MP Board Class 8th Special Hindi Model Question Paper

MP Board Class 8th Special Hindi Model Question Paper

समय : 3 घण्टा
पूर्णांक : 100

1. सही विकल्प चयन कर लिखिए-
(अ) महेश्वर नगरी नदी के तट पर है
(क) नर्मदा,
(ख) चम्बल,
(ग) सोन,
(घ) बेतवा।
उत्तर-
(क) नर्मदा,

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(आ) सिकन्दर की छाती दहलती थी
(क) हिन्दुस्तान की तलवार से,
(ख) बिजली के गरजने से,
(ग) अपनी प्रजा से,
(घ) गीत-संगीत से।
उत्तर-
(क) हिन्दुस्तान की तलवार से,

(इ) ‘खेड़ा सत्याग्रह’ नाम पड़ा
(क) अंग्रेजों के विरुद्ध बखेड़ा करने से,
(ख) खेड़ा के किसानों के लगान के कारण,
(ग) अंग्रेजों को खड़ा करने के कारण,
(घ) अन्याय के विरोध में।
उत्तर-
(ख) खेड़ा के किसानों के लगान के कारण,

(ई) मन, वचन और काया से इन्द्रियों को अपने वेश में रखना कहलाता है
(क) अहिंसा,
(ख) अस्तेय,
(ग) ब्रह्मचर्य,
(घ) अपरिग्रह।
उत्तर-
(ग) ब्रह्मचर्य,

(उ) ‘सत्याग्रह’ शब्द का सन्धि विच्छेद है
(क) सत्य + ग्रह,
(ख) सत्य + आग्रह,
(ग) सत्या + ग्रह,
(घ) सत्याग + रह।
उत्तर-
(ख) सत्य + आग्रह।

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(अ) अधिक फूल खिलने के कारण पटना का नाम ……………………………………… भी था।
(आ)मुण्डा जनजाति में ‘सिंग’ का अर्थ है ………………………………………।
(इ) एक समय में सौ प्रकार की बातें सुनकर दोहराने वाले व्यक्ति ………………………………………” कहलाते हैं।
(ई) शान्ति निकेतन की स्थापना ……………………………………… ने की थी।
(उ) गुप्तवंश भारतीय इतिहास में ……………………………………… के नाम से। विख्यात है।
(ऊ) धनुरासन में शरीर की आकृति ……………………………………… के समान हो। जाती है।
(ए) ईश्वर में विश्वास करने वाला ………………………………………” कहलाता है।
उत्तर-
(अ) कुसुमपुर,
(आ) सूर्य,
(इ) शतावधानी,
(ई) रवीन्द्रनाथ टैगोर,
(उ) स्वर्णयुग,
(ऊ) धनुष,
(ए) आस्तिक।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए(अ) ‘गाँव’ में रहने वाले व्यक्ति के लिए एक शब्द लिखिए।
उत्तर-
ग्रामीण।

(आ) ‘विचार’ और ‘हस्तक्षेप’ शब्द के लिए आगत (विदेशी शब्द) लिखिए।
उत्तर-
विचार-ख्याल, हस्तक्षेप-दखल।

(इ) नारी तथा पुरुष शब्द में ‘त्व’ प्रत्यय जोड़कर नए शब्द लिखिए।
उत्तर-
नारी + त्व = नारीत्व; पुरुष + त्व = पुरुषत्व।

(ई) ‘नारी’ और ‘जल’ शब्दों में उचित विशेषण जोड़कर लिखिए।
उत्तर-
सुन्दर नारी; स्वच्छ जल।

(उ) उत्प्रेक्षा अलंकार का उदाहरण लिखिए।
उत्तर-
“सोहत ओढ़े पीतपट स्याम सलोने गात।
मनहु नीलमणि सैल पर, आतप परयौ प्रभात।।”

(ऊ) निम्नलिखित शब्दों के लिंग परिवर्तन कर लिखिएपण्डित, आत्मज, तरुणी, पत्नी।
उत्तर-
पण्डित-पण्डितानी; आत्मज-आत्मजा;
तरुणी-तरुण; पत्नी-पति।।

(ए) जुगुप्सा किस रस का स्थायी भाव है?
उत्तर-
जुगुप्सा वीभत्स रस का स्थायी भाव है।

(ऐ) मोहन जायेगा? इस सम्बन्ध में से यदि वाक्य प्रश्नवाचक बन जाए तो इस आरोह-अवरोह को क्या कहेंगे?
(i) बलाघात,
(ii) अनुतान,
(iii) मात्रा सन्तुलन।
उत्तर-
(i) अनुतान।

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4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 3 से 5 वाक्यों में दीजिए-

(अ) जब बहू ने दर्पण देखा तो वह व्याकुल हो गई?
उसके अनुभव अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर-
जब बीरबल की पत्नी (बहू) कामकाज से निवृत्त हो गई तो उसने सोचा कि वह अब देखेगी कि उसका पति अपने लिए शहर से क्या वस्तु लाया है। उस बहू ने सन्दूक खोला, तो दर्पण देखा। उसमें झाँकते ही, उसे अपनी आकृति दिखाई दी। आकृति देखकर उसे लगा कि उसका पति अपने लिए एक दूसरी सुन्दर-सी पत्नी लेकर आया है, जो उसी की तरह सजी-धजी है और एक जादू से छिपाकर रख ली है। वे मुझे बहुत प्यार करने का नाटक करते हैं परन्तु वे शहर से मेरी सौत लेकर आए हैं। उसने अपनी सास को जोर से आवाज देते हुए पुकारा और कहा कि हे अम्मा! देखो-ये (बीरबल उसका पति) उसकी
सौतन शहर से ले आये हैं।

(आ) बॉम्बे नैचुरल हिस्ट्री सोसाइटी में सालिम को कैसे अनुभव हुए?
उत्तर-
‘बॉम्बे नैचुरल हिस्ट्री सोसाइटी’ में सालिम अली ने पक्षियों के शरीरों में भूसा भरकर रखे गये तरह-तरह के पक्षियों को देखा। वह अचम्भे में रह गया। श्री मिलार्ड ने किसी भी भारतीय वयस्क को इतने उत्साह से भरा नहीं देखा जो पक्षियों के बारे में जानना चाहता हो। उसने सीखना शुरू कर दिया कि पक्षियों को किस तरह पहचाना जाता है। साथ ही उसने यह भी सीख लिया कि मरे हुए पक्षी के शरीर में भूसा भरकर किस तरह सुरक्षित रखा जा सकता है।

(इ) संगीत का सामाजिक महत्त्व कब और क्यों बढ़ जाता है?
उत्तर –
संगीत का वास्तविक महत्त्व तब होता है, जब संगीत की शास्त्रीयता साधना को महत्त्व देती है। संगीत की मिठास आत्मिक शान्ति देती है एवं जीवन को जीने की उमंग पैदा करती है। संगीत से सने गीतों को सुनकर आदमी अपने आप में थिरक उठता है। उसके हृदय में करुणा का भाव जाग उठता है और करुणा का भाव आँसुओं के रूप में बह निकलता है। इससे साधारण लोग प्रभावित हो उठते हैं। यही कारण है कि संगीत को सम्पूर्ण समाज महत्त्व देता है।

(ई) कारकों के चिह्न (परसर्ग) कौन-कौन से हैं?
उत्तर-
अध्याय 4 व्याकरण में शीर्षक 14 ‘कारक’ का अवलोकन करें।

(उ) “मोहन पढ़ने में चतुर है और मोहन गाना गाता है” को जोड़कर संयुक्त वाक्य बनाइए।
उत्तर-
मोहन गाना गाता है लेकिन (वह) पढ़ने में भी चतुर है।

(ऊ) ‘वसीयतनामे का रहस्य’ अथवा ‘याचक और दाता’ नामक कहानी में से किसी एक का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर-
“वसीयतनामे का रहस्य”
इस कहानी में गाँव के एक वयोवृद्ध किसान की न्यायप्रियता, दूरदर्शिता, ईमानदारी, निष्पक्षता और बुद्धिचातुर्य से परिचित कराया गया है। लोग शिक्षित होकर भी बुद्धिमान नहीं होते। उस ग्रामीण ने अपनी जायदाद को तीन पुत्रों में बाँट दिए जाने के लिए वसीयत लिखी। वस्तुतः वह चाहता था कि परिश्रमी और ईमानदार पुत्र ही उसकी वसीयतनामे के हकदार हों। राजा ने भी बड़ी चतुराई से उस समस्या का समाधान खोज निकाला। चार पुत्र होने पर जायदाद का विभाजन तीन में ही हो; इस पहेली को राजा ने प्रत्येक पुत्र से किए प्रश्नों के उत्तर के माध्यम से सुलझा दिया। तात्पर्य यह है कि बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान बुद्धि के कौशल से सम्भव है।’

अथवा

वृद्धा ने सेठजी के घर जाकर मोहन के माथे पर हाथ फेरा। मोहन ने हाथ को पहचान लिया; उसने अपनी आँखें तुरन्त खोल दी। कहने लगा, ‘माँ’, तुम आ गईं। वृद्धा कहने लगी, “हाँ बेटा, तुम्हें छोड़कर कहाँ जा सकती हूँ। उसने मोहन का सिर गोद में रखा, थपथपाया। मोहन की नींद आ गई। कुछ दिन बाद मोहन स्वस्थ हो गया। जो काम दवाइयाँ, डॉक्टर और हकीम नहीं कर सके, वह काम वृद्धा माँ की ममता ने कर दिखाया।”

1. अब वह वृद्धा माँ वापस लौटने लगी तो सेठजी ने उससे कहा कि वे मोहन के ही पास रुक जाएँ, लेकिन वे नहीं मानी। सेठजी हाँडी के रुपये न देने के लिए क्षमा माँगने लगे और वह हाँडी लौटाने लगे तो वृद्धा ने कहा कि यह तो मैंने मोहन के लिए जमा किये थे। उसी को दे देना।

