MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण विलोम या विपरीतार्थी शब्द

MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण विलोम या विपरीतार्थी शब्द

किसी शब्द का विपरीत या उल्टा अर्थ देने वाले शब्द विपरीतार्थी या विलोम शब्द कहलाते हैं।
यहाँ कुछ शब्दों के विलोम या विपरीतार्थी शब्द दिए जा रहे हैं-

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MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण अनेकार्थक या अनेकार्थी शब्द

MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण अनेकार्थक या अनेकार्थी शब्द

अनेकार्थक या अनेकार्थी शब्द वे शब्द कहलाते हैं, जिनके अर्थ एक से अधिक होते हैं। जैसे – ‘कल’। ‘कल’ शब्द का अर्थ ‘शोर’ भी है, ‘मशीन’ भी है, ‘शांति’ भी है और ‘आने वाला अथवा बीता हुआ दिवस’ भी है। इस प्रकार के कई शब्द एक भाषा में रहते हैं। इनसे परिचित होना अत्यंत आवश्यक है।

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नीचे कुछ शब्द दिए जा रहे हैं–

  • अक्षर – नष्ट न होने वाला, स्वर – व्यंजन वर्ण, ईश्वर।
  • अनन्त – न अंत होने वाला, ईश्वर।
  • अम्बर – आकाश, कपड़ा, एक सुगंधित द्रव्य।
  • अमर – शाश्वत, देवता।
  • अर्थ – धन, व्याख्या, के लिए।
  • अलि – भँवरा, सखी।
  • अंक – गोद, गणना के अंक, मध्य।
  • उत्तर – जवाब, बाद का, दिशा का नाम।
  • कल – चैन, बीता हुआ कल, आने वाला दिन, मशीन, शोर।
  • कोट – किला, पहनने का एक वस्त्र।
  • ग्रहण – लेना, चाँद – सूर्य का ग्रहण।
  • गुण – विशेषता, रस्सी। गुरु – शिक्षक, बड़ा (महत्त्वपूर्ण)।
  • जड़ – मूल, मूर्ख।
  • जेठ – पति का बड़ा भाई, महीना विशेष।
  • खग – पक्षी, आकाश।
  • नव – नया, नौ।
  • नाग – साँप, हाथी।
  • पतंग – सूर्य, उड़ाई जाने वाली, गुड़िया, विशेष प्रकार का कीड़ा।
  • पय – दूध, पानी, अमृत।
  • फल – परिणाम, सेब, केला आदि, छुरी – बाण आदि का नुकीला भाग।
  • मधु – मीठा शहद, शराब।
  • लाल – रंग, बेटा, मूल्यवान पत्थर।
  • वर्ण – जाति, रंग, अक्षर।
  • विधि – ब्रह्मा, भाग्य, पद्धति, रीति।
  • हरि – विष्णु, सूर्य, इन्द्र, सिंह, सर्प।
  • हार – पराजय, आभूषण – विशेष।
  • श्री – शोभा, लक्ष्मी, धन – वैभव।

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MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण पर्यायवाची

MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण पर्यायवाची

एक अर्थ प्रकट करने के लिए प्रत्येक भाषा में कई शब्द होते हैं। ऐसे शब्द समानार्थी या पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं। वास्तव में तो एक–एक शब्द के सभी पर्यायवाची शब्दों का अर्थ एक समान नहीं होता, उनमें सूक्ष्म अंतर होता है। हवा, प्रभंजन, समीर, झंझा पर्यायवाची शब्द हैं।

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नीचे कुछ पर्यायवाची शब्द दिए जा रहे हैं–

  • अग्नि – आग, पावक, अनल, वह्नि।
  • अमृत – सुधा, अमिय, सोम पीयूष।
  • आकाश – नभ, गगन, आसमान, अंबर।
  • आँख – नेत्र, लोचन, नयन, दृग।
  • कमल – सरोज, जलज, पंकज, राजीव।
  • घर – गृह, गेह, सदन, मंदिर।
  • चंद्रमा – शशि, विधु, चंद्र मयंक।
  • जल – पानी, नीर, वारि, सलिल।
  • पर्वत – शैल, गिरि, पहाड़, अचल।
  • पुष्प – फूल, कुसुम, सुमन, प्रसून।
  • बादल – मेघ, घन, पयोद, नीरद।
  • मनुष्य – नर, मानव, आदमी, मानुष।
  • रात – रात्रि, निशा, रैन, यामिनी।
  • राजा – नृप, भूप, नरेश, नरेन्द्र।
  • समुद्र – सागर, जलधि, सिंधु, रत्नाकर।
  • सूर्य – भानु, रवि, दिवाकर, आदित्य।
  • सिंह – शेर, मृगेन्द्र, नाहर, मृगराज।
  • सर्प – भुजंग, विषधर, नाग, साँप।
  • स्त्री – नारी, भार्या, कांता, वधू।
  • हवा – वायु, समीर, बयार, अनिल।
  • हाथी – गज, करी, नाग, गयंद।
  • घोड़ा – अश्व, बाजि, तुरंग, तुरग।
  • कृष्ण – हरि, केशव, घनश्याम, मोहन।
  • कोयल – कोकिला, पिक, अलि, श्यामा।
  • पक्षी – विहग, खग, पखेरू, चिड़िया।
  • पुत्र – सुत, तनय, बेटा, पूत।
  • पुत्री – सुता, तनया, बेटी, तनूजा।
  • महादेव – शिव, शंभु, शंकर, गिरीश।
  • माता – मां, जननी, अम्ब, मातृ।।
  • मोर – केकी, मयूर, कलापी, सारंग।
  • सरस्वती – शारदा, भारती, वीणापाणि, गिरा।
  • सोना – कंचन, कनक, हेम, स्वर्ण।
  • हनुमान – पवनसुत, महावीर, कपीश्वर, रामदूत।
  • आम – रसाल, आम्र, अमृतफल, सहकार।
  • दुःख – क्लेश, विषाद, वेदना, संताप।
  • विष – गरल, हलाहल, जहर, माहुर।
  • सेना – सैन्य, दल, चमू, फौज।
  • शत्रु – रिपु, अरि, अमित्र, वैरी।
  • सुंदर – ललित, रम्य, चारु, सुरम्य।
  • मित्र – सखा, मीत, सुहृद, अंतरंग।
  • लक्ष्मी – कमला, पद्मा, श्री, हरिप्रिया।
  • पत्थर – पाषाण, उपल, पाहन, प्रस्तर।

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MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण शब्द विचार

MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण शब्द विचार

प्रश्न 1.
शब्द की परिभाषा दें।
उत्तर-
शब्द की परिभाषा-निश्चित अर्थ को प्रकट करने वाले वर्ण-समूह को शब्द कहते हैं। जैसे-घर, रोटी, अर्थ, विचार, शब्द आदि।

प्रश्न 2.
शब्द के कितने रूप हैं? उदाहरण सहित समझाएँ।
उत्तरउत्पत्ति के आधार पर हिंदी में शब्द के चार भेद हैं

