MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 1 स्वराभ्यासः

MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 1 स्वराभ्यासः (संस्कृत शब्द परिचयः)

MP Board Class 6th Sanskrit Chapter 1 अभ्यासः

Class 6 Sanskrit Chapter 1 MP Board प्रश्न 1.
चित्राणि दृष्ट्वा नामानि लिखत (चित्र देखकर नाम लिखो)
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 1 स्वराभ्यासः 1
उत्तर:
(क) कमलम् (कमल का फूल)
(ख) खड्गः (तलवार)
(ग) घटः (घड़ा)
(घ) छत्रम् (छाता)
(ङ) ऊष्ट्रः (ऊँट)
(च) एणः (बारहसिंगा)
(छ) धनुषम् (धनुष)
(ज) आम्रम् (आम का फल)
(झ) ढौलः (ढोलक)।

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MP Board Class 6 Sanskrit Chapter 1 प्रश्न 2.
कोष्ठात् उचितंशब्दं चित्वा चित्रानुसारं लिखत- (कोष्ठक से उचित शब्द चुनकर चित्र के अनुसार लिखो)
(गणेशः, ओष्ठौ, मयूरः, फणी, ऋषिः, बकः, झरः, रथः)
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 1 स्वराभ्यासः 2
उत्तर:
(क) ऋषिः (ऋषि)
(ख) गणेशः (गणेश)
(ग) औष्ठौ (ऊपर और नीचे के दोनों ओंठ)
(घ) झरः (झरना)
(ङ) मयूरः (मोर)
(च) बकः (बगुला)
(घ) फणी (साँप या सर्प)
(ज) रथः (रथ)।

Class 6 Sanskrit Surbhi Chapter 1 प्रश्न 3.
अधोलिखितानां शब्दानां वर्णान् पृथक्-पृथक लिखत (नीचे लिखे हुए शब्दों के वर्गों को अलग-अलग लिखो)
(क) चटका
(ख) नरेशः
(ग) पत्रम्
(घ) दर्पणः
(ङ) घटः।
उत्तर:
(क) चटका = च् + अ + ट् + अ + क् + आ।
(ख) नरेशः = न् + अ + र् + ए + श् + अ + :।
(ग) पत्रम् = प् + अ + त्र् + अ + म्।
(घ) दर्पणः = द + अ + र् + प् + अ + ण् + अ + :।
(ङ) घटः = घ् + अ + ट् + अ + :।

MP Board Class 6th Sanskrit Chapter 1 प्रश्न 4.
रिक्तस्थानानि पूरयत (खाली स्थान भरो)
(क) ज …………… यानम्,
(ख) शश………….
(ग) ग …………… शः
(घ) ………….. क्रम्
(ङ) इ …………….. का।
उत्तर:
(क) जलयानम्
(ख) शशकः
(ग) गणेश:
(घ) चक्रम्
(ङ) इष्टिका।

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Class 6 Sanskrit Chapter 1 प्रश्न 5.
वर्णमालानुसार क्रमेण स्थापयत (वर्णमाला के अनुसार क्रम से रखिए)
ऊर्णाः, बकः, औषधम्, हलम्, सरः, मयूरः, रथः, आम्रम्, घटः, कमलम्।
उत्तर:
आम्रम्, ऊर्णा, औषधम्, कमलम्, घटः, बकः, मयूरः, रथः, सरः, हलम्।

योग्यताविस्तारः
MP Board Class 6 Sanskrit प्रश्न 1.
पशूनां,शाकानां, फलानां च पञ्च-पञ्च नामानि लिखत। (पशुओं, शाक (सब्जी) और फलों के पाँच-पाँच नाम लिखो)।
उत्तर:

  1. पशुनाम् नामानि :
    अश्वः, ऊष्ट्रः, एणः, भल्लूकः, शशकः (घोड़ा, ऊँट, बारहसिंगा, भालू, खरगोश)।
  2. शाकानाम् नामानि :
    लशुनम्, आलु, पलाण्डुम्, कूष्माण्डं, शिम्बां (लहसुन, आलू, प्याज, कुम्हड़ा, सेम)।
  3. फलानाम् नामानि :
    आम्रम्, नारिकेलम्, जम्बीरम्, जम्बूफलम्, नारङ्गफलम् (आम, नारियल, नीबू, जामुन, नारंगी)।

स्वराभ्यासः शब्दार्थाः

स्वराः
अश्वः = घोड़ा। आम्रम् = आम्र। इष्टिका = ईंट। ईशः = ईश्वर। ऊष्ट्रः = ऊँट। ऊर्णा = ऊन। ऋषिः = ऋषि। एण: = बारहसिंगा। ऐन्द्रजालिकः = जादूगर। ओष्ठौ = ऊपर और नीचे के दोनों ओंठ। औषधम् = दवाई।

व्यञ्जनानि :
कमलम् = कमल। खड्गः = तलवार। गणेशः = गणेश। घटः = घड़ा। गङ्गा = गंगा नदी। चक्रम् = पहिया। छत्रम् = छाता। जलयानम् = पानी का जहाज। झरः = झरना। चञ्चु : = चोंच। टङ्कणयंत्रम् = टाइप करने की मशीन। ठठकः = ठठेरा। डमरूः = डमरू। ढौलः = ढोलक। बाणः = तीर। तरुः = पेड़, वृक्ष। थः = मरुद्यान। दर्पणः = शीशा। धनुः = धनुष। नरेशः = राजा। पर्णम् = पत्ता। फणी = साँप, सर्प। बकः = बगुला। भल्लूकः = भालू। मयूरः = मोर। यज्ञः = हवन। रथः = रथ। लड्डुः = लड्डू। वटः = बरगद। शशकः = खरगोश। षट्पदः = भौंरा। सरः = तालाब। हलम् = हल।

संयुक्त व्यञ्जनानि :
क्षत्रियः = क्षत्रिय। त्रसम् = बगीचा, या वृक्षों का झुरमुट। ज्ञानी = ज्ञानी (जानकार)।

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MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः

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MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 4 सङ्ख्याबोधः

MP Board Class 6th Sanskrit Chapter 4 अभ्यासः

MP Board Class 6 Sanskrit Chapter 4 प्रश्न 1.
उचितशब्देन रिक्तस्थानं पुरयत-
(उचित शब्द से खाली स्थान की पूर्ति करो)
(क) एकं ………… अस्ति। (बालकः/बालिका/फलम्)
(ख) तिस्त्रः …………….. सन्ति। (बालिकाः/बालकाः/फलानि)
(ग) सप्तः …………. सन्ति। (गजः/अश्वाः /अजा)
उत्तर:
क) फलम्
(ख) बालिकाः
(ग) अश्वाः

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Class 6 Sanskrit Chapter 4 MP Board प्रश्न 2.
उचितपरिवर्तनेन रिक्तस्थानं पूरयत (उचित परिवर्तन से रिक्त स्थान को पूरा करो)
(लता, बाला, छात्र, गृह, बालक, नृपः, अजा, गृह, मनुष्य, गज)
(क) द्वै ………..।
(ख) तिस्त्रः ……….।
(ग) द्वौ ……….।
(घ) चत्वारि …………।
(ङ) षट् ………..।
(च) सप्त …………
(छ) नव …………।
(ज) दश……………।
(झ) पञ्च …………।
(ब) त्रयः ………….।
उत्तर:
(क) लते
(ख) बालाः
(ग) छात्रौः
(घ) गृहाणि
(ङ) बालकाः
(च) नृपाः
(छ) अजाः
(छ) गृहाणि
(झ) मनुष्याः
(ञ) गजाः।

Class 6 Sanskrit Surbhi Chapter 4 प्रश्न 3.
उचितसङ्ख्यापदेन पूरयत(उचित संख्या शब्द से पूरा करो)
(क) …………. फलम्।
(ख) …………. जनाः।
(ग) ………………. लते।
(घ) …………… मयूराः।
(ङ) …………… अश्वौ।
(च) ……………. नेत्रे।
(छ) ……………. पुष्पाणि।
(ज) …………… पर्वताः।
(झ) …………… गजाः।
(ज) ……….. माला।
उत्तर:
(क) एकं
(ख) सप्त
(ग) द्वे
(घ) पञ्च
(ङ) द्वौः
(च) द्वे
(छ) चत्वारि
(ज) अष्ट
(झ) नव
(ञ) एका।

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Class 6th Sanskrit Chapter 4 प्रश्न 4.
संस्कृतसङ्ख्याः लिखत(संस्कृत संख्या को लिखो)
(क) २………… (स्त्रीलिङ्ग)
(ख) ४ ……….. (पुल्लिङ्ग)
(ग) २ ………… (नपुंसकलिङ्ग)
(घ) १………… (पुल्लिङ्ग)।
(ङ) ३…………. (स्त्रीलिङ्ग)
(च) २ ………… (नपुंसकलिङ्ग)
(छ) २…………(पुल्लिङ्ग)
(ज) १ ……….. (नपुंसकलिङ्ग)
(झ) ३ ………… (पुल्लिङ्ग)
(ञ) १ ………… (स्त्रीलिङ्ग)
उत्तर:
(क) द्वे
(ख) चत्वारः
(ग) त्रीणि
(घ) एकः
(ङ) तिस्रः
(च) द्वे
(छ) द्वौ
(ज) एकम्
(झ) त्रयः
(ञ) एका।

Sanskrit Class 6 Chapter 4 प्रश्न 5.
गणनां कृत्वां संख्यां लिखत (गिनती करके संख्या लिखो)
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 1
उत्तर:
(क) द्वे
(ख) तिस्त्रः
(ग) त्रीणि
(घ) षट्
(ङ) दश
(च) दश
(छ) पञ्च
(ज) अष्ट
(झ) चत्वारः
(ञ) नव।

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योग्यताविस्तर :
सङ्ख्यां कण्ठस्थीकुरुत (सङ्ख्याओं को कण्ठाग्र करो)

सङ्ख्याबोधः हिन्दी अनुवाद :

1. एकः वृक्षः।
एक पेड़।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 2

2. द्वौ बालको।
दो बालक।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 3

3. त्रयः अश्वाः।
तीन घोड़े।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 4

4. चत्वारः घटाः।
चार घड़े।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 5

5. पञ्च कुक्कुराः।
पाँच कुत्ते।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 6

6. षट् कपोताः।
छ: कबूतर।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 7

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7. सप्त शुकाः।
सात तोते।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 8

8. अष्ट मूषकाः।
आठ चूहे।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 9

9. नव मृगाः।
नौ हिरण।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 10

10. दश मयूराः।
दस मोर।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 11

1. एका बालिका।
एक लड़की।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 12

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2. द्वे बालिके।
दो लड़कियाँ।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 13

3. तिस्त्रः मालाः।
तीन मालाएँ।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 14

4. चतस्त्रः अजाः।
चार बकरियाँ।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 15

5. पञ्च चटकाः।
पाँच चिड़ियाँ।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 16

6. षट् घटिकाः।
छः घड़ियाँ।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 17

7. सप्त मक्षिका
सात मक्खियाँ।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 18

8. आष्टा छुरिका
आठ छुरियाँ।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 19

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9. नव पिपीलिका
नौ चींदियाँ।
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 20

10. दस लड़कियाँ।
दश बालिका
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 21

MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 22

MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 4 सङ्ख्याबोधः 23

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अनुवाद :
पुल्लिङ्ग-एक, दो, तीन, चार, पाँच।
स्त्रीलिङ्ग :
एक, दो, तीन, चार, पाँच।
नपुंसकलिङ्ग :
एक, दो, तीन, चार, पाँच।

नोट :
संस्कृत में-पुल्लिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग तथा नपुंसकलिङ्ग में संख्यावाचक शब्दों के रूपों में भेद उपर्युक्त तालिका में देखा जा सकता है।

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MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 10 परिचयः

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MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 10 परिचयः

MP Board Class 6th Sanskrit Chapter 10 अभ्यासः

Class 6 Sanskrit Chapter 10 MP Board प्रश्न 1.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) चन्द्रः कासां भूषणम् अस्ति? (चन्द्रमा किनका आभूषण है?)
उत्तर:
चन्द्रः ताराणां भूषणम् अस्ति? (चन्द्रमा तारों का आभूषण है।)

(ख) संस्कृतस्य पठने केषां रुचिः अस्ति? (संस्कृत पढ़ने में किसकी रुचि है?)
उत्तर:
संस्कृतस्य पठने छात्राणाम् रुचिः अस्ति। (संस्कृत के पढ़ने में छात्रों की रुचिः है।)

