MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 23 मुगलकालीन प्रशासन तथा जनजीवन

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 23 मुगलकालीन प्रशासन तथा जनजीवन

MP Board Class 7th Social Science Chapter 23 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) मुगलकाल में दीवान या वजीर क्या काम सँभालता था ?
(अ) आय-व्यय का हिसाब रखता था
(ब) सैन्य विभाग की देखभाल करता था
(स) घरेलू विभाग का हिसाब करता था
(द) न्याय विभाग का प्रमुख होता था।
उत्तर:
(अ) आय-व्यय का हिसाब रखता था

(2) मुगलकाल में लोगों का प्रमुख व्यवसाय क्या था ?
(अ) कृषि
(ब) काष्ठ उद्योग
(स) विदेशी व्यापार
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(अ) कृषि

(3) अकबर ने धार्मिक सहिष्णुता के आधार पर कौन-सा नया पंथ चलाया था ?
(अ) दीन-ए-इलाही
(ब) भक्ति आन्दोलन
(स) सिक्ख सम्प्रदाय
(द) ये सभी।
उत्तर:
(अ) दीन-ए-इलाही।

प्रश्न 2.
कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से सही शब्द चुनकर रिक्त स्थानों में लिखिए –
(1) अकबर के काल में भारतीय संगीत के महान गायक …………….. प्रसिद्ध थे। (तानसेन, तुलसीदास, रैदास, मीरा)
(2) शाहजहाँ द्वारा बनाए गए …………..को विश्वदाय भाग में शामिल कर लिया गया है। (जामा-मस्जिद, लाल-किला, ताजमहल, हवामहल)
उत्तर:
(1) तानसेन
(2) ताजमहल।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 23 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
मुगलकालीन साम्राज्य में सम्राट सर्वोपरि था उसकी सहायता हेतु प्रधानमन्त्री तथा अन्य मन्त्री होते थे। दीवान या वजीर राज्य की आय-व्यय का हिसाब रखता था, मीरबख्शी सैन्य विभाग का अध्यक्ष तथा खान-ए-सामां घरेलू विभाग का प्रधान होता था। मुगल साम्राज्य 18 सूबों में विभक्त था, जिनमें केन्द्र के शासन के समान व्यवस्था थी।

(2) मुगलकाल में आयात-निर्यात की जाने वाली वस्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
मुगल काल में सूती वस्त्र, मलमल, गरम मसाले, हल्दी, नमक, शोरा, नील, अफीम, चीनी, मिश्री, गोंद, हीरे-मोती, औषधियाँ आदि का निर्यात तथा सोना, चाँदी, ताँबा, सीसा, इस्पात, कांच, दर्पण, शराब, घोड़े, मूंगा, पारा आदि का आयात किया जाता था।

(3) अकबर की धार्मिक नीति का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मुगल सम्राट इस्लाम धर्म के कट्टर अनुयायी थे। विभिन्न धर्मों के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर उसने दीन-ए-इलाही नामक पंथ चलाया। औरंगजेब ने जजिया तथा तीर्थयात्रा कर लगाए। हिन्दुओं में वैष्णव, शैव मत अधिक प्रचलित थे। जैन धर्म का समाज में अधिक महत्व था। जैन और हिन्दुओं में तीर्थयात्रा का प्रचलन था। बौद्ध धर्म का लगभग ह्रास हो चुका था।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 23 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) मुगलकाल में स्थापत्य कला के विकास का उदाहरण सहिन वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मुगल शासक स्थापत्य कला के प्रेमी थी। इस काल के भवनों में हिन्दू-मुस्लिम स्थापत्य शैलियों का मिश्रण है। दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा इस काल का प्रमुख उदाहरण है। अकबर द्वारा फतेहपुर-सीकरी नगर बसाया गया, जिसमें बुलन्द दरवाजा सहित अनेक उत्कृष्ट व सुन्दर इमारतों का निर्माण करवाया गया। अकबर द्वारा भवन निर्माण कार्य में लाल बलुआ पत्थरों का उपयोग करवाया गया।

नूरजहाँ द्वारा अपने पिता एतमादुदौला के मकबरे का निर्माण मूल्यवान रत्नों को लगाकर कराया गया। शाहजहाँ द्वारा अपनी बेगम मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया गया जिसे विश्व धरोहर में शामिल किया गया है। इसमें सफेद संगमरमर पत्थरों का उपयोग किया गया है। शाहजहाँ ने आगरा में जामा मस्जिद, दिल्ली में लाल किला, शीशमहल, मोती मस्जिद आदि का सुन्दर निर्माण कराया।

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 22 औरंगजेब तथा मुगल साम्राज्य का पतन

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 22 औरंगजेब तथा मुगल साम्राज्य का पतन

MP Board Class 7th Social Science Chapter 22 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) जाटों का निवास मुख्य रूप से किन नगरों के आस-पास था ?
(अ) दिल्ली और आगरा
(ब) आगरा और मथुरा
(स) मथुरा और भरतपुर
(द) आगरा और झाँसी।
उत्तर:
(ब) आगरा और मथुरा

(2) पानीपत का तृतीय युद्ध किस वर्ष में हुआ था ?
(अ) सन् 1526
(ब) सन् 1556
(स) सन् 1560
(द) सन् 1761
उत्तर:
(द) सन् 1761

(3) यूरोपीय देशों में भारत की किन वस्तुओं की विशेष माँग थी?
(अ) वस्त्र और मसाले
(ब) वस्त्र और चाँदी
(स) मसाले और रत्न
(द) मसाले और घोड़े।
उत्तर:
(अ) वस्त्र और मसाले।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) औरंगजेब के विरुद्ध विद्रोह करने वाले बुन्देले नेता ………….. तथा ……………. थे।
(2) गुरुद्वारा शीशगंज …………..के बलिदान स्थान पर स्थित है।
(3) नादिरशाह का आक्रमण सन् …………… में हुआ था।
(4) औरंगजेब की ………….. फलस्वरूप मुगल प्रशासन ढीला पड़ गया।
उत्तर:
(1) चम्पतराय, छत्रसाल
(2) गुरुतेगबहादुर
(3) सन् 1739
(4) धार्मिक कट्टरता के।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 22 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) औरंगजेब ने हिन्दुओं पर कौन से कर लगाए थे ?
उत्तर:
औरंगजेब ने हिन्दुओं पर जजिया और तीर्थयात्रा कर लगाए थे।

(2) सतनामियों के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
सतनामी सत्य के नाम के उपासक थे तथा पुजारी जैसी वेशभूषा पहनते थे। इनका मुख्य केन्द्र नारनौल और मेवाड़ था। औरंगजेब के धार्मिक अत्याचारों के विरुद्ध इन्होंने विद्रोह किया।

(3) औरंगजेबकी किसनीति के कारण उसके उत्तराधिकारी अयोग्य रह गए ?
उत्तर:
औरंगजेब के अविश्वासी स्वभाव के कारण उसके उत्तराधिकारी अयोग्य रह गए।

(4) नादिरशाह तथा अहमदशाह अब्दाली के आक्रमणों के क्या परिणाम हुए ?
उत्तर:
इन दोनों के आक्रमणों से मुगल शासक तथा मराठे पराजित हो गए तथा मुगल साम्राज्य दिल्ली के आस-पास के क्षेत्र तक सीमित रह गया।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 22 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) मुगल साम्राज्य के पतन के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मुगल साम्राज्य के पतन के कारण:
(1) साम्राज्य का बड़ा होना – मुगल साम्राज्य के अत्यधिक विशाल हो जाने के कारण सम्पूर्ण साम्राज्य पर नियन्त्रण करना कठिन था तथा उसके अयोग्य उत्तराधिकारी साम्राज्य की रक्षा नहीं कर सके।

(2) उत्तराधिकार के नियम का अभाव – उत्तराधिकार के लिए कोई नियम नहीं था। प्रत्येक शासक की मृत्यु के पश्चात् उनके पुत्रों में राज्य की प्राप्ति के लिए संघर्ष होता रहा जिससे साम्राज्य भी कमजोर होता गया।

(3) औरंगजेब का अविश्वासी स्वभाव एवं कट्टर धार्मिक नीति – औरंगजेब को अपने पुत्रों पर भी विश्वास नहीं था। वह अपने पुत्रों को राजनैतिक एवं सैनिक शिक्षा प्रदान नहीं कर सका जिससे वे अयोग्य रह गए। औरंगजेब की अनुदार व असहिष्णुतापूर्ण धार्मिक नीति के कारण सिक्खों, जाटों, सतनामियों, मराठों आदि के द्वारा अपने धर्म की रक्षा के लिए किए गए संघर्षों को कुचलने के प्रयास में निरन्तर युद्ध चलते रहे, इसके फलस्वरूप मुगल साम्राज्य का पतन हुआ।

(4) औरंगजेब की दक्षिण भारत नीति – औरंगजेब के अन्तिम 25 वर्ष दक्षिण भारत में युद्ध में व्यतीत हुए जिससे उत्तर भारत में प्रशासन पर मुगलों की पकड़ कम हो गई तथा युद्धों के कारण राजकोष भी खाली हो गया।

(5) विलासी शासक एवं सरदार – मुगल शासकों की विलासिता और स्थापत्य-प्रेम के कारण साम्राज्य की आर्थिक स्थिति लड़खड़ाने लगी। राजसी ठाठ-बाट व भवन निर्माण में अत्यधिक धन व्यय किया गया। मुगल सरदारों की विलासिता, चारित्रिक दुर्बलता, सम्राट के प्रति निष्ठा में कमी तथा आपसी गुटबाजी मुगल साम्राज्य के पतन का कारण बनी।

(6) विदेशी आक्रमण – मुगल साम्राज्य की दुर्बलता का लाभ उठाकर ईरान के शासक नादिरशाह ने सन् 1739 में आक्रमण कर दिया। उसने दिल्ली में कत्लेआम कराया तथा शाहजहाँ का तख्ते ताऊस, कोहिनूर हीरा तथा 70 करोड़ की सम्पदा ईरान ले गया। 14 जनवरी, 1761 ई. के दिन नादिरशाह के सेनापति अहमदशाह अब्दाली तथा मराठों के बीच पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ, इसमें मराठे पराजित हो गए। इन दोनों के आक्रमणों से मुगल साम्राज्य दिल्ली के आस-पास तक सीमित रह गया।

(7) अंग्रेजों का कब्जा – अंग्रेज व्यापारी धीरे-धीरे एक राजनैतिक सत्ता बन गए। अंग्रेजी ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत के सभी मुगल साम्राज्य वाले भागों पर कब्जा कर लिया।

(8) नौ सैना की कमी – यूरोप की शक्तिशाली नौसेना के आगे मुगल ठहर न सके। मुगल साम्राज्य में नौ सेना की कमी उन्हें घातक सिद्ध हुई।

(9) यूरोपीय शक्तियाँ – यूरोप में भारतीय वस्त्र और मसालों की बहुत माँग थी अतः पुर्तगाल, हॉलैण्ड, फ्रांस और इंग्लैण्ड के व्यापारियों ने भारत से व्यापार करने के प्रयास तेज कर दिए। उन्होंने व्यापारिक कम्पनियाँ तथा सामान रखने के लिए गोदाम स्थापित किए और सेना भी रखने लगे। मुगल साम्राज्य के दुर्बल होते ही स्वतन्त्र राज्यों में संघर्ष होने लगे। इसका लाभ उठाकर । विदेशी अपनी नौ सेना तथा शक्ति के बल पर भारत की राजनीति । में दखल देने लगे।

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः (नाट्यांशः) (मध्यमव्यायोगात्)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 5 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए-)।
(क) घटोत्कचः कया आज्ञप्तः? (घटोत्कच ने किससे आज्ञा ली?)
उत्तर:
जनन्या (माता से)

(ख) किमहमब्राह्मणः इति कः उक्तवान्? (‘क्या मैं ब्राह्मण नहीं यह किसने कहा?)
उत्तर:
वृद्धः (बूढ़े व्यक्ति ने)

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(ग) पुरुषादः कः आसीत्? (मनुष्य को खाने वाला कौन था?)
उत्तर:
घटोत्कचः (घटोत्कच)।

(घ) कुलं का रक्षितुमिच्छति? (कुल को कौन बचाना चाहती है?)
उत्तर;
ब्राह्मणी (ब्राह्मण की पत्नी)

(ङ) ज्येष्ठः पितृसमः इति कैः उक्तम्? (बड़ा भाई पिता के समान है-यह किसने कहा?)
उत्तर:
ब्रह्मवादिभिः (ब्रह्मज्ञों द्वारा)

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प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत- (एक वाक्य में उत्तर लिखिए-)
(क) ब्राह्मणपरिवारः केन समासादितः? (ब्राह्मण परिवार किसके द्वारा पकड़ा गया?)
उत्तर:
ब्राह्मणपरिवारः घटोत्कचेन समासादितः। (ब्राह्मण परिवार घटोत्कच के द्वारा पकड़ा गया।)

(ख) सुतापेक्षी कः आसीत्? (पुत्र की अपेक्षा वाला कौन था?)
उत्तर:
सुतापेक्षी वृद्धः आसीत्। (पुत्र की अपेक्षा वाला बूढ़ा व्यक्ति था।)

(ग) पितॄणां सुसम्प्रियः कः भवति? (पिता को सबसे प्यारा कौन होता है?)
उत्तर:
पितृणां सुसम्प्रियः ज्येष्ठः श्रेष्ठः भवति।। (पिता को सबसे प्यारा बड़ा तथा श्रेष्ठ बेटा होता है।)

(घ) घटोत्कचः कति पुत्रान् विसर्जयितुं कथयति? (घटोत्कच कितने पुत्रों को छोड़ने के लिए कहता है?)
उत्तर:
घटोत्कचः एकं पुत्रं विसर्जयितुं कथयति। (घटोत्कच एक पुत्र को छोड़ने के लिए कहता है।)

(ङ) घटोत्कचः अन्ते किं कथयति? (घटोत्कच अन्त में क्या कहता है?)
उत्तर:
घटोत्कचः अन्ते कथयति-‘अहो स्वजनवात्सल्यम्। (घटोत्कच ने अन्त में कहा-‘वाह, अपने लोगों के प्रति कितना स्नेह ।’)

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प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिए)

(क) ब्राह्मणी वृद्धं किं कथयति? (ब्राह्मणी वृद्ध से क्या कहती है?)
उत्तर:
ब्राह्मणी वृद्धं कथयति-“पतिमात्रधर्मिणी पतिव्रतेति नाम गृहीतफलेनैतेन शरीरेणार्यं कलं च रक्षितमिच्छामि।”

