MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 15 कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 15 कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ

MP Board Class 8th Science Chapter 15 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 184

प्रश्न 1.
मुझे आश्चर्य है कि उन्हें इस समानता को ज्ञात करने में इतने वर्ष क्यों लगे?
उत्तर:
इस समानता को ज्ञात करने में इतने वर्ष इसलिए लगे क्योंकि किसी वस्तु का परिणाम जानने के लिए वैज्ञानिक खोजें करते हैं। खोज करने के लिए उन्हें लम्बे समय तक कठिन परिश्रम करना पड़ता है तब उनके परिश्रम का परिणाम निकलता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 185

रगड़ द्वारा आवेशन

क्रियाकलाप 15.2

प्रश्न 1.
सारणी में दी गई वस्तुएँ तथा पदार्थ एकत्र कीजिए। इनमें से प्रत्येक वस्तु को सारणी में दिए अनुसार पदार्थ के साथ रगड़कर आवेशित कीजिए। अपने अनुभवों को नोट कीजिए। आप इस सारणी में और अधिक वस्तुएँ जोड़ सकते है।
उत्तर:
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 15 कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ 1

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 186

क्रियाकलाप 15.3

प्रश्न 1.
आप क्या देखते हैं?
उत्तर:
गुब्बारे एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।

प्रश्न 2.
क्या गिलास में रखे रिफिल पर कोई प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
हाँ, गिलास में रखे रिफिल पर प्रभाव पड़ता है।

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प्रश्न 3.
क्या ये दोनों रिफिल एक-दूसरे को आकर्षित अथवा प्रतिकर्षित करते हैं?
उत्तर:
हाँ, वे एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।

प्रश्न 4.
यदि भिन्न पदार्थों से बनी दो आवेशित वस्तुओं को एक-दूसरे के निकट लाएँ तो क्या होगा?
उत्तर:
वे एक-दूसरे को आकर्षित करेंगी।

आवेशों के प्रकार तथा इनकी अन्योन्य क्रिया

प्रश्न 1.
क्या यह इंगित करता है कि गुब्बारे पर आवेश रिफिल के आवेश से भिन्न प्रकार का है?
उत्तर:
हाँ, यह इंगित करता है कि गुब्बारे पर आवेश रिफिल के आवेश से भिन्न प्रकार का है।

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प्रश्न 2.
क्या फिर हम यह कह सकते हैं कि आवेश दो प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
हाँ, आवेश दो प्रकार के होते हैं। धन आवेश तथा ऋण आवेश।

प्रश्न 3.
क्या हम यह भी कह सकते हैं कि सजातीय आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं जबकि विजातीय आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं?
उत्तर:
हाँ, यह सत्य है कि सजातीय आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित तथा विजातीय आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 187

प्रश्न 1.
आपके विचार से प्लास्टिक स्ट्रॉ पर किस प्रकार का आवेश होना चाहिए?
उत्तर:
प्लास्टिक स्ट्रॉ पर ऋणात्मक आवेश होना चाहिए।

आवेश का स्थानान्तरण

क्रियाकलाप 15.4

प्रश्न 1.
प्रेक्षण कीजिए क्या होता है? क्या पन्नी की पट्टियों पर कोई प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
हाँ, पन्नी की पट्टियाँ फैल जाती हैं।

प्रश्न 2.
क्या वे एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं अथवा आकर्षित करती हैं?
उत्तर:
हाँ, वे एक-दसरे को प्रतिकर्षित करती हैं।

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प्रश्न 3.
क्या हर बार पन्नी की पट्टियाँ समान रूप से व्यवहार करती हैं?
उत्तर:
हाँ, वे हर बार समान रूप से व्यवहार करती हैं।

प्रश्न 4.
क्या इस उपकरण का उपयोग यह पहचान करने के लिए कर सकते हैं कि कोई वस्तु आवेशित है अथवा नहीं? व उत्तर:
हाँ, इस उपकरण का उपयोग हम यह पहचान करने के लिए कर सकते हैं कि कोई वस्तु आवेशित है या नहीं।

प्रश्न 5.
क्या आप यह स्पष्ट कर सकते हैं कि पन्नी की पट्टियाँ एक-दूसरे को क्यों प्रतिकर्षित करती हैं?
उत्तर:
पन्नी की पट्टियाँ आवेशित वस्तुओं से समान आवेश प्राप्त करती हैं। समान आवेश वाली पट्टियाँ एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं और वे फैल जाती हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 189

तड़ित झंझा के समय क्या करें क्या न करें।

प्रश्न 1.
क्या आपको याद है कि तड़ित एक विद्युत् विसर्जन है?
उत्तर:
हाँ, याद है कि तड़ित एक विद्युत् विसर्जन है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 191

क्रियाकलाप 15.5

प्रश्न 1.
इन भूकम्पों द्वारा लोगों को हुई क्षति से सम्बन्धित संक्षिप्त रिपोर्ट बनाइए।
उत्तर:
पृथ्वी का अचानक काँपना अथवा थरथराना भूकम्प कहलाता है। यह एक प्राकृतिक आपदा है। भूकम्प के अन्तर्गत पृथ्वी अचानक थरथराने लगती है। इसका पहले से आभास नहीं होता है। भूकम्प के आने पर जनजीवन तथा सम्पत्ति की अपार क्षति होती है। इसके परिणामस्वरूप, भवन, सड़क, पुल, बाँध आदि नष्ट हो जाते हैं। जब भूकम्प काफी शक्तिशाली होते हैं तो जनजीवन और सम्पत्ति की बहुत अधिक हानि होती है। भूकम्प के आने से क्षेत्र सम्पूर्ण रूप से नष्ट हो जाते हैं। इसके आने से बाढ़, भूस्खलन, सुनामी आदि का खतरा बढ़ जाता है।

भूकम्प क्या होता है?

प्रश्न 1.
भूकम्प क्या होता है?
उत्तर:
पृथ्वी का अचानक काँपना अथवा थरथराना भूकम्प कहलाता है।

प्रश्न 2.
जब यह आता है तो क्या होता है?
उत्तर:
भूकम्प के आने से जनजीवन और सम्पत्ति की अपार हानि होती है। इसके आने से भवन, सड़क, पुल, बाँध आदि नष्ट हो जाते हैं। भूकम्प के आने से बाढ़, भूस्खलन तथा सुनामी आदि जैसी अन्य प्राकृतिक आपदाएँ आने की सम्भावना रहती है।

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प्रश्न 3.
इसके प्रभाव को कम करने के लिए हम क्या कर सकते हैं?
उत्तर:
भूकम्प के प्रभाव को कम करने के लिए निम्न उपाय कर सकते हैं –

  1. भवनों का निर्माण ऐसा हो कि वे बड़े भूकम्पों के झटकों को सहन कर सकें। भवनों के ढाँचे सरल हों ताकि वे ‘भूकम्प निरापाद’ हों।
  2. सभी भवनों विशेषकर ऊँची इमारतों में अग्निशमन के सभी उपकरण कार्यकारी स्थिति में होने चाहिए।
  3. भूकम्प प्रतिरोधी भवनों का निर्माण कराना चाहिए।
  4. दीवार घड़ी, फोटो फ्रेम, जल तापक आदि को दीवार पर लगाते समय सावधानी रखनी चाहिए ताकि वे भूकम्प आने पर लोगों के ऊपर न गिरें।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 192

क्रियाकलाप 15.6

प्रश्न 1.
अपने माता-पिता अथवा परिवार के अन्य बड़े-बूढ़ों अथवा पास-पड़ौस से भारत में सुनामी के कारण हुए नुकसान की जानकारी एकत्र कीजिए।
उत्तर:
प्राणघातक सुनामी लहरें हिन्द महासागर में 26 दिसम्बर, 2004 को आई थीं। इसमें लाखों लोगों की जीवनलीला समाप्त हो गई। इस आपदा से आर्थिक, जैविक तथा भावनात्मक असीमित हानि हुई। तमिलनाडु राज्य के दक्षिण-पूर्व समुद्री क्षेत्र तथा संघीय प्रदेश अण्डमान एवं निकाबार द्वीप समूह में हजारों मछुहारों तथा कई गाँवों से मानव सम्पदा समाप्त हो गई। तटीय क्षेत्र नष्ट हो गए। नागापट्टिनम शहर के कई मछुआरों के समुदाय समाप्त हो गए। वास्तव में ये इतनी ज्वारिक लहरें थीं जिसने हिंसक तांडवीय रूप धारण कर लिया था।

भूकम्प का क्या कारण है?

प्रश्न 1.
मेरी दादी ने मुझे बताया था कि पृथ्वी किसी सांड के एक सींग पर टिकी है तथा जब सांड़ उसे दूसरे सींग पर ले जाता है, तो भूकम्प आता है। यह कैसे सत्य हो सकता है?
उत्तर:
यह असत्य है। प्राचीन काल में लोग भूकम्प आने का सही कारण नहीं जानते थे। अतः उनकी धारणा मनगढन्त कथाओं द्वारा व्यक्त की जाती थी।

प्रश्न 2.
पृथ्वी के अन्दर भू-कंपन के क्या कारण हो सकते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी के अन्दर की सबसे ऊपरी सतह भूपर्पटी में विक्षोभ के कारण भू-कंपन होते हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 193

प्रश्न 1.
यदि वैज्ञानिक भूकम्प के बारे में इतना अधिक जानते हैं तो क्या वे आने वाले भूकम्प के समय तथा स्थान की भविष्यवाणी कर सकते हैं?
उत्तर:
यद्यपि वे भूकम्प के बारे में बहुत अधिक जानते हैं परन्तु अभी तक यह सम्भव नहीं हो सका है कि आने वाले भूकम्प के समय और स्थान की भविष्यवाणी कर सकें। ये अचानक आते हैं।

MP Board Class 8th Science Chapter 15 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1 व 2 में सही विकल्प का चयन कीजिए –

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से किसे घर्षण द्वारा आसानी से आवेशित नहीं किया जा सकता?

  1. प्लास्टिक का पैमाना।
  2. ताँबे की छड़।
  3. फूला हुआ गुब्बारा।
  4. ऊनी वस्त्र।

उत्तर:
ताँबे की छड़।

प्रश्न 2.
जब काँच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ते हैं तो छड़ –

  1. तथा कपड़ा दोनों धनावेश अर्जित कर लेते हैं।
  2. धनावेशित हो जाती है तथा कपड़ा ऋणावेशित हो जाती है।
  3. तथा कपड़ा दोनों ऋणावेश अर्जित कर लेते हैं।
  4. ऋणावेशित हो जाती है तथा कपड़ा धनावेशित हो जाता है।

उत्तर:
धनावेशित हो जाती है तथा कपड़ा ऋणावेशित हो जाती है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित कथनों के सामने सही के सामने ‘T’और गलत के सामने ‘F’ लिखिए।

  1. सजातीय आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते (T/F)
  2. आवेशित काँच की छड़ आवेशित प्लास्टिक स्ट्रॉ को आकर्षित करती है। (T/F)
  3. तड़ित चालक किसी भवन की तड़ित से सुरक्षा नहीं कर सकता। (T/F)
  4. भूकम्प की भविष्यवाणी की जा सकती है। (T/F)

उत्तर:

  1. असत्य।
  2. सत्य।
  3. असत्य।
  4. असत्य।

प्रश्न 4.
सर्दियों में स्वेटर उतारते समय चट-चट की ध्वनि सुनाई देती है। व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सर्दियों में जब हम स्वेटर उतारते हैं तो वह हमारी चा से रगड़ खाकर आवेशित हो जाता है। स्वेटर पर आवेश आने के कारण चट-चट की आवाज सुनाई देती है तथा चिंगारी भी दिखाई देती है। वास्तव में यह तड़ित के समान ही एक परिघटना है।

प्रश्न 5.
जब हम किसी आवेशित वस्तु को हाथ से छूते हैं तो वह अपना आवेश खो देती है। व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
हमारा शरीर विद्युत् का सुचालक है। जब हम किसी आवेशित वस्तु को हाथ से छूते हैं तो उसका आवेश हमारे शरीर में होकर पृथ्वी में चला जाता है और आवेशित वस्तु अनावेशित हो जाती है।

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प्रश्न 6.
उस पैमाने का नाम लिखिए जिस पर भूकम्पों की विनाशी ऊर्जा मापी जाती है। इस पैमाने पर किसी भूकम्प की माप 3 है। क्या इसे भूकम्प लेखी (सीसमोग्राफी) से रिकॉर्ड किया जा सकेगा? क्या इससे अधिक हानि होगी?
उत्तर:
भूकम्पों की विनाशकारी ऊर्जा को रिक्टर पैमाने पर मापा जाता है। हाँ, इसे भूकम्पलेखी, (सीसमोग्राफ) से रिकॉर्ड किया जा सकेगा। नहीं, इससे अधिक हानि नहीं होगी।

प्रश्न 7.
तड़ित से अपनी सुरक्षा के तीन उपाय सुझाइए।
उत्तर:
तड़ित से सुरक्षा के उपाय:
तड़ित के समय टेलीफोन व विद्युत् के तारों तथा धातु के पाइपों को नहीं छूना चाहिए।
बहते जल के सम्पर्क से बचने के लिए स्नान नहीं करना चाहिए।
घर में अन्दर होने पर कम्प्यूटर, टी.वी. आदि जैसे विद्युत् उपकरणों के प्लगों को सॉकेट से निकाल देना चाहिए।

प्रश्न 8.
आवेशित गुब्बारा दूसरे आवेशित गुब्बारे को प्रतिकर्षित करता है, जबकि अनावेशित गुब्बारा आवेशित गुब्बारे द्वारा आकर्षित किया जाता है। व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
आवेशित गुब्बारा दूसरे आवेशित गुब्बारे को प्रतिकर्षित करता है क्योंकि दोनों गुब्बारों पर सजातीय आवेश है। हम जानते हैं कि सजातीय आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। परन्तु आवेशित गुब्बारा अनावेशित गुब्बारे को आकर्षित करता है और अपने आवेश में से कुछ आवेश दूसरे गुब्बारे को दे देता है। हम जानते हैं कि आवेशित वस्तु अनावेशित वस्तु को आकर्षित करती है।

प्रश्न 9.
चित्र की सहायता से किसी ऐसे उपकरण का वर्णन कीजिए जिसका उपयोग किसी आवेशित वस्तु की पहचान में होता है।
उत्तर:
साधारण विद्युतदर्शी एक ऐसा उपकरण है जिससे किसी वस्तु में आवेश की उपस्थिति का पता लगाया जा सकता है कि वस्तु पर आवेश है या नहीं। साधारण विद्युतदर्शी काँच का एक बोतल या जार होता है जिसके मुँह पर कॉर्क का एक ढक्कन लगा होता है। कॉर्क के मध्य में एक छेद करके धातु की एक छड़ लगा दी जाती है। छड़ के निचले सिरे पर सोने/ऐलुमिनियम की 4 cm × 1 cm आकार की दो पट्टियाँ लगा दी जाती हैं। छड़ के ऊपरी सिरे पर धातु की एक चकती लगा दी जाती है। जब आवेशित वस्तु के सिरे को धातु की चकती से स्पर्श कराते हैं तो आवेश पट्टियों पर चला जाता है। पट्टियों पर समान आवेश होने से वे एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं और फैल जाती हैं। इस प्रकार इसका उपयोग करके ज्ञात किया जा सकता है कि वस्तु आवेशित है या नहीं।
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 15 कुछ प्राकृतिक परिघटनाएँ 2

प्रश्न 10.
भारत के उन तीन राज्यों (प्रदेशों) की सूची बनाइए जहाँ भूकम्पों के झटके अधिक सम्भावित हैं।
उत्तर:
भारत के तीन राज्य जहाँ भूकम्पों के झटके अधिक सम्भावित हैं –

  1. राजस्थान।
  2. कश्मीर।
  3. कच्छ का रन (गुजरात)।

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प्रश्न 11.
मान लीजिए आप घर से बाहर हैं तथा भूकम्प के झटके लगते हैं। आप अपने बचाव के लिए क्या सावधानियाँ बरतेंगे?
उत्तर:
यदि हम घर के बाहर हैं और भूकम्प के झटके लगते हैं तो हम निम्न सावधानियाँ बरतेंगे –

  1. भवनों, वृक्षों तथा ऊपर जाती हुई विद्युत् लाइनों से दूर किसी खुले स्थान को खोजकर धरती पर लेट जाएँगे।
  2. यदि हम किसी वाहन (कार/बस) में होंगे तो बाहर नहीं निकलेंगे और धीरे-धीरे किसी खुले हुए सुरक्षित स्थान पर पहुँचेंगे।

प्रश्न 12.
मौसम विभाग यह भविष्यवाणी करता है कि किसी निश्चित दिन तड़ित झंझा की सम्भावना है और मान लीजिए उस दिन आपको बाहर जाना है। क्या आप छतरी लेकर जाएँगे? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
तड़ित झंझा की सम्भावना होने पर उस दिन हम छतरी लेकर बाहर नहीं जाएँगे क्योंकि छतरी की डण्डी धातु की बनी होती है, इसलिए तड़ित उसकी डण्डी पर आघात कर सकती है।

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MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 14 विधुत धारा के रासानिक प्रभाव

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 14 विधुत धारा के रासानिक प्रभाव

MP Board Class 8th Science Chapter 14 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 172

प्रश्न 1.
क्या आप जानते हैं कि गीले हाथों से किसी विद्युत् साधित्र को छूना क्यों खतरनाक है?
उत्तर:
हाँ, हम जानते है कि गीले हाथों से किसी विद्युत् साधित्र को छूने से हमारे शरीर में विद्युत् प्रवाहित हो सकती है।

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प्रश्न 2.
क्या आपको याद है कि इसे सुनिश्चित करने में संपरीक्षित्र ने हमारी किस प्रकार सहायता की थी?
उत्तर:
हाँ, याद है। यदि संपरीक्षित्र (टेस्टर) में धारा प्रवाहित हो जाती है, तो बल्व दीप्त हो जाता है। यदि बल्ब दीप्त
नहीं होता है तो इसका अर्थ है कि विद्युत् धारा प्रवाहित नहीं हो रही है।

प्रश्न 3.
क्या द्रव भी विद्युत् चालन करते हैं?
उत्तर:
हाँ, कुछ द्रव जैसे, नलों का पानी, नींबू का रस, अम्ल, क्षार, लवण इत्यादि विद्युत् का चालन करते हैं।

क्रियाकलाप 14.1

प्रश्न 1.
क्या आप.इसके सम्भावित कारण बता सकते हैं? क्या यह सम्भव है कि तारों के संयोजन शिथिल हों या बल्ब फ्यूज हो गया हो अथवा आपके सेल बेकार हो गए हों?
उत्तर:
हाँ, यह सम्भव है कि तारों के संयोजन शिथिल हों या बल्ब फ्यूज हो गया हो अथवा सेल बेकार हो गये हों।

क्रियाकलाप 14.2

प्रश्न 1.
क्या संपरीक्षित्र का बल्ब दीप्त होता है? क्या नींबू का रस या सिरका विद्युत् का चालन करता है?
उत्तर:
हाँ, संपरीक्षित्र का बल्ब दीप्त होता है। हाँ, नींबू का रस या सिरका विद्युत् का चालन करता है।

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प्रश्न 2.
नींबू के रस या सिरके को आप सुचालक या हीन चालक में से किस वर्ग में रखेंगे?
उत्तर:
हम इन्हें सुचालक वर्ग में रखेंगे।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 173

प्रश्न 1.
कुछ स्थितियों में द्रव के चालक होने पर भी सम्भव हो सकता है कि बल्ब दीप्त न हो। ऐसा क्रियाकलाप 14.2 में भी हो सकता है। इसका क्या कारण हो सकता है?
उत्तर:
इसका कारण हो सकता है कि परिपथ में प्रवाहित धारा इतनी दुर्बल हो कि बल्ब का तन्तु पर्याप्त गर्म न हो पाने के कारण दीप्त न हो।

प्रश्न 2.
क्या आपको याद है कि बल्ब से विद्युत् प्रवाहित होने पर वह दीप्त क्यों होता है?
उत्तर:
हाँ, याद है। विद्युत् धारा के ऊष्मीय प्रभाव के कारण बल्ब का तन्तु उच्च ताप तक गर्म होकर दीप्त हो जाता है।

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प्रश्न 3.
अब आप यह जानना चाहेंगे किसी परिपथ में विद्युत् धारा दुर्बल कब होती है?
उत्तर:
किसी परिपथ में विद्युत् धारा दुर्बल उस स्थिति में हो सकती है जब कोई द्रव विद्युत् का चालन ठीक प्रकार से न कर पाता हो।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 174

प्रश्न 1.
क्या हम कोई ऐसा अन्य संपरीक्षित्र बना सकते हैं जो दुर्बल धारा को भी संसूचित कर सके?
उत्तर:
हाँ, हम दुर्बल धारा संसूचित करने के लिए प्रकाश उत्सर्जक डायोड (LED) उपयोग कर सकते हैं। यह दुर्बल धारा प्रवाहित होने पर भी दीप्त होता है।

प्रश्न 2.
क्या आपको याद है कि विद्युत् धारा चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न करती है?
उत्तर:
हाँ, याद है विद्युत् धारा चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न करती है।

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प्रश्न 3.
जब किसी तार में विद्यत धारा प्रवाहित होती है तो उसके पास रखी चुम्बकीय सुई पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
जब किसी तार में विद्युत् धारा प्रवाहित होती है तो उसके पास रखी चुम्बकीय सुई विक्षेपित हो जाती है।

प्रश्न 4.
क्या हम विद्युत् धारा के चुम्बकीय प्रभाव का उपयोग करके कोई संपरीक्षित्र बना सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, हम विद्युत् धारा के चुम्बकीय प्रभाव का उपयोग करके संपरीक्षित्र (टेस्टर) बना सकते हैं। यदि तार में धारा कम भी बहेभी तब भी चुम्बकीय सुई में विक्षेप हो जायेगा।

क्रियाकलाप 14.3

प्रश्न 1.
क्या संपरीक्षित्र के स्वतन्त्र सिरों को नींबू के रस में डुबोते ही आपको चुम्बकीय सुई में विक्षेप दिखाई देता है?
उत्तर:
नहीं, जब तार के स्वतन्त्र सिरों के बीच में खाली | स्थान रहेगा तो विद्युत् परिपथ पूरा नहीं होगा। इस स्थिति में
चुम्बकीय सुई में विक्षेप नहीं होगा।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 175

प्रश्न 1.
प्रत्येक स्थिति में देखिए कि चुम्बकीय सुई विक्षेप दर्शाती है अथवा नहीं। अपने प्रेक्षणों को सारणी में अंकित कीजिए।
उत्तर:
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 14 विधुत धारा के रासानिक प्रभाव 1a

प्रश्न 2.
पहेली यह जानना चाहती है कि क्या हर अवस्था में वायु विद्युत् की हीन चालक होती है।
उत्तर:
हाँ, वायु विद्युत् की हीन चालक होती है लेकिन जब यह आर्द्र होती तब यह विद्युत् की सुचालक होती है।

प्रश्न 3.
इसी से प्रेरित होकर बूझो यह जानना चाहता है कि क्या हीन चालकों की श्रेणी में रखे अन्य पदार्थ भी विशेष परिस्थिति में अपने में से विद्युत् को प्रवाहित होने देते हैं?
उत्तर:
नहीं, हीन चालकों की श्रेणी में रखे अन्य पदार्थ भी विशेष परिस्थिति में अपने में से विद्युत् धारा प्रवाहित कर सकते हैं।

क्रियाकलाप 14.4

प्रश्न 1.
संपरीक्षित्र का उपयोग करके परीक्षण कीजिए कि आसुत जल विद्युत् चालन करता है अथवा नहीं। आप क्या पाते हैं? क्या आसुत जल विद्युत् चालन करता है?
उत्तर:
जब संपरीक्षित्र को आसुत जल में रखते हैं तो संपरीक्षित्र,का बल्ब दीप्त नहीं होता। इससे स्पष्ट है कि आसुत जल विद्युत् चालन नहीं करता है।

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प्रश्न 2.
अब एक चुटकी साधारण नमक लेकर इसे आसुत जल में घोलिए फिर परीक्षण कीजिए। इस बार आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर:
जब संपरीक्षित्र को नमक मिले आसुत जल में डालते हैं तो संपरीक्षित्र का बल्ब दीप्त हो जाता है। यह दर्शाता है कि जब आसुत जल में चुटकी भर नमक घोल देते हैं तो वह विद्युत् का अच्छा चालक बन जाता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 176

प्रश्न 1.
वे कौन-से अन्य पदार्थ हैं जो आसुत जल में घुलने पर इसे चालक बना देते हैं?
उत्तर:
अम्ल, क्षार और लवण ऐसे पदार्थ हैं जिन्हें आसुत जल में घोलने पर इसे चालक बना देते हैं।

प्रश्न 2.
जब विद्युत् धारा किसी चालक विलयन से प्रवाहित होती है तो क्या वह उस विलयन में कोई प्रभाव उत्पन्न करती है।
उत्तर:
जब विद्युत् धारा चालक-विलयन से प्रवाहित होती है तो वह रासायनिक प्रभाव उत्पन्न करती है।

क्रियाकलाप 14.5

प्रश्न 1.
आपको क्या परिणाम प्राप्त होते हैं?
उत्तर:
हम पाते हैं कि जब अम्लों, क्षारकों और लवणों के विलयनों को आसुत जल में मिलाते हैं तो इन विलयनों में होकर विद्युत् का चालन होता है। इसका अर्थ है कि जब अम्लों, क्षारकों और लवणों को आसुत जल में मिलाते हैं तो आसुत जल में विद्युत् धारा का चालन हो जाता है अर्थात आसुत जल चालक विलयन बन जाता है।

विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

प्रश्न 1.
आपने विद्युत् धारा के कछ प्रभावों के बारे में सीखा था। क्या आप इन प्रभावों की सूची बना सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, विद्युत् धारा के कुछ प्रभाव हैं –

  1. विद्युत् धारा का ऊष्मीय प्रभाव।
  2. विद्युत् धारा का चुम्बकीय प्रभाव।
  3. विद्युत् धारा का रासायनिक प्रभाव।

क्रियाकलाप 14.6

प्रश्न 1.
क्या आप इलेक्ट्रोडों के समीप किसी गैस के बुलबुले देख पाते हैं?
उत्तर:
हाँ, हम इलेक्ट्रोडों के समीप ऑक्सीजन एवं हाइड्रोजन गैसों के बुलबुले देखते हैं।

प्रश्न 2.
क्या हम विलयन में हो रहे परिवर्तनों को रासायनिक परिवर्तन कह सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, हम विलयन में हो रहे परिवर्तनों को रासायनिक परिवर्तन कह सकते हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 178

विद्युत लेपन

प्रश्न 1.
क्या आप जानते हैं कि एक धातु की सतह के ऊपर दूसरी धातु की परत किस प्रकार निक्षेपित कर दी जाती है?
उत्तर:
हाँ, हम जानते हैं कि एक धातु की सतह के ऊपर दूसरी धातु की परत विद्युत् लेपन प्रक्रिया द्वारा निक्षेपित की जाती है।

प्रश्न 2.
विद्युत् लेपन के क्रियाकलाप को करने के पश्चात् पहेली ने इलेक्ट्रोड़ों को आपस में बदलकर क्रियाकलाप को दोहराया। आपके विचार से इस बार क्या प्रेक्षण करेगी?
उत्तर:
इस बार विद्युत् लेपन की प्रक्रिया नहीं होगी।

प्रश्न 3.
विलयन से कॉपर के क्षय की पूर्ति कैसे होती है?
उत्तर:
दूसरा इलेक्ट्रोड जो ताँबे की प्लेट का बना है उससे समान मात्रा का कॉपर विलयन में घुल जाता है। इस प्रकार विलयन से जो कॉपर कम होता है, वह विलयन में पुनः स्थापित हो जाता है, यह प्रक्रिया चलती रहती है। इस प्रकार विद्युत् लेपन प्रक्रिया में एक इलेक्ट्रोड से कॉपर दूसरे इलेक्ट्रोड पर स्थानान्तरित होता है।

क्रियाकलाप 14.7

प्रश्न 1.
क्या आप उनमें से किसी एक में कुछ अन्तर पाते हैं?
उत्तर:
हाँ, हम एक इलेक्ट्रोड में अन्तर पाते हैं। एक इलेक्ट्रोड पर ताँबा जमा हो गया है।

प्रश्न 2.
क्या आप इस पर कोई परत चढ़ी देखते हैं?
उत्तर:
हाँ, हम इस पर एक परत चढ़ी देखते हैं।

प्रश्न 3.
इस परत का रंग कैसा है?
उत्तर:
इस परत का रंग हरा-नीला है।

प्रश्न 4.
बैटरी के उस टर्मिनल को नोट कीजिए जिससे यह इलेक्ट्रोड संयोजित है।
उत्तर:
यह इलेक्ट्रोड बैटरी के ऋण टर्मिनल से संयोजित है?

MP Board Class 8th Science Chapter 14 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. विद्युत् चालन करने वाले अधिकांश द्रव ………….. तथा ……… के विलयन होते हैं।
  2. किसी विलयन से विद्युत्. धारा प्रवाहित होने पर …… प्रभाव उत्पन्न होता है।
  3. यदि कॉपर सल्फेट विलयन से विद्युत् धारा प्रवाहित की जाए तो कॉपर बैटरी के ……….. टर्मिनल से संयोजित प्लेट पर निक्षेपित होती है।
  4. विद्युत् धारा द्वारा किसी पदार्थ पर वांछित धातु की परत निक्षेपित करने की प्रक्रिया को ……….. कहते हैं।

उत्तर:

  1. अम्लों, क्षारकों, लवणों।
  2. चुम्बकीय।
  3. ऋण।
  4. विद्युत् लेपन।

प्रश्न 2.
जब किसी संपरीक्षित्र के स्वतन्त्र सिरों को किसी विलयन में डुबोते हैं तो चुम्बकीय सुई विक्षेपित होती है। क्या आप ऐसा होने के कारण की व्याख्या कर सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, ऐसा होने के कारण की व्याख्या कर सकते हैं। जब किसी संपरीक्षित्र (टेस्टर) के स्वतन्त्र सिरों को किसी विलयन में डुबोते हैं तो चुम्बकीय. सुई विक्षेपित होने का कारण है कि विद्युत् धारा चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न करती है। विद्युत् धारा दुर्बल होने पर भी चुम्बकीय सुई विक्षेपित होती है। चुम्बकीय सुई का विक्षेपण धारा की प्रबलता पर निर्भर करता है। धारा जितनी प्रबल होगी चुम्बकीय सुई उतना ही अधिक विक्षेपित होगी।

प्रश्न 3.
तीन ऐसे द्रवों के नाम लिखिए जिनका परीक्षण निम्नांकित चित्र में दर्शाए अनुसार करने पर चुम्बकीय सुई विक्षेपित हो सके।
उत्तर:
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 14 विधुत धारा के रासानिक प्रभाव 2

  1. कॉपर सल्फेट का विलयन।
  2. नींबू का रस।
  3. नल की टोंटी का जल।

प्रश्न 4.
निम्नांकित चित्र में दर्शाई गई व्यवस्था में बल्ब नहीं जलता। क्या आप सम्भावित कारणों की सूची बना सकते हैं? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 14 विधुत धारा के रासानिक प्रभाव 3
उत्तर:
दर्शाई गई व्यवस्था में बल्ब के न जलने के निम्न सम्भावित कारण हो सकते हैं।

  1. बल्ब फ्यूज हो सकता है।
  2. विद्युत् धारा इतनी दुर्बल हो कि बल्ब का तन्तु पर्याप्त गर्म न हो पाता हो फलस्वरूप बल्ब नहीं जलता हो।
  3. सेल से धारा प्रवाहित ही न हो रही हो।
  4. परिपथ में तारों का संयोजन ढीला हो।

प्रश्न 5.
दो द्रवों A और B के विद्युत् चालन की जाँच करने के लिए एक संपरीक्षित्र का प्रयोग किया गया। यह देखा गया कि संपरीक्षित्र का बल्ब द्रव A के लिए चमकीला दीप्त हुआ जबकि द्रव B के लिए अत्यन्त धीमा दीप्त हुआ। आप निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि –

  1. द्रव A, द्रव B से अच्छा चालक है।
  2. द्रव B, द्रव A से अच्छा चालक है।
  3. दोनों द्रवों की चालकता समान है।
  4. द्रवों को चालकता के गुणों की तुलना इस प्रकार नहीं की जा सकती।

उत्तर:
द्रव A, द्रव B, से अच्छा चालक है।

प्रश्न 6.
क्या शुद्ध जल विद्युत् का चालन करता है? यदि नहीं, तो इसे चालक बनाने के लिए इसमें अम्ल या क्षार या लवण घोलना चाहिए।
उत्तर:
नहीं, शुद्ध जल विद्युत् का चालन नहीं करता है। इसे चालक बनाने के लिए इसमें अम्ल या क्षार या लवण घोलना चाहिए।

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प्रश्न 7.
आग लगने के समय, फायरमैन पानी के हौज (पाइपों) का उपयोग करने से पहले उस क्षेत्र की मुख्य विद्युत् आपूर्ति को बन्द कर देते हैं। व्याख्या कीजिए कि वे ऐसा क्यों करते हैं?
उत्तर:
आग लगने के समय, फायरमैन पानी के हौज (पाइपों) का उपयोग करने से पहले उस क्षेत्र की मुख्य विद्युत् आपूर्ति इसलिए बन्द कर देते हैं कि साधारण पानी विद्युत् का सुचालक होता है। यदि पानी का छिड़काव करते समय यदि पानी विद्युत् बोर्ड आदि में चला गया तो सारे क्षेत्र में विद्युत् धारा फैलने का खतरा रहता है जिससे जान-माल की हानि हो सकती है।

प्रश्न 8.
तटीय क्षेत्र में रहने वाला एक बालक अपने संपरीक्षित्र से पीने के पानी तथा समुद्र के पानी का परीक्षण करता है। वह देखता है कि समुद्र के पानी के लिए चुम्बकीय सुई अधिक विक्षेप दर्शाती है। क्या आप उसके कारण की व्याख्या कर सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, समुद्र के पानी के लिए चुम्बकीय सुई अधिक विक्षेप इसलिए दिखाती है क्योंकि समुद्र का पानी पीने के पानी से अधिक अच्छा विद्युत् का चालक है, क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में लवण घुले रहते हैं।

प्रश्न 9.
क्या तेज वर्षा के समय किसी लाइनमैन के लिए बाहरी मुख्य लाइन के विद्युत् तारों की मरम्मत करना सुरक्षित है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
नहीं, तेज वर्षा के समय किसी लाइनमैन के लिए बाहरी मुख्य लाइन के विद्युत् तारों की मरम्मत करना सुरक्षित नहीं है क्योंकि पानी विद्युत् का सुचालक है। तेज वर्षा के समय जरा भी विद्युत् लीक होने की दशा में लाइनमैन को करेंट लग सकता है और उसकी जान तक जा सकती है।

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प्रश्न 10.
पहेली ने सुना था कि वर्षा का जल उतना ही शुद्ध है जितना कि आसुत जल। इसलिए उसने एक स्वच्छ काँच के बर्तन में कुछ वर्षा का जल एकत्रित करके संपरीक्षित्र से उसका परीक्षण किया। उसे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि चुम्बकीय सुई विक्षेप दर्शाती है। इसका क्या कारण हो सकता है?
उत्तर:
चुम्बकीय सुई द्वारा विक्षेप दर्शाने के निम्न कारण हो सकता है-वर्षा का जल वास्तव में एक अच्छा आसुत जल है लेकिन जब ये वायुमण्डल में आता है तो इसमें धूल, मिट्टी के कण तथा अन्य अशुद्धियाँ मिल जाती हैं जो विद्युत् का सुचालक बना देती हैं। अतः जब पहेली अपने संपरीक्षित्र से वर्षा के जल का परीक्षण करती है तो चुम्बकीय सुई विक्षेप दर्शाती है।

प्रश्न 11.
अपने आस-पास उपलब्ध विद्युत् लेपित वस्तुओं की सूची बनाइए।
उत्तर:
आस-पास की कुछ विद्युत् लेपित वस्तुएँ:

  1. नकली आभूषण।
  2. स्नान गृह की टोंटी।
  3. गैस बर्नर।
  4. सोफे के फ्रेम।
  5. साइकिल के पार्ट्स।
  6. कार के पार्ट्स।
  7. दरवाजों के हैण्डिल।
  8. ट्रेक्टर के पार्ट्स।
  9. मकान में लगी ग्रिल आदि।

प्रश्न 12.
जो प्रक्रिया आपने क्रियाकलाप 14.7 में देखी वह कॉपर के शोधन में उपयोग होती है। एक पतली शुद्ध कॉपर छड़ एवं एक अशुद्ध कॉपर की छड़ इलेक्ट्रोड के रूप में उपयोग की जाती है। कौन-सा इलेक्ट्रोड बैटरी के धन टर्मिलन से संयोजित किया जाए। कारण भी लिखिए।
उत्तर:
अशुद्ध कॉपर की छड़ को इलेक्ट्रोड के रूप में बैटरी के धन टर्मिनल से संयोजित करना चाहिए क्योंकि अशुद्ध छड़ का कॉपर विलयन में मिलेगा तथा कॉपर ऋण टर्मिलन से जुड़े शुद्ध कॉपर की छड़ पर जमा हो जायेगा।

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MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 8 कोशिका – संरचना एवं प्रकार्य

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 8 कोशिका – संरचना एवं प्रकार्य

MP Board Class 8th Science Chapter 8 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 90

प्रश्न 1.
सभी सजीव कुछ मूलभूत कार्य सम्पादित करते हैं। क्या आप इन कार्यों की सूची बना सकते हैं?
उत्तर:
सजीवों के मूलभूत कार्य हैं-वृद्धि और विकास, गति, पाचन, श्वसन, उत्सर्जन एवं प्रजनन आदि।

कोशिका

प्रश्न 1.
मुर्गी का अण्डा आसानी से दिखाई दे जाता है। क्या यह एकल कोशिका है अथवा कोशिकाओं का एक समूह?
उत्तर:
हाँ, यह एक एकल कोशिका है। यह आकार में बड़ा है, अतः इसे नग्न आँखों से देखा जा सकता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 91

सजीवों में कोशिका की संख्या, आकृति

प्रश्न 1.
वैज्ञानिक किस प्रकार सजीव कोशिकाओं का प्रेक्षण एवं अध्ययन करते हैं?
उत्तर:
वैज्ञानिक सजीव कोशिकाओं का प्रेक्षण व अध्ययन सूक्ष्मदर्शी की सहायता से करते हैं तथा कोशिका की संरचना का अध्ययन अभिरंजक का उपयोग करके करते हैं।

कोशिकाओं की संख्या

प्रश्न 1.
क्या आप किसी लम्बे वृक्ष अथवा हाथी जैसे विशाल जन्तु के शरीर में पाई जाने वाली कोशिकाओं की संख्या का अनुमान लगा सकते हो?
उत्तर:
हाँ, इनकी संख्या अरबों-खरबों में हो सकती है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 92

कोशिका की आकृति

प्रश्न 1.
अमीबा की आकृति को आप किस प्रकार परिभाषित करेंगे?
उत्तर:
अमीबा की आकृति सुनिश्चित नहीं होती, यह अनियमित होती है। अमीबा अपनी आकृति बदलता रहता है।

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प्रश्न 2.
अपनी आकृति बदलने से अमीबा को क्या लाभ होता है?
उत्तर:
अमीबा की बदलती हुई आकृति उसे गति प्रदान करने एवं भोजन ग्रहण करने में सहायता करती है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 93

प्रश्न 1.
क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि कोशिका का कौन-सा भाग आकृति को प्रदान करता है?
उत्तर:
कोशिका के विभिन्न संघटक एक झिल्ली द्वारा परिबद्ध होते हैं। यह झिल्ली पौधों एवं जन्तुओं की कोशिकाओं को आकृति प्रदान करती है।

कोशिका का साइज क्रियाकलाप 8.2

प्रश्न – मुर्गी का एक अण्डा उबालिए। उसका छिलका अलग कीजिए। आप क्या देखते हैं?
उत्तर:
हम देखते हैं कि एक सफेद पदार्थ पीले भाग को घेरे हुए है। सफेद भाग एल्ब्यूमिन है जो उबालने पर ठोस में परिवर्तित हो जाता है। पीला भाग योक है, यह एक एकल कोशिका का भाग है।

प्रश्न 1.
क्या हाथी की कोशिकाएँ चूहे की कोशिकाओं से बड़ी होती हैं?
उत्तर:
नहीं, कोशिका के आकार का सम्बन्ध जन्तु के आकार से नहीं होता। कोशिका के साइज का सम्बन्ध उसके प्रकार्य से होता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 94

कोशिका के भाग क्रियाकलाप 8.3

प्रश्न 1.
सूक्ष्मदर्शी के नीचे स्लाइड का प्रेक्षण कीजिए। इसका आरेख बनाकर नामांकित कीजिए। आप इसकी तुलना पुस्तक में दिये चित्र से कीजिए।
उत्तर:
प्याज की कोशिका की सीमा कोशिका झिल्ली द्वारा परिबद्ध होती है जो एक दृढ़ आवरण द्वारा आबद्ध होती है जिसे कोशिका भित्ति कहते हैं। कोशिका के केन्द्र में घनी एवं गोलाकार संरचना होती है जिसे केन्द्रक कहते हैं। केन्द्रक एवं कोशिका झिल्ली के मध्य जैली के समान कोशिकाद्रव्य पाया जाता है।
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 8 कोशिका - संरचना एवं प्रकार्य 1

प्रश्न 1.
मैं जानना चाहता हूँ कि पौधों को कोशिका भित्ति की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर:
पौधों को कोशिका भित्ति की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि यह कोशिका को दृढ़ता एवं आकार प्रदान करती है तथा यह पौधों की ताप में परिवर्तन, तीव्र गति से चलने वाली वायु, वायुमण्डलीय नमी आदि विभिन्न परिवर्तनों से पौधों की सुरक्षा करती है।

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प्रश्न 2.
पहेली ने बूझो से पूछा है कि क्या वह जन्तु कोशिका का भी प्रेक्षण कर सकता है?
उत्तर:
हाँ, वह जन्तु कोशिका भी प्रेक्षण कर सकता है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 95 केन्द्रक

प्रश्न 1.
पहेली जानना चाहती है कि क्या पौधों, जन्तु और जीवाणु की कोशिका में केन्द्रक की संरचना एक समान होती है?
उत्तर:
नहीं, पौधों, जन्तु और जीवाणु की कोशिका में केन्द्रक की संरचना एक समान नहीं होती। पौधों और जन्तुओं में केन्द्रक झिल्ली युक्त होते हैं। जीवाणु में केन्द्रक झिल्ली अनुपस्थित होती है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 96

पादप और जन्तु कोशिका की तुलना

प्रश्न 1.
पादप और जन्तु कोशिका की समानताओं और अन्तर को सूचीबद्ध करें।
उत्तर:
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 8 कोशिका - संरचना एवं प्रकार्य 2

MP Board Class 8th Science Chapter 8 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्न कथन सत्य (T) हैं अथवा असत्य (F) –

  1. एककोशिक जीव में एक ही कोशिका होती है। (T/F)
  2. पेशी कोशिका शाखान्वित होती है। (T/F)
  3. किसी जीव की मूल संरचना अंग हैं। (T/F)
  4. अमीबा की आकृति अनियमित होती है। (T/F)

उत्तर:

  1. सत्य।
  2. असत्य।
  3. असत्य।
  4. सत्य।

प्रश्न 2.
मानव तन्त्रिका कोशिका का रेखाचित्र बनाइए। तन्त्रिका कोशिकाओं द्वारा क्या कार्य किया जाता है?
उत्तर:
मानव तन्त्रिका कोशिका –
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 8 कोशिका - संरचना एवं प्रकार्य 3
कार्य:
तन्त्रिका कोशिका सन्देश प्राप्त कर उनका स्थानान्तरण करती है जिसके द्वारा यह शरीर में नियन्त्रण तथा समन्वय करती है।

प्रश्न 3.
निम्न पर संक्षिप्त नोट लिखिए –

  1. कोशिकाद्रव्य।
  2. कोशिका का केन्द्रक।

उत्तर:
1. कोशिकाद्रव्य: यह एक जैली जैसा पदार्थ होता है जो कोशिका झिल्ली एवं केन्द्रक के बीच पाया जाता है।
2. कोशिका का केन्द्रक:
यह सामान्यतः कोशिका के मध्य में होता है तथा गोलाकार होता है, परन्तु पादप कोशिका में कभी-कभी यह परिधि की ओर होता है। यह कोशिकाद्रव्य से एक झिल्ली द्वारा अलग रहता है। केन्द्रक में छोटी सघन संरचना होती है जिसे केन्द्रिका या न्यूक्लिओलस कहते हैं। इसके अतिरिक्त केन्द्रक में धागे के समान संरचनाएँ होती हैं जो क्रोमोसोम या गुणसूत्र कहलाते हैं। ये जीन के धारक हैं तथा आनुवंशिक गुणों को अगली पीढ़ी में स्थानान्तरित करते हैं।

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प्रश्न 4.
कोशिका के किस भाग में कोशिकांग पाए जाते हैं?
उत्तर:
कोशिकांग कोशिकाद्रव्य में पाए जाते हैं।

प्रश्न 5.
पादप कोशिका एवं जन्तु कोशिका के रेखाचित्र बनाकर उनमें तीन अन्तर लिखिए।
उत्तर:
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 8 कोशिका - संरचना एवं प्रकार्य 4
पादप कोशिका एवं जन्तु कोशिका में अन्तर:

पादप कोशिका जन्तु कोशिका
इसमें कोशिका भित्ति पायी जाती है। इसमें कोशिका भित्ति नहीं पायी जाती है।
केन्द्रक झिल्ली अनुपस्थित होती है। केन्द्रक झिल्ली उपस्थित होती है।
प्लास्टिड पाया जाता है। प्लास्टिड नहीं पाया जाता है।

प्रश्न 6.
यूकैरियोट्स तथा प्रोकैरियोट्स में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
यूकैरियोट्स तथा प्रोकैरियोट्स में अन्तर:

यूकैरियोट्स प्रोकैरियोट्स
इन जीवों की कोशिकाओं में झिल्ली युक्त सुसंगठित केन्द्रकं पाया जाता है। इन जीवों की कोशिकाओं में केन्द्रक पदार्थ केन्द्रक झिल्ली के बिना होता है।

प्रश्न 7.
कोशिका में क्रोमोसोम अथवा गुणसूत्र कहाँ पाए जाते हैं? इनका कार्य बताइए।
उत्तर:
कोशिका में क्रोमोसोम अथवा गुणसूत्र केन्द्रक में पाए जाते हैं। ये धागे के समान संरचनाएँ होती हैं। ये जीन के धारक हैं तथा आनुवंशिक गुणों अथवा लक्षणों को जनक से अगली पीढ़ी में स्थानान्तरित करते हैं। ये कोशिका विभाजन के समय ही दिखाई देते हैं।

प्रश्न 8.
“सजीवों में कोशिका मूलभूत संरचनात्मक इकाई है।” समझाइए।
उत्तर:
जिस प्रकार भवन निर्माण के लिए ईंटों का प्रयोग होता है, उसी प्रकार सजीव जगत के जीव भिन्न-भिन्न होते हुए भी कोशिकाओं के बने होते हैं। इसीलिए यह कहा जाता है कि कोशिका सजीवों की मूलभूत इकाई है। कोशिकाओं के आधार पर सजीवों को दो भागों में विभाजित किया जाता है –

  1. एककोशिक।
  2. बहुकोशिक।

बहुकोशिक सजीवों में विभिन्न कोशिकाएँ मिलकर ऊतक तथा विभिन्न ऊतक मिलकर अंगों का निर्माण करते हैं। विभिन्न कार्यों के लिए विभिन्न अंगों का उपयोग होता है। एककोशिक जीवों में सभी कार्य एक कोशिका द्वारा ही किए जाते हैं। अतः यह कहा जा सकता है कि कोशिका सजीवों की मूलभूत संरचनात्मक इकाई है।

प्रश्न 9.
बताइए कि क्लोरोप्लास्ट अथवा हरितलवक केवल पादप कोशिकाओं में ही क्यों पाए जाते हैं?
उत्तर:
हरितलवक केवल पादप कोशिकाओं में इसलिए पाए जाते हैं क्योंकि ये सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया की सहायता से अपना भोजन स्वयं बनाते उत्तरहैं जबकि जन्तु अपने भोजन के लिए अन्य जन्तुओं अथवा पौधों पर निर्भर रहते हैं।

प्रश्न 10.
बाईं से दाईं ओर:
4. यह कोशिकाद्रव्य से एक झिल्ली द्वारा अलग होता है।
3. कोशिकाद्रव्य के बीच रिक्त स्थान।
1. सजीवों की मूलभूत संरचनात्मक इकाई।

ऊपर से नीचे की ओर:
2. यह प्रकाश-संलेषण के लिए आवश्यक है।
1. कोशिका झिल्ली और केन्द्रिका झिल्ली के बीच पदार्थ।
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 8 कोशिका - संरचना एवं प्रकार्य 5

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MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

MP Board Class 10th Science Chapter 16 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न श्रृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 302

प्रश्न 1.
पर्यावरण-मित्र बनने के लिए आप अपनी आदतों में कौन-से परिवर्तन ला सकते हैं?
उत्तर:
पर्यावरण-मित्र बनने के लिए हम अपनी आदतों में निम्न प्रकार परिवर्तन ला सकते हैं –

  1. हम प्राकृतिक संसाधनों (प्राकृतिक सम्पदा) का संरक्षण के लिए कम उपयोग’, ‘पुनः चक्रण’ एवं ‘पुनः उपयोग’ की नीति अपनाकर पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकते हैं।
  2. हम जल, वायु, मृदा आदि को स्वयं भी प्रदूषित नहीं करेंगे और न औरों को करने देंगे।
  3. पर्यावरण के प्रति जनजागरण (जागरूकता) की अलख जगाएँगे।

प्रश्न 2.
संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य से परियोजना के क्या लाभ हो सकते हैं?
उत्तर:
अगर संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य से परियोजना वर्तमान पीढ़ी के लिए बहुत लाभदायक होगी क्योंकि आर्थिक विकास की दर तीव्र होगी।

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प्रश्न 3.
यह लाभ लम्बी अवधि को ध्यान में रखकर बनाई गई परियोजनाओं के लाभ से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
अगर हम संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य से परियोजनाएँ तैयार करते तो उसका लाभ वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकतानुसार उठा सकती है लेकिन लम्बी अवधि की परियोजनाओं से वर्तमान पीढ़ी भी लाभान्वित होगी साथ ही साथ भावी पीढ़ी भी इसका लाभ उठाएगी।

प्रश्न 4.
क्या आपके विचार में संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए? संसाधनों के समान वितरण के विरुद्ध कौन-कौन ताकतें कार्य कर सकती हैं?
उत्तर:
पृथ्वी के सभी प्राकृतिक संसाधनों का सम्पूर्ण मानव समुदाय में समान वितरण होना चाहिए जिससे प्रत्येक व्यक्ति उस साधन का उपयोग कर सके। मनुष्य का लालच, भ्रष्टाचार, समृद्धशाली एवं शक्तिशाली लोगों का दल इस समान वितरण के विरुद्ध कार्य कर सकता है।

प्रश्न श्रृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 306

प्रश्न 1.
हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
उत्तर:
हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण करना चाहिए क्योंकि वन एवं वन्य जीव हमारे लिए बहुत उपयोगी होते हैं।

  1. वनों से हमें भोजन, ईंधन, इमारती लकड़ी, औषधियाँ आदि अनगिनत उपयोगी सामग्री प्राप्त होती है।
  2. वन हमारे पर्यावरण को शुद्ध करते हैं। हमें प्राण वायु ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, भूमि क्षरण रोकते हैं तथा वर्षा को आमंत्रित करते हैं।
  3. वन्य जीवों से हमको बहुकीमती वस्तुएँ एवं औषधियाँ प्राप्त होती हैं; जैसे-हाथी दाँत, कस्तूरी, लाख, चमड़ा आदि।

प्रश्न 2.
संरक्षण के लिए कुछ उपाय सुझाइए।
उत्तर:
वन एवं वन्य जीव संरक्षण के उपाय:

  1. वनों के अतिदोहन पर अंकुश लगाकर तथा वृक्षारोपण के द्वारा वनों का संरक्षण किया जा सकता है।
  2. वन्य जीवों के शिकार (वध) पर रोक लगाकर एवं अभयारण्यों द्वारा उनका संरक्षण किया जा सकता है।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 310

प्रश्न 1.
अपने निवास क्षेत्र के आस-पास जल संग्रहण की परम्परागत पद्धति का पता लगाइए।
उत्तर:
हमारे क्षेत्र के आस-पास जल संग्रहण की परम्परागत पद्धति तालाब (पोखर) है।

प्रश्न 2.
इस पद्धति की पेय जल व्यवस्था पर्वतीय क्षेत्रों में, मैदानी क्षेत्र अथवा पठार क्षेत्र से तुलना कीजिए।
उत्तर:
मैदानी क्षेत्र अथवा पठार क्षेत्र में निचले स्थानों पर जल का संग्रहण एक तालाब या पोखर या झील के रूप में होता है तथा पर्वतीय क्षेत्र में जल के बहाव को रोकने के लिए छोटे बाँध बनाने पड़ते हैं जिससे जल का संग्रहण किया जा सके।

प्रश्न 3.
अपने क्षेत्र में जल के स्रोत का पता लगाइए। क्या इस स्रोत से प्राप्त जल उस क्षेत्र के सभी निवासियों को उपलब्ध है?
उत्तर:
हमारे क्षेत्र में जल का प्रमुख स्रोत भौम जल है जो कुओं या नलकूपों के माध्यम से उस क्षेत्र के सभी निवासियों को उपलब्ध है।

