MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 8 पृथ्वी के परिमण्डल

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 8 पृथ्वी के परिमण्डल

MP Board Class 6th Social Science Chapter 8 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(अ) पृथ्वी पर कितने परिमण्डल हैं ?
उत्तर:
पृथ्वी पर तीन परिमण्डल हैं – स्थलमण्डल, जलमण्डल और वायुमण्डल।

(ब) स्थलमण्डल का अर्थ बताइए।
उत्तर:
पृथ्वी का वह समस्त भू-भाग जो कठोर और नरम शैलों से बना है, स्थलमण्डल कहलाता है।

(स) पर्वत किसे कहते हैं ?
उत्तर:
ऊँची पहाड़ियों के समूह को पर्वत कहते हैं।

(द) जैवमण्डल की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
जीवों का वह मण्डल जो स्थल, जल और वायुमण्डल में पाया जाता है, जैवमण्डल कहलाता है।

(य) मैदान और पठार में अन्तर बताइए।
उत्तर:
हमारी पृथ्वी पर के वे निचले भाग जो समतल और सपाट हैं, मैदान कहलाते हैं। जबकि सामान्य रूप से ऊँचे उठे हुए वे भू-भाग जिनकी ऊपरी सतह लगभग समतल अथवा हल्की ऊँची-नीची होती है, पठार कहलाते हैं।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) स्थलमण्डल क्या है? उसके विभिन्न भू-स्वरूपों का वर्णन करिए।
उत्तर:
पृथ्वी का वह समस्त भू-भाग जो कठोर और नरम शैलों से बना है, स्थलमण्डल कहलाता है।
इसके प्रमुख भू-स्वरूप निम्नलिखित हैं –

  • पर्वत – ऊँची पहाड़ियों के समूह को पर्वत कहते हैं। पर्वत सैकड़ों किमी लम्बाई तक श्रेणियों के रूप में फैले रहते हैं। सबसे ऊँचा पर्वत हिमालय पर्वत है।
  • पठार – सामान्य रूप से ऊँचे उठे हुए वे भू-भाग जिनकी ऊपरी सतह लगभग समतल होती है, पठार कहलाते हैं। हमारे देश में दक्कन का पठार प्रसिद्ध है।
  • मैदान – पृथ्वी के वे निचले भाग जो समतल और सपाट हैं, मैदान कहलाते हैं। गंगा-यमुना का मैदान व उत्तर का विशाल मैदान इनमें प्रमुख हैं।

(ब) जैवमण्डल क्या है ? विभिन्न जीव किस प्रकार से पारिस्थितिक तंत्र में एक-दूसरे पर निर्भर हैं ? बताइए।
उत्तर:
जीवों का वह मण्डल जो स्थल, जल और वायुमण्डल में पाया जाता है, जैवमण्डल कहलाता है। जैवमण्डल के सभी जीव एक-दूसरे पर निर्भर हैं तथा वे अपने आस-पास के प्राकृतिक वातावरण से प्रभावित होते हैं। प्राकृतिक वातावरण तथा जैवमण्डल की यह पारस्परिक निर्भरता की व्यवस्था पारिस्थितिक तंत्र कहलाती है।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य के लिए एक पारिभाषिक शब्द लिखिए –
(अ) गैसों का मिश्रण जो पृथ्वी को चारों ओर से घेरे हुए है।
उत्तर:
वायुमण्डल

(ब) पृथ्वी पर बहुत बड़े जल भण्डार को कहते हैं।
उत्तर:
जलमण्डल

(स) वह भूखण्ड जो आस – पास के क्षेत्र से बहुत ऊँचा हो।
उत्तर:
पर्वत

(द) आसपास की नीची भूमि से एकदम सीधा उठा हुआ। विस्तृत भू-भाग।
उत्तर:
पठार

(य) स्थल के निचले, विस्तृत एवं समतल भू – भाग।
उत्तर:
मैदान

(र) पृथ्वी के तीनों परिमण्डल-स्थलमण्डल, जल – मण्डल और वायुमण्डल से मिलकर बना मण्डल।
उत्तर:
जैवमण्डल

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प्रश्न 4.
सही जोड़ी बनाइए –
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 8 पृथ्वी के परिमण्डल img 1
उत्तर:
1. (द) एशिया
2. (स) दक्कन
3. (य) हिमालय
4. (ब) वायुमण्डल
5. (अ) प्रशान्त

प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
1. पृथ्वी के भूमि वाले भाग को ……….. कहते हैं।
2. में स्थल मण्डल, जलमण्डल ………….. और …………. वायुमण्डल समाहीत हैं।
3. वायुमण्डल में सबसे कम ………… गैस पाई जाती है।
4. प्रकृति द्वारा दिये गये पदार्थों का …………. में सदपयोग करें।
उत्तर:
1. स्थलमण्डल
2. जैवमण्डल
3. कार्बन डाइऑक्साइड
4. मानव कल्याण।

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.5

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.5

प्रश्न 1.
निम्न रैखिक समीकरणों को हल कीजिए –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.5 img-1
हल:
1. \(\frac{x}{2}\) – \(\frac{1}{5}\) = \(\frac{x}{3}\) + \(\frac{1}{4}\)
2, 3, 4 व 5 का ल. स. = 60
दोनों पक्षों को 60 से गुणा करने पर,
60 x (\(\frac{x}{2}\) – \(\frac{1}{5}\)) = 60 x (\(\frac{x}{3}\) + \(\frac{1}{4}\))
या 30x – 12 = 20x + 15
या 30x – 20x = 15 + 12
या 10x = 27
या x = \(\frac{27}{10}\)

2. \(\frac{n}{2}\) – \(\frac{3n}{4}\) + \(\frac{5n}{6}\) = 21
2, 4 व 6 का ल. स. = 12
दोनों पक्षों को 12 से गुणा करने पर,
12 x (\(\frac{n}{2}\) – \(\frac{3n}{4}\) + \(\frac{5n}{6}\)) = 12 x 21
या 6n – 9n + 10n = 252
या 7n = 252
या n = \(\frac{252}{7}\)
n = 36

3. x + 7 – \(\frac{8x}{3}\) = \(\frac{17}{6}\) – \(\frac{5x}{2}\)
2, 3 व 6 का ल. स. = 12
दोनों पक्षों को 12 से गुणा करने पर,
12 x (x + 7 – \(\frac{8}{3}\)) = 12 x (\(\frac{17}{6}\) – \(\frac{5x}{2}\))
या 12x + 84 – 32x = 34 – 30x
या 12x – 32x + 30x = 34 – 84
या 10x = – 50
x = \(\frac{-50}{10}\)
x = – 5

4. \(\frac{x-5}{3}\) = \(\frac{x-3}{5}\)
5 (x – 5) = 3 (x – 3)
या 15x – 25 = 3x – 9
या 5x – 3x = – 9 + 25
या 2x = 16
या x = \(\frac{16}{2}\)
या x = 8

5. \(\frac{3t-2}{4}\) – \(\frac{2t+3}{3}\) = \(\frac{2}{3}\) – t
ल. स. = 3 x 4 = 12
दोनों पक्षों को 12 से गुणा करने पर,
12 x (\(\frac{3t-2}{4}\) – \(\frac{2t+3}{3}\)) = 12 x (\(\frac{2}{3}\) – t)
या 9t – 6 – 81 – 12 = 8 – 12t
या 9t – 8t + 12t = 8+ 6 + 12
या 13t = 26
या t = \(\frac{26}{13}\) = 2

6. m – \(\frac{m-1}{2}\) = 1 – \(\frac{m-2}{3}\)
2 व 3 का ल. स. = 2 x 3 = 6
दोनों पक्षों को 6 से गुणा करने पर
6 (m – \(\frac{m-1}{2}\)) = 6 (1 – \(\frac{m-2}{3}\))
या 6m – 3 (m – 1) = 6 – 2 (m – 2)
या 6m – 3m + 3 = 6 – 2m + 4
या 6m – 3m + 2m = 6 + 4 – 3
या 5m = 7
या m = \(\frac{7}{5}\)

प्रश्न 2.
निम्न समीकरणों को सरल रूप में बदलते हुए हल कीजिए –
7. 3 (t – 3) = 5 (2t + 1)
8. 15 (y – 4) – 2 (7 – 9) + 5 (v + 6) = 0
9. 3 (5z – 7) – 2 (9z – 11)= 4 (8z – 13) – 17
10. 0.25 (4f – 3) = 0.05 (10f – 9)
हल:
7. 3 (t – 3) = 5 (2t + 1)
3t – 9 = 10t + 5
या 3t – 10t = 5 + 9
या 7t = -14
या t= \(\frac{-14}{7}\) = – 2

8. 15 (y – 4) – 2 (y – 9) + 5 (y + 6) = 0
15y – 60 – 2y + 18 + 5y + 30 = 0
या 15y – 2y + 5y = 60 – 18 – 30
या 18y = 12
या y = \(\frac{12}{18}\) = \(\frac{2}{3}\)

9. 3 (5z – 7) – 2 (9z – 11)= 4 (8z – 13) – 17
15z – 21 – 18z + 22 = 32z – 52 – 17
या 15z – 18z – 32z = – 52 – 7 + 21 – 22
या – 35z = – 70
या z = \(\frac{-70}{-35}\)
z = 2

10. 0.25 (4f – 3) = 0.05 (10f – 9)
f – 0.75 = 0.5f – 0.45
या f – 0.5f = – 0.45 + 0.75
या 0.5f = 0.30
या f= \(\frac{0.30}{0.5}\)
या f= 0.6

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1

प्रश्न 1.
∆PQR में भुजा \(\overline{Q R}\) का मध्य-बिन्दु D है
\(\overline{P M}\) ….है।
PD….है।
क्या QM= MR ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 1
हल:
\(\overline{P M}\), शीर्षलम्ब है।
\(\overline{P D}\), माध्यिका है।
नहीं, QM ≠ MR, क्योंकि QR का मध्य-बिन्दु M नहीं है।

प्रश्न 2.
निम्न के लिए अनुमान से आकृति खींचिए :
(a) ∆ABC में, BE एक माध्यिका है।
(b) ∆PQR में, PQ और PR त्रिभुज के शीर्षलम्ब हैं।
(c) ∆XYZ में, YL एक शीर्षलम्ब उसके बहिर्भाग में है।
हल:
(a) संलग्न चित्र में, BE,∆ABC की माध्यिका है।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 2

(b) समकोण ∆PQR में, PQ तथा PR त्रिभुज के शीर्षलम्ब हैं।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 3

(c) संलग्न चित्र में, YL, ∆XYZ का शीर्षलम्ब है।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 4

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प्रश्न 3.
आकृति खींचकर पुष्टि कीजिए कि एक समद्विबाहु त्रिभुज में शीर्षलम्ब व माध्यिकाएँ एक ही रेखाखण्ड हो सकता है।
हल:
माना कि ∆ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसकी भुजा AB = AC
त्रिभुज की माध्यिका AM खींची। अब चाँद की सहायता से ∠AMC को मापते हैं।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 5
मापने पर, ∠AMC = 90°
∴ AM ⊥ BC
अत: ∆ABC की, अत: \(\overline{A M}\) माध्यिका और शीर्षलम्ब दोनों ही है।

इन्हें कीजिए

प्रश्न 1.
एक त्रिभुज ABC खींचिए और इसकी एक भुजा \(\overline{B C}\) को एक ओर बढ़ाइए चित्र (i)]। शीर्ष C पर बने कोण ACD पर ध्यान दीजिए। यह कोण ∆ABC के बर्हिभाग में स्थित है। हम इसे ∆ABC के शीर्ष पर बना एक बाह्य कोण कहते हैं।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 6
स्पष्ट है कि ∠BCA तथा ∠ACD परस्पर संलग्न कोण हैं। त्रिभुज के शेष दो कोण, ∠A तथा ∠B बाह्य कोण ACD के दो सम्मुख अन्त:कोण या दूरस्थ अन्तःकोण कहलाते हैं। अब काटकर या अक्स (Trace copy) लेकर ∠A तथा ∠B एक-दूसरे के संलग्न मिलाकर ∠ACD पर रखिए जैसा कि चित्र (ii) में दिखाया गया है। क्या वे दोनों कोण ACD को पूर्णतया आच्छादित करते हैं ? क्या आप कह सकते हैं,
m∠ACD = m∠A + m∠B?
हल:
हाँ, वे दोनों कोण ACD को पूर्णतया आच्छादित करते हैं।
हाँ, m∠ACD = m∠A + m∠B

प्रश्न 2.
छात्र इस क्रियाकलाप को स्वयं करें।
पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 130

सोचिए, चर्चा कीजिए एवं लिखिए

प्रश्न 1.
एक त्रिभुज के लिए बाह्य कोण भिन्न-भिन्न प्रकार से बनाये जा सकते हैं। इनमें से तीन भिन्न प्रकार के दिखाए गए हैं।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 7

इनके अतिरिक्त तीन और प्रकार से भी बाह्य कोण बबनाये जा सकते हैं। इन्हें भी अनुमान से बनाइए।
हल:
तीन अन्य प्रकार से बने बाह्य कोण –
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 8

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प्रश्न 2.
किसी त्रिभुज के एक शीर्ष पर बने दोनों बाह्य कोण क्या परस्पर समान होते हैं ?
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 9
हाँ ∆ABC की भुजा AC व BC को आगे बढ़ाने पर हमें क्रमश: ∠BCP व ∠ACQ प्राप्त होते हैं जो कि शीर्षाभिमुख हैं।
∴ ∠BCP = ∠ACQ
∴ त्रिभुज के प्रत्येक शीर्ष पर एक बाह्य कोणों का एक युग्म होगा जो आपस में समान होंगे।

प्रश्न 3.
किसी त्रिभुज के एक बाह्य कोण और उसके संलग्न अन्तःकोण के योग के बारे में आप क्या कह सकते हैं?
हल:
एक त्रिभुज के एक बाह्य कोण और उसका संलग्न कोण रैखिक युग्म बनाते हैं।
∴ बाह्य कोण + अन्त: कोण = 180°

सोचिए, चर्चा कीजिए एवं लिखिए

प्रश्न 1.
प्रत्येक दशा में अन्तः सम्मुख कोणों के बारे में आप क्या कह सकते हैं, जबकि बाह्य कोण है –
(i) एक समकोण
(ii) एक अधिककोण
(iii) एक न्यूनकोण।
हल:
(i) प्रत्येक अन्तः सम्मुख कोण न्यून कोण होगा।
(ii) कम-से-कम एक अन्तः सम्मुख कोण न्यूनकोण होना चाहिए।
(iii) प्रत्येक अन्तः सम्मुख कोण न्यून कोण होगा।

प्रश्न 2.
क्या किसी त्रिभुज का कोई बाह्य कोण एक सरल कोण भी हो सकता है?
हल:
नहीं, किसी त्रिभुज का कोई बाह्य कोण सरल कोण नहीं हो सकता, क्योंकि अन्तः कोण शून्य नहीं हो सकते हैं।

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
किसी त्रिभुज में एक बाह्य कोण की माप 70° है और उसके अन्तः सम्मुख कोणों में से एक की माप 25° है। दूसरे अन्तः सम्मुख कोण की माप ज्ञात कीजिए।
हल:
बाह्य कोण = 70°, अन्तः सम्मुख कोण = 25°
माना कि दूसरा अन्तः सम्मुख कोण = x°

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 131

अत: दोनों अन्तः सम्मुख कोणों का योग = बाह्य कोण
∴ x° + 250 = 70°
या x° = 70° – 25° = 45°

प्रश्न 2.
किसी त्रिभुज के दो अन्तः सम्मुख कोणों की माप 60° तथा 80° है। उसके बाह्य कोण की माप ज्ञात कीजिए।
हल:
अन्तः सम्मुख कोण = 60° व 80°
∵ बाह्य कोण = दो सम्मुख अन्त:कोणों का योग
∴ बाह्य कोण = 60° + 80° = 140°

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प्रश्न 3.
क्या इस चित्र में कोई त्रुटि है? टिप्पणी करें।
हल:
हम जानते हैं कि किसी त्रिभुज का बाह्य कोण अपने दोनों सम्मुख अन्त:कोणों के योग के बराबर होता है।
यहाँ प्रत्येक अन्त:कोण 50° है और बाह्य कोण भी 50° है।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.1 image 10
∴ इन मापों से त्रिभुज नहीं बन सकता है।
(∵ 50° ≠ 50° + 50°)

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions

MP Board Class 8th Maths Chapter 3 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 41

प्रश्न 1.
निम्न आकृतियों का सुमेलन कीजिए (ध्यान रखिए! एक आकृति का एक से अधिक आकृतियों से सुमेलन हो सकता है):
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-1
अपने मित्रों से इस मिलान की तुलना कीजिए। क्या वे सहमत हैं?
उत्तर:

  1. → (c)
  2. → (b)
  3. → (a)
  4. → (b)

हाँ, वे सहमत हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 42

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प्रश्न 1.
कुछ और बहुभुजों के उदाहरण देने का प्रयास कीजिए तथा कुछ और ऐसे उदाहरण दीजिए जो बहुभुज न हों।
उत्तर:
(i) बहुभुज
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-2
(ii) बहुभुज नहीं हैं –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-3

