MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए:
(i) 0.4 ÷ 2
(ii) 0.35 ÷ 5
(iii) 2.48 ÷ 4
(iv) 65.4 ÷ 6
(v) 651.2 ÷ 4
(vi) 14.49 ÷ 7
(vii) 3.96 ÷ 4
(viii) 0.80 ÷ 5
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7 1

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प्रश्न 2.
ज्ञात कीजिए:
(i) 4.8 ÷ 10
(ii) 52.5 ÷10
(iii) 0.7 ÷ 10
(iv) 33.1 ÷ 10
(v) 272.23 ÷ 10
(vi) 0.56 ÷ 10
(vii) 3.97 ÷ 10.
हल:
(i) 4.8 ÷ 10 = 0.48
(ii) 52.5 ÷ 10 = 5.25
(iii) 0.7 ÷ 10 = 0.07
(iv) 33.1 ÷ 10 = 3.31
(v) 272.23 ÷ 10 = 27.223
(vi) 0.56 ÷ 10 = 0.056
(vii) 3.97 ÷ 10 = 0.397

प्रश्न 3.
ज्ञात कीजिए :
(i) 2.7 ÷ 100
(ii) 0.3 ÷ 100
(ii) 0.78 ÷ 100
(iv) 432.6 ÷ 100
(v) 23.6 ÷ 100
(vi) 98.53 ÷ 100
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7 3

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प्रश्न 4.
ज्ञात कीजिए :
(i) 7.9 ÷ 1000
(ii) 26.3 ÷ 1000
(iii) 38.53 ÷ 1000
(iv) 128.9 ÷1000
(v) 0.5 ÷ 1000
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7 4
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7 4a

प्रश्न 5.
ज्ञात कीजिए:
(i) 7 ÷ 3.5
(ii) 36 ÷ 0.2
(iii) 3.25 ÷ 0.5
(iv) 30.947 ÷ 0.7
(v) 0.5 ÷ 0.25
(vi) 7.75 ÷ 0.25
(vii) 76.5 ÷ 0.15
(viii) 37.8 ÷ 1.4
(ix) 2.73 ÷ 1.3.
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7 5
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.7 5a

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प्रश्न 6.
एक गाड़ी 2.4 लीटर पैट्रोल में 43.2 km की दूरी तय करती है। यह गाड़ी 1 लीटर पैट्रोल में कितनी दूरी तय करेगी?
हल:
∵2.4 लीटर पैट्रोल में तय की गई दूरी = 43.2 km
∴ 1 लीटर पैट्रोल में तय की गई दूरी
= 432 ÷ 2.4 km
\(=\frac{432}{10} \div \frac{24}{10}=\frac{432}{10} \times \frac{10}{24}=18 \mathrm{km}\)
अतः गाड़ी द्वारा 1 लीटर पैट्रोल में तय की गई दूरी = 18 km.

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 1 शिवसङ्कल्पमस्तु

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 1 शिवसङ्कल्पमस्तु (पद्यम्) (यजुर्वेदात्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 1 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखो)
(क) मनः जाग्रतः कुत्र उदैति? (जाग्रत पुरुष का मन कहाँ जाता है?)
उत्तर:
मनः जाग्रतः दूरम उदैति। (जाग्रत पुरुष का मन दूर जाता है।)

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(ख) प्रजानाम् अन्तः स्थितं किम्? (प्राणियों के अन्दर क्या स्थित है?)
उत्तर:
प्रजानाम् अन्तः मनः स्थितः। (प्राणियों में (के भीतर) मन स्थित है।)

(ग) मनसः ऋते किंचन किं न क्रियते? (मन के बिना क्या कुछ नहीं किया जाता है?)
उत्तर:
मनसः ऋते किंचन कर्म न क्रियते। (मन के बिना कुछ भी कर्म नहीं किया जाता।)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) मे मनः किम् अस्तु? (मेरा मन कैसा हो?)
उत्तर:
में मनः शिवसङ्कल्पम् अस्तु। (मेरा मन कल्याणकारी सङ्कल्प वाला हो।)

(ख) मनसा सप्तहोता कः तायते? (मन से सात होताओं वाला क्या सम्पादित किया जाता है।)
उत्तर:
मनसा सप्तहोता यज्ञः तायते। (मन से सात होताओं वाला यज्ञ सम्पादित किया जाता है।)

(ग) मनसि प्रजानां सर्वं किम् ओतम्? (मन में प्राणियों का सारा क्या भरा है?)
उत्तर:
मनसि प्रजानां सर्वं चित्तम् ओतम्। (मन में प्राणियों का सारा ज्ञान भरा है।)

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प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत (नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए-)
(क) मनसा के यज्ञे विदथेषु कर्माणि कृण्वन्ति? (मन से कौन यज्ञ व ज्ञान-उपासनाओं में कर्म करते हैं?)
उत्तर:
मनसा अपसः धीराः मनीषणः यज्ञे विदथेषु कर्माणि कुर्वन्ति। (मन से कर्मवान्, धैर्यवान् और बुद्धिमान, पुरुष यज्ञ में व ज्ञान-उपासनाओं में कर्म करते हैं।)

(ख) अमृतेन किं परिगृहीतम्? (अमृत से क्या माना जाता है?)
उत्तर:
अमृतेन इंद भूतं भुवनं भविष्यत् सर्वम् परिगृहीतम्। (अमृत से भूतकाल, वर्तमान काल तथा भविष्यकाल की सांसारिक सारी वस्तुएँ मानी जाती हैं।

(ग) मनसि ऋचः साम यजूंषि कथं प्रतिष्ठिताः? (मन में ऋचाएँ, साममन्त्र व यजुर्मन्त्र कैसे स्थित हैं?)
उत्तर:
मनसि ऋचः सामः यजूंषि रथनाभौ अराः इव प्रतिष्ठिताः। (मन में ऋचाएँ, साममन्त्र व यजुर्मन्त्र, रथ चक्र की नाभि में तिल्लियों के समान स्थित हैं।)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत (दिए हुए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(सप्तहोता, मनः ऋते)

(क) तन्मे ……………. शिवसङ्कल्पमस्तु।
उत्तर:
तन्मे मनः शिवङ्कल्पमस्तु।

(ख) यस्मान्न ……………. किंचन कर्म क्रियते।
उत्तर:
यस्मान्न ऋते किंचन कर्म क्रियते।

(ग) येन यज्ञस्तायते …………….
उत्तर:
येन यज्ञस्तायते सप्तहोताः।

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(योग्यतानुसार (उचित रूप में) जोड़िए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 1 शिवसङ्कल्पमस्तु img 1
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 1 शिवसङ्कल्पमस्तु img 2
प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम् अशुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘न’ इति लिखत –
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) मनः दूरङ्गमम् अस्ति।
(ख) मे मनः शिवसङ्कल्पं न अस्तु।
(ग) मनः अपूर्वम् अस्ति।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) आम्।

प्रश्न 7.
एकवचनतः बहुवचने परिवर्तयत-(एकवचन से बहुवचन में बदलिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 1 शिवसङ्कल्पमस्तु img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 1 शिवसङ्कल्पमस्तु img 3

पश्न 8.
रेखाङ्कितपदान्याधृत्य प्रदत्तशब्दैः प्रश्ननिर्माणं कुरुत –
(रेखांकितपदों के आधार पर दिए गए शब्दों से प्रश्न बनाइए-)।
(केन, कस्मिन्, कस्य)
(क) मनः सुप्तस्य यथा एव एति। (सोए हुए पुरुष का मन वैसे ही लौट आता है।)
उत्तर:
मनः कस्य तथा एव एति? (मन किसका वैसे ही लौट आता है?)

(ख) येन धीराः कर्माणि कृण्वन्ति। (जिसके द्वारा धैर्यवान् कर्म करते हैं।)
उत्तर:
केन धीराः कर्माणि कृण्वन्ति? (किसके द्वारा धैर्यवान् कर्म करते हैं?)

(ग) यस्मिन् वेदाः प्रतिष्ठिताः। (जिसमें वेद स्थित हैं।)
उत्तर:
कस्मिन् वेदाः प्रतिष्ठिताः? (किसमें वेद स्थित हैं?)

योग्यताविस्तार –

पाठे आगतान् मन्त्रान् कण्ठस्थ कुरुत।
(पाठ में आए हुए मन्त्रों को कण्ठस्थ करो।)

समूहे एकाकी वा मन्त्राणां पाठं कुरुत।।
(समूह में या अकेले मन्त्रों का पाठ (जप) करो।

शिवसङ्कल्पमस्तु पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में ‘यजुर्वेद’ से संकलित कुछ मंत्र हैं, जिनमें मन को पवित्र तथा कल्याणकारी सङ्कल्प वाला होने की प्रार्थना प्रभु से की गई है, जिससे प्राणियों के सभी इच्छित कार्य सम्पन्न हो सकें।

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शिवसङ्कल्पमस्तु पाठ का अनुवाद

1. ॐयज्जायाग्रतो दूरमुदति दैवं तद् सुप्तस्य तथैवैति।
दूरङ्गमं ज्योतिषां ज्योतिरेकं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥1॥
अन्वय:
यत् जाग्रतः दूरम् उदैति, यत् दैवम्, तत् सुप्तस्य तथा एव एति, यत् दूरङ्गमम्, यत् ज्योतिषाम् एकं ज्योतिः, तत् मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु।।

शब्दार्था :
यत्-जो (मन)-The mind which; जाग्रतः-जाग्रत पुरुष का-of the waking person; उदैति-जाता है-goes; दैवम्-आत्मद्रष्टा-The viewer of self; सुप्तस्य-सोए हुए पुरुष का-of the sleeping person; एति-लौट आता है-returns, retreats; दूरङ्गमम्-भूत, भविष्य, वर्तमान सबको जानने वाला/दूर जाने वाला- one who goes far, one who knows the past, future and present; ज्योतिषाम्-इन्द्रियों का-of the senses; शिवसङ्कल्पम्-कल्याणकारी सङ्कल्प वाला-with resolve of welfare; अस्तु-हो-may be.

अनुवाद :
हे प्रभु! जाग्रत पुरुष का जो मन दूर जाता है, जो आत्मद्रष्टा (स्वयं को देखने वाला) है, और वह सोए हुए पुरुष का वैसे ही लौट आता है, जो भूत, भविष्य व वर्तमान सबको जानने वाला है, जो सब इन्द्रियों की एक ज्योति (प्रकाशक) है, वह मेरा मन कल्याणकारी सङ्कल्प वाला हो।

English :
Mind of waking person goes far-views self-mind of sleeping person retreats. Mind knows all times-enlightens the senses. May it prove to be of beneficial and auspicious resolve.

2. ॐयेन कर्माण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदधेषु धीरा।
यदपूर्वं यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥2॥
अन्वय :
येन अपसः धीराः मनीषिणः यज्ञे विदथेषु कर्माणि कृण्वन्ति यत् अपूर्वम्, यक्षम्, प्रजानामन्तः, तत् से मनः शिवसङ्कल्पमस्तु।

शब्दार्था :
येन-जिस मन के द्वारा-Through which (mind); अपसः-कर्मवान् पुरुष-the person who performs actions; विदधेषु-ज्ञान या उपासनाओं में-in knowledge or worshipperform; कृण्वन्ति-करते हैं, यत्-जो मन-which (mind); अपूर्वम्-सर्वप्रथम उत्पन्न-primordial; यक्षम्-यज्ञ सम्पादन में समर्थ या पूज्य-capable of performing a sacrifice or adorable (venerable).

अनुवाद :
हे प्रभु! जिसके द्वारा कर्मवान्, धैर्यवान् तथा बुद्धिमान, पुरुष यज्ञ में, ज्ञान या उपासनाओं में कर्म करते हैं, जो सर्वप्रथम उत्पन्न है, यज्ञ सम्पादन में समर्थ है तथा जीवों के अन्दर है, वह मेरा मन कल्याणकारी सङ्कल्प वाला हो।

English :
Mind inspires dutiful, forbearing and intelligent persons for performing sacrifices, seeking knowledge and doing worship. Primordial, capable of performing sacrifice and existing in all creatures.

3. ॐ यत्प्रज्ञानमुत चेतो धृतिश्च यज्जयोतिरन्तरमृतं प्रजासु।
यस्मान्न ऋते किंचन कर्म क्रियते तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥3॥
अन्वय :
यत् प्रज्ञानम्, उत चेतः, धृतिः च यत् प्रजासु अन्तः अमृतं ज्योतिः, यस्मात् ऋते किंचन कर्म न क्रियते, तत् मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु।

शब्दार्था :
प्रज्ञानम्-प्रकर्ष ज्ञान का साधन-Source of supreme knowledge; चेतः-सामान्य-विशेष ज्ञान कराने वाला-One who bestows general and special knowledge; धृतिः-धैर्य स्वरूप-forbearing; प्रजासु-जीवों में-among creatures; ज्योतिः-प्रकाशक है-Light (giver of light); किंचन-कुछ भी-nothing.

अनुवाद :
हे प्रभु! जो प्रकर्ष ज्ञान का साधन तथा सामान्य विशेष ज्ञान कराने वाला है, धैर्य स्वरूप है और जो जीवों के अन्दर अमर प्रकाशक है, जिसके बिना कोई भी कर्म नहीं किया जाता, ऐसा मेरा मन कल्याणकारी सङ्कल्प वाला हो।

English :
Mind-source of supreme knowledge, be tower of knowledge, forbearing-immortal light among creatures-promoter of all activities.

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4. ॐ येनेदं भूतं भुवनं भविष्यत्परिगृहीतममृतेन सर्वम् ।
येन यज्ञस्तायते सप्तहोता तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥4॥
अन्वय :
येन अमृतेन इदं भूतं भविष्यत् सर्वम् परिगृहीतम्, येन सप्तहोता यज्ञः तायते, तत् मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु।

शब्दार्था :
अमृतेन-अमर मन के द्वारा-Through immortal mind; भुवनम्-वर्तमान काल का-of the present; सर्वम्-सांसारिक सारी वस्तुएँ-all the worldly objects; परिगृहीतम्-माना जाता है-is considered (known as); सप्तहोता-सात होताओं वाला-by seven priests; तायते-सम्पादित किया जाता है-is performed.

अनुवाद :
हे प्रभु! जिसके अमृत मन के द्वारा भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्यत काल की सारी सांसारिक वस्तुओं का ग्रहण किया जाता है, जिसके द्वारा सात होताओं वाला यज्ञ सम्पादित किया जाता है, वह मेरा मन कल्याणकारी सङ्कल्प वाला हो।

English-The mind-attains everything in all ages (past, present and future. Which causes the completion of seven-priestly sacrifices.

5. ॐयस्मिन्नृचः साम यजूंषि यस्मिन् प्रतिष्ठिताः रथनाभाविवार ।
यस्मिंश्चित्तं सर्वमोतं प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु॥5॥

शब्दार्था :
यस्मिन्-जिस मन में-in which (mind); साम-साम मन्त्र-hymns of Sama Veda; यजूंषि-यजुर्मन्त्र-hymns of Yajur Veda; रथनाभौ-रथ चक्र की नाभि में-in the axle (hub)of the wheel of the chariot; अराः इव-तिल्लियों की तरह-like the spokes; प्रज्ञानाम्-प्राणियों का-of the animate beings; चित्तम्-ज्ञान -knowledge; ओतभ-भरा है-is full (replete).

अनुवाद :
हे प्रभु! जिस मन में ऋचाएँ, साम मन्त्र, यजुर्मन्त्र रथ चक्र की नाभि में तिल्लियों की तरह विराजमान हैं, जिस में प्राणियों का सारा ज्ञान भरा है, वह मेरा मन कल्याणकारी सङ्कल्प वाला हो।

English :
Mind-The container of Vedic hymns-full of all knowledge related to animate beings.

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए-
(i) 0.2 x 6
(ii) 8 x 4.6
(iii) 2.71 x 5
(iv) 20.1 x 4
(v) 0.05 x 7
(vi) 211.02 x 4
(vii)2 x 0.86
यहाँ सादा गुणा करने के पश्चात् दोनों संख्याओं में दशमलव बिन्दु के दाहिनी ओर अंक गिनकर दशमलव बिन्दु लगाएँगे।
हल:
(i) 0.2 x 6
∵ 2 x 6 = 12,
∴ 0.2 x 6 = 1.2

(ii) 8 x 4.6 ,
∵ 8 x 46 = 368
∴ 8 x 46 = 36.8

(iii) 2.71 x 5
∵ 271 x 5 = 1355;
∴ 2.71 x 5 = 13.55

(iv) 20.1 x 4
∵ 201 x 4 = 804
∴ 20.1 x 4 = 80.4

(v) 0.05 x 7
∵ 5 x 7 = 35
∴ 0.05 x 7 = 0.35

(vi) 211.02 x 4
∵ 21102 x 4 = 84408
∴ 211.02 x 4 = 844.08

(vii) 2 x 0.86
∵ 2 x 86 = 172
∴ 2 x 0.86 = 1.72

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प्रश्न 2.
एक आयत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए जिसकी लम्बाई 5.7 cm और चौड़ाई 3 cm है।
हल:
लम्बाई = 5.7 cm, चौड़ाई = 3 cm.
आयत का क्षेत्रफल = लम्बाई x चौड़ाई
= 5.7 x 3 = 17.1 cm2

प्रश्न 3.
ज्ञात कीजिए-
(i) 1.3 x 10
(ii) 36.8 x 10
(iii) 153.7 x 10
(iv) 168.07 x 10
(v) 31.1 x 100
(vi) 156.1 x 100
(vii) 3.62 x 100
(viii) 43.07 x 100
(ix) 0.5 x 10
(x) 0.08 x 10
(xi) 0.9 x 100
(xii) 0.03 x 1000
हल:
(i) 1.3 x 10 = 13
(ii) 36.8 x 10 = 368
(iii) 153.7 x 10 = 1537
168 : 07 x 10 = 1680.7
31.1 x 100 = 3110
(vi) 156.1 x 100 = 15610
(vii) 3.62 x 100 = 362
(viii) 43.07 x 100 = 4307
(ix) 0.5 x 10 = 5
(x) 0.08 x 10 = 0.8
(xi) 0.9 x 100 = 90
(xii) 0.03 x 1000 = 30
नोट – किसी संख्या को 10, 100 व 1000 से गुणा करने के लिए उसी संख्या को लिखकर दशमलव बिन्दु को दायीं ओर उतने ही अंक विस्थापित करते हैं जितने शून्य होते है।

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प्रश्न 4.
एक दुपहिया वाहन एक लीटर पैट्रोल में 55.3 km की दूरी तय करता है। 10 लीटर पैट्रोल में वह कितनी दूरी तय करेगा ?
हल:
∵ 1 लीटर पैट्रोल में तय की गई दूरी = 55.3 km
∴ 10 लीटर पैट्रोल में तय की गई दूरी = 55.3 x 10 km = 553 km

प्रश्न 5.
ज्ञात कीजिए-
(i) 2.5 x 0.3
(ii) 0.1 x 51.7
(iii) 0.2 x 316.8
(iv) 1.3 x 3.1
(v) 0.5 x 0.05
(vi) 11.2 x 0.15
(vii) 1.07 x 0.02
(viii) 10.05 x 1.05
(ix) 101.01 x 0.01
(x) 100.01 x 1.1
हल:
(i) 2.5 x 0.3
∵25 x 3 = 75
∴2.5 x 0.3 = 0.75
10, 100 और 1000 से भाग

(ii) 0.1 x 51.7
∵1 x 517 = 517
∴0.1 x 51.7 = 5.17

(iii) 0.2 x 316.8
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 1
∴ 0.2 x 316.8 = 63.36

(iv) 13 x 3.1
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 1a
∴ 1.3 x 3.1 = 4.03

(v) ∵5 x 5 = 25
∴0.5 x 0.05 = 0.025

(vi) 11:2 x 0.15
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 1b
∴ 11:2 x 0.15 = 1.68