वृद्धा ने सेठजी की धरोहर (मोहन) ईमानदारी से लौटा दी। अब वह उसे यहाँ छोड़कर अपनी लाठी का सहारा लेकर चलती हुई अपनी झोपड़ी में लौट गई। उसके नेत्रों से आँसू बह रहे थे, परन्तु यह आँसू फूलों के पराग से, ममता की महक से महक रहे थे। वृद्धा माँ का ममत्व सेठ बनारसीदास के धन से अधिक गरिमावान सिद्ध हुआ। इस तरह सेठजी याचक थे और वृद्धा माँ दाता के रूप में महान और उदारता की साक्षात् मूर्ति सिद्ध हुई।

(ए) पाषाण युग का मानव किस प्रकार का जीवन जीता था?
उत्तर-
पाषाण युग का मानव जंगलों, पर्वतों और नदी घाटियों में विचरण करता था। कन्दमूल, फल और पशुओं का शिकार कर अपना पेट भरता था तथा पहाड़ों की गुफाओं में रहता था।

(ए) प्राणायाम के लाभ बताइए।
उत्तर-
प्राणायाम के लाभ-

  • प्राणायाम से शरीर के सभी विकार दूर होते हैं।
  • इसमें प्राणशक्ति में वृद्धि होती है।
  • गले से सम्बन्धित रोग दूर होते हैं। स्वर मधुर बनता
  • थायरॉइड सम्बन्धी बीमारियाँ ठीक होती हैं।
  • आन्तरिक एवं मानसिक शान्ति मिलती है।
  • स्मृति बढ़ाने में सहायक है।
  • शरीर सुन्दर, सुडौल, शक्तिशाली एवं तेजस्वी बनता है।
  • शरीर में स्फूर्ति रहती है।
  • पाचन शक्ति में वृद्धि होती है।

(ओ) सत्याग्रह-आश्रमवासियों को किन नियमों का पालन करना पड़ता था?
उत्तर-
आश्रमवासियों को सादे वस्त्र और सादे भोजन से सन्तोष करना पड़ता था। भोजन के पदार्थों में मिर्च-मसाले नहीं डाले जाते थे, दूध बहुत कम दिया जाता, परन्तु फल और मेवे अधिक दिये जाते थे। आश्रमवासियों को छुट्टियाँ नहीं दी जाती थीं। उन्हें अपने हाथ से ही सारा काम करना पड़ता था। उनसे किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं ली जाती थी। जो अतिथि आते थे, उन्हें भी आश्रम के नियमों का पालन करना होता था।

(औ) निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए”मेरे स्वराज्य का ध्येय अपनी सभ्यता की विशेषता को अक्षुण्य बनाए रखना है। मैं बहुत-सी नई बातों को लेना चाहता हूँ, पर उन सबको भारतीयता का जामा पहनाना होगा। भारत ने पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त कर ली है। ऐसा तभी कहा जा सकेगा, जब जनता यह अनुभव करने लगेगी कि उसे अपनी उन्नति करने तथा रास्ते पर चलने की आजादी है।”

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प्रश्न-
(i) गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
(ii) स्वराज्य का ध्येय क्या है?
(ii) पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त कर ली है’, ऐसा कब कहा जा सकेगा?
उत्तर-
(i) स्वराज्य का ध्येय’ उपयुक्त शीर्षक है।
(ii) स्वराज्य का ध्येय है कि हम अपनी सभ्यता, अपनी संस्कृति को निरन्तर बनाए रखें। हम अपनी सभ्यता और संस्कृति में बाहर की बहुत-सी बातों को ग्रहण कर लेना तो चाहते हैं परन्तु उन्हें भारतीयता में बदलकर।
(iii) भारतवर्ष एक स्वतन्त्र देश है। इसने पूर्ण आजादी प्राप्त कर ली है।’ ऐसा तो तभी कहा जा सकेगा जब हम अपनी उन्नति करने में भी आजाद हों। साथ ही, हमें उन उपायों की भी जानकारी होनी चाहिए, जिन पर चलकर हम उन्नति कर सकें और अपनी आजादी की रक्षा कर सकें।

5. (अ) अपने प्रधानाध्यापक को साँची घूमने जाने के
लिए तीन दिवस के अवकाश हेतु आवेदन-पत्र लिखिए।
अथवा
अपनी माताजी को एक पत्र लिखकर शाला की
बालदिवस की गतिविधियों के बारे में बताइए।
उत्तर-
‘पत्र लेखन’ नामक अध्याय का अवलोकन करें।

(आ) निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए-
(1) गणतन्त्र दिवस,
(2) तुलसीदास,
(4) कम्प्यूटर,
(4) मेरा प्रिय शिक्षक।
उत्तर-
‘निबन्ध लेखन’ नामक अध्याय का अवलोकन करें।

(इ) गाँधी जी ने फिनिक्स आश्रम की स्थापना क्यों की?
उत्तर-
गाँधी जी रस्किन की पुस्तक (अपटू दिस लास्ट) में विशेष रुचि रखते थे। वे इसे एक उत्साहवर्धक एवं प्रभावशाली पुस्तक ठहराते थे। इस पुस्तक के सर्वोदयी विचार से प्रभावित होकर पुस्तक में वर्णित भावों एवं विचारों को मूर्त रूप देने के लिए डर्बन में सौ एकड़ भूमि लेकर फिनिक्स आश्रम की नींव डाली। इस प्रकार गाँधी जी पुस्तक में वर्णित विचारों को साकार रूप देने में सफल रहे।

6.
(अ) निम्नलिखित पद्यांशों में किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिएन इसका अर्थ हम पुरुषत्व का बलिदान कर देंगे। न इसका अर्थ हम नारीत्व का अपमान सह लेंगे। रहे इंसान चुप कैसे कि चरणाघात सहकर जब,
उमड़ उठती धरा पर धूल, जो लाचार सोई है।
उत्तर-
कवि यह बताते चलते हैं कि हम हिन्दुस्तानियों ने ही सदैव संसार को शान्ति का सन्देश दिया है तथा अहिंसा का उपदेश देकर मन, कर्म और वचन से सत्य का आचरण करने के लिए पूरे संसार को सलाह दी है। इसका यह अर्थ नहीं लगा लेना चाहिए कि हम अहिंसा का आचरण अपनाकर वीरता का त्याग कर देंगे और कायर बन जायेंगे और इसका यह अर्थ भी नहीं लगा लेना चाहिए कि हम नारीपन (स्त्रीत्व) के लिए किए गये अपमान को सह लेंगे। हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि धरती पर पैरों के नीचे दबी कुचली धूल भी पैरों की ठोकर खाने पर आकाश में उमड़कर चारों ओर छा जाती है। वह (स्त्री रूपी धूल) किसी वजह से अपनी लाचारी की दशा में अपनी शक्ति को पहचानती नहीं रही है। यह उसकी सुप्त अवस्था थी, अज्ञानता थी, उसकी अशिक्षा थी।

अथवा
पकड़ वारि की धार झूलता है मेरा मन, आओ रे सब मुझे घेरकर गाओ सावन। इन्द्रधनुष के झूले में झूलें मिल सब जन, फिर-फिर आए जीवन में सावन मन भावन॥
उत्तर-
प्रसंग-कवि कामना करता है कि सावन जीवन में बार-बार आये।

व्याख्या-कवि कहता है कि मेरा मन जल की धार को पकड़कर अनेक कल्पनाओं के झूले में झूलने लगता है। आप सब के सब सामूहिक रूप से मिलकर आओ। मुझे चारों ओर से – घेरकर खड़े हो जाओ तथा सावन के गीत गाओ। सभी लोग वर्षा ऋतु में आकाश में दिखने वाले इन्द्रधनुष के झूले में झूलें। इन्द्रधनुष। के अनेक रंगों की तरह अनेक कल्पनाओं में डूब जाओ। इस तरह मन को अच्छा लगने वाला (मन में अच्छे-अच्छे भाव पैदा करने वाला) सावन प्रत्येक प्राणी के मन में अनेक बार आता रहे, ऐसी मैं आशा करता हैं।

(आ) निम्नलिखित गद्यांशों में से किसी एक की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए। “ऋषि मुनियों और साधकों की हजारों वर्षों की तपस्या एवं परिश्रम का प्रतिफल है संगीत। कहा जाता है कि जिस। समाज में कला का स्थान नहीं होता, वह समाज भी प्राणहीन हो जाता है।”
उत्तर-
संगीत के विकास और उन्नति के लिए हमारे ऋषियों, मुनियों तथा संगीत कला की साधना करने वाले संगीतकारों ने तपस्या की। वे सभी एकचित्त होकर संगीत की साधना में लगे रहे। आज संगीत कला जिस मुकाम को प्राप्त हो गयी है, वह मुकाम उन सभी साधकों की तपस्या और उनकी। मेहनत का नतीजा है, परिणाम है। यह कहावत सत्य है कि वह समाज मरा हुआ (मृत) होता है जिसमें संगीत आदि अनेक कलाओं को महत्त्व नहीं दिया जाता। अतः समाज की जीवन्तता – के लिए आवश्यक ही नहीं अनिवार्य भी है कि समाज के लोगों को कला के महत्त्व को समझना चाहिए और इसके विकास
और उन्नति के लिए निरन्तर सहयोग देकर साधकों को उत्साहित। करना चाहिए।

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अथवा

“चाँद आता है तो चाँदी जैसी चमक उठती हैं, सूरज। आता है तो उस जैसी ही तप उठती हैं।”
उत्तर-
नदी का जल बड़े आकार वाली चट्टानों को डुबाता हुआ बहता है। जल के नीचे डूबी हुई चट्टानों के ऊपर छोटी-छोटी घास उग रही है। जाड़ा, गर्मी और बरसात के मौसम को निरन्तर सहती रहती हैं। इन चट्टानों को यदि काटने का प्रयास किया जाय, तो वे कट तो अवश्य जायेंगी परन्तु झुकती नहीं हैं। ये चट्टानें लगातार ही आगे तक बढ़ती जाती हैं अर्थात् बहुत दूरी तक ये चट्टानें नदी के अथाह तल के नीचे और किनारों पर लगातार अपने मस्तक को उठाये हुए आगे तक बहते जल के साथ बढ़ती हुई जाती हैं। उनकी पवित्रता धीमी नहीं होती, मन्द नहीं पड़ती। चन्द्रमा की चाँदनी में चाँदी की तरह ही चमचमाती रहती हैं। सूर्य के उदय होते ही, उसके तेज से एकदम तपने लगती हैं, परन्तु जब वर्षा ऋतु का आगमन होता है, तब यहाँ घना अन्धकार छा जाता है, फिर भी इनकी धवलता लिए हुए चमक, निर्मलता, उनकी पवित्रता समाप्त नहीं होती। यह वास्तव में तपस्या ही है। अन्य कुछ भी नहीं।