प्रश्न 2.
एक बहुभुज की एक कच्ची (Rough) आकृति खींचिए और उसकी भुजाओं और शीर्षों की पहचान कीजिए।
हल:
रेखाखण्ड जो बहुभुज बनाते हैं, बहुभुज की भुजाएँ कहलाती हैं तथा रेखाखण्ड परस्पर जहाँ मिलते हैं, बहुभुज के शीर्ष कहलाते हैं। संलग्न आकृति में, AB, BC, CD, DE, EF, तथा FA बहुभुज की भुजाएँ हैं तथा A, B, C, D, E और F शीर्ष हैं।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-4

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 42-43

विकर्ण

प्रश्न 1.
क्या आप संलग्न आकृतियों में प्रत्येक विकर्ण का नाम दे सकते हैं? क्या PQ एक विकर्ण है? LN के बारे में आप क्या कह सकते हैं?
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-5
हल:
किसी बहुभुज का विकर्ण उसके किन्हीं दो शीर्षों को जोड़ने से प्राप्त होता है।
चित्र (i) में, विकर्ण PR तथा QS हैं।
चित्र (ii) में, विकर्ण AC, AD, BD, BE और CE हैं।
चित्र (iii) में, विकर्ण KM और LN हैं। उत्तर
चित्र (i) में PQ विकर्ण नहीं है।
चित्र में (iii) LN विकर्ण है।

प्रश्न 2.
क्या बहिर्भाग की परिसीमा होती है?
उत्तर:
नहीं, बहिर्भाग की कोई परिसीमा नहीं होती है।

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उत्तल और अवतल बहुभुज

प्रश्न 1.
क्या आप बता सकते हैं कि इस प्रकार के बहुभुज एक-दूसरे से अलग क्यों हैं? जो बहुभुज उत्तल होते हैं उनके विकर्णों का कोई भी भाग बहिर्भाग में नहीं होता है। क्या यह अवतल बहुभुजों के लिए भी सत्य होता है? दी गई आकृतियों का अध्ययन कीजिए। तदुपरान्त अपने शब्दों में उत्तल बहुभुज तथा अवतल बहुभुज समझाने का प्रयास कीजिए। प्रत्येक प्रकार की दो आकृतियाँ बनाइए।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-6
उत्तर:
इस प्रकार के बहुभुज एक-दूसरे से अलग इसलिए हैं क्योंकि इन बहुभुजों में कुछ उत्तल बहुभुज हैं ([आकृति (i)] तथा कुछ अवतल बहुभुज हैं [आकृति (ii)]। उत्तल बहुभुजों में उनके विकर्णों का कोई भाग बहिर्भाग में नहीं होता है। यह अवतल बहुभुजों के लिए सत्य नहीं हैं। उत्तल बहुभुज वे बहुभुज होते हैं जिनके शीर्ष बाहर की ओर होते हैं तथा उनके विकर्ण अभ्यंतर में होते हैं। अवतल बहुभुज के शीर्ष अन्दर की ओर होते हैं तथा उनके विकर्ण बहिर्भाग में हो सकते हैं।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-7

सम तथा विषम बहुभुज

प्रश्न 1.
क्या एक आयत एक समबहुभुज है?
उत्तर:
नहीं, एक आयत एक समबहुभुज नहीं है। क्योंकि यह समकोणिक तो है परन्तु समभुज नहीं है।

प्रश्न 2.
क्या एक समबाहुत्रिभुज समबहुभुज है? क्यों?
उत्तर:
हाँ, एक समबाहु त्रिभुज समबहुभुज है। क्योंकि समबाहु त्रिभुज में भुजाएँ तथा कोण बराबर माप के होते हैं।

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 44

प्रश्न 1.
क्या आपने किसी ऐसे चतुर्भुज के बारे में पढ़ा है जो समभुज तो हो परन्तु समकोणिक न हो?
उत्तर:
हाँ, ऐसा चतुर्भुज सम चतुर्भुज है।

प्रश्न 2.
क्या कोई ऐसा त्रिभुज है जो समभुज तो हो परन्तु समकोणिक न हो?
उत्तर:
नहीं, ऐसा कोई त्रिभुज नहीं है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 44-45

इन्हें कीजिए

प्रश्न 1.
कोई एक चतुर्भुज, माना ABCD लीजिए (संलग्न चित्र 3.7)। एक विकर्ण खींचकर इसे दो त्रिभुजों में बाँटिए। आप छः कोण 1, 2, 3, 4, 5 और 6 प्राप्त करते हैं।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-8
त्रिभुज के कोण-योग वाले गुणधर्म का उपयोग कीजिए और तर्क कीजिए कि कैसे ∠A, ∠B, ∠C तथा ZD के मापों का योगफल 180° + 180° = 360° हो जाता है।
हल:
माना कि ABCD एक चतुर्भुज है और AC इसका एक विकर्ण है।
स्पष्ट है कि
∠1 + ∠4 = ∠A
तथा ∠2 + ∠5 = ∠C
∴ त्रिभुज के तीनों कोणों के मापों का योग 180° होता है। अत: ∆ABC से,
∠4 + ∠5 + ∠B = 180° …..(1)
∆ACD से,
∠1 + ∠2 + ∠D = 180° …..(2)
समीकरण (1) व (2) को जोड़ने पर, हम प्राप्त करते हैं।
∠4 + ∠5 + ∠B + ∠1 + ∠2 + ∠D = 180° + 180°
या (∠1 + ∠4) + ∠B + (∠2 + ∠5) + ∠D = 360°
या ∠A+ ∠B + ∠C+ ∠D = 360°
अतः ∠A+ ∠B + ∠C+ ∠D = 360°

प्रश्न 2.
किसी चतुर्भुज ABCD, की गत्ते वाली चार सर्वांगसम प्रतिलिपियाँ लीजिए जिनके कोण दर्शाए गए हैं। [आकृति 3.8 (i)]। इन प्रतिलिपियों को इस प्रकार से व्यवस्थित कीजिए जिसमें ∠1, ∠2, ∠3, ∠4 एक ही बिन्दु पर मिलें जैसा कि आकृति 3.8 (ii) में है।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-9
आप ∠1, ∠2, ∠3 तथा ∠4 के योगफल के बारे में क्या कह सकते हैं?
हल:
किसी चतुर्भुज ABCD के लिए,
m∠1 + m∠2 + m∠3 + m∠4 = 360°
अतः एक चतुर्भुज के चारों कोणों के मापों का योगफल 360° होता है।

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प्रश्न 3.
चतुर्भुज ABCD पर पुनः विचार कीजिए (चित्र 3.9)। माना इसके अभ्यंतर में कोई बिन्दु P स्थित है। P को शीर्षों A, B, C तथा D से जोड़िए। आकृति में ∆PAB पर विचार कीजिए। हम देखते हैं कि x=180° – m∠2 – m∠3 ; इसी प्रकार APBC, से y = 180° – m∠4 – m∠5;
∆PCD से z = 180° – m∠6 – m∠7; और
∆PDA से w = 180° – m∠8 – m∠1.
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-10
इसका उपयोग करके कुल माप m∠1 + m∠2 + …… + m∠8 ज्ञात कीजिए। क्या यह आपको परिणाम तक पहुँचाने में सहायता करता है? याद रखिए ∠x + ∠y + ∠z + ∠w = 360° है।
हल:
क्योंकि त्रिभुज के तीनों कोणों के मापों का योग 180° होता है;
अतः x = 180° – m∠2 – m∠3 …… (1)
y = 180° – m∠4 – m∠5 ….. (2)
z = 180° – m∠6 – m∠7 …… (3)
w = 180° – m∠8 – m∠1 …… (4)
समीकरण (1), (2), (3) एवं (4) को जोड़ने पर, हम प्राप्त करते हैं –
x + y + z + w = 720° – ∠1 + ∠2 + ∠3 + ∠4 + ∠5 + ∠6 + ∠7 + ∠8
लेकिन x + y + z +w = 360°
360° = 720° – ∠1 + ∠2 + ∠3 + ∠4 + ∠5 + ∠6 + ∠7+ ∠8
= 720° – (∠A + ∠B + ∠C + ∠D)
या ∠1 + ∠2 + ∠3 + ∠4 + ∠5 + ∠6 + ∠7 + ∠8 = 720° – 360° = 360°
हाँ, यह हमें सहायता करता है कि चतुर्भुज के कोणों के मापों का योग 360° होता है।

प्रश्न 4.
ये सभी चतुर्भुज उत्तल (convex) चतुर्भुज थे। यदि चतुर्भुज उत्तल नहीं होते तो क्या होता ? चतुर्भुज ABCD पर विचार कीजिए।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-11
इसे दो त्रिभुजों में बाँटिए और अन्तःकोणों का योगफल ज्ञात कीजिए (चित्र : 3.10)।
हल:
चतुर्भुज ABCD के विकर्ण BD को मिलाया।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Intext Questions img-12
त्रिभुज के कोण-योग गुणधर्म से,
∆ABD से, m∠1 + m∠2 + m∠3 = 180° …(1)
∆BCD से, m∠4 + m∠5 + m∠6 = 180° …(2)
समीकरण (1) व (2) को जोड़ने पर,
m∠1 + m∠2 + m∠3 + m∠4 + m∠5 + m∠6 = 180° + 180°
या m∠1 + (m∠2 + m∠6) + m∠5 + m∠3 + m∠4 = 360°
या ∠A + ∠B + ∠C + ∠D = 360°
अतः चतुर्भुज के अन्त:कोणों का योग = 360°

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम्

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् (नाट्यांशः) (वाल्मीकिरामायणतः)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 11 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) का रूपं नाशयिष्यति? (कौन रूप को नष्ट करेगा?)
उत्तर:
जरा। (बुढ़ापा ।)

(ख) सिद्धार्थः कस्य पुत्रः आसीत्? (सिद्धार्थ किसका पुत्र था?)
उत्तर:
शुद्धोदनस्य। (शुद्धोदन का)

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(ग) धरा कस्य पत्नी आसीत? (यशोधरा किसकी पत्नी थी?)
उत्तर:
सिद्धार्थस्य। (सिद्धार्थ की)

(घ) सिद्धार्थस्य पुत्रः कः आसीत्? (सिद्धार्थ का पुत्र कौन था?)
उत्तर:
राहुलः। (राहुल)

(ङ) सिद्धार्थ : कस्मिन् वंशे उत्पन्नः अभूत्? (सिद्धार्थ किस वंश में पैदा हुआ था?)
उत्तर:
शाक्यवंशे। (शाक्यवंश में)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए)
(क) कस्य अभिनिष्क्रमणसंस्कारः अस्ति: (किसका अभिनिष्क्रमण संस्कार है?)
उत्तर:
कुमार राहुलस्य अभिनिष्क्रमणसंस्कारः अस्ति। (कुमार राहुल का अभिनिष्क्रमण संस्कार है।)

(ख) सिद्धार्थः अनुज्ञां प्राप्तुं कस्य समीपं गतः? (सिद्धार्थ आज्ञा गप्त करने किसके पास गए थे?)
उत्तर:
सिद्धार्थः अनुज्ञां प्राप्तुं शुद्धोदनस्य समीपं गतः। (सिद्धार्थ आज्ञा लेने के लिए शुद्धोदन के पास गया था।)

(ग) सिद्धार्थः केषु नानुरञ्ज्यति? (सिद्धार्थ किससे खुश नहीं हो रहा था?)
उत्तर:
सिद्धार्थः नृत्यसङ्गीत-वादित्रेषु नानुरञ्जयति। (सिद्धार्थ नृत्य-संगीत-वाद्य आदि में खुश नहीं हो रहा था।)

(घ) वयं मनुष्याः कां जानन्तोऽपि न शोचामः? (हम लोग किसको जानते हुए भी नहीं सोचते?)
उत्तर:
वयं मनुष्याः प्रतिदिनं ग्रसन्ती मृत्युराक्षसीं जानन्तोऽपि न शोचामः। (हम लोग प्रतिदिन खाती हुई मृत्यु रूपी राक्षसी को जानते हुए भी नहीं सोचते हैं।)

(ङ) मनुष्यस्य यौवनं विलासश्च कदा शोभते? (मनुष्य का यौवन और विलास कब शोभा देते हैं?)
उत्तर:
जरां व्याधिं मृत्युं च विजित्यैव मनुष्यस्य यौवनं विलासश्च शोभते। (बुढ़ापा, रोग और मृत्यु को जीतकर ही मनुष्य का यौवन और विलास शोभा पाते हैं।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) यशोधरा तारस्वरेण सिद्धार्थं किम् उक्तवती? (यशोधरा ने ऊँचे स्वर में सिद्धार्थ को क्या कहा?)
उत्तर:
यशोधरा तारस्वरेण सिद्धार्थं उक्तवती यत्-“कुत्र प्रयातिः कुमारः?” इति। (यशोधरा ने ऊँचे स्वर से सिद्धार्थ को कहा कि-कुमार, आप कहाँ जा रहे हैं।”)

(ख) सिद्धार्थः किमर्थं लोकयात्रातः व्यरञ्ज्यत? (सिद्धार्थ क्यों लोकयात्रा पर जाना चाहता था?)
उत्तर:
सिद्धार्थः संसारस्य निःसारता, जनन-मरण-चक्रस्य बन्धनं, मानुषी गतिः, सर्वमिदं विचिन्त्य लोकयात्रातः व्यरज्यत।

(सिद्धार्थ, संसार की सारहीनता, जन्म-मरण के चक्र का बन्धन, मानुषी गति, इन सब को सोचकर लोकयात्रा पर जाना चाहता था।)

(ग) मनोज्ञेषु विषयेषु रतिविषये सिद्धार्थः शुद्धोदनं किम् अकथयत्? (मन के विषयों पर रति के विषय में शुद्धोदन ने क्या कहा?)
उत्तर:
मनोज्ञेषु विषयेषु रतिविषये सिद्धार्थः शुद्धोदनं अकथयत् यत्-“जरा व्याधिश्च मृत्युश्च यदि न स्युः तर्हि मम मनोज्ञेषु विषयेषु रतिर्भवेत्? (मन के विषयों पर रति के विषय में सिद्धार्थ ने शुद्धोदन से कहा कि-“बुढ़ापा, रोग और मृत्यु यदि न हों तो मेरे मन में विषयों पर रति होगी

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प्रश्न 4.
शुद्धवाक्याना समक्षम् ‘आम्’ अशुद्ध वाक्यानां समक्षम् ‘न’ इति लिखत- (शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ तथा अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) शुद्धोदनः राहुलस्य पिता असीत्।
(ख) यशोधरा राहुलस्य माता आसीत्।
(ग) सिद्धार्थः प्रव्रज्यार्थम् इच्छति।
(घ) सिद्धार्थः यशोधरायाः अनुज्ञां प्राप्तं गतः।
(ङ) शुद्धोदनः शाक्यवंशीयः न आसीत्।
उत्तर:
(क) न
(ख) आम्
(ग) आम्
(घ) न
(ङ) न।

प्रश्न 5.
अधोलिखितशब्दानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनं च लिखत-(नीचे लिखे शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 1
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 2

प्रश्न 6.
अघोलिखितपदानां धातुं लकारं च लिखत (नीचे लिखे पदों के धातु और लकार लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 3
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 4

प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानां धातुं प्रत्ययञ्च पृथक्कुरुत (नीचे लिखे पदों के धातु और प्रत्यय अलग कीजिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 5
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 6

प्रश्न 8.
अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत (नीचे लिखे पदों के संधिविच्छेद करके संधि का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 7
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 8

प्रश्न 9.
अधोलिखितपदानां समासविग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत (नीचे लिखे पदों के विग्रह कर समास का नाम लिखिए)
(क) धर्मचर्या
(ख) क्रीडोद्यानम्
(ग) विनोदसामग्री
(घ) लोकयात्रा
(ङ) महाराजः
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 11 महाभिनिष्क्रमणम् img 9

प्रश्न 10.
रेखाङ्कितसंज्ञाशब्दानां स्थाने सर्वनामशब्दानां प्रयोगं कुरुत (रखाङ्कित शब्दों के स्थान पर सर्वनाम शब्दों का प्रयोग कीजिए-)
(क) राहुलः शाक्यवंशधरः आसीत्। (राहुल शाक्यवंशधर था।)
उत्तर:
कः शाक्यवंशधरः आसीत्? (कौन शाक्यवंशधर था?)

(ख) यशोधरा सिद्धार्थस्य पत्नी आसीत्। (यशोधरा सिद्धार्थ की पत्नी थी।)
उत्तर:
का सिद्धार्थस्य पत्नी आसीत्? (कौन सिद्धार्थ की पत्नी थी?)

(ग) सिद्धार्थस्य पिता शुद्धोदनः आसीत्। (सिद्धार्थ के पिता शुद्धोदन थे।)
उत्तर:
कस्य पिता शुद्धोदनः आसीत्? (किसके पिता शुद्धोदन थे?)