(vii) 107 x 2 = 214
∴ 1.07 x 0.02 = 0.0214

(viii) 10.05 x 1.05
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 1c
∴1005 x 1.05 = 10.5525

(ix) ∵ 10101 x 1 = 10101
∴ 101.01 x 0.01 = 1:0101

(x) ∵ 10001 x 11 = 110011
∴100.01 x 1.1 = 110.011

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 53

प्रश्न
टुकड़ों की संख्या \(\frac { 9.5 }{ 1.9 }\) होगी। क्या यह सही है ?
उत्तर:
हाँ, यह सही है।

निम्न सारणी को पूरा कीजिए-
231.5 ÷ 10 = 23.15
231.5 ÷ 100 = 2:315
231.5 : 1000 = 0.2315

1.5 ÷ 10 = 0.15
1.5 ÷ 100 = 0.015
1.5 ÷ 1000 = 0.0015

29.36 ÷ 100 = 0:2936
29.36 ÷ 1000 = 0.02936
29.36 ÷ 10 = 2.936
नोट – किसी संख्या को 10, 100 व 1000 से भाग देने पर भागफल में दशमलव बिन्दु बायीं ओर उतने स्थान ही विस्थापित हो जाता है जितने 1 के साथ शून्य होते हैं।

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प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए-
(i) 235.4 ÷ 10
(ii) 235.4 ÷ 100
(iii) 235.4 ÷ 1000
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 2

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 54
प्रयास कीजिए

प्रश्न
(i) 35.7 ÷ 3 = ?
(ii) 25.5 ÷ 3= ?
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 2a

प्रयास कीजिए

प्रश्न
(i) 43.15 ÷ 5 = ?
(ii) 82.44 ÷ 6 ?
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 3

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 55

प्रयास कीजिए
(i) 15.55 ÷ 5
(ii) 126.35 ÷ 7
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 4

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 56
प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए-
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 5
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.6 5a

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 2 पर्यावरण संरक्षण के प्रयास व सफलताएँ

MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 2 पर्यावरण संरक्षण के प्रयास व सफलताएँ

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
आधुनिक कृषि में प्रोत्साहन दिया जा रहा है – (2016)
(i) जैविक खेती को
(ii) जैव उर्वरकों के उपयोग को
(iii) जैव कीटनाशकों के उपयोग को
(iv) उपर्युक्त सभी को।
उत्तर:
(iv) उपर्युक्त सभी को।

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प्रश्न 2.
पर्यावरण प्रभाव के निर्धारण का अन्तिम स्तर है
(i) विस्तृत प्रभाव निर्धारण
(ii) आलोचनात्मक पहलुओं का अध्ययन,
(iii) तीव्र प्रभाव निर्धारण
(iv) जोखिम का विश्लेषण।
उत्तर:
(i) विस्तृत प्रभाव निर्धारण

प्रश्न 3.
भारत में पर्यावरण प्रभाव के निर्धारण की जिम्मेदारी है
(i) पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की
(ii) रक्षा मंत्रालय की
(iii) पर्यटन एवं शहरी मंत्रालय की
(iv) कृषि मंत्रालय की।
उत्तर:
(i) पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की

प्रश्न 4.
चिपको आन्दोलन का प्रारम्भ हुआ (2008)
(i) कर्नाटक में
(ii) पूर्वोत्तर भारत में
(iii) उत्तराखण्ड में
(iv) केरल में।
उत्तर:
(iii) उत्तराखण्ड में

प्रश्न 5.
भारत में सी. एन. जी. का उपयोग सबसे पहले प्रारम्भ हुआ (2009, 12)
(i) मुम्बई में
(ii) दिल्ली में
(iii) कोलकाता में
(iv) चेन्नई में।
उत्तर:
(ii) दिल्ली में

रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए

  1. साइलेण्ट वेली …………. राज्य का एक छोटा-सा वन क्षेत्र है।
  2. चिपको आन्दोलन की शुरूआत वर्ष ………… में हुई।

उत्तर:

  1. केरल,
  2. 19741

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण संरक्षण से क्या आशय है? समझाइए। (2008)
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण और संसाधन को नष्ट होने से बचाने के लिए आयोजित प्रबन्धन को पर्यावरण संरक्षण कहते हैं।

प्रश्न 2.
पर्यावरण प्रभाव निर्धारण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
पर्यावरण प्रभाव निर्धारण पर्यावरणीय गुणवत्ता को बनाए रखने की महत्त्वपूर्ण तकनीक है।

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प्रश्न 3.
पर्यावरण प्रभाव का निर्धारण भारत में किस मंत्रालय की जिम्मेदारी है?
उत्तर:
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की।

प्रश्न 4.
जैविक खेती से आप क्या समझते हैं? (2017, 18)
उत्तर:
जैविक खेती वह खेती है जिसमें कृत्रिम रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया जाता है, वरन् जैविक खाद (गोबर या पेड़-पौधों की पत्तियों से बनी हरी खाद) का उपयोग होता है।

प्रश्न 5.
पर्यावरण प्रभाव निर्धारण के तीन प्रमुख स्तर कौन-कौन-से हैं?
उत्तर:

  1. प्रथम स्तर-प्रारम्भिक जाँच;
  2. द्वितीय स्तर-तीव्र प्रभाव निर्धारण;
  3. तृतीय स्तर-विस्तृत प्रभाव निर्धारण।

प्रश्न 6.
हमें पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता क्यों है? (2008)
उत्तर:
भावी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मानव, वनस्पति, जीव-जन्तु एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों (जल, वायु, खनिज) को संरक्षित किया जाना आवश्यक है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चिपको आन्दोलन क्या है एवं इसके आधारभूत तत्व कौन-कौन-से हैं?
उत्तर:
चिपको आन्दोलन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए एक कारगर उपाय है। यह केवल वृक्षों को बचाने का आन्दोलन ही नहीं है, अपितु भूमि नीति में आमूल परिवर्तन की माँग कर स्थायी कल्याणकारी आर्थिक पक्ष (अनाज, चारा, ईंधन, खाद, उर्वरक, कपड़ा) के लिए एक आधार प्रस्तुत करता है। इस आन्दोलन में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय है। इस आन्दोलन की सफलता ने सिद्ध कर दिया है कि गहन समस्याओं का निदान केवल नियम कानून बनाने से ही सम्भव नहीं होता। इसके लिए जनचेतना और अधिकारों की समझ होना भी आवश्यक है।

प्रश्न 2.
पर्यावरण संरक्षण किन महत्त्वपूर्ण उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आवश्यक है ? समझाइए।
उत्तर:
पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता :
पृथ्वी पर विविध प्रकार के पेड़-पौधे और जन्तु निवास करते हैं। मनुष्य पृथ्वी का सबसे बुद्धिमान और शक्तिशाली जीव है, पर प्रकृति ने मनुष्य को यह अधिकार नहीं दिया है कि वह यहाँ के संसाधनों को नष्ट करें। आवश्यकता इस बात की है कि हम इन संसाधनों को सजगता के साथ उपयोग करें। आज पर्यावरण असन्तुलन विश्व की सबसे बड़ी समस्या है। दूसरी ओर भावी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मानव, वनस्पति, जीव-जन्तु एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों (जल, वायु, खनिज) को संरक्षित किया जाना आवश्यक है।

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प्रश्न 3.
ई.आई.ए. की क्या भूमिका है? किन तत्वों को आधार मानकर ई. आई. ए. तैयार किया जाता है, वर्णन कीजिए।
(2009)
उत्तर:
पर्यावरणीय प्रभाव अनुमानक (ई.आई.ए.)-वर्तमान में पर्यावरण प्रदूषण और विघटन उच्च स्तर तक पहुंच चुका है। पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे, इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए पर्यावरणीय प्रभाव अनुमानक या ई.आई.ए. (Environment Impact Assessment) महत्त्वपूर्ण हो जाता है। पर्यावरणीय प्रभाव का निर्धारण अपनी परियोजनाओं से पर्यावरण पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव को शामिल करता है। पर्यावरण प्रभाव अनुमानक परियोजना से होने वाले लाभकारी और नुकसानदेह प्रभाव का मूल्यांकन गुणात्मक और संख्यात्मक दोनों प्रकार से करता है। ई.आई.ए. का लक्ष्य इस बात का ध्यान रखना होता है कि पर्यावरण का विघटन कम से कम हो।

पर्यावरणीय प्रभाव अनुमानक (ई.आई.ए.) के तत्व –

  1. भूमि पर प्रभाव-भूमि विघटन
  2. भूकम्प की सम्भावना
  3. मिट्टी एवं वायु की गुणवत्ता, धरातलीय एवं भूगर्भिक जल
  4. पौधों एवं वन्य जीवों की खतरे में पड़ी किस्मों की जानकारी
  5. ध्वनि प्रदूषण की स्थिति का आकलन
  6. सामाजिक आर्थिक प्रभाव
  7. अवशिष्ट व बचे पदार्थों का पर्याप्त उपयोग तथा
  8. जोखिम विश्लेषण व आपदा प्रबन्धन।

प्रश्न 4.
सी.एन.जी. से क्या आशय है? (2018) भारत में इसका सर्वाधिक उपयोग किस रूप में किया जा रहा है?
उत्तर:
सी.एन.जी. यानी कम्प्रैस्ड नेचुरल गैस धरती के भीतर पाए जाने वाले हाइड्रोकार्बन का मिश्रण है और इसमें 80 से 90 प्रतिशत मात्रा मीथेन गैस की होती है। सी.एन.जी. को वाहनों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने के लिए 200 से 250 किग्रा. प्रति वर्ग सेमी. तक दबाया यानी कम्प्रैस किया जाता है। यह गैस रंगहीन, गंधहीन, हवा से हल्की तथा पर्यावरण की दृष्टि से सबसे कम प्रदूषण उत्पन्न करती है। सी.एन.जी. को जलाने के लिए एल.पी.जी. की अपेक्षा ऊँचे तापमान की आवश्यकता पड़ती है इसलिए आसानी से आग पकड़ने का खतरा भी नहीं रहता। इसका उपयोग आज बिजलीघरों, खाद-कारखानों, इस्पात कारखानों, घरेलू ईंधन तथा वाहन के ईंधन के रूप में हो रहा है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चिपको आन्दोलन से क्या आशय है? इसका प्रारम्भ कैसे हुआ तथा इसकी अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के क्या कारण थे? (2008, 15)
अथवा
चिपको आन्दोलन से क्या आशय है? समझाइए। (2013, 17)
उत्तर:
विश्व प्रसिद्ध ‘चिपको आन्दोलन’ गढ़वाल की महिलाओं द्वारा चलाया गया था। आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य वनों की कटाई पर रोक लगाना था। इस आन्दोलन के प्रणेता सुन्दरलाल बहुगुणा हैं। इनके द्वारा प्रारम्भ किया गया चिपको आन्दोलन जंगल बचाने का एक पर्यायवाची शब्द बन चुका है।

यह केवल वृक्षों को बचाने का आन्दोलन ही नहीं है, अपितु भूमि नीति में आमूल परिवर्तन की माँग कर स्थायी कल्याणकारी आर्थिक पक्ष (अनाज, चारा, ईंधन, खाद, उर्वरक, कपड़ा) के लिए एक आधार. प्रस्तुत करता है। इस आन्दोलन का कर्म क्षेत्र, अब केवल भारतवर्ष में न होकर स्विट्जरलैण्ड जर्मनी और हॉलैण्ड भी है। यह आन्दोलन 1974 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश (वर्तमान में उत्तराखण्ड) सरकार द्वारा जंगलों को काटने का ठेका देने के विरोध में एक गांधीवादी संस्था ‘दशोली ग्राम स्वराज मण्डल’ ने चमोली जिले के गोपेश्वर में रेनी नामक ग्राम में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् बहुगुणा के नेतृत्व में प्रारम्भ किया गया।

इस आन्दोलन के तहत् महिलाएँ पेड़ों से चिपककर पेड़ को काटने से रक्षा करती थीं। पुरुषों की अनुपस्थिति में रेनी गाँव की एक साधारण महिला गौरा देवी श्रमिकों द्वारा वृक्षों को काटने से रोकने के लिए आगे आई। गौरा देवी ने गाँव में घर-घर जाकर लड़कियों और स्त्रियों को प्रतिरोध करने के लिए प्रेरित किया। गौरा देवी के नेतृत्व में वृक्षों को बचाने के लिए अहिंसक तकनीक चिपको का प्रयोग किया गया। स्त्रियों का कहना था कि ये जंगल हमारा मायका है, इसे हम किसी भी कीमत पर कटने नहीं देंगे। महिलाओं ने निरन्तर 48 घण्टे दिन-रात जंगल को घेरे रखा और ठेकेदार व वनकर्मियों की बन्दूक का भय भी इनकी हिम्मत को कम न कर पाया। इस घटना के बाद पूरे उत्तराखण्ड में वन संरक्षण हेतु जनता में नवीन उत्साह का संचार हुआ। इस आन्दोलन को गति प्रदान करने के लिए सुन्दरलाल बहुगुणा ने 2800 किमी की पदयात्रा की।

इस आन्दोलन के फलस्वरूप हिमालय क्षेत्र के वनों को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की माँग स्वीकार की गई। इस क्षेत्र के वनों के हरे वृक्षों को अगले 15 वर्षों तक काटने पर रोक लगा दी गयी। परिणामस्वरूप जंगलों का संवर्द्धन, भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि एवं वन्य प्राणियों के शिकार पर नियन्त्रण सम्भव हुआ।

प्रश्न 2.
साइलेण्ट वैली पर टिप्पणी कीजिए। (2008, 09, 10, 12)
उत्तर:
साइलेण्ट वैली (शान्त घाटी)-साइलेण्ट वैली केरल का एक छोटा वन क्षेत्र है। यह पश्चिमी घाट पर नीलगिरि के दक्षिण-पश्चिमी ढाल पर स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल 90 वर्ग किमी है। यह क्षेत्र चारों ओर से ऊँची पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह जनसंख्याविहीन, क्षेत्र है। कुन्तीपूजा नदी साइलेण्ट वैली के बीच से होकर बहती है। इस घाटी में दुर्लभ एवं मूल्यवान वनस्पति एवं जन्तुओं का भण्डार है।

केरल राज्य विद्युत् बोर्ड कुन्तीपूजा नदी पर बाँध बनाकर जल विद्युत् पैदा करना चाहता है। इसी प्रस्ताव के कारण पर्यावरणीय विवाद प्रारम्भ हुआ। केन्द्र सरकार के पर्यावरण विभाग ने केरल सरकार को बाँध निर्माण पर पुनः विचार करने को कहा। उक्त कार्य हेतु एक समिति गठित की गयी। एम. जी. के. मेनन की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने बाँध निर्माण को पर्यावरण की अपूरणीय क्षति बताकर बाँध न बनाने की सिफारिश की। समिति की जाँच रिपोर्ट के अनुसार शान्त घाटी कुछ विशिष्ट प्रकार की वनस्पतियों एवं वन्य प्राणियों का आश्रय स्थल है। यहाँ के भूमध्यरेखीय वर्षा वन बिना मानवीय हस्तक्षेप की स्थिति में ही सुरक्षित है। 1985 में साइलेण्ट वैली ‘राष्ट्रीय आरक्षित वन क्षेत्र’ घोषित करना पड़ा। इस प्रकार जन आन्दोलन के कारण ही बहुमूल्य वर्षा वन, दुर्लभ वनस्पति एवं जीव-जन्तुओं को सुरक्षित किया जा सका।

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प्रश्न 3.
जल संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए मध्य प्रदेश में कौन-कौन-से प्रयास किये गये हैं ? विस्तार से वर्णन कीजिए। (2008,09)
उत्तर:
मध्य प्रदेश में जल संरक्षण संवर्द्धन हेतु किये गए प्रयास पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में मील के पत्थर हैं। प्रमुख प्रयास निम्न प्रकार हैं –
(1) राजीव गांधी जल संग्रहण मिशन :
वर्ष 1994 में सूखा, अकाल एवं वन विनाश की समस्याओं के समाधान के लिए राजीव गांधी जल संग्रहण मिशन का कार्य प्रारम्भ हुआ। यह मिशन अन्तिम उपभोक्ता को भूमि और जल संरक्षण कार्यक्रम से जोड़कर उसके क्रियाकलाप और रख-रखाव पर बल देता है। मिशन के तहत जल संग्रहण हेतु स्थानीय समुदाय की माँग पर स्टाप डेम और तालाब बनाये गये। इन स्टाप डेमों और तालाबों में जल संग्रहण से जल की मात्रा में वृद्धि हुई। मृदा का कटाव रुका, सिंचाई हेतु जल मिला, पेड़-पौधे हरे-भरे हुए तथा जल संकट से मुक्ति हुई एवं पशुओं को सरलता से जल उपलब्ध होने लगा जिससे पशुधन व कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई।

(2) एक पंच एक तालाब योजना :
वर्ष 1999 में राज्य सरकार ने इस योजना के अन्तर्गत पंचायत के प्रत्येक सरपंच को अपने पाँच वर्ष के कार्यकाल में कम से कम एक तालाब के निर्माण को व पुराने तालाब के सुधार को अनिवार्य कर दिया। इनकी लागत का एक-चौथाई व्यय जनता द्वारा वहन किया।

(3) मिट्टी बचाओ अभियान :
मध्य प्रदेश में तवा बाँध के कारण अत्यन्त जल-जमाव एवं खारेपन को रोकने तथा किसानों को उसके लिए मुआवजा दिलाने हेतु वर्ष 1977 में मिट्टी बचाओ आन्दोलन प्रारम्भ किया गया।

(4) पानी रोको अभियान :
वर्ष 2000 में पानी रोको अभियान के अन्तर्गत छोटे-छोटे बाँध बनाकर पानी के संग्रहण को बढ़ाया गया, इससे लगभग 7 लाख जल संग्रहण क्षेत्र विकसित हुए।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चिपको आन्दोलन के प्रणोता कौन थे? (2009)
(i) नारायण दत्त तिवारी
(ii) सुन्दरलाल बहुगुणा
(iii) उमा भारती,
(iv) चौधरी देवीलाल।
उत्तर:
(ii) सुन्दरलाल बहुगुणा

प्रश्न 2.
साइलेण्ट वैली को राष्ट्रीय उद्यान कब घोषित किया गया?
(i) 1980
(ii) 1985
(iii) 1975
(iv) 1995
उत्तर:
(ii) 1985

प्रश्न 3.
सी. एन. जी. (C.N.G) का पूरा नाम है
(i) Compressed Natural Gas
(ii) Computerised Natural Gas
(iii) Common Natural Gas
(iv) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(i) Compressed Natural Gas

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. मनुष्य प्रकृति का सर्जक ही नहीं, एक …………. भी है।
  2. चिपको आन्दोलन …………. के संरक्षण के लिए एक कारगर उपाय है।
  3. वर्ष 2000 में पानी रोको अभियान के अन्तर्गत ……….. बनाकर पानी के संग्रहण को बढ़ाया गया।

उत्तर:

  1. घटक
  2. प्राकृतिक संसाधनों
  3. छोटे-छोटे बाँध

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सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
कुन्तीपूजा नदी साइलेण्ट वैली के बीच से होकर गुजरती है। (2009)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
भारत में पर्यावरणीय प्रभाव निर्धारण का कार्य कृषि मन्त्रालय द्वारा किया जाता है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
भारत में सी. एन. जी का उपयोग सबसे पहले दिल्ली में प्रारम्भ हुआ। (2008)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 4.
सन् 1999 में राज्य सरकार ने एक पंच एक तालाब योजना लागू की।
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 5.
चिपको आन्दोलन को राष्ट्रीय समर्थन व लोकप्रियता मिली।
उत्तर:
सत्य

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 2 पर्यावरण संरक्षण के प्रयास व सफलताएँ - 1

उत्तर:

  1. → (ग)
  2. → (घ)
  3. → (ङ)
  4. → (क)
  5. → (ख)

