MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 4 हमारा संविधान

MP Board Class 7th Social Science Chapter 4 हमारा संविधान

MP Board Class 7th Social Science Chapter 4 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) संविधान सभा का गठन हुआ था
(अ) दिसम्बर, 1946
(ब) जनवरी, 1947
(स) नवम्बर, 1945
(द) जनवरी, 19501
उत्तर:
(अ) दिसम्बर, 1946

(2) संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे –
(अ) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद,
(ब) डॉ. भीमराव अम्बेडकर
(स) डॉ. हरी सिंह गौर
(द) पं. जवाहरलाल नेहरू
उत्तर:
(ब) डॉ. भीमराव अम्बेडकर

(3) भारतीय संविधान सभा ने संविधान को अपनी स्वीकृति प्रदान की –
(अ) 26 नवम्बर, 1946
(ब) 26 जनवरी, 1950
(स) 26 नवम्बर, 1949
(द) 26 जनवरी, 1930
उत्तर:
(स) 26 नवम्बर, 1949

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) संविधान सभा के अध्यक्ष ………….. थे।
(2) भारतीय संविधान ………….. एवं निर्मित संविधान है।
(3) भारत में ………………. एवं शक्तिशाली न्यायपालिका है।
उत्तर:
(1) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(2) लिखित
(3) स्वतन्त्र।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 4 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) भारतीय संविधान सभा के किन्हीं तीन सदस्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
भारतीय संविधान सभा के तीन सदस्य डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, पं. जवाहरलाल नेहरू एवं सरदार वल्लभ भाई पटेल थे।

(2) “सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न” से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
“सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न” से तात्पर्य है-भारत एक स्वतन्त्र राष्ट्र है, यह शक्तियों से सम्पन्न एवं सर्वोच्च है। किसी अन्य बाहरी शक्ति का इस पर कोई नियन्त्रण नहीं है।

(3) भारत के संविधान को लिखित एवं निर्मित संविधान क्यों कहते हैं ?
उत्तर:
भारत का संविधान लिखित संविधान है तथा इसका निर्माण संविधान सभा द्वारा हुआ है। अतः इसे लिखित एवं निर्मित संविधान कहते हैं।

(4) संसदीय प्रणाली क्या है ?
उत्तर:
संसदीय प्रणाली में शासन की वास्तविक शक्तियाँ संसद में निहित होती हैं। शासन की शक्तियों का प्रयोग मन्त्रिपरिषद् करती है। मन्त्रिपरिषद् संसद के प्रति उत्तरदायी है।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 4 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) भारतीय संविधान की किन्हीं तीन विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारतीय संविधान की तीन विशेषताएँ –

  • संघात्मक शासन व्यवस्था – भारत के संविधान में संघात्मक शासन व्यवस्था को अपनाया गया है। इस व्यवस्था के कारण केन्द्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन है।
  • केन्द्र एवं राज्यों की अलग-अलग सरकारें हैं।
  • पंथ निरपेक्ष-पंथ निरपेक्ष का तात्पर्य है कि राज्य की दृष्टि से सभी धर्म समान हैं और राज्य के द्वारा विभिन्न धर्मावलम्बियों में कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

विस्तृत एवं व्यापक संविधान – भारतीय संविधान अन्य देशों के संविधानों की तुलना में बहुत विस्तृत एवं व्यापक है। भारत में अनेक जातियों, धर्मो और भाषाओं के बोलने वाले निवास करते हैं। उनकी अपनी संस्कृतियाँ हैं। अनेकता में एकता की भावना को सुदृढ़ करने के लिए संविधान में विस्तारपूर्वक उल्लेख है।

(2) टिप्पणी लिखिए –
(अ) पंथ निरपेक्षता,
(ब) संघात्मक शासन व्यवस्था,
(स) मौलिक अधिकार एवं कर्त्तव्य।
उत्तर:
(अ) पंथ निरपेक्षता – पंथ निरपेक्षता भारतीय संविधान की एक प्रमुख विशेषता है। इसके अनुसार राज्य की दृष्टि से सभी धर्म समान हैं और राज्य के द्वारा विभिन्न धर्मावलम्बियों में कोई मतभेद नहीं किया जाता है। राज्य किसी भी धर्म के लिए पक्षपातपूर्ण कार्य व हस्तक्षेप नहीं करेगा।

(ब) संघात्मक शासन व्यवस्था – भारत के संविधान में इस व्यवस्था को अपनाया गया है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत केंद्र अर्थात् संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन है। केंद्र और राज्यों की सरकारें भी अलग-अलग हैं।

(स) मौलिक अधिकार एवं कर्त्तव्य – भारतीय संविधान में नागरिकों को कुछ मूल अधिकार दिए गए हैं, इन अधिकारों | की रक्षा का दायित्व सर्वोच्च न्यायालय का है। भारतीय संविधान में अधिकारों के साथ – साथ नागरिकों के कर्त्तव्यों का भी उल्लेख किया गया है।

MP Board Class 7th Social Science Solutions

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 17 राज्यपाल एवं राज्य मन्त्रि-परिषद

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 17 राज्यपाल एवं राज्य मन्त्रि-परिषद

MP Board Class 7th Social Science Chapter 17 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) ………….. राज्य का प्रमुख होता है।
(2) मुख्यमन्त्री की नियुक्ति ……………. करता है।
(3) मन्त्रि-परिषद् का मुखिया …………… होता है।
(4) राज्यपाल पद पर नियुक्ति हेतु आयु …………….. वर्ष होनी चाहिए।
उत्तर:
(1) राज्यपाल
(2) राज्यपाल
(3) मुख्यमन्त्री
(4)35

प्रश्न 2.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए –
MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 17 राज्यपाल एवं राज्य मन्त्रि-परिषद
उत्तर:
(1) (d) राष्ट्रपति
(2) (a) पाँच
(3) (c) चार
(4) (b) कानून को लागू करना

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 17 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) राज्य सरकार के सभी कार्य किसके नाम से चलाए जाते हैं?
उत्तर:
राज्य सरकार के सभी कार्य राज्यपाल के नाम से चलाए जाते हैं।

(2) राज्यपाल किसकी सलाह से मन्त्रियों की नियुक्ति करता है?
उत्तर:
राज्यपाल मुख्यमन्त्री की सलाह से मन्त्रियों की नियुक्ति करता है।

(3) मन्त्रि-परिषद् की श्रेणियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मन्त्रि – परिषद् की श्रेणियाँ –

  •  कैबिनेट मन्त्री
  •  राज्य मन्त्री
  • उप मन्त्री, तथा
  • संसदीय सचिव हैं।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 17 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) राज्य मन्त्रि-परिषद् के कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राज्य मन्त्रि-परिषद् के कार्य निम्नलिखित हैं –
(i) कानूनों को लागू करना – मन्त्रि – परिषद् का मुख्य कार्य विधानसभा द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करना है।

(ii) राज्य हेतु नीति निर्धारण एवं क्रियान्वयन करना-राज्य मन्त्रि-परिषद् राज्य के विकास एवं संचालन हेतु नीति निर्धारण करता है तथा इन नीतियों को लागू करने हेतु आवश्यक आदेश एवं निर्देश प्रसारित करता है। वह प्रशासकीय स्तर पर इन नियमों के क्रियान्वयन पर निगरानी रखता है।

(iii) राज्यपाल को परामर्श देना – राज्य मन्त्रि-परिषद् उच्च पदों पर नियुक्ति हेतु राज्यपाल को परामर्श देता है। उसके बाद राज्यपाल नियुक्ति करता है।

(iv) विधायी कार्य – मन्त्रि-परिषद् के सदस्यों द्वारा तैयार किया हुआ शासकीय विधेयक व्यवस्थापिका के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जाता है। मन्त्रि-परिषद् के सदस्य विधान मण्डल में विधेयक सम्बन्धी जानकारी, प्रश्नों और समालोचनाओं के उत्तर देते हैं। यदि कोई विधेयक विधान सभा में पारित नहीं होता है तो सम्पूर्ण मन्त्रि-परिषद् द्वारा त्यागपत्र देना आवश्यक है।

(v) वित्तीय कार्य – राज्य विधान परिषद् राज्य की नीतियों। के क्रियान्वयन के लिए आय-व्यय सम्बन्धी प्रस्ताव तैयार करती है। इस प्रस्ताव को वित्त विधेयक कहते हैं। इस विधेयक को वित्त मन्त्री विधानसभा में प्रस्तुत करता है तथा मन्त्रि-परिषद् इस विधेयक को स्वीकृत करवाती है।

(2) राज्यपाल बनने के लिए क्या – क्या अर्हताएँ होनी चाहिए ?
उत्तर:
राज्यपाल बनने के लिए निम्नलिखित अर्हताएँ होनी चाहिए –

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • वह 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
  • वह संसद अथवा राज्य विधान मण्डल का सदस्य न हो।
  • वह केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार के अधीन किसी लाभकारी पद पर कार्यरत न हो।

(3) राज्यपाल द्वारा अध्यादेश कब व क्यों जारी किया जाता है ?
उत्तर:
जब विधानसभा की बैठकें नहीं चल रही हों और किसी कानून की तुरन्त आवश्यकता हो, तो राज्यपाल आदेश जारी कर सकता है। राज्यपाल द्वारा जारी यह आदेश ‘अध्यादेश’ कहलाता है। ये अध्यादेश कानून के समान ही होते हैं।

MP Board Class 7th Social Science Solutions

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 3 महर्षिः दयानन्दः

In this article, we will share MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 3 महर्षिः दयानन्दः Pdf, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 3 महर्षिः दयानन्दः (गद्यम्) (सङ्कलितम्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 3 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए-)।
(क) दयानन्दस्य जन्म कस्मिन् प्रदेशे अभवत्? (दयानन्द का जन्म किस प्रदेश में हुआ?)
उत्तर:
गुर्जरप्रदेशे (गुर्जर प्रदेश में)

(ख) दयानन्दः कस्मात् बहुविधानि शास्त्राणि अशिक्षत? (दयानन्द ने किससे अनेक शास्त्र सीखे?)
उत्तर:
स्वामिविरजानन्दात् (स्वामी विरजानन्द से)

MP Board Solutions

(ग) महर्षिः कस्य स्थापनां कृतवान्? (महर्षि ने किसकी स्थापना की?)
उत्तर:
आर्यसमाजस्य (आर्य समाज की)

(घ) दयानन्दः कयोः उन्नत्यै भारतीयसंस्कृतेः प्रचारमकरोत? (दयानन्द ने किनकी उन्नति के लिए भारतीय संस्कृति का प्रचार किया?)
उत्तर:
देशसमाजयोः (देश और समाज की)

(ङ) दयानन्दस्य चरितं केषां कृते अनुकरणीयमस्ति? (दयानन्द का चरित्र किनके लिए अनुकरणीय है?)
उत्तर:
भारतीयानाम् (भारतीयों के)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत- (एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) दयानन्दस्य जन्मनाम किम् आसीत्? (दयानन्द का असली (जन्म का) नाम क्या था?
उत्तर:
दयानन्दस्य जन्मनाम मूलशङ्करः आसीत्। (दयानन्द का असली (जन्म का) नाम मूलशङ्कर था।)

(ख) संन्यासग्रहणानन्तरं महर्षिः केन नाम्ना प्रसिद्ध? (संन्यास लेने के बाद महर्षि किस नाम से प्रसिद्ध हुए?)
उत्तर:
संन्यासग्रहणानन्तरं महर्षिः ‘दयानन्दसरस्वती’ इति नाम्ना प्रसिद्धः। (संन्यास लेने के बाद महर्षि दयानन्द सरस्वती’ नाम से प्रसिद्ध हुए।)

(ग) महर्षिः केषाम् उद्धाराय सदैव प्रायतत्? (महर्षि किनके उद्धार के लिए सदैव प्रयास करते रहे?)
उत्तर:
महर्षिः विधवाडऽबलानां दलितवर्गानां गवां च उद्धाराय सदैव प्रायतत्। (महर्षि विधवाओं, अबलाओं, दलितवर्गों और गायों के उद्धार के लिए सदा प्रयास करते रहे।)

(घ) दयानन्दः केषां प्रचारमकरोत्? (दयानन्द ने किनका प्रचार किया?)
उत्तर:
दयानन्दः चिरोपेक्षितवेदानां प्रचारमकरोत्। (दयानन्द ने बहुत समय से उपेक्षित वेदों का प्रचार किया।)

MP Board Solutions

(ङ) दयानन्दः कस्य मूर्तिरासीत्? (दयानन्द किसके प्रतीक थे?)
उत्तर:
दयानन्दः सत्यस्य धैर्यस्य ब्रह्मचर्यस्य च मूर्तिरासीत्। (दयानन्द सत्य, धैर्य और ब्राह्मचर्य के प्रतीक थे।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए-)
(क) दयानन्दः किमर्थं स्वगृहमत्यजत्? (दयानन्द ने अपना घर क्यों छोड़ा?)
उत्तर:
दयानन्दः अमरः भवितुम् स्वगृहमत्यजत्।। (दयानन्द ने अमर बनने के लिए अपना घर छोड़ दिया था।)

(ख) विद्यासमाप्तौ गुरुः दयानन्दं किम् आदिष्टवान्? (विद्या समाप्ति पर गुरु ने दयानन्द को क्या आदेश दिया?)
उत्तर:
विद्यासमाप्तौ गुरुः दयानन्दम् अदिष्टवान्-“वत्स! अस्माकम् अयम् देशः अविद्यान्धकारे पतितः वर्तते तद् गच्छ अविद्यान्धकारम् अपनय। आर्षशास्त्राणि उद्धर वैदिकज्योति च पुनः प्रकाशय।

(विद्यासमाप्ति पर गुरु ने दयानन्द को आदेश दिया-पुत्र! हमारा यह देश अज्ञानता रूपी अंधकार में डूबा हुआ है, जाओ और उस अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर करो। ऋषियों द्वारा रचित शास्त्रों से उद्धृत वैदिक ज्योति को फिर प्रकाशित करो।)

(ग) दयानन्देन के ग्रन्थाः विरचिताः?
(दयानन्द के द्वारा कौन से ग्रन्थ रचे गए?)
उत्तर:
दयानन्देन ऋग्वेदादिभाष्य भूमिका-सत्यार्थप्रकाश-संस्कारविधि प्रभृतिग्रन्थाः विरचिताः।

(दयानन्द ने ऋग्वेद आदि की भाष्य भूमिका-सत्यार्थ प्रकाश-संस्कारविधि आदि अनेक ग्रन्थों को रचा।)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूयरत- (दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(अविद्यान्धकारात्, संन्यासमगृणात्, यशः, दुःखानि, वेदान्)
(क) महर्षिः पूर्णानन्दसरस्वतीसकाशात् ……………….।
(ख) दयानन्दः मानवान् ………………. उद्धर्तुं कार्यक्षेत्रे समागतः।
(ग) जनाः ………………. प्रत्यागच्छेयुः इति महर्षेः सन्देशः।
(घ) दयानन्दः ………………. सोढ्वापि कर्त्तव्यविमुखः न जातः।
(ङ) महर्षिः ………………. शरीरेण अमरः अस्ति।
उत्तर:
(क) संन्यासमगृह्णात्
(ख) अविद्यान्धकारात्
(ग) वेदान
(घ) दुःखानि
(ङ) यशः।

MP Board Solutions

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से जोड़िए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 3 महर्षिः दयानन्दः img 1
उत्तर:
(क) 3
(ख) 4
(ग) 5
(घ) 1
(ङ) 2

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्धवाक्यानां समक्षं “न” इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) कथमहम् अमरो भवेयम् इति महर्षिः चिन्तयामास।
(ख) त्र्यशीत्युत्तराऽष्टादशशततमे ईशवीये वर्षे महर्षिः न दिवंगतः।
(ग) महर्षेः ख्यातिः सर्वत्र व्याप्ता अस्ति।
(घ) दयानन्दः सामाजिककुप्रथानां निवारणं कृतवान्।
(ङ) महर्षिसदृशाः महात्मानः वन्द्याः न भवन्ति।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) आम्
(घ) आम्
(ङ) न।

प्रश्न 7.
उदाहरणानुसारं शब्दानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनं च लिखत (उदाहरण के अनुसार शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति व वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 3 महर्षिः दयानन्दः img 2
(क) महर्षेः
(ख) नर्मदातीरे
(ग) गवाम्
(घ) सर्वेषाम्
(ङ) सत्यस्य
(च) महात्मानः
(छ) जनेषु
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 3 महर्षिः दयानन्दः img 3

प्रश्न 8.
उदाहरणानुसारं क्रियापदानां धातुं लकारं वचनं च लिखत
(उदाहरण के अनुसार क्रियापदों के धातु, लकार और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 3 महर्षिः दयानन्दः img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 3 महर्षिः दयानन्दः img 5

प्रश्न 9.
उदाहरणानुसारं धातुं प्रत्ययं च पृथक् कुरुत-
(उदाहरण के अनुसार धातु और प्रत्यय अलग कीजिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 3 महर्षिः दयानन्दः img 6
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 3 महर्षिः दयानन्दः img 7

प्रश्न 10.
उदाहरणानुसारं सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत
(उदाहरण के अनुसार सन्धिविच्छेद करके सन्धि का नाम लिखिए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 3 महर्षिः दयानन्दः img 8
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 3 महर्षिः दयानन्दः img 9

योग्यताविस्तार –

स्वामिदयानन्दसदृशानां महापुरुषाणां नामानि अन्विष्य लिखत।
(स्वामी दयानन्द जैसे महापुरुषों के नाम ढूँढकर लिखिए।)

महर्षेः दयानन्दस्य आदर्शविषये पञ्चवाक्यानि लिखत।।
(महर्षि दयानन्द के आदर्श विषय पर पाँच वाक्य लिखिए।)

महर्षिः दयानन्दः पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में भारत के महापुरुष ‘महर्षि दयानन्द’ के जीवन का वर्णन किया गया है। वे संसार में ‘दयानन्द सरस्वती के नाम से प्रसिद्ध हैं। इन्होंने व्याकरण, वेदान्त आदि अनेक शास्त्रों का अध्ययन किया था। इन्होंने योग की शिक्षा भी ली। इन्होंने आर्य समाज की स्थापना की तथा समाज में फैली कुप्रथाओं को दूर करने के भरसक प्रयत्न किए। इन्होंने ‘सत्यार्थ-प्रकाश’ की रचना की।

महर्षिः दयानन्दः पाठ का अनुवाद

1. महर्षेः दयानन्दस्य जन्म गुर्जरप्रदेशे ब्राह्मणपरिवारे फरवरीमासे द्वादशे दिनाङ्के चतुर्विशत्युत्तराऽष्टादशशततमे 12/02/1824 ईशवीये वर्षे अभवत्। अस्य जन्मनाम मूलशङ्करः आसीत्। यदा एषः षोडशवर्षीयः जातः तदा अस्य भगिनी स्वर्गं गता। वर्षत्रयानन्तरं चास्य पितृव्योऽपि दिवं गतः। गृहे अन्येषु जनेषु विलपत्सु अयं संसारस्य अनित्यतां विचारयन् “कथमहम् अमरो भवेयम्” इति चिन्तयामास। एकस्मिन्दिने मूलशङ्करः सहसैव स्वगृहमत्यजत्।

शब्दार्था :
षोडश-सोलह-Sixteen; भगिनी-बहन-Sister; पितृव्यः-चाचा-Uncle, विलपत्सु-विलाप -Wailing, bewailing, mourning.

