बनती है जो वायुमण्डल में चली जाती है।

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 14 प्राकृतिक सम्पदा image 6
इस प्रकार जीवमण्डल में कार्बन चक्र अथवा कार्बन डाइ-ऑक्साइड चक्र पूर्ण होता है।

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 2 न्यग्रोधवृक्षः

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 2 न्यग्रोधवृक्षः (कथा) (कथावल्लरीतः)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 2 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) ग्रामे कः वृक्षः आसीत्? (गाँव में कौन-सा पेड़ था?)
उत्तर:
न्यग्रोधवृक्षः (बरगद का पेड़)

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(ख) के मार्गायासं परिहरन्ति स्म? (कौन रास्ते की थकान दूर करते थे?)
उत्तर:
पथिकाः (राहगीर)

(ग) कस्य ध्वनिः अन्तरिक्षम् अस्पृशत्? (किसकी आवाज अंतरिक्ष को छू रही थी?)
उत्तर:
काकस्य (कौए की)

(घ) प्रकृतिदत्तः वरः कः? (प्रकृति का दिया हुआ वरदान क्या था?)
उत्तर:
वृक्षः (पेड़)

(ङ) तरोः पत्राणि खादन् कः नन्दति स्म? (पेड़ के पत्ते खाकर कौन प्रसन्न होता था?)
उत्तर:
अजापुत्रः (बकरी का बच्चा)

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प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) सर्वैः कस्य निर्णयः स्वीकृतः? (सबने किसका निर्णय माना?)
उत्तर:
सर्वैः अजस्य निर्णयः स्वीकृतः। (सबने बकरे का निर्णय माना।)

(ख) कः वृष्टिं वर्षति? (कौन वर्षा करता है?)
उत्तर:
वरुणदेवः वृष्टिं वर्षति। (वरुणदेव वर्षा करते हैं।)

(ग) वृक्षस्य आधारभूता का? (वृक्ष का आधार कौन है?)
उत्तर:
वृक्षस्य आधारभूता भूमाता। (पेड़ का आधार धरती है।)

(घ) अस्माभिः का वर्धनीया? (हमें क्या बढ़ाना चाहिए?)
उत्तर:
अस्माभिः वृक्षसम्पत् वर्धनीया। (हमें वृक्ष-सम्पत्ति को बढ़ाना चाहिए।)

(ङ) किं महत् पापम् अस्ति? (क्या बहुत बड़ा पाप है?)
उत्तर:
वृक्षाणां छेदनं महत् पापम् अस्ति । (पेड़ों को काटना बहुत बड़ा पाप है।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत- (नांचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए-)
(क) शकः किम् अवदत्? (तोते ने क्या कहा?)
उत्तर:
शुकः अवदत्-“अस्य वृक्षस्य फलानि खादन् जन्मतः अहम् अत्रेव वर्ते। नाहम् इमं द्रुमं परित्यक्तुमिच्छामि मदीय एवायं न्यग्रोधवृक्षः।” इति। (तोते ने कहा- “इस पेड़ के फल खाता हुआ मैं जन्म से यहीं हूँ। मैं इस पेड़ को नहीं छोड़ना चाहता। यह मेरा ही बरगद का पेड़ है।)

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(ख) कीटः किं प्रत्यवदत्? (कीड़े ने क्या जवाब दिया?)
उत्तर:
कीटः प्रत्यवदत्-“मदीयैः अर्भकैः सार्द्धम् अहं बहुवर्षेभ्यः अत्रैव उषितवानस्मि। अतः अयं वृक्षः ममैव” इति।

(कीड़े ने कहा-“मेरे पुत्रों के साथ मैं बहुत सालों से यहीं रह रहा हूँ। इसलिए यह पेड़ मेरा ही है।”)

(ग) वृक्षच्छेदनविषये काष्ठच्छेदकः किम् अवदत्? (वृक्ष काटने के विषय पर लकड़हारे ने क्या कहा?)
उत्तर:
वृक्षच्छेदनविषये काष्ठछेदकः अवदत्-“पूर्वम् अहं वृक्षान् छिनद्मि स्म। अधुना तादृशे कृत्सिते कर्मणि न व्यापारयामि। वृक्षाणां छेदनं महत् पापमिति मयाअधिगतमस्ति अतः न्यग्रोधवृक्षस्य छेदन अहं न करष्यिामि’ इति।

(वृक्ष काटने के विषय पर लकड़हारे ने कहा-“मैं पहले पेड़ काटता था पर अब यह बुरा काम नहीं करता। पेड़ काटना बहुत बड़ा पाप है, यह मैं जान गया हूँ, इसलिए मैं पेड़ नहीं काटूंगा।”)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत
(दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(नीडानि, अनिलं, मार्गायासं, सूर्यदेवः, चंक्रम्य)
(क) शाखान्तरं …………….. एकः कीटः अवदत्
(ख) पथिकाः …………….. परिहरन्ति स्म।
(ग) पक्षिणः शाखासु …………….. विरच्य वसन्ति स्म।
(घ) वायुः …………….. ददाति।
(ङ) …………….. प्रकाशं प्रयच्छति।
उत्तर:
(क) चंक्रम्य
(ख) मार्गायासं
(ग) नीडानि
(घ) अनिलं
(ङ) सूर्यदेवः

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत
(उचित रूप से जोड़िए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 2 न्यग्रोधवृक्षः img 1
उत्तर:
(क) 2
(ख) 3
(ग) 1
(व) 5
(ङ) 4

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्धवाक्यानां समक्षं “न” इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामाने ‘न’ लिखिए-)
(क) शुकस्य ध्वनिः अन्तरिक्षम् अस्पृशत्।
(ख) कीटः अर्भकैः सार्द्धम् वसति स्म।
(ग) वृक्षच्छेदकः वृक्षं खण्डशः कृतवान्।
(घ) वृक्षाणां छेदनं महत् पापम्।
(ङ) सूर्यदेवः वृष्टिं वर्षति।।
उत्तर:
(क) न
(ख) आम्
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न।

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प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानां प्रकृतिं प्रत्ययं च पृथक्कुरुत
(नीचे लिखे पदों की प्रकृति व प्रत्यय अलग कीजिए-)
यथा-भक्षयित्वा – भक्ष्+ क्त्वा
(क) कुर्वन्
(ख) विभज्य
(ग) छेत्तुम
(घ) विस्मृत्य
उत्तर:
(क) कुर्वन् – कृ+शतृ
(ख) विभज्य – वि+भ+ल्यप्
(ग) छेत्तुम – छिद्+तुमुन्
(घ) विस्मृत्य – वि+स्मृ+ल्यप्

प्रश्न 8.
अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के सन्धि-विच्छेद करके सन्धि का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 2 न्यग्रोधवृक्षः img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 2 न्यग्रोधवृक्षः img 3

प्रश्न 9.
अधोलिखितपदानां पर्यायशब्दान् लिखत
(नीचे लिखे पदों के पर्यायवाची शब्द लिखिए-)
यथा- वृक्षः – तरुः
(क) काकः
(ख) सर्पः
(ग) पिताः
(घ) पुत्रः
उत्तर:
(क) काकः – वायतः
(ख) सर्पः – भुजङ्गः
(ग) पिता – जनकः
(घ) पुत्रः – अर्भकः

प्रश्न 10.
अव्ययैः वाक्यरचनां कुरुत- (अव्ययों के द्वारा वाक्य बनाइए-)
यथा- एव – ईश्वरः एव रक्षकः अस्ति
(क) अपि
उत्तर:
अपि-पुत्रः अपि पित्रा सह गच्छति। (पुत्र भी पिता के साथ जाता है।)

(ख) तहिं
उत्तर:
तर्हि-यदि सः परिश्रमं करिष्यति तर्हि सफलं भविष्यति।
(यदि वह मेहनत करेगा तभी सफल होगा।)

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(ग) ततः
उत्तर:
ततः-ततः पार्वे उपवनम् अस्ति। (उसके पास में एक बगीचा है।)

योग्यताविस्तार

“वृक्षः” इति विषयमधिकृत्य संस्कृते निबन्धं लिखत।
‘वृक्ष’ इस विषय के आधार पर संस्कृत में निबन्ध लिखिए।

पर्यावरणसंरक्षणार्थम् उपायान् लिखत।
पर्यावरण संरक्षण के लिए उपाय लिखिए।

न्यग्रोधवृक्षः पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरुकता एक कथा के माध्यम से दाई गई है। इस कथा में वृक्ष का महत्त्व बताया गया है तथा उसे काटने से होने वाली हानियों का वर्णन किया गया है, जिससे वन-सरंक्षण किया जा सके।

न्यग्रोधवृक्षः पाठ का अनुवाद

1. कस्मिंश्चित ग्रामे एकःप्राचीनः विशालः त्च न्यग्रोधवृक्षः आसीत्। सः पशुपक्षिभ्यः बहुविधेभ्यः जीवजन्तुभ्यः मनुष्येभ्यः अपि नित्यं बहूपकारकः आसीत्। पथिकाः तस्य वृक्षस्य छायायां पाथेयं भक्षयित्वा मार्गायासं परिहरन्ति स्म। पशवः छायार्थं वृक्षमिमम् आश्रयन्ति स्म। पक्षिणः तस्य शाखासु नीडानि विरच्य वसन्ति स्म। साश्च तत्रत्येषु वल्मीकेषु वासं कुर्वन्ति स्म। एवं स वृक्षः सर्वप्रिय सर्वहितः सर्वापेक्षितः च आसीत्।

शब्दार्था :
न्यग्रोधवृक्षः-बरगद का पेड़-A banyan tree; बहुविधेभ्यः-अनेक प्रकार के-in various (different) ways; पथिकाः -राहगीर-travellers,passers by; way farers; पाथेयम्-रास्ते का भोजन-foodstuff; मार्गायासम्-रास्ते की थकान को-fatigue of the way;नीडानि-घोंसले-nests; विरच्य-बनाकर-making, building; वल्मीकेषु-बिलों में-holes (white ant; termite).

हिन्दी अनुवाद :
किसी गाँव में एक पुराना और विशाल बरगद का पेड़ था। वह पशु-पक्षियों व अनेक प्रकार के जीव-जन्तुओं तथा मनुष्यों के लिए भी सदा बहुत उपकारक था। राहगीर उस वृक्ष की छाया में रास्ते का भोजन खाकर रास्ते की थकान दूर करते थे। पशु छाया के लिए इस वृक्ष का आश्रय लेते थे। पक्षी उसकी शाखाओं पर घोंसले बनाकर रहते थे। और साँप वहीं पर बिलों में रहते थे। इस प्रकार वह वृक्ष सबका प्यारा, सबका हित करने वाला तथा सबके द्वारा अपेक्षित था।

2. तस्य न्यग्रोधवृक्षस्य शाखायाम् एकः काकः बहुकालात् वसन्नासीत्। कस्मिंश्चित् दिने स वायसः किमपि स्मरन् इतस्ततः दृष्ट्वा एवम् उच्चैः अरटत्-“हे बन्धवः श्रूयतां-श्रूयतां मे वचः। अहम् अस्मिन् वृक्षे चिरात् वसामि। अतः अस्योपरि ममैव अधिकारः वर्तते। अयं मदीयः वृक्षः इति। काकस्य ध्वनि क्रमेण अन्तरिक्षम् अस्पृशत्।

शब्दार्था :
वायसः-कौआ-Crow;अरटत-रटने लगा (लगातार) cawed persistently; चिरात्-बहुत समय से-since a long time; मदीयः-मेरा-mite, my.

अनुवाद :
उस बरगद के वृक्ष की शाखा पर एक कौआ बहुत समय से रहता था। किसी (एक) दिन वह कौआ कुछ याद कर इधर-उधर देखकर ही जोर से रटने लगा-‘हे बन्धुओ। सुनो, सुनो मेरी बात। मैं इस पेड़ पर बहुत समय से रहता हूँ। अतः इसके ऊपर मेरा ही अधिकार है। यह मेरा वृक्ष (पेड़) है। कौए की आवाज, क्रम से अन्तरिक्ष को छू रही थी।

English :
A crow lived in the tree; proclaimed himself as sole owner of the tree. Made a loud cry and tall claim over the tree.

3. काकस्य रटनं श्रुत्वा वृक्षस्य समीपे चरन्तः वृक्षाग्रे डयमानाः वृक्षस्य कोटरेषु निवसन्तः च सर्वे प्राणिनः पशवः पक्षिणः साश्च समायाताः। तेषां मध्ये प्रथमं सर्पः फटाटोपं कुर्वन् न्यगदत् “पितृपितामहान कालादपि अहम् अत्रैव निवसामि अतोऽयं वृक्षः मदीय एद” इति। ततः शाखातः शाखान्तरं चंक्रम्य एकः कीटः प्रत्यवदत् “मदीयैः अर्भकैः सार्द्धम् अहं बहुवर्षेभ्यः अत्रैव उषितवानस्मि। अतोऽयं वृक्षः ममैव” इति।

शब्दार्था :
डयमानाः-उड़ते हुए-flying; समायाताः-आ गए-gathered; assembled; flocked; फटाटोपम्-फण् से क्रोध को-showing anger by spreading its hood; न्यगदत्-बोला-uttered;spoke out; अर्भकैः-पुत्रों के साथ-with male issues.

अनुवाद :
कौए की रट को सुनकर पेड़ के पास में चरते हुए, पेड़ के आगे (ऊपर) उड़ते हुए और पेड़ के बिल में रहते हुए सभी प्राणी पशुओं, पक्षी और साँप वहाँ आ गए। उनके बीच में से पहले साँप फण से क्रोध प्रकट करते हुए बोला- “मेरे बाप-दादा के समय से ही मैं यहीं रह रहा हूँ, इसलिए यह मेरा ही पेड़ है।” तब एक शाखा से दूसरी शाखा पर घूमते हुए एक कीड़ा बोला-“मेरे पुत्रों के साथ मैं बहुत सालों से यहीं रह रहा हूँ। इसलिए यह मेरा ही पेड़ है।”

English :
All creatures flocked near the banyan tree. The snake spread its hood and called himself the possessor of the tree. An insect proclaimed its possession of the tree because of the long stay of his family in it.

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4. अनन्तरं शुकः “अस्य वृक्षस्य फलानि खादन् जन्मतः अहमत्रैव वर्ते। नाहमिमं द्रुमं परित्यक्तुमिच्छामि। मदीय एवायं न्यग्रोधवृक्षः” इति उच्चैः अभणत्। ततश्च तत्रत्याः अपरिमिताः कृमयः कीटाश्च “अयं तरुः अस्मदीय एव” इत्युक्त्वा वृक्षस्योपरि स्वं स्वम् अधिकार घोषयन् विचित्रतरं कोलाहलम् अकुर्वन्।

शब्दार्था :
द्रुमम्-पेड़ को-the tree; परित्यक्तुम्-छोड़ना-to leave; अभणत्बोला-repeated, uttered; तत्रत्याः -वहाँ के-living there; अपरिमिताः-न मापने योग्य-numberless; कृमयः-कीड़े-मकोड़े-insects (worms).

अनुवाद :
इसी बीच में तोता जोर से बोला-“इस पेड़ के फलों को खाता हुआ जन्म से ही मैं यहीं हूँ। मैं इस पेड़ को छोड़ना नहीं चाहता हूँ। यह बरगद का पेड़ मेरा ही है।” और तब वहाँ के सब छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़े “यह पेड़ हमारा ही है” ऐसा कहकर पेड़ पर अपने-अपने अधिकार की घोषणा करते हुए अजीब-सा शोर करने लगे।

English :
Parrot lived in the banyan since its birth. Claimed the tree its own. The worms and insects also declared their claim, created a strange bediam (clamour) scene of confusion).

5. अत्रान्तरे कश्चित् अजापुत्रः तत्रागतः। सोऽपि तस्य तरोः पत्राणि खादन नन्दति स्म। तं दृष्ट्वा सर्वे प्राणिनः न्यायनिर्णयं कर्तुं तं प्रार्थयन्त। सर्वेषां वचनानि श्रुत्वा स अजः अवदत्-“अस्तु मया समेषां समस्या समाकर्णिता। इदानीं मम चचनानि यूयं शृणुत। काश्चन शाखाः काकेभ्यः, शाखान्तराणि च कृमिकीटेभ्यः, मूलं सर्वेभ्यः अनेन प्रकारेण सर्वेभ्योऽपि वृक्षं विभज्य दापयिष्यामि। अस्मिन्नेव ग्रामे कश्चित् वृक्षच्छेदकः मे मित्रमस्ति। तम् आह्वयामि इमं वृक्षं खण्डशः कर्तुम्” इति।

शब्दार्था :
अजापुत्रः-बकरी का बच्चा-Kid; नन्दति-प्रसन्न होता है-rejoices; समेषाम्-सभी की-of one and all; समाकर्णिता-सुन ली है-have heard; दापयिष्यामि-दिलवाऊँगा-cause to be given; वृक्षच्छेदकः-लकड़हारा-a woodcutter; आह्वयामि-बुलाता हूँ-call.

अनुवाद :
तभी यहाँ कोई बकरी का बच्चा आता है। वह भी उस पेड़ के पत्तों को खाकर प्रसन्न होता था। उसे देखकर सभी प्राणियों ने न्यायनिर्णय करने की उससे प्रार्थना की। सबके वचनों को सुनकर वह बकरा बोला-“ठीक है, मेरे द्वारा सारी समस्या सुन ली गई है। अब मेरी बात तुम सब सुनो। कोई शाखा कौओं के लिए, शाखाओं के अन्दर का भाग कीड़े-मकोड़ों के लिए और जड़ सबके लिए इस प्रकार से सबको ही पेड़ को विभाजित कर दिलवाऊँगा। इसी गाँव में ही कोई लकड़हारा मेरा मित्र है। उसे इस पेड़ के टुकड़े-टुकड़े करने के लिए बुलाता हूँ।

English :
A kid arrives there. All the creatures asked him to give its judgement on the claimant of the tree. He proposed that the tree should be cut into pieces. (branches for crows, inner portion for worms and insects and root for all).

6. अजस्य निर्णयः सर्वैः स्वीकृतः अतः सर्वेऽपि वृक्षच्छेदकस्य समीपं गत्वा न्यग्रोधवृक्षं छित्वा तस्य भागानाम् वितरणार्थं प्रार्थयन्त। परं सोऽयं काष्ठच्छेदकः अवदत् “पूर्वम् अहं वृक्षान् छिनमि स्म। अधुना तादृशे कुत्सिते कर्मणि न व्यापारयानि। वृक्षाणां छेदनं महत् पापमिति मया अधिगतमस्ति अतः न्यग्रोधवृक्षस्य छेदनं अहं न करिष्यामि” इति।

शब्दार्था :
वितरणार्थम्-बाँटने के लिए-to make a division; कुल्सिते-बुरे में-evil, vicious, sinful; अधिगतम्-जान गया-have known.

अनुवाद :
बकरे का निर्णय सब ने मान लिया, इसलिए सभी ने लकड़हारे के पास जाकर बरगद के पेड़ को काटकर उसके टुकड़ों को बाँटने की प्रार्थना की। पर उस लकड़हारे ने कहा-‘पहले मैं पेड़ काटता था। अब उस बुरे काम (में) को नहीं करता हूँ’ पेड़ों को काटना बहुत बड़ा पाप है, मैं यह जान गया हूँ। इसलिए मैं बरगद का पेड़ नहीं काटूंगा।”

English :
Everyone honoured the kid’s decision. All approached the woodcutter to cut the tree into pieces; the woodcutter declined to do the sinful job of cutting a tree.

7. तथापि सर्वे प्राणिनः तं वृक्षं छेत्तुं यदा निर्बन्धम् अकुर्वन् सदा स धीमान् इदमाह-“अस्तु तर्हि प्रथमं मे वचः शृणुत-यूयं सर्वेऽपि अनेन वृक्षण उपकृताः एव। वृक्षस्य उपकारं स्वीकृत्य युष्माभिः कः प्रत्युपकारः कृतः? युष्माकं मध्ये कः वृक्षस्य जलसेचनम् अकरोत्? कः तस्य॑ रक्षणं विहितवान्? न कोऽपि किञ्चिदपि अकरोत्। वरुणदेवः वृष्टि वर्षति। सूर्यदेवः प्रकाशं प्रयच्छति। भूमाता वृक्षस्य आधारभूता अस्ति। वायुः अनिलं ददाति। ते सर्वे वृक्षं पालयन्ति पोषयन्ति रक्षन्ति च। ते न कदापि “मम अधिकारः वर्तते।” इति अवदन्। ते सर्वे परोपकारिणः। परं यूयं सर्वे परापकारिणः वृक्षस्य साहाय्यं स्वीकृत्य तमेव नाशयितुं कृतसङ्कल्पा यूयं स्वाश्रयमेव नाशयथ। अस्मिन् वृक्षे छिन्ने सति यूयं कुत्र गच्छथ?

शब्दार्था :
निर्बन्धम्-अत्यधिक आग्रह करना-Appealed repeatedly; insisted; प्रत्युपकारः-उपकार का बदला उतारना-to repay the gratitude; सेचनम्-सींचना-to sprinkle, वृष्टिम्-वर्षा को-rain.

अनुवाद :
तभी भी सब प्राणियों ने जब उसको पेड़ काटने के लिए अत्यधिक आग्रह किया, तब उस बुद्धिमान् ने कहा-“ठीक है, तो पहले मेरी बात सुनो-तुम सभी उस पेड़ के द्वारा उपकृत (उ कार करवाया जाना) हो। पेड़ के उपकार को लेकर तुम सब ने क्या प्रत्युपकार (उपकार बदला) किया? तुम सब के बीच में से किसने पेड़ को जल से सींचा? किसने इसकी रक्षा की? किसी ने भी कुछ भी नहीं किया। वरुण देव ने वर्षा की। सूर्यदेव ने प्रकाश दिया। भूमि माता पेड़ का आधार है। वायु ने हवा दी। उन सब ने पेड़ को पाला, पोषण किया और रक्षा की। उन्होंने कभी नहीं कहा कि “मेरा अधिकार है।” वे सब परोपकारी हैं। पर तुम सभी परापकारी हो, पेड़ की सहायता स्वीकार करके उसे ही नष्ट करने का सङ्कल्प कर तुम सब अपने आश्रय को ही नष्ट कर रहे हो। इस पेड़ के कट जाने पर तुम सब कहाँ जाओगे?

English :
Being insisted repeatedly the woodcutter reminded them of their ungrate fulness. They were out at harming themselves by cutting the tree reared by the divine powers. They would lose their own refuge.

8. सर्वमिदं श्रुत्वा पशुपक्षिणः “आम्। सत्यम्। वयं स्वकर्त्तव्यं विस्मृत्य अधिकारार्थं कोलाहलं कुर्मः। वृक्षः प्रकृतिदत्तः वरः अस्ति। स न कस्यापि एकस्य सम्पत् भवितुमर्हति। अस्माभिः सर्वैः मिलित्वा वृक्षस्य संरक्षणं संवर्धनं समारोपणं च कर्त्तव्यम्। न तु विनाशः कार्यः” इति दृढनिश्चयम् अकुर्वन्। अस्माभिः मानवैः अपि वृक्षसम्पत् वर्धनीया ननु।

शब्दार्था :
विस्मृत्य-भूलकर-forgetting; दत्तः-दिया हुआ-given;सम्पत्-संपत्तिproperty; संवर्धनम्-बढ़ाने का-growing (rearing).

अनुवाद :
यह सब सुनकर पशु-पक्षियों ने-“हाँ। सत्य है। हम सब अपने कर्तव्य को भूलकर अधिकार के लिए शोर कर रहे हैं। पेड़ प्रकृति का दिया हुआ वरदान है। वह किसी भी एक की सम्पत्ति नहीं हो सकती। हम सब को मिल कर पेड़ की रक्षा करनी चाहिए, बढ़ाना चाहिए और उगाना चाहिए। न कि विनाश करना चाहिए” ऐसा दृढ़निश्चय किया। हम मानवों के द्वारा भी वृक्ष सम्पत्ति को बढ़ाना चाहिए।

English :
All the creatures realised their folly. They had no claim on the tree which is a gift of nature. They should grow more trees and protect them. It is an object lesson to human beings also.