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.2

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.2

प्रश्न 1.
एक नगर के दिए हुए मानचित्र को देखिए। निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

(a) इस मानचित्र में इस प्रकार रंग भरिए –
नीला – जल; लाल – फायर-स्टेशन; नारंगी – लाइब्रेरी; पीला – स्कूल; हरा – पार्क; गुलाबी – कॉलेज बैंगनी – अस्पताल; भूरा – कब्रिस्तान।
(b) सड़क C और नेहरू रोड के प्रतिच्छेदन पर एक हरा ‘X’ तथा गाँधी रोड़ और सड़क A के प्रतिच्छेदन पर एक हरा ‘Y’ खींचिए।
(c) लाइब्रेरी से बस डिपो तक एक छोटा सड़क मार्ग लाल रंग से खींचिए।
(d) कौन अधिक पूर्व में है-सिटी पार्क या बाज़ार?
(e) कौन अधिक दक्षिण में है – प्राइमरी स्कूल या सीनियर सेकण्डरी स्कूल?

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.2 img-1
हल:
(a), (b) और (c) के लिए विद्यार्थी अभीष्ट मानचित्र में दिये गये निर्देशानुसार स्वयं रंग भरें। (d) ‘सिटी पार्क’ अधिक पूर्व में है। (e) सीनियर सेकण्डरी स्कूल अधिक दक्षिण में है।

प्रश्न 2.
उचित पैमाने और विभिन्न वस्तुओं के लिए संकेतों का प्रयोग करते हुए, अपनी कक्षा के कमरे का एक मानचित्र खींचिए।
हल:
कक्षा के कमरे का मानचित्र –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.2 img-2

प्रश्न 3.
उचित पैमाने और विभिन्न विशेषताओं (वस्तुओ) जैसे खेल का मैदान, मुख्य भवन, बगीचा इत्यादि के लिए संकेतों का प्रयोग करते हुए, अपने विद्यालय परिसर (compound) का एक मानचित्र खींचिए।
हल:
विद्यालय परिसर का मानचित्र –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.2 img-3

प्रश्न 4.
अपने मित्र के मार्ग दर्शन के लिए एक मानचित्र खींचिए ताकि वह आपके घर बिना किसी कठिनाई के पहुँच जाए।
हल:
\(\frac{1}{2}\) किमी.
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.2 img-4
जानकारी के लिए निर्देश –

  1. सिटी सेण्टर से अकबर रोड पर आइए।
  2. अकबर पर आगे बढ़िए, लाइब्रेरी तक आइए।
  3. लाइब्रेरी के सामने नेहरू रोड पर आइए।
  4. कुछ कदम आगे आइए, दाहिनी ओर पुलिस थाना आयेगा।
  5. पुलिस थाना से आगे आइए, कुछ दूरी चलकर दाहिने मुड़िए।
  6. आगे प्राइमरी स्कूल तक आइए।
  7. प्राइमरी स्कूल के सामने चलिए।
  8. हरी मिष्ठान से आगे बढ़िए और दाहिनी ओर मुड़िए।
  9. फायर स्टेशन से आगे सीधी सड़क पर चलिए।
  10. लगभग आधा किलोमीटर चलकर आप मेरे घर पर होंगे।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 173

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फलक, किनारे और शीर्ष

पहेली:
मेरा कोई शीर्ष नहीं है। मेरा कोई सपाट फलक नहीं हैं। मैं कौन हूँ?
उत्तर:
किनारा।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 175

इन्हें कीजिए (क्रमांक 10.4)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित बहुफलकों के लिए फलकों (faces), किनारों (edges) और शीर्षों (vertices) की संख्याओं को सारणीबद्ध कीजिए (यहाँ Vशीर्षों की संख्या, F फलकों की संख्या तथा E किनारों की संख्या प्रदर्शित करता है)।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.2 img-5
आप अन्तिम दो स्तम्भों से क्या निष्कर्ष निकालते हैं? क्या प्रत्येक स्थिति में आप F + V = E + 2, अर्थात् F + V – E = 2 प्राप्त करते हैं? यह सम्बन्ध ऑयलर सूत्र (Euler’s Formula) कहलाता है। वास्तव में, यह सूत्र प्रत्येक बहुफलक के लिए सत्य है।
हल:
यहाँ, V- शीर्षों की संख्या, F – फलकों की संख्या तथा E किनारों की संख्या है।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.2 img-6
अन्तिम दो स्तम्भों से यह निष्कर्ष निकलता है कि F + V = E + 2,
अर्थात् F + V – E = 2
यह सूत्र ऑयलर सूत्र कहलाता है जो प्रत्येक बहुलक के लिए सत्य है।

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सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए

प्रश्न 1.
यदि किसी ठोस में से कोई टुकड़ा काट दिया जाए, तो F, V और E में क्या परिवर्तन होता है ? (प्रारम्भ करने के लिए, एक प्लास्टिसीन का घन लीजिए तथा उसका एक कोना काटकर इसकी खोज कीजिए।)
हल:
माना कि ABCDEFGH एक प्लास्टिसीन का घन है। इस घन में से एक टुकड़ा XYZ एक कोने से काटकर अलग किया गया है। यहाँ, X, Y तथा Z सह किनारों क्रमशः FE, FG तथा FB के बिन्दु हैं।
स्थिति 1:
घन ABCDEFGH से,
फलकों की संख्या F = 6
शीर्षों की संख्या V = 8
किनारों की संख्या E= 12
अब – F + V = 6 + 8 = 14
= 14 + 2 = E + 2
अतः यहाँ ऑयलर सूत्र का सत्यापन होता है।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.2 img-7
स्थिति 2:
जब कि घन से एक टुकड़ा समतल XYZ द्वारा काट दिया जाता है –
फलकों की संख्या, F = 7
शीर्षों की संख्या, V = 10
किनारों की संख्या, E= 15
अब, F + V = 7 + 10 = 17
= 15 + 2 = E + 2
अतः, यहाँ ऑयलर सूत्र का सत्यापन होता है।

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MP Board Class 8th Special Hindi अपठित गद्यांश

MP Board Class 8th Special Hindi अपठित गद्यांश(Apathit Gadyansh)

निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(1) “मेरे स्वराज्य का ध्येय अपनी सभ्यता को अक्षुण्य बनाए रखना है। मैं बहुत-सी नई बातों को लेना चाहता हूँ, पर उन सबको भारतीयता का जामा पहनाना होगा। भारत ने पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त कर ली है। ऐसा तभी कहा जा सकेगा, जब जनता यह अनुभव करने लगेगी कि उसे अपनी उन्नति करने तथा रास्ते पर चलने की आजादी है।”

प्रश्न-
(i) पंक्तियों का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
(ii) स्वराज्य का ध्येय क्या है?
(iii) ‘पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त कर ली है’, ऐसा कब कहा जा सकेगा?
उत्तर-
(i) स्वराज्य का ध्येय’ उपयुक्त शीर्षक है।
(ii) स्वराज्य का ध्येय है कि हम अपनी सभ्यता, अपनी संस्कृति को निरन्तर बनाए रखें। हम अपनी सभ्यता और संस्कृति में बाहर की बहुत-सी बातों को ग्रहण कर लेना तो चाहते हैं परन्तु उन्हें भारतीयता में बदलकर।
(iii) भारतवर्ष एक स्वतन्त्र देश है। ‘इसने पूर्ण आजादी प्राप्त कर ली है।’ ऐसा तो तभी कहा जा सकेगा जब हम अपनी उन्नति करने में भी आजाद हों। साथ ही, हमें उन उपायों की भी जानकारी होनी चाहिए, जिन पर चलकर हम उन्नति कर सकें और अपनी आजादी की रक्षा कर सकें।

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(2) राष्ट्रीय एकता के अर्थ की विशदता उसकी। गम्भीरता को समझने के लिए सम्पूर्ण भारत की आर्थिक,। सामाजिक, राजनैतिक एवं वैचारिक समानता और एकता की भावभूमि को समझना होगा। हमारे विश्वास, पूजा-पाठ की विधियाँ, खान-पान, रहन-सहन तथा वेशभूषा में अन्तर हो सकता है लेकिन भारतवर्ष की राष्ट्रीय एवं प्रभुसत्ता। सम्बन्धी स्तर पर प्रत्येक नागरिक के एकमत होने की बात। महत्त्व रखती है। यही तो वह हस्ती है जो पराधीनता में भी स्वाधीनता की ज्वाला धधकती रही। प्रत्येक भारतीय के। हृदय में आज स्वाधीन भारत के एकत्व का आधार उसकी अनेकता की शिला है जिसकी गहरी नींव पड़ी है।

प्रश्न-
(i) पंक्तियों का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
(ii) राष्ट्रीय एकता के लिए किसका समझना जरूरी
(iii) ‘स्वाधीन भारत के एकत्व का आधार’ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(i) उपयुक्त शीर्षक है ‘राष्ट्रीय एकता’।
(ii) राष्ट्रीय एकता के लिए सम्पूर्ण भारत की आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक एवं वैचारिक समानता एवं एकता की भावभूमि को समझना जरूरी है।
(iii) स्वाधीन भारत के एकत्व का आधार उसकी अनेकता की शिला है जिसकी गहरी नींव पड़ी हुई है। यहाँ के नागरिक वेशभूषा में अन्तर कर सकते हैं लेकिन वे भारत की एकता और प्रभुसत्ता के स्तर पर एकमत ही रहते हैं।