MP Board Class 10th Science Chapter 16 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अपने घर को पर्यावरण-मित्र बनाने के लिए आप उसमें कौन-कौन से परिवर्तन सुझा सकते हैं?
उत्तर:
अपने घर को पर्यावरण-मित्र बनाने के लिए हम निम्न परिवर्तन सुझाएँगे:

  1. सौर ऊर्जा उपकरणों का अधिकाधिक प्रयोग करना।
  2. किचन गार्डन बनाना तथा पौधारोपण करना।
  3. घरेलू कचरे को दो अलग-अलग पात्रों में रखना एक में जैव निम्नीकरणीय एवं दूसरे में अजैव निम्नीकरणीय।
  4. फल-सब्जियों के छीलन एवं अवशेषों को किचन गार्डन में पौधों में डालना।
  5. वर्षा जल संग्रहण करना।
  6. पॉलीथीन एवं प्लास्टिक की थैलियाँ एवं बर्तनों के स्थान पर कपड़े, कागज एवं पत्तों से बने थैले एवं बर्तनों को उपयोग में लाना।
  7. घर के अन्दर एवं बाहर की सफाई व्यवस्था बनाए रखना।
  8. संसाधनों का न्यूनतम मितव्ययिता के साथ उपयोग करना।

प्रश्न 2.
क्या आप अपने विद्यालय में कुछ परिवर्तन सुझा सकते हैं जिनसे इसे पर्यानुकूलित बनाया जा सके?
उत्तर:
हाँ, हम अपने विद्यालय को पर्यानुकूलित बनाने हेतु निम्न सुझाव दे सकते हैं –

  1. विद्यालय के रिक्त स्थानों एवं प्रवेश मार्ग के दोनों ओर पौधारोपण करना तथा घास के मैदानों (लॉन) का प्रबन्ध करना।
  2. कूड़ा-करकट इत्यादि कूड़ेदान में डालना।
  3. शौचालय एवं पेशाबघरों की उचित व्यवस्था करना।
  4. शान्ति का वातावरण बनाए रखना।
  5. जल का अपव्यय नहीं करना।
  6. जहाँ आवश्यकता हो वहीं पर पंखे एवं बल्बों को चलाना।
  7. व्यर्थ विद्युत का अपव्यय नहीं करना।
  8. विद्यालय परिसर की स्वच्छता एवं सफाई का ध्यान रखना।

प्रश्न 3.
इस अध्याय में हमने देखा कि हम हम वन एवं वन्य जन्तुओं की बात करते हैं तो चार मुख्य दावेदार सामने आते हैं। इनमें से किसे वन उत्पाद प्रबन्धन हेत निर्णय लेने के अधिकार दिए जा सकते हैं? आप ऐसा क्यों सोचते हैं?
उत्तर:
हमारे विचार से वन उत्पाद प्रबन्धन हेतु निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय निवासियों को दिया जा सकता है। इससे खाद्य पदार्थ, चारा, औषधि आदि की आवश्यकताओं की पूर्ति तो होती रहेगी, साथ ही ईंधन भी मिलता रहेगा, लेकिन पेड़ों का निर्ममता के साथ कटान नहीं होगा और अन्य वन उत्पादों का दोहन नहीं होगा तथा वन्य जीवों का अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए वध भी नहीं होगा। इससे वन एवं वन सम्पदा दोनों ही संरक्षित रहेंगे।

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प्रश्न 4.
अकेले व्यक्ति के रूप में आप निम्न के प्रबन्धन में क्या योगदान दे सकते हैं?
(a) वन एवं वन्य जन्तु।
(b) जल संसाधन।
(c) कोयला एवं पेट्रोलियम।
उत्तर:
अकेले व्यक्ति के रूप में हम विभिन्न क्षेत्रों में प्रबन्धन के लिए निम्न योगदान दे सकते हैं –
(a) वन एवं वन्य जन्तु:

  1. अतिदोहन को रोकना।
  2. वन एवं वन्य जन्तुओं का संरक्षण करना।
  3. वृक्षारोपण एवं उनकी देखभाल करना।

(b) जल संसाधन:

  1. जल संसाधनों को प्रदूषण से बचाना।
  2. जल संसाधनों में कचरे, वाहित मलमूत्र आदि को प्रवाहित न करना।
  3. जल के दुरुपयोग को रोकना।
  4. वर्षा जल संग्रहण करना।

(c) कोयला एवं पेट्रोलियम:

  1. ईंधन एवं ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों का अत्याधिक प्रयोग करना।
  2. साइकिल/बस से अथवा पैदल चलना।
  3. घरों में CFL एवं फ्लोरोसेण्ट ट्यूब तथा एल.ई.डी. लाइट का प्रयोग करना।
  4. सर्दियों में हीटर का प्रयोग न करके गर्म कपड़ों के द्वारा ठण्ड से बचना।
  5. मकान में लिफ्ट के स्थान पर सीढ़ियों का प्रयोग करना।

प्रश्न 5.
अकेले व्यक्ति के रूप में आप विभिन्न प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम करने के लिए। क्या कर सकते हैं?
उत्तर:
अकेले व्यक्ति के रूप में हम विभिन्न प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम करने के लिए निम्न कदम उठाएँगे –

  1. उत्पादों को मितव्ययिता के साथ उपयोग करेंगे।
  2. उत्पादों को बर्बादी से रोकेंगे।
  3. इनकी बचत के लिए हम वैकल्पिक मार्ग चुनेंगे।
  4. अपनी आवश्यकताओं को सीमित करेंगे।

प्रश्न 6.
निम्न से सम्बन्धित ऐसे पाँच कार्य लिखिए जो आपने पिछले एक सप्ताह में किए हैं –
(a) अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
(b) अपने प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव को और बढ़ाया है।
उत्तर:
[निर्देश- इस प्रश्न का उत्तर छात्र स्वयं लिखें।

प्रश्न 7.
इस अध्याय में उठाई गई समस्याओं के आधार पर आप अपनी जीवन-शैली में क्या परिवर्तन लाना चाहेंगे जिससे हमारे संसाधनों के सम्पोषण को प्रोत्साहन मिल सके?
उत्तर:
अध्याय में दी गई समस्याओं के आधार पर अपने संसाधनों के सम्पोषण के लिए हम अपनी जीवन-शैली निम्न प्रकार बदलेंगे –

  1. ऐसी वस्तुओं के उपयोग कम कर देंगे जिनसे वन एवं वन्य जीवों तथा वन सम्पदा को क्षति पहुँचती है।
  2. अपनी आवश्यकताओं पर नियन्त्रण रखेंगे।
  3. ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग अधिकाधिक करेंगे।
  4. जीवाश्म ईंधन (खनिज तेलों) के उपयोग को कम करने के लिए अधिकतर पैदल, साइकिल या बसों का उपयोग करेंगे।
  5. जल की बचत करेंगे तथा प्रयुक्त जल को दूसरे भागों में उपयोग में लाएँगे।
  6. कम खर्च, पुनःचक्रण एवं पुन:उपयोग के सिद्धान्त को अपनाएँगे।

MP Board Class 10th Science Chapter 16 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 10th Science Chapter 16 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न में प्राकृतिक स्रोत कौन-सा नहीं है?
(a) मृदा।
(b) जल।
(c) विद्युत्।
(d) वायु (पवन)।
उत्तर:
(c) विद्युत्।

प्रश्न 2.
विश्व में सबसे तेजी से कम होने वाला प्राकृतिक संसाधन है –
(a) जल।
(b) वन।
(c) पवन।
(d) सौर प्रकाश।
उत्तर:
(b) वन।

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प्रश्न 3.
प्राकृतिक स्रोतों की सर्वश्रेष्ठ परिभाषा है, प्राकृतिक स्रोत वे वस्तुएँ हैं जो –
(a) केवल भूमि पर मौजूद हैं।
(b) प्रकृति का एक उपहार है जो मानव जाति के लिए बहुत लाभदायक होता है।
(c) मानव निर्मित वस्तुएँ हैं जो प्रकृति में रखी गई हैं।
(d) केवल जंगलों में मिलती हैं।
उत्तर:
(b) प्रकृति का एक उपहार है जो मानव जाति के लिए बहुत लाभदायक होता है।

प्रश्न 4.
गंगा नदी में प्रचुर मात्रा में कॉलीफॉर्म बैक्टीरियों के पाये जाने का मुख्य कारण है –
(a) अधजले शवों को जल में प्रवाहित करना।
(b) इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग के अपशिष्ट को बहाना।
(c) कपड़े धोना।
(d) भस्म एवं अस्थियाँ का विसर्जन।
उत्तर:
(a) अधजले शवों को जल में प्रवाहित करना।

प्रश्न 5.
एक नदी के जल का नमूना अम्लीय पाया गया जिसकी pH मान का परिसर 3.5 से 4.5 थी। नदी के किनारे बहुत-सी फैक्टरियाँ थीं जो अपने अपशिष्टों को नदी में बहा देती थीं। किन फैक्टरियों में से किसका वाहित अपशिष्ट नदी के जल के pH मान को कम करने का मुख्य कारण है?
(a) साबुन एवं डिटर्जेण्ट बनाने वाली फैक्टरी।
(b) लैड बैटरी बनाने वाली फैक्टरी।
(c) प्लास्टिक के कण बनाने वाली फैक्टरी।
(d) ऐल्कोहॉल बनाने वाली फैक्टरी।
उत्तर:
(b) लैड बैटरी बनाने वाली फैक्टरी।

प्रश्न 6.
फ्रैशवाटर पौधे एवं जन्तुओं के जीवन संचालन के लिए सर्वश्रेष्ठ pH रैंज होगी –
(a) 6.5 – 7.5
(b) 2.0 – 3.5
(c) 3.5 – 5.0
(d) 9.0 – 10.5
उत्तर:
(a) 6.5 – 7.5

प्रश्न 7.
लम्बे समय तक प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के लिए तीन ‘री’ हैं –
(a) री-साइकिल, री-जेनेरेट, री-यूज।
(b) री-डयूस, री-जेनेरेट, री-यूज।
(c) री-डयूस, री-यूज, री-डिस्ट्रीब्यूट।
(d) री-डयूस, री-साइकिल, री-यूज।
उत्तर:
(d) री-डयूस, री-साइकिल, री-यूज।

प्रश्न 8.
जैव-विविधता के सन्दर्भ में निम्न कुछ कथन दिए गए हैं। उन कथनों का चयन कीजिए जो जैव-विविधता की अवधारणा की सही व्याख्या करते हैं –
(i) जैव-विविधता किसी क्षेत्र में उपस्थिति जन्तु एवं वनस्पतियों की विभिन्न समष्टियों से सम्बन्ध रखती है।
(ii) जैव-विविधता केवल किसी क्षेत्र के पौधों से सम्बन्ध रखती है।
(iii) जैव-विविधता जंगलों में अधिक पायी जाती है।
(iv) जैव-विविधता किसी क्षेत्र में रहने वाले किसी समष्टि के कुल जीवों की संख्या से सम्बन्धित है।
(a) (i) एवं (ii)
(b) (ii) एवं (iv)
(c) (i) एवं (iii)
(d) (ii) एवं (iii)
उत्तर:
(c) (i) एवं (iii)

प्रश्न 9
निम्न दिए गए कथनों में से उन कथनों का चयन कीजिए जो संपोषणीय विकास की सही व्याख्या करते हैं –
(i) पर्यावरण को कम से कम हानि पहुँचाने वाला नियोजित विकास।
(ii) विकास पर्यावरण को चाहे कितनी भी हानि क्यों न पहँचाए।
(iii) पर्यावरण के संरक्षण के लिए सभी विकास कार्यों को रोकना।
(iv) सभी दावेदारों द्वारा स्वीकार्य विकास।
(a) (i) एवं (iv)
(b) (ii) एवं (iii)
(c) (ii) एवं (iv)
(d) केवल (iii)
उत्तर:
(a) (i) एवं (iv)

प्रश्न 10.
हमारे देश में विस्तृत वनों का सफाया कर दिया गया है और केवल एक समष्टि के पौधे उगाए गए हैं। यह आदत प्रोत्साहन देती है-
(a) उस क्षेत्र की जैव-विविधता को।
(b) क्षेत्र में एकल फसल को।
(c) प्राकृतिक वनों के विकास को।
(d) क्षेत्र के पारितन्त्र का संरक्षण करती है।
उत्तर:
(b) क्षेत्र में एकल फसल को।

प्रश्न 11.
सफल वन संरक्षण कूटनीति में सम्मिलित होना चाहिए-
(a) उच्चतम पोषी स्तर के जन्तुओं का संरक्षण।
(b) केवल उपभोक्ताओं का संरक्षण।
(c) केवल शाकाहारी उपभोक्ताओं का संरक्षण।
(d) सभी भौतिक एवं जैवीय घटकों के संरक्षण की विशद् योजना।
उत्तर:
(d) सभी भौतिक एवं जैवीय घटकों के संरक्षण की विशद् योजना।

प्रश्न 12.
चिपको आन्दोलन का प्रमख सन्देश है –
(a) वन संरक्षण के प्रयासों में सामूहिक सामुदायिक भागीदारी।
(b) वन संरक्षण के प्रयासों में सामुदायिक भागीदारी को पृथक रखना।
(c) विकास कार्यों के लिए वनों के वृक्षों को काट डालना।
(d) सरकारी एजेन्सियों को बिना जवाबदेही के वनों को नष्ट करने का आदेश देने का अधिकार।
उत्तर:
(a) वन संरक्षण के प्रयासों में सामूहिक सामुदायिक भागीदारी।

प्रश्न 13.
हमारे देश में अनेक स्थापित बाँधों की ऊँचाई बढ़ाने के प्रयास किए गए जैसे टेहरी एवं अल्मेरी बाँध नर्मदा से होकर। निम्न में से सही कथनों का चयन कीजिए जो बाँधों की ऊँचाई बढ़ाने के दुष्परिणाम होंगे –
(i) क्षेत्र के सभी भू-पादप एवं जन्तुओं का समूह नाश हो जाएगा।
(ii) क्षेत्र में रहने वाले सभी निवासी एवं घरेलू पशु विस्थापित हो जाएँगे।
(iii) कीमती कृषि भूमि का स्थायी नाश हो सकता है।
(iv) यह मनुष्यों के लिए स्थायी रोजगार सृजित होंगे।
(a) (i) एवं (ii)
(b) (i), (ii) एवं (iii)
(c) (ii) एवं (iv)
(d) (i), (iii) एवं (iv)
उत्तर:
(b) (i), (ii) एवं (iii)

प्रश्न 14.
संक्षिप्त शब्द GAP का विस्तृत रूप लिखिए –
(a) Government Agency for Pollution Control
(b) Gross Assimilation by Photosynthesis
(c) Ganga Action Plan
(d) Government Agency for Animal Protection
उत्तर:
(c) Ganga Action Plan

प्रश्न 15.
असत्य कथन का चयन कीजिए –
(a) आर्थिक विकास पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है।
(b) संपोषणीय विकास वर्तमान पीढ़ी के विकास को तो प्रोत्साहित करता ही है साथ ही भावी पीढ़ी के लिए संसाधनों का संरक्षण भी करता है।
(c) संपोषणीय विकास दावेदारों की विचारधारा को महत्व नहीं देता।
(d) संपोषणीय विकास दीर्घकालीन योजना और स्थायी विकास है।
उत्तर:
(c) संपोषणीय विकास दावेदारों की विचारधारा को महत्व नहीं देता।

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प्रश्न 16.
निम्न में कौन प्राकृतिक संसाधन नहीं है?
(a) आम का पेड़।
(b) सर्प (साँप)।
(c) पवन।
(d) लकड़ी का घर।
उत्तर:
(d) लकड़ी का घर।

प्रश्न 17.
असत्य कथन का चयन कीजिए –
(a) वनों से हमको विभिन्न प्रकार के उत्पाद मिलते हैं।
(b) वनों में अधिकतर पादप विविधता मिलती है।
(c) वन मृदा का संरक्षण नहीं करते हैं।
(d) वन जल का संरक्षण करते हैं।
उत्तर:
(c) वन मृदा का संरक्षण नहीं करते हैं।

प्रश्न 18.
बंगाल के अराबाढ़ी वन क्षेत्र में अधिकता है –
(a) टीक वृक्षों की।
(b) साल वृक्षों की।
(c) बाँस वृक्षों की।
(d) मेंग्रूव की।
उत्तर:
(b) साल वृक्षों की।

प्रश्न 19.
भूमि जल स्तर क्षीण नहीं होगा-
(a) वनों के विकास एवं वृद्धि से।
(b) ताप विद्युत घरों से।
(c) वनों की क्षति एवं वर्षा की कमी से।
(d) उच्च जल माँग वाली फसलों के उगाने से।
उत्तर:
(a) वनों के विकास एवं वृद्धि से।

प्रश्न 20.
बड़े बाँध बनाने का विरोध इसलिए है –
(a) सामाजिक कारण।
(b) आर्थिक कारण।
(c) पर्यावरणीय कारण।
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 21.
खादिन, बंधिस, अहार एवं कट्टा आदि प्राचीन परम्परागत संरचनाएँ हैं जो निम्न का उदाहरण –
(a) अन्न भण्डारण।
(b) काष्ट भण्डारण।
(c) जल संग्रहण।
(d) मृदा संरक्षण।
उत्तर:
(c) जल संग्रहण।

प्रश्न 22.
निम्न में से पदों का सही संयोग (युग्म) चुनिए जिसमें जीवाश्म ईंधन नहीं है –
(a) पवन, समुद्र (सागर) एवं कोयला।
(b) कैरोसीन, पवन एवं ज्वार।
(c) पवन, लकड़ी एवं सूर्य।
(d) पेट्रोलियम, लकड़ी, सूर्य।
उत्तर:
(c) पवन, लकड़ी एवं सूर्य।

प्रश्न 23.
निम्न में से पर्यावरण-मित्र क्रियाकलाप का चयन कीजिए –
(a) आवागमन के लिए कार का उपयोग करना।
(b) खरीददारी के लिए पॉलीथीन की थैलियों का उपयोग।
(c) कपड़ों को रंगने के लिए रासायनिक रंगों (डाई) का इस्तेमाल करना।
(d) सिंचाई के लिए ऊर्जा उत्पन्न करने हेतु पवनचक्की का उपयोग करना।
उत्तर:
(d) सिंचाई के लिए ऊर्जा उत्पन्न करने हेतु पवनचक्की का उपयोग करना।

प्रश्न 24.
बाढ़ प्रभावित खड्डों या नालियों में चैकडेम बनाना आवश्यक है क्योंकि वे –
(i) सिंचाई के लिए जल संग्रह करते हैं।
(ii) जल संचय करते हैं तथा मृदा अपरदन को रोकते हैं।
(iii) भू-जल संग्रह करते हैं।
(iv) जूल को स्थायी रूप से संग्रह कर लेते हैं।
(a) (i) एवं (iv)
(b) (ii) एवं (iii)
(c) (iii) एवं (iv)
(d) (ii) एवं (iv)
उत्तर:
(b) (ii) एवं (iii)

रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. ………. हेतु अमृता देवी विश्नोई राष्ट्रीय पुरस्कार की व्यवस्था भारत सरकार ने की।
  2. सुन्दरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में …… आन्दोलन का काफी प्रचार-प्रसार हुआ।
  3. वर्षा के जल को एकत्रित करके भूमि के अन्दर संग्रहण करने की प्रक्रिया …….. कहलाती है।
  4. जल को नष्ट होने या समाप्त होने तथा प्रदूषित होने से बचाने की प्रक्रिया ……. कहलाती है।
  5. कुआँ …….. का स्रोत है।

उत्तर:

  1. जीव संरक्षण।
  2. चिपको।
  3. वर्षा जल संग्रहण (रेनवाटर हार्वेस्टिंग)।
  4. जल संरक्षण।
  5. जल।

जोड़ी बनाइए
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन 1
उत्तर:

  1. → (c)
  2. → (d)
  3. → (e)
  4. → (a)
  5. → (b)

सत्य/असत्य कथन

  1. वनों के कटान से आर्थिक लाभ तो होता ही है, लेकिन पर्यावरण को कोई हानि नहीं पहुँचती।
  2. जल जीवन है।
  3. जंगली जन्तुओं का संरक्षण मानव के लिए खतरनाक हो सकता है।
  4. वन वर्षा को आमन्त्रित करते हैं तथा मृदा अपरदन को रोकते हैं।
  5. बाँधो से पर्यावरण को कोई हानि नहीं होती।

उत्तर:

  1. असत्य।
  2. सत्य।
  3. असत्य।
  4. सत्य।
  5. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. जीवाश्म ईंधन का उदाहरण दीजिए।
  2. गंगा प्रदूषण का प्रमुख एक कारण बताइए।
  3. बंगाल के उस वन का नाम क्या है जिसको संरक्षित सर्वश्रेष्ठ वन का उदाहरण माना जाता है?
  4. अमृता देवी विश्नोई राष्ट्रीय पुरस्कार की व्यवस्था किस कार्य के लिए की गई?
  5. वनों को अंधाधुन्ध कटाव से बचाने के लिए चलाए गए आन्दोलन का क्या नाम है?

उत्तर:

  1. कोयला एवं पेट्रोलियम
  2. अधजले शवों का विसर्जन
  3. अराबाड़ी साल वन
  4. जीव संरक्षण हेतु
  5. चिपको आन्दोलन।

MP Board Class 10th Science Chapter 16 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जल संरक्षण किसे कहते हैं?
उत्तर:
जल संरक्षण: “जल को नष्ट होने या समाप्त होने तथा प्रदूषित होने से बचाने की प्रक्रिया जल संरक्षण कहलाती है।”

प्रश्न 2.
“वर्षा जल संग्रहण” या “रेनवाटर हार्वेस्टिंग” किसे कहते हैं?
उत्तर:
“वर्षा जल संग्रहण” या “रेनवाटर हार्वेस्टिंग”:
“वर्षा के जल को एकत्रित करके भूमि के अन्दर संग्रह करने की प्रक्रिया “वर्षा जल संग्रहण” या “रेनवाटर हार्वेस्टिंग” कहलाती है।”

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प्रश्न 3.
“ग्राउण्ड वाटर रिचार्जिंग” किसे कहते हैं?
उत्तर:
ग्राउण्ड वाटर रिचार्जिंग:
“रेनवाटर हार्वेस्टिग एवं जल संरक्षण” की विधियों द्वारा जल का भूमि में पुनः संग्रहण करना ग्राउण्ड वाटर रिचार्जिंग कहलाता है।

प्रश्न 4.
गंगा नदी के जल प्रदूषण के दो मुख्य कारकों की सूची बनाइए। उल्लेख कीजिए कि किसी नदी के जल का प्रदूषण और संदूषण होना आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक क्यों सिद्ध होता है?
उत्तर:
गंगाजल को प्रदूषित करने वाले दो मुख्य कारक –

  1. अधजले शवों को गंगा में प्रवाहित करना।
  2. औद्योगिक अपशिष्टों एवं घरेलू अपशिष्टों को गंगा में प्रवाहित करना।
  3. किसी नदी के जल का प्रदूषित एवं संदूषित होना आस-पास के निवासियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। यह विभिन्न बीमारियों को जन्म देता है।

प्रश्न 5.
चिपको आन्दोलन क्या था? इस आन्दोलन से अन्ततः स्थानीय लोगों और पर्यावरण को किस प्रकार लाभ हुआ?
उत्तर:
चिपको आन्दोलन:
“हिमालय की ऊँची पर्वत श्रृंखलाओं वाले गढ़वाल के रेनी नामक ग्राम में पुरुषों की अनुपस्थिति में जब ठेकेदार अपने आदमियों को लेकर वृक्षों को काटने आया तो गाँव की स्त्रियाँ वहाँ पहुँचकर वृक्षों के तनों से चिपककर खड़ी हो गयीं। इस कारण ठेकेदार के आदमी वृक्षों को काट नहीं सके।

इस प्रकार उन स्त्रियों ने वन एवं वन्यजीव एवं पर्यावरण की रक्षा की। यह आन्दोलन चिपको आन्दोलन के नाम से प्रसिद्ध हुआ तथा सुन्दरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में खूब फला-फूला।” इस आन्दोलन से वहाँ के निवासियों को अत्यन्त लाभ मिला, वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ईंधन तथा अन्य सामग्री प्राप्त कर सके तथा पर्यावरण संरक्षित हुआ।

प्रश्न 6.
(i) वनों एवं (ii) वन्य जीवन के संरक्षण के दो-दो लाभ लिखिए।
उत्तर:
(i) वनों के संरक्षण के लाभ:

  1. इससे पर्यावरण सन्तुलित एवं प्रदूषण रहित रहता है जो वहाँ के निवासियों के लिए स्वास्थ्यप्रद है।
  2. वनों से विविध खाद्य सामग्री एवं औषधियाँ मिलती हैं।

(ii) वन्य जीवन के संरक्षण के लाभ:

  1. वन्य जीवों से हमें अनेक औषधियाँ तथा अन्य लाभदायक सामग्री मिलती है।
  2. वन्य जीव पर्यावरण सन्तुलन को बनाए रखते हैं।

प्रश्न 7.
कोई पाँच वस्तुओं की एक लिस्ट बनाइए जिनका उपयोग आप प्रतिदिन विद्यालय में करते हैं। उस लिस्ट में से उन वस्तुओं की पहचान कीजिए जिनका पुनर्चक्रण सम्भव है।
उत्तर:
विद्यालय में प्रतिदिन प्रयुक्त पाँच वस्तुएँ –
(1) प्लास्टिक बॉक्स।

  1. रेक्सिन बैग।
  2. प्लास्टिक स्केल।
  3. स्टील चम्मच।
  4. कागज की नोटबुक एवं बुक्स।

निम्न का पुनर्चक्रण सम्भव है –

  1. प्लास्टिक बॉक्स।
  2. प्लास्टिक स्केल।
  3. स्टील चम्मच।
  4. कागज की नोटबुक एवं बुक्स।

प्रश्न 8.
यद्यपि कोयला एवं पेट्रोलियम जैव-मात्रा या जैव अवशेषों के अपघटन (नवीकरण) से उत्पन्न होते हैं, फिर भी हम उनका संरक्षण आवश्यक क्यों समझते हैं?
उत्तर:
दोनों ऊर्जा स्रोत कोयला एवं पेट्रोलियम बनने में लाखों-करोड़ों वर्ष का समय लेते हैं तथा इन स्रोतों के उपयोग (दोहन) की दर उनके उत्पादन की दर से कहीं अधिक है तथा प्रकृति में इनका भण्डारण भी सीमित है तथा इन्हें आसानी से उत्पन्न भी नहीं किया जा सकता। इसलिए जिस तरह इनका उपयोग हो रहा है, ये निकट भविष्य में समाप्त हो जाएँगे। इसलिए इनका संरक्षण आवश्यक है ताकि हमारी भावी पीढ़ी को उपयोग के लिए ये मिल सकें।

प्रश्न 9.
सामुदायिक स्तर पर जल संग्रहण के दो लाभ लिखिए।
उत्तर:
सामुदायिक स्तर पर जल संग्रहण के दो लाभ:

  1. पृथ्वी का भूजल स्तर बढ़ जाता है।
  2. वर्षा ऋतु में संग्रह किया हुआ जल जब आवश्यकता हो तब प्रयोग में लाया जा सकता है।

MP Board Class 10th Science Chapter 16 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वन संरक्षण के लिए किये जाने वाले प्रयासों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
वन संरक्षण के लिए प्रयास-वन संरक्षण के लिए राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रमुख प्रयास अग्रांकित हैं –

  1. वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देना।
  2. आनुवंशिक आधार पर वृक्षों को तैयार करना।
  3. रोग प्रतिरोधी एवं कीट प्रतिरोधी वृक्षों को तैयार करना।
  4. सामाजिक वानिकी को प्रोत्साहित करना।
  5. वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण के कार्यों को जन-आन्दोलन का रूप देना।
  6. मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जलाई, 1987 में मुख्य वन संरक्षक के आधीन एक अलग प्रकोष्ठ की स्थापना की गई, जो वन संरक्षण तथा इसके विकास कार्यों की देखरेख करता है।

प्रश्न 2.
भूमिगत जल स्तर गिरने के कारण लिखिए। घर में वर्षा के जल के संग्रहण की विधि लिखिए।
उत्तर:
भूमिगत जल स्तर गिरने के प्रमुख कारण:

  1. हैण्डपम्प या सबमर्सीबल पम्पों की सहायता से भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन।
  2. वर्षा जल की कमी।
  3. स्थानीय स्तर पर जल के अन्य स्रोतों नदी, तालाबों की उपलब्ध में कमी।

घर में वर्षा जल के संग्रहण की विधि:
घर की छतों को इस प्रकार बनाना चाहिए कि उस पर वर्षा के जल का बहाव एक ही दिशा में हो। पाइप लाइन की सहायता से इस पानी को जमीन के अन्दर पहुँचाना चाहिए जहाँ से यह जल कुओं एवं हैण्डपम्प वाले जल-स्रोतों में संग्रहित हो जाये।

प्रश्न 3.
वर्षा जल संग्रहण के मुख्य उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
वर्षा जल संग्रहण के मुख्य उद्देश्य:

  1. भूमिगत जल के गुणों में सुधार लाना।
  2. अति दोहन के कारण रिक्त हुए जलस्रोतों में जलापूर्ति बनाये रखना।
  3. वाहित मल-जल एवं औद्योगिक अपशिष्ट जल का पुनः चक्रण करना।
  4. जल के अति प्रवाह एवं भूमि क्षरण को रोकना।
  5. आगामी समय (भविष्य) के लिए जल का संग्रहण करना।

प्रश्न 4.
कर्नाटक के एक गाँव में वहाँ के किसानों ने एक झील के चारों ओर फसल उगाना प्रारम्भ कर दिया। वह झील सदैव जल से भरी रहती थी। फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए वे अपने खेतों में उर्वरकों का प्रयोग करते थे। शीघ्र ही उन्होंने देखा कि वह झील पूर्णतया हरे तैरते पौधों से भर गयी है तथा मछलियों ने बड़ी तेजी से मरना प्रारम्भ कर दिया है। स्थिति का विश्लेषण कीजिए तथा झील में हरे पौधों की अत्यधिक वृद्धि एवं मछलियों की मृत्यु के कारणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
चूँकि किसानों ने अपनी फसल के उत्पादन के लिए अत्यधिक मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग किया। वे उर्वरक वर्षा ऋतु में वर्षा के जल के साथ बहकर उस झील में पहुँच गए। चूँकि बहुत से उर्वरकों में फॉस्फेट एवं नाइट्रेटस होते हैं। इसलिए झील इन रसायनों से परिपूर्ण हो गयी। इन रसायनों ने जलीय पौधों की वृद्धि को प्रोत्साहित किया। इसलिए झील की सतह हरे तैरते जलीय पौधों से भर गयी। हरे पौधों से झील के जल की सतह पूर्णतया ढक जाने से जलीय जीवों को सूर्य का प्रकाश नहीं मिल सका तथा जल में घुली ऑक्सीजन की अपर्याप्त मात्रा मछलियों के तेजी से मरने का कारण बनी।

प्रश्न 5.
अपने घरों में विद्युत ऊर्जा के संरक्षण के लिए क्या उपाय करेंगे?
उत्तर:
घरों में विद्युत ऊर्जा के संरक्षण के उपाय –

  1. जब आवश्यकता न हो तो बिजली के पंखे एवं बल्ब आदि को बन्द कर देंगे, उनको तभी प्रयोग में लाएँगे जब आवश्यकता हो।
  2. सौर ऊर्जा का अधिकाधिक उपयोग करेंगे।
  3. प्रकाश के लिए कम शक्ति के फ्लोरोसेण्ट ट्यूब CFL एवं LED बल्बों का उपयोग करेंगे।
  4. जाड़े के दिनों में जल को गर्म करने के लिए सौर तापन युक्तियों को प्रयोग में लाएँगे।

प्रश्न 6.
वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को कम करने के लिए कुछ उपाय सुझाइए।
उत्तर:
वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कम करने के उपाय –

  1. जीवाश्म ईंधन (खनिज ईंधन) की स्वचालित वाहनों में खपत कम करके अर्थात् इनका न्यूनतम उपयोग करना तथा साइकिल, बस आदि वैकल्पिक साधनों का अधिकतम उपयोग करना।
  2. स्वचालित वाहनों में पेट्रोल डीजल के स्थान पर CNG एवं अन्य स्वच्छ ईंधन का उपयोग करके।
  3. घरों में ईंधन के रूप में लकड़ी, कोयला आदि का उपयोग न करके LPG सौर ऊर्जा एवं विद्युत ऊर्जा का उपयोग करके।
  4. कचरे (कूड़ा करकट) को जलाने के बजाय उसका खाद बनाकर।
  5. औद्योगिक धुएँ को वायुमण्डल में छोड़ने से पहले उसका उपचार करके।
  6. अधिकाधिक पौधारोपण द्वारा।

प्रश्न 7.
क्या जल संरक्षण आवश्यक है? कारण दीजिए।
उत्तर:
प्रकृति में उपलब्ध शुद्ध एवं ताजा जल मानव जाति की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त है। लेकिन इसके असमान वितरण, मौसम में परिवर्तन, वर्षा का कम होना, जल का अपदोहन एवं जल की बर्बादी के कारण विश्व के विभिन्न भागों में जल का अभाव एक गम्भीर समस्या है। इस समस्या के निदान के लिए जल संरक्षण आवश्यक है क्योंकि जल ही जीवन है। जल के बिना जैवजगत (वनस्पति एवं जन्तुओं) का जीवन कठिन हो जायेगा।

प्रश्न 8.
अपशिष्ट जल के उपयोग के कुछ उपाय बताइए।
उत्तर:
अपशिष्ट जल के उपयोग के उपाय:

  1. अपशिष्ट जल का उपयोग भू-गर्म जल का स्तर बढ़ाने में किया जा सकता है।
  2. इसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जा सकता है।
  3. प्रदूषित एवं संदूषित जल का उपयोग विभिन्न फसलों के लिए उर्वरक का कार्य कर सकता है।
  4. उपचारित जल का उपयोग वाहनों की सफाई तथा बागवानी में किया जा सकता है।

प्रश्न 9.
बंगाल के अराबाड़ी जंगल (वन) संरक्षित वनों का एक अच्छा उदाहरण है क्यों?
उत्तर:
वन विभाग के एक दूरदर्शी अधिकारी ने बंगाल के अराबाड़ा के क्षतिग्रस्त साल वन के संरक्षण की एक योजना बनायी। वहाँ ग्रामवासियों को अपनी इस योजना में सम्मिलित किया और उनके सामूहिक प्रयासों से वह साल वन समृद्ध हो गया जो पहले बेकार पड़ा था। इसके बदले में उन ग्रामवासियों को, जिनको उस वन की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी थी, अपने पशुओं को चराने तथा कम मूल्य पर ईंधन के लिए लकड़ी एकत्रित करने की अनुमति दे दी गयी। इससे ग्रामवासियों को रोजगार के साथ-साथ फसल का 25 प्रतिशत के उपयोग का अधिकार मिला।

MP Board Class 10th Science Chapter 16 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वन्य संसाधनों के अनियन्त्रित दोहन से क्या हो रहा है?
उत्तर:
वन्य संसाधनों के अनियन्त्रित दोहन के प्रभाव-वन्य संसाधनों में वन्य जीव-जन्तु एवं पेड़-पौधे आते हैं।

  1. जलवायु में परिवर्तन हो रहा है।
  2. वायुमण्डल में CO2 की मात्रा बढ़ने से वायु प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, अम्ल वर्षा आदि की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है क्योंकि CO2 को पेड़-पौधे
  3. प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा प्राणवायु ऑक्सीजन में बदलते रहते हैं।
  4. वर्षा की कमी, भूमिगत जल स्तर में कमी तथा सतही जल का अभाव हो रहा है।
  5. पशुओं के लिए चारागाहों की कमी हो रही है।
  6. मरुस्थलीय भूमि में वृद्धि हो रही है।
  7. जन्तुओं (पशु एवं पक्षियों) के आवास नष्ट हो रहे हैं।
  8. वन सम्पदा की हानि हो रही है।
  9. भूमि क्षरण बढ़ रहा है।
  10. खाद्य श्रृंखला अव्यवस्थित हो रही है।

प्रश्न 2.
वनों की एक संसाधन के रूप में क्या महत्ता है?
उत्तर:
वन संरक्षण की मानव जीवन में उपयोगिता-वन मानव जीवन के लिए अत्यन्त उपयोगी हैं –

  1. ये पर्यावरण को सन्तुलित एवं प्रदूषण रहित रखते हैं।
  2. पशु-पक्षियों को आवास उपलब्ध कराते हैं।
  3. वर्षा को प्रोत्साहित करते हैं।
  4. वनों से विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्री प्राप्त होती है।
  5. वनों से फल, मेवे इत्यादि प्राप्त होते हैं।
  6. वनों से विभिन्न प्रकार की औषधियाँ मिलती हैं।
  7. वनों से उपयोगी इमारती लकड़ी प्राप्त होती है।
  8. वन पशुओं के लिए चारागाह का कार्य करते हैं। इस प्रकार वनों का संरक्षण करना मानव जीवन के लिए लाभदायक है।

प्रश्न 3.
जल प्रबन्धन एवं जल संरक्षण की विधियाँ लिखिए।
अथवा
जल प्रबन्धन एवं जल संरक्षण के उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जल प्रबन्धन एवं जल संरक्षण की विधियाँ एवं उपाय:

  1. जलीय चक्र को पूरा करने के लिए वनों के विनाश को रोककर नया वृक्षारोपण करना।
  2. घास की अनेक जातियाँ उगाकर सतही जल को बनाये रखना।
  3. जल को सभी प्रकार के प्रदूषण से बचाना।
  4. घरेलू, नगरीय एवं औद्योगिक वाहित अपशिष्टों को जलाशयों में मिलने से रोकना या उपचारित करना।
  5. जल को मितव्ययिता से व्यय करना।
  6. पक्के जलाशय बनाना।
  7. रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं अण्डरग्राउण्ड वाटर रिचार्जिंग की विधियों का उपयोग करना।
  8. वृक्षारोपण करना।
  9. बाढ़ प्रबन्धन के उपाय द्वारा अतिरिक्त जल का उपयोग करके सतही जल का संरक्षण करना।
  10. बाढ़ के प्रकोप से बचने के लिए नदियों के दोनों ओर पक्के कुओं का निर्माण करके पक्की नालियों द्वारा उन्हें नदी से जोड़ना।

प्रश्न 4.
(A) संलग्न चित्र (a) एवं (b) जल संग्राहकों (जल संग्रहण युक्तियों) की पहचान कीजिए तथा उनके नाम लिखिए।
(B) निम्न में कौन दूसरे से अधिक लाभदायक है और क्यों?
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन 2
उत्तर:
(A) चित्र (a) में जल संग्राहक (जल संग्रहण युक्ति) एक तालाब (पोखर) है जबकि (b) में जल संग्राहक (जल संग्रहण युक्ति) भू-गर्भ जल संग्राहक या जल संग्रहण युक्ति (Under ground water reservoir) है।
(B) चित्र (a) की अपेक्षा चित्र (b) का जल संग्रहण अधिक लाभप्रद है क्योंकि भूमि के अन्दर जल संग्रहण के अनेक लाभ हैं जोकि मुख्यतः निम्न प्रकार हैं –

  1. यह ऊर्ध्वपातन द्वारा नष्ट नहीं होता।
  2. यह पृथ्वी के अन्दर सभी जगह बहकर कुओं के जल स्तर को बढ़ाता है।
  3. यह पेड़-पौधों के बड़े क्षेत्र को नमी उपलब्ध कराता है।
  4. यह मानवीय अपशिष्टों एवं पशुओं द्वारा जल को प्रदूषित एवं संदूषित होने से रोकता है।
  5. यह कीड़े-मकोड़ों के प्रजनन एवं संपोषण को रोकता है।

प्रश्न 5.
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के सम्बन्ध में निम्न पदों की व्याख्या कीजिए –
(a) मितव्यय अर्थात् कम उपयोग (Reduced use)।
(b) पुनः चक्रण (Recycle)।
(c) पुनः उपयोग (Reuse)। हमारे दैनिक जीवन में प्रयुक्त पदार्थों में से उपर्युक्त प्रत्येक कोटि के दो पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मितव्यय अर्थात् कम उपयोग (Reduced use):
मितव्यय अर्थात् कम उपयोग का मतलब है कि हम किसी संसाधन का कम से कम उपयोग करें।

उदाहरण:

  1. जल एवं।
  2. विद्युत ऊर्जा।

(b) पुनः चक्रण-पुन:
चक्रण का अर्थ है जिस पदार्थ का हम उपयोग कर चुके हैं उस प्रयुक्त अपशिष्ट पदार्थ को किसी भी प्रक्रिया द्वारा उपयोगी पदार्थ में बदलना।

उदाहरण:

  1. प्लास्टिक या पॉलीथीन से बनी वस्तुएँ।
  2. कागज से बनी वस्तुएँ।

(c) पुनः उपयोग:
किसी वस्तु को उपयोग के बाद फेंकने के बजाय उसका बार-बार उपयोग करना। इसमें किसी भी रूप में पुन:चक्रण न तो छोटे स्तर पर और न ही बड़े स्तर पर सम्मिलित हैं। अर्थात् उस वस्तु को पुनः उसी रूप में प्रयुक्त करना है।

उदाहरण:

  1. प्रयुक्त खाली बोतलें।
  2. प्रयुक्त प्लास्टिक या पॉलीथीन की थैलियाँ।

प्रश्न 6.
अपने प्रतिदिन के क्रियाकलापों की एक लिस्ट बनाइए जिनसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके अथवा ऊर्जा का उपयोग कम हो सके।
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं ऊर्जा की बचत हेतु दैनिक क्रियाकलाप:

  1. पानी की बोतल में बचे पानी का उपयोग बागवानी में करना।
  2. पौधों में जल पाइप से न देकर हजारे आदि से देना।
  3. वाहनों को प्रतिदिन धोने के बजाय उन्हें तभी धोना जब वे गन्दे हो अथवा इसकी आवश्यकता हो।
  4. कपड़ों के धोवन से घर की सफाई करना अथवा टॉयलेट को साफ करना।
  5. बिजली के पंखों एवं बल्बों का आवश्यकतानुसार उपयोग करना।
  6. सौर जल ऊष्मक का उपयोग जल गर्म करने के लिए तथा सौर कुकर का उपयोग भोजन पकाने के लिए करना।
  7. परम्परागत बल्बों के स्थान पर CFL एवं LED बल्बों को उपयोग में लाना।
  8. चलने के लिए पैदल या साइकिल का उपयोग तथा यात्रा के लिए यात्री बसों का उपयोग करना।

प्रश्न 7.
(a) जल एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है, जो जीवन के लिए अमृत है। आपके विज्ञान के शिक्षक यह चाहते हैं कि आप रचनात्मक मूल्यांकन क्रियाकलाप के लिए “प्राणाधार प्राकृतिक सम्पदा-जल को कैसे बचाएँ” विषय पर कोई योजना बनाइए। “जल को कैसे बचाएँ” के बारे में अपने पड़ोस में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए कोई दो उपाय सुझाइए।
(b) किसी एक उपाय का नाम और उसकी व्याख्या कीजिए जिसके द्वारा भौम जल स्तर को नीचे गिरने से रोका जा सके।
उत्तर:
(a) “प्राणाधार प्राकृतिक सम्पदा-जल को कैसे बचाएँ” विषय पर योजना: निर्देश- इस योजना का छात्र अपने विज्ञान शिक्षक के सहयोग से स्वयं तैयार करें।

“जल को कैसे बचाएँ” के बारे में पड़ौस में जागरूकता पैदा करने के उपाय:

  1. जल के अपव्यय एवं दुरुपयोग को रोकने एवं मितव्ययता बरतने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
  2. वर्षा जल संग्रहण के लिए उन्हें प्रोत्साहित करेंगे।

(b) भौम जल स्तर को नीचे गिरने से रोकने के उपाय – घर में वर्षा जल संग्रहण की विधि – भूमिगत जल स्तर गिरने के प्रमुख कारण:

  1. हैण्डपम्प या सबमर्सीबल पम्पों की सहायता से भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन।
  2. वर्षा जल की कमी।
  3. स्थानीय स्तर पर जल के अन्य स्रोतों नदी, तालाबों की उपलब्ध में कमी।

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MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 3 संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक

MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 3 संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक

MP Board Class 8th Science Chapter 3 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 32

प्रश्न 1.
क्या आप कुछ प्राकृतिक रेशों के नाम बता सकते हैं?
उत्तर”
हाँ, प्राकृतिक रेशे कपास, रेशम और ऊन आदि हैं।

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प्रश्न 2.
निम्नांकित सारणी को भरिए –
उत्तर:
प्राकृतिक और कृत्रिम रेशे –

वस्तु का नाम रेशे का प्रकार
प्राकृतिक/कृत्रिम
सूती कपड़े प्राकृतिक रेशे
ऊनी स्वेटर प्राकृतिक रेशे
नाइलॉन की साड़ी कृत्रिम रेशे
साडी सिल्क की प्राकृतिक रेशे
बरसाती कृत्रिम रेशे

प्रश्न 3.
आपने कुछ वस्तुओं को कृत्रिम चिह्नित क्यों किया है?
उत्तर:
क्योंकि ये प्राकृतिक रेशे नहीं हैं। इन्हें मनुष्यों द्वारा बनाया गया है। ये कृत्रिम रूप से बनाए गए हैं। अतः मानव द्वारा निर्मित होने के कारण इन वस्तुओं को कृत्रिम चिह्नित किया है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 33

नाइलॉन

प्रश्न 1.
क्या नाइलॉन के रेशे सचमुच इतने मजबूत होते हैं कि हम उससे पैराशूट और चट्टानों पर चढ़ने की रस्सी का निर्माण कर सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, नाइलॉन के रेशे सचमुच बहुत मजबूत होते हैं। हम इनसे पैराशूट और चट्टानों पर चढ़ने की रस्सी का निर्माण कर सकते हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 34

क्रियाकलाप 3.1

प्रश्न 1.
आँकड़ों को निम्नांकित सारणी की भाँति सारणीबद्ध करिए।
उत्तर:
प्रेक्षण सारणी

धागे/रेशे के प्रकार धागे को तोड़ने हेतु आवश्यक कुल भार
कपास 50 ग्राम
ऊन 100 ग्राम
रेशम 120 ग्राम
नाइलॉन 200 ग्राम

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 35

प्रश्न 1.
मेरी माँ सदैव पेट (PET) बोतलें और चावल तथा चीनी संचयन के लिए पेट जार खरीदती हैं। मैं जानने के लिए उत्सुक हूँ कि आखिर यह पेट क्या है?
उत्तर:
पेट (PET) एक प्रकार का पॉलिएस्टर है। इसका उपयोग बोतलें, बर्तन, फिल्म, तार तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं के निर्माण हेतु किया जाता है।

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प्रश्न 2.
चारों ओर दृष्टि घुमाइए और पॉलिएस्टर से निर्मित वस्तुओं की सूची बनाइए।
उत्तर:
पॉलिएस्टर से निर्मित वस्तुएँ-कमीज, पेण्ट, साड़ी, धागे, छाते, चादर, स्वेटर आदि।

प्रश्न 3.
ओह! अब मैं समझी कि मेरी माँ रसोई में काम . करते समय पॉलिएस्टर से बने वस्त्र क्यों नहीं पहनतीं?
उत्तर:
पॉलिएस्टर से बने वस्त्र गर्म करने पर पिघल जाते हैं। ये आग को शीघ्र पकड़ लेते हैं। रसोई घर में इन वस्त्रों में आग लगने का खतरा रहता है। आग लगने पर कपड़ा पिघल जाता है और पहनने वाले व्यक्ति के शरीर से चिपक जाता है। ये स्थिति बहुत कष्टदायक होती है। यही कारण है कि वह पॉलिएस्टर से बने वस्त्र रसोईघर में काम करते समय नहीं पहनी।

प्रश्न 4.
कल्पना करिए कि आज वर्षा का दिन है। आप किस प्रकार का छाता प्रयोग में लाएँगे और क्यों?
उत्तर:
हम संश्लेषित कपड़े से बना छाता प्रयोग में लायेंगे क्योंकि ये शीघ्र सूखते हैं, अधिक समय तक चलते हैं, कम महँगे होते हैं तथा आसानी से उपलब्ध और रख-रखाव में सुविधाजनक हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 36

प्रश्न 1.
क्या संश्लेषित रेशे प्राकृतिक रेशों की अपेक्षा कम जल सोखते हैं? क्या वे सूखने में कम समय लेते हैं?
उत्तर:
हाँ, संश्लेषित रेशे प्राकृतिक रेशों की अपेक्षा कम जल सोखते हैं। हाँ, वे सूखने में कम समय लेते हैं।

प्रश्न 2.
यह क्रियाकलाप आपको संश्लेषित कपड़ों के गुणधर्मों के बारे में क्या बतलाता है?
उत्तर:
यह बतलाता है कि संश्लेषित रेशों से बने कपड़े सूखने में कम समय लेते हैं जबकि प्राकृतिक रेशों से बने कपड़े सूखने में अधिक समय लेते हैं। इसी प्रकार प्राकृतिक रेशों से बने कपड़े अधिक जल सोखते हैं जबकि संश्लेषित रेशों से बने कपड़े कम कम जल सोखते हैं।

प्रश्न 3.
अपने माता-पिता से इन कपड़ों के प्राकृतिक रेशों की तुलना में चिरस्थायित्व (टिकाऊपन), मूल्य और रख-रखाव के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
संश्लेषित रेशों से बने कपड़े, प्राकृतिक रेशों से बने कपड़ों की तुलना में अधिक टिकाऊ, सस्ते और रख-रखाव में सुविधाजनक हैं।
प्लास्टिक

प्रश्न 4.
क्या आपको आश्चर्य नहीं होता कि यह कैसे सम्भव है?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि प्लास्टिक को आसानी से साँचों में ढाला जा सकता है और इसका पुनःचक्रण हो सकता है। इसे पुनः प्रयुक्त किया जा सकता है। इसे रंगा और पिघलाया जा सकता है। इसे किसी भी रूप में ढालकर उपयोग में लाया जा सकता है।

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प्रश्न 5.
क्या सभी प्लास्टिक वस्तुएँ सरलतापूर्वक मोड़ी जा सकती हैं?
उत्तर:
नहीं, सभी प्लास्टिक वस्तुएँ मोड़ी नहीं जा सकती।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 37

प्लास्टिक, हल्का, प्रबल और चिरस्थायी है –

प्रश्न 1.
किस पदार्थ की बनी बाल्टियाँ और मग आज आप उपयोग में ले रहे हैं?
उत्तर:
आजकल हम प्लास्टिक की बनी बाल्टियाँ और मग उपयोग में ले रहे हैं।

प्रश्न 2.
प्लास्टिक पात्रों को उपयोग में लाने के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
प्लास्टिक पात्रों को उपयोग में लाने के निम्नलिखित लाभ हैं –

  1. प्लास्टिक पात्र बहुत हल्के, प्रबल और चिरस्थायी होते
  2. ये विभिन्न आकारों और साइजों में ढाले जा सकते हैं।
  3. ये धातुओं को पात्रों की अपेक्षा सस्ते होते हैं।
  4. ये उद्योगों और घरेलू कार्यों में विभिन्न उद्देश्यों हेतु उपयोग में लाए जा सकते हैं।

प्रश्न 3.
विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक पात्रों की सूची बनाइए जिन्हें आप दैनिक जीवन में उपयोग में लाते हैं।
उत्तर:
प्लास्टिक पात्र-बाल्टी, मग, गंगा सागर, पानी की टंकी, सामान ले जाने वाली थैलियाँ (कैरी बैग), पाइप, बर्तन, डस्टबिन, मेज, कुर्सी आदि।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 38

प्रश्न 1.
प्लास्टिक का निस्तारण एक प्रधान समस्या है। क्यों?
उत्तर:
प्लास्टिक एक जैव अनिम्नीकरणीय पदार्थ है जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं (जैसे-जीवाणुओं) द्वारा विघटित नहीं होता। इसलिए प्लास्टिक का निस्तारण एक प्रधान समस्या है।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 39

प्रश्न 1.
कुछ और तरीके भी सुझाइए जिनके द्वारा आप प्लास्टिक पदार्थों के उपयोग को कम करने में सहयोग दे सकते हैं।
उत्तर:
प्लास्टिक पदार्थों के उपयोग को कम करने के लिए हम 4R सिद्धान्त को अपना कर सहयोग दे सकते हैं। उपयोग करिए, पुनः उपयोग करिए, पुनः चक्रित करिये और पुनः प्राप्त करिए। हमें इस प्रकार की आदतें विकसित करनी चाहिए जो पर्यावरण हितैषी हों।

MP Board Class 8th Science Chapter 3 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कुछ रेशे संश्लेषित क्यों कहलाते हैं?
उत्तर:
कुछ रेशे संश्लेषित इसलिए कहलाते हैं क्योंकि ये मनुष्यों द्वारा बनाए जाते हैं।

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प्रश्न 2.
सही उत्तर को चिह्नित (✓) कीजिए –
रेयॉन एक संश्लेषित रेशा नहीं है, क्योंकि –
(क) इसका रूप रेशम समान होता है।
(ख) इसे काष्ठ लुग्दी से प्राप्त किया जाता है।
(ग) इसके रेशों को प्राकृतिक रेशों के समान बुना जा सकता है।
उत्तर:
(ख) इसे काष्ठ लुग्दी से प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 3.
उचित शब्दों द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

  1. संश्लेषित रेशे ……. अथवा ……… रेशे भी कहलाते हैं।
  2. संश्लेषित रेशे कच्चे माल से संश्लेषित किए जाते हैं, है जो ……. कहलाता है।
  3. संश्लेषित रेशे की भाँति प्लास्टिक भी एक ………. है।

उत्तर:

  1. कृत्रिम, मानव निर्मित।
  2. संश्लेषण।
  3. बहुलक।

प्रश्न 4.
नाइलॉन रेशों से निर्मित दो वस्तुओं के नाम बताइए जो नाइलॉन रेशे की प्रबलता दर्शाती हों।
उत्तर:

  1. पैराशूट।
  2. चट्टानों पर चढ़ने वाली रस्सी।

प्रश्न 5.
खाद्य पदार्थों का संचयन करने हेतु प्लास्टिक पात्रों के उपयोग के तीन प्रमुख लाभ बताइए।
उत्तर:
प्लास्टिक पात्रों के उपयोग के प्रयुक्त लाभ:

  1. ये हल्के होते हैं।
  2. ये प्रबल होते हैं।
  3. ये चिरस्थायी होते हैं।

प्रश्न 6.
थर्मोप्लास्टिक और थर्मोसेटिंग प्लास्टिक के मध्य अन्तर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
थर्मोप्लास्टिक और थर्मोसेटिंग प्लास्टिक में अन्तर:

थर्मोप्लास्टिक थर्मोसेटिंग प्लास्टिक
यह ऐसा प्लास्टिक है जो गर्म करने पर आसानी से विकृत हो जाता है और सरलतापूर्वक मुड़ जाता है। ये ऐसे प्लास्टिक हैं जिन्हें एक बार साँचे में ढाल दिया जाता है तो इन्हें ऊष्मा देकर नर्म नहीं किया जा सकता। जैसे – पॉलीथीन, पी.वी.सी. जैसे-बैकेलाइट, मेलामाइन। (PVC)

प्रश्न 7.
समझाइए,थर्मोसेटिंगप्लास्टिक से निम्नलिखित क्यों बनाए जाते हैं?

