MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 16 पर्यावरण के मुद्दे

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 16 पर्यावरण के मुद्दे

पर्यावरण के मुद्दे NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
घरेलू वाहित मल के विभिन्न घटक क्या हैं ? वाहित मल के नदी में विसर्जन से होने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए।
उत्तर
घरेलू वाहित मल में मुख्यतः जैव निम्नीकरण कार्बनिक पदार्थ होते हैं जिनका अपघटन जीवाणु व अन्य सूक्ष्म जीवों द्वारा होता है। इसके अतिरिक्त वाहित मल में अनेक प्रकार के निलंबित ठोस, रेत व सिल्ट कण, अकार्बनिक एवं कोलाइडी कण, मल, कपड़ा, खाद्य अपशिष्ट, कागज, रेशे आदि एवं घुले हुए पदार्थ (फॉस्फेट, नाइट्रेट, धातु आयन) होते हैं। नदियों में वाहित मल के विसर्जन फलस्वरूप ऑक्सीजन की कमी हो जाती है क्योंकि जैव निम्नीकरण से संबंधित सूक्ष्मजीव ऑक्सीजन की मात्रा का प्रयोग करने लगते हैं। इस कारण वाहित मल विसर्जन स्थल पर अनुप्रवाह जल में घुली O2, की मात्रा में तेजी से गिरावट आती है इसके कारण मछलियाँ तथा अन्य जलीय जीवों की मृत्यु दर में वृद्धि हो जाती है। इसी प्रकार वाहित मल में अनेक रोग-कारक सूक्ष्मजीव होते हैं । इस जल के उपयोग से पेचिश, टाइफाइड, पीलिया, हैजा आदि रोग हो सकते हैं।

प्रश्न 2.
आप अपने घर, विद्यालय या अन्य स्थानों में भ्रमण के दौरान जो अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं उनकी सूची बनाइए। क्या आप उन्हें आसानी से कम कर सकते हैं ? कौन-से ऐसे अपशिष्ट हैं जिनको कम करना काठेन या असंभव है ?
उत्तर-
घर, विद्यालय या अन्य स्थानों पर निम्नलिखित अपशिष्ट होते हैं–कागज, प्लास्टिक की थैलियाँ, फलों एवं सब्जियों के छिलके, थर्मोकोल एवं प्लास्टिक धातु के कप-प्लेट, पेंसिल के टुकड़े, लेड, लकड़ी की छिलन, धातुओं के अपशिष्ट पदार्थ, टिन, पैक्स, चाक के टुकड़े, काँच के टुकड़े, फटे वस्त्र, वाहित मल आदि  अपशिष्टो को कम करना कठिन ही नहीं असंभव भी है, वे हैं-प्लास्टिक एवं पॉलीथीन की थैलियाँ, टिन, पैक्स, रिफिल,.प्लास्टिक की बोतल, प्लास्टिक के व्यर्थ सामान आदि।

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प्रश्न 3.
वैश्विक उष्णता (ग्लोबल वार्मिंग) में वृद्धि के कारणों और प्रभावों की चर्चा कीजिए। वैश्विक उष्णता वृद्धि को नियंत्रित करने के क्या उपाय हैं ?
अथवा
ग्रीन हाउस प्रभाव से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर
परिभाषा-वायुमंडल में CO2 तथा अन्य हानिकारक गैसों की मात्रा में वृद्धि होने के कारण पृथ्वी की सतह एवं वायुमंडल में होने वाली तापमान वृद्धि को ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं। मानवीय कारणों से CO2 की मात्रा में वृद्धि तथा इससे तापमान में होने वाली वृद्धि को सर्वप्रथम अमेरिकी वैज्ञानिक रोजर रेवेल 1957 ने ग्रीनहाउस प्रभाव नाम दिया।

पृथ्वी की सतह पर गैसों का आवरण ग्रीन हाउस के शीशे जैसा कार्य करता है अर्थात् यह सौर विकिरण को तो पृथ्वी पर जाने देता है परन्तु लंबी तरंगदैर्घ्य के विकिरण को अवशोषित कर लेता है। प्राकृतिक ग्रीन हाउस प्रभाव पृथ्वी की सतह के तापमान को 15°C पर गर्म करता है ग्रीन हाउस गैसों की अनुपस्थिति में पृथ्वी का तापमान 20°C गिर सकता है। परन्तु औद्योगिक क्रान्ति के बाद वायुमंडलीय CO2, CFC, CH4, हैलोजेन्स और अन्य गैसों की मात्रा में ये अत्यधिक वृद्धि।

ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण-

  • वृक्षों के अत्यधिक कटाई से CO2 गैस की वातावरण में वृद्धि होना।
  • जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम) आदि के आरंभिक या पूर्ण दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइक्साइड एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइडों की मात्रा में वृद्धि।
  • रेफ्रिजिरेटरों एवं एयर कंडीशनरों में एरोसोल का उपयोग अग्निशमन यंत्रों तथा फोम के उपयोग से क्लोरोफ्लोरो कार्बन का वातावरण में एकत्रित होना। .
  • अनेक जैविक प्रक्रियाओं, कृषि कार्यों एवं अपशिष्टों के सड़ने से ग्रीन हाउस गैसों का वातावरण में एकत्रित होना।

ग्लोबल वार्मिंग के विनाशकारी परिणाम-

  • पृथ्वी का तापमान बढ़ने से पानी के वाष्पीकरण की दर बढ़ेगी जिससे उपलब्ध पानी में कमी आयेगी।
  • पृथ्वी का तापमान बढ़ने से ध्रुवों की बर्फ पिघलेगी जिससे समुद्र का जल स्तर बढ़ने से तटीय आबादी को, जीवन का खतरा हो जायेगा।
  • पेड़ पौधों एवं जंतुओं की मृत्यु दर बढ़ जायेगी।
  • जल एवं वायु प्रदूषण में तेजी से वृद्धि होगी।
  • असामयिक वृष्टि, अतिवृष्टि एवं अनावृष्टि एवं बाढ़ की संभावनाएँ बढ़ जायेंगी।

ग्लोबल वार्मिंग से बचने के उपाय-

  • वृक्षों के कटाई को प्रतिबंधित करना चाहिए तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण करना चाहिए।
  • जीवाश्म ईंधन को मितव्ययिता से तथा पूर्णदहन हो, ऐसा उपयोग करना चाहिए।
  • क्लोरो फ्लोरो कार्बन को पूर्णतः प्रतिबंधित कर देना चाहिए।
  • रासायनिक खादों के प्रयोग को बंद करके जैविक खादों के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिये।
  • अधिकाधिक वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करना चाहिए।

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प्रश्न 4.
कॉलम ‘अ’ और ‘ब’ में दिए गए मदों का मिलान कीजिए

कॉलम ‘अ’ – कॉलम ‘ब’

1. उत्प्रेरक परिवर्तक – (a) कणकीय पदार्थ
2. स्थिर वैद्युत अवक्षेपित्र – (b) कार्बन मोनोऑक्साइड और (इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर) नाइट्रोजन ऑक्साइड
3. कर्णमफ (इयर मफ्स) – (c) उच्च शोर स्तर
4. लैंडफिल – (d) ठोस अपशिष्ट।
उत्तर
1. (b), 2. (a), 3. (c), 4. (d).

प्रश्न 5.
निम्नलिखित पर आलोचनात्मक टिप्पणी लिखिए
(क) सुपोषण (यूट्रोफिकेशन)
(ख) जैव आवर्धन (बायोलॉजिकल मैग्निफिकेशन)
(ग) भौमजल (भूजल) का अवक्षय और इसकी पुनःपूर्ति के तरीके।
उत्तर
(क) सुपोषण (Eutrophication)-जलाशय, घरेलू अपशिष्ट, फॉस्फेट, नाइट्रेट इत्यादि से या इसके अपघटन से उत्पादों के मिलने से पोषक पदार्थों से समृद्ध हो जाते हैं । इस परिघटना के कारण जलाशय अत्यधिक उत्पादक या सुपोषी हो जाते हैं, जिसे सुपोषण (Eutrophication) कहते हैं। पोषकों के मिलने से जल में शैवाल (Algae) की प्रचुर मात्रा में वृद्धि होती है। इस कारण प्रदूषित जल में शैवालों की मात्रा अत्यधिक हो जाती है और वह जलाशय की सतह पर फैल जाते हैं। शैवालों की अत्यधिक वृद्धि के कारण जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है जिसके फलस्वरूप जीव जंतुओं की मृत्यु दर बढ़ जाती है।

(ख) जैव आवर्धन (बायोलॉजिकल मैग्निफिकेशन)-बायोमैग्नीफिकेशन-कुछ कीटनाशक पदार्थ तथा हानिकारक पदार्थ जल में मिलकर जलीय जीवधारियों के माध्यम से विभिन्न पोषी स्तरों में पहुँचते हैं। प्रत्येक स्तर पर जैविक क्रियाओं से इनकी सान्द्रता में वृद्धि होती जाती है। इस क्रिया को जैविक आवर्धन (Bio magnification) कहते हैं।

(ग) भौमजल (भूजल) का अवक्षय और इसकी पुनःपूर्ति के तरीके (Depletion of under ground water and measures for its Recovery)-वर्षा की कमी, वनोन्मूलन अधिक सिंचाई, तालाब या गड्ढों में अधिक अपशिष्टों के जमा हो जाने तथा औद्योगिक इकाईयों में अत्यधिक जल की माँग के कारण भूजल का स्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। इस कारण से कई क्षेत्रों में भू-जल स्तर (Water level) न्यूनतम स्तर पर जा पहुँचा है। जल एक नवीकरणीय प्राकृतिक सम्पदा है, फिर भी इसकी सुचारू रूप से आपूर्ति करना आवश्यक हो गया है। गिरते हुए भू-जल स्तर की पुनः पूर्ति निम्नलिखित तरीकों से की जा सकती है

  • रैनवाटर हार्वेस्टिंग द्वारा वर्षा जल को एकत्र करके उसका उपयोग करना चाहिए।
  • तालाबों तथा गड्ढों में सफाई करके जमा मलबे को हटाना चाहिए।
  • वर्षा के जल को जलाशयों में संगृहित करना चाहिए।
  • कम भू-जल स्तर वाले क्षेत्रों में कम सिंचाई वाली फसलें उगानी चाहिए।

प्रश्न 6.
अन्टार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र क्यों बनते हैं ? पराबैंगनी विकिरण के बढ़ने से हमारे ऊपर किस प्रकार प्रभाव पड़ेंगे?
अथवा
ओजोन छिद्र क्या है ? इसके प्रभाव लिखिए।
उत्तर
पृथ्वी के ऊपर ध्रुवों पर 6 कि.मी. तथा भूमध्य रेखा पर 17 कि. मी. की ऊँचाई पर समताप मण्डल स्थित है, जहाँ O3, की परत उपस्थित है जो पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है। अंटार्कटिका में हेली के केन्द्र पर ओजोन परत की मोटाई 33% रह गई है इसे ही ओजोन छिद्र कहते हैं। इस छिद्र के लिए CH4, N2O और CFCs जिम्मेदार हैं। CFCs गैस हैलोकार्बन वर्ग से संबंधित है। इनमें कार्बन और हैलोजन परमाणुओं वाली मानव निर्मित गैसों की श्रृंखला है। CFCs का उपयोग नोदक एयरोसॉल डिब्बों, एयर कंडीशनरों एवं फोम के निर्माण में हो रहा है। वायुमण्डल में CFCs के विघटन से क्लोरीन परमाणु बनते हैं जो O2, के अणुओं को नष्ट करते हैं। O2, की परत का क्षय हो रहा है।
CF2Cl2 —> CF2Cl+Cl
Cl+O3 —> CIO +O2
ClO+O —> Cl+O2
ओजोन छिद्र का प्रभाव-ओजोन परत की अनुपस्थिति में सूर्य से पराबैंगनी किरणें सीधी धरातल पर आ रही हैं जिससे कैंसर, मोतियाबिंद में वृद्धि हो रही है। मानव की प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है और न्यूक्लिक अम्ल भी प्रभावित हो रहा है। ये किरणें पौधों में प्रकाश संश्लेषण को भी प्रभावित करती हैं।

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प्रश्न 7.
वनों के संरक्षण और सुरक्षा में महिलाओं और समुदायों की भूमिका की चर्चा कीजिये।
उत्तर
वन संरक्षण हेतु हिमालय के अनपढ़ जनजातीय महिलाओं ने एक विशेष आन्दोलन दिसंबर, 1972 में प्रारंभ किया जो ‘चिपको आंदोलन’ के नाम में प्रसिद्ध हुआ। यह आन्दोलन उत्तराखण्ड के टिहरी गढ़वाल जिले में आरंभ हुआ। इन महिलाओं ने पेड़ों से चिपककर आंदोलन चलाया जिसके कारण इन्हें 1978 में पुलिस की गोलियों का शिकार होना पड़ा।

देश के अन्य भागों में जनजातियाँ इस आंदोलन से प्रेरित हुई और पेड़ों के विनाश के विरुद्ध आवाजें उठाई। इसी प्रकार सन् 1731 में राजस्थान में जोधपुर के निकट अमृता देवी उनकी तीन बेटियों और विश्नोई परिवार के सैकड़ों लोगों ने वृक्ष की रक्षा के लिए अपने प्राण गँवा दिये। इस प्रकार उन्होंने जंगल एवं जमीन की घरोहर को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रश्न 8.
पर्यावरणीय प्रदूषण को रोकने के लिये एक व्यक्ति के रूप में आप क्या उपाय करेंगे?
उत्तर
पर्यावरणीय प्रदूषण को निम्नलिखित उपायों द्वारा कम किया जा सकता है

  1. हमें प्रत्येक उपलब्ध स्थान पर अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाना चाहिए।
  2. घरों में भोजन बनाने के लिए धुआँ रहित ईंधन, जैसे-LPG, गोबर गैस, सौर ऊर्जा आदि के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
  3. वाहनों के धुएँ को रोकने के लिए उसमें फिल्टर का प्रयोग करना चाहिए।
  4. पॉलीथीन की थैलियों के स्थान पर हमें कागज की थैली या कपड़े का थैला उपयोग में लाना चाहिए।
  5. कूड़ा-करकट डस्टबीन में ही डालना चाहिए।
  6. पानी का दुरुपयोग न कर उसका संरक्षण करना चाहिए।
  7. उत्सवों पर आतिशबाजी के प्रयोग पर रोक लगनी चाहिए।
  8. मल पदार्थ, गोबर तथा पौधे के अवशेषों को गड्ढे में डालना चाहिए। जिससे ह्यूमस का निर्माण हो सके।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित के बारे में संक्षेप में चर्चा कीजिये-
(क) रेडियो सक्रिय अपशिष्ट,
(ख) पुराने बेकार जहाज और ई. अपशिष्ट
(ग) नगर पालिक के ठोस अपशिष्ट।
उत्तर
(क) रेडियो सक्रिय अपशिष्ट (Radioactive wastages)- प्रदूषण निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

(i) जल प्रदूषण-जल स्त्रोतों में होने वाले उन अवांछनीय परिवर्तन को जिससे जल प्रदूषित होता है, जल प्रदूषण कहते हैं। यह प्रदूषण वाहितमल, घरेलू बहिस्राव, औद्योगिक बहिस्राव, कृषि कार्यों, कीटनाशकों के प्रयोगों तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण होता है।

(ii) वायु प्रदूषण-वायुमण्डल में होने वाले ऐसे परिवर्तन जिनसे जीवों का नुकसान हो वायु प्रदूषण कहलाता है। यह मुख्यत: दहन क्रियाओं, औद्योगिक गतिविधियों, कृषि कार्यों में कीटनाशकों के प्रयोगों तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण होता है।

(iii) रेडियोऐक्टिव प्रदूषण-रेडियोऐक्टिव पदार्थों के कारण पैदा होने वाले प्रदूषण को रेडियोऐक्टिव प्रदूषण कहते हैं । परमाणु ऊर्जा के अपशिष्टों के कारण भी रेडियोऐक्टिव प्रदूषण होता है।

(iv)शोर प्रदूषण-अवांछनीय ध्वनि को शोर कहते हैं । वातावरण में फैली ऐसी अनियन्त्रित ध्वनि अथवा शोर को ध्वनि अथवा शोर प्रदूषण कहते हैं । यह प्रदूषण अनियन्त्रित ध्वनि, आतिशबाजी, लाउडस्पीकर, हवाई अड्डा, उद्योग इत्यादि से पैदा हुई ध्वनि के कारण होती है।

(v) मृदा प्रदूषण-मृदा में होने वाले हानिकारक परिवर्तनों को मृदा प्रदूषण कहते हैं । यह कीटनाशकों, खरपतवारनाशियों, उर्वरकों के प्रयोग के कारण होता है।

रेडियोऐक्टिव (विकिरण) प्रदूषण के कारण जीवों के ऊपर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं, जो बीमारियों के रूप में दिखाई देते हैं

  • ल्यूकीमिया तथा अस्थि कैंसर-रेडियोऐक्टिव प्रदूषण के कारण मनुष्य, गाय, बैल आदि जीवों में रुधिर तथा अस्थि का कैंसर होता है।
  • असामयिक बुढ़ापा-रेडियोऐक्टिव प्रदूषण के कारण जीवों की प्रजनन क्षमता घट जाती है तथा उनमें असामयिक बुढ़ापा आता है।
  • महामारी-विकिरण प्रदूषण के कारण जीवों में रोगजनकों के प्रति एन्टिटॉक्सिन उत्पादन की या रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है, जिसके कारण महामारी तेजी से फैलती है।
  • उत्परिवर्तन-इसके कारण जीवों में अचानक कुछ आनुवंशिक परिवर्तन पैदा हो जाते हैं।
  • तन्त्रिका तन्त्र तथा संवेदी कोशिकाएँ उत्तेजित हो जाती है।
  • बाह्य त्वचा पर घाव बन जाता है एवं आँख, आँत व जनन ऊतक प्रभावित होते हैं। इसके तात्कालिक प्रभाव के रूप में आँखों में जलन, डायरिया, उल्टी इत्यादि लक्षण दिखाई देते हैं। कैंसर होता है।

(ख) पुराने बेकार जहाज (Old useless ships)–पुराने बेकार मरम्मत के योग्य न रहने वाले जहाज, ठोस अपशिष्ट की तरह होते हैं । इन जहाजों को समुद्र तट पर तोड़कर कबाड़ (स्क्रेप) निकाला जाता है। जहाजों के स्क्रेप में अनेक विषाक्त पदार्थ जैसे-एस्बेस्टास, सीसा, पारा आदि निकल कर तटीय क्षेत्रों को प्रदूषित करते हैं।

ई-अपशिष्ट (e-wastes)-कम्प्यूटर व अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान जिन्हें मरम्मत करके ठीक-ठीक नहीं किया जा सकता, ई-अपशिष्ट कहलाते हैं। विकासशील देशों में ई-अपशिष्टों का पुनः चक्रण कर ताँबा, सिलिकॉन, निकिल एवं स्वर्ण धातु प्राप्त किया जाता है। इन देशों में पुनः चक्रण की क्रिया आधुनिक विधियों से करके हाथों द्वारा किया जाता है, जिससे ई-अपशिष्ट में मौजूद विषैले पदार्थ इन कार्य में जुड़े लोगों पर दुष्प्रभाव डालते हैं।

(ग) नगर पालिका के ठोस अपशिष्ट (Solid wastes of municipality)-नगर पालिक के ठोस अपशिष्टों में घरों, कार्यालयों, भंडारों, विद्यालयों आदि से रद्दी में फेंकी गई सभी चीजें आती है जो नगर पालिका द्वारा इकट्ठी की जाती है और इनका निपटान किया जाता है। इन्हें ठोस अपशिष्ट कहते हैं। इनमें आमतौर पर कागज, खाद्य अपशिष्ट, काँच, धातु, रबर, चमड़ा, वस्त्र आदि होते हैं। इनको जलाने से अपशिष्ट के आयतन में कमी आ जाती है, लेकिन यह सामान्यतः पूरी तरह जलता नहीं है और खुले में इसे फेंकने पर यह चूहों और मक्खियों के लिए प्रजनन स्थल का कार्य करता है। सैनेटरी लैंडफिल में अपशिष्ट को संघनन (Compaction) के बाद गड्ढा या खाई में डाला जाता है और प्रतिदिन धूल-मिट्टी (Dirt) से ढंक दिया जाता है।

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प्रश्न 10.
दिल्ली में वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए क्या प्रयास किये गये ? क्या दिल्ली में वायु की गुणवत्ता में सुधार हुआ।
उत्तर
वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर देश में सबसे अधिक है। 41 सर्वाधिक प्रदूषित नगरों में दिल्ली का स्थान चौथा है। इस स्थिति को देखकर भारत के न्यायालय ने भारत सरकार को निश्चित अवधि में प्रदूषण कम करने का उपाय करने बाबत् आदेश दिये कि सभी सरकारी वाहनों में डीजल के स्थान पर संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) का प्रयोग किया जाये। वर्ष 2002 के अंत तक सभी बसों को CNG. में परिवर्तित कर दिया गया।

CNG डीजल से बेहतर है, क्योंकि डीजल की तुलना में इसका दहन उच्च होता है तथा यह अन्य पेट्रोलियम पदार्थों से किफायती होता है, साथ ही दिल्ली में वाहन प्रदूषण को कम करने के अन्य उपाय भी किये गये हैं, जैसे-पुरानी गाड़ियों को धीरे-धीरे हटा देना, सीसा रहित पेट्रोल एवं डीजल का प्रयोग, कम गन्धक युक्त पेट्रोल और डीजल का प्रयोग, वाहनों में उत्प्रेरक परिवर्तनों का प्रयोग, वाहनों के लिए कठोर प्रदूषण स्तर लागू करना आदि। दिल्ली में किये गये उक्त प्रयासों के कारण यहाँ की वायु की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित के बारे में संक्षेप में चर्चा कीजिए
(क) ग्रीन हाऊस गैसें
(ख) उत्प्रेरक परिवर्तक
(ग) पराबैंगनी-B
उत्तर
(क) ग्रीन हाऊस गैसें (Green house gases)-वातावरण में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) मीथेन (CH4), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O), क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFC) गैसें ग्रीनहाऊस गैसें कहलाती हैं। इन गैसों के अत्यधिक उत्सर्जन से पृथ्वी के तापक्रम में वृद्धि होती है।

(ख) उत्प्रेरक परिवर्तक (Catalytic converter)-महानगरों में स्वचालित वाहन वायुमण्डल प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। जैसे-जैसे सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ती है यह समस्या छोटे शहरों में भी पहुंच रही है। स्वचालित वाहनों का रखरखाव उचित होना चाहिए। उनमें सीसा रहित पेट्रोल या डीजल का प्रयोग होने से उत्सर्जित प्रदूषकों की मात्रा कम हो जाती है। उत्प्रेरक परिवर्तक में कीमती धातु प्लैटिनम-पैलेडियम और रेडियम लगे होते हैं, जो उत्प्रेरक (Catalyst) का कार्य करते हैं। ये परिवर्तन स्वचालित वाहनों में लगे होते हैं जो विषैले गैसों के उत्सर्जन को कम करते हैं।

(ग) पराबैंगनी-बी (Ultraviolet-B)-पराबैंगनी-B(UV-B) विकिरण एक बड़ी तरंगदैर्घ्य वाली किरण है तथा पृथ्वी के वायुमण्डल द्वारा पूरी तरह अवशोषित नहीं हो पाती। ये किरणें जीवधारियों को बड़े पैमाने पर हानि पहुँचाती है। UV-B, DNA को क्षतिग्रस्त करता है जिसके कारण उत्परिवर्तन (Mutation) हो सकता है। त्वचा की कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त तथा शरीर में विविध प्रकार के कैंसर उत्पन्न हो सकते हैं। इसके प्रभाव से त्वचा में बुढ़ापे के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। हमारी आँखों का कॉर्निया UV-B विकिरण का अवशोषण करता है। इसकी उच्च मात्रा होने पर कार्निया में शोथ होने लगता है, जिसे मोतियाबिंद (Cataract) कहा जाता है। UV-B प्रतिरक्षा तंत्र को भी प्रभावित करता है।

पर्यावरणीय मुद्दे अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
जीवाश्मीय ईंधन का दहन निम्नलिखित का मुख्य कारण है
(a) SO2 प्रदूषण
(b) नाइट्रोजन डाइ-ऑक्साइड
(c) नाइट्रस ऑक्साइड प्रदूषण
(d) नाइट्रिक ऑक्साइड प्रदूषण।
उत्तर
(a) SO2 प्रदूषण

प्रश्न 2.
ग्रीन हाउस प्रभाव का कारण वायुमण्डल में निम्नलिखित की सान्द्रता का बढ़ना है
(a) CO2
(b)CO
(c) O3
(d) नाइट्रोजन ऑक्साइड।
उत्तर
(a) CO2

प्रश्न 3.
वातावरण में O2, की मात्रा में कमी का दायित्व किस रसायन के फलस्वरूप है
(a) CFC
(b) NO2
(c)CO2
(d) SO2
उत्तर
(a) CFC

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प्रश्न 4.
निम्न में से कौन-सा सर्वाधिक भयंकर रेडियोऐक्टिव प्रदूषक है
(a) स्ट्रांशियम-90
(b) फॉस्फोरस-32
(c) सल्फर-35
(d) कैल्सियम-40.
उत्तर
(a) स्ट्रांशियम-90

प्रश्न 5.
अम्लीय वर्षा का कारण है
(a) सल्फर डाइ-ऑक्साइड प्रदूषण
(b) कार्बन मोनो-ऑक्साइड प्रदूषण
(c) पीड़कनाशी प्रदूषण
(d) धूल कण।
उत्तर
(a) सल्फर डाइ-ऑक्साइड प्रदूषण

प्रश्न 6.
कार्बन मोनो-ऑक्साइड एक प्रमुख प्रदूषक है
(a) जल का
(b) हवा का
(c) ध्वनि का
(d) मृदा का।
उत्तर
(b) हवा का

प्रश्न 7.
पौधे हवा के शोधक माने जाते हैं, निम्न क्रिया के कारण
(a) श्वसन
(b) प्रकाश-संश्लेषण
(c) वाष्पोत्सर्जन
(d) शुष्कन।
उत्तर
(b) प्रकाश-संश्लेषण

प्रश्न 8.
ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाला प्रमुख प्रदूषक है
(a) ओजोन डाइ-ऑक्साइड
(b) कार्बन डाइ-ऑक्साइड
(c) कार्बन मोनो-ऑक्साइड
(d) नाइट्रोजन ऑक्साइड एवं फ्लोरोकार्बन
उत्तर
(d) नाइट्रोजन ऑक्साइड एवं फ्लोरोकार्बन

प्रश्न 9.
भोपाल गैस दुर्घटना में किस गैस का रिसाव हुआ था
(a) मेथिल आइसोसायनेट
(b) पोटैशियम आइसोथायोसायनेट
(c) सोडियम आइसो थायोसायनेट
(d) एथिल आइसोइनेट।
उत्तर
(a) मेथिल आइसोसायनेट

प्रश्न 10.
मिनिमाता रोग किसके कारण उत्पन्न होता है
(a) पेय जल में कार्बनिक प्रदूषक
(b) तेल उत्पन्य
(c) जल में पारद युक्त औद्योगिक कचरा
(d) वायुमंडलीय ऑर्गेनिक।
उत्तर
(c) जल में पारद युक्त औद्योगिक कचरा

प्रश्न 11.
ताजमहल को किससे खतरा है
(a) यमुना में आने वाले बाढ़
(b) तापक्रम द्वारा संगमरमर का वरण
(c) मथुरा रिफाइनरी से उत्पन्न प्रदूषक
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर
(c) मथुरा रिफाइनरी से उत्पन्न प्रदूषक

प्रश्न 12.
निम्न में से कौन वायुमंडलीय प्रदूषण उत्पन्न नहीं करेगा
(a) SO2
(b)CO2
(c)CO
(d) H2
उत्तर
(d) H2

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प्रश्न 13.
भोपाल गैस दुर्घटना कब हुई
(a) 1982
(b) 1984
(c) 1986
(d) 1988.
उत्तर
(c) 1986

प्रश्न 14.
ग्रीन हाउस प्रभाव में तापन का कारण होता है
(a) पृथ्वी पर आने वाले इन्फ्रारेड किरणें
(b) वायुमंडल की नमी
(c) वायुमंडलीय CO2
(d) वायुमंडलीय ओजोन।
उत्तर
(b) वायुमंडल की नमी

प्रश्न 15.
ग्रीन हाउस गैसें किससे संबंधित हैं–
(a) हरी शैवालों की अति वृद्धि
(b) वैश्विक तापमान में वृद्धि
(c) घरों में सब्जी की खेती
(d) टेरेस गार्डन का विकास।
उत्तर
(a) हरी शैवालों की अति वृद्धि

प्रश्न 16.
ग्रीन हाउस गैसें होती हैं
(a) CO2,CFC,CH2 ,NO2
(b) CO2,O2,N2,NO2,NH3
(c) CH4,N3,CO2,NH3
(d) CFC,CO2,NH3,H2
उत्तर
(d) CFC,CO2,NH3,H2

प्रश्न 17.
जल प्रदूषण किसके कारण होता है
(a) सल्फर डाइ-ऑक्साइड
(b) कार्बन डाइ-ऑक्साइड
(c) ऑक्सीजन
(d) औद्योगिक अपशिष्ट
उत्तर
(d) औद्योगिक अपशिष्ट

प्रश्न 18.
किस खेत से मीथेन गैस का उत्पादन होता है
(a) गेहूँ का खेत
(b) धान का खेत
(c) कपास का खेत
(d) मूंगफली का खेत।
उत्तर
(b) धान का खेत

प्रश्न 19.
प्रदूषित जल का उपचार किससे किया जाता है
(a) लाइकेन
(b) कवक
(c) फर्न
(d) फाइटो प्लैंक्टॉन।
उत्तर
(d) फाइटो प्लैंक्टॉन।

प्रश्न 20.
परिवहन से उत्पन्न गैस जो अचानक श्वास संबंधी रोग उत्पन्न हो सकता है
(a) CO
(b)CH4
(c)NO2
(d) क्लोरीन।
उत्तर
(a) CO

प्रश्न 21.
किस देश के द्वारा ग्रीन हाउस गैस का अधिकतम उत्पादन होता है
(a) भारत
(b) ब्रिटेन
(c) U.S.A.
(d) फ्रांस।
उत्तर
(c) U.S.A.

प्रश्न 22.
अम्लीय वर्षा से कौन अप्रभावित रहता है
(a) लिथोस्फीयर
(b) पौधे
(c) ओजोन परत.
(d) जन्तु।
उत्तर
(c) ओजोन परत.

प्रश्न 23.
ओजोन परत के छिद्र के कारण उत्पन्न होता है
(a) वैश्विक तापन
(b) प्रकाश संश्लेषण की दर में कमी
(c) अधिक UV किरणों का पृथ्वी पर आना
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 24.
भारत वर्ष में सबसे अधिक प्रदूषित नदी है
(a) गंगा
(b) यमुना
(c) गोमती
(d) गोदावरी।
उत्तर
(b) यमुना

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2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. चारों ओर फैले परिवेश को ………….कहते हैं।
2. पर्यावरण अध्ययन की प्रकृति …………… होती है।
3. …………. पृथ्वी पर जीवों का सर्वाधिक उच्च स्तर है।
4. …………….स्थान विशेष में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्राणियों, जीवाणुओं तथा कवकों का समूह है।
5. भू-पटल के ऊपर पाये जाने वाले वायु के विस्तार को ………….. कहते हैं।
6. विद्युत् चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के दृश्य रेंज को ………….. कहा जाता है।
7. मृदा की ऊर्ध्वाकार स्तरीय संरचना को ………….. कहते हैं।
8. …………. जल पौधों को सर्वाधिक रूप से उपलब्ध होता है।
9. ………….. मृदा में पाये जाने वाले जीवों के श्वसन के लिए आवश्यक होता है।
10. पृथ्वी पर जीवों के अस्तित्व के लिए मृत्यु एक ………….. घटना है।
11. जीवित रहने के लिए ………….. गैस आवश्यक है।
12. ……………. मछली, मच्छर के अण्डों एवं लार्वा का भक्षण करती है।
13. वनीकरण द्वारा वातावरणीय CO2, की मात्रा को …………… किया जा सकता है।
14. मृदा प्रदूषण ……………. के द्वारा होता है।
15. ओजोन परत सूर्य की …………. को अवशोषित करती है।
उत्तर

  1. पर्यावरण
  2. बहुविषयक
  3. जैवमंडल
  4. जैव-समुदाय
  5. वायुमंडल
  6. प्रकाश
  7. मृदा-परिच्छेदिका,
  8. केशिका
  9. ऑक्सीजन
  10. आवश्यक
  11. ऑक्सीजन
  12. गैम्बूशिया
  13. नियंत्रित,
  14. रासायनिक उर्वरकों,
  15. पराबैंगनी किरणों।

3. सही जोड़ी बनाइए

I. ‘A’ – ‘B’

1. अम्लीय वर्षा का कारण – (a)CO2
2. ग्रीन हाउस प्रभाव का कारण  – (b) SO2 प्रदूषण
3. वातावरण में O3 की मात्रा की कमी का कारण – (c) SO2 + NO2
4. जीवाश्मीय दहन का मुख्य कारण – (d) C.F.C.
उत्तर
1.(c), 2. (a), 3. (d), 4. (b)

II. ‘A’ – ‘B’

1. मच्छर नियंत्रण – (a) 1972 अधिनियम
2. शिकार पर रोक – (b) वनस्पति हानि
3. पेन (PAN) – (c) स्मॉग
4. ओजोन विघटन – (d) गैसों की स्क्रबिंग।
उत्तर
1. (c), 2.(a), 3. (b), 4. (d)

4. एक शब्द में उत्तर दीजिए

1. प्रभावकारी दशाओं का वह संपूर्ण योग जिसमें जीव पाये जाते हैं।
2 परस्पर प्रजनन करने वाले जीवों का समूह ।
3. किसी स्थान विशेष में पाये जाने वाले जीवों तथा निर्जीव कारकों के मध्य होने वाली अंतक्रिया से विकसित होने वाला तंत्र।
4. वायुमंडल का वह निचला हिस्सा जिसमें 90% से अधिक गैसें पायी जाती हैं।
5. बैंगनी रंग के प्रकाश से कम तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश की किरणें।
6. पौधे में पुष्पन क्रिया पर प्रकाश का प्रभाव।
7. मृदा में पाये जाने वाले सबसे छोटे आकार के कण।
8. गुरुत्वाकर्षण बल के कारण मृदा कणों के बीच रिसकर नीचे चले जाने वाला कण।
9. शुष्क स्थिति टालने के लिए कुछ ही समय में जीवन चक्र करने वाले पौधे।
10. लवणीय पर्यावरण में पाये जाने वाले पौधे।।
11. सुरक्षा के लिए एक जीव का दूसरे जीव का स्वरूप ग्रहण करना।
12. B.O.D. का पूरा नाम लिखिए।
13. वायु प्रदूषण करने वाली दो प्रमुख गैसों के नाम लिखिए।
14. मनुष्य की श्रवण क्षमता कितनी होती है ?
15. भारत की सबसे अधिक प्रदूषित नदी कौन-सी है ?
16 वातावरण में CO2 की सान्द्रता में वृद्धि होने से वातावरण के ताप में वृद्धि को क्या कहते हैं ?
17. D.D T. का पूरा नाम लिखिये।
18. पर्यावरण में CO2, की मात्रा कितनी होती है ?
19. किसके कारण धुएँ से आँखों में जलन पैदा होती है ?
20. विश्व-पर्यावरण दिवस कब मनाया जाता है ?
21. PAN का पूरा नाम लिखिए।
22. CFCs का पूरा नाम क्या है ?
23. भू-मण्डलीय तापन में CO2 का कितने प्रतिशत योगदान है ?
उत्तर

  1. पर्यावरण
  2. जाति
  3. पारिस्थितिक तंत्र
  4. क्षोभमंडल
  5. पराबैंगनी किरणें
  6. प्रकाश कालिता
  7. क्ले
  8. गुरुत्वाकर्षण जल
  9. इफिमीरल
  10. लवणोद्भिद
  11. अनुहरण
  12. Biological Oxygen Demand
  13. SO2, एवं CO2
  14. 10-12 डेसीबल
  15. गंगा
  16. ग्रीन हाऊस प्रभाव
  17. डाइक्लोरो डाइफिनाइल ट्राइक्लोरो एथेन,
  18. 0.03%,
  19. NO2
  20. 5 जून
  21. परॉक्सिल एसिटाइल नाइट्रेट,
  22. क्लोरो फ्लोरो कार्बन, 23.60%.

पर्यावरण के मुद्दे लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रदूषण की परिभाषा लिखिए।
उत्तर
“वायु, जल एवं मृदा के भौतिक, रासायनिक तथा जैविक गुणों में होने वाला ऐसा अवांछित परिवर्तन जो मनुष्य के साथ ही सम्पूर्ण परिवेश के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक तत्वों को हानि पहुँचाता है उसे प्रदूषण कहते हैं।”

प्रश्न 2.
वायु प्रदूषण के कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर

  1. प्राकृतिक स्रोतों में ज्वालामुखी, दावाग्नि, अपशिष्ट आदि प्रमुख हैं।
  2. मानव निर्मित स्रोत परिवहन, घरेलू कार्यों में दहन, ताप बिजली घर, उद्योग, कृषि कार्य, पेंट, वार्निश, खनन, रेडियोधर्मिता दुर्घटनाएँ, आतिशबाजी, गुलाल, धूम्रपान वायु प्रदूषण उत्पन्न करती हैं।
  3. कालिख, धुआँ, धूल, एस्बेस्टॉस तन्तु, कीटनाशक पौधे के परागण, कवकों एवं जीवाणुओं के स्पोर्स वायु प्रदूषण आदि के उदाहरण हैं।
  4. जीवाश्म के अपूर्ण दहन से CO2 का निर्माण होता है।

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प्रश्न 3.
अम्ल वर्षा क्या है ? मनुष्य में इसके दो प्रभाव लिखिए।
उत्तर
जीवाश्मीय ईधनों के जलने पर ऑक्सीकरण के द्वारा सल्फर के ऑक्साइड (SO2और SO3) पैदा होती हैं । ये दोनों गैसें पानी से क्रिया करके सल्फ्यूरस एवं सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) बनाती हैं । वर्षा के दिनों में जीवाश्मीय ईंधन के जलने से बनी SO2, और SO3 वर्षा की बूंदों के साथ अम्लों के रूप में पृथ्वी पर गिरती हैं, इसे ही अम्ल वर्षा कहते हैं। मानव पर इसके दो

प्रभाव

  • त्वचा में जलन होती है तथा फफोले बन जाते हैं।
  • इसके कारण इन्फ्लुएंजा, ब्रोंकॉइटिस तथा न्यूमोनिया रोग होते हैं।

प्रश्न 4.
वायु प्रदूषण का पौधों पर प्रभाव लिखिए।
उत्तर
वायु प्रदूषण का पौधों पर प्रभाव-

  • वायु प्रदूषण मुख्यत: SO2 की सान्द्रता बढ़ने के कारण पौधों की पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं।
  • इनकी पत्तियों की कोशिकाएँ तथा क्लोरोफिल अपघटित होने लगती हैं अन्त में पत्तियाँ गिरती हैं और पौधे की मृत्यु हो जाती है।
  • पौधों की कायिक एवं जनन वृद्धि रुक जाती है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है।
  • पौधे का विकास अवरुद्ध हो जाता है।

प्रश्न 5.
दहन क्रियाओं से होने वाले वायु प्रदूषण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर
दहन क्रियाओं से अनेक प्रकार के प्रदूषण होते हैं । घरेलू कार्यों में दहन क्रियाओं से जहाँ एक ओर CO2,CO, SO2, जैसे गैसें उत्पन्न होती हैं वही, इस क्रिया में वायुमण्डल की ऑक्सीजन उपयोग में ली जाती है। इससे वातावरण में ऑक्सीजन की कमी होती है। इसी प्रकार अनेक विद्युत्-गृहों में पत्थर का कोयला जलाने से अन्य गैसें तथा धुआँ उत्पन्न होता है। कोयले की राख व्यर्थ पदार्थ के रूप में उड़कर वायुमण्डल में मिलती है। दहन क्रियाओं से होने वाले प्रदूषण में सर्वाधिक बढ़ोत्तरी वाहनों में जलने वाले ईंधन से होती है। डीजल वाहनों के धुएँ में अनेक हाइड्रोकार्बन, सल्फर तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड आदि होते हैं। पेट्रोल से चलने वाले वाहनों के धुएँ में CO2 के अलावा सीसा भी होता है।

प्रश्न 6.
वायु प्रदूषण की रोकथाम हेतु उपाय लिखिए।
उत्तर
वायु प्रदूषण की रोकथाम हेतु उपाय-वायु प्रदूषण निम्नलिखित उपायों द्वारा रोका जा सकता

  • कल कारखानों को आबादी से दूर करके तथा इनमें शोधन यन्त्रों को लगाना।
  • नये वनों को लगाना तथा वनों की कटाई पर रोक लगाना।
  • अधिक धुआँ देने वाले वाहनों तथा संयन्त्रों पर प्रतिबंध लगाना।
  • बड़े नगरों में बगीचों, उद्यानों का विकास करना।
  • फैक्ट्रियों की चिमनियों को ऊँचा करना।
  • बस अड्डों तथा मोटर गैराजों को शहर से दूर करना।
  • वायु शोषक पादपों का वृक्षारोपण करना।
  • वायु प्रदूषण सम्बन्धी नियमों को बनाकर तथा उनका पालन करवाकर ।

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प्रश्न 7.
हरित गृह प्रभाव के नियंत्रण के कोई चार उपाय लिखिये।
उत्तर
हरित गृह प्रभाव के नियंत्रण के उपाय निम्नलिखित हैं

  • जीवाश्म ईंधनों के उपयोग में कमी लाई जाये।
  • वनों का विनाश रोका जाये तथा नये वन विकसित किये जायें।
  • हरित गृह गैसों के विसर्जन रोकने हेतु वित्तीय सहायता के साथ तकनीकी जानकारी दी जानी चाहिए।
  • ऊर्जा के परंपरागत स्रोतों पर निर्भरता कम की जाये। नये ऊर्जा स्रोतों का विकास किया जाये।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए
1. बायोमैग्नीफिकेशन,
2.UV-किरणें,
3. बायोडिग्रेडेबल प्रदूषक
4. नॉन-बायोडिग्रेडेबल प्रदूषक।
उत्तर-
1. बायोमैग्नीफिकेशन-कुछ कीटनाशक पदार्थ तथा हानिकारक पदार्थ जल में मिलकर जलीय जीवधारियों के माध्यम से विभिन्न पोषी स्तरों में पहुँचते हैं। प्रत्येक स्तर पर जैविक क्रियाओं से इनकी सान्द्रता में वृद्धि होती जाती है। इस क्रिया को जैविक आवर्धन (Bio magnification) कहते हैं।

2. पराबैंगनी किरणें या UV- किरणें-UV- किरणें वे प्रकाश कि हैं जिनकी तरंगदैर्ध्य 200 से 300 nm के बीच होता है। इन्हें हम सामान्य आँख से नहीं देख सकते हैं।

3. बायोडिग्रेडेबल प्रदूषक या निम्नीकरणीय प्रदूषक-जिन प्रदूषकों का सूक्ष्म जीवों की प्राकृतिक क्रियाओं द्वारा अहानिकारक पदार्थों में अपघटन किया जा सके, उन्हें जैव निम्नीकरणीय प्रदूषक कहते हैं। ये कम हानिकारक होते हैं । मल-मूत्र , कूड़ा-करकट इसी श्रेणी में आते हैं।

4.नॉन-बायोडिग्रेडेबल या जैव अनिम्नीकरणीय प्रदूषक-जिन प्रदूषकों का सूक्ष्म जीवों की प्राकृतिक क्रियाओं द्वारा अपघटन न किया जा सके उन्हें अनिम्नीकरणीय प्रदूषक कहते हैं। ये अपेक्षाकृत अधिक नुकसानदेह होते हैं। इनका प्रकृति में पुनर्चक्रण नहीं हो पाता। ऐल्युमिनियम, काँच, प्लास्टिक इसी श्रेणी में आते हैं।

प्रश्न 9.
SO2 का वातावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 16 पर्यावरण के मुद्दे 1

प्रश्न 10.
जल अथवा वायु प्रदूषण के स्रोतों के केवल नाम लिखिए।
उत्तर
जल प्रदूषण के स्रोत-जल प्रदूषण के प्रमुख स्रोत निम्नानुसार हैं

(A) मानवीय स्रोत

  • वाहित मल
  • घरेलू बहिस्राव
  • कृषि बहिस्राव
  • औद्योगिक बहिस्राव
  • तैलीय प्रदूषण।

(B) प्राकृतिक स्रोत-कुछ लवण तथा तत्व प्राकृतिक रूप से जल में मिलकर प्रदूषण फैलाते हैं जैसेसीसा, आर्सेनिक, पारा, निकिल आदि। वायु प्रदूषण के स्रोत-वायु प्रदूषण के स्रोतों को सामान्यत: दो भागों में बाँटते हैं

(A) प्राकृतिक स्रोत-ज्वालामुखी का लावा, धूल, वन की आग के धुएँ तथा दलदल भूमि की CH4

(B) कृत्रिम स्रोत या मानवीय स्रोत–मानवीय स्रोत निम्नानुसार हैं दहन क्रियाएँ, औद्योगिक गतिविधियाँ, कृषि कार्य, कीटनाशकों का प्रयोग तक परमाणु ऊर्जा सम्बन्धी गतिविधियाँ।

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प्रश्न 11.
जलीय जीवों पर जल प्रदूषण के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
जलीय पादपों पर जल प्रदूषण के प्रभाव-

  • N2 तथा P की उपस्थिति के कारण जल सतह पर काई जम जाती है, जिससे सूर्य प्रकाश गहराई तक नहीं जाता है।
  • प्रदूषित जल में सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ जाती है।
  • जल में गाद जमती है।
  • जलीय तापमान बढ़ता है तथा O2, का अनुपात कम होता है।

जलीय जन्तुओं पर जल प्रदूषण का प्रभाव-जलीय वनस्पति पर ही जन्तु जीवन निर्भर रहता है। जलीय जन्तु जल प्रदूषण से निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित होते हैं

  • B.O. D. की कमी के कारण जन्तु संख्या कम होते हैं।
  • स्वच्छ जल में पाये जाने वाले जन्तु समाप्त हो जाते हैं।
  • जन्तु विविधता कम होती है तथा मछलियों में तरह-तरह की बीमारियाँ होती हैं।
    जल से बाहर रहने वाले जीव भी प्रदूषित जल के उपयोग के कारण प्रभावित होते हैं।

प्रश्न 12.
जल प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण के उपाय बताइए।
उत्तर
जल प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं

  • प्रत्येक घर में सेप्टिक टैंक होना चाहिए।
  • जल स्रोतों में पशुओं को नहीं धोना चाहिए।
  • लोगों को नदी, तालाब, झील में स्नान नहीं करना चाहिए।
  • कीटनाशियों, कवकनाशियों इत्यादि के रूप में निम्नीकरण योग्य पदार्थों का प्रयोग करना चाहिए।
  • खतरनाक कीटनाशियों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। इन जल स्रोतों में पशुओं को भी नहीं धोना चाहिए।
  • जल स्रोतों के जल के शोधन पर विशिष्ट ध्यान देना चाहिए। बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में जल शोधन संयन्त्रों को लगाना चाहिए।

प्रश्न 13.
औद्योगिक कारणों से होने वाले वायु प्रदूषण का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर
वायु प्रदूषण मुख्यतः उद्योगों से निकले धुएँ एवं अपशिष्ट पदार्थों से ही होता है। कपड़ा उद्योगों, रासायनिक उद्योग, तेल शोधक कारखाने, गत्ता उद्योग एवं शक्कर उद्योग वायु प्रदूषण के मुख्य स्त्रोत हैं और H4S, SO2,CO2,CO, धूल, सीसा, ऐम्बेस्टॉस आर्सेनिक फ्लुओराइड, बेरिलियम तथा अनेक हाइड्रोकार्बन इन उद्योगों से निकले प्रमुख वायु प्रदूषक हैं । औद्योगिक क्षेत्रों के आस-पास के धुआँ को देखकर उद्योगों से होने वाले प्रदूषण को समझा जा सकता है। उद्योगों के कारण भारत के औद्योगिक शहर बहुत अधिक प्रदूषित हैं।

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प्रश्न 14.
ध्वनि प्रदूषण के स्रोत क्या हैं ? ध्वनि प्रदूषण के कोई चार प्रभाव लिखिए।
उत्तर
ध्वनि प्रदूषण के स्रोत (Sources of Noise Pollution)- ध्वनि प्रदूषण का स्रोत ध्वनि, शोर या आवाज ही है चाहे वह किसी भी प्रकार से पैदा हुई हो। टी. वी., रेडियों, कूलर, स्कूटर, कार, बस, ट्रेन, जहाज, रॉकेट, घरेलू उपकरण, वाशिंग मशीन, लाउड स्पीकर, स्टीरियो, टैंक, तोप तथा दूसरे सुरक्षात्मक उपकरणों के अलावा सभी प्रकार की आवाज करने वाले साधन उपकरण या कारक ध्वनि प्रदूषण स्रोत होते हैं।

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव-ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख प्रभाव निम्नानुसार हैं

  • सतत् शोर के कारण सुनने की क्षमता में कमी आती है।
  • ज्यादा शोर होने पर त्वचा में उत्तेजना पैदा होती है, जठर पेशियाँ संकीर्ण होती हैं और क्रोध तथा स्वभाव में उत्तेजना पैदा होती है।
  • शोर के कारण हृदय की धड़कन तथा रक्त दाब बढ़ता है और सिर दर्द, थकान, अनिद्रा आदि रोग होते हैं।
  • अधिक शोर के कारण ऐड्रीनल हॉर्मोनों का स्राव अधिक होता है।
  • यह कई उपापचयी क्रियाओं को प्रभावित करने के अलावा संवेदी तथा तन्त्रिका-तन्त्र को कमजोर बनाता है।

प्रश्न 15.
ध्वनि प्रदूषण से बचने के उपायों को लिखिए।
उत्तर
ध्वनि प्रदूषण से बचने के उपाय-ध्वनि प्रदूषण से निम्नलिखित उपायों द्वारा बचा जा सकता

  • ऐसे उपकरणों का निर्माण करना जो शोर या ध्वनि की तीव्रता को कम करें।
  • ध्वनि अवशोषकों का प्रयोग करना चाहिए।
  • मशीनों के साथ काम करने वाले व्यक्तियों को ध्वनि अवशोषक वस्त्रों को देना चाहिए।
  • पौधों को उगाकर भी ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
  • अनावश्यक शोर नहीं करना चाहिए। ध्वनि उत्पादक उपकरणों का आवश्यतानुसार ही प्रयोग करना चाहिए।
  • अनावश्यक ध्वनि पैदा करने वालों के खिलाफ कानून बनाकर उसका कड़ाई से पालन करवाना चाहिए।

प्रश्न 16.
प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं ? प्रत्येक का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर
प्रदूषण निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

(i) जल प्रदूषण-जल स्त्रोतों में होने वाले उन अवांछनीय परिवर्तन को जिससे जल प्रदूषित होता है, जल प्रदूषण कहते हैं। यह प्रदूषण वाहितमल, घरेलू बहिस्राव, औद्योगिक बहिस्राव, कृषि कार्यों, कीटनाशकों के प्रयोगों तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण होता है।

(ii) वायु प्रदूषण-वायुमण्डल में होने वाले ऐसे परिवर्तन जिनसे जीवों का नुकसान हो वायु प्रदूषण कहलाता है। यह मुख्यत: दहन क्रियाओं, औद्योगिक गतिविधियों, कृषि कार्यों में कीटनाशकों के प्रयोगों तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण होता है।

(iii) रेडियोऐक्टिव प्रदूषण-रेडियोऐक्टिव पदार्थों के कारण पैदा होने वाले प्रदूषण को रेडियोऐक्टिव प्रदूषण कहते हैं । परमाणु ऊर्जा के अपशिष्टों के कारण भी रेडियोऐक्टिव प्रदूषण होता है।

(iv)शोर प्रदूषण-अवांछनीय ध्वनि को शोर कहते हैं । वातावरण में फैली ऐसी अनियन्त्रित ध्वनि अथवा शोर को ध्वनि अथवा शोर प्रदूषण कहते हैं । यह प्रदूषण अनियन्त्रित ध्वनि, आतिशबाजी, लाउडस्पीकर, हवाई अड्डा, उद्योग इत्यादि से पैदा हुई ध्वनि के कारण होती है।

(v) मृदा प्रदूषण-मृदा में होने वाले हानिकारक परिवर्तनों को मृदा प्रदूषण कहते हैं । यह कीटनाशकों, खरपतवारनाशियों, उर्वरकों के प्रयोग के कारण होता है।

पर्यावरण के मुद्दे दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रेडियोऐक्टिव प्रदूषण से होने वाली बीमारियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
रेडियोऐक्टिव (विकिरण) प्रदूषण के कारण जीवों के ऊपर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं, जो बीमारियों के रूप में दिखाई देते हैं

  • ल्यूकीमिया तथा अस्थि कैंसर-रेडियोऐक्टिव प्रदूषण के कारण मनुष्य, गाय, बैल आदि जीवों में रुधिर तथा अस्थि का कैंसर होता है।
  • असामयिक बुढ़ापा-रेडियोऐक्टिव प्रदूषण के कारण जीवों की प्रजनन क्षमता घट जाती है तथा उनमें असामयिक बुढ़ापा आता है।
  • महामारी-विकिरण प्रदूषण के कारण जीवों में रोगजनकों के प्रति एन्टिटॉक्सिन उत्पादन की या रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है, जिसके कारण महामारी तेजी से फैलती है।
  • उत्परिवर्तन-इसके कारण जीवों में अचानक कुछ आनुवंशिक परिवर्तन पैदा हो जाते हैं।
  • तन्त्रिका तन्त्र तथा संवेदी कोशिकाएँ उत्तेजित हो जाती है।
  • बाह्य त्वचा पर घाव बन जाता है एवं आँख, आँत व जनन ऊतक प्रभावित होते हैं। इसके तात्कालिक प्रभाव के रूप में आँखों में जलन, डायरिया, उल्टी इत्यादि लक्षण दिखाई देते हैं। कैंसर होता है।