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 15 ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 15 ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में संसाधनों पर स्वामित्व होता है –
(i) निजी नियन्त्रण
(ii) सरकारी नियन्त्रण
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) निजी नियन्त्रण

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प्रश्न 2.
सिंचाई सुविधाएँ बढ़ाने के लिए किस शासक ने नहरें प्रमुखता से बनवायी? (2015)
(i) मोहम्मद तुगलक
(ii) अकबर
(iii) शाहजहाँ
(iv) हुमायूँ।
उत्तर:
(i) मोहम्मद तुगलक

प्रश्न 3.
अंग्रेजों के आगमन के पूर्व ग्रामीण अर्थव्यवस्था थी (2014)
(i) मुद्रा आधारित
(ii) आत्मनिर्भर
(iii) आयात पर निर्भर,
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(ii) आत्मनिर्भर

प्रश्न 4.
2001 में भारत में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत था
(i) 21.4
(ii) 32.8
(iii) 65.1
(iv) 72.2
उत्तर:
(iv) 72.2

प्रश्न 5.
भारत में भूमि सुधार कब प्रारम्भ किया गया?
(i) स्वतन्त्रता के पश्चात्
(ii) अंग्रेजों के आगमन से पूर्व
(iii) वैदिक काल में
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) स्वतन्त्रता के पश्चात्

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. …………. एक प्रणाली है जिसके द्वारा मनुष्य जीविकोपार्जन करता है।
  2. आजकल वर्षभर में प्रमुख रूप से ………… फसलें ली जाती है।
  3. अंग्रेजों के आगमन से पूर्व कृषि का उद्देश्य ………… था।
  4. …………. ने जमींदारी प्रथा चलाई। (2016)

उत्तर:

  1. अर्थव्यवस्था
  2. तीन फसलें
  3. जीवन निर्वाह
  4. लॉर्ड कार्नवालिस।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
फसलों के उचित बिक्री मूल्य हेतु सरकार न्यूनतम मूल्य निर्धारण करती है।
उत्तर:
सत्य

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प्रश्न 2.
अंग्रेजों के आगमन के बाद गाँव आत्मनिर्भर हो गए। (2018)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
अनार्थिक खेतों को मिलाकर चकबन्दी के द्वारा आर्थिक खेत बनाए।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद राष्ट्रीय आय में कृषि का योगदान बढ़ता जा रहा है।
उत्तर:
असत्य

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अर्थव्यवस्था से क्या आशय है?
उत्तर:
अर्थव्यवस्था से आशय आर्थिक संसाधनों के स्वामित्व से है। इसमें वह सम्पूर्ण क्षेत्र सम्मिलित किया जाता है जहाँ उसकी आर्थिक गतिविधियाँ संचालित होती हैं।

प्रश्न 2.
अंग्रेजों के आगमन के पूर्व भारत के गाँव किस प्रकार के थे?
उत्तर:
अंग्रेजों के आगमन के पूर्व भारत के गाँव आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं खुशहाल थे।

प्रश्न 3.
गाँवों की आत्मनिर्भरता से क्या आशय है? (2011)
उत्तर:
आत्मनिर्भरता से आशय यह है कि ग्रामवासी अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति अपने गाँव में ही पूर्ण कर सकें।

प्रश्न 4.
प्राचीन समय में गाँव की कार्यशील जनसंख्या के प्रमुख अंग कौनसे थे ?
उत्तर:
प्राचीन समय में गाँव की कार्यशील जनसंख्या या समुदाय के तीन प्रमुख अंग थे-कृषक, दस्तकार तथा ग्राम अधिकारी।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अंग्रेजों के आगमन से पूर्व भारतीय ग्रामीण कार्यशील समुदाय की संरचना बताइए।
उत्तर:
प्राचीन समय में गाँव की कार्यशील जनसंख्या या समुदाय के तीन प्रमुख अंग थे-कृषक, दस्तकार तथा ग्राम अधिकारी।
(1) कृषक:
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग कृषक होता है। प्राचीन समय में प्रत्येक कृषक का गाँव में अपना घर तथा भूमि में हिस्सा होता था। वे साधन सम्पन्न होते थे। खेती का उद्देश्य प्रायः जीवन निर्वाह होता था।

(2) दस्तकार :
गाँव में बढ़ई, लुहार, कुम्हार, कारीगर, मोची, जुलाहे आदि सभी प्रकार के दस्तकार पाये जाते थे। ये ग्रामीण समुदाय की विभिन्न आवश्यकताओं को गाँव में ही पूरा कर देते थे। उनके कार्यों का पारिश्रमिक अनाज या वस्तु के रूप में दिया जाता था।

(3) ग्राम अधिकारी:
ग्राम अधिकारी मुख्यत: तीन प्रकार के होते थे –

  • मुखिया गाँव का प्रमुख अधिकारी होता था। यह किसानों से लगान की वसूली कर शासक को देने के लिए उत्तरदायी था।
  • मालगुजारी का रिकार्ड रखने वाला।
  • कोटवार जो आपराधिक एवं अन्य महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ शासक को प्रदान करता था।

प्रश्न 2.
अंग्रेजों के आगमन के पश्चात् कृषि भूमि का हस्तान्तरण क्यों होने लगा? (2009, 12, 13)
उत्तर:
अंग्रेजों ने लगभग 200 वर्षों तक हमारे देश पर शासन किया। उन्होंने भारत एवं भारतीयों का हर प्रकार से शोषण किया। उन्होंने ऐसी नीतियाँ अपनाई जिसके कारण खुशहाल भारत गरीबी और भुखमरी से जूझने लगा। कृषि एवं उद्योग पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा। कृषकों में निर्धनता व्याप्त होने के कारण कृषक ऋण लेकर अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने लगे। किन्तु किन्हीं कारणोंवश ऋणों को वापस न कर पाने के कारण वे ऋणों के बोझ तले दबने लगे। समय पर ऋण चुका नहीं पाने के कारण साहूकार व महाजन ऋण के बदले उनकी जमीन पर कब्जा करने लगे। इस प्रकार कृषि भूमि का हस्तान्तरण कृषकों से साहूकारों एवं महाजनों को होने लगा। परिणामस्वरूप कृषक भूमिहीन एवं बेघर होने लगे। अतः स्पष्ट है कि अंग्रेजों ने जो जमींदारी प्रथा चलाई, उसका कृषि एवं कृषकों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा।

प्रश्न 3.
प्राचीन भारत में वस्तु विनिमय प्रणाली क्यों प्रचलित थी?
(2008, 09, 12)
उत्तर:
प्राचीन भारत में मनुष्य की आवश्यकताएँ सीमित होती थीं। परन्तु वह अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति, स्वयं नहीं कर सकता था। उसे अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अन्य व्यक्तियों पर निर्भर रहना पड़ता था। उस समय मुद्रा का चलन नहीं था। सभी ग्रामीण दस्तकारों तथा महाजनों से अपनी-अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ प्राप्त कर लेते थे और बदले में अनाज या फिर अन्य वस्तुएँ देते थे। इसी कारण इस प्रणाली को वस्तु विनिमय प्रणाली कहा गया। पण्डित, वैद्य, नाई, धोबी सभी व्यक्तियों की सेवाओं का भुगतान अनाज या अन्य वस्तुओं के रूप में किया जाता था। अन्य शब्दों में “वस्तु विनिमय प्रणाली, विनिमय की वह प्रणाली होती थी जिसमें वस्तु के बदले वस्तु या सेवा का प्रत्यक्ष आदान-प्रदान होता था। इसमें मुद्रा का प्रयोग नहीं किया जाता था।”

प्रश्न 4.
जनसंख्या का गाँव से शहरों की ओर पलायन क्यों होने लगा? समझाइए। (2008, 09, 13)
अथवा
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् जनसंख्या का गाँव से शहरों की ओर पलायन क्यों होने लगा? समझाइए। (2009)
उत्तर:
प्राचीन समय में सीमित आवश्यकताओं व यातायात व संचार के साधनों के अभाव में ग्रामीण जनसंख्या गाँवों में ही निवास करती थी, वह समृद्ध और खुशहाल थी। वह अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति गाँव में ही कर लेती थी। परन्तु अंग्रेजों के आगमन के पश्चात् खुशहाल व समृद्ध ग्रामीण जनता गरीबी व भुखमरी से जूझने लगी। ग्रामीण बेरोजगार हो गये। कृषक ऋणों के बोझ तले दब गये, उनकी भूमि उनसे छिन गयी। वे भूमिहीन और बेघर हो गये। भूमि की उत्पादकता कम हो गयी। अंग्रेजों द्वारा चलाई गई जमींदारी प्रथा से कृषि एवं कृषकों पर बुरा असर पड़ा। इन सभी बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीण जनता शहरों की ओर पलायन करने लगी। 1951 में कुल जनसंख्या में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत 82.7 था जो वर्ष 2011 में 68.84 प्रतिशत रह गया। जबकि शहरी जनसंख्या का प्रतिशत 1951 में 17:3 था जो सन् 2011 में बढ़कर 31.16 हो गया।

आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण जनसंख्या शहरों की ओर पलायन करने लगी है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की प्राचीन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ बताइए। (2009, 16)
अथवा
अंग्रेजों के आगमन से पूर्व भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कोई पाँच विशेषताएँ लिखिए। (2017)
उत्तर:
प्राचीन काल में देश की अधिकांश जनसंख्या गाँवों में रहती थी। वस्तुतः गाँव ही अर्थव्यवस्था की प्रमुख इकाई होते थे। उस समय गाँव आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं खुशहाल थे। प्राचीन ग्रामीण अर्थव्यवस्था आज के गाँवों से बहुत भिन्न थी। इसकी विशेषताओं को निम्न प्रकार स्पष्ट कर सकते हैं –
(1) कार्यशील समुदाय की संरचना :
प्राचीन ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाँव की कार्यशील जनसंख्या के प्रमुख तीन प्रकार होते थे-कृषक, दस्तकार तथा ग्राम अधिकारी।

(2) आत्मनिर्भरता :
प्राचीन समय में गाँव आत्मनिर्भर एवं स्वावलम्बी हुआ करते थे। ग्रामवासी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति गाँव में ही कर लेते थे। क्योंकि उस समय ग्रामीण जनता की आवश्यकताएँ सीमित होती थीं और यातायात और संचार के साधनों का अभाव होता था।

(3) वस्तु विनिमय प्रणाली :
प्राचीन अर्थव्यवस्था में वस्तु विनिमय प्रणाली का प्रचलन था। सभी ग्रामवासी दस्तकारों व महाजनों से अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ प्राप्त करते थे। इसके बदले उन्हें अनाज और वस्तुएँ दी जाती थीं। पण्डित, वैद्य, नाई, धोबी सभी की सेवाओं का पारिश्रमिक उस समय में अनाज या वस्तुओं के रूप में किया जाता था।

(4)श्रम की गतिहीनता :
प्राचीन अर्थव्यवस्था में परिवहन के साधनों के अभाव के कारण श्रम गतिहीन होता था। परिवहन के साधनों के अतिरिक्त जाति प्रथा, भाषा एवं खान-पान की कठिनाई आदि का प्रभाव भी श्रम की गतिहीनता पर पड़ता था। फलस्वरूप ग्रामवासी अपने गाँव में ही रहना अधिक पसन्द करते थे।

(5) सरल श्रम विभाजन :
उस काल में ग्रामवासियों में आर्थिक क्रियाएँ बँटी हुई थीं। कार्य का बँटवारा दो आधार पर किया जाता था –

  • वंशानुगत या परम्परा के आधार पर; जैसे-कृषि एवं पशुपालन व्यवसाय।
  • जातिगत परम्परा के आधार पर; जैसे-लुहार, सुनार, बढ़ई, मोची, नाई, धोबी आदि।

(6) बाह्य दुनिया से सम्पर्क का अभाव :
प्राचीन समय में हर गाँव अपने आप में सम्पूर्ण इकाई था। जहाँ प्रत्येक व्यक्ति अपनी समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेता था। बाहरी दुनिया से उसका किसी प्रकार का सम्पर्क नहीं रहता था।

(7) राज्य के प्रति उदासीनता :
ग्रामवासियों का मुख्य उद्देश्य जीवन निर्वाह करना होता था। उनका राज्य की गतिविधियों की ओर कोई विशेष रुझान नहीं होता था।

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प्रश्न 2.
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्या परिवर्तन हुए एवं विकास हेतु शासन ने क्या प्रयास किए? लिखिए।
उत्तर:
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निम्न परिवर्तन हुए
(1) उपलब्ध भूमि के आधार पर समुदाय की संरचना :
वर्तमान में कृषकों को उनके पास उपलब्ध भूमि के स्वामित्व के आधार पर निम्न भागों में बाँट सकते हैं –

  • बड़े कृषक
  • मंझोले कृषक
  • छोटे कृषक तथा
  • भूमिहीन कृषक।

(2) बहुविध फसलें :
फसलें तीन प्रकार की होती हैं-रबी, खरीफ एवं जायद। रबी जाड़ों की फसल, खरीफ वर्षाकाल की फसल और जायद गर्मी की फसल होती है। वर्तमान में परम्परागत फसलों के अतिरिक्त कुछ नगदी फसलों का प्रचलन भी हो गया है, जैसे-फूलों की खेती, तिलहन की खेती आदि।

(3) जनसंख्या का शहरों की ओर पलायन :
गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, बुनियादी सुविधाओं की कमी आदि अनेक कारणों से ग्रामीण जनता शहरों की ओर पलायन कर रही है। 1951 में कुल जनसंख्या में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत 82.7 प्रतिशत था जो वर्ष 2011 में 68.84 प्रतिशत रह गया है। जबकि शहरी जनसंख्या का प्रतिशत 1951 में 17:3 था जो 2011 में बढ़कर 31.16 हो गया। आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि ग्रामीण जनसंख्या का शहरों की ओर पलायन होने लगा है।

(4) मौद्रिक प्रणाली का प्रादुर्भाव :
गाँवों में प्राचीन समय में प्रचलित वस्तु विनिमय प्रणाली अब लुप्त हो गयी है। वर्तमान में सभी जगह मुद्रा का प्रयोग होने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी विनिमय की क्रय-विक्रय की मौद्रिक प्रणाली पूरी तरह लागू हो गयी है।

(5) अपर्याप्त संचार एवं आवागमन सुविधाएँ :
आज प्रत्येक गाँव को संचार एवं परिवहन के साधनों के माध्यम से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, परन्तु सड़कें कच्ची होने के कारण वर्षा के समय बहुत से गाँवों का अपने आस-पास के क्षेत्रों में सम्पर्क टूट जाता है। वर्षा के समय ट्रक, बस, रेल, ट्रैक्टर, जीप, मोटर साइकिल व साइकिल का प्रयोग होता है। वर्तमान में अधिकांश गाँव टेलीफोन एवं दूरदर्शन के माध्यम से भी जुड़ गये हैं।

(6) सहायक एवं कुटीर उद्योगों का विकास :
स्वतन्त्रता के पश्चात् ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ एवं उन्नत बनाने के उद्देश्य से कुटीर एवं लघु उद्योगों के विकास पर अत्यधिक ध्यान दिया गया है। कृषक और ग्रामवासी अपने खाली वक्त में इन उद्योगों के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर पा रहे हैं।

(7) तकनीकी उन्नति :
गाँवों में किसानों ने पुरानी तकनीक को छोड़कर नई को अपनाना शुरू कर दिया है। अब सिंचाई के लिए रहट की जगह पम्प का, हल की जगह हैरो व बैलगाड़ी की जगह ट्रक एवं ट्रैक्टर-ट्राली का प्रयोग किया जाने लगा है। किसान बड़ी मशीनों का प्रयोग भी करने लगे हैं। किसानों द्वारा थ्रेशर का प्रयोग करना अब आम बात हो गयी है।

(8) शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार-आधुनिक ग्रामवासी शिक्षा एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होते जा रहे हैं। गाँव में प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक सरकारी स्कूल खुल गये हैं। लड़कों के साथ लड़कियाँ भी स्कूल व कॉलेजों में पढ़ने लगी हैं। गाँवों में चिकित्सा की भी पर्याप्त सुविधाएँ उपलब्ध हो गई हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास हेतु शासन के प्रयास
सरकार द्वारा किये गये प्रयासों की विवेचना निम्न प्रकार है –
(1) भूमि सुधार :

  • सरकार ने जमींदारी प्रथा का उन्मूलन एवं चकबन्दी करके अनार्थिक जोतों को लाभप्रद बनाया है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि बहाल करने और उसके हस्तान्तरण पर रोक लगाने के लिए सरकारी बंजर भूमि, भूदान से प्राप्त भूमि, निर्धारित अधिकतम सीमा से प्राप्त भूमि आदि का वितरण किया गया है।
  • सरकार द्वारा फसल बीमा योजना शुरू की गयी है।
  • गाँवों में वित्त आपूर्ति हेतु ग्रामीण बैंकों तथा सरकारी बैंकों की स्थापना की गयी है।
  • फसलों की उचित बिक्री हेतु सरकार द्वारा न्यूनतम मूल्य का निर्धारण किया गया है। साथ ही फसलों के विपणन एवं भण्डारण की सुविधा भी मुहैया करवायी है।
  • केन्द्र सरकार की प्रधानमन्त्री सड़क योजना के माध्यम से प्राचीन इलाकों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

(2) आवास स्वच्छता एवं स्वास्थ्य :

  • स्वास्थ्यप्रद आवास व्यवस्था हेतु सरकार ने इन्दिरा आवास योजना चलाई है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता हेतु केन्द्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम चलाया गया है।
  • गाँवों में परिवार कल्याण केन्द्र एवं आँगनबाड़ी आदि के माध्यम से खान-पान, स्वास्थ्य शिक्षा सम्बन्धी जागरूकता का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
  • स्कूलों में सफाई, पेयजल एवं शिक्षण की बुनियादी आवश्यकताओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

(3) कुटीर एवं लघु उद्योग :

  • अखिल भारतीय हस्त करघा उद्योग बोर्ड, भारतीय कुटीर उद्योग, खादी ग्रामोद्योग आदि संस्थाओं द्वारा उद्योगों की समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करना।
  • कुटीर व लघु उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु लघु उद्योग विकास बैंक की स्थापना करना।
  • विपणन में सहायता प्रदान करने वाले सरकारी विभागों द्वारा इनके उत्पादों की खरीद सुनिश्चित की जाती है। इसके अतिरिक्त देश-विदेश में मेले, प्रदर्शनी व हाट आदि का भी अयोजन किया जाता है।
  • उद्योगों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये गये हैं।
  • इन उद्योगों को संरक्षण प्रदान करके बड़े उद्योगों से इनकी प्रतिस्पर्धा को समाप्त किया गया है।

उपर्युक्त सरकारी प्रयासों द्वारा गाँवों के विकास का प्रयास किया जा रहा है। हमें राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के आदर्शों को आधार बनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।

प्रश्न 3.
कुटीर एवं लघु उद्योग भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उन्नत बनाने में किस प्रकार सहायक हैं? समझाइए। (2015)
उत्तर:
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उन्नत बनाने में कुटीर एवं लघु उद्योगों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। गाँधीजी के अनुसार, “भारत का मोक्ष उसके कुटीर उद्योग-धन्धों में निहित है।” कुटीर और लघु उद्योग भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास की आधारशिला है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सन्दर्भ में लघु व कुटीर उद्योगों का औचित्य –
(1) आर्थिक विकास :
प्रत्येक गाँव में स्थानीय कच्चे माल की उपलब्धता के आधार पर छोटे-छोटे घरेलू उद्योग विकसित किये जा सकते हैं। जिससे रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है और कृषक व ग्रामवासी अपने खाली समय में इन उद्योगों के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। आय में वृद्धि होने से उनका जीवन-स्तर भी ऊँचा हो जाएगा।

(2) रोजगार :
गाँधीजी के अनुसार ग्रामोद्योग का अत्यधिक विकास कर हम राष्ट्र की महान् सेवा कर सकते हैं। केवल कुटीर एवं लघु उद्योग ही कम पूँजी के साथ अधिक श्रमिकों को रोजगार प्रदान कर सकते हैं। प्रच्छन्न बेरोजगारी और मौसमी बेरोजगारी के समाधान में लघु एवं कुटीर उद्योगों का विशेष महत्त्व है। इन उद्योगों को श्रमिकों के घरों पर ही बहुत कम पूँजी लगाकर खोला जा सकता है और आवश्यकतानुसार बन्द भी किया जा सकता है; जैसे-दियासलाई, मधुमक्खी पालन, साबुन निर्माण आदि। इस प्रकार स्पष्ट है कि लघु व कुटीर उद्योग बड़े उद्योगों की अपेक्षा ग्रामवासियों की बेरोजगारी दूर करने में सहायक होते हैं।

(3) आय वितरण :
कुटीर एवं लघु उद्योगों का स्वामित्व अधिक से अधिक लोगों के हाथ में होता है, जिससे आय का वितरण समान होता है। इन उद्योगों में श्रमिकों का शोषण भी नहीं होता है। आज देश में धनी और निर्धन के बीच एक बहुत बड़ी खाई है जो वृहत् उद्योगों के बढ़ने के साथ बढ़ती जा रही है।

(4) भारतीय ग्रामीण व्यवस्था के अनुरूप :
भारत कृषि प्रधान राष्ट्र है यहाँ की लगभग 68% जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है, परन्तु कृषकों को वर्षपर्यन्त कार्य नहीं मिल पाता है। इस दृष्टि से भी लघु व कुटीर उद्योग अत्यन्त उपयोगी हैं।

(5) कृषि पर जनसंख्या का भार कम करना :
भारत में कृषि पर जनसंख्या का भार निरन्तर बढ़ता जा रहा है। प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख व्यक्ति खेती पर आश्रित होने के लिए बढ़ जाते हैं। जिससे कृषि का विभाजन और अपखण्डन होता है। इस समस्या के समाधान की दृष्टि से लघु व कुटीर उद्योग बहुत उपयोगी हैं।

(6) कलात्मक वस्तुओं का निर्माण :
भारत की परम्परागत कलात्मक वस्तुओं के निर्माण में कुटीर व लघु उद्योगों का विशेष महत्त्व है। इन वस्तुओं के निर्यात से विदेशी मुद्रा की प्राप्ति भी होती है।

(7) तकनीकी ज्ञान की कम आवश्यकता :
पूँजी की भाँति भारत में तकनीकी ज्ञान का अभाव है। लघु उद्योगों व कुटीर उद्योगों को तकनीकी ज्ञान की बहुत कम आवश्यकता पड़ती है। इस दृष्टि से लघु व कुटीर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

(8) शीघ्र उत्पादक उद्योग :
लघु व कुटीर उद्योग शीघ्र उत्पादक उद्योग होते हैं अर्थात् इन उद्योगों में विनियोग करने और उत्पादन प्रारम्भ होने में अधिक समय नहीं लगता है।

उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि कुटीर व लघु उद्योगों का ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान है। सरकार ने भी इन क्षेत्रों में इन्हें विकसित करने के अनेक प्रयास किये हैं।

प्रश्न 4.
प्राचीन एवं आधुनिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए। (2009, 14, 16)
उत्तर:
प्राचीन एवं आधुनिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था का तुलनात्मक अध्ययन

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 15 ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास - 1

इस प्रकार स्पष्ट होता है कि वर्तमान में गाँव व ग्रामीणों का पहले से अधिक विकास हुआ। ये पहले की अपेक्षा अधिक जागरूक हो गये हैं। वे अपना और अपने परिवार के कल्याण के बारे में सोचते हैं। वे शिक्षा, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, राजनीति के बारे में जानने समझने लगे हैं।

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प्रश्न 5.
एक आदर्श ग्राम की विशेषताएँ क्या-क्या होती हैं ? लिखिए। (2008, 14, 15, 17)
अथवा
एक आदर्श ग्राम की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। (कोई पाँच) (2010, 18)
उत्तर:
देश को अग्रणी बनाने के लिये ग्राम सुधार आवश्यक है। यदि ऐसा हो जाए तो भारत एक समृद्ध, सम्पन्न एवं खुशहाल देश बन सकता है। हमें अपने गाँवों को आदर्श बनाने के प्रयास करने होंगे। एक आदर्श ग्राम की अग्रलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए –

  • उन्नत कृषि व्यवस्था :
    कृषि के विकास हेतु चकबन्दी, सामूहिक कृषि का प्रयोग, उपज में वृद्धि हेतु जैविक तथा रासायनिक उर्वरक, कृषि के लिये उन्नत बीजों का प्रयोग एवं सिंचाई की आधुनिक सुविधाओं का प्रयोग किया जाना चाहिए। उपज के भण्डारण हेतु उपयुक्त व्यवस्था एवं सहकारिता एवं शासकीय सहायता से उपज की बिक्री की व्यवस्था होनी चाहिए।
  • आवासीय सुविधाएँ :
    गाँवों में आवास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। मकान साफ-सुथरे होने चाहिए। साथ ही घर में स्नानगृह, शौचालय आदि की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। जानवरों के लिये अलग बाड़ा एवं गोबर से बायोगैस बनाने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
  • पेयजल व्यवस्था :
    ग्रामवासियों के लिये स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके लिये कुएँ, तालाब, बाबड़ी आदि का जीर्णोद्वार होना चाहिए। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि उसमें कचरा आदि न जा पाये। ग्रामवासियों को भू-जल संवर्द्धन का महत्त्व समझाना चाहिए।
  • शिक्षा का व्यवस्था :
    गाँव में प्रत्येक बच्चे को प्राथमिक शिक्षा देने का प्रयास करना चाहिए। बालिका शिक्षा के प्रति विशेष जागरूकता अपनानी चाहिए। गाँवों में परम्परागत शिक्षा के साथ-साथ प्रौढ़ । शिक्षा की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
  • स्वास्थ्य सुविधाएँ :
    प्रत्येक गाँव में प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र व अनुभवी चिकित्सक की व्यवस्था होनी चाहिए। चिकित्सा केन्द्र में आवश्यकतानुसार दवाइयों का प्रबन्ध होना चाहिए जिससे ग्रामवासियों को कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े। साथ ही शासन की विभिन्न स्वास्थ्य सम्बन्धी योजनाओं का लाभ ग्रामवासी प्राप्त कर सकें।
  • परिवार व संचार सुविधाएँ :
    गाँवों में परिवहन व संचार साधनों की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। परिवहन व्यवस्था हेतु पक्की सड़कें होनी चाहिए जो आस-पास के कस्बों और गाँवों को जिला मुख्यालय से जोड़े। टेलीफोन, डाकघर तथा इण्टरनेट की सुविधा भी उपलब्ध होनी चाहिए।
  • ऊर्जा एवं पर्यावरण जागरूकता :
    गाँवों में बिजली की व्यवस्था होनी चाहिए। सम्भव हो तो वैकल्पिक ऊर्जा का प्रयोग की समय-समय पर करना चाहिए। ग्रामवासियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करनी चाहिए। वृक्षों के उपयोग व वृक्षारोपण के प्रति ग्रामीणों को सक्रिय रहना चाहिए जिससे गाँवों में हरियाली व्याप्त हो सके।
  • औद्योगिक विकास :
    गाँवों में कृषि पर आधारित उद्योगों का विकास होना चाहिए, जैसे-डेयरी उद्योग, कुक्कुट उद्योग आदि। गाँवों में ऐसे उद्योगों का विकास होने से ग्रामवासियों को उन्हीं के गाँव में रोजगार प्राप्त हो सकता है। जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सकती है।
  • वित्तीय सुविधाएँ :
    गाँवों में वित्तीय सुविधाओं के लिये ग्रामीण बैंक व सहकारी बैंक आदि की सुविधा होनी चाहिए। गाँवों में स्वसहायता बचत समूहों के निर्माण के प्रति ग्रामीणों में जागरूकता पैदा करके उनकी बचत की आदत में वृद्धि करायी जा सकती है।
  • प्रशासनिक व्यवस्था :
    गाँवों में पंचायत व्यवस्था होनी चाहिए। ग्राम पंचायत के सदस्यों व सरपंच को गाँव के विकास के प्रति जागरूक होना चाहिए। जिससे गाँवों में स्वच्छता, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य व सुरक्षा सम्बन्धी व्यवस्थाएँ ग्रामवासियों को प्राप्त हो सकें। ग्राम पंचायत में प्रशासकीय पारदर्शिता बढ़ानी चाहिए।

प्रश्न 6.
किसी गाँव को आत्मनिर्भर व विकासशील बनाने के लिये क्या-क्या प्रयास करने की आवश्यकता होती है? लिखिए। (2009)
उत्तर:
किसी गाँव को आत्मनिर्भर व विकासशील बनाने के लिये निम्नलिखित प्रयासों की आवश्यकता होती है –

  • सिंचाई के साधनों का विकास :
    गाँवों में कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिये सिंचाई के साधनों पर ध्यान देना आवश्यक है। इसके लिये नहरों, कुओं, तालाबों एवं नलकूपों की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं जन जागृति के प्रयास :
    ग्रामीणों को जैविक खाद बनाने की विधि व उसके महत्त्व से परिचित कराने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जाने चाहिए तथा गाँवों में स्वच्छता बनाये रखने के लिये जन जागृति के प्रयास किये जाने चाहिए।
  • भण्डार गृहों की स्थापना :
    गाँवों में कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखने के लिये भण्डार गृहों की स्थापना की जाए जिससे उनकी फसल खराब न हो पाये।
  • पशुओं की दशा में सुधार :
    गाँवों में पशुओं के महत्त्व को देखते हुए उनकी हीन दशा सुधारने के लिये अच्छे व पौष्टिक चारे, पेयजल, चिकित्सा एवं नस्ल सुधारने हेतु पर्याप्त प्रयास करने चाहिए।
  • कृषि आधारित उद्योगों का विकास :
    कृषि आश्रित लघु उद्योगों; जैसे-डेयरी उद्योग, मुर्गी पालन उद्योग आदि के विकास पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।
  • अनावश्यक व्यय को रोकना :
    न्यूनतम आय होने पर भी ग्रामवासी पारिवारिक व सामाजिक कार्यक्रमों पर अधिक खर्च करते हैं। उदाहरणार्थ-विवाह कार्यों पर बीस हजार से दस लाख की राशि, शोक कार्यों पर दस से चालीस हजार की राशि व त्यौहारों पर 500 से 2000 की राशि खर्च कर दी जाती है। अतः व्यर्थ के व्ययों को रोकने के प्रयास किये जाने चाहिए तथा ग्राम पंचायत में इसकी चर्चा की जानी चाहिए।
  • बचत की प्रवृत्ति को बढ़ावा :
    गाँवों में स्वसहायता बचत समूहों के निर्माण के प्रयास किये जा सकते हैं। जिससे ग्रामवासियों में बचत की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिले।
  • शिक्षा का प्रसार :
    ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार एवं प्रचार की आवश्यकता है। जिससे किसानों को रूढ़िवादिता, अन्धविश्वासों के विचारों से उबारा जा सके। आकाशवाणी और टेलीविजन इस क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
समाजवादी अर्थव्यस्था में संसाधनों पर कैसा नियन्त्रण होता है?
(i) निजी नियन्त्रण
(ii) सरकारी नियन्त्रण
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ii) सरकारी नियन्त्रण

प्रश्न 2.
मिश्रित अर्थव्यवस्था में संसाधनों पर किस प्रकार का नियन्त्रण पाया जाता है?
(i) निजी नियन्त्रण
(ii) सरकारी नियन्त्रण
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) निजी नियन्त्रण