(ग) अवधेशः कस्य अग्रजः अस्ति? (अवधेश किसका बड़ा भाई है?)
उत्तर:
अवधेशः गिरीशस्य अग्रजः अस्ति। (अवधेशः गिरीश का बड़ा भाई है।)

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(घ) विद्यालस्य पुरतः किम् अस्ति? (विद्यालय के सामने क्या है?)
उत्तर:
विद्यालयस्य पुरतः उद्यानम् अस्ति। (विद्यालय के सामने उद्यान है।)

(ङ) भवतः/भवत्याः नाम किम्? (आपका नाम क्या है?)
उत्तर:
मम नाम कविता। (मेरा नाम कविता है।)

Class 6 Sanskrit Chapter 10 Parichay प्रश्न 2.
षष्ठीविभक्ति योजयित्वा रिक्तस्थानं पूरयत (षष्ठी विभक्ति जोड़कर रिक्त स्थान को पूरा करो)
(क) ………….. नाम अविनाशः। (आचार्य)
(ख) ………….. आचार्यः अविनाशः। (कविता-गिरीश)
(ग) ………… पदानि मधुराणि। (संस्कृतभाषा)
(घ) संस्कृतं ………….. भाषा। (शास्त्र)
(ङ) गिरीशस्य ……….. नाम अञ्जना अस्ति। (जननी)
उत्तर:
(क) आचार्यस्य
(ख) कवितायाः गिरीशस्य
(ग) संस्कृतभाषायाः
(घ) शास्त्रस्य
(ङ) जनन्याः।

MP Board Class 6 Sanskrit Chapter 10 प्रश्न 3.
चित्रं पश्यत। सम्बन्धवाचकवाक्यानि पठत (चित्र को देखो। सम्बन्ध वाचक वाक्यों को पढ़ो)
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 10 परिचयः 1

  • विश्वामित्रस्य शिष्यः। (विश्वामित्र के शिष्य)
  • दशरथस्य पुत्रः। (दशरथ के पुत्र)
  • रावण-कुम्भकर्णयोः संहारकः। (रावण कुम्भकर्ण के संहारक)
  • भरत-लक्ष्मण-शत्रुजानाम् अग्रजः। (भरत-लक्ष्मण-शत्रुघ्न के बड़े भाई।)
  • ‘सीतायाः पतिः। (सीता के पति)
  • अयोध्यायाः नृपः। (अयोध्या के राजा)
  • अहल्या-शबर्यो:मोक्षदायकः। (अहिल्या और शबरी को श्री रामः मुक्ति देने वाले)
  • ‘कौशल्या-सुमित्राकैकय्यीनां पुत्रः। (कौशल्या-सुमित्रा -कैकेई के पुत्र)

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Class 6 Sanskrit Chapter 10 प्रश्न 4.
चित्रं दृष्ट्वा सम्बन्धवाचकवाक्यानि लिखत। (चित्र को देखकर सम्बन्धवाचक वाक्यों को लिखो)
यथा-
श्रीकृष्णः वसुदेवस्य पुत्रः।
जैसे-श्रीकृष्ण वसुदेव के पुत्र हैं।
उत्तर:

  1. इदम् श्रीकृष्णस्य चित्रम्।
    (यह श्रीकृष्ण का चित्र है।)
  2. तस्य हस्तयोः मुरलिका उपशोभते।
    (उनके हाथों में मुरली सुशोभित है।)
  3. सः तस्या वादने निरतः।
    (वह उसको बजाने में संलग्न है।)
  4. श्रीकृष्णस्य पार्वे एका धेनुः स्थितः अस्ति।
    (श्रीकृष्ण की बगल में एक धेनु (गाय) खड़ी है।)
  5. सा श्रीकृष्णस्य पादे लिलीहता अस्ति।
    (वह श्रीकृष्ण के दोनों पैरों को चाट रही है।)

Sanskrit Class 6 Chapter 10 प्रश्न 5.
योग्यरूपं चित्वा रिक्तस्थानं पूरयत (उचित रूप चुनकर खाली स्थान भरो)
(क) शिवः …………. पतिः। (पार्वत्याः/पार्वतीनाम्)
(ख) हस्तः ……… अङ्गम्। (शरीरेण/शरीरस्य)
(ग) तत् मम ……….. गृहम्। (मित्रम्/मित्रस्य)
(घ) भोपालनगरं ……… राजधानी। (मध्यप्रदेशस्य/मध्या प्रदेशेन)
(ङ) वयं ………. अध्ययनम् इच्छामः। (भारतीयविद्याम्/भारतीयविद्यायाः)
उत्तर:
(क) पार्वत्याः
(ख) शरीरस्य
(ग) मित्रस्य
(घ) मध्यप्रदेशस्य
(ङ) भारतीयविद्यायाः।

Class 6th Sanskrit Chapter 10 प्रश्न 6.
रिक्तस्थानानि पूरयित्वा परिचयं लिखत (रिक्त स्थानों को पूरा करके परिचय लिखो)
(क) अहं ……….. पुत्रः।
(ख) अहं ……….. भगिनी/भ्राता।
(ग) सा ………… माता।
(घ) तस्याः नाम ………..।
उत्तर:
(क) राकेशः।
(ख) अवधेशस्य।
(ग) मम।
(घ) अञ्जना।

परिचय :

  1. अहं (गिरीश:) मम पितुः पुत्रः अस्मि। (मैं (गिरीश) अपने पिता का पुत्र हूँ।)
  2. अवधेशस्य भ्रातस्य अहम् अनुजः अस्मि। (अवधेश भाई का मैं अनुज हूँ।)
  3. मम माताः अञ्जना एकः साध्वी महिला। (मेरी माता अञ्जना एक साध्वी महिला है।)
  4. सा मम पितुः राकेशस्य पत्नी अस्ति। (वह मेरे पिता राकेश की पत्नी है।)
  5. मम भगिन्याः नाम मालिनी इति। (मेरी बहन का नाम मालिनी है।)
  6. आनन्द: मम मातुल: मम मातुः भ्राता भवति। (आनन्द मेरा मामा मेरी माता का भाई है।)
  7. शशाङ्क: मम अनुजः। (शशाङ्क मेरा अनुज है।)

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Class 6th Sanskrit Chapter 10 Question Answer प्रश्न 7.
कोष्ठकात् सर्वनामपदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत (कोष्ठक से सर्वनाम पद चुनकर खाली स्थानों को भरो)
(तस्य, तेषाम्, तयोः, तासाम्, तस्याः)
(क) सः श्रावणः। …………. माता पूर्णिमा।
(ख) सा दीक्षा। ………… अनुजः श्रवणः।
(ग) तौ भगिनीभ्रातरौ। ……….. पिता नारायणः।
(घ) ते भ्रमणार्थं काशीम् अगच्छन्। ……….. गृहं ग्वालियरनगरे अस्ति।
(ङ) दीक्षा बालिकाभिः सह गायति। ……….. गीतं मधुरम् अस्ति।
उत्तर:
(क) तस्य
(ख) तस्याः
(ग) तयोः
(घ) तेषाम्
(ङ) तेषाम्।

योग्यताविस्तारः
अधोलिखितवाक्यानि पठत (निम्नलिखित वाक्यों को पढ़ो)-
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 10 परिचयः 2
नोट :
वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़ें। शुद्ध उच्चारण का ध्यान रखते हुए उनके विभक्ति विग्रह पर विशेष ध्यान दें।

परिचयः हिन्दी अनुवाद

आचार्यः :
सर्वेषां स्वागतम्। मम नाम अविनाशः। भवतः नाम किम्?

गिरीश: :
मम नाम गिरीशः।

आचार्य: :
भवत्याः नाम किम्? कविता-मम नाम कविता।

आचार्यः :
गिरीश! तव परिवारस्य परिचयं वद।

गिरीश: :
मम जनन्याः नाम अञ्जना। जनकस्य नाम राकेशः।
अग्रजस्य नाम अवधेशः। अनुजस्य नाम शशाङ्कः। भगिन्याः नाम मालिनी। मातुलस्य नाम आनन्दः।

आचार्यः :
कविते! तव विद्यालयस्य परिचयं कथय।

कविता :
मम विद्यालयस्य नाम स्वामिविवेकानन्दविद्यालयः अस्ति। अयं नगरस्य मध्ये स्थितः अस्ति। एतस्य पुरतः उद्यानम् अस्ति। पृष्ठतः क्रीडाङ्गणम् अस्ति। क्रीडाङ्गणस्य वामतः मन्दिरे स्तः। दक्षिणतः भवनानि सन्ति।

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अनुवाद :
आचार्य :
सभी का स्वागत है। मेरा नाम अविनाश है। आपका नाम क्या है?

गिरीश: :
मेरा नाम गिरीश है। आचार्य:-आपका नाम क्या है?

कविता :
मेरा नाम कविता है।

आचार्य :
हे गिरीश! अपने परिवार का परिचय बतलाओ।

गिरीश :
मेरी माता का नाम अञ्जना है। पिता का नाम राकेश है। बड़े भाई का नाम अवधेश है। छोटे भाई का नाम शशाङ्क है। बहन का नाम मालिनी है। मामा का नाम आनन्द है।

आचार्य :
हे कविता! अपने विद्यालय का परिचय बतलाओ।

कविता :
मेरे विद्यालय का नाम स्वामी विवेकानन्द विद्यालय है। यह नगर के बीच में स्थित है। इसके सामने उद्यान (बगीचा) है। पीछे खेल का मैदान है। खेल के मैदान के बाईं तरफ दो मन्दिर हैं। दक्षिण की ओर भवन (बने) हुए हैं।

आचार्य: :
गिरीश! षष्ठवर्गस्य संस्कृतपुस्तकम् आनय। संस्कृतभाषायाः पदानि मधुराणि सन्ति। एषा वेदानाम्, उपनिषदां,शास्त्राणां च भाषा अस्ति रामायण महाभारतयोः कथा संस्कृते लिखिता अस्ति।

छात्रा: :
महोदय! संस्कृतभाषायाः पठने अस्माकंरुचिः अस्ति। वयं एतस्याः अध्ययनम् इच्छामः।

आचार्य: :
आम्! सर्वेषां शिष्याणाम् इच्छानुसारं संस्कृतं पाठयामि।-
ताराणां भूषणं चन्द्रः नारीणां भूषणं पतिः।
पृथिव्याः भूषणं राजा विद्या सर्वस्य भूषणम्॥

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अनुवाद :
आचार्य-हे गिरीश! कक्षा छः की संस्कृत की पुस्तक लाओ। संस्कृत भाषा के शब्द मधुर होते हैं। यह वेदों की, उपनिषदों की और शास्त्रों की भाषा है। रामायण और महाभारत की कथा संस्कृत में लिखी हुई है।

छात्रा :
महोदय! संस्कृत भाषा को पढ़ने में हमारी रुचि है। हम सभी इसके अध्ययन की इच्छा करते हैं।

आचार्य :
हाँ! सभी शिष्यों की इच्छा के अनुसार संस्कृत पढ़ाता हूँ।

“तारों का आभूषण चन्द्रमा होता है, स्त्रियों का आभूषण पति होता है। पृथ्वी का आभूषण राजा होता है, परन्तु विद्या तो सभी का आभूषण होती है।”

परिचयः शब्दार्थाः

परिवारस्य = परिवार का। जनन्याः = माता का। जनकस्य = पिता का। अग्रजस्य = बड़े भाई का। अनुजस्य = छोटे भाई का। मातुलस्य = मामा का। क्रीडाङ्गणस्य = खेल के मैदान का। ताराणाम् = तारों का। भूषणम् = आभूषण। नारीणाम् = नारियों का। पृथिव्याः = भूमि का। सर्वस्य = सभी का। पुरतः = आगे। पृष्ठतः = पीछे। वामतः = बाईं ओर। दक्षिणतः = दाईं ओर।

MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 9 उज्जयिनीदर्शनम्

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MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 9 उज्जयिनीदर्शनम्

MP Board Class 6th Sanskrit Chapter 9 अभ्यासः

Class 6 Sanskrit Chapter 9 MP Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) सर्वदा कस्मात् घण्टानादः श्रूयते? (सदा ही कहाँ से घण्टों की ध्वनि सुनाई देती है?)
उत्तर:
मन्दिरात् (मन्दिर से)

(ख) यात्रिकाः कस्मात् स्थानानां महत्वं जानन्ति? (यात्रीगण कहाँ से स्थानों के महत्व को जानते हैं?)
उत्तर:
मार्गदर्शकात् (मार्गदर्शकों से)

(ग) केभ्यः जयघोषः निःसरति? (किनके द्वारा जयघोष निकलते हैं?)
उत्तर:
भक्तजनमुखेभ्य (भक्तजनों के मुख से)।