  1. तत्सम,
  2. तद्भव,
  3. देशज,
  4. विदेशी।

1. तत्सम-संस्कृत भाषा के ऐसे शब्द, जो हिंदी में भी अपने मूल रूप में प्रचलित हैं, तत्सम कहलाते हैं। जैसे-वायु, नारी, सत्य, छात्र, समुद्र आदि।
2. तद्भव-जो शब्द संस्कृत भाषा के शब्दों से बिगड़ कर हिंदी में प्रचलित हैं, तद्भव कहलाते हैं। जैसे-सपना (स्वप्न), दूध (दुग्ध)।
3. देशज-जो शब्द स्थानीय पदार्थ के रूप में, कार्य के रूप में अथवा ध्वनि के अनुसार प्रसिद्ध और प्रचलित हैं, देशज कहलाते हैं। ये शब्द देश की विभिन्न बोलियों से लिये गए हैं। जैसे–पेट, खिड़की, थूक, चीनी।
4. विदेशी-वे शब्द, जो अंग्रेज़ी, अरबी, फारसी, तुर्की, पुर्तगाली, फ्रांसीसी आदि विदेशी भाषाओं से हिंदी में आए हैं, विदेशी कहलाते हैं। जैसे-स्कूल, बटन, आलू, गरीब, किताब, लाश।

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MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण शब्द विचार 1

प्रश्न 3.
तत्सम एवं तद्भव शब्द रूपों के अन्तर उदाहरण सहित समझाएँ।
उत्तर-
तत्सम और तद्भव शब्द-

तत्सम शब्द-
हिंदी में संस्कृत के कुछ शब्दों को ज्यों का त्यों (यथावत्) ले लिया है। ऐसे शब्द तत्सम कहलाते हैं।

तद्भव शब्द-
संस्कृत के कुछ शब्द ऐसे हैं, जिनका रूप परिवर्तन करके हिंदी में अपनाया गया है। ऐसे शब्दों को तद्भव शब्द कहते हैं। यहाँ कुछ तद्भव शब्द और उनके तत्सम रूप दिए जा रहे हैं

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प्रश्न 4.
हिन्दी में प्रयुक्त होने वाले कुछ विदेशी शब्दों के उदाहरण दें?
उत्तर-
अंग्रेजी-स्टेशन, राशन, सिनेमा, टेलीविजन, टिकट, फीस, रेडियो, डॉक्टर, बैंक आदि।
अरबी-मौलवी, अदालत, अमीर, मालिक, दुनिया, फकीर, तारीख, किताब, कसर आदि।
फारसी-जिंदगी, बाग, चश्मा, खरगोश, चाकू, कारखाना, रूमाल, शिकायत, जल्दी, खरीद, तमाम, ज़मीन, फौज़, काग़ज़, हज़ार, दुकान, बादाम आदि।
पुर्तगाली-प्याला, आलू, साबुन, नीलाम, पिस्तौल, आदि।
ग्रीक-सुरंग, दाम आदि।
तुर्की-दारोगा, तमगा, काबू, लाश, कालीन, तोप आदि।
फ्रांसीसी-कूपन, अंगरेज़, कारतूस आदि।

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MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण वर्तनी

MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण वर्तनी

प्रश्न 1.
वर्तनी की परिभाषा दें।
उत्तर-
‘वर्तनी’ का अर्थ है उच्चारण के अनुरूप वर्ण-विन्यास। इसे अंग्रेजी में (spelling) कहते हैं। सामान्यतया लिखने की रीति को वर्तनी कहते हैं। वर्तनी की शुद्धता के लिए उच्चारण की शुद्धता आवश्यक है। यदि उच्चारण गलत हुआ तो वर्तनी भी गलत होती है।

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प्रश्न 2.
वर्तनी संशोधन के नियमों पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
वर्तनी संबंधी कुछ नियम हैं, जिनका पालन करने से शब्दों के शुद्ध रूप लिखे जा सकते हैं।
1. किसी भी स्वर के साथ किसी अन्य स्वर की मात्रा नहीं लगनी चाहिए।

जैसे-

‘अ’ अिस, ओक, अपर-ये अशुद्ध रूप हैं।
इस, एक, ऊपर-ये शुद्ध रूप हैं।

2. भाववाची-ति, नि, धि, टि से समाप्त होने वाली स्त्रीलिंग संज्ञाओं की अंतिम ‘इ’ ह्रस्व होती है।

जैसे-

भक्ति, शक्ति, नीति, प्रीति, रीति, जाति आदि।

3. संस्कृत के तत्सम पुल्लिंग शब्द के अंतिम इ, उ, प्रायः ह्रस्व होते हैं।

जैसे-

कवि, कपि, हरि, रवि, वाल्मीकि, उदधि आदि।

4. तद्भव तथा विदेशी भाषाओं में आए पुल्लिंग शब्दों के अंतिम इ, उ दीर्घ होते हैं।

जैसे-

अंग्रेजी, फ्रांसीसी, आलू, भालू, डाकू, लड़ाकू।

5. ‘ऋ’ स्वर है। कभी-कभी उसका उच्चारण, रि, रु इस प्रकार करके इसी से शब्द लिखते हैं, वह अशुद्ध रूप है। ‘ऋ’ प्रारंभ में लगने वाले शब्द को ‘र’ से नहीं ‘ऋ’ से लिखना चाहिए

जैसे-

ऋतु लिखना चाहिए, रितु नहीं।
शुद्ध रूप-ऋचा, ऋग्वेद, ऋण, वृष्टि, कृषक, कृष्ण, तृण, तृष्णा आदि।

6. ‘घ’ तथा ‘ध’ वाले शब्द-‘घ’-घर, घोड़ा, घनश्याम, घड़ा, घमण्ड आदि।

‘ध’-धैर्य, धर्म, धन, धमाका, धाम आदि।

7. ‘व’ और ‘ब’ में अंतर-‘व’ के उच्चारण में होठ’ (ओठ) खुले रहते हैं और ‘ब’ के उच्चारण में बंद हो जाते हैं।

‘व’ वाले शब्द-वह, वर्ण, विवाहर, विश्व इत्यादि।
‘ब’ वाले शब्द-बाहर, बंद, बंदर, बँटवारा, बाप, बतासा, बनावट, बारात इत्यादि।

8. श, ष, स का अन्तर-‘श’ वाले शब्द-शहर, शरबत, शेर इत्यादि।

‘ष’ वाले शब्द-षट्कोण, नष्ट, कष्ट, राष्ट्र, युधिष्ठिर, विशिष्ट इत्यादि।
‘स’ वाले शब्द-समाज, सपेरा, समय, सावन, स्वागत, सरौता, सबेरा, स्वर्ग इत्यादि।

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प्रश्न 3.
परसर्ग या कारक चिह्न का प्रयोग कहाँ किया जाता है?
उत्तर-
परसर्ग या कारक चिह्न का प्रयोग-संज्ञा शब्दों के साथ होना चाहिए। इस प्रकार जैसे-राम ने, मोहन को, घर में सर्वनाम के साथ प्रयोग-जैसे-मैंने, आपने, उन्होंने, उनको, जिसको इत्यादि।

प्रश्न 4.
योजक चिह्न का प्रयोग सोदाहरण समझाइये।
उत्तर-
योजक चिह्न का प्रयोग समानपद में करना चाहिए।

जैसे-

माता-पिता,
भाई-बहन,
पाप-पुण्य,
सरस्वती – वन्दना,
शोध-संस्था,
रात-दिन आदि।

प्रश्न 5.
शुद्ध एवं अशुद्ध वर्तनी को उदाहरण सहित समझाएँ।
उत्तर-
जैसे-
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प्रश्न 6.
वर्ण तथा शब्द में क्या अंतर है?
उत्तर-
ध्वनि का लिखित रूप वर्ण कहलाता है। वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई है। इन्हें विभाजित नहीं किया जा सकता, परन्तु वर्णों के सार्थक समूह से शब्दों का निर्माण होता है।