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प्रश्न 3.
भारतीय अर्थव्यवस्था है
(i) पूँजीवादी
(ii) समाजवादी
(iii) मिश्रित
(iv) साम्यवादी।
उत्तर:
(iii) मिश्रित

प्रश्न 4.
अकबर के शासन काल में सही ढंग से भू-मापन किसने कराया? (2009)
(i) मोहम्मद तुगलक
(ii) टोडरमल
(iii) तानसेन
(iv) शाहजहाँ।
उत्तर:
(ii) टोडरमल

प्रश्न 5.
बड़े कृषक किसे कहते हैं?
(i) जिसके पास 2 से लेकर 10 हेक्टेअर तक भूमि है
(ii) जिसके पास 2 हेक्टेयर से भी कम भूमि है
(iii) जिसके पास 20 हेक्टेयर से अधिक भूमि है
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) जिसके पास 2 से लेकर 10 हेक्टेअर तक भूमि है

प्रश्न 6.
छोटे कृषकों की श्रेणी में वे कृषक आते हैं
(i) जिनके पास 2 से लेकर 10 हेक्टेअर तक भूमि है
(ii) जिनके पास 2 हेक्टेअर से भी कम भूमि है
(iii) जिनके पास 20 हेक्टेअर से अधिक भूमि है
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ii) जिनके पास 2 हेक्टेअर से भी कम भूमि है

प्रश्न 7.
जमींदारी प्रथा के जन्मदाता कौन थे?
(i) लॉर्ड कार्नवालिस
(ii) लॉर्ड कर्जन
(iii) लॉर्ड माण्टबेटन
(iv) लॉर्ड लेनिन।
उत्तर:
(i) लॉर्ड कार्नवालिस

प्रश्न 8.
सर्वप्रथम बंगाल में जमींदारी प्रथा किस वर्ष में प्रारम्भ की गई?
(i) 1870
(ii) 1875
(iii) 1793
(iv) 17451
उत्तर:
(iii) 1793

रिक्त स्थान की पूर्ति

  1. समाजवादी अर्थव्यवस्था में संसाधनों पर ……… नियन्त्रण होता है।
  2. वस्तुओं का, वस्तुओं के बदले में लेन-देन …………. कहलाता है।
  3. छोटे कृषक वे होते हैं जिनके पास ………… से भी कम भूमि है।

उत्तर:

  1. सरकार का
  2. वस्तु विनियम
  3. 2 हेक्टेअर।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
अंग्रेजों के आगमन के पूर्व ग्रामीण अर्थव्यवस्था आयात पर निर्भर थी। (2010)
उत्तर:
असत्य

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प्रश्न 2.
अकबर के शासनकाल में टोडरमल ने सही ढंग से भू मापन कराया।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
मझोले कृषक वे होते हैं जिनके पास 5 हेक्टेअर से अधिक भूमि होती है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
प्राचीन ग्रामीण अर्थव्यवस्था में वस्तु विनियम प्रणाली प्रचलित थी। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
भारत में आज गाँवों की संख्या 6,00,000 है। (2011)
उत्तर:
सत्य

सही जोड़ी मिलाइए

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 15 ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास - 2

उत्तर:

  1. → (ङ)
  2. → (घ)
  3. → (क)
  4. → (ग)
  5. → (ख)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
अंग्रेजों के आगमन के पूर्व भारत के गाँव किस प्रकार के थे?
उत्तर:
आत्मनिर्भर

प्रश्न 2.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग। (2012)
उत्तर:
कृषक

प्रश्न 3.
जिनके पास 2 से लेकर 10 हेक्टेअर भूमि है। (2012)
उत्तर:
बड़े कृषक

प्रश्न 4.
वस्तुओं का, वस्तुओं के बदले लेन-देन की प्रणाली। (2009, 10)
उत्तर:
वस्तु विनियम प्रणाली

प्रश्न 5.
अर्थव्यवस्था में संसाधनों पर निजी नियन्त्रण कहलाता है। (2011)
उत्तर:
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था

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प्रश्न 6.
सिंचाई सुविधाएँ बढ़ाने के लिये किस शासक ने नहरें प्रमुखता से बनाई? (2008)
उत्तर:
मोहम्मद तुगलक

प्रश्न 7.
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास हेतु किस उद्योग का अत्यधिक महत्त्व है? (2013)
उत्तर:
कुटीर एवं लघु उद्योग।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अर्थव्यवस्था के प्रकार लिखिए।
उत्तर:
अर्थव्यवस्था तीन प्रकार की होती है :

  1. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था
  2. समाजवादी अर्थव्यवस्था तथा
  3. मिश्रित अर्थव्यवस्था।

प्रश्न 2.
एक गाँव की अर्थव्यवस्था से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
एक गाँव की अर्थव्यवस्था में वहाँ पर स्थित खेत, दुकानें और अन्य सभी प्रतिष्ठान जहाँ व्यक्ति काम करते हैं, शामिल किये जाते हैं। इस प्रकार अर्थव्यवस्था जीविकोपार्जन का क्षेत्र होता है।

प्रश्न 3.
भारत कैसा देश है और यहाँ का मुख्य व्यवसाय क्या है?
उत्तर:
भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ का मुख्य व्यवसाय कृषि है।

प्रश्न 4.
वैदिक काल में अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार क्या था?
उत्तर:
वैदिक काल में अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि था। पशुपालन, आखेट और दस्तकारी का भी अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान था।

प्रश्न 5.
गुणवत्ता की दृष्टि से कहाँ की मलमल विश्व प्रसिद्ध है?
उत्तर:
गुणवत्ता की दृष्टि से ढाका की मलमल विश्व प्रसिद्ध है। अतः वस्त्र निर्माण का इस युग में विशेष विकास हुआ।

प्रश्न 6.
भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास को कितने भागों में विभाजित किया जा सकता है?
उत्तर:
भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास को तीन भागों में विभाजित कर सकते हैं –

  1. अंग्रेजों के आगमन के पूर्व ग्रामीण अर्थव्यवस्था
  2. अंग्रेजों के आगमन के पश्चात् ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा
  3. स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् ग्रामीण अर्थव्यवस्था।

प्रश्न 7.
प्राचीन समय में ग्रामीण समुदाय के कार्यों का पारिश्रमिक किस रूप में दिया जाता था?
उत्तर:
प्राचीन समय में गाँव में बढ़ई, लुहार, कुम्हार, कारीगर, मोची, जुलाहे आदि का पारिश्रमिक अनाज या वस्तु के रूप में दिया जाता था।

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प्रश्न 8.
ग्राम अधिकारी के रूप में मुखिया का क्या कार्य होता था?
उत्तर:
मुखिया गाँव का प्रमुख अधिकारी होता था। इसका कार्य किसानों से लगान की वसूली कर शासक को देना था।

प्रश्न 9.
वस्तु विनिमय प्रणाली किसे कहते थे?
उत्तर:
वस्तु विनिमय प्रणाली, विनिमय की वह प्रणाली होती थी जिसमें वस्तु के बदले वस्तु या सेवा का प्रत्यक्ष आदान-प्रदान होता था। इसमें मुद्रा का प्रयोग नहीं किया जाता था।

प्रश्न 10.
अंग्रेजों के आगमन के पश्चात् भारत के गाँवों की क्या दशा थी?
उत्तर:
अंग्रेजों ने भारत और भारतीयों का हर प्रकार से शोषण किया। उन्होंने ऐसी नीतियाँ अपनाईं जिसके कारण खुशहाल भारत गरीबी और भुखमरी से जूझने लगा। कृषि और उद्योग पर भी बुरा प्रभाव पड़ा।

प्रश्न 11.
ग्रामीण जनसंख्या शहरों की ओर पलायन क्यों कर रही है?
उत्तर:
गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीण जनसंख्या शहरों की ओर पलायन कर रही है।

प्रश्न 12.
न्यूनतम मूल्य का निर्धारण कौन करता है?
उत्तर:
न्यूनतम मूल्य का निर्धारण सरकार द्वारा फसलों की उचित बिक्री मूल्य हेतु किया जाता है।

प्रश्न 13.
आदर्श ग्राम कैसा होना चाहिए?
उत्तर:
एक आदर्श ग्राम में कृषि विकसित होनी चाहिए, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आवास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ग्राम में स्वच्छता के प्रति जागरूकता एवं उपलब्ध संसाधनों का सम्पूर्ण प्रयोग होना चाहिए।

प्रश्न 14.
चकबन्दी से क्या आशय है?
उत्तर:
चकबन्दी वह प्रक्रिया है जिसमें किसान की छितरी छोटी-छोटी जोतों के बदले उसी किस्म की उतने ही आकार के एक या दो भूखण्ड दे दिये जाते हैं। यह ऐच्छिक और अनिवार्य दोनों होती है।

प्रश्न 15.
भूमि सुधार क्या है?
उत्तर:
भूमि सुधार किसी संगठन या भूमि व्यवस्था की संस्थागत व्यवस्था में होने वाले प्रत्येक परिवर्तन से है। भूमि स्वामित्व एवं भूमि जोत में होने वाला सुधार भूमि सुधार के अन्तर्गत आता है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अर्थव्यवस्था से क्या आशय है ? यह कितने प्रकार की हो सकती है?
अथवा
अर्थव्यवस्था का आशय स्पष्ट कीजिए। (2008, 09)
उत्तर:
अर्थव्यवस्था एक प्रणाली है जिसके द्वारा मनुष्य जीविकोपार्जन करता है तथा अर्थव्यवस्था एक क्षेत्र विशेष में विद्यमान उत्पादन इकाइयों से बनती है। दूसरे शब्दों से हम कह सकते हैं कि अर्थव्यवस्था का अर्थ एक देश के उन सभी खेतों, कारखानों, दुकानों, खदानों, बैंकों, सड़कों, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, अस्तपाल आदि से है जो लोगों को रोजगार देते हैं एवं वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करते हैं तथा जिनका प्रयोग वहाँ की जनता द्वारा किया जाता है। अर्थव्यवस्था तीन प्रकार की हो सकती है-

  1. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था
  2. समाजवादी अर्थव्यवस्था तथा
  3. मिश्रित अर्थव्यवस्था।

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प्रश्न 2.
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् आधुनिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् 2011 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार वर्तमान में भारत की कुल जनसंख्या का 64.84 प्रतिशत भाग गाँवों में निवास करती है तथा शहरी क्षेत्रों से केवल 31.16 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। इसी प्रकार आज गाँवों की संख्या 6,38,588 है जबकि शहरों की संख्या मात्र 5,161 ही है। आज भी भारत गाँवों का देश है। यहाँ की अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान है। देश की दो-तिहाई जनसंख्या अपनी आजीविका के लिये प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर ही निर्भर है।

परन्तु देश के सकल उत्पाद में कृषि का योगदान केवल 26 प्रतिशत है। पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा देश का आर्थिक विकास तीव्र गति से हुआ है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी इससे अछूती नहीं रही है। गाँवों का स्वरूप बदलने लगा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अनेक परिवर्तन दृष्टिगोचर होने लगे। जिसमें से प्रमुख परिवर्तन मौद्रिक प्रणाली का प्रार्दुभाव, सहायक एवं कुटीर उद्योगों का विकास, तकनीकी उन्नति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, संचार एवं आवागमन की पर्याप्त सुविधाएँ आदि हैं।

प्रश्न 3.
स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद ग्रामीण समुदाय की संरचना में क्या परिवर्तन हुए?
उत्तर:
ग्रामीण समुदाय की संरचना-स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् कृषकों को उनके पास उपलब्ध भूमि के स्वामित्व के आधार पर चार भागों में बाँटा जा सकता है –

  • बड़े कृषक :
    बड़े कृषकों के अन्तर्गत वह कृषक आते हैं जिनके पास 2 हेक्टेअर से लेकर 10 हेक्टेअर तक भूमि है।
  • मॅझोले कृषक :
    मँझोले कृषक वह होते हैं जिनके पास 2 हेक्टेअर या उससे कुछ अधिक भूमि होती है।
  • छोटे कृषक :
    छोटे कृषक वह कहलाते हैं जिनके पास मात्रं 2 हेक्टेअर से भी कम भूमि होती है।
  • भूमिहीन कृषक :
    भूमिहीन कृषकों के पास अपनी कोई भूमि नहीं होती है। वह बँटाई पर भूमि लेकर खेती करते हैं या फिर दूसरों के खेतों में मजदूरी करते हैं।

प्रश्न 4.
अंग्रेजों के आगमन के पश्चात् भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विशेषताओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
अथवा
अंग्रेजों के आगमन के पश्चात् भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ लिखिए। (2008, 18)
उत्तर:
भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ

  • दस्तकारी एवं हस्तकला का पतन :
    अंग्रेजों की नीतियों के फलस्वरूप गाँवों में दस्तकारी व हस्तकला का पतन होने लगा। गाँव के दस्तकार बेरोजगार हो गये। गाँवों की समृद्धि और खुशहाली समाप्त हो गयी।
  • आत्मनिर्भरता की समाप्ति :
    कृषि के व्यापारीकरण के परिणामस्वरूप उपज को गाँवों के बाहर ले जाकर बेचा जाने लगा तथा गाँव की आवश्यकताओं की पूर्ति का सामान भी बाहर से आने लगा। इस प्रकार गाँवों की आत्मनिर्भरता स्वयं ही समाप्त हो गयी।
  • कृषि भूमि का हस्तान्तरण :
    निर्धनता के फलस्वरूप कृषक, महाजनों व साहूकारों से ऋण लेने लगे; पर ऋण की वापसी न कर पाने से महाजनों व साहूकारों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया। इस प्रकार कृषि भूमि का हस्तान्तरण साहूकारों व महाजनों को होने लगा। फलस्वरूप कृषक भूमिहीन हो गये।
  • कृषि का पिछड़ापन :
    अंग्रेजों द्वारा शुरू की गयी जमींदारी प्रथा का कृषि व कृषकों पर बहुत बुरा असर पड़ा। कृषक निर्धन एवं ऋणग्रस्त होते गये। शासन और जमींदारों ने भूमि की उत्पादकता और सुधार की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जिससे भूमि की उत्पादकता कम होती गई। परिणामस्वरूप किसानों का शोषण किया जाने लगा।

प्रश्न 5.
किसी ग्राम का आर्थिक अध्ययन करते समय हमें किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर:
आर्थिक अध्ययन से तात्पर्य है कि एक क्षेत्र विशेष में उपलब्ध संसाधन, वहाँ की जनसंख्या, आजीविका के साधन, आर्थिक स्थिति, परिवहन व संचार के साधन, वानिकी, उद्यानिकी, हाट-बाजार, वित्त, सामाजिक एवं सामुदायिक स्थितियों का अध्ययन करना। किसी गाँव के आर्थिक अध्ययन के लिए सबसे पहले अध्ययन का उद्देश्य निर्धारित करना होता है। तत्पश्चात् अध्ययन का क्षेत्र सुनिश्चित कर अध्ययन की योजना बनायी जाती है। किसी भी अध्ययन के लिये आवश्यक सांख्यिकी आँकड़ों की भी आवश्यकता पड़ती है। इसके लिये सामान्यतः तालिका और प्रश्नावली का निर्माण किया जाता है।

उस गाँव का अध्ययन करके, उस गाँव में उपलब्ध संसाधनों व सुविधाओं को ध्यान में रखकर, उस गाँव की असुविधाओं व समस्याओं के समाधान के लिये ग्रामवासियों का सहयोग लेना श्रेयस्कर होता है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् ग्रामीण अर्थव्यवस्था की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् 2011 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार वर्तमान में भारत की कुल जनसंख्या का 64.84 प्रतिशत भाग गाँवों में निवास करती है तथा शहरी क्षेत्रों से केवल 31.16 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। इसी प्रकार आज गाँवों की संख्या 6,38,588 है जबकि शहरों की संख्या मात्र 5,161 ही है। आज भी भारत गाँवों का देश है। यहाँ की अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान है। देश की दो-तिहाई जनसंख्या अपनी आजीविका के लिये प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर ही निर्भर है। परन्तु देश के सकल उत्पाद में कृषि का योगदान केवल 26 प्रतिशत है। पंचवर्षीय योजनाओं द्वारा देश का आर्थिक विकास तीव्र गति से हुआ है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी इससे अछूती नहीं रही है। गाँवों का स्वरूप बदलने लगा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अनेक परिवर्तन दृष्टिगोचर होने लगे। जिसमें से प्रमुख परिवर्तन मौद्रिक प्रणाली का प्रार्दुभाव, सहायक एवं कुटीर उद्योगों का विकास, तकनीकी उन्नति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, संचार एवं आवागमन की पर्याप्त सुविधाएँ आदि हैं।

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 11 दिल्ली सल्तनत

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 11 दिल्ली सल्तनत

MP Board Class 7th Social Science Chapter 11 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) आगरा को राजधानी बनाया था
(अ) कुतुबुद्दीन ऐबक ने
(ब) सिकन्दर लोदी ने
(स) बलबन ने
(द) फिरोज शाह ने।
उत्तर:
(ब) सिकन्दर लोदी ने

(2) इब्नबतूता किसके शासनकाल में आया था ?
(अ) मोहम्मद बिन तुगलक
(ब) रजिया
(स) अलाउद्दीन खिलजी
(द) इब्राहिम लोदी।
उत्तर:
(अ) मोहम्मद बिन तुगलक

(3) मोहम्मद तुगलक ने सिक्के चलवाये
(अ) चाँदी के
(ब) सोने के
(स) जस्ते के
(द) ताँबे के।
उत्तर:
(द) ताँबे के

(4) बलबन ने वजीर के रूप में शासन किया
(अ) 10 वर्ष
(ब) 20 वर्ष
(स) 30 वर्ष
(द) 40 वर्ष।
उत्तर:
(द) 40 वर्ष।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) गुलाम वंश का संस्थापक……….था।
(2) जौनपुर नगर ………..’ने बसाया था।
(3) तैमूर लंग ने सन् ………… में दिल्ली पर आक्रमण किया।
(4) अलाउद्दीन ने दक्षिण भारत की विजय का कार्य …………. सेनापति को सौंपा।
उत्तर:
(1) कुतुबुद्दीन ऐबक
(2) फिरोजशाह तुगलक
(3) 1398 ई
(4) मलिक काफूर।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) तुर्की सरदारों ने रजिया सुल्तान का क्यों विरोध किया ?
उत्तर:
रजिया पुरुषों के समान वस्त्र पहनकर दरबार में बैठती थी तथा युद्धों का नेतृत्व करती थी। तुर्की सरदारों को ये बर्दाश्त नहीं था। अतः उन्होंने रजिया सुल्तान का विरोध किया।

(2) बलबन की “लौह और रक्त” की नीति को समझाइए।
उत्तर:
बलबन ने अनेक विद्रोहों का दमन, भीषण नरसंहार बड़ी क्रूरता से किया। विद्रोहियों के प्रति अमानुषिक कठोर नीति के कारण उसे ‘लौह और रक्त’ नीति का सुल्तान कहा जाता है।

(3) फिरोज तुगलक के किन्हीं दो सुधारों को लिखिए।
उत्तर:
फिरोज तुगलक के दो सुधार –

  • उसने इस्लाम के नियमों के अनुसार शासन चलाया।
  • उसने जजिया को एक अलग कर बनाया तथा उसे ब्राह्मणों पर भी लागू किया।

(4) विजयनगर राज्य के प्रमुख शासकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
विजयनगर राज्य के प्रमुख शासक देवराय प्रथम, देवराय द्वितीय तथा कृष्णदेव राय थे।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 11 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) अलाउद्दीन खिलजी के सुधारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अलाउद्दीन खिलजी ने अपने शासनकाल में निम्नलिखित सुधार किए –
(i) सैनिक सुधार – सैनिकों की नियुक्ति उनकी योग्यता के आधार पर की जाती थी, उनके रंग-रूप, कद-काठी का विवरण रखा जाता था, सैनिकों को नकद वेतन देने की प्रथा को अपनाया, घोड़ों को दागने की व्यवस्था की तथा पुराने किलों की मरम्मत तथा नए किलों का निर्माण करवाया।

(ii) बाजार नियन्त्रण – धन की पूर्ति हेतु उसने बाजार नियन्त्रण लागू किया। वस्तुओं की कीमत निश्चित कर दी गई। कुशल तथा ईमानदार कर्मचारियों की नियुक्ति की। बाजार भाव पर निगरानी के लिए गुप्तचरों की व्यवस्था की। सरकारी गोदाम स्थापित किये तथा नियमों का उल्लंघन करने पर दंड दिया जाता था।

(iii) राजस्व नीति – उसने लगान का निर्धारण भूमि के माप के आधार पर किया। उपज का आधा हिस्सा भूमि राजस्व के रूप में तय किया तथा चारागाह कर, आयात निर्यात, जजिया, खम्स, जकात आदि करों में वृद्धि की।

(2) मोहम्मद बिन तुगलक की महत्वाकांक्षी योजनाएँ क्या थीं ? उसमें वह क्यों असफल रहा ?
उत्तर:
मोहम्मद बिन तुगलक की मुख्य योजनाएँ इस प्रकार थीं –
(i) राजधानी परिवर्तन – उसने दिल्ली के स्थान पर, दक्षिण में देवगिरि को अपनी राजधानी बनाया जिसका नाम दौलताबाद रखा। दिल्ली निवासियों को दौलताबाद जाने के कठोर आदेश दिए। रास्ते के कष्ट और वहाँ की जलवायु दिल्लीवासियों को रास नहीं आई अतः राजधानी को पुनः दिल्ली स्थानान्तरित करना पड़ा।

(ii) ताँबे की मुद्रा का प्रचलन – सुल्तान ने चाँदी की कमी के कारण चाँदी के सिक्कों के स्थान पर ताँबे के सिक्कों को चलाने का आदेश दिया। परिणामस्वरूप बाजार में भारी मात्रा में जाली सिक्के आ गये जिससे व्यापार और वाणिज्य में अव्यवस्था फैल गई और उसे पुनः चाँदी के सिक्के चलवाने पड़े।

(iii) दोआब में कर वृद्धि – राज्य की आय बढ़ाने के लिए सुल्तान ने गंगा और यमुना के बीच समृद्ध और उर्वर भूमि ‘दोआब’ में कर बढ़ा दिया। जिस समय कर लगाया गया वहाँ अकाल पड़ा हुआ था, जिससे लोगों में भारी असन्तोष फैल गया। सुल्तान की सभी योजनाएँ उचित क्रियान्वयन के अभाव में असफल रहीं।

(3) दिल्ली सल्तनत के पतन के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
दिल्ली सल्तनत के पतन के कारण निम्न हैं –

  • शासन व्यवस्था की दुर्बलता – दिल्ली सल्तनत में योग्य शासकों का अभाव था। उनका शासन सैनिक शक्ति तथा लूटमार पर टिका हुआ था तथा प्रान्तीय शासकों पर केन्द्रीय सरकार का नियंत्रण मजबूत नहीं था।
  • उत्तराधिकारी के निश्चित नियम का अभाव। उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए कोई नियम नहीं था। एक सुल्तान की मृत्यु के पश्चात गद्दी के लिए झगड़ा शुरू हो जाता था। जो व्यक्ति शक्तिशाली होता था वह सल्तान बन जाता था।
  • आपसी फूट – मुसलमानों में धार्मिक एकता तो थी किन्तु वे विभिन्न नस्लों, धर्मों, जातियों और कबीलों के थे, इसलिए उनमें आपस में प्रतिस्पर्धा रहती थी।
  • हिन्दुओं के साथ अत्याचार व स्थानीय शासकों का विरोध – अधिकांश शासकों ने धार्मिक असहिष्णुता की नीति का अनुसरण किया। स्थानीय शासक इनको सहन न कर सके और वे सुल्तानों के विरुद्ध लगातार विद्रोह करते रहे।
  • मोहम्मद बिन तुगलक की भूलें – मोहम्मद बिन तुगलक की योजनाओं की असफलता ने साम्राज्य को कमजोर कर दिया। जनता में असन्तोष फैल गया।
  • तैमूर का आक्रमण – तैमूर के आक्रमण से दिल्ली को धक्का लगा। उसने चारों ओर लूटपाट तथा कत्लेआम मचा दिया। सल्तनत की सैनिक व आर्थिक व्यवस्था बिगड़ गई।

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 9 प्राचीन भारत का इतिहास

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 9 प्राचीन भारत का इतिहास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सा नगर सिन्धु सभ्यता से सम्बन्धित नहीं है?
(i) मोहनजोदड़ो
(ii) कालीबंगा
(iii) लोथल
(iv) पाटलिपुत्र।
उत्तर:
(iv) पाटलिपुत्र।

प्रश्न 2.
चन्द्रगुप्त मौर्य के समय कौन-सा विदेशी यात्री भारत आया?
(i) फाह्यान
(ii) ह्वेनसांग
(iii) एरियन
(iv) मेगस्थनीज।
उत्तर:
(i) फाह्यान

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सही जोड़ी मिलाइए ‘अ’
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 9 प्राचीन भारत का इतिहास - 1

उत्तर:

  1. → (घ)
  2. → (क)
  3. → (ख)
  4. → (ग)
  5. → (ङ)

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. जैन धर्म के संस्थापक …………. थे। (2017)
  2. महात्मा बुद्ध को …………. वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था।
  3. …………. और ………….. भारत के दो महाकाव्य हैं।
  4. गुप्तवंश का संस्थापक …………. था।

उत्तर:

  1. प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव
  2. बोधि वृक्ष
  3. रामायण और महाभारत
  4. श्रीगुप्त।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वेदों की संख्या एवं उनके नाम लिखिए। (2014, 16)
उत्तर:
वेद चार हैं। उनके नाम हैं :

  1. ऋग्वेद
  2. सामवेद
  3. यजुर्वेद
  4. अथर्ववेद।

प्रश्न 2.
सिन्धु सभ्यता के चार प्रमुख नगरों के नाम लिखिए। (2016, 18)
उत्तर:

  1. मोहनजोदड़ो
  2. लोथल
  3. कालीबंगा
  4. मांडा।

प्रश्न 3.
मेगस्थनीज कौन था? उसके द्वारा रचित ग्रन्थ का नाम लिखिए।
उत्तर:
मेगस्थनीज़ चन्द्रगुप्त के दरबार में राजदूत बनकर आया था। उसने ‘इण्डिका’ नामक ग्रन्थ की रचना की थी।

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प्रश्न 4.
प्राचीन भारत के प्रमुख शिक्षा केन्द्रों के नाम लिखिए। (2014, 18)
उत्तर:
प्राचीन भारत के प्रमुख शिक्षा केन्द्र –

  1. नालन्दा विश्वविद्यालय
  2. तक्षशिला विश्वविद्यालय
  3. वल्लभी विश्वविद्यालय
  4. विक्रमशिला विश्वविद्यालय।

प्रश्न 5.
कौटिल्य (चाणक्य) कौन था? (2018) उसके प्रसिद्ध ग्रन्थ का नाम लिखिए। (2017)
उत्तर:
कौटिल्य (चाणक्य) चन्द्रगुप्त मौर्य का प्रधानमन्त्री था। उसका वास्तविक नाम विष्णुगुप्त था। चाणक्य ने ‘अर्थशास्त्र’ नामक ग्रन्थ की रचना की थी।

प्रश्न 6.
हूणों के आक्रमणों को विफल करने में कौन-सा गुप्त शासक सफल हुआ?
उत्तर:
हूणों के आक्रमणों को विफल करने में गुप्त शासक स्कन्दगुप्त सफल हुआ।

प्रश्न 7.
विक्रम संवत् किसने चलाया था?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) ने एक नवीन संवत् को प्रारम्भ किया, जिसे विक्रम संवत् के नाम से जाना जाता है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा नगर की खोज किसने की थी? (2015, 17)
उत्तर:
मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा नगर की खोज दयाराम साहनी तथा राखलदास बनर्जी ने की थी। 1921-22 ई. में इन दोनों विद्वानों ने हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में खुदाई कराकर इन नगरों की खोज की। पुरातत्ववेत्ताओं ने पुरातत्व परम्परा के अनुसार इस सभ्यता का नाम इसके सर्वप्रथम ज्ञात स्थल के नाम पर ‘हड़प्पा सभ्यता’ दिया।