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एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
राजीव गांधी जल संग्रहण मिशन कब प्रारम्भ किया गया? (2009)
उत्तर:
1994

प्रश्न 2.
एक सस्ता, अच्छा और कम प्रदूषण फैलाने वाला ऊर्जा संसाधन, जो वाहनों के लिए उपयोगी है, क्या है?
उत्तर:
सी. एन. जी. (Compressed Natural Gas)

प्रश्न 3.
मृदा को उपजाऊ बनाने के लिए खेतों में मौसम के अनुसार बदल-बदलकर पैदावार की व्यवस्था को क्या कहते हैं?
उत्तर:
फसल चक्र

प्रश्न 4.
वे जीव जो मृदा में पौष्टिक तत्व उत्पन्न करते हैं। (2008)
उत्तर:
जैव उर्वरक

प्रश्न 5.
चिपको आन्दोलन का प्रारम्भ किस राज्य में हुआ? (2018)
उत्तर:
उत्तराखण्ड।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
फसल चक्र से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिये खेतों में मौसम के अनुसार बदल-बदलकर पैदावार की व्यवस्था करना ही फसल चक्र कहलाता है।

प्रश्न 2.
जैव उर्वरक किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे जीव जो मिट्टी में पौष्टिक तत्व पैदा करते हैं; जैसे-जीवाणु, वर्मी, फफूंद आदि जैव उर्वरक कहलाते हैं।

प्रश्न 3.
पुनः चक्रण से क्या आशय है?
उत्तर:
ऐसी वस्तुओं या उत्पादों जिनका वास्तविक मूल्य उपयोग के कारण खत्म हो गया हो, को पुनः उपयोगी बनाना पुनः चक्रण कहलाता है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण प्रभाव अनुमानक के प्रमुख उद्देश्य बताइए। (2008)
उत्तर:
पर्यावरण प्रभाव निर्धारण पर्यावरणीय गुणवत्ता को बनाए रखने की महत्त्वपूर्ण तकनीक है। इसके मुख्य उद्देश्य निम्न हैं –

  1. पर्यावरण की गुणवत्ता बनी रहे।
  2. पर्यावरण को विघटन से बचाया जाए ताकि उपचार किया जा सके।
  3. पर्यावरण को क्षति पहुँचाए बिना प्रगति हो।

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प्रश्न 2.
एक उदाहरण देकर समझाइए कि मनुष्य ने प्राकृतिक पर्यावरण की आपदाओं पर विजय कैसे प्राप्त की है?
उत्तर:
मनुष्य पहले पर्यावरण का दास था। ऐसा माना जाता है कि मानव के क्रिया-कलाप पर्यावरण के प्रतिबन्धों से प्रभावित होते हैं अर्थात् मनुष्य जिस प्रकार के पर्यावरण में रहता है, उसके क्रिया-कलाप उसी पर्यावरण के अनुसार होते हैं। परन्तु आज मनुष्य ने विज्ञान और तकनीक के विकास द्वारा पर्यावरण की आपदाओं पर विजय प्राप्त कर ली है। उसने पर्यावरण प्रतिबन्धों को हटाना सीख लिया है। उदाहरण के लिए-अब उष्ण कटिबन्धीय मरुस्थलों की भयानक गर्मी मनुष्य के लिए कोई समस्या नहीं है।

उसने इस भीषण गर्मी से बचाव के लिए वातानुकूलित (एयरकंडीशन) निवास स्थान बना लिए हैं। मनुष्य ने समुद्र के खारे जल को मीठे जल में परिवर्तित करना सीख लिया है। मनुष्य ने बाढ़ जैसी आपदाओं से बचाव हेतु नदियों पर बाँध बना लिये हैं, इन बाँधों से वह सिंचाई हेतु जल तथा विद्युत् भी प्राप्त करने लगा है। इस प्रकार स्पष्ट है कि मनुष्य ने प्राकृतिक पर्यावरण की आपदाओं पर विजय प्राप्त कर उन्हें अपनी आवश्यकतानुसार परिवर्तित कर लिया है।

प्रश्न 3.
कोई विकासात्मक परियोजना प्रारम्भ करने के पूर्व परियोजनाकर्ता एवं प्रबन्धक को किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है, वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कोई विकासात्मक परियोजना प्रारम्भ करने के पूर्व परियोजनाकर्ता एवं प्रबन्धक को यह जानना आवश्यक हो जाता है कि उस योजना का उस स्थान विशेष की जलवायु, वनस्पति, जीव-जन्तु एवं समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा। विकास की इन योजनाओं; जैसे-विद्युत् संयन्त्र, बाँध, इस्पात एवं लौह कारखाने का पर्यावरण पर क्या प्रभाव होगा। खाद्यान्न तेल, कागज, सीमेण्ट उद्योग में यह और भी अधिक आवश्यक हो जाता है। अत: इन योजनाओं को प्रारम्भ से पूर्व पर्यावरण मसौदा तैयार किया जाता है। इस प्रकार विकास योजना के पूर्व पर्यावरण प्रभाव वक्तव्य तैयार किया जाता है, इसमें भूमि, धरातल, मिट्टी, जीव-जन्तु, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, प्रदूषण एवं आपदा प्रबन्धन से सम्बन्धित जानकारियाँ होती हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण संरक्षण से क्या अभिप्राय है? इसके लिए सुझाव दीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण संरक्षण का अर्थ विकास ही समझा जाना चाहिए और इस कार्य में ग्रामीण तथा शहरी सभी लोगों को सक्रिय होकर हिस्सा लेना चाहिए। बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए रचनात्मक कदम उठाने होंगे जिससे न तो पर्यावरण प्रदूषित हो और न ही आर्थिक, सामाजिक विकास अवरुद्ध हो। इस सम्बन्ध में यहाँ कुछ सकारात्मक सुझाव दिए जा रहे हैं –

  1. जनसाधारण को प्रदूषण से उत्पन्न खतरों से अवगत कराया जाय जिससे प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर प्रदूषण कम करने का हर सम्भव प्रयास ईमानदारी से करे।
  2. पर्यावरण की सुरक्षा के लिए औद्योगिक विकास अवरुद्ध न किया जाय बल्कि औद्योगिक विकास नियोजित ढंग से हो, जिससे कि पर्यावरण में किसी भी प्रकार का असन्तुलन उत्पन्न न हो। क्योंकि देखा गया है कि जिस ढंग से औद्योगिक विकास के लिए पेड़-पौधों को काटा जा रहा है वह आज की पर्यावरण सम्बन्धी सबसे बड़ी समस्या है।
  3. यातायात के साधनों से होने वाले प्रदूषण से बचने के लिए मोटर वाहन सम्बन्धी नियमों व कानून को सख्ती से लागू किया जाय। अत्यधिक धुआँ छोड़ने वाले तथा तीव्र ध्वनि के हॉर्न वाले वाहनों पर प्रतिबन्ध लगाया जाए।
  4. उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषित जल, जोकि नदियों व कृषि भूमि में पहुँचता है, इस पर भी प्रतिबन्ध लगाया जाना चाहिए। सभी उद्योगों में जल उपचार संयन्त्र स्थापित किये जाने चाहिए जिससे प्रदूषित जल को शुद्ध किया जा सके।
  5. जनसंख्या वृद्धि पर नियन्त्रण कर प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
  6. वनों की अन्धाधुन्ध कटाई पर सरकार को सख्ती बरतनी चाहिए, भूमि को बंजर होने से बचाने, पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने तथा वन रोपने हेतु सिंचाई की व्यवस्था में सुधार के लिए सघन वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया जाना चाहिए।
  7. योजना आयोग, पर्यावरण और वन विभाग और परम्परागत ऊर्जा विभाग, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभागों के बीच ऐसा समन्वय हो कि ये तीनों विभाग पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कृत संकल्प होकर कार्य करें।

प्रश्न 2.
वाटर हार्वेस्टिंग से क्या आशय है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वाटर हार्वेस्टिंग का आशय है पानी को रोकना, सहेजना, जमा करना और बाद में उसे पृथ्वी के ऊपर या नीचे जलस्रोतों में डालना। यह तकनीक बहुत सरल, सुगम और सस्ती है। अनुमान है कि 2000 वर्ग फुट की छत पर एक सेण्टीमीटर वर्षा होने पर वहाँ से लगभग 2000 लीटर पानी बहकर निकल जाता है। किसी क्षेत्र में अगर 100 सेण्टीमीटर वर्षा हो तो 100 वर्ग फुट की छत से वर्षाकाल में लगभग एक लाख लीटर पानी नलकूप, हैण्डपम्प, कुएँ, बावड़ी या जलाशय जैसे जलस्रोतों तक पहुँचाया जा सकता है। इस तरह इन जलस्रोतों की हर वर्ष भरपाई होते रहने से क्षेत्रों को सूखने से बचाया जा सकता है।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.2

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.2

प्रश्न 1.
याद कीजिए कि दो वृत्त सर्वांगसम होते हैं, यदि उनकी त्रिज्याएँ बराबर हैं। सिद्ध कीजिए कि सर्वांगसम वृत्तों की बराबर जीवाएँ उनके केन्द्रों पर बराबर कोण अन्तरित करती हैं। (2018, 19)
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.2 1
चित्र 10.1
दिया है : दो सर्वांगसम वृत्त जिनके केन्द्र O तथा O’ हैं।
जीवा AB = जीवा PQ केन्द्रों पर ∠AOB और ∠PO’Q अन्तरित करते हैं।
अब ΔOAB और OPQ में,
चूँकि OA = O’P (सर्वांगसम वृत्तों की त्रिज्याएँ हैं)
OB = O’Q (सर्वांगसम वृत्तों की त्रिज्याएँ हैं)
AB = PQ (दिया है)
⇒ ΔΟΑΒ ≅ ΔΟΡΟ (SSS सर्वांगसम प्रमेय)
⇒ ∠AOB = ∠PO’Q (CPCT)
अतः सर्वांगसम वृत्तों की बराबर जीवाएँ केन्द्रों पर बराबर कोण अन्तरित करती हैं। इति सिद्धम्

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प्रश्न 2.
सिद्ध कीजिए कि यदि सर्वांगसम वृत्तों की जीवाएँ उनके केन्द्रों पर बराबर कोण अन्तरित करें, तो जीवाएँ बराबर होती हैं।
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.2 2
चित्र 10.2
दिया है : दो सर्वांगसम वृत्त जिनके केन्द्र O तथा O’ है तथा जीवाएँ AB और PQ केन्द्रों पर क्रमशः
∠AOB = ∠PO’Q अन्तरित करती हैं।
अब ΔAOB और ΔPO’Q में,
चूँकि OA = O’P (सर्वांगसम वृत्तों की त्रिज्याएँ हैं)
∠AOB = ∠PO’Q (दिया है)
OB = O’Q (सर्वांगसम वृत्तों की त्रिज्याएँ)
⇒ ΔAOB ≅ ΔPO’Q (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AB = PQ (CPCT)
अतः सर्वांगसम वृत्तों में वे जीवाएँ जो केन्द्र पर बराबर कोण अन्तरित करती हैं आपस में बराबर होती हैं। इति सिद्धम्

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.1

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 वृत्त Ex 10.1

प्रश्न 1.
खाली स्थान भरिए
(i) वृत्त का केन्द्र वृत्त के ………………… में स्थित होता है। (बहिर्भाग/अभ्यन्तर)
(ii) एक बिन्दु, जिसकी वृत्त के केन्द्र से दूरी त्रिज्या से अधिक हो, वृत्त के ……….. स्थित होता है। (बहिर्भाग/अभ्यन्तर)
(iii) वृत्त की सबसे बड़ी जीवा वृत्त का ………….. होता है।
(iv) एक चाप ……………… होता है, जब इसके सिरे एक व्यास के सिरे हों।
(v) वृत्तखण्ड एक चाप तथा ………………. के बीच का भाग होता है।
(vi) एक वृत्त, जिस तल पर स्थित है, उसे ………………. भागों में विभाजित करता है।
उत्तर:
(i) अभ्यन्तर,
(ii) बहिर्भाग,
(iii) व्यास,
(iv) अर्द्धवृत्त,
(v) जीवा,
(vi) तीन।

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प्रश्न 2.
लिखिए सत्य/असत्य। अपने उत्तर का कारण दीजिए-
(i) केन्द्र को वृत्त पर किसी बिन्दु से मिलाने वाला रेखाखण्ड वृत्त की त्रिज्या होती है।
(ii) एक वृत्त में समान लम्बाई की सीमित जीवाएँ होती हैं।
(iii) यदि एक वृत्त को तीन बराबर भागों में बाँट दिया जाये, तो प्रत्येक भाग दीर्घ चाप होता है।
(iv) वृत्त की एक जीवा जिसकी लम्बाई त्रिज्या से दो गुनी होती है, वृत्त का व्यास कहलाती है।
(v) त्रिज्यखण्ड जीवा एवं संगत चाप के बीच का क्षेत्र होता है।
(vi) वृत्त एक समतल आकृति है।
उत्तर:
(i) कथन सत्य है, यही वृत्त की त्रिज्या की परिभाषा है।
(ii) कथन असत्य है, क्योंकि वृत्त में समान लम्बाई की असीमित जीवाएँ होती हैं।
(iii) कथन असत्य है, क्योंकि दीर्घ चाप वृत्त के आधे से अधिक होता है।
(iv) कथन सत्य है, क्योंकि वृत्त का व्यास केन्द्र से होकर जाने वाली जीवा है, जो दो त्रिज्याओं से मिलकर बना है।
(v) कथन असत्य है, क्योंकि यह वृत्तखण्ड होता है।
(vi) कथन सत्य है, क्योंकि वृत्त एक तल पर बिन्दुओं का समूह है।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Chapter 9 अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Maths Chapter 9 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी समान्तर चतुर्भुज ABCD की भुजा BC पर कोई बिन्दु E लिया जाता है। AE और DC को बढ़ाया जाता है जिससे वे F पर मिलते हैं। सिद्ध कीजिए किar (ADF) = ar (ABFC) है।
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 1
चित्र 9.26
समान्तर चतुर्भुज ABCD दिया है जिसकी भुजा BC पर कोई बिन्दु E है। AE और DC को बढ़ाया गया है जो बिन्दु F पर मिलते हैं। AC और BF को मिलाइए।
चूँकि AC समान्तर चतुर्भुज ABCD का विकर्ण है
⇒ ar (ADC) = ar (ABC) …(1)
चूँकि उभयनिष्ठ आधार FC पर DF || AB के मध्य ∆ACF एवं ∆BCF स्थित हैं।
⇒ ar (ACF) = ar (BCF) …(2)
⇒ ar (ADC) + ar (ACF) = ar (ABC) + ar (BCF) [समी. (1) और (2) से]
ar (ADF) = ar (ABFC). (चित्रानुसार) इति सिद्धम्

प्रश्न 2.
संलग्न चित्र में ABCDE एक पंचभुज है। AC के समान्तर खींची गई BP बढ़ायी गई DC को P पर तथा AD के समान्तर खींची गई EQ बढ़ायी गई CD से Q पर मिलती है।
सिद्ध कीजिए कि-
ar (ABCDE) = ar (APQ)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 2
चित्र 9.27
हल:
दिया है : ABCDE एक पंचभुज है। BP || AC और EQ || AD खींची गई हैं जो DC को दोनों ओर बढ़ाने पर क्रमशः P और Q बिन्दुओं पर मिलती हैं।
चूँकि उभयनिष्ठ आधार AC पर AC || BP के मध्य ∆ABC एवं ∆APC स्थित हैं। =
⇒ ar (ABC) = ar (APC) ….(1)
चूँकि उभयनिष्ठ आधार AD पर AD || EQ के मध्य ∆ADE और ∆ADO स्थित हैं।
⇒ ar (ADE) = ar (ADQ) …(2)
⇒ ar (ABC) + ar (ADE) = ar (APC) + ar (ADQ) [समीकरण (1) और (2) से]
⇒ ar (ABC) + ar (ACD) + ar (ADE) = ar (APC) + ar (ACD) + ar (ADQ) [दोनों ओर ar (ACD) जोड़ने पर]
अतः ar (ABCDE) = ar (APQ). (चित्रानुसार) इति सिद्धम्

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प्रश्न 3.
एक समान्तर चतुर्भुज ABCD के विकर्ण बिन्दु पर प्रतिच्छेद करते हैं। O से होकर एक रेखा खींची जाती है, जो AD को P और BC को Q पर मिलती है। दर्शाइए कि PQ इस समान्तर
चतुर्भुज ABCD को बराबर क्षेत्रफल वाले दो भागों में विभाजित करती है।
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 3
चित्र 9.28
ABCD एक दिया हुआ चतुर्भुज है जिसके विकर्ण AC और BD परस्पर O बिन्दु पर प्रतिच्छेद करते हैं। O से होकर रेखा POQ खींची गई है जो AD और BC को क्रमशः P और Q पर प्रतिच्छेद करती है। सिद्ध करना है कि PQ समान्तर चतुर्भुज ABCD को दो समान क्षेत्रफल वाले भागों में विभाजित करती है।
अर्थात् ar (ABQP) = ar (PQCD)
∆POA और ∆QOC में,
चूँकि ∠OAP = ∠OCQ (एकान्तर कोण हैं)
OA = OC (O, कर्ण AC का मध्य-बिन्दु है)
∠POA = ∠QOC (सम्मुख कोण हैं)
⇒ ∆POA = ∆QOC (ASA सर्वांगसमता प्रमेय से) …(1)
∆AOB और ∆COD में,
OA = OC (O, कर्ण AC का मध्य-बिन्दु है)
OB = OD (O, कर्ण BD का मध्य-बिन्दु है)
∠AOB = ∠COD (सम्मुख कोण हैं) AAOB = A COD (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)…(2)
∆BOQ और ∆DOP में,
चूँकि ∠QOB = ∠POD (सम्मुख कोण हैं)
OB = OD (O कर्ण BD का मध्य-बिन्दु है)
∠OBQ = ∠ODP (एकान्तर कोण हैं)
∆BOQ ≅ ∆DOP (ASA सर्वांगसमता प्रमेय)…(3)
⇒ ar (POA) + ar (AOB) + ar (BOQ) = ar (QOC) + ar (COD) + ar (DOP) [समी (1) + (2) + (3) से]
अतः ar (ABQP) = ar (PQCD). (चित्रानुसार)
इति सिद्धम्

प्रश्न 4.
संलग्न चित्र में ABCD और AEFD दो समान्तर चतुर्भुज है। सिद्ध कीजिए कि ar (PEA) = ar (QFD).
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 4
चित्र 9.28
हल:
ABCD एवं AEFD दो समान्तर चतुर्भुज दिए हैं।
⇒ BA || CD तथा EA || FD (चित्रानुसार)
चूँकि BA || CD को EQ तिर्यक रेखा बिन्दु P और Q पर प्रतिच्छेद करती है।
⇒ ∠EPA = ∠FQD (संगत कोण हैं)…(1)
चूँकि EA || FD को EQ तिर्यक रेखा बिन्दु E और F पर प्रतिच्छेद करती है।
∠PEA = ∠QFD (संगत कोण हैं) …(2)
अब ∆PEA और ∆QFD में,
∠EPA = ∠FQD [समीकरण (1) से]
∠PEA = ∠QFD [समीकरण (2) से]
एवं EA = FD (समान्तर चतुर्भुज AEFD की सम्मुख भुजाएँ हैं)
⇒ ∆PEA ≅ ∆QFD
अतः ar (PEA) = ar (QFD) (सर्वांगसम त्रिभुज क्षेत्रफल में समान होते हैं) इति सिद्धम्