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MP Board Class 6 Sanskrit Chapter 9 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) उज्जयनी कस्मात् नगरात् पश्चिमदिशि अस्ति? (उज्जियिनी किस नगर के पश्चिम दिशा में है?)
उत्तर:
उज्जयिनी भोपालनगरात् पश्चिमदिशि अस्ति। (उज्जयिनी भोपालनगर से पश्चिम दिशा में है)

(ख) उज्जयिन्याः मुख्यं दर्शनीयस्थानं किम् अस्ति? (उज्जयिनी का मुख्य दर्शनीय स्थान कौन-सा है?)
उत्तर:
उज्जयिन्याः मुख्यं दर्शनीय स्थानं-महाकालमन्दिरम्, महागणेशमन्दिरं,हरिसिद्धिमन्दिरम्, चिन्तामणिगणपति मन्दिरं, मङ्गलनाथमन्दिरं, कालभैरवमन्दिरम् च सन्ति। (उज्जयिनी के मुख्य दर्शनीय स्थान-महाकाल मन्दिर, महागणेश मन्दिर, हरिसिद्ध मन्दिर, चिन्तामणिगणपति मन्दिर, मङ्गलनाथ मन्दिर और काल भैरव मन्दिर हैं।)

(ग) कस्मात् जनाः श्रीकृष्णस्य इतिहासं जानन्ति? (लोग श्रीकृष्ण के इतिहास को किससे जानते हैं?)
उत्तर:
सान्दीपनि आश्रमात् जनाः श्रीकृष्णस्य इतिहास जानन्ति। (सान्दीपनि आश्रम से लोग श्रीकृष्ण के इतिहास को जानते हैं।)

(घ) महाकालमन्दिरात् जनाः कुत्र गच्छन्ति? (महाकाल मन्दिर से लोग कहाँ जाते हैं)
उत्तर:
महाकालमन्दिरात् जनाः महागणेशमन्दिरम्, हरिसिद्धि मन्दिरम् च गच्छन्ति। (महाकाल मन्दिर से लोग महागणेश मन्दिर और हरिसिद्ध मन्दिर जाते हैं।

(ङ) कस्मात् विक्रमसंवत्सरस्य गणना भवति? (विक्रमसंवत्सर की किससे गणना होती है?)
उत्तर:
उज्जयिन्याः राजा विक्रमादित्यस्य कालात् विक्रम संवत्सरस्य गणना भवति। (उज्जयिनी के राजा विक्रमादित्य के काल से विक्रमसंवत्सर की गणना होती है।)

Class 6 Sanskrit Chapter 9 प्रश्न 3.
चित्रं दृष्टवा पञ्चमीविभक्तिरूपाणि लिखत (चित्र देखकर पञ्चमी विभक्ति के रूप लिखो)
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 9 उज्जयिनीदर्शनम् 1
(क) (देवालयः) अर्चकः………… आगच्छति

MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 9 उज्जयिनीदर्शनम् 2
(ख) (वाटिका) बालिका…………. आगच्छति।

MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 9 उज्जयिनीदर्शनम् 3
(ग) (नदी) मुनिः………….. आगच्छति।

MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 9 उज्जयिनीदर्शनम् 4
(घ) (क्षेत्रम्) कृषकः…………. आगच्छति।
उत्तर:
(क) देवालयात्
(ख) वाटिकायाः
(ग) नद्याः
(घ) क्षेत्रात्।

MP Board Solutions

Sanskrit Class 6 Chapter 9 प्रश्न 4.
रेखाङ्कितपदस्य पञ्चमी-विभक्तौ परिवर्तनं कृत्वा वाक्यं लिखत (रेखाङ्कित शब्द का पञ्चमी विभक्ति में परिवर्तन करके वाक्य में लिखो)
(क) हिमालयः गङ्गा प्रवहति।
(ख) बालकः सिंहः विभेति।
(ग) वानरः शाखा कूर्दति।
(घ) छात्रः शाला आगच्छति।
(ङ) धार्मिकः काशी आगच्छति।
(च) महिला नदी जलम् आनयति।
(छ) प्रद्युम्न: गुरुकुलं प्रत्यागच्छति।
(ज) सज्जनः असत्यं विभेति।
(झ) सुरेशः रुग्णं शीतम् रक्षति।
उत्तर:
(क) हिमालयात्
(ख) सिंहात्
(ग) शाखायाः
(घ) शालयाः
(ङ) काश्याः
(च) नद्याः
(छ) गुरुकुलात्
(ज) असत्यात्
(झ) शैत्यात्।

Sanskrit Class 6 Chapter 9 Pdf प्रश्न 5.
उचितपरिवर्तनेन पञ्चमीविभक्तिरूपाणि लिखत (उचित परिवर्तन से पञ्चमी विभक्ति के रूप लिखो)
(अ)-
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 9 उज्जयिनीदर्शनम् 5
(ब)-
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 9 उज्जयिनीदर्शनम् 6
(स)-
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 9 उज्जयिनीदर्शनम् 7
(द)-
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 9 उज्जयिनीदर्शनम् 8

योग्यताविस्तारः
1. तसिल’ (तः) प्रत्ययस्य प्रयोगेण सरलरूपेण एकवचने पञ्चमीविभक्तिप्रयोगः सम्भवति। (तसिल तः प्रत्यय के प्रयोग से सरल रूप में एकवचन में पंचमी विभक्ति का प्रयोग हो सकता है।)
यथा-
विद्यालय – विद्यालयात् – विद्यालयतः
वाटिका – वाटिकायाः – वातिकातः
काशी – काश्याः – काशीतः
उद्यानम् – उद्यानात् – उद्यानतः

2. अधोलिखितं श्लोकं कण्ठस्थीकुरुत। अथ च श्लोकात् पञ्चमीविभक्तिशब्दान् चिनुत (निम्नलिखित श्लोक को कण्ठाग्र करो और इसके बाद श्लोक से पंचमी विभक्ति के शब्दों को चुनो)-

वात्सल्यात् अभयप्रदानसमयात् आार्तिनिर्वाणपणात
औदार्यात् अघशोषणात् अगणितश्रेयः पदप्रापणात्।
सेव्यः श्रीपतिरेक एव जगतामेतेऽभवन्साक्षिणः,
प्रह्लादश्च विभीषणश्च करिराट् पाञ्चाल्यहल्याधुवः॥
उत्तर:
ऊपर दिये गये श्लोक को कण्ठस्थ करो। उच्चारण की शुद्धता बनी रहने से श्लोक शीघ्र स्मृति में धारण हो जायेगा।
पंचमी विभक्ति के शब्द निम्नलिखित हैं-

  1. वात्सल्यात्
  2. अभयप्रदानसमयात्
  3. निर्वापणात्
  4. औदार्यात्
  5. अघशोषणात्
  6. प्रापणात्।

MP Board Solutions

उज्जयिनीदर्शनम् हिन्दी अनुवाद :

उज्जयिनी मध्यप्रदेशस्य प्रसिद्धं दर्शनीयस्थानम् अस्ति। उज्जयिनी भोपालात् पश्चिमदिशि अस्ति। विविधेभ्यः प्रदेशेभ्यः जनाः उज्जयिनीम् आगच्छन्ति। कुम्भपर्वणि विदेशेभ्यः अपि बहवः जनाः आगच्छन्ति।

अनुवाद :
उज्जियनी (उज्जैन) मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है। उज्जयिनी भोपाल से पश्चिम दिशा में है। अनेक प्रदेशों से लोग उज्जयिनी को आया करते हैं। कुम्भ पर्व पर (कुम्भ के उत्सव पर) विदेशों से भी बहुत से लोग आया करते हैं।

क्षिप्रानद्याः समीपे मुख्यदर्शनीयस्थानं महाकालमन्दिरं राजते। सर्वदा मन्दिरात् घण्टानादः श्रूयते। भक्तजनमुखेभ्यः जयघोषः निःसरति। महाकालमन्दिरात् जना: महागेणशमन्दिरं हरिसिद्धिमन्दिरं च गच्छन्ति। इतः चतुर्धाममन्दिरं समीपे एव अस्ति। ततः चिन्तामणिगणपतिमन्दिरं, मङ्गलनाथमन्दिरं, कालभैरवमन्दिरं च जनाः गच्छन्ति।

अनुवाद :
क्षिप्रा नदी के पास मुख्य दर्शनीय स्थल महाकाल मन्दिर सुशोभित है। सदा ही मन्दिर से घण्टों की ध्वनि सुनाई देती है। भक्तजनों के मुख से जयघोष निकलते हैं। महाकाल मन्दिर से लोग महागणेश मन्दिर तथा हरिसिद्धि मन्दिर जाते हैं। यहाँ से चार-धाम मन्दिर पास में ही है। उसके बाद चिन्मामणिगणपति मन्दिर को, मङ्गलनाथ मन्दिर को तथा काल भैरव मन्दिर को लोग जाया करते हैं।

उज्जयिन्याः सर्वेषु भागेषु रमणीयस्थानानि सन्ति। यात्रिकामार्गदर्शकात् स्थानानां महत्वं जानन्ति। पश्चक्रोशीयात्रायां स्थानात् स्थानं गच्छति।

MP Board Solutions

अनुवाद :
उज्जयिनी के सभी भागों में रमणीय स्थान हैं। यात्रा करने वाले लोग मार्गदर्शकों से स्थानों के महत्व को जानते हैं। पञ्चकोशी यात्रा में एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते हैं।
प्राचीनकालात् आरभ्य उज्जयिनीक्षेत्रं संस्कृतविद्याकेन्द्रम् अस्ति। सान्दीपनि आश्रमात् जनाः श्रीकृष्णस्य इतिहासं जानन्ति। उज्जयिन्याः राजाविक्रमादित्यस्य कालात् विक्रमसंवत्सरस्य गणना भवति। बहूनां कवीनां मुखेभ्यः एवं च कालिदासमुखात् अपि उज्जयिन्याः सौन्दर्यं वर्णितम् अस्ति। महाकालमहिमा यथा-

“आकाशे तारकं लिङ्ग, पाताले हाटकेश्वरम्।
मर्त्यलोके महाकालं लिङ्गत्रयमुपास्महे!॥”

अनुवाद :
प्राचीनकाल से उज्जयिनी का क्षेत्र संस्कृत विद्या का केन्द्र रहा है। सान्दीपनि आश्रम से लोग श्रीकृष्ण के इतिहास की जानकारी लेते हैं। उज्जयिनी के राजा विक्रमादित्य के समय से विक्रमसंवत की गणना होती है। बहुत से कवियों के मुखों से तथा इसी तरह कालिदास के मुख से भी उज्जयिनी के सौन्दर्य का वर्णन किया हुआ है। महाकाल की महिला (का वर्णन) जैसे

“आकाश में तारक लिङ्ग, पाताल में हाटकेश्वर, मृत्युलोक में महाकाल लिङ्ग-ये तीन लिङ्ग हैं। इन की (मैं) उपासना करता हूँ।”

उज्जयिनीदर्शनम् शब्दार्थाः

भोपालात् = भोपाल से। पश्चिमदिशि = पश्चिम दिशा में। विविधेभ्यः प्रदेशेभ्यः = विविध प्रदेशों से। कुम्भपर्वणि = कुम्भ पर्व में। राजते = शोभायमान है। श्रूयते = सुनाई देता है। निःसरति = निकलता है। भागेषु = भागों में। यात्रिकाः = यात्रीगण। मार्गदर्शकात् = मार्गदर्शक से। सान्दीपनि आश्रमात् = सान्दीपनि आश्रम से। उज्जयिन्याः = उज्जयिनी का। मर्त्यलोके = भूलोक में।

MP Board Class 6th General English Revision Exercises 1

MP Board Class 6th General English Solutions Revision Exercises 1

Listen and Write
(सुनो और लिखो )

Do yourself (स्वयं करें)

Word Power
(शब्द सामर्थ्य)

Fill in the blanks choosing correct words:
(शब्दों को चुनकर रिक्त स्थान भरिए:)
(buried, branches, soldiers, worried, childhood, prompt.)
Answer:
(i) Many of his soldiers were killed.
(ii) He was very sad and worried.
(iii) The tree spread its branches.
(iv) The teacher tried to prompt Gandhiji.
(v) A little seed was buried deep in the soil.

MP Board Solutions

Comprehension Questions
(बोध प्रश्न)

Answer these Question:
(इन प्रश्नों के उत्तर दीजिए:)

Class 6 English Revision Exercise 1 Question 1.
Where do we get fresh air from?
Answer:
We get fresh air from the tree.

Revision Exercise 1 Class 6 Question 2.
What is the the pleasantest thing a child can do?
Answer:
Swinging is the pleasantest thing a child can do according to the poet.