प्रश्न 2.
सरस्वती नदी के बारे में प्राप्त नवीन जानकारियों का वर्णन कीजिए। (2008)
उत्तर:
सरस्वती नदी के बारे में की गई खोजों में विष्णु श्रीधर वाकणकर का योगदान महत्त्वपूर्ण है। वैदिककाल में सरस्वती एक बहुत बड़ी नदी थी। इसका उल्लेख वेदों में बार-बार आया है। पिछले 20 वर्षों में हवाई एवं भू-सर्वेक्षणों के माध्यम से सरस्वती नदी के प्रवाह क्षेत्र को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है। यह माना गया है कि हिमालय में शिवालिक, श्रृंखलाओं में सरस्वती नदी का उद्गम स्थल रहा होगा, जहाँ से यह अम्बाला, थानेश्वर, कुरुक्षेत्र, पहोवा, सिरसा, हांसी, अग्रोहा, हनुमानगढ़, कालीबंगा होती हुई अनूपगढ़ से सूरतगढ़ तक बहती थी। कालान्तर में भूगर्भीय परिवर्तन के कारण सरस्वती नदी धीरे-धीरे सूख गई और कुछ समय बाद लुप्त हो गई। सरस्वती नदी पर विकसित सभ्यता के विषय में निरन्तर शोध चल रहा है।

प्रश्न 3.
कलिंग युद्ध का भारतीय इतिहास में क्या महत्त्व है? लिखिए। (2018)
अथवा
कलिंग युद्ध किसने जीता था ? कलिंग युद्ध का भारतीय इतिहास में क्या महत्त्व है? (2008)
उत्तर:
अशोक मौर्यवंश का तीसरा और सर्वाधिक प्रसिद्ध सम्राट था। उसने कलिंग से युद्ध किया था। अशोक और कलिंग की सेनाओं के बीच बड़ा भीषण युद्ध हुआ। अन्त में विजय अशोक की हुई। इस युद्ध में डेढ़ लाख लोगों को बन्दी बना लिया गया, एक लाख हताहत हुए और उससे कई गुना अधिक मारे गए। युद्ध की विभीषिका और रक्तचाप देखकर अशोक का हृदय परिवर्तन हो उठा। भयंकर नरसंहार देखकर उसका मन पश्चात्ताप से भर उठा और उसने युद्ध के स्थान पर शान्ति की नीति अपनाई। उसने युद्ध यात्राओं के स्थान पर धर्म यात्राएँ की। उसने युद्धघोष को धर्मघोष में बदल दिया और बौद्ध धर्म का अनुयायी हो गया। कलिंग युद्ध ने अशोक के जीवन को नवीन दिशा प्रदान की।

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प्रश्न 4.
चन्द्रगुप्त द्वितीय द्वारा स्थापित वैवाहिक सम्बन्ध का राजनीतिक महत्त्व लिखिए।
उत्तर:
अपने पिता समुद्रगुप्त से प्राप्त साम्राज्य को चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अधिक सुदृढ़ और सुरक्षित बनाया। चन्द्रगुप्त ने नागवंश की राजकुमारी कुबेरनागा से विवाह किया। इससे दोनों राजवंशों में मित्रता हुई। उसने अपनी पुत्री प्रभावती का विवाह वाकाटक नरेश रुद्रसेन द्वितीय के साथ किया। इस सम्बन्ध से चन्द्रगुप्त को शकों पर नियन्त्रण प्राप्त करने में सफलता मिली। यह विवाह सम्बन्ध राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण सिद्ध हुए। कदम्बवंश की राजकन्या का विवाह भी गुप्तवंश में हुआ था। इस विवाह सम्बन्ध द्वारा चन्द्रगुप्त द्वितीय का यश दक्षिण भारत में भी फैल गया। चन्द्रगुप्त द्वितीय के लिये ‘विक्रमादित्य’ उपाधि का उल्लेख मिलता है।

प्रश्न 5.
गुप्तकाल की शासन व्यवस्था की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
मौर्य शासकों की भाँति गुप्तकाल के राजाओं ने भी लोक कल्याण को प्रशासन का मूल आधार बनाया। राजा राज्य का सर्वोच्च अधिकारी था, राज्य की अन्तिम सत्ता उसी के हाथ में थी। राजा की सहायता के लिये मन्त्रिपरिषद् व अन्य पदाधिकारी होते थे। राज्य की आय का प्रमुख स्रोत ‘भूमिकर’ था जिसे ‘भाग’ कहते थे। यह सामान्यतया उपज का 1/6 भाग हुआ करता था। गुप्त प्रशासन तीन भागों में विभाजित था-केन्द्रीय, प्रान्तीय व स्थानीय शासन। गुप्त शासकों का ध्येय जनकल्याण था। इस हेतु उन्होंने औषधालय, चिकित्सालय, धर्मशालाएँ, पाठशालाएँ, सड़कें विश्रामगृह आदि बनवाये।

प्रश्न 6.
हर्ष के साम्राज्य विस्तार के बारे में लिखिए। (2008)
उत्तर:
सम्राट हर्षवर्धन थानेश्वर के शासक प्रभाकर वर्धन का पुत्र था। प्रभाकर वर्धन के बाद उसका पुत्र राज्यवर्धन गद्दी पर बैठा। राज्यवर्धन अपनी बहन राज्यश्री के पति कन्नौज नरेश गृहवर्मा की मदद के लिये मालवा शासक देवगुरु से संघर्षरत रहा और देवगुरु ने गृहवर्मा की हत्या कर दी। राज्यवर्धन ने देवगुरु को पराजित किया किन्तु देवगुरु के मित्र बंगाल नरेश शशांक ने धोखे से राज्यवर्धन का वध कर दिया। इन परिस्थितियों में हर्ष 16 वर्ष की आयु में सिंहासन पर बैठा। उसकी बहन के कोई सन्तान न होने से कन्नौज का राज्य भी उसे ही मिला। इस प्रकार वह थानेश्वर और कन्नौज दोनों का स्वामी हो गया। उसका साम्राज्य उत्तर में हिमालय से दक्षिण में नर्मदा नदी तक, पूरब में बंगाल से सिन्धु तक फैला हुआ था।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वैदिक सभ्यता का वर्णन कीजिए। (2009, 14)
अथवा
वैदिक सभ्यता में धार्मिक जीवन का वर्णन कीजिए। (2011) [संकेत- धार्मिक जीवन शीर्षक देखें।
उत्तर:
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद इन चारों वेदों एवं अन्य समकालीन साहित्य लेखन के काल को वैदिक सभ्यता के नाम से जाना जाता है। इसकी विवेचना अग्र प्रकार कर सकते हैं

(1) सामाजिक जीवन :
वैदिक काल का भारतीय समाज आर्य ‘जनों’ से मिलकर बना था। आर्यों के पास हजारों पालतू पशु होते थे। जानवरों के लिये जहाँ चारा पानी उपलब्ध होता था, वहीं ये बस जाते थे। आर्यों के सामाजिक संगठन का मुख्य आधार परिवार या कुटुम्ब था। परिवार का स्वामी या मुखिया सबसे वयोवृद्ध पुरुष होता था। वैदिक समाज में वर्ण व्यवस्था प्रचलित थी। वर्ण चार थे-ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व शूद्र। सामाजिक व्यवस्था के संचालन के लिये आर्यों ने अपने जीवन को सौ वर्ष का मानकर उसे चार आश्रमों में बाँटा था, यथा-ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं सन्यास आश्रम। स्त्रियों को समाज में उच्च स्थान प्राप्त था। दहेज प्रथा, पर्दाप्रथा, बाल विवाह जैसी कुप्रथाएँ प्रचलन में नहीं थीं। सूती, ऊनी, रेशमी वस्त्र उपयोग में लाये जाते थे। स्त्रियाँ शृंगार में विशेष रुचि लेती थीं। चावल, जौ, घी, दूध आर्यों का प्रमुख भोजन था। रथदौड़, घुड़सवारी, आखेट, नृत्य, जुआ, चौपड़ आदि मनोरंजन के साधन थे।

(2) आर्थिक जीवन :
वैदिक सभ्यता ग्रामीण एवं कृषि प्रधान सभ्यता थी। इस समय गेहूँ, जौ, उड़द, मसूर तथा तिल की खेती होती थी। कृषि के साथ पशुपालन अन्य मुख्य व्यवसाय था। घोड़े, गाय, बैल, भेड़, बकरी आदि पालतू पशु थे। गृह उद्योग और दस्तकारी उन्नत अवस्था में थे। बढ़ई, लुहार, सुनार, चर्मकार सभी के कार्यों का यथोचित महत्त्व था। आन्तरिक और बाह्य दोनों प्रकार का व्यापार होता था। वस्तु विनिमय प्रणाली का प्रचलन था। गाय वस्तु विनिमय का प्रमुख साधन थी। गाय के बाद ‘निष्क’ का उपयोग वस्तु विनिमय के लिये किया जाता था।

(3) धार्मिक जीवन :
आर्यों के धार्मिक जीवन की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं –

  • वैदिक आर्य प्रकृति के उपासक थे। वे प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते थे। सूर्य, चन्द्र, वायु, मेघ, उषा, अदिति प्रमुख देवी-देवता थे।
  • प्रत्येक आर्य के लिये यज्ञ का विधान था। उनका विश्वास था कि यज्ञ से देवता प्रसन्न होते हैं। पूजा पद्धति का मुख्य आधार ‘यज्ञ’ थे।
  • अनेक देवताओं को पूजते हुये वे एकेश्वरवाद में विश्वास करते थे।
  • अश्वमेध, राजसूय, बाजपेय जैसे महायज्ञों का सम्पादन इसी काल में हुआ।

(4) राजनीतिक जीवन :
आर्यों के राजनीतिक जीवन की प्रमुख विशेषताएँ निम्न थीं –

  • वैदिक आर्य अनेक ‘जन’ (कबीले) के रूप में संगठित थे। एक ‘जन’ में एक ‘वंश’ या ‘परिवार’ के व्यक्ति होते थे।
  • राजनीतिक व्यवस्था का आधार कुटुम्ब था। कुटुम्ब का प्रधान पिता होता था। अनेक कुटुम्बों को मिलाकर एक ‘ग्राम’ बनता था।
  • अनेक ग्रामों को मिलाकर ‘विंश’ बनता था। जिसका प्रधान ‘विंशपति’ कहलाता था।
  • अनेक विंशों को मिलाकर ‘जन’ बनता था जिसका प्रधान ‘गोप’ होता था।
  • उत्तर वैदिक काल में राजा की शक्ति और प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई। राजा के प्रमुख कर्तव्य प्रजा की रक्षा करना, युद्ध करना, शान्ति बनाये रखना तथा प्रजा को न्याय प्रदान करना था।

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प्रश्न 2.
सिन्धु सभ्यता (हड़प्पा संस्कृति) की क्या देन है? समझाइए। (2008, 09, 17)
उत्तर:
सिन्धु सभ्यता (हड़प्पा संस्कृति) की प्रमुख देन निम्नलिखित हैं
(1) श्रेष्ठ प्राचीनतम संस्कृति:
हड़प्पा संस्कृति को भारत की श्रेष्ठ प्राचीनतम संस्कृति माना जाता है क्योंकि इस संस्कृति की जानकारी से पूर्व भारत के इतिहास को वैदिक काल से प्रारम्भ माना जाता था। यह दयाराम साहनी तथा राखलदास बनर्जी की ऐतिहासिक खोजों का परिणाम है कि हमें यह ज्ञात हो सका कि भारत में आर्यों के आगमन से पूर्व यहाँ एक नगर सभ्यता फल-फूल रही थी। वास्तव में, हड़प्पा संस्कृति का सम्पूर्ण अध्ययन करने के पश्चात् हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि यह अत्यन्त प्राचीन संस्कृति होने के पश्चात् भी एक विकसित तथा उच्च कोटि की नगर सभ्यता थी।

(2) श्रेष्ठतम सुनियोजित नगर व्यवस्था का प्रारम्भ :
हड़प्पा संस्कृति में ही व्यवस्थित ढंग से नगरों की स्थापना का कार्य प्रारम्भ हुआ था। एक विद्वान के अनुसार हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के नगरों की स्थापना ऐसे सुव्यवस्थित ढंग से की गई थी कि जिसका उदाहरण संसार में हमें और कहीं नहीं मिलता। आधुनिक काल की तरह नगरों में छोटी व बड़ी सड़कों का निर्माण किया गया था।

(3) उच्चतम नगर स्वच्छता :
नगरों की स्वच्छता का ध्यान जितना इस संस्कृति में रखा जाता था उतना तत्कालीन किसी भी सभ्यता में नहीं किया जाता था। नगरों में छोटी व बड़ी नालियों की व्यवस्था की जाती थी।

(4) नागरिक सुविधाओं का ध्यान :
हड़प्पा संस्कृति का नगर-प्रबन्ध भी उत्तम तथा व्यवस्थित ढंग का था। ऐसा किसी भी प्राचीन संस्कृति में देखने को नहीं मिलता। स्थान-स्थान पर जल पीने की व्यवस्था थी तो उचित ढंग से स्नान करने के लिए सार्वजनिक स्नानागारों की भी व्यवस्था थी। यात्रियों के लिए धर्मशालाएँ भी बनीं थीं।

(5) आकर्षक तथा उपयोगी कला का विकास :
वास्तव में भारतीय कला का प्रारम्भ भी इस संस्कृति के काल से प्रारम्भ होता है। भवन निर्माण कला, चित्रकला, मूर्तिकला आदि का विकास यहाँ अपूर्व हुआ था। इस संस्कृति की कला की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ थीं –

  • कला में बनावटीपन का प्रभाव न होकर स्वाभाविकता थी।
  • भवनों का निर्माण उपयोगिता को ध्यान में रखकर हुआ था।
  • उपयोगिता के साथ-साथ कला में अपूर्व सौन्दर्य तथा आकर्षण भी था।
  • संगीत तथा नृत्यकला का भी यहाँ अपूर्व विकास हुआ।
  • ताम्रपत्र तथा मुद्रा कला की भी अपूर्व प्रगति हुई थी।
  • लेखन कला का भी प्रारम्भ इस सभ्यता से ही हुआ।

(6) विकसित धर्म-हड़प्पाकालीन धर्म एक विकसित धर्म था। उस काल के धर्म का प्रभाव वैदिककालीन धर्म पर पड़ने के साथ-साथ वर्तमान हिन्दू धर्म पर भी पड़ा है। अन्य शब्दों में उस काल की अनेक धार्मिक रीतियाँ आज के धर्म का भी अंग बनी हुई हैं। शिव तथा पृथ्वी माता की पूजा, लिंग पूजा, पीपल पूजा, सर्प पूजा तथा मूर्ति पूजा, वर्तमान हिन्दू धर्म का एक प्रमुख अंग है।

प्रश्न 3.
चन्द्रगुप्त मौर्य की शासन व्यवस्था की विशेषताएँ लिखिए। (2008, 09, 12, 14, 15, 17)
उत्तर :
चन्द्रगुप्त मौर्य की गणना भारत के महानतम शासकों में की जाती है। चन्द्रगुप्त मौर्य महान् विजेता, महान् कूटनीतिज्ञ, कुशल प्रशासक, धर्मपरायण एवं प्रजा हितैषी शासक था। उसके शासन की विशेषताएँ निम्नानुसार हैं –

  1. सम्राट, साम्राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था। वह सेना, न्याय-व्यवहार का प्रधान होता था। वह प्रजाहित के कार्यों में संलग्न रहता था।
  2. राजा की सहायता हेतु मन्त्रिपरिषद् थी।
  3. चन्द्रगुप्त मौर्य की गुप्तचर व्यवस्था, न्याय व्यवस्था एवं सैन्य संगठन सुदृढ़ था।
  4. राज्य की आय का प्रमुख साधन भूमिकर था। उपज का 1/6 भाग कर के रूप में लिया जाता था।
  5. कर एकत्र करने वाला अधिकारी ‘समाहर्ता’ कहलाता था।
  6. साम्राज्य प्रान्तों में विभाजित थे जो चक्र कहलाते थे। इनका शासन राजकुमार अथवा राजपरिवार के व्यक्तियों द्वारा होता था।
  7. नगरों का प्रबन्ध करने हेतु छः समितियाँ होती थीं। प्रत्येक में पाँच-पाँच सदस्य होते थे।
  8. चन्द्रगुप्त मौर्य का सैन्य संगठन सुदृढ़ था। इसकी देखरेख 6 समितियों द्वारा होती थी। ये समितियाँ-नौ सेना समिति, पदाति-सेना समिति, अश्व-सेना समिति, रथ सेना समिति, गज सेना समिति, यातायात व युद्ध सामग्री वाहिनी समिति थी।
  9. चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन में दण्ड-विधान कठोर था।
  10.  तत्कालीन समय में दो प्रकार के न्यायालय विद्यमान थे –
    • धर्मस्थीय (दीवानी) न्यायालय
    • कंटक शोधन (फौजदारी) न्यायालय।

प्रश्न 4.
अशोक के धम्म को समझाते हुए उसके धर्म की विशेषताएँ बताइए। (2009, 13, 16)
अथवा
अशोक के धम्म की तीन विशेषताएँ लिखिए। (2018)
उत्तर:
अशोक का धम्म (धर्म)-अपने प्रारम्भिक काल में अशोक हिन्दू धर्म का अनुयायी था परन्तु कलिंग युद्ध के उपरान्त उसने बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया। अपने लेखों में उसने बौद्धधर्म के मूल सिद्धान्तों का ही नहीं अपितु उसके कुछ नैतिक सिद्धान्तों का प्रचार किया। उसका धम्म सब धर्मों का सार था। अशोक के धम्म की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं –

  1. अशोक के धर्म की प्रमुख विशेषता ‘सार्वभौमिकता’ है, अर्थात् उसने अपने धर्म में सभी धर्मों के सद्गुणों का समावेश किया।
  2. अशोक ने अपने धर्म में अहिंसा को विशेष महत्त्व दिया। उसने उन यज्ञों को बन्द करवा दिया जिनमें पशुबलि होती थी।
  3. शोक ने अपने धर्म में अनुशासन तथा शिष्टाचार को भी विशेष महत्त्व दिया। उसने अपने शिलालेखों में उत्कीर्ण किया कि-“माता-पिता की आज्ञा का पालन होना चाहिए तथा इसी प्रकार गुरुजनों की आज्ञा का भी पालन होना चाहिए।”
  4. अशोक ने सेवकों, मित्रों तथा ब्राह्मणों के साथ सद्-व्यवहार करने पर भी बल दिया।
  5. अशोक ने धार्मिक आडम्बरों का विशेष विरोध किया तथा सत्य बोलने तथा सद् आचरण पर विशेष बल दिया।
  6. अशोक का धम्म सर्वमंगलकारी है जिसका मूल उद्देश्य प्राणी का मानसिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक उत्थान करना था। उसका धम्म अत्यन्त सरल तथा व्यावहारिक था।

प्रश्न 5.
गुप्तकाल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा गया है, इस कथन की व्याख्या (2008, 11, 12, 13, 15)
अथवा
गुप्तकाल को भारतीय इतिहास का “स्वर्ण युग” क्यों कहा गया है? (2018)
उत्तर:
गुप्तकाल में भारत की चहुँमुखी उन्नति हुई। इसी कारण इस काल को स्वर्ण युग की संज्ञा दी गई है। गुप्तकाल को स्वर्णयुग कहलाने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

  • महान शासकों का युग :
    गुप्तकाल की प्रमुख विशेषता थी कि इस युग में अनेक महान् शासकों ने जन्म लिया। चन्द्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त द्वितीय तथा स्कन्दगुप्त इस युग के महान शासक थे। समुद्रगुप्त द्वारा की गई महान् सैनिक विजयों के कारण उसे ‘भारत का नेपोलियन’ कहा जाता है। चन्द्रगुप्त द्वितीय को ‘विक्रमादित्य’ की उपाधि प्राप्त हुई। स्कन्दगुप्त भी बड़ा वीर और पराक्रमी था।
  • राजनीतिक एकता का युग :
    गुप्तकाल से पूर्व के दीर्घकाल में भारत छोटे-छोटे अनेक राज्यों में विभक्त था। विदेशी शक तथा कुषाणों ने काठियावाड़, गुजरात और महाराष्ट्र प्रदेशों पर अधिकार कर लिया था। विदेशी शक्तियों का उन्मूलन तथा छोटे-छोटे राज्यों को पराजित कर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना करना गुप्त सम्राटों का ही काम था।
  • आर्थिक सम्पन्नता का युग :
    गुप्तकाल में आर्थिक क्षेत्र में अत्यधिक उन्नति हुई थी। आन्तरिक शान्ति, कुशल प्रशासनिक व्यवस्था तथा यातायात की समुचित व्यवस्था के कारण भारत के आन्तरिक तथा बाह्य व्यापार को पर्याप्त प्रोत्साहन मिला। गुप्तकाल में भारत के चीन, जावा, बर्मा (म्यांमार) तथा रोम आदि देशों से व्यापारिक सम्बन्ध थे।।
  • लोक-कल्याणकारी राज्य :
    गुप्तकाल के शासक केवल निरंकुशता में ही विश्वास नहीं करते थे वरन् उनके अन्दर लोक-कल्याण की भी भावना थी। चीनी यात्री फाह्यान के यात्रा विवरण से स्पष्ट हो जाता है कि गुप्त सम्राट राज्य की आय का एक विशाल भाग जन या लोक-कल्याण में खर्च करते थे।
  • धार्मिक सहिष्णुता की स्थापना :
    गुप्त सम्राट वैष्णव धर्म के अनुयायी थे परन्तु वे बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म का भी आदर करते थे। प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार उपासना तथा पूजा-पाठ की स्वतन्त्रता थी।
    कीजिए।
  • साहित्य का अपूर्व विकास :
    गुप्तकाल में साहित्य का अपूर्व विकास हुआ। कालीदास, विशाखदत्त तथा भास इस काल के महान् साहित्यकार थे।।
  • विज्ञान का विकास :
    ज्योतिष, रसायनशास्त्र, गणित तथा खगोलशास्त्र का इस काल में अपूर्व विकास हुआ था। दशमलव प्रणाली की खोज इस काल में ही हुई थी। आर्यभट्ट, वराहमिहिर तथा नागार्जुन जैसे श्रेष्ठ वैज्ञानिक तथा खगोलशास्त्री इस काल में ही हुए थे।
  • ललित कलाओं का अपूर्व विकास :
    गुप्तकाल ललित कलाओं का भी स्वर्ण युग माना जाता है। स्थापत्य कला, मूर्तिकला तथा चित्रकला का इस युग में अपूर्व विकास हुआ। अजन्ता की गुफाओं के अधिकांश चित्र इस युग में ही बनाये गये थे।

प्रश्न 6.
समुद्रगुप्त के विजय अभियान का संक्षिप्त विवरण दीजिए। (2009)
उत्तर:
समुद्रगुप्त गुप्तकालीन भारत का एक महान दिग्विजयी सम्राट था। अपने शासन काल में उसने अनेक राजाओं को परास्त कर अपने साम्राज्य का अपूर्व विस्तार किया। उसकी प्रमुख दिग्विजयें निम्नलिखित थीं
(1) उत्तरी भारत की विजय :
उत्तरी भारत की विजयों का उल्लेख प्रयाग प्रशस्ति में मिलता है। इस प्रशस्ति के अनुसार समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त के 9 राज्यों को परास्त कर अपने साम्राज्य में मिला लिया था। ये राज्य थे-

  • नागदत्त
  • बलवर्मन
  • रुद्रदेव
  • मतिल
  • चन्द्रवर्मन
  • गणपति नाग
  • नागसेन
  • अच्युत
  • नंदिन।

(2) दक्षिण भारत की विजय :
उत्तरी भारत पर विजय प्राप्त करने के पश्चात् समुद्रगुप्त ने दक्षिण भारत के लगभग 12 राज्यों को पराजित कर अपने साम्राज्य में न मिलाकर अपनी अधीनता ही स्वीकार करायी तथा वार्षिक कर लेता रहा। समुद्रगुप्त ने यह नीति इस कारण अपनायी क्योंकि दक्षिण के राज्य उसके साम्राज्य से दूर पड़ते थे अतः प्रशासनिक कठिनाइयाँ आ सकती थीं।

(3) आटविक राज्यों पर विजय प्राप्त करना :
अभिलेखों से ज्ञात होता है कि जबलपुर तथा नागपुर के निकट 18 अटवी राज्य थे। इन समस्त राज्यों के राजाओं को पराजित कर अपना सेवक बनाया।

(4) सीमान्त राज्यों की विजय :
समुद्रगुप्त ने सीमान्त राज्यों पर भी अपना प्रभुत्व स्थापित किया। उसने कुछ राज्यों को तो पराजित किया तो कुछ ने बिना युद्ध किये ही उसकी अधीनता स्वीकार कर ली। प्रमुख सीमान्त राज्य निम्नलिखित थे-

  • समतट
  • दबाक
  • कामरूप
  • नेपाल
  • कर्तुरपुर।।

(5) गणराज्यों की विजय :
इस काल में अनेक गणराज्य भी थे जो गुप्त साम्राज्य के दक्षिण-पश्चिम में स्थित थे। इनमें प्रजातन्त्रात्मक शासन व्यवस्था का प्रचलन था। इन गणराज्यों ने बिना युद्ध किए ही समुद्रगुप्त की अधीनता स्वीकार कर ली। प्रमुख गणराज्य थे-मद्रक, रवरपारिक, मालव, अर्जुनायन, आभीर तथा हनकानिक।

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प्रश्न 7.
सम्राट हर्षवर्धन के शासन प्रबन्ध का वर्णन कीजिए। (2008, 09, 10, 16)
अथवा
सम्राट हर्षवर्धन की शासन व्यवस्था की तीन विशेषताएँ लिखिए। (2017, 18)
उत्तर:
सम्राट हर्षवर्धन के शासन प्रबन्ध का वर्णन निम्न प्रकार है –
(1) राजतन्त्रात्मक शासन :
हर्ष के शासन का स्वरूप राजतन्त्रात्मक था। केन्द्रीय शासन में सम्राट का स्थान सर्वोपरि था। वही सेना का प्रधान और सर्वोच्च न्यायाधीश होता था। प्रजा का कल्याण उसका मुख्य उद्देश्य था। सम्राट की सहायता के लिये अनेक मंत्री व सचिव होते थे। मन्त्रिपरिषद् के निर्णय को मानने को सम्राट बाध्य नहीं था।

(2) साम्राज्य की विशालता :
साम्राज्य की विशालता के कारण प्रशासकीय सुविधा हेतु उसे प्रान्तों में विभाजित किया गया। प्रान्त, भुक्ति या देश कहलाते थे। भुक्ति के शासक उपरिक कहलाते थे। इन पदों पर राजवंश के राजकुमार या राजपरिवार के सदस्य ही नियुक्त होते थे। प्रत्येक प्रान्त अनेक विषय (जिलों) में विभाजित था। विषय का शासक विषयपति कहलाता था। यह जिले की विभिन्न गतिविधियों का निरीक्षण करता था। शासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम होती थी।

(3) कठोर दण्ड विधान :
हर्ष के शासनकाल में दण्ड का विधान बहुत कठोर था। कुछ अपराधों के लिये अंग-भंग का दण्ड दिया जाता था। दण्ड विधान कठोर होने से अपराध कम होते थे।