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MP Board Class 9th Maths Chapter 9 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
संलग्न चित्र में PSDA एक समान्तर चतुर्भुज है। PS पर P बिन्दुए और R इस प्रकार लिए गए हैं कि PQ = QR = RS है। तथा PA || QB || RC है। सिद्ध कीजिए कि-
ar (PQE) = ar (CFD) है।
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चित्र 9.30
हल:
चूँकि PS | | AD को तिर्यक रेखा PD क्रमशः बिन्दु P और D पर प्रतिच्छेद करती है।
⇒ ∠SPD = ∠ADP अर्थात् ∠OPE = ∠CDF …(1) (एकान्तर कोण हैं)
चूँकि OP || RC को तिर्यक रेखा PD क्रमशः E और F पर प्रतिच्छेद करती है।
⇒ ∠PEQ = ∠EFR (संगत कोण हैं)
लेकिन ∠EFR = ∠DFC (सम्मुख कोण हैं)
∠PEQ = ∠DFC …(2)
अब ∆PEQ एवं ∆DFC में,
चूंकि ∠QPE = ∠CDF [समीकरण (1) से]
⇒ ∠PEQ = ∠DFC [समीकरण (2) से]
PQ = DC [PQ = RS दिया है RS = CD (RCDS एक समान्तर चतुर्भुज है)]
⇒ ∆PEQ = ∆DFC
अत: ar (PEQ) = ar (DFC). (सर्वांगसम त्रिभुजों के क्षेत्रफल बराबर होते हैं)
इति सिद्धम् वैकल्पिक विधि: PA || QB || RC || SD तिर्यक रेखा PS से PQ = QR = RS …(1)
अन्त:खण्ड काटते हैं, तो तिर्यक रेखा PD से PE = EF = FD …(2)
अन्त:खण्ड काटेंगे और तिर्यक रेखा AD से भी AB = BC = CD …(3)
अन्त:खण्ड काटेंगे।
चूँकि PS एवं AD समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ हैं।
⇒ PS = AD …(4)
अब ∆PQE और ∆CFD में,
चूँकि PQ = CD [समीकरण (1), (2) और (4) से]
∠QPE = ∠CDF (PS || AD एवं तिर्यक रेखा PD से बने एकान्तर कोण)
एवं PE = FD [समीकरण (2) से]
AQPE = ACFD (SAS सर्वांगसमता प्रमेय से)
अतः ar (POE) = ar (CFD). (सर्वांगसम के क्षेत्रफल बराबर होते हैं) इति सिद्धम्

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प्रश्न 2.
XY त्रिभुज LMN की भुजा LN पर स्थित दो बिन्दु इस प्रकार हैं कि LX = XY = YN है। Xसे होकर जाती हुई एक रेखा LM के समान्तर खींची गई है जो MNको zपर मिलती है देखिए संलग्न चित्र। सिद्ध कीजिए कि
ar (LZY) = ar (MZYX) है।
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चित्र 9.31
हल:
दिया है : ∆LMN की भुजा पर स्थित दो बिन्दु X और Y इस M –
प्रकार कि LX=XY = YN एवं XZ|| LM रेखाखण्ड MN को Z पर मिलती है। LZ को मिलाया गया है।
अब उभयनिष्ठ आधार XZ पर XZ || LM के बीच दो ∆LXZ और ∆MXZ स्थित हैं।
ar (LXZ) = ar (MXZ) 2 ar (LXZ) + ar (XYZ) = ar (MXZ) + ar (XYZ) (ar (XYZ) को दोनों ओर जोड़ने पर)
⇒ ar (LZY) = ar (MZYX). (चित्रानुसार) इति सिद्धम्

प्रश्न 3.
संलग्न चित्र में समान्तर चतुर्भुज ABCD एवं ABEF हैं। यदि समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल 90 cm2 है तो ज्ञात कीजिए
(i) ar (ABEF),
(ii) ar (ABD),
(iii) ar (BEF).
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चित्र 9.32
हल:
दिया है : दो समान्तर चतुर्भुज ABCD एवं ABEF तथा समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल 90 cm2 है। BF एवं BD को। मिलाया।

(i) उभयनिष्ठ आधार पर समान्तर चतुर्भुज ABCD और समान्तर चतुर्भुज ABEF एक ही AB || FC के मध्य स्थित हैं।
⇒ ar (ABEF) = ar (ABCD)
अतः ar (ABEF) = 90 cm2 . (∵ ar (ABCD) = 90 cm2)

(ii) चूँकि BD समान्तर चतुर्भुज ABCD का विकर्ण है।
ar (ABD) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) ar (ABCD)
अतः ar (ABD) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 90 cm2 = 45 cm2. (∵ ar (ABCD) = 90 cm2)

(iii) चूँकि FB समान्तर चतुर्भुज ABEF का विकर्ण हैं।
⇒ ar (BEF) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) ar (ABEF)
अतः ar (BEF) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 90 cm2 = 45 cm2. (ar (ABEF) = 90 cm2)

प्रश्न 4.
संलग्न चित्र में त्रिभुज ABC की भुजा AB का मध्य-बिन्दु है। यदि रेखाखण्ड CQ || PD भुजा AB में Q पर मिलता है तो सिद्ध कीजिए कि ar (BPQ) = \(\frac { 1 }{ 2 }\)ar (ABC) है।
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चित्र 9.33
हल:
∆ABC की भुजा AB का मध्य-बिन्दु D है तथा भुजा BC पर दिया हुआ कोई बिन्दु P है एवं CQ || PD भुजा AB से Q पर मिलता है।
PQ और CD को मिलाइए।
अब उभयनिष्ठ आधार DP पर DP || QC के मध्य ADPQ एवं ADPC स्थित हैं।
ar (DPQ) = ar (DPC) = ar (DPQ) + ar (DBP) = ar (DPC) + ar (DBP) [ar (DBP) को दोनों ओर जोड़ने पर]
⇒ ar (BPQ) = ar (DBC) (चित्रानुसार) …(2)
लेकिन ar (DBC) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) ar (ABC) (DC, ∆ ABC की माध्यिका है) …(3)
अतः ar (BPQ) = \(\frac { 1 }{ 2 }\)ar (ABC). [समीकरण (2) एवं (3) से] इति सिद्धम्

प्रश्न 5.
संलग्न चित्र में ABCD एक वर्ग है। E और F क्रमशः BC और CD भुजाओं के मध्य-बिन्दु हैं। यदि R रेखाखण्ड EF का मध्य-बिन्दु है। सिद्ध कीजिए कि-
ar (AER) = ar (AFR) है।
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चित्र 9.34
हल:
ABCD एक वर्ग दिया है जिसकी भुजा BC और CD के मध्य-बिन्दु
क्रमशः E और F हैं तथा R रेखाखण्ड EF का मध्य-बिन्दु है।
अब ∆ABE और ∆ADF में,
चूँकि AB = AD (वर्ग की भुजाएँ हैं)
∠ABE = ∠ADF (वर्ग के कोण हैं)
एवं BE = DF (वर्ग की भुजाओं के आधे हैं)
⇒ ∆ABE ≅ ∆ADF (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AE = AF (CPCT)
अब ∆AER और ∆AFR में,
चूंकि AE = AF (सिद्ध कर चुके हैं)
ER = FR (EF का मध्य-बिन्दु R दिया है)
AR = AR (उभयनिष्ठ है)
∆AER ≅ ∆AFR (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
अत: ar (AER) = ar (AFR). (सर्वांगसम क्षेत्रों के क्षेत्रफल बराबर होते हैं) इति सिद्धम्

वैकल्पिक विधि :
∆AEF की माध्यिका AR है (∵ R रेखाखण्ड EF का मध्य-बिन्दु है)
ar (AER) = ar (AFR). (माध्यिका त्रिभुज को दो बराबर क्षेत्रफल के क्षेत्रों में विभक्त करती हैं) इति सिद्धम्

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प्रश्न 6.
एक समलम्ब ABCD में, AB || DC है तथा L भुजा BC का मध्य-बिन्दु है। L से होकर एक रेखा PQ || AD खींची गई है जो AB को P पर और बढ़ाई गई DC को Q पर मिलती है (देखिए संलग्न चित्र)। सिद्ध कीजिए कि-
ar (ABCD) = ar (APQD) है
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चित्र 9.35
हल:
ABCD एक समलम्ब चतुर्भुज दिया है जिसकी भुजा BC का A मध्य-बिन्दु L है। से होकर PQ || AD खींची गई है तथा
समलम्ब की भुजाएँ AB || DC है।
अब ∆LPB और ∆LOC में,
चूँकि ∠LPB = ∠LQC (एकान्तर कोण हैं, क्योंकि AB || DQ एवं PQ तिर्यक)
∠LBP ≅ ∠LCQ (एकान्तर कोण हैं, क्योंकि AB || DQ एवं CB तिर्यक)
एवं BL = LC (BC का मध्य-बिन्दु L दिया है)
⇒ ∆LPB ≅ ∆LQC (AAS सर्वांगसमता प्रमेय से)
⇒ ar (LPB) = ar (LQC) (सर्वांगसमता क्षेत्रों के क्षेत्रफल बराबर होते हैं)
⇒ ar (APLCD) + ar (LPB) = ar (APLCD) + ar (LQC) [ar (APLCD) को दोनों ओर जोड़ने पर]
अतः ar (ABCD) = ar (APQD). (चित्रानुसार) इति सिद्धम्

प्रश्न 7.
किसी समान्तर चतुर्भुज का आधार 20 सेमी तथा ऊँचाई (शीर्षलम्ब) 10 सेमी है, तो समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (2019)
हल:
समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार x ऊँचाई (शीर्षलम्ब)
= 20 x 10 = 200 सेमी2
अतः समान्तर चतुर्भुज का अभीष्ट क्षेत्रफल = 200 सेमी2

प्रश्न 8.
यदि किसी समान्तर चतुर्भुज का आधार 4 cm तथा शीर्षलम्ब (ऊँचाई) 2 cm है, तो समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (2019)
हल:
निर्देश : उपर्युक्त प्रश्न की तरह हल करें
उत्तर-अभीष्ट क्षेत्रफल = 8 cm

प्रश्न 9.
संलग्न चित्र में यदि AB || CD और ∆ABC का क्षेत्रफल 100 वर्ग सेमी है, तो ∆ABD का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए और कारण भी दीजिए। (2019)
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चित्र 9.36
हल:
चूँकि ∆ABC एवं ∆ABD दोनों ही समान आधार AB पर तथा AB || CD के मध्य स्थित हैं।
इसलिए, क्षेत्रफल (∆ABD) = क्षेत्रफल (∆ABC)
⇒ क्षेत्रफल (∆ABD) = 100 वर्ग सेमी
अतः ∆ABD का अभीष्ट क्षेत्रफल = 100 वर्ग सेमी।

प्रश्न 10.
केवल चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए कि समान्तर चतुर्भुज के दोनों विकर्ण उसे बराबर (क्षेत्रफल वाले चार) त्रिभुजों में बाँटते हैं। (2019)
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चित्र 9.37
हल:
ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है जिसके विकर्ण AC एवं BD परस्पर O बिन्दु पर समद्विभाजित करके इसे चार बराबर-बराबर क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में विभाजित कर रहे हैं, अर्थात् क्षेत्रफल (∆ OBC) = क्षेत्रफल (∆ OCD) = क्षेत्रफल B (∆ODA) = क्षेत्रफल (∆OAB)

MP Board Class 9th Maths Chapter 9 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

सत्य/असत्य लिखिए और अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।

प्रश्न 1.
ABCD एक समान्तर चतुर्भुज और X- भुजा AB का मध्य-बिन्दु है। यदि ar(AXCD) = 24cm2 है तो ar (ABC) = 24 cm है।
उत्तर:
असत्य कथन, क्योंकि ar (AXCD) ≠ ar (ABC).

प्रश्न 2.
PORS एक आयत है, जो त्रिज्या 13 cm वाले वृत्त के चतुर्थांश के अन्तर्गत है। A भुजा PQ पर स्थित कोई बिन्दु है। यदि PS = 5 cm है, तो ar (PAS) = 30 cm2 है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंक
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प्रश्न 3.
PQRS एक समान्तर चतुर्भुज है जिसका क्षेत्रफल 180 cm2 है तथा A विकर्ण QS पर स्थित कोई बिन्दु है तब ∆ASR का क्षेत्रफल 90 cm2 है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि ∆QSR का क्षेत्रफल = \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 180 = 90 cm2 तथा
ar (ASR) < ar (QSR).

प्रश्न 4.
ABC और BDE दो समबाहु त्रिभुज इस प्रकार है कि D भुजा BC का मध्य-बिन्दु है। तब
ar (BDE) = \(\frac { 1 }{ 4 }\)ar (ABC).
उत्तर:
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प्रश्न 5.
संलग्न चित्र में ABCD और EFGD दो समान्तर चतुर्भुज है तथा G भुजा CD का मध्य-बिन्दु है, तब
ar (DPC) = ar (EFGD).
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 15
चित्र 9.38
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि ar(DPC) ≠ ar(EFGD) है।

MP Board Class 9th Maths Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
12 cm और 16 cm विकर्णों वाले एक समचतुर्भुज की भुजाओं के मध्य-बिन्दुओं को मिलाने से बनी आकृति का क्षेत्रफल है :
(a) 48 cm2 .
(b) 64 cm
(c) 96 cm2
(d) 192 cm2.
उत्तर:
(a) 48 cm2 .

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प्रश्न 2.
त्रिभुज की माध्यिकाएँ उसे विभाजित करती हैं, दो :
(a) बराबर क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में
(b) सर्वांगसम त्रिभुजों में
(c) समकोण त्रिभुजों में
(d) समद्विबाहु त्रिभुजों में।
उत्तर:
(a) बराबर क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में

प्रश्न 3.
8 cm और 6 cm भुजाओं वाले एक आयत की आसन्न भुजाओं के मध्य-बिन्दुओं को मिलाने से बनी आकृति है :
(a) 24 cm2 क्षेत्रफल का एक आयत
(b) 25 cm2 क्षेत्रफल का एक वर्ग
(c) 24 cm2 क्षेत्रफल का एक समलम्ब
(d) 24 cm2 क्षेत्रफल एक समचतुर्भुज।
उत्तर:
(d) 24 cm2 क्षेत्रफल एक समचतुर्भुज

प्रश्न 4.
संलग्न चित्र में समान्तर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल है :
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चित्र 9.39
(a) AB x BM
(b) BC – BN
(c) DC – DL
(d) AD x DL.
उत्तर:
(c) DC – DL

प्रश्न 5.
संलग्न चित्र में यदि समान्तर चतुर्भुज ABCD और आयत ABEM समान क्षेत्रफल वाले हैं, तो :
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चित्र 9.40
(a) ABCD का परिमाप = ABEM का परिमाप
(b) ABCD का परिमाप < ABEM का परिमाप (c) ABCD का परिमाप > ABEM का परिमाप
(d) ABCD का परिमाप = = (ABEM का परिमाप)।
उत्तर:
(c) ABCD का परिमाप > ABEM का परिमाप

प्रश्न 6.
किसी त्रिभुज की भुजाओं के मध्य-बिन्दु किसी भी एक शीर्ष को चौथा बिन्दु लेकर एक समान्तर चतुर्भुज बनाते हैं जिसका क्षेत्रफल बराबर है :
(a) \(\frac { 1 }{ 2 }\)ar (ABC)
(b) \(\frac { 1 }{ 3 }\)Jar (ABC).
(c) \(\frac { 1 }{ 4 }\)ar (ABC)
(d) ar (ABC).
उत्तर:
(a) \(\frac { 1 }{ 2 }\)ar (ABC)

प्रश्न 7.
दो समान्तर चतुर्भज बराबर आधारों पर और एक ही समान्तर रेखाओं के मध्य स्थित हैं। उनके क्षेत्रफलों में अनुपात होगा :
(a) 1 : 2
(b) 1 : 1
(c) 2 : 1
(d) 3 : 1.
उत्तर:
(b) 1 : 1

प्रश्न 8.
ABCD एक चतुर्भुज है जिसका विकर्ण AC है, उसे बराबर क्षेत्रफल वाले दो भागों में विभाजित करता है। तब ABCD :
(a) एक आयत है
(b) सदैव एक सम चतुर्भुज है
(c) एक समान्तर चतुर्भुज है
(d) (a), (b) या (c) में से कोई भी होना आवश्यक नहीं।
उत्तर:
(d) (a), (b) या (c) में से कोई भी होना आवश्यक नहीं

प्रश्न 9.
एक त्रिभुज और एक समान्तर चतुर्भुज एक ही आधार पर और एक ही समान्तर रेखाओं के बीच स्थित हैं, तो त्रिभुज के क्षेत्रफल का समान्तर चतुर्भुज के क्षेत्रफल से अनुपात है :
(a) 1 : 3
(b) 1 : 2
(c) 3 : 1
(d) 1 : 4.
उत्तर:
(b) 1 : 2

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प्रश्न 10.
ABCD एक समलम्ब है जिसकी समान्तर भुजाएँ AB = a cm और DC = b cm है (देखिए चित्र 9.41)। E और F समान्तर भुजाओं के मध्य-बिन्दु हैं। ar (ABFE) और ar (EFCD) का अनुपात है :

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(a) a : b
(b) (3a + b) : (a + 3b)
(c) (a + 3b) : (3a + b)
(d) (2a + b) : (3a + b).
उत्तर:
(b) (3a + b) : (a + 3b)

प्रश्न 11.
समानान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल होता है : (2018)
(a) आधार x ऊँचाई
(b) आधार + ऊँचाई
(c) 1/2 आधार x ऊँचाई
(d) आसन्न भुजाओं का गुणनफल
उत्तर:
(a) आधार x ऊँचाई

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. समचतुर्भुज का क्षेत्रफल उसके विकर्णों के गुणनफल का ……..होता है।
2. एक ही आधार और दो समान्तर रेखाओं के बीच बने समान्तर चतुर्भुज क्षेत्रफल में … होते हैं। (2019)
3. एक ही आधार पर व एक ही समान्तर रेखाओं के एक युग्म के बीच स्थित त्रिभुज क्षेत्रफल में ……. होते हैं।
4. एक ही आधार और उन्हीं समान्तर रेखाओं के मध्य स्थित आयत और समान्तर चतुर्भुज के क्षेत्रफल ……. होते हैं।
5. एक ही आधार और समान्तर रेखाओं के मध्य स्थित समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल त्रिभुज के क्षेत्रफल का ……… होता है।
उत्तर:
1. आधा,
2. बराबर,
3. बराबर,
4. बराबर,
5. दो गुना।

जोड़ी मिलान
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 9 समान्तर चतुर्भुज और त्रिभुजों के क्षेत्रफल Additional Questions 19
उत्तर:
1. → (c),
2. → (d),
3. → (e),
4. → (a),
5. → (b).