(ब्राह्मणी ने बूढ़े व्यक्ति को कहा-पति के धर्म का पालन करने वाली मैं पतिव्रता हूँ। गृहीत फल वाले इस शरीर से आर्य, स्वामी तथा कुल की रक्षा करना चाहती हूँ।)

(ख) द्वितीयः पुत्र स्वभ्रातरं किं कथयति? (दूसरे पुत्र ने अपने भाई से क्या कहा?)
उत्तर:
द्वितीयः पुत्रः स्वभ्रातरं कथयति-“कुले, लोके पितृणां च ज्येष्ठः श्रेष्ठः सुसंप्रियः ततः गुरुवृत्तिम् अनुस्मरन् अहमेव यास्यामि।”

(दूसरे पुत्र ने अपने भाई से कहा-इस संसार में, कुल में पिता का ज्येष्ठ पुत्र से अधिक स्नेह होता है। अतः पूर्वजों के आदर्श को निभाते हुए मैं ही जाऊँगा।)

(ग) तृतीयः पुत्रः स्वभ्रातरौ किं कथयति? (तीसरे पुत्र ने अपने भाइयों को क्या कहा?)
उत्तर:
तृतीयः पुत्रः स्वभ्रातरौ कथयति-“ब्रह्मवादिभिः ज्येष्ठो भ्राता पितृसमः कथितः ततः गुरुणां प्राणरक्षणं कर्तुम् अहम् अर्हः अस्मि।

(तीसरे पुत्र ने दोनों भाइयों से कहा- “ब्राह्मणों द्वारा बड़ा भाई पिता समान कहा गया है, तो बड़ों के प्राणों की रक्षा करने के लिए मैं योग्य हूँ।”)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूयरत-(दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(परिणामेन, पतिव्रतेति, बलाबलं, श्रेष्ठः, पितृसमः)
(क) पतिमात्रधर्मिणी………….नाम।
(ख) ज्येष्ठः ……………कुले लोके।
(ग) कृतकृत्यं शरीरं मे…………….जर्जरम्।
(घ) ज्येष्ठो भ्राता………!
(ङ) ……….परिज्ञाय पुत्रमेकं विसर्जय।
उत्तर:
(क) पतिव्रतेति
(ख) श्रेष्ठः
(ग) परिणामेन
(घ) पितृसमः
(ङ) बलाबलं

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से जोडिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 1
उत्तर:
(क) 4
(ख) 3
(ग) 1
(घ) 5
(ङ) 2

प्रश्न 6.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धवाक्यानां समक्षं ‘न’ इति लिखत–
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए-)
(क) घटीत्कचः जनन्या आज्ञप्तः।।
(ख) किमहमब्राह्मणः इति प्रथमः पुत्रः कथयति।
(ग) कुले लोके च अनुजः श्रेष्ठः भवति।
(घ) ज्येष्ठो भ्राता पितृसमः इति ब्रह्मवादिभिः कथितः।
(ङ) ब्राह्मणी पतिमात्रधर्मिणी आसीत्।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) आम्।

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प्रश्न 7.
अधोलिखित शब्दानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनं च लिखत-
(नीचे लिखे शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति व वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 2
(क) गुरुणाम्
(ख) तया
(ग) पल्या
(घ) भवन्तम्
(ङ) पितृणाम्
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 3

प्रश्न 8.
निम्नलिखितक्रियापदानां धातुं लकारं पुरुषं वचनं च लिखत
(नीचे लिखे क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखिए।)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 4
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 5

प्रश्न 9.
उदाहरणानुसारं धातुं प्रत्ययं च पृथक् कुरुत
(उदाहरण के अनुसार धातु और प्रत्यय अलग कीजिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 6
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 8

प्रश्न 10.
अधोलिखितसमासानां विग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत
(नीचे लिखे समासों के विग्रह कर समास का नाम लिखिए।)
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 5 कुटुम्बानुरक्तिः img 7

योग्यताविस्तार –

संस्कृतभाषायां रूपकाणां दश भेदाः भवन्ति। ते च, नाटकम्, प्रकरणम्, भाणः, प्रहसनम्, डिमः, व्यायोगः, समवकारः, वीथी, अङ्कः, ईहामृगः। संस्कृत भाषा में रूपक के दस भेद होते हैं। वे हैं-नाटक, प्रकरण, भाण, प्रहसन, डिम, व्यायोगह, समवकार, वीथी, अङ्क, ईहामृग।

नाट्यांशस्य सामूहिकम् अभिनयं कुरुत। (नाट्यांश का सामूहिक अभिनय कीजिए।)

कुटुम्बानुरक्तिः पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ महाकवि भास द्वारा रचित ‘मध्ययव्यायोगः’ नामक ग्रन्थ का एक अंश है। इस पाठ में घटोत्कच जब बलि के लिए एक ब्राह्मण परिवार को पकड़ता है, तब उस परिवार के सभी सदस्य अपने परिवार वालों के अन्य सदस्यों को छुड़ाने के लिए अपने प्राण देने के लिए आगे बढ़ते हैं। इस प्रकार अपने परिवार के प्रति समर्पण व प्रेम भाव इस पाठ में दर्शाया गया है।

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कुटुम्बानुरक्तिः  पाठ का अनुवाद

1. वृद्धः-हन्त निराशाः स्मः। भवतु पुत्र व्यपाश्रयिष्ये तावदेनम्।
प्रथमः (पुत्रः)-अलमलं परिश्रमेण।
वृद्धः-पुत्र! निर्वेदप्रत्यर्थिनी खलु प्रार्थना। भवतु पश्यामस्तावत्। भो भोः पुरुष! अस्त्वस्माकं मोक्षः?
घटोत्कचः-मोक्षोऽस्ति समयतः।
वृद्धः-कः समयः।

घटोत्कच :
अस्ति मे तत्रभवती जननी। तयाऽहमाज्ञप्तः। पुत्र! ममोपवासनिसर्गार्थमस्मिन्वनप्रदेशे कश्चिन्मानुषः प्रतिगृह्यानेतव्य इति। ततो मयाऽऽसादितो भवान्।।

शब्दार्था :
व्यपाश्रयिष्ये-निवेदन करते हैं-appeal, submit; निर्वेदप्रत्यर्थिनी-मुक्ति की याचना-appeal for freedom, मोक्षः-मुक्ति-freedom, समयतः-शर्त पर/से–on one condition, निसर्गार्थम्-पूर्ति के लिए-for the perfection, प्रतिगृह्यानेतव्य-पकड़कर लाओ-catch and bring, आसादितः-पकड़ा है-have caught.

अनुवाद :
वृद्ध पुरुष-हाय! हम निराश हो गये हैं। अच्छा पुत्र, तब निवेदन करते हैं। प्रथम पुरुष-अधिक परिश्रम मत करो।
वृद्ध-पुत्र, मुक्ति के लिए प्रार्थना करनी पड़ेगी। ठीक है, तब देखते हैं। हे पुरुष! हमें छोड़ दो।
घटोत्कच-एक शर्त पर छोड़ सकता हूँ।
वृद्ध-कैसी शर्त?

घटोत्कच :
मेरी आदरणीय माता है। उनके द्वारा मुझे आज्ञा दी गई है। पुत्र! मेरे उपवास की पूर्ति के लिए इस वन प्रदेश से कोई मनुष्य पकड़कर लाओ। इसलिए मेरे द्वारा आपको पकड़ा गया है।

English :
The old man asked Ghatotkach to leave him and his sons. Ghatotk. ch told them that he has been ordered by his mother to bring some man for perfection of her fast.

2. घटोत्कचः- पत्न्या चारित्रशालिन्या द्विपुत्रो मोक्षमिच्छसि।
बलाबलं परिज्ञाय पुत्रमेकं विसर्जय।।1॥

अन्वय :
(हे वृद्धः!) चारित्रशालिन्या पत्न्या (सह) द्विपुत्रः मोक्षम् इच्छसि (तर्हि) बलावलं परिज्ञाय एकं पुत्रं विसर्जय।

शब्दार्था :
बलाबलम्-प्रिय और अप्रिय-dear or not dear, परिज्ञाय-जानकरconsidering

अनुवाद :
हे वृद्ध ! चरित्रशाली पत्नी के साथ दो पुत्रों की मुक्ति चाहते हो, तो प्रिय और अप्रिय जानकर एक पुत्र को छोड़ दो।

English :
Consider the merits and demerits-leave one of the sons.

3. वृद्धः-हे भो राक्षसापसद! किमहमब्राह्मणः।
ब्राह्मणः श्रुतवान्वृद्धः पुत्रं शीलगुणान्वितम्।
पुरुषादस्य दत्त्वाहं कथं निवृत्तिमाप्नुयाम्॥2॥

अन्वय :
(अहम्) वृद्धः ब्राह्मणः श्रुतवान् शीलगुणान्वितं पुत्रं पुरुषादस्य दत्वा क्थं निर्वृत्तिम् आप्नुयाम्।

शब्दार्था :
राक्षसापसद-नीच राक्षस-Mean demon; श्रुतवान्-शास्त्रज्ञ-having knowledge of scriptures, पुरुषादस्य-मनुष्य को खाने के लिए-to be eaten by man, निर्वृत्तिम्-शान्ति को-peace.

अनुवाद :
(वृद्धः-अरे, नीच राक्षस! क्या मैं ब्राह्मण नहीं हूँ (अर्थात् नीच हूँ।) मैं बूढ़ा ब्राह्मण अपने शास्त्रज्ञ, शील व गुणों से युक्त पुत्र को मनुष्य को खाने के लिए देकर कैसे शान्ति प्राप्त करूँगा।

English :
I am not so mean. How can I seek peace by leaving my learned and virtuous son to be eaten.

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4. घटोत्कच :
यद्यर्थितो द्विजश्रेष्ठ! पुत्रमेकं न मुञ्चसि।
सकुटुम्बः क्षणेनैव विनाशमुपयास्यसि॥3॥

अन्वय :
द्विजश्रेष्ठः ! यदि अर्थितः एकं पुत्रं न मुञ्चसि (तर्हि) सकुटुम्बः क्षणेनैव विनाशम् उपयास्यसि।

शब्दार्था :
अर्थितः-धन के लिए/प्रार्थना किए जाने पर-for money, on our words, मुञ्चसि-छोड़ते हो-leave, उपयास्यसि-प्राप्त हो जाओगे-will attain.

अनुवाद :
घटोत्कच कहता है-हे ब्राह्मण श्रेष्ठ! यदि धन के कारण (हमारे कहने से) एक पुत्र को नहीं छोड़ते हो, तो कुटुम्ब सहित क्षण भर में ही विनाश को प्राप्त हो जाओगे।

English :
If you fail to leave one of the sons, you will soon be destroyed along with your family.

5. वृद्धः-एष एव मे निश्चयः
कृतकृत्यं शरीरं मे परिणामेन जर्जरम्।
राक्षसाम्नौ सुतापेक्षी होष्यामि विधिसंस्कृतम्॥4॥

अन्वय :
सुतापेक्षी (अहम्) परिणामेन जर्जरं विधिसंस्कृतं कृतकृत्यं मे वृद्धस्य शरीरं राक्षसाम्नौ होष्यामि।

शब्दार्था :
सुतापेक्षी-पुत्र की अपेक्षा वाला- expectation of boy, विधिसंस्कृतम्अनुष्ठानों द्वारा पवित्र-purified by observance of sacraments, कृतकृत्यम्-जिसके द्वारा समस्त कार्य पूर्ण कर लिए गए हों-who has finished all the activities.

अनुवाद :
वृद्धः-यह ही मेरा निश्चय है। पुत्र की अपेक्षा वाले, वृद्धावस्था के कारण थके हुए, अनुष्ठानों के कारण पवित्र, सभी कार्यों को पूर्ण करने वाले अपने बूढ़े शरीर की मैं राक्षस की अग्नि में आहुति दे दूंगा।

English :
The old man said, “My old and exhausted body will be burnt in the fire of the demon” for the sake of my son.

6. ब्राह्मणी-आर्य, वा मैवम्। पतिमात्रधर्मिणी पतिव्रतेति नाम। गृहीतफलेनैतेन शरीरेणार्यं कुलं च रक्षितुमिच्छामि।
घटोत्कचः-भवति! न खलु स्त्रीजनोऽभिमतस्तत्रभवत्या।
वृद्धः-अनुगमिष्यामि भवन्तम्।
घटोत्कचः-आः वृद्धस्त्वमपसर।
प्रथमः (पुत्र)-भोस्तात-ब्रवीमि खलु तावत्किञ्चित्।
वृद्धः-ब्रूहि, ब्रूहि शीघ्रम्।
शब्दार्थाः-अपसर-दूर हटो-keepaside, ब्रूहि-कहो-say, अभिमतः-उचित-proper.

अनुवाद :
ब्राह्मणी-ऐसा मत कहो।मैं केवल पति के धर्म का पालन करने वाली पतिव्रता हूँ। इस फल प्राप्त किए हुए शरीर के द्वारा आर्य और कुल की रक्षा करना चाहती हूँ।

घटोत्कच-देवी! उनके आदेश के अनुसार स्त्री नहीं चाहिए।
वृद्ध-तुम्हारे साथ मैं चलूँगा।
घटोत्कच-तुम वृद्ध हो, तुम दूर हटो।
प्रथम (पुत्र)-हे पिता! तो मैं कुछ कहूँ।
वृद्ध-कहो, शीघ्र कहो।

English :
The Brahmin woman and the old man offered themselves to save the family. Ghatotkach asked them to keep aside. The first son desired to say something.

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7. प्रथमः (पुत्र)- मम प्राणैर्गुरुप्राणानिच्छामि परिरक्षितम्।
रक्षणार्थ कुलस्यास्य मोक्तुमर्हति मां भवान॥5॥

अन्वय :
(अहं प्रथमः पुत्रः) मम प्राणैः गुरुप्राणान् परिरक्षितुम इच्छामि (अतः) भवान् अस्य कुलस्य रक्षणार्थं मां मोक्तुम अर्हति।

शब्दार्था :
परिरक्षितुम्-रक्षा करने के लिए-toprotect, गुरु-(पूर्वजों) बड़ों के-of the elderly people.

अनुवाद :
(मैं, पहला पुत्र) अपने प्राणों के द्वारा बड़ों के प्राणों की रक्षा करना चाहता हूँ। इसलिए आप इस कुल की रक्षा के लिए मुझे छोड़ दीजिए।

English :
The first son desired that he should be left to protect the lives of the elderly people in the family.