  1. डेगची के हत्थे।
  2. विद्युत् प्लग/स्विच/प्लग बोर्ड।

उत्तर:

  1. डेगची के हत्थे: थर्मोसेटिंग प्लास्टिक ऊष्मा का कुचालक है, इसलिए डेगची के हत्थे थर्मोसेटिंग प्लास्टिक के बनाए जाते हैं।
  2. विद्युत् प्लग/स्विच/प्लग बोर्ड: क्योंकि थर्मोसेटिंग प्लास्टिक विद्युत् का कुचालक है, इसलिए विद्युत् प्लग/स्विच/ प्लगबोर्ड थर्मोसेटिंग प्लास्टिक के बनाए जाते हैं।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित पदार्थों को “पुनः चक्रित किए जा सकते हैं” और “पुनः चक्रित नहीं किए जा सकते हैं” में वर्गीकृत कीजिए –
टेलीफोन यन्त्र, प्लास्टिक के खिलौने, कुकर के हत्थे, सामग्री लाने वाले थैले, बॉल प्वॉइंट पेन, प्लास्टिक के कटोरे, विद्युत् तारों के प्लास्टिक आवरण, प्लास्टिक की कुर्सियाँ, विद्युत् स्विच।
उत्तर:
पदार्थ जो पुनः चक्रित किए जा सकते हैं – प्लास्टिक खिलौने, सामग्री लाने वाले थैले, बॉल प्वॉइंट पेन, प्लास्टिक के कटोरे, विद्युत् तारों के प्लास्टिक आवरण, प्लास्टिक की कुर्सियाँ। पदार्थ जो पुनः चक्रित नहीं किए जा सकते हैं – टेलीफोन यन्त्र, कुकर के हत्थे, विद्युत् स्विच।

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प्रश्न 9.
राणा गर्मियों के लिए कमीजें खरीदना चाहता है। उसे सूती कमीजें खरीदनी चाहिए या संश्लेषित? कारण सहित राणा को सलाह दीजिए।
उत्तर:
राणा को गर्मियों के लिए सूती कमीजें खरीदनी चाहिए क्योंकि संश्लेषित कमीजें जल्दी गर्म हो जाती हैं और शरीर से चिपकने लगती हैं। इनके पहनने से पसीना भी अधिक आता है। ये हवा को अन्दर-बाहर नहीं आने देती हैं। इसके विपरीत सूती कमीजों से हवा अन्दर-बाहर आती-जाती है और पसीना सुखा देती है।

प्रश्न 10.
उदाहरण देकर प्रदर्शित कीजिए कि प्लास्टिक की प्रकृति असंक्षारक होती है।
उत्तर:
प्लास्टिक जल और वायु से अभिक्रिया नहीं करते, अतः इनका संक्षारण आसानी से नहीं होता। अतः इनकी प्रकृति असंक्षारक होती है।

उदाहरण:
घर में उपयोग में आने वाले प्लास्टिक के डिब्बे, बाल्टियाँ आदि को कई महीनों तक उपयोग में लाया जाता है उनमें न तो जंग लगती है और न ही उनके सामान्य रूप में बदलाव आता है।

प्रश्न 11.
क्या दाँत साफ करने के ब्रुश का हैण्डल और शूक (ब्रिस्टल) एक ही पदार्थ के बनाने चाहिए? अपना उत्तर स्पष्ट करिये।
उत्तर:
नहीं, दाँत साफ करने के ब्रुश का हैण्डल और शूक एक ही पदार्थ के नहीं बनाने चाहिए क्योंकि दाँत साफ करने के लिए नर्म वस्तु (नाइलॉन) की आवश्यकता होती है जिससे कि दाँत साफ करते समय दाँत और मसूड़ों को कोई नुकसान न हो। इसके विपरीत ब्रुश का हैण्डल सख्त वस्तु (प्लास्टिक) का होना चाहिए ताकि उसे आसानी से सही ढंग से पकड़ा जा सके।

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प्रश्न 12.
“जहाँ तक सम्भव हो प्लास्टिक के उपयोग से बचिए”, इस कथन पर सलाह दीजिए।
उत्तर:
प्लास्टिक अनभिक्रियाशील, हल्का, प्रबल और चिरस्थायी होता है। यह ऊष्मा और विद्युत् का कुचालक है, इसलिये यह बहुत उपयोगी है, परन्तु प्लास्टिक जैव अनिम्नीकरणीय है यह प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा सरलता से विघटित नहीं होता है। इसलिए इसका प्रयोग करते समय 4R सिद्धान्त को ध्यान में रखना चाहिए:

  1. उपयोग कम करिए (Reduce)
  2. पुनः उपयोग करिए (Reuse)
  3. पुनः चक्रित करिए (Recycle)
  4. पुनः प्राप्त करिए (Recover)

प्रश्न 13.
कॉलम A के पदों का कॉलम B में दिए गए वाक्य खण्डों से सही मिलान कीजिए –
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 3 संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक 1
उत्तर:

  1. → (d)
  2. → (c)
  3. → (a)
  4. → (b)

प्रश्न 14.
“संश्लेषित रेशों का औद्योगिक निर्माण | वास्तव में वनों के संरक्षण में सहायक हो रहा है।” टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
संश्लेषित रेशों को पौधों और जन्तुओं से प्राप्त नहीं किया जाता है। इन्हें रासायनिक पदार्थों का उपयोग करके बनाया जाता है। ये मानव निर्मित कृत्रिम रेशे हैं। इसलिए इनके निर्माण में पेड़-पौधों को काटने की आवश्यकता नहीं होती जबकि प्राकृतिक रेशों को प्राप्त करने के लिए पेड़-पौधों को काटना पड़ता है वहीं संश्लेषित रेशों के लिए इनकी आवश्यकता नहीं होती। अतः यह कहा जा सकता है कि संश्लेषित रेशों का औद्योगिक निर्माण वास्तव में वनों के संरक्षण में सहायक हो रहा है।

प्रश्न 15.
यह प्रदर्शन करने हेतु एक क्रियाकलाप का वर्णन करिए कि थर्मोप्लास्टिक विद्युत् का कुचालक है।
उत्तर:
थर्मोप्लास्टिक ऐसे प्लास्टिक हैं जो गर्म करने पर आसानी से विकृत हो जाते हैं और मुड़ जाते हैं। जैसे-पॉलिथीन, पीवीसी (PVC)। सर्वप्रथम हम थर्मोप्लास्टिक से बनी वस्तु, एक सेल और एक टॉर्च बल्ब लेकर विद्युत् परिपथ बनाते हैं। जब हम एक सेल के साथ एक बल्ब और एक थर्मोप्लास्टिक की वस्तु को चित्रानुसार जोड़ते हैं, तो हम देखते हैं कि बल्ब नहीं जलता है। यदि हम इस परिपथ में से थर्मोप्लास्टिक की वस्तु को हटा देते हैं तो बल्ब जलने लगता है। अतः इससे निष्कर्ष निकलता है कि थर्मोप्लास्टिक विद्युत् का कुचालक है इसमें होकर विद्युत् प्रवाहित नहीं होती है।
MP Board Class 8th Science Solutions Chapter 3 संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक 2

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MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

MP Board Class 10th Science Chapter 14 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न श्रृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 273

प्रश्न 1.
ऊर्जा का उत्तम स्रोत किसे कहते हैं?
उत्तर:
एक उत्तम ऊर्जा स्रोत वह कहलाता है जो –

  1. सतत् अनवरत रूप से प्रचुरता में आसानी से उपलब्ध हो।
  2. नवीकरणीय हो।
  3. पर्यावरण के लिए हानि रहित (पर्यावरण-मित्र) हो।
  4. मितव्ययी हो।

प्रश्न 2.
उत्तम ईंधन किसे कहते हैं?
उत्तर:
उत्तम ईंधन:
“अधिक कैलोरी मान वाला आसानी से कम मूल्य पर सर्वदा उपलब्ध, संग्रहण एवं परिवहन में प्ररक्षित ईंधन उत्तम ईंधन या आदर्श ईंधन कहलाता है।”

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प्रश्न 3.
यदि आप अपने भोजन को गर्म करने के लिए किसी भी ऊर्जा का उपयोग कर सकते हैं तो आप किसका उपयोग करेंगे और क्यों?
उत्तर:
हम भोजन को गर्म करने के लिए गैसीय जीवाश्म ईंधन (LPG या प्राकृतिक गैस) का प्रयोग करेंगे क्योंकि यह एक उत्तम एवं प्रयोग में आसान ईंधन है।

प्रश्न श्रृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 279

प्रश्न 1.
जीवाश्मी ईंधन की क्या हानियाँ हैं?
उत्तर:
जीवाश्म ईंधन से हानियाँ:

  1. इनके दहन से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर के ऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, लेड ऑक्साइड आदि अनेक वायु प्रदूषक उत्पन्न होते हैं।
  2. ठोस जीवाश्म ईंधन से राख आदि अपशिष्ट बचते हैं।
  3. वायु में हानिकारक गैसों के अतिरिक्त कार्बन के कण एवं धुआँ उत्पन्न होता है।
  4. इसके अतिरिक्त यह एक अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।

प्रश्न 2.
हम ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोतों की ओर क्यों बढ़ रहे हैं?
उत्तर:
परम्परागत ऊर्जा स्रोत हमारी जीवन शैली के बढ़ते स्तर के कारण उत्पन्न ईंधन की अत्यधिक आवश्यकता की आपूर्ति के लिए पर्याप्त नहीं है इसलिए हम ऊर्जा के वैकल्पिक (गैर-परम्परागत) ऊर्जा स्रोत की ओर बढ़ रहे हैं।

प्रश्न 3.
हमारी सुविधा के लिए पवन तथा जल ऊर्जा के पारम्परिक उपयोग में किस प्रकार से सुधार किए गए हैं?
उत्तर:
हमारी सुविधा के लिए पवन तथा जल ऊर्जा के पारम्परिक उपयोग के स्थान पर उससे विद्युत् उत्पादन किया जा रहा है जो बहु उपयोगी और सरल है।

प्रश्न शृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 285

प्रश्न 1.
सौर कुकर के लिए कौन-सा दर्पण (अवतल, उत्तल अथवा समतल) सर्वाधिक उपयुक्त होता है?
उत्तर:
समतल दर्पण।

प्रश्न 2.
महासागरों से प्राप्त हो सकने वाली ऊर्जाओं की क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर:
महासागरीय ऊर्जाओं (ज्वारीय ऊर्जा, तरंग ऊर्जा एवं महासागरीय तापीय ऊर्जा) की दक्षता अति विशाल है परन्तु इनके दक्षता पूर्वक व्यापारिक दोहन में अनेक कठिनाइयाँ हैं।

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प्रश्न 3.
भूतापीय ऊर्जा क्या होती है?
उत्तर:
भूतापीय ऊर्जा:
“जब जल भूमि के अन्दर तप्त स्थलों के सम्पर्क में आता है तो वाष्पीकृत हो जाता है जो पृथ्वी से बाहर गरम वाष्प (ऊष्मा स्रोत) के रूप में निकल जाती है। इस वाष्प की ऊर्जा का उपयोग विद्युत् ऊर्जा उत्पन्न करने में किया जाता है। इस ऊर्जा को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं।”

प्रश्न 4.
नाभिकीय ऊर्जा का क्या महत्व है?
उत्तर:
नाभिकीय ऊर्जा का महत्व:

  1. नाभिकीय ऊर्जा का उपयोग विद्युत् उत्पादन में किया जा सकता है।
  2. नाभिकीय ऊर्जा का उपयोग पनडुब्बी को चलाने में किया जाता है।
  3. कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज में इसका उपयोग होता है।
  4. कृषि एवं उद्योग क्षेत्र में इसका उपयोग होता है।
  5. इसमें ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने वाली गैसें उत्पन्न नहीं होती हैं।

प्रश्न शृंखला-4 # पृष्ठ संख्या 285

प्रश्न 1.
क्या कोई ऊर्जा स्रोत प्रदूषण मुक्त हो सकता है? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर:
हाँ, हो सकता है क्योंकि सौर सेल युक्ति का वास्तविक प्रचालन प्रदूषण मुक्त है लेकिन यह हो सकता है कि उस युक्ति के संयोजन में पर्यावरणीय क्षति हुई हो। इसके अतिरिक्त हाइड्रोजन एक प्रदूषण मुक्त ऊर्जा स्रोत है क्योंकि इसके दहन से जल वाष्प उत्पन्न होती है जो प्रदूषण उत्पन्न नहीं करती।

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प्रश्न 2.
रॉकेट ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का उपयोग किया जाता रहा है? क्या आप इसे CNG की तुलना में अधिक स्वच्छ ईंधन मानते हैं? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर:
हाँ, हम हाइड्रोजन को CNG की तुलना में अधिक स्वच्छ ईंधन मानते हैं क्योंकि हाइड्रोजन के दहन से जलवाष्प बनती है जो प्रदूषण पैदा नहीं करती जबकि CNG के दहन से कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड गैसें बनती हैं जो वायु प्रदूषण करती हैं।

प्रश्न श्रृंखला-5 # पृष्ठ संख्या 286

प्रश्न 1.
ऐसे दो ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए जिन्हें आप नवीकरणीय मानते हैं? अपने चयन के लिए तर्क दीजिए।
उत्तर:
नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत:

  1. बायो गैस।
  2. सौर ऊर्जा हैं। क्योंकि ये समाप्त होने वाले नहीं हैं बायोगैस, बायोमास (जन्तु एवं वनस्पति अपशिष्टों) से बनती है जो सदैव प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो सकती है और सूर्य सदैव चमकता रहेगा और हमको ऊर्जा प्रदान करता रहेगा।

प्रश्न 2.
ऐसे दो ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए जिन्हें आप समाप्य मानते हैं। अपने चयन के लिए तर्क दीजिए।
उत्तर:
समाप्य ऊर्जा स्त्रोत:

  1. कोयला।
  2. पेट्रोलियम हैं क्योंकि ये दोनों ही ऊर्जा स्रोत प्राकृतिक उथल-पुथल के परिणामस्वरूप हजारों लाखों वर्षों में बनकर तैयार हुए हैं। इनका प्राकृतिक भण्डारण भी सीमित है तथा इनका नवीकरण नहीं किया जा सकता।

MP Board Class 10th Science Chapter 14 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गर्म जल प्राप्त करने के लिए हम सौर जल तापक का प्रयोग किस दिन नहीं कर सकते?
(a) धूप वाले दिन।
(b) बादलों वाले दिन।
(c) गरम दिन।
(d) पवनों (वायु) वाले दिन।
उत्तर:
(b) बादलों वाले दिन।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन जैव-मास ऊर्जा स्रोत का उदाहरण नहीं है?
(a) लकड़ी।
(b) गोबर गैस।
(c) नाभिकीय ऊर्जा।
(d) कोयला।
उत्तर:
(c) नाभिकीय ऊर्जा।

प्रश्न 3.
जितने ऊर्जा स्रोत हम उपयोग में लाते हैं उनमें से अधिकांश सौर ऊर्जा को निरूपित करते हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा ऊर्जा स्त्रोत अन्ततः सौर ऊर्जा से व्युत्पन्न नहीं है?
(a) भूतापीय ऊर्जा।
(b) पवन ऊर्जा।
(c) नाभिकीय ऊर्जा।
(d) जैव-मास।
उत्तर:
(c) नाभिकीय ऊर्जा।

प्रश्न 4.
ऊर्जा स्रोत के रूप में जीवाश्मी ईंधनों तथा सूर्य की तुलना कीजिए और उनमें अन्तर लिखिए।
उत्तर:
जीवाश्मी ऊर्जा स्रोत एवं सौर ऊर्जा स्रोत में अन्तर –

जीवाश्म ऊर्जा स्रोत सौर ऊर्जा स्त्रोत
ये स्रोत समाप्य हैं। ये स्रोत असमाप्य हैं।
ये पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। ये पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करते हैं।
इनका उपयोग किसी भी मौसम एवं रात्रि में भी किया जा सकता है। इनका उपयोग केवल दिन में और वह भी धूप निकलने पर ही किया जा सकता है।

प्रश्न 5.
जैव मास का ऊर्जा स्रोत के रूप में जल वैद्युत की तुलना कीजिए और उनमें अन्तर लिखिए।
उत्तर:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 1
प्रश्न 6.
निम्नलिखित से ऊर्जा निष्कर्षित करने की सीमाएँ लिखिए –
(a) पवनें।
(b) तरंगें।
(c) ज्वार-भाटा।
उत्तर:
(a) पवनों से ऊर्जा निष्कर्षण की सीमाएँ:

  1. पवन ऊर्जा फॉर्म केवल उन्हीं क्षेत्रों में स्थापित किये जा सकते हैं जहाँ वर्ष के अधिकांश दिनों में तीव्र पवन चलती हों।
  2. टरबाइन की आवश्यक चाल को बनाये रखने के लिए पवन की चाल भी कम से कम 15 km/h होनी चाहिए।
  3. ऊर्जा फार्म स्थापित करने के लिए विशाल भूखण्ड की आवश्यकता होती है। 1 MW के जनित्र के लिए पवन फॉर्म को लगभग 2 हेक्टेयर भूमि चाहिए।
  4. संचायक सेलों जैसी कोई सुविधा होनी चाहिए जिससे पवन ऊर्जा का उपयोग उस समय किया जा सके जब पवन नहीं चलती है।
  5. पवन ऊर्जा फॉर्म की स्थापना में प्रारम्भिक लागत अत्यधिक है।
  6. पवन चक्कियों के दृढ़ आधार, विशाल पंखुड़ियाँ वायुमण्डल में खुले होने के कारण अंधड़, चक्रवात, धूप, वर्षा आदि प्राकृतिक थपेड़ों को सहन करना पड़ता है, अत: इनके लिए उच्च स्तर के रख-रखाव की आवश्यकता होती है।

(b) समुद्री तरंगों से ऊर्जा निष्कर्षण की सीमाएँ: तरंग ऊर्जा का वहीं पर व्यावहारिक उपयोग हो सकता है जहाँ तरंगें अत्यन्त प्रबल हों।

(c) ज्वार-भाटा से ज्वारीय ऊर्जा निष्कर्षण की सीमाएँ: ज्वारीय ऊर्जा का दोहन सागर के किसी संकीर्ण क्षेत्र पर बाँध का निर्माण करके होता है। इस प्रकार के बाँध निर्मित किए जा सकने वाले स्थान सीमित हैं।

प्रश्न 7.
ऊर्जा स्त्रोतों का वर्गीकरण निम्नलिखित वर्गों में किस आधार पर करेंगे –
(a) नवीकरणीय तथा अनवीकरणीय।
(b) समाप्य तथा अक्षय।
क्या (a) तथा (b) के विकल्प समान हैं?
उत्तर:
(a) ऊर्जा के वे स्रोत जो प्रकृति में उत्पन्न होते रहते हैं तथा जिनका पुनः उपयोग किया जा सकता है तथा समाप्त नहीं होते, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के वर्ग में आते हैं। जबकि ऊर्जा के वे स्रोत जो प्रकृति में प्राचीनकाल से एक लम्बी समयावधि में संचित हो पाते हैं तथा उन्हें पुनः प्राप्त करना असम्भव है तथा उनके निरन्तर उपयोग से जो समाप्त हो जाते हैं, अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के वर्ग में आते हैं।

(b) वे ऊर्जा स्रोत जो निरन्तर उपयोग के कारण समाप्त हो जाते हैं। समाप्य ऊर्जा स्रोत के वर्ग में आते हैं तथा जो निरन्तर उपयोग के बाद भी समाप्त नहीं होते, असमाप्य (अक्षय) ऊर्जा स्रोत के वर्ग में आते हैं।
हाँ (a) तथा (b) के विकल्प प्रायः समान हैं।

प्रश्न 8.
ऊर्जा के आदर्श स्रोत में क्या गुण होते हैं? (2019)
उत्तर:
आदर्श ऊर्जा स्रोत के गुण:

  1. प्रति एकांक आयतन अथवा प्रति एकांक द्रव्यमान अधिक कार्य करता है अर्थात् अधिक ऊर्जा देता है।
  2. सरलता से उपलब्ध होता है।
  3. परिवहन तथा भण्डारण में आसान होता है।
  4. वह सस्ता होता है।

प्रश्न 9.
सौर कुकर का उपयोग करने के क्या लाभ एवं हानियाँ हैं? क्या ऐसे भी क्षेत्र हैं जहाँ सौर कुकरों की सीमित उपयोगिता है?
उत्तर:
सौर कुकर के उपयोग के लाभ:

  1. ईंधन की बचत होती है।
  2. प्रदूषण नहीं होता है।
  3. रख-रखाव पर कोई खर्चा नहीं होता अर्थात् आर्थिक बचत होती है।
  4. खाना स्वादिष्ट एवं पौष्टिक बनता है।
  5. खाने के जलने की सम्भावना नहीं रहती।
  6. एक ही समय में चार-पाँच खाद्य पदार्थ पकाए जा सकते हैं।

सोलर कुकर के उपयोग की हानियाँ (सीमाएँ):

  1. सौर प्रकाश (धूप) की अनुपस्थिति में इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
  2. वस्तुओं को तलने, रोटी-पूड़ी आदि सेकना सम्भव नहीं।
  3. खाना बनने में अधिक समय लगता है। इसलिए तुरन्त खाना नहीं बना सकते।
  4. चाय आदि बनाना मुश्किल ही नहीं असम्भव ही होता है।

हाँ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहाँ सौर कुकरों की सीमित उपयोगिता है जहाँ धूप (सूर्य प्रकाश) कम समय के लिए तथा कम तीव्रता की होती है।

प्रश्न 10.
ऊर्जा की बढ़ती माँग के पर्यावरणीय परिणाम क्या हैं? ऊर्जा की खपत को कम करने के उपाय लिखिए।
उत्तर:
ऊर्जा की बढ़ती माँग की पूर्ति हेतु पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों का दोहन बढ़ेगा। लकड़ी के लिए पेड़-पौधों का अत्यधिक कटान होगा। जीवाश्म (खनिज) ईंधन एवं लकड़ी एवं अन्य पारम्परिक ईंधन के दहन से पर्यावरण प्रदूषित होगा। वनों के कटान से पर्यावरण को पर्याप्त हानि होगी।

ऊर्जा की खपत को कम करने के उपाय:

  1. ऊर्जा के परम्परागत स्रोतों का उपयोग मितव्ययिता के साथ करना।
  2. अनावश्यक रूप से ऊर्जा के दुरुपयोग को रोकना।
  3. ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देना।
  4. सौर ऊर्जा पर आधारित उपकरणों का अधिकाधिक उपयोग करना।
  5. पवन ऊर्जा का अधिकाधिक उपयोग करना आदि।

MP Board Class 10th Science Chapter 14 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 10th Science Chapter 14 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न में अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है –
(a) लकड़ी।
(b) सूर्य।
(c) जीवाश्म ईंधन।
(d) पवन।
उत्तर:
(c) जीवाश्म ईंधन।

प्रश्न 2.
अम्ल वर्षा होती है क्योंकि –
(a) सूर्य वायुमण्डल की ऊपरी परत को गर्म करता है।
(b) जीवाश्म ईंधन के दहन से वायुमण्डल में कार्बन, नाइट्रोजन एवं सल्फर के ऑक्साइड उत्सर्जित होते हैं।
(c) बादलों में घर्षण के कारण विद्युत आवेश पैदा होता है।
(d) पृथ्वी के वायुमण्डल में अम्ल होता है।
उत्तर:
(b) जीवाश्म ईंधन के दहन से वायुमण्डल में कार्बन, नाइट्रोजन एवं सल्फर के ऑक्साइड उत्सर्जित होते हैं।

प्रश्न 3.
ताप विद्युत् संयन्त्र में ईंधन प्रयुक्त होता है –
(a) जल।
(b) यूरेनियम।
(c) जैव-मास।
(d) जीवाश्म ईंधन।
उत्तर:
(d) जीवाश्म ईंधन।

प्रश्न 4.
जल विद्युत् संयन्त्र में प्रयुक्त होता है –
(a) संग्रहित जल में उपस्थित स्थितिज ऊर्जा का रूपान्तरण विद्युत् ऊर्जा में होता है।
(b) संग्रहित जल में उपस्थित गतिज ऊर्जा का रूपान्तरण विद्युत् ऊर्जा में होता है।
(c) जल से विद्युत् का निष्कर्षण किया जाता है।
(d) विद्युत् उत्पादन के लिए जल वाष्प में परिवर्तित होता है।
उत्तर:
(a) संग्रहित जल में उपस्थित स्थितिज ऊर्जा का रूपान्तरण विद्युत् ऊर्जा में होता है।

प्रश्न 5.
प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रमुखतः ऊर्जा स्रोत है –
(a) जल।
(b) सूर्य।
(c) यूरेनियम।
(d) जीवाश्म ईंधन।
उत्तर:
(b) सूर्य।

प्रश्न 6.
निम्न में से ऊर्जा का कौन-सा रूप उत्पन्न होने तथा प्रयुक्त होने के दौरान सबसे कम पर्यावरण को प्रदूषित करता है?
(a) नाभिकीय ऊर्जा।
(b) तापीय ऊर्जा।
(c) सौर ऊर्जा।
(d) भू-तापीय ऊर्जा।
उत्तर:
(c) सौर ऊर्जा।

प्रश्न 7.
महासागरीय तापीय ऊर्जा (OTE) निम्न के कारण होती है –
(a) महासागर में तरंगों द्वारा संग्रहित ऊर्जा।
(b) महासागर के विभिन्न स्तरों पर तापान्तर।
(c) महासागर के विभिन्न स्तरों पर दाबान्तर।
(d) महासागर में ज्वार का आना।
उत्तर:
(b) महासागर के विभिन्न स्तरों पर तापान्तर।

प्रश्न 8.
नाभिकीय ऊर्जा के उत्पादन में प्रमुख समस्या है कि किस प्रकार –
(a) केन्द्रक को विखण्डित किया जाय
(b) अभिक्रिया का संचालन किया जाय।
(c) ईंधन के कचरे को निस्तारित किया जाय।
(d) नाभिकीय ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित किया जाय।
उत्तर:
(c) ईंधन के कचरे को निस्तारित किया जाय।

प्रश्न 9.
सौर कुकर का कौन-सा भाग पौधा घर प्रभाव के लिए जिम्मेदार है?
(a) बॉक्स के अन्दर की सतह पर काला रंग करना।
(b) दर्पण।
(c) काँच की प्लेट।
(d) सौर कुकर बाहरी खोल।
उत्तर:
(c) काँच की प्लेट।

प्रश्न 10.
बायोगैस का मुख्य अवयव है –
(a) मीथेन।
(b) कार्बन डाइऑक्साइड।
(c) हाइड्रोजन।
(d) हाइड्रोजन सल्फाइड।
उत्तर:
(a) मीथेन।

प्रश्न 11.
एक पवन चक्की में उत्पन्न शक्ति –
(a) वर्षा ऋतु में अधिक होती है क्योंकि नम वायु अधिक द्रव्यमान से ब्लेड से टकराती है।
(b) मीनार (टॉवर) की ऊँचाई पर निर्भर होती है।
(c) पवन के वेग पर निर्भर करती है।
(d) मीनार के पास ऊँचे वृक्ष लगाकर बढ़ायी जा सकती है।
उत्तर:
(c) पवन के वेग पर निर्भर करती है।

प्रश्न 12.
सही कथन चुनिए
(a) सूर्य एक अक्षय ऊर्जा स्रोत है।
(b) जीवाश्म ईंधन के पृथ्वी में अनन्त भण्डार हैं।
(c) जल विद्युत् एवं पवन ऊर्जा संयन्त्र प्रदूषण रहित ऊर्जा स्रोत है।
(d) नाभिकीय ऊर्जा संयन्त्र में उत्पन्न कचरे का आसानी से निस्तारण किया जा सकता है।
उत्तर:
(a) सूर्य एक अक्षय ऊर्जा स्रोत है।

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प्रश्न 13.
जल विद्युत् संयन्त्र में अधिक विद्युत् ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है यदि जल अधिक ऊँचाई से गिरे क्योंकि –
(a) इसका तापमान बढ़ जाता है।
(b) अधिक स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में रूपान्तरित होती है।
(c) जल में उपस्थिति से विद्युत् ऊर्जा ऊँचाई पर बढ़ जाती है।
(d) जल के अधिक अणु आयनों में विभक्त हो जाते हैं।
उत्तर:
(b) अधिक स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में रूपान्तरित होती है।

प्रश्न 14.
पवन ऊर्जा के सन्दर्भ में निम्न में से असत्य कथन चुनिए –
(a) पवन ऊर्जा के दोहन की खुले क्षेत्र में न्यूनतम अपेक्षा की जाती है।
(b) बहुत अधिक ऊँचाई पर बहने वाली पवन में उपस्थित स्थितिज ऊर्जा पवन ऊर्जा का स्रोत है।
(c) पवन जब पवन चक्की के ब्लेड से टकराती है तो उसे घुमा देती है। इस प्रकार प्राप्त घूर्णन को पुनः प्रयुक्त किया जा सकता है।
(d) घूर्णन ऊर्जा के उपयोग का एक सम्भव तरीका यह है कि ब्लेडों के घूर्णन से एक विद्युत् जनित्र के टरबाइन को घुमाया जा सकता है।
उत्तर:
(b) बहुत अधिक ऊँचाई पर बहने वाली पवन में उपस्थित स्थितिज ऊर्जा पवन ऊर्जा का स्रोत है।

प्रश्न 15.
असत्य कथन चुनिए –
(a) हम अधिक पौधारोपण के लिए उत्साहित हैं जिससे अपने पर्यावरण को स्वच्छ रखा जा सके तथा ईंधन के लिए जैव-मास (लकड़ी आदि) उपलब्ध हो सके।
(b) जब फसल के अपशिष्ट एवं वनस्पति अपशिष्टों का ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में अपघटन होता है तो गोबर गैस का निर्माण होता है।
(c) बायोगैस (गोबर गैस) का मुख्य अवयव ईथेन गैस है। यह अत्यधिक धुआँ देती है तथा अत्यधिक मात्रा में ठोस अपशिष्ट बनाती है।
(d) जैव-मास एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।
उत्तर:
(c) बायोगैस (गोबर गैस) का मुख्य अवयव ईथेन गैस है। यह अत्यधिक धुआँ देती है तथा अत्यधिक मात्रा में ठोस अपशिष्ट बनाती है।

रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. ….. का प्रमुख अवयव मीथेन है।
  2. कोयला ऊर्जा का ……….. स्रोत है।
  3. सौर तापन युक्ति की सतह ……… रंग दी जाती है।
  4. बायोमास ऊर्जा का …… स्रोत है।
  5. बाँधों का उपयोग ……. ऊर्जा के उत्पादन में किया जाता है।

उत्तर:

  1. बायो गैस।
  2. अनवीकरणीय।
  3. काली।
  4. नवीकरणीय।
  5. जल विद्युत्।

जोड़ी बनाइए
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 2
उत्तर:

  1. → (c)
  2. → (d)
  3. → (e)
  4. → (a)
  5. → (b)

सत्य/असत्य कथन

  1. जो ऊर्जा स्रोत अनवीकरणीय होते हैं, वे असमाप्य होते हैं।
  2. सौर ऊर्जा का उपयोग विद्युत् उत्पादन में किया जाता है।
  3. जो ऊर्जा स्रोत नवीकरणीय होते हैं, वे समाप्य होते हैं।
  4. सौर कुकर में बाह्य सतह काली कर दी जाती है।
  5. सोलर कुकर का उपयोग रात्रि में भी कर सकते हैं।

उत्तर:

  1. असत्य।
  2. सत्य।
  3. असत्य।
  4. सत्य।
  5. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. ऊर्जा का विशाल प्राकृतिक स्रोत क्या है?
  2. बायोगैस संयन्त्र के लिए मुख्य निवेशी घटक क्या है?
  3. रसोईघर में प्रयुक्त गैस का नाम लिखिए।
  4. दो नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए।
  5. दो अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए।
    अथवा
  6. दो जीवाश्म ईंधन के नाम लिखिए। (2019)

उत्तर:

  1. सूर्य।
  2. जैव-मास।
  3. L.P.G.।
  4. जल, पवन।
  5. कोयला, पेट्रोलियम।

MP Board Class 10th Science Chapter 14 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पारम्परिक ऊर्जा स्रोत किन्हें कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
पारम्परिक ऊर्जा स्रोत:
वे ऊर्जा स्रोत जिनको हम सदियों से पारम्परिक रूप से प्रयोग करते आये हैं, पारम्परिक ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं।

उदाहरण: लकड़ी, गोबर, कोयला, पेट्रोलियम आदि।

प्रश्न 2.
जीवाश्म ईंधन किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जीवाश्म ईंधन (खनिज ईंधन):
“उच्च ताप एवं दाब पर जन्तु एवं वनस्पतियों के जीवाश्मों के अपघटन से भूगर्भ में निर्मित ईंधन जीवाश्म ईंधन या खनिज ईंधन कहलाता है।”

उदाहरण: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस।

प्रश्न 3.
जैव-मात्रा (जैवमास) किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जैव-मात्रा (जैवमास): “जन्तु एवं वनस्पतियों के अपशिष्ट जैव-मात्रा या जैवमास कहलाते है।”

प्रश्न 4.
बायोगैस किसे कहते हैं? इसका मुख्य अवयव क्या है?
उत्तर:
बायोगैस:
“बायो मात्रा के सूक्ष्मजीवियों द्वारा ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में अपघटन के फलस्वरूप प्राप्त होने वाली गैस बायोगैस कहलाती है।” इसका प्रमुख अवयव मीथेन है।

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प्रश्न 5.
सोलर कुकर में काँच की पट्टी का क्या महत्व है?
उत्तर:
सोलर कुकर में काँच की पट्टी का महत्व-काँच की पट्टी और ऊर्जा के लिए पारगम्य है लेकिन बॉक्स की सतह से उत्सर्जित होने वाली अवरक्त किरणों के लिए अपारगम्य है। इस प्रकार अवशोषित ऊष्मा बॉक्स के अन्दर ही रहती है।

प्रश्न 6.
ज्वार-भाटा किसे कहते हैं? यह क्यों आता है?
उत्तर:
ज्वार-भाटा:
“सागर जल स्तर के चढ़ने एवं गिरने की घटना ज्वार-भाटा कहलाती है।” यह घूर्णन करती पृथ्वी पर मुख्य रूप से चन्द्रमा के गुरुत्वीय आकर्षण के कारण आता है।

प्रश्न 7.
महासागरीय तापीय ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर:
महासागरीय तापीय ऊर्जा:
“महासागर के जलस्तरों के बीच तापान्तर के कारण प्राप्त ऊर्जा महासागरीय तापीय ऊर्जा कहलाती है।”

प्रश्न 8.
पवन चक्की क्या होती है? इसका प्रमुख उपयोग क्या है?
उत्तर:
पवन चक्की:
“पवन ऊर्जा का सदुपयोग करने वाला संयन्त्र पवन चक्की कहलाता है।” पवन चक्की का प्रमुख उपयोग विद्युत् उत्पन्न करना है।

प्रश्न 9.
नाभिकीय ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर:
नाभिकीय ऊर्जा:
“नाभिकीय अभिक्रियाओं जैसे नाभिकीय विखण्डन एवं नाभिकीय संलयन के फलस्वरूप प्राप्त ऊर्जा नाभिकीय ऊर्जा कहलाती है।”

प्रश्न 10.
प्राकृतिक गैस क्या है तथा CNG किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्राकृतिक गैस एवं CNG:
“तेलकूपों से खनिज तेल के साथ तथा अन्य कूपों से प्राप्त ज्वलनशील गैसीय मिश्रण प्राकृतिक गैस कहलाती है।” उच्च दाब पर जब प्राकृतिक गैस को सम्पीडित किया जाता है तो इसे CNG कहते हैं।

प्रश्न 11.
नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत क्या होते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
“ऊर्जा के वे स्रोत जो प्रकृति में निरन्तर उत्पन्न होते रहते हैं तथा समाप्त नहीं होते, नवीकरण णीय ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं।”
उदाहरण: सूर्य, पवन, जल आदि।

प्रश्न 12.
अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत क्या होते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत:
“ऊर्जा के वे स्रोत जो प्रकृति में प्राचीन काल से तथा बहुत लम्बी अवधि से संचित हैं और जो निरन्तर उपयोग से समाप्त हो रहे हैं तथा पुनः आसानी से प्राप्त नहीं होते, अनवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोत कहलाते हैं।”

उदाहरण:
जीवाश्म ईंधन; जैसे-कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस आदि।

प्रश्न 13.
हम वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग की ओर क्यों बढ़ रहे हैं? दो मुख्य कारण दीजिए।
उत्तर:
हम वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के उपयोग की तरफ इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि –

  1. अपने जीवन स्तर की गुणवत्ता सुधारने के लिए एवं बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण हमारी ऊर्जा की आवश्यकताएँ बढ़ने से माँग बढ़ रही है।
  2. खनिज जीवाश्म ईंधन का भण्डारण प्रकृति में सीमित है।

प्रश्न 14.
एक सोलर कुकर में समतल दर्पण एवं काँच की पट्टिका की क्या भूमिका है?
उत्तर:
समतल दर्पण एक परावर्तक का काम करता है तथा सौर ऊष्मा को कुकर पर डालता है। काँच की पट्टिका का काम पौधाघर प्रभाव पैदा करके सौर ऊर्जा को तो कुकर के अन्दर जाने देता है लेकिन कुकर से उत्सर्जित विकिरणों को बाहर नहीं आने देता।

प्रश्न 15.
“जीवाश्म ईंधन को जलाने से वैश्विक ऊष्मण होता है।” इस कथन की पुष्टि के लिए कारण दीजिए।
उत्तर:
जीवाश्म ईंधन को जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड आदि पौधाघर प्रभाव (Green House Effect):
डालने वाली गैसें उत्पन्न होती हैं जो सौर ऊष्मा को तो वायुमण्डल में प्रवेश करने देती हैं लेकिन पृथ्वी की विकिरण ऊष्मा को अन्तरिक्ष में जाने से रोकती हैं। इस कारण पृथ्वी का ताप बढ़ता जाता है जिससे वैश्विक ऊष्मण होता है।

MP Board Class 10th Science Chapter 14 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भूतापीय ऊर्जा क्या होती है? समझाइए।
उत्तर:
भूतापीय ऊर्जा:
पृथ्वी के गर्त में निरन्तर परिवर्तन होते रहते हैं। पृथ्वी के अन्दर कुछ चट्टानों का ताप काफी अधिक होता है जो चट्टानों में स्थित रेडियोधर्मी पदार्थों के विघटन से प्राप्त होता है। पृथ्वी की सतह के नीचे स्थित तप्त चट्टानों वाले क्षेत्र, तप्त क्षेत्र कहलाते हैं। जब पृथ्वी के अन्दर स्थित जल इन चट्टानों के संपर्क में आता है तो वाष्प में परिणित हो जाता है तथा चट्टानों के बीच किसी भाग में एकत्रित हो जाता है। वाष्प के अधिक मात्रा में एकत्रित होने से दाब बढ़ जाता है। इन चट्टानों में छेद करके तथा पाइप डालकर वाष्प को निकालकर उससे टरबाइन चलाकर विद्युत् उत्पन्न की जाती है। इस ऊर्जा को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 2.
ज्वारीय ऊर्जा एवं तरंग ऊर्जा को संक्षेप में समझाइए।
अथवा
महासागरीय ऊर्जा के दोहन के दो भिन्न तरीके लिखिए।
उत्तर:
ज्वारीय ऊर्जा:
घूर्णन करती पृथ्वी पर चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण सागरों के जल का स्तर चढ़ता-गिरता रहता है जिसको ज्वार-भाटा आना कहते हैं। सागर में ज्वार-भाटे की स्थिति निरन्तर चलती रहती है। ज्वार-भाटे में ऊर्जा होती है जिसका दोहन बाँध बनाकर तथा बाँध के द्वार पर टरबाइन स्थापित करके विद्युत् ऊर्जा में रूपान्तरित करके किया जा सकता है।

तरंग ऊर्जा:
समुद्र तट के निकट विशाल तरंगों की गतिज ऊर्जा का उपयोग विद्युत् उत्पन्न करने में किया जा सकता है। जहाँ महासागर के पृष्ठों पर प्रबल तरंगें उत्पन्न होती हैं वहाँ विभिन्न युक्तियों के प्रयोग द्वारा टरबाइन चलाकर तरंगों की गतिज ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में बदला जा सकता है।

प्रश्न 3.
पवन ऊर्जा का उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है?
उत्तर:
पवन ऊर्जा के उपयोग-पवन ऊर्जा का उपयोग निम्न प्रकार किया जा सकता है –

  1. पवन क्षेत्रों में पवन चक्कियाँ लगाकर उनके द्वारा टरबाइन चलाकर विद्युत् ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है।
  2. पाल नौकाओं में दिशा परिवर्तन के लिए पवन ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है।
  3. पवन चक्की द्वारा जल पम्प चलाकर पानी निकाला जा सकता है।
  4. ग्लाइडर की उड़ान में पवन ऊर्जा का उपयोग होता है।
  5. पवन चक्की से आटा पीसने का काम किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
बायोगैस एक उपयुक्त ईंधन क्यों माना जाता है?
उत्तर:
बायोगैस की विशेषताएँ:

  1. बायोगैस के जलाने से प्रदूषण नहीं होता।
  2. बायोगैस के जलने से कोई ठोस अवशिष्ट नहीं बचता।
  3. इसका कैलोरी मान पर्याप्त होता है।
  4. यह नीली लौ के साथ जलती है। धुआँ नहीं देती तथा बर्तनों को काला भी नहीं करती।

प्रश्न 5.
बायोगैस संयन्त्र किसानों के लिए वरदान है, क्यों?
उत्तर:
बायोगैस संयन्त्र किसानों के लिए वरदान है, क्योंकि –

  1. आवश्यक कच्चा माल बायोमास, गोबर एवं कृषि अपशिष्ट किसानों के पास उपलब्ध होता है।
  2. अपशिष्ट पदार्थों का निस्तारण होता है।
  3. बायोगैस मिलती है जो एक आदर्श ईंधन है जिससे खाना पकाया जा सकता है, रोशनी की जा सकती है तथा विद्युत् उत्पन्न की जा सकती है। .
  4. बची स्लरी एक उत्तम खाद का कार्य करती है।

प्रश्न 6.
नाभिकीय ऊर्जा की क्या हानियाँ हैं?
उत्तर:
नाभिकीय ऊर्जा से हानियाँ-इसकी निम्नलिखित हानियाँ हैं –

  1. रेडियोधर्मी विकिरण मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसके द्वारा कैंसर जैसी घातक बीमारियाँ हो सकती हैं।
  2. नाभिकीय ऊर्जा के उत्पादन के प्रत्येक चरण से प्राप्त “रेडियोधर्मी नाभिकीय कचरे” से वनस्पति एवं प्राणी जगत् को गम्भीर खतरा बना रहता ।
  3. नाभिकीय विकिरण से प्रभावित मनुष्य में आनुवंशिक विकृति उत्पन्न हो सकती है, जिसका दुष्प्रभाव आने वाली अनेक पीढ़ियों तक रहता है।
  4. नाभिकीय ऊर्जा पर आधारित परमाणु बम एवं हाइड्रोजन बम अत्यन्त विनाशकारी होते हैं।

प्रश्न 7.
सोलर कुकर के उपयोग के लाभ लिखिए। (2019)
उत्तर:
सौर कुकर के उपयोग के लाभ:

  1. ईंधन की बचत होती है।
  2. प्रदूषण नहीं होता है।
  3. रख-रखाव पर कोई खर्चा नहीं होता अर्थात् आर्थिक बचत होती है।
  4. खाना स्वादिष्ट एवं पौष्टिक बनता है।
  5. खाने के जलने की सम्भावना नहीं रहती।
  6. एक ही समय में चार-पाँच खाद्य पदार्थ पकाए जा सकते हैं।

सोलर कुकर के उपयोग की हानियाँ (सीमाएँ):

  1. सौर प्रकाश (धूप) की अनुपस्थिति में इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
  2. वस्तुओं को तलने, रोटी-पूड़ी आदि सेकना सम्भव नहीं।
  3. खाना बनने में अधिक समय लगता है। इसलिए तुरन्त खाना नहीं बना सकते।
  4. चाय आदि बनाना मुश्किल ही नहीं असम्भव ही होता है।

हाँ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहाँ सौर कुकरों की सीमित उपयोगिता है जहाँ धूप (सूर्य प्रकाश) कम समय के लिए तथा कम तीव्रता की होती है।

MP Board Class 10th Science Chapter 14 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आदर्श ईंधन के प्रमुख लक्षण लिखिए।
उत्तर:
आदर्श ईंधन के प्रमुख लक्षण (Main Characteristics of Ideal Fuel):
आदर्श ईंधन के निम्नलिखित प्रमुख लक्षण हैं –

  1. ऊष्मीय मान उच्च होना।
  2. दहन दर का सरलता से नियन्त्रित होना।
  3. दहन ताप का उचित होना।
  4. पूर्णरूप से दहन होना।
  5. विषैले पदार्थों का अनुपस्थित होना।
  6. प्रदूषण मुक्त होना।
  7. अपशिष्ट पदार्थों का न्यूनतम होना।
  8. पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होना।
  9. न्यूनतम मूल्य होना।
  10. भण्डारण आसान एवं सुरक्षित होना।
  11. परिवहन आसान एवं सुरक्षित होना।

प्रश्न 2.
अच्छे ईंधन का चयन (चुनाव) किस प्रकार किया जाता है? समझाइए।
उत्तर:
अच्छे ईंधन का चयन-अच्छे ईंधन के चयन के लिए हमको उस ईंधन में निम्न लक्षण देखने चाहिए कि –

  1. वह आसानी से जलता हो।
  2. वह लगातार जलता हो।
  3. वह पर्याप्त ऊर्जा मुक्त करता हो।
  4. वह पर्याप्त मात्रा में तथा आसानी से उपलब्ध हो।
  5. उसका परिवहन आसान एवं सुरक्षित हो।
  6. उसका भण्डारण आसान एवं सुरक्षित हो।
  7. वह जलने पर वायु को प्रदूषित नहीं करता हो।
  8. वह धुआँ नहीं देता हो तथा बर्तनों को काला भी नहीं करता हो।
  9. उसके जलने पर ठोस अवशिष्ट पदार्थ (राख) भी नहीं बचती हो।
  10. उसकी कीमत भी अधिक न हो।
  11. अगर किसी ईंधन में उपर्युक्त लक्षण हों तो वह अच्छा ईंधन होगा।

प्रश्न 3.
सौर ऊर्जा पर एक निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
सौर ऊर्जा:
सूर्य, ऊर्जा का सबसे अधिक प्रत्यक्ष एवं विशाल प्राकृतिक स्रोत है। यह एक नवीकरणीय स्रोत है। सूर्य लगभग 4.6 × 109 वर्ष से लगातार अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा विकरित कर रहा है और आगे भी करता रहेगा। इसकी इस ऊर्जा की उत्पत्ति का कारण इसके केन्द्र में विद्यमान हाइड्रोजन का उच्च ताप एवं दाब के कारण नाभिकीय संलयन की क्रिया है जिसके फलस्वरूप हीलियम बनती है तथा द्रव्यमान क्षति के कारण अपार ऊर्जा उत्पन्न होती है। इसके विकिरण में रेडियो तरंगों से लेकर गामा तरंगों तक सभी विद्युत् चुम्बकीय तरंगें उपस्थित रहती हैं। एक्स एवं गामा किरणें आयनमंडल का निर्माण करके पृथ्वी को जीवधारी ग्रह बनाने में मदद करती हैं।

सौर ऊर्जा के कारण ही हरे पेड़-पौधे प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन बनाते हैं। इसके कारण ही पवन प्रवाहित होती है, चक्रवात एवं जलचक्र सम्पन्न होते हैं। भारतवर्ष प्रतिवर्ष सूर्य से 5 × 108 करोड़ किलो वाट घण्टा सौर ऊर्जा प्राप्त करता है।
हमारे वायुमण्डल की ऊपरी सतह का प्रत्येक वर्ग मीटर लगभग 1.4 किलो जूल ऊर्जा प्रति सेकण्ड प्राप्त करता है जिसका लगभग 47% भाग पृथ्वी की सतह पर पहुँचता है तथा शेष भाग अन्तरिक्ष में परावर्तित हो जाता है।

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प्रश्न 4.
आजकल नाभिकीय ऊर्जा को उपयोगी बनाने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनायी जाती है? संक्षेप में वर्णन कीजिए।
अथवा
नाभिकीय रिएक्टर के मुख्य भागों के नाम लिखकर उन्हें चित्र द्वारा संक्षिप्त में समझाइए।
अथवा
नाभिकीय रिएक्टर का वर्णन निम्न शीर्षकों में कीजिए –
(i) नामांकित चित्र।
(ii) कार्यविधि।
उत्तर:
नाभिकीय ऊर्जा को उपयोगी बनाने के लिए नाभिकीय रियेक्टर द्वारा विद्युत् उत्पादन करते हैं।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 3
नाभिकीय रिएक्टर का वर्णन (Description of Nuclear Reactor):
नाभिकीय रिएक्टर कंक्रीट की मोटी दीवारों से बनाया जाता है। इसमें नियन्त्रित नाभिकीय विखण्डन की क्रिया द्वारा अत्यधिक मात्रा में ऊष्मीय ऊर्जा उत्पन्न की जाती है, जिससे जल को वाष्पित करके, उस वाष्प से टर्बाइन चलाकर विद्युत् ऊर्जा प्राप्त की जाती है। इसका उपयोग मानव कल्याण के लिये रचनात्मक कार्यों में किया जाता है।
एक सामान्य नाभिकीय रिएक्टर में निम्न अवयव होते हैं –

  1. ईंधन (Fuel): परिष्कृत यूरेनियम (U235) एवं प्लूटोनियम (Pu239) का उपयोग ईंधन के लिये होता है।
  2. नियन्त्रक (Controller): नाभिकीय क्रिया के नियन्त्रण के लिये कैडमियम तथा बोरॉन की छड़ें प्रयुक्त होती हैं। ये न्यूट्रॉन के अच्छे अवशोषक हैं।
  3. मन्दक (Moderator): ग्रेफाइट, कैडमियम का उपयोग न्यूट्रॉन की गति को कम करने के लिये मंदक के रूप में किया जाता है।
  4. शीतलक (Coolant): नाभिकीय विखण्डन से प्राप्त असीम ऊष्मीय ऊर्जा के अवशोषण के लिये भारी पानी तथा द्रवित सोडियम का उपयोग शीतलक के रूप में होता है।

कार्यविधि (Working) यूरेनियम:
235 का न्यूट्रॉनों के द्वारा विखण्डन कराया जाता है। मंदक द्वारा न्यूट्रॉन की गति कम कर दी जाती है। नियन्त्रक द्वारा अतिरिक्त न्यूट्रॉनों को अवशोषित कर लिया जाता है। उत्पन्न असीम ऊर्जा को भारी पानी या सोडियम द्वारा अवशोषण कर लिया जाता है, जिसका उपयोग विद्युत् उत्पादन में कर लिया जाता है।

प्रश्न 5.
पवन चक्की का वर्णन निम्न बिन्दुओं के वायु का टकराना आधार पर कीजिए –
(i) नामांकित चित्र।
(ii) कार्यकारी सिद्धान्त।
उत्तर:
कार्यकारी सिद्धान्त:
जब पवन चक्की के ब्लेडों से वायु टकराती है तो उन ब्लेडों पर एक बल लगता है। जिससे उसके ब्लेड घूमने लगते हैं। ब्लेडों के घूमने से पवन चक्की भी घूमने लगती है। पवन चक्की का घूर्णन उसके ब्लेडों की विशिष्ट बनावट के कारण सम्भव होता है जो विद्युत् पंखों के ब्लेडों के समान होती है। जिस प्रकार पंखे के ब्लेडों के घूमने से वायु गतिशील हो जाती है। इसके ठीक विपरीत उसी प्रकार गतिशील वायु से ब्लेड घूमते हैं।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 4