सत्य/असत्य कथन
1. समान्तर चतुर्भुज जो एक ही आधार और समान्तर रेखाओं के बीच स्थित हों, क्षेत्रफल में बराबर नहीं होते।
2. समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण उसे दो समान क्षेत्रफल वाले त्रिभुजों में विभक्त करते हैं।
3. प्रत्येक समान्तर चतुर्भुज समचतुर्भुज होता है।
4. प्रत्येक वर्ग एक आयत होता है लेकिन प्रत्येक आयत एक वर्ग नहीं होता।
5. आयत के विकर्ण परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
उत्तर:
1. असत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य।

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एक शब्द/वाक्य में उत्तर
1. एक सरल बन्द आकृति द्वारा घेरा गया तल क्या कहलाता है?
2. किसी बंद आकृति द्वारा घेरे गए तल का परिमाण क्या कहलाता है?
3. समान भुजाओं वाले समान्तर चतुर्भुज को क्या कहते हैं ?
4. यदि किसी चतुर्भुज की सम्मुख भुजाओं का एक युग्म समान्तर हो तो उसे क्या कहते हैं?
5. किसी समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण उस समान्तर चतुर्भुज को चार त्रिभुजों में विभक्त करते हैं, उनके क्षेत्रफल में क्या सम्बन्ध होता है ?
6. यदि त्रिभुज का आधार एवं शीर्षलम्ब दिया हो, तो त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात करने का सूत्र लिखिए। (2019)
उत्तर:
1. तलीय क्षेत्र,
2. उस आकृति का क्षेत्रफल,
3. समचतुर्भुज,
4. समलम्ब चतुर्भुज या समलम्ब,
5. बराबर होते हैं।,
6. \(\frac { 1 }{ 2 }\) x आधार x शीर्षलम्ब।

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1

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प्रश्न 1.
एक चतुर्भुज के कोण 3 : 5 : 9 : 13 के अनुपात में हैं। इस चतुर्भुज के सभी कोण ज्ञात कीजिए। (2018, 19)
हल:
चूँकि चतुर्भुज के चारों कोणों का अनुपात = 3 : 5 : 9 : 13 (दिया है)
मान लीजिए उसके कोण क्रमश: 3x, 5x, 9x एवं 13x हैं तो 3x + 5x + 9x + 13x = 360° (चतुर्भुज के कोणों का योग 360° होगा।)
⇒ 30x = 360°
⇒ x = 360°/30 = 12
इसलिए प्रथम कोण = 3 x x = 3 x 12 = 36°
द्वितीय कोण = 5 x x = 5 x 12 = 60°
तृतीय कोण = 9 x x = 9 x 12 = 108°
चतुर्थ कोण = 13 x x = 13 x 12 = 156°
अतः कोणों का अभीष्ट मान क्रमशः 36°, 60°, 108° एवं 156° हैं।

प्रश्न 2.
यदि एक समान्तर चतुर्भुज के विकर्ण बराबर हों तो दर्शाइए कि वह एक आयत है। (2019)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 1
चित्र 8.1
हल:
समान्तर चतुर्भुज ABCD के विकर्ण AC = DB (दिया है)
∆ABC एवं ∆DCB में,
चूँकि AB = DC (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ हैं)
AC = DB (दिया है)
एवं BC = BC (उभयनिष्ठ है)
∆ABC ≅ ∆DCB (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
∠ABC = ∠DCB (CPCT)
लेकिन ∠ABC + ∠DCB = 180° (AB || DC, BC तिर्यक के एक ओर के अन्तः कोण हैं)
⇒ ∠ABC = ∠DCB = 90°
लेकिन ∠A = ∠C तथा ∠B = ∠D (समान्तर – के सम्मुख कोण)
⇒ ∠A =∠B = ∠C = ∠D = 90° (समकोण)
अत: ABCD एक आयत है। इति सिद्धम्

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प्रश्न 3.
दर्शाइए कि यदि एक चतुर्भुज के विकर्ण परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करें तो वह एक समचतुर्भुज होता है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 2
हल:
दिया है: एक चतुर्भुज जिसके विकर्ण AC और BD परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं, अर्थात्
AO = CO एवं BO = DO …..(1)
और ∠AOB = ∠ BOC = ∠COD = ∠DOA = 90° …(2)
∆AOB और ∆AOD में,
चूँकि BO = DO [समीकरण (1) से]
∠AOB = ∠DOA [समीकरण (2) से]
एवं AO = AO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆AOB ≅ ∆AOD (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AB = AD (CPCT)
अब ∆AOD और ∆COB में,
चूँकि AO = CO [समीकरण (1) से]
⇒ ∆AOD ≅ ∆COB [समीकरण (2) से]
एवं DO = BO [समीकरण (1) से]
⇒ ∆AOD ≅ ∆COB (SAS प्रमेय से)
⇒ AD = BC (CPCT)
एवं ∠ADO = ∠CBO (CPCT)
AD || BC (एकान्तर कोण ∠ADO = ∠CBO)
इसलिए ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। (क्योंकि रेखा युग्म AD, BC बराबर और समान्तर हैं)
AB = BC = CD = DA (∵ AB = CD, DA = BC एवं AB = DA)
अतः ABCD एक सम चतुर्भुज है। इति सिद्धम्

प्रश्न 4.
दर्शाइए कि एक वर्ग के विकर्ण बराबर होते हैं और परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 3
चित्र 8.3
दिया है : एक वर्ग ABCD जिसके विकर्ण AC एवं BD परस्पर O बिन्दु पर प्रतिच्छेद करते हैं।
अब ∆ABC एवं ∆DCB में,
चूँकि AB = DC (वर्ग की भुजाएँ हैं)।
∠ABC = ∆DCB = 90° (वर्ग के कोण हैं)
एवं BC = BC (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆ABC ≅ ∆DCB (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AC = BD (CPCT)
अतः वर्ग के विकर्ण बराबर होते हैं।
इति सिद्धम् चूँकि वर्ग एक समान्तर चतुर्भुज है, इसलिए उसके विकर्ण AC एवं BD परस्पर O बिन्दु पर समद्विभाजित करेंगे।
अर्थात् AO = CO एवं BO = DO …(1)
अब, ∆ABO और ∆ADO में, AB = AD (वर्ग की भुजाएँ हैं)
BO = DO [समीकरण (1) से]
एवं AO = AO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆ABO ≅ ∆ADO (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠AOB = ∠AOD (CPCT)
लेकिन ∠AOB + ∠AOD = 180° (रेखाखण्ड BD बिन्दु 0 पर एक ही ओर बने कोण हैं)
⇒∠AOB = ∠AOD = 90°
अतः वर्ग के विकर्ण परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं। इति सिद्धम्

प्रश्न 5.
दर्शाइए कि यदि एक चतुर्भुज के विकर्ण बराबर हों और परस्पर लम्बवत् समद्विभाजित करें तो वह एक वर्ग होगा।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 4
चित्र 8.4
हल:
दिया है : ABCD चतुर्भुज के विकर्ण AC और BD परस्पर बिन्दु O पर लम्ब समद्विभाजित करते हैं तथा परस्पर बराबर हैं अर्थात्
AO = CO, BO = DO,
∠AOB = ∠ BOC = ∠COD = ∠DOA = 90°
एवं विकर्ण AC = BD
अब ∆AOD और ∆COB में,
चूँकि AO = CO (दिया है)
∠DOA = ∠BOC = 90° (दिया है)
एवं DO = BO (दिया है)
⇒ ∆AOD ≅ ∆COB (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AD = BC (CPCT)
⇒ ∠ADO = ∠OBC (CPCT)
⇒ AD || BC (∠ADO एवं ∠OBC एकान्तर कोण हैं)
⇒ □ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। (चूँकि AD = BC एवं AD || BC)
AB = CD एवं BC = DA (सम्मुख भुजाएँ हैं) …(1)
अब ∆AOB और ∆AOD में,
चूँकि BO = DO (दिया है)
∠AOB = ∠AOD = 90° (दिया है)
एवं AO = AO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆AOB ≅ ∆AOD (CPCT) (SAS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AB = DA …(2)
⇒ AB = BC = CD = DA [समीकरण (1) एवं (2) से]
इसलिए ABCD एक समचतुर्भुज है।
अब ∆ABC एवं ∆DCB में,
चूँकि AB = DC (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ हैं)
AC = DB (दिया है)
एवं BC = BC (उभयनिष्ठ है)
∆ABC ≅ ∆DCB (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
∠ABC = ∠DCB (CPCT)
∠ABC = ∠CDA
एवं ∠DAB = ∠ BCD (समान्तर □ के सम्मुख कोण हैं)
∠ABC = ∠BCD = ∠CDA = ∠ DAB
लेकिन ∠ABC + ∠BCD + ∠CDA + ∠DAB = 360° (चतुर्भुज के अन्तः कोण)
= ∠ABC = ∠BCD = ∠CDA = ∠DAB = 90°
अत: ABCD एक वर्ग है। (परिभाषा से) इति सिद्धम्

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प्रश्न 6.
संलग्न चित्र में समान्तर चतुर्भुज ABCD का विकर्ण AC कोण A को समद्विभाजित करता है। दर्शाइए कि
(i) यह LC को भी समद्विभाजित करता है।
(ii) ABCD एक समचतुर्भुज है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 6
चित्र 8.4
हल:
ABCD एक समान्तर चतुर्भुज दिया है जिसका विकर्ण AC ∠A का समद्विभाजक है अर्थात्
∠DAC = ∠ BAC …(1)
एवं DC || AB एवं AD || BC (समान्तर – की सम्मुख भुजाएँ हैं)

(i) चूँकि DC || AB को तिर्यक रेखा AC प्रतिच्छेद करती है।
⇒ ∠DCA = ∠BAC (एकान्तर कोण है।) …(2)
चूँकि AD || BC को AC तिर्यक रेखा प्रतिच्छेद करती है
⇒ ∠DAC = ∠ BCA (एकान्तर कोण है) …(3)
⇒ ∠DCA = ∠BCA [समीकरण (1), (2) एवं (3) से]
अतः विकर्ण AC कोण LC को भी समद्विभाजित करता है। । इति सिद्धम्

(ii) ∆DAC में, ∠DAC = ∠DCA (∠A = ∠C के अर्द्धक हैं)
⇒ DA = CD (बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ हैं)…(4)
चूँकि AB = CD एवं DA = BC (समान्तर □ की सम्मुख भुजाएँ हैं) …(5)
⇒ AB = BC = CD = DA [समीकरण (4) और (5) से]
अतः चतुर्भुज ABCD एक समचतुर्भुज है। इति सिद्धम्

प्रश्न 7.
ABCD एक समचतुर्भुज है। दर्शाइए कि विकर्ण AC कोणों A और C दोनों को समद्विभाजित करता है तथा विकर्ण BD कोणों B और D दोनों को समद्विभाजित करता है।
हल:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 7
चित्र 8.6
दिया है : ABCD एक समचतुर्भुज जिसमें AC एवं BD विकर्ण एक-दूसरे को बिन्दु 0 पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं,
AB = BC = CD = DA …(1)
AO = OC, BO = OD …(2)
∆AOB और ∆AOD में,
चूँकि AB = AD [समीकरण (1) से।]
BO = OD [समीकरण (2) से]
एवं AO = AO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆AOB ≅ ∆AOD (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠BAO = ∠DAO (CPCT)
∆COB और ∆COD में,
चूँकि CB = CD [समीकरण (1) से]
BO = OD [समीकरण (2) से]
एवं CO = CO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆COB ≅ ∆COD (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠BCO = ∠ DCO (CPCT)
अत: AC विकर्ण ∠A और LC दोनों को समद्विभाजित करता है। इति सिद्धम्
अब ∆BOA और ∆BOC में,
चूँकि BA = BC [समीकरण (1) से]
AO = OC [समीकरण (2) से]
एवं BO = BO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆BOA ≅ ∆BOC (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠ABO = ∠CBO. (CPCT)
∆DOA और ∆DOC में,
चूँकि DA = DC [समीकरण (1) से]
AO = OC [समीकरण (2) से ]
एवं DO = DO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆DOA = ∆DOC (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠ADO = ∠CDO (CPCT)
अतः विकर्ण BD, LB और CD दोनों को समद्विभाजित करता है। इति सिद्धम्

प्रश्न 8.
ABCD एक आयत है जिसके विकर्ण AC दोनों कोणों A और C को समद्विभाजित करता है। दर्शाइए कि-
(i) ABCD एक वर्ग है।
(ii) विकर्ण BD दोनों कोणों B और D को समद्विभाजित करता है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 8
चित्र 8.7
हल:
(i) ABCD एक आयत है जिसका विकर्ण AC दोनों कोणों A और C को समद्विभाजित करता है।
अब ∆ABC एवं ∆ADC में,
चूँकि ∠BAC = ∠DAC (∠A के आधे हैं)
AC = AC (उभयनिष्ठ है)
एवं ∠ACB = ∠ACD (∠C के आधे हैं)
⇒ ∆ABC ≅ ∆ADC (ASA सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ AB = AD (CPCT) …(1)
AB = CD एवं AD = BC ( आयत की सम्मुख भुजाएँ हैं)…(2)
AB = BC = CD = DA [समीकरण (1) और (2) से]
अत: ABCD एक वर्ग है। (आयत जिसकी भुजाएँ बराबर हों वर्ग होता है।) इति सिद्धम्

(ii) मान लीजिए कि विकर्ण AC एवं BD परस्पर O बिन्दु पर प्रतिच्छेद करते हैं।
∆AOB और ∆COB में,
चूँकि AB = BC (वर्ग की भुजाएँ हैं)
चूँकि AO = CO (वर्ग के विकर्ण परस्पर समद्विभाजित करते हैं)
चूँकि BO = BO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆AOB ≅ ∆COB (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠ABO = ∠CBO (CPCT)
अब ∆AOD और ∆COD में,
चूँकि AD = CD (वर्ग की भुजाएँ हैं)
AO = CO (वर्ग के विकर्ण परस्पर समद्विभाजित करते हैं)
चूँकि DO = DO (उभयनिष्ठ है)
⇒ ∆AOD ≅ ∆COD (SSS सर्वांगसमता प्रमेय)
⇒ ∠ADO ≅ ∠CDO (CPCT)
अतः विकर्ण BD दोनों कोणों B और D को समद्विभाजित करता है। इति सिद्धम्

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प्रश्न 9.
समान्तर चतुर्भुज ABCD के विकर्ण BD पर दो बिन्दु P और Q इस प्रकार स्थित है कि DP = BQ है (देखिए संलग्न चित्र)। दर्शाइए कि-
(i) ∆APD ≅ ∆CQB
(ii) AP= CQ
(iii) ∆AQB ≅ ∆CPD
(iv) AQ = CP
(v) APCQ एक समान्तर चतुर्भुज है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 9
चित्र 8.8
हल:
(i) ∆APD और ∆COB में,
चूँकि AD = CB (समान्तर – की सम्मुख भुजाएँ हैं)
DP = BQ (दिया है)
एवं ∠ADP = ∠CBQ (एकान्तर कोण हैं)
अतः ∆APD ≅ ∆CQB. (SAS सर्वांगसमता प्रमेय) इति सिद्धम्

(ii) चूँकि ∆APD ≅ ∆CQB (सिद्ध कर चुके हैं)
अतः AP = CQ. (CPCT) इति सिद्धम्

(iii) ∆AQB और ∆CPD में,
AB = CD (समान्तर □ की सम्मुख भुजाएँ हैं)
BQ = PD (दिया है)
∠ABQ = ∠ CDP (एकान्तर कोण है)
अतः ∆AQB ≅ ∆CPD. (SAS सर्वांगसमता प्रमेय) इति सिद्धम्

(iv) चूंकि ∆AQB ≅ ∆CPD (सिद्ध कर चुके हैं)
अतः AQ = CP. (CPCT) इति सिद्धम्

(v) चूँकि AP = CQ [भाग (ii) में सिद्ध कर चुके हैं।]
चूँकि AQ = CP [भाग (iv) में सिद्ध कर चुके हैं।]
अतः चतुर्भुज ∆PCQ एक समान्तर चतुर्भुज है। (चूँकि सम्मुख भुजाएँ समान हैं) इति सिद्धम्

प्रश्न 10.
ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है तथा AP और CQ शीर्ष A और C से विकर्ण BD पर क्रमशः डाले गए लम्ब हैं देखिए संलग्न चित्र। दर्शाइए कि-
(i) ∆APB ≅ ∆COD
(ii) AP = CP.
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 10
चित्र 8.9
हल:
(i) ∆APB और ∆COD में,
चूँकि DC = AB (समान्तर □ की सम्मुख भुजाएँ हैं)
∠CDQ = ∠ABP (एकान्तर कोण है)
∠APB = ∠CQD = 90° (AP ⊥ DB एवं CQ ⊥ DB)
अतः ∆APB ≅ ∆CQD. (SAA सर्वांगसमता प्रमेय) इति सिद्धम्

(ii) चूँकि ∆APB ≅ ∆COD (सिद्ध कर चुके हैं)
अतः AP = CQ. (CPCT) इति सिद्धम्

प्रश्न 11.
∆ABC और ∆DEF में, AB = DE, AB || DE, BC = EF और BC || EF है। शीर्ष A, B और C को क्रमशः शीर्ष D, E और F से जोड़ा जाता है (देखिए संलग्न चित्र)। दर्शाइए कि –
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 11
चित्र 8.10
(i) चतुर्भुज ABED एक समान्तर चतुर्भुज है।
(ii) चतुर्भुज BEFC एक समान्तर चतुर्भुज है।
(iii) AD || CF और AD = CE
(iv) चतुर्भुज ACFD एक समान्तर चतुर्भुज है।
(v) AC = DF है।
(vi) ∆ABC ≅ ∆DEF है।
हल:
(i) चूंकि AB = DE एवं AB || DE (दिया है)
अत: ABED एक समान्तर चतुर्भुज है। इति सिद्धम्

(ii) चूँकि BC = EF एवं BC || EF (दिया है)
अतः BEFC एक समान्तर चतुर्भुज है। इति सिद्धम्

(iii) चूँकि AD = BE एवं AD || BE (समान्तर □ABED की सम्मुख भुजाएँ हैं) …(1)
CF = BE एवं CF || BE (समान्तर □ BEFC की सम्मुख भुजाएँ हैं)…(2)
अत: AD = CF एवं AD || CE [समीकरण (1) एवं (2) से] । इति सिद्धम्

(iv) चूँकि AD = CF एवं AD || CF (सिद्ध कर चुके हैं)
अत: ACFD एक समान्तर चतुर्भुज है। इति सिद्धम्

(v) चूँकि चतुर्भुज ACFD एक समान्तर चतुर्भुज है (सिद्ध कर चुके हैं)
अत: AC = DE (समान्तर चतुर्भुज की सम्मुख भुजा हैं) इति सिद्धम्

(vi) ∆ABC और ∆DEF में,
चूँकि AB = DE (समान्तर □ABED की सम्मुख भुजाएँ हैं)
AC = DF (समान्तर □ACFD की सम्मुख भुजाएँ हैं)
BC = EF (समान्तर □CBEF की सम्मुख भुजाएँ हैं)
अत: ∆ABC ≅ ∆DEE (SSS सर्वांगसम प्रमेय) इति सिद्धम्

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प्रश्न 12.
संलग्न आकृति में ABCD एक समलम्ब है जिसमें AB || DC और AD = BC है। दर्शाइए कि
(i) ∠A = ∠B.
(ii) ∠C = ∠D.
(iii) ∆ABC ≅ ∆BAD.
(iv) विकर्ण AC = विकर्ण BD है।
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 8 चतुर्भुज Ex 8.1 12
चित्र 8.11
हल:
दिया है : ABCD एक समलम्ब चतुर्भुज जिसमें AB || DC और AD = BC है। विकर्ण AC और BD को मिलाया गया है।
रचना : AB को आगे बढ़ाइए और C से होकर CE || DA खींचिए जो AB को E पर प्रतिच्छेद करती है।

(i) AD = BC (दिया है) तथा AD = EC (रचना से)
⇒ BC = EC (एक वस्तु के बराबर वस्तुएँ बराबर होती हैं)
⇒ ∠CBE = ∠CEB (त्रिभुज की बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण हैं)
चूँकि ∠ABC + ∠ CBE = 180° (रेखा AE के बिन्दु B पर एक ओर बने कोण है)…(1)
चूँकि AD || EC को AE तिर्यक रेखा मिलती है।
⇒ ∠DAE + ∠CEB = 180° (एक ही ओर के अन्तः कोण हैं)
⇒ ∠DAE + ∠CBE = 180° (∵ ∠CEB = ∠CBE) …(2)
∠DAE = ∠ABC [समीकरण (1) और (2) से]
∠A = ∠B. इति सिद्धम्

(ii) चूँकि ∠A + ∠D = 180° (AB || DC, AD तिर्यक रेखा है) …(3)
∠B + ∠C = 180° (AB || DC, BC तिर्यक रेखा है) …(4)
∠A + ∠D = ∠B + ∠C [समीकरण (3) और (4) से]
अतः ∠C = ∠D. (क्योंकि ∠A = ∠B सिद्ध कर चुके हैं) इति सिद्धम्