अनुवाद ;
महर्षि दयानन्द का जन्म गुर्जर प्रदेश में ब्राह्मण परिवार में फरवरी मास में 12 तारीख को सन् 1824 ई. में हुआ था। उसका जन्म का नाम मूलशङ्कर था। जब यह सोलह वर्ष के हुए तब इनकी बहन का स्वर्गवास हो गया। तीन वर्ष के अन्दर इनके चाचा की भी मृत्यु हो गई। घर में अन्य लोगों के विलाप से इन्होंने संसार की अनित्यता के विषय में विचार करते हुए सोचा- “मैं किस प्रकार अमर बनूँ”। एक दिन मूलशङ्कर अचानक ही अपना घर छोड़कर चले गए।

English :
Maharishi Dayanand-born in Brahmin family on 12th February, 1824-birth name Mool Shankar-Lost sister and uncle at the age of 16 and 19-Awakened to world’s transitory nature-left home in quest of immortality.

MP Board Solutions

2. ततोऽसौ देशाद्देशान्तरं विचरन व्याकरणवेदान्तादीन्यनेकशास्त्राणि विशेषतः योगपद्धतिं च अशिक्षत। विचरणकालेऽयं नर्मदातीरे स्वामिपूर्णानन्दसरस्वतीसकाशात् संन्यासमगृह्णात्। तदा एषः ‘दयानन्दसरस्वतीति’ नाम्ना प्रसिद्धः जातः। अनन्तरं मथुरां गत्वा प्रज्ञाचक्षुषः स्वामिनः विरजानन्दात् बहुविधानि शास्त्राणि अशिक्षत। विद्यासमाप्तौ गुरुस्तमादिशत्-वत्स! देशोऽयमस्माकमविद्यान्धकारे पतितो वर्तते तद गच्छ अविद्यान्धकारम् अपनय। आर्षशास्त्राणि उदर वैदिकज्योतिः च पुनः प्रकाशय।

शब्दार्था :
प्रज्ञाचक्षुष-ज्ञान नेत्र वाले-knowledge vision; अपनय-दूर करो–remove.

अनुवाद :
तब उन्होंने एक देश से दूसरे देश में घूमते हुए व्याकरण, वेदान्त आदि अनेक शास्त्रों विशेषकर योग-प्रक्रिया को सीखा। घूमते समय इन्होंने नर्मदा के किनारे स्वामी पूर्णानन्द सरस्वती के पास संन्यास लिया। तब से यह ‘दयानन्द सरस्वती’ नाम से प्रसिद्ध हुए। बाद में मथुरा जाकर ज्ञाननेत्र वाले स्वामी विरजानन्द से बहुत से शास्त्र सीखे। विद्या की समाप्ति पर गुरु ने उसे आदेश दिया-हे वत्स! हमारा यह देश अज्ञानता रूप अन्धकार में गिरा हुआ है, तो जाओ, अज्ञानता रूपी अन्धकार को दूर करो। ऋषियों द्वारा रचित शास्त्रों से निकली वैदिक ज्योति को फिर से प्रकाशित करो।

English :
Learnt various scriptures and yogic practices during wanderings-Got sanyasa from Swami Poornananda Saraswati–came to be known as Dyanand Saraswati–Learnt various scriptures at Mathura from Swami Virajanand-directed to remove darkness of illiteracy and enlighten the vedic light.

3. दयानन्दोऽपि गुरोराज्ञां शिरसि कृत्वा पादौ प्रणम्य आशिषं च गृहीत्वा एतद्देशवासिनः मानवान् अविद्यान्धकाराद् उद्धर्तु कार्यक्षेत्रे समागतः। गुरोराज्ञां पालयन् देशसमाजयोः उन्नत्यै निरन्तर भारतीयसंस्कृतेः प्रचारमकरोत्। पाखण्डोन्मूलनाय वैदिकधर्मस्य च पुनःसंस्थापनाय अयं सम्पूर्णदेशे बभ्राम। सामाजिककुप्रथानां निवारणाय एषः आर्यसमाजस्य स्थापनां कृतवान्। महर्षिः विधवाऽबलानां दलितवर्गाणां गवां च उद्धाराय सदैव प्रायतत। स्वातन्त्र्यभावनाऽपि प्रथममनेनैव महर्षिणास्माकं हृदयेषु जागरिता । नानाविधानि दुःखानि सोढ्वापि नायं कर्त्तव्यविमुखो जातः। येनास्य महापुरुषस्य ख्यातिः सर्वत्र व्याप्ता।

शब्दार्था :
पाखण्डः-दिखावा-hypocrisy; उन्मूलनाय-दूर करने के लिए-to eradicate; प्रायतत-प्रयत्नशील रहे-Made efforts; सोढ्वापि-सहकर भी-Even after bearing; बभ्राम-घूमे-Wandered; व्याप्ता-फैल गई-Spread.

अनुवाद :
दयानन्द भी गुरु की आज्ञा को शिरोधार्य कर पाँव छूकर और आशीर्वाद लेकर इस देश के निवासी लोगों को अज्ञानता रूपी अन्धकार से उबारने के कार्य क्षेत्र में आ गए। गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए देश व समाज की उन्नति के लिए लगातार भारतीय संस्कृति का प्रचार किया। दिखातों को दूर करने और वैदिक धर्म की फिर से स्थापना के लिए यह पूरे देश में घूमे। सामाजिक कुप्रथाओं को हटाने के लिए इन्होंने आर्यसमाज की स्थापना की। महर्षि ने विधवाओं, अबलाओं, दलित वर्गों और गायों के उद्धार के लिए सदैव प्रयास किए। स्वतंत्रता की भावना भी सबसे पहले इन महर्षि ने ही हमारे मन में जगाई। अनेक प्रकार के दुख सहकर भी यह कर्तव्य विमुख नहीं हुए। जिससे इन महापुरुष की ख्याति सब जगह फैल गई।

English :
Entered the field of removing the darkness of ignorance-preached Indian culture for the upliftment of the nation and the society-deadset on removing hypocrisy and re-establishing vedic religion-Founded ‘Arya Samai’ to remove evil social practicesawakened the sense of freedom in human hearts-Afflictions failed to disincline him towards duty.

5. अयं महापुरुषः चिरोपेक्षितवेदानां प्रचारमकरोत्। एतस्य विशिष्टः सन्देशः आसीत् यत्-जनाः वेदान् प्रत्यागच्छेयुः। ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका- सत्यार्थप्रकाशसंस्कारविधिप्रभृतिग्रन्थाः एतेन विरचिताः। अक्टूबरमासे त्रिंशत् दिनाङ्के त्र्यशीत्युत्तराऽष्टादशशततमे (30/10/1883) ईशवीये वर्षे एषः भौतिकं शरीरं विहाय यशःशरीरेणामरोऽभवत्।।

महर्षि: दयानन्दः सत्यस्य धैर्यस्य ब्रह्मचर्यस्य च मूर्तिरासीत्। एतस्य चरितं सदैव भारतीयानां कृते अनुकरणीयमस्ति। एतादृशाः महात्मानः सर्वदा वन्द्या अविस्मरणीयाश्च भवन्ति।

शब्दार्था :
चिरोपेक्षितवेदानाम्-बहुत समय से उपेक्षित वेदों का-of long neglected vedas; विहाय-छोड़कर-leaving aside; वन्धा-वन्दनीय-adorable, venerable.

अनुवाद :
यह महापुरुष बहुत समय से उपेक्षित वेदों का प्रचार करते रहे। इनका प्रमुख सन्देश था-“लोग वेदों की ओर वापस आएँ (जावे)। ऋग्वेद आदि भाष्यभूमिका-सत्यार्थ प्रकाश-संस्कारविधि आदि अनेक ग्रन्थ इनके द्वारा रचे गए। अक्टूबर मास में 30 तारीख को सन् 1883 ई. में इस भौतिक शरीर को छोड़कर यश रूपी शरीर के द्वारा वे अमर हो गए।

महर्षि दयानन्द सत्य, धैर्य, व ब्रह्मचर्य के प्रतीक थे। इनका चरित्र सदैव भारतीयों के लिए अनुकरण करने योग्य है। ऐसे महात्मा हमेशा वन्दनीय और अविस्मरणीय होते हैं।

English :
Preached long neglected vedas-‘Back to Vedas’ was his sermon. Composed texts like commentary on Rigveda, Satyartha Prakash and Sanskar Vidhi-Died on 30th October 1883-Personification of truth, forbearance and celibacy.

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 3 आँकड़ो का प्रबंधन Ex 3.2

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 3 आँकड़ो का प्रबंधन Ex 3.2

प्रश्न 1.
गणित की एक परीक्षा में 15 विद्यार्थियों द्वारा (25 में से) प्राप्त किए गए अंक निम्नलिखित हैं-
19, 25, 23, 20, 9, 20, 15, 10, 5, 16, 25, 20, 24, 12, 20
इन आँकड़ों के बहुलक और माध्यक ज्ञात कीजिए। क्या ये समान हैं?
हल:
आँकड़ों को आरोही क्रम में लिखने पर,
5, 9, 10, 12, 15, 16, 19, 20, 20, 20, 20, 23, 24, 25, 25
यहाँ, आँकड़ों में 20 अधिक बार (4 बार) आया है। बहुलक = 20
यहाँ n = 15 (विषम)
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 3 आँकड़ो का प्रबंधन Ex 3.2 3
= 8 वाँ पद
= 20

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
एक क्रिकेट मैच में खिलाड़ियों द्वारा बनाये गये रन इस प्रकार हैं-
6, 15, 120, 50, 100, 80, 10, 15, 8, 10, 15
इन आँकड़ों के माध्य, बहुलक और माध्यक ज्ञात कीजिए। क्या ये तीनों समान हैं ?
हल:
आँकड़ों को आरोही क्रम में रखने पर, 6, 8, 10, 10, 15, 15, 15, 50, 80, 100, 120
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 3 आँकड़ो का प्रबंधन Ex 3.2 1a
नहीं, माध्य, बहुलक और माध्यक समान नहीं हैं।

प्रश्न 3.
एक कक्षा के 15 विद्यार्थियों के भार (kg में) इस प्रकार हैं
38, 42, 35, 37, 45, 50, 32, 43, 43, 40, 36, 38, 43, 38,47.
(i) इन आँकड़ों के बहुलक और माध्यक ज्ञात कीजिए।
(ii) क्या इनके एक से अधिक बहुलक हैं ?
हल:
आँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर,
32, 35, 36, 37, 38, 38, 38, 40, 42, 43, 43, 43, 45,47,50

(i) ∵ यहाँ, सबसे अधिक बार आने वाली संख्याएँ 38 और 43 हैं।
∴ अतः आँकड़ों के अभीष्ट बहुलक 38 और 43 हैं।
यहाँ n = 15 (विषम)
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 3 आँकड़ो का प्रबंधन Ex 3.2 3
= 8 वें पद का मान
= 40
(ii) हाँ, इनमें एक से अधिक बहुलक हैं। इनके दो बहुलक हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
निम्नलिखित आँकड़ों के बहुलक और माध्यक ज्ञात कीजिए
13, 16, 12, 14, 19, 12, 14, 13, 14
हल:
आँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर,
12, 12, 13, 13, 14, 14, 14, 16, 19
∵ यहाँ, सबसे अधिक बार आने वाली संख्या = 14
∴ अभीष्ट बहुलक = 14
यहाँ n = 9 (विषम)
अतः माध्यक = (9 + 1/2 )वें पद का मान
= 5वें पद का मान
= 14

प्रश्न 5.
बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य:
(i) बहुलक आँकड़ों में से सदैव एक संख्या होती है।
(ii) माध्य दिए हुए आँकड़ों में से एक संख्या हो सकता
(iii) माध्यक आँकड़ों में से सदैव एक संख्या होता है।
(iv) आँकड़ों 6, 4, 3, 8, 9, 12, 13, 9 का माध्य 9 है।
हल:
(i) सत्य,
(ii) असत्य,
(iii) सत्य,
(iv) असत्य।

MP Board Solutions

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 78

प्रश्न 1.
दिया हुआ दण्ड आलेख विभिन्न का द्वारा बनायी गयी जल प्रतिरोधी (Water resistant) घड़ियों की जाँच के लिए किए गए एक सर्वेक्षण को दर्शाता इनमें से प्रत्येक कम्पनी ने यह दावा किया कि उनकी घड़ियाँ जल प्रतिरोधी हैं। एक जाँच के बाद उपर्युक्त परिणाम प्रा हुए हैं।
(a) क्या आप प्रत्येक कम्पनी के लिए रिसाव (Leak) वाली घड़ियों की संख्या की जाँच की गयी कुल घड़ियों की संख्या से भिन्न बना सकते हैं ?
(b) इसके आधार पर आप क्या बता सकते हैं कि किस कम्पनी की घड़ियाँ बेहतर हैं ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 3 आँकड़ो का प्रबंधन Ex 3.2 4
हल:
(a) ग्राफ से, प्रत्येक कम्पनी द्वारा जाँच की गयी घड़ियों की संख्या = 40
रिसाव वाली घड़ियों की संख्या की कुल घड़ियों की संख्या से भिन्न :

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 3 आँकड़ो का प्रबंधन Ex 3.2 5
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 3 आँकड़ो का प्रबंधन Ex 3.2 5a
स्पष्ट है कि कम्पनी B की घड़ियाँ बेहतर हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
वर्षों 1995, 1996, 1997 और 1998 में अंग्रेजी और हिन्दी की पुस्तकों की बिक्री नीचे दी गयी है-
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 3 आँकड़ो का प्रबंधन Ex 3.2 6

एक दोहरा दण्ड आलेख खींचिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(a) किस वर्ष में दोनों भाषाओं की पुस्तकों को बिक्री का अन्तर न्यूनतम था ?
(b) क्या आप कह सकते हैं कि अंग्रेजी की पुस्तकों की माँग में तेजी से वृद्धि हुई है ? इसका औचित्य समझाइए।
हल:
(a) ग्राफ से स्पष्ट है कि दोनों भाषाओं की पुस्तकों की बिक्री का अन्तर वर्ष 1998 में न्यूनतम था।
(b) अंग्रेजी की पुस्तकों का दण्ड आलेख 100 बढ़ता ही गया है। इसलिए अंग्रेजी की पुस्तकों की माँग में तेजी से वृद्धि हुई।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 3 आँकड़ो का प्रबंधन Ex 3.2 6a

MP Board Class 7th Maths Solutions

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 16 राज्य की सरकार

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 16 राज्य की सरकार

MP Board Class 7th Social Science Chapter 16 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) हमारे देश में वर्तमान में राज्यों की कुल संख्या है –
(अ) 29
(ब) 27
(स) 35
(द) 25।
उत्तर:
(अ) 29

(2) विधानसभा का कार्यकाल होता है –
(अ) 6 वर्ष
(ब) 4 वर्ष
(स) 10 वर्ष
(द) 5 वर्ष।
उत्तर:
(द) 5 वर्ष

(3) राज्य सूची में कुल विषय सम्मिलित हैं –
(अ) 97
(ब) 62
(स) 42
(द) 22।
उत्तर:
(ब) 62

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(1) विधानसभा के सदस्य को …………. कहते हैं।
(2) विधानसभा की बैठकों की कार्यवाही का संचालन ……………. द्वारा किया जाता है।
(3) मध्य प्रदेश की विधानसभा में सदस्यों की कुल संख्या ……………. है।
(4) विधानसभा सदस्य चुने जाने हेतु न्यूनतम आयु सीमा ………. वर्ष है।
उत्तर:
(1) विधायक या विधानसभा सदस्य
(2) विधान सभा अध्यक्ष
(3) 230
(4) 25 वर्ष।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 16 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव कानून कब बन जाता है ?
उत्तर:
राज्यपाल अथवा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव कानून बन जाता है।

(2) भारतीय संविधान में उल्लेखित विषय सूची के नाम बताइए।
उत्तर:
भारतीय संविधान में उल्लेखित निम्नलिखित सूचियाँ

  • संघ सूची
  • राज्य सूची
  • समवर्ती सूची, तथा
  • अवशिष्ट विषय सूची।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 16 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) विधानसभा सदस्य बनने के लिए निर्धारित अर्हताएँ कौन-कौन सी हैं ?
उत्तर:
विधानसभा सदस्य बनने के लिए निर्धारित अर्हताएँ निम्नलिखित हैं –

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • वह 25 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
  • वह दिवालिया अथवा पागल न हो।।
  • वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन लाभ के पद पर न हो।

(2) विधानसभा के गठन की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मध्य प्रदेश की विधानसभा हेतु 230 स्थान निर्धारित हैं। एक व्यक्ति एक ही क्षेत्र का विधायक हो सकता है। उपरोक्त स्थानों के लिए भारत का चुनाव आयोग केन्द्र व राज्य सरकार के परामर्श से एक अधिसूचना जारी करता है जिसमें चुनाव की तिथियाँ घोषित की जाती हैं। इन तिथियों में प्रत्याशियों द्वारा नामांकन फार्म भरे जाने, नाम वापस लिए जाने, मतदान एवं मतगणना की तिथि आम जनता को बताई जाती है। चुनावों का संचालन चुनाव आयोग की देखरेख में होता है। चुनाव आयोग द्वारा सभी चुने हुए विधायकों की सूची घोषित करने पर विधानसभा के गठन की प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है।

(3) विधानसभा के कार्य व शक्तियों को समझाइए।
उत्तर:
विधानसभा के दो मुख्य कार्य हैं –

  1. कानून बनाना, तथा
  2. वित्तीय कार्य (बजट को स्वीकृति प्रदान करना)।

1. कानून बनाना:
विधानसभा को राज्य सूची में वर्णित । सभी 62 विषयों पर राज्य की आवश्यकतानुसार कानून बनाने का अधिकार है। सरकार द्वारा सदन में विधेयक प्रस्तुत किया जाता है जिस पर चर्चा होती है। विचार विनिमय के पश्चात् सदन उस विधेयक को पारित करता है। सदन द्वारा पारित विधेयक को। राज्यपाल की अनुमति हेतु भेजा जाता है। राज्यपाल आवश्यकता होने पर उसे राष्ट्रपति के पास भेज सकता है। राष्ट्रपति अथवा। राज्यपाल के हस्ताक्षर हो जाने के बाद विधेयक अधिनियम का रूप ले लेता है।