(घ) सिद्धार्थः परिव्राजकः अभवत्। (सिद्धार्थ संन्यासी बना।)
उत्तर:
कः परिव्राजकः अभवत्? (कौन संन्यासी बना?)

(ङ) सिद्धार्थः राहुलस्व जनकः आसीत्। (सिद्धार्थ राहल के पिता थे।)
उत्तर:
सिद्धार्थः कस्य जनकः आसीत्? (सिद्धार्थ किसका पिता था?)

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योग्यताविस्तार –

सिद्धार्थस्य विस्तृतजीवनचरितम् अन्विष्य लिखत।
(सिद्धार्थ का विस्तृत जीवन चरित्र ढूँढकर लिखिए

अस्य नाट्यांशस्य सामूहिकम् अभिनयं कुरुत।
(इस नाट्यांश का सामूहिक अभिनय कीजिए।)

महाभिनिष्क्रमणम् पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ सिद्धार्थ के जीवन का अंश है। इस पाठ में उनके संन्यास लेने से पूर्व की कथा है। जब उन्होंने शरीर की विभिन्न अवस्थाएँ-जरा, रोग व मृत्यु-देखी तो उन्हें इस संसार से विरक्ति हो गई और उन्होंने गृहत्याग कर संन्यास ले लिया था। इससे पूर्व उनकी जो मानसिक स्थिति थी, उसका वर्णन इस पाठ में किया गया है।

महाभिनिष्क्रमणम् पाठ का अनुवाद

1. सिद्धार्थः-(स्वगतं चिन्तयन्) हन्त। कियती विडम्बना मानवशरीरस्य। वासन्तिकं यौवनं, कुसुमसुकुमारमनोहरा देहसम्पत्, किमिदं सर्वं स्थिरम्? किं यशोधरायाः यौवनमचलम्? किं जरा व्याधिर्मत्युश्य मदीया अन्तः पुरपरिचारिकाः कदापि नाक्रमिष्यन्ति? किमेता न जानन्ति यद्यौवनं चपलम्? जरा रूपं नाशयिष्यति?
यशोधरा-कुमार! कुमार, किं चिन्तयति भवान्?

सिद्धार्थः :
न किमपि यशोधरे! उद्विग्नमिव मे चेतः। इत एहि अत्रोपविश। इदमेव विलोक्य आश्चर्यम् अनुभवामि यशोधरे यत् वयं मनुष्याः प्रतिदिनं ग्रसन्ती मृत्युराक्षसीं जानन्तोऽपि न शोचामः । अद्य न जाने मदीये हृदये कश्चन् वक्ति यत् जरां व्याधि मृत्यु च विजित्यैव मनुष्यस्य यौवनं विलासश्च शोभते। नृत्यसङ्गीत-वादिषु नानुरञ्ज्यामि, न च तुष्यामि क्रीडाद्यानद्रमः, प्रेक्षागृहपञ्जरैः, स्नानगृहनिर्झरैः।

यशोधरा-तर्हि कुमार! किं व्यवसीयते भवता?

सिद्धार्थः :
इदभेव वाञ्छामि यशोधरे, यदधुना परिवाजको भूत्वा मृत्योर्निग्रहाय तपश्चरेयम्।

शब्दार्थाः :
स्वगतम्-मन में-Inward, in heart; उद्विग्नम् -दुखी-grieved; ग्रसन्तीम्-खाती हुई-swallowing; शोचामः-(हम) सोचते हैं-feel sorrowful; नदीये-मेरे-mine; विजित्यैव-जीतकर ही-on getting victory; नानुरज्यामि-प्रसन्न नहीं होता हूँ-do not feel delighted; प्रेक्षागृहपज्जरैः-नाट्यशाला के पात्रों को-actors of theatre.

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अनुवाद :
सिद्धार्थ-(मन में सोचते हुए) आह! मानव शरीर की यह कैसी विडंबना है। वसन्त की तरह जवानी, फूल की तरह कोमल और सुन्दर शरीर क्या ये सब स्थिर हैं? क्या यशोधरा का यौवन अचल है? क्या बुढ़ापा, रोग और मृत्यु मेरे अन्तःपुर की सेविकाओं पर कभी आक्रमण नहीं करेंगे? क्या ये नहीं जानती हैं कि यौवन चंचल है? बुढ़ापा रूप को नष्ट कर देगा?

यशोधरा-कुमार! कुमार, आप क्या सोच रहे हैं?

सिद्धार्थ :
यशोधरा! कुछ नहीं। मेरा मन दुखी सा हो रहा है। यहाँ आजो, यहाँ बैठो। यशोधरा, यही देखकर मुझे आश्चर्य हो रहा है कि हम मनुष्य प्रतिदिन खाती हुई मृत्यु रूपी राक्षसी को जानते हुए भी नहीं सोचते हैं। आज न जाने मेरे मन में कोई कह रहा है कि बुढ़ापा, रोग और मृत्यु को जीतकर ही मनुष्य का यौवन और विलास शोभा पाता है। नृत्य-सङ्गति, बाजे आदि मुझे प्रसन्न नहीं कर रहे और न ही उद्यान, पेड़ों से नाट्यशाला के पात्रों से और स्नानगृह के झरनों के खेल से मैं खुश हूँ।

यशोधरा ;
तो कुमार। आपको क्या चाहिए?

सिद्धार्थ :
यशोधरा! मैं यही चाहता हूँ कि अब संन्यासी बनकर मृत्यु को पराजित करने के लिए तप करूँ!

English :
Old age, diseases and death bring about decay in beauty and youth-youth is flickering-old age disfigures beauty-nothing appeals an aggrieved soul-wish to get sanyasa (liberation) to defeat death through penance.

2. यशोधरा-किमिदं भाषते भवान्? परिव्रज्यायाः नायं समयः। कतिपयमासेभ्यः पूर्वमेव तु भवान शाक्यवंशधरस्य कुमार-राहुलस्य जनकः सञ्जातोऽस्ति। आगच्छतु भवान् अद्य कुमार-राहुलस्य अभिनिष्क्रमणसंस्कारः।

सिद्धार्थः :
न किमपि इच्छामि यशोधरे। अद्यैव प्रव्रज्यायै अनुमतिं ग्रहीतुं महाराजस्य सौधमुपसमि। अथैव प्रव्रज्यायै अनु। यशोधरा-(तारस्वरेण) कुत्र प्रयाति कुमारः? कुमार! कुमार!
(दृश्यपरिवर्तनम्) सिद्धार्थः-आर्य! अभिवादये। शुद्धोदनः-सिद्धार्थ! शाक्यवंशधरो भव।

सिद्धार्थः :
आर्य! अद्य एकामनुज्ञां ग्रहीतुं समुपस्थितोऽस्मि। अहं जानामि यदाजन्म महाराजस्य मह्यं किमप्यदेयं नास्ति।

शुद्धोदनः :
नि:शङ्कं ब्रूहि सिद्धार्थ! मम प्राणा अपि त्वदधीनाः कुमार।।

शब्दार्था: :
प्रव्रज्यायै-संन्यास के लिए-for assuming sanyasa; सौधमुपसमि-महल में जाऊँगा-.go to the palace; तारस्वरेण-ऊँचे स्वर में-loudly;प्रयाति-जाता है-goes; त्वदधीनाः-तुम्हारे अधीन-render under control.

अनुवाद :
सिद्धार्थः-यह आप क्या कह रहे हैं? यह समय संन्यास का नहीं है। कुछ महीने पूर्व ही तो आप शाक्यंवशधर कुमार राहुल के पिता बने हैं। आप आइए, आज कुमार राहुल का अभिनिष्क्रमण संस्कार है।

सिद्धार्थ :
यशोधरा! कुछ भी इच्छा नहीं है। आज ही संन्यास के लिए अनुमति लेने महाराज के महल में जाऊँगा। आज ही संन्यास के लिए। यशोधरा-(ऊँचे स्वर से) कुमार आप कहाँ जा रहे हैं? कुमार! कुमार!

(दृश्य बदलता है)

सिद्धार्थ :
आर्य! अभिवादन करता हूँ। शुद्धोदन-सिद्धार्थ! शाक्यवंश के धारक (रक्षक) हो।

सिद्धार्थ :
आर्य! आज एक आता लेने के लिएपस्थित हुआ हूँ। मैं जानता हूँ कि जब मेरा जन्म हुआ है, महाराज का मेरे लिए कुछ भी अदेय नहीं है।

शुद्धोदन :
निःसंकोच होकर कहो सिद्धार्थ! मेरे प्राण भी तुम्हारे अधीन हैं, कुमार!

English :
Yashodhra advises him not to take the drastic step Siddhartha is adamant. Siddhartha approaches his father to seek his permission.

3. सिद्धार्थः-महाराज! सुबहु मया विचारितं प्रजानां लोकयात्रार्थम्। अधुना शोकमृत्युभयानां निग्रहाय तपश्चिकीर्षामि। प्रव्रज्यायै अनुज्ञातुमर्हति मां महाराजः।

(कोलाहलो वर्धते, आश्रचर्यम्, आश्चर्यम् इति ध्वनयश्च) शुद्धोदनः-कुमार सिद्धार्थ! किमिदं व्यवसितं त्वया? न हि कालस्ते प्रव्रज्यां ग्रहीतुम्। प्रथमे वयसि चलायां मतौ धर्मचर्या बहु दोषा भवति। मया हि तव कुतूहलार्थं क्रीडोद्याने सर्वापि विनोदसामग्री समुदपस्थापिता। चित्रं मनोज्ञेऽपि विषये तव रतिर्न जायते।

सिद्धार्थ :
आर्य! जरा व्याधिश्च मृत्युश्च यदि न स्युस्तर्हि मम मनोज्ञेषु विषयेषु रतिर्भवत्। असंशयं मृत्युरिति जानतोऽपि यस्प हृदि रागो जायते तस्य चेतना लोहमयीमेव उत्प्रेक्षे।

शब्दार्थाः :
सुबहु-अच्छी तरह से-from all angles; चिकीर्षामि-इच्छा करता हूँ-wish for; व्यवसितम्-संङ्कल्प-resolve.

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अनुवाद :
सिद्धार्थः-महाराज! अच्छी तरह से मेरे द्वारा प्रजा की लोकयात्रा का विचार किया गया। अब शोक व मृत्यु के भय पराजित करने के लिए तप की इच्छा करता हूँ। महाराज, जाप मुझे संन्यास की आज्ञा दे, (शोर बढ़ जाता है, आश्चर्य है, आश्चर्य है, ऐसी ध्वनि होती है।)

शुद्धोदन :
कुमार सिद्धार्थ! क्या वह तुम्हारा सङ्कल्प है? यह समरः तुम्हारे संन्यास लेने का नहीं है। प्रथम आयु में चलते हुए विचार में धर्माचरण बहुत दोषपूर्ण होता है। मेरे द्वारा ही तुम्हारे मनोरंजन के लिए क्रीड़ास्थल में सभी मनोरंजन की सामग्री लाई गयी थी। चित्र भी तुम्हारे मन और बुद्धि के विषयों पर अनुराग उत्पन्न नहीं कर सके।

सिद्धार्थ :
आर्य! बुढ़ापा, रोग और मृत्यु यदि न होते तो मेरे मन-मस्तिष्क के विषयों पर अनुराग होता। संशय रहित, मृत्यु है, यह जानकर भी जिसके मन में राग उत्पन हो, उसका भन लोहे के समान होगा।

English :
Siddhartha expressed his desire to perform penances. The king advised him against his decision. He had arranged recreational facilities in his son’s palace. Siddhartha is hell bent on encountering old age, diseases and death.

4. शुद्धोदनः-कुमार! कस्त्वामेदं दोधितवान्? तवदं सुकुमारं वयः प्रसन्नसुन्दरं च वपुः किं प्रव्रज्यायै भगवता सृष्टम्? नायं कालस्तव तपोवनाश्रयस्य। गच्छ क्रीडोपवनम्। अनुभव नृत्यवादित्रविनोदम्।

सिद्धार्थः :
कथमहं चेतनां वञ्चयेयमार्य। यदि भवान्मे प्रतिभूर्भवति यन्मम जीवनं मरणाय न सृष्टमस्ति, मम शरीरं रोगेभ्यः सर्वदा मुक्तं स्यात्, मम यौदलं च जरा न कदाप्याक्षिपेत, तर्हि अहं तपोवनं न श्रयिष्ये।

सूत्रधारः :
संसारस्य निःसारता, जनन-मरण-चक्रस्य वन्धनं, मानुषी गतिः, र्वमिदं विचिन्त्य सिद्धार्थों व्यरञ्ज्यत लोकयात्रातः। सकृन्निशीथ तेन व्यवगितं यत्सर्वमिदं प्रपञ्चं परित्यजय जननमरणयोः पारं द्रष्टुं स तपस्तप्स्यति, साधनां विधास्यति, जीवनरहस्यं बोद्धं प्रयतिष्यते। (इति निष्क्रान्तः सर्वे)

शब्दार्थाः :
सष्टम-बनाया है-Created; वञ्चयेयम्-धोखा दूँगाँ-deceive; आक्षिपेक्-चढ़े-overrule; श्रयिष्ये-आश्रय ग्रहण करूँगा-seekshelter; निशीथे-अधी-रात में-at midnight; व्यवसितम्-निर्धारित कर-resolved;बोद्धम्-जानने के लिए-toknow; प्रतिभूः-जमानत, प्रमाण-evidence.

अनुवाद :
शुद्धोदन-कुमार! यह तुम्हें किसने बताया? तुम्हारी यह कोमल आयु और प्रसन्न व सुन्दर शरीर क्या संन्यास के लिए भगवान द्वारा बनाई गई है? यह समय तुम्हारे वन में आश्रय लेने का नहीं है। अपने क्रीडाग्रह में जाओ। नृत्य-संगीत आदि से मनोरञ्जन करो।

सिद्धार्थ :
आर्य! मैं अपने मन को कैसे धोखा दूं? यदि आप मुझे प्रमाण देते हैं कि मेरा जीवन मरने के लिए नहीं बना है, मेरा शरीर रोग से सदा मुक्त रहेगा, मेरी जवानी पर कभी बुढ़ापा नहीं चढ़ेगा, तो मैं तपोवन का आश्रय नहीं लूँगा।

सूत्रधार :
संसार की सारहीनता, जन्म-मरण के चक्र का बन्धन मनुष्य की गति, यह सब सोचकर सिद्धार्थ विरक्त हो कर लोकयात्रा को चला गया। ठीक आधी रात में उसके द्वारा निर्धारित करके कि यह सब दिखावा त्याग कर जन्म-मरण के पार देखने के लिए, वह तप करेगा, साधना करेगा और जीवन रहस्य जानने का प्रयास करेगा। (सब निकल जाते हैं।)

English :
The king asked the prince to return to the palace and enjoy himself.

The Prince rejected the king’s advice-he realised the futility of earthly pleasures.

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions

MP Board Class 8th Maths Chapter 1 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 02

संवृत

प्रश्न 1.
प्राकृत संख्याओं के लिए सभी चार संक्रियाओं के अन्तर्गत संवृत गुण की जाँच कीजिए।

1. योग:
यदि a और b दो पूर्ण संख्याएँ हैं तो a + b भी एक पूर्ण संख्या होगी।

प्रश्न 1.
4 + 7 = …… क्या यह एक पूर्ण संख्या
हल:
4 + 7 = 11; हाँ, यह एक पूर्ण संख्या है।
जाँच:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-1
अतः पूर्ण संख्याएँ योग के अन्तर्गत संवृत हैं उत्तर

2. व्यवकलन:
यदि a और b दो प्राकृत संख्याएँ इस प्रकार हैं कि a > b, तब a – b = प्राकृत संख्या होगी। यदि a < b या a = b, तो a-b प्राकृत संख्या नहीं होगी।
जाँच:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-2
अतः पूर्ण संख्याएँ व्यवकलन के अन्तर्गत संवृत नहीं हैं।

3. गुणन:
यदि a तथा b कोई दो पूर्ण संख्याएँ हैं, तो उनका गुणनफल भी एक पूर्ण संख्या होती है।

MP Board Solutions

प्रश्न 1.
3 x 7 = …. क्या यह एक पूर्ण संख्या है?
हल:
3 x 7 = 21 ; हाँ, यह एक पूर्ण संख्या है।
जाँच:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-3
अतः पूर्ण संख्याएँ गुणन के अन्तर्गत संवृत हैं।

4. भाग:
यदि a तथा b दो प्राकृत संख्याएँ हैं, तो यह आवश्यक नहीं कि a ÷ b प्राकृत संख्या होगी।
जाँच:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-4
अतः पूर्ण संख्याएँ भाग के अन्तर्गत संवृत नहीं हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 02-03

पूर्णांक

1. योग
प्रश्न 1.
क्या – 7 + (-5) एक-पूर्णांक है?
हल:
– 7 + (-5) = – 7 – 5 = – 12; हाँ, यह एक पूर्णांक।

प्रश्न 2.
क्या 8 + 5 एक पूर्णांक है?
हल:
8 + 5 = 13; हाँ, यह एक पूर्णांक है। अतः पूर्णांक योग के अन्तर्गत संवृत हैं।

2. व्यवकलन

MP Board Solutions

प्रश्न 1.
क्या 5 – 7 एक पूर्णांक है?
हल:
5 – 7 = – 2; हाँ, यह एक पूर्णांक हैं।

प्रश्न 2.
क्या 8 – (-6) एक पूर्णांक है?
हल:
8 – (-6) = 8 + 6 = 4; हाँ, यह एक पूर्णांक है।

प्रश्न 3.
जाँच कीजिए कि क्या b – a भी एक पूर्णांक है?
हल:
हाँ, (b – a) भी एक पूर्णांक है। अतः पूर्णांक व्यवकलन के अन्तर्गत संवृत है।

3. गुणन

प्रश्न 1.
क्या – 5 x 8 एक पूर्णांक है?
हल:
– 5 x 8 = – 40; हाँ, यह एक पूर्णांक है। अतः पूर्णांक गुणन के अन्तर्गत संवृत है।

4. भाग

प्रश्न 1.
क्या 5 + 8 एक पूर्णांक है?
हल:
5 + 8 = है, यह एक पूर्णांक नहीं है। अतः पूर्णांक भाग के अन्तर्गत संवृत नहीं है।

परिमेय संख्याएँ

(a) क्या आप जानते हैं कि परिमेय संख्याओं को कैसे जोड़ा जाता है?