(3) किसी भी समाज की प्रगति का मापदण्ड उस समाज द्वारा दी गई स्त्रियों की पद-मर्यादा है, क्योंकि स्त्रियाँ प्रत्येक सामाजिक संगठन का आधार और संस्कृति की स्त्रोत मानी जाती हैं। इसलिए कहा जाता है कि नारी शक्ति का अपार भण्डार है। नारी के वास्तविक महत्त्व को पारिवारिक सन्दर्भ में समझा जा सकता है-नारी परिवार की नींव है, परिवार समुदाय की नींव है और समुदाय राष्ट्र की। यह आज की ही सच्चाई नहीं है, यह तो आदिकालीन सच्चाई है, क्योंकि प्रसिद्ध विद्वान रायडन ने कहा था-स्त्रियों ने ही प्रथम सभ्यता की नींव डाली और उन्होंने ही जंगलों में मारे-मारे, भटकते-फिरते पुरुषों का हाथ पकड़कर उन्हें स्थिर जीवन दिया और ‘घर’ में बसाया।

प्रश्न-
(i) पंक्तियों का उपयुक्त शीर्षक दीजिए। .
(ii) नारी के महत्त्व को किस सन्दर्भ में समझा जा सकता है?
(ii) प्रसिद्ध विद्वान रायडन के कथन का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
(i) स्त्रियों की पद-मर्यादा’ उपयुक्त शीर्षक है।
(ii) नारी के महत्त्व को पारिवारिक सन्दर्भ में समझा जा सकता है, परिवार समुदाय की नींव है और समुदाय राष्ट्र की।
(iii) प्रसिद्ध विद्वान रायडन का कथन है-“स्त्रियों ने ही प्रथम सभ्यता की नींव डाली और उन्होंने ही जंगलों में मारे-मारे, भटकते-फिरते पुरुषों का हाथ पकड़कर उन्हें स्थिर जीवन दिया और ‘घर’ में बसाया।”

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(4) भारतीय जनता का अधिकांश भाग गाँवों में बसता है। उनका मुख्य उद्योग कृषि है और कृषि कार्य भारतीय जीवन में और भारतीय संस्कृति में सर्वोपरि, महत्त्वपूर्ण और श्रेष्ठ कहा गया है। कृषि कार्य को आध्यात्म और समन्वित श्रेष्ठ स्वरूप में उपस्थित किया गया है, परन्तु आज के वैज्ञानिक युग में कृषि कर्म के महत्त्व को गिरा दिया है और नौकरी को प्राथमिकता दी जा रही है लेकिन अत्यन्त दुःख की बात तो यह है कि कृषक स्वयं ही अपने कर्म को निकृष्ट और निम्नकोटि का मानने लगा है।

प्रश्न-
(i) पंक्तियों का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
(ii) कृषि कार्य के सन्दर्भ में क्या कहा गया है?
(iii) कृषि कर्म के प्रति कृषक की क्या सोच है?
उत्तर-
(i) इन पंक्तियों का उपयुक्त शीर्षक है-‘मुख्य उद्योग कृषि’।
(ii) कृषि कार्य के सन्दर्भ में कहा गया है कि भारतीय जीवन में तथा भारतीय संस्कृति में कृषि कार्य सर्वोपरि है और महत्त्वपूर्ण है। कृषि कार्य अध्यात्म और श्रम से संयुक्त होने से श्रेष्ठ है।
(iii) आज विज्ञान का युग है। किसान ने ही कृषि कर्म के महत्व को बहुत गिरा दिया है। उसने नौकरी को प्राथमिकता दी है। यह निन्दनीय भी है कि किसान ने ही अपने कर्म को निकृष्ट और पतित बना दिया है।

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MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti लेखकों और कवियों का जीवन परिचय

MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions लेखकों और कवियों का जीवन परिचय

कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’

जीवन परिचय-कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जन्म उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबन्द नगर में सन् 1906 ई. में हुआ था। आपके पिता रामदत्त मिश्र पूजा-पाठ व पुरोहिताई से अपनी जीविका प्राप्त करते थे। आपने स्वाध्याय से ही संस्कृत, अंग्रेजी आदि भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया। स्वतन्त्रता आन्दोलन में सक्रिय भाग लेने के कारण आपको अनेक बार कारावास का दण्ड भोगना पड़ा। ‘प्रभाकर’ जी एक ख्याति प्राप्त पत्रकार थे। पत्रकारिता के क्षेत्र में आपने महान् मानवीय आदर्शों की स्थापना की। मानव कल्याण के प्रति समर्पित साहित्यकार के रूप में आपने युगीन परिस्थितियों और समस्याओं का सजीव चित्रण अपनी कृतियों में चित्रित किया है।

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भाषा-शैली-‘प्रभाकर’ जी की भाषा तत्सम प्रधान शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली है। सुबोधता, माधुर्यमय, स्पष्टता, मुहावरों और कहावतों के प्रयोग से भाषा सशक्त हो गई है।

‘प्रभाकर’ जी की शैली में भावात्मकता, वर्णनात्मकता, नाटकीयता का गुण मिलता है।

प्रमुख कृतियाँ-पत्रकारिता और साहित्यिक क्षेत्र में आपने रेखाचित्र, संस्मरण, निबन्ध और रिपोर्ताज आदि विधाओं पर अपनी कलम का प्रभाव दिखाया। ‘ज्ञानोदय’, ‘नया जीवन’, ‘विकास’, पत्रिकाओं का सम्पादन करके पत्रकारिता को काफी ऊँचाई प्रदान की। ‘जिन्दगी मुस्कराई’, ‘माटी हो गई फूल’ ‘आकाश के तारे’, ‘धरती के फूल’, ‘दीप जले शंख बजे’ आपकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।

पं. माखन लाल चतुर्वेदी

जीवन परिचय-पं. माखन लाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल, सन् 1889 ई. को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के 5 बाबई ग्राम में हुआ था। इनके पिता पं. नन्दलाल चतुर्वेदी गाँव के प्राइमरी स्कूल में अध्यापक थे। इन्होंने घर पर ही संस्कृत, बंगला, गुजराती और अंग्रेजी भाषा का अध्ययन किया। पन्द्रह वर्ष की। उम्र में ही इनका विवाह हो गया था। इन्होंने आठ रुपये मासिक पर अध्यापन कार्य किया। इन्होंने राष्ट्रीय आन्दोलनों में भाग लिया और इन्हें जेल यात्राएँ भी करनी पड़ी। पं. माखन लाल चतुर्वेदी को सन् 1943 ई. में हिन्दी साहित्य सम्मेलन का अध्यक्ष बनाया गया। इनका उद्देश्य साहित्य सृजन और देश सेवा ही रहा। इसके लिए भारत सरकार ने इन्हें पद्मभूषण और सागर विश्वविद्यालय ने डी. लिट् की मानद उपाधियाँ प्रदान की। मध्य प्रदेश शासन ने। 7500 रुपये की भेंट तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। 80 वर्ष की। उम्र में 30 जनवरी, सन् 1968 ई. को उनका देहावसान हो गया।

भाषा-शैली-इनकी भाषा शुद्ध मजी हुई खड़ी बोली है।

जहाँ-तहाँ उर्दू के शब्दों का प्रयोग किया है। उनकी शैली मुक्तक। प्रधान है। उसमें छायावाद का पुट है।

प्रमुख कृतियाँ-

  1. हिम किरीटनी, हिम तरंगिनी, माता, युगचारण, समर्पण, वेणु लो गूंजे धरा (काव्यसंग्रह)।
  2. साहित्य देवता (गद्यकाव्य),
  3. चिन्तक की लाचारी, आत्मदीक्षा (भाषा संग्रह),
  4. अमीर इरादे, गरीब इरादे (निबन्ध संग्रह),
  5. नागार्जुन युद्ध (नाटक),
  6. वनवासी, कला का अनुवाद (कहानी संग्रह),
  7. प्रभा, कर्मवीर (सम्पादन)।

गुणाकर मुले

  • जन्म स्थान-महाराष्ट्र के अमरावती जिले का सिन्दी बुजरुक गाँव।
  • जन्म काल-सन् 1955 ई.।
  • शिक्षा-इलाहाबाद में उच्च शिक्षा।
  • कार्यक्षेत्र-स्वतन्त्र पत्रकारिता। विज्ञान में जटिल विषयों। को रोचक ढंग से प्रस्तुत करना।

डॉ. परशुराम शुक्ल

  • जन्म स्थान-कानपुर जिले का मैबूल नामक ग्राम।
  • जन्म काल-6 जून, सन् 1947 ई.।
  • लेखन विषय-शिशुगीत, बाल कविताएँ, बाल एकांकी तथा बाल उपयोगी
  • ज्ञान-विज्ञान से सम्बन्धित आलेख।
  • कृतियाँ-वृक्ष-कथा, मास्टर दीनदयाल, विश्व जलचर कोश तथा ज्ञान-विज्ञान कोश।

विष्णु प्रभाकर

  • जन्म स्थान-ग्राम मीरनपुर, जिला-मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)।
  • जन्म काल-सन् 1912 ई.।
  • विधाएँ-कहानी, उपन्यास, नाटक, एकांकी, रिपोर्ताज।
  • कृतियाँ-उपन्यास-‘ढलती रात’, ‘स्वप्नमयी’।
  • कहानी संग्रह-‘आदि और अन्त’, ‘संघर्ष के बाद’।
  • एकांकी संग्रह-‘डॉक्टर’, ‘प्रकाश’, ‘परछाइयाँ’।

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डॉ. बरसाने लाल चतुर्वेदी

जीवन परिचय-डॉ. बरसाने लाल चतुर्वेदी व्यंग्य और हास्य के प्रमुख हस्ताक्षर हैं। श्री चतुर्वेदी राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में ख्याति प्राप्त कवि हैं। ऊर्जावान् कवि डॉ. चतुर्वेदी ने लगभग 40 ग्रन्थों की रचना की है। गद्य तथा पद्य दोनों में आपका बराबर अधिकार है। डॉ. चतुर्वेदी को हास्य व्यंग्य लेखन के लिए ठिठोली ‘चकल्लम’, ‘मानव बिन्दु’ मुख्य विषय हैं। आपको भारत सरकार ने पद्मश्री से अलंकृत किया है।