जैसे-

अ, आ, इ, ई वर्ण हैं जबकि र् + आ + म् + अ = ‘राम’ शब्द है।

प्रश्न 7.
हिन्दी की लिपि का नाम बताएँ।
उत्तर-
हिन्दी की लिपि का नाम देवनागरी लिपि है। प्रश्न 8. वर्तनी के नियमों में से कोई भी दो नियम लिखिए।
उत्तर-
1. किसी भी स्वर के साथ किसी अन्य स्वर की मात्रा नहीं लगती है।

जैसे-

अशुद्ध-ओक, शुद्ध-एक।

2. ‘ऋ’ स्वर का शुद्ध उच्चारण

जैसे-

रितु-अशुद्ध, ऋतु-शुद्ध शब्द है।

प्रश्न 9.
मानक वर्तनी क्या है? सोदाहरण समझाएँ।
उत्तर-
वर्तनी संबंधी कुछ महत्वपूर्ण नियम हैं। शुद्ध शब्द उच्चारण के लिए, उनका पालन करने से मानक शुद्ध वर्तनी प्रस्तुत होती है।
जैसे-
‘ष’ के स्थान पर ‘श’ संबंधी अशुद्धियाँ।
अशुद्ध शब्द – मानक (शुद्ध) वर्तनी
द्वेश – द्वेष
निर्दोष – निर्दोश

प्रश्न 10.
निम्नांकित शब्दों के (मानक) शुद्ध रूप लिखिए।
उत्तर-
अशुद्ध रूप – मानक (शुद्ध रूप)

  1. उज्वल – उज्ज्व ल
  2. क्षन – क्षण
  3. एकलौता – इकलौता
  4. सौंदर्यता – सौंदर्य
  5. आशीर्वाद – आशीर्वाद
  6. चाहिये – चाहिए
  7. अनाधिकार – अनधिकार
  8. मैथली – मैथिली
  9. उपरोक्त – उपर्युक्त
  10. अनुग्रहित – अनुगृहीत

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प्रश्न 11.
‘ऋ’ तथा ‘रि’ से बनने वाले कोई चार शब्द लिखिए।
उत्तर-
‘रि’ –

  1. रिगवेद
  2. रितु
  3. रिषि
  4. रिचा।।

‘ऋ’ –

  1. ऋग्वेद
  2. ऋतु
  3. ऋषि
  4. ऋचा।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 5 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 5.3

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 5 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 5.3

निम्नलिखित समीकरणों में से प्रत्येक को हल कीजिए :

प्रश्न 1.
x2 + 3 = 0.
हल:
x2 + 3 = 0 या x 2 = – 3 या x = ± [/latex]\sqrt{-3}[/latex] = ± \(\sqrt{3}\)i.

प्रश्न 2.
2x2 + x + 1 = 0.
हल:
दिया गया है : 2x2 + x + 1 = 0,
समीकरण ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर,
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प्रश्न 3.
x + 3x + 9 = 0.
हल:
दिए गए समीकरण x2 + 3x + 9 = 0 की ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर, a = 1, b = 3, c = 9 .
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 5 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 5.3 img-3

प्रश्न 4.
-x2 + x – 2 = 0.
हल:
दिया गया है :
– x2 + x – 2 = 0,
– 1 से दोनों पक्षों में गुणा करने पर
x2 x + 2 = 0
इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर,
a = 1, b = – 1, c = 2
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 5 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 5.3 img-4

प्रश्न 5.
x2 + 3x + 5 = 0.
हल:
दिया गया है:
x2 + 3x + 5 = 0 इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर, a = 1, b = 3, c = 5
x = \(\frac{-b \pm \sqrt{b^{2}-4 a c}}{2 a}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 5 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 5.3 img-5

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प्रश्न 6.
x2 – x + 2 = 0
हल:
दिया है :
x2x + 2 = 0
इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर,
∴ a = 1, b = – 1, c = 2
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 5 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 5.3 img-6

प्रश्न 7.
\(\sqrt{2}\) x2 + x + \(\sqrt{2}\) = 0.
हल:
दिया है:
\(\sqrt{2}\) x2 + x + \(\sqrt{2}\) = 0
इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 5 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 5.3 img-7

प्रश्न 8.
\(\sqrt{3} x^{2}-\sqrt{2} x+3 \sqrt{3}\) = 0
हल:
दिया है :
\(\sqrt{3} x^{2}-\sqrt{2} x+3 \sqrt{3}\) = 0
इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर
a= \(\sqrt{3}\), b = – \(\sqrt{2}\), c = 3\(\sqrt{3}\)
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प्रश्न 9.
x2 + x + \(\frac{1}{\sqrt{2}}\) = 0.
हल:
दिया है:
दोनों पक्षों में \(\sqrt{2}\) से गुणा करने पर,
\(\sqrt{2}\)x2 + \(\sqrt{2}\)x + 1 = 0.
इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर
a = \(\sqrt{2}\) , b = \(\sqrt{2}\), c = 1
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 5 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 5.3 img-9

प्रश्न 10.
\(x^{2}+\frac{x}{\sqrt{2}}+1\) = 0.
हल:
दिया है: \(x^{2}+\frac{x}{\sqrt{2}}+1\) = 0.
दोनों पक्षों में \(\sqrt{2}\) से गुणा करने पर
\(\sqrt{2} x^{2}+x+\sqrt{2}\) = 0 .
इसकी ax2 + bx + c = 0 से तुलना करने पर
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MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण प्रत्यय

MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण प्रत्यय

प्रश्न 1.
प्रत्यय किसे कहते हैं?
उत्तर-
मूल शब्दों के अंत में जो शब्दांश जुड़कर नये शब्द बनाए जाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। दूसरे शब्दों में जो शब्दांश शब्द के अंत में जुड़कर नये-नये शब्दों का निर्माण करते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं।

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प्रश्न 2.
प्रत्यय कितने प्रकार के होते हैं? उत्तर-प्रत्यय दो प्रकार के होते हैं-कृत और तद्धित।

प्रश्न 3.
कृत प्रत्यय को सोदाहरण समझाएँ:
उत्तर-
कृत प्रत्यय-क्रिया शब्दों के अंत में जो शब्दांश जोड़े जाते हैं, वे कृत प्रत्यय कहलाते हैं,

जैसे-

पढ़ना + ई = पढ़ाई ; लिखना + ई = लिखाई।

क्रिया में प्रत्यय जोड़कर संज्ञाएँ भी बनाई जाती हैं और विशेषण भी। संज्ञा बनाने वाले हिंदी के प्रमुख कृत् प्रत्यय निम्नलिखित हैं-MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण प्रत्यय img 1

विशेषण बनाने वाले प्रत्यय
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प्रश्न 4.
तद्धित प्रत्यय को सोदाहरण समझाएँ।
उत्तर-
तद्धित प्रत्यय-जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण के साथ जुड़कर नये शब्द बनाते हैं, उन्हें तद्धित प्रत्यय कहते हैं।

संज्ञा बनाने वाले तद्धित प्रत्यय-
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विशेषण बनाने वाले तद्धित प्रत्यय-
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MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण उपसर्ग

MP Board Class 9th General Hindi व्याकरण उपसर्ग

प्रश्न 1.
उपसर्ग किसे कहते हैं?
उत्तर-
उपसर्ग वे अविकारी (अव्यय) शब्दांश होते हैं, जो किसी शब्द के पूर्व में जुड़कर मूल शब्द के अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं।

प्रश्न 2.
उपसर्ग की विशेषता बताइये।
उत्तर-
उपसर्ग किसी भी शब्द को परिवर्तित कर देता है। इससे