2. वित्तीय कार्य:
विधानसभा राज्य की वित्तीय व्यवस्था पर नियंत्रण रखती है। प्रतिवर्ष विधान सभा में वित्तमन्त्री द्वारा राज्य का आय-व्यय विधेयक (बजट) प्रस्तुत होता है। विधानसभा द्वारा बजट पारित होने पर इसे राज्यपाल के हस्ताक्षर हेतु भेजा जाता है। राज्यपाल के हस्ताक्षर होने के बाद सभी वित्तीय कार्य संचालित होते हैं। इसके अतिरिक्त विधान सभा कार्य विभिन्न माध्यमों से जनहित के कार्यों, सरकारी योजनाओं, विभागीय कार्यवाहियों आदि के सम्बन्ध में जानकारियाँ प्राप्त करना है।

विधानसभा की शक्तियाँ:
विधान सभा सरकारी विभागों द्वारा किए गए कार्यों पर नियन्त्रण रखती है। यह कार्य विधानसभा सदस्य विभिन्न प्रस्तावों के माध्यमों से करते हैं। ऐसे प्रस्ताव काम रोको प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण, प्रश्न पूछना, बजट में कटौती प्रस्ताव आदि हैं। गम्भीर स्थिति उत्पन्न होने पर सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव भी पेश किया जा सकता है।

MP Board Class 7th Social Science Solutions

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 15 राष्ट्रपति एवं केन्द्रीय मन्त्रि-परिषद

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 15 राष्ट्रपति एवं केन्द्रीय मन्त्रि-परिषद

MP Board Class 7th Social Science Chapter 15 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) राष्ट्रपति का कार्यकाल होता है –
(अ) 6 वर्ष
(ब) 1 वर्ष
(स) 5 वर्ष
(द) 4 वर्ष।
उत्तर:
(स) 5 वर्ष

(2) क्षमादान का अधिकार प्राप्त है –
(अ) प्रधानमन्त्री को
(ब) रक्षामन्त्री को
(स) उपराष्ट्रपति को
(द) राष्ट्रपति को।
उत्तर:
(2) (द) राष्ट्रपति को।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन ………. होता है।
(2) मन्त्रियों में विभागों का बँटवारा ………. करता है।
(3) राष्ट्रपति के चुनाव में राज्य विधानमण्डलों और …………….. के सदस्य मतदान करते हैं।
(4) राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति …………. के द्वारा की जाती है।
उत्तर:
(1) सभापति
(2) प्रधानमन्त्री
(3) संसद
(4) राष्ट्रपति।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) किसी विधेयक पर उपराष्ट्रपति द्वारा मतदान में क्यों भाग नहीं लिया जाता है ?
उत्तर:
क्योंकि वे राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य नहीं होते हैं।

(2) राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश कब जारी किया जाता है ?
उत्तर:
जब संसद की बैठकें न हो रही हों तथा किसी विषय पर कानून बनाने की आवश्यकता पड़ जाए तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है।

(3) संसदीय शासन प्रणाली में कितने प्रकार की कार्यपालिकाएँ होती हैं ?
उत्तर:
संसदीय शासन प्रणाली में दो प्रकार की कार्यपालिकाएँ होती हैं –

  • नाममात्र की कार्यपालिका, एवं
  • वास्तविक कार्यपालिका।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) भारत का राष्ट्रपति बनने के लिए कौन-कौन सी। अर्हताएँ आवश्यक है?
उत्तर:
भारत का राष्ट्रपति बनने के लिए निम्नलिखित। अर्हताएँ आवश्यक हैं –

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • वह 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
  • वह लोकसभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता रखता हो।
  • वह किसी सरकारी लाभ के पद पर न हो।

(2) राष्ट्रपति को प्राप्त शक्तियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राष्ट्रपति को निम्नलिखित शक्तियाँ प्राप्त हैं –

  • राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री की नियुक्ति करते हैं तथा प्रधानमन्त्री के सुझाव पर अन्य मन्त्रियों की भी नियुक्ति करते हैं।
  • राष्ट्रपति राज्यों के राज्यपाल, सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं।
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है।
  • राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने का अधिकार है। ऐसे अध्यादेशों को कानून के ही समान मान्यता प्राप्त है।
  •  राष्ट्रपति को क्षमादान का अधिकार प्राप्त है। न्यायालय द्वारा दिए गए किसी व्यक्ति के मृत्युदण्ड को राष्ट्रपति चाहे तो माफ कर सकते हैं या सजा को आजीवन कारावास में बदल सकते हैं।

MP Board Class 7th Social Science Solutions

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 26 बाल अधिकार एवं मानव अधिकार

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 26 बाल अधिकार एवं मानव अधिकार

MP Board Class 7th Social Science Chapter 26 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से सही शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(निधि, समानता, अधिकार, व्यवसाय, सर्वांगीण, जन्मसिद्ध, संस्कृति, स्वास्थ्यवर्धक)
(1) जीवन जीने का अधिकार हमारा ………… अधिकार
(2) विश्व के समस्त बच्चों को ……….. भोजन मिलना चाहिए।
(3) सभी मानवों को अपनी भाषा, लिपि और ……….. के संरक्षण का अधिकार है।
(4) मानव, समाज की ………. है।
(5) अपनी योग्यता के अनुसार कानूनी दायरे में हमें कोई भी ………….. चुनने का अधिकार है।
(6) बच्चों को अपने …………… विकास के लिए उचित सुविधा और साधन प्राप्त करने का अधिकार है।
(7) सभी नागरिकों को अवसरों की ……………. अधिकार है। का
उत्तर:
(1) जन्मसिद्ध
(2) स्वास्थ्यवर्धक
(3) संस्कृति
(4) निधि
(5) व्यवसाय
(6) सर्वांगीण
(7) समानता।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 26 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 2.
(1) समाचार-पत्र में क्या छपा था ?
उत्तर:
समाचार – पत्र में छपा था “संयुक्त परिवारों में पुत्रियों को अचल सम्पत्ति में बराबर का अधिकार दिलाने वाले हिन्दू उत्तराधिकार (संशोधित) विधेयक 2005 को सोमवार, दिनांक 29 अगस्त, 2005 को संसद की मंजूरी मिल गई।”

(2) लता ने वह समाचार किसे पढ़कर सुनाया ?
उत्तर:
लता ने वह समाचार अपनी सहेलियों को पढ़कर सुनाया।

(3) छात्राएँ कक्षा में दीदी से क्या-क्या जानना चाहती थीं?
उत्तर:
छात्राएँ कक्षा में दीदी से समाचार में छपी खबर एवं बाल अधिकारों के बारे में जानना चाहती थीं।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 26 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) प्रमुख बाल अधिकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रमुख बाल अधिकार अग्रलिखित हैं –
(1) जीवन जीने का अधिकार:

  • जीवित रहना बच्चों का बुनियादी अधिकार।
  • बच्चे को विकास के पूरे अवसर देना राज्य का कर्त्तव्य।
  • बच्चे को अपने परिवार के साथ रहने का अधिकार, परिवारविहीन बच्चों को संरक्षण।
  • बच्चों का सही पालन-पोषण करना परिवार का दायित्व तथा माता-पिता को सहायता देना राज्य का दायित्व।
  • पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएँ पाने का अधिकार।
  • स्वास्थ्य, भोजन, स्वच्छ जल, सुरक्षित आश्रय पाने का अधिकार।
  • जीवन के खतरों से सुरक्षा पाने का अधिकार।
  • शिशु मृत्यु दर कम करने हेतु राज्य का दायित्व।

(2) शिक्षा का अधिकार:

  • शिक्षा एवं व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास हेतु उचित सुविधाएँ एवं साधन पाने का अधिकार।
  • सभी बच्चों को प्राथमिक स्तर तक निःशुल्क शिक्षा का अधिकार।
  • शिक्षा एवं विकास में आने वाली बाधाओं से संरक्षण।
  • बच्चों को अपनी भाषा, धर्म और संस्कृति से दूर न करना।

(3) अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता, सूचना और संगठन बनाने का अधिकार:

  • अपनी आत्मा की आवाज को व्यक्त करने – और धर्म की स्वतन्त्रता।
  • समाज में सक्रिय भूमिका निभाने का अधिकार।
  • बच्चों को अपनी क्षमताओं एवं अभिरुचियों को विकसित करने का अधिकार।
  • आयु के अनुसार कानूनी सीमा में अपना संगठन बनाने का अधिकार।

(4) शोषण के विरुद्ध सुरक्षा का अधिकार:

  • बच्चों को सामाजिक एवं उनके साथ दुर्व्यवहार से सुरक्षा।
  • शोषण और क्रूरता से बच्चों को परिवार से अलग कर देने के विरुद्ध सुरक्षा।
  • गैर-कानूनी धन्धों में बच्चों को लगाने के विरुद्ध रोक।
  • बच्चों द्वारा मादक द्रव्यों के उपयोग एवं उनको उनके विक्रय करने से बचाना राज्य का दायित्व।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 26 अभ्यास प्रश्न – 2

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन किस वर्ष हुआ है ?
(अ) 1993
(ब) 1992
(स) 1990
(द) 1997
उत्तर:
(अ) 1993

(2) मध्य प्रदेश में मानव अधिकार आयोग का गठन कब किया गया ?
(अ) 17 सितम्बर, 1993 को
(ब) 13 सितम्बर, 1995 को
(स) 13 अक्टूबर, 1996 को
(द) 13 नवम्बर, 1993 को।
उत्तर:
(ब) 13 सितम्बर, 1995 को।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 26 लघु उत्तरीय प्रश्न – 2

प्रश्न 2.
(1) मानव अधिकारों के विषय में संयुक्त राष्ट्र संघ की विश्वव्यापी घोषणा क्या है ?
उत्तर:
मानव अधिकारों के विषय में संयुक्त राष्ट्र संघ की विश्वव्यापी घोषणा -“मानव अधिकारों की विश्वव्यापी घोषणा में राजनैतिक और नागरिक स्वतन्त्रता का उल्लेख किया गया है। इसमें आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लेख है।” यह घोषणा सिद्धान्तों का एक विवरण है। वे कानूनी रूप से बन्धनकारी नहीं है। ये दायित्वों का विवरण है। फिर भी ये अधिकार विश्व का सर्वाधिक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना गया है।

(2) मानव अधिकार समाज के लिए कितने उपयोगी हैं ?
उत्तर:
मानव अधिकार समाज के स्वरूप का एक बुनियादी अंग है। विश्व बन्धुत्व की भावना को दृढ़ व स्थायी बनाने के लिए इन अधिकारों का सहारा लिया जाने लगा है। मानव अधिकारों की घोषणा से स्वाधीनता और सम्मान को बल मिला है। राष्ट्रों के बीच सुरक्षा की भावना बढ़ी है तथा विश्व शान्ति की सम्भावना बढ़ी है।

(3) मानव अधिकारों का अन्तर्राष्ट्रीय मानव अधिकार वर्ष किस वर्ष में मनाया गया?
उत्तर:
मानव अधिकारों का अन्तर्राष्ट्रीय मानव अधिकार वर्ष संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 1968 में मनाया।

(4) यदि सरकार मानव अधिकारों की रक्षा नहीं करे, तो उस पर निगरानी कौन करता है?
उत्तर:
यदि सरकार मानव अधिकारों की रक्षा नहीं करे, तो मानव अधिकार आयोग उस पर निगरानी करता है। वह सरकार को अपने दायित्वों का पालन करने हेतु निर्देशित करता है।

(5) आतंकवाद द्वारा मानव अधिकारों का उल्लंघन कैसे होता है?
उत्तर:
आतंकवादी अपनी शर्तों, नीतियों व अपने विचारों से विश्व को चलाना चाहते हैं और वे इसके लिए हिंसा का मार्ग चुनते हैं। हिंसा का मार्ग चुनना मानव अधिकारों का उल्लंघन है।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 26 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न – 2

प्रश्न 3.
(1) मानव अधिकारों की सूची बनाइए। इन अधिकारों की भावना को प्रोत्साहन देने के लिए कौन-सी परिषद् कार्य करती है?
उत्तर:
मनुष्यों को निम्नलिखित मानव अधिकार प्राप्त हैं –

  • जीवन की स्वतन्त्रता का अधिकार।
  • समानता का अधिकार।
  • सम्पत्ति का अधिकार।
  • देश के शासन में भाग लेने तथा सरकारी सेवाओं में चयन हेतु समानता का अधिकार।
  • अपराध प्रमाणित न होने तक निर्दोष समझे जाने का अधिकार।
  • बिना किसी जाँच के बन्दी बनाए जाने, नजरबन्द करने, देश से निकालने से स्वतन्त्रता का अधिकार।
  • स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका द्वारा सुनवाई का अधिकार।
  • मत व अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का अधिकार।
  • शान्तिपूर्वक सभा आयोजित करने का अधिकार।
  • दासता, विवेक और धर्म की स्वतन्त्रता का अधिकार।
  • उत्पीड़न अथवा क्रूर अमानुषिक या अपमानजनक व्यवहार या दण्ड से स्वतन्त्रता का अधिकार।।
  • उचित व अनुकूल व्यवस्थाओं के अन्तर्गत काम करने का अधिकार।
  • समान कार्य के लिए समान वेतन का अधिकार।
  • अवकाश व विश्राम का अधिकार।
  • शिक्षा का अधिकार व समाज के सांस्कृतिक जीवन में भाग लेने का अधिकार।

इन अधिकारों की भावनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की आर्थिक व सामाजिक परिषद् कार्य करती है।

(2) मानव अधिकार आयोग पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मानव अधिकारों की रक्षा के लिए फरवरी 1946 में संयुक्त राष्ट्र संघ की आर्थिक व सामाजिक परिषद् ने मानव अधिकार आयोग की स्थापना की। मानव अधिकारों का क्रियान्वयन तथा उनकी रक्षा समस्त राष्ट्रों का दायित्व है। संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी देशों ने अपने – अपने देश में मानव अधिकार आयोग का गठन किया है। अक्टूबर 1993 में भारत ने भी राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग गठित किया है। यदि कहीं कोई मानव अधिकारों का उल्लंघन होता है तो मानव अधिकार आयोग सरकार को अपने दायित्वों का पालन करने हेतु निर्देशित करता है। शासकीय दबावों और ज्यादतियों के खिलाफ मानव अधिकार आयोग हस्तक्षेप कर सकता है।

MP Board Class 7th Social Science Solutions

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 7 विश्वभारतीयम्

In this article, we will share MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 7 विश्वभारतीयम् Pdf, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 7 विश्वभारतीयम् (संवादः) (सङ्कलितः)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 7 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए-)।
(क) ‘संस्कृतभाषा भारतीयभाषाभ्यः गङ्गानदी अस्ति’ इति कः उक्तवान्?’ (संस्कृतभाषा भारतीय भाषाओं के लिए गंगा नदी है।’ यह किसने कहा?)
उत्तर:
महात्मागान्धिः (महात्मा गांधी ने)

MP Board Solutions

(ख) भारतस्य प्रथमप्रधानमन्त्री कः आसीत्? (भारत का पहला प्रधानमन्त्री कौन था?)
उत्तर:
पं. जवाहरलाल नेहरूः (पं. जवाहरलाल नेहरू)

(ग) वैयाकरणेषु पूर्णः सर्वमान्यश्च कः? (वैयाकरणों में पूर्ण व सर्वमान्य कौन है?)
उत्तर:
पाणिनिः (पाणिनि)

(घ) भारतीयैकता साधकं किम्? (भारतीय एकता का साधक कौन है?)
उत्तर:
संस्कृतम् (संस्कृत)

(ङ) संस्कृतं कस्याः भाषायाः अपेक्षया अधिक समृद्धम्? (संस्कृत किस भाषा की अपेक्षा अधिक समृद्ध है?)
उत्तर:
लैटिन भाषायाः (लैटिन भाषा की)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत- (एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) संस्कृतभाषा कस्य पोषणं करोति? (संस्कृत भाषा किसका पोषण करती है?)
उत्तर:
संस्कृतभाषा विश्वबन्धुत्वस्व पोषणं करोति। (संस्कृत भाषा विश्वबन्धुत्व का पोषण करती है।)

(ख) सर्वप्राचीना भाषा का अस्ति? (सबसे पुरानी भाषा कौन-सी है?)
उत्तर:
सर्वप्राचीना भाषा संस्कृतभाषा अस्ति। (सबसे पुरानी भाषा संस्कृत है।)

(ग) श्रीमाता संस्कृतविषये किं कथयति? (श्रीमाता संस्कृत के विषय में क्या कहती हैं?)
उत्तर:
श्रीमाता संस्कृतविषये कथयति यत्-“संस्कृतमेवराष्ट्रभाषा भवितुम् अर्हति इति।”

(श्रीमाता ने संस्कृत के विषय पर कहा कि, “संस्कृत ही राष्ट्रभाषा बनने योग्य है।)

MP Board Solutions

(घ) मैक्समूलरः संस्कतविषये किमुक्तवान्? (मैक्समूलर ने संस्कृत के विषय में क्या कहा?)
उत्तर:
मैक्समूलरः संस्कृतविषये उक्तवान् यत्-“संस्कृतं विश्वस्य महत्तमा भाषा अस्ति।” इति। (मैक्समूलर ने संस्कृत के विषय पर कहा कि, ‘संस्कृत विश्व की सबसे महत्वपूर्ण भाषा है।)

(ङ) अस्माकं सर्वेषां जननी का? (हम सब की जननी कौन है?)
उत्तर:
अस्माकं सर्वेषां जननी भारतमाता अस्ति। (हम सबकी जननी भारतमाता है।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) संस्कृतविषये विवेकानन्देन किं कथितम्? (संस्कृत विषय पर विवेकानन्द ने क्या कहा?)
उत्तर:
संस्कृतविषये विवेकानन्देन कथितम्- “संस्कृतम् अनिवार्यतया शिक्षणीयम्, तोहि तस्योच्चारणध्वनिरेव राष्ट्रियभावम् आत्मगौरवम् उदात्तभावञ्च जनयति। किन्तु अस्माभिः सर्वैरपि भारतीयैः संस्कृतस्य प्रसारे प्रचारे च प्रयत्नः न क्रियते इति खेदस्य विषयः।’

(संस्कृत के विषय पर विवेकानन्द ने कहा, “संस्कृत अनिवार्य रूप से पढ़नी चाहिए, क्योंकि उसकी उच्चारण ध्वनि से ही राष्ट्रीय भाव, आत्मगौरव और उदात्तभाव उत्पन्न होता है। किन्तु हम सभी भारतीयों के द्वारा संस्कृत के प्रसार और प्रचार में प्रयत्न नहीं किया जाता, यह दुख का विषय है।”)

(ख) वेबरमहोदयेन संस्कृतविषये किमुक्तम्? लिखत। (वेबर महोदय ने संस्कृत के विषय पर क्या कहा? लिखो।)
उत्तर:
वेबरमहोदयेन संस्कृतविषये उक्तम्- “सम्प्रति सम्पूर्ण विश्वे पाणिनिरेव वैयाकरणेषु पूर्णः सर्वमान्यश्चास्ति। दर्शने व्याकरणे च प्रामाणिकतायाम् उर्वरतायाञ्च भारतीयाः उच्चतमस्थले प्रतिष्ठिताः।

(वेबर महोदय ने संस्कृत के विषय में कहा, “अब पूरे विश्व में पाणिनी ही वैयाकरणों में पूर्ण व सर्वमान्य है। दर्शन में और व्याकरण में प्रामाणिकता और उर्वरता में भारतीयों का सबसे ऊँचा स्थान है।”)