(4) राज्य की आय :
राज्य की आय का प्रमुख साधन भूमिकर था। भूमिकर सामान्य उपज का 1/6 भाग लिया जाता था। अनाज के रूप में कर चुकाने की व्यवस्था थी। इसके अतिरिक्त मण्डी, घाटों, व्यापारियों पर कर व अर्थदण्ड राज्य की आय के प्रमुख साधन थे।

(5) महान् शासक :
हर्ष भारत के महान् शासकों में से एक था। सामान्यतः यह माना जाता है कि हर्षवर्धन का सम्पूर्ण उत्तरी भारत में एकछत्र राज्य था। वह महान् विजेता, कुशल प्रशासक, लोक कल्याणकारी, महान् धर्मपरायण, विद्या-प्रेमी व महान् दानी था।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सिन्धु सभ्यता की खोज डा. दयाराम साहनी ने हड़प्पा नामक स्थल पर कब की थी?
(i) सन् 1901
(ii) सन् 1951
(iii) सन् 1921
(iv) सन् 1961
उत्तर:
(iii) सन् 1921

प्रश्न 2.
मोहनजोदड़ो का शाब्दिक अर्थ क्या है? (2009)
(i) मुर्दो का टीला
(ii) भगवान राम की जन्मस्थली
(iii) महावीर स्वामी का घर
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) मुर्दो का टीला

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प्रश्न 3.
राजतरंगिणी के लेखक (2008, 09)
(i) कौटिल्य
(ii) पाणिनी
(iii) कल्हण
(iv) हर्ष।
उत्तर:
(iii) कल्हण

प्रश्न 4.
वेदों की संख्या है (2011)
(i) 4
(ii) 6
(iii) 5
(iv) 81
उत्तर:
(i) 4

प्रश्न 5.
सामवेद, यजुर्वेद व अथर्ववेद की रचना किस काल में की गई?
(i) ऋग्वैदिक काल,
(ii) वैदिक काल
(iii) उत्तर काल,
(iv) सिन्धु सभ्यता।
उत्तर:
(ii) वैदिक काल

प्रश्न 6.
जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर कौन थे? (2009)
(i) वर्धमान महावीर स्वामी
(ii) महात्मा बुद्ध
(iii) दिगम्बर जैन
(iv) श्वेताम्बर जैन।
उत्तर:
(i) वर्धमान महावीर स्वामी

प्रश्न 7.
बौद्ध धर्म के संस्थापक का नाम क्या है? (2009)
(i) महावीर जैन
(ii) महात्मा बुद्ध
(iii) शुद्धोधन
(iv) हर्षवर्द्धन।
उत्तर:
(ii) महात्मा बुद्ध

प्रश्न 8.
महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति कहाँ हुई?
(i) पीपल वृक्ष
(ii) बोधि वृक्ष
(iii) बरगद वृक्ष
(iv) नीम वृक्ष।
उत्तर:
(ii) बोधि वृक्ष

प्रश्न 9.
‘मुद्रा राक्षस’ की रचना किसने की?
(i) कौटिल्य
(ii) कालिदास
(iii) विशाखदत्त
(iv) मेगस्थनीज।
उत्तर:
(iii) विशाखदत्त

प्रश्न 10.
‘इण्डिका’ की रचना किस लेखक ने की थी?
(i) कौटिल्य
(ii) कालिदास
(iii) विशाखदत्त
(iv) मेगस्थनीज।
उत्तर:
(iv) मेगस्थनीज।

प्रश्न 11.
यूनानी लेखकों ने अपने ग्रन्थों में चन्द्रगुप्त मौर्य को किस नाम से सम्बोधित किया है?
(i) सेन्ड्रोकोटस
(ii) सेल्यूकस
(iii) बेसेनियो
(iv) एन्टोनियो।
उत्तर:
(i) सेन्ड्रोकोटस

प्रश्न 12.
किस शासक को भारतीय नेपोलियन कहा जाता है? (2008, 17)
(i) स्कन्दगुप्त
(ii) समुद्रगुप्त
(iii) श्रीगुप्त
(iv) चन्द्रगुप्त।
उत्तर:
(ii) समुद्रगुप्त

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प्रश्न 13.
चन्द्रगुप्त द्वितीय को किस उपाधि से विभूषित किया गया?
(i) नेपोलियन
(ii) विक्रमादित्य
(iii) हिटलर
(iv) कौटिल्य।
उत्तर:
(ii) विक्रमादित्य

प्रश्न 14.
सम्राट हर्षवर्धन किस शासक का पुत्र था?
(i) राज्यवर्धन
(ii) विजयवर्धन
(iii) प्रभाकर वर्धन
(iv) गृहवर्मा।
उत्तर:
(ii) विजयवर्धन

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. विक्रम संवत् …………. ने चलाया था। (2008)
  2. सिन्धु सभ्यता की खोज सन् ……… में हुई। (2015)
  3. मोहनजोदड़ो की खोज …………. ने की थी। (2012)
  4. ………. में अनेक जनपदों का उल्लेख है। (2012)
  5. ………. विश्व का प्राचीनतम ग्रन्थ है।
  6. नंदवंश के शासनकाल में …………. का भारत पर आक्रमण हुआ। (2010)
  7. मौर्य वंश का अन्तिम शासक …………. था। (2008)
  8. बुद्ध का जन्म …………. नामक स्थान पर हुआ। (2011)
  9. अशोक महान ………… का पुत्र था। (2009)
  10. मोहनजोदड़ो में उत्खनन में एक विशाल …………. मिला है। (2014)
  11.  बौद्ध धर्म के संस्थापक …………. थे। (2016)

उत्तर:

  1. चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य)
  2. 1921 ई.
  3. राखलदास बनर्जी
  4. महाभारत
  5. ऋग्वेद
  6. चन्द्रगुप्त मौर्य
  7. वृहद्रथ
  8. लुम्बिनी
  9. बिन्दुसार
  10. स्नानागार
  11. गौतम बुद्ध।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
सिन्धु सभ्यता में मुख्य व्यवसाय पशुपालन था। (2008)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
चाणक्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का गुरु था। (2008)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
सामवेद विश्व का प्राचीनतम ग्रन्थ है। (2008)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
चन्द्रगुप्त द्वितीय के लिए ‘विक्रमादित्य’ उपाधि का उल्लेख मिलता है। (2011)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
महात्मा बुद्ध का जन्म लुम्बिनी नामक स्थान पर हुआ था। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 6.
वर्द्धमान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 7.
विक्रमादित्य उज्जैन के न्यायप्रिय शासक थे। (2010)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 8.
चन्द्रगुप्त मौर्य की गणना भारत के महानतम् शासकों में की जाती है। (2012)
उत्तर:
सत्य

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प्रश्न 9.
ऋग्वैदिक काल 1500 ई. पू. से 1000 ई. पू. माना जाता है। (2012)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 10.
चाणक्य का सम्बन्ध अर्थशास्त्र से है। (2013)
उत्तर:
सत्य

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 9 प्राचीन भारत का इतिहास - 2

उत्तर:

  1. → (ग)
  2. → (घ)
  3. → (ङ)
  4. → (क)
  5. → (ख)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
महान चरित्र के जीवन से सम्बन्धित विस्तृत काव्य रचना। (2008)
उत्तर:
महाकाव्य

प्रश्न 2.
विक्रम संवत् किसने चलाया? (2008)
उत्तर:
चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य)

प्रश्न 3.
मौर्य साम्राज्य का संस्थापक कौन था? (2008)
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य

प्रश्न 4.
किसी भी प्रकार का संग्रह नहीं करना। (2008)
उत्तर:
अपरिग्रह

प्रश्न 5.
जैन धर्म के संस्थापक मुनि। (2009, 11)
उत्तर:
महावीर स्वामी

प्रश्न 6.
चन्द्रगुप्त मौर्य के समय कौन-सा विदेशी यात्री भारत आया था?
(2014)
उत्तर:
फाह्यान।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राचीन भारत के इतिहास का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
प्राचीन भारत के इतिहास का अध्ययन करके ही हम प्राचीन भारतीय संस्कृति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अध्ययन से ही हमें ज्ञात होता है कि मानव ने पाषाण युग से लौह युग में किस प्रकार प्रवेश किया तथा आध्यात्मिक, कलात्मक तथा राजनीतिक क्षेत्रों की प्रगति की।

प्रश्न 2.
प्राचीन भारतीय इतिहास पर प्रकाश डालने वाले साहित्यिक स्रोतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वेद, आरण्यक, उपनिषद्, वेदांग, सूत्र, महाकाव्य, स्मृति, पुराण, बौद्ध साहित्य, जैन साहित्य, मुद्राराक्षस, अर्थशास्त्र, महाभाष्य, अष्टाध्यायी, राजतरंगिणी आदि साहित्यिक स्रोत प्राचीन भारतीय इतिहास पर प्रकाश डालते हैं।

प्रश्न 3.
प्राचीन भारत के अध्ययन के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण स्रोत क्या है?
उत्तर:
पुरातात्विक सामग्री; जैसे-अभिलेख, शिलालेख, स्तम्भलेख, ताम्रपत्र लेख, भोजपत्र लेख, मूर्तिलेख, मुद्राएँ, स्मारक आदि प्राचीन भारत के अध्ययन के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं।

प्रश्न 4.
लोथल तथा कालीबंगा कहाँ स्थित हैं ? यह प्राचीन इतिहास में क्यों प्रसिद्ध हैं?
उत्तर:
लोथल-यह गुजरात में रंगपुर के खण्डहरों से 48 मीटर उत्तर में स्थित है। कालीबंगा-यह राजस्थान के गंगानगर जिले में सरस्वती नदी के किनारे स्थित है। ये दोनों सिन्धु सभ्यता के प्रमुख नगर थे। इन नगरों में खुदाई में प्राप्त वस्तुओं से अनेक बातों का ज्ञान होता है।

प्रश्न 5.
सिन्धु घाटी सभ्यता किसे कहते हैं?
उत्तर:
भारत और पाकिस्तान के उत्तरी पश्चिमी भाग में सिन्धु व उसकी सहायक नदियों की घाटियों में जो नगर सभ्यता विकसित हुई, उसे सामान्यतः सिन्धु घाटी सभ्यता कहते हैं।

प्रश्न 6.
ऋग्वेद के सूक्तों की रचना कहाँ हुई थी?
उत्तर:
ऋग्वेद के सूक्तों की रचना सिन्धु घाटी के तट पर हुई थी।

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प्रश्न 7.
वैदिक सभ्यता (काल) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद इन चारों वेदों एवं अन्य समकालीन साहित्य लेखन के काल को वैदिक सभ्यता के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 8.
वैदिक समाज में कौन-कौन से वर्ण थे?
उत्तर:
वैदिक समाज में चार वर्ण थे-ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र।

प्रश्न 9.
वैदिक समाज में स्त्रियों की दशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वैदिक समाज में स्त्रियों को उच्च स्थान प्राप्त था। वे उच्च शिक्षा प्राप्त करती थीं तथा समस्त सामाजिक व धार्मिक कार्यों में भाग लेती थीं। दहेज प्रथा, पर्दा प्रथा, बाल-विवाह जैसी कुप्रथाएँ प्रचलन में नहीं थीं।

प्रश्न 10.
उन विदेशी यात्रियों के नाम लिखिए जिनके विवरण प्राचीन भारतीय इतिहास पर प्रकाश डालते हैं ?
उत्तर:
मेगस्थनीज, फाह्यान तथा ह्वेनसांग नामक विदेशी यात्री भारत आये थे। इनके विवरण प्राचीन भारतीय इतिहास पर प्रकाश डालते हैं।

प्रश्न 11.
प्राचीन भारत में अभिलेख किस भाषा में लिखे गये थे?
उत्तर:
प्राचीन भारत में अभिलेख प्राकृत तथा संस्कृत भाषा में लिखे गये थे।

प्रश्न 12.
वैदिक आर्य किसके उपासक होते थे?
उत्तर:
वैदिक आर्य प्रकृति के उपासक थे। वे प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते थे। सूर्य, चन्द्र, वायु, मेघ, उषा, अदिति प्रमुख देवी-देवता थे।

प्रश्न 13.
सिकन्दर कौन था?
उत्तर:
सिकन्दर मकदूनियां के शासक फिलिप का पुत्र था।

प्रश्न 14.
चन्द्रगुप्त के शासन प्रबन्ध का ज्ञान हमें किससे होता है?
उत्तर:
चन्द्रगुप्त के शासन प्रबन्ध का ज्ञान हमें मेगस्थनीज की ‘इण्डिका’ तथा कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ से होता है।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राचीन भारत के ऐतिहासिक कालक्रम के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
भारत की प्राचीन, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परम्परा अत्यन्त समृद्ध एवं गौरवशाली रही है। प्राचीन भारत के इतिहास में सिन्धु एवं सरस्वती सभ्यता अथवा हड़प्पा सभ्यता, वैदिक-सभ्यता, महाकाव्यकाल, बौद्ध एवं जैन धर्म, मौर्य साम्राज्य, गुप्त साम्राज्य एवं हर्ष साम्राज्य शामिल हैं। इन सभ्यताओं एवं राजवंशों की अपनी विशिष्टता रही है। प्राचीन काल से ही भारतीयों में ऐतिहासिक चेतना विद्यमान थी। प्राचीन भारतीय इतिहास पर प्रकाश डालने वाली सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। जैसे-साहित्यिक स्रोत, पुरातात्विक स्रोत, विदेशियों का यात्रा विवरण आदि।

प्रश्न 2.
प्राचीन भारतीय इतिहास के निर्माण में कौन-कौन से धार्मिक ग्रन्थ सहायक होते हैं? किन्हीं चार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्राचीन भारत के इतिहास के निर्माण में धार्मिक ग्रन्थों की भी विशेष भूमिका है। इनके अध्ययन से तत्कालीन सामाजिक, धार्मिक तथा राजनीतिक दशा की जानकारी होती है। प्राचीन भारतीय इतिहास पर प्रकाश डालने वाले प्रमुख धार्मिक ग्रन्थ हैं-वेद, पुराण, ब्राह्मण ग्रंथ, आरण्यक, उपनिषद्, वेदांग, स्मृति, महाभारत, पिटक, जातक तथा परिशिष्टपर्व। चार प्रमुख धार्मिक ग्रन्थ निम्नलिखित हैं –

  • वेद :
    वेद आर्यों के सर्वाधिक प्राचीनतम ग्रन्थ हैं। वेदों की संख्या चार है-ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, तथा अथर्ववेद। इनमें प्राचीनतम ऋग्वेद है।
  • ब्राह्मण ग्रन्थ :
    ब्राह्मण ग्रन्थों में विभिन्न कर्मकाण्डों का उल्लेख किया गया है। प्रमुख ब्राह्मण ग्रन्थ-ऐतरेय, शतपथ, पंचविश व गोपथ हैं।
  • उपनिषद् :
    उपनिषदों में भारतीय दर्शन तथा बिम्बसार के पूर्व के इतिहास का वर्णन है।
  • पुराण :
    पुराणों की संख्या अठारह है परन्तु विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण तथा ब्रह्म पुराण आदि विशेष महत्त्व रखते हैं। इनके अध्ययन से तत्कालीन इतिहास की पर्याप्त जानकारी होती है।

प्रश्न 3.
सिन्धु घाटी सभ्यता का विस्तार क्षेत्र कहाँ तक था?
उत्तर:
सिन्धु सभ्यता का विस्तार क्षेत्र अत्यधिक व्यापक था ? ईसा पूर्व से तीसरी और दूसरी शताब्दी में विश्व भर में किसी भी सभ्यता का क्षेत्र सिन्धु सभ्यता के क्षेत्र से बड़ा नहीं था। प्रो. आर. एन. राव के अनुसार सिन्धु सभ्यता का विस्तार पूर्व से पश्चिम 1,600 किलोमीटर तथा उत्तर से दक्षिण 1,100 किलोमीटर क्षेत्र में था। इस सभ्यता का विस्तार पाकिस्तान, दक्षिणी अफगानिस्तान तथा भारत के राजस्थान, गुजरात, जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं महाराष्ट्र तक था।

प्रश्न 4.
हड़प्पा संस्कृति के चार प्रमुख नगरों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सिन्धु सभ्यता अथवा हड़प्पा संस्कृति के चार प्रमुख नगर थे-हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल तथा कालीबंगा। इनका विवरण निम्नलिखित है –
(1) हड़प्पा :
यह नगर पश्चिमी पंजाब के मॉण्टगुमरी जिले में लाहौर से कोई 100 मील की दूरी पर स्थित था। 1921 ई. में आर. बी. दयाराम ने इसकी खुदाई करायी थी। यह नगर सिन्धु सभ्यता का सबसे बड़ा नगर था। इसमें समानान्तर चतुर्भुज के आकार का एक दुर्ग था जिसमें छः कोठार मिले हैं। हड़प्पा के निवासी पक्के मकानों में रहते थे।

(2) मोहनजोदड़ो :
यह भी सिन्धु सभ्यता का प्रमुख नगर था। 1922 ई. में आर. डी. बनर्जी ने इसकी खोज की थी। यह सिन्ध प्रान्त के लरकाना जिले में स्थित है। मोहनजोदड़ो का शाब्दिक अर्थ है-‘मृतकों का टीला’ इस नगर का यह नाम इस कारण पड़ा क्योंकि इस नगर की खुदाई में सात तहें मिलीं अत: यह सात बार बना और सात बार नष्ट हुआ। इस नगर का निर्माण एक निश्चित योजना के अनुसार किया गया था। सड़कों तथा नालियों का समुचित प्रबन्ध था। यहाँ के प्रत्येक मकान में स्नानागार भी होता था।

(3) लोथल :
पुरातत्वविदों के अनुसार यह नगर एक बन्दरगाह था। यह गुजरात में खम्भात की खाड़ी के ऊपर स्थित था। यहाँ अनेक प्रकार के आभूषण, मुद्राएँ तथा मिट्टी के बर्तन भी मिले हैं।

(4) कालीबंगा :
यह नगर राजस्थान के गंगानगर जिले में स्थित है। यहाँ के भवन तथा उनकी दीवारें, गोल कुएँ तथा चौड़ी सड़कें अपने ढंग की हैं। खुदाई में प्राप्त बर्तन, ताँबे के औजार, चूड़ियाँ, मिट्टी की मूर्तियाँ तथा खिलौने विशेष दर्शनीय हैं।

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प्रश्न 5.
सिन्धु घाटी सभ्यता के लोगों के सामाजिक और आर्थिक जीवन का विवरण दीजिए।
उत्तर:
(1) सामाजिक जीवन :
सिन्धु घाटी का समाज ‘मातृ प्रधान’ था। व्यवसाय के आधार पर समाज चार भागों में विभाजित था-विद्वान, योद्धा, व्यवसायी तथा मजदूर। यहाँ के निवासी शाकाहारी होने के साथ-साथ माँसाहारी भी थे। गेहूँ और जौ की रोटी विशेष रूप से खायी जाती थी। माँस मुख्यतया सूअर और भेड़ का खाया जाता था। वस्त्र ऊनी तथा सूती दोनों प्रकार के प्रयोग किये जाते थे। स्त्री और पुरुष दोनों ही शालों का प्रयोग करते थे। स्त्री तथा पुरुष दोनों ही अंगूठियाँ, कड़े, कंगन, कण्ठहार, कुण्डल आदि आभूषणों को धारण करते थे। सिन्धुवासी मनोरंजन प्रेमी थे। मनोरंजन के प्रमुख साधन थे-नृत्य, संगीत, जुआ खेलना, शिकार खेलना तथा चौपड़ खेलना।

(2) आर्थिक जीवन :
सिन्धु घाटी के निवासियों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। गेहूँ, जौ, कपास, मटर तथा तिल आदि की खेती मुख्यतया होती थी। फलों में खरबूज, तरबूज, खजूर तथा नारियल आदि उगाये जाते थे। पशुपालन का भी प्रचलन था। गाय, भैंस, भेड़, बकरी आदि प्रमुख रूप से पाले जाते थे। कुछ इतिहासकारों के अनुसार सिन्धुवासी विश्व के सूत कातने तथा वस्त्र निर्माण करने वाले प्रथम लोग थे। यहाँ धातुओं के सुन्दर आभूषण बनाये जाते थे तथा सीप, शंख, हाथी दाँत आदि के भी आभूषण बनाये जाते थे। विदेशी व्यापार भी होता था, जो थल तथा जल दोनों मार्गों से होता था।

प्रश्न 6.
सिन्धु सभ्यता के विनाश के चार कारण लिखिए।
उत्तर:
सिन्धु सभ्यता अथवा हड़प्पा संस्कृति के विनाश के निम्नलिखित कारण हैं –

  1. कुछ विद्वानों के मत में किसी बाहरी जाति के आक्रमण ने इस सभ्यता का विनाश कर दिया था।
  2. प्रसिद्ध भूगर्भशास्त्री साहनी के मत में सिन्धु सभ्यता के विनाश का कारण जल प्लावन था।
  3. कुछ इतिहासकारों के मत में किसी शक्तिशाली भूकम्प ने इस सभ्यता का विनाश कर दिया था।
  4. कुछ विद्वानों के मत में सिन्धु प्रदेश की जलवायु में परिवर्तन आने से इस सभ्यता का विनाश हो गया। इस मत के समर्थक हैं अमलानन्द घोष।
  5. अनेक विचारकों का यह भी मत है कि किसी संक्रामक रोग ने इस सभ्यता के विनाश में योगदान दिया।
  6. इस सभ्यता का विनाश का कारण सिन्धु नदी में तीव्र बाढ़ का आना भी माना जाता है।

प्रश्न 7.
वैदिक काल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वैदिक काल भारतीय इतिहास का वह काल माना जाता है, जिस काल में वेद तथा उनसे सम्बन्धित ग्रन्थों की रचना हुई थी। वैदिक काल को दो भागों में विभाजित किया गया है

  1. ऋग्वैदिक काल, तथा
  2. उत्तर वैदिक काल

(1) ऋग्वैदिक काल :
ऋग्वैदिक काल में ऋग्वेद की रचना हुई थी। अन्य शब्दों में जिस काल में ऋग्वेद की रचना हुई थी उस काल को ही ऋग्वैदिक काल कहते हैं।

(2) उत्तरवैदिक काल :
ऋग्वैदिक काल में केवल ऋग्वेद की रचना की गयी थी परन्तु उत्तर वैदिक काल में सामवेद, अथर्ववेद के अतिरिक्त ब्राह्मण ग्रन्थों, उपनिषद एवं आरण्यक की रचना भी हुई थी।

प्रश्न 8.
वैदिक सभ्यता की आश्रम व्यवस्था का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वैदिककालीन आर्यों ने मानव की आयु को 100 वर्ष का मानकर उसे 25-25 वर्षों के निम्नलिखित चार आश्रसों में विभाजित किया-

  • ब्रह्मचर्य आश्रम (जन्म से 25 वर्ष) :
    इस काल में आर्य ब्रह्मचर्य जीवन तथा विद्यार्थी जीवन का पालन करते थे।
  • गृहस्थ आश्रम (25 से 50 वर्ष) :
    ब्रह्मचर्य जीवन के पश्चात् आर्य विवाह कर गृहस्थ जीवन व्यतीत करते थे।
  • वानप्रस्थ आश्रम (50 से 75 वर्ष) :
    गृहस्थ आश्रम के पश्चात् आर्य सांसारिक चिन्ताओं से मुक्त होने के लिए वानप्रस्थ आश्रम में प्रवेश करते थे। इस काल में व्यक्ति अपने परलोक को सुधारने का प्रयास करता था।
  • संन्यास आश्रम (75 से 100 वर्ष) :
    यह आश्रम जीवन के अन्तिम काल से सम्बन्धित होता था। इस काल में मनुष्य परिवार व समाज से अलग होकर अपना समस्त समय ईश्वर चिन्तन तथा मोक्ष प्राप्ति के प्रयासों में लगाता था।

प्रश्न 9.
जैन धर्म के प्रमुख सिद्धान्तों को लिखिए।
उत्तर:
जैन धर्म के प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित हैं –
(1) ईश्वर में अविश्वास-जैन धर्म ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं करता। महावीर स्वामी के अनुसार विश्व का निर्माता ईश्वर नहीं है।

(2) स्याद्वाद-महावीर स्वामी के मत में प्रत्येक वस्तु के अनेक पक्ष होते हैं। अतः इसे अनेक दृष्टिकोण से देखना आवश्यक है।

(3) कर्म की प्रधानता-महावीर स्वामी ने कर्म की प्रधानता पर बल दिया, उनके मत में प्रत्येक व्यक्ति को अपने अच्छे व बुरे कर्मों का फल अवश्य मिलता है।

(4) त्रिरत्न-महावीर स्वामी के अनुसार निर्वाण या मोक्ष प्राप्ति के लिए निम्नलिखित तीन सिद्धान्तों को ध्यान में रखना चाहिए-

  • सम्यक् श्रद्धा
  • सम्यक् ज्ञान
  • सम्यक् आचरण।

(5) अहिंसा पर विशेष बल :
जैन धर्म अहिंसा पर विशेष बल देता है।

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प्रश्न 10.
महात्मा बुद्ध के प्रमुख सिद्धान्त क्या थे?
अथवा
महात्मा बुद्ध के चार आर्य सत्य कौनसे हैं?
अथवा
बौद्ध धर्म के अष्टांगिक मार्ग की आठ बातें कौन-सी हैं? (2015) [संकेत-दुःख निरोध के उपाय शीर्षक में देखें।]
उत्तर:
बौद्ध धर्म की चार विशेषताएँ अथवा चार आर्य सत्य निम्नलिखित हैं –

(1) दुःखमय संसार-बुद्ध के अनुसार यह विश्व दुःखमय है।

(2) दुःख समुदाय-बुद्ध के मत में दुःख का मूल कारण तृष्णा, मोह तथा माया है।

(3) दुःख निरोध-गौतम बुद्ध के अनुसार तृष्णा पर विजय प्राप्त करके दुःखों से भी मुक्ति प्राप्त की जा सकती है।

(4) दुःख निरोध के उपाय-बुद्ध के अनुसार दुःखों पर विजय प्राप्त करने के लिए अष्टांग मार्ग का अनुसरण करना चाहिए जिसमें निम्नलिखित बातें आती हैं-

  • सम्यक् दृष्टि
  • सम्यक् संकल्प
  • सम्यक् भाषा
  • सम्यक् आजीव
  • सम्यक् व्यायाम
  • सम्यक् कर्म
  • सम्यक् ध्यान
  • सम्यक् समाधि।

प्रश्न 11.
मौर्यकालीन इतिहास जानने के प्रमुख साधनों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मौर्यकालीन इतिहास जानने के प्रमुख साधन निम्नलिखित हैं –

  • धार्मिक साहित्य :
    धार्मिक साहित्य में जैन धर्म तथा बौद्ध धर्म का साहित्य तत्कालीन सामाजिक तथा राजनीतिक दशा पर प्रकाश डालता है। अन्य ग्रन्थों में दीपवंश तथा महावंश मौर्यकालीन सामाजिक तथा राजनीतिक दशा पर विशेष प्रकाश डालते हैं।
  • विशाखदत्त का मुद्राराक्षस :
    यह संस्कृत साहित्य का प्रसिद्ध नाटक है। इसके अध्ययन से चन्द्रगुप्त, कौटिल्य, नन्दवंश तथा मगध की क्रान्ति आदि के विषय में जानकारी मिलती है।
  • कौटिल्य का अर्थशास्त्र :
    कौटिल्य सम्राट चन्द्रगुप्त का मन्त्री, परामर्शदाता तथा सहायक था। उसने अर्थशास्त्र नामक ग्रन्थ की रचना की थी। इस ग्रन्थ में तत्कालीन राजनीति तथा प्रशासनिक सिद्धान्तों व न्याय प्रणाली आदि का उल्लेख है।
  • मेगस्थनीज की इण्डिका :
    मेगस्थनीज को सैल्यूकस ने अपना राजदूत बनाकर चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था। उसके द्वारा लिखित पुस्तक ‘इण्डिका’ मौर्यकालीन शासन व्यवस्था पर व्यापक प्रकाश डालती है। इण्डिका में मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था का भी व्यापक उल्लेख किया गया है।
  • अशोक के शिलालेख :
    अशोक ने अनेक चट्टानों तथा स्तम्भों पर धर्म लेख खुदवाये थे। इन लेखों में अशोक द्वारा किये गये धर्म प्रचार तथा शासन व्यवस्था सम्बन्धी नियमों का वर्णन मिलता है।