MP Board Class 6 English Revision Exercise 1 Question 3.
What did the Kind do after watching the spider?
Answer:
The king united his soldiers once again. He attacked his enemy and won back his kingdom.

Class 6th English Revision Exercise 1 Question 4.
What was the task that Mr. Giles set?
Answer:
Mr. Giles gave five words to write as spelling test.

Grammar in Use
(व्याकरण प्रयोग)

1. Fill in the blanks
(खाली स्थान भरिए )
Answer:
high             higher           highest
slow             slower           slowest
tall               taller             tallest
wide            wider             widest

2. Fill in the blanks with ‘and’ or ‘but’:
(‘and’ था ‘but’ से रिक्त स्थान भरिए:)
Answer:
Radha and Sita are two friends. Radha is intelligent and hardworking but Sita is dull and lazy. Both Radha and Sita like to play. Radha likes to go to school but Sita does not like school at all.

3. Make sentences of your own using the Past tense of the verbs given:
(दिये हुए Verbs का Past Tense में प्रयोग कर अपने वाक्य बनाएँ)

(play, grow, like, worry, try, point, cut, read, climb, slip.)
Answer:

  1. Ram played hockey.
  2. They grew rice in their field.
  3. I liked this book.
  4. Mother was worried about her child.
  5. He tried hard but couldn’t succeed.
  6. He pointed out his worn look.
  7. He cut his hand by the knife.
  8. She read the newspaper.
  9. It climbed the wall.
  10. It slipped out of my mind.

MP Board Solutions

Let’s Write
(आओ लिखें)

Class 5 English Revision Exercise 1 MP Board Question 1.
Write down five sentences on the ‘uses of trees’.
Answer:

  1. Trees are very useful to us.
  2. They make the air pure by taking in carbon dioxide and giving out oxygen.
  3. The oxygen given by them is used by living beings in breathing.
  4. They bring rainfall and prevent floods.
  5. They also prevent soil erosion or washing away of soil.

Revision Exercise 1 Class 6 English Question 2.
Make a list of the things that can be seen when going up in a swing.
Answer:
While going up in the swing we can see :

  1. rivers
  2. trees
  3. cattle and
  4. countryside.

Class 6th Revision Exercise 1 Question 3.
Write five sentences about Gandhiji and his life.
Answer:

  1. Gandhiji, was a great leader and freedom fighter.
  2. He helped India attain freedom by practising non-violence.
  3. He always spoke truth and led a life of simplicity.
  4. He was against un-touchability and fought for the upliftment of Harijans in India.
  5. He tried to do all his work on his own and even spun his own clothes by charkha.

MP Board Class 6 English Solutions

MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 6 मम दिनचर्या

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MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 6 मम दिनचर्या

MP Board Class 6th Sanskrit Chapter 6 अभ्यासः

Class 6 Sanskrit Chapter 6 Mp Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दो)
(क) मोहनः कदा उत्तिष्ठति? (मोहन कब उठता है?)
उत्तर:
पञ्चवादने (पाँच बजे)

(ख) मोहनः सार्धसप्तवादने कुत्र गच्छति? (मोहन साढ़े सात बजे कहाँ जाता है?)
उत्तर:
विद्यालयम् (विद्यालय को)

(ग) रुचिकरा भाषा का अस्ति? (रुचिकर भाषा कौन-सी है?)
उत्तर:
संस्कृतभाषा (संस्कृत भाषा)

MP Board Solutions

(घ) मोहनः रात्रौ किं पश्यति? (मोहन रात को क्या देखता है?)
उत्तर:
दूरदर्शनम् (दूरदर्शन) (टी. वी.)

(ङ) मोहनः कदा शयनं करोति? (मोहन कब सोता है?)
उत्तर:
नववादने (नौ बजे)।

Mp Board Class 6 Sanskrit Chapter 6 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) मोहनः स्नानान्तरं किं करोति? (मोहन स्नान करने के पश्चात् क्या करता है?)
उत्तर:
मोहनः स्नानान्तरं प्राणायाम स्वल्पाहारं च करोति। (मोहन स्नान करने के उपरान्त प्राणायाम और नाश्ता करता है।)

(ख) मोहनः कां कां भाषां पठति? (मोहन कौन-कौन सी भाषा पढ़ता है?)
उत्तर:
मोहनः हिन्दीभाषा, संस्कृतभाषां, आङ्गलभाषां च पठति। (मोहन हिन्दी भाषा, संस्कृत भाषा और अंग्रेजी भाषा पढ़ता है।)

(ग) मोहनः कदा क्रीडति? (मोहन कब खेलता है?)
उत्तर:
मोहनः सायंकाले क्रीडति। (मोहन सायंकाल खेलता है।)

MP Board Solutions

Mp Board Class 6th Sanskrit Chapter 6 प्रश्न 3.
निम्नलिखितवाक्येषु द्वितीयाविभक्तेः शब्दान् चित्वा कोष्ठके लिखत (निम्नलिखित वाक्यों में द्वितीया विभक्ति के शब्दों को चुनकर कोष्ठक में लिखो)
(क) गुरुम् ईशं च प्रणमामि। (गुरु और ईश्वर को प्रणाम करता हूँ।)
उत्तर:
गुरुम् ईशं

(ख) मातरं पितरं च नमामि। (माता और पिता को नमस्कार करता हूँ।)
उत्तर:
मातरं पितरं

(ग) अहं तत्र पाठान् पठामि। (मैं वहाँ पाठों को पढ़ता हूँ।)
उत्तर:
पाठान्

(घ) अहंद्वादशवादने गृहम् आगच्छामि। (मैं बारह बजे घर आता हूँ।)
उत्तर:
गृहम्।

Class 6 Sanskrit Chapter 6 प्रश्न 4.
वाक्यानि रचयत (वाक्यों की रचना करो)
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 6 मम दिनचर्या 1
उत्तर:

  1. कृपया चमसं ददातु।
  2. कृपया सुधाखण्ड (तालम्) स्वीकरोतु।
  3. कृपया स्यूतं ददातु।
  4. कृपया माला शाटिकां वा आनयतु।
  5. कृपया पत्रिका पत्रं वा पठतु।
  6. कृपया कर्तरीम् लेखनीम् वा स्वीकरोतु।
  7. कृपया पुस्तकम् फलम् वा ददातु।
  8. कृपया चित्रं पश्यतु।

MP Board Solutions

Class 6 Sanskrit Surbhi Chapter 6 प्रश्न 5.
अधोलिखितशब्देभ्यः उचितं शब्दं चित्वा रिक्त स्थानं पूरयत (निम्नलिखित शब्दों में से उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थानों को पूरा करो)
(माम्, पाठं, वस्तूनि, मित्रं, शिक्षकम्)
(क) अहं ………. पठामि।
(ख) सः ………. नमति।
(ग) संदीपः …………. क्रीणाति।
(घ) रमेशः …………. आह्वयति।
(ङ) सः …………. पृच्छति।
उत्तर:
(क) पाठम्
(ख) शिक्षक
(ग) वस्तूनि।
(घ) मित्रम्
(ङ) माम्।

Class 6th Sanskrit Chapter 6 प्रश्न 6.
निर्दिष्टशब्दानां द्वितीयाविभक्तेः रूपाणि निम्न कोष्ठके लिखत (निम्नलिखित शब्दों के द्वितीया विभक्ति के रूप को निम्न कोष्ठक में लिखो)
शब्द :
(1) (क) पुरुषः, (ख) युवकः
(2) (क) माला, (ख) पत्रिका
(3) (क) अंकनी, (ख) कर्तरी
(4) (क) वनम् (ख) पुस्तकम्।
उत्तर:
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 6 मम दिनचर्या 2

योग्यताविस्तारः
अधोलिखितेभ्यः श्लोकेभ्यः द्वितीयाविभक्तिशब्दान् चिनुत (निम्नलिखित श्लोकों में से द्वितीया विभक्ति के शब्दों को चुनो)

श्लोकान् च कण्ठस्थीकुरुत
(श्लोकों को कण्ठाग्र करो)।
(1) द्वितीया विभक्ति के शब्द
उत्तर:
(क)

  1. वसुदेवसुतं
  2. देवं
  3. कंसचाणूरमर्दनम्
  4. देवकी परमानन्दं
  5. कृष्णं
  6. जगद्गुरुम्।

(ख)

  1. कर्पूरगौरं
  2. करुणावतारं
  3. संसारसारं
  4. भुजगेन्द्रहारं
  5. सदावसन्तं
  6. हृदयारविन्दे
  7. भवं
  8. भवानीसहितं।

(ग)

  1. लम्बोदरम्
  2. महाकायं
  3. एकदन्तं
  4. गजाननम्
  5. विघ्ननाशकरं
  6. देवं
  7. हेरम्बं।

(घ)

  1. शान्ताकारं
  2. भुजगशयनं
  3. पद्मनाभं
  4. सुरेशम्
  5. विश्वाधारं
  6. गगनसदृशं
  7. मेघवर्णं
  8. शुभाङ्गम्
  9. लक्ष्मीकान्तं
  10. कमलनयनं
  11. योगिभिर्ध्यानगम्यम्
  12. विष्णुं
  13. भवभयहरं
  14. सर्वलोकैकनाथम्।

MP Board Solutions

नोट :
इन सभी चार श्लोकों को कण्ठस्थ करके अपनी कक्षा में परस्पर सुनाओ। ध्यान रखिये कि कोई भी शब्द त्रुटिपूर्ण उच्चारित न हो।

मम दिनचर्या हिन्दी अनुवाद

रमेश :
प्रातः त्वं कदा उत्तिष्ठसि?

मोहन :
अहं प्रातः पञ्चवादने उत्तिष्ठामि।

रमेश :
अनन्तरं त्वं किं करोषि?

मोहन :
अहंप्रथमं गुरुम् ईशंच प्रणमामि, पश्चात् मातरं पितरं च नमामि।

अनुवाद :
रमेश :
प्रातः तुम कब उठते हो?

मोहन :
मैं प्रातः पाँच बजे उठता हूँ।

रमेश :
इसके बाद तुम क्या करते हो?

मोहन :
मैं सबसे पहले गुरु और ईश्वर को प्रणाम करता हूँ। इसके बाद माता और पिता को नमस्कार करता हूँ।

रमेश :
ततः किं करोषि?

MP Board Solutions

मोहन: :
ततः अहं नित्यक्रियां करोमि स्नानं करोमि। ततः प्राणायामं स्वल्पाहारं च करोमि। पश्चात्, सार्धसप्तवा. दने विद्यालयं गच्छामि, तत्र पाठान् पठामि, सुलेखं लिखामि खेलामि च।

रमेश: :
मोहन! तत्र त्वं कां कां भाषां पठसि?

मोहन: :
अहं हिन्दीभाषा, संस्कृतभाषां, आङ्ग्लभाषां च पठामि।

अनुवाद :
रमेश :
इसके बाद क्या करते हो?

मोहन :
उसके बाद मैं नित्यक्रिया करता हूँ। इसके बाद स्नान करता हूँ, प्राणायाम और नाश्ता करता हूँ। बाद में, साढ़े सात बजे विद्यालय जाता हूँ। वहाँ पाठों को याद करता हूँ, सुलेख लिखता हूँ और खेलता हूँ।

रमेश :
मोहन! वहाँ तुम कौन-कौन सी भाषा पढ़ते हो?

मोहन :
मैं हिन्दी भाषा, संस्कृत भाषा तथा आङ्ग्ल भाषा (अंग्रेजी) पढ़ता हूँ।

रमेश: :
एताः सर्वाः भाषा: त्वं पठसि? किन्तु रुचिकरा सरला च भाषा का अस्ति?

मोहनः :
संस्कृतभाषा अतिरुचिकरा सरला च अस्ति।

रमेशः :
पठनानन्तरं किं किं करोषि त्वम्?

मोहन: :
अहं सार्धद्वादशवादने गृहम् आगच्छामि, तदा भोजनं करोमि, अनन्तरं गृहकार्यं करोमि। सायंकाले खेलामि। तत: भोजनं कृत्वा दूरदर्शनं पश्यामि। अनन्तरं नववादने शयनं करोमि।

MP Board Solutions

अनुवाद :
रमेश :
इतनी सभी भाषाओं को तुम पढ़ते हो? किन्तु रुचिकर और सरल भाषा कौन सी है?

मोहन :
संस्कृत भाषा बहुत रुचिकर और सरल है।

रमेश :
पढ़ने के पश्चात् तुम क्या-क्या करते हो?