(ग) एच.एच. विल्सनमहोदयः संस्कृतविषये किम् उक्तवान्?
(एच.एच. विल्सनमहोदय ने संस्कृत के विषय पर क्या कहा?)
उत्तर:
च.एच. विल्सन महोदयः संस्कृतविषये उक्तवान्-“न जाने अत्र संस्कृते किं तन्माधुर्यं विद्यते, येन वयम् वैदेशिकाः सर्वदैव समुन्मत्ता।”

(एच.एच. विल्सन महोदय ने संस्कृत के विषय पर कहा, “नहीं जानता कि इस संस्कृत में कौन-सा माधुर्य है, जिससे हम विदेशी हमेशा ही उन्मत्त होते हैं।”)

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
उचितशब्देन रिक्तस्थानापूर्तिं कुरुत (दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(क) भारतीयैकता………….संस्कृतम। (बाधक/साधक)
(ख) ………….वैदेशिकः विद्वान् अस्ति। (मैक्समूलरः/अरविन्दः)
(ग) ………….सम्पोषकं संस्कृतम्। (देशत्व/विश्वबन्धुत्व)
(घ) संस्कृतभाषा प्राचीनर्वाचीनयोर्मध्ये………….अस्ति। (सेतुः/केतुः)
(ङ) संस्कृतराहित्यं मानवजातेः कृते………….अस्ति। (अमूल्यधनम्/मूल्यधनम्)
उत्तर:
(क) साधकं
(ख) मैक्समूलरः
(ग) विश्वबन्धुत्व
(घ) सेतुः
(ङ) अमूल्यधनम्

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(कस्य कः कथनांशः अस्ति) (उचित क्रम से जोडिए-) (कौन-सा कथन किसका है?)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 7 विश्वभारतीयम् img 1
उत्तर:
(क) 5
(ख) 3
(ग) 4
(घ) 2
(ङ) 1

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षं ‘न’ इति लिखत (शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) संस्कृतं विश्वस्य महत्तमा भाषा अस्ति।
(ख) संस्कृतस्य व्याकरणं सर्वमान्यं न अस्ति।
(ग) संस्कृतभाषायाः अपेक्षा ग्रीकभाषा अधिकपूर्णा वर्तते।
(घ) संस्कृतमाधुर्यं वैदेशिकैः अपि अनुभूतम्।
(ङ) भारतीयैकतार्थं संस्कृतम् आवश्यकम् अस्ति।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) आम्

प्रश्न 7.
निम्नलिखितशब्दानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनं च लिखत (नीचे लिखे शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति व वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 7 विश्वभारतीयम् img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 7 विश्वभारतीयम् img 3

प्रश्न 8.
क्रियापदानां धातुं, लकारं, पुरुषं, वचनं च लिखत (क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखिए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 7 विश्वभारतीयम् img 6
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 7 विश्वभारतीयम् img 4

प्रश्न 9.
अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत। (नीचे लिखे पदों के सन्धि विच्छेद कर सन्धि का नाम लिखिए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 7 विश्वभारतीयम् img 7
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 7 विश्वभारतीयम् img 5

प्रश्न 10.
अव्ययैः वाक्यनिर्माणं कुरुत
(अव्ययों से वाक्य बनाइए।)
यथा- एव संस्कृतभाषा एवं देववाणी अस्ति।
उत्तर:
शब्द – वाक्य
(क) यदि-यदि सः न आगमिष्यति तर्हि किं?
(यदि वह न आया तो क्या होगा?

(ख) विना-अहं त्वाम् विना न गमिष्यामि।
(मैं तुम्हारे बिना नहीं जाऊँगी।)

(ग) यत्-सः कथयति यत्- ‘अहं कार्यं न करोमि।’
(वह कहता है कि-“मैं काम नहीं करता हूँ।”)

(घ) च-रामः श्यामः च आपणं गच्छतः।
(राम और श्याम बाजार जाते हैं)

(ङ) कृते-अहं तव कृते कार्यं करोमि।
(मैं तुम्हारे लिए काम कर रहा हूँ।)

योग्यताविस्तार –

संस्कृतभाषाविषये अन्ये के के विद्वांसः किं किमुक्तवन्तः अन्विष्य लिखत।
संस्कृतभाषा के विषय पर अन्य कौन-से विद्वान क्या कहते हैं, ढूँढ़ कर लिखो।

‘संस्कृतभाषा’ इति विषयमगधृत्य निबन्धं लिखत।
‘संस्कृत भाषा’ इस विषय के आधार पर निबन्ध लिखो।

MP Board Solutions

विश्वभारतीयम्  पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में सरकत भाषा की महत्ता बताते हुए अनेक राजनेताओं, देशी व विदेशी साहित्यकारों के संस्कत के विषय में मतों का वर्णन किया गया है। सभी ने संस्कृत भाषा का स्थान सव भाषाओं में सर्वोच्च बताते हुए उसे सम्मानीय भाषा कहा है तथा संस्कृत भाषा को सब भाषाओं की जननी स्वीकार किया है।

विश्वभारतीयम् पाठ का अनुवाद

1. आचार्यः-भोः छात्राः! ध्यानेन श्रृण्वन्तु। वयं संस्कृतं पठामः, लिखामः, वदामः, किञ्चिन्महत्त्वमपि जानीमः। किन्तु संस्कृतस्य विषये भारतीयाः वैदेशिकाः विद्वान्सः किं कथयन्ति भवन्तः जानन्ति वा?
सर्वे छात्राः-आचार्य! न जानीमः।

आचार्य :
तर्हि अद्य संस्कृतविषये मूर्धन्यविदुषां प्रसिद्धराजनेतृणां वैदेशिकानां विचाराणां। चर्चा कुर्मः।

दिशा :
आचार्य! के के भारतीयाः विद्वान्सः संस्कृतविषये उक्तवन्तः?

आचार्य :
नैके विद्वान्सः, राजनेतारः, साहित्यकारश्च संस्कृतस्य महत्त्वं प्रतिपादितवन्तः। भारतीयेषु महात्मागान्धि, पं जवाहरलालनेहरू- महर्षिअरविन्दस्वामिविवेकानन्दप्रभृतयः, तथा च वैदेशिकेषु मैक्समूलर- मैक्डानल-वेबर, विलियम-बॉप-हीरेन प्रभृतयः उल्लेखनीयाः।

शब्दार्थ :
शृण्वन्तु-सुनो-listen; मूर्धन्य-महान-top ranking, विदुषाम्-विद्वानों के-learned people, नैके-अनेक-many, प्रभृतपः-इत्यादि-etcetera.

अनुवाद :
आचार्य-छात्रो! ध्यान से सुनो। हम संस्कृत पढ़ते हैं, लिखते हैं, बोलते हैं, थोड़ा महत्व भी जानते हैं। किन्तु संस्कृत के विषय पर भारतीय व विदेशी विद्वान, क्या कहते हैं, जानते हो या नहीं?

सभी छात्र-आचार्य! नहीं जानते।

आचार्य :
तो आज संस्कृत विषय पर महान विद्वानों के प्रसिद्ध राजनेताओं के और विदेशियों के विचारों की चर्चा करते हैं।

दिशा :
आचार्य! कौन-से भारतीय विद्वानों ने संस्कृत के विषय पर कहा है?

आचार्य :
अनेक विद्वान्, राजनेता और साहित्यकारों ने संस्कृत के महत्व को बताया है। भारतीयों में महात्मा गांधी, पं. जवाहरलात नेहरू, महर्षि अरविन्द, स्वामी विवेकानन्द इत्यादि और वैसे ही विदेशियों में मैक्समूलर, मैक्डानल, वेबर, विलियम, बॉप, हीरेन इत्यादि प्रमुख हैं।

English :
The teacher refers to top ranking scholars and lovers of Sanskrit.

Many Indian scholars, political leaders and literary persons loved Sanskrit. Many foreign scholars are also noteworthy.

2. मृदुलः-आचार्य! महात्मागांधिः संस्कृतविषये किमुक्तवान्?
आचार्य :
महात्मागान्धिः अवदत्-“यत् संस्कृतम् अस्माकं भारतीयभाषाभ्यः गङ्गा : नदी अस्ति। अहं चिन्तयामि यदि संस्कृतगङ्गा शुष्का भवेत् तर्हि सर्वाः अपि भाषाः सारहीनाः स्युः।”

MP Board Solutions

प्रत्युष :
स्वामिविवेकानन्दः किमुक्तवान्?

आचार्य :
विवेकानन्दः उक्तवान् यत् “संस्कृतम् अनिवार्यतया शिक्षणीयम्, यतोहि तस्योच्चारणध्वनिरेव राष्ट्रियभावम् आत्मगौरवम् उदात्तभावञ्च जनयति। किन्तु अस्माभिः सर्वैरपि भारतीयैः संस्कृतस्य प्रसारे प्रचारे च प्रयत्नः न क्रियते इति खेदस्य विषयः।”

अनिकेत :
भारतस्य प्रथमप्रधानमन्त्री पं. जवाहरलालनेहरूः अपि संस्कृतभक्तः इति श्रूयते। असौ संस्कृतभाषाविषये किं चिन्तयति?

शब्दार्थाः :
शुष्का-सूखी-dry, सारहीनाः-साररहित- meaningless.

अनुवाद :
मृदुल-आचार्य! महात्मा गान्धी ने संस्कृत के विषय में क्या कहा?

आचार्य :
महात्मा गान्धी ने कहा- ‘संस्कृत हमारी भारतीय भाषाओं के लिए गङ्गा नदी है। मैं सोचता हूँ कि यदि संस्कृत रूपी गङ्गा सूख जाए तो सारी भाषाएँ भी ‘सारहीन हो जाएंगी।
प्रत्यूष-स्वामी विवेकानन्द ने क्या कहा?

आचार्य :
विवेकानन्द ने कहा कि-“संस्कृत अनिवार्य रूप से सीखनी चाहिए, क्योंकि उसकी उच्चारण ध्वनि से ही राष्ट्रीय भाव, आत्मगौरव और उदात्त (ऊँचा) भाव उत्पन्न होता है। किन्तु हम सब भारतीयों के द्वारा संस्कृत का प्रसार और प्रचार का प्रयत्न नहीं किया जा रहा, यह दुख का विषय है।

अनिकेत :
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू भी संस्कृत के भक्त थे, ऐसा सुना है। वे संस्कृत भाषा के विषय पर क्या सोचते हैं?

English :
Gandhi calied Sanskrit as Ganga or the source of all the Indian languages. Swami Vivekananda pitied that Sanskrit is neglected which arouses national sentiments.

Pt. Nehru’s views about Sanskrit.

3. आचार्यः :
संस्कृतसन्दर्भे एकदा पं. नेहरूः उक्तवान् यत्-“यदि कश्चित् मां पृच्छेत् यत् भारतस्य उदात्ततमकोषः कः? अथवा भारतस्य सर्वश्रेष्ठा सम्पत्तिः का? तर्हि अहं तु कथयिष्यागि संस्कृतभाषा अथवा संस्कृतवाङमयम् एव। अहं विश्वसिमि यावत् संस्कृतभाषा जीवति, जीवने प्रभवति तावत भारतराष्ट्रस्य मूलभूता एकता स्थास्यत्येव।”

रजतः :
अन्येषां साहित्यकाराणां विषयेऽपि ज्ञातुम् इच्छामि।

आचार्यः :
आम्! अहं संक्षेपेण वदामि-साहित्यकारः राजनेता डॉ. सम्पूर्णानन्दः अवोचत् यत्-‘संस्कृतमेव अस्य देशस्य राष्ट्रभाषा भवितव्या ।संस्कृते अमूल्यरत्नानि सन्ति। संस्कृतं न केवलं जीवितानाम् अपितु दिवङ्गतानां कृतेऽपि सञ्जीवनी अस्ति।’ इति।

अपि च साहित्ये घुमक्कड़धर्मस्य प्रस्तावकः साहित्यकारः राहुलसांस्कृत्यायनोऽपि उक्तवान् यत्-“अस्मत्प्राचीनतमा वाणी संस्कृतरूपेण अधुनाऽपि विद्यमाना। तत्त्वतः यथा हिन्दीकथासाहित्यादिनाम् अध्ययनं भवति तथा संस्कृतग्रन्थानाम् अपि अध्ययनमध्यापनञ्च सर्वत्र भवेत्।”

शब्दार्थाः :
वाङमयम-वाणी, भाषा-language;विश्वसिमि-विश्वास करता हूँ-believe, दिवङ्गतानाम्-मरे हुए लोगों का-of the dead.

अनुवाद :
आचार्य-संस्कृत के सन्दर्भ में एक बार पं. नेहरू ने कहा कि, “यदि कोई मुझे पूछे कि भारत का सबसे ऊँचा/बड़ा खजाना क्या है? या भारत की सर्वश्रेष्ठ सम्पत्ति क्या है? तो मैं कहूँगा संस्कृत भाषा या संस्कृत वाणी। मैं विश्वास करता हूँ कि जब तक संस्कृत भाषा जीवित है, जीवन चल रहा है, तब तक भारत राष्ट्र की मूलभूत एकता स्थित है।

रजत :
अन्य साहित्यकारों के विषय में भी जानना चाहता हूँ।

MP Board Solutions

आचार्य :
हाँ! मैं संक्षेप में बताता हूँ-साहित्यकार राजनेता डॉ. संपूर्णानन्द ने कहा कि, “संस्कृत ही इस देश की राष्ट्रभाषा होनी चाहिए। संस्कृत में बहुमूल्य रत्न हैं। संस्कृत न केवल जीवित लोगों को अपितु मरे हुए लोगों के लिए भी संजीवनी है।।

और साहित्य में घुमक्कड़ धर्म के प्रवर्तक साहित्यकार राहुल सांस्कृत्यायन ने भी कहा-“यह सबसे पुरानी भाषा। वाणी संस्कृत रूप में अब भी विद्यमान है। तत्व के जैसे हिन्दी कथा साहित्यादि का अध्ययन होता है वैसे ही संस्कृत ग्रन्थों का भी अध्ययन और अध्यापन सब जगह होना चाहिए।”

English :
Nehru-Sanskrit is the noblest treasure of India-It is the basis of national integrity. Dr. Sampooranananda-Sanskrit enshrines precious jewels-It gives life to all. Rahul SanskrityayanaSanskrit should be invariably taught everywhere like Hindi as it is our oldest language.

4. गिरिराजः :
महर्षेः अरविन्दस्य संस्कृतविषये कोऽभिप्रायः?
आचार्यः :
महर्षिः प्राह “सरलसंस्कृतमेव भारतराष्ट्रस्य राष्ट्रभाषा भवेत्।” अयमेव भावः श्रीमातु कथनेऽपि दृश्यते सा “संस्कृतमेवराष्ट्रभाषाभवितुम् अर्हति।” इत्युक्तवती। अन्येऽपि प्रसिद्धाः नायकाः संस्कृतस्य प्रशसां कृतवन्तः महनीयतां च स्वीकृतवन्तः। यथा-प्रथमः राष्ट्रपतिः डॉ. राजेन्द्रप्रसादः कथितवान् यत् ‘संस्कृतसाहित्यं न केवलं भारतस्य कृते अपितु मानवजातेः कृते अमूल्यधनम् अस्ति।’

पङ्कजः :
आचार्य! अन्यधर्मावलम्बिनः अपि संस्कृतस्य प्रशंसकाः खलु?

आचार्यः :
आम्! प्रसिद्धः मुस्लिमविचारकः बदरुद्दीनतय्यबमहोदयः उक्तवान् यत् ‘मम मते प्रत्येकम् अपि हिन्दुः, मुस्लिमः भारतीयो वा संस्कृतज्ञो भवेदिति।’

अन्यच्च प्रसिद्धः न्यायवेत्तां मु अली छागला उक्तवान् यत्” ममेच्छा यत् मातृभाषया सह संस्कृतशिक्षा अनिवार्या भवेत्।’ संस्कृतभाषा प्राचीनार्वाचीनयोर्मध्ये सेतुरस्तीति।

शब्दार्थाः :
महनीयताम्-महानता को-greatness, ममेच्छा-मेरी इच्छा-my wish, प्राचीनार्वाचीनयोर्मध्ये-पुराने और नए के बीच-between old and new, सेतुरस्ति-पुल हैं-bridge, धर्मावलम्बितः-धर्म को मानने वाले-religious persons.

अनुवाद :
गिरिराज-महर्षि अरविन्द का संस्कृत विषय पर क्या अभिप्राय है?

आचार्य :
महर्षि ने कहा-“सरल संस्कृत ही भारतराष्ट्र की राष्ट्रभाषा होनी चाहिए।” यही भाव श्री माता के कथन में भी दिखाई देता है, वह ‘संस्कृत ही राष्ट्रभाषा होने योग्य है” कहती थी। अन्य प्रसिद्ध नायक भी संस्कृत की प्रशंसा करते हुए उसकी महानता को मानते हैं। जैसे-प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने कहा, “संस्कृत साहित्य न केवल भारत के लिए बल्कि मानव जाति के लिए अमूल्य धन है।”

पङ्कज :
आचार्य! अन्य धर्मानुयायी भी संस्कृत के प्रशंसक होंगे?

आचार्य :
हाँ! प्रसिद्ध भुस्लिम विचारक बदरुद्दीनतय्यबमहोदय ने कहा- “मेरे विचार में प्रत्येक हिन्दू व मुस्लिग जो भारतीय हो संस्कृत को जानने वाला हो।”

और अन्य प्रसिद्ध न्यायमूर्ति मु. अली छागला ने कहा-“मेरी इच्छा है कि मातृभाषा के साथ संस्कृतशिक्षा अनिवार्य हो।” संस्कृत भाषा प्राचीन और नवीन के बीच पुल है।

MP Board Solutions

English :
Maharishi Aurovindo and Shri Mata-Sanskrit should be the national language of India.

Dr. Rajendra Prasad-Sanskrit literature is a precious treasure not only for India but for the entire humanity.

Badruddin Tayyabji-Every Indian should learn Sanskrit. Mohd Ali Chhagla-Sanskrit is bridge between the old and the new.

5. सलीमः-आचार्य! संस्कृतविषये भारतीयानां मन्तव्यम् अवगतम्। अधुना वैदेशिकानां विषयेऽपि ज्ञातुम् इच्छामि।

आचार्यः :
साधूक्तं त्वया। इदानीमहं वैदेशिकविदुषां संस्कृतविषयकं मन्तव्यं बोधयामि। ‘विलड्यूरन्ट’ विख्यातः पाश्चात्यसमीक्षकः सः उक्तवान् यत् भारतम् अस्माकं जातेः जन्मभूमिः, तथा संस्कृतं यूरोपीयभाषाणां जननी अस्ति। संस्कृतमेव अस्माकं दर्शनस्य जननी, अरबदेशात् प्राप्तस्य गणितस्य जननी, ईसाईधर्मे समाहितानां बौद्धादर्शानां जननी, ग्रामीणसभुदायेन स्वायत्तशासनस्य तथा गणतन्त्रस्य जननी एवं प्रकारेण भारतमाता नानाविधरूपेषु अस्माकं सर्वेषां जननी अस्ति। जॉनः–वैदेशिकेषु मैक्समूलरमहोदयः विख्यातः। तेन किमुक्तम?