  1. शब्द के अर्थ में एक नयी विशेषता आ जाती है।
  2. शब्द का अर्थ बदल जाता है।
  3. कहीं-कहीं शब्द के अर्थ में कोई विशेष अंतर नहीं आता। हिंदी में जो उपसर्ग मिलते हैं, वे संस्कृत, हिंदी और उर्दू भाषा के हैं।

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प्रश्न 3.
उपसर्ग कितने तरह के होते हैं? उनके उदाहरण दें।
उत्तर-
संस्कृत उपसर्ग
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हिंदी उपसर्ग

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MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 22 Gita ka Marm Question and Answer

In this article, we will share MP Board Class 8th Hindi Solutions Chapter 22 गीता का मर्म PDF download, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 22 Gita ka Marm Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 22 Gita ka Marm Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 22 गीता का मर्म प्रश्न उत्तर

गीता का मर्म बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
विशाल = विस्तृत, बड़ा; मर्मज्ञ ज्ञाता, जानकार; महास्य = महत्व प्रवचन = उपदेशः कटिलता कपटता, चालाकी; वाचालता = बातूनीपन; प्रयास = कोशिश, प्रयत्न; प्रपंच = पाखंड, नाटक; युक्तियुक्त = तर्कपूर्ण; धृष्टता = अशिष्टता, उइंडता; प्रकांड = महान, सर्वश्रेष्ठ; मर्म = सूक्ष्म अर्थ, रहस्य; तारतम्य = क्रम; लिप्सा = लालसा, इच्छा; मन्तव्य = विचार; पार्थ = अर्जुन का एक नाम; मध्यस्थता = बीच-बचाव; चित्त = मन; व्यापक = विशाल; शमन- नाश, शान्त; शास्त्र = पुस्तक, धर्मग्रन्थ; धर्मक्षेत्र = धर्मभूमि।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए
(क) राजा ने मंत्रियों के समक्ष कौन-सी इच्छा प्रकट की?
उत्तर
राजा ने मंत्रियों के समक्ष गीता का ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा प्रकट की।

(ख) राजा की घोषणा सुनकर उनके पास कौन-कौन आने लगे?
उत्तर
राजा की घोषणा सुनकर दूर-दूर से बड़े-बड़े विद्वान, पण्डित, ज्ञानीजन राजा के पास आने लगे।

(ग) गौवर्ण राजा के पास क्यों आया था?
उत्तर
गौवर्ण राजा को गीता का मर्म समझाने के लिए राजा के पास आया था।

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(घ) गीता में कुल कितने श्लोक हैं ?
उत्तर
गीता में कुल सात सौ श्लोक हैं।

(ङ) राजा के मन में कौन-सी कुटिलता समाई हुई थी?
उत्तर
राजा के मन में आधा राज्य न देने का लोभ व कुटिलता समाई हुई थी।

(च) दूसरों को उपदेश देने का अधिकारी कौन हो सकता है?
उत्तर
दूसरों को उपदेश देने का अधिकारी वही है जो स्वयं उस पर आचरण करता हो।

(छ) विद्या से हममें कौन-कौन से गुण आते हैं ?
उत्तर
विद्या से हममें विनम्रता आती है और व्यक्ति शालीन बन जाता है। मन शान्त हो जाता है, चित्त एकाग्र हो जाता है और तृष्णाओं का शमन होता है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(क) राजा आनन्द पाल ने अपने मंत्रियों से क्या कहा और क्यों ?
उत्तर
एक बार राजा आनन्द पाल के मन में गीता का ज्ञान अर्जित करने की कामना उत्पन्न हुई, उन्होंने तत्काल अपने मंत्रियों से कहा कि वे श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। अतः पूरे राज्य में यह घोषणा करवा दी जाये कि जो कोई भी विद्वानजन राजा को पूर्णरूप से गीता को समझा देगा, उसे राजा अपने राज्य का आधा हिस्सा प्रदान करेगा। मंत्रियों ने भी राजा के आदेशानुसार पूरे राज्य के समस्त नगरों तथा गाँवों में तथा राज्य के बाहर भी ढिंढोरा पिटवाकर यह घोषणा करवा दी कि राजा गीता का ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। अत: जो कोई भी राजा को पूर्ण रूप से गीता समझा देगा, उसे राजा द्वारा आधा राज्य उपहार स्वरूप प्रदान किया जायेगा।

(ख) गौवर्ण ने राजा को गीता का मर्म समझाने के लिए क्या प्रयास किया ?
उत्तर
गौवर्ण नाम के एक प्रकाण्ड विद्वान ने जब राजा की घोषणा सुनी तो उसने राजा को गीता का मर्म समझाने की ठानी। वह राजा के पास आया और बोला कि वह उन्हें गीता समझायेगा। राजा के ना-नुकर करने पर उसने राजा से एक अवसर प्रदान करने की प्रार्थना की। राजा द्वारा अनुमति प्रदान करने के उपरांत गौवर्ण ने राजा को गीता के एक-एक शब्द, पद, अक्षर व श्लोक का अर्थ व्याख्या सहित समझाया। धर्मक्षेत्रे कुरूक्षेत्रे …” से प्रारम्भ कर यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः’ तक पूरे सात सौ श्लोक राजा को लगभग कण्ठस्थ करा दिए। ‘

(ग) महायोगी विशाख ने दोनों की मध्यस्थता करते हुए क्या कहा?
उत्तर
महायोगी विशाख ने दोनों की मध्यस्थता करते हुए सर्वप्रथम राजा आनन्दपाल से पूछा “राजन्, क्या आप गीता को समझे?” राजा ने कहा-“तपोनिधि ! नहीं, मैं कुछ भी नहीं समझा।” फिर उन्होंने गौवर्ण से पूछा-“श्रीमान् ! आपने राजन् को गीता अच्छी तरह से समझा दी क्या ?” गौवर्ण ने कहा-“हाँ, मुनिवर । एक-एक शब्द, पद व अक्षर की व्याख्या करके समझाया है।” महायोगी विशाख गौवर्ण से बोले-“सच तो यह है कि आपने स्वयं ही गीता का मर्म नहीं समझा अन्यथा आप आधे राज्य के लोभ के कारण इस प्रपंच में नहीं पड़ते क्योंकि गीता तो निष्काम कर्म करने की शिक्षा देती है, फल प्राप्ति की आशा से कर्म करने की नहीं । राजन् ने भी अर्थ नहीं समझा है, अन्यथा विद्वानों का मान-सम्मान करने वाले राजा का व्यवहार इस प्रकार का नहीं होता। वास्तव में दूसरे को उपदेश देने का अधिकारी वही है जो स्वयं उस पर आचरण करता हो। ज्ञान या स्वाध्याय का अर्थ हमें स्वयं को जानना है।

विद्याग्रहण करने के बाद भी जिसने स्वयं को न जाना वह उसी व्यक्ति के समान है जिसके पास नक्शा तो है पर मार्ग नहीं सूझता। ज्ञान हमें रास्ता बताता है। इससे हमारी विचार शक्ति बढ़ती है और देखने की शक्ति व्यापक हो जाती है तथा मनन करने की शक्ति में वृद्धि हो जाती है। हम किसी परिणाम पर युक्तियुक्त ढंग से पहुँचने का प्रयत्न करते हैं। विद्या से विनम्रता आती है और व्यक्ति शालीन बन जाता है। मन शान्त हो जाता है, चित्त एकाग्र हो जाता है और तृष्णाओं का शमन होता है। मात्र विषयों को जानना ही सच्चा ज्ञान नहीं है, पढ़े हुए को चरित्र में डालना ही सच्चा ज्ञान है।