(iii) ∆ABC और ∆BAD में,
चूँकि BC = AD (दिया है)
∠B = ∠A (सिद्ध कर चुके हैं)
एवं AB = AB (उभयनिष्ठ है)
अतः ∆ABC ≅ ∆BAD. (SAS सर्वांगसमता नियम) इति सिद्धम्

(iv) चूँकि AABC ≅ A BAD (सिद्ध कर चुके हैं)
अतः विकर्ण AC = विकर्ण BD है। (CPCT) इति सिद्धम्

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MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions

MP Board Class 9th Maths Chapter 11 अतिरिक्त परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Maths Chapter 11 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक त्रिभुज की रचना कीजिए यदि उसका परिमाप 10-4 cm और दो कोण 45° और 120° है।
हल:
एक त्रिभुज ABC की रचना करनी है जिसमें ∠ B = 45°, ∠C = 120° तथा परिमाप AB + BC + CA = 10.4 cm
रचना:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 1
चित्र 11.23
(i) रेखाखण्ड PQ = 10.4 cm खींचा
(ii) रेखाखण्ड PQ के बिन्दु P और Q पर क्रमशः 45° और 120° के कोण बनाते हुए किरण PR एवं QS खींचे।
(iii) ∠ RPQ और ∠SQP की समद्विभाजक किरणे PX और QY खींचे जो परस्पर बिन्दु A पर प्रतिच्छेद करती हैं।
(iv) AP एवं AQ के लम्ब समद्विभाजक खींचिए जो रेखाखण्ड PQ को क्रमशः B और C बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद करते हैं।
(v) AB और AC को मिलाइए।
यही ∆ABC अभीष्ट त्रिभुज है।

प्रश्न 2.
त्रिभुज PQR की रचना कीजिए जिसमें QR = 3 cm, ∠ POR = 45° और QP – PR = 2 cm दिया है।
हल:
रचना :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 2
चित्र 11.24
(i) रेखाखण्ड QR = 3 cm खींचा।
(ii) QR के बिन्दु Q पर 45° का कोण बनाती हुए किरण QX खींची।
(iii) किरण QX में से Qs = 2 सेमी का रेखाखण्ड काटा।
(iv) SR को मिलाया।
(v) SR का लम्ब समद्विभाजक खींचा जो किरण Qx को बिन्दु P पर प्रतिच्छेद करता है।
(vi) PR को मिलाया।
यही ∆POR अभीष्ट त्रिभुज है।

प्रश्न 3.
एक समकोण त्रिभुज की रचना कीजिए जिसकी एक भुजा 3.5 cm तथा अन्य भुजा और कर्ण का योग 5.5 cm है।
हल:
एक समकोण ∆ABC की रचना करनी है जिसका कोण B समकोण है। आधार BC = 3.5 cm, कर्ण AC + भुजा AB = 5.5 cm है।
रचना:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 3
चित्र 11.25
(i) BC = 3.5 cm का एक रेखाखण्ड खींचिए।
(ii) बिन्दु B पर BC के साथ 90° का कोण बनाते हुए किरण BX खींचिए।
(iii) किरण BX में से BD = 5.5 cm का एक रेखाखण्ड काटिए।
(iv) DC को मिलाइए।
(v) DC का लम्ब समद्विभाजक खींचिए जो BD को बिन्दु A पर काटता है।
(vi) AC को मिलाइए।
यही ∆ABC अभीष्ट त्रिभुज है।

प्रश्न 4.
एक त्रिभुज ABC की रचना कीजिए जिसमें BC = 5 cm, ∠B = 60° और AC + AB = 7.5 cm है।
हल:
रचना :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 4
चित्र 11.26
(i) एक रेखाखण्ड BC = 5 cm खींचिए।
(ii) BC के बिन्दु B पर 60° का कोण बनाते हुए एक किरण BX खींचिए।
(iii) किरण BX में से BD = 7.5 cm का रेखाखण्ड काटिए।
(iv) DC को मिलाइए।
(v) DC का लम्ब समद्विभाजक खींचिए जो BD को बिन्दु पर प्रतिच्छेद करता है।
(vi) AC को मिलाइए।
यही ∆ABC अभीष्ट त्रिभुज है।

MP Board Class 9th Maths Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चाँदे की सहायता से 110° का एक कोण खींचिए और फिर उसे समद्विभाजित कीजिए। प्रत्येक कोण को मापिए।
हल:
रचना:
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 5
चित्र 11.27
(i) एक रेखाखण्ड BC खींचिए।
(ii) B पर ∠ ABC = 110° का कोण बनाइए।
(iii) ∠ABC का समद्विभाजक BD खींचिए।
मापन करने पर प्रत्येक कोण का माप = 55° है।

प्रश्न 2.
3.6 cm, 3.0 cm और 4.8 cm भुजाओं वाले एक त्रिभुज की रचना कीजिए।
हल:
एक त्रिभुज ABC की रचना करनी है जिसमें AB = 3.6 cm, BC = 3.0 cm और AC = 4.8 cm।
रचना :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 6
चित्र 11.28
(i) AB = 3.6 cm का एक रेखाखण्ड खींचिए।
(ii) A को केन्द्र लेकर 4.8 cm की त्रिज्या से एक चाप खींचिए।
(iii) B को केन्द्र लेकर 3.0 cm की त्रिज्या से एक चाप खींचिए जो पहले चाप को बिन्दु C पर प्रतिच्छेद करता है।
(iv) AC और BC को मिलाइए।
यही ∆ABC अभीष्ट त्रिभुज है।

प्रश्न 3.
60° का कोण बनाकर इसका कोणार्द्धक खींचिए। (2019)
अथवा
60° का कोण बनाकर उसका समद्विभाजक खींचिए। (2019)
हल:
रचना :
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 11 रचनाएँ Additional Questions 7
चित्र 11.29
(i) एक किरण BC खींचिए।
(ii) B को केन्द्र लेकर किसी त्रिज्या से एक चाप खींचिए जो BC को बिन्दु P पर प्रतिच्छेद करता है।
(iii) P को केन्द्र लेकर उसी त्रिज्या से एक चाप खींचिए जो पूर्व से चाप को Q बिन्दु पर प्रतिच्छेद करता है।
(iv) BQ से होकर एक किरण BA खींचिए।
यही ∠ABC = 60° का अभीष्ट कोण है।
(v) P और Q को केन्द्र लेकर PQ के आधे से अधिक की त्रिज्या लेकर चाप खींचिए जो परस्पर बिन्दु R पर प्रतिच्छेद करते हैं।
(vi) BR से होकर किरण BD खींचिए।
यही BD अभीष्ट कोणार्द्धक (समद्विभाजक) है।

MP Board Class 9th Maths Chapter 11 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

निम्नलिखित में प्रत्येक में सत्य या असत्य कथन लिखिए। अपने उत्तर का कारण दीजिए।

प्रश्न 1.
52.5° के कोण की रचना की जा सकती है।
उत्तर:
कथन सत्य है, क्योंकि 52.5° = 105°/2 की रचना की जा सकती है।

प्रश्न 2.
42.5° के कोण की रचना की जा सकती है।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि 42.5° = 85°/2 और 85° के कोण की रचना नहीं की जा सकती है।

प्रश्न 3.
एक त्रिभुज ABC की रचना की जा सकती है जिसमें AB = 5 cm, ∠A = 45° और BC + AC = 5 cm ।
उत्तर:
कथन असत्य है, क्योंकि दो भुजाओं का योग तीसरी के बराबर है।

प्रश्न 4.
एक त्रिभुज ABC की रचना की जा सकती है जिसमें BC = 6 cm, ∠C = 30° और AC – AB = 4 cm है।
उत्तर:
कथन सत्य है, क्योंकि AC – AB < BC. प्रश्न 5. एक त्रिभुज ABC की रचना की जा सकती है जिसमें ∠B = 105°, ∠ C = 90° और AB + CA = 10 cm है। उत्तर: कथन असत्य है, क्योंकि ∠ B + ∠C = 105° + 90° = 195° > 180°.

प्रश्न 6.
एक त्रिभुज ABC की रचना की जा सकती है जिसमें ∠B = 60°, ∠C = 45° और AB+ BC + AC = 12 cm है।
उत्तर:
कथन सत्य है, क्योंकि ∠ B + ∠ C = 60° + 45° = 105° < 180°.

MP Board Class 9th Maths Chapter 11 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पटरी और परकार की सहायता से निम्न कोण की रचना सम्भव नहीं है :
(a) 37.5°
(b) 40°
(c) 22.5°
(d) 67.50.
उत्तर:
(b) 40°

प्रश्न 2.
एक त्रिभुज ABC जिसमें BC = 6 cm और ∠B = 45° दिया है, की रचना सम्भव नहीं है यदि AB और AC का अन्तर है:
(a) 6.9 cm
(b) 5.2 cm
(c) 5.0 cm
(d) 4.0 cm.
उत्तर:
(a) 6.9 cm

प्रश्न 3.
एक त्रिभुज ABC, जिसमें BC = 3 cm और ∠C = 60° की रचना सम्भव है जब AB और AC का अन्तर बराबर है :
(a) 3 : 2 cm
(b) 3.1 cm
(c) 3 cm
(d) 2.8 cm.
उत्तर:
(d) 2.8 cm.

प्रश्न 4.
पटरी और परकार की सहायता से निम्न कोण की रचना सम्भव है :
(a) 35°
(b) 40°
(c) 37.5°
(d) 47.5°
उत्तर:
(c) 37.5°

प्रश्न 5.
एक त्रिभुज ABC जिसमें AB = 4 cm और A = 60° है, की रचना सम्भव नहीं है, यदि BC और AC का अन्तर है:
(a) 3.5 cm
(b) 4.5 cm
(c) 3 cm
(d) 2.5 cm.
उत्तर:
(b) 4.5 cm

रिक्त स्थानों की पूर्ति
1. वह मापक यन्त्र जिसके एक ओर सेण्टीमीटर, मिलीमीटर तथा दूसरी ओर इंच और उसके भाग चिह्नित हों कहलाता है।
2. त्रिभुजाकार युग्म जिसमें एक के कोण 60°, 30° और 90° तथा दूसरे के 45°, 450 और 90° होते हैं कहलाता है।
3. मापक यन्त्र जिसकी दोनों भुजाओं में दो नुकीले सिरे होते हैं ……….. कहलाता है।
4. दो टाँगों वाला यन्त्र जिसके एक सिरे पर नुकीला सिरा तथा दूसरे सिरे पर पेंसिल लगाने की व्यवस्था हो …….. कहलाता है।
5. अर्द्धचन्द्राकार पारदर्शी मापक यन्त्र जिसकी वृत्तकार परिधि अंशांकित हो ..कहलाता है।
उत्तर:
1. अंशांकित पटरी (स्केल),
2. सेटस्क्वायर,
3. डिवाइडर,
4. परकार (कम्पास),
5. चाँदा।

सत्य/असत्य कथन

1. उस त्रिभुज की रचना सम्भव है जिसकी दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा के बराबर हो।
2. पटरी एवं परकार की सहायता से 50° का कोण बनाना सम्भव नहीं है।
3. उस त्रिभुज की रचना सम्भव है जिसकी दो भुजाओं का अन्तर तीसरी भुजा के बराबर हो।
4. पटरी और परकार की सहायता से उस कोण की रचना सम्भव है जिसकी माप 7.5 के पूर्ण गुणक में हो।
5. उस त्रिभुज की रचना सम्भव है जिसकी दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से छोटा हो।
उत्तर:
1. असत्य,
2. सत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. वह त्रिभुज क्या कहलाता है जिसकी भुजाएँ बराबर हों?
2. समबाहु त्रिभुज के प्रत्येक कोण का मान क्या होता है?
3. समकोण त्रिभुज में अधिकतर कितने समकोण हो सकते हैं?
4. किसी त्रिभुज के तीनों कोणों का योग कितना होता है?
5. वह रेखा क्या कहलाती है जो किसी रेखाखण्ड को समकोण पर दो बराबर भागों में विभक्त करती है।
उत्तर:
1. समबाहु त्रिभुज,
2. 60°,
3. एक
4. 180°
5. लम्ब समद्विभाजक।

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MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 6 भारत : प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीव

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 पाठान्त अभ्यास

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
भारत में सबसे कम वन क्षेत्र वाला राज्य है (2009, 11)
(i) असम
(ii) राजस्थान
(iii) झारखण्ड
(iv) हरियाणा।
उत्तर:
(iv) हरियाणा।

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प्रश्न 2.
सुन्दरी वृक्ष पाया जाता है (2009, 10)
(i) उष्ण कटिबन्धीय वन में
(ii) हिमालयीन वन में
(iii) मैंग्रोव वन में,
(iv) उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन में।
उत्तर:
(iii) मैंग्रोव वन में,

प्रश्न 3.
राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति है (2009)
(i) आर्द्र उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन
(ii) अल्पाइन प्रकार के वन,
(iii) उष्ण कटिबन्धीय कंटीले वन
(iv) आर्द्र उष्ण कटिबन्धीय अर्द्ध सदाबहार वन।
उत्तर:
(iii) उष्ण कटिबन्धीय कंटीले वन

प्रश्न 4.
भारतीय सिंहों का प्राकृतिक आवास आरक्षित क्षेत्र है (2008, 09, 12, 15)
(i) गुजरात का गिर क्षेत्र
(ii) असम का काजीरंगा वन क्षेत्र
(iii) पश्चिम बंगाल का सुन्दरवन
(iv) नीलगिरि वन क्षेत्र।
उत्तर:
(i) गुजरात का गिर क्षेत्र

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राकृतिक वनस्पति से क्या तात्पर्य है? (2017)
उत्तर:
प्राकृतिक रूप से मानव के हस्तक्षेप के बिना उगने वाले पेड़-पौधों को प्राकृतिक वनस्पति कहते हैं।

प्रश्न 2.
वन किसे कहते हैं? (2014, 16, 18)
उत्तर:
वन उस बड़े भू-भाग को कहते हैं, जो प्राकृतिक रूप से उगने वाले पेड़-पौधों तथा झाड़ियों द्वारा आच्छादित होता है।

प्रश्न 3.
मैंग्रोव वन किसे कहते हैं? (2017)
उत्तर:
भारत के तटवर्ती क्षेत्रों में जहाँ ज्वारभाटा आते हैं, वहाँ मैंग्रोव या ज्वारीय वन पाये जाते हैं।

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प्रश्न 4.
देशज व विदेशज वनस्पति से क्या आशय है?
उत्तर:
जो वनस्पति मूलरूप से भारतीय है, उसे देशज वनस्पति कहते हैं लेकिन जो पौधे भारत के बाहर से आये हैं, उन्हें विदेशज वनस्पति कहते हैं।

प्रश्न 5.
अभ्यारण्य किसे कहते हैं? (2014, 16, 18)
उत्तर:
अभ्यारण्य राष्ट्रीय उद्यानों के समान ही होते हैं। ये वन्य प्राणियों को संरक्षित और प्रजातियों को सुरक्षित करने के लिए प्राकृतिक स्थल हैं यहाँ बिना अनुमति के शिकार करना मना होता है।

प्रश्न 6.
प्रशासनिक आधार पर वनों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
प्रशासनिक आधार पर वनों को तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है –

  • आरक्षित वन :
    जो वन इमारती लकड़ी अथवा वन उत्पादों को प्राप्त करने के लिए स्थायी रूप से सुरक्षित किये गये हैं जिनमें पशुओं की चराई व कृषि करने की अनुमति प्राप्त नहीं होती है, आरक्षित वन कहलाते हैं।
  • संरक्षित वन :
    ये वन जिनमें पशुओं को चराने व खेती करने की अनुमति सामान्य प्रतिबन्धों के साथ दे दी जाती है, संरक्षित वन कहलाते हैं।
  • अवर्गीकृत वन :
    वे वन जो न तो आरक्षित हैं और न ही सुरक्षित हैं, अवर्गीकृत वन कहलाते हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रवासी पक्षी क्या है?
उत्तर:
उत्तरी एशिया से भारत में अल्पकाल के लिए आने वाले पक्षियों को प्रवासी पक्षी कहा जाता है। भारत के कुछ दलदली भाग प्रवासी पक्षियों के लिये प्रसिद्ध हैं। शीत ऋतु में साइबेरियन सारस बहुत संख्या में यहाँ आते हैं। इन पक्षियों का मनपसन्द स्थान कच्छ का रन है। जिस स्थान पर मरुभूमि समुद्र से मिलती है, वहाँ लाल सुन्दर कलगी वाले फ्लैमिंगो हजारों की संख्या में आते हैं।

प्रश्न 2.
वन संरक्षण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
वन राष्ट्रीय सम्पदा हैं। यह मानव के लिये विभिन्न प्रकार से उपयोगी हैं। वनों से हमें प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होते हैं। मनुष्य की आवश्यकताएँ अनन्त होती हैं जबकि उन आवश्यकताओं को पूरा करने वाले प्रकृति प्रदत्त साधन सीमित हैं और यदि हम इन साधनों का अन्धाधुन्ध उपयोग करेंगे तो यह एक निश्चित समय के पश्चात् समाप्त हो जायेंगे। अतः वनों की देखभाल करना व उनको काटने से रोकना आदि ही वन संरक्षण कहलाते हैं। सरकार भी समय-समय पर अनेक कार्यक्रम शुरू करके वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करती है जिससे हम जीवन-पर्यन्त तक वनों से लाभान्वित होते रहें।

प्रश्न 3.
भारत की हिमालयी क्षेत्र की वनस्पति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हिमालयी क्षेत्रों में तापमान की कमी तथा ऊँचाई के कारण अन्य भागों की तुलना में वनस्पति में अधिक अन्तर होता है। शिवालिक श्रेणियों में 1000 मीटर की ऊँचाई पर, पर्वतपदीय क्षेत्र, भाबर व तराई में उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन पाये जाते हैं। 1000 से 2000 मीटर की ऊँचाई पर आर्द्र शीतोष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन पाये जाते हैं। ये लम्बे पेड़ों से युक्त घने वन हैं। पूर्वी हिमालय में ओक तथा चेस्टनट, पश्चिमी हिमालय में चीड़ तथा 2000 से 3000 मीटर की ऊँचाई वाले भागों में देवदार, सिल्वर, फर, स्यूस कम घने रूप में मिलते हैं। कम ऊँचाई वाले भागों में साल मुख्य वृक्ष है। जहाँ तापमान कम तथा वर्षा 100 सेमी से कम होती है; वहाँ जंगली जैतून, कठोर बबूल एवं कठोर सवाना घास के साथ ओक व देवदार के वृक्ष पाये जाते हैं। 3000 से 4000 मीटर की ऊँचाई पर अल्पाइन वनस्पति पाई जाती है।

प्रश्न 4.
राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्य में अन्तर
राष्ट्रीय उद्यान तुलनात्मक रूप से एक विस्तृत क्षेत्र होता है। यह क्षेत्र मानव के शोषण और अधिग्रहण के द्वारा परिवर्तित नहीं हुआ है। विशिष्ट वैज्ञानिक शिक्षा और मनोरंजन के लिए इसके पेड़-पौधे, जीव-जन्तुओं की प्रजातियों को भू-आकृतिक स्थलों और आवासों के साथ संरक्षित किया गया है। राष्ट्रीय उद्यान में शिकार और चराई पूर्णतया वर्जित होते हैं। राष्ट्रीय उद्यानों में मानवीय हस्तक्षेप पूर्णतया प्रतिबन्धित होता है।

अभ्यारण्य राष्ट्रीय उद्यानों के समान ही होते हैं। ये वन्य प्राणियों को संरक्षित और प्रजातियों को सुरक्षित करने के प्रति समर्पित हैं। अभ्यारण्य में अनुमति के बिना शिकार करना मना है, लेकिन चराई और गौ-पशुओं का आना-जाना नियमित होता रहता है। अभ्यारण्य में मानवीय क्रिया-कलापों की अनुमति होती है।