प्रश्न 1.
\(\frac{-3}{8}\) + \(\frac{-4}{5}\) =\(\frac { -15+(-32) }{ 40 } \) = …… क्या यह एक परिमेय संख्या है?
हल:
\(\frac{-3}{8}\) + \(\frac { (-4) }{ 5 } \) = \(\frac { -15+(-32) }{ 40 } \)
= \(\frac{-47}{40}\); हाँ, यह एक परिमेय संख्या है।

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प्रश्न 2.
\(\frac{4}{7}\) + \(\frac{6}{11}\) = . . . . ; क्या यह एक परिमेय संख्या है?
हल:
\(\frac{4}{7}\) + \(\frac{6}{11}\) = \(\frac { 44+22 }{ 77 }\) = \(\frac{86}{77}\); हाँ, यह एक परिमेय संख्या है। अतः परिमेय संख्याएँ योग के अन्तर्गत संवृत हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 04

प्रश्न 1.
दो परिमेय संख्याओं का योग भी एक परिमेय संख्या है। कुछ और परिमेय संख्याओं के युग्म लेकर इसकी जाँच कीजिए।
हल:
(i) \(\frac{2}{3}+\frac{1}{5}=\frac{10}{15}+\frac{3}{15}=\frac{10+3}{15}=\frac{13}{15}\); एक परिमेय संख्या है।
(ii) \(\frac{-3}{4}+\frac{5}{7}=\frac{-21}{28}+\frac{20}{28}=\frac{-21+20}{28}=\frac{-1}{28}\); एक परिमेय संख्या है।
(iii) \(\frac{-9}{4}+\frac{-2}{12}=\frac{-27}{12}+\frac{-2}{12}=\frac{-27-2}{12}=\frac{-29}{12}\); एक परिमेय संख्या है।
अतः किन्हीं दो परिमेय संख्याओं a तथा b के लिए a+b भी एक परिमेय संख्या है।

(b)
प्रश्न 1.
क्या दो परिमेय संख्याओं का अन्तर भी एक परिमेय संख्या होगा?
उत्तर:
हाँ, दो परिमेय संख्याओं का अन्तर भी एक परिमेय संख्या होगा।

प्रश्न 2.
\(\frac{5}{8}-\frac{4}{5}=\frac{25-32}{40}\) = …… क्या यह एक परिमेय संख्या है?
उत्तर:
\(\frac{5}{8}-\frac{4}{5}=\frac{25-32}{40}\) = \(\frac{-7}{40}\) यह एक परिमेय संख्या है।

प्रश्न 3.
\(\frac{3}{7}-\left(\frac{-8}{5}\right)\) = …… क्या यह एक परिमेय संख्या है।
उत्तर:
\(\frac{3}{7}-\left(\frac{-8}{5}\right)=\frac{3}{7}+\frac{8}{5}=\frac{15+56}{35}=\frac{71}{35}\) ; यह एक परिमेय संख्या है।

प्रश्न 4.
परिमेय संख्याओं के कुछ और युग्मों के लिए इसकी जाँच कीजिए?
उत्तर:
(i)
\(\frac{7}{9}-\frac{2}{5}=\frac{7 \times 5-2 \times 9}{45}=\frac{35-18}{45}=\frac{17}{45}\) यह एक परिमेय संख्या है।
(ii)
\(=\frac{33+5}{15}=\frac{38}{15}\) ; यह एक परिमेय संख्या है।
अतः परिमेय संख्याएँ व्यवकलन के अन्तर्गत संवृत हैं। अर्थात् किन्हीं दो परिमेय संख्याओं a तथा b के लिए a-b भी एक परिमेय संख्या होगी।

(c) दो परिमेय संख्याओं के गुणनफल

प्रश्न 1.
\(\frac{-4}{5}\)x\(\frac{-6}{11}\) = …… ; क्या यह एक परिमेय संख्या है?
उत्तर:
\(\frac{-4}{5}\)x\(\frac{-6}{11}\) = \(\frac { (-4)x(-6) }{ 5×11 } \) = \(\frac{24}{55}\) हाँ, यह एक परिमेय संख्या है।

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प्रश्न 2.
परिमेय संख्याओं के कुछ और युग्म लीजिए और जाँच कीजिए कि उनका गुणनफल भी एक परिमेय संख्या है।
हल:
(i) \(\frac{-3}{5} \times 7=\frac{(-3) \times 7}{5}=\frac{-21}{5}\) यह एक परिमेय संख्या है।
(ii) \(\frac{-3}{4} \times \frac{1}{7}=\frac{(-3) \times 1}{4 \times 7}=\frac{-3}{28}\) यह एक परिमेय संख्या है।
(iii) \(\frac{2}{3} \times \frac{5}{9}=\frac{2 \times 5}{3 \times 9}=\frac{10}{27}\) यह एक परिमेय संख्या है।
अतः स्पष्ट है कि परिमेय संख्याएँ गुणन के अन्तर्गत संवृत हैं। अर्थात् किन्हीं दो परिमेय संख्याओं a तथा b के लिए ax b भी एक परिमेय संख्या होगी।

(d)
प्रश्न 1.
\(\frac{2}{7}\) ÷ \(\frac{5}{3}\) ; क्या यह एक परिमेय संख्या है?
उत्तर:
\(\frac{2}{7} \div \frac{5}{3}=\frac{2}{7} \times \frac{3}{5}=\frac{2 \times 3}{7 \times 5}=\frac{6}{35}\) ; हाँ, यह एक परिमेय संख्या है।

प्रश्न 2.
\(\frac{-3}{8}\) ÷ \(\frac{5}{3}\) ; क्या यह एक परिमेय संख्या है?
उत्तर:
\(\frac{-3}{8} \div \frac{-2}{9}=\frac{-3}{8} \times \frac{9}{-2}=\frac{-27}{-16}=\frac{27}{16}\) हाँ, यह एक परिमेय संख्या है।

प्रश्न 3.
क्या आप कह सकते हैं कि परिमेय संख्याएँ भाग के अन्तर्गत संवृत हैं?
उत्तर:
किसी संख्या a के लिए a ÷ 0 परिभाषित नहीं है। अतः परिमेय संख्याएँ भाग के अन्तर्गत संवृत नहीं हैं। तथापि, यदि हम शून्य को शामिल न करें तो दूसरी सभी परिमेय संख्याओं का समूह, भाग के अन्तर्गत संवत है।

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 05

प्रयास कीजिए (क्रमांक 1.1)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सारणी में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-5

क्रमविनिमेयता

(i) पूर्ण संख्याएँ

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सारणी के रिक्त स्थानों को भरते हुए विभिन्न संक्रियाओं के अन्तर्गत पूर्ण संख्याओं की क्रमविनिमेयता का स्मरण कीजिए।
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-6

प्रश्न 2.
जाँच कीजिए कि क्या प्राकृतिक संख्याओं के – लिए भी ये संक्रियाएँ क्रमविनिमेय हैं?
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-7

(ii) पूर्णांक

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सारणी के रिक्त स्थानों को भरिए और पूर्णांकों के लिए विभिन्न संक्रियाओं की क्रमविनिमेयता जाँचिए।
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-8

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 06

(iii) परिमेय संख्याएँ

(a) योग:

प्रश्न 1.
(i) क्या \(\frac{-6}{5}+\left(\frac{-8}{3}\right)=\left(-\frac{8}{3}\right)+\left(\frac{-6}{5}\right)\) है?
(ii) क्या \(\frac{-3}{8}+\frac{1}{7}=\frac{1}{7}+\left(\frac{-3}{8}\right)\) है?
हल:
(i)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-9
(ii)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-10
अतः परिमेय संख्याओं के लिए योग क्रम- विनिमेय है।

(b) व्यवकलन:

प्रश्न 1.
(i) क्या \(\frac{2}{3}-\frac{5}{4}=\frac{5}{4}-\frac{2}{3}\) है?
(ii) क्या \(\frac{1}{2}-\frac{3}{5}=\frac{3}{5}-\frac{1}{2}\) है?
हल:
(i)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-11
(ii)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-12
स्पष्ट है कि परिमेय संख्याओं के लिए व्यवकलन क्रमविनिमेय नहीं है।

(c) गुणन:
हम पाते हैं कि \(\frac{-7}{3} \times \frac{6}{5}=\frac{-42}{15}=\frac{6}{5} \times \frac{(-7)}{3}\)

प्रश्न 1.
क्या \(\frac{-8}{9} \times\left(\frac{-4}{7}\right)=\left(\frac{-4}{7}\right) \times\left(\frac{-8}{9}\right)\) है?
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-13

प्रश्न 2.
कुछ और गुणनफलों के लिए जाँच कीजिए।
हल:
(i)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-14
(ii)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-15
अतः परिमेय संख्याओं के लिए गुणन क्रमविनिमेय है।

(d) भाग:

प्रश्न 1.
क्या \(\frac{-5}{4} \div \frac{3}{7}=\frac{3}{7} \div\left(\frac{-5}{4}\right)\) है?
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-16
हम पाते हैं कि दोनों पक्षों के व्यंजक समान नहीं हैं। अतः परिमेय संख्याओं के लिए भाग क्रमविनिमेय नहीं है।

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 07

प्रयास कीजिए (क्रमांक 1.2)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सारणी को पूरा कीजिए –
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-17

(i) पूर्ण संख्याएँ –

प्रश्न 1.
इस सारणी को भरिए और अन्तिम स्तम्भ में दी गई टिप्पणियों को सत्यापित कीजिए।
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-18

प्रश्न 2.
प्राकृत संख्याओं के लिए विभिन्न संक्रियाओं की साहचर्यता की स्वयं जाँच कीजिए।
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-19

(ii) पूर्णांक

प्रश्न 1.
पूर्णांकों के लिए चार संक्रियाओं की साहचर्यता निम्नलिखित सारणी से देखी जा सकती है –
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-20

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 08

(iii) परिमेय संख्याएँ

(a) योग

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए \(\frac{-1}{2}+\left[\frac{3}{7}+\left(\frac{-4}{3}\right)\right]\) और \(\left[\frac{-1}{2}+\frac{3}{7}\right]+\left(\frac{-4}{3}\right)\) क्या ये दोनों योग समान हैं?
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-21

प्रश्न 2.
कुछ और परिमेय संख्याएँ लीजिए। उपर्युक्त उदाहरणों की तरह उन्हें जोड़िए और देखिए कि क्या दोनों योग समान हैं?
(i) \(\left[\frac{-1}{3}+\frac{3}{4}\right]+\left(\frac{-5}{6}\right)\) और \(\left(\frac{-1}{3}\right)+\left[\frac{3}{4}+\left(\frac{-5}{6}\right)\right]\)
(ii) \(\left[\frac{-6}{7}+\left(\frac{-7}{14}\right)\right]+7\) और \(\frac{-6}{7}+\left[\left(\frac{-7}{14}\right)+7\right]\)
हल:
(i)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-22
(ii)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-23
हम पाते हैं कि दोनों योग समान हैं। अतः परिमेय संख्याओं के लिए योग साहचर्य है।
अर्थात् किन्हीं तीन परिमेय संख्याओं a, b तथा c के लिए a + (b + c) = (a + b) + c.

(b) व्यवकलन

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प्रश्न 1.
क्या \(\frac{-2}{3}-\left[\frac{-4}{5}-\frac{1}{2}\right]=\left[\frac{-2}{3}-\left(\frac{-4}{5}\right)\right]-\frac{1}{2}\) है? स्वयं जाँच कीजिए।
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-24
अतः परिमेय संख्याओं के लिए व्यवकलन साहचर्य नहीं है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 09

(c) गुणन

प्रश्न 1.
क्या \(\frac{2}{3} \times\left(\frac{-6}{7} \times \frac{4}{5}\right)=\left(\frac{2}{3} \times \frac{-6}{7}\right) \times \frac{4}{5}\) है?
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-25

प्रश्न 2.
कुछ और परिमेय संख्याएँ लीजिए और स्वयं जाँच कीजिए। क्या \(\left(\frac{-5}{3} \times \frac{3}{-7}\right) \times \frac{3}{2}=\frac{-5}{3} \times\left(\frac{3}{-7} \times \frac{3}{2}\right)\) है?
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-26
हम पाते हैं कि परिमेय संख्याओं के लिए गुणन साहचर्य है। अर्थात् किन्हीं तीन परिमेय संख्याओं a, b तथा c के लिए ax (bx c)= (ax b) x c.

(d) भाग

प्रश्न 1.
आइए, देखते हैं कि यदि \(\frac{1}{2} \div\left[\frac{-1}{3} \div \frac{2}{5}\right]=\left[\frac{1}{2} \div\left(\frac{-1}{3}\right)\right] \div \frac{2}{5}\) है? क्या L.H.S. = R.H.S. है?
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-27
अतः बायाँ पक्ष ≠ दायाँ पक्ष
स्पष्ट है कि परिमेय संख्याओं के लिए भाग साहचर्य नहीं है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 10

MP Board Solutions

प्रयास कीजिए (क्रमांक 1.3)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सारणी को पूरा कीजिए
उत्तर:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-28

प्रश्न 2.
क्या आप सोचते हैं कि क्रमविनिमेयता और साहचर्यता के गुणधर्मों की सहायता से परिकलन आसान हो गया है?
उत्तर:
हाँ, वास्तव में क्रमविनिमेयता और साहचर्यता के गुणधर्मों की सहायता से परिकलन आसान हो गया है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 11

शून्य (0) की भूमिका

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पर विचार कीजिए –
2 + 0 = 0 + 2 = 2 (शून्य को पूर्ण संख्या में जोड़ना)
– 5+ 0 = …+… = – 5(शून्य को पूर्णांक में जोड़ना)
\(\frac{-2}{7}\) + ……. = 0 + \(\left(\frac{-2}{7}\right)\) = \(\frac{-2}{7}\) (शून्य को परिमेय संख्या में जोड़ना)
हल:
– 5 + 0 = 0 + (-5) = – 5
\(\frac{-2}{7}\) + 0 = 0 + \(\left(\frac{-2}{7}\right)\) = \(\frac{-2}{7}\)

प्रश्न 2.
ऐसे कुछ और योग ज्ञात कीजिए। आप क्या देखते हैं?
हल:
(i) 7 + 0 = 0 + 7 = 7
(ii) 121 + 0 = 0 + 121 = 121
(iii) – 11 + 0 = 0 + (-11) = – 11
(iv) – 150 + 0 = 0 + (-150) = -150
(v) \(\frac{2}{11}\) + 0 = 0 + \(\frac{2}{11}\) = \(\frac{2}{11}\)
(vi) \(\frac{-3}{17}\) = + 0 = 0 + \(\left(\frac{-3}{17}\right)\) = \(\frac{-3}{17}\)
हम देखते हैं कि किसी पूर्ण संख्या अथवा पूर्णांक अथवा परिमेय संख्याओं में शून्य जोड़ा जाता है तो वही संख्या प्राप्त होती है।
अतः पूर्ण संख्याओं, पूर्णांकों और परिमेय संख्याओं के योग के लिए शून्य योज्य तत्समक है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 12

1 की भूमिका

प्रश्न 1.
हम पाते हैं कि 5 x 1 = 5 = 1 x 5 (पूर्ण संख्या के साथ 1 का गुणन) –
\(\frac{-2}{7}\) x 1 =……. x ….. \(\frac{-2}{7}\)
\(\frac{3}{8}\) x …….. = 1 x \(\frac{1}{8}\) = \(\frac{3}{8}\)
आप क्या पाते हैं? कुछ और परिमेय संख्याओं के लिए इसकी जाँच कीजिए।
हल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-29
कुछ और गुणनफल इस प्रकार है –
(i) – 11 x 1 = 1 x (-11) = – 11
(ii) \(\frac{3}{13}\) x 1 = 1 x \(\frac{3}{13}\) = \(\frac{3}{13}\)
(iii) \(\frac{-11}{29}\) x 1 = 1 x \(\left(\frac{-11}{29}\right)\) = \(\frac{-11}{29}\)
हम पाते हैं कि किसी परिमेय संख्या a के लिए 1 गुणनात्मक तत्समक है।
a x 1 = 1 x a = a