प्रश्न 12.
भारत पर सिकन्दर के आक्रमण की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सिकन्दर अपने विश्व विजय अभियान के सम्बन्ध में भारत आया था। वह मकदूनियां के शासक फिलिप का पुत्र था। पिता की मृत्यु के बाद 20 वर्ष की उम्र में सिंहासन पर बैठा। वह असाधारण महत्त्वाकांक्षाओं वाला शासक था। फारस को परास्त करने के उपरान्त वह ‘सोने की चिड़िया’ कहे जाने वाले भारत में प्रविष्ट हुआ। सिकन्दर को एक जन-जातीय शासक हस्ती जिसे यूनानी एस्ड्रस कहते हैं, के विरुद्ध लड़ना पड़ा, जिन्होंने सिकन्दर का जमकर प्रतिरोध किया। हस्ती के वीरगति को प्राप्त करने के बाद उनकी रानी एवं अन्य स्त्रियों ने अन्तिम क्षण तक अपने देश की रक्षा का प्रण लेकर युद्ध में भाग लिया।

अंततः विजय सिकन्दर को मिली। सिकन्दर आगे बढ़ा और तक्षशिला के शासक आम्भी ने सिकन्दर के सामने आत्मसमर्पण कर दिया लेकिन झेलम प्रदेश के शासक पोरस ने आत्मसमर्पण से इन्कार कर दिया। पोरस और सिकन्दर में घमासान युद्ध हुआ, लेकिन जीत सिकन्दर की हुई। बाद में सिकन्दर ने पोरस की वीरता व स्वाभिमान को देखते हुए उसके साथ एक राजा के समान व्यवहार किया और उसका राज्य लौटा दिया।

प्रश्न 13.
मौर्य साम्राज्य के पतन के कारणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
मौर्य समाज के पतन के निम्नलिखित कारण थे –

  1. अशोक ने ब्राह्मणों को अपनी धार्मिक नीति के द्वारा असन्तुष्ट कर दिया था। यज्ञों में पशुबलि पर रोक लगाना तथा महामात्रों की नियुक्ति ब्राह्मणों में से न करना इसके उदाहरण हैं।
  2. सम्राट अशोक के उत्तराधिकारी अयोग्य थे अत: वे विशाल मौर्य साम्राज्य को सुरक्षित नहीं रख सके।
  3. अशोक की शान्तिवादी तथा अहिंसा की नीति ने मौर्य साम्राज्य की सेना को अत्यधिक निर्बल बना दिया था। दीर्घकाल तक अशोक द्वारा युद्ध न किये जाने के कारण मौर्य सैनिक अकर्मण्य हो गये थे।
  4. अशोक की दान प्रवृत्ति ने राजकोष को खाली कर दिया था। इसके अतिरिक्त अशोक ने स्तूपों, बिहारों, चैत्यों तथा स्तम्भों के निर्माण में भी अपार धन व्यय कर वित्तीय संकट उत्पन्न कर दिया था।
  5. प्रजा में राष्ट्रीय भावना का अभाव।
  6. मौर्यों के अन्तिम शासक वृहद्रथ का उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने वध कर दिया। उपर्युक्त कारणों से मौर्य साम्रज्य का पतन हो गया।

प्रश्न 14.
चन्द्रगुप्त प्रथम के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
घटोत्कच के उपरान्त उसके पुत्र चन्द्रगुप्त (प्रथम) ने गुप्त साम्राज्य की बागडोर सँभाली। चन्द्रगुप्त के लिये ‘महाराजाधिराज’ की उपाधि का उल्लेख मिलता है। चन्द्रगुप्त प्रथम ने लिच्छवी वंश की राजकुमारी कुमार देवी से विवाह कर अपनी राजनीतिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया। चन्द्रगुप्त ने 320 ई. में ‘गुप्त संवत्’ की स्थापना की थी। चन्द्रगुप्त प्रथम ने 335 ई. तक शासन किया था। उसने अपने शासनकाल में ही अपने पुत्र समुद्रगुप्त को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था।

प्रश्न 15.
“समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहा जाता है।” क्यों?
उत्तर:
समुद्रगुप्त नेपोलियन के समान ही वीर योद्धा, साहसी, पराक्रमी तथा निर्भीक शासक था। स्मिथ के शब्दों में-“जिस प्रकार नेपोलियन ने एक महान योद्धा और विजेता के समान बाहुबल तथा रण-कौशल से अन्य राजाओं को धूल में मिला दिया था, उसी प्रकार समुद्रगुप्त ने भी वीरता और साहस के साथ समस्त भारत पर विजय प्राप्त कर अपने को एक महान योद्धा और सेनानायक सिद्ध कर दिया था।” स्मिथ के इस कथन से स्पष्ट हो जाता है कि समुद्रगुप्त नेपोलियन के समान ही एक महान योद्धा, महान सेनानायक तथा एक विशाल साम्राज्य निर्माता था।

प्रश्न 16.
फाह्यान कौन था? यह भारत कब आया था? उसने भारत के विषय में क्या लिखा है?
उत्तर:
फाह्यान चीन का निवासी तथा बौद्ध भिक्षु था। चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के शासन काल में वह बौद्ध धर्म का अध्ययन करने भारत आया था। लगभग 6 वर्ष तक वह भारत में रहा। इस काल में उसने भारत की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा धार्मिक दशा का निरीक्षण कर एक सजीव विवरण प्रस्तुत किया।

फाह्यान के अनुसार, गुप्त काल में भारत में आन्तरिक शान्ति थी। चोर लुटेरों का भय नहीं था। निर्धन तथा अनाथ लोगों को राज्य की ओर से सहायता दी जाती थी। साधारण दण्ड व्यवस्था थी। राजद्रोहियों का सीधा हाथ काट लिया जाता था। फाह्यान के अनुसार, साधारण जनता का आर्थिक स्तर अच्छा था। मनुष्य सदाचारी थे तथा परस्पर सहयोग का जीवन व्यतीत करते थे।

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प्रश्न 17.
आर्यभट्ट के विषय में आप क्या जानते हैं? उसने विज्ञान, गणित और नक्षत्र विद्या के क्षेत्र में क्या योगदान दिया?
उत्तर:
आर्यभट्ट गुप्तकाल का एक महान वैज्ञानिक तथा गणित का एक विशेषज्ञ था, उसका विज्ञान, गणित तथा नक्षत्र विद्या के क्षेत्र में निम्नलिखित योगदान था –

  1. आर्यभट्ट ने सर्वप्रथम सिद्ध किया कि पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है।
  2. आर्यभट्ट ने चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के कारणों का पता लगाया।
  3. आर्यभट्ट ने दशमलव पद्धति का आविष्कार किया।
  4. अंकगणित तथा ज्यामिति के क्षेत्र में आर्यभट्ट ने अनेक खोजें की।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 9 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सिन्धु घाटी सभ्यता अथवा हड़प्पा सभ्यता के लोगों के सामाजिक जीवन का विवरण दीजिए।
उत्तर:
सामाजिक जीवन मोहनजोदड़ो और हड़प्पा में खुदाई से प्राप्त सामग्री तथा स्रोतों से सिन्धु घाटी के निवासियों की सामाजिक स्थिति का ज्ञान होता है। सिन्धु घाटी के निवासियों के सामाजिक जीवन का वर्णन निम्न शीर्षकों में किया जा सकता है
(1) सामाजिक संगठन :
सिन्धु घाटी का समाज व्यवसाय के आधार पर चार भागों में विभाजित था-

  • विद्वान तथा शिक्षित वर्ग
  • योद्धा या सैनिक वर्ग
  • व्यापारी तथा दस्तकार
  • श्रमिक। समाज में वर्ण-व्यवस्था का अभाव था तथा समाज की इकाई परिवार थी। इतिहासकारों के अनुसार सिन्धु सभ्यता का समाज ‘मातृप्रधान’ था।

(2) भोजन :
इतिहासकार चाइल्ड के अनुसार सिन्धुवासियों का प्रमुख भोजन गेहूँ, जौ, चावल तथा दूध था। सब्जियों तथा फलों का भी सेवन किया जाता था। फलों में खजूर प्रमुख रूप से खाया जाता था। माँस खाने का भी प्रचलन था। गाय, भेड़, मछली तथा मुर्गे आदि का माँस ही खाया जाता था।

(3) वेश-भूषा :
सिन्धु सभ्यता के किसी भी क्षेत्र में तत्कालीन समय का कोई भी वस्त्र उपलब्ध नहीं हुआ। अतः ऐसी दशा में खुदाई में प्राप्त मूर्तियों का अवलोकन करके ही वेश-भूषा की जानकारी प्राप्त की गयी है। मूर्तियों को देखकर ज्ञात होता है कि सिन्धुवासी शरीर पर दो कपड़े धारण करते थे। प्रथम वस्त्र को बायें कन्धे के ऊपर तथा दाहिनी भुजा के नीचे से निकालकर पहना जाता था, जिससे सीधा हाथ उचित ढंग से कार्य कर सके। दूसरा वस्त्र जो शरीर के नीचे पहना जाता था, वर्तमान धोती के समान होता था। इतिहासकारों के मत में स्त्रियों व पुरुषों के वस्त्रों में विशेष अन्तर नहीं था। सूती वस्त्र अधिक मात्रा में पहने जाते थे परन्तु ऊनी वस्त्रों का भी प्रचलन था।

(4) आभूषण :
सिन्धु-सभ्यता के निवासियों में स्त्री व पुरुष दोनों ही आभूषण पहनने में रुचि लेते थे। आभूषण, सोने, चाँदी, हाथी-दाँत आदि के बनाये जाते थे। ताँबे, मिट्टी, सीप आदि के आभूषण निर्धन व्यक्ति पहनते थे। सोने के आभूषण अत्यधिक आकर्षक होते थे। मार्शल के अनुसार-“सोने के आभूषणों की चमक तथा रचना को देखकर ऐसा ज्ञात होता है कि ये आधुनिक बाड स्ट्रीट (जो कि लन्दन में है) के किसी सुनार की दुकान से लाये गये हैं न कि पाँच हजार वर्ष पूर्व किसी प्रागैतिहासिक घर से।” हार, बाजूबन्द, अंगूठियाँ, कड़े, कुण्डल तथा बालियाँ स्त्री और पुरुष दोनों ही पहनते थे।

(5) सौन्दर्य प्रसाधन :
खुदाई में प्राप्त सामग्री से ज्ञात होता है कि सिन्धु सभ्यता की स्त्रियाँ काजल, सुरमा, सिन्दूर तथा दर्पण व कंघी का प्रयोग अपने सौन्दर्य विकास के लिए करती थीं। इतिहासकार मैके (Mackay) के अनुसार इस काल की स्त्रियाँ लिपिस्टिक का भी प्रयोग करती थीं। स्त्रियाँ केश सज्जा का भी ध्यान रखती थीं।

(6) आमोद-प्रमोद के साधन :
सिन्धु घाटी के निवासी अनेक क्रिया-कलापों से अपना मनोरंजन करते थे। खुदाई में अनेक पाँसे प्राप्त हुए हैं जिनसे ज्ञात होता है कि यहाँ के निवासी जुआ खेलने में विशेष रुचि लेते थे। अन्य आमोद के साधन थे-शिकार करना, नृत्य करना, गाना तथा बजाना। तबले, ढोल तथा तुरही के चित्र मुद्राओं पर बने मिले हैं।

(7) मृतक संस्कार :
खुदाई में प्राप्त अवशेषों का निरीक्षण करने से स्पष्ट होता है कि यहाँ तीन प्रकार से शवों का अन्तिम संस्कार होता था

  • शवों को जैसे का तैसा दफनाना।
  • शव का पशु-पक्षियों के सम्मुख खाने को डाल देना।
  • दाह संस्कार करने के पश्चात् अस्थियों को भूमि में गाढ़ देना

(8) स्त्रियों की दशा :
मातृदेवी की उपासना करना इस बात का प्रमाण है कि सिन्धुवासी स्त्रियों को विशेष सम्मान देते थे। दूसरे यहाँ के परिवार मातृसत्तात्मक होते थे जिनमें स्त्रियों का स्थान ऊँचा होता था।

प्रश्न 2.
सिन्धु घाटी सभ्यता के लोगों के आर्थिक जीवन के बारे में अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
आर्थिक जीवन सिन्धु घाटी के आर्थिक जीवन की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं –

  • कृषि :
    सिन्धु घाटी के निवासियों का प्रमुख व्यवसाय कृषि थी। जिस प्रकार मिस्र में नील नदी ने वरदान का कार्य किया उसी प्रकार सिन्धु नदी ने भी अपने अपार जल से इस सभ्यता के विकास में योग दिया। गेहूँ, जौ, चावल तथा कपास की मुख्यतया खेती होती थी। फलों में नींबू, अनार, खजूर तथा केला आदि उगाये जाते थे।
  • पशुपालन :
    कृषि के साथ-साथ इस सभ्यता के निवासियों का अन्य प्रमुख व्यवसाय पशु-पालन था। खुदाई में प्राप्त अस्थि-पिंजरों से तथा मुद्राओं पर अंकित चित्रों से स्पष्ट होता है कि यहाँ के निवासी गाय, भैंस, बैल, भेड़, बकरी आदि प्रमुखतया पालते थे। घोड़े से यहाँ के निवासी अपरिचित थे।
  • शिकार :
    शिकार का भी एक व्यवसाय के रूप में चलन था। माँस प्राप्त करने के लिए पशुओं का शिकार किया जाता था। पशुओं की खाल तथा अस्थियों से अनेक वस्तुओं का निर्माण होता था।
  • वस्त्र-उद्योग :
    वस्त्र-उद्योग पर्याप्त उन्नति पर था। एक विद्वान के अनुसार सिन्धुवासी सम्भवतः विश्व के सूत कातने तथा वस्त्र बुनने वाले प्रथम लोग थे। वस्त्र सूती तथा ऊनी दोनों प्रकार के बुने जाते थे।
  • अन्य उद्योग :
    नगरों की खुदाई में विशाल संख्या में मिट्टी के बर्तन मिले हैं जिनमें प्याले, सुराहियाँ, मटके तथा नादें प्रमुख हैं। कुम्हार चाकों पर बर्तन बनाते थे तथा उन पर सुन्दर चित्रकारी करते थे। सिन्धु सभ्यता में धातुओं के भी सुन्दर आभूषण बनाये जाते थे।
  • धातुओं का उपयोग :
    खुदाई में प्राप्त सोने, चाँदी के आभूषण तथा ताँबा, काँसा आदि के अस्त्र-शस्त्र तथा बर्तनों से स्पष्ट हो जाता है कि सिन्धु निवासी सोना, चाँदी, ताँबा, रांगा तथा काँसा आदि धातुओं से परिचित थे।
  • व्यापार :
    सिन्धु घाटी के निवासी भारत के विभिन्न भागों के साथ व्यापार करने के साथ-साथ विश्व के अन्य देशों से भी व्यापार करते थे। विदेशों से व्यापार थल तथा जल दोनों ही मार्गों से होता था। थल मार्ग के लिए ऊँटों, बैलों तथा बैलगाड़ियों का प्रयोग होता था। जल मार्गों के लिए नावों तथा जहाजों का प्रयोग होता था। नावें नदियों में प्रयोग की जाती थीं परन्तु जहाजों का प्रयोग समुद्र में किया जाता था। सुमेरिया, ईरान तथा मिस्र से सिन्धुवासियों के घनिष्ठ व्यापारिक सम्बन्ध थे।

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प्रश्न 3.
अशोक को महान् सम्राट क्यों कहा जाता है? संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
अथवा
इतिहास में अशोक का क्या स्थान है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अधिकांश इतिहासकारों के मत में अशोक भारत का ही नहीं वरन् विश्व के महान् सम्राटों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। प्रसिद्ध इतिहासकार एच. जी. वेल्स के अनुसार, “इतिहास में प्रसिद्ध सहस्रों महान् राजाओं, सम्राटों, धर्मावतारों और राजेश्वरों में अशोक का नाम अलग और एक तारे के समान चमकता है।” निम्नलिखित कारणों से अशोक को एक महान् सम्राट कहा जाता है।

  • आदर्श व्यक्तित्व :
    अशोक का व्यक्तित्व अत्यन्त प्रभावशाली तथा महान् था। उसकी योग्यताओं तथा प्रतिभाओं को पहचानकर ही बिन्दुसार ने अपने साम्राज्य के विद्रोहों को दबाने के लिए भेजा तो उसने इस क्षेत्र में अपूर्व सफलता प्राप्त की। इसके अतिरिक्त अशोक तत्कालीन सम्राटों की तरह भोगविलास का जीवन नहीं व्यतीत करता था। उसके व्यक्तित्व में सादगी तथा कर्तव्यनिष्ठा का सुन्दरतम समन्वय था।
  • महान् विजेता :
    अशोक एक महान् विजेता था। उसके पिता बिन्दुसार ने कलिंग को जीतने का प्रयास किया था किन्तु सफल नहीं हो पाया था परन्तु अशोक ने अपने पराक्रम से कलिंग विजय प्राप्त की।
  • महान् धर्म विजेता :
    अशोक युद्ध विजेता होने के साथ-साथ एक महान् धर्म विजेता भी था। कलिंग युद्ध के पश्चात् उसने धर्म विजय का अभियान प्रारम्भ किया तथा बौद्ध धर्म के प्रचार में व्यापक सफलता प्राप्त की।
  • लोक-कल्याणकारी शासक :
    अशोक एक लोक-कल्याणकारी शासक था। उसने जनता के कल्याण के लिए चिकित्सालयों तथा धर्मशालाओं का निर्माण करवाया था।
  • धार्मिक सहिष्णुता का प्रतिपादक :
    अशोक बौद्ध धर्म का अनुयायी था परन्तु उसने अपनी प्रजा पर इस धर्म को लादने का कभी भी प्रयास नहीं किया तथा धार्मिक सहिष्णुता की नीति को अपनाकर सब धर्मों की अच्छाइयों का समन्वय किया। अशोक सब धर्मों को आदर की दृष्टि से देखता था।
  • कुशल प्रशासक :
    अशोक का साम्राज्य अत्यन्त विशाल था, परन्तु उसने अपने साम्राज्य का शासन प्रबन्ध बड़ी कुशलता तथा व्यवस्था से संचालित किया था। अशोक ने कलिंग युद्ध के पश्चात् अपने शासन में दो प्रमुख सिद्धान्तों का समावेश किया-(1) नैतिक आचरण पर बल देना, (2) लोक कल्याण की भावना।

उपर्युक्त विवरणों से स्पष्ट हो जाता है कि अशोक एक अद्वितीय महान् सम्राट था। डॉ. मुखर्जी के अनुसार, “प्रत्येक युग और प्रत्येक देश में अशोक जैसा सम्राट पैदा नहीं होता।”

प्रश्न 4.
गुप्त साम्राज्य के पतन के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए। (2010)
अथवा
गुप्त साम्राज्य के पतन के कोई तीन कारण लिखिए। (2017)
उत्तर:

  • दुर्बल तथा अयोग्य उत्तराधिकारी :
    समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य तथा स्कन्दगुप्त के पश्चात् जितने भी गुप्त सम्राट हुए वे सब दुर्बल तथा अयोग्य थे और उनमें इतनी क्षमता तथा योग्यता नहीं थी कि वे अपने पूर्वजों के साम्राज्य को जैसा का तैसा बनाये रखते।
  • उत्तराधिकार के निश्चित नियमों का न होना :
    गुप्तकाल में उत्तराधिकार का कोई निश्चित नियम न था परिणामस्वरूप सिंहासन प्राप्ति के लिए राजकुमारों में परस्पर संघर्ष और गृह कलह होते थे। राजमहल संघर्षों तथा षड्यन्त्रों के केन्द्र बन गये थे। इस प्रकार के संघर्षों ने गुप्त साम्राज्य के पतन में विशेष योगदान दिया।
  • आन्तरिक कलह :
    चन्द्रगुप्त द्वितीय के पश्चात् उत्तराधिकार नियमों के अभाव के कारण राज्य में आन्तरिक,कलह तथा संघर्ष की भावना का अपूर्व विकास हुआ जिसके कारण गुप्त साम्राज्य को गहरा आघात लगा तथा उसका पतन हो गया।
  • साम्राज्य का अत्यधिक विशाल होना :
    समुद्रगुप्त तथा चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपनी दिग्विजयों तथा युद्धप्रियता से एक दृढ़ तथा विशाल साम्राज्य की स्थापना कर ली थी। इतने विशाल साम्राज्य को कुशलता तथा दृढ़ता के साथ अपने नियन्त्रण में समुद्रगुप्त तथा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ही रख सके परन्तु उनके बाद के गुप्त शासक अपनी अयोग्यता तथा दुर्बलता के कारण उसे अपने नियन्त्रण में नहीं रख सके।
  • सीमा सुरक्षा की उपेक्षा करना :
    चन्द्रगुप्त द्वितीय के पश्चात् जितने भी गुप्त सम्राट हुए उन्होंने अपनी सीमा सुरक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया। इससे विदेशी आक्रमणकारियों को उत्तरी-पश्चिमी सीमान्त प्रदेश में से आक्रमण करने का अवसर एवं प्रोत्साहन प्राप्त हुआ। यह गुप्त साम्राज्य के लिए घातक सिद्ध हुआ।
  • दयनीय आर्थिक दशा :
    चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के शासनकाल के पश्चात् गुप्त साम्राज्य की आर्थिक दशा अत्यन्त शोचनीय हो गयी थी। समुद्रगुप्त तथा चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपने शासनकाल में सोने के सिक्के चलाये थे परन्तु कुमारगुप्त तथा स्कन्दगुप्त के काल में चाँदी तथा ताँबे के सिक्के चलाये गये। इस प्रकार यह निष्कर्ष निकलता है कि गुप्तकाल की आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन शोचनीय होती गयी।
  • हूणों के आक्रमण :
    इतिहासकारों के अनुसार गुप्त साम्राज्य के पतन का प्रमुख कारण हूणों के आक्रमण थे। यह सत्य है कि स्कन्दगुप्त के शासनकाल तक के सभी सम्राटों ने हूणों के आक्रमणों को विफल कर दिया था परन्तु उसके शासनकाल के पश्चात् गुप्तकाल के निर्बल शासक हूण आक्रमणों से गुप्त साम्राज्य की रक्षा नहीं कर सके।

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत : जनसंख्या

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत : जनसंख्या

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
निम्न में से किस अवधि में जनसंख्या वृद्धि लगभग स्थिर गति से बढ़ी है?
(i) 1901-21
(ii) 1921-51
(iii) 1951-81
(iv) 1981-2001.
उत्तर:
(i) 1901-21

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प्रश्न 2.
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला प्रदेश है
(i) उत्तर प्रदेश
(ii) बिहार
(iii) केरल
(iv) पश्चिम बंगाल।
उत्तर:
(ii) बिहार

प्रश्न 3.
किस राज्य में साक्षरता का प्रतिशत सबसे अधिक है? (2008, 09)
(i) उत्तर प्रदेश
(ii) केरल
(iii) गोवा
(iv) दिल्ली
उत्तर:
(ii) केरल

प्रश्न 4.
सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला केन्द्र शासित प्रदेश है (2008)
(i) चण्डीगढ़
(ii) पुदुचेरी
(iii) दिल्ली
(iv) लक्षद्वीप।
उत्तर:
(iii) दिल्ली

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. भारत में जनसंख्या का घनत्व …………. है।
  2. भारत में सर्वाधिक साक्षरता वाला राज्य ……….. है।
  3. राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का अध्यक्ष ……….. होता है।
  4. विश्व जनसंख्या दिवस प्रतिवर्ष ……….. को मनाया जाता है।
  5. जनसंख्या के मान से भारत का विश्व में ………….. स्थान है।
  6. भारत में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ………… है।

उत्तर:

  1. बड़ा असमान
  2. केरल
  3. प्रधानमन्त्री
  4. 11 जुलाई
  5. दूसरा
  6. कम।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जन्मदर किसे कहते हैं?
उत्तर:
जन्मदर किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष, प्रति हजार जनसंख्या पर जीवित नवजात बच्चों की संख्या को कहते हैं।

प्रश्न 2.
मृत्युदर किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष, प्रति हजार व्यक्तियों पर मरने वालों की संख्या मृत्युदर कहलाती है।

प्रश्न 3.
वर्ष 2011 में भारत में जनसंख्या का घनत्व कितना था?
उत्तर:
वर्ष 2011 में भारत में जनसंख्या का औसत घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था।

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प्रश्न 4.
वर्ष 2011 में भारत का लिंग अनुपात क्या था?
उत्तर:
वर्ष 2011 में भारत का लिंग अनुपात 1000 पुरुषों पर 943 स्त्रियाँ थीं।

प्रश्न 5.
जनसंख्या और क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है ?
उत्तर:
भारत का जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में दूसरा तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में सातवाँ स्थान है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या वृद्धि की कोई चार समस्याएँ लिखिए। (2008, 09, 10, 14, 15, 17)
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण उत्पन्न प्रमुख समस्याएँ निम्न हैं –

  • बेरोजगारी की समस्या :
    जनसंख्या वृद्धि के कारण बेरोजगारी की समस्या निरन्तर बढ़ती जा रही है। सरकार जितने लोगों को रोजगार उपलब्ध कराती है, उससे अधिक नये लोग बेरोजगारी की लाइन में आ जाते हैं।
  • प्रति व्यक्ति आय :
    जनसंख्या में तेजी से वृद्धि होने पर प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि धीमी हो जाती है। ऐसे में निवेश का बड़ा भाग जनसंख्या के भरण-पोषण में लग जाता है तथा आर्थिक विकास के लिये निवेश का एक छोटा-सा भाग ही बचता है।
  • भूमि पर दबाव :
    हमारे देश में जनसंख्या वृद्धि के परिणामस्वरूप भूमि पर दबाव निरन्तर बढ़ता जा रहा है। इससे भू-जोतों का आर्थिक विभाजन हुआ है तथा कृषि उत्पादकता में कमी आयी है।
  • गरीबी :
    भारत में जनसंख्या वृद्धि का एक बड़ा दुष्परिणाम गरीबी के रूप में सामने आता है। विशाल जनसंख्या और उस पर सीमित संसाधनों के चलते बड़ी संख्या में गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहे लोगों का जीवन-स्तर सुधारना अत्यन्त दुष्कर कार्य साबित हुआ है।

प्रश्न 2.
भारत में लिंगानुपात की दर निरन्तर क्यों कम होती जा रही है ? कोई चार कारण लिखिए। (2013, 14, 16, 18)
अथवा
भारत में लिंगानुपात की दर में गिरावट होने के कारण लिखिए। (2008, 09)
उत्तर:
भारत में लिंगानुपात की दर कम होने के निम्न कारण हैं –

  1. महिलाओं में साक्षरता का कम होना।
  2. मातृ मृत्यु-दर का ऊँचा होना।
  3. पुरुष प्रधान समाज में पुत्र होने की प्रबल इच्छा होना।
  4. कन्या भ्रूण हत्या में लगातार वृद्धि होना।
  5. समाज में बालिकाओं के प्रति उपेक्षा का भाव व कन्या का बोझ समझना।
  6. समाज में प्रचलित दहेज प्रथा के कारण कन्या भ्रूण हत्या व किशोरियों व युवतियों का आत्महत्या करने के लिये प्रेरित होना।

प्रश्न 3.
राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग से आप क्या समझते हैं ? लिखिए। (2008, 09, 12, 13, 15)
उत्तर:
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 के अनुसरण में राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग की स्थापना की गई है। प्रधानमन्त्री इस आयोग के अध्यक्ष हैं। सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, प्रशासक तथा सम्बन्धित केन्द्रीय मंत्रालयों एवं विभागों के प्रभारी केन्द्रीय मंत्री, प्रतिष्ठित जनसांख्यिकीविद्, जनस्वास्थ्य, व्यवसायिक एवं गैर-सरकारी संगठन इस आयोग के सदस्य होते हैं।

प्रश्न 4.
लिंग अनुपात से क्या आशय है? देश में इसके वितरण को समझाइए। (2016)
उत्तर:
लिंग अनुपात से तात्पर्य किसी क्षेत्र में प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या से है। भारतवर्ष में 2001 की जनगणना के अनुसार प्रति हजार पुरुषों पर 933 स्त्रियाँ थीं अर्थात् भारत में पुरुषों की संख्या से स्त्रियों की संख्या कम है। भारत में लिंगानुपात लगातार घटता जा रहा है। सन् 1901 में यह 972 था, जो घटते-घटते 2011 में 940 रह गया है। भारत में लिंग अनुपात में क्षेत्रीय भिन्नता पायी जाती है। केरल में लिंगानुपात (1084) अनुकूल है जबकि दमन दीव में यह (618) प्रतिकूल है।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारणों व उसके नियन्त्रण के उपायों को लिखिए।
अथवा
जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित करने के चार उपाय बताइए। (2008, 11, 12, 17, 18)
उत्तर:
जनसंख्या वृद्धि के कारण

  • जन्मदर व मृत्युदर :
    1911-1921 की अवधि में जन्म-दर 48.1 और मृत्यु-दर 47.2 थी, अर्थात् दोनों ही अधिक थीं। 1921 से 1951 तक यद्यपि जन्म-दर धीमी गति से घटी, किन्तु मृत्यु-दर अपेक्षाकृत तेजी से घटी थी, जिससे जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हुई। वर्ष 2016 के अनुसार भारत में जन्मदर 20.4 प्रति हजार और मृत्यु-दर 64 प्रति हजारं थी। मृत्यु-दर में निरन्तर कमी का कारण चिकित्सा सुविधाओं में वृद्धि तथा भरण-पोषण की पर्याप्त सुविधा होना है।
  • गर्म जलवायु :
    उष्ण जलवायु में मानव की उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। कम आयु में ही किशोर व किशोरियाँ सन्तान उत्पत्ति के योग्य हो जाते हैं। परिणामस्वरूप जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती है।
  • भाग्यवादिता :
    भारत में अधिकांश रूढ़िवादी लोग बच्चों का पैदा होना ‘ईश्वर की इच्छा’ मानकर अधिक सन्तान उत्पत्ति को रोकना अनुचित समझते हैं। अतः धार्मिक अन्धविश्वास भी जनसंख्या वृद्धि के लिये उत्तरदायी है।
  • कम उम्र में शादी :
    भारत में विवाह की आयु कम है। कम उम्र में शादी हो जाने से जनसंख्या में वृद्धि होना स्वाभाविक हो जाता है।
  • साक्षरता का निम्न स्तर :
    भारत में साक्षरता का निम्न स्तर भी जनसंख्या वृद्धि के लिये उत्तरदायी है। निम्नवर्ग परिवार कल्याण कार्यक्रम अपनाने में संकोच करते हैं। सन् 2011 के आँकड़ों के अनुसार भारत में 82.14% पुरुष साक्षर थे व 65.46% स्त्रियाँ साक्षर थीं। आर्थिक समीक्षा 2017-18;A 163.