मोहन :
मैं साढ़े बारह बजे घर आ जाता हूँ, तब भोजन करता हूँ। इसके बाद गृहकार्य करता हूँ। सायंकाल खेलता हूँ। उसके बाद भोजन करके दूरदर्शन देखता हूँ। बाद में, नौ बजे सोता हूँ।

मम दिनचर्या शब्दार्थाः

कदा = कब। वादनम् = बजे। पञ्चवादने = पाँच बजे। स्वल्पाहारः = कलेवा। सार्धसप्तवादने= साढ़े सात बजे। रुचि करा = प्रिय लगने वाली। शयनम् = सोना। अनन्तरम् = बाद में। उत्तिष्ठसि = उठते हो (तुम)। करोति = करते हो (तुम)।

MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 7 संहतिः कार्यसाधिका

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MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 7 संहतिः कार्यसाधिका

MP Board Class 6th Sanskrit Chapter 7 अभ्यासः

Class 6 Sanskrit Chapter 7 MP Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) वयं नेत्राभ्यां किं कर्मः? (हम दोनों नेत्रों से क्या करते हैं?)
उत्तर:
पश्यामः (देखते हैं)

(ख) तृणानां मेलनेन किं भवति? (तिनकों के मेल से क्या होता है?)
उत्तर:
रज्जुनिर्माणं (रस्सी का निर्माण)

(ग) केन बलशाली गजः बध्यते? (बलशाली हाथी किससे बाँधा जाता है?)
उत्तर:
रज्जुना (रस्सी से)

MP Board Solutions

(घ) कैः वस्त्रनिर्माणं भवति? (वस्त्र निर्माण किससे होता है?)
उत्तर:
तन्तुभिः (धागों से)

(ङ) घटः केन पूर्णः भवति? (घड़ा किससे भर जाता है?)
उत्तर:
बिन्दुना (बूंद से)

(च) का कार्यसाधिका भवति? (कार्य में सफलता देने वाली क्या होती है?)
उत्तर:
संहति (एकता)।

Class 6 Sanskrit Chapter 7 MP Board प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) वयं कया जिघ्राम:? (हम किससे सूंघते हैं?)
उत्तर:
वयं नासिकया जिघ्रामः। (हम नाक से सूंघते हैं।)

(ख) वयं कैः अन्नचर्वणं कुर्मः? (हम किसके द्वारा अन्न को चबाते हैं?)
उत्तर:
वयं दन्तैः अन्नचर्वणं कुर्मः। (हम दाँतों से अन्न को चबाते हैं।)

(ग) केन चक्रनिर्माणं भवति? (किसके द्वारा चक्र का निर्माण होता है?)
उत्तर:
बहुनाम् अराणां सहयोगेन चक्रनिर्माणं भवति। (बहुत-सी तीलियों के सहयोग से चक्र का निर्माण होता है।)

(घ) वृक्षः कैः शोभते? (वृक्ष किससे शोभा पाता है?)
उत्तर:
पर्णैः, पुष्पैः, फलैः, शाखाभिः च वृक्षः शोभते। (पत्तों, फूलों, फलों और शाखाओं से वृक्ष शोभा पाता है।)

Class 6 Sanskrit Surbhi Chapter 7 प्रश्न 3.
उचितं मेलयत (उचित का मिलान करो)
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 7 संहतिः कार्यसाधिका 1
उत्तर:
(क) → 3
(ख) → 7
(ग) → 6
(घ) → 5
(ङ) → 2
(च) → 1
(छ) → 4

MP Board Solutions

Class 6 Sanskrit Chapter 7 प्रश्न 4.
निम्नलिखितशब्दानां तृतीयाविभक्तेः रूपाणि लिखत (निम्नलिखित शब्दों के तृतीया विभक्ति के रूपों को लिखो)
(1)(क)-पाद, (ख)-घट, (ग)-अर।
(2) (क)-जिह्वा, (ख)-इष्टिका, (ग)-शाखा।
(3) (क)-शरीर, (ख)-चक्र, (ग)-चित्र।
उत्तर:
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 7 संहतिः कार्यसाधिका 2

MP Board Class 6th Sanskrit Chapter 7 प्रश्न 5.
निम्नलिखितैः शब्दैः वाक्यानि रचयत (निम्नलिखित शब्दों से वाक्यों की रचना करो)
(क) हस्तेन
(ख) पादाभ्या
(ग) नासिकया
(घ) मालाभिः
(ङ) संहतिः।
उत्तर:
(क) अहम् हस्तेन कार्यम् करोमि। (मैं हाथ से कार्य करता हूँ।)
(ख) वयम् पादाभ्यां चलामः। (हम दो पैरों से चलते हैं।)
(ग) नासिकया वयं जिघ्रामः। (हम नाक से सूंघते हैं।)
(घ) मालाभिः देवताः पूज्यन्ते। (मालाओं से देवताओं की पूजा की जाती है।)
(ङ) संहतिः कार्यसाधिका भवति। (एकता से कार्य सफल होता है।)

Sanskrit Class 6 Chapter 7 प्रश्न 6.
उचितशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत (उचित शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति करो)
(क) कार्यसाधनाय ……….. श्रेष्ठा। (भिन्नता/संहतिः)
(ख) मालायाः निर्माणं …….. भवति। (पुष्पैः/पुष्पाय)
(ग) वयं नेत्राभ्यां ……….। (शृणुमः/पश्यामः)
(घ) ………. वस्त्रनिर्माणं भवति। (बिन्दुभिः/तन्तुभिः)
(ङ) कार्याणि ……….. पूर्णानि भवन्ति। (जनेन/जनैः)
(च) सीता ……….. सह वनं गच्छति।। (जनकेन/रामेण)
(छ) रमेशः मित्रैः ……….. क्रीडति। (सः/सह)
(ज) रमा …………. सह क्रीडति। (लतया/लतायाः)
उत्तर:
(क) संहतिः
(ख) पुष्पैः
(ग) पश्यामः
(घ) तन्तुभिः
(ङ) जनौः
(च) रामेण
(छ) सह
(ज) लतया।

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Class 6th Sanskrit Chapter 7 प्रश्न 7.
पाठे आगतान् तृतीयाविभक्तेः शब्दान् लिखत (पाठ में आये हुए तृतीया विभक्ति के शब्दों को लिखो)
उत्तर:
(1) शरीरेण, (2) मेलनेन, (3) सहयोगेन, (4) नेत्राभ्याम्, (5) कर्णाभ्याम्, (6) नासिकया, (7) जिह्वया, (8) पादाभ्याम्, (9) हस्ताभ्याम्, (10) दन्तैः, (11) मुखेन, (12) रज्जु ना, (13) तेन, (14) घटेन, (15) पुष्पैः, (16) मालाभिः, (17) जनैः, (18) एकेन, (19) जनेन, (20) बहुभिः, (21) क्रीडकैः, (22) विभिन्नैः, (23) मुद्रितपत्रैः, (24) पर्णैः, (25) पुष्पैः, (26) फलैः, (27) शाखाभिः, (28) तन्तुभिः, (29) पञ्चभिः, (30) अङ्गुलीभिः, (31) एकया, (32) इष्टिकया, (33) बिन्दुना, (34) निपातेन, (35) तृणैः, (36) आपन्नेः।

Class 6 Sanskrit Chapter 7 Question Answer प्रश्न 8.
एकतया जनाः कानि-कानि कार्याणि कुर्वन्ति, चिन्तयित्वा पञ्च वाक्यानि लिखत। (एकता से मनुष्य कौन-कौन से कार्य करते हैं, विचार करके पाँच वाक्य लिखो।)
उत्तर:

  1. एकतया जनाः देशस्य रक्षां कुर्वन्ति।
    (एकता से मनुष्य देश की रक्षा करते हैं।)
  2. एकतया जनाः सबलाः भवन्ति।
    (एकता से लोग बलशाली बनते हैं।)
  3. एकतया विपत्तिकाले अपि सफलताम् आनुवन्ति।
    (एकता से विपत्तिकाल में भी सफलता प्राप्त करते हैं।)
  4. एकतया कठिन कार्याणि अपि तैः क्रियन्ते।
    (एकता से कठिन कार्य भी उनके द्वारा किये जाते हैं।)
  5. एकतया राष्ट्रस्य विघटनम् अपि न कर्तुम् शक्यते।
    (एकता से राष्ट्र का विघटन भी नहीं किया जा सकता।)

योग्यताविस्तारः
अधोलिखितान् श्लोकान् कण्ठस्थं कुरुत, तृतीयाविभक्तेः शब्दान् चिनुत।
(नीचे लिखे श्लोकों को कण्ठस्थ करो। तृतीया विभक्ति के शब्दों को चुनो।)
उत्तर:
(1) पाठ्य पुस्तक के इन श्लोकों को सावधानीपूर्वक बार-बार पढ़िये। शुद्ध वाचन करके कण्ठस्थ करने का प्रयास कीजिए।

(2) तृतीया विभक्ति के शब्द

  • दाने, कङ्कणेन, स्नानेन, चन्दनेन, मानेन, भोजनेन, ज्ञानेन, मुण्डनेन।
  • चतुर्भिः, ताडनैः, त्यागेन, शीलेन, गुणेन।
  • पञ्चभिः।

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संहतिः कार्यसाधिका हिन्दी अनुवाद :

शरीरेण एकताबोधः भवति। शरीरे विभिन्नानि अङ्गानि भवन्ति। अङ्गानां मेलनेन शरीरनिर्माणं भवति। अङ्गानां सहयोगेन एव शरीरं सर्वाणि कार्याणि करोति।

वयं नेत्राभ्यां पश्यामः। कर्णाभ्यां शृणुमः। नासिकया जिघ्रामः। जिह्वया स्वादयामः। पादाभ्यां चलामः। हस्ताभ्यां कार्यं कुर्मः। दन्तैः अन्नचर्वणं कुर्मः। मुखेन खादामः, पिबामः वदामः च। एवम् अङ्गानां सहयोगेन एव शरीरेण सर्वाः क्रियाः भवन्ति।

अल्पानाम् अपि वस्तूनां सहयोगेन वयं दीर्घाणि कार्याणि कुर्मः। तृणानां मेलनेन रज्जुनिर्माणं भवति। रज्जुना शय्यानिर्माणं भवति। तेन एव कूपात् घटेन जलं प्राप्नुमः। रज्जुना बलशाली गजः अपि बध्यते। पुष्पैः मालायाः निर्माणं भवति। मालाभिश्च देवानां पूजनं वयं कुर्मः। महत् कार्याणि बहुभिः जनैः एव पूर्णानि भवन्ति, न तु एकेन जनेन।

अनुवाद :
शरीर से एकता का बोध होता है। शरीर में अनेक अङ्ग होते हैं। अङ्गों के मेल से शरीर का निर्माण होता है। अङ्गों के सहयोग से ही शरीर सभी कार्यों को करता है।

हम दो नेत्रों से देखते हैं। दो कानों से सुनते हैं। नाक से सूंघते हैं। जीभ से स्वाद लेते हैं (चखते हैं)। दो पैरों से चलते हैं। दो हाथों से कार्य करते हैं। दाँतों से अन्न को चबाते हैं। मुख से खाते हैं, पीते हैं और बोलते हैं। इस प्रकार अङ्गों के सहयोग से ही शरीर के द्वारा सभी क्रियाएँ होती हैं।

थोड़ी-सी भी वस्तुओं के सहयोग से हम बड़े कार्यों को कर लेते हैं। तिनकों के मेल से रस्सी का निर्माण होता है। रस्सी से शय्या (चारपाई) का निर्माण होता है। उसके द्वारा ही कुएँ से घड़े के द्वारा जल प्राप्त करते हैं। रस्सी से बलशाली हाथी भी बाँध लिया जाता है। फूलों से माला का निर्माण होता है और मालाओं से देवताओं की पूजा करते हैं। बड़े-बड़े कार्य बहुत-से लोगों के द्वारा ही पूरे किए जाते हैं, न कि एक आदमी के द्वारा।

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बहुभिः क्रीडकैः एव क्रीडनं भवति। विभिन्नै: मुदितपत्रैः पुस्तकनिर्माणं भवति। पर्णैः, पुष्पैः, फलैः,शाखाभिः च वृक्षः शोभते। तन्तुभिः वस्त्रनिर्माणं भवति। पञ्चभिः अङ्गुलीभिः मुष्टिः भवति। बहूनाम् अराणां सहयोगेन चक्रनिर्माणं भवति। एकया एकया इष्टिकया गृहनिर्माणं भवति। एकेन एकेन बिन्दुना घटः पूर्णः भवति। तदा वयं जलं पिबामः। उक्तश्च-
“जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः”