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(घ) अर्जुन ने इन्द्र से अपनी विद्या का उपयोग किन-किन के लिए करने को कहा था ?
उत्तर
अर्जुन ने इन्द्र से अपनी विद्या का उपयोग सत्य व न्याय की रक्षा करने, दुष्टों का दमन करने, असहायों की सहायता करने, नारी की रक्षा करने, निर्बल को सबल बनाने तथा धर्म की रक्षा करने के लिए कहा था।

(ङ) राजा आनन्दपाल के मन में किस प्रसंग को सुनकर हलचल मची और क्यों?
उत्तर
जब महायोगी विशाख के मुँह से राजा आनन्दपाल ने अर्जुन और इन्द्र से सम्बन्धित प्रसंग सुना तो उसके मन में हलचल मच गई। उन्हें लगा कि राजा के रूप में उनका कार्य जन कल्याण होना चाहिए, राज भोग की लिप्सा नहीं। उनके मन में वैराग्य भाव जाग्रत हो गया। उन्होंने अपना सम्पूर्ण राजपाट गीता का मर्म.सुनाने वाले पंडित गौवर्ण को देने की इच्छा व्यक्त की। उधर महाज्ञानी गौवर्ण सोचने लगे कि मैं तो पंडित हूँ, राज भोग अथवा आधे राज्य का लालच मेरे आत्मकल्याण के लिए उचित नहीं। उनके मन में भी विरक्ति पैदा हो गई और वे भी राज-पाट के मोह से मुक्त हो गए।

(च) इस कहानी से आज का विद्यार्थी क्या सीख ले सकता है ? अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर
इस कहानी से आज का विद्यार्थी यह सीख ग्रहण कर सकता है कि उसे सच्ची, अर्थपूर्ण एवं सही शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए। साथ ही उसे यह भी स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि शिक्षा मात्र धनोपार्जन तथा यश प्राप्ति का साधन नहीं है वरन् इसका उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए। यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि यदि विद्यार्थी अपने द्वारा अर्जित ज्ञान (शिक्षा) को अपने चरित्र में भी डाल लेता है तो वह और अधिक सार्थक हो सकता है। साथ ही इस कहानी के द्वारा विद्यार्थियों को यह भी संदेश दिया गया है कि उन्हें लोभ और लालच से सदैव बचना चाहिए।

प्रश्न 4.
किसने, किससे कहा?
(क)”मुझे गीता का ज्ञान प्राप्त करना है।”
उत्तर
राजा आनन्दपाल ने अपने मंत्रियों से कहा।

(ख)”राजन आप लोभवश ऐसा कह रहे हैं।”
उत्तर
गौवर्ण ने राजा आनन्दपाल से कहा।

(ग) “आप अपने दिए हुए वचन से पीछे हट रहे हैं।”
उत्तर
गौवर्ण ने राजा आनन्दपाल से कहा।

(घ) “धृष्टता क्षमा करें देव। विजय, यश और राज्य भोगने के लिए मैंने धनुर्विद्या प्राप्त नहीं की है।”
उत्तर
अर्जुन ने इन्द्र से कहा।

(ङ) “आप दोनों ही गीता के मर्म को भली-भाँति समझ गए हैं।”
उत्तर
महायोगी विशाख ने राजा आनन्दपाल एवं गौवर्ण दोनों से कहा।

गीता का मर्म भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और उन्हें अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए
मर्मज्ञ, ढिंढोरा, महात्म्य, प्रकाण्ड, धनुर्विद्या, स्वाध्याय, तृष्णा ।
उत्तर
विद्यार्थी उपर्युक्त शब्दों को ठीक-ठीक पढ़कर उनका | शुद्ध उच्चारण करने का अभ्यास करें।
वाक्य प्रयोग-

  1. आर्यभट्ट ज्योतिष विद्या के भी मर्मज्ञ थे।
  2. राजा ने अपने राज्य में यह ढिंढोरा पिटवा दिया कि पूर्णमासी को एक विशाल दंगल का आयोजन होगा।
  3. हिन्दू धर्म में गौ-दान का बहुत महात्म्य बताया गया है।
  4. कालिदास संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान थे।
  5. अर्जुन धनुर्विद्या में सर्वाधिक निपुण योद्धा थे।
  6. विद्यार्थी को स्वाध्याय अवश्य करना चाहिए।
  7. मनुष्य को कभी भी पराये धन एवं वैभव की तृष्णा नहीं करनी चाहिए।

प्रश्न 2.
‘वाचाल’शब्द में ता’ प्रत्यय लगाकर नया शब्द ‘वाचालता’ और ‘सत्य’ में ‘अ’ उपसर्ग लगाकर ‘असत्य’
नया शब्द बना है। इसी प्रकार ‘ता’ प्रत्यय और ‘अ’ उपसर्ग लगाकर चार-चार शब्द लिखिए
उत्तर
‘ता’ प्रत्यय से बने शब्द – ‘अ’ उपसर्ग से बने शब्द
(1) आतुर + ता = आतुरता – (1) अ + नाथ = अनाथ
(2) कामुक + ता = कामुकता – (2) अ + धर्म = अधर्म
(3) दृढ़ + ता = दृढ़ता – (3) अ+ ज्ञात = अज्ञात
(4) महान + ता = महानता – (4) अ+ ज्ञानी = अज्ञानी

प्रश्न 3
निम्नलिखित सामासिक पदों का समास विग्रह करते हुए उनमें निहित समास पहचानकर लिखिए
महापण्डित, मान-सम्मान, यथोचित, लोभवश, महाराज, देवलोक, तपोनिधि।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 1
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 2

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का सन्धि-विच्छेद कीजिए और सन्धि का प्रकार भी लिखिए
सम्मान, स्वागत, उत्थान, निराश, परोपकार।।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 3

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वर्ग पहेली में से राजा, इन्द्र, नारी और धनुष के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द खोजकर लिखिए
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 4
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 5
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 6

प्रश्न 6.
उदाहरण के अनुसार ‘नहीं’,’मत’ और ‘न’ का – प्रयोग हुए निषेधवाचक वाक्य (दो-दो) लिखिए।
उत्तर
(क) ‘नहीं’ का प्रयोग
उदाहरण- मेरी समझ में कुछ नहीं आया।

  1. उसने मुझसे कुछ नहीं कहा।
  2. वह मेरे लिए उपहार नहीं लाया।

(ख) ‘मत’ का प्रयोग
उदाहरण-कक्षा में शोर मत करो।

  1. वहाँ मत बैठो।
  2. सड़क के बीचों-बीच मत चलो।

(ग) ‘न’ का प्रयोग
उदाहरण-आप इधर न बैठे।

  1. आप इधर न थूकें।
  2. कृपया मुझे अनावश्यक सलाह न दें।

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प्रश्न 7.
अर्थ के आधार पर निम्नलिखित वाक्यों के भेद – उनके सामने लिखिए
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 22 गीता का मर्म 7