8. द्वितीयः (पुत्रः) आर्य! मा मैवम् ।
ज्येष्ठः श्रेष्ठ कुले लोके पितृणां च सुसंप्रियः।
ततोऽहमेव यास्यामि गुरुवृत्तिमनुस्मरन॥6॥

अन्वय :
(भो जनक!) कुले, लोके पितॄणां च ज्येष्ठः श्रेष्ठः सुसंप्रियः (भवति) ततः गुरुवृत्तिम् अनुस्मरन् अहमेव यास्यामि।।

शब्दार्था :
सुसंप्रियः-अच्छा व प्यारा-mostloving,गुरुवृत्तिम्-पूर्वजों के आदर्श को-the ideals of the ancestors, अनुस्मरन्-चलाते हुए, याद करते हुए-following, recalling, यास्यामि-जाऊँगा-shall go.

अनुवाद :
दूसरा (पुत्र)-आर्य! ऐसा मत कहो।
हे पिता! इस संसार में, कुल में सबसे बड़ा व श्रेष्ठ ही माता-पिता को अच्छा व प्यारा लगता है। तब पूर्वजों के आदर्श का अनुकरण करते हुए मैं ही जाऊँगा।

English :
Second son : Being the elder, the better and the more loving son, I would go in accordance with the ancestral practice.

9. तृतीयः (पुत्रः)-आर्य! मा मैवम्।
ज्येष्ठो भ्राता पितृसमः कथितो ब्रह्मवादिभिः।
ततोऽहं कर्तुमस्म्य) गुरुणां प्राणरक्षणम्॥7॥
घटोत्कचः-अहो स्वजनवात्सल्यम्।
(इति निष्क्रान्ताः सर्वे)

अन्वयः-ज्येष्ठः भ्राता ब्रह्मवादिभिः पितृसमः कथितः ततः गुरुणां प्राणरक्षणं कर्तुम् अहम् अर्हः अस्मि।

शब्दार्था :
पितृसमः-पिता के समान-like a father, ब्रह्मवादिभिः-ब्रह्मज्ञों ने-by the brahmins, अर्हः-योग्य-capable, वात्सल्यम्-प्रेम-affection.

अनुवाद :
तृतीय (पुत्र) – आर्य! ऐता मत कहो।
ब्रह्मज्ञों के अनुसार बड़े भाई को पिता के समान कहा गया है। तो बड़ों की प्राणरक्षा करने के लिए मैं योग्य हूँ।
घटोत्कच-वाह! अपने लोगों के लिए कितना स्नेह।
(सब निकल जाते हैं)

English :
Eldest son is like a father-Hence Iam capable of saving my elderly people-filial affection praised (appreciated)

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार

MP Board Class 9th Science Chapter 15 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

प्रश्न शृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 229

प्रश्न 1.
अनाज, दाल, फल तथा सब्जियों से हमें क्या प्राप्त होता है?
उत्तर:
अनाज से कार्बोहाइड्रेट, दाल से प्रोटीन तथा फल एवं सब्जियों से विटामिन्स एवं मिनरल्स मिलते हैं।

प्रश्न श्रृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 230

प्रश्न 1.
जैविक तथा अजैविक कारक किस प्रकार फसल उत्पादन को प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
फसल उत्पादन को प्रभावित करने वाले जैविक कारक:

  1. रोग, कीट तथा निमेटोड फसल उत्पादन को कम करते हैं।
  2. कुछ बैक्टीरिया नाइट्रोजन स्थिरीकरण द्वारा वायुमण्डल की नाइट्रोजन को नाइट्रेट्स में बदल देते हैं जिससे फसल उत्पादन बढ़ता है।

फसल उत्पादन को प्रभावित करने वाले अजैविक कारक:

  1. सूखा (अनावृष्टि), बाढ़ (अतिवृद्धि), क्षारकता, पाला आदि फसल उत्पादन को कम कर देते हैं।
  2. उचित ताप, वायु, सूर्य का प्रकाश आदि फसल उत्पादन को बढ़ाते हैं।

प्रश्न 2.
फसल सुधार के लिए ऐच्छिक सस्य विज्ञान गुण क्या हैं?
उत्तर:
ऐच्छिक सस्य विज्ञान गुण-चारे वाली फसलों के लिए लम्बी तथा सघन शाखाएँ तथा अनाज के लिए बौने पौधे ऐच्छिक सस्य विज्ञान गुण होते हैं। इन फसलों को उगाने से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 231

प्रश्न 1. वृहत् पोषक क्या है? इन्हें वृहत् पोषक क्यों कहते हैं?
उत्तर:
नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, कैल्सियम, मैग्नीशियम एवं सल्फर वृहत् पोषक कहलाते हैं। इन पोषकों की अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है इसलिए इन्हें वृहत् पोषक कहते हैं।

प्रश्न 2.
पौधे अपना पोषक कैसे प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
पौधे अपना पोषक मृदा, हवा एवं पानी से प्राप्त करते हैं।

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प्रश्न शृंखला-4 # पृष्ठ संख्या 232

प्रश्न 1.
मिट्टी की उर्वरकता को बनाए रखने के लिए खाद तथा उर्वरक के उपयोग की तुलना कीजिए।
उत्तर:
उर्वरक फसलों का उत्पादन बढ़ाते हैं अर्थात् कम समय में अधिक उत्पादन लेकिन इनका लगातार तथा अधिक उपयोग मृदा की उर्वरकता को शनैः-शनैः घटाता है, जबकि खाद के उपयोग से मृदा की उर्वरकता दीर्घ अवधि तक बनी रहती है।

प्रश्न श्रृंखला-5 # पृष्ठ संख्या 235

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-सी परिस्थिति में सबसे अधिक लाभ होगा और क्यों?
(a) किसान उच्चकोटि के बीज का उपयोग करें, सिंचाई न करें अथवा उर्वरक का उपयोग न करें।
(b) किसान सामान्य बीजों का उपयोग करें, सिंचाई करें तथा उर्वरक का उपयोग करें।
(c) किसान अच्छी किस्म के बीजों का प्रयोग करें, सिंचाई करें, उर्वरक का उपयोग करें तथा फसल सुरक्षा की विधियों को अपनाएँ।
उत्तर:
परिस्थिति (c) सबसे अधिक लाभदायक रहेगी क्योंकि सबसे अधिक फसल उत्पादन के लिए आवश्यक है कि अच्छी किस्म के बीजों का उपयोग किया जाए, सिंचाई की जाए, उर्वरकों का प्रयोग हो एवं फसल को नुकसान से बचाने के लिए सुरक्षा विधियों का प्रयोग किया जाए।

प्रश्न शृंखला-6 # पृष्ठ संख्या 235

प्रश्न 1.
फसल की सुरक्षा के लिए निरोधक विधियों तथा जैव नियन्त्रण क्यों अच्छा समझा जाता है?
उत्तर:
निरोधक विधियों और जैव नियन्त्रण से उत्पादों की गुणवत्ता सुरक्षित रहती है। बीजों की अंकुरण क्षमता बनी रहती है तथा उत्पाद की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। इसलिए फसल की सुरक्षा के लिए निरोधक विधियाँ तथा जैव नियन्त्रण को अच्छा समझा जाता है।

प्रश्न 2.
भण्डारण की प्रक्रिया में कौन से कारक अनाज को हानि पहुँचाने के लिए उत्तरदायी हैं?
उत्तर:
भण्डारण की प्रक्रिया में अनाज को हानि पहुँचाने वाले कारक:

1. जैविक कारक:
कीट, कृन्तक, कवक, चिंचड़ी तथा जीवाणु।

2. अजैविक कारक (भौतिक कारक):
नमी का होना तथा उचित ताप का अभाव।

प्रश्न श्रृंखला-7 # पृष्ठ संख्या 236

प्रश्न 1.
पशुओं की नस्ल सुधार के लिए प्रायः कौन-सी विधि का उपयोग किया जाता है और क्यों?
उत्तर:
पशुओं की नस्ल सुधार के लिए प्रायः संकरण विधि का उपयोग किया जाता है क्योंकि इससे एक ऐसी संतति प्राप्त होती है जिसमें दोनों नस्लों के अच्छे ऐच्छिक गुण विद्यमान होंगे।

प्रश्न शृंखला-8 # पृष्ठ संख्या 237

प्रश्न 1.
निम्नलिखित की विवेचना कीजिए –
“यह रुचिकर है कि भारत में कुक्कुट, अल्प रेशे के खाद्य पदार्थों को उच्च पौष्टिकता वाले पशु प्रोटीन आहार में परिवर्तित करने के लिए सबसे अधिक सक्षम हैं। अन्य रेशे के खाद्य पदार्थ मनुष्यों के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं।”
उत्तर:
कुक्कुट (मुर्गियाँ) जो भोजन ग्रहण करती हैं वे प्रायः कृषि के उपोत्पाद से प्राप्त सस्ता रेशेदार आहार होता है जो मनुष्यों के सर्वथा अनप्रयुक्त तथा अपशिष्ट होता है। इनसे मनुष्यों को जो अण्डे एवं माँस के रूप में खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं वे उच्च पौष्टिकता वाला पशु प्रोटीन आहार होता है। इस प्रकार भारत में कुक्कुट अल्प रेशे के खाद्य पदार्थों को उच्च पौष्टिकता वाले पशु प्रोटीन आहार में परिवर्तित करने के लिए सक्षम होते हैं।

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प्रश्न श्रृंखला-9 # पृष्ठ संख्या 238

प्रश्न 1.
पशुपालन तथा कुक्कुट पालन की प्रबन्धन प्रणाली में क्या समानताएँ हैं?
उत्तर:
पशुपालन एवं कुक्कुट पालन की प्रबन्धन प्रणाली में समानताएँ –

  1. दोनों के लिए उचित, स्वच्छ, हवादार, रोशनी युक्त एवं संक्रमणरहित आवास की व्यवस्था करना।
  2. दोनों के लिए आहार एवं जल की व्यवस्था करना।
  3. दोनों को बीमारियों से बचाने के उपाय एवं टीकाकरण।
  4. दोनों को अच्छे उत्पादन के लिए संकरण द्वारा अच्छी नस्लें तैयार करना।

प्रश्न 2.
ब्रौलर तथा अण्डे देने वाली लेयर में क्या अन्तर है? इनके प्रबन्धन के अन्तर को भी स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ब्रौलर तथा अण्डे देने वाली लेयर में अन्तर:
ब्रौलर को माँस उत्पादन के लिए तथा लेयर को अण्डे उत्पादन के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

ब्रौलर तथा अण्डे देने वाली लेयर के प्रबन्धन में अन्तर:
ब्रौलर के आवास, पर्यावरण तथा पोषक सन्तुलित आहार का विशेष ध्यान रखना होता है। ब्रौलर के आहार में प्रोटीन तथा वसा की प्रचुर मात्रा आवश्यक है तथा अण्डे देने वाले कुक्कुटों के आहार में विटामिन ‘A’ तथा ‘K’ की अधिक मात्रा आवश्यक है।

प्रश्न श्रृंखला-10 # पृष्ठ संख्या 239

प्रश्न 1.
मछलियाँ कैसे प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
मछलियाँ प्राप्त करने की दो अग्र विधियाँ हैं –

  1. प्राकृतिक स्रोत से मछलियाँ पकड़ना।
  2. मछली पालन या मत्स्य संवर्धन।

प्रश्न 2.
मिश्रित मछली संवर्धन के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
मिश्रित मछली संवर्धन से एक साथ पाँच-छ: स्पीशीज की मछलियों का प्रचुर मात्रा में उत्पादन किया जा सकता है।

प्रश्न श्रृंखला-11 # पृष्ठ संख्या 240

प्रश्न 1.
मधु उत्पादन के लिए प्रयुक्त मधुमक्खियों में कौन से ऐच्छिक गुण होने चाहिए?
उत्तर:
मधु उत्पादन के लिए प्रयुक्त मधुमक्खियों के ऐच्छिक गुण –

  1. मधु एकत्रित करने की अधिकतम क्षमता।
  2. निर्धारित छत्ते में अधिक समय तक रहने की प्रवृत्ति।
  3. तीव्र प्रजनन की प्रवृत्ति।
  4. कम डंक मारने की प्रवृत्ति।

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प्रश्न 2.
चरागाह क्या है? और ये मधु उत्पादन से कैसे सम्बन्धित है?
उत्तर:
चरागाह:
मधुमक्खियों के चरागाह वे क्षेत्र कहलाते हैं जहाँ मधुमक्खियाँ फूलों से मकरन्द एवं पराग कण एकत्रित करती हैं।”

चरागाहों का मधु उत्पादन से सम्बन्ध:
मधु की गुणवत्ता एवं मात्रा मधुमक्खियों के चरागाह अर्थात् उनको मधु एकत्रित करने के लिए उपलब्ध फूलों पर निर्भर करती है। चरागाह की पर्याप्त उपलब्धता एवं पुष्पों की किस्में मधु के स्वाद को निर्धारित करती हैं।

MP Board Class 9th Science Chapter 15 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
फसल उत्पादन की एक विधि का वर्णन कीजिए जिससे अधिक पैदावार प्राप्त हो सके।
उत्तर:
अधिक पैदावार के लिए फसल उत्पादन की अन्तराफसलीकरण विधि-इस विधि में दो अथवा दो से अधिक फसलों को एक साथ एक ही खेत में निर्दिष्ट पैटर्न पर उगाते हैं। कुछ पंक्तियों में एक प्रकार की फसल तथा उसके एकान्तर में स्थित दूसरी पंक्तियों में दूसरे प्रकार की फसल उगाते हैं। इससे अधिक पैदावार प्राप्त होती है।

प्रश्न 2.
खेतों में खाद तथा उर्वरकों का प्रयोग क्यों करते हैं?
उत्तर:
पौधों की वृद्धि के लिए पोषक पदार्थों की आवश्यकता होती है। इन पोषकों की कमी से पौधों की शारीरिक क्रियाओं, जनन, वृद्धि एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए खेतों में खाद तथा उर्वरकों के रूप में पोषकों को मिलाना आवश्यक है। इसलिए इनका प्रयोग करते हैं।

प्रश्न 3.
अन्तराफसलीकरण तथा फसल चक्र के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
अन्तराफसलीकरण तथा फसल चक्र के लाभ:

  1. कम कृषि लागत में फसल की उपज में वृद्धि।
  2. भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखते हुए भूमि का समुचित उपयोग।
  3. आर्थिक जोखिम कम होता है तथा आय में वृद्धि होती है।
  4. एक साथ अनेक प्रकार के शुद्ध बीजों का उत्पादन सरल होता है।
  5. खरपतवारों को नियन्त्रित करने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 4.
आनुवंशिक फेरबदल क्या है? कृषि प्रणालियों में यह कैसे उपयोगी है?
उत्तर:
आनुवंशिक फेरबदल:
“फसल सुधार के लिए ऐच्छिक गुणों वाले जीन का डालना जिससे आनुवंशिकीय रूपान्तरित फसल प्राप्त होती है, आनुवंशिक फेरबदल कहलाता है।”

आनुवंशिक फेरबदल की कृषि प्रणालियों में उपयोगिता:
इस प्रक्रिया से हमको ऐच्छिक गुणों वाले उन्नत किस्म के कृषि उत्पाद एवं अच्छी गुणवत्ता वाले विशेष बीज उपलब्ध होते हैं।

प्रश्न 5.
भण्डारगृहों (गोदामों) में अनाज की हानि कैसे होती है?
उत्तर:
भण्डारगृहों (गोदामों) में अनाज की हानि:

  1. नमी, सीलन एवं ताप का अभाव अनाज को बदरंग कर देते हैं तथा अनाज सड़ भी जाता है।
  2. अनाज की अंकुरण क्षमता कम हो जाती है।
  3. कीट, कृन्तक, कवक, चिंचड़ी तथा जीवाणु अनाज को नष्ट कर देते हैं तथा पेस्ट (चूहे) अनाज को खा जाते हैं।
  4. अनाज का वजन कम हो जाता है तथा गुणवत्ता खराब होने से बाजार मूल्य भी कम होता है।

प्रश्न 6.
किसानों के लिए पशुपालन प्रणालियाँ कैसे लाभदायक हैं?
उत्तर:
पशुपालन की प्रणालियों से किसानों को उचित पशु आवास का प्रबन्धन, पशुओं के उचित आहार, प्रजनन प्रबन्धन, पशुओं में फैलने वाले रोगों और उनके उचित उपचार की जानकारी मिलती है। इससे पशु उत्पादन को बढ़ाने में सहायता मिलती है। इस प्रकार किसानों के लिए पशुपालन प्रणालियाँ लाभदायक हैं।

प्रश्न 7.
पशुपालन के क्या लाभ हैं?
उत्तर:

  1. पशुपालन से भोज्य पदार्थ दूध की आपूर्ति होती है।
  2. पशुपालन से कृषि कार्यों (हल चलाना, सिंचाई करना, बोझा ढोना आदि) के लिए पशु उपलब्ध होते हैं।

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प्रश्न 8.
उत्पादन बढ़ाने के लिए कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन तथा मधुमक्खी पालन के प्रबन्धन में क्या समानताएँ हैं?
उत्तर:
उत्पादन बढ़ाने के लिए कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन एवं मधुमक्खी पालन के प्रबन्धन में निम्न समानताएँ हैं –

  1. उचित आवास की व्यवस्था करना।
  2. उनके सन्तुलित एवं पौष्टिक आहार की व्यवस्था करना।
  3. उनको नीरोग रखने के लिए व्यवस्था करना।
  4. उनके प्रजनन की उचित व्यवस्था करना।

प्रश्न 9.
प्रग्रहण मत्स्यन, मेरीकल्चर तथा जल संवर्धन में क्या अन्तर है?
उत्तर:
प्रग्रहण मत्स्यन:
प्राकृतिक स्रोतों से मछली पकड़ने की विधि प्रग्रहण मत्स्यन कहलाती है। इसमें तालाबों, नदियों तथा समुद्रों से पारम्परिक तरीकों से मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। इससे मछली उत्पादन अधिक मात्रा में नहीं हो पाता।

मेरीकल्चर:
मत्स्यपालन की वह विधि जिसके द्वारा समुद्र में मछलियों का संवर्धन किया जाता है। मेरी कल्चर कहलाती है। इसमें आर्थिक महत्व की मछलियों का संवर्धन किया जा सकता है।

जल संवर्धन:
ताजा जल स्रोत; जैसे नाले, नदियाँ, तालाब, पोखर आदि में जहाँ प्रग्रहण विधि से मत्स्य उत्पादन अधिक नहीं होता वहाँ संवर्धन द्वारा अधिकांश मत्स्य उत्पादन किया जाता है। इस प्रणाली को जल संवर्धन कहते हैं। इस प्रणाली द्वारा मछली उत्पादन अधिक होता है।

MP Board Class 9th Science Chapter 15 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 9th Science Chapter 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से किस पौधे से तेल प्राप्त होता है?
(a) मसूर
(b) सूरजमुखी
(c) फूलगोभी
(d) गुड़हल
उत्तर:
(b) सूरजमुखी

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा कार्बोहाइड्रेट का स्रोत नहीं है?
(a) चावल
(b) बाजरा
(c) ज्वार
(d) चना
उत्तर:
(d) चना

प्रश्न 3.
देश की खाद्य समस्या के हल के लिए निम्नलिखित में से कौन आवश्यक है?
(a) उत्पादन का बढ़ाना तथा खाद्यान्न का भण्डारण
(b) लोगों को आसानी से खाद्यान्न का मिलना
(c) लोगों के पास अन्न खरीदने के लिए धन का होना
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 4.
खरपतवार फसलों को निम्नलिखित में से किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
(a) वृद्धि करने से पहले ही खेत में पादप को नष्ट करके
(b) पादप की वृद्धि को प्रभावित करके
(c) पादप के अन्य संसाधनों में प्रतियोगिता के कारण पोषक पदार्थ की उपलब्धता में कमी करके
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(c) पादप के अन्य संसाधनों में प्रतियोगिता के कारण पोषक पदार्थ की उपलब्धता में कमी करके

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प्रश्न 5.
मधुमक्खी की निम्नलिखित जातियों (स्पीशीज) में से कौन-सी स्पीशीज इटली की है।
(a) ऐपिस डॉर्मेटा
(b) ऐपिस फ्लोरी
(c) ऐपिस सेरना इण्डिका
(d) ऐपिस मेलीफेरा
उत्तर:
(d) ऐपिस मेलीफेरा

प्रश्न 6.
पशुपालन निम्नलिखित उद्देश्यों में से किसके लिए किया जाता है?
(i) दुग्ध उत्पादन
(ii) कृषि कार्य
(iii) माँस उत्पादन
(iv) अण्डा उत्पादन

(a) (i), (ii) तथा (iii)
(b) (ii), (iii) तथा (iv)
(c) (ii) तथा (iii)
(d) (iii) तथा (iv)
उत्तर:
(a) (i), (ii) तथा (iii)

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-से पशु भारतीय हैं?
(i) बॉस इण्डिकस
(ii) बॉस डोमेस्टिका
(iii) बॉस बुबेलिस
(iv) बॉस बुल्गैरिस

(a) (i) तथा (iii)
(b) (ii) तथा (iii)
(c) (i) तथा (iv)
(d) (ii) तथा (iv)
उत्तर:
(a) (i) तथा (iii)

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से कौन-सी विदेशी नस्ल है?
(i) ब्रॉन
(ii) जर्सी
(ii) ब्राउन स्विस
(iv) जर्सी स्विस

(a) (i) तथा (iii)
(b) (ii) तथा (iii)
(c) (i) तथा (iv)
(d) (ii) तथा (iv)
उत्तर:
(b) (ii) तथा (iii)

प्रश्न 9.
मुर्गीपालन निम्नलिखित में से किसकी वृद्धि के लिए किया जाता है?
(i) अण्डा उत्पादन
(ii) पंख उत्पादन
(iii) चिकनमाँस
(iv) दुग्ध उत्पादन

(a) (i) तथा (iii)
(b) (i) तथा (ii)
(c) (ii) तथा (iii)
(d) (iii) तथा (iv)
उत्तर:
(a) (i) तथा (iii)

प्रश्न 10.
कुक्कुट (मुर्गियाँ) निम्नलिखित रोगजनकों में से किसके प्रति सुग्राह्य हैं?
(a) विषाणु
(b) जीवाणु
(c) कवक
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में से कौन-सी मछली जल की सतह से भोजन प्राप्त करती है?
(a) रोहू
(b) मृगल
(c) सामान्य कार्प
(d) कटला
उत्तर:
(b) मृगल

प्रश्न 12.
पशुपालन में निम्नलिखित में से किसका वैज्ञानिक प्रबन्धन किया जाता है?
(i) पशु प्रजनन
(ii) पशु संवर्धन
(iii) पशुधन
(iv) पशुओं का पालन-पोषण

(a) (i), (ii) तथा (iii)
(b) (ii), (iii) तथा (iv)
(c) (i), (ii) तथा (iv)
(d) (i), (iii) तथा (iv)
उत्तर:
(b) (ii), (iii) तथा (iv)

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प्रश्न 13.
निम्नलिखित पोषकों में से कौन-सा पोषक उर्वरकों में उपलब्ध नहीं होता है?
(a) नाइट्रोजन
(b) फॉस्फोरस
(c) आयरन
(d) पोटैशियम
उत्तर:
(c) आयरन

प्रश्न 14.
अन्न भण्डारण के नियन्त्रण और रोकथाम के लिए कौन-सा उपाय किया जाता है?
(a) भण्डारण कक्ष की भली-भाँति स्वच्छता
(b) उत्पाद को अच्छी तरह सुखाना
(c) धूमन
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 15.
दुग्ध उत्पादन में अपार वृद्धि कहलाती है –
(a) श्वेत क्रान्ति
(b) हरित क्रान्ति
(c) नीली क्रान्ति
(d) ये सभी
उत्तर:
(a) श्वेत क्रान्ति

प्रश्न 16.
मछली उत्पादन में अपार वृद्धि कहलाती है –
(a) श्वेत क्रान्ति
(b) हरित क्रान्ति
(c) नीली क्रान्ति
(d) ये सभी
उत्तर:
(c) नीली क्रान्ति

प्रश्न 17.
कृषि उत्पादन में अपार वृद्धि कहलाती है –
(a) श्वेत क्रान्ति
(b) हरित क्रान्ति
(c) नीली क्रान्ति
(d) ये सभी
उत्तर:
(b) हरित क्रान्ति

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. अरहर ……… का एक अच्छा स्रोत है।
2. बरसीम ……की एक मुख्य फसल है।
3. वर्षा ऋतु में होने वाली फसल को ………….. फसल कहते हैं।
4. ……. विटामिनों से भरपूर होती है।
5. ………… फसल शीत ऋतु में होती है।
6. खेती जो उर्वरक, शाकनाशी तथा पीड़कनाशी जैसे रसायनों की अनुपस्थित में होती है उसे …….. कहते हैं।
7. गेहूँ और मूंगफली का एक ही खेत में साथ-साथ उगाने को ………. कहते हैं।
8. सोयाबीन और मक्का को एकान्तर पंक्ति में एक ही खेत में उगाने को ………… कहते हैं।
9. एक भूमि के टुकड़े में विभिन्न फसलों को पूर्व नियोजित तरीके को क्रमवार उगाने को …………. कहते हैं।
10. गोखरू (जैन्थियम) तथा गाजर घास (पारथेनियम) आमतौर पर ………….. कहे जाते हैं।
11. किसी बीमारी का कारक जीव ……….. कहलाता है।
12. दीप्तिकाल पादपों में ……….. को प्रभावित करता है।
13. खरीफ की फसल की खेती ………… से ………….. तक की जाती है।
14. रबी की खेती …………. से ……….. की जाती है।
15. धान, मक्का, मूंग तथा उड़द ……. फसलें हैं।
16. गेहूँ, चना, मटर, सरसों ……… फसलें हैं।
17. पादपों की वृद्धि के लिए कुल ………….. पोषक तत्व आवश्यक होते हैं।
18. …………. तथा …………. पादपों को वायु से प्राप्त होते हैं।
19. पादपों को ……….. की आपूर्ति जल द्वारा होती है।
20. पादपों को ….. पोषकों की आपूर्ति मृदा से होती है।
21. कुल ……….. पोषकों की बड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है और इन्हें ………. कहते हैं।
22. कुल ……….. पोषकों की अल्पमात्रा में आवश्यकता होती है और इन्हें ………… कहते हैं।
उत्तर:

  1. प्रोटीन
  2. चारे
  3. खरीफ
  4. वनस्पति
  5. रबी
  6. जैविक कृषि
  7. मिश्रित फसल
  8. अन्तरफसलीकरण
  9. फसल चक्र
  10. खरपतवार
  11. रोगजनक
  12. पुष्पन
  13. जून, अक्टूबर
  14. नवम्बर, अप्रैल
  15. खरीफ
  16. रबी
  17. सोलह
  18. कार्बन, ऑक्सीजन
  19. हाइड्रोजन
  20. तेरह
  21. छ:, बृहद पोषक
  22. सात, सूक्ष्म पोषक।

सही जोड़ी बनाना
I.
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार 1
उत्तर:

  1. → (ii)
  2. → (iii)
  3. → (i)
  4. → (iv)।

II.
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार 2
उत्तर:

  1. → (iii)
  2. → (v)
  3. → (iv)
  4. → (i)
  5. → (ii)।

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सत्य/असत्य कथन

1. श्वेत क्रान्ति का अर्थ दुग्ध उत्पादन को बढ़ाना है।
2. नीली क्रान्ति का अर्थ मत्स्य उत्पादन को बढ़ाना है।
3. पर्यावरणीय गुणवत्ता के साथ समझौता किए बिना खाद्य उत्पादन में वृद्धि संधारणीय कृषि कहलाती है।
4. संकरण का अर्थ है आनुवंशिक रूप से दो असमान पादपों के बीच क्रासिंग कराना।
5. दो किस्मों के बीच किया जाने वाला संकरण, अन्तरास्पीशीजी संकरण कहलाता है।
6. किसी पादप में वांछित गुणों वाले जीन डालने से आनुवंशिकीय रूपान्तरित फसल प्राप्त होती है।
7. दो स्पीशीजों के पौधों के बीच किया जाने वाला संकरण अन्तरावैरायटी संकरण कहलाता है।
8. खाद में जैव पदार्थों की मात्रा अधिक होती है और पोषक पदार्थों की मात्रा कम होती है।
9. खाद रेतीली मृदा में जलधारण क्षमता को बढ़ाती है।
10. खाद चिकनी मृदा से अतिरिक्त जल को बाहर निकालने में सहायता करती है।
11. ,खाद का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण को प्रदूषित करता है, क्योंकि यह जन्तु के उत्सर्जित अपशिष्ट से बनी होती है।
उत्तर:

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. सत्य
  5. सत्य
  6. सत्य
  7. असत्य
  8. सत्य
  9. सत्य
  10. असत्य
  11. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
कृषि उत्पादन में अपार वृद्धि क्या कहलाती है?
उत्तर:
हरित क्रान्ति।

प्रश्न 2.
दुग्ध उत्पादन में अपार वृद्धि क्या कहलाती है?
उत्तर:
श्वेत क्रान्ति।

प्रश्न 3.
मत्स्य उत्पादन में अपार वृद्धि क्या कहलाती है?
उत्तर:
नीली क्रान्ति।

प्रश्न 4.
श्वेत क्रान्ति के जनक का नाम लिखिए।
उत्तर:
डॉ. वर्गीस कुरियन।

प्रश्न 5.
भारतीय मधुमक्खी का जन्तु वैज्ञानिक नाम लिखिए।
उत्तर:
ऐपिस सेरना इण्डिका।

प्रश्न 6.
जिन पोषकों की अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है। उनको क्या कहते हैं?
उत्तर:
वृहद् पोषण।

प्रश्न 7.
जिन पोषकों की अल्प मात्रा में आवश्यकता होती है उन्हें क्या कहते हैं?
उत्तर:
सूक्ष्म पोषक।

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प्रश्न 8.
व्यावसायिक रूप से तैयार पादप पोषक क्या कहलाते हैं?
उत्तर:
उर्वरक।

प्रश्न 9.
जन्तुओं के अपशिष्ट एवं पौधों के कचरे से बने पादप पोषक क्या कहलाते हैं।
उत्तर:
खाद।

प्रश्न 10.
इटली की मधुमक्खी का नाम क्या है?
उत्तर:
ऐपिस मेलीफेरा।

प्रश्न 11.
कुक्कुट पालन में किसकी उन्नत नस्लें विकसित की जाती हैं? (2018)
उत्तर:
कुक्कुट (मुर्गी)।

MP Board Class 9th Science Chapter 15 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मिश्रित खेती से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मिश्रित खेती:
“जब किसी फार्म पर फसलों के उत्पादन के साथ-साथ कोई अन्य कृषि आधारित व्यवसाय भी अपनाया जाता है, तब कृषि की यह प्रणाली मिश्रित खेती (कृषि) कहलाती है।”

प्रश्न 2.
फसल चक्र को लाभ सहित समझाइए।
उत्तर:
फसल चक्र:
“किसी निश्चित समय में फसलों की पूर्व योजनानुसार क्रम में अदल-बदल कर बोना, जिससे कि भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट न हो, फसल चक्र कहलाता है। फसल चक्र का प्रमुख लाभ भूमि की उर्वरा शक्ति बनाये रखकर फसलों का उत्पादन करना है।

प्रश्न 3.
खाद किसे कहते हैं?
उत्तर:
खाद:
“जन्तुओं के अपशिष्ट एवं पादप कचरे से निर्मित तथा प्रचुर मात्रा में कार्बनिक पदार्थों से युक्त पादप पोषक खाद कहलाते हैं।”

प्रश्न 4.
उर्वरक किसे कहते हैं?
उत्तर:
उर्वरक:
“व्यावसायिक रूप से निर्मित तथा नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटैशियम प्रदान करने वाले पादप पोषक उर्वरक कहलाते हैं।

प्रश्न 5.
अन्तराफसलीकरण से क्या समझते हो?
उत्तर:
अन्तराफसलीकरण:
“वह फसल पैटर्न जिसमें दो या दो से अधिक फसलों को एक साथ एक ही खेत में निर्दिष्ट पैटर्न पर उगाते हैं, अन्तराफसलीकरण कहलाता है।

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प्रश्न 6.
खरपतवार किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
खरपतवार:
“कृषि योग्य भूमि में उगने वाले अनावश्यक पौधे जो कृषि को हानि पहुँचाते हैं, खरपतवार कहलाते हैं।”

प्रश्न 7.
पशुपालन किसे कहते हैं?
उत्तर:
पशुपालन:
“पशुधन के प्रबन्धन को पशुपालन कहते हैं। इसके अन्तर्गत अनेक कार्य एवं व्यवस्थाएँ आती हैं। जैसे- भोजन व्यवस्था, आवास व्यवस्था, रोगों पर नियंत्रण एवं प्रजनन कराना।

प्रश्न 8.
आनुवंशिक रूप से रूपान्तरित फसलें क्या होती हैं? भारत में उगायी जाने वाली एक ऐसी फसल का नाम बताइए।
उत्तर:
आनुवंशिक रूपान्तरित फसलें:
“वे फसलें जिनमें वांछित लक्षण प्राप्त करने के लिए किसी दूसरे स्रोत से प्राप्त जीन को प्रवेश कराकर विकसित किया गया हो, आनुवंशिक रूपान्तरित (G.M.) फसल कहलाती है।”
उदाहरण:
बीटी कपास जी. एम. फसल का उदाहरण है।

प्रश्न 9.
उर्वरक का अधिक उपयोग पर्यावरण के लिए क्यों हानिकारक है?
उत्तर:
उर्वरक का अत्यधिक उपयोग पर्यावरणीय प्रदूषण पैदा करता है क्योंकि इसकी अप्रयुक्त मात्रा वायु, जल एवं मृदा प्रदूषण पैदा करती हैं तथा भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है।

प्रश्न 10.
संकरण तथा दीप्तिकाल की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
संकरण:
“आनुवंशिक रूप से भिन्न जीवों में क्रॉस कराना संकरण कहलाता है।”

दीप्तिकाल:
“सूर्य के प्रकाश की अवधि जो पौधे को मिलती है, दीप्तिकाल कहलाती है।”

प्रश्न 11.
“कृषि पद्धतियाँ तथा फसल की पैदावार का सम्बन्ध पर्यावरणीय परिस्थितियों से होता है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
विभिन्न फसलों तथा कृषि प्रणालियों की विभिन्न जलवायु अवस्थाएँ, तापमान, दीप्तिकाल की आवश्यकताएँ, उनकी वृद्धि तथा जीवन चक्र के पूर्ण होने के लिए होती हैं। कुछ फसलों को वर्षा ऋतु (खरीफ फसल) तथा कुछ को शीत ऋतु (रबी फसल) में बोया जाता है।

प्रश्न 12.
यदि किसी गाँव में पूरे साल कम वर्षा हुई है, तो आप किसानों को अच्छी फसल लेने के लिए क्या उपाय सुझाएँगे?
उत्तर:
कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किसानों को दिए जाने वाले सुझाव –

  1. जलाभाव सहिष्णु तथा जल्दी पकने वाली किस्मों की खेती करें।
  2. मृदा को अधिक ह्यूमस से समृद्ध करें क्योंकि यह जलधारण क्षमता बढ़ाती है और मृदा लम्बे समय के लिए जलधारण करती है।

प्रश्न 13.
हरी खाद तैयार करने के लिए इन कथनों को सही क्रम में लिखिए –
(a) हरे पौधे मृदा में अपघटित हो जाते हैं।
(b) खाद बनाने के लिए हरे पौधे उगाये जाते हैं या फसली पौधों के भागों का इस्तेमाल किया जाता है।
(c) पौधे खेत में जोत दिये जाते हैं, जो मृदा में मिल जाते हैं।
(d) अपघटन के बाद हरी खाद बन जाती है।
उत्तर:
(b)→ (c)→ (a)→ (d).

प्रश्न 14.
“कृषि पद्धतियों में अधिक लागत से अधिक पैदावार होती है।” व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
कृषि प्रणालियों में अच्छी लागत से अधिक पैदावार होती है क्योंकि अच्छी आर्थिक स्थिति वाले किसान अधिक धन लगाकर विभिन्न विकसित कृषि पद्धतियाँ, कृषि तकनीकों एवं कृषि उपकरणों तथा साधनों का उपयोग करके अधिक पैदावार कर सकते हैं।

प्रश्न 15.
फसल सुधार में संकरण की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
संकरण अन्तरकिस्मीय, अन्तरस्पीशीज अथवा अन्तरवंशीय हो सकता है। अच्छे लक्षणों वाली वांछित दो फसलों को चयनित करके उन जनक फसलों को संकरण करके नई फसल प्राप्त की जाती है। संकरण की इस विधि से हम अधिक उपज वाली, रोग प्रतिरोधी तथा पीड़करोधी फसल तैयार कर सकते हैं।

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प्रश्न 16.
मधुमक्खी पालन हमें अच्छे चरागाह में क्यों करना चाहिए?
उत्तर:
अच्छे चरागाहों में मधुमक्खियों को अधिक मात्रा में पुष्प रस एवं अच्छी गुणवत्ता वाला मकरन्द प्राप्त होता है। इसके फलस्वरूप मधुमक्खियाँ अधिक मात्रा में तथा अच्छी गुणवत्ता का शहद बनाती हैं। इसलिए मधुमक्खी पालन हमको अच्छे चरागाह में करना चाहिए।

प्रश्न 17.
वे विधियाँ बताइए जिनसे कीट फसल की पैदावार को प्रभावित करता है।
उत्तर:
कीट पौधों के भागों विशेषकर पत्तियों को काटकर, कोशिकाओं का वेधन करके तथा कोशिकाओं का रस चूसकर फसल की पैदावार को कम करके प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 18.
पशुओं के भोजन के दो प्रकारों के नाम तथा उनके कार्य लिखिए।
उत्तर:

  1. रूक्षांश-ये प्रायः रेशे प्रदान करते हैं।
  2. सान्द्र-ये प्रोटीन तथा प्रचुर मात्रा में पोषक उपलब्ध कराते हैं।

प्रश्न 19.
यदि कुक्कुट (मुर्गियाँ) आकार में बड़ी होती तथा उनमें ग्रीष्म अनुकूलन की क्षमता नहीं होती तो क्या होता? कुक्कुटों को छोटे आकार का और उन्हें ग्रीष्म अनुकूलित बनाने के लिए क्या उपाय किया जाता है?
उत्तर:
कुक्कुट पक्षियों का बड़ा आकार (शरीर की सतही क्षेत्रफल की अधिकता) और ग्रीष्म-अनुकूलित न होने के कारण अण्डा उत्पादन में कमी आ जाती है। कुक्कुटों का छोटा आकार एवं ग्रीष्म अनुकूल प्राप्त करने के लिए कुक्कुटों में संकरण कराया जाता है।

MP Board Class 9th Science Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उन्नत फसलों में पाए जाने वाले कुछ लाभदायक लक्षणों की सूची बनाइए।
उत्तर:
उन्नत फसलों में सुधार के बाद फसल के लाभदायक लक्षण हैं –

  1. अधिक पैदावार
  2. उत्तम पोषण गुणवत्ता
  3. जैविक तथा अजैविक तनाव से प्रतिरोधकता
  4. परिपक्वन में परिवर्तन
  5. व्यापक अनुकूलता
  6. इच्छित शस्य-विज्ञान लक्षण।

प्रश्न 2.
फसल उत्पादन में जैव पदार्थ क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
जैव पदार्थ फसलों के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि –

  1. यह मृदा की संरचना सुधारने में सहायता करता है।
  2. यह बलुई मृदा में जल भराव की क्षमता को बढ़ाने में सहायक होता है।
  3. मृत्तिका मृदा में अधिक जैव पदार्थ जल निकासी में सहायता करते हैं।
  4. ये जल प्लावन को रोकने में सहायता करते हैं।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित के समूह बनाइए तथा उन्हें ऊर्जा देने वाले, प्रोटीन देने वाले, तेल देने वाली तथा चारा देने वाली फसलों में वर्गीकृत कीजिए –
गेहूँ, चावल, बरसीम, मक्का, चना, जई, अरहर, सूडान घास, मंसूर, सोयाबीन, मूंगफली, अरंडी तथा सरसों।
उत्तर:

  1. ऊर्जा देने वाले-गेहूँ, चावल, मक्का।
  2. प्रोटीन देने वाले-चना, अरहर, मंसूर, सोयाबीन।
  3. तेल देने वाले-मूंगफली, अरंडी, सरसों, सोयाबीन।
  4. चारा देने वाले-बरसीम, जई, सूडान घास।

प्रश्न 4.
कम्पोस्ट तथा वर्मी कम्पोस्ट में अन्तर बताइए।
उत्तर:
कम्पोस्ट:
“कम्पोस्ट का बनना एक ऐसी क्रिया है जिसमें फसलों के अपशिष्ट, जन्तुओं के अपशिष्ट; जैसे-मल-मूत्र, पशुओं के मल-मूत्र, वनस्पतियों के अपशिष्ट, घरेलू अपशिष्ट, भूसा, उखाड़े हुए खरपतवार आदि का अपघटन करके खाद की तरह प्रयुक्त किया जाता है। – वर्मी कम्पोस्ट-ऐसा कम्पोस्ट जो केंचुओं का प्रयोग करके जैव पदार्थों से तैयार किया जाता है। इससे अपघटन की क्रिया तीव्र हो जाती है तथा अच्छी गुणवत्ता की खाद प्राप्त होती है।

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प्रश्न 5.
इटली की एक मधुमक्खी की किस्म ऐपिस मेलीफेरा को शहद उत्पादन के लिए भारत लाया गया है। इस मधुमक्खी के उन गुणों का उल्लेख कीजिए जिनमें यह अन्य किस्मों से बेहतर मानी जाती है।
उत्तर:
इटली की मधुमक्खी ऐपिस मेलीफेरा के विशिष्ट गुण निम्न हैं –

  1. इनका दंश कम होता है।
  2. इनकी मधु संग्रहण क्षमता अधिक होती है।
  3. यह अपने छत्ते में ठीक प्रकार से लम्बे समय तक रहती है।
  4. इसकी प्रजनन क्षमता अच्छी है।

प्रश्न 6.
खरपतवार नियन्त्रण के लिए विभिन्न विधियों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
खरपतवार के नियन्त्रण के विभिन्न उपाय निम्न हैं –

  1. यान्त्रिक विधि से निकालना।
  2. बीच की क्यारी अच्छी तरह बनाना ताकि खरपतवार की वृद्धि न हो।
  3. समय से फसल बोना ताकि खरपतवार की वृद्धि न हो।
  4. अन्तरफसलीकरण तथा फसल चक्र द्वारा खरपतवार का नियन्त्रण करना।