प्रश्न 2.
आतिशबाजी से पर्यावरण में किस प्रकार का प्रदूषण फैलता है ? समझाइए।
उत्तर
आतिशबाजी का अर्थ विभिन्न उत्सवों के दौरान पटाखों तथा बारूद का अत्यधिक उपयोग से है। वैसे हम इसे खुशी के मौकों पर प्रयोग करते हैं, लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि यह हमें भविष्य में दुःख ही देगा। आतिशबाजी के कारण पर्यावरण में निम्न प्रकार से प्रदूषण फैलता है

  • वायु प्रदूषण-आतिशबाजो में प्रयुक्त विस्फोटकों से निकली हानिकारक गैसें जैसे-CO2,CO, SO2, इत्यादि वायु को प्रदूषित करती हैं, जिससे अनेक प्रकार की श्वास सम्बन्धी बीमारियाँ हो सकती हैं।
  • ध्वनि प्रदूषण-आतिशबाजी के कारण पैदा हुई ध्वनि, ध्वनि प्रदूषण पैदा करती है।
  • जल प्रदूषण-आतिशबाजी के कारण पैदा हुआ कचरा नालियों में मिलकर जल को प्रदूषित करता है। इसके फलस्वरूप कई विषैले पदार्थ भी पैदा होते हैं।

आतिशबाजी सबसे अधिक वायु प्रदूषण पैदा करती है। इसके कारण बहुत अधिक मात्रा में धुआँ पैदा होता है, जो सीधे वायुमण्डल में मिल जाता है । इसके अलावा इसके प्रभाव से बहुत अधिक मात्रा में धूल, वायु में कणीय प्रदूषक के रूप में मिल जाती है, जिसके साथ कुछ बारूद तथा दूसरे हानिकारक पदार्थों के कण भी होते हैं, जो भूमि पर गिरकर प्रदूषण पैदा करते हैं। आतिशबाजी की आवाज से व्यक्ति बहरा हो सकता है। उसका रक्त-दाब बढ़ सकता है तथा उसमें हृदयाघात व तन्त्रिकीय विकृति पैदा हो सकती है।

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प्रश्न 3.
‘वायु प्रदूषण’ पर एक निबंध लिखिए।
उत्तर
वायु प्रदूषणा-वायुमण्डल मे होने वाले ऐसे परिवर्तन जिनसे जीवों का नुकसान हो वायु प्रदूषण कहलाता है। यह मुख्यत: दहन क्रियाओं, औद्योगिक गतिविधियों, कृषि कार्यों में कीटनाशकों के प्रयोगों तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण होता है।

उत्तर.
वाय प्रदूषण के प्रभात्र-वायु प्रदूषण हमारे शरीर में तरह-तरह की विकृतियाँ पैदा करता है। इसके कुछ हानिकारक प्रभाव निम्नलिखित हैं

1. कारखानों की चिमनियों से निकलने वाली So,श्वास नली में जलन पैदा करती है तथा फेफड़ों को हानि पहुँचाती है। यह विभिन्न प्रकार के पौधों को क्षतिग्रस्त कर देती है। कुछ अधिपादप एवं लाइकेन SO2, से स्वतंत्र माध्यम में वहत तीव्रता से बढ़ते हैं। जन्तुओं में इसका प्रभाव श्वसन क्रिया पर सबसे अधिक पड़ता है।

2. नाइट्रस ऑक्साइड से फेफड़ों, आँखों व हृदय के रोग तथा ओजोन से आँख के रोग, खाँसी एवं सीने में दर्द होने लगता है। यह कई पौधों में वाष्पोत्सर्जन की दर बढ़ाकर भी उन्हें नुकसान पहुंचाती है।

3.P.A.N. प्रकाश प्रतिक्रिया में प्रकाशीय जल-अपघटन को रोककर, परितन्त्र का उत्पादन कम कर देती है। यह आँखों में जलन पैदा करके फेफड़ों को क्षति पहुँचाती है।

प्रश्न 4.
मुख्य वायु प्रदूषकों के नाम तथा उनके प्रभावों का पृथक्-पृथक् विवरण दीजिए।
उत्तर
मुख्य वायु प्रदूषक-मुख्य वायु प्रदूषकों के नाम तथा उनके प्रभाव निम्नानुसार हैं

  • कार्बन मोनोऑक्साइड-ये रुधिर के हीमोग्लोबीन से संयुक्त होकर उसकी ), सम्वहन क्षमता को प्रभावित करते हैं, जिसके कारण सिरदर्द, सुस्ती, कमजोरी, भाराल्पता इत्यादि की शिकायत होती है।
  • सल्फर डाइऑक्साइड-इसके कारण जन्तुओं में श्वास की बीमारी, श्लैष्मिक ज्वर (influenza) और न्यूमोनिया तथा अम्ल वर्षा के कारण त्वचीय रोग होते हैं। पौधों में इसकी कमी से पत्तियाँ सबसे अधिक प्रभावित होती हैं तथा उत्पादकता कम हो जाती है।
  • हाइड्रोजन सल्फाइड-इसके कारण पौधों में पतझड़ तथा जन्तुओं की आँख में जलन, गले में खराश तथा उल्टी आती है।
  • नाइट्रोजन के ऑक्साइड-इसके कारण पत्तियों में हरिमहीनता, पत्तियों में सड़न, पुष्प तथा फल का पतन होता है। मनुष्य तथा जन्तुओं में इसके कारण श्वसन सम्बन्धी बीमारियाँ होती हैं।
  • ऐरोसोल्स-ऐरोसोल्स ओजोन परत को प्रभावित करने वाले रसायन हैं, जिसके कारण अल्ट्रावायलेट किरणें पृथ्वी पर आकर जन्तु तथा पादपों को नुकसान पहुँचाती हैं।
  • अमोनिया-यह पौधों के बीजों के अंकुरण, जड़ एवं प्ररोह वृद्धि और पौधों में हरितलवक अपघटन को पैदा करती है। जन्तुओं में यह श्वास में कठिनाई पैदा करती है।
  • हाइड्रीजन क्लोराइड-इसके कारण पौधों की पत्तियाँ तथा जन्तुओं की आँख व श्वसन अंग प्रभावित होते हैं।
  • हाइड्रोकार्बन-इसके कारण पौधों में पीलेपन, पत्तियों की सड़न, कलिका का सूखना, पत्तों का छोटापन इत्यादि समस्याएँ पैदा होती हैं। जन्तुओं में इनके कारण आँख एवं नाक की म्यूकस ग्रन्थियाँ उत्तेजित हो जाती हैं। इसके कारण फेफड़ों का कैंसर भी होता है। उपर्युक्त के अलावा भी वायु में कई प्रदूषक और पाये जाते हैं, जो जीवों को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 5.
मृदा प्रदूषण को नियन्त्रित करने वाले उपायों को लिखिए।
उत्तर
निम्नलिखित उपायों को अमल में लाकर मृदा प्रदूषण के दर को काफी हद तक कम कर नियन्त्रित किया जा सकता है

  • ठोस तथा अनिम्नीकरण योग्य पदार्थों जैसे-लोहा, ताँबा, काँच, पॉलिथीन को मिट्टी में नहीं दबाना चाहिए।
  • रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशियों, शाकनाशियों आदि के प्रयोग को कम-से-कम करना चाहिए।
  • रासायनिक कीटनाशियों के स्थान पर जैव कीटनाशियों का प्रयोग करना चाहिए।
  • ठोस अपशिष्टों को मृदा में मिलाने के बजाय उनको गलाकर इनके चक्रीकरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
  • अपशिष्ट पदार्थों को खुले में छोडने के बदले खोखले, बन्द स्थानों में संग्रहीत करना चाहिए।
  • मृदा-क्षरण (Soil erosion) को रोकने का तरीका अपनाना चाहिए साथ ही भूमि में भरपूर जल संचयन हो इसका ध्यान रखा जाना चाहिए।
  • जैव उर्वरकों के प्रयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए।
  • गोबर, कार्बनिक अपशिष्ट तथा मानव मल-मूत्र से जैव गैस उत्पादन पर ज्यादा बल देना चाहिए।
  • एकीकृत भूमि प्रबन्धन तकनीक को अपनाना चाहिए ताकि भूमि प्रदूषण के प्रत्येक पहलू पर समुचित ध्यान देकर भूमि प्रदूषण को रोका जा सके।

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प्रश्न 6.
भूमि प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
भूमि प्रदूषण के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं

  1. अम्ल वर्षा के घटक मृदा को प्रदूषित करते हैं।
  2. अवांछित कूड़ा-करकट जैसे-घरेलू अपमार्जक, पॉलिथीन आदि मृदा को प्रदूषित करते हैं।
  3. मृदा की लवणता, अनियन्त्रित फसल उत्पादन, अनियन्त्रित मल विसर्जन, अनियन्त्रित चराई इत्यादि कार्य मृदा को प्रदूषित करते हैं।
  4. उर्वरकों, कीटनाशियों, शाकनाशियों का अन्धाधुन्ध उपयोग मृदा की प्राकृतिक संरचना को परिवर्तित करता है।
  5. औद्योगिक अपशिष्ट निकिल, आर्सेनिक, कैडमियम मृदा प्रदूषण पैदा कर जीव-जन्तुओं को प्रभावित करते हैं।
  6. मलेरिया उन्मूलन में DDT का अत्यधिक उपयोग भी मृदा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बना है, क्योंकि यह खाद्य श्रृंखला द्वारा मनुष्य के शरीर में पहुँच कर अल्सर, कैंसर जैसे खतरनाक रोगों को पैदा करता है।

प्रश्न 7.
विजिबल स्पेक्ट्रम से क्या तात्पर्य है ? सूर्य प्रकाश के विभिन्न स्पेक्ट्रम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखते हुए, UV किरणों का जैविक प्रणालियों पर प्रभाव लिखिए।
उत्तर
दृश्य स्पेक्ट्रम (वर्णक्रम)-सूर्य द्वारा उत्सर्जित विकिरण के 390 nm से 760 nm की तरंगदैर्ध्य की प्रकाश किरणों को मनुष्य की आँखें देख सकती हैं, इसे दृश्य स्पेक्ट्रम कहते हैं।
सूर्य प्रकाश के विभिन्न स्पेक्ट्रम-सूर्य के प्रकाश से निकलने वाले विकिरण अथवा प्रकाश को तीन भागों में बाँटते हैं

  • अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रम-सूर्य प्रकाश के 200 से 390 nm तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश किरण पुंज को अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रम कहते हैं। इसे हमारी आँखें नहीं देख सकतीं।
  • दृश्य स्पेक्ट्रम-390 से 760 nm तरंगदैर्ध्य की प्रकाश किरणों को दृश्य वर्णक्रम (visible spectrum) कहते हैं।
  • अवरक्त स्पेक्ट्रम या वर्णक्रम-सूर्य प्रकाश के 760 nm से अधिक तरंगदैर्ध्य की प्रकाश किरणों को अवरक्त वर्णक्रम (Infrared spectrum) कहते हैं । इसे भी हमारी आँखें नहीं देख सकती।

UV किरणों का जैविक प्रणालियों पर प्रभाव-UV किरणें कोशिकाओं के DNA को विकृत कर देती हैं, जिससे कोशिकाओं में DNA द्विगुणन एवं प्रोटीन संश्लेषण की क्रिया रुक जाती है। इसके अलावा जन्तुओं में इनके प्रभाव से कैंसर, ट्यूमर, महामारी, आनुवंशिक विकृति जैसी समस्याएँ भी पैदा होती हैं।
पौधों में UV किरणों के प्रभाव से कई विषैले प्रकाश उत्पादों का संश्लेषण होता है, जिसके कारण इनकी मृत्यु हो जाती है।

यदि UV किरणों से प्रभावित जीव को कुछ देर तक सामान्य सूर्य के प्रकाश में रखा जाये तो इसका प्रभाव कुछ कम हो जाता है। UV किरणे काँच को पार नहीं कर पाती अर्थात् इसका प्रयोग करके हानिकारक प्रभाव से बचा जा सकता है।

प्रश्न 8.
आयोनाइजिंग एवं नॉन-आयोनाइजिंग रेडियोधर्मिता में अन्तर स्पष्ट कीजिए। इनके स्रोत तथा प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
आयोनाइजिंग एवं नॉन-आयोनाइजिंग रेडियोधर्मिता में अन्तर-आयोनाइजिंग एवं नॉनआयोनाइजिंग विकिरण में निम्नलिखित अन्तर हैं

  • आयोनाइजिंग रेडियोधर्मिता रेडियोधर्मी पदार्थों के कारण पैदा होती है, जबकि नॉन-आयोनाइजिंग सूर्य की किरणों के कारण पैदा होती है।
  • आयोनाइजिंग विकिरण a,B, Y किरणों का बना होता है, जबकि नानआयोनाइजिंग विकिरण 200 से 390nm तक की तरंगदैर्घ्य वाली किरणों का बना होता है।
  • आयोनाइजिंग विकिरण जीव समुदाय के लिए बहुत अधिक हानिकारक होता है, जबकि नॉन-आयोनाइजिंग विकिरण अपेक्षाकृत कम हानिकारक होता है।
  • आयोनाइजिंग विकिरण का प्रभाव दीर्घगामी होता है, जबकि नॉन-आयोनाइजिंग विकिरण का प्रभाव जल्दी दिखाई देता है।

स्रोत-आयोनाइजिंग रेडियाधर्मिता के स्रोत प्रकृति में पाये जाने वाले रेडियोधर्मी पदार्थ होते हैं अर्थात् इनमें अल्फा, बीटा एवं गामा किरणें ही रेडियोधर्मिता पैदा करती हैं। नॉन-आयोनाइजिंग रेडियोधर्मिता का स्रोत सूर्य होता है।

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प्रश्न 9.
ध्वनि प्रदूषण के कारण और जीवधारियों पर इसके चार प्रभाव लिखिए।
उत्तर
ध्वनि प्रदूषण के कारण (स्रोत)-ध्वनि प्रदूषण का स्रोत ध्वनि, शोर या आवाज ही है, चाहे वह किसी भी प्रकार से पैदा हुई हो । टी.वी., रेडियो, कूलर प्कूटर, कार, बस, ट्रेन, प्लेन, रॉकेट, घरेलू उपकरण, वाशिंग मशीन, लाउडस्पीकर, स्टीरियो, टैंक, तोप तथा दूसरे सुरक्षात्मक उपकरणों के अलावा आवाज उत्पन्न करने वाले सभी प्रकार के साधन, उपकरण या कारक ध्वनि प्रदूषण के स्रोत होते हैं । उद्योग, कल-कारखाने तथा यान व हवाई अड्डे ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं।
ध्वनि प्रदूषण का जीवधारियों पर प्रभाव-इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं

  • सतत् शोर के कारण सुनने की क्षमता में कमी आती है तथा आदमी के बहरा होने की सम्भावना बढ़ती है।
  • ज्यादा शोर होने पर त्वचा में उत्तेजना (Irritation) पैदा होती है, जठर पेशियाँ (Gastric muscles) संकीर्ण होती हैं और क्रोध तथा स्वभाव में उत्तेजना पैदा होती है।
  • शोर के कारण हृदय की धड़कन (Heart beating) तथा रक्त दाब (Blood pressure) बढ़ता है।
  • ध्वनि प्रदूषण के कारण सिर दर्द, थकान, अनिद्रा आदि रोग होते हैं ।
  • अधिक शोर के कारण ऐड्रीनल हॉर्मोन (Adrenal hormones) का स्राव अधिक होता है।
  • यह कई उपापचयी क्रियाओं को प्रभावित करने के अलावा संवेदी (Sensory) तथा तन्त्रिका तन्त्र (Nervous system) को कमजोर बनाता है।
  • अवांछित ध्वनि (शोर) के कारण मस्तिष्क का तनाव बढ़ता है, जिससे व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है।
  • तीव्र शोर के कारण हमारा पाचन तंत्र (Digestive system) प्रभावित होता है और पाचन (Digestion) क्रिया अनियमित हो जाती है। शोर के कारण अल्सर (Ulcer) की सम्भावना भी बढ़ती है।
  • ध्वनि प्रदूषण के कारण धमनियों में कोलेस्ट्रॉल का जमाव बढ़ता है, जिसके परिणामस्वरूप रक्तचाप (Blood pressure) भी बढ़ता है।
  • शोर के कारण हमारे शरीर का पूरा अन्तःस्रावी तन्त्र (Endocrine system) उत्तेजित हो जाता है।
  • शोर में लगातार रहने पर बुढ़ापा (Ageing) जल्दी आता है।

प्रश्न 10.
हरित गृह प्रभाव क्या है ? इनके चार प्रभावों का वर्णन कीजिये।
उत्तर
“मानव द्वारा निर्मित CO2 के कारण उत्पन्न कम्बल जैसे प्रभाव (Blanketing effect) के कारण पृथ्वी की सतह के तापमान में होने वाली क्रमिक वृद्धि को ही हरित गृह प्रभाव (Greenhouse effect) कहते हैं।
हरित गृह (ग्रीन हाउस) प्रभाव के दुष्परिणाम (प्रभाव)

(1) पृथ्वी की जलवायु पर प्रभाव (Efféct on global climate)-कार्बन-डाइऑक्साइड के अवरक्त लाल विकिरणों (Infrared radiations) के अवशोषक गुण के कारण ही CO2 को पृथ्वी का ताप निर्धारित करने वाला प्रमुख कारक माना गया है। ग्रीन हाउस गैसों (Green house gases) की मात्रा में वृद्धि के साथसाथ पृथ्वी के सभी भागों के तापमान में वृद्धि एकसमान (Uniform) नहीं होती है। तापमान में होने वाली वृद्धि ध्रुवों (Poles) में सर्वाधिक तथा कटिबंधों (Tropics) में सबसे कम होती है, अत: आइसलैण्ड (Iceland), ग्रीनलैण्ड (Green-land), स्वीडन (Sweden), नार्वे (Norway), फिनलैण्ड (Finland), अलास्का (Alaska) एवं साइबेरिया (Siberia) इससे सर्वाधिक प्रभावित हैं तथा ध्रुवों पर जमी बर्फ पिघलने लगी है।

(2) वनों पर हरित गृह प्रभाव का प्रभाव (Effect of Green house Effect on forests)-वायुमण्डलीय तापमान में वृद्धि होने के कारण केवल वही पेड़-पौधे जीवित रह पायेंगे जो कि इस उच्च तापमान को सहन कर सकेंगे। इसके साथ नये प्रकार की वनस्पतियों की उत्पत्ति होगी। शाकीय (Herbaceous) पौधे इस बढ़ते हुए तापमान में जीवित नहीं रह पायेंगे। कठोर काष्ठ (Hard wood) वाले पौधों का तेजी से विकास होगा। एक अनुमान के अनुसार वायुमण्डल में CO2 की मात्रा दुगुनी हो जाने पर हरित जैव भार (Green biomass) में अत्यधिक कमी आ जायेगी।

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(3) फसलों पर प्रभाव (Effect on crops)-हरित गृह प्रभाव के कारण वातावरण के तापमान में वृद्धि होने पर पौधों से होने वाले वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) एवं वाष्पीकरण (Evaporation) की दर में अत्यधिक वृद्धि होगी, अतः ऐसे पौधे जिनके लिये अधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, उनके लिये जल कमी की समस्या उत्पन्न हो जायेगी। इसके साथ-साथ ऐसी फसलें, जिन्हें एक निश्चित तापमान की आवश्यकता होती है, वे अधिक तापमान के कारण नष्ट हो जायेंगी। अधिक तापमान के कारण पौधों पर रोगों एवं कीटों का प्रकोप बढ़ जायेगा, फलतः उत्पादन में कमी आयेगी।

(4) ओजोन परत पर प्रभाव (Effect on ozone layer)-डॉ. इवान्स (Dr. Evans) के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में हरित गृह प्रभाव के द्वारा पृथ्वी पर वापस आने वाले ऊष्मीय विकिरणों (Heat radiations) की मात्रा CFC (क्लोरोफ्लुओरो-कार्बन) की मात्रा में वृद्धि के साथ-साथ दुगुनी हो गयी है। CFC वायुमण्डल में उपस्थित ओजोन स्तर को अत्यधिक हानि पहुँचाती है। CFC के प्रकाश अपघटनी विघटन (Photolytic dissociation) के कारण क्लोरीन (Chlorine) गैस मुक्त होती है, जो कि ओजोन, (Ozone) के साथ क्रिया करके आण्विक ऑक्सीजन (Molecular oxygen) एवं क्लोरीन मोनोऑक्साइड (Chlorine Mono-oxide) का निर्माण करती है। यह क्लोरीन मोनोऑक्साइड वातावरण में उपस्थित आण्विक ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके ऑक्सीजन (O2) के अणुओं का निर्माण करके पुनः क्लोरीन (Cl) गैस मुक्त करती है।
नियंत्रण के उपाय

  • स्वचालित वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को उत्प्रेरक संपरिवर्तकों के प्रयोग द्वारा ही नियंत्रित किया जा सकता है।
  • रेडियोधर्मी विकिरण के प्रभाव से बचने के लिए परमाणु विस्फोटों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहिए तथा परमाणु संयंत्रों में सुरक्षा हेतु विशेष प्रबंध करने चाहिए।

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MP Board Class 12th General English Grammar Primary and Modal Auxiliaries

MP Board Class 12th General English Grammar Primary and Modal Auxiliaries

Auxiliary शब्द का अर्थ सहायक होता है, अत: Auxiliary verbs को Helping verbs भी कहा जाता है।

Auxiliary verbs के दो उपभेद होते हैं

  1. Primary Auxiliary Verbs, और
  2. Modal Auxiliary Verbs. संक्षेप में उन्हें Primary Auxiliaries और Modal Auxiliaries कहा जाता है।

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1. Primary Auxiliaries

निम्नलिखित तीन क्रियाएँ और उनके रूप Primary Auxiliaries कही जाती हैं

  1. BeBe, been, is, am, are, was, were.
  2. Have – Has, have, had.
  3. Do – Do, does, did.

Functions of Primary Auxiliaries

Primary Auxiliaries निम्नलिखित कार्य करती हैं
1. Primary Auxiliary के बाद not रखने से वाक्य Negative (नकारात्मक) बन जाता है,

जैसे-
He is not sleeping.

2. Primary Auxiliary को Subject से पहले रखने से वाक्य Interrogative (प्रश्नवाचक) बन जाता है,
जैसे-
It is (not) sleeping?

3. Be के रूप is, am, are, was, were का प्रयोग मुख्य क्रिया के साथ Continuous Tenses (Assertives एवं Interrogatives) तथा Passive voice बनाने में करते हैं,

जैसे-
1. He is writing. (वह लिख रहा है।) Present continuous Tense.
2. He is not writing. (वह नहीं लिख रहा है।)
3. Is he writing a letter? (क्या वह एक पत्र लिख रहा है?)
4. A letter was written. (एक पत्र लिखा गया था।) Passive voice.
5. A letter was not written. (एक पत्र नहीं लिखा गया था।) Passive voice.
6. Was a letter written? (क्या एक पत्र लिखा गया था?) Passive voice

Been का प्रयोग Perfect Continuous Tenses में और Perfect Tenses के Passive voice में होता है।, जैसे

1. He has been writing letters.
2. A letter has been written.

Has, have, had a HORIA Perfect Tense (Assertives T Interrogatives) बनाये जाते हैं,

जैसे-
1. He has slept. (वह सो चुका है।) Present Perfect Tense.
2. He has not slept. (वह नहीं सोया है।) Present Perfect Tense.
3. Has he slept? (क्या वह सो चुका है?) Present Perfect Tense.
4. They had finished their work. (वे अपना काम समाप्त कर चुके थे।) Past Perfect Tense.
5. Had they finished their work? (क्या वे अपना काम समाप्त कर चुके थे?)

Do, does, did प्रश्न और नकारात्मक बनाने में मुख्य क्रिया की सहायता करते हैं,

जैसे-
Do you know him? (क्या तुम उसे जानते हो?) Interrogative
I do not know him. (मैं उसे नहीं जानता हूँ।) Negative

इन Verbs, Tenses और Numbers के लिए तालिका 1 देखिए।

MP Board Class 12th General English Grammar Primary and Modal Auxiliaries 1

Note-Am केवल 1 के साथ आता है। You जब एकवचन होता है तब भी you के साथ are और were और have आते हैं। ऐसी स्थिति में are, were, have एकवचन की भाँति प्रयोग होते हैं।

Solved Exercise
1. Fill in the blanks with suitable Auxiliary Verbs given in brackets.
1. I …………………. paid my fee before the last working day. (had, have, were)
2. The birds …………………. flying. (have, was, are)
3. He …………………. not know my address. (does, has, was)
4. They …………………. submitted their exercise books. (are, have, do)
5. I …………………. not see you in the class. (am, have, did)
6. The farmers …………………. returning home. (have, were, do)
7. My brother …………………. not agree to my proposal. (do, has, does)
8. She …………………. not read this book yet. (do, has, was)
9. Mother …………………. cooking. (does, has, is)
10. My friend …………………. waiting for me at the station. (had, was, are)
Answer:
1. had,
2. are,
3. does,
4. have,
5. did,
6. were,
7. does,
8. has,
9. is,
10. was.

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B. 1. …………………. not show that letter to anyone. (have, am, did)
2. Mohan …………………. sleeping in this room. (has, was, does)
3. He …………………. not tell a lie. (has, is, does)
4. He …………………. been a good player of hockey. (has, have, do)
5. A dog …………………. not eat grass. (has, was, does)
6. They …………………. lived in my house for five years. (are, have, did)
7. You …………………. not look well. (does, has, do)
8. The wind …………………. blowing hard. (had, has, was)
Answer:
1. did,
2. was,
3. does,
4. has,
5. does,
6. have,
7. do,
8. was.

(2) Fill in the blanks with suitable Auxiliary Verbs given in brackets.

1. …………………. our soldiers fight bravely? (Have, Did, Are)
2. Five subjects …………………. taught at the high school stage. (are, have, had)
3. …………………. the farmers sown the field? (Are, Have, Do)
4. Tickets …………………. sold here for N. E. Railway. (have, are, had)
5. He …………………. not allowed to enter the class. (has, was, does)
6. …………………. you have tea in the evening daily? (Do, Are, Have)
7. …………………. she made tea when I came? (Does, Had, Was)
8. Ready-made garments …………………. sold here. (do, does, are)
9. …………………. it rain heavily in winter in your state? (Does, Has, Is)
10. I …………………. help him. (am, did, have)
Answer:
1. Did,
2. are,
3. Have,
4. are,
5. was,
6. Do,
7. Had,
8. are,
9. Does,
10. did.

Exercises For Practice

1. Choose the right word from the words given in brackets :
1. We …………………. not go to school on sundays. (are, do, have)
2. The dogs …………………. barking. (do, are, was)
3. The train …………………. arrived. (has, did, is)
4. He …………………. not know my address. (does, has, was)
5. I …………………. not see you in the class. (am, have, did)
6. The farmers …………………. returning home. (have, were, do)
7. She …………………. not read this book yet. (do, has, was)
8. Mother …………………. cooking (does, has, is)
9. My friend …………………. waiting for me at the station. (had, was, are)
10. He …………………. not tell a lie. (has, is, does)
11. He …………………. been a good player of hockey. (has, have, do)
12. A dog …………………. not eat grass.” (has, was, does)
13. They …………………. lived in my house for five years. (are, have, did)
14. You …………………. not look well. (does, are, do)
15. The wind …………………. blowing hard. (had, has, was)

2. Fill in the blanks with suitable Auxiliary verbs. Study the examples.

1. …………………. you play cricket? (Are, Do, Does)
2. The school …………………. decorated on Independence Day. (has, had, was)
3. He …………………. sung a song. (does, has, is)
4. I …………………. not show that letter to anyone. (have, am, did)
5. Madhu …………………. sleeping in his room. (has, was, does)
6. …………………. she eat apple? (Does, Has, Was)
7. …………………. Archit play cards? (Has, Is, Does)

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2. Model Auxiliaries

Mood से बना है Modal। ये विशेष प्रकार की helping verbs हैं। इनके द्वारा मुख्य (finite) verb के mood (भाव), Attitude या viewpoint (दृष्टिकोण) को व्यक्त किया जाता है।

Functions of Modal Auxiliaries

1. ये क्रियाएँ Finite Verbs के Mood को प्रकट करने में सहायता करती है; जैसेIf he were here, I would punish him.
इस वाक्य में क्रिया would मुख्य क्रिया punish को Subjunctive Mood बनाने में सहायता करती है।

2. Modal Auxiliaries, Primary Auxiliaries की भाँति, अपने बाद not लगाकर वाक्य को Negative बना देती हैं; जैसेI shall not go there.
He cannot come here. Note-Can + not सदैव मिलाकर (cannot) लिखे जाते हैं। प्रश्नवाचक वाक्य में can और not अलग-अलग हो जाते हैं जैसा कि नीचे अन्तिम उदाहरण में हुआ है।

3. Primary Auxiliaries की भाँति ही Subject के पहले आकर Modal Auxiliaries वाक्य को Interrogative बना देती हैं।

जैसे-
Will you go there ?
Can you not inform him ?

मुख्यत: will, shall, should, ought to, may, might, has to, have to, had to, need, dare Modal हैं।

Has To
‘Has to’ modal auxiliary का प्रयोग 3rd person singular number (He, She, It, name of a person आदि) के साथ Present Tense में किया जाता है। यह बाध्यता के अर्थ में प्रयोग होती है।

1. She has to work late.
उसे देर तक काम करना पड़ता है।
2. He has to go there.
उसे वहाँ जाना पड़ता है।
3. He has to fetch water in the morning.
उसे सुबह पानी लाना पड़ता है।
4. He has to bow before him.
उसे उनके सामने झुकना पड़ता है।
5. Ram has to get up early in the morning.
राम को सुबह जल्दी उठना पड़ता है।
6. Sheela has to do it daily. शीला को यह प्रतिदिन करना पड़ता है।

Have To
‘Have to’ भी बाध्यता व्यक्त करता है। इसका प्रयोग first person, second person तथा third person plural pronouns के साथ किया जाता है। इसका प्रयोग भी Present Tense में किया जाता है।

1. I have to clean my room these days.’
मुझे अपना कमरा इन दिनों साफ करना पड़ता है।
2. They have to go there.
उन्हें वहाँ जाना पड़ता है।
3. You have to bow before him.
तुम्हें उनके सामने झुकना पड़ता है।
4. The students have to work hard.
विद्यार्थियों को कठिन परिश्रम करना पड़ता है।
5. You have to play.
तुम्हें खेलना पड़ता है।
6. We have to show respect to our teacher.
हमें अपने शिक्षक के प्रति आदर दिखाना पड़ता है।

Had To
‘Had to’ का प्रयोग Past Tense में सभी Persons तथा Numbers के साथ किया जाता है।

1. We had to buy the Diwali gifts.
हमें दीपावली की भेंट खरीदनी पड़ी।
2. Ramesh had to eat it.
रमेश को यह खाना पड़ा।
3. I had to talk to him.
मुझे उनसे बात करनी पड़ी।
4. You had to work very hard.
तुम्हें बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ा।
5. He had to sing a song.
उसे गीत गाना पड़ा।
6. I had to be with him.
मुझे उसके साथ रहना पड़ा।

Will Have To
‘Will have to’ modal auxiliary का प्रयोग Future Tense में Second तथा Third person pronouns के साथ किया जाता है।

1. You will have to attend the meeting.
तुम्हें मीटिंग में भाग लेना पड़ेगा।
2. He will have to buy a car. .
उसे कार खरीदनी पड़ेगी।
3. She will have to sing a song.
उसे गीत गाना पड़ेगा।
4. They will have to vacate this house.
उन्हें यह मकान खाली करना पड़ेगा।
5. Ram will have to come here.
राम को यहाँ आना पड़ेगा।

Shall Have To
‘Shall have to modal auxiliary at yeri Future Tense Å first person pronouns के साथ किया जाता है।

1. I shall have to go with you.
मुझे तुम्हारे साथ जाना पड़ेगा।
2. I shall have to visit Delhi.
मुझे दिल्ली जाना पड़ेगा।
3. We shall have to buy a washing machine.
हमें वॉशिंग मशीन खरीदनी पड़ेगी।
4. We shall have to help him.
हमें उसकी सहायता करनी पड़ेगी।
5. I shall have to set him right.
मुझे उसको ठीक करना होगा
6. We shall have to punish Ram.
हमें राम को दंडित करना होगा।

Exercises For Practice
(1) Complete the following sentences by using ‘have to’, ‘has to’, ‘had to’, ‘will have to’, ‘shall have to’ in the blanks :

1. Reeta …………………. look after her small baby.
2. You …………………. cook food for your family.
3. Mother …………………. scold Sarita because she had split all the milk.
4. They …………………. listen the lecture.
5. …………………. open the account.
6. We …………………. help the flood victims.
7. Ramesh …………………. learn his lesson.
8. They …………………. serve their country.
9. We …………………. show respect to our elders.
10. The sweeper …………………. sweep the road.
11. The postman …………………. deliver letters.
12. We …………………. participate in the race.
13. She …………………. sing a song in the function yesterday.
14. Suman …………………. dance tomorrow.
15. We …………………. nab the extremists.

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2. Complete the following sentences by using “have to’, ‘has to’, ‘had to’, ‘will have to or ‘shall have to:
1. They …………………. prepare the final report yesterday since they couldn’t defy the Director’s orders.
2. A meeting will be held tomorrow and all the officials …………………. attend it.
3. Her eye-sight is very weak, she …………………. wear spectacles all the time.
4. Our area is infested with mosquitoes. You …………………. sleep under a mosquito net.
5. Many factory workers …………………. Work overtime to supplement their income.
6. She …………………. do what her husband says.
7. The husbands of the working ladies …………………. wash the dishes, clean the floors and cook the meals.
8. The people of the village …………………. use cow dung cakes for cooking.
9. All the girls invariably …………………. help their mothers in the kitchen.
10. I …………………. buy a new ball pen since I have lost my old ball pen.

Must
Must का प्रयोग निम्न अवस्थाओं में किया जाता है—
1. Advice in the form of order (आज्ञा के रूप में सलाह) :

(i) The captain said, “All must get up at 5 a. m.”
कप्तान ने कहा “सभी को प्रात: 5 बजे उठ जाना चाहिये।”
(ii) Mother said to child, “You must brush your teeth before going to bed.”
माँ ने बालक से कहा, “तुम्हें सोने से पहले अपने दाँत ब्रुश से अवश्य साफ करने चाहिये।”

2. Compulsion (बाध्यता) :
(1) Candidates must be present 15 minutes before the examination starts.
अभ्यर्थियों को परीक्षा प्रारम्भ होने से 15 मिनट पूर्व उपस्थित हो जाना चाहिये।
(ii) You must deposit fee on or before 15th.
तुम्हें 15 तारीख को या उससे पहले फीस अवश्य जमा कर देनी चाहिये।
(iii) They must leave immediately after they have taken food.
भोजन लेने के तत्काल बाद उन्हें रवाना हो जाना चाहिये।
(iv) You must keep quiet at the hospital.
तुम्हें अस्पताल में शान्त रहना चाहिये।
(v) Court orders must be obeyed.
न्यायालय के आदेश अवश्य माने जाने चाहिये।

3. Prohibition (निषेध) के लिये :
(i) Advertisement must not be written on this wall.
इस दीवार पर विज्ञापन (इश्तहार) नहीं लिखे जाने चाहिए।
(ii) You must not go there.
तुम्हें वहाँ नहीं जाना चाहिये।
(iii) Boys must not loiter here and there.
लड़कों को यहाँ-वहाँ व्यर्थ नहीं घूमना चाहिये।

Should
1. Should, shall के Past Tense के रूप में प्रयुक्त होता है, जब complex sentences में sequence of tense के कारण Subordinate clause में प्रयुक्त shall को परिवर्तित करना होता है।
As-
(i) He told me that I should be given the prize.
उसने कहा कि मुझे इनाम दिया जायेगा।
(ii) The teacher told us that we should not get the fee concession.
शिक्षक ने हमसे कहा कि हमें शुल्क मुक्ति नहीं मिलेगी।
(iii) I said that I should pay the tax in time.
मैंने कहा कि मैं समय पर टैक्स चुका दूंगा।
(iv) We informed that we should not take part in games.
हमने सूचित किया कि हम खेलों में भाग नहीं लेंगे।

2. Should के साथ Verb की I form स्वतन्त्र वाक्य में आने पर यह Advice, Suggestion, Warning, Duty, Moral obligation या Wish का भाव प्रकट करती है। अर्थ होता है ‘चाहिये’

(a) AS-Advice (सलाह) तथा Suggestion (सुझाव)
(1) You should consult the doctor at once.
तुम्हें शीघ्र ही डॉक्टर से परामर्श करना चाहिये।
(ii) The children should obey their parents.
बालकों को अपने माता-पिता की सलाह माननी चाहिये।
(iii) You should not play at a dirty place.
तुम्हें गन्दे स्थान पर नहीं खेलना चाहिये।
(iv) They suggested that we should buy a colour TV set.
उन्होंने सुझाव दिया है कि हमें रंगीन टी.वी. खरीदना चाहिये।

(b) Warning (चेतावनी)
(i) Walk carefully lest you should fall.
सावधानी से चलो अन्यथा तुम गिर जाओगे।
(ii) Pay your taxes in time lest you should pay a heavy penalty.
अपना टैक्स समय पर अदा करो अन्यथा तुम्हें भारी जुर्माना देना पड़ेगा।
(iii) Keep this medicine in fridge lest it should be spoiled.
इस दवाई को फ्रिज में रखो अन्यथा यह खराब हो जायेगी।
(iv) Walk slowly lest you should disturb the patients.
धीमे चलो अन्यथा तुम रोगियों को परेशान करोगे।

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(c) Duty (कर्त्तव्य) तथा Moral obligation (नैतिक बन्धन)

(i) We should honour our elders.
हमें अपने बड़ों का सम्मान करना चाहिये।
(ii) You should pray to God daily.
तुम्हें प्रतिदिन ईश्वराधना करनी चाहिये।
(iii) Boys should be present daily.
लड़कों को प्रतिदिन उपस्थित रहना चाहिये।
(iv) The farmers should give up the habit of taking loans frequently.
किसानों को बार-बार ऋण लेने की आदत छोड़ देनी चाहिये।
(v) One should not be dependent on others.
किसी व्यक्ति को दूसरे पर निर्भर नहीं होना चाहिये।

(d) Wish (कल्पना या कामना)
(1) We think that we should be successful.
हम सोचते हैं कि हमें सफल होना चाहिये।
(ii) If all goes well, the vehicle should land on the moon at 00:01 hrs.
यदि सब ठीक रहा तो वाहन चन्द्रमा पर रात्रि के बारह बजकर 1 मिनट पर उतरना चाहिए।
(iii) The doctors think that the patient should become conscious within an hour.
डॉक्टर सोचते हैं कि रोगी एक घण्टे के अन्दर होश में आ जाना चाहिए।

Should have + V III : (III form of Verb) :

किसी Subject के साथ should have + third form of verb का प्रयोग होने पर यह उपर्युक्त भावनाओं का प्रकटीकरण कर विपरीत अर्थ व्यक्त करेगा।

As—
(i) He should have arrived by this time.
उसे इस समय तक आ जाना चाहिये था। (पर नहीं आया)
(ii) You should not have beaten his dog.
तुम्हें उसके कुत्ते को नहीं पीटना चाहिये था। (पर तुमने पीटा)

NEED/NEEDN’T
इस Modal का प्रयोग Main Verb के रूप में तथा Auxiliary के रूप में होता है।
1.Need का प्रयोग Main Verb के रूप में होने पर यह अन्य Complete Verbs की तरह ही प्रयुक्त होता है Need = आवश्यकता होना

(1) I need some money.
मुझे कुछ धन की आवश्यकता है।
(ii) The old man needs help.
वृद्ध आदमी को सहायता की आवश्यकता है।
(iii) These rooms need renovation.
इन कमरों को नवीनीकरण की आवश्यकता है।
(iv) Do you really need a new scooter? ।
क्या तुम्हें वास्तव में नये स्कूटर की आवश्यकता है?

2. Auxiliary रूप में Need का प्रयोग Negative व Interrogative Sentences के रूप में दबाव (Pressure), कर्त्तव्य (Obligation) या आवश्यकता के अभाव को प्रकट करने के लिये किया जाता है। केवल वर्तमान काल में सभी Subjects के साथ

(i) You needn’t go there.
तुम्हें वहाँ जाने की आवश्यकता नहीं है।
(ii) She needn’t shed crocodile tears.
उसे झूठ-मूठ के आँसू बहाने की आवश्यकता नहीं है।

SHALL
(a) I, we के साथ shall शुद्ध भविष्य काल प्रकट करता है;

जैसे-
I shall go tomorrow. (मैं कल जाऊँगा।)
We shall be late. (हमें देर हो जायेगी।)

(b) You, he, she, it, they के साथ shall रंजित भविष्य काल प्रकट करता है;

जैसे-
You shall get a prize.
तुम्हें इनाम मिलेगा। (वायदा, वचन)
She shall wash dirty clothes.
वह गन्दे कपड़े धोयेगी। (आज्ञा)
He shall suffer for coming late.
देर से आने के लिए वह भुगतेगा। (धमकी)

WILL
(a) You, he, she, it, they के साथ will शुद्ध भविष्य काल प्रकट करता है;

जैसे-
You will be late. (तुम्हें देर हो जायेगी।)
He will come at 4. (वह चार बजे आयेगा।)

(b) I, we के साथ will रंजित भविष्य काल प्रकट करता है;

जैसे-
I will find out the thief.
मैं चोर को खोज लूँगा। (निश्चय)
I will help you. मैं तुम्हारी सहायता करूँगा। (वचनं, वायदा)
We will visit the Taj tomorrow. हम कल ताज देखेंगे। (इरादा)

Would
(a) Would Indirect Speech में will का Past Tense होता है,

जैसे-
Direct-Shyam said, “She will be ill.” Indirect-Shyam said that she would be ill.
(श्याम ने कहा कि वह बीमार हो जायेगी।)

(b) प्रायः स्वभाववश किये जाने वाले कार्यों की चर्चा में would Past Tense में प्रयुक्त होता है,

जैसे-
Sonu would sit and talk all the day.
(सोनू पूरे दिन बैठा और बातें करता रहेगा।)

(c) प्रार्थना करने के लिए would का प्रयोग वर्तमान समय की बात के लिए भी questions में होता है;

जैसे-
Would you please read the letter?
(क्या आप कृपया पत्र पढ़ेंगे?)

(d) Conditional statements में would का प्रयोग होता है;

जैसे-
They would be killed if the car went so fast.
(वे मारे जायेंगे यदि कार इतनी तेज चली।)

Can
Can का प्रयोग ability (योग्यता), capacity (क्षमता), permission (अनुमति) – या possibility (सम्भावना) व्यक्त करने के लिए होता है;

जैसे-
She can speak Sanskrit.
(वह संस्कृत बोल सकती है।) (योग्यता)
I can swim two kilometres in twenty minutes.
(मैं बीस मिनट में दो किमी तैर सकता हूँ।) (क्षमता)
You can wait in my office.
(आप मेरे दफ्तर में प्रतीक्षा कर सकते हैं।) (अनुमति)
The lost child can be anywhere now.
(खोया हुआ बच्चा अब कहीं भी हो सकता है।) (सम्भावना)

Could
Could का प्रयोग भूतकाल की योग्यता या क्षमता तथा वर्तमान काल की विनम्र प्रार्थना व्यक्त करने में किया जाता है—
Two years ago I could read without spectacles.
(दो वर्ष पूर्व मैं बिना चश्मे के पढ़ सकता था।) (क्षमता)
I could see him through the window.
(मैं उसे खिड़की से देख सका।) (क्षमता)
Could you show me the way?
(क्या आप मुझे रास्ता दिखा सकते हैं) (प्रार्थना)

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May
Can से may अधिक औपचारिक (formal) शब्द है। निम्नलिखित अर्थों में may का प्रयोग होता है :

May I come in?
(क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ?) (आज्ञा मानना)
You may go now.
(अब आप जा सकते हैं।) (आज्ञा देना)
She may like it.
(वह इसे पसन्द कर सकती है।) (सम्भावना प्रकट होना)
May you live long !
(आप दीर्घायु हों।) (कामना, इच्छा या आशा प्रकट करना)

Might
(a) Indirect Speech में may का Past tene might होता है;

जैसे
Direct-He said, “She may go today.” Indirect—He said that she might go that day.
(उसने कहा कि वह उस दिन जा सकती थी।)

(b) वाक्य में जब मुख्य क्रिया Past Tense में हो तो might का (may का नहीं) प्रयोग करना चाहिए;

जैसे-
We thought the thief might be hiding in the house.
(हम लोगों ने सोचा कि चोर घर में छिपा हो सकता है।)

(c) Might से may की अपेक्षा अधिक हल्की (अधिक दूर की) सम्भावना व्यक्त की जाती है;

जैसे-
You might meet snakes in the field.
(खेत में तुम्हें सर्प मिल सकते हैं।)

Ought To
अर्थ में Ought to लगभग should के समान है। Ought to के द्वारा वाक्य में कर्त्तव्य बताया जाता है या नैतिक परामर्श दिया जाता है;

जैसे-
You ought to obey your parents.
(तुम्हें अपने माता-पिता का कहा मानना चाहिए।) (कर्त्तव्य)
You ought to rise early
(तुम्हें जल्दी उठना चाहिए।) (नैतिक परामर्श)
He has been practising for long. He ought to be a good lawyer.
(वह बहुत दिनों से वकालत कर रहा है। उसे एक अच्छा वकील होना चाहिए।) (अनुभव पर आधारित विश्वास)

Ought to के बाद क्रिया का पहला Form आता है।

Used To
Used to का प्रयोग उस कार्य के लिए होता है, जो भूतकाल में आदतन होता रहा हो और वर्तमान में बन्द कर दिया गया हो;

जैसे-
I used to play the violin a few years ago.
(मैं कुछ वर्षों पहले वायलिन बजाया करता था।)

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Used to का प्रयोग केवल भूतकाल में होता है। इसके बाद क्रिया का पहला Form आता है।

Solved Exercise

Fill in the blanks choosing the right modals.
1. Candidates……. not bring textbooks into the examination room. (might, will, may, need)
2. I know the place so I…….advise you where to go. (can, must, should, ought to)
3. The swimmer was very tired but he…….reach the shore. (could, managed to, would, might)
4. He……..read well when he was only five years old. (could, managed to, might, would)
5. You should buy it now; prices………go up after the budget. (will, must, may, shall)
6. If I bought a lottery ticket …….win rupees one lac. (will, must, may, shall)
7. The buses were all full so …….take a taxi. (would, could, had to, must)
8. “Cars………not be parked here.” (must, need, could, should)
9. You…… not drive fast; we have plenty of time. (must, need, could, should)
10. He……..not ask for a pay rise for fear of losing his job. (must, need, dare, will)
11. You……not do all the exercise. Ten sentences will be enough. (could, should, need, must)
12. If you……see him, give him my regards. (will, shall, would, should)
13. I…….be an atheist but now I believe in God. (would, could, used to, ought to)
14. …….I do that sum for you? (Shall, Will, Can, May)
15. Come what may, I…… stop smoking? (shall, will, can, may)
16. …….you stop making all that noise? (Shall, Will, Can, May)
17. He will get a driving license as soon as he……drive well. (will, shall, may, can)
18. The sun……….rise at 6.17 hours tomorrow. (can, may, will, shall)
19. ……….I need a lot of money for the journey? (Can, May, Will, Shall)
20. You………. -speak up. I can hardly hear you. (must, will, can, may)
Answer:
1. may,
2. can,
3. managed to,
4. could,
5. may,
6. may,
7. had to,
8. must,
9. need,
10. dare,
11. need,
12. should,
13. used to,
14. Shall,
15. will,
16. Will,
17. can,
18. will,
19. Shall,
20. must.