सूरदास

जीवन परिचय-कृष्ण भक्त सूरदास का जन्म मथुरा-आगरा सड़क के किनारे बसे रुनकता गाँव में सन् 1478 ई. में हुआ था। ये जन्मान्ध थे। संगीत प्रतिभा जन्म से ही थी। गऊघाट पर रहकर ईश्वर भजन करते थे। यहाँ से महाप्रभु बल्लभाचार्य की प्रेरणा पाकर रंगनाथ जी के मन्दिर में आ गए और श्रीकृष्ण की लीलाओं का गान पदों के माध्यम से करने लगे।
सन् 1582 ई. में इनका निधन हो गया। इस तरह इन्होंने 104 वर्ष का यशस्वी जीवन प्राप्त किया।
कृतियाँ-सूर-सागर, सूरसारावली तथा साहित्य लहरी इनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं।

रस-सूर के काव्य में वात्सल्य एवं शृंगार रस का अपूर्व प्रयोग हुआ है।
भाषा-सूर की भाषा ब्रजभाषा है। कहावतों और लोकोक्तियों के प्रयोग से भाषा सजीव हो उठी है। भाषा की मधुरता सम्पूर्ण काव्य में व्याप्त है।

तुलसीदास

जीवन परिचय-रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि तुलसी का जन्म सन् 1532 ई. में बाँदा जिले के राजापुर गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्माराम और माता का नाम हुलसी था। इनके गुरु नरहरिदास थे। गुरु की कृपा से इन्हें भक्ति मार्ग मिला। सन् 1623 ई. में 94 वर्ष की उम्र में इनका निधन हो गया।

कृतियाँ-रामचरितमानस, विनय-पत्रिका, कवितावली, गीतावली, बरवै-रामायण आदि प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।। रस-सभी नव-रसों का प्रयोग तुलसी ने अपने काव्य में किया है।

भाषा-तुलसी ने अपने काव्य में ब्रज और अवधी भाषा का। प्रयोग किया है। भाषा संस्कृतनिष्ठ परिमार्जित तथा श्रुतिमाधुर्य गुण प्रधान है।

मीराबाई

जीवन परिचय-मीरा का जन्म सन् 1498 ई. में राजस्थान के चौकड़ी (मेड़ता), जोधपुर में हुआ था। मीरा पर अपने पितामह दूदाजी का प्रभाव था। वे वैष्णव भक्त थीं। मीरा का। विवाह उदयपुर के राणा साँगा के पुत्र भोजराज के साथ हुआ था, परन्तु भोजराज की असमय मृत्यु हो गई। मीरा ने अपना मन। संसार के माया-मोह से हटा लिया और वे श्रीकृष्ण के रंग में रंग गईं। सन् 1546 ई. में उनका निधन हो गया।।

कृतियाँ-‘नरसी जी का मायरा’, ‘गीत गोविन्द की टीका’, ‘राग गोविन्द’, ‘राग सोरठा के पद’ प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।

रस-मीरा के काव्य में शान्त और श्रृंगार रस का प्रयोग हुआ है।

भाषा-मीरा की कविता में राजस्थानी संस्कारित ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ है।

सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’

जीवन परिचय-निराला जी का जन्म बंगाल के मेदिनीपुर में सन् 1897 ई. में हुआ था। आपके पिता पं. रामसहाय त्रिपाठी उन्नाव जिले के ‘गढाकोला’ गाँव के रहने वाले थे। आपका कार्यक्षेत्र प्रमुख रूप से उत्तर प्रदेश ही रहा है। आपकी रचनाओं में प्रेम, सौन्दर्य, उल्लास, ओज और भक्ति के स्वर हैं। हिन्दी के छायावादी कवियों में आप निराले ही हैं। हिन्दी कविता को मुक्त छन्द आपकी देन है। आपका निधन 15 अक्टूबर, सन् 1961 ई. को हो गया।

कृतियाँ-

  1. काव्य-अनामिका, परिमल, गीतिका, तुलसीदास, अपरा, अणिमा, बेला, नये पत्ते, कुकुरमुत्ता।
  2. उपन्यास-अप्सरा, अलका, प्रभावती, निरूपमा।
  3. कहानी-लिली, सखी, चतुरी, चमार, सुकुल की बीबी।
  4. हास्य-व्यंग्य-कुल्लीभाट, बिल्लेसुर बकरिहा।
  5. समालोचना-रवीन्द्र कविता कला आदि। रस-शृंगार, करुण, शान्त, वीर और रौद्र रसों का प्रयोग। भाषा-संस्कृत गर्भित खड़ी बोली।

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शिवमंगल सिंह ‘सुमन’

जीवन परिचय-शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ का जन्म सन् 1916 ई. बसन्त पंचमी को झगरपुर, जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश में। हुआ था। आपकी आधी शिक्षा मध्य भारत में हुई थी। ग्वालियर के महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज में व्याख्याता के पद पर उनकी नियुक्ति हुई। उज्जैन के माधव कॉलेज में वे प्राचार्य रहे। वे। विक्रम विश्वविद्यालय के बरसों तक कुलपति के रूप में कार्य करते रहे। सुमन जी हिन्दी के अग्रणी कवियों में माने जाते

कृतियाँ-‘हिल्लोल’, ‘जीवन के गान’, ‘प्रलय सृजन’, ‘विश्वास बढ़ता ही गया’, ‘आँखें भरी नहीं’, ‘विन्ध्य-हिमाचल’, “माटी की बारात’। ‘माटी की बारात’ पर आपको साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत किया गया है।

रस-करुण, वीर और शान्त रस की अभिव्यक्ति।
भाषा-परिमार्जित लालित्य प्रधान खड़ी बोली।

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MP Board Class 8th Sanskrit अनुवाद-रचना

MP Board Class 8th Sanskrit अनुवाद-रचना

एक भाषा को दूसरी भाषा में बदलने का नाम अनुवाद है। संस्कृत में शब्दों के रखने का कोई क्रम नहीं है। वाक्य का कोई भी शब्द कहीं भी रखा जा सकता है; जैसे

रामः विद्यालयं गच्छति।
या
विद्यालयं रामः गच्छति। इत्यादि

अनुवाद करने के लिए हमें विभक्ति, कारक, वचन, पुरुष, लिंग, शब्द रूप, धातु रूप का ज्ञान होना आवश्यक है। नीचे सरलता के लिए कारक और उनके चिह्न दिये जा रहे हैं-
MP Board Class 8th Sanskrit अनुवाद-रचना 1

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पुरुष

कहने वाले, सुनने वाले या जिसके विषय में बात की जाती है, उस संज्ञा या सर्वनाम को पुरुष कहते हैं। पुरुष तीन प्रकार के होते हैं-
(क) अन्य पुरुष या प्रथम पुरुष-जिसके विषय में बात की जाये उसे अन्य पुरुष कहते हैं। जैसे-रामः, सः, सा, तत्, किम्, बालक, बालिका इत्यादि।
(ख) मध्यम पुरुष-जिससे प्रत्यक्ष बात की जाती है उसे मध्यम पुरुष कहते हैं। जैसे-त्वम् (तुम्), युवाम् (तुम दोनों), यूयम् (तुम सब)।
(ग) उत्तम पुरुष-जो बात को कहता है उसके लिए उत्तम पुरुष का प्रयोग होता है। जैसे-अहम् (मैं), आवाम् (हम दोनों), वयम् (हम सब)।

लिङ्ग

संस्कृत में लिंग के तीन प्रकार होते हैं-
(क) पुल्लिग-रामः, बालकः, हरिः, गुरुः, सः इत्यादि।
(ख) स्त्रीलिंग-सीता, बालिका, सा, माला, रमा इत्यादि।
(ग) नपुंसकलिंग-फलम्, पुस्तकम्, वस्त्रम्, जलम्, मित्रम् इत्यादि।

वचन

प्रत्येक विभक्ति में तीन वचन होते हैं
(क) एकवचन :
एक व्यक्ति या वस्तु के लिए एक वचन का प्रयोग होता है; जैसे बालकः (एक बालक), रामः (राम), बालिका (एक लड़की) इत्यादि।
(ख) द्विवचन :
दो व्यक्ति या वस्तुओं के लिए द्विवचन का प्रयोग होता है; जैसे बालकौ (दो बालक), बालिके (दो लड़कियाँ), पुस्तके (दो पुस्तकें) इत्यादि।
(ग) बहुवचन :
तीन या तीन से अधिक व्यक्ति या वस्तुओं के लिए बहुवचन का प्रयोग होता है; जैसे-बालका (बहुत से बच्चे), बालिकाः (लड़कियाँ), पुस्तकानि (पुस्तकें) इत्यादि।

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अभ्यास 1.
लट्लकार (वर्तमानकाल)
MP Board Class 8th Sanskrit अनुवाद-रचना 2

अभ्यास 2.
लट्लकार (वर्तमान काल)
MP Board Class 8th Sanskrit अनुवाद-रचना 3

अभ्यास 3.
लङ्लकार (भूतकाल)
MP Board Class 8th Sanskrit अनुवाद-रचना 4

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अभ्यासः 4.
लट्लकार (भविष्यकाल)
MP Board Class 8th Sanskrit अनुवाद-रचना 5
अभ्यास 5.
लोट्लकार (आज्ञार्थ)
MP Board Class 8th Sanskrit अनुवाद-रचना 6

अभ्यास 6.
विधिलिङ्ग लकार (चाहिए अर्थ में)
MP Board Class 8th Sanskrit अनुवाद-रचना 7

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MP Board Class 8th Sanskrit पत्र-लेखनम्

MP Board Class 8th Sanskrit पत्र-लेखनम्

1. अवकाशार्थं प्रार्थनापत्रम्
(अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र)