प्रश्न 2.
क्या 1 पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए भी गुणनात्मक तत्समक है?
उत्तर:
हाँ, 1 पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए भी गुणनात्मक तत्समक है।

सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए –

प्रश्न 1.
यदि कोई गुणधर्म परिमेय संख्याओं के लिए सत्य है तो क्या वह गुणधर्म पूर्णांकों, पूर्ण संख्याओं के लिए भी सत्य होगा? कौन-से गुणधर्म इनके लिए सत्य होंगे और कौन-से सत्य नहीं होंगे?
उत्तर:
हाँ, वे गुणधर्म जो परिमेय संख्याओं के लिए सत्य हैं, तो वे गुणधर्म पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए भी सत्य हैं।

  1. पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए व्यवकलन और भाग साहचर्य नहीं हैं।
  2. पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए व्यवकलन और भाग संवृत नहीं हैं।
  3. पूर्णांकों और पूर्ण संख्याओं के लिए व्यवकलन और भाग क्रमविनिमेय नहीं हैं।

एक संख्या का ऋणात्मक

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प्रश्न 1.
किसी परिमेय संख्या \(\frac{2}{3}\) के लिए हम पाते हैं, \(\frac{2}{3}+\left(-\frac{2}{3}\right)=\frac{2+(-2)}{3}=0\) इसके अतिरिक्त \(\left(-\frac{2}{3}\right)+\frac{2}{3}=0\) कैसे? इसी प्रकार \(\frac{-8}{9}\) + …. ….. +\(\left(\frac{-8}{9}\right)\) = 0 ….. + \(\left(\frac{-11}{7}\right)\) = \(\left(\frac{-11}{7}\right)\) + …… = 0
हुल:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-30
अत: \(\frac{a}{b}\) का योज्य प्रतिलोम –\(\frac{a}{b}\) तथा \(-\left(\frac{a}{b}\right)\) का योज्य प्रतिलोम है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 14

प्रयास कीजिए (क्रमांक 1.4)

प्रश्न 1.
वितरकता के उपयोग से निम्नलिखित का मान ज्ञात कीजिए –
(i) \(\left\{\frac{7}{5} \times\left(\frac{-3}{12}\right)+\frac{7}{5} \times \frac{5}{12}\right\}\)
(ii) \(\left\{\frac{9}{16} \times \frac{4}{12}\right\}+\left\{\frac{9}{16} \times \frac{-3}{9}\right\}\)
हल:
वितरकता के अन्तर्गत हम एक गुणनफल को दो गुणनफलों के योग अथवा अन्तर के रूप में विभक्त करते हैं।
(i)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-31
(ii)
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Intext Questions img-32

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम्

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 6 यशः शरीरम् (कथा) (सङ्कलिता)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 6 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए-)।
(क) मार्कण्डेयः नाम ऋषिः कुत्र वसति स्म? (मार्कण्डेय ऋषि कहाँ रहते थे?)
उत्तर:
गङ्गातीरे (गङ्गा के किनारे)

(ख) वासुदेवः कस्य प्रियशिष्यः आसीत्? (वासुदेव किसका प्रिय शिष्य था?)
उत्तर:
मार्कण्डेयस्य (मार्कण्डेय का)।

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(ग) वासुदेवः प्रथमं कस्य गृहं प्रति प्रस्थितः? (वासुदेव पहले किसके घर गया?)
उत्तर:
देवराजस्य (देवराज के)

(घ) रामदेवः कस्मिन् ग्रामे वसति स्म? (रामदेव किस गाँव में रहता था?)
उत्तर:
रामनाथपुरे (रामनाथ पुर में)

(ङ) जनाः प्रतिदिनं कं स्मरन्ति स्म? (लोग प्रतिदिन किसको याद करते थे?)
उत्तर:
रामदेवम् (रामदेव को)

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प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत- (एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) कः मृतोऽपि जीवति? (कौन मरकर भी जीवित है?)
उत्तर:
यः समाजहितं चिन्तयति सः मृतोऽपि जीवति।।
(जो समाज के हित की सोचता है, वह मरकर भी जीवित है।)

(ख) कः जीवन्नपि मृतः एव? (कौन जीते हुए भी मृत है?)
उत्तर:
यः स्वार्थमात्रं चिन्तयति सः जीवन्नपि मृतः एव।
(जो केवल अपने विषय में सोचता है, वह जीवित होकर भी मृत है।)

(ग) देवालये किं प्रचलति स्म? (मंदिर में क्या चल रहा था?)
उत्तर:
देवालये प्रसादत्वेन भोजनवितरणं प्रचलति स्म। (मंदिर में प्रसाद के रूप में भोजन बँट रहा था।)

(घ) जलं दत्वा माता किम् अपृच्छत? (जल देकर माता ने क्या पूछा?)
उत्तर:
जलं दत्वा माता अपृच्छत्-भवता कुत्र गम्यते?” इति। (जल देकर माता ने पूछा- “आप कहाँ जा रहे हैं?)

(ङ) भोजनपरिवेषकाः किं कृतवन्तः? (भोजन परोसने वालों ने क्या किया?)
उत्तर:
भोजनपरिवेषकाः वासुदेवाय अन्नं पायसादिकं न परिविष्टवन्तः। (भोजन परोसने वालों ने वासुदेव के लिए अन्न-खीर आदि नहीं परोसा।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए।)
(क) कोपेन देवराजः किम् उक्तवान् ? (क्रोध में देवराज ने त्म्या कहा?)
उत्तर:
कोपेन देवराजः उक्तवान्–“किं धनं याचयितुम् आगतं भवता? मया कस्मैचित् किमपि न दीयते। मम विश्रान्तिः नाशिता भवता। निर्गम्यताम इतः” इति।

(क्रोध में देवराज ने कहा-“क्या तुम धन माँगने आए हो? मैं किसी को कुछ नहीं दूंगा। मेरा आराम भंग कर दिया तुमने। चले जाओ यहाँ से।”)

(ख) पुत्रः वासुदेवं विषादेन किमुक्तवान् ? (पुत्र ने वासुदेव को दुख से क्या कहा?)
उत्तर:
पुत्रः वासुदेवं विषादेन उक्तवान्-“मम पिता विंशति वर्षेभ्यः पूर्वम् एव दिवं गतः। इदानीं लोके तस्य स्मृतिमात्रम् अस्ति।” इति।

(पुत्र ने वासुदेव को दुख से कहा-“मेरे पिता 20 वर्ष पहले ही स्वर्ग चले गए। अब संसार में उनकी केवल याद ही है।”)

(ग) यदा वासुदेवस्य अध्ययनं समाप्तं तदा गुरुः तमाहूय किमवदत्? (जब वासुदेव का अध्ययन समाप्त हो गया, तब गुरु ने उसे बुलाकर क्या कहा?)
उत्तर:
यदा वासुदेवस्य अध्ययनं समाप्तं तदा गुरुः तमाहूय अवदत्-“शिष्य! अधुना भवान सर्वविद्यापारङ्गतः अस्ति। अतः इतः परं स्वग्रामं गन्तुम् अर्हति भवान्। गमनात् पूर्वं भवता द्वारकापुरस्य देवराजस्य गृहं दृष्ट्वा आगन्तव्यम्। किन्तु गृहस्यान्तः न गन्तव्यम्’ इति।

(जब वासुदेव का अध्ययन समाप्त हुआ तब गुरु ने उसे बुलाकर कहा, शिष्य! अब तुम समस्त विद्याओं में निपुण हो। अब तुम यहाँ से अपने गाँव जाने योग्य हो। जाने से पूर्व तुम द्वारकापुर के देवराज के घर जाकर देखकर आओ। पर घर के अन्दर नहीं जाना।”)

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प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूयरत
(दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(बहवः, भोजनम्, मध्येमार्गम्, रामदेवस्य, देवालयम्)
(क) तत्र प्रसादत्वेन ………………. प्रचलति स्म।
(ख) वासुदेवः कञ्चित्………………. अपश्यत।
(ग) मया……………….जीवनम् एव अनुसरणीयम्।
(घ) गुरुकुले……………….शिष्याः आसन्।
(ङ) …………….तेन सोमपुरं प्राप्तम्।
उत्तर:
(क) भोजनम्
(ख) देवालयम्
(ग) रामदेवस्य
(घ) बहवः
(ङ) मध्येमार्गम्।

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से मिलाइए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 1
उत्तर:
(क) 3
(ख) 5
(ग) 4
(घ) 1
(ङ) 2

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्धवाक्यानां समक्ष “न” इति लिखत
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) गुरुकुले बहवः शिष्याः आसन्।
(ख) मध्येमागं तेन रत्नपुर प्राप्तम्।।
(ग) ग्रामे सर्वे देवराजं सगौरवं स्मरन्ति स्म।
(घ) रामदेवः प्रातः स्मरणीयः आसीत्।
(ङ) रामदेवस्य गृहं वैभवोपेतम् आसीत्।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न।।

प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानां विभक्तिं वचनं च लिखत
(नीचे लिखे पदों की विभक्ति व वचन लिखिए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 3

प्रश्न 8.
उदाहरणानुसारं पदानां प्रकृतिं प्रत्ययं च पृथक्कुरुत
(उदाहरणानुसार पदों की प्रकृति व प्रत्यय अलग करके लिखिए-)
(क) गन्तव्यम्
(ख) प्रस्थितवान्
(ग) प्राप्तवान्
(घ) उक्त्वा
(ङ) सत्कृत्व
(च) आगत्य
(छ) यात्विा
(ज) वदन्दः
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 4

प्रश्न 9.
अधोलिखितशब्दानां पर्यायशब्दान् लिखत।
(नीचे लिखे शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए।)
(क) मुनिः
(ख) युक्कः
(ग) अम्ब
(घ) बुभुक्षितः।
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 7

प्रश्न 10.
अधोलिखितवाक्यानां कथानुसारेण क्रमसंयोजनं कुरुत
(नीचे लिखे वाक्यों को कथा के अनुसार क्रम से लिखिए।)
(क) ततः वासुदेवः रामनाथपुरं प्राप्य रामदेवस्य गृहम् अगच्छत्।
(ख) गङ्गातीरे मार्कण्डेयः नाम कश्चन मुनिः वसति स्म।
(ग) मया रामदेवस्य जीवनम् एव अनुसरणीयम्
(घ) किञ्चिदने गतः वासुदेवः किञ्चित् देवालयम् अपश्यत्।
(ङ) शिष्यः अनन्तरं रामनाथपुरं प्रति प्रस्थितवान्।
(च) वासुदेवः तस्य प्रियशिष्यः आसीत्।
उत्तर:
(क) गङ्गातीरे मार्कण्डेयः नाम कश्चन मुनिः वसति स्म।
(ख) वासुदेवः तस्य प्रियशिष्यः आसीत्।
(ग) किञ्चिदग्रे गतः वासुदेवः किञ्चित् देवालयम् अपश्यत्।
(घ) शिष्यः अनन्तरं रामनाथपुरं प्रति प्रस्थितवान्।
(ङ) ततः वासुदेवः रामनाथपुरं प्राप्य रामदेवस्य गृहम् अगच्छत्।
(च) मया रामदेवस्य जीवनम् एव अनुसरणीयम्।

प्रश्न 11.
प्रदत्तं चित्रम् अवलम्ब्य पञ्चवाक्यानि रचयत।
(दिए गए चित्र को देखकर पाँच वाक्य बनाइए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 6 यशः शरीरम् img 6
उत्तर:
(क) अस्मिन् चित्रे द्वे स्त्रियौ स्तः।
(ख) ते वार्तालापं कुरुतः।
(ग) गवेषणेन बालकः पश्यति।
(घ) आकाशे वायुयानं गच्छति।।
(ङ) द्वे स्त्रियौ गृहात् बहिः तिष्ठतः।

योग्यताविस्तार –

संस्कृतसाहित्यस्य अन्याः कथाः अन्विष्य पठत।
(संस्कृत साहित्य की अन्य कथाएँ ढूँढ़कर पढ़ो।)

अन्ये ये महापुरुषाः यशः शरीरेण ख्याताः सन्ति तेषां जीवनवृत्तान्तं कथारूपेण लिखत।
(अन्य जो महापुरुष यशरूपी शरीर से प्रसिद्ध हैं, उनके जीवन-वृत्तान्त को कथा रूप में लिखो।)

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यशः शरीरम् पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में यश की महत्ता को एक कथा के माध्यम से सिद्ध किया गया है। इस पाठ में दो विशेष पात्रो का वर्णन है जिनमें से एक धनी होते हुए भी जीवित होने पर अपयश के कारण मृत के समान व घृणित है, तथा दूसरा जीवित न होने पर भी यश रूप शरीर से लोगों के हृदयों में जीवित है। अतः मनुष्य को सदा यश-प्राप्ति के लिए अच्छे कार्य करने चाहिएं।

यशः शरीरम् पाठ का अनुवाद

1. गङ्गातीरे मार्कण्डेयः नाम कश्चन मुनिः वसति स्म। तस्य गुरुकुले बहवः शिष्याः आसन्। वासुदेवः तस्य प्रिय शिष्यः। तस्य द्वादशवर्षात्मकम् अध्ययनं यदा समाप्तं तदा गुरुः तम् आहूय अवदत्-“शिष्य! अधुना भवान् सर्वविद्यापारङ्गतः अस्ति। अतः इतः परं स्वग्रामं गन्तुम् अर्हति भवान्। गमनात् पूर्वं भवता द्वारकापुरस्य देवराजस्य गृहं दृष्ट्वा आगन्तव्यम्। किन्तु गृहस्यान्तः न गन्तव्यम्” इति।।

वासुदेवः तस्मिन् एव दिने द्वारकापुरं प्रति प्रस्थितवान्। दिनत्रयात्मकस्य प्रयाणस्य अनन्तरं तं ग्रामं प्राप्य सः ग्रामद्वारे स्थितान् जनान् अपृच्छत्-“देवराजस्य गृहं कुत्र?” इति। “वृथा किमर्थं गम्यते तत्र?” इति उपेक्षया वदन्तः ते देवराजगृहस्थलं सूचितवन्तः। अग्रे गतः सः कूपात् जलम् उद्धरन्तीं महिला याचित्वा जलं प्राप्य तत् पिबन् ताम् अपृच्छत्-“देवराजगृहं कुत्र?” “तस्य पापिनः नाम किमर्थं मम पुरतः उच्चारयति भवान्?” इति वदन्ती सा महिला ततः निरगच्छत् एव।

शब्दार्था :
आहूय-बुलाकर-caling; सर्वविद्यापारङ्गतः-समस्त विद्याओं में निपुण-skilled in all types of learning; प्रस्थितवान्-गया-started, वृथा-व्यर्थ में-in vain, वदन्तः-बोलते हुए-speaking, उद्धरन्तीम्-निकालती हुई को-drawing.

अनुवाद :
गङ्गा के किनारे मार्कण्डेय नाम के कोई मुनि रहते थे। उनके गुरुकुल में बहुत सारे शिष्य थे। वासुदेव उनका प्रिय शिष्य था। उसका बारह वर्ष तक का अध्ययन जब समाप्त हुआ, तब गुरु ने उसको बुलाकर कहा-“शिष्य! अब आप समस्त विद्याओं में निपुण हो गए हो। इसलिए यहाँ से दूर अपने गाँव में जाने योग्य हो गए हो । जाने से पहले तुम्हारे द्वारा द्वारकापुर के देवराज के घर को देखकर आना होगा। पर घर के अन्दर मत जाना।”

वासुदेव उसी दिन ही द्वारकापुर की ओर चला गया। तीन दिन की यात्रा के बाद उस गाँव में पहुँचकर उस गाँव के द्वार पर खड़े लोगों से पूछा-“देवराज का घर कहाँ है?” “व्यर्थ में वहाँ क्यों जा रहे हो?” इस प्रकार गुस्से में बोलते हुए उन्होंने देवराज का घर बता दिया। आगे जाते हुए उसने कुएँ से जल निकालती हुई महिला से माँगकर जल लेकर व पीकर उससे पूछा-“देवराज का घर कहाँ है?” “उस पापी का नाम मेरे सामने क्यों बोला, आपने?” ऐसा कहते हुए वह महिला वहाँ से चली ही गई।

English :
Vasudev learnt all subjects. Directed by Guru Markandeya to locate the house of Devraj at Dwakrapur-went to the village and learnt that Devraj was an evil-minded person.