अतः संहतिः एव कार्यसाधिका भवति। अनेकातायाम् एकता अस्माकं भारतदेशस्य गौरवसूत्रम् अपि अस्ति। उक्तम्

अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका।
तृणैर्गुणत्वमापन्नैर्बध्यन्ते मत्तदन्तिनः॥

अनुवाद :
बहुत से खिलौनों से खेल होता है। लिखे हुए विभिन्न पृष्ठों से पुस्तक का निर्माण होता है। पत्तों, फूलों, फलों, और शाखाओं से वृक्ष शोभा पाता है। धागों से वस्त्र (कपड़ा)
का निर्माण होता है। पाँच अँगुलियों से मुट्ठी बनती है। बहुत-सी तीलियों के सहयोग से चक्र का निर्माण होता है। एक-एक ईंट से घर का निर्माण होता है। एक-एक बूंद से घड़ा भर जाता है। तब हम जल पीते हैं।

कहा भी गया है-
“क्रमश: जल की बूंदों के गिरने से घड़ा भर जाता है।”
इसलिए एकता ही कार्य को सिद्ध कराने वाली होती है। अनेकता में एकता हमारे भारत देश का गौरवसूत्र (धागा) भी है।

कहा गया है-
“छोटी सी वस्तुओं की संहति (एकता) कार्य में सफलता प्राप्त कराती है। घास से रस्सी बना लेने पर (घास-फूस को कई गुना करके रस्सी बना लेने से) मतवाले हाथियों को भी बाँध लिया जाता है।”

संहतिः कार्यसाधिका शब्दार्थाः

कर्णाभ्यां = कानों से। क्रीडकैः = खिलाड़ियों से। संहति = एकता। कार्यसाधिका = कार्य को सिद्ध करने वाली। रज्जुना = रस्सी के द्वारा। घटः = घड़ा। इष्टिकया = ईंट से। जिह्वया = जीभ से। गजः = हाथी। मुदितपत्रैः = लिखित पन्नों द्वारा (पृष्ठों द्वारा)। अराणाम् = तीलियों के। मुष्टिः = मुट्ठी।

MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 8 परोपकारः

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MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 8 परोपकारः

MP Board Class 6th Sanskrit Chapter 8 अभ्यासः

Class 6 Sanskrit Chapter 8 MP Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) के जलं वर्षन्ति? (जल कौन बरसाते हैं?)
उत्तर:
मेघाः (बादल)

(ख) कः देशरक्षां करोति? (देश की रक्षा कौन करता है?)
उत्तर:
सैनिकः

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(ग) का भोजनं पचति? (भोजन कौन पकाती है?)
उत्तर:
माता (माँ)

(घ) कः विद्याधनं ददाति? (विद्या और धन कौन देता है?)
उत्तर:
पिता (पिता)।

MP Board Class 6 Sanskrit Chapter 8 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) धनं किमर्थं भवति? (धन किसके लिए होता है?)
उत्तर:
धनं राष्ट्रविकासाय भवति। (धन राष्ट्र के विकास के लिए होता है।)

(ख) माता स्वपुत्र्यै किं यच्छति? (माता अपनी पुत्रियों को क्या देती है?)
उत्तर:
माता स्वपुत्र्यै सुसंस्कारं यच्छति। (माता अपनी पुत्रियों को सुसंस्कार देती है।)

(ग) परोपकाराय के फलानि यच्छन्ति? (परोपकार के लिए कौन फल देते हैं?)
उत्तर:
परोपकाराय वृक्षाः फलानि यच्छन्ति। (परोपकार के लिए वृक्ष फल देते हैं।)

Class 6th Sanskrit Chapter 8 प्रश्न 3.
उचितपरिवर्तनेन पूरयत (उचित परिवर्तन से पूरा करो)
(अ)
(क) परोपकारः………..।
(ख) जनकः ……….।
(ग) लाभ:………..।
(घ) विकासः………..।
(ङ) परिश्रमः……….।
उत्तर:
(क) परोपकाराय
(ख) जनकाय
(ग) लाभाय
(घ) विकासाय
(ङ) परिश्रमाय।

(आ)
(क) महिला……….।।
(ख) सरला………।
(ग) लता……….।
(घ) सुरक्षा……..।
(ङ) वसुधा ……….।
उत्तर:
(क) महिलायै
(ख) सरलायैः
(ग) लतायै
(घ) सुरक्षायै
(ङ) वसुधायै।

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(ङ)
(क) धनं………..।
(ग) फलं………..।
(ङ) स्वास्थ्यं………..।
(ख) ज्ञानं………..।
(घ) पुस्तकं………..।
उत्तर:
(क) धनाय
(ख) ज्ञानाय
(ग) फलाय
(घ) पुस्तकाय
(ङ) स्वास्थ्याय।

(ई)
(क) जननी………।
(ख) सखी ………..।
(ग) पुत्री………..।
(घ) शालिनी………..।
(ङ) नलिनी……….।
उत्तर:
(क) जनन्यै
(ख) सख्य
(ग) पुत्र्यै
(घ) शालिन्यै
(ङ) नलिन्यै।

Class 6 Sanskrit Chapter 8 Question Answer प्रश्न 4.
बहुवचने परिवर्तयत (बहुवचन में बदलिए)
(क) पुत्राय
(ख) विकासाय
(ग) परिश्रमाय।
उत्तर:
(क) पुत्रेभ्यः
(ख) विकासेभ्यः
(ग) परिश्रमेभ्यः।

Sanskrit Class 6 Chapter 8 Question Answer प्रश्न 5.
उचितपदेन रिक्तस्थानं पूरयत (उचित शब्द से रिक्त स्थानों को पूरा करो)
(क) मोहनः………… भोजनं ददाति। (भिक्षुकं/भिक्षुकाय)
(ख) धनं………….. भवति। (परोपकारेण/परोपकाराय)
(ग) शास्त्रं ………… अस्ति। (पण्डिताः/पण्डिताय)
(घ) भोजन …………. भवति। (स्वास्थ्यस्य/स्वास्थ्याय)
(ङ) महिला ………….. धनं ददाति। (निर्धने/निर्धनाय)
उत्तर:
(क) भिक्षुकाय
(ख) परोपकाराय
(ग) पण्डिताय
(घ) स्वास्थ्याय
(ङ) निर्धनाय।

Class 6 Chapter 8 Sanskrit प्रश्न 6.
प्रदत्तशब्दैः रेखाङ्कितशब्दान् आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत (रेखांकित शब्दों को आधार बनाकर प्रश्न बनाओ)
(केभ्यः, किमर्थं, का, कानि)
(क) सूर्यः परोपकाराय तपति।
(ख) माता सर्वेभ्यः भोजनं पचति।
(ग) वृक्षेभ्यः फलानि जायन्ते।
(घ) प्रकृतिः सर्वेभ्यः सुखं ददाति।
उत्तर:
(क) सूर्य किमर्थं तपति?
(ख) माता केभ्यः भोजनं पचति?
(ग) वृक्षेभ्यः कानि जायन्ते?
(घ) का सर्वेभ्यः सुखं ददाति?

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योग्यताविस्तारः
1. ‘षष्ठी’-विभक्त्या सह ‘कृते’ शब्दस्य योगेन अपि चतुर्थी विभक्तिकार्यं भवति।
(षष्ठी विभक्ति के साथ ‘कृते’ शब्द के योग होने पर भी चतुर्थी विभक्ति का कार्य होता है।)
यथा-
रामस्य कृते – रामाय
बालिकायाः कृते – बालिकायै
वनस्य कृते – वनाय
छात्राणां कृते – छात्रेभ्यः
महिलानां कृते – महिलाभ्यः

2. श्लोकेभ्यः ‘चतुर्थी विभक्तिशब्दान्’ चिनुत। (श्लोकों से चतुर्थी विभक्ति के शब्दों को चुनो)
उत्तर:
चतुर्थी विभक्ति के शब्द :
(क)

  1. नागेन्द्रहाराय
  2. त्रिलोचनाय
  3. भमाङ्करागाय
  4. महेश्वराय
  5. नित्याय
  6. शुद्धाय
  7. दिगम्बराय
  8. तस्मै
  9. नकाराय
  10. शिवाय।

(ख)

  1. देव्यै
  2. महादैव्यै
  3. शिवायै
  4. प्रकृत्यै
  5. भद्रायै।

(ग)

  1. कुलितालकायै
  2. शेखराय
  3. दिव्याम्बरायै
  4. दिगम्बराय
  5. शिवायै
  6. शिवाय।

परोपकारः हिन्दी अनुवाद

परेषाम् उपकारः परोपकारः। सर्यः लोकहिताय तपति। नद्यः परोपकाराय वहन्ति। वृक्षाः परोपकाराय फलानि यच्छन्ति। मेघाः परोपकाराय जलं वर्षन्ति। वसुधा परोपकाराय भारं वहति। एवं प्रकृतिः परोपकाराय प्रेरयति। प्रकृत्यै वयं किं कुर्मः?

अनुवाद :
दूसरों की भलाई करना (ही) परोपकार होता है। सूर्य संसार के हित के लिए तपता है। नदियाँ परोपकार के लिए बहती हैं। वृक्ष दूसरों की भलाई के फल देते हैं। बादल दूसरों की भलाई के लिए जल को बरसाते हैं। पृथ्वी दूसरों की भलाई के लिए बोझा ढोती है। इसी तरह प्रकृति दूसरों की भलाई के लिए प्रेरणा देती है। प्रकृति के लिए हम क्या करें।

किं यूयं किश्चित् स्मरथ यत् एषा प्रकृतिः अस्मभ्यम् अहर्निशं सर्वं सुखं ददाति। यदा प्रकृत्याः सुरक्षायै वयं मानवाः किश्चिदपि कर्तुं शक्नुमः, तदा अस्माकं जीवन सुखकर भविष्यति। एतदर्थं जलसंरक्षणं, वायुसंरक्षणं, भूसंरक्षणम् च अवश्यमेव करणीयम्।

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अनुवाद :
क्या तुम्हें कुछ याद है कि यह प्रकृति हम सब को रात और दिन सभी सुखों को प्रदान करती है। जब प्रकृति की सुरक्षा के लिए हम सभी मनुष्य कुछ भी करने में समर्थ होते हैं, तब हमारा जीवन सुखकर होगा। इसके लिए जल संरक्षण, वायु-संरक्षण और भू-संरक्षण अवश्य ही करना चाहिए।

माता सर्वेभ्यः भोजनं पचति। भोजनं स्वाथ्यलाभाय भवति। स्वास्थ्यं ज्ञानायं परिश्रमाय च भवति। परिवारे पिता पुत्राय विद्याधनं ददाति। माता स्वपुत्र्यै सुसंस्कारं यच्छति।

अनुवाद :
माता सबके लिए भोजन पकाती है। भोजन स्वास्थ्य के लाभ के लिए होता है। स्वास्थ्य ज्ञान के लिए और परिश्रम के लिए होता है। परिवार में पिता पुत्र के लिए विद्या और धन दे देता है। माता अपनी पुत्रियों को सुसंस्कार देती है।

सैनिकः देशसुरक्षायै स्वशरीरस्य बलिदानं करोति। जनसेवकः समाजविकासाय सततं कार्यं करोति। परिश्रमः धनार्जनाय भवति। धनं राष्ट्रविकासाय, धर्माय, सुखाय च भवति। अतः परोपकारस्य विषये कथितम्-

परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः, परोपकाराय वहन्ति नद्यः।
परोपकाराय दुहन्ति गावः, परोपकारार्थमिदं शरीरम्॥

अनुवाद :
सैनिक देश की सुरक्षा के लिए अपने शरीर का बलिदान करता है। जनसेवक समाज के विकास के लिए लगातार कार्य करता है। परिश्रम धन कमाने के लिए होता है। धन राष्ट्र के विकास के लिए, धर्म के लिए और सुख के लिए होता है। इसलिए परोपकार के विषय में कहा गया है

‘दूसरों की भलाई के लिए वृक्षों पर फल लगते हैं, दूसरों की भलाई के लिए नदियाँ बहती हैं। परोपकार के लिए गायों को दुहा जाता है, परोपकार के लिए ही यह शरीर होता है।’

परोपकारः शब्दार्थाः

वहन्ति = बहती हैं। फलन्ति = फल देती हैं। पचति = पकाती हैं। मेघाः = बादल। विनीतम् = विनम्र। दुहन्ति = दूध देती है। वर्षन्ति = बरसते हैं। सततम् = निरन्तर। यच्छति = देती है, देता है। धर्माय = धर्म के लिए। धनार्जनाय = धन कमाने के लिए। प्रकृत्यै = प्रकृति के लिए। प्रकृत्याः = प्रकृति की।