गीता का मर्म परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) “सच तो यह है कि आपने स्वयं ही गीता का मर्म नहीं समझा अन्यथा आप आधे राज्य के लोभ के कारण इस प्रपंच में नहीं पड़ते क्योंकि गीता तो निष्काम कर्म करने की शिक्षा देती है, फल प्राप्ति की आशा से कर्म करने की नहीं। राजन् ने भी अर्थ नहीं समझा है, अन्यथा विद्वानों का मान-सम्मान करने वाले राजा का व्यवहार इस प्रकार का नहीं होता। वास्तव में दूसरे को उपदेश देने का अधिकारी वही है जो स्वयं उस पर आचरण करता हो। ज्ञान या स्वाध्याय का अर्थ हमें स्वयं को जानना है। विद्याग्रहण करने के बाद भी जिसने स्वयं को न जाना वह उसी व्यक्ति के समान है जिसके पास नक्शा तो है पर’मार्ग नहीं सूझता। ज्ञान हमें रास्ता बताता है। इससे हमारी विचार शक्ति बढ़ती है और देखने की शक्ति व्यापक हो जाती है तथा मनन करने की शक्ति में वृद्धि हो जाती है। हम किसी परिणाम पर युक्तियुक्त ढंग से पहुँचने का प्रयत्न करते हैं। विद्या से विनम्रता आती है और व्यक्ति शालीन बन जाता है। मन शान्त हो जाता है, चित्त एकाग्न हो जाता है और तृष्णाओं का शमन होता है। मात्र विषयों को जानना ही सच्चा ज्ञान नहीं है, पढ़े हुए को चरित्र में डालना ही सच्चा ज्ञान है।”

शब्दार्थ-मर्म = अर्थ, सार; प्रपंच = पाखंड, नाटक; निष्काम = बिना स्वार्थ; व्यापक = दीर्घ; युक्तियुक्त = तर्कपूर्ण; शालीन = सभ्य; तृष्णा = इच्छा; शमन शांत ।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा-भारती’ के पाठ ‘ गीता का मम’ से अवतरित है।

प्रसंग-इस गद्यांश में गीता के गूढ़ रहस्य को बहुत ही । सरल शब्दों में समझाया गया है।

व्याख्या-महायोगी विशाख गौवर्ण को सम्बोधित करते हुए – कहते हैं कि गीता के विद्वान होने के बाद भी गौवर्ण गीता-सार को स्वयं ही नहीं समझ पाये। आधा राज्य प्राप्त करने के स्वार्थ के चलते उन्होंने राजा को गीता समझाने की ठानी थी, जबकि गीता तो निस्वार्थ भाव से कर्म करने की सीख देती है। दूसरी ओर राजा, जो ज्ञानी लोगों का सदैव आदर-सत्कार करता था, वह भी । मीता के ज्ञान को किंचित मात्र भी ग्रहण नहीं कर सका। वास्तवमें, वही व्यक्ति दूसरों को सीख प्रदान कर सकता है, जो स्वयं उस सीख पर अमल करता हो। ज्ञान प्राप्ति का प्रमुख उद्देश्य व्यक्ति के लिए स्वयं को जानना होना चाहिए। ज्ञान हमें हमारे ।

गंतव्य तक का रास्ता सुझाता है। ज्ञान से हमारी विचार शक्ति, दृष्टिकोण एवं मनन करने की शक्ति बढ़ती है। यह ज्ञान ही है कि. । जिसके चलते हम किसी समस्या के समाधान हेतु तर्कपूर्ण ढंग से सोच पाते हैं। विद्या व्यक्ति के अन्दर समस्त उच्च मानवीय गुणों; यथा-विनम्रता, शालीनता इत्यादि को समाहित करती है और उसके मन को शान्त एवं चित्त को एकाग्र कर उसकी समस्त इच्छाओं को शान्त करती है। वास्तव में, ज्ञान का सही अर्थ विभिन्न विषयों का अध्ययन करना ही नहीं है अपितु अर्जित ज्ञान को चरित्र में ढालकर जीवन को उच्चता की ओर ले जाना है।

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MP Board Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 10 Pran Jaye Par Vriksh Na Jaye Question and Answer

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 10 Pran Jaye Par Vriksh Na Jaye Question Answer MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 10 Pran Jaye Par Vriksh Na Jaye Question Answers MP Board

भाषा भारती कक्षा 8 पाठ 10 प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए प्रश्न उत्तर

बोध प्रश्न

MP Board Class 8 Hindi Chapter 10 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
उत्तर
रक्षक = रक्षा करने वाले ताम्रपत्र = ताँबे का पत्तर, स्मृति पत्र; श्रद्धांजलि = मरने के बाद श्रद्धा प्रकट करने हेतु व्यक्त शब्द; संवर्द्धन = वृद्धि, विकास; शहीद = बलिदान; प्रशस्ति = प्रशंसा; उत्कृष्ट = उच्च कोटि का।

Class 8 Hindi Chapter 10 MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप में उत्तर लिखिए

(क) सैनिकों की कुल्हड़ी का सबसे पहले विरोध किसने किया?
उत्तर
सैनिकों की कुल्हाड़ी का सबसे पहले विरोध एक महिला अमृता देवी विश्नोई ने किया। कुल्हाड़ी चलाना आरम्भ किए जाने पर अमृतादेवी विश्नोई पेड़ों से लिपट गई।

(ख) अमृता देवी का नारा क्या था?
उत्तर
पेड़ों से लिपटकर वह कहती रही “सिर साँटे पर  रूख रहे तो भी सस्तो जाण”। यही अमृतादेवी का नारा था।’

(ग) विश्नोई समाज की स्थापना किसने की थी ?
उत्तर
विश्नोई समाज की स्थापना आज से लगभग पाँच सौ वर्ष पहले सन् 1485 ई. में भगवान जम्भेश्वर ने की थी।

(घ) हिरणों की रक्षा में कौन शहीद हुआ था ?
उत्तर
सन् 1996 ई. में अक्टूबर माह में राजस्थान के चुरु जिले में हिरणों की रक्षा करते हुए श्री निहालचन्द विश्नोई शहीद हुए थे।

(ङ) राजा ने पेड़ काटने की क्या सजा घोषित की ?
उत्तर
राजा अभयसिंह ने सैनिकों के दुष्कृत्य के लिए क्षमा माँगी और ताम्रपत्र पर राजा की आज्ञा को जारी किया गया कि विश्नोई गाँवों में कोई भी पेड़ नहीं काटेगा। यदि काटेगा तो राजदण्ड का भागी होगा।

Bhasha Bharti Class 8 Chapter 10 प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए

(क) जोधपुर के राजा अभयसिंह को लकड़ी की आवश्यकता क्यों पड़ी? इसके लिए उन्होंने क्या किया ?
उत्तर
जोधपुर के राजा अभयसिंह ने अपना महल बनवाया। यह भादों का महीना था एवं शुक्ल पक्ष की दशमी का दिन था। इसके निर्माण के लिए राजा अभयसिंह को लकड़ी की आवश्यकता पड़ी। इसके लिए राजा अभयसिंह ने अपनी सेना के कुछ सैनिकों को लकड़ी काटकर लाने का आदेश दिया। इस तरह राजा के सैनिक जोधपुर के पास खेजड़ली गाँव पहुँचे। वहाँ वे पेड़ काटना चाहते थे। यह गाँव विश्नोइयों का था। विश्नोइयों ने कहा, “हम परम्परा से वनों के रक्षक हैं। हमारे रहते पेड़ नहीं कट सकते।” सैनिकों ने उनके विरोध की अनदेखी की। सैनिकों ने कुल्हाड़ी चला दी। अमृता देवी विश्नोई नामक महिला पेड़ों से लिपट गई और कहती रही, “सिर साँटे पर रूख रहे तो भी सस्तो जाण।” राजा की आज्ञा का पालन करना है, इस भाव से सैनिकों ने अमृता देवी को काट डाला।