प्रश्न 6.
जल-विद्युत् उत्पादक यन्त्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
अथवा
जल-विद्युत् का उत्पादन किस प्रकार किया जाता है? चित्र सहित समझाइए।
उत्तर:
जल-विद्युत् उत्पादक यन्त्र (Hydroelectric Generator):
जल-विद्युत् उत्पादक यन्त्र के प्रमुख दो अंग होते हैं –
(1) जेनरेटर।
(2) टर्बाइन।
(1) जेनरेटर (Generator):
जेनरेटर के दो भाग होते हैं –
(i) स्टेटर (Stator): यह भाग स्थिर रहता है। यह एक खोखले बेलन के अन्दर कई कुण्डलियों से बनाया जाता है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 5
(ii) रोटर (Rotor): यह भाग एक धुरी पर घूर्णन करता है। घूर्णन करने वाली धुरी पर शक्तिशाली चुम्बक के अनेक दुकड़े संगलित करके इसे बनाया जाता है।

(2) टर्बाइन (Turbine): टर्बाइन की धुरी रोटर की धुरी से दृढ़ता से जुड़ी रहती है।

कार्यविधि (Working):
जब टर्बाइन को प्राकृतिक या कृत्रिम जल प्रपात के द्वारा घुमाया जाता है तो रोटर की धुरी पर जुड़े चुम्बक, स्टेटर के मध्य घूर्णन करने लगते हैं जिससे कुण्डलियों में विद्युत् धारा उत्पन्न होती है। इस प्रकार उत्पन्न विद्युत् जल-विद्युत् कहलाती है।

प्रश्न 7.
सौर सेल पेनल का सचित्र वर्णन कीजिए। सौर सेल पेनल की क्रियाविधि एवं उपयोगिता लिखिए।
उत्तर:
सौर सेल पेनल:
सौर सेलों का विशिष्ट क्रम में संकलन सौर सेल पेनल कहलाता है जहाँ सौर सेल सौर ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करनी की एक युक्ति है।

सौर सेल पेनल की क्रियाविधि:
जब किसी सौर सेल या सौर सेल पेनल में प्रयुक्त अर्द्धचालकों पर सौर प्रकाश डाला जाता है, तो उससे इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होकर प्रवाहित होने लगते हैं। इसके फलस्वरूप परिपथ में धारा प्रवाहित होने लगती है।
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सौर सेल पेनल की उपयोगिता:

  1. तट से दूर निर्मित खनिज तेल के कुएँ खोदने के यन्त्रों तक विद्युत् आपूर्ति करना।
  2. दूरदर्शन की अभिग्रहियों को प्रचालित करने के लिए।
  3. दुर्गम क्षेत्रों में विद्युत् आपूर्ति करने में।
  4. कृत्रिम उपग्रहों एवं अन्तरिक्ष अन्वेषकों के लिए प्रमुख ऊर्जा स्रोत के रूप में।
  5. रेडियो एवं बेतार संचार यन्त्रों, यातायात संकेतों आदि के संचालन में।
  6. सड़क प्रकाश योजना में।

प्रश्न 8.
सौर ऊष्मक (कुकर) का निम्न शीर्षकों में वर्णन कीजिए –

  1. सिद्धान्त।
  2. उपकरण का नामांकित चित्र।
  3. कार्यविधि।
  4. उपयोग।

अथवा
सोलर कुकर का चित्र बनाकर कार्यविधि समझाइए।
अथवा
सोलर कुकर का वर्णन कीजिए। स्वच्छ नामांकित चित्र बनाकर इसके प्रमुख उपयोग लिखिए।
उत्तर:
सौर ऊष्मक (कुकर) का सिद्धान्त:
काले और खुरदरे पदार्थ ऊष्मा के अच्छे अवशोषक होते हैं। अतः काली तापन युक्ति को सूर्य के प्रकाश में रख देते हैं तो वह सौर ऊष्मा को अवशोषित कर लेती है। यदि इसे काँच की पट्टिका द्वारा ढक दिया जाये तो उत्सर्जन द्वारा होने वाले ऊष्मा ह्रास को रोका जा सकता है जिससे अन्दर के ताप में वृद्धि होती रहती है।

कार्यविधि:
सौर ऊष्मक को धूप में रखा जाता है। ढक्कन को इस प्रकार समंजित सूर्य)४ किया जाता है कि सूर्य का प्रकाश समतल दर्पण से परावर्तित होकर, सौर ऊष्मक के अन्दर प्रवेश करे। बॉक्स के अन्दर का काला रंग तथा बर्तनों के बाहर का काला रंग ऊष्मा को अवशोषित करता है। बॉक्स के ऊपर रखी हुई काँच की प्लेट ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न करती है जिसके कारण बॉक्स के अन्दर का ताप बढ़ता जाता है, जिससे भोजन पक जाता है।

उपयोग:
सौर ऊष्मक का उपयोग प्रायः खाना बनाने में किया जाता है। आजकल मूंगफली भूनने, अनाज के दाने भूनने में भी सौर ऊष्मक का उपयोग किया जाता है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 7

प्रश्न 9.
स्थायी गुम्बद प्रकार के बायो गैस (गोबर गैस) संयन्त्र का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्थिर गुम्बदनुमा टंकी वाला बायो गैस संयन्त्र:
इस संयन्त्र में गैस एकत्रित करने के लिए गुम्बदनुमा स्थिर टंकी रहती है। इसलिए इसे स्थिर गुम्बदनुमा टंकी वाला बायोगैस संयन्त्र कहते हैं। इसके प्रमुखतः निम्नलिखित चार भाग होते हैं –
(1) संपाचक टैंक (Digestion Tank):
यह टैंक कंक्रीट द्वारा जमीन के अन्दर या बाहर बनाया जाता है। इसी के अन्दर जन्तु अवशेषों के आसानी से अनॉक्सी सूक्ष्म-जीवों द्वारा पानी की उपस्थिति में अपघटन से मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड आदि गैसों का मिश्रण प्राप्त होता है जिसे बायोगैस कहते हैं।
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(2) मिलाने का टैंक (Mixing Tank):
यह टैंक सीमेण्ट से जमीन के ऊपर बनाया जाता है। इसका सम्बन्ध संपाचक टैंक से होता है। इस टैंक में गोबर में जल मिलाकर घोल बनाया जाता है जिसे एक खिड़की की सहायता से संपाचक टैंक में भेज दिया जाता है।

(3) गुम्बदनुमा टैंक (Dome Type Tank):
यह टैंक बायोगैस को एकत्रित करने के काम आता है। यह गुम्बद के आकार का होता है तथा संपाचक टैंक के ऊपर स्थित होता है। इसके ऊपर गैस वाल्व सहित गैस निर्गम पाइप लगा होता है जिसके द्वारा गैस की आपूर्ति की जाती है।

(4) निर्गम टैंक (Exhaust Tank):
यह टैंक संपाचक टैंक से लगा हुआ होता है। इसका सम्बन्ध संपाचक टैंक से एक खिड़की के द्वारा होता है जिसमें से स्लरी निकलकर इस टैंक में एकत्रित होती रहती है। दाब बढ़ने पर यह स्लरी बाहर आ जाती है। यह उत्तम किस्म की खाद का काम करती है।

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प्रश्न 10.
तैरती हुई टंकी वाले बायो गैस संयन्त्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
तैरती हुई टंकी वाला बायो गैस संयन्त्र:
इस संयन्त्र में गैस की टंकी पानी में तैरती है, इसलिए इसे तैरती हुई टंकी वाला बायो गैस संयन्त्र कहते हैं। इसके मुख्यतः निम्नलिखित भाग होते हैं –
(1) मिश्रण टैंक (Mixing Tank): इसमें गोबर और पानी का घोल तैयार किया जाता है।

(2) संपाचक टैंक (Digestion Tank):
गोबर पानी का घोल मिश्रण टैंक से संपाचक टैंक में आ जाता है तब यहाँ सूक्ष्मजीवी द्वारा इसका अपघटन होने से बायो गैस का निर्माण होता है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 9
(3) गैस की तैरती टंकी (Floating Tank of Gas):
यह टंकी पानी में तैरती रहती है। इसमें गैस एकत्रित होती रहती है। इस टंकी में गैस-वाल्व युक्त गैस निर्गम पाइप लगा होता है जिससे गैस की आपूर्ति की जाती है।

(4) स्लरी निर्गम टैंक (Slurry Exhaust Tank): अवशेष स्लरी इस टैंक में एकत्रित हो जाती है जो खाद के रूप में प्रयुक्त होती है।

प्रश्न 11.
“ऊर्जा संकट के दौर में नाभिकीय ऊर्जा का विकल्प प्रासंगिक है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
ऊर्जा संकट के दौर में नाभिकीय ऊर्जा का विकल्प-जनसंख्या बेतहाशा बढ़ रही है। भौतिक संसाधनों के उपयोग की प्रवृत्ति बहुत तेजी से बढ़ रही है। हमारे परम्परागत ऊर्जा स्रोत सीमित एवं निश्चित हैं लेकिन उनकी खपत की दर बहुत तीव्र है। यही हाल रहा तो हमारे सभी परम्परागत ऊर्जा स्रोत शीघ्र समाप्त हो जायेंगे और मानव जीवन दुश्वार हो जायेगा। न खाना बन पायेगा और न पानी ही गर्म होगा। चारों ओर अँधेरा ही अँधेरा नजर आयेगा। विकट ऊर्जा संकट पैदा हो जायेगा।

ऊर्जा संकट के इस दौर में नाभिकीय ऊर्जा का विकल्प ही सामने रहता है। इससे अपार ऊर्जा प्राप्त हो सकती है। नाभिकीय ऊर्जा से इतनी विशाल मात्रा में विद्युत् ऊर्जा तैयार की जा सकती है जो हमारी सम्पूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके। इससे ग्लोबल वार्मिंग वाली गैसें भी नहीं बनेंगी व पर्यावरण प्रदूषण मुक्त रहेगा।

लेकिन नाभिकीय विद्युत् गृहों में घटित, चेरनोबिल (सोवियत संघ) एवं थ्रीमाइल द्वीप (अमेरिका) जैसी दुर्घटनाएँ मन में आशंका उत्पन्न करती हैं। अतः इनके संयमित एवं सावधानीपूर्वक उपयोग करने की आवश्यकता है।

प्रश्न 12.
ऊर्जा संकट के इस दौर में दैनिक जीवन में ऊर्जा के सदुपयोग करने के लिए किन-किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर:
ऊर्जा समाज की मूलभूत आवश्यकता है। जिस तीव्र गति से जनसंख्या बढ़ रही है तथा जिस तीव्र गति से ऊर्जा स्रोतों के उपयोग की प्रवृत्ति बढ़ रही है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि पारम्पारिक ऊर्जा स्रोत शीघ्र ही समाप्त हो जायेंगे क्योंकि वर्तमान ऊर्जा आपूर्ति मुख्य रूप से इन स्रोतों पर ही निर्भर है। इससे एक विशाल ऊर्जा संकट पैदा हो जायेगा। अतः ऊर्जा संकट के इस दौर में हमें दैनिक जीवन में ऊर्जा के सदुपयोग करने के लिए निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए –

  1. ऊर्जा के परम्परागत स्रोतों का उपयोग मितव्ययिता के साथ करना चाहिए।
  2. घरों में विद्युत् बल्बों के स्थान पर एल. ई. डी या सी. एफ. एल. का उपयोग करना चाहिए तथा ए. सी., माइक्रोवेव आदि का कम से कम उपयोग करना चाहिए।
  3. विवाह समारोह आदि में जहाँ तक हो सके विद्युत् ऊर्जा का कम से कम उपयोग करना चाहिए। अनावश्यक रूप से ऊर्जा का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।
  4. जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल, डीजल, कैरोसीन) का विवेकपूर्ण एवं मितव्ययिता से प्रयोग करना चाहिए।
  5. ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
  6. सौर ऊर्जा पर आधारित उपकरणों (सोलर कुकर, सोलर जल ऊष्मक, सौर सेल पैनल) का उपयोग बहुतायत में करना चाहिए।
  7. जैव ईंधन (बायोगैस) पर आधारित तकनीक और उपकरणों का उपयोग करना चाहिए।
  8. पवन ऊर्जा का अधिकाधिक उपयोग करना चाहिए।

प्रश्न 13.
ताप विद्युत् उत्पादन की प्रक्रिया को निदर्शित करने के लिए एक मॉडल का नामांकित चित्र बनाइए तथा उसकी क्रियाविधि समझाइए।
उत्तर:
संलग्न चित्रानुसार ताप विद्युत् उत्पादन को निदर्शित करने हेतु एक मॉडल बनाइए। जब कुकर को गर्म करते हैं तो उसका जल वाष्पीकृत होकर भाप नली से होता हुआ टरबाइन की पंखुड़ियों पर दबाव डालता है जिसे पंखुड़ियाँ घूमती हैं इससे रोटर घूमता है जिससे डायनमो (जनित्र) का थैफ्ट घूमता है जिससे विद्युत् उत्पादन होता है जिसका निदर्शन बल्ब के जलने से होता है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 10

प्रश्न 14.
सौर ऊर्जा का उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है और ऊर्जा के उपयोग की दो सीमाएँ लिखिए। किस प्रकार इन बाधाओं को दूर किया जा सकता है?
उत्तर:
सौर ऊर्जा का उपयोग सौर कुकर, सौर जल ऊष्मक के द्वारा किया जा सकता है। ये सौर तापन युक्ति द्वारा सम्भव होता है।

सौर तापन युक्तियाँ (Solar Heating Devices):
वे युक्तियाँ जिनके द्वारा सौर ऊर्जा का उपयोग ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में पानी गरम करने या खाना पकाने के कार्य में लाया जाता है, सौर तापन युक्तियाँ कहलाती हैं।”
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 11

सौर तापन युक्ति का सिद्धान्त (Principle of Solar Heating Device):
कृष्ण (काली) सतह ऊष्मीय ऊर्जा की अच्छी अवशोषक होती है। अत: सौर प्रकाश में रखी हुई कोई कृष्ण पट्टिका (काली सतह) एक सरल सौर तापन युक्ति मानी जा सकती है परन्तु वायुमण्डल का ताप गिरने पर यही कृष्ण पट्टिका (काली सतह) ऊष्मा को विकरित करना प्रारम्भ कर देती है, जब तक कि इसका ताप वायुमण्डल के ताप के बराबर न हो जाये। यदि इस युक्ति को काँच की प्लेट से ढक दिया जाये तो इस प्रकार विकिरण से होने वाले ऊर्जा हास को रोका जा सकता है।

सौर ऊर्जा के उपयोग की सीमाएँ:

  1. इसका उपयोग रात्रि में नहीं किया जा सकता।
  2. इसका उपयोग केवल सूर्य के प्रकाश में दिन में किया जा सकता है।

सौर ऊर्जा के उपयोग की बाधाओं को दूर करना:
इसके लिए हमको सौर सेल पेनलों का उपयोग करके सौर ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करके बैटरी में संचित कर लेना चाहिए।

प्रश्न 15.
अपारम्परिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग की क्या आवश्यकता है? महासागरीय ऊर्जा का किन भिन्न-भिन्न तरीकों से दोहन किया जा सकता है?
उत्तर:
अपारम्परिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग की आवश्यकता:
परम्परागत ऊर्जा स्रोत हमारी जीवन शैली के बढ़ते स्तर के कारण उत्पन्न ईंधन की अत्यधिक आवश्यकता की आपूर्ति के लिए पर्याप्त नहीं है इसलिए हम ऊर्जा के वैकल्पिक (गैर-परम्परागत) ऊर्जा स्रोत की ओर बढ़ रहे हैं।

महासागरीय ऊर्जा के उपयोग (दोहन) के विभिन्न विधियाँ:
पृथ्वी के गर्त में निरन्तर परिवर्तन होते रहते हैं। पृथ्वी के अन्दर कुछ चट्टानों का ताप काफी अधिक होता है जो चट्टानों में स्थित रेडियोधर्मी पदार्थों के विघटन से प्राप्त होता है। पृथ्वी की सतह के नीचे स्थित तप्त चट्टानों वाले क्षेत्र, तप्त क्षेत्र कहलाते हैं। जब पृथ्वी के अन्दर स्थित जल इन चट्टानों के संपर्क में आता है तो वाष्प में परिणित हो जाता है तथा चट्टानों के बीच किसी भाग में एकत्रित हो जाता है। वाष्प के अधिक मात्रा में एकत्रित होने से दाब बढ़ जाता है। इन चट्टानों में छेद करके तथा पाइप डालकर वाष्प को निकालकर उससे टरबाइन चलाकर विद्युत् उत्पन्न की जाती है। इस ऊर्जा को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं।

ज्वारीय ऊर्जा:
घूर्णन करती पृथ्वी पर चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण सागरों के जल का स्तर चढ़ता-गिरता रहता है जिसको ज्वार-भाटा आना कहते हैं। सागर में ज्वार-भाटे की स्थिति निरन्तर चलती रहती है। ज्वार-भाटे में ऊर्जा होती है जिसका दोहन बाँध बनाकर तथा बाँध के द्वार पर टरबाइन स्थापित करके विद्युत् ऊर्जा में रूपान्तरित करके किया जा सकता है।

प्रश्न 16.
परम्परागत एवं अपरम्परागत ऊर्जा स्रोतों की एक लिस्ट (तालिका) बनाइए। किसी एक अपरम्परागत ऊर्जा स्रोत से ऊर्जा के उपयोग का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
परम्परागत ऊर्जा स्रोत: जीवाश्म या खनिज ईंधन, जल, पवन एवं जीव-मास आदि।

अपरम्परागत ऊर्जा स्त्रोत: नाभिकीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, महासागरीय ऊर्जा स्रोत एवं भूतापीय ऊर्जा स्रोत।

सौर ऊर्जा से ऊर्जा का दोहन (सौर सेल पेनल द्वारा):
सौर सेलों का विशिष्ट क्रम में संकलन सौर सेल पेनल कहलाता है जहाँ सौर सेल सौर ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करनी की एक युक्ति है।

सौर सेल पेनल की क्रियाविधि:
जब किसी सौर सेल या सौर सेल पेनल में प्रयुक्त अर्द्धचालकों पर सौर प्रकाश डाला जाता है, तो उससे इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होकर प्रवाहित होने लगते हैं। इसके फलस्वरूप परिपथ में धारा प्रवाहित होने लगती है।

सौर सेल पेनल की उपयोगिता:

  1. तट से दूर निर्मित खनिज तेल के कुएँ खोदने के यन्त्रों तक विद्युत् आपूर्ति करना।
  2. दूरदर्शन की अभिग्रहियों को प्रचालित करने के लिए।
  3. दुर्गम क्षेत्रों में विद्युत् आपूर्ति करने में।
  4. कृत्रिम उपग्रहों एवं अन्तरिक्ष अन्वेषकों के लिए प्रमुख ऊर्जा स्रोत के रूप में।
  5. रेडियो एवं बेतार संचार यन्त्रों, यातायात संकेतों आदि के संचालन में।
  6. सड़क प्रकाश योजना में।

प्रश्न 17.
विभिन्न स्रोतों से प्राप्त ऊर्जा अन्ततः प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सूर्य से ही प्राप्त होती है? क्या आप इससे सहमत हैं? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
हाँ, हम सहमत हैं कि विभिन्न ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त ऊर्जा वास्तव में सूर्य से ही उत्पादित है।
सौर ऊर्जा:
सूर्य, ऊर्जा का सबसे अधिक प्रत्यक्ष एवं विशाल प्राकृतिक स्रोत है। यह एक नवीकरणीय स्रोत है। सूर्य लगभग 4.6 × 109 वर्ष से लगातार अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा विकरित कर रहा है और आगे भी करता रहेगा। इसकी इस ऊर्जा की उत्पत्ति का कारण इसके केन्द्र में विद्यमान हाइड्रोजन का उच्च ताप एवं दाब के कारण नाभिकीय संलयन की क्रिया है जिसके फलस्वरूप हीलियम बनती है तथा द्रव्यमान क्षति के कारण अपार ऊर्जा उत्पन्न होती है। इसके विकिरण में रेडियो तरंगों से लेकर गामा तरंगों तक सभी विद्युत् चुम्बकीय तरंगें उपस्थित रहती हैं। एक्स एवं गामा किरणें आयनमंडल का निर्माण करके पृथ्वी को जीवधारी ग्रह बनाने में मदद करती हैं।

सौर ऊर्जा के कारण ही हरे पेड़-पौधे प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन बनाते हैं। इसके कारण ही पवन प्रवाहित होती है, चक्रवात एवं जलचक्र सम्पन्न होते हैं। भारतवर्ष प्रतिवर्ष सूर्य से 5 × 108 करोड़ किलो वाट घण्टा सौर ऊर्जा प्राप्त करता है। हमारे वायुमण्डल की ऊपरी सतह का प्रत्येक वर्ग मीटर लगभग 1.4 किलो जूल ऊर्जा प्रति सेकण्ड प्राप्त करता है जिसका लगभग 47% भाग पृथ्वी की सतह पर पहुँचता है तथा शेष भाग अन्तरिक्ष में परावर्तित हो जाता है।

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प्रश्न 18.
जैव-मात्रा क्या है? एक बायो गैस (गोबर गैस) संयन्त्र का सिद्धान्त एवं कार्यविधि का नामांकित रेखाचित्र की सहायता से वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जैव-मात्रा: “जन्तु एवं वनस्पतियों के अपशिष्ट जैव-मात्रा या जैवमास कहलाते है।”

स्थिर गुम्बदनुमा टंकी वाला बायो गैस संयन्त्र:
इस संयन्त्र में गैस एकत्रित करने के लिए गुम्बदनुमा स्थिर टंकी रहती है। इसलिए इसे स्थिर गुम्बदनुमा टंकी वाला बायोगैस संयन्त्र कहते हैं। इसके प्रमुखतः निम्नलिखित चार भाग होते हैं –
(1) संपाचक टैंक (Digestion Tank):
यह टैंक कंक्रीट द्वारा जमीन के अन्दर या बाहर बनाया जाता है। इसी के अन्दर जन्तु अवशेषों के आसानी से अनॉक्सी सूक्ष्म-जीवों द्वारा पानी की उपस्थिति में अपघटन से मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड आदि गैसों का मिश्रण प्राप्त होता है जिसे बायोगैस कहते हैं।
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(2) मिलाने का टैंक (Mixing Tank):
यह टैंक सीमेण्ट से जमीन के ऊपर बनाया जाता है। इसका सम्बन्ध संपाचक टैंक से होता है। इस टैंक में गोबर में जल मिलाकर घोल बनाया जाता है जिसे एक खिड़की की सहायता से संपाचक टैंक में भेज दिया जाता है।

(3) गुम्बदनुमा टैंक (Dome Type Tank):
यह टैंक बायोगैस को एकत्रित करने के काम आता है। यह गुम्बद के आकार का होता है तथा संपाचक टैंक के ऊपर स्थित होता है। इसके ऊपर गैस वाल्व सहित गैस निर्गम पाइप लगा होता है जिसके द्वारा गैस की आपूर्ति की जाती है।

(4) निर्गम टैंक (Exhaust Tank):
यह टैंक संपाचक टैंक से लगा हुआ होता है। इसका सम्बन्ध संपाचक टैंक से एक खिड़की के द्वारा होता है जिसमें से स्लरी निकलकर इस टैंक में एकत्रित होती रहती है। दाब बढ़ने पर यह स्लरी बाहर आ जाती है। यह उत्तम किस्म की खाद का काम करती है।

तैरती हुई टंकी वाला बायो गैस संयन्त्र:
इस संयन्त्र में गैस की टंकी पानी में तैरती है, इसलिए इसे तैरती हुई टंकी वाला बायो गैस संयन्त्र कहते हैं। इसके मुख्यतः निम्नलिखित भाग होते हैं –
(1) मिश्रण टैंक (Mixing Tank): इसमें गोबर और पानी का घोल तैयार किया जाता है।

(2) संपाचक टैंक (Digestion Tank):
गोबर पानी का घोल मिश्रण टैंक से संपाचक टैंक में आ जाता है तब यहाँ सूक्ष्मजीवी द्वारा इसका अपघटन होने से बायो गैस का निर्माण होता है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 9
(3) गैस की तैरती टंकी (Floating Tank of Gas):
यह टंकी पानी में तैरती रहती है। इसमें गैस एकत्रित होती रहती है। इस टंकी में गैस-वाल्व युक्त गैस निर्गम पाइप लगा होता है जिससे गैस की आपूर्ति की जाती है।

(4) स्लरी निर्गम टैंक (Slurry Exhaust Tank): अवशेष स्लरी इस टैंक में एकत्रित हो जाती है जो खाद के रूप में प्रयुक्त होती है।

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MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

MP Board Class 10th Science Chapter 13 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न शृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 250

प्रश्न 1.
चुम्बक के निकट लाने पर दिक् सूचक की सुई विक्षेपित क्यों होती है?
उत्तर:
दिक् सूचक भी एक छोटा चुम्बक है तथा दो चुम्बकों के ध्रुवों के मध्य आकर्षण एवं प्रतिकर्षण के बल कार्य करते हैं फलस्वरूप दिक् सूचक की सुई चुम्बक के निकट लाने पर विक्षेपित हो जाती है।

प्रश्न शृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 255

प्रश्न 1.
किसी छड़ चुम्बक के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ खींचिए।
उत्तर:
छड़ चुम्बक के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 1

प्रश्न 2.
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणों की सूची बनाइए। (2019)
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण:

  1. चुम्बकीय क्षेत्र में चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ चिकने बन्द वक्र होते हैं जो परस्पर कभी प्रतिच्छेद नहीं करते।
  2. ये रेखाएँ चुम्बक के बाहर उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर तथा चुम्बक के अन्दर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है।
  3. अधिक प्रबलता वाले चुम्बकीय क्षेत्र में ये क्षेत्र रेखाएँ पास-पास तथा कम प्रबलता वाले क्षेत्र में दूर-दूर होती हैं।

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प्रश्न 3.
दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करतीं?
उत्तर:
दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ अगर परस्पर प्रतिच्छेद करेंगी तो प्रतिच्छेद बिन्दु पर क्षेत्र की तीव्रता की दो दिशाएँ होंगी जो असम्भव हैं।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 256-257

प्रश्न 1.
मेज के तल पर पड़े तार के वृत्ताकार पाथ पर विचार कीजिए। मान लीजिए इस पाथ में दक्षिणावर्त विद्युत् धारा प्रवाहित हो रही है। दक्षिण-हस्त-अंगुष्ठ नियम को लागू करके पाथ के भीतर तथा बाहर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
पाथ के अन्दर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा पाथ के तल के लम्बवत् अन्दर की ओर होगी तथा पाथ के बाहर ऊपर की ओर।

प्रश्न 2.
किसी दिए गए क्षेत्र में चुम्बकीय क्षेत्र एकसमान है। इसे निरूपित करने के लिए आरेख खींचिए।
हल:
समान चुम्बकीय क्षेत्र के लिए आरेख –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 2

प्रश्न 3.
सही विकल्प चुनिएकिसी विद्युत् धारावाही सीधी लम्बी परिनालिका के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र –
(a) शून्य होता है।
(b) इसके सिरों की ओर जाने पर घटता है।
(c) इसके सिरों की ओर जाने पर बढ़ता है।
(d) सभी बिन्दुओं पर समान रहता है।
उत्तर:
(d) सभी बिन्दुओं पर समान रहता है।

प्रश्न श्रृंखला-4 # पृष्ठ संख्या 259

प्रश्न 1.
किसी प्रोटॉन का निम्नलिखित में से कौन-सा गुण किसी चुम्बकीय क्षेत्र में मुक्त गति करते समय परिवर्तित हो जाता है? (यहाँ एक से अधिक सही उत्तर हो सकते है)
(a) द्रव्यमान।
(b) चाल।
(c) वेग।
(d) संवेग।
उत्तर:
(c) वेग एवं (d) संवेग।

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प्रश्न 2.
पाठ्य-पुस्तक के क्रियाकलाप 13.7 में हमारे विचार से छड़ AB का विस्थापन किस प्रकार प्रभावित होगा यदि –
(i) छड़ AB में प्रवाहित विद्युत् धारा में वृद्धि हो जाय।
(ii) अधिक प्रबल नाल चुम्बक प्रयोग किया जाय।
(iii) छड़ AB की लम्बाई में वृद्धि कर दी जाये।
उत्तर:
छड़ AB के विस्थापन की दिशा में उपर्युक्त तीनों स्थितियों (a), (b) एवं (c) में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा प्रत्येक स्थिति में छड़ पर बल अधिक लगेगा। इसलिए विस्थापन तेज तथा अधिक होगा।

प्रश्न 3.
पश्चिम की ओर प्रक्षेपित कोई धनावेश कण (अल्फा कण) किसी चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा उत्तर की ओर विक्षेपित हो जाता है। चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा क्या होगी?
(a) दक्षिण की ओर।
(b) पूर्व की ओर।
(c) अधोमुखी।
(d) उपरिमुखी।
उत्तर:
(d) उपरिमुखी।

प्रश्न शृंखला-5 # पृष्ठ संख्या 261

प्रश्न 1.
फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम लिखिए। (2019)
उत्तर:
फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम:
“अपने वाम-हस्त (बाएँ हाथ) की तर्जनी, मध्यमा एवं अंगूठे को हम परस्पर लम्बवत् दिशा में फैलाएँ और यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा चालक में प्रवाहित विद्युत् धारा की दिशा की ओर संकेत करती है, तो अंगूठा चालक की गति की दिशा अथवा चालक पर लगने वाले बल की दिशा की ओर संकेत करेगा।”
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 3

प्रश्न 2.
विद्युत् मोटर का क्या सिद्धान्त है?
उत्तर:
विद्युत् मोटर का सिद्धान्त-विद्युत् मोटर विद्युत् धारा के चुम्बकीय प्रभाव के सिद्धान्त पर कार्य करता है जिसके परिणामस्वरूप विद्युत् ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है। यह फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम पर आधारित होता है। इसके आधार पर चुम्बकीय क्षेत्र में रखी धारावाही कुण्डली पर आरोपित बलों के कारण कुण्डली घूमती है।

प्रश्न 3.
विद्युत् मोटर में विभक्त वलय की क्या भूमिका है?
उत्तर:
विभक्त वलय के कारण मोटर DC विद्युत् पर कार्य करती है। विभक्त वलय की भूमिका दिक् परिवर्तक की है।

प्रश्न श्रृंखला-6 # पृष्ठ संख्या 264

प्रश्न 1.
किसी कुण्डली में विद्युत् धारा प्रेरित करने के विभिन्न ढंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
किसी कुण्डली में विद्युत् धारा प्रेरित करने के विभिन्न ढंग:

  1. एक प्रबल चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को कुण्डली की तरफ लाने पर कुण्डली में वामवर्त विद्युत् धारा प्रेरित होगी।
  2. प्रबल चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को कुण्डली से दूर ले जाने पर कुण्डली में दक्षिणावर्त विद्युत् धारा प्रेरित होगी।
  3. इसके दक्षिणी ध्रुव को कुण्डली की ओर लाने पर कुण्डली में दक्षिणावर्त विद्युत् धारा प्रेरित होगी।
  4. दक्षिणी ध्रुव को कुण्डली से दूर ले जाने पर कुण्डली में वामावर्त विद्युत् धारा प्रेरित होगी।
  5. चुम्बक को स्थिर रखकर कुण्डली में सापेक्ष गति कराने पर भी कुण्डली में विद्युत् धारा प्रेरित होगी।

प्रश्न शृंखला-7 # पृष्ठ संख्या 265-266

प्रश्न 1.
विद्युत् जनित्र का सिद्धान्त लिखिए।
उत्तर:
विद्युत् जनित्र का सिद्धान्त-विद्युत् जनित्र का सिद्धान्त विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण की परिघटना पर आधारित है जिसके अनुसार चुम्बकीय क्षेत्र में घूर्णन करती कुण्डली में प्रेरित विद्युत् धारा प्रवाहित होती है जिसकी दिशा फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम पर आधारित है तथा इससे यान्त्रिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है।

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प्रश्न 2.
दिष्ट धारा के कुछ स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर:
दिष्ट धारा के स्रोत:

  1. दिष्ट धारा जनित्र।
  2. रासायनिक विद्युत् सेल (बैटरी)।
  3. सौर विद्युत् सेल आदि।

प्रश्न 3.
प्रत्यावर्ती विद्युत् धारा उत्पन्न करने वाले स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रत्यावर्ती विद्युत् धारा जनित्र।

प्रश्न 4.
सही विकल्प का चयन कीजिए –
ताँबे के तार की एक आयताकार कुण्डली किसी चुम्बकीय क्षेत्र में घूर्णी गति कर रही है। इस कुण्डली में प्रेरित विद्युत् धारा की दिशा में कितने परिभ्रमण के पश्चात् परिवर्तन होता है?
(a) दो।
(b) एक।
(c) आधे।
(d) चौथाई।
उत्तर:
(c) आधे।

प्रश्न श्रृंखला-8 # पृष्ठ संख्या 267

प्रश्न 1.
विद्युत् परिपथों तथा साधित्रों में सामान्यतः उपयोग होने वाले दो सुरक्षा उपायों के नाम लिखिए।
उत्तर:
विद्युत् परिपथों एवं साधित्रों में प्रयुक्त सुरक्षा उपाय:

  1. भू-सम्पर्कन।
  2. विद्युत् फ्यूज।

प्रश्न 2.
2 kW शक्ति अनुमतांक का एक विद्युत् तंदूर किसी घरेलू परिपथ (220 V) में प्रचलित किया जाता है जिसका विद्युत् धारा अनुमतांक 5 A है। इससे आप किस परिणाम की अपेक्षा करते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
चूँकि परिपथ में अधिकतम प्रयुक्त हो सकने वाली शक्ति की मात्रा P = 220 V × 5 A = 1100 W अर्थात् 1.1 kW है जबकि तंदूर की शक्ति 2 kW है जो अधिक है अतः अतिभारण के कारण विद्युत् फ्यूज उड़ जायेगा।

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प्रश्न 3.
घरेलू विद्युत् परिपथों में अतिभारण से बचाव के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
उत्तर:
अतिभारण से बचने के लिए परिपथ के गर्म तारों के साथ उपयुक्त विद्युत् फ्यूज लगा देना चाहिए।

MP Board Class 10th Science Chapter 13 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन किसी लम्बे विद्युत्वाही तार के निकट चुम्बकीय क्षेत्र का सही वर्णन करता है?
(a) चुम्बकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के लम्बवत् होती हैं।
(b) चुम्बकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के समान्तर होती हैं।
(c) चुम्बकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ अरीय होती हैं जिनका उद्भव तार से होता है।
(d) चुम्बकीय क्षेत्र की संकेन्द्री क्षेत्र रेखाओं का केन्द्र तार होता है।
उत्तर:
(d) चुम्बकीय क्षेत्र की संकेन्द्री क्षेत्र रेखाओं का केन्द्र तार होता है।

प्रश्न 2.
विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण की परिघटना –
(a) किसी वस्तु को आवेशित करने की प्रक्रिया है।
(b) किसी कुण्डली में विद्युत् धारा प्रवाहित होने के कारण चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने की प्रक्रिया
(c) कुण्डली तथा चुम्बक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुण्डली में प्रेरित विद्युत् धारा उत्पन्न करना है।
(d) किसी विद्युत् मोटर की कुण्डली घूर्णन कराने की प्रक्रिया है।
उत्तर:
(c) कुण्डली तथा चुम्बक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुण्डली में प्रेरित विद्युत् धारा उत्पन्न

प्रश्न 3.
विद्युत् धारा को उत्पन्न करने की युक्ति को कहते हैं –
(a) जनित्र।
(b) गैल्वेनोमीटर।
(c) अमीटर।
(d) मोटर।
उत्तर:
(a) जनित्र।

प्रश्न 4.
किसी ac जनित्र तथा dc जनित्र में एक मूलभूत अन्तर यह है कि –
(a) ac जनित्र में विद्युत् चुम्बक होता है जबकि dc जनित्र में स्थायी चुम्बक होता है।
(b) dc जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है।
(c) ac जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है।
(d) ac जनित्र में सी वलय होते हैं तथा dc जनित्र में दिक् परिवर्तक होता है।
उत्तर:
(d) ac जनित्र में सी वलय होते हैं तथा dc जनित्र में दिक् परिवर्तक होता है।

प्रश्न 5.
लघु पाथन के समय परिपथ में विद्युत् धारा का मान –
(a) बहुत कम हो जाता है।
(b) परिवर्तित नहीं होता।
(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है।
(d) निरन्तर परिवर्तित होता है।
उत्तर:
(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रकथनों में कौन-सा सही है तथा कौन-सा गलत है? इसे प्रकथन के सामने अंकित कीजिए –
(a) विद्युत् मोटर यान्त्रिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में रूपान्तरित करता है।
(b) विद्युत् जनित्र वैद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य करता है।
(c) किसी लम्बी वृत्ताकार धारावाही कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र समानान्तर सीधी क्षेत्र रेखाएँ होता है।
(d) हरे विद्युत् रोधन वाला तार प्रायः विद्युन्मय तार होता है।
उत्तर:
(a) असत्य।
(b) सत्य।
(c) सत्य।
(d) असत्य।

प्रश्न 7.
चुम्बकीय क्षेत्र को उत्पन्न करने के दो तरीकों की सूची बनाइए।
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र को उत्पन्न करने के तरीके:

  1. छड़ चुम्बक द्वारा।
  2. धारावाही चालक (सीधा, वृत्ताकार पाथ या परिनालिका) द्वारा।

प्रश्न 8.
परिनालिका चुम्बक की भाँति कैसे व्यवहार करती है? क्या आप किसी छड़ चुम्बक की सहायता से किसी विद्युत् धारावाही परिनालिका के उत्तर ध्रुव तथा दक्षिण ध्रुव का निर्धारण कर सकते हैं?
उत्तर:
जब किसी परिनालिका में विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है तो यह परिनालिका एक चुम्बक की तरह व्यवहार करती है अर्थात् स्वतन्त्रतापूर्वक लटकाने पर इसका एक सिरा उत्तर की ओर तथा दूसरा सिरा दक्षिण की ओर स्थिर हो जाता है ठीक स्वतन्त्रतापूर्वक लटके छड़ चुम्बक की तरह।

इस प्रकार परिनालिका एक चुम्बक की तरह व्यवहार करती है। जब हम एक छड़ चुम्बक को स्वतन्त्रतापूर्वक लटकी धारावाही परिनालिका के समीप लाते हैं तो परिनालिका का जो सिरा छड़ चुम्बक के दक्षिण ध्रुव की ओर आकर्षित होगा वह उत्तरी ध्रुव तथा दूसरा सिरा दक्षिणी ध्रुव होगा।

प्रश्न 9.
किसी चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित धारावाही चालक पर आरोपित बल कब अधिकतम होगा?
उत्तर:
जब धारावाही चालक चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् होगा तब उस पर आरोपित बल अधिकतम होगा।

प्रश्न 10.
मान लीजिए आप किसी चैम्बर में अपनी पीठ को किसी एक दीवार से लगाकर बैठे हैं। कोई इलेक्ट्रॉन पुंज आपके पीछे की दीवार से सामने वाली दीवार की ओर क्षैतिजतः गमन करते हुए किसी प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा आपके दायीं ओर विक्षेपित हो जाता है। चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा क्या है?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र की अभीष्ट दिशा ऊर्ध्वाधर अधोमुखी होगी।

प्रश्न 11.
विद्युत् मोटर का नामांकित आरेख खींचिए। इसका सिद्धान्त तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। विद्युत् मोटर में विभक्त विलय का क्या महत्व है?
उत्तर:
विद्युत् मोटर का नामांकित चित्र –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 4

विद्युत् मोटर का सिद्धान्त एवं कार्यविधि:
सिद्धान्त:
विद्युत् मोटर विद्युत् धारा के चुम्बकीय प्रभाव के सिद्धान्त पर फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम के अनुसार विद्युत् ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में बदलने का कार्य करता है।

कार्यविधि:
जब चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् रखी धारावाही कुण्डली ABCD में वामावर्त दिशा में विद्युत् धारा अर्थात् भुजा AB में A से B की ओर तथा CD में C से D की ओर बहती है तो फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम के अनुसार AB एवं CD पर विपरीत दिशा में बल लगेंगे जो AB को अधोमुखी तथा CD को उपरमुखी विस्थापित करेगा। आधे घूर्णन के बाद AB एवं CD में धारा की दिशा में परिवर्तन हो जायेगा। इससे CD अधोमुखी एवं AB उपरमुखी विस्थापन करेगा। इस प्रकार कुण्डली एक दिशा में लगातार घूमती रहेगी।

विभक्त वलय का महत्व:
विभक्त वलय कुण्डली में प्रवाहित धारा की दिशा उसकी भुजाओं AB तथा CD में क्रमश: B से A तथा D से C की बदलकर दिक् परिवर्तक का कार्य करते हैं जिससे कुण्डली लगातार एक ही दिशा में घूमती रहती है।

प्रश्न 12.
ऐसी कुछ युक्तियों के नाम लिखिए जिनमें विद्युत् मोटर उपयोग किए जाते हैं।
उत्त:
विद्युत् मोटर को प्रयुक्त करने वाली युक्तियाँ:

  1. विद्युत् पंखे।
  2. विद्युत् मिक्सर।
  3. रेफ्रिजरेटर।
  4. विद्युत् वाशिंग मशीन।
  5. कम्प्यूटर।
  6. MP-3 प्लेयर आदि।

प्रश्न 13.
कोई विद्युत्रोधी ताँबे के तार की कुण्डली किसी गैल्वेनो से संयोजित है। क्या होगा यदि कोई छड़ चुम्बक –
(i) कुण्डली में धकेला जाता है?
(ii) कुण्डली के भीतर से बाहर खींचा जाता है?
(iii) कुण्डली के भीतर स्थिर रखा जाता है?
उत्तर:
(i) गैल्वेनोमीटर की सुई एक दिशा में क्षणिक गति करेगी।
(ii) गैल्वेनोमीटर की सुई (i) के विपरीत दिशा में क्षणिक गति करेगी।
(iii) गैल्वेनोमीटर की सुई में कोई परिवर्तन दिखाई नहीं देगा।

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प्रश्न 14.
दो वृत्ताकार कुण्डली A तथा B एक-दूसरे के निकट स्थित हैं। यदि कुण्डली A में विद्युत् धारा में कोई परिवर्तन करें तो क्या कुण्डली B में कोई विद्युत् धारा प्रेरित होगी? कारण लिखिए।
उत्तर:
हाँ, कुण्डली B में विद्युत् धारा प्रेरित होगी क्योंकि कुण्डली A में धारा परिवर्तन के फलस्वरूप उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र में परिवर्तन होगा जो कुण्डली B के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र में परिवर्तन करेगा, फलस्वरूप कुण्डली B में प्रेरित वि. बा. बल उत्पन्न होगा।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित की दिशा निर्धारित करने वाला नियम लिखिए –

  1. किसी विद्युत् धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र।
  2. किसी चुम्बकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लम्बवत् स्थित, विद्युत् धारावाही सीधे चालक पर आरोपित बल तथा
  3.  किसी चुम्बकीय क्षेत्र में किसी कुण्डली के घूर्णन करने पर उस कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत् धारा।

उत्तर:
1. दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम:
“यदि आप दाहिने हाथ में धारावाही सीधे चालक को इस प्रकार पकड़ें कि आपका अंगूठा विद्युत् धारा की दिशा की ओर संकेत करें तो आपकी अंगुलियाँ चालक के चारों ओर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र में चुम्बकीय बल रेखाओं की दिशा को प्रदर्शित करेंगी।”
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 5

2. फ्लेमिंग के बाएँ हाथ का नियम:
“यदि बाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा एवं अंगूठे को परस्पर लम्बवत् फैलाएँ और यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा, मध्यमा विद्युत् धारा की दिशा को प्रदर्शित करे तो अंगूठा लगने वाले बल की दिशा प्रदर्शित करेगा।”

3. फ्लेमिंग का दायें हाथ का नियम:
“यदि दाएँ हाथ की तर्जनी, मध्यमा एवं अंगूठे को परस्पर लम्बवत् दिशा में फैलाएँ और यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा एवं अंगूठा चालक की दिशा को प्रदर्शित करे तो मध्यमा प्रेरित विद्युत् धारा की दिशा को प्रदर्शित करेगी।”
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प्रश्न 16.
नामांकित आरेख खींचकर किसी विद्युत् जनित्र का मूल सिद्धान्त तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। इसमें ब्रुशों का क्या कार्य है?
उत्तर:
विद्युत् जनित्र का नामांकित आरेख –
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जनित्र विद्युत् जनित्र का मूल सिद्धान्त:
विद्युत् जनित्र का सिद्धान्त विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण की परिघटना पर आधारित है जिसके आधार पर जब किसी कुण्डली के तल पर चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है तो उस कुण्डली में प्रेरित विद्युत् धारा प्रवाहित होती है और इस प्रकार यान्त्रिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करने का कार्य विद्युत् जनित्र करता है।

कार्यविधि:
जब आर्मेचर (कुण्डली) ABCD को दक्षिणावर्त दिशा में घुमाया जाता है तो कुण्डली में विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण के कारण विद्युत् धारा प्रेरित हो जाती है। धारा की दिशा फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम से ज्ञात की जाती है। कुण्डली के आधा चक्कर पूरा करने तक धारा की दिशा वही रहती है अतः पहले आधे चक्कर में धारा B2 से B1 की दिशा में बहती है। अगले आधे चक्कर में विद्युत् धारा की दिशा बदल जाती है। अतः धारा B2 से B1 की ओर बहती है। इस प्रकार परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित होती है।

ब्रुशों का कार्य:
दोनों ब्रुश घूर्णन करती कुण्डली के वलयों के सम्पर्क में रहते हैं जिससे उसके घूर्णन में कोई बाधा नहीं आती तथा उससे प्राप्त विद्युत् धारा को बाह्य परिपथ में प्रवाहित करने में सहायक है।

प्रश्न 17.
किसी विद्युत् परिपथ में लघु पाथन कब होता है?
उत्तर:
खराब तथा क्षतिग्रस्त तारों के कारण जब कभी विद्युन्मय एवं उदासीन तार आपस में मिल जाते हैं तो परिपथ का प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है तथा उसमें धारा की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है। इस प्रकार लघु पाथन हो जाता है।

प्रश्न 18.
भू-सम्पर्क तार का क्या कार्य है? धातु के आवरण वाले विद्युत् साधित्रों को भू-सम्पर्कित करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
भू-सम्पर्क तार का कार्य-भू-सम्पर्क तार एक सुरक्षा युक्ति है जो यह सुनिश्चित करता है कि साधित्र के धात्विक आवरण में यदि विद्युत् धारा का कोई भी क्षरण होता है तो भू-सम्पर्क तार विद्युत् धारा के लिए अल्प प्रतिरोध का कार्य करता है जिससे इसका सम्पर्क भूमि से हो जाता है। इस प्रकार साधित्र को उपयोग करने वाले व्यक्ति तीव्र विद्युत् आघात से बच जाते हैं। इसलिए धातु के आवरणों वाले विद्युत् साधित्रों को भू-सम्पर्क तार से जोड़कर भू-सम्पर्कित करना आवश्यक है।

MP Board Class 10th Science Chapter 13 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 10th Science Chapter 13 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के सम्बन्ध में अग्र में से असत्य कथन छाँटिए –
(a) किसी चुम्बकीय क्षेत्र में रखे चुम्बकीय कम्पास के उत्तरी ध्रुव की दिशा ही उस चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा होती है।
(b) चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ बन्द वक्र होते हैं।
(c) यदि चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ समान्तर तथा समदूरस्थ हैं तो ये शून्य चुम्बकीय क्षेत्र को प्रदर्शित करती हैं।
(d) चुम्बकीय क्षेत्र की आपेक्षिक प्रबलता चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की सन्निकटता से प्रदर्शित होती है।
उत्तर:
(c) यदि चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ समान्तर तथा समदूरस्थ हैं तो ये शून्य चुम्बकीय क्षेत्र को प्रदर्शित करती हैं।

प्रश्न 2.
निम्न संलग्न आकृति में परिपथ की व्यवस्था से कुंजी को निकाल दिया जाय अर्थात् परिपथ को खोल दिया जाय और चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ खींची जायें क्षैतिज तल ABCD पर, तो क्षेत्र रेखाएँ होंगी –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 8
(a) संकेन्द्री वृत्त।
(b) दीर्घ वृत्ताकार।
(c) परस्पर समान्तर सीधी रेखाएँ।
(d) बिन्दु O के पास वृत्ताकार और दूर जाने पर दीर्घ वृत्ताकार।
उत्तर:
(c) परस्पर समान्तर सीधी रेखाएँ।

प्रश्न 3.
एक वृत्ताकार कुण्डली कागज की तल के लम्बवत् तल में रखी जाती है तथा इसमें विद्युत् धारा बह रही होती है जब कुंजी को चालू कर दिया जाता है। विद्युत् धारा कुण्डली के अक्ष से होकर कागज के तल में A से B की ओर प्रवाहित हो रही है जो A और B से क्रमशः एण्टी-क्लॉकवाइज एवं क्लॉक वाइज दिखाई देती है। चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ B से A की ओर संकेत करती हैं। देखिए संलग्न आकृति।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 9
(a) A के नजदीक।
(b) B के नजदीक।
(c) A के नजदीक यदि धारा की तीव्रता कम है और अगर धारा की तीव्रता अधिक है तो B के नजदीक।
(d) B के नजदीक यदि धारा की तीव्रता कम है और अगर धारा की तीव्रता अधिक है तो A के नजदीक।
उत्तर:
(a) A के नजदीक।

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प्रश्न 4.
किसी लम्बी धारावाही परिनालिका के सिरे पर N एवं S ध्रुव (पोल) उत्पन्न होते हैं। निम्न कथनों में असत्य कथन है –
(a) परिनालिका के अन्दर की क्षेत्र रेखाएँ सीधी समान्तर रेखाओं के रूप में होती हैं ये यह प्रदर्शित करती है कि परिनालिका के अन्दर प्रत्येक बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र समान है।
(b) परिनालिका के अन्दर उत्पन्न शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र का उपयोग उसके अन्दर चुम्बकीय पदार्थ जैसे कच्चा लोहा आदि रखकर उसे चुम्बक बनाने में किया जा सकता है।
(c) परिनालिका से सम्बन्धित चुम्बकीय क्षेत्र का स्वरूप एक छड़ चुम्बक के चारों ओर के चुम्बकीय क्षेत्र के स्वरूप से भिन्न होता है।
(d) यदि परिनालिका में विद्युत् धारा की दिशा बदल दी जाय तो परिनालिका के सिरों पर उत्पन्न चुम्बकीय ध्रुव N एवं S भी परिवर्तित हो जाते हैं।
उत्तर:
(c) परिनालिका से सम्बन्धित चुम्बकीय क्षेत्र का स्वरूप एक छड़ चुम्बक के चारों ओर के चुम्बकीय क्षेत्र के स्वरूप से भिन्न होता है।

प्रश्न 5.
एक समरूप चुम्बकीय क्षेत्र कागज के तल में बाईं ओर से दायीं ओर को आरोपित है। जैसा कि संलग्न आकृति में दिखाया गया है। एक इलेक्ट्रॉन एवं एक प्रोटॉन उस चुम्बकीय क्षेत्र में गति करते हैं।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 10
इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन पर लगने वाले बल होंगे –
(a) दोनों बल कागज के लम्बवत् अन्दर की ओर।
(b) दोनों बल कागज के लम्बवत् बाहर की ओर।
(c) एक बल कागज के लम्बवत् अन्दर की ओर तथा दूसरा बल कागज के लम्बवत् बाहर की ओर क्रमशः।
(d) दोनों बल समरूप चुम्बकीय क्षेत्र के समानान्तर लेकिन विपरीत दिशाओं में।
उत्तर:
(a) दोनों बल कागज के लम्बवत् अन्दर की ओर।

प्रश्न 6.
वाणिज्यिक (व्यापारिक) विद्युत् मोटर प्रयोग नहीं करती –
(a) आर्मेचर को घुमाने के लिए विद्युत् चुम्बक।
(b) धारावाही चालक कुण्डली में चालक तार की अधिक चक्करों की संख्या।
(c) आर्मेचर को घुमाने के लिए स्थायी चुम्बक।
(d) एक कच्चे लोहे की क्रोड जिस पर कुण्डली लपेटी जाती है।
उत्तर:
(c) आर्मेचर को घुमाने के लिए स्थायी चुम्बक।

प्रश्न 7.
संलग्न चित्र में दी गयी व्यवस्था में दो कुण्डलियाँ अचालक बेलनाकार छड़ पर लपेटी गयी हैं। प्रारम्भ में कुंजी का प्लग नहीं लगाया गया है। जब कुंजी का प्लग लगाया जाता है और फिर निकाल दिया जाता है, तब –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 11
(a) गैल्वेनोमीटर में पूरे समय तक विस्थापन शून्य रहेगा।
(b) गैल्वेनोमीटर में क्षणिक विस्थापन होगा लेकिन यह शीघ्र ही समाप्त हो जायेगा और कुंजी निकालने पर कोई असर नहीं होगा।
(c) गैल्वेनोमीटर में क्षणिक विस्थापन होगा और शीघ्र ही समाप्त हो जायेगा और बाद में विस्थापन उसी दिशा में होगा।
(d) गैल्वेनोमीटर में क्षणिक विस्थापन होकर और शीघ्र ही वह समाप्त हो जायेगा बाद में विस्थापन विपरीत दिशा में होगा।
उत्तर:
(d) गैल्वेनोमीटर में क्षणिक विस्थापन होकर और शीघ्र ही वह समाप्त हो जायेगा बाद में विस्थापन विपरीत दिशा में होगा।

प्रश्न 8.
असत्य कथन का चयन कीजिए –
(a) फ्लेमिंग दक्षिण-हस्त नियम प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने में प्रयुक्त होता है।
(b) दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम धारावाही चालक के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए प्रयुक्त होता है।
(c) DC एवं AC में यह अन्तर है कि DC सदैव एक ही दिशा में प्रवाहित होती है जबकि AC निश्चित समय अन्तराल के बाद अपनी दिशा बदलती रहती है।
(d) भारत में AC हर 1/50 सेकण्ड बाद अपनी दिशा बदलती है।
उत्तर:
(d) भारत में AC हर 1/50 सेकण्ड बाद अपनी दिशा बदलती है।

प्रश्न 9.
एक क्षैतिज चालक तार में समान निश्चित धारा कागज के तल में पूर्व से पश्चिम की ओर बह रही है जैसा कि संलग्न चित्र में दिखाया गया है। उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा एक बिन्दु पर उत्तर से दक्षिण होगी –
(a) सीधे तार के ऊपर।
(b) सीधे तार के नीचे।
(c) तार की उत्तरी दिशा में कागज पर स्थित किसी बिन्द पर।
(d) तार की दक्षिण दिशा में कागज पर स्थित किसी बिन्दु पर।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 12
उत्तर:
(b) सीधे तार के नीचे।

प्रश्न 10.
किसी धारावाही लम्बी सीधी परिनालिका के अन्दर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता होगी –
(a) क्रोड की अपेक्षा सिरों पर अधिक।
(b) मध्य में सबसे कम।
(c) सभी स्थानों पर समान।
(d) एक सिरे से दूसरे सिरे तक बढ़ती हुई।
उत्तर:
(c) सभी स्थानों पर समान।

प्रश्न 11.
एक AC जनित्र को DC जनित्र में बदलने के लिए प्रयुक्त होना चाहिए –
(a) विभक्त वलय प्रकार का दिशा परिवर्तक।
(b) विसी वलय एवं ब्रुश।
(c) शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र।
(d) एक आयताकार तार की कुण्डली।
उत्तर:
(a) विभक्त वलय प्रकार का दिशा परिवर्तक।

प्रश्न 12.
लघुपाथन एवं अतिभारण से होने वाली हानि से उपकरणों को बचाने की सर्वश्रेष्ठ एवं अति आवश्यक युक्ति है –
(a) भूसम्पर्क करना।
(b) फ्यूज वायर का प्रयोग।
(c) स्टेबलाइजर का प्रयोग।
(d) विद्युत् मीटर का प्रयोग।
उत्तर:
(b) फ्यूज वायर का प्रयोग।

प्रश्न 13.
विद्युत् ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में बदलने वाली युक्ति है –
(a) जनित्र।
(b) मोटर।
(c) धारा नियन्त्रक।
(d) धारामापी।
उत्तर:
(b) मोटर।

प्रश्न 14.
यांन्त्रिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में बदलने वाली युक्ति है –
(a) जनित्र।
(b) मोटर।
(c) धारा नियन्त्रक।
(d) फ्यूज।
उत्तर:
(a) जनित्र।

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प्रश्न 15.
उपकरणों को विद्युत् आघात से बचाने वाली युक्ति है –
(a) जनित्र।
(b) मोटर।
(c) फ्यूज।
(d) धारा नियन्त्रक।
उत्तर:
(c) फ्यूज।

रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र में खींची गयी क्षेत्र रेखाएँ परस्पर … होती हैं।
  2. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ परस्पर प्रतिच्छेद ……….. हैं।
  3. चुम्बकीय ध्रुवों के पास क्षेत्र रेखाएँ ……होती हैं।
  4. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ ………. वक्र होती हैं।
  5. विद्युत् तथा चुम्बकत्व में सम्बन्ध ज्ञात किया।

उत्तर:

  1. समान्तर।
  2. नहीं करती।
  3. सघन (पास-पास)।
  4. बन्द।
  5. आर्टेड।

जोड़ी बनाइए
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 13
उत्तर:

  1. → (c)
  2. → (d)
  3. → (e)
  4. → (a)
  5. → (b)

सत्य/असत्य कथन

  1. घरेलू विद्युत् प्रत्यावर्ती धारा (AC) होती है।
  2. विद्युत् उपकरण श्रेणीक्रम में संयोजित होते हैं।
  3. AC जनित्र में विसर्णी वलय प्रयोग होते हैं।
  4. किसी परिपथ में अत्यधिक धारा प्रवाह भूसम्पर्क कहलाता है।
  5. DC जनित्र में विभक्त वलय प्रयुक्त होते हैं।

उत्तर:

  1. सत्य।
  2. असत्य।
  3. सत्य।
  4. असत्य।
  5. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. उस युक्ति का क्या नाम है जो विद्युत् ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में बदलती है?
  2. उस युक्ति का क्या नाम है जो यान्त्रिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में बदल देती है?
  3. उस युक्ति का क्या नाम है जो अतिभारण एवं लघुपाथन से उपकरणों की रक्षा करती है?
  4. घरेलू परिपथ में किस प्रकार की धारा प्रवाहित होती है?
  5. विद्युत् घंटी में किस प्रकार की चुम्बक का प्रयोग किया जाता है?