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प्रश्न 5.
भारत में पौधों तथा वनस्पति का वितरण किन तत्वों पर निर्भर करता है? लिखिए।
उत्तर:
भारत में पौधों तथा वनस्पति का वितरण निम्न तत्वों पर निर्भर करता है

  • भूमि :
    भूमि का वनस्पति पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। ऊबड़-खाबड़ तथा असमान भू-भाग पर जंगल व घास के मैदान मिलते हैं जो कि वन्य प्राणियों के आश्रय स्थल हैं।
  • मिट्टी :
    विभिन्न स्थानों की विभिन्न प्रकार की मिट्टियाँ विविध प्रकार की वनस्पति का आधार है। नदियों के डेल्टाई क्षेत्रों में मैंग्रोव वन, ऊँचे पर्वतों के ढलानों पर शंकुधारी वन पाये जाते हैं। मैदानी क्षेत्र कृषि के लिये अनुकूल है तो पठारी क्षेत्रों में पर्णपाती वन मिलते हैं।
  • तापमान :
    प्रत्येक पौधे के अंकुरण, वृद्धि एवं प्रजनन के लिए अनुकूल तापमान की आवश्यकता होती है। उष्ण कटिबन्ध में उच्च तापमान और आर्द्रता के कारण विविध प्रकार के पेड़-पौधे उगते हैं। ऊँचे पर्वतों पर तापमान कम होने के कारण वनस्पति का वर्द्धन काल छोटा होता है।
  • सूर्य का प्रकाश :
    सूर्य का प्रकाश अधिक समय तक मिलने के कारण वृक्ष गर्मी की ऋतु में जल्दी बढ़ते हैं। जैसे-हिमालय पर्वतीय क्षेत्र की दक्षिणी ढलानों पर अधिक सूर्यताप मिलने के कारण उत्तरी ढलानों की अपेक्षा अधिक सघन वनस्पति पायी जाती है।
  • वर्षा :
    भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में बड़े-बड़े पेड़ सघनता में पाये जाते हैं। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में बौने वृक्ष, घास तथा झाड़ियाँ पायी जाती हैं। मरुस्थलीय क्षेत्रों में पेड़-पौधों की जड़ें लम्बी होती हैं। थार मरुस्थल की वनस्पति पानी की कमी के कारण काँटेदार होती है।

प्रश्न 6.
सदाबहार वन तथा पर्णपाती वन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सदाबहार वन तथा पर्णपाती वन

सदाबहार वन पर्णपाती वन
1. सदाबहार वनों के वृक्ष अत्यन्त सघन, लम्बे तथा सदा हरे-भरे रहते हैं। 1. पर्णपाती वनों के वृक्ष कम घने, अपेक्षाकृत छोटे होते हैं तथा गर्मियों में अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं।
2. इन वृक्षों के नीचे दलदल तथा विषैले जीव-जन्तु पाये जाते हैं। 2. इन वनों के नीचे दलदल नहीं पाया जाता, किन्तु जंगली जानवर पाये जाते हैं।
3. आबनूस, महोगनी तथा रोजवुड इन वनों के व्यापारिक महत्त्व के वृक्ष हैं। 3. साल और सागौन इन वनों के बहुत ही महत्त्वपूर्ण और उपयोगी वृक्ष हैं
4. इन वनों में एक साथ अनेक जातियों के वृक्ष पाये जाते हैं। 4. ये विरल वन हैं। एक जाति के वृक्ष समूह एक साथ मिल जाते हैं।
5. ये वन महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, त्रिपुरा, मणिपुर आदि राज्यों में पाये जाते हैं। 5. ये मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान आदि राज्यों में पाये जाते हैं।

प्रश्न 7.
उष्ण आर्द्र सदाबहार वनों की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. ये वन भारत के उन प्रदेशों में पाये जाते हैं जहाँ वार्षिक वर्षा 300 सेमी से अधिक होती है तथा शुष्क ऋतु छोटी होती है।
  2. ये वन अत्यधिक घने होते हैं। इनमें पेड़ों की लम्बाई 60 मीटर या इससे अधिक होती है।
  3. इन वनों के पेड़ों के नीचे झाड़ियाँ, बेलें, लताएँ आदि का सघन जाल पाया जाता है। घास प्रायः अनुपस्थित होती है।
  4. इनके पेड़ों की लकड़ी अधिक कठोर व भारी होती है।
  5. वृक्षों में पतझड़ का कोई निश्चित समय नहीं होता है। अतः ये वन सदैव हरे-भरे लगते हैं।
  6. भारत में ये वन पश्चिमी घाट के दक्षिणी भाग, केरल, कर्नाटक तथा उत्तर पूर्व की पहाड़ियों में प्रमुखता से पाये जाते हैं।

प्रश्न 8.
मानव के लिये वन किस प्रकार उपयोगी हैं? वर्णन कीजिए।
अथवा
वनों के प्रत्यक्ष लाभ की तुलना में अप्रत्यक्ष लाभ कैसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण है? समझाइए।
उत्तर:
वन राष्ट्रीय सम्पदा हैं। यह मानव के लिए विभिन्न प्रकार से उपयोगी हैं। वन उत्पाद व संरक्षण दोनों प्रकार के कार्य करते हुए देश के आर्थिक विकास में योगदान देते हैं। वनों से हमें दो प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं-प्रत्यक्ष लाभ एवं अप्रत्यक्ष लाभ।
(A) प्रत्यक्ष लाभ :

  1. वनों से पर्याप्त मात्रा में लकड़ी प्राप्त होती है। वनों की लकड़ियों का उपयोग ईंधन, फर्नीचर, खेल का सामान, दियासलाई तथा कागज आदि वस्तुएँ बनाने में किया जाता है।
  2. वनों से अनेक प्रकार के गौण पदार्थ प्राप्त होते हैं, जिनमें बाँस, बेंत, लाख, राल, शहद, गोंद, चमड़ा रंगने के पदार्थ तथा जड़ी-बूटियाँ प्रमुख हैं।
  3. वनों से हमें वस्त्र बनाने के लिए रेशम और समूर प्राप्त होता है।
  4. खैर नामक वृक्ष से कत्था प्राप्त होता है।
  5. वनों से अनेक लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।

(B) अप्रत्यक्ष लाभ :

  1. वन भूमि के कटाव को रोकते हैं, क्योंकि वृक्ष जल की बूंदों को सीधे भूमि पर गिरने से रोक देते हैं।
  2. वनों द्वारा भूमि की उर्वरता में अत्यधिक वृद्धि होती है, क्योंकि वृक्षों की पत्तियाँ, घास व पेड़-पौधे, झाड़ियाँ आदि भूमि पर गिरकर व सड़कर ह्यूमस रूप में भूमि की उर्वरा-शक्ति को बढ़ाते हैं।
  3. वन बाढ़ के प्रकोप को रोकते हैं, क्योंकि वृक्ष जल के तीव्र प्रवाह पर रोक लगा देते हैं जिससे जल का प्रवाह मन्द पड़ जाता है।
  4. वायु-प्रदूषण भी वन रोकने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  5. वन वर्षा करने में सहायक होते हैं।
  6. वन जलवायु को मृदुल बनाते हैं। वन गर्मी और सर्दी की तीव्रता को कम करने में सहायक होते हैं।
  7. वन पक्षियों तथा जीव-जन्तुओं के प्राकृतिक आश्रय स्थल हैं।
  8. वन प्राकृतिक सौन्दर्य के प्रतीक हैं।
  9. वन प्राकृतिक सन्तुलन के स्रोत हैं।

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MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत के मुख्य वनस्पति प्रकारों का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में कितने प्रकार के वन पाये जाते हैं। संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
(1) उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन :
इस प्रकार के वन भारत के उन भागों में पाये जाते हैं जहाँ वर्षा का वार्षिक औसत 200 सेमी या उससे अधिक रहता है। ये वृक्ष 60 मीटर या इससे भी अधिक ऊँचाई तक बढ़ जाते हैं। ये वन पश्चिमी घाट, मेघालय तथा उत्तरी-पूर्वी भारत के अन्य भागों में पाये जाते हैं। इस प्रकार के वनों में महोगनी, आबनूस तथा कपूरा जैसे अनेक प्रकार के वृक्ष पाये जाते हैं।

(2) उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन :
इस प्रकार के वन भारत के उन क्षेत्रों में पाये जाते हैं जहाँ वर्षा का औसत 75 से 200 सेमी के मध्य रहता है। इन वनों को मानसूनी वन’ भी कहते हैं। इन वनों के दो उपवर्ग हैं –

  • आर्द्र पर्णपाती वन
  • शुष्क पर्णपाती वन।

प्रथम वर्ग के वनों का विस्तार उत्तर में हिमालय की तराई व भावर प्रदेश, प्रायद्वीप के उत्तर-पूर्वी भागों तथा पश्चिमी घाट के पूर्वी भागों में पाया जाता है। सागौन इन वनों का महत्त्वपूर्ण वृक्ष है। आर्थिक दृष्टि से ये महत्त्वपूर्ण वन हैं। शुष्क पर्णपाती वनों के प्रमुख क्षेत्र दक्षिण-पश्चिमी बिहार, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश, पूर्वी महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक आदि में विस्तृत हैं। साल इन वनों का सर्वाधिक लाभदायक और महत्त्वपूर्ण वृक्ष है। इन्हें पर्णपाती (शुष्क और आर्द्र) इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये ग्रीष्म ऋतु में 6 से लेकर 8 सप्ताह तक अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं। प्रत्येक जाति के वृक्षों के पतझड़ का समय अलग-अलग होता है।

(3) कँटीले वन तथा झाड़ियाँ :
इस प्रकार के वन भारत के उन भागों में उगते हैं जहाँ वर्षा का वार्षिक औसत 75 सेमी से कम है। ये वन प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी भाग में, दक्षिण में सौराष्ट्र से लेकर उत्तर में पंजाब के मैदानों तक फैले हैं। पूर्व में ये वन उत्तरी मध्य प्रदेश प्रमुख रूप से मालवा का पठार तथा दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड के पठार पर फैले हैं। इन वनों में कीकर, बबूल, बेर, खजूर, रामबाँस, नागफनी, खजेड़ा आदि वृक्ष अधिक उगते हैं। आर्थिक दृष्टि से ये वन उपयोगी नहीं हैं, केवल खजूर ही उपयोगी है।

(4) पर्वतीय वन :
पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान की कमी व ऊँचाई के कारण अन्य भागों की तुलना में वनस्पति में अधिक अन्तर पाया जाता है। शिवालिक श्रेणियों में 1000 मीटर की ऊँचाई पर पर्वतपदीय क्षेत्र, भावर व तराई में उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन पाये जाते हैं। 1000 से 2000 मीटर की ऊँचाई पर आर्द्र शीतोष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन पाये जाते हैं। ये लम्बे पेड़ों से युक्त घने वन हैं। पूर्वी हिमालय में ओक तथा चेस्टनट, पश्चिमी हिमालय में चीड़ तथा 2000 से 3000 मीटर की ऊँचाई वाले भागों में देवदार, सिल्वर फर, स्प्रूस कम घने रूप में मिलते हैं। कम ऊँचाई वाले भागों में साल मुख्य वृक्ष है। जहाँ तापमान कम तथा वर्षा 100 सेमी से कम होती है, वहाँ जंगली जैतून, कठोर बबूल एवं कठोर सवाना घास के साथ ओक व देवदार के वृक्ष पाये जाते हैं। 3000 से 4000 मीटर की ऊँचाई पर अल्पाइन वनस्पति पायी जाती है।

(5) मैंग्रोव या ज्वारीय वन :
भारत के तटवर्ती क्षेत्रों में जहाँ ज्वारभाटा आता है, ये वन पाये जाते हैं। इन वनों में ताड़, नारियल मैंग्रोव, नीपा, फोनेक्स, कैसटाइना आदि वृक्षों की प्रधानता होती है। गंगा तथा ब्रह्मपुत्र नदियों के डेल्टा में सुन्दरी वृक्ष पाये जाते हैं। इन वनों में सागरीय जल भरा रहता है। अतः इनमें आने-जाने के लिये नावों का प्रयोग किया जाता है। इन वनों में वृक्षों की छाल खारे जल के कारण नमकीन व कठोर हो जाती है। वृक्षों की लकड़ी का उपयोग नाव बनाने तथा नमकीन छाल का प्रयोग चमड़ा रंगने में किया जाता है।

प्रश्न 2.
वन संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता क्यों है ? उनके संरक्षण के प्रमुख उपाय बताइए।
उत्तर:
वन संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता :
वन राष्ट्रीय सम्पदा हैं। यह मानव के लिये विभिन्न प्रकार से उपयोगी हैं। मनुष्य की आवश्यकताएँ अनन्त होती हैं जबकि उनको पूरा करने के लिये प्रकृति प्रदत्त साधन सीमित हैं। यदि हम इन संसाधनों का तीव्रता से प्रयोग करते जाएँगे तो एक समय पश्चात् इन संसाधनों की कमी हो जाएँगी। अतः संसाधनों की कमी से उत्पन्न समस्याओं को देखते हुए इनका संरक्षण व संवर्द्धन आवश्यक है। इसके साथ-साथ हमें वनों से इमारती लकड़ी, ईंधन की लकड़ी, पशुओं के लिये चारा, लघु व कुटीर उद्योगों के लिये कच्चा माल तथा औषधियों हेतु कच्ची सामग्री प्राप्त होती है। अत: इनका संरक्षण आवश्यक है।

वन संरक्षण के उपाय :
वन संरक्षण हेतु निम्नलिखित उपाय किये गये –

  1. सरकार द्वारा क्रियान्वित वन नीति का मुख्य उद्देश्य पर्यावरणीय स्थिरता और पारिस्थितिक सन्तुलन बनाये रखना है।
  2. वन संरक्षण कानून-1980 वनों के विनाश तथा वनभूमि का वनों के अतिरिक्त दूसरे कार्यों के लिये उपयोग को रोकना है।
  3. वन रोपण एवं बंजर भूमि का विकास।
  4. मौजूदा वनों में पुनर्रोपण करना।
  5. वनों की नियन्त्रित एवं वैज्ञानिक विधि से कटाई।
  6. वनों को आग से बचाना और इसके निरीक्षण के लिये अनुवीक्षण मीनारों की स्थापना करना।
  7. ईंधन के लिये वैकल्पिक स्रोत; जैसे-रसोई गैस, सौर चूल्हे आदि का प्रयोग करना।
  8. भवन निर्माण में लकड़ी की अपेक्षा लोहा, टिन आदि का प्रयोग करना।
  9. पशुचारण और ईंधन हेतु वृक्षों व झाड़ियों की कटाई पर रोक।
  10. इमारती लकड़ी के व्यापार को सीमित करना।
  11. दीमक, सँडी, झींगुर, गुबरेला जैसे हानिकारक कीटों पर नियन्त्रण।
  12. कृषि वानिकी, विस्तार वानिकी, रक्षा पंक्ति वानिकी, वन संरक्षण, चिपको आन्दोलन एवं वन महोत्सव के प्रति लोगों में चेतना विकसित करना।

प्रश्न 3.
वन्य जीवों के संरक्षण के लिये किये गये उपायों को लिखिए।
अथवा
‘वन्य जीवों का संरक्षण’ पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
‘वन्य-जीवों का संरक्षण :
वन्य-प्राणी प्रकृति की धरोहर हैं। वन्य जीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। संकटापन्न वन्य-जीवों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इनकी अब गणना की जाने लगी है। बाघ परियोजना को सफलता मिल चुकी है। असम में गैंडे के संरक्षण की एक विशेष योजना चलायी जा रही है। सिंहों की घटती संख्या चिन्ता का विषय बन गयी है। अत: आरक्षित क्षेत्रों की संख्या और उनके क्षेत्रों के विस्तार पर बल दिया जा रहा है। वन्य-प्राणियों की सुरक्षा के लिए भारत में वन प्राणी संरक्षण क्षेत्रों की स्थापना की गयी है, जहाँ पशु-पक्षियों को प्राकृतिक वातावरण में फलने-फूलने का अवसर प्रदान किया जाता है।

“वर्तमान में संरक्षित क्षेत्र के अन्तर्गत 103 राष्ट्रीय उद्यानों और 535 अभ्यारण्यों की गिनती की जाती है जो देश के एक लाख 56 हजार वर्ग किमी क्षेत्र पर फैले हैं।” देश में प्राणी उद्यानों के प्रबन्धन की देख-रेख के लिए एक केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण स्थापित किया गया है। यह संस्था 200 से अधिक चिड़ियाघरों के कार्यों में तालमेल रखती है और जानवरों के आदान-प्रदान की वैज्ञानिक ढंग से देख-रेख करती है।

वन्य जीवों के संरक्षण हेतु उपाय-संसार की 5 लाख जीव प्रजातियों में से लगभग 75,000 भारत में है। पक्षियों की लगभग 12,000 प्रजातियाँ एवं 900 उपजातियाँ भारत में विद्यमान हैं। वन्य जीवों के संरक्षण हेतु निम्न उपाय किये गये हैं –

  • बाघ परियोजना :
    1 अप्रैल, 1973 को ‘बाघ परियोजना’ की शुरूआत हुई। इस समय देश के 27 अभ्यारण्यों में यह परियोजना चल रही है।
  • लाल पांडा परियोजना :
    हिमालय क्षेत्र में संरक्षण करने की परियोजना की शुरूआत वर्ष 1996 . में की। 1 भारत 2017, पृष्ठ 297.
  • मणिपुर थामिन (ब्रो ऐन्टलर हिरण) परियोजना :
    1977 में मणिपुर थामिन परियोजना शुरू की गयी।
  • गिर सिंह अभ्यारण्य योजना :
    1972 में गुजरात सरकार ने इनके संरक्षण, सुरक्षा एवं सुधार के लिए केन्द्र सरकार के सहयोग से यह परियोजना शुरू की।
  • हिमालय कस्तूरी परियोजना :
    भारत सरकार के सहयोग से संरक्षण परियोजना उत्तर प्रदेश के ‘केदारनाथ अभ्यारण्य’ में आरम्भ की गयी।
  • हाथी परियोजना :
    यह परियोजना झारखण्ड के सिंहभूमि जिले में 7 दिसम्बर, 1992 को शुरू की गयी।
  • मगर प्रजनन परियोजना :
    भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यू.एन.डी. पी.) की सहायता से 1975 में उड़ीसा में मगर प्रजनन तथा प्रबन्ध की परियोजना आरम्भ की।
  • प्रोजेक्ट हांगुल :
    ‘प्रोजेक्ट हांगुल’ 1970 में शुरू की गयी।
  • देश में जीवमण्डल निचय (आरक्षित क्षेत्र) की स्थापना :
    देश में 14 जीवमण्डल निचय स्थापित किये गये हैं। इनमें से सुन्दर वन (पश्चिम बंगाल), नंदादेवी (उत्तराखण्ड), मन्नार की खाड़ी (तमिलनाडु) नीलगिरि (केरल, कर्नाटक तथा तमिलनाडु) की गणना विश्व के जीवमण्डल निचय में की जाती है। अन्य जीवमण्डल नाकरेक, ग्रेट निकोबार, मानस, सिमलीपाल, दिहांग-दिबांग, डिब्रु साइकवोबा, अगस्तमलाई, कंचनजंघा, पंचमढ़ी, अचनकमट-अभटूकंटक हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 अन्य परीक्षोपयोगी प्रश्न

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कौन-सी औषधीय वनस्पति नहीं हैं? (2008)
(i) तुलसी
(ii) नीम
(iii) सर्पगंधा
(iv) टीक।
उत्तर:
(iv) टीक।

प्रश्न 2.
संसार की 5 लाख जीव प्रजातियों में भारत में कितनी प्रजातियाँ पायी जाती हैं?
(i) 50,000 लगभग
(ii) 5,000 लगभग
(iii) 75,000 लगभग
(iv) 15,000 लगभग।
उत्तर:
(iii) 75,000 लगभग