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2. किञ्चिदग्रेगतः वासुदेवः कञ्चित् देवालयम् अपश्यत्। तत्र प्रसादत्वेन भोजनवितरणं प्रचलति स्म। नितरां बुभुक्षितः वासुदेवः जनानां पङ्क्तौ उपाविशत्। भोजनसमये स्वपार्श्वे उपविष्टवन्तं कञ्चित् जनम् अपृच्छत् वासुदेवः-“देवराजः किं धनिक?” इति। तदा सः पार्श्वस्थः जनः-“धिक् भवन्तम्। भोजनकाले तस्य पापिनः नाम स्मारितम्” इति वदन् भोजनं परित्यज्य उत्थितः एव। एतत् दृष्ट्वा परिवेषकाः वासुदेवाय अन्नं पायसादिकं न परिविष्टवन्तः एव। अपूर्णोदरः एव सः ततः उत्थितवान्।

शब्दार्था :
प्रसादत्वेन–प्रसाद के रूप में-as; नितराम्-बहुत अधिक-excessively, extremely; बुभुक्षितः-भूखा-hungry,स्वपार्श्वे अपने पास में-near him, उपविष्टवन्तः-बैठे हुए-sitting, धिक-धिक्कार है-fie, वदन-बोलते हुए-saying,परित्यज्य-छोड़कर-leaving, परिवेषकाः-खाना परोसने वाले-servers of food, पायसादिकम्-खीर इत्यादि-porridge etc, परिविष्टवन्तः-परोसा-served, अपूर्णोदरः-खाली पेट-empty bellied.

अनुवाद :
कुछ आगे जाने पर वासुदेव ने एक मन्दिर देखा। वहाँ प्रसाद के रूप में भोजन बँट रहा था। बहुत अधिक भूखा वासुदेव लोगों की पंक्ति में बैठ गया। भोजन के समय अपने पास में बैठे किसी व्यक्ति से वासुदेव ने पूछा-“देवराज क्या धनी है?’ तब पास में बैठा वह व्यक्ति बोला, “आपको धिक्कार है। भोजन के समय उस पापी का नाम याद किया।” ऐसा कहते हुए भोजन छोड़कर उठ ही गया। यह देखकर खाना परोसने वालों ने वासुदेव के लिए अन्न खीर आदि परोसा ही नहीं। खाली पेट ही वह वहाँ से उठ गया।

English :
Vasudev reached a temple-sat in the line to receive ‘Prasad’-asked somebody about Devraj-The fellow cursed him and stood up ‘Vasudev also remained hungry-Prasad was net served to him.”

3. दूरात् एव देवराजस्य गृहं दृष्ट्वा प्रत्यागतः सः दिनद्वयस्य अनन्तरं गुरुकुलं प्राप्तवान्। गुरुः तं पुनः अवदत्-‘रामनाथपुरं गत्वा रामदेवस्य गृहं ज्ञात्वा आगन्तव्यम्” इति। शिष्यः अनन्तरदिने एव रामनाथपुरं प्रति प्रस्थितवान्। मध्येमागं तेन सोमपुरं प्राप्तम्। तत्र स्वगृहस्य पुरतः उपविष्टां काञ्चित् मातरम् अवदत् सः-“अम्ब! किञ्चित् जल ददातु” इति।

जलं दत्वा माता अपृच्छत्-“भवता कुत्र गम्यते?” इति।
‘रामदेवस्य गृहं प्रति’ इति अवदत् वासुदेवः।

“अहो, प्रातः स्मरणीयः सः” इति उक्त्वा सा माता वासुदेवं सस्नेहम् अन्तः नीत्वा भोजनादिकं दत्वा सत्कृतवती। ततः निर्गतः वासुदेवः रामनाथपुरं प्राप्य ‘रामदेवस्य गृहं कुत्र?’ इति कञ्चित् अपृच्छत् । सः अपि सत्कृत्य स्वयम् आगत्य रामदेवगृहं प्रादर्शयत् । दूरात् एव तत् दृष्टवा वासुदेवः गुरुकुलं प्रत्यगच्छत्।

शब्दार्था :
प्रत्यागतः-लौट आया-returned, ज्ञात्वा-जानकर-knowing; मध्येमार्गम्-रास्ते के बीच में-on the way; पुरतः-सामने-in front of; नीत्वा-ले जाकर-taking; सत्कृत्य-सत्कार करके-honouring, welcoming, प्रादर्शयत्-दिखाया-showed.

अनुवाद :
दूर से ही देवराज का घर देखकर वह लौट आया। वह दो दिन बाद गुरुकुल पहुँचा। गुरु ने उसे फिर कहा-रामनाथपुर जाकर रामदेव का घर जानकर आओ।” शिष्य दूसरे दिन ही रामनाथपुर की ओर चला गया। रास्ते के बीच में वह सोमपुर पहुंचा। वह अपने घर के सामने बैठी हुई किसी माता (वृद्ध स्त्री) से बोला-“माता! थोड़ा जल दे दो।”
जल देकर माता ने पूछा-“आप कहाँ जा रहे हो?
“रामदेव के घर की ओर।” वासुदेव बोला।

“वाह, वह प्रातः याद करने योग्य है।” ऐसा कहकर उस माता ने वासुदेव को प्रेम से अन्दर ले जाकर भोजन आदि देकर सत्कार किया ! वहाँ से निकल कर वासुदेव रामनाथ पुर पहुँचकर ‘रामदेव का घर कहाँ है?” किसी से पूछा। उसने भी सत्कार करके स्वयं आकर रामदेव का घर दिखाया। दूर से ही वह देखकर वासुदेव गुरुकुल लौट आया।

English :
Vasudev was again directed to learn about Ramdev’s house at Ramnathpur. Vasudev left for the place-Reached Sompur on the way. Asked a woman about Ramdev. She welcomed him-Reached Ramnathpur-Somebody greeted him and showed Ramdev’s house-Viewing the house from a distance Vasudev returned to the Gurukul.

5. दिनद्वयस्य अनन्तरं गुरुः अकथयत्-‘वासुदेव! भवान् इतः स्वगृह गन्तुम् अर्हति। गमनात् पूर्वं भवता देवराज-रामदेवयोः पूर्णः परिचयः प्राप्तव्यः” इति। एतम् आदेशं पालयन् वासुदेवः पुनरपि द्वारकापुरं प्राप्य देवराजस्य गृहम् अगच्छत्। वैभवोपेतं गृहं तत्। द्वाररक्षकः तस्य प्रवेशं निषिद्धवान्। बहुधा प्रार्थना यदा कृता तदा सः अन्तः गत्वा देवराजं वासुदेवागमनं निवेदितवान्। कोपेन एव बहिः आगत्य देवराजः-“किं धनं याचितुम् आगतं भवता? मया कस्मैचित् किमपि न दीयते । मम विश्रान्तिः नाशिता भवता। निर्गम्यताम् इतः” इति तर्जयित्वा तं प्रेषितवान्।

शब्दार्था :
वैभवोपेतम्-वैभव, विशालता से युक्त को-grand, splendid, निषिद्धवान्-रोका-refused, checked; निर्गम्यताम्-निकल जाओ-go away, तर्जयित्वा-डाँटकर-scolding, snubbing.

अनुवाद :
दो दिन बाद गुरु ने कहा-“वासुदेव! तुम यहाँ से अपने घर जाने योग्य हो.। जाने से पहले तुम देवराज व रामदेव का पूरा परिचय प्राप्त करना।”

इस आदेश को पालते हुए वासुदेव फिर द्वारकापुर पहुँचकर देवराज के घर गया। उसका घर विशालता से युक्त था। द्वारपाल ने उसे अन्दर जाने से रोका। बहुत प्रार्थना जब की तब उसने अन्दर जाकर देवराज को वासुदेव के आने की बात बताई। क्रोध में ही बाहर आकर देवराज ने-“क्या तुम धन माँगने आए हो? मैं किसी को कुछ नहीं दूंगा। मेरे आराम को भंग कर दिया तुमने। यहाँ से चले जाओ।” डाँटकर उसे निकाल (भेज) दिया।

English :
Guru asked Vasudev to gather detailed information about Devraj and Ramdev. Vasudev was not allowed to enter Devraj’s building. Devraj came out-called him a beggar-turned him awaysnubbed him also for robbing him of his rest.

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7. ततः वासुदेवः रामनाथपुरं प्राप्य रामदेवस्य गृहम् अगच्छत्। पर्णेः निर्मितं प्राचीनं गृहं तत्। कश्चन् युवकः तं सादरं स्वागतीकृत्य पानीयभोजनादिभिः तं सत्कृत्य विश्रान्त्यर्थं व्यवस्थाम् अकरोत्। विश्रान्तेः अनन्तरं सः ‘अहं रामदेवस्य पुत्रः’ इति स्वपरिचयम् उक्त्वा आगमनकारणम् अपृच्छत्। यदा वासुदेवः रामदेवस्य दर्शनेच्छा प्राकटयत् तदा पुत्रः एक भावचित्रं प्रदर्श्य-“मम पिता विंशति वर्षेभ्यः पूर्वम् एव दिवं गतः। इदानीं तस्य स्मृतिमात्रम् अस्ति लोके” इति विषादेन अवदत्। रामदेवः ग्रामस्य विकासाय देवालय-चिकित्सालय-विद्यालय-ग्रन्थालय-धर्मशालोद्यानानि यानि कारितवान तत्सर्वम अपश्यत् वासुदेवः। ग्रामे सर्वे रामदेवं सगौरवं स्मरन्ति स्म।

‘देवराजे जीवति सति अपि कोऽपि तस्मिन् आदरवान् न । रामदेवः तु विंशतिवर्षेभ्यः पूर्वम् एव दिवं गतः चेदपि जनाः प्रतिदिनं तं स्मरन्ति । यः समाजहितं चिन्तयति सः मृतोऽपि जीवति। यः स्वार्धमात्रं चिन्तयति सः तु जीवन्नपि मृतः एव’ इति अवगतवान् वासुदेवःमया रामदेवस्य जीवनम् एव अनुसरणीयम्’ इति सङ्कल्प्य स्वग्रामम् अगच्छत्।

शब्दार्था :
पर्णैः-पत्तों से-leaves, दर्शनेच्छाम्-देखने की इच्छा को-adesire to see, भावचित्रम्-छायाचित्र को-photo, प्रदर्श्य-दिखाकर-showing, विषादेन-दुःख से-with grief.

अनुवाद :
तब वासुदेव रामनाथपुर पहुँचकर रामदेव के घर गया। वह पत्तों का बना पुराना घर था। किसी युवक ने उसका आदर सहित स्वागत कर, पानी भोजन आदि से उसका सत्कार कर आराम करने की व्यवस्था की। आराम करने के बाद उसने, “मैं रामदेव का पुत्र हूँ।” ऐसा अपना परिचय देकर आने का कारण पूछा। जब वसुदेव ने रामदेव को देखने की इच्छा प्रकट की तब पुत्र ने एक छायाचित्र दिखाकर– “मेरे पिता बीस वर्ष पहले ही स्वर्ग चले गए। अब इस संसार में उनकी केवल स्मृति ही रह गई है।” दुःख से कहा। रामदेव ने गाँव के विकास के लिए जो मंदिर-चिकित्सालयविद्यालय-ग्रन्थालय-धर्मशाला, उद्यान आदि बनवाये, वह सब वासुदेव ने देखे। गाँव में रामदेव को गर्व से याद करते थे।

“देवराज जीवित होते हुए भी कोई उसका आदर नहीं करता। रामदेव तो बीस वर्ष पूर्व ही स्वर्ग चले गए, फिर भी लोग उन्हें प्रतिदिन याद करते हैं। जो समाज के हित की सोचता है, वह मरकर भी जीवित है। जो स्वार्थ की ही सोचता है, वह तो जीवित होते हुए भी मृत ही है।” यह जानकर वासुदेव, “मेरे द्वारा रामदेव के जीवन का ही अनुसरण करना चाहिए,” यह सङ्कल्प कर अपने गाँव को चला गया।

English :
Vasudev then reached Ramnathpur. Ramdev’s son greeted him-served food and drink Ramdev had built a temple, a dispensary, a school, a library and an inn before his death. All the villagers remembered him with honour, Vasudev learnt the difference between a selfish and egoistic richman and a poor social workerVasudev resolved to follow Ramdev’s path of social service.

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 24 सिक्ख एवं मराठा शक्ति का उत्कर्ष

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 24 सिक्ख एवं मराठा शक्ति का उत्कर्ष

MP Board Class 7th Social Science Chapter 24 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) ‘खालसा’ समूह का निर्माण किया
(अ) गुरु गोविन्द सिंह ने
(ब) गुरु तेगबहादुर ने
(स) बंदा बहादुर ने
(द) गुरु हरगोविन्द ने।
उत्तर:
(अ) गुरु गोविन्द सिंह ने

(2) मराठा शक्ति के संगठन का श्रेय है –
(अ) सम्भाजी को
(ब) शाहजी को
(स) शिवाजी को
(द) पेशवा को।
उत्तर:
(स) शिवाजी को

(3) शिवाजी की बढ़ती शक्ति को देखकर बीजापुर के सुल्तान ने शिवाजी का दमन करने के लिए किसे भेजा था ?
(अ) अफजल खाँ को
(ब) आदिल खाँ को
(स) शाइस्ता खाँ को
(द) हसनशाह को।
उत्तर:
(अ) अफजल खाँ को

(4) शिवाजी के अष्टप्रधान में सर्वोच्च स्थान था –
(अ) अमात्य का
(ब) सचिव का
(स) पण्डित राव का
(द) पेशवा का।
उत्तर:
(द) पेशवा का।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) “सच्चा पादशाह” की उपाधि …………. को दी गई।
(2) सिक्खों के प्रथम गुरु …………… थे।
(3) शिवाजी ने अपना राज्याभिषेक कराकर …………. की उपाधि धारण की।
(4) शिवाजी के राज्य की आय का साधन ………….. था।
उत्तर:
(1) बन्दा बहादुर
(2) गुरुनानक
(3) छत्रपति
(4) भूमि कर।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 24 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) गुरु गोविन्द सिंह ने सिक्ख शक्ति को मजबूत करने के लिए क्या प्रयास किये थे ?
उत्तर:
गुरु गोविन्द सिंह ने सिक्ख शक्ति को मजबूत करने के लिए राजकीय चिन्ह और सैनिक वेशभूषा धारण की। उन्होंने सिक्खों से भेट में घोड़े और शस्त्र लेना प्रारम्भ किया तथा समस्त सिक्खों को शस्त्र रखने को कहा।

(2) शिवाजी को प्रारम्भिक जीवन में किस प्रकार की शिक्षा मिली?
उत्तर:
शिवाजी को प्रारम्भिक जीवन में स्वतन्त्रता और सदाचार की शिक्षा मिली।

(3) शिवाजी ने अफजल खाँ का वध क्यों किया ?
उत्तर:
अफजल खाँ ने शिवाजी को षड्यन्त्र से मारने की योजना बनाई, शिवाजी को इस षड्यन्त्र का पता चल गया। उन्होंने अपनी रक्षा के लिए अफजल खाँ का वध कर दिया।

(4) टिप्पणी लिखिए –
(अ) अष्ट प्रधान
(ब) शिवाजी की सैनिक व्यवस्था।
उत्तर:
(अ) अष्ट प्रधान-शिवाजी ने शासन प्रबन्ध में सहायता और परामर्श के लिए आठ मन्त्रियों की एक परिषद् बनाई, जिसे अष्ट प्रधान कहा जाता है। इस परिषद् में प्रत्येक व्यक्ति अपने विभाग का प्रमुख होता था, परन्तु सभी शिवाजी की अध्यक्षता में काम करते थे। ये अष्ट प्रधान इस प्रकार थे –

  • पेशवा (प्रधानमन्त्री)
  • अमात्य (वित्तमन्त्री)
  • सुमंत (विदेश मन्त्री)
  • मन्त्री
  • सचिव
  • पंडितराव (पुरोहित)
  • सेनापति
  • न्यायाधीश।

(ब) शिवाजी की सैनिक व्यवस्था-शिवाजी ने नियमित एवं स्थायी सेना की व्यवस्था की थी। उनकी सेना में पैदल, अश्वारोही और जल सेना थी। सैनिकों पर कठोर अनुशासन व नियन्त्रण रहता था। पवित्र ग्रन्थों रामायण, गीता, कुरान आदि की रक्षा करना व बच्चों, वृद्धों तथा स्त्रियों का अपमान न होने देना, यह सैनिकों का प्रमुख कर्त्तव्य था।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 24 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) मुगल तथा सिक्ख सम्बन्धों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मुगल तथा सिक्खों के बीच सम्बन्ध अच्छे नहीं थे। वे जीवनभर मुगल सम्राटों के धार्मिक अत्याचारों और धर्मान्धता की नीति के विरुद्ध संघर्ष करते रहे। जहाँगीर ने अपने विद्रोही पुत्र खुसरो को सहायता देने के आरोप में गुरु अर्जुनदेव का वध कर दिया। गुरु गोविन्दसिंह के शक्तिशाली संगठन को देखकर उनके दो पुत्रों को जीवित चुनवाकर मार डाला तथा औरंगजेब के उत्तराधिकारी फर्रुखसियर ने बंदा बहादुर को यातना देकर मरवा दिया। सन् 1764 में अमृतसर में सिक्खों ने इकट्ठे होकर देग, तेग, फतेह चिन्हों वाले चाँदी के सिक्के जारी करके सिक्ख सम्प्रभुता की प्रथम घोषणा की।