उत्तर:

  1. विद्युत् मोटर।
  2. विद्युत् जनित्र।
  3. फ्यूज तार।
  4. प्रत्यावर्ती धारा।
  5. विद्युत् चुम्बक (अस्थायी चुम्बक)।

MP Board Class 10th Science Chapter 13 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चुम्बकीय क्षेत्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र: “किसी चुम्बक के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ चुम्बकीय बल की अनुभूति होती है, चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है।”

प्रश्न 2.
परिनालिका किसे कहते हैं?
उत्तर:
परिनालिका: “पास-पास लिपटे विद्युत्रोधी ताँबे के तार की बेलनाकार अनेक फेरौं वाली कुण्डली परिनालिका कहलाती है।

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प्रश्न 3.
विद्युत् चुम्बक क्या होती है?
उत्तर:
जब किसी चुम्बकीय पदार्थ जैसे कच्चा लोहा आदि की छड़ को किसी धारावाही परिनालिका के अन्दर रखा जाता है तो उसके अन्दर अस्थायी चुम्बक के गुण उत्पन्न हो जाते हैं। इस प्रकार बनी चुम्बक विद्युत् चुम्बक कहलाती है।

प्रश्न 4.
विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण से क्या समझते हो?
उत्तर:
विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण:
जब किसी कुण्डली और चुम्बक के बीच सापेक्ष गति होती है तो कुण्डली में विद्युत् धारा उत्पन्न हो जाती है। इस परिघटना को विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं और इस प्रकार उत्पन्न विद्युत् धारा को प्रेरित विद्युत् धारा कहते हैं।

प्रश्न 5.
दिक् परिवर्तक किसे कहते हैं?
उत्तर:
दिक् परिवर्तक:
वह युक्ति जो किसी विद्युत् परिपथ में विद्युत् धारा के प्रवाह को उत्क्रमित कर देती है, दिक् परिवर्तक कहलाती है।”

प्रश्न 6.
एक धारावाही परिनालिका का उपयोग करके स्थायी चम्बक किन शर्तों के अन्तर्गत प्राप्त किया जा सकता है। नामांकित
परिपथ द्वारा अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
धारावाही परिनालिका द्वारा स्थायी चुम्बक प्राप्त करने के लिए आवश्यक शर्ते –

  1. परिनालिका में दिष्ट धारा प्रवाहित होनी चाहिए।
  2. परिनालिका के अन्दर चुम्बकीय पदार्थ जैसे स्टील आदि की छड़ चित्र रखी होनी चाहिए।

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 14

प्रश्न 7.
जैसा कि संलग्न चित्र में दिखाया गया है। कागज के तल में AB एक धारावाही सीधा चालक है। बिन्दु P एवं Q पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा क्या होगी? यदि r1 > r2 हो तो किस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता अधिक होगी?
उत्तर:
बिन्दु P पर कागज के तल के लम्बवत् अन्दर की ओर तथा बिन्दु Q पर कागज के तल के लम्बवत् बाहर की ओर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा होगी। निकटस्थ बिन्दु अर्थात् बिन्दु Q पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता अधिक होगी।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 15

प्रश्न 8.
जब किसी चुम्बकीय कम्पास को किसी धारावाही चालक के पास रखा जाता है तो वह विक्षेपित हो जाती है। यदि चालक में विद्युत् धारा की तीव्रता बढ़ा दी जाय तो उसके विक्षेप पर क्या प्रभाव पड़ेगा? अपने उत्तर का कारण बताइए।
उत्तर:
कम्पास का विक्षेप बढ़ जाता है क्योंकि चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता धारावाही चालक में प्रवाहित विद्युत् धारा की मात्रा के समानुपाती होती है।

प्रश्न 9.
यह सर्व ज्ञात है कि जब किसी धात्विक तार में विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है तो उसके चारों ओर एक चम्बकीय क्षेत्र पैदा हो जाता है। यदि एक पतली किरण पंज (i) अल्फा कणों की (ii) न्यूट्रॉनों की प्रवाहित हो तो क्या उनके चारों ओर भी इसी प्रकार का चुम्बकीय क्षेत्र पैदा होगा? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
(i) अल्फा कणों के किरण पुंज के चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र पैदा होगा क्योंकि अल्फा कण धनावेशित होते हैं और उनका प्रवाह उनकी दिशा में विद्युत् धारा के प्रवाह की तरह ही है।
(ii) चूँकि न्यूट्रॉन उदासीन कण होते हैं इसलिए उनके किरण पुंज के चारों ओर कोई भी चुम्बकीय क्षेत्र पैदा नहीं होगा।

प्रश्न 10.
दक्षिण हस्त-अंगुष्ठ नियम में अंगूठे की दिशा क्या प्रदर्शित करती है? यह नियम फ्लेमिंग के वाम-हस्त नियम से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
दक्षिण-हस्त-अंगुष्ठ नियम में अंगूठा विद्युत् धारा की दिशा को प्रदर्शित करता है। दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम किसी धारावाही चालक द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को निर्धारित करता है जबकि फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम चुम्बकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा निर्धारित करता है।

प्रश्न 11.
मीना किसी धारावाही वृत्ताकार पाथ के अक्ष के पास चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ खींचती है। वह जैसे ही वृत्ताकार पाथ के केन्द्र से दूर हटती है वह प्रेक्षित करती है कि क्षेत्र रेखाएँ मुड़ती जाती हैं। आप उसके प्रेक्षण की कैसे व्याख्या करेंगे?
उत्तर:
जैसे-जैसे पाथ के केन्द्र से दूरी बढ़ती जाती है। चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता कम होती जाती है। यह चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की समीपता को कम करती जाती है। इसलिए क्षेत्र रेखाएँ मुड़ती जाती हैं।

प्रश्न 12.
किसी धारावाही परिनालिका के सिरों के पास चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं का मुड़ना क्या प्रदर्शित करता है?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं का मुड़ना अर्थात् क्षेत्र रेखाओं की समीपता कम होना परिनालिका के सिरे से दूर जाने पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का कम होते जाना प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 13.
चार ऐसे उपकरणों के नाम लिखिए जहाँ विद्युत् मोटर एक घूर्णन युक्ति, जो विद्युत् ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में परिवर्तित कर देती है, एक आवश्यक अवयव की तरह प्रयुक्त होती है? किस सम्बन्ध में एक मोटर एक जनित्र से भिन्न होती है?
उत्तर:
उपकरण जिनमें विद्युत् मोटर प्रयुक्त होती है:

  1. विद्युत् पंखा।
  2. विद्युत् मिक्सर ग्राइण्डर।
  3. वाशिंग मशीन।
  4. कम्प्यूटर ड्राइव आदि।

विद्युत् मोटर विद्युत् ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करती है जवकि जनित्र यान्त्रिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में।

प्रश्न 14.
एक साधारण विद्युत् मोटर में दो स्थायी (स्थिर) चालक ब्रशों की क्या भूमिका है?
उत्तर:
एक साधारण विद्युत् मोटर में दो स्थिर चालक ब्रुश बैटरी से संयोजित होते हैं तथा ये दो अर्ध विभक्त वलयों के बाहरी तल को स्पर्श करते हैं जिनके आन्तरिक तल एक्सल से जुड़े रहते हैं तथा पृथक्कृत होते हैं। इससे एक्सल को घूमने में आसानी रहती है।

प्रश्न 15.
दिष्टधारा (D.C.) एवं प्रत्यावर्ती धारा (A.C.) में क्या अन्तर है? भारत में प्रयुक्त प्रत्यावर्ती धारा कितनी बार एक सेकण्ड में दिशा परिवर्तन करती है?
उत्तर:
दिष्टं धारा सदैव एक दिशा में प्रवाहित होती है जबकि प्रत्यावर्ती धारा एक निश्चित समयान्तराल के बाद अपनी दिशा बदलती है। भारत में प्रयुक्त AC की आवृत्ति 50 हर्ट्ज़ है और प्रत्येक चक्र में यह दो बार अपनी दिशा बदलती है अर्थात् भारत में प्रयुक्त AC एक सेकण्ड में 100 बार दिशा बदलती है।

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प्रश्न 16.
किसी विद्युत् उपकरण के परिपथ में श्रेणीक्रम में फ्यूज लगाने की क्या भूमिका है? उपयुक्त क्षमता के फ्यूज को अधिक क्षमता के फ्यूज से क्यों नहीं बदलना चाहिए?
उत्तर:
परिपथ में अधिक धारा के हिसाब से उपयुक्त क्षमता का फ्यूज लगा होता है यदि लघुपाथन या अतिभारण के कारण परिपथ में धारा का मान बढ़ जाता है तो ऊष्मीय प्रभाव के कारण फ्यूज का तार पिघल जाता है और विद्युत् धारा का प्रवाह रुक जाता है। इससे उपकरण क्षतिग्रस्त होने से बच जाते हैं।

अगर उचित क्षमता से अधिक का फ्यूज लगा दिया जायेगा तो फ्यूज का तार पिघलेगा नहीं और अधिक धारा प्रवाह के कारण उपकरण नष्ट होने की सम्भावना अधिक हो जाती है। इसलिए हमको उचित क्षमता का समान फ्यूज लगाना चाहिए।

MP Board Class 10th Science Chapter 13 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक चुम्बकीय कम्पास सुई कागज के तल में बिन्दु A के पास रखी है जैसा कि संलग्न चित्र में दिखाया गया है। एक धारावाही सीधे चालक को किस तल में रखना चाहिए कि यह A से होकर जाता हो लेकिन कम्पास सुई के विस्थापन (विक्षेप) चित्र में कोई अन्तर नहीं आये। किस अवस्था में सुई में विक्षेप सर्वाधिक होगी और क्यों?
उत्तर:
स्वयं कागज के तल में क्योंकि इस अवस्था में कम्पास का अक्ष ऊर्ध्वाधर है और धारावाही चालक द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र भी ऊर्ध्वाधर है। कम्पास सुई का घूमना एक दिक्पात (डिप) की अवस्था है जो इस अवस्था में सम्भव नहीं। डिप की अवस्था तभी सम्भव है जब कम्पास सुई का अक्ष क्षैतिज हो। विक्षेप अधिकतम होगा जब चालक कागज के तल के लम्बवत् A से होकर जाय तथा इसके द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र कागज के तल में अधिकतम हो।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 16

प्रश्न 2.
विद्युत् फ्यूज क्या होता है? इसकी बनावट का सचित्र वर्णन कीजिए। इसकी क्रियाविधि का भी वर्णन कीजिए।
अथवा
फ्यूज तार क्या है? इसका उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
विद्युत् फ्यूज (Electric Fuse):
विद्युत् फ्यूज वह युक्ति होल्डर है जिसकी सहायता से किसी विद्युत् परिपथ में होकर जाने वाली धारा की अधिकतम सीमा नियन्त्रित की जा सकती है। यह उच्च प्रतिरोध एवं कम गलनांक की मिश्रधातु का छोटा तार F होता है जो पोर्सिलेन होल्डर के दोनों टर्मिनलों T1 एवं T2 के बीच कसा रहता है। इस होल्डर को पोर्सिलेन केसिंग में लगा देते हैं। यह परिपथ में गर्म तार के साथ श्रेणीक्रम में लगाया जाता है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 17

क्रियाविधि:
जब परिपथ में अतिभारण या लघुपाथन के कारण बहुत अधिक धारा प्रवाहित होती है, तब फ्यूज का तार गर्म होकर पिघल जाता है; जिससे परिपथ टूट जाता है और धारा बन्द हो जाती है। इसका उपयोग विद्युत् उपकरण की सुरक्षा के लिए किया जाता है।

प्रश्न 3.
घरेलू विद्युत् परिपथ का नामांकित चित्र बनाइए।
अथवा
एक कमरे में एक प्लग सॉकेट, एक बल्ब एवं एक रेगुलेटर सहित पंखा के लिए एक सरल परिपथ का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
परिपथ का नामांकित चित्र –
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प्रश्न 4.
निकट में चुम्बक के अभाव में एक चुम्बकीय सुई उत्तर-दक्षिण दिशा में संकेत करती है लेकिन जब-जब उसके पास एक छड़ चुम्बक या धारावाही वृत्ताकार पाथ लाया जाता है तो वह विक्षेपित हो जाती है। चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के कुछ प्रमुख गुण लिखिए।
उत्तर:
बिना किसी चुम्बक की उपस्थिति के चुम्बकीय कम्पास सुई पर केवल पार्थिव चुम्बकीय क्षेत्र लागू होता है। इस कारण वह उत्तर दक्षिण दिशा में संकेत करती है लेकिन जब उसके पास चुम्बक या धारावाही पाथ (जो चुम्बक की तरह व्यवहार करता है) लाया जाता है तो उसके परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में कम्पास सुई विक्षेपित हो जाती है।
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के प्रगुण:

  1. चुम्बकीय क्षेत्र में चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ चिकने बन्द वक्र होते हैं जो परस्पर कभी प्रतिच्छेद नहीं करते।
  2. ये रेखाएँ चुम्बक के बाहर उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर तथा चुम्बक के अन्दर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है।
  3. अधिक प्रबलता वाले चुम्बकीय क्षेत्र में ये क्षेत्र रेखाएँ पास-पास तथा कम प्रबलता वाले क्षेत्र में दूर-दूर होती हैं।

प्रश्न 5.
एक नामांकित परिपथ आरेख की सहायता से धारावाही सरल सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाओं के पैटर्न प्रदर्शित कीजिए। किस प्रकार दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम इनकी दिशा निर्धारण में सहायक होता है ?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ तार के चारों ओर वृत्ताकार होती हैं। तार के पास ये सघन तथा परस्पर विरल होती जाती हैं।
आरेख –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 19

दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम:
“यदि आप दाहिने हाथ में धारावाही सीधे चालक को इस प्रकार पकड़ें कि आपका अंगूठा विद्युत् धारा की दिशा की ओर संकेत करें तो आपकी अंगुलियाँ चालक के चारों ओर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र में चुम्बकीय बल रेखाओं की दिशा को प्रदर्शित करेंगी।”
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 5

प्रश्न 6.
एक नामांकित आकृति की सहायता से एक वृत्ताकार धारावाही वृत्ताकार पाथ (कुण्डली) के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के वितरण को समझाइए। ऐसा क्या है कि धारावाही n फेरों की कुण्डली में उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र किसी बिन्दु पर उस चुम्बकीय क्षेत्र का n गुना होता है जो एक फेरे के वृत्ताकार पाथ के द्वारा उत्पन्न होता है ?
उत्तर:
किसी धारावाही कुण्डली द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र किसी बिन्दु पर उन सभी चुम्बकीय क्षेत्रों का योगफल होता है जो कुण्डली के प्रत्येक फेरे के द्वारा उत्पन्न होता है। इसलिए n फेरों वाली धारावाही कुण्डली द्वारा किसी बिन्दु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र उसके एक फेरे द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का n गुना होता है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 20

प्रश्न 7.
विद्युत् मोटर का नामांकित चित्र बनाइए। (2019)
उत्तर:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 4

प्रश्न 8.
विद्युत् जनित्र का नामांकित चित्र बनाइए। (2019)
उत्तर:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 7

MP Board Class 10th Science Chapter 13 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक क्रियाकलाप का वर्णन कीजिए जिससे यह प्रदर्शित होता हो कि धारावाही चालक पर किसी चुम्बकीय क्षेत्र के कारण लगने वाला बल चालक की लम्बाई एवं बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र दोनों के लम्बवत् होता है। इस बल की दिशा ज्ञात करने में फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम किस प्रकार सहायक है?
उत्तर:
संलग्न चित्र के अनुसार एक ऐलुमिनियम की छड़ लेकर एक स्टैण्ड से लटकाकर एक विद्युत् परिपथ तैयार कीजिए तथा एक प्रबल नाल चुम्बक इस प्रकार व्यवस्थित कीजिए कि छड़ नाल चुम्बक के दोनों ध्रुवों के बीच रहे।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 21
आकृति 13.20 जब हम परिपथ में विद्युत् धारा प्रवाहित करते हैं तो ऐलुमिनियम की छड़ विस्थापित होती है जो उस पर लगने वाले बल के कारण है। हम प्रेक्षित करते हैं कि छड़ बाईं ओर विस्थापित होती है और जब हम विद्युत्

धारा के चुम्बकीय प्रभाव 285 धारा की दिशा बदलते हैं तब छड़ के विस्थापन की दिशा भी बदल जाती है। यह विस्थापन हर स्थिति में बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र एवं विद्युत् धारा (चालक की लम्बाई) दोनों के लम्बवत् है।

फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम:
“अपने वाम-हस्त (बाएँ हाथ) की तर्जनी, मध्यमा एवं अंगूठे को हम परस्पर लम्बवत् दिशा में फैलाएँ और यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा चालक में प्रवाहित विद्युत् धारा की दिशा की ओर संकेत करती है, तो अंगूठा चालक की गति की दिशा अथवा चालक पर लगने वाले बल की दिशा की ओर संकेत करेगा।”
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 3

प्रश्न 2.
“विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण की व्याख्या कीजिए। एक प्रयोग का वर्णन कीजिए जिससे यह प्रदर्शित हो कि जब एक बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र किसी चालक के बंद पाथ के परिच्छेद में होकर बढ़ता या घटता है तो उस बन्द पाथ में विद्युत् धारा प्रवाहित होती है।
उत्तर:
विद्युत् चुम्बकीय प्ररेण:
जब किसी कुण्डली और चुम्बक के बीच सापेक्ष गति होती है तो कुण्डली में विद्युत् धारा उत्पन्न हो जाती है। इस परिघटना को विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं और इस प्रकार उत्पन्न विद्युत् धारा को प्रेरित विद्युत् धारा कहते हैं।

प्रयोग-प्रेरित विद्यत् धारा के प्रदर्शन के लिए:
संलग्न चित्रानुसार एक कुण्डली को एक परिपथ द्वारा एक गैल्वेनोमीटर से संयोजित कीजिए। अब एक छड़ चुम्बक को कुण्डली के पास तेजी से लाइए तो देखते हैं कि गैल्वेनोमीटर में विक्षेप होता है। यदि छड़ चुम्बक स्थिर रहती है तो विक्षेप नहीं होता। चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को कुण्डली के पास लाने पर अथवा दक्षिणी ध्रुव को कुण्डली से दूर ले जाने पर एक दिशा में विक्षेप होता है लेकिन उत्तरी ध्रुव कुण्डली से दूर ले जाने एवं दक्षिणी ध्रुव को कुण्डली के पास लाने पर विक्षेप दूसरी दिशा में होता है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 22
इससे प्रदर्शित होता है कि किसी बन्द कुण्डली (पाथ) के परिच्छेद से होकर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के घटने या बढ़ने पर कुण्डली (पाथ) में प्रेरित विद्युत् धारा प्रवाहित होती है।

प्रश्न 3.
एक AC जनित्र का सिद्धान्त एवं क्रियाविधि नामांकित परिपथ आरेख की सहायता से वर्णन कीजिए। एक AC जनित्र को एक DC जनित्र में बदलने के लिए उसकी संरचना व्यवस्था में क्या परिवर्तन करेंगे?
उत्तर:
विद्युत् जनित्र का नामांकित आरेख –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 7
AC को DC में बदलने के लिए व्यवस्था में परिवर्तन – AC को DC में बदलने के लिए सी वलयों के स्थान पर अर्द्ध-विभक्त वलयों का प्रयोग करेंगे।

प्रश्न 4.
घरेलू विद्युत् परिपथ का एक व्यवस्थात्मक आरेख खींचिए। विद्युत् फ्यूज के महत्व को समझाइए। ऐसा क्यों है कि फ्यूज के जल जाने पर उसी क्षमता का फ्यूज लगाना चाहिए?
उत्तर:
परिपथ का नामांकित चित्र –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 18
परिपथ में अधिक धारा के हिसाब से उपयुक्त क्षमता का फ्यूज लगा होता है यदि लघुपाथन या अतिभारण के कारण परिपथ में धारा का मान बढ़ जाता है तो ऊष्मीय प्रभाव के कारण फ्यूज का तार पिघल जाता है और विद्युत् धारा का प्रवाह रुक जाता है। इससे उपकरण क्षतिग्रस्त होने से बच जाते हैं।

प्रश्न 5.
विद्युत् धारा का उपयोग करते समय हमें कौन-कौन सी मुख्य सावधानियाँ रखनी चाहिए?
अथवा
विद्युत् धारा परिपथों को उपयोग में लाते समय क्या-क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?
उत्तर:
विद्युत् परिपथ के उपयोग में सावधानियाँ:

  1. आग लगने या अन्य किसी दुर्घटना के समय परिपथ का स्विच तुरन्त बन्द कर देना चाहिए।
  2. परिपथ में अतिभारण एवं लघुपाथन से बचने के लिए उपयुक्त क्षमता का फ्यूज प्रयोग में लाना चाहिए।
  3. विद्युत् उपकरणों के उपयोग में सदैव भू-सम्पर्क तार प्रयोग में लाना चाहिए।
  4. प्रयोग में लाते समय धातु के बने विद्युत् उपकरणों को नहीं छूना चाहिए।
  5. परिपथ में फ्यूज एवं स्विचों को सदैव गर्म तार (विद्युन्मय तार) में लगाना चाहिए।
  6. अच्छे किस्म की विद्युत् युक्तियों को उपयोग में लाना चाहिए।
  7. संयोजन तारों के जोड़ों को विद्युत्रोधी टेप से ढक देना चाहिए।
  8. विद्युत् परिपथ में लगे स्विच ऑन-ऑफ करते समय हमारे हाथ गीले नहीं होने चाहिए।
  9. घरेलू विद्युत् उपकरणों का प्रयोग रबर या प्लास्टिक की चप्पल पहनकर करना चाहिए।
  10. उच्च शक्ति के उपकरणों के लिए 15 ऐम्पियर विद्युत् धारा के प्लग, सॉकेट एवं स्विच का प्रयोग करना चाहिए।

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MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

MP Board Class 10th Science Chapter 15 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न शृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 289

प्रश्न 1.
क्या कारण है कि कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय होते हैं और कुछ अजैव निम्नीकरणीय?
उत्तर:
कुछ पदार्थों का मृतोपजीवियों या मृतजीवी अथवा अपघटक एवं जीवाणुओं द्वारा अपघटन या पाचन हो जाता है। इसलिए वे पदार्थ जटिल में सरल में अपघटित हो जाते हैं अथवा जैव निम्नीकरणीय होते हैं लेकिन कुछ पदार्थों का अपघटन नहीं होता इसलिए वे अजैव निम्नीकरणीय होते हैं।

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प्रश्न 2.
ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर:
जैव निम्नीकरणीय पदार्थों का पर्यावरण पर प्रभाव:

  1. अगर जैव निम्नीकरणीय पदार्थों की मात्रा इतनी हो कि वे सूक्ष्मजीवी अपघटकों द्वारा विघटित किए जा सकें तो वे पारिस्थितिक तन्त्र को न केवल सन्तुलित रखते हैं अपितु उपयोगी सिद्ध होते हैं।
  2. अगर जैव निम्नीकरणीय पदार्थों की मात्रा इतनी अधिक हो कि वे सूक्ष्मजीवी अपघटनों द्वारा विघटित न हो सकें तो ऐसे पदार्थ पर्यावरण को प्रदूषित करने लगते हैं।

प्रश्न 3.
ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर:
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों का पर्यावरण पर प्रभाव:

  1. ये पदार्थ कचरे की तरह एकत्रित होते रहते हैं तथा इनका प्रबन्धन करना कठिन होता है तथा ये प्रदूषण पैदा करते हैं।
  2. ये पदार्थ खाद्य श्रृंखला में एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर तक स्थानान्तरित होने के कारण इनका जैविक आवर्धन होता है।

प्रश्न श्रृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 294

प्रश्न 1.
पोषी स्तर क्या है? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण दीजिए तथा इसमें विभिन्न पोषी स्तर बताइए।
उत्तर:
पोषी स्तर:
“खाद्य शृंखला (आहार श्रृंखला) के विभिन्न चरणों को जहाँ पर भोजन अथवा ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है, पोषी स्तर कहते हैं।”
आहार श्रृंखला एवं पोषी स्तर का उदाहरण –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 1

प्रश्न 2.
पारितन्त्र में अपमार्जकों की क्या भूमिका है?
उत्तर:
पारितन्त्र में अपमार्जकों की भूमिका-अपमार्जक (अपघटक सूक्ष्मजीवी) उत्पादकों एवं विभिन्न प्रकार के उपभोक्ताओं के मृत शरीर का अपघटन करके जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल कार्बनिक पदार्थों में परिवर्तित कर देते हैं जिनको उत्पादकों (पौधों) द्वारा मृदा में पोषण के लिए अवशोषण कर लिया जाता है।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 296

प्रश्न 1.
ओजोन क्या है? यह किसी पारितन्त्र को किस प्रकार प्रभावित करती है?
उत्तर:
ओजोन:
ओजोन ऑक्सीजन का एक अपररूप है जिसके एक अणु में ऑक्सीजन के तीन परमाणु होते हैं। इस गैस का अणुसूत्र O3 होता है। ओजोन का पारितन्त्र पर प्रभाव-ओजोन वायुमण्डल में एक सुरक्षात्मक परत का निर्माण करती है जो सूर्य से आने वाली घातक पराबैंगनी किरणों को रोकती है तथा वैश्विक ऊष्मण (ग्लोबल वार्मिंग) पौधाघर प्रभाव (ग्रीन हाउस प्रभाव) आदि से बचाव करती है। पराबैंगनी किरणों से होने वाले घातक रोगों त्वचा कैन्सर, आँख के रोग (मोतियाबिन्द, आँख के घाव) आदि से बचाव करती है।

प्रश्न 2.
आप कचरा निपटान की समस्या को कम करने में क्या योगदान कर सकते हैं? किन्हीं दो तरीकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कचरा निपटान प्रबन्धन में योगदान:

  1. अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों; जैसे-प्लास्टिक एवं पॉलीथीन आदि के उपयोग को बन्द करके जैव निम्नीकरणीय पदार्थों; जैसे-कागज, मिट्टी आदि की बनी वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए।
  2. कचरे का पुनः चक्रण करके पुनः उपयोग में लाना चाहिए।

MP Board Class 10th Science Chapter 15 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-से समूहों में केवल जैव निम्नीकरणीय पदार्थ हैं?
(a) घास, पुष्प तथा चमड़ा।
(b) घास, लकड़ी तथा प्लास्टिक।
(c) फलों के छिलके, केक तथा नींबू का रस।
(d) केक, लकड़ी एवं घास।
उत्तर:
(a) घास, पुष्प तथा चमड़ा।
(c) फलों के छिलके, केक एवं नींबू का रस।
(d) केक, लकड़ी तथा घास।

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन आहार श्रृंखला का निर्माण करते हैं? (2019)
(a) घास, गेहूँ तथा आम
(b) घास, बकरी तथा मानव
(c) बलरी, गाय तथा हाथी
(d) घास, मछली तथा बकरी।
उत्तर:
(b) घास, बकरी तथा मानव।

प्रश्न 3.
निम्न में से कौन पर्यावरण-मित्र व्यवहार कहलाते हैं?
(a) बाजार जाते समय सामान के लिए कपड़े का थैला ले जाना।
(b) कार्य समाप्त हो जाने पर लाइट (बल्ब) तथा पंखे का स्विच बन्द करना।
(c) माँ द्वारा स्कूटर से विद्यालय छोड़ने के बजाय तुम्हारा विद्यालय तक पैदल जाना।
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर;
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 4.
क्या होगा यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें (मार डालें)?
उत्तर:
यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें (मार डालें) तो उसके ऊपर वाले पोषी स्तर के जीव पोषण के अभाव में धीरे-धीरे नष्ट हो जाएँगे तथा नीचे वाले पोषी स्तर में जीवों की संख्या अत्यधिक बढ़ती जायेगी फिर उनमें जीवन संघर्ष होगा।

प्रश्न 5.
क्या किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव भिन्न-भिन्न पोषी स्तरों के लिए अलग-अलग होगा? क्या किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितन्त्र को प्रभावित किए बिना हटाना सम्भव है?
उत्तर:
हाँ, किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने पर उससे नीचे के पोषी स्तरों एवं ऊपर के पोषी स्तरों के लिए अलग-अलग होगा। हाँ, किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितन्त्र को प्रभावित किए बिना हटाना सम्भव है यदि हम उच्चतम पोषी स्तर को हटा दें अर्थात् अपमार्जकों को हटाना पारितन्त्र को प्रभावित करेगा क्योंकि फिर मृतजीवों का अपघटन नहीं होगा।

प्रश्न 6.
जैविक आवर्धन (Biological magnification) क्या है? क्या पारितन्त्र के विभिन्न स्तरों पर जैविक आवर्धन का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न होगा?
उत्तर:
जैविक आवर्धन (Biological magnification):
“पौधों एवं फसलों को रोग मुक्त रखने एवं पीड़कों से बचाने के लिए विभिन्न प्रकार के कीटनाशी, फफूंदनाशी, खरपतवारनाशी एवं पीड़कनाशी आदि रसायनों का प्रयोग किया जाता है। इन रसायनों का अत्यधिक मात्रा में प्रयोग करना पौधों के माध्यम से खाद्य श्रृंखला के विभिन्न पोषण स्तरों में प्रवेश कर जाते हैं तथा वहाँ संचित होने लगते हैं। इस परिघटना को जैविक आवर्धन कहते हैं।” हाँ, पारितन्त्र के विभिन्न स्तरों पर जैविक आवर्धन का प्रभाव भिन्न-भिन्न होता है। चूँकि मनुष्य आहार श्रृंखला में शीर्षस्थ होता है अतः मनुष्य के जैविक आवर्धन सर्वाधिक होता है।

प्रश्न 7.
हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कौन-सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं?
उत्तर:
हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से उत्पन्न समस्याएँ:
हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरा जैसे पॉलीथीन आदि एवं विभिन्न रसायनों का जैव अपघटकों द्वारा अपघटन एवं अपमार्जन नहीं होता। अतः ये पर्यावरण में एकत्रित होते जाते हैं और चारों ओर इस कचरे के ढेर लग जाते हैं। पर्यावरण प्रदूषित होता है। प्रमुखतः मृदा प्रदूषण, वायु प्रदूषण एवं जल प्रदूषण की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, परिणामस्वरूप विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ पैदा होती हैं। कचरे के ढेर की वजह से भू-भाग बेकार हो जाते हैं। जैविक आवर्धन होता है। जब इस कचरे को गाय आदि पशु खाते हैं तो उनके मरने की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं।

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प्रश्न 8.
यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो तो क्या इसका हमारे पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा?
उत्तर:
हमारे द्वारा उत्पादित जैव निम्नीकरणीय कचरा यदि अल्पमात्रा में हो तो उसका सूक्ष्मजीवियों द्वारा अपघटन हो जाता है और अमूल्य खाद्य का निर्माण होता है जिसका पुनः उपयोग पोषण के लिए पौधों द्वारा कर लिया जाता है, हालांकि इससे दुर्गन्ध युक्त गैसों का निर्माण होता है जो वातावरण को दुर्गन्ध से भर देती हैं और यदि कचरा अत्यधिक है तो उसका अपघटन एवं निपटान कठिन ही नहीं अपितु असम्भव हो जाता है जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है और विभिन्न बीमारियों को आमन्त्रित करता है।

प्रश्न 9.
ओजोन परत की क्षति हमारे लिए चिन्ता का विषय क्यों है? इस क्षति को सीमित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
उत्तर:
ओजोन परत की क्षति (क्षरण) हमारे लिए चिन्ता का विषय इसलिए है क्योंकि इसके अनेक दुष्परिणाम हैं, जो निम्नलिखित हैं –

  1. ओजोन परत के क्षरण के कारण सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरण वायुमण्डल में प्रवेश कर जाती है जिससे त्वचा कैन्सर हो जाता है।
  2. मनुष्य की त्वचा की ऊपरी सतह की कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। क्षतिग्रस्त कोशिकाओं से हिस्टामिन नामक रासायनिक पदार्थ स्रावित होता है, जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता नष्ट हो जाती है। फलस्वरूप अल्सर, निमोनिया, ब्रोन्काइटिस जैसी भयानक बीमारियाँ होने की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं।
  3. इससे आनुवंशिक विकृतियाँ उत्पन्न हो जाती हैं तथा चिरकालिक रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
  4. पराबैंगनी विकिरण से आँख के घातक रोग, मोतियाबिन्द, आँख में घाव एवं सूजन हो जाती है।
  5. ओजोन क्षरण से वायुमण्डल का ताप बढ़ जाता है।
  6. इसके सूक्ष्मजीवी एवं वनस्पतियों पर घातक प्रभाव पड़ते हैं। वनस्पतियों में प्रोटीन की कमी हो जाती है। प्रकाश-संश्लेषण एवं चयापचय क्रियाएँ प्रभावित होती हैं।
  7. इसके कारण खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है। उत्पादक शैवाल नष्ट हो जाते हैं। शैवालों के नष्ट होने से जलीय जीव मछलियाँ, जलीय पक्षी, समुद्र में रहने वाले स्तनी जीव आदि प्रभावित होते हैं।
  8. ओजोन परत की क्षति को सीमित करने के लिए उठाए गए कदम-ओजोन परत की क्षति क्लोरोफ्लोरो-कार्बन, नाइट्रस ऑक्साइड तथा मीथेन गैसों के कारण होती है। क्लोरोफ्लोरो-कार्बन सर्वाधिक क्षति पहुँचाता है। इसका विकल्प तलाशा जा रहा है तथा ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।

MP Board Class 10th Science Chapter 15 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 10th Science Chapter 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न में कौन-सा मानव रचित (कृत्रिम) पारितन्त्र है –
(a) पोखर।
(b) खेत।
(c) झील।
(d) जंगल।
उत्तर:
(b) खेत।

प्रश्न 2.
किसी आहार श्रृंखला में तृतीय पोषण स्तर पर सदैव होते हैं –
(a) माँसाहारी।
(b) शाकाहारी।
(c) अपघटक।
(d) उत्पादक।
उत्तर:
(a) माँसाहारी।

प्रश्न 3.
एक पारितन्त्र में होते हैं –
(a) सभी सजीव।
(b) सभी अजैव वस्तुएँ।
(c) सभी सजीव एवं अजैव वस्तुएँ।
(d) कभी सजीव कभी अजैव वस्तुएँ।
उत्तर:
(c) सभी सजीव एवं अजैव वस्तुएँ।

प्रश्न 4.
एक दी हुई खाद्य श्रृंखला में मान लीजिए चतुर्थ पोषण स्तर पर 5 k J ऊर्जा की मात्रा है तो उपभोक्ता स्तर पर कितनी ऊर्जा उपलब्ध होगी?
घास → टिड्डे → मेंढक → सर्प → चील (गिद्ध)
(a) 5 k J
(b) 50 k J
(c) 500 k J
(d) 5000 k J
उत्तर:
(d) 5000 k J

प्रश्न 5.
अजैव निम्नकरणीय पीड़कनाशकों का आहार श्रृंखला के प्रत्येक पोषण स्तर पर बढ़ती मात्रा में संचयन कहलाता है –
(a) पोषण।
(b) प्रदूषण।
(c) जैव-आवर्धन।
(d) सम्मिश्रण।
उत्तर:
(c) जैव-आवर्धन।

प्रश्न 6.
ओजोन परत का क्षरण मुख्य रूप से इस कारण है –
(a) क्लोरोफ्लोरो-कार्बन।
(b) कार्बन मोनोऑक्साइड।
(c) मीथेन।
(d) पीड़कनाशक।
उत्तर:
(a) क्लोरोफ्लोरो-कार्बन।

प्रश्न 7.
वे जीव जो अकार्बनिक यौगिकों से विकिरण ऊर्जा का प्रयोग करके कार्बोहाइड्रेट्स में संश्लेषण करते हैं, कहलाते हैं –
(a) अपघटक।
(b) उत्पादक।
(c) शाकाहारी।
(d) माँसाहारी।
उत्तर:
(b) उत्पादक।

प्रश्न 8.
पारितन्त्र में 10% ऊर्जा उपलब्ध होती है। एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर में स्थानान्तरण हेतु निम्न के रूप में –
(a) ऊष्मीय ऊर्जा।
(b) प्रकाश ऊर्जा।
(c) रासायनिक ऊर्जा।
(d) यान्त्रिक ऊर्जा।
उत्तर:
(c) रासायनिक ऊर्जा।

प्रश्न 9.
उच्चतर पोषण स्तर के जीव जो निम्न पोषण स्तर के अनेक प्रकार के जीवों पर पोषण के लिए निर्भर होते हैं, बनाते हैं –
(a) आहार (खाद्य) जाल।
(b) पारितन्त्र का पिरामिड।
(c) पारितन्त्र।
(d) आहार (खाद्य) शृंखला।
उत्तर:
(a) आहार (खाद्य) जाल।

प्रश्न 10.
पारितन्त्र में ऊर्जा का प्रवाह सदैव होता है –
(a) एकदैशिक।
(b) द्वि-दैशिक।
(c) बहु-दैशिक।
(d) कोई निश्चित दिशा नहीं।
उत्तर:
(a) एकदैशिक।

प्रश्न 11.
अधिक देर तक मनुष्य का पराबैंगनी विकिरण में खुले रहने का परिणाम होता है –
(i) प्रतिरक्षण तन्त्र का नष्ट होना
(ii) फेफड़ों का नष्ट होना
(iii) चर्म कैंसर
(iv) आमाशयिक अल्सर।
(a) (i) एवं (ii)
(b) (ii) एवं (iv)
(c) (i) एवं (iii)
(d) (iii) एवं (iv)
उत्तर:
(c) (i) एवं (iii)

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प्रश्न 12.
वस्तुओं के निम्न समूहों में से किनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ हैं?
(i) लकड़ी, कागज, चमड़ा।
(ii) पॉलीथीन, डिटर्जेण्ट, PVC।
(iii) प्लास्टिक, डिटर्जेण्ट, घास।
(iv) प्लास्टिक, बैकेलाइट, DDT।
(a) (iii)
(b) (iv)
(c) (i) एवं (iii)
(d) (ii), (iii) एवं (iv)
उत्तर:
(d) (ii), (iii) एवं (iv)

प्रश्न 13.
एक खाद्य श्रृंखला में पोषण स्तरों को कौन सीमित करता है?
(a) उच्चतर पोषण स्तर में ऊर्जा का कम होना।
(b) अपर्याप्त खाद्य आपूर्ति।
(c) प्रदूषित वायु।
(d) जल।
उत्तर:
(a) उच्चतर पोषण स्तर में ऊर्जा का कम होना।

प्रश्न 14.
निम्न में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) सभी हरे पेड़-पौधे एवं हरी-नीली ऐल्गी उत्पादक होते हैं।
(b) हरे पौधे अपना भोजन कार्बनिक यौगिकों से लेते हैं।
(c) उत्पादक अपना भोजन अकार्बनिक पदार्थों से प्राप्त करते हैं।
(d) पौधे सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित कर देते हैं।
उत्तर:
(b) हरे पौधे अपना भोजन कार्बनिक यौगिकों से लेते हैं।

प्रश्न 15.
कौन-से जैव समूह आहार श्रृंखला का निर्माण नहीं करते?
(i) घास, शेर, खरगोश, भेड़िया।
(ii) जलीय पौधे, मनुष्य, मछली, टिड्डे।
(iii) भेड़िया, घास, सर्प, चीता।
(iv) मेंढक, सर्प, चील, घास, टिड्डे।
(a) (i) एवं (iii)
(b) (iii) एवं (iv)
(c) (ii) एवं (iii)
(d) (i) एवं (iv)
उत्तर:
(c) (ii) एवं (iii)

प्रश्न 16.
हरे पौधों द्वारा प्रकाश-संश्लेषण के लिए सौर विकिरण की ऊर्जा का निम्न प्रतिशत भाग अवशोषित किया जाता है –
(a) 1%
(b) 5%
(c) 8%
(d) 10%
उत्तर:
(a) 1%

प्रश्न 17.
संलग्न चित्र के विभिन्न पोषण स्तर दिखाए गए हैं। एक पिरामिड के रूप में किस पोषण स्तर में सर्वाधिक ऊर्जा उपलब्ध होती है?
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 2
(a) T4
(b) T2
(c) T1
(d) T3
उत्तर:
(c) T1

प्रश्न 18.
क्या होगा यदि दी हुई आहार (खाद्य) श्रृंखला से हिरन गायब हो जाएँ –
घास → हिरन → चीता
(a) चीतों की जनसंख्या बढ़ जायेगी।
(b) घास की मात्रा (जनसंख्या) बढ़ जाएगी।
(c) चीते घास खाना प्रारम्भ कर देंगे।
(d) चीतों की जनसंख्या घट जाएगी और घास की जनसंख्या बढ़ जाएगी।
उत्तर:
(d) चीतों की जनसंख्या घट जाएगी और घास की जनसंख्या बढ़ जाएगी।

प्रश्न 19.
किसी पारितन्त्र में अपघटक –
(a) अकार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में परिवर्तित करते हैं।
(b) कार्बनिक पदार्थों को अकार्बनिक रूप में परिवर्तित करते हैं।
(c) अकार्बनिक पदार्थों को कार्बनिक पदार्थों में परिवर्तित करते हैं।
(d) कार्बनिक पदार्थों को अपघटित नहीं करते।
उत्तर:
(b) कार्बनिक पदार्थों को अकार्बनिक रूप में परिवर्तित करते हैं।

प्रश्न 20.
यदि एक टिड्डे को मेंढक खा जाता है तब ऊर्जा का स्थानान्तरण होगा –
(a) उत्पादक से अपघटक को।
(b) उत्पादक से प्राथमिक उपभोक्ता को।
(c) प्राथमिक उपभोक्ता से द्वितीयक उपभोक्ता को।
(d) द्वितीय उपभोक्ता से प्राथमिक उपभोक्ता को।
उत्तर:
(c) प्राथमिक उपभोक्ता से द्वितीयक उपभोक्ता को।

प्रश्न 21.
डिस्पोजेवल प्लास्टिक प्लेटों का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि –
(a) वे हल्के वजन के पदार्थों से बने होते हैं।
(b) वे विषाक्त पदार्थों से बने होते हैं।
(c) वे जैव निम्नीकरणीय पदार्थों से बने होते हैं।
(d) वे अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों से बने होते हैं।
उत्तर:
(d) वे अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों से बने होते हैं।

रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर के लिए ऊर्जा का स्थानान्तरण …….प्रतिशत होता है। (2019)
  2. हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण के लिए सौर विकिरण ऊर्जा का केवल ……….. प्रतिशत भाग अवशोषित करते हैं।
  3. एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर को ऊर्जा का भाग ………. जाता है।
  4. मनुष्य …….. जीव है।
  5. किसी आहार (खाद्य) श्रृंखला में केवल ……….. पोषण स्तर ही हो सकते हैं।

उत्तर:

  1. दस।
  2. एक।
  3. घटता।
  4. सर्वाहारी।
  5. चार-पाँच।

जोड़ी बनाइए
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 3
उत्तर:

  1. → (c)
  2. → (d)
  3. → (e)
  4. → (a)
  5. → (b)

सत्य/असत्य कथन

  1. कुत्ता सर्वाहारी है।
  2. मनुष्य अपना भोजन स्वयं पकाता है, इसलिए उत्पादक है।
  3. क्लोरोफ्लोरो-कार्बन ओजोन परत को क्षीण करती है।
  4. पृथ्वी की सतह से ऊपर वायु से घिरा क्षेत्र पर्यावरण कहलाता है।
  5. ओजोन परत पराबैंगनी विकिरण को रोकता है।

उत्तर:

  1. सत्य।
  2. असत्य।
  3. सत्य।
  4. असत्य।
  5. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. जो पदार्थ सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित होते हैं, क्या कहलाते हैं?
  2. जो पदार्थ सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित नहीं होते हैं, क्या कहलाते हैं?
  3. पौधे अपना भोजन किस प्रक्रिया द्वारा बनाते हैं?
  4. अपघटक मृतजीवों को किस प्रकार के पदार्थों में अपघटित करते हैं?
  5. अनेक आहार श्रृंखलाओं का एक संयुक्त समूह क्या कहलाता है?