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प्रश्न 3.
बाघ विकास कार्यक्रम परियोजना कब प्रारम्भ की गई?
(i) 1971
(ii) 1973
(iii) 1975
(iv) 19791
उत्तर:
(ii) 1973

प्रश्न 4.
भारत में वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम कब पारित हुआ? (2008,09)
(i) 1971
(ii) 1972
(iii) 1970
(iv) 19751
उत्तर:
(ii) 1972

प्रश्न 5.
मगर प्रजनन एवं प्रबन्ध परियोजना कब प्रारम्भ की गई?
(i) 1970
(ii) 1972
(iii) 1975
(iv) 19741
उत्तर:
(iii) 1975

प्रश्न 6.
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में कहाँ स्थित है? (2017)
(i) जबलपुर
(ii) नरसिंहपुर
(iii) होशंगाबाद,
(iv) मण्डला।
उत्तर:
(iv) मण्डला।

रिक्त स्थान पूर्ति

  1. जो वनस्पति मूल रूप से भारतीय है, उसे …………. वनस्पति कहते हैं। (2008, 09)
  2. जो वनस्पति भारत के बाहर से आती है, उन्हें …………. वनस्पति कहते हैं। (2008)
  3. भारत में प्रथम जीव आरक्षित क्षेत्र …………. में स्थापित किया गया। (2008)
  4. ………… में भारत में वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम पारित हुआ। (2011)
  5. …………. राष्ट्रीय उद्यान में बाघ नहीं पाये जाते हैं। (2008)
  6. देश में सिंहों का प्राकृतिक आवास स्थल गुजरात का ………… जंगल है। (2010)
  7. कान्हा राष्ट्रीय उद्यान …………. जिले में स्थित है। (2008, 09)
  8. सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान …………. जिले में हैं। (2009, 17)
  9. ज्वारीय वन में ………… वृक्ष पाया जाता है। (2013)
  10. सुन्दरी वृक्ष ………… में पाया जाता है। (2016)
  11. राजस्थान की ………… प्राकृतिक वनस्पति है। (2016)

उत्तर:

  1. देशज
  2. विदेशज
  3. नीलगिरि
  4. 1972
  5. माधव (शिवपुरी)
  6. गिर क्षेत्र
  7. मण्डला,
  8. होशंगाबाद
  9. सुन्दरी
  10. मैंग्रोव वन
  11. उष्ण कटिबन्धीय कटीले वन।

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सत्य/असत्य

प्रश्न 1.
गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा में सुन्दरी वृक्ष पाये जाते हैं। (2008)
उत्तर:
सत्य

प्रश्न 2.
जो वनस्पति मूल रूप से भारतीय नहीं है, उसे देशज वनस्पति कहते हैं। (2013)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 3.
आरक्षित वनों में पशुओं को चराने की अनुमति दी जाती है।
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 4.
मध्य प्रदेश में 45% क्षेत्र में वन है। (2008)
उत्तर:
असत्य

प्रश्न 5.
तुलसी वनस्पति का जुकाम व खाँसी के लिए उपयोग होता है। (2008)
उत्तर:
सत्य

सही जोड़ी मिलाइए
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 6 भारत प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीव - 1
उत्तर:

  1. → (ख)
  2. → (ङ)
  3. → (घ)
  4. → (क)
  5. → (ग)
  6. → (च)।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
ऐसे वन जो न तो आरक्षित हैं और न ही सुरक्षित हैं। (2008)
उत्तर:
अवर्गीकृत वन

प्रश्न 2.
ऐसे वन जो एक ऋतु विशेष से पत्ते गिरा देते हैं। (2008, 09, 11)
उत्तर:
पर्णपाती

प्रश्न 3.
भाबर से लगा हुआ अधिक नम तथा दलदली क्षेत्र जहाँ घने वन तथा विविध वन्य जीव पाए जाते हैं। (2010)
उत्तर:
तराई

प्रश्न 4.
वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देने का कार्यक्रम। (2009)
उत्तर:
सामाजिक वानिकी

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प्रश्न 5.
सुन्दरी वृक्ष पाया जाता है। (2008)
उत्तर:
गंगा, ब्रह्मपुत्र डेल्टा में

प्रश्न 6.
अल्पकाल के लिए आने वाले पक्षी को कहते हैं। (2012, 15)
उत्तर:
प्रवासी पक्षी

प्रश्न 7.
प्रशासनिक आधार पर वनों को कितनी श्रेणियों में रखा गया है? (2013)
उत्तर:
तीन

प्रश्न 8.
भारतीय सिंहों का प्राकृतिक आवास आरक्षित क्षेत्र। (2013)
उत्तर:
गुजरात का गिर क्षेत्र

प्रश्न 9.
राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति है। (2014)
उत्तर:
उष्ण-कटिबन्धीय कँटीले वन

प्रश्न 10.
भारत में सबसे कम वन क्षेत्र वाला राज्य कौन-सा हैं? (2018)
उत्तर:
हरियाणा।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी क्षेत्र की वनस्पति को प्रभावित करने वाले तत्वों का नाम लिखिए।
उत्तर:
किसी क्षेत्र की वनस्पति को प्रभावित करने वाले तत्वों में वर्षा, तापमान, आर्द्रता, मिट्टी, समुद्र तल से ऊँचाई तथा भूगर्भिक संरचना महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 2.
प्राकृतिक आधार पर वनों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर:
प्राकृतिक आधार पर वनों को पाँच भागों में बाँटा जा सकता है –

  1. उष्ण कटिबन्धीय सदाबहार वन
  2. उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन
  3. पर्वतीय वन
  4. मैंग्रोव वन
  5. उष्ण कटिबन्धीय कँटीले वन।

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प्रश्न 3.
उन वन्य प्राणियों के नाम लिखिए जो अब विलुप्त होने के कगार पर हैं?
उत्तर:
गैंडा, चीता, शेर, सोहन चिड़िया आदि वन्य प्राणी अब विलुप्त होने के कगार पर हैं।

प्रश्न 4.
भारत की वनस्पति में इतनी विविधता क्यों हैं? (2015)
उत्तर:
दक्षिण से लेकर उत्तर ध्रुव तक विविध प्रकार की जलवायु के कारण भारत में अनेक प्रकार की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं जो समान आकार के अन्य देशों में बहुत कम मिलती हैं। यहाँ लगभग 46,000 प्रकार के पेड़-पौधे पाए जाते हैं।

प्रश्न 5.
पारिस्थितिक तन्त्र से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
भौतिक पर्यावरण और उसमें रहने वाले जीवों के सम्मिलित रूप को पारिस्थितिक तन्त्र या पारितन्त्र कहते हैं।

प्रश्न 6.
भाबर किसे कहते हैं?
उत्तर:
हिमालय क्षेत्र की पहाड़ियों के गिरीपाद प्रदेश में कंकड़ पत्थरों की एक पतली पेटी नदी की धारा के समानान्तर फैली है जो लगभग 8 से 16 किमी चौड़ी है, वह भाबर कहलाती है।

प्रश्न 7.
सागौन, बबूल, खैर और चन्दन वृक्षों का एक-एक मुख्य उपयोग लिखिए।
उत्तर:

  1. बबूल – दन्त मंजन
  2. सागौन – इमारती लकड़ी व फर्नीचर
  3. खैर – कत्था
  4. चन्दन – अगरबत्ती।

प्रश्न 8.
भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों के नाम लिखिए और बताइए कि ये किन-किन प्रदेशों में स्थित हैं? 1 भारत 2017, पृष्ठ 5 व 6
उत्तर:

  1. काजीरंगा-असम
  2. रणथम्भौर-राजस्थान
  3. बांधवगढ़-मध्य प्रदेश
  4. कान्हा किसली-मध्य प्रदेश
  5. माधव (शिवपुरी)-मध्य प्रदेश
  6. नन्दादेवी-उत्तराखण्ड।

प्रश्न 9.
मनुष्य के जीवित रहने के लिये पारितन्त्र का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
पारितन्त्र का विकास लाखों :
करोड़ों वर्षों में हुआ है। पारितन्त्र के अन्तर्गत आने वाले पौधों तथा जीव-जन्तुओं में गहरा सम्बन्ध होता है। मानव भी अपने अस्तित्व एवं विकास के लिये पारितन्त्र के जीव-जन्तुओं और वनस्पति पर आश्रित हो जाता है। पारितन्त्र से छेड़छाड़ करने से अत्यन्त गम्भीर परिणाम हो सकते हैं अतः पारितन्त्र का संरक्षण आवश्यक है।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय वनस्पति के प्रमुख कटिबन्धों के नाम लिखिए। ज्वारीय वन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारतीय वनस्पति के चार प्रमुख कटिबन्ध निम्नलिखित हैं :

  1. उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन
  2. उष्ण कटिबन्धीय पर्णपाती वन
  3. कँटीले वन तथा झाड़ियाँ
  4. ज्वारीय वन।

ज्वारीय वन :
ये वन तट के सहारे नदियों के ज्वारीय क्षेत्र में पाये जाते हैं। ज्वारीय क्षेत्र में मिलने के कारण इन वनों को ज्वारीय वन कहा जाता है। इन वनों में ताड़, नारियल, मैंग्रोव, नीपा, फोनेक्स, कैज्युराइना आदि के वृक्षों की प्रधानता होती है। गंगा तथा ब्रह्मपुत्र नदियों के डेल्टा में सुन्दरी नामक वृक्ष पाये जाते हैं। इन वनों में सागरीय जल भरा रहता है, अतः इनमें आने-जाने के लिए नावों का प्रयोग किया जाता है। इन वनों के वृक्षों की छाल खारे जल के प्रभाव से नमकीन तथा लकड़ी कठोर हो जाती है। इन वृक्षों की कठोर लकड़ी का उपयोग नाव बनाने तथा नमकीन छाल का उपयोग चमड़ा रंगने में किया जाता है।

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प्रश्न 2.
वनस्पति तथा जीव-जन्तु में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वनस्पति तथा जीव-जन्तु

वनस्पति जीव-जन्तु
1. प्राकृतिक वनस्पति के आवरण में वन, घास भूमियाँ तथा झाड़ियाँ शामिल हैं। 1. जीव-जन्तुओं में मछलियाँ, पक्षी, स्तनधारी पश, छोटे कीट, कृमि आदि शामिल हैं।
2. भारत में पेड़-पौधों की 46,000 प्रकार की जातियाँ पायी जाती हैं। 2. यहाँ लगभग 92,037 जातियों के जीव-जन्तु पाये जाते हैं।
3. वनस्पति सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को खाद्य ऊर्जा में बदल सकती है। 3. जीव-जन्तु अस्तित्व के लिए पूर्णरूपेण वनस्पति जगत पर आधारित हैं।
4. पौधों को दो वर्गों-फूल वाले पौधे तथा बिना फूल वाले पौधे के रूप में बाँटा जाता है। 4. जीव-जन्तुओं को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है-(i) शाकाहारी जीव तथा (ii) माँसाहारी जीव।
5. वनस्पति जीव-जन्तुओं की पूरक है। 5. जीव-जन्तु वनस्पति जगत के पूरक हैं।

प्रश्न 3.
भारत में प्रायः औषधि के लिये प्रयोग होने वाले कुछ प्रमुख पादप-सर्पगंधा, तुलसी, नीम, जामुन, बबूल, कचनार व अर्जुन के उपयोग बताइए।
उत्तर:

  1. सर्पगंधा-रक्तचाप के निदान के लिए
  2. तुलसी-जुकाम और खाँसी के लिए
  3. नीम-जैव व जीवाणु प्रतिरोध हेतु
  4. जामुन-पाचन क्रिया को ठीक करने, मधुमेह में उपयोगी
  5. बबूल-फुन्सी में लाभदायक व शारीरिक शक्ति में वृद्धि हेतु उपयोगी
  6. कचनार-फोड़ा व दमा रोग के लिये उपयोगी
  7. अर्जुन-कान का दर्द ठीक करने व रक्तचाप को नियन्त्रित करने के लिए।

प्रश्न 4.
प्रायद्वीपीय पर्वतीय वनों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. इन वनों में अधिक ऊँचाई वाले भागों में अविकसित वनों या झाड़ियों के साथ खुली हुई विकसित तरंगित घास भूमि पायी जाती है।
  2. इन वनों में पेड़ों के नीचे वनस्पति का जाल पाया जाता है। इसमें परपोषी पौधे, काई व बारीक पत्तियों वाले पौधे प्रमुख होते हैं।
  3. ये वन नीलगिरि, अन्नामलाई, पालनी, पश्चिमी घाट व महाबलेश्वर, सतपुड़ा व मैकल पहाड़ियों पर पाये जाते हैं।
  4. इन वनों में पाया जाने वाले मैग्लोनिया, लारेल, एल्म सामान्य वृक्ष हैं। जबकि सिनकोना व यूकेलिप्टस वृक्षों को विदेश से लाकर लगाया गया है।

प्रश्न 5.
आर्द्र तथा शुष्क पर्णपाती वन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आर्द्र तथा शुष्क पर्णपाती वन

आर्द्र पर्णपाती वन शुष्क पर्णपाती वन
1. इन वनों का विस्तार उत्तरी-पूर्वी राज्यों, हिमालय के गिरिपाद क्षेत्रों, झारखण्ड, पश्चिमी उड़ीसा, छत्तीसगढ़ तथा पश्चिमी घाट से पूर्वी ढाल पर है। 1. यह प्रायद्वीपीय पठार के वर्षा वाले भागों में पाये ये जाते हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश में पाये जाते हैं।
2. ये वन उन क्षेत्रों में पाये जाते हैं जहाँ वर्षा की मात्रा 100 सेमी से 200 सेमी होती है। 2. शुष्क पर्णपाती वन 70 से 100 सेमी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं।
3. सागौन इन वनों का प्रमुख वृक्ष है। बाँस, साल शीशम, चन्दन तथा खैर महत्त्वपूर्ण व्यापारिक प्रजातियाँ हैं। 3. विस्तृत क्षेत्रों में सागौन तथा अन्य वृक्ष उगते हैं। अधिक सूखे भागों में झाड़ियाँ तथा कँटीले वनों का विस्तार पाया जाता है।

प्रश्न 6.
“वन पर्यावरण के महत्त्वपूर्ण अंग हैं।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
पर्यावरण सन्तुलन के लिए वन क्यों आवश्यक हैं? कोई चार कारण बताइए।
उत्तर:
वनों एवं पर्यावरण में घनिष्ठ सम्बन्ध है। यह निम्न तथ्यों से स्पष्ट है –

  1. वन वायुमण्डल को शुद्ध रखते हैं और वायु प्रदूषण को कम करते हैं।
  2. वन वायुमण्डल को ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
  3. वन वायु के तापमान को बनाये रखते हैं, जिससे वर्षा होती है।
  4. वन जलवायु को सम रखते हैं।
  5. वन जल के बहाव को रोकते हैं, जिससे भूमि का कटाव रुक जाता है तथा भूगर्भीय जल-स्तर में वृद्धि होती है।

प्रश्न 7.
जीव-आरक्षित क्षेत्र (बायोस्फीयर रिजर्व) किसे कहते हैं? ऐसे दो क्षेत्रों के नाम बताइए। (2015)
उत्तर:
भारत में जैव-विविधता की सुरक्षा के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। इस योजना के अन्तर्गत नीलगिरि में भारत का प्रथम जीव-आरक्षित क्षेत्र (बायोस्फीयर रिजर्व) स्थापित किया गया है। यह कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के सीमावर्ती क्षेत्रों में फैला है। इसका क्षेत्रफल 5500 वर्ग किमी है। इस योजना के अन्तर्गत प्रत्येक जन्तु तथा पौधे का रक्षण अनिवार्य है। इसकी स्थापना 1986 में की गयी थी। उत्तराखण्ड के हिमालय क्षेत्र में नन्दादेवी का जीव-आरक्षित क्षेत्र 1988 में स्थापित किया गया था।

प्रश्न 8.
पारिस्थितिक सन्तुलन के लिए वन क्यों आवश्यक हैं?
अथवा
वन संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
वनों को काटे जाने के कारण पर्यावरण प्रदूषित हुआ है तथा पारिस्थितिकी में भी परिवर्तन आया है। इसी प्रकार वर्तमान युग में अधिकांश देशों में वनों का क्षेत्रफल कम हो रहा है। इस कमी के कारण भू-अपरदन, अनावृष्टि, बाढ़ आदि समस्याएँ आज मानव के समक्ष आ खड़ी हैं। अतः वायु प्रदूषण की समस्या आज के मानव के सामने सबसे बड़ी समस्या के रूप में उपस्थित हुई है। इसी कारण वन-संरक्षण पारिस्थितिक सन्तुलन के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 9.
वनों के विनाश के क्या कारण हैं?
उत्तर:
वनों के विनाश के कारण –

  1. जनसंख्या में तीव्र वृद्धि होने से कृषि भूमि की प्राप्ति के लिए वनों को काटकर खेती की जा रही है।
  2. इमारती लकड़ी और चारे की बढ़ती माँग तथा वन्य भूमि के खेती के लिए उपयोग से वनों पर जबरदस्त प्रभाव पड़ा रहा है।
  3. ईंधन के रूप में प्रयोग करने हेतु लकड़ी काटी जा रही है।
  4. आवागमन के साधनों, रेल, सड़क मार्गों के विकास हेतु वनों को काटा जा रहा है।
  5. आवास समस्या की पूर्ति के लिए वनों को काटकर रिहायशी भूमि का विस्तार किया जा रहा है।

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प्रश्न 10.
कँटीले वनों की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
जिन क्षेत्रों में 70 सेमी से भी कम वार्षिक वर्षा होती है। वहाँ कँटीले वन तथा झाड़ियाँ पायी जाती हैं। इस प्रकार की वनस्पति देश के उत्तर-पश्चिमी भागों में पायी जाती है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं –

  1. इन वनों के वृक्षों का आकार छोटा, पत्तियाँ छोटी तथा जड़ें लम्बी होती हैं।
  2. इन वनों के कीकर, बबूल, खैर तथा खजूर उपयोगी वृक्ष हैं।
  3. इन वनों में वृक्ष दूर-दूर पाये जाते हैं।
  4. कँटीली झाड़ियों में चूहे, खरगोश, लोमड़ी, भेड़िये, जंगली गधा, घोड़े, ऊँट तथा सिंह पाये जाते हैं।

MP Board Class 9th Social Science Chapter 6 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मध्य प्रदेश में पाये जाने वाले जीव-जन्तुओं व प्रमुख वन्य-जीव अभ्यारण्यों के नाम लिखिए।
अथवा
मध्य प्रदेश में पाये जाने वाले जीव-जन्तुओं व प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
वन सम्पदा की दृष्टि से मध्य प्रदेश सम्पन्न राज्य है। यहाँ कुल भूमि का लगभग 30 प्रतिशत भाग वनों से घिरा हुआ है जिसमें विभिन्न प्रकार के वन्य-पशु एवं जीव-जन्तु पाये जाते हैं। मध्य प्रदेश के प्रमुख वन्य-पशु, जीव व पक्षी, काला हिरण, तेंदुआ, चिंकारा, बन्दर, गौर, नीलगाय, चीतल, साँभर, शेर, भालू, घड़ियाल, मगर, कछुआ, सोन चिड़िया, खरमौर आदि हैं। इन वन्य पशुओं, जीवों व पक्षियों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने एवं प्रजातीय सुरक्षा हेतु वन्य जीव अभ्यारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान विकसित किये गये हैं जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं –
मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान
MP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 6 भारत प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीव - 2

मध्य प्रदेश के वन्य जीव अभ्यारण्य
MP Board ClaMP Board Class 9th Social Science Solutions Chapter 6 भारत प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीव - 3ss 9th Social Science Solutions Chapter 6 भारत प्राकृतिक वनस्पति एवं वन्य जीव - 3

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