सेवायाम्
श्रीमन्तः प्रधानाचार्यमहोदयाः
राजकीयः विद्यालयः
भोपालनगरम्

महोदयाः!
सविनयं निवेदनम् अस्ति यत् गतगुरुवासरतः अहं ज्वरेण अतीव पीडितोऽस्मि। एतेन कारणेन विद्यालयम् आगन्तुं न शक्नोमि। अत एव दिनत्रयस्य अवकाशार्थं भवन्तं प्रार्थये।
दिनाङ्क : १/०८/२००७

भवताम् आज्ञानुवर्ती शिष्यः
संजय शर्मा
कक्षा अष्टम्

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2. अनुजं प्रति पत्रम्
(छोटे भाई को पत्र)

इन्दौरनगरतः
दिनाङ्क : ५-१०-२००७

प्रिय रमेशः!
चिरंजीव!
आवयोः माता स्वपत्रेण सूचयति यत् तव मनः अध्ययने पूर्ववत् न भवति। प्रायेण त्वं क्रीडने एव संलग्नः भवति। इदं तु अशोभनम् अस्ति। अयं तव जीवनस्य निर्माणकालः। अध्ययनमेव तव जीवनम् उन्नेष्यति।

शुभेच्छुः
राजेशः

3. शुल्क मुक्तये प्रार्थना-पत्रम्
(शुल्क मुक्ति के लिए प्रार्थना-पत्र)

सेवायाम्
श्रीमन्तः प्रधानाचार्यमहोदयाः
राजकीयः विद्यालयः
भोपालनगरम्

मान्याः!
अहम् भवतां विद्यालये अष्टकक्षायाम् अध्ययनं करोमि। मम। पिता एकः साधारणतः कर्मकरः अस्ति। तस्य श्रमेण परिवारस्य पालनमपि कठिनम् अस्ति। अतः अहम् शिक्षणशुल्कं दातुम् असमर्थोऽस्मि। निवेदनम् अस्ति यत् शुल्कात् मुक्तिं प्रदाय मयि कृपां करिष्यन्ति भवन्तः।
दिनाङ्क : १०/०७/२००७

भवताम् आज्ञाकारी शिष्यः
मनोजः
कक्षा-अष्टम्

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.1

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.1

प्रश्न 1.
दिए हुए प्रत्येक ठोस के लिए, दो दृश्य दिए गए हैं। प्रत्येक ठोस के लिए संगत, ऊपर से दृश्य और सामने से दृश्य का मिलान कीजिए। इनमें से एक आपके लिए किया गया है।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.1 img-1
उत्तर:

(a) → (iii) सामने से → (iv) ऊपर से
(b) → (i) सामने से, (v) ऊपर से
(c) → (iv) सामने से → (ii) ऊपर से
(d) → (v) सामने से → (iii) ऊपर से
(e) → (ii) सामने से → (i) ऊपर से।

प्रश्न 2.
दिए हुए प्रत्येक ठोस के लिए, तीन दृश्य दिए गए हैं। प्रत्येक ठोस के संगत, ऊपर से दृश्य, सामने से दृश्य और पार्श्व दृश्य की पहचान कीजिए।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.1 img-2
उत्तर:

(a) (i)→ सामने, (ii) → पार्श्व, (iii) ऊपरी
(b) (i) → पार्श्व, (ii) सामने, (iii) ऊपरी
(c) (i) → सामने, (ii) पार्श्व, (iii) ऊपरी
(d) (i) → सामने, (ii) पार्श्व, (iii) ऊपरी।

प्रश्न 3.
दिए हुए प्रत्येक ठोस के लिए, ऊपर से दृश्य, सामने से दृश्य और पार्श्व दृश्य की पहचान कीजिए –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.1 img-3
उत्तर:

(a) (i) → ऊपरी, (ii) → सामने, (iii) पार्श्व
(b) (i) → पार्श्व, (ii) सामने, (iii) ऊपरी
(c) (i)→ ऊपरी, (ii) पार्श्व, (iii) सामने
(d) (i) → पार्श्व, (ii) सामने, (iii) ऊपरी
(e) (i)→ सामने, (ii) ऊपरी, (iii) पार्श्व।

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प्रश्न 4.
दी हुई वस्तुओं के, सामने से दृश्य, पार्श्व दृश्य और ऊपर से दृश्य खींचिए –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.1 img-4
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.1 img-5

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 171

प्रश्न 1.
अब एक अन्य मानचित्र को देखिए, जो उसकी 10 वर्षीय बहन मीना ने अपने घर से अपने स्कूल का मार्ग दर्शाने के लिए खींचा है (आकृति 10.12)।
यह मानचित्र पिछले मानचित्र से भिन्न है। यहाँ, मीना ने भिन्न-भिन्न सीमा-चिह्नों (landmarks) के लिए भिन्न-भिन्न संकेतों का प्रयोग किया है। दूसरी बात यह है कि लम्बी दूरियों के लिए लम्बे रेखाखण्ड खींचे गए हैं तथा छोटी दूरियों के लिए छोटे रेखाखण्ड खींचे गए हैं। अर्थात् उसने इस मानचित्र को एक पैमाने (scale) के अनुसार खींचा है। अब, आप निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दे सकते हैं –

  1. राघव का स्कूल उसके निवास स्थान से कितनी दूरी पर है?
  2. किसका स्कूल उनके घर से अधिक निकट है-राघव का या मीना का?
  3. मार्ग में कौन-कौन से महत्त्वपूर्ण सीमा-चिह्न है?

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.1 img-6
हल:
1. राघव के निवास से उसके स्कूल की दूरी = \(\frac{1}{2}\) किमी + 1 किमी + \(\frac{1}{3}\) किमी = \(\frac{3+6+2}{2}\) किमी
= \(\frac{11}{6}\) किमी = 1\(\frac{5}{6}\) किमी राघव का स्कूल उसके निवास से 1\(\frac{5}{6}\) किमी. है।

2. मीना के स्कूल की दूरी = \(\frac{1}{2}\) किमी + 1 किमी + \(\frac{1}{4}\) किमी = \(\frac{2+4+1}{4}\) किमी
= \(\frac{7}{4}\) किमी = 1\(\frac{3}{4}\) किमी
स्पष्ट है कि 1\(\frac{3}{4}\) किमी < 1\(\frac{5}{6}\) किमी
अत: मीना का स्कूल उसके घर से अधिक निकट है।

3. मार्ग में तालाब और अस्पताल महत्वपूर्ण सीमा-चिह्न

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 172

इन्हें भी कीजिए (क्रमांक 10.3)

प्रश्न 1.
एक नगर के संलग्न मानचित्र को देखिए।
(a) मानचित्र में इस प्रकार रंग भरिए: नीला – जल, लाल – फायर स्टेशन, नारंगी- लाइब्रेरी, पीला – स्कूल, हरा – पार्क, गुलाबी – सामुदायिक केन्द्र, बैंगनी – अस्पताल, भूरा – कब्रिस्तान।

(b) दूसरी सड़क और दानिम सड़क के प्रतिच्छेदन (intersection) पर एक हरा ‘x’ अंकित कीजिए। जहाँ नदी, तीसरी सड़क से मिलती है, वहाँ एक काला ‘Y’ अंकित कीजिए तथा मुख्य सड़क और पहली सड़क के प्रतिच्छेदन पर एक लाल ‘Z’ अंकित कीजिए।

(c) कॉलेज से झील तक के लिए एक छोटा सड़क का मार्ग गहरे गुलाबी रंग में खींचिए।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.1 img-7
हल:
विद्यार्थी अभीष्ट मानचित्र में (a), (b) और (c) के लिए दिये गये निर्देशानुसार स्वयं रंग भरें।

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प्रश्न 2.
अपने घर से अपने स्कूल तक के मार्ग का उस पर आने वाले महत्वपूर्ण सीमा-चिह्नों को दर्शाते हुए एक मानचित्र खींचिए।
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Ex 10.1 img-8

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MP Board Class 8th Sanskrit निबन्ध-रचना

MP Board Class 8th Sanskrit निबन्ध-रचना

(1) उद्यानम्

  1. उद्यानम् अत्यन्तं रमणीयम् भवति।
  2. उद्याने वृक्षाः रोहन्ति।
  3. वृक्षाः पर्णैः, पुष्प, फलैः च शोभन्ते।
  4. बालकाः उद्याने क्रीडन्ति।
  5. उद्याने तडागः अपि अस्ति।
  6. जनाः उद्याने भ्रमणार्थं गच्छन्ति।
  7. खगाः वृक्षेषुः निवसन्ति।
  8. तत्र ते नीडान् रचयन्ति।
  9. प्रभाते खगानां कूजनम् मनोहरम् भवति।
  10. वर्तमानकाले वृक्षारोपणकार्य तीव्रगत्या प्रसरति।

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(2) विद्यालयः

  1. मम विद्यालयः ‘गुराडियामाता’ ग्रामे स्थितः अस्ति।
  2. विद्यालयस्य भवनम् अतीवसुन्दरम् अस्ति।
  3. अहम् प्रतिदिनं विद्यालयं गच्छामि।
  4. अहं विद्यालयं गत्वा गुरुन् प्रणमामि
  5. गुरवः स्नेहेन पठम् पाठयन्ति
  6. विद्यालये एकम् उद्यानम् अपि अस्ति।
  7. विद्यालये एकः पुस्तकालयः अस्ति।
  8. विद्यालये एक विशालं क्रीडाक्षेत्रम् अस्ति।
  9. तत्र छात्राः क्रीडन्ति।
  10. विद्यालयः मह्यम् अतीव रोचते।

(3) धेनुः

  1. धेनुः अस्माकम् माता अस्ति।
  2. धेनोः चत्वारः पादाः, द्वे,शृङ्गे, एकं लाङ्गलं च भवति।
  3. धेनूनां विविधाः वर्णाः भवन्ति।
  4. धेनुः तृणानि भक्षयति।
  5. धेनुः जनेभ्यः मधुरम्. पयः प्रयच्छति।
  6. गोमूत्रेण विविधानां दोषाणां रोगाणां च नाशः भवति।
  7. धेनोः दुग्धेन दधि, तक्रम, नवनीतम्, घृतम् च निर्मितम् भवति
  8. भारतीयसंस्कृतौ धेनूनाम् महत्त्वम् अधिकम् अस्ति।
  9. धेनोः दुग्धम् मधुरम्, पथ्यम् हितकारि च भवति।
  10. वयं धेनुम् मातृरूपेण पूजयामः।

