भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 20 रुपये की आत्मकथा प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 20 Rupay ki Atmakatha Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 20 Rupay ki Atmakatha Questions and Answers

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) वैदिक युग में रुपये का नाम था
(i) रुफियाह
(ii) रुपी,
(iii) रुष्यकम्
(iv) रुपाई।
उत्तर
(iii) रुष्यकम्

(ख) सन् 1957 के पूर्व रुपये में होते थे
(1) 1000 पैसे
(ii) 64 पैसे
(iii) 50 पैसे
(iv) 25 पैसे
उत्तर
(ii) 64 पैसे

(ग) रुपये के नए अंतर्राष्ट्रीय प्रतीक की लिपि है
(i) द्रविड़
(ii) ब्राह्मी
(iii) देवनागरी
(iv) गुरुमुखी
उत्तर
(iii) देवनागरी।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) रुपया शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग ………………. ने किया।
(ख) रुपये का दशमलवीकरण सन् ………………….. में किया गया।
उत्तर
(क) शेरशाह सूरी
(ख) 1957 ई.।

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प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) शेरशाह सूरी के कार्यकाल में रुपये का वजन कितना था?
उत्तर
शेरशाह सूरी के कार्यकाल में रुपया चाँदी के सिक्के के रूप में था जिसका वजन 178 ग्रेन था जो लगभग 11.5 ग्राम के बराबर था।

(ख) रुपए को कागज के एक ओर किस बैंक ने मुद्रित किया था ?
उत्तर
रुपए को कागज के एक ओर बैंक ऑफ बंगाल ने मुद्रित किया था।

(ग) प्राचीन समय में सोने और तांबे के सिक्के किस नाम से जाने जाते थे?
उत्तर
प्राचीन समय में सोने और तांबे के सिक्कों को भी – “रुप्यकम्’ के नाम से जाना जाता था।

(घ) रुपए के नए अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप की डिजाइन किसने की?
उत्तर
रुपए के नए अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप (र) की डिजाइन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के प्राध्यापक श्री उदय कुमार ने की।

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प्रश्न 4.
तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) हिन्दी के अतिरिक्त अन्य भारतीय भाषाओं में रुपए को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर
हिन्दी के अतिरिक्त अन्य भारतीय भाषाओं में ‘रुपया’ शब्द का नाम भी उस नाम की समानता लिए हुए नाम से ही जाना जाता है। जैसे-गुजरात में रुपियो’, कन्नड़ में रुपाई’, मलयालम में ‘रुपा’, मराठी में ‘रुपए’ नाम से जाना जाता है। इन सब भाषाओं में थोड़े परिवर्तन से रुपए का स्वरूप एक ही है।

(ख) दशमलवीकरण के पूर्व रुपए को किस प्रकार विभाजित किया जाता था?
उत्तर
दशमलवीकरण से पूर्व रुपए को आने, पैसे और पाई में बाँटा गया था। उस समय (अर्थात् 1957 से पूर्व) तीन पाई का एक पैसा होता था। चार पैसे का एक आना और सोलह आने का एक रुपया होता था।

(ग) वर्तमान में किन-किन देशों की मुद्राओं के लिए अन्तर्राष्ट्रीय प्रतीक प्रयोग में लाए जाते हैं ?
उत्तर
अन्य देशों की मुद्राओं के अन्तर्राष्ट्रीय प्रतीक निम्न प्रकार से प्रयोग में लाए जाते हैं
MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 20 रुपये की आत्मकथा 1
प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) जब रुपया प्रचलन में नहीं था, तब बाजार में लेन-देन कैसे होता होगा?
उत्तर
रुपये के प्रचलन में न होने पर, बाजार में लेन-देन वस्तु के बदले वस्तु द्वारा होता था।

(ख) रुपये को कागज पर मुद्रित करने के क्या लाभ हैं?
उत्तर
मुद्रा का भार नहीं होता है। अत: लाने और ले जाने में आसानी और सरलता होती है। चोरी और लूट का अंदेशा कम हो गया है। मुद्रा के नष्ट होने पर शीघ्र ही छपाई होकर उसकी भरपाई की जा सकती है।

(ग) यदि आप विदेश जाते हैं, तो क्या भारतीय रुपया वहाँ चलेगा?
उत्तर
विदेश जाने पर, अब भारतीय रुपया वहाँ चल सकेगा क्योंकि अब रुपये ने अपना अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप प्राप्त करने में सफलता प्राप्त कर ली है। रुपये ने भी डॉलर, पौण्ड और यूरो की तरह अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में पहचान बना ली है।

प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए

(क) यदि रुपए का प्रचलन न होता तो क्या होता?
उत्तर
यदि रुपए का प्रचलन न होता तो बाजार में वस्तुओं के खरीदने और बेचने में बड़ी कठिनाई होती। वस्तु के बदले वस्तु खरीदने में वस्तु को भार रूप में इधर से उधर लाना और ले जाना पड़ता। साथ ही, व्यापारी द्वारा बदले में ली जाने वाली वस्तु का उचित मूल्य नहीं दिया जाता। खरीदने वाले की वस्तु का मूल्य बेचने वाले के द्वारा निर्धारित होता। इस तरह व्यापारी खरीददार को ठगता।

(ख) यदि कागज पर रुपए के छापने की शुरूआत नहीं होती, तो क्या होता?
उत्तर
धातु की मुद्रा का बोझ लादकर बाजार में वस्तु खरीदने के लिए ले जाना पड़ता। कागज की मुद्रा आसानी से और बिना भार के तथा सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाई जा सकती है। ठगी और चोरी का डर बढ़ गया होता।

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भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और लिखिए
अस्तित्व, प्रणाली, प्रतीक, उल्लेख, शुल्क।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से उच्चारण कीजिए और लिखकर अभ्यास कीजिए।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखिए
(i) मुदरित
(ii) अर्थिक
(iii) चिन्ह
(iv) दसमलव
(v) बांटा।
उत्तर-
(i) मुद्रित, (ii) आर्थिक, (iii) चिह्न, (iv) दशमलव, (v) बाँटा।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त उपसर्ग अलग करके लिखिए
(i) अनुराग
(ii) अपमान
(iii) अनुमान
(iv) अपकार।
उत्तर
(i) अनु + राग (अनु उपसर्ग)
(ii) अप + मान (अप उपसर्ग)
(iii) अनु + मान (अनु उपसर्ग)
(iv) अप + कार (अप उपसर्ग)।

प्रश्न 4.
‘ईय’ प्रत्यय लगाकर निम्नलिखित शब्दों से नए शब्द बनाइए
(i) भारत
(ii) यूरोप
(ii) स्वर्ग
(iv) शासक।
उत्तर
(i) भारत + ईय = भारतीय
(ii) यूरोप + ईय = यूरोपीय
(iii) स्वर्ग + ईय = स्वर्गीय
(iv) शासक + ईय = शासकीय।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(i) पाठ्य-पुस्तक
(ii) सिक्का
(iii) स्वतन्त्रता
(iv) मुद्रा
(v) शासन।
उत्तर
(i) कक्षा 6 के लिए हिन्दी की पाठ्य-पुस्तक शासन द्वारा बदल दी गई है।
(ii) भारतीय सिक्के ‘रुपये’ का अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अब अपना अलग ही महत्व है।
(iii) भारत की स्वतन्त्रता में भारतीय वीर जवानों ने अपनी जान की परवाह नहीं की।
(iv) भारतीय मुद्रा का प्रचलन विश्व बाजार में अब महत्वपूर्ण हो गया है।
(v) शासन द्वारा नकल मुक्त परीक्षा कराने के लिए बहुत अच्छी पहल की गई है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों की संधि विच्छेद कीजिए
(i) शिक्षार्थी
(ii) कवीश्वर
(iii) नदीश
(iv) भानूदय
(v) महात्मा
(vi) परीक्षार्थी।
उत्तर
(i) शिक्षा + अर्थी
(ii) कवि+ ईश्वर
(iii) नदी+ ईश
(iv) भानु + उदय
(v) महा + आत्मा
(vi) परीक्षा + अर्थी

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए
कुछ लोग कागज पर मुद्रित रुपये को तोड़-मरोड़कर रखते हैं, उस पर कुछ भी लिख देते हैं, उनमें छेदकर उनका स्वरूप बिगाड़ देते हैं, सजावट या माला में उपयोग करते हैं। ऐसा करना भारतीय मुद्रा का अपमान है। हमारा दायित्व है। कि हम रुपये का स्वरूप बनाए रखें।
(क) गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) हम रुपये के स्वरूप को कैसे सुरक्षित रख सकते
उत्तर
(क) ‘भारतीय मुद्रा’ उचित शीर्षक है।
(ख) हम रुपये के स्वरूप को सुरक्षित रख सकते हैं यदि हम उसे सजावट और माला में उपयोग न करें। साथ ही उसे तोड़-मरोड़कर न रखें। उसके स्वरूप को बनाए रखने का प्रयास करें।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित शब्दों में ‘र’ या ‘ऋ’ का उचित संकेत लगाकर सही शब्द बनाकर लिखिए
(i) ऋष्टि
(ii) दर्शन
(iii) कर्म
(iv) गह
(v) सूर्य
(vi) क्रम।
उत्तर
(i) दृष्टि
(ii) दर्शन
(iii) कर्म
(iv) गृह
(v) सूर्य
(vi) क्रम।

रुपये की आत्मकथा परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) आज मैं आपको अपनी कहानी बताने जा रहा हूँ। मेरा अस्तित्व प्राचीन काल से रहा है। वैदिक युग में मुझे ‘रुप्यकम्’ के नाम से जाना जाता था। रुप्यकम् का अर्थ है: चाँदी का सिक्का। उस समय अन्य धातु के सिक्कों को भी रुप्यकम् ही कहा जाता था। इस कारण हिन्दी में मेरा नाम रुपया हो गया।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियों को हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के पाठ ‘रुपये की आत्मकथा’ से लिया गया है। यह आत्मकथा संकलित है।

प्रसंग-भारतीय मुद्रा का नाम रुपया है। रुपये के प्रचलन में आने का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-रुपया अपनी कहानी बताते हुए कहता है कि रुपया मेरा नाम बहुत पुराने समय से प्रचलन में आया हुआ है। वैदिक युग में भी इसे ‘रुप्यकम्’ नाम से पुकारा जाता था। वास्तव में रुप्यकम् का अर्थ होता है-चाँदी का सिक्का। उस समय अन्य धातुओं से भी सिक्के बनते थे और उन्हें भी रुप्यकम् कहा जाता था। हिन्दी भाषा में रुप्यकम् के स्थान पर इस सिक्के का नाम रुपया हो गया।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 19 खूनी हस्ताक्षर प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 19 Khooni Hastakshar Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 19 Khooni Hastakshar Questions and Answers

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” यह नारा था
(i) गाँधीजी का
(ii) सुभाषचन्द्र बोस का,
(iii) तिलक जी का
(iv) नेहरू जी का।
उत्तर
(ii) सुभाषचन्द्र बोस का

(ख) आजादी के परवाने पर नवयुवकों ने हस्ताक्षर किए थे
(i) काली स्याही से
(ii) नीली स्याही से
(iii) रक्त की स्याही से
(iv) लाल स्याही से।
उत्तर
(iii) रक्त की स्याही से

(ग) आजादी के परवाने पर हस्ताक्षर होने के बाद तारों ने देखा
(i) हिन्दुस्तानी विश्वास
(ii) स्थान
(iii) भाषण
(iv) सर्वस्व समर्पण।
उत्तर
(i) हिन्दुस्तानी विश्वास।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) यूँ कहते-कहते वक्ता की आँखों में ……………. आया।
उत्तर
खून

(ख) पर यह …………….. पत्र नहीं, आजादी का परवाना है।
उत्तर
साधारण

(ग) रण में जाने को ……………… खड़े तैयार दिखाई देते थे।
उत्तर
युवक

(घ) यह शीश कटाने का …………….. नंगे सिर झेला जाता है।
उत्तर
सौदा

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) सुभाषचन्द्र बोस ने बलिदान करने को क्यों कहा?
उत्तर
‘भारत के लिए स्वतन्त्रता देवी को प्राप्त करने के लिए अपना बलिदान करो’ ऐसा सुभाष बाबू ने इसलिए कहा कि आजादी का इतिहास खून से लिखा जाता है।

(ख) शीशों के फूल चढ़ाने से कवि का क्या अभिप्राय
उत्तर
देश की आजादी के लिए, निर्दयी शासक वर्ग से मुक्ति पाने में सफलता तभी मिल सकेगी, जब हम अपने शीशरूपी फूलों को आजादी की वेदी पर सर चढ़ा सकेंगे।

(ग) खून को पानी के समान कब कहा जाता है ?
उत्तर
जिस खून में आजादी प्राप्त करने के लिए जोश नहीं हो, उस जीवन में गतिशीलता न हो, उस व्यक्ति का खून-खून नहीं, वह पानी है। क्योंकि ऐसा खून देश के किसी भी काम में नहीं आता है।

(घ) आजादी का इतिहास कैसे लिखा जाता है ?
उत्तर
आजादी का इतिहास काली स्याही से नहीं लिखा जाता है, वह तो रक्त की लाल स्याही से लिखा जाता है जिसमें बलिदानों का जिक्र होता है।

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(ङ) आजादी का परवाना किसे कहा गया है ?
उत्तर
आजादी का परवाना कोई साधारण कागज नहीं होता । है। उसे भरने के लिए तन-मन-धन और जीवन का बलिदान एवं सर्वस्व समर्पण करना होता है। जिस पर अपने रक्त की उजली बूंदें गिरी होती हैं।

(च) खूनी हस्ताक्षर से कवि का क्या आशय है ?
उत्तर
खूनी हस्ताक्षर से कवि का आशय इस बात से है कि वह अपनी मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व निछावर करने के लिए तैयार है।

(छ) सुभाषचन्द्र बोस के नारे का युवकों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर
‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ और इन्कलाब के नारों ने भारतीय नवयुवकों में भारतीय आजादी के लिए जोश भर दिया। वे उसके लिए अपना सर्वस्व निछावर करने के लिए तैयार हो गए। वे रणक्षेत्र में जाने के लिए हुँकार भर रहे थे।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए

(क) आजादी के चरणों में, जयमाल चढ़ाई जाएगी।
वह सुनो, तुम्हारे शीशों के फूलों से गूंथी जाएगी।

(ख) सारी जनता हुँकार उठी, हम आते हैं, हम आते हैं।
माता के चरणों में यह लो, हम अपना रक्त चढ़ाते हैं।
उत्तर
‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ शीर्षक के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 3 व9 को देखिए।

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भाषा की बात

प्रश्न 1.
शुद्ध उच्चारण कीजिए
(i) सुभाष
(ii) स्वतन्त्रता
(iii) स्याही
(iv) रक्तिम
(v) इन्कलाब
(vi) हस्ताक्षर।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से सही उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए
(i) पानी
(ii) फूल
(ii) धन
(iv) माता।
उत्तर
(i) पानी – जल, पय
(ii) फूल – पुष्प, सुमन।
(iii) धन – दौलत, द्रव्य।
(iv) माता – जननी, जन्मदात्री।

प्रश्न 3.
विलोम शब्द लिखिए
(i) स्वतन्त्रता
(ii) सही
(iii) काला
(iv) जीवन
(v) विश्वास।
उत्तर
(i) स्वतन्त्रता = परतन्त्रता
(ii) सही = गलत
(iii) काला = सफेद
(iv) जीवन = मरण
(v) विश्वास = अविश्वास।

प्रश्न 4.
सही जोड़ी बनाइए
(i) खून – (क) स्वतन्त्रता
(ii) कुरबानी – (ख) लेखनी
(iii) आजादी – (ग) प्रवाह, गतिशीलता
(iv) कलम – (घ) रक्त
(v) रवानी – (ड.) बलिदान
उत्तर
(i) →(घ), (ii) →(ड.), (iii) →(क), (iv) →(ख), (v) →(ग)

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(i) खून में उबाल आना
(ii) शीश कटाना
(iii) खून की – नदी बहाना।
उत्तर
(i) खून में उबाल आना-सुभाष के भाषणों से युवकों के खून में उबाल आ गया।
(ii) शीश कटाना-मातृभूमि की आजादी की रक्षा में अनेक युवक शीश कटाने के लिए चल पड़े।
(iii) खून की नदी बहाना-आजादी की रक्षा में भारतीय युवकों को खून की नदी बहानी पड़ी।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(i) अर्पण
(ii) परवाना
(iii) जयमाल
(iv) संग्राम
(v) रणवीर।
उत्तर
(i) अर्पण-आजादी के दीवानों ने अपना तन-मन-धन सब देश के लिए अर्पण कर दिया।
(ii) परवाना-आजादी के परवाने पर अनेक युवकों ने अपने उजले रक्त से हस्ताक्षर कर दिए।
(ii) जयमाल-आजादी की देवी के गले में नरमुण्डों की जयमाल सुहाती है।
(iv) संग्राम-देश की स्वतन्त्रता के संग्राम में अनेक युवकों ने अपनी प्राणाहुति दे दी।
(v) रणवीर-रणवीर राणा प्रताप अपने चेतक घोड़े पर चढ़कर लड़ते हुए दुश्मनों के छक्के छुड़ा रहे थे।

खूनी हस्ताक्षर सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) वह खून कहो किस मतलब का
जिसमें उबाल का नाम नहीं।
वह खून कहो किस मतलब का
आ सके देश के काम नहीं।
वह खून कहो किस मतलब का
जिसमें जीवन न रवानी है।
जो परवश होकर बहता है,
वह खून नहीं है, पानी है।

शब्दार्थ-परवश होकर = पराधीन होकर।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के पाठ ‘खूनी हस्ताक्षर’ से अवतरित हैं। इसके रचयिता गोपाल प्रसाद ‘व्यास’ हैं।

प्रसंग-कवि का आशय यह है कि देश की आजादी के लिए मर-मिटने वाले वीरों का खूब ही खून कहलाने योग्य है।

व्याख्या-कवि कहता है कि खून में जोश होता है, तो वह वास्तव में खून कहा जा सकता है। जो खून देश के काम आ सके, वही खून है। इसके विपरीत वह खून किसी काम का नहीं है। जीवन की गति से युवक खून ही खून कहलाने योग्य है। गतिहीन खून किसी मतलब का नहीं होता है। पराधीन होकर बहने वाला खून खून नहीं, वह तो पानी है।

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(2) उस दिन लोगों ने सही-सही
खू की कीमत पहचानी थी।
जिस दिन सुभाष ने बर्मा में
मांगी उनसे कुरबानी थी।
बोले, “स्वतन्त्रता की खातिर
बलिदान तुम्हें करना होगा।
तुम बहुत जी चुके हो जग में,
लेकिन आगे मरना होगा।