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(ख) अमृता देवी वृक्षों की रक्षा और किस प्रकार से कर सकती थीं ? सोचकर लिखिए।
उत्तर
राजा के आदेश से उनके सैनिक पेड़ काटने के लिए खेजड़ली गाँव पहुँचे। राजा की आज्ञा का पालन करना उन सैनिकों का धर्म हो गया था। अमृता देवी वृक्षों की रक्षा के लिए उन्हें काटने से रोकने के लिए, सैनिकों से निवेदन कर सकती थीं तथा अपनी बात को राजा के पास जाकर विरोध के रूप में कह सकती थीं और पेड़ों के न काटने के लिए अपनी परम्परा को स्पष्ट रूप से बता सकती थीं।

(ग) अमृतादेवी का नारा इस पाठ में किस तरह सार्थक हुआ?
उत्तर
अमृता देवी का नारा, “सिर साँटे पर रूख रहे तो भी सस्तो जाण” सार्थक हो गया। पेड़ों की आवश्यकता हम लोगों को है, पेड़ों को हमारी आवश्यकता नहीं है। दिन-प्रतिदिन बढ़ते प्रदूषण से अपनी रक्षा के लिए हमें पेड़ लगाने होंगे और उनकी रक्षा करनी होगी। अमृता देवी और तीन सौ बासठ शहीदों के बलिदान की स्मृति में भारत सरकार प्रति वर्ष राष्ट्रीय पर्यावरण पुरस्कार देती है। मध्य प्रदेश का वन विभाग प्रति वर्ष वन-संवर्द्धन एवं वन रक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली ग्राम पंचायत अथवा संस्था को शहीद अमृता देवी विश्नोई पुरस्कार और एक लाख रुपया नकद प्रदान करता है। मध्य प्रदेश सरकार शहीद अमृता देवी विश्नोई के नाम पर दो व्यक्तिगत पुरस्कार भी देती है। पचास हजार रुपया नगद और प्रशस्ति पत्र के पुरस्कार के रूप में वन सम्बर्द्धन और वन्य प्राणियों की रक्षा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति को प्रतिवर्ष दिए जाते हैं।

(घ) राजा अभयसिंह ने पश्चाताप किस प्रकार किया ?
उत्तर
जब जोधपुर के राजा अभयसिंह को विश्नोई समाज द्वारा किए गये बलिदान सम्बन्धी भीषण घटना का समाचार मिला तो उन्हें बड़ा दुःख हुआ। वे स्वयं खेजड़ली गाँव आए। अपनी सेना के द्वारा किए गये दुष्कृत्य के लिए क्षमा माँगी। उन्होंने ताम्रपत्र जारी किया। उसमें राजाज्ञा जारी की गई कि विश्नोई – गाँवों में कोई पेड़ नहीं काटेगा। यदि काटेगा तो राजदण्ड का भागी होगा। इस प्रकार राजा के द्वारा निर्णय लिया गया और पश्चाताप किया गया।

(ङ) अमृता देवी व अन्य शहीदों से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर
अमृता देवी व अन्य शहीदों से यह प्रेरणा मिलती है कि हमें पर्यावरण की सुरक्षा के लिए वृक्षों और वनों को पूर्ण सुरक्षा देनी चाहिए। उनके सम्वर्द्धन और विकास में रुचि लेनी चाहिए। वन्य जीवों की सुरक्षा और उनकी प्रजातियों का विकास करना चाहिए। प्रत्येक राज्य सरकार को वृक्षारोपण और वन सम्पदा के विकास और सुरक्षा के लिए अपनी ओर से प्रोत्साहन पुरस्कार घोषित किये जाने चाहिए। ग्राम पंचायतों को भी वृक्षों का आरोपण करने के अभियान चलाने चाहिए।

Hindi Chapter 10 Class 8 MP Board प्रश्न 4.
सही विकल्प चुनिए
(क) विश्नोई समाज के नियम मुख्यतः आधारित थे
(अ) प्रकृति के पोषण पर
(आ) समाज की परम्परा पर
(इ) धर्म की मान्यता पर
(ई) जीव-जन्तुओं के प्रति करुणा पर,
(उ) इन सबके सम्मिलित प्रभाव वाली प्रथा पर।
उत्तर
उ) इन सबके सम्मिलित प्रभावशाली प्रथा पर

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(ख) म. प्र. सरकार किसके नाम पर दो व्यक्तिगत पुरस्कार देती है?
(अ) विश्नोई समाज
(आ) अमृता देवी विश्नोई
(इ) निहालचन्द विश्नोई
(ई) शहीदों।
उत्तर
(आ) अमृता देवी विश्नोई

(ग) वृक्ष का पर्यायवाची शब्द है
(अ) काननं
(आ) तरु
(इ) गिरि
(ई) चक्षु
उत्तर
(आ) तरु

(घ) अमृता देवी के साथ शहीद विश्नोइयों की संख्या थी
(अ) 362
(आ) 365
(इ) 363
(ई) 364
(ङ) श्री निहाल चन्द विश्नोई को भारत सरकार ने
उत्तर
(अ) 362

(ङ) सम्मानित किया
(अ) पद्मश्री से
(आ) शौर्य चक्र से
(इ) परमवीर चक्र से
(ई) वीर चक्र से।
उत्तर
(आ) शौर्य चक्र से

भाषा-अध्ययन

Class 8 Hindi Chapter 10 Pran Jaye Par Vachan Na Jaye प्रश्न 1.
नीचे लिखे शब्दों के विलोम शब्द उनके नीचे बनी वर्ग पहेली (पाठ्यपुस्तक में) में दिए गए हैं। आप उन्हें खोजकर लिखिए
वाचाल, राजा, अपमानित, भक्षक, हर्ष, क्षम्य, हिंसा, हित, दुःखी, विरोध।
उत्तर

  1. मूक
  2. रंक
  3. सम्मानित
  4. रक्षक
  5. शोक
  6. अक्षम्य
  7. अहिंसा
  8. अहित
  9. सुखी
  10. समर्थन

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 10 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध उच्चारण कीजिए और उन्हें वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
श्रद्धांजलि, संकल्प, शौर्यचक्र, प्रासंगिक, जम्भेश्वर।
उत्तर
विद्यार्थी उपर्युक्त शब्दों को ठीक-ठीक पढ़कर उनका शुद्ध उच्चारण करने का अभ्यास करें।
वाक्यों में प्रयोग-

  1. महापुरुषों के नियमों का पालन करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होती है।
  2. हम देश की सेवा करने का संकल्प लेते हैं।
  3. निहाल चन्द को मरणोपरान्त शौर्य चक्र से सम्मानित किया।
  4. अमृता देवी का वृक्ष संरक्षण कार्यक्रम आज बहुत ही प्रासंगिक है।
  5. जम्भेश्वर भगवान ने प्रकृति के नियमों के पालन का आदेश दिया।

Class 8 Chapter 10 Hindi MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों की सन्धि विच्छेद कीजिए और सन्धि का प्रकार लिखिए
वृक्षारोपण, एकमेव, राजाज्ञा, मरणोपरान्त, वातावरण।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 10 प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए 1
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 10 प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए 2

Class 8th Hindi Chapter 10 MP Board प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का समास विग्रह कीजिए
ताम्रपत्र, राजदण्ड, प्रतिवर्ष, ग्राम पंचायत, शौर्य चक्र।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 10 प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए 3

MP Board Class 8th Hindi Chapter 10 प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग पहचानकर लिखिए
गैर सैनिक, पर्यावरण, सम्मान, प्रशस्ति, प्रदूषण, संवर्द्धन।
उत्तर
MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 10 प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए 4