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(4) मम कर्त्तव्यम्

  1. लोकहितं मम कर्त्तव्यम्।
  2. देशसेवां करणं मम कर्त्तव्यम्।
  3. सर्वजनसम्मानं मम कर्त्तव्यम्
  4. सर्वजनहितं मम कर्त्तव्यम्।
  5. समयेन विद्यालयगमनं मम कर्त्तव्यम्।
  6. सर्वैः सह मधुरभाषणं मम कर्त्तव्यम्।
  7. राष्ट्रध्वजसम्मानं मम कर्त्तव्यम्।
  8. राष्ट्रगानसम्मानं मम कर्त्तव्यम्।
  9. ध्यानेन पठनम् मम कर्त्तव्यम्।
  10. गुरुजनसम्मानं मम कर्त्तव्यम्।

(5) पुस्तकम्

  1. पुस्तकानि मह्यम् अतीव रोचन्ते।
  2. मम समीपे बहूनिपुस्तकानि सन्ति।
  3. पुस्तकानि अतीव मनोहराणि सन्ति।
  4. मम समीपे चित्रपुस्तकम् अपि अस्ति।
  5. रमणीयं चित्रं चित्तम् आनन्दयति।
  6. स्तकानि ज्ञानस्य भण्डारः भवन्ति।
  7. पुस्तकानि अस्माकं मित्राणि सन्ति।
  8. पुस्तकानां सङ्गतिः लाभप्रदा भवति।
  9. अस्माभिः पुस्तकानि रक्षणीयानि।
  10. स्वगृहे लघुः पुस्तकालयो निर्मातव्यः।
  11. पुस्तकेषु यत्र कुत्रचित् न लेखनीयम्।

(6) विवेकानन्दः

  1. स्वामी विवेकानन्दस्य बाल्यकालस्य नाम ‘नरेन्द्रनाथः’ आसीत्।
  2. स्वामी विवेकानन्दस्य जन्म कोलकातानगरे अभवत्।
  3. स्वामी विवेकानन्दस्य पिता ‘विश्वनाथदत्त’! आसीत्।
  4. स्वामी विवेकानन्दस्य माता ‘भुवनेश्वरी देवी’ आसीत्।
  5. स्वामी विवेकानन्दस्य गुरुः ‘रामकृष्णपरमहंसः’ आसीत्।
  6. स्वामी विवेकानन्दस्य शिष्या ‘भगिनी निवेदिता’ आसीत्।
  7. स्वामी विवेकानन्दः यूनां कृते पथप्रदर्शकः आसीत्।
  8. स्वामी विवेकानन्दः संस्कृतानुरागी आसीत्।
  9. नरेन्द्रनाथः ‘स्वामी विवेकानन्दः’ इति नाम्ना प्रसिद्धोऽभवत्।
  10. स्वामी विवेकानन्दस्य बहवः शिष्याः अभवन्।

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(7) अनुशासनम्

  1. मानव जीवने अनुशासनस्य विशेष महत्त्वम् अस्ति।
  2. अनुशासनम् विना जीवनं कष्टमयं भवति।
  3. समाजे नियमानाम् पालनम् एष अनुशासनं भवति।
  4. अनुशासनं विना कोऽपि कार्य सफलं न भवति।
  5. सामाजिकम् परिवारिकम् च व्यवस्थायै अनुशासनम् परमावश्यकम् अस्ति।
  6. राष्ट्रस्य प्रगतये अपि अनुशासनम् अत्यावश्यकम् अस्ति।
  7. मानवतायाः विकासाया छात्रेषु अनुशासनम् अनिवार्यम् अस्ति।
  8. प्रकृतिः अपि ईश्वरस्य अनुशासने परिलक्ष्यते।
  9. अनुशासनस्य पालनस्य भावना बाल्यकालादेव प्रवर्तते।
  10. अतः अस्माभिः जीवनस्य प्रत्येके क्षेत्रे अनुशासनस्य पालनम् करणीयम्।

(8) मध्यप्रदेशः

  1. मध्यप्रदेशः भारतगणराज्यस्य विशालं राज्यम् अस्ति।
  2. अस्मिन् प्रदेशे अनेकानि नगराणि सन्ति।
  3. तत्र औद्योगिक विकासः तीव्र गत्या अभवत्।
  4. अनेकानि रमणीकानि नगराणि सन्ति।
  5. तानि विद्यायाः केन्द्राणि सन्ति।
  6. तेषु नगरेषु अनेके विद्यालयाः महाविद्यालयाः विश्वविद्यालयाः सन्ति।
  7. विविध विषयानाम् ज्ञानम् तेषु गुरुभिः प्रदीयते।
  8. अस्य प्रदेशस्य राजधानी भोपालनगरम् अस्ति।
  9. अस्य नगरस्य महत्वम् प्राचीनकालात् एव वर्तते।
  10. इदम् नगरम् सरोवराणाम्। उद्यानाम् च अस्ति।
  11. राष्ट्रस्य विकासे मध्यप्रदेशस्य अति महत्त्वम् वर्तते।

(9) महात्मा गाँधी

  1. महात्मा गाँधी अस्माकं महापुरुषः अस्ति।
  2. सः। अहिंसाम् परिपालयन् स्वदेशं वैदेशिकेभ्यः अयुञ्चयत्।
  3. महात्मा गाँधिनः वास्तविक नाम मोहनदास गाँधी आसीत्।
  4. तस्य पितुः नाम करमचन्द गाँधी तस्य मातु च नाम पुतलीबाई आसीत्।
  5. तस्य माता अति धार्मिक प्रवृत्येः आसीत्।
  6. तस्य पिता तस्मिन् अत्यन्तं अस्निह्यत्।
  7. उच्च शिक्षा प्राप्तुं सः विदेशं अगच्छत्।
  8. स्वतन्त्रतासंग्रामस्य सः प्रमुख नेता आसीत्।
  9. तस्य प्रेरणया एवं जनाः स्वतन्त्रता आन्दोलने अक्षपिन् स्वदेशं स्वतन्त्रमकुर्वन।
  10. महात्मा गाँधी सम्पूर्ण संसारस्य वन्दनीयः अस्ति।

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(10) दीपावलिः

  1. दीपावलिः एकः धार्मिकः उत्सवः अस्ति।
  2. दीपावलिः उत्सवः शरत्कालस्य मध्ये भवति।
  3. मनुष्या स्व-स्व गृहाणि गोमयेन, मृत्तिकया, सुधया वा निर्दोषाणि कुर्वन्ति।
  4. श्रुयते यद् अयम् मुख्य-रूपेण वैश्यानाम् उत्सवः अस्ति।
  5. अस्मिन् दिने सर्वे जनाः प्रसन्नाः भवन्ति।
  6. गृहे-गृहे मिष्ठानानां निर्माणं। भवति।
  7. सर्वे लक्ष्मीपूजनं कुर्वन्ति।
  8. सर्वाणि भवनानि सुन्दराणि राजन्ते।
  9. दीपावलिः प्रकाशस्य उत्सवः अस्ति।
  10. रात्रौ दीपकानाम् आभा सर्वेषाम् मनांसि हरति।

(11) महापुरुषः-आजादचन्द्रशेखरः

  1. महांश्चासौ पुरुषः इति महापुरुषः।
  2. पुरुषः महत्कार्यं कृत्वा महापुरुषः भवति।
  3. समाजहितार्थं राष्ट्रहितार्थं च यानि कार्याणि भवन्ति, तानि एव महत्कार्याणि भवन्ति।
  4. चन्द्रशेखरः आजादः एवमेव राष्ट्रसेवी महापुरुषः अस्ति।
  5. १९०६ख्रीस्ताब्दे आजादचन्द्रशेखरस्य जन्म अभवत्।
  6. अस्य जन्मभूमिः अलीराजपुरमण्डलस्य ‘भाभरा’ नामकग्रामे अस्ति।
  7. तस्य पिता सीतारामतिवारी, माता च जगरानीदेवी आसीत्।
  8. चन्द्रशेखरस्य अध्ययनं वाराणस्यां संस्कृतविद्यालये अभवत्।
  9. सः हिन्दुस्तान-सोसलिस्ट-रिपब्लिकन आर्मी नाम्ना सङ्घटनं कृतवान्।
  10. आजादचन्द्रशेखरः १९३१ ख्रिस्ताब्दे इलाहाबादनगरे (प्रयागनगरे) वीरगति प्राप्नोत्।

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MP Board Class 8th Special Hindi पत्र-लेखन

MP Board Class 8th Special Hindi पत्र-लेखन

(1) मित्र को सफलता के लिए बधाई-पत्र

24, गाँधी नगर,
ग्वालियर
23 मई,..

प्रिय कनिष्क,
कल दैनिक ‘अमर उजाला’ में तुम्हारा परीक्षाफल देखने पर ज्ञात हुआ कि तुम परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हो। तुम्हारी सफलता पर मुझे अत्यधिक प्रसन्नता का अनुभव हुआ। सबसे प्रथम अपनी इस सफलता पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करो। आशा है कि तुम भविष्य में भी इसी प्रकार सफलता की डगर पर अग्रसर होते रहोगे।

शुभकामनाओं सहित
अक्षय कुलश्रेष्ठ

(2) अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
शासकीय उ. मा. विद्यालय,
भोपाल (म. प्र.)
विषय-अस्वस्थ होने पर अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र। मान्यवर !
मैं रात से तीव्र ज्वर से पीड़ित हूँ, शरीर में अत्यधिक दर्द भी है। इसलिए मैं पाठशाला में उपस्थित होने में असमर्थ हूँ।
अतः श्रीमान् जी से विनम्र निवेदन है कि मुझे दिनांक 8 अगस्त से 14 अगस्त, 20 …..” तक अवकाश प्रदान कर अनुग्रहीत करें।

सधन्यवाद
दिनांक ………………….