शब्दार्थ-कीमत = मूल्य, महत्व। कुर्बानी = बलिदान। संदर्भ = पूर्व की तरह।

प्रसंग-सुभाष चन्द्र बोस ने बर्मा में लोगों को बलिदान होने के लिए आग्रह किया, तब लोगों को खून के महत्व की जानकारी हुई।

व्याख्या-कवि बताता है कि जिस दिन सुभाषचन्द्र बोस ने भारतीय जनों को बर्मा में अपने बलिदान के लिए पुकारा, उस दिन लोगों को खून का महत्व ज्ञात हुआ था। उन्होंने लोगों को पुकार करके कहा कि तुम्हें स्वतन्त्रता प्राप्त करने के लिए बलिदान करने होंगे। अब तक तुमने पराधीनता में बहुत समय तक जीवन बिता लिया है। लेकिन अब पराधीनता को समाप्त करने के लिए तुम्हें मृत्यु स्वीकार करनी होगी।

(3) आजादी के चरणों में,
जयमाल चढ़ाई जाएगी।
वह सुनो, तुम्हारे शीशों के
फूलों से गूंथी जाएगी।
आजादी का संग्राम कहीं
पैसे पर खेला जाता है?
यह शीश कटाने का सौदा
नंगे सर झेला जाता है।

शब्दार्थ-सौदा = सामान, व्यापार। सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-आजादी प्राप्त करने के लिए शीश कटाना होता है।

व्याख्या-कवि कहता है कि स्वतन्त्रता देवी के चरणों में वह जयमाला अर्पित की जाएगी, जिसे तुम्हारे (देशवासियों के) शीशों रूपी फूलों से गूंथा जाएगा। तुम्हें ध्यान रखना चाहिए कि यह आजादी की लड़ाई कभी भी पैसों के आधार पर नहीं लड़ी जा सकती। यह तो सिर कटाने का सौदा है (व्यापार है)। इस सिर कटाने के सौदे को नंगे सिर ही झेलना पड़ता है।

(4) आजादी का इतिहास कहीं
काली स्याही लिख पाती है ?
इसके लिखने के लिए खून
की नदी बहाई जाती है।”
यूँ कहते-कहते वक्ता की
आँखों में खून उतर आया।
मुख रक्त-वर्ण हो दमक उछा
दमकी उनकी रक्तिम काया।

शब्दार्थ-वक्ता = कहने वाला।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-आजादी को प्राप्त करने की लड़ाई काली स्याही से नहीं, वरन् खून की लाल स्याही से ही लिखी जाती है।

व्याख्या-कवि सुभाषचन्द्र बोस के उद्बोधन को स्पष्ट करता है कि आजादी की यह लड़ाई कभी भी काली स्याही से नहीं लिखी जाती है। इसके लिए खून की लाल स्याही की जरूरत पड़ती है। इस स्याही को पाने के लिए युद्ध क्षेत्र में खून की नदी बहानी पड़ती है। ऐसा कहते-कहते कहने वाले सुभाषचन्द्र बोस की आँखों में खून उतर आया अर्थात् क्रोध अपनी सीमा से ऊपर बढ़ने लगा। उनका मुख लाल पड़ गया और चमकने लगा। उनके लालवर्ण के शरीर की कान्ति दमकने लगी।

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(5) आजानु-बाहु ऊँची करके,
वे बोले, “रक्त मुझे देना।
इसके बदले में भारत की
आजादी तुम मुझसे लेना।”
हो गई सभा में उथल-पुथल,
सीने में दिल न समाते थे।
स्वर इन्कलाब के नारों के
कोसों तक छाए जाते थे।

शब्दार्थ- आजानुबाहु = घुटने तक लम्बे हाथ। इन्कलाब = परिवर्तन।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-सुभाष बाबू ने अपनी लम्बी भुजाओं को उठाकर लोगों का आह्वान किया कि तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।

व्याख्या-सुभाषचन्द्र बोस ने घुटनों तक लम्बी बाहों को ऊपर उठाते हुए लोगों को पुकारते हुए कहा कि आप मुझे रक्त दो, इसके बदले, मैं तुम्हें भारत देश की आजादी दूंगा। ऐसा कहते ही सभा में उथल-पुथल मच गई। प्रत्येक व्यक्ति के सीने में दिल नहीं समा सके (वे सभी उत्साह से भरे थे)। परिवर्तन के नारों के स्वर कोसौं तक आए हुए सुनाई दे रहे थे।

(6) “हम देंगे, देंगे खून”.
शब्द बस यही सुनाई देते थे।
रण में जाने को युवक खड़े
तैयार दिखाई देते थे।
बोले सुभाष, “इस तरह नहीं,
बातों से मतलब सरता है।
लो, यह कागज, है कौन यहाँ
आकर हस्ताक्षर करता है?

शब्दार्थ-रण = युद्ध के मैदान में। सरता है = पूरा होता है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-सुभाष चन्द्र बोस के आह्वान पर लोग अपना खून देने को तैयार हो गए।

व्याख्या-वहाँ सभास्थल पर लोगों के स्वर निकल पड़े कि हम खून देंगे। चारों और यही स्वर गूंज रहा था। युद्ध क्षेत्र में जाने के लिए अनेक युवक खड़े दीख पड़ रहे थे। सुभाष ने कहा कि इस तरह की बातें करने से कभी भी कोई मतलब पूरा नहीं होता। यह कागज लीजिए और यहाँ आकर कौन-कौन दस्तखत करता है? अर्थात दस्तखत कीजिए।

(7) इसको भरने वाले जन को
सर्वस्व-समर्पण करना है।
अपना तन-मन-धन-जन जीवन
माता को अर्पण करना है।
पर यह साधारण पत्र नहीं,
आजादी का परवाना है।
इस पर तुमको अपने तन का
कुछ उज्ज्वल रक्त गिराना है।

शब्दार्थ-अर्पण करना है = त्यागना है। परवाना = आदेश भरा पत्र। उज्ज्वल = उजला।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-आजादी प्राप्त करने के लिए हस्ताक्षर युक्त यह महत्वपूर्ण आदेश है।

व्याख्या-इस असाधारण पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अपना सर्वस्व त्याग करना है (प्राण निछावर करने के लिए तैयार रहना है)। भारत माता की आजादी के लिए तुम सभी को अपना तन, मन, धन तथा जीवन का समर्पण करना है। तुम्हें ध्यान रखना चाहिए कि यह कोई साधारण पत्र नहीं है, यह निश्चित रूप से आजादी का आदेश भरा पत्र है। इस पत्र पर तुम्हें अपने शरीर का उजला खून गिराना है। अर्थात् आजादी के लिए खून देना होगा।

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(8) वह आगे आए, जिसके तन में
भारतीय खू बहता हो।
वह आगे आए जो अपने को
हिन्दुस्तानी कहता हो।
वह आगे आए, जो इस पर
खूनी हस्ताक्षर देता हो।
मैं कफन बढ़ाता हूँ, आए
जो इसको हँसकर लेता हो।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-सुभाष बाबू ने खून के हस्ताक्षर करने को पत्र आगे बढ़ाया।

व्याख्या-कवि कहता है कि इस पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए वही आगे बढ़ कर आये, जिसमें भारतीयता का खून हो और जो अपने आप को हिन्दुस्तानी कहने में गर्व का अनुभव करता हो। इस पत्र पर खून से हस्ताक्षर करने वाला ही आगे बढ़कर आये। उसके लिए यह कागज का पत्र नहीं, यह तो कफन है। इसे प्राप्त करने के लिए वही आगे बढे, जो हँस-हँस कर इसे ग्रहण करने में अपना गौरव अनुभव करता हो।

(9) सारी जनता हुँकार उछी
“हम आते हैं, हम आते हैं।
माता के चरणों में यह लो,
हम अपना रक्त चढ़ाते हैं।”
साहस से बढ़े युवक उस दिन,
देखा, बढ़ते ही आते थे।
चाकू-छुरी कटारों से,
वे अपना रक्त गिराते थे।

शब्दार्थ-सारी जनता = सभी लोग। सन्दर्भ = पूर्व की तरह।

प्रसंग-सुभाष के आह्वान पर लोग अपना बलिदान करने के लिए आगे ही आगे बढ़ते चले।

व्याख्या-सभी लोग जो सभास्थल पर मौजूद थे, हुँकार भरकर कहने लगे कि हम भारत माता की आजादी के लिए खून देने को आ रहे हैं। भारत की स्वतन्त्रता की देवी के चरणों में हम अपना रक्त चढ़ाने के लिए तत्पर हैं, जितना चाहते हो, ले लीजिए। युवकों में साहस था। सभी युवक उस दिन साहसपूर्वक आगे-ही-आगे बढ़ते आ रहे थे। वे सभी अपने शरीर से चाकुओं से, छुरियों से तथा कटारों से अपना रक्त गिरा रहे थे। अर्थात् अपना सर्वस्व देने में उन्हें कोई कष्ट नहीं हो रहा था (वे आजादी की वेदी पर अपना रक्त चढ़ाने के लिए तत्पर थे।)

(10) फिर उसी रक्त की स्याही में,
वे अपनी कलम डुबाते थे।
आजादी के परवाने पर
हस्ताक्षर करते जाते थे।
उस दिन तारों ने देखा था,
हिन्दुस्तानी विश्वास नया।
जब लिखा महारणवीरों ने
खू से अपना इतिहास नया।

शब्दार्थ-परवाना = आदेश-पत्र सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-रक्त में अपनी कलम डुबाते हुए देशभक्त युवकों ने आजादी के परवाने पर खून से हस्ताक्षर कर दिये।

व्याख्या-अपने शरीर के रक्त की स्याही में कलम डुबाते हुए आजादी के उस परवाने पर सभी युवकों ने हस्ताक्षर कर दिए। उस दिन आकाश में तारों ने देखा कि हिन्दुस्तानी लोग विश्वसनीय होते हैं। उस समय रणबांकुरे भारतीय वीरों ने अपने खून से नया इतिहास लिख डाला।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 18 परमानन्द माधवम् प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 18 Parmanand Madhyam Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 18 Parmanand Madhyam Questions and Answers

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) सदाशिवराव काने का जन्म सन् में हुआ था
(i)23 नवम्बर, 1909
(ii) 21 नवम्बर, 1906
(iii) 23 दिसम्बर, 1989
(iv) 25 दिसम्बर, 1990.
उत्तर
(i) 23 नवम्बर, 1909

(ख) सदाशिवराव कात्रे द्वारा स्थापित बिलासपुर के पास कुष्ठ रोग सेवा का आश्रम है
(i) बेतलपुर
(ii) झाँसी
(iii) चाँपा
(iv) रायपुर।
उत्तर
(iii) चाँपा

(ग) राष्ट्र के लिए कलंक है
(i) मलेरिया
(ii) कुष्ठ रोग
(iii) हैजा,
(iv) दमा।
उत्तर
(ii) कुष्ठ रोग

(घ) सदाशिवराव की मृत्यु सन् में हुई
(i) 16 मई, 1977
(ii) 15 मई, 1975
(iii) 25 जून, 1990
(iv) 30 जून, 1977.
उत्तर
(i) 16 मई, 1977.

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) कुष्ठ रोगियों की दुर्दशा देखकर उनका हृदय………… से भर गया।
(ख) सदाशिवराव कात्रे ……………. का व्रत लेकर चाँपा पहुँचे।
(ग) सदाशिवराव कात्रे को ……. के विवाह की चिन्ता थी।
(घ) कुष्ठ रोगियों की चिकित्सा एवं आवास हेतु ……………………ग्राम में स्थान मिल गया।
उत्तर
(क) करुणा
(ख) कुष्ठ निवारण
(ग) अपनी पुत्री
(घ) लखुरौं।

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प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) सदाशिवराव कात्रे का जन्म कहाँ हुआ था ?
उत्तर
सदाशिवराव कात्रे का जन्म मध्य प्रदेश के ‘गुना’ जिले के आरौन ग्राम में हुआ था।

(ख) कुष्ठ रोगी के प्रति घृणा भाव होने का कारण लिखिए।
उत्तर
कुष्ठ रोगी के घावों से द्रव का निरन्तर बहते रहना, और भिनभिनाती मक्खियाँ ही रोगी के प्रति घृणा पैदा करती हैं।

(ग) सदाशिवराव कात्रे ने पुत्री प्रभावती को क्यों पढ़ाया ?
उत्तर
सदाशिवराव कात्रे ने अपनी पुत्री प्रभावती को इसलिए पढ़ाया कि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सके। वे सोचते थे कि कुष्ठ रोगी पिता की कन्या का वरण कौन करेगा। इस दृष्टि से उन्होंने अपनी पुत्री को सुशिक्षित कराया।

(घ) समाज का सकारात्मक दृष्टिकोण कैसे विकसित होने लगा?
उत्तर
सदाशिवराव कात्रे ने आश्रम में रामचरितमानस और महाभारत के अनेक उदाहरण देकर कुष्ठ रोग के प्रति सेवाभाव एवं सहयोग को राष्ट्रीय गुण के रूप में लोगों के हृदय में जगाया। उन्होंने खुद कुदाल से खोदकर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया। सदाशिवराव कात्रे के अथक परिश्रम एवं राष्ट्र भक्ति के भाव से समाज का सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होने लगा।

(ङ) सदाशिवराव कात्रे ने किसकी प्रेरणा से कुष्ठ रोगियों की सेवा का कार्य प्रारम्भ किया ?
उत्तर
सदाशिवराव कात्रे कुष्ठ निवारण का व्रत लेकर चले तो उनकी मुलाकात मध्य प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल महामहिम हरिभाऊ पाटस्कर से हो गई। उन्होंने कुष्ठ रोगियों की सेवा के विषय में चर्चा की। इस तरह राज्यपाल महोदय से प्रेरणा प्राप्त करके सदाशिवराव कात्रे ने कुष्ठ रोगियों की चिकित्सा और आवास के लिए स्थान प्राप्त करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए।

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प्रश्न 4.
तीन से पांच वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) ‘सदाशिवराव कात्रे में जिजीविषा स्पष्ट दिखाई देती थी’, ऐसा क्यों कहा गया है?
उत्तर
सदाशिवराव कात्रे को कुष्ठ रोग ने घेर लिया। सभी लोग घृणा करते थे। परिवार के लोगों ने उनके खानपान और रहने की व्यवस्था अलग कर दी। वे उस रोग के विषय में अज्ञानी थे। रोग के कारण द्रव लगातार बहता रहता था, मक्खियाँ भिनभिनाती रही जिससे लोगों में घृणा पैदा हो रही थी। उन्हें धैर्य और स्नेह करने वाला कोई भी नहीं था। जीवन में घृणा, दुराव और निराशा भर गई थी। परन्तु फिर भी उनके अन्दर जीवन जीने की लालसा स्पष्ट दीख पड़ती थी। उन्होंने इन सभी विपरीत स्थितियों में कुष्ठ रोग को दूर करने का व्रत लिया और सुनियोजित प्रयास किए। इससे लगता था कि उनमें जिजीविषा विद्यमान थी।

(ख) सदाशिवराव कात्रे ‘परमानन्द माधवम्’ क्यों कहलाए?
उत्तर
सदाशिवराव कात्रे को परमानन्द माधवम् इसलिए कहा जाता था कि उन्होंने अपने जीवन के अन्तिम समय तक बिना किसी स्वार्थ के कुष्ठ रोग से पीड़ितों की सेवा के लिए आश्रम व चिकित्सालय की स्थापना की। वे कुष्ठ रोग को राष्ट्र के लिए कलंक कहते थे। आश्रम में हर क्षण भगवत् भजन और संकीर्तन चलता रहता था। उनके प्रयासों से कुष्ठ रोगियों को सेवा और उपचार मिलने लगा। समाज में सही धारणा बनने लगी। साथ ही सदाशिव का अर्थ परमानन्द और गोविन्द का नाम माधव (कृष्ण) भी है। इसलिए उन्हें परमानन्द माधवम् कहा जाने लगा।

(ग) भारतीय कुष्ठ निवारक संघ, चाँपा की स्थापना कब और कैसे हुई ?
उत्तर
सदाशिवराव कात्रे ने कुष्ठ रोगियों के इलाज का व्रत लिया। उनकी भेंट मध्य प्रदेश के राज्यपाल महामहिम हरिभाऊ पाटस्कर से हुई। कुष्ठ रोगियों की सेवा के विषय पर चर्चा हुई। उनसे प्रेरणा लेकर कुष्ठ रोगी होते हुए भी उनकी सेवा के कार्य में खुशी-खुशी लगे रहे। सदाशिवराव कात्रे की योजना के अनुसार कुष्ठ रोगियों की चिकित्सा एवं आवास के लिए लखु नामक ग्राम में स्थान मिल गया। यह स्थान चौपा से दस किमी. दूर है। सन् 1962 ई. में यह आश्रम भारतीय कुष्ठ निवारक संघ, चाँपा के नाम से स्थापित हो गया।

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प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) “प्रकृति ने भी सदाशिवराव कात्रे के साथ क्रूर उपहास किया”, ऐसा क्यों कहा गया है ?
उत्तर
सदाशिवराव कात्रे के पिता का देहावसान उस समय हो गया जब इनकी आयु आठ वर्ष थी। इनकी शिक्षा ‘काका’ के यहाँ झाँसी में हुई। शिक्षा पाकर इन्हें रेलवे में नौकरी मिल गई। सन् 1930 ई. में इनका विवाह हो गया। इसी बीच उन्हें कुष्ठ रोग ने घेर लिया। इन्हें अपनी अल्पायु से ही आपदाओं ने घेरा हुआ था। इस प्रकार यह कि ‘प्रकृति ने भी सदाशिवराव कात्रे के साथ क्रूर उपहास किया’ कहा गया है। कुष्ठ रोग भयानक रोग है जिससे समाज और अपने भी छूट जाते हैं।

(ख) आश्रम में रहकर कोई कार्य करने हेतु तैयार नहीं होता था, क्यों?
उत्तर
कुष्ठ रोगियों के आश्रम में सेवा करने के लिए कोई भी तैयार नहीं होता था क्योंकि रोगियों के अंगों से रिसता द्रव,भिनभिनाती मक्खियाँ जो घृणा का भाव पैदा करती थीं। आश्रम में कुष्ठ रोगियों के प्रति अछूत जैसी दशा, धैर्य और अपनेपन की कमी थी।

(ग) कुष्ठरोगियों की दुर्दशा देखकर सदाशिवराव कात्रे के हृदय में करुणा उत्पन्न होने के दो कारण लिखिए।
उत्तर
सदाशिवराव कात्रे के हृदय में करुणा उत्पन्न होने के दो कारण थे