उत्तर:

  1. जैव निम्नीकरणीय।
  2. अजैव निम्नीकरणीय।
  3. प्रकाश-संश्लेषण।
  4. सरल अकार्बनिक।
  5. आहार (खाद्य) जाल।

MP Board Class 10th Science Chapter 15 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पर्यावरण क्या है?
उत्तर:
पर्यावरण:
“चारों ओर की उन बाहरी दशाओं का सम्पूर्ण योग, जिसके अन्दर एक जीव या समुदाय रहता है, पर्यावरण कहलाता है।”

प्रश्न 2.
जैव निम्नीकरणीय पदार्थ क्या होते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जैव निम्नीकरणीय पदार्थ:
“वे पदार्थ जो सूक्ष्मजीवों द्वारा आसानी से अपघटित हो जाते हैं तथा अपघटन के बाद हानिकारक पदार्थ नहीं बनते, जैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं।”

उदाहरण:
घरेलू अपशिष्ट, मलमूत्र, वाहितमल, कृषि एवं जन्तु अपशिष्ट आदि।

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प्रश्न 3.
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ क्या होते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ-“वे पदार्थ जो सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित नहीं होते, अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं।” ।

उदाहरण:
विभिन्न कृषि रसायन, पॉलीथीन, कृत्रिम रेशे आदि।

प्रश्न 4.
अपशिष्ट किन्हें कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अपशिष्ट:
“उपयोग के बाद त्यागा गया पदार्थ जो वातावरण को प्रदूषित करता है, अपशिष्ट कहलाता है।”

उदाहरण:
घरेलू अपशिष्ट, कृषि अपशिष्ट, पॉलीथीन आदि।

प्रश्न 5.
पारिस्थितिकी क्या है? पारिस्थितिक तन्त्र के प्रमुख घटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
पारिस्थितिकी:
“विज्ञान की वह शाखा, जिसमें पारिस्थितिक तन्त्र का अध्ययन किया जाता है, पारिस्थितिकी कहलाती है।”

पारिस्थितिक तन्त्र के प्रमुख घटक-इसके दो घटक हैं –

  1. जैविक घटक।
  2. अजैविक घटक।

प्रश्न 6.
जैविक घटक क्या हैं? कार्य के आधार पर जैविक घटकों को कौन-कौन से भागों में बाँटा गया है?
उत्तर:
जैविक घटक:
“पारिस्थितिक तन्त्र के वे घटक जो सजीव होते हैं, जैविक घटक कहलाते हैं।”

जैविक घटकों को कार्य के आधार पर निम्न तीन भागों में बाँटा गया है –

  1. उत्पादक।
  2. उपभोक्ता।
  3. अपघटक (अपमार्जक)।

प्रश्न 7.
उत्पादक किन्हें कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
उत्पादक:
“जो जीव अपने पोषण के लिए सौर ऊर्जा एवं क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल को प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रिया द्वारा कार्बोहाइड्रेट में परिवर्तित कर देते हैं, उन्हें उत्पादक कहते हैं।”

उदाहरण: हरे पेड़-पौधे और हरी, नीली शैवाल (ऐल्गी)।

प्रश्न 8.
उपभोक्ता किन्हें कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
उपभोक्ता:
“वे जीव जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपने पोषण के लिए पौधों (उत्पादकों) पर निर्भर करते हैं तथा अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते, उपभोक्ता कहलाते हैं।

उदाहरण: सभी प्रकार के जन्तु।

प्रश्न 9.
पोषण के आधार पर उपभोक्ताओं को किन-किन भागों में बाँटा गया है?
उत्तर:
पोषण के आधार पर उपभोक्ताओं को निम्न तीन भागों में बाँटा गया है –

  1. शाकाहारी।
  2. माँसाहारी।
  3. सर्वाहारी।

प्रश्न 10.
शाकाहारी से क्या समझते हो? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
शाकाहारी: “वे उपभोक्ता जो अपने पोषण के लिए केवल पेड़-पौधों पर निर्भर रहते हैं, शाकाहारी कहलाते हैं।”

उदाहरण: भेड़-बकरी प्रायः सभी पालतू पशु एवं खरगोश आदि।

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प्रश्न 11.
माँसाहारी किन्हें कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
माँसाहारी:
“वे जन्तु जो अपने पोषण के लिए केवल जन्तुओं पर निर्भर करते हैं अर्थात् उनके माँस का भक्षण करते हैं, माँसाहारी कहलाते हैं।”

उदाहरण: भेड़िया, शेर, बिल्ली आदि।

प्रश्न 12.
सर्वाहारी क्या होते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
सर्वाहारी:
“वे जन्तु जो अपने पोषण के लिए पेड़-पौधों एवं जन्तुओं दोनों पर निर्भर रहते हैं, सर्वाहारी कहलाते हैं।”

उदाहरण: मनुष्य, कुत्ता, कौआ आदि।

प्रश्न 13.
अजैविक घटक क्या होते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अजैविक घटक:
“पारितन्त्र के कार्बनिक एवं अकार्बनिक पदार्थ तथा भौतिक वातावरण आदि सभी अजैव पदार्थ अजैविक घटक कहलाते हैं।”

उदाहरण:
कार्बनिक पदार्थ – कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन आदि।
अकार्बनिक पदार्थ – हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि।
भौतिक वातावरण – प्रकाश, ताप आदि।

प्रश्न 14.
आहार श्रृंखला (खाद्य श्रृंखला) किसे कहते हैं?
उत्तर:
आहार श्रृंखला (खाद्य श्रृंखला):
“भोजन रूपी ऊर्जा की जीवों में क्रमिक रूपान्तरण की श्रृंखला आहार श्रृंखला (खाद्य श्रृंखला) कहलाती है।”

प्रश्न 15.
खाद्य जाल (आहार जाल) किसे कहते हैं?
उत्तर:
आहार जाल (खाद्य जाल):
“जब अनेक खाद्य शृंखलाएँ परस्पर मिलकर एक जटिल पथ बनाती है तो एक जाल-सा बनता है, जिसे आहार जाल (खाद्य जाल) कहते हैं।”

प्रश्न 16.
ग्रीन हाउस गैसें किन्हें कहते हैं? उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
ग्रीन हाउस गैसें:
“जो गैसें पौधा घर प्रभाव (ग्रीन हाउस प्रभाव) उत्पन्न करती हैं, ग्रीन हाउस गैसें कहलाती हैं।”

उदाहरण:
कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रोजन के ऑक्साइड एवं क्लोरोफ्लोरो-कार्बन आदि।

प्रश्न 17.
ग्लोबल वार्मिंग से क्या समझते हो?
उत्तर:
ग्लोबल वार्मिंग:
“मानव के क्रियाकलापों के फलस्वरूप ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण सम्पूर्ण पृथ्वी का तापमान बढ़कर सामान्य तापमान से अधिक हो रहा है, यह घटना ग्लोबल वार्मिंग कहलाती है।”

प्रश्न 18.
ओजोन परत क्या है? यह क्यों क्षीण हो रही है?
उत्तर:
ओजोन परत:
“हमारे वायुमण्डल में समुद्र सतह से 32 से 80 किमी तक ओजोन की एक मोटी परत पाई जाती है, जिसे ओजोन परत कहते हैं।” ओजोन परत ऐरोसॉल (क्लोरोफ्लोरो-कार्बन) जैसे प्रदूषकों की उपस्थिति के कारण क्षीण हो रही है।

प्रश्न 19.
अम्ल वर्षा किसे कहते हैं?
उत्तर:
अम्ल वर्षा:
वायुमण्डल में जब अम्लीय गैसें; जैसे-CO2, SO2, SO3 एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइड एकत्रित हो जाते हैं तो वर्षा के जल में घुलकर अम्ल बनकर बरसते हैं, जिसे अम्ल वर्षा कहते हैं।

प्रश्न 20.
यदि किसी खाद्य श्रृंखला के प्रथम पोषी स्तर पर 10,000 जूल ऊर्जा उपलब्ध है, तो द्वितीय पोषी स्तर के जीवों को कितनी ऊर्जा उपलब्ध होगी?
उत्तर:
द्वितीय पोषी स्तर के जीवों के लिए उपलब्ध –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 4

प्रश्न 21.
ओजोन परत की क्षति चिन्ता का विषय है, क्यों?
उत्तर:
ओजोन परत की क्षति (क्षरण) हमारे लिए चिन्ता का विषय इसलिए है क्योंकि इसके अनेक दुष्परिणाम हैं, जो निम्नलिखित हैं –

  1. ओजोन परत के क्षरण के कारण सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरण वायुमण्डल में प्रवेश कर जाती है जिससे त्वचा कैन्सर हो जाता है।
  2. मनुष्य की त्वचा की ऊपरी सतह की कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। क्षतिग्रस्त कोशिकाओं से हिस्टामिन नामक रासायनिक पदार्थ स्रावित होता है, जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता नष्ट हो जाती है। फलस्वरूप अल्सर, निमोनिया, ब्रोन्काइटिस जैसी भयानक बीमारियाँ होने की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं।
  3. इससे आनुवंशिक विकृतियाँ उत्पन्न हो जाती हैं तथा चिरकालिक रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
  4. पराबैंगनी विकिरण से आँख के घातक रोग, मोतियाबिन्द, आँख में घाव एवं सूजन हो जाती है।
  5. ओजोन क्षरण से वायुमण्डल का ताप बढ़ जाता है।
  6. इसके सूक्ष्मजीवी एवं वनस्पतियों पर घातक प्रभाव पड़ते हैं। वनस्पतियों में प्रोटीन की कमी हो जाती है। प्रकाश-संश्लेषण एवं चयापचय क्रियाएँ प्रभावित होती हैं।
  7. इसके कारण खाद्य श्रृंखला प्रभावित होती है। उत्पादक शैवाल नष्ट हो जाते हैं। शैवालों के नष्ट होने से जलीय जीव मछलियाँ, जलीय पक्षी, समुद्र में रहने वाले स्तनी जीव आदि प्रभावित होते हैं।
  8. ओजोन परत की क्षति को सीमित करने के लिए उठाए गए कदम-ओजोन परत की क्षति क्लोरोफ्लोरो-कार्बन, नाइट्रस ऑक्साइड तथा मीथेन गैसों के कारण होती है। क्लोरोफ्लोरो-कार्बन सर्वाधिक क्षति पहुँचाता है। इसका विकल्प तलाशा जा रहा है तथा ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है।

प्रश्न 22.
निम्नलिखित खाद्य श्रृंखला में, शेर को 100 J ऊर्जा उपलब्ध है। उत्पादक स्तर पर कितनी ऊर्जा उपलब्ध थी?
पादप → हिरण → शेर
उत्तर:
उत्पादक स्तर (पादपों) के लिए –
उपलब्ध ऊर्जा = 100 J × (10)2 = 10.000 J

प्रश्न 23.
अनुचित तरीके से कचरे (अपशिष्ट) का फेंकना पर्यावरण के लिए अभिशाप क्यों है?
उत्तर:
अनुचित तरीके से फेंके गए कचरे (अपशिष्ट) का उचित विस्तारण न होने के कारण यह वातावरण को प्रदूषित करता है। इससे वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण एवं जल प्रदूषण होता है जो सभी जीवधारियों के लिए हानिकारक होते हैं।

प्रश्न 24.
एक पोखर (तालाब) की सामान्य आहार श्रृंखला (खाद्य श्रृंखला) लिखिए।
उत्तर:
पोखर (तालाब) की एक सामान्य आहार श्रृंखला (खाद्य श्रृंखला) –
जलीय पौधे → छोटे जलीय जन्तु, लार्वा, कीड़े-मकोड़े आदि → मछलियाँ → जलीय पक्षी।

प्रश्न 25.
फसल वाले क्षेत्र (खेत) कृत्रिम पारितन्त्र माने जाते हैं, क्यों?
उत्तर:
फसल वाले क्षेत्र (खेत) मनुष्य द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं, प्राकृतिक रूप से नहीं बनते, इसलिए इन्हें कृत्रिम पारितन्त्र माना जाता है।

प्रश्न 26.
निम्न में से गलत जोड़ी को छाँटिए एवं इसका संशोधन कीजिए –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 5
उत्तर:
गलत जोड़ी है –
(b) पारितन्त्र – पर्यावरण के जैवीय घटक

संशोधित रूप
(b) पारितन्त्र – पर्यावरण के जैवीय एवं अजैवीय घटक

प्रश्न 27.
हम तालाबों एवं झीलों की सफाई नहीं करते जबकि जल जीवशाला की सफाई करनी पड़ती है, क्यों?
उत्तर:
तालाब एवं झीलें प्राकृतिक पारितन्त्र हैं जो पूर्ण हैं तथा परस्पर अन्योन्य क्रियाओं को करने में सक्षम हैं जबकि जल जीवशाला एक कृत्रिम एवं अपूर्ण मानवनिर्मित पारितन्त्र है जिसमें परस्पर अन्योन्य क्रियाओं की क्षमता नहीं इसलिए जल जीवशाला को सफाई की आवश्यकता होती है जबकि तालाब एवं झीलों की नहीं।

प्रश्न 28.
उर्वरक उद्योग (कारखानों) के कचरे के निस्तारण की तकनीक सुझाइए।
उत्तर:

  1. वायु प्रदूषण का नियन्त्रण करना चाहिए।
  2. वाहित कचरे को पर्यावरण में बहाने से पहले उपचारित करना चाहिए।

प्रश्न 29.
उर्वरक उद्योग के उप-उत्पाद क्या हैं? वे पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
उर्वरक उद्योग के उप-उत्पाद हानिकारक वायु प्रदूषण गैसें; जैसे-सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) एवं नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) आदि हैं जो वायु प्रदूषक हैं तथा अम्ल वर्षा के कारक हैं।

MP Board Class 10th Science Chapter 15 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कचरे के प्रबन्धन की तकनीक पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
कचरे के प्रबन्धन की तकनीक:

  1. कचरे का वर्गीकरण विघटनीय-अविघटनीय; ज्वलनशील-अज्वलनशील इत्यादि में करना।
  2. स्थान-स्थान पर कूड़ेदान रखवाना।
  3. अपशिष्ट को डम्पिंग स्थल तक पहुँचाने की उत्तम व्यवस्था करना।
  4. ठोस जैविक अपशिष्ट को वर्मीकम्पोस्टिंग विधि द्वारा खाद में परिवर्तित करना।
  5. अनुपयोगी अजैविक अपशिष्ट को पुन:चक्रण द्वारा उपयोगी पदार्थों में बदलना।

प्रश्न 2.
अजैविक तथा जैविक घटकों की परस्पर अन्तक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अजैविक एवं जैविक घटकों की अन्तक्रिया:
जैविक घटक के उत्पादक (हरे पौधे) वातावरण से अजैविक अकार्बनिक पदार्थ कार्बन डाइ-ऑक्साइड एवं जल लेकर सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाशसंश्लेषण के द्वारा अपना भोजन बनाते हैं। वे उत्पादक एवं स्वपोषी होते हैं। अत: उत्पादकों को कार्बनिक एवं अकार्बनिक पदार्थों एवं भौतिक वातावरण (अजैविक घटकों) की आवश्यकता होती है।

उपभोक्ता अपने पोषण के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पौधों पर निर्भर करते हैं तथा उन्हें वातावरण के अजैविक घटकों (प्रकाश, ताप, जल एवं वायु) की भी आवश्यकता होती है। अतः कह सकते हैं कि सजीवों की प्रथम अन्तक्रिया वातावरण के तत्वों से तथा द्वितीय अन्तक्रिया सजीवों के साथ परस्पर होती है। जैविक तत्वों की मृत्यु के बाद सूक्ष्मजीवी अपघटकों के द्वारा उनका अपघटन कर दिया जाता है। उनमें व्याप्त मूल खनिज पदार्थ तथा कार्बनिक एवं अकार्बनिक पदार्थों को अजैविक वातावरण में मिला दिया जाता है।

MP Board Solutions

प्रश्न 3.
एक खाद्य श्रृंखला को चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
खाद्य श्रृंखला का चित्र द्वारा प्रदर्शन –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 6

प्रश्न 4.
एक खाद्य जाल को चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
खाद्य जाल का चित्र द्वारा प्रदर्शन –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 7

प्रश्न 5.
पर्यावरण संरक्षण क्या है? पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण संरक्षण:
“प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करके पर्यावरण को प्रदूषण रहित एवं स्वस्थ बनाना, पर्यावरण संरक्षण कहलाता है।”

पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य –

  1. प्राकृतिक सम्पदाओं को निरन्तर बनाये रखना, उनका सदुपयोग करना तथा उनकी वृद्धि करना।
  2. नवीनीकरणीय एवं अनवीनीकरणीय संसाधनों का उपयोग विवेक एवं मितव्ययिता के साथ करना।
  3. प्राकृतिक संसाधनों (जल, मृदा, वन, खनिज, सम्पदा, जन्तुओं एवं ऊर्जा) का संरक्षण करके पर्यावरण का संरक्षण करना।

प्रश्न 6.
पर्यावरण संरक्षण पर प्रकाश डालिए।
अथवा
प्राकृतिक सम्पदा एवं संसाधन के संरक्षण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण एवं प्राकृतिक सम्पदा का संरक्षण –

  1. जल संरक्षण: जल को प्रदूषण से बचाना, उसके अतिव्यय को रोकना, उसका उपयुक्त तरीके से संग्रहण करना। इन सब क्रियाकलापों से जल का संरक्षण किया जा सकता है।
  2. मृदा संरक्षण: इसके संरक्षण के लिए खेतों पर मेंड बनाना, जैविक खाद का प्रयोग करना, वृक्षारोपण करना आदि।
  3. वन संरक्षण: वन के संरक्षण के लिए वनों का रखरखाव ठीक से करना, वृक्षारोपण, राष्ट्रीय उद्यान एवं अभ्यारण्यों की स्थापना करना आदि।
  4. खनिज: इनके संरक्षण के लिए इनका मितव्ययिता के साथ सीमित प्रयोग करना।
  5. ऊर्जा: इसके संरक्षण के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का अधिकाधिक उपयोग करना तथा परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के प्रयोग में मितव्ययिता रखना।

प्रश्न 7.
पर्यावरण संरक्षण हेतु जागरूकता क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
पर्यावरण संरक्षण हेतु जागरूकता की आवश्यकता:
पर्यावरण संरक्षण एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। इसे अकेले न तो शासन एवं प्रशासन पूर्ण कर सकता है और न कोई व्यक्ति। यह संयुक्त रूप से प्रयत्न करने पर ही सम्भव है। इसके लिए आवश्यक है जनता को जागरूक बनाया जाए। उसे पर्यावरण के नष्ट होने के कारणों, उसके प्रभावों की जानकारी देना आवश्यक है।

जनजागरण के द्वारा ही वे अपने पर्यावरण की वास्तविक स्थितियों से भलीभाँति परिचित हो सकेंगे और पर्यावरण के संरक्षण में अपना क्रियात्मक योगदान दे सकेंगे। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के लिए समग्र जागरूकता आवश्यक है।

प्रश्न 8.
ग्रीन हाउस प्रभाव को समझाइए।
उत्तर:
ग्रीन हाउस प्रभाव (Green House Effect):
ठण्डे प्रदेशों में पौधों को ठण्ड से बचाने के लिए काँच या फाइबर ग्लास के बने पौधाघरों में रखा जाता है। सूर्य से निकलने वाली छोटी तरंगदैर्घ्य की विकिरण काँच से होकर इसमें प्रवेश कर जाती है तथा वहाँ ये बड़ी तरंगदैर्घ्य की विकिरणों में बदल जाती है जिनको काँच बाहर आने से रोकता है।

इस प्रकार पौधाघर का ताप वायुमण्डल के ताप से अधिक रहता है। इस घटना को पौधाघर प्रभाव या ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं। काँच की जगह यही कार्य पर्यावरण में कार्बन डाइ-ऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, ओजोन, क्लोरोफ्लोरोकार्बन आदि गैसें करती हैं, जिन्हें ग्रीन हाउस गैसें कहते हैं। इससे पृथ्वी का ताप बढ़ जाता है।

प्रश्न 9.
ग्लोबल वार्मिंग को समझाइए।
उत्तर:
ग्लोबल वार्मिंग की व्याख्या-मनुष्य के क्रियाकलापों से वायुमण्डल में ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि हो रही है। ये गैसें कम्बल का कार्य करती हैं तथा ग्रीन हाउस के प्रभाव के कारण ये सूर्य के प्रकाश की ऊष्मा को पृथ्वी पर आने देती हैं लेकिन पृथ्वी की ऊष्मा को अन्तरिक्ष में नहीं जाने देती। ज्यों-ज्यों ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि होती जा रही है, त्यों-त्यों पृथ्वी पर ऊष्मा की मात्रा में वृद्धि होती जा रही है। इससे वैश्विक ताप में भी वृद्धि होती जा रही है। इस तरह ग्लोबल वार्मिंग की समस्या खड़ी हो रही है। इससे पृथ्वी का सामान्य ताप पहले से काफी बढ़ गया है।

प्रश्न 10.
ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण लिखिए।
उत्तर:
ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य कारण:

  1. वृक्षों के अत्यधिक कटान से कार्बन डाइ-ऑक्साइड गैस की वातावरण में वृद्धि होना।
  2. जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम) आदि के आंशिक या पूर्ण दहन से कार्बन मोनो-ऑक्साइड एवं कार्बन डाइ-ऑक्साइड एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइडों की मात्रा में वृद्धि।
  3. रेफ्रिजरेटरों एवं एयर कण्डीशनरों में ऐरोसोल का उपायेग, अग्निशमन यन्त्रों तथा फोम के उपयोग से क्लोरोफ्लोरोकार्बन का वातावरण में एकत्रित होना।
  4. अनेक जैविक प्रक्रियाओं, कृषि कार्यों एवं अपशिष्टों के सड़ने से ग्रीन हाउस गैसों का वातावरण में एकत्रित होना।

प्रश्न 11.
ग्लोबल वार्मिंग के विनाशकारी परिणामों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
ग्लोबल वार्मिंग के विनाशकारी परिणाम:

  1. पृथ्वी का तापमान बढ़ने से पानी के वाष्पीकरण की दर बढ़ेगी जिससे उपलब्ध पानी में कमी आयेगी।
  2. पृथ्वी का तापमान बढ़ने से ध्रुवों की बरफ पिघलेगी जिससे समुद्र का जल स्तर बढ़ने से तटीय आबादी को जीवन का खतरा हो जायेगा।
  3. पेड़-पौधों एवं जन्तुओं की मृत्यु सम्भव है।
  4. जल एवं वायु प्रदूषण में तेजी से वृद्धि होगी।
  5. असामयिक वर्षा, अतिवृष्टि एवं अनावृष्टि एवं बाढ़ की सम्भावनाएँ बढ़ जायेंगी।

प्रश्न 12.
ग्लोबल वार्मिंग से बचाव के उपाय लिखिए।
उत्तर:
ग्लोबल वार्मिंग से बचाव के उपाय:

  1. वृक्षों के अत्यधिक कटान को प्रतिबन्धित करना चाहिए तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण करना चाहिए।
  2. जीवाश्म ईंधन का मितव्ययिता से तथा पूर्ण दहन के साथ उपयोग करना चाहिए।
  3. क्लोरोफ्लोरोकार्बन (ऐरोसोल) को पूर्णतः प्रतिबन्धित कर देना चाहिए।
  4. रासायनिक खादों के प्रयोग को बन्द करके जैविक खादों के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
  5. अधिकाधिक वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करना चाहिए।

प्रश्न 13.
ओजोन स्तर (परत) के ह्रास (क्षरण) के कारणों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
ओजोन स्तर (परत) के ह्रास (क्षरण) के कारण:

  1. क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस (ऐरोसोल) द्वारा ओजोन को नष्ट करना।
  2. मोटर वाहनों, ऊर्जा संयन्त्रों एवं विभिन्न प्रकार के उद्योगों से निकलने वाले धुएँ में पाई जाने वाली सल्फर डाइ-ऑक्साइड, कार्बन मोनो-ऑक्साइड,
  3. नाइट्रोजन के ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन आदि द्वारा ओजोन स्तर का क्षरण करना।
  4. अन्तरिक्ष यान, जेट वायुयान में ईंधन के जलने से नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्पन्न होना।
  5. ज्वालामुखी विस्फोट के कारण वायुमण्डल में सल्फर डाइ-ऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि होना।
  6. हेलोन-1301, क्लोरोफॉर्म, कार्बन टेट्राक्लोराइड, मीथेन, ऐरोसोल, फोम आदि से ओजोन का क्षरण होना।

प्रश्न 14.
अम्ल वर्षा कैसे होती है?
उत्तर:
अम्ल वर्षा की प्रक्रिया:
वायु प्रदूषण के फलस्वरूप वायुमण्डल में कार्बन डाइ-ऑक्साइड, सल्फर डाइ-ऑक्साइड एवं नाइट्रोजन के ऑक्साइड जैसी अम्लीय गैसें एकत्रित हो जाती हैं। सूर्य की ऊष्मा के कारण नदियों, झीलों, तालाबों एवं समुद्रों का जल वाष्प बनकर वायुमण्डल में एकत्रित होता है। यह जलवाष्प उन अम्लीय गैसों से मिश्रित हो जाती है।

जब अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, तब जलवाष्प संघनित होकर जल की बूंदों में परिवर्तित होकर अम्लीय गैसों को अपने में घोलकर अम्ल बनाती है। इसमें कार्बनिक अम्ल, सल्फ्यूरस अम्ल, सल्फ्यूरिक अम्ल एवं नाइट्रिक अम्ल बनते हैं। जब जल की बूंदें वर्षा के रूप में पृथ्वी पर बरसती हैं तो उनके साथ अम्ल भी बरसता है। इस प्रकार अम्ल वर्षा होती है।

प्रश्न 15.
मानव के क्रियाकलापों ने जीवमण्डल के जीव रूपों को बुरी तरह प्रभावित किया है। मानव द्वारा प्रकृति के असीमित दोहन ने जीवमण्डल के जैव-अजैव अवयवों के संवेदनशील सन्तुलन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। मानव द्वारा स्वयं सृजित प्रतिकूल परिस्थितियों ने न केवल उसकी अपनी उत्तरजीविता को ललकारा है, बल्कि पृथ्वी के समस्त जीवों को भी ललकारा है। आपका एक सहपाठी जो आपके स्कूल के ‘ईको क्लब’ का सक्रिय सदस्य है, स्कूल के छात्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता उत्पन्न कर रहा है तथा इसे समाज में भी फैला रहा है। वह पास-पड़ोस के पर्यावरण के निम्नीकरण को रोकने के लिए भी कठोर कार्य कर रहा है।
(a) हमें अपने पर्यावरण का संरक्षण करना क्यों आवश्यक है?
(b) घरेलू अपशिष्टों के निरापद निपटारे के लिए हरी और नीली कड़ा-पेटियों का महत्व लिखिए।
(c) आपके उस सहपाठी द्वारा प्रदर्शित दो मूल्यों की सूची बनाइए जो आपके विद्यालय के ‘ईको क्लब’ का सक्रिय सदस्य है।
उत्तर:
(a) हमें अपने पर्यावरण का संरक्षण करना अति आवश्यक है क्योंकि हमारे द्वारा प्रकृति के असीमित दोहन ने जीवमण्डल के जैव एवं अजैव अवयवों के संवेदनशील सन्तुलन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। हमारे द्वारा सृजित प्रतिकूल परिस्थितियों ने न केवल हमारी अपनी उत्तरजीविता खतरे पड़ गयी है अपितु पृथ्वी के समस्त जीवों की उत्तरजीविता को भी भारी खतरा हो गया है। सम्पूर्ण पर्यावरण असन्तुलित होता जा रहा है।

(b) घरेलू अपशिष्टों के निपटारे के लिए हरी और नीली कूड़ा-पेटियों का बहुत महत्व है। इससे जैव निम्नीकरणीय एवं अजैव निम्नीकरणीय कचरे को पृथक्-पृथक् रखा जा सकता है जिससे उनका उचित तरीके से निस्तारण किया जा सके। अलग-अलग रंग होने से कचरे के मिश्रित होने की सम्भावना नहीं रहती।

(c) ‘ईको क्लब’ के सक्रिय सदस्य द्वारा प्रदर्शित मूल्य:

  1. पर्यावरणीय-मित्रता।
  2. मानवीय मूल्य।

प्रश्न 16.
जैव निम्नीकरणीय एवं अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों के बीच प्रत्येक का एक उदाहरण देकर विभेदन कीजिए। उन दो आदतों में परिवर्तन की सूची बनाइए जिन्हें पर्यावरण को बचाने के लिए, व्यक्ति अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों के निपटारा करने में अपना सकते हैं।
उत्तर:
जैव निम्नीकरणीय पदार्थ वे पदार्थ होते हैं जो सूक्ष्मजीवियों द्वारा आसानी से अपघटित होकर सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदल जाते हैं। जैसे जन्तु एवं वनस्पति अवशेष एवं अपशिष्ट, जबकि अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ वे पदार्थ हैं जिनका सूक्ष्मजीवियों द्वारा या तो अपघटन नहीं होता या फिर बहुत अधिक धीमी गति से अपघटन होता है और वे लम्बे समय तक प्रकृति में बने रहकर पर्यावरण को हानि पहुँचाते हैं; जैसे-पॉलीथीन, प्लास्टिक एवं धातुएँ आदि।

पर्यावरण बचाने के लिए अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों के निपटारे के लिए आदतों में बदलाव –

  1. अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों पॉलीथीन एवं प्लास्टिक आदि के स्थान पर उनकी वैकल्पिक जैव निम्नीकरणीय पदार्थों का अधिकाधिक प्रयोग करना; जैसे-कागज की थैलियाँ, कपड़े के थैले, मिट्टी के कुल्लड़, सकोरे, वृक्ष के पत्तों से बने पत्तल एवं दोने आदि।
  2. अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों का पुनर्चक्रण करके पुनः उपयोग करना।

प्रश्न 17.
पारितन्त्र में ऊर्जा प्रवाह को दर्शाइए। यह एकदैशिक क्यों होता है? पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
पारितन्त्र में ऊर्जा का प्रवाह –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 8
चूँकि ऊर्जा का प्रवाह एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर की ओर आगे बढ़ता जाता है और वापस विपरीत दिशा में नहीं होता इसलिए यह एकदैशिक कहलाता है। इसके अतिरिक्त उपलब्ध ऊर्जा हर पोषी स्तर पर कम होती जाती है जिससे ऊर्जा का वापस लौटना असम्भव हो जाता है।

प्रश्न 18.
बाजार से खरीददारी करने के लिए कपड़े के थैलों का उपयोग करना प्लास्टिक की थैलियों से क्यों उत्तम है?
उत्तर:
कपड़े के थैलों का उपयोग प्लास्टिक की थैलियों के उपयोग से उत्तम है क्योंकि –

  1. कपड़े के थैलों में अधिक सामान आ जाता है।
  2. कपड़ा जैव निम्नीकरणीय पदार्थ है जबकि प्लास्टिक अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ है।
  3. कपड़ा पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करता जबकि प्लास्टिक पर्यावरण को प्रदूषित करता है।
  4. कपड़े के थैलों को बार-बार उपयोग में लाया जा सकता है जबकि प्लास्टिक (पॉलीथीन) की थैलियों को बार-बार प्रयोग में नहीं लाया जा सकता।

प्रश्न 19.
निम्न वाक्यों, कथनों एवं परिभाषाओं के लिए एक शब्द सुझाइए –
(a) भौतिक एवं जैवीय दुनिया जहाँ हम रहते हैं?
(b) आहार श्रृंखला (खाद्य शृंखला) का प्रत्येक स्तर जहाँ ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है।
(c) पारितन्त्र के भौतिक कारक; जैसे-तापक्रम, वर्षा, पवन, मृदा आदि।
(d) वे जीव, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पेड़-पौधों पर भोजन के लिए निर्भर होते हैं।
उत्तर:
(a) पर्यावरण या जैवमण्डल।
(b) पोषीस्तर।
(c) पारितन्त्र के अजैव घटक।
(d) उपभोक्ता या परपोषी।

प्रश्न 20.
अपघटक (अपमार्जक) क्या होते हैं? इनकी अनुपस्थिति पारितन्त्र पर क्या कुप्रभाव डालेगी?
उत्तर:
अपघटक (अपमार्जक):
“वे सूक्ष्मजीवी जो जन्तुओं एवं वनस्पतियों के अवशेषों, मृत शरीरों एवं जैव अपशिष्टों का साधारण अकार्बनिक यौगिकों में अपघटन करके पौधों के लिए उपयोगी बनाते हैं, अपघटक (अपमार्जक) कहलाते हैं।”

अपमार्जकों (अपघटकों) की अनुपस्थिति का पारितन्त्र पर प्रभाव:
अगर पारितन्त्र से अपघटक अनुपस्थित हो जाएँ तो जैव निम्नीकरणीय पदार्थों और अपशिष्टों का अपघटन नहीं होगा और पारितन्त्र में उनकी मात्रा इतनी बढ़ जायेगी कि उनका निस्तारण करना असम्भव हो जायेगा। इससे पर्यावरण प्रदूषित होगा अर्थात् अपशिष्टों का पुनर्चक्रण रुक जायेगा।

प्रश्न 21.
अपने दैनिक जीवन के चार ऐसे क्रियाकलापों का वर्णन कीजिए जो पारितन्त्र मैत्रीय हों।
उत्तर:

  1. जैव निम्नीकरणीय एवं अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों को पृथक्-पृथक् रखना जिससे उनका आसानी से निपटारन हो सके।
  2. घरों में पेड़-पौधे लगाना, किचन गार्डन में फल-सब्जी उगाना तथा सड़कों के सहारे वृक्षारोपण करना।
  3. प्लास्टिक एवं पॉलीथीन की थैलियों एवं अन्य वस्तुओं के स्थान पर कपड़े एवं कागज के बने थैले तथा पत्तों से बने पत्तल, दोनों एवं मिट्टी के बने कुल्लड़-सकोरों को उपयोग में लाना।
  4. उर्वरकों के स्थान पर कम्पोस्ट एवं वर्मी कम्पोस्ट खाद का उपयोग करना। (5) वर्षा जल संग्रहण करना।

प्रश्न 22.
आहार जाल (खाद्य जाल) एवं आहार श्रृंखला (खाद्य शृंखला) के दो अन्तर लिखिए।
उत्तर:

आहार जाल (खाद्य जाल) आहार श्रृंखला (खाद्य श्रृंखला)
आहार जाल अनेक आहार श्रृंखलाओंCका कम संकलन है जो आपस में गुथी होती है। आहार श्रृंखला एक जीवों की श्रृंखला है जो अपने पोषण के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
उच्चतर पोषी स्तर के सदस्य अपने नीचे के पोषी स्तर की किसी अन्य श्रृंखला के सदस्य जीव द्वारा पोषण प्राप्त कर सकते हैं। उच्चतर पोषी स्तर के जीव अपने से निम्न पोषी स्तर के किसी विशेष सदस्य जीव से पोषण प्राप्तकर सकते हैं।

प्रश्न 23.
कृषिकर्म के क्रियाकलापों से पर्यावरण पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कृषिकर्म के क्रियाकलापों का पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव –

  1. उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग मृदा की गुणवत्ता को समाप्त कर देता है तथा कृषि के लिए उपयोगी सूक्ष्मजीवियों का वध कर देती है।
  2. पीड़कनाशक आदि अजैव निम्नीकरणीय रसायनों का अत्यधिक उपयोग जैव संवर्धन को बढ़ावा देता है।
  3. अत्यधिक फसल उत्पादन मृदा की उर्वरक क्षमता का ह्रास करता है।
  4. कृषि के लिए अत्यधिक जमीनी जल का उपयोग जल स्तर को गिराता है।
  5. प्राकृतिक पारितन्त्र एवं आवास को हानि पहुँचाता है।

MP Board Class 10th Science Chapter 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आपके घर में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले अपशिष्टों के नाम लिखिए। आप उनके निस्तारण के लिए क्या उपाय अपनाएँगे?
उत्तर:
घरों में प्रतिदिन उत्पन्न (पैदा होने वाले) अपशिष्ट निम्न प्रकार के हैं –

  1. रसोईघर के अपशिष्ट।
  2. कागज के अपशिष्ट; जैसे-अखबार, कॉपी-किताब, लिफाफे, थैलियाँ आदि।
  3. पॉलीथीन या प्लास्टिक की थैलियाँ, गिलास, प्लेट, कटोरियाँ एवं चम्मच आदि।
  4. फल एवं तरकारियों की छीलन तथा उनके अन्य अपशिष्ट।

उनके निस्तारण के उपाय एवं सावधानियाँ:

  1. जैव निम्नीकरणीय एवं अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों का पृथक्-पृथक् संचय करना जिससे उनके निस्तारण में आसानी हो।
  2. पॉलीथीन एवं प्लास्टिक की थैलियाँ एवं अन्य वस्तुओं का सुरक्षापूर्वक निस्तारण के लिए उन्हें पुनर्चक्रण के लिए दे देंगे।
  3. फल एवं तरकारियों के छिलके, छीलन एवं अन्य अवशेषों को पौधों में डालना ताकि उनका उपयोग खाद के रूप में हो सके जो पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध करा सके।
  4. कागज के अखबार, कापियाँ एवं पुस्तकों तथा अन्य अप्रयुक्त कागज उत्पादों को पुनर्चक्रण के लिए दे देंगे।
  5. रसोईघर के अपशिष्टों के निपटान (निस्तारण) के लिए कम्पोस्ट गड्डे का निर्माण करेंगे।

प्रश्न 2.
पर्यावरणीय समस्याएँ क्या-क्या हैं? लिखिए।
उत्तर:
प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएँ-प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएँ निम्न हैं –

  1. वायु, जल, मृदा एवं ध्वनि के प्रदूषण की समस्याएँ।
  2. मरुस्थल, भूस्खलन, बाढ़, नदियों के मार्ग में परिवर्तन, मृदा अपरदन की समस्याएँ।
  3. प्राणी एवं पादप जातियों के विलोपन के कारण जंगलों के विनाश की समस्या।
  4. लवणों के कारण मरुस्थल बनने अर्थात् लवणीकरण की समस्या।
  5. कचरे के जमाव एवं उसके निस्तारण की समस्या।
  6. प्राकृतिक संसाधनों के ह्रास की समस्या।
  7. ग्लोबल वार्मिंग एवं ग्रीन हाउस के प्रभाव की समस्या।
  8. ओजोन परत के पतले होने तथा उसमें छेद होने की समस्या।

प्रश्न 3.
अम्ल वर्षा का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
अम्ल वर्षा का पर्यावरण पर प्रभाव:

  1. धरती का हरा-भरा आवरण नष्ट हो जाता है।
  2. पेड़-पौधों की जड़ें सिकुड़ने लगती हैं।
  3. पेड़-पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता नष्ट हो जाती है।
  4. पेड़-पौधों की पत्तियाँ झड़ जाती हैं।
  5. मृदा की अम्लीयता बढ़ जाती है तथा उसकी उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती है।
  6. सभी जैविक क्रियाएँ मन्द पड़ जाती हैं।
  7. खड़ी फसलें नष्ट हो जाती हैं।
  8. पेयजल प्रदूषित हो जाता है।
  9. मनुष्य की त्वचा एवं आँखों में जलन होने लगती है तथा श्वसन रोग हो जाते हैं।
  10. ऐतिहासिक महत्व के भवनों (जैसे ताजमहल) पर दुष्प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 4.
पर्यावरण हेतु जागरूकता पर एक निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण हेतु जागरूकता:
दिन-प्रतिदिन पर्यावरण असन्तुलित होता जा रहा है जिससे मानव जीवन एवं जन्तुओं तथा पेड़-पौधों का जीवन संकट में पड़ सकता है। अतः इसके संरक्षण की महती आवश्यकता है। लेकिन यह कार्य एक अकेले के बूते का नहीं है। शासन-प्रशासन भी इस कार्य को पूर्ण रूप से करने में सक्षम नहीं, जब तक कि जन-जन इसके लिए जागरूक नहीं होगा। जन-जागृति के लिए तथा मनुष्यों में जागरूकता पैदा करने के लिए उन क्षेत्रों की जानकारी होना आवश्यक है जिनमें उन्हें जागरूक करना है और वे निम्न हैं –

  1. जनसंख्या वृद्धि: जनसंख्या वृद्धि से प्रदूषण की समस्या बढ़ती है, संसाधनों का अधिकाधिक दोहन होता है। इसलिए इस पर नियन्त्रण आवश्यक है।
    संसाधनों का समुचित प्रयोग: संसाधन सीमित हैं अतः उनका विवेकपूर्ण एवं मितव्ययिता के साथ उपयोग करना आवश्यक है तथा उन्हें लम्बे समय तक बनाये रखना है।
  2. प्रदूषण के प्रति सचेत करना: प्रदूषण से नाना प्रकार की असाध्य बीमारियाँ पैदा होती हैं। सबसे ज्यादा प्रदूषण मनुष्य के क्रियाकलापों से होता है।
  3. अतः इसके प्रति सचेत करना आवश्यक है। उन्हें प्रदूषणों के कारणों, उनके दुष्परिणामों एवं उनसे निदान के सम्बन्ध में बताना है।
  4. संरक्षण के प्रति जागरूकता: प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उन्हें जागरूक बनाना है कि वे उन संसाधनों का अति दोहन न करें बल्कि उन्हें संरक्षित करें।
  5. आदतों में सुधार: मनुष्य के अन्दर मितव्ययिता की प्रवृत्ति को बढ़ाना है जिससे वे संसाधनों के अपव्यय को रोक सकें क्योंकि ऊर्जा बचाना, ऊर्जा पैदा करने के समान होता है।
  6. उपर्युक्त सभी क्षेत्रों में जागरूकता लाकर पर्यावरण को संरक्षित किया जा सकता है। इसके लिए पर्यावरण शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  7. प्रारम्भ से ही बच्चों के पाठ्यक्रम में पर्यावरण पर पाठ्य सामग्री होना आवश्यक है।
  8. पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिए प्रतियोगिताएँ (निबन्ध, वाद-विवाद, पोस्टर), सेमीनार, कार्यशालाएँ एवं प्रदर्शन रैली आयोजित करना अधिक कारगर होगा।

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MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार

MP Board Class 10th Science Chapter 11 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न शृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 41

प्रश्न 1.
नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
नेत्र की समंजन क्षमता-“नेत्र द्वारा निकटस्थ से लेकर दूरस्थ वस्तुओं को सुस्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह नेत्र लेन्स की फोकस दूरी को समायोजन करने से सम्भव होता है। नेत्र की इस समायोजन क्षमता को नेत्र की समंजन क्षमता कहते हैं।

प्रश्न 2.
निकट दृष्टि दोष का कोई व्यक्ति 1.2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख सकता। इस दोष को दूर करने के लिए प्रयुक्त संशोधक लेन्स किस प्रकार का होना चाहिए?
उत्तर:
अवतल (अपसारी) लेन्स।

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प्रश्न 3.
मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिन्दु तथा निकट बिन्दु नेत्र से कितनी दूरी पर होते हैं?
उत्तर:
मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए नेत्र से क्रमशः दूर बिन्दु की दूरी अनन्त तथा निकट बिन्दु की दूरी 25 cm होती है।

प्रश्न 4.
अन्तिम पंक्ति में बैठे किसी विद्यार्थी को श्यामपट्ट पढ़ने में कठिनाई होती है। यह विद्यार्थी किस दृष्टि दोष से पीड़ित है? इसे किस प्रकार संशोधित किया जा सकता है?
उत्तर:
वह विद्यार्थी निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है। इस दोष का निवारण उपयुक्त क्षमता के अवतल (अपसारी) लेन्स के उपयोग द्वारा किया जा सकता है।

MP Board Class 10th Science Chapter 11 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मानव नेत्र अभिनेत्र लेन्स की फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं को फोकसित कर सकता है। ऐसा हो पाने का कारण है?
(a) जरा-दूरदृष्टिता।
(b) समंजन।
(c) निकट दृष्टि।
(d) दीर्घ दृष्टि।
उत्तर:
(b) समंजन।

प्रश्न 2.
मानव नेत्र जिस भाग पर किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब बनाते हैं, वह है – (2019)
(a) कॉर्निया।
(b) परितारिका।
(c) पुतली।
(d) दृष्टि-पटल।
उत्तर:
(d) दृष्टि-पटल।

प्रश्न 3.
सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी होती है, लगभग –
(a) 25 m
(b) 2.5 cm
(c) 25 cm
(d) 2.5 m
उत्तर:
(c) 25 cm

प्रश्न 4.
अभिनेत्र लेन्स की फोकस दूरी में परिवर्तन किया जाता है –
(a) पुतली द्वारा।
(b) दृष्टि-पटल द्वारा।
(c) पक्ष्माभी द्वारा।
(d) परितारिका द्वारा।
उत्तर:
(c) पक्ष्माभी द्वारा।

प्रश्न 5.
किसी व्यक्ति को अपनी दूर की दृष्टि को संशोधित करने के लिए 5.5 डाइऑप्टर क्षमता के लेन्स की आवश्यकता है। अपनी निकट की दृष्टि को संशोधित करने के लिए उसे +1.5 डाइऑप्टर क्षमता के लेन्स की आवश्यकता है। संशोधित करने के लिए आवश्यक लेन्स की फोकस दूरी क्या होगी?

  1. दूर की दृष्टि के लिए।
  2. निकट की दृष्टि के लिए।

उत्तर:
1. दूर की दृष्टि के लिए –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 1
अतः लेन्स की अभीष्ट फोकस दूरी = – 18.2 cm (लगभग) – उत्तर

2. निकट की दृष्टि के लिए –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 2
अतः लेन्स की अभीष्ट फोकस दूरी = 66.7 cm (लगभग) – उत्तर

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प्रश्न 6.
किसी निकट दृष्टि से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिन्दु नेत्र के सामने 80 cm की दूरी पर है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेन्स की प्रकृति तथा क्षमता क्या होगी?
हल:
चूँकि u = – ∞ cm एवं v = – 80 cm (∵ दोनों दूरियाँ नेत्र लेन्स के सामने हैं)
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 3
अतः अभीष्ट लेन्स की प्रकृति अपसारी अवतल लेन्स एवं उसकी अभीष्ट क्षमता = – 1.25 D – उत्तर

प्रश्न 7.
चित्र बनाकर दर्शाइए कि दीर्घ दृष्टि दोष कैसे संशोधित किया जाता है? एक दीर्घ दृष्टि दोष युक्त नेत्र का निकट बिन्दु 1 m है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेन्स की क्षमता क्या होगी? मान लीजिए कि सामान्य नेत्र का निकट बिन्दु 25 cm है।
हल:
दीर्घ दृष्टि दोष का संशोधन उपयुक्त क्षमता के उत्तल लेन्स का उपयोग करके किया जाता है।

दीर्घ दृष्टि दोष एवं उसके निवारण का किरण आरेख –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 4
संख्यात्मक भाग –
हम जानते हैं कि स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (एक स्वस्थ नेत्र के लिये) = 25 cm = u = – 25 cm
दिया है: निकट बिन्दु = 1 m ⇒ u = – 100 cm
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 5
अतः लेन्स की अभीष्ट क्षमता = 3D एवं प्रकृति अभिसारी उत्तल लेन्स।

प्रश्न 8.
सामान्य नेत्र 25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट क्यों नहीं देख पाते?
उत्तर:
क्योंकि स्वस्थ सामान्य नेत्र के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी 25 cm होती है। इसलिए सामान्य नेत्र 25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख पाते।

प्रश्न 9.
जब हम नेत्र से किसी वस्तु की दूरी को बढ़ा देते हैं तो नेत्र में प्रतिबिम्ब दूरी का क्या होता है?
उत्तर:
जब हम नेत्र से किसी वस्तु की दूरी को बढ़ा देते हैं, तो नेत्र में प्रतिबिम्ब दूरी पर नेत्र की समंजन क्षमता के कारण कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

प्रश्न 10.
तारे क्यों टिमटिमाते हैं?
उत्तर:
तारे पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर स्थित हैं, अतः तारों से चलने वाले प्रकाश को वायुमण्डल की विभिन्न परतों को पार करना पड़ता है। इन परतों का घनत्व बदलते रहने से इनकी सघनता भी बदलती रहती है। किसी विशेष तारे से आने वाली प्रकाश की किरणें इन विभिन्न परतों से अपवर्तित होकर हमारी आँखों में आती है। परतों के बदलते रहने से तारे के प्रतिबिम्ब की स्थिति भी बदलती हुई प्रतीत होती है। इसलिए तारे टिमटिमाते हैं।

प्रश्न 11.
व्याख्या कीजिए कि ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते?
उत्तर:
ग्रह पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर नहीं होते इसलिए उनसे आने वाले प्रकाश की किरणों को विभिन्न बदलती सघनता वाली वायुमण्डल की परतों से नहीं गुजरना पड़ता तथा उनके प्रतिबिम्ब की स्थिति नहीं बदलती इसलिए ग्रह नहीं टिमटिमाते।

प्रश्न 12.
सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है?
उत्तर:
सूर्योदय के समय सूर्य से आने वाली प्रकाश किरणों को वायुमण्डल में वायु की मोटी परतों से गुजरना पड़ता है। इससे प्रकाश का प्रकीर्णन अधिक होता है लेकिन लाल रंग के प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं हो पाता। इसलिए हमारी आँखों में लाल रंग की प्रकाश की किरणें ही पहुँच पाती हैं। इसलिए सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ प्रतीत होता है।

प्रश्न 13.
किसी अन्तरिक्ष यात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला क्यों प्रतीत होता है?
उत्तर:
चूँकि अन्तरिक्ष यात्री पृथ्वी से इतनी अधिक ऊँचाई पर होता है कि उन तक प्रकीर्णित प्रकाश नहीं पहुँच पाता। इसलिए उन्हें आकाश नीले की अपेक्षा काला प्रतीत होता है।

MP Board Class 10th Science Chapter 11 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 10th Science Chapter 11 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कोई छात्र आपतन कोण के विभिन्न मानों के लिए काँच के त्रिभुजाकार प्रिज्म से होकर गुजरने वाली प्रकाश किरण का पथ आरेखित करता है। प्रकाश किरण आरेखों का विश्लेषण करने पर उसे निम्नलिखित में से कौन-सा निष्कर्ष निकालना चाहिए?
(a) निर्गत किरण आपतित किरण के समान्तर होती है।
(b) निर्गत किरण आपतित किरण की दिशा से किसी कोण पर मुड़ जाती है।
(c) निर्गत किरण और अपवर्तित किरण एक-दूसरे से समकोण बनाती है।
(d) निर्गत किरण आपतित किरण के लम्बवत् होती है।
उत्तर:
(b) निर्गत किरण आपतित किरण की दिशा से किसी कोण पर मुड़ जाती है।

प्रश्न 2.
नीचे दिए गए आरेख में सही अंकित कोण कौन-से हैं?
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 6
उत्तर:
(d) ∠r, ∠A और ∠D

प्रश्न 3.
निम्नलिखित किरण आरेख का अध्ययन कीजिए –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 7
इस आरेख में आपतन कोण, निर्गत कोण और विचलन कोण को क्रमशः किनके द्वारा निरूपित किया गया है?
(a) y, p, z
(b) x, q, z
(c) p, y, z
(d) p, z, y
उत्तर:
(c) p, y, z

प्रश्न 4.
स्वस्थ मनुष्य के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी है –
(a) 20 cm
(b) 25 cm
(c) 10 cm
(d) 30 cm
उत्तर:
(b) 25 cm

प्रश्न 5.
निकट दृष्टि दोष दूर करने में लेन्स प्रयुक्त होता है –
(a) उत्तल।
(b) अवतल।
(c) बेलनाकार लेन्स/उत्तल दर्पण।
(d) सामान्य लेन्स।
उत्तर:
(d) सामान्य लेन्स।

प्रश्न 6.
दूर दृष्टि दोष दूर करने में लेन्स प्रयुक्त होता है –
(a) उत्तल लेन्स।
(b) अवतल लेन्स।
(c) साधारण लेन्स।
(d) बेलनाकार लेन्स।
उत्तर:
(a) उत्तल लेन्स।

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प्रश्न 7.
एक व्यक्ति 2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता। यह दोष दूर किया जा सकता है –
(a) + 0.5 D
(b) – 0.5D
(c) + 0.2 D
(d) – 0.2 D
उत्तर:
(b) – 0.5D

प्रश्न 8.
एक छात्र अपनी कक्षा की आखिरी बेंच पर बैठकर श्यामपट (ब्लैकबोर्ड) पर लिखे अक्षरों को पढ़ सकता है, लेकिन अपनी पुस्तकों में लिखे अक्षरों को पढ़ने में असमर्थ है। निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है?
(a) उसकी आँख का निकट बिन्दु दूर चला गया है।
(b) उसकी आँख का निकट बिन्दु उसके समीप आ गया है।
(c) उसकी आँख का दूर बिन्दु उसके पास आ गया है।
(d) उसकी आँख का दूर बिन्दु उससे दूर चला गया है।
उत्तर:
(a) उसकी आँख का निकट बिन्दु दूर चला गया है।

प्रश्न 9.
एक प्रिज्म ABC जिसका आधार BC है, विभिन्न मुद्राओं में रखा गया है। एक संकीर्ण श्वेत प्रकाश की किरण चित्रानुसार प्रिज्म पर आपतित होती है। निम्न में से किस स्थिति में वर्ण विक्षेपण के बाद ऊपर से तीसरा रंग आसमानी नीला रंग होगा?
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 8
उत्तर:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 21

प्रश्न 10.
दोपहर में सूर्य श्वेत दिखाई देता है क्योंकि –
(a) प्रकाश कम प्रकीर्णित होता है।
(b) श्वेत प्रकाश की सभी रंग प्रकीर्णित हो जाते हैं।
(c) नीला रंग का प्रकीर्णन सबसे अधिक होता है।
(d) लाल रंग का प्रकीर्णन सबसे अधिक होता है।
उत्तर:
(a) प्रकाश कम प्रकीर्णित होता है।

प्रश्न 11.
निम्न में कौन से प्रकाश की घटनाएँ इन्द्रधनुष के निर्माण में संलिप्त होती हैं?
(a) परावर्तन, अपवर्तन एवं वर्ण विक्षेपण।
(b) अपवर्तन, वर्ण विक्षेपण एवं पूर्ण आन्तरिक परावर्तन।
(c) अपवर्तन, वर्ण विक्षेपण एवं आन्तरिक परावर्तन।
(d) वर्ण विक्षेपण, प्रकीर्णन एवं पूर्ण आन्तरिक परावर्तन।
उत्तर:
(c) अपवर्तन, वर्ण विक्षेपण एवं आन्तरिक परावर्तन।

प्रश्न 12.
तारों का टिमटिमाना निम्न वायुण्डलीय घटना के कारण होता है?
(a) जल की बूंदों के द्वारा प्रकाश का वर्ण विक्षेपण।
(b) वायुमण्डल की विभिन्न अपवर्तनांकों की परतों के द्वारा प्रकाश का अपवर्तन।
(c) धूल के कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन।
(d) बादलों द्वारा प्रकाश का आन्तरिक परावर्तन।
उत्तर:
(b) वायुमण्डल की विभिन्न अपवर्तनांकों की परतों के द्वारा प्रकाश का अपवर्तन।

प्रश्न 13.
स्वच्छ आकाश नीला दिखाई देता है क्योंकि –
(a) नीला प्रकाश वायुमण्डल द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है।
(b) वायुमण्डल में पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित कर लिया जाता है।
(c) बैंगनी एवं नीले रंग के प्रकाश का अन्य सभी रंग के प्रकाश की अपेक्षा अधिक प्रकीर्णन होता है।
(d) बैंगनी एवं नीले रंग के प्रकाश को छोड़कर शेष सभी रंगों के प्रकाश का प्रकीर्णन अधिक होता है।
उत्तर:
(c) बैंगनी एवं नीले रंग के प्रकाश का अन्य सभी रंग के प्रकाश की अपेक्षा अधिक प्रकीर्णन होता है।

प्रश्न 14.
श्वेत प्रकाश के विभिन्न रंग के प्रकाश के वायु में संचरण के सम्बन्ध में कौन-सा कथन सत्य है?
(a) लाल रंग का प्रकाश सबसे अधिक तेज गति से संचरण करता है।
(b) नीला प्रकाश हरे प्रकाश से अधिक तेजी से गति करता है।
(c) श्वेत प्रकाश के सभी रंग समान चाल से गति करते हैं।
(d) पीला प्रकाश लाल एवं बैंगनी प्रकाश की औसत चाल से गति करता है।
उत्तर:
(c) श्वेत प्रकाश के सभी रंग समान चाल से गति करते हैं।

प्रश्न 15.
ऊँची इमारतों की चोटी पर सबसे ऊपर खतरे के सूचक के रूप में लाल रंग के लगाए जाते हैं। ये दूर से ही आसानी से देखे जा सकते हैं क्योंकि लाल प्रकाश –
(a) धुएँ एवं कोहरे के कारण सर्वाधिक प्रकीर्णित होता है।
(b) धुएँ एवं कोहरे के कारण न्यूनतम प्रकीर्णित होता है।
(c) धुएँ एवं कोहरे के द्वारा अधिकतर अवशोषित कर लिया जाता है।
(d) वायु में सबसे तेज गति करता है।
उत्तर:
(b) धुएँ एवं कोहरे के कारण न्यूनतम प्रकीर्णित होता है।

प्रश्न 16.
सूर्यादय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य का लाल दिखाई देना निम्न में से प्रकाश की किस घटना का परिणाम है?
(a) प्रकाश का वर्ण विक्षेपण।
(b) प्रकाश का प्रकीर्णन।
(c) प्रकाश का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन।
(d) प्रकाश का पृथ्वी तल से परावर्तन।
उत्तर:
(b) प्रकाश का प्रकीर्णन।

प्रश्न 17.
गहरे समुद्र का जल नीला दिखाई देने के कारण है –
(a) जल में ऐल्गी एवं अन्य पौधों की उपस्थिति।
(b) आकाश का जल में परावर्तन (प्रतिबिम्ब बनना)।
(c) प्रकाश का प्रकीर्णन।
(d) समुद्र के द्वारा प्रकाश का अवशोषण।
उत्तर:
(c) प्रकाश का प्रकीर्णन।

प्रश्न 18.
जब प्रकाश की किरण नेत्रों में प्रवेश करती है, तो प्रकाश का अधिकतम अपवर्तन होता है निम्न पर –
(a) क्रिस्टलीय लेन्स।
(b) कॉर्निया का बाह्य पृष्ठ।
(c) उपतारा (आइरिस)।
(d) तारा (प्यूपिल)।
उत्तर:
(b) कॉर्निया का बाह्य पृष्ठ।

प्रश्न 19.
नेत्र लेन्स की फोकस दूरी बढ़ती है जब नेत्र की माँसपेशियाँ –
(a) विमोचित होती हैं तथा नेत्र लेन्स पतला हो जाता है।
(b) सिकुड़ती (संकुचित) हैं तथा नेत्र लेन्स मोटा हो जाता है।
(c) विमोचित होती है तथा नेत्र लेन्स मोटा हो जाता है।
(d) सिकुड़ती (संकुचित) होती है तथा नेत्र लेन्स पतला हो जाता है।
उत्तर:
(a) विमोचित होती हैं तथा नेत्र लेन्स पतला हो जाता है।

प्रश्न 20.
निम्न में कौन-सा कथन सत्य है?
(a) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति दूर रखी वस्तुओं को आसानी से देख पाता है।
(b) दूर दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति निकट में रखी हुई वस्तुओं को आसानी से देख सकता है।
(c) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति पास में रखी हुई वस्तुओं को आसानी से देख सकता है।
(d) दूर दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति दूर पर रखी वस्तुओं को आसानी से नहीं देख सकता।
उत्तर:
(c) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति पास में रखी हुई वस्तुओं को आसानी से देख सकता है।

रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. प्रिज्म के दो फलकों के बीच का कोण ……… कहलाता है।
  2. प्रिज्म में आपाती किरण एवं निर्गत किरण के बीच का कोण ……… कहलाता है।
  3. श्वेत प्रकाश का रंगों में विभक्त होना ………. कहलाता है।
  4. इन्द्रधनुष जल की सूक्ष्म बूंदों द्वारा प्रकाश के ……….. के कारण प्राप्त होता है।
  5. आकाश का रंग नीला प्रकाश के ………. के कारण दिखाई देता है।
  6. सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी ……. है। (2019)

उत्तर:

  1. प्रिज्म कोण।
  2. विचलन कोण।
  3. वर्ण विक्षेपण।
  4. परिक्षेपण।
  5. प्रकीर्णन।
  6. 25 सेमी।

जोड़ी बनाइए
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 10
उत्तर:

  1. → (c)
  2. → (d)
  3. → (e)
  4. → (a)
  5. → (b)

सत्य/असत्य कथन

  1. सूर्योदय के समय सूर्य लाल प्रतीत होता है।
  2. निकट की वस्तुओं को ठीक से नहीं देख पाना निकट दृष्टि दोष है।
  3. सूर्यास्त के समय सूर्य लाल दिखाई देता है।
  4. दूर की वस्तुओं को ठीक से नहीं देख पाना दूर दृष्टि दोष है।
  5. दोपहर के समय सूर्य का रंग श्वेत दिखाई देना।

उत्तर:

  1. सत्य।
  2. असत्य।
  3. सत्य।
  4. असत्य।
  5. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. नेत्र के किस भाग पर वस्तुओं के प्रतिबिम्ब बनते हैं?
  2. नेत्र लेन्स की फोकस दूरी को कौन समंजित करता है?
  3. श्वेत प्रकाश के विक्षेपण में किस रंग के प्रकाश का विचलन सर्वाधिक होता है।
  4. श्वेत प्रकाश के विक्षेपण में किस रंग के प्रकाश का विचलन न्यूनतम होता है।
  5. अन्तरिक्ष यात्रियों को आकाश कैसा दिखाई देगा?