जनसंख्या वृद्धि रोकने के उपाय

  • परिवार कल्याण :
    परिवार कल्याण द्वारा छोटे परिवारों के लाभों का प्रचार करना चाहिए, जिससे प्रभावित होकर प्रत्येक व्यक्ति विभिन्न प्रकार के कृत्रिम साधनों को प्रयोग में लाने लगे।
  • शिक्षा तथा सामाजिक सुधार :
    जब तक देश में शिक्षा की उचित व्यवस्था नहीं होगी, परिवार नियोजन कभी भी सफलतापूर्वक कार्य नहीं कर सकता। एक अविकसित देश का अज्ञानी व्यक्ति जो सामाजिक व धार्मिक अन्धविश्वासों में जकड़ा हुआ है, परिवार नियोजन के लाभों को समझ नहीं सकेगा। अतः शिक्षा का प्रसार होना चाहिए। शिक्षा द्वारा बाल-विवाह, जातिवाद आदि सामाजिक कुरीतियाँ स्वयं समाप्त हो जाएँगी, जो जनसंख्या वृद्धि में सहायक होती हैं।
  • आर्थिक विकास :
    जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिये समाज का समुचित आर्थिक विकास होना चाहिए। साथ ही कृषि, उद्योग, व्यापार, यातायात एवं संवाद-वाहन आदि सभी क्षेत्रों का सामूहिक विकास भी आवश्यक है इससे रोजगार के स्तर में वृद्धि होगी, आय और जीवन-स्तर में वृद्धि होगी, फलस्वरूप जनसंख्या वृद्धि पर रोक लग जाएगी।
  • सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में वृद्धि :
    देश में सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में वृद्धि की जानी चाहिये, जिससे संकटकाल या वृद्धावस्था में सहारा पाने की दृष्टि से सन्तानोत्पत्ति की प्रवृत्ति को नियन्त्रित किया जा सके।
  • विवाह की आयु सम्बन्धी नियमों का पालन :
    सरकार को विवाह की आयु सम्बन्धी नियमों का कठोरता से पालन कराना चाहिए। जनसंख्या नीति के अनुसार देश में लड़के व लड़कियों के लिये विवाह योग्य आयु क्रमश: 21 व 18 वर्ष है। इस सम्बन्ध में आवश्यक दण्ड व पुरस्कार की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
  • प्रेरणाएँ :
    सीमित परिवार के संदेश को व्यापक स्तर पर फैलाने के लिये कुछ प्रेरणाओं को अपनाना आवश्यक होता है; जैसे-सीमित परिवार वालों को वेतन वृद्धि, मकान आवण्टन, कॉलेज में प्रवेश, रोजगार आदि की अतिरिक्त सुविधा प्रदान की जाएँ।
  • मनोरंजन के साधनों में वृद्धि :
    सन्तति निग्रह के लिये मनोरंजन के साधनों में वृद्धि की जानी चाहिए। मनोरंजन के साधनों के अभाव में सन्तान वृद्धि को प्रोत्साहन मिलता है।

प्रश्न 2.
भारत में जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करने वाले कारकों को उदाहरण सहित लिखिए। (2008)
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व को प्रोत्साहित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं –
(1) भौतिक कारक
(2) सामाजिक-आर्थिक कारक।

(1) भौतिक कारक :
भौतिक कारकों में धरातल, जलवायु, मिट्टी और खनिज आदि प्रमुख हैं। धरातल की बनावट जनसंख्या वितरण को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। गंगा-यमुना तथा समुद्रतटीय मैदानों में जनसंख्या घनत्व अधिक है, वहीं पर्वतीय प्रदेश अरुणाचल में सबसे कम जनसंख्या घनत्व है। जलवायु दशायें भी जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करती हैं। अनुकूल जलवायु मनुष्य के स्वास्थ्य व कार्यक्षमता पर अच्छा प्रभाव डालती है। पश्चिमी राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश में विषम जलवायु के कारण कम जनसंख्या पायी जाती है। उपजाऊ मिट्टी कृषि के लिये उपयुक्त होती है इसलिये जनसंख्या का अधिक घनत्व नदियों के उपजाऊ मैदानों में होता है क्योंकि कृषि उपजें ही उनके जीवन-यापन व भरण-पोषण का मुख्य आधार होती हैं। खनिजों की उपलब्धता और इन पर आधारित औद्योगिक विकास ने छोटा नागपुर पठार खनिज क्षेत्र में जनसंख्या को आकर्षित किया। इस प्रकार छोटा नागपुर के पठार पर जनसंख्या बहुत सधन है।

(2) सामाजिक :
आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारक-सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारक भी जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उदाहरणार्थ-सांस्कृतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक तथा राजनैतिक कारकों के कारण ही मुम्बई-पुणे के औद्योगिक क्षेत्र में जनसंख्या वृद्धि और घनत्व में तीव्रता से वृद्धि हुई है। प्राचीनकाल में मुम्बई महत्त्वहीन था परन्तु यूरोपियन लोगों के आवागमन के पश्चात् इसका महत्त्व दिनोंदिन बढ़ता गया। आज मुम्बई व्यापारिक एवं औद्योगिक केन्द्र बन गया है। परिणामस्वरूप यहाँ जनसंख्या बढ़ती जा रही है।

प्रश्न 3.
घनत्व की दृष्टि से भारत को कितने भागों में विभाजित किया जा सकता है ?
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व के आधार पर भारत को चार भागों में बाँटा जा सकता है-
(1) उच्च घनत्व वाले क्षेत्र
(2) मध्यम घनत्व वाले क्षेत्र
(3) साधारण घनत्व वाले क्षेत्र
(4) न्यूनतम घनत्व वाले क्षेत्र।

  1. उच्च घनत्व वाले क्षेत्र :
    उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल एवं केरल आते हैं यहाँ 501 से अधिक व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर निवास करते हैं। क्योंकि यहाँ की उपजाऊ मिट्टी और जल की उपलब्धता मानव के भरण-पोषण को पर्याप्त सुविधा प्रदान करती है। इन क्षेत्रों में रोजगार के पर्याप्त अवसर भी विद्यमान होते हैं।
  2. मध्यम घनत्व वाले क्षेत्र :
    इसके अन्तर्गत वे क्षेत्र आते हैं, जहाँ जनसंख्या घनत्व 251 से 500 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी पाया जाता है। इसके अन्तर्गत आन्ध्र प्रदेश, असम, गोवा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, झारखण्ड, पंजाब, हरियाणा, त्रिपुरा, दादरा व नगर-हवेली शामिल हैं। विकसित कृषि, खनिजों की उपलब्धता एवं औद्योगिक विकास आदि इन क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या घनत्व के मुख्य कारण हैं।
  3. साधारण घनत्व वाले क्षेत्र :
    मध्य प्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड, मेघालय, मणिपुर, नागालैण्ड, इस क्षेत्र के अन्तर्गत आते हैं। यहाँ जनसंख्या का घनत्व 101 से 250 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। ये पर्वतीय तथा ऊबढ़-खाबड़ वनाच्छादित प्रदेश हैं। यहाँ जीवनयापन की सुविधाएँ सीमित हैं।
  4. निम्न घनत्व वाले क्षेत्र :
    इस क्षेत्र में जम्मू व कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, सिक्किम तथा अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह आते हैं। पर्वतीय क्षेत्र, आवागमन में असुविधा, कृषि व उद्योगों का न्यून विकास आदि कारण कम जनसंख्या घनत्व के लिये उत्तरदायी हैं। इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व 13 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।

प्रश्न 4.
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 क्या है? इसके तहत सरकार द्वारा क्या प्रावधान किए गए हैं? लिखिए।
अथवा
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 क्या है? (2009)
उत्तर:
15 फरवरी, 2000 को नई ‘राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000’ की घोषणा की गई। इस नवीनतम संशोधित जनसंख्या नीति के अनुसार सामाजिक-आर्थिक विकास के लिये जीवन में गुणात्मक सुधार किया जाना आवश्यक है, ताकि मानव शक्ति समाज के लिये उत्पादक पूँजी में परिवर्तित हो सके। इस नीति के निम्नलिखित उद्देश्य हैं –

  • तात्कालिक उद्देश्य :
    गर्भ निरोधक उपायों के विस्तार हेतु स्वास्थ्य एवं बुनियादी ढाँचे का विकास।
  • मध्यकालीन उद्देश्य :
    सन् 2010 तक कुल प्रजनन दर को घटाना।
  • दीर्घकालीन उद्देश्य :
    सन् 2045 तक स्थायी आर्थिक विकास हेतु स्थिर जनसंख्या के उद्देश्य को प्राप्त करना।

नई नीति में इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिये निम्नलिखित सामाजिक जनांकिकी लक्ष्य भी घोषित किये गये हैं –

  1. बुनियादी प्रजनन तथा शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, आपूर्तियों तथा आधारभूत ढाँचे से सम्बन्धित अपूर्ण आवश्यकताओं पर ध्यान देना।
  2. 14 वर्ष तक की उम्र तक विद्यालय शिक्षा को निःशुल्क करना। प्रारम्भिक तथा माध्यमिक स्तर पर छात्र और छात्राओं के विद्यालय छोड़ने की दर में 20% तक की कमी लाना।
  3. शिशु मृत्यु दर को 100 से नीचे लाना (प्रत्येक 1 लाख जीवित जन्मों पर)।
  4. सार्वभौमिक टीकाकरण द्वारा गम्भीर बीमारियों की रोकथाम करना।
  5. कन्याओं का विवाह 20 वर्ष की उम्र के बाद करने के लिये प्रोत्साहन देना।
  6. सभी प्रसव संस्थाओं में प्रशिक्षित प्रसव नौं का शत-प्रतिशत होना।
  7. गर्भ निरोधक के व्यापक विकल्पों की जानकारी देना।
  8. जन्म, मृत्यु, विवाह तथा गर्भावस्था का शत-प्रतिशत पंजीकरण।
  9. एड्स की खतरनाक बीमारी को फैलने से रोकने के प्रयास करना तथा प्रजनन अंग संक्रमण (आर. टी. आई.) और यौन संचारी रोगों की रोकथाम करना।
  10. प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को घर-घर तक पहुँचाने के लिये भारतीय औषधि पद्धति को एकीकृत करना।
  11. संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनके नियन्त्रण के लिये भरपूर प्रयास करना।
  12. जन्म दर में कमी लाने के लिये छोटे परिवार के मानदण्डों को ठोस रूप में बढ़ावा देना।
  13. परिवार कल्याण कार्यक्रम को जन-केन्द्रित कार्यक्रम के रूप में विकसित करना।

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प्रश्न 5.
भारत में साक्षरता-विकास की स्थिति तथा महिला साक्षरता को बढ़ाने के लिये अपने सुझावात्मक विचार लिखिए।
उत्तर:
साक्षरता से तात्पर्य :
जो व्यक्ति किसी भाषा को समझने के साथ लिख और पढ़ सकता है, साक्षर कहलाता है। जो पढ़ सकता है, परन्तु लिख नहीं सकता, वह साक्षर नहीं कहलाता है। साक्षरता के लिये कोई औपचारिक शिक्षा लेना आवश्यक नहीं होता है।

भारत में साक्षरता विकास की स्थिति :
हमारा देश संसार में जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवाँ बड़ा देश है। किन्तु साक्षरता की दृष्टि से अभी भी पीछे है। स्वतन्त्रता के पश्चात् हमने साक्षरता में वृद्धि की है। लेकिन अभी भी निरन्तर प्रयास की आवश्यकता है। भारत में साक्षरता की स्थिति को निम्न तालिका से स्पष्ट किया जा सकता है –

भारत में साक्षरता की स्थिति (प्रतिशत में)
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत जनसंख्या - 1

तालिका से स्पष्ट है कि 1911 में देश में साक्षरता मात्र 6% थी। स्वतन्त्रता के पश्चात् 1950-51 में यह बढ़कर 18:33% हो गई। तब से लगातार साक्षरता प्रतिशत में वृद्धि हो रही है। वर्ष 2010-11 में यह बढ़कर 74.04% हो गई है। यह उपलब्धि भारत सरकार द्वारा निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने का ही परिणाम है। भारत में साक्षरता में भिन्नताएँ दृष्टिगोचर होती हैं। बिहार में साक्षरता की दर 63.82% है। जबकि केरल में यह 93.91% है। लक्षद्वीप में 92.98 है।

महिला साक्षरता में वृद्धि के उपाय :
भारत में महिलाओं की साक्षरता दर पुरुषों की तुलना में बहुत कम है। वर्तमान आँकड़ों को देखने पर स्पष्ट होता है कि आज भी महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम साक्षर हैं। वर्ष 2010-11 में साक्षर पुरुष 82.14% व साक्षर महिला 65.46% थी। ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति और भी खराब है।

महिला साक्षरता में वृद्धि करके जनसंख्या वृद्धि को रोका जा सकता है। शिक्षित लड़कियाँ उचित उम्र में विवाह करती हैं। विवाह करने के कुछ समय पश्चात् तक वह गर्भ धारण करना नहीं चाहती हैं। शिक्षित महिलाएँ रोजगार करने में पीछे नहीं रहती हैं। साथ ही वह कम बच्चों में विश्वास रखती हैं। शिक्षित स्त्रियों का दृष्टिकोण बहुत व्यापक होता है। वह परिवार कल्याण कार्यक्रम का महत्त्व समझती हैं। वह अपने बच्चों की संख्या सीमित रखने और दो बच्चों के जन्म के मध्य पर्याप्त समय रखती हैं। साथ ही शिक्षित महिलाएँ लड़का-लड़की में भेद न करके केवल एक-दो बच्चों को ही जन्म देती हैं। अतः लड़कियों को स्वयं शिक्षा प्राप्त करने में पहल करनी चाहिए क्योंकि शिक्षित लड़कियाँ जनसंख्या वृद्धि को एक सीमा तक रोक सकती हैं। सरकार को ग्रामीण इलाकों में लड़कियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करानी चाहिए; साथ ही उनको वजीफा भी देना चाहिए जिससे उनके माता-पिता उनको शिक्षित कराने के लिये आगे आएँ।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में संसार की कुल जनसंख्या का कितने प्रतिशत भाग निवास करता है?
(i) 16.7
(ii) 12.4
(iii) 15.0
(iv) 25.4.
उत्तर:
(i) 16.7

प्रश्न 2.
जनसंख्या की गणना कितने वर्ष के अन्तराल पर होती है?
(i) 5 वर्ष
(ii) 10 वर्ष
(iii) 3 वर्ष
(iv) 1 वर्ष।
उत्तर:
(ii) 10 वर्ष

प्रश्न 3.
5 अरबवें शिशु का जन्म किस देश में हुआ था?
(i) भारत
(ii) यूगोस्लाविया
(iii) अमेरिका
(iv) पाकिस्तान।
उत्तर:
(ii) यूगोस्लाविया

प्रश्न 4.
भारत में सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला प्रदेश है
(i) बिहार
(ii) महाराष्ट्र
(iii) मिजोरम
(iv) अरुणाचल प्रदेश।
उत्तर:
(iv) अरुणाचल प्रदेश।

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रिक्त स्थान पूर्ति

  1. भारत में महिला साक्षरता …………. प्रतिशत है।
  2. 5 अरबवें शिशु का जन्म ………… में हुआ था।
  3. क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में ………… स्थान है।

उत्तर:

  1. 65-46
  2. यूगोस्लाविया
  3. सातवाँ।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
भारत में सर्वाधिक गरीब जनसंख्या वाला राज्य बिहार है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
विश्व का हर छठवाँ व्यक्ति भारत में निवास करता है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 3.
भारत में सर्वाधिक साक्षरता वाला राज्य केरल है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
प्रतिवर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
भारत में जनसंख्या का वितरण समान है।
उत्तर:
असत्य।

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत जनसंख्या - 2
उत्तर:

  1. → (ङ)
  2. → (घ)
  3. → (क)
  4. → (ख)
  5. → (ग)
  6. → (च)।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
जनसंख्या नियन्त्रण हेतु महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम।
उत्तर:
परिवार कल्याण

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प्रश्न 2.
प्रत्येक व्यक्ति की औसत आयु। (2009)
उत्तर:
प्रत्याशित आयु

प्रश्न 3.
एक निश्चित समयान्तराल में जनसंख्या की अधिकारिक गणना। (2010)
उत्तर:
जनगणना

प्रश्न 4.
नवीन जनसंख्या नीति की घोषणा कब की गई?
उत्तर:
15 फरवरी, 2000

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि दर से क्या आशय है?
उत्तर:
प्राकृतिक वृद्धि दर से आशय जन्मदर व मृत्युदर के अन्तर से है।

प्रश्न 2.
नवीन जनसंख्या नीति की घोषणा कब की गई?
उत्तर:
नवीन जनसंख्या नीति की घोषणा 15 फरवरी, 2000 को की गई थी।

प्रश्न 3.
जनगणना का तात्पर्य क्या है? (2011)
उत्तर:
एक निश्चित समयान्तराल में जनसंख्या की आधिकारिक गणना जनगणना कहलाती है। भारत में प्रत्येक दस वर्ष पर जनगणना होती है।

प्रश्न 4.
जनसंख्या वृद्धि दर से आप क्या समझते हैं? (2010)
उत्तर:
जनसंख्या की वृद्धि दर, जनसंख्या बढ़ने की गति को बताती है। वृद्धि दर से बढ़ी हुई जनसंख्या की आधार वर्ष की जनसंख्या से तुलना की जाती है इसे वार्षिक या दशकीय गति से ज्ञात किया जाता है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 7 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की जनसंख्या की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
संसार में चीन के बाद भारत दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 1,21,01,93, 422 है। यहाँ संसार की कुल जनसंख्या का 17.5 प्रतिशत भाग निवास करता है, जबकि इसका कुल क्षेत्रफल विश्व के कुल क्षेत्रफल का केवल 2-41 प्रतिशत ही है। इस प्रकार भारत जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का दूसरा तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवाँ बड़ा देश है। भारत की जनसंख्या उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की कुल सम्मिलित जनसंख्या से भी अधिक है। अन्य शब्दों में संसार का हर छठवाँ व्यक्ति भारत में निवास करता है।

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प्रश्न 2.
“भारत में जनसंख्या का वितरण असमान है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या का वितरण असमान है। पर्वतीय भागों, वन क्षेत्रों और मरुस्थलों की अपेक्षा मैदानी भागों में अधिक जनसंख्या है। इसी प्रकार नदियों के उपजाऊ मैदानों, समुद्र तटीय क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक है। हिमालयीन छोटे राज्य सिक्किम की जनसंख्या मात्र 6.7 लाख ही है, जबकि मैदानी बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की जनसंख्या 19.95 करोड़ है। कुल मिलाकर भारत में 10 ऐसे राज्य हैं जिनमें से प्रत्येक की जनसंख्या 6 करोड़ से अधिक है। कुछ राज्य क्षेत्रफल में बड़े होते हुए भी कम जनसंख्या वाले हैं, जैसे राजस्थान और मध्य प्रदेश जबकि ये दोनों ही क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के बड़े राज्य हैं। केवल पाँच राज्यों (उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और आन्ध्र प्रदेश) में देश की आधे से अधिक जनसंख्या निवास करती है।

प्रश्न 3.
जनसंख्या घनत्व क्या है? इसे कैसे ज्ञात किया जाता है? (2008)
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व:
किसी क्षेत्र में निवास करने वाली जनसंख्या और उस क्षेत्र के प्रति इकाई क्षेत्रफल (वर्ग किमी.) के अनुपात को जनसंख्या घनत्व कहते हैं। किसी देश या प्रदेश की जनसंख्या का घनत्व ज्ञात करने के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है –
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 7 भारत जनसंख्या - 3
प्रश्न 4.
भारत में साक्षरता दर में भिन्नताएँ पायी जाती हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
साक्षरता की दर में प्रादेशिक भिन्नताएँ अत्यधिक हैं। बिहार में साक्षरता की दर 63.82 प्रतिशत है, जबकि केरल में यह 93.9 प्रतिशत है। लक्षद्वीप में 92.8 और मिजोरम में 88.4 प्रतिशत साक्षरता है। बिहार में साक्षरता दर सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की तुलना में सबसे कम है।

पुरुषों और स्त्रियों की साक्षरता दर में भी आश्चर्यजनक अन्तर है। भारत में पुरुषों की औसत साक्षरता दर 82.14 है, जबकि स्त्रियों की साक्षरता दर केवल 65.46 प्रतिशत है। शहरी और ग्रामीण जनसंख्या की साक्षरता दर में भी बहुत अन्तर है। वर्ष 2011 में शहरी क्षेत्रों की साक्षरता दर 85.7 प्रतिशत थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह मात्र 68.9 प्रतिशत थी।

प्रश्न 5.
जनसंख्या विस्फोट से आप क्या समझते हैं? (2009)
उत्तर:
जनसंख्या विस्फोट का अर्थ
“आजकल ‘जनसंख्या विस्फोट’ शब्द का प्रयोग बहुत हो रहा है। जनसंख्या के अत्यन्त तीव्र गति से एकाएक वृद्धि के लिए इन शब्दों का प्रयोग किया जाता है। ‘विस्फोट’ शब्द उस तरह की स्थिति को बताता है जैसे उसके प्रभाव उतने ही गम्भीर या भयानक होते हैं। जैसे कि परमाणु बम के Fall out या गिरने या उसके दूषित पदार्थों से प्रभावित होने के होते हैं।”

हर देश में जब विकास होगा तो जन्म-दर की तुलना में मृत्यु-दर अधिक तीव्र गति से घटेगी और उसका परिणाम यह होगा कि जनसंख्या में वृद्धि होगी। आज पैदा होने वाले बच्चे, जिन्हें अकाल शिशु मृत्यु से बचा लिया जाएगा, 20-22 वर्ष बाद स्वयं बच्चे पैदा करेंगे। यहाँ से ही ‘जनसंख्या विस्फोट’ की स्थिति निर्मित होगी।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी पौधे की 62 पत्तियों की लम्बाइयाँ मिलीमीटर में मापी जाती हैं। इससे प्राप्त आँकड़े आगे दी गई सारणी द्वारा निरूपित हैं :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 1
उपरोक्त आँकड़ों को निरूपित करने के लिए एक आयत चित्र खींचिए।
हल :
संतत बारम्बारता बंटन सारणी बनाने पर,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 2
अभीष्ट आयत चित्र :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 3

प्रश्न 2.
कक्षा आठ की विभिन्न अनुभागों (सेक्शनों) के विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त किए गए अंकों का बंटन निम्नलिखित है: प्राप्तांक
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 4
उपरोक्त बंटन के लिए एक आयत चित्र खींचिए।
हल :
आयत की लम्बाई ज्ञात करने के लिए,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 5
अभीष्ट आयत चित्र :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 6

प्रश्न 3.
निम्नलिखित सारणी एक राजमार्ग पर किसी स्थान से होकर जाने वाली कारों की चालों के बारम्बारता बंटन को दर्शाती है :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 7
इन आँकड़ों को निरूपित करने के लिए आयत चित्र एवं बारम्बारता बहुभुज खींचिए।
हल :
अभीष्ट आयत चित्र एवं बारम्बारता बहुभुज :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 8

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित सारणी किसी कक्षा के अनुभागों A और B द्वारा प्राप्त किए गए अंकों का बंटन दर्शाती है:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 9
इन दोनों अनुभागों के विद्यार्थियों के प्राप्तांकों को एक ही आलेख पर दो बारम्बारता बहुभुजों से निरूपित कीजिए। आप क्या देखते हैं ?
हल :
अभीष्ट बारम्बारता बहुभुज :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 10
प्राप्तांक 30 एवं 60 पर प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या दोनों अनुभागों में बराबर हैं।

प्रश्न 5.
दी गयी सारणी के लिए आयत चित्र बनाइए एवं निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (2019)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 11
(i) सबसे अधिक बारम्बारता वाला वर्ग कौन-सा है?
(ii) कौन-कौन से वर्गों की बारम्बारता समान है?
हल :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 12
(i) वर्ग (20-40)
(ii) वर्ग (0-20) तथा (120-140) एवं (80-100) तथा (100-120)]

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
30 विद्यार्थियों के रक्त समूह निम्नलिखित रूप में रिकॉर्ड किए गए :
A, B, O, A, AB, O, A, O, B, A, O, B, A, AB, B, A, AB, B, A, A, O, A, AB, B, A, O, B, A, B, A.
इन आँकड़ों के लिए एक बारम्बारता बंटन सारणी तैयार कीजिए।
हल :
अभीष्ट बारम्बारता बंटन सारणी :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 13

प्रश्न 2.
निम्नलिखित आँकड़ों से एक संतत बारम्बारता बंटन तैयार कीजिए :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 14
हल :
प्रत्येक वर्ग की वर्ग माप = 10 है अत: वर्गों की सीमाएँ मध्य-बिन्दु से 5 कम एवं 5 अधिक होंगी।
अतः अभीष्ट संतत बारम्बारता बंटन सारणी:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 15
अभीष्ट वर्ग माप = 10

प्रश्न 3.
दिए हुए बारम्बारता बंटन को एक सतत् वर्गीकृत बंटन में बदलिए :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 16
किन अन्तरालों में 153.5 और 157.5 सम्मिलित किए जाएँगे ?
हल :
अभीष्ट संतत वर्गीकृत बारम्बारता बंटन :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 17
अतः 153.5 वर्ग अन्तराल (153.5 – 157.5) में एवं 157.5 वर्ग अन्तराल (157.5 – 161.5) में सम्मिलित किए जाएंगे।

प्रश्न 4.
किसी महीने में एक परिवार द्वारा विभिन्न मदों पर किए गए व्यय निम्नलिखित हैं :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 18
उपरोक्त को निरूपित करने के लिए एक दण्ड आलेख खींचिए।
हल :
अभीष्ट दण्ड आलेख :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 19

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प्रश्न 5.
यदि निम्नलिखित आँकड़ों का माध्य 20.2 है, तो p का मान ज्ञात कीजिए :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 20
हल :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 21
⇒ 606 + 20.2 p = 610 + 20 p
⇒ 0.2 p = 4
⇒ p = 20
अतःp का अभीष्ट मान = 20.

प्रश्न 6.
निम्नलिखित बंटन का माध्य ज्ञात कीजिए :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 22
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 23
अतः अभीष्ट माध्य = 8:05.

प्रश्न 7.
किसी बास्केट बॉल टीम द्वारा मैचों की एक श्रृंखला में निम्नलिखित प्वाइंट अर्जित किए गए:
17, 2, 27, 25, 5, 14, 18, 10, 24, 48, 10, 8, 7, 10, 28.
इन आँकड़ों के लिए माध्यक और बहुलक ज्ञात कीजिए।
हल :
आँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर,
2, 5, 7, 8, 10, 10, 10, 14, 17, 18, 24, 25, 27, 28, 48.
माध्यक = \(\frac { x+1 }{ 2 }\) वाँ पद = 8वाँ पद = 14
बहुलक = सर्वाधिक बारम्बारता वाला पद = 10
अतः अभीष्ट माध्यक = 14 एवं बहुलक = 10.

प्रश्न 8.
निम्न आँकड़ों का माध्य ज्ञात कीजिए : 1, 2, 3, 4, 5 (2019)
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 24
अतः अभीष्ट माध्य = 3.

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विद्यार्थियों को दिए गए गणित के एक निदानात्मक टेस्ट में (100 में से) उनके द्वारा प्राप्त किए गए अंक निम्नलिखित रूप में रिकॉर्ड किए गए :
46, 52, 48, 11, 41, 62, 54, 53, 96, 40, 95, 44.
उपर्युक्त आँकड़ों के लिए कौन-सा औसत एक अच्छा प्रतिनिधित्व करेगा और क्यों?
उत्तर-
माध्यक आँकड़ों का एक अच्छा प्रतिनिधित्व करेगा क्योंकि

  • प्रत्येक मान केवल एक बार आ रहा है।
  • आँकड़े चरम मानों से प्रभावित हो रहे हैं।

प्रश्न 2.
एक बच्चा कहता है कि 3, 14, 18, 20, 5 का माध्यक 18 है। यह बच्चा माध्यक ज्ञात करने के बारे में क्या नहीं जानता ?
उत्तर-
यह बच्चा नहीं जानता कि माध्यक ज्ञात करने के लिए आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना होता है।

प्रश्न 3.
फुटबॉल के एक खिलाड़ी द्वारा 10 मैचों में किए गए गोलों की संख्या निम्नलिखित है :
1, 3, 2, 5, 8, 6, 1, 4, 7, 9.
क्योंकि मैचों की संख्या 10 (एक सम संख्या है इसलिए)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 25
क्या यह सही उत्तर है ? और क्यों ?
उत्तर-
यह उत्तर सही नहीं है, क्योंकि माध्यक ज्ञात करने के लिए प्रेक्षणों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना आवश्यक है।

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प्रश्न 4.
क्या यह कहना सही है कि आयत चित्र में प्रत्येक आयत का क्षेत्रफल संगत वर्ग अन्तराल की माप के समानुपाती होता है। यदि नहीं तो कथन का सही रूप लिखिए।
उत्तर-
कथन असत्य है, क्योंकि एक आयत चित्र में प्रत्येक आयत का क्षेत्रफल उसकी बारम्बारता के समानुपाती होता है।

प्रश्न 5.
एक सतत् ? बंटन के वर्ग चिह्न निम्नलिखित हैं :
1.04, 1.14, 1.24, 1.34, 1.44, 1.54, और 1.64.
क्या यह कहना सही है कि अन्तिम अन्तराल 1.55-1-73 होगा। अपने उत्तर का कारण दीजिए।
उत्तर-
यह उत्तर सही नहीं है, क्योंकि दो क्रमागत प्राप्तांकों का उत्तर वर्ग माप के बराबर होना चाहिए।

प्रश्न 6.
30 बच्चों से पूछा गया कि उन्होंने पिछले सप्ताह कितने घण्टे टी. वी. के प्रोग्राम देखे। इसके परिणाम निम्नलिखित रूप से रिकॉर्ड किए गए:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 26
क्या हम कह सकते हैं कि उस सप्ताह में 10 या उससे अधिक घण्टों तक टी. वी. देखने वालों बच्चों की संख्या 22 है ? अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।
उत्तर-
नहीं, क्योंकि उस सप्ताह में 10 या अधिक घण्टे तक टी. वी. देखने वाले छात्रों की संख्या 4 + 2 = 6 है।

MP Board Class 9th Maths Chapter 14 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वर्ग 90-120 का वर्ग चिह्न है :
(a) 90
(b) 105
(c) 115
(d) 120.
उत्तर:
(b) 105

प्रश्न 2.
25, 18, 20, 22, 6, 6, 17, 15, 12, 30, 32, 10, 19, 8, 11, 20 आँकड़ों का परिसर है :
(a) 10
(b) 15
(c) 18
(d) 26.
उत्तर:
(d) 26.

प्रश्न 3.
एक बारम्बारता बंटन में एक वर्ग का मध्य-बिन्दु 10 है तथा उसकी चौड़ाई 6 है। इस वर्ग की निम्न सीमा है:
(a) 6
(b) 7
(c) 8
(d) 12.
उत्तर:
(b) 7

प्रश्न 4.
किसी बारम्बारता बंटन में पाँच सतत वर्गों में से प्रत्येक की चौड़ाई 5 है तथा सबसे छोटे वर्ग की निम्न सीमा 10 है। सबसे बड़े वर्ग की उपरि सीमा है :
(a) 15
(b) 25
(c) 35
(d) 40.
उत्तर:
(c) 35

प्रश्न 5.
मान लीजिए कि एक सतत् बारम्बारता बंटन में एक वर्ग का मध्य-बिन्दु m है और उपरि वर्ग सीमा l है। इस वर्ग की निम्न सीमा है :
(a) 2m + l
(b) 2m – l
(c) m – l
(d) m – 2l.
उत्तर:
(b) 2m – l

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प्रश्न 6.
एक बारम्बारता बंटन के वर्ग चिह्न 15, 20, 25, ……… हैं। चिह्न 20 के संगत वर्ग है :
(a) 12.5-17.5
(b) 17.5-22.5
(c) 18.5-21.5
(d) 19.5-20.5.
उत्तर:
(b) 17.5-22.5

प्रश्न 7.
वर्ग अन्तराल 10-20, 20-30 में संख्या 20 निम्नलिखित वर्ग में सम्मिलित है :
(a) 10-20
(b) 20-30
(c) दोनों में
(d) इनमें से किसी में नहीं।
उत्तर:
(b) 20-30

प्रश्न 8.
पाँच संख्याओं का माध्य 30 है। यदि इनमें से एक संख्या को हटा दिया जाए तो इसका माध्य 28 हो जाता है। हटाई गई संख्या है :
(a) 28
(b) 30
(c) 35
(d) 38.
उत्तर:
(d) 38.

प्रश्न 9.
यदि आँकड़ों के प्रत्येक प्रेक्षण में 5 की वृद्धि की जाती है तो उसका माध्य :
(a) वही रहता है
(b) प्रारम्भिक माध्य का पाँच गुना हो जाता है
(c) पाँच कम हो जाता है ।
(d) पाँच बढ़ जाता है।
उत्तर:
(d) पाँच बढ़ जाता है।

प्रश्न 10.
4, 4, 5, 7, 6, 7, 7, 12, 3 संख्याओं का माध्यक है :
(a) 4
(b) 5
(c) 6
(d) 7
उत्तर:
(c)6

प्रश्न 11.
15, 14, 19, 20, 14, 15, 10, 14, 15, 18, 14, 19, 15, 17, 15 आँकड़ों का बहुलक है :
(a) 14
(b) 15
(c) 16
(d) 17
उत्तर:
(b) 15

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. 2, 3 और 4 का माध्य ………. होता है। (2019)
2. आँकड़ों के अधिकतम एवं न्यूनतम मानों का अन्तर आँकड़ों का ……….. कहलाता है।
3. एक ही अंक की पुनरावृत्ति संख्या उस अंक की ………. कहलाती है।
4. किसी वर्ग की उच्च सीमा एवं निम्न सीमा के अन्तर को ………. कहते हैं।
5. वर्ग की आवृत्ति को उसके मध्य-बिन्दु पर केन्द्रित मानकर बनाया गया बहुभुज ……… कहलाता है।
उत्तर-
1. 3,
2. परिसर,
3. बारम्बारता,
4. वर्ग अन्तराल,
5. बारम्बारता बहुभुज।

जोड़ी मिलान

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Additional Questions image 27
उत्तर-
1.→(c),
2.→(d),
3.→(e),
4.→(a),
5.→(b).

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सत्य/असत्य कथन

1. आँकड़ों के किसी निश्चित समूह का मान एक और केवल एक होता है।
2. संख्याओं 3, 6, 10, 12, 7 और 15 की माध्यिका 8.5 है।
3. प्रेक्षणों के अधिकतम एवं न्यूनतम मानों के अन्तर को वर्गान्तर कहते हैं।
4. संकलित आँकड़ों का सारणी के रूप में निरूपण बारम्बारता सारणी कहलाता है।
5. दण्ड चित्र सदैव ऊर्ध्वाधर बनाए जाते हैं।
6. वर्ग अन्तराल 90-100 में 90 वर्ग की निम्न वर्ग सीमा है। (2018)
उत्तर-
1. सत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य,
6. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. 2, 4, 6, 8, 10 का माध्य क्या होगा?
2. 2, 3, 4, 2, 12, 8, 7, 9, 8, 6, 8, 5, 8 का बहुलक क्या होगा?
3. किन्हीं चरों का औसत मान क्या कहलाता है?
4. किसी वर्ग के अन्तर्गत आने वाले पदों की संख्या क्या कहलाती है?
5. वर्ग 10-20 का मध्यमान क्या होगा?
6. 1, 3, 4, 4, का समान्तर माध्य होगा। (2018)
7. आँकड़े 3, 3, 2, 3 और 4 में बहुलक क्या होगा? (2019)
8. वर्ग 80-100 का परास क्या होगा? (2019)
9. प्रथम पाँच प्राकृत संख्याओं का माध्य क्या होगा? (2019)
उत्तर-
1.6 (छः),
2. 8 (आठ),
3. माध्य,
4. उस वर्ग की बारम्बारता,
5. 15 (पन्द्रह),
6. 3 (तीन)
7.3 (तीन),
8. 20 (बीस),
9. 3 (तीन)।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions

MP Board Class 9th Maths अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Maths दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संलग्न चित्र में दी हुई पतंग को बनाने के लिए प्रत्येकरंग(शेड) के कितने कागज की आवश्यकता होगी यदि ABCD विकर्ण 44 cm वाला एक वर्ग है तथा नीचे 20 cm, 20 cm और 14 cm वाला एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
हल:

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 1
ज्ञात है : एक पतंग जो एक वर्ग ABCD एवं एक समद्विबाहु ∆ CEF से बना है। वर्ग का विकर्ण AC = BD = 44 cm है जो परस्पर बिन्दु O पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
अर्थात् OA = OB = OC = OD = 22 cm
एवं ∠AOB = ∠ BOC = ∠COD = ∠DOA = 90°
समद्विबाहु त्रिभुज की भुजाएँ क्रमशः CE = 20 cm, CF = 20 cm एवं EF = 14 cm हैं। हम जानते हैं कि वर्ग के विकर्ण वर्ग को चार सर्वांगसम भागों में विभक्त करते हैं। पीला रंग का कागज वर्ग के दो चतुर्थांश I एवं II में है।
⇒ पीले रंग के कागज का क्षेत्रफल = 2 x \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 22 x 22 = 484 cm
लाल रंग का कागज केवल वर्ग के एक चतुर्थांश IV में है
⇒ लाल रंग के कागज का क्षेत्रफल = \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 22 x 22 = 242 cm2
हरे रंग का कागज वर्ग के चतुर्थांश III एवं समद्विबाहु त्रिभुज (V) में है
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 1a
∴ हरे रंग के कागज का क्षेत्रफल = ar (CEF) + ar (AOD)
= 131.14 + 242 = 373.14
अतः पीले रंग के कागज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 484 cm2
लाल रंग के कागज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 242 cm2
एवं हरे रंग के कागज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 373.14 cm2 .

प्रश्न 2.
एक त्रिभुज का परिमाप 50 cm है। त्रिभुज की एक भुजा छोटी भुजा से 4 cm लम्बी है तथा तीसरी भुजा छोटी भुजा के दुगने से 6 cm कम है। त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
मान लीजिए ∆ की छोटी भुजा = x cm तो प्रश्नानुसार दूसरी भुजा (x + 4) cm तथा तीसरी भुजा (2x – 6) cm होगी।
परिमाप = x + (x + 4) + (2x – 6)= 50 cm
⇒ 4x – 2 = 50 ⇒ 4x = 52
⇒ x = \(\frac { 52 }{ 4 }\) = 13 cm
अतः त्रिभुज की भुजाएँ क्रमशः 13 cm, 17 cm एवं 20 cm होंगी।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 2
अतः त्रिभुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 109.54 cm2.

प्रश्न 3.
संलग्न चित्र में ∆ABC की भुजाएँ AB = 7.5 cm, AC = 6.5 cm और BC = 7 cm हैं। आधार BC पर एक समान्तर चतुर्भुज DBCE की रचना की जाती है जो क्षेत्रफल में ∆ABC के बराबर है। इस समान्तर चतुर्भुज की ऊँचाई DF ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक त्रिभुज जिसकी भुजा AB = 7.5 cm,
AC = 6.5 और BC = 7 cm
आधार BC = 7 cm पर एक समान्तर चतुर्भुज DBCE दिया है जिसका क्षेत्रफल ∆ABC के क्षेत्रफल के बराबर है। मान लीजिए समान्तर चतुर्भुज की ऊँचाई DF = d cm
∆ ABC में,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 3
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 3a
चूँकि ar (DBCE) = ar (ABC) (दिया है)
⇒ 7 x d = 21 ⇒ d = 2 = 3 cm
अतः समान्तर चतुर्भुज की अभीष्ट ऊँचाई DF = 3 cm.

प्रश्न 4.
संलग्न चित्र में 50 cm x 70 cm की विमाओं वाली एक आयताकार टाइल पर चित्र में दर्शाए गए अनुसार एक डिजाइन बनाया गया है। इस डिजाइन में 8 त्रिभुज हैं जिनमें से प्रत्येक की भुजाएँ 26 cm, 17 cm और 25 cm की हैं। डिजाइन का पूर्ण क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए तथा टाइल के शेष भाग का क्षेत्रफल भी ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक 50 cm x 70 cm विमाओं वाली 70cmटाइल जिसके अन्दर 26 cm, 17cm एवं 25 cm विमाओं वाली 8 सर्वांगसम त्रिभुजों से बनी आकृति।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 4
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 4a
∴ डिजाइन का क्षेत्रफल = 8 x त्रिभुज का क्षेत्रफल
= 8 x 204 = 1632 cm2
चूँकि आयताकार टाइल का क्षेत्रफल = लम्बाई x चौड़ाई
⇒ ar (आयताकार टाइल) = 70 x 50 = 3500 cm2
टाइल के शेष भाग का क्षेत्रफल = 3500 – 1632 = 1868 cm2
अतः टाइल की डिजाइन का अभीष्ट क्षेत्रफल = 1632 cm2
एवं शेष टाइल का अभीष्ट क्षेत्रफल = 1868 cm2.

MP Board Class 9th Maths लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भुजाओं 50 m, 65 m और 65 m वाले त्रिभुजाकार खेत में ₹ 7 प्रति m2 की दर से घास लगवाने का व्यय ज्ञात कीजिए।
हल:
त्रिभुजाकार खेत के लिए,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 5
चूँकि घास लगाने का व्यय = दर x क्षेत्रफल = 7 x 1500 = ₹ 10,500
अतः घास लगवाने का अभीष्ट व्यय = ₹ 10,500.

प्रश्न 2.
एक फ्लाई ओवर की त्रिभुजाकार दीवारों को विज्ञापन के लिए प्रयोग किया जाता है। दीवारों की भुजाएँ 13 m, 14 m और 15 m हैं। विज्ञापनों से एक वर्ष में ₹2,000 प्रति m2 की दर से आय होती है। एक कम्पनी इनमें से एक दीवार को 6 महीने के लिए किराये पर लेती है। उस कम्पनी ने कितना किराया दिया ?
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 6
अतः विज्ञापन के लिए अभीष्ट किराया = ₹ 84,000.

प्रश्न 3.
एक समद्विबाहु त्रिभुज का परिमाप 32 cm है। एक बराबर भुजा और आधार का अनुपात 3 : 2 है। इस त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक समद्विबाहु त्रिभुज जिसकी एक बराबर भुजा और आधार का अनुपात 3 : 2 है तथा परिमाप 32 cm है।
⇒ भुजाओं का अनुपात = 3 : 3 : 2
मान लीजिए भुजाएँ 3x, 3x एवं 2x हैं।
तो परिमाप 3x + 3x + 2x = 32 cm (दिया है)
⇒ x = 32 ⇒ x = \(\frac { 32 }{ 8 }\) = 4 cm
⇒ भुजाएँ क्रमश: 12 cm, 12 cm और 8 cm हैं। त्रिभुज में,
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 6a
अतः त्रिभुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 32√2 cm2.

प्रश्न 4.
संलग्न चित्र में दिए हुए समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। साथ ही शीर्ष A से भुजा DC पर शीर्ष लम्ब की लम्बाई भी ज्ञात कीजिए।
हल:
दियाहैः एक समान्तर चतुर्भुज जिसकी भुजाएँ DC = 12 cm, BC = 17 cm और विकर्ण DB = 25 cm तथा A से DC पर शीर्षलम्ब = AE = d (मान लीजिए)
हम जानते हैं कि समान्तर चतुर्भुज का विकर्ण उसे दो सर्वांगसम त्रिभुजों में विभक्त करता है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 7
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 7a
चूँकि समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार (DC) x शीर्षलम्ब (AE)
⇒ 12 x d = 180 ⇒ d = \(\frac { 180 }{ 12 }\) = 15 cm
अतः समान्तर चतुर्भुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 180 cm2
एवं समान्तर चतुर्भुज का अभीष्ट शीर्षलम्ब = 15 cm.

प्रश्न 5.
एक खेत एक समान्तर चतुर्भुज के आकार का है जिसकी भुजाएँ 60 m और 40 m हैं तथा एक विकर्ण 80 m है। इस खेत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक समान्तर चतुर्भुज के आकार का खेत ABCDP
जिसकी भुजा AB = 60 m, BC = 40 m एवं विकर्ण AC = 80 m है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 8
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 8a
अत: खेत का अभीष्ट क्षेत्रफल= 600√15 m2.

प्रश्न 6.
एक त्रिभुजाकार का खेत का परिमाप 420 m हैं तथा इसकी भुजाओं का अनुपात 6 : 7 : 8 है। इस खेत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है : एक त्रिभुजाकार खेत जिसकी परिमाप 420 m तथा भुजाओं का अनुपात 6 : 7 : 8 है।
चूँकि भुजाओं का अनुपात = 6 : 7 : 8 = भुजाएँ हैं 6x, 7x एवं 8x (मान लीजिए)
⇒ परिमाप = 6x + 7x + 8x = 420 ⇒ 21x = 420 ⇒ x = \(\frac { 420 }{ 21 }\) = 20 m
⇒ भुजाओं का वास्तविक मान a = 120 m, b = 140 m एवं c = 160 m
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 9
अतः खेत का अभीष्ट क्षेत्रफल = 2100√15 m2.

प्रश्न 7.
किसी त्रिभुज की भुजाएँ क्रमश: 60 m, 100 m और 140 m हैं। त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (2019)
हल:
दिया है : त्रिभुज की भुजाएँ क्रमश: a = 60 m, b = 100 m एवं c = 140 m
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 10
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 10a
अतः त्रिभुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 1500√3 m.

प्रश्न 8.
किसी त्रिभुज ABC की भुजाएँ क्रमशः 40 m, 24 एवं 32 m हैं, तो त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (2019)
हल:
निर्देशः उपर्युक्त प्रश्न की तरह हल करें
उत्तर:
अभीष्ट क्षेत्रफल = 384 m

MP Board Class 9th Maths अति लघु उत्तरीय प्रश्न

सत्य तथा असत्य कथन लिखिए तथा अपने उत्तर का औचित्व दीजिए।

प्रश्न 1.
आधार 4 cm और ऊँचाई 6 cm वाले त्रिभुज का क्षेत्रफल 24 cm2 है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि ar (∆) = \(\frac { 1 }{ 4 }\) x 4 x 6 = 12 cm2.

प्रश्न 2.
एक त्रिभुज ABC का क्षेत्रफल 8 cm है जिसमें AB = AC = 4 cm तथा ∠A = 90° है।
उत्तर:
कथन सत्य है, क्योंकि ar (ABC) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 4 x 4 = 8 cm2.

प्रश्न 3.
एक समद्विबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल \(\frac { 5 }{ 4 }\)√11 cm2 होगा यदि उसका परिमाप 11 cm और आधार 5 cm है।
उत्तर:
कथन सत्य है, प्रत्येक बराबर भुजा 3 cm है।

प्रश्न 4.
एक समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल 20√3 cm है जिसकी प्रत्येक भुजा 8 cm है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि समबाहु ∆ का क्षेत्रफल 16√3 cm2 होगा।

प्रश्न 5.
यदि एक समचतुर्भुज की एक भुजा 10 cm और विकर्ण 16 cm है तो उस समचतुर्भुज का क्षेत्रफल 96 cm2 है।
उत्तर:
कथन सत्य है, क्योंकि उसके विकर्ण से बने एक त्रिभुज का क्षेत्रफल = 48 cm2.

प्रश्न 6.
एक समान्तर चतुर्भुज का आधार और संगत शीर्षलम्ब क्रमशः 10 cm और 3.5 cm हैं। उस समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल 30 cm है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = 10 x 3.5 = 35 cm2.

प्रश्न 7.
भुजा a वाले एक समषद्भुज का क्षेत्रफल भुजा a वाले पाँच समबाहु त्रिभुज के क्षेत्रफल के बराबर होता है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि यह a भुजा वाले 6 समबाहु त्रिभुजों के क्षेत्रफलों के योग के बराबर होगा।

MP Board Class 9th Maths वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक समद्विबाहु समकोण त्रिभुज का क्षेत्रफल 8 cm है। इसके कर्ण की लम्बाई है:
(a) \(\sqrt { 32 }\) cm
(b) \(\sqrt { 16 }\) cm
(c) \(\sqrt { 48 }\) cm
(d) \(\sqrt { 24 }\) cm.
उत्तर:
(a) \(\sqrt { 32 }\) cm

प्रश्न 2.
एक समबाहु त्रिभुज का परिमाप 60 m है। इसका क्षेत्रफल है :
(a) 10√3 m2
(b) 15√3 m2
(c) 20√3 m2
(d) 100√3 m2.
उत्तर:
(d) 100√3 m2.

प्रश्न 3.
2√3 cm भुजा वाले समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल है :
(a) 5.196 cm2
(b) 0.866 cm2
(c) 3:496 cm2
(d) 1:392 cm2.
उत्तर:
(a) 5.196 cm2

प्रश्न 4.
क्षेत्रफल 9√3 cm वाले समबाहु त्रिभुज की प्रत्येक भुजा की लम्बाई है:
(a) 8 cm
(b) 36 cm
(c) 4 cm
(d) 6 cm.
उत्तर:
(d) 6 cm.

प्रश्न 5.
यदि एक समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल 16/3 cm है तो इसकी परिमाप होगी :
(a) 48 cm
(b) 24 cm
(c) 12 cm
(d) 36 cm.
उत्तर:
(b) 24 cm

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. एक समकोण समद्विबाहु त्रिभुज की बराबर भुजा 10 cm है तो इसके विकर्ण लम्बाई …… होगी।
2. 10 cm और 6 cm भुजाओं वाले आयत का क्षेत्रफल …….. होगा।
3. एक समबाहु त्रिभुज की प्रत्येक भुजा 10 cm है तो इसका क्षेत्रफल ……… होगा।
4. एक आयत की भुजाएँ मीटर में मापी गई हैं। इसके क्षेत्रफल का मात्रक ………. होगा।
5. आधार 12 cm तथा शीर्षलम्ब 8 cm वाले त्रिभुज का क्षेत्रफल ……. है।
उत्तर:
1. 10√2 cm,
2. 60 cm2,
3. 25√3 cm2,
4. m2,
5. 48 cm2.

जोड़ी मिलान
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 12 हीरोन का सूत्र Additional Questions 11
उत्तर:
1. → (c),
2. →(d),
3. → (e),
4. → (a),
5. → (b).

सत्य/असत्य कथन

1. हीरोन का सूत्र केवल समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात करने में प्रयुक्त होता है।
2. समान्तर चतुर्भुज की संलग्न भुजाएँ तथा एक विकर्ण दिया हो तो उसका क्षेत्रफल हीरोन के सूत्र से ज्ञात कर सकते हैं।
3. एक त्रिभुज का क्षेत्रफल होता है उसका आधार x शीर्षलम्ब।
4. आयत का क्षेत्रफल उसकी लम्बाई एवं चौड़ाई के गुणनफल के बराबर होता है।
5. समचतुर्भुज का क्षेत्रफल उसके विकर्णों के गुणनफल के बराबर होता है।
उत्तर:
1. असत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर
1. किसी त्रिभुज की परिमाप का मात्रक क्या होता है?
2. क्षेत्रफल को मापने का मात्रक क्या है?
3. किसी त्रिभुज की भुजाओं के योग को क्या कहते हैं?
4. किसी वर्ग की भुजा 4 सेमी है। उसके विकर्ण उसे चार त्रिभुजों में विभक्त करते हैं तो प्रत्येक त्रिभुज का क्षेत्रफल क्या होगा?
5. हीरोन का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर:
1. सेमी या मीटर,
2. सेमी या मीटर,
3. परिमाप,
4. 4 cm2,
5. अलेक्जेण्ड्रिया (मिस्र) में।

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