(2) शिवाजी में उच्चकोटि की प्रशासनिक क्षमता थी।स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिवाजी के शासन प्रबन्ध का मुख्य उद्देश्य प्रजा की सुख-समृद्धि तथा मातृभूमि की रक्षा के लिए श्रेष्ठ सेना का गठन करना था। शिवाजी राज्य के सर्वेसर्वा थे। असीम निरंकुश शक्तियों के होते हुए भी शिवाजी ने उनका उपयोग जन-कल्याण के कार्यों के लिए किया। वे वीर सेनानायक, कूटनीतिज्ञ व उत्तम शासक थे। धार्मिक सहिष्णुता, उच्चकोटि का चरित्र, न्यायप्रियता और कुशल प्रशासन के कारण, वे महान शासक के रूप में प्रसिद्ध हुए। उच्चकोटि की प्रशासनिक क्षमता के कारण शिवाजी ने अपना शासन सुचारु रूप से चलाया। अतः हम कह सकते हैं कि शिवाजी में उच्चकोटि की प्रशासनिक क्षमता थी।

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MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 1

MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 1

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) भारत में मध्यकाल का आरम्भ माना जाता है –
(अ) तेरहवीं शताब्दी से
(ब) सातवीं शताब्दी से
(स) आठवीं शताब्दी से
(द) बारहवीं शताब्दी से।
उत्तर:
(स) आठवीं शताब्दी से

(2) तंजौर के प्रसिद्ध राजराजेश्वर मन्दिर का निर्माण करवाया था –
(अ) राजराज प्रथम
(ब) राजेन्द्र प्रथम
(स) कृष्ण प्रथम
(द) कृष्ण द्वितीय।
उत्तर:
(अ) राजराज प्रथम

(3) संविधान निर्माण सभा के अध्यक्ष थे –
(अ) डा. हरीसिंह गौर
(ब) डा. भीमराव अम्बेडक
(स) डा. राजेन्द्र प्रसाद
(द) पं. जवाहरलाल नेहरू
उत्तर:
(स) डा. राजेन्द्र प्रसाद,

(4) राज्यसभा में सदस्यों की कुल संख्या है –
(अ) 238
(ब) 250
(स) 230
(द) 260
उत्तर:
(ब) 250

(5) दिन और रात बराबर होते हैं –
(अ) 21 मार्च व 25 सितम्बर को
(ब) 21 जून व 22 दिसम्बर को
(स) 25 दिसम्बर व 25 जून को
(द) इनमें से किसी तिथि पर नहीं
उत्तर:
(द) इनमें से किसी तिथि पर नहीं

(6) वायुमण्डल में कितने प्रतिशत ऑक्सीजन गैस पाई जाती है?
(अ) 78%
(ब) 21%
(स) 28%
(द) 71%
उत्तर:
(ब) 21%

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) व्यापार के माध्यम से भारत का ………….. निरन्तर सम्पर्क बना रहा।
(2) ……………. ने प्रसिद्ध ग्रन्थ रामायण की रचना तमिल भाषा में की।
(3) मध्य प्रदेश की राजधानी का प्राचीन नाम …………… था।
(4) भारतीय संविधान लिखित एवं …………. संविधान
(5) पृथ्वी का अक्ष अपने तल से ……………. अंश का कोण बनाता है।
उत्तर:
(1) अरबों
(2) कंबन
(3) भोजपाल
(4) निर्मित
(5) 66,00

प्रश्न 3.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए –
MP Board Class 7th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 1
उत्तर:
(1) (b) उत्तर रामचरित
(2) (a) गीत गोविन्द
(3) (d) सिद्धान्त शिरोमणि
(4) (c) जीवन रक्षक गैस

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प्रश्न 4.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(1) चौहान वंश के प्रमुख शासकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
चौहान वंश के प्रमुख शासक अजयराज चौहान एवं पृथ्वीराज चौहान थे।

(2) चोलकालीन आर्थिक व्यवस्था की कोई तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
चोलकालीन आर्थिक व्यवस्था की तीन विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  • चोल साम्राज्य में जन-जीवन बहुत सम्पन्न था।
  • कृषि तथा व्यापार उन्नत अवस्था में थे।
  • राज्य की आय के प्रमुख स्रोत भूमिकर तथा व्यापार कर थे।

(3) “पंथ निरपेक्षता” से क्या आशय है ? लिखिए।
उत्तर:
‘पंथ निरपेक्षता’ भारतीय संविधान की एक प्रमुख विशेषता है। इसके अनुसार राज्य की दृष्टि से सभी धर्म समान हैं और राज्य के द्वारा विभिन्न धर्मावलम्बियों में कोई मतभेद नहीं किया जाता है। राज्य किसी भी धर्म के लिए पक्षपातपूर्ण कार्य व हस्तक्षेप नहीं करेगा।

(4) राज्यसभा सदस्य होने के लिए कोई तीन आवश्यक अर्हताएँ लिखिए।
उत्तर:
राज्यसभा सदस्य होने के लिए तीन आवश्यक अर्हताएँ निम्न हैं –

  • उसकी आयु 30 वर्ष या उससे अधिक हो।
  • वह भारत का नागरिक हो तथा मतदाता सूची में उसका नाम हो।
  • वह न्यायालय द्वारा पागल, दिवालिया घोषित न हो।

(5) क्षोभ अथवा परिवर्तन मण्डल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
क्षोभमण्डल, वायुमण्डल की एक परत है। ध्रुवों पर। इसकी ऊँचाई 8 किमी तथा विषुवत् वृत्त पर 18 किमी तक है। इस परत में जल वाष्प व धूल के कण पाए जाते हैं। इसमें मौसम सम्बन्धी सभी घटनाएँ घटित होती हैं। इस परत में सभी प्रकार का जीवन पाया जाता है। इसमें ऊँचाई बढ़ने पर प्रति 165 मीटर ऊँचाई के साथ 1°C की दर से तापमान घटता है।

(6) पृथ्वी के अक्ष से क्या आशय है ?
उत्तर:
पृथ्वी के मध्य में उत्तरीय ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव से गुजरने वाली धुरी पृथ्वी का अक्ष कहलाती है। पृथ्वी अपने अक्ष पर 23 ° झुकी हुई है।

(7) ऋतु परिवर्तन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
वर्ष की वह अवधि जिसमें मौसम सम्बन्धी दशाएँ लगभग समान होती हैं और जो पृथ्वी अक्ष पर झुकाव और उसके द्वारा सूर्य की परिक्रमा करने के परिणामस्वरूप बनती हैं, उसे ऋतु कहते हैं। ऋतुओं का क्रम से बदलना ऋतु परिवर्तन कहलाता है। इसका मूल आधार ताप है।

(8) सूर्य जब मकर रेखा पर होता है तो भारत में कौन-सी ऋतु होती है ?
उत्तर:
सूर्य जब मकर रेखा पर होता है तब उत्तरी गोलार्द्ध में सूर्य की किरणें पड़ती हैं जिससे वहाँ का तापमान कम रहता है। भारत उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है, इसलिए भारत में शीत ऋतु होती है।

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(1) पूर्व मध्यकाल के आरम्भ में भारत की राजनैतिक स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पूर्व मध्यकाल के आरम्भ में भारत अनेक छोटे:
छोटे राज्यों में बँटा हुआ था, जिनमें राज्य विस्तार के लिए संघर्ष चलते रहते थे। दक्षिण भारत में सबसे शक्तिशाली चोल राज्य था। आरम्भ में इनका राज्य कोरोमण्डल और मद्रास (चैन्नई) तक था। नवीं शताब्दी में चोल नरेशों ने पांड्य राजाओं से तंजौर जीतकर उसे अपनी राजधानी बनाया।

इन्होंने व्यवस्थित शासन प्रबन्ध के लिए साम्राज्य को कई इकाइयों में विभाजित किया, आर्थिक व्यवस्था सुदृढ़ की और साहित्य तथा स्थापत्य कला को संरक्षण दिया। उनकी सामुद्रिक शक्ति बहुत बढ़ी हुई थी। चोल नरेश राजेन्द्र प्रथम ने सन् 1025 ई. में मलाया तथा सुमात्रा द्वीपों पर विजय प्राप्त की। चोल राज्य के व्यापारिक सम्बन्ध चीन तथा दक्षिण एशिया के अन्य देशों से थे।

(2) पल्लव वंश की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
पल्लव वंश की प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं –

  • पल्लवों का शासन प्रबन्ध सुव्यवस्थित था।
  • इनके शासन काल में शिक्षा, साहित्य एवं कला की उन्नति हुई।
  • यहाँ की स्थानीय भाषा तमिल थी, जिसमें उत्तम साहित्य की रचना हुई।
  • अधिकांश पल्लव राजा भगवान शिव के भक्त थे तथा हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार अधिक था।
  • पल्लवों ने काँची के धर्मराज व कैलाशनाथ मन्दिर तथा महाबलीपुरम् में समुद्र तट पर चट्टान को काटकर रथ मन्दिर बनवाया।

(3) स्वतन्त्रता का अधिकार के अन्तर्गत हमें प्राप्त स्वतन्त्रताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्वतन्त्रता के अधिकार के अन्तर्गत हमें निम्न स्वतन्त्रताएँ प्राप्त हैं –

  • विचार व्यक्त करने की स्वतन्त्रता – भारत के सभी नागरिकों को विचार व्यक्त करने, भाषण देने, अपने तथा दूसरे व्यक्तियों के विचारों को जानने और प्रचार करने, समाचार-पत्र में लेख आदि लिखने की स्वतन्त्रता है।
  • सम्मेलन करने की स्वतन्त्रता – हमें अपने विचारों को समझाने के लिए सभा करने तथा जुलूस निकालने की स्वतन्त्रता है। लेकिन जुलूस शान्तिपूर्ण होना चाहिए। वे सभी व्यक्ति जो किसी बात पर एक समान विचार रखते हों, अपने अधिकारों के लिए इकट्ठे होकर संगठन बना सकते हैं।
  • भ्रमण की स्वतन्त्रता – भारत के सभी नागरिकों को बिना किसी विशेष अधिकार पत्र के देश में कहीं भी आने-जाने की स्वतन्त्रता है।
  • निवास एवं बसने की स्वतन्त्रता – भारत के सभी नागरिकों को अपनी इच्छानुसार अस्थायी या स्थायी रूप से भारत के किसी भी स्थान पर बसने एवं निवास करने की स्वतन्त्रता एवं अधिकार है।
  • व्यापार एवं व्यवसाय की स्वतन्त्रता – प्रत्येक नागरिक को कानूनी सीमा में रहकर अपनी इच्छानुसार कार्य तथा व्यवसाय करने की स्वतन्त्रता है।
  • जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतन्त्रता-समस्त अधिकारों का महत्व केवल तब तक है जब तक कि व्यक्ति सुरक्षित एवं जीवित है। संविधान के अनुसार व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध कहीं नहीं ले जाया जा सकता है। संविधान जीवन व सुरक्षा का अधिकार प्रदान करता है।

(4) कानून निर्माण की प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर:
किसी विषय पर कानून बनाने से पूर्व मन्त्रिपरिषद् एक प्रस्ताव तैयार करती है जिसे विधेयक कहते हैं। यह दो प्रकार के होते हैं –

  • साधारण विधेयक
  •  वित्त विधेयक।

1. विधेयक का प्रथम वाचन – सभापति की अनुमति से मन्त्रिपरिषद् का कोई सदस्य या सांसद सदन में विधेयक प्रस्तुत करता है। इस विधेयक का शीर्षक विधेयक प्रस्तुत करने वाले सदस्य द्वारा पढ़ा जाता है। इस प्रस्ताव की प्रति सभी सदस्यों को दे दी जाती है। इस प्रस्ताव का केन्द्रीय सरकार के शासकीय गजट में प्रकाशन होता है। इस विधेयक पर बहस नहीं होती है।

2. विधेयक का दूसरा वाचन – इस समय विधेयक पर विचार – विमर्श होता है। सरकार एवं विपक्ष द्वारा इस विधेयक की उपयोगिता या अनुपयोगिता पर बहस होती है। विधेयक के प्रत्येक बिन्दु एवं मुद्दों तथा निहित सिद्धान्तों पर परिचर्चा होती है। विधेयक में संशोधन के प्रस्ताव रखे जाते हैं। विधेयक में संशोधन हेतु बहुमत के आधार पर निर्णय होता है।

3. विधेयक का तृतीय वाचन – द्वितीय वाचन के बाद विधेयक का प्रारूप निश्चित हो जाता है। इस वाचन के समय संशोधन सहित तैयार विधेयक को स्वीकृत किए जाने हेतु एक प्रस्ताव विधेयक के प्रस्तावक द्वारा सदन में रखा जाता है। इस समय विधेयक में संशोधन नहीं किए जाते। सदन विधेयक को स्वीकार अथवा अस्वीकार भी कर सकता है। विधेयक पर मतदान के बाद यह क्रिया पूर्ण हो जाती है।

4. विधेयक के स्वीकृत हो जाने पर इसे दूसरे सदन में स्वीकृति हेतु भेजा जाता है। दूसरे सदन में भी विधेयक का प्रथम, द्वितीय  एवं तृतीय वाचन होता है। यदि विधेयक दूसरे सदन में स्वीकृत हो जाता है तो इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक कानून बन जाता है। इस कानून का सरकार के राजकीय गजट में प्रकाशन किया जाता है।

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(5) वायुमण्डल के संघटन को समझाइए।
उत्तर:
पृथ्वी के चारों ओर फैली हुई वायु अनेक गैसों का मिश्रण है। इनमें नाइट्रोजन 78%, ऑक्सीजन 21% तथा 1% आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन, हीलियम तथा ओजोन गैसें पाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त कुछ मात्रा में जल वाष्प, धुआँ, धूल के कण आदि मौजूद रहते हैं। ऑक्सीजन ‘जीवनदायिनी’ तथा | ओजोन ‘जीवनरक्षक’ गैस है। नाइट्रोजन वनस्पति के विकास में सहायक है। हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन से पानी बनता है। कार्बन डाइऑक्साइड और जल पेड़-पौधों के लिए आवश्यक है।

(6) स्थायी पवनों के विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्थायी पवनें तीन प्रकार की होती हैं –

(i) व्यापारिक पवनें – प्राचीन काल में व्यापारी पालयुक्त जलयानों के संचालन में इन पवनों का उपयोग करते थे। ये पवनें ! पृथ्वी के दोनों गोलार्डों में पूरे वर्ष नियमित रूप से चलती हैं। उत्तरी। गोलार्द्ध में ये पवनें उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर चलती हैं।

(ii) पछुवा पवनें – ये पवनें दोनों गोलार्डों में वर्ष भर निश्चित दिशा में उच्च वायुदाब से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब की ओर चलती। हैं। ये उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर – पूर्व की ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर चलती हैं।

(iii) ध्रुवीय पवनें – ये पवनें दोनों गोलार्डों में ध्रुवीय उच्च दाब की पेटियों से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब की पेटियों की ओर चलती हैं। उत्तरी गोलार्डों में ये उत्तर-पूर्व से दक्षिण – पश्चिम की ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर होती हैं। ध्रुवों से चलने के कारण ये हवाएँ ठण्डी और शुष्क होती हैं।

(7) पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन किस प्रकार होता है ? चित्र द्वारा समझाइए।
उत्तर:
ऋतुओं का क्रम से बदलना ऋतु परिवर्तन कहलाता है। ऋतु परिवर्तन का मूल आधार ताप है। पृथ्वी को ताप सूर्य से प्राप्त होता है। सूर्य की परिक्रमा और अपने अक्ष पर 23, झुकी होने के कारण पृथ्वी को मिलने वाली ताप की मात्रा बदलती रहती है। इससे पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन होता है।
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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम्

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 10 आह्वानम् (गीतम्) (सङ्कलितम्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 10 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) भारतस्य पुरातनः सखा कः विद्यते? (भारत का पुराना मित्र कौन है?)
उत्तर:
चीनः (चीन)

(ख) कस्मिन् प्रवर्तितुं कदापि न खिद्यते? (किसमें प्रवृत्त होने के लिए दुख नहीं होता?)
उत्तर:
स्वकर्मणि (अपने कर्म में)

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(ग) पापसिन्धवः शत्रवः का प्रयान्तु? (पापरूपी समुद्र/शत्रु किसको प्राप्त हो?)
उत्तर:
अशेषताम् (समाप्ति को)

(घ) वयं कया स्वदेशरक्षणोद्यताः? (हम किससे अपने देश की रक्षा के लिए तैयार हों?)
उत्तर:
सत्यनिष्ठया (सत्य निष्ठा से)