शब्दार्थाः :
मन्तव्यम्-विचार-view, अवगतम्-जान लिए-known, साधूक्तम्ठीक/बहुत अच्छा कहा-well spoken, पाश्चात्यसमीक्षकः-पश्चिमी देश के समीक्षकreviewers of western countries, विख्यातः-प्रसिद्ध-famous.

अनुवाद :
सलीम-आचार्य! संस्कृत विषय पर भारतीयों के विचार जान लिए। अब विदेशियों के विषय में भी जानना चाहता हूँ।

आचार्य :
तुम्हारे द्वारा सही कहा गया है। अब मैं विदेशी विद्वानों के संस्कृत विषयक विचारों को बताता हूँ। ‘विलड्यूरन्ट’ प्रसिद्ध पाश्चात्य समीक्षक, उसने कहा कि भारत हमारी जाति की जन्मभूमि है तथा संस्कृत यूरोपीय भाषाओं की जननी है। संस्कृत ही हमारे दर्शन की जननी है, अरब देश से प्राप्त गणित की जननी है। ईसाई धर्म में समाहित बौद्ध दर्शनों की जननी है, ग्रामीण समुदाय द्वारा स्वायत्तशासन की व गणतन्त्र की जननी है। इस प्रकार से भारतमाता अनेक प्रकार के रूपों में हम सबकी जननी है।

जॉन-विदेशियों में मैक्समूलर महोदय प्रसिद्ध हैं। उन्होंने क्या कहा?

English :
Wildurant-India is the birth place of our race and Sanskrit is the mother of all European languages and our philosophy. It is the mother of Arabic Mathematics–Mother of Buddhistic, philosophy-mother of autonomous and republic rule-Hence Mother India is ‘Mother of all’ in one way or the other.

6. आचार्यः-मैक्समूलरः उक्तवान् यत्-“संस्कृतं विश्वस्य महत्तमा भाषा अस्ति।” एवमपि प्राध्यापकः बॉप उक्तवान् यत्-‘संस्कृतमेव सम्पूर्णविश्वस्य एका भाषा आसीत् कदाचित् इति।” करतारसिंह-इतरेषामपि वैदेशिकविचारकाणाम् अभिप्रायः अपि ज्ञातव्यः खलु?

आचार्यः :
सत्यमेव! जानन्तु। विद्वान मैक्डानल उक्तवान् यत्-“वयं योरोपीयाः अद्यावधि स्ववर्णमालाम् अपि पूर्णीकर्तुं न समर्थाः परं भारतीयानां भाषा तथा भाषाविज्ञानं न केवल पूर्णम् अपितु वैज्ञानिकम् अस्ति।’ अन्यच्च विलियमजोन्समहोदयः उक्तवान् यत्-“संस्कृतस्य रचना आश्चर्यकारिणी अस्ति। इयं ग्रीकभाषायाः अपेक्षया अधिकपूर्णा, लैटिनभाषायाः अपेक्षया अधिका समृद्धा तथा च उभयोः तुलनायाम् अति परिष्कृता वर्तते।” मनीषः-केनापि अन्येन पाश्चात्यविद्वषाम् अपि संस्कृतविषये किमपि उक्तम्?

शब्दार्थाः :
ज्ञातव्यः-जानना चाहिए-should be known, अद्यावधि-आज के समय तक-up till the modern age, इतरेषामपि-दूसरों का भी-of others also, स्ववर्णमालाम्-अपनी वर्णमाला को-Own Letters (alphabet), पूर्णीकर्तुम-पूरा करने के लिए-to complete.

अनुवाद :
आचार्य-मैक्समूलर ने कहा कि-संस्कृत विश्व की महत्वपूर्ण भाषा है। ऐसे ही प्राध्यापक बॉप ने कहा कि, “संस्कृत ही कभी पूरे विश्व की एकमात्र भाषा थी।”
करतारसिंह-दूसरे विदेशियों के विचारों का अभिप्रायः भी जानना चाहिए?

MP Board Solutions

आचार्य :
सत्य ही है। जानते हो। विद्वान् मैक्डानल ने कहा कि, “हम सब यूरोपीय आज तक अपनी वर्णमाला भी पूरा करने में समर्थ नहीं हो पाए, पर भारतीयों की भाषा तथा भाषाविज्ञान न केवल पूरा है, बल्कि वैज्ञानिक है।” और अन्य, विलियमजोन्स महोदय ने कहा कि, “संस्कृत की रचना आश्चर्यचकित करने वालो है। यह ग्रीकभाषा की अपेक्षा अधिक पूर्ण, लैटिन भाषा की अपेक्षा अधिक समृद्ध और दोनों की तुलना में अधिक परिष्कृत है।
मनीष-और किन पाश्चात्य विद्वानों ने भी संस्कृत के विषय पर कुछ कहा?

English :
Max Muller, “Sanskrit is important language of the world, Bopp, ‘Sanskrit was the only language of entire world sometimes.
Macdonell, Sanskrit and philology are both perfect and scientific.
William Jones-The structure of Sanskrit is wonder striking. It is perfect, prosperous and refined.

7. आचार्यः-आम्! वेबर महोदयेन कथितं यत्-‘सम्प्रति सम्पूर्ण विश्वे पाणिनिरेव वैयाकरणेषु पूर्णः सर्वमान्यश्चास्ति। दर्शने व्याकरणे च प्रामाणिकतायाम् उर्वरतायाञ्च भारतीयाः उच्चतमस्थले प्रतिष्ठिताः।’ तथा च एच.एच. विल्सन् महोदयेन कथितम् यत् –
न जाने विद्यते कं तन्माधुर्यमत्र संस्कृते।
सर्वदैव समुन्मत्ता येन वैदेशिका वयम्॥

सर्वे छात्राः-आचार्य! वयम् आनन्दिताः, संस्कृतं प्रति विश्वप्रसिद्धानां विदुषाम् अभिमतं श्रुत्वा, संस्कृतस्य वैश्विक महत्त्वं च ज्ञात्वा। उच्यते हि
भारतीयैकता साधकं संस्कृतम्।
विश्वबन्धुत्वसम्पोषकं संस्कृतम्॥
(सर्वे मिलित्वा श्लोकस्य सस्वरगायनं कुर्वन्ति)

शब्दार्थाः :
सम्प्रति-अब-now, समुन्मत्ता-उन्मत्ता को-Craziness, infatuation.

अनुवाद :
आचार्य-हाँ! वेबर महोदय ने कहा कि-अब पूरे संसार में पाणिनि ही वैयाकरणों में पूर्ण और सर्वमान्य है। दर्शन में और व्याकरण में प्रामाणिकता और उर्वरता में भारतीयता सबसे ऊँचे स्थान पर स्थित है। और एच.एच. विल्सन महोदय ने कहा कि –
नहीं जानते कि इस संस्कृत में कौन-सा माधुर्य है, जिससे हम विदेशी हमेशा ही उन्मत्त होते हैं।
सभी छात्र-आचार्य! हम सब प्रसन्न हुए, संस्कृत के प्रति विश्वप्रसिद्ध विद्वानों के विचार सुनकर और संस्कृत का वैश्विक महत्व जानकर।।

भारतीय एकता का साधक है संस्कृत।
विश्व बन्धुत्व की सम्पोषक है संस्कृत॥
(सब मिलकर श्लोक का ऊँचे स्वर में गायन करते हैं।)

English :
Weber : Panini alone is a perfect and well-known grammarian in the world. Indians are top ranking in philosophy and grammar.

H.H. Wilson : ‘Sanskrit enshrines charming sweetness even for foreigners’.

Sanskrit enjoys world-wide importance since it strengthens national integrity and worldly friendlness.

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 25 हमारी न्यायपालिका

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 25 हमारी न्यायपालिका

MP Board Class 7th Social Science Chapter 25 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नांकित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की पद मुक्ति आयु सीमा है –
(अ) 65 वर्ष
(ब) 62 वर्ष
(स) 67 वर्ष
(द) 60 वर्ष
उत्तर:
(अ) 65 वर्ष

(2) राष्ट्रपति द्वारा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के समय सलाह ली जाती है –
(अ) मुख्यमन्त्री से
(ब) राज्यपाल से
(स) शिक्षा मन्त्री से
(द) किसी से नहीं।
उत्तर:
(ब) राज्यपाल से।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) उच्चतम न्यायालय ………… में स्थित है।
(2) न्यायाधीश पद के लिए ………….. का नागरिक होना चाहिए।
(3) भारत के ………… मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं।
(4) मध्यप्रदेश का उच्च न्यायालय …………’ में स्थित है।
उत्तर:
(1) दिल्ली
(2) भारत
(3) राष्ट्रपति
(4) जबलपुर।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 25 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) उच्चतम न्यायालय में कुल कितने न्यायाधीश होते हैं?
उत्तर:
उच्चतम न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश तथा 30 अन्य न्यायाधीश, कुल मिलाकर 31 न्यायाधीश होते हैं।

(2) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद के लिए क्या-क्या योग्यताएँ होनी चाहिए ?
उत्तर:
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद के लिए निम्नलिखित योग्यलाएँ होनी चाहिए –

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • वह राज्य के किसी भी न्यायालय में कम-से-कम 10 वर्ष तक न्यायिक पद पर कार्य कर चुका हो अथवा 10 वर्ष तक । अधिवक्ता रहा हो।
  • राष्ट्रपति की दृष्टि से वह कानून का अच्छा जानकार । होना चाहिए।

(3) उच्च न्यायालय के दो प्रमुख कार्य बताइए।
उत्तर:
उच्च न्यायालय के दो प्रमुख कार्य –

  • दीवानी व फौजदारी दोनों ही मामलों में राज्य की सीमा । में अपील सुनना।
  • राज्य में स्थित जिलों के जिला न्यायालय द्वारा दिए गए मृत्युदण्ड की सजा का अनुमोदन करना।

MP Board Solutions

MP Board Class 7th Social Science Chapter 25 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) उच्चतम न्यायालय के अधिकार व शक्तियों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उच्चतम न्यायालय के अधिकार व शक्तियाँ –

(i) प्रारम्भिक क्षेत्राधिकार – इसके अन्तर्गत निम्नलिखित मामले सीधे उच्चतम न्यायालय में सुने जा सकते हैं –

  • जिसमें एक ओर केन्द्र सरकार हो और दूसरी ओर एक  या एक से अधिक राज्य हों।
  • मौलिक अधिकारों के हनन सम्बन्धी मामले।

(ii) अपीलें सुनने का अधिकार – इसके अधिकार क्षेत्र के अन्तर्गत सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध संवैधानिक, दीवानी, फौजदारी आदि सभी प्रकार के मामलों की सुनवाई करना है। –

(iii) मूल अधिकारों की रक्षा – उच्चतम न्यायालय मूल अधिकारों की रक्षा करता है। किसी नागरिक के मौलिक । अधिकारों का हनन होने पर वह सीधे उच्चतम न्यायालय की शरण ले सकता है।

(iv) संविधान की रक्षा – उच्चतम न्यायालय संविधान की व्याख्या करता है। वह संविधान के विरुद्ध सरकार द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को समाप्त कर सकता है।

(v) अभिलेख न्यायालय – उच्चतम न्यायालय के निर्णय । अभिलेख के रूप में प्रकाशित किए जाते हैं। आगे आने वाले मुकदमों में इनका प्रयोग कानून के रूप में किया जाता है।

MP Board Class 7th Social Science Solutions

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 14 नागरिकों के संवैधानिक अधिकार एवं कर्त्तव्य

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 14 नागरिकों के संवैधानिक अधिकार एवं कर्त्तव्य

MP Board Class 9th Social Science Chapter 14 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 14 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
44वें संशोधन के द्वारा किस मौलिक अधिकार को मूल अधिकारों की सूची से हटा दिया गया है?
(i) सम्पत्ति का अधिकार
(ii) स्वतन्त्रता का अधिकार
(iii) समानता का अधिकार,
(iv) संस्कृति एवं शिक्षा का अधिकार।
उत्तर:
(i) सम्पत्ति का अधिकार

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
इनमें से कौन-सा कार्य बाल श्रम की श्रेणी में आता है?
(i) 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से होटलों में, निर्माण कार्य में या खदानों में कार्य कराना
(ii) 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का घूमना और शिक्षा प्राप्त करना
(iii) 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के खेल के कार्य
(iv) 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का शारीरिक व्यायाम करना।
उत्तर:
(i) 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से होटलों में, निर्माण कार्य में या खदानों में कार्य कराना

प्रश्न 3.
इनमें से कौन-सा अधिकार स्वतन्त्रता के मौलिक अधिकार से सम्बन्धित नहीं है?
(i) भाषण की स्वतन्त्रता
(ii) उपाधियों का अन्त
(iii) निवास की स्वतन्त्रता
(iv) भ्रमण की स्वतन्त्रता।
उत्तर:
(ii) उपाधियों का अन्त

प्रश्न 4.
किस लेख द्वारा उच्चतम या उच्च न्यायालय किसी भी अभिलेख को अपने अधीनस्थ न्यायालय से अपने पास मँगा सकता है?
(i) बन्दी प्रत्यक्षीकरण
(ii) उत्प्रेषण
(iii) अधिकार पृच्छा
(iv) परमादेश।
उत्तर:
(ii) उत्प्रेषण

प्रश्न 5.
6 से 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार किस मौलिक अधिकार के अन्तर्गत आता है?
(i) समानता का अधिकर
(ii) संस्कृति व शिक्षा का अधिकार
(iii) स्वतन्त्रता का अधिकार
(iv) संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
उत्तर:
(ii) संस्कृति व शिक्षा का अधिकार

प्रश्न 6.
मौलिक अधिकारों का संरक्षण निम्नलिखित में से कौन करता है? (2009)
(i) संसद
(ii) विधान सभाएँ
(iii) सर्वोच्च न्यायालय
(iv) भारत सरकार।
उत्तर:
(iii) सर्वोच्च न्यायालय

प्रश्न 7.
सूचना समय पर न मिलने पर सबसे पहले अपील की जाती है
(i) विभाग प्रमुख
(ii) लोक सूचना अधिकारी
(iii) सूचना आयोग
(iv) मुख्यमंत्री।
उत्तर:
(iii) सूचना आयोग

प्रश्न 8.
राज्य के नीति निदेशक तत्व निम्न में से क्या हैं?
(i) कानून द्वारा बन्धनकारी है
(ii) न्याय योग्य हैं
(iii) राज्य के लिए रचनात्मक निर्देश है
(iv) न्यायपालिका के आदेश हैं।
उत्तर:
(iii) राज्य के लिए रचनात्मक निर्देश है

MP Board Solutions

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. मौलिक अधिकारों के पीछे …………. की शक्ति होती है।
  2. सूचना का अधिकार बढ़ते ………… को रोकने का सशक्त अस्त्र है। (2017)
  3. संविधान के अनुच्छेद …….. के द्वारा प्रत्येक नागरिक को विधि के समक्ष समानता और संरक्षण प्राप्त है।
  4. संविधान में अस्पृश्यता …………. अपराध है।
  5. संविधान के 44वें संविधान द्वारा …………. के मौलिक अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से हटा दिया मया है।

उत्तर:

  1. कानून
  2. भ्रष्टाचार
  3. 14
  4. दण्डनीय
  5. सम्पत्ति के अधिकार।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 14 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कानून के समक्ष समानता का क्या अर्थ है?
उत्तर:
संविधान के अनुच्छेद 14 के अन्तर्गत प्रत्येक नागरिक को कानून के समक्ष समानता और संरक्षण का अधिकार प्राप्त है। संविधान की दृष्टि में कानून सर्वोपरि है। कानून से ऊपर कोई व्यक्ति नहीं है। एक-सा अपराध करने वाले समान दण्ड के भागीदार होंगे।

प्रश्न 2.
मौलिक अधिकार के प्रकारों के नाम लिखिए।
उत्तर:
हमें संविधान द्वारा 6 मौलिक अधिकार प्राप्त हैं –

  1. समानता का अधिकार
  2. स्वतन्त्रता का अधिकार
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार
  4. धर्म की स्वतन्त्रता का अधिकार
  5. संस्कृति एवं शिक्षा सम्बन्धी अधिकार
  6. संवैधानिक उपचारों के अधिकार।

प्रश्न 3.
संवैधानिक में अस्पृश्यता का अन्त करने के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
उत्तर:
संविधान के अनुच्छेद 17 द्वारा नागरिकों में सामाजिक समानता लाने के लिए अस्पृश्यता के आचरण का निषेध किया गया है। नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 द्वारा राज्य अथवा नागरिकों द्वारा अस्पृश्यता का व्यवहार अपराध माना जाएगा, जिसके लिए दण्ड की व्यवस्था की गयी है।

प्रश्न 4.
सूचना का अधिकार किसे प्राप्त है?
उत्तर:
देश के प्रत्येक नागरिक को सूचना का अधिकार प्राप्त है।

प्रश्न 5.
सूचना के अधिकार किन सिद्धान्तों पर आधारित हैं?
उत्तर:
यह प्रमुख रूप से तीन सिद्धान्तों पर आधारित हैं-

  1. जवाबदेही का सिद्धान्त.
  2. सहभागिता का सिद्धान्त तथा
  3. पारदर्शिता का सिद्धान्त।

प्रश्न 6.
नीति निदेशक तत्व किसके लिए निर्देश हैं?
उत्तर:
नीति निदेशक तत्व संविधान निर्माताओं द्वारा केन्द्रीय सरकार एवं राज्य सरकारों की नीतियों के निर्धारण के लिए दिये गये दिशा निर्देश हैं।

MP Board Solutions

MP Board Class 9th Social Science Chapter 14 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राज्य के नीति निदेशक तत्व और मौलिक अधिकारों में क्या अन्तर है? स्पष्ट कीजिए। (2008, 09, 10, 18)
उत्तर:
नीति निदेशक तत्व और मौलिक अधिकारों में अन्तर-नीति निदेशक तत्व और मौलिक अधिकारों में महत्त्वपूर्ण अन्तर निम्नलिखित हैं –