प्रश्न 7.
मत्स्य संवर्धन के दो गुण तथा दो दोष बताइए। (2019)
उत्तर:
मत्स्य संवर्धन के गुण:

  1. कम क्षेत्र से अधिक मात्रा में वांछित मछलियों को प्राप्त किया जा सकता है।
  2. मछलियों में सुधार किया जा सकता है।

मत्स्य संवर्धन के दोष:

  1. जैव-विविधता का संकट उत्पन्न हो सकता है।
  2. केवल आर्थिक महत्व की तथा बहुमूल्य मछलियों का ही संवर्धन किया जायेगा।

प्रश्न 8.
मिश्रित मछली संवर्धन से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
मिश्रित मछली (मत्स्य) संवर्धन:
“पाँच या छः स्पीशीजों जिनमें विदेशी एवं स्वदेशी दोनों प्रकार की मछलियाँ सम्मिलित होती हैं, को एक ही तालाब में संवर्धन करने की विधि मिश्रित मछली (मत्स्य) संवर्धन कहलाती है।” इन स्पीशीज का चयन इनकी अशन प्रवृत्तियों के आधार पर किया जाता है ताकि भोजन के लिए इनमें स्वयं प्रतिस्पर्धा न हो। परिणामस्वरूप तालाब के प्रत्येक भाग में भोजन उपलब्ध रहता है। उदाहरण के लिए, कतला सतहभोजी है, रोहू मध्यक्षेत्र भोजी है तथा मृगाल और सामान्य कार्प अधःस्तल-भोजी होती है।

प्रश्न 9.
पीड़कनाशी का उपयोग बहुत सही सान्द्रण तथा बहुत सही विधि से क्यों किया जाता है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पीड़कनाशी का उपयोग उपयुक्त सान्द्रण में तथा उचित विधि से करना होता है क्योंकि यदि इसका अधिक मात्रा में उपयोग हो गया तो –

  1. मृदा को नुकसान पहुँचता है तथा मृदा की उर्वरकता कम हो जाती है।
  2. जैव पदार्थों की पुनः पूर्ति रुक जाती है।
  3. मृदा के सूक्ष्म कण नष्ट हो जाते हैं।
  4. वायु, जल तथा मृदा प्रदूषण उत्पन्न होता है।

प्रश्न 10.
कुक्कुट (मुर्गियों) की बीमारियों से रोकथाम के लिए कुछ उपाय सुझाइए।
उत्तर:
कुक्कुट (मुर्गियों) की बीमारियों से रोकथाम के उपाय –

  1. कुक्कुट फार्म को साफ (स्वच्छ) तथा संक्रमण रहित रखना चाहिए।
  2. रोगाणुनाशी का समय-समय पर छिड़काव करना चाहिए।
  3. कुक्कुटों का उपयुक्त टीकाकरण कराते रहना चाहिए।
  4. कुक्कुटों को पौष्टिक सन्तुलित आहार देना चाहिए।
  5. पशु चिकित्सकों से समय-समय पर जाँच कराते रहना चाहिए।

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प्रश्न 11.
मछली पालन की महत्ता एवं उपयोगिता लिखिए।
उत्तर:
मछली पालन की उपयोगिता एवं महत्ता:

  1. यह उद्योग कम समय एवं लागत वाला लाभकारी उद्योग है।
  2. मछली प्रोटीन, विटामिन एवं खनिज पदार्थों का एक अच्छा स्रोत है, अतः मछली पालन से कुपोषण की समस्या से छुटकारा मिलता है।
  3. यह व्यापार बेरोजगारी समाप्त करके आर्थिक स्थायित्व प्रदान कर सकता है।
  4. यह व्यवसाय खेती के साथ-साथ अतिरिक्त अधिक आय प्रदान कर सकता है।

प्रश्न 12.
मधुमक्खी पालन की महत्ता एवं उपयोगिता लिखिए। (2019)
उत्तर:
मधुमक्खी पालन की महत्ता एवं उपयोगिता:

  1. पौष्टिक, स्वास्थ्यवर्धक एवं औषधीय गुणों वाला शहद प्राप्त होता है।
  2. इससे मोम प्राप्त होता है जिसका उपयोग औषधियाँ, मलहम, क्रीम, पॉलिश, वेसलीन एवं मोमबत्ती बनाने में होता है।
  3. मधुमक्खियाँ परागण क्रिया में भाग लेकर फसल की पैदावार बढ़ाती हैं।
  4. इस उद्योग का संचालन निर्धन एवं अल्पशिक्षित ग्रामीण भी कर सकते हैं।

प्रश्न 13.
सिंचाई के चार स्त्रोतों का वर्णन कीजिए। (2018)
उत्तर:
सिंचाई के जल स्त्रोत एवं विधियाँ:

1. नहर:
नदी या बाँधों से पानी सिंचाई के लिए नहरों द्वारा दूर-दराज तक पहुँचाया जाता है। इससे खेतों को पानी मिलता है।

2. नलकूप:
-बोरिंग करके जमीन में पाइप डाल दिए जाते हैं फिर उसमें सबमर्सीबल पम्प फिट कर दी जाती है जिससे जमीन के अन्दर से सिंचाई के लिए पानी प्राप्त किया जाता है।

3. चरस:
यह एक चमड़े का बहुत बड़ा थैला होता है जिसमें मोटा रस्सा बाँधकर कुए से बैलों के द्वारा पानी खींचा जाता है।

4. रहट:
यह युक्ति कुए में स्थापित कर दी जाती है इसमें छोटी-छोटी अनेकों बाल्टियाँ चेन द्वारा लगी होती हैं जो एक पहिए पर घूमती हुई नीचे कुए के जल तक जाती है तथा वहाँ से जल लाकर देती हैं।

प्रश्न 14.
हरी खाद क्या है? इसके लाभ लिखिए। (2019)
उत्तर:
हरी खाद:
“जो खाद खेतों में हरे पौधों के अपघटन से तैयार की जाती है, हरी खाद कहलाती है।” इसको तैयार करने के लिए खेतों में ढेंचा, पटसन, मूंग अथवा ग्वार आदि बोया जाता है, जिसे बड़ा होने पर खेत में ही जोत दिया जाता है और अपघटन के बाद उसे हरी ग्वाद बनने के लिए छोड़ दिया जाता है।

हरी खाद के लाभ:

  1. यह खाद हरे पौधों; जैसे-ढेंचा, पटसन, मूंग एवं ग्वार के अपघटन से बनाई जाती है। अतः हानिकारक रसायनों से मुक्त होती है।
  2. यह खाद मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है।

MP Board Class 9th Science Chapter 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए –
1. वर्मी कम्पोस्ट (2018, 19)
2. हरी खाद (2018, 19)
3. जैव उर्वरक (2019)।
उत्तर:
1. वर्मी कम्पोस्ट:
“कम्पोस्ट खाद की एक किस्म जिसमें जैव पदार्थ और पोषक पदार्थों की पर्याप्त मात्रा विद्यमान रहती है, जिसे बनाने में जन्तुओं के उत्सर्जी पदार्थ एवं पादपों के अवशेषों का शीघ्र अपघटन करने के लिए केंचुओं का उपयोग किया जाता है, वर्मी कम्पोस्ट कहा जाता है।”

2. हरी खाद:
“जो खाद खेतों में हरे पौधों के अपघटन से तैयार की जाती है, हरी खाद कहलाती है।” इसको तैयार करने के लिए खेतों में ढेंचा, पटसन, मूंग अथवा ग्वार आदि बोया जाता है, जिसे बड़ा होने पर खेत में ही जोत दिया जाता है और अपघटन के बाद उसे हरी ग्वाद बनने के लिए छोड़ दिया जाता है।

3. जैव उर्वरक:
“जीव जो पादपों को पोषक देते हैं तथा जिनका उपयोग पौधों के द्वारा उर्वरक के रूप में किया जाता है, वे जैव उर्वरक कहलाते हैं।” उदाहरण के लिए, नीली-हरी शैवाल जो चावल के खेतों में मृदा के अन्दर नाइट्रोजन स्थिरीकरण द्वारा नाइट्रेट्स बनाते हैं वे जैव उर्वरक होते हैं।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट कीजिए –
1. मछली पकड़ना तथा मछली संवर्धन
2. मिश्रित फसल तथा अन्तरफसलीकरण
3. मधुमक्खी पालन तथा कुक्कुट पालन।
उत्तर:
1. मछली पकड़ना, प्राकृतिक संसाधनों से मछली निकालने की विधि होती है जबकि मछली संवर्धन, मत्स्य उत्पादन द्वारा मछली प्राप्त करना है।

2. मिश्रित खेती में दो या दो से अधिक फसलों को एक साथ ही एक ही खेत में उगाते हैं, जबकि अन्तरफसलीकरण में दो या अधिक फसलों को एक साथ एक ही खेत में निश्चित पैटर्न में उगाते हैं। जैसे अलग-अलग पंक्तियों में।

3. मधुमक्खी पालन, मधु (शहद) का उत्पादन करने के लिए मधुमक्खियों को पालने की प्रक्रिया है जबकि कुक्कुट पालन अण्डे और माँस का उत्पादन करने के लिए घरेलू कुक्कुट (मुर्गियाँ) को पालने की प्रक्रिया होती है।

प्रश्न 3.
संलग्न चित्र में खेती की दो फसलों को (प्लाट ‘A’ तथा प्लाट ‘B’) क्रमशः खाद तथा रासायनिक उर्वरक से दर्शाया गया है, दूसरे पर्यावरणीय कारकों को यथावत्र रखते हुए ग्राफ का अवलोकन कीजिए तथा निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 15 खाद्य संसाधनों में सुधार 3
1. ग्राफ ‘B’ पैदावार में अचानक वृद्धि तथा शनैः-शनैः कमी क्यों दिखाता है?
2. ग्राफ ‘A’ की सबसे ऊँची चोटी कुछ विलम्बित है, क्यों?
3. दोनों ग्राफों के पैटर्न अलग होने के क्या कारण हैं?
उत्तर:
1. रासायनिक उर्वरक को डालने से अधिक मात्रा में N, P, K पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं जिससे उत्पादन में अचानक वृद्धि हो जाती है। लगातार अधिक मात्रा में प्रयोग किए गए रासायनिक उर्वरक उन सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देते हैं जो मृदा में जैव पदार्थों की पुनः पूर्ति करते हैं। इससे मृदा की उर्वरक शक्ति में कमी आने लगती है। इस कारण ग्राफ ‘B’ पहले पैदावार में अचानक वृद्धि तथा शनैः-शनैः पैदावार में कमी दिखाता है।

2. खाद, मृदा में पोषकों की आपूर्ति धीरे-धीरे अल्प मात्रा में करती है क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में जैव पदार्थ होते हैं। यह मृदा को पोषकों से समृद्ध करती है और उसकी उर्वरकता बढ़ाती है। इसके कारण मृदा की उर्वरकता कम नहीं होती और फसल उत्पादन भी कम नहीं होता है। इसलिए ग्राफ ‘A’ की सबसे ऊँची चोटी कुछ विलम्बित होती है।

3. दो ग्राफों का अन्तर दर्शाता है कि खाद का उपयोग लम्बी अवधि के लिए लाभदायक है क्योंकि जब खाद की मात्रा बढ़ाई जाती है तो यह उच्च उत्पादन को बढ़ाए रखती है।

उर्वरकों का उपयोग यदि लम्बे समय के लिए किया जाये तो मृदा की उर्वरकता शनैः-शनैः कम होती जाती है और इसलिए फसल का उत्पादन भी कम होता जाता है। इस कारण दोनों ग्राफों के पैटर्न अलग-अलग हैं।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए – (2019)
1. मधुमक्खी पालन
2. मुर्गीपालन
3. फसल पैटर्न
4. अनाज का भंडारण।
उत्तर:
1. मधुमक्खी पालन:
मधु (शहद) और मोम के उत्पादन करने के लिए मधुमक्खियों को पालने की प्रक्रिया मधुमक्खी पालन कहलाती है। शहद का सर्वत्र उपयोग होता है अतः इसके लिए मधुमक्खी पालन का उद्यम एक कृषि उद्योग बन गया है। शहद एवं मोम का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। …

2. मुर्गीपालन:
अण्डे और माँस का उत्पादन करने के लिए मुर्गियों को पालने की प्रक्रिया मुर्गीपालन कहलाती है। मुर्गीपालन में उन्नत मुर्गी की नस्लें विकसित की जाती हैं। अंडों के लिए अंडे देने वाली (लेअर) तथा माँस के लिए ब्रौलर मुर्गीपालन किया जाता है।

3. फसल पैटर्न:
“किसी निश्चित समय में फसलों की पूर्व योजनानुसार क्रम में अदल-बदल कर बोना, जिससे कि भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट न हो, फसल चक्र कहलाता है। फसल चक्र का प्रमुख लाभ भूमि की उर्वरा शक्ति बनाये रखकर फसलों का उत्पादन करना है।

4. अनाज का भंडारण:
अनाज (कृषि उत्पाद) का जैविक एवं अजैविक कारकों से सुरक्षित भण्डार की प्रक्रिया अनाज का भण्डारण कहलाती है। जैविक कारक कीट, कृन्तक, कवक, चिचड़ी तथा जीवाणु हैं तथा अजैविक कारक भण्डारण के स्थान पर उपयुक्त नमी व ताप का अभाव है। ये कारक अनाज की गुणवत्ता को खराब कर देते हैं, वजन कम कर देते हैं तथा अंकुरण करने की क्षमता कम कर देते हैं।

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 21 समुद्र की गतियाँ

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 21 समुद्र की गतियाँ

MP Board Class 7th Social Science Chapter 21 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) लहरें उत्पन्न होने का सबसे प्रमुख कारक है
(अ) पृथ्वी की घूर्णन गति
(ब) ज्वार-भाटा
(स) पवन
(द) जल में ताप की भिन्नता।
उत्तर:
(स) पवन

(2) लघु ज्वार आता है –
(अ) अष्टमी को
(ब) पूर्णिमा को
(स) अमावस्या को
(द) चतुर्थी को।
उत्तर:
(2) (अ) अष्टमी को।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) गर्म और ठण्डी जल धारा के मिलने से समुद्री तट पर …………….. होता है।
(2) ………….. लहरें सबसे अधिक विनाशकारी होती हैं।
(3) उत्तरी गोलार्द्ध में धाराएँ अपनी ……………. ओर मुड़ जाती हैं।
उत्तर:
(1) कोहरा
(2) सुनामी
(3) दायीं।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 21 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) समुद्री जल में कौन-कौन सी गतियाँ होती हैं ?
उत्तर:
समुद्री जल में तीन प्रकार की गतियाँ होती हैं –

  • लहरें
  • धाराएँ, तथा
  • ज्वार-भाटा।

(2) लहर किसे कहते हैं ?
उत्तर:
वायु के प्रभाव से समुद्री सतह के जल का ऊपर-नीचे होना लहरें कहलाता है।

(3) जलधारा किसे कहते हैं ?
उत्तर:
समुद्रों में नियमित रूप से एक निश्चित दिशा की ओर, क्षैतिज रूप से प्रवाहित होने वाली विशाल जलराशि को जलधारा कहते हैं।

(4) ज्वार – भाटा किसे कहते हैं ?
उत्तर:
चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति के कारण समुद्र के जल का ऊपर उठकर किनारों की ओर बढ़ना ‘ज्वार’ तथा किनारों के पीछे हटना ‘भाटा’ कहलाता है।

(5) ज्वार – भाटे से कोई तीन लाभ बताइए।
उत्तर:
ज्वार-भाटे से लाभ –

  • ज्वारीय शक्ति से जल विद्युत उत्पन्न की जा सकती है।
  • अनेक प्रकार की सीमें, शंख, मोती आदि वस्तुएँ किनारों पर आ जाती हैं।
  • नदियों के मुहानों की गन्दगी साफ हो जाती है तथा नौकायन में सहायता मिलती है।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 21 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) लहर और धारा में क्या अन्तर है ? समझाइए।
उत्तर:
लहर और धारा में अन्तर

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 21 समुद्र की गतियाँ-1

(2) दीर्घ ज्वार और लघु ज्वार का नामांकित रेखाचित्र बनाते हुए समझाइए।
उत्तर:
दीर्घ ज्वार-जिस दिन सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा एक सरल रेखा में होते हैं, उस दिन सूर्य और चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति के प्रभाव से पृथ्वी पर अन्य दिनों की अपेक्षा ऊँचा ज्वार आता है। इसे दीर्घ ज्वार कहते हैं। दीर्घ ज्वार अमावस्या तथा पूर्णिमा के दिन आता है।

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 21 समुद्र की गतियाँ-2
लघु ज्वार – शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की सप्तमी या अष्टमी के दिन सूर्य और चन्द्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति समकोण बनाती हुई होती है। इस कारण जल में खिंचाव एक-दूसरे के विपरीत होता है। जिससे ज्वार का उभार अपेक्षाकृत कम होता है। इस समकोणीय स्थिति से उत्पन्न ज्वार को लघु ज्वार कहते हैं।

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 21 समुद्र की गतियाँ-3

(3) जलधाराओं के उत्पन्न होने के प्रमुख कारण लिखते हुए मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को लिखिए।
उत्तर:
जल धाराओं के उत्पन्न होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

  1.  स्थायी पवनों का प्रभाव-स्थायी पवनों के प्रभाव से जलधाराएँ उत्पन्न होकर इन हवाओं की दिशा की ओर बहने लगती हैं।
  2. तापमान में भिन्नता का प्रभाव-विषुवत रेखा के आस-पास तापमान अधिक रहने के कारण समुद्री जल गर्मी पाकर फैलता है और जलधाराएँ ध्रुवों की ओर बढ़ने लगती हैं।विषुवत रेखा के समीप खाली स्थान को भरने के लिए ध्रुवों की ओर से ठण्डी जलधाराएँ विषुवत रेखा की ओर बहने लगती हैं। इस प्रकार तापमान की भिन्नता जलधाराओं को उत्पन्न करती हैं।
  3. पृथ्वी की दैनिक परिभ्रमण गति का प्रभाव-पृथ्वी। अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर 24 घण्टे में घूर्णन गति
    द्वारा एक चक्कर पूरा करती है जिससे जलधाराएँ उत्तरी गोलार्द्ध में। अपने दायीं ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती हैं।
  4. स्थल भू-भाग का प्रभाव-बहती हुई धारा के सामने जब कोई विशाल स्थल भाग आ जाता है, तो वह अपनी दिशा । स्थल के अनुरूप बदल लेती हैं।
  5. समुद्र की लवणता का प्रभाव-कुछ धाराएँ जल के घनत्व में अन्तर होने से भी उत्पन्न होती हैं।
    जलधाराओं का मानव जीवन पर प्रभाव – इन धाराओं का जलवायु, आवागमन, वर्षा और मत्स्य उद्योग पर प्रभाव पड़ता है –
    • गर्म जलधाराएँ अपने तटवर्ती स्थानों का तापमान बढ़ा देती हैं तथा ठण्डी धाराएँ निकटवर्ती क्षेत्रों का सामान्य तापमान कम कर देती हैं।
    • समुद्रों में जहाँ गर्म और ठण्डी धाराएँ मिलती हैं, तो वहाँ घना कोहरा उत्पन्न हो जाता है।
    • गर्म जलधारा के कारण ऊँचे अक्षांशों में स्थित बन्दरगाह वर्षभर खुले रहते हैं। गर्म धाराओं के ऊपर बहने वाली हवाएँ गर्म होकर
      आर्द्रता ग्रहण कर लेती हैं और निकटवर्ती क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा कर देती हैं।

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 20 जलमण्डल

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 20 जलमण्डल

MP Board Class 7th Social Science Chapter 20 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) संसार का सबसे बड़ा महासागर है –
(अ) अटलांटिक महासागर
(ब) प्रशान्त महासागर
(स) हिन्द महासागर
(द) आर्कटिक महासागर।
उत्तर:
(ब) प्रशान्त महासागर

(2) हमारी पृथ्वी के कितने भाग पर जल है ?
(अ) 51 प्रतिशत
(ब) 61 प्रतिशत
(स) 71 प्रतिशत
(द) 81 प्रतिशत।
उत्तर:
(2) (स) 71 प्रतिशत।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) पृथ्वी के ……….. गोलार्द्ध में जल भाग अधिक है।
(2) संसार का सबसे बड़ा गर्त …………….।
उत्तर:
(1) दक्षिणी
(2) मैरियाना।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 20 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) संसार के प्रमुख महासागरों के नाम लिखिए।
उत्तर:
संसार के प्रमुख महासागर हैं – प्रशान्त महासागर, अटलाण्टिक महासागर, हिन्द महासागर तथा आर्कटिक महासागर।

(2) महासागरों से कोई तीन लाभ लिखिए।
उत्तर:
महासागरों से निम्नलिखित लाभ हैं –

  • भूमि पर वर्षा – भूमि पर समस्त वर्षा समुद्र से उठी भाप से होती है, जो वनस्पति, जीव-जन्तु एवं मानव जीवन के लिए उपयोगी है।
  • तापमान का सन्तुलन – महासागर धरातल पर तापमान का सन्तुलन बनाने में उपयोगी हैं।
  • आवागमन के साधन – महासागर विभिन्न महाद्वीपों को जोड़ते हैं जो अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में सहायक हैं।

(3) जलमण्डल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
पृथ्वी का जल से घिरा हुआ भाग जलमण्डल र कहलाता है। पृथ्वी का लगभग 71 प्रतिशत भाग जल है।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 20 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) जलचक्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
नदियाँ, नाले, तालाब, झीलें, भूमिगत जल, बर्फीले क्षेत्र, सागर, महासागर आदि जल के प्रमुख स्रोत हैं। गर्मी में इन स्रोतों से पानी का वाष्पीकरण होता रहता है। ये जलवाष्प ठण्डी होकर बादलों के रूप में परिवर्तित हो जाती है। इन बादलों से बूंदों के रूप में वर्षा होती है। वर्षा जल का कुछ भाग भूमि में समा जाता है तथा शेष भाग नदी नालों आदि द्वारा महासागरों में पहुँच जाता है। इस प्रकार जल जलमण्डल से वायुमण्डल, वायुमण्डल से थलमण्डल और थलमण्डल से जलमण्डल में लगातार आता । जाता रहता है। जल के इस आवागमन को ‘जलचक्र’ कहते हैं –

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 20 जलमण्डल-1

(2) महासागरीय तली के विभिन्न रूपों का वर्णन कीजिए व नामांकित रेखाचित्र बनाइए।
उत्तर:
महासागरीय तली को बनावट के आधार पर चार भागों में बाँटा जा सकता है –

  • महाद्वीपीय निमग्न तट-महाद्वीपों के चारों ओर तट के पास की भूमि, जो जल में डूबी होती है, उसे “महाद्वीपीय निमग्न तट” कहते हैं। ये मछलियों के भण्डार माने जाते हैं।
  • महाद्वीपीय निमग्न ढाल-महाद्वीपीय निमग्न तट की समाप्ति के बाद महाद्वीपीय निमग्न ढाल प्रारम्भ हो जाता है। इसकी गहराई निमग्न तट से अधिक है।
  • महासागरीय गहरे मैदान-महाद्वीपीय निमग्न ढाल के बाद गहरे मैदान प्रारम्भ होते हैं। ये मैदान समुद्र की तली का सबसे अधिक भाग घेरे रहते हैं। इनमें समुद्री जीव-जन्तुओं के अवशेष एवं सूक्ष्म वनस्पति के अंश पाए जाते हैं।
  • महासागरीय गर्त-समुद्र की तली में कहीं-कहीं गहरे खड्डे पाए जाते हैं, जिन्हें महासागरीय गर्त कहते हैं।
    MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 20 जलमण्डल-2

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 3 आँकड़ो का प्रबंधन Ex 3.4

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 3 आँकड़ो का प्रबंधन Ex 3.4

प्रश्न 1.
बताइए कि निम्नलिखित में किसका होना निश्चित है, किसका होना असम्भव है तथा कौन हो भी सकता है, परन्तु निश्चित रूप से नहीं-
(i) आज आप कल से अधिक आयु के हैं।
(ii) एक सिक्के को उछालने पर चित आएगा।
(iii) एक पासे को फेंकने पर 8 आएगा।
(iv) एक ट्रैफिक लाइट हरी दिखेगी।
(v) कल बादल घिरे होंगे।
हल:
(i) निश्चित है,
(ii) यह हो सकता है, परन्तु निश्चित रूप से नहीं,
(iii) असम्भव है,
(iv) हो भी सकता है, परन्तु निश्चित रूप से नहीं,
(v) हो भी सकता है, परन्तु निश्चित रूप से नहीं।

प्रश्न 2.
एक डिब्बे में 6 कंचे हैं, जिन पर 1 से 6 संख्याएँ अंकित हैं :
(i) संख्या 2 वाले कंचे को इसमें से निकालने की प्रायिकता क्या है ?
(ii) संख्या 5 वाले कंचे हो इसमें से निकालने की प्रायिकता क्या है ?
हल:
कुल कंचों की संख्या = 6
घटना घटित होने की कुल स्थितियाँ = 6
(i) संख्या 2 वाले कंचे को निकालने की प्रायिकता p(2) = \(\frac { 1 }{ 6 }\)
(ii) संख्या 5 वाले कंचे को निकालने की प्रायिकता P(5) = \(\frac { 1 }{ 6 }\)

प्रश्न 3.
यह निर्णय लेने के लिए कि कौन-सी टीम खेल प्रारम्भ करेगी, एक सिक्का उछाला जाता है। इसकी क्या प्रायिकता है कि आपकी टीम खेल प्रारम्भ करेगी ?
हल:
सिक्के को उछालने पर चित या पट आ सकते हैं।
∴ घटना घटित होने की स्थिति (Chance) = 1
घटना घटित होने की कुल स्थितियाँ = 2
∴ अभीष्ट प्रायिकता = \(\frac { 1 }{ 2 }\)

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 30 यूरोप महाद्वीप : भौगोलिक स्वरूप

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 30 यूरोप महाद्वीप : भौगोलिक स्वरूप

MP Board Class 7th Social Science Chapter 30 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए
MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 30 यूरोप महाद्वीप - भौगोलिक स्वरूप-1
उत्तर:
(1) (b) कैस्पियन सागर
(2) (e) टैगा
(3) (a) एलब्रुस चोटी
(4) (c) रेण्डियर
(5) (d) माउण्ट ब्लैक

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) क्षेत्रफल की दृष्टि से यूरोप ……………. महाद्वीप से बड़ा है।
(2) यूरोप की सबसे बड़ी नदी ……………. है।
(3) यूरोप महाद्वीप का अधिकांश भाग कटिबन्ध में फैला है।
(4) आल्पस पर्वत का सबसे ऊँचा शिखर ……………” है।
(5) यूरोप की पूर्वी सीमा ……………. पर्वत बनाता है।
उत्तर:
(1) आस्ट्रेलिया
(2) वोल्गा
(3) शीतोष्ण
(4) माउण्ट ब्लैक
(5) यूराल।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 30 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) यूरोप महाद्वीप का अक्षांशीय विस्तार लिखिए।
उत्तर:
यूरोप महाद्वीप 35° उत्तरी अक्षांश से 72° उत्तरी अक्षांश के बीच स्थित है।

(2) यूरोप की कौन-सी महत्त्वपूर्ण नदी काला सागर में गिरती है ?
उत्तर:
यूरोप की डेन्यूब नदी काला सागर में गिरती है।

(3) यूरोप की जलवायु पर किन हवाओं का प्रभाव सबसे अधिक है ?
उत्तर:
यूरोप की जलवायु पर पछुआ हवाओं का प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है।

(4) भूमध्यसागरीय वनस्पति की विशेषताएँ क्या हैं ?
उत्तर:
भूमध्यसागरीय वनस्पति की विशेषताएँ –

  • ये गहरी जड़ों वाले छोटे पौधे होते हैं।
  • ये छोटी, मोटी और चमकीली पत्तियों वाले वृक्ष होते हैं।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 30 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4
(1) यूरोप की जलवायु तथा वनस्पति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
यूरोप की जलवायु – यूरोप शीतोष्ण जलवायु वाला महाद्वीप है। इसका अधिकांश भाग शीतोष्ण कटिबन्ध में है। यहाँ की जलवायु पर समुद्र की समीपता, पर्वतों, पठारों, उत्तरी अटलांटिक प्रवाह तथा पछुआ हवाओं का गहरा प्रभाव पड़ता है। साल भर चलने वाली पछुआ हवाओं और समुद्री धाराओं के प्रभाव से पश्चिम में पर्याप्त वर्षा होती है। पश्चिम से पूर्व की ओर जाने वाली वर्षा कम होती जाती है तथा ठण्ड बढ़ती जाती है। इस प्रकार की जलवायु महाद्वीपीय जलवायु कहलाती है।

यहाँ गर्मियों में अधिक गर्मी तथा जाड़ों में अधिक ठण्ड पड़ती है। पर्वतीय भागों में वर्षा 100 से 200 सेमी तक होती है। दक्षिणी यूरोप भूमध्यसागरीय जलवायु वाला क्षेत्र है। यहाँ गर्मी प्रायः सूखी निकल जाती है तथा जाड़ों में वर्षा होती है। यूरोप का उत्तरी भाग आर्कटिक वृत्त में आ जाने से यहाँ ठण्ड अधिक पड़ती है और वर्षा बहुत कम होती है। रूस और नार्वे के उत्तरी भाग में तेज ठण्डी हवाओं के कारण लगभग साल भर बर्फ जमी रहती है। इसे टुण्ड्रा की जलवायु कहते हैं।

वनस्पति – यूरोप के लगभग एक चौथाई भाग में वन हैं।
(i) टुण्ड्रा के वन – महाद्वीप के सबसे उत्तरी भाग में नार्वे देश के उत्तर में टुण्ड्रा प्रदेश है। यहाँ साल भर बर्फ जमे रहने के कारण वनों का अभाव है। गर्मियों में बर्फ पिघलने पर लिचेन, काई तथा मॉस नामक छोटी झाडियाँ उग आती हैं।

(ii) टैगा के वन – टुण्ड्रा के दक्षिण में कोणधारी पेड़ों के वन पाए जाते हैं, जिन्हें टैगा कहते हैं। यहाँ के पेड़ों की आकृति कोण के समान तथा पत्तियाँ नुकीली होती हैं। मुख्य वृक्ष फर,। पाइन, स्यूस, लार्च आदि हैं।

(iii) मिश्रित वन – यूरोप के मध्यवर्ती व पश्चिमी भाग में कोणधारी व चौड़ी पत्ती वाले मिश्रित वन हैं। यह वन टैगा वनों के दक्षिण में पाए जाते हैं जिनमें ओक, ऐस, पोपलर आदि वृक्ष मुख्य हैं।

(iv) स्टेप्स के घास के मैदान – यूरोप के दक्षिणी-पूर्वी भाग में कम वर्षा के क्षेत्र में छोटी घास विशेष रूप से पैदा होती है।

(v) भूमध्यसागरीय वनस्पति – यूरोप के दक्षिण में भूमध्य सागर के पास विशेष प्रकार की भूमध्य सागरीय वनस्पति पाई जाती है। गहरी जड़ों वाले छोटे पौधे इस जलवायु में विशेष रूप से पैदा होते हैं। ये छोटी, मोटी और चमकीली पत्तियों वाले वृक्ष होते हैं।

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(2) यूरोप के प्राकृतिक विभागों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
यूरोप को चार भागों में बाँटा जा सकता है –

(i) उत्तरी – पश्चिमी उच्च भूमि – महाद्वीप के उत्तरीपश्चिमी भाग में पर्वत और पठार हैं। इनका विस्तार नार्वे तथा स्वीडन देशों में अधिक है। अतः इन्हें नार्वे और स्वीडन के पर्वत और पठार भी कहते। इन्हें स्केन्डिनेवियन पर्वत भी कहा जाता है। नार्वे के समुद्री तट बहुत कटे-फटे, सँकरे और अधिक ढालू हैं, जिन्हें फियोर्ड तट कहते हैं।

(ii) मध्य के विशाल मैदान-ये मैदान पश्चिम में अटलांटिक महासागर के तट पर फ्रांस से लेकर पूर्व में यूराल पर्वत तक यूरोपीय रूस में फैले हुए हैं। मैदानों की चौड़ाई रूस में सबसे अधिक है और ये पश्चिम की ओर क्रमश: सँकरे होते गए हैं। उत्तर में श्वेत सागर से लेकर दक्षिणी पर्वतमाला तक इन मैदानों का विस्तार सामाणिकपशाग है। नदियों के कछार बनने के कारण यहाँ की मिट्टी उपजाऊ है। मैदान के पूर्वी भाग में वोल्गा नदी तथा पश्चिम में डेन्यूब नदी है जो क्रमशः कैस्पियन सागर तथा काला सागर में गिरती हैं।

(iii) मध्यवर्ती पठार – यूरोप के मैदानी भाग के दक्षिण में पठारों और कम ऊँचे पर्वतों की श्रृंखला फैली हुई है। इनमें फ्रांस का मैसिफ, ब्लैक फॉरेस्ट और बोहेमियाँ के पठार हैं। पुर्तगाल व स्पेन में भी पठारों का विस्तार है। अधिकांश भाग चट्टानी तथा अनुपजाऊ है।

(iv) दक्षिणी अल्पाइन पर्वतमाला – दक्षिण में ऊँचे नवीन पर्वतों की श्रृंखला भी है। यह श्रृंखला पश्चिम में अटलांटिक महासागर से पूर्व में कैस्पियन सागर तक फैली है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण आल्पस पर्वत की श्रृंखला है, जिसकी सबसे ऊँची चोटी माउण्ट ब्लैक है। अन्य पर्वत श्रेणियों में पेरेनीज, एपीनाइन, डिनारिक, कार्पेशियन और कॉकेशस हैं। कॉकेशस की सबसे ऊँची चोटी एलब्रुस चोटी है।

मानचित्र कार्य:
निम्नांकित को यूरोप के रेखा मानचित्र में दर्शाइए –

  • आल्पस और स्केन्डिनेवियन पर्वत
  • सीन, राइन और वोल्गा नदी
  • टैगा वनों का क्षेत्र
  • आइसलैण्ड, नार्वे
  • वाल्टिक सागर, भूमध्य सागर, काला सागर, श्वेत सागर।
    MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 30 यूरोप महाद्वीप - भौगोलिक स्वरूप

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 31 यूरोप महाद्वीप : आर्थिक स्वरूप

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 31 यूरोप महाद्वीप : आर्थिक स्वरूप

MP Board Class 7th Social Science Chapter 31 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए
MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 31 यूरोप महाद्वीप - आर्थिक स्वरूप-1
उत्तर:
(1) (d) गेहूँ
(2) (a) अंगूर
(3) (b) घड़ियाँ
(4) (e) माल ढुलाई
(5) (c) कम आबादी

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) यूरोप की …………… प्रतिशत से अधिक जनसंख्या कृषि से रोजी-रोटी कमाती है।
(2) ……………. को ‘रोटी की टोकरी’ कहा जाता है।
(3) चुकन्दर से …………. बनाई जाती है।
(4) फ्रांस की राजधानी ………….. है।
(5) यूरोप महाद्वीप के …………… प्रतिशत लोग शिक्षित
उत्तर:
(1) 15
(2) यूक्रेन
(3) शक्कर
(4) पेरिस
(5)90

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 31 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) मिश्रित खेती किसे कहते हैं ?
उत्तर:
खेती का वह प्रणाली जिसमें विभिन्न फसलों के साथ-साथ पशुपालन भी किया जाता है, मिश्रित खेती कहलाती है।

(2) भूमध्यसागरीय जलवायु वाले देशों में कौन-कौन सी खेती अधिक होती है ?
उत्तर:
भूमध्यसागरीय जलवायु वाले देशों में रसीले फलों की खेती अधिक होती है। इसमें जैतून, अंगूर, सेब, अंजीर, मौसमी, संतरा, नींबू आदि की खेती अधिक होती है।

(3) यूरोप के चार कोयला उत्पादक देशों के नाम लिखिए।
उत्तर:
यूरोप के चार कोयला उत्पादक देश जर्मनी, रूस, पोलैण्ड तथा ब्रिटेन हैं।

(4) पवन ऊर्जा का उत्पादन यूरोप के किन-किन देशों में होता है ?
उत्तर:
पवन ऊर्जा का उत्पादन यूरोप के हॉलैण्ड, बेल्जियम और डेनमार्क में होता है।

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 31 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) यूरोप के औद्योगिक विकास का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
यूरोप आधुनिक उद्योगों का जन्मदाता कहा जाता है। यूरोप के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र पश्चिम में ब्रिटेन से लेकर पूर्व में पोलैण्ड तक फैले हैं। __ यूरोप का सबसे महत्त्वपूर्ण उद्योग लोहा-इस्पात उद्योग है। यहाँ कोयला तथा कच्चा लोहा अधिक मिलने से इस उद्योग का विकास अधिक हुआ है। लोहा-इस्पात बनाने के कारखाने, रूस, जर्मनी, इटली, फ्रांस, पोलैण्ड, ब्रिटेन, रोमानियाँ, स्पेन, बेल्जियम और चैक गणराज्य में हैं।

महत्त्वपूर्ण वस्तुएँ बनाने के प्रसिद्ध केन्द्र निम्नलिखित हैं –

  • रेल के इंजन व डिब्बे – फ्रांस, बेल्जियम व जर्मनी।
  • मोटर गाड़ियाँ – इटली, रूस, फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम व ब्रिटेन।
  • जलयान – स्काटलैण्ड व नार्वे।
  • हवाई जहाज – ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी।
  • इन्जीनियरिंग के सामान – ब्रिटेन व जर्मनी।
  • सूती वस्त्र उद्योग – ब्रिटेन व जर्मनी।

इसके अतिरिक्त इन देशों में बिजली का सामान, सीमेण्ट आदि अनेक उपभोक्ता वस्तुओं का निर्माण होता है। स्विट्जरलैण्ड, डेनमार्क, बेल्जियम, हॉलैण्ड, ऑस्ट्रिया, चैक गणराज्य जैसे देशों में घड़ियाँ, बिजली का सामान, दवाइयाँ, रासायनिक पदार्थ, फर्नीचर, श्रृंगार का सामान आदि का निर्माण किया जाता है। कृषि पर आधारित उद्योगों में गेहूँ का आटा बनाना, बिस्कुट, डबलरोटी बनना, चुकन्दर से शक्कर बनाना, दूध से मक्खन, पनीर व पाउडर बनाना, माँस को डिब्बों में बन्द करना प्रमुख महत्त्वपूर्ण।

उद्योग हैं। मुलायम लकड़ी से कागज, लुग्दी तथा कृत्रिम रेशा बनाने के उद्योग भी प्रमुख हैं। इस प्रकार यूरोप के लोगों ने प्राकृतिक संसाधनों का भरपूर उपयोग करते हुए कुशल कारीगरों और नवीनतम् मशीनों की सहायता से अत्यधिक विकास किया है। यही कारण है कि यूरोप। विकसित महाद्वीप है। इसके अधिकांश देश भी विकसित देशों की श्रेणी में आते हैं और अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार भी करते हैं।

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(2) यूरोप के औद्योगिक विकास में खनिज पदार्थ किस प्रकार सहायक हैं ?
उत्तर:
बहुतायत में खनिज उत्पादन के कारण यूरोप औद्योगिक विकास में सबसे आगे रहा है। कोयला, लोहा, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, यूरोप में पाए जाने वाले महत्त्वपूर्ण खनिज हैं, जो औद्योगिक विकास के आधार हैं। विभिन्न खनिजों के उत्पादन में महत्त्वपूर्ण देश निम्नलिखित हैं –

  • कोयला – जर्मनी, रूस, पोलैण्ड, यूक्रेन, ब्रिटेन, चैक गणराज्य।
  • कच्चा लोहा – रूस, स्वीडन, फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन, चैक गणराज्य।
  • पेट्रोलियम – रूस, पोलैण्ड, ग्रेट ब्रिटेन, आयरलैण्ड तथा रोमानिया।

इसके अतिरिक्त यूरोप में मैंगनीज, गंधक, अभ्रक, सीसा, सोना, ताँबा, पोटाश, चूना पत्थर आदि का भी उत्पादन होता है। विशेष रूप से हॉलैण्ड, बेल्जियम और डेनमार्क में पवन ऊर्जा का उत्पादन होता है।

मानचित्र कार्य:
निम्नांकित को यूरोप के रेखा मानचित्र में दर्शाइए –

  • रसीले फलों की खेती का क्षेत्र
  • यूरोप के प्रमुख वायुमार्ग
  • दुग्ध उत्पादन के लिए प्रसिद्ध तीन देश
  • पेरिस, लन्दन, रोम, बर्लिन और मैड्रिड नगर।
    MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 31 यूरोप महाद्वीप - आर्थिक स्वरूप

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MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 19 मौसम और जलवायु

MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 19 मौसम और जलवायु

MP Board Class 7th Social Science Chapter 19 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) मौसम ……………. क्षेत्र को प्रभावित करता है।
(2) लगभग एक-सी वायुमण्डलीय दशा को कहते हैं।
(3) मौसम और जलवायु की दशा में …………. तत्व शामिल हैं।
उत्तर:
(1) छोटे
(2) ऋतु
(3) छः

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MP Board Class 7th Social Science Chapter 19 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 2.
(1) मौसम किसे कहते हैं ? मौसम व ऋतु में क्या अन्तर
उत्तर:
किसी स्थान पर तापमान, वायुदाब, हवाएँ, आर्द्रता, वर्षा आदि की दशाओं में शीघ्र परिवर्तन होने की स्थिति को मौसम कहते हैं। मौसम एक छोटे से स्थान तक सीमित रहता है तथा इसमें शीघ्र ही बदलाव होता रहता है जबकि ऋतु एक बड़े भू-भाग पर लगभग समान रहने वाली वायुमण्डलीय अवस्था है। ऋतु में शीघ्र ही बदलाव नहीं होता।

(2) किसी स्थान की जलवायु को जानने के लिए कितने वर्षों के आँकड़ों का औसत निकालते हैं ?
उत्तर:
किसी स्थान की जलवायु को जानने के लिए लगभग 30 वर्षों के मौसम सम्बन्धी आँकड़ों का औसत निकाला जाता है।

(3) किसी स्थान की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
किसी स्थान की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं –

  • स्थान की अक्षांशीय स्थिति
  • समुद्र तल से ऊँचाई
  • स्थल तथा जल का वितरण
  • समुद्र से दूरी
  • हवाओं – की दिशा
  • वायुदाब की पेटियाँ
  • पर्वतों की स्थिति
  • धरातल का स्वरूप, तथा
  • समुद्री जल धाराएँ।

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प्रश्न 3.
(1) मौसम और जलवायु में अन्तर समझाइए।
उत्तर:
मौसम और जलवायु में अन्तर –
MP Board Class 7th Social Science Solutions Chapter 19 मौसम और जलवायु-1

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