  1. कुष्ठ रोगियों की दशा अछूत जैसी होना, घर-परिवार से अलग कर देना।
  2. उन रोगियों के प्रति घृणा एवं अपनापन से रहित मानकर उपेक्षा भरा जीवन, सामाजिक असम्मान और घृणास्पद व्यवहार।

(घ) चाँपा नगर के प्रतिष्ठित जन कुष्ठ रोगियों की सेवा हेतु कैसे प्रेरित हुए?
उत्तर
चांपा नगर के आश्रम में कुष्ठ रोगियों के लिए चिकित्सा और आवास के लिए लखुरौं ग्राम में स्थान मिल गया। यह संस्था पंजीबद्ध हो गई। सदाशिवराव के प्रयासों से, रामचरितमानस और महाभारत के उदाहरणों से लोगों में कुष्ठ रोग के प्रति सेवा भाव जगने लगा। चाँपा के प्रतिष्ठावान और समझदार उदार व्यक्तियों में कुष्ठरोग के प्रति सेवाभाव एवं सहयोग को राष्ट्रीय गुण के रूप में जगाया। इस प्रकार सदाशिवराव के अथक परिश्रम और राष्ट्रभक्ति के भाव से लोगों में सकारात्मक सोच पैदा होने लगी।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
पौराणिक, संचालित, चिकित्सा, संवेदनशील, करुणा।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखिए
(i) असरम
(ii) देहवसान
(iii) दैदिप्यमान
(iv) अंतद्वर्द्ध
(v) राष्ट्र।
उत्तर
(i) आश्रम
(ii) देहावसान
(iii) दैदीप्यमान
(iv) अन्तर्द्वन्द्व
(v) राष्ट्र।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग बताइए
(i) दुर्दशा
(ii) उपचार
(iii) अज्ञान
(iv) अनुभव
(v) विज्ञापन।
उत्तर
(i) दुर + दशा
(ii) उप + चार
(iii) अ + ज्ञान
(iv) अनु + भव
(v) वि + ज्ञापन।

प्रश्न 4.
‘आई’ प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द लिखिए
उत्तर
भलाई, लिपाई, पुताई, लिखाई, पढ़ाई, बुराई।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों का संधि विच्छेद कीजिए
(i) चिकित्सालय
(ii) देहावसान
(iii) विवाहोपरान्त
(iv) अल्पायु
(v) मतावलम्बी।
उत्तर
(i) चिकित्सा + आलय
(ii) देह + अवसान
(iii) विवाह + उपरान्त
(iv) अल्प + आयु
(v) मत + अवलम्बी।

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग | कीजिए
(i) आत्मबल
(ii) व्यवस्था
(iii) संतोष
(iv) कुष्ठरोगी
(v) जन्म।
उत्तर-
(i) आत्मबल = आत्मबल से ही मुशीबतों पर विजय पा सकते हैं।
(ii) व्यवस्था = आश्रम की व्यवस्था में सभी सदस्यों के सहयोग की जरूरत है।
(iii) सन्तोष = सन्तोष से जीवन सुखी होता है।
(iv) कुष्ठ रोगी= कुष्ठ रोगी से लोग घृणा करने लगते हैं।
(v) जन्म = जन्म से कोई बड़ा-छोटा नहीं होता है।

परमानन्द माधवम्प रीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) रोग के प्रति अज्ञानता, रोग से रिसने वाला द्रव और भिनभिनाती मक्खियाँ ही रोगी के प्रति घृणा पैदा करती हैं। जिन परिस्थितियों में रोगी को अधिक ढाढ़स, अपनापन और स्नेह की आवश्यकता होती है, उन परिस्थितियों में निरन्तर घृणा और दुराव जीवन में नैराश्य का भाव पैदा करता है लेकिन इन सब परिस्थितियों में भी सदाशिवराव की जिजीविषा स्पष्ट दिखाई देती थी।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा-भारती’ के पाठ ‘परमानन्द माधवम्’ से ली गई हैं। इस पाठ के लेखक ‘भागीरथ कुमरावत’ हैं।

प्रसंग-इन पंक्तियों में बताया गया है कि सदाशिवराव कुष्ठ रोगी थे। विपरीत परिस्थितियों में भी उनमें जीवन जीने की प्रबल इच्छा थी।

व्याख्या-लेखक कहता है कि इस कुष्ठ रोग के विषय में जानकारी न होना तथा इस रोग के कारण शरीर से धीरे-धीरे बहता हुआ पदार्थ तथा ऊपर से मक्खियों का लगातार भिनभिनाते रहना, उस रोगी के प्रति घृणा भाव पैदा करता है। ऐसी दशा में रोगी को धैर्य बँधाने की जरूरत होती है। उसके प्रति अपनापन और प्रेम रखने की आवश्यकता होती है, परन्तु उस गम्भीर दशा में लोग ऐसे रोगी से लगातार घृणा करते हैं। अपनेपन के भाव को छिपा लेते हैं। उस दशा में उस रोगी के हृदय में जीवन के प्रति निराशा की भावना पैदा हो जाती है। इस तरह की विपरीत परिस्थितियों में रहते हुए भी सदाशिवराव के अन्दर जीवन को जीने की इच्छा साफ दीख पड़ती थी।

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(2) सदाशिवराव सोचते थे कि यदि कुष्ठ के कलंक से राष्ट्र को मुक्त करना है तो राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक का सहभाग इसमें होना चाहिए। रोग मुक्त समाज होगा तो राष्ट्र बलवान होगा। यह सद्भाव लेकर सदाशिवराव ने तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति महोदय डॉ. राधाकृष्णन को पत्र लिखा। राष्ट्रपति महोदय ने पत्र पाकर इनके कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा तो की ही साथ-ही-साथ इन्हें प्रशंसा पत्र और एक हजार रुपये का योगदान भी भेजा। इस प्रकार सदाशिवराव के कार्यों को समाज द्वारा मान्यता मिलने लगी जिससे उनका मनोबल यह कार्य करने में और भी बढ़ गया।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-सदाशिवराव ने अपने राष्ट्र से कुष्ठ रोग को मिटाने के लिए संकल्प लिया और समाज ने उनके कार्य को महत्व देना शुरू कर दिया।

व्याख्या-सदाशिवराव की चिन्तन शैली में एक बात जोर पकड़ती नजर आने लगी कि यदि पूरे राष्ट्र से कुष्ठ रोग को दूर करना है, तो इस प्रयास में भारत के प्रत्येक नागरिक को अपना सहयोग देना चाहिए। कुष्ठ रोग भारत के लिए कलंक है। इस रोग से यदि राष्ट्र मुक्ति पा सका तो समझिए पूरा देश शक्तिशाली हो सकेगा। किसी भी रोग से रहित नागरिक स्वस्थ राष्ट्र की नींव रखते हैं। इसी अच्छी भावना के साथ उन्होंने उस समय के देश के राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन को एक पत्र लिखा और उस पत्र में उन्होंने अपनी कार्य-योजना का विवरण भी दिया जिसे पढ़कर राष्ट्रपति महोदय बहुत प्रभावित हुए और सदाशिवराव के इस कार्य की बार-बार प्रशंसा की। साथ ही, उन्होंने उनको एक प्रशंसा पत्र तथा एक हजार का योगदान भी भेजकर अपने सहयोग की पहल की। इसका प्रभाव यह हुआ कि सदाशिवराव द्वारा चलाए गए कार्यों को समाज ने महत्व प्रदान किया। इसका नतीजा यह हुआ कि सदाशिवराव को मानसिक बल प्राप्त हुआ और वे अपने कार्य में पूरी मजबूती से लग गए।

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भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 17 संकल्प प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 17 Sankalp Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 17 Sankalp Questions and Answers

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) संकल्प लेकर आगे बढ़ें
(i) मन में
(ii) तन में,
(iii) आँखों में
(iv) साँसों में।
उत्तर
(i) मन में

(ख) हार बनता है
(i) धूल से
(ii) फूल से
(iii) धूप से
(iv) कंकड़ से।
उत्तर
(ii) फूल से।

प्रश्न 2.
सही शब्द चयन कर रिक्त स्थान भरिए(चुन-चुनकर, गिर-गिरकर, गरज-गरज)

(क) बादल बनकर ……….वह धरती पर बरसे।
(ख) ………… चलना सीखेंगे, गिरने से न डरें।
(ग) ………………. कर गूंथे सुमनों से, बनें हार अनगिन हाथों
उत्तर
(क) गरज-गरज
(ख) गिर-गिरकर
(ग) चुन| चुनकर।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) आत्म-विश्वास कब बढ़ता है ?
उत्तर
कार्य करने से आत्म-विश्वास बढ़ता है।

(ख) ‘उद्गम रूप धरें’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘उद्गम रूप धरै’ का आशय यह है कि लगातार वर्षा होने से छोटी-छोटी बूंदें भी नदी का उद्गम स्थल बन जाती हैं।

(ग) धरती फल कब देती है ?
उत्तर
जलाशयों के जल को सूर्य की किरणें जब भाप बना देती हैं, भाप बादल बन जाती है, बादलों के बरस पड़ने पर, ताप सहने वाली धरती जल को सोख लेती है, फिर धरती अपने अन्दर से बीज को उगाकर फल देने लगती है।

(घ) बादल कैसे बनते हैं ?
उत्तर
जल सूर्य की किरणों से भाप बन जाता है, वही भाप बादल बन जाती है।

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(ङ) कविता में संकल्प करने पर क्यों बल दिया गया
उत्तर
कविता में कवि ने मन में अच्छी शुद्ध कामना-पवित्र विचारपूर्वक कार्य करने पर बल दिया है। इससे मनुष्य अपने सुविचारित कार्य में सफलता प्राप्त करता है।

(च) सुमनों का हार किस प्रकार बनता है ?
उत्तर
अनेक हाथों से एक-एक कर तोड़े गए एवं एकत्र किए गए फूलों को धागे में पिरोने पर हार बनता है। सहयोग और कार्य को निरन्तर करते रहने पर ही उसका फल आकर्षक हार के रूप में प्राप्त होता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांशों का भाव स्पष्ट कीजिए

(क) एक बूंद गिरकर सूखेगी, बार-बार गिर घट भर देगी। बिना रुके जो बूंदें गिरी, उद्गम रूप धरें।

(ख) चुन-चुनकर गूंथे सुमनों से, बने हार अनगिन हाथों से। मन में ले संकल्प विजय का, आगे बढ़े चलें।
उत्तर
‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ के अन्तर्गत पद्यांश संख्या । व4 का अध्ययन कीजिए।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिएविश्वास, जलाशय, दुर्गम, उद्गम, संकल्प।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से उच्चारण करना सीखिए और अभ्यास कीजिए।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए
(i) बूंदें
(ii) सकल्प
(iii) दुरगम
(iv) किरने
(v) परबत।
उत्तर
(i) बूंदें
(ii) संकल्प
(iii) दुर्गम
(iv) किरणें
(v) पर्वत।

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प्रश्न 3.
दिए गए शब्दों में से विलोम शब्दों की सही जोड़ी बनाइए-
(i) विश्वास
(ii) पराजय
(iii) धरती
(iv) सुगम
(v) आकाश
(vi) जय
(vii) दुर्गम
(viii) अविश्वास।
उत्तर
शब्द -विलोम शब्द
(i) विश्वास – (viii) अविश्वास
(ii) पराजय – (vi) जय
(iii) धरती – (v) आकाश
(iv) सुगम – (vii) दुर्गम

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए
(क) पथ
(ख) प्रतिदिन
(ग) बादल
(घ) विजय
(ङ) काँटा।
उत्तर
(क) पथ = संकल्प लेकर आगे बढ़ने से पथ की बाधाएँ समाप्त हो जाती हैं।
(ख) प्रतिदिन = ईश्वर की पूजा करके प्रतिदिन का कार्य प्रारम्भ करने से विजय मिलती है।
(ग) बादल = बादल गरजते हैं और बरसते हैं।
(घ) विजय =संकल्पित होकर विजय पथ पर आगे बढ़ते रहो।
(ङ) काँटा = उत्साह भरे मन से आगे बढ़ते हुए मार्ग के कौट भी फूल बन जाते हैं।

प्रश्न 5.
भिन्न अर्थ वाले शब्द को छाँटकर लिखिए
(i) नदी = तटिनी, सरिता, सविता, तरंगिणी।
(ii) पर्वत = गिरि, पहाड़, अचल, पाहन।
(iii) सागर = समुद्र, पीयूष, जलधि, उदधि।
(iv) फूल = पुष्प, सुमन, कुसुम, लता।
(v) धरती = गगन, पृथ्वी, भू, धरा।
उत्तर
(i) सविता
(ii) पाहन
(iii) पीयूष
(iv) लता
(v) गगन।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पंक्तियों में से अनुप्रास अलंकार पहचानकर लिखिए
(क) दुर्गम पथ पर्वत सम बाधा।
(ख) बार-बार गिर घट भर देगी।
(ग) गिर-गिरकर चलना सीखें।
(घ) गरज-गरजकर बादल बरसें।
उत्तर
(क)

  • पथ-पर्वत
  • दुर्गम-सम।

(ख)

  • बार-बार
  • गिर-भर।

(ग) गिर-गिरकर।
(घ) गरज-गरजकर ।

संकल्प सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

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(1) पथ की बाधाएँ गिनने से, निज विश्वास घटे।
करने से होता है सब कुछ, करना शुरू करें।
एक बूंद गिरकर सूखेगी, बार-बार गिर घट भर देगी।
बिना रुके जो बूंदें गिरती, उद्गम रूप धरें।
गिर-गिरकर चलना सीखेंगे, गिरने से न डरें।।

शब्दार्थ-पथ = मार्ग। बाधाएँ = रुकावटें। घट = घड़ा। उद्गम = निकलना, उत्पन्न होना।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषाभारती’ के पाठ ‘संकल्प’ से ली गई हैं। इस कविता के रचयितालक्ष्मीनारायण भाला ‘अनिमेष’ हैं।

प्रसंग-मार्ग में आने वाली बाधाओं के गिनने से अपना विश्वास कम हो जाता है।

व्याख्या-कवि का तात्पर्य यह है कि कोई भी काम करने पर ही होता है, उस कार्य को करना प्रारम्भ कीजिए। उस कार्य के करने के मार्ग में आने वाली रुकावटों की गिनती मत करो। ऐसा करने से तो आत्म-विश्वास घट जाता है। आकाश से एक बूंद गिरती है, तो वह सूख ही जाती है, लेकिन वही बूंद बार-बार गिरेगी, तो वह एक घड़े को भर देती है। बूंदों के गिरने की निरन्तरता किसी भी नदी का उद्गम बन जाती है अर्थात् नदी के प्रवाह को रूप दे देती है। इसलिए बार-बार गिरते-पड़ते रहने से हम चलना सीखते हैं। गिरमे से कभी नहीं डरना चाहिए। तात्पर्य यह है कि जीवन में विफलताएँ तो आती हैं, पर उनसे निराश नहीं होना चाहिए। विफलताएँ ही सफलता की सीढ़ियाँ हुआ करती हैं।

(2) नदियों का उद्गम अति छोटा, दुर्गम-पथ,
पर्वत सम बाधा।
बिना थमे चलती जब धारा, सागर गले मिले।
चलने से मंजिल पायेंगे, चलना शुरू करें।

शब्दार्थ-दुर्गम पथ = कठिनाई भरा मार्ग। बाधा = रुकावटें। गले-मिले = मिल जाती है। मंजिल पाना = अपने पहुँचने के स्थान तक पहुँच जाते हैं।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कोई भी कार्य करने से ही पूरा होता है। चलते रहने से अपने अभीष्ट स्थान तक पहुंच जाते हैं।

व्याख्या-नदी अपनी उत्पत्ति स्थल पर बहुत छोटे आकार की होती है। उसका मार्ग बहुत कठिनाई भरा होता है। मार्ग में पर्वत जितनी ऊँची रुकावटें आती हैं लेकिन बिना रुके लगातार जब वह जल की धारा चलती रहती है, बहती रहती है, तो समुद्र से मिल जाती है। उसी तरह हे मनुष्यो ! जब आप चलना प्रारम्भ कर देंगे, तो निश्चय ही अपनी मंजिल प्राप्त करने में सफल हो जायेंगे, अत: तुम्हें चलना तो शुरू कर देना चाहिए।

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(3) जलाशयों पर किरणें पड़तीं,
प्रतिदिन जल वाष्य में बदलतीं।
बादल बनकर गरज-गरज वह धरती पर बरसे।
ताप सहे, जल को भी सोखे, धरती फल उगले॥

शब्दार्थ-जलाशय = तालाब या झील। वाष्प = भाप। ताप = गर्मी। फल उगले = फसल के रूप में फल देती है।

सन्दर्भ-पूर्व की भाँति।

प्रसंग-तालाबों का जल सूर्य की किरणों के द्वारा भाप बनता है, वर्षा होती है और धरती से फसल रूप में फल की प्राप्ति होती है।

व्याख्या-कवि कहता है कि तालाबों-झीलों के ऊपर पड़ने वाली सूर्य की किरणें उनके जल को प्रतिदिन भाप के रूप में बदलती रहती हैं, वही भाप बादल बन जाती है। बादल गरज-गरज कर जमीन पर बरस पड़ते हैं। यह धरती सूरज की गर्मी को सहन करती है, बादलों से बरसते जल को सोख लेती है और फिर फसल रूप में अपनी सम्पूर्ण प्रक्रिया का फल हमें देती है। कष्टों की गर्मी जल से शान्त होकर हमें सरस फल देती है। हम सुखी हो जाते हैं।

(4) चुन-चुनकर गूंथे सुमनों से,
बनें हार अनगिन हाथों से।
मन में ले संकल्प विजय का, आगे बढ़े चलें।
कौन भला रोकेगा जब हम, काँटों से न डरें।

शब्दार्थ-सुमन = फूल। अनगिन = अनेक। संकल्प = प्रण, प्रतिज्ञा। काँटों से = बाधाओं से।

सन्दर्भ-पूर्व की भाँति।

प्रसंग-प्रण करके, संकल्प धारण करके ही जीत पाई जा सकती है।

व्याख्या-एक-एक फूल चुनकर अनेक हाथों से गूंथे जाने पर ही हार (माला) बन पाता है। यदि जीत पाने का हम संकल्प ले लेते हैं, और विजय-पथ पर आगे बढ़ते जाते हैं, तो निश्चय ही हमें कौन रोक सकता है, जीत पाने से। हमें केवल आने वाली रुकावटों से, बाधाओं से डरना नहीं चाहिए।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 16 श्रम की महिमा प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 16 Shram ki Mahima Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 16 Shram ki Mahima Questions and Answers