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MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti विविध प्रश्नावली 1

MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions विविध प्रश्नावली 1

Class 6 Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 1.
निम्नलिखित विकल्पों में से सही चुनकर। लिखिए
(क) चीनी दार्शनिक थे
(i) लुकमान,
(ii) कन्फ्यू शस,
(iii) शास्त्री जी,
(iv) न्यूटन।
उत्तर-
(ii) कन्फ्यू शस,

(ख) महानगरों में गगन चूमते खड़े हैं
(i) पहाड़,
(ii) वृक्ष,
(iii) भवन,
(iv) खम्बे।
उत्तर-
(iii) भवन,

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(ग) उज्जयिनी के सम्राट का नाम था
(i) कालिदास,
(ii) विक्रमादित्य,
(iii) शिवाजी,
(iv) राजा भोज।
उत्तर-
(ii) विक्रमादित्य,

(घ) सफलता शब्द में ‘ता’ है
(i) उपसर्ग,
(ii) प्रत्यय,
(iii) क्रिया,
(iv) सर्वनाम।
उत्तर-
(ii) प्रत्यय,

(ङ) ‘सूर्य’ का पर्यायवाची शब्द है
(i) मयंक,
(ii) भास्कर,
(iii) इन्दु,
(iv) रज।
उत्तर-
(ii) भास्कर।

Class 6th Hindi Chapter 1 MP Board प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) ………………………” युद्ध वाणी के प्रयोग का ही परिणाम था।
(ख) बाबा भारती अपने घोड़े को ……………………… कहकर पुकारते थे।
(ग) धन के कोष भरने के बाद भी मनुष्य को ……………………… नहीं है।
(घ) ‘विशेष’ शब्द में ……………………… उपसर्ग है।
(ङ) मीठी बोली’ शब्द में ……………………… विशेषण है।
उत्तर-
(क) महाभारत,
(ख) सुलतान,
(ग) सन्तोष,
(घ) ‘वि’,
(ङ) मीठी।

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) स्वतन्त्रता संग्राम में शत्रु की दशा कैसी थी?
उत्तर-
स्वतन्त्रता संग्राम में माँ भारती के वीर सपूतों के साहस व पराक्रम को देखकर शत्रु काँपने लगते हैं।

(ख) अपना घोड़ा वापस पाकर बाबा भारती ने क्या कहा?
उत्तर-
अपना घोड़ा वापस पाकर बाबा भारती ने सन्तोष की साँस ली और बोले कि अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह नहीं मोड़ेगा।

(ग) जन-सेवा का भाव क्यों समाप्त हो रहा है?
उत्तर-
जन-सेवा का भाव इसलिए समाप्त हो रहा है, क्योंकि जो शिक्षा दी जा रही है वह संस्कारविहीन है जिससे लोगों में चिन्तन की गहराई और विस्तृतता नहीं है।

(घ) संज्ञानन्द की पत्नी का नाम क्या था?
उत्तर-
संज्ञानन्द की पत्नी का नाम क्रियादेवी था।

(ङ) खाई-कुएँ से कवि का क्या आशय है?
उत्तर-
खाई-कुएँ से आशय है श्रेष्ठ वीरों के मार्ग में सब – ओर कठिनाई और बाधाएँ होती हैं।

(च) पतित-पावनी किसे कहा गया है?
उत्तर-
पतित-पावनी शब्द ‘गंगा माता’ के लिए कहा गया

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Bhasha Bharati Class 6th प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन से पाँच वाक्यों में दीजिए

(क) शास्त्रीजी ने अपनी पत्नी को कौन-कौन सी पंक्तियाँ सुनायीं और क्यों?
उत्तर-
शास्त्रीजी ने अपनी पत्नी को निम्नलिखित पंक्तियाँ सुनायीं “कुदरत को नापसन्द है सख्ती जबान में, इसलिए तो दी नहीं हड्डी जबान में, जो बात कहो, साफ हो, सुथरी हो, भली हो। कड़वी न हो, खट्टी न हो, मिश्री की डली हो।”

इन पंक्तियों को सुनकर उनकी पत्नी का क्रोध सदा के लिए समाप्त हो गया। इसी उद्देश्य से शास्त्रीजी ने उपर्युक्त पंक्तियाँ अपनी पत्नी को सुनायीं।।

(ख) खड्गसिंह ने बाबा भारती का घोड़ा वापिस क्यों कर दिया? समझाइए।
उत्तर-
खड्गसिंह के ऊपर बाबा भारती के इस कथन का कि “लोगों के सामने इस घटना को प्रकट न करना क्योंकि उन्हें इस घटना का पता लग गया, तो वे किसी गरीब पर विश्वास नहीं करेंगे।” बहुत प्रभाव पड़ा। वह सोचने लगा कि बाबा को घोड़े के छीन लेने का कोई कष्ट नहीं है, उन्हें तो केवल यही ख्याल रहा कि कहीं लोग गरीबों पर विश्वास करना न छोड़ दें। यह बात खड्गसिंह के कानों में बराबर गूंजती थी। इस बात से प्रभावित होकर कि बाबा भारती कोई सामान्य आदमी नहीं, यह तो निश्चय ही कोई देवता हैं, बाबा भारती के घोड़े को वापिस कर दिया। खड्गसिंह का हृदय परिवर्तन हो चुका था। उसकी आँखों में नेकी के आँसू भर आए।

(ग) अगस्त्य ऋषि का उल्लेख कवि ने क्यों किया है?
उत्तर-
कवि ने भारतीय वीरों में अपने निश्चय की दृढ़ता को बनाए रखने और अपने उद्देश्य से न डिगने के लिए अगस्त्य ऋषि का उल्लेख किया है। अगस्त्य ऋषि ने अपने हाथों की अंजलि जैसे छोटे साधन से विशाल समुद्र को पीकर उसके घमण्ड को चूर कर दिया था, अत: पक्के इरादों वाले हे वीरवरो ! तुम भी विपत्तियों पर विजय पाकर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हो।

(घ) ‘अपना हिन्दुस्तान कहाँ है?’ कवि ने यह प्रश्न क्यों किया?
उत्तर-
अपना हिन्दुस्तान कहाँ है? यह प्रश्न कवि ने उचित ही किया है क्योंकि भूमण्डलीकरण के इस युग में हिन्दुस्तानीपन, अपनी जीवन शैली, अपनी सोच, अपनी शैक्षिक-प्रणाली, शिक्षा की विस्तृतता, गम्भीरता इत्यादि सभी समाप्त हो चुकी हैं। पारिवारिकता, संघीय सोच, वैवाहिक संस्थाएँ सब की सब बदल चुकी हैं। धन के लालच में लोगों के पारिवारिक सम्बन्ध टूट चुके हैं। टेलीफोन पर बातचीत करके ही किसी भी तरह की जानकारी ली जाती है। भारत से वैदिककालीन शिक्षा समाप्त है। मन्त्रों की घोष यन्त्रों की आवाज तले लुप्त हो गयी है। हमारी चिन्तन शैली भी सीमित हो चुकी है। शिक्षा संस्कारविहीन हो चुकी है। हनुमान की योगपरक शक्ति, राम की मर्यादा को भुला दिया है। कवियों और साहित्यकारों को समाज और शासन द्वारा सम्मान प्राप्त नहीं है। देश में तुलसी, सूर, निराला, दिनकर, रहीम और रसखान जैसे जनकवियों का अभाव है। गीतों और कविता में मधुमास की सरसता, श्रेष्ठ, काव्य सृजन की शक्ति का ह्रास हो चुका है। इन सभी बातों को सोचकर कवि ने अपना हिन्दुस्तान कहाँ है?’ कहकर उचित समय पर प्रश्न उठाया है। हिन्दुस्तानीयत की रक्षा के सवाल का उत्तर ही भारत राष्ट्र को सुदृढ़ता, सुसम्पन्नता से संयुक्त कर सकता है।

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Class 6 Hindi Chapter 1 MP Board प्रश्न 5.
निम्नांकित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए

(क) हो अगस्त्य, क्या कठिन सुखाना, बाधा का दुर्दम सागर। सम्हल-सम्हल कर चलो वीरवर, तलवारों की धारों पर।
उत्तर-
हे वीरो! तुम्हें किसी भी तरह का मोह भी छू न सके, इसके लिए तुम्हें एक तपस्वी बन जाना चाहिए। तुम्हें लोहे के हृदय वाला हो जाना चाहिए जिससे काल भी भयभीत हो उठे। तुम्हें अत्यन्त पक्के इरादों वाला हो जाना चाहिए। हे वीरवरो! तुम्हें अगस्त्य ऋषि के समान बन जाना चाहिए जिससे बाधाओं के  र्दमनीय (कठिनाई से वश में किए जाने वाला) सागर को भी वश में करना तुम्हारे लिए बिल्कुल भी कठिन नहीं होगा। अतः हे श्रेष्ठ वीरो! तुम्हें सम्हल कर तलवार की धार पर चलना है (चुनौतीपूर्ण कार्य करना है।)

(ख) कविकुल गुरु की सृजन शक्ति का, वह पांवन संस्कार कहाँ है?
फूहड़ गीतों में खोया जो, वह मधुरस शृंगार कहाँ है?
उत्तर-
आज कविकुल गुरु कालिदास की सी काव्य रचना करने की शक्ति पैदा करने के पवित्र संस्कार कहाँ छिप गए हैं। मिठास भरा श्रृंगार रस तो आज के फूहड़ गीतों में खो गया है। मन में उत्साह भर देने वाली कविता की धारा ही कहीं विलुप्त हो गयी है। साथ ही, राजा भोज जैसे साहित्य प्रेमी भी नहीं दीखते जिन्होंने कविता के साहित्यिक विकास को विस्तार दिया था। आज तुलसीदास, सूरदास, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ और रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जैसे महान कवि भी जन्म नहीं ले रहे जिन्होंने जन-जन में परस्पर आदर्श प्रेम, समता, महानता और राष्ट्रीय एकता के भाव लोगों में भरने के लिए काव्य रचना की। रहीम और रसखान जैसे आदर्श एवं जनकवियों का सर्वत्र अभाव . (कमी) दीख रहा है। आज वास्तव में, ऐसे अपने हिन्दुस्तान की विश्वभर में खोज करनी है कि वे अब कहाँ है ?

Bhasha Bharati Class 6 प्रश्न 6.
निम्नांकित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए

(क) वाणी तो सभी को मिली हुई है, परन्तु बोलना किसी-किसी को ही आता है।
उत्तर-
लेखक का कथन है कि वाणी (जीभ) सभी को प्राप्त है परन्तु उससे बोलना तो किसी-किसी को ही आता है। बहुत कम लोग बोलना जानते हैं। वाणी का प्रयोग हर कोई ठीक से नहीं कर पाता। ऐसा देखा जाता है कि कुछ लोगों की वाणी से प्रेम झलकता है, तो किसी की बात इतनी चुभने वाली होती है कि झगड़ा हो जाता है। कड़वी बात संसार में कितने ही झगड़े पैदा कर देती है और उसका प्रभाव बहुत ही कष्टकारक होता है। बोलने में मात्र तीन इंच की छोटी जीभ का प्रयोग करते हैं परन्तु उसका प्रभाव इतना विनाशकारी होता है कि उससे छः फीट का लम्बा मनुष्य मर जाता है।

(ख) बाबाजी भी मनुष्य ही थे। अपनी वस्तु की प्रशंसा दूसरे के मुख से सुनने के लिए उनका हृदय अधीर हो गया।
उत्तर-
बाबा भारती भले ही संन्यासी थे लेकिन थे तो मनुष्य ही। अपनी चीज की तारीफ सबको अच्छी लगती है। खड्ग सिंह के मुख से अपने घोड़े की तारीफ सुनने की चाह उनके मन में जाग उठी।

(ग) अब संसार की कोई आकांक्षा मुझे इस स्थान से नहीं हटा सकती, क्योंकि यह मेरा प्यारा देश है और यही मेरी मातृभूमि है। बस, मेरी उत्कट इच्छा यही है कि मैं अपनी प्यारी मातृभूमि 1 में ही अपने प्राण विसर्जन करूँ।
उत्तर-
लेखक का मन अपनी मातृभूमि के प्रेम में रंग गया है। उसके अन्दर किसी भी अन्य वस्तु को याद करने की अब कोई | इच्छा नहीं रह गई है, जिसे प्राप्त करने के लिए वह अपनी मातृभूमि का त्याग कर सके। उसे उसकी मातृभूमि मिल गई है। वह उसकी मातृभूमि ही उसका प्यारा मातृदेश है। उसकी यह हार्दिक इच्छा है कि वह अपने जीवन के शेष समय को यहीं रहकर व्यतीत करे तथा जिस मातृभूमि ने उसे जन्म दिया, जिसका अन्न-जल खा-पीकर बड़ा हुआ, उसी मातृभूमि की पवित्र गोद में रहकर अपने जीवन की इह-लीला समाप्त करे। अपनी प्यारी भूमि में जन्म लेकर उसी की गोद में अपने प्राण त्याग करे।