  1. मूल अधिकारों को न्यायालय का संरक्षण प्राप्त है। इसके विपरीत राज्य के नीति-निदेशक तत्वों को न्यायालय का संरक्षण प्राप्त नहीं है।
  2. “मौलिक अधिकार राज्य के लिए कुछ निषेध आज्ञाएँ हैं। इनके द्वारा राज्य को यह आदेश दिया जाता है कि राज्य को क्या नहीं करना चाहिए? इसके विपरीत नीति के निदेशक सिद्धान्तों के द्वारा राज्य को ये निर्देश दिये जाते हैं कि उसे क्या करना चाहिए।”
  3. मौलिक अधिकार नागरिकों की वैधानिक माँग है, किन्तु नीति निदेशक सिद्धान्त नागरिकों की वैधानिक माँग नहीं है।
  4.  नीति-निदेशक सिद्धान्त एक प्रकार के आश्वासन है, जिनका पालन करने में सरकार किसी भी स्थिति में असमर्थ हो सकती है। इसके विपरीत मौलिक अधिकारों की उपेक्षा कोई भी सरकार नहीं कर सकती।
  5. मौलिक अधिकारों को कुछ परिस्थितियों में मर्यादित, सीमित, निलम्बित या स्थगित किया जा सकता है, परन्तु नीति-निदेशक तत्वों के साथ ऐसी बात नहीं है।
  6. 1976 तक नीति-निदेशक तत्वों की स्थिति मूल अधिकारों से गौण थी, लेकिन 42वें संविधान के संशोधन द्वारा यह स्थिति बदल गयी है। अब नीति-निदेशक तत्वों को मूल अधिकारों से उच्च स्थान प्राप्त है। इस संशोधन में यह व्यवस्था है कि यदि संसद के किसी कानून से नीति-निदेशक तत्व का पालन होता है, लेकिन उससे मूल अधिकारों का उल्लंघन होता है तो कानून को न्यायालय अवैध घोषित नहीं कर सकता है।
  7. मौलिक अधिकारों का विषय व्यक्ति (Individual) है, जबकि नीति-निदेशक तत्वों का विषय राज्य (State) है।

प्रश्न 2.
मौलिक अधिकारों को न्यायिक संरक्षण किस प्रकार प्राप्त है? समझाइए।
अथवा
संवैधानिक उपचारों के अधिकार से आपका क्या तात्पर्य है? (2010)
उत्तर:
संवैधानिक उपचारों का अधिकार-संविधान द्वारा नागरिकों को जो मूल अधिकार प्रदान किये गये हैं, उनकी सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। यदि केन्द्र सरकार, राज्य सरकार या किसी अन्य द्वारा नागरिकों के उपर्युक्त मूल अधिकारों में बाधा पहुँचाई जाती है तो नागरिक उच्च या उच्चतम न्यायालय से अपने अधिकारों की सुरक्षा की माँग कर सकते हैं। मूल अधिकारों की रक्षा के लिए ये न्यायालय निम्न प्रकार के आदेश जारी करते हैं –

  1. बन्दी प्रत्यक्षीकरण आदेश
  2. परमादेश
  3. प्रतिशोध लेख
  4. उत्प्रेषण लेख
  5. अधिकार पृच्छा।

आपातकाल में नागरिकों के कुछ अधिकारों तथा संवैधानिक उपचारों के अधिकार को निलम्बित किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
“मौलिक अधिकार और मौलिक कर्त्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।” उक्त कथन को समझाइए।
उत्तर:
मौलिक अधिकार और मौलिक कर्त्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हम अधिकारों की प्राप्ति कर्तव्यों की पूर्ति के बिना नहीं कर सकते हैं। यदि नागरिक अपने मौलिक कर्त्तव्यों को पूरा करेंगे तो उन्हें अपने मौलिक अधिकारों की प्राप्ति सरलता से हो जाएगी। अगर देश के नागरिक मौलिक कर्त्तव्यों का पालन नहीं करते हैं तो देश में अव्यवस्था होगी और अशान्ति का वातावरण उत्पन्न होगा। मौलिक कर्त्तव्यों की पूर्ति स्वस्थ सामाजिक वातावरण का निर्माण करती है। हमारे देश के संविधान में मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्यों के मध्य कोई कानूनी सम्बन्ध निश्चित नहीं किया गया है। इनकी अवहेलना करने पर किसी भी प्रकार के दण्ड की व्यवस्था नहीं की गयी है। परन्तु हमारा राष्ट्र के प्रति यह दायित्व बनता है कि हम उचित प्रकार से इन कर्त्तव्यों का पालन करें। मौलिक कर्त्तव्य देश की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय सम्पत्ति, व्यक्तिगत एवं सामूहिक प्रगति, देश की सुरक्षा व्यवस्था आदि को सुदृढ़ बनाने, पर्यावरण संरक्षित रखने, राष्ट्रीय आदर्शों का आदर करने की प्रेरणाएँ हैं।

प्रश्न 4.
किस प्रकार की सूचना देने के लिए सरकार बाध्य नहीं है? कोई चार छूट बताइए।
उत्तर:
कुछ सूचनाएँ या जानिकारियाँ ऐसी भी होती हैं, जो आम जनता तक नहीं पहुँचाई जा सकती हैं। उनके स्पष्ट किये जाने से देश की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा और आर्थिक तथा वैज्ञानिक हित को हानि पहुँचती है। अतः कुछ सूचनाओं को न देने की छूट दी गई है। निम्नलिखित सूचना देने के लिए सरकार बाध्य नहीं है –

  1. जिस सूचना में भारत की संप्रभुता, अखंडता, राज्य की सुरक्षा, रणनीति, वैज्ञानिक या आर्थिक हित और विदेश से सम्बन्ध की अवमानना होती हो।
  2. जिसको प्रकट करने के लिए किसी न्यायालय या अन्य प्राधिकरण द्वारा मना किया गया है, जिससे न्यायालय की अवमानना होती हो।
  3. सूचना, जिसके प्रकट करने से किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा को भय हो।
  4. मन्त्रिमंडल के कागज-पत्र इसमें सम्मिलित हैं-मंत्रिपरिषद् सचिवों और अन्य अधिकारियों के विचार-विमर्श के अभिलेख।

प्रश्न 5.
अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति को बढ़ावा देने हेतु नीति निदेशक तत्वों में क्या निर्देश हैं? लिखिए।
उत्तर:
भारत के संविधान में कल्याणकारी राज्य की स्थापना करके सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय प्रदान करना, नीति निदेशक तत्वों का प्रमुख कार्य है। नीति निदेशक तत्व भारत में सामाजिक और आर्थिक क्रान्ति को साकार करने का सपना है। अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति को बढ़ावा देने के लिए नीति निदेशक तत्वों में निम्नलिखित निर्देश दिये गये हैं –

  1. अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा बनाये रखने का प्रयास करना।
  2. राज्यों के मध्य न्याय संगत एवं सम्मानपूर्वक सम्बन्धों की स्थापना करने का प्रयास करना।
  3. अन्तर्राष्ट्रीय कानून एवं संधियों का आदर करना।
  4. अन्तर्राष्ट्रीय झगड़ों को मध्यस्थता द्वारा शान्तिपूर्ण ढंग से निपटाने का प्रयास करना।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.
स्वतन्त्रता के अधिकार से हमें कौन-कौन सी स्वतन्त्रताएँ प्राप्त हुई हैं? (2009)
अथवा
स्वतन्त्रता के अधिकारों के अन्तर्गत नागरिकों को कौन-सी स्वतन्त्रताएँ प्राप्त हैं? (2012, 15, 17)
उत्तर:
संविधान के अनुच्छेद-10 द्वारा नागरिकों को स्वतन्त्रता का अधिकार दिया गया है। इससे उन्हें विचारों की अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतन्त्रता प्राप्त होती है। यह उसके शारीरिक, मानसिक तथा नैतिक विकास के लिए अत्यन्त आवश्यक है। इनके अभाव में व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का पूर्ण विकास नहीं कर सकता है। स्वतन्त्रता के अधिकार में हमें निम्नलिखित स्वतन्त्रताएँ प्राप्त हैं –

  1. भाषण तथा अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता।
  2. अस्त्र-शस्त्र के बिना शान्तिपूर्ण ढंग से एकत्रित होने की स्वतन्त्रता।
  3. समुदाय या संघ बनाने की स्वतन्त्रता।
  4. पूरे भारत में कहीं भी भ्रमण करने की स्वतन्त्रता।
  5. भारत के किसी भी कोने में निवास करने की स्वतन्त्रता।
  6. अपनी इच्छा के अनुकूल रोजगार या व्यवसाय करने की स्वतन्त्रता।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 14 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मौलिक अधिकारों से आशय व उसके महत्त्व को स्पष्ट कीजिए। (2008, 09, 14, 16)
उत्तर:
मौलिक अधिकार का अर्थ-मौलिक अधिकार वे अधिकार हैं, जिन्हें देश के सर्वोच्च कानून में स्थान दिया गया है तथा जिनकी पवित्रता तथा उलंघनीयता को विधायिका तथा कार्यपालिका स्वीकार करते हैं, अर्थात् जिसका उल्लंघन कार्यपालिका तथा विधायिका भी नहीं कर सकती। यदि वे कोई ऐसा कार्य करें, जिनसे संविधान का उल्लंघन होता है तो न्यायपालिका उनके ऐसे कार्यों को असंवैधानिक घोषित कर सकती है। –

मौलिक अधिकारों का महत्त्व
(1) व्यक्ति के विकास में सहायक :
मौलिक अधिकार उन परिस्थितियों को उपलब्ध कराते हैं, जिनके आधार पर व्यक्ति अपनी मानसिक, शारीरिक, नैतिक, सामाजिक, धार्मिक आदि क्षेत्रों में उन्नति कर सकता है। मूल अधिकार व्यक्ति को उन क्षेत्रों में सुरक्षा और स्वतन्त्रता भी प्रदान करते हैं। इस प्रकार मौलिक अधिकार नागरिकों के व्यक्तित्व के विकास में सहायक हैं। :

(2) प्रजातन्त्र की सफलता के आधार :
हमारे देश में प्रजातन्त्रीय शासन-प्रणाली को अपनाया गया है। ‘स्वतन्त्रता’ और ‘समानता’ प्रजातन्त्र के मूल आधार हैं। बिना इसके प्रजातन्त्र की सफलता की आशा नहीं की जा सकती। भारतीय संविधान में ‘स्वतन्त्रता’ और ‘समानता’ दोनों को अधिकार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक नागरिक को शासन की आलोचना करने का अधिकार है। निर्वाचन में खड़े होने, प्रचार करने, मत देने आदि के सभी को समान अधिकार हैं। इस प्रकार मूल अधिकार सफल लोकतन्त्र के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं।

(3) एक दल की तानाशाही पर रोक :
प्रजातन्त्र में ‘बहुमत की तानाशाही’ का सदैव भय बना रहता है। अतः मूल अधिकार अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करते हैं। इस प्रकार मौलिक अधिकार किसी एक दल की तानाशाही पर अंकुश लगाने में सहायक हैं।

(4) न्यायप्रालिका की सर्वोच्चता :
मौलिक अधिकारों को न्यायपालिका का संरक्षण प्राप्त है इसलिए कार्यपालिका और व्यवस्थापिका नागरिकों के मौलिक अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं।

(5) देश की सामाजिक व आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप :
मौलिक अधिकार हमारे देश की सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक आदि परिस्थितियों के अनुरूप हैं। इसलिए जीविकोपार्जन का अधिकार, शिक्षा पाने का अधिकार आदि उनमें सम्मिलित किये गये हैं।

(6) अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के उत्थान में सहायक :
मौलिक अधिकार अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्ग के हितों की रक्षा करते हैं।

(7) व्यक्ति और राज्य के मध्य सामंजस्य :
श्री एम. बी. पायली के अनुसार, “मूल अधिकार एक ही समय पर शासकीय शक्ति से व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं एवं शासकीय शक्ति द्वारा व्यक्ति स्वातन्त्र्य को सीमित करते हैं। इस प्रकार मौलिक अधिकार व्यक्ति और राज्य के मध्य सामंजस्य स्थापित करता है।

प्रश्न 2.
स्वतन्त्रता के अधिकारों के अन्तर्गत नागरिकों को कौन-सी स्वतन्त्रताएँ प्राप्त हैं? (2009, 13)
उत्तर:
संविधान के अनुच्छेद-10 द्वारा नागरिकों को स्वतन्त्रता का अधिकार दिया गया है। इस अधिकार के अन्तर्गत नागरिकों को निम्नलिखित स्वतन्त्रताएँ प्राप्त हैं –
(1) विचार और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता :
भारत में प्रत्येक नागरिक को अपने विचारों की अभिव्यक्ति करने तथा भाषण देने की स्वतन्त्रता प्रदान की गई है। परन्तु साथ ही इस अधिकार पर कुछ प्रतिबन्ध भी लगाये गये हैं, ताकि कोई नागरिक उनका दुरुपयोग न कर सके।

(2) अस्त्र-शस्त्र रहित शान्तिपूर्ण ढंग से सभा तथा सम्मेलन करने की स्वतन्त्रता :
प्रत्येक भारतीय नागरिक को बिना अस्त्र-शस्त्र के शान्तिपूर्ण ढंग से सम्मेलन करने की स्वतन्त्रता है। परन्तु देश की एकता और उसकी प्रभुता के हित में राज्य इन पर प्रतिबन्ध भी लगा सकता है।

(3) समुदाय और संघ निर्माण की स्वतन्त्रता :
भारतीय नागरिकों को अपनी सांस्कृतिक व बौद्धिक . आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संस्थाएँ तथा संघ निर्माण करने का अधिकार है।

(4) भ्रमण की स्वतन्त्रता :
भारत के सभी नागरिक बिना किसी प्रतिबन्ध या अधिकार-पत्र के भारत की सीमाओं के अन्दर कहीं भी भ्रमण कर सकते हैं।

(5) व्यवसाय की स्वतन्त्रता :
संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छानुसार व्यवसाय चुनने तथा उसे करने की स्वतन्त्रता प्रदान करता है। परन्तु वृत्ति, उपजीविका व्यापार करने की स्वतन्त्रता पर प्रतिबन्ध लगाया जा सकता है। कारण यह है कि राज्य को स्वयं या किसी निगम के द्वारा किसी व्यापार, उद्योग या सेवा का स्वामित्व ग्रहण करने का पूरा अधिकार है। इन उद्योगों से सरकार जनता को पृथक् रख सकती है। इसके अतिरिक्त किसी व्यवसाय को ग्रहण करने के लिए व्यावसायिक योग्यता की भी शर्त लगा सकती है, जैसे-वकालत पेशा ग्रहण करने के लिए एल. एल. बी. की परीक्षा एवं प्रशिक्षण होना अनिवार्य है।

(6) व्यक्तिगत स्वतन्त्रता :
बिना कारण बताये गिरफ्तारी एवं नजरबन्दी के विरुद्ध व्यवस्था के अन्तर्गत यदि किसी भी व्यक्ति को बन्दी बनाया जाता है तो उसे मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना चौबीस घण्टे से अधिक समय तक बन्दी बनाकर नहीं रखा जा सकता है। साथ ही अभियुक्त को वकील आदि से परामर्श करने एवं पैरवी आदि कराने की भी पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त है। जिन लोगों को नजरबन्द किया जाता है उन्हें भी साधारण अवस्था में तीन महीने से अधिक समय के लिए नजरबन्द नहीं किया जा सकता है। परन्तु ‘नजरबन्दी परामर्शदात्री समिति’ जब अधिक समय के लिए नजरबन्दी की सलाह देती है तो यह अवधि बढ़ाई जा सकती है। फिर भी संसद को अधिकार रहता है कि वह निर्णय ले कि किसी व्यक्ति को अधिक से अधिक कितने समय तक नजरबन्द रखा जा सकता है।

(7) आवास की स्वतन्त्रता :
भारत के प्रत्येक नागरिक को किसी भी स्थान पर स्थायी तथा अस्थायी निवास करने की स्वतन्त्रता है। पश्चिमी बंगाल का निवासी उत्तर प्रदेश में निवास कर सकता है और उत्तर प्रदेश का निवासी पश्चिमी बंगाल में। स्वतन्त्रता के मौलिक अधिकारों पर कुछ प्रतिबन्ध भी लगाये गये हैं। नागरिक जनता को भड़काने वाले भाषण नहीं दे सकते। इसी प्रकार अनैतिक तथा अपराधी समुदायों के गठन की स्वतन्त्रता नहीं है। साम्प्रदायिकता फैलाने वाले समुदाय भी नहीं बनाये जा सकते। “आन्तरिक सुरक्षा अधिनियम” (MISA) द्वारा व्यक्तिगत स्वतन्त्रता पर भी अंकुश लगाया जा सकता है। परन्तु यह प्रतिबन्ध विशेष परिस्थितियों में ही लगाया जाता है; सामान्य परिस्थितियों में नहीं।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
संवैधानिक उपचारों के अधिकार के अन्तर्गत कौन से प्रमुख लेख (रिट् न्यायालय जारी करते हैं?
उत्तर:
संविधान के अनुच्छेद-32 से 35 तक मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए संविधान में प्रबन्ध किये गये हैं। इन अधिकारों के अन्तर्गत न्यायालय निम्नलिखित पाँच प्रकार के लेख (रिट) जारी करते हैं

(1) बन्दी प्रत्यक्षीकरण आदेश :
यह अत्यन्त महत्त्वपूर्ण आदेश है। इस आदेश द्वारा बन्दी व्यक्तियों को तुरन्त ही न्यायालय के सम्मुख प्रस्तुत करने तथा बन्दी बनाये जाने के कारण बताने का आदेश दिया जाता है। न्यायालय के विचार में यदि किसी व्यक्ति को अवैध रूप से बन्दी बनाया गया है, तो वह उसे मुक्त करने का आदेश देता है।

(2) परमादेश :
इस आदेश को उस समय जारी किया जाता है जब किसी संस्था या पदाधिकारी अपने कर्तव्यों का उचित ढंग से पालन नहीं करते जिसके परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति के मूल अधिकारों का हनन होता है। न्यायालय इस आदेश द्वारा संस्था या पदाधिकारी को अपने कर्तव्य पालन का आदेश दे सकता है।

(3) प्रतिषेध :
इसके द्वारा उच्च या सर्वोच्च न्यायालय अपने अधीनस्थ न्यायालयों को किसी कार्य को न करने का आदेश दे सकता है। जो विषय किसी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के बाहर के होते हैं, उनकी सुनवाई उस न्यायालय में न हो, उस उद्देश्य से ये लेख जारी किये जाते हैं।

(4) उत्प्रेषण :
इसके द्वारा कोई न्यायालय अपने अधीनस्थ न्यायालय को आदेश देकर सभी प्रकार के अभिलेख (रिकॉर्ड) अपने पास मँगवा सकता है।

(5) अधिकार पृच्छा :
जब किसी व्यक्ति को कानून की दृष्टि से कोई कार्य करने का अधिकार नहीं है और वह व्यक्ति उस कार्य को करता है, तब यह लेख जारी किया जाता है। उदाहरणार्थ-यदि कोई व्यक्ति ऐसे पद पर नियुक्त किया जाता है, जिसके लिए वह कानून की दृष्टि में योग्य नहीं है, तो न्यायालय उस लेख द्वारा उसकी नियुक्ति पर तब तक के लिये रोक लगा सकता है जब तक कि उसका निर्णय न हो जाए। ये सभी लेख मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध जारी किये जाते हैं।