प्रश्न 1.
सहा विकल्प चुनकर लिखिए

(क) धरती में बीज बोता है
(i) लोहार
(ii) किसान
(iii) जमींदार
(iv) सफाईकर्मी।
उत्तर
(ii) किसान

(ख) सूत कातकर कपड़ा बुनता है
(i) बढ़ई
(ii) कुम्हार
(iii) जुलाहा
(iv) व्यापारी।
उत्तर
(iii) जुलाहा

(ग) बापूजी से मिलने पहुँचे
(i) शिक्षक
(ii) वकील
(iii) डॉक्टर
(iv) मुखिया।
उत्तर
(ii) वकील

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(घ) बापूजी पूजा के समान मानते थे
(i) भाषण देना
(ii) श्रम करना,
(iii) लेख लिखना
(iv) घूमना।
उत्तर
(ii) श्रम करना।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) किसान धरती में ……….. गाड़ता है।
(ख) गाँधीजी अनाज से …….. चुनते थे।
(ग) गाँधीजी को काम ……….. से करना भाता था।
(घ) गाँधीजी कपास के जैसा ही धुनते थे।
उत्तर
(क) बीज
(ख) कंकड़
(ग) सफाई
(घ) जुलाहों।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) “इसलिए यह बड़ा और वह छोटा” पंक्ति से कवि का क्या आशय है?
उत्तर
कवि का इस पंक्ति से आशय यह है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी काम को करने से छोटा या बड़ा नहीं होता है।

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(ख) आश्रम के कार्य गाँधीजी स्वयं क्यों करते थे ?
उत्तर
गाँधीजी आश्रम के कार्य स्वयं ही करते थे क्योंकि उनके लिए श्रम करना (कार्य करना) ही ईश्वर की पूजा करने के समान था। गाँधीजी की यही विचारधारा थी, यही
उनका दर्शन था।

(ग) ऐसे थे गांधीजी’ सम्बोधन में कवि का संकेत क्या है?
उत्तर
‘ऐसे थे गाँधीजी’ सम्बोधन में कवि का संकेत इस बात की ओर है कि श्रम को ही गाँधी ईश्वर मानते थे। कर्म करना ईश्वर की पूजा करना है। वे आश्रम के हर कार्य को चाहे वह सूत कातना हो, अनाज से कंकड़ अलग करना हो, कपास धुनना हो, चक्की पीसना हो, कपड़ा बुनना हो-स्वयं किया करते थे।

(घ) गाँधीजी ने सेवा के काम को ईश्वरीय कार्य क्यों माना है?
उत्तर
काम करने के पीछे जो भावना है, वह सेवा की है, सेवा किसी भी जीव की क्यों न हो, वह तो सेवा का कार्य। सेवा में समर्पण, त्याग और निष्ठा का भाव होता है। इसलिए सेवा का कार्य ईश्वरीय माना गया।

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(ङ) इस कविता से आपको क्या सीख मिलती है ?
उत्तर
इस कविता से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने सभी कार्य अपने हाथ से करने चाहिए। काम करने से कोई भी व्यक्ति नीचा-ऊँचा अथवा बड़ा या छोटा नहीं होता है। काम करने के पीछे सेवा की भावना होती है। सेवा का कार्य ही ईश्वर की पूजा है।

(च) गाँधीजी छोटे से छोटे कार्य को भी महत्व क्यों देते थे?
उत्तर
छोटे से भी छोटा कार्य भी महत्वपूर्ण होता है। इस कार्य के करने के पीछे सेवा की भावना होती है। उस सेवा में ईश्वर की सेवा छिपी है। इसलिए गाँधीजी छोटे से छोटे कार्य को भी महत्व देते थे। प्रत्येक छोटे कार्य से ही बड़े कार्य को करने का मार्ग खुलता है। काम करने की भावना पुष्ट होती है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए

(क) ‘सेवा का हर काम, हमारा ईश्वर है भाई।’
(ख) ‘एक आदमी घड़ी बनाता, एक बनाता चप्पल।’
इसीलिए यह बड़ा, और वह छोटा, इसमें क्या बल।’
(ग) “ऐसे थे गाँधीजी, ऐसा था उनका आश्रम,
गाँधीजी के लेखे पूजा के समान था श्रम।’
उत्तर
सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या के अन्तर्गत पद्यांश सं. 4, 1 व 3 की व्याख्या देखें।

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भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
सड़क, घड़ी, आश्रम, ईश्वर।।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से शुद्ध उच्चारण करना सीखिए और अभ्यास कीजिए।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए
(i) पूस्तक
(ii) जूलाहो
(iii) इश्वर
(iv) ऊतसाह।
उत्तर
(i) पुस्तक
(ii) जुलाहों
(iii) ईश्वर
(iv) उत्साह।

प्रश्न 3.
(अ) स्तम्भ में तद्भव और (ब) स्तम्भ में उनके तत्सम शब्द दिए गए हैं, उन्हें सम्बन्धित शब्द से जोड़िए
MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 श्रम की महिमा 1
उत्तर
(क)→ (vi), (ख) → (iv), (ग) → (v), (घ) →(iii), (ङ) →(i), (च) →(i)

प्रश्न 4.
स्तम्भ’क’ में दिए गए महावरों को स्तम्भ’ख के गलत क्रम में रखे उनके अर्थ से सही क्रम में मिलाइए
MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 श्रम की महिमा 2
उत्तर
(अ) → (iv), (ब) → (iii), (स) → (ii), (द) →(i)

प्रश्न 5.
दी गई वर्ग पहेली में गाँधीजी के जीवन से जुड़ी पाँच वस्तुएँ हैं, उन्हें छाँटकर अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए
MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 श्रम की महिमा 3
उत्तर
(1) चश्मा
(2) लाठी
(3) खादी की धोती
(4) घड़ी
(5) चरखा

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(i) व्यापारी
(ii) कपड़ा
(iii) आदमी
(iv) चक्की ।
उत्तर
(i) व्यापारी-व्यापारी देश-विदेश को माल भेजते हैं और मैंगाते हैं।
(ii) कपड़ा-जुलाहे कपड़ा बुनते हैं।
(iii) आदमी-आदमी अपना काम स्वयं करता है।
(iv) चक्की-चक्की से अनाज पीसा जाता है।

श्रम की महिमा सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1) तुम कागज पर लिखते हो
वह सड़क झाड़ता है
तुम व्यापारी
वह धरती में बीज गाड़ता है।
एक आदमी घड़ी बनाता
एक बनाता चप्पल
इसीलिए यह बड़ा और वह छोटा
इसमें क्या बल।

शब्दार्थ-बीज गाड़ता = बीज बोता है। बल = महत्वपूर्ण बात।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा| भारती’ के ‘श्रम की महिमा’ शीर्षक कविता से अवतरित हैं। इस कविता के रचयिता कवि भवानी प्रसाद मिश्र’ हैं।

प्रसंग-काम कोई भी हो, उससे कोई ऊँचा-नीचा, छोटा या बड़ा नहीं होता है।

व्याख्या-कवि कहता है कि एक तुम हो, कागज पर लिखते हो और एक वह जो सड़क की सफाई करता है। तुम व्यापार करने वाले हो सकते हो या वह व्यक्ति जो खेतों में बीज बोता है, इसलिए वह किसान है। एक वह व्यक्ति जो घड़ी बनाता है या उसकी मरम्मत करता है, साथ ही वह व्यक्ति जो चप्पल बनाता या उनकी मरम्मत करता है। इस आधार पर कोई छोटा या बड़ा हो सकता है क्या ? अर्थात् नहीं। इस बात में कोई बल नहीं है, अर्थात् यह बात महत्वपूर्ण नहीं है।

(2) सूत कातते थे गांधी जी
कपड़ा बुनते थे,
और कपास जुलाहों के जैसा ही
धुनते थे
चुनते थे अनाज के कंकर
चक्की घिसते थे
आश्रम के कागजयाने
आश्रम में पिसते थे
जिल्द बाँध लेना पुस्तक की
उनको आता था
हर काम सफाई से
नित करना भाता था।

शब्दार्थ-चक्की घिसते थे = चक्की चला कर दाना पीसते थे, आटा बनाते थे। नित = रोजाना। भाता था = अच्छा लगता था।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-महात्मा गाँधी अपने आश्रम में अपने सारे काम अपने हाथ से करते थे।

व्याख्या-गाँधीजी अपने आश्रम में रहते हुए, सूत कातते थे। उससे कपड़ा बुनते थे। साथ ही जुलाहों से भी बढ़िया ढंग से कपास धुनते थे। अनाज में से कंकड़ आदि चुनकर अलग करते और अनाज को साफ करके, अपने आप ही चक्की से आटा बनाते थे। वे पुस्तकों की जिल्द भी बनाना जानते थे। उन्हें प्रत्येक काम सफाई से करना प्रतिदिन ही अच्छा लगता था। कहने का तात्पर्य यह है कि महात्मा गाँधी अपने काम करने के लिए किसी पर भी निर्भर नहीं रहते थे।

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(3) ऐसे थे गांधी जी
ऐसा था मका आश्रम
गांधी जी के लेखे
पूजा के समान था श्रम।
एक बार उत्साह-ग्रस्त
कोई वकील साहब
जब पहुँचे मिलने
बापूजी पीस रहे थे तब।

शब्दार्थ-लेखे = अनुसार। श्रम = काम करना। पीस रहे थे = चक्की चलाकर अनाज से आटा बना रहे थे।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह। प्रसंग-गांधीजी श्रम को ही ईश्वर की पूजा मानते

व्याख्या-गांधीजी और उनका आश्रम ऐसा था जिसमें वे परिश्रम को ही ईश्वर की पूजा मानते थे। एक बार कोई वकील साहब उनके पास आश्रम में पहुँचे। वकील साहब बहुत ही उत्साहित थे। जिस समय वे आश्रम में पहुँचे। तब महात्मा गाँधी अनाज को चक्की से पीसकर आटा बना रहे थे।

(4) बापूजी ने कहा-बैठिए
पीसेंगे मिलकर
जब वे झिझके
गांधीजी ने कहा
और खिलकर
सेवा का हर काम
हमारा ईश्वर है भाई
बैठ गये वे दबसट में
पर अक्ल नहीं आई

शब्दार्थ-झिझके – शर्मिन्दा हुए। दबसट में = समीपही।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-गाँधीजी ने उन वकील साहब से हँसकर कहा कि भाई आओ, दोनों ही मिलकर चक्की से आटा बनाते हैं।

व्याख्या-वकील साहब उत्साहपूर्वक जोश से भरे हुए, बापूजी से मिलने आश्रम में पहुँचे। तब गाँधीजी ने उनसे कहा, आइए, बैठिए। हम दोनों ही मिलकर अनाज पीसेंगे और आटा तैयार करेंगे। इस पर वकील साहब कुछ झिझकने लगे अर्थात् उन्हें चक्की पीसना एक घृणित-सा काम लगा। इस पर गाँधीजी ने खिलखिलाकर ठहाका भरते हुए (जोर से हँसते हुए) कहा कि हे भाई! सेवा में कोई भी किया गया हमारा काम, ईश्वर ही होता है। इसे सुनते ही वह वकील महोदय भी समीप बैठ गए लेकिन गाँधीजी द्वारा कही गई बात समझ नहीं सके। उनकी बुद्धि ने काम नहीं किया अर्थात् गाँधीजी के कहे हुए शब्दों के अर्थ को वे समझ नहीं सके।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 15 दस्तक प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 15 Dastak Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 15 Dastak Questions and Answers

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) लेखक के पुत्र का नाम था
(i) गणेशन
(ii) सोनू
(iii) गरीबा
(iv) हरी बाबू।
उत्तर
(ii) सोनू

(ख) त्रिवेन्द्रम का प्रसिद्ध सागर तट है
(i) कोलकाता
(ii) कोवलम
(iii) मुम्बई
(iv) गोआ।
उत्तर
(ii) कोवलम

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) ……….. ऊँचे पद पर कार्यरत थे।
(ख) शीला अवकाश के क्षणों में ……. का कार्य करने लगी।
उत्तर
(क) हरीबाबू
(ख) समाज सेवा

प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर लिखिए-

(क) सोनू अचेत कैसे हो गया था ?
उत्तर
सोनू छत से गिर पड़ा और उसके सदमे से वह अचेत हो गया।

(ख) लेखक गरीबा के घर क्यों गया था?
उत्तर
गरीबा बीमार हो गया था इसलिए मुलाकात न होने के कारण लेखक उससे मिलने के लिए उसके घर चला गया था।

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(ग) शीला मूच्छिंत क्यों हो गई थी?
उत्तर
शीला अपने पुत्र सोनू को छत से गिरने पर मूर्णित देखकर स्वयं मूर्च्छित हो गई।

(घ) लेखक ने गणेशन की मदद कैसे की?
उत्तर
लेखक ने आठ वर्षीय गणेशन के पैर में आर-पार चुभी कील को खींचकर निकाला और पट्टी बाँध दी। उसे अपनी पीठ पर लादकर ऑटो स्टैण्ड तक पहुँचाया।

प्रश्न 4.
तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) शीला अपने पति से नाराज क्यों रहती थी?
उत्तर
शीला अपने पति से नाराज इसलिए रहती थी कि वह (पति) समाज के काम के लिए, अपनी चिन्ता छोड़कर भी लगे रहते थे। लोगों की सेवा करने, उनकी समस्याओं को दूर कराने में सहायता करने में वे (लेखक महोदय) लगे रहते थे। अपने घर और गृहस्थी के लिए समय नहीं निकाल पाते थे। अतः शीला अपने पति से नाराज रहती थी।

(ख) शीला के व्यवहार में परिवर्तन का क्या कारण था?
उत्तर
सोनू छत से गिर पड़ा, मूर्च्छित हो गया। जिस किसी ने भी यह समाचार सुना, वही सहायता के लिए दौड़ पड़ा। शीला पुत्र को अस्पताल में मूर्च्छित दशा में देखकर मूर्छित हो गई। एकत्र हुए समाज के लोग किसी भी तरह की सहायता, चाहे वह धन की हो या बल की, तैयार थे। इतनी संख्या में सहायकों और सहयोगियों को देखकर शीला के व्यवहार में परिवर्तन आया। लेखक द्वारा की गई समाज सेवा में शीला की आस्था और विश्वास बढ़ गया और वह स्वयं समाज की सहायता में मुहल्लों और पड़ोस की महिला-मण्डलों में जाकर उपस्थित होने लगी।

(ग) समाज ने भी उनके साथ वही व्यवहार किया जैसा उन्होंने किया था? इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
लेखक समाज सेवा में हर समय तत्पर रहते थे। वे अपनी गृहस्थी और घर की समस्याओं के समाधान के लिए समय नहीं दे पाते थे। वे समाज सेवा में सब कुछ भूले हुए थे। एक दिन जब उनका सोनू छत से गिर पड़ा, अचेत हो गया, तो समाज के लोग ही उसे अस्पताल ले गए। लेखक तो उस समय त्रिवेन्द्रम में अपने किसी मित्र के कार्य से गए हुए थे। उनकी गैर-मौजूदगी में भी समाज के लोगों ने उनके पुत्र सोनू के लिए जो सहयोग दिया, वैसा तो स्वयं लेखक भी नहीं कर पाते। क्योंकि लेखक चौबीस घण्टे समाज की सेवा में लगे रहते थे, तो उस दिन समाज ने भी अपनी कृतज्ञता का परिचय दिया। समाज ने वही किया, जैसा उन्होंने समाज के लिए किया था।

(घ) शीला ने समाज की उपेक्षा करने वालों के विषय में क्या कहा?
उत्तर
शीला और लेखक के पुत्र सोनू को अस्पताल में सहायता के लिए तत्पर लोगों की भीड़ देखकर तथा सोनू के स्वस्थ हो जाने पर शीला भी समाज के द्वारा दिए गए सहयोग से प्रभावित होकर अपने अवकाश के समय में प्रत्येक मुहल्ले में जाकर महिलाओं के बीच समाज सेवा करने लगी। वह कहने लगी कि समाज की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। यदि ऐसा कोई करता भी है तो वह व्यक्ति अपनी ही उन्नति से सन्तुष्ट होता रहता है। उसे समाज के कल्याण की चिन्ता नहीं होती। परन्तु अनुभव से देखा गया है कि ऐसे व्यक्तियों का प्रकृति स्वयं नियन्त्रण करती है। समय आने पर उसे दण्ड भी देती है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित गद्यांश की व्याख्या कीजिए

‘जो समाज की उपेक्षा कर मात्र अपनी ही उनति में संतुष्ट रहता है, प्रकृति उसका नियन्त्रण स्वयं करती है। समय आने पर उन्हें दण्ड भी देती है।’
उत्तर
प्रस्तुत पंक्ति लेखक की पत्नी शीला का कथन है। (व्याख्या के लिए प्रश्न 4 के खण्ड (घ) के उत्तर का अध्ययन कीजिए।

प्रश्न 6.
सोचिए और बताइए

(क) शीला मुहल्ले-मुहल्ले जाकर समाज सेवा क्यों करने लगी?
उत्तर
शीला अपने पुत्र सोनू के साथ छत से गिरकर हुई दुर्घटना के समय समाज के लोगों ने जो सहयोग दिया, उसे देखकर उसके मन के विचारों में परिवर्तन हुआ। उसे समझ में आने लगा कि लेखक के द्वारा की गई समाज-सेवा का प्रतिफल-समाज के लोगों का सहयोग मिला और सोनू को स्वास्थ्य लाभ मिला। इस सब के पीछे लेखक की समाज सेवा की भूमिका की प्रधानता है। सेवा का बदला सेवा के रूप में ही प्राप्त होता है। यह समझकर शीला मुहल्ले-मुहल्ले जाकर समाज-सेवा करने लगी।

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(ख) छत से गिरने की दुर्घटना से कैसे बचा जा सकता है?
उत्तर
मकान की छत की मुंडेर की ऊँचाई अधिक होनी चाहिए। छत पर बच्चों या युवकों को खेलते समय बार-बार ध्यान दिलाते रहना चाहिए कि छत पर सावधानी बरतें, खेलते हुए बच्चे या युवक आपस में धक्का-मुक्की न करें। छत की मुंडेर की तरफ पीठ करके चलना अथवा दौड़ना नहीं चाहिए।

प्रश्न 7.
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए
(क) यदि त्रिवेन्द्रम में लेखक की जगह आप होते तो क्या करते?
उत्तर
त्रिवेन्द्रम में लेखक की जगह होने पर मैं स्वयं गणेशन को ऑटो स्टैण्ड पर लाकर ऑटो से अस्पताल पहुंचाता और उसकी उचित मरहम-पट्टी करता। उसके थोड़ा सम्हलने पर उसके घर पहुँचा कर ही, अपने काम को पूरा करता।