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MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र

पारितंत्र NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिये

1. पादपों को …………… कहते हैं, क्योंकि ये कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण करते हैं।
2. पादप द्वारा प्रमुख पारितंत्र का पिरामिड (संख्या का)…………… प्रकार का होता है।
3. एक जलीय पारितंत्र में, उत्पादकता का सीमाकारक …………… है।
4. हमारे पारितंत्र में सामान्य अपरदन …………… है।
5. पृथ्वी पर कार्बन का प्रमुख भण्डार …………… हैं।
उत्तर

  1. उत्पादक
  2. उल्टा
  3. प्रकाश
  4. केंचुआ
  5. समुद्र एवं वायुमण्डल।

प्रश्न 2.
एक खाद्य श्रृंखला में निम्नलिखित में सर्वाधिक संख्या किसकी होती है
(a) उत्पादक
(b) प्राथमिक उपभोक्ता
(c) द्वितीयक उपभोक्ता
(d) अपघटक।
उत्तर
(d) अपघटक।

प्रश्न 3.
एक झील में द्वितीयक (दूसरी) पोषण स्तर होता है
(a) पादप प्लवक
(b) प्राणी प्लवक
(c) नितलक (बेन्थॉस)
(d) मछलियाँ।
उत्तर
(b) प्राणी प्लवक

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प्रश्न 4.
द्वितीयक उत्पादक है
(a) शाकाहारी (शाकभक्षी)
(b) उत्पादक
(c) मांसाहारी (मांसभक्षी)
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर
(a) शाकाहारी (शाकभक्षी)

प्रश्न 5.
प्रासंगिक सौर विकिरण में प्रकाश-संश्लेषणात्मक सक्रिय विकिरण का क्या प्रतिशत होता है
(a) 100%
(b) 50%
(c) 1-5%
(d) 2-10%
उत्तर
(b) 50%

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए
(क) चारण खाद्य श्रृंखला एवं अपरदन खाद्य श्रृंखला,
(ख) उत्पादन एवं अपघटन
(ग) ऊर्ध्ववर्ती (शिखरांश) व अधोवर्ती पिरामिड।
उत्तर
(क) चारण खाद्य श्रृंखला एवं अपरदन खाद्य श्रृंखला

1. चारण खाद्य श्रृंखला (Grazing food chain)–चारण खाद्य श्रृंखला पादपों से प्रारंभ होकर छोटे जंतुओं से बड़े जंतुओं की ओर चलती है। जैसे
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 1
यह ऊर्जा के स्रोत हेतु प्रत्यक्ष रूप से और विकिरण पर निर्भर होती है।

2. अपरदन खाद्य श्रृंखला (Detritus food chain)-यह खाद्य श्रृंखला मृत जीवों से प्रारंभ होकर सूक्ष्मजीवों की ओर चलती है। जैसे
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 2
यह ऊर्जा के स्रोत हेतु सौर विकिरण पर निर्भर नहीं होती।

(ख) उत्पादन तथा अपघटन में अंतर
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 3

(ग) उर्ध्ववर्ती पिरामिड व अधोवर्ती पिरामिड में अंतर
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 4

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए
(क) खाद्य श्रृंखला तथा खाद्य जाल (वेष)
(ख) लिटर (कर्टक) एवं अपरद
(ग) प्राथमिक एवं द्वितीयक उत्पादकता।
उत्तर
(क) खाद्य श्रृंखला व खाद्य जाल में अन्तर
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 5

(ख) लिटर (कर्टक) एवं अपरद
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 6

(ग) प्राथमिक एवं द्वितीयक उत्पादकता।
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 7
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 8

प्रश्न 8.
पारिस्थितिक तंत्र के घटकों की व्याख्या कीजिए।
अथवा
पारिस्थितिक तन्त्र किसे कहते हैं ? किसी तालाब पारितन्त्र के मुख्य घटकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
पारिस्थितिक तन्त्र-टेंसले के अनुसार, “वातावरण के जीवीय तथा अजीवीय घटकों की समन्वित प्रणाली को पारिस्थितिक तन्त्र कहते हैं।” तालाब परितन्त्र के घटक-तालाब के घटक भी एक प्रारूपिक घटकों के ही समान निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

(A) अजैविक घटक-तालाब का मुख्य अजीवीय घटक जल होता है, जिसमें सभी कार्बनिक तथा अकार्बनिक रसायन घुले रहते हैं।

(B) जीवीय घटक-तालाब पारितन्त्र में सभी जीवीय घटक पाये जाते हैं

(1) उत्पादक-प्लवक जैसे-वॉलवॉक्स, पेण्डोराइना, ऊडोगोनियम, स्पाइरोगायरा इत्यादि के अलावा हाइड्रिला, सेजिटेरिया, युट्रिकुलेरिया, ऐजोला, ट्रापा, लेना, टाइफा, निम्फिया आदि पादप तालाब पारितन्त्र उत्पादक वर्ग का निर्माण करते हैं।

(2) प्राथमिक उपभोक्ता-इस श्रेणी में जन्तु प्लवक डेफ्निया, साइक्लोप्स, पैरामीशियम, अमीबा आदि आते हैं।

(3) द्वितीयक एवं तृतीयक उपभोक्ता-छोटी शाकाहारी मछलियों को खाने वाली बड़ी मछलियाँ द्वितीयक उपभोक्ता एवं सारस तथा मांसाहारी मछली खाने वाले आदमी जल तन्त्र के तृतीयक उपभोक्ता की तरह कार्य करते हैं।

(4) अपघटक-विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव इसके अन्तर्गत रखे जाते हैं, जो जन्तुओं एवं पादपों के मृत शरीर को विघटित करके फिर से उनके अवयवों को भूमि में मिला देते हैं, जिससे उत्पादक उनका उपयोग कर सकें। कवक सिफैलोस्पोरियम, क्लैडोस्पोरियम, पायथियम, कवुलेरिया, सैप्रोलिग्निया तथा जीवाणु इस श्रेणी के उदाहरण हैं।

नोट- वातावरण के मुख्य घटक निम्नानुसार हैं
(A) अजैविक घटक-ये दो प्रकार के होते हैं

  • ऊर्जा-प्रकाश, ताप तथा रासायनिक पदार्थों की ऊर्जा।
  • पदार्थ-पानी, मिट्टी, लवण इत्यादि।

(B) अजैविक घटक-ये तीन प्रकार के होते हैं

  • उत्पादक-हरे पौधे।
  • उपभोक्ता-प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक।
  • अपघटक-जीवाणु एवं कवक।

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प्रश्न 9.
पारिस्थितिक पिरामिड को पारिभाषित कीजिए तथा जैव मात्रा या जैव भार तथा संख्या के पिरामिडों की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर
पोषी स्तर-आहार श्रृंखला या पारिस्थितिक-तन्त्र के उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं के विभिन्न स्तरों को पोषक स्तर कहते हैं। दूसरे शब्दों में आहार श्रृंखला की प्रत्येक कड़ी पोषी या पोषक स्तर कहलाती आहार शंकु या पारिस्थितिक शंकु- यदि पारितन्त्र के विभिन्न पोषक स्तरों के जीवों को उनकी शेर संख्या, जीवभार तथा उनमें संचित ऊर्जा की मात्राओं बाघ के अनुपात को चित्र द्वारा व्यक्त करें तो एक शंकु जैसी आकृति प्राप्त होती है जिसे आहार शंकु कहते हैं। ये

1. जीव संख्या का शंकु- जब आहार श्रृंखला को पोषक स्तरों का शंकु पोषक स्तरों में उपस्थित जीवों की संख्या के आधार पर बनाते हैं तो इसे जीव संख्या का शंकु कहते हैं। यदि हम संख्या को आधारानें तो उत्पादकों की संख्या सबसे अधिक तथा इसके बाद के पोषक स्तरों के जीवों की संख्या क्रम से कम होती जाती है इस कारण इसका शंकु सीधा बनता है, लेकिन एक वृक्ष को आधार मानने पर यह उल्टा बनता है।

2. जीव भार का शंकु-यदि किसी पारितन्त्र में संख्या के स्थान पर जीवों के कुल भार के आधार पर पोषी स्तरों को देखें तो उल्टे तथा सीधे, अर्थात् दोनों प्रकार के शंकु बनते हैं।

3. ऊर्जा का शंकु-यदि किसी पारितन्त्र के विभिन्न जैविक घटकों में संचित ऊर्जा को आधार मानकर शंकु का निर्माण करें तो इसे ऊर्जा का शंकु कहते हैं यह शंकु हमेशा सीधा बनता है, क्योंकि प्रत्येक पोषी स्तरों में ऊर्जा में कमी आती जाती है। (लघु उत्तरीय प्रश्न क्र. 6 का चित्र देखें।) ऊर्जा के शंकु को सीधा बनने का कारण-चूँकि प्रत्येक पोषी स्तर में ऊर्जा की मात्रा कम होती जाती है इस कारण ऊर्जा का शंकु हमेशा सीधा ही बनता है।

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 9

तालाब के जैव भार काशंकु-किसी पारिस्थितिक तन्त्र में जीवित जीवों का इकाई क्षेत्र में शुष्कभार जीव भार कहलाता है। सामान्यत: उत्पादकों का भार सबसे ज्यादा होता है ।
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 10
इसके बाद भार क्रमशः कम होता जाता है इस कारण जीवभार का शंकु सीधा बनता है, लेकिन तालाब पारिस्थितिक तन्त्र इसका अपवाद है अर्थात् उपभोक्ता यह उल्टा बनता है क्योंकि तालाब में शैवालों अर्थात् उत्पादों का भार सबसे कम होता है। कीटों और दूसरे सूक्ष्म जीवों का भार उत्पादक उत्पादों से ज्यादा होता है। इसी प्रकार छोटी मछलियों का भार कीटों से ज्यादा और उन पर आश्रित बड़ी मछलियों का भार सबसे ज्यादा होता है|

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प्रश्न 10.
प्राथमिक उत्पादकता क्या है ? उन कारकों की संक्षेप में चर्चा कीजिए जो प्राथमिक उत्पादकता को प्रभावित करते हैं
उत्तर
हरे पादपों द्वारा उत्पादित द्रव्यों की कुल मात्रा को प्राथमिक उत्पादन (Primary production) कहा जाता है। इसे प्रति इकाई समय में प्रति इकाई क्षेत्रफल में उत्पादित जैव भार या संचित ऊर्जा के रूप में व्यक्त करते हैं । सामान्यतया इसे ग्राम/मीटर वर्ष के रूप में व्यक्त किया जाता है। प्राथमिक उत्पादकता दो प्रकार की होती है-

  • सकल (Gross) तथा
  • नेट (Net) या वास्तविक या शुद्ध।

प्राथमिक उत्पादकों द्वारा ऊर्जा के पूर्ण अवशोषण की दर को या कार्बनिक पदार्थों यथा जैव भार के कुल उत्पादन की दर को सकल प्राथमिक उत्पादकता (Gross primary productivity) कहते हैं तथा उत्पादकों को श्वसन क्रिया के पश्चात् बचे हुए जैव भार या ऊर्जा की दर को वास्तविक या नेट प्राथमिक उत्पादकता कहते हैं अर्थात् वास्तविक या नेट प्राथमिक उत्पादकता (NPP) = सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP)-श्वसन दर (R)।

प्राथमिक उत्पादकता, प्रकाश संश्लेषण तथा श्वसन को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारकों से सर्वाधिक प्रभावित होती है जैसे-विकिरण, तापमान, प्रकाश, मृदा की आर्द्रता आदि। जलीय पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादकता प्रकाश के कारण सीमित रहती है। महासागरों (गहरे) में पोषक तत्व (जैसे-नाइट्रोजन, फॉस्फोरस आदि) उत्पादकता को सीमित करते हैं।

प्रश्न 11.
अपघटन की परिभाषा दीजिए तथा अपघटन की प्रक्रिया एवं उसके उत्पादों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
आपने शायद सुना होगा कि केंचुए किसान के मित्र होते हैं, क्योंकि ये खेतों और बगीचों में जटिल कार्बनिक पदार्थों का खण्डन करने के साथ-साथ मृदा को भुरभुरा बनाते हैं। इसी प्रकार अपघटक (Decomposer) जटिल कार्बनिक पदार्थों को अकार्बनिक तत्वों जैसे CO2, जल व पोषक पदार्थों में खण्डित
करने में सहायता करते हैं तथा इस प्रक्रिया को अपघटन (Decomposition) कहते हैं।

पादपों के मृत अवशेष ‘ जैसे–पत्तियाँ, छाल, टहनियाँ, पुष्प एवं प्राणियों के मृत अवशेष, मल सहित अपरद (Detritus) बनाते हैं जो कि अपघटन हेतु कच्चे माल का काम करते हैं। इस प्रक्रिया में कवक, जीवाणुओं, अन्य सूक्ष्मजीवों के अतिरिक्त छोटे प्राणियों जैसे-निमेटोड, कीट, केंचुए आदि का मुख्य योगदान रहता है। अपघटन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरण-खण्डन, निक्षालन अपचयन, ह्यूमीफिकेशन (Humification), खनिजीकरण है।

ह्यूमीफिकेशन तथा खनिजीकरण की प्रक्रियाएँ अपघटन के समय मृदा में सम्पन्न होती हैं। हयूमीफिकेशन के कारण एक गहरे रंग के क्रिस्टल रहित पदार्थ का निर्माण होता है जिसे ह्यूमस (Humus) कहते हैं । ह्यूमस सूक्ष्मजैविकी क्रियाओं के लिये उच्च प्रतिरोधी होता है और इसका अपघटन बहुत धीमी गति से होना है। स्वभाव से कोलॉइडल होने के कारण यह पोषक के भण्डार का कार्य करता है। ह्यूमस पुनः सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित होता है और खनिजीकरण प्रक्रिया के द्वारा अकार्बनिक पोषक उत्पन्न होते हैं।

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प्रश्न 12.
पारिस्थितिक तन्त्र में ऊर्जा के प्रवाह को समझाइए।
अथवा
पारिस्थितिक तन्त्र में ऊर्जा का प्रवाह क्या है? खाद्य श्रृंखला में इसका ह्रास होता है, क्यों?
अथवा
पारितन्त्र में ऊर्जा के प्रवाह से क्या तात्पर्य है ? किसी पारितन्त्र में विभिन्न पोषी स्तरों पर ऊर्जा का किस प्रकार से ह्रास होता है ? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
पारिस्थितिक तन्त्र में ऊर्जा का प्रवाह-किसी पारिस्थितिक तन्त्र में ऊर्जा स्रोत से ग्रहण की गई ऊर्जा को उत्पादकों से विभिन्न उपभोक्ताओं और अपघटकों की ओर भोजन के रूप में स्थानान्तरण होने की क्रिया को ऊर्जा का प्रवाह कहते हैं। पारितन्त्र में ऊर्जा का ह्रास-सूर्य द्वारा उत्सर्जित ऊर्जा के एक या दो प्रतिशत भाग को हरे पौधे प्रकाशसंश्लेषण की क्रिया के द्वारा संगृहीत करते हैं तथा भोज्य पदार्थों में रासायनिक बन्ध के रूप मे इकट्ठा कर लेते हैं।

डॉ. कैलाश चन्द्र (1972) के अनुसार-पौधों द्वारा भोज्य पदार्थों के रूप में संचित ऊर्जा का लगभग 90% स्वयं की जैविक क्रियाओं और उसके शरीर के बाहर ऊष्मा के रूप में निकल जाता है। शेष 10% भाग संचित भोज्य पदार्थ के रूप में प्राथमिक उपभोक्ताओं द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है। इसी प्रकार प्राथमिक उपभोक्ता भी प्राप्त

ऊर्जा का 90% भाग खर्च कर देते हैं और 10% भाग अगली पारितन्त्र श्रेणी को स्थानांतरित कर देते हैं। पारितन्त्र में यही क्रम चलता रहता है और अन्त में अपघटक मृत जीवों के शरीर में बची शेष ऊर्जा के कुछ भाग को बाहरी वातावरण में मुक्त कर देते हैं और कुछ का स्वयं उपयोग कर लेते हैं । इस प्रकार पारितन्त्र में ऊर्जा का एक दिशीय प्रव ना रहता है तथा प्रत्येक स्तर में इसमें कमी आती रहती है। अतः पारितन्त्र में आहार-श्रृंखला जितनी छोटी होगी, ऊर्जा का ह्यस उतना ही कम होगा।

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प्रश्न 13.
एक पारिस्थितिक तंत्र में एक अवसादी चक्र की महत्वपूर्ण विशिष्टताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर
एक पारिस्थितिक तंत्र में अवसादी चक्र की महत्वपूर्ण विशिष्टताएँ निम्नलिखित हैं

  • अवसादन चक्र जैव-भू रसायन चक्र (Biogiochemical cycle) का एक प्रकार है।
  • अवसादी चक्र (Sedimentary cycle) में पोषक तत्वों का संचय पृथ्वी की चट्टानों में होता है। उदाहरण के लिए, फॉस्फोरस, पोटैशियम, कैल्सियम, सल्फर आदि के चक्र।
  • ये चक्र अपेक्षाकृत अधिक धीमें होते हैं। ये अधिक परिपूर्ण (Perfect) भी नहीं होते क्योंकि चक्रित तत्व किसी भी संचय स्थल में फँसकर रह जाते हैं तथा चक्रण से बाहर हो जाते हैं। अतः इनकी प्रकृति में उपलब्धता पर गहरा प्रभाव पड़ता है, हो सकता है यह रूकावट सैकड़ों से सहस्रों वर्षों के लिए बनी रहे।

प्रश्न 14.
एक पारिस्थितिक तंत्र में कार्बन चक्रण की महत्वपूर्ण विशिष्टताओं की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
सजीवों के शुष्क भार का 49% भाग कार्बन से बना होता है। समुद्र में 71% कार्बन विलेय के रूप में विद्यमान है। यह सागरीय कार्बन भण्डार वायुमण्डल में CO2, की मात्रा को नियमित करता है। कुल भूमण्डलीय कार्बन का केवल 1% भाग ही वायुमण्डल में समाहित है। जीवाश्मी ईंधन भी कार्बन के भण्डार का प्रतिनिधित्व करता है। कार्बन चक्र वायुमण्डल, सागर तथा जीवित व मृतजीवों द्वारा सम्पन्न होता है। जैवमण्डल में प्रकाश संश्लेषण के द्वारा प्रतिवर्ष 4×1013 कि.ग्रा. कार्बन का स्थिरीकरण होता है। एक महत्वपूर्ण कार्बन की मात्रा CO2, के रूप में उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं के श्वसन क्रिया के माध्यम से वायुमण्डल में वापस आती है। इसके साथ ही भूमि, कचरा सामग्री एवं मृत कार्बनिक पदार्थों के अपघटन प्रक्रिया द्वारा भी CO2, की काफी मात्रा अपघटकों द्वारा छोड़ी जाती है।

यौगिकीकृत कार्बन की कुछ मात्रा अवसादों में नष्ट होती है और संचरण द्वारा निकाली जाती है। लकड़ी के जलाने, जंगली आग एवं जीवाश्म ईंधन के जलने के कारण, कार्बनिक सामग्री, ज्वालामुखीय क्रियाओं आदि के अतिरिक्त स्रोतों द्वारा वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड को मुक्त करता है।

कार्बन चक्र में मानवीय क्रियाकलापों का महत्वपूर्ण प्रभाव है। तेजी से जंगलों का विनाश तथा परिवहन एवं ऊर्जा के लिए जीवाश्मी ईंधनों को जलाने आदि से, महत्वपूर्ण रूप से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड को मुक्त करने की दर बढ़ी है।

पारितंत्र अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

पारितंत्र वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है
(a) सौर ऊर्जा
(b) हरे पौधे
(c) भोज्य पदार्थ
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर
(a) सौर ऊर्जा

प्रश्न 2.
वृक्ष का पारिस्थितिक तंत्र में संख्या का पिरामिड होगा
(a) उल्टा
(b) सीधा
(c) (a) एवं (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(a) उल्टा

प्रश्न 3.
मनुष्य होता है
(a) उत्पादक
(b) मांसाहारी
(c) सर्वाहारी
(d) शाकाहारी।
उत्तर
(c) सर्वाहारी

प्रश्न 4.
मानव निर्मित पारिस्थितिक तंत्र है
(a) वन
(b) तालाब
(c) मछली घर
(d) झील।
उत्तर
(c) मछली घर

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प्रश्न 5.
इनमें से अपघटक है
(a) जीवाणु व कवक
(b) शैवाल
(c) चूहे
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर
(a) जीवाणु व कवक

प्रश्न 6.
खाद्य श्रृंखला प्रारंभ होती है
(a) प्रकाश-संश्लेषण से
(b) श्वसन से
(c) अपघटन से
(d) N2 के स्थिरीकरण से।
उत्तर
(a) प्रकाश-संश्लेषण से

प्रश्न 7.
खाद्य जाल बनती है
(a) एक खाद्य श्रृंखला से
(b) दो खाद्य श्रृंखला से
(c) परस्पर जुड़ी खाद्य श्रृंखलाओं से
(d) तीन खाद्य श्रृंखला से।
उत्तर
(c) परस्पर जुड़ी खाद्य श्रृंखलाओं से

प्रश्न 8.
इकोसिस्टम शब्द का सर्वप्रथम उपयोग किया था
(a) टेन्सले ने
(b) ओडम ने
(c) रीटर ने
(d) मिश्रा व पुरी ने।
उत्तर
(a) टेन्सले ने

प्रश्न 9.
प्राथमिक या प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता कहलाते हैं
(a) स्वपोषी
(b) शाकाहारी
(c) मांसाहारी
(d) रक्तभक्षी।
उत्तर
(b) शाकाहारी

प्रश्न 10.
खाद्य श्रृंखला के प्रारंभिक जीव होते हैं
(a) प्रकाश-संश्लेषी
(b) परजीवी
(c) सहजीवी
(d) मृतोपजीवी।
उत्तर
(a) प्रकाश-संश्लेषी

प्रश्न 11.
सही खाद्य श्रृंखला है
(a) घास, टिड्डे, मेढक, साँप, बाज़
(b) घास, मेढक, साँप, मोर
(c) घास, मोर, टिड्डे, बाज़
(d) घास, साँप, शशक
उत्तर
(a) घास, टिड्डे, मेढक, साँप, बाज़

प्रश्न 12.
झील के पारिस्थितिक तंत्र में जैवभार का पिरामिड होता है
(a) सीधा
(b) उल्टा
(c) उल्टा व सीधा दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर
(b) उल्टा

प्रश्न 13.
‘बायोसीनोसिस’ शब्द का उपयोग करने वाले वैज्ञानिक
(a) थाइनमैन
(b) कार्ल मोबियस
(c) एस.ए. फोर्ब्स
(d) फ्रेडरिक
उत्तर
(b) कार्ल मोबियस

प्रश्न 14.
ऊर्जा का पिरामिड होता है
(a) हमेशा सीधा
(b) हमेशा उल्टा
(c) उल्टा व सीधा
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(a) हमेशा सीधा

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प्रश्न 15.
समुदाय व पर्यावरण की मिली-जुली इकाई कहलाती है
(a) परितंत्र
(b) खाद्य जाल
(c) खाद्य श्रृंखला
(d) पारिस्थितिक शंकु।
उत्तर
(a) परितंत्र

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिये

1. दो समीपस्थ जीवोमों के मध्य उपस्थित संक्रमण क्षेत्र ……………… कहलाता है।
2. …………….. ने सर्वप्रथम इकोसिस्टम शब्द का उपयोग किया था।
3. पारिस्थितिक तंत्रों में ऊर्जा का मूल स्रोत ……………… होता है।
4. नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला बैक्टीरिया ……………… कहलाता है।
5. प्रत्येक पारिस्थितिक तंत्र ऊर्जा के लिए ……………… पर आश्रित होता है।
6. पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन को ……………… कहते हैं।
7. किसी स्थान विशेष पर उपस्थित समस्त पौधे उस स्थान का ……………… बनाते हैं।
8. बड़े पारिस्थितिक तंत्र को ……………… कहते हैं।
उत्तर

  1. इकोटोन
  2. टेन्सले
  3. सूर्य प्रकाश
  4. राइजोबियम
  5. सौर ऊर्जा
  6. समस्थिरता
  7. पादप जाल
  8. जीवोम।

3. सही जोड़ी बनाइए

I. ‘A’ – ‘B’

1. पारिस्थितिक तंत्र – (a) प्राथमिक उपभोक्ता
2. भेड़िया, मोर – (b) ऊर्जा प्रवाह
3. शेर, साँप, चीता – (c) एक बन्द तंत्र
4. पृथ्वी – (d) पारिस्थितिकी की मूल क्रियात्मक इकाई
5. 10% नियम – (e) द्वितीयक उपभोक्ता
6. भेड़, बकरी – (f) तृतीयक उपभोक्ता।
उत्तर
1. (d), 2. (e), 3. (f), 4. (c), 5. (b), 6. (a).

II. ‘A’ – ‘B’

1. ए. जी. टेन्सले – (a) सरलतम पारिस्थितिक तंत्र
2. सर्वाधिक स्थायी पारिस्थितिक तंत्र – (b) इकोसिस्टम
3. पारिस्थितिकी की मूल इकाई – (c) मेक्रोफाइट्स
4. सबसे कम स्थायी पारिस्थितिक तंत्र – (d) पारिस्थितिक तंत्र
5. जलकाय सतह के जीव – (e) जटिलतम पारिस्थितिक तंत्र।
उत्तर
1. (b), 2. (e), 3. (d), 4. (a), 5. (c)

4. एक शब्द में उत्तर दीजिए

1. पारिस्थितिक तन्त्र के दो घटकों के नाम लिखिये।
2. इकोसिस्टम शब्द का प्रयोग किसने किया था ?
3. कौन-सा पारिस्थितिक तन्त्र सर्वाधिक स्थायी होता है ?
4. उस पारिस्थितिक तन्त्र का नाम लिखिये जो सबसे कम स्थायी होता है।
5. सर्वाधिक स्तरीकरण प्रदर्शित करने वाले पारिस्थितिक तन्त्र का नाम लिखिये।
6. किन्हीं दो प्रकार की खाद्य श्रृंखलाओं के नाम लिखिये।
7. बहुत-सी खाद्य श्रृंखलाओं के परस्पर जुड़ने के कारण निर्मित संरचना को क्या कहते हैं ?
8. पारिस्थितिक तंत्र की मूल इकाई का नाम लिखिये।
9. सर्वाधिक उत्पादकता प्रदर्शित करने वाले पारिस्थितिक तन्त्र का नाम लिखिये।
10.जलकाय की सतह पर पाये जाने वाले जीवों को क्या कहते हैं ?
11.दो समीपस्थ जीवोमों के मध्य उपस्थित संक्रमण क्षेत्र को क्या कहते हैं ?
12.अनुक्रमण शब्द का सर्वप्रथम उपयोग किसने किया था ?
13.नग्न चट्टान से प्रारंभ होने वाला अनुक्रमण ।
14.मरुक्रमण कहाँ से प्रारंभ होता है ?
उत्तर

  1. जैविक घटक, अजैविक घटक
  2. ए.जी. टेन्सले
  3. महासागरीय
  4. मरुस्थलीय
  5. जलीय
  6. चारण, अपरद
  7. खाद्य जाल
  8. उत्पादक
  9. महासागरीय
  10. बेन्थोज
  11. इकाटोन
  12. हुल्ट (1885)
  13. लिथोसियर
  14. चट्टानों से।

पारितंत्र अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मृदा निर्माण की प्रक्रिया को क्या कहते हैं ?
उत्तर
पीडोजिनेसिस।

प्रश्न 2.
ऊर्जा का पिरामिड कैसा होता है ?
उत्तर
हमेशा सीधा।

प्रश्न 3.
कौन-सा पारिस्थितिक तन्त्र सर्वाधिक स्थायी होता है ?
उत्तर
जटिलतम पारिस्थितिक तंत्र

प्रश्न 4.
बहुत सी खाद्य श्रृंखलाओं के परस्पर जुड़ने के कारण निर्मित संरचना को क्या कहते हैं?
उत्तर
खाद्य जाल।

प्रश्न 5.
सर्वाधिक उत्पादकता प्रदर्शित करने वाले पारिस्थितिक तन्त्र का नाम लिखिये।
उत्तर
उष्ण कटिबंधीय पारिस्थितिक तंत्र।

प्रश्न 6.
पारिस्थितिक तंत्र में कवक एवं जीवाणु क्या कहलाते हैं ?
उत्तर
सूक्ष्म उपभोक्ता या अपघटक।

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प्रश्न 7.
एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर तक कितनी ऊर्जा पहुँचती है ?
उत्तर
10%।

प्रश्न 8.
रसायन संश्लेषी जीवाणु किस प्रकार का घटक है ?
उत्तर
स्वपोषित।

प्रश्न 9.
प्रो. आर. मिश्रा द्वारा पारिस्थितिक तंत्र के अनुसार दिये गये शब्द को लिखिए।
उत्तर
इकोकोज्म (Ecocosm)।

प्रश्न 10.
हरे पादपों का कौन-सा पोषण स्तर है ?
उत्तर
पोषण स्तर प्रथम।

प्रश्न 11.
उत्पादक के लिए परिवर्तक शब्द किसने दिया था ?
उत्तर
इ.जे. कोरोमेन्डी (E.J. Koromandy) ने।

प्रश्न 12.
किन्हीं दो अवसादी चक्रों के नाम लिखिए।
उत्तर

  • फॉस्फोरस चक्र
  • सल्फर चक्र।

प्रश्न 13.
ऊर्जा के स्तूप (पिरामिड) हमेशा होते हैं ?
उत्तर
सीधा।

प्रश्न 14.
अपघटकों के उदाहरण हैं ?
उत्तर
जीवाणु एवं कवक।

प्रश्न 15.
ऊर्जा के 10% का नियम किसने दिया ?
उत्तर
लिण्डेमान ने।

प्रश्न 16.
पौधे नाइट्रोजन को किस रूप में ग्रहण करते हैं ?
उत्तर
नाइट्रोजन के यौगिक (नाइट्रेट आयन NO5 ) के रूप में।

प्रश्न 17.
दो प्रकार के खाद्य श्रृंखलाओं के नाम लिखिए।
उत्तर
चारण खाद्य श्रृंखला, अपरदन खाद्य शृंखला।

पारितंत्र लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पारिस्थितिक तंत्र के जैविक व अजैविक घटकों के नाम लिखिये।
उत्तर
वातावरण के मुख्य घटक निम्नानुसार हैं
(A) अजैविक घटक-ये दो प्रकार के होते हैं

  • ऊर्जा-प्रकाश, ताप तथा रासायनिक पदार्थों की ऊर्जा।
  • पदार्थ-पानी, मिट्टी, लवण इत्यादि।

(B) अजैविक घटक-ये तीन प्रकार के होते हैं

  • उत्पादक-हरे पौधे।
  • उपभोक्ता-प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक।
  • अपघटक-जीवाणु एवं कवक।

प्रश्न 2.
वायुमण्डल के विभिन्न घटकों के नाम तथा उनका अनुपात लिखिए।
उत्तर
वायुमण्डल के घटकों के नाम तथा उनका अनुपातनाम

  • नाम – अनुपात
  • ऑक्सीजन – 20%
  • नाइट्रोजन – 79%
  • कार्बन-डाइऑक्साइड – 0.03%
  • हाइड्रोजन – 0.00005%

इसके अलावा शेष गैसें, जैसे-हीलियम, आर्गन, नियॉन तथा क्रिप्टॉन अत्यल्प मात्रा में पायी जाती हैं।

प्रश्न 3.
अपमार्जक एवं अपघटक में अन्तर बताइए।
उत्तर
अपमार्जक वे जीव हैं, जो दूसरे जीवों के मृत शरीर को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। जैसेगिद्ध। जबकि अपघटक वे जीव हैं, जो मृत जीवों के शरीर को उनके अवयवों में विघटित कर देते हैं, जैसेजीवाणु एवं कवक।

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प्रश्न 4.
जीवोम एवं परितन्त्र में अन्तर बताइए।
उत्तर
किसी निश्चित क्षेत्र में आपस में जुड़े वातावरणीय तथा जीवीय घटकों को एक साथ परितन्त्र कहते हैं। यह जल की एक बूंद से लेकर समुद्र इतना बड़ा हो सकता है, जबकि बहुत बड़े परितन्त्र को जीवोम कहते हैं। जैसे-महासागर।

प्रश्न 5.
पारिस्थितिक तंत्र के जैविक घटकों के नाम लिखिये।
उत्तर
(1) उत्पादक-सभी हरे–पौधे (दूब, जौ, आम आदि)।
(2) उपभोक्ता-

  • प्राथमिक उपभोक्ता-सभी शाकाहारी जन्तु (बकरी, टिड्डे, चूहा, हिरण आदि)।
  • द्वितीयक उपभोक्ता-शाकाहारियों को खाने वाले मांसाहारी (सियार, लोमड़ी, मेंढक आदि)।
  • तृतीयक उपभोक्ता-द्वितीयक उपभोक्ता को खाने वाले जन्तु (शेर, बाघ, सर्प आदि)।

(3) अपघटक-वे जीव जो मृत जीवों के शरीर को अनेक अवयवों में अपघटित कर देते हैं। (जीवाणु, कवक)

प्रश्न 6.
केवल चित्र की सहायता से घास पारिस्थितिक तन्त्र में ऊर्जा का सीधा पिरामिड बनाकर समझाइए।
उत्तर
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 11

प्रश्न 7.
प्रकृति में नाइट्रोजन चक्र को समझाइये।
उत्तर
वायु में नाइट्रोजन पर्याप्त मात्रा में पायी जाती है। बादल की बिजली और वर्षा के कारण यह नाइट्रोजन ऑक्साइड के रूप में मृदा में मिल जाती है। इसके अलावा कुछ सूक्ष्म जीव भी वायुमंडल की N2 को नाइट्रोजन के ऑक्साइडों (नाइट्राइट, नाइट्रेट) में बदल देते हैं जिसे पौधे अवशोषित करके अपने लिए आवश्यक प्रोटीन बनाते हैं इनसे यह प्रोटीन जन्तुओं में जाता है और जब जीव मरते हैं तो अपघटक जीवों के प्रोटीन की N2 को गैस के रूप में पुनः वातावरण में मुक्त कर देते हैं।
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 12

प्रश्न 8.
प्रकृति में सल्फर चक्र को रेखाचित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 13

प्रश्न 9.
जलवायु के प्रकाश कारक का पौधों पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर
प्रकाश पारिस्थितिक-तन्त्र का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो सम्पूर्ण पारितन्त्र को ऊर्जा देता है। हरे पौधे इसे अवशोषित कर प्रकाश-संश्लेषण करते हैं । इसी कारण प्रकाश की तीव्रता, अवधि इत्यादि का पादपों की वृद्धि पर प्रभाव पड़ता है। प्रकाश तीव्रता की आवश्यकता के आधार पर पादप दो प्रकार के होते हैं

  • हेलियोफाइट्स-ये तेज प्रकाश में अच्छी वृद्धि करते हैं, अर्थात् इनमें तेज प्रकाश में संश्लेषण की क्षमता होती है।
  • सायोफाइट्स-ये कम प्रकाश में प्रकाश-संश्लेषण करते हैं, अर्थात् ये छायादार स्थानों में उगते हैं।

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प्रश्न 10.
आहार जाल का अर्थ स्पष्ट करते हुए एक आहार जाल का रेखाचित्र बनाइए।
उत्तर
खाद्य-जाल-पारितन्त्र का कोई भी जीव एक से अधिक खाद्य श्रृंखलाओं का सदस्य हो सकता है। ऐसा होने पर वह विभिन्न आहार श्रृंखलाओं के बीच एक कड़ी का काम करता है। इस प्रकार एक जैव समुदाय की सभी आहार श्रृंखलाएँ मिलकर एक जाल का रूप ले लेती हैं जिसे खाद्य जाल या आहार जाल कहते हैं।
उदाहरण-घास पारितन्त्र में टिड्डे, चूहे, शशक, हिरण आदि पाये जाते हैं, जिन्हें मेढक, पक्षी, भेड़िया आदि जन्तु खाकर एक खाद्य जाल की संरचना करते हैं इस पारितन्त्र में एक भी श्रृंखला सीधी नहीं रह पाती है।
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प्रश्न 11.
प्रकृति में कैल्सियम चक्र को रेखाचित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 15

प्रश्न 12.
वृक्ष एवं तालाब पारिस्थितिक तंत्र के घटकों के संख्या का पिरामिड बनाइये।
उत्तर
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 16

प्रश्न 13.
तालाब पारिस्थितिकी तन्त्र के उपभोक्ता समुदाय को 66-75 शब्दों में समझाइए।
उत्तर
तालाब एक सरल तथा कृमि पारितन्त्र है जिसके अन्दर उपभोक्ता वर्ग के जीव निम्नानुसार होते

  • प्राथमिक उपभोक्ता-इसमें तालाब के शाकाहारी जन्तु प्लवक आते हैं, जैसे-डैफनिया, साइक्लोस, पैरामीशियम, अमीबा। इसके अलावा कुछ नितलस्थ जन्तु, जैसे-अनेक प्रकार की मछलियाँ, क्रस्टेशिया, मोलस्क, कीट तथा भुंग आदि भी प्राथमिक उपभोक्ता की तरह व्यवहार करते हैं।
  • द्वितीयक उपभोक्ता-छोटी शाकाहारी मछलियों तथा कीटों को खाने वाली बड़ी मछलियाँ, मेढक, इत्यादि जीव इस श्रेणी में आते हैं।
  • तृतीयक उपभोक्ता-द्वितीयक उपभोक्ताओं को ग्रहण करने वाले जीव सारस, बगुला एवं मांसाहारी मछलियाँ इस श्रेणी में आते हैं।

प्रश्न 14.
किसी तालाब पारिस्थितिक-तन्त्र के जैवभार के शंकु को समझाइए।
उत्तर
तालाब के जैव भार काशंकु-किसी पारिस्थितिक तन्त्र में जीवित जीवों का इकाई क्षेत्र में शुष्कभार जीव भार कहलाता है। सामान्यत: उत्पादकों का भार सबसे ज्यादा होता है ।
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 17
इसके बाद भार क्रमशः कम होता जाता है इस कारण जीवभार का शंकु सीधा बनता है, लेकिन तालाब पारिस्थितिक तन्त्र इसका अपवाद है अर्थात् उपभोक्ता यह उल्टा बनता है क्योंकि तालाब में शैवालों अर्थात् उत्पादों का भार सबसे कम होता है। कीटों और दूसरे सूक्ष्म जीवों का भार उत्पादक उत्पादों से ज्यादा होता है। इसी प्रकार छोटी मछलियों का भार कीटों से ज्यादा और उन पर आश्रित बड़ी मछलियों का भार सबसे ज्यादा होता है

पारितंत्र दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पारिस्थितिक-तन्त्र में पोषी स्तरों से आप क्या समझते हैं ? विभिन्न प्रकार के आहार शंकुओं का वर्णन कीजिए। संक्षेप में समझाइए कि ऊर्जा शंकु सदैव सीधे ही क्यों होगी?
उत्तर
पोषी स्तर-आहार श्रृंखला या पारिस्थितिक-तन्त्र के उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं के विभिन्न स्तरों को पोषक स्तर कहते हैं। दूसरे शब्दों में आहार श्रृंखला की प्रत्येक कड़ी पोषी या पोषक स्तर कहलाती
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 18

आहार शंकु या पारिस्थितिक शंकु- यदि पारितन्त्र के विभिन्न पोषक स्तरों के जीवों को उनकी शेर संख्या, जीवभार तथा उनमें संचित ऊर्जा की मात्राओं बाघ के अनुपात को चित्र द्वारा व्यक्त करें तो एक शंकु जैसी आकृति प्राप्त होती है जिसे आहार शंकु कहते हैं। ये

1. जीव संख्या का शंकु- जब आहार श्रृंखला को पोषक स्तरों का शंकु पोषक स्तरों में उपस्थित जीवों की संख्या के आधार पर बनाते हैं तो इसे जीव संख्या का शंकु कहते हैं। यदि हम संख्या को आधारानें तो उत्पादकों की संख्या सबसे अधिक तथा इसके बाद के पोषक स्तरों के जीवों की संख्या क्रम से कम होती जाती है इस कारण इसका शंकु सीधा बनता है, लेकिन एक वृक्ष को आधार मानने पर यह उल्टा बनता है।

2. जीव भार का शंकु-यदि किसी पारितन्त्र में संख्या के स्थान पर जीवों के कुल भार के आधार पर पोषी स्तरों को देखें तो उल्टे तथा सीधे, अर्थात् दोनों प्रकार के शंकु बनते हैं।

3. ऊर्जा का शंकु-यदि किसी पारितन्त्र के विभिन्न जैविक घटकों में संचित ऊर्जा को आधार मानकर शंकु का निर्माण करें तो इसे ऊर्जा का शंकु कहते हैं यह शंकु हमेशा सीधा बनता है, क्योंकि प्रत्येक पोषी स्तरों में ऊर्जा में कमी आती जाती है। (लघु उत्तरीय प्रश्न क्र. 6 का चित्र देखें।) ऊर्जा के शंकु को सीधा बनने का कारण-चूँकि प्रत्येक पोषी स्तर में ऊर्जा की मात्रा कम होती जाती है इस कारण ऊर्जा का शंकु हमेशा सीधा ही बनता है।

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प्रश्न 2.
स्थलीय बायोम से क्या तात्पर्य है ? ये कितने प्रकार के होते हैं ? किसी एक बायोम का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर
स्थलीय बायोम-प्राकृतिक रूप से बड़े-बड़े क्षेत्रों में फैले पारितन्त्रों को बायोम कहते हैं अर्थात् बायोम बड़े पारिस्थितिक तन्त्र हैं। अगर बायोम भूमि पर हो तब उसे स्थलीय बायोम कहते हैं । स्थलीय बायोम निम्न प्रकार के हो सकते हैं
(अ) वनीय बायोम-ये निम्न प्रकार के हो सकते हैं

  • ऊष्ण कटिबन्धीय वन
  • शीतोष्ण कटिबन्धीय वन
  • टैगा वन।

(ब) घास स्थलीय बायोम-ये निम्न प्रकार के हो सकते हैं

  • ऊष्ण कटिबन्धीय एवं
  • शीतोष्ण कटिबन्धीय।

(स) रेगिस्तानी बायोम
(द) टुण्ड्रा बायोम
घास स्थलीय बायोम या पारितन्त्र-वह बायोम (पारितन्त्र) है जिसमें लम्बी-लम्बी घासें पायी जाती हैं इसकी भूमि उपजाऊ होती है। यहाँ पर लगभग 25 से 75 सेमी. औसतन वार्षिक वर्षा होती है। इस पारितन्त्र (बायोम) के घटक निम्नानुसार होते हैं-

(A) अजीवीय घटक-इसमें भूमि के कार्बनिक तथा अकार्बनिक पदार्थ तथा जलवायुवीय घटक आते हैं

(B) जीवीय घटक-इसके जीवीय घटक निम्नानुसार होते हैं.

  • उत्पादक-इस वर्ग में घासें, शाकीय पादप तथा झाड़ियाँ आती हैं।
  • प्राथमिक उपभोक्ता-इस क्षेत्र के शाकाहारी जन्तुओं में गाय, भैंस, बकरियाँ, भेड़, हिरन, खरगोश, चूहे, कीट, पक्षी प्रमुख होते हैं।
  • द्वितीयक उपभोक्ता-कई प्रकार के मांसाहारी जीव जो प्राथमिक उपभोक्ताओं का भक्षण करते हैं, द्वितीयक उपभोक्ता कहलाते हैं। साँप, पक्षी, लोमड़ी, भेड़िया आदि इस समूह के प्राणी हैं।
  • तृतीयक उपभोक्ता-ये जीवधारी द्वितीयक उपभोक्ताओं को खाने के कारण उच्च मांसाहारी कहलाते हैं, क्योंकि इस पारितन्त्र में इन्हें खाने वाला दूसरा जीव नहीं होता। बाज, मोर इसी श्रेणी में रखे जाते हैं।
  • अपघटक-अनेक प्रकार के सूक्ष्मजीवी कवक जीवाणु एवं एक्टिनोमाइसीट्स घास के मैदान के अपघटक होते हैं। ये उत्पादकों तथा उपभोक्ताओं के मृत शरीर व उत्तार्जी पदार्थों को विघटित करके उन्हें पुनः अजीवित घटकों में बदल देते हैं, जो पुनः पेड़-पौधों को प्राप्त हो जाते हैं।

प्रश्न 3.
पारिस्थितिक तंत्र में खनिजों के चक्रीकरण को समझाइये।
उत्तर
जैव-भूगर्भीय रासायनिक चक्र—पारितन्त्र या प्रकृति में पोषक पदार्थों और मानव निर्मित वस्तुओं सहित (रासायनिक खादों, दवाओं इत्यादि के रूप में प्रयुक्त पदार्थ) दूसरे कई अन्य पदार्थ अजीवीय से जीवीय और पुन: अजीवीय घटकों में एक चक्र के रूप में प्रवाहित होते रहते हैं, इस चक्र को जैव-भूगर्भीय रासायनिक चक्र या खनिजों का चक्रीकरण कहते हैं। प्रमुख चक्र हैं N2 चक्र, O2 चक्र, कार्बन चक्र आदि।

सल्फर चक्र-प्रकृति में यह तत्व रूप में मिलती है, कुछ जीवाणु इसे सल्फेट में बदल देते हैं, जिसे पौधे ग्रहण कर लेते हैं, पौधों से यह जन्तुओं में आती है और जब ये सब मरते हैं, तब जीवाणु इन्हें H2S और तात्विक रूप में मुक्त कर देते हैं, जो जीवाणुओं द्वारा पुनः SC के रूप में रूपान्तरित कर दी जाती है
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 19

कैल्सियम चक्र-भूमि से पादप Ca को लवण के रूप में ग्रहण करते हैं उनसे इसे जन्तु ग्रहण करते हैं, जहाँ यह अस्थियों के कवचों में उपस्थित रहता है। जब पादप एवं जन्तु मरते हैं, तब इनके शरीर का अपघटन जीवाणुओं द्वारा किया जाता है और इनके शरीर की Ca को फिर से प्रकृति में मुक्त कर दिया जाता है
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 14 पारितंत्र 20

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MP Board Class 12th Business Studies Important Questions with Answers

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MP Board Class 12th Business Studies Important Questions with Answers

MP Board Class 12th Business Studies: Principles and Functions of Management Important Questions with Answers

  • Chapter 1 Nature and Significance of Management
  • Chapter 2 Principles of Management
  • Chapter 3 Business Environment
  • Chapter 4 Planning
  • Chapter 5 Organising
  • Chapter 6 Staffing
  • Chapter 7 Directing
  • Chapter 8 Controlling

MP Board Class 12th Business Studies: Business Finance and Marketing Important Questions with Answers

  • Chapter 9 Financial Management
  • Chapter 10 Financial Market
  • Chapter 11 Marketing
  • Chapter 12 Consumer Protection
  • Chapter 13 Entrepreneurship Development

MP Board Class 12th Business Studies Syllabus and Marking Scheme

Latest Syllabus and Marks Distribution Business Studies Class XII for the academic year 2019 – 2020 Examination.

Business Studies
Class XII

Time : 3 Hours.
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MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 13 जीव और समष्टियाँ

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 13 जीव और समष्टियाँ

जीव और समष्टियाँ NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
शीत निष्क्रियता (हाइबर्नेशन) से उपरति (डायपॉज) किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर
दोनों ही क्रियाएँ ताप अनुकूलन से संबंधित हैं । प्राणियों में जब जीव प्रवास (Migrate) नहीं कर पाता है तो वह पलायन करके शीत ताप से बचता है, जैसे शीत ऋतुओं में शीत निष्क्रियता (Hibernation) में जाना तथा उस समय पलायन से बचाव का तरीका है। प्रतिकूल परिस्थितियों में झीलों और तालाबों में प्राणी प्लवक (Zooplankton) की अनेक जातियाँ उपरति (Diapause) में आ जाती हैं जो निलंबित (Suspended) परिवर्धन की एक अवस्था है।

दोनों ही क्रियाओं में प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित बचे रहने में सहायता मिलती है। जैसे ही इन्हें उपयुक्त पर्यावरण उपलब्ध होता है, ये अपना सामान्य जीवन व्यतीत करने लगते हैं। इन अवस्थाओं में भोजन ग्रहण, वृद्धि, गतिशीलता तथा प्रजनन क्रियाएँ सुप्त (Dormant) हो जाती हैं।

प्रश्न 2.
अगर समुद्रीय मछली को अलवण जल (फ्रेश वॉटर) की जलजीवशाला (एक्वेरियम) में रखा जाता है तो क्या यह मछली जीवित रह पायेगी? क्यों और क्यों नहीं ?
उत्तर
समुद्रीय जल की लवणता 3% होती है, जो प्रायः सभी समुद्रों में एक समान होती है। इस गुण के कारण समुद्रीय प्राणियों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवासन में कोई बाधा नहीं होती है। जबकि अलवणीय जल में लवणता परिवर्तनशील होती है। समुद्रीय व अलवण जलीय जल में रहने वाले प्राणियों को शरीर में पानी के नियमन की समस्या से सामना करना पड़ता है। शुद्ध जलीय (अलवणीय) प्राणियों को

अंत:परासरण (Endosmosis) से सामना करना पड़ता है, जबकि समुद्रीय प्राणियों को बहि:परासरण (Exosmosis) से सामना करना पड़ता है। जब अलवण जल प्राणी समुद्र के पानी में और समुद्रीय प्राणी अलवण जल में लंबे समय तक नहीं रह सकते क्योंकि उन्हें परासरणीय (Osmotic) समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अतः समुद्रीय मछली को अलवण जल की जलजीवशाला (एक्वेरियम) में रखने पर कुछ समय बाद मर जायेगी।

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प्रश्न 3.
लक्षण प्ररूपी (फीनोटाइपिक) अनुकूलन की परिभाषा दीजिए। एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
आकारिकी लक्षण बाहर से दिखते हैं अत: ये लक्षण प्ररूपी (फीनोटाइपिक),अनुकूलन होते हैं। अत: ऐसे बाहरी लक्षण जिसके कारण वह जीव वहाँ के पर्यावरण में जीवित रहने में सक्षम होता है, उन्हें लक्षण प्रारूप अनुकूलन (Phenotypic adaptation) कहते हैं। उदा.-मरुस्थलीय पादप जैसे-नागफनी, कैक्टस में पत्तियों का अभाव होता है क्योंकि वे काँटों में रूपान्तरित होकर वाष्पोत्सर्जन को न्यून (कम) कर देती है। मरुस्थल में जल की कमी होती है अत: ये जल की कम-से-कम हानि करते हैं। पत्तियों का कार्य हरे चपटे तनों के द्वारा होता है। अत: काँटें पत्तियों का रूपांतरण है तथा तना चपटा व हरा पत्ती सदृश होता है।

प्रश्न 4.
अधिकतर जीवधारी 45° सेंटी. से अधिक तापमान पर जीवित नहीं रह सकते। कुछ सूक्ष्मजीव (माइक्रोब) ऐसे आवास में जहाँ तापमान 100 सेंटी. से अधिक है, कैसे जीवित रहते हैं ?
उत्तर
सभी सजीवों में समस्त प्रकार की उपापचयी क्रियाएँ एक निश्चित न्यून तापक्रम पर प्रारम्भ हो जाती है । तापक्रम के बढ़ने के साथ-साथ उपापचयी क्रिया की दर भी बढ़ जाती है परंतु और अधिक तापमान के बढ़ने के साथ-साथ उपापचयी क्रियाएँ धीरे-धीरे मंद होना प्रारंभ हो जाती हैं। कुछ प्राणियों में जैविक क्रियाएँ अत्यधिक तापक्रम पर भी होती रहती हैं।

जीवाणुओं, कवकों व निम्न पादपों में विभिन्न प्रकार के मोटी भित्ति वाले बीजाणु बनते हैं, जिससे वे उच्च ताप को सह लेते हैं। बीजाणुओं में जनन के दौरान अन्त:बीजाणु (Endospore) बनता है। अन्त:बीजाणु की भित्ति मोटी होती है। बेसिलस एन्थ्रेसिस व क्लॉस्ट्रीडियम टिटैनी का जीवाणु 100°C तापमान को सहन कर सकता है। ताप के प्रति यह रोधकता भित्ति में उपस्थित कैल्सियम डाइपिकोलिक अम्ल की अधिकता के कारण होती है।

प्रश्न 5.
उन गुणों को बताइए जो व्यष्टियों में तो नहीं पर समष्टियों में होते हैं।
उत्तर
समष्टि में कुछ ऐसे गुण होते हैं जो व्यष्टि जीव में नहीं होते। व्यष्टि जन्मता और मरता है लेकिन समष्टि में जन्म दरें और मृत्यु दरें होती हैं । समष्टि में इन दरों को क्रमशः प्रति व्यक्ति जन्म दर और मृत्यु दर कहते हैं इसलिए दर को समष्टि के सदस्यों के संबंधों में संख्या परिवर्तन (वृद्धि या ह्रास) के रूप में प्रकट किया गया है। समष्टि का दूसरा विशिष्ट गुण लिंग अनुपात यानि नर एवं मादा का अनुपात है। व्यष्टि या तो नर है या मादा है लेकिन समष्टि का लिंग अनुपात है (जैसे कि समष्टि का 60 प्रतिशत स्त्री है और 40 प्रतिशत नर है)।

प्रश्न 6.
अगर चरघातांकी रूप से (एक्सपोनेन्शियली) बढ़ रही समष्टि 3 वर्ष में दोगुने साइज की हो जाती है, तो समष्टि की वृद्धि की इन्ट्रिन्सिक दर (r) क्या है ?
उत्तर
चरघातांकी वृद्धि (Exponential growth)-किसी समष्टि की अबाधित वृद्धि उपलब्ध संसाधनों (आहार, स्थान आदि) पर निर्भर करती है असीमित संसाधनों की उपलब्धता होने पर समष्टि में संख्या वृद्धि पूर्ण क्षमता से होती है। जैसा कि डार्विन ने प्राकृतिक वरण सिद्धांत को प्रतिपादित करते हुये प्रेक्षित किया था, इसे चरघातांकी अथवा ज्यामितीय वृद्धि कहते हैं। यदि N साइज की समष्टि में जन्मदर ‘b’ और मृत्यु दर ‘d’ के रूप में निरूपित की जाए, तब इकाई समय अवधि ‘t’ में समष्टि की वृद्धि या कमी होगी
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‘r’ प्राकृतिक वृद्धि की इन्ट्रिन्सिक दर (Intrinsic rate) कहलाती है। यह समष्टि वृद्धि पर जैविक या अजैविक कारकों के प्रभाव को निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण प्राचल (Parameter) है। यदि समष्टि 3 वर्ष में दोगुने साइज की हो जाती है तो समष्टि की वृद्धि की इन्ट्रिन्सिक दर ‘3r’ होगी।

प्रश्न 7.
पादपों में शाकाहारिता (Herbivory) के विरुद्ध रक्षा करने की महत्वपूर्ण विधियाँ बताइये।
उत्तर
पादपों के लिये शाकाहारी प्राणी परभक्षी है। लगभग 25% कीट पादपभक्षी (Phytophagous) है अर्थात् वे पादप रस एवं पौधों के अन्य भाग खाते हैं। पौधों के लिये यह समस्या विशेष रूप से गंभीर है, क्योंकि वे अपने परभक्षियों से दूर नहीं भाग सकते जैसा कि अन्य प्राणी करते हैं। इसलिये पादपों ने अपने बचाव के लिये आश्चर्यजनक रूप से आकारिकी एवं रासायनिक रक्षाविधियाँ विकसित कर ली हैं।

रक्षा के लिये सबसे सामान्य आकारिकी साधन काँटे ( एकेशिया कैक्टस) है। बेर की झाडी में भी काँटे होते हैं । अनेक पौधे इस प्रकार रसायन उत्पन्न करते हैं जो खाए जाने पर शाकाहारियों को बीमार कर देते हैं। खेतों में उगे हुए ऑक (Calotropis) खरपतवार अधिक विषैले ग्लाइकोसाइड उत्पन्न करते हैं जिसके कारण कोई भी पशु इन पौधों को नहीं खाते हैं। पौधों में अनेक रसायन जैसे-निकोटिन, कैफीन, क्वीनीन, अफीम आदि प्राप्त होते हैं। वस्तुतः ये रसायन चरने वाले प्राणियों से बचने की रक्षा विधियाँ हैं।

प्रश्न 8.
ऑर्किड पौधा, आम के पेड़ की शाखा पर उग रहा है। ऑर्किड और आम के पेड़ के बीच पारस्परिक क्रिया का वर्णन आप कैसे करेंगे?
उत्तर
आम की शाखा पर एक अधिपादप (Epiphyte) के रूप में उगने वाला ऑर्किड पौधा एक सहभोजिता (Commensalism) का उदाहरण है। सहभोजिता में एक जाति को लाभ होता है और दूसरे को न तो लाभ होता है और न ही हानि। यहाँ ऑर्किड को फायदा होता है जबकि आम को इससे कोई लाभ नहीं होता है। ऑर्किड का पौधा आम की शाखा पर उगकर प्रकाश, वायु व वातावरण से नमी का अवशोषण करता है।

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प्रश्न 9.
कीट पीड़कों (पेस्ट/इंसेक्ट) के प्रबंध के लिए जैव-नियंत्रण विधि के पीछे क्या पारिस्थितिक सिद्धांत है ?
उत्तर
कीट पीड़कों (पेस्ट/इंसेक्ट) के प्रबंध के लिए जैव-नियंत्रण विधि के पीछे परभक्षी की शिकारनियंत्रण योग्यता पर आधारित पारिस्थितिक सिद्धांत है (based on the prey- regulating ability of the predator)।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित के बीच अंतर कीजिए
(क)शील निष्क्रियता और ग्रीष्म निष्क्रियता (हाइबर्नेशन एंड एस्टीवेशन)
(ख) बाह्योष्मी तथा आंतरोष्मी (एक्टोथर्मिक एंड एंडोथर्मिक)।
उत्तर
(क) शीत निष्क्रियता और ग्रीष्म निष्क्रियता (हाइबर्नेशन एंड एस्टीवेशन) में अंतर शीत निष्क्रियता-कुछ जीव शीत ऋतु के कुप्रभाव से बचने के लिए कुछ समय के लिए अधिक अनुकूल क्षेत्रों में चले जाते हैं । इसे शीत निष्क्रियता कहते हैं। ग्रीष्म निष्क्रियता-कुछ जीव ग्रीष्म ऋतु में गर्मी के कुप्रभाव से बचने के लिए अधिक अनुकूली क्षेत्रों में चले जाते हैं। जैसे गर्मी की अवधि में व्यक्ति दिल्ली से शिमला चला जाए। इसे ग्रीष्म निष्क्रियता कहते हैं।

(ख) बाह्योष्मी तथा आंतरोष्मी (एक्टोथर्मिक एंड एंडोथर्मिक ) में अंतर बाह्योष्मी-शीत रुधिर वाले जीवों में अपने वातावरण के अनुसार अपने शरीर का तापमान बनाए रखने की क्षमता होती है। बहुत सारे सक्रिय बाह्योष्मी जीव जैसे-मेढक, सर्प आदि अपने शरीर की ऊष्मा को बनाए रखने के लिए गतिशील रहते हैं। आंतरोष्मी-ऊष्म रुधिर धारी जन्तु जैसे, पक्षी तथा मनुष्य अपने शरीर की क्रिया क्रियात्मकता द्वारा एक निश्चित तापमान बनाए रखते हैं। बाह्य तापीय उतार-चढ़ाव का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी (नोट) लिखिए
(क) मरुस्थलीय पादपों और प्राणियों का अनुकूलन
(ख) जल की कमी के प्रति पादपों का अनुकूलन
(ग) प्राणियों में व्यावहारिक (बिहेवियोरल) अनुकूलन
(घ) पादपों के लिये प्रकाश का महत्व
(ङ) तापमान और पानी की कमी का प्रभाव तथा प्राणियों का अनुकूलन।।
उत्तर
(क) मरुद्भिद पौधों में शुष्क वातावरण को सहने के लिये निम्न प्रकार के प्रकार्यात्मक अनुकूलन पाये जाते हैं
पत्तियों में अनुकूलन (Adaptations in leaves)