उत्तर:

  1. दृष्टि पटल (रेटिना)।
  2. पक्ष्माभी।
  3. बैंगनी।
  4. लाल।
  5. काला।

MP Board Class 10th Science Chapter 11 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निकट दृष्टि दोष किसे कहते हैं?
उत्तर:
निकट दृष्टि दोष:
“जब कोई व्यक्ति पास रखी वस्तुओं को तो आसानी से तथा स्पष्टता के साथ देख पाता है लेकिन दूरी पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता तो उस व्यक्ति का दृष्टि दोष निकट दृष्टि दोष कहलाता है।”

प्रश्न 2.
दूर दृष्टि (दीर्घ दृष्टि) दोष किसे कहते हैं?
उत्तर:
दूर दृष्टि (दीर्घ दृष्टि) दोष:
“जब कोई वस्तु दूरी पर रखी हुई वस्तुओं को तो स्पष्ट रूप से तथा आसानी के साथ देख पाता है लेकिन पास में रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता तो उस व्यक्ति का दृष्टि दोष दूर दृष्टि (दीर्घ दृष्टि) दोष कहलाता है।”

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प्रश्न 3.
जरा दूरदर्शिता किसे कहते हैं?
उत्तर:
जरा दूरदर्शिता:
“वृद्धावस्था के कारण नेत्र की पेशियाँ कमजोर होने के कारण जब कोई व्यक्ति न तो पास रखी हुई वस्तुओं को स्पष्टतया देख पाता है और न ही दूर रखी हुई वस्तुओं को स्पष्टतया देख पाता है तो उस व्यक्ति के नेत्र दोष को जरा दूरदर्शिता कहते हैं।”

प्रश्न 4.
स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी किसे कहते हैं?
उत्तर:
स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी:
“वह न्यूनतम दूरी जिस पर रखी वस्तु को एक स्वस्थ व्यक्ति स्पष्ट रूप से तथा आसानी से देख पाता है, स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी कहलाती है।” स्पष्ट मनुष्य के लिए इसका मान 25 cm होता है।

प्रश्न 5.
विचलन कोण किसे कहते हैं?
उत्तर:
विचलन कोण:
“जब कोई प्रकाश की किरण किसी त्रिभुजाकार प्रिज्म के पृष्ठ पर आपतित होती है तो उसके दूसरे पृष्ठ से निर्गत हो जाती है तो आपाती किरण एवं निर्गत किरण के बीच का कोण विचलन कोण कहलाता है।”

प्रश्न 6.
प्रकाश का प्रकीर्णन किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रकाश का प्रकीर्णन:
“वायु में उपस्थित धुआँ एवं धूल के कणों के कारण प्रकाश के विभिन्न रंग वायुमण्डल में बिखर (छिटक) जाते हैं प्रकाश की यह घटना प्रकाश का प्रकीर्णन कहलाती है।”

प्रश्न 7.
वर्ण विक्षेपण किसे कहते हैं?
उत्तर:
वर्ण विक्षेपण:
वह प्रकाशीय घटना जिसके फलस्वरूप प्रकाश के विभिन्न अवयवी रंगों के लिए विभिन्न विचलन कोण होने के कारण श्वेत प्रकाश विभिन्न अवयवी रंगों में विभक्त हो जाता है, वर्ण विक्षेपण कहलाती है।

प्रश्न 8.
वर्णक्रम क्या है?
उत्तर:
वर्णक्रम:
“वर्ण विक्षेपण के फलस्वरूप श्वेत प्रकाश का अपने अवयवी रंगों में विभक्त होकर विभिन्न रंगों का प्राप्त अनुक्रम वर्णक्रम कहलाता है।

प्रश्न 9.
स्वच्छ आकाश नीला क्यों दिखाई देता है?
उत्तर:
वायु में उपस्थित वायु के अणु एवं अन्य कण बैंगनी एवं नीले प्रकाश का तीव्रता से प्रकीर्णन कर देते हैं। प्रकीर्णित नीला प्रकाश जब हमारे नेत्रों में पड़ता है तो वह आकाश की ओर से आता प्रतीत होता है इसलिए हमें आकाश नीला दिखाई पड़ता है।

प्रश्न 10.
हम पास की और दूर की वस्तुओं को स्वच्छता के साथ देख सकने में किस प्रकार समर्थ हो सकते हैं?
उत्तर:
हमारे नेत्र की पक्ष्माभि नेत्र लेन्स की क्षमता को कम ज्यादा करने की क्षमता रखती है इसी समंजन क्षमता के कारण हम पास की वस्तुओं को भी देख सकते हैं और दूर रखी वस्तुओं को भी।

प्रश्न 11.
हम किसी तारे को आकाश में देखते हैं, क्या वह उसकी वास्तविक स्थिति है? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
नहीं। वह तारे की वास्तविक स्थिति नहीं है क्योंकि तारे से आने वाला प्रकाश वायुमण्डल की निरन्तर परिवर्तनीय अपवर्तनांक वाली परतों के द्वारा अपवर्तन के बाद हमारे नेत्रों में पड़ता है। इसलिए हम उसका प्रतिबिम्ब ही देखते हैं।

प्रश्न 12.
हम वर्षा होने के बाद ही आकाश में इन्द्रधनुष क्यों देखते हैं?
उत्तर:
वर्षा के समय जो जल की बूंदें हैं वे एक प्रिज्म का कार्य करती हैं जिससे वे प्रकाश का वर्ण विक्षेपण करके वर्णक्रम प्रदान करती हैं जो धनुषाकार होता है। इसलिए हम वर्षा के बाद ही इन्द्रधनुष देखते हैं।

MP Board Class 10th Science Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जब हम उगते (उदय होते), डूबते (अस्त होते) एवं दोपहर के समय सूर्य को देखते हैं तो उसके रंगों में क्या अन्तर होता है? प्रत्येक की व्याख्या कीजिए।
अथवा
हमें सर्योदय एवं सर्यास्त के समय सर्य लाल दिखाई देता है तथा दोपहर के समय सर्य लाल नहीं दिखाई देता अपितु श्वेत एवं चमकीला दिखाई देता है। हम इसकी किस प्रकार व्याख्या कर सकते हैं?
उत्तर:
सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय हमको सूर्य लाल दिखाई देता है लेकिन दोपहर के समय यह लाल दिखाई न देकर श्वेत चमकीला दिखाई देता है क्योंकि सूर्य सूर्यास्त एवं सूर्योदय के समय क्षितिज के पार होता है उस समय उसके प्रकाश को हमारे नेत्रों तक आने में बहुत लम्बी वायुमण्डलीय दूरी तय करनी पड़ती है। इससे वायु के अणुओं के द्वारा प्रकाश के अधिकांश रंगों का प्रकीर्णन हो जाता है लेकिन सर्वाधिक तरंगदैर्घ्य होने के कारण लाल रंग के प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं हो पाता और हमारे नेत्रों में लाल रंग का प्रकाश पड़ता है इस कारण हमको सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य लाल दिखाई देता है लेकिन दोपहर के समय सूर्य हमारे ऊपर हमसे बहुत पास होता है और उसके प्रकाश का प्रकीर्णन कम होने के कारण अधिकांश प्रकाश हमारे नेत्रों में पड़ता है इसलिए दोपहर के समय सूर्य लाल दिखाई न देकर श्वेत चमकीला दिखाई देता है।

प्रश्न 2.
निम्न के लिए किरण आरेख खींचिए –
(a) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित नेत्र।
(b) दूर दृष्टि (दीर्घ दृष्टि) दोष से पीड़ित नेत्र।
उत्तर:
(a) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित नेत्र का किरण आरेख –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 11

(b) दूर दृष्टि (दीर्घ दृष्टि) दोष से पीड़ित नेत्र का किरण आरेख –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 4

प्रश्न 3.
एक छात्रा पीछे की बेंच पर अपनी कक्षा में बैठी है। वहश्यामपट (ब्लैक-बोड) पर लिखे अक्षरों को तो ठीक से पढ़ नहीं पाती लेकिन पुस्तक में लिखे अक्षरों को सुगमता से स्पष्टतया देख पाती है। डॉक्टर इस छात्रा को क्या सलाह देंगे? नेत्र के इस दोष को ठीक करने के लिए प्रयुक्त युक्ति का एक किरण आरेख खींचिए।
उत्तर:
डॉक्टर उस छात्रा को बताएगा कि उसको निकट दृष्टि दोष है उसे दूर की वस्तुओं को देखने के लिए एक चश्मे का प्रयोग करना होगा और वह उसे एक ऋणात्मक लेन्स क्षमता का अवतल लेन्स युक्त चश्मा लगाने को देगा।
निकट दृष्टि दोष के निवारण का किरण आरेख –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 12

प्रश्न 4.
एक महिला को – 4.5D क्षमता के लेन्स के चश्मे की आवश्यकता अपने नेत्र दोष को संशोधन हेतु है।
(a) वह महिला किस प्रकार के दृष्टि दोष से पीड़ित है?
(b) उस दृष्टि दोष के संशोधन हेतु प्रयुक्त लेन्स (संशोधन लेन्स) की फोकस दूरी क्या है?
(c) उस संशोधक लेन्स की प्रकृति क्या है
उत्तर:
(a) महिला निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है। क्योंकि उसे – 4-5 D क्षमता के संशोधक लेन्स की आवश्यकता है और यह लेन्स निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति के लिए ही संशोधक लेन्स की तरह प्रयोग करने की आवश्यकता होती है।

(b) चूँकि फोकस दूरी
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 13
अतः संशोधक लेन्स की अभीष्ट क्षमता = – 22.22 cm है।

(c) यह संशोधक लेन्स अपसारी प्रकृति का अवतल लेन्स है। – उत्तर

प्रश्न 5.
आप दो समरूप काँच के प्रिज्मों को कैसे प्रयोग करेंगे जिससे एक प्रिज्म पर आपतित संकीर्ण श्वेत प्रकाश किरण दूसरे प्रिज्म से होकर एक संकीर्ण श्वेत प्रकाश किरण के रूप में निर्गत हो? सम्बन्धित रेखाचित्र खींचिए।
उत्तर:
हम दोनों प्रिज्मों को एक-दूसरे के समान्तर चित्रानुसार इस प्रकार रखेंगे कि उनमें से एक प्रिज्म का आधार नीचे की ओर तथा दूसरे का आधार ऊपर की ओर रहे तथा उनके बीच में थोड़ा रिक्त स्थान रहे। इससे एक प्रिज्म द्वारा प्रकाश किरण का वर्ण विक्षेपण होगा जो दूसरे प्रिज्म द्वारा संयुक्त होकर एक संकीर्ण श्वेत प्रकाश की किरण के रूप में निर्गत होगा।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 14

प्रश्न 6.
जब एक प्रिज्म के अपवर्तक तल पर एक संकीर्ण श्वेत प्रकाश किरण आपतित होती है तो उसका वर्ण विक्षेपण हो जाता है। इस घटना को दर्शाने वाला एक किरण आरेख खींचिए तथा प्राप्त वर्णक्रम के रंगों का अनुक्रम लिखिए।
अथवा
प्रिज्म से श्वेत प्रकाश के विक्षेपण का चित्र बनाइए। (2019)
अथवा
प्रिज्य की सहायता से प्राप्त होने वाली विभिन्न रंगों की किरणों की स्थिति समझाइए।
अथवा
सिद्ध कीजिए कि सूर्य का प्रकाश सात रंगों का बना होता है।
अथवा
क्या होता है जब श्वेत प्रकाश की किरण प्रिज्म से गुजरती है? चित्र द्वारा समझाइए।
अथवा
प्रिज्म द्वारा सूर्य के प्रकाश के वर्ण विक्षेपण को चित्र सहित समझाइए।
उत्तर:
जब श्वेत प्रकाश की किरण प्रिज्म से गुजरती है तो वर्णक्रम प्राप्त होता है। चित्रानुसार सूर्य का प्रकाश एक प्रिज्म पर डालते हैं तथा प्राप्त वर्णक्रम को पर्दे पर लेते हैं तो हम देखते हैं कि वर्णक्रम में सात रंग हैं।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 15
जिनका अनुक्रम है – (आधार से शीर्ष की ओर)

  1. बैंगनी (Violet)
  2. जामुनी (Indigo)
  3. नीला (Blue)
  4. हरा (Green)
  5. पीला (Yellow)
  6. नारंगी (Orange)
  7. लाल (Red)

प्रश्न 7.
एक व्यक्ति दूर स्थित वस्तुओं को स्पष्टता के साथ देख सकता है लेकिन उसे पुस्तक पढ़ने में कठिनाई होती है। वह व्यक्ति किस दृष्टि दोष से पीड़ित है? इसका निवारण करने के लिए क्या करेंगे ? किरण आरेख खींचिए।
उत्तर:
वह व्यक्ति दूर दृष्टि दोष से पीड़ित है। इसके निवारण के लिए उसे उपयुक्त लेन्स क्षमता का उत्तल लेन्स का चश्मा धारण करना होगा।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 4

प्रश्न 8.
प्रकाश के प्रकीर्णन से क्या समझते हो? इस परिघटना की सहायता से व्याख्या कीजिए कि स्वच्छ आकाश का रंग नीला क्यों होता है?
अथवा
सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है?
उत्तर:
प्रकाश का प्रकीर्णन:
“वायु में उपस्थित धुआँ एवं धूल के कणों के कारण प्रकाश के विभिन्न रंग वायुमण्डल में बिखर (छिटक) जाते हैं प्रकाश की यह घटना प्रकाश का प्रकीर्णन कहलाती है।”

स्वच्छ अकाश का नीला प्रतीत होने की परिघटना:
वायु में उपस्थित वायु के अणु एवं अन्य कण बैंगनी एवं नीले प्रकाश का तीव्रता से प्रकीर्णन कर देते हैं। प्रकीर्णित नीला प्रकाश जब हमारे नेत्रों में पड़ता है तो वह आकाश की ओर से आता प्रतीत होता है इसलिए हमें आकाश नीला दिखाई पड़ता है।

सूर्योदय के समय सूर्य का रक्ताभ दिखाई देना:
वर्षा के समय जो जल की बूंदें हैं वे एक प्रिज्म का कार्य करती हैं जिससे वे प्रकाश का वर्ण विक्षेपण करके वर्णक्रम प्रदान करती हैं जो धनुषाकार होता है। इसलिए हम वर्षा के बाद ही इन्द्रधनुष देखते हैं।

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प्रश्न 9.
यह दर्शाने के लिए किसी क्रियाकलाप का वर्णन कीजिए कि किस प्रकार एक प्रिज्म द्वारा विपाटित श्वेत प्रकाश को अन्य सर्वसम प्रिज्म द्वारा पुनर्योजित करके पुनः श्वेत प्रकाश प्राप्त किया जा सकता है? श्वेत प्रकाश के स्पेक्ट्रम के पुनर्योजन को दर्शाने के लिए एक किरण आरेख भी खींचिए।
उत्तर:
हम दोनों प्रिज्मों को एक-दूसरे के समान्तर चित्रानुसार इस प्रकार रखेंगे कि उनमें से एक प्रिज्म का आधार नीचे की ओर तथा दूसरे का आधार ऊपर की ओर रहे तथा उनके बीच में थोड़ा रिक्त स्थान रहे। इससे एक प्रिज्म द्वारा प्रकाश किरण का वर्ण विक्षेपण होगा जो दूसरे प्रिज्म द्वारा संयुक्त होकर एक संकीर्ण श्वेत प्रकाश की किरण के रूप में निर्गत होगा।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 14

प्रश्न 10.
काँच के किसी प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के विक्षेपण का कारण लिखिए। न्यूटन ने काँच के दो सर्वसम प्रिज्मों द्वारा यह किस प्रकार दर्शाया कि श्वेत प्रकाश सात वर्णों का बना है। किरण आरेख खींचकर दर्शाइए कि जब कोई संकीर्ण श्वेत प्रकाश पुंज एक-दूसरे से उल्टे व्यवस्थित काँच के दो सर्वसम प्रिज्मों के संयोजन के प्रथम प्रिज्म के एक फलक पर तिर्यकतः आपतन करता है, तो इस संयोजन में उस पुंज का क्या होता है?
उत्तर:
काँच के प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के वर्ण विक्षेपण का कारण:
जब कोई प्रकाश किरण किसी प्रिज्म के अपवर्तक तल पर आपतित होती है तो निर्गत किरण आपतित किरण के साथ विचलन कोण बनाती है जो प्रत्येक रंग के प्रकाश के लिए भिन्न-भिन्न होता है। विचलन कोण की इसी विभिन्नता के कारण प्रकाश के अलग-अलग रंग अलग-अलग हो जाते हैं और प्रकाश का वर्ण विक्षेपण हो जाता है।

हम दोनों प्रिज्मों को एक-दूसरे के समान्तर चित्रानुसार इस प्रकार रखेंगे कि उनमें से एक प्रिज्म का आधार नीचे की ओर तथा दूसरे का आधार ऊपर की ओर रहे तथा उनके बीच में थोड़ा रिक्त स्थान रहे। इससे एक प्रिज्म द्वारा प्रकाश किरण का वर्ण विक्षेपण होगा जो दूसरे प्रिज्म द्वारा संयुक्त होकर एक संकीर्ण श्वेत प्रकाश की किरण के रूप में निर्गत होगा।

प्रश्न 11.
मानव नेत्र का नामांकित चित्र बनाइए। (2019)
उत्तर:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 16

MP Board Class 10th Science Chapter 11 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव नेत्र की संरचना एवं उसकी कार्यविधि की व्याख्या कीजिए। हम स्पष्टता के साथ किस प्रकार पास रखी वस्तुओं को देख सकते हैं उसी स्पष्टता के साथ दूर रखी वस्तुओं को भी देख सकते हैं?
उत्तर:
मानव नेत्र की बनावट-मानव नेत्र कपाल की नेत्र गुहा में सुरक्षित रहता है। इसमें नेत्र लेन्स निकाय एक क्रिस्टलीय लेन्स होता है जिसकी लेन्स क्षमता को पक्ष्माभि पेशियाँ नियन्त्रित करती हैं। नेत्र लेन्स प्रकाश किरण पुंज को एक प्रकाश सुग्राही परदे पर जिसे दृष्टि पटल (रेटिना) कहते हैं पर प्रतिबिम्बित करता है जिस पर दृष्टि तन्त्रिकाएँ होती हैं जो प्राप्त संवेदनाओं को मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं।

लेन्स के आगे एक पारदर्शी उभार होता है जिसे स्वच्छ मण्डल (कॉर्निया) कहते हैं। कॉर्निया से होकर ही प्रकाश नेत्र में प्रवेश करता है। कॉर्निया के पीछे एक संरचना होती है जिसे परितारिका (आइरिस) कहते हैं। यह पुतली (प्यूपिल) के आकार (साइज) को नियन्त्रित करती है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 16

कार्यविधि:
जब प्रकाश हमारे नेत्रों पर पड़ता है तो प्रकाश की तीव्रता के अनुसार परितारिका पुतली के आकार को कम या अधिक कर देती है। प्रकाश किरण पुंज पुतली में होकर नेत्र लेन्स पर पड़ता है जिसकी लेन्स क्षमता को पक्ष्माभी पेशियाँ वस्तु की स्थिति के अनुसार निश्चित करती है।

लेन्स उन प्रकाश किरण पुंज को दृष्टि पटल पर फोकसित करके बिम्ब का प्रतिबिम्ब बनाता है जहाँ से इसकी संवेदना दृक् (दृष्टि) तन्त्रिकाएँ ग्रहण करती हैं और मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं। मस्तिष्क का दृष्टि पिण्ड इन सिग्नलों की व्याख्या करता है और हमको बिम्ब का आभास होता है।

प्रश्न 2.
हम कैसे निर्धारित करते हैं कि कोई व्यक्ति निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है या दीर्घ दृष्टि दोष से? किरण आरेखों का प्रयोग करके बताइए कि किस प्रकार निकट दृष्टि दोष एवं दीर्घ (दूर) दृष्टि दोष का निवारण कैसे किया जा सकता है?
उत्तर:
अगर कोई व्यक्ति पास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख पाता है और दूर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता तो हम निर्धारित करेंगे कि वह व्यक्ति निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है और यदि व्यक्ति दूर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख पाता है तथा पास रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता है तो हम निर्धारित करेंगे कि वह व्यक्ति दूर (दीर्घ) दृष्टि दोष से पीड़ित है।

डॉक्टर उस छात्रा को बताएगा कि उसको निकट दृष्टि दोष है उसे दूर की वस्तुओं को देखने के लिए एक चश्मे का प्रयोग करना होगा और वह उसे एक ऋणात्मक लेन्स क्षमता का अवतल लेन्स युक्त चश्मा लगाने को देगा।

निकट दृष्टि दोष के निवारण का किरण आरेख –

वह व्यक्ति दूर दृष्टि दोष से पीड़ित है। इसके निवारण के लिए उसे उपयुक्त लेन्स क्षमता का उत्तल लेन्स का चश्मा धारण करना होगा।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 12

प्रश्न 3.
नामांकित किरण आरेख की सहायता से किसी त्रिभुजाकार काँच की प्रिज्म के द्वारा प्रकाश के अपवर्तन की परिघटना को समझाइए। इस प्रकार विचलन कोण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
काँच की त्रिभुजाकार प्रिज्म द्वारा प्रकाश का अपवर्तन-जब प्रकाश की किरण त्रिभुजाकार काँच के प्रिज्म के एक अपवर्तक पृष्ठ पर आपत्ति होती है तो अपवर्तन के बाद दूसरे अपवर्तक तल पर गिरती है जहाँ से पुनः अपवर्तन के पश्चात् निर्गत हो जाती है। यह निर्गत किरण मूल आपतित किरण के साथ एक कोण बनाती है जिसे हम विचलन कोण कहते हैं और इस प्रकार प्रिज्म द्वारा प्रकाश का अपवर्तन होता है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 17

विचलन कोण की परिभाषा:
“जब कोई प्रकाश की किरण किसी त्रिभुजाकार प्रिज्म के पृष्ठ पर आपतित होती है तो उसके दूसरे पृष्ठ से निर्गत हो जाती है तो आपाती किरण एवं निर्गत किरण के बीच का कोण विचलन कोण कहलाता है।”

प्रश्न 4.
वायुमण्डल में प्रकाश का अपवर्तन किस प्रकार होता है? आकाश में तारे क्यों टिमटिमाते प्रतीत होते हैं जबकि ग्रह नहीं?
उत्तर:
वायुमण्डल में प्रकाश का अपवर्तन-वायुमण्डल में उपस्थित वायु की अनेक विभिन्न सघनता की परतें होती हैं जिनकी सघनता परिवर्तित होती रहती है तथा इनके अपवर्तनांक भी भिन्न-भिन्न होते हैं और वह भी परिवर्तित होते रहते हैं। इसलिए इस अपवर्तक माध्यम (वायु) की अस्थिरता के कारण इसमें होकर देखने पर हमको वस्तु की परिवर्तनशील आभासी स्थिति देखने को मिलती है। इस तरह प्रकाश का वायुमण्डलीय अपवर्तन होता है जो निरन्तर परिवर्तित होता रहता है।

तारे पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर स्थित हैं, अतः तारों से चलने वाले प्रकाश को वायुमण्डल की विभिन्न परतों को पार करना पड़ता है। इन परतों का घनत्व बदलते रहने से इनकी सघनता भी बदलती रहती है। किसी विशेष तारे से आने वाली प्रकाश की किरणें इन विभिन्न परतों से अपवर्तित होकर हमारी आँखों में आती है। परतों के बदलते रहने से तारे के प्रतिबिम्ब की स्थिति भी बदलती हुई प्रतीत होती है। इसलिए तारे टिमटिमाते हैं।

ग्रह पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर नहीं होते इसलिए उनसे आने वाले प्रकाश की किरणों को विभिन्न बदलती सघनता वाली वायुमण्डल की परतों से नहीं गुजरना पड़ता तथा उनके प्रतिबिम्ब की स्थिति नहीं बदलती इसलिए ग्रह नहीं टिमटिमाते।

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प्रश्न 5.
वायुमण्डलीय अपवर्तन क्या है? इस परिघटना का उपयोग करके नीचे दी गयी प्राकृतिक घटनाओं की व्याख्या कीजिए –
(a) तारों का टिमटिमाना।
(b) अग्रिम सूर्योदय और विलम्बित सूर्यास्त।
अपने उत्तरों के स्पष्टीकरण के लिए आरेख खींचिए।
उत्तर:
वायुमण्डलीय अपवर्तननिर्देश:
वायुमण्डल में प्रकाश का अपवर्तन-वायुमण्डल में उपस्थित वायु की अनेक विभिन्न सघनता की परतें होती हैं जिनकी सघनता परिवर्तित होती रहती है तथा इनके अपवर्तनांक भी भिन्न-भिन्न होते हैं और वह भी परिवर्तित होते रहते हैं। इसलिए इस अपवर्तक माध्यम (वायु) की अस्थिरता के कारण इसमें होकर देखने पर हमको वस्तु की परिवर्तनशील आभासी स्थिति देखने को मिलती है। इस तरह प्रकाश का वायुमण्डलीय अपवर्तन होता है जो निरन्तर परिवर्तित होता रहता है।

तारे पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर स्थित हैं, अतः तारों से चलने वाले प्रकाश को वायुमण्डल की विभिन्न परतों को पार करना पड़ता है। इन परतों का घनत्व बदलते रहने से इनकी सघनता भी बदलती रहती है। किसी विशेष तारे से आने वाली प्रकाश की किरणें इन विभिन्न परतों से अपवर्तित होकर हमारी आँखों में आती है। परतों के बदलते रहने से तारे के प्रतिबिम्ब की स्थिति भी बदलती हुई प्रतीत होती है। इसलिए तारे टिमटिमाते हैं।

ग्रह पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर नहीं होते इसलिए उनसे आने वाले प्रकाश की किरणों को विभिन्न बदलती सघनता वाली वायुमण्डल की परतों से नहीं गुजरना पड़ता तथा उनके प्रतिबिम्ब की स्थिति नहीं बदलती इसलिए ग्रह नहीं टिमटिमाते।

(a) तारों का टिमटिमाना:
तारे पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर स्थित हैं, अतः तारों से चलने वाले प्रकाश को वायुमण्डल की विभिन्न परतों को पार करना पड़ता है। इन परतों का घनत्व बदलते रहने से इनकी सघनता भी बदलती रहती है। किसी विशेष तारे से आने वाली प्रकाश की किरणें इन विभिन्न परतों से अपवर्तित होकर हमारी आँखों में आती है। परतों के बदलते रहने से तारे के प्रतिबिम्ब की स्थिति भी बदलती हुई प्रतीत होती है। इसलिए तारे टिमटिमाते हैं।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 18

(b) अग्रिम सूर्यादय एवं विलम्बित सूर्याप्त:
सूर्योदय से पहले एवं सूर्यास्त के बाद सूर्य क्षितिज से नीचे होता है लेकिन वायुमण्डलीय अपवर्तन के कारण अनेक अपवर्तन के बाद सूर्य से आने वाला प्रकाश पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के कारण हम तक पहुँचता है और हमको सूर्य का प्रतिबिम्ब दिखाई देता है। इसलिए हमको सूर्योदय अग्रिम तथा सूर्यास्त विलम्बित दिखाई पड़ता है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 19

प्रश्न 6.
मानव नेत्र में पक्ष्माभी पेशियों का महत्व लिखिए। उस दृष्टि दोष का नाम लिखिए जो वृद्धावस्था में पक्ष्माभी पेशियों के धीरे-धीरे दुर्बल होने के कारण उत्पन्न होता है। इस दोष से पीड़ित व्यक्तियों को सुस्पष्ट देख सकने के लिए किस प्रकार के लेन्सों की आवश्यकता होती है?

अक्षय अपनी कक्षा में अन्तिम पंक्ति में बैठे हुए, ब्लैकबोर्ड पर लिखे शब्दों को स्पष्ट नहीं देख पा रहा था। जैसे ही शिक्षक महोदय को पता चला उन्होंने कक्षा में घोषणा की कि क्या पहली पंक्ति में बैठा हुआ कोई छात्र अक्षय से अपनी सीट बदलना चाहेगा? सलमान तुरन्त ही अपनी सीट अक्षय से बदलने के लिए तैयार हो गया। अब अक्षय को ब्लैकबोर्ड पर लिखा हुआ स्पष्ट दिखाई देने लगा। यह देखकर शिक्षक महोदय ने अक्षय के माता-पिता को सन्देश भेजा कि वे शीघ्र ही अक्षय के नेत्रों का परीक्षण करवायें।

उपर्युक्त घटना के सन्दर्भ में निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(a) अक्षय किस दृष्टि दोष से पीड़ित है? इस दोष के लिए किस प्रकार का लेन्स उपयोग किया जाता है?
(b) शिक्षक महोदय एवं सलमान द्वारा प्रदर्शित मूल्यों का उल्लेख कीजिए।
(c) आपके विचार से अक्षय को शिक्षक महोदय एवं सलमान के प्रति अपनी कृतज्ञता किस प्रकार प्रकट करनी चाहिए?
उत्तर:
मानव नेत्र में पक्ष्माभी पेशियों का महत्व:
मानव नेत्र में पक्ष्माभी पेशियाँ आवश्यकतानुसार नेत्र की लेन्स क्षमता (फोकस दूरी) को परिवर्तित करके उसकी समंजन क्षमता को नियन्त्रित करती है।

वृद्धावस्था में होने वाला दृष्टि दोष एवं उसका निवारण:
वृद्धावस्था में पक्ष्माभी पेशियों के धीरे-धीरे दुर्बल होने के कारण उत्पन्न नेत्र रोग जरा दूरदर्शिता कहलाता है। इसके निवारण के लिए द्विफोकसी लेन्स के उपयोग की आवश्यकता होती है।
(a) अक्षय निकट दृष्टि दोष से पीड़ित है। इस दोष के संशोधन के लिए उपयुक्त ऋणात्मक क्षमता का अवतल लेन्स प्रयोग किया जाता है।
(b) शिक्षक महोदय और सलमान द्वारा प्रदर्शित मूल्य मानवीय मूल्य है।
(c) हमारे विचार से अक्षय को शिक्षक महोदय एवं सलमान का आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापन करना चाहिए।

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प्रश्न 7.
(a) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित कोई छात्र 5 m से अधिक दूरी पर स्थित बिम्बों को स्पष्ट नहीं देख पाता। इस दृष्टि दोष के उत्पन्न होने के दो सम्भावित कारणों की सूची बनाइए। किरण आरेखों की सहायता से व्याख्या कीजिए कि
(i) वह छात्र 5 m से अधिक दूरी पर स्थित बिम्बों को क्यों नहीं देख पाता?
(ii) इस दृष्टि दोष के संशोधन के लिए उसे किस प्रकार के लेन्स का उपयोग करना चाहिए और इस लेन्स के उपयोग द्वारा इस दोष का संशोधन किस प्रकार होता है?
(b) यदि इस प्रकरण में संशोधक लेन्स की फोकस दूरी का संख्यात्मक मान 5 m है, तो नयी कार्तीय चिह्न परिपाटी के अनुसार इस लेन्स की क्षमता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(a) निकट दृष्टि दोष होने के सम्भावित कारण:
अभिनेत्र लेन्स की वक्रता का अत्यधिक होना।
नेत्र गोलक का लम्बा हो जाना।
(i) चूँकि छात्र का दूर बिन्दु 5 m है अर्थात् अधिकतम 5 m दूर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब ही उसके दृष्टि पटल पर बनता है, इससे अधिक दूरी के बिम्ब का फोकस दृष्टि पटल से पहले ही हो जाता है। इसलिए उसे 5 m से अधिक दूरी का बिम्ब दिखाई नहीं देता।
किरण आरेख –
(a) निकट दृष्टि दोष से पीड़ित नेत्र का किरण –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 11

(ii) इस दृष्टि दोष के निवारण (संशोधन) के लिए उपयुक्त ऋणात्मक क्षमता के अवतल लेन्स का प्रयोग करना चाहिए। इससे यह प्रकाश किरणों का अपसरण कर देगा। दूसरे शब्दों में इसके द्वारा नेत्र लेन्स की क्षमता कम हो जायेगी और उसकी फोकस दूरी बढ़ जायेगी जिससे बिम्ब का प्रतिबिम्ब दृष्टि पटल पर बनेगा और दिखाई देगा। इस प्रकार उक्त दोष का संशोधन (निराकरण) हो जाता है।
किरण आरेख –
डॉक्टर उस छात्रा को बताएगा कि उसको निकट दृष्टि दोष है उसे दूर की वस्तुओं को देखने के लिए एक चश्मे का प्रयोग करना होगा और वह उसे एक ऋणात्मक लेन्स क्षमता का अवतल लेन्स युक्त चश्मा लगाने को देगा।
निकट दृष्टि दोष के निवारण का किरण आरेख –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 12

(b) चूँकि फोकस दूरी का संख्यात्मक मान 5 m है और लेन्स अवतल है जिसकी फोकस दूरी एवं लेन्स क्षमता दोनों ऋणात्मक होते हैं अतः f = – 5 m
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 20

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MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

MP Board Class 10th Science Chapter 10 पाठान्तर्गत प्रश्नोत्तर

प्रश्न श्रृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 185

प्रश्न 1.
अवतल दर्पण की मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए। (2019)
उत्तर:
अवतल दर्पण की मुख्य फोकस:
“अवतल दर्पण की मुख्य अक्ष के समान्तर आने वाली प्रकाश की किरणें अवतल दर्पण से परावर्तन के पश्चात् जिस बिन्दु से होकर जाती हैं उस बिन्दु को अवतल दर्पण की मुख्य फोकस कहते हैं।” इसे अक्षर ‘F’ से व्यक्त करते हैं।

प्रश्न 2.
एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 cm है। इसकी फोकस दूरी क्या होगी?
हल:
दिया है: गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या R = 20 cm
चूँकि फोकस दूरी (f) ⇒ \(\frac { R }{ 2 } \) ⇒ f ⇒ \(\frac { 20 }{ 2 } \) = 10 cm
अतः गोलीय दर्पण की अभीष्ट फोकस दूरी = 10 cm

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प्रश्न 3.
उस दर्पण का नाम बताइए जो बिम्ब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सके।
उत्तर:
अवतल दर्पण।

प्रश्न 4.
हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं?
उत्तर:
हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता देते हैं क्योंकि इससे ये सदैव सीधा तथा छोटा प्रतिबिम्ब बनाते हैं तथा इनका दृष्टि क्षेत्र बहुत अधिक होता है। इसलिए इससे पीछे का पूरा दृश्य ड्राइवर को दिखाई देता है।

प्रश्न श्रृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 188

प्रश्न 1.
उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी वक्रता त्रिज्या 32 cm है।
हल:
दिया है: उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या R = 32 cm
चूँकि फोकस दूरी f ⇒ \(\frac { R }{ 2 } \) ⇒ f ⇒ \(\frac { 32 }{ 2 } \) = 16 cm
अतः उत्तल दर्पण की अभीष्ट फोकस दूरी = 16 cm

प्रश्न 2.
कोई अवतल दर्पण अपने सामने 10 cm की दूरी पर रखे किसी बिम्ब का तीन गुना आवर्धित (बड़ा) वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाता है। प्रतिबिम्ब दर्पण से कितनी दूरी पर है।
हल:
चूँकि प्रतिबिम्ब बिम्ब से तीन गुना उल्टा (वास्तविक) बन रहा है अतः h’ = – 3h एवं u = –  10 cm (दिया है)
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 1
अतः प्रतिबिम्ब दर्पण के सम्मुख बाईं ओर उससे 30 cm दूरी पर है।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 194

प्रश्न 1.
वायु में गमन करती एक प्रकाश की किरण जल में तिरछी प्रवेश करती है। क्या प्रकाश किरण अभिलम्ब की ओर झुकेगी अथवा अभिलम्ब से दूर हटेगी? बताइए क्यों?
उत्तर:
प्रकाश किरण अभिलम्ब की ओर झुकेगी क्योंकि जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम (वायु) से सघन माध्यम (जल) में तिरछी प्रवेश करती है तो प्रकाश की किरण धीमी हो जाती है तथा अभिलम्ब की ओर मुड़ जाती है।

प्रश्न 2.
प्रकाश वायु से 1.50 अपवर्तनांक काँच की प्लेट में प्रवेश करता है। काँच में प्रकाश की चाल कितनी है? निर्वात में प्रकाश की चाल 3 × 108 ms-1 है।
हल:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 2

प्रश्न 3.
सारणी 10.3 से अधिकतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को ज्ञात कीजिए। न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
पाठ्य-पुस्तक में दी सारणी 10.3 के आधार पर –
अधिकतम प्रकाशिक घनत्व वाला माध्यम = हीरा (n = 2.42)
एवं न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व वाला माध्यम = वायु (n = 1.0003)

प्रश्न 4.
आपको कैरोसीन, तारपीन का तेल तथा जल दिए गए हैं। इनमें प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है? सारणी 10.3 में दिए गए आंकड़ों का उपयोग कीजिए।
उत्तर:
जल में प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है।

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प्रश्न 5.
हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
हीरे का अपवर्तनांक 2.42 से अभिप्राय है कि प्रकाश की हीरे में चाल उसकी निर्वात में चाल 3 × 108 ms-1 का \(\frac { 1 }{ 2.42 } \) गुना है। दूसरे शब्दों में निर्वात में प्रकाश की चाल = 2.42 × हीरे में प्रकाश की चाल।

प्रश्न शृंखला-4 # पृष्ठ संख्या 203

प्रश्न 1.
किसी लेंस की एक डायप्टर (डाइऑप्टर) क्षमता को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
लेंस की 1 डाइऑप्टर क्षमता:
जब किसी अभिसारी (द्वि-उत्तल) लेंस की फोकस दूरी 1 m हो तो उसकी लेंस क्षमता 1 डाइऑप्टर होगी अर्थात् किसी लेंस की 1 डाइऑप्टर क्षमता उस द्वि-उत्तल लेंस की क्षमता के बराबर है जिसकी फोकस दूरी 1 m हो।

प्रश्न 2.
कोई उत्तल लेंस किसी सुई का वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिम्ब उस लेंस से 50 cm दूर बनाता है। यह सुई उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखी हुई है, यदि इसका प्रतिबिम्ब उसी साइज का बन रहा है जिस साइज का बिम्ब है। लेंस की क्षमता भी ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 3
अतः बिम्ब बाईं ओर लेंस से 50 cm दूर रखा होगा।
तथा
लेंस की आवर्धन क्षमता = 4 डाइऑप्टर है।

प्रश्न 3.
2 m फोकस दूरी वाले अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है: अवतल लेंस की फोकस दूरी f = – 2 n
(चूँकि अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है।)
और चूँकि
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 4
अतः अवतल लेंस की अभीष्ट क्षमता = – 0.5 डाइऑप्टर हैं।

MP Board Class 10th Science Chapter 10 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता?
(a) जल।
(b) काँच।
(c) प्लास्टिक।
(d) मिट्टी।
उत्तर:
(d) मिट्टी।

प्रश्न 2.
किसी बिम्ब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा बिम्ब से बड़ा पाया गया। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?
(a) मुख्य फोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीच।
(b) वक्रता केन्द्र पर।
(c) वक्रता केन्द्र से परे।
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच।
उत्तर:
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच।

प्रश्न 3.
किसी बिम्ब का वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए बिम्ब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें?
(a) लेंस के मुख्य फोकस पर।
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर।
(c) अनंत पर।
(d) लेंस के प्रकाशिक केन्द्र तथा मुख्य फोकस के बीच।
उत्तर:
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर।

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प्रश्न 4.
किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ – 15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस सम्भवतः है –
(a) दोनों अवतल।
(b) दोनों उत्तल।
(c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल।
(d) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल।
उत्तर:
(a) दोनों अवतल।

प्रश्न 5.
किसी दर्पण से आप चाहे कितनी ही दूरी पर खड़े हों, आपका प्रतिबिम्ब सदैव सीधा प्रतीत होता है। सम्भवतः दर्पण है –
(a) केवल समतल।
(b) केवल अवतल।
(c) केवल उत्तल।
(d) या तो समतल अथवा उत्तल।
उत्तर:
(d) या तो समतल अथवा उत्तल।

प्रश्न 6.
किसी शब्दकोष (Dictionary) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेंस पसन्द करेंगे?
(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस।
(b) 50 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस।
(c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस।
(d) 5 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस।
उत्तर:
(c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस।

प्रश्न 7.
15 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिम्ब का सीधा प्रतिबिम्ब बनाना चाहते हैं। बिम्ब का दर्पण से दूरी का परिसर (Range) क्या होना चाहिए? प्रतिबिम्ब की प्रकृति कैसी है? प्रतिबिम्ब बिम्ब से बड़ा है या छोटा? इस स्थिति में प्रतिबिम्ब बनने का एक किरण आरेख बनाइए।
उत्तर:
बिम्ब का दर्पण से दूरी का परिसर = 0 cm से 25 cm है।
प्रतिबिम्ब की प्रकृति: आभासी।
प्रतिबिम्ब का साइज: बिम्ब से बड़ा।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 5

प्रश्न 8.
निम्न स्थितियों में प्रयुक्त दर्पण का प्रकार बताइए –

  1. किसी कार का अग्र-दीप (हैड-लाइट)।
  2. किसी वाहन का पार्श्व/पश्च-दृश्य दर्पण।
  3. सौर भट्टी।

अपने उत्तर की कारण सहित पुष्टि कीजिए।
उत्तर:

  1. अवतल दर्पण: शक्तिशाली समान्तर किरण पुन्ज प्राप्त करने के लिए।
  2. उत्तल दर्पण: बहुत अधिक दृष्टि क्षेत्र प्राप्त करने एवं पश्च-दृश्य का सीधा प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए।
  3. अवतल दर्पण: सूर्य के प्रकाश को केन्द्रित करने के लिए।

प्रश्न 9.
किसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज से ढक दिया गया है। क्या यह लेंस किसी बिम्ब का पूरा प्रतिबिम्ब बना पायेगा? अपने उत्तर की प्रयोग द्वारा जाँच कीजिए। अपने प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
हाँ, यह लेंस किसी बिम्ब का पूरा प्रतिबिम्ब बना पायेगा।
निर्देश: शेष प्रयोगात्मक भाग के लिए छात्र स्वयं अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 10.
5 cm लम्बा कोई बिम्ब 10 cm फोकस दूरी के किसी अभिसारी लेंस से 25 cm की दूरी पर रखा जाता है। प्रकाश किरण आरेख खींचकर बनने वाले प्रतिबिम्ब की स्थिति, साइज तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
प्रतिबिम्ब बनने का प्रकाश किरण आरेख –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 6
प्रतिबिम्ब की स्थिति: V= 167 cm (लगभग), साइज: h = 3.3 cm (लगभग)
एवं प्रतिबिम्ब की प्रकृति: वास्तविक एवं उल्टा।

प्रश्न 11.
15 cm फोकस दूरी का कोई अवतल लेंस किसी बिम्ब का प्रतिबिम्ब लेंस से 10 cm दूरी पर बनाता है। बिम्ब लेंस से कितनी दूरी पर है? किरण आरेख खींचिए।
हल:
दिया है: f = – 15 cm, v = – 10 cm
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 7
अतः बिम्ब लेंस से 30 cm की दूरी पर बाईं ओर है तथा अभीष्ट किरण आरेख निम्न है –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 8

प्रश्न 12.
15 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण में कोई बिम्ब 10 cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिम्ब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है: f = 15 cm, u = – 10 cm
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 9
अतः अभीष्ट प्रतिबिम्ब की दर्पण से दूरी दर्पण के पीछे 6 cm होगी तथा वह प्रतिबिम्ब सीधा तथा काल्पनिक होगा।

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प्रश्न 13.
एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन +1 है। इसका क्या अर्थ है?
उत्तर:
समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब बिम्ब के बराबर, सीधा तथा दर्पण के पीछे समान दूरी पर बनेगा।

प्रश्न 14.
5.0 cm लम्बाई का कोई बिम्ब 30 cm वक्रता त्रिज्या के किसी उत्तल दर्पण के सामने 20 cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है: उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या R = 30 cm
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 10

प्रश्न 15.
7.0 cm साइज का कोई बिम्ब 18 cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण के सामने 27 cm की दूरी पर रखा गया है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी परदे को रखें कि उस पर वस्तु का स्पष्ट फोकसित प्रतिबिम्ब प्राप्त किया जा सके। प्रतिबिम्ब का साइज तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल:
ज्ञात है: f = – 18 cm, u = – 27 cm, बिम्ब की लम्बाई h = 7.0 cm
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 11
अतः स्पष्ट प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए परदे को दर्पण के सम्मुख अभीष्ट 54 cm की दूरी पर रखना होगा तथा प्रतिबिम्ब 14 cm लम्बा, उल्टा तथा वास्तविक बनेगा।

प्रश्न 16.
उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता – 2.0 D है। यह किस प्रकार का लेंस है? (2019)
हल:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 12
अतः लेंस की अभीष्ट फोकस दूरी – 50 cm है तथा यह अपसारी अवतल लेंस होगा।

प्रश्न 17.
कोई डॉक्टर + 1.5 D का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। क्या निर्धारित लेंस अभिसारी है अथवा अपसारी? (2019)
हल:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 13

MP Board Class 10th Science Chapter 10 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 10th Science Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दिए गए किरण आरेखों का अध्ययन कीजिए और निम्नलिखित में से सही कथन चुनिए –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 14
(a) युक्ति X अवतल दर्पण है और युक्ति Y उत्तल लेंस है, जिनकी फोकस दूरियाँ क्रमशः 20 cm और 25 cm हैं।
(b) युक्ति X उत्तल लेंस है और युक्ति Y अवतल दर्पण है जिनकी फोकस दूरियाँ क्रमशः 10 cm एवं 25 cm हैं।
(c) युक्ति X अवतल लेंस है और युक्ति Y उत्तल दर्पण है, जिनकी फोकस दूरियाँ क्रमशः 25 cm और 25 cm हैं।
(d) युक्ति X उत्तल लेंस है और युक्ति Y अवतल दर्पण है, जिनकी फोकस दूरियाँ क्रमश: 20 cm और 25 cm हैं।
उत्तर:
(d) युक्ति X उत्तल लेंस है और युक्ति Y अवतल दर्पण है, जिनकी फोकस दूरियाँ क्रमश: 20 cm और 25 cm हैं।

प्रश्न 2.
कोई छात्र उत्तल लेंस द्वारा किसी दूरस्थ बिम्ब का धुंधला प्रतिबिम्ब परदे पर प्राप्त करता है। परदे पर स्पष्ट प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए उसे लेंस को रिवर्स करना होगा –
(a) परदे से दूर।
(b) परदे की ओर।
(c) किसी ऐसी स्थिति पर जो परदे से काफी दूर है।
(d) यात्री परदे की ओर या परदे से दूर, यह प्रतिबिम्ब की स्थिति पर निर्भर करता है।
उत्तर:
(b) परदे की ओर।

प्रश्न 3.
कोई छात्र अत्यन्त सावधानीपूर्वक आपतन कोण (∠1) के विभिन्न मानों के लिए काँच के स्लैब से गुजरने वाली प्रकाश किरण का पथ आरेखित करता है। फिर वह आपतन कोण के प्रत्येक मान के लिए अपवर्तन कोण (∠r) और निर्गत कोण (∠e) के संगत मानों को मापता है। इन कोणों की माप का विश्लेषण करके उसे क्या निष्कर्ष निकालना चाहिए?
(a) ∠i > ∠r < ∠e
(b) ∠i = ∠e > ∠r
(c) ∠i < ∠r < ∠e
(d) ∠i = ∠e < ∠r
उत्तर:
(b) ∠i = ∠e > ∠r

प्रश्न 4.
दिए गए अवतल दर्पण की सन्निकट फोकस दूरी ज्ञात करने के लिए आप दर्पण द्वारा किसी दूरस्थ बिम्ब का प्रतिबिम्ब किसी परदे पर फोकसित करते हैं। पर्दे पर प्राप्त प्रतिबिम्ब, बिम्ब की तुलना में सदैव –
(a) पार्श्व परिवर्तित और छोटा होता है।
(b) उल्टा और छोटा होता है।
(c) सीधा और छोटा होता है।
(d) सीधा और अत्यधिक छोटा होता है।
उत्तर:
(d) सीधा और अत्यधिक छोटा होता है।

प्रश्न 5.
मान लीजिए आपने अपनी प्रयोगशाला की मेज के दूरस्थ सिरे पर रखी मोमबत्ती की ज्वाला का प्रतिबिम्ब उत्तल लेंस द्वारा पर्दे पर फोकसित कर लिया है। अब यदि आपके शिक्षक महोदय आपको सूर्य से आपकी मेज पर आती सूर्य की समान्तर किरणों को उसी पर्दे पर फोकसित करने का सुझाव दें, तो आपसे यह अपेक्षा की जाती है कि आप –
(a) लेंस को थोड़ा-सा पर्दे की ओर खिसकायेंगे।
(b) लेंस को थोड़ा-सा पर्दे से दूर खिसकायेंगे।
(c) लेंस को थोड़ा-सा सूर्य की दिशा में खिसकायेंगे।
(d) लेंस और पर्दे दोनों को सूर्य की ओर खिसकायेंगे।
उत्तर:
(a) लेंस को थोड़ा-सा पर्दे की ओर खिसकायेंगे।

प्रश्न 6.
आप अपनी प्रयोगशाला में विभिन्न आपतन कोणों (∠i) के लिए काँच के स्लैब से गुजरने वाली प्रकाश किरण का पथ आरेखित करते हैं तथा प्रत्येक प्रकरण में तदनुरूपी अपवर्तन कोण (∠r) और निर्गत कोण (∠e) भी मापते हैं। आपने प्रेक्षणों के आधार पर आपका सही निष्कर्ष वह है कि –
(a) ∠i बड़ा है < r से, परन्तु ∠e के लगभग बराबर है।
(b) ∠i छोटा है < r से, परन्तु ∠e के लगभग बराबर है।
(c) ∠i बड़ा है < e से, परन्तु ∠r के लगभग बराबर है।
(d) ∠i छोटा है < e से, परन्तु ∠r के लगभग बराबर है।
उत्तर:
(b) ∠i छोटा है < r से, परन्तु ∠e के लगभग बराबर है।

प्रश्न 7.
कोई छात्र अपने विद्यालय की प्रयोगशाला में दिए गए अवतल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात करते समय दर्पण (M) द्वारा प्रयोगशाला की दूरस्थ खिड़की (W) का स्पष्ट प्रतिबिम्ब पर्दे (S) पर प्राप्त करता है। दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात करने के लिए उसे कौन-सी दूरी मापनी चाहिए?
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 15
(a) MW
(b) MS
(c) SW
(d) MW-MS
उत्तर:
(b) MS