(ख) यदि हरीबाबू की तरह आप ऊँचे पद पर होते तो क्या-क्या करते?
उत्तर
ऊँचे पद पर होने का तात्पर्य यह नहीं है कि मनुष्य मानवता को भुला दे और अपने स्वार्थों की पूर्ति भर ही करता रहे। सरकारी अधिकारी भी जनता का सेवक होता है। जनता की किसी भी असुविधा का निवारण करना, उसकी सेवा करना ही उसका धर्म है। इस दृष्टि से सेवा-धर्म का निर्वाह ही करता।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
शुद्ध उच्चारण कीजिए
बड़बड़ाहट, प्लास्टर, स्वभाव, अनुपस्थिति, स्वस्थ, नियन्त्रण।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय के सहयोग से उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए
(i) मनोरज्जन
(ii) अन्तरद्वनद
(iii) हिरदय
(iv) चनचल
(v) दरशन।
उत्तर
(i) मनोरंजन
(ii) अन्तर्द्वन्द
(iii) हृदय
(iv) चंचल
(v) दर्शन।

प्रश्न 3.
नीचे लिखे शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
(i) आशा
(ii) उपस्थित
(iii) कठिन
(iv) अमीर
(v) उन्नति
(vi) कठोर।
उत्तर
(i) निराशा
(ii) अनुपस्थित
(iii) सरल
(iv) गरीब
(v) अवनति
(vi) कोमल।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों में संज्ञा, सर्वनाम व क्रिया छाँटकर लिखिए
(i) चिल्लाना
(ii) वे
(iii) शीला
(iv) बोलना
(v) बड़बड़ाना
(vi) वह
(vii) हरीबाबू
(viii) अघाना
(ix) मैं
(x) सोनू
(xi) उसने
(xii) गरीबा।
उत्तर

  1. संज्ञा-शीला, हरीबाबू, सोनू, गरीबा।
  2. सर्वनाम-वे, वह, मैं, उसने।
  3. क्रिया-चिल्लाना, बोलना, बडबड़ाना, अघाना।

प्रश्न 5.
इस पाठ में अन्य भाषा के शब्द छाँटकर लिखिए।
उत्तर
प्लास्टर, लाचार, सरेआम, फिल्मी, खासी, देहात, आरामखाना, मनुहार, दम, अमुक, कार, तमाम, गन्दी, माफ, मोहल्ला, लायक, बेताव, टेपरिकार्ड, हवाइयाँ, ऑटो स्टैण्ड, किलोमीटर, रूमाल, अस्पताल।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों में ‘आई’ का ‘आहट प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए
(i) बुरा
(ii) लड़खड़ान
(iii) चतुर
(iv) गुनगुनाना
(v) भला
(vi) लड़ना
(vii) गुदगुदाना
(viii) चहचहाना।
उत्तर
(i) बुरा + आई = बुराई
(ii) लड़खड़ाना + आहट = लड़खड़ाहट
(iii) चतुर + आई = चतुराई
(iv) गुनगुनाना + आहट = गुनगुनाहट
(v) भला + आई = भलाई
(vi) लड़ना + आई = लड़ाई
(vii) गुदगुदाना + आहट = गुदगुदाहट,
(viii) चहचहाना + आहट = चहचहाहट।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(i) तिल का ताड़ बनाना
(ii) नाक में दम करना
(iii) सीधे मुँह बात न करना
(iv) कान भरना।
उत्तर
(i) तिल का ताड़ बनाना-छोटी बात को बढ़ाचढ़ाकर कहना।
प्रयोग-गिरीश बाबू अपने साथियों की थोड़ी भी गलती को अपने साहब से तिल का ताड़ बना कर कहते हैं।
(ii) नाक में दम करना-परेशान कर देना।
प्रयोग-राघव ने अपनी जिद्द पूरा करने के लिए अपने माँ-बाप की नाक में दम कर दिया।
(iii) सीधे मुंह बात न करना-घमण्ड करना।
प्रयोग-राधे की अभी-अभी फूड कार्पोरेशन में नियुक्ति क्या हुई है, वह तो किसी से भी सीधे मुँह बात नहीं करता है।
(iv) कान भरना-चुगली मारना।
प्रयोग-प्रायः देखा गया है कि मेरे दफ्तर के एक-दो बाबू दूसरे कर्मचारियों के खिलाफ अपने अधिकारी के कान भरते रहते हैं।

दस्तक परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

(1) उसका अन्तर्द्वन्द्व बराबर चलता रहा। वह औरों की भाँति ही मुझे भी अपने परिवार की प्रगति और खुशहाली में सन्तुष्टि के लिए सीमित रखना चाहती थी। इसलिए मन ही मन उसके विचारों की संकीर्णता और द्वन्द्व समाप्त करने के लिए मैं चिन्तित रहने लगा था।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषाभारती’ के पाठ ‘दस्तक’ से ली गई है। इस कहानी के लेखक डॉ. शिवभूषण त्रिपाठी हैं।

प्रसंग-कहानीकार ने स्पष्ट किया है कि मन के अन्दर उठने वाले संकुचित विचार मनुष्य को स्वार्थी बना देते हैं।

व्याख्या-लेखक की पत्नी शीला नहीं चाहती कि वे सदा सामाजिक कार्यों में ही लगे रहें। उनके बाहर रहने की स्थिति में घर पर कोई घटना घटती है, तो कौन सहायक होगा, ऐसा कहने पर लेखक ने शीला को कहा कि उसे केवल धैर्य रखना चाहिए। परन्तु उसके मन में उत्पन्न विचारों की हलचल मचती रही। वह चाहती थी कि वह (लेखक) भी सदा अपनी और अपने परिवार की उन्नति, बढ़ोत्तरी और सम्पन्नता के लिए कार्य करने तक ही सीमित रहें। लेखक सोचता था कि उनकी पत्नी की यह संकुचित विचारधारा और उसके मन में उठने वाले विचारों की हलचल समाप्त हो जाय। यही लेखक की चिन्ता का कारण था।

(2) अस्पताल में अमीर-गरीब सभी स्तर के सहयोगियों की एकत्रित भीड़ को देखकर वह दंग रह गई। उसे मेरी अनुपस्थिति की अनुभूति भी नहीं हो सकी थी। शायद मैं उपस्थित रहकर भी उतना धन नहीं जुटा सकता था। उस दिन जिस समाज के पीछे मैं दिवाना रहता था, उसका दर्शन करते वह नहीं अघाती थी।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-लेखक का पुत्र सोनू छत से गिर गया। लेखक किसी के काम से त्रिवेन्द्रम गया हुआ था। बालक गिरने से अचेत हो गया। दर्शक और सहयोगी जन उसे अस्पताल ले गए। पत्नी पुत्र की दशा पर स्वयं मूर्छित हो गई।

व्याख्या-अस्पताल में भर्ती किए गए लेखक के अचेत पुत्र के इलाज के लिए धनवान और गरीब सभी स्तर के लोग वहाँ पहुँच गए। इन सहयोगियों की भीड़ को देखकर वह (लेखक की पत्नी) भी अचम्भे में पड़ गई। उसे लेखक का गैर-हाजिर होना भी मालूम न हुआ क्योंकि रुपये-पैसे का प्रबन्ध किसने किया, यह भी पता नहीं चला। लेखक कहता है, जो भी धन सोनू के लिए खर्च किया गया, उतना वह स्वयं भी एकत्र नहीं कर पाता। पूरा समाज उस दिन अस्पताल में इकट्ठा था। लेखक ने सदा ही समाज की चिन्ता की। उस समाज की सेवा में वह सदा तत्पर रहता था। उस समाज के लोगों की भीड़ देखकर वह अघाती नहीं | थी। अर्थात् समाज का हर व्यक्ति उसकी सेवा के लिए तत्पर था।

(3) सूर्यास्त का समय था। त्रिवेन्द्रम के प्रसिद्ध सागर तट, कोवलम बीच पर हजारों की भीड़ मचल रही थी। बच्चे कभी सागर के जल को एक-दूसरे पर उछालते तो कभी बालुकामय तट पर दौड़ते। वह दृश्य बहुत ही रोचक एवं आकर्षक था।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-सूर्य के छिपने के समय पर समुद्र के किनारे का वर्णन है।

व्याख्या-लेखक अपने मित्र के किसी काम से त्रिवेन्द्रम गया हुआ है। सूर्य के छिपने का समय हो चुका था, त्रिवेन्द्रम का | समुद्री किनारा अपने सायंकालीन सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध है। कोवलम नाम से प्रसिद्ध समद्री किनारे पर हजारों की संख्या में लोग इकट्ठे घूम-फिर रहे थे। बच्चे समुद्र के पानी को एक-दूसरे पर उछालते तो कभी बालू भरे समुद्री किनारे पर इधर से उधर दौड़ रहे थे। यह दृश्य बहुत ही अच्छा लग रहा था तथा सब को अपनी ओर खींच रहा था।

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(4) इस घटना को सुनकर मेरे सिद्धान्तों के प्रति शीला की आस्था और विश्वास अधिक दृढ़ हो गया था। उसे आश्चर्य हो रहा था कि जब मेरा सोनू छत से गिरा था, ठीक उसी दिन उसी समय मैं आठ वर्षीय गणेशन को पीठ पर लादकर ऑटो स्टैण्ड पर जा रहा था। उसी समय मेरी अनुपस्थिति में सोनू की सहायता के लिए लोग व्याकुल हो उठे थे।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-पैर में कील चुभ जाने से कष्ट पाते गणेशन को ऑटो स्टेण्ड तक लेकर लेखक पहुँचाता है। तो उधर लेखक के पुत्र सोनू की सहायता के लिए भी लोग हड़बड़ाये जा रहे थे। यद्यपि लेखक वहाँ नहीं था।

व्याख्या-लेखक ने जब पैर में कील के चुभने से घायल आठ वर्षीय गणेशन को ऑटो स्टेण्ड तक, अपनी पीठ पर लाद कर पहुँचाया ठीक उसी समय इधर छत से गिरे लेखक के पुत्र सोनू को अस्पताल पहुंचाने में सहायता करने के लिए जुटे लोगों की भीड़ को देखकर लेखक की पत्नी शीला को यह विश्वास हो गया कि लेखक द्वारा समाज के लोगों की सहायता करने के सिद्धान्त का, नियम का ही यह प्रभाव है, जिससे लोग सोनू की सहायता धन और बल दोनों से करने के लिए जुटे हुए थे। समाज सेवा के नियम में शीला की आस्था पक्की होती जा रही थी। लोग लेखक के पुत्र के कष्ट से व्याकुलं थे लेकिन वे सभी उसकी गैर-मौजूदगी में भी सोनू की सहायता को अड़े हुए थे। सेवा का फल मीठा होता है।

(5) समाज को समझने का जब समय था,शक्ति थी, तब समझ न सके और जब समाज को समझने की समझ आई तो बहुत देर हो चुकी थी, काल उनकी देहली पर खड़ा दस्तक दे रहा था।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-जकलेखक त्रिवेन्द्रम से लौटकर अपने घर आए, घटना को जाना-समझा तो उसी समय ऊँचे पद पर आसीन हरीबाबू की याद आई और वह कहने लगे कि

व्याख्या-हरीबाबू ने अच्छे और ऊँचे पद पर रहकर नौकरी की, लेकिन उस नौकरी के मध्य केवल अपना ही स्वार्थ सिद्ध किया। समाज के लोगों की सहायता की बात तो दूर, उनके विषय में सोचा भी नहीं। अपने ही कष्टों से वैभवपूर्ण होने पर भी, पागल की स्थिति में आ गए, कोई भी उनकी सहायता के लिए नहीं आया। जब वे सामर्थ्यवान थे, तो समाज की सेवा कर सकते थे, उस समय उन्होंने समाज को न तो समझा और न उसे समझने की बुद्धि (सूझ-बूझ) आई। अब समाज को समझने लगे, तो समय निकल चुका था। समाज की सेवा करने की समय सीमा से बाहर हो चुके वे रिटायर हो चुके थे क्योंकि अब तो वे अपने जीवन की अन्तिम सीढ़ी पर थे। काल किसी भी समय आकर दस्तक देने वाला था। उस अवस्था में (चौथेपन में) मनुष्य किसी की भी सहायता करने की सामर्थ्य से रहित हो जाता है।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 14 नारियल का बगीचा-केरल प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 14 Nariyal Ka Bagicha Keral Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 14 Nariyal Ka Bagicha Keral Questions and Answers

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) आदि शंकराचार्य का जन्म हुआ था
(i) रामेश्वरम् में
(ii) अहमदाबाद में,
(iii) केरल में
(iv) मुम्बई में।
उत्तर
(iii) केरल में

(ख) केरल का नृत्य है
(i) कुचीपुड़ी
(ii) भरतनाट्यम्
(iii) कथकली
(iv) भांगड़ा।
उत्तर
(iii) कथकली

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(ग) इमली के मसालेदार पानी को केरल में कहते
(i) रसम
(ii) सांभर,
(iii) उत्तपम
(iv) चटनी।
उत्तर
(i) रसम

(घ) केरल के पश्चिम में स्थित है
(i) हिन्द महासागर
(ii) अरब सागर
(iii) भूमध्य सागर
(iv) बंगाल की खाड़ी।
उत्तर
(ii) अरब सागर

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) केरल का मुख्य त्योहार ……. है।
(ख) केरल में नीलगिरि पर्वत पर ………….के बगीचे में
(ग) केरल की राजधानी ………………है
(घ) रामकृष्ण मेनन केरल के होकर भी अच्छी ………….. बोलते थे।
(ङ) केरल के लोग नृत्य और संगीत के बड़े ………………है
उत्तर
(क) ओणम
(ख) चाय
(ग) त्रिवेन्द्रम
(घ) हिन्दी
(ङ) शौकीन।

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प्रश्न 3.
एक या दो वाक्य में उत्तर दीजिए

(क) रामकृष्ण मेनन का वतन कहाँ था ?
उत्तर
रामकृष्ण मेनन का वतन केरल की राजधानी त्रिवेन्द्रम में है।

(ख) लेखक को प्लेटफार्म पर खड़े सज्जन पर दया क्यों आ गई?
उत्तर
प्लेटफार्म पर खड़े सज्जन पर लेखक को दया इसलिए आ गई कि एक पहलवाननुमा लड़का डिब्बे के दरवाजे में खड़ा होकर उसे डिब्बे में चढ़ने नहीं दे रहा था। गाड़ी चलने वाली थी। उन सज्जन ने अनेक बार मिन्नतें की लेकिन उस लड़के ने उस यात्री को चढ़ने नहीं दिया। जब लेखक ने पहल की तो वह बेचारा प्लेटफार्म से डिब्बे में चढ़ सका।

(ग) केरल के वनों में कौन-कौन से वृक्ष होते हैं ?
उत्तर
केरल के वनों में सागौन, शीशम, रबर और चन्दन के वृक्ष होते हैं। नारियल का पेड़ उनकी प्रतिदिन की आवश्यकताओं को पूरा करता है।

(घ) केरलवासी नारियल को कौन-सा वृक्ष कहते
उत्तर
केरलवासी नारियल को कल्पवृक्ष कहते हैं।

(ङ) केरल के लोगों का पहनावा कैसा है ?
उत्तर
केरल में गर्मी बहुत पड़ती है, इसलिए वहाँ के लोग ढीले-ढाले कपड़े पहनते हैं। वे लुंगी ही पहनते हैं। स्त्रियाँ धोती और ब्लाउज पहनती हैं। उनके कपड़े प्राय: सफेद रंग के ही ज्यादा होते हैं।

(च) कथकली’ का नाम कथकली क्यों पड़ा?
उत्तर
‘कथकली’ नामक नृत्य कला में अनेक कथाओं को नृत्य में डाल लिया जाता है। इसलिए इसे कथकली कहा जाता है।

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प्रश्न 4.
तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) नारियल के पेड़ की क्या उपयोगिता है ?
उत्तर
नारियल अमृत के समान मीठा पानी देता है। उसकी गिरी से साग-सब्जी, चटनी बनती है। उसके गोले से तेल निकलता है जो साबुन बनाने और सिर में डालने के काम आता है। इसके तने से पानी की नाली बनती हैं। उससे रस्सी, मोटे । रस्से, चटाई, कूँची पायदान बनाये जाते हैं। नारियल के छिलकों से कटोरे, प्याले, चमचे बनते हैं। इसकी लकड़ी से और पत्तियों से मकान की छत बनाई जाती है।

(ख) केरल को भारत का नन्दनवन क्यों कहते हैं ?
उत्तर
केरल भारतवर्ष का नन्दनवन है क्योंकि यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता चारों ओर बिखरी पड़ी है, जिस तरह स्वर्ग में नन्दनवन अपनी छटा से देवताओं के मन का रंजन करता रहता है, वैसे ही यहाँ के वन समूल में अनेक तरह के पेड़-पौधे पाये जाते हैं। इन पेड़-पौधों ने केरल को प्राकृतिक सुन्दरता दे दी है। रंग-बिरंगे फूलों और चन्दन आदि के वृक्षों की गंध चारों ओर बिखरती रहती है। इसलिए केरल को स्वर्ग का बगीचा नन्दनवन । कहा गया है।

(ग) केरल के खान-पान में मुख्य भोजन क्या है ?
उत्तर
केरल के लोगों का मुख्य रूप से भोजन चावल ही है। इस चावल से वहाँ भिन्न-भिन्न वस्तुएँ बनाई जाती हैं। चावल के साथ रसम तथा सांभर भी बनता है। रसम एक तरह का मसालेदार पानी होता है और सांभर एक प्रकार की दाल होती है। इडली और डोसा यहाँ के लोगों का खाद्य पदार्थ है।

(घ) ‘ओणम’ के दिन केरलवासी क्या करते हैं?
उत्तर
ओणम के दिन केरलवासी नौका और लक्ष्मी की पूजा करते हैं। अनेक मिठाइयाँ बनती हैं। नौका प्रतियोगिता होती है। नौकाओं में बैठे लोग मीठे स्वरों में गीत गाते हैं। हाथियों पर देवताओं की सवारी निकाली जाती है। संगीत और नृत्य के कार्यक्रम होते हैं। कथकली नृत्य होता है।

(ङ) केरल में कौन-सी नृत्य कला विकसित हुई ? इसकी क्या विशेषता है ?
उत्तर
केरल में कथकली नामक नत्य कला विकसित हुई है। इस कला की यह विशेषता है कि इसमें अनेक कथाओं को नृत्य में ढाल लिया जाता है। अत: इसे ‘कथकली’ में कहा जाता है। यह ‘कथकली’ नृत्य आज पूरे भारत में प्रसिद्ध है।