प्रश्न 4.
सूचना के अधिकार के कोई दो सैद्धान्तिक आधारों का वर्णन कीजिए, साथ ही लिखिए कि यदि सूचना समय पर न मिले तो क्या करना चाहिए?
उत्तर:
सूचना के अधिकार का सैद्धान्तिक आधार यह अधिकार एक महत्त्वपूर्ण अधिकार है, क्योंकि यह प्रमुख रूप से तीन सिद्धान्तों पर आधारित है।
(1) जवाबदेही का सिद्धान्त :
हमारे शासन का स्वरूप लोकतान्त्रिक है। इससे सरकारें लोकहित के लिए उत्तरदायी ढंग से कार्य करती हैं। मात्र किसी व्यक्ति या वर्ग विशेष द्वारा लाभ के लिए कार्य नहीं किया जाना चाहिए। अतः सरकार तथा इससे सम्बन्धित समस्त संगठनों एवं लोक प्राधिकरणों को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाया गया है। जनता को इनके कार्यों की जानकारी देना आवश्यक है।

(2) सहभागिता का सिद्धान्त :
एक प्रजातान्त्रिक व्यवस्था में सरकारों द्वारा अधिकांश कार्य जनता के लिए और जनता के सहयोग से किया जाता है। योजना निर्माण की प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी होना आवश्यक है, जिससे लोगों द्वारा समय रहते जनता के हित में योजनाओं में वांछित परिवर्तन एवं संशोधन किया जा सके।

(3) पारदर्शिता का सिद्धान्त :
तीसरा आधार है-पारदर्शिता का सिद्धान्त। सार्वजनिक धन एवं समय के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार, गबन आदि को रोकने के लिए सरकारी काम-काज में पारदर्शिता होना आवश्यक है। इससे भ्रष्ट लोगों पर अंकुश लगाया जा सकता है और ईमानदार लोग निर्भय एवं निष्पक्ष होकर कार्य कर सकेंगे।

लोक सूचना अधिकारी द्वारा सूचना आधी, पूर्णतः सही न दिये जाने पर आवेदक 30 दिनों के भीतर प्रथम अपीलीय अधिकारी को अपील कर सकता है। अपीलीय अधिकारी को, अपील प्राप्त होने के सामान्यतः 30 दिन एवं अधिकतम 45 दिन के भीतर कार्यवाही अपेक्षित है। साथ ही इस कार्यवाही की सूचना आवेदक को भी दी जानी चाहिए, जिस पर 30 दिनों के भीतर कार्यवाही कर आवेदक को सूचित किया जाता है। यदि प्रथम अपीलीय अधिकारी 30 दिन के भीतर की गई प्रथम अपील पर कार्यवाही की सूचना आवेदक को नहीं देता है तो आवेदक 90 दिनों के अन्दर द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग में कर सकता है या सूचना आयोग को पूर्ण विवरण सहित शिकायत कर सकता है।

प्रश्न 5.
सूचना के अधिकार का महत्व स्पष्ट करते हुए सूचना आयोग के गठन के बारे में लिखिए।
अथवा
सूचना के अधिकार का महत्त्व वर्णित कीजिए। (2017)
उत्तर:
सूचना के अधिकार का महत्त्व सूचना के अधिकार का महत्त्व निम्नलिखित बिन्दुओं से स्पष्ट है –
(1) मौलिक अधिकारों को प्रभावशाली बनाना :
मौलिक अधिकारों में सूचना का अधिकार भी निहित है। यह भाषण एवं अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार की रक्षा करता है। सूचना एवं जानकारी के अभाव में किसी भी व्यक्ति को सार्थक ढंग से अपनी राय अभिव्यक्त करना सम्भव नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे संविधान A-21 के अन्तर्गत प्रदत्त जीवन के अधिकार से भी जोड़ा है। जानने के अधिकार के बिना जीने का अधिकार अधूरा रह जाता है।

(2) शासन को पारदर्शी बनाना :
इस अधिनियम का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है शासन में पारदर्शिता लाना। जनता के प्रतिनिधि अपने अधिकारों का उपयोग उचित ढंग से कर रहे हैं या नहीं, पैसों का उपयोग सही ढंग से हो रहा है या नहीं, इन तथ्यों की जानकारी जनता को होनी चाहिए। इससे सार्वजनिक धन के माध्यम से जन-कल्याण का उद्देश्य प्राप्त किया जा सकता है। सूचना के अधिकार से पारदर्शिता होगी और सार्वजनिक धन को सावधानी से प्रयोग करने का दबाव बनेगा।

(3) शासन में जनता की सहभागिता बढ़ाना :
भारतीय संविधान सहभागी लोकतन्त्र के सिद्धान्त पर आधारित है। इसके लिए जनता द्वारा चुनाव के माध्यम से अपने प्रतिनिधि का चयन किया जाता है, परन्तु पिछले काफी समय से नागरिकों की निष्क्रियता एक प्रमुख कारण रहा है। अतः शासन व्यवस्था में जनता की सहभागिता बढ़ाने में यह अधिकार एक प्रभावी अस्त्र है।

(4) भ्रष्टाचार पर नियन्त्रण :
सूचना का अधिकार बढ़ते हुए भ्रष्टाचार को रोकने का एक सशक्त अस्त्र है। पारदर्शिता एवं जवाबदेही के सिद्धान्त पर आधारित होने के कारण भ्रष्ट आचरण करने वाला व्यक्ति तुरन्त पहचान लिया जाएगा एवं उसके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जा सकेगी। इसी भय के कारण उत्तरदायी लोग अनुचित कार्यों से दूर होंगे और सुशासन की परिकल्पना को भी साकार किया जा सकता है।

(5) योजनाओं को सफल बनाना :
योजनाओं को सफल बनाने में भी सूचना के अधिकार की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। शासकीय योजनाओं की सफलता मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर करती है-एक योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से निर्धारित समयावधि में पूर्ण हो जाए एवं दूसरा योजना का लाभ वास्तविक लाभार्थी तक पहुँचाया जा सके। इन दोनों ही उद्देश्यों की पूर्ति में सूचना का अधिकार एक कारगर अस्त्र है।

इस प्रकार स्पष्ट है कि सूचना का अधिकार एक अत्यधिक महत्त्वपूर्ण अधिकार है।

सूचना आयोग का गठन :
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत राष्ट्रीय स्तर पर केन्द्रीय सूचना आयोग तथा प्रदेश स्तर पर राज्य सूचना आयोग गठन का प्रावधान है। राज्य सूचना आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त के अतिरिक्त अधिक-से-अधिक.9 राज्य सहायक सूचना आयुक्त नियुक्त करने का प्रावधान है। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा एक समिति की सिफारिश पर की जाती है, जिसके अध्यक्ष मुख्यमन्त्री होते हैं। इस समिति में विधानसभा में विपक्ष के नेता और मुख्यमन्त्री द्वारा नामित एक मंत्री भी होते हैं। मुख्य सूचना आयुक्त व राज्य सूचना आयुक्तों का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।

प्रश्न 6.
मौलिक कर्त्तव्य किसे कहते हैं? संविधान में वर्णित मौलिक कर्तव्यों का वर्णन कीजिए। (2008, 13, 15)
अथवा
संविधान में वर्णित मौलिक कर्तव्यों का वर्णन कीजिए। (2018)
उत्तर:
साधारण शब्दों में किसी काम को करने के दायित्व को कर्त्तव्य कहते हैं। मौलिक कर्त्तव्य ऐसे बुनियादी कर्तव्यों को कहते हैं जो व्यक्ति को अपनी उन्नति व विकास के लिए तथा समाज व देश की प्रगति के लिए अवश्य ही करने चाहिए।

जब भारत के संविधान का निर्माण हुआ था तब उसमें सिर्फ मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया गया था। इसमें कर्त्तव्यों की कोई व्याख्या नहीं की गई थी, जबकि अधिकार और कर्त्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए अनुच्छेद-51 (क) में निम्नलिखित मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है –

  1. संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं और राष्ट्रगान का आदर करें।
  2. स्वतन्त्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोये रखें और उनका पालन करें। .
  3. भारत की सम्प्रभुता, एकता और अखण्डता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण बनाये रखें।
  4. देश की रक्षा करें और आह्वान किये जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।
  5. भारत के सभी लोगों में समरसता और सम्मान, भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभावों से दूर हो। ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध हैं।
  6. हमारी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्त्व समझें और उसका परिरक्षण करें।
  7. प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अन्तर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करें और उसका संवर्धन करें तथा प्राणिमात्र के प्रति दयाभाव रखें।
  8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।
  9. सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें।
  10. व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत् प्रयास करें, जिससे राष्ट्र निरन्तर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नयी ऊँचाइयों को छू सके।
  11. यदि माता-पिता या संरक्षक हैं, तो छ: वर्ष और चौदह वर्ष तक की आयु वाले अपने बालक या प्रतिपाल्य को यथास्थिति शिक्षा के अवसर प्रदान करें।

MP Board Solutions

प्रश्न 7.
नीति निदेशक तत्वों के प्रकार स्पष्ट करते हुए उनका वर्णन करें। (2016)
अथवा
गाँधीजी के विचारों के अनुकूल निदेशक तत्व कौन-से हैं? (2009)
अथवा
नीति निदेशक तत्वों के उद्देश्य स्पष्ट करते हुए उनका वर्णन कीजिए। (2009)
अथवा
राज्य के नीति निदेशक तत्वों के प्रकार का वर्णन कीजिए। (2008)
उत्तर:
नीति निदेशक तत्व भारत में सामाजिक और आर्थिक क्रान्ति को साकार करने का सपना है। इनको निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है –

  1. कल्याणकारी व्यवस्था।
  2. गाँधीजी के विचारों के अनुकूल निदेशक तत्व।
  3. अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति को बढ़ावा।

1. कल्याणकारी व्यवस्था :

  • देश के संसाधनों का प्रयोग लोक कल्याण के लिए किया जाए।
  • महिला और पुरुषों को समान जीविका के साधन उपलब्ध कराना।
  • धन और उत्पादन के साधन मात्र कुछ व्यक्तियों के हाथों में केन्द्रित न हो, उनका उपयोग व्यापक जनहित के लिए हो।
  • महिलाओं और पुरुषों को समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए।
  • बच्चे और नवयुवकों की आर्थिक एवं नैतिक पतन से रक्षा हो।
  • सभी को रोजगार और शिक्षा प्राप्त हो, बेरोजगारी व असमर्थता में राज्य द्वारा सहायता मिले।
  • सभी व्यक्तियों को गरिमामयी जीवन स्तर, पर्याप्त अवकाश एवं सामाजिक व सांस्कृतिक सुविधाएँ प्राप्त हों। सभी के भोजन एवं स्वास्थ्य के स्तर में सुधार हो।
  • बच्चों के लिए अनिवार्य निःशुल्क शिक्षा का प्रबन्ध हो।’

2. गाँधीजी के विचारों के अनुकूल निदेशक तत्व –

  • कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना।
  • ग्राम पंचायतों का गठन करना और उन्हें स्वशासन की इकाई बनाना।
  • पिछड़ी एवं अनुसूचित जाति तथा जनजातियों की शिक्षा एवं आर्थिक हितों का सवंर्धन करना तथा उन्हें शोषण से बचाने हेतु प्रयास करना।
  • नशीली वस्तुओं के प्रयोग पर पाबन्दी लगाना।
  • कृषि और पशुपालन को वैज्ञानिक ढंग से करवाने का प्रबन्ध करना।
  • पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु प्रयास करना व वन्य जीवों की रक्षा करना।
  • दुधारू व बोझ ढोने वाले पशुओं की रक्षा व उनकी नस्ल को सुधारने के उपाय करना।
  • सारे देश में दीवानी और फौजदारी कानून बनाना।
  • राष्ट्रीय व ऐतिहासिक महत्त्व के स्थानों की सुरक्षा करना।
  • लोक सेवा में कार्यपालिका एवं न्यायपालिका को पृथक् करने का प्रयास करना।

3. अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति को बढ़ावा-

  1. अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा को बढ़ावा देना।
  2. राज्यों के मध्य न्यायसंगत एवं सम्मानपूर्ण सम्बन्धों की स्थापना करने का प्रयास करना।
  3. अन्तर्राष्ट्रीय कानून एवं सन्धियों का आदर करना।
  4. अन्तर्राष्ट्रीय झगड़ों को मध्यस्थता द्वारा शान्तिपूर्ण ढंग से निपटाने का प्रयास करना।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 14 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 14 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान कितने भागों में विभाजित है?
(i) 22 भागों
(ii) 20 भागों
(iii) 11 भागों
(iv) 25 भागों।
उत्तर:
(i) 22 भागों

प्रश्न 2.
इसमें से कौन सा मौलिक अधिकार नहीं है?
(i) काम करने एवं आराम करने का अधिकार
(ii) स्वतन्त्रता का अधिकार
(iii) समानता का अधिकार
(iv) शोषण के विरुद्ध अधिकार।
उत्तर:
(i) काम करने एवं आराम करने का अधिकार

प्रश्न 3.
संविधान ने नागरिक को कितने मूलाधिकार प्रदान किये हैं?
(i) 10
(ii) 8
(iii) 6
(iv) 71
उत्तर:
(iii) 6

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
संविधान के अनुच्छेद 22 में व्यक्ति को कौन सा अधिकार प्रदान किया गया है?
(i) जीवन व व्यक्तिगत स्वतन्त्रता
(ii) गिरफ्तारी निवारण सम्बन्धी अधिकार
(iii) शोषण के विरुद्ध अधिकार
(iv) निवास व भ्रमण का अधिकार।
उत्तर:
(ii) गिरफ्तारी निवारण सम्बन्धी अधिकार

प्रश्न 5.
संवैधानिक उपचारों हेतु न्यायालय द्वारा कितने प्रकार के लेख (रिट) जारी किये गये हैं?
(i) चार प्रकार के
(ii) तीन प्रकार के
(iii) छ: प्रकार के
(iv) पाँच प्रकार के।
उत्तर:
(iv) पाँच प्रकार के।

रिक्त स्थान की पूर्ति

  1. भारतीय संविधान कुल ……. भागों में विभाजित है। (2010)
  2. संविधान में अस्पृश्यता का किसी भी रूप में व्यवहार ………… है।
  3. मौलिक अधिकारों का संरक्षण ………… करता है। (2008,09)
  4. हमें भारतीय संविधान द्वारा ………… मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। (2011, 13)
  5. सूचना का अधिकार देश के प्रत्येक …………. को प्राप्त है। (2013)
  6. मौलिक अधिकार …………. के लिए हैं। (2014)

उत्तर:

  1. 22
  2. दण्डनीय अपराध
  3. सर्वोच्च न्यायालय
  4. 6
  5. नागरिक
  6. नागरिकों।

सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
संविधान ने नागरिकों को 8 मौलिक अधिकार प्रदान किये हैं। (2009)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 2.
संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा नागरिकों को विधि के समक्ष समानता और संरक्षण प्राप्त है। (2014)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
20 वर्ष की आयु तक विद्यालय शिक्षा को मुफ्त व अनिवार्य बनाना है। (2012)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
राज्य के नीति-निदेशक तत्व राज्य के लिए रचनात्मक निर्देश हैं। (2009)
उत्तर:
सत्य

MP Board Solutions

प्रश्न 5.
मौलिक कर्तव्यों का पालन प्रत्येक राज्य के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 6.
मूल अधिकारों को न्यायालय का संरक्षण प्राप्त है। (2015)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 7.
भारत के संविधान में अस्पृश्यता का किसी भी रूप में व्यवहार दण्डनीय अपराध है। (2016)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 8.
संस्कृति और शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार है। (2016)
उत्तर:
सत्य

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 14 नागरिकों के संवैधानिक अधिकार एवं कर्त्तव्य - 1
उत्तर:

  1. →(ङ)
  2. →(घ)
  3. →(ख)
  4. → (क)
  5. → (ग)

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
मौलिक अधिकारों का संरक्षण कौन करता है? (2008)
उत्तर:
सर्वोच्च न्यायालय

प्रश्न 2.
14 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों से श्रम कहलाता है। (2012, 15)
उत्तर:
बाल अपराध

प्रश्न 3.
देश का सर्वोच्च कानून जिसमें किसी देश की राजनीति और समाज को चलाने वाले मौलिक कानून हों। (2011)
उत्तर:
संविधान

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
भाषण की अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता। (2012)
उत्तर:
स्वतन्त्रता का अधिकार

प्रश्न 5.
देश की सर्वोच्च विधायी संस्था द्वारा उस देश के संविधान में किया जाने वाला बदलाव।। (2010)
उत्तर:
संविधान संशोधन।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 14 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मौलिक अधिकार किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह अधिकार जो व्यक्ति के सर्वांगीण विकास एवं गरिमा के लिए आवश्यक हैं, जिन्हें देश के संविधान में अंकित किया गया है और सर्वोच्च न्यायालय जिनकी सुरक्षा करता है, मौलिक अधिकार कहलाते हैं।

प्रश्न 2.
भारतीय संविधान कितने भागों में विभाजित है?
उत्तर:
भारतीय संविधान कुल 22 भागों में विभाजित है। इसके तीसरे भाग में मूल अधिकार हैं, चौथे भाग में नीति निदेशक तत्व हैं और बाद में जोड़े गये भाग चार (क) में मूल कर्त्तव्य हैं। ये सब एक ही व्यवस्था के अंग हैं।

प्रश्न 3.
बालश्रम (14 वर्ष के कम आयु वाले बच्चों से श्रम) के सम्बन्ध में कौन-सा कानून बनाया गया है?
उत्तर:
बालश्रम के सम्बन्ध में अनुच्छेद-23 एवं 24 में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों एवं अन्य खतरनाक स्थानों पर नियुक्ति आदि पर रोक लगायी गयी है। इस सम्बन्ध में ‘शोषण के विरुद्ध अधिकार’ कानून बनाया गया है।

प्रश्न 4.
संवैधानिक उपचारों हेतु न्यायालय ने कितने प्रकार के लेख (रिट) जारी किये हैं ?
उत्तर:
संवैधानिक उपचारों हेतु न्यायालय ने पाँच प्रकार की रिट जारी की हैं। जो निम्न हैं –

  1. बन्दी प्रत्यक्षीकरण
  2. प्रतिषेध
  3. परमादेश
  4. उत्प्रेषण
  5. अधिकार पृच्छा।

प्रश्न 5.
हमें कर्त्तव्य का पालन क्यों करना चाहिए?
उत्तर:
भारतीय नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम संविधान का पालन करें, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गीत का सम्मान करें अर्थात् देश की एकता और अखण्डता की रक्षा के लिए हमें कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