Class 8 Hindi Chapter 10 Bhasha Bharti प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों में उद्देश्य और विधेय छाँटकर लिखिए
(क) भगवान जम्भेश्वर द्वारा हरे-भरे वृक्षों को बनाए रखने की प्रेरणा दी गई थी।
(ख) विश्नोई समाज ने वनों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
(ग) भारत शासन प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पुरस्कार देता है।
उत्तर
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प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) इन दिनों वृक्षों की घटती संख्या और बिगड़ते पर्यावरण को देखकर समूचे विश्व में पर्यावरण की रक्षा की चिन्ता की जा रही है। वृक्षों की अंधाधुन्ध कटाई पर रोक लगाई जा रही है। वृक्षारोपण पर जोर दिया जा रहा है। आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व जब चारों ओर वन-ही-वन थे, भगवान जम्भेश्वर द्वारा हरे-भरे वृक्षों की रक्षा करने की प्रेरणा देना सचमुच अद्भुत था। इन दिनों बिगड़ते प्रदूषण को देखते हुए यह प्रेरणा बहुत प्रासंगिक है।

शब्दार्थ-घटती संख्या कम होती संख्या; पर्यावरण = चारों ओर का वातावरण; अंधाधुन्ध = बिना सोचे-विचारे; वृक्षारोपण = पेड़-पौधे लगाना; प्रेरणा = उत्साहपूर्ण तीव्र इच्छा; अद्भुत = अनोखी; बिगड़ते = खराब होते; प्रदूषण = बहुत तीव्रता से फैलते हुए दोष; प्रासंगिक = उचित।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के पाठ ‘प्राण जाएँ पर वृक्ष न जाए’ से अवतरित हैं।

प्रसंग-इसमें वृक्षों की अन्धाधुन्ध कटाई के दोष और पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव को बताया है।

व्याख्या-आजकल लोगों द्वारा वृक्षों को काटा जा रहा है। इससे वृक्षों की संख्या में बहुत कमी आ गई है। इसका सीधा प्रभाव यह हुआ है कि हमारे चारों ओर का वातावरण खराब होता जा रहा है। इसके दोषपूर्ण प्रभाव को देखते हुए विद्वानों को इस बात की चिन्ता लग गई है कि इस बिगड़ते वातावरण को किस तरह बचाया जाए। अत: विभिन्न देशों की सरकारों में वृक्षों की बिना सोचे-विचारे की जा रही कटाई पर रोक लगाने के लिए विचार किया जा रहा है। इसके अलावा नए वृक्ष लगाए जाने के “लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। आज से सैकड़ों वर्ष पहले हमारे चारों ओर घने जंगल बड़ी तादाद में थे। भगवान जम्भेश्वर का आज से लगभग पाँच सौ वर्ष पहले जन्म हुआ था। उन्होंने लोगों को प्रेरित किया कि वे हरे-भरे वृक्षों की रक्षा करें और नये पेड़-पौधे लगाएँ। इस तरह लोगों में उत्साह जागृत करना सभी के लिए एक अनोखी बात थी। आज के पर्यावरण को चारों ओर से प्रदूषित किए जाने के प्रसंग में उनके द्वारा दी गई प्रेरणा व उत्साह बहुत ही महत्वपूर्ण है।

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(2) आज्ञा पालन विवेक के साथ करना है, इस बात का सैनिकों ने ध्यान नहीं रखा। इस बलिदान को देखकर सैकड़ों विश्नोई नर नारी आगे आकर पेड़ों की रक्षा करने के लिए पेड़ों से लिपट गए। पेड़ों को काटने से बचाने के लिए सभी अपना सिर कटवाने को तैयार थे। पेड़ों की रक्षा के लिए आत्म-बलिदान के लिए तत्पर विश्नोई नर-नारी “सिर साँटे पर रूख रहे” का नारा लगा रहे थे। सेना कुल्हाड़ी चलाती रही। एक-एक करके 362 विश्नोई नर-नारी स्वयं कट गए, परन्तु उन्होंने एक भी पेड़ नहीं कटने दिया।

शब्दार्थ-विवेक = अच्छी तरह विचार करके; आज्ञा पालन = आदेश का मानना; बलिदान = त्याग; नर-नारीपुरुष और स्त्री; रक्षा = बचाव; आत्मबलिदान = अपने जीवन का त्याग; तत्पर = तैयार; साँटे = कट जाए; रूख = वृक्ष।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-पेड़ों की रक्षा में विश्नाई समाज ने अपना बलिदान दिया; इस महान त्याग के विषय में बताया जा रहा है।

व्याख्या-जोधपुर के राजा अभयसिंह ने अपने सैनिकों को अपने महल के निर्माण के लिए खेजड़ली गाँव में जाकर पेड़ों को काटने के लिए आदेश दिया। उस गाँव के विश्नोई समाज के लोगों ने उन सैनिकों को पेड़ काटने से रोक दिया। सैनिक राजा की आज्ञा पालन करना ही उचित समझते रहे। उनके द्वारा राजा की आज्ञा का पालन सोच-विचार करके ही करना चाहिए था, लेकिन सैनिकों ने इस बात का ध्यान नहीं रखा। विश्नोई समाज के सैकड़ों लोग पेड़ों को कटने से बचाने के लिए आये और पेड़ों से लिपट गये। वे सभी अपने सिर कटवाने को तैयार थे परन्तु पेड़ नहीं कटने चाहिए। वे पेड़ों को काटे जाने से रोकने के लिए अपना बलिदान देने को तैयार थे। उन्होंने कहा था कि चाहे हमारे सिर कट जाएँ, पर वृक्षों को काटने से रोका जाए। उनकी रक्षा की जानी चाहिए। उनका यही नारा था। सेना अपनी कुल्हाड़ी चला रही थी। उधर एक-एक करके तीन सौ बासठ विश्नोई समाज के स्त्री-पुरुष अपने आप कट गए। उन्होंने इस तरह एक भी वृक्ष नहीं कटने दिया।

(3) स्मरण रहे, हमें पेड़ों की जरूरत है, पेड़ों को हमारी जरूरत नहीं है। वातावरण में दिन-प्रतिदिन बढ़ते प्रदूषण से बचने के लिए हमें पेड़ों की रक्षा करनी ही होगी तथा और पेड़ लगाने होंगे। वृक्ष रक्षा तथा जीवन रक्षा का संकल्प एवं नया वृक्षारोपण कार्य ही वृक्षों की रक्षा में शहीद हुए विश्नोइयों को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

शब्दार्थ-स्मरण रहे = याद रखना होगा; जरूरत = आवश्यकता; दिन-प्रतिदिन = रोजाना; प्रदूषण = बड़ी मात्रा में दोष; बचाने के लिए = रक्षा के लिए; और दूसरे लगाने होंगे रोपने होंगे; संकल्प = प्रतिज्ञा, प्रण; वृक्षारोपण कार्य = वृक्ष लागने का काम; शहीद हुए = अपनी बलि देने वाले।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-बलिदान करने वाले विश्नोइयों को श्रद्धांजलि देने के लिए हमें वृक्ष लगाने होंगे तथा वन के जीवों की रक्षा करनी -होगी।

व्याख्या-हमें यह याद रखना होगा कि हमारी आवश्यकता है कि पेड़ रहें। पेड़ों को हमारी कोई आवश्यकता नहीं है। हमारे चारों ओर के वातावरण में रोजाना प्रदूषण बढ़ रहा है। हमें अपनी रक्षा करनी है, तो हमें पेड़ों की रक्षा करनी होगी। क्योंकि प्रदूषण से हम अनेक तरह के रोगों से ग्रस्त हो जायेंगे। इसके लिए हमें पेड़ लगाने होंगे। वन के जीवों की रक्षा करने से और नये पेड़-पौधे लगाने से ही हम बलिदानी विश्नोइयों को सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।

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