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प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) ‘जैसा देश, वैसा वेश’ रामकृष्ण ने ऐसा क्यों कहाँ ?
उत्तर
रामकृष्ण ने ‘जैसा देश वैसा वेश’ कहावत इसलिए कही कि मनुष्य जिस स्थान और जलवायु वाले प्रदेश में रहता है, तो वह वहाँ के मौसम के अनुकूल अपने वस्त्रों का चुनाव करता है और उन्हें पहनता है। रामकृष्ण लुंगी पहने हुए थे। क्योंकि केरल में गर्मी अधिक होती है, अत: लोग ढीले-ढाले वस्त्र पहनते हैं।

(ख) केरल में ढीले-ढाले और सफेद कपड़े क्यों पहने जाते हैं?
उत्तर
केरल में मौसम गर्म होता है। गर्मी के कारण लोग ढीले-हाले कपड़े पहनते हैं जिससे उन्हें गर्मी कम लगे। सफेद कपड़ा भी प्रायः गर्मी नहीं देता है। इसलिए वे सफेद कपड़े पहनते हैं।

(ग) रामकृष्ण मेनन ‘केरल’ को अपना बतन क्यों कहते हैं?
उत्तर
रामकृष्ण मेनन का जन्म केरल की राजधानी त्रिवेन्द्रम में हुआ है और त्रिवेन्द्रम केरल की राजधानी है। अत: केरल को वे अपना वतन कहते हैं।

(घ) पहलवाननुमा लड़का सज्जन को ट्रेन के अन्दर क्यों नहीं आने दे रहा था ?
उत्तर
पहलवाननुमा लड़का सज्जन को ट्रेन के अन्दर इसलिए नहीं आने दे रहा था कि उस सज्जन के आने देने से डिब्बे में भीड़ हो सकती है। साथ ही वह दरवाजे पर खड़ा होकर प्रकृति के सुन्दर दृश्य देख रहा था। उसे हवा का भी आनन्द मिल रहा था।

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प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना करके प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) यदि लेखक उस सज्जन को ट्रेन के अन्दर आने में मदद नहीं करते तो उनका क्या होता?
उत्तर
यदि लेखक उस सज्जन को ट्रेन के अन्दर आने में मदद नहीं करते तो वह बेचारे उसी प्लेटफार्म पर ही रह गए होते। ट्रेन चली जाती। उन सज्जन का कोई भी परिचित वहाँ नहीं था। वह रात भर प्लेटफार्म पर ही पड़ा रहता।

(ख) यदि केरल का मौसम कश्मीर जैसा होता तो वहाँ के जन-जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता?
उत्तर
यदि केरल का मौसम कश्मीर जैसा होता, तो वहाँ का जन-जीवन अब की अपेक्षा बिल्कुल विपरीत होता। उनका खान-पान बिल्कुल भिन्न होता। उनका पहनावा भी ढीला-ढाला न होकर वे कसे हुए वस्त्र पहनते, गर्म कपड़े पहनते। वे रंगीन कपड़े पहनना पसन्द करते। उन लोगों के शरीर का रंग भी गोरा होता। प्राकृतिक परिस्थिति के अनुसार उनका जन-जीवन प्रभावित होकर भिन्न तरह का होता।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
शुद्ध उच्चारण कीजिए
त्रिवेन्द्रम, ग्रीष्मकालीन, कम्पार्टमेन्ट, सेन्टीमीटर।
उत्तर
कक्षा में अध्यापक महोदय की सहायता से उच्चारण करना सीखिए और अभ्यास कीजिए।

प्रश्न 2.
वर्तनी शुद्ध कीजिए
(i) वृरक्षों
(ii) गोर
(iii) आतमियता
(iv) हांफते
(v) पत्तीयों
(vi) कार्यकरम।
उत्तर
(i) वृक्षों
(ii) गौर
(iii) आत्मीयता
(vi) हाँपत
(v) पत्तियों
(vi) कार्यक्रम

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प्रश्न 3.
‘ता’ प्रत्यय जोड़कर पाँच नए शब्द बनाइए।
उत्तर

  1. सहजता
  2. सरलता
  3. कठिनता
  4. तरलता
  5. मलिनता
  6. गहनता
  7. समीपता।

प्रश्न 4.
‘इक’ प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए।
(1) संस्कृत
(2) संसार
(3) समाज
(4) प्रकृति
(5) धर्म।
उत्तर

  1. संस्कृत + इक = सांस्कृतिक
  2. संसार + इक = सांसारिक
  3. समाज+इक = सामाजिक
  4. प्रकृति + इक = प्राकृतिक
  5. धर्म + इक = धार्मिक

प्रश्न 5.
नीचे लिखे शब्दों में तत्सम एवं तद्भव शब्द पहचान कर लिखिए
रात, पितृ, बहन, नाच, बानर, रस्सी, पिता, भगिनी, नृत्य, बंदर, चाँद, रज्जु, चन्द्रमा, रात्रि। तत्सम
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 14 नारियल का बगीचा-केरल 1

प्रश्न 6.
दिए गए सर्वनाम से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(मेरी, वह, मुझे, मैं, मैंने।)
(क) ………….. उन सज्जन की मदद की।
(ख)……………. अपनी जगह से उठा।
(ग)…………..उन पर दया आ गई।
(घ) आप …………… जगह पर बैठिए।
(ङ) खिड़की पर खड़ा………….. नवयुवक हमारी बातें सुन रहा था।
उत्तर
(क) मैंने
(ख) मैं
(ग) मुझे
(घ) मेरी
(ङ) वह।

नारियल का बगीचा-केरल परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) हमारा केरल भारत का नन्दनवन है। आप देखेंगे कि उसका प्राकृतिक सौन्दर्य कश्मीर से जरा भी कम नहीं। आदि शंकराचार्य का जन्म केरल में हुआ। इसलिए उस प्रदेश का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व भी है।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषाभारती’ के पाठ ‘नारियल का बगीचा केरल’ पाठ से ली गई हैं। यह पाठ संकलित है।

प्रसंग-इन पंक्तियों में केरल के विषय में जानकारी दी गई है।

व्याख्या-लेखक का सहयात्री केरल का ही निवासी है। उसने बताया कि केरल बहुत सुन्दर प्रदेश है। अपनी प्राकृतिक सुन्दरता से उसे भारत का नन्दनवन कहा जाता है। उसकी प्राकृतिक सुन्दरता इतनी प्रभावकारी है कि धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला | कश्मीर भी उससे कम पड़ सकता है। केरल वह प्रान्त है जहाँ आदि शंकराचार्य ने जन्म लिया था। उन्होंने भारतीय धर्म और संस्कृति को महान् बनाया, इसलिए इस प्रदेश का धर्म के क्षेत्र में बहुत बड़ा महत्व है। धर्म और संस्कृति को विकसित करने में इस प्रदेश की भूमिका अति महत्वपूर्ण है।

(2) हमारे जंगलों में शेर, भेड़िया, रीछ, चीता आदि पशु बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। हाथी भी खूब मिलते हैं। असम की ही तरह उनका उपयोग हमारे यहाँ लकड़ियों को होने तथा सवारी करने में होता है। असम की ही तरह हमारे यहाँ नीलगिरी पर्वत पर चाय के बगीचे हैं। इसके अलावा कालीमिर्च, इलायची, सुपारी तथा नागरवेल भी यहाँ बड़ी मात्रा में पैदा होते हैं।”

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-केरल के जंगलों में पाये जाने वाले पशुओं के विषय में बताया गया है तथा उनका उपयोग क्या है, इसे बताते हुए वहाँ की प्रमुख उपजों के बारे में जानकारी दी है।

व्याख्या-केरल के वनों में पाये जाने वाले जंगली पशुओं में शेर, भेड़िया, रीछ, चीता आदि बड़ी संख्या में हैं। वहाँ जंगलों में हाथी भी बड़ी संख्या में मिलते हैं। इन हाथियों को लोग पालते भी हैं। इनसे लकड़ियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ढोकर ले जाने का काम लिया जाता है। इसके अतिरिक्त इन हाथियों पर सवारी भी करते हैं। जिस तरह असम में हाथियों से लकड़ी ढोने का काम और सवारी करने का काम लिया जाता है, उसी तरह यहाँ भी इन हाथियों का दुलाई और सवारी के मतलब से अधिक महत्व है। नीलगिरि पर्वत की ढलानों वाली भूमि पर असम की तरह ही चाय की खेती की जाती है। चाय के बड़े क्षेत्रफल में बगीचे हैं। इसके अलावा केरल में कालीमिर्च, इलायची, सुपारी तथा नागरवेल को उगाया जाता है। इनको मसाले व औषधियों के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।

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(3) केरल में समुद्री किनारों, झीलों, नदियों तथा नहरों के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान पर नावों से यात्रा की जाती है और यह सरल तथा सुगम भी होती है। वैसे हमारी राजधानी त्रिवेंद्रम से उत्तर की ओर एक रेलमार्ग जाता है लेकिन हमारे यहाँ रेल बहुत नहीं हैं। हाँ, पक्की सड़कें हैं।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-केरल में यात्रा के साधनों के बारे में बताया जा रहा है।

व्याख्या-केरल समुद्री किनारों से घिरा है, यहाँ झीलें और नदियाँ बहुत हैं। इन नदियों से नहरें निकाली गई हैं। अत: समुद्री किनारों, झीलों, नदियों और नहरों की संख्या बहुत है। इसलिए इनमें नावें चलाकर यात्रा की जाती है। इसलिए यात्रा करने का खर्च भी कम आता है। यह यात्रा बहुत सरल और आसान होती है। केरल की राजधानी त्रिवेन्द्रम है। त्रिवेन्द्रम से उत्तर की ओर आने वाला मात्र एक ही रेलमार्ग है। केरल में रेल बहुत कम हैं। वहाँ सड़क मार्ग हैं। सड़कें साफ-सुथरी और पक्की हैं।

(4) ओणम हमारा मुख्य त्योहार है। इस त्योहार पर घरों को सजाया जाता है। नौका और लक्ष्मी की पूजा की जाती है। तरह-तरह की मिठाइयाँ बनाई जाती हैं। इस त्योहार पर नौका प्रतियोगिता होती है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-केरल के त्योहार और खेल आदि के विषय में बताया गया है।

व्याख्या-केरल में त्योहार भी मनाए जाते हैं। उनमें ओणम’ त्योहार मुख्य है। इस त्योहार के आने से पहले घरों की सफाई की जाती है। उन्हें सजाया जाता है। इस दिन नौका और लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा की जाती है। सच पूछा जाये तो नाव ही उनकी जीविका का मुख्य साधन है। अनेक तरह की मिठाइयाँ बनाई जाती हैं। नौकाओं (नावों) की प्रतियोगिता (मुकाबला परीक्षा) होती है। जो भी नाविक अच्छा नाविक सिद्ध होता है, उसे पुरस्कृत किया जाता है।

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भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 7 हम बीमार ही क्यों हों? प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 7 Ham Bimar hi kyon Ho Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 7 Ham Bimar hi kyon Ho Questions and Answers

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 7 प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) हमारा शरीर तत्वों से मिलकर बना है
(i) एक
(ii) तीन
(iii) चार
(iv) पाँच।
उत्तर
(iv) पाँच

(ख) चमड़ी के एक-एक छिद्र में है
(i) आकाश
(ii) पाताल
(iii) जल
(iv) वायु।
उत्तर
(i) आकाश

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(ग) हम जितना भोजन करते हैं, जल पीते हैं, उसकी
तुलना में वायु ग्रहण करते हैं
(i) चार गुना
(ii) पाँच गुना,
(iii) सात गुना
(iv) छह गुना।
उत्तर
(iii) सात गुना

(घ) सूर्य नमस्कार करने से शरीर में अधिक मात्रा में होते हैं-
उत्पन्न
(i) लाल रक्त कण
(ii) श्वेत रक्त कण,
(iii) सूक्ष्म अवयव
(iv) क्षार पदार्थ।
उत्तर
(i) लाल रक्त कण।

MP Board Class 6 Hindi Chapter 7 प्रश्न 2.
निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) हमारे शरीर के ………….” भाग में केवल जल है।
(ख) भोजन के …………. घण्टे पूर्व तथा ……” घण्टे बाद पानी पीना अच्छी आदत है।
(ग) सूर्य केवल प्रकाश और ताप ही नहीं देता बल्कि …………….” और लम्बी उम्र भी प्रदान करता है।
उत्तर
(क) वजन के 100 भागों में 70
(ख) एक, दो
(ग) बुद्धि।

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MP Board Class 6th Hindi Chapter 7 प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) पाँच तत्वों के नाम लिखिए।
उत्तर
पाँच तत्व हैं

  1. आकाश
  2. वायु,
  3. अग्नि
  4. जल, एवं
  5. पृथ्वी।

(ख) ‘आरोग्य सम्राट्’ किस तत्व को कहा गया है?
उत्तर
आकाश तत्व को ‘आरोग्य सम्राट्’ कहा गया है।

(ग) हमें कैसा भोजन करना चाहिए?
उत्तर
हमें सन्तुलित, प्राकृतिक आहार लेना चाहिए जिसमें गेहूँ, दाल, घी, तेल आदि का एक हिस्सा एवं चार हिस्सा दूध, फल और हरी सब्जियाँ लेना आवश्यक है।

(घ) स्वस्थ रहने के लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए?
उत्तर
स्वस्थ रहने के लिए हमें-आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी तत्वों की सन्तुलित मात्रा शरीर में रखनी चाहिए। सन्तुलित प्राकृतिक आहार लिया जाना चाहिए। इस तरह रोग पास नहीं आयेगा।

Class 6 Hindi Chapter 7 MP Board प्रश्न 4.
तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) जल को जीवन कहा गया है। क्यों ?
उत्तर
जल को जीवन और अमृत भी कहते हैं। जीवन के लिए जल तत्व अत्यन्त आवश्यक है। यह वास्तव में प्राणियों का प्राण है। शरीर के वजन के 100 भागों में 70 भाग  केवल जल है। जल के योग से शरीर के छोटे से छोटे अंगों का पोषण होता है। जल ही पसीने के रूप में, फेफड़ों से वाष्प के रूप में और पेट से मल-मूत्र के रूप में शरीर की गन्दगी को बाहर निकालता है। जल से पाचन क्रिया ठीक रहती है। इस प्रकार जल है तो जीवन है।

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(ख) सन्तुलित आहार किसे कहते हैं ? यह क्यों आवश्यक है?
उत्तर
शरीर के स्वस्थ रखने के लिए हमें सन्तुलित आहार लेना चाहिए। सन्तुलित आहार में एक हिस्सा गेहूँ, दाल, घी, तेल आदि होना चाहिए और इसके अतिरिक्त चार हिस्सा दूध, फल, हरी सब्जियाँ आदि का होना अनिवार्य है। साथ ही उस आहार में प्राकृतिक रूप से सन्तुलन बना रहना चाहिए। सन्तुलित आहार में पृथ्वी तत्व का सामंजस्य अनिवार्य है। भोजन में शामिल सभी वस्तुएँ जो खाने और पीने योग्य हैं, वे सभी पृथ्वी तत्व से संयुक्त होती हैं। इस तरह सन्तुलित आहार के उपयोग से आरोग्य लाभ प्राप्त हो सकता है।

(ग) “सूर्य के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा | सकती” सिद्ध कीजिए।
उत्तर
सूर्य से हमें प्रकाश और ताप मिलता है। इससे – हमें बुद्धि और लम्बी आयु का वरदान भी मिलता है। सूर्य की प्रात:कालीन किरणों से हमें विटामिन ‘डी’ मिलता है जिससे लाल रक्त कण उत्पन्न होते हैं, जिससे हमारी जीवन शक्ति बढ़ती है। सूर्य से प्राप्त गर्मी से पृथ्वी तत्व-अन्न, फल, जल, सब्जियाँ आदि की प्राप्ति होती है, जिससे हमारा जीवन विकसित होता है। सूर्य को देवता के रूप में हम पूजते हैं। सूर्य से जीवन संरक्षित होता है। सूर्य जीवन का देवता है। रोम, यूनान, मिस्र आदि देशों में सूर्य को देवता माना जाता है।

(घ) पृथ्वी को माँ क्यों कहा गया है?
उत्तर
पृथ्वी हमारी माँ है। हम पृथ्वी पर ही जन्म लेते हैं, वह हमें धारण करती है। उससे उत्पन्न तत्वों-अन्न, जल, दूध, फल, हरी सब्जियाँ, मक्खन, शहद आदि से हमारा पोषण होता है। हमें सन्तुलित आहार मिलता है। पृथ्वी के बिना हमारा अस्तित्व नहीं है। सन्तुलित और प्राकृतिक आहार पृथ्वी की देन है, अत: पृथ्वी हमारी माँ है। पृथ्वी ही जन्म देने वाली, पोषण करने वाली और अन्त में अपनी ही गोद में विश्राम देने वाली है, अत: माता पृथ्वी पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ सत्य है।

Class 6 Bhasha Bharti Chapter 7 प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) पृथ्वी पर जल की मात्रा बिल्कुल कम हो जाए तो क्या होगा?
उत्तर
जल वह तत्व है जिसकी कमी से प्राणियों का जीवन असम्भव हो जाएगा। जल अमृत है। जल ही प्राण है। हमारे शरीर के वजन के 100 भागों में 70 भाग केवल जल है। जल हमारे भोजन का अनिवार्य तत्व है। इसके सहयोग से खून शरीर के अति सूक्ष्म अवयवों का पोषण करता है। जल ही शरीर की गन्दगी बाहर फेंक निकालता है। शरीर का निरोग बने रहना शुद्ध जल की प्राप्ति से सम्भव है।

(ख) आपको सब्जियाँ न मिलें तो सन्तुलित आहार की पूर्ति कैसे करोगे?
उत्तर
सब्जियों के न मिलने पर सन्तुलित आहार की पूर्ति में फल, दूध और जल की मात्रा बढ़ा देंगे। साथ ही सूर्योदय से पहले खुले मैदान में स्वच्छ वायु सेवन के लिए निकलेंगे जिससे अन्य आवश्यक विटामिनों की पूर्ति हो सके।

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(ग) शरीर में जल की मात्रा कम हो जाए तो इसकी पूर्ति हेतु आप क्या करेंगे?
उत्तर
शरीर में जल की मात्रा कम हो जाने पर इसकी पूर्ति के लिए ठण्डे जल से स्नान करेंगे। रसदार फलों और सब्जियों का उपयोग बढ़ा देंगे। इस तरह धीरे-धीरे जल की मात्रा की कमी पूरी हो सकती है।