प्रार्थी
रजनीकान्त
कक्षा 8(ब)

(3) पिता को वार्षिक परीक्षा की
जानकारी देने हेतु पत्र

छात्रावास,  मिशन उ. मा. विद्यालय,
जबलपुर (म.प्र.)
28 मार्च, ……

आदरणीय पिताजी,
सादर चरण स्पर्श।
कल प्रातः आपका पत्र मिला। मैं यहाँ पर स्वस्थ एवं सानन्द हूँ, आशा है कि भगवान की कृपा से आप सब भी सकुशल होंगे।
मैं यहाँ पर अपनी वार्षिक परीक्षा की तैयारी करने में जुटा हुआ हूँ। इसलिए पत्र देने में विलम्ब हुआ। वार्षिक परीक्षा सम्भवतः 10 अप्रैल, 20….. से शुरू होगी।
मैं साल के प्रारम्भ से ही पूर्ण मनोयोग से पढ़ाई कर रहा हूँ। अत: मुझे अपनी परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने की पूर्ण आशा है। आपका आशीर्वाद ही इस दिशा में मेरे लिए आशा का सम्बल सिद्ध होगा।
माताजी को चरण स्पर्श तथा छोटे भाई-बहनों को मेरा ढेर सारा प्यार।

पत्रोचार की प्रतीक्षा में
आपका प्रिय पुत्र
कनिष्क

(4) स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र हेतु
आवेदन-पत्र

सेवा में,
प्रधानाचार्य,
उ. मा. विद्यालय, जबलपुर (म. प्र.)
विषय-स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र हेतु आवेदन। मान्यवर !
सेवा में विनम्र प्रार्थना है कि मैं आपकी पाठशाला का कक्षा 8वीं (स) का छात्र हूँ।।
मेरे पिताजी का स्थानान्तरण नहर विभाग में ग्वालियर हो गया है। ऐसी दशा में मैं भविष्य में ग्वालियर के ही किसी विद्यालय में अध्ययन करूँगा।
‘अतः आपसे सानुरोध प्रार्थना है कि मुझे स्थानान्तरण प्रमाण-पत्र प्रदान करने की कृपा करें। मेरे पास पाठशाला की कोई सामग्री नहीं है तथा शुल्क भी अदा कर दिया है।

सधन्यवाद
दिनांक …..

प्रार्थी आपका आज्ञाकारी शिष्य
अक्षय कुमार,
कक्षा 8 (स)

(5) अपने क्षेत्र में लाउडस्पीकर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को
रोकने के लिए एक शिकायती पत्र जिला कलेक्टर को लिखिए।

श्रीमान्,
जिलाधीश महोदय,
ग्वालियर (म. प्र.)
विषय-लाउडस्पीकर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को रोकने के सम्बन्ध में। महोदय,
मैं दानाओली क्षेत्र का निवासी हूँ। यहाँ आस-पास लाइट एण्ड साउण्ड की बहुत-सी दुकानें हैं। साथ ही अनेक बैण्ड वाले हैं। ये सभी दिन-रात लाउडस्पीकर से तेज ध्वनि से रिकार्डिंग करते रहते हैं। पास में ही एक अस्पताल भी है जिससे वहाँ मरीज परेशान रहते हैं। कृपया इस तेज ध्वनि से उत्पन्न होने वाले ध्वनि प्रदूषण को रोकने के आदेश सम्बन्धित थाने के स्टाफ को करने का कष्ट करें।

मैं आपका आभारी रहूँगा।
दिनांक …….

प्रार्थी
राजीव कुमार

(6) अपने प्रधानाध्यापक को शुल्क मुक्ति
हेतु प्रार्थना-पत्र लिखिए।

सेवा में,
प्रधानाध्यापक महोदय,
शासकीय उ. मा. विद्यालय,
मुरैना (म. प्र.)
विषय-शुल्क मुक्ति हेतु प्रार्थना-पत्र। महोदय,
विनम्र निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा 8 (अ) का छात्र हूँ। मेरे दो और भाई भी आपके विद्यालय में अध्ययनरत्
प्रार्थी
मेरे पिताजी की आर्थिक स्थिति इतनी इच्छी नहीं है कि वे हम तीनों भाइयों के विद्यालय शुल्क का भुगतान कर सकें।
अतः श्रीमान् जी से प्रार्थना है कि मेरा शुल्क माफ कर मुझे
शुल्क-मुक्ति प्रदान करने का कष्ट करें।
आपकी अति कृपा होगी।
सधन्यवाद
दिनांक …………….

प्रार्थी
राजकुमार गाँधी
कक्षा 8 (अ)

(7) विद्यालय में बाल दिवस के आयोजन की जानकारी देते हुए
माताजी को पत्र लिखिए।

कक्ष संख्या-24
बालक हॉस्टल, राजकीय विद्यालय
मुरैना (म. प्र.)
दिनांक 16-11-20….

पूजनीया माता जी,
सादर चरण स्पर्श।
मैं कुशलतापूर्वक हूँ। आपकी कुशलक्षेम की कामना करता हूँ। त्रैमासिक परीक्षा हो चुकी है। परीक्षाफल अच्छा रहा है। परिश्रम करता रहूँगा।

इस वर्ष 14 नवम्बर को विद्यालय में बाल दिवस पर अनेक कार्यक्रम हुए। यह बाल दिवस वास्तव में चाचा नेहरू का जन्मदिन है। चाचा नेहरू बच्चों से बहुत प्रेम करते थे। अत: बच्चों का सम्पूर्ण विकास करने के उद्देश्य से अपने जन्मदिन को उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया।

बालकों ने कविताएँ, भाषण और नेहरू जी पर आधारित नाटक प्रस्तुत किए। आचार्यों ने श्री नेहरू जी के जीवन, शिक्षा व देशभक्ति पर भाषण दिए। पं. नेहरू हमारे देश के पहले प्रधानमन्त्री थे। वे भारत माता से बहुत प्रेम करते थे। वे कहते थे कि भारत की उन्नति बालकों के विकास पर निर्भर है। अन्त में सभी विद्यार्थियों को मिठाई वितरित की गई।

अन्त में, मैं चाहता हूँ कि आप अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देती रहें। मुझे अपना आशीर्वाद दें जिससे मैं पढ़-लिखकर स्वयं को देश का अच्छा नागरिक सिद्ध कर सकूँ। पिताजी को प्रणाम। रिंकू को प्यार।

आपका प्रिय बेटा
राहुल पाठक

(8) साँची घूमने जाने के लिए प्रधानाचार्य को
अनुमति/ अवकाश हेतु आवेदन-पत्र लिखिए।

सेवा में,

प्रधानाचार्य महोदय,
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय
खजूरी बाजार, इन्दौर (म. प्र.)

मान्यवर,

नम्र निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा-8 का छात्र हूँ। मैं अपनी कक्षा का नायक हूँ मेरे अन्य दस सहपाठियों
ने निश्चय किया है कि हम साँची के स्तूपों का अवलोकन करने | जाएँ। हम सभी ने वहाँ पहुँचने के लिए जैन ट्रैवल्स की बस भी
भाड़े पर ले ली है। हम लोग कल दि. 20.8.20…. को अपनी यात्रा पर चल देंगे। अतः आपसे प्रार्थना है कि मुझे व मेरे अन्य नौ सहपाठियों को वहाँ जाने की अनुमति व कम से कम तीन दिन का अवकाश देने की कृपा करें।
अवकाश 20.08.20…. से 22.08.20…. तक मंजूर कर कृतार्थ करें।

आपके आज्ञाकारी शिष्य
मोहन व अन्य छात्र
कक्षा 8

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Intext Questions

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Intext Questions

पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या में 163-164

प्रश्न 1.
निम्नलिखित का मिलान कीजिए (आपके लिए, पहला मिलान किया हुआ है) –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Intext Questions img-1
उत्तर:

(a) → (ii) द्वि-विमीय → (iii) वर्ग
(b) → (iii) त्रि-विमीय → (vii) शंकु
(c) → (i) त्रि-विमीय → (ii) बेलन
(d) → (iv) द्वि-विमीय → (viii) त्रिभुज
(e) → (v) त्रि-विमीय → (vi) घन
(f) → (vii) द्वि-विमीय → (iv) वृत्त
(g) → (vi) त्रि-विमीय → (v) घनाभ
(h) → (viii) त्रि-विमीय → (i) गोला।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 164-165

इन्हें कीजिए (क्रमांक 10.1)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित चित्रों (वस्तुओं) का उनके आकारों से मिलान कीजिए –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Intext Questions img-2
उत्तर:

(i) → (c)
(ii) → (d)
(iii) → (e)
(iv) → (b)
(v) → (a).

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 165

3 – D आकारों के दृश्य

प्रश्न 1.
एक गिलास के निम्नलिखित दृश्य हो सकते हैं –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 10 ठोस आकारों का चित्रण Intext Questions img-3
एक गिलास का ऊपर से दृश्य (top view) संकेन्द्रीय वृत्तों का एक युग्म क्यों है? यदि इसे भिन्न दिशा से देखा जाए, तो क्या पार्श्व दृश्य कुछ और प्रकार का प्रतीत होगा ? इसके बारे में सोचिए।
उत्तर:
एक गिलास का ऊपर से दृश्य संकेन्द्रीय वृत्तों का एक युग्म है क्योंकि इस स्थिति में हम गिलास के ऊपर और नीचे की स्थिति देखते हैं जो कि विभिन्न त्रिज्याओं के वृत्त हैं। ऊपर के वृत्त के केन्द्र नीचे वाले वृत्त के ठीक नीचे हैं। नहीं, इसको भिन्न दिशा से देखने पर इसका पार्श्व दृश्य कुछ और प्रकार का प्रतीत नहीं होगा।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 166

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इन्हें कीजिए (क्रमांक 10.2)

प्रश्न 1.
अपने आस-पास की विभिन्न वस्तुओं को विभिन्न स्थितियों से देखिए। अपने मित्रों के साथ उनके विभिन्न दृश्यों की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करके देखें।

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