प्रश्न 8.
किसी छात्र ने नीचे दिए गए आरेख में दर्शाए अनुसार एक भली-भाँति प्रदीप्त दूरस्थ भवन का प्रतिबिम्ब पर्दे (S) पर फोकसित करने के लिए किसी युक्ति (X) का उपयोग किया। इस युक्ति (X) के विषय में सही कथन चुनिए –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 16
(a) यह युक्ति 8 cm फोकस दूरी का अवतल लेंस है।
(b) यह युक्ति 8 cm फोकस दूरी का उत्तल दर्पण है।
(c) यह युक्ति 4 cm फोकस दूरी का उत्तल लेंस है।
(d) यह युक्ति 8 cm फोकस दूरी का उत्तल लेंस है।
उत्तर:
(d) यह युक्ति 8 cm फोकस दूरी का उत्तल लेंस है।

प्रश्न 9.
कोई छात्र आयताकार काँच की सिल्ली से होकर गुजरने वाली प्रकाश किरण का पथ आपतन कोणों के विभिन्न मानों के लिए आरेखित करता है। वह प्रयोग के प्रत्येक चरण को करते समय यथासम्भव सावधानियाँ बरतता है। प्रयोग के अन्त में, मापों का विश्लेषण करने पर निम्नलिखित में से उसका सम्भावित निष्कर्ष क्या होना चाहिए?
(a) ∠i = ∠e < r
(b) ∠i < ∠e < ∠r
(c) ∠i > ∠e > ∠r
(d) ∠i = ∠e > ∠r
उत्तर:
(d) ∠i = ∠e > ∠r

प्रश्न 10.
इनमें से कौन-सी युक्ति एक बिन्दु स्रोत से आने वाले प्रकाश पुंज को समान्तर बना देती है जब वह इस पर आपतित होता है?
(a) अवतल दर्पण एवं उत्तल लेंस।
(b) उत्तल दर्पण एवं अवतल लेंस।
(c) दो समतल दर्पण 90° पर रखे हुए।
(d) अवतल दर्पण एवं अवतल लेंस।
उत्तर:
(a) अवतल दर्पण एवं उत्तल लेंस।

प्रश्न 11.
एक 10 mm लम्बी पिन को एक अवतल दर्पण के सम्मुख ऊर्ध्वाधरतः रखा गया तो उसका 5 mm लम्बा प्रतिबिम्ब दर्पण के सम्मुख दर्पण से 30 cm दूरी पर बना तो दर्पण की फोकस दूरी होगी –
(a) – 30 cm
(b) – 20 cm
(c) – 40 cm
(d) – 60 cm
उत्तर:
(b) – 20 cm

प्रश्न 12.
निम्न में से किस स्थिति में अवतल दर्पण वास्तविक बिम्ब से बड़ा प्रतिबिम्ब बना सकता है?
(a) जब वह बिम्ब अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या के बराबर दूरी पर रखा गया हो।
(b) जब वह बिम्ब अवतल दर्पण की फोकस दूरी से कम दूरी पर रखा गया हो।
(c) जब वह बिम्ब अवतल दर्पण की फोकस एवं उसके वक्रता केन्द्र से बीच रखा गया हो।
(d) जब वह बिम्ब अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या से अधिक दूरी पर रखा गया हो।
उत्तर:
(c) जब वह बिम्ब अवतल दर्पण की फोकस एवं उसके वक्रता केन्द्र से बीच रखा गया हो।

प्रश्न 13.
संलग्न आकृति एक प्रकाश किरण को दर्शाती है जो माध्यम –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 17
उत्तर:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 18

प्रश्न 14.
एक प्रकाश किरण माध्यम (A) से माध्यम (B) में प्रवेश करती है जैसा कि संलग्न चित्र में दिखाया गया है। माध्यम (A) के सापेक्ष माध्यम (B) का अपवर्तनांक है –
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 19
(a) इकाई से अधिक।
(b) इकाई से कम।
(c) इकाई के बराबर।
(d) शून्य।
उत्तर:
(a) इकाई से अधिक।

प्रश्न 15.
प्रकाश पुंज किसी बॉक्स के छिद्र A एवं B से आयनित होते हैं तथा क्रमशः छिद्र C एवं D से निर्गत हो जाते हैं जैसा कि निम्न आकृति में दर्शाया गया है। बक्से के अन्दर निम्न में से कौन-सी युक्ति होगी?
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 20
(a) आयताकार काँच का गुटाका।
(b) उत्तल लेंस।
(c) अवतल लेंस।
(d) प्रिज्म।
उत्तर:
(a) आयताकार काँच का गुटाका।

प्रश्न 16.
एक प्रकाश पुंज एक बॉक्स में साइड A की तरफ से छिद्रों द्वारा आपतित होती है तथा दूसरी साइड B की तरफ के छिद्रों से निर्गत हो जाती है। जैसा कि संलग्न चित्र में दिखाया गया है। उस बॉक्स में निम्न में से कौन-सी युक्ति हो सकती है?
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 21
(a) अवतल लेंस।
(b) आयतकार काँच का गुटका।
(c) प्रिज्म।
(d) उत्तल लेंस।
उत्तर:
(d) उत्तल लेंस।

प्रश्न 17.
निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है?
(a) एक उत्तल लेंस की क्षमता 4 D है जबकि उसकी फोकस दूरी 0.25 cm है।
(b) एक उत्तल लेंस की क्षमता – 4 D है जबकि उसकी फोकस दूरी 0.25 cm है।
(c) एक अवतल लेंस की क्षमता 4 D है जबकि उसकी फोकस दूरी 0.25 cm है।
(d) एक अवतल लेंस की क्षमता – 4 D है जबकि उसकी फोकस दूरी 0:25 cm है।
उत्तर:
(a) एक उत्तल लेंस की क्षमता 4 D है जबकि उसकी फोकस दूरी 0.25 cm है।

प्रश्न 18.
किसी वाहन में लगे पश्च-दृश्य दर्पण के द्वारा उत्पन्न आवर्धन होगा –
(a) एक से कम।
(b) एक से अधिक।
(c) एक के बराबर।
(d) एक से कम या एक से अधिक दर्पण के सम्मुख बिम्ब की स्थिति पर निर्भर करेगा।
उत्तर:
(a) एक से कम।

प्रश्न 19.
सूर्य से आने वाली प्रकाश-किरणें एक अवतल दर्पण पर आपतित होकर एक बिन्दु पर अभिसरित होती हैं जो दर्पण से 15 cm की दूरी पर स्थित है। एक बिम्ब को कहाँ रखा जाय कि प्रतिबिम्ब की लम्बाई इसके बराबर हो?
(a) दर्पण के सम्मुख 15 cm की दूरी पर।
(b) दर्पण के सम्मुख 30 cm की दूरी पर।
(c) दर्पण के सम्मुख 15 cm एवं 30 cm के बीच।
(d) दर्पण के सम्मुख 30 cm से अधिक दूरी पर।
उत्तर:
(b) दर्पण के सम्मुख 30 cm की दूरी पर।

प्रश्न 20.
दूरी पर खड़ी ऊँची इमारत का पूरी लम्बाई का प्रतिबिम्ब देखा जा सकता है निम्न से –
(a) अवतल दर्पण।
(b) उत्तल दर्पण।
(c) समतल दर्पण।
(d) समतल एवं अवतल दोनों दर्पणों में।
उत्तर:
(b) उत्तल दर्पण।

प्रश्न 21.
टॉर्चों, सर्च लाइटों एवं वाहनों की हैड लाइटों में बल्ब रखा जाता है –
(a) परावर्तक के पोल (ध्रुव) एवं फोकस के बीच।
(b) परावर्तक के फोकस के काफी समीप।
(c) परावर्तक के फोकस एवं वक्रता केन्द्र के बीच।
(d) परावर्तक के वक्रता केन्द्र पर।
उत्तर:
(b) परावर्तक के फोकस के काफी समीप।

प्रश्न 22.
परावर्तन के नियम अच्छे साबित होते हैं निम्न के लिए –
(a) केवल समतल दर्पण।
(b) केवल अवतल दर्पण।
(c) केवल उत्तल दर्पण।
(d) सभी दर्पणों के लिए चाहे उसका आकृति कुछ भी हो।
उत्तर:
(d) सभी दर्पणों के लिए चाहे उसका आकृति कुछ भी हो।

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प्रश्न 23.
चार विभिन्न विद्यार्थियों ने अलग-अलग वायु से आने वाली तथा आयताकार काँच के गुटके में से होकर निर्गत होने वाली प्रकाश किरण के पथ का आरेख बनाया जो निम्न आकृति में क्रमशः (a), (b), (c) एवं (d) से दिखाया गया हैइनमें से कौन-सा आरेख सही है?
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 22
उत्तर:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 23

प्रश्न 24.
आपको जल, सरसों का तेल, ग्लिसरीन एवं मिट्टी का तेल दिए हुए हैं। समान कोण पर आपतित होने पर प्रकाश किरण किस माध्यम में अधिक झुकेगी?
(a) मिट्टी का तेल।
(b) जल।
(c) सरसों का तेल।
(d) ग्लिसरीन।
उत्तर:
(d) ग्लिसरीन।

प्रश्न 25.
जब प्रकाश की किरण किसी अवतल दर्पण पर आपतित होती है – जैसा कि संलग्न आकृति में दिखाया गया है, तो निम्न में कौन-सा किरण आरेख सही है?
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 24
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 25
उत्तर:
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प्रश्न 26.
जब प्रकाश की किरण एक उत्तल लेंस पर आपतित होती है जैसा कि संलग्न चित्र में दिखाया गया है तो निम्न में कौन-सा किरण आरेख सही है ?
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उत्तर:
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प्रश्न 27.
एक बच्ची एक मैजिक-दर्पण के सम्मुख खड़ी है। वह अपने सिर का प्रतिबिम्ब बड़ा तथा उसी साइज के अपने शरीर के मध्य भाग का प्रतिबिम्ब बराबर तथा उसी साइज की अपनी टाँगों का प्रतिबिम्ब छोटा देखती है तो ऊपर से नीचे तक मैजिक दर्पण में दर्पणों के संयोजन का सही क्रम होगा?
(a) समतल, उत्तल एवं अवतल।
(b) उत्तल, अवतल एवं समतल।
(c) अवतल, समतल एवं उत्तल।
(d) उत्तल, समतल एवं अवतल।
उत्तर:
(c) अवतल, समतल एवं उत्तल।

प्रश्न 28.
इनमें से किस युक्ति द्वारा अनन्त पर रखे बिम्ब का अत्यधिक छोटा एवं बिन्दु की बराबर प्रतिबिम्ब बनेगा?
(a) केवल अवतल दर्पण से।
(b) केवल उत्तल दर्पण से।
(c) केवल उत्तल लेंस से।
(d) अवतल दर्पण, उत्तल दर्पण, उत्तल लेंस एवं अवतल लेंस।
उत्तर:
(d) अवतल दर्पण, उत्तल दर्पण, उत्तल लेंस एवं अवतल लेंस।

रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. ……….. लेंस एवं ………… दर्पण में प्रतिबिम्ब सदैव छोटा और सीधा बनता है।
  2. µ = sin i/sin r कहलाता है ………… का नियम।
  3. सीधा एवं बड़ा प्रतिबिम्ब बनता है केवल ………… दर्पण एवं ………… लेंस में।
  4. प्रतिबिम्ब की ऊँचाई और बिम्ब की ऊँचाई का अनुपात ………… कहलाता है।
  5. उत्तल लेंस की क्षमता ………… तथा अवतल लेंस की क्षमता ………… होती है।

उत्तर:

  1. अवतल, उत्तल।
  2. स्नैल।
  3. अवतल, उत्तल।
  4. आवर्धन।
  5. धनात्मक, ऋणात्मक।

जोड़ी बनाइए
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उत्तर:

  1. → (c)
  2. → (d)
  3. → (e)
  4. → (a)
  5. → (b)

सत्य/असत्य कथन

  1. अवतल दर्पण में बने प्रतिबिम्ब सदैव वास्तविक होते हैं।
  2. लेंस की क्षमता का मात्रक डायप्टर होता है।
  3. उत्तल लेंस में सदैव वास्तविक प्रतिबिम्ब बनते हैं।
  4. अपवर्तनांक का कोई मात्रक नहीं होता है।
  5. काँच का अपवर्तनांक एक से कम होते है।

उत्तर:

  1. असत्य।
  2. सत्य।
  3. असत्य।
  4. सत्य।
  5. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

  1. दर्पण: सूत्र लिखिए अथवा किसी गोलीय दर्पण में फोकस अन्तर (f), बिम्ब की दर्पण से दूरी (u) एवं __ प्रतिबिम्ब की दर्पण से दूरी (v) में सम्बन्ध लिखिए।
  2. लेंस: सूत्र लिखिए अथवा लेंस की फोकस दूरी (f), बिम्ब की लेंस से दूरी (u) एवं प्रतिबिम्ब की लेंस से दूरी (v) में सम्बन्ध लिखिए।
  3. लेंस की क्षमता के लिए सूत्र लिखिए तथा उसका मात्रक भी लिखिए।
  4. किसी गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या R एवं उसकी फोकस दूरी (f) में क्या सम्बन्ध है?
  5. दो माध्यमों के बीच अपवर्तनांक एवं उनमें प्रकाश की चालों में क्या सम्बन्ध है?

उत्तर:
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MP Board Class 10th Science Chapter 10 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गोलीय दर्पण किसे कहते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
गोलीय दर्पण:
“ऐसे दर्पण जिनका परावर्तक पृष्ठ गोलीय होता है, गोलीय दर्पण कहलाते हैं।” गोलीय दर्पण के प्रकार-ये दो प्रकार के होते हैं –

  1. अवतल दर्पण।
  2. उत्तल दर्पण।

प्रश्न 2.
आवर्धन किसे कहते हैं?
उत्तर:
आवर्धन:
किसी प्रकाशिक युक्ति द्वारा उत्पन्न आवर्धन वह आपेक्षिक विस्तार है जिसमें ज्ञात होता है कि उस युक्ति द्वारा बना प्रतिबिम्ब, बिम्ब की अपेक्षा कितना गुणा आवर्धित है।
अर्थात्
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प्रश्न 3.
अपवर्तनांक से क्या समझते हैं?
अथवा
अपवर्तनांक और माध्यमों में प्रकाश की चाल में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
अपवर्तनांक:
एक माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक पहले माध्यम में प्रकाश की चाल एवं दूसरे माध्यम के प्रकाश की चाल के अनुपात के बराबर होता है। इस अनुपात को अपवर्तनांक अथवा सापेक्ष अपवर्तनांक कहते हैं।
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प्रश्न 4.
निरपेक्ष अपवर्तनांक से क्या समझते हो?
उत्तर:
निरपेक्ष अपवर्तनांक:
जब किसी माध्यम का अपवर्तनांक निर्वात (वायु) की सापेक्ष ज्ञात किया जाता है तब इसे निरपेक्ष अपवर्तनांक कहते हैं। इसे n से प्रदर्शित करते हैं। अर्थात् –
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प्रश्न 5.
लेंस की क्षमता से क्या समझते हो? इसका मात्रक क्या है?
उत्तर:
लेंस की क्षमता:
“किसी लेंस द्वारा प्रकाश किरणों का अभिसरण या अपसरण करने की मात्रा को उस लेंस की क्षमता के रूप में व्यक्त किया जाता है।” संख्यात्मक रूप से “लेंस की मीटर में व्यक्त फोकस दूरी का व्युत्क्रम उस लेंस की क्षमता कहलाती है।”
अर्थात्
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लेंस की क्षमता का मात्रक: इसका मात्रक डायप्टर (D) होता है।

प्रश्न 6.
एक पेंसिल पानी से भरे एक काँच के पात्र में तिरछी डुबोई जाती है तो यह वायु एवं जल के अन्तरापृष्ठ पर मुड़ी हुई दिखाई पड़ती है। क्या यह पेंसिल उतनी ही मुड़ी हुई प्रतीत होगी जबकि इसे जल के स्थान पर अन्य द्रव जैसे कैरोसीन या तारपीन के तेल में डुबाई जाती है। अपने उत्तर का कारण बताइए।
उत्तर:
नहीं, उतनी मुड़ी नहीं दिखाई देगी क्योंकि किसी भी माध्यम में प्रकाश की सापेक्ष चाल उनके सापेक्ष अपवर्तनांकों पर निर्भर करती है।

प्रश्न 7.
एक माध्यम का अपवर्तनांक किस प्रकार प्रकाश की चाल पर निर्भर करता है। किसी माध्यम का दूसरे माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक का व्यंजक उन दोनों माध्यमों में प्रकाश की चाल के पदों में ज्ञात कीजिए।
हल:
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प्रश्न 8.
एक 20 cm फोकस दूरी वाला उत्तल लेंस में आवर्धित आभासी प्रतिबिम्ब एवं वास्तविक प्रतिबिम्ब दोनों प्रकार से बना सकता है। क्या यह कथन सत्य है? यदि हाँ, तो बिम्ब को प्रत्येक अवस्था में कहाँ रखना चाहिए जिससे ये प्रतिबिम्ब प्राप्त हो सके?
उत्तर:
कथन सत्य है क्योंकि उत्तल लेंस आभासी एवं वास्तविक दोनों प्रकार के आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सकता है। पहली स्थिति में बिम्ब को दर्पण से 20 cm से कम दूरी पर रखना चाहिए और दूसरी स्थिति में बिम्ब के दर्पण से 20 cm से 40 cm के बीच दूरी पर रखना चाहिए।

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प्रश्न 9.
सुधा देखती है कि उसकी विज्ञान-प्रयोगशाला की खिड़की के कपाट का स्पष्ट प्रतिबिम्ब एक लेंस से 15 cm की दूरी पर बनता है। अब वह लेंस की स्थिति को छेड़े बिना खिड़की से बाहर दिखाई देनी वाली इमारत को फोकस करना चाहती है। उसको किस दिशा में परदे (स्क्रीन) को खिसकाना चाहिए जिससे उसे उस इमारत का स्पष्ट प्रतिबिम्ब उस परदे पर बन सके। उस लेंस की लगभग फोकस दूरी क्या है?
उत्तर:
इमारत का स्वच्छ एवं स्पष्ट प्रतिबिम्ब परदे (स्क्रीन) पर प्राप्त करने के लिए सुधा को स्क्रीन को लेंस की तरफ खिसकाना चाहिए। लेंस की लगभग फोकस दूरी 15 cm है।

प्रश्न 10.
एक लेंस की क्षमता एवं फोकस दूरी किस प्रकार सम्बन्धित है? आपको दो लेंस 20 cm एवं 40 cm फोकस दूरी के उपलब्ध कराये जाते हैं। अधिक अभिसारी प्रकाश प्राप्त करने के लिए आप कौन-सा लेंस प्रयोग में लाएँगे?
उत्तर:
किसी लेंस की क्षमता (P) उस लेंस की मीटर में मापी गयी फोकस दूरी का व्युत्क्रम होता है अर्थात् –
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अर्थात् किसी लेंस की क्षमता उसकी फोकस दूरी का व्युत्क्रमानुपाती होती है। इसलिए 20 cm फोकस दूरी वाला लेंस अधिक अभिसारी प्रकाश उपलब्ध करायेगा।

प्रश्न 11.
किसी उत्तल लेंस के मुख्य अक्ष पर लेंस के प्रकाशिक केन्द्र से 12 cm की दूरी पर कोई 4 cm लम्बा बिम्ब स्थित है। लेंस से 24 cm दूरी पर लेंस के दूसरी ओर इस बिम्ब का तीक्ष्ण प्रतिबिम्ब एक पर्दे पर बन रहा है। अब यदि इस बिम्ब को लेंस से कुछ दूर ले जाएँ, तो बिम्ब का तीक्ष्ण प्रतिबिम्ब पर्दे पर फिर प्राप्त करने के लिए पर्दे को किस दिशा में (लेंस की ओर अथवा लेंस से दूर) ले जाना होगा? प्रतिबिम्ब के आवर्धन पर इसका क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
परदे को थोड़ा लेंस की ओर ले जाना होगा। उपर्युक्त प्रक्रिया में लेंस से बिम्ब की दूरी u का मान बढ़ रहा है तथा प्रतिबिम्ब की लेंस से दूरी v का मान घट रहा है। इसलिए आवर्धन का मान कम हो जायेगा।

प्रश्न 12.
काँच और जल के निरपेक्ष अपवर्तनांक क्रमश: \(\frac { 3 }{ 2 } \) एवं \(\frac { 4 }{ 3 } \) हैं। यदि काँच में प्रकाश की चाल 2 × 108 m/s है तो (i) निर्वात, (ii) जल में प्रकाश की चाल परिकलित कीजिए।
हल:
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प्रश्न 13.
सौर भट्टियों की अभिकल्पना में उपयोग होने वाले दर्पण का नाम लिखिए। इस युक्ति द्वारा उच्च ताप किस प्रकार प्राप्त किया जाता है? इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सौर भट्टियों की अभिकल्पना में प्रयुक्त होने वाला दर्पण दीर्घ द्वारक का अवतल दर्पण होगा। अवतल दर्पण समानान्तर सौर प्रकाश पुंज का अभिसरण करके एक बिन्दु पर केन्द्रित करेगा जिससे उस स्थान का ताप अत्यधिक बढ़ जायेगा। इस प्रकार हम उसके उपयोग से उच्च ताप प्राप्त कर सकेंगे।

प्रश्न 14.
कोई बिम्ब 15 cm फोकस दूरी की अवतल लेंस से 30 cm की दूरी पर स्थित है। लेंस द्वारा बने प्रतिबिम्ब के चार अभिलक्षणों (प्रकृति, स्थिति आदि) की सूची बनाइए।
उत्तर:
प्रतिबिम्ब:

  1. लेंस के उसी ओर फोकस एवं प्रकाशिक केन्द्र के बीच बनेगा।
  2. प्रतिबिम्ब सीधा होगा।
  3. प्रतिबिम्ब छोटा होगा।
  4. प्रतिबिम्ब आभासी होगा।

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प्रश्न 15.
आयताकार काँच के गुटके से प्रकाश के अपवर्तन का आरेख खींचिए। (2019)
हल:
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प्रश्न 16.
गोलीय दर्पण के वक्रता केन्द्र की परिभाषा लिखिए। (2019)
उत्तर:
गोलीय दर्पण का वक्रता केन्द्र:
“गोलीय दर्पण जिस गोले के भाग होते हैं, उस गोले का केन्द्र उस गोलीय दर्पण का वक्रता केन्द्र कहलाता है।”

MP Board Class 10th Science Chapter 10 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
‘परावर्तन के नियम’ लिखिए। (2019)
अथवा
प्रकाश के परावर्तन के नियम को किरण – आरेख (रेखाचित्र) द्वारा समझाइए।
उत्तर:
परावर्तन के निम्नलिखित दो नियम हैं –

1. आपतित किरण, अभिलम्ब एवं परावर्तित किरण एक ही तल में होते हैं।

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 39

2. आपतन कोण तथा परावर्तन कोण परस्पर बराबर होते हैं।

प्रश्न 2.
अपवर्तन के नियम लिखिए। अपवर्तन को दर्शाने वाला एक किरण आरेख खींचिए जिसमें एक प्रकाश किरण एक आयताकार काँच के गुटके से होकर निर्गत होती है।
उत्तर:
प्रकाश के अपवर्तन के नियम:

  1. आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा दोनों माध्यमों को पृथक् करने वाले पृष्ठ के आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब सभी एक ही तल में होते हैं।
    प्रकाश के किसी निश्चित रंग तथा निश्चित माध्यमों के युग्म के लिए आपतन कोण की ज्या (sine) तथा अपवर्तन कोण की ज्या (sine) का अनुपात स्थिर रहता है।
  2. इस नियम को स्नैल का अपवर्तन नियम कहते हैं।
    अर्थात्

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 40

प्रश्न 3.
लेंस की क्षमता को परिभाषित कीजिए तथा इसका मात्रक भी लिखिए। एक छात्र 50 cm फोकस दूरी का लेंस प्रयुक्त करता है तथा दूसरा छात्र – 50 cm फोकस दूरी का लेंस। इन लेंसों की प्रकृति क्या है तथा इनकी लेंस क्षमता क्या-क्या है?
उत्तर:
लेंस की क्षमता की परिभाषा एवं मात्रक:
“किसी लेंस द्वारा प्रकाश किरणों का अभिसरण या अपसरण करने की मात्रा को उस लेंस की क्षमता के रूप में व्यक्त किया जाता है।” संख्यात्मक रूप से “लेंस की मीटर में व्यक्त फोकस दूरी का व्युत्क्रम उस लेंस की क्षमता कहलाती है।”
अर्थात्
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लेंस की क्षमता का मात्रक: इसका मात्रक डायप्टर (D) होता है।
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प्रश्न 4.
एक उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब बनने को दर्शाने के लिए किरण आरेख खींचिए जबकि बिम्ब स्थित है –

  1. अनन्त पर।
  2. दर्पण से किसी दूरी पर।

उत्तर:
1. उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब बनना जब बिम्ब अनन्त पर स्थित है।
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2. उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब बनना जब बिम्ब दर्पण से किसी दूरी पर स्थित है।
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प्रश्न 5.
निम्न प्रत्येक स्थिति में प्रकाश युक्ति गोलीय दर्पण अथवा लेंस का प्रयोग किया गया है तथा प्रत्येक स्थिति में सीधा और आभासी प्रतिबिम्ब बनता है तो प्रत्येक स्थिति में प्रयुक्त युक्ति की पहचान कीजिए –

  1. बिम्ब को युक्ति एवं इसके फोकस के बीच रखा गया है, बना हुआ प्रतिबिम्ब इस युक्ति के पीछे तथा आवर्धित है।
  2. बिम्ब को युक्ति एवं इसके फोकस के बीच रखा गया है, प्रतिबिम्ब आवर्धित एवं युक्ति के उसी तरफ बना है।
  3. बिम्ब को अनन्त एवं युक्ति के बीच रखा गया है, प्रतिबिम्ब फोकस एवं प्रकाशिक केन्द्र के बीच एवं छोटा बिम्ब की तरफ ही बनता है।
  4. बिम्ब को अनन्त एवं युक्ति के बीच रखा गया है, प्रतिबिम्ब ध्रुव एवं फोकस के बीच छोटा तथा युक्ति के पीछे बनता है।

उत्तर:

  1. अवतल दर्पण।
  2. उत्तल लेंस।
  3. अवतल लेंस।
  4. उत्तल दर्पण।

प्रश्न 6.
काँच की सापेक्ष हीरे का अपवर्तनांक 1.6 है। काँच का निरपेक्ष अपवर्तनांक 1.5 है तो हीरे का निरपेक्ष अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए।
हल:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 44
अतः हीरे का अभीष्ट निरपेक्ष अपवर्तनांक = 2.40
वैकल्पिक विधिदिया है:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 45
अतः हीरे का अभीष्ट अपवर्तनांक = 2.40

प्रश्न 7.
एक किरण आरेख खींचकर एक प्रकाश किरण का किरण-पथ प्रदर्शित कीजिए जबकि प्रकाश किरण तिरछी आपतित होती हुई प्रवेश करती है –
(a) हवा से जल में।
(b) जल से हवा में।
उत्तर:
किरण के अपवर्तन का किरण आरेख –
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प्रश्न 8.
जब एक प्रकाश किरण किसी माध्यम में डूबे काँच की आयताकार गुटके पर आपतित होती है तो निर्गत किरण आपतित किरण के समान्तर क्यों होती है? किरण आरेख खींचकर व्याख्या कीजिए।
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उत्तर:
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प्रश्न 9.
दो समतल दर्पणों के संयोजन की किस स्थिति में आपतित किरण परावर्तित किरण के समान्तर रहेगी चाहे आयतन कोण कुछ भी हो? एक आरेख के द्वारा इसे प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
जब दो समतल दर्पणों को परस्पर समकोण पर रखे जाएँ तो कोई भी प्रकाश किरण किसी भी कोण पर एक दर्पण पर आपतित होती है तो दोनों दर्पणों से परावर्तन के पश्चात् आपतित किरण के सदैव समान्तर परावर्तित हो जाती है।
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प्रश्न 10.
यदि कोई दर्पण उसके सामने कहीं भी स्थित बिम्ब का सदैव ही सीधा और साइज में छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है, तो वह दर्पण किस प्रकार का है? अपने उत्तर की पुष्टि के लिए एक किरण आरेख खींचिए। इस प्रकार के दर्पण प्रायः कहाँ और क्या उपयोग किए जाते हैं?
उत्तर:
वह दर्पण उत्तल दर्पण है।
उत्तल दर्पण के उपयोग:

  1. वाहनों के पश्च दृश्य दर्पण के रूप में पीछे के वाहनों को देखने के लिए। इससे प्रतिबिम्ब सदैव सीधा तथा छोटा बनता है इससे दृष्टि-क्षेत्र बढ़ जाता है।
  2. नगर की सड़कों के खम्भों पर लगे विद्युत् बल्बों के परावर्तन के रूप में जिससे प्रकाश किरणें अधिक से अधिक क्षेत्रफल तक फैल सकें।

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प्रश्न 11.
किसी दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा और – 1 आवर्धन का है। यदि प्रतिबिम्ब की दर्पण से दूरी 40 cm है, तो बिम्ब कहाँ स्थित है? यदि बिम्ब को दर्पण की ओर 20 cm स्थानान्तरित कर दिया जाय तो प्रतिबिम्ब कहाँ बनेगा? अपने उत्तर की पुष्टि के लिए कारण दीजिए तथा बिम्ब की नयी स्थिति के लिए किरण आरेख खींचिए।
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उत्तर:
प्रतिबिम्ब के स्थान पर अर्थात् दर्पण से 40 cm की दूरी पर दर्पण के वक्रता केन्द्र पर स्थित है क्योंकि आवर्धन – 1 है अतः प्रतिबिम्ब उल्टा तथा बिम्ब के बराबर है। यह स्थिति अवतल दर्पण के वक्रता केन्द्र पर होती है।
चूँकि दर्पण की फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है। इसलिए बिम्ब को दर्पण की ओर 20 cm खिसकाने पर उसकी स्थिति फोकस पर होगी जिसका प्रतिबिम्ब अनन्त पर बनेगा।

प्रश्न 12.
2.5 cm ऊँचाई का कोई बिम्ब 10 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल लेंस के प्रकाशिक केन्द्र ‘O’ से 15 cm की दूरी पर स्थित है। बनने वाले प्रतिबिम्ब की स्थिति और साइज ज्ञात करने के लिए किरण आरेख खींचिए। इस आरेख में प्रकाशिक केन्द्र ‘O’ मुख्य फोकस F तथा प्रतिबिम्ब की ऊँचाई अंकित कीजिए।
उत्तर:
अभीष्ट आरेख निम्न है –
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यहाँ प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर लेंस से 30 cm दूरी पर बनेगा तथा उसकी ऊँचाई 5.0 cm होगी। (आरेखानुसार मापने पर)

प्रश्न 13.
यदि कोई लेंस उसके सामने स्थित किसी बिम्ब की किसी भी स्थिति के लिए सदैव ही सीधा और छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है, तो उस लेंस की प्रकृति क्या है? अपने उत्तर की पुष्टि किरण आरेख खींचकर कीजिए। यदि इस लेंस की क्षमता का संख्यात्मक मान 10 D है, तो कार्तीय प्रणाली के अनुसार इसकी फोकस दूरी क्या है?
उत्तर:
अवतल लेंस में ही सदैव प्रत्येक स्थिति में प्रतिबिम्ब बिम्ब से छोटा तथा सीधा बनता है अतः दिया हुआ लेंस अवतल लेंस है जिसकी प्रकृति अपसारी है। लेंस की फोकस दूरी एवं लेंस क्षमता ऋणात्मक होगी।
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अतः लेंस की अभीष्ट फोकस दूरी = – 10 cm है।

प्रश्न 14.
कोई छात्र 10 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस का उपयोग करके लेंस से लगभग 2 m दूरी पर रखी मोमबत्ती की ज्वाला को परदे पर फोकसित करता है। इसके पश्चात् वह ज्वाला को धीरे-धीरे लेंस की ओर खिसकाता है और हर बार उसके प्रतिबिम्ब को परदे पर फोकसित करता है।

  1. परदे पर ज्वाला को फोकसित करने के लिए उसे लेंस को किस दिशा में खिसकाना होता है?
  2. परदे पर बनी ज्वाला के प्रतिबिम्ब के साइज में क्या अन्तर होता है?
  3. परदे पर बनी ज्वाला की तीव्रता (चमक) में क्या अन्तर दिखाई देता है?
  4. जब ज्वाला लेंस के बहुत पास (लगभग 5 cm) दूरी पर होती है, तो परदे पर क्या दिखाई देता है?

उत्तर:

  1. लेंस को परदे से दूर मोमबत्ती की ज्वाला की ओर खिसकाना होगा।
  2. प्रतिबिम्ब का साइज बढ़ता जायेगा।
  3. ज्वाला की तीव्रता (चमक) कम होती जायेगी।
  4. परदे पर कुछ भी दिखाई नहीं देगा क्योंकि ज्वाला का प्रतिबिम्ब नहीं बनेगा।

प्रश्न 15.
अवतल दर्पण के उपयोग लिखिए। (2019)
उत्तर:
अवतल दर्पण के उपयोग:

  1. परवलयाकार अवतल दर्पण को टॉर्च, सर्चलाइट तथा वाहनों के अग्रदीपों में शक्तिशाली समान्तर किरण पुंज प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं।
  2. नाक, कान, गला, दाँत एवं आँख का परीक्षण करने के लिए चिकित्सकों द्वारा प्रयुक्त किये जाते हैं।
  3. सोलर भट्टियाँ एवं सोलर कुकर में प्रकाश किरणों को केन्द्रित करने हेतु प्रयुक्त।
  4. शेव बनाने के लिए इनका प्रयोग होता है जिससे दाढ़ी का प्रतिबिम्ब बड़ा बन सके।

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प्रश्न 16.
एक लेंस द्वारा मोमबत्ती की ज्वाला का प्रतिबिम्ब एक पर्दे पर लिया गया जो लेंस की दूसरी ओर स्थित है। यदि प्रतिबिम्ब ज्वाला का तीन गुना बड़ा हो एवं लेंस तथा प्रतिबिम्ब के बीच दूरी 80 cm हो तो मोमबत्ती को लेंस से कितनी दूरी पर रखना चाहिए? 80 cm की दूरी पर बने प्रतिबिम्ब की एवं लेंस की प्रकृति क्या है?
उत्तर:
चूँकि प्रतिबिम्ब को पर्दे पर लिया गया है तथा प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर बना है इसलिए प्रतिबिम्ब वास्तविक है तथा लेंस अभिसारी उत्तल लेंस है। प्रतिबिम्ब उल्टा बनेगा।

संख्यात्मक प्रश्न का हल:
दिया है: प्रतिबिम्ब की लम्बाई (h’) = 3 × बिम्ब की लम्बाई (h) एवं लेंस से प्रतिबिम्ब की दूरी v = 80 cm
चूँकि
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अतः मोमबत्ती को लेंस से लगभग 26.7 cm दूर रखना चाहिए।

MP Board Class 10th Science Chapter 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अवतल दर्पण में प्रतिबिम्ब का बनना दर्शाने हेतु किरण आरेख खींचिए तथा प्रत्येक स्थिति में प्रतिबिम्ब की स्थिति एवं प्रकृति आदि के बारे में लिखिए जबकि बिम्ब स्थित है –
(a) अनन्त पर।
(b) वक्रता केन्द्र से परे।
(c) वक्रता केन्द्र पर।
उत्तर:
अवतल दर्पण में प्रतिबिम्ब का बनना –
(a) जब वस्तु (बिम्ब) अनन्त पर स्थित है तो प्रतिबिम्ब बनेगा

  1. फोकस पर
  2. बिन्दु के आकार का।
  3. उल्टा।
  4. वास्तविक।

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(b) जब वस्तु वक्रता केन्द्र से परे हो (अनन्त और केन्द्र के बीच) तो प्रतिबिम्ब बनेगा –

  1. वक्रता केन्द्र (C) और फोकस (F ) के बीच।
  2. छोटा।
  3. उल्टा।
  4. वास्तविक।

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 56

(c) जब वस्तु वक्रता केन्द्र (C) पर हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा –

  1. वक्रता केन्द्र (C) पर।
  2. वस्तु के बराबर।
  3. उल्टा।
  4. वास्तविक।

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प्रश्न 2.
अवतल दर्पण में प्रतिबिम्ब का बनना दर्शाने के लिए किरण आरेख खींचिए तथा प्रतिबिम्ब की स्थिति एवं प्रकृति आदि के बारे में प्रत्येक स्थिति में लिखिए। जबकि बिम्ब (वस्तु) स्थित है।
(a) वक्रता केन्द्र (C) एवं फोकस (F) के बीच।
(b) फोकस (F) पर।
(c) फोकस (F ) एवं ध्रुव (P) के बीच।
उत्तर:
अवतल दर्पण में प्रतिबिम्ब बनना
(a) जब बिम्ब (वस्तु) वक्रता केन्द्र (C) एवंफोकस (F) के बीच स्थित हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा –

  1. वक्रता केन्द्र से परे अर्थात् (वक्रता केन्द्र एवं अनन्त के बीच)।
  2. वस्तु से बड़ा (आवर्धित)।
  3. उल्टा।
  4. वास्तविक।

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(b) जब बिम्ब फोकस (F) पर हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा –

  1. अनन्त पर।
  2. बहुत बड़ा (अति आवर्धित)।
  3. उल्टा।
  4. वास्तविक।

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(c) जब बिम्ब फोकस (F) एवं ध्रुव (P) के बीच स्थित हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा –
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  1. दर्पण के पीछे।
  2. आवर्धित।
  3. सीधा।
  4. आभासी।

प्रश्न 3.
उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिम्ब बनना प्रदर्शित करने के लिए किरण आरेख खींचिए तथा प्रतिबिम्ब की स्थिति एवं प्रकृति आदि का उल्लेख कीजिए जबकि बिम्ब स्थित है –
(a) अनन्त पर।
(b) 2 F से परे अर्थात् 2 F एवं अनन्त (∞) के बीच।
(c) 2 F पर।
उत्तर:
उत्तल लेंस में प्रतिबिम्ब का बनना –
(a) जब बिम्ब अनन्त पर हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा –

  1. लेंस दूसरी ओर फोकस (F) पर।
  2. बहुत छोटा बिन्दु आकार का।
  3. उल्टा।
  4. वास्तविक।

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 61

(b) जब बिम्ब वस्तु अनन्त (∞) और 2 F के बीच हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा –

  1. F एवं 2 F के बीच।
  2. छोटा।
  3. उल्टा।
  4. वास्तविक।

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 62

(c) जब बिम्ब 2 F पर हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा –

  1. 2 F पर।
  2. बराबर।
  3. उल्टा।
  4. वास्तविक।

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 63

प्रश्न 4.
उत्तल लेंस में प्रतिबिम्ब बनना दर्शाने के लिए किरण आरेख खींचिए तथा प्रतिबिम्ब की स्थिति एवं प्रकृति आदि का उल्लेख कीजिए। जबकि बिम्ब स्थित है –
(a) F एवं 2 F के बीच।
(b) F पर।
(c) F और प्रकाशिक केन्द्र O के बीच।
उत्तर:
उत्तल लेंस में प्रतिबिम्ब का बनना –
(a) जब बिम्ब F एवं 2 F के बीच स्थित हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा –

  1. 2 F से परे।
  2. आवर्धित।
  3. उल्टा।
  4. वास्तविक।

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 64

(b) जब बिम्ब फोकस (F) पर स्थित हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा –

  1. अनन्त पर।
  2. अति आवर्धित।
  3. उल्टा।
  4. वास्तविक।

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 65

(c) जब बिम्ब फोकस (F) एवं प्रकाशिक केन्द्र (O) के बीच हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा –

  1. लेंस के उसी ओर।
  2. आवर्धित।
  3. सीधा।
  4. आभासी।

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प्रश्न 5.
अवतल लेंस में प्रतिबिम्ब बनना दर्शाने के लिए किरण आरेख खींचिए तथा प्रतिबिम्ब की स्थिति एवं प्रकृति आदि का उल्लेख कीजिए जबकि बिम्ब स्थित हो –
(a) अनन्त पर।
(b) F एवं अनन्त के बीच।
(c) F पर।
उत्तर:
(a) जब बिम्ब अनन्त पर हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा।

  1. लेंस के उसी ओर F पर।
  2. बिन्दु आकार।
  3. सीधा।
  4. आभासी।

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(b) जब बिम्ब अनन्त एवं F के बीच स्थित हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा।

  1. फोकस (F) एवं प्रकाशिक केन्द्र (O) के बीच।
  2. छोटा।
  3. सीधा।
  4. आभासी।

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(c) जब बिम्ब फोकस (F) पर हो तो प्रतिबिम्ब बनेगा –

  1. फोकस (F) एवं प्रकाशिक केन्द्र (O) के बीच।
  2. छोटा।
  3. सीधा।
  4. आभासी।

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प्रश्न 6.
एक छात्र ने एक उत्तल लेंस का प्रयोग करके एक मोमबत्ती की ज्वाला को एक सफेद परदे पर फोकस किया। उसने मोमबत्ती, लेंस एवं पर्दे की स्थितियाँ अग्र प्रकार प्रेक्षित कर अंकित की –
मोमबत्ती की स्थिति = 12.0 cm पर।
उत्तल लेंस की स्थिति = 50.0 cm पर।
परदे की स्थिति = 88.0 cm पर।
(i) उस उत्तल लेंस की फोकस दूरी क्या है?
(ii) यदि वह छात्र मोमबत्ती को लेंस की ओर 31.0 cm की स्थिति तक खिसका देता है तो प्रतिबिम्ब कहाँ बनेगा?
(iii) यदि मोमबत्ती को पुनः लेंस की ओर खिसका दें तो बनने वाले प्रतिबिम्ब की प्रकृति क्या होगी?
(iv) उपर्युक्त स्थिति (iii) के लिए प्रतिबिम्ब बनने को दर्शाने के लिए किरण आरेख खींचिए।
हल:
(ii) चूँकि अब मोमबत्ती की नयी स्थिति = 31.0 cm पर है
⇒ मोमबत्ती की लेंस से दूरी (u) = 31 – 50 = – 19 cm
– चूँकि मोमबत्ती लेंस के फोकस पर स्थित है अत: मोमबत्ती का प्रतिबिम्ब अनन्त पर बनेगा।

(iii) यदि हम मोमबत्ती को लेंस की ओर और अधिक खिसकाएँगे तो इसकी स्थिति फोकस और प्रकाशिक केन्द्र के बीच हो जाएगी।
अतः प्रतिबिम्ब लेंस के उसी ओर सीधा एवं आभासी होगा तथा परदे पर नहीं बनेगा।

(iv) किरण आरेख – जब मोमबत्ती लेंस के फोकस (F) एवं प्रकाशिक केन्द्र (O) के बीच है।
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प्रश्न 7.
20 cm फोकस दूरी वाले एक दर्पण द्वारा किसी बिम्ब का प्रतिबिम्ब बिम्ब की ऊँचाई का \(\frac { 1 }{ 3 } \) भाग के बराबर का बनता है। बिम्ब को दर्पण से कितनी दूरी पर रखना चाहिए। प्रतिबिम्ब एवं दर्पण की प्रकृति क्या होगी?
हल:
इस प्रश्न में दो स्थितियाँ हो सकती हैं।
(i) जब दर्पण अवतल हो तो उसकी फोकस दूरी ऋणात्मक होगी, अर्थात् f = – 20 cm,
u एवं v दोनों ऋणात्मक होंगे।
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अतः बिम्ब को अवतल दर्पण से 80 cm की दूरी पर उसके सम्मुख रखना चाहिए। दर्पण अवतल तथा प्रतिबिम्ब उल्टा तथा वास्तविक होगा तथा दर्पण के सम्मुख बनेगा। – उत्तर

(ii) जब दर्पण उत्तल होगा तो दर्पण की फोकस दूरी धनात्मक अर्थात् f = + 20 cm होगी तथा प्रतिबिम्ब सीधा, आभासी तथा दर्पण के पीछे बनेगा। यहाँ u ऋणात्मक तथा v धनात्मक होगा।
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अतः बिम्ब को उत्तल दर्पण के सम्मुख 40 cm की दूरी पर रखना होगा। दर्पण उत्तल तथा प्रतिबिम्ब सीधा एवं आभासी होगा तथा दर्पण के पीछे बनेगा।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित प्रेक्षण तालिका का विश्लेषण कीजिए, जिसमें उत्तल लेंस की स्थिति में बिम्ब दूरी (u) के साथ प्रतिबिम्ब दूरी (v) का विचरण दर्शाया गया है, और बिना कोई परिकलन किए ही निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
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(a) उत्तल लेंस की फोकस दूरी क्या है? अपने उत्तर की पुष्टि के लिए कारण दीजिए।
(b) उस प्रेक्षण की क्रम संख्या लिखिए, जो सही नहीं है। यह निष्कर्ष आपने किस आधार पर निकाला है?
(c) किसी उचित पैमाने को चुनकर क्रम संख्या 2 के प्रेक्षण के लिए किरण आरेख खींचिए। आवर्धन का लगभग मान भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(a) चूँकि प्रेक्षण क्रम संख्या 3 में हैं एवं v के संख्यात्मक मान बराबर हैं जोकि 40 cm है। यह उत्तल लेंस में तभी सम्भव होता है जब वस्तु 2 F पर होती है तो प्रतिबिम्ब 2 F पर बनता है।
इसलिए
2 F = 40 cm ⇒ f = \(\frac { 40 }{ 2 } \) = 20 cm
अतः उत्तल लेंस की अभीष्ट फोकस दूरी = 20 cm है।

(b) क्रम संख्या 6 वाला प्रेक्षण सही नहीं है क्योंकि इसमें बिम्ब की स्थिति फोकस (F) एवं प्रकाशिक केन्द्र (O) के बीच स्थित है जिससे उसका प्रतिबिम्ब आभासी बनेगा जिसका प्रेक्षण सम्भव नहीं है।

(c) स्थिति (b) में बनने वाले प्रतिबिम्ब के लिए किरण आरेख –
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प्रश्न 9.
(a) यदि किसी दर्पण द्वारा उसके सामने स्थित बिम्ब की किसी भी स्थिति के लिए सदैव ही छोटा, सीधा एवं आभासी प्रतिबिम्ब बनता है, तो इस दर्पण की प्रकृति लिखिए और अपने उत्तर की पुष्टि के लिए एक किरण आरेख भी खींचिए। इस प्रकार के दर्पणों का एक उपयोग लिखिए तथा उनका उपयोग क्यों किया जाता है? उसका उल्लेख कीजिए।
(b) गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या की परिभाषा लिखिए। किसी गोलीय दर्पण की प्रकृति और फोकस दूरी ज्ञात कीजिए, जिसकी वक्रता त्रिज्या + 24 cm है।
उत्तर:
(a) जब दो समतल दर्पणों को परस्पर समकोण पर रखे जाएँ तो कोई भी प्रकाश किरण किसी भी कोण पर एक दर्पण पर आपतित होती है तो दोनों दर्पणों से परावर्तन के पश्चात् आपतित किरण के सदैव समान्तर परावर्तित हो जाती है।
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 49

(b) गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या:
“गोलीय दर्पण जिस गोले के भाग होते हैं उसकी त्रिज्या गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या कहलाती है।” दूसरे शब्दों में “गोलीय दर्पण के वक्रता केन्द्र से उसके प्रकाशिक केन्द्र की सीधी दूरी उस गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या होती है।”
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 75
अतः दर्पण की अभीष्ट फोकस दूरी + 12 cm है तथा दर्पण एक उत्तल दर्पण है।

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प्रश्न 10.
12 cm फोकस दूरी के अवतल दर्पण द्वारा किसी बिम्ब का सीधा प्रतिबिम्ब बनाने के लिए कहा गया है।
(i) दर्पण के सामने बिम्ब की दूरी का क्या परिसर होगा?
(ii) बनने वाला प्रतिबिम्ब साइज में बिम्ब से छोटा होगा या बड़ा होगा। इस प्रकरण में प्रतिबिम्ब दर्शाने के लिए किरण आरेख खींचिए।
(iii) इस बिम्ब का प्रतिबिम्ब कहाँ बनेगा यदि इसे दर्पण के सामने 24 cm की दूरी पर रख दिया जाए। अपने उत्तर की पुष्टि के लिए इस स्थिति के लिए भी किरण आरेख खींचिए।
उपर्युक्त किरण आरेखों में ध्रुव मुख्य फोकस और वक्रता केन्द्र की स्थितियों को भी दर्शाइए।
उत्तर:
(i) दर्पण के सम्मुख इस स्थिति के लिए बिम्ब की दूरी दर्पण में 12 cm से कम होनी चाहिए।
(ii) बनने वाला प्रतिबिम्ब साइज में बिम्ब से बड़ा होगा।
किरण आरेख –
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(iii) जब बिम्ब को दर्पण के सम्मुख 24 cm की दूरी पर रखा जाता है तो यह स्थिति बिम्ब की वक्रता केन्द्र पर है जिसका प्रतिबिम्ब भी वक्रता केन्द्र पर ही अर्थात् दर्पण के सम्मुख दर्पण से 24 cm की दूरी पर बिम्ब के ऊपर ही बनेगा।
किरण आरेख –
जहाँ P = ध्रुव, F = मुख्य फोकस, C = वक्रता केन्द्र
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प्रश्न 11.
(a) गोलीय लेंस के प्रकाशिक केन्द्र की परिभाषा लिखिए।
(b) किसी अपसारी लेंस की फोकस दूरी 20 cm है। 4 cm ऊँचाई के किसी बिम्ब को इस लेंस के प्रकाशिक केन्द्र से कितनी दूरी पर रखा जाना चाहिए कि इसका प्रतिबिम्ब लेंस से 10 cm दूरी पर बने। प्रतिबिम्ब का साइज भी परिकलित कीजिए।
(c) उपर्युक्त स्थिति के लिए प्रतिबिम्ब बनना दर्शाने के किरण आरेख खींचिए।
उत्तर:
(a) गोलीय लेंस का प्रकाशिक केन्द्र:
“लेंस के मुख्य अक्ष पर स्थित वह बिन्दु जिससे होकर जाने वाली प्रकाश किरण अपवर्तन के पश्चात् आपतित किरण की दिशा में निर्गमित होती है, लेंस का प्रकाशिक केन्द्र कहलाता है।” यह लेंस का केन्द्रीय बिन्दु होता है।

(b) अपसारी लेंस अवतल लेंस होता है जिसकी फोकस दूरी प्रतिबिम्ब की दूरी दोनों ऋणात्मक होते हैं।
दिया है: f = – 20 cm, v = – 10 cm तथा बिम्ब की ऊँचाई h = 4 cm
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अतः वस्तु को लेंस के सामने उससे 20 cm की दूरी पर रखी जानी चाहिए तथा प्रतिबिम्ब का अभीष्ट साइज लगभग 2 cm है।

(c) किरण आरेख – (अपसारी लेंस में प्रतिबिम्ब बनना)
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प्रश्न 12.
किसी लेंस की क्षमता से क्या तात्पर्य है? इसके SI मात्रक की परिभाषा लिखिए। आपके पास दो लेंस A और B हैं, जिनकी फोकस दूरियाँ क्रमशः + 10 cm और – 10 cm हैं। इन दोनों लेंसों की प्रकृति लिखिए और क्षमता ज्ञात कीजिए। इन दोनों में से किस लेंस से किसी बिम्ब को लेंस से 8 cm दूरी पर रखने पर उसका आभासी और आवर्धित प्रतिबिम्ब बनेगा ? अपने उत्तर की पुष्टि के लिए एक किरण आरेख खींचिए।
उत्तर:
लेंस की क्षमता:
“किसी लेंस द्वारा प्रकाश किरणों का अभिसरण या अपसरण करने की मात्रा को उस लेंस की क्षमता के रूप में व्यक्त किया जाता है।” संख्यात्मक रूप से “लेंस की मीटर में व्यक्त फोकस दूरी का व्युत्क्रम उस लेंस की क्षमता कहलाती है।”
अर्थात्
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लेंस की क्षमता का मात्रक: इसका मात्रक डायप्टर (D) होता है।

लेंस की क्षमता के मात्रक डायप्टर की परिभाषा:
एक डायप्टर उस लेंस की क्षमता के बराबर होती है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर हो।
अर्थात्
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+ 10 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस द्वारा वस्तु को लेंस से 8 cm दूरी पर रखने पर अर्थात् फोकस (F) एवं प्रकाशिक केन्द्र (O) के बीच रखने पर सीधा, आभासी और आवर्धित प्रतिबिम्ब बनेगा।
किरण आरेख –
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प्रश्न 13.
10 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल लेंस के आधे भाग को काले कागज से ढक दिया गया है। क्या यह लेंस 30 cm दूरी पर स्थित बिम्ब का पूरा प्रतिबिम्ब बना सकता है? अपने उत्तर की पुष्टि के लिए एक किरण आरेख खींचिए।
कोई 4 cm लम्बा बिम्ब 20 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल लेंस के मुख्य अक्ष के लम्बवत् रखा है। बिम्ब की लेंस से दूरी 15 cm है। प्रतिबिम्ब की प्रकृति, स्थिति और साइज ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
हाँ, इस लेंस द्वारा 30 cm दूरी पर स्थित बिम्ब का पूरा प्रतिबिम्ब बन सकता है।
किरण आरेख –
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संख्यात्मक भाग का हल –
दिया है: h = 4 cm, f= 20 cm, u= – 15 cm
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अतः प्रतिबिम्ब लेंस के उसी ओर लेंस से 60 cm की दूरी पर सीधा, 16 cm ऊँचा तथा आभासी बनेगा।

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