  • मरुद्भिद पौधों की पत्तियाँ छोटी (Small) होती हैं, जिससे वाष्योत्सर्जन (Transpiration) करने वाले क्षेत्रफल में कमी आती है। उदाहरण-केजूराइना (Casurina)।
  • कुछ पौधों जैसे-अकेसिया मेलैनोजाइलॉन (Acacia melanonylon) में पर्णफलक (Leaf lamina) अनुपस्थित होता है तथा पर्णवृन्त (Petiole) चपटा होकर प्रकाश-संश्लेषण का कार्य करता है। इसे फिल्लोड (Phyllode) कहते हैं।
  • कुछ मरुद्भिद पौधों जैसे-ऐलोय (Aloe), ऐगेव (Agave), यूक्का (Yucca) एवं बिगोनिया (Begonia) आदि में पत्तियाँ मोटी, गूदेदार एवं मांसल होती हैं। अत: इनमें जल की अत्यधिक मात्रा संचित रहती है।
  • नागफनी (Opuntia) एवं ऐस्पेरेगस (Asparagus) में पत्तियाँ काँटों (Spines) में रूपान्तरित होती हैं। इसी प्रकार पाइनस (Pinus) की पत्तियाँ लम्बी एवं सूच्याकार (Needle shaped) होकर जल की हानि को कम करते हैं।
  • कुछ मरुद्भिद् पौधों में अनुपत्र (Stipules) काँटों (Spines) में रूपान्तरित होकर वाष्पोत्सर्जन की दर को कम करते हैं। उदाहरण-यूफोर्बिया स्प्लेन्डेन्स (Euphorbia splendens), बेर (Zizvphus jujuba), अकेसिया (Acacia), कैपेरिस (Capparis) आदि।
  • इन पौधों की पत्तियों की बाह्य सतह चमकदार (Shiny) होती है, अतः ये प्रकाश को परावर्तित करके तापमान को कम करने में सहायता करती हैं। उदाहरण- कनेर (Nerium)।
  • कुछ एकबीजपत्री मरुद्भिद् पौधों की पत्तियाँ मुड़ी हुई (Rolled) अथवा वलयित (Folded) होकर रन्ध्रों को अन्दर की ओर छिपा लेती हैं, जिसके कारण वाष्पोत्सर्जन की दर कम हो जाती है। उदाहरणएमोफिला (Ammophila), पोआ (Poa), सोमा (Psomma), एग्रोपायरॉन (Agropyron) आदि।

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(ख) मरुद्भिद् पौधों की आंतरिक संरचना के अनुकूलन

  • इन पौधों के तनों एवं पत्तियों की बाह्य त्वचा (Epidermis) के ऊपर एक मोटी उपत्वचा (Cuticle) पाई जाती है।
  • इनकी बाह्य त्वचा (Epidermis) बहुस्तरीय (Multilayered) भी हो सकती है। उदाहरणनेरियम (Nerium)।
  • बाह्य त्वचा की भित्तियों का मोटा होना, इससे वाष्पोत्सर्जन की दर कम हो जाती है।
  • इन पौधों के पत्तियों की निचली सतह पर धंसे हुए रन्ध्र (Suncken stomata) पाये जाते हैं। यह रन्ध्र, रन्ध्रीय गुहाओं (Stomatal cavities) में स्थित होते हैं जिनमें रोम (Hairs) या रन्ध्रीय रोम (Stomatal hairs) उपस्थित होते हैं। उदाहरण- कनेर (Nerium), पाइनस (Pinus) |
  • इन पौधों की हाइपोडर्मिस (Hypodermis) मोटी भित्ति वाली स्क्लेरेनकायमी कोशिकाओं (Sclerenchymatous cell) की बनी होती है जो कि जल के वाष्पीकरण को रोकते हैं। उदाहरण–पाइनस (Pinus) की पत्तियाँ।
  • इनकी पत्तियों में मीजोफिल (Mesophyll), पैलिसेड ऊतक (Palisade tissue) एवं स्पंजी पैरेनकाइमा (Spongy parenchyma) में स्पष्ट तथा भिन्नित होते हैं।

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  • अन्तरकोशिकीय अवकाश (Intercellular spaces) आकार में बहुत छोटे होते हैं अथवा अनुपस्थित होते हैं।
  • इनमें शरीर को मजबूती प्रदान करने के लिए यान्त्रिक ऊतक (Mechanical tissue) कोलेनकाइमा (Collenchyma) के रूप में तथा स्क्ले रेनकाइमा (Sclerenchyma) के रूप में उपस्थित रहता है।
  • इनके तनों के वल्कुट (Cortex) में क्लोरेनकाइमा भी पाया जाता है।
  • इन पौधों में संवहनी ऊतक (Conducting tissue), दारु (Xylem) तथा पोषवाह (Phloem) के रूप में पूर्णतया विकसित होता है, जिससे जल व पोषक पदार्थों का संवहन (Conduction) आसानी से होता है।
  • इनकी बाह्यत्वचा (Epidermis) के ऊपर रोम (hairs) अथवा कण्टक (Spines) पाये जाते हैं, जो कि वाष्पोत्सर्जन की दर को कम करते हैं।
  • रंध्रों की संख्या कम व पत्ती की निचली सतह में होती है।
  • तनों में धंसे हुए रंध्रों का पाया जाना।

मरुद्भिद पौधों में शुष्क वातावरण को सहने के लिये निम्न प्रकार के प्रकार्यात्मक अनुकूलन पाये जाते हैं
पत्तियों में अनुकूलन (Adaptations in leaves)

  • मरुद्भिद पौधों की पत्तियाँ छोटी (Small) होती हैं, जिससे वाष्योत्सर्जन (Transpiration) करने वाले क्षेत्रफल में कमी आती है। उदाहरण-केजूराइना (Casurina)।
  • कुछ पौधों जैसे-अकेसिया मेलैनोजाइलॉन (Acacia melanonylon) में पर्णफलक (Leaf lamina) अनुपस्थित होता है तथा पर्णवृन्त (Petiole) चपटा होकर प्रकाश-संश्लेषण का कार्य करता है। इसे फिल्लोड (Phyllode) कहते हैं।
  • कुछ मरुद्भिद पौधों जैसे-ऐलोय (Aloe), ऐगेव (Agave), यूक्का (Yucca) एवं बिगोनिया (Begonia) आदि में पत्तियाँ मोटी, गूदेदार एवं मांसल होती हैं। अत: इनमें जल की अत्यधिक मात्रा संचित रहती है।
  • नागफनी (Opuntia) एवं ऐस्पेरेगस (Asparagus) में पत्तियाँ काँटों (Spines) में रूपान्तरित होती हैं। इसी प्रकार पाइनस (Pinus) की पत्तियाँ लम्बी एवं सूच्याकार (Needle shaped) होकर जल की हानि को कम करते हैं।
  • कुछ मरुद्भिद् पौधों में अनुपत्र (Stipules) काँटों (Spines) में रूपान्तरित होकर वाष्पोत्सर्जन की दर को कम करते हैं। उदाहरण-यूफोर्बिया स्प्लेन्डेन्स (Euphorbia splendens), बेर (Zizvphus jujuba), अकेसिया (Acacia), कैपेरिस (Capparis) आदि।
  • इन पौधों की पत्तियों की बाह्य सतह चमकदार (Shiny) होती है, अतः ये प्रकाश को परावर्तित करके तापमान को कम करने में सहायता करती हैं। उदाहरण- कनेर (Nerium)।
  • कुछ एकबीजपत्री मरुद्भिद् पौधों की पत्तियाँ मुड़ी हुई (Rolled) अथवा वलयित (Folded) होकर रन्ध्रों को अन्दर की ओर छिपा लेती हैं, जिसके कारण वाष्पोत्सर्जन की दर कम हो जाती है। उदाहरणएमोफिला (Ammophila), पोआ (Poa), सोमा (Psomma), एग्रोपायरॉन (Agropyron) आदि।

(ग) प्राणियों में व्यावहारिक (बिहेवियोरल) अनुकूलन-कुछ जीव अपने पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों का सामना करने के लिए व्यावहारिक अनुक्रियाएँ दर्शाते हैं। स्तनधारियों में अपने आवास के उच्च तापमान से निपटने के लिये जो कार्यकीय योग्यता होती है, मरुस्थल की छिपकलियों में इस योग्यता की कमी है, लेकिन वे व्यावहारिक साधनों द्वारा अपने शरीर के तापमान को काफी स्थिर बनाये रख सकती है। जब इनका तापमान सुविधा के स्तर से नीचे चला जाता है तब वे धूप सेंककर ऊष्मा अवशोषित करती है लेकिन जब परिवेश का तापमान बढ़ने लगता है तब वे छाया में चली जाती है। कुछ जातियों में भूमि के ऊपर की ऊष्मा से बचने के लिए मिट्टी में बिल खोदने की क्षमता बढ़ती है।

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(घ) पादपों के लिये प्रकाश का महत्व-प्रकाश पारिस्थितिक तन्त्र का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो सम्पूर्ण परितन्त्र को ऊर्जा देता है। हरे पौधे इसे अवशोषित कर प्रकाश संश्लेषण करते हैं। इसी कारण प्रकाश की तीव्रता, अवधि इत्यादि का पादपों की वृद्धि पर प्रभाव पड़ता है। प्रकाश तीव्रता की आवश्यकता के आधार पर पादप दो प्रकार के होते हैं-

(i) हेलियोफाइट्स-ये तेज प्रकाश में अच्छी वृद्धि करते हैं अर्थात् इनमें तेज प्रकाश में संश्लेषण की क्षमता होती है।

(ii) सायोफाइट्स-ये कम प्रकाश में प्रकाश-संश्लेषण करते हैं अर्थात् ये छायादार स्थानों में उगते हैं। इमरसन प्रभाव (Emmerson Effect)-रॉबर्ट इमरसन ने प्रकाश संश्लेषण की क्रिया पर कार्य करते हुए विभिन्न तरंगदैर्घ्य वाले प्रकाश में क्वाण्टम उत्पादन (एक क्वाण्टम प्रकाश के अवशोषण से मुक्त हुए ऑक्सीजन के अणुओं की संख्या) ज्ञात किया और पाया कि 680 nm तरंगदैर्घ्य वाले लाल प्रकाश में क्वाण्टम उत्पादन सबसे अधिक होता है, लेकिन जब इस लाल प्रकाश का तरंगदैर्घ्य और अधिक बढ़ाया जाता है।

तब क्वाण्टम उत्पादन एकाएक एकदम गिर जाता है। इसे रेड ड्रॉप (Red drop) कहते हैं । इमरसन ने यह भी पाया कि जब पौधे का 680 nm तरंगदैर्ध्य वाले लाल प्रकाश के साथ-साथ कम तरंगदैर्घ्य वाला प्रकाश दिया जाता है तब क्वाण्टम उत्पादन पुनः बढ़ जाता है। इसे ही इमरसन का वृद्धिकारी प्रभाव (Emmerson enhancement effect) कहते

(ङ) तापमान और पानी की कमी का प्रभाव तथा प्राणियों का अनुकूलन–तापमान और जलजंतुओं के भौगोलिक वितरण को प्रभावित करता है हमारी पृथ्वी का तापमान मौसम के अनुसार परिवर्तित होता रहता है। तापमान एन्जाइम्स की क्रियाशीलता को प्रभावित करता है। इसमें प्राणी की कार्यिकीय प्रक्रियाएँ प्रभावित होती हैं। इसमें प्राणी के लिए आकारिकी तथा शारीरिक परिवर्तन होते हैं जैसे कि गर्म भागों में पाये जाने वाले स्तनियों की तुलना में ठंडे भागों में रहने वाले स्तनियों की पूँछ, थूथन, कान व टाँगें अपेक्षाकृत छोटी रहती हैं। ठण्डे क्षेत्रों में पाये जाने वाले पक्षी एवं स्तनधारी गर्म क्षेत्रों के पक्षी व स्तनियों की अपेक्षा बड़े आकार के होते हैं कम ताप वाले पानी में पायी जाने वाली मछलियों में गर्म जलीय मछलियों की तुलना में कशेरुकों की संख्या अधिक होती है।

रेगिस्तानी जंतुओं एवं पादपों को जल की कमी का सामना करना पड़ता है। रेगिस्तान में रहने वाले प्राणियों में जल संरक्षण हेतु विशेष अनुकूलन पाये जाते हैं । रेगिस्तानी जंतुओं में स्वेदग्रंथियाँ बहुत कम या अनुपस्थित होती हैं जिससे वाष्पन कम हो। ये प्राणी उपापचय क्रियाओं के फलस्वरूप उत्पन्न जल का प्रयोग अपनी जैविक क्रियाओं में करते हैं । रेगिस्तानी प्राणी उत्सर्जी पदार्थों का भी अत्यधिक सांद्र स्थिति में परित्याग करते हैं।

प्रश्न 12.
अजीवीय (एबायोटिक) पर्यावरणीय कारकों की सूची बनाइए।
उत्तर
पर्यावरण में मुख्य रूप से दो घटक जीवीय तथा अजीवीय होते हैं । अजैविक कारक निम्न होते हैं

  • जलवायवीय कारक-जैसे-प्रकाश, तापमान, वर्षा, पवन, वायुमण्डलीय गैसें तथा आर्द्रता आदि।
  • मृदीय कारक-जैसे-मृदा गठन, मृदा जीव, मृदा वायु, मृदा ताप, मृदा जल आदि।
  • स्थलाकृतिक कारक-जैसे-तुंगता, ढलान, अनावरण आदि।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित का उदाहरण दीजिए
(क) आतपोद्भिद् (हेलियोफाइट)
(ख) छायोद्भिद् (स्कियोफाइट)
(ग) सजीवप्रजक (विविपेरस)अंकुरण वाले पादप
(घ)आंतरोष्मी (एंडोथर्मिक) प्राणी
(ङ) बाह्योष्मी (एक्टोथर्मिक) प्राणी
(च) नितलस्थ (बेंथिक) जोन का जीव।
उत्तर
(क) आतपोद्भिद् (Heliophytes)-उदाहरण-सूरजमुखी, एमेरेन्थस।
(ख) छायोद्भिद् (Sciophytes)-उदाहरण-पाइसिया, ऐबीज, टेक्सस।
(ग) सजीवप्रजक (Viviparous)-उदाहरण-राइजोफोरा, सेलकोर्निया, सोनेरेशिया आदि ।
(घ) आंतरोष्मी (Endothermic) प्राणी-उदाहरण-भुंग, सरीसृप।
(ङ) बाह्योष्मी (Ectothermic) प्राणी-उदाहरण-ऊँट, कुत्ता, बिल्ली।
(च) नितलस्थ (Benthos)-उदाहरण-केकड़ा, भृग, ऐम्फिनोड, सीप, कोरल आदि।

प्रश्न 14.
समष्टि (पॉपुलेशन) एवं समुदाय (कम्युनिटी) की परिभाषा दीजिए।
अथवा
समष्टि एवं समुदाय में क्या अन्तर है?
उत्तर
समष्टि एवं समुदाय में अन्तर
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प्रश्न 15.
निम्नलिखित की परिभाषा दीजिए तथा प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए
(क) सहभोजिता (कमेन्सेलिज्म)
(ख) परजीविता (पैरासिटिज्म)
(ग) छद्मावरण (कैमुफ्लॉज)
(घ) सहोपकारिता (म्युचुअलिज्म)
(ङ) अंतरजातीय स्पर्धा (इंटरस्पेसिफिक कंपीटिशन)।
उत्तर
(क) सहभोजिता (कमेन्सेलिज्म)-लघु उत्तरीय प्रश्न क्रमांक 13 एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न क्रमांक 7 का अवलोकन कीजिए।

(1) परजीविता एवं सहजीविता में अंतर
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(2) सहजीविता एवं सहभोजिता (कमेन्सलिज्म) में अन्तर

(1) सहजीविता वह सम्बन्ध है, जिसमें दो जीव एक-दूसरे को लाभ पहुँचाते हुए जीवित रहते हैं, जबकि सहभोजिता या कमेन्सलिज्म वह सम्बन्ध है, जिसमें एक जीव लाभान्वित होता है दूसरा नहीं।

(2) सहजीविता में दोनों जीवों के बीच क्रियात्मक सम्बन्ध होता है, जबकि कमेन्सलिज्म में दोनों जीवों के बीच क्रियात्मक सम्बन्ध नहीं होता है।
उदाहरण-सहजीविता-लाइकेन तथा लेग्यूमिनोसी कुल के पादपों की जड़ों में पाये जाने वाले जीवाणु का सम्बन्ध। सहभोजिता-ऑर्किड तथा वृक्षों का सम्बन्ध, बंजर एवं चरती भूमि में चरती गाय की पीठ पर बैठे पक्षी का सम्बन्ध।

(3) हाइड्रोसियर एवं जिरोसियर में अन्तर

  • जल में होने वाले अनुक्रमण को हाइड्रोसियर कहते हैं, जबकि मरुभूमि में होने वाले अनुक्रमण को जिरोसियर कहते हैं।
  • हाइड्रोसियर में परिवर्तन अपेक्षाकृत तीव्रता से होता है, जबकि जिरोसियर में परिवर्तन अपेक्षाकृत धीमी गति से होता है।
  • हाइड्रोसियर में जलीय पौधे बनते हैं, जबकि जिरोसियर में मरुस्थलीय पौधे बनते हैं। उदाहरण-झील पारितन्त्र का विकास (हाइड्रोसियर), मरुभूमि में झाड़ियों का विकास।

जैविक समुदाय की विभिन्न जातियों के बीच अन्तर्सम्बन्ध-किसी भी जैविक समुदाय की विभिन्न जातियों के सदस्य अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दूसरे पर निर्भर रहते हैं। एक समुदाय की विविध जातियों में निम्नलिखित प्रकार का सम्बन्ध हो सकता है–

(1) परजीविता-जब एक जीव दूसरे जीव से पोषण प्राप्त करता है, तब इस सम्बन्ध को परजीविता कहते हैं।

(2) सहजीविता-दो जातियों का ऐसा सम्बन्ध है, जिसमें दोनों एक-दूसरे को लाभ पहुँचाते हुए साथसाथ जीवित रहती हैं। जैसे-लाइकेन एक ऐसा जीव है, जिसमें एक कवक तथा एक शैवाल समूह के जीव साथ-साथ रहते हैं।

(3) सहभोजिता-जब दो सदस्य साथ-साथ इस प्रकार जीवित रहते हैं कि एक सदस्य को लाभ होता है, जबकि दूसरे सदस्यों को इस सम्बन्ध में न ही लाभ होता है और न ही नुकसान। जैसे-ऑर्किड उच्च पादपों पर उगता है।

(4) शिकार एवं शिकारी-दो जातियों के बीच ऐसा सम्बन्ध है, जिसमें एक जन्तु दूसरे का शिकार कर अपना भोजन प्राप्त करता है। जैसे-जंगल के शेर और हिरन का सम्बन्ध ।

(5) अपमार्जिता- यह दो जातियों के बीच आहार प्राप्ति का अटूट सम्बन्ध है, जिसमें एक जाति के जीव दूसरे जीव जाति के मृत शरीर से भोजन प्राप्त करते हैं। जैसे-गिद्ध एवं चील मरे हुए पशुओं के शरीर से भोजन प्राप्त कर वातावरण की प्राकृतिक रूप से सफाई करते हैं।

(6) प्रतिस्पर्धा-वह सम्बन्ध है, जिसमें किसी समुदाय में एक ही जाति अथवा अलग-अलग जातियों के जीव जल, भोजन, आवास, प्रकाश आदि के लिए संघर्ष करते हैं। प्रतिस्पर्धात्मक सम्बन्ध किसी भी जैविक समुदाय को जीवन्त बनाये रखता है।

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(ख) (1) परजीविता-दो जातियों के बीच ऐसा सम्बन्ध है, जिसमें एक सदस्य को लाभ तथा एक को हानि होती है। लाभ प्राप्त होने वाले सदस्य को परजीवी तथा हानि प्राप्त होने वाले सदस्य को पोषक कहते हैं। परजीवी सदस्य पोषक से भोजन तथा आवास प्राप्त करता है। कुछ परजीवी पोषक के शरीर के बाहर रहकर ही पोषण प्राप्त करते हैं, इन्हें बाह्य परजीवी कहते हैं, जैसे-लीच, , खटमल, मच्छर आदि, जबकि कुछ परजीवी सदस्य पोषक के शरीर के अन्दर रहकर अपना पोषण प्राप्त करते हैं, इन्हें अन्त:परजीवी कहते हैं। जैसे-फीताकृमि, ऐस्केरिस आदि।

(2) जैविक स्थिरता–किसी जीव समुदाय की यथास्थिति बनाये रखने की क्षमता को जैविक स्थिरता कहते हैं। ऐसा देखा गया है कि किसी जैविक समुदाय में जितनी अधिक जातियाँ पायी जाती हैं, वह समुदाय उतना ही अधिक स्थिर होता है। जातियों की संख्या में अधिकता का सामान्य अर्थ जीव समुदाय में विविधता से है। प्रकृति का नियम है कि विविधता में ही स्थिरता होती है। इसे हम उदाहरण के द्वारा समझा सकते हैं। यदि किसी बड़े क्षेत्र में एक ही प्रकार के पौधे लगा लें और उनमें कोई बीमारी लग जाय तो पूरे क्षेत्र की वनस्पतियाँ नष्ट हो जायेंगी, इसके विपरीत प्राकृतिक जंगल में किसी जाति के पादपों में रोग लगता है, तो शेष वृक्ष तथा पौधे जीवित रहेंगे, क्योंकि उसमें हजारों प्रकार की जातियाँ पायी जाती हैं । इसी कारण कृत्रिम रूप से विकसित जंगलों की अपेक्षा प्राकृतिक जंगल अधिक स्थायी होते हैं।

(3) जाति प्रभाविता–प्रत्येक जीवीय समुदाय में एक अथवा कुछ जातियों के जीव अधिक संख्या में पाये जाते हैं, इस जाति अथवा जातियों की प्रभावी जाति तथा समुदाय के इस गुण को जाति प्रभाविता कहते हैं। इन जातियों का समुदाय की अन्य जातियों तथा वहाँ के वातावरण पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। उदाहरणउष्ण कटिबन्धीय (ट्रॉपिकल) प्रदेशों के अधिक वर्षा वाले जंगलों में लगभग 10 जातियाँ ही प्रभावी रूप में पायी जाती हैं।

जैविक समुदाय की विभिन्न जातियों के बीच अन्तर्सम्बन्ध-किसी भी जैविक समुदाय की विभिन्न जातियों के सदस्य अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दूसरे पर निर्भर रहते हैं। एक समुदाय की विविध जातियों में निम्नलिखित प्रकार का सम्बन्ध हो सकता है-

  • परजीविता-जब एक जीव दूसरे जीव से पोषण प्राप्त करता है, तब इस सम्बन्ध को परजीविता कहते हैं।
  • सहजीविता-दो जातियों का ऐसा सम्बन्ध है, जिसमें दोनों एक-दूसरे को लाभ पहुँचाते हुए साथसाथ जीवित रहती हैं। जैसे-लाइकेन एक ऐसा जीव है, जिसमें एक कवक तथा एक शैवाल समूह के जीव साथ-साथ रहते हैं।
  • सहभोजिता-जब दो सदस्य साथ-साथ इस प्रकार जीवित रहते हैं कि एक सदस्य को लाभ होता है, जबकि दूसरे सदस्यों को इस सम्बन्ध में न ही लाभ होता है और न ही नुकसान। जैसे-ऑर्किड उच्च पादपों पर उगता है।
  • शिकार एवं शिकारी-दो जातियों के बीच ऐसा सम्बन्ध है, जिसमें एक जन्तु दूसरे का शिकार कर अपना भोजन प्राप्त करता है। जैसे-जंगल के शेर और हिरन का सम्बन्ध ।
  • अपमार्जिता- यह दो जातियों के बीच आहार प्राप्ति का अटूट सम्बन्ध है, जिसमें एक जाति के जीव दूसरे जीव जाति के मृत शरीर से भोजन प्राप्त करते हैं। जैसे-गिद्ध एवं चील मरे हुए पशुओं के शरीर से भोजन प्राप्त कर वातावरण की प्राकृतिक रूप से सफाई करते हैं।
  • प्रतिस्पर्धा-वह सम्बन्ध है, जिसमें किसी समुदाय में एक ही जाति अथवा अलग-अलग जातियों के जीव जल, भोजन, आवास, प्रकाश आदि के लिए संघर्ष करते हैं। प्रतिस्पर्धात्मक सम्बन्ध किसी भी जैविक समुदाय को जीवन्त बनाये रखता है।

(ग) छद्मावरण (Camonflage)–शिकारी जातियों के परभक्षण के प्रभाव को कम करने के लिए विभिन्न रक्षा विधियाँ विकसित कर ली है। इन्हीं विधियों में से एक छद्मावरण है। कीटों और मेढकों की कुछ जातियाँ परभक्षियों से बचने के लिए गुप्त रूप से रंगीन हो जाती हैं। जिससे ये अपने वातावरण में सुगमता से पहचान में नहीं आतीं।

(घ) सहोपकारिता (Mutalism)-लघु उत्तरीय प्रश्न क्रमांक 13 एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न क्रमांक 7 का अवलोकन कीजिए।

(ङ) अंतरजातीय स्पर्धा (Interspecific competition)-अंतरजातीय संघर्ष में निकटतम रूप से संबंधित जातियाँ विभिन्न संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। उदाहरण के लिए, दक्षिण अमेरिका की कुछ उथली झीलों में आगंतुक फ्लैमिंगो और प्राणि प्लवक के लिये स्पर्धा करती है।

प्रश्न 16.
उपयुक्त आरेख (डायग्राम) की सहायता से लॉजिस्टिक (संभार तंत्र)समष्टि (पॉपुलेशन) वृद्धि का वर्णन कीजिए।
उत्तर-प्रकृति में किसी भी समष्टि के पास इतने असीमित संसाधन नहीं होते कि चरघातांकी वृद्धि (Exponential growth) होती रहे। इसके कारण सीमित संसाधनों के लिये व्यष्टियों में प्रतिस्पर्धा होती है।
आखिर में ‘योग्यतम्’ व्यष्टि जीवित बनी रहकर जनन करेंगी। अनेक देशों ने इस तथ्य को समझा और मानव समष्टि वृद्धि को सीमित करने के लिए विभिन्न प्रतिबंध लागू किए हैं। प्रकृति में दिए गए आवास के पास अधिकतम संभव संख्या के पालन-पोषण के लिए पर्याप्त संसाधन होते हैं, इससे आगे और वृद्ध संभव नहीं है। उस आवास में इस जाति के लिए इस सीमा की प्रकृति की पोषण क्षमता (Carrying capacity, K) मान लेते है।
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 13 जीव और समष्टियाँ 5
किसी आवास में सीमित संसाधनों के साथ वृद्धि कर रही समष्टि आरंभ में पश्चतता प्रावस्था (Lag phase) दर्शाती है। 5 उसके बाद त्वरण और मंदन (Acceleration and decleration) [ए
और अंततः अनन्तस्पर्शी (Asymptote) प्रावस्थाएँ आती हैं जब समष्टि घनत्व पोषण क्षमता तक पहुँच जाती है। समय (t) के संदर्भ N का आरेख (Plot) से सिग्माभ वक्र (Sigmoid curve) बन जाता है। इस प्रकार की समष्टि वृद्धि विर्हस्ट पर्ल लॉजिस्टिक वृद्धि (Verhulst-Pearl logistic growth) कहलाती है और निम्नलिखित समीकरण द्वारा वर्णित है
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 13 जीव और समष्टियाँ 6
जहाँ, N = समय ‘t’ पर समष्टि घनत्व, r= प्राकृतिक वृद्धि की इंट्रीन्सिक दर, K = पोषण क्षमता।
अधिकांश प्राणियों की समष्टियों में वृद्धि के लिए संसाधन परिमित (Finite) और देर-सबेर सीमित होने वाले हैं, इसलिए लॉजिस्टिक वृद्धि मॉडल को अधिक यथार्थपूर्ण माना जाता है।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित कथनों में परजीविता (पैरासिटिज्म ) को कौन-सा सबसे अच्छी तरह स्पष्ट करता है
(क) एक जीव को लाभ होता है,
(ख)दोनों जीवों को लाभ होता है,
(ग) एक जीव को लाभ होता है दूसरा प्रभावित नहीं होता है
(घ) एक जीव को लाभ होता है दूसरा प्रभावित होता है।
उत्तर
(घ) एक जीव को लाभ होता है दूसरा प्रभावित होता है।

प्रश्न 18.
समष्टि (पॉपुलेशन) की कोई तीन महत्वपूर्ण विशेषताएँ बताइए और व्याख्या कीजिए।
उत्तर
समष्टि में कुछ ऐसे गुण होते हैं जो व्यष्टि जीव में नहीं होते। व्यष्टि जन्मता और मरता है लेकिन समष्टि में जन्म दरें और मृत्यु दरें होती हैं । समष्टि में इन दरों को क्रमशः प्रति व्यक्ति जन्म दर और मृत्यु दर कहते हैं। इसलिए दर को समष्टि के सदस्यों के संबंधों में संख्या में परिवर्तन (वृद्धि या ह्रास) के रूप में प्रकट किया। उदाहरण के लिए, अगर किसी ताल में पिछले साल कमल के 20 पौधे थे और जनन द्वारा 8 नए पौधे और हो

जाते हैं जिससे वर्तमान समष्टि 20 हो जाती है, तो हम जन्म दर को 8/20=0.4 संतति प्रति कमल प्रतिवर्ष के हिसाब से परिकलन (कैल्कुलेट) करते हैं ! अगर प्रयोगशाला समष्टि में 40 फलमक्खियों में से 4 व्यष्टि किसी विशिष्टीकृत समय अंतराल में, मान लीजिए एक सप्ताह के दौरान मर जाते हैं । तो उस समय के दौरान समष्टि में मृत्यु दर 4/40=0.1 व्यष्टि प्रति फलमक्खी प्रति सप्ताह कहलाएगी। समष्टि का दूसरा विशिष्ट गुण लिंग अनुपात यानि नर एवं मादा का अनुपात है। व्यष्टि या तो नर है या मादा है, लेकिन समष्टि का लिंग अनुपात होता है (जैसे कि समष्टि का 60 प्रतिशत स्त्री है और 40 प्रतिशत नर है)।
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 13 जीव और समष्टियाँ 7
किसी दिए गए समय में समष्टि भिन्न आयु वाले व्यष्टियों से मिलकर बनती है। अगर समष्टि के लिए आयु वितरण (दी गई आयु अथवा आयु वर्ग के व्यष्टियों का प्रतिशत) आलेखित (प्लॉटेड) किया जाता है तो बनने वाली संरचना आयु पिरामिड कहलाती है (चित्र) मानव समष्टि के लिए आयु पिरामिड आमतौर पर नर . और स्त्रियों की आयु का वितरण संयुक्त आरेख को दर्शाता है। पिरामिड का आकार समष्टि की स्थिति
प्रतिबिंबित दर्शाता है
(क) क्या यह बढ़ रहा है
(ख) स्थिर है या
(ग) घट रहा है।
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 13 जीव और समष्टियाँ 8

जीव और समष्टियाँ अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

जीव और समष्टियाँ वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
संगठन के स्तर में स्पष्ट एवं आसानी से पहचाने जाने वाली इकाई है
(a) कोशिका
(b) ऊतक
(c) अंग
(d) व्यक्तिगत जीव।
उत्तर
(d) व्यक्तिगत जीव।

प्रश्न 2.
अन्तरजातीय संचार में उपयोगी रासायनिक यौगिक है
(a) एलोकेमिक्स
(b) कैरोमोन्स
(c) ऑक्जिन्स
(d) फेरोमोन्स।
उत्तर
(d) फेरोमोन्स।

प्रश्न 3.
एक प्रजाति एवं उसके पर्यावरण में अन्तर्सम्बन्धों का अध्ययन कहलाता है
(a) सामुदायिक पारिस्थितिकी
(b) स्वयं पारिस्थितिकी
(c) इथोलॉजी
(d) वन पारिस्थितिकी।
उत्तर
(b) स्वयं पारिस्थितिकी

प्रश्न 4.
वह कारक जो जनसंख्या के परिमाण को प्रभावित नहीं करता
(a) माइग्रेशन
(b) इमाइग्रेशन
(c) इमीग्रेशन
(d) नेटेलिटी।
उत्तर
(a) माइग्रेशन

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प्रश्न 5.
एक ही प्रजाति के जीवों का दो विभिन्न रूपों में पाया जाना कहलाता है
(a) द्विरूपता
(b) त्रिरूपता
(c) बहुरूपता
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।।
उत्तर
(a) द्विरूपता

प्रश्न 6.
इकाई समय में प्रति 1000 व्यक्तियों का प्रतिवर्ष जन्मदर कहलाता है
(a) मृत्युदर
(b) जैविक दर
(c) जन्मदर
(d) वृद्धि दर।
उत्तर
(c) जन्मदर

प्रश्न 7.
नर चीते (Tiger) व मादा सिंह (Lioness) की उर्वर संतति कहलाती है
(a) खच्चर
(b) लाइगर
(c) हिन्नी
(d) टिग्लायन।
उत्तर
(d) टिग्लायन।

प्रश्न 8.
वह देश जो ऋणात्मक जनसंख्या वृद्धि प्रदर्शित करता है
(a) आस्ट्रेलिया
(b) ग्रीनलैण्ड
(c) आस्ट्रिया
(d) यू.एस.ए.।
उत्तर
(c) आस्ट्रिया

प्रश्न 9.
सहजीविता शब्द का सर्वप्रथम उपयोग करने वाले वैज्ञानिक हैं
(a) डी-बैरी
(b) मैकडुगल
(c) लिनीयस
(d) ओडम।
उत्तर
(a) डी-बैरी

प्रश्न 10.
किसी समुदाय में ज्यादा संख्या या आकार में स्थित समष्टि को उस समुदाय का कहते हैं
(a) निर्दिष्ट जाति
(b) प्रभावी जाति
(c) समुदाय
(d) जाति विविधता।
उत्तर
(b) प्रभावी जाति

प्रश्न 11.
निश्चित क्षेत्र में रहने वाली समस्त समष्टियों को उस स्थान का कहते हैं
(a) जीवीय समुदाय
(b) झील समुदाय
(c) जलक्रम
(d) मरुक्रमक।
उत्तर
(a) जीवीय समुदाय

प्रश्न 12.
धंसे हुए रन्ध्र पाये जाते हैं
(a) मरुद्भिद् पौधों में
(b) जलीय पौधों में
(c) समोद्भिद् पौधों में
(d) तैरते हुए पौधों में।
उत्तर
(a) मरुद्भिद् पौधों में

प्रश्न 13.
स्पंजी जड़ें पायी जाती हैं
(a) जूसिया में
(b) ट्रापा में
(c) इकॉर्निया में
(d) पिस्टिया में।
उत्तर
(a) जूसिया में

प्रश्न 14.
वायवीय श्वसन मूलें या न्यूमैटोफोर पाये जाते हैं
(a) जलीय पौधों में
(b) दलदली पौधों में
(c) मरुद्भिद् पौधों में
(d) समोद्भिद पौधों में।
उत्तर
(b) दलदली पौधों में

प्रश्न 15.
मैंग्रूव पौधे का उदाहरण है
(a) राइजोफोरा
(b) इकॉर्निया
(c) ऐविसीनिया
(d) (a) एवं (c) दोनों में ।
उत्तर
(a) राइजोफोरा

प्रश्न 16.
अल्पविकसित संवहनी ऊतक पाये जाते हैं
(a) मरुद्भिदों में
(b) जलोद्भिदों में
(c) समोद्भिदों में
(d) हैलोफाइट्स में।
उत्तर
(c) समोद्भिदों में

प्रश्न 17.
नागफनी में फिल्लोक्लैड रूपान्तरण है
(a) तना का
(b) पत्ती का
(c) जड़ का
(d) उपर्युक्त सभी का।
उत्तर
(a) तना का

प्रश्न 18.
जड़ रहित संवहनी पादप है
(a) वॉल्फिया
(b) लेम्ना
(c) इकॉर्निया
(d) साल्वीनिया।
उत्तर
(a) वॉल्फिया

प्रश्न 19.
मुक्त प्लावी पौधों का उदाहरण है
(a) पिस्टिया
(b) ट्रापा
(c) इकॉर्निया
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 20.
विविपैरी पायी जाती है
(a) जलोद्भिदों में
(b) मरुद्भिदों में
(c) मैंग्रूव पौधों में
(d) उपरिरोही पौधों में।
उत्तर
(c) मैंग्रूव पौधों में

प्रश्न 21.
मूल पॉकेट पायी जाती है
(a) राइजोफोरा में
(b) इकॉर्निया में
(c) वॉल्फिया में
(d) सैजिटेरिया में।
उत्तर
(b) इकॉर्निया में

प्रश्न 22.
निम्नलिखित कथनों में परजीविता (पैरासिटिज्म) को कौन-सा सबसे अच्छी तरह स्पष्ट करता है
(a) एक जीव को लाभ होता है
(b) दोनों जीव को लाभ होता है
(c) एक जीव को लाभ होता है दूसरा प्रभावित नहीं होता है
(d) एक जीव को लाभ होता है दूसरा प्रभावित होता है।
उत्तर
(d) एक जीव को लाभ होता है दूसरा प्रभावित होता है।

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिये

1. …………… एक जड़ रहित मुक्त प्लावी पौधा है।
2. श्वसन मूलें …………… पौधों में पाई जाती हैं।
3. मातृ पौधे के ऊपर बीजों का अंकुरित होना ……. कहलाता है।
4. मांसल होकर पत्तीनुमा संरचना धारक तने को …………… कहते हैं।
5. पिस्टिया की जड़ों में मूल टोप के स्थान पर …………… पाया जाता है।
6. पाइनस की जड़ों व कवकों के सह-सम्बन्ध को …………… कहते हैं।
7. रैफ्लेशिया एक …………… परजीवी कहलाता है।
8. भू-मण्डल का वह भाग जहाँ जीव रहते हैं …………… कहलाते हैं।
9. ऐसे जीव जो दूसरे के मृत शरीर का भक्षण करते हैं …………… कहलाते हैं।
10. काष्ठीय आरोही पौधों को …………… कहते हैं।
11. आर्किड एक …………… पादप है।
12. नर गधे और घोड़े की संतति को …………… कहते हैं।
13. चन्दन एक …………… परजीवी पादप है।
उत्तर

  1. वॉल्फिया
  2. मैंग्रूव (दलदली)
  3. जरायुजता
  4. पर्णकाय स्तंभ
  5. मूल पॉकेट
  6. सह-परोपकारिता
  7. पूर्ण मूल
  8. स्थलमंडल
  9. मृतोपजीवी
  10. लिआनास
  11. उपरिरोही
  12. खच्चर
  13. आंशिक मूल।

3. सही जोड़ी बनाइए

I. ‘A’ – ‘B’

1. जलक्रमक अनुक्रमण – (a) आस्थापन
2. अपरदन – (b) स्थिरीकरण
3. आक्रमण – (c) बड अनूप
4. चरम अवस्था – (d) झील
5. सिपेरस – (e) प्रारम्भिक काल।
उत्तर
1. (d), 2. (e), 3. (a), 4. (b), 5. (c)

II. ‘A’ – ‘B’

1. प्रतिजीविता – (a) चारण और चराई
2. सहभोजिता – (b) गुणात्मक गुण
3. परभक्षण – (c) लाइकेन
4. ऋतुजैविकी – (d) अधिपादप एवं अधिजन्तु
5. सहोपकारिता – (e) ऋणात्मक अन्योन्य क्रिया।
उत्तर
1. (e), 2. (d), 3. (a), 4. (b), 5. (c).

III . ‘A’ – ‘B’

1. इकॉर्निया – (a) मैंग्रूव पादप
2. राइजोफोरा – (b) स्थिर प्लावी पादप
3. जूसिया – (c) पर्णकाय स्तंभ
4. रैननकुलस. – (d) मुक्त प्लावी पादप
5. नागफनी – (e) उभयचर।
उत्तर
1. (d), 2. (a), 3. (b), 4. (e), 5. (c)

4. एक शब्द में उत्तर दीजिए

1. एक ऐसे जन्तु का नाम लिखिये जो कि अपने अण्डों को दूसरे जन्तु के घोंसलों में देता है।
2. जाति बहुरूपता का एक उदाहरण दीजिए।
3. सहपरोपकारिता एवं प्रोटोकोऑपरेशन के एक-एक उदाहरण दीजिये।
4. लाइकेनों में सहजीवी रूप से कौन-से दो जीव पाये जाते हैं ?
5. लाइकेनों में शैवाल एवं कवक के मध्य किस प्रकार का सहसम्बन्ध पाया जाता है ?
6. काष्ठीय आरोही पौधों को क्या कहा जाता है ?
7. वार्मिंग ने जल सम्बन्धों के आधार पर पौधों के कितने समूह बताये हैं?
8. एक ऐसे आवृत्तबीजी पादप का नाम बताइये जिसमें जड़ तंत्र अनुपस्थित होता है।
9. किन्हीं दो मुक्त प्लावी पौधों के नाम लिखिये।
10. किन्हीं दो उभयचर पौधों के नाम लिखिये।
11. जलकुंभी एवं सिंघाड़े के पौधों में पाये जाने वाले उस अनुकूलन को लिखिये जिसके कारण यह पौधा जल की सतह पर तैरने में सक्षम होता है।
12. किसी एक मैंग्रूव पौधे का नाम लिखिये।
13. न्यूमैटोफोर किन पौधों में पाये जाते हैं ?
14. किसी ऐसे पौधे का नाम लिखिये जिसमें तना पत्तीनुमा संरचना में तथा पत्तियाँ काँटों में रूपान्तरित होती हैं।
उत्तर

  1. कोयल
  2. मधुमक्खी
  3. सहपरोपकारिता-लाइकेन तथा प्रोटोकोऑपरेशन-सी एनीमोन तथा हार्मिट-क्रैब
  4. शैवाल एवं कवक
  5. सहपरोपकारिता
  6. लिआनास
  7. तीन समूह
  8. वॉल्फिया
  9. हाइड्रिला, साल्विया
  10. रैननकुलस, सैजीटेरिया
  11. जलीय
  12. राइजोफोरा
  13. दलदली
  14. नागफनी।

जीव और समष्टियाँ अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक ऐसे आवृतबीजी का नाम लिखिए जिसमें जड़ तंत्र अनुपस्थित होता है।
उत्तर
वॉल्फिया।

प्रश्न 2.
जलकुंभी और सिंघाड़े में जल की सतह पर तैरने के लिये पाये जाने वाले अनुकूलन को लिखिए।
उत्तर
पर्णवृंत स्पंजी वायु से भरा रहता है।

प्रश्न 3.
वैण्डा में किस प्रकार की जड़ होती है ?
उत्तर
अपस्थानिक जड़।

प्रश्न 4.
किन पौधों में मूल गोप का अभाव होता है ?
उत्तर
जलीय पौधों में।

प्रश्न 5.
श्वसन मूलें किन पौधों में पायी जाती हैं ?
उत्तर
दलदली पौधों में।

प्रश्न 6.
सुन्दरवन डेल्टा में किस प्रकार की वनस्पति पाई जाती है ?
उत्तर
मैंग्रूव वनस्पति।

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प्रश्न 7.
उस एक पौधे/वृक्ष का नाम लिखिए जिसमें निमैटोफोर्स पाये जाते हैं।
उत्तर
एक्सिनीया।

प्रश्न 8.
मानव जाति की जनसंख्या के अध्ययन को क्या कहते हैं ?
उत्तर
डेमोग्राफी।

प्रश्न 9.
विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में निवास करने वाली प्रजातियों को क्या कहते हैं ?
उत्तर
एलोट्रॉपिक।

प्रश्न 10.
एक मृतोपजीवी आवृत्तबीजी पौधे का नाम बताइये।
उत्तर
मोनोट्रापा।

प्रश्न 11.
हर्मिट क्रेब और सी-एनीमोन के मध्य का संबंध कहलाता है।
उत्तर
सहजीवन (प्रोटो को-ऑपरेशन)।

प्रश्न 12.
इकाई समय में किसी जीवसंख्या में उत्पन्न नये जीवों की वास्तविक संख्या को क्या कहते हैं ?
उत्तर
जन्म दर।

प्रश्न 13.
दो वनस्पति क्षेत्रों के बीच का संक्रमण प्रदेश क्या कहलाता है ?
उत्तर
इकोटोन।

प्रश्न 14.
किसी समुदाय में उपस्थित सभी जातियों के विभिन्न जीवन रूपों का प्रतिशत वितरण क्या कहलाता है ?
उत्तर
जैव-स्पेक्ट्रम।

प्रश्न 15.
एक ऐसे जन्तु का नाम बताइए जो कि अपने अण्डे दूसरे जन्तु के घोंसलों में देता है।
उत्तर
कोयल।

प्रश्न 16.
जाति बहुरूपता का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
मधुमक्खी

प्रश्न 17.
कीटभक्षी पौधे कीटों का भक्षण क्यों करते हैं ?
उत्तर
N2 की कमी को पूरा करने के लिए।

प्रश्न 18.
प्रमुख अजैव कारक कौन-से हैं ?
उत्तर
तापमान, जल, प्रकाश व मृदा

प्रश्न 19.
एक कीटभक्षी का नाम लिखिये।
उत्तर
यूट्रीकुलेरिया, ड्रोसेरा आदि।

जीव और समष्टियाँ लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पारिस्थितिक प्रतिस्पर्धा किसे कहते हैं ?
उत्तर
एक निश्चित क्षेत्र में उपस्थित जीवों के बीच पारिस्थितिक कारकों के दोहन के लिए होने वाली प्रतिस्पर्धा को पारिस्थितिक प्रतिस्पर्धा कहते हैं।

प्रश्न 2.
किसी भी जनसंख्या की विशेषताओं के नाम लिखिए।
अथवा
समष्टि पर प्रभाव डालने वाले कारकों के नाम लिखिये।
उत्तर
किसी भी जनसंख्या में निम्नलिखित विशेषताएँ पायी जाती हैं-

  • जनसंख्या घनत्व
  • जन्म दर
  • मृत्यु-दर
  • वयस या आयु वितरण
  • जैविक क्षमता
  • जनसंख्या वृद्धि फार्म
  • जनसंख्या में परिवर्तन
  • जनसंख्या का प्रकीर्णन।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से प्रत्येक को परिभाषित कीजिए (प्रत्येक को 25 शब्दों में)
(1) पॉपुलेशन
(2) जनसंख्या घनत्व
(3) जैव क्षमता
(4) जन्म-दर
(5) मृत्यु-दर।
उत्तर
1. समष्टि (पॉपुलेशन)-नाइट (1965) के अनुसार, “किसी निश्चित क्षेत्र तथा समय में एक जाति या आपस में घनिष्ट रूप से सम्बन्धित कई जातियों (जीव, जन्तु तथा पौधों) के समूह को समष्टि कहते हैं।” जैसे-घास के मैदान में टिड्डों का समूह।

2. जनसंख्या घनत्व-प्रति इकाई क्षेत्रफल या आयतन में उपस्थित एक जाति या आपस में सम्बन्धित कई जातियों की औसत संख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं।

3. जैविक क्षमता/जीवीय विभव-अनुकूलतम परिस्थितियों में किसी जनसंख्या या समष्टि में वृद्धि की अधिकतम क्षमता को जैव क्षमता कहते हैं। किसी समष्टि की जैव क्षमता उसके वास्तविक निष्पादन से अधिक होती है, वास्तविक दर में यह अन्तर जैव क्षमता के पर्यावरणीय प्रतिरोध के कारण होता है।

4. जन्म-दर-इकाई समय में किसी जनसंख्या द्वारा उत्पन्न कुल नए सदस्यों की संख्या जन्म-दर कहलाती है। किसी भी जनसंख्या में जन्म-दर की अधिकतम सीमा होती है, लेकिन वास्तविक जन्म दर अधिकतम अपेक्षित दर से कम होती है।

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 (5) मृत्यु-दर-इकाई समय में किसी समष्टि में मरने वाले जीवों की औसत संख्या को मृत्यु-दर कहते हैं।

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प्रश्न 4.
जनसंख्या नियंत्रण के लिए जन-जागृति हेतु आप क्या सुझाव देंगे?
उत्तर
जनसंख्या नियंत्रण के लिए जन-जागृति हेतु सबसे ज्यादा आवश्यक है-
(1) शिक्षा का प्रसार एवं प्रचार । इससे बहुत-सी भ्रांतियाँ दूर की जा सकती हैं, जैसे
(अ) संतान, भगवान की देन है
(ब) पुत्र से मोक्ष प्राप्ति
(स) अधिक संतान से अधिक आय आदि।

(2) जनसंख्या वृद्धि की भयावहता की वास्तविकता से परिचय कराना।
(3) परिवार नियोजन के तरीकों का उपयोग।
(4) एक-से-अधिक शादी पर प्रतिबंध।
(5) विवाह की आयु में वृद्धि करना।
(6) जन्म-दर कम करना।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित के दो-दो उदाहरण दीजिएसहजीवी, सहभोजी, फाइटोप्लैंक्टॉन, जूप्लैंक्टॉन एवं जड़युक्त तैरने वाले पौधे।
उत्तर
1. सहजीवी-

  • इश्चिरिचिया,
  • ट्राइकोनिम्फा (दीमक की आँत में)

2. सहभोजी

  • ऑर्किड और वृक्ष
  • हर्मिट क्रैब (मोलस्क कवच पर)

3. फाइटोप्लैंक्टॉन-

  • नास्टॉक
  • एनाबीना

4. जूप्लैंक्टॉन-

  • पैरामीशियम
  • यूग्लीना

5. जड़युक्त तैरने वाले पौधे

  • वोल्फिया
  • लेम्ना।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट कीजिए
(1) स्पीशीज एवं पॉपुलेशन
(2) जनसंख्या वृद्धि एवं जनसंख्या घनत्व
(3) मोनोस्पेसिफिक एवं पॉलिस्पेसिफिक पॉपुलेशन
(4) प्रतिस्पर्धा एवं प्रकीर्णन।
उत्तर
(1) स्पीशीज एवं पॉपुलेशन में अन्तर–आपस में संकरण सम्बन्ध रखने वाले एकसमान जीवों के समूह को स्पीसीज (जाति) कहते हैं, जबकि एक निश्चित समय में इकाई क्षेत्रफल में रहने वाली एक ही जाति की संख्या को समष्टि या पॉपुलेशन कहते हैं।

(2) जनसंख्या वृद्धि एवं जनसंख्या घनत्व में अन्तर-इकाई समय में किसी समष्टि या जनसंख्या में होने वाली वृद्धि को जनसंख्या वृद्धि कहते हैं, जबकि इकाई क्षेत्रफल में एक जाति के जीवों की औसत संख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं।

(3) एकजातीय (Monospecific) एवं बहुजातीय (Polyspecific) समष्टि में अन्तर–इकाई समय में किसी निश्चित क्षेत्र में एक जाति के जीवों की कुल संख्या को एकजातीय समष्टि कहते हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप में ऐसा नहीं होता, बल्कि कोई जाति अकेले न रहकर कई जातियों के समूह में रहती हैं। एक समय में किसी निश्चित क्षेत्र की सभी जातियों की संख्या को बहुजातीय समष्टि कहते हैं।

(4) प्रतिस्पर्धा एवं प्रकीर्णन में अन्तर-प्रत्येक जैविक समुदाय में एक ही जाति और सभी जातियों के सदस्यों के बीच जल, भोजन, आवास, प्रकाश आदि के लिए संघर्ष होता है, जिसे प्रतिस्पर्धा कहते हैं, जबकि समष्टि प्रकीर्णन वह साधन है, जिसके द्वारा विनिष्ट समष्टि पुनः स्थापित होकर साम्यावस्था में आती है या आने का प्रयास करती है। समष्टि प्रकीर्णन में जीव या उनके बीज एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आवागमन करते हैं।

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प्रश्न 7.
भारत में जनसंख्या वृद्धि के चार कारण दीजिए।
उत्तर
भारत में जनसंख्या वृद्धि के चार कारण निम्नलिखित हैं-

  • जन्म-दर में वृद्धि
  • मृत्यु-दर में कमी
  • शिक्षा का महत्व नहीं समझना व इसका पर्याप्त प्रचार व प्रसार न होना
  • रूढ़िवादिता।

प्रश्न 8.
समष्टि साम्यावस्था से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर
किसी समष्टि के वृद्धि स्वरूप को देखने पर पता चलता है कि किसी नये क्षेत्र में पहुँचकर प्रत्येक समष्टि तेजी से वृद्धि करके चरम सीमा पर पहुँच जाती है और लम्बे समय तक इसी चरम सीमा पर स्थित रहती है या स्थिर रहने का प्रयास करती है, इस अवस्था को साम्यावस्था कहते हैं। प्रत्येक समष्टि हमेशा इसी अवस्था में रहने का प्रयास करती है। साम्यावस्था में किसी समष्टि की जन्म तथा मृत्यु-दर बराबर होती है। साम्यावस्था में रहने के लिए समष्टि विभिन्न प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारकों से संघर्ष करती है और सफलता मिलने पर साम्यावस्था में बनी रहती है।

प्रश्न 9.
नई जाति की उत्पत्ति का संक्षिप्त विवरण लिखिए।
उत्तर
किसी नये जीव या जाति की उत्पत्ति पूर्व में अस्तित्व वाले जीव या जाति से ही होती है। किसी भी जाति का आवास एक बड़ा क्षेत्र होता है। जब इस क्षेत्र में किसी भौतिक अवरोध के कारण आवास के दोनों ओर के सदस्यों के बीच सम्पर्क टूट जाता है, तब दोनों ओर के जीवों में अपने-अपने वातावरण के प्रति अनुकूलन पैदा होने से गुणों में परिव.. आने लगता है। एक लम्बे समय के बाद यह परिवर्तन इतना अधिक हो जाता है कि इनमें जनन सम्बन्ध स्थापित नहीं हो पाता। कालान्तर में यह अन्तर इतना बढ़ जाता है कि पृथक् हुआ समूह एक नयी जाति का रूप ले लेता है।

प्रश्न 10.
एक जाति के सदस्यों के परस्पर सहयोगात्मक सम्बन्धों को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर
एक जाति के जीवों में सहयोगात्मक सम्बन्ध-जब एक जाति के विभिन्न सदस्य विभिन्न कार्यों में एक-दूसरे की मदद करते हैं तो इसे सहयोगात्मक सम्बन्ध कहते हैं। एक जाति के जीवों में सहयोगात्मक सम्बन्ध के कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं

  • जनन के लिए-जनन के लिए एक ही जाति के नर एवं मादा सदस्य एक-दूसरे का सहयोग करते हैं, जिससे उनकी निरन्तरता बनी रहे। जैसे-कुछ जीव स्थायी कुछ अस्थायी जनन सम्बन्ध बनाते हैं।
  • भोजन के लिए-कुछ जाति के जीव भोज्य पदार्थ को सरलता से प्राप्त करने के लिए सामूहिक शिकार करते हैं। जैसे-अफ्रीकी सिंह।
  • सुरक्षा के लिए-शत्रुओं से सुरक्षा के लिए कुछ जातियाँ, जैसे-हिरन, खरगोश समूह में रहते हैं।
  • सामाजिक व्यवस्था-कुछ जीवों में सरलतापूर्वक जीवन व्यतीत करने के लिए तथा काम के बँटवारे के लिए सामाजिक व्यवस्था पायी जाती है। जैसे-चींटियाँ।

प्रश्न 11.
जनसंख्या वृद्धि ग्राफ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर
समष्टि के वृद्धि करने के ढंग को वृद्धि स्वरूप कहते हैं । समष्टियाँ प्राय: दो रूपों में वृद्धि करती हैं, जिन्हें क्रमश: ‘J’ आकार स्वरूप और ‘S’ आकार स्वरूप कहते हैं । ‘J’ आकार स्वरूप का अर्थ है कि जब किसी समष्टि के समय और वृद्धि का ग्राफ खींचते हैं तो यह Jआकार का प्राप्त होता है। इस प्रकार की वृद्धि
में शुरू में समष्टि का घनत्व तेजी से बढ़ता है, लेकिन वातावरणीय प्रतिरोध या अन्य कारकों के प्रभाव के कारण यह सहसा रुक जाता है। वृद्धि का यह ढंग कुछ शैवालों, कवकों और कीटों में देखा जा सकता है। S आकार के वृद्धि स्वरूप का अर्थ है कि जब किसी समष्टि की वृद्धि और समय का ग्राफ खींचते हैं तो यह S आकार का प्राप्त होता है। यह ग्राफ इस बात को व्यक्त करता है कि शुरू में समष्टि धीरे-धीरे वृद्धि करती है, इसके बाद तेजी से वृद्धि करती है और उसके बाद वातावरणीय प्रतिरोध के बढ़ने पर यह क्रमिक रूप से धीमी गति से वृद्धि करने लगती है। यह वृद्धि स्वरूप सामान्य रूप से अधिकांश समष्टियों में देखा जा सकता है।
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 13 जीव और समष्टियाँ 11

प्रश्न 12.
जन्तु सम्प्रेषण के कोई पाँच उदाहरण दीजिए।
उत्तर
जन्तुओं द्वारा आपस में सूचनाओं के आदान-प्रदान को जन्तु सम्प्रेषण कहते हैं इसके पाँच उदाहरण निम्नानुसार हैं-

  • सिंह, मोर, कोयल विशेष प्रकार की आवाजों को निकालकर नर या मादा की उपस्थिति का आभास कराते हैं
  • खरगोश अपने समूह के दूसरे सदस्य को अपनी पूँछ को जमीन पर पटककर खतरे की सूचना देता है।
  • मधुमक्खी विशिष्ट नृत्यों द्वारा भोजन के स्थान की सूचना देती है।
  • नर मेढक जननकाल में ‘टर्र-टाँ’ की आवाज के द्वारा मादा मेढक को अपनी उपस्थिति बताते हैं।
    कुत्ते, भय, याचना, मित्रता एवं आक्रमण की सूचना अपनी विभिन्न मुद्राओं से देते हैं।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट कीजिए
(1) परजीविता एवं सहजीविता
(2) सहजीविता एवं सहभोजिता
(3) हाइड्रोसियर एवं जिरोसियर।
उत्तर
(1) परजीविता एवं सहजीविता में अंतर
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(2) सहजीविता एवं सहभोजिता (कमेन्सलिज्म) में अन्तर

(1) सहजीविता वह सम्बन्ध है, जिसमें दो जीव एक-दूसरे को लाभ पहुँचाते हुए जीवित रहते हैं, जबकि सहभोजिता या कमेन्सलिज्म वह सम्बन्ध है, जिसमें एक जीव लाभान्वित होता है दूसरा नहीं।

(2) सहजीविता में दोनों जीवों के बीच क्रियात्मक सम्बन्ध होता है, जबकि कमेन्सलिज्म में दोनों जीवों के बीच क्रियात्मक सम्बन्ध नहीं होता है।
उदाहरण-सहजीविता-लाइकेन तथा लेग्यूमिनोसी कुल के पादपों की जड़ों में पाये जाने वाले जीवाणु का सम्बन्ध। सहभोजिता-ऑर्किड तथा वृक्षों का सम्बन्ध, बंजर एवं चरती भूमि में चरती गाय की पीठ पर बैठे पक्षी का सम्बन्ध।

(3) हाइड्रोसियर एवं जिरोसियर में अन्तर

  • जल में होने वाले अनुक्रमण को हाइड्रोसियर कहते हैं, जबकि मरुभूमि में होने वाले अनुक्रमण को जिरोसियर कहते हैं।
  • हाइड्रोसियर में परिवर्तन अपेक्षाकृत तीव्रता से होता है, जबकि जिरोसियर में परिवर्तन अपेक्षाकृत धीमी गति से होता है।
  • हाइड्रोसियर में जलीय पौधे बनते हैं, जबकि जिरोसियर में मरुस्थलीय पौधे बनते हैं। उदाहरण-झील पारितन्त्र का विकास (हाइड्रोसियर), मरुभूमि में झाड़ियों का विकास।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए
(1) परजीविता
(2) जैविक स्थिरता
(3) जाति प्रभाविता।
उत्तर
(1) परजीविता-दो जातियों के बीच ऐसा सम्बन्ध है, जिसमें एक सदस्य को लाभ तथा एक को हानि होती है। लाभ प्राप्त होने वाले सदस्य को परजीवी तथा हानि प्राप्त होने वाले सदस्य को पोषक कहते हैं। परजीवी सदस्य पोषक से भोजन तथा आवास प्राप्त करता है। कुछ परजीवी पोषक के शरीर के बाहर रहकर ही पोषण प्राप्त करते हैं, इन्हें बाह्य परजीवी कहते हैं, जैसे-लीच, , खटमल, मच्छर आदि, जबकि कुछ परजीवी सदस्य पोषक के शरीर के अन्दर रहकर अपना पोषण प्राप्त करते हैं, इन्हें अन्त:परजीवी कहते हैं। जैसे-फीताकृमि, ऐस्केरिस आदि।

(2) जैविक स्थिरता–किसी जीव समुदाय की यथास्थिति बनाये रखने की क्षमता को जैविक स्थिरता कहते हैं। ऐसा देखा गया है कि किसी जैविक समुदाय में जितनी अधिक जातियाँ पायी जाती हैं, वह समुदाय उतना ही अधिक स्थिर होता है। जातियों की संख्या में अधिकता का सामान्य अर्थ जीव समुदाय में विविधता से है। प्रकृति का नियम है कि विविधता में ही स्थिरता होती है। इसे हम उदाहरण के द्वारा समझा सकते हैं। यदि किसी बड़े क्षेत्र में एक ही प्रकार के पौधे लगा लें और उनमें कोई बीमारी लग जाय तो पूरे क्षेत्र की वनस्पतियाँ नष्ट हो जायेंगी, इसके विपरीत प्राकृतिक जंगल में किसी जाति के पादपों में रोग लगता है, तो शेष वृक्ष तथा पौधे जीवित रहेंगे, क्योंकि उसमें हजारों प्रकार की जातियाँ पायी जाती हैं । इसी कारण कृत्रिम रूप से विकसित जंगलों की अपेक्षा प्राकृतिक जंगल अधिक स्थायी होते हैं।

(3) जाति प्रभाविता–प्रत्येक जीवीय समुदाय में एक अथवा कुछ जातियों के जीव अधिक संख्या में पाये जाते हैं, इस जाति अथवा जातियों की प्रभावी जाति तथा समुदाय के इस गुण को जाति प्रभाविता कहते हैं। इन जातियों का समुदाय की अन्य जातियों तथा वहाँ के वातावरण पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। उदाहरणउष्ण कटिबन्धीय (ट्रॉपिकल) प्रदेशों के अधिक वर्षा वाले जंगलों में लगभग 10 जातियाँ ही प्रभावी रूप में पायी जाती हैं।

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प्रश्न 15.
समष्टि उच्चावचन किसे कहते हैं ?
उत्तर
किसी समष्टि के साम्यावस्था में पहुँचने के बाद इसके घनत्व में कमी या अधिकता होती रहती है। साम्यावस्था के घनत्व में कमी या अधिकता होने की क्रिया को समष्टि उच्चावचन कहते हैं। यह समष्टि का एक प्रमुख गुण है, जो जलवायवीय कारकों एवं समष्टि की आपसी सम्बन्धों या क्रियाओं के कारण होता है।

प्रश्न 16.
जनसंख्या प्रकीर्णन को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर
समष्टि परिक्षेपण या प्रकीर्णन वह साधन है, जिसके द्वारा विनिष्ट समष्टि पुनः स्थापित होकर साम्यावस्था में आती है या आने का प्रयास करती है। इसमें समष्टि जीव.या उनके बीज एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आवागमन करते हैं। वास्तव में समष्टि परिक्षेपण,वह क्रिया है, जिसके द्वारा कोई समष्टि अपने आवास में वृद्धि करती है। परिक्षेपण और प्रजनन में गहरा सम्बन्ध होता है, क्योंकि प्रजनन की अनुपस्थिति में परिक्षेपण नहीं हो सकता। समष्टि परिक्षेपण तीन विधियों के द्वारा हो सकता है

  • अग्रवासन-किसी समष्टि में बाहरी सदस्यों का आना अग्रवासन कहलाता है।
  • प्रवासन-किसी समष्टि के सदस्यों का दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से बसना प्रवासन कहलाता है।
  • प्रवजन-किसी समष्टि के सदस्यों का दो तरफा प्रकीर्णन (जाना और आना) प्रवजन कहलाता है। जैसे-साइबेरियन पक्षी शीत ऋतु में दक्षिण दिशा में आते हैं लेकिन ग्रीष्म ऋतु में वापस लौट जाते हैं।

जीव और समष्टियाँ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जलीय पौधों के विशिष्ट लक्षण लिखिए।
उत्तर
जलीय पौधों के विशिष्ट लक्षण-

  • इन पौधों में बाह्य त्वचा पर उपत्वचा का अभाव होता है।
  • इन पौधों में जड़ तन्त्र अल्पविकसित होता है तथा जड़ें प्रायः छोटी एवं शाखारहित होती हैं। वॉल्फिया नामक आवृतबीजी पादप में तो जड़ों का अभाव होता है।
  • इन पौधों के शरीर में बड़े-बड़े अन्तर कोशिकीय अवकाश पाये जाते हैं जो कि वायु के संचार में सहायक होते हैं एवं पौधों को तैरने में सहायता करते हैं।
  • इन पौधों का सम्पूर्ण पादप शरीर जल एवं खनिज पदार्थों के अवशोषण में सहायक होता है।
  •  इन पौधों में रन्ध्रों का अभाव होता है यदि रन्ध्र उपस्थित भी होते हैं तो वे अक्रिय होते हैं ।
  • इन पौधों में यांत्रिक ऊतक अल्प विकसित होते हैं।
  • इन पौधों में संवहनी ऊतक या तो अनुपस्थित होते हैं अथवा अल्प विकसित होते हैं।
  • जल निमग्न पौधों में पत्तियाँ पतली, लंबी एवं फीतेनुमा होती हैं।
  • प्लावी पौधों में पत्तियाँ बड़ी चपटी होती हैं । बाह्य सतह पर मोम का जमाव होता है।
  • पर्णवृन्त लम्बे, लचीले, स्पंजी एवं श्लेष्मीय होते हैं।

प्रश्न 2.
मरुद्भिद् पौधों की आंतरिक संरचना में पाये जाने वाले अनुकूलन का सचित्र वर्णन कीजिये।
उत्तर
मरुद्भिद् पौधों की आंतरिक संरचना के अनुकूलन

  • इन पौधों के तनों एवं पत्तियों की बाह्य त्वचा (Epidermis) के ऊपर एक मोटी उपत्वचा (Cuticle) पाई जाती है।
  • इनकी बाह्य त्वचा (Epidermis) बहुस्तरीय (Multilayered) भी हो सकती है। उदाहरणनेरियम (Nerium)।
  • बाह्य त्वचा की भित्तियों का मोटा होना, इससे वाष्पोत्सर्जन की दर कम हो जाती है।
  • इन पौधों के पत्तियों की निचली सतह पर धंसे हुए रन्ध्र (Suncken stomata) पाये जाते हैं। यह रन्ध्र, रन्ध्रीय गुहाओं (Stomatal cavities) में स्थित होते हैं जिनमें रोम (Hairs) या रन्ध्रीय रोम (Stomatal hairs) उपस्थित होते हैं। उदाहरण- कनेर (Nerium), पाइनस (Pinus) |
  • इन पौधों की हाइपोडर्मिस (Hypodermis) मोटी भित्ति वाली स्क्लेरेनकायमी कोशिकाओं (Sclerenchymatous cell) की बनी होती है जो कि जल के वाष्पीकरण को रोकते हैं। उदाहरण–पाइनस (Pinus) की पत्तियाँ।
  • इनकी पत्तियों में मीजोफिल (Mesophyll), पैलिसेड ऊतक (Palisade tissue) एवं स्पंजी पैरेनकाइमा (Spongy parenchyma) में स्पष्ट तथा भिन्नित होते हैं।

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 13 जीव और समष्टियाँ 13

  • अन्तरकोशिकीय अवकाश (Intercellular spaces) आकार में बहुत छोटे होते हैं अथवा अनुपस्थित होते हैं।
  • इनमें शरीर को मजबूती प्रदान करने के लिए यान्त्रिक ऊतक (Mechanical tissue) कोलेनकाइमा (Collenchyma) के रूप में तथा स्क्ले रेनकाइमा (Sclerenchyma) के रूप में उपस्थित रहता है।
  • इनके तनों के वल्कुट (Cortex) में क्लोरेनकाइमा भी पाया जाता है।
  • इन पौधों में संवहनी ऊतक (Conducting tissue), दारु (Xylem) तथा पोषवाह (Phloem) के रूप में पूर्णतया विकसित होता है, जिससे जल व पोषक पदार्थों का संवहन (Conduction) आसानी से होता है।
  • इनकी बाह्यत्वचा (Epidermis) के ऊपर रोम (hairs) अथवा कण्टक (Spines) पाये जाते हैं, जो कि वाष्पोत्सर्जन की दर को कम करते हैं।
  • रंध्रों की संख्या कम व पत्ती की निचली सतह में होती है।
  • तनों में धंसे हुए रंध्रों का पाया जाना।

प्रश्न 3.
जलीय पौधों के आकारिकीय अनुकूलनों का वर्णन कीजिये।
अथवा
जलीय पौधों में पाए जाने वाले किन्हीं दो अनुकूलनों को लिखिए।
उत्तर
जलीय पौधों के आकारिकीय अनुकूलन निम्नलिखित हैं
(1) जड़ों के अनुकूलन

  • जड़ तन्त्र (Root system) अल्पविकसित होती है तथा ये अशाखित (Unbranched) होती हैं। कुछ प्लावी पौधों (Floating plants) उदाहरण-वॉल्फिया (Wolffia), यूट्रिकुलेरिया (Utricularia) तथा जल निमग्न पौधों (Submerged plants) उदाहरण-सिरेटोफिलम (Ceratophyllum) में जड़ें अनुपस्थित होती हैं।
  • कीचड़ में उगने वाले पौधों को छोड़कर अन्य सभी जलीय पौधों में मूलरोम (Root hairs) अनुपस्थित होते हैं, क्योंकि उनके शरीर की सम्पूर्ण सतह अवशोषण (Absorption) का कार्य करती है।
  • कुछ पौधों जैसे–इकॉर्निया (Eichhormia), ट्रापा (Trapa) एवं पिस्टिया (Pistia) आदि की जड़ों में मूल टोप (Root cap) का अभाव होता है तथा यह मूल पॉकेट (Root pocket) के द्वारा प्रतिस्थापित होती है।
  • यदि जड़ें उपस्थित रहती हैं, तो वे अपस्थानिक (Adventitious) होती हैं तथा ये लम्बाई में छोटी, अशाखित एवं अल्पविकसित होती हैं । लेप्ना (Lemna) में जड़ें पौधे के सन्तुलन (Balance) को बनाते हुए लंगर (Anchor) की भाँति कार्य करती हैं।

(2) तनों में होने वाले अनुकूलन (Adaptations in stems)

  • जलमग्न पौधों (Submerged plants) उदाहरण-हाइड्रिला (Hydrilla), पोटेमोजिटॉन – (Potamogeton) आदि में तना लम्बा (Long), पतला (Slender) एवं लचीला (Flexible) होता है।
  • स्वतन्त्र रूप से तैरने वाले पौधों (Free floating plants) में तना जल की सतह के समानान्तर उस पर तैरता रहता है। उदाहरण-ऐजोला (Azolla), साल्विनिया (Salvinia) आदि। जलकुम्भी (Eichhomia) में तना स्पंजी (Spongy), मोटा, स्टोलन युक्त (Stoloniferous) एवं छोटा होता है।
  • जल में तैरने वाले जड़ युक्त पौधे (Rooted floating plants) जिनमें पत्तियाँ जल की सतह पर तैरती रहती हैं तथा तना प्रकन्द (Rhizome) के रूप में पाया जाता है। उदाहरण-निम्फिया (Nymphaea), निलम्बो (Nelumbo)।
  • इन पौधों में प्रजनन रनर (Runner), स्टोलन (Stolon) एवं ट्यूबर (Tuber) आदि के द्वारा होता है। तने प्रायः बहुवर्षीय (Perennial) होते हैं।

(3) पत्तियों में पाये जाने वाले अनुकूलन (Adaptations in leaves)

(i) जलमग्न रूपों (Submerged forms) में पत्तियाँ पतली (thin), लम्बी (long) एवं फीतेनुमा (Ribbon shaped) होती हैं। उदाहरण-वैलिस्नेरिया (Vallisneria), सिरेटोफिलम (Ceratophyllum) एवं रैननकुलस एक्वेटिलिस (Ranunculus aquatilis) की पत्तियाँ पतली एवं कटी-फटी (Finely divided) होती हैं। जलमग्न पौधों में कटी-फटी पत्तियाँ जल के तरंगों (Waves) के प्रति कम प्रतिरोधक (Resistant) होती हैं और पौधों को सुरक्षित रखती हैं।

(ii) प्लावी पौधों (Floating plants) उदाहरण-निम्फिया(Nymphaea) एवं कुमुदनी (Nelumbo) की पत्तियाँ अपेक्षाकृत बड़ी (Large), चपटी (Flat), पूर्ण (Entire) एवं प्लावी (Floating) होती हैं। इनकी बाह्य सतह पर मोम (Wax) का जमाव (Coating) होता है। इन पौधों की पत्तियों के पर्णवृन्त (Petiole) लम्बे, लचीले (Flexible), स्पंजी (Spongy) एवं श्लेष्म (Mucilage) के द्वारा घिरे रहते हैं, जिसके कारण पत्तियाँ जल की सतह पर आ जाती हैं।

(iii) कुछ प्लावी पौधों उदाहरण-जलकुम्भी (Eichhornia) एवं सिंघाड़ा (Trapa) आदि पौधों में पत्तियों के पर्णवन्त (Petiole) फूले हुए (Swollen) एवं स्पंजी (Spongy) होते हैं, जिनमें हवा भरी रहती है। यह गुण पौधे को तैरने में सहायता करता है।

(iv) रैननकुलस (Ranunculus), सैजिटेरिया (Sagittaria), एवं लिम्नोफिला (Limnophila) आदि में विषमपर्णता (Heterophylly) पायी जाती है। इनमें कई प्रकार की पत्तियाँ पायी जाती हैं

  • जलमग्न पत्तियाँ (Submerged leaves)
  • प्लावित पत्तियाँ (Floating leaves) एवं
  • वायवीय पत्तियाँ (Aerial leaves)। निमग्न पत्तियाँ, रेखीय (linear), फीतेनुमा (Ribbon shaped) तथा कटी-फटी (Dissected) होती हैं । प्लावित पत्तियाँ पूर्ण (Entire) एवं पालित (Lobed) होती हैं।

प्रश्न 4.
मरुद्भिद पौधों के तनों एवं पत्तियों में पाये जाने वाले आकारिकीय अनुकूलनों का वर्णन कीजिए।
अथवा
मरुदभिद पौधों को उदाहरण सहित संक्षेप में समझाइए।
उत्तर
मरुद्भिद पौधों में शुष्क वातावरण को सहने के लिये निम्न प्रकार के प्रकार्यात्मक अनुकूलन पाये जाते हैं
पत्तियों में अनुकूलन (Adaptations in leaves)

  • मरुद्भिद पौधों की पत्तियाँ छोटी (Small) होती हैं, जिससे वाष्योत्सर्जन (Transpiration) करने वाले क्षेत्रफल में कमी आती है। उदाहरण-केजूराइना (Casurina)।
  • कुछ पौधों जैसे-अकेसिया मेलैनोजाइलॉन (Acacia melanonylon) में पर्णफलक (Leaf lamina) अनुपस्थित होता है तथा पर्णवृन्त (Petiole) चपटा होकर प्रकाश-संश्लेषण का कार्य करता है। इसे फिल्लोड (Phyllode) कहते हैं।
  • कुछ मरुद्भिद पौधों जैसे-ऐलोय (Aloe), ऐगेव (Agave), यूक्का (Yucca) एवं बिगोनिया (Begonia) आदि में पत्तियाँ मोटी, गूदेदार एवं मांसल होती हैं। अत: इनमें जल की अत्यधिक मात्रा संचित रहती है।
  • नागफनी (Opuntia) एवं ऐस्पेरेगस (Asparagus) में पत्तियाँ काँटों (Spines) में रूपान्तरित होती हैं। इसी प्रकार पाइनस (Pinus) की पत्तियाँ लम्बी एवं सूच्याकार (Needle shaped) होकर जल की हानि को कम करते हैं।
  • कुछ मरुद्भिद् पौधों में अनुपत्र (Stipules) काँटों (Spines) में रूपान्तरित होकर वाष्पोत्सर्जन की दर को कम करते हैं। उदाहरण-यूफोर्बिया स्प्लेन्डेन्स (Euphorbia splendens), बेर (Zizvphus jujuba), अकेसिया (Acacia), कैपेरिस (Capparis) आदि।
  • इन पौधों की पत्तियों की बाह्य सतह चमकदार (Shiny) होती है, अतः ये प्रकाश को परावर्तित करके तापमान को कम करने में सहायता करती हैं। उदाहरण- कनेर (Nerium)।
  • कुछ एकबीजपत्री मरुद्भिद् पौधों की पत्तियाँ मुड़ी हुई (Rolled) अथवा वलयित (Folded) होकर रन्ध्रों को अन्दर की ओर छिपा लेती हैं, जिसके कारण वाष्पोत्सर्जन की दर कम हो जाती है। उदाहरणएमोफिला (Ammophila), पोआ (Poa), सोमा (Psomma), एग्रोपायरॉन (Agropyron) आदि।

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प्रश्न 5.
जैविक समुदाय से आप क्या समझते हैं ? किसी जैव समुदाय के विशिष्ट लक्षणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
जैविक समुदाय-किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र या वास स्थान में निवास करने वाली विभिन्न समष्टियों के समूह को जैविक समुदाय या जीवीय समुदाय या पारिस्थितिकी समुदाय कहते हैं।
जैव समुदाय के विशिष्ट लक्षण-प्रत्येक जीवीय समुदाय में कुछ विशेषताएँ पायी जाती हैं जिनमें से कुछ प्रमुख निम्नानुसार हैं

1.जाति विविधता-प्रत्येक जीवीय समुदाय में अनेक प्रकार के जीव एक साथ रहते हैं और सभी एकदूसरे से किसी-न-किसी रूप में जुड़े होते हैं।

2. रचना एवं वृद्धि स्वरूप-प्रत्येक जीवीय समुदाय की एक निश्चित रचना होती है जिसमें तीन प्रकार के जीव पाये जाते हैं-

  • उत्पादन
  • उपभोक्ता एवं
  • अपघटक । इसके साथ ही प्रत्येक जीव समुदाय का एक निश्चित वृद्धि स्वरूप होता है।

3. अनुक्रमण-प्रत्येक जैविक समुदाय परिवर्तनशील होता है तथा इसमें होने वाले परिवर्तन को रोका नहीं जा सकता है।

4. आत्मनिर्भरता-प्रत्येक जीवीय समुदाय में स्वपोषी तथा परपोषी दोनों ही जीव रहते हैं तथा सभी जीव भोजन तथा अपनी अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं। परपोषी तथा विषमपोषी जीव की उपस्थिति के कारण प्रत्येक जीव समुदाय आत्मनिर्भर होता है।

5. जीवों के बीच अन्तर्सम्बन्ध-जीवीय समुदाय के सभी जीव एक-दूसरे से घनिष्टतापूर्वक जुड़े होते हैं।

6. जाति प्रभाविता-प्रत्येक जैविक समुदाय में एक जाति प्रभावी रूप में पायी जाती है।

प्रश्न 6.
जन्तुओं की सहयोगात्मक क्रियाओं का वर्णन कर उनका किसी जाति के लिए महत्व बताइए।
उत्तर
एक ही जाति के जीवों में कई प्रकार के क्रियात्मक संबंध होते हैं
(A) सहयोगात्मक

  • सुरक्षा एवं भोजन के लिये सहयोग-इस सहयोग से जीवों को हिंसक जातियों से रक्षा प्रदान कर भोजन की खोज में मदद करता है। उदाहरण-बंदर, हिरण, जेब्रा, हाथी।
  • सामाजिक व्यवस्था-इस व्यवस्था के कारण शांति एवं अनुशासन बनाये रखने में मदद मिलती है। जिससे सुरक्षापूर्वक सरलता से जीवनयापन करते हैं। उदाहरण-चींटी, दीमक, मधुमक्खी।
  • प्रादेशिकता-कुछ जंतुओं में निश्चित क्षेत्र में अपने परिवार के शेष सदस्यों के साथ सहयोगात्मक रूप से जीवनयापन करते हैं । जंतुओं का स्थायी क्षेत्र बिल, घोंसला, झाड़ी, गुफा या दूसरे रूप में हो सकता है।
  • प्रजनन सहयोग-कई जंतु प्रजनन सहयोग के लिये आजीवन नर-मादा जोड़ा बनाते हैं इसे एक विवाही जीव कहते हैं। लोमड़ी, भेड़िया, एक नर के साथ कई मादाएँ हों तो बहु विषाही जीव कहते हैं। उदाहरण-हिरण, वालरस।
  • पैतृक संरक्षण या देखभाल-संतति तथा अंडों को सुरक्षा के लिये एक-दूसरे का सहयोग करते हैं। उदाहरण-मनुष्य, बंदर, हाथी।
  • सूचनाओं का आदान-प्रदान-लैंगिक रूप से जनन करने वाले जातियों में इन सूचनाओं का विशेष महत्व होता है। दैनिक जीवन में भी विशेष महत्व होता है।

(B) प्रतिस्पर्धात्मक-एक ही जाति के विभिन्न सदस्य आपस में भोजन, प्रजनन, क्षेत्र, गृह क्षेत्र तथा सुरक्षा आदि के लिये संघर्ष करते हैं। आवास हेतु पक्षी, भोजन हेतु छिपकली में संघर्ष देखा जाता है। एक ही जाति के सदस्यों के बीच में स्पर्धा के कारण उपलब्ध संसाधनों का जाति के सदस्यों में वितरण संतुलन बना रहता है। एक जाति के लिए सहयोगात्मक क्रियाओं का महत्व–एक जाति के जीव आपस में प्रजनन, भोजन, सुरक्षा एवं सामाजिक व्यवस्था के लिए सहयोगात्मक सम्बन्ध स्थापित करते हैं। एक जाति के सदस्यों को इस सम्बन्ध में कई लाभ होते हैं।

अगर हम प्रजनन सम्बन्ध को ही देखें तो यह बिना दो जीवों के सहयोग के सम्भव ही नहीं है। कई जीव जैसे बन्दर प्रजनन के लिए एक बड़ा समूह बनाते हैं जिसमें एक नर होता है और कई मादाएँ। कई जीव भोजन को सरलता से प्राप्त करने के लिए सामूहिक रूप में शिकार करते हैं । इसी प्रकार जीव जब समूह में रहते हैं तब मांसाहारी जीव आक्रमण नहीं करते जिनसे समूह के कारण उनको सुरक्षा मिलती है। इसी प्रकार चींटियों तथा मधुमक्खियों में समूह के कारण भोजन इत्यादि प्राप्त करने में सरलता होती है और उनका हर काम ठीक ढंग से होता है।

प्रश्न 7.
किसी जैविक समुदाय की विभिन्न जातियों के बीच अन्तर्सम्बन्धों का उदाहरणों सहित विवरण दीजिए।
उत्तर
जैविक समुदाय की विभिन्न जातियों के बीच अन्तर्सम्बन्ध-किसी भी जैविक समुदाय की विभिन्न जातियों के सदस्य अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए दूसरे पर निर्भर रहते हैं। एक समुदाय की विविध जातियों में निम्नलिखित प्रकार का सम्बन्ध हो सकता है–

(1) परजीविता-जब एक जीव दूसरे जीव से पोषण प्राप्त करता है, तब इस सम्बन्ध को परजीविता कहते हैं।

(2) सहजीविता-दो जातियों का ऐसा सम्बन्ध है, जिसमें दोनों एक-दूसरे को लाभ पहुँचाते हुए साथसाथ जीवित रहती हैं। जैसे-लाइकेन एक ऐसा जीव है, जिसमें एक कवक तथा एक शैवाल समूह के जीव साथ-साथ रहते हैं।

(3) सहभोजिता-जब दो सदस्य साथ-साथ इस प्रकार जीवित रहते हैं कि एक सदस्य को लाभ होता है, जबकि दूसरे सदस्यों को इस सम्बन्ध में न ही लाभ होता है और न ही नुकसान। जैसे-ऑर्किड उच्च पादपों पर उगता है।

(4) शिकार एवं शिकारी-दो जातियों के बीच ऐसा सम्बन्ध है, जिसमें एक जन्तु दूसरे का शिकार कर अपना भोजन प्राप्त करता है। जैसे-जंगल के शेर और हिरन का सम्बन्ध ।

(5) अपमार्जिता- यह दो जातियों के बीच आहार प्राप्ति का अटूट सम्बन्ध है, जिसमें एक जाति के जीव दूसरे जीव जाति के मृत शरीर से भोजन प्राप्त करते हैं। जैसे-गिद्ध एवं चील मरे हुए पशुओं के शरीर से भोजन प्राप्त कर वातावरण की प्राकृतिक रूप से सफाई करते हैं।

(6) प्रतिस्पर्धा-वह सम्बन्ध है, जिसमें किसी समुदाय में एक ही जाति अथवा अलग-अलग जातियों के जीव जल, भोजन, आवास, प्रकाश आदि के लिए संघर्ष करते हैं। प्रतिस्पर्धात्मक सम्बन्ध किसी भी जैविक समुदाय को जीवन्त बनाये रखता है।

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MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बीटी (Bt) आविष के रवे कुछ जीवाणुओं द्वारा बनाये जाते हैं, लेकिन जीवाणु स्वयं को नहीं मारते क्योंकि
(क) जीवाणु आविष के प्रति प्रतिरोधी होते हैं
(ख) आविष अपरिपक्व हैं।
(ग) आविष (Toxin) निष्क्रिय होता है
(घ) आविष जीवाणु की विशेषथैली में मिलता है।
उत्तर
(ग) आविष (Toxin) निष्क्रिय होता है।

प्रश्न 2.
पारजीनी जीवाणु क्या है ? किसी ऐक उदाहरण द्वारा सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
पारजीनी जीवाणु (Transgenic Bacteria)-ऐसे बैक्टीरिया (जीवाणु) जिनके डी.एन.ए. में परिचालन द्वारा एक अतिरिक्त (बाहरी) जीन व्यवस्थित होता है जो अपना लक्षण व्यक्त करता है, इसे पारजीनी जीवाणु कहते हैं।

उदाहरण-ई. कोलाई (E.coli) बैक्टीरिया एक पारजीनी जीवाणु है जो मधुमेह (डायबिटीज) रोग के निदान के लिए इन्सुलिन (Insulin) को उत्पन्न करता है। इन्सुलिन अणु दो पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं का बना होता है-A श्रृंखला (A chain) तथा B श्रृंखला (B chain) जो आपस में डाइ-सल्फाइड बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं। इन्सुलिन की दोनों शृंखलाओं का जैव संश्लेषण (Biosynthesis) एकल पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं प्राक्इन्सुलिन (Proinsulin) के रूप में होता है।

मानव सहित स्तनधारियों में इन्सुलिन प्राक् -हॉर्मोन (Pro-hormone) संश्लेषित होता है जिसमें एक अतिरिक्त फैलाव होता है जिसे पेप्टाइड C(Peptide-C) कहते हैं । यह ‘सी’ पेप्टाइड परिपक्व इन्सुलिन में नहीं होता है, जो परिपक्वता के दौरान इन्सुलिन से अलग हो जाता है। सन् 1983 में एली लिली नामक एक अमेरिकी कम्पनी ने दो DNAअनुक्रमों को तैयार किया जो मानव इन्सुलिन की श्रृंखला A और B के अनुरूप होते हैं, जिसे इश्चेरिचिया कोलाई (E.coli) के प्लास्मिड में प्रवेश कराकर इन्सुलिन का उत्पादन किया। इन अलग-अलग निर्मित श्रृंखलाओं में A और B को निकालकर डाइसल्फाइड बन्ध बनाकर आपस में संयोजित कर मानव इन्सुलिन का निर्माण किया जाता है।

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प्रश्न 3.
आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के उत्पादन के लाभ व हानि का तुलनात्मक विभेद कीजिये ?
उत्तर
आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के उत्पादन के लाभ (Advantages of Production of Genetically Modified (GM) crops)
जैव प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके कई पादपों में लाभप्रद गुणों का निवेश किया जाता है। जैव प्रौद्योगिकी से विकसित आनुवंशिकता रूपान्तरित फसलों के लाभप्रद गुण अग्रलिखित हैं

  • इस प्रकार के फसलों में पोषण गुणवत्ता में सुधार (Improvement in Nutritional Quality) हुआ है, जैसे-अधिक उत्पादन, अच्छे प्रोटीन : टक तथा अच्छे आवश्यक गुणों जैसे-गेहूँ की अच्छी बेकिंग गुणवत्ता तथा जौ की अच्छी माल्टिंग गुणवत्ता आदि का विकास इस प्रकार की फसलों में हुआ है।
  • लवण एवं सूखा सहिष्णुता-इस प्रकार की फसलें अजैव प्रतिबलों (Abiotic stresses) जैसे– ठण्डा, सूखा, लवण, ताप आदि के प्रति अधिक सहिष्णु (Tolerant) होते हैं।
  • इस प्रकार की फसलें रासायनिक पीड़क नाशकों पर कम निर्भर करती है।
  • इस प्रकार की फसलें कटाई के पश्चात् होने वाले नुकसान को कम करती है।
  • इस प्रकार की फसलें ऐसे पादपों के विकास में सहायक है जिनसे वैकल्पिक पदार्थों (Pharmaceuticals) की आपूर्ति भी की जाती है।

आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों के उत्पादन से हानि (Disadvantages of Production of Genetically Modified Crops) आनुवंशिक रूपान्तरित फसलों से कुछ हानियाँ भी होती है जो निम्न हैं

  • इस प्रकार की कुछ फसलों में बीज उत्पन्न करने की शक्ति नहीं होती जिससे प्रत्येक वर्ष किसान को नये बीज खरीदने पड़ते हैं।
  • छोटे किसान प्रत्येक बार इन फसलों को नहीं उगा सकते क्योंकि ये फसलें बहुत महँगी पड़ती है।
  • इस प्रकार की फसलों से लोगों में एलर्जी उत्पन्न होने की सम्भावना रहती है।

प्रश्न 4.
क्राई प्रोटीन्स क्या है ? उस जीव का नाम बताइए जो इसे पैदा करता है ? मनुष्य अपने फायदे के लिये इस प्रोटीन को कैसे उपयोग में लाते हैं ?
उत्तर
जीव विष जिस जीन द्वारा कूटबद्ध होते हैं, उसे क्राई (Cry) कहते हैं। क्राई प्रोटीन क्रिस्टलीय प्रोटीन्स (Crystalline proteins) का एक वर्ग है। बैसीलस थूरीनजिएन्सिस जीवाणु की कुछ प्रजातियाँ क्राई प्रोटीन्स का निर्माण करती है। यह प्रोटीन फसल पादपों को कीट पीड़कों (Insect pests) के प्रति प्रतिरोधी बनाती है। ये कई प्रकार की होती है। उदाहरण के लिये, जो प्रोटीन्स जीन क्राई I ए सी (Cry I AC) व क्राई II ए बी (Cry II A B) द्वारा कूटबद्ध होते हैं वे कपास के मुकुल कृमि (Bud worm) को नियंत्रित करते हैं। जबकि क्राई I ए बी (Cry IA B) मक्का छेदक (Maize borer) को नियंत्रित करता है। ये प्रोटीन कई प्रकार के कीटों की प्रजातियों के लिये विष (Toxic) है लेकिन मनुष्य के लिये हानिकारक नहीं है।

प्रश्न 5.
जीन चिकित्सा क्या है ? एडीनोसिन डिएमिनेज (ए. डी. ए.) की कमी का उदाहरण देते हुए इसका सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
जीन चिकित्सा (Gene Therapy)-जीन चिकित्सा में उन विधियों का सहयोग लिया जाता है जिनके द्वारा किसी बच्चे या भ्रूण में चिन्हित किये गये जीन दोषों का सुधार किया जाता है। उसमें रोग के उपचार के लिये जीनों को व्यक्ति की कोशिकाओं या ऊतकों में प्रवेश कराया जाता है। आनुवंशिक दोष वाली कोशिकाओं के उपचार के लिये सामान्य जीन को व्यक्ति या भ्रूण में स्थानान्तरित करते हैं जो निष्क्रिय जीन की क्षतिपूर्ति कर उसके कार्यों को सम्पन्न करते हैं।

जीन चिकित्सा का सर्वप्रथम प्रयोग सन् 1990 में एक चार वर्षीय बालिका में एडीनोसिन डिएमिनेज (Adenosine deaminase) की कमी को दूर करने के लिये किया गया था। यह एन्जाइम प्रतिरक्षा तंत्र के कार्य के लिए अति आवश्यक होता है। एडीनोसिन डिएमिनेज (ADA) से संबंधित जीन में गड़बड़ी होने के कारण घातक सम्बद्ध प्रतिरक्षा न्यूनता (Severe combined Immuno Deficiency SCID) रोग उत्पन्न होता है ।। इस प्रकार के रोगी में अक्रियाशील T- लिम्फोसाइट्स होती है। इसके कारण प्रतिरक्षा तंत्र रोगजनकों से लड़ने की क्षमता नहीं होती है।

जीन चिकित्सा में सर्वप्रथम रोगी के शरीर के रक्त से लसीकाणु को निकालकर शरीर के बाहर संवर्धित किया जाता है। सक्रिय ADA का CDNA लसीकाणु में प्रवेश कराकर अन्त में रोगी के शरीर में समाकलित कर दिया जाता है। ये कोशिकाएं मृतप्राय होती है इसलिये आनुवंशिकत: निर्मित लसीकाणुओं को समय-समय पर रोगी के शरीर से अलग करने की आवश्यकता होती है। यदि मज्जा कोशिकाओं से विलगित
अच्छे जीनों को प्रारंभिक भ्रूणीय अवस्था की कोशिकाओं से उत्पादित ADA में प्रवेश करा दिया जाये तो यह एक स्थाई उपचार हो सकता है।

प्रश्न 6.
ई. कोलाई जैसे जीवाणु में मानव जीन की क्लोनिंग एवं अभिव्यक्ति के प्रायोगिक चरणों का आरेखीय निरूपण प्रस्तुत कीजिए
उत्तर
पुनर्योगज डीएनए तकनीक (Re combinant DNA Technology)-

पुनर्योगज DNA प्राप्त करने के लिए तीन विधियाँ प्रयुक्त की
(अ) DNA की दो श्रृंखलाओं के अंतिम छोर पर नई DNA श्रृंखलाएँ जोड़कर-यदि हम एक DNA के सिरे पर कुछ क्षारक (जैसे – TTTTT) जोड़ दें, तथा दूसरे DNA के सिरे पर इसके संयुग्मी क्षारक (AAAAAA) जोड़ दें और फिर इन दोनों प्रकार के DNA को मिलायें, तो नई लड़ियाँ आपस में H-bond बनाकर दो भिन्न DNA अणुओं को संयुक्त कर देंगी। इस कार्य के लिए विशेष एंजाइम का उपयोग किया जाता है जिसे डी.एन.ए. ‘ए’ DNA ‘A’ टर्मिनल ट्रांसफरेज (Terminal Transferase) कहते हैं। अनजुड़े स्थानों को डी.एन.ए. लाइगेज (DNA Ligase) नामक एंजाइम द्वारा भर देते हैं।

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(ब) नियंत्रण एंजाइमों की सहायता से (With the help of Restriction Enzymes) –
इस विधि में संयुग्मी क्षारकों के बीच हाइड्रोजन बंध बनाकर संकरित DNA का निर्माण करते हैं। परन्तु इस विधि में एक विशेष एंजाइम, नियंत्रण एंजाइम (Restriction Enzymes) का उपयोग करते हैं। इस प्रकार के लगभग 100 एंजाइम अब उपलब्ध है। ये एंजाइम चाकू की तरह कार्य करते हैं तथा DNA श्रृंखला को विशिष्ट स्थानों पर इस प्रकार से काट देते हैं कि वांछित जीनों वाले खंड प्राप्त हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, ई. कोलाई से ईको आर.आई. (Eco RI) नामक नियंत्रण एंजाइम पृथक् किया गया है। यह DNA अणु में क्षारकों के निम्न क्रम को पहचान कर उसे G तथा A के मध्य काट देता है|
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भिन्न-भिन्न स्रोतों से प्राप्त दो DNA के टुकड़ों को मिला दिया जाये तो संयुग्मी बेस आपस में हाइड्रोजन आबंध बनाकर द्विकुंडलित रचना बना लेते हैं। जो स्थान बिना जुड़े रहते हैं, उन्हें DNA लाइगेज की सहायता से जोड़ लिया जाता है, जैसा कि पहली विधि में किया गया था। स्पष्ट है कि Eco तथा DNA Ligase की सहायता से विभिन्न जीवों के जीनों को संयुक्त कराके संकरित जीन तैयार किये जा सकते हैं। संकरित जीन में दोनों ही जीवों के गुण उपस्थित होंगे। यहाँ तक कि ऐसे जीव, जिनमें कोई समानता नहीं है (हाथी और मनुष्य, चूहा और बंदर, टमाटर और आम) इत्यादि। यही नहीं पौधों और जंतुओं के बीच भी संकरण की संभावना बढ़ गई है।

(स) क्लोनिंग (Cloning)—
यह विधि सबसे अधिक सरल तथा उपयोगी सिद्ध हुई है। आप जानते हैं कि कोशिकाओं में DNA का प्रतिकृतिकरण होता रहता है। परन्तु यह भी तभी होता है, जब स्वयं जीन इसका आदेश देता है। कोशिका में इन ‘प्रतिकृतिकरण जीनों’ की संख्या बहुत कम होती है। जैसे, कुछ जीवाणुओं के गुणसूत्र में 300-500 तक जीन होते हैं, परन्तु ‘प्रतिकृतिकरण जीन’ केवल एक ही होता है। इस जीन की एक विशेषता यह भी है कि यदि इसे मूल DNA से अलग करके किसी दूसरे DNA के साथ जोड़ दिया जाये तो यह उसकी प्रतिकृति करने लगता है। जीवाणुओं के प्लाज्मिड (Plasmid) में भी यह जीन उपस्थित होता है। यही कारण है कि जिस जीवाणु कोशिकाओं में प्लाज्मिड होता है, वे तेजी से गुणन करती है।
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शरीर में प्रत्येक पदार्थ के संश्लेषण के लिए कोई निश्चित जीन उत्तरदायी होता है। यदि इस विशिष्ट जीन के साथ प्लाज्मिड के साथ पहले बताई विधियों द्वारा संकरित करा दिया जाये और इस संकरित DNA को पुनः जीवाणु की कोशिका में स्थापित करके उपयुक्त संवर्धन माध्यम में उगने दिया जाये, तो जीवाणु में वह जीन उसी पदार्थ का संश्लेषण करता है जो कि वह मूल शरीर में करता था। इस समस्त प्रक्रिया को क्लोनिंग (Cloning) कहते हैं। पोषी जीवाणु के लिए ई. कोलाई का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 7.
तेल के रसायनशास्त्र तथाr-DNA तकनीक जिसके बारे में आपको जितना भी ज्ञान प्राप्त है, उसके आधार पर बीजों से तेल हाइड्रोकार्बन हटाने की कोई एक विधि सुझाझा ?
उत्तर
बीजों से तेल हटाने के लिए जैव प्रौद्योगिकी की आण्विक जैव तकनीक का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 8.
इन्टरनेट से पता लगाइए कि गोल्डन राइस (गोल्डन धान ) क्या है ?
उत्तर
“गोल्डन राइस” चावल (ओराइजा सटाइवा) की एक किस्म है जो जैव प्रौद्योगिकी द्वारा विकसित की गई है।

प्रश्न 9.
क्या हमारे रुधिर में प्रोटिओजेज तथा न्यूक्लिएजेज है ?
उत्तर
नहीं।

प्रश्न 10.
इन्टरनेट से पता लगाइए कि मुखीय सक्रिय औषध प्रोटीन को किस प्रकार बनायेंगे ? इस कार्य में आने वाली प्रमख समस्याओं का वर्णन कीजिये।
उत्तर
प्रोटीन की संरचना तथा कार्यों के अध्ययन के लिए मास-स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक पर आधारित पेप्टाइड-एमाइड-ड्यूटीरियम परिवर्तन तकनीक का अध्ययन किया जाता है तथा प्रोब उप-अणुक प्रोटीन संचालक की क्षमता का अध्ययन किया जाता है। यह विधि अत्यधिक श्रम व समय लेने वाली है। इस विधि में एमाइड के पृथक्करण का अध्ययन किया जाता है। ड्यूटीरियम एक्सचेंज मास स्पेक्ट्रोस्कोपी (DXMS) के द्वारा बन्ध का पूर्ण होना एवं एकल एमाइड (अमीनो अम्ल) पृथक्करण तीव्रता से सिद्ध होता है।

उपर्युक्त तकनीक से अत्यन्त कम मात्रा में उपस्थित पदार्थ में तथा लम्बे प्रोटीन पर सरलतापूर्वक कार्य किया जाता है। रिसेप्टर-लिगेन्ड युग्म पर जो जीवित कोशिका के अन्दर या कोशिका पर उपस्थित होते हैं, को शुद्धता के बिना अध्ययन किया जा सकता है। प्रोटीन रिसेप्टर की झिल्लियों का इन विट्रो विश्लेषण किया जाता है। इसकी मुख्य कठिनाई यह है कि इसके द्वारा कैंसर रोग हो जाता है।

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
गेहूँ है एक
(a) फल
(b) बीज
(c) भ्रूण
(d) ग्लूम।
उत्तर
(b) बीज

प्रश्न 2.
कॉल्चीसीन निम्न में से कौन-सा प्रभाव डालता है
(a) D.N.A. द्विगुणन
(b) गुणसूत्रों का द्विगुणन
(c) स्पिण्डिल तन्तुओं का बनना
(d) मध्य पटलिका के बनने में अवरोधन
उत्तर
(b) गुणसूत्रों का द्विगुणन

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प्रश्न 3.
वह पौधा जिसमें बीज बनता है फिर भी वर्धी प्रजनन द्वारा उगाया जाता है
(a) आलू
(b) नीम
(c) आम
(d) सेवन्ती।
उत्तर
(a) आलू

प्रश्न 4.
मानव निर्मित अन्न है
(a) ट्रिटिकम
(b) ट्रिटिकेल
(c) पाइसम
(d) गन्ना।
उत्तर
(b) ट्रिटिकेल

प्रश्न 5.
सोनेरा 64 और लारोजा 64A किस पादप की प्रजातियाँ हैं
(a) गेहूँ
(b) धान
(c) मटर
(d) मक्का
उत्तर
(a) गेहूँ

प्रश्न 6.
अगुणित नर पौधे किसके संवर्धन से तैयार किये जा सकते हैं
(a) पुतन्तु
(b) परागकण
(c) पुंकेसर
(d) पुमंग।
उत्तर
(b) परागकण

प्रश्न 7.
संकरण के समय फूल की कली से पुंकेसरों को हटाने की क्रिया कहलाती है
(a) कृप्स करवाना
(b) स्वनिषेचन
(c) विपुंसन
(d) टोपपिन
उत्तर
(c) विपुंसन

प्रश्न 8.
बीज बुआई निर्भर करती है
(a) तापमान पर
(b) प्रकाश अवधि पर
(c) भूमि की नमी पर
(d) उपर्युक्त सभी पर।
उत्तर
(d) उपर्युक्त सभी पर।

प्रश्न 9.
संकर ज्यादातर जनक से ओजस्वी होते हैं क्योंकि
(a) समयुग्मजता
(b) संकर ओज
(c) जनक ज्यादातर कमजोर होते हैं
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(b) संकर ओज

प्रश्न 10.
Ti प्लाज्मिड जो आनुवंशिक इंजीनियरिंग में प्रयुक्त होता है, प्राप्त होता है
(a) इश्चेरिचिया कोलाई से
(b) बैसीलस थूरिनजिएन्सिस से
(c) एग्रोबैक्टीरियम राइजोजीन्स से
(d) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स से।
उत्तर
(d) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स से।

प्रश्न 11.
Bt टॉक्सिन है
(a) अंत: कोशिकीय लिपिड
(b) अंत: कोशिकीय क्रिस्टलित प्रोटीन
(c) बाह्य कोशिकीय क्रिस्टलित प्रोटीन
(d) लिपिड।
उत्तर
(c) बाह्य कोशिकीय क्रिस्टलित प्रोटीन

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प्रश्न 12.
बैसीलस थूरिनजिएन्सिस (Bt) विभेद अपूर्व कार्य के लिए प्रयोग किया जाता है
(a) बायोमेटलर्जिक तकनीक
(b) बायोइन्सेक्टिसाइड्स पौधे
(c) जैव उर्वरक
(d) बायोमिनरेलाइजेशन प्रक्रम।
उत्तर
(b) बायोइन्सेक्टिसाइड्स पौधे

प्रश्न 13.
भारतीय पौधों में विदेशी DNA स्थानान्तरण में सामान्यतः प्रयोग की जाती है
(a) ट्राइकोडर्मा हार्जीएनम
(b) मेलोइडोगॉन इन्काग्नीटा
(c) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स
(d) पेनीसिलीयम एक्सपेन्सम
उत्तर
(c) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स

प्रश्न 14.
बायोपाइरेसी सम्बन्धित है
(a) जैव अणु तथा जीन्स की खोज से
(b) परम्परागत ज्ञान से
(c) जैव अनुसंधान से
(d) उपरोक्त सभी से।
उत्तर
(c) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स

प्रश्न 15.
सुनहरे चावल में कौन-सा विटामिन प्रचुर होता है
(a) विटामिन A
(b) विटामिन B
(c) विटामिन C
(d) विटामिन
उत्तर
(a) विटामिन A

2.  रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. देश के जैव संसाधनों की चोरी, डकैती तथा गैर कानूनी दोहन को ………….. कहते हैं।
2. जैविक पदार्थों के प्रयोग के लिए……………. एक प्रशासकीय आज्ञापत्र (Official licence) है।
3. जीवित जीवधारियों द्वारा उत्पन्न यौगिक ………….. है।
4. ……………. मानकों का एक समूह है जिसका प्रयोग हमारे कार्यों तथा जैविक संसार के बीच संबंधों को नियंत्रित करने में होता है।
5. उत्पाद की पुनर्घाप्ति, इसका शोधन तथा क्रियाविधि ………….. क्रिया कहलाती है।
उत्तर

  1. बायोपाइरेसी
  2. जैव एकाधिकार (बायोपेटेंट)
  3. जैव अणु
  4. जैव आचार संहिता
  5. डाउन स्ट्रीम।

3. सही जोड़ी बनाइए

‘A’ – ‘B’

1. एण्टीबायोटिक्स – (a) प्रति विषाणु प्रोटीन
2 ह्यूमूलिन – (b) जैव अणु तथा जीन की खोज
3. बायोपाइरेसी – (c) एस. वाक्समेन
4. इन्टरफेरॉन – (d) मानव इंसुलिन।
उत्तर
1. (c), 2. (d), 3. (b), 4. (a)

4. एक शब्द में उत्तर दीजिए

1. प्रथम ट्रांसजेनिक फसल का नाम लिखिए।
2. Bt-कपास में स्थानान्तरित कीटरोधी प्रोटीन का नाम क्या है ?
3. मानवनिर्मित इन्सुलिन का नाम क्या है ?
4. Nif जीन किस सूक्ष्मजीव में पाए जाते हैं ?
उत्तर

  1. तम्बाकू
  2. Cry प्रोटीन
  3. ह्यूम्यूलिन
  4. राइजोबियम।

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वे जीन जिनके जीन्स हस्तकौशल द्वारा परिवर्तित किये जा चुके हैं, उन्हें क्या कहते हैं ?
उत्तर
आनुवंशिकतः रूपान्तरित जीव (Genetically modified organisms = GMO)

प्रश्न 2.
जैव प्रौद्योगिकी के सहयोग से तैयार की गई पीड़क फसलों के नाम लिखिए। उत्तर-बी.टी. कपास, बी.टी मक्का, धान, टमाटर, आलू व सोयाबीन। प्रश्न 3. बी.टी. विष (Bt toxin) प्रोटीन किसके द्वारा उत्पन्न
होता है ?
उत्तर
बैसीलस थूरीनजिएंसिस (Bacillus thuringiensis) द्वारा।

प्रश्न 4.
बी.टी. विष किस जीन द्वारा कूटबद्ध होता है ?
उत्तर
बी.टी. विष क्राई (Cry) जीन्स द्वारा कूटबद्ध होता है।

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प्रश्न 5.
RNi का पूर्ण नाम लिखिए।
उत्तर
आर एन ए अंतरक्षेप (RNA interference)!