MP Board Solutions

MP Board Class 9th Social Science Chapter 14 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
“संविधान में अस्पृश्यता का किसी भी रूप में व्यवहार दण्डनीय अपराध है।” स्पष्ट कीजिए। (2008)
अथवा
भारतीय संविधान में अस्पृश्यता का अन्त करने के लिए क्या व्यवस्था की गई है ? (2011)
उत्तर:
संविधान के अनुच्छेद-17 द्वारा नागरिकों में सामाजिक समानता लाने के लिए अस्पृश्यता अर्थात् छुआछूत के व्यवहार का निषेध किया गया है। नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 द्वारा राज्य अथवा नागरिकों द्वारा किसी भी रूप में अस्पृश्यता का व्यवहार अपराध माना जाएगा। जो नागरिक छुआछूत को मानेगा तथा इसे बढ़ावा देगा, वह दण्ड का भागी होगा। इस अधिकार के द्वारा अछूतों के साथ किये गये अन्याय का निराकरण होता है। संविधान में यह भी स्पष्ट लिखा हुआ है कि राज्य, जाति, वंश, धर्म, लिंग तथा जन्म-स्थान के नाम पर कोई भेदभाव नहीं करेगा। अतः किसी भी व्यक्ति को दुकानों, सार्वजनिक जलपान-गृहों, कुओं, तालाबों, नदी के घाटों, सड़कों, पार्कों तथा ऐसे सार्वजनिक प्रयोग के स्थानों में नहीं रोका जा सकता है जिनको बनाये रखने का व्यय या तो पूर्णतः या आंशिक रूप से राज्य के द्वारा होता है। किसी को भी जाति या अन्य किसी आधार पर अपमानित नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न 2.
समानता के अधिकार को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समानता का अधिकार अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। यह लोकतन्त्र की आधारशिला है। इस अधिकार के अन्तर्गत नागरिकों को निम्न प्रकार की समानताएँ प्रदान की गई हैं –

  1. कानून के समक्ष सभी नागरिक समान हैं।
  2. धर्म, वंश, जाति, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ राज्य किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करेगा।
  3. राज्य के अधीन नौकरियों और पदों के सम्बन्ध में नियुक्ति के समान अवसर प्राप्त होंगे।
  4. अस्पृश्यता के आधार पर किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
  5. सेना तथा शिक्षा सम्बन्धी उपाधियों को छोड़कर अन्य सभी प्रकार की उपाधियों का अन्त।

प्रश्न 3.
जीवन और व्यक्तिगत स्वतन्त्रता के संरक्षण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जीवन और व्यक्तिगत स्वतन्त्रता के संरक्षण के सन्दर्भ में अनुच्छेद-21 के अनुसार किसी भी नागरिक को कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त, उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतन्त्रता से वंचित नहीं किया जा सकता है। प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन और प्राणों की रक्षा के साथ समाज में मानवीय प्रतिष्ठा के साथ जीवित रहने का अधिकार है। इसके अन्तर्गत सम्मानजनक आजीविका के अवसर और बंधुआ मजदूरी से भी मुक्ति शामिल है। परन्तु नागरिक संविधान द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त स्वतन्त्रता का उपभोग नहीं कर सकता है।

प्रश्न 4.
गिरफ्तारी निवारण सम्बन्धी अधिकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
संविधान के अनुच्छेद-22 के अन्तर्गत देश के नागरिक को गिरफ्तारी निवारण सम्बन्धी कुछ अधिकार प्रदान किये गये हैं, जो निम्नलिखित हैं –

  1. देश के किसी भी नागरिक को उसके अपराध के विषय में बताए बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।
  2. प्रत्येक आरोपी को अपने बचाव के लिए वकील से सलाह-मशविरा करने से वंचित नहीं किया जा सकता है।
  3. न्यायालय की आज्ञा के बिना किसी भी आरोपी को 24 घण्टों से ज्यादा समय तक बन्दी बनाकर नहीं रखा जा सकता है अर्थात् 24 घण्टे के भीतर आरोपी को निकटतम न्यायालय के सामने प्रस्तुत करना आवश्यक है।

प्रश्न 5.
‘शोषण के विरुद्ध अधिकार’ से नागरिकों को कौन-कौन से अधिकार प्राप्त हुए हैं?
अथवा
नागरिकों को शोषण के विरुद्ध क्या अधिकार प्राप्त हैं? (2009)
उत्तर:
शोषण के विरुद्ध अधिकारों का वर्णन अनुच्छेद-23 एवं 24 में है। इन अधिकारों के द्वारा श्रमिकों, अल्पसंख्यकों तथा स्त्रियों को अन्याय व शोषण से मुक्ति दिलाने की चेष्टा की गयी है। ये निम्नलिखित हैं –

  1. बेगार व बलपूर्वक श्रम कराने का अन्त-संविधान की धारा-23 के अनुसार मनुष्यों से बेगार या बलपूर्वक कराया गया श्रम, कानून के विरुद्ध माना जाएगा।
  2. मनुष्य के क्रय-विक्रय का अन्त-संविधान के द्वारा मानव के क्रय-विक्रय को अवैध घोषित कर दिया गया है।
  3. अल्प आयु के बालकों से श्रम लेने पर रोक-14 वर्ष तक की आयु के बालकों को किसी कारखाने या खान में काम पर नहीं रखा जाएगा।
  4. स्त्रियों की सुरक्षा-संविधान में स्त्रियों को भी पुरुषों के समान अवसर देने की व्यवस्था की गयी है। स्त्रियों से किसी प्रकार का कठोर कार्य नहीं लिया जाएगा।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.
धार्मिक स्वतन्त्रता के अधिकार को स्पष्ट कीजिए। (2009)
उत्तर:
अनुच्छेद-25 से 28 के अन्तर्गत इस अधिकार की व्याख्या की गई है। भारत को धर्म निरपेक्ष राज्य घोषित किया गया है जिसका अर्थ है कि राज्य किसी भी धर्म से सम्बन्धित नहीं रहेगा और न ही किसी धर्म विशेष का पोषण करेगा। भारतीय नागरिकों को धार्मिक स्वतन्त्रता प्रदान की गयी है, जिसके अन्तर्गत –

  1. नागरिक अपनी इच्छानुसार किसी भी धर्म को अपना सकते हैं।
  2. प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का शान्तिपूर्वक प्रचार करने का अधिकार है।
  3. नागरिक धार्मिक संस्थाओं की व्यवस्था कर सकते हैं।
  4. अपनी धार्मिक संस्थाओं का प्रबन्ध करने तथा इनके सम्बन्ध में सम्पत्ति प्राप्त करने और व्यय करने की स्वतन्त्रता प्रत्येक नागरिक को है।
  5. राज्य द्वारा संचालित तथा सहायता प्राप्त विद्यालयों में किसी भी प्रकार की धार्मिक शिक्षा प्रदान नहीं की जाएगी।

प्रश्न 7.
संस्कृति तथा शिक्षा सम्बन्धी अधिकार पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
संविधान की 29वीं एवं 30वीं धाराओं में नागरिकों के संस्कृति व शिक्षा सम्बन्धी अधिकारों का उल्लेख किया गया है, जो निम्नलिखित हैं –

  1. भाषा, लिपि व संस्कृति की सुरक्षा-प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भाषा, लिपि एवं विशिष्ट संस्कृति की रक्षा व प्रचार-प्रसार करने का अधिकार है।
  2. सहायता अनुदान में निष्पक्षता-सरकार समस्त विद्यालयों को चाहे वे अल्पसंख्यकों के हों या बहुसंख्यकों के, सभी को समान अनुदान देगी।
  3. शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश की समानता-जाति, भाषा व धर्म के आधार पर किसी भी नागरिक को सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश से नहीं रोका जा सकता।
  4. शिक्षण संस्थाओं की स्थापना का अधिकार-संविधान के अनुच्छेद-30 के अनुसार समस्त अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रुचि की शिक्षण संस्थाओं को स्थापित करने का अधिकार है।

प्रश्न 8.
राज्य के नीति निदेशक तत्वों से क्या तात्पर्य है? इनके क्या उद्देश्य हैं?
उत्तर:
भारत के संविधान में कल्याणकारी राज्य की स्थापना कर सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय प्रदान करने के लिए नीति निदेशक सिद्धान्तों को शामिल किया गया है। नीति निदेशक तत्व संविधान निर्माताओं द्वारा केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों को नीतियों के निर्धारण के लिए दिए गए दिशा निर्देश हैं। ये निर्देश शासन प्रशासन के समस्त अधिकारियों के लिए मार्गदर्शक सिद्धान्त भी हैं। यह अपेक्षा की जाती है कि इनके अनुसार ही सभी कार्य सम्पन्न हों, परन्तु ऐसा न होने पर नागरिक इसकी अपील न्यायालय में नहीं कर सकता है। जबकि मौलिक अधिकारों के सम्बन्ध में ऐसा नहीं है। नीति निदेशक तत्व राज्य के कर्त्तव्य हैं। ये भारतीय संविधान की विशेषता है।

नीति निदेशक तत्वों के उद्देश्य :
नीति निदेशक तत्व भारत में सामाजिक और आर्थिक क्रान्ति को साकार करने का सपना है। इनका उद्देश्य आम आदमी की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना और समाज के ढाँचे को परिवर्तित कर भारतीय जनता को सही अर्थों में समान एवं स्वतन्त्र बनाना है। इन तत्वों का उद्देश्य भारत को :

  1. कल्याणकारी राज्य में बदलना
  2. गाँधीजी के विचारों के अनुकूल बनाना तथा
  3. अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति के पोषक राज्य के रूप में विकसित करना है।

प्रश्न 9.
सूचना के अधिकार से सम्बन्धित सूचनाएँ हम किन स्रोतों से प्राप्त कर सकते हैं?
उत्तर:
सूचनाएँ दो प्रकार से प्राप्त की जा सकती हैं –

  1. प्रकाशित सूचनाओं द्वारा :
    विभाग और शासकीय निकाय समय-समय पर स्वयं से सम्बन्धित जानकारियाँ प्रकाशित करते हैं, अतः सूचनाएँ उनसे मिल जाती हैं।
  2. आवेदन-पत्र प्रस्तुत करके :
    इस प्रकार सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदक को सादे कागज पर अपना नाम, पता दर्शाते हुए विभाग, शासकीय निकाय के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होता है। आवश्यक दस्तावेजों की छाया प्रतियाँ भी माँगी जा सकती हैं। इस हेतु कुछ शुल्क का प्रावधान भी है।

प्रश्न 10.
सूचना के अधिकार के अन्तर्गत हम सरकारी कार्यालय से जानकारी कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
उत्तर:
सूचना के अधिकार के तहत किसी भी सरकारी कार्यालय से जानकारी निम्नलिखित रूपों में प्राप्त की जा सकती है –

  1. दस्तावेज की फोटोकॉपी
  2. दस्तावेज एवं आँकड़ों की सी. डी. फ्लॉपी, वीडियो कैसेट की प्रति
  3. प्रकाशन जो सम्बन्धित विभाग द्वारा प्रकाशित किए गए हों
  4. दस्तावेजों का अवलोकन अर्थात् दस्तावेजों को उन्हीं के कार्यालय में पढ़ा जा सकता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 11.
सूचना के अधिकार के तहत सूचना नहीं देने वाले अधिकारियों को किन स्थितियों में और क्या दण्ड दिया जा सकता है?
उत्तर:
सूचना न देने पर दण्ड-सूचना नहीं देने वाले अधिकारियों को निम्नलिखित स्थितियों में सजा दी जा सकती है –

  1. लोक सूचना अधिकारी या सहायक लोक सूचना अधिकारी द्वारा आवेदन लेने से मना करना।
  2. निर्धारित समय में जानकारी नहीं देना।
  3. जानबूझ कर गलत, अधूरी व गुमराह करने वाली जानकारी देना।
  4. माँगी गई सूचना को नष्ट करना।

उपर्युक्त स्थितियों में सूचना आयोग ऐसे लोक सूचना अधिकारियों पर 250 रुपये प्रतिदिन से लेकर अधिकतम 25,000 रुपए तक अर्थदण्ड आरोपित करने का आदेश दे सकता है। इसी प्रकार, लोक सूचना अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने हेतु विभाग प्रमुख को आयोग अनुशंसा भी कर सकता है।

प्रश्न 12.
राज्य सूचना आयोग के कार्य व अधिकार कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
राज्य सूचना आयोग के कार्य व अधिकार राज्य सूचना आयोग के निम्नलिखित कार्य व अधिकार है –

  1. राज्य सूचना आयोग का कार्य सूचना के अधिकार को लागू करवाना है। आयोग लोगों से सूचना प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करता है और इससे सम्बन्धित शिकायतों/अपीलों की सुनवाई करता है।
  2. आयोग सूचना के अधिकार से सम्बन्धित किसी भी प्रकरण की जाँच के आदेश दे सकता है।
  3. आयोग के पास सिविल कोर्ट से सम्बन्धित समस्त अधिकार हैं। इसके अन्तर्गत किसी भी व्यक्ति को सम्मन जारी करना, सुनवाई के दौरान उसकी हाजिरी (उपस्थिति) सुनिश्चित करना तथा साक्ष्य प्रस्तुत करने के आदेश देने जैसे अधिकार प्रमुख हैं।

प्रश्न 13.
सूचना के अधिकार के अन्तर्गत हम किस प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं?
उत्तर:
सूचना के अधिकार के अन्तर्गत हम निम्न प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं –

  1. सरकार व सरकार के किसी भी विभाग से सम्बन्धित सूचना।
  2. सरकारी ठेकों का भुगतान, अनुमानित खर्च, निर्माण कार्यों के माप आदि की फोटो प्रतियाँ।।
  3. सड़क, नाली व भवन निर्माण में प्रयुक्त सामग्री के नमूने।
  4. निर्माणाधीन या पूर्ण विकास कार्यों का अवलोकन।
  5. सरकारी दस्तावेजों, जैसे-ड्राइंग, रिकॉर्ड पुस्तिका व रजिस्टरों आदि का अवलोकन।’
  6. यदि कोई शिकायत की गई है या कोई आवेदन दिया गया है तो उस पर प्रगति की जानकारी।
  7. सरकारी परियोजनाओं की जानकारी जिनका क्रियान्वयन कोई भी सरकारी विभाग या स्वयंसेवी संस्था कर रही हो।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 14 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संविधान ने नागरिकों को कौन-कौन से मौलिक अधिकार प्रदान किये हैं? वर्णन कीजिए।
अथवा
संविधान में कितने मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया गया है? ‘समानता के अधिकार’ की व्याख्या कीजिए। (2009)
अथवा
मौलिक अधिकार किसे कहते हैं ? भारतीय संविधान द्वारा हमें कितने मौलिक अधिकार प्राप्त हैं? (2011, 12)
उत्तर:
1948 में संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा मानव अधिकारों का घोषणा-पत्र जारी किया गया था। भारतीय संविधान में नागरिकों को जो मौलिक अधिकार प्रदान किये गये हैं, वे इसी घोषणा-पत्र पर आधारित हैं। ये अधिकार अग्रवत् हैं –

  • समानता का अधिकार :
    इस अधिकार के द्वारा प्रत्येक नागरिक को कानून के समक्ष समानता है तथा भेदभाव, अस्पृश्यता और उपाधियों का अन्त कर दिया गया है। सरकारी नौकरियों में बिना धर्म, जाति, लिंग आदि का भेदभाव किये समानता है।
  • स्वतन्त्रता का अधिकार :
    स्वतन्त्रता के अधिकार के अन्तर्गत नागरिकों को भाषण देने तथा विचार प्रकट करने, शान्तिपूर्ण सभा करने, संघ बनाने, देश में किसी भी स्थान पर घूमने-फिरने की, देश के किसी भी भाग में व्यवसाय की तथा देश में कहीं भी रहने की स्वतन्त्रता आदि प्राप्त है।
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार :
    प्रत्येक नागरिक को शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने का अधिकार है। इस अधिकार के अनुसार मानव के क्रय-विक्रय, किसी से बेगार लेने तथा 14 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों को कारखानों, खानों या किसी खतरनाक धन्धे में लगाने पर रोक लगा दी गयी है।
  • धार्मिक स्वतन्त्रता का अधिकार :
    भारत एक धर्म-निरपेक्ष राष्ट्र है, अतः प्रत्येक नागरिक को किसी भी धर्म का अनुसरण करने का अधिकार है। प्रत्येक धर्म के अनुयायियों को अपनी धार्मिक संस्थाएँ स्थापित करने तथा उनका प्रबन्ध करने का अधिकार है।
  • सांस्कृतिक तथा शिक्षा सम्बन्धी अधिकार :
    इस अधिकार के अन्तर्गत भारत के नागरिकों को अपनी भाषा, लिपि तथा संस्कृति को सुरक्षित रखने तथा उसका विकास करने का अधिकार है।
  • संवैधानिक उपचारों का अधिकार :
    इस अधिकार के अनुसार प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार दिया गया है कि यदि उपरिवर्णित पाँच अधिकारों में से किसी भी अधिकार पर आक्षेप किया जाए या उससे छीना जाए, चाहे वह सरकार की ओर से ही क्यों न हो, तो वह सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय से न्याय की माँग कर सकता है।

प्रश्न 2.
सूचना के अधिकार से क्या समझते हैं? सूचना अधिकार अधिनियम सम्बन्धी विशेष तथ्यों को स्पष्ट कीजिए। (2014)
उत्तर:
सूचना का अधिकार-भारतीय संसद में मई 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम पारित किया गया। इस अधिनियम के द्वारा देश के लोगों को किसी भी सरकारी कार्यालय से जानकारी प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। देश में विगत् कई वर्षों से विकास में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के कई प्रयास किए जाते रहे हैं। पंचायत राज की स्थापना और सार्वजनिक सेवाओं की निगरानी में स्थानीय समुदाय की भागीदारी इसका प्रमुख आयाम है। सार्वजनिक सेवाओं, सुविधाओं और योजनाओं, नियम-कायदों के बारे में जानकारी न होने से लोग विकास के कार्यों में भलीभाँति भागीदारी नहीं कर पाते हैं। लेकिन अब सूचना के अधिकार द्वारा विकास योजनाओं और सार्वजनिक कार्यों में पारदर्शिता लाई जा सकती है। शासन में निर्णय लेने की प्रक्रिया में पक्षपात की सम्भावना एवं भ्रष्टाचार को समाप्त करने की दिशा में यह एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

सूचना अधिकार अधिनियम सम्बन्धी तथ्य :
इस अधिनियम के विशेष तथ्य निम्नलिखित हैं –
(1) सूचना के अधिकार किसे प्राप्त हैं :
सूचना का अधिकार देश के प्रत्येक नागरिक को प्राप्त है। कोई भी नागरिक लोक निकाय से उससे सम्बन्धित जानकारी प्राप्त कर सकता है। इसके अतिरिक्त सभी लोक निकाय अपने दैनिक कार्य-कलापों के सम्बन्ध में आवश्यक सूचनाओं को सूचना-पट पर लोगों की जानकारी के लिए प्रदर्शित करते हैं।

(2) लोक निकाय से आशय :
ऐसे समस्त प्राधिकरण अथवा संस्थाएँ जिनकी स्थापना संसद या विधान मण्डल द्वारा पारित किये गये कानून (अधिनियम) के अन्तर्गत की गई हो, वे लोक निकाय की श्रेणी में सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त वे परिषद् भी इसमें सम्मिलित की गई हैं जो स्वशासी या गैर-सरकारी हैं, किन्तु जिन्हें या तो सरकारी अनुदान मिलता है या जिनका नियन्त्रण केन्द्र या राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। इस प्रकार, लोक निकाय से आशय सरकारी, संवैधानिक संस्थाएँ एवं विभागों से है।

MP Board Class 9th Social Science Solutions