(ङ) भारतीयकेतवः कां वृत्तिं स्फुरन्तु? (भारतीय झण्डे किस वृत्ति को स्फुरित करें?)
उत्तर:
अरातिनीवृतिम् (शत्रु को सब ओर से पकड़कर मारने के भाव को)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तर लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) कृषीबलैः काः समेधिताः भवन्तु? (किसानों के द्वारा वया वृद्धि को प्राप्त हो?
उत्तर:
कृषीबलैः धान्यवृद्धयः समेधिताः भवन्तु। (किसानों के द्वारा धानअदि वृद्धि को प्राप्त हों।)

(ख) ऊर्जितं यशः कैः अर्जितम्? (तेजस्वितापूर्ण यश किसके द्वारा अर्जित किया गया?)
उत्तर:
ऊर्जितं यशः पूर्वपुरुषैः अर्जितम्। (तेजस्वितापूर्ण यश पूर्वजों द्वारा अर्जित किया गया।)

(ग) अखर्वगर्ववृत्तिना केन वीक्षितम्? (बड़े घमण्डी आचरण वाले किराको देखा गया?)
उत्तर:
अखर्वगर्ववृत्तिना अरिणा वीक्षितम्।
(बड़े धमण्डी आचरण वाले शत्रु के द्वारा देखा गया।)

(घ) भारतीयाः केषां वंशजाः सन्ति? (भारतीय किसके वंशज हैं?)
उत्तर:
भारतीयाः वसिष्ठ-याज्ञवल्क्य-गौतम-अत्रि एतेषाम् वंशजाः सन्ति। (भारतीय वसिष्ठ-याज्ञवल्क्य-गौतम व अत्रि के वंशज हैं।)

(ङ) शत्रवः द्रुतं किं फलं प्राप्नुवन्तु? (शत्रु शीघ्र किस फल को प्राप्त हों?)
उत्तर:
शत्रवः द्रुतं निजप्रवञ्चनाफलं प्राप्नुवन्तु। (शत्रु शीघ्र अपने उगी रूपी कर्म के फल को प्राप्त हों।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)
(क) वीरबन्धवः किं कुर्वन्तु? (वीर बन्धु क्या करें?)
उत्तर:
वीरबन्धवः पापसिन्धवः शत्रवः अशेषतां प्रयान्तु।। (वीरबन्धु पाप रूपी समुद्र जैसे शत्रुओं को समाप्त करें।)

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(ख) अद्य कं स्मरन्तु? (आज किसको याद करें?)
उत्तर:
अद्य पूर्वपुरुषैः समस्तदिक्षुविश्रुतं अर्जितम् ऊर्जितम् यशः स्मरन्तु। (आज पूर्वजों के द्वारा, सारी दिशाओं में विख्यात, अर्जित तेजस्वीपूर्ण यश को स्मरण करें।)

(ग) भवत्सु जीवितेषु के नदन्ति? (आप सब में जीवित रहते हुए कौन अस्पष्ट बोल रहे हैं?)
उत्तर:
भवत्सु जीवितेषु दस्यवः नदन्ति। (आप सब में जीवित रहते हुए लुटेरे अस्पष्ट बोल रहे हैं।)

प्रश्न 4.
उचितशब्देन रिक्तस्थानानि पूरयत (उचित शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(क) स्वकर्मणि प्रवर्तितुं ………………. नैव खिद्यते। (अद्यापि/कदापि)
(ख) पुरातनं स्वपौरुष ………………. वीरबन्धवः। (विस्मरन्तु/स्मरन्तु)
(ग) यथा विहाय ………………. आचरन्तु तेऽद्भुतम् ।(कूटनीतिम्/राजनीतिम्)
(घ) समस्तदिक्षु ………………. तदद्य यावदूर्जितम्। (श्रुतं/विश्रुत)
(ङ) कदा प्रदर्शयिष्यते द्विषां ………………. बलस्य वः। (बलं/फल)
उत्तर:
(क) कदापि
(ख) स्मरन्तु
(ग) कूटनीतिम्
(घ) विश्रुतं
(ङ) फलं

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से जोड़िए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 1
उत्तर:
(क) 2
(ख) 1
(ग) 4
(घ) 5
(ङ) 3

प्रश्न 6.
अधोलिखितपदानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनञ्च लिखत (नीचे लिखे पदों के मूलशब्द विभक्ति और वचन लिखिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 3

प्रश्न 7.
अघोलिखितक्रियापदानां धातुं लकारं पुरुषं वचनञ्च लिखत (नीचे लिखे क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष व वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 10 आह्वानम् img 5

प्रश्न 8.
विलोमशब्दान् लिखत-(विलोम शब्द लिखिए)
यथा – स्वदेशः – विदेशः
(क) स्मरन्तु
(ख) पुरातनम्
(ग) अशेषताम्
(घ) सत्यनिष्ठया
उत्तर:
(क) स्मरन्तु – विस्मरन्तु
(ख) पुरातनम् – नवीनम्
(ग) अशेषताम् – शेषताम्
(घ) सत्यनिष्ठया – असत्यनिष्ठया

प्रश्न 9.
पर्यायशब्दान् लिखत-(पर्यायशब्द लिखिए)
यथा – सूर्य दिवाकरः, भास्करः
(क) कालः
(ख) क्षितौ
(ग) शत्रवः
(घ) जगत्सु
उत्तर:
(क) कालः – समयः
(ख) क्षितौ – पृथिव्याम्, धरायाम्
(ग) शत्रवः – रिपवः, अरयः
(घ) जगत्सु – संसारेषु, विश्वेषु

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प्रश्न 10.
रेखाङ्कितपदान्याधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत (रखाङ्कित पदों के आधार पर प्रश्न बनाइए)
(क) दस्यवः नदन्ति
(लुटेरे अस्पष्ट बोल रहे हैं।)
उत्तर:
के नदन्ति? (कौन अस्पष्ट बोल रहे हैं?)

(ख) वयं हिमालयस्य रक्षणे समुद्यताः। (हम सब हिमालय की रक्षा के लिए तैयार हों।)
उत्तर:
वयं कस्य रक्षणे समुद्यताः? (हम किसकी रक्षा के लिए तैयार हों?)

(ग) पापसिन्धवः शत्रवः अशेषतां प्रयान्तु। (पाप रूपी समुद्र शत्रु समाप्ति को प्राप्त हों।)
उत्तर:
के शत्रवः अशेषतां प्रयान्तु? (कौन से शत्रु समाप्ति को प्राप्त हों?)

(घ) ते कूटनीतिं विहाय आचरन्तु। (वे कुटनीति को छोड़कर आचरण करें।)
उत्तर:
ते किं विहाय आचरन्तु? (वे किसको छोड़कर आचरण करें?)

(ङ) नदीषु यन्त्रयानलौहमार्गसेतवः सन्तु। (नदियों पर मशीनों द्वारा चलने वाले वाहन, लोहे की पटरी वाले रास्ते तथा पुल हों।)
उत्तर:
केषु यन्त्रयान लौह मार्ग सेतवः सन्तु?
(किन पर मशीनों द्वारा चलने वाले वाहन, लौहे की पटरी वाले रास्ते तथा पुल हों।)

योग्यताविस्तार –

पाठे आगतं गीतं लयबद्धं गायत।
(पाठ में आए गीत को लयबद्ध करके गाओ।)

अन्यदेशभक्तिविषयकं संस्कृतगीतम् अन्विष्य गायत।
(अन्य देश भक्ति के संस्कृत गीत ढूंट कर गाओ।)

आह्वानम् पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ एक गीत है जो श्री दयाशङ्कर वाजपेयी के द्वारा रचा गया है, जिसमें भारत और चीन के मध्य हुए युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों के साथ प्रत्यक्ष चर्चा करके लिखा गया है।

आह्वानम् पाठ का अनुवाद

1. युवान एष वः परीक्षणस्य काल आगतः हिमालयस्य रक्षणे समुद्यताः स्थ सर्वतः।
अयं सखा पुरातनोऽस्य भातरस्य विद्यते स्वकर्मणि प्रवर्तितुं कदापि नैव खिद्यते॥1॥

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अन्वयः :
युवान! एषः कालः वः परीक्षणस्य आगतः (अस्ति), सर्वतः, हिमालयस्य रक्षणे समुद्यताः स्थ। अयम् अस्य भारतस्थ पुरातनः सखा विद्यते स्वकर्मणि प्रवर्तितुं कदापि न एव खिद्यते।

शब्दार्थाः :
युवान!-हे युवको!-oh young men; वः-तुम्हारा-yours; समुद्यताःतैयार-ready; स्थ-हों-be; खिद्यते-दुखी होता है-is aggrieved.

अनुवाद :
हे युवको! यह समय तुम्हारी परीक्षा का है, सब ओर से हिमालय की रक्षा के लिए तैयार हो। यह इस भारत का पुराना मित्र है। अपने कर्म में प्रवृत्त होने के लिए कभी भी दुखी नहीं होता है।

English :
Young men, be ready to defend Himalaya-India’s oldest friend never aggrieved in getting inclined to self duties.

2. अखर्वगर्ववृत्तिनारिणात्र येन वीक्षितं सहेक्षणेन तत्क्षणन्तु तच्छिरः क्षितौ धृतम्।
यथा क्षमावशा वयं तथैव रोषपूरिताः यथैव शीलसंस्कृतास्तथा प्रसिद्धशूरताः॥2॥

अन्वयः :
अत्र येन अखर्वगर्ववृत्तिना अरिणा वीक्षितम् (तदा) तत् क्षणं तु ईक्षणेन सह तच्छिरः क्षितौ धृतम्, वयं यथा क्षमावशाः (स्मः) तथैव वयं रोषपूरिता (अपि स्मः), (एवमेव) यथा शील-संस्कृता एव तथा प्रसिद्धशूरताः (स्मः)।

शब्दार्थाः :
अखर्वगर्ववृत्तिना-बड़े घमण्डी आचरण वाले के द्वारा-of proud conduct (arrogant);अरिणा-शत्रु के द्वारा-by enemy; वीक्षितम्-देखा गया-seen; सहेक्षणेन-देखने के साथ ही-at the very sight; धृतम्-रख दिया-placed.

अनुवाद :
यहाँ जिस, बड़े घमण्डी आचरण वाले शत्रु के द्वारा देखा गया, तब उस क्षण तो देखने के साथ ही पृथ्वी पर गिरा दिया, हम जितने क्षमाशील हैं, उतने ही क्रोध से भरे हुए भी हैं। इस प्रकार जैसे हमारी शील संस्कृति प्रसिद्ध है वैसे ही वीरता भी।

English :
We beheaded the proud enemy for his evil intentions-We are both forgiving and equally brave.

3.पुरातनं स्वपौरुषं स्मरन्तु वीरबन्धवः अशेषतां प्रयान्तु शत्रवोऽद्य पापसिन्धव। – निजप्रवञ्चनाफलं समाप्नुवन्तु ते द्रुतं यथा विहाय कूटनीतिमाचरन्तु तेऽद्भुतम्॥3॥

अन्वयः :
वीरबन्धवः! पुरातनं स्वपौरुषं स्मरन्तु अद्य पापसिन्धवः शत्रवः अशेषतां प्रयान्तु। ते द्रुतं निजप्रवञ्चनाफलं समाप्नुवन्तु, यथा ते अद्भुतं कूटनीतिं विहाय आचरन्तु।।

शब्दार्थाः :
स्वपौरुषम्-अपने पुरुषत्व को-own valour; पापसिन्धवः-पापरूपी समुद्र-ocean in the form of sin; अशेषताम्-समाप्ति का-completion; निजप्रवञ्चनाफलम्-अपने ठगी रूपी कर्म के फल को-fruitof their trickery;समाप्नुवन्तु-प्राप्त करें-obtain; विहाय-छोड़कर-leaving.

अनुवाद :
हे वीर बन्धुओ! अपने पुराने पुरुषत्व को याद करो, आज पापरूपी समुद्र से शत्रु समाप्ति को प्राप्त हो। वे शीघ्र अपने ठगी रूपी कर्म के फल को प्राप्त करें, जिससे वे अपनी अजीब सी कूटनीति को छोड़कर अच्छा आचरण करें।

English :
Remember your chivalry-Bring an end to sinful enemies-tell them suffer the fruit of their trickery and leave diplomacy.

4. कृषीबलैः समेधिता भवन्तु धान्यवृद्धयः श्रमेण सन्तु साधितास्तु वीरसाहसर्द्धयः।
स्मरन्तु पूर्वपूरुषैर्जगत्सु यद् यशोऽर्जितम् समस्तदिक्षु विश्रुतं तदद्य यावदूर्जितम्॥4॥

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अन्वयः :
कृषीबलैः धान्यवृद्धयः समेधिताः भवन्तु श्रमेण साधिताः तु वीरसहासर्द्धयः सन्तु। पूर्वपुरुषैः जगत्सु, समस्तदिक्षुविश्रुतं यावद् ऊर्जितं यशः अर्जितं, तद् अद्य स्मरन्तु।

शब्दार्थाः :
कृषीवलैः-किसानों के द्वारा-By farmers; समेधिताः-वृद्धि को प्राप्त-attain propserity; वीरसाहसर्द्धय-पराक्रम-उत्साह की वृद्धि-increase invalour and courage; दिक्षु-दिशाओं में-indirections; विश्रुतम्-विख्यात-famous; अर्जितम्-तेजस्विता पूर्ण-full of bu’stre; स्मरन्तु-स्मरण करें-remember.

अनुवाद :
किसानों के द्वारा धान्य-वृद्धि से वृद्धि को प्राप्त हो, परिश्रम से प्राप्त । पराक्रम व उत्साह की वृद्धि हो। संसार में पूर्वजों के द्वारा समस्त दिशाओं में विख्यात, जो तेजस्वितापूर्ण यश प्राप्त किया है, उसे आज याद करो।

English :
Let farmers flourish-let there be advancement in courage-remember the renown of your ancestors through the world.

5. वयं तु सत्यनिष्ठया स्वदेशरक्षणोधताः प्रवञ्चनैकदक्षशत्रुपक्षतक्षणव्रताः।
नदीषु सन्तु यन्त्रयानलौहमार्गसेतवः अरातिनीवृतिं स्फुरन्तु भारतीयकेतवः॥5॥

अन्वयः :
वयं तु सत्यनिष्ठया स्वदेशरक्षणोद्यताः प्रवञ्चनैकदक्षशत्रुपक्षतक्षणव्रताः (स्मः), नदीषु यन्त्रयानलौहमार्गसेतवः भारतीय केतवः अरातिनीवृत्तिं स्फुरन्तु।

शब्दार्थाः :
सत्यनिष्ठया-सत्यनिष्ठा से-with sincere loyalty; उद्यताः-तैयार -ready; केतवः-झण्डे-flags; अरातिनीवृत्तिम्-शत्रु को सब ओर से पकड़कर मारने के भाव को-enemies by grabbing them all over.

अनुवाद :
हम सब तो सत्यनिष्ठा से अपने देश की रक्षा के लिए तैयार हैं, एकमात्र छल-कपट में निपुण शत्रुओं के पक्ष को काटने का वृत धारण करने वाले हैं, नदियों पर मशीनों द्वारा चलने वाले वाहन, लोहे की पटरी वाले रास्ते तथा पुल हों, भारतीय पताकाएँ शत्रु को सब ओर से पकड़कर मारने के भाव को स्फुरित करें।

English :
We are ready to serve our country honestly. We will sever the heads of deceitful enemies-let there be machines and iron rails. Let the Indian flags be unfurled around the enemies.

6. अये वशिष्ठ-याज्ञवल्क्य-गौतमात्रिवंशजाः तथैव सूर्यचन्द्रपावकान्ववायतल्लजाः। – भवत्सु जीवितेषु हन्त! किं नदन्ति दस्यवः? कदा प्रदर्शयिष्यते द्विषां फलं बलस्य वः॥6॥

अन्वयः :
हन्त! अये वसिष्ठ-याज्ञवल्क्य-गौतम-अत्रि वंशजा (सन्ति), तथैव सूर्यचन्द्रपावकान्ववायतल्लजाः भवत्सु जीवितेषु दस्यवः किंनदन्ति? वः बलस्य फलं द्विषां (कृते) कदा प्रदर्शयिष्यते।

शब्दार्थाः :
हन्त!-खेद है-Alas! fie; अन्ववायतल्लजाः-कुल में सर्वश्रेष्ठ-of noblest family; भवत्सु-आप सब में-in you all; जीवितेषु-जीवित रहते हुए-while living; दस्यवः-लुटेरे-robbers; नदन्ति-अस्पष्ट बोल रहे हैं -speaking vaguely; वः-तुम्हारे-yours; द्विषाभ्-शत्रुओं के-of enemies.

अनुवाद :
खेद है। अरे, वसिष्ठ, याज्ञवल्क्य, गौतम अत्रि के वंश में आप उत्पन्न हुए हैं। वैसे ही, सूर्य और चन्द्र से पवित्र, कुल में सर्वश्रेष्ठ आप सब के जीवित रहते हुए लुटेरे अस्पष्ट बोल रहे हैं। तुम्हारे बल का फल शत्रुओं को कब दिखाओगे।

English :
You are the descendants of rishis and of noble birth show your valour to let down robberr.

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