भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 12 डॉ. होमी जहाँगीर भाभा प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 12 Dr Homi Jehangir Bhabha Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 12 Dr Homi Jehangir Bhabha Questions and Answers

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) भाभा अणु-शक्ति संस्थान स्थित है
(i) चेन्नई में
(ii) ट्राम्बे में,
(iii) इंग्लैण्ड में,
(iv) जिनेवा में।
उत्तर
(ii) ट्राम्बे में,

(ख) डॉ. भाभा को पी-एच.डी की उपाधि मिली
(i) सन् 1941 में,
(ii) सन् 1947 में,
(iii) सन् 1951,
(iv) सन् 1966 में।
उत्तर
(i) सन् 1941 में।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) डॉ. भाभा के पिता का नाम …………था।
उत्तर
श्री जे०एस०भाभा

(ख) डॉ. भाभा …………… से संगीत सुनते थे।
उत्तर
ग्रामोफोन।

प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) भारत में अणुशक्ति का विकास किसने किया ?
उत्तर
भारत में अणु शक्ति का विकास प्रथम वैज्ञानिक डॉ. होमी जहाँगीर भाभा ने किया।

(ख) विज्ञान में रुचि के अलावा डॉ. भाभा की और कौन-कौन सी विशेषताएँ थीं?
उत्तर
डा० भाभा को गणित और भौतिक विज्ञान से अति प्रेम था, उन्होंने विद्युत एवं चुम्बक सम्बन्धी बातों के अतिरिक्त कॉस्मिक किरण की मौलिक खोजों पर भाषण दिए। उन्हें संगीत, नृत्य एवं चित्रकला से भी भारी लगाव था। वे पेड़-पौधों और बगीचों के बड़े शौकीन थे।

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(ग) डॉ. भाभा की एकमात्र इच्छा क्या थी?
उत्तर
डॉ. भाभा की एकमात्र इच्छा थी कि भारत को आने वाले वर्षों में आणविक शक्ति के कार्यों के लिए दूसरों का मुँह न ताकना पड़े।

(घ) चित्रकार ने डॉ. भाभा के बनाए चित्र को देखकर क्या कहा था?
उत्तर
चित्रकार ने डॉ. भाभा के बनाए चित्र को देखकर कहा था कि एक दिन यह बालक महान कलाकार बनेगा।

(ङ) अणुशक्ति के रचनात्मक प्रयोग के लिए कौन-सी संस्था स्थापित की गई ?
उत्तर
अणुशक्ति के रचनात्मक प्रयोग के लिए मुम्बई में सर दोराबजी-टाटा ट्रस्ट द्वारा “टाटा इन्स्टीट्यूट ऑफ फंडामेन्टल रिसर्च” नामक संस्था स्थापित की गई।

प्रश्न 4. तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) डॉ. भाभा को संगीत के प्रति लगाव कैसे उत्पन्न हुआ?
उत्तर
डॉ.भाभा को बचपन में नींद नहीं आती थी। वे प्रायः रोते रहते थे। इससे पिता को बड़ी चिन्ता लग गई। उन्होंने डॉक्टर की सलाह ली। उनकी सलाह पर डॉ. भाभा के सामने ग्रामोफोन बजाया जाने लगा। इससे उनका ध्यान बँट जाता और वे चुप हो जाते थे। फलतः उनको संगीत के प्रति लगाव हो गया।

(ख) अणुशक्ति के बारे में डॉ. भाभा के क्या विचार थे?
उत्तर
डॉ. भाभा अणुशक्ति से अणुबम बनाने के पक्ष में नहीं थे। अणुबम से लाखों लोगों की जान चली जाती है। इसलिए वे अणुशक्ति का प्रयोग शांतिपूर्ण एवं रचनात्मक कार्यों के लिए करना चाहते थे।

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(ग) डॉ. भाभा की शिक्षा कहाँ-कहाँ हुई ?
उत्तर
मुंबई विश्वविद्यालय से ई.एम.सी. की परीक्षा पास करके वे आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैण्ड चले गए। वहाँ इंजीनियरिंग की परीक्षा पास करके गणित और भौतिक विज्ञान की शिक्षा के लिए उन्होंने कैम्ब्रिज केयस कॉलेज में प्रवेश लिया। उसी मध्य उन्होंने यूरोप के विभिन्न देशों में जाकर विद्युत एवं चुम्बक तथा कॉस्मिक किरण की मौलिक खोज पर अपने भाषण दिए। उन्हें लन्दन की रॉयल सोसाइटी का फैलो चुना गया। पी-एच. डी. तथा डी.एस-सी की उपाधियाँ विभिन्न विश्वविद्यालयों से प्राप्त हुई।

(घ) डॉ. भाभा की मृत्यु कैसे हुई ?
उत्तर
24 जनवरी, 1966 को भारतीय विमान सेवा का ‘कंचनजंघा’ नामक जेट विमान मुम्बई से जिनेवा जा रहा था। इसी विमान से डॉ. भाभा भी यात्रा कर रहे थे। जिनेवा के पास एक बहुत ऊँचा पहाड़ है ‘माउन्ट ब्लॉक’ इस पहाड़ से वह विमान टकरा कर गिर गया। इस दुर्घटना में डॉ.भाभा की मृत्यु हो गई।

प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) अणुशक्ति का प्रयोग विकास के कार्यों में किस प्रकार हो सकता है ?
उत्तर
अणुशक्ति के प्रयोग से बिजली प्राप्त की जा सकती है। इंजन चलाए जा सकते हैं। कल-कारखानों की बड़ी-बड़ी मशीनें चलाई जा सकती हैं। उजाला किया जा सकता है। रेलगाड़ियाँ चलायी जा सकती हैं। खेती के लिए विद्युत से पानी खींचा जा सकता है। अणुशक्ति से अनेक रोगों के इलाज में सहायता मिल सकती है। लोगों के लिए अनेक वैज्ञानिक प्रयोगों में इससे ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। आवागमन, स्वच्छता, चिकित्सा आदि सम्बन्धी सुविधाएँ ली जा सकती हैं।

(ख) किसी कार्य से ध्यान बंटाने के लिए कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं?
उत्तर
ऐसे अनेक कार्य हैं जिनके द्वारा किसी काम से ध्यान हटाया जा सकता है, जैसे-

  1. संगीत सुनना
  2. चित्रकारी करना
  3. पेड़ पौधों की सिंचाई-गुड़ाई करना व कलात्मक क्रियाएँ करना
  4. शास्त्रीय और आधुनिक संगीत सीखना तथा
  5. प्राकृतिक रूप से आकर्षक स्थलों पर घूमना-फिरना।

(ग) विमान दुर्घटनाएँ किन-किन कारणों से हो सकती
उत्तर
विमान दुर्घटनाएँ प्रायः इंजन में खराबी होने से हो सकती, हैं। परन्तु कभी-कभी पर्वतीय क्षेत्रों के मध्य से या ऊपर से गुजरने पर उन स्थलों की बनावट व ऊँचाई का सही ज्ञान न होने पर दुर्घटना होती है। आकाश में उड़ते पक्षियों से टकराने से विमान असन्तुलित होकर गिर जाते हैं। इंजन में आग लग जाती है। पेट्रोल ट्रैक के अचानक फट जाने से भी दुर्घटना होती है। तेज तूफान आने पर कुहरा या धुंध छाये रहने से दृष्टिबाधित होने की स्थिति में विमान दुर्घटनाएं हो जाती हैं। रडार यंत्र की खराबी से विमान सम्पर्क टूट जाने पर विमान भटक कर टकरा जाते हैं और दुर्घटनाएं हो जाती हैं।

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प्रश्न 6.
अनुभव और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए

(क) यदि 15 वर्ष की आयु में ही डॉ. होमी जहाँगीर भाभा को यूरोप में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल जाता तो उनके व्यक्तित्व में क्या परिवर्तन होते ? .
उत्तर
यदि 15 वर्ष की आयु में ही डॉ. भाभा को यूरोप में शिक्षा के लिए भेज दिया जाता तो वे थोड़े समय में ही विज्ञान सम्बन्धी शिक्षा प्राप्त करके भारत लौट आते और अपनी प्रशंसनीय सेवाओं को देश को समर्पित करते। देश विविध क्षेत्रों में प्रगति करता और विश्व में अपने विकास से एक विशेष स्थान बना पाता।

(ख) यदि डॉ. भाभा का दुर्घटना में निधन नहीं होता तो अणुशक्ति के उनके शान्तिपूर्ण प्रयासों का विश्व पर क्या प्रभाव पड़ता?
उत्तर
यदि डॉ. भाभा का दुर्घटना में निधन नहीं होता तो उनकी अणुशक्ति के शान्तिपूर्ण प्रयासों का विश्व पर यह प्रभाव | पड़ता कि उस शक्ति का विनाशकारी रूप (बम) के निर्माण में प्रयोग नहीं किया जाता। देशों में अपनी सुरक्षा के नाम पर बनने वाले विध्वंसक यंत्र नहीं बनते। विश्व में पर्यावरणीय समस्या नहीं आती। पानी-हवा आदि स्वच्छ रहते। अनेक रोगों से मुक्ति मिलती। विश्व के देश अपेक्षाकृत विकसित होते, सुख और शान्ति होती। लोग समृद्ध, स्वस्थ और सुखी होते।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का उच्चारण कीजिएअन्तर्राष्ट्रीय, ट्रॉम्बे, अलंकृत, सौन्दर्यपूर्ण, इंस्टीट्यूट।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय के सहयोग से शुद्ध उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।

प्रश्न 2.
पाठ में आए शब्द-युग्मों को छाँटकर लिखिए।
उत्तर
अणु-शक्ति, पढ़े-लिखे, संगीत-प्रेमी।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए
(i) संसार
(ii) उपवन
(iii) दीप
(iv) मार्ग।
उत्तर
(i) संसार-जग, जगत, विश्व, दुनिया।
(ii) उपवन-बाग, बगीचा।
(iii) दीप-दीया, दीपक।
(iv) मार्ग-पथ, राह, रास्ता।

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प्रश्न 4.
दिए गए शब्दों में त्व, इत, ईय प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए
प्रभु, पशु, नारी, पुष्प, सम्मान, प्रभाव, दर्शन, राष्ट्र, भारत।
उत्तर

  1. प्रभु + त्व = प्रभुत्व, पशु + त्व = पशुत्व, नारी + त्व = नारीत्व।
  2. पुष्प + इत=पुष्पित, सम्मान + इत = सम्मानित, प्रभाव + इत = प्रभावित।
  3. दर्शन + ईय = दर्शनीय, राष्ट्र + ईय = राष्ट्रीय, भारत + ईय = भारतीय।

प्रश्न 5. उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाइए
उपसर्ग-अ, सु, दुर्।
शब्द-शुभ, ज्ञान, सभ्य, मार्ग, गंध, संस्कृत, जन, गति,
उत्तर

  1. अ+ शुभ-अशुभ, अ + ज्ञान = अज्ञान, अ + सभ्य = असभ्य।
  2. सु + मार्ग = सुमार्ग, सु + गंध = सुगंध, सु + संस्कृत = सुसंस्कृत।
  3. दुर् + जन् = दुर्जन, दुर् + गति = दुर्गति, दुर् + गुण = दुर्गुण।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए
(i) घर
(ii) खेत
(iii) लाज।
उत्तर
(i) घर = गृह
(ii) खेत = क्षेत्र
(iii) लाज = लज्जा।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(1) अणु-शक्ति
(2) संगीत-प्रेमी
(3) वैज्ञानिक
(4) सपूत।
उत्तर

  1. अणुशक्ति-डॉ. भाभा ने अणु-शक्ति का प्रयोग विकास और शान्ति के कार्यों के लिए उपयोग करने की सलाह दी।
  2. संगीत-प्रेमी-डॉ. भाभा बचपन से ही संगीत-प्रेमी थे।
  3. वैज्ञानिक-विश्व के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों द्वारा डॉ. भाभा को स्मरण किया जाता है।
  4. सपूत-डॉ. भाभा भारत माता के वह सपूत थे जिन्होंने सदैव चाहा कि अणुशक्ति का उपयोग केवल मानव कल्याण के लिए किया जाये।

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प्रश्न 8.
निम्नलिखित वाक्यों में से मुख्य क्रिया और सहायक क्रिया छाँटकर लिखिए
(क) गोपाल स्कूल जाता है।
(ख) वह पुस्तक पढ़ चुका है।
(ग) सौता पत्र लिख रही है।
(घ) राम स्कूल गया था।
उत्तर
(क) ‘जाना’ मुख्य क्रिया, ‘है’ सहायक क्रिया।
(ख) ‘पढ़ना’ मुख्य क्रिया, ‘है’ सहायक क्रिया।
(ग) “लिखना’ मुख्य क्रिया, ‘है’ सहायक क्रिया।
(घ) ‘जाना’ मुख्य क्रिया, था’ सहायक क्रिया।

डॉ. होमी जहाँगीर भाभा परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) डॉक्टर भाभा अणु-शक्ति से अणुबम बनाने के पक्ष में नहीं थे। अणुबम से लाखों लोगों की जान चली जाती है। इसलिए वे अणु-शक्ति का प्रयोग शांतिपूर्ण, रचनात्मक कार्यों के लिए करना चाहते थे।

सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा भारती’ के’डॉ. होमी जहाँगीर भाभा’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक डॉ. सुखदेव दुबे व अन्य लेखकगण हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में डॉ. भाभा की दूरदर्शिता का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-डॉ. होमी जहाँगीर भाभा अणु’ की शक्ति को पहचानते थे। साथ ही, वह यह भी जानते थे कि ‘अणुबम’ के रूप में इसकी ताकत का गलत उपयोग, मानव सभ्यता के लिए काफी खतरनाक होता है। अणुबम के विध्वंस से पलभर में हजारों-लाखों जिन्दगियाँ काल के गाल में समा जाती हैं। अत: वे अणु-शक्ति का सही उपयोग करके इस विलक्षण ‘ऊर्जा’ को मानव की सेवा में तथा शांतिपूर्ण एवं रचनात्मक कार्यों में लगाना चाहते थे।

(2) उनकी कलात्मक रुचि का परिणाम है कि दाम्बे के अणु-शक्ति संस्थान में बगीचे तथा पौधों की सजावट सौन्दर्यपूर्ण एवं कलापूर्ण दिखाई देती है। टाटा इंस्टीट्यूट की गैलरियों तथा कमरों में सजे चित्र एवं वहाँ के उपवन उनकी वैज्ञानिकता एवं कलात्मकता के सुन्दर संगम हैं।

संदर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में डॉ. भाभा की कलात्मकता एवं रुचियों का वर्णन किया है।

व्याख्या-डॉ. भाभा के अन्दर कला के प्रति रुझान था जिसका नतीजा यह है कि उन्होंने अणुशक्ति केन्द्र ट्राम्बे में एक बगीचा विकसित किया है। इस बगीचे कों अनेक पेड़-पौधों से सुन्दर बनाया है, उसकी सजावट में इन्हीं पौधों को विशेष महत्व है। यह सजावट अति कलापूर्ण है। टाटा इन्स्टीट्यट की गैलरियों और अन्य कमरों की सजावट भी चित्रों द्वारा की गई है। ये चित्र भी डॉ. भाभा की कलात्मक रुचि को प्रकट करते हैं। वहाँ के बगीचे और समीप वाले उपवनों के विकास में वैज्ञानिकता झलकती है और उनकी कला का अनोखा जोड़ है, मिश्रण है। इस तरह डॉ. भाभा की वैज्ञानिकता में उनकी कलात्मकता का योग बेजोड़

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(3) भारत के इस महान सपूत की स्मृति में ट्रॉम्बे के अणु-शक्ति केन्द्र का नाम बदलकर ‘भाभा अणु-शक्ति अनुसन्धान केन्द्र’ कर दिया गया। डॉ. भाभा आज भले ही हमारे बीच न हों परन्तु उन्होंने विज्ञान जगत को जो अमूल्य योगदान दिया है उससे भावी वैज्ञानिकों को सदा मार्गदर्शन मिलता रहेगा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-डॉ. भाभा के द्वारा विज्ञान जगत के लिए किए गए कार्यों का महत्व बताया गया है।

व्याख्या-डॉ. भाभा भारत के बहुत बड़े महत्वपूर्ण पुत्र थे। वे आज इस दुनिया में हमारे बीच नहीं हैं, परन्तु विज्ञान के संसार में उन्होंने जो भी हमारे लिए किया है, उसका महत्व महान है। विज्ञान जगत में किया गया उनका कार्य बेजोड़ है। उनकी यादगार के लिए ही ट्रॉम्बे के अणुशक्ति केन्द्र का नाम बदल दिया है और उसका नाम ‘भाभा अणु-शक्ति अनुसन्धान केन्द, कर दिया गया है। उनके वैज्ञानिक प्रयोगों और खोजों से भविष्य के वैज्ञानिकों को उस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए दिशा-निर्देशन मिलेगा और मानवता की भलाई होती रहेगी। संसार में सुख-समृद्धि होती रहेगी।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 2 कटुक वचन मत बोल प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 2 Katuk Vachan Mat Bol Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 2 Katuk Vachan Mat Bol Questions and Answers

Class 6 Hindi Chapter 2 Katuk Vachan Mat Bol प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) दाँत जल्दी टूट जाते हैं क्योंकि वे होते हैं
(i) छोटे,
(ii) संख्या में अधिक,
(iii) कठोर,
(iv) कमजोर।
उत्तर
(iii) कठोर

(ख) मधुर वचन है
(i) तीर,
(ii) औषधि
(iii) नीर
(iv) क्षार।
उत्तर
(ii) औषधि।

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Bhasha Bharti Class 6 Chapter 2 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) शरीर में ……..” अच्छी नहीं है तो सब बुरा-बुरा है।
(ख) वाणी का वरदान मात्र ……. को मिला है।
(ग) वाक्चातुर्य से कटु सत्य को प्रिय और “…” बनाया जा सकता है।
(घ) वाणी के दुरुपयोग से स्वर्ग भी ……. में परिणत हो सकता है।
उत्तर
(क) अगर जीभ
(ख) मानव
(ग) मधुर
(घ) नर्क।

Class 6 Hindi Chapter 2 MP Board प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) मालिक ने लुकमान की बुद्धिमानी की परीक्षा किस प्रकार ली?
उत्तर
मालिक ने लुकमान की बुद्धिमानी की परीक्षा यह प्रश्न पूछकर ली कि शरीर का कौन-सा हिस्सा सबसे अच्छा और सबसे बुरा होता है।

(ख) जिज्ञासु ने कन्फ्यूशस से क्या प्रश्न किया?
उत्तर
जिज्ञासु ने कन्फ्यूशस से प्रश्न किया कि सबसे दीर्घजीवी कौन होता है।

(ग) श्रीमती शास्त्री नौकर पर क्रोधित क्यों हुई?
उत्तर
श्रीमती शास्त्री नौकर पर क्रोधित इसलिए हुई क्योंकि उससे कोई काम बिगड़ गया था।

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(घ) राजा ने स्वप्न में क्या देखा?
उत्तर
राजा ने स्वप्न में देखा कि उसके सारे दाँत टूट गए हैं।

(ङ) बुलबुल और फूल का संवाद लिखिए।
उत्तर
बुलबुल ने सुबह-सुबह ताजे खिले फूल से कहा-“अभिमानी फूल! इतराओ मत ! इस बाग में तुम्हारे जैसे बहुत फूल खिल चुके हैं।” (इस पर) फूल ने हँसकर कहा, “मैं सच्ची बात पर नाराज नहीं होता, पर एक बात है कि कोई भी अपने प्रिय से कड़वी बात नहीं कहता।”

MP Board Class 6 Hindi Chapter 2 प्रश्न 4. तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) लुकमान ने अपने मालिक के दोनों प्रश्नों के उत्तर में जीभ’ ही क्यों कहा?
उत्तर
लुकमान ने अपने मालिक के दोनों प्रश्नों के उत्तर में ‘जीभ’ ही कहा क्योंकि जीभ अच्छी है, तो सब अच्छा ही अच्छा है और अगर शरीर में जीभ अच्छी नहीं है तो सब बुरा ही बुरा है। जीभ के कारण ही सारी बुराई और भलाई है।

(ख) ‘जो नम्र होता है, वही अधिक समय तक जीता है’, एक उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
जो नम्र होता है, वही अधिक समय तक जीता है; इस बात को इस उदाहरण से समझा जा सकता है। जीभ दाँतों से पहले पैदा होती है और दाँत बाद में। परन्तु दाँत अपनी कठोरता के कारण पहले टूट जाते हैं (पहले चले जाते हैं) परन्तु जीभ कोमल होती है, लचीली होती है, नम्र होती है। इसलिए वह दीर्घजीवी है अधिक समय तक जीती है।

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(ग) ‘जीभ ने दुनिया में बड़े-बड़े कहर ढाए हैं’, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
जीभ के दुरुपयोग से समाज में नर्क तुल्य कष्टमय वातावरण पैदा हो जाता है। वाणी के प्रयोग से ही समाज में खुशहाली छा सकती है परन्तु जब उसका सही उपयोग नहीं होता तो पूरा संसार संकट में पड़ जाता है। महाभारत युद्ध भी जीभ के दुरुपयोग के कारण ही हुआ।

(घ) ‘वाणी तो सभी को मिली हुई है परन्तु बोलना किसी-किसी को ही आता है’, भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
सभी लोगों को ‘जीभ’ (वाणी) मिली हुई है। वे इसके उपयोग को ठीक तरह नहीं जानते। वे बोलने की कला के जानकार नहीं हैं। कोई बात प्रेम की वर्षा करती है, तो किसी के द्वारा बोले गए शब्द कई झगड़ों को पैदा कर देते हैं। यहाँ तक कि इस जीभ का सही उपयोग सुख-शान्ति देने वाला है तो कहीं इसके विपरीत दुःख और कलह पैदा करने वाला भी होता है। अत: वाणी के सदुपयोग की कला किसी-किसी को ही प्राप्त है।

(ङ) ‘कटुक वचन मत बोल’, पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर
‘कटुक वचन मत बोल’ पाठ से हमें शिक्षा मिलती है कि मनुष्यों को हमेशा विनम्र और मधुरभाषी होना चाहिए। विनम्रता और प्रेमपूर्ण भाषा के प्रयोग से मनुष्य दीर्घजीवी होता है। कड़वी बात से झगड़े-झंझट पैदा होते हैं। अतः हमें सदैव मृदुभाषी होना चाहिए।

Class 6 Bhasha Bharti Chapter 2 प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) ‘तीन इंच की जीभ, छः फुट के आदमी को मार सकती है’, कैसे?
उत्तर
मनुष्य की जीभ मात्र तीन इंच लम्बी होती है। परन्तु इससे कहे गए कटुवचन छ: फुट लम्बे आदमी के तन-मन को वेध देते हैं। वह मरा हुआ सा हो सकता है। इस वाणी के दुरुपयोग से संसार में अनेक झगड़े पैदा हो जाते हैं।

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(ख) ‘किसी का हृदय कटु वाणी से दुःखी नहीं करना चाहिए’, क्यों?
उत्तर
कटु वाणी से किसी भी मनुष्य को दुखी नहीं करना चाहिए, क्योंकि कटु वचन (तेज) वाण (तीर) के समान होता है। वह कानों के मार्ग से प्रवेश करके सारे शरीर को वेध डालता है। कटु वचन से सारा शरीर जलकर राख हो जाता है।

(ग) ‘बातन हाथी पाइए, बातन हाथी पाँव, का क्या आशय है?
उत्तर
बातों के द्वारा ही मनुष्य असम्भव को भी सम्भव बना सकता है, यदि वह अपनी जीभ का सदुपयोग करता है। मृदु वचन और नम्रतापूर्ण आचरण से मनुष्य महत्त्वपूर्ण बन सकता है और इसके विरुद्ध आचरण से अर्थात् कटु वचन से वह अपने महत्त्व को खो देता है। बात के बोलने का ढंग उसे समाज में आदरणीय और निरादरणीय बना सकता है।

Class 6th Hindi Chapter 2 MP Board प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए

(क) यदि लुकमान की जगह आप होते तो मालिक के प्रश्नों का क्या उत्तर देते?
उत्तर
लुकमान की जगह यदि मैं होता तो उसके प्रश्नों का उत्तर यही देता कि जीभ के कारण ही संसार में सारी भलाई और बुराई है। जीभ से मृदु वचन बोलने पर सर्वत्र सुख ही सुख होगा परन्तु कटु वचन बोलने पर सर्वत्र कलह और कटुताएँ ही होंगी।

(ख) हमें वाणी का वरदान न मिला होता तो क्या होता?
उत्तर
मनुष्य को ईश्वर ने वाणी का वरदान दिया है, जिससे वह अपने दुःख-सुख के भावों को अपने दूसरे साथियों से कह लेता है। दूसरों के भावों को सुनकर उनकी सहायता कर लेता है। वाणी के वरदान के न मिलने की दशा में यह सारा जगत मूक बना होता।

भाषा की बात

Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 2 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और लिखिए
व्यक्तित्व, विदीर्ण, प्रशंसा, वाणी, बुद्धिमान।
उत्तर
कक्षा में अपने अध्यापक की सहायता से शुद्ध उच्चारण करके अभ्यास करें और लिखें।

MP Board Class 6th Hindi Chapter 2 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखिए
जिग्यासु, दाशनिक, हिरदय, प्रसनशा, हंसकर।
उत्तर
जिज्ञासु, दार्शनिक, हृदय, प्रशंसा, हँसकर।

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Class 6 Hindi Chapter 2 Bhasha Bharti प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
स्वप्न, लोकप्रिय, ऐश्वर्य, कारावास, अभिमानी।
उत्तर
स्वप्न-युवकों को स्वप्न देखने के साथ ही कर्मशील भी होना चाहिए।
लोकप्रिय-मृदुभाषी और नम्र व्यक्ति लोकप्रिय होता है। ऐश्वर्य-शुद्ध आचरण से व्यक्ति ऐश्वर्य प्राप्त करता है।
कारावास-आजादी के लिए आन्दोलन करने वाले देशभक्तों को कारावास दिया गया।
अभिमानी-अभिमानी व्यक्ति कभी भी आदर नहीं पाता है।

Class 6th Hindi Chapter 2 Katuk Vachan Mat Bol प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों में से विकारी और अविकारी शब्द छाँटकर लिखिए
लड़की, तालाब, गाँव, ही, भी, नगर, तथा, इधर ।
उत्तर
(क) विकारी शब्द-लड़की, तालाब, गाँव, नगर।
(ख) अविकारी शब्द-ही, भी, तथा, इधर ।

कटुक वचन मत बोल परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

(1) वाणी तो सभी को मिली हुई है परन्तु बोलना किसी-किसी को ही आता है। बोलते तो सभी हैं किन्तु क्या बोलें, कैसे शब्द बोलें, कब बोलें-इस कला को बहुत कम लोग जानते हैं। एक बात से प्रेम झरता है, दूसरी बात से झगड़ा होता है। कड़वी बात ने संसार में न जाने कितने झगड़े पैदा किए हैं। जीभ ने दुनिया में बड़े-बड़े कहर बाए हैं। जीभ होती तो तीन इंच की ही है, पर वह पूरे छह फुट के आदमी को मार सकती है।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा-भारती’ के ‘कटुक वचन मत बोल’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक रामेश्वर दयाल दुबे हैं।

प्रसंग-इस गद्यांश में बताया गया है कि वाणी से ही प्रेम और कटुता (दुश्मनी) पैदा होती है।

व्याख्या-लेखक का कथन है कि वाणी (जीभ) सभी को प्राप्त है परन्तु उससे बोलना तो किसी-किसी को ही आता है। बहुत कम लोग बोलना जानते हैं। वाणी का प्रयोग हर कोई ठीक से नहीं कर पाता। ऐसा देखा जाता है कि कुछ लोगों की वाणी से प्रेम झलकता है, तो किसी की बात इतनी चुभने वाली होती है कि झगड़ा हो जाता है। कड़वी बात संसार में कितने ही झगड़े पैदा कर देती है और उसका प्रभाव बहुत ही कष्टकारक होता है। बोलने में मात्र तीन इंच की छोटी जीभ का प्रयोग करते हैं परन्तु उसका प्रभाव इतना विनाशकारी होता है कि उससे छः फीट का लम्बा मनुष्य मर जाता है।

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(2) संसार के सभी प्राणियों में वाणी का वरदान मात्र मानव को मिला है। उसके सदुपयोग से स्वर्ग पृथ्वी पर उतर सकता है और उसके दुरुपयोग से स्वर्ग भी नर्क में परिणत हो सकता है। महाभारत युद्ध वाणी के प्रयोग का ही परिणाम था।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इस गद्यांश में बताया गया है कि संसार में मनुष्य को वाणी (बोलने की शक्ति) प्राप्त है। इसके ही प्रयोग से इस संसार को स्वर्ग अथवा नर्क बनाया जा सकता है।

व्याख्या-लेखक का कथन है कि संसार में अनेक प्राणी हैं। उनमें से मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जिसे बोलने की शक्ति दी गई है। यह वास्तव में ईश्वर का ही श्रेष्ठ वरदान है। ईश्वर के इस वरदान का उचित और अनुचित प्रयोग ही इस संसार को स्वर्ग (सुखमय) और नर्क (दुःखमय) बना सकता है। वाणी के अनुचित प्रयोग से ही कौरव और पाण्डवों के मध्य ‘महाभारत’ युद्ध हुआ। कटु वाणी के प्रयोग का प्रतिफल विनाशकारी युद्ध हुआ। इस वरदान का उचित और अनुचित प्रयोग ही इस संसार को स्वर्ग (सुखमय) और नर्क (दुःखमय) बना सकता है। वाणी के अनुचित प्रयोग से ही कौरव और पाण्डवों के मध्य ‘महाभारत’ युद्ध हुआ। कटु वाणी के प्रयोग का प्रतिफल विनाशकारी युद्ध हुआ।

(3) सदा से यह कहा जाता रहा है कि किसी का हृदय अपनी कटु वाणी से दुखी मत करो।
‘मधुर वचन है औषधि, कटुक वचन है तीर।
श्रवण मार्ग होइ संचरै, वेधै सकल शरीर॥
कटुक वचन सबसे बुरा, जारि करै तन छार।
साधु वचन जल रूप है, बरसै अमृत धार॥
कुदरत को नापसन्द है सख्ती जबान में।
इसलिए तो दी नहीं हड्डी जबान में॥
जो बात कहो, साफ हो, सुथरी हो, भली हो।
कड़वी न हो, खट्टी न हो, मिश्री की डली हो॥

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में लेखक ने किसी कवि की उक्तियों को उदाहरण रूप में प्रस्तुत करके कहा है कि कड़वी बात कहकर किसी को भी दुःख नहीं पहुँचाना चाहिए।

व्याख्या-लेखक का कथन है कि अपने कटु वचनों से किसी को भी कष्ट नहीं पहुँचाना चाहिए ; क्योंकि मीठी वाणी एक औषधि है जिससे मनुष्य अपने तन और मन से स्वस्थ रहता है, जबकि कड़वा वचन तीर (वाण) के समान है जो कानों के मार्ग से प्रवेश पाकर सारे शरीर को वेध देता है। कटु वचन सबसे बुरा है जिससे सारा शरीर जलकर (राख) हो जाता है जबकि सज्जन की मधुर वाणी शीतल जल के समान है जो बरसकर (कहे जाने पर) सुनने वाले व्यक्ति पर अमृतधारा जैसा  प्रभाव डालती है (जिससे शारीरिक और मानसिक ताप (कष्ट) समाप्त हो जाते हैं।

लालबहादुर शास्त्री की शेर के माध्यम से मधुर वाणी की विशेषता बताते हुए लेखक कहता है कि वाणी की कटुता प्रकृति को भी पसन्द नहीं है, तभी तो जीभ में कठोर हड्डी नहीं दी है। इसलिए सदैव साफ सुथरी और मीठी बात बोलनी चाहिए। बात में कटुता, खटास न हो, वह तो मिश्री की डेली के समान मिठास युक्त हो।

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(4) सत्य कभी-कभी कड़वा भी होता है। कुछ अप्रिय बातें कहनी ही पड़ती हैं किन्तु ऐसे अवसर पर होना यह चाहिए कि बात भी कह दी जाए और उसमें वह कड़वाहट भी न आने पाए जो दूसरे के हृदय को विदीर्ण कर दे। जरूरी नहीं है कि जीभ की कमान से सदा वचनों के बाण ही छोड़े जाएँ। वाक्- चातुरी से कटु
सत्य को प्रिय और मधुर बनाया जा सकता है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में बताया गया है कि कटु-सत्य को अपनी वाणी की चतुराई से प्रिय और मीठा बनाया जा सकता है।

व्याख्या-लेखक कहता है कि सत्य के कथन में कभी-कभी कटुता भी आ जाती है। देखा जाता है कि कुछ ऐसी बातें होती हैं कि वे सुनने में अप्रिय और कटु हों, परन्तु उनका कथन अति आवश्यक होता है। ऐसी दशा में हमें चाहिए कि उस अप्रिय (सत्य) बात को कहते हुए कड़वाहट भी पैदा न हो तथा सुनने वाले के हृदय पर भी कोई चोट न पहुँचे। यह देखना चाहिए कि अपनी वाणी से ऐसे वचन कभी न कहें कि जिससे दूसरे का मन आहत हो। अपनी वाणी से चतुराई पूर्वक ऐसे वचन बोलने चाहिए जिसके द्वारा कड़वा सत्य भी मीठा और प्रिय लगे।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 6 विजय गान प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 6 Vijay Gan Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 6 Vijay Gan Questions and Answers

Vijay Gan Class 6 प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) पथ में बरस रही हैं
(i) चिंगारियाँ
(ii) बाधाएँ,
(iii) शक्तियाँ
(iv) बिजलियाँ।
उत्तर
(ii) बाधाएँ

(ख) धरा संतप्त हो रही है
(i) पुण्य से
(i) दया से,
(iii) दान से
(iv) पाप से।
उत्तर
(iv) पाप से

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 6 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) वीरों को ………… की धारों पर चलना पड़ता है।
(ख) नभ मण्डल को नित ………………. उगलने दो।
(ग) दृढ़ निश्चय से ………………. डर जाता है।
(घ) दुर्गम सागर सुखाने के लिए तुम ………… हो।
उत्तर
(क) तलवारों
(ख) अंगार
(ग) काल स्वयं
(घ) अगस्त्य।

Class 6 Hindi Chapter 6 MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो वाक्यों में लिखिए

(क) वीरों के पथ में क्या बरस रही हैं ?
उत्तर
वीरों के पथ में बाधाएँ बरस रही हैं।

(ख) अंगार उगलने के लिए किससे कहा गया है?
उत्तर
अंगार उगलने के लिए नभ मण्डल से कहा गया है।

(ग) कवि किससे, किसको टकरा देना चाहता है ?
उत्तर
कवि समुद्र को हिमालय से, सूर्य को चन्द्रमा से, धरती को आकाश से टकरा देना चाहता है।

(घ) कवि तपस्वी बनने के लिए क्यों कह रहा है ?
उत्तर
कवि कह रहा है कि तुम (वीर पुरुष) तपस्वी बन जाओ जिससे तुम्हारे ऊपर माया-मोह का प्रभाव न पड़ सके।

(ङ)’प्राणों की पतवार से कवि का क्या आशय है?
उत्तर
प्राणों की पतवार से कवि का आशय है कि हे वीरो! तुम अपने अन्दर प्राण शक्ति (ऊर्जा) इतनी पैदा कर लो कि तुम्हें बाधाओं के सागर को पार करने में किसी तरह का डर न लगे।

(च) वीरों से काल कब डरने लगता है ?
उत्तर
पक्के इरादे वाले वीरों से काल डरने लगता है।

(छ) ‘विजय गान’ कविता का सार लिखिए।
उत्तर
कवि का आशय है कि श्रेष्ठ वीरों को विजय के मार्ग पर बाधाओं की चुनौती को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ते जाना चाहिए। मनुष्य जीवन एक महासंग्राम है। इसमें अनेक तरह की रुकावटें आती हैं। जीवन की इन रुकावटों पर जीत पाने के लिए साहसपूर्वक सावधानी से आगे ही आगे बढ़ते जाना चाहिए।

तलवार की धार पर चलने के समान दुर्गम जीवन पथ पर चलने के लिए त्याग, तपस्या और पक्के संकल्प की जरूरत होती है। प्राण-शक्ति के सहारे मनुष्य को जीवन के समुद्र को पार करने में सफलता प्राप्त हो सकती है।

MP Board Class 6 Hindi Chapter 6 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांशों का भाव स्पष्ट कीजिए

(क) बरस रही बाधाएँ पथ में उमड़-उमड़ कर धारों से। वीर, सिन्धु के पार उतरते, प्राणों की पतवारों से।
(ख) छूने पाए मोह न तुमको, बनो तपस्वी ! लौह हृदय !
काल स्वयंडर जाये देखकर, ध्रुव से भी ध्रुवतर निश्चय।
उत्तर
खण्ड ‘क’: सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 1 व 3 की व्याख्या देखिए।

भाषा की बात

Class 6 Hindi Chapter 6 Vijay Gan प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
प्राण, संतप्त, ध्रुव, अगस्त्य।
उत्तर
कक्षा में अपने अध्यापक महोदय की सहायता से उच्चारण करना सीखिए और लगातार अभ्यास कीजिए।

Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 6 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की सही वर्तनी कीजिए
बीरबर, निशचय, तलवर, अगार।
उत्तर
वीरवर, निश्चय, तलवार, अंगार।

MP Board Class 6th Hindi Chapter 6 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए. हिमाचल, मंडल, अम्बर, हृदय।
उत्तर

  • हिमाचल-जाड़े के दिनों में हिमाचल बर्फ से ढक जाता है।
  • मंडल-आकाश मंडल से भीषण आग बरस रही है।
  • अम्बर-अम्बर में काले बादल छाए हुए हैं।
  • हृदय-उदार हृदय व्यक्ति आदरणीय होते हैं।

Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 6 प्रश्न 4.
कविता की पहली पंक्ति में ‘सम्हल-सम्हल’ का प्रयोग हुआ है। ऐसे अन्य पदों को छाँटिए जिनमें एक ही शब्द का दो बार प्रयोग हुआ हो।
उत्तर
सम्हल-सम्हल, उमड़-उमड़, घुमड़-घुमड़।

Bhasha Bharti Class 6 प्रश्न 5.
इस कविता की जिन पंक्तियों में वर्गों की आवृत्ति हुई है, उन्हें छाँटकर लिखिए।
उत्तर
‘अवनी-अम्बर’ में : ‘अ’ वर्ण की।
‘पाप-ताप’ में ‘प’ वर्ण की। ध्रुव से ध्रुवतर, में ‘ध्रु’ एवं व वर्ण की।

Class 6 Hindi Bhasha Bharti प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों में उचित उपसर्ग व प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए ज्ञान, सफल।
उत्तर
अज्ञानता और असफलता।

Vijayakanth Kavita Ka Sar Likhiye प्रश्न 7.
पर्यायवाची शब्द लिखिएसूर्य, चन्द्रमा, सिन्धु, अग्नि, अम्बर।
उत्तर

  • सूर्य = भानु, भास्कर, सूरज, दिवाकर, दिनकर, आदित्य।
  • चन्द्रमा = चन्द्र, शशि, रजनीकर, शीतकर, सुधांशु, सुधाकर, राकापति।
  • सिन्धु = समुद्र, सागर, वारिधि, पयोधि, नीरधि।
  • अग्नि =आग, वैश्वानर, अनल, पावक, हुताशन।
  • अम्बर = आकाश, क्षितिज, अन्तरिक्ष, नभ, गगन, व्योम।

विजय गान सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या 

(1) सम्हल-सम्हल कर चलो वीरवर,
तलवारों की धारों पर!
इधर-उधर हैं खाई-कुएँ, ऊपर है सूना अम्बर
बरस रहीं बाधाएँ पथ में,
उमड़-उमड़ कर धारों से।
वीर, सिन्धु के पार उतरते,
प्राणों की पतवारों से।
टकराने दो सिन्धु-हिमाचल,
सूर्य-चन्द्र अवनी-अम्बर।
सम्हल-सम्हल कर चलो वीरवर,
तलवारों की धारों पर।

शब्दार्थ-सम्हल=सम्हल कर सावधानीपूर्वक। वीरवर = श्रेष्ठवीर। अम्बर = आकाश। बाधाएँ = रुकावटें। पथ = मार्ग। सिन्धु = समुद्र। अवनी = धरती।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक भाषा-भारती’ की ‘विजय गान’ नामक कविता से ली गई हैं। इस कविता के रचयिता नटवरलाल ‘स्नेही’ हैं।

प्रसंग-कवि ने कठिनाइयों में भी सावधानीपूर्वक अपने जीवन रूपी मार्ग पर लगातार चलते रहने का आह्वान किया है।

व्याख्या-कवि कहता है कि हे श्रेष्ठ वीरो ! तुम्हें चुनौतियों भरे अति कठिनाइयों वाले जीवन पथ पर सावधानीपूर्वक चलते जाना चाहिए। जीवन का मार्ग कठिनाइयों की, खाइयों और कुओं (रुकावटों) से बाधित है। ऊपर आकाश सूना है। तुम्हारे मार्ग में रुकावटों की वर्षा हो रही हैं।

ये बाधाएँ वर्षा की जलधारा के समान झड़ी लगाए उमड़ रही हैं। (परन्तु तुम्हें घबराना नहीं चाहिए क्योंकि तुम वीर हो और) वीर तो अपने प्राणों की पतवार से (प्राणों की बाजी लगा करके) विपत्तियों के सागर को पार कर जाते हैं। चाहे, समुद्र और हिमालय, सूर्य और चन्द्रमा तथा धरती और आकाश आपस में क्यों न टकरा जाएँ, तुम्हें तो हे श्रेष्ठ वीरो! सावधानी से तलवारों की धार पर भी अपने मार्ग पर आगे ही आगे बढ़ते जाना है।

(2) पापों से संतप्त धरा का
पाप, ताप में जलने दो।
घुमड़-घुमड़ कर नभ मंडल को
नित अंगार उगलने दो।
जल जाएगा पाश पुराना, परवशता अंचल जर्जर।
सम्हल-सम्हल कर चलो वीरवर तलवारों की धारों पर।

शब्दार्थ-संतप्त =कष्ट पाती हुई। ताप = ऊष्मा, गर्मी। पाश = जाल। परवशता = गुलामी। अंचल= आंचल जर्जर = जीर्ण क्षीर्ण, पुराना और फटा हुआ।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।
प्रसंग-इस पद्यांश में सारी धरती से पुरानापन तथा गुलामी के पुराने अंचल को जलाकर भस्म कर देने के लिए आह्वान किया गया है।
व्याख्या-कवि कहता है कि यह धरती अनेक तरह से किए गए पापों से संताप के कष्ट पा रही है। इसे पाप की ताप (आग) से जलने दो। सारा आकाश मण्डल भी बार-बार उमड़-घुमड़ कर अंगारे उगलने लग जाय जिससे पुरानी गुलामी का झीना सा जर्जर जाल जलकर समाप्त हो जाए। इसलिए, हे श्रेष्ठ वीरो ! तुम सावधानीपूर्वक तलवारों की धार पर चलते चलो (जीवन की अनेक बाधाओं को दूर करते हुए आगे बढ़ते चलो।)।

(3) छूने पाए मोह न तुमको,
बनो तपस्वी! लौह हृदय। काल स्वयं डर जाय देखकर,
ध्रुव से भी ध्रुवतर निश्चय। हो अगस्त्य,
क्या कठिन सुखाना बाधा का दुर्दम सागर।
सम्हल-सम्हल कर चलो वीरवर तलवारों की धारों पर।

शब्दार्थ-लौह हृदय = लोहे से बने पक्के हृदय वाले। ध्रुव = अटल। निश्चय = इरादा। अगस्त्य = एक ऋषि का नाम जिन्होंने अपनी अंजलि से सारे समुद्र को पीकर सुखा दिया था। बाधा – रुकावट। दुर्दम = जिसे वश में करना बहुत ही कठिन होता है। सागर = समुद्र।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि भारत के वीरों को पक्के इरादे से भयभीत न होकर बाधाओं पर विजय प्राप्त करने का आह्वान करता है।

व्याख्या-हे वीरो! तुम्हें किसी भी तरह का मोह भी छू न सके, इसके लिए तुम्हें एक तपस्वी बन जाना चाहिए। तुम्हें लोहे के हृदय वाला हो जाना चाहिए जिससे काल भी भयभीत हो उठे। तुम्हें अत्यन्त पक्के इरादों वाला हो जाना चाहिए। हे वीरवरो! तुम्हें अगस्त्य ऋषि के समान बन जाना चाहिए जिससे बाधाओं के दुर्दमनीय (कठिनाई से वश में किए जाने वाला) सागर को भी वश में करना तुम्हारे लिए बिल्कुल भी कठिन नहीं होगा। अतः हे श्रेष्ठ वीरो! तुम्हें सम्हल कर तलवार की धार पर चलना है (चुनौतीपूर्ण कार्य करना है।)

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 4 अपना हिन्दुस्तान कहाँ है? प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 4 Apna Hindustan Kahan Hai Pyara Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 4 Apna Hindustan Kahan Hai Questions and Answers

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 4 प्रश्न 1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) हम सब मद में झूम रहे हैं
(i) सत्याग्रह के
(ii) आन्दोलन के
(iii) भूमण्डलीकरण के
(iv) व्यवसायीकरण के।
उत्तर
(iii) भूमण्डलीकरण के

(ख) धन के कोष भरे होने पर भी नहीं है
(i) लालच
(ii) सन्तोष
(iii) दया,
(iv) श्रृंगार।
उत्तर
(ii) सन्तोष।

MP Board Class 6 Hindi Chapter 4 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए(क) जनसेवा का ……. कहाँ है ?
(ख) साक्षरता का ………..” है, चिन्तन का विस्तार नहीं है।
(ग) टी. वी. टेलीफोन बज रहे पर आपस में ……….. बन्द है।
(घ) आओ, खोजें सकल विश्व में अपना ….. कहाँ है ?
उत्तर
(क) भाव
(ख) आन्दोलन
(ग) बात
(घ) हिन्दुस्तान।

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Class 6 Hindi Chapter 4 Mp Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) हम सारी दुनिया किन साधनों से घूम रहे हैं?
उत्तर
हम सारी दुनिया टी. वी. और टेलीफोन से ही घूम

(ख) साक्षरता से आशय क्या है ?
उत्तर
साक्षरता से यह आशय है कि सभी जन सामान्य स्तर तक पढ़ना-लिखना सीख जाएँ।

(ग) भूमण्डलीकरण का परिवारों पर क्या प्रभाव पड़ा है ?
उत्तर
भूमण्डलीकरण का परिवारों पर यह प्रभाव पड़ा है कि वे बिखर गये हैं। पारिवारिक समरसता समाप्त हो गई है। आपसी सम्बन्ध टूट चुके हैं। परिवार के सदस्य एक-दूसरे से बातचीत तक नहीं करते। उनमें आपसी सम्बन्ध समाप्त हो चुके हैं।

(घ) ‘मन को जो आन्दोलित कर दे’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है ?
उत्तर
मन के भावों को बदल देने वाली काव्य धारा मिट चुकी है। मन में देश प्रेम, समता, एकता, मर्यादा पालन, अन्याय की समाप्ति, न्याय की प्राप्ति के लिए जन-जन में हलचल पैदा करने के लिए काव्य रचना करना क्यों रुक गया है।

(ङ) “धन से कोष भरे हैं लेकिन फिर भी संतोष कहाँ हैं?” का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
लोगों में धन एकत्र करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। उनके खजाने में धन भरा पड़ा है फिर भी वे उचित-अनुचित साधनों से धन एकत्र करने में जुटे हैं। देश, समाज एवं जन की उन्हें चिन्ता नहीं है। वे धन लोलुप बन चुके हैं।

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(च) अपना हिन्दुस्तान कहाँ है ?’ कवि का संकेत किस ओर है ?
उत्तर
हिन्दुस्तानी धन कमाने की चेष्टा से देश छोड़कर विदेशों में बस गये हैं। वे अपनी ऊर्जा और ज्ञान का उपयोग विदेशों में कर रहे हैं जिससे वे देश सम्पन्न हो रहे हैं। उन देशों की संस्कृति और सभ्यता उन लोगों पर प्रभाव डाल रही है। वे अपने देश, अपने समाज, अपनी संस्कृति सभ्यता को भूल चुके हैं। यही इस पंक्ति का आशय है।

(छ) कविता में उन्लेखित कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
कविकुल गुरु कालिदास, राजा भोज, सूरदास, तुलसीदास, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, रहीम और रसखान आदि कवियों के नाम का उल्लेख किया है।

Apna Hindustan Kahan Hai प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांशों का भाव स्पष्ट कीजिए।

(क) टी. वी. टेलीफोन बज रहे, पर आपस में बात
अब की कविता लगती जैसे परिवारों का भंग छंद है।

(ख) राजनीति की कूटचाल में, जनसेवा का भाव कहाँ
रामराज में जरा बताओ केवट की वह नाव कहाँ है?
उत्तर
खण्ड ‘क’ : सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 02 व 03 की व्याख्या देखिए।

भाषा की बात

Class 6 Hindi Chapter 4 Apna Hindustan Kaha Hai प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का उच्चारण कीजिए तथा लिखिए. भूमण्डलीकरण, साक्षरता, यंत्र, अपहरण, प्रतिभा, आन्दोलित, श्रृंगार।
उत्तर
अपनी कक्षा में अपने अध्यापक महोदय की सहायता से उच्चारण करें और लगातार अभ्यास कीजिए तथा सावधानी से लिखिए।

MP Board Class 6th Hindi Chapter 4 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की सही वर्तनी लिखिए
हीन्दूस्तान, दुनियाँ, परीवार, मृदु, सन्तोश ।।
उत्तर
हिन्दुस्तान, दुनिया, परिवार, मृदु, सन्तोष।

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Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 4 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
संस्कार, आन्दोलन, वैभव, राजनीति, शिक्षा।
उत्तर

  1. संस्कार- भारतीय संस्कृति में सोलह संस्कार बताए गए हैं।
  2. आन्दोलन-सामाजिक परिवर्तन के लिए जनआन्दोलन अनिवार्य है।
  3. वैभव-भारतीय लोग भौतिक वैभव प्राप्त करने के उद्देश्य से विदेशों को पलायन करते जा रहे हैं।
  4. राजनीति-आज देश की राजनीति सही दिशा से भटक गई है।
  5. शिक्षा-शिक्षा का उद्देश्य विस्तृत होना चाहिए।

Class 6 Bhasha Bharti Chapter 4 प्रश्न 4.
इस कविता से योजक चिह्न वाले शब्द छाँटकर लिखिए।
उत्तर
ऊँचे-ऊँचे, जन-जन, बड़ी-बड़ी, बड़े-बड़े,  जन्म-जन्म, दैव-विधान, जन-सेवा, राम-राज।

Class 6th Hindi Chapter 4 Mp Board प्रश्न 5.
‘खोज’ विदेशी शब्द है जो दूसरी भाषा से लिया गया है। ऐसे शब्द आगत शब्द कहलाते हैं। निम्नलिखित शब्दों में से आगत शब्द छाँटकर लिखिए
विश्व, ताकत, जरा, सकल, फूहड़, वैभव, टी.वी., टेलीफोन।
उत्तर
निम्नलिखित ‘आगत’ शब्द हैंताकत, जरा, फूहड़, टी.वी., टेलीफोन।

अपना हिन्दुस्तान कहाँ है? सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) भूमण्डलीकरण के युग में अब अपनी पहचान कहाँ है?
आओ खोजें सकल विश्व में अपना हिन्दुस्तान कहाँ है?
भूमण्डलीकरण के मद में हम सब कैसे झूम रहे|
टी.वी. टेलीफोनों से ही सारी दुनिया घूम रहे हैं।
साक्षरता का आन्दोलन है, चिन्तन का विस्तार कहाँ है।
जन-जन में जो फैल रही, उस शिक्षा में संस्कार कहाँ हैं?
बड़ी-बड़ी खोजें सकल विश्व में अपना हिन्दुस्तान कहाँ है?
आओ खोजें सकल विश्व में, अपना हिन्दुस्तान कहाँ है?

शब्दार्थ-भूमण्डलीकरण = समस्त धरती पर रहने वाले लोगों का एक भाव। सकल = समस्त, सब। विश्व = संसार। मद – घमण्ड, नशा। साक्षरता = सामान्य स्तर तक पढ़ना और लिखना। चिन्तन = सोच, विचारशीलता।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘अपना हिन्दुस्तान कहाँ है’ नामक पाठ से अवतरित है। इसके रचयिता ‘दयाल सिंह पवार’ हैं।

प्रसंग-इस पद्यांश में बताया है कि हम अपनी संस्कृति को इस भूमण्डलीकरण के कारण भुला चुके हैं।

व्याख्या-कवि कहता है कि आज हम भूमण्डलीकरण के इस युग में अपने हिन्दुस्तान की अपनी संस्कृति और सभ्यता को भूलते जा रहे हैं। हमारी संस्कारों की संस्कृति से होने वाली पहचान समाप्त हो रही है, उसे भुला दिया है। इस युग में अब यह आवश्यक हो गया है कि हम अपने हिन्दुस्तान की खोज करें कि उसका सारे विश्व में अस्तित्व है भी अथवा नहीं।

हम सभी भूमण्डलीकरण के मद (नशे) में मतवाले हो गए हैं। टी. वी. और टेलीफोन पर ही सारी दुनिया की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, यह जानकारी अपूर्ण है, अवास्तविक है। सामान्य स्तर तक शिक्षा का प्रसार करने का आन्दोलन चलाया हुआ है, परन्तु उस शिक्षा प्रसार में विस्तृत चिन्तन नहीं है। इस शिक्षा में संकीर्णता है। सभी लोगों को दी जाने वाली इस शिक्षा से शिक्षार्थियों को संस्कारवान् नहीं बनाया जा रहा है। संस्कार-विहीन शिक्षा लोगों का कल्याण नहीं कर सकती। सारे विश्व में बड़ी-बड़ी खोजें की जा रही हैं। लेकिन लगता है अपना हिन्दुस्तान तो कहीं खो गया है। उसका ‘विश्वगुरुत्व’ चला गया है। इसलिए अब हम सब अपने हिन्दुस्तान को इस विश्व में खोज निकालें।

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(2) महानगर में गगन चूमते ऊँचे-ऊँचे भवन खड़े हैं।
बड़े-बड़े भवनों में झांकें तो टूटे परिवार पड़े हैं।
टी.वी. टेलीफोन बज रहे पर आपस में बात बन्द है।
अबकी कविता लगती जैसे परिवारों का भंग छन्द है।
जन्म-जन्म के बन्धन वाला बोलो दैव-विधान कहाँ
आओ खोजें सकल विश्व में अपना हिन्दुस्तान कहाँ है?

शब्दार्थ-महानगर = बड़े-बड़े शहर। गगन चूमते = आकाश को छूने वाले (बहुत ऊँचे-ऊँचे)। भवन = मकान। झाँके = देखें (ध्यान से देखें तो)। टूटे = अलग-अलग। बात बन्द है = बातचीत नहीं होती। भंग= टूटा हुआ। दैव-विधान = देवताओं द्वारा बनाया नियम।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि ने बताया है कि आज हिन्दुस्तान की पारिवारिक समरसता टूट गई है।

व्याख्या-बड़े-बड़े शहरों में आकाश को छूने वाले बहुत ऊँचे-ऊँचे भवनों (घरों) का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन इन भवनों में ध्यान से झाँक कर देखें तो पता चलता है कि इनमें रहने वाले परिवार बिखर गये हैं, वे अलग-अलग रह रहे हैं। सम्मिलित परिवारों का रूप समाप्त हो गया है। टी. वी. और टेलीफोनों पर ही बातचीत कर ली जाती है, लेकिन परिवार के सदस्य परस्पर बातचीत नहीं करते।

आज के कवियों द्वारा रचित कविताओं में बिखरे परिवारों के टूटे छन्द दीख पड़ते हैं। भारत की संस्कृति देवताओं द्वारा विकसित की गई है परन्तु उस संस्कृति के दैवीविधानों (नियमों) का पालन नहीं हो रहा। जन्म-जन्मान्तर के बन्धनों का विधान, लगता है, समाप्त कर दिया गया। अत: आज आवश्यकता है, इस बात की कि हम इस विश्व में अपने खोए हुए, बिखरे हुए हिन्दुस्तान को खोजें।

(3) यंत्रों की ताकत के भीतर, मंत्रों का मृदु घोष कहाँ
धन के कोष भरे हैं लेकिन फिर भी वह सन्तोष कहाँ है?
राजनीति की कूट चाल में जन सेवा का भाव कहाँ
रामराज में जरा बताओ केवट की वह नाव कहाँ है?
कितने ही अपहरण हो रहे किन्तु कहो हनुमान कहाँ है?
आओ खोजें सकल विश्व में अपना हिन्दुस्तान कहाँ

शब्दार्थ-यंत्र = औजार। ताकत = शक्ति। मृदु = कोमल। घोष = ध्वनि। कोष = खजाने। कूट = कुटिल (टेढ़ी-मेढ़ी)। केवट = नाविक। अपहरण = बलपूर्वक चुराना।

संदर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि कहता है कि हमारे वेद मंत्रों की कोमल ध्वनि लुप्त ह्ये गयी है। विविध यंत्रों का आविष्कार करके मानव जाति को भी भयभीत बनाया जा रहा है।

व्याख्या-कवि अपनी वाणी से लोगों का आह्वान करता है कि आज विनाशकारी अनेक यंत्रों का आविष्कार किया जा रहा है। लेकिन इन यंत्रों में वैदिक मंत्रों की सी कोमल ध्वनि नहीं है। वेद मंत्रों की मृदु ध्वनि (घोष) में जनकल्याण का सन्देश गूंजता था। आज लोगों के पास अकूत सम्पत्ति है। उनके खजाने भरे पड़े हैं लेकिन इन धनपतियों में सन्तोष नहीं है। वे अधिक से अधिक धन प्राप्त करने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं।

राजनेताओं ने आज की राजनीति को कूटनीति में बदल दिया है जिसकी कुचाल से स्वार्थ पूरा करने में वे लगे हुए हैं। इन राजनेताओं में जन सेवा का भाव नहीं है। आजादी के बाद रामराज की स्थापना का सपना टूट चुका है। रामराज का केवट नाव चलाकर स्वधर्म का पालन करने वाला, पता नहीं कहाँ छिप गया है। समता और एकता विलुप्त हो चुकी है। समाज में अनेक कुकृत्य हो रहे हैं। अपहरण से मर्यादाओं को कुचला जा रहा है। इन मर्यादाओं की रक्षा आवश्यक है। इसके लिए हनुमान सरीखे बुद्धिमान विवेकी बलवान् की जरूरत है। परन्तु वे कहाँ हैं, प्रत्येक हिन्दुस्तानी में उसी विवेक और बल की आवश्यकता है। अतः कवि आह्वान करता है कि इस सारे संसार में अपने गौरवपूर्ण हिन्दुस्तान की खोज करें।

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(4) कवि कुल गुरु की सूजन शक्ति का वह पावन संस्कार कहाँ है?
फूहड़ गीतों में खोया जो वह मधुरस शृंगार कहाँ
मन को जो आन्दोलित करक दे, कविता की वह धार कहाँ है?
भोजराज की कविता वाला वह वैभव विस्तार कहाँ
तुलसी, सूर, निराला, दिनकर और रहीम, रसखान कहाँ है?
आओ खोजें सकल विश्व में अपना हिन्दुस्तान कहाँ

शब्दार्थ-सृजन शक्ति = रचना कौशल। पावन = पवित्र । संस्कार = ठीक तरह से किसी भी कार्य को करने का तरीका (शैली)। फूहड़ = असभ्यता से भरे, घृणा पैदा करने वाले। मधुरस- मिठास से भरा । आन्दोलित = हलचल मचा देने वाला। भोजराज = राजा भोज जिन्होंने काव्य साहित्य के विकास के लिए, उसकी अभिवृद्धि के लिए कवियों को प्रोत्साहित किया था।

संदर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-भारतीय साहित्यिक धरोहर की रक्षा करने और उसके विकास के लिए कवि ने अपनी ओजस्वी वाणी में सभी जनों का आह्वान किया है।

व्याख्या-आज कविकुल गुरु कालिदास की सी काव्य रचना करने की शक्ति पैदा करने के पवित्र संस्कार कहाँ छिप गए हैं। मिठास भरा शृंगार रस तो आज के फूहड़ गीतों में खो गया है। मन में उत्साह भर देने वाली कविता की धारा ही कहीं विलुप्त हो गयी है। साथ ही, राजा भोज जैसे साहित्य प्रेमी भी नहीं दीखते जिन्होंने कविता के साहित्यिक विकास को विस्तार दिया था।

आज तुलसीदास, सूरदास, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ और रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जैसे महान कवि भी जन्म नहीं ले रहे जिन्होंने जन-जन में परस्पर आदर्श प्रेम, समता, महानता और राष्ट्रीय एकता के भाव लोगों में भरने के लिए काव्य रचना की। रहीम और रसखान जैसे आदर्श एवं जनकवियों का सर्वत्र अभाव (कमी) दीख रहा है। आज वास्तव में, ऐसे अपने हिन्दुस्तान की विश्वभर में खोज करनी है कि वे अब कहाँ है |

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 5 व्याकरण परिवार प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 5 Vyakaran Parivar Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 5 Vyakaran Parivar Questions and Answers

Class 6 Hindi Chapter 5 Mp Board प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) संज्ञानन्द का काम नहीं हो सकता
(i) विशेषण के बिना
(ii) क्रिया विशेषण के बिना
(iii) विस्मयादिबोधक के बिना,
(iv) क्रिया देवी के बिना।
उत्तर
(iv) क्रिया देवी के बिना

(ख) संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द
(i) क्रिया विशेषण
(ii) विशेषण,
(iii) सम्बन्धबोधक
(iv) क्रिया।
उत्तर
(ii) विशेषण।

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 5 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) अपनी भाषा को बिगाड़कर विदेशी भाषा के शब्दों की मिलावट से हम अपनी संस्कृति पर गहरा “…..” कर रहे हैं।
(ख) महान, महानतर और महानतम शब्द ……..” की अवस्थाएँ हैं।
(ग) क्रिया विशेषण की माँ का नाम ………” है।
(घ) संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य में अन्य शब्दों से सम्बन्ध बताने वाले शब्द ……….” कहलाते हैं।
उत्तर
(क) आघात
(ख) विशेषण
(ग) क्रिया देवी
(घ) सम्बन्धबोधक।

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MP Board Class 6 Hindi Chapter 5 प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) विशेषण किसे कहते हैं?
उत्तर
संज्ञा अथवा सर्वनाम शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं।

(ख) सर्वनाम शब्द किन शब्दों के बदले में आते हैं ?
उत्तर
संज्ञा शब्दों के बदले में सर्वनाम शब्द आते हैं।

(ग) समुच्चयबोधक वाक्य में क्या काम करता है?
उत्तर
समुच्चयबोधक वाक्य दो शब्दों या दो या दो से अधिक वाक्यों को जोड़ता है। दो या दो से अधिक वाक्यों को जोड़कर ऐसे उपवाक्यों का निर्माण होता है जो अपना स्वतंत्र अर्थ प्रकट कर सकते हैं।

Class 6 Hindi Chapter 5 Vyakaran Parivar प्रश्न 4.
(क) तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए
उत्तर
संज्ञानन्द और क्रिया देवी के तीन बच्चे हैं-एक पुत्र और दो पुत्रियाँ । पुत्र का नाम ‘सर्वनाम’ है। उनकी दो बेटियों के नाम हैं-विशेषण तथा क्रिया-विशेषण। उनके दो नौकर भी हैं जिनके नाम हैं-सम्बन्धबोधक तथा समुच्चयबोधक।

(ख) व्याकरण के परिवार में विशेषण का क्या महत्त्व
उत्तर
व्याकरण के परिवार में विशेषण का बहुत बड़ा महत्त्व है। विशेषण संज्ञा और सर्वनाम की विशेषताओं, उनके गुणों को बताने वाला शब्द है। विशेषण की तीन अवस्थाएँ होती हैं

  • सामान्य अवस्था
  • तुलनात्मक अवस्था
  • उत्तमावस्था। जैसे-विशाल, विशालतर, विशालतम।

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(ग) हिन्दी भाषा के जन्म की कहानी लिखिए।
उत्तर
हिन्दी भाषा का जन्म संस्कृत भाषा से हुआ है। संस्कृत भाषा हमारे देश की सबसे प्राचीन भाषा है। हिन्दी भाषा के अतिरिक्त संस्कृत से ही प्राकृत और पाली भाषाओं का जन्म हुआ है। प्राकृत भाषाओं से अपभ्रंश भाषा विकसित हुई है। इसी अपभ्रंश से हिन्दी का धीरे-धीरे विकास हुआ है। हिन्दी भाषा की विशेषता है कि इसमें जो बोला जाता है, वही लिखा जाता है।

(घ) क्रिया-विशेषण और सम्बन्धबोधक में क्या अन्तर
उत्तर
क्रिया-विशेषण-वाक्य की क्रिया की विशेषता बताता है। इसके अतिरिक्त विशेषण और स्वयं अपनी अर्थात् क्रिया-विशेषण की भी विशेषताओं का उल्लेख करती है।
सम्बन्धबोधक-किसी संज्ञा या सर्वनाम के पहले प्रयुक्त संज्ञा अथवा सर्वनाम के साथ उनके परस्पर सम्बन्ध को स्पष्ट करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

Vyakaran Parivar Class 6 प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) क्रिया-विशेषण, विशेषण से किस प्रकार भिन्न
उत्तर
क्रिया-विशेषण द्वारा किसी वाक्य की क्रिया, उसमें प्रयुक्त विशेषण अथवा दूसरी क्रिया-विशेषण की विशेषता बताई जाती है। जबकि विशेषण अपने वाक्य में प्रयुक्त किसी संज्ञा या सर्वनाम की ही विशेषता स्पष्ट करता है। यही दोनों में अन्तर है।

(ख) संकट के समय यदि आपके मित्र साथ छोड़ दें तो आप क्या करेंगे?
उत्तर
संकट के समय यदि हमारा मित्र अचानक साथ छोड़ देता है, तो हमें अचम्भा या विस्मय होता है। लेकिन हम प्रयास करेंगे कि उस मित्र की सहायता या सहयोग हमको मिले। यदि किसी कारण वैसा नहीं होता है तो हमें स्वयं संकट का मुकाबला करने को तैयार रहना चाहिए। साहसपूर्वक आने वाले संकट की घड़ी में धैर्यपूर्वक अपने कर्त्तव्य का पालन करते रहना चाहिए।

(ग) विस्मयादिबोधक शब्दों से हम अपने मन के किन-किन भावों को प्रकट करते हैं ?
उत्तर
विस्मयादिबोधक शब्द हमारे मन के भय, आक्रोश, कष्ट, खुशी, प्रशंसा, अचम्भा आदि भावों को प्रकट करता है।

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Class 6th Hindi Chapter 5 Vyakaran Parivar प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए

(क) क्या आप समुच्चयबोधक शब्दों के अभाव में अपनी बात पूरी कर सकते हैं ?
उत्तर
हम समुच्चयबोधक शब्दों के अभाव में अपनी बात पूरी कर तो सकते हैं परन्तु अनावश्यक रूप से शब्दों की आवृत्ति बढ़ने से वाक्य की संरचना का रूप बिगड़ जाएगा।

(ख) यदि भाषा में क्रिया का प्रयोग न किया जाए तो क्या होगा?
उत्तर
भाषा में क्रिया के प्रयोग के बिना बात का उद्देश्य पता नहीं चलेगा। अर्थ समझ में नहीं आने पर भाषा का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।

(ग) यदि व्याकरण में सर्वनामों का प्रयोग न होता तो भाषा पर क्या प्रभाव पड़ता?
उत्तर
सर्वनामों के प्रयोग के बिना भाषा की सुन्दरता समाप्त ही हो जाती और संज्ञाओं के प्रयोग बार-बार करने पड़ते जिससे भाषा को बोलने, पढ़ने अथवा लिखने के प्रति अरुचि बनी रहती।

भाषा की बात

MP Board Class 6th Hindi Chapter 5 प्रश्न 1.
1. निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(1) सन्नाटा पसरना
(2) गप्पें लड़ाना
(3) आदत में शुमार होना,
(4) हाथ बंटाना।
उत्तर

  1. सन्नाटा पसरना-हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के क्रिकेटरों के बीच मैच होने के कारण लोग घरों से नहीं निकले। अत: सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
  2. गप्पें लड़ाना-पुस्तकालय में बैठे छात्र/छात्राएँ आपस में गप्पें लड़ाते रहते हैं।
  3. आदत में शुमार होना-बात-बात में झूठ बोलना तुम्हारी आदत में शुमार है।
  4. हाथ बँटाना-घर के सदस्य घरेलू कामकाज में हाथ बँटाते ही हैं।

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भाषा भारती कक्षा 5 Solutions Chapter 6 प्रश्न 2.
नीचे लिखे शब्दों के विलोम शब्द उनके नीचे लिखे शब्दों से चुनकर लिखिए
उत्तर
शब्द – विलोम
(i) सुत – (क) असत्य
(ii) मित्र – (ख) सरस
(iii) प्रशंसा – (ग) विषाद
(iv) हर्ष – (घ) सुता
(v) नीरस – (ड.) निराशा
(vi) सत्य – (च) शत्रु
(vii) आशा – (छ) निन्दा
उत्तर
(i) – (घ),(ii) – (च),(iii) – (छ),(iv) – (ग), (v) – (ख), (vi) – (क), (vii) – (ङ)

Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 6 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए
(1) घर, (2) पुत्र, (3) पुत्री, (4) हाथ, (5) मित्र।
उत्तर
(1) घर=गृह, सदन, भवन।
(2) पुत्र = बेटा, सुत, तनय।
(3) पुत्री = सुता, बेटी, तनया।
(4) हाथ = कर, हस्त, बाहु।
(5) मित्र = सृहद, सखा, साथी।

Class 6 Bhasha Bharti Chapter 5 प्रश्न 4.
निम्नलिखित कथन किसके हैं, उनके विषय में एक-एक वाक्य लिखिए

(1) “मैं सर्वनाम की बड़ी बहन हूँ।”
उत्तर
सर्वनाम की बड़ी बहन विशेषण है। यह कथन विशेषण का है। विशेषण का काम है किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता या उनके गुण बताना।

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(2) “मैं अपनी माँ को बहुत चाहती हूँ।”
उत्तर
यह कथन है क्रिया-विशेषण का जो क्रिया देवी की दूसरी पुत्री है। क्रिया-विशेषण क्रिया की विशेषता बताती है। यह विशेषण और स्वयं अपनी (क्रिया विशेषण की) विशेषता बतलाती है।

(3) “बच्चा हमारे घर जन्मे और उसका नामकरण पड़ौसी करें।”
उत्तर
यह वाक्य ‘संज्ञानन्द’ का है। इस के विषय में संज्ञानन्द का कहना है कि हिन्दी (हिन्दू, हिन्दुस्तान) शब्द संस्कृत का नहीं है। यह फारसी का है। फारसी बोलने वाले सिन्धु को हिन्दू बोलते थे। इसलिए इस देश की भाषा को हिन्दी कहकर पहचान दी गई है।

(4) “मैं परिवार में सबसे बड़ा हूँन ! घर का सारा काम मुझे ही करना पड़ता है।”
उत्तर
उपर्युक्त कथन सर्वनाम का है। सर्वनाम का प्रयोग संज्ञा के बदले करते हैं।

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 5 प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक-एक शब्द लिखिए
(क) वह क्रिया, जिसका कोई कर्म न हो।
(ख) वह क्रिया जिसके साथ कर्म होता है।
(ग) वे शब्द जिनके रूप लिंग, वचन या कारक के अनुसार बदल जाते हैं।
(घ) वे शब्द जिनके रूप सदैव एक जैसे रहते हैं।
(ङ) कार्य की समाप्ति का बोध कराने वाला काल।
उत्तर
(क) अकर्मक
(ख) सकर्मक
(ग) विकारी
(घ) अविकारी
(ङ) भूतकाल।

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Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 5 प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों में से संज्ञा एवं उसके भेदों के नाम छाँटकर लिखिए
(क) सभी प्राणियों में वाणी का वरदान मात्र मानव को मिला है।
(ख) मानव अपने सत्कर्मों से स्वर्ग को भी पृथ्वी पर उतार सकता है।
(ग) सबके साथ प्रेम का व्यवहार करो।
(घ) गोपाल कृष्ण गोखले बचपन से तेज बुद्धि के थे।
(ङ) सब के जीवन में बुढ़ापा आता ही है।
(च) गंगा हिमालय से निकलती है।
(छ) लड़के खेल रहे हैं।
(ज) वह पुस्तक पुरानी है।
उत्तर-
(क)

  1. प्राणियों-जातिवाचक संज्ञा,
  2. वाणी- जातिवाचक संज्ञा,
  3. वरदान-भाववाचक संज्ञा,
  4. मानव-जातिवाचक संज्ञा।

(ख)

  1. मानव-जातिवाचक संज्ञा
  2. सत्कर्मों-भाव वाचक संज्ञा।
  3. स्वर्ग-भाववाचक संज्ञा,
  4. पृथ्वीजातिवाचक संज्ञा।

(ग)

  1. प्रेम-भाववाचक संज्ञा
  2. व्यवहार-भाववाचक संज्ञा।

(घ)

  1. गोपाल कृष्ण गोखले-व्यक्तिवाचक संज्ञा,
  2. बचपन-भाववाचक संज्ञा
  3. बुद्धि-भाववाचक संज्ञा।

(छ)

  1. जीवन-भाववाचक संज्ञा
  2. बुढ़ापाभाववाचक संज्ञा

(च)

  1. गंगा-व्यक्तिवाचक संज्ञा
  2. हिमालय- व्यक्तिवाचक संज्ञा।

(छ)

  1. लड़के-जातिवाचक संज्ञा।

(ज)

  1. पुस्तक-जातिवाचक संज्ञा।

व्याकरण परिवार परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

(1) टेलीविजन पर कार्यक्रम क्यों देख रहे हैं आप? जानते नहीं, टेलीविजन जिस भाषा का प्रयोग कर रहा है, उससे हम अपनी परम्पराओं को भूलते जा रहे हैं। अपनी भाषा को बिगाड़कर विदेशी भाषा के शब्दों की मिलावट से हम अपनी संस्कृति पर गहरा आघात कर रहे हैं।

सन्दर्भ-यह गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के पाठ’व्याकरण परिवार से लिया गया है। इसके लेखक-डॉ. प्रेम भारती हैं।

प्रसंग-इस गद्यांश में अपनी भाषा के प्रयोग करने के लिए सलाह दी गई है।

व्याख्या-लेखक ने क्रियादेवी नामक पात्र द्वारा संज्ञानन्द नामक अपने पति से पूछा है कि वे टेलीविजन पर किसी भी कार्यक्रम को क्यों देख रहे हैं। टेलीविजन पर विदेशी भाषा में किसी भी कार्यक्रम को दिखाया जा रहा है। इस भाषा के प्रयोग के कारण हमने अपने रीति-रिवाजों को भुला दिया है। इस विदेशी भाषा के शब्दों ने अपनी भाषा में मिलकर बड़ा बिगाड़ पैदा किया है। इस तरह इन शब्दों की मिलावट ने हमारी सभ्यता और हमारे आचरण को गहरी चोट पहुँचाई है। हमारे व्यक्तित्व, जाति एवं राष्ट्र सम्बन्धी आचरण और विचारों तक को प्रभावित किया है जिससे हमारी राष्ट्रीय सोच और बौद्धिक विकास में बाधा पड़ी है।

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(2) संस्कृत भाषा इस देश की सबसे प्राचीन भाषा है, जिसका व्यवहार ऋषि-मुनि, विद्वान, कवि सभी करते रहे हैं। इसे देवभाषा भी कहा जाता है। उसकी सन्तानें प्राकृत भाषा एवं पाली भाषा के रूप में प्राप्त होती हैं। प्राकृत भाषाओं से ही अपभ्रंश भाषा का जन्म हुआ है।

संदर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-लेखक ने संस्कृत की प्राचीनता बताई है और उससे जन्म लेने वाली भाषाओं का उल्लेख किया है।

व्याख्या-लेखक स्पष्ट करता है कि संसार की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत है। इस भाषा का प्रयोग ऋषियों, मुनियों,विद्वानों और कवियों ने किया है। इसी भाषा को देवताओं की भाषा भी कहा जाता है। प्राचीन काल के भारतीय समाज के लोगों का आचरण देवताओं के समान था। संस्कृत भाषा की दो

प्रमुख सन्तानें-प्राकृत भाषा और पाली हैं। प्राकृत भाषाओं से ही अपभ्रंश भाषा विकसित हुई है। अर्थात् इन सभी भाषाओं की जननी संस्कृत ही है।

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भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 11 झाँसी की रानी प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 11 Jhansi Ki Rani Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 11 Jhansi Ki Rani Questions and Answers

Class 6 Hindi Chapter 11 Jhansi Ki Rani प्रश्न 1.
दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) रानी के बचपन की सहेलियाँ थीं
(i) चाकू, छुरी
(ii) तोप, बन्दूक,
(iii) बरछी, ढाल
(iv) तीर कमान।
उत्तर
(iii) बरछी, ढाल

(ख) रानी लक्ष्मीबाई बचपन में ही सीख गई थी
(i) गायन कला
(ii) नृत्य कला
(iii) शस्त्र कला
(iv) पाक कला।
उत्तर
(ii) नृत्य कला

(ग) रानी की सखियाँ साथ आई थीं
(i) कुन्ती और सुनीता
(ii) मीना और कांति,
(iii) काना और मुंदरा
(iv) मुन्द्रा और कान्हा।
उत्तर
(iii) काना और मुंदरा

(घ) रानी की तलवार से घायल होकर रण क्षेत्र से भागा था
(i) लार्ड डलहौजी
(ii) लेफ्टिनेंट वॉकर
(iii) जनरल स्मिथ
(iv) रोज।
उत्तर
(ii) लेफ्टिनेंट वॉकर

(ङ) बलिदान के समय वीरांगना लक्ष्मीबाई की उम्र थी
(i) तेईस वर्ष
(ii) बीस वर्ष
(iii) चौबीस वर्ष
(iv) पच्चीस वर्ष।
उत्तर
(i) तेईस वर्ष

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Lakshmi Bai Tejasvi Nari Thi प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) वीर शिवाजी की ……… उनको याद जवानी थी।
(ख) हुई वीरता की ………. के साथ सगाई झाँसी में।
(ग) रानी एक …….. बहुतेरे होने लगे वार पर वार।
(घ) गुमी हुई …………. की कीमत सबने पहचानी थी।
उत्तर
(क) गाथाएँ
(ख) वैभव
(ग) शत्रु
(घ) आजादी।

Lakshmi Bai Tejasvi Nari Thi Vakya Ko Shuddh Kijiye प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) लक्ष्मीबाई ने बचपन में कौन-कौन से शस्त्रों को चलाना सीख लिया था ?
उत्तर
लक्ष्मीबाई ने अपने बचपन में ही बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी चलाना सीख लिया था।

(ख) झाँसी के राजा की मृत्यु होने पर डलहौजी प्रसन्न क्यों हुआ था ?
उत्तर
झाँसी के राजा की मृत्यु होने पर डलहौजी इसलिए प्रसन्न हुआ था क्योंकि राजा नि:सन्तान ही मर गए थे। लावारिस राज्य का अंग्रेजी शासन वारिस बन जाता था। ऐसा नियम उस समय के डलहौजी ब्रिटिश शासक ने बनाया था। यह नियम ब्रिटिश शासकों की राज्य-हड़प नीति कहलाई। डलहौजी इस कारण प्रसन्न हुआ कि अब झाँसी का राज्य भी ब्रिटिश शासन में शामिल हो जाएगा।

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(ग) अंग्रेजों ने भारतीय राज्यों पर किस प्रकार अधिकार किया?
उत्तर
अंग्रेजों ने भारतीय राज्यों को अपने अधिकार में कर लिया क्योंकि भारतीय राज्यों के बहुत से शासक नि:सन्तान थे और उन्हें दत्तक पुत्र लेकर राज्य का वारिस बनाने का कोई अधिकार नहीं है, ऐसा नियम बनाकर राज्य हड़प नीति के अन्तर्गत भारतीय राज्यों को अपने अधीन कर लिया।

(घ) ‘हमको जीवित करने आई, बन स्वतंत्रता नारी थी,’ से कवयित्री का आशय क्या है ?
उत्तर
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी को आजाद बनाए रखने के लिए कुल तेईस वर्ष की उम्र में ही अपना बलिदान कर दिया। वह अत्यन्त तेजस्वी थी। उन्होंने स्वतंत्रता की नारी के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने हम सभी भारतीयों को ‘स्वतंत्रता ही जीवन था इस तरह शिक्षा देने के लिए अवतार लिया था। उन्होंने हमें आजादी का मार्ग दिखाने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उन्हें जो भी हम भारतीयों को सिखाना था, वह अपने बलिदान से सिखा दिया। वह स्वतंत्रता की साक्षात् देवी थी।

(ङ)’झाँसी की रानी’ कविता से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर
‘झाँसी की रानी’ कविता से हमें प्रेरणा मिलती है कि हम अपनी मातृभूमि की आजादी की रक्षा अपने प्राणों की बलि चढ़ा कर भी करें। अन्याय के आगे नझुकें। साथ ही, हमारे अन्दर राष्ट्र प्रेम और राष्ट्रीयता की भावना पुष्ट होती है।

MP Board Class 6th Hindi Chapter 11 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए

(क) हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में।
(ख) जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई, मर्द बनी मर्दानों में।
(ग) घायल होकर गिरी सिंहनी, उसे वीरगति पानी थी।
(घ) मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी।
उत्तर
‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ शीर्षक के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 3,7, 10 व 11 की व्याख्या देखिए।

भाषा की बात

MP Board Class 6 Hindi Chapter 11 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिएभृकुटी, कृपाण, वैभव, वज्र, अश्रुपूर्ण।
उत्तर
कक्षा में अध्यापक महोदय के सहयोग से शुद्ध रूप से उच्चारण सीखिए और अभ्यास कीजिए।

Lakshmi Bai Tejasvi Nari Thi Shuddh Karke Likhiye प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में सही मात्रा लगाकर उनके शुद्ध रूप लिखिए
(i) किमत,
(ii) फीरंगी
(iii) झांसि
(iv) उदीत
(v) खुब
(vi) बून्देले
(vii) शत्रु
(viii) मनूज।
उत्तर-(i) कीमत, (ii) फिरंगी, (ii) झाँसी, (iv) उदित, (v) खूब, (vi) बुन्देले, (vii) शत्रु, (vii) मनुज।

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Lakshmi Bai Tejasvi Nari Thi Vakya Ko Shuddh Karke Likhiye प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में तत्सम और तद्भव शब्द छाँटकर लिखिए
कृपाण, बूढ़ा, मुंह, चिन्ता, पिता, सौभाग्य, शोक, सौख, शत्रु, मनुजा
उत्तर
तत्सम – कृपाण, चिन्ता, सौभाग्य, शोक, शत्रु।
तद्भव – बूढ़ा, मुँह, पिता, सीख, मनुज।

Lakshmi Bai Tejasvi Nari Thi Shuddh Kijiye प्रश्न 4.
सु, वि, सम् उपसर्ग लगाकर तीन-तीन शब्द बनाइए
उत्तर
(क)
(i) सु + भट = सुभट
(ii) सु + मति = सुमति,
(iii) सु + लेख = सुलेख
(iv) सु + मुखी = सुमुखी।

(खा)
(i) वि + राट – विराट
(ii) वि + रूप – विरूप
(iii) वि + जय – विजय
(iv) वि + ख्यात – विख्यात।

(ग)
(i) सम् + मुख – सम्मुख
(ii) सम् + वृद्धि – सम्वृद्धि
(iii) सम् + मिलित – सम्मिलित्
(iv) सम् + ऋद्धि- समृद्धि।

Lakshmi Bai Tejasvi Nari Thi Shuddh Kijiye प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
(i) सिंहासन, (ii) गाथा, (iii) मैदान, (iv) वीरगति (v) स्वतंत्रता।
उत्तर-
(i) राजसभा में सिंहासन पर राजा विराजमान है।
(ii) लक्ष्मीबाई की वीरता की गाथा बुन्देलखण्ड का बच्चा-बच्चा गाता है।
(iii) लड़ाई के मैदान में वीरों ने युद्ध किया।
(iv) अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करते हुए अपने वीरों ने वीरगति पाई थी।
(v) स्वतंत्रता के दीवाने फाँसी के फंदों को चूमते हुए शहीद हो गए।

Jhansi Ki Rani Class 6 Vyakhya प्रश्न 6.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
(i) स्वर्ग सिधारना
(ii) मुँह की खाना।
उत्तर
(i) स्वर्ग सिधारना – मृत्यु प्राप्त करना।
प्रयोग-आजादी की रक्षा के लिए युद्ध करते हुए अनेक वीर स्वर्ग सिधार गए।
(ii) मुंह की खाना- बुरी तरह पराजित होना।
प्रयोग-पाक सेना को भारत की सेना से हर युद्ध में मुँह की खानी पड़ी है।

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झाँसी की रानी सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) ‘सिंहासन हिल छ’, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी।
बूढ़े भारत में भी आई, फिर से नई जवानी थी।
गुमी हुई आजादी की कीमत सबने पहचानी थी।
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।1।

शब्दार्थ-राजवंशों ने = राजा-महाराजाओं ने। भृकुटी = भौंहें (क्रोध में भर उठे थे)। गुमी हुई = खोई हुई। फिरंगी = अंग्रेजों ने।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘झाँसी की रानी’ नामक पाठ से ली गई हैं। इसकी रचयिता ‘श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान’ हैं।

प्रसंग-यहाँ पर कवयित्री ने झाँसी की रानी की वीरता का उल्लेख किया है। जब रानी झाँसी के सिंहासन पर बैठी तो उन्होंने अंग्रेजों से अपने देश को आजाद कराने के लिए उनसे युद्ध किया।

व्याख्या-जब लक्ष्मीबाई झाँसी की रानी बनी तो उन्होंने भारतीय जनता में आजादी का मन्त्र फूंक दिया। अंग्रेजों के द्वारा गुलाम बनाये गये राजाओं ने भी अंग्रेजों से युद्ध करने का संकल्प लिया। क्रोध में उनकी भौहें तन उठी और देश में उथल-पुथल मच गई। भारत जो आजादी की आशा ही छोड़ चुका था उसमें एक नई आशा जागी। अब सबको लग रहा था कि अपनी आजादी जो उन्होंने खो दी थी वह अत्यन्त कीमती थी। अब सबने भारत से अंग्रेजों को खदेड़ने का निश्चय कर लिया। इस प्रकार सन् 1857 में फिर से अतीत के गौरव की वह तलवार युद्ध में चमक उठी। इस कहानी को बुन्देलखण्ड के हरबोले (गवैये) गाते हैं कि झाँसी की रानी ने अंग्रेजों के साथ पुरुषों की भांति जमकर युद्ध किया था।

(2) कानपुर के नाना की मुंह बोली बहिन छबीली थी।
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी।
नाना के संग पढ़ती थी वह, नाना के संग खेली थी।
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी, उसकी यही सहेली थी।
वीर शिवाजी की गाथाएँ, उसको याद जबानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।2।

शब्दार्थ-सन्तान = पुत्र-पुत्री। गाथाएँ = कहानियाँ । कृपाण = तलवार।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लक्ष्मीबाई के साहस और वीरता का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-लक्ष्मीबाई कानपुर के नाना साहब की मुंहबोली बहिन थीं। उन्होंने बचपन में उनका नाम छबीली रखा था। लक्ष्मीबाई अपने पिता की इकलौती सन्तान थीं। वह बचपन में नाना के साथ पढ़ती थीं और उन्हें के साथ खेलती थीं। बचपन में उनके प्रिय खेल थे बरछी, बाल, तलवार और कटारों से खेलना। यही उनके खिलौने थे और यही उन्हें अपनी सहेलियों की तरह प्रिय थे। लक्ष्मीबाई बचपन से साहसी थीं। वीर शिवाजी की वीरता की कहानियाँ उन्हें बचपन से ही याद थीं। यह कहानी बुन्देलखण्ड के हरबोले बड़े जोर-शोर से गाते हैं कि लक्ष्मीबाई मदों की तरह अंग्रेजों से खूब लड़ी थीं।

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(3) हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में।
ब्याह हुआ, रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में।
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में।
सुभट-बुन्देलों की विरुदावलि-सी वह आईझाँसी में।
चित्रा ने अर्जुन को पाया शिव से मिली भवानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।3।

शब्दार्थ-वैभव = सम्पन्नता। विरुदावलि – प्रशंसा के गीत। भवानी = पार्वती जी।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में लक्ष्मीबाई के विवाह का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-लक्ष्मीबाई वीरता की साकार मूर्ति थी। उनकी सगाई झाँसी के राजा के साथ हो गई और वे विवाह करके झाँसी की रानी बन गई। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वीरता का विवाह सम्पन्नता के साथ हुआ हो। राजभवन में बधाइयाँ बर्जी, खूब खुशियाँ मनाई गई। भाट लोग उनकी प्रशंसा के गीत गाते थे। उन्होंने झाँसी के राजा को उसी प्रकार प्राप्त किया था जैसे चित्रा ने अर्जुन को और पार्वती ने शंकर जी को प्राप्त किया था। यह कहानी बुन्देलखण्ड के हरबोले गाते हैं। झाँसी की रानी पुरुषों के समान बड़ी वीरता से लड़ी थी।

(4) उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियालीछाई।
किन्तु काल-गति चुपके चुपके, काली घटा घेर लाई।
तीर चलाने वाले कर में, उसे चूड़ियाँ कब भाई।
रानी विधवा हुई हाय ! विधि को भी नहीं दया आई।
निःसंतान मरे राजाजी, रानी शोक समानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।4।

शब्दार्थ-उदित = उदय। मुदित = प्रसन्न। उजियाली = चमक,खुशियाँ । कालगति = मृत्यु की गति । काली घटा = दु:ख के बादल। कर हाथ। विधि=विधाता। शोक= दुःख।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में लक्ष्मीबाई के जीवन में आये दुःखों का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-रानी जब विवाह करके झाँसी आई तो ऐसा लग रहा था मानो सौभाग्य उदय हो गया है। महल में प्रसन्नता का वातावरण था किन्तु काल की गति को कोई नहीं जान सकता। वहाँ दु:ख के बादल कब छा गए किसी को कुछ भी पता न चला। विधाता को भी रानी के तीर चलाने वाले हाथों में चूड़ियाँ नहीं सुहाई। राजा की असमय मृत्यु से रानी विधवा हो गई। उनके कोई सन्तान भी नहीं थी। अब रानी के शोक का ठिकाना नहीं था। ऐसा बुन्देलखण्ड हरबोले गाते हैं। झाँसी की रानी ने अंग्रेजों से पुरुषों की भाँति वीरता से युद्ध किया।

(5) बुङ्गमा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हर्षाया।
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया।
फौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया।
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज झाँसी आया।
अश्रुपूर्ण रानी ने देखा, झाँसी हुई विरानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।5।

शब्दार्थ-हर्षाया = प्रसन्न हुआ। दुर्ग = किला। लावारिस = जिसका कोई उत्तराधिकारी न हो। वारिस = उत्तराधिकारी। वीरानी = परायी।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में अंग्रेजों के खिलाफ रानी के द्वारा युद्ध करने का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-जब राजा की मृत्यु हो गई तो अंग्रेज गवर्नर डलहौजी बड़ा प्रसन्न हुआ। उसने सोचा कि अब झाँसी का राज्य हड़पने का अच्छा मौका है। उसने अपनी फौजें झाँसी की ओर भेज दर्दी और किले पर अपना झण्डा फहरा दिया। वह लावारिस झाँसी का वारिस (मालिक) बन बैठा। रानी को इससे बड़ी भारी पीड़ा हुई। आँखों में आँसू भर कर उसने देखा कि झाँसी परायी हुई जा रही है। बुन्देलखण्ड के हरबोले गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मर्दो की भाँति अंग्रेजों से वीरतापूर्वक युद्ध किया।

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(6) छिनी राजधानी देहली की, लिया लखनऊ बातोंबात।
कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर पर भी घात।
उदैपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक की कौन बिसात।
जबकि सिंध, पंजाब, ब्रह्म पर,अभी हुआ था बजनिपात।
बंगाल, मद्रास आदि की, भी तो यही कहानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।6।

शब्दार्थ-घात = निशाना लगाना। विसात – ताकत। बज-निपात = बिजली टूटना।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में अंग्रेजों द्वारा भारत में अपने शासन को किस तरह स्थापित किया गया। इसका वर्णन किया गया है।

व्याख्या-अंग्रेजों ने दिल्ली, लखनऊ को बड़ी आसानी से अपने कब्जे में कर लिया, उन्होंने पेशवा को बिठूर में कैद कर लिया। नागपुर, उदयपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक आदि का तो कहना ही क्या उन्होंने सिंध, पंजाब, ब्रह्मपुत्र, बंगाल, मद्रास आदि नगरों समेत पूरे भारत को अपने अधीन कर लिया। बुन्देलखण्ड के हरबोले इसी कहानी को गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मर्दो की तरह साहस से अंग्रेजों से खूब डटकर युद्ध किया था।

(7) इनकी गाथा छोड़ चलें हम, झांसी के मैदानों में।
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई, मर्द बनी मर्दानों में।
लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में।
रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वन्द्व असमानों में।
जख्मी होकर वॉकर भागा उसे अजब हैरानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।7।

शब्दार्थ-गाथा = कथा, कहानी। द्वन्द्व = दो व्यक्तियों का परस्पर युद्ध। असमान = बराबर नहीं। अजब = अनोखा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में रानी लक्ष्मीबाई के युद्ध कौशल का सजीव वर्णन किया गया है।

व्याख्या-रानी लक्ष्मीबाई की वीरता और उनके अद्भुत युद्ध कौशल की कहानियाँ झाँसी के मैदानों में बिखरी पड़ी हैं। युद्ध के दौरान वे पुरुष रूप धारण कर कहर बरपाती थी। अंग्रेजों से छिड़े भीषण युद्ध में अंग्रेजों की सेना का लेफ्टिनेंट वॉकर रानी से युद्ध करने के लिए आगे आया। रानी ने अपनी चमचमाती तलवार खींच ली और इसके साथ ही दो बिना बराबरी के योद्धाओं (एक पुरुष व एक महिला) में युद्ध प्रारम्भ हो गया किन्तु रानी लक्ष्मीबाई के रण-कौशल के आगे उसकी एक न चली और वह शीघ्र ही घायल होकर मैदान से भाग गया। उसे एक महिला के यूँ वीरता-प्रदर्शन पर काफी आश्चर्य था। बुन्देलखण्ड के हरबोले इसी कहानी को गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मदों की तरह साहस से अंग्रेजों से खूब डटकर युद्ध किया था।

(8) रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार।
घोड़ा थककर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार।
यमुना तट पर अंग्रेजों ने, फिर खाई रानी से हार।
विजयी रानी आगे चल दी किया ग्वालियर पर अधिकार।
अंग्रेजों के मित्र, सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुंह, हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।8।

शब्दार्थ-निरंतर = लगातार । तत्काल = तुरन्त, जल्दी ही। सिधार = मरकर। रजधानी = राजधानी।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई के अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष की अमर गाथा का सुन्दर वर्णन किया है।

व्याख्या-झाँसी पर जब अंग्रेजों ने अपना शासन स्थापित कर लिया तो रानी लक्ष्मीबाई ने उनके विरुद्ध युद्ध का बिगुल बजा दिया। इसी क्रम में वह अपनी एक छोटी-सी टुकड़ी के साथ लगभग सौ मील का लम्बा सफर तय करके कालपी आ पहुँची। इतनी लम्बी दूरी और वह भी लगातार, अत्यधिक थकान के कारण रानी का प्रिय घोड़ा बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा और अगले ही पल उसकी मृत्यु हो चुकी थी। घोड़े की मृत्यु से रानी को झटका लगा किन्तु उसने हिम्मत नहीं हारी। इस बीच अंग्रेजों को रानी के कालपी पहुँचने की सूचना मिल चुकी थी।

यमुना के किनारे अंग्रेजों और रानी के मध्य युद्ध हुआ। फिर से रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए और उन्हें पराजय का मुँह देखने के लिए मजबूर कर दिया। अंग्रेजों को धूल चटाने के पश्चात् बड़े मनोबल व आत्मविश्वास के साथ रानी लक्ष्मीबाई ने कालपी से ग्वालियर की ओर कूच किया और ग्वालियर पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। रानी के हाथों परास्त ग्वालियर के पूर्व राजा सिंधिया, जो अंग्रेजों का मित्र भी था को अपनी राजधानी छोड़कर भाग जाना पड़ा था। बुन्देलखण्ड के हरबोले इसी कहानी को गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मर्दो की तरह साहस से अंग्रेजों से खूब डटकर युद्ध किया था।

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(9) विजय मिली पर अंग्रेजों की फिर सेना घिर आई थी।
अब जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुंह की खाई थी।
काना और मुंदरा सखियाँ रानी के संग आई थीं।
युद्ध क्षेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी।
पर पीछे छूरोज आ गया, हाय ! घिरी अब रानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।91

शब्दार्थ-विजय = जीत। सम्मुख = सामने। मुँह की खाना = पराजित होना।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में रानी और उसकी सहेलियों द्वारा अंग्रेजों के दाँत खट्टे करने व रानी के दुश्मनों के मध्य घिर जाने का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-रानी लक्ष्मीबाई से मिली करारी हार से बौखलाकर अंग्रेजों ने अब बहुत बड़ी सेना लड़ने के लिए भेजी। इस बार अंग्रेजी सेना का प्रमुख जनरल स्मिथ था, किन्तु उसकी एक न चली और रानी लक्ष्मीबाई और उनकी दो सहेलियों काना और मुन्दरा ने युद्ध के मैदान में अंग्रेजी सेना पर कहर बरपाते हुए जनरल स्मिथ को पराजित कर दिया। पर देखते ही देखते एक नये दल-बल के साथ पीछे से यूरोज लड़ने के लिए युद्ध-मैदान पर आ पहुँचा। रानी और उसकी छोटी-सी सेना अब बुरी तरह घिर चुकी थी। बुन्देलखण्ड के हरबोले इसी कहानी को गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मदों की तरह साहस से अंग्रेजों से खूब डटकर युद्ध किया।

(10) तो भी रानी मार काटकर चलती बनी सैन्य के पार।
किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार।
घोड़ा अड़ा नया घोड़ा था, इतने में आ गये सवार।
रानी एक शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार।
घायल होकर गिरी सिंहनी, उसे वीरगति पानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।10।

शब्दार्थ-सैन्य = सेना। विषम = भयानक। सवार = घुड़सवार सैनिक । वीरगति = युद्ध में बहादुरी से लड़ते हुए मृत्यु को प्राप्त हो जाना।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-झाँसी पर जब अंग्रेजों ने आक्रमण किया तो रानी | लक्ष्मीबाई ने उनका बड़ी बहादुरी से मुकाबला किया। रानी का घोड़ा कालपी में आकर मर गया तब उन्होंने नया घोड़ा लिया और अंग्रेजों की सेना में मार-काट मचा दी।

व्याख्या-रानी शत्रुओं से घिरी हुई थी किन्तु वह बड़ी वीरता से उन्हें मारकर अपने लिये रास्ता निकाल लेती थी किन्तु, एक नाले के पास घोड़े के अड़ जाने से शत्रुओं ने उसे फिर से घेरने का मौका पा लिया। युद्ध में रानी बुरी तरह घायल हो गई। इस प्रकार वह बहादुर सिंहनी लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गई। बुन्देले हरबोले आज भी उसकी गौरव गाथा गाकर बताते हैं कि रानी लक्ष्मीबाई ने बड़ी बहादुरी से युद्ध किया था।

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(11) रानी गई सिधार, चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी।
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी।
अभी अ कुल तेईस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी।
हमको जीवित करने आई, बन स्वतंत्रता नारी थी।
दिखा गई पथ सिखा गई, हमको जो सीख सिखानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी। 11।

शब्दार्थ-सिधार = स्वर्ग सिधार गई। दिव्य = अलौकिक, दैवीय। तेज = प्रकाश (आत्मा का प्रकाश परमात्मा के प्रकाश से मिल गया)। मनुज = मनुष्य। अवतारी = अवतार लेने वाली देवी। स्वतन्त्रता नारी= स्वतन्त्रता की देवी। पथ-रास्ता। सीख = शिक्षा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में कवयित्री ने झाँसी की रानी की वीरता का वर्णन बड़ी भावपूर्ण शैली में किया है।

व्याख्या-झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई स्वर्ग सिधार गई। अब उसकी अलौकिक सवारी स्वर्ग का विमान था। उसकी आत्मा का तेज परमात्मा के तेज से मिल गया। रानी ने मोक्ष प्राप्त किया। वह इसकी सच्ची अधिकारिणी भी थीं। तेईस साल की उम्र में उसकी वीरता को देखकर ऐसा लगता था कि वह कोई मनुष्य नहीं थी बल्कि अवतार लेकर कोई देवी आई थी। वह स्वतन्त्रता की देवी हमें एक नया जीवन देने आई थीं। वह हमें स्वतन्त्रता का रास्ता दिखा गई और अपने देश को स्वतन्त्र कराने का पाठ पढ़ा गई। बुन्देलखण्ड के हरबोले इस कहानी को गाते हैं कि वह मर्दो जैसे युद्ध करने वाली रानी जो बड़ी वीरता से लड़ी थी, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ही थी।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 1 विजयी विश्व तिरंगा प्यारा प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 1 Vijayi Vishwa Tiranga Pyara Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 1 Vijayi Vishwa Tiranga Pyara Questions and Answers

Bhasha Bharti Class 6 प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) सदा शक्ति …………… वाला।
(ख) प्रेम सुधा …………… वाला।
(ग) स्वतन्त्रता के …………..रण में।
(घ) मिट जाय भय …………… सारा।
(ङ) तब होवे प्रण …………… हमारा।
उत्तर
(क) बरसाने
(ख) सरसाने
(ग) भीषण
(घ) संकट
(ङ) पूर्ण।

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Bhasha Bharti Class 6 Chapter 1 प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) कवि के अनुसार हमारा ध्येय क्या है?
उत्तर
कवि के अनुसार हमारा ध्येय पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त करना है।

(ख) झंडे को ऊँचा रखने से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
हमारा देश हमेशा ही शक्ति का प्रेरणा स्रोत, प्रेमरूपी अमृत से संचित करने वाला, मातृभूमि के लिए वीरों के तन-मन से प्यारा है। इन्हीं कारणों से भारतवर्ष की विश्व में गौरवपूर्ण प्रतिष्ठा है। कवि चाहता है कि ऐसे गौरवशाली देश का राष्ट्रीय झण्डा ‘तिरंगा’ सदैव ऊँचा ही रहे।

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(ग) कवि ने झंडे को ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ क्यों कहा है?
उत्तर
कवि ने भारतीय झण्डे ‘तिरंगे’ को ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ इसलिए कहा है क्योंकि कवि का मानना है कि ‘तिरंगा’ हमारी राष्ट्रीय भावनाओं का प्रमुख प्रेरणा स्रोत है। इसको देखकर प्रत्येक भारतीय स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है।

(घ) कवि वीरों को क्यों बुला रहा है ?
उत्तर
कवि मातृभूमि को स्वतन्त्र कराने के उद्देश्य से स्वयं के प्राणों की आहुति के लिए वीरों का आह्वान कर रहा है।

(ङ) तिरंगे को देखकर वीरों के मन में कौन-से भाव जाग्रत होते हैं ? .
उत्तर
तिरंगा विश्व में हमारी शान एवं विजय का प्रतीक है। यह वीरों के मन में शक्ति, जोश, आनन्द एवं साहस के भावों का संचार करने वाला है। तिरंगा हमें अपने देश की रक्षार्थ अपनी जान तक बलिदान करने के लिए प्रतिपल प्रेरित करता रहता है।

(च) स्वतंत्रता संग्राम में शत्रु की दशा कैसी है ?
उत्तर
स्वतंत्रता संग्राम में माँ भारती के वीर सपूतों के साहस व पराक्रम को देखकर शत्रु काँपने लगते हैं।

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Class 6 Hindi Bhasha Bharti प्रश्न 3.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए

(क) मातृभूमि का तन-मन सारा।
झंडा ऊँचा रहे हमारा॥

(ख) स्वतंत्रता के भीषण रण में।
लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में।

(ग) इस झंडे के नीचे निर्भय,
रहे स्वतंत्र यह अविचल निश्चय,

(घ) इसकी शान न जाने पाए.
चाहे जान भले ही जाए।

उत्तर
खण्ड ‘क’ : सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या देखें।

भाषा की बात

Vijayi Vishwa Tiranga Pyara Class 6 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
स्वतन्त्रता, मातृभूमि, निर्भय, निश्चय, ध्येय, प्रण।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से अपनी कक्षा में शुद्ध उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।

Class 6th Hindi Bhasha Bharti प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए
पूरण, सान, विरो, ऊंचा।
उत्तर
पूर्ण, शान, वीरो, ऊँचा।

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Class 6 Hindi Chapter 1 Vijayi Vishwa Tiranga प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए
सुधा, विश्व, झंडा, माता, शत्रु, तन।
उत्तर
सुधा – अमृत, अमिय
विश्व. – जगत, संसार
झंडा- ध्वज, पताका
माता – जननी, माँ
शत्रु – बैरी, अरि
तन – देह, शरीर।

MP Board Class 6 Hindi Bhasha Bharti Solution प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिएस्वतंत्र, शत्रु, नीचे, विजय।
उत्तर
शब्द – विलोम
स्वतंत्र – परतंत्र
शत्रु – मित्र

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विजयी विश्व तिरंगा प्यारा सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) विजयी विश्व तिरंगा प्यारा।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा॥
सदा शक्ति बरसाने वाला,
प्रेम सुधा सरसाने वाला;
वीरों को हरषाने वाला,
मातृभूमि का तन-मन सारा।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा॥

शब्दार्थ-विजय = जीत प्राप्त करने वाला। तिरंगा = तिरंगा झण्डा । सुधा = अमृत। सरस = सुन्दर। हरषाना = खुश करना। तन = शरीर। सदा = हमेशा।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषा भारती’ के ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ नामक पाठ से अवतरित है। यह श्री श्यामलाल ‘पार्षद’ द्वारा रचित है।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में विश्व विजय के प्रतीक रूप में तिरंगे झण्डे के गौरव का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-कवि की यह हार्दिक इच्छा है कि सारी दुनिया में जीत प्राप्त करने वाला हमारा यह तिरंगा हमेशा सबसे ऊँचाई पर फहराता रहे। हमेशा शक्ति का प्रेरणास्रोत, प्रेम रूपी अमृत से संचित करने वाला, वीरों को प्रमुदित (प्रसन्न) करने वाला एवं मातृभूमि के लिए तन तथा मन के समान प्यारा यह तिरंगा सदा दुनिया में सबसे ऊँचाई पर शान से फहराता रहे।

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(2) स्वतन्त्रता के भीषण रण में,
लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में;
काँपे शत्रु देखकर मन में,
मिट जाये भय संकट सारा।
झण्डा ऊँचा रहे हमारा॥

शब्दार्थ-भीषण रण = भयंकर संग्राम लखकर = देखकर । क्षण-क्षण = प्रत्येक पल। संकट = मुसीबत।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने तिरंगे झण्डे को जोश तथा प्रेरणा का उद्गम स्थल ठहराया है।

व्याख्या-आजादी के संग्राम को देखकर देश में वीरों का जोश हर क्षण बढ़ता जाता है तथा उनके जोश को देखकर ही दुश्मन भयभीत होकर मन ही मन काँपने लगता है एवं जो सब प्रकार के डर तथा मुसीबतों को समाप्त करने वाला है। ऐसा हर क्षण हमारे मन में जोश तथा उमंग का संचार करने वाला प्रिय तिरंगा झण्डा सारी दुनिया में सबसे ऊँचाई पर हमेशा फहराता रहे।

(3) इस झण्डे के नीचे निर्भय,
रहे स्वतन्त्र यह अविचल निश्चय;
बोलो भारत माता की जय,
स्वतन्त्रता है ध्येय हमारा।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा॥

शब्दार्थ-निर्भय = बिना डर के। संकल्प = प्रतिज्ञा। ध्येय = उद्देश्य, लक्ष्य।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने आजादी के लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाने का संकेत दिया है।

व्याख्या-इस झण्डे के नीचे रहते हुए निर्भय होकर हम स्वतन्त्रता प्राप्त करने के लक्ष्य पर डटे रहें। आओ भारत माता की जय बोलते हुए हम संकल्प (प्रतिज्ञा) करें कि स्वतन्त्रता प्राप्त करना ही हमारा सबसे ऊँचा उद्देश्य है। संगठन, हेलमेल तथा निडरता का प्रतीक तिरंगा सारी दुनिया में सबसे ऊँचाई पर लहराता रहे।

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(4) आओ प्यारे वीरो, आओ,
देश धर्म पर बलि-बलि जाओ;
एक साथ सब मिलकर गाओ,
प्यारा भारत देश हमारा।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा।’

शब्दार्थ-बलि = कुर्बान, बलिदान। सन्दर्भ=पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने वीरों (बहादुरों) को अपने देश की आजादी के लिए अपना बलिदान करने को कहा है।

व्याख्या-भारत के प्यारे वीरो! आओ तथा देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दो अथवा देश पर कुर्बान हो जाओ। सब समवेत स्वर में कहो कि भारत हमारा प्यारा देश है। समस्त विजय भावना का प्रतीक हमारा प्यारा झण्डा सबसे ऊँचाई पर लहराकर हमें जोश प्रदान करता रहे।

(5) इसकी शान न जाने पाये,
चाहे नान भले ही जाये;
विश्व विजय करके दिखलाएँ,
तब होवे प्रण पूर्ण हमारा।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा॥

शब्दार्थ-शान = गौरव, प्रतिष्ठ। जान = प्राण। प्रण – प्रतिज्ञा। सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि ने प्रस्तुत पद्यांश में तिरंगे के गौरव को चिरस्थायी बनाने का आह्वान किया है।

व्याख्या-भारत की शान एवं गौरव के प्रतीक इस तिरंगे की प्रतिष्ठा में तनिक भी कमी नहीं आनी चाहिए भले ही इसकी रक्षा के लिए हमें अपने प्राणों को कुर्बान करना पड़े। जब हम वास्तव में विजय प्राप्त कर लेंगे अर्थात् देश आजाद हो जायेगा तभी हमारा प्रण (प्रतिज्ञा) पूरा ठहराया जाएगा।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 8 संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 8 Sangeet Shiromani Swami Haridas Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 8 Sangeet Shiromani Swami Haridas Questions and Answers

MP Board Class 6 Hindi Chapter 8 प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) सम्राट अकबर के नौ रत्नों में से एक थे
(i) मोहन
(ii) तानसेन
(iii) रूपा
(iv) अल्लादीन।
उत्तर
(ii) तानसेन

(ख) दीपक को प्रज्ज्वलित करने वाला राग है
(i) दीपक राग
(ii) ठुमरी,
(iii) राग भैरवी
(iv) मियाँ मल्हार।
उत्तर
(i) दीपक राग

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Bhasha Bharti Class 6 Chapter 8 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) तानसेन के गुरु का नाम ……..था।
(ख) अकबर ने स्वामी हरिदास को ………….. की उपाधि प्रदान की।
(ग) रूपा ने ………….गाकर तानसेन के प्राणों की रक्षा की।
(घ) गुरु जी …………में संगीत कभी नहीं सुना सकते।
उत्तर
(क) स्वामी हरिदास
(ख) संगीत शिरोमणि
(ग) मेघ मल्हार
(घ) राजमहल।

Class 6 Hindi Chapter 8 MP Board प्रश्न 3.
बताइए, किसने किससे कहा

(क) “तानसेन ! यह हमारी खुशकिस्मती है कि हम इस मुल्क के बादशाह हैं।”
(ख) “क्या बहन को भाई पर तरस नहीं आता ? भाई के प्राणों की रक्षा बहन नहीं करेगी ?”
(ग) “तानसेन ! राजमहल का सम्मान और नवरत्नों में स्थान मिल जाना सदा सुखकारी नहीं होता।”
उत्तर
(क) सम्राट अकबर ने तानसेन से
(ख) तानसेन ने अपनी गुरु बहन रूपा से
(ग) स्वामी हरिदास ने अपने शिष्य तानसेन से।

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 8 प्रश्न 4.
चार से पाँच वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) सम्राट अकबर किस पवित्र जमीन को सलाम करते हैं और क्यों?
उत्तर
सम्राट अकबर हिन्दुस्तान की पवित्र जमीन को सलाम करते हैं। यह देश संसार के सभी देशों में अनोखा है। यहाँ के रीति-रिवाज, कला, संगीत एवं यहाँ की अनेक बोलियों में मिठास है। यहाँ का संगीत पूर्ण रूप से विकसित है, नृत्य में भी भावों को साकार किया जाता है। साथ ही यहाँ के ग्रन्थों में अद्वितीय ज्ञान भरा पड़ा है। इसलिए यहाँ की यह भूमि पवित्र है। अत: इस पवित्र जमीन को वह सलाम करता है।

(ख) दीपक राग प्राणों को संकट में डाल सकता है, कारण बताइए।
उत्तर
दीपक राग प्राण लेवा राग है। इस राग से गायक के तन में गर्मी बहुत बढ़ जाती है। दीपक राग के गाने का मतलब सीधा मृत्यु को ही निमन्त्रण है। इस दीपक राग के गाने से पहले मेघ मल्हार गीत गाए जाने का प्रबन्ध कर लेना चाहिए। जब दीपक राग गायक के शरीर में आग पैदा करने लगे, तब मेघ मल्हार गाकर, गायक के प्राणों की रक्षा करनी पड़ती है।

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(ग) स्वामी हरिदास संगीत की शिक्षा को ‘समाज’ क्यों | कहते थे?
उत्तर
स्वामी हरिदास ने संगीत को समाज से जोड़ दिया है क्योंकि उनके संगीत में जो मिठास है, वह अत्यन्त प्रभावकारी है। सभी लोग इस संगीत शिरोमणि के संगीत से प्रभावित हो उठते हैं, इसका केवल यही कारण है कि उन्होंने संगीत की शिक्षा को समाज से जोड़कर देखा है। संगीत के लाभ स्वयं अपने स्वार्थ के लिए नहीं, अपनी प्रसिद्धि और सम्मान के लिए नहीं-संसार के स्वामी जगन्नियंता को रिझाने के लिए वे गाते हैं। अत: उन्होंने संगीत की शिक्षा को ‘समाज’ कहा है।

(घ) दीपक राग सुनने के पीछे सम्राट् का क्या भाव था? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
दीपक राग सुनने के पीछे सम्राट् का भाव यह था कि वह तानसेन के साथ ही उसके गुरु स्वामी हरिदास को भी अपने राज दरबार में सम्मानित ‘नवरत्न’ के रूप में नियुक्त कर लेगा जिससे दीपक राग को सुनने के लिए मेघ मल्हार के गाने की पूर्ति स्वामी हरिदास से हो जाएगी। परन्तु ऐसा नहीं हो सका क्योंकि स्वामी हरिदास ने तो अपने संगीत को ब्रज विहारी कृष्ण को समर्पित कर दिया था। वे कृष्ण की भक्ति में ही गीत गाते थे। किसी राज दरबार में स्वार्थ या लोभ के कारण नहीं। वास्तविकता तो यह भी थी कि राजा अकबर स्वामी हरिदास की परीक्षा लेना चाहता था कि वे स्वार्थ और लोभ के कारण तो संगीत की शिक्षा नहीं देते।

(ङ) तानसेन और स्वामी हरिदास के गायन में मुख्य अन्तर क्या था ?
उत्तर
तानसेन का गायन भी अच्छा था लेकिन स्वामी हरिदास के गायन का कोई जवाब नहीं था। अर्थात् तानसेन और हरिदास के गायन की तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि तानसेन को तो अपना गीत हिन्दुस्तान के शहंशाह की खुशी के लिए गाना पड़ता था जिससे उसके संगीत में पराधीनता, परवशता आ जाती थी जबकि स्वामी हरिदास जी तो संसार के स्वामी को रिझाने के लिए गाते थे अर्थात् वे अपना गीत गाने के लिए स्वाधीन थे। जब वे चाहते थे, तो गाते थे। किसी के आदेश पर नहीं। यही अन्तर था तानसेन और स्वामी हरिदास के गायन में।

Class 8 Chapter 6 Hindi Bhasha Bharti प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) तानसेन ने अपने गुरु को अन्तर्यामी क्यों कहा?
उत्तर
तानसेन को गुरुदेव स्वामी हरिदास ने बहुत उदास देखा, उसका चेहरा उतरा हुआ था। ऐसा गुरुदेव के द्वारा पूछे जाने पर कि ऐसी क्या बात है जिससे तुम दुःखी प्रतीत हो रहे हो? इसका उत्तर देते हुए तानसेन ने अपने गुरु को निवेदन किया कि हे गुरुदेव, आप तो अन्तर्यामी हो। ऐसा कहते हुए स्पष्ट किया कि सम्राट् अकबर मुझसे (तानसेन से) दीपक राग सुनना चाहते हैं, वह भी आज ही रात को। मुझे बताइए मेघ मल्हार का प्रबन्ध किए बिना दीपक राग कैसे सुनाया जा सकता है। मेरी इस चिन्ता को आपने समझ लिया है, आप वस्तुतः अन्तर्यामी हैं।

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(ख) अकबर ने सम्राट होते हुए स्वयं को बदकिस्मत क्यों कहा?
उत्तर
अकबर ने तानसेन से कहा कि उसने (राजा अकबर ने) तुमसे (तानसेन से) दीपक राग सुनने की फरमाईश इसलिए की थी कि स्वामी हरिदास जी का मेघ मल्हार सुनने का मौका मिलेगा, पर बीच में रूपा के आ जाने से हम आपके गुरु से मेघ मल्हार सुनने से वंचित रह गए। तुम्हारे गुरु की गायकी सुनने की मन में इच्छा है, लेकिन हमारी बदकिस्मती है कि हमारी प्रार्थना उन्होंने स्वीकार नहीं की क्योंकि वे राज भवन में संगीत नहीं गा सकते।

(ग) अकबर ने स्वामी हरिदास के संगीत को ‘जन्नत का संगीत’ क्यों कहा है ?
उत्तर
स्वामी हरिदास ने अपने आश्रम में संगीत सुनाते हुए सेवक वेषधारी सम्राट् अकबर को और तानसेन को उनके हाव-भावों से सही रूप में पहचान लिया। तब स्वामी हरिदास के चरण स्पर्श करते हुए अकबर ने कहा कि आपके संगीत को सुनने का मौका किसी अन्य तरीके से मिलना कठिन था। आज इस अपने नाटक द्वारा तानसेन और उसके सेवक बने अकबर ने उनका संगीत सुन लिया। सचमुच ही गुरुदेव आपका संगीत जन्नत का संगीत है।

Class 6 Bhasha Bharti Chapter 8 प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए

(क) यदि निपुण गायिका रूपा तानसेन की मदद न करती, तो क्या हो सकता था ?
उत्तर

  • तानसेन की मदद रूपा द्वारा न किए जाने पर वह दीपक राग नहीं गाता तो नवरत्नों में से उसे अपमानित करके निकाला जा सकता था।
  • यदि रूपा मदद नहीं करती, और राजहठ के चलते, तानसेन दीपक राग गाता तो उस राग की सिद्धि पर तानसेन के शरीर में अग्नि जल उठती और उसके प्राणों पर संकट आ पड़ता।

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(ख) तानसेन के स्थान पर यदि आप होते, तो प्राणों पर संकट के बाद भी क्या सम्राट् की आज्ञा का पालन करते ?
उत्तर
तानसेन के स्थान पर मेरे होने की स्थिति में तथा प्राणों पर संकट के बाद भी मैं सम्राट् की आज्ञा का पालन करता। क्योंकि मुझे अपने सम्मान का अधिक ख्याल होता। इतने समय तक राजभवन में ‘नवरत्न’ के पद पर रहते हुए परीक्षा की घड़ी आने पर मैं किस प्रकार पीछे हटता। यह तो मेरे स्वाभिमान का प्रश्न बन गया होता।

भाषा की बात

Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 8 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और लिखिए
दृश्य, यशस्वी, सम्राट, वृन्दावन, भैरवी, सिद्धि।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से कक्षा में शुद्ध उच्चारण करने का प्रयास कीजिए और अभ्यास कीजिए। बाद में अपनी पुस्तिका में लिखिए।

Bhasha Bharti Class 8 Chapter 6 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध रूप लिखिए
(1) अन्तयामी, (2) निमनत्रण, (3) प्रतिक्छा, (4) संमान।
उत्तर

  1. अन्तर्यामी
  2. निमन्त्रण
  3. प्रतीक्षा
  4. सम्मान

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MP Board Class 6 Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में विशेषण और विशेष्य बताइए
शब्द-निपुण राधिका, अच्छा भाग्य, सम्राट अकबर, नव
उत्तर
विशेष्य-राधिका, भाग्य, अकबर, रत्न।
विशेषण-निपुण, अच्छा, सम्राट, नव।

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 6 प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के साथ ‘उप’ उपसर्ग लगाकर नए शब्द बनाइए
(1) स्थित, (2) करण, (3) लब्ध, (4) न्यास, (5) वास।
उत्तर

  1. उप + स्थित = उपस्थित
  2. उप + करण = उपकरण
  3. उपलब्ध- उपलब्ध
  4. उप + न्यास- उपन्यास
  5. उप + वास = उपवास।

तानसेन का जीवन परिचय प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(1) संगीत, (2) विधाता, (3) दीवाना, (4) प्रभात।
उत्तर

  1. संगीत-स्वामी हरिदास का संगीत वास्तव में जन्नत का संगीत था।
  2. विधाता-जन्म और मृत्यु तो विधाता का नियम है।
  3. दीवाना-तानसेन के संगीत ने राजदरबार में सभी श्रोताओं को दीवाना बना दिया।
  4. प्रभात-‘प्रभात’ बेला में आश्रम का वातावरण मन को हरने वाला था।

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तानसेन पर प्राणों का संकट क्यों आ गया था प्रश्न 6.
दिए गए अनुच्छेद में यथास्थान विराम चिन्हों का प्रयोग कीजिए
(क) तो इसमें भय कैसा दीपक राग तो तुम्हें आता है सुना देना चिन्ता की क्या बात है
(ख) दीपक राग तो मुझे आता है गुरुदेव आपने ही मल्हार की छत्रछाया में मुझे इस राग का अभ्यास कराया है अगर मल्हार का प्रबन्ध किए बिना दीपक राग सुनाया तो मैं स्वयं भस्म हो जाऊँगा।
उत्तर
(क) तो इसमें भय कसा ? दीपक राग तो तुम्हें आता है; सुना देना। चिन्ता की क्या बात है?
(ख) दीपक राग तो मुझे आता है। गुरुदेव ! आपने ही मल्हार की छत्रछाया में मुझे इस राग का अभ्यास कराया है। अगर मल्हार का प्रबन्ध किए बिना दीपक राग सुनाया, तो मैं स्वयं ही भस्म हो जाऊँगा।

 संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) राजमहल का सम्मान और नवरत्नों में स्थान मिल जाना हमेशा सुखकारी नहीं होता। कभी-कभी वह संकट भी खड़ा कर देता है। जब तुमने दरबारी जीवन का आनंद लिया है तो प्राण-घातक कष्ट भी झेलो।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा भारती’ के पाठ संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास’ से ली गई हैं। इस पाठ के लेखक ‘जयपाल तरंग’ हैं।

प्रसंग-स्वामी हरिदास तानसेन को बताते हैं कि राजदरबारी जीवन सुख और दुःख दोनों को देने वाला है।

व्याख्या-स्वामी हरिदास ने तानसेन को अपनी अनुभूति से बताया कि किसी को यदि राजभवन से सम्मान मिलता है और तुम्हें वहाँ के नवरत्नों में जो स्थान मिला है, वह सदा ही सुख देने वाला नहीं हो सकता। यह दिया गया सम्मान और पद कभी-कभी किसी प्रकार का संकट भी पैदा कर देता है। नतीजा यह होता है कि दरबारी एवं नवरत्नों में स्थान पाने वाले व्यक्ति का जीवन कष्टमय हो जाता है। परन्तु क्योंकि तुमने एक दरबारी का जीवन स्वीकार किया है और उसका आनन्द भी लिया है, तो तुम्हें अवश्य ही प्राणों का नाश करने वाला कष्ट (दुःख) भी भोगना ही चाहिए।

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(2) मैं तुम्हारे यशस्वी होने की कामना करता हूँ। मृत्यु तो विधाता का लेख है। वह अवश्यम्भावी है फिर भी दरबारी जीवन की सत्य-कथा तो समझ ही गए हो ? राजा, जोगी, अग्नि और जल की प्रीति उलटी होती है। इनसे बचकर रहना ही हितकर है।

सन्दर्भ- पूर्व की तरह।

प्रसंग-स्वामी हरिदास तानसेन को यशस्वी होने का आशीर्वाद देते हैं। उन्हें राजा, योगी, अग्नि और जल (इन चार वस्तुओं) से सदैव बचकर रहने की सलाह देते हैं।

व्याख्या-स्वामी हरिदास तानसेन को आशीर्वाद देते हैं कि उसका यश बना रहे। साथ ही यह कामना भी करते हैं कि उसका यश भरा जीवन सदा सुरक्षित रहे। लेकिन मृत्यु के विषय में बताते हैं कि यह तो निश्चित है जो विधाता ने अवश्य ही होने वाली बात बतलायी। लेकिन उन्होंने बताया कि राजदरबार का जीवन कैसा होता है, उसकी सच्ची कहानी तो तुम जान गए होगे। तुम्हें यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि राजा, जोगी, अग्नि और जल से प्रेम करते हो, तो इनका तुम्हारे प्रति उल्टा (कष्टदायी) व्यवहार भी होगा। अर्थात् जो इनके पास रहेगा, उसे ही ये लोग कष्ट देंगे, जलाएँगे और गलाएँगे। अत: इनसे जितना हो सके दूर ही रहना चाहिए।

(3) यह हमारी खुशकिस्मती है कि हम इस मुल्क के बादशाह हैं जिसका दुनिया में कोई जवाब नहीं। हम इस मुल्क की कला को, इसके संगीत को, इसकी मीठी-मीठी बोलियों को, इसकी पुरानी किताबों में छिपे ज्ञान को सबको समझना चाहते हैं।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-राजा अकबर तानसेन से कहते हैं कि वह स्वयं को बड़ा भाग्यशाली मानते हैं कि संसार के अद्वितीय देश हिन्दुस्तान के राजा हैं।

व्याख्या-राजा अकबर तानसेन को अपने मन की बात स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि वह स्वयं को बहुत बड़ा भाग्यशाली मानते हैं कि वह एक ऐसे देश का राजा है जिस देश के मुकाबले का संसार में कोई भी देश नहीं है। राजा ने अपने हृदय की इच्छा प्रकट करते हुए कहा कि वह इस देश की कला, संगीत एवं यहाँ की अनेक बोलियों की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। इस देश की बोलियों में अनोखी मिठास है। यहाँ पुराने ग्रन्थों में छिपे ज्ञान की जानकारी लेकर, उस ज्ञान को अच्छी तरह समझना चाहते हैं।

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(4) स्वामी जी, हम हिन्दुस्तान के रीति-रिवाज और कलाओं की इज्जत करते हैं। उन्हें ऊँचा दर्जा देते हैं। हमें फन है हिन्दुस्तान पर। हम इस पवित्र जमीन को सलाम करते हैं। स्वामी जी ! यह मुल्क संगीत, नृत्य और ज्ञान का भरपूर खजाना है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-राजा अकबर ने स्वामी हरिदास जी से अपन मन की बात स्पष्ट कह दी कि वह इस देश हिन्दुस्तान पर बहुत गर्व अनुभव करता है।

व्याख्या-स्वामी हरिदास जी से राजा अकबर ने कहा कि वह इस देश के रीति-रिवाजों, तीज-त्यौहारों और कलाओं का बड़ा सम्मान करता है। उन्हें उच्च दर्जे पर रखता है। वह इसकी पवित्र भूमि को बार-बार प्रणाम करता है। वह अचम्भा करते हुए कहता है कि इस देश में संगीत, नृत्य और उच्चकोटि का ज्ञान वास्तव | में अनोखा है, इन सभी से भरपूर यह देश विश्व में अकेला है।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 3 हार की जीत प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 3 Haar Ki Jeet Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 3 Haar Ki Jeet Questions and Answers

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 3 प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) बाबा भारती रहते थे
(i) कुटिया में
(ii) मन्दिर में,
(iii) राजमहल में
(iv) बड़े भवन में।
उत्तर-
(ii) मन्दिर में

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(ख) बाबा भारती को खड्ग सिंह ने रोका
(i) अपाहिज बनकर,
(ii) वैद्य बनकर,
(iii) किसान बनकर
(iv) पुजारी बनकर।
उत्तर
(i) अपाहिज बनकर

MP Board Class 6 Hindi Chapter 3 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) जो उसे एक बार देख लेता है, उसके हृदय पर उसकी ……….. अंकित हो जाती है।
(ख) बाबा भारती और खड्ग सिंह ……..” में पहुंचे।
(ग) ओ बाबा ! इस …..” की सुनते जाना।
(घ) अब कोई .की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।
उत्तर
(क) छवि
(ख) अस्तबल
(ग) कैंगले
(घ) गरीबों।

Class 6 Hindi Chapter 3 Haar Ki Jeet प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) बाबा भारती अपने घोड़े को किस नाम से पुकारते थे?
उत्तर
बाबा भारती अपने घोड़े को ‘सुलतान’ नाम से पुकारते थे।

(ख) खखड्ग सिंह कौन था ?
उत्तर
खड्ग सिंह उस इलाके का कुख्यात डाकू था।

(ग) खड्ग सिंह बाबा भारती के पास क्यों गया था ?
उत्तर
खड्ग सिंह बाबा भारती के पास उनके घोड़े सुलतान को देखने की चाह से गया था।

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(घ) खड्ग सिंह ने जाते समय बाबा भारती से क्या कहा था ?
उत्तर
खड्ग सिंह ने जाते समय बाबा भारती से कहा कि “बाबा जी, मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूंगा।”

(ङ) खड्ग सिंह ने अपने को किसका सौतेला भाई बताया था ?
उत्तर
खड्ग सिंह ने अपने को दुर्गादत्त वैद्य का सौतेला भाई बताया था।

Class 6th Hindi Chapter 3 MP Board प्रश्न 4.
तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) बाबा भारती की दिनचर्या क्या थी?
उत्तर
बाबा भारती गाँव से बाहर एक छोटे से मन्दिर में रहते थे और भगवान का भजन करते थे। अपने घोड़े सुलतान को अपने हाथ से खरहरा करते थे। वे खुद ही उसे दाना खिलाते थे। उस घोड़े के बिना उनका जीवित रहना असम्भव ही था।

(ख) “विचित्र जानवर है, देखोगे तो प्रसन्न हो जाओगे” यह कथन बाबा भारती ने किससे और क्यों कहा?
उत्तर
“विचित्र जानवर है, देखोगे तो प्रसन्न हो जाओगे।” यह कथन बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कहा। बाबा भारती ने यह वाक्य इसलिए कहा कि खड्गसिंह को ‘सुलतान’ को देखने की चाह थी। जो भी कोई उनके घोड़े की प्रशंसा करता, वे अति प्रसन्न होते और खुशी से उसके गुणगान करने लगते।

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(ग) अपाहिज ने बाबा भारती से क्या कहा ?
उत्तर
अपाहिज ने बाबा भारती से कहा कि, “ओ बाबा! इस कैंगले की सुनते जाना।” वह वृक्ष की छाया में पड़ा कराह . रहा था और उसने बाबा से कहा कि वह दुखिया है, वह दया का पात्र है। उसे वहाँ से तीन मील दूर ‘रामवाला’ तक जाना है। अत: उसे घोड़े पर चढ़ा लें। परमात्मा उनका भला करेगा।

(घ) बाबा भारती ने खड्गसिंह से घटना को किसी के सामने प्रकटन करने के लिए क्यों कहा?
उत्तर
अपाहिज बने खड्गसिंह को बाबा भारती ने अपने घोड़े पर बैठा लिया। उसने घोड़े की पीठ पर बैठते ही लगाम को झटका देकर छीन लिया और घोड़े पर तन कर बैठ गया और घोड़े को दौड़ा लिए जा रहा है। तब बाबा ने खड्गसिंह से तेज आवाज में कहा कि वह इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करे; क्योंकि इस घटना को जानकर कोई भी आदमी किसी गरीब पर विश्वास नहीं करेगा।

Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 3 प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) क्या खड्गसिंह द्वारा अपाहिज बनकर घोड़ा ले जाना उचित था ?
उत्तर
खड्गसिंह बाबा भारती के ‘सुलतान’ नामक घोड़े को किसी भी तरह प्राप्त कर लेना चाहता था। वह इलाके का प्रसिद्ध डाकू था। उसने अपाहिज के रूप में अपने आपको प्रदर्शित किया। बाबा भारती को उस अपाहिज पर दया आ गई और अपने घोड़े पर बैठा लिया। थोड़ी ही देर में घोड़े की लगाम को झटक कर वह घोड़े को वश में कर चल दिया। इस तरह उसका उस घोड़े को ले जाना उचित नहीं था, क्योंकि जो भी कोई इस घटना को सुनेगा, वह भी इस कृत्य को अच्छा नहीं बताएगा, क्योंकि फिर गरीब की कोई भी व्यक्ति सहायता करने के लिए तैयार नहीं होगा और इस तरह गरीबों का विश्वास खत्म हो जाएगा।

(ख) “इस समय उसकी आँखों में नेकी के आँसू थे।” इस वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
बाबा भारती ने यह शब्द कि ‘अपाहिज बनकर घोड़े को छीन लेने’ की इस घटना को सुनकर कोई भी गरीब का विश्वास नहीं करेगा,’ यह शब्द खड्गसिंह के कानों में लगातार गूंज रहे थे। वह सोचने लगा कि बाबा कितने ऊँचे और पवित्र भावों के व्यक्ति है। इन विचारों वाला यह बाबा वास्तव में मनुष्य न होकर साक्षात देवता है। खड्गसिंह ने घोड़े को चुपचाप ले जाकर उसके अस्तबल में बाँध दिया और वहाँ से चल दिया। उस समय बाबा के विचारों से प्रभावित डाकू खड्गसिंह की आँखों में नेकी के आँसू थे। खड्गसिंह का बाबा के विचारों से हृदय परिवर्तन हो गया। वह एक भला आदमी बन गया।

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Class 6 Hindi Chapter 3 MP Board प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए

(क) यदि बाबा भारती घोड़ा नहीं दिखाते, तो खड्गसिंह क्या करता?
उत्तर
यदि बाबा भारती घोड़ा नहीं दिखाते, तो खड्गसिंह उस घोड़े के गुणों की जानकारी स्वयं न कर सकने से, उसको न चुराता।

(ख) यदि बाबा भारती अपाहिज की आवाज सुनकर घोड़ा नहीं रोकते तो खड़गसिंह क्या कर सकता था ?
उत्तर
अपाहिज की आवाज सुनकर बाबा भारती घोड़े को नहीं रोकते, तो खड्गसिंह निश्चय ही बाबा भारती पर आक्रमण करता और घोड़े को छीन कर ले जा सकता था।

(ग) यदि बाबा भारती की जगह आप होते तो क्या करते?
उत्तर
यदि बाबा भारती की जगह मैं होता तो उस अपाहिज बने डाकू खड्गसिंह की वास्तविकता का पता लगाता और हर तरह घोड़े को छीन कर ले जाने से रोकने की कोशिश करता।

भाषा की बात

MP Board Class 6th Hindi Chapter 3 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का उच्चारण कीजिएकुख्यात, हृदय, प्रतिक्षण, स्वप्न, मिथ्या।
उत्तर
छात्र कक्षा में अपने अध्यापक की सहायता से उच्चारण करें और अभ्यास करें।

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 3 प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से सही वर्तनी वाला शब्द छाँटकर लिखिए
बलबान, बलवान, बल्वान, वलबान।
सुल्तान, शुलतान, सुलतान, सूल्तान।
नमश्कार, नमष्कार, नामश्रकार, नमस्कार।
परार्थना, प्रार्थना, प्राथर्ना, प्राथना।
उत्तर
बलवान, सुलतान, नमस्कार, प्रार्थना।

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Har Ki Jeet Class 6 Question Answer प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
करुणा, अपाहिज, पवित्र, घमण्ड।
उत्तर
करुणा-रोगी की छटपटाहट परिजनों में करुणा पैदा कर रही थी।
अपाहिज-सरकार ने अपाहिजों की सहायता के लिए अनेक योजनाएं चलायी हैं।
पवित्र-अमरनाथ की पवित्र गुफा के दर्शन के लिए प्रतिवर्ष यात्री जाते हैं।
घमण्ड-घमण्ड करने से आदमी पतित बन जाता है।

Class 6 Bhasha Bharti Chapter 3 प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों में से संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण एवं क्रिया शब्दों को छाँटकर दी गई तालिका में लिखिए
कुख्यात, पवित्र, खेत, कीर्ति, तुम्हें, प्रसन्न, उसकी, उन्हें, चिल्लाना, सुन्दर, विचित्र, हिनहिनाना, तनना, घोड़ा, बाबा भारती, खड्गसिंह, मन्दिर, उनका, उस, बोला, दिखाया।
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 3 हार की जीत 1

Baba Bharati Ki Dincharya Kya Thi प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखिए
(i) जिसका अंग भंग हो गया हो,
(ii) घोड़ा बाँधने का स्थान,
(iii) जो दूसरों की प्रशंसा करता है
(iv) जो दूसरों की निन्दा करता है।
उत्तर
(i) अपाहिज
(ii) अस्तबल
(iii) प्रशंसक
(iv) परनिंदक।

Class 6 Hindi Haar Ki Jeet प्रश्न 6.
दिए गए वाक्यों में का, की, के, को (सम्बन्धकारक) का प्रयोग करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) बाबा को प्रतिक्षण खड्गसिंह ……….. भय लगा रहता था।
(ख) उन्होंने सुलतान ……………. ओर से मुँह मोड़ लिया।
(ग) रात्रि ……….” तीसरा प्रहर बीत चुका था।
(घ) माँ ………… अपने बेटे को देखकर आनन्द आता है।
(ङ) वे इस भय को स्वप्न के भय ……..नाईं मिथ्या समझने लगे।
(च) मन्दिर ……… अन्दर कोई शब्द सुनाई न देता था।
उत्तर
(क) का, (ख) की, (ग) का, (घ) को, (ङ) की, (च) के।

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Khadak Singh Baba Bharati Ke Pass Kyon Gaya Tha प्रश्न 7.
‘इया’ और ‘आहट’ प्रत्यय लगाकर दस नए शब्द बनाइए
उत्तर
(क) (1) दुःख + इया = दुखिया,
(2) लिख + इया = लिखिया,
(3) लठ + इया = लठिया,
(4) लुट + इया = लुटिया,
(5) खाट + इया = खटिया

(ख) (1) मुस्कराना + आहट = मुस्कराहट
(2) चिल्लाना +आहट = चिल्लाहट
(3) खिलखिलाना + आहट = खिलखिलाहट
(4) किलकिलाना + आहट = किलकिलाहट
(5) चिलचिलाना + आहट = चिलचिलाहट।

हार की जीत परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

(1) माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनन्द आता है वही आनन्द बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा भारती’ के ‘हार की जीत’ नामक पाठ से अवतरित है। इसके लेखक प्रसिद्ध कहानीकार श्री सुदर्शन हैं।

प्रसंग-इसमें बाबा भारती का अपने घोड़े के प्रति अत्यधिक लगाव के विषय में बतलाया गया है।

व्याख्या-लेखक का कथन है कि जिस प्रकार माँ अपने पुत्र को देखकर अत्यन्त हर्षित होती है और जिस प्रकार किसान जब बड़े परिश्रम से फसल तैयार करता है और उसे खेत में फलते-फूलते देखकर बहुत ही खुशी महसूस करता है बिल्कुल इसी प्रकार की प्रसन्नता बाबा भारती को अपने घोड़े को देखकर हुआ करती थी। बाबा भारती अपने घोड़े सुलतान को पुत्र की भाँति प्यार करते थे।

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(2) बाबाजी भी मनुष्य ही थे। अपनी वस्तु की प्रशंसा दूसरे के मुख से सुनने के लिये उनका हृदय अधीर हो उठा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-यहाँ पर लेखक ने बताया है कि प्रत्येक मनुष्य को अपनी वस्तु की प्रशंसा अच्छी लगती है।

व्याख्या-बाबा भारती भले ही संन्यासी थे लेकिन थे तो मनुष्य ही। अपनी चीज की तारीफ सबको अच्छी लगती है। खड्ग सिंह के मुख से अपने घोड़े की तारीफ सुनने की चाह उनके मन में जाग उठी।

(3) इसकी रखवाली में वे कई रात सोए नहीं। भजन भक्ति न कर रखवाली करते रहे। परन्तु आज उनके मुख पर
दुःख की रेखा तक न दिखाई पड़ती थी। उन्हें केवल यह ख्याल था कि कहीं लोग गरीबों पर विश्वास करना न छोड़ दें। ऐसा मनुष्य, मनुष्य नहीं, देवता है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में लेखक ने बाबा भारती में मोह भाव के न रहने और गरीब के प्रति विश्वास न किए जाने की संभावना का वर्णन किया है।

व्याख्या-बाबा भारती अपने सुलतान नामक घोड़े की रखवाली रात-दिन करते हैं। वे कई रातों से सोए नहीं, क्योंकि उन्हें डर है कि डाकू खड्गसिंह किसी भी समय उनके घोड़े को चुरा कर ले जा सकता था। उन्होंने ईश्वर की भक्ति और ध्यान-भजन सब छोड़ दिया था। परन्तु अब जबकि सुलतान को अपाहिज के रूप में डाकू खड्ग सिंह ने छीन लिया तो बाबा भारती ने अपनी तेज आवाज में केवल इतना ही कहा कि तुम इस घटना को किसी से मत कहना, क्योंकि इसे सुनकर लोग गरीब का विश्वास करना छोड़ देंगे। यह वाक्य उस डाकू के कानों में निरन्तर गूंज रहा था। साथ ही, बाबा के चेहरे पर घोड़े को छीन लेने की घटना का कोई भी-दुःख का भाव नहीं था। उन्हें तो केवल चिन्ता इस बात की थी इस घटना को सुनकर लोग गरीबों पर विश्वास करना छोड़ देंगे। यही विचार उन्हें बार-बार दुःखी बना रहा था। खड्ग सिंह इस बात का विचार करके सोचने लगा कि यह बाबा भारती शायद मनुष्य नहीं हैं, यह तो साक्षात देवता ही हैं।

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(4) अब बाबा भारती आश्चर्य और प्रसन्नता से दौड़ते हुए अन्दर घुसे और अपने प्यारे घोड़े के गले से लिपटकर इस प्रकार रोने लगे मानो कोई पिता बहुत दिन से बिछड़े हुए पुत्र से मिल रहा हो। बार-बार उसके मुंह पर थपकियाँ देते।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-बाबा भारती ने अस्तबल में अपने घोड़े को देखा तो वे अचम्भे में पड़ गये और उसकी गर्दन से लिपटकर रोने लगे। उनका प्यार पुत्र से बिछड़े पिता जैसा था।

व्याख्या-लेखक वर्णन करता है कि घोड़े की हिनहिनाहट सुनकर बाबा भारती को अचम्भा हुआ और उनकी प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। वे घोड़े को देखकर दौड़े और अस्तबल में घुसे। वे घोड़े की गर्दन से लिपटकर बहुत देर तक रोते रहे क्योंकि वे अपने घोड़े से बहुत प्यार करते थे। इस तरह उनके और घोड़े के मिलन का यह दृश्य ठीक वैसा ही था जैसे कोई पिता अपने बिछड़े पुत्र से बहुत दिन बाद मिल रहा हो। बाबा भारती का अपने घोड़े के प्रति पुत्रवत् प्रेम था। उन्होंने प्यारपूर्वक घोड़े के मुंह को बहुत देर तक थपथपाया।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 10 क्या ऐसा नहीं हो सकता? प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 10 Kya Aisa Nahi Ho Sakta Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 10 Kya Aisa Nahi Ho Sakta Questions and Answers

MP Board Class 6th Hindi Chapter 10 प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) नहाने के बाद मुझे देना होगा
(i) नाश्ता
(ii) आराम
(iii) टॉवेल
(iv) पुस्तक।
उत्तर
(iii) टॉवेल

(ख) चादर के अनुसार पसारना चाहिए
(i) बाहें
(ii) पैर
(iii) मुँह
(iv) जीभ
उत्तर
(क)
(ii) पैर।

Class 6 Hindi Chapter 10 MP Board प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) तुम अपने फटे …………..को चादर से ढक देते हो।
(ख) बिखरी हुई पुस्तकों को …………से लगा देते हो।
(ग) हम सबके चेहरे पर अभावों की ……………….. छाई हुई है।
(घ) सुख-दुःख के इस ….. में से ही अभावों की कश्ती के पार होने का मार्ग गया है।
उत्तर
(क) बिस्तर
(ख) करीने
(ग) धुंध
(घ) समन्दर।

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Bhasha Bharti Class 6 Chapter 10 प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) धुंध से लेखक का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर
धुंध से लेखक का यह अभिप्राय है कि अपनी कमियों के अन्धकार की छाया प्रत्येक मनुष्य के चेहरे पर छाई हुई है। अर्थात् उन कमियों को किसी भी व्यक्ति के बाहरी चेहरे के हाव-भाव से पहचाना जा सकता है।

(ख) मित्र अपने फटे बिस्तर को कैसे छिपाता है ?
उत्तर
मित्र अपने फटे बिस्तर को उजली चादर को बि. छाकर छिपाता है।

(ग) अव्यवस्थाओं के होते हुए भी मित्र लेखक से रुकने का आग्रह क्यों करता है?
उत्तर
अव्यवस्थाओं के होते हुए भी मित्र लेखक से रुकने का आग्रह इसलिए करता है कि इन अभावों को दिखावे की चादर से न ढकते हुए. हे मेरे मित्र ! तू मेरे पास बैठ। प्रेमपूर्वक अपने परिवार से सम्बन्धित दुःख-सुख की बातें कर, जिससे मन का बोझ कुछ हल्का हो सके और आडम्बर के बोझ के नीचे अपनी आत्मा को कुचलने से बचा ले।

(घ) लेखक ने मित्र को राजनीति और साहित्य के बदले कौन-सी बात करने की सलाह दी?
उत्तर
लेखक अपने मित्र को सलाह देता है कि वह राजनीति और साहित्य की बातें न करे। उसे तो अपने बाल-बच्चों से सम्बन्धित, घर और गृहस्थी की बातें करनी चाहिए जिससे
जीवन के सुख और दु:ख के महासागर को पार करने का उपाय निकल सके।

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MP Board Class 6 Hindi Chapter 10 प्रश्न 4.
चार-पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) लेखक के लिए मित्र किस तरह सुविधाएँ जुटाता है? लिखिए।
उत्तर
लेखक के लिए मित्र घर में घी और शक्कर के न होने पर घी-शक्कर छिपाकर लेकर आता है। इन चीजों को किसी से उधार भी लेकर आता है। फटे बिस्तर को नई चादर से ढक देता है। पड़ौसी के स्वच्छ दर्पण को माँग लाता है। भोजन कर लेने पर बच्चे से पान मँगाकर रख देता है। बाल-बच्चों और गृहस्थी की बातें न करते हुए राजनीति और पत्र-पत्रिकाओं के साहित्य की बातों में उलझा देता है। टूटे कप की चाय को स्वयं उठा लेता है। सही नए कप में लेखक को चाय देता है। इस तरह की अनेक सुविधाओं को जुटाता है।

(ख) लेखक को मित्र के चेहरे पर निश्चिन्तता का भाव दिखाई क्यों नहीं दिया ?
उत्तर
लेखक को मित्र के चेहरे पर निश्चिन्तता का भाव इसलिए दिखाई नहीं दिया क्योंकि उसके घर में गृहस्थी की चीजों का अभाव था। घी-शक्कर का इन्तजाम लेखक से छिपकर करता है, पड़ौस से दर्पण और तौलिया लाकर रखता है। फटे बिस्तर को नई चादर से छिपाता है। बच्चे को भेजकर लेखक के लिए पान मँगाकर रखता है। खूटी पर बेतरतीब रखे कपड़ों को और बिखरी पुस्तकों को करीने से लगा देता है। घर-गृहस्थी की बातें न करके राजनीति और साहित्य की बातें करने लग जाता है।

(ग) लेखक की अपने मित्र से क्या अपेक्षाएँ हैं?
उत्तर
लेखक अपने मित्र से अपेक्षा करता है कि वह अपने फटे बिस्तर को वैसे ही बने रहने देता। टूटे हत्थे वाली कुर्सी पर ही लेखक को बैठने देता। धुंधले दर्पण और फटे गन्दे तौलिए को ही लेखक को नहाने के बाद बदन पोंछने के लिए देता। बाल-बच्चों और गृहस्थी की बातें खुलकर करता। उजली चादर से बिस्तर को ढकने को तथा टूटे हत्थे वाली कुर्सी को बीच की दीवार न बनने देता। हृदय में बसे सच्चे प्रेम को इस बनावटी व्यवहार से ढकने न देता।

(घ) लेखक मित्र को किस तरह के व्यवहार की सलाह देता है? कोई तीन बिन्दु लिखिए।
उत्तर
लेखक निम्नलिखित रूप के व्यवहार की सलाह देता है

  • हम दोनों मित्र ठीक वैसे ही मिलें जैसे हम हैं। बनावटी दिखने का प्रयत्न बन्द करें।
  • जैसी सूखी रोटी तुम खाते हो, वैसी ही मुझे खिलाओ। राजनीति और साहित्य में मत उलझाओ।
  • जिस फटे तौलिए से अपना शरीर पोंछते हो, उसी से मुझे भी अपना शरीर पोंछने दो। साथ ही चाय पीते समय जिस टूटे हुए कप को तुम मुझसे बदल देते हो, उसे मेरे ही पास रहने दो।

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Class 6 Hindi Chapter 10 प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) अपने लिए कष्ट उठाकर व्यवस्था जुटाते अपने मित्र को देखकर आपके मन में कैसे विचार उत्पन्न होंगे, बताइए।
उत्तर-अपने लिए कष्ट उठाते हुए व्यवस्था जुटाने में लगे मित्र को देखकर मेरे मन में यह विचार आता है कि मेरा मित्र सामान्य रूप से वही रूखी-सूखी रोटी खिलाता, जो वह स्वयं खाता है। उजले चादर से फटे बिस्तर को ढकने के लिए, टूटे हत्थे वाली कुर्सी को हटाते हुए, गन्दे फटे तौलिए का प्रयोग कर लेने देने के लिए, उजले साफ दर्पण का पड़ौस से इन्तजाम न करने की बात कहता। सच्चे प्रेम भरे व्यवहार को आडम्बर से छिपाने की बात न करने की सोचता।

(ख) मित्र अपने फटे बिस्तर को चादर से क्यों छिपाने का प्रयास करता है?
उत्तर
मित्र अपने फटे बिस्तर को चादर से छिपाने का प्रयास करता है ताकि उसकी असल स्थिति का आभास लेखक को न हो सके। मित्र की अभावों भरी गृहस्थी का आभास लेखक को होगा, तो उसे कष्ट होगा। अपनी वस्तुस्थिति से लेखक को परिचित न होने देने का मित्र प्रयास करता है।

MP Board Class 5 Hindi Bhasha Bharti Solution Chapter 10 प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए

(क) मान लीजिए आपके घर अचानक मेहमान आ जाते हैं और आपके माता-पिता घर पर नहीं हैं। घर में अनेक अव्यवस्थाएँ हैं। ऐसी स्थिति में आप अतिथि का स्वागत कैसे करेंगे?
उत्तर
घर में अव्यवस्थाओं के चलते, माता-पिता के घर पर न होने की दशा में जो भी कुछ सरलता से कर सकता हूँ, करूँगा। बैठने के लिए कहूँगा। शुद्ध ताजा पानी पीने को दूँगा और फिर प्रयास करूंगा कि मैं अपने माता-पिता को उनके आगमन की सूचना दूँ। सम्भवतः आगन्तुक मेहमान उस स्थिति में मेरी प्रार्थना के अनुसार रुकें और माता-पिता के आगमन तक प्रतीक्षा करें। उनके लिए घर में जो भी कुछ वस्तु होगी, मैं उनके लिए प्रस्तुत करके उनका आतिथ्य करूँगा।

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(ख) आपकी दृष्टि में उधार लेकर अथवा मांगकर व्यवस्था जुटाना कहाँ तक उचित है ?
उत्तर
मेरी दृष्टि में उधार लेकर या माँगकर व्यवस्था जुटाना बिल्कुल भी उचित नहीं है। अपनी परिस्थिति के अनुसार जो भी सम्भव हो सके, उसी से अतिथि सत्कार की व्यवस्था करना उचित है। किसी भी तरह के आडम्बर का व्यवहार सच्चे प्रेम को छिपा देता है जिसकी चिन्ता चेहरे पर झलक उठती है।

(ग) किसी के घर जाने पर आप फटे बिस्तर पर ध्यान देंगे या उनके स्नेह को प्राथमिकता देंगे?
उत्तर
फटे बिस्तर पर ध्यान देने का कोई अर्थ नहीं है। स्नेह की पवित्रता महत्वपूर्ण है और उसी का प्राथमिकता से ध्यान रखना आनन्ददायी है।

भाषा की बात

Class 6 Hindi Chapter 10 Question Answer प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और लिखिए
स्वागत, व्यवस्था, दृष्टि, निर्निमेष, निश्चिन्तता।
उत्तर
कक्षा में अपने अध्यापक महोदय की सहायता से शुद्ध उच्चारण करें और अभ्यास करें।

Class 6th Hindi Chapter 10 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की सही वर्तनी लिखिए
राज्यनीती, आवकाश, विशबास, दृश्टी।
उत्तर
राजनीति, अवकाश, विश्वास, दृष्टि।

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Class 6 Chapter 10 Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों को बहुवचन में बदलिए

(क) बालक स्कूल जा रहा है।
(ख) गाय चर रही है।
(ग) नदी में बाढ़ आई है।
(घ) वह पुस्तक पड़ रहा है।
उत्तर
(क) बालक स्कूल जा रहे हैं।
(ख) गायें चर रही हैं।
(ग) नदियों में बाढ़ आई है।
(घ) वे पुस्तक पढ़ रहे हैं।

Chapter 10 Hindi Class 6 प्रश्न 4.
निम्नलिखित मुहावरों और लोकोक्तियों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(क) पलकों पर वैवना
(ख) कलेजे पर साँप लोटना
(ग) आम के आम गुठलियों के दाम।
(घ) कंगाली में आटागीला।
उत्तर
(क) बलकों पर बैठाना-रवि अपने मेहमानों को पलकों पर बैठाता फिरता है।
(ख) कलेजे पर साँप लोटना-मेरे पुत्र के द्वारा परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने पर, मेरे पड़ौसी के कलेजे पर साँप लोट गया।
(ग) आम के आम गुठलियों के दाम-मैं गया तो था इन्दौर एक उत्सव में, लेकिन पास में ही ओउम्कारेश्वर के दर्शन भी करके आम के आम गुठलियों के दाम भी प्राप्त कर लिए।
(घ) कंगाली में आटा गीला-मैंने सोचा था कि अपने पुराने इंजन की मरम्मत कराके पानी की समस्या हल हो जाएगी, लेकिन साथ में पाइप लाइन का टूट जाना मेरे लिए कंगाली में आटा गीला हो जाना है।

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Hindi Class 6 Chapter 10 प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों में से अकर्मक और सकर्मक क्रियाएँ छाँटिए
(क) तुम धुंधले काँच को छिपाते हो।
(ख) मैं तुम्हारे साथ रहता हूँ।
(ग) तुम क्यों रो रहे हो ?
(घ) कोयल आकाश में उड़ रही है।
उत्तर
(क) छिपाते हो-सकर्मक।
(ख) रहता हूँअकर्मक।
(ग) रो रहे हो-अकर्मक।
(घ) उड़ रही है-अकर्मक।

Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 10 प्रश्न 6.
अपने मित्र को पत्र लिखकर गणतन्त्र दिवस की बधाई दीजिए।
उत्तर
‘पत्र लेखन’ खण्ड में देखिए।

क्या ऐसा नहीं हो सकता परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) मैं जब तक स्नान करता हूँ तब तक तुम अपने फटे बिस्तर को, नई चादर से ढक देते हो, धुंधले आईने की जगह पड़ोसी से माँगा हुआ साफ आईना सजा देते हो और खूटियों पर लटकते बेतरतीब से कपड़ों तथा बिखरी हुई पुस्तकों को करीने से लगा देते हो।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा भारती’ के ‘क्या ऐसा नहीं हो सकता ?’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस पाठ के लेखक ‘रामनारायण उपाध्याय’ हैं।

प्रसंग-लेखक ने इन पंक्तियों के माध्यम से स्पष्ट किया है कि लोग सच्चाई को छिपाने का प्रयत्ल करते हैं, बाहरी आडम्बरों में उलझकर सहज प्रेम की महत्ता को समझ नहीं पाते हैं।

व्याख्या-एक मित्र अपने मित्र को पत्र लिखता है; लेखक उस पत्र लेखक मित्र के भावों को स्पष्टता देता है कि जब मैं तुम्हारे घर जाता हूँ तब तक वहाँ स्नान करता हूँ, तब उसी मध्य तुम अपने फटे बिस्तर को किसी नई चादर से ढक देते हो जो दर्पण तुम्हारे घर में है वह धुंधला हो गया है, उसके स्थान पर अपने पड़ोसी के साफ उजले दर्पण को ले आते हो और सजा देते हो। यह दर्पण माँगा हुआ होता है। कमरे में इधर-उधर बिना तरतीब ही खूटी पर लटकते कपड़ों को ठीक तरह लगा देते हो, साथ ही इधर-उधर पड़ी हुई, बिखेर दी गई पुस्तकों को उसी दरम्यान ठीक क्रम से लगा देते हो। यह तुम्हारा बनावटीपन और दिखावा है जो प्रेम की सहज भूमि पर औपचारिकता मात्र है। हम मिलन के वास्तविक दु:ख से रहित हो जाते हैं।

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(2) तुम जब मुझे विदा करते हो, तब भी तुम्हारा ध्यान मेरे रवाना होने के बाद किये जाने वाले कामों में लगा रहता है लेकिन मैं जब तक तुम्हारी दृष्टि से ओझल नहीं हो जाता, तुम तब तक मेरी ओर निर्निमेष दृष्टि से निहारते हो, मानो अपनी पलकों पर बिठाकर तुम मुझे विदाई देते हो। मैं जानता हूँ, तुम्हारी उस दृष्टि में कितना दर्द, कितनी लाचारी, कितना स्नेह समाया हुआ है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-लोगों के आम व्यवहार में भी सच्चाई छिपी होती है। स्नेह भरे दिलों में दर्द की टीसन और दिखावे की लाचारी भर दी है।

व्याख्या-लेखक कहता है कि वह जब अपने मित्र से विदा लेता है, तो उस मित्र का ध्यान उसके प्रस्थान करने के बाद किये जाने योग्य सभी कामों में उलझा रहता है। वह जब तक उसकी आँखों से पूर्णत: ओझल नहीं हो जाता, तब तक अपनी एकटक निगाहों से उसे देखता रहता है। ऐसा प्रतीत होता है कि मानो वह उसे (लेखक को) अत्यन्त आदर भाव के साथ प्रेमपूर्वक विदा कर रहा है। लेखक अपने उस मित्र की निगाहों में समाये हुए दर्द को, उसकी लाचारी को प्रदर्शित कर रहा था। लेकिन उसके हृदय में गहरा स्नेह समाया हुआ था।

(3) क्या यह नहीं हो सकता कि हम जैसे हैं, ठीक वैसे ही मिलें और जो हम नहीं हैं, वैसा दिखने का प्रयत्न बन्द कर दें? जैसी सूखी रोटी तुम खाते हो, वैसी ही मुझे खिलाओ। जिस फटे टॉवेल से तुम अपना शरीर पोंछते हो, उसी से मुझे भी अपना शरीर पोंछने दो। चाय पीते समय जिस टूटे हुए कप को तुम मुझसे बदल लेते हो, उसे मेरे ही पास रहने दो।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-लेखक अपने मित्र के दिखावपूर्ण व्यवहार पर अपने हृदय की वेदना को व्यक्त करता है।

व्याख्या-लेखक स्पष्ट करता है कि हम सभी दिखावे के व्यवहार को छोड़ कर सच्चाई के आधार पर अपने व्यवहार को विकसित करें। क्या यह सम्भव नहीं है ? निश्चय ही, यह हो सकता है। जैसे हम नहीं हैं, उस स्थिति में अपने आपको दिखाने का जो प्रयत्न है, उसे छोड़ दें। अर्थात् आडम्बरपूर्ण व्यवहार का रूप समाप्त कर देना चाहिए। अपनी स्वाभाविक स्थिति में हमारा वह साधारण रूप में खिलाया गया भोजन वस्तुत: असली प्रेम को प्रदर्शित करने वाला होगा।

भोज्य वस्तुओं में दिखावट पसन्द नहीं है। तुम जिस फटे अंगोछे से स्नान के बाद अपने अंग पोछते हो, वही अंगोछा अपने मित्र को दीजिए, व्यर्थ के दिखावे में जीवन की मौलिकता नष्ट होती है। टूटे कप (प्याले) में दी गई चाय को तुरन्त हटा देते हो और स्वयं उस टूटे कप की चाय पीने लगते हो और मुझे अपना वाला अन्य कप देकर हृदय की सरलता भरे प्रेम को बनावटी प्यार के आवरण से ढकने की कोशिश करते हो। ऐसा व्यवहार प्रेम के सात्विक स्वरूप को समाप्त कर देता है।

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(4) अपने फटे हुए बिस्तर को तुम उजली चादर से मत उको और कुर्सी के टूटे हुए हत्थों को बीच में आने दो ताकि वे हमारे बीच दीवार न बन सकें और इन सबसे बचे हुए समय में तुम जब भी मेरे पास बैठो, बजाय राजनीति और साहित्य के, अपनी घर-गिरस्ती की, बाल-बच्चों की, सुख-दुःख की बातें करो। विश्वास रखो, सुख-दुःख के इस समन्दर में से ही हमारे अभावों की किश्ती के पार होने का मार्ग गया है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-लेखक अपने मित्र को दिखावपूर्ण व्यवहार को बन्द करने और सच्चाईपूर्ण, आडम्बररहित व्यवहार को अपनाने का अच्छा परामर्श देता है।

व्याख्या-अपने मित्र को लिखे अपने पत्र के अन्त में लेखक लिखता है कि हे मेरे मित्र फटे हुए अपने बिस्तर को तुम साफ चादर से ढकने की कोशिश मत करो। टूटे हुए हत्थे वाली कुर्सी पर ही मुझे बैठने दो। मेरे और तुम्हारे बीच जो मित्रता का पवित्र भाव है, उसे बनावट के व्यवहार की चादर से मत डको। मैं चाहता हूँ कि इस बनावट के रिश्ते चलाने में जो समय नष्ट होता है, उस समय को बचाकर तुम मेरे समीप बैठो।

राजनीति और साहित्य की बातें मत करो। घर और परिवार की समस्याओं सम्बन्धी बातें करो। अपनी आने वाली पीढ़ी-बाल-बच्चों से सम्बन्धित बातें करो। इस तरह अपने अन्त:करण में व्याप्त सुख और दुःख से प्राप्त होने और उसके निवारण सम्बन्धी उपार्यों की बातें ही सच्चे व्यवहार से सम्बन्धित हैं। तुम्हें यह विश्वास रखना होगा कि हमारी कमियों की नौका ही सुख-दुःख के महासागर को पार कर हमारी सहायक हो सकती है। अर्थात् अभावों को दूर करो और दुःख अपने आप मिट जायेंगे।

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