MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

विलयन NCERT पाठ्यनिहित प्रश्न

प्रश्न 1.
यदि 22g बेन्जीन 122g कार्बन टेट्राक्लोराइड में घुली हुई है, तब बेन्जीन (C6H6) एवं कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl4) का द्रव्यमान प्रतिशत की गणना कीजिए।
हल
विलयन का द्रव्यमान = बेन्जीन का द्रव्यमान +CCl4 का द्रव्यमान
= 22g + 122g = 144g

(a)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 1
बेन्जीन का द्रव्यमान % = 15.28%.
(b)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 2
CCl4 का द्रव्यमान % = 84.72%
या
CCl4 का द्रव्यमान % = 100-15.28
CCl4 का द्रव्यमान % = 84.72%.

प्रश्न 2.
बेन्जीन विलयन में 30% द्रव्यमान की दृष्टि से कार्बन टेट्राक्लोराइड है, तब बेन्जीन मोल प्रभाज की गणना कीजिए।
उत्तर
हल- A → बेन्जीन : B → CCl4
A → Benzene : B → CCl4
WA = 30g
MA = 78g
WB = 70g
MB = 154g
nA = \(\frac{\mathrm{W}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{M}_{\mathrm{A}}}=\frac{30}{78} = 0.38\)

nB =\( \frac{\mathrm{W}_{\mathrm{B}}}{\mathrm{M}_{\mathrm{B}}}=\frac{70}{154} = 0.45\)

XA = \(\frac{n_{\mathrm{A}}}{n_{\mathrm{A}}+n_{\mathrm{B}}}=\frac{0.38}{0.38+0.45}\) = 0.46g

XB =1-XA = 0.54.

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प्रश्न 3.
निम्न विलयनों में प्रत्येक की मोलरता की गणना कीजिए
(a) 30g CO(NO3), 6H2O 4:3L विलयन में
(b) 30g ml 0.5 MH2SO4 500 ml तक तनु करते हैं।
हल
(a) CO(NO3), 6H2O का मोलर द्रव्यमान = MB = 29
CO(NO3), 6H2O का WB = 30g,
Vsol 4.3L = 4300ml

\(\mathrm{M}=\frac{\mathrm{W}_{\mathrm{B}} \times 1000}{\mathrm{M}_{\mathrm{B}} \times \mathrm{V}_{\mathrm{sol}}}\)

M = \(\frac{30 \times 1000}{291 \times 4300}\) = 0.024.

(b) तनुता के बाद विलयन की मोलरता की गणना कर सकते हैं
M1V1 (सान्द्रण)= M2V2 (तनुता)
0.5 ×30 = M2 × 500
M2 = \(\frac{0.5 \times 30}{500}\) = 0.03.

प्रश्न 4.
यूरिया (NH2CONH2) के द्रव्यमान की गणना कीजिए, जिसके 2.5kg के 0.25 मोलल जलीय विलयन बनाने के लिए आवश्यक है।
हल
0.25 मोलल विलयन का अर्थ है, 0.25 मोल यूरिया 1000g जल में है।
यूरिया का द्रव्यमान = 0.25 × 60 = 15g
विलयन का कुल द्रव्यमान = 1000 + 15 = 1015g
= 1.015kg
1.015 kg विलयन में यूरिया है = 15g.
2.5 kg विलयन में यूरिया की आवश्यकता होगी,

= \(\frac{15 \times 2.5}{1 \cdot 015}\) = 36.94g.

प्रश्न 5.
गणना कीजिए (a) मोललता, (b) मोलरता एवं (c) KI का मोल प्रभाज यदि 20% (द्रव्यमान/द्रव्यमान ) जलीय KI का घनत्व 1.202 gmL-1 है।
हल-
(a) M = \(\frac{\% \times d \times 10}{M_{B}}\) = MB = 166
M = \(\frac{20 \times 1.202 \times 10}{166}\) = =1.45molL-1

(b) M = \(\frac{\mathrm{W}_{\mathrm{B}} \times 1000}{\mathrm{M}_{\mathrm{B}} \times \mathrm{W}_{\mathrm{A}}}\), MB = 20, WA = 80
m = \(\frac{20 \times 1000}{166 \times 80}\) = 1.5 kgmol-1

(c)
KI के मोल = 0.120
H2O के मोल = \(\frac{80}{18}\) = 4.44
Xkl = \(\frac{0.120}{4.44+0.120}\) = 0.0263.

प्रश्न 6.
H2S सड़े अण्डे जैसी गंध वाली जहरीली गैस है, जिसका उपयोग गुणात्मक विश्लेषण में करते हैं। यदि STP पर H2S की जल में विलेयता 0.195 m है, हेनरी नियम स्थिरांक की गणना कीजिए।
हल
0.195 M विलयन का अर्थ है, 0.195 मोल H2S 1kg जल में विलेय है।
H2S के मोल = 0.195
जल के मोल = \(\frac{1000}{18}\) =55.55
H2S का मोल प्रभाज = \(\frac{0.195}{55.55+0.195}\) = 0.0035
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प्रश्न 7.
298K पर CO2 का जल में हेनरी नियम स्थिरांक 1.67×108 pa है। 500 ml सोडा वाटर में CO2 की मात्रा की गणना कीजिए, जबकि इसे 298K एवं 2.5 atm. दाब पर CO2 को भरा गया है।
हल- हेनरी नियम के अनुसार,
P= KHX…………. (i)
P2 = 2.5atm = 2.5 × 101325 Pa
KH = 1.67 × 108 Pa
इन मानों को समी. (i) में रखने पर, हमें प्राप्त होगा,
2.5 ×101325 = 1.67 × 10% ×X
X = 1.517 × 10-3
\(\mathrm{X}_{\mathrm{CO}_{2}}=\frac{n_{\mathrm{CO}_{2}}}{n_{\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}}+n_{\mathrm{CO}_{2}}}=\frac{n_{\mathrm{CO}_{2}}}{n_{\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}}}
n_{\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}}=\frac{500}{18}\) = 27.77

अतः समी. (ii) से हमें प्राप्त होता है।
1.517×101-3 = \(\frac{n_{\mathrm{CO}_{2}}}{27 \cdot 77}\)
\(n_{\mathrm{CO}_{2}}\) = 0.042mol.

प्रश्न 8.
350K पर शुद्ध द्रवों A एवं B का वाष्पदाब क्रमशः 450 एवं 700 mm Hg हैं। यदि कुल वाष्पदाब 600mm Hg हो, तब द्रव मिश्रण का संघटन ज्ञात कीजिए, वाष्प प्रावस्था में संघटन भी ज्ञात कीजिए।
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प्रश्न 9.
298K पर शुद्ध जल का वाष्पदाब 23-8mm Hg है। 50g यूरिया (NH,CONH) को 850g जल में घुला हो, तब इस विलयन में जल के वाष्प दाब एवं इसके आपेक्षिक अवनमन की गणना कीजिए। .
हल
हमें ज्ञात है,
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यहाँ P° = 23.8mm, W2 = 50g,
M2 (यूरिया) = 60g mol-1
W1 = 850g, M1 (जल) = 18g mol-1
हमारा उद्देश्य P एवं p° – Ps/P° की गणना करना है।
मानों को समी. (i) में रखने पर
\(\frac{P^{0}-P_{s}}{P^{0}}\) = \(\frac{50 / 60}{850 / 18+50 / 60}=0 \cdot 017\)
वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन 0.017 है
P° = 23.8mm को रखने पर हमें प्राप्त होगा,
\(\frac{23 \cdot 8-P_{S}}{23 \cdot 8}=0 \cdot 017\)
23.8 Ps = 0.412
Ps= 23:39
अतः विलयन में जल का वाष्प दाब = 23-4 mm.

प्रश्न 10.
750 mmHg पर जल का क्वथनांक 99.63°C है। 500g जल में कितना सुक्रोस मिलावे, कि यह जल 100°C पर क्वथन करें।
हल
ΔTb = 100 – 99.63 = 0.37
आवश्यक सुक्रोस की मात्रा की गणना निम्न व्यंजक से गणना कर सकते हैं
ΔTb = \(\frac{\mathrm{K}_{b} \times \mathrm{W}_{\mathrm{B}} \times 1000}{\mathrm{M}_{\mathrm{B}} \times \mathrm{W}_{\mathrm{A}}}\)
Kb = 0.52kgmol-1,MB = 342gmol-1,
WA = 500g, ΔTb = 0.37
इन मानों को समी. (i) में रखने पर, हमें प्राप्त होगा –
0.37 = \(\frac{0.52 \times \mathrm{W}_{\mathrm{B}} \times 1000}{342 \times 500}\)
342×500
wB = 121.67g.

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प्रश्न 11.
एस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन C,CH,08)) के द्रव्यमान की गणना कीजिए, जिसे 75g एसीटिक अम्ल में घोलने पर गलनांक 1.5°C कम होवे।kf = 3.9k kg mol-1.
हल
हमें ज्ञात है,
ΔTf = \(\frac{\mathbf{K}_{f} \times 1000}{\mathbf{M}_{\mathbf{B}} \times \mathbf{W}_{\mathbf{A}}}\)
दिया गया है, ΔTb =1.5, Kf = 3.9Kkg mol-1,
WA = 75g
MB (एस्कॉर्बिक अम्ल C6H8O6)
= 6 × 12 + 8 + 16 × 8 =176
इन मानों को समी (i) में रखने पर
1.5 = \(\frac{3.9 \times \mathrm{W}_{\mathrm{B}} \times 1000}{176 \times 75}\)
WB = 5.077g.

प्रश्न 12.
उस विलयन के परासरण दाब की पास्कल में गणना कीजिए, जिसे 1.0g बहुलक, जिसका मोलर द्रव्यमान 185,000 है को 37°C पर 450 ml जल में घोला गया है।
हल
हमें ज्ञात है, π = CRT =\(\frac { n }{ v }\) RT
π = \(\frac{1 \cdot 0}{185,000}\)
V= 450ml, T = 273+37 =310K
R = 8:314 × 103 PaLmol-1K-1
π = \(\frac{1 \times 8.314 \times 10^{3} \times 310}{185,000 \times \frac{450}{1000}}\)
π = 30.96 Pa

विलयन NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
विलयन को परिभाषित कीजिए। कितने प्रकार के विलयन बनाए जा सकते हैं ? प्रत्येक प्रकार के विलयन को उदाहरण देकर समझाइये।
उत्तर
विलयन – दो या दो से अधिक अक्रियाशील पदार्थों का समांगी मिश्रण होता है। जिसके रासायनिक संघटन को कुछ सीमा तक परिवर्तित किया जा सकता है। प्रत्येक विलयन में दो घटक विलायक तथा विलेय होते हैं।
विलयन के प्रकार – भौतिक अवस्था के आधार पर विलयन के तीन प्रकार होते हैं। जिन्हें पुनः तीन वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है –
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प्रश्न 2.
माना दो पदार्थों के बीच ठोस विलयन बनता है, जिनमें से एक के कण अत्यधिक बड़े तथा दूसरे के कण अत्यधिक छोटे हैं। किस प्रकार का ठोस विलयन संभव है ?
हल- अन्तराकाशी ठोस विलयन।

प्रश्न 3.
निम्न को परिभाषित कीजिए –
(i) मोल प्रभाज
(ii) मोललता
(iii) मोलरता
(iv) द्रव्यमान प्रतिशत।
उत्तर
(i) मोल प्रभाज (Mole fraction)-किसी विलयन में उपस्थित किसी अवयव (विलायक या विलेय) के मोलों की संख्या तथा विलयन में उपस्थित कुल मोलों की संख्या के अनुपात को मोल प्रभाज कहते हैं।
यदि विलेय के मोलों की संख्या n व विलायक के मोलों की संख्या N हो, तो
विलेय का मोल प्रभाज = \(\frac{n}{n+N} \)
विलायक का मोल प्रभाज = \(\frac{n}{n+N} \)

(ii) मोललता (Molality)-“किसी विलयन की मोललता प्रति 1000 ग्राम विलायक में घुले विलेय पदार्थ के मोलों की संख्या है।” इसे m द्वारा प्रदर्शित करते हैं।
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(iii) मोलरता (Molarity) – “किसी विलयन की मोलरता उसके एक लीटर में घुले विलेय पदार्थ के मोलों की संख्या है।” इसे M द्वारा दर्शाते हैं।
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(iv) द्रव्यमान प्रतिशत (Percentage by mass)-किसी विलयन की द्रव्यमान प्रतिशतता द्रव्यमान के अनुसार विलेय के भागों की वह संख्या है, जो द्रव्यमान के अनुसार विलयन के 100 भागों में उपस्थित रहती है। साधारणतः विलेय का ग्रामों में वह द्रव्यमान जो 100 ग्राम विलयन में उपस्थित रहता है, द्रव्यमान प्रतिशतता कहलाता है।
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किसी द्विअंगी विलयन के लिए WA विलायक का द्रव्यमान एवं WBविलेय का द्रव्यमान हो, तो
विलायक (A) का द्रव्यमान % = \(\frac{\mathrm{w}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{W}_{\mathrm{A}}+\mathrm{W}_{\mathrm{B}}} \times 100\)
इसी भाँति,
विलेय (B) का द्रव्यमान % = \(\frac{\mathrm{w}_{\mathrm{B}}}{\mathrm{W}_{\mathrm{A}}+\mathrm{W}_{\mathrm{B}}} \times 100\)

इसे (W/W) से व्यक्त किया जाता है। उदाहरणार्थ- 10% Na2CO3 (W/W) का अर्थ है कि 100 ग्राम विलयन में 10 ग्राम Na2CO3 उपस्थित है (अर्थात् 10g Na2CO3 को 90g जल में विलेय किया गया है।)

प्रश्न 4.
प्रयोगशाला में उपयोग लाए जाने वाले नाइट्रिक अम्ल जलीय विलयन में द्रव्यमान की दृष्टि से 68% होता है। यदि विलयन का घनत्व 1.504gmL-1 हो, तो इस अम्ल के सेम्पल की मोललता क्या होगी?
हल
विलयन की मोललता निम्न के उपयोग से गणना की जा सकती है –
M = \(\frac{\% \times d \times 10}{M_{B}}\) ; % = 68;d = 1.504g mol-1,
MB= 63
M = \(\frac{68 \times 1.504 \times 10}{63}\) = 16.23M.

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प्रश्न 5.
जल में ग्लूकोस के विलयन पर 10% W/W लिखा है, तब विलयन में प्रत्येक अवयव की मोललता एवं मोल प्रभाज क्या होगा? यदि विलयन का घनत्व 1.2gmL-1 है, तब विलयन की मोलरता क्या होगी?
हल-
10% (W/w) ग्लूकोस का अर्थ है- 10g ग्लूकोस 100g विलयन में है, i.e., 90 g जल = 0.090 kg जल
nग्लूकोस = \(\frac{10}{180}\) = 0.05555mol,
\(n_{\mathrm{H}_{2} \mathrm{O}}\) = \(\frac{90}{18}\) = 5 mol.
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प्रश्न 6.
1g Na2CO3, एवं NaHCO3 के मिश्रण से पूर्ण क्रिया कराने के लिए 0.1M HCl के कितने ml की आवश्यकता होगी, जबकि मिश्रण में दोनों सम आण्विक मात्रा में हैं ?
हल
माना यहाँ xg Na2CO3 एवं (1 – x) g NaHCO3 मिश्रण में है –
Na2CO3 का मोलर द्रव्यमान = 106 g/mol
NaHCO3 का मोलर द्रव्यमान = 84g/mol
Na2CO3 के मोलों की संख्या = NaHCO3 के मोलों की संख्या
\(\frac{x}{106}\) = \(\frac{(1-x)}{84}\)
हल करने पर x= 0.56.
Na2CO3के मोलों की संख्या = NaHCO3 के मोलों की संख्या
=5.283 x 10-3
उदासीनीकरण प्रक्रम की अवधि, निम्न अभिक्रिया होती है –
Na2CO3 + 2HCl → 2NaCl + H2O + CO2
NaHCO3 + HCl + NaCl + H2O +CO2
आवश्यक HCl के मोलों की संख्या
= 2 × Na2CO3 के मोलों की संख्या + NaHCO3 के मोलों की संख्या
= 2 × 5.283 × 10-3 + 5.283 × 10-3
= 0.0158
अब
M =\(\frac{n_{B} \times 1000}{V}\)
V = \(\frac{0.0158 \times 1000}{0.1}\) = 158ml.

प्रश्न 7.
द्रव्यमान की दृष्टि से 25% विलयन के 300g एवं 40% के 400g को मिलाने पर प्राप्त विलयन के द्रव्यमान प्रतिशत की गणना कीजिए।
हल
25% विलयन के 300 g में विलेय है = 75g
40% विलयन के 400 g में विलेय है = 160g
कुल विलेय = 160 + 75 = 235g
कुल विलयन = 300 + 400 = 700g
विलेय का द्रव्यमान % =\(\frac{235}{700}\) × 100 = 33.5%
जल का द्रव्यमान % = 100 – 33.5 = 66.5%.

प्रश्न 8.
222.6 g एथिलीन ग्लाइकॉल (C2H6O2) एवं 200g जल को मिलाने पर एण्टीफ्रिज विलयन बनता है। विलयन की मोललता की गणना कीजिए। यदि विलयन का घनत्व 1.072 gmL-1 हो, तब विलयन की मोलरता क्या होगी?
हल
विलेय C2H4(OH)2 का द्रव्यमान = 222.6g, विलेय का मोलर द्रव्यमान = 62 g mol-1
∴ विलेय के मोल =\(\frac{222 \cdot 6}{62}\) = 3.59
विलायक का द्रव्यमान = 200g = 0.2kg
m=\(\frac{3.59}{0.2}\)molkg-1
विलयन का कुल द्रव्यमान = 222.6 + 200 = 422.6g .
∴विलयन का आयतन = \(\frac{422.6}{1.072}\)
= 394.2 ml = 0.3942 L
M=\(\frac{3 \cdot 59}{0.3942}\) = 9.11molL-1.

प्रश्न 9.
एक पेयजल के सेम्पल में क्लोरोफॉर्म (CHCl3) सहित अनेक अशुद्धियाँ पाई जाती हैं, माना ये कासनोजन है। इन अशुद्धियों का लेवल 15 ppm (द्रव्यमान की दृष्टि से) था।
(i) इसे द्रव्यमान के प्रतिशत में दर्शाइए।
(ii) जल के सेम्पल में क्लोरोफॉर्म की मोललता ज्ञात कीजिए।
हल
15 ppm (द्रव्यमान में) का अर्थ है- 15 g CHCl3 106 g विलयन में उपस्थित है।
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प्रश्न 10.
ऐल्कोहॉल एवं जल के विलयन में आण्विक अन्तःक्रिया का क्या रोल होगा?
हल
एल्कोहॉल जल के साथ अन्तर आण्विक H-बंध बनाता है, इसलिए जल में ऐल्कोहॉल विलेय है।

प्रश्न 11.
क्या कारण है कि तापक्रम में वृद्धि से गैसें द्रव में कम विलेय होती हैं ?
हल-
अधिकतर गैसों की ताप में वृद्धि से द्रव में विलेयता घटती है, क्योंकि घुलना एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है। गर्म करने पर घुली हुई गैसें विलयन से बाहर निकलती हैं।

प्रश्न 12.
हेनरी नियम को लिखते हुए कुछ प्रमुख अनुप्रयोग भी लिखिए।
हल
हेनरी का नियम-स्थिर ताप पर किसी विलायक के निश्चित आयतन में विलेय गैस का द्रव्यमान गैस के दाब के समानुपाती होता है, जिसके साथ वह विलायक साम्यावस्था में है।
यदि विलायक आयतन में विलेय गैस का द्रव्यमान m तथा साम्य दाब हो, तो
m = kp (जहाँ k एक स्थिरांक है।)
हेनरी के नियम के अनुप्रयोग (Applications of Henry’s law) –

1. कार्बोनिकृत पेय पदार्थों के उत्पादन में- मृदु पेय, सोडा वाटर, बीयर जैसे कार्बोनिकृत पेय पदार्थों (Carbonated beverages) को बनाते समय CO2 की विलेयता बढ़ाने के लिए उच्च दाब का उपयोग किया जाता है।’

2. रक्त में घुली गैसों के विनिमय में- श्वास के द्वारा अन्दर ली गई वायु में O2 का आंशिक दाब उच्च होता है, फेफड़ों में पहुँचकर यह हीमोग्लोबीन से संयुक्त होकर ऑक्सीहीमोग्लोबीन बनाती है। उतकों (Tissues) में ऑक्सीजन का आंशिक दाब तुलनात्मक रूप से कम होता है अत: ऑक्सीहीमोग्लोबीन से ऑक्सीजन मुक्त होकर कोशिका सक्रियण के लिए उपलब्ध हो जाती है।

3. गहरे समुद्र में गोताखोरी के लिए- गहरे समुद्र में गोताखोरी करते समय श्वसन के लिए संपीडित वायु का उपयोग किया जाता है। संपीडित वायु में O2 के अतिरिक्त N2 भी होती है जो सामान्य दाब पर रक्त में ज्यादा विलेयशील नहीं होती है किन्तु उच्च दाब पर N2 की रक्त में विलेयता बढ़ जाती है एवं N2 रक्त में घुल जाती है। रक्त में नाइट्रोजन की उच्च सान्द्रता के हानिकारक प्रभावों एवं बेण्ड्स को रोकने के लिए गोताखोरों द्वारा प्रयुक्त टैंक को हीलियम द्वारा तनु किए गए वायु (He = 11.7%, N2 = 56-2% एवं O2 = 32.9%) से भरते हैं।

4. बहुत ऊँचाई पर बहुत ऊँचाई पर O2 का आंशिक दाब सतह की तुलना में अत्यन्त कम होता है। परिणामस्वरूप पर्वतारोहियों के श्वसन द्वारा उनके रक्त एवं कोशिकाओं में उपस्थित ऑक्सीजन का सान्द्रण निम्न हो जाता है। रक्त में ऑक्सीजन की कमी पर्वतारोहियों को कमजोर बना देती है एवं वे ठीक-ठीक सोचने में भी असमर्थ होते हैं जिसे एनॉक्सिया (Anoxia) कहा जाता है।

5. जलीय जीवन में- वायु में उपस्थित ऑक्सीजन की जल में विलेयता के कारण ही नदी, समुद्र एवं झीलों में जलीय जीव-जन्तुओं का जीवन संभव हो पाता है।

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प्रश्न 13.
एक विलयन में 6.56 x 10-3g एथेन है, तब एथेन का आंशिक दाब 1 bar है। यदि विलयन में 5.00 x 10-2g एथेन हो, तब गैस का आंशिक दाब क्या होगा?
हल
हेनरी नियम से, m = K × P
6.56 × 10-3g=K × 1 bar
K= 6-56 × 10-3g bar-1
अब यदि m = 5 × 10-2g, P= ?
प्रयुक्त करने पर, m’ =K × P’
5-00 × 10-2g = 6.56 × 10-3g bar-1 × P’
P =\(\frac{5 \cdot 00 \times 10^{-2}}{6 \cdot 56 \times 10^{-3}}\) = 7.62 bar

प्रश्न 14.
राउल्ट नियम से धनात्मक एवं ऋणात्मक विचलन का क्या अर्थ है, एवं Δmix चिन्ह किस प्रकार राउल्ट नियम से धनात्मक एवं ऋणात्मक विचलन से संबंधित है ?
उत्तर
धनात्मक विचलन-जब विलयन का वाष्प दाब, राउल्ट के नियम से प्राप्त वाष्प दाब से अधिक होता है, तो वह धनात्मक विचलन कहलाता है। दो घटक A तथा B से बने विलयन के लिए यदि विलेय और विलायक A-B के अन्तराकर्षण बल का मान विलेय (A-A) एवं विलायक (B-B) के अन्तराकर्षण बल के मान से कम हो तो विलेय और विलायक की निष्कासन की प्रवृत्ति का मान घटकों की शुद्ध अवस्था की तुलना में ज्यादा हो जाता है। अतः प्रत्येक घटक के आंशिक दाब का मान राउल्ट के नियम से प्राप्त होने वाले आंशिक दाब की तुलना में उच्च होता है।
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धनात्मक विचलन प्रदर्शित करने वाले विलयन के गुण

(i) \(\mathrm{P}_{\mathrm{A}}>\mathrm{P}_{\mathrm{A}}^{\circ} \mathrm{X}_{\mathrm{A}}\) एवं \(\mathrm{P}_{\mathrm{B}}>\mathrm{P}_{\mathrm{B}}^{\circ} \mathrm{X}_{\mathrm{B}}\)
(ii) ΔHmixing > 0 तब विचलन धनात्मक होता है।
(iii) ΔUmixing > 0 तब विचलन धनात्मक होता

उदाहरण – (1) एथिल एल्कोहॉल तथा जल, (2) एसीटोन तथा बेंजीन।
ऋणात्मक विचलन – जब विलयन का वाष्पदाब राउल्ट के नियम से प्राप्त वाष्प दाब से कम प्राप्त होता है तो यह ऋणात्मक विचलन कहलाता है। इस प्रकार के विलयनों में A-B (विलेय और विलायक) अन्तराकर्षण बल का । मान A-A (विलेय-विलेय) और B-B (विलायक-विलायक) के मध्य लगने वाले अन्तराकर्षण बल से प्रबल होता है। अतः विलयन में A और B (विलेय एवं विलायक) के अणुओं के निष्कासित होने की प्रवृत्ति शुद्ध घटकों की तुलना में कम होती है। अतः प्रत्येक घटक का विलयन में वाष्प दाब राउल्ट के नियम से प्राप्त होने वाले दाब से कम होता है।
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ऋणात्मक विचलन प्रदर्शित करने वाले विलयन के गुण –
(i) PA <\(\mathrm{P}_{\mathrm{A}}^{\circ} \mathrm{X}_{\mathrm{A}}\) तथा PB< \(\mathrm{P}_{\mathrm{B}}^{\mathrm{o}} \mathrm{X}_{\mathrm{B}}\)
(ii) ΔHmisxing <0 तब विचलन ऋणात्मक होता है।
(iii) Δmisxing <0 तब विचलन ऋणात्मक होता है।
उदाहरण – (1) HNO3 तथा जल, (2) क्लोरोफॉर्म तथा एसीटोन।

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प्रश्न 15.
विलायक के सामान्य क्वथनांक पर एक 2% अवाष्पशील विलेय का जलीय विलयन 1.004 bar दाब प्रेक्षित करता है। विलेय का मोलर द्रव्यमान क्या होगा?
हल
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 17

प्रश्न 16.
हेप्टेन एवं ऑक्टेन आदर्श विलयन बनाते हैं। 373K पर दो द्रवों अवयवों का वाष्प दाब क्रमशः 105.2K Pa एवं 46.8 k Pa हैं। 26.0g हेप्टेन एवं 35g ऑक्टेन के मिश्रण का वाष्पदाब क्या होगा?
हल
हेप्टेन (C7H16),
द्रव्यमान = 26g
मोलर द्रव्यमान = 100
ऑक्टेन (C8H18)
द्रव्यमान = 35g .
मोलर द्रव्यमान = 114
मोलों की संख्या (n1) = \(\frac{26}{100}\) = 0.26
मोलों की संख्या (n2) = \(\frac{35}{114}\) = 0.31
मोल प्रभाज = X1 = \(\frac{n_{1}}{n_{1}+n_{2}}\) X2 = 1 – 0.456
X1 = \(\frac{0 \cdot 26}{0 \cdot 26+0 \cdot 31}\) X2 =0.544
X1 = 0.456
वाष्पदाब \(\mathrm{P}_{1}^{\mathrm{o}}\) = 105.2
\(\mathrm{P}_{2}^{\mathrm{o}}\) = 46.8
मिश्रण का वाष्प दाब (P) = \(\mathrm{P}_{1}^{\mathrm{o}} \mathrm{X}_{1}+\mathrm{P}_{2}^{\mathrm{o}} \mathrm{X}_{2}\)
P = 105.2 × 0.456 + 46.8 × 0.544
P = 42.97 + 25.46 = 73.43 kPa.

प्रश्न 17.
300K पर जल का वाष्पदाब 123kPa है, यदि इसके अवाष्पशील विलेय के 1 मोलल विलयन के वाष्पदाब की गणना कीजिए।
हल
1 मोलल विलयन का अर्थ है, विलेय का 1 मोल विलायक के 1 kg (जल) में उपस्थित है। …
∴ विलेय का मोल प्रभाज =\(\frac{1}{1+55.5}\) = 0-0177
अब, \(\frac{p^{0}-p_{s}}{p^{0}}=x_{2}\) , i.e. \(\frac{12 \cdot 3-P_{s}}{12 \cdot 3}=0 \cdot 0177\)
∴ Ps = 12.08 kPa.

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प्रश्न 18.
उस अवाष्पशील विलेय (मोलर द्रव्यमान 40g mol-1) की गणना कीजिए जो 114g ऑक्टेन में घुलकर उसके वाष्पदाब को 80% कम कर देता है।
हल
राउल्ट के नियम से,
P= \(\mathrm{P}_{\mathrm{A}}^{\mathrm{o}} \mathrm{X}_{\mathrm{A}}\)
\(\mathrm{P}_{\mathrm{A}}^{\circ}\) = 100, P = 80
∴ समी. (i) से XA = 0.80
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प्रश्न 19.
एक विलयन जिसे एक अवाष्पशील ठोस के 30g को 90g जल में विलीन करके बनाया गया है, इसका 298K पर वाष्पदाब 2.8kPa है, इसमें 18g जल मिलाने पर विलयन का नया वाष्पदाब 298K पर 2.9kPa हो जाता है, तब गणना कीजिए –
(i) विलेय का मोलर द्रव्यमान, (ii) 298K पर जल का वाष्पदाब।
हल
रॉउल्ट के नियम को लागू करने पर,
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प्रथम प्रयोग से
जहाँ A = विलायक, B = विलेय
दिया गया है- WB = 30g, WA = 90g, Ps = 2.8kPa
MA = 18g mol-1
मानों को समी. (i) में रखने पर,
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द्वितीय प्रयोग से
दिया गया है- WB = 30g, WA = 90 + 18 = 108g,
Ps = 2.9 kPa, MA = 18gmol-1
समी. (i) में मानों को रखने पर
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समी. (iii) को समी. (ii) से भाग देने पर हमें प्राप्त होता है,
\(\frac{\mathrm{M}_{\mathrm{B}}-5}{\mathrm{M}_{\mathrm{B}}-6}\) = \(\frac{2 \cdot 9}{2 \cdot 8}\)
अथवा, 2.8(MB – 5) = 2.9 (MB – 6)
अथवा, 2.9 × 6 – 2.8 ×5 = MB (2.9 – 2.8)
अथवा, MB =\(\frac{3 \cdot 4}{0 \cdot 1}\) = 34g mol-1  …………………………….. (iv)          
समी. (iv) से Mg का मान समी. (iii) में रखने पर हमें प्राप्त होता है,
\(\frac{34-5}{34} = \frac{2 \cdot 9}{\mathrm{P}^{\circ}}\)
अथवा, P0 =\( \frac{2 \cdot 9}{0.853}\) = 3.4kPa.

प्रश्न 20.
गन्ने के रस (Cane sugar) का जल में 5% विलयन का हिमांक बिन्दु 271K है। यदि शुद्ध जल का हिमांक बिन्दु 273.15K हो, तो जल में 5% ग्लूकोस के हिमांक बिन्दु की गणना कीजिए। हल-गन्ने की शर्करा के लिए,
ΔTf = 273.15-271-0 = 2.15°C
Kf = \(\frac{2 \cdot 15 \times 100 \times 342}{1000 \times 5}\)
= 14.706 KM -1
ग्लूकोस विलयन के लिए,
ΔTb = \(\frac{14706 \times 1000 \times 5}{100 \times 180}\) = 4.085K.

प्रश्न 21.
दो तत्व A एवं B यौगिक बनाते हैं, जिनका सूत्र AB2एवं AB4 है। यदि 20g बेन्जीन (C6H6) में घोल देवें, AB2 का 1g हिमांक बिन्दु में 2-3K का अवनमन करता है, जबकि 1g AB41:3K का अवनमन होता है। बेंजीन के लिए मोलर अवनमन स्थिरांक 5.1Kkg mol-1 A एवं B के परमाणु द्रव्यमान की गणना कीजिए।
हल
सूत्र को लागू करने पर,
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माना A एवं B के परमाणु द्रव्यमान क्रमशः ‘a’ एवं ‘b’ हैं,
तब AB2 का मोलर द्रव्यमान = a+2b = 110.87g mol-1
AB4 का मोलर द्रव्यमान = a+4b = 196.15g mol-1
समी. (ii) से समी. (i) को घटाने पर –
2b = 85-28 अथवा b = 42.64
समी. (i) में रखने पर, हमें प्राप्त होगा, a + 2 × 42.64 = 110.8
अथवा a = 25.59
अतः A का परमाणु द्रव्यमान = 25.59u.
B का परमाणु द्रव्यमान = 42.6u.

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प्रश्न 22.
300K पर 36g ग्लूकोस एक लीटर विलयन में उपस्थित है, इसका परासरण दाब 4.98 bar है। यदि समान ताप पर विलयन का परासरण दाब 1.52 bar हो, तो इसका सान्द्रण क्या होगा?
हल
हमें ज्ञात है- πV = nRT
प्रथम प्रकरण में, 4.98 × 1= \(\frac{36}{180} \)× R × T
द्वितीय प्रकरण में, 1:52 × 1 = \(\frac{\mathrm{W}}{180}\) × RT
समी (i) में समी. (ii) का भाग देने पर, हमें प्राप्त होगा,
\(\frac{4 \cdot 98}{1 \cdot 52}=\frac{36}{W}\)
w = 10.987g/L.

प्रश्न 23.
निम्न जोड़ों में प्रमुख अन्तर-आण्विक आकर्षण अन्तःक्रिया को समझाइये
(i) n-हेक्सेन एवं n-ऑक्टेन,
(ii) I2 एवं CCl4
(iii) NaClO4 एवं जल
(iv) मेथेनॉल एवं एसीटोन
(v) एसीटोनाइट्राइल (CH3CN) एवं एसीटोन (C3H6O)।
उत्तर-
(i) n-हेक्सेन एवं n- ऑक्टेन – परिक्षेपण अथवा लण्डन बल
(ii) I2 एवं CCl4 (दोनों अध्रुवीय हैं) – लण्डन अथवा परिक्षेपण बल
(iii) NaClO4 एवं जल (आयनिक) (ध्रुवीय) – आयन-द्विध्रुव अन्तर-क्रिया को आयन का जलयोजन (ध्रुवीय) कहते हैं।
(iv) मेथेनॉल एवं ऐसीटोन – द्विध्रुव-द्विध्रुव (ध्रुवीय)
(iv) एसीटोनाइट्राइल एवं ऐसीटोन (ध्रुवीय) – द्विध्रुव-द्विध्रुव (ध्रुवीय )।

प्रश्न 24.
विलेय-विलायक अन्तःक्रिया के आधार पर निम्न को n-ऑक्टेन में विलेयता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए एवं समझाइए- चक्रीय हेक्सेन, KCl, CH3OH, CH3CN.
उत्तर
विलेयता के लिए हमें ज्ञात है Like dissolves like (समान-समान को घोलना), n-ऑक्टेन अध्रुवीय विलायक है, अतः अध्रुवीय यौगिक अधिक विलेय होते हैं।
KCl> CH3OH <CH3CN < चक्रीय हेक्सेन

प्रश्न 25.
निम्न में से कौन-सा यौगिक जल में अविलेय है, आंशिक विलेय है एवं अत्यधिक विलेय है, पहचान कीजिए.
(i) फीनॉल,
(i) टॉलुईन
(iii) फॉर्मिक अम्ल
(iv) एथिलीन ग्लाइकॉल
(v) क्लोरोफॉर्म
(vi) पेण्टेनॉल।
उत्तर
अत्यधिक विलेय -फॉर्मिक अम्ल एवं एथिलीन ग्लाइकॉल। ये जल के अणुओं के साथ Hबंध बनाने की क्षमता रखते हैं।
अविलेय -क्लोरोफॉर्म एवं टॉलुईन अध्रुवीय हैं, ये ध्रुवीय माध्यम जैसे-जल में अविलेय हैं। आंशिक विलेय-फीनॉल एवं पेन्टेनॉल जल के साथ दुर्बल H-बंध बनाते हैं, अतः ये आंशिक विलेय हैं।

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प्रश्न 26.
झील के जल का घनत्व 1.25gmL-1 है एवं 92g Na+ आयन प्रति kg जल में हैं, झील में Na+ आयनों की मोललता की गणना कीजिए। .
हल
दिया गया है,
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प्रश्न 27.
यदि CuS का विलेयता गुणनफल 6 × 10-16 है। जलीय विलयन में Cus की अधिकतम मोलरता की गणना कीजिए।
हल
दिया गया है,
Cus at Ksp = 6 × 10-16
यदि ‘S’ विलेयता है, तब
Cus ⇌ Cu2+ + S2-
[Cu2+] = S [Su2-] = S
Ksp = [Cu2+] [Su2-] = S2
∴ विलेयता S = \(\sqrt{\mathrm{K}_{s p}}\) = \(\sqrt{6 \times 10^{-16}}\) = 2.45 × 10-8M.

प्रश्न 28.
यदि 6.5g C9H8O4 450g CH3CN में घुली है, तब एसीटोनाइट्राइल (CH3CN) में एस्पिन (C9H8O4) के द्रव्यमान प्रतिशत की गणना कीजिए।
हल
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प्रश्न 29.
नेलोरफिन (C19H21NO3) जो मार्फिन के समान है, का उपयोग स्वापक (Narcotic) उपभोक्ताओं द्वारा स्वापक छोड़ने से उत्पन्न लक्षणों को दूर करने के लिए करते हैं। सामान्यतः नेलोरफिन खुराक 1.5 mg दिया जाता है। उपरोक्त खुराक के लिए 1.5 x 10-m जलीय विलयन में आवश्यक द्रव्यमान की गणना कीजिए।
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प्रश्न 30.
मेथेनॉल में 0.15M 250ml विलयन बनाने के लिए आवश्यक बेन्जोइक अम्ल (C6H5 COOH) की मात्रा की गणना कीजिए।
हल-हमें ज्ञात है M = \(\frac{\mathrm{w}_{\mathrm{B}} \times 1000}{\mathrm{M}_{\mathrm{B}} \times \mathrm{V}}\)
दिया गया है, M = 0.15, V = 250 ml, MB= 122
0.15 = \(\frac{\mathrm{W}_{\mathrm{B}} \times 1000}{122 \times 250}\)
WB = 4.575g.

प्रश्न 31.
प्रेक्षिप्त जल के हिमांक में अवनमन, समान मात्रा में एसीटिक अम्ल, ट्राईक्लोरो एसीटिक अम्ल एवं ट्राई फ्लुओरो एसीटिक अम्ल, में वृद्धि उपरोक्त दिए गए क्रम में होती है, विस्तृत रूप में समझाइये।
उत्तर-
एसीटिक अम्ल < ट्राइक्लोरो एसीटिक अम्ल < ट्राइफ्लुओरो एसीटिक अम्ल
कार्बोक्सिलिक समूह के साथ जुड़े समूहों के इलेक्ट्रॉन विकर्षी प्रभाव में वृद्धि से आयनन की मात्रा में वृद्धि होती है।
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इलेक्ट्रॉन विकर्षी प्रभाव में वृद्धि हिमांक में अवनमन एक अणुसंख्यक गुणधर्म है । ट्राइफ्लुओरो एसीटिक अम्ल के आयनन से अधिक आयन उत्पन्न होते हैं, तब हिमांक में अवनमन अधिकतम होगा।

प्रश्न 32.
250g जल में 10g CH3CH2CHClCOOH को मिलाने पर जल के हिमांक में अवनमन की गणना कीजिए।
Ka = 1.4 x 10-13, Kf =1.86K kgmol-1.
हल- CH3CH2CHClCOOH का मोलर द्रव्यमान (MB)
(विलेय) = 122.5g mol-1.
WB = 10g.
nB = \(\frac{10}{122 \cdot 5}\) = 8.16 × 10-2mol
m = \(\frac{8.16 \times 10^{-2} \times 1000}{250}\)
= 0.3265m
यदि αCH3CH2 CHCl COOH के वियोजन की मात्रा है,
CH3CH2 CHCl COOH ⇌ CH3CH2 CHCl COO + H+
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प्रश्न 33.
500g जल में 19-5g CH2F COOH घुला है।जल में हिमांक में अवनयन 1.0°C प्रेक्षित हुआ, फ्लुओरो-एसीटिक अम्ल का वॉण्ट हॉफ गुणांक एवं वियोजन स्थिरांक की गणना कीजिए।
हल
CH2F COOH का आण्विक द्रव्यमान (MB ) = 78
WB = 19.5g, WA= 500g
m = \(\frac{\mathrm{W}_{\mathrm{B}} \times 1000}{\mathrm{M}_{\mathrm{B}} \times 500}\)=\(\frac{19.5 \times 1000}{78 \times 500}=0.50 \mathrm{m}\)
= 1.86 × 0.50 = 0.93K
वॉण्ट हॉफ कारक
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प्रश्न 34.
293K पर जल का वाष्पदाब 17:535 mm Hg है। 25g ग्लुकोस को 450g जल में घोलकर 293K पर जल के वाष्पदाब की गणना कीजिए।
हल
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 29

प्रश्न 35.
298K पर मेथेन की बेन्जीन में मोललता का हेनरी नियम स्थिरांक 4.27x 105 mmHg है। 298K एवं 760mm Hg पर मेथेन की बेन्जीन में विलेयता की गणना कीजिए।
हल
जहाँ KH = 4.27 × 105 mm, P=760mm
हेनरी नियम को लागू करने पर, P = KHX
X = \(\frac{P}{K_{H}}=\frac{760}{4.27 \times 10^{5}}\) = 1.78 × 10-3
∴ बेन्जीन में मेथेन का मोल प्रभाज = 1.78 × 10-3

प्रश्न 36.
100g द्रव A (मोलर द्रव्यमान 140g mol-1) 1000g द्रव B (मोलर द्रव्यमान 180g mor’) में विलेय है।शुद्ध द्रव B का वाष्पदाब 500 torr प्राप्त होता है। यदि विलयन का कुल वाष्पदाब 475 torr है, तब शुद्ध द्रव A का वाष्प दाब एवं विलयन में इसके वाष्प दाब की गणना कीजिए।
हल:
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प्रश्न 37.
328K पर शुद्ध ऐसीटोन एवं क्लोरोफॉर्म के वाष्पदाब क्रमश: 741.8 mm Hg एवं 632.8 mm Hg हैं। माना ये सभी संघटन पर आदर्श विलयन बनाते हैं।
PTotal, Pक्लोरोफॉर्म एवं Pएसीटोन को Xएसीटोन के फलन के रूप में ग्राफ खींचते हैं। मिश्रण के विभिन्न संघटनों पर प्रेक्षित प्रायोगिक आँकड़े है –
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समान ग्राफ पेपर पर इन आँकड़ों को प्लाट करना है। तब यह बताना है ये आदर्श विलयन से धनात्मक विलयन अथवा ऋणात्मक विचलन दर्शाते हैं।
हल
From the question, we have the following data
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उक्त ग्राफ से देखा जा सकता है कि विलयन के PTotal के लिए प्लॉट निम्नवक्रीय है। अतः विलयन आदर्श व्यवहार से ऋणात्मक विचलन प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 38.
सभी संघटनों पर बेन्जीन एवं टॉलुईन आदर्श विलयन बनाते हैं। शुद्ध बेन्जीन एवं टॉलुईन का 300 K पर वाष्पदाब क्रमशः 50.71mm Hg एवं 32.06mm Hg है। यदि 80g बेन्जीन को 100g टॉलुईन में मिलावें, तो वाष्य प्रावस्था में बेन्जीन के मोल प्रभाज की गणना कीजिए।
हल
A→ बेन्जीन (C6H6), B-→ टॉलुईन (C7H8)
बेन्जीन के मोलों की संख्या nA = \(\frac { 80 }{ 78 }\) = 1.026
टॉलुईन के मोलों की संख्या nB = \(\frac { 100 }{ 92 }\) = 1.087
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प्रश्न 39.
वायु अनेक गैसों का मिश्रण है। इनमें मुख्य अवयव 298K पर लगभग ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन 20% एवं 79% हैं। 10 atm. दाब पर जल एवं वायु साम्यावस्था में हैं। यदि 298K पर ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन के हेनरी नियम स्थिरांक क्रमश: 3.30 x 107 mmHg एवं 6.51 x 107 mm हों तो जल में इन गैसों का संघटन की गणना कीजिए।
हल
जल के ऊपर वायु का वाष्पदाब = 10 atm.
N2 एवं O2 आंशिक दाब
\(\mathrm{P}_{\mathrm{N}_{2}}\) =\(\frac{79 \times 10}{100}\) = 7.9 atm.
= 7.9 × 760 mm = 6004 mm Hg
\(P_{O_{2}}\)=\(\frac{20 \times 10}{100}\) = 2 atm.
= 2 × 760 mm Hg = 1520 mm Hg.
हेनरी नियम लागू करने पर,
\(\mathrm{P}_{\mathrm{N}_{2}}=\mathrm{K}_{\mathrm{H}} \mathrm{X}_{\mathrm{N}_{2}}\)
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प्रश्न 40.
CaCl2 (i = 2.47) की मात्रा ज्ञात कीजिए, जब इसे 2.5 लीटर जल में घोला जाता है, इसका 27°C पर परासरण दाब 0.75 atm. है।
हल
CaCl2 के लिए, i = 2.47
π= iCRT
\(\pi=i \frac{n_{\mathrm{B}}}{\mathrm{V}} \mathrm{RT}\)
0.75 = \(\frac{2 \cdot 47 \times n_{\mathrm{B}} \times 0 \cdot 082 \times 300}{2 \cdot 5}\)
nB = \(\frac{0.75 \times 2.5}{2.47 \times 0.082 \times 300}\)
nB = 0.0308 mol.

प्रश्न 41.
25°C पर 25 mg K2SO4 को 2 लीटर जल में घोलने पर बने विलयन का वाष्प दाब ज्ञात कीजिए, मान लीजिए यह पूर्ण वियोजित हो जाता है।
हुल
πV= inBRT
π × 2 = 3 × \(\frac{0.025}{174}\) × 0.0821 × 298
π = 5.272 × 10-3 atm.

विलयन अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

विलयन वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
विलेय की मोलल सान्द्रता वाले विलयन का क्वथनांक उन्नयन सर्वाधिक होगा यदि विलायक –
(a) एथिल ऐल्कोहॉल है
(b) ऐसीटोन है
(c) बेन्जीन है
(d) क्लोरोफॉर्म है।
उत्तर
(c) बेन्जीन है

प्रश्न 2.
समान परासरण दाब वाले विलयन कहलाते हैं
(a) अतिपरासरी
(b) अल्पपरासरी
(c) समपरासरी
(d) नॉर्मल।
उत्तर
(c) समपरासरी

प्रश्न 3.
IM NaOH के 10 ml को उदासीन करने के लिए IM H2SO4 के कितने ml की आवश्यकता
होगी
(a) 20ml
(b) 2.5ml
(c) 5ml
(d) 10ml.
उत्तर
(c) 5ml

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से कौन राउल्ट नियम से धनात्मक विचलन नहीं दर्शाता है –
(a) बेन्जीन-क्लोरोफॉर्म
(b) बेन्जीन-ऐसीटोन
(c) बेन्जीन-एथेनॉल
(d) बेन्जीन-CCl4
उत्तर
(a) बेन्जीन-क्लोरोफॉर्म

प्रश्न 5.
H2SO4 के एक घोल, जिसमें 9.8 gm H2SO4, 2 लिटर जल में घुला है, की मोलरता है –
(a) 0.1M
(b) 0.05M
(c) 0.01M
(d) 0.2M.
उत्तर
(b) 0.05M

प्रश्न 6.
साधारण नमक को जल में घोलने पर –
(a) जल का क्वथनांक घट जाता है
(b) जल का क्वथनांक बढ़ जाता है
(c) कोई परिवर्तन नहीं होता हैं
(d) कुछ कहा नहीं जा सकता।
उत्तर
(b) जल का क्वथनांक बढ़ जाता है

प्रश्न 7.
जब रक्त कोशिकाएँ, कोशिका एक से अधिक परासरण वाले विलयन में रखी जाती है, तो –
(a) वे सिकुड़ जाती हैं
(b) वे फूल जाती हैं
(c) कोई प्रभाव नहीं होता
(d) पहले सिकुड़ती हैं बाद में फूलती हैं।
उत्तर
(a) वे सिकुड़ जाती हैं

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प्रश्न 8.
सभी आदर्श विलयन बनाते हैं, केवल एक नहीं –
(a)C2H5Br वC2H5Cl
(b) C6H5Cl व C6H5Br
(c) C6H6 व C6H5CH3
(d) C2H5I व C2H5OH
उत्तर
(b) C6H5Cl व C6H5Br

प्रश्न 9.
राउल्ट के नियमानुसार एक अवाष्पशील विलेय के विलयन के लिए सापेक्ष वाष्प-दाब अवनमन बराबर है –
(a) विलायक के मोल प्रभाज के
(b) विलेय के मोल प्रभाज के ।
(c) विलायक के द्रव्यमान प्रतिशत के
(d) विलेय के द्रव्यमान प्रतिशत के।
उत्तर
(b) विलेय के मोल प्रभाज के ।

प्रश्न 10.
परासरण दाब (P), आयतन (V) व ताप (T) के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है –
(a) Pr ∝ \(\frac{1}{V}\), यदि T स्थिर है
(b) P ∝T, यदि v स्थिर है
(c) P ∝ v, यदि T स्थिर है
(d) PV, यदि T स्थिर है।
उत्तर
(c) P∝ v, यदि T स्थिर है

प्रश्न 11.
किसका क्वथनांक 1 atm दाब पर अधिकतम होगा
(a) 0.1M ग्लूकोज
(b) 0.1M BaCl2
(c) 0.1M NaCl
(d) 0.1M यूरिया।
उत्तर
(b) 0.1M BaCl2

प्रश्न 12.
अर्द्धपारगम्य झिल्ली रासायनिक रूप से है –
(a) कॉपर फेरोसायनाइड
(b) कॉपर फेरीसायनाइड
(c) कॉपर सल्फेट
(d) पोटैशियम फोरोसायनाइड।
उत्तर
(a) कॉपर फेरोसायनाइड

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में से कौन-सा अणुसंख्यक गुणधर्म है –
(a) पृष्ठ तनाव
(b) श्यानता
(c) परासरण दाब
(d) प्रकाशीय घूर्णन।
उत्तर
(c) परासरण दाब

प्रश्न 14.
एक विद्युत्-अपघट्य का प्रायोगिक अणुभार सदैव ही इसके परिकलित मान से कम होगा, क्योंकि वाण्ट हॉफ गुणांकां का मान होता है –
(a) 1 से कम
(b) 1 से अधिक
(c) 1 के तुल्य
(d) शून्य।
उत्तर
(b) 1 से अधिक

प्रश्न 15.
“मोलल विलयन” में विलेय पदार्थ का 1 मोल घुला रहता है –
(a) 1000gm विलायक में
(b) 1 लिटर विलयन में
(c) 1 लिटर विलायक में
(d) 22.4 लिटर विलयन में।
उत्तर
(a) 1000gm विलायक में

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प्रश्न 16.
यदि विलयन का क्वथनांक T, तथा विलायक का क्वथनांक T, हो, तो क्वथनांक में उन्नयन होगा
(a) T1 + T2
(b) T1 – T2
(c) T2 – T1
(d) T 1T2.
उत्तर
(b) T1 – T2

प्रश्न 17.
अणुसंख्यक गुणधर्म है –
(a) मुक्त ऊर्जा में परिवर्तन
(b) दाब में परिवर्तन
(c) वाष्पन की ऊष्मा
(d) परासरण दाब।
उत्तर
(d) परासरण दाब।

प्रश्न 18.
एक विलयन की ग्राम मोललता है –
(a) प्रति 1000ml विलायक में विलेय के अणुओं की संख्या
(b) प्रति 1000 ग्राम विलायक में विलेय के अणुओं की संख्या
(c) प्रति 1000ml विलयन में विलेय के अणुओं की संख्या
(d) प्रति 1000ml विलायक में विलेय के ग्राम तुल्यांकों की संख्या।
उत्तर
(b) प्रति 1000 ग्राम विलायक में विलेय के अणुओं की संख्या

प्रश्न 19.
एक आदर्श विलयन वह है जो –
(a) राउल्ट नियम से नकारात्मक विचलन प्रदर्शित करता है
(b) राउल्ट नियम से सकारात्मक विचलन प्रदर्शित करता है
(c) राउल्ट नियम से कोई सम्बन्ध नहीं रखता है
(d) राउल्ट नियम का पालन करता है।
उत्तर
(d) राउल्ट नियम का पालन करता है।

प्रश्न 20.
समान मोलरता वाले BaCl2 NaCl तथा ग्लूकोज विलयनों के परासरण दाब का क्रम होगा –
(a) BaCl2 > NaCl > ग्लूकोज
(b) NaCl> BaCl2 > ग्लूकोज
(c) ग्लूकोज > BaCl2 > NaCl
(d) ग्लूकोज > NaCl> BaCl2
उत्तर
(a) BaCl2 > NaCl > ग्लूकोज

प्रश्न 21.
किसी विलेय के उसके विलयन में 20 mol है तथा मोलों की पूर्ण संख्या 80 है। विलेय का मोल प्रभाज होगा
(a) 2.5
(b) 0.25
(c) 1
(d) 0.75.
उत्तर
(b) 0.25

प्रश्न 22.
एक विलयन में जल का मोल तथा एथेनॉल के मोल हैं। इसमें जल एवं एथेनॉल का एक मोल प्रभाज होगा –
(a) 0.2 जल + 0.8 एथेनॉल
(b) 0.4 जल + 0.6 एथेनॉल
(c) 0.6 जल + 0.4 एथेनॉल
(d) 0.8 जल + 0.2 एथेनॉल।
उत्तर
(a) 0.2 जल + 0.8 एथेनॉल

प्रश्न 23.
किसी घोल के अणुसंख्यक गुण आधारित हैं –
(a) विलायक की प्रकृति पर
(b) विलेय की प्रकृति पर
(c) विलेय के कणों की संख्या पर
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर
(c) विलेय के कणों की संख्या पर

प्रश्न 24.
शुद्ध जल की मोलरता है –
(a) 55.6
(b) 50
(c) 100
(d) 18.
उत्तर
(a) 55.6

प्रश्न 25.
निम्न में से कौन-सा अणुसंख्यक गुण धर्म नहीं है –
(a) परासरण दाब
(b) वाष्पदाब पर अवनमन
(c) हिमांक अवनमन
(d) क्वथनांक उन्नयन।
उत्तर
(b) वाष्पदाब पर अवनमन

प्रश्न 26.
परासरण दाब ज्ञात करने का सूत्र है
(a) \(\pi=\frac{n \mathrm{RT}}{m}\)
(b) \(\mathrm{P}=\frac{n \mathrm{RT}}{\mathrm{V} d}\)
(c)\( \pi=\frac{n \mathrm{RT}}{\mathrm{V}}\)
(d) \(P=\frac{R T}{V}\)
उत्तर
(c) \(\pi=\frac{n \mathrm{RT}}{\mathrm{V}}\)

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प्रश्न 27.
अणुसंख्यक के गुण के प्रेक्षित मान तथा अणुसंख्यक गुण के सैद्धान्तिक मान के अनुपात को कहते हैं –
(a) अणुसंख्यक गुण
(b) वाण्ट हॉफ गुणांक
(c) विलयन स्थिरांक
(d) विशिष्ट स्थिरांक।
उत्तर
(b) वाण्ट हॉफ गुणांक

प्रश्न 28.
निम्नलिखित में से कौन राउल्ट नियम से धनात्मक विचलन नहीं दर्शाता है –
(a) बेन्जीन-क्लोरोफॉर्म
(b) बेन्जीन-ऐसीटोन
(c) बेन्जीन-एथेनॉल
(d) बेन्जीन-CCl4
उत्तर
(d) बेन्जीन-CCl4

प्रश्न 29.
6 ग्राम यूरिया 180 ग्राम जल में उपस्थित है तो यूरिया का मोल प्रभाज होगा –
(a) \(\frac{10}{10-1}\)
(b) \(\frac{10-1}{10}\)
(c) \(\frac{0-1}{10-1}\)
(d) \(\frac{10-1}{0-1}\)
उत्तर
(c) \(\frac{0-1}{10-1}\)

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. विलयन में विलेय की सामान्य स्थिति दर्शाने वाले वाण्ट-हॉफ गुणांक का मान एक से ………. होगा।
  2. वाष्पदाब में आपेक्षिक अवनमन का व्यंजक ………. है।
  3. 1000gm विलायक में विलेय के मोलों की संख्या ……………….. कहलाती है।
  4. द्रव मिश्रण जो बिना संघटक परिवर्तन किये हुए उबलता है, उसे ………………….. कहते हैं।
  5. अर्द्धपारगम्य झिल्ली से केवल ………………….. के अणु पार हो सकते हैं।
  6. ऊँचे स्थानों पर जल का क्वथनांक घट जाता है, क्योंकि ऊँचे स्थलों पर वायुमण्डलीय दाब….. हो जाता है।
  7. जल की मोललता ……………… होती है।
  8. सोडा वाटर .. ………………… विलयन है।
  9. एक लीटर विलयन में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या ………….. कहलाती है।
  10. H2O+ C2H5OH का 95.4% अनआदर्श विलयन ………… विचलन दर्शाता है।

उत्तर

  1. बराबर
  2. \(\frac{P_{A}^{\circ}-P_{A}}{P_{A}^{\circ}}\)
  3. मोललता
  4. एजियोट्रॉपिक द्रव मिश्रण
  5. विलायक
  6. कम
  7. 55.6m
  8. गैस का द्रव में
  9. मोलरता
  10. धनात्मक।

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3. उचित संबंध जोडिए –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 36
उत्तर
1. (c), 2. (a), 3. (b), 4. (h), 5. (1), 6. (g), 7. (d), 8. (e)

4. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. नॉर्मलता व्यक्त करने का सूत्र लिखिए।
  2. मोललता का मात्रक क्या होता है ?
  3. वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन तथा विलेय का द्रव्यमान में संबंध बताने वाला सूत्र लिखिए।
  4. किसी भी तनु विलयन के वे गुणधर्म जो विलयन में उपस्थित विलेय की संख्या पर निर्भर करते हैं, क्या कहलाते हैं ?
  5. राउल्ट का नियम क्या है ?
  6. धनात्मक विचलन वाले अनादर्श विलयन का एक उदाहरण लिखिए।
  7. ऋणात्मक विचलन वाले अनादर्श विलयन का एक उदाहरण लिखिए।
  8. एण्टी फ्रिज यौगिक का एक उदाहरण दीजिए।
  9. प्रदूषण व्यक्त करने की इकाई लिखिए।
  10. न्यूनतम क्वथन स्थिर क्वाथी विलयन का एक उदाहरण लिखिए।

उत्तर

  1. MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 37
  2. मोल प्रति किलो ग्राम,
  3. \(\frac{\mathrm{P}_{\mathrm{A}}^{\mathrm{o}}-\mathrm{P}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{P}_{\mathrm{A}}^{\circ}}=\frac{\mathrm{W}_{\mathrm{B}}}{\mathrm{M}_{\mathrm{B}}} \times \frac{\mathrm{M}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{W}_{\mathrm{A}}}\)
  4. अणुसंख्यक गुणधर्म,
  5. निश्चित ताप या किसी अवाष्पशील विलेय वाले विलयन के लिए वाष्प दाब में आपेक्षिक द्रव्यमान विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है,
  6. CH3COCH3+ C6H6
  7. CHCl3 + CH3COCH3,
  8. एथिलीन,
  9. P.P.M.,
  10. 96-4C2H5OH + 4.5 H2O.

विलयन अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वाण्ट हॉफ घटक (i) को निर्धारित करने वाला सूत्र क्या है ?
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 38

प्रश्न 2.
वाण्ट हॉफ समीकरण लिखिए। इसकी सहायता से अणुभार ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर-
वाण्ट हॉफ समीकरण, πV =nRT
या \(\pi=\frac{n \mathrm{RT}}{\mathrm{V}}\)
या \(\pi=\frac{\mathrm{WRT}}{\mathrm{MV}} \) (∵ n =\(\frac{\mathrm{W}}{\mathrm{M}}\))
∴ M = \(\frac{\mathrm{WRT}}{\pi \mathrm{V}}\)

प्रश्न 3.
ऑक्जेलिक अम्ल (तुल्यांक भार = 63) के 6.3 ग्राम 500 मिली विलयन में घुले हैं। विलयन की नॉर्मलता ज्ञात कीजिए।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 39

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प्रश्न 4.
फॉर्मलता की परिभाषा एवं सूत्र लिखिए।
उत्तर
फॉर्मलता (Formality) – किसी भी विलेय के ग्राम सूत्र भार की संख्या जो एक लीटर विलायक में उपस्थित हो फॉर्मलता (F) कहलाती है। यह उस विलयन में प्रयुक्त होती है, जहाँ विलेय का संगुणन होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 40

प्रश्न 5.
NaOH के 4.0 ग्राम/लीटर सांद्रता वाले विलयन की मोलरता ज्ञात कीजिये।
हल
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 41

प्रश्न 6.
ऋणात्मक विचलन वाले विलयन के दो-दो उदाहरण लिखिए। .
CHCl3 +CH3COCH3, CHCl3 +C2H5OC2H5
CHCl3 +C6H6, CH3COOH+C6H5N
ऋणात्मक विचलन प्रदर्शित करने वाले कारक हैं।

प्रश्न 7.
धनात्मक विचलन प्रदर्शित करने वाले अनादर्श विलयन के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर
धनात्मक विचलन प्रदर्शित करने वाले अनादर्श विलयन –
(i) CCl4 और CHCl3, का मिश्रण,
(ii) CCI और CH6CH3 (टॉलुईन) का मिश्रण।

प्रश्न 8.
नॉर्मलता की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-नॉर्मलता (Normality)—“किसी विलयन की नॉर्मलता उसके एक लीटर विलयन में उपस्थित विलेय के ग्राम-तुल्यांकों की संख्या है।” इसे N द्वारा दर्शाते हैं। यदि किसी विलयन के एक लीटर में विलेय पदार्थ का एक ग्राम-तुल्यांक विलेय हो, तो उस विलयन की नॉर्मलता 1 N होगी। उसी प्रकार यदि किसी विलयन के 1 लीटर में 0.5 ग्राम-तुल्यांक विलेय पदार्थ विलेय हो, तो उसकी नॉर्मलता 0.5 N होगी।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 42

प्रश्न 9.
यदि NaOH की 2 ग्राम मात्रा 250 मिली विलयन में उपस्थित है, तो विलयन की नॉर्मलता ज्ञात कीजिए।
उत्तर
NaOH का तुल्यांकी भार = 40
250 ml विलयन में उपस्थित
NaOH की मात्रा = 2 ग्राम
∴ 1000 ml विलयन में उपस्थित
NaOH = \(\frac{2 \times 1000}{250}\) = 8 ग्राम
अतः . NaOH ग्राम/ ली. सांद्रता = 8 ग्राम
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 43

प्रश्न 10.
मोलरता व मोललता में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
मोलरता तथा मोललता में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 44

प्रश्न 11.
पार्ट्स प्रति मिलियन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर
पार्ट्स प्रति मिलियन (ppm) – जब विलयन में विलेय का सान्द्रण बहुत कम हो तब इस इकाई का प्रयोग करते हैं। अंश या भाग आयतन या द्रव्यमान के रूप में हो सकते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 45

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प्रश्न 12.
विसरण और परासरण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
विसरण और परासरण में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 46

प्रश्न 13.
ऋणात्मक विचलन प्रदर्शित करने वाले अनादर्श विलयन के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर
(i) ऐसीटोन और क्लोरोफॉर्म
(ii) जल और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल।

प्रश्न 14.
विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्म किस कारक पर निर्भर करते हैं ?
उत्तर
विलयन के अणुसंख्यक, विलयन में उपस्थित विलेय के अणुओं की संख्या पर निर्भर करते हैं।

प्रश्न 15.
संक्रमण ताप किसे कहते हैं ?
उत्तर
वह ताप जिस पर विलेयता की प्रकृति परिवर्तित होती है (उदाहरण-पहले बढ़ती है, फिर घटती है) संक्रमण ताप कहलाता है। सोडियम सल्फेट की जल में विलेयता 32.4 तक बढ़ती है, उसके बाद घटने लगती है। अत: 32.4°C सोडियम सल्फेट का संक्रमण ताप कहलाता है।

प्रश्न 16.
एक ऐसे ठोस विलयन का उदाहरण दीजिए, जिसमें विलेय कोई गैस है।
उत्तर-पैलेडियम (विलायक) में हाइड्रोजन (विलेय) का विलयन।।

प्रश्न 17.
ठण्डे देशों में सड़कों पर जमी बर्फ को हटाने के लिए CaCl2 का उपयोग किया जाता है। क्यों?
उत्तर
सड़कों पर जमे बर्फ पर CaCl2 या NaCl छिड़कने से जल का क्वथनांक कम हो जाता है। जिससे बर्फ पिघल जाता है एवं सड़कों पर जमी बर्फ साफ हो जाती है।

विलयन लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राउल्ट का नियम क्या है ?
उत्तर
राउल्ट के नियमानुसार “ स्थिर ताप पर वाष्पदाब में आपेक्षिक अवनमन, विलयन में उपस्थित विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है।”
गणितीय रूप में, \(\frac{P_{A}^{\circ}-P_{A}}{P_{A}^{\circ}}=X_{B}\)
जहाँ, \(\mathrm{P}_{\mathrm{A}}^{\circ}\) = शुद्ध विलायक का वाष्पदाब ,
PA= विलयन में उपस्थित विलायक का वाष्पदाब
XB = विलेय का मोल प्रभाज।

प्रश्न 2.
स्थिरक्वाथी मिश्रण (Azeotropes) किसे कहते हैं ? ये कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर
स्थिर क्वाथी मिश्रण (Azeotropes)—ऐसे विलयन, जो बिना संघटन के परिवर्तन के एक ही ताप पर आसवित हो जाते हैं। स्थिर क्वथनांक या स्थिर क्वाथी मिश्रण कहलाता है। 95.6% एल्कोहॉल और 4.4% जल का मिश्रण स्थिर क्वाथी मिश्रण का उदाहरण है, जो 78.13°C पर उबलता है। स्थिर क्वाथी मिश्रण के अवयवों को आसवन द्वारा पृथक् नहीं किया जा सकता।
स्थिर क्वाथी दो प्रकार के होते हैं –
(i) निम्न क्वथन स्थिर क्वाथी मिश्रण-ऐसे विलयन, जो राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन प्रदर्शित करते हैं अर्थात् इनका वाष्पदाब उच्च होता है। अतः इनका क्वथनांक कम होता है।
उदाहरण – एसीटोन + CS2,C2H5 OH + n-hexane
(ii) उच्च क्वथन स्थिर क्वाथी मिश्रण-वे विलयन जो राउल्ट के नियम से ऋणात्मक विचलन प्रदर्शित करते हैं, उनका वाष्पदाब अपेक्षाकृत कम व क्वथनांक उच्च होता है। उदाहरण – एसीटोन + क्लोरोफॉर्म, ईथर + क्लोरोफॉर्म।

प्रश्न 3.
क्वथनांक के उन्नयन तथा आण्विक द्रव्यमान में सम्बन्ध दीजिए।
उत्तर
क्वथनांक के उन्नयन तथा आण्विक द्रव्यमान में सम्बन्ध-मानलो WB ग्राम अवाष्पशील विलेय WA ग्राम विलायक में घुला है तथा विलेय का मोलर द्रव्यमान MB ग्राम है।
अतः मोललता m =\(\frac{\mathrm{W}_{\mathrm{A}} / \mathrm{M}_{\mathrm{B}} \times 1000}{\mathrm{W}_{\mathrm{A}}}\) ……………..(1)
किसी अवाष्पशील विलेय के लिए,
ΔTb= Kb.m …………….(2)
समी. (1) एवं (2) से,
ΔTb = \(\frac{\mathrm{K}_{b} \times \mathrm{W}_{\mathrm{B}} \times 1000}{\mathrm{M}_{\mathrm{B}} \times \mathrm{W}_{\mathrm{A}}}\) …………..(3)
Mb = \(\frac{\mathrm{K}_{b} \times \mathrm{W}_{\mathrm{B}} \times 1000}{\Delta \mathrm{T}_{b} \times \mathrm{W}_{\mathrm{A}}}\) …………..(4)

प्रश्न 4.
वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन से विलेय का आण्विक द्रव्यमान ज्ञात करने हेतु सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर
वाष्पदाब में आपेक्षिक अवनमन से अवाष्पशील विलेय के आण्विक द्रव्यमान की गणनाहम जानते हैं कि जब किसी द्रव में कोई अवाष्पशील विलेय मिलाया जाता है, तब वाष्पदाब में अवनमन (P-P) होता है। राउल्ट के नियमानुसार, विलेय को विलायक में मिलाने पर वाष्पदाब में आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है। |
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 47
यदि nA और nB क्रमशः विलायक और विलेय के मोलों की संख्याएँ, WA और nB क्रमशः विलायक और विलेय के द्रव्यमान तथा MA और nb क्रमश: विलायक और विलेय के आण्विक द्रव्यमान हों तो,
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 48
समीकरण (1), (3) और (4) के आधार पर वाष्पदाब में आपेक्षिक अवनमन सम्बन्धी गणनाएँ की जाती हैं।

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प्रश्न 5.
आदर्श और अनादर्श विलयन किसे कहते हैं ? उदाहरण देकर समझाइये।
उत्तर
आदर्श विलयन-आदर्श विलयन ऐने विलयन को कहते हैं, जिस पर राउल्ट का नियम विलयन की सभी सान्द्रताओं तथा सभी ताप की स्थिति में पूर्ण रूप से लागू होता है।
आदर्श विलयन बनाने की शर्ते इस प्रकार हैं –
(i) ΔVmixing = 0 (ii) ΔHmixing = 0.
उदाहरण – C2H5Br+C2H5Cl.
अनादर्श विलयन-अनादर्श विलयन ऐसे विलयन हैं, जिन पर राउल्ट का नियम विलयन की सभी सान्द्रताओं तथा तापों की स्थिति में पूर्ण रूप से लागू नहीं होता है।
इन विलयनों के लिए ΔVmixing # 0 एवं ΔHmixing # 0 होता है।
उदाहरण – बेंजीन + ऐसीटोन।

प्रश्न 6.
विसरण व परासरण में अन्तर लिखिए।
उत्तर
विसरण और परासरण में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 49

प्रश्न 7.
विलयनों के अणुसंख्यक गुणों के चार उदाहरण लिखिये।
उत्तर
विलयन के ऐसे भौतिक गुण जो विलयन के एक निश्चित आयतन में घुले हुए विलेय के कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, अणुसंख्यक गुण-धर्म कहलाते हैं । ये निम्न हैं –
1. वाष्प दाब में अवनमन ।
2. क्वथनांक में उन्नयन ।
3.. हिमांक का अवनमन ।
4. परासरण दाब ।
सभी अणुसंख्यक गुणों के मान विलेय के सान्द्रण में वृद्धि के साथ बढ़ते हैं तथा सान्द्रण में कमी के साथ घटते हैं ।

प्रश्न 8.
वाण्ट हॉफ विलयन समीकरण स्थापित कीजिए।
उत्तर- “किसी अवाष्पशील विलेय के तनु विलयन का परासरण दाब (π), विलयन के परमताप (T) के समानुपाती होता है, जब विलयन का सान्द्रण (C) स्थिर हो।” इसे वाण्ट हॉफ नियम कहते हैं।
π ∝ T (C स्थिर है) …………(1)
व्युत्पत्ति – π परासरण दाब विलयन के मोलर सान्द्रण (C) के समानुपाती होता है।
(2)
∴ π ↓∝ C(T स्थिर है)
समी. (1) एवं समीकरण (2) से,
π ∝ CT
या π = CRT (वाण्ट हॉफ समीकरण) …………(3)
जहाँ, R = गैस स्थिरांक
c = \(\frac{1}{\mathrm{V}}\)
π = \(\frac{\mathrm{RT}}{\mathrm{V}}\)………………….(4)
या
πV = RT…………………….(5)
इसे वाण्ट हॉफ आदर्श विलयन समीकरण कहते हैं।

प्रश्न 9.
निम्न को समझाइए (1) मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक, (2) मोलल क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक।
उत्तर
(1) मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक-किसी विलयन का मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक, विलयन के हिमांक में उस कमी के बराबर है, जो एक मोल अवाष्पशील विलेय को 1000 ग्राम विलायक में विलेय करने पर प्राप्त होता है।
∴ हिमांक में अवनमन ΔTf ∝ m
ΔTf = kf × m
यदि m = 1
तो ΔTf = kf
जहाँ, kf मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक है।

(2) मोलल क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक-किसी विलयन का मोलल क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक, विलयन के क्वथनांक में हुई उस वृद्धि के बराबर होता है, जो एक मोल अवाष्पशील पदार्थ को 1000 ग्राम विलायक में विलेय करने पर प्राप्त होता है।
क्वथनांक में उन्नयन ΔTb∝ m
ΔTb = kb × m
यदि m = 1
तो ΔTb = kb
जहाँ, kb मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक है।

प्रश्न 10.
(a) परासरण दाब क्या है ?
(b) यूरिया के एक लीटर विलयन में 6 gm यूरिया घुला है। 300 K पर यूरिया के उस विलयन का परासरण दाब ज्ञात कीजिए।(R = 0.0821 L/Atm-1mol-1) (यूरिया का अणुभार = 60)
उत्तर
(a) परासरण दाब-किसी विलयन को विलायक से अर्द्धपारगम्य झिल्ली द्वारा अलग रखने पर परासरण को रोकने के लिए विलयन पर कम-से-कम जो बाहरी दाब लगाना पड़ता है, वह विलयन का परासरण दाब कहलाता है। परासरण दाब को π से दर्शाते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 50

(b) हल – wB = विलेय का द्रव्यमान = 6 gm
R = विलयन का स्थिरांक = 0 . 0821 L/Atm-1mol-1
T = परम ताप = 300K
MB = विलेय का आण्विक द्रव्यमान = 60 gm
V = 1. OL
∴\(\pi=\frac{\mathrm{W}_{\mathrm{B}} \mathrm{RT}}{\mathrm{M}_{\mathrm{B}} \times \mathrm{V}}\)

= \(\frac{6 \times 0 \cdot 0821 \times 300}{60 \times 1 \cdot 0}\)
= 2.463 वायुमण्डल।

विलयन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
स्थिर क्वाथी मिश्रण किसे कहते हैं ? आदर्श विलयन एवं अनादर्श विलयन में तीन अंतर लिखिए।
उत्तर
स्थिरक्वाथी मिश्रण-द्रवों का ऐसा मिश्रण जो एक निश्चित ताप पर बिना संघटन बदले उसी ताप पर आसवित होता है, स्थिरक्वाथी मिश्रण कहलाता है।
आदर्श विलयन एवं अनादर्श विलयन में अंतरक –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 51

प्रश्न 2.
(a) हिमांक अवनमन से क्या तात्पर्य है ?
(b) 100gm जल में 1gm NaCl विलेय कर एक विलयन बनाया गया है।जल का मोलल अवनमन स्थिरांक 1.8544gm moL-1हो, तो NaCl के वियोजन की मात्रा ज्ञात कीजिए। NaCl विलयन के लिए हिमांक में अवनमन 0.6044 है।
उत्तर
(a) हिमांक अवनमन-किसी पदार्थ का हिमांक वह ताप है, जिस पर उसकी ठोस तथा द्रव अवस्थाओं के वाष्पदाब समान होते हैं। चूँकि विलयन का वाष्प दाब विलायक के वाष्प दाब से कम होता है, जिसके कारण विलयन का हिमांक शुद्ध विलायक के हिमांक से कम हो जाता है, इसे हिमांक में अवनमन कहते हैं।
(b) NaCl के प्रेक्षित आण्विक द्रव्यमान की गणना निम्नलिखित सूत्र से की जाती है –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 52
अतः प्रेक्षित आण्विक द्रव्यमान (Observed molecular mass) = 30.6
सोडियम क्लोराइड का सामान्य आण्विक द्रव्यमान = 58.5
माना NaCl के वियोजन की मात्रा α है (अर्थात् 1 मोल NaCl में से α मोल वियोजित होता है)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 53

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प्रश्न 3.
धनात्मक विचलन वाले विलयन व ऋणात्मक विचलन वाले विलयन में पाँच अंतर लिखिए।
उत्तर
धनात्मक विचलन वाले विलयन व ऋणात्मक विचलन वाले विलयन में अंतर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 54

प्रश्न 4.
परासरण दाब मापन की बर्कले एवं हार्टले विधि का संक्षिप्त वर्णन कीजिए तथा इस विधि के लाभ बताइये।
उत्तर
बर्कले औरहार्टले की विधि (Berkley and Hartley Method)-उपकरण में दो समकेन्द्रिक नलियाँ होती हैं, जिनमें भीतरी नली संरन्ध्र होती है। भीतरी संरन्ध्र नली पर विद्युत् विधि से कॉपर फेरोसायनाइड की अर्द्धपारगम्य झिल्ली बना दी जाती है। इसके एक सिरे पर केशिका नली (Capillary tube) तथा दूसरे सिरे पर टोंटीदार कीप लगाते हैं। संरन्ध्र नली को घेरे हुए गन मेटल की बनी बाहरी नली होती है। इसमें जलरोधक पिस्टन लगा होता है. जिससे विलयन की सतह पर दाब डाला जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन - 55

भीतरी नली में आसुत जल भर दिया जाता है, जो केशिका नली में एक निशान तक होता है। बाहरी नली में वह विलयन भरते हैं, जिसका परासरण दाब ज्ञात करना होता है । परासरण के कारण भीतरी नली से झिल्ली द्वारा जल का प्रवाह विलयन की ओर होता है और केशिका नली में जल-स्तर नीचे आने लगता है। अब पिस्टन द्वारा विलयन पर दाब डालकर केशिका नली में जल-स्तर पूर्व निशान पर स्थिर रखा जाता है। स्थायी स्थिति आने पर पिस्टन द्वारा, जो दाब लगाया जाता है वह विलयन का परासरण दाब होता है।

लाभ – इस विधि के निम्नांकित लाभ हैं –
(i) परासरण दाब निकालने में समय कम लगता है।
(ii) विलयन की सान्द्रता न बदलने से परिणाम सही मिलते हैं।
(iii) अर्द्धपारगम्य झिल्ली पर अधिक दाब न पड़ने से वह टूटती नहीं।
(iv) उच्च परासरण दाब का मापन किया जा सकता है।

प्रश्न 5.
फीनॉल को बेन्जीन में घोलने पर उसके दो अणु संगुणित होकर एक बड़ा अणु बना लेते हैं। जब 2gm फीनॉल को 100gm बेन्जीन में घोला जाता है, तब हिमांक में 0.69°C की कमी होती है। फीनॉल की संगुणन की मात्रा ज्ञात कीजिए। (Kb = 5.12 g mol-1)
उत्तर
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या
\(\frac{94}{1484}\)=\(\frac{1-\frac{x}{2}}{1}\)
0.63 =1 – 1-\(\frac{x}{2}\)
0.63 = \( \frac{2-x}{2}\)
0.63 × 2 = 2 – x
1.26 =2 – x
x = 2 – 1.26
संगुणन की मात्रा = 0.74
संगुणन की % मात्रा = 74%.

प्रश्न 6.
वाण्ट हॉफ गुणांक से आप क्या समझते हैं ? इसकी उपयोगिता को लिखिए।
उत्तर
वाण्ट हॉफ गुणांक (Van’t Hoff’s Factor)-विलयन में विलेय के अणुओं का संगुणन या वियोजन होने पर विलेय के आण्विक द्रव्यमान के सामान्य मान और प्रेक्षित मान का अनुपात वाण्ट हॉफ गुणांक कहलाता है। इसे । से प्रदर्शित करते हैं।
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विलयन में विलेय के अणुओं का संगुणन होने पर कणों की प्रभावी संख्या कम हो जाती है एवं वियोजन होने पर कणों की प्रभावी संख्या बढ़ जाती है। चूंकि अणुसंख्यक गुण विलयन में प्रभावी कणों की वास्तविक संख्या पर आधारित है तथा आण्विक द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती है, अतः प्रेक्षित मान संगुणन या वियोजन होने पर सामान्य मानों से क्रमशः अधिक या कम होते हैं । वाण्ट हॉफ गुणांक i द्वारा अणुसंख्यक गुणों के समीकरण संशोधित कर लिये जाते हैं, जिनसे विलेय का सही आण्विक द्रव्यमान प्राप्त होता है।

क्वथनांक में उन्नयन ΔTb = iKbm
हिमांक का अवनमन ΔTf = iKfm
परासरण दाब
π = iCRT

i के मान से संगुणन की कोटि एवं वियोजन की मात्रा ज्ञात करने में सहायता मिलती है। का मान –
(a) एक हो तो अणुओं का संगुणन या वियोजन न होना प्रदर्शित होता है।
(b) एक से कम हो तो अणुओं का संगुणन होता है, जैसे-बेंजीन में बेंजोइक अम्ल का विलयन।
(c) एक से अधिक हो तो अणुओं का वियोजन होता है, जैसे-जल में NaCl का विलयन ।
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प्रश्न 7.
असामान्य अणुसंख्यक गुणों के मान असामान्य होने के कारण आण्विक द्रव्यमान असामान्य होते हैं,,कारण लिखिए।
उत्तर
इसके प्रमुख दो कारण हैं(1) विलेय के अणुओं का संगुणन, (2) विलेय के अणुओं का वियोजन।
(1) विलेय के अणुओं का संगुणन-किसी भी विलेय को विलायक में विलेय करने पर उसका संगुणन हो जाता है, तो विलयन में विलेय के कणों की संख्या सामान्य रूप में प्राप्त होने वाले अणुओं की संख्या से कम हो जाती है। इसके कारण अणुसंख्यक गुणों के मान कम प्राप्त होते हैं । इस प्रकार आण्विक द्रव्यमान की गणना करने पर प्राप्त मान विलेय के सामान्य आण्विक द्रव्यमान से अधिक होता है क्योंकि हम जानते हैं कि अणुसंख्यक गुण विलेय के आण्विक द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है। एसीटिक अम्ल एवं बेंजीन का उदाहरण ले तो हम पायेंगे कि एसीटिक अम्ल को बेंजीन में विलेय करने पर उसका आण्विक द्रव्यमान 120 प्राप्त होगा जबकि सामान्य आण्विक द्रव्यमान 60 है।
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(2) विलेय के अणुओं का वियोजन-कुछ विद्युत्-अपघट्य पदार्थ जैसे-BaCI, KCI आदि के विलयन में उनके अणुओं का दो या दो से अधिक कण जो आयन के रूप में विद्यमान है का वियोजन होता है। जिससे विद्युत्-अपघट्य पदार्थों के विलयनों में कणों या आयनों की संख्या विलेय के अणुओं की संभावित संख्या से अधिक हो जाती है। इस प्रकार ऐसे विलयनों के लिए अणुसंख्यक का मान अधिक मिलेगा जैसा कि हम जानते हैं अणुसंख्यक गुण आण्विक द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं। इस प्रकार ऐसे यौगिकों के लिए अणुसंख्यक गुण के आधार पर ज्ञात किए आण्विक द्रव्यमान के मान सामान्य आण्विक द्रव्यमान के मान से हमेशा कम ही होते हैं।
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि विलेय के संगुणन या वियोजन के कारण पदार्थ के प्रेक्षित आण्विक द्रव्यमान सामान्य आण्विक द्रव्यमान से अधिक या कम होते हैं।

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प्रश्न 8.
मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक क्या है? एक जलीय विलयन का हिमांक -0.385°C है यदि
Kf = 3.85 Kkg mol-1
तथा
kb = 0.712 Kgmol-1
हो, तो इसके क्वथनांक में उन्नयन ज्ञात कीजिए।
उत्तर
मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक – 1 ग्राम विलेय पदार्थ को 1000 ग्राम विलायक में घोलने पर विलयन के हिमांक में जो कमी होती है, उसे मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक कहते हैं। इसे Kf से दर्शाते हैं।
दिया है-विलयन का हिमांक = 0.385°C
∴ ΔTf = T1 – T2
=0 – (-0.385)
= 0.385°C Kg = 3.85 K Kgmol-1
Kb = 0.712 K Kgmol-1
मोललता m=\(\frac{\Delta \mathrm{T}_{f}}{\mathrm{K}_{f}}\) = \(\frac{0.385}{3.85}\) =0.1
क्वथनांक में उन्नयन = ΔTb
ΔTb=Kb× m .
= 0.712 × 0-1
= 00712°C.

प्रश्न 9.
क्वथनांक में उन्नयन क्या है ? अवाष्पशील पदार्थ के मिलाने से विलयन का क्वथनांक क्यों बढ़ जाता है ? ग्राफ की सहायता से समझाइये।
उत्तर
क्वथनांक में उन्नयन-“किसी द्रव का क्वथनांक वह ताप है, जिस पर उसके वाष्पदाब का मान वायुमण्डलीय दाब के बराबर हो जाता है।”
हमें यह भी ज्ञात है कि किसी विलयन का वाष्पदाब शुद्ध विलायक के वाष्पदाब से कम होता है। अत: वह ताप जिस पर किसी विलयन का वाष्पदाब वायुमण्डलीय दाब के बराबर हो जाता है (अर्थात् विलयन का क्वथनांक), उस ताप से अधिक होगा जिस पर शुद्ध विलायक का F वाष्पदाब वायुमण्डलीय दाब के बराबर हो जाता है (अर्थात् शुद्ध विलायक का क्वथनांक)। कहने का तात्पर्य यह है कि शुद्ध विलायक में कोई विलेय मिला देने पर उसका क्वथनांक बढ़ जाता है।

Tb, , का मान \(\mathrm{T}_{b}^{\circ}\) के मान से अधिक है, अतः विलयन का क्वथनांक विलायक के क्वथनांक से अधिक है। दूसरे शब्दों में, शुद्ध विलायक की अपेक्षा विलयन उच्च ताप पर उबलता है। अतः विलेय को विलायक में घोलने से उसके क्वथनांक में होने वाली वृद्धि को क्वथनांक का उन्नयन (Elevation of boiling point) कहते हैं । उसे ΔTb, से प्रदर्शित करते हैं, अतः \(\Delta \mathrm{T}_{b}=\mathrm{T}_{b}-\mathrm{T}_{b}^{0}\)
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प्रश्न 10.
सिद्ध कीजिए कि किसी विलयन का आपेक्षिक वाष्पदाब अवनमन, विलयन में उपस्थित विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है।
अथवा
राउल्ट का नियम क्या है ? इसका गणितीय स्वरूप स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
राउल्ट का नियम (अवाष्पशील विलेय के लिए)-जब किसी वाष्पशील द्रव में कोई अवाष्पशील विलेय मिला दिया जाये तो विलायक का वाष्पदाब कम हो जाता है। विलयन में उपस्थित विलायक का वाष्पदाब विलयन में विलायक के मोल प्रभाज के समानुपाती होता है।
व्यंजक प्राप्त करना – चूँकि विलयन में उपस्थित विलेय अवाष्पशील है, अतः विलयन का वाष्पदाब (P), विलयन में विलायक के वाष्पदाब (PA) के बराबर होगा। अतः
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आधार पर राउल्ट नियम की दूसरी परिभाषा दी जा सकती है, जिसके अनुसार –

अवाष्पशील विलेय वाले विलयन के लिए किसी निश्चित ताप पर वाष्पदाब में आपेक्षिक अवनमन विलयन में विलेय के मोल प्रभाज के बराबर होता है।
समीकरण (8) से स्पष्ट है कि वाष्पदाब में आपेक्षिक अवनमन का मान विलेय के मोलर सान्द्रण पर निर्भर करता है, विलेय की प्रकृति पर नहीं, अत: वाष्पदाब में आपेक्षिक अवनमन एक अणुसंख्यक गुण है।

प्रश्न 11.
मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक क्या है ? मोलल हिमांक अवनमन में संबंध प्रदर्शित करने के लिए सूत्र की व्युत्पत्ति कीजिए।
अथवा हिमांक अवनमन क्या है ? इसका विलेय के आण्विक द्रव्यमान के साथ सम्बन्ध स्थापित कीजिये।
उत्तर
किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय पदार्थ मिलाने पर प्राप्त विलयन का वाष्प दाब शुद्ध विलायक के वाष्प दाब से कम होता है, जिसके कारण हिमांक ताप में कमी आ जाती है अर्थात् वाष्प दाब अवनमन के कारण विलयन का हिमांक शुद्ध विलायक के हिमांक से कम हो जाता है। इस प्रकार, विलायक और विलयन के हिमांकों का अन्तर हिमांक का अवनमन (ΔT<sub<f) कहलाता है।

हिमांक में अवनमन द्वारा विलेय का आण्विक द्रव्यमान ज्ञात करना-हिमांक में अवनमन (ΔT<sub<f) का प्रायोगिक निर्धारण करके अवाष्पशील विलेय का आण्विक द्रव्यमान ज्ञात किया जा सकता है। . किसी अवाष्पशील विलेय के विलयन के लिए,
ΔTf = Kf× m ……………(1)
मानलो WB ग्राम अवाष्पशील विलेय WA ग्राम विलायक में घुला है तथा विलेय का आण्विक (मोलर) द्रव्यमान MB ग्राम है।
atah
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समीकरण (4) से शेष अन्य राशियों के मान ज्ञात होने पर विलेय के आण्विक द्रव्यमान M की गणना की जा सकती है।

विलयन आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
सोडियम कार्बोनेट के 1.325 ग्राम 250 ml विलयन में विलेय है। विलयन की सन्दता ग्राम / लीटर में ज्ञात कीजिए ।
हल
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Na2CO3 का भार = 1.325 ग्राम .
विलयन का आयतन = 250 ml
सोडियम कार्बोनेट की ग्राम प्रति लीटर सान्द्रता =\(\frac{1 \cdot 325}{250} \times 1000\) = 5.3 ml

प्रश्न 2.
4gm कॉस्टिक सोडा (NaOH) 500 ml जलीय विलयन में घुले हैं। घोल की नॉर्मलता ज्ञात कीजिए।
हल
जबकि 500 ml विलयन में 4 gm NaOH घुला है।
∴ 1000 ml में \(\frac{4 \times 1000}{500}=8 \mathrm{gm}\)
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= \(\frac { 8 }{ 40 }\)

= \(\frac { 1 }{ 5 }\) = 0.2N.

प्रश्न 3.
ग्लूकोज के 5% विलयन के 25°C पर परासरण दाब की गणना कीजिए। ग्लूकोज का आण्विक द्रव्यमान = 180, R = 0.0821 लीटर वायुमण्डल।
हल- ∵ 5 ग्राम ग्लूकोज 100 मिली में घुला है
∴ 180 ग्राम ग्लूकोज होगा \(\frac{100}{5} \times 180\) = 3600 लीटर
= 3.6 लीटर में
हम जानते हैं, PV = RT
∴P × 3.6 = 0.0821 × (25 + 273) = 0.0821 × 298
या
P = \(\frac{0.0821 \times 298}{3.6}\) = 6.80 वायुमण्डल।

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प्रश्न 4.
12.5 ग्राम यूरिया के 170 ग्राम जल में विलयन के क्वथनांक में उन्नयन 0.63 K पाया गया है। जल के लिये Kb = 0.52 Km-1 है, तो यूरिया के आण्विक द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
उत्तर
हल-
सूत्र- MB = \(\mathrm{K}_{b} \times \frac{\mathrm{W}_{\mathrm{B}} \times 1000}{\Delta \mathrm{T}_{b} \times \mathrm{W}_{\mathrm{A}}}\)

दिया है, WA = 170 gm, WB = 12.5 gm, ΔTb= 0.63 K, Kb= 0.52 Km-1 सूत्र में मान रखने पर,

MB = \(\frac{0 \cdot 52 \times 12 \cdot 5 \times 1000}{0 \cdot 63 \times 170}\)
= 60.7 gm mol-1.

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MP Board Class 12th Hindi Swati Solutions गद्य Chapter 5 तिमिर गेह में किरण आचरण

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MP Board Class 12th Hindi Swati Solutions गद्य Chapter 5 तिमिर गेह में किरण आचरण (ललित निबंध, डॉ. श्यामसुन्दर दुबे)

तिमिर गेह में किरण आचरण अभ्यास

तिमिर गेह में किरण आचरण अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक का बचपन कहाँ गुम हो गया है? (2016)
उत्तर:
पुराने घर की जर्जर दीवारों में ही लेखक का बचपन गुम हो गया है।

प्रश्न 2.
गाँव की संध्या में पूजा भाव किन ध्वनियों में प्रकट होता है?
उत्तर:
गाँव की संध्या में पूजा भाव घण्टियों की टनटनाहट और शंख घड़ियालों की मिली-जुली स्वर लहरी में स्पंदित होकर प्रकट होता है।

प्रश्न 3.
खेत में किस चीज को ढूंढ़ लेना परम सुख की प्राप्ति जैसा था?
उत्तर:
खेत में एक पकी कचरिया को ढूँढ़ लेना ही परम सुख की प्राप्ति थी।

प्रश्न 4.
घर खुलते ही लेखक को कैसा लगने लगा था?
उत्तर:
घर खुलते ही लेखक को लगा जैसे ताले के साथ ही उनके भीतर कुछ स्मृतियाँ खुलती जा रही थीं।

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तिमिर गेह में किरण आचरण लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बचपन के अनुभव, स्मृति में क्यों स्थायी होते हैं?
उत्तर:
बचपन के खरे और करारे अनुभव ताजी और पहलौटी अनुभूति के कारण स्मृति में सदैव घर किये रहते हैं। धीरे-धीरे मन का पानी उतर जाता है। मन स्वाद के बारे में रसहीन हो जाता है, हम जड़ होते जाते हैं। केवल बचपन की वस्तुओं से टकराकर ही हम उस सुख-बिन्दु की स्थायी स्मृति में आ जाते हैं।

प्रश्न 2.
उन तीन पारम्परिक चीजों के नाम लिखिए जो गाँव के जीवन से गायब हो रही (2009)
उत्तर:
गाँव के जीवन से अनेक पारम्परिक चीजें गायब हो रही हैं, जिनमें से तीन निम्नलिखित हैं-

  1. हलों के साथ टिप्पे की टिटकारें।
  2. तालाब जैसे भरे बंधान।
  3. टिमटिमाते दीयों की रोशनी।

प्रश्न 3.
आले में गेहूँ के दानों के अंकुरित होने को लेखक ने किस प्रेरणा से जोड़ा है?
उत्तर:
आले में गेहूँ के दानों के अंकुरित होने को लेखक ने जीवन की सृजनात्मक प्रेरणा से जोड़ा है। सृजन का प्रकाश ही जीवन का दूसरा नाम है। आदमी का आचरण, शील,श्रम, विवेक और भावना जिसे छू लें, वह प्रकाशित हो जाता है। यह प्रकाशवान सृजन कभी रुकता नहीं। सृजन दीपक के प्रकाश के समान स्वयं भी प्रकाशित होता है और दूसरों को भी प्रकाशित करता है।

तिमिर गेह में किरण आचरण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक ने जीवन में प्रकाश को किन-किन सन्दर्भो में प्रकट किया है?
उत्तर:
ललित निबन्ध शैली में लिखे गये प्रस्तुत निबन्ध ‘तिमिर गेह में किरण आचरण’ में लेखक ने आचरण को जीवन के दीपक का प्रकाश बताते हुए अनेक सन्दर्भो में प्रस्तुत किया है। प्रकाश दीपक या बल्ब का ही नहीं, ज्ञान व विकास का प्रकाश भी जीवन में अनिवार्य है। आगे बताया गया है कि प्राकृतिक प्रकाश से भी अधिक शक्तिशाली होता है,स्मृतियों का प्रकाश, जो क्षणिक दुःख में सुख का आभास कराता है। सृजन व निर्झर भी प्रकाश के प्रतीक हैं जो जीवन को विकास व ऊर्ध्वगमन की शक्ति देते हैं। आस्था भी प्रकाश का ही एक रूप है,जो आत्मा को मजबूत करती है। सद् आचरण, शील, श्रम, विवेक, सत्य, ईमानदारी, कर्मठता सब जीवन में प्रकाश के रूप हैं। लेखक कहता है कि प्रकाश जीवन का ही दूसरा नाम है। एकांकी और वीराने में भी व्यक्ति चारित्रिक प्रकाश का आनन्द अनुभव करता है। प्रकाशित व्यक्ति जब दूसरों को छूता है, तो दूसरा व्यक्ति भी प्रकाशित, यानि ज्ञानवान् व सुखी हो जाता है।

प्रश्न 2.
स्वयं प्रकाशित होकर दूसरों को प्रकाशित करने की क्षमता मनुष्य में किन विशेषताओं से आती है?
उत्तर:
जीवन सरल नहीं होता है। इसमें अनेक मुसीबतें, कठिनाइयाँ, दुःख, रुकावटें, आपत्तियाँ आती रहती हैं। जो व्यक्ति जीवन के असली प्रकाश को अपने में जाग्रत कर लेता है-अर्थात् सृजन का प्रकाश भर लेता है, वह बड़े-बड़े अँधेरों को तराशकर प्रकाश निर्झर से धरती की प्यास बुझा देता है। सृजन का विकास उन्हीं व्यक्तियों में प्रकाशित होता है। जो आचरणवान, शीलवान, ईमानदार,सत्यवादी,परिश्रमी, विवेकी, दूसरों की भावनाओं को छूने वाले होते हैं। साथ ही वे आस्थावान तथा निष्ठावान भी होते हैं। वे अकेले और वीराने में भी सृजन की भावना से आश्वस्त होते हैं। ऐसे व्यक्ति स्वयं तो प्रकाशित होते ही हैं, जिनको वे छू देते हैं, वे भी प्रकाशित हो जाते हैं, जिनमें सृजन की भावना नहीं है, उनमें भी सृजन का मन्त्र फूंक देते हैं। दीपकों की पंक्तियाँ प्रकाशित होकर दीपावली मनाने लगती हैं। श्रेष्ठ व चरित्रवान गुणों वाले व्यक्ति में ही सृजन का प्रकाश जागता है, तब ही वह स्वयं प्रकाशित होकर दूसरों को प्रकाशित करने की क्षमता रखता है।

प्रश्न 3.
लेखक को अपने गाँव लौटने पर क्या-क्या परिवर्तन दिखाई दिए?
उत्तर:
लेखक को अपने गाँव लौटने पर गाँव में अप्रत्याशित परिवर्तन दिखाई दिया। जिन हलों के साथ टिप्पे की टिटकारें सुनायी देती थीं उनके स्थान पर फटफटाते ट्रेक्टर खेतों की छाती चीर रहे थे,तालाब जैसे भरे बंधान गायब थे,बदले में बरसात कम होने के कारण ट्यूबवैल धरती का पेट चीरकर पानी खींच रहे थे। भभकती सिंचाई-मशीनें हड़बड़ा रही थीं। बिजली गाँव को चौंधिया रही थी। टिमटिमाते दीपक गायब थे। न ढोर,न बछेरू और गोचर भूमि गायब थी। न कउड़े न लोग, न मन्दिर की घंटियों की टनटनाहट और न शंख-घड़ियाल की सुरीली आवाज ही सुनाई पड़ती थी। रामधुनों और भजनों के ढोल-मंजीरों का स्थान टी.वी. के पास चला गया था। चोरी, डकैती, मुकदमों ने गाँव की चौपाल तोड़ दी थी। आत्मीयता नष्ट हो गई थी। सब अपने स्वार्थ साधन में लगे थे। इज्जत-आबरू दाँव पर थी। राजनीति ने ऐसा हड़कम्प मचाया है कि तीन घरों का गाँव भी तीन पार्टियों में बँट गया था।

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प्रश्न 4.
लेखक ने घर का वास्तविक रूप किन शब्दों में व्यक्त किया है?
उत्तर:
लेखक ने बहुत दिनों के बाद लौटकर अपने पुस्तैनी घर को देखा तो पाया कि वर्षा के कारण दीवारों का प्लास्टर जहाँ-तहाँ से उखड़ गया है, जिस कारण दीवारों पर चित्र से बने लगते हैं। चबूतरे पर गायों के खड़े होने के कारण पैरों के निशान बन गये हैं, जो अस्त-व्यस्त व्यंजनों के समान दिखाई देते हैं। घर का नक्शा ही बदल गया है। जिस कारण वह घर एक ऐतिहासिक इमारत-सा लग रहा है, ऐसी इमारत जो जर्जर हो उठी है। किवाड़ों पर मकड़ियों ने जाले बना लिये हैं, चारों ओर धूल का साम्राज्य है। यह तो घर का भौतिक रूप है। इसके साथ घर का एक और अमूर्त रूप है, जिसमें लेखक की आत्मा स्मृतियों में खोई है। लेखक का बचपन इसी घर में बीता है। लेखक की किलकारियाँ, हँसना, रोना, ममत्व,क्रोध आदि इन्हीं दीवारों से जुड़ा है। माता-पिता तथा बहनों की आत्मीयता बिखर गयी है। घर का खुलना-घर का खुलना नहीं था बल्कि लेखक के मन में स्मृतियों का पर्दा खुलता चला जा रहा था। ईंट-पत्थर से बनी इमारत घर नहीं होती । घर होता है व्यक्ति की भावनाओं, प्रेम, स्नेह, ममत्व आदि के संयोग से।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिये
(1) दीवारों पर वर्षा ने …………… बदल गया हो।
(2) मेरी किलकारियाँ …………. जा रहा है।
(3) असल प्रकाश ……… नहीं रोका जा सकता।
(4) मुझे लगा हमारे भीतर की ………… केन्द्र बन सकेंगे।
(5) जीवन बहुत सरल ……….. कर सकोगे।
उत्तर:
प्रस्तुत गद्यांशों की व्याख्या पाठ के ‘व्याख्या हेतु गद्यांश’ भाग में देखिए।

तिमिर गेह में किरण आचरण भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के हिन्दी मानक रूप लिखिए
उजास, कसैला, किवाड़, चतेवरी।
उत्तर:
उजाला, कड़वा, दरवाजा, चित्रकारी।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए
निर्झर, कर्कश, प्रकाश, उल्लास।
उत्तर:

  1. निर्झर – झरना, प्रपात।
  2. कर्कश – कठोर, तीखी।
  3. प्रकाश – आलोक,प्रभा।
  4. उल्लास – खुशी,प्रसन्नता।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध कीजिये

  1. उसकी आयु बीस वर्ष है।
  2. गुरु के ऊपर श्रद्धा रखनी चाहिए।
  3. यहाँ केशरिया दही की लस्सी मिलती है।
  4. भाषा का माधुर्यता बस देखते ही बनती है।

उत्तर:

  1. वह बीस वर्ष का है।
  2. गुरु पर श्रद्धा रखनी चाहिए।
  3. यहाँ केसरिया दही की लस्सी मिलती है।
  4. भाषा का माधुर्य देखते ही बनता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्द युग्मों में से पूर्ण पुनरुक्त, अपूर्ण पुनरुक्त, प्रति ध्वन्यात्मक शब्द और भिन्नात्मक शब्दों को पृथक्-पृथक् लिखिए.
तीज-त्यौहार, छानी-छप्पर, आल-जाल, छोटी-मोटी, प्रचार-प्रसार, उर्दू-फारसी, खेलते-खेलते।
उत्तर:
पूर्ण पुनरुक्त शब्द – खेलते – खेलते-खेलते।
अपूर्ण पुनरुक्त शब्द – तीज-त्यौहार,छानी-छप्पर,प्रचार-प्रसार।
प्रतिध्वन्यात्मक शब्द – आल-जाल,छोटी-मोटी।
भिन्नात्मक शब्द – उर्दू-फारसी।

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प्रश्न 5.
दिये गये वाक्यों का भाव विस्तार कीजिये-
(1) कउड़े को आग के ताप से दिपदिपाते चेहरों की प्रसन्नता अँधेरों में भी खनक जाती है।
(2) जवारों जैसे पीताभ गेहूँ के पौधे क्या यह संदेश नहीं देते कि सृजन की यात्रा कभी रुकती नहीं?
उत्तर:
(1) सर्दियों के मौसम में दिनभर कठोर परिश्रम करने के बाद लोग शाम को अलाव जलाकर उसकी गरमाई के चारों ओर बैठकर अपनी दिनभर की थकान उतारते हैं तथा वार्तालाप, हँसी-मजाक, समस्याओं के समाधान आदि से उनके चेहरे पर अन्धकार में भी छायी प्रसन्नता, उनकी बोली से स्पष्ट हो जाती है। यह सुख आज के वैज्ञानिक युग में समाप्त हो गया है।

(2) गेहूँ का पौधा बढ़कर मनुष्य को प्रेरणा देता है कि निर्माण सदैव विकास की ओर जाता है। सृजन को अँधेरे-बन्द कमरों में बन्द नहीं किया जा सकता है। जैसे-छोटे से दीपक की लौ दूर-दूर तक प्रकाश फैलाती है, उसी प्रकार सृजन का प्रकाश फैलता ही जाता है। व्यक्ति का आचरण,शील, विवेक,मेहनत, ईमानदारी,आस्था, निष्ठा आदि गुण सृजन की यात्रा को आगे की ओर ले जाते हैं। आले में अंकुरित गेहूँ के पौधे मनुष्य को यही प्रेरणा देते हैं।

प्रश्न 6.
मातृभाषा की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
जिस क्षेत्र विशेष में जो भाषा बोली जाती है तथा बालक अपनी माँ के मुँह से जो सुनता है,वही मातृभाषा है। सर्वप्रथम मातृभाषा ही शिशु के इस दुनिया में आँख खोलने के साथ ही कानों में पड़ती है तथा हर समय हमारे सम्पर्क में रहती है। मातृभाषा सीखने और समझने में सरल लगती है। इसके माध्यम से विचारों का प्रदान-प्रदान करना सरल होता है और भावों की अभिव्यक्ति सहज होती है। मातृभाषा में आत्मीयता होती है।

तिमिर गेह में किरण आचरण पाठ का सारांश

सुविख्यात कवि,निबन्धकार, कथाकार एवं उच्च कोटि के आलोचक ‘डॉ. श्यामसुन्दर दुबे’ द्वारा लिखित प्रस्तुत निबन्ध ‘तिमिर गेह में किरण-आचरण’ में लेखक ने बताया है कि अज्ञान व दुःख के निवारण का साधन प्राणी का सद् आचरण है। सुख का प्रकाश बाहर से नहीं वह तो आचरण और आत्म-चेतना से फैलता है। इसलिए मनुष्य को सदैव अपने भीतर खोए बचपन की तलाश करते रहना चाहिए। बचपन की संवेदनाएँ ही आत्मीय संसार को दृढ़ बनाती हैं। सृजनशीलता प्रदान करती हैं।

प्रस्तुत निबन्ध आत्मकथात्मक शैली में लिखा गया है। लेखक बहत समय के बाद अपने बचपन के घर पर लौटता है तो देखता है ताले पर जंग है, दीवारों के टूटे प्लास्टर चित्रकारी जैसे लगते हैं। चबूतरे पर धूल है। मकड़ियों के जाले हैं। घर की इस बदसूरती को देखकर बचपन की याद आती है, जिसमें माता-पिता तथा बहनों की आत्मीयता है। घर के बाद लेखक गाँव व खेत में अपने बचपन को तलाशता है। मन्दिरों की घण्टियों,शंख-घड़ियालों की आवाज,अलाव की गर्मी, ज्वार-बाजरे के खेतों के सौन्दर्य का सुख भूल चुका है।

समय परिवर्तनशील है। खेतों में हल के स्थान पर ट्रैक्टर, तालाब के स्थान पर ट्यूबवैल, दीपक के स्थान पर बिजली के बल्ब, चौपाल का रूप चोरी, डकैती और मुकदमों ने ले लिया है। रामधुन व भजन टी.वी. बन गया है। सब अपने स्वार्थ में लगे हैं। राजनीति का प्रकोप है। इस कारण जीवन के सुख रूपी घर में दुःख रूपी चूहे-छिपकलियाँ कूदते हैं। लेखक ने दुःख के अन्धकार को दूर करने का तरीका बताया है वह है-सृजन का प्रकाश। आदमी का आचरण, आदमी का शील, आदमी का भ्रम, आदमी का विवेक जिसे छू ले, वह प्रकाशित हो जाये। लाख अँधेरे आयें, लाख आपत्तियाँ आयें, यदि व्यक्ति अपने प्रति आस्थावान, निष्ठावान, परिश्रमी और सदाचारी है तो वह स्वयं भी सुख के प्रकाश से दीप्त होता है तथा दूसरों को भी करता है। यही दीपावली का दिन है,यही प्रकाशोत्सव है। आज मनुष्य हिंसा, प्रतिहिंसा, स्वार्थ, छल, फरेब, दगाबाजी आदि के अँधेरे में फँसा है। इन अँधेरों को दूर करके ही हम शाश्वत प्रकाश के केन्द्र बन सकते हैं।

“सजन की झाड़ से अज्ञान के अँधेरे को दूर किया जा सकता है। वो माचिस की तीलियाँ स्वयं प्रकाशित हो उठेगी।” लोक बोली के अनेक शब्दों से भाषा का प्रवाह बढ़ा है। व्यास शैली व उदाहरण शैली ने निबन्ध को बोधगम्य बना दिया है। सत्य है, सृजन ही जीवन का प्रकाश है।

तिमिर गेह में किरण आचरण कठिन शब्दार्थ

चतेवरी = चित्रकारी। अतीत = बीता हुआ। प्रहारों = चोटों। हिलबिलान = खो जाना। स्पंदित = धड़कना। कउड़े = अलाव। निबिड़ता = अन्धकार। बिसर = भूलना। पहलौटी = पहला। अनुभूति = एहसास। झकझकाती = चमकती। पसरा = फैला। मद्धिम = धीमी। हडकंप = भाग-दौड़। भाराक्रांत = भार से दबा हुआ। स्मृतियों = यादों। उजास = उजाला। ऊर्ध्वमुखी = ऊपर मुख किये हुए। विकीर्ण = फैलाना। पीताभ = पीली चमक वाला। वीराने = सुनसान। सृजन = रचना। समूचे = पूरे। फरेब = कपट। दगाबाजी = धोखा। शाश्वत = हमेशा रहने वाला।

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तिमिर गेह में किरण आचरण संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

(1) दीवारों पर वर्षा ने ऊबड़-खाबड़ चतेवरी अंकित कर दी थी। दरवाजे के सामने वाले चबूतरे पर गौ-खुरों की रूदन-बूंदन से अटपटी वर्णमाला लिख गई थी। घर का समूचा नाक-नक्शा ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे अतीत के प्रहारों को झेलते-झेलते वह झुर्रियों के इतिहास में बदल गया हो।

सन्दर्भ :
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक के ललित निबन्ध ‘तिमिर गेह में किरण-आचरण’ से उद्धृत हैं। इसके लेखक ‘डॉ. श्यामसुन्दर दुबे’ हैं।

प्रसंग :
समय बीतने पर हर सुन्दर वस्तु असुन्दर बन जाती है। उस पर बनी अतीत की लकीरें उसके इतिहास को बदल देती हैं।

व्याख्या :
आत्म कथात्मक शैली में अपनी स्मृतियों का वर्णन करते हुए लेखक कहता है कि जब वह एक लम्बे अन्तराल के बाद अपने गाँव के मकान पर लौटता है तो पाता है कि वर्षा के कारण मकान की दीवारों का प्लास्टर उखड़ गया है जिससे दीवारें चित्रकारी-सी की हुई प्रतीत होती हैं। मुख्य दरवाजे के सामने बने चबूतरे पर गायों को रौंदने से जमीन पर पशुओं के खुरों के निशान बन गये हैं,जो हिन्दी की वर्णमाला के समान दिखाई देते हैं। पूरे घर का नक्शा बदल गया है; जैसे मनुष्य समय की चोट खा-खाकर बूढ़ा हो जाता है, उसके शरीर पर पड़ी झुर्रियाँ उसे बदसूरत बना देती हैं, उसी प्रकार लेखक का मकान भी समय बीतने के साथ जर्जर हो गया था। उसी घर में लेखक यादों के सहारे सृजनात्मक कार्य के लिये आया था।

विशेष :

  1. पुराने घर में अपनत्व को ढूँढ़ता लेखक।
  2. साधारण-सरल खड़ी बोली, जिसमें ऊबड़-खाबड़, चतेवरी जैसे आंचलिक शब्दों का प्रयोग।
  3. पुनरुक्त शब्दों का प्रयोग, जैसे-झेलते-झेलते,ऊबड़-खाबड़।।
  4. संस्कृत के तत्सम शब्दों को भी लिया गया है, जैसे-अंकित, अतीत।
  5. व्यास शैली।

(2) मेरी किलकारियाँ और रोदन, मेरा क्रोध और मेरा ममत्व, इसी के भीतर किस कोने में अटके हैं? माता-पिता और बहिनों की आत्मीयता दरवाजों के भीतर से हमकती-सी लगती है। मेरा अतीत ढोता यह घर, जिसका ताला खोलने में ही मुझे आधा घण्टा लग गया, मेरे सामने खुला पड़ा था। घर नहीं खुला था, लगा किं जैसे ताले के साथ ही मेरे भीतर कुछ खुलता जा रहा है।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
डॉ. श्यामसुन्दर दुबे जब अपने मकान का ताला खोलते हैं तो उनका मन बचपन की यादों से भावुक हो उठता है क्योंकि इसी घर में उनका बचपन बीता था।

व्याख्या :
घर के दरवाजे पर लगे ताले पर जंग लग गयी थी, जिसके कारण लेखक को ताला खोलने में लगभग आधा घण्टा लगा। ताला खुलते ही घर के दृश्य को देखकर लेखक का बचपन साकार हो उठा और उन्हें लगा कि इसी घर में उनकी बचपन की किलकारियाँ,रोना, गुस्सा करना,क्रोध करना छिपा है। साथ ही,परिवार के साथ ममत्व भी दीवारों के बीच छिपा है। उनको महसूस होता है कि माता-पिता तथा बहिनों का प्यार मानो दरवाजों में से आवाज दे रहा है अर्थात् उन्हें पारिवारिक जनों के लाड़-प्यार, दुलार की स्मृति हो आती है। इसी घर में लेखक का बचपन बीता था घर के खुलने के साथ-साथ उनके हृदय में यादों के दरवाजे भी खुल गये, जिन्होंने लेखक को विचलित कर दिया। इस प्रकार दरवाजा खुलते ही लेखक अतीत के संसार में चला गया।

विशेष :

  1. बचपन की मधुर स्मृतियों का हृदयस्पर्शी शब्दों में चित्रण है।
  2. हुमकती जैसे शब्दों के प्रयोग से भाषा में आंचलिकता आ गई है।
  3. सरल खड़ी बोली है, जिसमें संस्कृत के तत्सम शब्द हैं।
  4. व्यास व उद्धरण शैली का प्रयोग है।

(3) चीजें ही बदल रही हैं तो बचपन को पाना कठिन होता जाता है। जिन हलों के साथ टिप्पे की टिटकारें सुनी थीं, वे हल चूल्हे की आग बन गये। फटफटाते ट्रैक्टर खेतों की छाती चीर रहे हैं। तालाब जैसे भरे बंधान गायब हैं, बरसात ही कम हो रही है तो कहाँ से भरें खेत? धरती का पेट चीरकर पानी खींचा जा रहा है। भभकती सिंचाई-मशीनें, हड़बड़ा रही हैं। झकझकाती बिजली गाँव को चौंधिया रही है।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
लेखक गाँव में पहँच कर पाता है कि गाँव आधुनिक साधनों से पूर्ण है। बचपन का कोई भी चिह्न उसे दिखाई नहीं देता है। इस बदलाव से उसकी आत्मा जैसे बिखर जाती है।

व्याख्या :
जिस बचपन को ढूँढने लेखक अपने गाँव गया था। वह बचपन उसे नहीं मिला। पूरा गाँव आधुनिकता में डूब गया था। बचपन में खेत जोतने के लिए हलों का प्रयोग किया जाता था, उस हल की लकड़ी जला दी गयी थी। उसके स्थान पर ट्रेक्टर खेतों को जोत रहे थे। सिंचाई के लिए तालाबों में पानी भरा रहता था अब वह तालाब वर्षा कम होने के कारण सूख गये थे। जमीन को खोदकर ट्यूबबैल बनाये जा रहे जिसने पृथ्वी की सरसता को कम कर प्राकृतिक आपदाओं को जन्म दिया है। दीपक की रोशनी का स्थान चमकती बिजली ने ले लिया था। सम्पूर्ण ग्रामीण जीवन में आमूल-चूल परिवर्तन आ गया था। ऐसे में लेखक को अपना बचपन न मिलने के कारण उसका हृदय भर आया था।

विशेष :

  1. गाँव में विज्ञान की प्रगति का साक्षात्कार है।
  2. सरल खड़ी बोली में स्थानीय शब्दों की बहुलता है।
  3. व्यास शैली व उद्धरण शैली के माध्यम से बदलते परिवेश का चित्रण है।

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(4) असल प्रकाश तो हमारे जीवन में छिपा हुआ है-सृजन का प्रकाश! आदमी का आचरण, आदमी का शील, आदमी का श्रम, आदमी का विवेक और आदमी की भावना जिसे छ लें, वह प्रकाशित हो जाये। बड़े-बड़े अंधेरों को तराशकर ये प्रकाश-निर्झर बहा दें। जवारों जैसे पीताभ गेहूँ के पौधे क्या यह संदेश नहीं देते कि सृजन की यात्रा कभी रुकती नहीं ? उसे अँधेरे बन्द कमरों में भी नहीं रोका जा सकता। (2009, 11, 14, 17)

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
अन्धकार का विलोम प्रकाश है और प्रकाश जीवन का दूसरा नाम है। दीपक या बिजली के बल्ब का प्रकाश तो प्रकाश का आभास है, वास्तविक प्रकाश प्राणी के कर्म और आचरण में होता है।

व्याख्या :
लेखक प्रकाश यानि उजाले के वास्तविक रूप को बताते हुए कहता है कि प्रकाश बाहर की वस्तु न होकर जीवन में चरितार्थ होने वाली वस्तु है, वह है अच्छाई-सत्य व कर्म को अपनाकर नवीनता का निर्माण करना। निर्माण कार्य वही प्राणी कर सकता है, जिसका आचरण शुद्ध हो, विचार अच्छे हों। प्राणी की विनम्रता, परिश्रम, अच्छे-बुरे की पहचान कर अच्छाई के मार्ग पर चलना,दूसरे के दुःखों,वेदनाओं,पीड़ाओं आदि को समझकर सहभागी बनने वाला व्यक्ति ही सृजन कार्य कर सकता है।

ऐसा ही व्यक्ति जीवन के अँधेरों रूपी दुःखों को सुख रूपी जल की धारा में बदल सकता है। खेतों में उगने वाले पौधा जो कभी तिल जैसा बीज था, विकसित होकर पौधा बनता है तथा संसार को भोजन के रूप में जीवन देता है। यह पौधा मनुष्य को संदेश देता है कि विकास की गति, निर्माण की गति कभी नहीं रुकती है। विकास को कमरों में या किसी अन्धकार में बन्द करके, नहीं रखा जा सकता है। विकास जल की वह धारा है जो निरन्तर बहती रहती है।

विशेष :

  1. वास्तविक प्रकाश निर्माण व रचना है।
  2. सरल खड़ी बोली में तत्सम शब्दों के साथ प्रादेशिक शब्दों का प्रयोग है।
  3. उदाहरण के द्वारा कथन का स्पष्टीकरण है।

(5) जीवन बहुत सरल नहीं है। मेहनत और ईमानदारी ही ऊर्जा बढ़ाते हैं। लाख अँधेरे आएँ, लाख आपत्तियाँ आएँ, तुम यदि अपने प्रति आस्थावान्, निष्ठावान् रहोगे, तो स्वयं प्रकाशित होकर दूसरों को भी प्रकाशित कर सकोगे।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
लेखक बचपन के घर में अकेला अँधेरे में खड़ा होने पर भी निरुत्साही न होकर आत्मविश्वास के साथ निर्माण के प्रकाश से प्रसन्न है। उसी समय उसे अपने पिता के द्वारा कही गयी बातें याद आती हैं-कर्मठ व्यक्ति ही निर्माण रूपी प्रकाश से संसार को सुख देता है।

व्याख्या :
लेखक के पिता ने कहा था-संसार में रहकर सुखों की प्राप्ति करना कोई सरल काम नहीं है। श्रम और ईमानदारी ही प्राणी में काम करने की शक्ति देते हैं। कर्मठता ही वह अग्नि है जो सुख रूपी भोजन को स्वादिष्ट बनाती है तब काम करने की शक्ति मिलती है। प्राणी के जीवन में चाहे अनगिनत दुःख,मुसीबतें या रुकावटें आयें परन्तु वह अपने कर्म,मेहनत, सत्य और ईमानदारी पर आस्थावान है, तो उसके विकास को कोई नहीं रोक सकता है।

वह स्वयं का ही विकास नहीं करता बल्कि जो उसके सम्पर्क में आता है उन्हें भी प्रकाश देता है, अर्थात् सुख देता है, उन्हें कर्मठ बनने की प्रेरणा देता है। यही प्रेरणा जीवन का सच्चा प्रकाश है और यही प्रकाश दीपावली के दीपक का प्रकाश है। जिस दिन मनुष्य स्वयं कर्मठ बन कर दूसरों को कर्मठ बनायेगा। वही दिन दीपावली का दिन होगा। असंख्य दीपक जलकर प्रकाश फैलायेंगे,मानव जाति निर्माण पथ पर चल पड़ेगी, तब सुख ही सुख का साम्राज्य होगा।

विशेष :

  1. कर्म और ईमानदारी ही सुख के साधन हैं,सफलता के फल हैं।
  2. छोटी-छोटी उक्तियों के माध्यम से प्राणी को अच्छाई का संदेश दिया गया है।
  3. संस्कृत गर्भित शब्दावली के साथ उर्दू के शब्दों का भी बाहुल्य है।
  4. व्यास व उद्धरण शैली का प्रयोग है।

(6) मुझे लगा हमारे भीतर की सृजन-चेतना समाप्त होती जा रही है। हिंसा, प्रतिहिंसा, स्वार्थ, छल, फरेब, दगाबाजी न जाने क्या-क्या हमारे भीतर डेरा डालकर घुप्प अँधेरे में मकड़जाल बुन रहे हैं। मन के इस अँधेरे में भटकते हम एक-दूसरे को लहूलुहान करने पर तुले हैं। इस अँधेरे को दूर करके ही हम मानवता के प्रकाश को फैला पायेंगे; तभी दीए भी हमारे लिये शाश्वत प्रकाश केन्द्र बन सकेंगे।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
निबन्ध के अन्तिम गद्यांशों में लेखक ने बताया है कि मनुष्य में आज कर्मठता, ईमानदारी,निष्ठा, आस्था आदि समाप्त हो गई है,जो समस्त दुःखों का कारण है।

व्याख्या :
डॉ. दुबे कहते हैं कि मनुष्य के दुःख का कारण उसके अपने ही अवगुण हैं। आज का प्राणी स्वार्थी,धन का लोलुप,आलसी, असत्यवादी,बेईमान बन गया है। जैसे अँधेरे में चूहे, छिपकलियाँ,मकड़ी अपना आधिपत्य जमा लेते हैं। उसी प्रकार सृजन के प्रकाश के अभाव में मनुष्य की मनोवृत्ति दूसरों को सताने, अपने स्वार्थ को सिद्ध करने, छल-कपट, धोखा करने में व्यस्त हो गयी है। इन अवगुणों के कारण दूसरे लोगों को सताने में ही आज प्राणी सुख अनुभव करता है। जिस दिन ये बुराइयाँ मनुष्य में से निकल जायेंगी या मनुष्य इन पर विजय प्राप्त कर लेगा। उसी दिन सृजन का प्रकाश फैल जायेगा और वह दिन सुख की दीपावली का दिन होगा। सद्गुणों के दीए हमेशा जलने लगेंगे। तब ही मानव जाति को जीवन का सच्चा सुख मिलेगा। इसलिए प्राणी को कर्मठ, ईमानदार, सत्यवादी, आस्थावान व निष्ठावान बनाना अनिवार्य है।

विशेष :

  1. मनुष्य को सद्गुणों से युक्त होने की प्रेरणा दी गई है।
  2. सद्गुणों से ही मनुष्य के जीवन में सृजन का प्रकाश होता है।
  3. तत्सम शब्दावली के साथ उर्दू व देशज शब्दों का प्रयोग है।
  4. शैली व्याख्यात्मक तथा उद्धरण है।

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 15 यशोधरा की व्यथा

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 15 यशोधरा की व्यथा (कविता, मैथिलीशरण गुप्त)

यशोधरा की व्यथा पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

यशोधरा की व्यथा लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यशोधरा ने ‘वसंत’ किसको कहा है?
उत्तर:
यशोधरा ने बसंत राजकुमार सिद्धार्थ को कहा है।

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प्रश्न 2.
धरती किसके ताप से जल रही है?
उत्तर:
धरती राजकुमार सिद्धार्थ की तप साधना के तप से जल रही है।

प्रश्न 3.
गौतम बुद्ध के त्याग से वृक्षों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
गौतम बुद्ध के त्याग से प्रभावित होकर वृक्षों ने भी अपने पत्ते त्याग दिए।

प्रश्न 4.
यशोधरा की विनय क्या है?
उत्तर:
यशोधरा की विनय यह है कि उसके पति के श्रम का फल सब भोगे।

यशोधरा की व्यथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कविता में गौतम बुद्ध के कौन-कौन से गुण बताए गए हैं? (M.P. 2009)
उत्तर:
गौतम बुद्ध में तपस्वी, त्यागी, दयालु, विश्व मंगलकारी और उदारता के गुण बताए गए हैं।

प्रश्न 2.
यशोधरा की निजी व्यथा लोक-व्यथा क्यों बन गई है?
उत्तर:
यशोधरा की निजी व्यथा लोक-व्यथा इसलिए बन गई क्योंकि उसके पति विश्व-कल्याण की भावना से ही उसे छोड़कर गए थे।

प्रश्न 3.
कविता में वर्णित षड्ऋतुओं में से किसी एक ऋतु का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
षड्ऋतुओं में से एक ग्रीष्मऋतु है। इस ऋतु में धूल भरी आँधियाँ चलती हैं। भीषण गर्मी के कारण प्यास से गला सूखां जाता है। शरीर से पसीना बहता रहता है। गर्मी की तीव्रता से दृष्टि झुलसी जाती है, जिसके कारण आँखों के सामने अँधेरा छा जाता है। पृथ्वी गर्मी से निरंतर जलती रहती है।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों का अर्थ लिखिए –

  1. तप मेरे मोहन का उद्धव धूल उड़ाता आया।
  2. अरी! वृष्टि ऐसी ही उनकी, दया-दृष्टि रोती थी।
  3. मेरी बाँह गही स्वामी ने, मैंने उनकी छाँह गही।
  4. उनके श्रम के फल सब भोगें, यशोधरा की विनय यही।

उत्तर:

  1. ग्रीष्म ऋतु में यह जो धूल उड़ रही है, यह ग्रीष्म ऋतु में उड़ने वाली धूल नहीं है, अपितु यशोधरा के पति सिद्धार्थ तप की तपस्या के परिणामस्वरूप धूल सूख गई है और वही वायु में मिलकर यहाँ आ रही है।
  2. ऐ वृष्टि! जिस प्रकार तूं निरंतर वरस रही है, उसी प्रकार मेरे प्रियतम की दया-दृष्टि हुआ करती थी।
  3. मेरे स्वामी ने अमर संबंधों के लिए मेरी बाँह पकड़ी थी, मेरा वरण किया था और मैंने उनकी शरण ली थी।
  4. मेरे प्रियतम के श्रम का फल सारा विश्व भोगे, यही यशोधरा की कामना है, यही उसकी उदारता है।

यशोधरा की व्यथा भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
आशा से आकाश थमा है।
उत्तर:
आशा के आधार पर ही आधारहीन आकाश थमा हुआ है। यदि जीवन में आशा न हो, तो जीवन व्यर्थ हो जाता है। यदि जीवन में आशा है, तभी तक जीवन निरंतर चलता रहता है। आशा है, तो जीवन में सफलता प्राप्त की जा सकती है। निराशाभरा जीवन व्यक्ति को निष्क्रिय बना देता है। आशा से भरा व्यक्ति पुरुपार्थ करके जीवन में उन्नति (प्रगति) करता है।

प्रश्न 2.
विश्व-वेदना की चमक उन्हें होती थी।
उत्तर:
गौतम बुद्ध संसार के दुख से दुखी होते थे। विश्व को दुखों से मुक्ति के लिए ही उन्होंने गृह-त्याग किया और तपस्या की। उनके हृदय में भी विश्व-मंगल की भावना को लेकर टीस उठती थी। गौतम बुद्ध ने मानव को दुखों से मुक्ति दिलाने का मार्ग खोजा, ज्ञान प्राप्त किया और स्वयं को इस कार्य में समर्पित कर दिया।

यशोधरा की व्यथा भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सामासिक शब्दों का विग्रह कर उनके नाम लिखिए –
वाधा-व्यथा, विश्व-वेदना, दिनमुख, नवरस, अग्नि-कुंड, दूध-दही।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 15 यशोधरा की व्यथा img-1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में से तत्सम और तद्भव शब्दों को छाँटिए –
पत्ता, वाष्प, सूखा, शत, साँस, प्रिय।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 15 यशोधरा की व्यथा img-3

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए –
मही, विश्व, सलिल, हेम, स्वामी, पेड़।
उत्तर:

  • मही – पृथ्वी, जमीन, धरती।
  • विश्व – संसार, दुनिया, जगत।
  • सलिल – जल, पानी, अंबु।
  • हेम – सोना, स्वर्ण, कनक।
  • स्वामी – मालिक, सरदार, नेता।
  • पेड़ – वृक्ष, तरु, विटप।

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प्रश्न 4.
‘योग’ शब्द दो अर्थों में प्रयुक्त हुआ है –

  1. उद्धव योग मार्ग का संदेश लेकर आए।
  2. मुझे विभूति रमाने का भी योग नहीं मिल सका।

इसी प्रकार के पाँच शब्द खोजकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:

  • कमल – आपका नाम कमल है।
    कमल कीचड़ में खिलते हैं।
  • अर्थ – आजकल देश अर्थ अभाव से गुजर रहा है।
    स्वतन्त्रता का अर्थ है आज़ादी।
  • आम – आम आम फलों का राजा है।
    यह आम रास्ता नहीं है।
  • कल – कल वर्षा अवश्य होगी।
    इस क्षेत्र में अनेक कल कारखाने हैं।
  • अचल – हिमालय अचल भारत की उत्तर दिशा में है।
    यह मेरी अचल सम्पत्ति है।

यशोधरा की व्यथा योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
लोक कल्याण के लिए बुद्ध की तरह वैभव त्यागने वाले महापुरुषों के जीवनवृत्त संकलित कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2.
समाज में आदर्श प्रस्तुत करने वाली भारतीय नारियों की जीवनियों का संग्रह कीजिए।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

यशोधरा की व्यथा परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न –

प्रश्न 1.
राजकुमार सिद्धार्थ यशोधरा के थे ………..।
(क) भाई
(ख) पति
(ग) सगे-संबंधी
(घ) पिता
उत्तर:
(ख) पति।

प्रश्न 2.
‘यशोधरा की व्यथा’ कविता में कवि ने प्राचीन परंपरा का आश्रय लिया है ………..।
(क) षड्ऋतु वर्णन का
(ख) बारहमासा वर्णन का
(ग) ऋतु वर्णन का
(घ) सौन्दर्य वर्णन का
उत्तर:
(क) षड्ऋतु वर्णन का।

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प्रश्न 3.
यशोधरा के विरह और सिद्धार्थ की तप साधना का तप ही है –
(क) ग्रीष्म की लू
(ख) ग्रीष्म की तपन
(ग) ग्रीष्म जलती किरणें
(घ) ग्रीष्म की प्यास
उत्तर:
(ख) ग्रीष्म की तपन।

प्रश्न 4.
कौन-सी ऋतु सिद्धार्थ की शांति और शोभा वृद्धि करते हुए यशोधरा की विरह बढ़ाती है?
(क) बसंत ऋतु
(ख) शिशिर ऋतु
(ग) शरद् ऋतु
(घ) हेमंत ऋतु
उत्तर:
(ग) शरद् ऋतु।

प्रश्न 5.
सिद्धार्थ के त्याग को देखकर किसने अपना क्या त्यागा? (M.P. 2012)
(क) पेड़ों ने पत्ते
(ख) बादलों ने वर्षा
(ग) पक्षियों ने उड़ना
(घ) चंद्रमा ने चाँदनी
उत्तर:
(क) पेड़ों ने पत्ते।

प्रश्न 6.
‘मेरी बाधा-व्यथा सही’ के द्वारा गुप्तजी ने प्रकट किया है –
(क) यशोधरा की आपबीती
(ख) अपनी आपबीती
(ग) यशोधरा की विरह-वेदना
(घ) यशोधरा की तप-साधना
उत्तर:
(ग) यशोधरा की विरह-वेदना।

II. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पस्कीजिए –

  1. ‘यशोधरा की व्यथा’ में यशोधरा की ………. वेदना है। (अशान्त/विरह)
  2. ‘मैं ऊष्मा-सी यहाँ रही’ ………. अलंकार का उदाहरण है। (उपमा/रूपक)
  3. वर्षा मानो सिद्धार्थ की ………. प्रतीक है। (शान्ति/करुणा)
  4. जागी किसकी वाष्प राशि, जो सूने में ………. थी। (रोती/सोती)
  5. यशोधरा ने अपनी व्यथा अपनी ………. से कही है। (दासी/सखी)

उत्तर:

  1. विरह
  2. उपमा
  3. करुणा
  4. सोती
  5. सखी।

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III. निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए –

  1. यशोधरा की व्यथा में षड्ऋतुओं के चित्र हैं।
  2. शरद ऋतु सिद्धार्थ की करुणा है।
  3. यशोधरा का विरह अडिग है।
  4. यशोधरा की व्यथा संयोग शृंगार रस में है।
  5. यशोधरा का विरह ग्रीष्म की तपन है।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. सत्य।

IV. निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए – (M.P. 2009)

प्रश्न 1.
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 15 यशोधरा की व्यथा img-4
उत्तर:

(i) (ङ)
(ii) (ग)
(iii) (घ)
(iv) (ख)
(v) (क)।

V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

प्रश्न 1.
यशोधरा ने किसको वसंत और ऊष्मा कहा है?
उत्तर:
यशोधरा ने वसंत सिद्धार्थ को और स्वयं को ऊष्मा को है।

प्रश्न 2.
यशोधरा के अनुसार यह धरती किसके ताप और तप से जल रही है?
उत्तर:
यशोधरा के अनुसार यह धरती उसके स्वामी सिद्धार्थ के तप और उसके विरहजनित ताप से जल रही है।

प्रश्न 3.
शरदातप किसके विकास का सूचक है?
उत्तर:
शरदातप सिद्धार्थ की तपस्या के विकास का सूचक है।

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प्रश्न 4.
यशोधरा कौन थी? (M.P.2009)
उत्तर:
यशोधरा सिद्धार्थ की धर्मपत्नी थी।

प्रश्न 5.
मैथिलीशरण गुप्त किस प्रकार के कवि हैं?
उत्तर:
मैथिलीशरण गुप्त राष्ट्रीय विचारधारा के कवि हैं।

यशोधरा की व्यथा लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
यशोधरा कौन थी? (M.P. 2009)
उत्तर:
यशोधरा राजकुमार सिद्धार्थ की पत्नी थी। प्रश्न 2. यशोधरा को किस बात का दुख है?
उत्तर:
यशोधरा को इस बात का दुख है कि उसे अपनी शरीर पर भस्म लगाने का भी अवसर नहीं मिला।

प्रश्न 3.
वर्षा सिद्धार्थ की किस भावना की परिचायक है?
उत्तर:
वर्षा सिद्धार्थ की करुण भावना की परिचायक है।

प्रश्न 4.
यशोधरा ने खट्टे दिन किसे कहा है?
उत्तर:
यशोधरा ने खट्टे दिन अपने जीवन के बुरे दिनों को कहा है।

प्रश्न 5.
सिद्धार्थ की शांति-कांति की ज्योत्स्ना कैसी है?
उत्तर:
सिद्धार्थ की शांति-कांति की ज्योत्स्ना हरेक पल जलती है।

प्रश्न 6.
शरद् ऋतु का सिद्धार्थ-यशोधरा पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
उत्तर:
शरद् ऋतु की शांति और शोभा को प्रदर्शित करते हुए यशोधरा के विरह को बढ़ा रही है।

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प्रश्न 7.
ऋतुओं का यशोधरा के विरह पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
उत्तर:
ऋतुओं का यशोधरा के विरह पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। वे उसको विचलित नहीं कर पा रही हैं। वे तो उसके विरह से पीड़ित होकर अपनी भाव-दशाओं को बदल रही हैं।

यशोधरा की व्यथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि ने इस कविता में किसकी व्यथा को व्यक्त किया है?
उत्तर:
कवि ने इस कविता तें यशोधरा की व्यथा को व्यक्त किया है। उनके पति राजकुमार सिद्धार्थ अपनी पत्नी को अर्ध रात्रि में सोता हुआ छोड़कर साधना करने के लिए राजमहल छोड़कर चले गए थे। वियोगिनी यशोधरा की विरह-वेदना को ही कवि ने प्रस्तुत किया है।

प्रश्न 2.
यशोधरा ने यह क्यों कहा कि “हाय! विभूति रमाने का भी मैंने योग न पाया।” (M.P. 2012)
उत्तर:
राजकुमार सिद्धार्थ उसे सोता हुआ छोड़कर तपस्या करने चले गए। यशोधरा चाहते हुए भी साधना हेतु शरीर पर भस्म मलकर संन्यासिनी नहीं बन सकती थी; क्योंकि उसे अपने पुत्र राहुल का पालन-पोषण करना था। इसीलिए उसने यह कहा कि “हाय! विभूत रमाने का भी मैंने योग न पाया।”

प्रश्न 3.
यशोधरा किसको अपने प्रियतम के विकास की सूचक मानती है?
उत्तर:
यशोधरा पृथ्वी तल पर शरद् ऋतु की खिली हुई धूप को अपने प्रियतम (राजकुमार सिद्धार्थ) के विकास की सूचक मानती है।

प्रश्न 4.
ग्रीष्म ऋतु में यशोधरा की क्या स्थिति हो गई?
उत्तर:
ग्रीष्म ऋतु में यशोधरा की स्थिति बड़ी भयानक और दुखद हो गई। उसका जीवन नीरस और शुष्क हो गया। उसका कंठ सूख गया। उसे पसीना छूटने लगा, “मृगतृष्णा की माया ने उसे घेर लिया। उसकी दृष्टि झुलस गयी, उसकी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा। उसे अपने प्रियतम की छाया भी नहीं दिखाई दे रही थी।”

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प्रश्न 5.
विश्व-वेदना की चमक किसे और क्यों होती थी?
उत्तर:
विश्व-वेदना की चमक सिद्धार्थ को होती थी क्योंकि वे संसार के दुख से दुखी थे। उनके हृदय में विश्व-वेदना की कसक होती थी। इसके लिए ही उन्होंने गृह-त्याग किया। फिर घोर तपस्या की। ज्ञान प्राप्त करके सदुपदेश दिया। इस प्रकार उन्होंने विश्व-वेदना को समाप्त करने के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया।

यशोधरा की व्यथा कवि-परिचय

प्रश्न 1.
मैथिलीशरण गुप्त का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
मैथिलीशरण गुप्त का जन्म सन् 1886 ई० में उत्तर प्रदेश के झाँसी जिले के अन्तर्गत चिरगाँव में हुआ। वे वैश्य परिवार से थे। इनके पिता सेठ रामचरणजी भगवान राम के परमभक्त थे। गाँव में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद इनको अंग्रेजी पढ़ने के लिए मेक्डॉनल स्कूल भेजा गया, पर वहाँ उनका मन नहीं लगा। वे पढ़ाई बीच में छोड़कर गाँव चले आए।

फिर उन्होंने घर पर ही हिंदी, संस्कृत और बांग्ला साहित्य का अध्ययन किया। मुंशी अजमेरी के सहयोग से इनमें काव्य के संस्कार उत्पन्न हुए। देश की स्वतंत्रता के बाद ये राज्य सभा के सदस्य बने। भारत सरकार ने इन्हें ‘पद्मभूषण’ की उपाधि प्रदान की और आगरा विश्वविद्यालय ने इन्हें डी. लिट. की उपाधि से सम्मानित किया। गुप्तजी की आरम्भिक रचनाएँ ‘वैश्योपकारक’ में प्रकाशित हुईं इसके बाद में पण्डित महावीर प्रसाद द्विवेदी की ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित होने लगीं। द्विवेदीजी के आदेश, उपदेश और प्रोत्साहन से इनकी कविताओं में निखार आया। इन्होंने साहित्य . जगत् को अनेक रचनाएँ दीं। 1964 में इनका देहांत हो गया।

साहित्यिक विशेषताएँ:
गुप्तजी राष्ट्रकवि थे। उनकी रचनाओं में सर्वत्र राष्ट्रीय भावनाओं का प्रतिनिधित्व हुआ है। मात्मा गाँधी के नेतृत्व में देश ने स्वाधीनता का संघर्ष किया। उसकी काव्यमय व्यंजना गुप्तजी के काव्य में देखी जा सकती है। गाँधी जी के राजनीतिक एवं सामाजिक विचारों को गुप्तजी ने उसी प्रकार अभिव्यंजित किया जैसे प्रेमचन्द ने अपने उपन्यासों में किया है।

देश की जनता स्वतन्त्रता के लिए छटपटा रही थी और सत्याग्रही अपना सब कुछ न्योछावर कर रहे थे, उस समय गुप्तजी ने ‘भारत भारती’ लिखी। इस रचना के बाद भी गुप्तजी ने गाँधी जी के सत्याग्रह और अहिंसा की नीति, खादी और रचनात्मक कार्यक्रम, हिन्दू-मुसलमानों की साम्प्रदायिक एकता के समर्थन में काव्य स्वनाएँ कीं। अछूतोद्धार, और स्त्री-शिक्षा आदि के आंदोलनों का समर्थन भी गुप्तजी ने अपनी रचनाओं में किया। इसीलिए उन्हें राष्ट्रकवि कहा गया।

रचनाएँ:
गुप्तजी की प्रथम रचना 1909 में प्रकाशित हुई ‘रंग में भंग’। आपने मौलिक एवं अनूदित दोनों प्रकार की ही रचनाएँ कीं।

काव्य-संग्रह:
‘पद्य प्रबंध’, ‘मंगल घट’, ‘स्वदेश संगीत’ (प्रारंभिक रचनाएँ), ‘जयद्रथ वध’ (1910), ‘पंचवटी (1925), ‘झंकार’ (1929), ‘साकेत’ (1931), ‘यशोधरा’ .. (1932), ‘द्वापर’ (1936), ‘जयभारत’ (1952), ‘विष्णुप्रिया’ (1957) आदि।

नाटक:
तिलोत्तमा, चंद्रहास और अनघ।

अनूदित काव्य:
प्लासी का युद्ध, मेघनाथ-वध और ऋतु संहार। अन्य रचनाओं में चंद्रहास, विष्णुप्रिया, वृत्र-संहार, नहुष आदि प्रमुख हैं।

भाषा-शैली:
गुप्तजी ने अपने काव्य-का सृजन ब्रजभाषा में शुरू किया था। उस समय ब्रजभाषा एवं अवधी काव्य की प्रतिलित भाषा थी। धीरे-धीरे वे खड़ी बोली में काव्य-रचना करने लगे। इसके लिए गुप्तजी सदैव पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी के ऋणी हैं। वे सरल एवं सुबोध भाषा के समर्थक रहे। उनके काव्य में यथास्थान अलंकारों का प्रयोग है। शृंगार, करुण, वीर और वात्सल्य उनके प्रिय रस हैं। उनका श्रृंगार रस अत्यंत मर्यादित हैं, उन्होंने विभिन्न छंदों का प्रयोग किया है। तुकांत, अतुकांत और गीति छंदों पर उनका अच्छा अधिकार था।

कहीं-कहीं वे इतने क्लिष्ट एवं दुर्बोध शब्दों का वे प्रयोग भी कर गए हैं, जिन्हें संस्कृत जानने वाले भी कठिनाई से ही समझ पाते हैं। कहीं-कहीं प्रांतीय बोलियों के शब्दों के प्रयोग से भी परहेज नहीं करते। इससे कभी-कभी रचना अपरिष्कृत-सी भी लगती है। कहीं-कहीं तत्सम एवं तद्भव शब्द उनकी काव्य भाषा में न केवल खटकते हैं, बल्कि भाषा को विकृत भी कर देते हैं। इसके बावजूद उनकी भाषा अर्थ अभिव्यक्ति में पूर्णतः समर्थ है। साहित्य में स्थान-राष्ट्रीय कवि गुप्त का हिंदी कवियों में अत्यधिक चर्चित और सम्मानपूर्ण स्थान है। हिंदी काव्य के क्षेत्र में आपका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।

यशोधरा की व्यथा पाठ का सारांश

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प्रश्न 1.
‘यशोधरा की व्यथा’ कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
‘यशोधरा की व्यथा’ कविता के कवि मैथिलीशरण गुप्त हैं। यह कविता कवि द्वारा रचित ‘यशोधरा’ नामक महाकाव्य से ली गई है। राजकुमार सिद्धार्थ अपनी पत्नी यशोधरा को सोता हुआ छोड़कर आधी रात को अपनी साधना सम्पन्न करने के लिए राजमहल छोड़कर चले गए थे। यशोधरा महल में अपने पुत्र राहुल के साथ रह गई थी। वियोगिनी यशोधरा इस कविता में अपनी विरह वेदना को प्रकट कर रही है। यशोधरा अपनी सखी को सम्बोधित कर रही है। इसमें कवि ने प्राचीन षड्ऋतु वर्णन परम्परा का निर्वाह किया है।

एक के बाद एक ऋतुएँ आती हैं और विरहिणी यशोधरा के विरह को बढ़ाती हैं। यशोधरा का विरह और सिद्धार्थ की तप साधना का ताप ही ग्रीष्म की तपन है, वर्षा मानो करुणा की प्रतीक है। शरद ऋतु सिद्धार्थ की शांति और शोभा को प्रदर्शित करती हुई यशोधरा के विरह में वृद्धि करती है। शिशिर की ठण्डी साँसें प्रिय का शीतल स्पर्श है। इसी प्रकार कवि ने हेमन्त और बसंत ऋतु में भी यशोधरा के विरह-भाव को स्पष्ट किया है। ऋतुएँ ही विरहिणी यशोधरा के विरह को विचलित नहीं करती हैं अपितु वे भी यशोधरा के विरह से पीड़ित होकर अपनी भाव दशा को बदल रही है। कविता में सभी ऋतुओं का मानवीकरणी किया गया है।

यशोधरा की व्यथासंदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1.
सखि! बसंत से कहाँ गए थे,
मैं ऊष्मा-सी यहाँ रही।
मैंने ही क्या सहा, सभी ने।
मेरी बाधा व्यथा सही॥

तप मेरे मोहन का उद्धव धूल उड़ाता आया,
हाय! विभूति रमाने का भी मैंने योग न पाया।
सूखा कण्ठ, पसीना छूटा मृग-तृष्णा की माया,
झुलसी दृष्टि, अँधेरा दीखा, टूट गई वह छाया।
मेरा ताप और तप उनका,
जलती है यह जठर मही॥ (Page 69) (M.P. 2012)

शब्दार्थ:

  • सखि – सहेली।
  • ऊष्मा – गर्मी।
  • व्यथा – पीड़ा-दुख।
  • तप – तपस्या।
  • मोहन – श्रीकृष्ण।
  • उद्धव – कृष्ण का मित्र।
  • विभूति – राख, भस्म।
  • योग – सुअवसर, सुयोग।
  • कण्ठ – गला।
  • मृगतृष्णा – छलावा, भ्रम।
  • जठर – उदर।
  • मही – पृथ्वी।

प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कविता ‘यशोधरा की व्यथा’ से उद्धृत है। इस काव्यांश में विरह व्यथित यथोधरा अपनी सखि से पूछ रही है कि उसके मोहन अर्थात् राजकुमार सिद्धार्थ उसे अकेली छोड़कर कहाँ गए।

व्याख्या:
यशोधरा अपनी सखी से पूछ रही है कि हे सखि! बसंत वे समान सुन्दर, लुभावने और सुख देने वाले मेरे प्रियतम राजकुमार सिद्धार्थ कहाँ चले गए और मैं ग्रीष्म ऋतु-सी यहाँ रह गई, अर्थात् सिद्धार्थ के मुझे छोड़कर चले जाने से मेरा जीवन उसीप्रकार नीरस और शुष्क हो गया है, जिस प्रकार बसंत के चले जाने के बाद ग्रीष्म ऋतु में चारों ओर शुष्कता और नीरसता छा जाती है। प्रियतम की अनुपस्थिति में मुझे जिस प्रकार की विरह व्यथा को सहन करना पड़ रहा है, उसी प्रकार की पीड़ा सभी सह रहे हैं। आगे यशोधरा अपने को गोपी-रूप में और सिद्धार्थ को कृष्ण-रूप में मानकर कह रही है कि ऐ उद्धव! यह जो तुम देख रहे हो, यह ग्रीष्म ऋतु में उठने वाली धूलि के झोंके नहीं हैं।

मेरे मोहन की तपस्या से तो सारा संसार जल उठा है और उसी जलन के परिणामस्वरूप धूल सूख गई है तथा वह वायु में मिलकर यहाँ आ रही है। यशोधरा अपनी हार्दिक वेदना को व्यक्त करती हुई कहती है कि कहाँ तो एक ओर मेरे प्रियतम तपस्या कर रहे हैं और कहाँ दूसरी ओर मैं हूँ, जिसे तपस्या – तो क्या, शरीर पर भस्म लगाने का अवसर भी नहीं मिला है। कहने का भाव यह कि मेरे लिए यह भी सम्भव नहीं है कि मैं अपने प्रियतम की भाँति अपने शरीर पर भस्म रमाकर योगिनी भी बन जाऊँ, क्योंकि मुझे तो राहुल का पालन-पोषण करना है।

इस ग्रीष्म ऋतु में मेरा गला सूखा जा रहा है, शरीर से पसीना निरंतर बह रहा है और चारों ओर मृग मरीचिका दिखाई दे रही है। गर्मी की तीव्रता से दृष्टि झुलस-सी गई है, जिसके कारण आँखों के सामने अँधेरा-सा दिखाई देता है और आँखों के समक्ष अँधेरा छा जाने से प्रियतम की अथवा अपनी छाया भी नहीं दिखाई दे रही है। यशोधरा कहती है कि यह जो कठोर पृथ्वी निरंतर जल रही है, इसके जलन का कारण ग्रीष्म ऋतु नहीं है, अपितु मेरे विरह से उत्पन्न ताप और मेरे प्रियतम का तप है।

विशेष:

  1. ग्रीष्म ऋतु में यशोधरा की विरह व्यथा में सूर्य की तपन वृद्धि कर रही है।
  2. यशोधरा की विरह का ताप और सिद्धार्थ की तप साधना का ताप ही ग्रीष्म की तपन है।
  3. बसंत-से, ऊष्मा-सी में उपमा अलंकार है।
  4. यशोधरा को इस बात का दुख है कि उसे अपने प्रियतम की भाँति भस्म रमने का भी अवसर प्राप्त नहीं हुआ।
  5. मृग-तृष्णा की माया में रूपक अलंकार है।
  6. भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है।
  7. मानवीकरण का सौन्दर्य विद्यमान है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्त संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
यशोधरा को अपना जीवन ऊष्मा-सा क्यों लगता है?
उत्तर:
यशोधरा के स्वामी सिद्धार्थ उसे छोड़कर चले गए हैं। उनके यूँ चले जाने से उसका जीवन नीरस एवं शुष्क हो गया है। उसे विरह-व्यथा सहनी पड़ रही थी, इसलिए यशोधरा को अपना जीवन ऊष्मा-सा लग रहा है।

प्रश्न (ii)
यहाँ ‘मोहन’ किसे कहा गया है? उनके तप का संसार पर क्या असर हुआ है?
उत्तर:
यहाँ ‘मोहन’ सिद्धार्थ को कहा गया है। उनके तप के प्रभाव से सारा संसार जल उठा है और धूल सूखकर हवा के साथ उड़ रही है।

प्रश्न (iii)
यशोधरा पर ग्रीष्म ऋतु का क्या प्रभाव पड़ा है?
उत्तर:
ग्रीष्म ऋतु के प्रभाव से यशोधरा का गला सूखता जा रहा है। शरीर पसीने में तर हो रहा है। गर्मी के कारण आँखों के सामने अँधेरा छाया हुआ है। उसे चारों ओर मृग-मारीचिका दिखाई दे रही है।

काव्यांश पर आधारित सौंदर्य संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य-भाव यह है कि सिद्धार्थ वसंत के समान सुंदर, सुखद और मनोहर थे। उनके चले जाने से यशोधरा का जीवन ग्रीष्म ऋतु की भाँति शुष्क हो गया है। उसे विरह-व्यथा सहनी पड़ रही है। गर्मी में उड़ती धूत उसे सिद्धार्थ के तप का प्रभाव लग रही है। वह सिद्धार्थ के समान योगिनी भी नहीं बन सकती है क्योंकि उस पर पुत्र के पालन-पोषण का दायित्व है।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
काव्यांश में यशोधरा की विरह व्यथा का मर्मस्पर्शी वर्णन है। यशोधरा को दुख है कि वह भस्म रमाकर योगिनी न बन की। ‘बसंत-से’, ‘ऊष्मा-सी में ऊष्मा अलंकार, ‘मृगतृष्णा की माया’ में रूपक अलंकार तथा मानवीकरण का सौंदर्य है। भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है। काव्यांश में वियोग शृंगार रस व्याप्त है।

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प्रश्न 2.
जागी किसकी वाष्प राशि, जो सूने में सोती थी,
किसकी स्मृति के बीज उगे ये, सृष्टि जिन्हें बोती थी।
अरी! वृष्टि ऐसी ही उनकी, दया-दृष्टि रोती थी,
विश्व-वेदना की ऐसी ही चमक उन्हें होती थी।
किसके भरे हृदय की धारा,
शतधा होकर आज वही॥2॥ (Page 70)

शब्दार्थ:

  • वाष्प – भाप।
  • स्मृति – याद।
  • सृष्टि – विश्व।
  • वृष्टि – वर्षा।
  • दया – दृष्टि-दया, करुणारूपी दृष्टि।
  • विश्व-वेदना – संसार का दुख।
  • शतधा – सैकड़ों।

प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कविता ‘यशोधरा की व्यथा’ से लिया गया है। यशोधरा अपनी विरह-व्यथा को व्यक्त कर रही है।

व्याख्या:
यशोधरा अपनी सखि को संबोधित करती हुई कहती है कि अपने प्रियतम की अनुपस्थिति में मैं जिस तरह की पीड़ा को सहन कर रही हूँ, उसी प्रकार की पीड़ा सभी सहन कर रहे हैं। यशोधरा कहती है कि वह कौन व्यक्ति है, जिसके नेत्रों से वह अश्रु-वृष्टि जग उठी है, जो सूने में सो रही थी। उसके कथन का भाव यह है कि मेरा जीवन प्रियतम से मिलने के समय इतना सुखमय था कि मैंने कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि कभी विरह के कारण मेरे नेत्रों में भी आँसू आ सकते हैं; किन्तु यह विधि की विडम्बना ही है कि आज मेरे नेत्रों में निरंतर अश्रु-प्रवाह चलता रहता है।

यशोधरा के मस्तिष्क में अपने मिलन की सुखद घड़ियों की स्मृति जगती है और वह कहती है कि वह कौन व्यक्ति है जिसकी स्मृति के वे बीज आज उग आये हैं जिनका वपन सृष्टि लगातार कर रही थी। उसके कथन का आशय यह है कि आज मेरे मानस-पटल पर प्रियतम से मिलन के सुखद चित्र अंकित हो रहे हैं। ये स्मृति-चित्र बहुत पहले से ही बनते चले आ रहे हैं। यशोधरा के नेत्रों से अश्रुओं की जो वर्षा हो रही है उसे संबोधित करती हुई वह कहती है कि ऐ वृष्टि! जिस प्रकार तू निरंतर आँखों से झर रही है, उसी प्रकार तो मेरे प्रियतम की दया-दृष्टि हुआ करती थी।

जिस प्रकार आज मेरे मन में विरह की टीस उठ रही है, उसी प्रकार की टीस मेरे प्रियतम के मन में भी विश्वमंगल की भावना को लेकर हुआ करती थी। वह प्रश्न करती है कि वंह कौन व्यक्ति है, जिसके भरे-पूरे हृदय की धारा सैकड़ों खण्डों में विभक्त होकर बह रही है। यशोधरा के कथन का तात्पर्य यह है कि एक ओर तो प्रियतम के प्रेम से आप्लावित मेरा हृदय खंड-खंड हो गया है और दूसरी ओर मेरे प्रियतम का करुणापूर्ण हृदय विश्व कल्याण की भावना से द्रवित हो उठा है।

विशेष:

  1. वर्षा ऋतु सिद्धार्थ की करुणा की परिचायक है। वर्षा ऋतु यशोधरा के हृदय में सिद्धार्थ की स्मृति उत्पन्न कर रही है। अपने प्रियतम की याद उसके हृदय में विरह की पीड़ा में वृद्धि कर रही है।
  2. दया-दृष्टि में रूपक और अनुप्रास अलंकार है।
  3. विश्व-वेदना में अनुप्रास है।
  4. मानवीकरण अलंकार का सौन्दर्य विद्यमान है।
  5. भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है। ।
  6. छंदबद्धता और तुकांत का सुन्दर मेल है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
वाष्पराशि के जागने का क्या आशय है?
उत्तर:
यशोधरा के साथ जब तक सिद्धार्थ थे तब तक उसकी आँखों में सोए पड़े थे, किंतु अब वही आँसू आँखों से निरंतर बहते रहते हैं। ऐसा लगता है कि वाष्पराशि अर्थात् आँसू जाग गए हैं।

प्रश्न (ii)
सिद्धार्थ के मन में किस बात के प्रति दुख था?
उत्तर:
सिद्धार्थ के मन में जनकल्याण और विश्वमंगल की भावना की प्रबल आकांक्षा थी। इसे पूरा करने के लिए उनका मन दुखी था।

प्रश्न (iii)
विरहाकुल यशोधरा वर्षा को देखकर क्या सोचती है?
उत्तर:
विरहाकुल यशोधरा वर्षा को सिद्धार्थ की करुणा का परिणाम सोचती है। वह सोचती है कि उसके प्रिय का करुणापूर्ण हृदय विश्वकल्याण की भावना से पिघल उठा है।

काव्यांश पर आधारित शिल्प-सौंदर्य संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
काव्यांश में वियोगिनी यशोधरा की विरह व्यथा का मर्म स्पर्शी चित्रण किया गया है। इसके लिए षड्ऋतु वर्णन का सहारा लिया गया है। इस अंश में वर्षा ऋतु अपने विभिन्न उद्दीपनों के माध्यम से यशोधरा की विरह व्यथा और बढ़ा देती हैं। यह ऋतु उसके हृदय में सिद्धार्थ की यादें धधका देती है, जिससे उसकी व्यथा और बढ़ गई है।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
विरह वियोगिनी यशोधरा वर्षा को सिद्धार्थ की करुणा का परिचायक मानती है। उसकी विरह बढ़ती जा रही है। ‘दया-दृष्टि’ में रूपक, विश्व-वेदना में अनुप्रास अलंकार है। मानवीकरण अलंकार का सौंदर्य है। भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है। काव्यांश में वियोग श्रृंगार रस व्याप्त है।

प्रश्न 3.
उनकी शांति-कांति की ज्योत्स्ना, जगती है पल-पल में,
शरदातप उनके विकास का, सूचक है थल-थल में।
नाच उठी आशा प्रति दल पर, किरणों की झल-झल में,
खुला सलिल का हृदय-कमल खिल हंसो की कल-कल में
पर मेरे मध्याह्न बता क्यों,
तेरी मूर्छा बनी रही॥3॥ (Page 70)

शब्दार्थ:

  • कांति – चमक।
  • ज्योत्स्ना – चंद्रिका।
  • शरदातप – शरद्कालीन धूप।
  • थल – स्थल।
  • दल – पत्र, पत्ता।
  • सलिल – पानी।
  • हृदय-कमल – हृदय रूपी कमल।
  • मध्याह – दोपहर का समय।
  • मूर्छा – बेहोशी।

प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कविता ‘यशोधरा की व्यथा’ से लिया गया है। यशोधरा शरद् ऋतु के द्वारा अपनी विरह व्यथा को व्यक्त कर रही है। शरद ऋतु सिद्धार्थ की शांति और शोभा को प्रदर्शित करते हुए यशोधरा की पीड़ा को बढ़ा रही है।

व्याख्या:
पृथ्वी पर शरद् की जो शुभ्र चन्द्रिका छायी हुई है, उसे देखकर यशोधरा कहती है कि वस्तुतः यह चन्द्र की ज्योत्स्ना नहीं है अपितु मेरे प्रियतम की शांति एवं आभा का ही प्रकाश है जो विश्व में चारों ओर विकीर्ण हो रहा है। पृथ्वी तल पर शरद् की जो धूप छायी हुई है उसे यशोधरा अपने प्रियतम के विकास की सूचक मानती है। प्रातःकाल में पत्तों के ऊपर पड़ी हुई ओस पर किरणों की झिलमिलाहट को देखकर यशोधरा कहती है कि यह तो वस्तुतः मेरे प्रियतम की आशा ही है, जो ओस-बिन्दुओं पर पड़ी हुई किरणों के बहाने नृत्य कर रही है।

शरद् ऋतु में सरोवर का जल स्वच्छ हो गया है और उसमें कमल विकसित हो गए हैं। विकसित कमलों को देखकर ऐसा लग रहा है, जैसे मानो सरोवर का हृदय विकसित हो गया है और हंसों का समुदाय उसके आस-पास अपनी मधुर ध्वनि कर रहा है। शरद् में सरोवर का यह और आकर्षक दृश्य यशोधरा के लिए एक नूतन अर्थ का द्योतक है और वह यह कि यह सरोवर, जो सिद्धार्थ के महाभिनिष्क्रमण के समय चेष्टारहित हो गयाथा, उनके आगमन की सूचना पाकर आनन्दविभोर हो उठा है। किन्तु इतना सब कुछ होने पर भी यशोधरा के आनन्द की घड़ी अभी तक नहीं आई है। उसके जीवन की दुपहरी अब भी पहले के ही तरह बनी हुई है। वह लगातार जल रही है। जिस प्रकार दोपहर के समय पेड़-पौधे मुझ जाते हैं उसी प्रकार उसका शरीर मुझाया हुआ है।

विशेष:

  1. शरद ऋतु सिद्धार्थ के शांति और शोभा को प्रदर्शित करती हुई यशोधरा की विरह-व्यथा को बढ़ाती है।
  2. पल-पल, थल-थल, झल-झल, कल-कल में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।
  3. शांति-कांति में पद-मैत्री है।
  4. ‘हृदय-कमल’ में रूपक अलंकार है।
  5. ज्योत्स्ना जगती, मेरे मध्याह्न, किरणों की में अनुप्रास अलंकार है।
  6. मानवीकरण अलंकार है।
  7. भाषा तत्सम शब्दावलीयुक्त खड़ी बोली है।
  8. छंदबद्ध रचना में तुकांतता है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
चाँदनी देखकर यशोधरा क्या सोचती है?
उत्तर:
पृथ्वी पर शरदकालीन चाँदनी बिखरी हुई है, जिसे देखकर यशोधरा सोचती है कि यह चाँद की चाँदनी नहीं, बल्कि उसके प्रिय की शांति एवं आभा की चमक है जो चारों ओर बिखर गई है।

प्रश्न (ii)
शरद ऋतु में सरोवर का सौंदर्य किस प्रकार बढ़ गया है?
उत्तर:
शरद ऋतु में सरोवर का जल स्वच्छ हो गया है। उसमें कमल खिल गए हैं। खिले कमलों से ऐसा लगता है, मानो सरोवर का हृदय विकसित हो गया है। स्वच्छ जल में हंस मधुर ध्वनि करते हुए तैर रहे हैं।

प्रश्न (iii)
यशोधरा शरद के सुहावने समय को ‘मध्याह्न’ क्यों कह रही है?
उत्तर:
शरद का समय विरहिणी यशोधरा के लिए सुखद नहीं है। उसका शरीर अब भी उसी प्रकार मुर्शाया हुआ है, जैसे दोपहरी में पौधे मुरझा जाते हैं, इसीलिए इस सुहावने समय को उसने मध्याह्न कहा है।

काव्यांश पर आधारित शिल्प-सौंदर्य संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
काव्यांश में विरहाकुल यशोधरा की दशा का मार्मिक चित्रण हुआ है। षड्ऋतु वर्णन के माध्यम से यह वर्णन प्रभावी बन गया है। शरद ऋतु में चारों ओर बिखरी चाँदनी और सरोवर में खिले कमल सौंदर्य बढ़ा रहे हैं पर यशोधरा का तन-मन दोपहरी में मुरझाए पौधों जैसा है। वह विरहाग्नि में जल रही है।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शरद ऋतु में फैली शोभा एवं शांति से यशोधरा की विरह व्यथा बढ़ रही है। ‘हृदय कमल’ में रूपक, ‘ज्योत्स्ना जगती’ तथा ‘मेरे मध्याह्न’ में अनुप्रास अलंकार, ‘पल-पल’, ‘थल-थल’ आदि में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार, काव्यांश में मानवीकरण अलंकार है। तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली का प्रयोग है। अंतिम पंक्तियों में वियोग शृंगार रस घनीभूत है।

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प्रश्न 4.
हेमपुंज हेमंत काल के, इस आतप पर बारूँ।
प्रिय स्पर्श की पुलकावलि मैं, कैसे आज बिसारूँ।
किंत शिशिर ये ठंडी साँसें, हाय कहाँ तक धारूँ,
तन गारूँ मन मारूँ पर क्या, मैं जीवन भी हारूँ।
मेरी बाँहें गही स्वामी ने,
मैं ने उनकी छाँह गही॥4॥ (Page 70)

शब्दार्थ:

  • हेमपंज – सोने का ढेर या भण्डार।
  • आतप – धूप।
  • स्पर्श – छूना। पुलकावलिरोमांच।
  • विसारूँ – भूलना।
  • धारूँ – धारण करूँ।
  • गारूँ – निचोड़ना, क्षीण करना।
  • छाँह – छोह छाया।

प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कविता ‘यशोधरा की व्यथा’ से लिया गया है। यशोधरा अपनी विरह-व्यथा अपनी सखि से कह रही है।

व्याख्या:
ऋतुएँ परिवर्तनशील हैं। यशोधरा अपने प्रियतम के गुणों की छाया उनके विकास में देखकर उनका स्मरण कर व्यथा का विस्तार देखती है। यशोधरा गौतम को याद करती हुई अपनी सखी से कहती है कि ऐ सखि! मैं हेमन्त ऋतु की धूप पर सोने का ढेर तक निछावर करने को प्रस्तुत हूँ। आज मुझे प्रियस्पर्श के कारण हुए रोमांच का भी जो अनुभव हो रहा है, उसे कैसे भूल सकती हूँ। किन्तु अब तो शिशिर भी आ पहुँचा है।

उसके साथ भयानक शीतलता भी आयी है। ऐ सखि! बता तो सही कि मैं ठंडी साँसों को कहाँ तक सहन कर सकती हूँ। मेरा शरीर निरंतर क्षीण होता जा रहा है। मैं बार-बार अपने मन को मार रही हूँ; किन्तु इसका यह अर्थ. तो नहीं कि मैं जीवन से भी हार मान बैठू। अमर संबंधों की स्थापना के लिए प्रियतम ने मेरा वरण किया था और मैंने उनकी शरण ली थी।

विशेष:

  1. कवि ने हेमंत और शिशिर ऋतु में यशोधरा की विरह व्यथा को प्रकट किया है।
  2. हेमपुंज हेमंत, मन मारूँ में अनुपास अलंकार है।
  3. तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है।
  4. मानवीकरण अलंकार है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
यशोधरा हेमज न्योछावर करना चाहती है, क्यों?
उत्तर:
यशोधरा हेमंत ऋतु की कोमल धूप पर सोने का ढेर (हेमपुंज) न्योछावर करना चाहती है, क्योंकि यह धूप उसे रोमांचित कर रही है।

प्रश्न (ii)
शिशिर ऋतु का यशोधरा पर क्या प्रभाव पड़ा है?
उत्तर:
शिशिर ऋतु में ठंड वहुत बढ़ गई है। वह भयानक हो गई है। यशोधरा का कमजोर शरीर इसे सहने में असमर्थ हो रहा है। उसका शरीर निरंतर क्षीण होता जा रहा है।

प्रश्न (iii)
हेमंत की धूप यशोधरा को किन यादों को ताजा करा रही है?
उत्तर:
हेमंत की धूप यशोधरा को रोमांचित कर रही है। इससे उसे प्रिय के स्पर्श के कारण होने वाले रोमांच की यादें ताजा हो रही हैं।

काव्यांश पर आधारित शिल्प-सौंदर्य संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
काव्यांश में यशोधरा की विरह व्यथा का वर्णन किया गया है। एक ओर हेमंत की धूप उसे रोमांचित कर प्रिय की याद में दग्ध कर रही है तो शिशिर द्वारा उसके शरीर को और कमजोर करने का चित्रण है। विरह उसके शरीर को कथित एवं क्षीण कर रहा है।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
काव्यांश में हेमंत और शिशिर द्वारा यशोधरा की विरह बढ़ाने का मर्मस्पर्शी वर्णन है। ‘हेम-पुंज हेमंत’, ‘मन मारूँ’ में अनुप्रास तथा काव्यांश में मानवीकरण अलंकार है। भाषा तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली है। काव्यांश में वियोग शृंगार रस घनीभूत है।

प्रश्न 5.
पेड़ों ने पत्ते तक उनका, त्याग देखकर त्यागे।
मेरा धुंधलापन कुहरा बन, छाया सबके आगे।
उनके तप के अग्नि-कुंड-से घर-घर में है जागे,
मेरे कम्प हाय! फिर भी तुम नहीं कहीं से भागे।
पानी जमा परंतु न मेरे,
खट्टे दिन का दूध-दही॥5॥ (Page 70)

शब्दार्थ:

  • खट्टे दिन – बुरे दिन।

प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कविता ‘यशोधरा की व्यथा’ से लिया गया है। इस काव्यांश में यशोधरा अपनी विरह-व्यथा व्यक्त कर रही है।

व्याख्या:
पतझड़ का आगमन हुआ। वनस्थली में सभी ओर पतझड़-ही-पतझड़ देखकर यशोधरा कहती है कि मेरे प्रियतम के अपूर्व त्याग को देखकर वृक्षों ने अपने पत्तों तक का त्याग कर दिया है किन्तु दूसरी ओर मेरी निराशा कुहरे का रूप धारण करके सबके सामने छा गई है। संध्या के समय बृहस्थ अपने घर के आँगन में अँगीठी जलाते हैं और उसके चारों ओर बैठकर अपना शरीर सेंकते हैं।

इसे देखकर यशोधरा कहती है कि मेरे प्रियतम की तपस्या की पंचाग्नि से प्रभावित होकर ही इन गृहस्थों ने अपने-अपने घरों में अंगीठियाँ जलायी हैं। इस प्रकार इन लोगों का तो शीत से उत्पन्न कंपन दूर हो गया; किन्तु मेरा कंपन अभी भी बना हुआ है। अंत में शेष प्रकृति को सफल होते देखकर यशोधरा कहती है कि जल तो जगकर चट्टान बन गया; किन्तु मेरे बुरे दिन अब भी दूर नहीं हुए; अर्थात् मेरी मनोकामनाएँ अभी तक पूर्ण नहीं हुईं।

विशेष:

  1. यशोधरा ने पतझड़ के द्वारा अपनी विरह व्यथा को व्यक्त किया है।
  2. दूध-दही में अनुप्रास अलंकार है।
  3. भाषा तत्सम शब्दावलीयुक्त खड़ी बोली है।
  4. घर-घर में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।
  5. छंदबद्ध रचना में तुकांतता है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु, संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
पेड़ों के गिरते पत्ते देख यशोधरा क्या सोचती है?
उत्तर:
पतझड़ में पेड़ों के गिरते पत्ते देख यशोधरा सोचती है कि उसके प्रिय सिद्धार्थ का त्याग देखकर वन प्रांत के सभी वृक्षों ने अपने पत्तों का त्याग कर दिया

प्रश्न (ii)
यशोधरा की निराशा किस रूप में फैली है?
उत्तर:
विरहाग्नि में जलती यशोधरा की विरह कम होने की जगह बढ़ती ही जा रही है। इससे उसकी निराशा भी बढ़ गई है। यह निराशा चारों ओर कोहरे के रूप में छा गयी है।

प्रश्न (iii)
‘खट्टे दिन’ किसे कहा गया है और क्यों?
उत्तर:
‘खट्टे दिन’ यशोधरा के विरहयुक्त समय को कहा गया है। उसके बुरे दिन अभी समाप्त नहीं हुए हैं। ऐसा इसलिए कहा गया है कि क्योंकि उसकी मनोकामना पूर्ण नहीं हुई है।

काव्यांश पर आधारित शिल्प-सौंदर्य संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
काव्यांश में विभिन्न ऋतुओं के. माध्यम से यशोधरा की विरह-व्यथा का चित्रण किया गया है। पतझड़ में वनस्थली के वृक्षों के गिरते पत्तों को अपने प्रिय का अद्भुत त्याग समझती है। उसकी निराशा ही कोहरा बन चारों ओर छा गई है। अर्थात् उसकी विरह व्यथा कम नहीं हो रही है।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
काव्यांश में यशोधरा द्वारा पतझड़ और चारों ओर छाए कोहरे के माध्यम से विरह-व्यथा प्रकट की गई है। ‘दूध-दही’ में अनुप्रास अलंकार तथा घर-घर में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है। तत्सम शब्दावली युक्त खड़ी बोली का प्रयोग है। काव्यांश में वियोग श्रृंगार रस व्याप्त है।

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प्रश्न 6.
आशा से आकाश थमा है, स्वाँस-तन्तु कब टूटे।
दिन मुख दमके, पल्लव चमके, भव ने नव रस लूटे।
स्वामी के सद्भाव फैलकर, फूल-फूल में फूटे,
उन्हें खोजने को मानो, नूतन निर्झर छूटे।
उनके श्रम के फल सब भोगें,
यशोधरा-की विनय यही॥6॥ (Page 71)

शब्दार्थ:

  • स्वाँस तंतु – साँसों के सूत्र।
  • दिन मुख – सूर्य।
  • पल्लव – पत्ते।
  • भव – संसार।
  • नव रस – नए रस।
  • नूतन निर्झर – नए झरने।
  • श्रम – परिश्रम।
  • स्वामी – पति (गौतम बुद्ध)।

प्रसंग:
प्रस्तुत काव्यांश मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कविता ‘यशोधरा की व्यथा’ से लिया गया है। ऋतु परिवर्तन के बाद भी यशोधरा की व्यथा का अन्त नहीं हुआ, फिर भी वह आशा का दामन थामे हुए है। उसे विश्वास है कि उसके पति एक दिन अवश्य आयेंगे।

व्याख्या:
यशोधरा कहती है कि यह आधारहीन आकाश आशा की भित्ति पर ही टिका हुआ है। यदि जीवन में आशा न हो तो जीवन का सूत्र कभी भी टूट सकता है। रात्रि के पश्चात् नियति के क्रमानुसार दिन का आगमन होता है। अंधकार के पश्चात् सारा संसार प्रकाश से जगमगा उठता है इसलिए यशोधरा भी अपने प्रिय-मिलन की आशा को लिए जी रही है। इस समय अपने प्रियतम के वियोग में उसका जीवन रात्रि के समान अंधकारमय हो रहा है; किन्तु उसे यह दृढ़ विश्वास है कि कल उसके जीवन का भी सवेरा होगा। उसके जीवन में प्रकाश आयेगा और नये-नये पत्ते भी पल्लवित होंगे।

आकाश को अपने विश्वास के ही कारण फल मिला है। वहाँ सूर्योदय हुआ, जिसके परिणामस्वरूप सारे संसार में नये आनन्द की लहर फैल गई और वनस्पतियों में अंकुर फूट पड़े। वातावरण में चारों ओर उल्लास-ही-उल्लास दृष्टिगोचर हुआ। प्रफुल्लित तथा सौन्दर्य से भरपूर पुष्पों में यशोधरा अपने स्वामी की कल्याणमयी भावनाओं का प्रतिबिंब देखती है। जिस प्रकार पुष्पों की सुगंध से समस्त उपवन महक उठा है, ठीक उसी प्रकार कल उसके पति का यश सारे संसार में फैलेगा। जब यशोधरा की दृष्टि बड़ी तेजी से बहती हुई निर्झरिणियों पर पड़ती है, तो उसे लगता है, मानो ये उसके पति के पाद-प्रक्षालनार्थ वेग से दौड़ी जा रही है।

कहने का भाव यह है कि उसे यह विश्वास है कि सिद्धि-प्राप्ति के उपरान्त मानव तो क्या, प्रकृति भी उसके प्रियतम के चरणों पर झुकेगी। सारा संसार उसके प्रियतम की पूजा करेगा और यशोधरा को उसके त्याग के प्रतिफल में अपने स्वामी का कल्याण प्राप्त होगा। यशोधरा यही विनय करती है कि उसके प्रियतम अपनी तपस्या के परिश्रम के परिणामस्वरूप जो फल लावें, उसका भोगी समस्त संसार बने।

विशेष:

  1. विरहिणी यशोधरा को भी प्रिय-मिलन की आशा है।
  2. उनके श्रम-फल सब भोगे में विश्व कल्याण की भावना झलकती है।
  3. फूल-फूल में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।
  4. नूतन-निर्झर में अनुप्रास अलंकार है।
  5. उन्हें खोजने को मानो, नूतन निर्झर छूटे में उत्प्रेक्षा अलंकार है।
  6. भाषा तत्सम शब्दावलीयुका खड़ी बोली है।
  7. छंदबद्ध रचना में तुकांतता है।

काव्यांश पर आधारित विषय-वस्तु संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
आकाश और जीवन में क्या समानता है?
उत्तर:
आकाश और जीवन में यह समानता है कि जिस प्रकार आकाश आधाररहित होकर आशा की दीवार पर टिका है, उसी प्रकार जीवन की आशा पर टिका है। आशा के अभाव में जीवन कभी भी टूट सकता है।

प्रश्न (ii)
यशोधरा के जीवन का अवलंब क्या है?
उत्तर:
यशोधरा के जीवन का अवलंब प्रिय से मिलन की आशा है। उसे दृढ़ विश्वास है कि प्रिय के बिना उसका जो जीवन अंधकारमय हो गया है, उसका सवेरा अवश्य होगा, जिससे उसका जीवन भी आलोकित हो जाएगा।

प्रश्न (iii)
यशोधरा क्या विनय करती है?
उत्तर:
यशोधरा यह विनय करती है कि उसके प्रिय पति अपने पति के परिश्रम के उपरांत जो भी फल लाएँ, उसका उपयोग समस्त संसार करे।

काव्यांश पर आधारित शिल्प-सौंदर्य संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भाव-सौंदर्य:
काव्यांश में विरहाकुल यशोधरा का जीवन के प्रति आशीभरे दृष्टिकोण का वर्णन है। ऋतु परिवर्तन के बाद भी वह कथित है, पर आशा की डोर थामे है। काव्यांश में उसके त्यागमयी दृष्टिकोण की झलक मिलती है जिसमें वह पति की तपस्या से प्राप्त फल से संसार के लाभान्वित होने की कामना करती है।

प्रश्न (ii)
काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिल्प-सौंदर्य:
यहाँ यशोधरा के आशावादी दृष्टिकोण एवं त्यागमयी भावना का वर्णन किया गया है, जिसमें विश्वकल्याण की झलक मिलती है। काव्यांश में अनुप्रास, पुनरुक्तिप्रकाश तथा उत्प्रेक्षा अलंकार है। भाषा तत्सम शब्दावलीयुक्त खड़ी बोली है। काव्यांश में वियोग श्रृंगार रस की अनुभूति होती है।

MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 6 राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय

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MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 6 राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय

राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय Important Questions

राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न (a)
समष्टि अर्थशास्त्र के अध्ययन का विषय है –
(a) राष्ट्रीय आय का सिद्धांत
(b) उपभोक्ता का सिद्धांत
(c) उत्पादक का सिद्धांत
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) राष्ट्रीय आय का सिद्धांत

प्रश्न (b)
निम्नलिखित में कौन-सा प्रवाह नहीं है –
(a) पूँजी
(b) आय
(c) निवेश
(d) मूल्य ह्रास।
उत्तर:
(a) पूँजी

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प्रश्न (c)
राष्ट्रीय आय का मापन निम्नलिखित में किस विधि से किया जाता है –
(a) उत्पादन विधि
(b) आय विधि
(c) व्यय विधि
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न (d)
प्राथमिक क्षेत्र में निम्नलिखित में कौन शामिल है –
(a) भूमि
(b) बन
(c) खनन
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न (e)
एक वर्ष की राष्ट्रीय आय को जनसंख्या से भाग देने पर प्राप्त होती है –
(a) निजी आय
(b) व्यक्तिगत आय
(c) व्यक्तिगत व्यय योग्य आय
(d) प्रति व्यक्ति आय।
उत्तर:
(d) प्रति व्यक्ति आय।

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प्रश्न (f)
उत्पादन करने वाले उद्यमों को बाँटा जाता है –
(a) दो क्षेत्रों में
(b) तीन क्षेत्रों में
(c) चार क्षेत्रों में
(d) पाँच क्षेत्रों में।
उत्तर:
(b) तीन क्षेत्रों में

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. कृषि को …………………………….. क्षेत्र में शामिल किया जाता है।
  2. पीगू ने कल्याण को ………………………….. भागों में बाँटा है।
  3. चीनी उत्पाद अर्थव्यवस्था के …………………………………. क्षेत्र में सम्मिलित होता है।
  4. भारत में राष्ट्रीय आय की गणना का कार्य …………………………….. करता है।
  5. एक लेखा वर्ष की अवधि में देश की भौगोलिक सीमाओं के अंतर्गत उत्पादित अन्तिम वस्तुओं एवं सेवाओं के योग को …………………………….. कहते हैं।
  6. …………………………. आय देश के आर्थिक विकास का सूचक होती है।

उत्तर:

  1. प्राथमिक
  2. दो
  3. द्वितीयक
  4. केन्द्रीय सांख्यिकीय
  5. GDP
  6. राष्ट्रीय।

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प्रश्न 3.
सत्य /असत्य बताइये –

  1. भारत की प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों की तुलना में काफी कम है?
  2. काले धन ने देश में समानान्तर अर्थव्यवस्था को जन्म दिया है?
  3. भारत की राष्ट्रीय आय में सर्वाधिक योगदान द्वितीयक क्षेत्र का है?
  4. प्राथमिक क्षेत्र में विद्युत्, गैस एवं जलापूर्ति को सम्मिलित किया जाता है?
  5. उपहार के रूप में प्राप्त आय को राष्ट्रीय आय में सम्मिलित किया जाता है?
  6. पुरानी वस्तुओं की बिक्री से प्राप्त आय को राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता है।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. असत्य
  5. असत्य
  6. सत्य।

प्रश्न 4.
सही जोड़ियाँ बनाइये –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 6 राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय img 1
उत्तर:

  1. (e)
  2. (a)
  3. (d)
  4. (c)
  5. (b)

प्रश्न 5.
एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिये –

  1. भारतीय अर्थव्यवस्था के कौन – से क्षेत्र का राष्ट्रीय आय में सर्वाधिक योगदान है?
  2. अंतिम स्टॉक एवं प्रारंभिक स्टॉक में अन्तर कहलाता है?
  3. राष्ट्रीय आय का अध्ययन किस अर्थशास्त्र में किया जाता है?
  4. राष्ट्रीय आय में वृद्धि किस बात की सूचक होती है?
  5. राष्ट्रीय आय की गणना वर्ष में कितनी बार की जाती है ?
  6. वर्ष में कौन – सी वस्तुओं व सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को कुल राष्ट्रीय उत्पाद में जोड़ा जाता है?

उत्तर:

  1. तृतीयक
  2. स्टॉक में परिवर्तन
  3. समष्टि अर्थशास्त्र में
  4. आर्थिक प्रगति की
  5. एक बार
  6. अंतिम।

राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यष्टि अर्थशास्त्र क्या है?
उत्तर:
वह अर्थशास्त्र जिसमें व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक समस्याओं का अध्ययन एवं विश्लेषण किया जाता है व्यष्टि अर्थशास्त्र कहलाता है। जैसे – एक व्यक्ति, एक परिवार, एक इकाई, एक उत्पादक आदि।

प्रश्न 2. समष्टि अर्थशास्त्र क्या है?
उत्तर:
समष्टि अर्थशास्त्र वह आर्थिक प्रणाली है जिसमें आर्थिक समस्याओं का अध्ययन एवं विश्लेषण अर्थव्यवस्था के स्तर पर किया जाता है। जैसे – सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था, समग्र उत्पादन, समग्र विनियोग आदि।

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प्रश्न 3. आर्थिक इकाई क्या है?
उत्तर:
आर्थिक इकाई का आशय उन व्यक्तियों या संस्थाओं से है जो आर्थिक निर्णय लेते हैं। उदाहरण के लिये, उपभोक्ता निर्णय लेता है, क्या एवं कितना उपभोग करना है? एक उत्पादक निर्णय लेता है कि किन वस्तुओं एवं सेवाओं का, कितनी मात्रा में उत्पादन करना है। वह आर्थिक इकाई या अभिकर्ता एक निवेशक भी हो सकता है जो यह निर्णय लेता है कि उसे कब, कहाँ एवं कितनी मात्रा में धन का विनियोजन करना है। सरकार भी आर्थिक इकाई के रूप में निर्णयकर्ता हो सकती है कि अधिकतम लोक कल्याण एवं देश के आर्थिक विकास में कैसे निर्णय लिये जायें ताकि आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

प्रश्न 4.
उपभोक्ता वस्तुएँ किसे कहते हैं?
उत्तर:
मानवीय आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिये प्रत्यक्ष रूप से उपभोग करने की प्रतिसालग्न वस्तुएँ ही उपभोक्ता वस्तुएँ कहलाती हैं। उदाहरण के लिये, दूध, सब्जी, गेहूँ, चावल का उपभोग आदि।

प्रश्न 5.
पूँजीगत वस्तुओं से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
उत्पादन की प्रक्रिया में ऐसी स्थिर परिसंपत्तियाँ जिनका बार – बार प्रयोग होता है पूँजीगत वस्तुएँ कहलाती हैं। इन्हें टिकाऊ उपभोग उत्पादक वस्तुओं के नाम से भी जाना जाता है। प्लांट एवं मशीनरी पूँजीगत वस्तुएँ हैं जिनका प्रयोग उत्पादन में बारंबार किया जाता है।

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प्रश्न 6.
अंतिम वस्तुओं से आपका क्या आशय है?
उत्तर:
अंतिम वस्तुओं काय उन:
से है जो उपभोक्ता एवं निवेशक द्वारा वस्तु के अंतिम प्रयोग के लिये उपलब्ध होती है। उदाहरण के लियं उपपाक्ताओं द्वारा उपभोग के लिये एवं उत्पादकों द्वारा निवेश के लिये जो वस्तुएँ अंतिम तौर पर उपलब्ध होती हैं उन्हें अंतिम वस्तुएँ कहते हैं। दूसरे शब्दों में, जब कोई वस्तु अंतिम प्रयोगकर्ता के पास पहुँच जाती है तो उसे अंतिम वस्तु कहा जाता है जिसका अंतिम प्रयोग केवल उपभोक्ता या निवेश होता है।

प्रान 7.
मध्यवर्ती वस्तुओं से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मध्यवर्ती वस्तुओं का आशय ऐसी वस्तुओं से है जो किसी लेखावर्ष में उत्पादन में कच्चे माल के रूप में उपयोग के लिये अथवा पुनः बिक्री के लिये खरीदी जाती है । मध्यवर्ती वस्तुओं को राष्ट्रीय आय की गणना में शामिल नहीं किया जाता है।

प्रश्न 8.
प्रवाह एवं स्कंध (Flow and Stock) की अवधारणा को समझाइये?
उत्तर:
प्रवाह चर के अन्तर्गत:
प्रवाह एक ऐसी मात्रा है जिसे उचित समयावधि जैसे घंटे, दिन, सप्ताह, मास, वर्ष आदि के आधार पर मापा जाता है। उदाहरण के लिये, व्यय, बचत, पूँजी निर्माण, ब्याज, पूँजीह्रास, मुद्रा की पूर्ति में परिवर्तन आदि। स्कंध (स्टॉक) वह मात्रा है जो किसी निश्चित समय बिन्दु पर मापी जाती है। उदाहरण के लिये, विदेशी ऋण, ऋण की मात्रा, संपत्ति, उपस्कर आदि।

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प्रश्न 9.
सकल निवेश (Gross Investment) से क्या आशय है?
उत्तर:
सकल निवेश से तात्पर्य पूँजीगत वस्तुओं जैसे:
मशीनों, भवनों, उपकरणों के स्कंध में वृद्धि से है जो भविष्य में अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता को बढ़ाते हैं। किसी अर्थव्यवस्था में उत्पादन क्षमता में भौतिक पूँजी के स्कंध में होने वाली वृद्धि, पूँजी निर्माण कहलाती है। अतः अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने वाला निवेश, सकल निवेश कहलाता है। सकल निवेश में से ह्रास को घटाकर शुद्ध निवेश ज्ञात किया जाता है।

प्रश्न 10.
मूल्यह्रास किसे कहते हैं?
उत्तर:
अचल संपत्तियों के निरंतर उपयोग के कारण इन परिसंपत्तियों के मूल्य में आने वाली शनैःशनैः कमी ही मूल्यह्रास कहलाती है। सामान्य टूट – फूट एवं अप्रचलन के कारण स्थायी संपत्तियों के मूल्य में गिरावट को स्थायी पूँजी का उपभोग कहते हैं। राष्ट्रीय आय की गणना के लिये सकल राष्ट्रीय उत्पाद में से ह्रास को घटाया जाता है।

प्रश्न 11.
आय के चक्रीय प्रवाह (Circular flow of Income) से आपका क्या आशय है?
उत्तर:
आय के चक्रीय प्रवाह से आशय मुद्रा एवं पदार्थ तथा सेवाओं के निरंतर प्रवाह से है। आय का चक्रीय प्रवाह अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों जैसे परिवार, फर्म, सरकारी क्षेत्र से जुड़ा रहता है। उदाहरण के लिये, फर्मे पहले आय सृजित करती हैं तत्पश्चात् ये आय परिवारों में साधन सेवायें प्रदान करने के लिये वितरित की जाती हैं और अंत में वही आय फर्मों के पास वापस आ जाती है। यही आय का चक्रीय प्रवाह कहलाता है।

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प्रश्न 12.
आय का चक्रीय प्रवाह किन सिद्धांतों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
आय का चक्रीय प्रवाह दो मूल सिद्धांतों पर निर्भर होता है –

  1. विनिमय की प्रक्रिया में उपभोक्ता द्वारा किया गया खर्च विक्रेताओं द्वारा प्राप्त की गई राशि के बराबर होता है।
  2. वस्तुओं एवं सेवाओं का प्रवाह एक दिशा की ओर होता है जबकि मौद्रिक भुगतानों का प्रवाह विपरीत दिशा की ओर होता है इसी कारण आय का चक्रीय प्रवाह उत्पन्न होता है।

अतः वास्तविक प्रवाह का अर्थ पदार्थों एवं सेवाओं के प्रवाहों से है जबकि मौद्रिक प्रवाह का आशय साधन भुगतान एवं उपभोग व्यय से है।

प्रश्न 13.
राष्ट्रीय आय क्या है?
उत्तर:
एक देश के सामान्य निवासियों द्वारा देश के अंदर व देश के बाहर अर्जित साधन आय का योग ही राष्ट्रीय आय कहलाती है एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को राष्ट्रीय आय कहते हैं।

राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय में अन्तर स्पष्ट कीजिए?
अथवा
राष्ट्रीय आय तथा प्रति व्यक्ति आय से क्या आशय है?
राष्ट्रीय आय तथा प्रति व्यक्ति आय में अन्तर बताइए?
उत्तर:
राष्ट्रीय आय:
एक वर्ष में उत्पादित समस्त वस्तुओं एवं सेवाओं के मौद्रिक मूल्य का योग राष्ट्रीय आय कहलाती है।

प्रति व्यक्ति आय:
जब कुल राष्ट्रीय आय में कुल जनसंख्या से भाग दिया जाता है तो प्रति व्यक्ति आय प्राप्त होती है।
राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय में अन्तर –
राष्ट्रीय आय:

  1. किसी देश के समस्त उत्पादकों के वास्तविक उत्पादन का योग राष्ट्रीय आय कहलाता है।
  2. राष्ट्रीय आय में प्रति व्यक्ति आय शामिल होती है।
  3. राष्ट्रीय आय विकास का प्रतीक है।

प्रति व्यक्ति आय:

  1. एक व्यक्ति विशेष द्वारा विभिन्न स्रोतों से प्राप्त उत्पादन का योग राष्ट्रीय आय कहलाता है।
  2. प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय आय का एक भाग है।
  3. प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय आय का एक भाग है।

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प्रश्न 2.
समष्टि अर्थशास्त्र के दृष्टिकोण से अर्थव्यवस्था के चार प्रमुख क्षेत्रकों का वर्णन कीजिए?
उत्तर:
किसी अर्थव्यवस्था को समष्टि अर्थशास्त्र के दृष्टिकोण से जिन चार भागों में विभाजित किया गया है वे निम्न हैं –
1. परिवार क्षेत्र:
जिन वस्तुओं एवं सेवाओं का उपभोग उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है उसे परिवार क्षेत्र कहते हैं। इस क्षेत्र में परिवार क्षेत्र के उत्पादन के घटकों का स्वामी भी परिवार होता है।

2. उत्पादक क्षेत्र:
इस क्षेत्र में उन सभी घटकों को सम्मिलित किया जाता है जो उत्पादन की क्रिया में संलग्न रहते हैं। वे सभी इकाइयाँ जो उत्पादन का कार्य करती हैं उन्हें अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्र में सम्मिलित किया जाता है वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन जिन फर्मों के द्वारा किया जाता है उनके द्वारा उत्पादन के साधनों जैसे भूमि, श्रम, पूँजी, संगठन एवं साइज (क्षेत्र) किराया देकर प्राप्त किया जाता है।

3. सरकारी क्षेत्र:
कल्याणकारी सेवाओं को बनाये रखने का काम सरकार का है। वैसे तो सरकार का कार्य कानून और व्यवस्था को बनाये रखना है किन्तु सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के लिये एक उत्पादक की तरह भी कार्य करती है।

4. विदेशी क्षेत्र:
‘इसमें शेष विश्व को सम्मिलित किया जाता है। इसे Rest of the world’ कहते हैं। इसके अन्तर्गत घरेलू अर्थव्यवस्था का विश्व के अन्य देशों के मध्य पूँजी के प्रवाह तथा आयात – निर्यात को शामिल किया जाता है।

प्रश्न 3.
व्यष्टि अर्थशास्त्र एवं समष्टि अर्थशास्त्र में अन्तर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
व्यष्टि अर्थशास्त्र एवं समष्टि अर्थशास्त्र में अन्तर –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 6 राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय img 2

प्रश्न 4.
स्टॉक तथा प्रवाह से क्या समझते हैं? स्टॉक तथा प्रवाह में तीन अन्तर बताइए?
उत्तर:
स्टॉक तथा प्रवाह:
स्टॉक वह मात्रा है जिसे किसी समय विशेष पर मापा जाता है जबकि प्रवाह वह मात्रा है जिसे विशेष समयावधि में मापा जाता है। जैसे एक निश्चित तिथि पर देश में मुद्रा की मात्रा स्टॉक है तथा एक वित्त वर्ष में जो व्यय है वह प्रवाह कहलाता है।
स्टॉक तथा प्रवाह में अन्तर –
स्टॉक:

  1. स्टॉक वह मात्रा है, जिसे किसी समय विशेष पर मापा मापा जाता है।
  2. स्टॉक का कोई समयकाल नहीं होता।
  3. स्टॉक एक स्थैतिक अवधारणा है।
  4. कुछ चरों की स्टॉक अवधारणाएँ नहीं होती। कुछ चरों की केवल प्रवाह अवधारणाएँ होती हैं। जैसे – आयात – निर्यात।

प्रवाह:

  1. प्रवाह वह मात्रा है, जिसे विशेष समयावधि में मापा जाता है।
  2. प्रवाह का समयकाल होता है।
  3. प्रवाह एक प्रावैगिक अवधारणा है।
  4. कुछ चरों की केवल प्रवाह अवधारणाएँ होती हैं। जैसे – आयात – निर्यात।

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प्रश्न 5.
राष्ट्रीय आय एवं राष्ट्रीय पूँजी में अन्तर बताइए?
उत्तर:
राष्ट्रीय आय एवं राष्ट्रीय पूँजी में अन्तर –
राष्ट्रीय आय:

  1. राष्ट्रीय आय एक समयावधि जैसे – एक वर्ष की होती है – अतः यह एक प्रवाह होती है।
  2. राष्ट्रीय आय में सेवाएँ शामिल होती हैं।
  3. राष्ट्रीय आय में पूँजीगत तथा उपभोग दोनों वस्तुएँ शामिल होती हैं।
  4. राष्ट्रीय आय, राष्ट्रीय पूँजी को प्रभावित करती है।
  5. आर्थिक क्रियाएँ राष्ट्रीय आय को प्रभावित करती हैं।

राष्ट्रीय पूँजी:

  1. राष्ट्रीय पूँजी किसी समय विशेष पर होती है, एक स्टॉक है।
  2. राष्ट्रीय पूँजी में सेवाएँ शामिल नहीं होती हैं।
  3. राष्ट्रीय आय में केवल पूँजीगत वस्तुओं को शामिल शामिल होती हैं।
  4. राष्ट्रीय पूँजी, राष्ट्रीय आय का कारण होती है।
  5. एक निश्चित समय में राष्ट्रीय पूँजी स्थिर होती है।

प्रश्न 6.
सन् 1929 की विश्वव्यापी मंदी को समझाइये?
उत्तर:
सन् 1929 में विश्वव्यापी मंदी ने संपूर्ण विश्व के विकासत देशों की अर्थव्यवस्था को चूर-चूर कर दिया। इस मंदी में उत्पादन तो था पर खरीदने वाले नहीं थे। सन् 1929 से सन् 1933 के मध्य संयुक्त राज्य अमेरिका में बेरोजगारी 3% से बढ़कर 25% तक बढ़ गई। अमेरिका के समग्र निर्गत में 33% की गिरावट आ गई। इसी दौरान सन् 1936 में जॉन मेनार्ड कीन्स ने एक पुस्तक प्रकाशित की ‘रोजगार, ब्याज एवं मुद्रा का सामान्य सिद्धांत’ इसी ने समष्टि अर्थव्यवस्था की नींव रखी।

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प्रश्न 7.
समष्टि अर्थशास्त्र एवं व्यष्टि अर्थशास्त्र में परस्पर क्या निर्भरता है?
उत्तर:
समष्टि अर्थशास्त्र में हम सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था का एक इकाई के रूप में अध्ययन करते हैं एवं व्यष्टि अर्थशास्त्र में हम अर्थव्यवस्था की छोटी – छोटी इकाईयों का अध्ययन करते हैं। दोनों एक – दूसरे के प्रतियोगी नहीं वरन् पूरक हैं। एक – दूसरे पर आश्रित हैं। उदाहरण के लिये, यदि व्यक्ति की आय बढ़ेगी तो राष्ट्रीय आय स्वतः बढ़ जायेगी परन्तु राष्ट्रीय आय में वृद्धि हो रही है तो यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति की आय बढ़ रही हो। व्यष्टि अर्थशास्त्र की भाँति समष्टि अर्थशास्त्र में भी सीमित साधनों के विवेकपूर्ण उपयोग एवं प्रबंधन की समस्या ही मुख्य समस्या है। समष्टि अर्थशास्त्र में व्यक्तिगत हित की अपेक्षा सार्वजनिक हित एवं सामाजिक कल्याण पर अधिक बल दिया जाता है। समष्टि अर्थशास्त्र एवं व्यष्टि अर्थशास्त्र राधा एवं कृष्ण की भाँति है दोनों एक – दूसरे के बिना रह नहीं सकते। दोनों एक – दूसरे पर निर्भर हैं।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित आँकड़ों से राष्ट्रीय आय की गणना कीजिए –

  1. वेतन – ₹ 6,000
  2. किराया – ₹ 2,000
  3. लाभ – ₹ 2,000
  4. ब्याज – ₹ 1,000
  5. उपभोग – ₹ 5,000
  6. सकल घरेलू विनियोग – ₹ 800।

हल: राष्ट्रीय आय = वेतन + किराया + लाभ + ब्याज
= 6,000 + 2,000 + 2,000 + 1.000
= ₹ 11,000।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर आय गणना विधि द्वारा राष्ट्रीय आय की गणना कीजिए –
मदें:
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 6 राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय img 3
हल: राष्ट्रीय आय = वेतन एवं मजदूरी + ब्याज + किराया + लाभ
= 18,000 + 7,000 + 6,000 + 25.000
राष्ट्रीय आय = ₹ 56,000 करोड़।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर आय गणना विधि द्वारा राष्ट्रीय आय की गणना कीजिए –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 6 राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय img 4
हल: राष्ट्रीय आय = वेतन एवं मजदूरी + किराया/लगान + लाभ + ब्याज
= 30,000 + 10,000 + 50,000 + 10,000
राष्ट्रीय आय = ₹ 1,00000 करोड़।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित आँकड़ों से राष्ट्रीय आय की गणना कीजिए –

  1. वेतन – ₹ 60,000
  2. किराया – ₹ 20,000
  3. लाभ – ₹ 20,000
  4. ब्याज – ₹ 10,000
  5. उपभोग – ₹ 50,000
  6. सकल घरेलू उत्पाद – ₹ 8,000
  7. मूल्यह्रास – ₹ 10,000

हल: राष्ट्रीय आय की गणना
सूत्र – राष्ट्रीय आय = वेतन + किराया + लाभ + ब्याज
= 60,000 + 20,000 + 20,000 + 10,000
राष्ट्रीय आय = 1,10,000.

प्रश्न 12.
सकल घरेलू उत्पाद की कोई चार विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर:
सकल घरेलू उत्पाद की विशेषताएँ निम्न हैं –

  1. सकल राष्ट्र इस तथ्य को संकेत करता है कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के मूल्य में घिसावट व्यय शामिल है।
  2. सकल घरेलू उत्पाद के मूल्य में दोहरी गणना से बचने के लिए केवल अंतिम वस्तुओं व सेवाओं के मूल्य को ही जोड़ा जाता है।
  3. पुरानी वस्तुओं की बिक्री से प्राप्त राशि इसमें नहीं जोड़ी जाती।
  4. इसके मूल्य में स्व – उपभोग के लिए किया गया उत्पाद तथा खुद – काबिज मकानों का आरोपित किराया शामिल होता है।

प्रश्न 13.
आय गणना विधि का चुनाव करते समय किन – किन बातों पर ध्यान देना आवश्यक है?
उत्तर:
आय गणना विधि का चुनाव करते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए –

  1. गैर – कानूनी कार्यों से होने वाली आय को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। जैसे – जमाखोरी, तस्करी. घूस से प्राप्त आय।
  2. पुरानी वस्तुओं की बिक्री से प्राप्त होने वाली आय को राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता है, किन्तु दलालों को मिलने वाला कमीशन राष्ट्रीय आय में जोड़ा जाता है।
  3. आकस्मिक रूप से मिलने वाली आय को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। जैसे – लॉटरी से मिलने वाली आय।
  4. हस्तांतरित भुगतान, जैसे – पेंशन, छात्रवृत्तियाँ, बेरोजगारी भत्ता, सरकारी सहायता आदि को राष्ट्रीय आय में नहीं जोड़ा जाता।
  5. मृत्यु कर, उपहार कर, सम्पत्ति कर, अप्रत्याशित लाभों पर कर आदि को राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि इन करों का भुगतान करदाता या तो अपने धन में से अथवा भूतकाल की बचत से करता है।

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प्रश्न 14.
आय गणना प्रणाली के प्रमुख घटकों के बारे में लिखिए?(कोई पाँच)
उत्तर:
आय गणना प्रणाली के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं –
1. मजदूरी आय:
मजदूरी आय से तात्पर्य, उस आय से है जो श्रमिक को उनकी सेवाओं के बदले मौद्रिक या किस्त के रूप में प्राप्त होती है। इसमें समस्त कर्मचारियों के वेतन व मजदूरी, श्रमिकों को प्राप्त सामाजिक सुरक्षा योगदान, पेंशन, फण्ड, आवास, शिक्षा, मनोरंजन आदि की सुविधाओं को सम्मिलित किया जाता है।

2. गैर – मजदूरी आय:
भूमि के स्वामी, पूँजीपति तथा साहसी को किराया (लगान), ब्याज तथा लाभांश के रूप जो आय प्राप्त होती है, उसे गैर – मजदूरी आय कहते हैं। इसमें मिश्रित आय को भी सम्मिलित किया गया है।

3. परिचालन अधिशेष:
इसमें सार्वजनिक उद्योगों के परिचालन अधिशेष को सम्मिलित किया जाता है।

4. विदेशों से शुद्ध आय:
इसमें कर्मचारियों का शुद्ध पारिश्रमिक, सम्पत्ति के स्वामित्व एवं उद्यमशीलता से शुद्ध आय तथा निवासी कम्पनियों द्वारा विदेशों से शुद्ध प्रतिधारित आय को सम्मिलित किया जाता है।

5. स्व – उपभोग के लिए वस्तुएँ:
एक अर्थव्यवस्था में उत्पन्न सभी वस्तुएँ बाजार में बिकने के लिये नहीं आतीं बल्कि उसका एक भाग उत्थादक स्वयं के उपभोग के लिये अपने पास रख लेता है। अतः इस भाग का मौद्रिक मूल्य राष्ट्रीय आय में सम्मिलित किया जाता है।

प्रश्न 15.
सकल घरेलू उत्पाद के अंग कौन – कौन से हैं?
उत्तर:
सकल घरेलू उत्पाद से अभिप्राय किसी देश में एक निश्चित समयावधि में उत्पादित अन्तिम वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्यों के योग से होता है –
सकल घरेलू उत्पाद के अंग:

  1. एक देश की घरेलू सीमा में एक निश्चित अवधि में उत्पादित अन्तिम वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य के योग को सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं।
  2. वस्तुओं के उत्पादन में उपभोग एवं पूँजीगत वस्तुओं को शामिल किया जाता है।
  3. उपभोक्ता एवं पूँजीगत वस्तुओं को टिकाऊ एवं गैर – टिकाऊ वस्तुओं में विभक्त किया जाता है।
  4. निजी एवं सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के उत्पादन को लिया जाता है।
  5. अन्तिम वस्तुओं के उत्पादन को ही सकल घरेलू उत्पाद में शामिल किया जाता है।

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प्रश्न 16.
राष्ट्रीय आय की उत्पादन विधि को समझाइये?
अथवा
राष्ट्रीय आय गणना की मूल्य वृद्धि विधि की व्याख्या कीजिए?
उत्तर:
इस विधि के अन्तर्गत राष्ट्रीय आय ज्ञात करने के लिए हम या तो मूल्य वृद्धि ज्ञात कर लेते हैं या एक लेखा वर्ष में उत्पादित समस्त वस्तुओं व सेवाओं के मौद्रिक मूल्य का योग कर लेते हैं। इस योग को बाजार कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं।

प्रश्न 17.
निम्नलिखित आँकड़ों से वैयक्तिक आय और वैयक्तिक प्रयोज्य आय की गणना कीजिए –
(₹ करोड़ में)

  1. कारक लागत पर निवल घरेलू उत्पाद – 8,000
  2. विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय – 200
  3. अवितरित लाभ – 1,000
  4. निगम कर – 500
  5. परिवारों द्वारा प्राप्त ब्याज – 1.500
  6. परिवारों द्वारा भुगतान किया गया ब्याज – 1,200
  7. अंतरण आय – 300
  8. वैयक्तिक कर – 500

हल:
1. वैयक्तिक आय की गणना –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 6 राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय img 5
2.  वैयक्तिक प्रयोज्य आय की गणना –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 6 राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय img 6

प्रश्न 18.
हजाम राजू एक दिन में बाल काटने के लिए ₹ 500 का संग्रहरण करता है। इस दिन उसके उपकरण में ₹ 50 का मूल्यह्रास होता है। इस ₹ 450 में से राजू ₹ 30 बिक्री कर अदा करता है। ₹ 200 घर ले जाता है और ₹ 220 उन्नति और नए उपकरणों का क्रय करने के लिए रखता है। वह अपनी आय में से ₹ 20 आयकर के रूप में अदा करता है। इन पूरी सूचनाओं के आधार पर निम्नलिखित में राजू का योगदान ज्ञात कीजिए –

  1. सकल घरेलू उत्पाद।
  2. बाजार कीमत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद।
  3. कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद।
  4. वैयक्तिक आय।
  5. वैयक्तिक प्रयोज्य आय।

हल :
ΣRi = ₹ 500
स्थायी पूँजी का उपयोग = ₹ 50
बिक्री कर = ₹ 30
प्रतिधारित आय = ₹ 220
घर ले जाई गई आय = ₹ 200
आयकर = ₹ 20

(a) बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP at Market Price) में योगदान
= बाल काटने के लिए प्राप्त आगम
= ₹ 500

(b) बाजार कीमत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP at Market Price) में योगदान
= बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद – स्थायी पूँजी का उपभोग
= ₹ 500 – ₹ 50 = ₹450

(c) साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद में योगदान
= बाजार कीमत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद – शुद्ध अप्रत्यक्ष कर
-₹ 450 – ₹ 30 = ₹420

(d) वैयक्तिक आय = साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद में योगदान – अवितरित लाभ
= ₹ 420 – ₹ 220
= ₹ 200

(e) वैयक्तिक प्रयोज्य आय = वैयक्तिक आय – प्रत्यक्ष कर
= ₹ 200 – ₹ 20
= ₹ 180
अतः

  1. ₹ 500
  2. ₹ 450
  3. ₹ 420
  4. ₹ 200
  5. ₹ 180.

राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राष्ट्रीय आय के महत्व को पाँच बिन्दुओं में स्पष्ट कीजिए?
अथवा
राष्ट्रीय आय का महत्त्व लिखिए। (कोई चार)
उत्तर:
राष्ट्रीय आय की गणना का निम्नलिखित महत्व है –

1. आर्थिक विकास का मापदण्ड:
जिन देशों की राष्ट्रीय आय अधिक होती है वह आर्थिक दृष्टि से विकसित माने जाते हैं तथा जिन देशों की राष्ट्रीय आय कम होती है, वह पिछड़े हुए देश माने जाते हैं।

2. जीवन – स्तर का सूचक:
जिस देश में प्रतिव्यक्ति राष्ट्रीय आय जितनी अधिक होती है, वहाँ के नागरिकों का जीवन – स्तर प्राय: उतना ही ऊँचा होता है।

3. तुलनात्मक अध्ययन में सहायक:
राष्ट्रीय आय के अध्ययन से विभिन्न देशों की कुल तथा प्रतिव्यक्ति आय की तुलनात्मक जानकारी उपलब्ध हो जाती है।

4. आर्थिक कल्याण का मापक:
यदि अन्य बातें समान रहें तो राष्ट्रीय आय में वृद्धि होने पर आर्थिक कल्याण भी बढ़ जाता है तथा राष्ट्रीय आय में कमी होने पर आर्थिक कल्याण भी कम हो जाता है।

5. आर्थिक नीति के निर्माण में सहायक:
राष्ट्रीय आय के आँकड़े किसी देश की आर्थिक नीति के निर्माण में भी सहायक होते हैं। इन आँकड़ों से सरकार को रोजगार, साख, बचत तथा विनियोग संबंधी मामलों में आर्थिक नीति बनाने में सहायता मिलती है।

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प्रश्न 2.
सकल घरेलू उत्पाद तथा सकल राष्ट्रीय आय में अंतर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
सकल घरेलू उत्पाद एवं सकल राष्ट्रीय आय में अंतर –
क्र. सकल घरेलू उत्पाद:

  1. सकल घरेलू उत्पाद का आशय एक देश की घरेलू सीमा के अंदर उत्पादित कुल अंतिम निवासियों द्वारा उत्पादित)कुल अंतिम वस्तुओं वस्तुओं व सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य से है।
  2. सकल घरेलू उत्गद एक भौगोलिक धारणा है।
  3. इसका संबंध देश के घरेलू सीमा से है।
  4. GDP = P(G) + P(S)
  5. यदि विदेशों से प्राप्त आय ऋणात्मक है तो इसका मूल्य GNP के मूल्य से अधिक होगा। मूल्य GDP के मूल्य से अधिक होगा।

सकल राष्ट्रीय आय:

  1. सकल राष्ट्रीय आय से आशय एक राष्ट्र के निवासियों द्वारा उत्पादित कुल अंतिम वस्तुओं वस्तुओं व सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य से है।
  2. सकल राष्ट्रीय आय एक राष्ट्रीय धारणा है।
  3. इसका संबंध देश के सामान्य निवासियों से है।
  4. GNP = GDP + NFIA
  5. यदि विदेशों से प्राप्त आय धनात्मक है, तो इसका मूल्य GDP के मूल्य से अधिक होगा।

प्रश्न 3.
राष्ट्रीय आय एवं निजी आय में अन्तर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
राष्ट्रीय आय एवं निजी आय में अन्तर –
राष्ट्रीय आय:

  1. राष्ट्रीय आय में केवल आय भुगतान शामिल किए जाते हैं।
  2. राष्ट्रीय आय में निजी एवं सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों में सृजित आय को शामिल किया जाता है।
  3. राष्ट्रीय आय एक देश के सामान्य निवासियों की आय होती है।
  4. राष्ट्रीय आय = घरेलू साधन आय + विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय।

निजी आय:

  1. निजी आय में आय भुगतान तथा हस्तान्तरण भुगतान दोनों शामिल किये जाते हैं।
  2. निजी आय में केवल निजी क्षेत्र की आय को शामिल किया जाता है।
  3. निजी आय निजी क्षेत्र के लोगों की आय होती है।
  4. निजी आय में राष्ट्रीय ऋणों पर ब्याज के भुगतान को शामिल किया जाता है।
  5. निजी आय = घरेलू साधन आय + घरेलू उत्पाद से प्राप्त शुद्ध साधन आय से सरकारी क्षेत्र को प्राप्त आय + समस्त चालू हस्तान्तरण + विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय।

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प्रश्न 4.
भारत में राष्ट्रीय आय में वृद्धि की धीमी गति के किन्हीं पाँच कारणों का वर्णन कीजिए?
अथवा
भारत की राष्ट्रीय आय कम होने के कारणों को लिखिए?
उत्तर:
भारत में राष्ट्रीय आय में वृद्धि की धीमी गति के प्रमुख कारण निलिखित हैं –
1. जनसंख्या में वृद्धि:
राष्ट्रीय आय में वृद्धि की धीमी गति का सबसे प्रमुख कारण हैं, जनसंख्या में तीव्र वृद्धि। जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण राष्ट्रीय आय में वृद्धि की दर धीमी हो गई है।

2. कृषि पर निर्भरता:
देश की 71% जनसंख्या अभी भी कृषि में लगी हुई है। जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में केवल 12% जनसंख्या लगी है एवं सेवा क्षेत्र में केवल 17% जनसंख्या लगी है। इसलिए राष्ट्रीय आय में वृद्धि की गति धीमी है।

3. पूँजी की कमी:
देश में पूँजी की कमी राष्ट्रीय आय में धीमी वृद्धि का एक प्रमुख कारण रही है पूँजी की कमी का कारण लोगों की बचत करने की इच्छा एवं शक्ति तथा विनियोग की प्रेरणा का कम होना है।

4. तकनीकी पिछड़ापन:
भारत के तकनीकी पिछड़ेपन के कारण उत्पादन में परम्परागत रीतियों का प्रयोग किया जाता है जिसके कारण उत्पादकता का स्तर निम्न बना रहता है। इससे कृषि व औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में लोगों की आय कम रहती है।

5. आय का असमान वितरण:
भारत में राष्ट्रीय आय का वितरण बहुत असमान है। इसी असमानता का प्रमुख कारण सरकार की दोषपूर्ण कर नीति है।

प्रश्न 5.
भारत में राष्ट्रीय आय की वृद्धि हेतु पाँच आवश्यक सुझाव दीजिए?
अथवा
भारत में राष्ट्रीय आय को बढ़ाने के चार सुझाव दीजिए?
उत्तर:
भारत की राष्ट्रीय आय में वृद्धि हेतु प्रमुख सुझाव निम्नलिखित हैं –

  1. प्राकृतिक साधनों का उचित उपयोग: देश की राष्ट्रीय आय में वृद्धि के लिये यह आवश्यक है कि प्राकृतिक साधनों का उचित उपयोग किया जाये।
  2. जनसंख्या की वृद्धि पर नियंत्रण: देश की राष्ट्रीय आय में वृद्धि के लिये यह आवश्यक है कि यथासंभव बढ़ती हुई जनसंख्या की दर को कम किया जाय।
  3. बचतों को प्रोत्साहन एवं पूँजी – निर्माण: देश की राष्ट्रीय आय में वृद्धि के लिये घरेलू बचतों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिऐतथा उन बचतों को पूँजी-निर्माण में बदल दिया जाना चाहिए।
  4. कृषि का आधुनिकीकरण करना: कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिये कृषि का आधुनिकीकरण आवश्यक है। कृषि के आधुनिकीकरण से उत्पादन बढ़ेगा। फलतः देश की राष्ट्रीय आय भी बढ़ेगी।
  5. साहसियों को पर्याप्त सुविधाएँ एवं प्रेरणाएँ: राष्ट्रीय आय में वृद्धि के लिये सरकार को चाहिये कि वह उद्योग स्थापित करने वाले साहसियों को पर्याप्त सुविधाएँ दें तथा उनको उत्पादन करने के लिये प्रोत्साहित करें।

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प्रश्न 6.
बंद अर्थव्यवस्था एवं खुली अर्थव्यवस्था में अन्तर बताइए?
उत्तर:
बंद अर्थव्यवस्था एवं खुली अर्थव्यवस्था में अन्तर –
बंद अर्थव्यवस्था:

  1. जब किसी देश का अन्य दूसरे देशों से कोई आर्थिक संबंध आर्थिक संबंध नहीं होती है, तो उसे बंद अर्थ – व्यवस्था कहते हैं।
  2. बंद अर्थव्यवस्था में सकल घरेलू उत्पाद एवं राष्ट्रीय आय दोनों एक समान होते हैं।
  3. बंद अर्थव्यवस्था एक काल्पनिक अर्थव्यवस्था है।
  4. बंद अर्थव्यवस्था में पूँजी-निर्माण नगण्य होता है।
  5. बंद अर्थव्यवस्था में उपभोग एवं विनियोग दोनों उत्पादन के बराबर होते हैं।

खुली अर्थव्यवस्था:

  1. जब किसी देश का अन्य दूसरे देशों से आर्थिक संबंध स्थापित हो जाता है, तो उसे खुली अर्थव्यवस्था कहा जाता है।
  2. खुली अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय आय एवं घरेलू आय में अन्तर होता है।
  3. खुली अर्थव्यवस्था एक वास्तविक अर्थव्यवस्था है।
  4. खुली अर्थव्यवस्था में उपभोग तथा विनियोग का योग उत्पादन से अधिक भी हो सकता है और कम भी।

प्रश्न 7.
राष्ट्रीय आय की गणना विधियाँ कौन – सी हैं?
अथवा
राष्ट्रीय आय मापने की विधियों की विवेचना कीजिए?
उत्तर:
1.आय गणना विधि:
इस विधि में सभी साधनों द्वारा प्राप्त आय को जोड़ा जाता है अतः इसे प्राप्त आय गणना विधि भी कहते हैं। इस विधि में एक वर्ष में व्यक्ति या व्यावसायिक उपक्रमों द्वारा प्राप्त विशुद्ध आय को ज्ञात किया जाता है, उनका योग ही राष्ट्रीय आय होता है। इस योगफल में अनुत्पादक आय को शामिल नहीं किया जाता है।

2. व्यय गणना विधि:
इस विधि में लोगों में व्यय और बचत को जोड़कर राष्ट्रीय आय की गणना की जाती है)। इस विधि के अनुसार किसी देश की कुल राष्ट्रीय आय लोगों के कुल उपभोग एवं बचतों के बराबर होती है।

3. मिश्रित गणना विधि:
इस प्रणाली का प्रयोग डॉ. व्ही. के. राव ने किया है) इसमें उत्पादन विधि व आय विधि दोनों का मिश्रित प्रयोग करने राष्ट्रीय आय की गणना की जाती है। यह विधि भारत में राष्ट्रीय आय की गणना हेतु सफल विधि मानी गयी है।

4. उत्पादन गणना विधि:
इस विधि में एक वर्ष के अन्तर्गत देश में स्थित सारे उद्योगों, व्यवसायों, कृषि कार्य द्वारा समस्त उत्पादित वस्तुओं का मूल्य जोड़ दिया जाता है, इससे से कच्चे माल का मूल्य, मशीनों का ह्रास तथा प्रतिस्थापना आदि का मूल्य घटाकर वास्तविक राष्ट्रीय आय ज्ञात कर लिया जाता है। इस प्रणाली का प्रयोग करते समय वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य की दोहरी गणना से बचना चाहिए। विदेशों को भुगतान में दिये जाने वाले चरण एवं ब्याज की राशि घटाते हुए प्राप्त होने वाले ऋण एवं ब्याज की आय को जोड़कर राष्ट्रीय आय की गणना करनी चाहिए।

5. सामाजिक लेखांकन विधि:
इस विधि का आविष्कार प्रो. रिचर्ड स्टोन ने किया है। इसमें देश की समस्त जनसंख्या को कई वर्गों जैसे उत्पादन संस्थाएँ, वित्तीय संस्थाएँ, बीमा एवं सामाजिक सुरक्षा संस्थाएँ, अंतिम उपभोक्ता वर्ग एवं अन्यों में बाँट दिया जाता है, इनमें प्रत्येक वर्ग के कुछ व्यक्तियों की आय ज्ञात करके उसका औसत निकालकर उस वर्ग के व्यक्तियों की संख्या से गुणा कर दिया जाता है। इस प्रकार सभी वर्ग के व्यक्तियों की आय ज्ञात करके इन्हें जोड़कर कुल राष्ट्रीय आय की गणना कर ली जाती है।

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प्रश्न 8.
एक किसान ने ₹ 500 का कपास स्वतः उत्पादित करके कपड़ा मिल को बेचा। कपड़ा मिल ने कपड़ा तैयार करके ₹ 600 में रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री को बेचा। रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री ने ड्रेसेज तैयार करके ₹ 1000 में एक स्टोर को बेच दिया। स्टोर मालिक ने ₹ 1200 में ड्रेसों को उपभोक्ताओं को बेचा?
प्रत्येक फर्म द्वारा की गई मूल्य वृद्धि सकल मूल्य वृद्धि ज्ञात कीजिए?
हल:
किसान, कपड़ा मिल, रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री, स्टोर द्वारा की गयी मूल्य वृद्धि निम्न प्रकार होगी
1.  किसान द्वारा मूल्य वृद्धि = कपड़ा मिल को कपास का विक्रय
= ₹ 500

2.  कपड़ा मिल द्वारा मूल्य वृद्धि = रेडीमेड गारमेंट फैक्टरी को कपड़ा का विक्रय – किसान से कपास का क्रय – विक्रय
= 600 – ₹ 500 = 100

3. रेडीमेड गारमेंट फैक्टरी द्वारा = स्टोर को ड्रेसेज का विक्रय मूल्य – कपड़ा मिल से कपास का क्रय – मूल्य
= 1000 – 600 = ₹ 400

4. स्टोर द्वारा मूल्य वृद्धि = अंतिम उपभोक्ताओं को विक्रय मूल्य – रेडीमेड गारमेंट फैक्टरी से ड्रेसेज का क्रय मूल्य
= 1200 – 1000 = ₹ 200
कुल मूल्य वृद्धि = किसान + कपड़ा मिल + रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री + स्टोर द्वारा मूल्य वृद्धि।
= ₹ 1200।

प्रश्न 9.
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की प्रमुख विशेषतायें क्या हैं? लिखिये?
उत्तर:
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में सामान्यतया निम्न प्रमुख विशेषताएँ दृष्टिगोचर होती हैं –
1.स्वतंत्र माँग एवं पूर्ति बल से कार्यान्वित-पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में एक बाजार इतना संपन्न होता है कि वह क्रेताओं एवं विक्रेताओं के परस्पर संबंध को जन्म देता है। यही कारण है कि पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का बाजार स्वतंत्र माँग एवं पूर्ति बल से कार्यान्वित होता है।

2. माँग एवं पूर्ति की सापेक्षिक शक्तियों से मूल्य निर्धारण:
इस बाजार में वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतें माँग तथा पूर्ति की बाजार शक्तियों द्वारा निर्धारित होती हैं।

3. उपभोक्ता बाजार का सम्राट:
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता प्रमुख होता है। उसकी आय, आदत, प्राथमिकताओं के अनुसार ही उत्पादों का क्रय करके वह अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करता है तथा उत्पादक भी उन्हीं वस्तुओं का उत्पादन करते हैं जिनके उत्पादन से उन्हें अधिकतम लाभ की प्राप्ति होती है। उत्पादक के लिये उपभोक्ता पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में बाजार का सम्राट है अतएव माँग के विरुद्ध उत्पादक उत्पादन नहीं कर सकता है।

4. पूँजी संचय को बढ़ावा:
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों में पूँजी को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है एवं मुख्य साधन के रूप में देखा जाता है इसलिये पूँजी के संचय की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है।

5. सरकारी हस्तक्षेप नहीं:
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादकों के निर्णयों में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। सरकार बाजार की माँग एवं पूर्ति की अंतक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं करती है। सरकार कानून व्यवस्था एवं प्रतिरक्षा के रख – रखाव पर अपना ध्यान केन्द्रित करती है।

6. स्वामित्व एवं प्रबंधन निजी हाथों में – पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों पर स्वामित्व निजी हाथों में होता है। यहाँ तक कि उसका प्रबंधन भी पूँजीपतियों के हाथों में होता है। एक उत्पादक निर्णय लेने में स्वतंत्र होता है। लाभ पर अधिकार भी उत्पादक का होता है।

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प्रश्न 10.
राष्ट्रीय आय से संबंधित समुच्चय के अन्तर्गत सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP), सकल घरेलू उत्पाद (GDP), शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDP) को बाजार मूल्य एवं साधन लागत पर समझाइये?
उत्तर:
1.सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP):
सकल राष्ट्रीय उत्पाद से आशय देश के सामान्य निवासियों द्वारा घरेलू भौगोलिक सीमा के अन्दर एवं देश के बाहर अर्जित की गई आय से है। जब सकल घरेलू उत्पाद में विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय को जोड़ दिया जाता है तो उसे सकल राष्ट्रीय उत्पाद कहा जाता है। इसे निम्न समीकरण द्वारा भी समझाया जा सकता है GNP = GDP + NFIA (Net Factor Income from Abroad) या सकल राष्ट्रीय उत्पाद = सकल घरेलू उत्पाद + विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय या GNP = GDP + X – M भी होता है।

सकल राष्ट्रीय उत्पाद की गणना में मूल्य ह्रास को नहीं घटाया जाता है। इसकी गणना स्थिर मूल्यों के आधार पर भी की जा सकती है। विशेषकर सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, बेरोजगारी भत्ता, पूँजीगत वस्तुओं के क्रय – विक्रय इत्यादि को इसकी गणना में शामिल नहीं किया जाता है। साथ ही जिन सेवाओं का कोई मौद्रिक मूल्य नहीं होता उसे भी इसकी गणना में सम्मिलित नहीं किया जाता है। कालाबाजारी एवं तस्करी से बेची एवं खरीदी जाने वाली वस्तुओं को भी शामिल नहीं किया जाता है।

2. सकल घरेलू उत्पाद (GDP):
किसी देश की भौगोलिक सीमाओं के अन्दर एक वर्ष की अवधि में, उत्पादित समस्त अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के मौद्रिक मूल्य जिसमें विदेशों से प्राप्त आय को सम्मिलित नहीं । किया जाता है सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं। इसकी गणना साधन लागत पर एवं बाजार मूल्य पर की जाती है।, इसे निम्न समीकरणों की सहायता से स्पष्ट किया जा सकता है –
GDP = C + 1
GDP = (P x Q) + (P x S)
GDP = C + Cg + I + Lg
सकल घरेलू उत्पाद में हस्तांतरण आय एवं गैर कानूनी क्रियाओं से प्राप्त आय को शामिल नहीं किया जाता है। पुरानी पूँजीगत वस्तुओं की बिक्री को भी इसकी गणना में शामिल नहीं किया जाता है।

(अ) बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद:
उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का सकल मूल्य लिया जाता है। उत्पादित वस्तु की मात्रा के साथ उत्पादित वस्तु के मूल्य का गुणा किया जाता है।
GDPMP = P (Q) + P (S)

(ब) साधन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद:
उत्पादन के प्रत्येक साधन विशेष की प्राप्त आय उसकी आय कहलाती है जिनका योग करके सकल घरेलू उत्पाद की गणना की जाती है। उत्पादकों के लिये साधनों का पुरस्कार लागत कहलाती है।
GDPfc = Net factor income (Domestic factor – Income) + Depreciation Expenses.
अर्थात् साधन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद = बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद – परोक्ष कर उत्पाद + सरकारी सहायता

स्थायी मूल्यों पर गणना:
स्थायी मूल्यों पर भी सकल घरेलू उत्पाद की गणना की जा सकती है। स्थायी मूल्यों की सहायता से अनुमानित मूल्य ज्ञात किया जा सकता है। इसे वास्तविक घरेलू आय भी कहा जाता है।

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प्रश्न 11.
उत्पादन गणना विधि को अपनाने पर कौन – कौन सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता?
उत्तर:
उत्पादन गणना विधि को अपनाने पर निम्नांकित कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है –

  1. यह निश्चित करना कठिन होता है कि कौन – से पदार्थों को अंतिम माना जाए तथा कौन – से पदार्थों को मध्यवर्ती या कच्चा माल माना जाए।
  2. मूल्य हास का सही अनुमान लगाना कठिन है, क्योंकि पूँजीगत पदार्थों के मूल्य में कमी अनेक कारणों से हो सकती है।
  3. अनेक उत्पादक क्रियाओं को उत्पादन की मात्रा में सम्मिलित नहीं किया जाता है।
  4. उत्पादन के सभी क्षेत्रों से संबंधित सही आँकड़े, उपलब्ध न होना।
  5. दोहरी गणना की संभावना सदैव बनी रहती है, जिससे सही माप नहीं हो पाती है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व

p-ब्लॉक के तत्त्व NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ट्राइहैलाइडों की अपेक्षा पेंटाहैलाइड अधिक सहसंयोजी क्यों होते हैं ?
उत्तर
केन्द्रीय परमाणु की जितनी अधिक धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था होगी उसकी ध्रुवण क्षमता उतनी ही अधिक होगी। जिसके कारण केन्द्रीय परमाणु और हैलोजन परमाणु के मध्य बने बन्ध का सहसंयोजी लक्षण बढ़ जाता है। पेन्टाहैलाइड में केन्द्रीय परमणु +5 ऑक्सीकरण अवस्था में है जबकि ट्राइहैलाइड में यह +3 ऑक्सीकरण अवस्था में है। अतः ट्राइहैलाइडों की अपेक्षा पेन्टाहैलाइड अधिक सहसंयोजी होते हैं।

प्रश्न 2.
वर्ग-15 के तत्वों के हाइड्राइडों में BiH3 सबसे प्रबल अपचायक क्यों है ?
उत्तर
वर्ग-15 के सभी तत्वों में Bi परमाणु सबसे बड़ा है। अत: Bi-H आबन्ध दूरी सबसे अधिक और Bi-H बन्ध वियोजन एन्थैल्पी सबसे कम है। यही कारण है कि Bi-H बन्ध, वर्ग के दूसरे हाइड्राइडों की तुलना में आसानी से वियोजित (टूट) हो जाता है जिसके कारण BiH3 सबसे प्रबलतम अपचायक है।

प्रश्न 3.
N2 कमरे के ताप पर कम क्रियाशील क्यों है ?
उत्तर
N ≡ N में आबंध एन्थैल्पी उच्च होती है ऐसा pπ-pπ आबंध के कारण है अत: N2 कम क्रियाशील है। यह केवल उच्च ताप पर क्रियाशील होता है।

प्रश्न 4.
अमोनिया की लब्धि को बढ़ाने के लिये आवश्यक स्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर
व्यापक स्तर पर अमोनिया हैबर प्रक्रम द्वारा बनाई जाती है।

N2(g) +3H2(g) ⇌ 2NH3(g)fH°= -92.4 kJ mol-1

ली-शातेलिए नियम के अनुसार, उच्च दाब अमोनिया निर्मित करने के लिए अनुकूल होता है। अमोनिया उत्पादन के लिए अन्य अनुकूलतम परिस्थितिया निम्न प्रकार हैं –

  • ताप- लगभग 700 K
  • दाब- 200 वायुमण्डलीय दाब या 200 x 105Pa
  • उत्प्रेरक-आयरन ऑक्साइड
  • वर्धक-मॉलिब्डेनम, MO या K2O तथा Al2O3

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प्रश्न 5.
Cu2+ विलयन के साथ अमोनिया कैसे क्रिया करती है ?
उत्तर
अमोनिया Cu2+ आयन के नीले रंग के विलयन से क्रिया करता है तथा गहरे नीले रंग का विलयन बनाता है।

Cu+2(aq) +4NH3(aq) ⇌ [Cu(NH3)4]2+(aq)

प्रश्न 6.
N2O5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता क्या है ? ।
उत्तर
N2O5 की संरचना से ज्ञात होता है कि N2O5 में N की सहसंयोजकता चार है।
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प्रश्न 7.
PH3 से PH+4 का आबंध कोण अधिक है, क्यों ?
उत्तर
PH3 व PH+4 में P की संकरण अवस्था sp3 है। PH4+ आयन में चारों उपकक्षक आबंधित है। जबकि PH3 में फॉस्फोरस पर इलेक्ट्रॉन युग्म होता है जो कोण के मान को प्रतिकर्षण के कारण कम करते हैं। सामान्यतया 109°2s’. से कम होता है।
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प्रश्न 8.
क्या होता है जब श्वेत फॉस्फोरस को CO2के अक्रिय वातावरण में सान्द्र कॉस्टिक सोडा विलयन के साथ गर्म करते हैं ?
उत्तर
श्वेत फॉस्फोरस को CO2 के अक्रिय वातावरण में सान्द्र कॉस्टिक सोडा विलयन के साथ गर्म करने पर PH3 (फॉस्फीन)उत्पन्न होती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 3

प्रश्न 9.
क्या होता है जब PCl5 को गर्म करते हैं ?
उत्तर
PCl5 में 5P-Cl बन्ध है जिसमें तीन निरक्षीय P-Cl आबन्ध (लम्बे) तथा दो अक्षीय आबन्ध छोटे हैं। दोनों अक्षीय आबन्ध, निरक्षीय आबन्धों से बड़े होते हैं क्योंकि निरक्षीय आबन्ध युग्मों की तुलना में अक्षीय आबन्ध युग्मों पर अधिक प्रतिकर्षण होता है। जब PCl5 को गर्म किया जाता है तो कम स्थायी दोनों अक्षीय आबन्ध टूट जाते हैं तथा PCl3 बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 4
हल्का गर्म करने पर PCl5 उर्ध्वपातित हो जाता है परन्तु अधिक गर्म करने से वियोजित हो जाता है।

प्रश्न 10.
PCl5 की भारी पानी में जल अपघटन अभिक्रिया का संतुलित समीकरण लिखिए।
उत्तर
PCl5 + D2O → POCl3 + 2DCl.

प्रश्न 11.
H3PO4 की क्षारकता क्या है ?
उत्तर
H3PO4 अणु में P-OH तीन आबंध होते हैं। इसलिए यह तीन क्षारकता दर्शाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 5

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प्रश्न 12.
क्या होता है जब H3PO3 को गरम करते हैं ?
उत्तर
गरम करने पर H3PO4 असमानुपातिक गुण दर्शाता है तथा यह असमानुपातिक होकर आर्थोफॉस्फोरिक अम्ल तथा फॉस्फीन देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 6

प्रश्न 13.
सल्फर के महत्वपूर्ण स्रोतों को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर-
सल्फर की उपलब्धता तथा स्रोत भूपर्पटी में सल्फर की उपलब्धता केवल 0.03 से 0.1% है। संयुक्त अवस्था में निम्न रूपों में पाई जाती हैं –

(i) सल्फेटों के रूप में-उदाहरण- जिप्सम (CaSO4. 2H2O), एप्सम लवण (MgSO4.7H2O), बेराइट (BaSO4).
(ii) सल्फाइड़ों के रूप में- उदाहरण- गेलेना (PbS), यशद ब्लैंड (ZnS), कॉपर पाइराइट (CuFeS2)
सल्फर की सूक्ष्म मात्रा ज्वालामुखी में हाइड्रोजन सल्फाइड के रूप में पाई जाती है। कार्बनिक पदार्थों जैसे –
अंडे, प्रोटीन, लहसुन, प्याज, सरसों, बाल तथा ऊन में सल्फर होती है।

प्रश्न 14.
वर्ग-16 के तत्वों के हाइड्राइडों के तापीय स्थायित्व के क्रम को लिखिये।
उत्तर
वर्ग-16 के तत्वों के हाइड्राइडों का तापीय स्थायित्व H-E आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी के अनुक्रमानुपाती होता है। वर्ग में नीचे जाने पर, आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी घटती है क्योंकि आबन्ध लम्बाई बढ़ती है। अतः आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी का घटता हुआ क्रम निम्न है

H2O > H2S > H2Se > H2Te > H2Po.

तापीय स्थायित्व का क्रम भी इसी प्रकार है।

प्रश्न 15.
H2O एक द्रव तथा H2S गैस क्यों है ?
उत्तर
H2O के अणुओं के मध्य प्रबल हाइड्रोजन बंध उपलब्ध होता है जबकि H2S अणुओं के मध्य हाइड्रोजन आबंध नहीं होता अतः जल द्रव है तथा H2S गैस।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व ऑक्सीजन के साथ सीधे अभिक्रिया नहीं करता –
Zn, Ti, Pt, Fe.
उत्तर
Pt नोबल धातु होने के कारण ऑक्सीजन से सीधे क्रिया नहीं करता। Zn, Ti तथा Fe सक्रिय धातु होने के कारण ऑक्सीजन से सीधे क्रिया करते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 7

प्रश्न 17.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए –
(i) C2H4 + O2
(ii) 4Al + 3O2
उत्तर
(i) C2H4 + 3O2 → 2CO2(g) + 2H2O
(ii) 4Al + 3O2 → 2Al2O3

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प्रश्न 18.
O3 एक प्रबल ऑक्सीकारक की तरह क्रिया क्यों करती है ?
उत्तर
O3 एक प्रबल ऑक्सीकारक है क्योंकि यह आसानी से नवजात ऑक्सीजन मुक्त करती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 8

प्रश्न 19.
O3 का मात्रात्मक आकलन कैसे किया जाता है ?
उत्तर
जब ओजोन को पोटैशियम आयोडाइड विलयन की अधिकता में क्रियाशील किया जाता है तब आयोडीन उत्पन्न होती है । जब उत्पन्न आयोडीन I2 को सोडियम थायोसल्फेट से क्रियाशील किया जाता है तब मात्रात्मक रूप से O3 गैस की गणना करता है।

2I+H2O(l) + O3(g) → 2OH(aq) + I2(s) + O2(g)

प्रश्न 20.
तब क्या होता है जब सल्फर डाइऑक्साइड को Fe(III) लवण के जलीय विलयन में से प्रवाहित करते हैं ?
उत्तर
Fe (III) आयन विलयन से SO2 गैस को गुजारा जाता है तब Fe (III) आयन अपचयित होकर Fe (II) आयन में बदल जाते हैं।

2Fe+3 + SO2 + 2H2O → 2Fe+2 + SO42- + 4H+

प्रश्न 21.
दो S-O आबन्धों की प्रकृति पर टिप्पणी कीजिए जो SO2 अणु बनाते हैं क्या SO2 अणु के ये दोनों S-O आबन्ध समतुल्य हैं ?
उत्तर
SO2 अणु में दोनों S-O बन्धों की प्रकृति सहसंयोजी है। दोनों की आबन्ध लम्बाई (143 pm) समान है। यह दो विहित रूपों का अनुनाद संकर है। (संरचना के लिये पाठ्यपुस्तक देखें)

प्रश्न 22.
SO2 की उपस्थिति का पता कैसे लगाया जाता है ?
उत्तर
यह तीखी गंध वाली रंगहीन गैस है। इसकी उपस्थिति का पता निम्न दो परीक्षणों द्वारा किया जाता है –
(a) यह अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट (VII) विलयन को रंगहीन कर देती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 9
(b) यह अम्लीय पोटैशियम डाइक्रोमेट विलयन का रंग नारंगी से हरा कर देती है।
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प्रश्न 23.
उन तीन क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए जिनमें H2SO4 महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उत्तर
H2SO4 के उपयोग –

  • इसका उपयोग वर्णकों, प्रलेपों तथा रंजकों के मध्यवर्तियों के उत्पादन में किया जाता है।
  • यह पेट्रोलियम के शोधन में प्रयोग किया जाता है।
  • इसका उपयोग उर्वरकों के उत्पादन में किया जाता है।

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प्रश्न 24.
संस्पर्श प्रक्रम द्वारा H2SO4 की मात्रा में वृद्धि करने के लिए आवश्यक परिस्थितियों को लिखिए।
उत्तर
सम्पर्क विधि द्वारा H2SO4 उत्पादन की मुख्य रासायनिक समीकरण निम्न है –

2SO2(g)+ O2(g) ⇌ 2SO3(g)fH°= -1966kJmol-1)

अभिक्रिया उत्क्रमणीय, ऊष्माक्षेपी तथा आयतन के घटते क्रम में प्रेरित होती है।
∴ कम, ताप व उच्च दाब, प्रभावी कारक है H2SO4 के उत्पादन में लेकिन ताप बहुत कम नहीं होना चाहिए। नहीं तो अभिक्रिया धीमी हो जाएगी।
अतः 720 K ताप व 2 बार वायुदाब तथा V2O5 उत्प्रेरक अभिक्रिया को यदि प्रदान करता है।

प्रश्न 25.
जल में H2SO2 के लिए \(K_{a_{2}}<<K_{a_{1}}\) क्यों है ?
उत्तर
जल में H2SO4 प्रबल अम्ल है क्योंकि आयनित होकर H3O+ तथा HSO4 आयन बनाता है। HSO4(aq); से H3O+ बनने की आयतन मान कम है जब अत: \(K_{a_{2}}<<K_{a_{1}}\)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 11

प्रश्न 26.
आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी तथा जलयोजन एन्थैल्पी जैसे प्राचलों को महत्व देते हुए F2 तथ Cl2 की ऑक्सीकारक क्षमता की तुलना कीजिए।
उत्तर
F2 तथा Cl2 के तुलनात्मक परमाण्विक गुण
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 12

उपरोक्त आँकड़ों से स्पष्ट है कि आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के मान क्लोरीन के लिए उच्च हैं लेकिन जलयोजन एन्थैल्पी का मान फ्लुओरीन के लिए बहुत उच्च है। उन दोनों के प्रभावों की क्षतिपूर्ति करता है। यह मान ही फ्लुओरीन को क्लोरीन की तुलना में प्रबल ऑक्सीकारक बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 13

हैलोजनों की तुलनात्मक ऑक्सीकारक सामर्थ्य को उनकी जल के साथ अभिक्रिया से और अधिक समझा जा सकता है।

2F2(g) +2H2O(l) → 4H+(aq) + 4F(aq) + O2(g)
Cl2(g) +H2O (l) → HCl (aq) + HOCl(aq)

प्रश्न 27.
दो उदाहरणों द्वारा फ्लुओरीन के असामान्य व्यवहार को दर्शाइये।
उत्तर
फ्लुओरीन के दो असामान्य व्यवहार इस प्रकार हैं –
(i) यह केवल एकमात्र ऑक्सी-अम्ल बनाती है जबकि अन्य हैलोजन अनेक ऑक्सी-अम्ल बनाते हैं।
(ii) प्रबल हाइड्रोजन बन्ध के कारण हाइड्रोजन फ्लुओराइड (HF) द्रव है (क्वथनांक 293 K) जबकि दूसरे हाइड्रोजन हैलाइड गैस हैं।

प्रश्न 28.
समुद्र कुछ हैलोजन का मुख्य स्रोत है। टिप्पणी कीजिए।
उत्तर
हैलोजन के लिए महासागर प्रमुख स्रोत है समुद्री जल में क्लोराइड, ब्रोमाइड और आयोडीन के लवण मिलते हैं। जब पानी को सुखाया जाता है तब लवणों को प्राप्त करते हैं।
KCl, MgCl2. 6H2O. तथा 0.5% मात्रा में आयोडीन।

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प्रश्न 29.
Cl2 की विरंजक क्रिया का कारण बताइये।
उत्तर
क्लोरीन की विरंजन क्रिया ऑक्सीकरण के कारण है। जब क्लोरीन जल से क्रिया करती है तो यह नवजात ऑक्सीजन देती है जो रंगीन पदार्थों को विरंजित करती है।

Cl2 +H2O → 2HCl + [O]
रंगीन पदार्थ + [O] → रंगहीन पदार्थ

लोरीन का विरंजक प्रभाव स्थायी होता है। यह नमी की उपस्थिति में वानस्पतिक अथवा कार्बनिक पदार्थों को विरंजित करती है।

प्रश्न 30.
उन कुछ विषैली गैसों के नाम बताइये जो क्लोरीन गैस से बनाई जाती है।
उत्तर
(i) फॉस्जीन (COCl2)
(ii) अश्रुगैस (CCl3.NO2)
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प्रश्न 31.
I2 की अपेक्षा ICl अधिक क्रियाशील क्यों है ?
उत्तर
ICl में उपस्थित, I-Cl आबन्ध, I2 में उपस्थित I-Iआबन्ध की तुलना में दुर्बल होते हैं। अतः ICl, I2 की तुलना में अधिक क्रियाशील है।

प्रश्न 32.
हीलियम को गोताखोरी के उपकरणों में उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर
रक्त में बहुत कम विलेयता के कारण हीलियम का उपयोग गोताखोरी के उपकरणों में किया जाता है।

प्रश्न 33.
निम्नलिखित समीकरण को संतुलित कीजिए –

XeF6 + H2O →XeO2F2 + HF
उत्तर
XeF6 + 2H2O →XeO2F2 + 4HF.

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प्रश्न 34.
रेडॉन के रसायन का अध्ययन करना कठिन क्यों था?
उत्तर
रेडॉन एक रेडियोधर्मी तत्व है जिनकी अर्धआयु बहुत कम है अत: इनकी रासायनिक शास्त्र को समझना कठिन है।

p-ब्लॉक के तत्त्व NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वर्ग 15 के तत्वों के सामान्य गुणधर्मों को उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्था, परमाण्विक आकार, आयनन एन्थैल्पी तथा विद्युत्ऋणात्मकता के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
उत्तर
आवर्त सारणी के समूह 15 में पाँच तत्वों-नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), आर्सेनिक (As), एण्टीमनी (Sb) तथा बिस्मथ (Bi) का समावेश है। इन तत्वों को सम्मिलित रूप से ‘प्रिकोजन’ कहा जाता है तथा उनके यौगिकों को ‘प्रिकोनाइड’ कहते हैं। इसका ग्रीक में अर्थ होता है-दम घुटने वाला (क्योंकि वायुमंडल की आयतनानुसार 21% ऑक्सीजन को हटा दिया जाए तो शेष बची नाइट्रोजन में दम तो घुटेगा ही)।

निम्न बिन्दुओं पर इनकी विवेचना इस प्रकार है –

1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic configuration)-इनके संयोजकता कक्ष में पाँच इलेक्ट्रॉन होते हैं तथा इस कक्ष का सामान्य विन्यास ns2np3 से प्रदर्शित होता है। जहाँ, n= 2 से 6 तक होता है। अंतिम से पहले वाले कक्ष में N में 2, फॉस्फोरस में 8 तथा अन्य में 18 इलेक्ट्रॉन होते हैं। np3 में स्थित तीन इलेक्ट्रॉन हुंड के नियम के अनुसार, npx1npy1npz1 के रूप में वितरित होते हैं। यह विन्यास अर्द्धपूरित अवस्था में होने के कारण स्थायित्व प्रदर्शित करता है। यही कारण है कि ये तत्व अधिक क्रियाशीलता प्रदर्शित नहीं करते।

2. आयनन एन्थैल्पी (Ionization enthalpy)-(a) समूह 14 (कार्बन परिवार) के तत्वों की तुलना में समूह 15 (नाइट्रोजन परिवार) के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी अपेक्षा से अधिक होती है।
(b) उसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटती है।

3. विद्युत् ऋणविद्युतता (Electronegativity)-समूह 14 के तत्वों की तुलना में समूह 15 के तत्वों की ऋणविद्युतता अधिक होती है। इसका कारण परमाण्विक त्रिज्या का घटना तथा नाभिकीय आवेश का बढ़ना है।

4. परमाण्विक आकार (Atomic shape)-समूह 15 में ऊपर से नीचे जाने पर विद्युत्ऋणता में कमी होती जाती है, इसका कारण परमाणु त्रिज्या का बढ़ना तथा आवरण प्रभाव का बढ़ना है। .

5. ऑक्सीकरण अवस्था (Oxidation state)-समूह 15 के तत्वों का संयोजकता कक्ष का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np3 होने के कारण इन तत्वों की संभावित ऑक्सीकरण अवस्थाएँ -3, +3 तथा +5 हो सकती हैं।
N तथा P अपने यौगिकों में -3 ऑक्सीकरण अवस्था में होते हैं। इनकी उच्च विद्युत्ऋणता तथा छोटा आकार इसका कारण है। अधिक विद्युत्धनी तत्वों से संयोगकर, ये नाइट्राइड तथा फॉस्फाइड बनाते हैं । जैसे Mg3N2 तथा Mg3P2, जिसमें N तथा P की ऑक्सीकरण अवस्था -3 है।

किंतु समूह में नीचे जाने पर यह प्रवृत्ति कम होती जाती है क्योंकि परमाणु का आकार भी बढ़ता है तथा विद्युत्ऋणता भी घटती हैं अपने से अधिक विद्युत्ऋणी तत्वों से जब ये संयोग करते है, तो धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करने लगते हैं।

फॉस्फोरस तथा आगे के तत्व +3 एवं +5 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं। +3 ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी होती है। समूह में नीचे जाने पर +5 ऑक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व घटता जाता है।

+5 ऑक्सीकरण अवस्था के लिये ns2np3 के सभी पाँचों इलेक्ट्रॉन निकलना आवश्यक है किंतु समूह में नीचे जाने पर ns2 इलेक्ट्रॉनों की अक्रियता बढ़ती जाती है। यह इलेक्ट्रॉन युग्म अलग नहीं होता, इसलिए इसे

“अक्रिय इलेक्ट्रॉन युग्म” (Inert electron pair) कहते हैं। इसके प्रभाव से मात्र ns3 के तीन इलेक्ट्रॉन निकल पाते हैं जो +3 ऑक्सीकरण अवस्था के लिए जिम्मेदार हैं। जिस प्रभाव के कारण +5 ऑक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व समाप्त हो जाता है, उसे अक्रिय युग्म प्रभाव (Inert pair effect) कहते हैं। इसीलिए BiCl3 का अस्तित्व है, BiCl5 का नहीं।

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प्रश्न 2.
नाइट्रोजन की क्रियाशीलता फॉस्फोरस से भिन्न क्यों है ?
उत्तर
नाइट्रोजन द्विपरमाणुक रूप में पाया जाता है। नाइट्रोजन के दो परमाणुओं के बीच त्रिबन्ध (N≡N) की उपस्थिति के कारण इसकी आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी (941.4 kJ mol-1) अधिक है। इस प्रकार नाइट्रोजन अपने तत्व रूप में अक्रिय है।

इसके विपरीत फॉस्फोरस (श्वेत या पीला) P4 अणु से बना होता है, क्योंकि N≡N त्रिबन्ध की अपेक्षा (941.4 kJ mol-1), P-P एकल बन्ध काफी दुर्बल (213 kJ mol-1) होता है। अतः फॉस्फोरस, नाइट्रोजन की अपेक्षा बहुत अधिक क्रियाशील है।

प्रश्न 3.
वर्ग 15 के तत्वों की रासायनिक क्रियाशीलता की प्रवृत्ति की विवेचना कीजिए।
उत्तर
रासायनिक क्रियाशीलता (Multiple bonding and Chemical reactivity) –
(a) समूह 15 के तत्व क्रियाशीलता के मामले में बहुत भिन्नता रखते हैं। अधिक विद्युत्ऋणी होने के बावजूद नाइट्रोजन अक्रिय है। N2 की अक्रियता का कारण अणु में त्रिबंध का होना तथा अत्यधिक बंधन ऊर्जा (941.4 kJ mol-1) का होना है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 15

फॉस्फोरस की परमाणुकता 4 है। चारों P परमाणु एक चतुष्फलक के शीर्षों पर स्थित होते हैं तथा आपस में जुड़े होते हैं। इस प्रकार से फॉस्फोरस की तीन सहसंयोजकताएँ पूर्ण होती हैं।

sp3 संकरण में बनने वाला 109°28′ का कोण इसमें लुप्त रहता है तथा 60° का कोण होता है। इस वजह से श्वेत रंग का P4 एक अत्यंत ‘तनाव’ युक्त अणु होता है जो इसे सक्रिय बनाता है। दूसरी ओर लाल रंग का फॉस्फोरस खुली श्रृंखला में होने के कारण अपेक्षाकृत निष्क्रिय होता है। As, Sb तथा Bi भी क्रियाशील नहीं है।।

(b) दो नाइट्रोजन परमाणुओं के बीच Pπ-Pπ बंध के कारण त्रिबंध होता है। फॉस्फोरस में Pπ-Pπ बंध संभव है। ऐसे बंधन मुक्त यौगिकों के उदाहरण – POX3,RN = PX3,R3P = O,R3P = CR2 (R = एल्किल समूह)।

फॉस्फोरस तथा आर्सेनिक में Pπ-Pπ बंध भी बनाने की क्षमता है। ऐसा ये संक्रमण तत्वों के साथ करते हैं। :P(C2H5), तथा :As(C6H5)3 लिगेण्ड के रूप में रहकर संक्रमण धातु के साथ यह बंध बनाते हैं। अभी हाल में P = C, P≡ C, P = N, P = P तथा As = As समूहों से युक्त यौगिकों का भी संश्लेषण किया गया है।

प्रश्न 4.
NH3 हाइड्रोजन बंध बनाती है। परंतु PH3नहीं बनाती क्यों ?
उत्तर
नाइट्रोजन और हाइड्रोजन की विद्युत्ऋणात्मकताओं में अपेक्षाकृत अधिक अन्तर होने से इनके बीच बने सहसंयोजी बन्ध की प्रकृति ध्रुवीय है। यही कारण है कि NH3 अणुओं के बीच H-आबन्ध बनाता है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 16

फॉस्फोरस तथा हाइड्रोजन की विद्युतऋणात्मकताएँ समान हैं यही कारण है कि P-H सहसंयोजी बन्ध अध्रुवीय होता है। अतः PH3 अणुओं के बीच H-आबन्ध नहीं बनते हैं।

प्रश्न 5.
प्रयोगशाला में नाइट्रोजन कैसे बनाते हैं ? संपन्न होने वाली अभिक्रिया के रासायनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर
(i) N2 के विरचन की प्रयोगशाला विधि – जलीय अवस्था में अमोनियम क्लोराइड और सोडियम नाइट्राइट क्रिया कर N2 बनाते हैं। अभिक्रिया में थोड़ी मात्रा में NO और HNO3 बनाता है जिन्हें H2SO4 और K2Cr2O7 की क्रिया से हटाया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 17
प्रश्न 6
अमोनिया का औद्योगिक उत्पादन कैसे किया जाता है?
उत्तर
अमोनिया निर्माण की हैबर विधि
(a) सिद्धान्त – एक आयतन नाइट्रोजन गैस और तीन आयतन हाइड्रोजन गैस आपस में क्रिया करके अमोनिया बनाती है। यह एक ऊष्माक्षेपी क्रिया है। इसमें अमोनिया के बनने से आयतन में कमी होती है, क्योंकि कुल चार आयतन अभिकारक से दो आयतन क्रियाफल प्राप्त होते हैं । अतः ली-शातेलिये के सिद्धान्त के अनुसार अमोनिया के अधिक उत्पादन हेतु N2 तथा H2 का अधिक सान्द्रण कम ताप एवं उच्च दाब ही उपयुक्त परिस्थिति होगी।
(b) अभिक्रिया का समीकरण –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 18

(c) विधि-वायु को, शुद्ध N2 तथा वॉटर गैस से प्राप्त H2 को क्रमशः 1 : 3 अनुपात में मिलाकर 200 वायुमण्डलीय दाब से संपीडक में प्रवेश कराते हैं । इसमें Fe चूर्ण एवं उत्प्रेरक वर्धक Mo रखा होता है। इस कक्ष का ताप 450-500°C तक नियंत्रित रखते हैं। उत्प्रेरक कक्ष से निकलने वाली गैसों में 10% से 15% तक NH3 रहती है। इसे संघनित्र की सहायता से ठंडा करके अलग कर लेते हैं। शेष अनुपयुक्त गैस को पम्प की सहायता से पुनः उत्प्रेरक कक्ष में पहुँचा दिया जाता है।

(d) सावधानियाँ-(1) N2 और H2 शुद्ध अवस्था एवं शुष्क अवस्था में होनी चाहिए, क्योंकि अशुद्धियाँ उत्प्रेरक को विषाक्त कर देती हैं । (2) ताप एवं दाब नियन्त्रित होने चाहिए।

(e) क्लोरीन की अधिकता में क्रिया
3Cl2 +8NH3 → N2 + 6NH4Cl.

प्रश्न 7.
उदाहरण देकर समझाइए कि कॉपर धातु HNO3 के साथ अभिक्रिया करके किस प्रकार भिन्न उत्पाद दे सकती है ?
उत्तर-
कॉपर धातु की HNO3 के साथ अभिक्रिया के उत्पाद, प्रयुक्त HNO3 की प्रयोग की जाने वाली सान्द्रता पर निर्भर करते हैं।
(i) कॉपर धातु, तनु HNO3 के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रोजन (II) ऑक्साइड देता है।

3Cu + 8HNO3 (तनु) → 3Cu(NO3)2+4H2O + 2NO

(ii) कॉपर धातु, सान्द्र HNO, के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रोजन (IV) ऑक्साइड या नाइट्रोजन डाइऑक्साइड NO2 देता है।
Cu + 4HNO3 (सान्द्र) →Cu(NO3)2+ 2H2O + 2NO2

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प्रश्न 8.
NO2 तथा N2O5 के अनुनादी संरचनाओं को लिखिए।
उत्तर-
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 19

प्रश्न 9.
HNH कोण का मान, HPH, HAsH तथा HSbH कोणों की अपेक्षा अधिक क्यों है ?
(संकेत-NH3 में sp3संकरण के आधार तथा हाइड्रोजन ओर वर्ग के दूसरे तत्वों के बीच केवल s-p आबंधन के द्वारा व्याख्या की जा सकती है।)
उत्तर
वर्ग-15 के हाइड्राइडों में केन्द्रीय परमाणु E (जहाँ E = N, P, As, Sb, Bi)sp3 संकरित है। वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर इसकी विद्युत्ऋणात्मकता घटती है परन्तु आकार बढ़ता है। जिससे केन्द्रीय परमाणु के चारों ओर बन्धन इलेक्ट्रॉन युग्मों के मध्य प्रतिकर्षण बलों में निरन्तर कमी आती है। इस प्रकार वर्ग के नीचे जाने पर आबन्ध कोण घटता जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 78

प्रश्न 10.
R3P = O पाया जाता है जबकि R3N= O नहीं क्यों ( R = ऐल्किल समूह)?
उत्तर- नाइट्रोजन ऑक्सीजन के साथ dπ-pπ बन्ध नहीं बना पाता है क्योंकि इसके संयोजकता कोश में d-कक्षक अनुपस्थित होते हैं। अतः इसकी सहसंयोजकता 3 तक सीमित है। परन्तु, R3N = O में नाइट्रोजन की संयोजकता 5 होनी चाहिये। अतः यह यौगिक नहीं पाया जाता। फॉस्फोरस में d-कक्षक उपस्थिति होता है जिसके कारण यह dπ-pπ बन्ध बना सकता है तथा अपनी सहसंयोजकता 4 से अधिक दिखा सकता है। अतः फॉस्फोरस R3P = O बनाता है जिसमें इसकी सहसंयोजकता 5 है।

प्रश्न 11.
समझाइए कि क्यों NH3 क्षारकीय है जबकि BiH3 केवल दुर्बल क्षारक है।
उत्तर
NH3 और BiH3 में केन्द्रीय परमाणु पर इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होता है जिस कारण से लुईस क्षार की भांति व्यवहार करते हैं। NH3 से BiH3 तक क्षार गुण का होता है क्योंकि परमाणु आकार बढ़ने से इलेक्ट्रॉन घनत्व कम होता जाता है। अतः इलेक्ट्रॉन युग्म त्यागने की प्रवृत्ति कम होती है। इसलिए क्षारक गुण घटता है।

प्रश्न 12.
नाइट्रोजन द्विपरमाणुक अणु के रूप में पाया जाता है तथा फॉस्फोरस P4 के रूप में क्यों?
उत्तर
नाइट्रोजन का छोटा आकार होता है तथा वैद्युत्ऋणात्मकता प्रबल है जिससे pπ-pπ बहुआबंध बनाता है । अतः नाइट्रोजन अपने ही परमाणु के साथ त्रिआबंध बनाता है। फॉस्फोरस परमाणु का आकार बड़ा है तथा नाइट्रोजन की तुलना में वैद्यत्ऋणात्मकता कम है। अतः pπ-pπ आबंध बनाने की क्षमता कम है। इसलिए फॉस्फोरस व फॉस्फोरस परमाणु के मध्य एकल आबंध बनते हैं। अत: P, के रूप में होता है।

प्रश्न 13.
लाल फॉस्फोरस तथा श्वेत फॉस्फोरस के गुणों की मुख्य भिन्नताओं को लिखिए।
उत्तर
लाल फॉस्फोरस तथा सफेद फॉस्फोरस के गुणों में तुलना –

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 21

प्रश्न 14.
फॉस्फोरस की तुलना में नाइट्रोजन श्रृंखलन गुणों को कम प्रदर्शित करता है, क्यों?
उत्तर
छोटा आकार तथा अनाबंध इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण आबंध युग्म के साथ प्रतिकर्षण दर्शाता है जबकि p-फॉस्फोरस का आकार बड़ा है जिसके कारण अनाबंध इलेक्ट्रॉन युग्म व आबंध इलेक्ट्रॉन युग्म में प्रतिकर्षण कम होता है। परिणामस्वरूप N-N एकल आबंध दुर्बल तथा P-P एकल आबंध प्रबल होता है। अत: N आबंध प्रबलता कम दर्शाता है या शृंखलन गुण कम दर्शाता है।

प्रश्न 15.
H3PO3 की असमानुपातन अभिक्रिया दीजिए।
उत्तर- ऑर्थोफॉस्फोरस अम्ल गर्म करने पर असमानुपातित होकर आर्थोफॉस्फोरिक अम्ल तथा फॉस्फीन देता है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 22

प्रश्न 16.
क्या PCI5 ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों कार्य कर सकता है ? तर्क दीजिए।
उत्तर
PCl5 में, P की ऑक्सीकरण संख्या +5 है जो अधिकतम है। इसे यह और नहीं बढ़ा सकता। अत: PCl5, अपचायक का कार्य नहीं कर सकता है। परन्तु यह अपनी ऑक्सीकरण संख्या +5 से घटाकर +3 कर सकता है अतः यह ऑक्सीकारक का कार्य कर सकता है।
उदाहरण –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 23

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प्रश्न 17.
O, S, Se, Te तथा Po को इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्था तथा हाइड्राइड निर्माण के संदर्भ में आवर्त सारणी के एक ही वर्ग में रखने का तर्क दीजिए।
उत्तर-
समूह-16 के तत्वों को समग्र रूप से केल्कोजन कहा जाता है।
(i) समूह-16 के तत्वों में प्रत्येक में 6-संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। इन तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2np4 होता है। जहाँ, n का मान 2 से 6 तक बदल सकता है।

(ii) ऑक्सीकरण अवस्था- चूँकि इन तत्वों में 6-संयोजी इलेक्ट्रॉन विद्यमान होते हैं, (ns2, np4) अतः ये -2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं। इस प्रकार केवल ऑक्सीजन ही प्रभावी रूप से -2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते है, अर्थात् ये उच्च विद्युत् ऋणात्मक होते हैं। ये -1 (H2O2), 0 (O2) और +2 (OF2) ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करते हैं । इस प्रकार समूह में नीचे आने पर तत्वों की विद्युत् ऋणात्मकता में निरंतर कमी होने के कारण -2 ऑक्सीजन अवस्था के स्थायित्व में भी कमी आती है। इस समूह के भारी तत्व d-कक्षक की उपस्थिति के अनुसार +2, +4 एवं +6 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं।

(iii) हाइड्राइड्स का निर्माण-ये तत्व H2E प्रकार के हाइड्राइड्स का निर्माण करते हैं। जहाँ, E= O, S, Se, Te, PO होता है। ऑक्सीजन तथा सल्फर को H2E2 प्रकार के हाइड्राइड्स का निर्माण करते हैं। ये हाइड्राइड्स पूर्णतया परितवर्तनशील गुण वाले होते हैं।

प्रश्न 18.
क्यों डाइऑक्सीजन एक गैस है जबकि सल्फर एक ठोस है ?
उत्तर
लघु आकार वाले ऑक्सीजन अणु में अन्तरा इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण के कारण O-O आबन्ध, S-S आबन्ध की तुलना में दुर्बल होता है। उच्च विद्युत्ऋणात्मकता और आकार छोटा होने के कारण, ऑक्सीजन pr-pr बहुआबन्ध बनाती है। अतः यह द्विपरमाणुक अणु के रूप में विद्यमान है जो एक-दूसरे से दुर्बल वाण्डर वाल्स बलों द्वारा जुड़े होते हैं । इस प्रकार ऑक्सीजन कमरे के ताप पर गैस रूप में उपस्थित है। सल्फर की pπ-pπ बहुआबन्ध बनाने की प्रवृत्ति कम है। परमाणु आकार बड़ा तथा कम विद्युत्ऋणात्मकता होने के कारण यह मजबूत S-S एकल आबन्ध बनाती है। यही कारण है कि सल्फर शृंखलन गुण दर्शाती है तथा बहुपरमाणुक अणु Sg रूप में विद्यमान होती है। अतः सल्फर कमरे के ताप पर ठोस रूप में विद्यमान होती है।

प्रश्न 19.
यदि O → O तथा O → O2- के इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी मान पता हो, जो क्रमश: 141 तथा 702 kJ morl-1है, आप कैसे स्पष्ट कर सकते हैं कि O2- स्पीशीज वाले ऑक्साइड अधिक बनते हैं न कि O वाले ?
(संकेत-यौगिकों के बनने में जालक ऊर्जा कारक को ध्यान में रखिए)
उत्तर
O→ O तथा O → O2- के लिए क्षय इलेक्ट्रॉन लब्धि मान होता है। 141 तथा 702 kJ mol-1 क्रमश: बहुत से ऑक्साइड O2- आयन रखते हैं, न कि O आयन क्योंकि कुल एन्थैल्पी मान ऋणात्मक होता

प्रश्न 20.
कौन-से एरोसोल्स ओजोन हैं ?
उत्तर
क्लोरोफ्लुओरो कार्बन या फ्रियॉन।

प्रश्न 21.
संस्पर्श प्रक्रम द्वारा H2SO4 के उत्पादन का वर्णन कीजिए।
उत्तर
निर्माण-सल्फ्यूरिक अम्ल का औद्योगिक निर्माण अधिकतर संपर्क विधि से किया जाता है जिसके लिए कच्चे माल के रूप में सल्फर अथवा आयरन पायराइटीज को लिया जाता है।
सिद्धांत-शुद्ध एवं शुष्क SO2 तथा वायु के मिश्रण को उत्प्रेरक V2O5 पर प्रवाहित करने से, वह SO3 में ऑक्सीकृत हो जाती है, जो जल से क्रिया करके H2SO4 बनाता है।

2SO2 + O2 → 2SO3 + 45.2 kcal
SO3 + H2O → H2SO4

विधि-विधि का क्रमबद्ध वर्णन निम्नलिखित है –

  • सल्फर बर्नर (Sulphur or pyrite burner)-भट्ठियों (B) में शंधक को जलाकर SO2 बनायी जाती है।
  • धूल कक्ष (Dust chamber)-बनी हुई so2 धूल कक्ष D से गुजरती है। यहाँ आने वाले वाष्पीय मिश्रण पर जल-वाष्प का फुहारा छोड़ा जाता है। भाप द्वारा भीगकर धूल के कण भारी हो जाते हैं और नीचे बैठ जाते हैं।
  • शीतक पाइप (Cooling pipes)-गैसीय मिश्रण अब शीतक पाइपों से गुजरता है, जिससे ताप कम होकर 100°C हो जाता है।
  • धोवन स्तम्भ (Washing tower or scrubber)- इस कक्ष (W) में क्वार्ट्ज के टुकड़े भरे होते हैं और ऊपर से ठण्डे पानी की फुहार चालू रहती है। गैसीय मिश्रण यहाँ से गुजरते समय उसमें बचे धूल के कण और जल में विलेय अशुद्धियाँ हट जाती हैं।
  • शुष्क स्तम्भ (Drying tower)-ऊँचे बने हुए इस कक्ष (D) में क्वार्ट्ज के टुकड़े भरे होते हैं और ऊपर से सान्द्र गंधकाम्ल का फुहारा चलता रहता है। गैसें इस कक्ष में नीचे से प्रवेश करती हैं। गंधकाम्ल के द्वारा गैसें शुष्क होकर आगे बढ़ती हैं।
  • आर्सेनिक शोधक-इस स्तम्भ (P) में फेरिक हाइड्रॉक्साइड रहता है। गैसों में उपस्थित आर्सेनिक के ऑक्साइड यहाँ सोख लिए जाते हैं।

परीक्षण कक्ष (Testing chamber)-इस प्रकार शुद्ध किया हुआ गैसीय मिश्रण सम्पर्क कक्ष में भेजने के पूर्व उसका परीक्षण किया जाता है। परीक्षण कक्ष (T) में प्रकाश की तेज किरण पुंज भेजी जाती है। यदि धूल आदि के कण हों तो वे चमक जाते हैं तब इस गैसीय मिश्रण को पुन:शुद्ध किया जाता है। पूर्ण शुद्ध और परीक्षित गैसीय मिश्रण अब गर्म कर (H द्वारा) सम्पर्क कक्ष (R) में भेजा जाता है।

सम्पर्क कक्ष (Contact chamber)-यह लोहे, का बना एक बड़ा कक्ष (R) होता है जिसमें लोहे के कई पाइप होते हैं। इन पाइपों में उत्प्रेरक वेनेडियम पेण्टॉक्साइड (V2O5) या प्लैटिनम युक्त ऐस्बेस्टॉस या अन्य उपयुक्त उत्प्रेरक भरा रहता है। इनका ताप 450°C रखा जाता है। शुद्ध एवं परीक्षित सल्फर डाइऑक्साइड और हवा का गर्म मिश्रण इन पाइपों में उत्प्रेरक के सम्पर्क में रहकर आगे बढ़ता है और सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO3) बनाता है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 24
कैलोरी क्रिया ऊष्माक्षेपी होने से अब ताप स्वयं ही मिलने लगता है।

अवशोषक स्तम्भ (Absorption tower)- बनी हुई सल्फर ट्राइऑक्साइड को सान्द्र गन्धकाम्ल के फुहारे लगे कक्ष (A) में भेजा जाता है । गन्धकाम्ल SO3 अवशोषित होकर उसे और अधिक सान्द्र बनाती है। यह अम्ल SO3 की अधिकता के कारण कुहरा जैसी धूम्र से कक्ष भर जाता है। प्राप्त हुआ अम्ल सधूम गंधकाम्ल (Fuming sulphuric acid) या ओलियम (Oleum) कहलाता है।

H2SO4 + SO3 → H2S2O7

ओलियम में आवश्यकतानुसार जल मिलाकर उससे वांछित सान्द्रता वाला गन्धकाम्ल प्राप्त कर लिया जाता है।

H2S2O7 + H2O → 2H2SO4

So3 जल में तेजी से और सूं-सूं की आवाज के साथ घुलती है।
उपकरण का नामांकित चित्र –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 25

नोट-विस्तृत वर्णन हेतु NCERT पाठ्य-पुस्तक देखें।

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प्रश्न 22.
SO2 किस प्रकार से एक वायु प्रदूषक है?
उत्तर-

  • कम सान्द्रता में भी यह पौधों के लिए हानिकारक है। यह क्लोरोफिल बनने की प्रक्रिया को मंद करती है। पत्तियों का कटना-फटना तथा हरे रंग का क्षय (क्लोरोसिस) इसके कारण है।
  • SO2 वायु में उपस्थित नमी से क्रिया करके सल्फ्यूरस अम्ल बनाती है जो अम्ल वर्षा का कारण है। यह इमारतों के संगमरमर को नष्ट करती है तथा पौधों, जानवरों तथा मनुष्यों में अनेक रोग उत्पन्न करती है।
    SO2 + \(\frac{1}{2}\) O2 + H2O → H2SO4

प्रश्न 23.
हैलोजन प्रबल ऑक्सीकारक क्यों होते हैं ?
उत्तर
एक इलेक्ट्रॉन तत्काल प्रतिग्रहण कर लेने की प्रवृत्ति के कारण हैलोजनों की प्रबल ऑक्सीकारक प्रकृति होती है। कम आबन्ध वियोजन एन्थैल्पी, उच्च विद्युत्ऋणात्मकता तथा अधिक ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि के कारण हैलोजन प्रबलता से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति रखते हैं।
x2 +2e → 2x
इस प्रकार ये एक अच्छे ऑक्सीकारक है।

प्रश्न 24.
स्पष्ट कीजिए कि फ्लुओरीन केवल एक ही ऑक्सी-अम्ल, HOF क्यों बनाता है ?
उत्तर
उच्च विद्युत्ऋणात्मकता, छोटे आकार तथा d-कक्षकों की अनुपस्थिति के कारण फ्लुओरीन ऑक्सी-अम्लों में केवल +1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है। यह अन्य सदस्यों की तरह +3, +5 और +7 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करती। यही कारण है कि अन्य हैलोजनों की अपेक्षा यह केवल एकमात्र ऑक्सी-अम्ल HOF बनाती है। HOFO, HOFO2 और HOFO3 नहीं।

प्रश्न 25.
व्याख्या कीजिए कि क्यों लगभग एक समान विद्युत्-ऋणात्मकता होने के पश्चात् भी नाइट्रोजन हाइड्रोजन आबंध निर्मित करता है, जबकि क्लोरीन नहीं ?
उत्तर
ऑक्सीजन परमाणु में केवल दो कक्षक होते हैं 1s22s22p4 जबकि क्लोरीन में तीन कक्षक 1s22s22p63s23p5 अतः ऑक्सीजन परमाणु का आकार छोटा होता है। हाइड्रोजन आबंध के लिए आवश्यक’ शर्त छोटा आकार होता है । छोटा आकार हाइड्रोजन आबंध बनने में सहायक है। अतः ऑक्सीजन हाइड्रोजन से आबंध बनाकर हाइड्रोजन आबंध बनाता है जबकि क्लोरीन नहीं।

प्रश्न 26.
ClO2 के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर
(i) क्लोरीन डाइऑक्साइड ClO2 प्रबल ऑक्सीकारक है।
(ii) यह प्रबल क्लोरीकारक है और इसकी ब्लीच क्षमता Cl2 की तुलना में 30 गुना अधिक है।

प्रश्न 27. हैलोजन रंगीन क्यों होते हैं ?
उत्तर
हैलोजन समूह के समस्त तत्व रंगीन होते हैं, उनका रंग परमाणु संख्या में वृद्धि के साथ गहरा होता जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 26
पीला हरा-पीला भूरा बैंगनी हैलोजनों में रंग उनके अणुओं द्वारा दृश्य प्रकाश (Visible light) के अवशोषण के कारण होता है। अणुओं द्वारा दृश्य प्रकाश के अवशोषण के फलस्वरूप बाह्यतम इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं, जिसके कारण ये तत्व रंगीन दिखाई देते हैं। उदाहरणार्थ-फ्लुओरीन का आकार अत्यन्त छोटा होने के कारण बाह्य इलेक्ट्रॉन पर नाभिक का आकर्षण अधिक होता है तथा बाह्यतम इलेक्ट्रॉन को उत्तेजित करने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। फ्लुओरीन परमाणु अधिक ऊर्जा वाले बैंगनी विकिरणों को अवशोषित करते हैं, अत: वे हल्के पीले दिखाई देते हैं। जबकि आयोडीन परमाणु का आकार बड़ा होता है। बाह्यतम इलेक्ट्रॉन नाभिक से काफी दूर रहते हैं। उन्हें उत्तेजित करने के लिए कम ऊर्जा वाले पीले विकिरणों की आवश्यकता होती है। दृश्य प्रकाश से पीले रंग के विकिरण के अवशोषण के कारण वे बैंगनी दिखाई देते हैं।

प्रश्न 28.
जल के साथ F2 तथा Cl2 की अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 27

प्रश्न 29.
आप HCl से Cl2 तथा Cl2 से HCl को कैसे प्राप्त करेंगे? केवल अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर
(i) Cl2 का HCl से निर्माण
MnO2 +4HCl → MnCl2 + Cl2 + 2H2O
(ii)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 28

प्रश्न 30.
एन-बार्टलेट Xe तथा PtF6 के बीच अभिक्रिया कराने के लिए कैसे प्रेरित हुए ?
उत्तर- एन-बार्टलेट ने निम्न अभिक्रिया द्वारा एक लाल रंग के यौगिक O2+: [PtF6] को बनाने में सफलता प्राप्त की
O2(g) + PtF6(g) → O2+[PtF6]

उन्होंने अनुभव किया कि ऑक्सीजन और जिनॉन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी लगभग समान हैं।
O2 की lE1 = 1175 kJmol-1
Xe की lE1 = 1170 kJmol-1

इससे उन्होंने O2+ [PtF2] जैसा ही जिनॉन का यौगिक बनाने पर विचार किया तथा Xe और PtF6 को मिलाकर लाल रंग के एक-दूसरे यौगिक Xe+PtF6 के विरचन में सफलता प्राप्त की।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 29
प्रश्न 31.
निम्नलिखित में फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्या हैं ?
(i) H3PO3, (ii) PCl3, (iii) Ca3P2, (iv) Na3PO4, (v) POF3.
उत्तर-
(i) माना H3PO3 की ऑक्सीकरण अवस्था
3x (+1) + x + 3x (-2) = 0, x = +3
(ii) PCl3 = x + 3(-1) = 0 or x = +3
(iii) Ca3P2 = 3 x (+2) + 2x = 0 or x = -3
(iv) Na3PO4 = 3 x (+1) + x + 4 x (-2) = 0 x = +5
(v) POF3 = x + (-2) + 3 x (-1) = 0 or x = +5.

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प्रश्न 32.
निम्नलिखित के लिए संतुलित समीकरण दीजिए –
(i) जब NaCl को MnO, की उपस्थिति में सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गरम किया जाता है।
(ii) जब क्लोरीन गैस को Nal के जलीय विलयन में से प्रवाहित किया जाता है।
उत्तर
(i) सम्पूर्ण अभिक्रिया 4NaCl + MnO2 + 4H2SO4 → MnCl2 + 4NaHSO4 + 2H2O + Cl2
(ii) Cl2(g) + 2NaI(aq)→ 2NaCl(aq) + I2(s)

प्रश्न 33.
जीनॉन फ्लु ओराइड, XeF2, XeF4 तथा XeF6 कैसे बनाए जाते हैं ?
उत्तर
जीनॉन फ्लु ओराइड (Xenon Fluoride)-जीनॉन के तीन फ्लुओराइड महत्वपूर्ण है – XeF2, XeF4 तथा XeF6 । ये सभी यौगिक जीनॉन तथा फ्लुओरीन के बीच निकिल की नलिका में उच्च ताप तथा दाब पर बनाए गये हैं –

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 30

प्रश्न 34.
किस उदासीन अणु के साथ ClO समइलेक्ट्रानी है? क्या एक अणु लुइस क्षारक है ?
उत्तर
ClO सहइलेक्ट्रॉन गुण दर्शाता है ClF के साथ क्योंकि दोनों में 26 इलेक्ट्रॉन होते हैं।

प्रश्न 35.
XeO3 और XeOF4 बनाने की प्रक्रिया बताइए।
उत्तर
XeF4 और XeF6 का जल अपघटन करने पर XeO3 बनता है।
6XeF4 +12H20 → 4Xe + 2XeO3 + 24F+3O2
XeF6 +3H2O → XeO3 +6HF
XeF6 के आंशिक अपघटन से XeOF4 बनता है
XeF6 + H2O → XeOF4 +2HF

प्रश्न 36.
निम्नलिखित प्रत्येक समुच्चय को सामने लिखे गुणों के अनुसार सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए
(i) F6, Cl2, Br2, I2 आबंध वियोजन एन्थैल्पी बढ़ते क्रम में
(ii) HF, HCl, HBr, HI अम्ल सामर्थ्य बढ़ते क्रम में।
(iii) NH3, PH3, ASH3, SbH3, BiH3 – क्षारक सामर्थ्य बढ़ते क्रम में।
उत्तर
(i) I2 <F2 < Br2 <Cl2
(ii) HF <HCl< HBr <HI
(iii) BiH3 < SbH3 < ASH3 < PH3 < NH3

प्रश्न 37.
निम्नलिखित में से कौन-सा एक अस्तित्व में नहीं है ?
(i) XeOF4, (ii) NeF2, (iii) XeF2, (iv) XeF6.
उत्तर-
NeF2 नहीं बन सकता।

प्रश्न 38.
उस उत्कृष्ट गैस स्पीशीज का सूत्र देकर संरचना की व्याख्या कीजिए जो कि इनके साथ समसंरचनीय है-.
(i) ICl4, (ii) IBr2 , (iii) BrO3.
उत्तर
(i) XeF4 तथा ICl4 सहइलेक्ट्रॉन गुण दर्शाते हैं दोनों की संरचना वर्ग समतल है।
(ii) XeF2 व IBr2 सहइलेक्ट्रॉन गुण दर्शाते हैं दोनों रेखीय है।
(iii) XeO3 व BrO3, पिरामिड आकृति के हैं तथा सह-इलेक्ट्रॉन दर्शाते हैं। संरचना के लिये पाठ्यपुस्तक देखिए।

प्रश्न 39.
उष्कृष्ट गैसों के परमाण्विक आकार तुलनात्मक रूप से बड़े क्यों होते हैं ?
उत्तर
उत्कृष्ट गैसों के परमाण्विक आकार तुलनात्मक रूप से बड़े होते हैं क्योंकि इनकी त्रिज्याएँ, वाण्डरवाल्स त्रिज्याएँ होती हैं जिनका मान सहसंयोजी त्रिज्याओं तथा धात्विक त्रिज्याओं से अपेक्षाकृत अधिक होता है। जबकि एक ही आवर्त में दूसरे सदस्यों की त्रिज्याएँ सहसंयोजक त्रिज्याएँ या धात्विक त्रिज्याएँ होती हैं जिनका मान कम होता है।

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प्रश्न 40.
निऑन तथा ऑर्गन गैसों के उपयोग सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर
निऑन –

  • 1000 वोल्ट तथा 2 mm दाब पर जब नियॉन की नली से विद्युत् विसर्जन किया जाता है, तो चमकदार नारंगी रंग की प्रतिदीप्ति बनती है। इसलिए इसका उपयोग साइन बोर्ड में किया जाता है। अन्य गैसों के साथ मिलकर विभिन्न रंग मिलते हैं, इसलिए विज्ञापन बोर्डो में इसका भरपूर उपयोग होता है।
  • हरितगृहों में नियॉन लैम्पों का उपयोग होता है, क्योंकि यह क्लोरोफिल निर्माण में तथा पौधों की वृद्धि को बढ़ाता है।
  • विद्युत् उपकरणों में सुरक्षा के तहत इसका उपयोग होता है।

ऑर्गन-

  • विद्युत् बल्बों में लगे टंगस्टन के फिलामेण्ट की आयु बढ़ाने के लिए इसे भरा जाता है।
  • रेडियो वाल्व तथा रेक्टिफायर (Rectifires) में।
  • प्रतिदीप्ति नलिका (जैसे-ट्यूबलाइट) में मयूरी वाष्प के साथ इसे भरा जाता है।
  • कुछ रासायनिक अभिक्रियाओं में अक्रिय वातावरण निर्माण करने में तथा वेल्डिंग में अक्रिय वातावरण निर्माण करने में।

p-ब्लॉक के तत्त्व अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

p-ब्लॉक के तत्त्व वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. (A) सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
किस यौगिक में ऑक्सीजन + 2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है –
(a) H2O
(b) Na2O
(c) OF2
(d) MgO.
उत्तर
(c) OF2

प्रश्न 2.
लाल-भूरे रंग की गैस निर्मित करती है, जब वायु द्वारा नाइट्रिक ऑक्साइड ऑक्सीकृत होती है। वह गैस है –
(a) Na2O2
(b) Na2O4
(c) NO2
(d) N2O3.
उत्तर
(c) NO2

प्रश्न 3.
फॉस्फोरस के एक ऑक्सी अम्ल का सूत्र H3PO4 है, वह है –
(a) द्वि क्षारकीय अम्ल
(b) एक क्षारकीय अम्ल
(c) त्रिक्षारकीय अम्ल
(d) चतुष्क्षारकीय अम्ल।
उत्तर
(c) त्रिक्षारकीय अम्ल

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रारूपिक धातु है –
(a) P
(b) As
(c) Sb
(d) Bi.
उत्तर
(d) Bi.

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में कौन-सा ऑक्साइड अनु चुम्बकीय है –
(a) NO2O4
(b) NO2
(c) P4O6
(d) N2O5
उत्तर
(b) NO2

प्रश्न 6.
अमोनिया को शुष्क बनाया जाता है –
(a) H2SO4 से
(b) P2O5 से
(c) अजलीय CaCl2
(d) कोई नहीं।
उत्तर
(d) कोई नहीं।

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प्रश्न 7.
नाइट्रिक अम्ल, आयोडीन को परिवर्तित करता है –
(a) आयोडिक अम्ल में
(b) हाइड्रोआयोडिक अम्ल में
(c) आयोडीन पेन्टॉक्साइड में
(d) आयोडीन नाइट्रेट में।
उत्तर
(a) आयोडिक अम्ल में

प्रश्न 8.
अमोनिया एक लुइस बेस है यह धनायनों के साथ संकर लवण बनाती है। निम्न धनायनों में कौन NH3 के साथ संकर लवण नहीं बनाता है –
(a) Ag+
(b) Cu2+
(c) Cd2+
(d) Pb2+
उत्तर
(d) Pb2+

प्रश्न 9.
अमोनिया विलयन पर्याप्त घुल जाता है
(a) Hg2Cl2 में
(b) PbCl2 में
(c) AgI में
(d) Cu(OH)2 में।
उत्तर
(d) Cu(OH)2 में।

प्रश्न 10.
P2O5 के एक अणु को ऑर्थो-फॉस्फोरिक अम्ल में परिवर्तित करने के लिए जल के अणुओं की आवश्यकता होती है –
(a) 2
(b) 3
(c) 4
(d) 5.
उत्तर
(b) 3

प्रश्न 11.
So2 के विरंजन क्रिया का कारण है –
(a) अपचयन
(b) ऑक्सीकरण
(c) जल-अपघटन
(d) इसकी अम्लीय प्रकृति।
उत्तर
(a) अपचयन

प्रश्न 12.
जब SO2 अम्लीय K2Cr2O7 विलयन में प्रवाहित की जाती है –
(a) विलयन नीला हो जाता है
(b) विलयन रंगहीन हो जाता है
(c) SO2 अपचयित हो जाती है
(d) हरा क्रोमिक सल्फेट बनता है।
उत्तर
(d) हरा क्रोमिक सल्फेट बनता है।

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प्रश्न 13.
P2O3 से निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल बनता है –
(a) H4P2O7
(b) H3PO4
(c) H3PO3
(d) HPO3.
उत्तर
(c) H3PO3

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में कौन-सा हैलाइड सबसे अधिक अम्लीय है –
(a) PCl5
(b) SbCl3
(c) BrCl3
(d) CCl4.
उत्तर
(a) PCl5

प्रश्न 15.
सल्फ्यूरिक अम्ल के औद्योगिक निर्माण में प्रयुक्त उत्प्रेरक है –
(a) Al2O3
(b) CrO3
(c) V2O5
(d) MnO2.
उत्तर
(c) V2O5

प्रश्न 16.
फॉस्फोरस ट्राइ हैलाइड के जल-अपघटन से प्राप्त होते हैं –
(a) एक एकक्षारकीय अम्ल तथा एक द्विक्षारकीय अम्ल
(b) एक एकक्षारकीय अम्ल तथा एक त्रिक्षारकीय अम्ल
(c) एक एकक्षारकीय अम्ल तथा एक लवण
(d) दो द्विक्षारकीय अम्ल।
उत्तर
(a) एक एकक्षारकीय अम्ल तथा एक द्विक्षारकीय अम्ल

प्रश्न 17.
निम्नलिखित अभिक्रिया में –
P4 + 3NaOH + 3H2O → PH3 + 3NaH2PO2
(a) फॉस्फोरस ऑक्सीकृत हुआ है
(b) फॉस्फोरस ऑक्सीकृत और अवकृत दोनों हुआ है
(c) फॉस्फोरस अवकृत हुआ है
(d) सोडियम ऑक्सीकृत हुआ है।
उत्तर
(b) फॉस्फोरस ऑक्सीकृत और अवकृत दोनों हुआ है

प्रश्न 18.
हास्य गैस है –
(a) NO
(b) N2O
(c) N2O3
(d) N2O5.
उत्तर
(b) N2O

प्रश्न 19.
सफेद फॉस्फोरस (P) में नहीं होता है –
(a) छ: P-P एकल बंध
(b) चार P-P एकल बंध
(c) चार एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म
(d) P-P-P कोण 60° का।
उत्तर
(b) चार P-P एकल बंध

प्रश्न 20.
NH4Cl तथा NaNO2 विलयन को गर्म करने पर प्राप्त होती है –
(a) N2O
(b) N2
(c) NO2
(d) NH3
उत्तर
(b) N2

प्रश्न 21.
मेटा फॉस्फोरिक अम्ल का सूत्र है
(a) H3PO4
(b) HPO3
(c) H3PO3
(d) H2PO2.
उत्तर
(b) HPO3

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प्रश्न 22.
वह गैस जो जल पर एकत्रित नहीं की जा सकती है-
(a) Na
(b) O2
(c) SO2
(d) PH5
उत्तर
(c) SO2

(B) सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
क्लोरीन विरंजन गुण निम्न में से एक की उपस्थिति में ही होता है –
(a) शुष्क वायु
(b) नमी
(c) सूर्य का प्रकाश
(d) शुद्ध ऑक्सीजन।
उत्तर
(b) नमी

प्रश्न 2.
He, Ar, Kr और Xe में से कौन-सा तत्व सबसे कम संख्या में यौगिक बनाता है –
(a) He
(b) Ar
(c) K
(d) Xe.
उत्तर
(a) He

प्रश्न 3.
चमकीले विद्युत् विज्ञापनों में किस गैस का उपयोग होता है –
(a) जेनॉन
(b) आर्गन
(c) निऑन
(d) हीलियम।
उत्तर
(c) निऑन

प्रश्न 4.
मोनाजाइट स्रोत है –
(a) Ne
(b) Ar
(c) Kr
(d) He.
उत्तर
(d) He.

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से कौन-से अवयवों की सीधी अभिक्रिया से प्राप्त नहीं होता –
(a) XeF2
(b) XeF4
(c) XeO3
(d) XeF6.
उत्तर
(a) XeF2

प्रश्न 6.
कौन-सा हैलाइड न्यूनतम स्थायी है, जिसका अस्तित्व सन्देहात्मक है –
(a) CI4 .
(b) GeI4
(c) SnI4
(d) PbI4.
उत्तर
(d) PbI4.

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प्रश्न 7.
निम्न में से तीव्रतम अम्ल कौन-सा है –
(a) HBr
(b) HCl
(c) HF
(d) HI.
उत्तर
(d) HI.

प्रश्न 8.
निम्न में से कौन सबसे अधिक ऋणविद्युती है –
(a) F
(b) Cl
(c) Br
(d) I.
उत्तर
(a) F

प्रश्न 9.
कौन-सा हैलोजन कमरे के ताप पर ठोस अवस्था में रहता है –
(a) F
(b) Cl
(c) Br
(d) I.
उत्तर
(d) I.

प्रश्न 10.
इलेक्ट्रॉन बन्धुता अधिकतम है –
(a) F
(b) Cl
(c) Br
(d) I.
उत्तर
(b) Cl

प्रश्न 11.
हैलोजन परमाणु के बाह्यतम् कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है –
(a) s2p5
(b) s2p3
(c) s2p6
(d) s2p4
उत्तर
(a) s2p5

प्रश्न 12.
निम्न में से सबसे अधिक क्षारीय गुण प्रदर्शित करने वाला तत्व है –
(a) F
(b) Cl
(c) Br
(d) I.
उत्तर
(d) I.

प्रश्न 13.
सबसे प्रबल अपचायक है –
(a) F
(b) Br
(c) I
(d) Cl.
उत्तर
(c) I

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प्रश्न 14.
निम्नलिखित में से सबसे दुर्बल अम्ल है –
(a) HF
(b) HCl
(c) HBr
(d) HI.
उत्तर
(a) HF

प्रश्न 15.
ऑक्सीकारक गुण सबसे अधिक होता है –
(a) I2
(b) Br2
(c) F2
(d) Cl2.
उत्तर
(c) F2

प्रश्न 16.
किस अक्रिय गैस का अष्टक पूर्ण नहीं है
(a) हीलियम
(b) निऑन
(c) आर्गन
(d) क्रिप्टॉन।
उत्तर
(a) हीलियम

प्रश्न 17.
कौन-सा हैलोजन ऊर्ध्वपातित होता है
(a) क्लोरीन
(b) ब्रोमीन
(c) आयोडीन
(d) फ्लुओरीन।
उत्तर
(c) आयोडीन

प्रश्न 18.
निम्न में से कौन-सा उत्कृष्ट गैस जल में सर्वाधिक विलेय है –
(a) He
(b) Ar
(c) Ne
(d) Xe.
उत्तर
(d) Xe.

प्रश्न 19.
KI के घोल में I2 सुगमता से घुलकर बनाती है –
(a) I
(b) KI2
(c) KI
(d) KI3
उत्तर
(d) KI3

प्रश्न 20.
दमा के मरीजों के लिए श्वसन में प्रयुक्त गैस जिसे ऑक्सीजन में मिलाते हैं –
(a) N2
(b) Cl2
(c) He
(d) Ne.
उत्तर
(c) He

प्रश्न 21.
डीकन विधि का उपयोग इसके निर्माण में होता है –
(a) विरजंक चूर्ण
(b) क्लोरीन
(c) नाइट्रिक अम्ल
(d) सल्फ्यूरिक अम्ल।
उत्तर
(b) क्लोरीन

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प्रश्न 22.
समुद्री घास निम्न के औद्योगिक निर्माण का स्रोत है –
(a) क्लोरीन
(b) ब्रोमीन
(c) आयोडीन
(d) फ्लुओरीन।
उत्तर
(c) आयोडीन

प्रश्न 23.
विद्युत् बल्ब में कौन-सी गैस भरना ज्यादा उपयोगी है –
(a) He
(b) Ne
(c) Ar
(d) Kr.
उत्तर
(c) Ar

2. (A) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. N2 O एक ……….. ऑक्साइड है।
  2. कैरो अम्ल का रासायनिक सूत्र ……… होता है।
  3. सान्द्र नाइट्रिक अम्ल जिसमें ……….. घुली रहती है, इसके कारण इसका रंग गहरा भूरा होता है।
  4. नाइट्रोजन के ऑक्साइड में ……….. तथा ………. अनुचुम्बकीय है।
  5. पायरो फॉस्फोरिक अम्ल ………. क्षारकीय अम्ल है।
  6. H2S गैस को सान्द्र H2SO4 द्वारा शुष्क नहीं किया जा सकता, क्योंकि H2S उसे ……… कर देती है।
  7. सधूम सल्फ्यूरिक अम्ल SO3 में घुलकर ………… बनाता है।
  8. H2S2O8 (मार्शल अम्ल)में S की ऑक्सीकरण अवस्था …………..होती है।
  9. NH3 को HCl के साथ संयोग करके ………….. का सफेद धूम्र देता है।
  10. समूह 16 के तत्वों को ………….. कहते हैं।
  11. …………. प्रशीतक के रूप में उपयोग आती है।

उत्तर

  1. उदासीन
  2. H2SO5
  3. NO2
  4. NO; NO2
  5. चतुष्क
  6. अपचयित
  7. ओलियम
  8. + 6
  9. NH4Cl
  10. कैल्कोजन
  11. द्रव NH3 .

(B) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. सर्वोच्च इलेक्ट्रॉन बन्धुता …………. की होती है।
  2. नमी की उपस्थिति में क्लोरीन …………. का कार्य करती है।
  3. ब्लीचिंग पाउडर को ………… भी कहा जाता है।
  4. सामान्य ताप पर ब्रोमीन ………………. है।
  5. AX5 अन्तर हैलोजन यौगिक की आकृति …………. होती है।
  6. क्लोरीन की खोज …………. ने की थी।
  7. नील बर्टलेट ने सर्वप्रथम उत्कृष्ट यौगिक ……….. बनाया है।
  8. सबसे अधिक इलेक्ट्रॉन बन्धुता रखने वाला तत्व ……….. है।
  9. हैलोजन के ऑक्सी अम्लों में ………… संकरण पाया जाता है।
  10. गैस जो हल्की होने की कारण ………… वायुयानों के टायर में भरी जाती है।
  11. विज्ञापनों के लिए अक्रिय गैस ………………का सर्वाधिक उपयोग होता है।
  12. समूह 17 के तत्व सामान्यतया …………….. कहलाते हैं।
  13. ………….. रेडियोऐक्टिव अक्रिय गैस है।

उत्तर

  1. क्लोरीन
  2. विरंजक
  3. कैल्सियम क्लोरोहाइपो क्लोराइड,
  4. द्रव
  5. वर्ग पिरामिडीय
  6. शीले
  7. Xe[PtF6 ],
  8. क्लोरीन,
  9. sp3
  10. हीलियम,
  11. Ne (निऑन),
  12. हैलोजन,
  13. रेडॉन।

3. (A) एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी की रक्षा कौन करती है ?
  2. कसीस का तेल जिसे किंग ऑफ केमिकल कहा जाता है, इसका रासायनिक नाम बताइए।
  3. प्रशीतन में किस गैस का उपयोग किया जाता है ?
  4. जल का घनत्व किस ताप पर सर्वाधिक होता है ?
  5. सल्फ्यूरिक अम्ल में SO3 गैस विलेय करने पर क्या बनता है ?
  6. एक प्रतिक्लोर का नाम लिखिए।
  7. हाथी दाँत, तेल आदि के विरंजन में किस गैस का उपयोग किया जाता है ?
  8. अमोनियम लवण क्षारीय नेसलर अभिकर्मक से क्रिया करके किस रंग का अवक्षेप देता है ?
  9. N से Bi की ओर जाने पर Bi +3 ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी होता है +5 की अपेक्षा, क्यों?
  10. प्रकृति में आयतन के अनुसार N2 का प्रतिशत बताइए।

उत्तर

  1. ओजोन परत
  2. सल्फ्यूरिक अम्ल
  3. NH3
  4. 4°C
  5. ओलियम
  6. SO2
  7. ओजोन
  8. भूरे
  9. अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण
  10. 80%.

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(B) एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए –

  1. रेडियो एक्टिव हैलोजन का नाम बताइए।
  2. विद्युत् बल्बों में नाइट्रोजन के साथ किस उत्कृष्ट गैस का उपयोग किया जाता है ?
  3. कैन्सर के उपचार में उपयोग आने वाली उत्कृष्ट गैस का नाम लिखिए।
  4. कार्नेलाइट का सूत्र लिखिए।
  5. वायुमण्डल में किस उत्कृष्ट गैस की उपलब्धता सर्वाधिक है ?
  6. XeF6 की आकृति क्या होती है ?
  7. फ्लुओरीन का एक उपयोग लिखिए।
  8. XeO3 में किस प्रकार का संकरण पाया जाता है ?
  9. F की ऑक्सीकरण अवस्था कितनी है ?
  10. प्रयोगशाला में क्लोरीन किस अभिक्रिया से बनाते हैं ? केवल समीकरण लिखिए।
  11. AX3 प्रकार के अन्तर हैलोजन यौगिक की आकृति क्या होती है ?
  12. हैलोजन अम्लों की शक्ति का सही क्रम लिखिए।
  13. कौन-सी उत्कृष्ट गैसें यौगिक नहीं बनाती हैं ?
  14. F किस उत्कृष्ट गैस के साथ यौगिक बनाता है ?
  15. समुद्री शैवाल किस हैलोजन का मुख्य स्रोत है ?

उत्तर-

  1. ऐस्टेटीन
  2. Ar
  3. Rn
  4. KCI.MgCl2.6H2 O
  5. आर्गन
  6. विकृत अष्टफलकीय
  7. फ्लुओरो कार्बन बनाने में, जिसका उपयोग रेफ्रिजरेशन में होता है,
  8. sp3
  9. -1
  10. MnO2 + 4HCl → MnCl2 +2H2 O + Cl2
  11. T आकृति की,
  12. HF < HCI< HBr < HI,
  13. He, Ne एवं Ar,
  14. Xe,
  15. आयोडीन।

4. उचित सम्बन्ध जोड़िए –
I.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 31
उत्तर
1. (d), 2. (c), 3. (a), 4. (b), 5. (1), 6. (g), 7. (e), 8. (i), 9. (j), 10. (h).

II.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 32
उत्तर
1. (e), 2. (c), 3. (b), 4. (a), 5. (d).

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III.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 33
उत्तर
1. (e)
2. (d)
3. (b)
4. (a)
5. (c).

p-ब्लॉक के तत्त्व अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सान्द्र गंधक अम्ल उच्च क्वथनांक वाला तैलीय द्रव क्यों है ?
उत्तर
H2SO4 अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध होने के कारण यह उच्च क्वथनांक वाला तैलीय द्रव है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 34

प्रश्न 2.
डाइनाइट्रोजन (N) कमरे के ताप पर कम क्रियाशील क्यों है ?
उत्तर
N≡N बंध की उच्च बन्ध एन्थैल्पी के कारण डाइनाइट्रोजन कमरे के ताप पर काफी अक्रिय है।

प्रश्न 3.
N2 गैस है जबकि P4 एक वाष्पशील ठोस, क्यों ?
उत्तर
N2 अणु में N≡N के बीच त्रिबंध होता है तथा यह पूर्णत: अध्रुवीय अणु होता है, इसमें वाण्डर वाल्स बल नगण्य होता है इसलिए यह गैसीय अवस्था में होता है एवं P4 अणु की संरचना चतुष्फलकीय होती है। इसमें चतुष्फलकीय अणु दुर्बल वाण्डर वाल्स बंध द्वारा जुड़कर क्रिस्टलीय रूप ले लेता है। .

प्रश्न 4.
HCIO, HBro एवं HIO के अम्लीय प्रबलता का क्रम लिखिए।
उत्तर
HCIO से HIO तक हाइपो हैलस अम्लों की प्रबलता घटती है –
HCIO > HBrO > HIO.

प्रश्न 5.
क्लैथेट यौगिक क्या है ? .
उत्तर
किसी यौगिक के क्रिस्टल जालक के होल या रिक्तिको में छोटे आकार के तत्व जैसे उत्कृष्ट गैसों के समा जाने या प्रवेश करने से क्लैथ्रेट यौगिक प्राप्त होते है। उदाहरण-Kr3 (β क्विनॉल)।

प्रश्न 6.
1 परमाणु की तुलना में F परमाणु की ऋणविद्युत्ता अधिक है फिर भी HF की अम्लीय प्रबलता HI की अपेक्षा कम होती है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
F परमाणु का आकार छोटा होने के कारण H-F बंध की बंध वियोजन H-I बंध की अपेक्षा बहुत उच्च होती है जिसमें । परमाणु का आकार बड़ा होता है।

प्रश्न 7.
कौन-कौन-सी उत्कृष्ट गैसे रासायनिक यौगिक बना सकती हैं ?
उत्तर
Kr एवं Xe अत्यधिक विशिष्ट परिस्थितियों के अन्तर्गत यौगिक बना सकती है।

प्रश्न 8.
फ्लुओरीन, क्लोरीन की तुलना में प्रबल ऑक्सीकारक क्यों है ?
उत्तर
फ्लुओरीन, क्लोरीन से अधिक विद्युत्-ऋणात्मक होने के कारण इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की अधिक क्षमता रखता है, फलस्वरूप फ्लुओरीन, क्लोरीन की तुलना में प्रबल ऑक्सीकारक है।

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प्रश्न 9.
F2O को फ्लुओरीन का ऑक्साइड नहीं माना जाता है, क्यों?
उत्तर-फ्लुओरीन आवर्त सारणी का सर्वाधिक ऋणविद्युती तत्व है। इसकी ऋणविद्युत्ता 0 से अधिक होती है। नामकरण पद्धति में कम ऋणविद्युती तत्व का नाम पहले एवं अधिक ऋणविद्युती तत्व का नाम बाद में लिखते हैं इसलिए F2O या OF2 को ऑक्सीजन डाइफ्लुओराइड कहा जाता है।

प्रश्न 10.
अंतर हैलोजन यौगिक हैलोजन की अपेक्षा अधिक क्रियाशील होते हैं, क्यों ? .
उत्तर-
दो भिन्न हैलोजन के बीच बना बंध (A-B), शुद्ध हैलोजन (एक ही प्रकार के हैलोजन) परमाणु के बीच बने बंध (A-A या B-B) की तुलना में ज्यादा ध्रुवीय और दुर्बल होता है इसलिए अन्तर हैलोजन यौगिक अधिक क्रियाशील होते हैं।

प्रश्न 11.
हीलियम और निऑन फ्लुओरीन के साथ यौगिक नहीं बनाते हैं, क्यों ?
उत्तर
He और Ne के संयोजकता कक्ष में d-ऑर्बिटल नहीं होने के कारण इनके इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर Xe के समान उच्च ऊर्जा के d-कक्षक में नहीं जा सकते इसलिए He और Ne फ्लुओरीन के साथ यौगिक नहीं बनाते हैं।

p-ब्लॉक के तत्त्व लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सामान्य ताप पर H2O द्रव है जबकि H2S गैस है, क्यों ? जल का क्वथनांक उच्च क्यों होता है ?
उत्तर
जल के अणु में Oxygen परमाणु उच्च विद्युत्-ऋणात्मक होता है। जिसके कारण जल के अन्य अणुओं से H- बन्धन (Inter molecular hydrogen bonding) करता है। फलस्वरूप जल के समस्त अणु संगुणित हो जाते हैं, जिससे क्वथनांक उच्च हो जाता है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 35
H2S में हाइड्रोजन बंध नहीं पाये जाने के कारण इसके अणुओं में संगुणन नहीं होता तथा गैसीय अवस्था में रहता है। जबकि H2O द्रव अवस्था में।

प्रश्न 2.
फॉस्फोरस के पाँच ऑक्सी अम्लों के नाम लिखकर उनकी संरचना सूत्र दर्शाइए।
उत्तर
फॉस्फोरस के पाँच ऑक्सी अम्लों के नाम –

  1. हाइपो फॉस्फोरस अम्ल (H3PO2) एक क्षारकीय
  2. हाइपो फॉस्फोरिक अम्ल (H4P2O6) चतुर्भारकीय
  3. फॉस्फोरस अम्ल (H3PO3) द्विक्षारकीय
  4. ऑर्थो-फॉस्फोरिक अम्ल (H3PO4) त्रिक्षारकीय
  5. पायरो फॉस्फोरिक अम्ल (H4P2O7) चतुर्धारकीय।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 36

प्रश्न 3.
ऑक्सीजन का व्यवहार अपने समूह के अन्य तत्त्वों से भिन्न है। कारण लिखिए।
उत्तर
ऑक्सीजन के असंगत व्यवहार के निम्न कारण हैं –

  • परमाणु आकार का छोटा होना।
  • विद्युत्-ऋणात्मकता का मान अधिक होना।
  • d-कक्षक का उपलब्ध न होना।
  • इसकी आयनन ऊर्जा उच्च होती है।

प्रश्न 4.
क्या कारण है कि ऑक्सीजन एक गैस है, जबकि सल्फर एक ठोस है ?
उत्तर
ऑक्सीजन द्वि-परमाणुक अणु O2 बनाता है। इसमें ऑक्सीजन के विभिन्न अणु दुर्बल अन्तरअणुक वाण्डर वाल बल द्वारा बँधे होते हैं। अतः ऑक्सीजन सामान्य ताप पर गैस होती है।
दूसरी ओर सल्फर आठ परमाणुओं की जटिल आण्विक संरचना बनाता है। अतः सल्फर के इस S8 अणु का आण्विक द्रव्यमान अधिक होने के कारण यह ठोस अवस्था में होता है।

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प्रश्न 5.
जल उदासीन होता है किन्तु H2S एक दुर्बल अम्ल है, क्यों ?
उत्तर
जल के अणुओं में प्रबल H-बन्ध पाये जाने के कारण इनके अणु परस्पर संगुणित अवस्था में रहते हैं, जिससे इसके वियोजन स्थिरांक (Ka) का मान कम होता है। अत: जल उदासीन द्रव है। जबकि H2S में S की ऋणविद्युत्ता अधिक नहीं होने के कारण हाइड्रोजन बन्ध नहीं बना पाता तथा सल्फर का परमाणु आकार ऑक्सीजन के परमाणु चित्र-S, अणु की संरचना आकार से बड़ा होता है। जिससे यह हाइड्रोजन का प्रोटॉन के रूप में मुक्त होने के लिए सहायक होता है। अतः H2S दुर्बल अम्ल है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 37

प्रश्न 6.
प्रयोगशाला में अमोनिया गैस को शुष्क करने के लिए अनबुझे चूने का ही प्रयोग किया जाता है। कारण लिखिए।
उत्तर
प्रयोगशाला में अमोनियम क्लोराइड (नौसादर) और क्षार या बुझा हुआ चूना विलयन को कठोर काँच के फ्लास्क में गर्म करने पर अमोनिया गैस बनती है। इसे बिना बुझे हुए चूने द्वारा शुष्क कर हवा के अधोविस्थापन द्वारा एकत्रित कर लिया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 38
अमोनिया को चूने के अलावा अन्य जल शोषक पदार्थों (H2SO4, P2O5, CaCl2) से शुष्क नहीं किया जा सकता क्योंकि वह उनसे क्रिया करती है। अमोनिया के, जल में अत्यधिक विलेय होने से जल के ऊपर भी एकत्रित नहीं किया जा सकता।

2NH3 + H2SO4 → (NH4)2SO4बनता है।
CaCl2 + 8NH3 → CaCl2 . 8NH3 योगात्मक यौगिक बनता है।
6NH3 + P2O5 +3H2O → 2(NH4)3 PO4 बनता है।

प्रश्न 7.
SO2 तथा Cl2 की विरंजन क्रिया में अन्तर लिखिए।
अथवा, क्लोरीन द्वारा फूलों का विरंजन स्थायी होता है जबकि SO2 द्वारा अस्थायी होता है, कारण समझाइए।
उत्तर
SO2 द्वारा विरंजन-नमी की उपस्थिति में SO2 गैस वनस्पतियों के रंगीन पदार्थ को अपचयन द्वारा रंगहीन बना देती है। यह विरंजन अस्थायी होता है, क्योंकि वायुमण्डल की ऑक्सीजन द्वारा रंगहीन पदार्थ का ऑक्सीकरण हो जाता है तथा वह रंगीन पदार्थ में बदल जाता है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 39

Cl2 द्वारा विरंजन-Cl2 द्वारा विरंजन ऑक्सीकरण क्रिया से होता है। नमी की उपस्थिति में यह वनस्पतियों एवं रंगीन वस्तुओं का विरंजन कर देती है । Cl2 और जल की क्रिया से नवजात ऑक्सीजन बनती है, जो रंगीन पदार्थ को ऑक्सीकरण द्वारा रंगहीन पदार्थ में बदल देती है।

Cl2 + H2O →HCl + HClO
HClO→ HCI +O
रंगीन पदार्थ + O → रंगहीन पदार्थ

Cl2 द्वारा किया गया विरंजन स्थायी होता है।

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प्रश्न 8.
सल्फर के किन्हीं पाँच ऑक्सी अम्लों के सूत्र एवं संरचना लिखिए।
उत्तर
सल्फर के प्रमुख ऑक्सी अम्ल तथा उसमें सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था निम्नलिखित हैं –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 40

प्रश्न 9.
H2SO4 के निर्माण की सीस कक्ष विधि के प्रयुक्त ग्लोबर स्तम्भ के कोई चार कार्य लिखिए।
उत्तर
ग्लोबर स्तम्भ के मुख्यत: चार कार्य हैं –

  • सीस कक्ष का अम्ल जिसमें जल की अशुद्धि होती है। SO2 से मिलकर H2SO4 बनाता है जिससे इस अम्ल का सान्द्रण 80% तक हो जाता है।
  • गैलूसैक स्तम्भ से प्राप्त नाइट्रीकृत H2SO4 में से N2 के ऑक्साइड मुक्त हो जाते हैं।
  • बर्नर से प्राप्त SO2 तथा NO2 का मिश्रण 50 से 80°C तक ठण्डा हो जाता है।
  • इस स्तम्भ में कुछ SO2 का SO3 में ऑक्सीकरण हो जाता है।

प्रश्न 10.
अम्लराज क्या है ? इसका उपयोग लिखिए।
उत्तर
अम्लराज (Aqua regia)—यह 1 भाग सान्द्र HNO3 तथा 3 भाग सान्द्र HCl को मिलाने से बनता है।
उपयोग–अम्लराज Au, Pt और Ir को घोलने के लिए प्रयुक्त होता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 41

प्रश्न 11.
सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण में संपर्क विधि को सीस कक्ष विधि से अधिक उपयुक्त क्यों माना जाता है ?
उत्तर

  • सम्पर्क विधि से प्राप्त अम्ल शुद्ध होता है किन्तु सीस कक्ष विधि से प्राप्त अम्ल अशुद्ध होता है।
  • सम्पर्क विधि के संयंत्र के लिये कम स्थान लगता है जबकि सीस कक्ष विधि के संयंत्र के लिये अधिक स्थान चाहिए।
  • सम्पर्क विधि में ठोस उत्प्रेरक प्लैटिनीकृत एस्बेस्टस प्रयुक्त होता है जबकि सीस कक्ष विधि में प्रयुक्त उत्प्रेरक गैसीय होता है जिसका प्रवाह नियमित रखना आवश्यक है।
  • सम्पर्क विधि संयंत्र को लगाने में सीस कक्ष संयंत्र की तुलना में कम खर्च आता है।
  • सम्पर्क विधि में प्राप्त अम्ल अधिक सान्द्र होता है किन्तु सीस कक्ष विधि में तनु अम्ल प्राप्त होता है।

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प्रश्न 12.
PH3 का क्वथनांक NH3 से कम होता है, क्यों ?
उत्तर
नाइट्रोजन और फॉस्फोरस दोनों की विद्युत्-ऋणात्मकता में बड़ा अन्तर होने के कारण NH3 अणु अन्तर आण्विक H- बन्ध बनाने में भाग लेता है इसलिए NH3 एक संगुणित अणु के रूप में विद्यमान रहता है। इन हाइड्रोजन बन्धों को तोड़ने के लिए ऊर्जा की अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है।
जबकि PH3 हाइड्रोजन बन्ध बनाने में भाग नहीं लेता है इसलिए यह अखण्डित अणु के स्वरूप में विद्यमान नहीं रह पाता इसलिए PH3 का क्वथनांक NH3 से कम ही पाया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 42

प्रश्न 13.
फॉस्फीन बनाने की प्रयोगशाला विधि का नामांकित चित्र बनाइए तथा रासायनिक समीकरण दीजिए।
उत्तर
प्रयोगशाला में फॉस्फीन गोल पेंदी के फ्लास्क में सफेद फॉस्फोरस और NaOH को CO2 एवं तेल गैस के अक्रिय वातावरण में गर्म करके बनायी जाती है। मुक्त फॉस्फीन में अपद्रव्य के रूप में फॉस्फोरस डाइहाइड्राइड होने के कारण इसमें बड़ी शीघ्रता से आग लग जाती है। गैस के बुलबुले वायु के सम्पर्क में आते ही वलयाकार धुएँ के चक्र बनाते हैं। NaOH के स्थान पर ऐल्कोहॉली KOH भी प्रयुक्त कर सकते हैं।
फॉस्फीन PH3 बनाने की प्रयोगशाला विधि का नामांकित चित्र –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 43
अभिक्रिया समीकरण –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 44

प्रश्न 14.
नाइट्रोजन का अपने समूह 15 से भिन्नता एवं समूह 16 के गन्धक से विकर्ण सम्बन्ध रखती है, समानता एवं भिन्नता का कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
नाइट्रोजन की अन्य तत्वों से भिन्नता के कारण निम्नलिखित हैं –

  • नाइट्रोजन के परमाणु आकार का छोटा होना।
  • उच्च ऋणविद्युत्ता का होना।
  • बहु-बन्ध बनाने की प्रवृत्ति का होना।
  • d-ऑर्बिटलों का अभाव होना।

नाइट्रोजन का गन्धक से विकर्ण सम्बन्ध-नाइट्रोजन समूह 15 का तत्व है जबकी गन्धक समूह 16 का तत्व, परन्तु दोनों समानता प्रदर्शित करते हैं।
इन तत्वों में मुख्य समानताएँ निम्नलिखित हैं –

  • दोनों ही तत्व अधातु हैं।
  • दोनों ही तत्व ऋणविद्युती हैं।
  • दोनों ही तत्वों के ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।
  • दोनों ही तत्व अस्थायी सहसंयोजक ऑक्सी हैलाइड तथा हैलाइड बनाते हैं।

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प्रश्न 15.
पायरो फॉस्फोरिक अम्ल की संरचना लिखिए।
उत्तर
पायरो फॉस्फोरिक अम्ल में फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण संख्या +5
है। यह चतुर्भारकीय अम्ल है। पायरो शब्द ऐसे अम्लों के लिए प्रयुक्त होता है जो दो अणुओं को गर्म करने पर एक जल अणु की कमी से प्राप्त होता है। इसका रासायनिक सूत्र H4P2O7,(P2O5.2H2O) है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 45

प्रश्न 16.
ऑक्सीजन -2 से +2 तक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है, जबकि इस समूह के अन्य तत्व + 2, +4 तथा + 6 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं। इसका कारण लिखिए।
उत्तर
ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था – 2 है, परन्तु H2O2, O2,O2F2 तथा OF2 आदि में यह क्रमशः – 1, 0, +1 तथा +2 ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करता है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s22s22p22p1y2p1z है एवं ऑक्सीजन के पास nd कक्षक रिक्त नहीं होते हैं, जिससे इसकी संयोजकता इससे अधिक नहीं होती। ऑक्सीजन के अतिरिक्त अन्य तत्वों के पास nd कक्षक रिक्त होते हैं, जिससे आवश्यकतानुसार ns तथा np कक्षक के इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरित होकर इनमें आ जाते हैं, किन्तु ऑक्सीजन में ऐसी परिस्थिति नहीं है।

प्रश्न 17.
समझाइए ऑक्सीजन का अणुसूत्र O2 है, जबकि सल्फर का ss है।
उत्तर
ऑक्सीजन परमाणु का आकार छोटा होता है अतः यह स्वयं के साथ स्थायी द्विबन्ध बनाने की क्षमता रखता है। अतः इसका अणु सूत्र O2 है जबकि सल्फर परमाणु का आकार बड़ा होने के कारण यह बहुबन्ध नहीं बनाता है, इसलिए यह S2 के रूप में नहीं रहता है। इसके साथ ही साथ S-S बन्ध ऊर्जा अधिक होने के कारण इसमें श्रृंखलन का गुण ऑक्सीजन से अधिक होता है, इसलिए सल्फर S रूप में रहता है जिसमें प्रत्येक सल्फर परमाणु अन्य सल्फर परमाणुओं से एकल सहसंयोजी बन्ध द्वारा जुड़कर सिकुड़ी हुई रिंग (Puckered ring) जैसी संरचना बनाता है।

प्रश्न 18.
नाइट्रोजन के महत्वपूर्ण ऑक्साइडों की संरचना लिखिए।
उत्तर-
नाइट्रोजन के ऑक्साइडों की संरचना –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 46

प्रश्न 19.
ओजोन के निर्माण की सीमेन-हालस्के ओजोनाइजर विधि को समझाइए तथा नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर
ओजोन की अधिक मात्रा में बनाने के लिए सीमेन और हालस्के का ओजोनाइजर (Siemen’s and Halske’s ozonizer) प्रयुक्त किया जाता है, जो ढलवाँ लोहे का बॉक्स होता है। बक्से में दो-दो की कतारों में लगभग दस-बारह काँच की नलियाँ होती हैं। इन नलियों में ऐल्युमिनियम के इलेक्ट्रोड लगे होते हैं। नली में से शुष्क वायु प्रवाहित करते हैं तथा इलेक्ट्रोडों से 800-1000 वोल्ट विभव पर विद्यत धारा प्रवाहित करते । हैं। उपकरण को ठण्डा रखने के लिए उसके चारों ओर जल प्रवाहित करते हैं। लोहे के पात्र का भू-सम्पर्क कर देते हैं। क्रिया के पश्चात् बाहर आयी हुई वायु ओजोन मिश्रित होती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 47

प्रश्न 20.
H2O की तुलना में H2S प्रबल अपचायक है, क्यों? कोई तीन कारण दीजिए।
उत्तर
H2O की अपेक्षा H2S एक प्रबल अपचायक है क्योंकि H2S अपना हाइड्रोजन आसानी से मुक्त कर देता है H2O नहीं, इसके मुख्य कारण हैं

  • H2O में H-बन्ध होता है जिससे हाइड्रोजन मुक्त करने में अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  • S का आकार ऑक्सीजन से बड़ा होता है।
  • ऑक्सीजन की विद्युत्-ऋणता सल्फर से अधिक होती है।

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प्रश्न 21.
सल्फ्यूरस अम्ल अपचायक क्यों है ?
उत्तर
क्योंकि H2SO3 के सल्फर परमाणु पर अभी भी एक अनाबंधित इलेक्ट्रॉन होता है, इस इलेक्ट्रॉन युग्म को खोकर H,SO, का सल्फर परमाणु अपनी उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में आ सकता है। इसलिए H2SO3 अपचायक की तरह कार्य करता है।

प्रश्न 22.
उत्कृष्ट गैसों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर
उत्कृष्ट गैसों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित हैं –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 48

प्रश्न 23.
कारण स्पष्ट कीजिए –
(a) HF द्रव है, जबकि अन्य हैलोजन के हाइड्राइड सामान्य ताप पर गैस है।
(b) फ्लुओरीन, पॉलीहैलाइड नहीं बनाता ।
उत्तर
(a) फ्लुओरीन की ऋणविद्युत्ता अन्य हैलोजनों से सर्वोच्च होती है। अत: HF अणु H बंध द्वारा संयुग्मित होते हैं। इसके साथ ही साथ HF का क्वथनांक अन्य हैलोजन अम्लों से अधिक होता है, इसलिए HF द्रव होता है, जबकि हैलोजन के हाइड्राइड कमरे के ताप पर गैस होते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 49
(b) फ्लुओरीन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s22s2p5 है। इसके संयोजकता कोश में रिक्त d-कक्षक की अनुपस्थिति के कारण यह उच्च ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करता है और इसीलिए यह पॉलीहैलाइड नहीं बनाता है।
आर्गन

प्रश्न 24.
कारण दीजिए –
(a) उत्कृष्ट गैसें एकपरमाणुक होती हैं।
(b) उत्कृष्ट गैसों की परमाणु त्रिज्याएँ सबसे अधिक होती हैं।
(c) उत्कृष्ट गैसों की आयनन ऊर्जा सर्वोच्च होती है।
उत्तर
(a) उत्कृष्ट गैसों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में एक भी अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं इसलिए वे रासायनिक बन्ध नहीं बनाते हैं और एकपरमाणुक होते हैं।
(b) उत्कृष्ट गैसों के बाह्यतम् कोश पूर्णतः भरे होते हैं तथा उत्कृष्ट गैसों के परमाणुओं की वाण्डर वाल्स त्रिज्या का मान अन्य परमाणुओं के सहसंयोजक त्रिज्या के मान से अधिक होता है।
(c) उत्कृष्ट गैसों के बाह्य कोश में सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं, अतः इन्हें अयुग्मित करने के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे इनकी आयनन ऊर्जा अपने-अपने आवर्गों में सर्वोच्च होती है।

प्रश्न 25.
प्राप्य क्लोरीन से आप क्या समझते हैं ? समीकरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
ब्लीचिंग पाउडर तनु H2SO4 के आधिक्य (अथवा CO2) से क्रिया करके क्लोरीन गैस मुक्त करता है।

CaOCl2 + H2SO4→ CaSO4 + H2O + Cl2
CaOCl2 + CO2 → CaCO3 + Cl2

इस प्रकार मुक्त क्लोरीन “प्राप्य क्लोरीन” कहलाता है। एक अच्छे नमूने में 35-38% प्राप्य क्लोरीन होती है।

प्रश्न 26.
हीलियम के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर
हीलियम के उपयोग- (1) दमा के रोगियों को हीलियम ऑक्सीजन का मिश्रण साँस लेने के लिए दिया जाता है।
(2) वायु की अपेक्षा हीलियम का भार कम होने के कारण इसे वायुयानों के टायरों में भरा जाता है। ,

प्रश्न 27.
XeF2 तथा XeF4 की संरचना समझाइए।
उत्तर
XeF2 की संरचना-XF2 में Xe, sp3d संकरित अवस्था में होता है। इसलिए इसकी संरचना त्रिभुजीय द्विपिरामिडीय होनी चाहिए। लेकिन 3 एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति के कारण XeF2 की संरचना रेखीय होती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 50
XeF2 की संरचना – Xe की उत्तेजित अवस्था में 5p-कक्षक के 2 इलेक्ट्रॉन 54-कक्षक में जाकर sp2d2 संकरण बनाते हैं। इन 6 संकरित कक्षकों में से चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन XeF4 बनाते हैं। दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति के कारण संरचना वर्ग समतलीय होती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 51

प्रश्न 28.
फ्लुओरीन केवल एक ही ऑक्सीकरण अवस्था (-1) प्रदर्शित करता है, क्यों?
उत्तर
फ्लुओरीन की विद्युत्-ऋणात्मकता सबसे अधिक होती है। अत: वह हमेशा -1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है। साथ ही फ्लुओरीन के संयोजकता कोश में d-कक्षक नहीं पाये जाते, अत: उसकी कोई उत्तेजित अवस्था नहीं हो सकती। इसके फलस्वरूप वह कोई उच्च ऑक्सीकरण अवस्था नहीं दर्शाता।

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प्रश्न 29.
क्लोरीन के किन्हीं तीन प्रमुख ऑक्सी अम्लों के सूत्र, संरचना एवं उनकी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ लिखिए।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 52
संरचना-HClO की संरचना-HClO के ClO आयन में केन्द्रीय परमाणु क्लोरीन sp3 संकरण द्वारा चार संकर कक्षक बनाता है, जिनमें से तीन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म और चौथा ऑक्सीजन परमाणु के d-कक्षक से अतिव्यापन करके σ-बन्ध बनाता है। इनकी आकृति रेखीय हो जाती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 53
HClO4 की संरचना-इसके केन्द्रीय परमाणु Cl में sp3 संकरण होता है, इस प्रकार ClO4 आयन की संरचना चतुष्फलकीय होती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 54

प्रश्न 30.
ब्लीचिंग पाउडर की विरंजन क्रिया को समझाइए।
उत्तर
जिस वस्त्र का विरंजन करना होता है, उसे Na2CO3 विलयन के साथ उबालकर चिकनाई हटा लेते हैं। फिर उसे घिर्रियों की सहायता से अनेक बड़े पत्थरों के टबों में ले जाया जाता है। वस्त्र को पहले एक ऐसे पात्र में डुबाया जाता है, जिसमें विरंजक चूर्ण (CaOCl2) का तनु विलयन भरा रहता है । वस्त्र को इस पात्र से निकाल कर दूसरे पात्र में डुबाते हैं, जिसमें तनु H2SO4 भरा रहता है । तनु H2SO4 की विरंजक चूर्ण की क्रिया से क्लोरीन गैस निकलती है, जो वस्त्र का विरंजन कर देती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 55
अब इसे तीसरे पात्र में, जिसमें सोडियम थायो-सल्फेट या हाइपो का विलयन होता है डुबा देते हैं। हाइपो द्वारा क्लोरीन की अधिक मात्रा समाप्त हो जाती है। इसके पश्चात् कपड़े को चौथे टब में ले जाया जाता है, जिससे इसे पानी में खूब धोते हैं । यहाँ कपड़े में लगे सारे रासायनिक पदार्थों को धोकर निकाल दिया जाता है। इसके बाद कपड़े को गर्म रोलरों पर दबाया जाता है, जिससे कपड़ा सूख जाता है तथा इस्तरी करने के बेलनों से कपड़े की सिकुड़न दूर कर दी जाती है। अन्त में रंग उड़े कपड़े को छड़ पर गोल करके लपेट देते हैं।

प्रश्न 31.
उत्कृष्ट गैसें निष्क्रिय क्यों होती हैं ?
उत्तर
उत्कृष्ट गैसें निम्नलिखित कारणों से निष्क्रिय होती हैं –

  • उत्कृष्ट गैसें निष्क्रिय होती हैं, क्योंकि इनका अष्टक पूर्ण होता है, जो तत्व की सबसे अधिक स्थायी अवस्था है। इनके परमाणु में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं होता है।
  • उत्कृष्ट गैसों की आयनन ऊर्जा अति उच्च होती है तथा इलेक्ट्रॉन बन्धुता एवं ऋणविद्युत्ता शून्य होती है, अतः ये न तो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं, न त्यागते हैं और न ही साझा करते हैं। अत: ये निष्क्रिय होते हैं।

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प्रश्न 32.
फ्लुओरीन की अन्य हैलोजनों से भिन्नता के कोई तीन कारण दीजिए।
उत्तर
फ्लुओरीन के अन्य हैलोजनों से भिन्नता के निम्न कारण हैं –

  • फ्लुओरीन की बन्ध ऊर्जा अत्यन्त कम 158 kJ मोल-1 है, जिसके कारण F2 से अभिक्रिया हेतु बहुत कम सक्रियण ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  • फ्लुओरीन परमाणु का आकार अन्य हैलोजनों की तुलना में छोटा होता है, फलस्वरूप फ्लुओरीन का अन्य परमाणुओं के साथ बना सहसंयोजी बन्ध प्रबल होता है।
  • फ्लुओरीन की ऋणविद्युत्ता अन्य हैलोजनों से अधिक होती है, अत: यह आसानी से F आयन बना सकता है। ऋणविधुत्ता अधिक होने के कारण यह दूसरे तत्वों को उनके यौगिकों से प्रतिस्थापित कर देता है।

प्रश्न 33.
जीनॉन उत्कृष्ट गैस है, फिर भी यह यौगिक बनाती है, क्यों ? इसके दो यौगिक के संरचना सूत्र दर्शाइए।
उत्तर
सन् 1962 में नील बार्लेट ने देखा कि ऑक्सीजन PtF6 से क्रिया करके O2[PtF6 ] बनाता है। उन्होंने सोचा कि ऑक्सीजन और जीनॉन की प्रथम आयनन ऊर्जा लगभग बराबर होती है। इसी आधार पर उन्होंने Xe व PtF6 की सीधी अभिक्रिया द्वारा प्रथम यौगिक Xe[Ptf6 ] बना लिया, जो नारंगी पीले रंग का ठोस था।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 56
प्रश्न 34.
फ्लुओरीन, क्लोरीन की तुलना में प्रबल ऑक्सीकारक है, कारण दीजिए।
उत्तर
फ्लुओरीन, क्लोरीन की तुलना में निम्नलिखित कारणों से प्रबल ऑक्सीकारक है—

  • F परमाणु का आकार Cl परमाणु से छोटा होता है।
  • F की ऋणविद्युत्ता Cl से अधिक होती है।
  • फ्लुओरीन की वियोजन ऊर्जा क्लोरीन से बहुत कम होती है।
  • फ्लुओरीन का E0 का मान क्लोरीन से अधिक होता है।

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प्रश्न 35.
क्लोरीन गैस बनाने की प्रयोगशाला विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
प्रयोगशाला विधि-हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और MnO2 की क्रिया से-एक फ्लास्क में MnO2 लिया जाता है। थिसिल फनल द्वारा सान्द्र HCI डाला जाता है। HCl की मात्रा इतनी डाली जाती है कि MnO2 पूर्ण रूप से ढंक जाये। फ्लास्क को धीरे-धीरे गर्म करते हैं, जिससे हरे-पीले रंग की Cl2 गैस निकलती है।

MnO2 + 4HCl → MnCl2 + 2H2O+Cl2

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 57
प्राप्त Cl2 गैस में HCl और जल वाष्प की अशुद्धियाँ होती हैं, जो क्रमशः जल और सान्द्र H2SO4 में प्रवाहित करने से दूर हो जाती है।

प्रश्न 36.
उत्कृष्ट गैसों के पाँच भौतिक गुणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
उत्कृष्ट गैसों के भौतिक गुण –

  • परमाणु त्रिज्या उत्कृष्ट गैसों की आयनिक त्रिज्या वाण्डर वाल्स त्रिज्या के संगत है। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर वाण्डर वाल्स त्रिज्या बढ़ती जाती है।
  • आयनन ऊर्जा—इनका स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होने के कारण आयनन ऊर्जा बहुत अधिक होती है। आयनन ऊर्जा का मान परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ घटता जाता है।
  • इलेक्ट्रॉन बन्धुता—इनके स्थायी विन्यास ns2np6 के कारण उत्कृष्ट गैसों में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति नहीं होती है। इस कारण इनकी इलेक्ट्रॉन बन्धुता लगभग शून्य होती है।
  • गलनांक एवं क्वथनांक इनके परमाणुओं में दुर्बल आकर्षण बल होने के कारण इन गैसों के गलनांक एवं क्वथनांक कम होते हैं। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर m.p. और b.p. का मान क्रमशः बढ़ता जाता है।
  • द्रवीकरण-उत्कृष्ट गैसें सुगमता से द्रवीभूत नहीं होती हैं । इसका कारण इनमें दुर्बल वाण्डर वाल्स बलों का होना है।

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प्रश्न 37.
हैलोजन के हाइड्राइडों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर
हैलोजन, हाइड्रोजन से योग करके वाष्पशील हैलाइड बनाते हैं, जिनका सामान्य सूत्र HX है।
x2 + H2 → 2HX
इन हाइड्राइडों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  • भौतिक अवस्था सामान्य परिस्थितियों में HCl, HBr और HI गैस तथा HF द्रव है।
  • स्थायित्व समूह में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर हाइड्राइडों का स्थायित्व घटता है। H सबसे अधिक तथा HI सबसे कम स्थायी है।
  • अपचायक प्रवृत्ति समूह में ऊपर से नीचे जाने पर HF से HI तक अपचायक गुण बढ़ता है।
  • बन्ध की प्रकृति सभी हैलाइड सहसंयोजी प्रकृति के होते हैं, किन्तु कुछ में आयनिक लक्षण भी होते हैं। आयनिक लक्षण HF से HI तक क्रमशः घटता है।
  • अम्लीय शक्ति सभी जल में आयनित होकर अम्ल की तरह व्यवहार करते हैं। इन अम्लों की शक्ति HF से HI की ओर बढ़ती है।

प्रश्न 38.
समूह 17 के तत्व (हैलोजन) रंगीन होते हैं, क्यों?
उत्तर
हैलोजन समूह के समस्त तत्व रंगीन होते हैं, उनका रंग परमाणु संख्या में वृद्धि के साथ गहरा होता जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 58
हैलोजनों में रंग उनके अणुओं द्वारा दृश्य प्रकाश (Visible light) के अवशोषण के कारण होता है। अणुओं द्वारा दृश्य प्रकाश के अवशोषण के फलस्वरूप बाह्यतम् इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं, जिसके कारण ये तत्व रंगीन दिखाई देते हैं। उदाहरणार्थ-फ्लोरीन का आकार अत्यन्त छोटा होने के कारण बाह्य इलेक्ट्रॉन पर नाभिक का आकर्षण अधिक होता है तथा बाह्यतम् इलेक्ट्रॉन को उत्तेजित करने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। फ्लुओरीन परमाणु अधिक ऊर्जा वाले बैंगनी विकिरणों को अवशोषित करते हैं, अत: वे हल्के पीले दिखाई देते हैं जबकि आयोडीन परमाणु का आकार बड़ा होता है । बाह्यतम् इलेक्ट्रॉन नाभिक से काफी दूर रहते हैं। उन्हें उत्तेजित करने के लिए कम ऊर्जा वाले पीले विकिरणों की आवश्यकता होती है। दृश्य प्रकाश से पीले रंग के विकिरण के अवशोषण के कारण वे बैंगनी दिखाई देते हैं।

प्रश्न 39.
फ्लुओरीन केवल +1 या-1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है जबकि अन्य हैलोजन तत्व इसके अतिरिक्त +3, +5 एवं +7 ऑक्सीकरण अवस्था भी दर्शाते हैं, क्यों ?
उत्तर
फ्लुओरीन केवल +1 या-1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है जबकि अन्य हैलोजन तत्व जैसेCl, Br तथा I, +3, +5, +7 ऑक्सीकरण अवस्था भी दर्शाते हैं क्योंकि शेष हैलोजन Cl, Br व I में रिक्त d-कक्षक भी उपस्थित होता है। जिसके फलस्वरूप उत्तेजित अवस्था में इलेक्ट्रॉन d-कक्षक में जाने से क्रमशः 3,5, 7 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हो जाते हैं। यही कारण है कि ये हैलोजन क्रमशः +3, +5 एवं +7 ऑक्सीकरण अवस्था भी दर्शाते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 59

प्रश्न 40.
कारण स्पष्ट कीजिए(a) आयोडीन कुछ धात्विक गुण प्रदर्शित करता है। (b) हैलोजन प्रबल ऑक्सीकारक होते है, क्यों?
उत्तर
(a) आयोडीन की आयनन ऊर्जा कुछ कम होती है, अतः यह अपने संयोजकता कोश के एक इलेक्ट्रॉन को मुक्त कर कुछ अभिक्रियाओं में I आयन देता है। इसलिए यह कुछ धात्विक गुण रखता है।
I → I+ + e
(b) सभी हैलोजनों की इलेक्ट्रॉन बंधुता अधिक होती है, अतः इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रकृति अधिक होती है, इसलिए हैलोजन प्रबल ऑक्सीकारक है। ऑक्सीकारक क्षमता F से I की ओर जाने पर घटती है।

F2> Cl2> Br2 > I2 अतः फ्लुओरीन सबसे प्रबल ऑक्सीकारक है।

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प्रश्न 41.
हैलोजन श्रेणी में फ्लुओरीन अन्य सदस्यों की तुलना में सबसे अधिक सक्रिय है, किन्हीं तीन बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
फ्लुओरीन की क्रियाशीलता के निम्नलिखित कारण हैं –
1. परमाणु त्रिज्या-फ्लुओरीन की परमाणु त्रिज्या छोटी होती है तथा इसके नाभिक पर उच्च धन आवेश होता है। इसलिये यह शीघ्रता से सहसंयोजी बंध बनाते हैं।
2. विद्युत् ऋणात्मकता-इसकी विद्युत् ऋणात्मकता का मान आवर्त सारणी के सभी तत्वों की विद्युत् ऋणात्मकता से अधिक है।
3. ऑक्सीकारक गुण-फ्लोरीन अन्य हैलोजन की तुलना में प्रबल ऑक्सीकारक है। इसलिये यह सरलता से इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋण आयन बना सकता है।

p-ब्लॉक के तत्त्व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ओजोन की निम्नलिखित पर रासायनिक समीकरण दीजिए –
(1) K2MnO4
(2) I2
(3) Ag2O
(4) CH2== CH2
(5) PbS.
उत्तर
(1) पोटैशियम मैंगनेट से पोटैशियम परमैंगनेट बनता है।
2K2MnO4 + H2O + O3 → 2KMnO4 + 2KOH +O2

(2) आयोडीन ऑक्सीजन से क्रिया करके आयोडिक अम्ल देता है।

I2 + H2O + 5O3 → 2HIO3 + 5O2

(3) सिल्वर ऑक्साइड अवकृत होकर सिल्वर देता है।

Ag2O + O3 →2Ag + 2O2

(4) एथिलीन ओजोनॉइड बनाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 60
(5) Pbs को PbSOA में ऑक्सीकृत कर देता है।

PbS + 4O3 → PbsO4 +4O2

प्रश्न 2.
नाइट्रिक अम्ल के निर्माण की ओस्टवाल्ड विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
ओस्टवाल्ड की विधि-1 आयतन अमोनिया और 8 आयतन वायु का मिश्रण प्लैटिनम की जाली (Platinum-gauze) के ऊपर 800°C ताप पर प्रवाहित किया जाता है तो 90% अमोनिया का नाइट्रिक ऑक्साइड में ऑक्सीकरण हो जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 61
बनी हुई नाइट्रिक ऑक्साइड को बची हुई ऑक्सीजन कक्ष में भेजा जाता है, जिससे वह नाइट्रोजन परॉक्साइड में बदल जाती है।

2NO +O2 → 2NO2

यह NO, शोषक कक्ष में भेज दी जाती है, जहाँ ऊपर से धीरे-धीरे जल गिरता रहता है। जल और NO, के संयोग से तनु नाइट्रिक अम्ल बन जाता है।

2NO2 + H2O → HNO2 + HNO3
3HNO2 → HNO3 + H2O + 2NO.

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प्रश्न 3.
नाइट्रोजन अपने समूह के तत्वों से किन-किन गुणों में भिन्नता प्रदर्शित करता है, और क्यों?
उत्तर
नाइट्रोजन निम्न कारणों से अपने समूह के अन्य तत्वों से भिन्नता प्रदर्शित करता है –

  • परमाणु का छोटा आकार,
  • उच्च विद्युत्-ऋणात्मकता,
  • बहु बन्ध बनाने की प्रवृत्ति
  • संयोजकता में वृद्धि के लिए d-उपकक्ष का उपलब्ध न होना।

गुणों में भिन्नता-

  • नाइट्रोजन निष्क्रिय गैस है जबकि अन्य सदस्य क्रियाशील ठोस हैं ।
  • नाइट्रोजन अणु द्विपरमाणुक (N2) है जबकि अन्य तत्वों के अणु चतुःपरमाणुक (P4, AS4, Sb4) हैं ।
  • नाइट्रोजन जटिल यौगिक नहीं बनाता जबकि अन्य तत्व रिक्त d-कक्षक की उपस्थिति के कारण जटिल यौगिक बनाते हैं।
  • नाइट्रोजन के अनेक ऑक्साइड (N2O, NO, N2O3, N2O4, N2O5) ज्ञात हैं। अन्य तत्वों के इतने ऑक्साइड नहीं बनते।
  • NH2 उच्च क्वथनांक वाला द्रव है जबकि अन्य हाइड्राइड गैस हैं ।
  • नाइट्रोजन अपने यौगिक में श्रृंखलन गुण प्रदर्शित करता है जबकि अन्य तत्वों में शृंखलन गुण नहीं पाया जाता ।
  • नाइट्रोजन अपरूपता प्रदर्शित नहीं करता जबकि अन्य तत्व कई अपरूपों में ज्ञात हैं ।
  • नाइट्रोजन संकुल आयन नहीं बनाता जबकि अन्य तत्व संकुल आयन बनाते हैं जैसे, PF4SbF6आदि।

प्रश्न 4.
ब्रॉडी ओजोनाइजर का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर
यह काँच की U आकार की नली होती है। भीतर नली में तनु H2SO4 डालकर Pt का तार डाला जाता है। काँच के सम्पूर्ण उपकरण को काँच के बर्तन में लटका देते हैं। इसमें भी H2SO4 भरा होता है। बाहरी बर्तन में भी Pt का इलेक्ट्रोड लगा देते हैं। U नली से शुष्क O2 प्रवाहित करते हैं। तीव्र विद्युत् विसर्जन से .ओजोनीकृत ऑक्सीजन प्राप्त होती है। इसमें ओजोन की मात्रा 20% होती है।
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प्रश्न 5.
नाइट्रोजन परिवार के हाइड्राइडों का निम्न बिन्दुओं पर वर्णन कीजिए –
(i) नाम व सूत्र, (ii) क्षारीय गुण, (iii) अपचायक गुण, (iv) बंध कोण, (v) गलनांक एवं क्वथनांक।
उत्तर
(i)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 63
(ii) क्षारीय गुण-NH3 से BiH3 की ओर जाने पर क्षारीयता घटती जाती है। क्योंकि नाइट्रोजन के छोटे आकार के कारण एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थिति से इस पर इलेक्ट्रॉन घनत्व उच्च होता है।
(iii) अपचायक गुण-NH3 से BiH3 की ओर जाने पर अपचायक क्षमता बढ़ती है।
(iv) बंध कोण-समूह में ऊपर से नीचे चलने पर बन्ध कोण घटता जाता है क्योंकि केन्द्रीय परमाणु की विद्युत्-ऋणात्मकता घटती है।
(v) गलनांक तथा क्वथनांक (m.p. and b.p.) – जहाँ तक गलनांक अथवा क्वथनांक का प्रश्न है, समूह 15 के तत्व कोई क्रमिकता प्रदर्शित नहीं करते। N से लेकर As तक गलनांक बढ़ता जाता है, जबकि पुनः Sb तथा Bi तक घटता है। क्वथनांक N से Bi तक लगातार बढ़ता जाता है। . .

प्रश्न 6.
ऑक्सीजन परिवार के हाइड्राइडों का निम्न बिन्दुओं पर वर्णन कीजिए –
(i) नाम व सूत्र, (ii) ऊष्मीय स्थायित्व, (iii) अपचायक गुण, (iv) अम्लीय गुण, (v) सहसंयोजक गुण।
उत्तर
(i)
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 64
(ii) ऊष्मीय स्थायित्व-हाइड्राइडों का ऊष्मीय स्थायित्व नीचे की ओर घटता है क्योंकि परमाणु आकार में वृद्धि से बंध शक्ति घटती है।
(iii) अपचायक गुण – H2O अपचायक नहीं है। H2S से H2Te तक अपचायक गुण बढ़ता है क्योंकि बंध शक्ति कम होने से हाइड्रोजन देने की प्रकृति बढ़ती है।
(iv) अम्लीय गुण-सभी दुर्बल अम्लीय प्रकृति के होते हैं। H2O से H2Te तक अम्लीय प्रकृति बढ़ती है क्योंकि हाइड्राइडों द्वारा सरलता से H’ दिया जाता है।
(v) सहसंयोजक गुण-हाइड्रोजन के बाह्यतम् कक्ष में एक इलेक्ट्रॉन होता है इससे वह ऑक्सीजन परिवार के अन्य तत्वों से सहसंयोजक बंध बनाकर अपना बाह्यतम् कक्ष पूर्ण करता है।

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प्रश्न 7.
क्लोरीन निर्माण की विधि का निम्न बिन्दुओं के आधार पर वर्णन कीजिए –
(1) नेल्सन सेल का नामांकित चित्र, (2) सिद्धान्त तथा (3) डीकन विधि।
उत्तर
क्लोरीन का निर्माण ब्राइन NaCl के विद्युत्-अपघटन द्वारा किया जाता है इसमें क्लोरीन उपजात के रूप में प्राप्त होती है। नेल्सन सेल-यह इस्पात की टंकी में बेलनाकार ऐस्बेस्टॉस की तह लगी इस्पात की छिद्र युक्त नली लगाकर चित्र में दिखाये अनुसार बनाया जाता है। इस्पात की यह छिद्र युक्त नली कैथोड का कार्य करती है। इस नली में NaCl का विलयन भरकर इस्पात की टंकी में लटका देते हैं। इस विलयन में कार्बन की छड़ लगाकर उसे ऐनोड बनाया जाता है। विद्युत् प्रवाहित करने पर NaCl का विद्युत्-अपघटन हो जाता है। क्लोरीन ऐनोड पर मुक्त होकर बाहर निकल जाती है और सोडियम आयन ऐस्बेस्टॉस की तह को पार कर कैथोड पर मुक्त होने के बाद टंकी में आने वाली भाप से क्रिया करके NaOH विलयन बनाता है, जो अलग निकाल दिया जाता है। NaCl प्रयुक्त होने वाले सभी विद्युत्-अपघटनी सेलों में अभिक्रिया अग्रानुसार होती है –
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(2) डीकन विधि-क्लोरीन का उत्पादन पहले डीकन विधि द्वारा किया जाता था, जिसमें HCl अम्ल गैस को उत्प्रेरक क्यूप्रिक क्लोराइड (CuCl2) की उपस्थिति में ऑक्सीजन के साथ 450°C पर गर्म किया जाता था।
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प्रश्न 8.
क्लोरीन की निम्न के साथ होने वाली अभिक्रिया का समीकरण दीजिए –
(1) NH3 (2) NaOH, (3) H2O, (4) विरंजन गुण।।
उत्तर
क्लोरीन की अभिक्रिया –
(1) अमोनिया से क्रिया-अभिक्रिया दो प्रकार की होती है –
(a) अमोनिया के आधिक्य में अमोनियम क्लोराइड और नाइट्रोजन बनती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्त्व - 68
(b) यदि क्लोरीन की अधिकता हो तो एक विस्फोटक पदार्थ नाइट्रोजन ट्राइक्लोराइड बनता है।
NH3 +3Cl2 → NCl3 + 3HCl

(2) NaOH से क्रिया –
(a) ठण्डे और तनु कॉस्टिक सोडा से अभिक्रिया कर क्लोराइड और हाइपोक्लोराइट बनाती है।
Cl2 + 2NaOH → NaCl+NaClO + H2O
(b) गर्म और सान्द्र कॉस्टिक सोडा के साथ क्रिया कर क्लोराइड और क्लोरेट बनाती है।
3Cl2 + 6NaOH → NaClO3 +5NaCl +3H2O

(3) जल से क्रिया-Cl2 जल में घुलकर क्लोरीन जल बनाती है। यह हाइपोक्लोरस अम्ल होता है, जो बाद में HCl में विघटित हो जाता है।
[Cl2 + H2O → HOCl + HCl] x 2
2HOCl→2HCl + O2
2Cl2 + 2H2O → 4HCl + O2

(4) विरंजन गुण-नमी की उपस्थिति में क्लोरीन विरंजन का कार्य करती है तथा वनस्पतियाँ और रंगीन वस्तुओं का रंग उड़ा देती है। यह क्रिया ऑक्सीकरण के कारण होती है। अतः विरंजन स्थायी होती है।
Cl2 +H2 O → HClO + HCl
HCIO → HCl + O
रंगीन पदार्थ +(O) → रंगहीन पदार्थ ।

प्रश्न 9.
उत्कृष्ट गैसों के पृथक्करण की डेवार विधि का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए –
उत्तर
डेवार विधि –
सिद्धांत – नारियल का कोयला या काष्ठ कोयला विभिन्न तापक्रमों पर विभिन्न गैसों का अधिशोषण करता है।

विधि – चित्रानसार उपकरण में उत्कृष्ट गैसों का मिश्रण लिया जाता है। शीत कुण्ड में रखे उपकरण में नारियल का कोयला भरा होता है, इसमें-100°C पर Xe, Kr तथा Ar का अधिशोषण हो जाता है। अनाशोषित He और Ne के मिश्रण को – 180°C पर नारियल के कोयले के सम्पर्क में रखा जाता है, जिससे निऑन पूर्ण रूप से अधिशोषित हो जाती है तथा He मुक्त अवस्था में बची रहती है। इसे चारकोल का ताप
बढ़ाकर Ne पृथक् कर लेते हैं।
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Ar, Kr और Xe अधिशोषित चारकोल को द्रव वायु के ताप (- 193°C) पर रखे एक अन्य चारकोल के सम्पर्क में लाने पर Ar इस चारकोल में अधिशोषित हो जाती है। Kr और Xe वाले चारकोल का ताप – 90°C कर देने पर Kr निकल जाती है और Xe चारकोल के साथ बची रहती है। अब विभिन्न गैसें अधिशोषित चारकोल का ताप बढ़ाकर प्राप्त कर ली जाती हैं।

प्रश्न 10.
समूह 17 के तत्वों को हैलोजन क्यों कहते हैं ? हैलोजन के निम्नलिखित गुणों की प्रकृति समझाइए
(1) ऑक्सीकरण अवस्था, (2) विद्युत्-ऋणात्मकता, (3) ऑक्सीकारक गुण, (4) अन्य तत्वों के साथ बन्ध बनाने की प्रकृति।
उत्तर
हैलोजन शब्द का अर्थ है समुद्री लवण बनाने वाला। वर्ग 17 के प्रथम चार सदस्य समुद्री जल में लवण के रूप में पाये जाते हैं । अत: वर्ग 17 के तत्वों को हैलोजन कहते हैं।
हैलोजनों में गुणों की प्रकृति –
(1) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ-हैलोजनों की सामान्य ऑक्सीकरण संख्या – 1 होती है। फ्लुओरीन को छोड़कर अन्य हैलोजनों की ऑक्सीकरण संख्या +7 तक पाई जाती है।
F → -1
Cl → -1, + 1, + 3, +5, +7
Br → -1, + 1, +3,+5
I → -1, +1, + 3, +5, +7

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अन्तिम कोश अष्टक विन्यास प्राप्त करने हेतु एक इलेक्ट्रॉन लेते या साझा करते समय, जब ये अपने से कम ऋणविद्युती तत्व से संयुक्त होते हैं तो इनकी ऑक्सीकरण अवस्था – 1 होती है और यदि अपने से अधिक ऋणविद्युती तत्वों से संयुक्त होते हैं, तो ऑक्सीकरण अवस्था + 1 होती है। HF, HCl व HI में हैलोजन की ऑक्सीकरण अवस्था -1 तथा ClF BrF, IF, HClO, HBrO, HIO में हैलोजन की ऑक्सीकरण अवस्था + 1 है।

फ्लुओरीन सर्वाधिक ऋणविद्युती तत्व है तथा हमेशा – 1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है। F परमाणु के संयोजकता कोश में d-कक्षक नहीं होते, जिससे यह किसी उत्तेजित अवस्था में नहीं आ पाता, जिसके कारण यह कोई उच्च ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करता। _

F को छोड़कर शेष अन्य हैलोजन परमाणुओं के संयोजकता कोश में d-कक्षक होते हैं, जिससे p तथा s कक्षकों के इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर इन कक्षकों में पहुँच सकते हैं, जिसके कारण ये +3, +5, +7 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं । ब्रोमीन परिरक्षण प्रभाव (Screening effect) की अधिकता के कारण +7 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करता।

(2) विद्युत्-ऋणात्मकता-इस समूह के तत्वों की विद्युत्-ऋणात्मकता अन्य समूह के तत्वों से अधिक होती है तथा F से At तक घटती है । ज्ञात तत्वों में फ्लुओरीन की विद्युत्-ऋणात्मकता सर्वाधिक है, जिसका मान 4 दिया गया है।

(3) ऑक्सीकारक गुण-हैलोजन प्रबल ऑक्सीकारक है। इन तत्वों की इलेक्ट्रॉन बन्धुता अधिक होती है। अतः इनमें इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता अधिक है। इस कारण ये प्रबल ऑक्सीकारक होते हैं। ऑक्सीकारक गुण के घटने का क्रम इस प्रकार है- F2> Cl2 > Br2 >I2

(4) अन्य तत्वों के साथ बन्ध बनाने की प्रकृति-हैलोजन, धातु अथवा विद्युत् धनात्मक तत्वों के साथ आयनिक बन्ध बनाते हैं । हैलोजन परमाणु का आकार बढ़ने के साथ-साथ आयनिक बन्ध बनाने की प्रकृति कम होती जाती है। उदाहरण-AIF3 आयनिक है, जबकि AlCl2 सहसंयोजक है। ये अधातुओं के साथ सहसंयोजक बन्ध बनाते हैं।

(a) हाइड्राइड-सभी हैलोजन HX प्रकार के हाइड्राइड बनाते हैं। HF द्रव है, जबकि HCI, HBr व HI गैसें हैं।
(b) हैलोजन ऑक्सीजन से सीधे क्रिया नहीं करते, ये अप्रत्यक्ष रूप से बनाये जाते हैं। उदाहरणऑक्सीजन डाइफ्लुओराइड, OF2 को NaOH पर F2 की क्रिया द्वारा बनाया जाता है।

2F2 + 2NaOH → 2 NaF + OF2 + H2O.

प्रश्न 11:
ब्लीचिंग पाउडर का निम्नलिखित बिन्दुओं पर वर्णन कीजिए –
(i) बनाने की विधि
(ii) गुण
(iii) उपयोग।
उत्तर
(i) बनाने की विधि-बुझे हुए चूने पर क्लोरीन की क्रिया से ब्लीचिंग पाउडर (विरंजक चूर्ण) बनता है।
Ca(OH)2 + Cl2 → CaOCl2 +H2O
ब्लीचिंग पाउडर बनाने के लिए दो प्रकार के संयन्त्र होते हैं।

(1) हेसेनक्लेवर संयन्त्र-इसमें अनेक क्षैतिज बेलन होते हैं जिनमें घूमने वाले शेफ्ट लगे होते हैं। ऊपर से बुझा हुआ चूना डाला जाता है, जो घूमने
वाले शेफ्ट से एक बेलन से दूसरे में होता हुआ नीचे कम पहुँच जाता है। इसमें नीचे की ओर से क्लोरीन प्रवाहित की जाती है। नीचे आता हुआ Ca(OH)2 तथा नीचे से ऊपर जाती हुई क्लोरीन आपस में क्रिया कर ब्लीचिंग पाउडर बनाते हैं। इसे नीचे ग्राही में एकत्र कर लेते हैं।
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(2) बेकमेन संयन्त्र-आजकल विरंजक चूर्ण को बेकमेन संयन्त्र द्वारा बनाया जाता है। यह लोहे का एक ऊर्ध्वाधर स्तम्भ होता है जिसमें नीचे से थोड़ा ऊपर क्लोरीन तथा गर्म वायु के अन्दर जाने का रास्ता होता है तथा ऊपर एक कीप लगी रहती है। ऊपरी सिरे पर अप्रयुक्त क्लोरीन एवं वायु के एक निकास द्वार होता है। स्तम्भ के अन्दर की ओर क्षैतिज खाने के बने होते हैं। प्रत्येक खाने में घूमने वाली रेक लगी होती है तथा नीचे जाने पर यह ऊपर आती क्लोरीन से क्रिया कर ब्लीचिंग पाउडर में परिवर्तित हो जाती है।
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(ii) ब्लीचिंग पाउडर के गुण –

(1) यह सफेद रंग का चूर्ण है, जिसमें क्लोरीन की प्रबल गन्ध होती है।
(2) यह ठण्डे जल में विलेय है। किन्तु चूने की उपस्थिति के कारण स्वच्छ विलयन नहीं बनता है।
चित्र-बेकमेन संयंत्र
(3) ठण्डे पानी में हिलाकर छानने पर ठण्डा छनित विलयन क्लोराइड हाइपोक्लोराइड आयनों की अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करता है, जबकि गर्म करने पर यह क्लोराइड तथा क्लोरेट आयनों की उपस्थिति को प्रदर्शित करता है।
(4) तनु अम्लों की कम मात्रा से क्रिया-तनु अम्लों की अपर्याप्त मात्रा से ब्लीचिंग पाउडर की क्रिया कराने पर हाइपोक्लोरस अम्ल मुक्त होता है, जो नवजात ऑक्सीजन देने के कारण ऑक्सीकारक तथा विरंजक का कार्य करता है।
(5) तनु अम्लों की अधिक मात्रा से क्रिया-ब्लीचिंग पाउडर तनु अम्लों की अधिक मात्रा से क्रिया कर क्लोरीन गैस मुक्त करता है।

CaOCl2 + H2SO4 → CaSO4 + H2O + Cl2

इस प्रकार मुक्त क्लोरीन ‘प्राप्य क्लोरीन’ (Available chlorine) कहलाती है। एक अच्छे नमूने (Sample) में 35 – 38% प्राप्य क्लोरीन होती है।

(6) अपघटन उत्प्रेरक कोबाल्ट क्लोराइड की अल्प मात्रा की उपस्थिति में अपघटित होकर ऑक्सीजन देता है।

2CaOCl2 → 2CaCl2 + O2

अधिक समय तक रखा रहने पर इसका स्वतः ऑक्सीकरण हो जाता है तथा यह कैल्सियम क्लोरेट, कैल्सियम क्लोराइड के मिश्रण में परिवर्तित हो जाता है।

6CaoCl2→ Ca(ClO3)2 +5CaCl2

(iii) उपयोग–(1) जल को कीटाणुओं तथा रोगाणुओं से मुक्त करने में।
(2) क्लोरोफॉर्म के निर्माण में।
(3) ऊन को सिकुड़ने से बचाने के लिए।
(4) कपड़े, कागज के कारखानों में विरंजक के रूप में।

प्रश्न 12.
अन्तर हैलोजन यौगिक किन्हें कहते हैं ? ये कितने प्रकार के होते हैं ? प्रत्येक प्रकार का एक-एक उदाहरण देकर संरचना खींचिए।
उत्तर
हैलोजन परिवार के सदस्यों की ऋणविद्युतता में अन्तर होने के कारण दो भिन्न हैलोजनों का संयोग सम्भव हो जाता है जब दो भिन्न हैलोजन आपस में मिलकर द्विअंगी यौगिक बनाते हैं तो उन्हें अन्तर हैलोजन यौगिक कहते हैं।
ये यौगिक चार प्रकार के होते हैं इसका सामान्य सूत्र AXn होता है। जहाँ n = 1, 3, 5, 7 है।

1. AX – CIF, BrF, BrCI, IBr, ICI
2. AX3 – ClF3, BrF3, ICl3
3. AX5 – BIF5, IF5
4. AX7 – IF7

1. AX प्रकार-जैसे-CIF, BrCl, IBr, ICl.
इनकी आकृति रेखीय (Linear) होती है। चित्र के अनुसार ClF में क्लोरीन का मूल अवस्था (Ground state) में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास दिखाया गया है। इसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है, जो दूसरे हैलोजन परमाणु से सहसंयोजी बन्ध बनाकर अन्तरा-हैलोजन यौगिक बनाता है।
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2. AX3 प्रकार-इनकी T-आकृति होती है। जैसे-ClF3 अणु इनका केन्द्रीय परमाणु X में sp3d संकरण होता है।
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3. AX5 (IF5, BrF5 आदि) प्रकार-इस प्रकार के यौगिकों में sp3d2 संकरण होता है। इनकी संरचना वर्ग पिरामिडीय होती है, जिसमें एक स्थान पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म रहता है। जैसे-चित्र में IF5 अणु का बनना दिखाया गया है।
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4. AX7(IF7) प्रकार-इसकी आकृति पंचभुजीय पिरामिडीय होती है, जो कि sp3d3 संकरण से बनती है। IF7 अणु में होने वाला sp3d3 संकरण
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प्रश्न 13.
अक्रिय गैसों के उपयोग लिखिए।
उत्तर
अक्रिय गैसों के उपयोग (Uses of Noble Gases) –
हीलियम के उपयोग-1. हीलियम का घनत्व बहुत कम है। यह हाइड्रोजन के बाद सबसे हल्की गैस है। मौसम का पता लगाने वाले गुब्बारों में आजकल हाइड्रोजन और हीलियम के मिश्रण का उपयोग किया जाता है।
2. गोताखोरों द्वारा गहरे समुद्र में साँस लेने के लिए हीलियम और ऑक्सीजन के मिश्रण का उपयोग किया जाता है। इसका कारण यह है, कि हीलियम गैस नाइट्रोजन की अपेक्षा अधिक दाब पर रक्त में कम विलेय है।
3. दमा (Asthma) के रोगियों को भी हीलियम-ऑक्सीजन का मिश्रण स्वाँस लेने के लिए दिया जाता है।
4. वायु की अपेक्षा हीलियम का भार कम होता है इसलिए बड़े वायुयानों के टायरों में इसे भरा जाता है।
5. निम्न ताप के मापन में प्रयुक्त गैस थर्मामीटर में इसका उपयोग होता है।’
6. अक्रिय गैस होने के कारण यह सिग्नल लैम्प, निर्वात् नलिकाओं (Vacuum tubes), रेडियो ट्यूब तथा विद्युत-ट्रांसफॉर्मरों में भरने के काम आती है।

आर्गन के उपयोग-

  • हीलियम के समान इसका भी उपयोग ऐल्युमिनियम व स्टेनलेस स्टील के वेल्डिंग के लिए अक्रिय वातावरण उत्पन्न करने के लिए होता है। .
  • विद्युत् बल्बों में 25% नाइट्रोजन के साथ आर्गन गैस भरी जाती है।
  • इसका उपयोग रेडियो वाल्वों में किया जाता है।
  • विभिन्न रंगों का प्रकाश उत्पन्न करने के लिए आर्गन को निऑन के साथ विसर्ग नली में मिश्रित किया जाता है।

निऑन के उपयोग-

  • निऑन प्रकाश का उपयोग विज्ञापनों के लिए किया जाता है। निऑन से हरा प्रकाश उत्पन्न करने के लिए निऑन के साथ पारे की वाष्प मिला देते हैं।
  • निऑन लैम्पों का उपयोग हवाई जहाजों के संकेतक के रूप में होता है। निऑन प्रकाश बहुत दूर तक दिखता है तथा कोहरे का भी उस पर प्रभाव नहीं होता।

क्रिप्टॉन (Kr) और जीनॉन (Xe) के उपयोग-

  • आर्गन के स्थान पर इनका भी उपयोग विद्युत् बल्बों में किया जा सकता है, परन्तु ये महँगी है।
  • इन गैसों का उपयोग क्षणदीप्ति फोटोग्राफी (Flash photography) में किया जाता है।
  • क्रिप्टॉन का उपयोग प्रतिदीप्नि (Fluorescence), तापदीप्ति (Incandescence) तथा विसर्जन लैम्पों में अधिक हो रहा है।
  • क्रिप्टॉन लैम्प का उपयोग हवाई जहाज के उतरने के स्थान पर चिन्ह (Sign) के रूप में होता है। यह लैम्प एक मिनट में 40 बार चमकता है।

रेडॉन (Rn) के उपयोग-1. कैन्सर के उपचार में तथा रेडियोधर्मी सम्बन्धी शोध कार्य में प्रयुक्त होता है।
2.X-किरणों के उपस्थापन (Substitute) के रूप में, प्रौद्योगिकी रेडियोलॉजी में।

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MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण

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MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण

आय एवं रोजगार का निर्धारण Important Questions

आय एवं रोजगार का निर्धारण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

प्रश्न (a)
आय तथा रोजगार का निर्धारण होता है –
(a) कुल माँग द्वारा
(b) कुल पूर्ति द्वारा
(C) कुल माँग तथा कुल पूर्ति दोनों के द्वारा
(d) बाजार माँग द्वारा।
उत्तर:
(C) कुल माँग तथा कुल पूर्ति दोनों के द्वारा

प्रश्न (b)
बचत तथा उपभोग के बीच संबंध होता है –
(a) विपरीत
(b) प्रत्यक्ष
(c) विपरीत तथा प्रत्यक्ष दोनों
(d) न तो विपरीत न ही प्रत्यक्ष।
उत्तर:
(a) विपरीत

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प्रश्न (c)
जब अर्थव्यवस्था अपनी सारी अतिरिक्त आय बचाने का फैसला करता है तो विनियोग गुणक होगा –
(a) 1
(b) अनिश्चित
(c) 0
(d) अपरिमित।
उत्तर:
(a) 1

प्रश्न (d)
“पूर्ति अपना माँग स्वयं उत्पन्न कर लेती है।” कथन देने वाले अर्थशास्त्री हैं –
(a) कीन्स
(b) पीगू
(c) जे. बी. से
(d) एडम स्मिथ।
उत्तर:
(c) जे. बी. से

प्रश्न (e)
क्लासिकल विचारधारा निम्न में से किस तथ्य पर आधारित है –
(a) से’ का बाजार नियम
(b) मजदूरी दर की पूर्ण लोचशीलता
(c) ब्याज दर की पूर्ण लोचशीलता
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. अतिरिक्त विनियोग की प्रत्याशित लाभप्रदता …………………………….. कहलाती है।
  2. अवस्फीतिक अन्तराल …………………………… माँग की माप है।
  3. न्यून माँग …………………………………. अंतराल को बताती है।
  4. माँग आधिक्य की दशा में बैंक दर में ………………………………. करनी चाहिए।
  5. गुणक उल्टी दिशा में कार्य ………………………………… सकता है।
  6. जिस बिन्दु पर समग्र माँग एवं समग्र आपूर्ति बराबर होती है, उसे …………………………………. कहा जाता है।
  7. अपूर्ण रोजगार …………………………………….. माँग का परिणाम है।
  8. उपभोग प्रवृत्ति विवरण योग्य आय तथा ……………………………………. में संबंध दर्शाती है।

उत्तर:

  1. पूँजी की सीमान्त क्षमता
  2. न्यून
  3. अवस्फीतिक
  4. वृद्धि
  5. कर
  6. प्रभावपूर्ण माँग
  7. अभावी
  8. उपभोग।

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प्रश्न 3.
सत्य /असत्य बताइये –

  1. पूर्ण रोजगार का आशय शून्य बेरोजगारी नहीं होता है।
  2. भविष्य में ब्याज दर में वृद्धि, बचतों को कम कर देती है।
  3. जिस अनुपात में आय बढ़ती है उसी अनुपात में उपभोग व्यय नहीं बढ़ता है।
  4. रोजगार के सिद्धांत का प्रतिपादन सर्वप्रथम मार्शल ने किया था।
  5. अपूर्ण रोजगार न्यून माँग का परिणाम है।
  6. अर्द्धविकसित देशों में कीन्स का सिद्धांत लागू होता है।
  7. कीन्स का सिद्धान्त पूर्ण प्रतियोगिता पर आधारित है।

उत्तर:

  1. सत्य
  2. असत्य
  3. सत्य
  4. असत्य
  5. असत्य
  6. असत्य
  7. सत्य।

प्रश्न 4.
सही जोड़ियाँ बनाइये –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 1
उत्तर:

  1. (d)
  2. (a)
  3. (c)
  4. (f)
  5. (b)
  6. (e).

प्रश्न 5.
एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिये –

  1. गुणक के रिसाव अधिक होने पर गुणक का प्रभाव कैसा होगा?
  2. माँग आधिक्य किसे जन्म देता है?
  3. अभावी माँग को संतुलित करने का सर्वोत्तम उपाय क्या है?
  4. बेरोजगारी का न्यून माँग सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया?
  5. प्रो. कीन्स द्वारा प्रतिपादित ब्याज के सिद्धांत का नाम बताइए?
  6. अभावी माँग को संतुलित करने का सर्वोत्तम उपाय क्या है?

उत्तर:

  1. कम
  2. मुद्रा स्फीति
  3. सार्वजनिक व्यय में वृद्धि
  4. कीन्स
  5. तरलता पसंदगी
  6. निर्यात में वृद्धि करना।

आय एवं रोजगार का निर्धारण लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आय व रोजगार के परम्परावादी सिद्धान्त की विशेषताएँ लिखिए?
उत्तर:
आय व रोजगार के परम्परावादी सिद्धान्त की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

1. माँग एवं पूर्ति में स्वतः
सन्तुलन – प्रो. जे. बी. से का विचार था कि, यदि अर्थशास्त्र में अनावश्यक सरकारी या अर्द्ध-सरकारी हस्तक्षेप न हो, तो माँग व पूर्ति का स्वतः सन्तुलन हो जाता है।

2. बेरोजगारी की कल्पना निराधार:
परम्परावादी अर्थशास्त्री बेरोजगारी की समस्या से भयभीत नहीं थे। चूँकि अति – उत्पादन असम्भव है, अतः सामान्य बेरोजगारी भी असंभव होगी।

3. हस्तक्षेप रहित आर्थिक समाज:
परम्परावादी अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अर्थव्यवस्था में एक ऐसी लोच होती है, जो बाह्य हस्तक्षेप को किसी दशा में स्वीकार नहीं करती है। यदि अर्थव्यवस्था में सरकारी या अर्द्धसरकारी हस्तक्षेप किया गया तो अवश्य बेरोजगारी उत्पन्न होगी।

4. रोजगार दिलाने वाली लागत का स्वतः
प्रकट होना – परम्परावादी अर्थशास्त्रियों की धारणा है कि, जब बेकार पड़े साधनों को काम पर लगाया जाता है, तब इनसे वस्तुओं का उत्पादन बढ़ जाता है। नये साधनों को विशेषकर श्रमिक को आय प्राप्त होती है, नये – नये साधनों को रोजगार प्राप्त होता है। इस क्रिया से रोजगार तथा आय-स्तर में वृद्धि होने लगती है।

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प्रश्न 2.
कीन्स के अनुसार बेरोजगारी क्यों होती है?
उत्त:
कीन्स के अनुसार कुल माँग तथा पूर्ण रोजगार में स्वतः साम्य स्थापित नहीं हो सकता है। इसलिए पूर्ण रोजगार की स्थिति कभी-कभी मुश्किल से पाई जाती है। यह संभव है कि कुल माँग कुल पूर्ति से कम रहे और इस कारण पूर्ण रोजगार की स्थिति गड़बड़ा जाये । कीन्स का विचार है कि अर्थव्यवस्था में अनैच्छिक बेरोजगारी की स्थिति रहती है। कीन्स का कहना है कि बेरोजगारी प्रभावपूर्ण माँग की कमी तथा उपभोग एवं विनियोग पर व्यय की कमी के कारण होती है।

प्रश्न 3.
आय एवं रोजगार के परम्परावादी सिद्धांत की मान्यताएँ लिखिए?
उत्तर:
आय व रोजगार के परंपरावादी सिद्धांत की प्रमुख मान्यताएँ निम्न हैं –

  1. स्वतंत्र प्रतियोगिता तथा स्वतंत्र व्यापार की दशा उपस्थित हो।
  2. बाजार के विस्तार की पूर्ण संभावना हो।
  3. सरकारी व गैर – सरकारी हस्तक्षेप को समाप्त कर दिया गया है तथा संरक्षण नहीं दिया जाता है।
  4. बंद अर्थव्यवस्था का होना।
  5. मुद्रा का न होना । समाज द्वारा अर्जित संपूर्ण आय को उपभोग में व्यय कर देना।

प्रश्न 4.
समग्र माँग के कोई चार घटक बताइये?
उत्तर:
समग्र माँग – समग्र माँग से तात्पर्य एक अर्थव्यवस्था में एक वर्ष में वस्तुओं एवं सेवाओं की माँगी गई कुल मात्रा से है, अर्थात् समग्र माँग से तात्पर्य उस राशि से होता है जो उत्पादक रोजगार के निश्चित स्तर पर उत्पादित वस्तुओं की बिक्री से प्राप्त होने की आशा करते हैं।
घटक – समग्र माँग के घटक निम्नलिखित हैं –

1. निजी उपभोग की माँग:
एक देश के सभी परिवारों द्वारा अपने निजी उपभोग पर जो कुछ व्यय किया जाता है उसे निजी उपभोग व्यय कहा जाता है। चूँकि व्यय ही माँग को जन्म देता है अत: निजी उपभोग व्यय ही उस देश की निजी उपभोग माँग बन जाती है।

2. निजी विनियोग की माँग:
निजी विनियोग माँग से तात्पर्य निजी विनियोग कर्ताओं के द्वारा की जाने वाली पूँजीगत वस्तुओं की माँग से है। निजी विनियोग की माँग दो तत्वों पर निर्भर करती है –

  1. पूँजी की सीमान्त कुशलता एवं
  2. ब्याज की दर।

3. सरकार द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं की माँग:
सरकार के द्वारा भी विभिन्न प्रकार की वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीदी की जाती है। अतः सरकार द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुएँ एवं सेवाएँ ही सरकारी माँग कहलाती हैं।

4. विशुद्ध निर्यात माँग:
जब एक देश दूसरे देश को वस्तुओं का निर्यात करता है तो यह विदेशियों द्वारा उस देश में उत्पादित वस्तुओं की माँग को बतलाता है। अतः निर्यात से देश में आय, उत्पादन एवं रोजगार को प्रोत्साहन मिलता है। इसके विपरीत जब देश दूसरे देशों से आयात करता है तो इससे देश की आय विदेशों को चली जाती है। अतः आयात देश में रोजगार बढ़ाने में सहायक नहीं होते हैं। अत: देश की समग्र माँग को ज्ञात करने के लिए विशुद्ध निर्यात माँग को शामिल किया जाता है, अर्थात् निर्यातों में आयातों को घटाया जाता है।

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प्रश्न 5.
संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए” –

  1. पूर्ण रोजगार से क्या आशय है?
  2. अपूर्ण रोजगार से क्या आशय है?

उत्तर:

  1. किसी अर्थव्यवस्था में कार्य करने के इच्छुक व्यक्ति को समर्थ प्रचलित मजदूरी दरों पर काम मिलना ही पूर्ण रोजगार है।
  2. अर्थव्यवस्था में कार्य करने के इच्छुक व्यक्ति को प्रचलित मजदूरी दरों पर कार्य न मिलना ही अपूर्ण रोजगार है।

प्रश्न 6.
अत्यधिक माँग को ठीक करने के उपाय बताइए?
उत्तर:
अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं –

  1. मुद्रा निर्गम सम्बन्धी नियमों को कठोर बनाना: अत्यधिक माँग की मात्रा कम करने के लिए यह आवश्यक है कि सरकार मुद्रा निकालने सम्बन्धी नियमों को कड़ा करे ताकि केन्द्रीय बैंक को अतिरिक्त मुद्रा निकालने में अधिक कठिनाई हो।
  2. पुरानी मुद्रा वापस लेकर नई मुद्रा देना: अत्यधिक माँग की दशा में साधारण उपचार उपयोगी नहीं हो सकते, अतः पुरानी सब मुद्राएँ समाप्त कर उनके बदले में नई मुद्राएँ दे दी जाती हैं।
  3. साख – स्फीति को कम करना: अत्यधिक माँग अथवा स्फीति को कम करने के लिए साख – स्फीति को कम करना आवश्यक है।
  4. बचत का बजट बनाना: अत्यधिक माँग की स्थिति में सरकार को बचत का बजट बनाना चाहिए। बचत का बजट उसे कहते हैं, जिससे सार्वजनिक व्यय की तुलना में सार्वजनिक आय अधिक होती है।
  5. सार्वजनिक व्यय पर नियंत्रण: अत्यधिक माँग की दशा में सरकार को सड़कें बनाने, नहर व बाँधों का निर्माण करने, स्कूल, अस्पताल एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे कामों पर सार्वजनिक व्यय को कम कर देना चाहिए तथा साथ ही सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों में भी विनियोग को कम ही रखना चाहिए।

प्रश्न 7.
समग्र माँग तथा समग्र पूर्ति में अंतर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
समग्र माँग तथा समग्र पूर्ति में अंतर –

समग्र माँग:

  1. समग्र पूर्ति से अभिप्राय एक लेखा वर्ष के दौरान देश में उत्पादित समस्त वस्तुओं पर किए जाने वाले व्यय के योग से है।
  2. समग्र माँग का मापन वस्तुओं और सेवाओं पर समुदाय द्वारा कुल व्यय पर किया जाता है।
  3. इनमें निम्न दरें शामिल होती हैं –
    • परिवार द्वारा उपभोग पर नियोजित व्यय
    • फर्म के निवेश व्यय
    • सरकार का नियोजित व्यय।

समग्र पूर्ति:

  1. समग्र पूर्ति से अभिप्राय अर्थव्यवस्था में दिए हुए समय में खरीदने के लिए उपलब्ध उत्पाद से है।
  2. समग्र पूर्ति वस्तुओं और सेवाओं के कुल उत्पादन को भी कहते हैं।
  3. इसमें केवल उपभोग तथा पूर्ति शामिल होते हैं।

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प्रश्न 8.
प्रेरित निवेश तथा स्वतंत्र निवेश में अंतर स्पष्ट्र कीजिए?
उत्तर:
प्रेरित निवेश तथा स्वतंत्र निवेश में अंतर –
प्रेरित निवेश:

  1. यह आय पर निर्भर होता है।
  2. यह आय लोच होता है।
  3. यह सामान्यतया निजी क्षेत्र के द्वारा किया जाता है।
  4. प्रेरित निवेश वक्र बायें से दायें ऊपर की ओर जाता है।

स्वतंत्र निवेश:

  1. इसका आय से संबंध नहीं होता है अर्थात् स्वतंत्र होता है।
  2. यह आय लोच नहीं होता है।
  3. यह सामान्यतया सरकार द्वारा किया जाता है।
  4. स्वतंत्र निवेश वक्र OX वक्र के समान्तर ही बनता है।

प्रश्न 9.
मितव्ययिता के विरोधाभास की व्याख्या कीजिए?
उत्तर:
बचत (मितव्ययिता) का विरोधाभास यह बताता है कि यदि एक अर्थव्यवस्था में सभी लोग अपनी आय का अधिक भाग बचत करना आरंभ कर देते हैं तो कुल बचत का स्तर या तो स्थिर रहेगा या कम हो जायेगा। दूसरे शब्दों में, यदि अर्थव्यवस्था में सभी लोग अपनी आय का कम बचाना आरंभ कर देते हैं तो अर्थव्यवस्था में कुल बचत का स्तर बढ़ जायेगा। इस बात को इस प्रकार भी कह सकते हैं कि यदि लोग ज्यादा मित्तव्ययी हो जाते हैं तो या तो वे अपने आय का पूर्व स्तर रखेंगे या उनकी आय का स्तर गिर जायेगा।

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प्रश्न 10.
‘प्रभावी माँग’ क्या है? जब अंतिम वस्तुओं की कीमत और ब्याज की दर दी हुई हो, तब आप स्वायत्त व्यय गुणक कैसे प्राप्त करेंगे?
उत्तर:
प्रभावी माँग का आशय:
यदि आपूर्ति लोच पूर्णतया लोचदार है तो दी गई कीमत पर उत्पाद का निर्धारण पूर्णतः सामूहिक माँग पर निर्भर करता है। इसे प्रभावी माँग कहते हैं। दी गई कीमत पर साम्य उत्पाद, सामूहिक माँग और ब्याज की दर का निर्धारण निम्न समीकरण द्वारा किया जा सकता है –
स्वायत्त व्यय गुणक = \(\frac { \triangle Y }{ \triangle \bar { A } } \) = \(\frac{1}{1 – C}\)
यहाँ ∆Y = अन्तिम वस्तु उत्पाद की कुल वृद्धि
∆\(\bar { A } \) = स्वायत्त व्यय में वृद्धि
C = सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति।

प्रश्न 11.
जब स्वायत्त निवेश और उपभोग व्यय (A) ₹ 50 करोड़ हो और सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) 0.2 तथा आय (Y) का स्तर ₹ 4,000 – 00 करोड़ हो, तो प्रत्याशित समस्त माँग ज्ञात कीजिए। यह भी बताएँ कि अर्थव्यवस्था संतुलन में है या नहीं। कारण भी बताएँ?
हलः
दिया है –
स्वायत्त उपभोग (A) = ₹ 50 करोड़
MPS = 0.2
AS/ (आय) Y = ₹ 4,000 करोड़
AD = A + CY
C = 1 – MPS तथा Y का मान रखने पर,
AD = 50 + (1 – 0.2) 4,000
= 50 + 0.8 x 4,000
= 50 + 3,200 = ₹ 3,250 करोड़
अत: AD < AS ( ∵ 3,250 < 4,000)
अर्थव्यवस्था संतुलन की स्थिति में तब होती है जब AD तथा AS बराबर होते हैं, क्योंकि यहाँ AD < AS अतः अर्थव्यवस्था संतुलन में नहीं है।

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प्रश्न 12.
सीमांत उपभोग प्रवृत्ति किसे कहते हैं? यह किस प्रकार सीमांत बचत प्रवृत्ति से संबंधित है?
उत्तर:
आय में परिवर्तन व उपभोग में परिवर्तन के अनुपात को सीमांत उपभोग प्रवृत्ति कहा जाता है। जिसे निम्न सूत्र द्वारा प्रदर्शित किया जाता है –
उत्तर:
MPC = \(\frac{∆C}{∆Y}\)
जहाँ MPC = सीमांत उपभोग प्रवृत्ति
∆C = उपभोग में परिवर्तन
∆Y = आय में परिवर्तन
सीमांत उपभोग प्रवृत्ति तथा सीमांत प्रवृत्ति में संबंध:
बचत में परिवर्तन तथा आय में परिवर्तन का अनुपात सीमांत बचत प्रवृत्ति कहलाता है। जिसे निम्न सूत्र द्वारा प्रदर्शित किया जाता है –
MPS = \(\frac{∆S}{∆Y}\)
जहाँ MPS = सीमांत बचत प्रवृत्ति
∆S = बचत में परिवर्तन
∆Y = आय में परिवर्तन।
सीमांत उपभोग प्रवृत्ति तथा सीमान्त बचत प्रवृत्ति का योग सदैव इकाई – (1) के बराबर होता है। अर्थात् –
MPC + MPS = 1
यदि MPC या MPS में किसी एक का मूल्य घटता है तो दूसरे के मूल्य में वृद्धि होती है।

आय एवं रोजगार का निर्धारण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आय एवं रोजगार के सिद्धान्त के बारे में परम्परावादी अर्थशास्त्रियों एवं कीन्स के विचारों की तुलना कीजिए?
उत्तर:
परम्परावादी सिद्धान्त तथा कीन्स के सिद्धान्त में अंतर –
परम्परावादी सिद्धान्त:

  1. इस सिद्धान्त के अनुसार, आय तथा रोजगार का निर्धारण केवल पूर्ण रोजगार स्तर पर होता है।
  2. यह सिद्धांत प्रो. जे. बी. से के बाजार नियम की मान्यताओं पर आधारित है।
  3. इस सिद्धांत के अनुसार, बचत और विनियोग में समानता ब्याज की दर में परिवर्तन द्वारा स्थापित की जाती है।
  4. यह सिद्धांत दीर्घकालीन मान्यता पर आधारित है।
  5. इस सिद्धांत के अनुसार, अर्थव्यवस्था में सामान्य, अति उत्पादन तथा सामान्य बेरोजगारी की कोई संभावना नहीं हो सकती।

कीन्स का सिद्धान्त:

  1. इस सिद्धान्त के अनुसार, आय तथा रोजगार स्तर का निर्धारण उस बिन्दु पर होगा, जहाँ पर सामूहिक माँग, सामूहिक पूर्ति के बराबर होती है। इसके लिए पूर्ण रोजगार स्तर का होना आवश्यक नहीं है।
  2. यह सिद्धांत उपभोग के मनोवैज्ञानिक नियम पर आधारित है। इस सिद्धांत के अनुसार, बचत और विनियोग में समानता आय में परिवर्तन द्वारा स्थापित होती है।
  3. यह सिद्धान्त अल्पकालीन मान्यता पर आधारित है।
  4. यह सिद्धांत अल्पकालीन मान्यता पर आधारित है।
  5. इस सिद्धांत के अनुसार, अपूर्ण रोजगार संतुलन की एक सामान्य स्थिति है। पूर्ण रोजगार की स्थिति तो एक आदर्श एवं विशेष स्थिति है।
  6. इस सिद्धांत के अनुसार, सामान्य, अति उत्पादन तथा सामान्य बेरोजगारी संभव है।

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प्रश्न 2.
गुणक की धारणा को समझाइए?
उत्तर:
गुणक का सिद्धांत:
कीन्स के रोजगार सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण अंग गुणक है, लेकिन कीन्स का गुणक ‘विनियोग गुणक’ है। गुणक विनियोग की प्रारंभिक वृद्धि तथा आय की कुल अंतिम वृद्धि के बीच आनुपातिक संबंध को बताता है। कीन्स का विचार है कि जब किसी देश की अर्थव्यवस्था में विनियोग की मात्रा में वृद्धि की जाती है तो उस देश की आय में केवल विनियोग की मात्रा की तुलना में जितने गुना वृद्धि होती है, उसे ही कीन्स ने ‘गुणक’ कहा है।
सूत्र के रूप में,
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 2
K = \(\frac { \triangle Y }{ \triangle I } \)
यदि गुणक का मूल्य दिया है तो विनियोग में वृद्धि किये जाने से आय में कितनी वृद्धि होगी? यह सरलतापूर्वक निकाली जा सकती है। इसका सूत्र है –
∆Y = K . ∆I
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 3
सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति का आकार जितना बड़ा होगा गुणक का मूल्य भी अधिक होगा। गुणक के गुणक द्वारा कीन्स ने यह बलताया है कि सरकार विनियोग में जिस अनुपात में वृद्धि करती है। गुणक के कारण आय कई गुना बढ़ जाती है। इससे अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी को दूर किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
पूँजी की सीमांत कुशलता को निर्धारित करने वाले तत्वों को लिखिए?
उत्तर:
पूँजी की सीमांत कुशलता को निर्धारित करने वाले तत्व निम्नलिखित हैं –

1. माँग की प्रवृत्ति:
यदि किसी वस्तु की माँग की आशंका भविष्य में अधिक बढ़ने की है तो पूँजी की सीमांत कुशलता भी ऊँची होगी। जिसके परिणामस्वरूप विनियोग बढ़ जायेगा। इसके विपरीत अगर भविष्य में वस्तुओं की माँग घटने की आशंका है तो पूँजी की सीमांत कुशलता भी घट जायेगा और विनियोग भी कम हो जाएगा।

2. लागतें एवं कीमतें:
यदि भविष्य में वस्तु की उत्पादन लागत बढ़ने की तथा उनकी कीमतों में गिरावट.की सम्भावना है तो पूँजी की सीमांत कुशलता गिर जायेगी। इससे विनियोग की मात्रा भी कम हो जायेगी। इसके विपरीत भविष्य में वस्तु की लागतों में कमी और कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है तो पूँजी की सीमांत कुशलता भी बढ़ेगी और विनियोग भी बढ़ेगा।

3. तरल परिसम्पत्तियों में परिवर्तन:
जब एक साहसी के पास विभिन्न प्रकार की परिसम्पत्तियाँ बड़ी मात्रा में नगदी (तरल) के रूप में रहती है तब वह नये-नये विनियोग से लाभ उठाना चाहता है। ऐसी परिस्थिति में पूँजी की सीमांत कुशलता में वृद्धि होगी। इसके विपरीत जब परिसम्पत्तियाँ नगदी के रूप में नहीं होती हैं, तब नये विनियोग अवसरों का लाभ उठाने में कठिनाइयाँ आती हैं। इससे पूँजी की सीमांत कुशलता घट जाती है।

4. आय में परिवर्तन:
अप्रत्याशित लाभ अथवा हानियों के कारण हुए आय में आकस्मिक परिवर्तन तथा भारी कराधान अथवा कर रियायतों के कारणों से आय में जो परिवर्तन होता है उसका भी पूँजी की सीमांत कुशलता पर प्रभाव पड़ता है।

5. उपभोग प्रवृत्ति:
यदि उपभोग प्रवृत्ति अल्पकाल में ऊँची है तो इससे पूँजी की सीमांत कुशलता बढ़ जायेगी। इसके विपरीत उपभोग की प्रवृत्ति कम है तो पूँजी की सीमांत कुशलता घट जाएगी।

प्रश्न 4.
समग्र माँग एवं समग्र पूर्ति द्वारा आय व रोजगार के संतुलन स्तर को तालिका व रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए?
उत्तर:
कीन्स के अनुसार, आय तथा रोजगार के संतुलन स्तर का निर्धारण वहाँ होता है, जहाँ पर सामूहिक माँग तथा सामूहिक पूर्ति बराबर होते हैं। यहाँ सामूहिक माँग तथा सामूहिक पूर्ति का तात्पर्य समग्र माँग एवं समग्र पूर्ति से है। आय के संतुलन – स्तर के निर्धारण की व्याख्या समग्र माँग तथा समग्र पूर्ति की एक काल्पनिक तालिका की सहायता से की जा सकती है।
तालिका के द्वारा स्पष्टीकरण (र करोड़ में) आय उपभोग विनियोग। बचत समग्र माँग समग्र पर्ति विवरण (C)
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 4
उपर्युक्त तालिका में राष्ट्रीय आय के ₹ 400 करोड़ के स्तर पर समग्र माँग तथा समग्र पूर्ति बराबर हैं। दोनों ₹400 करोड़ के स्तर पर हैं। इस संतुलन – स्तर पर बचत भी विनियोग के बराबर है। इस संतुलन – स्तर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन स्थायी नहीं होगा। उदाहरणस्वरूप, ₹ 400 करोड़ के आय – स्तर से पूर्व कोई भी आय – स्तर है, तो समग्र माँग, समग्र पूर्ति से अधिक होगी। जिसका अर्थ यह है कि उद्यमी अधिक लाभ प्राप्त करने हेतु उत्पादन के साधनों को अधिक रोजगार देंगे तथा उत्पादन का स्तर बढ़ायेंगे, जिसके फलस्वरूप राष्ट्रीय आय बढ़ेगी।

यह तब तक बढ़ेगी, जब तक कि आय के संतुलन बिन्दु तक न पहुँच जाएँ। इसके विपरीत, यदि आयस्तर ₹ 400 करोड़ से अधिक है तो लोग उद्यमियों को प्राप्त होने वाली न्यूनतम राशि से कम व्यय करने को तैयार हैं अर्थात् माँग समस्त पूर्ति से कम होगी। इस स्थिति में उद्यमियों को हानि उठानी होगी, क्योंकि उनका पूरा उत्पादन नहीं बिक सकेगा। ऐसी स्थिति में आय तथा रोजगार का संतुलन उस बिन्दु पर आधारित होगा, जहाँ पर समग्र माँग तथा समग्र पूर्ति एक – दूसरे के बराबर होगी।
रेखाचित्र द्वारा स्पष्टीकरण –
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 5
प्रस्तुत रेखाचित्र में समग्र माँग वक्र, समग्र पूर्ति वक्र को बिन्दु E पर काटता है। इस बिन्दु पर आय का। संतुलन स्तर ₹ 400 करोड़ निर्धारित होता है। आय में हुए किसी प्रकार के परिवर्तन की आय के संतुलन स्तर की ओर आने की प्रवृत्ति होगी। रेखाचित्र का निचला भाग (भाग – B) आय के इसी स्तर पर बचत और विनियोग को प्रदर्शित करता है। आय के संतुलन – स्तर पर समग्र माँग की मात्रा को कीन्स ने प्रभावपूर्ण माँग कहा है। कीन्स के अनुसार “सामूहिक माँग या समग्र माँग वक्र के जिस बिन्दु पर सामूहिक पूर्ति या समग्र पूर्ति वक्र उसे काटता है, उस बिन्दु का मूल्य ही प्रभावपूर्ण माँग कहलायेगा।”

प्रश्न 5.
उपभोग प्रवृत्ति को निर्धारित करने वाले पाँच तत्व लिखिए?
उत्तर:
उपभोग प्रवृत्ति को निर्धारित करने वाले तत्व निम्नलिखित हैं –

  1. मौद्रिक आय: समाज में रहने वाले व्यक्तियों की जब मौद्रिक आय बढ़ जाती है, तो उपभोग प्रवृत्ति भी बढ़ जाती है। इसके विपरीत मौद्रिक आय में कमी होने पर उपभोग प्रवृत्ति भी घट जायेगी।
  2. राजस्व नीति: यदि सरकार करों की दरों में वृद्धि करती है तो उपभोग प्रवृत्ति घट जाएगी और यदि कल्याणकारी योजनाओं पर अधिक व्यय करती है तो उपभोग प्रवृत्ति में वृद्धि हो जायेगी।
  3. ब्याज की दर: ब्याज की दर में वृद्धि होने पर लोग उपभोग में कमी करेंगे और बचत में वृद्धि करेंगे। इसके विपरीत ब्याज की दर में कमी आने पर बचत कम होगी और उपभोग प्रवृत्ति में वृद्धि होगी।
  4. आय का वितरण: समाज में आय का वितरण असमान होने पर उपभोग प्रवृत्ति कम होती है और समाज में यदि आय का वितरण समान है तो उपभोग प्रवृत्ति में वृद्धि होगी।
  5. प्रदर्शन प्रभाव: जिन राष्ट्रों में समाज में प्रदर्शन प्रभाव या दिखावा अधिक होता है वहाँ के लोगों में उपभोग प्रवृत्ति अधिक होता है।

प्रश्न 6.
पूर्ण रोजगार एवं अनैच्छिक बेरोजगारी की धारणा पर प्रकाश डालिए?
उत्तर:
1. पूर्ण रोजगार से आशय:
साधारण अर्थों में पूर्ण रोजगार से आशय, उस स्थिति से है, जिसमें कोई भी व्यक्ति बेरोजगार न हो, श्रम की माँग और पूर्ति बराबर हो। समष्टि अर्थशास्त्र के आधार पर, पूर्ण रोजगार से आशय है, किसी दिए हुए वास्तविक मजदूरी स्तर पर श्रम की माँग, श्रम की उपलब्ध पूर्ति के बराबर होती है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 6

परंपरावादी परिभाषा:
लर्नर के अनुसार “पूर्ण रोजगार वह अवस्था है जिसमें वे सब लोग जो मजदूरी की वर्तमान दरों पर काम करने के है योग्य तथा इच्छुक हैं, बिना किसी कठिनाई के काम प्राप्त करते हैं।”

आधुनिक परिभाषा:
स्पेन्सर के अनुसार, “पूर्ण रोजगार वह स्थिति है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति जो काम करना चाहता है, काम कर रहा है सिवाय उनके जो संघर्षात्मक तथा संरचनात्मक बेरोजगार हैं।” उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि पूर्ण रोजगार की स्थिति शून्य बेरोजगारी की स्थिति नहीं है। यह बेरोजगारी की प्राकृतिक दर की स्थिति है।

2. अनैच्छिक बेरोजगारी:
अनैच्छिक बेरोजगारी वह स्थिति है, जिसमें लोगों को रोजगार के अवसर के अभाव में बेरोजगार रहना पड़ता है। जब लोग मजदूरी की वर्तमान दर पर काम करने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें काम नहीं मिलता तो उसे अनैच्छिक बेरोजगारी कहा जाता है।

प्रस्तुत रेखाचित्र में E बिन्दु पूर्ण रोजगार की बिन्दु है। इस बिन्दु पर श्रम की माँग व पूर्ति दोनों बराबर हैं। किन्तु ON2, मजदूरी पर ON, श्रमिक काम करने को इच्छुक हैं । जबकि उत्पादकों द्वारा केवल ON2, श्रमिकों की माँग की जाएगी। इस प्रकार N,N2, श्रम की मात्रा अनैच्छिक रूप से बेरोजगार कहलाएगी।

प्रश्न 7.
अभावी माँग का देश के उत्पादन, रोजगार एवं मूल्यों पर प्रभाव बताइए?
उत्तर:
1. अभावी माँग का उत्पादन पर प्रभाव:
यदि अर्थव्यवस्था में कुल पूर्ति की तुलना में कुल माँग कम हो तो इसका आशय यह होगा कि देश में वस्तुओं एवं सेवाओं की जितनी मात्रा उपलब्ध है, उतनी माँग नहीं है। इससे अर्थव्यवस्था में कुल उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव निम्न हैं –

  1. माँग की कमी के कारण उत्पादक वस्तुओं का उत्पादन घटाने के लिए बाध्य होंगे।
  2. इस कारण वे अपनी वर्तमान उत्पादन क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं कर पायेंगे।
  3. इसका प्रभाव यह होगा कि देश की उत्पत्ति के साधनों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पायेगा।
  4. इसके कारण कुछ वर्तमान फर्मे अपना कार्यकी बन्द करना शुरू कर देगी तथा कई फर्मे बाजार में प्रवेश नहीं कर पायेंगी –
  5. परिणामस्वरूप उत्पादन की लागत में वृद्धि हो जायेगी।

2. अभावी माँग का रोजगार पर प्रभाव:
जब किसी अर्थव्यवस्था में अभावी माँग (माँग की कमी) की स्थिति होती है, तो उसका देश के रोजगार स्तर पर निम्न प्रभाव पड़ता है –

  1. माँग की कमी के कारण उत्पादकों को वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन में कमी करनी पड़ेगी, जिससे देश में रोजगार स्तर में कमी आ जायेगी, क्योंकि उन्हें आवश्यक मात्रा में उत्पादन करने के लिए पहले से कम श्रमिकों की आवश्यकता पड़ेगी।
  2. यदि देश में अपूर्ण रोजगार की स्थिति है तो इसका प्रभाव यह होगा कि कुछ लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ेगा।
  3. यदि देश में पहले से ही अल्प रोजगार की स्थिति है तो इसका अर्थ यह होगा कि यह स्थिति और विकट हो जायेगी।

3. अभावी माँग का मूल्यों पर प्रभाव:
जब किसी अर्थव्यवस्था में अभावी माँग की स्थिति होती है तो उसका अर्थव्यवस्था की कीमतों पर निम्न प्रभाव पड़ता है –

  1. यदि देश कुल माँग, कुल पूर्ति की तुलना में कम है तो इसका सामान्य प्रभाव यह होगा कि देश में मूल्य – स्तर में कमी आ जायेगी।
  2. मूल्य – स्तर में कमी आने से उत्पादकों के लाभ के अन्तर में कमी आ जायेगी।
  3. इस स्थिति का लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा, क्योंकि उन्हें कम मूल्य पर वस्तुएँ एवं सेवाएँ प्राप्त हो सकेंगी।

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प्रश्न 8.
प्रभावपूर्ण माँग के निर्धारण को समझाइए?
उत्तर:
किसी अर्थव्यवस्था में एक वर्ष में आम जनता द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं पर किया जाने वाला कुल व्यय जो उपभोग की मात्रा को प्रदर्शित करता है प्रभावपूर्ण समग्र माँग कहलाती है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 7
प्रभावपूर्ण समग्र माँग दो तत्वों पर निर्भर करती है –

  1. उपभोग माँग
  2. निवेश माँग।

उपभोग माँग वक्र आय के बढ़ने से ऊपर की ओर चढ़ता है और आय के घटने से गिरता है लेकिन इसे प्रवृत्ति के स्थिर रहने की दशा में सीमांत उपभोग प्रवृत्ति घटने से उपभोग माँग गिरता हुआ दिखाई देता है। इसी प्रकार विनियोग माँग ब्याज की दर एवं पूँजी की सीमांत उत्पादकता पर निर्भर करती है। ब्याज दर कम है तो निवेश की माँग अधिक होगी एवं ब्याज दर अधिक है तो निवेश की माँग कम होगी।

प्रश्न 9.
प्रभावपूर्ण माँग का महत्व बताइये? (कोई चार बिन्दु)
उत्तर:
प्रभावपूर्ण माँग का महत्व
1. रोजगार का निर्धारण:
कीन्स के अनुसार, रोजगार की मात्रा प्रभावपूर्ण माँग पर निर्भर करती है और कुल माँग, कुल आय के बराबर होती है, अतः रोजगार की मात्रा एक ओर उत्पादन की मात्रा को निर्धारित करती है तथा दूसरी ओर उत्पन्न होने वाली आय को भी निर्धारित करती है।

2. आय की प्राप्ति:
प्रभावपूर्ण माँग आय का भी निर्धारण करता है। प्रभावपूर्ण माँग से श्रमिकों को रोजगार की प्राप्ति होती है। रोजगार प्राप्ति से श्रमिकों को आय की प्राप्ति होती है वह प्रभावपूर्ण माँग का ही परिणाम है।

3. विनियोग का महत्व:
प्रभावपूर्ण माँग विनियोग का भी निर्धारण करता है। प्रभावपूर्ण माँग के कारण उत्पादकों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। उत्पादन में वृद्धि करने के लिए विनियोगकर्ता या उत्पादक नये – नये पूँजीगत संसाधनों में विनियोग करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।

4. पूर्ण रोजगार की मान्यता का खण्डन:
प्रभावपूर्ण माँग पूर्ण रोजगार की मान्यता का भी खण्डन करता है। पूर्ण रोजगार का तात्पर्य है कार्य करने योग्य सभी व्यक्तियों को प्रचलित मजदूरी पर रोजगार की प्राप्ति होना। लेकिन वास्तव में व्यावहारिक जीवन में रोजगार की प्राप्ति प्रभावपूर्ण माँग पर निर्भर करता है।

प्रभावपूर्ण माँग बढने पर रोजगार में वृद्धि होती है, लोगों को रोजगार प्राप्त होता है जिससे धीरे – धीरे बेरोजगारी कम होती है। इसके विपरीत प्रभावपूर्ण माँग में कमी होने से रोजगार का स्तर घटने लगता है। समाज में बेरोजगारी फैलती है। तब इन परिस्थितियों में चाहे कितना भी योग्य व्यक्ति या श्रमिक हो उसकी छटनी होने लगती है और वे बेरोजगार हो जाते हैं। वैसे भी व्यावहारिक जीवन में पूर्ण रोजगार की मान्यता नहीं पायी जाती।

प्रश्न 10.
अभावी माँग का क्या आशय है तथा अभावी माँग के उत्पन्न होने के क्या कारण हैं?
उत्तर:
अभावी माँग का अर्थ:
अभावी माँग से अभिप्राय, उस स्थिति से है, जब पूर्ण रोजगार स्तर पर कुल माँग, कुल पूर्ति से कम होती है। अर्थात् जब अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार स्तर बनाये रखने के लिए जितना व्यय आवश्यक होता है, उतना नहीं होता तो इसे अभावी माँग की स्थिति कहेंगे। ऐसी स्थिति में, कुल माँग व कुल पूर्ति रोजगार स्तर से पूर्व ही बराबर (संतुलन) होती है अर्थात् कुल माँग पूर्ण रोजगार स्तर बनाये रखने के लिए कम होती है। अभावी माँग के कारण – किसी भी अर्थव्यवस्था में अभावी माँग की स्थिति निम्नलिखित कारणों से उत्पन्न हो सकती है –

1. सरकार द्वारा करेंसी की पूर्ति में कमी या बैंकों द्वारा साख निर्माण को घटाना:
जब देश का केन्द्रीय बैंक चलन में मुद्रा की मात्रा कम कर देता है तो इसके कारण मुद्रा व साख की मात्रा कम हो जाती है। अतः इसके कारण कुल व्यय, कुल आय से कम हो जाती है, जिसके कारण अभावी माँग उत्पन्न हो जाती है।

2. बचत प्रवृत्ति में वृद्धि के कारण उपभोग माँग में कमी:
सामूहिक माँग (समग्र माँग) के कम होने के कारण वस्तुओं व सेवाओं की कीमत में कमी आने लगती है जिसके कारण मुद्रा का मूल्य बढ़ जाता है। अत: व्यक्ति मुद्रा का संचय अधिक करते हैं और व्यय कम करते हैं।

3. करारोपण नीति:
जब सरकार अपने कर नीति में कर की दर वस्तुओं व व्यक्तियों पर अत्यधिक लगाती है तो स्वाभाविक है कि लोगों की उपभोग व्यय की प्रवृत्ति कम हो जाती है और अभावी माँग उत्पन्न हो जाती है।

4. सार्वजनिक व्यय में कमी:
जब सरकार अपने व्ययों में कटौती करती है और योजनागत व्यय या उत्पादकीय कार्यों को भी कम करना प्रारंभ कर देती है, तो सामूहिक माँग कम हो जाती है और अभावी माँग की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

5. मुद्रा के चलन वेग में कमी:
व्यक्तियों की उपभोग प्रवृत्ति घटने और लाभ की आशा कम होने के कारण मुद्रा का चलन वेग घट जाता है और समस्त माँग कम हो जाती है जिसके कारण अभावी माँग उत्पन्न हो जाती है।

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प्रश्न 11.
अत्यधिक माँग से क्या आशय है? इसके कारणों पर प्रकाश डालिए?
उत्तर:
किसी भी अर्थव्यवस्था में रोजगार एवं आय का संतुलन उस पर होता है, जहाँ पर कुल माँग एवं कुल पूर्ति बराबर हो। अर्थात् यह आवश्यक नहीं है कि कुल माँग व कुल पूर्ति सदैव बराबर हो। कभी कुल माँग अधिक होती है तो कभी कुल पूर्ति। जब कुल पूर्ति माँग अधिक होती और कुल पूर्ति कम होती है तो इस स्थिति को अत्यधिक माँग कहते हैं।

उदाहरणार्थ, मान लीजिए कि किसी अर्थव्यवस्था में एक निश्चित समयावधि पर कुल माँग ₹ 500 करोड़ है। अब यदि इसकी कुल पूर्ति भी ₹ 500 करोड़ है तो यह कहा जाएगा कि अर्थव्यवस्था संतुलन की स्थिति में है। अब कल्पना कीजिए कि कुल पूर्ति केवल ₹ 400 करोड़ है तो इसका अर्थ यह होगा कि कुल माँग, कुल पूर्ति की तुलना में ₹ 100 करोड़ अधिक है। इसी को अत्यधिक माँग कहते हैं। कीन्स के शब्दों में “अत्यधिक माँग वह स्थिति है जबकि वर्तमान कीमतों पर वस्तुओं और सेवाओं की कुल माँग उपलब्ध कुल पूर्ति से बढ़ जाती है।”

अत्यधिक माँग के कारण:
अत्यधिक माँग के निम्नलिखित कारण हैं –

1. मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि:
अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि होने से और उत्पादन की मात्रा में वृद्धि न होने के कारण देश में माँग प्रेरित मुद्रा स्फीति उत्पन्न होती है।

2. प्रयोज्य आय में वृद्धि:
जब लोगों की प्रयोज्य आय में वूद्धि होती है तो भी उपभोग व्यय में वृद्धि हो जाती है। परिणामस्वरूप मुद्रा स्फीति की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

3. घाटे की वित्त व्यवस्था:
वर्तमान समय में कल्याणकारी सरकारें घाटे की वित्त व्यवस्था अपनाकर सार्वजनिक व्यय में वृद्धि करती है, तो लोगों के पास एक ओर उपभोग आय में वृद्धि हो जाती है और दूसरी ओर वस्तुओं के न होने के
कारण अत्यधिक माँग की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और मूल्य में वृद्धि हो जाती है।

4. विनियोग में वृद्धि:
व्यावसायिक फर्मे ऋण प्राप्त करके नये उपकरणों, मशीनों तथा अन्य क्षेत्रों में विनियोग में वृद्धि करती हैं जिसके परिणामस्वरूप माँग में वृद्धि होती है।

5. वस्तुओं का विदेशों में निर्यात:
वस्तुओं का विदेशों में निर्यात के कारण भी अर्थव्यवस्था में पूर्ति की कमी और माँग में अतिरेक की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, परिणामस्वरूप मूल्य – स्तर में वृद्धि होती है।

प्रश्न 12.
अत्यधिक माँग में सुधार के उपायों का वर्णन कीजिए?
उत्तर:
अत्यधिक माँग में सुधार के उपाय:
जव अर्थव्यवस्था में अत्यधिक माँग की दशा उत्पन्न हो जाती है तो उसे निम्नलिखित उपायों से ठीक किया जा सकता है –

(अ) मौद्रिक उपाय
(ब) राजकोषीय उपाय एवं
(स) अन्य उपाय।

(अ) मौद्रिक उपाय:
अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए कुल मुद्रा पूर्ति को कम करना चाहिए। इस दृष्टिकोण से निम्नलिखित उपाय हैं –

1. मुद्रा निर्गम संबंधी नियमों को कठोर बनाना:
अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए यह आवश्यक है कि सरकार मुद्रा निकालने संबंधी नियमों को कड़ा करें ताकि केन्द्रीय बैंक को अतिरिक्त मुद्रा निकालने में अधिक कठिनाई हो।

2. पुरानी मुद्रा वापस लेकर नई मुद्रा देना:
अत्यधिक माँग की दशा में साधारण उपचार उपयोगी नहीं हो सकते, अतः पुरानी सब मुद्राएँ समाप्त कर उनके बदले में नई मुद्राएँ दे दी जाती हैं। प्रथम महायुद्ध के पश्चात् 1924 में जर्मनी की अनियंत्रित मुद्रा – स्फीति को समाप्त करने के लिये 10 खरब मुद्राओं के बदले में एक नयी मुद्रा दी गयी थी।

3. साख स्फीति को कम करना:
अत्यधिक माँग अथवा स्फीति को कम करने के लिए साख स्फीति को कम करना आवश्यक है इसके लिए केन्द्रीय बैंक द्वारा बैंक दर बढ़ाकर, प्रतिभूतियाँ बेचकर तथा बैंकों से अधिक कोष माँगकर, साख कम की
जा सकती है।

(ब) राजकोषीय उपाय:
इसमें निम्नलिखित उपाय हैं –

1. बचत का बजट बनाना:
अत्यधिक माँग की स्थिति में सरकार को बजट, बचत का बनाना चाहिए। इसका तात्पर्य है, जिससे सार्वजनिक व्यय की तुलना में सार्वजनिक आय अधिक होती है।

2. ऋण प्राप्ति:
अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए सरकार को ऋण पत्र बेचनी चाहिए और जनता को यह ऋण – पत्र खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

3. बचतों को प्रोत्साहन:
अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए सरकार को बैंकों एवं डाकघरों के माध्यम से ऐसी नीतियाँ कार्यान्वित करनी चाहिए जिससे लोग बचत के लिए प्रोत्साहित हो। इसके लिए आकर्षक ब्याज की दर अपनानी चाहिए।

(स) अन्य उपाय:
अन्य उपाय इस प्रकार हैं –

  1. अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए आयात में वृद्धि और निर्यात में कमी करनी चाहिए।
  2. अत्यधिक माँग को ठीक करने के लिए उद्योगों में उचित विनियोग नीति अपनायी जानी चाहिए।
  3. सरकार को मूल्यों में सहायता करनी चाहिए।

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प्रश्न 13.
“किसी रेखा में पैरामेट्रिक शिफ्ट” से आप क्या समझते हैं? रेखा में किस प्रकार शिफ्ट होता है जब इसकी

  1. ढाल घटती है और
  2. इसके अंतः खंड में वृद्धि होती है।

उत्तर:
हम दो सरल रेखाएँ लेते हैं, जो एक – दूसरे की अपेक्षा अधिक खड़े ढाल वाली हैं। सत्ताएँ: और m को आरेख का पैरामीटर कहते हैं। जैसे – जैसे m बढ़ता है सरल रेखा ऊपर की ओर बढ़ती है। इसे सरल रेखा में पैरामैट्रिक शिफ्ट कहते हैं।

1. ढाल घटती है:
y = mx + ε के रूप में ε सरल रेखीय समीकरण को दर्शाने वाले आरेख पर क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर अक्षों पर x और y दो परिवर्तों को रेखाचित्र में दर्शाया गया है। यहाँ m सरल रेखा की प्रवणता (ढाल) है और Σ ऊर्ध्वाधर अक्ष पर अन्तः खण्ड है। जब x में एक इकाई की वृद्धि होती है, तो y के मूल्य 10 में m इकाइयों की वृद्धि हो जाती है। जब रेखा की 5प्रवणता (ढाल) घटती है, तो सरल रेखा में ऋणात्मक शिफ्ट होता है। निम्नांकित चित्र से स्पष्ट हो रहा है कि जैसे – जैसे m का। मूल्य घट रहा है अर्थात् m का मूल्य 1 से कम करके 0.5 करने पर। सरल रेखा नीचे की ओर शिफ्ट हो रही है जिससे इसकी ढाल घट जाती है। इसे पैरामैट्रिक शिफ्ट कहते हैं।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 8

2. रेखा के अन्तः खण्ड में वृद्धि होती है:
जब सरल रेखा के अंत:खण्ड में वृद्धि होती है तब सरल रेखा समान्तर रूप से शिफ्ट होती है। यदि समीकरण y = 0.5 x + Σ में का मान 2 से बढ़ाकर 3 कर दिया जाये तो सरल रेखा समान्तर रूप से ऊपर की ओर शिफ्ट हो जायेगी। इसे निम्न चित्र में दर्शाया गया है –

रेखाचित्र में Σ के अंत:खण्ड में 2 से 3 तक वृद्धि करने पर सरल रेखा समान्तर रूप से ऊपर की ओर शिफ्ट हो जाती है।
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 9

प्रश्न 14.
कीन्स के रोजगार सिद्धांत को समझाइये?
उत्तर:
कीन्स का रोजगार सिद्धांत:
कोन्स ने अपनी सुप्रसिद्ध पुस्तक ‘सामान्य सिद्धांत’ में आय एवं रोजगार के सामान्य सिद्धांत का क्रमबद्ध एवं वैज्ञानिक विश्लेषण किया है। तीसा को महामन्दी (सन् 1930) में इन्होंने अपने सिद्धांत का प्रतिपादन किया था। उनके अनुसार एक अर्थव्यवस्था में आय एवं रोजगार का स्तर मुख्य रूप से प्रभावपूर्ण माँग’ के द्वारा निर्धारित होता है। प्रभावपूर्ण माँग में कमी ही बेरोजगारी का कारण होता है किन्तु प्रभावपूर्ण माँग का निर्धारण दो तत्वों के द्वारा होता है –

  1. सामूहिक माँग और
  2. सामूहिक पूर्ति।

सामूहिक पूर्ति और सामूहिक माँग जहाँ एक – दूसरे के बराबर होते हैं, वहीं साम्य बिन्दु प्रभावपूर्ण माँग का बिन्दु भी होता है। इसी प्रभावपूर्ण माँग के बिन्दु पर अर्थव्यवस्था में उत्पादन की मात्रा तथा रोजगार की कुल संख्या का निर्धारण होता है। अत: कीन्स का रोजगार का सिद्धांत समझने के लिए निम्न रेखाचित्र को समझना होगा –
प्रभावपूर्ण माँग = कुल उत्पादन = कुल आय = रोजगार
MP Board Class 12th Economics Important Questions Unit 7 आय एवं रोजगार का निर्धारण img 10
उक्त अनुसार उत्पादन प्रभावपूर्ण माँग के कारण होता है, माँगें कुल माँग द्वारा शासित होती हैं।

MP Board Class 12th Economics Important Questions

MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 4 नियोजन

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MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 4 नियोजन

नियोजन Important Questions

नियोजन वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए –

प्रश्न 1.
योजना के निम्न में से कौन-से उद्देश्य हैं –
(a) पूर्वानुमान
(b) मितव्ययता
(c) निश्चित लक्ष्यों को स्थापित करना
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 2.
“नियोजन भविष्य को पकड़ने के लिये बनाया गया पिंजड़ा है।” यह कथन किसने कहा है-
(a) हार्ट
(b) हेनरी फेयोल
(c) उर्विक
(d) ऐलन।
उत्तर:
(d) ऐलन।

प्रश्न 3.
नियोजन प्रक्रिया का अंतिम चरण है –
(a) लक्ष्य निर्धारण
(b) पूर्वानुमान
(c) सर्वोत्तम विकल्प का चयन
(d) अनुसरण करना।
उत्तर:
(d) अनुसरण करना।

प्रश्न 4.
भावी क्रियाओं का पूर्व निर्धारण, प्रबंध के किस कार्य के अंतर्गत किया जाता है –
(a) नियोजन
(b) संगठन
(c) नियंत्रण
(d) निर्देशन
उत्तर:
(a) नियोजन

प्रश्न 5.
उद्देश्य होने चाहिए –
(a) आदर्श
(b) जटिल
(c) व्यावहारिक
(d) एकपक्षीय।
उत्तर:
(c) व्यावहारिक

प्रश्न 6.
निम्न का योजना से संबंध नहीं है –
(a) बजट
(b) अभिप्रेरणा
(c) कार्यक्रम
(d) कार्यविधि।
उत्तर:
(b) अभिप्रेरणा

प्रश्न 7.
“मेरी संपत्ति, कारखाना, सब कुछ ले जाओ, मेरे लिए मेरा संगठन छोड़ दो, मैं अपने व्यापार को पुनः उसी स्थिति में खड़ा कर दूँगा।” यह कथन है –
(a) हेनरी फेयोल
(b) एफ.डब्ल्यू. टेलर
(c) हेनरी फोर्ड
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) हेनरी फोर्ड

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. ………….. एक ऐसी विधि है जो कार्य को पूरा करती है।
  2. नियोजन एक ……………. प्रक्रिया है।
  3. …………… प्रबन्ध का प्राथमिक कार्य है।
  4. बिना लक्ष्य के ……………………. की प्राप्ति नहीं हो सकती।
  5. बजट भविष्य के लिए ………………… का पूर्वानुमान है।

उत्तर:

  1. प्रक्रिया
  2. उद्देश्य निर्धारित
  3. नियोजन
  4. उद्देश्य
  5. खर्चों

प्रश्न 3.
एक शब्द या वाक्य में उत्तर दीजिए

  1. नियोजन करते समय प्रबन्ध को भविष्य के बारे में कुछ कल्पनाएँ (मान्यताएँ) करनी होती है। इन्हें क्या कहते हैं ?
  2. प्रबंध के सभी कार्यों में से एक कार्य को आधारभूत कार्य माना जाता है। उस कार्य का नाम बताइए।
  3. प्रतिस्पर्धी की नीति के विश्लेषण में कौन-सी योजना सहायता करती है ?
  4. वह योजना कौन-सी है जो कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले और न किए जाने वाले कार्य को बताती है ?
  5. प्रबंध के किस स्तर पर नियोजन कार्य किया जाता है ?
  6. नियोजन का घनिष्ठ संबंध किस प्रक्रिया से है ?
  7. लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए किसकी आवश्यकता होती है ?
  8. नियोजन किस प्रकार की प्रक्रिया है ?
  9. प्रबंधकीय कार्यों का आधार क्या है ?
  10. भावी अनिश्चतता दूर करने में क्या आवश्यक है ?
  11. योजना किस प्रकार की क्रिया है ?
  12. नीतियों के निर्धारण का आधार क्या होता है ?
  13. नियोजन में सर्वप्रथम किसका निर्धारण किया जाता है ?
  14. क्या नियोजन पीछे देखने की क्रिया है ?
  15. क्या नियोजन एक भौतिक कसरत है ?

उत्तर:

  1. परिकल्पनाएँ
  2. नियोजन
  3. व्यूह रचना
  4. नियम
  5. सभी स्तरों पर
  6. नियंत्रण
  7. श्रेष्ठनियोजन
  8. बौद्धिक प्रक्रिया
  9. नियोजन
  10. नियोजन
  11. निरंतर चलने वाली क्रिया
  12. लक्ष्य
  13. लक्ष्य/उद्देश्य
  14. नहीं
  15. नहीं।

प्रश्न 4.
सत्य या असत्य बताइये

  1. नियोजन एक भौतिक कसरत है।
  2. नियोजन एक मानसिक कसरत है।
  3. नियोजन प्रबन्ध का प्राथमिक कार्य है।
  4. नियोजन आगे देखने की प्रक्रिया है।
  5. नियोजन समय की बर्बादी है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. सत्य
  5. असत्य

प्रश्न 5.
सही जोड़ी बनाइये –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 4 नियोजन image - 1
उत्तर:

  1. (d)
  2. (e)
  3. (b)
  4. (f)
  5. (a)
  6. (c)

नियोजन अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
“नियोजन एक मानसिक कार्य है।” समझाइए।
उत्तर:
किसी भी योजना को बनाने के लिए उच्च स्तरीय सोच की आवश्यकता होती है, क्योंकि इसमें पूर्वानुमान लंगाना पड़ता है, विकल्पों का मूल्यांकन करते हुए उपयुक्त विकल्प का चयन करना पड़ता है। इन सभी कार्यों हेतु उच्च स्तरीय ज्ञान की आवश्यकता होती है। अतः नियोजन एक मानसिक कार्य है।

प्रश्न 2.
व्युत्पन्न योजना किसे कहते हैं ? क्या सहायक योजना व्युत्पन्न योजना होती है ?
उत्तर:
व्युत्पन्न योजना वह योजना कहलाती है जो मुख्य योजना की सहायता के लिए और मुख्य योजना में से ही बनाई जाती है। हाँ, सहायक योजना, व्युत्पन्न योजना होती है क्योंकि सहायक योजना की व्युत्पत्ति मुख्य योजना से ही होती है।.

प्रश्न 3.
नियोजन को भविष्यवाणी क्यों कहा जाता है ?
उत्तर:
नियोजन का संबंध भविष्य से होता है अतः इसे भविष्यवाणी भी कहा जाता है।

प्रश्न 4.
नियोजन की सीमाओं पर विजय पाने के क्या उपाय हो सकते हैं ?
उत्तर:
नियोजन की सीमाओं पर विजय प्राप्त करने के निम्नलिखित उपाय हो सकते हैं

  1. नियोजन करते समय वर्तमान और भविष्य की समस्याओं का ध्यान रखना चाहिए।
  2. नियोजन उच्च स्तरीय प्रबंधकों द्वारा किया जाना चाहिए।
  3. नियोजन की सफलता हेतु सभी कर्मचारियों का सहयोग लेना चाहिए।
  4. नियोजन की पूर्ण जानकारी संबंधित पक्षों को देनी चाहिए।
  5. नियोजन सदैव विश्वसनीय आँकड़ों द्वारा बनाया जाना चाहिए।
  6. नियोजन लोचपूर्ण होना चाहिए।

प्रश्न 5.
नियोजन के अंतर्गत पाँच डब्ल्यू (W) कौन-से हैं ?
उत्तर:
नियोजन के पाँच डब्ल्यू (W) हैं –

  1. क्या (What)
  2. कहाँ (Where)
  3. कब (When)
  4. क्यों (Why)
  5. तथा कौन (Who)

कोई भी योजना हो इन पाँच दृष्टिकोणों के आधार पर ही बनती है।

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प्रश्न 6.
मोर्चाबन्दी कितने प्रकार की होती है ? समझाइए।
उत्तर:
मोर्चाबन्दी दो प्रकार की होती है

  1. बाहरी मोर्चाबन्दी-बाहरी मोर्चाबन्दी से तात्पर्य है जो प्रतियोगी को ध्यान में रखकर बनाई जाती है।
  2. आंतरिक मोर्चाबन्दी-ऐसी मोर्चाबन्दी जो किसी परिवर्तन से संस्था के अंदर ही उत्पन्न होने वाली समस्या का सामना करने के लिए बनाई जाती है।

प्रश्न 7.
क्या बजट का संबंध नियोजन और नियंत्रण दोनों से होता है ? समझाइए।
उत्तर:
जब कोई बजट तैयार किया जाता है तो एक योजना बनाकर तैयार होता है अतः यह नियोजन से संबंधित होता है और जब परिणामों से विचलन को मापने के लिए एक उपकरण के रूप में इसका प्रयोग करते हैं तो इसका संबंध नियंत्रण से होता है। अतः कहा जा सकता है कि बजट का संबंध नियोजन तथा नियंत्रण दोनों से होता है।

प्रश्न 8.
यदि योजना न बनाई जाये तो इसका संगठन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
कार्य कैसे करना है, इसके लिए पहले से ही किया गया नियोजन कार्य को निर्देशित करता है। योजना के अभाव में अलग-अलग दशाओं में कार्य होगा तथा संगठन अपने इच्छित उद्देश्य को प्राप्त करने में सफल नहीं हो पाएगा।

प्रश्न 9.
वे कौन-सी घटनाएँ तथा शक्तियाँ हैं जो व्यवसाय की योजनाओं को प्रभावित करती हैं ?
उत्तर:
कीमतों तथा लागतों में वृद्धि, सरकारी हस्तक्षेप, अप्रत्याशित घटनाएँ तथा परिवर्तन, कानूनी प्रावधान तथा अधिनियम, व्यवसाय की योजनाओं को प्रभावित करते हैं।

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प्रश्न 10.
“नियोजन सफलता की गारंटी नहीं है।” इस कथन को समझाइए।
उत्तर:
व्यवसाय की सफलता तभी संभव है जब योजनाओं को उचित प्रकार से बनाया तथा क्रियान्वित किया जाए। व्यावसायिक वातावरण स्थिर नहीं होता वह गत्यात्मक होता है। नियोजन समस्याओं को रोक नहीं सकता। यह केवल उसका पूर्वानुमान लगा सकता है तथा समस्याओं के उत्पन्न होने पर उनका सामना करने के लिए आकस्मिक योजना बना सकता है। प्रबन्ध के द्वारा अच्छे प्रयास किए जाने के बाद भी नियोजन कई बार सफल नहीं हो पाता। इसलिए माना जाता है कि नियोजन सफलता की गारंटी नहीं है।

प्रश्न 11.
निम्न के बारे में आप क्या जानते हैं

  1. सेविवर्गीय नीति
  2. विक्रय नीति
  3. मूल्य निर्धारण नीति।

उत्तर:

  1. सेविवर्गीय नीति-इसके अंतर्गत यह निश्चित किया जाता है कि कर्मचारियों की पदोन्नति का आधार योग्यता होगी या फिर वरिष्ठता।
  2. विक्रय नीति-इस नीति में यह निश्चित किया जाता है कि माल नकद बेचा जाना है या उधार भी।
  3. मूल्य निर्धारण नीति-इस नीति में विक्रय मूल्य का निर्धारण किया जाता है अर्थात् यह तय किया जाता है कि लागत में कितना लाभ जोड़कर विक्रय मूल्य निर्धारित करना है।

प्रश्न 12.
नियोजन की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
नियोजन की बहुमान्य परिभाषाएँ निम्न हैं –

  1. बिली ई. गौज, “नियोजन मूल रूप से चयन करना है और नियोजन की समस्या उसी समय पैदा होती है जबकि किसी वैकल्पिक कार्य विधि की जानकारी हुई हो।”
  2. जार्ज आर. टैरी, “नियोजन भविष्य में झाँकने की एक विधि या तकनीक है तथा भावी आवश्यकताओं का एक रचनात्मक पुनर्निरीक्षण है, जिससे कि वर्तमान क्रियाओं को निर्धारित लक्ष्यों के सम्बन्ध में समायोजित किया जा सके।”

प्रश्न 13.
नियोजन प्रबंध का प्राथमिक कार्य है ?
उत्तर:
नियोजन प्रबंध का प्राथमिक कार्य है, सर्वप्रथम योजना बनाई जाती है। जिसके द्वारा प्रबंध अपने लक्ष्यों एवं उद्देश्यों को निर्धारत करता है तथा लक्ष्य प्राप्ति हेतु क्या, किसे कब कैसे करना है ? इसका निर्धारण करता है। तत्पश्चात् इसकी शर्तों के लिए सभी प्रबन्धकीय क्रियाएँ जैसे–संगठन, नियुक्तिकरण, निर्देशन, नियंत्रण सम्पन्न होती है।

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प्रश्न 14.
नियोजन और नियंत्रण में क्या संबंध है ?
उत्तर:
नियोजन और नियंत्रण में घनिष्ठ संबंध है। प्रभावी नियंत्रण उसी उपक्रम में रह सकता है, जहाँ पर समस्त क्रियाएँ निर्बाध गति से चलती हैं। बिना रुकावट के समस्त क्रियाएँ उसी उपक्रम में चलती हैं, जहाँ सम्पूर्ण व्यवस्था नियोजित हो, अतः स्पष्ट है कि जहाँ नियोजन नहीं वहाँ नियंत्रण नहीं। इस प्रकार नियंत्रण व्यवस्था हेतु नियोजन का अत्यधिक महत्व है।

प्रश्न 15.
प्रभावपूर्ण नियंत्रण हेतु नियोजन जरूरी है। समझाइए।
उत्तर:
प्रभावपूर्ण नियंत्रण की दृष्टि से नियोजन प्रबंधकीय नियंत्रण की कुंजी है। पूर्वानुमान बजट निर्माण, बजटरी नियंत्रण आदि के लिए पूर्ण नियोजन आवश्यक है। संस्था के लक्ष्य तभी पूरे हो सकते हैं जब प्रत्येक कदम पर प्रबंधकीय नियंत्रण प्रभावपूर्ण ढंग से लागू किया जाये।

प्रश्न 16.
नियोजन का आशय समझाइये।
उत्तर:
नियोजन-“नियोजन एक बौद्धिक क्रिया है, जिसके द्वारा प्रबंध अपने लक्ष्यों व उद्देश्यों को निर्धारित करता है तथा इसकी प्राप्ति हेतु विभिन्न विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ का चयन कर भावी कार्यों की रूपरेखा तैयार करता है तथा लक्ष्य प्राप्ति हेतु क्या, किसे, कब, कैसे करना है ? इसका निर्धारण करता है।”

प्रश्न 17.
यदि योजना न बनायी जाये तो इसका संगठन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
योजना के अभाव में कर्मचारी भिन्न-भिन्न दिशाओं में कार्य करेंगे और संगठन अपने इच्छित उद्देश्य को प्राप्त करने में असफल होगा।

प्रश्न 18.
विभिन्न विकल्पों में से श्रेष्ठ का चयन करना ही नियोजन है। समझाइये।
उत्तर:
नियोजन का निर्माण करते समय उपलब्ध विभिन्न विकल्पों की तुलना की जाती है अर्थात् लक्ष्यों, नीतियों, विधियों एवं कार्यक्रमों में सबसे उपयोगी एवं उत्तम का चयनकर योजनाएँ व नीतियों का निर्माण कर व्यावसायिक संस्थाओं की सफलता प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है।

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प्रश्न 19.
“नियोजन भविष्य को पकड़ने के लिए रखा गया पिंजड़ा है।” इस कथन को समझाइए।
उत्तर:
भविष्य के कार्यों का वर्तमान में निर्धारण ही नियोजन है। व्यवसाय के विभिन्न कार्य कब, कैसे कहाँ व किस रूप में करना है इसकी योजना बना लेना ही नियोजन है। इसके अन्तर्गत भविष्य के जोखिमों का पता लगाकर उससे बचने का आवश्यक प्रयोग पूर्ण किया जा सके।

प्रश्न 20.
“नियोजन से भावी अनिश्चितता दूर होती है।” समझाइए।
उत्तर:
बिना नियोजन के भविष्य के प्रत्येक कार्य में अनिश्चितता रहती है कि कब, क्या तथा कैसे करना है अतः इस अनिश्चितता से बचने के लिए नियोजन करना अत्यन्त आवश्यक है। इतना ही नहीं विभिन्न प्राकृतिक एवं अन्य कारकों से भविष्य में अनेक परिवर्तन होते रहते हैं, अतः इन परिवर्तनों का सामना करने के लिए भी नियोजन करना आवश्यक है।

प्रश्न 21.
“नियोजन से साधनों का सदुपयोग होता है।” समझाइए।
अथवा
“श्रेष्ठ नियोजन साधनों के दुरूपयोग को रोकता है।” समझाइए।
उत्तर:
प्रत्येक उपक्रम के पास साधन होते हैं, अतः उपलब्ध साधनों का सदुपयोग करना प्रत्येक उपक्रम के लिए आवश्यक है, इस हेतु नियोजन के अन्तर्गत विभिन्न आँकड़ों व प्रवृत्तियों के द्वारा भविष्य की घटनाओं का अनुमान लगाया जाता है ताकि लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सके। अत: नियोजन से उपक्रम के सभी साधनों का सदुपयोग किया जा सकता है अतः साधनों के दुरुपयोग को नियोजन रोकता है।

प्रश्न 22.
किसी भी राष्ट्र के लिए नियोजन का अत्यधिक महत्व है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
किसी भी राष्ट्र के लिए नियोजन का अत्यधिक महत्व है। इन्हीं योजनाओं से रोजगार, शिक्षा, व्यापार, उद्योग, कृषि आदि का विकास कैसे हो इस संबंध में योजनायें तैयार की जाती हैं ताकि बेरोजगारी, अशिक्षा जैसे देश के शत्रुओं को भगाया जा सके। राष्ट्रीय नियोजन के कारण ही आज रोजगार के साधनों में वृद्धि को रही है, शिक्षा का प्रसार हो रहा है, उद्योग धंधे स्थापित हो रहे हैं, बेरोजगारी को दूर करने का राष्ट्रीय प्रयास जारी है। यह सब नियोजन से भी संभव हो सका है।

प्रश्न 23.
“बिना नियोजन के लक्ष्यों की प्राप्ति संभव नहीं है। स्पष्ट कीजिए।”
उत्तर:
प्रत्येक संस्था का एक निश्चित लक्ष्य या उद्देश्य होता है। इन निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति समय पर तभी हो सकती है, जब संस्था की समस्त क्रियाएँ पूर्व नियोजित ढंग से सम्पन्न की जाये। नियोजन में प्रत्येक काये व्यवस्थित व सही समय पर होने से लक्ष्य पूर्व निर्धारित समय में आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 24.
बजट नियोजन का एक प्रारूप (प्रकार) क्यों माना जाता है ?
उत्तर:
क्योंकि बजट विभिन्न विभागों के निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु आवश्यक अनुमानित जन सामग्री, समय एवं अन्य साधनों का ब्यौरा देता है।

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प्रश्न 25.
“बजट का संबंध नियोजन व नियंत्रण दोनों से होता है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब हम बजट तैयार करते हैं, तो उसका संबंध नियोजन से होता है और जब हम परिणामों में विचलन को मापने के लिए एक उपकरण के रूप में इसका प्रयोग करते हैं तो इसका संबंध नियंत्रण से होता है।

प्रश्न 26.
नियंत्रण एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
व्यापारिक वातावरण में परिवर्तन आता रहता है और इसमें इतना अधिक परिवर्तन आता है कि एक ही प्रक्रिया को अपनाना व्यवसाय के लिए हितकर नहीं है और इसमें हानि भी हो सकती है अतः प्रत्येक व्यवसायी के लिए आवश्यक है कि वह परिवर्तनों को ध्यान में रखें तथा समयानुसार उसका अनुसरण करें।

नियोजन लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नियोजन की सीमाओं के दो उदाहरण दीजिए जो कि नियंत्रण से बाहर होते हैं।
उत्तर:
नियोजन की सीमाएँ निम्न हैं

  1. प्राकृतिक आपदा- प्राकृतिक आपदा कब, कहां और कैसे आ जाए यह पूर्व निश्चित नहीं होता आपदाएँ सदैव मानव के नियंत्रण के बाहर होती हैं।
  2. बाजार में प्रवृत्ति, रुचि या फैशन में परिवर्तन-बाजार में प्रतिदिन नए सामान उपलब्ध हो जाते हैं इस कारण उपभोक्ता की रुचि बदलती रहती है।

प्रश्न 2.
क्या नियोजन के बिना नियंत्रण संभव है ?
उत्तर:
नियोजन को नियंत्रण की पूर्व-आवश्यकता माना जाता है। यह उन लक्ष्यों अथवा मानकों को तय करता है जिसके अनुरूप वास्तविक कार्यानुपालन की माप की जाती है, अन्तरों को जाना जाता है तथा सुधारात्मक कार्यवाही की जाती है क्योंकि लक्ष्य न होने पर न तो अन्तरों का पता लगाया जाता है और न ही सुधारात्मक कार्यवाही हो सकती है अतः नियंत्रण के बिना नियोजन संभव ही नहीं है।

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प्रश्न 3.
नियोजन क्या है ? इसकी कोई दो परिभाषाएँ दीजिए।
उत्तर:
नियोजन से आशय-नियोजन से अभिप्राय वर्तमान में यह निश्चय करना कि भविष्य में क्या किया जाना है। यह करने से पूर्व सोचने की क्रिया है। नियोजन प्रक्रिया में प्रबंधक भविष्य का पूर्वानुमान लगाता है। दूसरे शब्दों में नियोजन हम जहाँ हैं, से लेकर हमें जहाँ जाना है कि बीच की दूरी को कम करता है।

परिभाषा-

  1. कूण्ट्ज एवं ओ. डोनेल के अनुसार, “क्या करना है, कैसे करना है, इसे क्यों करना है और इसे किसे करना है, का पूर्व निर्धारण ही नियोजन है।”
  2. एलन के अनुसार, “नियोजन भविष्य को पकड़ने के लिए बनाया गया पिंजरा है।”

प्रश्न 4.
बजट और कार्यक्रम में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बजट और कार्यक्रम में अंतर –

बजट:

  1. बजट का समय प्रायः एक वर्ष होता है।
  2. बजट में अधिक महत्व वित्त को दिया जाता है।
  3. बजट संस्था के सामान्य उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु एक गुणात्मक सारिणी है।
  4. बजट को प्रायः एक बड़ी योजना का वित्तीय आधार माना जाता है।

कार्यक्रम:

  1. कार्यक्रम का समय उस समय तक होता है जब तक कि उद्देश्य प्राप्त न हो जाए।
  2. कार्यक्रम में वित्त के साथ-साथ कार्यविधि को भी महत्व दिया जाता है।
  3. कार्यक्रम किसी विशिष्ट उद्देश्य की प्राप्ति हेतु क्रमबद्ध व समयबद्ध सारिणी है।
  4. प्रायः प्रत्येक कार्यक्रम का अपना-अपना बजट भी होता है।

प्रश्न 5.
स्थायी और एकल योजनाओं में अन्तर बताइए।
उत्तर:
स्थायी और एकल योजनाओं में अन्तर –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 4 नियोजन image - 2

प्रश्न 6.
नियोजन प्रक्रिया एक चरण के रूप में एक विकल्प का चयन करना’ से क्या आशय होता है ?
उत्तर:
एक विकल्प के चयन का अर्थ-एक विकल्प के चुनाव से अभिप्राय उद्देश्य की प्राप्ति के विभिन्न विकल्पों में से एक ऐसे विकल्प का चयन करना है जो संस्था के लिए उपयुक्त हो। यह विकल्प अधिक लाभप्रद, संभव तथा कम नकारात्मक हस्तक्षेप वाला होना चाहिए। कई बार ऐसा होता है कि कोई एक विकल्प उपयुक्त नहीं होता। ऐसी अवस्था में एक विकल्प का चुनाव करने की बजाय विभिन्न विकल्पों का मिश्रण चुना जा सकता है।

प्रश्न 7.
नियम व कार्यविधि में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नियम व कार्यविधि में अन्तर –
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 4 नियोजन image - 3

प्रश्न 8.
उद्देश्य व नीतियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उद्देश्य व नीतियों में अंतर
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 4 नियोजन image - 4

प्रश्न 9.
उद्देश्य की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  1. उद्देश्य का निर्धारण प्रायः संस्था के उच्च स्तर के प्रबंधकों द्वारा किया जाता है।
  2. वे भविष्य के मामलों का वर्णन करते हैं जिन्हें संगठन प्राप्त करना चाहता है।
  3. वे व्यापार की संपूर्ण योजना को मार्गदर्शन देते हैं।
  4. संगठन में विभिन्न विभागों या इकाइयों के अपने-अपने अलग उद्देश्य होते हैं।
  5. उद्देश्य दीर्घकालीन भी हो सकते हैं और लघुकालीन भी।

प्रश्न 10.
उद्देश्य के महत्व/आवश्यकता के बिन्दु लिखिए।
उत्तर:
उद्देश्य का महत्व –

  1. उद्देश्य संस्था की विभिन्न गतिविधियों को दिशा प्रदान करते हैं।
  2. वे संगठन में निर्णयन और अन्य समस्त क्रियाओं को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
  3. सुभाषित उद्देश्य प्रबंधकीय कुशलता लाते हैं।
  4. वे समन्वय को सुविधाजनक बनाते हैं।
  5. वे संसाधनों के सर्वोत्तम प्रयोग में सहायता करते हैं।

प्रश्न 11.
कार्यविधियों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
कार्यविधियों की विशेषताएँ

  1. वे एक दिनचर्या में प्रयोग किये जाने वाले चरणों का कालक्रम है कि गतिविधियों का किस प्रकार पालन किया जाये।
  2. ये प्रायः आंतरिक लोगों द्वारा पालन करने के लिए बनी होती हैं।
  3. कार्यविधियों का नीतियों के साथ गहरा संबंध होता है।
  4. क्रियाविधियाँ वे चरण हैं जिनका नीतियों के खाके में पालन किया जाता है।
  5. ये नियमित घटनाओं को संचालित करने का एक व्यवस्थित तरीका है।
  6. ये किसी विशेष कार्यों को करने के लिए चरणों की श्रृंखला तय करती हैं।

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प्रश्न 12.
व्यूह रचना (रणनीति) की विशेषताएँ/प्रकृति लिखिए।
उत्तर:
व्यूह रचना (रणनीति) की विशेषताएँ-निम्नलिखित विशेषताएँ व्यूह रचना की प्रकृति दर्शाती हैं

  1. रणनीतियाँ प्रतियोगियों की योजनाओं के प्रकाश में बनाई गई योजनाएँ हैं।
  2. वे एकल प्रयोग योजनाएँ होती हैं, क्योंकि वे बाजार की दशाओं में परिवर्तन के साथ प्रायः बदलती रहती है।
  3. इसके तीन उपाय हैं
    • दीर्घकालीन लक्ष्यों का निर्धारण
    • अमुक/विशिष्ट क्रियाविधि को अपनाना
    • उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संसाधनों का बँटवारा करना।
  4. रणनीतियों का निर्माण संस्था के उच्च स्तर प्रबंधकों के द्वारा होता है।
  5. रणनीति एक गत्यात्मक अवधारणा है।
  6. जब कभी किसी रणनीति का निर्माण किया जाता है तब उस समय, व्यावसायिक पर्यावरण का ध्यान रखना पड़ता है।

प्रश्न 13.
व्यूह रचना के महत्व के बिन्दु लिखिए।
उत्तर:
व्यूह रचना का महत्व

  1. यह एक व्यापक योजना है जो संगठन के उद्देश्य को पूरा करती है।
  2. यह संगठन के दीर्घकालीन जीवन तथा विकास के लिए आवश्यक है।
  3. व्यूह रचना की सहायता से संगठन पर्यावरण अवसरों से लाभ उठा सकते हैं।
  4. व्यूह रचना की सहायता से संगठन पर्यावरण अवरोधों का मुकाबला कर सकता है।

प्रश्न 14.
नियोजन की सीमाओं को नियंत्रित करने के कोई तीन उपाय लिखिए।
उत्तर:

  1. विश्वसनीय तथ्य एकत्रित करने पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।
  2. नियोजन में कर्मचारियों की भागीदारी होनी चाहिए।
  3. नियोजन बनाते समय बाहरी पर्यावरण का गहन अध्ययन करना चाहिए।

प्रश्न 15.
आदर्श नियोजन की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
एक आदर्श नियोजन की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. निश्चित लक्ष्य-प्रबंध का प्रथम कार्य नियोजन करना है। नियोजन के कुछ निश्चित लक्ष्य होते हैं जिनके आधार पर ही योजनाएँ तैयार की जाती हैं, जिससे लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त किया जा सके।
  2. श्रेष्ठ विकल्प का चयन-योजना बनाते समय विभिन्न विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ का चयन करके योजनाएँ एवं नीतियाँ बनाई जाती हैं।
  3. लोचता-योजना में लोचता का गुण होना चाहिए क्योंकि कोई भी योजना जितनी लचीली होगी उतनी ही सफल होगी।
  4. निरंतरता-कोई भी योजना एक बार बनाने की वस्तु नहीं है अपितु यह कार्य सदैव चलते रहना . चाहिए, आवश्यकता पड़ने पर पुरानी योजना में संशोधन भी किया जाता है।

प्रश्न 16.
बताइये किस प्रकार नियोजन निर्णय लेने को सुविधाजनक बनाता है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नियोजन में लक्ष्य निर्धारित किये जाते हैं। इन लक्ष्यों की सहायता से प्रबंधक विविध गतिविधियों (alternatives) का मूल्यांकन करता है और उपयुक्त गतिविधि का चयन करता है। योजनाएँ पहले से ही बना ली जाती हैं कि क्या करना है और कब । अतः निर्णय पूरे विश्वास से लिए जा सकते हैं।

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प्रश्न 17.
योजनाओं के प्रकार के रूप में ‘पद्धति’ और ‘बजट’ में अंतर्भेद कीजिए।
उत्तर:
पद्धति और बजट में अन्तर-पद्धति योजना का वह प्रकार है जो किसी काम को पूरा करने के लिए की जाने वाली विभिन्न क्रियाओं का क्रम निश्चित करती है। इसका संबंध सभी क्रियाओं से न होकर किसी एक क्रिया से होता है।

एक कार्य को पूरा करने की कई विधियाँ होती हैं। कई पद्धतियों से ऐसी पद्धति को चुना जाता है जिससे काम करने वाले व्यक्ति को थकावट कम हो, उत्पादकता में वृद्धि हो तथा कम लागते आये। पद्धतियाँ कर्मचारियों के लिए दिशा-निर्देश के रूप में कार्य करती हैं। ये कर्मचारियों के कार्यों में एकरूपता लाने में सहायता करती है।

प्रश्न 18.
योजनाओं के प्रकार के रूप में ‘उद्देश्य’ तथा ‘युक्ति/रणनीति’ में अंतर्भेद कीजिए।
उत्तर:
उद्देश्य तथा रणनीति में अंतर-उद्देश्य वे अंतिम परिणाम होते हैं जिन्हें व्यवसाय के किसी विशेष क्षेत्र में एक निश्चित समयावधि के भीतर प्राप्त करना होता है। ये व्यावसायिक क्रियाओं को दिशा प्रदान करते हैं। यह भविष्य की इच्छित स्थिति है जहाँ तक प्रबंध पहुंचना चाहता है। उद्देश्य संगठन के मूल होते हैं। उद्देश्यों का अर्थ है कि व्यापारिक फर्मे क्या चाहती हैं। उदाहरण के लिए एक संगठन का उद्देश्य 10% बिक्री बढ़ाना है। इसके विपरीत युक्ति/रणनीति/मोर्चाबंदी एक व्यापक योजना है जो उद्देश्यों को पूरा करती है। जब कभी रणनीति बनाई जाती है तो व्यापारिक वातावरण को ध्यान में रखा जाता है। व्यूह रचना के तीन आयाम हैं

  1. दीर्घकालीन लक्ष्यों का निर्धारण
  2. विशिष्ट कार्य-विधि को अपनाना तथा
  3. उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संसाधनों का बँटवारा करना।

नियोजन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नियोजन करते समय क्या बाधाएँ या कठिनाइयाँ आती हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नियोजन के मार्ग में आने वाली बाधाएँ. निम्न हैं

1. व्ययपूर्ण कार्य -यह एक न्यायपूर्ण कार्य है क्योंकि इसको बनाने में बहुत समय, धन तथा श्रम लगता है जिसके कारण लागत बढ़ जाती है। कभी-कभी नियोजन से मिलने वाले लाभ उस पर किए गए व्यय की अपेक्षा बहुत कम होते हैं।

2. भावी घटनाओं की अनिश्चितता -चूँकि भविष्य अनिश्चित होता है और योजनाएँ भविष्य के लिए ही बनाई जाती है अत: यह योजनाएँ पूरी तरह से सटीक हो यह कोई जरूरी नहीं होता क्योंकि जो होने वाला है वह तो होता ही है। ऐसी दशा में नियोजन क्यों और कैसे किया जाए उसका कोई औचित्य नहीं है।

3. सर्वोत्तम विकल्प के चयन में कठिनाई -दिये गए विकल्पों में सर्वोत्तम विकल्प कौन-सा है यह तय करना कठिन है। यह भी संभव है कि जो विकल्प आज सर्वोत्तम है, वह कल सर्वोत्तम नहीं रहे। अत: नियोजन के कार्य में बाधा ध्यान देने योग्य है।

4. नीरस कार्य-योजना बनाने का कार्य मुख्यत – सोचने तथा कागजी खानापूर्ति से संबंध रखता है जबकि प्रबंधक सक्रिय कार्य करना पसंद करते हैं। अतः उनके लिए नियोजन कार्य नीरस प्रकृति का बन जाता

5. लोच का अभाव -नियोजन होने के पश्चात् व्यावसायिक उपक्रमों को अपने समस्त संसाधनों को पूर्व निश्चित क्रम से कार्य में लगाना पड़ता है। इससे प्रबंध में कुछ सीमा तक लोच का अभाव हो जाता है।

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प्रश्न 2.
नियोजन के तत्व कौन-कौन से हैं ?
अथवा
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए

  1. लक्ष्य या उद्देश्य
  2. नीतियाँ
  3. बजट
  4. मोर्चाबन्दी
  5. कार्यक्रम।

उत्तर:

1. लक्ष्य या उद्देश्य-लक्ष्य नियोजन का आधार होते हैं, लक्ष्य परिणाम होते हैं, इन्हीं परिणामों की प्राप्ति के लिए भविष्य की समस्त क्रियायें सम्पादित की जाती हैं। लक्ष्यों के द्वारा हमें क्या करना है, का ज्ञान होता है।

2. नीतियाँ-लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए जिन सिद्धान्तों को ध्यान में रखा जाता है वे सिद्धान्त ही नीतियाँ कहलाती हैं। नीतियाँ प्रबंधकीय क्रियाओं का मार्गदर्शन करती हैं।

3. बजट-बजट भविष्य के लिये खर्चों का पूर्वानुमान होते हैं । बजट बन जाने से खर्चों को नियंत्रित एवं नियमित किया जा सकता है। बजट भविष्य की आवश्यकताओं का अनुमान है जो व्यक्तियों द्वारा लगाया जाता है और एक निश्चित समय में एक निश्चित उद्देश्य को प्राप्त करने का स्पष्टीकरण देता है। यह भविष्य की योजनाएँ होती हैं। इसके बनने के बाद ही विभिन्न विभागों के कार्य-कलापों की सीमा निश्चित हो जाती है।

4. मोर्चाबन्दी-मोर्चाबन्दी या व्यूहरचना एक व्यावहारिक योजना है जिसमें प्रतिस्पर्धियों को ध्यान में रखकर योजना बनाई जाती है। जब एक उत्पादक अपनी योजना को गुप्त रखकर अन्य प्रतिस्पर्धी की योजना को ज्ञात करने का प्रयास करता है, यही मोर्चाबन्दी कहलाती है।

5. कार्यक्रम-किसी कार्य को सम्पन्न करने की संक्षिप्त योजना को कार्यक्रम कहा जाता है। कार्यक्रम एक उद्देश्य की प्राप्ति के लिये आवश्यक प्रयासों की एक श्रेणी है जो प्राथमिकता के क्रम में व्यवस्थित होते हैं।

प्रश्न 3.
आदर्श नियोजन की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
आदर्श नियोजन की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं

1. निश्चित लक्ष्य (Definite goals) -प्रबन्ध का प्रथम कार्य है नियोजन करना। नियोजन के कुछ निश्चित लक्ष्य होते हैं। इन लक्ष्यों के आधार पर ही योजना तैयार की जाती हैं, जिससे लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त किया जा सके।

2. पूर्वानुमान (Forecasting) -नियोजन में पूर्वानुमान का विशेष महत्त्व है। जानकारी एवं आँकड़ों के आधार पर पूर्वानुमान किये जाते हैं, जिससे योजना बनाने में काफी सुविधा होती है। हेनरी फेयोल ने इस हेतु ‘PREVOYANCE’ शब्द का प्रयोग किया है, जिसका आशय आगे देखना (Looking Ahead) होता है।

3. श्रेष्ठ विकल्प का चुनाव (Selection of best alternatives) – योजना बनाते समय विभिन्न विकल्पों को तैयार कर उनकी तुलना की जाती है, तत्पश्चात् उनमें से श्रेष्ठ का चुनाव कर कार्य हेतु योजनायें एवं नीतियाँ बनाई जाती हैं।

4. सर्वव्यापकता (Pervasiveness) – सम्पूर्ण प्रबन्ध में नियोजन व्याप्त है, प्रबन्ध के प्रत्येक क्षेत्र में नियोजन का अस्तित्व है, प्रत्येक प्रबन्धक को योजनायें बनानी पड़ती हैं। इसी प्रकार फोरमैन भी अपने स्तर पर योजनायें बनाता है। अत: यह सर्वव्यापी है।

5. लोचता (Flexibility) – योजना में लोच का गुण अवश्य रहता है, अर्थात् आवश्यकतानुसार उसमें परिवर्तन करना पड़ता है, योजनायें जितनी लचीली होंगी, योजना उतनी सफल होगी। अतः योजना में लोचता होनी चाहिये।

6. निरन्तरता (Continuity) – योजना केवल एक बार बनाने की वस्तु नहीं है, अपितु योजना बनाने का कार्य निरन्तर चलता रहता है। आवश्यकतानुसार पुरानी योजनाओं में संशोधन भी किया जाता है। अत: योजनायें निरन्तर चलती रहती हैं।

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प्रश्न 4.
नियोजन के उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
नियोजन के उद्देश्य (Goals or Objectives of Planning) नियोजन करना मनुष्य के लिये आवश्यक है। नियोजन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं –

1. भावी कार्य-योजना तैयार करना-नियोजन का आशय है भविष्य के गर्त को देखना अर्थात् भविष्य में क्या, कहाँ, कैसे, किससे व कौन कार्य करेगा इसकी रूपरेखा तैयार करना ही नियोजन का उद्देश्य होता है।

2. भावी गतिविधियों में निश्चितता लाना-कार्य-योजना सुनिश्चित न होने से कौन-सा कार्य कब, कहाँ, कैसे व कौन करेगा यह अनिश्चित रहता है, जबकि इसका पूर्व निर्धारण कर लेने से भविष्य के कार्यों में निश्चितता आती है। अतः नियोजन भविष्य के कार्य में निश्चितता व स्थिरता प्रदान करता है।

3. कार्यों में एकरूपता लाना-नियोजन द्वारा कार्यों में एकरूपता लाई जा सकती है क्योंकि कार्यों को करने का सम्पूर्ण ढंग नियोजन द्वारा पूर्व से ही निर्धारित कर दिया जाता है। कार्यों में एकरूपता से व्यवसाय व उत्पाद की ख्याति बढ़ती है।

4. भविष्य की जानकारी देना-नियोजन करने के पश्चात् उसकी जानकारी संबंधित कर्मचारियों व अधिकारियों को दी जाती है, ताकि वे नियोजन के अनुरूप कार्य कर सकें। अतः जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से भी नियोजन किया जाता है।

5. अपव्यय रोककर मितव्ययिता लाना-नियोजन के अंतर्गत एक मानक व सम्भावित बजट तैयार किया जाता है। इसमें उन बिन्दुओं को ध्यान में रखा जाता है जहाँ पर अधिक व अनावश्यक व्यय होने की सम्भावना है। इन व्ययों को कम करने के उपाय खोजे जाते हैं । इस प्रकार नियोजन का उद्देश्य अपव्यय को रोककर उत्पादन में मितव्ययिता लाना है।

6. पूर्वानुमान लगाना-नियोजन में भविष्य के कार्यों व व्ययों का पूर्वानुमान लगाया जाता है ताकि उसमें आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सके।

प्रश्न 5.
नियम व नीतियों में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
नियम व नीति में अन्तर –
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प्रश्न 6.
नीतियों तथा कार्यविधियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नीतियाँ तथा कार्यविधि में अंतर
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प्रश्न 7.
नियोजन के महत्व या लाभ लिखिए। –
उत्तर:
व्यवसाय हो या सामान्य जीवन, धर्म हो या राजनीति किसी भी क्षेत्र में नियोजन के महत्त्व को नकारा नहीं जा सकता। सत्य तो यही है कि बिना नियोजन के आज कोई भी कार्य अधूरा-सा लगने लगता है। बिना मानचित्र (Map) बनाये हम एक अच्छे भवन निर्माण की कल्पना नहीं कर सकते हैं। आज व्यवसाय में प्रतिदिन हमें नियोजन का सहारा लेना पड़ता है। इसीलिये कहा गया है कि नियोजन व्यवसाय का आधार स्तम्भ है। जिस प्रकार मकान का आधार (Base) कमजोर हो तो पूरा मकान कमजोर होगा। वैसे ही किसी व्यवसाय का नियोजन ही कमजोर रहा तो वह व्यवसाय कभी भी सशक्त व विकसित नहीं हो सकता। नियोजन के महत्त्व को स्पष्ट करते हुए जी.डी. एच. कोल ने कहा है-“बिना नियोजन के कोई भी कार्य तीर और तुक्के पर आधारित होगा जिससे केवल भ्रम, सन्देह एवं अव्यवस्था ही उत्पन्न होगी।” नियोजन के महत्त्व को निम्न शीर्षकों द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है

1. प्रबन्धकीय कार्यों का आधार – प्रबन्ध के अन्तर्गत अनेक कार्य किये जाते हैं, जैसे-संगठन, निर्णयन, नियंत्रण, समन्वय, अभिप्रेरणा आदि। इन सभी कार्यों को कैसे पूर्ण करना है, इस हेतु एक योजना बनाई जाती है, इसी के साथ विभिन्न नीतियों व कार्य विधियों को कैसे लागू किया जाये, ताकि लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके, इस हेतु एक योजना अवश्य बना ली जाती है। इस प्रकार प्रबन्ध के अन्य कार्यों का नियोजन आधार है।

2. भावी अनिश्चितता को दूर करने के लिये – बिना नियोजन के भविष्य के प्रत्येक कार्य में अनिश्चितता.रहती है कि अब क्या व कैसे करना है, अतः इस अनिश्चितता से बचने के लिये नियोजन करना अत्यन्त आवश्यक है। इतना ही नहीं विभिन्न प्राकृतिक एवं अन्य कारकों से भविष्य में अनेक परिवर्तन होते रहते हैं। अतः इन परिवर्तनों का सामना करने के लिये भी एक योजना बनाना अच्छा होता है।

3. उतावले निर्णयों से बचने के लिये – एक कहावत है कि “जल्दी काम शैतान का’ अर्थात् उतावले या शीघ्र निर्णय उसी समय लेना चाहिये जब कोई अन्य विकल्प न हो, उतावले निर्णयों की सफलता पर सदैव संदेह रहता है, इसीलिये व्यवसाय के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु पूर्व में ही नियोजन कर लिया जाये तो उतावले निर्णयों से बचा जा सकता है। ऐलन ने कहा है- “नियोजन के माध्यम से उतावले निर्णयों और अटकलबाजी कार्यों की प्रकृति को समाप्त किया जा सकता है।”

4. साधनों का सदुपयोग—प्रत्येक उपक्रम के पास साधन होते हैं । अतः उपलब्ध साधनों का सदुपयोग करना प्रत्येक उपक्रम के लिये आवश्यक है। इस हेतु नियोजन के अन्तर्गत विभिन्न आँकड़ों (Datas) व प्रवृत्तियों ( Trends) के द्वारा भविष्य की घटनाओं का अनुमान लगाया जाता है, ताकि लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सके। नियोजन से उपक्रम के सभी साधनों का सदुपयोग किया जा सकता है।

5. लागत व्यय में कमी-नियोजन में प्रत्येक स्तर पर की जाने वाली क्रियाओं के व्यय का पूर्वानुमान लगाया जाता है, यदि किसी स्तर पर व्यय का अनुमान अधिक हो तो उसे पूर्वानुमान करते समय ही कम करने के उपाय खोजे जा सकते हैं साथ ही नियोजन द्वारा विभिन्न क्रियाओं में आने वाली लागत को भी नियंत्रित किया जा सकता है। नियोजन में वस्तु की लागत के विभिन्न स्तर (Process) पर लागत का अनुमान लगाकर एक मानक (Standard) निर्धारित किया जाता है, तत्पश्चात् इसी मानक को ध्यान में रखकर उत्पादन पर व्यय किये जाते हैं।

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प्रश्न 8.
कभी-कभी प्रबंध के सर्वोच्च प्रबंधों के बावजूद भी नियोजन क्यों असफल होते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
हमने नियोजन के लाभों एवं महत्त्व की विस्तृत विवेचना की है। इनके लाभों एवं महत्त्व को देखते हुये प्रबन्धकों को नियोजन अत्यन्त सावधानी व सतर्कता से करना चाहिये तथा नियोजन का कार्य अनुभवी व विशिष्ट योग्यता वाले प्रबन्धकों से कराना चाहिये। नियोजन के निर्माण में सामान्यतः जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है वे निम्नलिखित हैं

1. श्रेष्ठ नियोजकों का अभाव-नियोजन सदैव भविष्य के बचाव के लिये किया जाता है। इसके लिये योग्य, अनुभवी एवं कुशल नियोजकों (नियोजन करने वाले) का अभाव रहता है। योग्य योजना बनाने वाले सभी उपक्रम को नहीं मिल पाते हैं साथ ही भविष्य की योजना के लिये मशीन, यन्त्रों तथा सांख्यिकी ज्ञान की आवश्यकता होती है। इसके अभाव में भी अच्छे नियोजक श्रेष्ठ योजना नहीं बना सकते।

2. नियोजन तकनीक का अभाव-नियोजन का आधार भविष्य होता है भविष्य में क्या होगा और क्या नहीं होगा इसको ज्ञात करने के लिये विशिष्ट तकनीक से अनुमान लगाना तथा विभिन्न वैज्ञानिक तरीकों से जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है। इसके लिये विशिष्ट यन्त्रों व उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है। भारत में इनका अभाव रहा है तथापि विगत कुछ वर्षों से सूचना तकनीक (Information Technology) के क्षेत्र में आशातीत प्रगति हुई है। इससे मौसम, वर्षा आदि का अनुमान लगाना अब आसान हो गया है। किन्तु व्यापारिक क्षेत्र में अनुमान लगाना काफी कठिन है।

3. सर्वोत्तम विकल्प के चुनाव में कठिनाई-नियोजन करने में अनेक विकल्प सामने रहते हैं। सभी विकल्पों में गुण व दोष होते हैं उनमें से कौन सा श्रेष्ठ होगा यह चुनना एक कठिन कार्य है। इसे चुनने में भी विशिष्ट अनुभव व ज्ञान की आवश्यकता होती है। साथ ही वर्तमान में जो विकल्प श्रेष्ठ होगा वह भविष्य में भी श्रेष्ठ होगा यह आवश्यक नहीं है। अत: सर्वोत्तम विकल्प के चुनने की समस्या भी नियोजन की एक सीमा होती है।

4. भविष्य की अनिश्चितता-यह सर्वविदित है कि भविष्य अनिश्चित है और कोई भी अनुमान शत्-प्रतिशत सत्य नहीं निकलता है। अतः नियोजन के निर्माण में या योजना बनाने में सबसे बड़ी समस्या भविष्य की अनिश्चितता है। भविष्य की अनिश्चितता के कारण ही अनेक समस्यायें एवं बाधायें उत्पन्न होती हैं।

5. नियोजन के दोष या कमियाँ-नियोजन की कुछ सीमायें स्वयं नियोजन के कुछ दोषों के कारण पाई जाती हैं जो इस प्रकार हैं

  1. कुछ आलोचकों का मानना है कि नियोजन अपव्यय है इसे तैयार करने में समय, धन व श्रम लगता है। वह अनावश्यक है।
  2. कुछ आलोचकों का मानना है कि नियोजन एक निश्चित तरीके से कार्य करने को बाध्य करता है जबकि समय परिवर्तनशील है इसमें अधिक स्थिरता उचित नहीं है।
  3. नियोजन की प्रक्रिया में प्रबन्धकों, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उचित नहीं मिल पाता।
  4. योजनाओं का सामयिक मूल्यांकन करने में असफल रहना।
  5. औपचारिकताओं पर अत्यधिक ध्यान देना।
  6. नियोजन पूर्व निर्धारित कार्य पद्धतियों, विधियों, कार्यक्रमों एवं प्रभावों के आधार पर कार्य करने के लिए व्यक्तियों को बाद्ध करता है। फलत: व्यक्तियों में पहलपन (Initiative) का अभाव रहता है।

नियोजन की सीमाओं के सम्बन्ध में जार्ज ए. स्टेनर (George A. Steener) ने कहा है- “नियोजन न तो एक प्रबन्धक की सभी समस्याओं का समाधान ही करेगा और न ही व्यवसाय की सफलता की गारण्टी देगा।”

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प्रश्न 9.
नियोजन के सिद्धांत लिखिए।
उत्तर:
बिना किसी सिद्धान्त के किसी भी शास्त्र का विकसित होना सम्भव नहीं है। प्रबन्धशास्त्री कूण्ट्ज ओ’ डोनेल ने विभिन्न दृष्टिकोणों से नियोजन के सिद्धांतों को स्पष्ट किया है। प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित

1. उद्देश्यों के प्रति योगदान का सिद्धान्त (Principle of contribution to objectives) – यह सिद्धांत इस बात पर बल देता है कि नियोजन संस्था के उद्देश्यों की प्राप्ति में योगदान देने वाला होना चाहिये। यह सिद्धान्त इस बात की ओर भी संकेत करता है कि किसी भी नियोजन को जब तक उद्देश्योन्मुख नहीं किया जाता तब तक वह नियोजन अच्छा परिणाम नहीं दे सकता है।

2. नियोजन की मान्यताओं का सिद्धान्त (Principle of planning premises) – सामान्यतः किसी भी कार्य को करने की कुछ मान्यतायें हैं जिनको ध्यान में रखते हुये ही कार्य किया जाता है। अच्छे नियोजन की मान्यताओं को पहले से ही निश्चित किया जाना चाहिये, इससे समन्वय के कार्यों में अत्यधिक सहायता मिलती है।

3. कार्यकुशलता का सिद्धान्त (Principle of efficiency) – इसी सिद्धान्त के अनुसार नियोजन न्यूनतम प्रयत्नों एवं लागतों द्वारा संगठन या संस्था के लक्ष्यों की प्राप्ति में सहयोग देने वाला होना चाहिये।

4. लोच का सिद्धान्त (Principle of flexibility) – इस सिद्धान्त के अनुसार योजना या नियोजन सदैव लोचदार व परिवर्तनशील होना चाहिये क्योंकि भविष्य की समस्याओं एवं परिस्थितियों के अनुरूप नियोजन में परिवर्तन आवश्यक है।

5. व्यापकता का सिद्धान्त (Principle of pervasiveness) – इस सिद्धान्त के अनुसार नियोजन एक सर्वव्यापी क्रिया है जिसकी आवश्यकता एक उपक्रम में प्रबन्ध के सभी स्तरों में होती है। अतः नियोजन प्रबन्ध के सभी स्तरों के अनुरूप होना चाहिये।

6. समय का सिद्धान्त (Principle of timing) – नियोजन में समय का विशेष महत्व है क्योंकि समय पर नियोजन बना कर उचित समय पर क्रियान्वयन नहीं हो सका तो लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन होगा।

MP Board Class 12 Business Studies Important Questions

MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 8 बीमार का इलाज

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 8 बीमार का इलाज (एकांकी, उदयशंकर भट्ट)

बीमार का इलाज पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

बीमार का इलाज लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
चंद्रकांत किस सभ्यता व रहन-सहन का प्रेमी था?
उत्तर:
चंद्रकांत अंग्रेजी सभ्यता व रहन-सहन का प्रेमी था।

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प्रश्न 2.
कांति अपने मित्र को आगरा क्यों लाया?
उत्तर:
कांति अपने मित्र को छुट्टियाँ बिताने के लिए आगरा लाया था।

प्रश्न 3.
आगरा पहुँचने पर विनोद का मज़ा किरकिरा क्यों हो गया था?
उत्तर:
आगरा पहुंचने पर विनोद बीमार पड़ गया और उसका सारा मज़ा किरकिरा हो गया था।

प्रश्न 4.
घर में स्वच्छता और सलीके का अभाव क्यों था?
उत्तर:
नौकर पर निर्भर रहने तथा रूढ़िवादी गृहस्वामिनी सरस्वती के कारण घर में स्वच्छता और सलीके का अभाव था।

प्रश्न 5.
होम्योपैथी के प्रति विश्वास किसे था और क्यों?
उत्तर:
कांति का विश्वास होम्योपैथी के डॉक्टर नानक चंद के प्रति है क्योंकि उनके हाथ में जादू है। कांति को विश्वास है कि उनके इलाज से शाम तक बुखार उतर जाएगा।

प्रश्न 6.
डॉ. गुप्ता ने विनोद का मार्जन होते देखकर क्या कहा?
उत्तर:
डॉ. गुप्ता ने विनोद का मार्जन होते देखकर कहा, “महाराज क्यों मारना चाहते हो बीमार को? निमोनिया हो जाएगा। अटरन्यूसेन्स।”

बीमार का इलाज दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
“तुमने तो कुंभकरण के चाचा को भी मात कर दिया” यह कथन किसने, किससे और क्यों कहा था?
उत्तर:
यह कथन कांति ने अपने मित्र विनोद से कहा था, क्योंकि वह आठ बजे तक सोता रहा। विनोद को कांति के साथ गाँव जाना था। इसलिए उसे अब तक तैयार हो जाना चाहिए था।

प्रश्न 2.
चंद्रकांत विनोद के इलाज के लिए किसे बुलाना उचित समझते है? कारण स्पष्ट कीजिए। इससे आप कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर:
चंद्रकांत विनोद के इलाज के लिए एलोपैथी के डॉक्टर गुप्ता को बुलाना उचित समझते हैं। इसका कारण यह है कि चंद्रकांत को एलोपैथी चिकित्सा-पद्धति पर विश्वास है। उनका मानना है कि डॉ. गुप्ता ने प्रतिमा का बुखार आते ही उतार दिया था। दूसरी बात यह कि वे मानते थे कि ‘कड़वी भेषज बिन पिये मिटे न तन को ताप।’ हम चंद्रकांत की बात से बिलकुल सहमत नहीं हैं; क्योंकि अन्य चिकित्सा पद्धति भी रोगों का निदान करने की क्षमता रखती है।

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प्रश्न 3.
सुखिया विनोद की किस प्रकार की चिकित्सा के पक्ष में था? क्या आप उसके इलाज से सहमत होते?
उत्तर:
सुखिया विनोद की झाड़-फूंक की पद्धति से चिकित्सा कराने के पक्ष में था। उसका विश्वास था कि ओझा के हाथ फेरते ही बुखार उतर जाएगा। इसीलिए वह ओझा से अभिमंत्रित जल भी लाया था।

प्रश्न 4.
‘कड़वी भेषज बिन पिये, मिटे न तन को ताप’ चंद्रकांत के इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इसका आशय है कि कड़वी औषधि (दवाई) पिये विना शरीर का ताप नहीं मिटता। बुखार से छुटकारा पाने के लिए कड़वी दवा पीना आवश्यक होता है। स्वस्थ होने के लिए कड़वी दवाई तो पीनी ही पड़ती है।

प्रश्न 5.
परिवार के सदस्यों में इलाज के संबंध में हुए विवाद का विनोद पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
कांति का मित्र विनोद छुट्टियाँ मनाने कांति के घर आगरा गया था। वहाँ उसे बुखार आ गया, जिससे एक तो उसकी छुट्टियों का मजा किरकिरा हो गया दूसरा, घर में सब उसके इलाज को लेकर झगड़ रहे थे जिससे विनोद परेशान हो गया। वह झगड़े से इतना परेशान हो गया था कि उसे किसी की भी दवाई न पीने का निर्णय लेना पड़ा। जब उसे यह समझ में नहीं आया कि वह किसकी बात माने या किसकी न माने, तो वह बाहर जाने के लिए उठा और बोला-मेरा बुखार घूमने से उतरता है।

प्रश्न 6.
नीचे कुछ कथन और उनको बोलने वालों के नाम दिए गए हैं। ‘क’ स्तंभ का ‘ख’ स्तंभ से सही संबंध जोडिए।
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 8 बीमार का इलाज img-1
उत्तर:

  1. (घ)
  2. (ङ)
  3. (ग)
  4. (ख)
  5. (क)

बीमार का इलाज भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्ति का भाव-विस्तार कीजिए’ –

प्रश्न 1.
सारी देह अंगारे-सी दहक रही है।’
उत्तर:
विनोद बुखार से पीड़ित है। वुखार के कारण उसका शरीर अंगारे की भाँति दहक रहा है; अर्थात् उसे अत्यधिक बुखार है। इससे उसका शरीर बहुत गरम है।

बीमार का इलाज भाषा-अनुशीलन

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प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के हिंदी रूप लिखिए –
नाइट, खैर, हकीम, फीवर, फैमिली, काबिल, माइंड, ख्याल, फेथ, सलीका।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 8 बीमार का इलाज img-2

प्रश्न 2.
निम्नलिखित सामासिक शब्दों का समास-विग्रह कर उनके नाम लिखिए –
गृह स्वामिनी, मंत्राभिषिक्त, पढ़े-लिखे, माता-पिता, यथाशक्ति, चौराहा, नीलकंठ, गजानन, पीताम्बर। .
उदाहरण:
आदि-प्रारंभ, आदी-अभ्यस्त।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 8 बीमार का इलाज img-3

प्रश्न 3.
नीचे उच्चारण में पर्याप्त समानता और आंशिक अंतर वाले शब्द दिए गए हैं। इनके अर्थ भिन्न-भिन्न हैं। उदाहरण के अनुसार इनके अर्थ लिखिए –
अतुल-अतल, अभय-उभय, आकर-आकार, आभरण-आवरण, बलि-बली, प्रसाद-प्रासाद, शोक-शौक, शकल-सकल, ग्रह-गृह, शर-सर, अनिल-अनल।
उत्तर:

  • अतुल – असीम
    अतल – अथाह।
  • अभय – निडर
    उभय – दोनों।
  • आकर – खजाना
    आकार – रूप।
  • आभरण – आभूषण
    आवरण – ढकना।
  • बलि – चढ़ावा
    बली – सशक्त।
  • प्रसाद – देवताओं को चढ़ाई गई वस्तु
    प्रासाद – महल।
  • शोक – दुख
    शौक – चाह, रुचि।
  • शकल – सुन्दर
    सकल – समस्त।
  • ग्रह – नक्षत्र
    गृह – घर।
  • शर – बाण
    सर – तालाब।
  • अनिल – वायु
    अनल – आग।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
नाक में दम होना, भाड़ झोंकना, चक्कर में पड़ना, गाँट बाँधना, मात देना, बाल धूप में पकना।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 8 बीमार का इलाज img-4

प्रश्न 5.
निम्नलिखित लोकोक्तियों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए –

  1. घोड़ी नहीं चढ़े तो क्या बारात भी नहीं देखी।
  2. आम के आम गुठलियों के दाम।
  3. हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और।
  4. अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गईं खेत।
  5. आधी छोड़ सारी को धारू, आधी मिले न पूरी पावै।
  6. थोथा चना बाजे घना।

उत्तर:

1. घोड़ी नहीं चढ़े, तो क्या बारात भी नहीं देखी:
राकेश अंतरिक्ष में नहीं गया तो क्या हुआ? उसे अंतरिक्ष की बहुत जानकारी है। उस पर तो ‘घोड़ी नहीं चढ़े, तो क्या बारात भी नहीं देखी’ वाली कहावत पूरी तरह चरितार्थ होती है।

2. आम के आम गुठलियों के दाम:
प्रापर्टी डीलर ने यह फ्लैट सस्ते में खरीदा है। वह चार साल फ्लैट में रहा और अब लाभ में बेच दिया। इसे कहते हैं ‘आम के आम गुठलियों के दाम’।

3. हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और:
वामदल प्रतिदिन सरकार से समर्थन लेने की धमकियाँ देते रहते हैं और करते-धरते कुछ नहीं हैं, भैया इनकी स्थिति हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और वाली है।

4. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गईं खेत:
अब फेल होने पर रोने से क्या लाभ; क्योंकि अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।

5. आधी छोड़ सारी को धावै, आध्री मिले न पूरी पावै:
अधिक लालच करना अच्छा नहीं होता। कभी ऐसा न हो। – आधी छोड़ सारी को धावै, आधी मिले न पूरी पावै। इसलिए जो कुछ मिलता है उसे ले लो।

6. थोथा चना बाजे घना:
वह केवल डींगें मारना जानता है। बातें तो ऐसी करता है, मानो संसार के वैज्ञानिक उसके सामने कुछ नहीं। अरे भाई! उसकी स्थिति तो थोथा चना बाजे घना वाली है।

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों को कोष्ठक में दिए निर्देशानुसार रूपान्तरित कीजिए –

  1. मेरे भाग्य में गाँव की सैर नहीं लिखी है। (विधिसूचक)
  2. कमबख्त बुखार बेमौके आ धमका। (प्रश्नवाचक)
  3. गाँव का रास्ता ऊबड़-खाबड़ है। (निषेधात्मक)
  4. बुखार कभी झाड़-फूंक से गया है। (विस्मयादिवाचक वाक्य)
  5. पंडित जी मंदिर में पूजा कर रहे हैं। (आज्ञावाचक)

उत्तर:

  1. मेरे भाग्य में गाँव की सैर लिखी है।
  2. क्या कमबख्त बुखार बेमौके आ धमका?
  3. गाँव का रास्ता ऊबड़-खाबड़ नहीं है।
  4. अरे! बुखार कभी झाड़-फूंक से गया है।
  5. पंडितजी, मंदिर में पूजा करो।

प्रश्न 7.
उदाहरणः यदि तुम दवा नहीं पिओगे, तो तुम्हें लाभ नहीं होगा।
दवा पिए बिना तुम्हें लाभ नहीं मिलेगा। उदाहरण के अनुसार दिए गए वाक्यों को रूपान्तरित कीजिए।

  1. यदि तुम स्टेशन नहीं जाओगे तो श्याम सुंदर नहीं मिलेगा।
  2. यदि आप दूध नहीं पिएँगे तो शरीर में शक्ति नहीं आएगी।
  3. जब तक मैं दवा नहीं पियूँगा तब तक मुझे नींद नहीं आएगी।
  4. यदि रश्मि नहीं सोएगी तो उसे आराम नहीं मिलेगा।

उत्तर:

  1. स्टेशन गए बिना तुम्हें श्याम नहीं मिलेगा।
  2. दूध पिए बिना शरीर में शक्ति नहीं आएगी।
  3. दवा पिए बिना मुझे नींद नहीं आएगी।
  4. सोए बिना रश्भि को आराम नहीं मिलेगा।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार वाक्यों में रूपान्तरित कीजिए –

  1. वह गृह कार्य करके स्कूल जाता है। (संयुक्त वाक्य)
  2. प्रसिद्ध कवि का सभी आदर करते हैं। (मिश्र वाक्य)
  3. मैं उन लोगों में से नहीं हूँ, जो दवा देने के लिए भागते फिरें।(सरल वाक्य)
  4. जो अपनी जान-पहचान के लोग हैं, वे सदा प्रसन्न रहें। (सरल वाक्य)

उत्तर:

  1. वह गृह कार्य करता है और स्कूल जाता है।
  2. जो प्रसिद्ध कवि होते हैं, उनका सभी आदर करते हैं।
  3. मैं दवा लेने के लिए भागते फिरने वाले लोगों में से नहीं हूँ।
  4. अपनी जान-पहचान के लोग सदा प्रसन्न रहें।

बीमार का इलाज योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
अपने सहपाठियों की सहायता से इस एकांकी का अभिनय कीजिए।
उत्तर:
अपने भाषा अध्यापक की सहायता से छात्र अभिनय की तैयारी कर अभिनय करें।

प्रश्न 2.
यदि आपके पड़ोस में किसी बीमार के इलाज के संबंध में कोई विवाद हो तो आप उसे कैसे सुलझाएँगे?
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

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प्रश्न 3.
आप 25 घरों का सर्वे कीजिए और जानिए कि आपके गाँव/शहर में अधिकांश लोग इलाज किस विधि द्वारा कराते हैं।
उत्तर:
छात्र स्वयं करें।

बीमार का इलाज परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
अंग्रेजी सभ्यता व रहन-सहन का प्रेमी है –
(क) कांति
(ख) विनोद
(ग) शांति
(घ) चंद्रकांत
उत्तर:
(घ) चंद्रकांत।

प्रश्न 2.
विनोद लापरवाही से कभी उठकर बैठ जाता है और कभी………….है।
(क) उठकर खाँसने लगता
(ख) उठकर टहलने लगता
(ग) उठकर जाने लगता
(घ) उठकर दवाई लेने लगता
उत्तर:
(ख) उठकर टहलने लगता।

प्रश्न 3.
प्रतिमा का केस खराब कर दिया था –
(क) वैद्य हरिचंद्र ने
(ख) डॉक्टर गुप्ता ने
(ग) डॉ. भटनागर ने
(घ) पुजारीजी ने
उत्तर:
(ग) डॉ. भटनागर ने।

प्रश्न 4.
‘दूध तो मैं पिऊँगा नहीं’, किसने कहा?
(क) कांति ने
(ख) शांति ने
(ग) प्रतिमा ने
(घ) विनोद ने
उत्तर:
(घ) विनोद ने।

प्रश्न 5.
मैं चाहता हूँ कि अपनी जान-पहचान के लोग सदा ……. रहें।
(क) प्रसन्न
(ख) बीमार
(ग) निरोग
(घ) स्वस्थ
उत्तर:
(क) प्रसन्न।

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प्रश्न 6.
कांति के साथ पढ़े हैं –
(क) डॉ. भटनागर
(ख) डॉ. नानकचंद
(ग) वैद्य हरिचंद
(घ) विनोद
उत्तर:
(घ) विनोद।

प्रश्न 7.
सुखिया किस चिकित्सा पद्धति में विश्वास करता है?
(क) झाड़-फूंक
(ख) एलोपैथी
(ग) होमियोपैथी
(घ) आयुर्वेदिक
उत्तर:
(क) झाड़-फूंक।

प्रश्न 8.
बीमारी पहचानने में कर तो ले कोई मेरा मुकाबला, कहा –
(क) हरिचंद्र वैद्य ने
(ख) डॉ. गुप्ता ने
(ग) डॉ. नानकचंद ने
(घ) चंद्रकांत ने
उत्तर:
(क) डॉ. नानकचंद ने।

प्रश्न 9.
मुझे इस घर में सब बीमार मालूम पड़ते हैं, कहा –
(क) डॉ. नानकचंद ने
(ख) डॉ. गुप्ता ने
(ग) डॉ. भटनागर ने
(घ) हरिचंद ने वैद्य
उत्तर:
(क) हरिचंद वैद्य ने।

प्रश्न 10.
अब इस घर में मेरी कोई जरूरत नहीं है, किसने कहा –
(क) प्रतिमा ने
(ख) सरस्वती ने
(ग) चन्द्रकांत ने
(घ) कांति ने
उत्तर:
(ख) सरस्वती ने।

II. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों के आधार पर करें –

  1. ‘बीमार का इलाज’ ………. है। (नाटक/एकांकी) (M.P. 2012)
  2. ………. ने कहा, “दूध तो पिऊँगा नहीं। (विनोद/कांति)
  3. ………. ने कहा, “ये बाल धूप में सफेद नहीं हुए।” (सरस्वती/चन्द्रकांत)
  4. उदयशंकर भट्ट का जन्म सन् ………. ई० में हुआ था। (1966/1897)
  5. ‘बीमार का इलाज’ में ………. है। (मनोरंजन/व्यंग्य)

उत्तर:

  1. एकांकी
  2. विनोद
  3. चन्द्रकांत
  4. 1897
  5. व्यंग्य।

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III. निम्नलिखित कथनों में सत्य/असत्य’ छाँटिए –

  1. ‘बीमार का इलाज’ एक निबंध है। (M.P. 2009)
  2. परिवार के सभी सदस्य अपने-अपने ढंग से इलाज कराते हैं।
  3. ‘बीमार का इलाज’ की भाषा तत्सम है।
  4. सुखिया-झाड़-फूंक में विश्वास करता है।
  5. कांति अपने मित्र विनोद को अपने साथ रहने के लिए लाया था।’

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. असत्य।

IV. निम्नलिखित के सही जोड़े मिलाइए –

प्रश्न 1.
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 8 बीमार का इलाज img-5
उत्तर:

(i) (ग)
(ii) (घ)
(iii) (ङ)
(iv) (ख)
(v) (क)।

V. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में दीजिए –

प्रश्न 1.
विनोद को अचानक क्या हो गया?
उत्तर:
बुखार।

प्रश्न 2.
सरस्वती किस विचारधारा की थी?
उत्तर:
रूढ़िवादी।

प्रश्न 3.
नानकचंद कौन है?
उत्तर:
नानकचंद होम्योपैथी का डॉक्टर है।

प्रश्न 4.
विनोद क्यों बाहर घूमने निकल जाता है?
उत्तर:
वह अपने इलाज के लिए होने वाले झगड़े से परेशान होकर बाहर निकल जाता है।

प्रश्न 5.
विनोद की छुट्टियाँ क्यों बेकार हो गईं?
उत्तर:
बुखार आने से विनोद की छुट्टियाँ वेकार हो गई।

बीमार का इलाज लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विनोद ने क्यों कहा कि मेरी छुट्टियाँ बेकार हो गईं?
उत्तर:
विनोद आगरा आकर बीमार पड़ गया। अब वह घूमने के लिए गाँव नहीं जा सका, इसलिए उसने कहा कि सारी छुट्टियाँ बेकार हो गई।

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प्रश्न 2.
चंद्रकांत ने डॉक्टर भटनागर के संबंध में क्या कहा?
उत्तर:
चंद्रकांत ने कहा, “डॉक्टर भटनागर इस घर में कदम नहीं रख सकता।”

प्रश्न 3.
होमियोपैथी का डॉक्टर कौन है?
उत्तर:
होमियोपैथी का डॉक्टर नानकचंद है।

प्रश्न 4.
सरस्वती पंडित से किसका मार्जन करने के लिए कहती है और क्यों?
उत्तर:
सरस्वती पंडितजी से विनोद का मार्जन करने के लिए कहती है ताकि सारी अला-बला दूर हो जाए।

प्रश्न 5.
चंद्रकांत ने वैद्यजी की दवा के संबंध में क्या कहा है?
उत्तर:
वैद्यों की दवा पीना मृत्यु को बुलाना है।

प्रश्न 6.
कांति ने विनोद के बारे में क्या सोचा था?
उत्तर:
कांति ने विनोद के बारे में सोचा था-कुछ दिन यहाँ घर में आनंद-मौज करेंगे। फिर खूब गाँव की सैर करेंगे।

प्रश्न 7.
“डॉक्टर भटनागर इस घर में कदम नहीं रख सकता।” ऐसा किसने कहा?
उत्तर:
“डॉक्टर भटनागर इस घर में कदम नहीं रख सकता।” ऐसा कांति के पिता चन्द्रकांत ने कहा।

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प्रश्न 8.
डॉक्टर भटनागर ने किसका केस खराब कर दिया था?
उत्तर:
डॉक्टर भटनागर ने प्रतिमा का केस खराब कर दिया था।

बीमार का इलाज दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विनोद के लिए कांति ने किस प्रकार के इलाज का सुझाव दिया?
उत्तर:
कांति होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में विश्वास रखता था। इसी कारण वह अपने मित्र विनोद का इलाज होम्योपैथी के डॉक्टर से करवाना चाहता था। उसके अनुसार होम्योपैथी के डॉक्टर के हाथ में जादू-सा प्रतीत होता था। उसका होम्योपैथी पर विश्वास दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था।

प्रश्न 2.
घर के अलग-अलग सदस्यों ने बीमार का इलाज कैसे किया? ‘बीमार का इलाज’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
‘बीमार का इलाज’ एकांकी में परिवार के सदस्यों के विचार आपस में कहीं नहीं मिलते थे। वे बीमार की तकलीफ को ध्यान न देकर अपनी सलाह को ही कार्यान्वित करना चाहते थे। विनोद का मित्र होम्योपैथी पद्धति से इलाज करवाना चाहता था, तो पिता एलोपैथी पर विश्वास रखते थे और माँ आयुर्वेद द्वारा इलाज करवाना चाहती थीं। साथ ही पंडित द्वारा मार्जन भी करवा रही थीं।

प्रश्न 3.
‘बीमार का इलाज’ एकांकी के किन्हीं चार पात्रों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. चंद्रकांत-आगरा का एक रईस, जो अंग्रेजी सभ्यता व रहन-सहन का प्रेमी है। उम्र 45 वर्ष।
  2. कांति-चंद्रकांत का बड़ा पुत्र। उम्र लगभग 21-22 वर्ग।
  3. विनोद-कांति का समवयस्क मित्र।
  4. सरस्वती-कांति की माँ-अपने पति के सर्वथा भिन्न, दुवली-पतली, पुराने विचारों की।

प्रश्न 4.
“मुझे इस घर में सभी बीमार मालूम पड़ते हैं”-‘बीमार का इलाज’ एकांकी में डॉक्टर ने यह वाक्य क्यों कहा?
उत्तर:
डॉ. नानकचंद ने कांति के परिवार के सभी सदस्यों की अलग-अलग सोच और पारस्परिक समझ के अभाव के कारण सभी को मानसिक रूप से बीमार पाया। वे सभी अपने-आप को श्रेष्ठ समझते हैं और अपने-अपने दृष्टिकोण को ही सही मानते हैं। इसलिए सभी अपनी-अपनी चिकित्सा-पद्धति से विनोद का इलाज कराने की कोशिश करते हैं। डॉ. नानकचंद के आने पर विनोद परेशान होकर घूमने चला जाता है।

डॉक्टर उसे नींद में घूमने की बीमारी बता देते हैं। चन्द्रकांत डॉक्टर को बताता है कि डॉक्टर ने उसे बुखार की देवा दी है और सरस्वती बताती है कि वैद्य ने उसे अपच का काढ़ा दिया है। सुखिया अपना मत व्यक्त करता है कि फायदा तो ओझा से उसके द्वारा लाए जल से हुआ है। डॉ. नानकचंद सभी को मानसिक रूप से बीमार मान लेते हैं।

प्रश्न 5.
घर के लोग घर में आया मेहमान का किस-किस तरह से इलाजकरवाते हैं?
उत्तर:
घर के लोग घर में आए मेहमान का अलग-अलग तरह से इलाज करवाते – हैं। एक ओर मेहमान को एलोपैथिक डॉक्टर की दवा लेनी पड़ती है, तो दूसरी ओर वैद्यजी की। इसी प्रकार एक ओर मंदिर के पुजारी उस पर जल छिड़कने आते हैं, तो दूसरी ओर होम्योपैथिक डॉक्टर की दवाई पर उसे विश्वास करने के लिए कहा जाता है। इस तरह घर के लोगों की रुचि के अनुसार इलाज होता रहा।

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प्रश्न 6.
“मेरा बुखार घूमने से उतरता है।” ऐसा विनोद ने क्यों कहा?
उत्तर:
“मेरा बुखार घूमने से उतरता हैं।” ऐसा विनोद ने कहा। इसलिए क्योंकि उसका इलाज घर के लोग अपनी-अपनी रुचि के अनुसार करवाते हैं। इससे वह ठीक नहीं हो पाता है। यही नहीं, एक स्थिति ऐसी भी आ जाती है कि उसके इलाज को लेकर घर के स्वामी और उसकी पत्नी आपस में झगड़ने लगते हैं। इसे देखकर वह परेशान हो उठता है। फिर वह यह कहते हुए बाहर निकल जाता है- “मेरा बुखार घूमने से उतरता है।”

बीमार का इलाज लेखक-परिचय

प्रश्न 1.
उदयशंकर भट्ट का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
उदयशंकर भट्ट का जन्म सन् 1897 ई० में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ। उनके पूर्वज गुजरात से आकर यहाँ बस गए थे। उनके घर का वातावरण संस्कृतमय था। वे बचपन से ही संस्कृत के छंदों में रचना करने लगे थे। इतना ही नहीं अपने शिक्षा काल में भी हिंदी में भी कविताएँ और लेख आदि लिखने लगे थे। उन्होने स्वतन्त्रता आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद वे आकाशवाणी के परामर्शदाता और निदेशक रहे। जीविकोपार्जन के लिए उन्होंने सबसे पहले लाला लाजपतराय के नेशनल कॉलेज, लाहौर में अध्यापन कार्य किया।

बाद में लाहौर के ही खालसा कॉलेज, सनातन धर्म कॉलेज आदि में. भी अध्यापन कार्य किया। इसी समय उनमें नाटक लिखने की रुचि उत्पन्न हुई। 28 फरवरी, सन् 1966 ई० में उनका निधन हो गया। साहित्यिक विशेषताएँ-भट्टी वहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने नाटककार के रूप में ख्याति अर्जित की। उन्होंन एकांकियों की भी रचना की थी। उन्होंने एकांकियों के माध्यम से समाज में प्रचलित जनजीवन की समस्याओं को प्रस्तुत किया। उन्होंने कई ऐतिहासिक व पौराणिक नाटक भी लिखे।

रचनाएँ:
तक्षशिला, युगदीप, अमृत और विप, विक्रमादित्य, मुक्तिपथ, शकविजय,स्त्री का हृदय, आन का आदमी, कालिदास, मत्स्यगंधा, वह जो मने देखा, एक पक्षी आदि।

भाषा-शैली:
भट्टी ने अपनी रचनाओं में आम बोलचाल की सरल भापा का प्रयोग किया है। उन्होंने क्षेत्रीय शव्दावली का भी खुलकर प्रयोग किया। उनकी भाषा में हास्य और व्यंग्य का पुट भी मिलता है। उनकी भाषा पात्रानुकूल और भापानुकल है।

महत्त्व:
भट्टजी का हिंदी नाटककारों और एकांकीकारों में महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उनके अधिकांश नाटक और एकांकी मंचित हो चुके हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं के द्वारा हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है।

बीमार का इलाज पाठ का सारांश

प्रश्न 1.
‘बीमार का इलाज’ एकांकी का सार लिखिए।
उत्तर:
उदयशंकर भट्ट द्वारा लिखित एकाकी ‘बीमार का इलाज’ एक मनोरंजक घटना पर आधारित है। इस एकांकी का सार इस प्रकार है-चंद्रकांत के बड़े पुत्र कांति का मित्र विनोद इलाहाबाद से आगरा घूमने आता है लेकिन अचानक वह बीमार पड़ जाता है। उसने आगरा से कांति के गाँव जाने का कार्यक्रम बनाया था परंतु आगरा आते ही उसे बुखार चढ़ जाता है और वह गाँव नहीं जा पाता है। इस कारण विनोद का सारा आनंद समाप्त हो जाता है। कांति के परिवार के सभी सदस्य अपने-अपने ढंग से इलाज कराते हैं। परिवार के सदस्यों के विचार परस्पर नहीं मिलते हैं।

वे बीमार की तकलीफ को ध्यान में न रखकर अपनी ही प्रिय चिकित्सा पद्धति से इलाज कराना चाहते हैं। कांति के पिता एलोपैथी से इलाज कराना चाहते हैं। इसके लिए वे डॉक्टर गुप्ता को बुलाते हैं। उनकी पत्नी सरस्वती आयुर्वेदिक पद्धति में विश्वास रखती हैं इसलिए वह वैद्य हरिचंद को बुलाती हैं और पंडितजी से मार्जन भी करवाती हैं। चंद्रकांत का नौकर झाड़-फूंक में विश्वास करता है। इसके लिए वह झाड़-फूंक करने वाला यानी ओझा को लेकर आता है। इस प्रकार बीमार महमान को एक ओर एलोपैथिक डॉक्टर की दवाई लेनी पड़ती है, तो दूसरी ओर वैद्यजी का काढ़ा पीना पड़ता है।

एक ओर मंदिर के पुजारी उस पर जल छिड़कने आते हैं, तो दूसरी ओर होम्योपैथिक डॉक्टर की दवाई पर विश्वास करने को कहा जाता है। स्थिति यहाँ तक पहुँच जाती है कि मेहमान विनोद के इलाज को लेकर घर के स्वामी चंद्रकांत और उसकी पत्नी सरस्वती का आपस में झगड़ा हो जाता है। अंत में विनोद उनसे पीछा छुड़ाने के लिए बाहर घूमने निकल जाता है। चंद्रकांत, सरस्वती और सुखिया परस्पर अपने-अपने विश्वास को लेकर झगड़ने लगते हैं। इस पर डॉक्टर नानकचंद कांति से कहते हैं, “मुझे तो इस घर में सभी बीमार मालूम होते हैं। इसके साथ ही डॉक्टर घर से बाहर चले जाते हैं और एकांकी समाप्त हो जाता है। इस एकांकी से मनोरंजन होने के साथ-साथ लोगों की विचित्र प्रवृत्तियों की ओर व्यंग्यपूर्ण संकेत भी मिलते हैं।

बीमार का इलाज संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1.
मेरे बच्चे, तुम पढ़-लिखकर भी नासमझ ही रहे। बिना अनुभव के समझदार और बच्चे में अंतर ही क्या है। अरे, होम्योपैथी भी कोई इलाज है। गाँठ बाँध लो-“कड़वी भेषज बिन पिये, मिटे न तन को ताप।” ये बाल धूप में सफेद नहीं हुए हैं। (Page 32)

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ उदयशंकर भट्ट द्वारा रचित एकांकी ‘बीमार का इलाज’ से उद्धृत हैं। हास्य-प्रधान इस एकांकी में कांति का मित्र विनोद बीमार है। इसमें बीमार की दयनीय स्थिति के साथ-साथ लोगों की विचित्र प्रवृत्तियों की ओर भी व्यंग्यपूर्ण संकेत मिलते हैं। बीमार के इलाज के लिए चंद्रकांत, डॉ. गुप्ता को बुलाने के लिए कहते हैं, तो कांति होम्योपैथी के डॉ. नानक चंद को बुलाना चाहते हैं। इस पर कांति के पिता चंद्रकांत कहते हैं।

व्याख्या:
पढ़-लिखकर शिक्षित तो हो गए, परंतु तुम्हारे अंदर अभी समझदारी विकसित नहीं हो पाई है। तुम नासमझ बच्चे के ही समान हो। कहने का भाव यह कि तुम अनुभवहीन शिक्षित व्यक्ति तो हो, किंतु समझदारी के अभाव में बालक के समान हो। होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति बीमार व्यक्ति का इलाज करने का सही ढंग नहीं है। भाव यह कि चंद्रकांत इस चिकित्सा पद्धति को इलाज के लिए गलत बताते हैं। वह अपने पुत्र को समझाते हुए कहते हैं कि तुम अच्छी प्रकार समझ लो कि कड़वी दवा के बिना बुखार ठीक नहीं हो सकता है। यह मैंने अनुभव से सीखा है। मेरे बाल धूप में सफेद नहीं हुए हैं। यही मेरे लंबे जीवन और उसमें प्राप्त अनुभव के प्रतीक हैं।

विशेष:

  1. चंद्रकांत का अनुभव था कि कटु औषधि ही रोग को मिटा सकती है।
  2. प्रस्तुत एकांकी में लेखक ने बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया है जिसमें क्षेत्रीय शब्दावली का भी प्रयोग हआ है।

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प्रश्न 2.
लो और सुनो। इनके मारे भी मेरी नाक में दम है। उस मरे डॉक्टर को कुछ न आवे है न जावे है। न जाने क्यों डॉक्टर गुप्ता के पीछे पड़ रहे हैंगे। क्या नाम है मरे उस भटनागर का? इन दोनों ने तो प्रतिमा को मार ही डाला था। वह तो कहो, भला हो इन वैद्य जी का। बचा लिया। जा, बेटा शांति, जा तो सही जल्दी। (Page 32)

प्रसंग:
प्रस्तुत पंक्तियाँ उदयशंकर भट्ट द्वारा रचित एकांकी ‘बीमार का इलाज’ से उद्धृत हैं। हास्य-प्रधान इस एकांकी में कांति का मित्र विनोद बीमार है। चंद्रकांत डॉक्टर को बुलाने की बात करते हैं तो उनकी पत्नी सरस्वती डॉक्टर की बुराई करती है; क्योंकि उसका विश्वास चिकित्सा की आयुर्वेदिक प्रणाली पर है और वह वैद्यजी को बुलाना चाहती है। वह डॉक्टर को बुलाने की बात सुनकर अपने पति चन्द्रकांत से कहती है –

व्याख्या:
लो यह भी सुनो, ये एलोपैथी के डॉक्टर से विनोद का इलाज कराना चाहते हैं। इनके कारण भी मैं परेशान रहती हूँ। उस मरे डॉक्टर को कुछ आता-जाता नहीं है। अर्थात् डॉक्टर को रोग के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। वह रोग की पहचान करने में असमर्थ हैं। फिर भी पता नहीं क्यों डॉक्टर गुप्ता को बुलाने पर जोर दे रहे हैं। उस डॉक्टर भटनागर ने और डॉक्टर गुप्ता ने तो मिलकर प्रतिमा को लगभग मार ही डाला था; अर्थात् जब प्रतिमा बीमार पड़ी तो इन दोनों डॉक्टरों को बुलाया गया था।

इनके इलाज से प्रतिमा स्वस्थ होने की अपेक्षा और अधिक बीमार हो गई थी। उसकी स्थिति बिगड़ गई थी। यह तो वैद्यजी ने अपने इलाज से बचा लिया था। दूसरे शब्दों में, प्रतिमा वैद्यजी के इलाज से ही निरोग हुई थी। सरस्वती अपने बेटे कांति से कहती है-जा बेटा, जल्दी से जाकर वैद्यजी को बुला ला।

विशेष:

  1. सरस्वती का विश्वास आयुर्वेदिक चिकित्सा-पद्धति पर विश्वास है। वह वैद्यजी से ही विनोद का इलाज करवाना चाहती है। उसका एलोपेथी चिकित्सा-पद्धति पर बिलकुल विश्वास नहीं है।
  2. बोलचाल की सरल भाषा का प्रयोग किया गया है।
  3. भाषा पात्रानुकूल व भावानुकूल है।

MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 2 प्रबंध के सिद्धान्त

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MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 2 प्रबंध के सिद्धान्त

प्रबंध के सिद्धान्त Important Questions

प्रबंध के सिद्धान्त अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
“मानसिक क्रांति” से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
कर्मचारी वर्ग तथा प्रबंधकों की मानसिकता में परिवर्तन होना ही मानसिक क्रान्ति है। इसके लिए यह जरूरी है कि दोनों वर्ग परम्परागत उत्पादन विधियों के स्थान पर नवीन वैज्ञानिक विधियों का उपयोग समझे व उन्हें अपनाये। प्रबंधक श्रमिकों में विश्वास रखे तथा उनके हितों का बराबर ध्यान रखे। श्रमिकों को प्रबंधकों के प्रति निष्ठावान होकर सामूहिक हित के लिए कार्य करना चाहिए।

उद्योगपति को यह स्वीकार करना चाहिए कि श्रमिक वस्तु नहीं है अपितु मनुष्य है और इसलिए उसकी भावनाओं, अपेक्षाओं तथा आवश्यकताओं का पूरा-पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। श्रमिकों को भी समझना चाहिए कि वे संस्था के हैं तथा संस्था उन सबकी। इस प्रकार सभी के मन में उपक्रम के हित में क्रान्ति जागृत होगी।

प्रश्न 2.
प्रबंध के सिद्धांत से क्या आशय है ?
उत्तर:
प्रबंध के क्षेत्र में प्रभावी प्रबंध तथा इसकी सफलता हेतु कुछ मान्यताओं के आधार पर कार्य किये जाते हैं, जिन्हें प्रबंध के मार्गदर्शक कहते हैं। प्रबंध हेतु बनाये गये ये मार्गदर्शक ही प्रबंध के सिद्धांत हैं।

प्रश्न 3.
फेयोल के पहल शक्ति के सिद्धांत को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पहल शक्ति का सिद्धांत-पहल करने का आशय प्रत्येक कर्मचारी व अधिकारियों को सतत् नई-नई योजना व कार्य के लिए लगातार प्रयास करना है। अतः प्रबन्ध के प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों को निरन्तर नई योजना व कार्य अपनाने का प्रयास करने हेतु आवश्यक अधिकार दिया जाना चाहिए।

प्रश्न 4.
प्रबन्ध के सिद्धान्त की उत्पत्ति कैसे होती है ?
अथवा
प्रबन्धकीय सिद्धान्तों की उत्पत्ति कैसे होती हैं ?
उत्तर:
प्रबन्ध के सिद्धान्त की उत्पत्ति के दो चरण निम्नलिखित है

  1. गंभीर अवलोकन- जब कर्मचारी कार्य करते हैं तब वे कार्य करते समय उन्हें गहनता से अवलोकन करते हैं तथा वे विभिन्न प्रबन्धकीय निर्णयों पर कर्मचारियों की प्रतिक्रिया लिखते हैं।
  2. प्रयोग- बार-बार प्रयोग में लाए गए निर्णयों कथनों को कर्मचारियों के विभिन्न समूहों के साथ विभिन्न संगठनों में जाँचे जाते हैं।

प्रश्न 5.
समता का सिद्धांत क्या है ?
उत्तर:
हेनरी फेयोल के अनुसार संस्था में प्रत्येक कर्मचारी न्याय, सहानुभूति और समानता के व्यवहार की अपेक्षा रखता है, अतः संस्था के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु प्रबंधक को श्रमिकों व कर्मचारियों के साथ समानता का व्यवहार करना चाहिए।

प्रश्न 6.
श्रम विभाजन से कार्यक्षमता किस प्रकार विकसित होती है ?
उत्तर:
हेनरी फेयोल के अनुसार, किसी भी उपक्रम में समान क्षमता वाले कर्मचारी नहीं होते हैं, अतः कर्मचारी व मजदूरों को उनकी कार्यक्षमता व रुचि के अनुरूप कार्य सौंपना चाहिए तथा श्रमिकों को विभिन्न वर्गों में वर्गीकृत करना चाहिए। ऐसा करने से वे स्वयं अभिप्रेरित होकर कार्य करते हैं तथा उनकी कार्यक्षमता का विकास होता है।

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प्रश्न 7.
आदेश की एकता के सिद्धांत तथा निर्देश की एकता के सिद्धांत में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आदेश की एकता का सिद्धांत तथा निर्देश की एकता का सिद्धांत में अंतर।

आदेश की एकता का सिद्धांत

  1. यह सिद्धांत अधीनस्थ के ऊपर एकात्मक नियंत्रण संभव बनाता है।
  2. यह सिद्धांत अधिकारी और अधीनस्थ के संबंध को मजबूत करता है।

निर्देश की एकता का सिद्धांत

  1. यह सिद्धांत कार्यों में विशिष्टीकरण तथा योजनाओं के एकीकरण में सहायता करता है।
  2. यह सिद्धांत योजनाओं के एकीकरण में सहायता करता है।

प्रश्न 8.
विकेन्द्रीयकरण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
जब उपक्रमों में निर्णय लेने का अधिकार उच्च प्रबंधकों के पास होता है तो इसे विकेन्द्रीयकरण की स्थिति कहते हैं, इसके विपरीत जब निर्णय लेने के अधिकार अधीनस्थों को बाँट दिये जाते हैं, तो उसे विकेन्द्रीयकरण कहते हैं । प्रबंध शास्त्री हेनरी फेयोल के अनुसार केन्द्रीयकरण तथा विकेन्द्रीयकरण दोनों संतुलित मात्रा में उपक्रम में होना चाहिए।

प्रश्न 9.
प्रमापीकरण सिद्धांत क्या है ?
उत्तर:
एफ. डब्ल्यू. टेलर के अनुसार, कम लागत पर उत्तम वस्तुओं के निर्माण के लिए आवश्यक है कि प्रमाप अर्थात् सर्वोत्तम का निर्धारण किया जाये। श्रमिकों से निश्चित प्रमाप की वस्तु, उपकरण, कच्चा माल, कार्य की दशाएँ प्रमापित विधि के अनुसार ही कार्य कराना चाहिए।

प्रश्न 10.
हेनरी फेयोल का निर्देश की एकरूपता का सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर:
हेनरी फेयोल का निर्देश की एकरूपता का सिद्धान्त के अनुसार कर्मचारी को आदेश एक ही अधिकारी से मिलना चाहिए, क्योंकि अनेक अधिकारी के आदेश भी अलग-अलग हो तो ऐसी दशा में कर्मचारी किस आदेश का पालन करे यह दुविधा की स्थिति होती है, अत प्रत्येक कर्मचारी को चाहे वह किसी भी स्तर का क्यों न हो आदेश एक ही अधिकारी से मिलना चाहिए।

प्रश्न 11.
श्रेष्ठ प्रबन्ध के लिए वैज्ञानिक चयन एवं प्रशिक्षण आवश्यक है। समझाइये।
उत्तर:
कर्मचारियों का उचित चुनाव ही वैज्ञानिक चयन है। टेलर का मत है कि कार्य के लिए शारीरिक एवं मानसिक रूप से उपयुक्त व्यक्ति का चुनाव किया जाना चाहिए। चयन पश्चात् कार्यक्षमता में वृद्धि के लिए उन्हें समय-समय पर प्रशिक्षित किया जाना है, क्योंकि जब तक कर्मचारी पूर्णत प्रशिक्षित नहीं होगा तब तक वह पूर्ण दक्षता से कार्य नहीं कर सकता है।

प्रश्न 12.
टेलर की आठ नेता वाली योजना क्या है ?
उत्तर:
एफ. डब्ल्यू. टेलर ने उपक्रम हेतु क्रियात्मक संगठन प्रणाली का सुझाव दिया। इसमें एक कार्य पर आठ नियंत्रकों का नियंत्रण व पर्यवेक्षण होता है। इस संगठन को आठ नेता वाली योजना कहते हैं । ये नेता निम्नानुसार हैं-

  1. टोली नायक
  2. गति नायक
  3. निरीक्षक
  4. मरम्मत नायक
  5. कार्यक्रम लिपिक
  6. संकेत कार्ड लिपिक
  7. समय तथा पारिश्रमिक लिपिक
  8. अनुशासन अधिकारी।

प्रश्न 13.
“मैं” और “हम” का सिद्धांत क्या है ?
उत्तर:
हेनरी फेयोल के इस सिद्धांत के अनुसार पूँजीपतियों और श्रमिकों को ‘मैं’ के स्थान पर ‘हम’ के सिद्धांत को अमल में लाना चाहिए, क्योंकि मैं घमण्ड का और हम सहयोग का दर्पण है, दोनों पक्षों को आपसी सहयोग व सहकारिता की भावना के साथ कार्य करना चाहिए।-

प्रश्न 14.
टेलर के कार्यानुमान का सिद्धांत’ को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कार्यानुमान का सिद्धांत (Principal of task idea)-टेलर के अनुसार प्रत्येक कार्य को प्रारंभ करने के पूर्व उस कार्य के संबंध में पूर्वानुमान (Forecasting) लगा लेना चाहिए, जैसे-कार्य करने में कितना समय लगेगा, इस पर अनुमानित व्यय कितना होगा, कार्य के दौरान क्या-क्या परेशानियाँ आ सकती हैं ?