Hindi Class 6 Chapter 7 प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना

(क) यदि आपको पृथ्वी के अतिरिक्त अन्य ग्रह पर जाना पड़े तो आप अपने साथ क्या-क्या ले जाना चाहेंगे और क्यों
उत्तर
अन्य ग्रह पर जाने की स्थिति में अपने साथ वे सभी वस्तुएँ ले जाना चाहेंगे जिनसे हमें जल, वायु तथा खाद्य वस्तुएँ आदि जिनसे हमारे जीवन को बनाए रखने में सहायता मिल सके।

(ख) यदि पाँच भौतिक तत्वों में से आपको कोई दो तत्व लेने को कहा जाए तो आप कौन-से दो तत्वों का चयन करेंगे और क्यों ?
उत्तर
पाँच तत्वों में से हम जल और पृथ्वी तत्व को लेना चाहेंगे, क्योंकि पृथ्वी तत्व से अन्न, फल, दूध एवं सब्जियाँ अपने आप ही प्राप्त हो जायेंगी। जीवन की प्रक्रिया चल सकेगी तथा जल तत्व उसे सहारा देगा।

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भाषा की बात

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 6 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिएसन्तुलित, बुद्धिमत्ता, निर्दोष, स्वास्थ्य, प्रदत्त।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से अपनी कक्षा में शुद्ध उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।

Class 6th Hindi Chapter 7 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित की वर्तनी शुद्ध कीजिए.
सूरक्षा, वायूमडल, सासं, निमल, भक्ती।
उत्तर
सुरक्षा, वायुमंडल, सांस, निर्मल, भक्ति।

Class 6 Hindi Chapter 7 प्रश्न 3.
उदाहरण के अनुसार प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए
उदाहरण- बनना + आवट = बनावट। लिखना + आई = लिखाई।
(i) लिखना + आवट
(ii) सजना + आवट
(iii) दिखना + आई
(iv) सिलना + आई।
उत्तर-
(i) लिखावट
(ii) सजावट
(iii) दिखाई
(iv) सिलाई।

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Class 6 Chapter 7 Hindi प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए
(1) आकाश, (2) सूर्य, (3) पृथ्वी, (4) अग्नि, (5) नदी।
उत्तर

  1. आकाश = नभ, व्योम, आसमान, शून्य।
  2. सूर्य = सूरज, भानु, भास्कर, रवि।।
  3. पृथ्वी = धरती, वसन्धुरा, वसुधा, भूमि।
  4. अग्नि = आग, अनल, ज्वाला, पावक।
  5. नदी = सरिता, तटिनी, तरंगिणी, नद।

Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 7 प्रश्न 5.
विलोम शब्दों की सही जोड़ी बनाइए
(i) लाभ – (क) अशुद्ध
(ii) स्वस्थ – (ख) विषम
(iii) शुद्ध – (ग) नीचे
(iv) सम – (घ) अप्रसन्न
(v) ऊपर – (ङ) हानि
(vi) प्रसन्न – (च) अस्वस्थ
उत्तर
(i)→(ङ), (ii)→ (च), (iii)→ (क), (iv)→ (ख),(v)→ (ग),(vi)→ (घ)

Class 6 Hindi Chapter 7 Question Answer प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(1) प्राचीन, (2) भोजन, (3) संयम, (4) सदाचार, (5) पवित्र।
उत्तर

  1. प्राचीन-भारतीय सभ्यता बहुत प्राचीन है।
  2. भोजन-भोजन में सभी अनिवार्य तत्व होने चाहिए।
  3. संयम-संयमपूर्ण जीवन सुखमय होता है।
  4. सदाचार-सदाचार से शरीर स्वस्थ रहता है।
  5. पवित्र-गंगा का जल पवित्र होता है।

परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

(1) टहलने के लिए बस्ती से दूर कोई ऐसा साफ-सुथरा पथ चुनना चाहिए जो प्रकृति के साम्राज्य से होकर गुजरता हो। टहलने के अतिरिक्त आसन, प्राणायाम, तैराकी एवं अन्य कसरतों के माध्यम से हम अपने शरीर को वायु तत्व प्रदान कर सकते हैं।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा भारती’ के पाठ ‘हम बीमार ही क्यों हों ?’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस पाठ के लेखक डॉ. आनन्द हैं।

प्रसंग-लेखक टहलने और व्यायाम करने की सलाह देता है, जिससे हम अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं।

व्याख्या-अपने स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए टहलना आवश्यक है लेकिन हमें घूमने-फिरने के लिए ऐसे स्थान को चुनना चाहिए, जो स्वच्छ हो। हमें ऐसे मार्ग से टहलने निकलना चाहिए जहाँ किसी तरह की गन्दगी न हो, साथ ही प्राकृतिक रूप से खुला और स्वच्छ वातावरण हो। चारों ओर कुदरत की सुन्दरता और सफाई हो। टहलने के अलावा हमें प्रतिदिन प्राणायाम, तैरना तथा दूसरी तरह की कसरतें भी खुले प्राकृतिक परिवेश में करनी चाहिए। इससे हमें खुली शुद्ध वायु प्राप्त होती है और हमारा शरीर इस तरह स्वस्थ बना रह सकता है।

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(2) सूर्य केवल प्रकाश और ताप ही नहीं देता है, बल्कि वह बुद्धि और लम्बी उम्र भी प्रदान करता है। सूर्य के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। भारत ही क्यों, रोम, यूनान, मिस्त्र सभी जगह सूर्य को देवता माना गया है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-लेखक का मानना है कि सूर्य से केवल उजाला ही नहीं, हमें बुद्धि तथा लम्बी उम्र भी मिलती है।

व्याख्या-लेखक का मत है कि सूर्य से हमें प्रतिदिन उजाला और गर्मी मिलती है। इसके अतिरिक्त सूर्य हमें बुद्धि और दीर्घ आयु भी प्रदान करता है। यदि सूर्य न होता, तो निश्चय ही पृथ्वी पर जीवन असम्भव होता। सूर्य को देवता रूप में हम पूजते हैं। भारत में ही नहीं, रोम में, यूनान में तथा मिस्त्र आदि देशों में सूर्य को देवता माना जाता है। उसे जीवन देने वाला देवता कहा जाता है।

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(3) हम भला पृथ्वी के बिना कैसे रह सकते हैं? जो कुछ हम खाते-पीते हैं या आहार के रूप में लेते हैं, वे सभी वस्तुएँ हमें पृथ्वी से ही प्राप्त होती हैं। सन्तुलित प्राकृतिक आहार जीवन का सबसे बड़ा वरदान है। दूध, फल, अंकुरित अन्न, हरी सब्जियाँ, मक्खन,शहद आदि वस्तुएँ भोजन में समुचित मात्रा में होंगी तो पृथ्वी तत्व सन्तुलित बना रहेगा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-पृथ्वी का महत्व बतलाते हुए लेखक बता देना चाहता है कि पृथ्वी ने हमें प्राकृतिक रूप से वे सभी वस्तुएँ प्रदान की है जिनसे हम अपने शरीर को पूर्ण स्वस्थ रख सकते हैं।

व्याख्या-धरती के बिना हमारा जीवन सम्भव नहीं है। पृथ्वी ही हमें वह सब देती है, जिसका उपयोग हम अपने शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए करते हैं। खाने-पीने के लिए जो हम आहार रूप में ग्रहण करते हैं, वह सब पृथ्वी द्वारा दिया जाता है। जीवन का सबसे बड़ा वरदान आहार है जिसमें कुदरत का सन्तुलन समाया हुआ है। हम जो भी अन्न रूप में, हरी सब्जियों के रूप में, मक्खन एवं शहद के रूप में प्राप्त करते हैं, उन सभी का उपयोग भोजन के रूप में उचित मात्रा में करते हैं, वह पृथ्वी माता का वरदान है। इन सभी के रूप में उन सभी की उचित मात्रा को ग्रहण करते रहने से हम स्वस्थ बने रहेंगे। यह सब सन्तुलित और कुदरती रूप में भोग किया जाना चाहिए। ये सभी पदार्थ पृथ्वी तत्व हैं क्योंकि ये सभी पृथ्वी से मिलते हैं।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 13 बसन्त प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 13 Basant Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 13 Basant Questions and Answers

Bhasha Bharti Class 5 Chapter 13 Question Answer प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) बसन्त का घर उजाड़ दिया
(i) वृक्ष काटकर
(ii) वृक्ष लगाकर,
(iii) सड़क बनाकर
(iv) पहाड़ काटकर।
उत्तर
(i) वृक्ष काटकर

(ख) बसन्त में झूले डाले जाते हैं
(i) गेंदा पर
(ii) अमुआ पर,
(iii) बेरी पर
(iv) चम्पा पर।
उत्तर
(ii) अमुआ पर

(ग) बसन्त के स्वागत में गीत गाती है
(i) कोयल
(ii) मोरनी,
(iii) चिड़िया
(iv) गौरेया।
उत्तर
(i) कोयल

(घ) हरे-भरे पेड़ कटने से अब पहले की तरह नहीं आता
(i) शिशिर
(ii) हेमन्त
(iii) ग्रीष्म,
(iv) बसन्त।
उत्तर
(iv) बसन्त

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Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 13 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) बसन्त आने पर …………… आती थी।
(ख) कवि ने जंगल को ………. कहा है।
(ग) पत्तों के झुरमुट से …….. धुन आती थी।
(घ) बसन्त के ……….. में कोयल गीत गाती थी।
उत्तर
(क) हरियाली
(ख) जीवन
(ग) कुहू कुहू
(घ) स्वागत।

Class 6 Hindi Chapter 13 Question Answer प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) हरियाली कौन-सी ऋतु लाती है?
उत्तर
हरियाली बसन्त ऋतु लाती है।

(ख) बसन्त में कौन-कौन से फूल खिलते हैं?
उत्तर
बसन्त में चम्पा, चमेली और गेंदा के फूल खिलते हैं।

(ग) अब पहले की तरह बसन्त क्यों नहीं आता ?
उत्तर
अब पहले की तरह बसन्त इसलिए नहीं आता है क्योंकि लोगों ने हरे-भरे वृक्षों से परिपूर्ण जंगल काट दिए हैं।

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(घ) पूर्व की तरह बसन्त कब आएगा?
उत्तर
पूर्व की तरह बसन्त अब तभी आएगा जब बंजर बनी हुई धरती पर हरियाली भरे पेड़-पौधे लगेंगे। वनों की हरियाली ही जीवन देती है।

(ङ) बसन्त में क्या-क्या परिवर्तन दिखाई देने लगते हैं ?
उत्तर
बसन्त में चारों ओर का वातावरण खुशहाली का होता है, हरियाली छा जाती है, तरह-तरह के फूल खिल उठते हैं। आम पर बौर आ जाता है। उनकी डालियों में झूले पड़ जाते हैं। मोर-मोरनी नाचने लगते हैं। कोयल पत्तों के झुरमुट में कुहू कुहू की धुन में गीत गाती है। सुगन्ध युक्त हवा बहने लगती है।

Class 6 Hindi Chapter 13 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांशों का भाव स्पष्ट कीजिए

(i) बहती थी मस्त पवन, झूम उठे पागल मन,
मोर भी नाचा था, वन में मयूर संग।

(ii) बोला बसन्त फिर, अब कहाँ आऊँ मैं ? . कट गए वृक्ष सब, कहाँ ठहर जाऊँ मैं?
उत्तर
‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ शीर्षक में पद्यांश संख्या 1 व 3 की व्याख्या देखिए।

भाषा की बात

Bhasha Bharti Class 5 Chapter 13 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
उजाड़, आँगन, हरियाली, झुरमुट।
उत्तर
कक्षा में अपने अध्यापक के सहयोग से शुद्ध उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।

Class 6 Hindi Vasant Chapter 13 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से सही वर्तनी वाला शब्द चुनकर लिखिए

(क) चमिली, चमैली, चमेली।
(ख) मायूर, मयूर, मयुर।
(ग) जगंल, जगलं, जंगल।
(घ) उजाढ़, उजाड़, ऊजाड।
उत्तर
(क) चमेली
(ख) मयूर
(ग) जंगल
(घ) उजाड़।

Class 6 Hindi Lesson 13 Question Answer प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए

(i) फूल
(ii) मयूर
(iii) जंगल
(iv) पवन
(v) वृक्ष।
उत्तर
(i) फूल = पुष्प, कुसुम
(ii) मयूर = मोर, केकी
(ii) जंगल = वन, अरण्य
(iv) पवन = हवा, वायु, समीर
(v) वृक्ष = पेड़, पादप, विटप।

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Class 6th Hindi Chapter 13 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों में से अनुप्रास अलंकार वाली पंक्तियाँ छाँटकर लिखिए

(i) चम्पा चमेली संग
(ii) गेंदा भी फूले थे
(iii) कुहू-कुहू धुन आती थी।
(iv) कहाँ ठहर जाऊँ में।
(v) तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।
(vi) सन सिय सत्य असीस हमारी।
उत्तर
(i) चम्पा चमेली संग
(iii) कुहू कुहू धुन आती थी
(v) तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये
(vi) सुनु सिय सत्य असीस हमारी।

Class 6 Chapter 13 Hindi प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों में से विशेषण और विशेष्य छाँटकर लिखिए

(क) आज मस्त पवन बह रही है।
(ख) बगीचे में सुन्दर फूल खिले हुए हैं।
(ग) काली कोयल कुहू कुहू कर रही है।
उत्तर
(क) विशेषण-मस्त, विशेष्य-पवन।
(ख) विशेषण-सुन्दर, विशेष्य-फूल।
(ग) विशेषण-काली, विशेष्य-कोयल।

बसन्त सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) बसन्त तुम आते थे
हरियाली लाते थे।
चम्पा चमेली संग
गेंदा भी फूले थे
अमुआ की डाली पर
डाले फिर झूले थे।
बहती थी मस्त पवन
झूम उठे पागल मन
मोर भी नाचा था
वन में मयूर संग।

शब्दार्थ-अमुआ = आम। पवन = हवा।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा-भारती’ की कविता ‘बसन्त’ से ली गई हैं। इस कविता की रचना ‘प्रमोद सोनी’ ने की है।

प्रसंग-बसन्त के आगमन पर चारों ओर सुन्दरता बिखर पड़ती है।

व्याख्या-कवि कहता है कि हे बसन्त ! जब तुम आते हो तब अपने साथ हरियाली लाते हो। बसन्त ऋतु में चम्पा, चमेली और गेंदा के फूल खिल रहे थे। आम के वृक्षों पर बौर आ गया है, भीनी गन्ध के मध्य झूले डाल दिए गए हैं। मतवाली हवा बहने लगी थी; उससे पागल हुआ मन भी झूम उठता था। वन में मोर भी मयूरी (मोरनी) के साथ नाचा करते थे।

(2) स्वागत में गीत कोई
कोयल भी गाती थी
पत्तों के झुरमुट से
कुहू कुहू धुन आती थी।
क्यों नहीं लगता अब
जैसे तुम आए हो
हरियाली मस्त पवन
संग नहीं लाए हो।

शब्दार्थ-मस्त = मतवाला बनाने वाला।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-अब बसन्त के आगमन पर पक्षियों द्वारा कोई भी गीत आदि नहीं गाये जाते हैं।

व्याख्या-कवि कहता है कि पहले बसन्त के आने पर उसके स्वागत में कोयल अपनी कुहू कुहू की ध्वनि में गीत गाया करती थी। पेड़ों के पत्तों के झुरमुट में छिपकर कोयल जो अपनी मीठी तान छेड़ती तो सब कुछ आनन्दमय हो जाता था। लेकिन अब तुम्हारे (बसन्त के) आगमन पर वैसा नहीं लगता। हे बसन्त! तुम अब अपने साथ कोई वैसी हरियाली, मतवाला बना देने वाली हवा को भी नहीं लाते हो। इसलिए अब ऐसा क्यों नहीं लगता कि बसन्त आ गया है।

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(3) बोला बसन्त फिर
अब कहाँ आऊँ मैं?
कट गए वृक्ष सब
कहाँ ठहर जाऊँ मैं ?
हरे भरे जंगल सब
तुमने तो काट दिए
घर मेरा उजाड़ कर
अपनों में बाँट दिए।

शब्दार्थ-उजाड़कर = बरबाद करके। सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-‘बसन्त’ आ गया है, ऐसा क्यों नहीं लगता ? इस प्रश्न का उत्तर बसन्त देता है।

व्याख्या-बसन्त ने उत्तर देते हुए कहा कि मैं कहाँ पर आऊँ, क्योंकि मेरे ठहरने के स्थान हरे-भरे पेड़-पौधे थे, उन सबको तुमने काट दिया है। बताओ तो मैं अब कहाँ ठहरूँ? हरियाली से परिपूर्ण जंगलों को तुमने काट दिया है। हरे-भरे वन ही मेरे निवास स्थान थे, उन्हें ही काटकर मेरा घर बरबाद कर दिया है। हे मनुष्यो। तुमने ही हरे-भरे वनों को काट कर अपनों में आपस में बाँट लिया है। मेरे लिए तो रहने का स्थान छोड़ा ही नहीं है।

(4) दुखी है मेरा मन
कुछ तो दुख बाँटो
जंगल ही जीवन है
जंगल को मत काटो।
मेरे घर आँगन को फिर से बसाओगे
बंजर इस धरती पर
हरियाली लाओगे।
अब तो मैं आऊँगा
वृक्ष जब लगाओगे।

शब्दार्थ-बंजर = ऊसर; वह भूमि जिसमें कोई भी बीज अंकुरित नहीं होता है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-दुःखी मन वाला बसन्त अपने आगमन की शर्त बताता है कि इस धरती को हरे-भरे पेड़-पौधों से युक्त कीजिए, मैं अवश्य ही समय से आऊँगा।।

व्याख्या-बसन्त कहता है कि मेरे मन के अन्दर व्याप्त दु:ख को, हे मनुष्यो ! आप सभी बाँट लीजिए। यह मेरा दुःख तभी जा सकेगा, जब आप जंगलों को नहीं काटोगे। जंगलों की वृद्धि कीजिए। जंगल हैं तो जीवन सुरक्षित है। पेड़-पौधे लगाकर मेरे घर-आँगन को हरियाली से सम्पन्न कर दीजिए। यह हरियाली ही मेरा निवास है, घर है। यह धरती जिसे पेड़-पौधों को काटकर बंजर बना दिया है। उसे हरियाली से सम्पन्न बनाइए। बसन्त का आगमन तो तभी हो सकेगा जब वृक्षों का रोपण किया जाएगा।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 9 पद और दोहे प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 9 Pad Aur Dohe Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 9 Pad Aur Dohe Questions and Answers