प्रश्न 6.
आनुवंशिक रोग से ग्रसित शिशु के रोगोपचार के लिये उपयुक्त चिकित्सा व्यवस्था का नाम लिखिए।
उत्तर
जीन चिकित्सा।

प्रश्न 7.
उस जीवाणु का वैज्ञानिक नाम लिखिये, जिसमें Bt जीव विष निर्मित होता है।
उत्तर
बैसीलस थूरीनजिएंसिस।

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
GM खाद्य क्या है ?
अथवा
जी.एम. फसल को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर
आनुवंशिक रूप से रूपान्तरित फसलों से उत्पादित खाद्य पदार्थों को GM खाद्य कहते हैं। यह GM

  • GM खाद्य पदार्थों में प्रति जैविक प्रतिरोधी जीन पाये जाते हैं।
  • इनमें ट्रांसजीवों (Transgenes) द्वारा उत्पादित प्रोटीन पाई जाती है। उदा. Cry-प्रोटीन । यह प्रोटीन कीट प्रतिरोधी किस्मों में पाई जाती है।
  • इन खाद्य पदार्थों में प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीनों के द्वारा उत्पादित एन्जाइम पाये जाते हैं जो कि पुनर्योजन DNA तकनीक में जीन ट्रांसफर के समय काम आते हैं।

प्रमुख GM फसल, खाद्य एवं फल

  • मक्का (Maize)-आनुवंशिक रूप से रूपांतरित जीनों का समावेश किया गया है जिनमें पीड़कों (Pests) एवं रोगों के लिए प्रतिरोधकता पायी जाती है।
  • फ्लौर-सौर टमाटर (Flaur Saur Tomato)-यह प्रथम GM खाद्य है । इन टमाटरों में कैनामाइसिन (Kanamycin) जैसे प्रतिजैविक के लिए प्रतिरोधकता पाई जाती है।
  • रेप ऑयल सीड (Rape Oil Seed)–यह एक नया पादप है जिनमें बास्टा (Basta) नाम खरपतवारनाशी के प्रति प्रतिरोधकता पाई जाती है।

प्रश्न 2.
GM फसलों के लाभ लिखिए।
उत्तर
GM फसलों के लाभ

  • GM फसलें, फसली पौधों में वांछित फिनोटाइपिक लक्षण उत्पन्न करती हैं।
  • Transgenesis द्वारा GM पौधों में विशिष्ट प्रकार की प्रोटीन उत्पन्न करने वाले जीवों को प्रविष्ट कराया जाता है। ये फसलें बाद में उस प्रोटीन का उत्पादन करती हैं।
  • इनमें विशिष्ट जैव-रासायनिक पथ वाले पौधों का संश्लेषण होता है।
  • इन फसलों में पूर्व से उपस्थित जीन की अभिव्यक्ति को रोकने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 3.
आनुवंशिक रूप से रूपांतरित खाद्य क्या है ? कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
ऐसी फसलें जिनमें अन्य प्रजातियों के उपयोगी जीन पाये जाते हैं तथा जिन्हें आनुवंशिक अभियांत्रिकी की सहायता से दूसरे में प्रविष्ट कराया जाता है उसे आनुवंशिक रूप से रूपांतरित (Genetically modified) या ट्रांसजेनिक फसलें कहते हैं । इन फसलों को ट्रांसजिनेसिस विधि द्वारा पुनर्योगज DNA तकनीक की सहायता से तैयार किया जाता है।
उदाहरण-

  • फ्लौर सौर टमाटर-यह प्रथम GM खाद्य है। इनमें कैनामाइसिन जैसे प्रतिजैविक के लिए प्रतिरोधकता पायी जाती है।
  • रेप ऑयल सीड-यह नया GM पादप है जिनमें बास्टा नामक खरपतवारनाशी के प्रति प्रतिरोधकता होती है।

प्रश्न 4.
दोषमुक्त कृषि किसे कहते हैं ?
उत्तर
कृषि की वह विधि जो कि दीर्घकालीन, टिकाऊ एवं हानि रहित होती है उसे दोषमुक्त कृषि कहते हैं । हरित क्रांति एवं उसके बाद के दौर में अधिक उत्पादन हेतु नई किस्मों के उपयोग, सिंचित क्षेत्र में वृद्धि, उर्वरकों के अति उपयोग, कीटनाशकों तथा शाकनाशी रसायनों के अंधाधुंध उपयोग से फसल उत्पादन में तो अत्यधिक वृद्धि हुई, परन्तु भूमि की गिरती उर्वरता, खाद्य व जल में प्रदूषण, विभिन्न रोगों व विकृतियों के रूप में सामने आ रही है।

पौधों व मनुष्य में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधी क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है। खाद्य व जल जनित बीमारियाँ मानव एवं पशु स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं । यह सब आधुनिक व्यावसायिक खेती के कारण हो रहा है, अतः एक ऐसी कृषि प्रणाली को विकसित करने की आवश्यकता हो गई है जो उपर्युक्त दोषों से मुक्त हों। ऐसी कृषि को दोषमुक्त या दीर्घकालीन कृषि कहा जाता है । दोषमुक्त कृषि का सबसे अच्छा उदाहरण कार्बनिक खेती (Organic agriculture) है।

प्रश्न 5.
कार्बनिक खेती क्या है ? इसका क्या आधार होता है ?
उत्तर
कार्बनिक खेती (Organic agriculture)-खेती कृषि उत्पादन की वह पद्धति है जिसमें संश्लेषित उर्वरक, कीटनाशक, निंदानाशक, पौध वृद्धि नियामक, पशुजनित पदार्थ, आनुवंशिक रूप से रूपान्तरित जीवाणु का उपयोग नहीं किया जाता है। इस विधि में भूमि की उर्वरता तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए जैविक खाद, फसल चक्र तथा कीटों तथा खरपतवारों को नष्ट करने के लिए जैव पीड़क नाशकों का उपयोग किया जाता
है। इसके अन्तर्गत पर्यावरण को क्षति पहुँचाये बिना उर्वरकों एवं कृषि रसायनों का कम-से-कम प्रयोग करते हुए जैविक आधारित उर्वरकों, खादों एवं जैव पीड़कनाशकों का अधिकाधिक उपयोग करके उत्पादन में वृद्धि की जाती है।

खेती के आधार (Basic of organic agriculture)-

  • कार्बनिक खेती भूमि, पौधे, पशु व मानव तथा वैश्विक परिस्थितियों को सुधारने व उसे टिकाऊ बनाने पर आधारित है।
  • कार्बनिक उन खेती उन जैव पारिस्थितिक तंत्रों एवं जैव चक्रों पर आधारित है जिसमें उन्हीं जैव तंत्रों व जैव पारिस्थितिक तंत्रों का उपयोग किया जाता है तथा उन्हें बढ़ाया जाता है।
  • कार्बनिक खेती वातावरण एवं जीवन की संभावनाओं को प्रदूषण मुक्त बनाने पर आधारित है।
  • कार्बनिक खेती वर्तमान एवं भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य एवं वातावरण को बचाने के लिए वांछित सावधानियों एवं आवश्यक उपायों पर आधारित है।

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प्रश्न 6.
जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इन्जीनियरिंग को समझाइए।
अथवा
आनुवंशिक अभियांत्रिकी किसे कहते हैं ? उसका मानव जीवन में महत्व लिखिए।
उत्तर
वैज्ञानिकों द्वारा DNA या आनुवंशिक पदार्थ की संरचना में आवश्यकतानुसार हेर-फेर करने को जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इन्जीनियरिंग कहते हैं । आनुवंशिक पदार्थ का कृत्रिम संश्लेषण दो अलग-अलग जीनों के DNA खण्डों को जोड़कर नया DNA बनाना, DNA की मरम्मत, DNA से कुछ न्यूक्लियोटाइड को हटाकर या जोड़कर या विस्थापित करके इच्छित संरचना वाले नये DNA अणुओं का संश्लेषण करके जीन क्रिया का नियन्त्रण करना तथा जीवधारियों में इच्छित गुणों का समावेश करना जेनेटिक इन्जीनियरिंग का मुख्य उद्देश्य है। आनुवंशिकी की यह शाखा अभी अपने शैशव काल में है।

उम्मीद की जाती है कि इस विधि के द्वारा आनुवंशिक वैज्ञानिक जीन की संरचना में सुधार करके अथवा विकृत जीन को सामान्य जीन द्वारा विस्थापित करके आनुवंशिक रोगों से मानव जाति को मुक्ति दिला सकेंगे अथवा मानव द्वारा उपयोग में आने वाले पादपों व जन्तुओं की नस्लों का सुधार कर सकेंगे। आनुवंशिक पदार्थ के संगठन में हेर-फेर, DNA की संरचना का ज्ञान एक अत्याधुनिक तकनीक के विकास के कारण सम्भव हो सकता है। इनको रिकॉम्बिनेन्ट DNA तकनीकी कहते हैं।

आनुवंशिक अभियांत्रिकी का मानव जीवन में महत्व

1. औद्योगिक उपयोग-उच्च वर्गों के जीवों के विटामिन प्रतिजैविक या हॉर्मोन के जीन को कोड करके तथा इनके संश्लेषित DNA को जीवाणुओं में पुनः स्थापित करके विटामिन्स, हॉर्मोन्स आदि यौगिकों का औद्योगिक स्तर पर संश्लेषण किया जाना सम्भव हुआ है। इस विधि से मानव इन्सुलिन का Humulin नाम से जैव-संश्लेषण किया गया है।

2.चिकित्सीय उपयोग-नयी दवाइयों का जैवस्तर पर संश्लेषण तथा जीन चिकित्सा द्वारा हीमोफीलिया, फिनाइल कीटोन्यूरिया आदि वंशागत रोगों का उपचार किया जाना सम्भव हुआ है।

3. कृषि क्षेत्र में उपयोग-

  • जीवाणु अथवा नीले-हरे शैवाल से नाइट्रोजन यौगिकीकरण करने वाले जीनों का अनाज वाली फसलों में स्थानान्तरण करने हेतु प्रयोग जारी है, जिससे हमारी फसलें पर्यावरण से नाइट्रोजन का सीधा प्रयोग कर सकेंगी और हमें कृषि में कृत्रिम उर्वरक के उपयोग की आवश्यकता नहीं रहेगी।
  • आनुवंशिक अभियांत्रिकी के द्वारा पौधों की नई एवं उच्च उत्पादन वाली प्रजातियों का विकास किया जाता है।
  • इसकी सहायता से उच्च गुणवत्ता एवं प्रोटीन युक्त पौधे विकसित किये जा सकते हैं।

4. जीन संरचना अभिव्यक्ति में परिवर्तन-इस तकनीक द्वारा इच्छानुसार नये-नये प्रकार के जीवों तथा वनस्पतियों का निर्माण सम्भव हो सकेगा।

प्रश्न 7.
जीन लाइब्रेरी या जीन बैंक क्या हैं ? इसे तैयार करने की विधि लिखिये ।
उत्तर
जीनोमिक लाइब्रेरी या जीन बैंक के अन्दर जीनोम खण्डों अथवा पूर्ण जीनोम को संरक्षित किया जाता है। जीनोमिक लाइब्रेरी तैयार करने के लिए कई क्रियाएँ चरण के रूप में सम्पन्न कराई जाती हैं

Isolation of m-RNA from tissue

Reverse transcriptase

c-DNA copies

Removal of m-RNA by alkali treatment

Single-stranded c-DNA

Double-stranded c-DNA with DNA polymerase forming hairpin loops

Removal of hairpin loops with Si nuclease

Double-stranded c-DNA

Insertion in vector to make library
चित्र-जीनोमिक लाइब्रेरी का निर्माण

(1) DNA खण्डों का उत्पादन।
(2) DNA खण्डों का वाहक क्लोन (प्लाज्मिड, कास्मिड या विषाणु) में प्रवेश।
(3) क्लोन्ड DNA का पोषक जीवाणु में प्रवेश। इस प्रकार प्राप्त पोषक जीवाणु जिसमें इच्छित DNA संरक्षित रहता है, को संवर्धन माध्यम में विकसित करते हैं। ऐसा करने पर जीवाणुओं की कॉलोनियाँ प्राप्त होती हैं। इन जीवाणुओं से एन्जाइम की सहायता से DNA को प्राप्त कर इन खण्डों को जीनोमिक लाइब्रेरी में संरक्षित किया जाता है।

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिक इन्जीनियरिंग की अनुप्रयोज्यता का वर्णन कीजिए।
उत्तर
अनुप्रयोज्यता की दृष्टि से आनुवंशिक इन्जीनियरिंग हमें निम्नलिखित लाभदायक तथा हानिकारक परिणाम देती है
(A) लाभदायक प्रभाव

  • औद्योगिक उपयोग-उच्च वर्गों के जीवों के विटामिन प्रतिजैविक या हॉर्मोन के जीन का कोड करके तथा संश्लेषित DNA को जीवाणुओं में पुन:स्थापित करके विटामिन्स, हॉर्मोन्स आदि यौगिकों को औद्योगिक स्तर पर संश्लेषण किया जाना सम्भव हुआ है। इस विधि से मानव इन्सुलिन का Humulin नाम से जैव-संश्लेषण किया गया है।
  • चिकित्सीय उपयोग-नयी दवाइयों का जैव स्तर पर संश्लेषण तथा जीन चिकित्सा द्वारा हीमोफीलिया, फीनाइलकीटोन्यूरिया आदि वंशागत रोगों का उपचार किया जाना सम्भव हुआ है।
  • कृषि क्षेत्र में उपयोग-जीवाणु अथवा नीले-हरे शैवाल से नाइट्रोजन यौगिकीकरण करने वाले जीनों का अनाज वाली फसलों में स्थानान्तरण करने हेतु प्रयोग जारी है, जिससे हमारी फसलें पर्यावरण से नाइट्रोजन का सीधा प्रयोग कर सकेंगी और हमें कृषि में कृत्रिम उर्वरक के उपयोग की आवश्यकता नहीं रहेगी।
  • जीन संरचना अभिव्यक्ति में परिवर्तन-इस तकनीक द्वारा इच्छानुसार नये-नये प्रकार के जीवों तथा वनस्पतियों का निर्माण सम्भव हो सकेगा।

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(B) हानिकारक प्रभाव

  • रोगाणु ऐन्टीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो सकते हैं।
  • आन्त्र में पाये जाने वाले जीवाणु कैन्सर कारक हो सकते हैं।
  • सामान्य वाइरस से अत्यधिक खतरनाक वाइरस का निर्माण हो सकता है।

प्रश्न 2.
फोरेंसिक विज्ञान क्या है ? फोरेंसिक विज्ञान में DNA फिंगर प्रिंटिंग की विधि समझाइए।
उत्तर
फोरेंसिक विज्ञान-फोरेंसिक विज्ञान के अन्तर्गत अपराधों की विवेचना की जाती है। आज जैव तकनीकी ने अपराधिक प्रकरणों के निपटारे में नये आयाम खोल दिये हैं। इनमें से DNA फिंगर प्रिंटिंग

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements

The d-and f-Block Elements NCERT Intext Exercises

Question 1.
The silver atom has completely filled d-orbitals (4d10) in its ground state. How can you say that it is a transition element?
Answer:
Silver (Z = 47) can exhibit +2 oxidation state wherein it will have incompletely filled d-orbitals (4d), hence a transition element.

Question 2.
In the series Sc (Z = 21) to Zn (Z = 30), the enthalpy of atomisation of Zinc is the lowest, i.e., 126 KJ mol-1. Why?
Answer:
In case of Zinc, 3d-electrons are not involved in metallic bonding, due to having 3d10 configuration. Because of poor metallic bonding, the enthalpy of atomisation of Zinc is the lowest.

Question 3.
Which of the 3d series of the transition metals exhibits the largest number of oxidation state and why?
Answer:
Manganese (Z = 25), as its atom has the maximum number of unpaired electrons.

Question 4.
The E° (M2+/M) value for copper is positive (+0.34V). What is possibly the reason for this? (Hint: Consider its high ∆0H°Θ and low ∆hydH°).
Answer:
E°(M+2/M) for any metal depends upon the sum of enthalpies of atomisation, ionisation enthalpy and hydration enthalpy. Copper has high enthalpy of atomisation and low hydration enthalpy. Hence, E°(Cu+2/Cu) is positive.

Question 5.
How would you account for the irregular variation of ionisation enthalpies (first and second) in the first series of the transition elements?
Answer:
Irregular variation of ionisation enthalpies is mainly attributed to a varying degrees of stability of different 3d-configurations (e.g., d°, d5, d10 are exceptionally stable).

Question 6.
Why is the highest oxidation state of a metal exhibited in its oxide or fluoride only?
Answer:
Both.oxygen and fluorine are highly electronegative. Thus, they oxidise the met¬als in their compounds in highest oxidation state.

Question 7.
Which is a stronger reducing agent Cr2+ or Fe2+ and why ?
Answer:
Cr2+ is a stronger reducing agent than Fe2+
Reason: d4 → d3 occurs in case of Cr2+ to Cr3+
But d6 → d5 occurs in case of Fe2+ to Fe3+

Question 8.
Calculate the ‘spin only’ magnetic moment of M2+(aq) ion (Z = 27).
Answer:
The electronic configuration of M+2 (Z = 27) is
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Question 9.
Explain why the Cu+ ion is not stable in aqueous solutions?
Answer:
Cu+ in aqueous solution undergoes disproportionation,
i.e., 2Cu+(aq) → Cu2+(aq) + Cu(s)
The E° value for this is favourable.

Question 10.
Actinide contraction is greater from element to element than lanthanide contraction. Why?
Answer:
This is due to the poor shielding effect by 5f electrons in the actinoids than that of 4f electrons in the lanthanoids.

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The d-and f-Block Elements NCERT Text Book Exercises

Question 1.
Write down the electronic configuration of:
(i) Cr3+
(ii) Pm3+
(iii) Cu+
(iv) Ce4+
(v) CO2+
(vi) Lu2+
(vii) Mn2+
(viii) Th4+
Answer:
(i) Cr3+: [Ar]3d3
(ii) Pm3+ : [Xe]4f4
(iii) Cu+ : [Ar]3d10
(iv) Ce4+ : [Xe]54
(v) CO2+ : [Ar]3d7
(vi) LU2+ : [Xe]4f14 5d1
(vii) Mn2+ : [Ar]3d5
(viii) Th4+ : [Rn].

Question 2.
Why are Mn2+ compounds more stable than Fe2+ towards oxidation to their +3 oxidation state?
Answer:
Mn+2 has stable electronic configuration [Ar]4s03d5 and they do not easily change to Mn+3, Fe+2 [Ar] 4s03d6 on oxidation forms Fe+3 [Ar] 4s03d5 a more stable configuration.

Question 3.
Explain briefly how +2 oxidation state becomes more and more stable in the first half of the first row transition elements with increasing atomic number?
Answer:
Except for Scandium (which shows an oxidation state of +3) all other first-row transition elements show an oxidation state of +2. This is due to loss of two ns electrons. In the first half, as we move from Ti+2 to Mn+2 the electronic configuration changes from 3d2 to 3d5 i.e., more and more d-orbitals are half-filled imparting greater and greater stability of +2 oxidation state.

Question 4.
To what extent do the electronic configurations decide the stability of oxidation states in the first series of the transition elements? Illustrate your answer with examples.
Answer:
The electronic configurations play a very crucial role in deciding the stability of oxidation states. The presence or absence of complete or half-filled d orbitals in that oxidation state decides its stability. Also the ability to give away e decide the oxidation state which depends on the energy possessed by it and henceforth its electronic configuration,
For example
Sc shows +3 oxidation state only
[M] 3d1 4s2 +1, +2 very unstable due to presence of 1 d e- +3 oxidation state is stable with noble gas configuration.
Mn : [Ar] 3d5 4s2 has +2, +3, +4, +5, +6, +7 states but only +2 and +7 states are stable due to the half filled d orbital or completely empty d orbital.
similarly Ti = +2, +3, +4 with +4 most stable due to the same reason.

Question 5.
What may be the stable oxidation state of the transition element with the following d electronic configurations in the ground state of their atoms : 3d3,3d5,3d8 and 3d4?
Solution:
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Question 6.
Name the oxometal anions of the first series of the transition metals in which the metal exhibits the oxidation state equal to its group number.
Answer:
Vanadate VO3, chromate CrO42-, permanganate MnO4.

Question 7.
What is lanthanoid contraction? What are the consequences of lanthanoid contraction?
Answer:
An interesting feature of the atomic size of lanthanides is that on moving down the group steady decrease in atomic size is observed. The shape of the f-orbital is in such a way that its shielding effect is minimum, therefore on the addition of extra electron in the f-subshell only attractive force increases. The steady decrease (contraction) in the size of fourteen lanthanide elements (La3+ 1 06Å to Lu3+ 0.8Å) by a value of about 0.2Å is known as lanthanide contraction.
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Reason:
(i) The new electrons in lanthanides instead of going to the outermost shell enter (n-2)f- suborbital as a result of which force of attraction increases between electron and nucleus due to which atom or ion contracts.

(ii) Electron entering in (n-2)f- suborbital have negligible or zero shielding effect over electrons present in the last orbit. In addition, the shape of the f-suborbital is not favourable for the shielding effect of electrons. Thus, lanthanide contraction occurs.

Consequences of lanthanide contraction:

  • Change in the properties of lanthanides: Due to lanthanide contraction, little change occurs in the properties of lanthanides. So it is very difficult to obtain them in a pure state.
  • Influence over the properties of other elements: Lanthanide contraction has an important influence over the element present before and after it e.g., there is a difference in properties of Ti and Zr while Zr and Hf have similar properties.

Question 8.
What are the characteristics of the transition elements and why are they called transition elements? Which of the d-block elements may not be regarded as the transition elements?
Answer:
Transition elements have incompletely filled d orbitals in their ground state or in any one of their oxidation states.
d-block elements are called transition elements and they lie between s and p block elements also all their properties are intermediate between s and p block elements.

Zn, Cd, Hg (elements of group 12) are not considered as transition metals because they have fully filled (d10) d orbitals configuration in their ground state as well as in their common oxidation state.

Question 9.
In what way is the electronic configuration of the transition elements different from that of the non-transition elements?
Answer:
The transition elements involve the filling of d-orbitals while the representative elements involve the filling of s and p-orbitals. The general electronic configuration of transition element is (n-1)d1-10 ns1-2 on the other hand, the general electronic configuration of representative elements in ns1-2 or ns2 np1-6. Thus, in representative elements, only the last shell is incomplete while in transition elements the last but one shell is also incomplete.

Question 10.
What are the different oxidation states exhibited by the lanthanoids?
Answer:
The lanthanoids have an electronic configuration of 6s2 common with variable occupancy of 4f level. These elements have only one oxidation state(+3).

Question 11.
Explain giving reasons:
(i) Transition metals and many of their compounds show paramagnetic behaviour.
(ii) The enthalpies of atomisation of the transition metals are high.
(iii) The transition metals generally form coloured compounds.
(iv) Transition metals and their many compounds act as good catalyst.
Answer:
(i) Paramagnetic substance is one which is attracted by magnetic field. It arises due to presence of unpaired electron in atom, ion or molecule.

Most of the transition elements and compounds are paramagnetic in nature. This is due to fact that transition elements involve partially filled 4 subshell and their atom and ion contain unpaired electron.

(ii) Transition elements have high effective nuclear charge and a large number of valence electrons. Therefore, they form very strong metallic bonds. As a result, the enthalpy of atomization of transition metals is high.

(iii) The colour of transitional metal ions is due to partially filled (n-1)d orbitals. In transitional metal ions which contain unpaired d electrons, transition of electrons takes place from one 4-orbital to another 4-orbital. During this transition it absorbs some radiation of visible light and reflects the remaining radiation in the form of coloured light. Thus, the colour of the ion is complementary to the colour absorbed by it.

For example: [Cu(H2O)6]2+ ion appears blue because it absorbs the red colour of the visible light for electron promotion and reflects its complementary blue colour.

Colour of some ions:
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(iv)Transition elements act as good catalysts in a chemical reaction in the hydrogenation of Ni metal, in contact process of manufacture of SO3, Pt and in the manufacture of NH3 by Haber process Fe acts as a catalyst. In the method of preparation of O2 by heating KClO3, MnO2 acts as catalyst.

Question 12.
What are interstitial compounds? Why are such compounds well known for transition metals?
Answer:
Interstitial compounds are those which are formed when small atoms like H, N or C are trapped inside the crystal lattices of metals. They are usually non-stoichiometric and are neither typically ionic nor covalent. Interstitial compounds are well known for transition compounds due to its closed crystalline structure with voids in them. The atomic size of transition metals is very large hence have large voids to occupy these small atoms.

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Question 13.
How is the variability in oxidation states of transition metals different from that of non-transition metals? Illustrate with examples.
Answer:
In transition elements, the oxidation states vary from +1 to any highest oxidation state by one. For example, for manganese it may vary as +2, +3, +4, +5, +6, +7. In the nontransition elements the variation is selective, always differing by 2, e.g. +2, +4, or +3, +5 or +4, +6 etc.

In transition metals, because of the small energy difference between ns and (n – 1)d orbitals, both s and (n – l)d electrons can take part in bond formation and hence they show a variable oxidation state.

Question 14.
Describe the preparation of potassium dichromate from iron chromite ore. What is the effect of increasing pH on a solution of potassium dichromate?
Answer:
Preparation: It is prepared from chromite ore or ferrochrome of chrome iron FeCr2O4 (FeO.Cr2O3). Different steps involved in the process are as follows:

1. Preparation of sodium chromate : The ore is finely powdered, mixed with sodium carbonate and quick lime and then roasted (heated to redness) in a reverberatory furnace in presence of excess of air when sodium chromate (yellow in colour) is formed with the evolution of CO2. Quick lime is added to keep the mass porous and thus facilitates oxidation.
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The roasted mass is extracted with water when sodium chromate dissolves completely leaving behind ferric oxide.

2. Conversion of sodium chromate to sodium dichromate: Sodium chromate is extracted with water and acidified with sulphuric acid to get sodium dichromate.
2Na2CrO4 + H2SO4 → Na2Cr2O7 + Na2SO4 + H2O
On concentration, the less soluble sodium sulphate Na2SO4.10H2O crystallizes out. This is filtered hot and allowed to cool when sodium dichromate Na2Cr2O7.2H2O separates on standing.

3. Conversion of sodium dichromatic into potassium dichromate: Hot concentrated solution of sodium dichromate is treated with requisite amount of potassium chloride when potassium dichromate being less soluble crystallizes out on cooling.
Na2Cr2O7 + 2KCl → K2Cr2O7 + 2NaCl
Effect of pH on a solution of K2Cr2O7: Potassium chloride being less soluble than sodium chloride is obtained in the form of orange coloured crystals and can be removed by filtration. The dichromate ion \(\mathrm{Cr}_{2} \mathrm{O}_{7}^{2-}\) exists in equilibrium with chromate \(\mathrm{Cr}_{2} \mathrm{O}_{4}^{2-}\) ion at pH 4. However, by changing the pH, they can be interconverted.
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Question 15.
Describe the oxidising action of potassium dichromate and write the ionic equations for its reaction with:
(i) Iodide
(ii) Iron(II) solution and
(iii) H2S.
Answer:
Reaction of K2Cr2O7 with acidic FeSO4, KI and H2S :
K2Cr2O7 acts as a very strong oxidizing agent in the acidic medium.
K2Cr2O7 + 4H2SO4 → K2SO4 + Cr2 (SO4)3 + 4H2O + 3[O]
K2Cr2O7 takes up electrons to get reduced and acts as an oxidizing agent. The reaction K2Cr2O7 with other iodides, iron (II) solution, and H2S are given below :
(i) It oxidizes ferrous sulphate to ferric sulphate.
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(ii) It liberates I2 from KI.
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These reactions are used in the estimation of iodine and ferrous ion in volumetric analysis

(iii) It oxidizes SO2 to sulphuric acid.
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(iv) It oxidizes H2S to sulphur.
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Question 16.
Describe the preparation of potassium permanganate. How does the acidified permanganate solution react with
(i) Iron(II) ions
(ii) SO2
(iii) Oxalic acid?
Write the ionic equations for the reactions.
Answer:
Preparation: Potassium permanganate is prepared from manganese dioxide. On a large scale, it is prepared from the mineral pyrolusite. The process involves the following steps:

1. Conversion of MnO2 into potassium manganate: The finely powdered pyrolusite mineral is fused with potassium carbonate or potassium hydroxide in presence of atmospheric oxygen or an oxidising agent such as potassium nitrate or potassium chlorate. The fused mass turns green due to the formation of potassium manganate.
2MnO2 + 2K2CO3 + O2 → 2K2MnO4 + 2CO2
2MnO2 + 4KOH + O2 → 2K2MnO4 + 2H2O
MnO2 + 2KOH + KNO3 → K2MnO4 + KNO2 + H2O
3MnO2 + 6KOH + KCl1O3 → 3K2MnO4 + KCl + 3H2O

2. Oxidation of potassium manganate into potassium permanganate :
(i) Chemical oxidation: The fused mass is extracted with water and the solution is filtered. The green solution is then converted to potassium permanganate by bubbling carbon dioxide, chlorine or oxygen through it.
32MnO4 + 2CO2 → 2KMnO4 + MnO2 ↓+ 2K2CO3
2K2MnO4 + Cl2 → 2KMnO4 + 2KCl
2K2MnO4 + H2O + O3 → 2KMnO4 + 2KOH + O2
The purple solution of potassium permanganate thus obtained is concentrated when it deposits dark purple, needle-like crystals having a metallic luster.

(ii) Electrolytic oxidation: Nowadays, it is largely manufactured by the electrolytic oxidation of manganate. The manganate solution is electrolysed between iron electrodes separated by a diaphragm. The oxygen evolved at the anode converts manganate to permanganate.
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After the oxidation is completed, the solution is filtered and evaporated under controlled conditions to obtain the crystals of potassium permanganate.

(i) Acidified KMnO4 solution oxidizes Fe(II) ions to Fe(III) ions i.e. ferrous ions to ferric ions.
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(ii) Acidified potassium permanganate oxidizes SO2 to sulphuric acid.
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(iii) Acidified potassium permanganate oxidizes oxalic acid to carbon dioxide.
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Question 17.
For M2+/M and M3+/M2+ systems the E° values for some metals are as follows:
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Use this data to comment upon:
(i) The stability of Fe3+ in acid solution as compared to that of Cr3+ or Mn3+ and
(ii) The ease with which iron can be oxidised as compared to a similar process for either chromium or manganese metal.
Answer:
(i) As E° Cr+3/Cr+2 is negative (-0.4V), this means Cr+3 ion in solution cannot be reduced to Cr+2 easily, i.e., Cr+3 ions are very stable. As E° M+3/ Mn+2 is positive (+ 1.5V), Mn+3 ions can easily be reduced to Mn+2 ions in comparison to Fe+3 ions. Thus, the relative stability of these ions is:
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(ii) Oxidation potentials for the given pairs will be +0-9V, + 1-2V and 04V. Thus, the order of their getting oxidised will be in the order Mn > Cr > Fe.

Question 18.
Predict which of the following will be coloured in aqueous solution? Ti3+, V3+, Cu+, Sc3+, Mn2+, Fe3+ and CO2+. Give reasons for each.
Answer:
The ions with one or more unpaired electrons will be coloured in an aqueous solution due to the d-d transition.
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Question 19.
Compare the stability of the +2 oxidation state for the elements of the first transition series.
Answer:
The relative stability of +2 oxidation state increases on moving from Sc to Zn. This is because on moving from top to bottom it becomes more and more difficult to remove the third e- from the d-orbital.

Question 20.
Compare the chemistry of actinoids with that of the lanthanoids with special reference to:
(i) Electronic configuration
(ii) Atomic and ionic sizes
(iii) Oxidation state and
(iv) Chemical reactivity.
Answer:
Differences between Lanthanoids and Actinoids:

Lanthanoids

  1. Differentiating or last electrons enter in 4 f-subshell of (n – 2) orbit.
  2. These elements come after lanthanum so these are called lanthanoids.
  3. The common oxidation state is +3, other oxidation states are +2 and +4 also.
  4. Atomic or ionic radius decreases gradually and this is called lanthanide contraction.
  5. Lanthanoids have a smaller tendency to form complexes.
  6. Lanthanoids do not form oxo-ions.
  7. Compounds of lanthanoids exhibit less basic in nature.
  8. Lanthanoids are not radioactive except Promethium.
  9. Except for Pm, other lanthanoids are present in nature in abundance comparatively more than iodine.

Actinoids

  1. Differentiating or last electrons enter in 5f-subshell of (n – 2) orbit.
  2. These elements come after actinium so these are called actinoids.
  3. The common oxidation state in actinoids is also +3 but other oxidation states are higher, e.g., +4, +5, +6, and +7.
  4. Atomic or ionic radius also decreases gradually and steadily and this is called actinoid contraction.
  5. Actinoids have a comparatively higher tendency of complex formation.
  6. Oxo-ions are formed, e.g., UO+2, PuO+2, UO+, etc.
  7. Compounds of actinoids are more basic in nature.
  8. All the actinoids are radioactive.
  9. Most of these are not found in nature and are artificially prepared.

Question 21.
How would you account for the following:
(i) Of the d4 species, Cr2+ is strongly reducing while manganese(III) is strongly oxidising.
(ii) Cobalt(II) is stable in an aqueous solution but in the presence of complexing reagents, it is easily oxidised.
(iii) The d1 configuration is very unstable in ions.
Answer:
(i) Cr2+ is strongly reducing in nature. It has a d4 configuration. While acting as a reducing agent, it gets oxidised to Cr3+ (electronic configuration d3). This d3 configuration can be written as t23 configuration, which is a more stable configuration. In the case of Mn3+ (d4) it Mn2+ (d5). This has an exactly half-filled d – orbital and is highly stable.

(ii) Co (II) is stable in aqueous solutions, however, in the presence of strong field complexing is agents, it is oxidised to Co (II). Although the 3rd ionisation energy for Co is high, but the higher amount of crystal field stabilisation field ligands overcomes this ionisation energy.

(iii) The ions in d configuration tend to lose one more electrons to get into stable d0 configuration. Also, the hydration or lattice energy is more than sufficient to remove the only electron present in the d-orbital of these ions. Therefore, they act as reducing agents.

Question 22.
What is meant by ‘disproportionation’? Give two examples of disproportionation reaction in an aqueous solution.
Answer:
The disproportionation reactions are those in which the same substance get oxidised as well as reduced, for example
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 18

Question 23.
Which metal in the first series of transition metals exhibits +1 oxidation state most frequently and why?
Answer:
In the fast transition series, Cu exhibits a +1 oxidation state very frequently. It is because Cu (+1) has an electronic configuration of [Ar] 3d10. The completely filled d – orbital makes it highly stable.

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Question 24.
Calculate the number of unpaired electrons in the following gaseous ions: Mn3+, Cr3+, V3+ and Ti3+. Which one of these is the most stable in aqueous solution?
Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 19
Cr+2 is most stable as it has a half-filled t28 level.

Question 25.
Give examples and suggest reasons for the following features of the transition metal chemistry:
(i) The lowest oxide of transition metal is basic, the highest is amphoteric/acidic.
(ii) A transition metal exhibits the highest oxidation state in oxides and fluorides.
(iii) The highest oxidation state is exhibited in oxo-anions of a metal.
Answer:
(i) The lowest oxide of transition metal is basic because the metal atom has low oxidation state whereas the highest is acidic or amphoteric due to highest oxidation state. For
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 20
In low oxidation state of the metal, some of the valence electrons of the metal atom are not involved in bonding. Hence, it can donate electrons and behave as a base. In the higher oxidation state, valence electrons are involved in the bonding and are not available. Instead, an effective nuclear charge is high. Hence, it can accept electrons and hence behave as an acid.

(ii) A transition metal exhibits higher oxidation states in oxides and fluorides because oxygen and fluorine are of small size and high electronegativity and hence can readily oxidise metals, for example OsF6[Os(VI)], V2O5[V(V)].

(iii) Oxo-anions of metals have highest oxidation states, for example Cr in Cr2O2-7 has an oxidation state of +6 whereas Mn in MnO4 has an oxidation state of +7. This is because of high electronegativity of oxgyen and is high oxidising property.

Question 26.
Indicate the steps in the preparation of:
(i) K2Cr2O7 from chromite ore
(ii) KMnO4 from pyrolusite ore.
Answer:
(i) It oxidizes ferrous sulphate to ferric sulphate.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 21

(ii) Acidified KMnO4 solution oxidizes Fe(II) ions to Fe(III) ions i.e. ferrous ions to ferric ions.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 22

Question 27.
What are alloys? Name an important alloy which contains some of the lanthanoid metals. Mention its uses.
Answer:
An alloy is a solid or solution of two or more elements in a metallic matrix. It can either be a partial solid solution or a complete solid solution. Alloys are usually found to possess different physical properties than those of the component elements.
An important alloy of lanthanoids is Mischmetal It contains lanthanoids (4.95%), iron (5%), and traces of S, C, Si, Ca, and Al.

Uses:

  1. Mischmetal is used in cigarettes and gas lighters
  2. It is used in flame-throwing tanks
  3. It is used in flame bullets and shills.

Question 28.
What are inner transition elements? Decide which of the following atomic numbers are the atomic numbers of the inner transition elements: 29,59,74,95,102, 104.
Answer:
The f-block elements i.e., in which last electrons into antepenultimate f-subshell are called inner-transition elements. These include lanthanoids (58-71) and actinoids (90-103). Thus, elements with atomic numbers 59,95, and 102 are inner transition elements.

Question 29.
The chemistry of the actinoid elements is not so smooth as that of the lanthanoids. Justify this statement by giving some examples of the oxidation state of these elements.
Answer:
Lanthanoids primarily show three oxidation states, +3 states are the most common. Lanthanoids display a limited number of oxidation states because the difference between the energies of 4f, 5d, and 6s orbitals is quite large. On the other hand, the energy difference between the 5f, 6d, and 7s orbitals is very less. Hence, actinoids display a large number of oxidation states. For example uranium and plutonium display +3, +4, +5 and +6 oxidation states while neptunium display +3, +4, +5 and +7. The most common oxidation state in the case of actinoids is also +3.

Question 30.
Which is the last element in the series of actinoids? Write the electronic configuration of this element. Comment on the possible oxidation state of this element.
Answer:
Last element of the actinoid series = Lawrencium (Z = 103)
Electronic configuration = [Rn] 5f14 6dl1 7s2 Possible oxidation state = +3.

Question 31.
Use Hund’s rule to derive the electronic configuration of Ce3+ ion, and calculate its magnetic moment on the basis of ‘spin only formula.
Answer:
Ce : 1s2 2s2 2p6 3s2 3p6 3d10 4s2 4p6 4d10 5s2 sp6 4f1 5d1 6s2
Ce : [Xe] 4f1 5d1 6s2
Ce3+: {Xe} 4f1
ForCe3+:
Number of unpaire electrons = n = 1
\(\mu=\sqrt{\mathrm{n}(\mathrm{n}+2)}\)
= √8
= 2√2
= 2.828 BM.

Question 32.
Name the members of the lanthanoid series which exhibit +4 oxidation states and those which exhibit +2 oxidation states. Try to correlate this type of behaviour with the electronic configurations of these elements.
Answer:
+4 = 58Ce, 59Pr 60Nd 65Tb 66Dy
+2 = 60Nd 62Sm 63EU 69Tm 70Yb.
+4 oxidation state is shown when the configuration left is close to either 4f0 (i.e., 4f0 4f1 4f2) or close to 4f0 (i.e.,4f0 4f1 4f2) or close to 4f2 (i.e., 4f7 or 4f8) +2 oxidation state is shown when the configuration is 5d° 6s2 so that two electrons are easily lost.

Question 33.
Compare the chemistry of the actinoids with that of lanthanoids with reference to:
(i) Electronic configuration
(ii) Oxidation states and
(iii) Chemical reactivity.
Answer:
Lanthanoids

  1. Differentiating or last electrons enter in 4 f-subshell of (n – 2) orbit.
  2. These elements come after lanthanum so these are called lanthanoids.
  3. The common oxidation state is +3, other oxidation states are +2 and +4 also.
  4. Atomic or ionic radius decreases gradually and this is called lanthanide contraction.
  5. Lanthanoids have smaller tendency to form complexes.
  6. Lanthanoids do not form oxo-ions.
  7. Compounds of lanthanoids exhibit less basic in nature.
  8. Lanthanoids are not radioactive except Promethium.
  9. Except Pm, other lanthanoids are present in nature in abundance comparatively more than iodine.

Actinoids

  1. Differentiating or last electrons enter in 5f-subshell of (n – 2) orbit.
  2. These elements come after actinium so these are called actinoids.
  3. The common oxidation state in actinoids is also +3 but other oxidation states are higher, e.g., +4, +5, +6, and +7.
  4. Atomic or ionic radius also decreases gradually and steadily and this is called actinoid contraction.
  5. Actinoids have a comparatively higher tendency of complex formation.
  6. Oxo-ions are formed, e.g., UO+2, PuO+2, UO+, etc.
  7. Compounds of actinoids are more basic in nature.
  8. All the actinoids are radioactive.
  9. Most of these are not found in nature and are artificially prepared.

Question 34.
Write the electronic configurations of the elements with the atomic numbers 61, 91,101, and 109.
Answer:
(i) Z = 61 : [Xe] 4f5 5d0 6s2
(ii) Z = 91 : [Rn] 5f2 6d1 7s2
(iii) Z = 101 : [Rn] 5f13 6d0 7s2
(iv) Z = 109 : [Rn] 5f14 6d7 7s2

Question 35.
Compare the general characteristics of the first series of transition metals with those of the second and third series metals in the respective vertical columns. Give special emphasis on the following points:
(i) Electronic configurations
(ii) Oxidation states
(iii) Ionisation enthalpies and
(iv) Atomic sizes.
Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 23

Question 36.
Write down the number of 3d electrons in each of the following ions: Ti2+, V2+, Cr3+, Mn2+, Fe2+, Fe3+, CO2+, Ni2+ and Cu2+. Indicate how would you expect the five 3d orbitals to be occupied for these hydrated ions (Octahedral).
Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 24
Note: About t2g and eg orbitals refer to MOT Unit 9.

Question 37.
Comment on the statement that elements of the first transition series possess many properties different from those of heavier transition elements.
Answer:
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 25

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Question 38.
What can be inferred from the magnetic moment values of the following complex species?
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 26
Answer:
K4[Mn(CN)6]
Mn+2: 3d5, magnetic moment of 2.2 indicates that it has one unpaired electron and hence forms inner orbitals or low spin complex. Its configuration is t52g.
[Fe(H2O)6]2+
Fe+2: 3d6, the magnetic moment value is close to 4 unpaired electrons so it forms an outer orbital complex having 4 unpaired electrons. Its configuration is t2g 4eg2g.
K2[MnCl4]
Mn+2: 3d5, the magnetic moment corresponds to 5 unpaired electrons. The CZ-orbitals are not disturbed. So it forms a tetrahedral complex. Its configuration is t2g 3eg2

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The d-and f-Block Elements Other Important Questions and Answers

The d-and f-Block Elements Objective Type Questions

Question 1.
Choose the correct answer :

Question 1.
In which of the compounds Mn shows highest oxidation state :
(a) K2MnO4
(b) KMnO4
(c) MnO2
(d) Mn3O4.
Answer:
(b) KMnO4

Question 2.
Which forms interstitial compound :
(a) Fe
(b) Ca
(c) Ni
(d) All of these
Answer:
(b) Ca

Question 3.
In neutral medium equivalent weight of KMnO4 is :
(a) M
(b) M/2
(c) M/3
(d) M/5.
Answer:
(c) M/3

Question 4.
The Lanthanide which is widely used :
(a) Lanthanum
(b) Nobelium
(c) Thorium
(d) Cerium.
Answer:
(d) Cerium.

Question 5.
Electronic configuration of Gadolinium is :
(a) [Xe] 4f6, 5d9, 6s2
(b) [Xe] 4f7, 5d1,6s2
(c) [Xe] 4f3, 5d5, 6s2
(d) [Xe] 4f6, 5d2, 6s2.
Answer:
(b) [Xe] 4f7, 5d1,6s2

Question 6.
Lanthanides contraction is responsible for the fact:
(a) 2r and Y have almost equal radius
(b) Zr and Nb have same oxidation state
(c) Zr and Hf have almost equal radius
(d) Zr and Zn have same oxidation state.
Answer:
(c) Zr and Hf have almost equal radius

Question 7.
In 3d series which elements shows highest oxidation state :
(a) Mn
(b) Fe2+
(c) Ni
(d) Cr.
Answer:
(a) Mn

Question 8.
Which of the transition metal ion is coloured :
(a) Cu+
(b) V2+
(c) Sc3+
(d) Ti4+.
Answer:
(b) V2+

Question 9.
A transition metal which is green in +3 oxidation state and orange in +6 oxidation state is:
(a) Mn
(b) Cr
(c) Os
(d) Fe.
Answer:
(b) Cr

Question 10.
In lanthanides the basicity of lanthanide oxides are :
(a) Increases
(b) Decreases
(c) First increases then decreases
(d) First decreases then increases.
Answer:
(b) Decreases

Question 11.
Number of unpaired electron in Fe+2 ion is :
(a) 0
(b) 4
(c) 6
(d) 3.
Answer:
(b) 4

Question 12.
Fe, Co, Ni, are magnetic substances of which type :
(a) Paramagnetic
(b) Ferromagnetic
(c) Diamagnetic
(d) Anti ferromagnetic.
Answer:
(b) Ferromagnetic

Question 2.
Fill in the blanks :

  1. Metals Fe, CO, Ni are known as ………………………
  2. Ionic size of trivalent cations are ……………………… with increase in atomic numbers.
  3. The transition metals having lower oxidation state shows ……………………… nature.
  4. K2Cr2O7 is a strong ……………………… agent, which gives ……………………… nascent oxygen.
  5. Zn shows only ……………………… oxidation state.
  6. f-block elements are known as ……………………… elements.
  7. Transition elements and their compounds act as ………………………
  8. General electronic configuration of inner transition element is ………………………
  9. Chemical form of Potassium manganate is ………………………
  10. f-block elements are also known as ………………………

Answers:

  1. Ferrous metals
  2. Decreases
  3. Basic
  4. Oxidising 3
  5. + 2
  6. Inner transition
  7. Catalyst
  8. (n-2)f1-14 (n-1)d1-2 ns2
  9. K2MnO4
  10. Transitional Elements.

Question 3.
Match the following :
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 27
Answers:

  1. (f)
  2. (g)
  3. (e)
  4. (c)
  5. (b)
  6. (d)
  7. (a).

Question 4.
Answer in one word / sentence :

1. Which is colourless Cu2+ or Cu+?
2. In a reaction KMnO4 is replaced by K2MnO4 then what will be the change in oxidation state of Mn ?
3. Which series shows higher oxidation state lanthanides or actinides ?
4. Which oxidation state of lanthanum is most stable ?
5. Write the equivalent weight of K2Cr2O7 in acid medium.
6. How many unpaired electrons are present in Fe3+ ?
7. Give the name of oxidising agent used in chromyl chloride test.
8. Out of (7-block elements, Zn does not show variable valencies, why ?
9. Which is the most important oxidation state of Cu ?
10. f-block elements can be divided into how many series ?
11. What is Lunar caustic ?
12. In d-block elements Zn does not exhibit variable oxidation state. Why ?
13. What is the alkaline solution of HgCl2 and KI known as ?
Answers:
1. Cu+
2. 1
3. Actinides
4. +3
5. 49
6. 5
7. K2Cr2O7
8. Completely filled ‘d’orbitals
9. +2
10. 2
11. AgNO3 (Silver nitrate)
12. Due to fully filled d-orbitals
13. Nessler’s reagent.

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The d-and f-Block Elements Short Answer Type Questions

Question 1.
Silver atom has completely filled d-orbitals (4d10) in its ground state. How can you say that it is a transition element ?
Answer:
Silver exhibits 4d105s0 electronic configuration in +1 oxidation state. But in some compounds it exhibits +2 oxidation state. In this state its electronic configuration is 4d95s0. Thus, due to incompletely filled 4d orbital, it is a transition element.

Question 2.
What are Transition elements ? They show metallic character. Why ?
Answer:
Elements whose atoms in their ground state or ions in their common oxidation states have incomplete or partially filled cf orbitals are called transitional elements. They are in group 2 to 13. Example : Fe, Ni, Co, etc.
General formula : (n-1)d1-10 ns1-2
Metallic character of an element depends on its tendency to form cation by loosing one or more electrons from its atom. All transitional elements are metals because they contain one or two electrons in their outermost shell which can be easily lost due to low ionisation energy. Thus, they are metallic in nature.

Question 3.
Why do transition metals exhibit variable oxidation states ?
Answer:
Transition metals exhibit variable valency because the energy subshell (n-1)d and ns are very close. Thus, possibility to lose electrons from ns subshell as well as from (n-1) d subshell is very much if there are unpaired electrons. So oxidation states of these metals may increase.
In these elements Mn shows maximum variable valencies.

Question 4.
Transition elements form alloy easily. Explain.
Answer:
It is the homogeneous mixture of two or more metals or metals with non-metals. Alloys are made to confer the property of metals. Transition elements have great tendency to form alloys because these elements have similar atomic size and can mutually substitute their positions in their crystal lattice. Alloys are comparatively hard and have higher m.p. than the elements from which they are made.

Question 5.
Explain magnetic properties of transitional elements on the basis of their electronic configuration.
Or,
Explain diamagnetism and paramagnetism.
Answer:
Magnetic property : Magnetic property is shown as:
(a) Paramagnetic substances: The substances which are attracted by magnetic field are called as paramagnetic substances. This property of paramagnetism is due to presence of unpaired electrons in atomic orbitals.
Fe, Co and Ni are ferromagnetic because they can be magnetised. Paramagnetism is represented by following formula :
\(\mu=\sqrt{n(n+2)}\)
Where, µ = Magnetic moment, n = Number of unpaired electrons.
(b) Diamagnetic substances : The substances which are repelled by magnetic field are called diamagnetic substances. In this type of substances all electrons are paired. Zinc is a diamagnetic metal.

Question 6.
Transition elements are inactive. Why ?
Answer:
The reason for low reactivity of transition elements are the following :

  1. High ionisation energy.
  2. High value of sublimation or atomization energy.
  3. Small value of hydration energy.
  4. Low value of standard electrode potential.

Question 7.
Write main characteristics of transitional elements.
Answer:
Main characteristics of transitional elements :

  1. Transition metals are metallic in nature which has electropositive character from Ti to Cu.
  2. They are hard and conductor of heat and electricity.
  3. Their b.p. and m.p. are high.
  4. They show variable oxidation states.
  5. These metals form coloured ions.
  6. These metals form co-ordination compounds.
  7. They are generally paramagnetic.
  8. These are good catalysts.
  9. These form alloys.
  10. These form interstitial compounds with non-metals.

Question 8.
Write any five main differences between d and f-Block elements.
Answer:
Differences between d and f-Block Elements :

d-Block Elements:

  1. Two shells n and (n-1) are incomplete.
  2. Last electron enters the d- orbital of penultimate shell.
  3. d-block elements are normally called Transitional element.
  4. d-block elements are available in nature.
  5. These elements exhibit variable oxidation state.
  6. These elements are stable.

f-Block Elements:

  1. Three shells n, (n-1) and (n-2) are inco-mplete.
  2. Last electron enters the orbital of antip-enultimate (n-2) shell.
  3. f-block elements are normally called Inner Transitional element.
  4. f-block elements are very rare. Therefore they are known as Rare Earth elements.
  5. These elements also exhibit variable oxidation state.
  6. These elements are less stable and many are radioactive.

Question 9.
What are Inner Transition elements ?
Answer:
These are the elements which contain (n-2)f and (n-1)d incomplete orbitals or in which electron enter in the antipenultimate (two energy levels below the outermost orbit orbital. These are so called because these are found within the transition elements. There are two types of inner transition elements :
(i) Lanthanides series : The 14 elements after Lanthanum (La57)
i. e., 58Ce – 71 LU are called lanthanides.
(ii) Actinides series : The 14 elements after Actinide (Ac89) i.e., Th90 to Lw103.

Question 10.
Write the name of members of Group 12. Why are they generally not considered as transition elements ?
Answer:
Members of Group 12 are Zn, Cd and Hg which are not included in transition elements because in both their atomic state and in bivalent ion state their electronic configuration is (n – 1)d10 i.e., their d-orbitals are completely filled. Therefore, they are not considered as transition elements.

Question 11.
Write any five characteristics of lanthanides.
Answer:
Five characteristics of lanthanides :

  1. These belongs tof-block because last electron goes to the f-subshell.
  2. These are shining metals like silver.
  3. These are good conductor of heat and electricity.
  4. Melting point and density of these are high.
  5. From La to Lu, atomic radii decreases continuously, it is called lanthanide contraction.

Question 12.
What is the reason that the ionisation energy of 5d series elements is higher than the series ?
Answer:
On moving from top to bottom in a group, value of ionisation energy decreases, but ionisation energy of elements of 5d series is higher than that of elements of 4d series. This is because of the presence of 14 Lanthanide elements in between due to which their size does not increase appreciably. Thus, attractive force between the nucleus and outermost electron is more and this is the cause of higher ionisation potential.

Question 13.
(i) Transition metals possess the ability, to form complex compounds. Explain.
(ii) Zn, Cd and Hg do not show the properties of Transition elements.
(iii) Why is Ti known as a wonder metal ?
Answer:
(i) Cause of formation of complex compounds by Transition metals :
(a) Small size of ions of these elements and high nuclear charge due to which these ions attract ligands.
(b) They possess vacant zforbitals in order to accomodate the electron pair donated by ligand.

(ii) Elements in which (n-1) d-orbital is partially filled are known as Transition elements.
Whereas in Zn [3d10 4s2], in Cd [4d10 5s2] and in Hg [5d10 6s2] state is found. Therefore, these do not show the properties of Transition elements.

(iii) Titanium is a shining white metal. It is extented strong (harder than steel), has high m.p. Good conductor of electric current resistant to corrosion and light metal. Due to all these qualities, it is called wonder metal.

Question 14.
The radius of Fe2+ ion is smaller than the radius of Mn2+ ion, why ?
Answer:
The atomic number of Fe (26) is more than the atomic number of Mn (25). Due to higher value of atomic number, iron nucleus contains more protons. Hence the force of attraction between the nucleus and the electrons of outermost orbit is more. Due to strong attractive force of the nucleus the electron cloud is pulled inwards which results in smaller size of Fe2+ ion as compared to Mn2+ ion.

Question 15.
Why is it difficult to separate lanthanide group ? Explain.
Answer:
The 14 inner transition elements which come after lanthanum (atomic number 57) are called lanthanides. In these elements, the incoming electrons enter in 4f – orbital leaving 5th and 6th orbital.

Separation of lanthanide is not possible due to lanthanide contractions. All lanthanides have quite similar properties. This is the reason why it is difficult to separate.

Question 16.
(i) TiO2 is white whereas TiCl3 is violet, why ?
(ii) In first transitional series paramagnetism increases till Cr then it starts de-creasing. Why ?
Answer:
(i) In TiO2, Ti is in +4 oxidation state (3d04s0) having a vacant d-orbital hence there is no d-d transition and it is white. On the other hand, in TiCl3, Ti is in +3 oxidation state (3d1 4s0) having one unpaired electron in its 3d- orbital, hence it is coloured.
(ii) In first transitional series, the number of unpaired electrons till Cr (3d5) increases and then due to pairing the number of unpaired electrons decreases. Thus, due to this at first paramagnetism increases till Cr and then it decreases.

Question 17.
Write chromyl chloride test with equation.
Answer:
Chromyl Chloride Test: 1. When a metal chloride is heated with solid potassium dichromate and cone. H2SO4 orange coloured vapours of chromyl chloride are formed.
K2Cr2O7 + 6H2SO4 + 4KCl → 2CrO2Cl2 ↑+ 6KHSO4 + 3H2O
2. When these fumes are passed in sodium hydroxide solution, yellow solution of sodium chromate is obtained. When lead acetate is added to it in presence of acetic acid yellow precipitate of lead chromate is obtained.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 28

Question 18.
Write names, symbols and electronic configuration of first transition series.
Answer:
First transition series: In the elements of this series from Sc21 to Cu29 electrons are filled in 3d-orbitals. The general electronic configuration of first transition series is 3d1-10 4s2. In these elements electronic configuration of Cr24 and Cu29 is 3d5 4s1 and 3d10 4s1 respectively.
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Question 19.
Write general electronic configuration of f-block elements. Write any two uses of lanthanides. Write any two uses of Actinides.
Answer:
General outer electronic configuration of f-block element is :
(n – 2)f1-14 (n – 1)d0-1 ns2.
Uses of Lanthanides : 1. Alloys of lanthanides are called mischmetals and it is used in manufacture of heat resistant, stainless and instrumental steel.
2. Lanthanides compounds are used in ceramic industry, paints, textile industry.
Uses of Actinides : 1. Compound of Thorium are used in cancer treatment.
2. Uranium are used for nuclear energy and its compounds are used in ceramic, medicine etc.

Question 20.
Write uses of KMnO4 and K2Cr2O7.
Answer:
Uses of KMnO4 :

  1. As a disinfectant for water.
  2. As an oxidizing agent in the laboratory and industry.
  3. For qualitative detection of halides, oxalates, sulphites etc.

Uses of K2Cr2O7:

  1. In calico printing and dyeing.
  2. As an oxidizing agent.
  3. In chrome tanning in lather industry.
  4. In volumetric analysis, it is used in the estimation of ferrous and iodides in redox titration.

Question 21.
Why generally Zn, Cd and Hg are not considered as transition elements ?
Answer:
The atom or ion of an element having incomplete d-orbital is called transition element. On the basis of this definition Zn, Cd and Hg which have complete d-orbital should not be included in J-block elements infact these elements do not resemble d-block in a number of properties, even then these elements are included in d-block element therefore Zn, Cd and Hg are called non-typical transition elements while rest of all transition elements are called typical elements.

Question 22.
Explain Cu+ is colourless while Cu+2 is coloured.
Answer:
If a transition metal contain unpaired electron, it shows paramagnetism and forms coloured compound. In Cu+ d-orbital is partially filled (3d9) thus Cu+ is colourless and diamagnetic while Cu+2 is coloured and paramagnetic.

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Question 23.
What are transition elements ? In how many series they are divided ? Explain.
Answer:
In modern periodic table elements present between 5-block and p-block elements are called transition elements or elements having partially filled d-orbitals are called transition elements. These are known as d-block elements because last electron enters the d-orbitals e.g., Iron (Fe), Chromium (Cr).
Division of d block → Elements of this block has been divided into four series :

(i) First transition series or 3d series → These elements have last electrons in 3d subshell. These series contain 10 elements from atomic number 21 to 30 in fourth period. i.e.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 30

(ii) Second transition series or 4d series → This series include 10 elements from atomic number 39 to 48 in fifth period. The last electron enters in 4d orbitals.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 31

(iii) Third transition series or 5d series → This series also contain 10 elements of 6th period from atomic number 57, 72 to 80. The last electron’ enters in 5d orbitals e.g.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 32
Elements between La (57) and Hf (72) i.e. from Ce (58) to Lu (71) are called lanthanides or inner transition elements.

(iv) Fourth transition series or 6d series → This series is incomplete. It starts with Actinium (89). Elements between Actinium (89) and Meitnerium (109) are called as Acti-nides. The last electron enters in 6d orbitals, e.g.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 33

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The d-and f-Block Elements Long Answer Type Questions

Question 1.
Giving the electronic configuration of Lanthanide, explain their oxidation state.
Answer:
Lanthanide series : In this series electrons are filled in 4f-sub-shell. Normal electronic configuration of these electrons are (n-2)f1 to 14 (n-1)0 to 1 ns2. Total number of lanthanides are 14 which start from atomic number 58 (Cerium) to atomic number 71 (Lutetium). The main characteristics of this series are following :

Oxidation state: Highest oxidation state of lanthanides is (+3). It is due to loss of 2s electron and one d electron in La. Electronic configuration of La3+ is similar to Xe = 54, which is most stable. Some elements also show +2 and +4 oxidation state because these elements losing 2 or 4 electrons get stable configuration of f7 or f14 e.g., Ce4+(4f1), Tb+(4f8),Er2+(4f11),Yb2+(4f13) but Sm2+,Tm2+ are the exceptions.

Normally +4 oxidation state of lanthanides act as strong oxidizing agent. Like Ce+4 is a good oxidant of aqueous solution which changes to +4 and +3. On the other side +2 oxidation state of lanthanides act as strong reductant. Like Sm2+, Eu2+ and Yb2+ ions, are good reductants which get oxidized in aqueous solution from +2 to +3.

Chemical reactivity : Initial members of this series are highly reactive with the in-crease in atomic number reactivity decreases and are less reactive like Al of high atomic number. Lanthanides react with H2 at 575-675 K temperature forming LaH3. They react with C, X2,O2 and S to form carbide (M2O3 and M2S3), oxide and sulphide. Maximum compounds show +3 oxidation state but some elements also exhibit +2 and +4 oxidation state. On reacting with water, oxides of lanthanides form insoluble hydroxide. These oxides are stronger base than Al(OH)3 but weaker base than Ca(OH)2. These hydroxides react with CO2 to form carbonate.

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Question 2.
Explain the oxidizing property of KMnO4 in acidic, neutral and alkaline medium giving two examples each.
Answer:
KMnO4 acts as strong oxidizing agent in acidic, neutral and alkaline medium.
In acidic medium: It oxidizes in presence of dilute H2SO4 and get reduced.
2KMnO4 + 3H2SO4 → K2SO4 + 2MnSO4 + 3H2O + 5[O]
e.g., (i) It oxidizes ferrous salt into ferric salt,
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 34

(ii) It oxidizes oxalate to CO2 :
2KMnO4 + 3H2SO4 + 5C2H2O4 → K2SO4 + 2MnSO4 + 8H2O + 10CO2

(iii) It oxidizes iodide ion to iodine :
2KMnO4 + 10KI + 8H2SO4 → 6K2SO4 + 2MnSO4 + 8H2O + 5I2

(iv) It oxidizes nitrites to nitrates :
2KMnO4 + 3H2SO4 + 5NaNO2 → 2MnSO4 + K2SO4 + 5NaNO3 + 3H2O

In neutral medium: In this medium, the reaction begins with neutral ethylene glycol but this does not give neutral reaction because KOH formed in the reaction makes basic in nature.
2KMnO4 + H2O → 2KOH + 2MnO2 + 3[O]
e.g., (i) It oxidizes manganous sulphate to manganese dioxide.
2KMnO4 + 3MnSO4 + 2H2O → 5MnO2 + K2SO4 + 2H2SO4

(ii) It oxidizes hydrogen sulphide to sulphur.
2KMnO4 + 4H2S → 2MnS + K2SO4 + 4H2O + S
In alkaline medium : In alkaline medium, reduces to MnO2 and gives 3 nascent oxygen.
e.g., (i) It oxidizes ethylene to ethylene glycol.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 The d-and f-Block Elements 35
(ii) It oxidizes iodide to iodate.
2 KMnO4 + H2O + KI → 2 MnO2 + 2 KOH + KIO3
Potassium iodate

KMnO4 gives more number of nascent oxygen in acidic medium than in alkaline medium due to which it acts as stronger oxidizing agent in acidic medium.
Uses of KMnO4: (i) As an oxidizing agent or as Baeyer’s solution in laboratory and industry.
(ii) In the manufacture of saccharin, benzoic acid, etc.

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MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 11 जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 11 जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम NCERT प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्या आप दस पुनर्योगज प्रोटीन के बारे में बता सकते हैं जो चिकित्सीय व्यवहार के काम में लाये जाते हैं ?
उत्तर
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प्रश्न 2.
एक सचित्र चार्ट (आरेखित निरुपण के साथ) बनाइए जो प्रतिबंध एंजाइम के (जिस क्रियाधार DNA पर यह कार्य करता है उसे ) उन स्थलों को जहाँ यह DNA को काटता है व इनसे उत्पन्न उत्पाद को दर्शाता है ?
उत्तर
यहाँ ई. कोलाई से प्राप्त EcoRI नामक प्रतिबंधन एन्जाइम (Restriction Enzyme) का उदाहरण दिया जा रहा है
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प्रश्न 3.
कक्षा ग्यारहवीं में जो आप पढ़ चुके हैं उसके आधार पर क्या आप बता सकते हैं कि आणविक आकार के आधार पर एंजाइम बड़े हैं या डी.एन.ए.। आप इसके बारे में कैसे पता लगायेंगे ?
उत्तर
प्रोटीन अमीनो अम्लों से बनी है। प्रोटीन 20 प्रकार के अमीनो अम्लों से बनी है जो पेप्टाइड आबंधों के द्वारा जुड़ी होती है। प्रोटीन में कुल अमीनो अम्लों की संख्या, उनके प्रकार, उनके लगने के क्रम आदि के कारण अनन्त प्रकार की प्रोटीने संभव हैं। प्रोटीनों की औसत लंबाई चारों ओर 300 है जो कि अमीनो अम्लों का बचा-खुचा पदार्थ है। इनमें से कुछ एक्टिन फिलामेंट हैं जो कि हजारों एक्टिन अणुओं से बने हैं।

डी.एन.ए. पॉलीमरेज न्यूक्लियोटाइडों से बने होते हैं। वे चार न्यूक्लियोटाइड होते हैं जो कि एक-दूसरे के साथ फॉस्फोडाइएस्टर आबंधों से जुड़े हुए होते हैं । DNA पॉलीमरेज न्यूक्लियोटाइडों के लाखों बड़े अणुओं को अपने अंदर रख सकते हैं। उदाहरण के लिए, सबसे बड़ा मानव गुणसूत्र 220 मिलियन बेस पेयर लंबा है। इस प्रकार DNA एंजाइम से बड़े हैं।

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प्रश्न 4.
मानव की एक कोशिका में DNA की मोलर सन्द्रिता क्या होगी ? अपने अध्यापक से परामर्श कीजिए।
उत्तर
मोलर सांद्रता (Molar concentration)-किसी पदार्थ की सांद्रता प्रति इकाई आयतन में उसकी मात्रा की माप होती है। इसे सामान्यतया मोलरता (Molarity) के पदों में व्यक्त किया जाता है। किसी पदार्थ की मोलरता एक लीटर आयतन में उपस्थित उसके अणुओं की संख्या होती है। अणुओं के सांद्रता की गणना निम्न सूत्र से की जा सकती है
MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 11 जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम 3
DNA अणु जटिल जैविक वृहदाणु होते हैं। इनका अणुभार 106 से 109 डाल्टन तक होता है । हमारे शरीर में DNA के न्यूक्लियोटाइड का औसत आण्विक द्रव्यमान 130.86 होता है। अत: मानव DNA अणु का आण्विक द्रव्यमान 6×109 न्यूक्लियोटाइड (मानव जीनोम प्रोजेक्ट के अनुसार) x 130.86 = 784.56 x 10° g/mol. होगा।

प्रश्न 5.
क्या सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबंधन एण्डोन्यूक्लिएज नहीं मिलते हैं ? अपने उत्तर को सही सिद्ध कीजिए।
उत्तर
नहीं, सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिऐज नहीं मिलते हैं। ये कुछ जीवाणुओं में उपस्थित रहते हैं। सन् 1963 में ई. कोलाई (E.coli) से दो एन्जाइम पृथक् किये गये थे। ये जीवाणुभोजी की वृद्धि को रोक देते हैं। इनमें एक एन्जाइम DNA मेथिल समूह को जोड़ता है, जबकि दूसरा एन्जाइम DNA को काटता है। दूसरे एन्जाइम को प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिएज (Restriction endonuclease) कहते हैं। प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिऐजका उपयोग आनुवंशिक इंजीनियरिंग में DNA के पुनर्योगज अणु (Recombinant molecules of DNA) बनाने में किया जाता है जिसका निर्माण विभिन्न जीनोमों से प्राप्त DNA से मिलकर होता है।

प्रश्न 6.
अच्छी हवा व मिश्रण विशेषता के अतिरिक्त विलोडन हौज बायोरिऐक्टर में कौन-सी अन्य कम्पन्न फ्लास्क सुविधाएँ हैं ?
उत्तर
सभी पुनर्योगज प्रौद्योगिकियों का अंतिम उद्देश्य वांछित प्रोटीन का उत्पादन करना होता है। इसके लिये पुनर्योगज DNA के अभिव्यक्त होने की आवश्यकता होती है। बाहरी जीन उपयुक्त परिस्थितियों में अभिव्यक्त होती है। वांछित जीन को क्लोन करने पर लक्ष्य प्रोटीन की अभिव्यक्ति को प्रेरित करने वाली परिस्थितियों को अनुकूलतम बनाने के बाद इनका व्यापक स्तर पर उत्पादन किया जाता है।

उत्पादों की अधिक मात्रा में उत्पादन हेतु बायोरियेक्टर (Bioreactor) की सहायता ली जाती है। बायोरिएक्टर वांछित उत्पादन हेतु अनुकूलतम परिस्थितियाँ उपलब्ध कराती है। अनुकूलतम परिस्थितियों में तापमान, pH, क्रियाधार, लवण, विटामिन, ऑक्सीजन आदि आते हैं। विलोडन हौज बायोरिएक्टर में प्रक्षोभक तंत्र (Agitator system), O2, प्रदाय तंत्र, झाग नियंत्रण तंत्र, तापक्रम तंत्र, पी.एच नियंत्रण तंत्र व प्रतिचयन प्रहार (Sampling ports) लगा होता है जिससे संवर्धन की थोड़ी मात्रा समय-समय पर निकाली जा सकती है।

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प्रश्न 7.
शिक्षक से परामर्श कर पाँच पैलिंड्रोमिक अनुप्रयास करना होगा कि क्षार युग्मक नियमों का पालन करते हुए पैलिंड्रोमिक अनुक्रम बनाने के उदाहरण का पता लगाइए।”
उत्तर
प्रत्येक सीमाकारी एन्जाइम, DNA स्ट्रेण्ड के विशिष्ट 4 से 6 न्यूक्लियोटाइड क्षार अनुक्रम को पहचानता है। इस क्रम को अभिज्ञेय स्थल (Recognition site) या पैलिन्ड्रोम (Palindrome) कहते हैं। पैलिन्ड्रोम वे शब्द होते हैं जिन्हे बांये से दांये अथवा दांये से बांये पढ़ने पर एक समान नजर आते हैं जैसे
MOM, BOB, MADAM, MALAYALAM

परन्तु शब्द पैलिन्ड्रोम और DNA पैलिन्ड्रोम में अंतर है। DNA में पैलिन्ड्रोम क्षारक युग्मों का एक ऐसा अनुक्रम होता है जो पढ़ने के अभिविन्यास को समान रखने पर दोनों लड़ियों में एक जैसा पढ़ा जाता है। उदाहरणार्थ-निम्न अनुक्रमों को 5’→ 3′ दिशा में पढ़ने पर दोनों लड़ियों में एक जैसा पढ़ा जायेगा। यदि इसे 3′ → 5′ दिशा में पढ़ा जाए तब भी यह बात सही बैठती है|

5′-GAATTC -3′
3′ – CTTAAG -5′

प्रतिबंधन एन्जाइम DNA लड़ी को पैलिन्ड्रोम स्थल के केन्द्र से कुछ दूरी पर परन्तु विपरीत लड़ियों में दो समान क्षारकों के बीच काटते हैं । यहाँ पांच पैलिन्ड्रोम क्षारकों के क्रम का उदाहरण दिया जा रहा है-
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प्रश्न 8.
अर्धसूत्री विभाजन को ध्यान में रखते हुए क्या आप बता सकते हैं कि पुनर्योगज DNA किस अवस्था में बनते हैं ?
उत्तर
प्रथम अर्धसूत्री विभाजन की प्रथम पूर्वावस्था (Ist prophase) की उप-अवस्था जाइगोटीन (Zygotene) में समजात गुणसूत्र जोड़े बनते हैं। इसे सूत्र युग्मक (Synapsis) कहते हैं । पैकिटीन (Pachytene) उप-अवस्था में सूत्रयुग्मक सम्मिश्र (Synaptonemal complex) में एक या अधिक स्थानों पर गोल सूक्ष्म घुण्डियां दिखाई देने लगती हैं, इन्हें पुनर्संयोजन घुण्डियां (Recombination nodule) कहते हैं। समजात गुणसूत्रों के परस्पर जुड़े क्रोमेटिड्स (Chromatids) के मध्य एक या अधिक खण्डों की पारस्परिक अदला बदली को पारगमन कहते हैं। इससे ही समजात पुनर्संयोजित DNA(Recombinant DNA) बन जाता है। पुनर्संयोजन घुण्डियां उन स्थानों पर बनती हैं जहाँ पर पारगमन हेतु क्रोमेटिड्स के टुकड़े टूट कर पुन: जुड़ते हैं।

प्रश्न 9.
क्या आप बता सकते हैं कि प्रतिवेदक (रिपोर्टर) एन्जाइम को वरणयोग्य चिन्ह की उपस्थिति में बाहरी DNA को परपोषी कोशिकाओं में स्थानान्तरण के लिये मॉनीटर करने के लिये किस प्रकार उपयोग में लाया जा सकता है ? ।
उत्तर
DNA द्वारा आदाता (ग्राही) कोशिका में प्रवेश करने का कार्य तभी किया जाता है जब आदाता कोशिका अपने चारों ओर स्थित DNA को धारण करने में सक्षम हो जाती है। यह कार्य अनेक विधियों के द्वारा किया जाता है । यदि पुनर्योगज DNA को जिसमें प्रतिजैविक, जैसे-ऐम्पिसिलिन के प्रति प्रतिरोधी जीन स्थित होती है, ई. कोलाई (E.coli) कोशिकाओं में स्थानान्तरित किया जाए तो परपोषी कोशिकाएँ प्रतिरोधी कोशिकाओं में रूपान्तरित हो जाती है।

यदि रूपान्तरित कोशिकाओं को अगार युक्त प्लेट पर फैलाया जाता है तो केवल कुछ रूपान्तरित कोशिकाएँ ही विकसित हो पाती है, जबकि अरूपान्तरित आदाता कोशिकाओं की मृत्यु हो जाती है। प्रतिरोधी जीन के कारण कोई भी ऐम्पिसिलिन की उपस्थिति में रूपान्तरित कोशिका का चयन कर सकता है। ऐसे प्रक्रम में प्रतिरोधी जीन को वरणयोग्य चिन्हक कहते हैं।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित का संक्षिप्त वर्णन कीजिए
(क) प्रतिकृतियन का उद्भव
(ख) बायोरिएक्टर
(ग) अनुप्रवाह संसाधन।
उत्तर
(क) प्रतिकृतियन का उद्भव-यह वह अनुक्रम है जहाँ से प्रतिकृतियन की शुरूआत होती है और जब कोई डी.एन.ए. का कोई खंड इस अनुक्रम से जुड़ जाता है तब परपोषी कोशिकाओं के अंदर – प्रतिकृति कर सकता है। यह अनुक्रम जोड़े गए डी.एन.ए. के प्रतिरूपों की संख्या के नियंत्रण के लिए भी उत्तरदायी है। इसलिए यदि कोई लक्ष्य डी.एन.ए. की काफी संख्या प्राप्त करना चाहता है तो इसे ऐसे संवाहक में क्लोन करना चाहिए जिसका मूल (Ori) अत्यधिक प्रतिरूप बनाने में सहयोग करता है।

(ख) बायोरिएक्टर-बायोरिएक्टर एक बर्तन के समान है, जिसमें सूक्ष्मजीवों, पौधों, जंतुओं व मानव कोशिकाओं का उपयोग करते हुए कच्चे माल को जैव रूप से विशिष्ट उत्पादों व्यष्टि एंजाइम आदि में परिवर्तित किया जाता है। बायोरिएक्टर वांछित उत्पाद पाने के लिए, अनुकूलतम परिस्थितियाँ उपलब्ध करता है । वृद्धि के लिए ये अनुकूलतम परिस्थितियाँ हैं तापमान, pH, क्रियाधार, लवण, विटामिन, ऑक्सीजन । जो बायोरिएक्टर में सामान्यतया सर्वाधिक उपयोग में लार,ता है वह विलोडन (स्टिरिंग) प्रकार का है जिसे चित्र में दर्शाया गया है।

विलोडित हौज रिएक्टर सामान्यतया बेलनाकार होते हैं या जिनके आधार घुमावदार होने से रिएक्टर के अंदर अंतर्वस्तु के मिश्रण में सहायता मिलती है। विलोडक बायोरिएक्टर में ऑक्सीजन उपलब्धता व उसके मिश्रण का काम करते हैं । विकल्पतः हवा बुलबुले के रूप में बायोरिएक्टर में भेजी जा सकती है। रिएक्टर में एक प्रक्षोभक यंत्र (एजिटेटर सिस्टम), ऑक्सीजन प्रदाय तंत्र, झाग नियंत्रण तंत्र, तापक्रम नियंत्रण तंत्र, पीएच नियंत्रण तंत्र व प्रति चयन प्रद्वार लगा होता है जिससे संवर्धन की थोड़ी मात्रा समय-समय पर निकाली जा सकती है।
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(ग) अनुप्रवाह संसाधन-जैव संश्लेषित अवस्था के पूर्ण होने के बाद परिष्कृत तैयार होने व विपणन के लिए भेजे जाने से पहले कई प्रक्रमों से होकर गुजरता है। इन प्रक्रमों में पृथक्करण कशोधन सम्मिलित है और इसे सामूहिक रूप से अनुप्रवाह संसाधन कहते हैं । उत्पाद को उचित परिरक्षक के साथ संरूपित करते हैं औषधि के मामले में ऐसे संरूपण (फॉर्मुलेशन) की चिकित्सीय परीक्षण से गुजारते है। प्रत्येक उत्पाद के लिए सुनिश्चित गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षण की भी आवश्यकता होती है। अनुप्रवाह संसाधन व गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षण प्रत्येक उत्पाद के लिए भिन्न-भिन्न होती है।

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प्रश्न 11.
संक्षेप में बताइए
(क) पी.सी.आर.,
(ख) प्रतिबंधन एंजाइम और डी.एन.ए.,
(ग) काइटिनेज।
उत्तर
(क) पी.सी.आर.- पी.सी.आर. का अर्थ पॉलिमरेज चेन रिऐक्शन (पॉलिमरेज शृंखला अभिक्रिया) है। इस अभिक्रिया में उपक्रमकों (प्राइमर्स-छोटे रासायनिक संश्लेषित अल्प न्यूक्लियोटाइड जो डी.एन.ए. क्षेत्र के पूरक होते हैं) के दो समुच्चयों (सेट्स) व डी.एन.ए. पॉलिमरेज एंजाइम का उपयोग करते हुए पात्रे (इन विट्रो) विधि द्वारा उपयोगी जीन के कई प्रतिकृतियों का संश्लेषण होता है। यह एंजाइम जिनोमिक डी.एन.ए. को टेंपलेट के रूप में लेकर अभिक्रिया से मिलने वाले न्यूक्लियोटाइडों का उपयोग करते हुए उपक्रमकों को विस्तृत कर देता है। यदि डीएनए प्रतिकृतयेन प्रक्रम कई बार दोहराया जाता है तब डीएनए खंड को लगभग एक अरब गुना प्रवर्धित किया जा सकता है।

(ख) प्रतिबंधन एंजाइम और डी.एन.ए.-आणविक कैंची कहे जाने वाले प्रतिबंधन एंजाइम (रिस्ट्रिक्शन एंजाइम) की खोज से डी.एन.ए. को विशिष्ट जगहों पर काटना संभव हो सका। कटे हुए डी.एन.ए. का भाग प्लाज्मिड डी.एन.ए. से जोड़ा जाता है। यह प्लाज्मिड डी.एन.ए. संवाहक (वेक्टर) की तरह कार्य करता है जो इससे जुड़े डी.एन.ए. को स्थानांतरित करता है। प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन को संवाहक के साथ जोड़ने का काम एंजाइम डीएनए लाइगेज के द्वारा होता है जो डी.एन.ए. अणु के कटे हुए भाग पर कार्य कर उसके किनारों को जोड़ने का काम करता है ।

इस संयोजन से पात्रे (इन विट्रो) नये गोलाकार स्वतः प्रतिकृति बनाने वाले डी.एन.ए. का निर्माण होता है जिसे पुनर्योगज डी.एन.ए. कहते हैं। जब यह डी.एन.ए. इंश्चिरिचिया कोलाई में स्थानांतरित किया जाता है तो यह नए परपोषी के डी.एन.ए. पॉलिमरेज एंजाइम का उपयोग कर अनेक प्रतिकृतियाँ बना लेता है। प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन की प्रति का ई. कोलाई का गुणन, ई. कोलाई में प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन की क्लोनिंग कहलाती है।

(ग) काइटिनेज-काइटिनेज एक प्रकार का एंजाइम है।

प्रश्न 12.
अपने अध्यापक से चर्चा करके पता लगाइए कि निम्नलिखित के बीच कैसे भेद करेंगे

(क) प्लाज्मिड DNA और गुणसूत्रीय DNA
(ख) RNA और DNA
(ग) एक्सोन्यूक्लिएज और एंडोन्यूक्लिएज।
उत्तर
(क) प्लाज्मिड DNA और गुणसूत्रीय DNA (Plasmid DNA and Chromosomal DNA)
प्लाज्मिड अतिरिक्त गुणसूत्रीय रचनाएँ होती हैं जो जीवाणुओं के अन्दर स्वतः गुणित होती रहती है। इनका DNA दो सूत्रों का बना, प्रायः गोलाकार (Circular) होता है। इन पर अन्य जीनों के अतिरिक्त प्लाज्मिड की प्रतिकृति करने वाले जीन भी पाये जाते हैं। पुनर्योगज DNA तकनीक में प्रयुक्त प्लाज्मिड में प्रतिजैविक रोधिता वाले जीन भी होते हैं जिनसे पुनर्योगज DNA अणुओं की पहचान सम्भव हो पाती है।

गुणसूत्रों में उपस्थित DNA गुणसूत्रीय DNA होता है। यह भी दो सूत्रों का होता है परन्तु गोलाकार नहीं होता तथा कोशिका के केन्द्रक में होता है। इसमें प्रतिजैविक रोधिता वाले जीन नहीं होते हैं । यह प्लाज्मिड DNA की तुलना में अधिक लम्बा तथा अधिक न्यूक्लियोटाइड युक्त होता है।

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(ख) DNA तथा RNA में अन्तरDNA
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(ग) एक्सोन्यूक्लिएज और एंडोन्यूक्लिएज (Exonuclease and Endonuclease)एक्सोन्यूक्लिएज-ये DNA के सिरे से न्यूक्लियोटाइड को अलग करते हैं। एन्डोन्यूक्लिएज-ये DNA के भीतर विशिष्ट स्थलों पर काटते हैं। प्रत्येक प्रतिबंधन एन्डोन्यूक्लिऐज DNA अनुक्रम की लम्बाई के निरीक्षण पश्चात् कार्य करता है । जब यह अपना विशिष्ट पहचान अनुक्रम पा जाता है तब यह DNA से जुड़ता है तथा द्विकुंडलिनी की दोनों लड़ियों को शर्करा-फॉस्फेट आधार स्तम्भों के विशिष्ट केन्द्रों पर काटता है।

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
कृत्रिम रूप से जीन की प्रकृति में परिवर्तन करना कहलाता है
(a) जीन परिचालन
(b) जीन हेर-फेर
(c) (a) एवं (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) (a) एवं (b) दोनों

प्रश्न 2.
D.N.A. पुनर्योगज तकनीक का आविष्कार कब किया गया
(a) सन् 1971
(b) सन् 1972
(c) सन् 1973
(d) सन् 1974.
उत्तर
(b) सन् 1972

प्रश्न 3.
एच. हैरिस व जे. एफ. वाटकिन्स द्वारा D.N.A. पुनर्योजन की कौन-सी विधि दी गयी थी
(a) रूपान्तरण
(b) पराक्रमण
(c) क्लोनिंग
(d) प्रोटोप्लास्ट संलयन।
उत्तर
(d) प्रोटोप्लास्ट संलयन।

प्रश्न 4.
कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने एक कृत्रिम जीन बनाया जिसकी क्षमता थी
(a) कृत्रिम इन्सुलिन बनाने की
(b) कृत्रिम जीन पैदा करने की
(c) कीड़ों का प्रकोप नहीं होने की
(d) पोषक खाद्य उत्पादन करने की।
उत्तर
(a) कृत्रिम इन्सुलिन बनाने की

प्रश्न 5.
विशिष्ट जीन के समान जीन प्राप्त करना कहलाता है
(a) जीव क्लोनिंग
(b) जीन क्लोनिंग
(c) D.N.A. क्लोनिंग
(d) R.N.A. क्लोनिंग।
उत्तर
(b) जीन क्लोनिंग

प्रश्न 6.
पादपों में कायिक संवर्धन द्वारा उत्पादित संततियों को कहते हैं
(a) कैलस
(b) अंडाणु
(c) क्लोन
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) क्लोन

प्रश्न 7.
आनुवंशिक अभियांत्रिकी में ‘आण्विक कैंची’ की तरह उपयोग किया जाता है
(a) DNA पॉलीमरेज
(b) DNA लाइगेज
(c) हेलिकेज
(d) रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज।
उत्तर
(d) रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज।

प्रश्न 8.
लक्ष्य ऊतक (Target tissue) में ट्रांसजीन की ट्रांसजेनिक अभिव्यक्ति निर्धारित होती है
(a) इन्हान्स द्वारा
(b) रिपोर्टर द्वारा
(c) प्रमोटर द्वारा
(d) ट्रांसजीन द्वारा।
उत्तर
(b) रिपोर्टर द्वारा

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प्रश्न 9.
प्रथम प्रतिबंधन एण्डोन्यूक्लिएज निम्न में कौन-सा पहचाना गया
(a) EcoRI
(b)Hind II
(c) Hind III
(d) TaqI
उत्तर
(b)Hind II

प्रश्न 10.
pBR322 वाहक में किसके प्रति प्रतिरोधी जीन होती है
(a) एम्पीसिलिन
(b) टेट्रासाइक्लिन
(c) उपर्युक्त दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) उपर्युक्त दोनों

प्रश्न 11.
एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएंस का DNA खण्ड (t-DNA) सामान्य पौधों की कोशिकाओं में क्या रोग उत्पन्न करता है
(a) कैंसर
(b) अपघटन
(c) अर्बुद
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) अर्बुद

2.  रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. D.N.A. में संचित सूचना के संचरण तथा फिर से प्रकट होने एवं लक्षणों के बनने को ………….
कहते हैं।
2. ……………. मानव निर्मित इन्सुलिन है।
3. क्लोनिंग से …………….. वाले जीन भी उत्पन्न हो जाने की संभावना होती है।
4. वाहक का …………….. एवं …………….. आसान होना चाहिए।
5. आनुवंशिक इंजीनियरिंग से ऐसे जीव भी उत्पादित किये जा सकते हैं जिनका …………. सर्वथा नया हो।
6. …… जीन वाहक का कार्य करता है।
उत्तर

  1. भावाकृति
  2. ह्यूम्यूलिन
  3. अवांछित गुणों
  4. विलगन, शुद्धिकरण
  5. जीन प्रारूप
  6. Ti प्लाज्मिड।

3. सही जोड़ी बनाइए

‘A’ -‘B’

1. इन्सुलिन – (a) डी.एन.ए. में सकारात्मक परिवर्तन
2. जीन बैंक – (b) मानव जीनोम प्रायोजना
3. जीन अभियांत्रिकी – (c) जीन अभियांत्रिकी
4. जीनोमिकी – (d) ज्ञात D.N.A. संरक्षण
उत्तर
1. (c), 2. (d), 3. (a), 4. (b).

4. एक शब्द में उत्तर दीजिए

1. उस पादप का नाम बताइये जिसके DNA में न्यूक्लियोटाइड्स का क्रम सर्वप्रथम पढ़ा गया।
2. किसी जीनोम का संरचनात्मक तथा क्रियात्मक पक्ष का अध्ययन ।
3. उस वैज्ञानिक का नाम बताइये जिन्होंने DNA फिंगरप्रिंटिंग की आधारशिला रखी।
4. समान न्यूक्लियोटाइड क्रम के खण्डों वाला DNA
5. ऐसा जीव जिसमें दूसरे स्रोत (जीव) के जीन को प्रवेशित कराया गया है।
6. CCMB कहाँ स्थित है ?
7. प्रथम जन्तु क्लोन का नाम बताइये।
8. वह चिकित्सा पद्धति जिसके द्वारा किसी जीव में गड़बड़ी वाले जीन को सही जीन द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।
9. विषाणुओं को नष्ट करने वाला जैव अणु जो मनुष्य में विषाणु प्रतिरोधकता उत्पन्न करता है।
10. Ti प्लाज्मिड का स्रोत।
उत्तर

  1. एरेबिडोप्सिस
  2. जीनोमिक्स
  3. एलेक जेफरी
  4. रिपिटीटिव DNA
  5. ट्रांसजेनिक
  6. हैदराबाद
  7. डॉली (भेड़)
  8. जीन थेरैपी
  9. इन्टरफेरॉन
  10. एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमिफेसिएन्स।

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लक्ष्य जीन को पृथक करने के लिए कौन-से एन्जाइम की आवश्यकता होती है ?
उत्तर
लक्ष्य जीन को पृथक् करने के लिए प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिएज एन्जाइम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 2.
कौन-सा DNA पॉलीमरेज उच्च ताप पर भी सक्रिय रहता है ?
उत्तर
टेक (Taq) DNA पॉलीमरेज उच्च ताप पर भी सक्रिय रहता है।

प्रश्न 3.
किन्ही तीन प्रतिबंधन एण्डोन्यूक्लिएज एन्जाइमों के नाम लिखिए।
उत्तर

  • EcoRI
  • Hind II
  • Hind III.

प्रश्न 4.
PCR का पूर्ण नाम लिखिए। इसमें कौन-सा एन्जाइम प्रयुक्त होता है ?
उत्तर
पॉलिमरेज श्रृंखला अभिक्रिया (Polymerase Chain Reaction) इसमें टेक (Taq) DNA पॉलमरेज एन्जाइम प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 5.
जीवाणुभोजी (Bacteriophage) किसे कहते हैं ?
उत्तर
जीवाणुओं को संक्रमित करने वाले विषाणु को जीवाणुभोजी कहते हैं।

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प्रश्न 6.
प्रथम पुनर्योगज DNA का निर्माण किसमें हुआ था ?
उत्तर
जीवाणु सालमोनेला टाइफीयूरिम में।

प्रश्न 7.
आण्विक कैंची किसे कहते हैं ?
उत्तर
प्रतिबंधन एन्जाइम (Restriction Enzyme) को आण्विक कैंची कहते हैं।

प्रश्न 8.
हिंड II (Hind II) DNA अणु को कहाँ से काटता है ?
उत्तर
हिंड II, DNA अणु को उस विशेष बिन्दु पर काटते हैं जहाँ पर छ: क्षारक युग्मों (Base pairs) का विशेष अनुक्रम होता है।

प्रश्न 9.
चिपचिपे सिरे किस एन्जाइम के कार्य में सहायता करते हैं ?
उत्तर
एन्जाइम DNA लाइगेज के कार्य में सहायता प्रदान करता है।

प्रश्न 10.
DNA खण्ड किस प्रकार के आवेशित अणु होते हैं ?
उत्तर
ऋणात्मक आवेशित (Charged) होते हैं।

प्रश्न 11.
इलेक्ट्रोफोरेसिस में DNA को देखने के लिये किससे अभिरंजित किया जाता है ?
उत्तर
इथीडियम ब्रोमाइड नामक यौगिक से अभिरंजित करते हैं।

प्रश्न 12.
इलेक्ट्रोफोरेसिस में क्या होता है ?
उत्तर
DNA खण्ड का पृथक्करण एवं विलगन।

प्रश्न 13.
जीवाणु कोशिका में मिलने वाले वर्तुल DNA का प्रमुख कार्य बताइये।
उत्तर
यह संवाहक (वेक्टर) की तरह कार्य करता है।

प्रश्न 14.
उस तकनीक का नाम लिखिए, जिसके द्वारा DNA खण्डों को अलग कर सकते हैं ?
उत्तर
जैव वैद्युत कण संचलन (Electrophoresis)।

प्रश्न 15.
प्लाज्मिड pBR322 में पाये जाने वाले दो प्रतिजैविक प्रतिरोधी जीन के नाम लिखिये ?
उत्तर
एम्पिसिलिन व टेट्रासाइक्लीन ।

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिक अभियांत्रिकी किसे कहते हैं ?
उत्तर
DNA या आनुवंशिक पदार्थ की संरचना में आवश्यकतानुसार हेर-फेर करने की क्रिया को आनुवंशिक अभियान्त्रिकी कहते हैं।

प्रश्न 2.
आनुवंशिक अभियांत्रिकी के दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर
उद्देश्य-

  • जीन की संरचना में इच्छित परिवर्तन करना।
  • आनुवंशिक विकृतियों को ठीक करना।

प्रश्न 3.
बैक्टीरियोफेज क्या है ?
उत्तर
बैक्टीरियोफेज जीवाणु कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रकार का परजीवी विषाणु है, जिसका शरीर दो भागों-सिर एवं पूँछ का बना होता है। इसके सिर में आनुवंशिक पदार्थ के रूप DNA पाया जाता है। आनुवंशिक अभियान्त्रिकी में इसका बहुत अधिक महत्व है।

प्रश्न 4.
रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज क्या है ?
उत्तर
रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज, न्यूक्लिएज समूह का एन्जाइम है। यह नाभिकीय अम्लों विशेषकर DNA को विशिष्ट स्थान पर काटने का कार्य करता है।

प्रश्न 5.
वाहक क्या है ?
उत्तर
DNA पुनर्योजन तकनीक में विदेशज जीन (Foreign DNA) को अपने साथ इच्छित स्थल तक लाने वाले DNA खण्ड को वाहक (Vector) कहते हैं।

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प्रश्न 6.
वाहक के चार लक्षण लिखिये।
उत्तर
वाहक के लक्षण-

  • स्व-द्विगुणन की क्षमता होनी चाहिए।
  • इसका विलगन एवं शुद्धिकरण आसान होना चाहिए।
  • अणुभार कम होने चाहिए ताकि इस पर बड़े DNA अथवा जीन को जोड़ा जा सके।
  • पोषक कोशिका (Host Cell) के अन्दर इसका विनिष्टिकरण (Degradation) नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 7.
प्लाज्मिड किसे कहते हैं ?
उत्तर
प्लाज्मिड्स बाह्य नाभिकीय (Extra nuclear) स्वत: द्विगुणित होने वाले (Self replicating), सहसंयोजी रूप से बन्द (Covalently Closed), वलयाकार, द्विसूत्री DNA अणु हैं, जो कि प्रायः सभी जीवाणु कोशिकाओं में पाये जाते हैं।

प्रश्न 8.
DNA लाइगेज क्या होता है ?
उत्तर
DNA लाइगेज एक विशिष्ट प्रकार का एन्जाइम होता है, जो दो DNA खण्डों को आपस में या DNA अणु के टूट-फूट वाले स्थल को जोड़ने का कार्य करता है।

प्रश्न 9.
c-DNA किसे कहते हैं ?
उत्तर
जीवन कोशिका में पुनर्योजित DNA का द्विगुणन से प्राप्त प्रतिलिपियों को क्लोन्ड या पुंजीकृत DNA (c-DNA) कहा जाता है।

प्रश्न 10.
Ti प्लाज्मिड क्या है ?
उत्तर
ऐग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेसिएन्स (Agrobacterium tumifaciens) नामक जीवाणु में पाये जाने वाले विशिष्ट प्लाज्मिड जो कि द्विबीजपत्री पौधों में संक्रमण पश्चात् ट्यूमर निर्माण को अभिप्रेरित करता है, Ti प्लाज्मिड कहलाता है। यह जीन अभियांत्रिकी में वाहक का भी कार्य करता है।

प्रश्न 11.
विश्व के पहले जन्तु क्लोन का नाम बताइए।
उत्तर
विश्व में पहला जन्तु क्लोन भेड़ का उत्पन्न कराया गया, जिसका नाम डॉली रखा गया है।

प्रश्न 12.
कृत्रिम रूप से DNA संश्लेषण की विधि को खोजने वाले वैज्ञानिकों के नाम बताइए।
उत्तर
कृत्रिम रूप से DNA संश्लेषण की विधि के खोज का श्रेय डॉ. हरगोबिन्द खुराना, एम. नीरेनबर्ग एवं आर. हौली को दिया जाता है, जिसके लिए इन तीनों वैज्ञानिकों को एक साथ सन् 1968 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

प्रश्न 13.
जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इन्जीनियरिंग को समझाइए।
उत्तर
वैज्ञानिक द्वारा DNA या आनुवंशिक पदार्थ की संरचना में आवश्यकतानुसार हेर-फेर करने को जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इन्जीनियरिंग कहते हैं। आनुवंशिक पदार्थ का कृत्रिम संश्लेषण दो अलग-अलग जीनों के DNA खण्डों को जोड़कर नया DNA बनाना, DNA की मरम्मत, DNA से कुछ न्यूक्लियोटाइड को हटाकर या जोड़कर या विस्थापित करके इच्छित संरचना वाले नये DNA अणुओं का संश्लेषण करके जीन क्रिया का नियन्त्रण करना तथा जीवधारियों में इच्छित गुणों का समावेश करना जेनेटिक इन्जीनियरिंग का मुख्य उद्देश्य है। आनुवंशिकी की यह शाखा अभी अपने शैशव काल में है।

उम्मीद की जाती है कि इस विधि के द्वारा आनुवंशिक वैज्ञानिक जीन की संरचना में सुधार करके अथवा विकृत जीन को सामान्य जीन द्वारा विस्थापित करके आनुवंशिक रोगों से मानव जाति को मुक्ति दिला सकेंगे अथवा मानव द्वारा उपयोग में आने वाले पादपों व जन्तुओं की नस्लों का सुधार कर सकेंगे। आनुवंशिक पदार्थ के संगठन में हेर-फेर, DNA की संरचना का ज्ञान एक अत्याधुनिक तकनीक के विकास के कारण सम्भव हो सकता है। इनको रिकॉम्बिनेन्ट DNA तकनीकी कहते है

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प्रश्न 14.
फसल सुधार में आनुवंशिक इंजीनियरिंग के तीन उपयोग लिखिए।
उत्तर-
फसल सुधार में आनुवंशिक इंजीनियरिंग के उपयोग

  • धान्यों में स्वयं नाइट्रोजन स्थिरीकरण गुण पैदा करने के प्रयास में काफी सफलता मिली है।
  • पौधों की जंगली प्रजातियों से जीनों को प्राप्त कर उन्हें फसली पौधों में स्थानांतरण कर उनमें परजीवियों तथा.कीड़े-मकोड़ों के प्रति प्रतिरोधकता पैदा करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं।
  • केन्द्रकीय एवं हरितलवक जीन्स को पुन: समायोजित कर फसली पौधों की प्रकाश-संश्लेषण करने की क्षमता बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके अलावा C3,पौधों को C4 पौधों में परिवर्तित करने के प्रयास में भी इस तकनीक द्वारा आशान्वित सफलता मिली है।

प्रश्न 15.
जीन क्लोनिंग के उपयोग लिखिये।
उत्तर
जीन क्लोनिंग के उपयोग-

  • किसी जीव के इच्छित जीनोटाइप को संरक्षित करने में।
  • उच्च गुणों वाले जीवों को सरलता से प्राप्त करने में।
  • विलुप्त हो रहे पादपों तथा जन्तुओं को संरक्षित करने में।
  • उपयोगी (दूध, प्रोटीन देने वाले) जंतुओं को पैदा करने में।
  • मानव अंग प्रत्यारोपण के लिये आनुवंशिक रूप से परिवर्तित पशुओं को पैदा करने में।

प्रश्न 16.
चिकित्सा के क्षेत्र में आनुवंशिक इंजीनियरिंग के कोई तीन उपयोग लिखिये।
उत्तर
चिकित्सा के क्षेत्र में आनुवंशिक इंजीनियरिंग के उपयोग-

  • गोइडल ने E.coli के D.N.A. में इस हॉर्मोन के जीन को निवेशित कर माध्यम से मनुष्य के वृद्धि हॉर्मोन का संश्लेषण कराया।
  • हिपैटाइटिस B एक संदूषित जीन के कारण होता है, इसे प्रतिस्थापित कर वैज्ञानिकों ने इस रोग का इलाज ढूँढ लिया है।
  • कृत्रिम जीन निर्माण द्वारा (जीन संवर्द्धन तकनीक) मानव इंसुलिन मधुमेह की बीमारी को दूर करने के लिये तैयार करना।

प्रश्न 17.
जीन्स बैंक से आप क्या समझते हैं ? इसका क्या महत्व है ?
उत्तर
जीन्स को जीवों के अथवा संश्लेषित अवस्था में संरक्षित करने वाली संस्था या स्थान को जीन बैंक कहते हैं। इसके अन्तर्गत जीवों की कोशिकाओं में पाये जाने वाले आनुवंशिक पदार्थ (DNA) का संरक्षण किया जाता है। इसका सबसे पहला उपाय यह है कि दुर्लभ जीवों को संरक्षित रखा जाये। दूसरे उपाय के अन्तर्गत जीवों की कोशिकाओं या ऊतकों को सुरक्षित रखा जाता है। महत्व-जीन्स बैंक में जीनों को संरक्षित रखकर इनके द्वारा नयी उन्नतशील जातियों को तैयार किया जाता है तथा उन पर अनेक वैज्ञानिक परीक्षण भी किये जा सकते हैं।

प्रश्न 18.
आनुवंशिक इन्जीनियरिंग की महत्ता एवं उसके तीन उपयोग लिखिए।
उत्तर
मनुष्य को जैव-तकनीक तथा आनुवंशिक इन्जीनियरिंग के द्वारा कई उपयोगी एवं महत्वपूर्ण सफलताएँ प्राप्त हुई हैं। ऐसा लगता है कि इसकी सहायता से सुजननिकी के क्षेत्र में कई विचार जो अब तक कल्पनामयी लगते थे, निकट भविष्य में वास्तविकता में बदल जायेंगे। आनुवंशिक इन्जीनियरिंग के उपयोगअनुप्रयोज्यता की दृष्टि से आनुवंशिक इन्जीनियरिंग हमें निम्नलिखित लाभदायक तथा हानिकारक परिणाम देती है

प्रश्न 19.
जीन क्लोनिंग से क्या समझते हैं ? इसका क्या महत्व है ?
अथवा
जीन क्लोनिंग क्या है ? दो उदाहरण दीजिये।
उत्तर
जीन क्लोनिंग, पुनर्संयोजित DNA खण्डों को प्राप्त करने या तैयार करने की एक विधि है, जिसमें विदलित DNA (Cleaved DNA) अणु को विषाणु DNA या प्लाज्मिड DNA के साथ सम्बन्धित करते हैं और फिर विषाणु अथवा जीवाणु द्विगुणन कराके इससे सम्बन्धित DNA की प्रतिलिपियाँ तैयार करते हैं। इस प्रकार से प्राप्त सम्बन्धित DNA की प्रतियों जो पुनर्संयोजित DNA के गुणन से बनती हैं, क्लोन्ड DNA कहते हैं तथा यह तकनीक जीन क्लोनिंग कहलाती है।

महत्व-

  • इसके द्वारा उपयोगी आनुवंशिक गुणों को प्राप्त किया जा सकता है।
  • इस तकनीक के द्वारा कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
  • इस तकनीक के द्वारा कई दवाइयों का संश्लेषण किया जा सकता है।
  • इसका उपयोग सुजननिकी में किया जा सकता है।

जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आनुवंशिक इंजीनियरिंग की अनुप्रयोज्यता का वर्णन कीजिए।
अथवा
आनुवंशिक इंजीनियरिंग का औद्योगिक एवं चिकित्सा क्षेत्र में योगदान लिखिए।
अथवा
जीन अभियांत्रिकी के लाभदायक तथा हानिकारक प्रभावों को लिखिये।
अथवा
आनुवंशिक इंजीनियरिंग के तीन महत्व लिखिये।
अथवा
जीन आनुवंशिक अभियांत्रिकी किसे कहते हैं ? औद्योगिक एवं चिकित्सा के क्षेत्र में इसका महत्व लिखिए।
उत्तर
अनुप्रयोज्यता की दृष्टि से आनुवंशिक इन्जीनियरिंग हमें निम्नलिखित लाभदायक तथा हानिकारक परिणाम देती है

(A) लाभदायक प्रभाव

1. औद्योगिक उपयोग-उच्च वर्गों के जीवों के विटामिन प्रतिजैविक या हॉर्मोन्स के जीन का कोड करके तथा इनके संश्लेषित DNA को जीवाणुओं में पुन:स्थापित करके विटामिन्स, हॉर्मोन्स आदि यौगिकों को औद्योगिक स्तर पर संश्लेषण किया जाना सम्भव हुआ है। इस विधि से मानव इन्सुलिन का Humulin नाम से जैव-संश्लेषण किया गया है।

2.चिकित्सीय उपयोग-नयी दवाइयों का जैव स्तर पर संश्लेषण तथा जीन चिकित्सा द्वारा हीमोफीलिया, फीनाइलकीटोन्यूरिया आदि वंशागत रोगों का उपचार किया जाना सम्भव हुआ है।

3. कृषि क्षेत्र में उपयोग-जीवाणु अथवा नीले-हरे शैवाल से नाइट्रोजन यौगिकीकरण करने वाले जीनों का अनाज वाली फसलों में स्थानान्तरण करने हेतु प्रयोग जारी है, जिससे हमारी फसलें पर्यावरण से नाइट्रोजन का सीधा प्रयोग कर सकेंगी और हमें कृषि में कृत्रिम उर्वरक के उपयोग की आवश्यकता नहीं रहेगी।

4. जीन संरचना अभिव्यक्ति में परिवर्तन-इस तकनीक द्वारा इच्छानुसार नये-नये प्रकार के जीवों तथा वनस्पतियों का निर्माण सम्भव हो सकेगा।

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(B) हानिकारक प्रभाव-

  • रोगाणु ऐण्टिबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो सकते हैं।
  • आंत में पाये जाने वाले जीवाणु कैन्सर कारक हो सकते हैं।
  • सामान्य वाइरस से अत्यधिक खतरनाक वाइरस का निर्माण हो सकता है।

प्रश्न 2.
पुनर्संयोजन DNA तकनीक के महत्व एवं उपयोग को लिखिए।
अथवा
आनुवंशिक अभियांत्रिकी की महत्ता एवं अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर
जीन क्लोनिंग या पुनर्योगज DNA तकनीक जैविक विज्ञान (Biological sciences) के सभी क्षेत्रों में अत्यधिक उपयोगी सिद्ध हुआ है। इस तकनीक के प्रमुख महत्व एवं उपयोग निम्नानुसार हैं

  • पुनर्योगज DNA तकनीक या जीन क्लोनिंग के द्वारा हमें वांछित गुणों वाले जीनों को अन्य जन्तु व पौधों में प्रत्यारोपित करके इनकी अच्छी किस्में तैयार करने में सफलता प्राप्त हुई है।
  • इस तकनीक के द्वारा आनुवंशिक रोगों का भ्रूणीय अवस्था में ही पता लगाया जा सकता है।
  • rec-DNA तकनीक की सहायता से DNA/ जीन के क्रमीकरण (Sequencing of DNA/ Gene) में सहायता मिली है।
  • इस तकनीक की सहायता से विभिन्न प्रकार की पुनर्योगज वैक्सीनों (Recombinant vaccine) का विकास किया जाता है। उदाहरण-हिपैटाइटिस-B वैक्सीन।
  • इसकी सहायता से जीन क्रिया नियमन के अध्ययन में सुविधा हुई है।
  • इस तकनीक के द्वारा ही विभिन्न प्रकार की प्रोटीन्स जैसे-इन्सुलिन, हॉर्मोन्स, इण्टरफेरॉन्स एवं विटामिनों का औद्योगिक स्तर पर निर्माण जीवाणुओं द्वारा संभव हुआ है।
  • इस तकनीक के द्वारा उत्कृष्ट किस्म के प्रतिजैविकों का उत्पादन किया जाता है।
  • हीमोफिलिक मनुष्यों में VIII C (ऐण्टिहीमोफिलिक ग्लोब्यूलिन) का अभाव होता है। यह फैक्टर रक्त के थक्का बनाने (Blood clotting) का कार्य करता है। इसके जीन की क्लोनिंग के फलस्वरूप उपयुक्त मात्रा में VIII C कारक का उत्पादन संभव हो गया है।

प्रश्न 3.
पुनर्संयोजन DNA क्या है ? इसके निर्माण के चरणों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
जीन मैनीपुलेशन या जेनेटिक इंजीनियरिंग को समझाइये।
अथवा
डी. एन. ए. पुनर्योगज तकनीक क्या है ?
अथवा
रिकॉम्बिनेन्ट D.N.A. तकनीक के विभिन्न चरणों में लिखिये।
अथवा
D.N.A. पुनर्योगज तकनीक क्या है ? इस तकनीक के उपकरण का नाम लिखिये। (कोई चार)
उत्तर
किसी जीव के जीनोम में वांछित लक्षणों वाले जीनों को प्रविष्ट कराकर एक नये प्रकार के DNA को बनाना DNA पुनर्संयोजन तकनीक कहलाती है तथा इस प्रकार बने DNA को पुनर्संयोजन DNA या पुनर्योगज DNA कहते हैं। पुनर्योगज DNA तकनीक का उपयोग करके किसी जीव के आनुवंशिक संगठन में परिवर्तन करने की तकनीक को जीन तकनीक या जीन प्रौद्योगिकी (Gene technology) कहते हैं।

पुनर्योगज या पुनर्संयोजन DNA तकनीक के विभिन्न चरण-पुनर्योगज DNA तकनीक एक जटिल प्रक्रिया है, जो कि निम्नलिखित चरणों में पूर्ण की जाती है

  1. विदेशज (Foreign) या टारगेट DNA का चयन जिसकी क्लोनिंग करनी होती है।
  2. प्लाज्मिड या लैम्डा फेज या कॉस्मिड में से किसी एक का वाहक अर्थात् वेक्टर के रूप में चयन।
  3. फॉरेन DNA को वेक्टर DNA के साथ जोड़ना अर्थात् पुनर्योगज. DNA का निर्माण।
  4. पोषक कोशिका में पुनर्योगज DNA का स्थानान्तरण।
  5. रूपान्तरित कोशिकाओं का चयन। जीन पुनर्संयोजन तकनीक द्वारा इन्सुलिन जीन का जीवाणु में प्रवेश की प्रक्रिया का चित्रात्मक निरूपण द्वारा इसके विभिन्न चरणों को प्रदर्शित किया जा रहा है।

MP Board Class 12th Biology Solutions Chapter 11 जैव प्रौद्योगिकी-सिद्धान्त व प्रक्रम 7
प्रश्न 4.
मानव इन्सुलिन के उत्पादन में आनुवंशिक इन्जीनियरिंग के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर
अलरिच तथा उनके सहयोगियों (Ulrich at, 1977) ने चूहे में इन्सुलिन बनाने वाले जीन को निष्कर्षित कर ई. कोलाई जीवाणु में स्थानान्तरित करने में सफलता पायी। इन लोगों ने चूहे से विशुद्ध m-RNA को निकाला तथा उससे रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एन्जाइम की सक्रियता से DNA का संश्लेषण किया। इस इन्सुलिन संश्लेषण से सम्बन्धित DNA को प्लाज्मिड DNA के साथ एन्डोन्यूक्लिएज तथा लाइगेज के साथ जोड़कर पुनर्योगज DNA का निर्माण किया। इस पुनर्योगज DNA को ई. कोलाई के 1776 विभेद के Ex 2 होस्ट (पोषक) में स्थानान्तरित कर चूहे के इन्सुलिन DNA को क्लोन किया। नये वातावरण में इन जीन के ट्रांसलेशन (अनुलिपिकरण या अनुवादन) से जैविक रूप से सक्रिय इन्सुलिन का उत्पादन होता है।

नोट-बैक्टीरियोफेज जीवाणु कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रकार का परजीवी विषाणु है, जिसका शरीर दो भागों-सिर एवं पूँछ का बना होता है। इसके सिर में आनुवंशिक पदार्थ के रूप DNA पाया जाता है। आनुवंशिक अभियान्त्रिकी में इसका बहुत अधिक महत्व है।

प्रश्न 5.
क्लोन किसे कहते हैं ? जीन एवं पादप क्लोन किस प्रकार तैयार किये जाते हैं समझाइये?
उत्तर
अलैंगिक विधि द्वारा उत्पन्न आनुवंशिक रूप से समान जीवों को क्लोन कहते हैं। जीन एवं पादप क्लोन निम्नानुसार तैयार किये जाते हैं

1. जीन क्लोनिंग (Gene cloning)-विशिष्ट जीन के समान जीन प्राप्त करना जीन क्लोनिंग कहलाता है। क्लोन प्राप्त करने वाले DNA खण्ड को पहले वाहक DNA में प्रवेश कराया जाता है। उसके बाद यह वाहक DNA पोषक कोशिका में डाला जाता है जहाँ पर इसके जीन क्लोन प्राप्त होते हैं । जीवाणुओं के माध्यम से जीन क्लोनिंग में निम्न चरण पाये जाते हैं.

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(i) जीन का निर्माण (Preparation of the gene)-जीवाणु द्वारा जीन क्लोनिंग के लिए DNA को प्रकिण्व एण्डोन्यूक्लिएज की सहायता से छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल लेते हैं। प्रत्येक खण्ड एकहरा शीर्षयुक्त होता है।

(ii) वाहक में प्रवेश कराना (Insertion into vector)—वाहक एक ऐसा प्रतिनिधि (Agent) है जिसका उपयोग DNA को पोषक जीवाणु कोशिका के प्लाज्मिड तक पहुँचाने के लिए किया जाता है। वाहक (Vector) DNA को एण्डोन्यूक्लिएज की सहायता से खोलते हैं। DNA लाइगेज प्रकिण्व की सहायता से DNA खण्ड वेक्टर के प्लाज्मिड या गुणसूत्र (DNA) से जोड़ देते हैं। अब DNA खण्डयुक्त प्लाज्मिड को पुनर्संयोजित प्लाज्मिड कहते हैं।

(iii) पोषक कोशिका का पुनर्निर्माण (Transformation of host cell)—संयुक्त प्लाज्मिड को पोषक जीवाणु कोशिका के अन्दर प्रवेश कराते हैं जहाँ पर जीवाणु कोशिका द्वारा प्लाज्मिड का निर्माण किया जाता है। इन जीवाणुओं को कैल्सियम क्लोराइड के तनु एवं ठण्डे विलयन में रखते हैं। यह विलयन जीवाणु कोशिका द्वारा विदेशी DNA को ग्रहण करने में मदद करता है।

इस प्रकार से DNA के पुनर्निर्माण के लिए E. coli नामक जीवाणु का उपयोग किया जाता है क्योंकि

  • इसका विस्तृत रूप से अध्ययन किया जा चुका है।
  • कैल्सियम क्लोराइड द्वारा उपचारित इस जीवाणु की कोशिका में DNA पुनर्निर्माण तीव्रता से होता है।
  • यह जीवाणु लगभग सभी प्रकार के DNA का अनुलिपिकरण कर सकता है।
    इस प्रकार प्राप्त DNA की अनुकृतियों को जीन बैंक या जीनोमिक लाइब्रेरी में रखा जाता है।

2. पादप क्लोनिंग (Plant cloning)—कायिक प्रवर्धन द्वारा उत्पादित सन्ततियों को क्लोन कहते हैं वर्तमान युग में ऊतक संवर्धन तकनीक द्वारा पौधों के क्लोन तैयार किये जाते हैं। इस कार्य हेतु पौधे के भाग (एक्सप्लाण्ट) का चयन करके उसे एक कृत्रिम संवर्धन माध्यम में उगाया जाता है। संवर्धन माध्यम में सर्वप्रथम कोशिकाओं का एक असंगठित एवं अविभाजित समूह बनता है जिसे कैलस (Callus) कहते हैं । इस कैलस के टुकड़ों को अब हॉर्मोन युक्त अन्य संवर्धन माध्यम में उगाया जाता है जिससे छोटे-छोटे पौधे बनते हैं । इन पौधों को अब खेतों/क्यारियों में रोपित किया जाता है।

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MP Board Class 12th General English Model Question Paper

MP Board Class 12th General English Model Question Paper

Time : 3 Hrs
M.M.: 100

Instructions :

  • Read the instructions carefully.
  • All questions are compulsory.
  • Answers must be complete and to the point.

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Section ‘A’

1. Read the following passage and answer the questions given below it:

Because our eyes are so valuable to us both for work and for play, it is important that we should take very great care of them. By using our eyes foolishly it is possible to damage them so severely that they never fully recover. For this reason, it is wise to observe a few simple rules, especially when reading, writing or doing other close work such as making models.

Whatever work we are doing there should always be enough light. It should be sufficiently strong and should at the same time be, evenly spread. If we are writing we should be in such a position that the hand which holds the pen does not cast a shadow on the paper, where the letters are being formed. Very strong light should be avoided since it is tiring for eyes, particularly when reflected from a sheet of white paper.

When reading or writing it is best to sit straight, but quite comfortably, and to have the page about twelve inches from the eyes. Never look directly at a very bright light, such as the sun or a welder’s arc, unless you have thick dark glass to look through. Lights as bright as these can quickly damage the retina beyond repair.

Questions:
(a) Eyes are valuable to us :
(i) for work (ii) for play (iii) for work and play (iv) none of these.

(b) By using our eyes foolishly it is possible to:
(i) protect them (ii) neglect them. (iii) damage them severely (iv) none of these.

(c) The word ‘observe’ in the passage means :
(i) break (ii) follow (iii) ignore (iv) see.

(d) Whatever work we are doing there should be enough : [1]
(i) air (ii) sound (iii) noise (iv) light.

(e) Very strong light should be avoided since it is : [1]
(i) tiring for the eyes (ii) comfortable for the eyes (iii) does not affect our eyes (iv) All the above.

(f) The verb form of‘simple’ is: [1]
(i) simple (ii) simplify (iii) simplicity (iv) None of these.

(g) Whatever work we are doing there should be : [1]
(i) enough light (ii) sufficiently strong light (iii) evenly spread light (iv) All of these.

(h) While reading or writing the page should be……..from the eyes. [1]
(i) twelve inches (ii) twenty inches (iii) two inches (iv) twenty-two inches.

(i) Why we should not look directly at a very bright light? [2]
(j) What care should we take while reading or writing? [2]
Answer:
(a) (iii) for work and play
(b) (iii) damage them severely
(c) (ii) follow
(d) (iv) light
(e) (i) tiring for the eyes
(f) (ii) simplify
(g) (iv) All of these
(h) (i) Twelve inches.
(i) While reading or writing it is best to sit comfortably but straight and to have the page about twelve inches from the eyes.
(j) We should never look directly at very bright light such as the sun or welder’s arc without dark glasses because such bright lights can quickly damage the retina beyond repair.

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2. Read the following passage and answer the questions given below it:

Destruction of forests has a major impact on the productivity of our croplands. This happens in two ways. Soil erosion increases manifold and the soil literally gets washed away, leading to an accentuated cycle of floods and droughts. But equally important is the impact of the shortage of firewood on the productivity of croplands. When firewood becomes scarce, people begin to bum cow dung and crop wastes. In many places cow dung and crop wastes are now the major sources of cooking energy. Thus, slowly every part of the plant gets used and nothing goes back to the soil. Over a period of time this nutrient drain affects crop productivity. Add to this the technology of the Green Revolution, the technology of growing high yielding varieties on a limited diet of chemical fertilizers like nitrogen, phosphates and potash. The total biomass production goes up and so does the drain of the nutrients from the soil.

Questions:
(A) Make notes in points, from the above passage, using abbreviations, where necessary and supply a suitable title also. [5]
(B) Write a summary of the above passage in about 90 words. [3]
Answer:
(A) Title : Destruction of Forests and Productivity of Land.

Notes:

  • Destruction of forests has an impact on the productivity of croplands.
  • It leads to soil erosion and leads to increased floods and droughts.
  • It also results in a shortage of firewood and the resultant use of cow dung and crop wastes. The two are major sources of cooking energy.
  • Thus, every part of the plant gets used up and nothing goes back to the soil. This nutrient drain affects productivity.
  • With Green Revolution, the high yielding varieties require limited fertilizers. With increased biomass production nutrients drain also increases.

(B) Summary : The destruction of forests has adversely affected productivity of croplands. It causes soil erosion and increased floods and droughts. It also leads to shortage of firewood and the resultant use of cow dung and crop waste. Thus, every part of the plant is used up but nothing goes back to the soil. This nutrient drain affects productivity. With. Green Revolution the high yielding varieties require limited fertilizers. Increased biomass production thus increases nutrients drain.

Section ‘B’

3. You are B. Reddy of Bhopal. You want to let out a house. Write out an advertisement to be published in the classified column of a newspaper. [5]
Or
You are Alok Gupta, the secretary of the cultural activities of your school. Draft a notice giving information about the selection of two participants from your school to take part in the inter-school debate competition.
Answer:
See Chapter 3.

4. With the help of the words given below produce a write-up on ‘The Value of Games and Sports.’ [6]
Necessary for life—remove monotony, make our body healthy, learning good habits, develop equality and brotherhood.
Or
Using the following inputs produce a write-up on ‘Illegal Immigration A Real Threat’:
2 crore illegal immigrants, social problems, altering demographic complexion, problem acute in some states and towns, burden on economic resources, security problem.
Answer:
See Chapter 4.

5. Write an application to your principal requesting him to issue a character certificate.
Or [6]
Write an application to the Director of Education. M.P. Bhopal, asking for a job as a teacher in an educational institution, [6]
Answer:
See Chapter 5.

6. Write a letter to your father, explaining why you could not get good, marks in the half-yearly examination. [6]
Or
Your friend is worried about the coming examinations. Write a letter to him giving moral support for success in the examinations.
Answer:
See Chapter 5.

7. Write an essay on any one of the following topics in about 250 words:
(a) The Cleanliness Drive
(b) The Festival You Like Most
(c) The Population Problem in India
(d) Science in Daily Life
(e) Educational Value of Computers
Or
With the help of the words given below, produce a write-up on ‘Grow More Trees’:

Importance of trees, the usefulness of trees in life, to survive in life trees are necessary, useful for animals and birds shelter, protect and development of our trees.
Answer:
See Chapters 6 and 7.

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Section ‘C’

8. Fill in the blanks with the help of correct alternatives5
(1) We must help the poor. (a, an, the) [1]
(2) He speaks different languages. (few, many, some) [1]
(3) There is milk in the pot. (little, few) [1]
(4) They a house in Delhi two years ago. (buy, bought) [1]
(5) The man is honest is trusted. (who, whom) [1]
Answer:
(1)the,
(2) many,
(3) little,
(4) bought,
(5) who.

9. Do as directed: [5]
(1) The child cried for milk. (Change into Present Continuous)
(2) Post the letter today. (Change the voice)
(3) She is Miss Sheela. She used to teach us English. (Combine using Adjective Clause)
(4) The brave should be honored. (Begin with We )
(5) I have studied English well. I may get a distinction in it. (Combine using ‘so that’)
Answer:
(1) The child is crying for milk
(2) Let the letter be posted today.
(3) She is Miss Sheela who used to teach us English.
(4) We should honor the brave.
(5) I have studied English well so that I may get a distinction in it.

Section ‘D’

10. Read the following extracts and answer the questions given below:

(A) Teach me to listen, Lord
To myself
Help me to be less afraid
To trust the voice inside
In the deepest part of me.

Questions:
(1) A word having the same meaning as the word ‘belief is :
(a) afraid (b) deepest (c) trust (d) inside.

(2) A word from the stanza which is the opposite of‘more’ is :
(a) part (b) less (c)lord (d) voice.

(3) What does the poet mean by ‘in the deepest part of me’?
Answer:
See Chapter 16.

(B) Can I admire the statue great,
When living men starve at its feet.
Can I admire the parks green tree,
A roof for homeless misery?

Questions:
(1) Name the poet :
(a) Sri Aurobindo (b) W. H. Davies (c) William Rands (d) Anonymous.

(2) Give the meaning of the word ‘starve’ :
(a) die of hunger (b) labour hard (c) work comfortably (d) live happily.

(3) Why does the poet say that he cannot admire the great statue? [1]
Answer:
See Chapter 15.

11. Answer any two of the following questions: [4]
(a) When does the poet wish to listen to the voice of God?
(b) What does the poet compare the human body with?
(c) What other meaning does the word ‘ball’ have?
Answer:
See Chapter 15.

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12. Answer any seven of the following questions: [14]
(a) How did the author prevent his companion from discovering that he was blind?
(b) In which area will India become a global leader?
(c) What was Ghasi’s complaint to the panchayat?
(d) How did the woman in the hut react when she saw Birju?
(e) What strange fact did the narrator discover when he looked at the man’s visiting card?
(f) What is the author’s opinion on things and people we are yet to see and know?
(g) Why did the neighborhood children come to Mini’s house?
(h) What reflects our true belief?
Answer:
See Chapter 15.

13. What are the functions of the two hemispheres of the brain? [4]
Or
What are the governing values? How can we identify our governing values?
14. Answer any four of the following questions: [8]
(a) ‘Which are the two types of reading?
(b) What do you understand by do’s and don’t?
(c) Why we must take risk?
(d) What happens when you dream big?
(e) How does a cloud feel when it travels in the sky?
Answer:
See Chapter 17.

15. How can you say that nature’s bounty is boundless? [4]
Or
Summarize the poem ‘A Psalm of Life’.
Answer:
See Chapter 17.

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक

बहुलक NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बहुलक क्या होते हैं ?
उत्तर
सरल अणुओं अर्थात् एकलक के संयोजन से बने उच्चतर आण्विक द्रव्यमान वाले यौगिकों को बहुलक कहते हैं। पॉलिमर शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के दो शब्द poly + mer के योग से हुई है। Poly = many (बहु), mer = parts (भाग) इन्हें वृहत् अणु भी कहते हैं।
उदाहरण-P.V.C..टेफ्लॉन, पॉलिथीन इत्यादि।

प्रश्न 2.
संरचना के आधार पर बहुलकों का वर्गीकरण कैसे किया जाता है ?
उत्तर
संरचना के आधार पर बहुलकों को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है

  1. रेखीय बहुलक– पॉलिएथिलीन, नायलॉन, पॉलिविनाइल क्लोराइड।
  2. शाखित श्रृंखला बहुलक-निम्न घनत्व पॉलिथीन, ग्लाइकोजन।
  3. तिर्यकबद्ध बहुलक-बेकेलाइट, मेलामिन इत्यादि।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित बहुलकों को बनाने वाले एकलकों के नाम लिखिए[
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 4
उत्तर
(a) हेक्सामथेलीन, डाईएमीन तथा एडीपिक अम्ल
(b) केप्रोलेक्टम
(c) टेट्राफ्लुओरोएथिलीन।

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प्रश्न 4.
निम्न को योगात्मक एवं संघनन बहुलकों में वर्गीकृत कीजियेटेरिलीन, बैकेलाइट, पॉलिविनाइल क्लोराइड, पॉलिथीन।
उत्तर

  1. टेरिलीन- संघनन बहुलक
  2. बैकेलाइट- संघनन बहुलक
  3. पॉलिविनाइल क्लोराइड- योगात्मक बहुलक
  4. पॉलिथीन- योगात्मक बहुलक।

प्रश्न 5.
ब्यूना-N और ब्यूना-5 के मध्य अंतर समझाइए।
उत्तर
ब्यूना- N- 1, 3-ब्यूटाडाइईन एवं एक्रिलोनाइट्राइल का सहबहुलक है।
ब्यूना- S- 1, 3-ब्यूटाडाइईन एवं स्टाइरिन का सहबहुलक है।

प्रश्न 6.
निम्न बहुलकों को उनके अंतराआण्विक बलों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए

  • नायलॉन-6, 6, ब्यूना-S, पॉलिथीन
  • नायलॉन-6, निओप्रिन, पॉलिविनाइल क्लोराइड।

उत्तर
अंतराआण्विक बलों के बढ़ते क्रम –

  • ब्यूना-S, पॉलिथीन, नायलॉन-6, 6
  • निओप्रिन, पॉलिविनाइल क्लोराइड, नायलॉन-6।

बहुलक NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बहुलक और एकलक पदों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
बहुलक-बहुलक उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले पदार्थ होते हैं जिनमें वृहत् संख्या में पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयाँ पायी जाती हैं। इन्हें बृहत् अणु भी कहा जाता है । बहुलकों के कुछ उदाहरण- पॉलिथीन, बैकलाइट, रबर, नायलॉन 6, 6 आदि हैं।
एकलक- एकलक एक सरल अणु है जो बहुलीकृत होने में सक्षम है और इससे संगत बहुलक बनता
उदाहरण- पॉलिथीन एक बहुलक है। इसका सरल अणु एथिलीन एकलक है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 5

प्रश्न 2.
प्राकृतिक और संश्लेषित बहुलक क्या हैं ? प्रत्येक के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
1. प्राकृतिक बहुलक-प्राकृतिक बहुलक उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले वृहत्अणु हैं और यह पादपों और जंतुओं में पाए जाते हैं। प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल इसके उदाहरण हैं।

2. संश्लेषित बहुलक-संश्लेषित बहुलक मानव निर्मित उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले वृहत्अणु हैं। संश्लेषित प्लास्टिक, रेशे और रबर इसके अंतर्गत आते हैं। इनके दो विशिष्ट उदाहरण पॉलिथीन और डेक्रॉन हैं।

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प्रश्न 3.
समबहुलक और सहबहुलक पदों (शब्दों) में विभेद कर प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर
समबहुलक- एक ही प्रकार की एकलक स्पीशीज के बहुलीकरण से बनने वाले योगात्मक बहुलकों को समबहुलक कहा जाता है।
उदाहरण –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 6

सहबहुलक- दो भिन्न-भिन्न प्रकार के एकलकों के योगात्मक बहुलीकरण से बनने वाले बहलकों को सहबहुलक कहा जाता है।
उदाहरण –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 7

प्रश्न 4.
एकलक की प्रकार्यात्मकता को आप किस प्रकार समझाएँगे?
उत्तर
प्रकार्यात्मकता एकलक में आबंधी स्थितियों की संख्या है।
उदाहरण- एथीन, प्रोपीन, स्टाइरीन, एक्रिलोनाइट्राइल की प्रकार्यात्मकृता एक है तथा एथिलीन ग्लाइकॉल, ऐडिपिक अम्ल हेक्सामेथिलीनडाइएमीन की दो है।

प्रश्न 5.
बहुलीकरण (Polymerization) पद (शब्द) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर
एक अथवा अधिक एकलकों की सहसंयोजक बंधों द्वारा पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयों के एक साथ श्रृंखलित होने से बनने वाले उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले बहुलक बनने की प्रक्रिया बहुलीकरण है।

प्रश्न 6.
(NH-CHR-CO)n एक समबहुलक है या सह-बहुलक ?
उत्तर
चूँकि (NH-CHR -CO)n इकाई, एकल एकलक इकाई से प्राप्त होती हैं इसलिए यह एक समबहुलक है।

प्रश्न 7.
आण्विक बलों के आधार पर बहुलक किन संवर्गों में वर्गीकृत किए जाते हैं ?
उत्तर
विभिन्न बहुलकों की श्रृंखलाओं के मध्य उपस्थित आण्विक बलों के आधार पर बहुलकों का …वर्गीकरण निम्न प्रकार से दिया गया है।

  1. प्रत्यास्थ बहुलक,
  2. रेशे,
  3. तापसुघट्य बहुलक और
  4. तापदृढ़ बहुलक।

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प्रश्न 8.
संकलन और संघनन बहुलीकरण के मध्य आप किस प्रकार विभेद करेंगे?
उत्तर
संकलन बहुलीकरण-योगात्मक बहुलक द्वि या त्रि-आबंध युक्त एकलक अणुओं के पुनरावृत्त योग से बनते हैं। एक ही प्रकार के एकलक स्पीशीज के बहुलीकरण से बनने वाले योगात्मक बहुलक को समबहुलक कहते हैं तथा भिन्न-भिन्न प्रकार के एकलकों के योगात्मक बहुलीकरण से बनने वाले बहुलकों को सहबहुलक कहते हैं।
उदाहरण- एथीन से पॉलिएथिलीन का निर्माण।

संघनन बहुलीकरण- दो भिन्न द्वि-क्रियात्मक या त्रि-क्रियात्मक इकाइयों के बीच पुनरावृत्त संघनन अभिक्रिया द्वारा बनते हैं। इन बहुलीकरण अभिक्रिया के दौरान लघु अणु जैसे-H2O-NH3, HCl इत्यादि का विलोपन होता है।
उदाहरण- नायलॉन-6, 6, हेक्सामेथिलीनडाईएमीन तथा एडिपिक अम्ल का संघनन बहुलक है।

प्रश्न 9.
सहबहुलीकरण (Co-polymerization) पद(शब्द)की व्याख्या कीजिए और दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
सहबहुलीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें एक से अधिक प्रकार की स्पीशीज का बहुलीकरण किया जाता है। सहबहुलक में प्रत्येक एकलक की अनेक इकाइयाँ होती हैं।
उदाहरण- ब्यूना-S- यह 1, 3-ब्यूटाडाइईन तथा स्टाइरीन का सहबहुलक है।
ब्यूना-N- यह 1, 3-ब्यूटाडाइईन तथा एक्रिलोनाइट्राइल का सहबहुलक है।

प्रश्न 10.
एथीन के बहुलीकरण के लिए मुक्त मूलक क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर
बेंजॉयल परॉक्साइड की उपस्थिति में एथीन का बहुलीकरण मुक्त मूलक क्रियाविधि द्वारा समझा जा सकता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 8

प्रश्न 11.
तापसुघट्य और तापदृढ़ बहुलकों को प्रत्येक के दो उदाहरण के साथ परिभाषित कीजिए।
उत्तर
तापसुघट्य बहुलक को बार-बार तापन द्वारा मृदुलित और शीतलन द्वारा कठोर बनाया जा सकता है। अतः इसे बार-बार उपयोग किया जा सकता है। पॉलिथीन और पॉलिप्रोपिलीन आदि इसके उदाहरण हैं। तापदृढ़ बहुलक स्थायी रूप से दृढ़ रहने वाला बहुलक है। यह साँचे में ढालने की प्रक्रिया में कठोर हो जाता है तथा जम जाता है और पुनः मृदुलित भी नहीं किया जा सकता। बैकेलाइट और मेलामिन-फॉर्मेल्डिहाइड बहुलक इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 12.
निम्न बहुलकों को प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त एकलक लिखिए

  • पॉलिवाइनिल क्लोराइड,
  • टेफ्लॉन,
  • बैकेलाइट।

उत्तर

  • पॉलिवाइनिल क्लोराइड का एकलक, CH,=CHCI (वाइनिल क्लोराइड) है।
  • टेफ्लॉन का एकलक, CF2=CF2 (टेट्राफ्लुओरोएथिलीन) है।
  • बैकेलाइट के बनने में प्रयुक्त होने वाले एकलक, HCHO (फॉर्मेल्डिहाइड) और C6H5OH (फीनॉल) हैं।

प्रश्न 13.
मुक्त मूलक योगज बहुलकन में प्रयुक्त एक सामान्य प्रारंभक का नाम और संरचना लिखिए।
उत्तर
बेजॉइल परॉक्साइड
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 9

प्रश्न 14.
रबर अणुओं में द्विबंधों की उपस्थिति किस प्रकार उनकी संरचना और क्रियाशीलता को प्रभावित करती है ?
उत्तर
संरचना की दृष्टि से प्राकृतिक रबर एक रेखीय cis-1,4-पॉलिआइसोप्रिन है। इस बहुलक में द्विआबंध आइसोप्रिन इकाइयों के C, और C, के मध्य स्थित होते हैं। द्विआबंध का cis अभिविन्यास दुर्बल अंतर-आण्विक बलों द्वारा प्रभावी आकर्षण के लिए श्रृंखलाओं को समीप नहीं आने देता। अतः प्राकृतिक रबर की कुंडलित सरंचना होती है और यह प्रत्यास्थता प्रदर्शित करता है।
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प्रश्न 15.
रबर के वल्कनीकरण के मुख्य उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
उत्तर
प्राकृतिक रबर के निम्नलिखित भौतिक गुणों के सुधार के लिये वल्कनीकरण किया जाता है

  • प्राकृतिक रबर उच्च ताप (>335K) ताप पर नर्म है।
  • प्राकृतिक रबर निम्न ताप (<283K) ताप पर भंगुर है।
  • यह अध्रुवीय विलायकों में घुलनशील है।
  • ऑक्सीकरण कर्मकों के आक्रमण के प्रति प्रतिरोधी नहीं है।

प्रश्न 16.
नायलॉन-6 और नायलॉन-6, 6 में पुनरावृत्त एकलक इकाइयाँ क्या हैं ?
उत्तर
नायलॉन-6 की पुनरावृत्त एकलक इकाई [NH(CH2)5-CO] है। नायलॉन-6, 6 बहुलक की पुनरावृत्तं एकलक इकाई दो एकलकों हेक्सामेथिलीनडाइऐमीन और ऐडिपिक अम्ल से व्युत्पित होती है।
[NH-(CH2)6-NH-CO(CH2)4-CO]

प्रश्न 17.
निम्नलिखित बहुलकों के एकलकों का नाम और संरचना लिखिए।
(i) ब्यूना-S,
(ii) ब्यूना-N,
(iii) डेक्रॉन,
(iv) निओप्रीन।
उत्तर
एकलकों के नाम और संरचनाएँक्र.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 11

प्रश्न 18.
निम्नलिखित बहुलक संरचनाओं के एकलक की पहचान कीजिए
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 12
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उत्तर
(i) डेकानॉइक अम्ल –
HOOC-(CH2)8-COOH और हेक्सामेथिलीनडाइएमीन-H2N-(CH2)6-NH2 है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 14

प्रश्न 19.
एथिलीन ग्लाइकॉल और टेरेफ्थैलिक अम्ल से डेक्रॉन किस प्रकार प्राप्त किया जाता है ?
उत्तर
डेक्रॉन बनाने के लिये निम्नलिखित समीकरण हैं-
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प्रश्न 20.
जैवनिम्नीय बहुलक क्या हैं ? एक जैवनिम्नीय ऐलिफैटिक पॉलिएस्टर का उदाहरण दीजिए।
उत्तर
जैवनिम्नीय बहुलक वह बहुलक है जो एक लम्बे समयांतराल के बाद स्वयं के द्वारा अथवा सूक्ष्मजीवों की क्रिया द्वारा विघटित हो जाता है। जैवनिम्नीय बहुलक कहलाता है। इस प्रकार के बहुलक का उपयोग तथा उनका निस्तारण पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न नहीं करता है।
उदाहरण- पॉलिहाइड्रॉक्सीब्यूटीरेट को -हाइड्रॉक्सी वैलरेट PHBV.
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बहुलक अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुलक वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है –
(a) सिल्क सेल्युलोज से बनाया जाता है
(b) नायलॉन-6, 6 इलास्टोमर्स का उदाहरण है
(c) प्राकृतिक रबर की पुनरावृत्त इकाई आइसोप्रिन है
(d) स्टार्च तथा सेल्युलोज दोनों ग्लूकोज के बहुलक हैं।
उत्तर
(b) नायलॉन-6, 6 इलास्टोमर्स का उदाहरण है

प्रश्न 2.
CaC2 से पॉलिएथिलीन का निर्माण निम्न प्रकार से होता है –
CaC2+2H2O →Ca(OH)2+C2H2
C2H2+H2 →C2H4
nC2H4 →(-CH2-CH2-)n
64.0 Kg CaC2 से पॉलिएथिलीन की मात्रा प्राप्त होगी-
(a) 7 kg
(b) 14 kg
(c) 21 kg
(d) 28 kg.
उत्तर
(d) 28 kg.

प्रश्न 3.
निम्न घनत्व पॉलिएथिलीन के लिये निम्न दिये गये कथनों में से कौन-सा कथन गलत है –
(a) इसके निर्माण हेतु उच्च दाब की आवश्यकता है
(b) यह विद्युत् का दुर्बल चालक है
(c) इसके निर्माण हेतु उत्प्रेरक के रूप में ऑक्सीजन या परॉक्साइड प्रयुक्त होता है
(d) इसका उपयोग बाल्टियाँ तथा डस्टबीन बनाने में होता है।
उत्तर
(d) इसका उपयोग बाल्टियाँ तथा डस्टबीन बनाने में होता है।

प्रश्न 4.
नायलॉन उदाहरण है –
(a) पॉलिऐमाइड
(b) पॉलिथीन
(c) पॉलिएस्टर
(d) पॉलिसैकेराइड।
उत्तर
(a) पॉलिऐमाइड

प्रश्न 5.
प्राकृतिक रबर में होता है –
(a) वैकल्पिक सिस एवं ट्रान्स अभिविन्यास
(b) अनियमित सिस एवं ट्रान्स अभिविन्यास
(c) सभी सिस अभिविन्यास
(d) सभी ट्रान्स अभिविन्यास।
उत्तर
(c) सभी सिस अभिविन्यास

प्रश्न 6.
निम्न में से कौन-सा संघनन बहुलक नहीं है –
(a) मेलामाइन
(b) ग्लिपटल
(c) डेक्रॉन
(d) नियोप्रिन।
उत्तर
(d) नियोप्रिन।

प्रश्न 7.
निम्न में से नियोप्रिन का एकलक है –
(a)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक -1
(b)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक -2
(c) CH2=CH-C=CH
(d) CH2= CH-CH= CH2.
उत्तर
(a)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक -1

प्रश्न 8.
निम्न में से कौन-सा बहुलक जैवनिम्नीकरण बहुलक है –
(a) पॉलिएथिलीन
(b) बैकेलाइट
(c) PHBU
(d) PVC.
उत्तर
(c) PHBU

प्रश्न 9.
निम्न में से किसमें एस्टर बंध होता है –
(a) नायलॉन
(b) बैकलाइट
(c) टेरीलीन
(d) P.V.C.
(e) रबर।
उत्तर
(c) टेरीलीन

प्रश्न 10.
टेफ्लॉन किसका बहुलक है –
(a) टेट्राफ्लुओरो एथिलीन
(b) टेट्रा आयोडो एथिलीन
(c) टेट्राब्रोमो एथिलीन
(d) टेट्राफ्लुओरो एथिलीन।
उत्तर
(a) टेट्राफ्लुओरो एथिलीन

प्रश्न 11.
नायलॉन थ्रेड होते है –
(a) पॉलिएमाइड बहुलक
(b) पॉलिएथिलीन बहुलक
(c) पॉलिविनाइल बहुलक
(d) पॉलिएस्टर बहुलक।
उत्तर
(a) पॉलिएमाइड बहुलक

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प्रश्न 12.
बैकेलाइट बहुलक है –
(a) HCHO एवं एसीटीक अम्ल का
(b) HCHO एवं फिनॉल का
(c) C2H5-OH एवं फिनॉल का
(d) CH3-COOH एवं बेंजीन का।
उत्तर
(b) HCHO एवं फिनॉल का

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में जैवनिम्नीकरण बहुलक (Biodegradable) है –
(a) सेल्युलोज
(b) पॉलिथीन
(c) पॉलिविनाइल फ्लोराइड
(d) नायलॉन-6.
उत्तर
(a) सेल्युलोज

प्रश्न 14.
नायलॉन-6, 6 नहीं है –
(a) संघनन बहुलक
(b) सह बहुलक
(c) पॉलि ऐमाइड .
(d) समबहुलक।
उत्तर
(d) समबहुलक।

प्रश्न 15.
निम्न में श्रृंखला वृद्धि बहुलक है –
(a) स्टार्च
(b) न्यूक्लिक अम्ल
(c) पॉलिस्टाइरिन
(d) प्रोटीन।
उत्तर
(c) पॉलिस्टाइरिन

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. क्लोरोप्रिन ………….. बनाने में उपयोग किया जाता है।
  2. बहुलकों पर आवेश ………… है।
  3. बहुलक प्रकाश का …………… करते हैं।
  4. बहुलकों का अणु द्रव्यमान …………… होता है।
  5. ग्लूकोज ……………. का मोनोमर है।
  6. सेल्युलोज एक ………….. बहुलक है।
  7. एथिलीन ग्लाइकॉल तथा थैलिक अम्ल का बहुलक …………… कहलाता है।
  8. रबर …………… बहुलक है।
  9. रबर का वल्कनीकरण ………….. का उदाहरण है।
  10. बैकेलाइट एक ………………. प्लास्टिक है।
  11. नाइलॉन -6 को …………… भी कहते हैं।
  12. टेफ्लॉन …………… का बहुलक है।

उत्तर

  1. संश्लेषित रबर
  2. नहीं होता
  3. प्रकीर्णन
  4. अधिक
  5. सेल्युलोज
  6. प्राकृतिक
  7. ग्लिप्टल
  8. प्राकृतिक
  9. इलेस्टोमर
  10. ताप दृढ़
  11. पेर्लीन-2
  12. टेट्रा फ्लोरो एथिलीन।

3. उचित संबंध जोडिए

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 3
उत्तर

  1. (d)
  2. (a)
  3. (c)
  4. (1)
  5. (b)
  6. (g)
  7. (e)
  8. (h).

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4. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. प्राकृतिक बहुलकों के दो उदाहरण दीजिए।
  2. योग बहुलक के दो उदाहरण दीजिए।
  3. संघनन बहुलक के दो उदाहरण दीजिए।
  4. ब्यूना रबर का रासायनिक नाम लिखिए।
  5. संश्लेषित रबर का एक उदाहरण दीजिए।
  6. पॉलीथीन का एकलक है।
  7. एथिलीन ग्लाइकॉल तथा डाइमेथैल थैलिक अम्ल के संघनन से प्राप्त बहुलक का नाम क्या है ?
  8. दो या दो से अधिक भिन्न एकलकों के बहुलीकरण को क्या कहते हैं ?
  9. टायर के धागे बनाने में प्रयुक्त बहुलक का नाम क्या है ?
  10. कैप्रोलैक्टम के बहुलीकरण से क्या प्राप्त होता है ?

उत्तर

  1. प्राकृतिक बहुलक-रबर, स्टार्च
  2. योग बहुलक-(i) पॉलिथीन (ii) पॉलिप्रापिलीन
  3. संघनन बहुलक- (i) नायलॉन-6 (ii) बैकलाइट
  4. स्टायरिन ब्यूटा डाइईन रबर (S.B.R)
  5. स्टाइरीन ब्यूटा-डाइ-ईन रबर (S.B.R.)
  6. एथीन (CH2 = CH2)
  7. टेरीलीन (डेक्रॉन)
  8. सह बहुलीकरण
  9. नायलॉन-6
  10. नायलॉन-6.

बहुलक लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्या योगात्मक व संघनन बहुलीकरण में सहबहुलक (Copolymer) बनता है ?
उत्तर
हाँ, यह दोनों प्रकार के बहुलीकरण में बन सकता है। जैसे ब्यूना-S एक सहबहुलक है जो कि स्टाइरिन व 1, 3-ब्यूटाडाइईन से योगात्मक बहुलीकरण में बनता है। नायलॉन-6, 6 एक सह बहुलक है जो कि एडिपिक अम्ल एवं हेक्सामेथिलीन डाई एमीन के संघनन बहुलीकरण से बनता है।

प्रश्न 2.
नायलॉन-6 एवं नायलॉन-6,6 में क्रमश: 6 एवं 6, 6 क्या व्यक्त करते हैं ?
उत्तर
नायलॉन-6 को कैप्रोलैक्टम से बनाया जाता है जो कि साइक्लोहेक्सेन से प्राप्त होता है। यह 6 कार्बन परमाणु युक्त यौगिक है अतः नायलॉन-6 में 6 अंक, इन्हीं 6 कार्बन परमाणुओं को व्यक्त करते हैं।

नायलॉन-6, 6 को 6 कार्बन परमाणु युक्त एडिपिक अम्ल तथा 6 कार्बन परमाणु युक्त डाइ एमीन से बनाया जाता है। अतः नाम नायलॉन-6, 6 में इसे 6, 6 से व्यक्त किया जाता है जो कि दोनों यौगिकों में 6-6 कार्बन श्रृंखला को व्यक्त करते हैं।

प्रश्न 3.
निम्न बहुलकों को उनके बढ़ते हुए अन्तर आण्विक बल के आधार पर व्यवस्थित कीजिए तथा इनको योगात्मक व संघनन बहुलक के रूप में भी वर्गीकृत कीजिए-नायलॉन-6, 6, ब्यूना-S, पॉलिथीन।
उत्तर
अन्तर आण्विक बल का बढ़ता हुआ क्रम है- पॉलिथीन < ब्यूना-S < नायलॉन-6,6
संघनन बहुलक- नायलॉन-6, 6
योगात्मक बहुलक- ब्यूना-S एवं पॉलिथीन।

प्रश्न 4.
थर्मोप्लास्टिक बहुलक, थर्मोसेटिंग बहुलक से किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर
थर्मोप्लास्टिक बहुलक एवं थर्मोसेटिंग बहुलक में भिन्नता –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 17

प्रश्न 5.
क्या पॉलिएस्टर व पॉलिएक्रिलेट्स समान है ? उत्तर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
पॉलिएस्टर व पॉलिएक्रिलेट्स दोनों अलग-अलग श्रेणियों के बहुलक हैं तथा दोनों में निम्न अन्तर स्पष्ट है

  • पॉलिएक्रिलेट्स एकलक (होमोपॉलिमर) है जबकि पॉलिएस्टर, सह बहुलक की प्रकृति के हैं।
  • पॉलिएक्रिलेट्स में बहुलकों का संश्लेषण योगात्मक बहुलीकरण द्वारा होता है जबकि पॉलिएस्टर का संश्लेषण संघनन बहुलीकरण द्वारा होता है।
  • पॉलिएक्रिलेट्स में बहुलीकरण C =C बन्ध के द्वारा होता है जबकि पॉलिएस्टर में यह एस्टर बन्ध के द्वारा होता है।

प्रश्न 6.
मुक्त मूलक बहुलीकरण अभिक्रिया में हमेशा एकलक का विशुद्ध रूप ही क्यों लिया जाता है ?
उत्तर
मुक्त मूलक बहुलीकरण में अशुद्धियाँ श्रृंखला स्थानान्तरण एजेण्ट के रूप में कार्य कर सकती है तथा मुक्त मूलक से क्रिया कर अभिक्रिया को धीमा कर सकती है या पूरी अभिक्रिया को ही रोक सकती है।

प्रश्न 7.
प्राकृतिक रबर तथा वल्कनित रबर के कुछ महत्वपूर्ण अन्तर लिखिए।
उत्तर
प्राकृतिक रबर एवं वल्कनित रबर में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 18

प्रश्न 8.
पॉलिथीन क्या है ? इसके दो उपयोग लिखिये।
उत्तर
पॉलिथीन या पॉलिएथिलीन (Polyethylene)-अत्यधिक उच्च दाब 1000-3000 वायुमण्डल एवं 373 से 573K पर ऑक्सी अथवा अकार्बनिक परऑक्साइड की उपस्थिति में एथिलीन बहुलीकृत होकर पॉलिएथिलीन बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - Q8
इस प्रकार पॉलिएथिलीन एक योगात्मक बहुलक है तथा व्यापार में पॉलिथीन के नाम से प्रसिद्ध है। यह ताप प्लास्टिक है तथा गर्म करने से नर्म हो जाता है, जिससे इसे विभिन्न आकृतियों में ढाला जा सकता है। यह जल, अम्ल, क्षार तथा कार्बनिक विलायकों द्वारा अप्रभावित रहती है।
उपयोग (Uses)-

  • न टूटने वाली बोतलें, पाइप, बाल्टी आदि घरेलू उपयोग की वस्तुओं के निर्माण में।
  • पैक करने वाली सामग्रियों के निर्माण में,
  • तारों के विद्युत्-रोधन में।

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प्रश्न 9.
निओप्रिन रबर क्या है ? इसके उपयोग लिखिए।
उत्तर
निओप्रिन रबर-यह संश्लेषित रबर है, जो पोटैशियम परसल्फेट की उपस्थिति में क्लोरोप्रिन (2- क्लोरो ब्यूटा-1, 3 डाईन) के बहुलीकरण से बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 20
उपयोग-

  • पेट्रोल ले जाने वाली पाइप लाइन बनाने में।
  • कोयला खानों में काम करने वालों के लिए बेल्ट बनाने में।

प्रश्न 10.
पी.वी.सी. क्या है ? इसके क्या उपयोग हैं ?
उत्तर
पॉलि वाइनिल क्लोराइड (PVC)-इसे वाइनिल क्लोराइड के बहुलीकरण से बनाया जाता है। वाइनिल क्लोराइड को बेन्जॉइल परऑक्साइड की उपस्थिति में अक्रिय विलायक में लेकर गर्म करके इसे प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 11.
टेफ्लॉन क्या है ? इसके उपयोग लिखिये।
उत्तर
टेफ्लॉन या पॉलिटेट्राफ्लु ओरोएथिलीन [Teflon, Polytetrafluoroethylene (PTFE).. टेफ्लॉन टेट्राफ्लुओरो एथिलीन का उच्च बहुलक है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 21
टेफ्लॉन रासायनिक रूप से निष्क्रिय एवं ऊष्मा प्रतिरोधी बहुलक है। इसका गलनांक 603K है।
उपयोग– यह गैस्केट, पम्प की पैकिंग, बल्ब की सील, अस्नेहित बेयरिंग, फिल्टर वस्त्र (जालीदार कपड़ा) आदि को बनाने के उपयोग में आता है।

प्रश्न 12.
सेल्युलोज क्या है ? इसके उपयोग लिखिये।
उत्तर
सेल्युलोज प्रकृति द्वारा संश्लेषित बहुसैकेराइड (Polysaccharide) है। सेल्युलोज का अणुसूत्र (C6H10O5)n है। यह पेड़-पौधों की कोशिका भित्ति (Cell wall) का प्रमुख अंग है तथा कुछ जीव-जन्तुओं के ऊतक (Tissues) में भी पाया जाता है। लकड़ी में 60% तथा रुई (कॉटन) में 90% सेल्युलोज होती है। यह प्रकृति में सर्वाधिक मात्रा में मिलने वाला कार्बनिक यौगिक है।
उपयोग- सेल्युलोज से निर्मित अर्द्ध-संश्लेषित बहुलक कृत्रिम धागे व प्लॉस्टिक बनाने में बहुत उपयोगी

प्रश्न 13.
जिग्लर-नाटा उत्प्रेरक क्या है ? इसके उपयोग लिखिये ।
उत्तर
जिग्लर-नाटा उत्प्रेरक-टाइटेनियम क्लोराइड और ऐल्युमिनियम यौगिक का अक्रिय विलायक (हेक्सेन) में मिश्रण जिग्लर-नाटा उत्प्रेरक कहलाता है। उपयोग-1. कम दाब और ताप पर एथिलीन से पॉलिथीन बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 22
पॉलिथीन पॉलिथीन का उपयोग खिलौने, रेडियो, टी.वी. के केबिनेट बनाने में होता है।
2. कम ताप और दाब पर प्रोपिलीन जिग्लर-नाटा उत्प्रेरक की उपस्थिति में पॉलिप्रोपिलीन बहुलक बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 23
पॉलिप्रोपिलीन पॉलिप्रोपिलीन का उपयोग बोतलें, पाइप, ग्रामोफोन, रिकॉर्ड बनाने में होता है।

प्रश्न 14.
नायलॉन-6 और नायलॉन-6,6 में अन्तर स्पष्ट कीजिएं।
उत्तर
नायलॉन-6 और नायलॉन-6,6 में अन्तर।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 24
प्रश्न 15.
टेफ्लॉन की विधि, गुण तथा उपयोग का वर्णन कीजिए।
उत्तर
टेफ्लॉन-यह ट्रेटाफ्लोरोएथिलीन को अमोनियम परऑक्सी सल्फेट की उपस्थिति में गर्म करके बनाया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 25
गुण-

  • यह बहुत कठोर पदार्थ है,
  • ऊष्मा का प्रतिरोधी होता है,
  • इसका गलनांक 330°C है,
  • यह रासायनिक रूप से निष्क्रिय होता है।

उपयोग- टेफ्लॉन का उपयोग सान्द्र अम्लों और दाहक द्रवों के भरने की केन बनाने तथा ऊष्मा व रासायनिक पदार्थों के प्रतिस्थायी वस्तुएँ बनाने में होता है।

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प्रश्न 16.
बैकलाइट कैसे बनाते हैं ? इसके उपयोग लिखिए।
उत्तर
क्षार की उपस्थिति में फीनॉल और फॉर्मेल्डिहाइड के संघनन से बैकेलाइट बनता है। बैकेलाइट क्रॉस बन्ध (Cross linked) बहुलक है।
उपयोग़-बहुलीकरण की अल्प मात्रा में बने हुए मुक्त मृदु बैकलाइट स्तरित काष्ठ के तख्तों के लिए बन्धक गोंद के रूप में तथा वार्निशों एवं लैकरों में उपयोग किये जाते हैं। बहुलीकरण की मात्रा उच्च होने से कठोर बैकलाइट बनते हैं, जो कंघे, फाउण्टेन पेन की नलियों, ग्रामोफोन के रिकॉर्ड, बिजली के सामान, फार्माइका मेज तलों तथा अनेक उत्पादों के बनाने के लिए उपयोग किये जाते हैं।
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प्रश्न 17.
नायलॉन-6,6 बनाने की विधि, गुण एवं उपयोग लिखिए।
उत्तर
नायलॉन- 6,6 – यह पॉलिऐमाइड संवर्ग का अति सामान्य बहुलक है। इसमें अनुलग्न-66 का अर्थ है कि बहुलक श्रृंखला में एसिड और डाइऐमीन दोनों के छ:-छ: कार्बन परमाणु होते हैं।
नायलॉन- 6,6 बनाने की विधि-यह ऐडिपिक अम्ल या 1,6- हेक्सेन डाइ ओइक ऐसिड तथा हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन या 1, 6-डाइऐमीनो हेक्सेन के बहुलीकरण से बनाया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक - 27
गुण-

  • नायलॉन धागे की उच्च तन्य शक्ति होती है।
  • ये कठोर होते हैं।
  • इनकी प्रवृत्ति इलेस्टिक होती है।
  • नायलॉन की संरचना प्रोटीन के समान होती है।

उपयोग-

  • इसका उपयोग ब्रिसल और ब्रश बनाने में होता है।
  • वस्त्र उद्योग में धागे, गलीचे, बनियान, जुरावे बनाने में होता है।

बहुलक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राकृतिक बहुलक क्या है ? कुछ प्रमुख बहुलकों को उदाहरण द्वारा समझाइये।
उत्तर
प्राकृतिक बहुलक (Natural polymers)-अनेक बहुलक प्रकृति में पाये जाते हैं । प्रकृति में इनका निर्माण एकलक इकाइयों के संयोजन अथवा संघनन द्वारा न होकर एक जटिल उपापचय प्रक्रिया (metabolic process) द्वारा होता है। कुछ प्रमुख प्राकृतिक बहुलक निम्न हैं

1. पॉलिसैकेराइड (Polysaccharides)-ये मोनोसैकेराइडों के उच्च अणु द्रव्यमान वाले बहुलक है। इसका मुख्य उदाहरण स्टॉर्च तथा सेलूलोस है। स्टॉर्च पौधे का मुख्य संरक्षित खाद्य पदार्थ है जबकि सेलूलोस पौधों का मुख्य संरचनात्मक भाग है।

2. प्रोटीन (Proteins)-ये a ऐमीनो अम्लों के बहुलक हैं। प्रोटीन शरीर के अधिकांश भाग की रचना ही नहीं अपितु उसका संचालन भी करते हैं। प्रोटीन के जल-अपघटन से अन्तिम उत्पाद a ऐमीनो कार्बोक्सिलिक अम्ल प्राप्त होते हैं।

3. न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic acids)-ये प्राकृतिक बहुलक पदार्थ हैं जो प्रत्येक जीवित कोशिका में “न्यूक्लिओ प्रोटीन” नामक यौगिक के रूप में प्रोटीनों के साथ संयुक्त पाये जाते हैं। प्रोटीनों के जैव संश्लेषण का नियंत्रण इन्हीं के द्वारा होता है। ये आनुवंशिक सूचना के वाहक हैं तथा इस विशिष्ट कार्य हेतु इनकी संरचना भी विशिष्ट होती है। राइबोन्यूक्लिक अम्ल (RNA) तथा डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल (DNA) मुख्य न्यूक्लिक अम्ल है।

4. प्राकृतिक रबर (Natural rubber)-प्राकृतिक रबर पौधों के लैटेक्स से प्राप्त होती है जो आइसोप्रीन (2- मेथिल 1,3 ब्यूटाडाईन) का बहुलक है।

प्रश्न 2.
संरचना के आधार पर बहुलकों को कितने भागों में विभाजित किया गया है ? उदाहरण देते हुए समझाइये।
उत्तर
संरचना के आधार पर बहुलकों को निम्न भागों में विभाजित किया गया है

1. रैखिक बहुलक (Linear polymers)-इस प्रकार के बहुलकों में एकलक इकाइयाँ मिलकर लम्बी सीधी श्रृंखला बनाती है। ये बहुलक इकाइयाँ एक के ऊपर एक स्थित होती हैं जिसके कारण इसकी तन्यता एवं गलनांक उच्च होते हैं । उदाहरण-पॉलि एथिलीन, नाइलॉन, पॉलि एस्टर।

2. शाखित श्रृंखला बहुलक (Branched Chain Polymer)-शाखित बहुलक पार्श्व-शाखाओं वाली एक दीर्घ श्रृंखला है। इस प्रकार के बहुलकों में एकलक इकाइयाँ आपस में जुड़कर मुख्य श्रृंखला और इससे अनेक पार्श्व श्रृंखलाएँ निकलती हैं जो शाखित होती हैं। उदाहरण-ऐमिलोपेक्टिन, ग्लाइकोजेन।।

3. तिर्यकबद्ध बहुलक-इस प्रकार के बहुलक में एकलक इकाइयाँ आपस में जुड़कर जाली के समान संरचना बनाती हैं। ये बहुलक अत्यन्त कठोर एवं भंगुर होते हैं। उदाहरण-बेकेलाइट तथा यूरिया, फार्मेल्डिहाइड रेजीन।

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