उन्हें कैसे हल किया जायेगा आदि। कार्य के दौरान सामान्य दशायें रहने पर कार्य का प्रमाप (Standard) निर्धारित कर लेना चाहिए। यही कार्यानुमान (कार्य का अनुमान) का सिद्धांत है।

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प्रश्न 15.
टेलर द्वारा प्रतिपादित गति अध्ययन को समझाइए। –
उत्तर:
गति अध्ययन (Motion study) किसी कार्य को करने के लिए श्रेष्ठ विधि कौन-सी होगी, इसे पता करना गति अध्ययन (Motion or Speed study) कहलाता है। इस अध्ययन के द्वारा किसी कार्य को करने की गति ज्ञात की जाती है, इस अध्ययन हेतु टेलर एक ऐसे स्थान पर बैठ गये जहाँ से वे सभी श्रमिकों की हरकतों को देख सकें।

प्रश्न 16.
प्रबन्ध के सिद्धान्त सामान्य दिशा-निर्देश हैं। समझाइये।
उत्तर:
प्रबन्ध के सिद्धान्त सामान्य-दिशा-निर्देश होते हैं ये भौतिक एवं रसायन शास्त्रों के सिद्धान्तों की तरह कठोर नहीं होते और न ही पूर्ण रूप से खरे उतरते हैं। इसे सभी परिस्थितियों में आँख मूंद कर लागू नहीं किये जा सकते। प्रबन्ध के सिद्धान्तों का प्रयोग संगठन की प्रकृति और स्थिति पर निर्भर करता है। प्रबन्धक को संगठन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संगठन की प्रकृति और आकार के अनुसार इन सिद्धान्तों को लागू करना चाहिए।

प्रश्न 17.
वैज्ञानिक प्रबंध के जन्मदाता कौन थे, उनकी मृत्यु कब तथा कहाँ हुई ?
उत्तर:
वैज्ञानिक प्रबंध के जन्मदाता एफ.डब्ल्यू. टेलर थे। उनकी मृत्यु सन् 1915 में फिलाडेल्फिया में हुई।

प्रश्न 18.
फेयोल ने व्यावसायिक कार्यों को कितने भागों में बाँटा ?
उत्तर:
फेयोल ने व्यावसायिक कार्यों को छ: भागों में बाँटा-

  1. तकनीकी कार्य
  2. वाणिज्यिक कार्य
  3. वित्तीय कार्य
  4. सुरक्षात्मक कार्य
  5. लेखा संबंधी कार्य
  6. प्रबंधकीय कार्य।

प्रश्न 19.
समय अध्ययन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
समय अध्ययन (Time Study) अलफोर्ड तथा बीटी के अनुसार, “किसी कार्य को करने में उपयोग किए जाने वाली विधियों व उपकरणों का वैज्ञानिक विश्लेषण करना, उस कार्य को करने के सर्वश्रेष्ठ तरीके के व्यावहारिक तथ्यों का विकास करना तथा आवश्यक समय का निर्धारण करना, समय अध्ययन कहलाता है।” किसी भी उत्पादन क्रिया को करने में लगने वाले समय की जाँच एवं उसका रिकार्ड करना ही समय अध्ययन कहलाता है।

प्रश्न 20.
थकान अध्ययन से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
थकान अध्ययन (Fatigue Study)-थकान और श्रमिक की कार्य क्षमता का आपस में घनिष्ठ संबंध है। इसलिए टेलर ने प्रत्येक क्रिया को सूक्ष्म दृष्टि से अध्ययन करके यह मालूम किया कि श्रमिक लगातार काम करने से थक जाता है और शेष बचे समय में उसकी कार्यक्षमता गिर जाती है। टेलर ने थकान अध्ययन से मालूम किया कि श्रमिक को थकान कब और कैसे होती है तथा उसे कैसे दूर किया जाए ? थकान को दूर करने के लिए समय-समय पर आराम की उचित व्यवस्था होनी चाहिए तथा कार्य की प्रवृत्ति में परिवर्तन करना चाहिए। जैसे शारीरिक कार्य करने वालों को मानसिक कार्य दिया जाए तथा मानसिक कार्य करने वालों को शारीरिक कार्य दिया जाए।

प्रबंध के सिद्धान्त लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
फेयोल द्वारा प्रतिपादित प्रबन्ध के 14 सिद्धान्तों के नाम लिखिए।
उत्तर:
फेयोल द्वारा प्रतिपादित प्रबंध के सिद्धांत निम्नलिखित हैं

  1. श्रम विभाजन का सिद्धान्त।
  2. अधिकार तथा उत्तरदायित्व का सिद्धान्त।
  3. अनुशासन का सिद्धान्त।
  4. आदेश की एकता।
  5. निर्देश की एकता।
  6. सामूहिक हितों की प्राथमिकता का सिद्धान्त।
  7. कर्मचारियों के पारिश्रमिक का सिद्धान्त।
  8. केन्द्रीयकरण का सिद्धान्त।
  9. व्यवस्था का सिद्धान्त।
  10. समता का सिद्धान्त ।
  11. स्थायित्व का सिद्धान्त।
  12. पहल शक्ति का सिद्धान्त।
  13. संपर्क श्रृंखला/ सोपान श्रृंखला का सिद्धान्त।
  14. सहयोग एवं सहकारिता का सिद्धान्त।

प्रश्न 2.
समय अध्ययन और गति अध्ययन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समय अध्ययन और गति अध्ययन में अन्तर-
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प्रश्न 3.
वैज्ञानिक प्रबंध का श्रमिकों द्वारा विरोध क्यों किया जाता है ? कोई चार कारण लिखिए।
उत्तर:
वैज्ञानिक प्रबंध का सबसे अधिक विरोध श्रमिकों द्वारा किया गया, जिसके निम्न कारण हैं

  1. कार्य में वृद्धि-वैज्ञानिक प्रबंध को अपनाने से श्रमिकों की कार्यक्षमता बढ़ाना आवश्यक हो गया, जिससे श्रमिकों पर कार्य का बोझ बढ़ गया। कार्य का बोझ बढ़ जाने से श्रमिकों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ने से श्रमिकों ने वैज्ञानिक प्रबंध का भारी विरोध किया।
  2. कठोर नियंत्रण-वैज्ञानिक प्रबंध के अन्तर्गत आठ नेता वाले संगठन को अपनाने से श्रमिकों पर एक साथ अनेक लोगों का नियंत्रण रहता है, जिसे श्रमिक पसंद नहीं करते हैं।
  3. बेकारी का भय-वैज्ञानिक प्रबंध में मशीनों का कार्य बढ़ जाने से श्रमिकों में बेकारी का भय बना रहता है, अतः वे इसका विरोध करते हैं।
  4. श्रमिकों का शोषण-वैज्ञानिक प्रबंध में कार्य अधिक होने से उत्पादन में वृद्धि जिस मात्रा में होती है, उस मात्रा में श्रमिकों की मजदूरी नहीं बढ़ाई जाती है।

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प्रश्न 4.
टेलर व फेयोल के प्रबंध संबंधी दृष्टिकोणों में प्रमुख समानताएँ बताइए।
उत्तर:
टेलर एवं फेयोल के दृष्टिकोणों में समानताएँ

  1. दोनों प्रबन्धकीय दशाओं में सुधार लाना चाहते थे।
  2. दोनों मानवीय दृष्टिकोण के प्रबल समर्थक थे।
  3. दोनों ने पूर्वानुमान तथा नियोजन को विशेष महत्त्व दिया।
  4. दोनों समकालीन 1841 ई. से 1925 ई. तक प्रबंध विशेषज्ञ थे।
  5. दोनों ने प्रबंध को अर्जित प्रतिभा के रूप में स्वीकार किया।

प्रश्न 5.
औद्योगिक संगठन में उत्पादन की कुशलता में वृद्धि के लिए कई सिद्धांत (वैज्ञानिक प्रबंध के सिद्धांत) टेलर ने विकसित किए हैं, उन सिद्धांतों को समझाइए।
उत्तर:
टेलर द्वारा प्रतिपादित वैज्ञानिक प्रबंध के सिद्धान्त निम्न हैं-
1. आधुनिक यंत्र व उपकरणों का सिद्धांत- उत्पादन के दौरान आधुनिक एवं उन्नत यंत्र तथा उपकरणों का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि उन्नत यंत्र से उत्पादन लागत कम एवं उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है एवं उत्पादन समय की बचत होती है।

2. प्रमापीकरण का सिद्धांत- इस सिद्धांत के अंतर्गत एक निश्चित व प्रमाप की वस्तु, उपकरण, कच्चा माल व कार्य की दशायें तथा प्रमापित विधि श्रमिकों को दी जाती है। जिससे श्रेष्ठ वस्तु कम लागत पर उत्पादित हो सके।

3. आदर्श लागत लेखा प्रणाली का सिद्धांत-यह सिद्धांत उन्नत व आदर्श लेखाकर्म प्रणाली के उपयोग को प्रोत्साहित करता है चूँकि आदर्श लेखा प्रणाली में योग्य व अनुभवी व कुशल लेखापालों की सेवाएँ ली जाती हैं।

प्रश्न 6.
टेलर एवं फेयोल के प्रबंध सम्बन्धी सिद्धान्तों की प्रमुख असमानताएँ बताइये।
उत्तर:
टेलर एवं फेयोल के सिद्धान्तों की असमानताएँ

  1. टेलर का अध्ययन केन्द्र श्रमिक था, जबकि फेयोल का अध्ययन केन्द्र प्रबंध था।
  2. टेलर के सिद्धान्त वैज्ञानिक प्रबंध के सिद्धान्त थे, जबकि फेयोल के सिद्धान्त प्रशासन के सिद्धान्त माने जाते थे।
  3. टेलर का प्रयोग बिन्दु कारखाना था जबकि फेयोल का प्रयोग बिन्दु प्रशासन था।
  4. टेलर ने उपक्रम हेतु क्रियात्मक संगठन को उचित ठहराया, जबकि फेयोल ने आदेश की एकता को उचित ठहराया।
  5. टेलर का अध्ययन तथा योगदान निम्न स्तर से उच्च स्तर था,जबकि फेयोल का अध्ययन तथा योगदान प्रारम्भ से ही उच्च स्तर रहा और उन्होंने अपने सिद्धान्तों में आदेश,निर्देश, अधिकार आदि शब्दों का प्रयोग किया।
  6. टेलर को कारखाना विशेषज्ञ माना जाता है, तो फेयोल को प्रबंध विशेषज्ञ माना जाता है।
  7. वर्तमान में टेलर के सिद्धान्त व्यवहार में दिखाई नहीं पड़ते, जबकि फेयोल के सिद्धान्त आज भी अनेक उपक्रमों में लागू किये गये हैं।

प्रश्न 7.
“टेलर तथा फेयोल के कार्य एक-दूसरे के पूरक हैं।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
एफ. डब्ल्यू. टेलर को वैज्ञानिक प्रबंध का जनक एवं हेनरी फेयोल को औद्योगिक प्रबंध के आधुनिक सिद्धान्त का पिता’ कहा जाता है। दोनों समकालीन थे। टेलर (जन्म 1856) और फेयोल (जन्म 1841) प्रबंध के क्षेत्र में दोनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यद्यपि दोनों के विचार एवं कार्य प्रणाली में अन्तर है, जैसे टेलर ने श्रमिकों की कार्यक्षमता को बढ़ाने को सिद्धान्त का आधार बनाया है तो फेयोल ने प्रबंध के कार्यों को, टेलर ने इंजीनियरिंग पक्ष पर जोर दिया है जबकि फेयोल ने प्रशासन के कार्यों पर, फिर भी दोनों के कार्यों में विरोध नहीं है वे एक-दूसरे के पूरक हैं।

दोनों ने प्रबंध के एक-एक पक्ष को लिया है। दोनों के विचारों को मिला देने से प्रबंध एवं प्रशासन सम्बन्धी विचार पूर्ण हो जाते हैं। इसीलिए उर्विक का कथन है कि, “टेलर तथा फेयोल ने कार्य काफी सीमा तक एक-दूसरे के पूरक थे। दोनों ने ही यह अनुभव किया कि प्रबंध के समस्त स्तरों पर कर्मचारियों तथा उनके प्रबंध की समस्या औद्योगिक सफलता की आधारशिला है। इस समस्या के समाधान हेतु दोनों ही ने वैज्ञानिक विधियों के उपयोग पर बल दिया।” टेलर को ‘वैज्ञानिक प्रबंध का जनक’ और फेयोल को प्रशासन के सिद्धान्त का जनक’ कहा जाता है। प्रबंध एवं प्रशासन मूल में एक हैं, अतः थियो हेमन का यह कथन उचित है कि “दोनों विद्वानों की विचारधारा में विरोधाभास ढूँढना व्यर्थ है।” दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।

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प्रश्न 8.
प्रबंध के सिद्धांतों का महत्व तीन बिंदुओं में समझाइए।
उत्तर:
प्रबंध के सिद्धांतों से प्रबंधकीय कार्यों में सुधार होता है। सिद्धांत ही प्रबंध के कार्य को मार्गदर्शन एवं दिशा प्रदान करते हैं। प्रबंध के सिद्धांत निम्न हैं

1. कार्यक्षमता में वृद्धि-प्रबंध के सिद्धांत के अनुसार कार्य करने से प्रबंधकों, फोरमेन व कर्मचारियों की कार्य कुशलता तथा क्षमता में वृद्धि होती है। सिद्धांतों के आधार पर श्रेष्ठ ढंग से कार्य किया जा सकता है।

2. प्रशिक्षण में सहायक-सिद्धांतों से कोई भी कार्य सुनिश्चित प्रक्रिया व विधि से सम्पन्न होता है। ये सिद्धांत प्रशिक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। सिद्धांतों के आधार पर प्रशिक्षण नियमबद्ध हो जाता है। प्रबंध को व प्रशिक्षण दाताओं के लिए ये सिद्धांत बहुत सहायक सिद्ध हुए हैं।

3. प्रबंध का विस्तृत ज्ञान-सिद्धांतों के माध्यम से ही प्रबंध को परिभाषित किया जा सकता है। प्रबंध क्या है इसका विस्तृत ज्ञान केवल इसके सिद्धांतों के अध्ययन से ही प्राप्त किया जा सकता है। सिद्धांतों के आधार पर प्रबंध की प्रकृति को बताया जा सकता है। इन सिद्धांतों से प्रबंधकीय ज्ञान में काफी वृद्धि होती है।

4. अनुसंधान में सुविधा-प्रबंध के क्षेत्र में अनुसंधान करते समय प्रबंध के सिद्धांत अत्यधिक महत्वपूर्ण सिद्ध होते हैं। इनसे कर्मचारियों, श्रमिकों की वस्तु स्थिति ज्ञात की जाती है।

प्रश्न 9.
प्रबंधकीय सिद्धान्त तथा प्रबंधकीय तकनीक में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रबंधकीय सिद्धान्त तथा प्रबंधकीय तकनीक में अंतर
प्रबंधकीय तकनीक

  1. प्रबंधकीय सिद्धान्त लचीले होते हैं।
  2. प्रबंधकीय सिद्धान्त, प्रबंधकीय कार्यों के लिए बनाई जाती हैं।

प्रबंधकीय तकनीक

  1. प्रबंधकीय तकनीक, सिद्धांतों की अपेक्षा कम लचीला होता है।
  2. प्रबंधकीय तकनीकें, वे पद्धतियाँ और कार्य लिए दिशा-निर्देश होते हैं।

प्रश्न 10.
प्रबंध के सिद्धान्तों की उत्पत्ति कैसे होती है ?
उत्तर:
प्रबंध के सिद्धान्त निम्नलिखित दो चरणों में बनाए जाते हैं

  1. गहन अवलोकन–प्रत्येक व्यवसाय में प्रबन्धकों के समक्ष कार्य के दौरान कई समस्याएँ आती हैं। ऐसे में प्रबंधक कार्य के समय कर्मचारियों का अवलोकन करते हैं तथा उनकी प्रतिक्रियाएँ देखते हैं । घटनाओं के ऐसे अवलोकन के आधार पर सिद्धान्त बनाये जाते हैं।
  2. बार-बार किये गये प्रयोग-इस विधि में बार-बार की जाने वाली प्रतिक्रिया को विभिन्न संगठनों में अलग-अलग कर्मचारियों पर प्रयोग किया जाता है। एक जैसे परिणाम प्राप्त होने पर यह सिद्धान्त का रूप ले लेता है।

प्रश्न 11.
एस्प्रिट डी कार्स (Esprit De Corps) के सिद्धान्त को समझाइए।
उत्तर:
एस्प्रिट डी कार्स का अर्थ है, “संघ ही शक्ति है” इस सिद्धान्त के अनुसार, प्रत्येक कर्मचारी को स्वयं को टीम का सदस्य मानना चाहिए तथा समूह या टीम के लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए। प्रबंध को कर्मचारियों के बीच सहयोग की भावना का विकास करना चाहिए। इस सिद्धान्त को मानने से सामूहिक लक्ष्य की प्राप्ति होती है।

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प्रश्न 12.
उचित मजदूरी का निर्धारण करते समय किन-किन बिन्दुओं को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर:
उचित मजदूरों का निर्धारण करते समय निम्नांकित बिन्दुओं को ध्यान में रखना चाहिए

  1. संस्था की वित्तीय स्थिति।
  2. सरकार का न्यूनतम मजदूरी अधिनियम।
  3. प्रतियोगियों द्वारा भुगतान की जाने वाली मजदूरी और बोनस।

प्रश्न 13.
प्रबंधकीय सिद्धान्त किस प्रकार प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाते हैं ? उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
प्रबंधकीय सिद्धान्त व्यक्तिगत पूर्वाग्रह और पक्षपात को निरूत्साहित करके, प्रशासन को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। ये सिद्धान्त वस्तुनिष्ठता और वैज्ञानिक निर्णयों को बढ़ावा देते हैं।

उदाहरण के लिए आदेश की एकता का सिद्धान्त तथा निर्देश की एकता का सिद्धान्त संगठन की क्रमबद्ध और सरल कार्यवाही का नेतृत्व करते हैं। आदेश की एकता अधिक अधिकारियों की व्याकुलता को टालता है। निर्देश की एकता सामान्य दिशा में सभी कर्मचारियों के प्रयासों को एकीकृत करता है। इसी प्रकार सोपान श्रृंखला सूचना का प्रवाह व्यवस्थित रूप से करता है। ये सभी सिद्धान्त निश्चित रूप से प्रभावी और कुशल प्रशासन लाते हैं।

प्रश्न 14.
वैज्ञानिक प्रबंध की उन तकनीकों की पहचान कीजिए जिन्हें निम्न कथनों द्वारा विवेचित किया गया है

  1. जब कई विशेषज्ञ प्रत्येक श्रमिक का पर्यवेक्षण करते हैं।
  2. किसी कार्य को करने का सर्वोत्तम उपाय जानना होता है।
  3. श्रमिकों को दी जाने वाली अलग-अलग मजदूरी।
  4. जब सामग्री, मशीनों, उपकरणों, कार्यविधियों तथा कार्यदशाओं में उचित शोध के पश्चात् समानता लाई जाती है।
  5. एक निर्धारित कार्य को पूरा करने में लगने वाले प्रमाप समय को निर्धारित किया जाना होता है।
  6. प्रतियोगिता से सहकारिता की ओर एक-दूसरे के संबंध में श्रमिकों तथा प्रबंधकों की मनोवृत्ति बदलती है।

उत्तर:

  1. क्रियात्मक फोरमैनशिप।
  2. विधि अध्ययन ।
  3. विभेदात्मक कार्य मजदूरी प्रणाली।
  4. कार्य का मानकीकरण।
  5. समय अध्ययन।
  6. मानसिक क्रांति।

प्रश्न 15.
आदेश की एकता तथा कार्यात्मक फोरमैनशिप में क्या अंतर है ?
उत्तर:
आदेश की एकता तथा कार्यात्मक फोरमैनशिप में अंतर-
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 2 प्रबंध के सिद्धान्त image - 4

प्रश्न 16.
प्रबंधकीय सिद्धान्त तथा शुद्ध विज्ञान के सिद्धान्त की तुलना कीजिए।
उत्तर:
प्रबंधकीय सिद्धान्त तथा शुद्ध विज्ञान के सिद्धान्त की तुलना-
MP Board Class 12th Business Studies Important Questions Chapter 2 प्रबंध के सिद्धान्त image - 5
प्रश्न 17.
जब एक सेल्समैन को दो उच्च अधिकारियों से आदेश मिलते हैं तो इसके क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं ?
उत्तर:
जब एक सेल्समैन को दो उच्च अधिकारियों से आदेश प्राप्त हो तो निम्नलिखित दुष्परिणाम हो सकते हैं

  1. सेल्समैन के दिमाग में शक पैदा हो सकता है।
  2. वह कार्य से बचने का अवसर ढूँढता है।
  3. दोनों अधिकारियों के मध्य मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं ।
  4. अनुशासन बनाए रखना कठिन हो सकता है।

प्रश्न 18.
यह देखा गया कि एक संगठन में “प्रचलित स्थिति, व्यवस्था के सिद्धान्त के उल्लंघन के कारण है।” प्रचलित स्थिति क्या हो सकती है ?
उत्तर;
व्यवस्था के सिद्धान्त के उल्लंघन के कारण संस्था में निम्नलिखित स्थितियाँ हो सकती हैं

  1. आवश्यकता के समय आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं होगी। सामग्री की तलाश में उनका काफी समय तथा ऊर्जा व्यर्थ हो जाएगा।
  2. अव्यवस्थाएँ बढ़ती जा सकती हैं।
  3. दुर्घटनाओं की संभावना में वृद्धिहोगी।

प्रश्न 19.
फोरमैनशिप के अन्तर्गत उन अधिकारियों के नाम बताइए जो निम्नलिखित कार्य करते हैं-

  1. उत्पादित वस्तुओं की किस्म की जाँच करना और प्रमापित किस्म से मिलान करके अंतर का पता लगाना और विपरीत अंतर आने पर सुधारात्मक कार्यवाही करना।
  2. यह देखना कि सभी श्रमिक अपना-अपना कार्य निर्धारित गति से कर रहे हैं।
  3. यह निश्चित करना कि किसी विशेष कार्य को पूरा करने का क्रम क्या होगा?
  4. मशीनों और औजारों को काम करने योग्य हालत में बनाए रखना।
  5. एक विशेष विधि में कार्य करने के लिए निर्देश देना।
  6. यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक कार्य व्यवस्थित ढंग से हो रहा है।

उत्तर;

  1. निरीक्षक
  2. गति नायक
  3. कार्य मार्ग लिपिक
  4. मरम्मत नायक
  5. संकेत कार्ड लिपिक
  6. अनुशासन अधिकारी।

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प्रबंध के सिद्धान्त दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वैज्ञानिक प्रबन्ध के लाभ अथवा गुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वैज्ञानिक प्रबन्ध के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं

1. उत्पादन में वृद्धि-वैज्ञानिक प्रबन्ध के द्वारा व्यवसाय की उत्पादन क्रिया में कुशलता, कर्मचारियों की कार्यकुशलता में वृद्धि एवं अन्य क्षेत्रों का उचित प्रबन्ध करके उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है।-

2. कम लागत-वैज्ञानिक प्रबन्ध के द्वारा उत्पादन के विभिन्न साधनों का कुशलतम प्रयोग करके एवं नई नीतियों का निर्माण कर उत्पादन लागत में कमी लायी जाती है।-

3. प्रमापीकरण-वैज्ञानिक प्रबन्ध के अन्तर्गत उत्पादन रीतियाँ, मशीन एवं सामग्री और श्रम तथा उत्पादन की जाने वाली वस्तु का प्रमाप निर्धारित कर दिये जाते हैं। हर, प्रमाप का हर सम्भव पालन करके उत्पादन उत्तम किस्म का प्राप्त होता है।-

4. लाभ में वृद्धि-वैज्ञानिक प्रबन्ध के अन्तर्गत कार्यकुशलता में वृद्धि एवं क्षय अपव्ययों में कमी कर लागत पर नियंत्रण कर उत्पादन लागत में कमी की जाती है, एवं अधिकतम लाभ कमाने की चेष्टा की जाती है।-

5. समाज को लाभ-वैज्ञानिक प्रबंध से समाज में रोजगार के अवसर में वृद्धि होती है जिससे लोगों को श्रेष्ठ वस्तुएँ प्राप्त होती हैं तथा जीवन स्तर में वृद्धि होती है।-

प्रश्न 2.
वैज्ञानिक प्रबंध से क्या आशय है ? इसकी विशेषताएँ भी बताइए।
उत्तर:
वैज्ञानिक प्रबंध का आशय-वैज्ञानिक प्रबंध से तात्पर्य प्रबंध के रूढ़िवादी तरीकों के स्थान पर तर्कसंगत आधुनिक तरीकों को अपनाने से है। एफ.डब्ल्यू. टेलर वैज्ञानिक प्रबंध के जनक माने जाते हैं।
वैज्ञानिक प्रबंध की विशेषताएँ-उपरोक्त परिभाषाओं की विवेचना करने पर वैज्ञानिक प्रबन्ध की निम्न विशेषताएँ बताई जा सकती हैं

  1. वैज्ञानिक प्रबन्ध के अन्तर्गत कार्य के निश्चित उद्देश्य होते हैं।
  2. निश्चित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सुनिश्चित योजना होती है।
  3. वैज्ञानिक प्रबन्ध के अन्तर्गत कर्मचारियों में पारस्परिक सहयोग आवश्यक है।
  4. न्यूनतम लागत पर अधिकतम उत्पादन का लक्ष्य लेकर कार्य किया जाता है।
  5. सम्पूर्ण कार्य सहकारिता की भावना से सम्पादित किया जाता है।
  6. वैज्ञानिक नियंत्रण प्रणाली अपनाई जाती है।

प्रश्न 3.
वैज्ञानिक प्रबंध की तकनीकों को समझाइए।
उत्तर:
वैज्ञानिक प्रबंध की तकनीकें

1. समय अध्ययन-यह तकनीक कार्य के दौरान लगने वाले मानक समय का निर्धारण करती है।

2. गति अध्ययन-इसमें कार्य के दौरान कर्मचारियों की गतियों का अध्ययन किया जाता है ताकि उनकी अनावश्यक गतियों को रोका जा सके।

3. थकान अध्ययन-यह अध्ययन कार्य को पूरा करने में आराम हेतु मध्यान्तर के समय विस्तार तथा बारम्बारता को तय करता है। थकान को कम करने के लिए कार्य के दौरान नियमित रूप से अन्तर होना आवश्यक होता है।

4. कार्य पद्धतियाँ (कार्यविधि) अध्ययन-यह कार्य को करने की विधियों से संबंधित होता है। इसमें संयंत्र अभिविन्यास, उत्पाद रचना, सामग्री हस्तगन तथा कार्य प्रक्रिया का गहन अध्ययन किया जाता है ताकि सामग्री को लाने व ले जाने एवं रखने की दूरी तथा लागत में कमी आये।

5. कार्य का मानकीकरण एवं सरलीकरण- कार्य के मानकीकरण का आशय मानक उपकरणों, विधियों, प्रक्रियाओं को अपनाने तथा आकार, प्रकार, गुण, वचन, मापों आदि को निर्धारित करने से है।

इससे संसाधन की बर्बादी रुकती है तथा गुणवत्ता में वृद्धि होती है साथ ही मानवीय थकान कम हो जाती है। कार्य के सरलीकरण का आशय उत्पाद की एक रेखा के अनावश्यक आयामों तथा किस्मों को कम करने से है।

प्रश्न 4.
टेलर के वैज्ञानिक प्रबंध के सिद्धांतों को समझाइए।
उत्तर:
टेलर द्वारा प्रतिपादित प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित हैं

1. कार्य संबंधी अनुमान-इसके अन्तर्गत इस बात का सावधानीपूर्वक अनुमान लगाना चाहिए कि एक श्रमिक उपयुक्त परिस्थितियों में कितना कार्य कर सकता है, इस अनुमान के बिना यह मालूम नहीं किया जा सकता है कि श्रमिक प्रमापित उत्पादन से कम कार्य करते हैं या अधिक।

2. उत्तम सामग्री की व्यवस्था कारखाने में प्रयोग किये जाने वाले कच्चे माल का प्रभाव श्रमिक की कार्यक्षमता पर पड़ता है। अतः कच्चा माल अच्छी किस्म का होना चाहिए, जिससे उत्पादन की मात्रा में वृद्धि हो तथा उत्पादन लागत में कमी आए।

3. अपवाद का सिद्धान्त-टेलर का मानना है कि संस्था के सभी कार्य सामान्य परिस्थितियों में अधीनस्थों द्वारा ही किये जाने चाहिए। केवल अपवाद की स्थिति में ही प्रबन्धकों को रोजमर्रा के कार्यों में हस्तक्षेप करना चाहिए।

4. नियोजन का सिद्धान्त-इस सिद्धान्त के अनुसार प्रत्येक कार्य पूर्व निर्धारित नियोजन के अनुसार ही किया जाना चाहिए तथा प्रत्येक कार्य को योजना बनाकर करना चाहिए।

5. कर्मचारियों के वैज्ञानिक चयन व प्रशिक्षण का सिद्धान्त-इस सिद्धान्त के अनुसार, कर्मचारियों का उचित चयन होना चाहिए, अर्थात् कार्य के अनुरूप व्यक्तियों का चयन होना चाहिए, जो अकुशल कर्मचारी हैं, उन्हें आवश्यकता पड़ने पर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

प्रश्न 5.
हेनरी फेयोल द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्तों को समझाइये।
उत्तर:
हेनरी फेयोल द्वारा प्रतिपादित प्रबंध के सिद्धान्त निम्न हैं

1. श्रम-विभाजन का सिद्धान्त-विशिष्टीकरण के आधार पर श्रम-विभाजन करना एक अच्छे प्रबंध की आवश्यकता है, चूंकि किसी भी उपक्रम में समान क्षमता वाले कर्मचारी नहीं होते हैं, अत: कर्मचारी तथा मजदरों को उनकी कार्यक्षमता के अनुरूप कार्य का युक्तिसंगत विभाजन करना चाहिए। इस हेतु श्रमिकों को विभिन्न वर्गों में वर्गीकृत करना चाहिए, इस सिद्धान्त का पालन करने से कर्मचारियों की कार्यदक्षता में वृद्धि होती है।

2. अधिकार तथा दायित्व का सिद्धान्त-अधिकार एवं दायित्व एक गाड़ी के दो पहियों के समान हैं अर्थात् अधिकार दायित्व तथा दायित्व अधिकार के अनुरूप होना चाहिए अर्थात् जो व्यक्ति दायित्व स्वीकार करें उसे अधिकार अवश्य देना चाहिए, जिससे वह अधिकारों द्वारा श्रेष्ठ कार्य करवा सके।

3. अनुशासन का सिद्धान्त जहाँ अनुशासन नहीं वहाँ कुछ भी नहीं, अत- श्रेष्ठ कार्य एवं परिणामों की आशा नहीं करनी चाहिए। अनुशासन हो इस हेतु आवश्यक नियम, कानून तथा दण्ड का स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए।

4. आदेश की एकता का सिद्धान्त- इस सिद्धान्त के अन्तर्गत कर्मचारी को आदेश एक ही अधिकारी से मिलना चाहिए, क्योंकि अनेक अधिकारी के आदेश भी अलग-अलग होंगे। ऐसी दशा में कर्मचारी किस आदेश का पालन करे? यह दुविधा की स्थिति होती है, अतः प्रत्येक कर्मचारी को चाहे वह किसी भी स्तर का क्यों न हो, आदेश एक ही अधिकारी से मिलना चाहिए।

5. निर्देश की एकता का सिद्धान्त-कार्य के दौरान कर्मचारी को किसी एक ही निर्देशक से निर्देश मिलना चाहिए ताकि उस निर्देश का पूर्ण रूप से पालन किया जा सके। एक से अधिक निर्देश की स्थिति में कार्य में रुकावट आती है।

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प्रश्न 6.
प्रबंध के सिद्धान्तों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
प्रबन्ध में विज्ञान एवं कला के गुण विद्यमान हैं इसीलिये प्रबन्ध को कला एवं विज्ञान कहा गया है। प्रबन्ध के सिद्धान्त अन्य भौतिक एवं रसायन शास्त्र के सिद्धान्तों की भाँति स्थिर व निश्चित नहीं होते। प्रबन्ध के सिद्धान्तों की प्रकृति को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है

1. सिद्धान्तों की सार्वभौमिकता (Universality of principles)-प्रबन्ध के सिद्धान्त प्रत्येक संगठन, समूह व स्थान पर समान रूप से लागू होते हैं चाहे वह सरकारी संगठन या संस्था हो या व्यावसायिक संगठन हो। इसीलिये हेनरी फेयोल ने प्रबन्ध के सिद्धांतों की सार्वभौमिकता पर बल दिया है।

2. सिद्धान्त गत्यात्मक प्रकृति के (Dynamic nature of principles)-प्रबन्ध के सिद्धान्त गत्यात्मक व लोचपूर्ण होते हैं। इनके सिद्धान्त अन्य भौतिक व रसायन तथा गणित शास्त्र की तरह स्थिर नहीं होते । कारण एवं प्रभाव से प्रबन्ध के सिद्धान्त बदल जाते हैं। प्रबन्ध के महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त जो कभी महत्त्वपूर्ण थे वे आज सामाजिक परिवर्तन के कारण परिवर्तित हो गए हैं।

3. मानवीय व्यवहार पर केन्द्रित (Concentrated on human behavior)-प्रबन्ध मानवीय व्यवहार से पूर्णतः सम्बन्धित है। प्रबन्ध के आसपास या प्रबन्ध स्वयं मनुष्य से सम्बन्धित होता है। किसी भी संगठन में मनुष्य की भूमिकायें महत्त्वपूर्ण होती हैं अत- मानवीय व्यवहार जिस प्रकृति व प्रवृत्ति का होगा उसी के अनुरूप व्यापारिक गतिविधियाँ प्रभावशील होंगी। इस प्रकार प्रबन्ध पूर्णत- मानवीय व्यवहारों पर केन्द्रित होता है।

4. प्रबन्ध के सिद्धान्त सापेक्ष होते हैं (Relative principles)-प्रबन्ध के सिद्धान्त सापेक्ष (Relative) होते हैं न कि निरपेक्ष (Absolute) अर्थात् किसी संगठन की आवश्यकतानुसार इन सिद्धान्तों को लागू किया जाता है। इन्हें लागू करना आवश्यक नहीं है। प्रत्येक संगठन, समाज, संस्था की प्रकृति भिन्न-भिन्न होती है। अतः इसी भिन्नता के कारण संस्था या संगठन के अनुकूल सिद्धान्तों को अपनाया जा सकता है।

5. समान महत्त्व (Equal importance)-प्रबन्ध के समस्त सिद्धांतों का महत्त्व एकसमान है। किन्तु यह सत्य है कि कुछ सिद्धान्त यदि किसी संगठन के लिये महत्त्वपूर्ण हैं, तो कुछ सिद्धान्त अन्य संगठन के लिये महत्त्वपूर्ण होंगे। किन्तु प्रत्येक संगठन में इन सिद्धान्तों की भूमिका कुछ न कुछ अवश्य रहती है।

MP Board Class 12th Hindi Swati Solutions पद्य Chapter 7 सामाजिक समरसता

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MP Board Class 12th Hindi Swati Solutions पद्य Chapter 7 सामाजिक समरसता

सामाजिक समरसता अभ्यास

सामाजिक समरसता अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
केवट के अनुसार “पगधूरि” का क्या प्रभाव है? (2015)
उत्तर:
केवट के अनुसार श्रीराम की पगधूरि का प्रभाव यह है कि उसके स्पर्श से शिला भी स्त्री बन जाती है।

प्रश्न 2.
केवट की जीविका का एकमात्र आधार क्या था?
उत्तर:
केवट की जीविका का एकमात्र आधार उसकी नाव थी। उस नाव में वह सवारियाँ बैठा कर गंगा पार कराता था।

प्रश्न 3.
कवि के अनुसार हमें अशिक्षित या असभ्य बताने वाले लोग कौन हैं?
उत्तर:
कवि के अनुसार हमें अशिक्षित या असभ्य बताने वाले लोग वे हैं,जो हम लोगों की सभ्यता से अनजान हैं या वे पक्षपात की भावना से ग्रसित हैं।

प्रश्न 4.
सभी देश हमारे यहाँ किस प्रयोजन से आते रहे हैं?
उत्तर:
सभी देशों के लोग भारत में शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते रहे हैं।

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सामाजिक समरसता लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
केवट के किन वचनों को सुनकर प्रभु को हँसी आ गई? (2016)
उत्तर:
केवट कहता है कि हे प्रभु ! आपके चरणों की धूल का प्रभाव बहुत ही विशाल है। मेरी नाव तो लकड़ी की है जो पत्थर से बहुत कोमल है (केवट के मन में शंका है कि जिन चरणों की धूल से पत्थर की शिला स्त्री बन गई तो उसकी नाव तो नष्ट ही हो जायेगी)। अतः केवट श्रीराम के सम्मुख एक शर्त रखता है कि वह उनके पवित्र चरणों को धोकर ही उन्हें नाव पर चढ़ायेगा। प्रभु की स्वीकृति मिलने पर केवट अपने परिवार सहित श्रीराम के चरणों की वन्दना करता है,तत्पश्चात् एक कठौते में गंगाजल भरकर रामजी के चरण धोकर उस पवित्र जल का पान करता है। इस प्रकार केवट की भक्ति और उसकी प्रेम से परिपूर्ण भोली वाणी सुनकर श्रीराम (प्रभु) को हँसी आ गई।

प्रश्न 2.
प्राचीनता की खोज बढ़ने पर हम पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
अतीत की खोज होने पर हमारी उच्चता (सभ्यता) के प्रमाण मिलते जायेंगे। जहाँ-जहाँ भी लोग जायेंगे तो वे पायेंगे कि भारतवासियों के चरण वहाँ पहले पड़ चुके हैं।

प्रश्न 3.
भारत की सभ्यता के विकास को कौन लोग स्वीकार नहीं करते और क्यों?
उत्तर:
भारत की सभ्यता के विकास को वे लोग स्वीकार नहीं करते जो भारत के गौरवशाली इतिहास से अनजान हैं या जानबूझ कर पक्षपात की भावना से ग्रसित होने के कारण भारत की सभ्यता को स्वीकार नहीं करते।

प्रश्न 4.
सुरलोक में देवगण किसका वंदन कर रहे हैं? (2017)
उत्तर:
सरलोक में देवगण भारत के ऋषि.मनियों और सुशिक्षित भारतीयों का वन्दन कर रहे हैं। यहाँ के प्राचीन गौरव से देवता भी परिचित हैं। समय-समय पर भगवान यहीं पर अवतरित होते रहे हैं।

सामाजिक समरसता दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
राम को पार उतारने के लिए केवट कौन-सी शर्त रखता है और क्यों? (2010, 14)
उत्तर:
श्रीराम को जानकी और लक्ष्मण सहित गंगा पार उतारने के लिए केवट यह शर्त रखता है कि वह श्रीराम के चरणों को धोकर ही अपनी नाव पर चढ़ायेगा क्योंकि उनके चरणों की रज के स्पर्श से एक शिला भी स्त्री बन गई थी। यदि वह रज उसकी नाव को स्पर्श करेगी तो या तो मेरी नाव नष्ट हो जायेगी या दसरी स्त्री बन जायेगी। फिर वह अपने परिवार का पालन कैसे करेगा। यह भोला-सा उसका तर्क बड़ी चतुरता लिए हुए है। वह उनके चरणों का चरणामृत स्वयं पीकर और अपने परिवार को पिलाकर सबका उद्धार करना चाहता है।

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प्रश्न 2.
रामचन्द्र जी का भाव समझकर केवट ने क्या-क्या उपक्रम किए?
उत्तर:
रामचन्द्र जी की स्वीकृति का रुख देखकर केवट ने अति प्रसन्न होकर अपनी पत्नी और बच्चों को बुला लिया और रामजी की वन्दना करके उनको चारों ओर से घेर कर वे सब बैठ गये। फिर वह छोटे से कठौते में गंगाजल भर लाया और श्रीराम के चरण-कमलों को धोकर उसे चरणामृत बना लिया। फिर उसने उस पवित्र चरणामृत को स्वयं पीया और अपने घरवालों को पिलाया। इस प्रकार उसने श्रीराम के चरणों के जल को पीकर और अपने परिवार को पिलाकर भवसागर से सबका उद्धार कर लिया। नाव पर चढ़ाने की यह शर्त रखना उसकी चतुरता थी कि वह सहज में ही संसार-सागर से पार हो गया।

प्रश्न 3.
“हमको अशिक्षित कहने वाले लोग सभ्य कैसे हो सकते हैं?” इन पंक्तियों से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
‘हमको अशिक्षित कहने वाले लोग सभ्य कैसे हो सकते हैं’ इस पंक्ति से कवि मैथिलीशरण गुप्त का तात्पर्य यह है कि भारतवर्ष प्राचीन काल से ही शिक्षित और सभ्य रहा है। यहाँ के ऋषि-मुनियों ने वेद-उपनिषदों का ज्ञान विश्व को दिया। सर्वप्रथम भारतवासियों ने ही विश्व को सभ्यता का पाठ पढ़ाया। विदेशों से अनेक छात्र प्राचीनकाल में भारत में शिक्षा प्राप्त करने आते थे। भारत का प्राचीन गौरव और वैभव उन्नत था। हमको अशिक्षित बताने वाले लोग हमारी सभ्यता और गौरव से अनजान हैं या पक्षपात से ग्रसित हैं। उन्हें भारत की प्राचीन सभ्यता का ज्ञान नहीं है। फिर वे लोग भारत से पहले सभ्य हो ही नहीं सकते। भारत की सभ्यता का डंका प्राचीनकाल से ही विश्व में गूंज रहा है।

प्रश्न 4.
‘महत्ता’ कविता में भारतवर्ष की किन-किन विशेषताओं का उल्लेख किया गया है? (2009, 14)
उत्तर:
‘महत्ता’ नामक कविता में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने भारत की महत्ता का उल्लेख किया है। जो लोग हमको अतीत में असभ्य बता रहे हैं वे लोग हमारी सभ्यता से या तो अनजान हैं या पक्षपात की भावना से ग्रसित हैं। भविष्य में यदि प्राचीनता की खोज की जायेगी तो सभी जगह भारतवासियों के पदचिह्न और सभ्यता के चिह्न मिलेंगे। यहीं से पूरे विश्व ने ज्ञान प्राप्त किया। अनेक देशों के छात्र भारत में पढ़ने के लिए आते थे। हमने स्वयं पीछे रहकर भी दूसरों को आगे बढ़ाने का उपक्रम किया। यूनान जैसे देश भी हमने सभ्य कर दिये। हमने मरते हुए लोगों को भी जगाकर जीवन का मन्त्र दिया। जो लोग हमारी सभ्यता पर हँसते थे, वे हमारे आधुनिक अनुसंधान देखकर लज्जित हैं। जो लोग व्यर्थ में ही हम लोगों से विरक्त हैं वे कल हमारी प्रगति देखकर हमसे प्रेम करने लगेंगे। सभी लोग विद्या प्राप्त करने के लिए भारतवर्ष में लगातार आते रहे हैं। देवता भी स्वर्ग में भारतवासियों के उत्कर्ष को देखकर गुणगान करते रहे हैं।

सामाजिक समरसता काव्य सौन्दर्य

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिये
अनुरक्त, उत्कर्ष, अज्ञ, मरण।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Swati Solutions पद्य Chapter 7 सामाजिक समरसता img-1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के मानक रूप लिखिए
धूरि, लरिका, पायन,प्रभाउ, आयसु, बानी।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Swati Solutions पद्य Chapter 7 सामाजिक समरसता img-2

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प्रश्न 3.
तुलसीदास किस भाषा के कवि हैं? उनकी भाषा के कुछ शब्द पाठ से छाँटकर लिखिए।
उत्तर:
तुलसीदास मुख्यतः अवधी भाषा के कवि हैं। उनके कुछ शब्द हैं-
“एहि घाटतें थोरिक दूरि अहै कटि लौं जल,थाह देखाइहौं जू।
परसै पगधूरि तरै तरनी, घरनी घर क्या समुझाइहौं जू।”

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों में आए अलंकार छाँटकर लिखिए

  1. बरषै सुमन, जय-जय कहें टेरि-टेरि।
  2. पावन पाय पखारि कै नाव चढ़ाइहौं।
  3. ज्यों ज्यों प्रचुर प्राचीनता की खोज बढ़ती जायेगी।

उत्तर:

  1. ‘जय-जय’ और ‘टेरि-टेरि’ में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार।
  2. पावन पाय पखारि’ में अनुप्रास अलंकार।
  3. ‘ज्यों-ज्यों में पुनरुक्तिप्रकाश और ‘प्रचुर प्राचीनता’ में अनुप्रास अलंकार।

प्रश्न 5.
प्रबन्ध काव्य से आप क्या समझते हैं? किन्हीं दो प्रबन्ध काव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रबन्ध काव्य के छंद एक कथा के धागे में माला की तरह गुंथे होते हैं, अर्थात् जो रचना कथा-सूत्रों या छन्दों की तारतम्यता में अच्छी तरह निबद्ध हो उसे प्रबन्ध काव्य कहते हैं, जैसे-साकेत,रामचरितमानस।

प्रश्न 6.
नाटक और एकांकी में अन्तर बताइये।
उत्तर:
(1) नाटक-इसमें अनुकरण तत्व की प्रधानता रहती है और मानवीय जीवन के क्रियाशील कार्यों का अनुकरण होता है। इसमें कई अंक होते हैं।
(2) एकांकी-एकांकी एक अंक वाला नाटक है। यह एक ऐसी पूर्ण नाटकीय रचना है जिसमें मानव जीवन के एक पक्ष, एक चरित्र, एक समस्या और एक भाव की अभिव्यक्ति होती है।

केवट प्रसंग भाव सारांश

प्रस्तुत कविता ‘केवट प्रसंग’सन्त कवि ‘तुलसीदास’ द्वारा रचित है। यहाँ पर कवि ने केवट की अनन्य भक्ति और राम का उस पर अनुग्रह मनमोहक प्रसंग के रूप में प्रस्तुत किया है।

समाज की रचना एक सम्पूर्ण इकाई के रूप में निर्धारित की गई है। किन्तु सामाजिक गतिशीलता के अन्तर्गत अनेक व्यतिक्रम आते हैं। समाज के चिन्तक और साहित्यकार अपनी अभिव्यक्ति के माध्यम से समरसता को सुरक्षित रखने का प्रयास करते हैं। भक्तिकाल के कवियों में सामाजिक समरसता का स्वर अत्यधिक रूप से मुखरित हुआ है। कविवर तुलसी ने केवट और राम के प्रसंग में इस तथ्य को संवेदना के स्तर पर प्रकट किया है। अयोध्या के राजपुत्र राम केवट से जिस आत्मीय भाव से भेंट करते हैं वह एक भावुक दृश्य है। केवट के प्रेम से वशीभूत होकर राम ने सहर्ष अपने चरण-कमल धुलवाये और केवट को प्रसन्न किया। केवट का भोलापन राम के हृदय को प्रसन्न करता है। केवट से उनका प्रेम समरसता का सन्देश प्रदान करता है।

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केवट प्रसंग संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

1. नाम अजामिल से खल कोटि अपार नदी भव बूड़त काढ़े।
जो सुमिरें गिरि मेरु सिलाकन होत, अजाखुर बारिधि बाढ़े॥
तुलसी जेहि के पद पंकज तें प्रगटी तटिनी, जो हरै अघ गाढ़े।
ते प्रभु या सरिता तरिबे कहुँ माँगत नाव करारें बै ठाढ़े॥
एहि घाटतें थोरिक दूरि अहै कटि लौं जलु, थाह दिखाइहौं जू।
परसें पगधूरि तरै तरनी, घरनी घर क्या समझाइहौं जू।
तुलसी अवलम्बु न और कछू लरिका केहि भाँति जिआइहौं जू।
बरु मारिए मोहि बिना पग धोएँ हौं नाथ न नाव चढ़ाइहौं जू।

शब्दार्थ :
खल = पापी,दुष्ट; कोटि = करोड़ों, अनेक; नदी भव = संसार रूपी सागर; बूड़त = डूबते हुए; मेरु = सुमेरु पर्वत; सिलाकन = पत्थर का कण; अजाखुर = बकरी के खुर के बराबर; बारिधि = समुद्र; पद पंकज = चरण-कमल; तटिनी = गंगा नदी; अघ = पाप; कटिलौं = कमर के बराबर; थाह = गहराई; परसै = स्पर्श करके; पगधूरि = पैरों की धूल; घरनी = घरवाली; अवलम्बु = और कोई सहारा; लरिका = बच्चे; बरु मारिए = चाहे मार दें।

सन्दर्भ :
प्रस्तुत पंक्तियाँ तुलसीदास द्वारा रचित ‘केवट प्रसंग’ से उद्धृत हैं।।

प्रसंग :
यहाँ पर वर्णन है कि वनवास प्राप्त राम, सीता और लक्ष्मण गंगा के किनारे पर खड़े हैं और केवट से उन्हें गंगा पार उतारने के लिए नाव लाने के लिए अनुरोध कर रहे हैं। केवट अपनी एक शर्त के साथ पार उतारने के लिए वार्तालाप कर रहा है।

व्याख्या :
तुलसीदास जी कहते हैं कि जिस प्रभु ने अजामिल जैसे अनेक पापियों का भव सागर से उद्धार कर दिया। जिसके स्मरण (जप) करने से सुमेरु पर्वत चट्टान के एक कण के समान छोटा हो सकता है और समुद्र बकरी के खुर के समान हो सकता है। उन्हीं के चरण कमलों से गंगाजी प्रकट हुई थीं जो कठोर पापों को भी नष्ट कर देती हैं अर्थात् इसमें स्नान करने से पापी के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। वही प्रभु राम सुरसरि से पार उतरने के लिए केवट से नाव माँग रहे हैं। अर्थात् वह ब्रह्म जो सर्व समर्थ है,वह केवट से पार उतारने के लिए निहोरा कर रहा है।

केवट ने श्रीराम के सामने एक शर्त रखी कि वह उनके चरण धोकर ही नाव पर चढ़ायेगा। उसके मन में यह शंका है कि उनके चरणों में लगी धूल से जब पत्थर की शिला स्त्री बन गई तो फिर उसकी नाव तो नष्ट हो ही जायेगी,फिर वह घर जाकर अपनी घर वाली को क्या समझायेगा। इसके अलावा उसके पास और कोई सहारा (रोजी) नहीं है, वह अपने बच्चों का पालन कैसे करेगा। चाहे वे (राम और लक्ष्मण) उसे बेशक मार दें पर बिना पग धोए वह उन्हें अपनी नाव पर नहीं चढ़ायेगा। यदि उन्हें उसकी शर्त मंजूर नहीं है, तो इस घाट से थोड़ी दूर चलकर कमर तक जल है और वह उसकी थाह लेकर भी दिखा देगा। वे चाहें तो वहाँ से जल में प्रवेश करके गंगा पार जा सकते हैं।

काव्य सौन्दर्य :

  1. अवधी भाषा का सुन्दर समायोजन है।
  2. प्रभु के गुणों का वर्णन किया गया है।
  3. अनुप्रास अलंकार का प्रयोग सुन्दर बन पड़ा है।
  4. तद्भव शब्दों का प्रयोग कविता में मधुरता लिये है।

2. रावरे दोषु न पायन को, पगधूरि को भूरि प्रभाउ महा है।
पाहन तें बन-बाहनु काठ को कोमल है, जलु खाइ रहा है।
पावन पाय पखारि कै नाव चढ़ाइहौं, आयसु होत कहा है।
तुलसी सुनि केवट के बर बैन हँसे प्रभु जानकी ओर हहा है।।
प्रभुरुख पाइ कै, बोलाइ बालक घरनिहि
बंदि कै चरन चहँ दिसि बैठि घेरि-घेरि।
छोटो-सो कठौता भरि आनि पानी गंगाजू को,
घोड़ पाय पीअत पुनीत बारि फेरि-फेरि।
तुलसी सराहैं ताको भागु, सानुराग सुर,
बरर्षे सुमन, जय-जय कहैं टेरि-टेरि।
बिबिध सनेह-सानी बानी असयानी सुनि,
हँसे राघौ जानकी-लखन तन हेरि-हेरि॥

शब्दार्थ :
रावरे = स्वामी; दोषु = दोष; पायन = चरणों का; पगधूरि = चरण रज; भूरि = बहुत; बन-बाहनु = नाव;जलु खाइ रहा है = जल ने खा लिया है; पखारि = धोकर; आयसु = आज्ञा; बर बैन = श्रेष्ठ वचन; प्रभुरुख = प्रभु की स्वीकृति; घरनिहि = पत्नी; कठौता = पानी भरने का लकड़ी का बर्तन; पुनीत = पवित्र; सराहैं = प्रशंसा करते हैं; सानुराग = प्रसन्नता से; सुर = देवता; टेरि-टेरि = बुला बुलाकर; बिबिध = अनेक प्रकार की; असयानी = भोली; राघौ = राम जी; हेरि-हेरि = देख-देख कर।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
यहाँ पर केवट अपनी बात पर अडिग रहते हुए विनती करता है कि मेरी नाव लकड़ी की है जो पाहन से बहुत कोमल है। प्रभु की स्वीकृति पा उसने उनके चरणों के पवित्र जल से अपने परिवार का उद्धार कर लिया।

व्याख्या :
केवट कहता है कि हे स्वामी ! आपके चरणों का दोष नहीं है.पर आपके चरणों की धूल का प्रभाव बहुत बड़ा है। मेरी नाव तो लकड़ी की है जो चट्टान से बहुत कोमल है और जल में निरन्तर चलने के कारण जल में उसकी लकड़ी गल गई है। मैं आपके पवित्र चरणों को धोकर ही नाव पर चढ़ाऊँगा, आपकी क्या आज्ञा है, मुझे बताएँ। तुलसीदास जी कहते हैं कि केवट के श्रेष्ठ गूढ़ भरे वचनों को सुनकर प्रभु जानकी की ओर देखकर मुस्कराए।

प्रभु की स्वीकृति पाकर केवट ने अपनी पत्नी और बालकों को बुला लिया। श्रीराम के चरणों की वन्दना की और चारों तरफ से उन्हें घेर कर बैठ गये। छोटे से कठौते (पानी भरने का लकड़ी का कटोरा जैसा बर्तन) में गंगाजल भरकर राम जी के चरण धोकर उस पवित्र जल को अपने पूरे परिवार के साथ पिया। तुलसी कहते हैं कि देवता भी प्रसन्न होकर केवट के भाग्य की सराहना करने लगे। देवता पुष्पों की वर्षा करने लगे और बार-बार जय-जयकार करने लगे। केवट की प्रेम से भरी हुई भोली वाणी सुनकर श्रीराम जानकी और लक्ष्मण की ओर देखकर हँसने लगे।

काव्य सौन्दर्य :

  1. अवधी भाषा का सुन्दर प्रयोग है।
  2. तद्भव शब्दों के प्रयोग से कविता में मधुरता आ गई है।
  3. अनुप्रास और पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार का प्रयोग है।

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महत्ता भाव सारांश

प्रस्तुत कविता ‘महत्ता’ राष्ट्रकवि ‘मैथिलीशरण गुप्त’ द्वारा लिखित है। इस देश-भक्ति से ओतप्रोत कविता में कवि ने भारतीयों के ओज, परोपकारिता एवं सभ्यता का वर्णन किया है।

आधुनिक युग में मैथिलीशरण गुप्त के काव्य में सामाजिक समरसता के प्रसंग सर्वाधिक हैं। वे हमारे अतीत को अपनी कविता में स्पष्ट करते हैं कि हमारा अतीत पारस्परिक सद्भाव से ओतप्रोत था। भारतीय मृत्यु में भी अमरता के दर्शन करते हैं। भारतीय सदा से ही शिक्षित और सभ्य रहे हैं। यद्यपि महाभारत का समर हुआ फिर भी हम लोग विकसित हुए और यूनान जैसे देशों को भी हमने सभ्यता का पाठ पढ़ाया। अन्य देश हमारी सभ्यता और प्रगति को देखकर अचम्भित हैं। भारत देवताओं के स्वर्ग से भी अधिक उन्नतिशील है।

महत्ता संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

(1) जो पूर्व में हमको अशिक्षित या असभ्य बता रहे
वे लोग या तो अज्ञ हैं या पक्षपात जता रहे।
यदि हम अशिक्षित थे, कहें तो सभ्य वे कैसे हए?
वे आप ऐसे भी नहीं थे, आज हम जैसे हुए। (2013)

शब्दार्थ :
पर्व में = पहले; अज्ञ = अनजान; पक्षपात = दूसरे का पक्ष लेना।

सन्दर्भ :
प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘महत्ता’ नामक शीर्षक से उद्धृत हैं। इसके रचयिता राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त हैं।

प्रसंग :
यहाँ पर कवि भारत के प्राचीन गौरव का बखान करते हुए आज भी भारत को उच्च स्थान पर सुशोभित कर रहा है।

व्याख्या :
जो लोग (देश) प्राचीन काल से ही भारत को असभ्य और अशिक्षित बता रहे हैं वे या तो हमारी सभ्यता से अवगत नहीं हैं या फिर पक्षपात से ग्रसित होने के कारण ऐसा कर रहे हैं। यदि हम अशिक्षित थे तो वे फिर कैसे सभ्य हो सकते हैं क्योंकि भारत से ही विविध प्रकार के ज्ञान अन्य देशों में पहुँचे। हम जितने सभ्य और ज्ञानी आज हैं वे लोग स्वयं पहले उतने सभ्य और जानकार नहीं थे।

काव्य सौन्दर्य :

  1. भारत के प्राचीन गौरव का प्रभावशाली वर्णन किया है।
  2. अनुप्रास अलंकार है।

(2) ज्यों-ज्यों प्रचुर प्राचीनता की खोज बढ़ती जायगी,
त्यों-त्यों हमारी उच्चता पर ओप चढ़ती जायगी,
जिस ओर देखेंगे हमारे चिह्न दर्शक पायेंगे,
हमको गया बतलायेंगे, जब जो जहाँ तक जायेंगे।

शब्दार्थ :
प्रचुर = अधिक; प्राचीनता = अतीत; ओप = चमक; दर्शक = देखने वाले।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
कवि ने इन पंक्तियों में व्यक्त किया है कि ज्यों-ज्यों प्राचीनता की खोज होगी त्यों-त्यों भारत की महानता का पता लगता जायेगा।

व्याख्या :
जैसे-जैसे प्राचीनता की खोज होती जायेगी वैसे-वैसे हमारी उच्चता (श्रेष्ठता) के प्रमाण मिलते जायेंगे। जहाँ भी वे लोग देखेंगे भारतीयों के पद-चिह्न वहीं पर पायेंगे और संसार के सामने यह घोषणा करेंगे कि भारतीय वहाँ तक जा चुके हैं।

काव्य सौन्दर्य :

  1. भारत के प्राचीन गौरव का सुन्दर वर्णन है।
  2. अनुप्रास और पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार की छटा दर्शनीय है।

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(3) पाये हमीं से प्रथम सबने अखिल उपदेश हैं,
हमने उजड़कर भी बसाए दूसरे बहुदेश हैं,
यद्यपि महाभारत-समर था मरण भारत के लिए,
यूनान जैसे देश फिर भी सभ्य हमने कर दिये।।

शब्दार्थ :
अखिल = सम्पूर्ण; समर = युद्ध । सन्दर्भ-पूर्ववत्। प्रसंग-उक्त पंक्तियों में कवि ने भारत को परोपकारी और धैर्यवान बताया है।

व्याख्या :
सभी देशों ने भारत के ऋषि-मुनियों के सदुपदेश प्राचीन काल से ही सुने हैं। भारतीयों ने अपनी परवाह न कर परोपकार किए हैं और उजड़े हुए देशों को पुनः बसाया है। यद्यपि महाभारत का युद्ध एक प्रकार से भारत का सर्वनाश था, परन्तु फिर भी हम पुनः स्थापित हुए और सभ्यता और प्रगति का पथ प्राप्त किया। यूनान जैसे देशों की सभ्यता भी भारत की ही देन है। भारत ने यूनान को सभ्य बनाने में अपना योगदान दिया।

काव्य सौन्दर्य :

  1. भारत की दूरदर्शिता और परोपकारिता का वर्णन सटीक है।
  2. मानवीकरण का प्रयोग भारत के लिए किया गया है।

4. हमने बिगड़कर भी बनाये जन्म के बिगड़े हुए,
मरते हुए भी हैं जगाये मृतक-तुल्य पड़े हुए।
गिरते हुए भी दूसरों को हम चढ़ाते ही रहे,
घटते हुए भी दूसरों को हम बढ़ाते ही रहे।

शब्दार्थ :
मृतक-तुल्य = मरे हुए के समान।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
यहाँ कवि बता रहा है कि हमने गिरते हुए भी दूसरों को उठाया। सब लोगों को हमने ज्ञान दिया।

व्याख्या :
कवि कहता है कि भारतवासियों ने बिगड़े हुए लोगों को सुधारा है। हमने स्वयं की हालत न देखकर मृत समान लोगों को जाग्रत कर जीने का सुख प्रदान किया है। गिरते हुओं को हम ऊपर चढ़ाते रहे हैं और स्वयं पीछे रहकर दूसरों को आगे बढ़ाते रहते हैं।

काव्य सौन्दर्य :

  1. विरोधाभास अनूठा है।
  2. दूसरों का भला करने की भावना बलवती है।

(5) कल जो हमारी सभ्यता पर थे हँसे अज्ञान से,
वे आज लज्जित हो रहे हैं अधिक अनुसन्धान से।
जो आज प्रेमी हैं हमारे भक्त कल होंगे वही,
जो आज व्यर्थ विरक्त हैं अनुरक्त कल होंगे वही॥ (2012, 16)

शब्दार्थ :
अज्ञान = जानकारी न होना; अनुसंधान = खोज।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
यहाँ कवि ने भारतवासियों की उदारता का वर्णन किया है।

व्याख्या :
अतीत में जो लोग हमारी सभ्यता पर हँसते थे, वे ही लोग आज हमारे अनुसन्धानों (खोजों) को देखकर लज्जित हो रहे हैं। जो देश आज हमारे मित्र हैं, वे भविष्य में हमारी प्रगति को देखकर हमारे भक्त बन जायेंगे। आज जो लोग हमें व्यर्थ का समझकर विरक्त हैं.वे भविष्य में हमसे प्रेम करने लगेंगे।

काव्य सौन्दर्य :

  1. भारत की महानता का वर्णन किया गया है।
  2. अनुप्रास अलंकार का प्रयोग सुन्दर है।
  3. विरोधाभास-विरक्त और अनुरक्त में है।

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(6) सब देश विद्या-प्राप्ति को सतत यहाँ आते रहे,
सुरलोक में भी गीत ऐसे देवगण गाते रहे”
हैं धन्य भारतवर्षवासी, धन्य भारतवर्ष है,
सुरलोक से भी सर्वथा उसका अधिक उत्कर्ष है।”

शब्दार्थ :
सतत = लगातार; सुरलोक = देवलोक, स्वर्ग; सर्वथा = हमेशा।

सन्दर्भ :
पूर्ववत्।

प्रसंग :
उक्त पंक्तियों में कवि ने भारत की महानता के कारण भारतवासियों को और भारत को धन्य कहा है।

व्याख्या :
सभी देशों के लोग विद्या प्राप्त करने हेतु सदा भारत में आते रहे हैं। स्वर्ग में भी देवता भारत के लोगों के गुणगान गाते रहते हैं। भारतवासी और भारतवर्ष दोनों ही अपनी विद्या और उत्सर्ग के लिए धन्य हैं। भारत का अभ्युदय स्वर्ग से भी अधिक है। कहने का तात्पर्य है कि भारतवर्ष स्वर्ग से भी अधिक उन्नतिशील है।

काव्य सौन्दर्य :

  1. भारत की समता स्वर्ग से करके कवि ने भारत के उत्कर्ष को उजागर किया है।
  2. अनुप्रास अलंकार का प्रयोग है।