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MP Board Class 6 Hindi Bhasha Bharti Solution प्रश्न 7.
‘हार की जीत’ कहानी के अनुरूप हृदय परिवर्तन करने वाली कोई कहानी लिखिए।
उत्तर-
विद्यार्थी स्वयं लिखें।

Bhasha Bharti Class 6 प्रश्न 8.
निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए “हिन्दू होते हुए भी शिवा के लिए सभी धर्म पूज्य हैं। इस्लाम के पवित्र स्थान, उसके पवित्र ग्रन्थ सम्मान की वस्तुएँ हैं। शिवा, हिन्दू और मुसलमान प्रजा में कोई भेद नहीं समझता। वह देश में हिन्दू राज्य नहीं, सच्चे स्वराज्य की स्थापना चाहता है। आतताइयों से सत्ता का अपहरण कर उदारचेताओं के हाथों में अधिकार देना चाहता है। फिर पर-स्त्री ! अरे ! पर-स्त्री तो हर एक के लिए माता के समान है।”

  1. सभी धर्म किसे पूज्य हैं?
  2. शिवा कैसे राज्य की स्थापना करना चाहता है?
  3. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

उत्तर-

  1. शिवा हिन्दू है। लेकिन उसके लिए सभी धर्म पूज्य हैं।
  2. शिवा सच्चे स्वराज्य की स्थापना करना चाहता है।
  3. ‘शिवा की उदारता’।

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MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 5 विद्या-महिमा

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MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Surbhi Chapter 5 विद्या-महिमा

MP Board Class 6th Sanskrit Chapter 5 अभ्यासः

Class 6 Sanskrit Chapter 5 MP Board प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत(एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) विद्या कि ददाति? (विद्या क्या देती है?)
उत्तर:
विनयम् (विनम्रता)

(ख) कः सर्वत्र पूज्यते? (किसकी सभी जगह पूजा की जाती है?)
उत्तर:
विद्वान् (विद्यावान्)

(ग) देवैः कः पूज्यते? (देवताओं के द्वारा किसी पूजा की जाती है?)
उत्तर:
विद्यावान् (विद्या से युक्त)

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(घ) विदेशेषु विद्या किम् भवति? (विदेशों में विद्या क्या होती है?)
उत्तर:
धनम् (धन)।

MP Board Class 6 Sanskrit Chapter 5 प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत(एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) कस्मात् पात्रतां याति? (किससे पात्रता (योग्यता) आती है?)
उत्तर:
विनयाद् पात्रतां याति। (विनय (नम्रता) से योग्यता आती है।)

(ख) परलोके धनं किम्? (परलोक में धन क्या है?)
उत्तर:
परलोके धनं धर्मः। (परलोक में धर्म ही धन है।)

(ग) स्वदेशे कः पूज्यते? (अपने देश में किसकी पूजा होती है?)
उत्तर:
स्वदेशे राजा पूज्यते। (अपने देश में राजा की पूजा होती है।)

(घ) केषां बलं विद्या? (किसका बल विद्या होती है?)
उत्तर:
निर्बलानां बलं विद्या। (बलहीनों का बल विद्या होती है।)

Class 6 Sanskrit Surbhi Chapter 5 प्रश्न 3.
उचितं योजयत (उचित को जोडिए)
MP Board Class 6th Sanskrit Solutions Chapter 5 विद्या-महिमा 1
उत्तर:
(क) → 3
(ख) → 5
(ग) → 1
(घ) → 2
(ङ) → 4

Class 6 Sanskrit Chapter 5 Vidya Mahima प्रश्न 4.
रिक्तस्थानानि पूरयत (रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए)
(क) पात्रत्वाद् …………. , आप्नोति ………….. धर्मः।
(ख) पुस्तकस्था तु या ………..।
(ग) स्वदेशे ……… पूज्यते। ……. सर्वत्र पूज्यते।
(घ) …………. सर्वस्य भूषणम्।
उत्तर:
(क) धनम्, धनाद्;
(ख) विद्या परहस्तगतं धनम्
(ग) राजा, विद्वान्;
(घ) विद्याः।

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MP Board Class 6th Sanskrit Chapter 5 प्रश्न 5.
कोष्ठकात् चित्वा विलोमशब्दैः मेलयत (कोष्ठक से चुनकर विलोम शब्दों से मिलाओ)
(अ) (क) सुखम्
(ख) विदेशेषु
(ग) इहलो के
(घ) महाधनः
(ङ) सुन्दरः
(च) निर्बलः
(छ) विद्वान्
(ज) मित्रम्
(झ) कुलीनः
(ञ) सुशीलः।

(ब) (अकुलीनः, शत्रुः, निर्धनः, दुःखम्, कुरूपः, स्वदेशेषु, दुःशीलः, परलोके, सबलः, मूर्खः।)
उत्तर:
(क) सुखम् – दु:खम्
(ख) विदेशेषु – स्वदेशेषु
(ग) इहलोके – परलोके
(घ) महाधन: – निर्धनः
(ङ) सुन्दरः – कुरूंपः
(च) निर्बल: – सबलः
(छ) विद्वान् – मूर्खः
(ज) मित्रम् – शत्रुः
(झ) कुलीनः – अकुलीनः
(ञ) सुशील: – दुःशीलः।।

Surbhi Class 6 Chapter 5 प्रश्न 6.
उदाहरणानुगुणं अन्वयपूर्ति कुरुत (उदाहरण के अनुसार अन्वय की पूर्ति करो)
(क) कुरूपाणां …………. विद्या, …………. धनं (विद्या) तथा। निर्बलानां बलं …………. अतः ………… साधनीया।
(ख) विदेशेषु ……… धनं, व्यसनेषु मतिः………। परलोके ………….. धनं, ………… सर्वत्र वै धनम्।
उत्तर:
अन्वय-
(क) कुरूपाणां रूपं विद्या, निर्धनानां धनं (विद्या) तथा। निर्बलानां बलं विद्या अतः प्रयत्नेन साधनीया।
(ख) विदेशेषु विद्या धनं, व्यसनेषु मतिः धनम्। परलोके धर्म: धनं, शीलंः सर्वत्र वै धनम्।

Class 6th Sanskrit Chapter 5 Question Answer प्रश्न 7.
‘विद्या’ विषये संस्कृते पञ्च वाक्यानि लिखत। (‘विद्या’ विषय पर संस्कृत में पाँच वाक्यों लिखो।)
उत्तर:
‘विद्या’

  1. विद्याधनं सर्वधनं प्रधानमस्ति।
    विद्या धन सभी धनों में प्रधान होता है।
  2. विद्या एव मानवस्य भूषणमस्ति।
    विद्या ही मनुष्य का आभूषण है।
  3. विद्या तु सदा उपार्जनीया अस्ति।
    विद्या तो सदा ही प्राप्त करने योग्य होती है।
  4. विद्याविहीनः जनः पशुः भवति।
    विद्या से रहित मनुष्य पशु होता है।
  5. विद्या विनयम् ददाति।
    विद्या विनय देती है।

योग्यताविस्तारः
पाठस्थ श्लोकान् कण्ठस्थीकुरुत।
(पाठ में आये श्लोकों को कण्ठाग्र करो।)

‘विद्या’ इति शब्दमधिकृत्य अन्यश्लोकानाम् सङ्ग्रहणं शिक्षकस्य साहाय्येन कुरुत।
(‘विद्या’ शब्द पर आधारित अन्य श्लोकों का संग्रह शिक्षक की सहायता से करो।)
उत्तर:
(1) नक्षत्रभूषणो चन्द्रो, नारीणाम् भूषणं पतिः।
पृथिवीभूषणं राजा, विद्या सर्वस्य भूषणम्॥

(2) अपूर्वः कोऽपि कोशोऽयं विद्यते तव भारति।
व्ययतो वृद्धिमायाति क्षयमायाति संचयात्।।

(3) विद्या नाम नरस्य रूपमधिक,प्रच्छन्न गुप्तं धनम्।
विद्या भोगकरी यशः सुखकरी, विद्या गुरुणां गुरुः॥

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विद्या-महिमा हिन्दी अनुवाद

(1) विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति, धनाद् धर्मः ततः सुखम्॥

अनुवाद :
विद्या नम्रता देती है। नम्रता से पात्रता (योग्यता) आती है। पात्रता से धन प्राप्त होता है। धन से धर्म और धर्म से सुख प्राप्त होता है।

(2) विदेशेषु धनं विद्या, व्यसनेषु धनं मति।
परलोके धनं धर्मः, शीलं सर्वत्र वै धनम्॥

अनुवाद :
विदेश में विद्या ही धन है। विकारों में बुद्धि ही धन है। परलोक में धर्म ही धन है और शील तो सभी स्थानों पर धन है।

(3) सुन्दरोऽपि सुशीलोऽपि कुलीनोऽपि महाधनः।
शोभते न बिना विद्या, विद्या सर्वस्य भूषणम्॥

अनुवाद :
बिना विद्या के मनुष्य शोभायमान नहीं लगता, चाहे वह सुन्दर, सुशील, अच्छे कुल का एवं बहुत धनवान भी हो। अतः विद्या सबका भूषण है।

(4) विद्या रूपं कुरूपाणाम्, निर्धनानां धनं तथा।
निर्बलानां बलं विद्या, साधनीया प्रयत्नतः॥

अनुवाद :
कुरूपों का रूप विद्या होती है तथा निर्धनों का धन (विद्या) होती है। बलहीनों का बल विद्या ही होती है जो प्रयत्नपूर्वक प्राप्त की जा सकती है।

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(5) विद्वत्वं च नृपत्वं च, नैव तुल्यं कदाचन।
स्वदेशे पूज्यते राजा, विद्वान् सर्वत्र पूज्यते॥

अनुवाद :
विद्वान और राजा की कभी तुलना नहीं की जा सकती है। (क्योंकि) राजा की पूजा अपने देश में होती है (किन्तु) विद्वान सर्वत्र पूजा जाता है।

(6) अलसस्य कुतो विद्या, अविद्यस्य कुतो धनम्।
अधनस्य कुतो मित्रम्, अमित्रस्य कुतो सुखम्॥

अनुवाद :
आलसी को विद्या कहाँ? विद्याहीन के पास धन कहाँ? धनहीन के मित्र कहाँ और बिना मित्र वाले पुरुष को सुख कहाँ?

(7) पुस्तकस्था तु या विद्या, परहस्तगतम् धनम्।
कार्यकाले समुत्पन्ने न सा विद्या न तद् धनम्॥

अनुवाद :
पुस्तक में स्थित विद्या (अर्थात् बिना याद की हुई विद्या) और दूसरे के हाथ में गया हुआ धन। कार्य पड़ने पर (आवश्यकता होने पर) न तो वह विद्या काम आती है और न ही वह धन।

(8) किं कुलेन विशालेन, विद्याहीनस्य देहिनः।
अकुलीनोऽपि विद्यावान, देवैरपि सः पूज्यते॥

अनुवाद :
विशाल कुल में उत्पन्न होने से क्या, यदि मनुष्य विद्याहीन है (और) निम्न कुल में उत्पन्न होने पर भी जो विद्यावान है, देवता भी उसकी पूजा करते हैं।

विद्या-महिमा शब्दार्थाः

पुस्तकस्था = पुस्तक में लिखी हुई। परहस्तगतं = दूसरे के हाथ में गया हुआ। अकुलीनोऽपि = अच्छे कुल में जन्म लेने पर भी। देहिनः = शरीर में। ददाति = देती है। साधनीया = अर्जित करनी चाहिए। कदाचन = कभी भी। विद्याहीनस्य = विद्या से रहित। या = जो। पात्रत्वात् = योग्यता से। नैव = नहीं। कुरूपाणाम् = कुरूपों का। प्रयत्नतः = प्रयत्नपूर्वक। अविद्यस्य = विद्या रहित का। अमित्रस्य = मित्र रहित का। व्यसनेषु = विकारों में। शीलं = चरित्र। निर्बलानां = शक्तिहीनों का। महाधनः = बहुत धनी। अलसस्य = आलसी का। कुतो = कैसे। शोभते = सुशोभित होता है। विद्वत्वं = विद्वान। नृपत्व = राजा।

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