Class 6 Hindi Chapter 9 MP Board प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) मीरा ने आँसुओं के जल से सींचकर बोई है
(i) प्रेम की बेल
(ii) मोती की बेल,
(iii) मूंगे की बेल
(iv) फूल की बेल।
उत्तर
(i) प्रेम की बेल

(ख) भूखे को भीख देने की बात कही है
(i) रहीम ने
(ii) कबीर ने,
(iii) मीरा ने
(iv) कमाल ने।
उत्तर
(ii) कबीर ने

(ग) जहाँ काम आवे सुई, कहा करै
(i) त्रिशूल
(ii) फूल
(iii) तलवारि
(iv) सम्पत्ति
उत्तर
(iii) तलवारि

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Bhasha Bharti Class 6 Chapter 9 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) छौड़ दई कुल की ………… कहा करै कोई।
(ख) घृत-घृत सब काढ़ि लियो …………….. पियो कोई।
(ग) कर ….. की बंदगी भूखे को दै भीख।
(घ) जो रहीम उत्तम ……….. का करि सकत कुसंग।
उत्तर
(क) कानि
(ख) छाछ
(ग) साहब
(घ) प्रकृति।

MP Board Class 6th Hindi Chapter 9 प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) मीराबाई ने श्रीकृष्ण की किस रूप में उपासना की है?
उत्तर
मीराबाई ने श्रीकृष्ण की पति रूप में उपासना की है।

(ख) कबीर ने किन दो बातों की सीख दी है?
उत्तर
कबीर ने साहब (ईश्वर) की वन्दना करने और भूखे को भीख (भिक्षा) देने की सीख दी है।

(ग) कल का काम आज ही क्यों कर लेना चाहिए?
उत्तर
कल का काम आज ही कर लेना चाहिए, क्योंकि क्षण भर में ही मृत्यु हो सकती है। मृत्यु हो जाने पर काम न किया हुआ ही रह जाएगा।

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(घ) रहीम ने उत्तम प्रकृति का महत्व किस उदाहरण से स्पष्ट किया है ?
उत्तर
रहीम ने उत्तम प्रकृति का महत्व यह उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया है कि शीतलता देने वाले चन्दन के वृक्ष पर अनेक सर्प लिपटे रहते हैं, फिर भी उस पर साँपों के जहर का प्रभाव नहीं होता है।

(ङ) सच्चे मित्र की क्या पहचान है ?
उत्तर
सच्चे मित्र की यह पहचान है कि वह अपने मित्र का साथ विपत्ति काल में भी नहीं छोड़ता। विपरीत परिस्थितियों में भी वह साथ देता है।

MP Board Class 6 Hindi Chapter 9 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांशों के भाव स्पष्ट कीजिए

(क) भगत देखि राजी भई, जगत देखि रोई।
दासी ‘मीरा’ लाल गिरधर, तारो अब मोही॥

(ख) कबिरा सोई पीर है, जो जाने पर पौर।
जो पर पोर न जानई, सो काफिर बेपीर ।

(ग) एक साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहि सीचिवो, फूलै फलै अघाय।
उत्तर
‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 1, 2, व 3 की व्याख्या देखें।

भाषा की बात

Class 6 Hindi Chapter 9 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
भ्रात, धृत, प्रकृति, सम्पत्ति, भुजंग, व्याप्त।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से शुद्ध उच्चारण करना सीखें और अभ्यास करें।

Class 6 Hindi Lesson 9 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के मानक रूप लिखिएअंसुअन, भगत, जाके, तिरसूल, परलै, अब्ब, कब्ब, विपति।
उत्तर
अश्रुओं, भक्त, जिसके, त्रिशूल, प्रलय, अब, कब, विपत्ति।

6th Class Hindi Chapter 9 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के सामने उनके पर्याय लिखे हैं। इनमें एक शब्द पर्यायवाची शब्द नहीं है, उसे चुनकर लिखिए
(क) देवता = सुर, असुर, देव।
(ख) पति = प्राणनाथ, कंत, तनय।
(ग) अभिलाषा = लोभ, इच्छा, चाह।
(घ) सज्जन सभ्य, शिष्ट, अशिष्ट। ।
(ङ) फूल = पुष्प, कुसुम, पुरुष।
उत्तर
(क) असुर
(ख) तनय
(ग) लोभ
(घ) अशिष्ट
(ङ) पुरुष

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Hindi Class 6 Chapter 9 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों में अनुप्रास अलंकार है। प्रत्येक पंक्ति में पहचान स्पष्ट कीजिए
(i) जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।
(ii) एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाए।
(iii) कहि रहीम सम्पत्ति सगै बनत बहुत बहुरीत।
(iv) जो पर पीर न जानई, सो काफिर बेपौर।
उत्तर-
(i) ‘मोर-मुकुट-मेरो’ शब्दों में ‘म’ वर्ण की कई बार आवृति होने पर अनुप्रास अलंकार है।
(ii) साधे, सब, सधै, सब, साधे, सब’ शब्दों में ‘स’ वर्ण की कई बार आवृति होने से अनुप्रास अलंकार है।
(ii) सम्पति, बनत, बहुत, रीत’ शब्दों में ‘त’ वर्ण की कई बार आवृति होने से अनुप्रास अलंकार है।
(iv) पर, पीर, काफिर, बेपीर’ शब्दों में ‘प’ और ‘र’ वर्ण की कई बार आवृति होने से अनुप्रास अलंकार है।

Class 6th Hindi Chapter 9 Question Answer प्रश्न 5.
तालिका में दिए गए शब्दों की सही जोड़ी बनाइएशब्द
विलोम – शब्द
(i) पण्डित – (क) घृणा
(ii) देव – (ख) दुःख
(iii) प्रेम – (ग) रात
(iv) सुख – (घ) थल
(v) जल – (ङ) दानव
(vi) दिन – (च) मूर्ख
उत्तर
(i)→ (च), (ii)→ (ङ), (iii) → (क), (iv)→ (ख),(v)→(घ), (vi)→ (ग)

Class 6 Hindi 9 Chapter प्रश्न 6.
उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाइए
(i) परा + जय
(ii) परा + भव
(iii) परा + क्रम
(iv) नि +रंजन
(v) नि+ वेश
(vi) नि+ दान।
उत्तर
(i) पराजय
(ii) पराभव
(iii) पराक्रम
(iv) निरंजन
(v) निवेश
(vi) निदान

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Soi Meri Chona Re Question Answer प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों में आवट और आहट प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए
(i) सजाना + आवट
(ii) बनाना + आवट
(iii) लिखना + आवट
(iv) मुस्कराना + आहट
(v) टकराना + आहट
(vi) चिल्लाना + आहट
(vii) घबराना + आहट
उत्तर
(i) सजावट
(ii) बनावट
(iii) लिखावट
(iv) मुस्कराहट
(v) टकराहट
(vi) चिल्लाहट
(vii) घबराहट।

पद और दोहे सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई॥
जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।
तात मात भ्रात बंधु, आपनों न कोई॥
छाँड़ि दई कुल की कानि, कहा करै कोई।
सन्तन डिंग बैठि-बैंठि लोक-लाज खोई॥
चूनरी के किये टूक, ओढ़ लीन्हीं लोई।
मोती मूंगे उतारि, वन-माला पोई।
अंसुअन जल सींच-सींच, प्रेम बेलि बोई।
अब तो बेलि फैल गई आनन्द फल होई॥
प्रेम की मथनियाँ बड़े, जतन से बिलोई।
घृत-घृत सब काढ़ि लियो, छाछ पियो कोई॥
भगत देखि राजी भई, जगत देखि रोई।
दासी ‘मीरा’ लाल गिरधर, तारो अब मोही।

शब्दार्थ-आपनों = अपना। छाँड़ दई = छेड़ दी। कुल = परिवार । कानि = इज्जत, कुल मर्यादा। हिंग=पास। खोई = मिटा दी। लाजशर्म, लज्जा। चूनरी=चूंदरी, चादर।  लोई = लोई नामक वस्त्र जिसे प्राय: त्यागी, साधु-सन्त ओढ़ते हैं। वन-माला = वन के फूल और पत्तियों की माला। पोई = पिरो कर। प्रेम बेलि-प्रेम की लता। होई = लग रहे हैं। मथनियाँ = मथानी, रई। बिलोई=दही मथने का काम किया। जतन से = प्रयत्न से। काढ़ि लियो = निकाल लिया। छछ = मट्ठा। पियो कोई = कोई भी पीता रहे। राजी भई = प्रसन्न हुई। जगत देखि रोई = संसार के बन्धनों को देखकर दु:खी होने लगी। तारो = उद्धार करो। मोही = मेरा, या मुझे।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद ‘पद और दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पद मीराबाई की रचना है।

प्रसंग-मीरा ने स्वयं को श्रीकृष्ण की भक्ति में लीम कर दिया है। वह चाहती है कि उसके इष्ट भगवान कृष्ण उसका भवसागर से उद्धार कर दें।

व्याख्या-मीराबाई कहती है कि मेरे प्रभु, तो गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले, गौ का पालन करने वाले श्रीकृष्ण हैं। उनके अतिरिक्त मेरा कोई अन्य प्रभु नहीं है। अपने सिर पर जो मोर-मुकुट धारण करते हैं, वही मेरे पति हैं। माता-पिता, भाई-बन्धु (सरो सम्बन्धी) अपने तो कोई भी नहीं हैं। मैंने कुल मर्यादा छोड़ दी है, मेरा कोई क्या कर सकेगा। साधु-सन्तों की संगति में बैठना शुरू कर दिया है, मैंने लोक-लाज भी खो दी है। प्रतिष्ठित घर की बहू जिस चादर को ओढ़ कर चलती है, उस चादर के मैंने दो टुकड़े कर दिए हैं, (फाड़ दी है)। लोई पहन ली है। मोती-मूंगे धारण करना छोड़ दिया है।

वन के फूलों की माला (सहज में प्राप्त फलों की माला) पिरो कर पहनने लगी हैं। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में आँसू बहाते हुए, उनके प्रति प्रेम की बेलि को बोया है और लगातार सचिा है। वह बाल अब फूलकर फैल चुकी है। उस पर अब तो आनन्द के फल लगने शुरू हो गए हैं। प्रेम की मथानी से प्रयत्नपूर्वक बिलोने पर (अमृत रूपी) सम्पर्ण घी निकाल लिया है।

शेष छाछ (मट्ठा) रह गया है, उसे कोई भी पीता रहे (संसार छोड़ा हुआ मट्ठा है-तत्वहीन पदार्थ है। जो उसे पीना चाहे वह पीता रहे।) में प्रभु भक्तों की संगति में आनन्दित हो रही हूँ। संसार को देखकर अत्यधिक दु:खी होती हूँ। मीराबाई वर्णन करती हैं कि मैं तो गिरधर लाल श्रीकृष्ण की दासी हूँ। हे प्रभो आप मेरा उद्धार कीजिए।

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(2) कबिरा कहै कमाल सौं, दो बातें लै सीख।
कर साहब की बन्दगी, भूखे को दें भीख॥1॥
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजां आपना, मुङ्गा सा बुरा न कोय॥2॥
कबिरा सोई पीर है, जो जाने पर पीर।
जो पर पीर न जानई, सो काफिर बेपीर ॥3॥
जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोव तू फूल।
तोहि फूल को फूल हैं, वाको है तिरसूल ॥4॥
काल्ह करें सो आज कर, आज कर सो अव्व।
पल में परलै होयगी, बहुरि करैगो कब्ध ॥5॥

शब्दार्थ-सीख = शिक्षा ग्रहण कर ले। बन्दगी = प्रार्थना, भक्ति। साहब= स्वामी, ईश्वर। भीख = भिक्षा। न मिलिया कोय = कोई नहीं मिला। खोजां = ढूँढ़ने पर। पर-पीर-दूसरे की पीड़ा। जानै = जानता है।
काफिर = विधर्मी। बेपीर = किसी की पीड़ा को न समझने वाला। तोको = तेरे लिए। बुवै = बोता है।
ताहि = उसको। तोहि = तेरे लिए। वाको = उसके लिए। तिरसूल = त्रिशूल (बड़े-बड़े काँट)। काल्ह = कल। अब्ब-अभी-अभी, इसी समय। परलै = प्रलय। बहुरि = फिर।

सन्दर्भ-प्रस्तुत दोहे ‘पद और दोहे’ नामक पाठ से लिए गए हैं। इनकी रचना कबीर ने की है।

प्रसंग-कबीर ने लोगों को सलाह दी है कि उन्हें देखना चाहिए कि समाज में कोई व्यक्ति दुःखी, भूखा या किसी भी तरह के कष्ट से पीड़ित तो नहीं है। यदि ऐसा है तो प्रत्येक को सहायता के लिए उठ खड़ा होना चाहिए।

व्याख्या-

  • कबीर अपने पुत्र कमाल को समझाते हुए कहते हैं कि तुम्हें दो बातों की शिक्षा ग्रहण कर लेनी चाहिए। पहली यह है कि तुम्हें ईश्वर की वन्दना करना सीख लेना चाहिए और दूसरी बात यह कि भूखे व्यक्ति को भिक्षा देनी चाहिए।
  • कबीर कहते हैं कि संसार में बुरे व्यक्ति की जाँच करने के लिए मैं निकला, तो मुझे कोई भी व्यक्ति बुरा नहीं मिला।
    परन्तु जब मैंने अपने हृदय में झाँका और देखा, तो मुझे यह बात ज्ञात हुई कि स्वयं मुझसे बढ़कर बुरा कोई अन्य व्यक्ति नहीं है।
  • कबीर कहते हैं कि वही सच्चा पीर (ईश का भक्त) है जो दूसरों के कष्ट को अच्छी तरह जानता है। जो दूसरों की पीड़ा को समझ नहीं सकता, वह निश्चय ही विधर्मी है, बेपीर है अर्थात् उसे किसी के भी प्रति किसी भी तरह की सहानुभूति नहीं है।
  • कबीर कहते हैं कि जो भी कोई व्यक्ति तुम्हारे लिए काँटा बोता है, अर्थात् तुम्हारे लिए किसी भी प्रकार की विपत्तियाँ
    (कष्ट) देता है, तो तुम्हें उसके बदले में फूल ही बोने चाहिए। प्रतिकार में काँट (कष्ट) नहीं बोना चाहिए, बाधाएँ नहीं डालनी चाहिए। क्योंकि अन्त में तुम्हारे लिए फूल ही फूल रहेंगे (अर्थात् किसी भी तरह का कष्ट नहीं होगा)। उसके लिए (काँटे बोने वाले के लिए) तो बड़े-बड़े (त्रिशूल जैसे) काँट ही पैदा होंगे।
  • कबीर ने अपना कार्य करने की सलाह देते हुए उपदेश दिया है कि जो काम कल किया जाना है, उसे आज ह और जो काम आज करना है, उसे अभी-अभी पूरा कीजिए क्योंकि, पल (क्षण) भर में ही प्रलय (मृत्यु) हो गई, तो फिर उस काम को कब कर सकोगे।

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(3) एक साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहि सींचिबो, फूलै फलै अघाय॥1॥
रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।
जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तरवारि॥2॥
रहिमन चुप है बैठिए, देखि दिनन के फेर।
जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहें बेर॥ 3 ॥
जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥4॥
कहि रहीम सम्पति सगे, बनत बहुत बहुरीत।
बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥5॥

शब्दार्थ-एकै साधे = एक की साधना करने पर। जाय = चला जाता, नष्ट हो जाता है। सीचिबो सींचने मात्र से। मूलहि = मूल में,जड़ में। अघाय-पूर्ण तृप्ति तक। बड़ेन-बड़े लोगों को। डारि = फेंकना। तरवारि = तलवार। दिनन के फेर बदले हुए समय को। नीके = अच्छे। बेर – देर। प्रकृति = स्वभाव। कुसंग- बुरी संगति। व्यापत = समा जाना। भुजंग = जहरीले साँप। सम्पति- सम्पत्ति काल में। बहु रीत- अनेक रीतियों से (किसी भी प्रकार से)। बिपति-कसौटि = विपत्ति जैसी कसौटी पर। कसे = कसने पर। जे कसे = जो कस दिए जाते हैं। ते ही = वे ही। साँचे मीत सच्चे मित्र।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक भाषा भारती’ के पाठ ‘पद और दोहे’ नामक पाठ से ली गई हैं। ये दोहे रहीम की रचना हैं।

प्रसंग-इन दोहों में रहीम ने सत्संगति, गुण ग्रहण करना तथा विषम स्थिति में मौन धारण करके रहने का उपदेश किया है।

व्याख्या

  • रहीम जी कहते हैं कि एक ईश्वर की साधना करने से सब कुछ प्राप्त करने में सफलता मिल जाती है। सब (ईश्वर और संसार) की साधना करने से सब कुछ मिट जाता है। इसलिए मूल (जड़) की सिंचाई करने से वृक्ष पर फूल-फल पूर्ण सन्तुष्ट करने के लिए लगना प्रारम्भ हो जाता है।
  • रहीम जी सलाह देते हैं कि बड़े लोगों को संगति पाकर छोटे आदमियों का अपमान कभी भी नहीं करना चाहिए। उदाहरण देते हुए कि जो काम (सिलाई आदि) छोटी सी सुई से किया जा सकता है, वही काम तलवार (बड़ी वस्तु) से नहीं किया जा सकता अर्थात् छोटे आदमी ही कभी-कभी महत्वपूर्ण होते हैं।
  • रहीम जी कहते हैं कि दिनों के परिवर्तन से (समय के बदल जाने पर-विपरीत समय पर) किसी भी कार्य की सिद्धि न हो सकने की दशा में शान्तिपूर्वक बैठ जाना चाहिए। (खराब समय में शान्ति से विचार करने लग जाना चाहिए, अधीर नहीं होना चाहिए, क्योंकि जब अच्छा समय आएगा, तो बात बनते (काम होने में) देर नहीं लगती।
  • रहीम जी कहते हैं कि जो व्यक्ति अच्छे स्वभाव का होता है, उसके ऊपर बुरी संगति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। देखिए चन्दन के वृक्ष पर अनेक सर्प लिपटे रहते हैं, लेकिन उस वृक्ष पर उन सपों के जहर का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता। चन्दन वृक्ष शीतलता और शीलवानपन का प्रतीक है।
  • रहीम जी कहते हैं कि सम्पत्ति काल में बहुत से लोग अनेक तरह से सगे-सम्बन्धी बनने लगते हैं। (परन्तु सच्चे मित्र सिद्ध नहीं होते)। सच्चे मित्र तो वही होते हैं जो विपत्ति रूपी कसौटी पर कसे जाने पर साथ रहते हैं। अर्थात् विपत्ति में जो साथ देते हैं, वे ही सच्चे मित्र होते हैं।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer