MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti विविध प्रश्नावली 1

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MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Solutions विविध प्रश्नावली 1

Class 8 Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 1.
सही जोड़ी बनाइए
(अ) सुसंस्कृत – अभिमान
(ब) सामंजस्य – अच्छे संस्कार वाला
(स) आचरण औचित्य
(द) दंभ व्यवहार।
उत्तर-
(अ) 2,
(ब) 3,
(स) 4,
(द) 1

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MP Board Class 8 Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 2.
सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
1. महात्मा बुद्ध का हृदय संसार के कष्टों को देखकर …………………………. था। (तुःखी, सुखी)
2. जाँच-पड़ताल और …………………………. लोगों तक पहुँचने के लिए पुलिस को लोगों से पूछताछ करनी पड़ती है। (निदोष, दोषी)
3. रास्ते से ग्वालिन गुजरी थी, उस रास्ते का नाम राजा ने रखा था …………………………. (हीरा-कुणी, सोनी-कुणी)
4. चाँद बाँटता …………………………. सबको, बादल वर्षा-जल दे जाते। (रोशनी, अमृत)
5. डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा भारत के …………………………. राष्ट्रपति (नवें, दसवें)
उत्तर-
1. दुखी,
2. दोषी,
3. हीरा-कुणी,
4. अमृत,
5. नवें।

Class 8th Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 3.
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत के किस गरिमामय पद को सुशोभित किया?
2. वृक्ष हमें क्या देते हैं?
3. कुणी किसका नाम था?
4. सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के प्रति आपका क्या कर्तव्य है?
5. महात्मा बुद्ध जंगल की ओर क्यों जा रहे थे?
6. विनम्र व्यक्ति की क्या पहचान है?
7. सरदार पटेल का स्वभाव कैसा था?
8. ‘एक वेश’ से कवि उदयशंकर भट्ट का क्या आशय है?
उत्तर-
1. अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत के प्रधानमंत्री गरिमामय पद को सुशोभित किया।
2. वृक्ष हमें फूल, फल और बीज देते हैं।
3. कुणी गाय का नाम था।
4. सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के प्रति हमारा यह कर्तव्य है कि हम उसे निकट के चिकित्सालय में पहुँचाएं और पुलिस को इसकी सूचना दें।
5. महात्मा बुद्ध जंगल की ओर इसलिए जा रहे थे कि उसमें अंगुलिमाल रहता था।
6. आगंत्तुक का प्रसन्नतापूर्वक स्वागत करना विनम्र व्यक्ति की पहचान है?
7. सरदार पटेल का स्वभाव अत्यधिक वीर, निर्भय, दृढ़ निश्चयी, परिश्रनी तथा लगनशील था।
8. ‘एक वेश’ से कवि उदयशंकर भट्ट का आशय है-‘राष्ट्रीय एकता।’

Class 8 Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 4.
लघु उत्तरीय प्रश्न

Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 1.
‘जिएँ देश के लिए जिएँ हम’ पंक्ति से कवि का क्या आशय है?
उत्तर-
‘जिगू देश के लिए जिएँ हम’ पंक्ति से कवि का क्या आशय है-अपने देश को महान् बनाने के लिए हमें अपना तन, मन, धन सब कुछ जरूरत पड़ने पर न्यौछावर कर देना चाहिए।

Class 8 Hindi Vividh Prashnavali 1 MP Board प्रश्न 2.
विनम्र व्यक्ति का व्यवसाय हमेशा क्यों फलता-फूलता है?
उत्तर-
विनम्र व्यक्ति का व्यवसाय हमेशा फलता-फूलता है। यह इसलिए कि वह हर किसी समस्या का समाधान बड़े ही सहज रूप में करके सफलता की ऊँचाइयों पर चढ़ता जाता

Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 3.
महात्मा बुद्ध के मन में जंगल में जाते समय क्या-क्या विचार आ रहे थे?
उत्तर-
महात्मा। दु के मन में जंगल में जाते समय ये विचार आ रहे थे कि आदमी आदमी को मारता क्यों है? जीव, जीव को देखकर प्रसन्न क्यों नहीं होता?’

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Vividh Prashnavali 1 Class 8 Hindi प्रश्न 4.
हम पुलिस को किस प्रकार सहयोग कर सकते हैं?
उत्तर-
हम पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने, सूचना का आदान-प्रदान करने, कानून एवं नियमों का स्वेच्छा से पालन करने और कानून व संविधान में आस्था बनाए रखने में सहयोग कर सकते हैं।

Class 8 Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 5.
सरदार पटेल को ‘लौह पुरुष’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर-
सरदार पटेल को ‘लौह पुरुष’ कहा जाता है। यह इसलिए कि वे स्वभाव से अत्यधिक वीर, निर्भय, दृढ़ निश्चयी, परिश्रमी तथा लगनशील थे। .

Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 6.
हीरा अपने बच्चे से मिलने के लिए क्यों छटपटा रही थी?
उत्तर-
हीरा अपने बच्चे से मिलने के लिए छटपटा रही थी। यह इसलिए कि उसकी छाती अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए फटने लगी थी। इसे वह और अधिक सहन नहीं कर पा रही थी।

Class 8 Hindi Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 7.
‘दधीचि’ ऋषि कौन थे?
उत्तर-
दधीचि’ ऋपि ने अस्त्र बनाने के लिए अपनी हड्डियाँ तक देवताओं को दान कर दी थीं। इन हडिडयों से वज्र बनाया गया। फिर उससे इंद्र ने राक्षसों को परास्त किया।

Hindi Sugam Bharti Class 8 Digest Pdf प्रश्न 8.
मध्यप्रदेश ने कौन-कौन से शीर्ष पुरुष राष्ट्र को दिए हैं?
उत्तर-
मध्यादेश ने डॉ. शंकर दयाल शर्मा और श्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे शीर्प पुरुष राष्ट्र को दिए हैं।

Class 8 Vividh Prashnawali प्रश्न 5.
निम्नलिखित पंक्तियों का अर्थ लिखिएगहरी नदियाँ, निर्झर, नाले, निर्मल जल दिन-रात बहाते ऊँचे-नीचे पर्वत ही तो, इन सोतों को जनक कहाते।
उत्तर-
प्रकृति के जो-जो रूप परोपकार करते रहते हैं, उनमें बड़ी-बड़ी गहरी नदियाँ, छोटे-बड़े झरने और पतले-चौड़े नाले दिन-रात दूसरों के लिए ही स्वच्छ और मीठे जल प्रदान करते रहते हैं। इन सबका जन्मदाता पर्वत ही होता है। वह इन्हें हमेशा जीवन गति प्रदान करता है।

MP Board Solution Class 8 Hindi प्रश्न 6.
‘अंहिसा की विजय’ अथवा ‘हीरा-कुणी’ में से किसी एक कहानी का सारांश लिखिए।
उत्तर-
‘अहिंसा की विजय’ कहानी का सारांश कोसल की राजधानी श्रावस्ती की प्रजा अंगुलिमाल डाकू के अत्याचार से बड़ी त्रस्त थी। भगवान बुद्ध ने वहाँ के राजा प्रसेनजित को धीरज वधाते हुए उसकी चिंता दूर करने के लिए अंगुलिमाल के पास चल दिए। अंगुलिमाल जंगल में रहता था। वह बहुत बड़ा भयंकर डाकू था। उसने हजार आदमियों की हत्या करने की प्रतिज्ञा की थी। इसका हिसाब रखने के लिए वह जिसका वध करता, उसकी एक अंगुली काट लेता। इस प्रकार की अंगुलियों की माला अपने गले में डाले रहता।

आदमी, आदमी को क्यों मारता है? जीव, जीव को देखकर प्रसन्न क्यों नहीं होता?’ ‘यही सोचते हुए महात्मा बुद्ध को अचानक यह आवाज सुनाई दी, ‘टहर जा’, महात्मा बुद्ध रुक गए। उनके सामने अंगुलिमाल आकर खड़ा हो गया। बुद्ध ने कहा, ‘मैं तो ठहर गया, भला तू कब ठहरेगा?’ इसे सुनकर अंगुलिमाल ने विनीत स्वर में कहा, ‘महात्मन् मैं आपकी बात नहीं समझ सका।’

महात्मा बुद्ध ने उसे समझाया कि जीवन में दुख-ही-दुख है। मैं तो आत्मज्ञान प्राप्त कर इससे छूट गया हूँ लेकिन तू इससे कब मुक्त होगा?’ बुद्ध के प्रभाव को देखकर अंगुलिमाल उनके चरणों पर गिर पड़ा। बुद्ध ने उसे दया-शांति का उपदेश देकर अपना शिष्य बना लिया।

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MP Board Solutions Class 8 Hindi प्रश्न 7.
(अ) विलोम शब्द लिखिए- औपचारिक, शांति, दिन, कृतज्ञ।
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 8 मध्य प्रदेश के गौरव 3

(ब) निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग अलग करके लिखिए-
अभिरुचि, अपमान, अनाचार, प्रतिकार।
उत्तर-
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 8 मध्य प्रदेश के गौरव 4.
MP Board Class 8th Hindi Sugam Bharti Chapter 8 मध्य प्रदेश के गौरव 5

(स) दिए गए शब्दों में से तत्सम, तद्भव तथा विदेशी शब्द छाँटकर लिखिए-
रिकार्ड, दुग्ध, टिकिट, कान, पृष्ठभूमि, घर।
उत्तर-
(स) तत्सम शब्द – दुग्ध, पृष्ठभूमि
तद्भव शब्द – कान, घर
विदेशी शब्द – रिकार्ड, टिकिट।
रिकार्ड, दुग्ध, टिकिट, कान, पृष्ठभूमि, घर।

(द) निम्नलिखित शब्दों में से संज्ञा, विशेषण तथा सर्वनाम छाँटकर लिखिए-
तुम्हारा, फूल, लाल, हमारा, राजा, कोमल।
उत्तर-
(द) संज्ञा-राजा, फूल,
विशेषण-लाल, कोमल
सर्वनाम-तुम्हारा, हमारा।

Class 8 Subject Hindi Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 8.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(अ)धीरज, सावधान, प्रेमपूर्वक
(ब) पाठ्य पुस्तक में पढ़ी हुई किसी कविता की चार पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर-
(अ) शब्द – वाक्य-प्रयोग
धीरज – हमें विपत्तिकाल में धीरज रखना चाहिए।
सावधान – विनम्र सावधान होकर बात करते है।
प्रेमपूर्वक – प्रेमपूर्वक व्यवहार से सफलता मिलती है।

(ब) कुदरत हमको रोज सिखाती,
जग-हित में कुछ करना सीखें।
अपने लिए सभी जीते हैं,
औरों के हित मरना सीखें॥

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MP Board Class 12th Special Hindi स्वाति कवि परिचय (Chapter 1-5)

MP Board Class 12th Special Hindi स्वाति कवि परिचय (Chapter 1-5)

1. मीराबाई

जीवन परिचय

हिन्दी साहित्य में मीराबाई का विशेष महत्व है। मीरा भक्त कवयित्री हैं। उनकी रचनाएँ हृदय की अनुभूति मात्र हैं।

मीराबाई का जन्म राजस्थान में जोधपुर के मेड़ता के निकट चौकड़ी ग्राम में सन् 1503 ई. (संवत् 1560 ई) में हुआ था। वे राठौर रत्नसिंह की पुत्री थीं। बचपन में ही मीरा की माता का निधन हो गया था। इस कारण ये अपने पितामह राव दूदाजी के साथ रहती थीं। राव दूदा कृष्ण भक्त थे। अत: मीरा भी कृष्ण भक्ति में रंग गई। मीरा का विवाह उदयपुर के महाराज भोजराज के साथ हुआ था। विवाह के कुछ वर्ष उपरान्त ही इनके पति का स्वर्गवास हो गया। इस असह्य कष्ट ने इनके हृदय को भारी आघात पहुँचाया। इससे उनमें विरक्ति का भाव पैदा हो गया। वे साधु सेवा में ही जीवन-यापन करने लगीं। वे राजमहल से निकलकर मंदिरों में जाने लगी और साधु संगति में कृष्ण-कीर्तन करने लगीं। इनकी अनन्य कृष्ण भक्ति और संत समागम से राणा परिवार रुष्ट हो गया। इससे चित्तौड़ के तत्कालीन राणा ने उन्हें भाँति-भाँति की यातनाएँ देना शुरू कर दिया। कहते हैं कि एक बार मीरा को विष भी दिया गया, किन्तु उन पर उसका असर नहीं हुआ। राणा की यातनाओं से ऊब कर ये कृष्ण की लीलाभूमि मथुरा-वृन्दावन चली गईं और वहीं शेष जीवन व्यतीत किया। मीरा की भक्ति-भावना बढ़ती गई और वे प्रभु प्रेम में दीवानी बन गईं। संसार से विरक्त, कृष्ण भक्ति में लीन मीरा की वियोग भावना ही इनके साहित्य का मूल आधार है। मीरा अपने अन्तिम दिनों में द्वारका चली गईं। वहाँ ही सन् 1546 ई.(संवत् 1603 वि) में वे स्वर्ग सिधार गईं।

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  • साहित्य सेवा

मीराबाई द्वारा लिखित काव्य उनके हृदय की मर्मस्पर्शी वेदना है और भक्ति की तल्लीनता है। उन्होंने सीधे सरल भाव से अपने हृदय के भावों को कविता के रूप में व्यक्त कर दिया है। उनका साहित्य भक्ति के आवरण में वाणी की पवित्रता है और संगीत का माधुर्य है। मन की शान्ति के लिए और भक्ति मार्ग को पुष्ट करने के लिए मीरा की साहित्य सेवा सर्वोच्च

  • रचनाएँ

मीराबाई के नाम से जिन कृतियों का उल्लेख मिलता है उनके नाम हैं-‘नरसी जी को माहेरो’, ‘गीत गोविन्द की टीका’, ‘राग-गोविन्द’, ‘राग-सोरठा के पद’, ‘मीराबाई का मलार’, ‘गर्वागीत’, ‘राग विहाग’ और फुटकर पद। भौतिक जीवन से निराश मीरा की एकान्त निष्ठा गिरधर गोपाल में केन्द्रित है। ‘मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई’ कहकर मीरा ने कृष्ण के प्रति अपना समर्पण भाव व्यक्त किया है। भक्ति का यह भी एक लक्षण है।

  • भाव पक्ष

मीराबाई द्वारा रचित काव्य साहित्य में उनके हृदय की मर्मस्पर्शिनी वेदना है, प्रेम की आकुलता है तथा भक्ति की तल्लीनता है। उन्होंने अपने मन की अनुभूति को सीधे ही सरल, सहज भाव में अपने पदों में अभिव्यक्ति दे दी है। मीरा के पदों के वाचन और गायन से संकेत मिलता है कि मीरा की भक्ति-भावना अन्तःकरण से स्फूर्त है। उन्होंने मुक्त भाव से सभी भक्ति सम्प्रदायों से प्रभाव ग्रहण किया है।

उनकी रचनाओं में माधुर्य समन्वित दाम्पत्य भाव है। मीरा का विरह पक्ष साहित्य की दृष्टि से मार्मिक है। उनके आराध्य तो सगुण साकार श्रीकृष्ण हैं। मीरा के बहुत से पदों में रहस्यवाद स्पष्ट दिखाई देता है। रहस्यवाद में प्रिय के प्रति उत्सुकता, मिलन और वियोग के चित्र हैं।

  • कला पक्ष
  1. भाषा-मीरा की भाषा राजस्थानी और ब्रजभाषा है, किन्तु पदों की रचना ब्रजभाषा में ही है। उनके कुछ पदों में भोजपुरी भी दिखाई देती है। मीरा की भाषा शुद्ध साहित्यिक भाषा न रहकर जनभाषा ही रही।
  2. शैली-मीरा ने मुक्तक शैली का प्रयोग किया है। उनके पदों में गेयता है। भाव सम्प्रेषणता मीरा की गीति शैली की प्रधान विशेषता है।
  3. अलंकार इनकी रचनाओं में अधिकतर उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अनुप्रास आदि अलंकारों को सर्वत्र देखा जा सकता है।
  • साहित्य में स्थान

मीरा ने अपने हृदय में व्याप्त वेदना और पीड़ा को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। भक्तिकाल के स्वर्ण युग में मीरा के भक्ति भाव से सम्पन्न पद आज भी अलग ही जगमगाते दिखाई देते हैं।

2. केशवदास

जीवन परिचय
हिन्दी साहित्य के कवियों एवं आचार्यों में केशव का साहित्य विलक्षण एवं प्रभावशाली है। इन्हें रीतिकाल का प्रवर्तक माना जाता है। केशवदास के जन्मकाल के सम्बन्ध में विद्वान एकमत नहीं हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार इनका जन्मकाल सन् 1555 ई. (संवत् 1612) तथा मृत्यु सन् 1617 ई. (संवत् 1674) माना गया है। इनका जन्म स्थान ओरछा, मध्यप्रदेश है। ये दरबारी कवि थे। इन्हें ओरछा नरेश महाराजा रामसिंह के दरबार में विशेष सम्मान प्राप्त था। नीति निपुण एवं स्पष्टवादी केशव की प्रतिभा बहुमुखी है। उनकी रचनाओं में उनके आचार्य, महाकवि और इतिहासकार का रूप दिखाई देता है। आचार्य का आसन ग्रहण करने पर इन्हें संस्कृत की शास्त्रीय पद्धति को हिन्दी में प्रचलित करने की चिन्ता हई जो जीवन के अन्त तक बनी रही। इनके पहले भी रीतिग्रन्थ लिखे गए किन्तु व्यवस्थित और सर्वांगीण ग्रन्थ सबसे पहले इन्होंने ही प्रस्तुत किए। अनुप्रास,यमक और श्लेष अलंकारों के ये विशेष प्रेमी थे। इनके श्लेष संस्कृत पदावली के हैं। अलंकार सम्बन्धी इनकी कल्पना अद्भुत है।

  • साहित्य सेवा

केशवदास ने लक्षण ग्रन्थ,प्रबन्ध काव्य, मुक्तक सभी प्रकार के ग्रन्थों की रचना की है। ‘रसिक प्रिया’,’कवि प्रिया’ और ‘छन्दमाला’ उनके लक्षण ग्रन्थ हैं। रीतिग्रन्थों की रचना इनके कवि रूप में आविर्भाव से पूर्ण भी होती रही। परन्तु जिस तरह के व्यवस्थित और समय ग्रन्थ इन्होंने प्रस्तुत किए, वैसे अन्य कोई कवि रीति ग्रन्थ प्रस्तुत करने में सफल नहीं हुआ।

इनका कवि रूप इनकी प्रबन्ध एवं मुक्तक दोनों प्रकार की रचनाओं में दृष्टिगोचर होता है। संवादों के उपयुक्त विधान का इनमें विशिष्ट गुण है। मानवीय मनोभावों की इन्होंने सुन्दर व्यंजना की है। संवादों में इनकी उक्तियाँ विशेष मार्मिक हैं तथापि प्रबन्ध के बीच अनावश्यक उपदेशात्मक प्रसंगों का नियोजन उसके वैशिष्ट्य में व्यवधान उपस्थित करता है। इनके प्रशस्ति काव्यों में इतिहास की सामग्री प्रचुर मात्रा में है। मध्यकाल में किसी के पांडित्य अथवा विद्वता की परख की कसौटी थी-केशव की कविता। केशव यदि ‘रसिक प्रिया’ जैसी भाषा लिखते रहते तो वे कठिन काव्य के प्रेत’ कहलाने से बच जाते। कल्पना शक्ति-सम्पन्न और काव्यभाषा

में प्रवीण होने पर भी केशव पाण्डित्य प्रदर्शन का लोभ संवरण नहीं कर सके।

  • रचनाएँ –

‘रसिक प्रिया’, कवि प्रिया’, ‘रामचन्द्रिका’, ‘वीर चरित्र’, विज्ञान गीता’ और ‘जहाँगीर जस चन्द्रिका’,इनकी महत्वपूर्ण रचनाएँ हैं। संस्कृत के ‘प्रबोध चन्द्रोदय’ नाटक के आधार पर विज्ञान गीता’ निर्मित हुई है। ‘जहाँगीर जस चन्द्रिका’ में जहाँगीर के दरबार का वर्णन है। जनश्रुति है कि रामचन्द्रिका का सृजन उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास के कहने से किया।

  • भाव पक्ष
  1. रस-केशवदास की रचनाओं में परिस्थिति के अनुसार रसों की निष्पत्ति हुई है। श्रृंगार का वर्णन उत्तम है। वियोग और संयोग दोनों पक्षों का वर्णन उत्कृष्ट है। वीर रस का प्रयोग पात्रों के सम्वादों से हुआ है। शान्त रस निर्वेद की दशा में है।
  2. अर्थ गाम्भीर्य केशवदास द्वारा प्रयुक्त सम्वादों के अर्थ में गम्भीरता है।
  3. नीति तत्व केशव दरबारी कवि थे। अतः उनकी रचनाओं में नीति तत्व की प्रधानता है। इनकी कविता में नैतिक मूल्यों की रक्षा की गई है।
  • कला पक्ष
  1. भाषा केशव ने अपने ग्रन्थों की रचना ब्रजभाषा में ही की है। कुछ रचनाओं में संस्कृत के प्रभाव दृष्टिगोचर होते हैं। कहीं-कहीं इनकी रचनाओं में दुरूहता आ गई है।
  2. शैली इन्होंने अपनी रचनाओं में प्रबन्ध शैली एवं मुक्तक शैली को अपनाया है। अलंकारप्रधान और व्यंग्यप्रधान शैली को स्थान दिया गया है।
  3. अलंकार-केशव ने उपमा,रूपक,उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति आदि अलंकारों का प्रयोग किया है।
  4. छन्द इन्होंने दोहा, कवित्त,सवैया,चौपाई, सोरठा आदि का प्रयोग किया है। केशव लक्षण ग्रन्थों के रचयिता रहे हैं। अतः उन्होंने छन्दों,शैली, रस निष्पत्ति आदि पर नए-नए प्रयोग किए हैं।
  5. सम्वाद योजना केशव की सम्वाद योजना बेजोड़ है। पात्र सम्वादों के माध्यम से परस्पर भावजगत की भी अभिव्यक्ति करते चलते हैं।

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  • साहित्य में स्थान

केशवदासजी हिन्दी के प्रमुख आचार्य हैं। उनकी समस्त रचनाएँ शास्त्रीय रीतिबद्ध हैं। ये उच्चकोटि के रसिक थे,पर उनकी आस्तिकता में कमी नहीं आने पाई है। नीतिनिपुण, निर्भीक एवं स्पष्टवादी केशव की प्रतिभा सर्वतोमुखी है। अपने लक्षण ग्रन्थों के लिए वे सदा स्मरणीय रहेंगे।

3. सूरदास [2009, 13, 15]

जीवन परिचय
मध्यकालीन वैष्णव भक्त कवियों में सूरदास का स्थान श्रेष्ठ है। सूरदास ने भक्तिधारा को जनभाषा के व्यापक धरातल पर अवतरित करके संगीत और माधुर्य से मंडित किया। सूरदास विट्ठलनाथ द्वारा स्थापित अष्टछाप के अग्रणी भक्त कवि हैं। इनका जन्म सन् 1478 ई.(संवत् 1535 वि) में आगरा के समीप रुनकता नामक गाँव में हुआ था। कुछ विद्वान दिल्ली के समीप ‘सीही नामक स्थान को इनका जन्मस्थान मानते हैं। बल्लभाचार्य जी ने इन्हें दीक्षा प्रदान की और गोवर्धन स्थित श्रीनाथ जी के मन्दिर में इनको कीर्तन करने के लिए नियुक्त कर दिया। इस प्रकार आप आजीवन गऊघाट पर रहते हुए श्रीमद्भागवत के आधार पर श्रीकृष्ण लीला से सम्बन्धित पदों की रचना करते रहे और मधुर स्वर से उनका गायन करते रहे।

महात्मा सूरदास का जन्मान्ध होना विवादास्पद है। सूर की रचनाएँ यह सिद्ध करती हैं कि एक जन्मान्ध कवि इतना सजीव और उच्चकोटि का वर्णन नहीं कर सकता। सूरदास की मृत्यु सन् 1583 ई.(सं.1640 वि) में मथुरा के समीप पारसोली नामक ग्राम में विट्ठलनाथ जी की उपस्थिति में हुई। कहा जाता है कि अपने परलोक गमन के समय सूरदास “खंजन नैन रूप रस माते” पद का गान अपने तानपूरे पर अत्यन्त मधुर स्वर में कर रहे थे।

सूरदास की भाषा ललित और कोमलकान्त पदावली से युक्त ब्रजभाषा है जिसमें सरलता के साथ-साथ प्रभावोत्पादकता भी मिलती है। सूरदास हिन्दी काव्याकाश के सूर्य हैं जिन्होंने अपने काव्य-कौशल से हिन्दी साहित्य की अप्रतिम सेवा की और बल्लभाचार्य से दीक्षा ग्रहण करने के बाद दास्यभाव और दैन्यभाव के पदों के स्थान पर वात्सल्य और प्रधान सखाभाव की भक्ति के पदों की रचना करना शुरू कर दिया।

  • साहित्य सेवा

सूरदास हिन्दी काव्याकाश के सूर्य हैं, जिन्होंने अपने काव्य-कौशल से हिन्दी साहित्य की अप्रतिम सेवा की। इनके गुरु बल्लभाचार्य थे। दीक्षा ग्रहण कर इन्होंने दैन्यभाव के पदों की रचना छोड़कर सखाभाव की भक्ति के पदों की रचना करना शुरू कर दिया। अष्टछाप के भक्त कवियों में सूरदास अगणी कवि थे। उनके काव्य का मुख्य उद्देश्य कृष्ण भक्ति का प्रचार करना था। वात्सल्य वर्णन को हिन्दी की अमूल्य निधि कहा जाता है जो सूरदास की रचनाओं में मिलता है। बाल मनोविज्ञान के तो सूरदास अद्वितीय पारखी थे।

  • रचनाएँ

विद्वानों के अनुसार सूरदास ने तीन कृतियों का सृजन किया था—
(1) सूरसागर,
(2) सूरसारावली,
(3) साहित्य लहरी।

(1) सूरसागर ही इनकी अमर कृति है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के सवा लाख गेय पद हैं,परन्तु अभी तक 6 या 7 हजार के लगभग पद प्राप्त हैं।
(2) सूर सारावली में ग्यारह सौ छन्द संगृहीत हैं। यह सूरसागर का सार रूप ग्रन्थ है।
(3) साहित्य लहरी में एक सौ अठारह पद संगृहीत हैं। इन सभी पदों में सूर के दृष्ट-कूट पद सम्मिलित हैं। इन पदों में रस का सर्वश्रेष्ठ सृजन हुआ है।

सूरदास सगुण भक्तिधारा कृष्णोपासक कवियों में श्रेष्ठ कवि हैं।

  • भाव पक्ष
  1. भक्तिभाव-सूरदास कृष्ण भक्त थे। काव्य ही उनका भगवत् भजन था। उनके काव्य में एक भक्त हृदय की अभिव्यक्ति सहज ही दिखाई देती है। सूर की भक्ति सखा-भाव लिए हुए थी। कृष्ण को सखा मानकर ही उन्होंने अपने आराध्य की समस्त बाल-लीलाओं और प्रेम लीलाओं का वर्णन किया है।
  2. भावुकता एवं सहृदयता-सूरदास ने अपने पदों में मानव मन के अनेक भावों का वर्णन किया है। उनके वर्णन में गोप-बालकों के,माता यशोदा के और पिता नन्द के विविध भावों की यथार्थता और मार्मिकता मिलती है।
  3. श्रेष्ठ रस संयोजना—सूर की उत्कृष्ट रस संयोजना के आधार पर डॉ.श्यामसुन्दर दास ने उन्हें रससिद्ध कवि’ कह कर पुकारा है। सूर के काव्य मैं शान्त, शृंगार और वात्सल्य रस स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
  4. अद्वितीय वात्सल्य-सूरदास ने कृष्ण के बाल चरित्र, शरीर सौन्दर्य, माता-पिता के हृदय वात्सल्य का जैसा स्वाभाविक, अनूठा एवं मनोवैज्ञानिक सरस वर्णन किया है, वैसा वर्णन सम्पूर्ण विश्व के साहित्य में दुर्लभ है। सूर वात्सल्य रस के सर्वोत्कृष्ट कवि हैं।
  5. श्रृंगार रस का वर्णन-सूरदास ने अपनी रचनाओं में श्रृंगार के दोनों पक्षों संयोग और वियोग का मार्मिक चित्रण करके उसे रसराज सिद्ध कर दिया है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने लिखा है-“श्रृंगार का रस-राजत्व यदि हिन्दी में कहीं मिलता है तो केवल सूर में।”
  • कला पक्ष
  1. लालित्यप्रधान ब्रजभाषा-सूरदास ने बोलचाल की ब्रजभाषा को लालित्य-प्रधान ब्रजभाषा बना दिया है। उनकी प्रयुक्त भाषा सरल, सरस एवं प्रभावशाली है जिससे भाव प्रकाशन की क्षमता का आभास होता है। सूरदास ने अवधी और फारसी के शब्दों और लोकोक्तियों के प्रयोग से अपनी भाषा में चमत्कार उत्पन्न कर दिया है। भाषा में माधुर्य सर्वत्र दिखाई देता है।
  2. गेय पद शैली-सूरदास ने अपनी काव्य रचना गेय पद शैली में की है। माधुर्य और प्रसाद गुण-सम्पन्न शैली वर्णनात्मक है। उनकी शैली में वचनवक्रता और वाग्विदग्धता उनकी एक विशेषता है।
  3. अलंकारों की सहज आवृत्ति-सूरदास की रचनाओं में अलंकार अपने स्वाभाविक सौन्दर्य के साथ प्रविष्ट हो जाते हैं। डॉ. हजारी प्रसाद के शब्दों के अनुसार, “अलंकारशास्त्र तो सूर के द्वारा अपना विषय वर्णन शुरू करते ही उनके पीछे हाथ जोड़कर दौड़ पड़ता है, उपमानों की बाढ़ आ जाती है। रूपकों की वर्षा होने लगती है।”
  4. छंद योजना की संगीतात्मकता-सूरदास ने मुक्तक गेय पदों की रचना की है। उनके पदों में संगीतात्मकता सर्वत्र परिलक्षित होती है।
  • साहित्य में स्थान

सूरदास अष्टछाप के ब्रजभाषा कवियों में सर्वोत्कृष्ट कवि हैं। इनका बाल प्रकृति-चित्रण, वात्सल्य तथा श्रृंगार का वर्णन अद्वितीय है। सूर का क्षेत्र सीमित है,पर उसके वे एकछत्र सम्राट हैं। वे अपनी काव्यकला और साहित्यिक प्रतिभा के बल पर हिन्दी साहित्य जगत के सूर्य माने जाते हैं। जब तक सूर की प्रेमासिक्त वाणी का सुधा प्रवाह है, तब तक हिन्दू जीवन से समरसता का स्रोत कभी सूखने नहीं पाएगा।

4. गोपाल सिंह नेपाली

  • जीवन परिचय

राष्ट्रीय भावों से ओतप्रोत गोपाल सिंह नेपाली का जन्म बेतिया (बिहार) में 11 अगस्त सन् 1903 को हुआ था। इनके पिता रायबहादुर गोरखा रायफल में सैनिक थे। देश-प्रेम और मानवता की भावना इन्हें विरासत में प्राप्त थीं। 14 वर्ष की आयु से ही ये कविता लिखने की ओर आकर्षित हुए। इन्होंने विभिन्न नेपाली पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन और कवि सम्मेलनों में अपने गीतों से विशिष्ट पहचान बनाई। नेपाली जी रतलाम टाइम्स (मालवा), चित्रपट (दिल्ली), सुधा (लखनऊ) और योगी (साप्ताहिक,पटना) के सम्पादन विभाग में रहे। अनेक चलचित्रों में इन्होंने अपने गीत लिखे। 50 से अधिक फिल्मों में इन्होंने गीत लिखे हैं। 1962 के चीनी आक्रमण के समय इन्होंने देश में जगह-जगह घूम कर गीतों का गायन किया और देश-भक्ति की भावना जाग्रत की।

  • साहित्य सेवा

नेपाली जी अपनी रचनाओं में प्रकृति के रम्य रूप और मनोहर छवियों को प्रस्तुत करते हैं जिसमें एक ओर प्रणय और सौन्दर्य प्रकट है तो दूसरी ओर राष्ट्र-प्रेम उत्कट है। शोषित के प्रति सहानुभूति और स्थितियों से जूझने का सन्देश उनमें मुखर हो उठा है। भाई-बहन के प्रेम को देश-प्रेम में परिवर्तित कर दिया गया है तथा जिसके माध्यम से हमारे हृदय में देश-भक्ति जाग्रत होने का संदेश दिया गया है।

  • रचनाएँ

‘उमंगें’, ‘पंछी’, ‘रागिनी’, नीलिमा’, ‘पंचमी’, ‘सावन’, ‘कल्पना’, ‘आँचल’, ‘रिमझिम’, ‘नवीन’,’हिन्दुस्तान’, ‘हिमालय पुकार रहा है’,आदि इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं।

  • भाव पक्ष
  1. देश-प्रेम-गोपाल सिंह नेपाली ने अपनी कविताओं में देश-प्रेम पर ही मुख्य रूप से जोर दिया है। इन्होंने अपनी कविताओं में राष्ट्रीय चेतना के साथ-साथ मानवीय जीवन की अनुभूतियों का प्रभावशाली वर्णन किया है।
  2. सहृदयता और भावुकता-भाई-बहन कविता में भाई-बहन के बीच के प्रेम को राष्ट्रीय प्रेम के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है। हृदय के भाव राष्ट्र प्रेम को समर्पित हैं।
  3. उत्कृष्ट रस योजना-गोपाल सिंह नेपाली की कविताएँ देश-भक्ति पर आधारित होने के कारण वीर रस को ही इंगित करती हैं। नए-नए प्रतीकों एवं बिम्बों के माध्यम से अपने भावों को अभिव्यक्त किया है।
  • कला पक्ष
  1. भाषा-गोपाल सिंह नेपाली की भाषा साहित्यिक होने के साथ-साथ व्यावहारिक है। इनके भाव जनमानस के निकट,सरल और सहज हैं। इनके द्वारा प्रयुक्त भाषा सरल, सहज एवं प्रभावशाली है।
  2. अनुप्रास और पुनरुक्तिप्रकाश का सुन्दर प्रयोग किया है।
  3. बिम्बों के माध्यम से भाव प्रकाश में अनूठापन आ गया है।
  • साहित्य में स्थान

नेपाली जी की रचनाओं में राष्ट्र-प्रेम उत्कट है। शोषित के प्रति सहानुभूति और स्थितियों से जूझने का सन्देश इनकी कविताओं में दिखाई देता है। नेपाली जी की गणना विशिष्ट राष्ट्रीय कवियों में की जाती है। उन्होंने मानवीय रिश्तों को आधार बनाकर काव्य रचना की है। गीतधारा को आगे बढ़ाने में उन्होंने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

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5. घनानन्द

  • जीवन परिचय

घनानन्द हिन्दी की रीति मुक्तकाव्य धारा के कवि हैं। इनका जन्म 1658 ई. और मृत्यु 1739 ई.में मानी जाती है। हिन्दी में घनानन्द और आनन्दघन नाम के दोनों रचनाकारों को पहले एक ही माना जाता था, लेकिन आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने दोनों कवियों का भिन्न-भिन्न होना मान्य कर दिया। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने घनानन्द को रीतिमुक्त काव्यधारा का श्रेष्ठ रचनाकार कहा है। रीतिमुक्त काव्यधारा के श्रेष्ठ कवि घनानन्द साक्षात् रसमूर्ति हैं। किवदन्तियों के अनुसार घनानन्द मुहम्मदशाह रंगीले के मीर मुंशी थे। सन् 1739 ई.में नादिरशाह द्वारा किए गए कत्लेआम में ये मारे गए।

  • साहित्य सेवा

घनानन्द लौकिक प्रेम के अनुपमेय कवि थे। विरहजन्य प्रेम की पीर के ये अमर गायक रहे। इनकी वेदना का मूल कारण उनकी प्रेयसी ‘सुजान’ रही है। भक्तिपरक कविताओं में ‘सुजान’ श्रीकृष्ण के सम्बोधन के लिए प्रयोग किया गया है। स्वानुभूत विरह वेदना की विविध स्थितियों के हृदयस्पर्शी चित्र इनके काव्य में अंकित हैं।

  • रचनाएँ

घनानन्द की रचनाएँ अधिकतर मुक्तक रूप में मिलती हैं। इनकी कुछ रचनाएँ भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने ‘सुन्दरी तिलक’ पत्रिका में छापी। 1870 में उन्होंने ‘सुजान शतक’ नाम के इनके 119 कवित्त प्रकाशित किए। इसके पश्चात् जगन्नाथ दास रत्नाकर ने सन् 1897 में इनकी ‘वियोग बेलि’ और ‘विरह लीला’ नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित की। ‘घनानन्द कवित्त’, ‘कवित्त संग्रह’, ‘सुजान-विनोद’, ‘सुजान हित’, ‘वियोग बेलि’, ‘आनन्द घन जू’, ‘इश्क लता’, ‘जमुना जल’ और ‘वृन्दावन सत’ आदि इनकी रचनाएँ हैं।

  • भाव पक्ष

(1) इनकी कविता में रसद शृंगार है जिसमें संयोग और वियोग दोनों पक्षों का सटीक वर्णन है। उन्हें संयोग में भी वियोग दिखाई देता है।

“यह कैसो संयोग न जानि परै जु वियोग न क्यों विछोहत है।” घनानन्द के काव्य में संयोग का चित्रण अति अल्प है। उनके काव्य में वियोग की सभी अवस्थाओं,दशाओं, स्थितियों आदि का स्वाभाविक चित्रण हुआ है।

इन्होंने शब्दों के भावों का हृदय से साक्षात्कार किया है। कला पक्ष

  1. भाषा-उनकी भाषा ब्रज है जो सजीव,लाक्षणिक,व्यंजना प्रचुर तथा व्याकरणसम्मत है। उनकी भाषा फारसी काव्य से प्रभावित होते हुए भी मौलिक है।
  2. ध्वन्यात्मक शब्दों का प्रयोग किया है।
  3. अलंकार-इनकी रचनाओं में अनुप्रास एवं रूपक का प्रयोग सुन्दर रूप में हुआ है।

इस प्रकार भाषा, छन्द, शैली अलंकार और उसके अनुप्रयोग की दृष्टि से घनानन्द की रचनाएँ अत्यन्त सरस एवं प्रौढ़ हैं।

  • साहित्य में स्थान

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार घनानन्द रीतिमुक्त काव्यधारा के श्रेष्ठ कवि हैं। घनानन्द ने अपने पदों में ‘सुजान’ का इतनी तन्मयता से उल्लेख किया है कि उसका आध्यात्मीकरण हो गया है। सुजान का उनकी प्रेयसी होना ही अधिक उपयुक्त लगता है। सुजान को श्रृंगार पक्ष में नायिका और भक्ति पक्ष में कृष्ण मान लेना उचित होगा।

6. जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’

जीवन परिचय
जगन्नाथदास रत्नाकर’ आधुनिक काल के ब्रजभाषा के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं। इन्होंने अपने काव्य में मध्ययुगीन काव्य परम्परा के साथ-साथ भक्ति युग के भाव और रीतिकाल की कला का समन्वय किया है। कविवर रत्नाकर का जन्म सन् 1886 ई.में काशी के एक प्रतिष्ठित वैश्य परिवार में हुआ था। बचपन में उर्दू, फारसी, अंग्रेजी की शिक्षा मिली। बी.ए., एल एल.बी.के बाद एम.ए. की पढ़ाई इनकी माता के निधन के कारण पूरी नहीं हो पाई। इनके पिता पुरुषोत्तमदास फारसी भाषा के विद्वान एवं काव्य मर्मज्ञ थे। आपका घर साहित्यकारों का संगम स्थल था। आपको भारतेन्दुजी का सान्निध्य मिला इसके फलस्वरूप इन्होंने उर्दू-फारसी में कविता करना प्रारम्भ कर दिया। 21 जून सन् 1932 को हरिद्वार में इनका देहावसान हो गया।

  • साहित्य सेवा

रत्नाकर द्वारा लिखे गए ऐतिहासिक लेखों, मौलिक कृतियों की रचना और महत्वपूर्ण ग्रन्थों के सम्पादन से उनके गंभीर अध्ययन और मौलिक प्रतिभा का पता चलता है। उन्होंने साहित्य सुधा निधि तथा सरस्वती पत्रिकाओं का सम्पादन किया। रसिक मंडल, प्रयाग तथा काशी नागरी प्रचारणी सभा की स्थापना व विकास में योगदान दिया।

  • रचनाएँ

इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं-‘उद्धव शतक’, ‘गंगावतरण, ‘वीराष्टक’, ‘शृंगार लहरी’, ‘गंगा लहरी’, ‘विष्णु लहरी’ ‘हिंडोला’, ‘कलकाशी’, ‘रत्नाष्टक’ आदि। इनके सम्पादित ग्रन्थ हैं ‘बिहारी रत्नाकर’,’हित तरंगिणी’, ‘सूरसागर’ आदि।

  • भाव पक्ष

जगन्नाथदास रत्नाकर ब्रजभाषा के उत्कृष्ट कवि हैं। इनके काव्य में भाों की मार्मिकता तथा कला की अभिव्यंजना परिलक्षित होती है।

  1. रस योजना ब्रजभाषा के भावुक कवि ‘रत्नाकर’ में श्रृंगार रस की प्रधानता मिलती है। उनके प्रमुख काव्य ‘उद्धव शतक’ का मूल रस श्रृंगार ही है। वियोग पक्ष में गोपियों ने उद्धव से कहा है”टूक-टूक है है मन मुकुर हमारौ हाय, चूँकि हूँ कठोर-बैन-पाहन चलावौ ना।” ‘वीराष्टक’ तथा ‘गंगावतरण’ में रौद्र रस की योजना दर्शनीय है। शान्त, करुणा,वात्सल्य, वीभत्स रसों की संयोजना भी दिखाई देती है।
  2. अनुभाव विधानरत्नाकर ने भावों को सबलता प्रदान करने के लिए पात्रों की चेष्टाओं आदि का सुन्दर वर्णन किया है। श्रीकृष्ण का संदेश सुनने के लिए कृष्ण प्रेम में व्याकुल गोपियों की आकुलता देखिए”उझकि-उझकि पद-कंजनि के पंजनि पै, पेखि-पेखि पाती छाटी छोहनि छबै लगी।”
  3. भक्ति-भावना रत्नाकर के काव्य में श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति-भावना की अभिव्यक्ति हुई है। गोपियाँ अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पित हैं। उद्धव का ज्ञान गोपियों की सगुण भक्ति के सामने पराजित हो जाता है।
  4. प्रकृति चित्रण-रत्नाकर’ ने अपने काव्य में प्रकृति के अनेक रूप चित्रित किए हैं। प्रकृति के आलम्बन का एक दृश्य देखिए-

“स्वाति घटा घहराति मुक्ति-पानिप सों पूरी।
कैचों धावति झुकति सुभ्र आमा रुचि रुरी।”

  • कला पक्ष
  1. भाषा रत्नाकर ने अपने काव्य की रचना ब्रजभाषा में की है। भाव के अनुरूप अभिव्यक्ति देने में यह भाषा सक्षम है। इनके काव्य में अर्थ की गम्भीरता, पद विन्यास, वाक् चातुर्य,चमत्कार सौष्ठव,समाहार शक्ति विद्यमान है।
  2. चित्रोपम वर्णन शैली-रत्नाकर’ जी में चित्रात्मक वर्णन शैली के द्वारा विषय को साकार करने की अद्भुत शक्ति है। उदाहरण देखिए
    “कोऊ सेद-सानी, कोऊ भरि दृग पानी रह कोऊ घूमि-घूमि परी भूमि मुरझानी हैं।”
  3. अलंकार विधान-रूपक, यमक, श्लेष, उत्प्रेक्षा आदि सभी अलंकारों की शोभा चमत्कारपूर्ण है। ‘रत्नाकर’ का काव्य गत्यात्मक संगीतमय छन्दों में रचित है। कवित्त, रोला, सवैया, दोहा,छप्पय उनके प्रिय छन्द हैं।
  • साहित्य में स्थान

रत्नाकर द्वारा लिखे गए साहित्यिक ऐतिहासिक लेखों मौलिक कतियों और महत्वपर्ण ग्रन्थों के सम्पादन से उनके गम्भीर अध्ययन, अद्वितीय प्रतिभा और सूक्ष्म दृष्टि का अवलोकन होता है। उन्होंने ‘साहित्य सुधानिधि’ तथा ‘सरस्वती’ पत्रिकाओं का सम्पादन किया। रसिक मंडल,प्रयाग तथा काशी नागरी प्रचारणी सभा की स्थापना व उनके विकास में योगदान दिया। ‘रत्नाकर ब्रजभाषा काव्य की महान् विभूति हैं। बाबू श्यामसुन्दरदास ने कहा है “एक विशेष पथ पर परिश्रमपूर्वक चलते-चलते रत्नाकरजी साहित्य में अपनी एक अलग लीक बना गए हैं। इस दृष्टि से वे हिन्दी के एक ऐतिहासिक पुरुष ठहरते हैं।”

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8. कबीरदास [2009, 16]

  • जीवन परिचय

जनभाषा में भक्ति, नीति और दर्शन प्रस्तुत करने वाले कवियों में कबीर अग्रगण्य हैं। कबीरदास जी निर्गुण काव्यधारा के ज्ञानमार्गी शाखा के कवि थे। इनका जन्म काशी में सन् 1398 ई.में हुआ। इनकी रचनाओं से प्रतीत होता है कि इनके माता-पिता जुलाहे थे। जनश्रुति है कि कबीर एक विधवा ब्राह्मणी की परित्यक्त संतान थे। इनका पालन-पोषण एक जुलाहा दम्पत्ति ने किया। इस नि:सन्तान जुलाहा दम्पत्ति नीरू और नीमा ने इस बालक का नाम कबीर रखा। कबीर की शिक्षा विधिवत् नहीं हुई। उन्हें तो सत्संगति की अनंत पाठशाला में आत्मज्ञान और ईश्वर प्रेम का पाठ पढ़ाया गया। स्वयं कबीर कहते हैं-“मसि कागद छुऔ नहीं, कलम गही नहिं हाथ।”

कबीर गृहस्थ थे। इनको स्वामी रामानन्द से ‘राम’ नाम का गुरुमंत्र मिला। उनकी पत्नी का नाम लोई, पुत्र का नाम कमाल और पुत्री का नाम कमाली था। कबीर पाखण्ड और अन्धविश्वासों के घोर विरोधी थे। कबीर का बचपन मगहर में बीता, परन्तु बाद में काशी में जाकर रहने लगे। जीवन के अन्तिम दिनों में ये पुनः मगहर चले गए। इस प्रकार 120 वर्ष की आयु में सन् 1518 ई. में इनका देहावसान हो गया।

  • साहित्य सेवा

अशिक्षित होते हुए भी कबीरदास अद्भुत प्रतिभा के धनी थे। उनकी रचनाओं को धर्मदास नामक प्रमुख शिष्य ने ‘बीजक’ नाम से संग्रह किया है। डॉ.श्यामसुन्दर दास ने कबीर की रचनाओं को कबीर ग्रन्थावली’ में संगृहीत करके सम्पादित किया है। खुले आकाश के नीचे आस-पास खड़े व बैठे लोगों के बीच अपने अनुभवों को अभिव्यक्त करना ही उनकी उत्कृष्ट साहित्य सेवा थी।

  • रचनाएँ

कबीर की अभिव्यक्तियों को शिष्यों द्वारा तीन रूप में संकलित किया गया है-

  1. साखी,
  2. सबद,
  3. रमैनी।

(1) साखी कबीर की शिक्षाओं और सिद्धान्तों का प्रस्तुतीकरण ‘साखी’ में हुआ है। इसमें दोहा छन्द का प्रयोग हुआ है।
(2) सबद-इसमें कबीर के गेय पद संगृहीत हैं। गेय पद होने के कारण इसमें संगीतात्मकता है। इनमें कबीर ने भक्ति-भावना, समाज सुधार और रहस्यवादी भावनाओं का वर्णन किया है।
(3) रमैनी-रमैनी चौपाई छन्द में है। इनमें कबीर का रहस्यवाद और दार्शनिक विचार व्यक्त हुए हैं।

  • भाव पक्ष
  1. निर्गुण ब्रह्म की उपासना—कबीर निर्गुण ब्रह्म के उपासक थे। उनका उपास्य, अरूप, अनाम, अनुपम सूक्ष्म तत्व है। इसे वे ‘राम’ नाम से पुकारते थे। कबीर के ‘राम’ निर्गुण निराकार परमब्रह्म हैं।
  2. प्रेम भावना और भक्ति कबीर ने ज्ञान को महत्व दिया। उनकी कविता में स्थान-स्थान पर प्रेम और भक्ति की उत्कृष्ट भावना परिलक्षित होती है। उनका कहना है-“यह तो घर है प्रेम का, खाला का घर नाहिं” और “ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पण्डित होय।” इत्यादि।
  3. रहस्य भावना-परमात्मा से विविध सम्बन्ध जोड़कर अन्त में ब्रह्म में लीन हो जाने के भाव अपनी कविता में कबीर ने व्यक्त किए हैं। जैसे – “राम मोरे पिऊ मैं राम की बहुरिया।”
  4. समाज सुधार और नीति उपदेश सामाजिक जीवन में फैली बुराइयों को मिटाने के लिए कबीर की वाणी कर्कश हो उठी। कबीर ने समाजगत बुराइयों का खण्डन तो किया ही, साथ-साथ आदर्श जीवन के लिए नीतिपूर्ण उपदेश भी दिया। कबीर के काव्य में इस्लाम के एकेश्वरवाद, भारतीय द्वैतवाद,योग साधना, अहिंसा, सूफियों की प्रेम साधना आदि का समन्वित रूप दिखाई देता है।

इनके काव्य में शान्त रस की प्रधानता है। आत्मा-परमात्मा के मिलन का श्रृंगार भी शान्त रस ही बन गया है।

  • कला पक्ष
  1. अकृत्रिम भाषा कबीर की भाषा अपरिष्कृत है। उसमें कृत्रिमता का अंश भी नहीं है। स्थानीय बोलचाल के शब्दों की प्रधानता दिखाई देती है। उसमें पंजाबी, राजस्थानी, उर्द, फारसी आदि भाषाओं के शब्दों का विकृत रूप प्रयोग किया गया है। इससे भाषा में विचित्रता आ गई है। कबीर की भाषा में भाव प्रकट करने की सामर्थ्य विद्यमान है। इनकी भाषा को पंचमेल खिचड़ी अथवा सधुक्कड़ी भी कहा जाता है।
  2. सहज निर्द्वन्द्व शैली-कबीर ने सहज, सरल व सरस शैली में अपने उपदेश दिए हैं। भाव प्रकट करने की दृष्टि से कबीर की भाषा पूर्णतः सक्षम है। काव्य में विरोधाभास,दुर्बोधता एवं व्यंग्यात्मकता विद्यमान है।
  3. अलंकार-कबीर के काव्य में स्वभावतः अलंकारिता आ गई है। उपमा, रूपक, सांगरूपक, अन्योक्ति,उत्प्रेक्षा,विरोधाभास आदि अलंकारों की प्रचुरता है।
  4. छन्द कबीर की साखियों में दोहा छन्द का प्रयोग हुआ है। ‘सबद’ पद है तथा ‘रनी’ चौपाई छन्दों में मिलते हैं। ‘कहरवाँ’ छन्द भी उनकी रचनाओं में मिलता है। इन छन्दों का प्रयोग सदोष ही है।
  • साहित्य में स्थान

कबीर समाज सुधारक एवं युग निर्माता के रूप में सदैव स्मरण किए जायेंगे। उनके काव्य में निहित सन्देश और उपदेश के आधार पर नवीन समन्वित समाज की संरचना सम्भव है। डॉ. द्वारका प्रसाद सक्सैना ने लिखा है-“कबीर एक उच्चकोटि के साधक, सत्य के उपासक और ज्ञान के अन्वेषक थे। उनका समस्त साहित्य एक जीवन मुक्त सन्त के गूढ़ एवं गम्भीर अनुभवों का भण्डार है।”

8. बिहारीलाल [2010]

  • जीवन परिचय

रीतिकाल के प्रतिनिधि कवियों में बिहारी की गणना बड़े सम्मान के साथ की जाती है। श्रृंगार रस के वर्णन में ये निस्संदेह अद्वितीय कवि हैं। कविवर बिहारी का जन्म संवत् 1652 वि. (सन् 1595 ई) में हुआ। बिहारी के जीवनवृत्त के बारे में उनका निम्न दोहा देखिए-

“जन्म ग्वालियर जानिये, खण्ड बुन्देले बाल।
तरुनाई आई सुखद, मथुरा बसि ससुराल॥”

इनका जन्म गोविन्दपुर नामक ग्राम में हुआ। इनके पिता का नाम केशवराय था। इनका बचपन बुन्देलखण्ड में बीता। इनका विवाह मथुरा में हुआ और युवावस्था में ससुराल में ही रहे।

बिहारी के गुरु बाबा नरहरदास थे। उन्होंने बिहारी का परिचय सम्राट जहाँगीर से कराया। कुछ समय बाद बिहारी जयपुर चले गए। उन दिनों जयपुर के प्रौढ़ महाराजा जयसिंह ने एक अल्पवयस्का से नया-नया विवाह किया था और राजकाज से विमुख हो गए थे। ऐसी स्थिति में बिहारी ने अग्र दोहा उनके पास पहुँचाया-

“नहिं पराग नहिं मधुर मधु नहिं विकास इहि काल।
अली कली ही सौं बिंध्यो, आगे कौन हवाल॥”

इस दोहे का राजा जयसिंह पर अनुकूल प्रभाव पड़ा और पुनः राजकाज पर ध्यान देने लगे। बिहारी को दरबार में सम्मानपूर्वक स्थान दिया गया। यहाँ रहते हुए बिहारी ने सात सौ तेरह दोहों की रचना की। प्रत्येक दोहे पर उनको एक स्वर्ण मुद्रा प्राप्त होती थी। सं.1720 वि. (सन् 1663 ई) में इनका देहावसान हो गया।

  • साहित्य सेवा

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इनकी एक ही रचना ‘सतसैया’ मिलती है। हिन्दी में समास पद्धति की शक्ति का परिचय सबसे पहले बिहारी ने दिया। श्रृंगार रस के ग्रन्थों से ‘बिहारी सतसई’ सर्वोत्कृष्ट रचना है। श्रृंगारिकता के अतिरिक्त इसमें भक्ति और नीति के दोहों का भी अदभुत समन्वय मिलता है।

  • रचनाएँ

बिहारी ने अपने जीवनकाल में 713 दोहों की रचना की है, जिन्हें ‘बिहारी सतसई’ के नाम से संकलित किया गया। यह अकेला ग्रन्थ ही कवि के रूप में बिहारी की कीर्ति का स्रोत है।

  • भाव पक्ष

विषय-वस्तु के आधार पर बिहारी के दोहों को चार भागों में बाँटा जा सकता है-
(1) शृंगारपरक,
(2) भक्तिपरक,
(3) नीतिपरक,
(4) प्रकृति चित्रण सम्बन्धी।

(1) श्रृंगारपरक दोहे-अधिकतर दोहे शृंगाररस प्रधान हैं। इन्होंने श्रृंगार के संयोग और वियोग दोनों ही पक्षों को अपने काव्य में स्थान दिया है। बिहारी की नायिका का मुख पूर्णचन्द्र के समान प्रकाशित है और उसके प्रकाश के कारण उसके घर के आस-पास पूर्णिमा ही रहती है। उदाहरण देखिए-

“पत्रा ही तिथि पाइये, वा घर के चहुँ पास।
नित प्रति पून्यों ही रहत, आनन ओप उजास॥”

(2) भक्ति भावना वृद्धावस्था में बिहारी का मन संसार से विरक्त होकर प्रभु-चरणों में लग जाता है। इस प्रकार के दोहों में शान्त रस प्रधान है। सगुण ब्रह्म के कृष्ण रूप ने उन्हें अधिक आकर्षित किया है

“मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोय।
जा तन की झाईं परै, स्याम हरित दुति होय॥”

(3) नीतिपरक दोहेइनके अनेक दोहे नीति और उपदेश को लिए हुए हैं। इन्होंने अपने नीतिपरक दोहों में जीवन की गहरी नीतियों को सरल ढंग से व्यक्त किया है

“दीरघ साँस न लेह, दुःख सुख साँइहि न भूलि।
दई दई क्यों करत है, दई दई सु कबूलि॥”

(4) प्रकृति चित्रण-अपने श्रृंगार चित्रण में बिहारी ने प्रकृति को अधिकतर उद्दीपन के रूप में लिया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रकृति को आलम्बन रूप में भी प्रस्तुत किया है, वे प्रकृति के कुशल पर्यवेक्षक हैं। जेठ की दोपहरी का एक दृश्य देखिए-

“बैठ रही अति सघन वन, पैठ सदन तन माह।
देखि दुपहरी जेठ की, छाँहौ चाहति छाँह।।”

  • कला पक्ष
  1. भाषा-बिहारी की भाषा साहित्यिक ब्रजभाषा है। यह सामान्य जन के लिए भी दुर्बोध नहीं है। इसमें कहीं-कहीं बुन्देलखण्डी शब्दों का भी प्रयोग हुआ है। इसके अतिरिक्त बिहारी ने पूर्वी, अवधी और अरबी-फारसी के प्रचलित शब्दों को भी अपने काव्य में स्थान दिया है। बिहारी की भाषा सामासिक भाषा है, जिसमें थोड़े में बहुत कुछ कह देनी की सामर्थ्य है।
  2. अलंकार योजना–अन्य रीतिकाल के कवियों की भाँति बिहारी ने भी प्रायः सभी प्रकार के अलंकारों का प्रयोग किया है। लेकिन बिहारी की भाषा में अलंकार भार बनकर नहीं आए हैं। रूपक, उपमा, श्लेष, यमक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, अन्योक्ति आदि अलंकारों को बड़े स्वाभाविक रूप में अपने काव्य में प्रयुक्त किया है।
  3. छन्द विधान–बिहारी ने अपने काव्य में दोहा छन्द को ही अपनाया है। दो पंक्तियों के छोटे से छन्द में इन्होंने गागर में सागर भर दिया है।
  • साहित्य में स्थान

बिहारी की काव्य प्रतिभा बहुमुखी थी। नख-शिख वर्णन,नायिका भेद,प्रकृति चित्रण,रस, अलंकार सभी कुछ बिहारी के काव्य में उत्कृष्ट है। रचनाओं में कवित्त शक्ति और काव्य रीतियों का जैसा सुन्दर सम्मिश्रण बिहारी में है वैसा किसी अन्य रीतिकालीन कवि में दुर्लभ है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने बिहारी के विषय में सत्य ही कहा है-“जिस कवि में कल्पना की समाहार शक्ति के साथ भाषा की समास शक्ति जितनी ही अधिक होगी, उतनी ही उसकी मुक्तक रचना सफल होगी। यह क्षमता बिहारी में पूर्ण रूप से विद्यमान थी।” बिहारी के काव्य में भाव पक्ष और कला पक्ष का अद्भुत सामंजस्य है। उनका हर दोहा ‘गागर में सागर’ है।

9. जयशंकर प्रसाद [2009, 11, 14]

जीवन परिचय
छायावादी काव्य के आधार स्तम्भ जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 में वाराणसी,उत्तर प्रदेश में हुआ था। इनके पिता सुंघनी शाहू वैभवशाली व्यक्ति थे। विलक्षण प्रतिभा के धनी प्रसादजी एक साथ कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार तथा निबंधकार थे। इनके बाल्यकाल में ही इनके पिता तथा बड़े भाई स्वर्गवासी हो गए। परिणामस्वरूप अल्पावस्था में ही प्रसादजी को घर का सारा भार वहन करना पड़ा। इन्होंने स्कूली शिक्षा छोड़कर घर पर ही अंग्रेजी, हिन्दी, बंगला तथा संस्कृत भाषा का ज्ञान प्राप्त किया। सुस्थिर होकर कुशलतापूर्वक अपने व्यापार और परिवार को सँभाला और आजीवन अपने उत्तरदायित्व का सफलतापूर्वक निर्वाह करते रहे। साथ-साथ साहित्य सृजन भी करते रहे और अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया। इनका देहावसान 15 नवम्बर,सन् 1937 को हुआ।

  • साहित्य सेवा

जयशंकर ‘प्रसाद’ आधुनिक हिन्दी काव्य के सर्वप्रथम कवि थे। सूक्ष्म अनुभूति और रहस्यवादी चित्रण इनके काव्य की विशेषता है। हिन्दी साहित्य के इतिहास में नया युग ‘छायावादी युग’ के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार जयशंकर प्रसाद छायावादी युग के प्रवर्तक थे। प्रेम और सौन्दर्य इनके काव्य के प्रमुख विषय रहे।

  • रचनाएँ

प्रसाद जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार थे। गद्य और पद्य,प्रबन्ध और मुक्तक, खण्डकाव्य और प्रबन्ध काव्य और कहानी, नाटक, उपन्यास, निबन्ध तथा आलोचना, कहने का आशय यह है कि साहित्य का कोई भी पक्ष उनसे अछूता नहीं बचा और इन सभी रूपों में उन्होंने अत्यन्त उत्कृष्ट कोटि के साहित्य का प्रणयन किया है। प्रसाद जी की काव्य कृतियाँ निम्नलिखित हैं

  1. चित्राधार,
  2. कानन कुसुम,
  3. करुणालय,
  4. महाराणा का महत्व,
  5. प्रेम पथिक,
  6. झरना,
  7. आँसू,
  8. लहर,
  9. कामायनी।

‘कामायनी’ छायावाद का महाकाव्य है और ‘आँसू’ प्रसादजी का लोकप्रिय विरह काव्य है।

  • भाव पक्ष
  1. दार्शनिक विचारधारा प्रसाद एक दार्शनिक कवि हैं। उनके महाकाव्य ‘कामायनी’ में आनन्दवाद की प्रतिष्ठा की गई है। यह ग्रन्थ अपनी अद्भुत छटा बिखेरता हुआ भ्रमित मनुष्यों का पथ प्रदर्शन कर रहा है।
  2. प्रेम और सौन्दर्य की विवेचना-प्रसादजी प्रमुखतया प्रेम और सौन्दर्य के उपासक हैं। छायावादी कवि प्रकृति की हर वस्तु में सुन्दरता के दर्शन करता है। प्रसाद द्वारा निरूपित प्रेम में प्रधानता सर्वत्र मानसिक पक्ष की ही है। प्रसाद के द्वारा व्यक्त सौन्दर्य में बाह्य सौन्दर्य और शारीरिक सौन्दर्य का अदभुत सामंजस्य है।

कामायनी का उदाहरण देखिए-

“नील परिधान बीच सुकुमार,
खुला था मृदुल अधखुला अंग,
खिला हो ज्यों बिजली का फूल,
मेघ वन बीच गुलाबी रंग।”

(3) अनुभूतिपूर्ण काव्य-अनुभूति की गहनता काव्य की श्रेष्ठता को प्रदर्शित करती है। प्रसादजी के काव्य में हमें यही गहराई दिखाई देती है। आँसू में प्रेमानुभूति देखिए-

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“रो रो कर सिसक सिसक कर
कहता मैं करुण कहानी,
तुम सुमन नोचते सुनते,
करते जाते अनजानी।”

(4) वेदना की अभिव्यक्ति प्रसाद के काव्य में सर्वत्र एक गहन वेदना की अभिव्यक्ति मिलती है। ‘आँसू’ में तो उनकी गहन वेदनाभूति अपनी सम्पूर्ण गहराई से व्यक्त हुई है, जिसकी पीड़ा पाठक के हृदय को छू जाती है।
(5) कल्पना का अतिरेक व रहस्यवाद-भावानुभूति के साथ-साथ प्रसाद की कविताओं में कल्पना की अधिकता भी है। कंटकाकीर्ण कठोर यथार्थ के सामने अपनी कल्पना का जगत उसे अत्यन्त मधुर प्रतीत होता है। रहस्य की ओर आकर्षण छायावादी कवियों की प्रमुख विशेषताओं में से एक है। प्रसाद जी प्रकृति के कण-कण में रहस्यमयी सत्ता का आभास पाते और अनुभव करते हैं। पर इस रहस्यमयी सत्ता का रहस्य आखिर में रहस्य ही रहता है।

कामायनी का उदाहरण देखिए-

“हे अनन्त रमणीय ! कौन तुम,
यह मैं कैसे कह सकता, कैसे हो?
क्या हो इसका तो,
भार विचार न सह सकता।”

(6) प्रकृति चित्रण-प्रसादजी के काव्य में प्रकृति के सभी मनोहारी रूपों का बड़ा ही रमणीय चित्रण हुआ है। प्रसाद जी ने प्रकृति को जड़वस्तु के रूप में ग्रहण न कर जीवित और चैतन्य सत्ता के रूप में ग्रहण किया है।
(7) नारी के प्रति श्रद्धा भाव छायावादी कवियों ने नारी को पूर्ण सम्मान दिया है। प्रसादजी ने भी अपने काव्य में नारी के सभी रूपों को दर्शाते हुए इस बात का ध्यान रखा है कि उसके सम्मान में कहीं कमी न आने पाए।

  • कला पक्ष
  1. भाषा-प्रसादजी के काव्य की भाषा व्याकरणसम्मत, परिष्कृत एवं परिमार्जित खड़ी बोली है। संस्कृत शब्दों की बहुलता होने पर भी भाषा क्लिष्ट अथवा दुरूह नहीं हुई है। भावों की गहराई और कवि कौशल के कारण प्रसादजी की लाक्षणिक और व्यंजनामयी भाषा में चित्रोपमता आ गई है।
  2. अलंकारों का प्रयोग-प्रसादजी की भाषा में अलंकारों का प्रचुर मात्रा में प्रयोग हुआ है। उनका प्रयोग इतना सहज है कि वे सर्वत्र काव्य के सौन्दर्य को स्पष्ट करते हैं। शब्दालंकारों और अर्थालंकारों के साथ-साथ उन्होंने मानवीकरण, विशेषण विपर्यय और ध्वन्यार्थ व्यंजना आदि पाश्चात्य अलंकारों को भी मुक्त हृदय से अपनाया है।
  3. छन्द योजना प्रसादजी ने अपने काव्य में परम्परागत छन्दों के साथ ही साथ नये-नये छन्दों को लिखकर मौलिकता का परिचय दिया है। ‘आँसू’ में प्रयुक्त छन्द आँसू छन्द ही कहा जाने लगा।
  • साहित्य में स्थान

भाव पक्ष और कला पक्ष की दृष्टि से प्रसादजी का काव्य उच्चकोटि का है। निःसन्देह प्रसाद हिन्दी के युग प्रवर्तक साहित्यकार एवं छायावादी कवि हैं। नूतनता की काव्यधारा को प्रवाहित करने का श्रेय जयशंकर प्रसाद को ही है। प्रसादजी की शैली काव्यात्मक चमत्कारों से परिपूर्ण है।

10. भवानी प्रसाद मिश्र [2016]

जीवन परिचय
भवानी प्रसाद मिश्र का जन्म सन 1913 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के टिगरिया ग्राम में हुआ था। कविता और साहित्य के साथ-साथ राष्ट्रीय आन्दोलन में जिन कवियों की भागीदारी थी उनमें श्री मिश्रजी प्रमुख थे। इनके पिता का नाम श्री सीताराम मिश्र तथा माँ का नाम श्रीमती गोमती देवी था। इन्होंने खण्डवा, बैतूल आदि से प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त कर जबलपुर के ऐवर्टसन कालेज से बी.ए.परीक्षा पास की। स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए सन् 1942 ई.में इन्होंने जेल यात्रा की। प्रारम्भ में इन्होंने वर्धा में महिला आश्रम में अध्यापन कार्य किया तथा ‘कल्पना’ नामक पत्रिका का सम्पादन किया। तत्पश्चात् आकाशवाणी में सेवारत रहे। 1985 ई.में इनका देहावसान हो गया।

  • साहित्य सेवा

भवानी प्रसाद मिश्र की कविता हिन्दी की सहज लय की कविता है। भाषा में भावाभिव्यक्ति की अपूर्व क्षमता है। इनकी रचनाएँ मुक्त छंद में लिखी गई हैं। मिश्रजी को सच्चा कवि हृदय प्राप्त है। हिन्दी के नए कवियों में इनका महत्वपूर्ण स्थान है। गाँधीवाद से प्रभावित मिश्रजी के काव्य में मानव कल्याण के स्वर मुखरित हुए हैं। प्रयोगवाद एवं नयी कविता के कवियों में इनका सम्माननीय स्थान है।

  • रचनाएँ

भवानी प्रसाद मिश्र की प्रमुख काव्य रचनाएँ हैं—’गीत फरोश’, ‘सतपुड़ा के जंगल’, ‘सन्नाटा’, ‘चकित है दुःख’, बनी हुई रस्सी’,’खुशबू के शिलालेख’, अनाम तुम आते हो’, इन्द्र कुसुम’, ‘गाँधी पचशती’, ‘त्रिकाल संध्या’, ‘कालजयी’, ‘संप्रति’, ‘जल रही हैं सड़कों पर बत्तियाँ’ आदि।

  • भाव पक्ष
  1. भाषा-मिश्रजी की भाषा सहज एवं सरल है। उनकी भाषा भावाभिव्यक्ति में सशक्त है। इन्होंने अपने काव्य में मुक्त छन्द को अपनाया है। अपने भावों को सहज, सरल भाषा शैली में व्यक्त करने में मिश्रजी कुशल रहे हैं।
  2. अपूर्व प्रकृति चित्रण-इनकी कविताओं में अनुपम प्रकृति चित्रण को भी स्थान दिया गया है। सतपुड़ा के जंगल इनको प्रभावित करते हैं।
  3. अनुभूतिपूर्ण काव्य-इनकी कविताओं में अपनी अनुभूति को कल्पना का जामा पहनाकर अभूतपूर्व बना दिया गया है। इनके काव्य में भावाभिव्यक्ति की सशक्त योजना है।
  4. वेदना की अभिव्यक्ति-इनके काव्य में कहीं-कहीं वेदना की अभिव्यक्ति बड़ी अनूठी बन पड़ी है जो पाठकों के हृदय तक पहुँचने में समर्थ है। प्रतीकों का प्रयोग भी मार्मिक बन पड़ा है।
  • कला पक्ष
  1. अभिव्यक्ति की कशलता मिश्रजी की भाषा में सहजता और सरलता मिलती है। भाषा में भावाभिव्यक्ति की अपूर्व क्षमता है। इनके भावों में गहराई होते हुए भी वे सरलता लिए हुए है। चिन्तनशीलता इनकी रचनाओं का विशिष्ट गुण है। अपने नए-नए भावों को कविता की पंक्तियों में पिरोकर पाठकों के सामने प्रस्तुत किया है।
  2. अलंकारों और महावरों का प्रयोग मिश्रजी ने अपनी कविता में अलंकारों, लोकोक्तियों और मुहावरों का प्रयोग किया है। अनेक प्रतीकों के माध्यम से नए-नए विचारों को समझाने का कार्य किया है।
  3. गाँधीवादी विचारधारा-मिश्रजी ने गाँधीवादी विचारधारा से प्रभावित होने के कारण अपनी कविताओं में गाँधी दर्शन का प्रभाव छोड़ा है। इनकी कविताओं में वैयक्तिकता और आत्मानुभूति दृष्टिगोचर होती है। इनकी गीतफरोश नामक कविता अत्यन्त चर्चित रही।

उसकी कुछ पंक्तियाँ देखिए-

“जी हाँ हुजूर मैं गीत बेचता हूँ।
मैं तरह-तरह के किसिम किसिम के गीत बेचता हूँ।
जी पहले कुछ दिन शर्म लगी मुझको
पर पीछे-पीछे अकल जगी मुझको
जी लोगों ने तो बेच दिए ईमान
जी आप न हों सुनकर ज्यादा हैरान
मैं सोच समझकर आखिर
अपने गीत बेचता हूँ।”

  • साहित्य में स्थान

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पं. भवानी प्रसाद मिश्र प्रयोगशील एवं नई कविता के लोकप्रिय कवि हैं। इनकी कविताओं में एक ऐसी सरलता और ताजगी है.जो आज के किसी अन्य कवि में दिखाई नहीं देती। गाँधीवाद से प्रभावित मिश्रजी की कविताओं में मानव कल्याण के स्वर मुखरित हुए हैं। प्रयोगवाद एवं नयी कविता के कवियों में इनका प्रशंसनीय स्थान है। इन्होंने सहज और सरल भाषा शैली में अपने विचारों को व्यक्त करके अपनी कविता को आत्मीय वार्तालाप तथा आत्मानुभव के रूप में प्रतिष्ठित किया है।

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3

MP Board Class 8 Maths Chapter 5 Square And Square Roots Question 1.
What could be the possible ‘ones’ digits of the square root of each of the following numbers?
(i) 9801
(ii) 99856
(iii) 998001
(iv) 657666025
Solution:
(i) We know that the ‘ones’ place of the square of 1 and 9 is 1.
∴ The possible ‘ones’ digits of the square root of 9801 are 1 and 9.
(ii) We know that the ‘ones’ place of the square of 4 and 6 is 6.
∴ The possible ‘ones’ digits of the square root of 99856 are 4 and 6.
(iii) We know that the ‘ones’ place of the square of 1 and 9 is 1.
∴ The possible ‘ones’ digits of the square root of 998001 are 1 and 9.
(iv) We know that ‘ones’ place of the square of 5 is 5.
∴ The possible ‘ones’ digit of the square root of 657666025 is 5.

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Solve a quadratic equation by completing the square calculator mathpapa.

MP Board Class 8 Maths Chapter 6 Exercise 6.3 Question 2.
Without doing any calculation, find the numbers which are surely not perfect squares,
(i) 153
(ii) 257
(iii) 408
(iv) 441
Solution:
We know that the numbers ending with 2, 3, 7 or 8 are not perfect squares. So, (i), (ii) and (iii) are surly not perfect squares.
(iv) Since, the number 441 ends with 1. Thus, 441 may or may not be a perfect square.

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MP Board Class 8 Maths Chapter 6 Question 3.
Find the square root of 100 and 169 by the method of repeated subtraction.
Solution:
First consider 100.
(1) 100 – 1 = 99
(2) 99 – 3 = 96
(3) 96 – 5 = 91
(4) 91 – 7 = 84
(5) 84-9 = 75
(6) 75 – 11 = 64
(7) 64 – 13 = 51
(8) 51 – 15 = 36
(9) 36 – 17 = 19
(10) 19 – 19 = 0.
∴ \(\sqrt{100}\) = 10.
Now, consider 169
(1) 169 – 1 = 168
(2) 168 – 3 = 165
(3) 165 – 5 = 160
(4) 160 – 7 = 153
(5) 153 – 9 = 144
(6) 144 – 11 = 133
(7) 133 – 13 = 120
(8) 120 – 15 = 105
(9) 105-17 = 88
(10) 88 – 19 = 69
(11) 69 – 21 = 48
(12) 48 – 23 = 25
(13) 25 – 25 = 0.
∴ \(\sqrt{169}\) = 13.

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Class 8 Maths Chapter 6 MP Board Question 4.
Find the square roots of the following numbers by the Prime Factorisation Method.
(i) 729
(ii) 400
(iii) 1764
(iv) 4096
(v) 7744
(vi) 9604
(vii) 5929
(viii) 9216
(ix) 529
(x) 8100
Solution:
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 1
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Class 8 Maths MP Board Chapter 6 Question 5.
For each of the following numbers, find the smallest whole number by which it should be multiplied so as to get a perfect square number. Also find the square root of the square number so obtained.
(i) 252
(ii) 180
(iii) 1008
(iv) 2028
(v) 1458
(vi) 768
Solution:
(i) We have, 252 = 2 × 2 × 3 × 3 × 7
The smallest whole number is 7 by which 252 should be multiplied so as to get a perfect square.
252 × 7 = 2 × 2 × 3 × 3 × 7 × 7
Now each prime factor is in a pair. Therefore, 252 × 7 = 1764 is a perfect square.
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 9

(ii) We have, 180 = 2 × 2 × 3 × 3 × 5
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 10
The smallest whole number is 5, by which 180 should be multiplied so as to get a perfect square.
180 × 5 = 2 × 2 × 3 × 3 × 5 × 5
So, \(\sqrt{900}\) = 2 × 3 × 5 = 30.

(iii)
We have,
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 11
1008 = 2 × 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 7
The smallest whole number is 7, by which 1008 should be multiplied so as to get a perfect square.
1008 × 7 = 2 × 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 7 × 7
Now each prime factor is in pair. Therefore,
1008 × 7 = 7056 is a perfect square.
So, \(\sqrt{7056}\) = 2 × 2 × 3 × 7 = 84.

(iv) We have, 2028 = 2 × 2 × 3 × 13 × 13
The smallest whole number is 3 by which 2028 should be multiplied so as to get a perfect square.
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 12
2028 × 3 = 2 × 2 × 3 × 3 × 13 × 13
Now each prime factor is in pair. Therefore, 2028 × 3 = 6084 is a perfect square.
So, \(\sqrt{6084}\) = 2 × 3 × 13 = 78.

(v) We have, 1458 = 2 × 3 × 3 × 3 × 3 × 3 × 3
The smallest whole number is 2, by which 1458 should be multiplied so as to get a perfect square.
1458 × 2 = 2 × 2 × 3 × 3 × 3 × 3 × 3 × 3
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 13
Now each prime factor is in pair.
Therefore, 1458 × 2 = 2916 is a perfect square.
So, \(\sqrt{2916}\) = 2 × 3 × 3 × 3 = 54

(vi) We have, 768 = 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 3
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 14
The smallest whole number is 3, by which 768 should be multiplied so as to get a perfect square.
768 × 3 = 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 3 × 3
Now each prime factor is in pair.
Therefore, 768 × 3 = 2304 is a perfect square.
So, \(\sqrt{2304}\) = 2 × 2 × 2 × 2 × 3 = 48.

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MP Board Class 8th Maths Chapter 6 Question 6.
For each of the following numbers, find the smallest whole number by which it should be divided so as to get a perfect square. Also find the square root of the square number so obtained,
(i) 252
(ii) 2925
(iii) 396
(iv) 2645
(v) 2800
(vi) 1620
Solution:
(i) We have 252 = 2 × 2 × 3 × 3 × 7
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 15
We find that 252 should be divided by 7, to get a perfect square.
252 ÷ 7 = 36 = 2 × 2 × 3 × 3
Therefore, the required smallest number is 7.

(ii) We find that 2925 = 3 × 3 × 5 × 5 × 13
We find that 2925 should be divided by 13, to get a perfect square.
2925 ÷ 13 = 225 = 3 × 3 × 5 × 5
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 16
Therefore, the required smallest number is 13.
Also, \(\sqrt{225}\) = 3 × 5 = 15.

(iii) We have, 396 = 2 × 2 × 3 × 3 × 11
We find that 396 should be divided by 11, to get a perfect square.
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 17
396 ÷ 11 = 36 = 2 × 2 × 3 × 3
Therefore, the required smallest number is 11.
Also, \(\sqrt{36}\) = 2 × 3 = 6.

(iv) We have, 2645 = 5 × 23 × 23
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 18
We find that 2645 should be divided by 5, to get a perfect square.
2645 ÷ 5 = 529 = 23 × 23
Therefore, the required smallest number is 5.
Also, \(\sqrt{529}\) = 23.

(v) We have, 2800 = 2 × 2 × 2 × 2 × 5 × 5 × 7
We find that 2800 should be divided by 7, to get a perfect square
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 19
2800 ÷ 7 = 400 = 2 × 2 × 2 × 2 × 5 × 5
Therefore, the required smallest number is 7.
Also, \(\sqrt{400}\) = 2 × 2 × 5 = 20.

(vi) We have,
1620 = 2 × 2 × 3 × 3 × 3 × 3 × 5
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Class 8 MP Board Maths Chapter 6 Question 7.
The students of Class VIII of a school donated ₹ 2401 in all, for the Prime Minister’s National Relief Fund. Each student donated as many rupees as the number of students in the class. Find the number of students in the class.
Solution:
We have, 2401 = 7 × 7 × 7 × 7
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 21
We find that the number of students in the class is 49.

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MP Board Class 8 Chapter 6 Question 8.
2025 plants are to be planted in a garden in such a way that each row contains as many plants as the number of rows. Find the number of rows and the number of plants in each row.
Solution:
Total number of plants = 2025
The plants are planted in a garden in such a way that each row contains as many plants as the number of rows.
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 22
2025 = 3 × 3 × 3 × 3 × 5 × 5
∴ Number of plants in each row = \(\sqrt{2025}\) = 3 × 3 × 5 = 45
So, number of rows = number of plants.
Thus, the number of rows = 45
and number of plants in each row = 45.

Class 8 Maths Chapter 6 Exercise 6.3 MP Board Question 9.
Find the smallest square number that is divisible by each of the numbers 4,9 and 10.
Solution:
The smallest number divisible by each 4, 9 and 10 is their LCM.
The LCM of 4, 9 and 10 is 2 × 2 × 3 × 3 × 5 = 180.
Now, prime factorisation of 180 is
180 = 2 × 2 × 3 × 3 × 5
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 23
In order to get a perfect square, each factor of 180 must be paired.
So, we need to make pair of 5.
∴ 180 should be multiplied by 5.
Hence, the required number is 180 × 5 = 900.

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MP Board Solution Class 8 Maths Question 10.
Find the smallest square number that is divisible by each of the numbers 8, 15 and 20.
Solution:
The smallest number divisible by each 8, 15 and 20, is their LCM.
The LCM of 8, 15 and 20 is 2 × 2 × 2 × 3 × 5 = 120
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 6 Square and Square Roots Ex 6.3 24
Now prime factorisation of 120 is
120 = 2 × 2 × 2 × 3 × 5 ….. (i)
In order to get a perfect square, each factor of 120 must be paired.
Thus we multiply (i) by 2 × 3 × 5 = 30, we get 120 × 30 = 3600.

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MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti विविध प्रश्नावली 1

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions विविध प्रश्नावली 1

Class 7 Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांशों की संदर्भ एवं प्रसंग सहित व्याख्या कीजिए-

(क) “यह तो होता ही है कि जब बड़े काम किए जाते हैं,
उनमें कामयाबी भी होती है, नाकामयाबी भी होती है,
मगर हम सब शरीक रहें, कामयाबी की
खुशी में भी और नाकामयाबी के दुःख में भी।”

(ख) “मैं दुनिया को बता देना चाहता हूँ कि हिन्दुओं
के रस्मों-रिवाज मुसलमान के लिए भी उतने ही
प्यारे और पाक हैं जितने उनके लिए। तुम भूलते
हो कि हम सब एक परवरदिगार की औलाद

(ग) “सांस्कृतिक ऐतिहासिक दृष्टि से सम्पन्न यह
हमारा मध्य प्रदेश, लघुभारत कहा जाता है। मध्य
प्रदेश के वैभव की मिठास यहाँ के निवासियों के
हृदय में रची बसी है।”

उत्तर-
(क) नेहरू जी अपने सहयोगियों के संग के दिनों को स्मरण करते हुए लिखते हैं कि जब बड़े उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु प्रयास किये जाते हैं तो उनमें सफलता तो प्राप्त होती ही है, कभी-कभी असफलता भी हाथ लगती है। मगर निराशा के इस क्षण में तथा सफलता की स्थिति में खुशी के पलों में हमें सदैव संग रहना चाहिए।

(ख) हुमायूँ अपने सेनापति को सम्बोधित करते हुए कहता है कि हिन्दुओं और मुसलमानों में कोई अन्तर नहीं है। सब के सब उस एक मालिक की सन्तान हैं जिसने उन्हें बनाया है। आज मैं इस पूरे संसार के सामने यह सिद्ध करना चाहता हूँ कि हिन्दुओं के सभी रीति-रिवाज और परम्पराएँ एक मुसलमान के लिए भी समान रूप से प्रिय और पवित्र हैं।

(ग) मध्यप्रदेश में विभिन्न धर्मों, रीति-रिवाजों व मान्यताओं के लोग परस्पर भाईचारे और सद्भाव से निवास करते हैं। यहाँ भारत के अन्य सभी प्रदेशों में मनाये जाने वाले पारम्परिक तीज-त्यौहार मनाये जाते हैं। अतः सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक रूप से समृद्ध मध्य प्रदेश को लघु भारत कहना ठीक ही है। मध्यप्रदेश के गौरवशाली अतीत की मिठास इस प्रदेश | के निवासियों के मन में आज भी विद्यमान है तथा जिसे उनके व्यवहार से महसूस किया जा सकता है।

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Class 7th Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 2.
निम्नलिखित दोहों का भावार्थ लिखिए-

(क) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।”

(ख) “विद्या धन उद्यम बिना, कहौ जु पावै कौन,
बिना डुलाए न मिले, ज्यों पंखा को पौन।”

उत्तर-
कबीर कहते हैं कि मनुष्य को सदैव अपनी निन्दा करने वाले का स्वागत करना चाहिए और उसे अपने पास रखना चाहिए। वास्तव में, निन्दा करने वाला व्यक्ति बिना पानी और साबुन के तुम्हारे व्यवहार में से तुम्हारे दोषों को दूर कर तुम्हारे स्वभाव को स्वच्छ और कोमल बना सकता है।

वृन्द कहते हैं कि जिस प्रकार गर्मी के समय में बिना पंखे को घुमाये (परिश्रम किए) उसकी हवा का आनन्द नहीं लिया जा सकता है, ठीक उसी प्रकार विद्या रूपी धन को बिना परिश्रम किये प्राप्त नहीं किया जा सकता है। अर्थात् प्रत्येक मनुष्य को अभीष्ट की प्राप्ति हेतु अथक् मेहनत करनी चाहिए।

MP Board Class 7th Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) दीपू का घर में रौब क्यों नहीं था?
उत्तर-
दीपू घर में सबसे छोटा था। अतः उसका घर में रौब नहीं था।

(ख) नेहरू जी ने किन जंजीरों को तोड़ने के लिए कहा
उत्तर-
नेहरूजी ने पुरानी रीति और रस्मों की उन जंजीरों को तोड़ने का आह्वान किया है जो हिन्दुस्तान को आगे बढ़ने से रोकती हैं, देशवासियों में फूट डालती हैं, बेशुमार लोगों को दबाये रखती हैं और जो शरीर और आत्मा के विकास के मार्ग को अवरुद्ध करती हैं।

(ग) विक्रमादित्य के नवरत्नों में से किन्हीं तीन के नाम – लिखिए।
उत्तर-
कालिदास, वराहमिहिर, वाणभट्ट।

(घ) विक्रमादित्य के चरित्र के कोई चार गुण लिखिए।
उत्तर-
विक्रमादित्य अपनी न्यायप्रियता, बुद्धिमत्ता, विवेकपूर्ण निर्णय और प्रजापालन आदि के लिए इतिहास में अमर हैं।

(ङ) भोपाल के दर्शनीय स्थल कौन-कौन से हैं?
उत्तर-
भोपाल के दर्शनीय स्थलों में भारत-भवन, मानव संग्रहालय, बिड़ला मन्दिर, ताज-उल-मस्जिद, वन-विहार आदि = प्रमुख हैं।

(य) “राखी वह शीतल प्रलेप है, जो सारे घाव भर देता है।” यह कथन किसने व किससे कहा?
उत्तर-
यह कथन रानी कर्मवती ने जवाहर बाई से कहा।

Class 7th Vividh Prashnavali 1 Hindi प्रश्न 4.
कोष्ठक में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) दीपू को …………………………… पर विश्वास था। (नानी/चाची/दादी)
(ख) …………………………… भारत का हृदय स्थल है। (उत्तर प्रदेश/बिहार/मध्यप्रदेश)
(ग) शिवपुरी में …………………………… राष्ट्रीय उद्यान है। (जवाजी/माधव)
(घ) …………………………… नदी मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाती है। (गंगा/जमुना/नर्मदा)
(ङ) हीरों की खानों के लिए …………………………… विश्व में प्रसिद्ध (सतना/पन्ना/छतरपुर)
उत्तर-
(क) दादी,
(ख) मध्यप्रदेश
(ग) माधव,
(घ) नर्मदा,
(ङ) पन्ना।

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MP Board Class 7 Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर, सही विकल्प चुनकर लिखिए
(अ) नेहरूजी ने अपनी भस्म कहाँ बिखेरने की इच्छा व्यक्त की थी?
(क) नदियों में
(ख) खेतों में
(ग) पर्वतों पर
(घ) समुद्र में।
उत्तर-
(ख) खेतों में,

(ब) दीपू कौन-सी कक्षा में पड़ता था?
(क) तीसरी
(ख) चौथी
(ग) पाँचवीं
(घ) पहली।
उत्तर-
(ख) चौथी,

(स) तानसेन और बैजूबावरा की संगीत स्पर्धा कहाँ हुई थी?
(क) ओरछा
(ख) ग्वालियर
(ग) आगरा
(घ) दिल्ली।
उत्तर-
(ख) ग्वालियर,

(द) कर्मवती कहाँ की महारानी थी?
(क) झाँसी
(ख) मेवाड़
(ग) गढ़ मण्डला
(घ) इन्दौर।
उत्तर-
(ख) मेवाड़।

Class 7th Hindi Vividh Prashnawali 1 प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(क) हमारे मन में किनके प्रति दया की भावना होनी चाहिए?
उत्तर-
हमारे मन में दीन-दुखी जीवों के प्रति दया की भावना होनी चाहिए।

(ख) भरहुत और साँची क्यों प्रसिद्ध हैं?
उत्तर-
भरहुत अपनी प्राचीनतम स्थापत्य कला के लिए तथा साँची बौद्ध स्तूपों के लिए प्रसिद्ध है।

(ग) मध्यप्रदेश की किन्हीं तीन बोलियों के नाम लिखिए।
उत्तर-
मध्यप्रदेश की तीन बोलियाँ-बुन्देली, मालवी और निमाड़ी हैं।

(घ) कर्मवती ने राखी को वरदान क्यों कहा है?
उत्तर-
राखी सारे बैर-भावों को दूर कर देती है। साथ ही इसे पहनकर प्रत्येक भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है। अतः कर्मवती ने इसे वरदान की संज्ञा दी है।

Class 7th Hindi Bhasha Bharti प्रश्न 7.
निम्नलिखित की सही जोड़ियाँ बनाइए
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti विविध प्रश्नावली 1 1
उत्तर-
(क) → (3), (ख) → (1), (ग) → (4), (घ) → (2).

Nehru Ji Ne Kin Janjeeron Ko Todne Ke Liye Kaha Hai प्रश्न 8.
निम्नलिखित शब्दों को वाक्य में प्रयोग कीजिए-
वैमनस्य, तोपखाना, पश्चाताप, वरदान, आज्ञापालन, पिटारा।
उत्तर-
(क) वैमनस्य-हमें वैमनस्य की भावना से बचना चाहिए।
(ख) तोपखाना-अंग्रेजों की सेना में कई समृद्ध तोपखाना थे।
(ग) पश्चाताप-उसे अपनी गलती पर बाद में काफी पश्चाताप हुआ।
(घ) वरदान-अच्छी शिक्षा देना वरदान के समान है।
(ङ) आज्ञापालन-राम अपने पिता दशरथ के आज्ञापालन में सहर्ष वनवास को चले गये।
(च) पिटारा-जादूगर के जादू के पिटारे में बहुत से खेल हैं।

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 9.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए-
सस्कृति, प्रतिविम्व, परयटक, वेभव, स्त्रजन, हसना, प्रान।
उत्तर-
अशुद्ध शब्द शुद्ध शब्द
सस्कृति – संस्कृति
प्रतिविम्व – प्रतिबिम्ब
परयटक – पर्यटक
वेभव – वैभव
स्त्रजन – सृजन
हसना – हँसना
प्रान – प्राण

Bhasha Bharti Class 7 प्रश्न 10.
निम्नलिखित वाक्यों को कोष्ठक में दिए निर्देशानुसार बदलिए
(क) मामाजी वाराणसी पहुँचे। (निषेधात्मक)
(ख) राम ने गंगा में डुबकी लगाई। (प्रश्नवाचक)
(ग) क्या लड़का कपड़े लेकर भाग गया? (साधारण वाक्य)
(घ) आपने यह क्या कर डाला? (विस्मयादिबोधक)
उत्तर-
(क) मामाजी वाराणसी नहीं पहुँचे।
(ख) क्या राम ने गंगा में डुबकी लगाई?
(ग) लड़का कपड़े लेकर भाग गया।
(घ) अरे ! आपने यह क्या कर डाला।

Class 7 Hindi Bhasha Bharti प्रश्न 11.
निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए-
राखी, धागा, भाई, पताका, सपूत, शत्रु, लड़की।
उत्तर-
एकवचन – बहुवचन
राखी – राखियाँ
धागा – धागे
भाई – भाइयों
पताका – पताकाओं
सपूत – सपूतों
शत्रु – शत्रुओं
लड़की – लड़कियाँ

Class 7 Sanskrit Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 12.
निम्नलिखित सामासिक पदों में तत्पुरुष समास छाँटिए
सेनापति, माता-पिता, चौराहा, यथाशक्ति,वीरव्रत, महारानी, रसोईघर।
उत्तर-
सेनापति, वीरव्रत, रसोईघर।

MP Board Class 7 Hindi प्रश्न 13.
निम्नलिखित शब्दों में से हिन्दी, अंग्रेजी तथा उर्दू के शब्द छाँटकर तालिका में लिखिए-
दोस्त, टॉफी, कक्षा, बस्ता, ट्रिप, बेवकूफ, बारह, कार्तिक, मजबूर, तरकीब, कीर्तन, रेडियो, पक्ष।
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti विविध प्रश्नावली 1 2

MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti प्रश्न 14.
निम्नलिखित गद्यांश में विराम चिह्नों का उचित प्रयोग कीजिए-
मैं मुन्ना आपने पहचाना नहीं मुझे हाँ मुन्ना भूल गये आप मामाजी खैर कोई बात नहीं इतने साल भी तो हो गये तुम यहाँ कैसे
उत्तर-
मैं मुन्ना, आपने पहचाना नहीं मुझे? हाँ मुन्ना। भूल गये आप मामाजी? खैर, कोई बात नहीं। इतने साल भी तो हो गये। तुम यहाँ कैसे?

Class 5 Hindi Vividh Prashnavali 1 प्रश्न 15.
नीचे दिए गए उपसर्ग’योग’ शब्द में लगाकर नए शब्द बनाइए-
प्र, वि, अभि, उप, सह, सु।
उत्तर-

  • प्र + योग = प्रयोग,
  • वि + योग = वियोग,
  • अभि + योग = अभियोग,
  • उप + योग = उपयोग,
  • सह + योग = सहयोग,
  • सु + योग = सुयोग।

विविध प्रश्नावली 1 कक्षा 5 प्रश्न 16.
निम्नलिखित शब्दों के हिन्दी शब्द लिखिए-
खिदमत, सौगात, पैगाम, मुताबिक, हिफाजत, कुर्बानी, खौफ।
उत्तर-

  • उर्दू शब्द – हिन्दी शब्द
  • खिदमत – आवभगत
  • सौगात – उपहार
  • पैगाम – सन्देश
  • मुताबिक – अनुसार
  • हिफाजत – सुरक्षा
  • कुर्बानी – बलिदान
  • खौफ – डर

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दादी की घड़ी प्रश्न 17.
“दादी की घड़ी” पाठ का सारांश लिखिए।
उत्तर-
दादी ने दीपू को अपने और करीब लाते हुए प्यार से समझाया कि भला तकिया भी कहीं बोलता है जो दूसरों को जगा देगा ? वास्तव में असली अलार्म तो मनुष्य का दिल होता है। जब कभी हमें अवश्य एवं निश्चित समय पर सुबह उठना होता है, तो वह हमारा दिल ही है, जो हमें अभीष्ट समय पर अपने आप उठा देता है। अलार्म घड़ी की आवाज को तो हम चाहें तो बन्द भी कर सकते हैं, किन्तु दिल की आवाज को बन्द नहीं किया जा सकता है। यह तो हमें उठाकर ही शान्त होती है। दिलरूपी घड़ी का रहस्य जानकर दीपू प्रसन्न हुआ।

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MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti विविध प्रश्नावली 1

MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti Solutions विविध प्रश्नावली 1

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. निम्नलिखित पर्यायवाची शब्दों की सही जोड़ी बनाइए
(1) निशा – (क) अमृत
(2) वीणावादिनी – (ख) विहग
(3) पक्षी – (ग) कमल
(4) सुधा – (घ) रात
(5) सरोज – (ङ) सरस्वती
उत्तर-
(क) → (4),
(ख) → (3),
(ग) → (5),
(घ) → (1),
(ङ) → (2).

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2. सही विकल्प चुनिए
(1) हृदय भर आना मुहावरे का अर्थ है-
(क) प्यास बुझाना,
(ख) दुःखी होना,
(ग) खुशी होना।
उत्तर-
(ख) दुःखी होना,

(2) निम्नलिखित रचनाकारों में से किसका सम्बन्ध राजस्थान से है ?
(क) सूर,
(ख) तुलसी,
(ग) मीरा।
उत्तर-
(ग) मीरा,

(3) ‘श्रुति ईमानदार है और प्रतिभाशाली भी है।’ यह वाक्य है
(क) साधारण वाक्य,
(ख) मिश्रित वाक्य,
(ग) संयुक्त वाक्य।
उत्तर-
(ग) संयुक्त वाक्य।

3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) जहाज का पंछी’ शब्द कवि …………………………………….’ की कविता में प्रयुक्त हुए हैं।
(ख) आधी ताकत खींच लेने की शक्ति का वरदान राजा ……………………………………. को प्राप्त था।
(ग) छंद दो प्रकार के हैं। एक ……………………………………. छंद,दूसरा वर्णिक छन्द।
उत्तर-
(क) सूरदास,
(ख) बाली,
(ग) मात्रिक।

4. निम्नलिखित शब्द उपसर्ग जुड़कर बने हैं। इन शब्दों के उपसर्ग अलग कर निम्न तालिका में लिखिए-
प्रतिक्षण, पराजय, अभिशाप, अनुगमन, विज्ञान।
उत्तर-

MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. किस बात के मान लेने से हमारी शक्ति आधी हो जाती है?
उत्तर-
विरोधी के बल और अपने बल को तौले बिना, उसे शक्तिशाली मान लेने से हमारी शक्ति आधी हो जाती है।

2. उपमा’ अलंकार में कौन-कौन से चार अंग होते हैं ?
उत्तर-
उपमा अलंकार में चार अंग होते हैं
(1) उपमेय (प्रस्तुत),
(2) उपमान (अप्रस्तुत),
(3) साधारण धर्म,
(4) वाचक।

3. अपराजिता महिला का नाम क्या है ? ‘अपराजिता’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर-
अपराजिता महिला का नाम डॉ. चन्द्रा है।

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MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti लघु उत्तरीय प्रश्न.

1. कवि वीणावादिनी से किस प्रकार का झरना बहाने के लिए आग्रह कर रहा है ?
उत्तर-
कवि वीणावादिनी से ज्योर्तिमय निर्झर (झरना) बहाने के लिए आग्रह कर रहा है। …

2. कलषु भेद से कवि का क्या आशय है ?
उत्तर-
कलुष भेद से कवि का आशय मन के विकारों को दूर (नष्ट) करने से है।

3. आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए लेखक ने कौन-सा सूत्र बताया है ?
उत्तर-
आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए लेखक ने सूत्र बताया है कि हम दुविधा से ऊपर उठे अर्थात् दुविधा को नष्ट कर देना चाहिए क्योंकि इससे एकाग्रता नष्ट हो जाती है। .

4. उपसर्ग और प्रत्यय में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
उपसर्ग और प्रत्यय में अन्तर को, समझने के लिए इनकी परिभाषाओं को ध्यान में रखना होगा। इनकी परिभाषाएँ इस प्रकार हैं

  1. उपसर्ग-जो शब्दांश या ध्वनि किसी सार्थक शब्द के शुरू में जुड़कर इसके अर्थ में बदलाव कर देते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं; जैसे-प्र, परा, अप, सम आदि।
  2. प्रत्यय-जो शब्दांश सार्थक शब्दों के अन्त में जुड़कर नयापन या भिन्न अर्थ की उत्पत्ति करता है, वह प्रत्यय कहलाता है; जैसे-योग के बाद इक जोड़े जाने पर यौगिक शब्द बनता

MP Board Class 8th Hindi Bhasha Bharti दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर उत्तर दीजिए-
“नव गति नव लय ताल-छन्द नव।
नवल कंठ, नव जलद मन्द रव॥”
(1) उपर्युक्त पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है ?
(2) उपर्युक्त पंक्तियाँ किस पाठ से ली गई हैं ?
(3) कविता के कवि का नाम लिखिए।
(4) ताल छन्द का क्या आशय है ?
उत्तर-
(1) उपर्युक्त पंक्तियों में अनुप्रास अलंकार है।
(2) उपर्युक्त पंक्तियाँ ‘ वर दें’ पाठ से ली गई हैं।
(3) इस कविता के कवि का नाम सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ है।
(4) ताल-छन्द का आशय यह है कि ‘कविता’ करने के लिए किसी भी ताल अथवा छन्द की अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए। कविता तो सीधे हृदय से निकले भावों का उद्गार होती है। ताल और छन्द का बन्धन वहाँ नहीं होना चाहिए।

2. रचना की दृष्टि से वाक्य कितने प्रकार के हैं ? नाम लिखिए।
उत्तर-
रचना की दृष्टि से वाक्य तीन प्रकार के होते हैं

  • साधारण वाक्य,
  • मिश्रित वाक्य,
  • संयुक्त वाक्य।

3. मुफ़्तानन्द जी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर-
मुफ़्तानन्द जी बिना निमन्त्रण के भी किसी के . द्वारा दिए गये भोज आदि में चले जाते हैं। वे मुफ्त खाकर मस्त रहते हैं। पैसा खर्च करना वे सीखे ही नहीं। वे अखबार पर भी खर्च नहीं करते। अपनी सन्तान की शिक्षा पर भी कोई खर्च नहीं करते। मुफ्त में प्राप्त की गई पुस्तकों में से वे अपने पुस्तकालय की शोभा बढ़ाते हैं। ‘फ्री पास’ से सिनेमा देखना वे अच्छा मानते हैं। औषधि तक वे मुफ़्त ही प्राप्त करते हैं। यहाँ तक है कि वे मुफ्त में ही अपनी मृत्यु प्राप्त करने के लिए ‘फ्री पास’ की इच्छा करते हैं।

4. तुलसीदास जी ने “अपनपौ हारे” क्यों कहा है ? समझाइए।
उत्तर-
तुलसीदास जी भगवान राम के चरणों की भक्ति छोड़कर कहीं दूसरी जगह जाना नहीं चाहते अर्थात् वे किसी दूसरे देवता की भक्ति नहीं करना चाहते। जितने भी देवता, दनुज, मुनि, नाग और मनुष्य हैं, वे सब माया के वशीभूत हैं। वे बेचारे हैं और दीन बने हए हैं। अत: वे (तुलसीदास) इनके हाथों में जाकर, अर्थात् इनकी शरण में जाकर अपनेपन का (अपने स्वाभिमान का) त्याग नहीं करना चाहते। अपने स्वाभिमान को ‘हारकर जीवन जीवित रहना अपमानजनक है, मृत्यु प्राप्त करने से भी अधिक पीड़ादायक होगा।

5. निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़िए और मात्राएँ बताइए कि उनमें कौन-सा छन्द है ?
उत्तर-
यह दोहा छन्द है, क्योंकि जिस छन्द के विषम व सम चरणों में क्रमशः 13 और 11 मात्राएँ हों और उसके चार चरण हों तो वह दोहा छन्द होता है अर्थात् पहले और तीसरे चरण में तेरह और दूसरे तथा चौथे चरण में ग्यारह-ग्यारह मात्राएँ हों तो वह दोहा छन्द होता है।

6. निम्नलिखित शब्दों का अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
नतमस्तक, आभामण्डित, रंचमात्र, जिजीविषा, जिह्वाग्र, पुष्पवेषी, यातनाप्रद।
उत्तर-
(1) नतमस्तक = सिर झुकाकर।
वाक्य प्रयोग-हमें नतमस्तक होकर नमस्कार करना चाहिए।

(2) आभामण्डित-कांति से सुशोभित।
वाक्य प्रयोग-आभामण्डित मुखमण्डल तेज बिखेर रहा था।

(3) रंचमात्र = थोड़ा-सा, तनिक-सा।
वाक्य प्रयोग-वह रंचमात्र भी अपने दुष्कर्म पर लज्जित नहीं था।

(4) जिजीविषा = जीवित रहने की इच्छा।
वाक्य प्रयोग-छोटा भी जीव विरोधी दशा में भी जिजीविषा लिए होता है।

(5) जिह्वाग्र = जीभ पर।
वाक्य प्रयोग-अपने दुश्मनों का नाम हम जिह्वाग्र पर नहीं आने देते हैं।

(6) पुष्पवेषी = फूलों का वेश बनाने वाला।
वाक्य प्रयोग-देवाङ्गनाएँ प्रायः पुष्प वेषी होती हैं।

(7) यातनाप्रद = कष्टदायक।
वाक्य प्रयोग-यातनाप्रद परिस्थितियों ने उसे निराश बना दिया।

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7. आर्यभट्ट नामक उपग्रह के अतिरिक्त भारत ने और कौन-कौन से उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे ?
उत्तर-
आर्यभट्ट के अतिरिक्त भारत ने अनेक कृत्रिम उपग्रह । अंतरिक्ष में भेजे हैं। इनमें से भास्कर – I व II, रोहिणी, ऐरियन
मैसेंजर, इण्सैट 1A; 1B, 1C, 1D, IRS-1A, 1B, इण्सेट 2A, 2B, 2C, 2D, 2E, ओसियन सेट, इण्सेट 3A, 3B, 3C, 3D, 3E, कल्पना-I, ऐड्सेट, इण्सेट -4A, 4B, 4C, 4D इत्यादि प्रमुख हैं।

8. यदि आपने कोई दर्शनीय स्थल देखा है, तो उसकी विशेषताएँ बतलाते हुए यात्रा-वृत्तान्त लिखिए।
उत्तर-
विद्यार्थी स्वयं लिखें।

9. किसी संत कवि द्वारा रचित कोई एक पद/कविता लिखिए।
उत्तर-
बसो मैरे नैनन में नंदलाल। – मोर मुकुट मकराकृति कुंडल, अरुण तिलक दिए भाल॥ मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने बिसाल। अधर-सुधा-रस मुरली राजत, उर बैजंती-माल॥ छुद्रं घंटिका कटि-तट सोभित, नूपुर सबदं रसाल। मीरा प्रभु संतन सुखदाई, भगत बछल गोपाल॥
-मीराबाई

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MP Board Class 10th Special English Unseen Passages Discursive

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MP Board Class 10th Special English Unseen Passages Discursive

Passage-1

Read the following passage carefully and answer the questions that follow:

Parents and teachers must learn to respect the children. No Japanese ever strikes a child. Yet Japanese children are models of reasonableness. The Japanese maintain a commendable attitude towards their children. They treat children as their equals and always address them as such. They never criticize them harshly. The use of rod is absolutely unknown in Japanese homes. Japanese code of life is very strict in certain respects. It exerts strict obedience and enforces strict respect. Japanese soldiers have earned a name for their high sense of duty and readiness from self-sacrifice. There come out of a traditional love for their country and its sovereign, rather than from fear of any penalties in childhood. (M.P. Board 2012)

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Questions:
(i) How should parents and teachers treat children?
(ii) How do Japanese parents treat their children?
(iii) What type of attitude they keep with their children?
(iv) For what have Japanese soldiers earned a name?
(v) From what does their high sense of duty come?
(vi) What type of life Japanese lead?
(vii) What quality they gain from their childhood?
Answers:
(i) Parents and teachers should respect the children.
(ii) The Japanese never strike their children.
(iii) They maintain a commendable attitude towards their children.
(iv) Japanese soldiers have earned a name for their high sense of duty and readiness for self-sacrifice.
(v) It comes out of a traditional love for their country and its sovereign.
(vi) Japanese exert strict obedience and enforce strict respect to lead their life.
(vii) They gain the quality of commendable attitude from their childhood.

Passage-2

He was a Hindu and an Indian, the greatest in many generations, and he was proud of being a Hindu and an Indian. To him India was dear because she had represented throughout the ages certain immutable truths. But though he was intensely religious and came to be called the Father of the Nation, which he had liberated, yet no narrow religious or national bonds confined his spirit. And so he became the great internationalist believing in essential unity of man the underlying unity of all religions, and the needs of humanity, and more specially devoting himself to the service of poor, the distressed and the oppressed millions everywhere.

Questions:
(a) This passage is written about:
(i) Mahatma Gandhi
(ii) Pt. Nehru
(iii) Rajiv Gandhi

(b) The word in this passage similar in meaning to ‘that cannot be changed’:
(i) liberated
(ii) underlying
(iii) undevoting
(iv) immutable

(c) The meaning of ‘distressed’ is:
(i) happy
(ii) upset and anxious
(iii) relaxed

(d) What was he proud of?
(e) Why was India dear to him?
(f) What did the hero of the passage devote himself to?
Answers:
(a) (i) Mahatma Gandhi.
(b) (iv)immutable
(c) (ii) upset and anxious.
(d) He was proud of being a Hindu and an Indian.
(e) India was dear to him because she had represented certain immutable truths througout the ages.
(f) The hero of the passage devoted himself to the service of the poor, the distressed and the oppressed millions everywhere:

Passage-3

Our opportunities are great but let me warn you that when power outstrips ability, we will fall on evil days. We should develop competence and ability which would help us utilise the opportunities which are now open to us. From tomorrow morning — from midnight today — we cannot throw the blame on the Britisher. We have to assume the responsibility ourselves for what we do. A free India will be judged by the way in which it will serve the interests of the commonman in the matter of food, clothing, shelter and social activities. Unless we destroy corruption in high places and root out every trace of nepotism, love of power, profiteering and black marketing which have spoiled the good name of this country in recent times, we will not be able to raise the standards of efficiency in administration as well as in the production and distribution of the necessary goods of life. (153 ivords) Extract from a speech by Dr. S.Radhakrishnan (1947)

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Questions:
(a) The speaker of these lines is
(i) Mahatma Gandhi
(ii) Pt. Nehru
(iii) Dr. S. Radhakrishanan

(b) The word in this passage similar in meaning to ‘takes away’ is:
(i) ability
(ii) outstrip
(iii) throw

(c) The meaning of ‘suppose’ is:
(i) trace
(ii) assume
(iii) raise

(d) What does the speaker warn of?
(e) What have we to assume?
(f) What can we do to raise the standards of efficiency in administration?
Answers:
(a) (iii) Dr. S. Radhakrishnan
(b) (ii) outstrip
(c) (ii) assume
(d) The speaker warns when power outstrips ability we will fall on evil days.
(e) We have to assume the responsibility ourselves.
(f) We can destroy corruption and root out nepotism love of power, profiteering and black marketing.

Passage-4

I was overwhelmed with gratuitous advice. Well-meaning yet ignorant friends thrust their opinions into unwilling ears. The majority of them said I could not do without meat in the cold climate. I would catch consumption. Mr. Z went to England and caught it on account of his foolhardiness. Others said I might do without flesh but without wine I could not move. I would be numbed with cold. One went so far as to advise me to take eight bottles of whisky, for I should want them after leaving Aden. Another wanted me to smoke, for his friend was obliged to smoke in England. Even medical men, those who had been to England, told the same tale. But as I wanted to come at any price, I replied that I would try my best to avoid all these things but if they were found to be absolutely necessary I did not know what I should do. I may here mention that my aversion to meat was not so strong then as it is now. I was even betrayed into taking meat about six or seven times at the period when I allowed my friends to think for me. But in the steamer my ideas began to change. I thought I should not take meat on any account. My mother before consenting to my departure extracted a promise from me not to take meat. So I was bound nof to take it, if only for the sake of the promise.

The fellow-passengers in the steamer began to advise us (the friend who was with me and myself) to try it.

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Questions:
(a) The word in the passage similar in meaning to ‘overjoyed’ is
(i) ignorant
(ii) overwhelmed
(iii) foolhardiness

(b) The meaning of ‘gratuitous’ is
(i) faithful
(ii) trustworthy
(iii) full of obligation

(c) Give a word which means opposite to ‘arrival’.
(d) Where did the narrator had this experience?
(e) What did the friends of the narrator advise him?
(f) Why did the narrator not accept their idea?
Answers:
(a) (ii) overwhelmed.
(b) (iii) full of obligation.
(c) departure.
(d) The narrator had this experience in England.
(e) The friends advised the narrator to eat meat.
(f) The narrator’s mother had taken a promise from him that he would not eat meat. So he did not accept their (friends’) idea.

Passage-5

He was a very regular correspondent. There was hardly a letter calling for a considered reply which he did not answer himself. Letters from individuals, dealing with their personal and private problems, constituted a considerable portion of his correspondence and his replies are valuable as guidance to others with similar problems. For a great period of his life, he did not take the assistance of any stenographer or typist, and used to write whatever he required in his own hand, and even when such assistance became unavoidable, he continued writing a great deal in his own hand. There were occasions when he became physically unable to write with the fingers of his right hand and, at a later stage in his life, he learnt the art of writing with his left hand. He did the same thing with spinning. Private correspondence, which absorbed much of his writing in this way, constituted an important and significant part of his teachings, as applied to particular problems of the ordinary man in his everyday life. (From Dr. Rajendra Prasad’s Homage to Gandhiji)

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Questions:
(a) has been talked about in this passage.
(i) Mahatma Gandhi
(ii) Dr. Rajendra Prasad
(iii) Gautam Buddha

(b) The word in the passage similar in meaning to ‘very remarkable’ is
(i) correspondence
(ii) significant
(iii) required

(c) The meaning of ‘teachings’ is
(I) reading
(ii) writing
(iii) learning/preaching

(d) What is valuable for others?
(e) What did Gandhiji did for a great period of his life?
(f) What constituted a significant part of his teachings?
Answers:
(a) (i) Mahatma Gandhi.
(b) (ii) significant
(c) (iii) learning/preaching
(d) The correspondence of Gandhiji is valuable for others.
(e) Gandhiji did not take the assistance of any stenographer for a great period. He used to write a great deal in his own hand.
(f) Gandhiji’s private correspondence constituted a significant part of his teachings.

Passage-6

1. There are several reasons for a headache. Physical, emotional and mental factors, anxiety and tension are a few. Sometimes, head-ache can be a signal of an underlying disease. More than medicines, yoga therapy eminently suits any need. Yoga is a comprehensive mode of culturing the body and the mind. Using an ‘Integrated Approach of Yoga’, the Yoga Research Centres have been able to cure some tough headaches. The integrated approach includes breathing, asanas, pranayama, meditation and devotional sessions.

2. Yoga asanas, especially the ones imitating the natural postures of animals, have a tremendous tranquilising effect, without having to depend on common drugs. Pranayama inhibits random agitations in Pranic (energy) flows in Pranamayakosa, stabilising the autonomic nervous system. Dhyana and Samadhi culture the mind to relax it. This approach alters the reaction of an individual to headache. By interrupting the vicious cycle of pain-agony-pain, it prevents headache from becoming a crippling problem.

3. Through asanas that calm you, the pranayama exercises that inhibit
random energy flows and the meditation that cultivates and relaxes your mind, yoga offers a holistic-form of pain relief. It stops you from becoming locked in the vicious circle of pain-anxiety-pain.

4. Chronic pain: Chronic pain essentially is imbalance in prana (energy). This imbalance initially manifests only as functional abnormality like insomnia, lack of enthusiasm, fatigue, increased irritability and lack of concentration. Over the years, the imbal-ance settles in an organ. Chronic pain may sometimes be just a long standing muscle spasm, which later on may give rise to organic changes in the form of chronic inflammation.

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Questions:
(a) The word similar in meaning to ‘interfering in an affair’ is
(i) cycle
(ii) interrupting
(iii) becoming

(b) Give adjective form of ‘essentially’.
(c) Sometimes headache can be a signal of an underlying desease. (Say True or False)
(d) How does yoga help us?
(e) What does integrated yoga include?
(f) What is chronic pain?
Answers:
(a) (ii) interrupting
(b) essential
(c) True
(d) Integrated yoga cures some tough headaches.
(e) Integrated yoga includes breathing, asanas, pranayama, meditation and devotional sessions.
(f) Chronic pain essentially is imbalance in prana(energy).

Passage-7

1. India was once considered the land of knowledge and enlightenment. In ancient times scholars from all over Asia and Europe used to flock to Taxila, Nalanda and other Indian centres of learning. Apart from the arts, culture, philosophy and religion, these scholars came to study medicine, law and martial sciences. But despite having a vastly expanded university system and historical advantages, modern India has yet to provide international or even regional leadership in higher education. From the surrounding countries of Asia and Africa only a few students come to India for higher education.

2. The United States is by far the most successful country in attracting foreign students. But other countries such as Australia, Canada and Britain also aggressively market their universities abroad through their education counselling services and recruit- merit fairs with the active cooperation of their diplomatic missions abroad.

3. Likewise, India should also capitalise on the advantages offered by its higher education institutions, market Indian universities abroad and facilitate the entry of foreign students into them.

4. The revenue from foreign students can be used to ease the financial crunch faced by Indian universities, improve academic facilities and subsidise the cost of educating Indian students.

5. But apart from economic advantages many other benefits would accrue to the nation. India would gain global and regional in-fluence, goodwill and become a major provider of higher education. Many Asian and African countries, especially the smaller ones have poorly developed university systems and would look to Indian universities for the higher education of their youth. At the same time Indian students will not be deprived if 10 per cent supernumerary seats for foreign students are created in universities and professional colleges.

6. Already professional education in India has proved accessible and affordable for foreign students, especially from Malaysia, the Middle East and South Africa. In these countries higher education training facilities are limited. Many NRI (non-resident Indian) families abroad, especially those from English-speaking industrialised countries are also keen to send their children to study in their motherland and are hopeful to become attuned to their Indian roots in the process.

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Questions:
(a) The word similar in meaning to ‘inner awareness’ is
(i) knowledge
(ii) enlightenment
(iii) virtue

(b) Give a word opposite in meaning to ‘advantage’.
(c) India has never been a land of knowledge and enlightenment. (Say True or False)
(d) Name some ancient centres of learning in India.
(e) Which country attracts most foreign students.
(f) How can the revenue from foreign students be used?
Answers:
(a) (ii) enlightenment
(b) disadvantage
(c) False
(d) Taxila, Nalanda
(e) The United States attracts most foreign students.
(f) The revenue from foreign students can be used to ease financial crunch faced by Indian universities and improve academic facilities.

Passage-8

1. Our house is filled with photos. They cover the walls of my kitchen, dining room and den. I see our family’s entire history, starting with my wedding, continuing through the births of both sons, buying a home, family gatherings and vacations. When my sons were little, they loved to pose. They waved, danced, climbed trees, batted balls, hung upside down from the jungle gym and did anything for a picture. But when they reached adolescence, picture-taking changed into something they barely tolerated. Their bodies were growing at haphazard speeds. Reluctantly they stood with us or with their grandparents at birthday celebrations and smiled weakly at the camera for as short a time as possible.

2. I am the chronicler of our photographs. I select those to be framed and arrange the others in albums. The process is addictive, and as the shelves that hold our albums become fuller and fuller, I wonder what will become of them. Will anyone look at these photographs in future years? If my sons look at them, what will they think of us and of themselves? One bright afternoon, I took some photographs of my father with my husband as they fished on a lake near our vacation house. As my sons and I sat on the shore and watched them row away, I picked the camera up and photographed the beautiful lake surrounded by green trees. The two men I loved gradually grew smaller until all I could see were my father’s red shirt, and the tan and blue caps on their heads.

3. My father died a week later, and suddenly those photos became priceless to me. I wept when I pasted them in our album. I wept again afterwards when I saw my younger son looking at them. It was a few days before he went away to college. He had taken all our albums down from the bookshelves in the den and spread them out on the carpet. It had been a very long time since I had seen him doing this. Once he stopped posing for pictures, he seemed to lose interest in looking at them. But now he was on the verge of leaving home. This was his special time to look ahead and look back. I stood for a moment in the hall by the den, and then tiptoed away. I didn’t take a photo of my son that afternoon, but I will remember how he looked for as long as I live. Some pictures, I learned, don’t have to be taken with a camera.

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Questions:
(a) Give a word similar in meaning to ‘marriage’.
(b) Give a word oppositie in meaning to ‘adolescence’.
(c) I picked the camera up and photographed the beautiful horse. (Say True or False)
(d) Give noun form of ‘entire’.
(e) What does the narrator talk about here?
(f) What did the narrator learn at last?
Answers:
(a) wedding
(b) maturity
(c) False
(d) entirety
(e) The narrator talks about his habit of photography.
(f) At last the narrator learned that some pictures don’t have to be taken with a camera.

Passage-9

1. Why is it that there are very few women players in our orchestras? If one could reply flatly—sex discrimination: they don’t want women in orchestras—that would be a definite answer. But one can’t say that. As a matter of fact there are, if not many, a few women playing today in symphony orchestras. Nevertheless, it is true that male orchestral players are in an overwhelming majority. Why is that? I’m afraid, there is no one to answer. There are physical reasons why women don’t perform well on certain instruments. The average woman is not likely to possess sufficient lung power and sheer muscular strength to play the tuba just as an average woman’s hands are not likely to be large enough to finger a double bass satisfactorily. But what about the other instruments?

2. I think social and family pressures have been very strong in keeping women out of orchestras. Think of the prejudice that existed half a century ago against the so-called ‘nice’ girls going on stage. The stage was won out for the simple reason that it had to have women to play feminine roles in plays and operas, and was willing to offer a young woman more money than she could make in any other profession. Moreover, on stage, she was appearing as an individual, as a centre of attraction. This was gratifying to both her and her family. To this day, while the average parents are reconciled to seeing their daughter become an opera singer or concert artist, they don’t like the idea of seeing her submerging her personality to become the member of a chorus of the orchestra.

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Questions:
(a) The word similar in meaning to ‘a group of musicians’ is
(i) orchestra
(ii) chorus
(iii) stage

(b) As a matter of fact there are absolutely no women playing today in symphony. (Say True or False)

(c) The meaning of ‘majority’ is
(i) very few in number,
(ii) dozen,
(iii) maximum in number

(d) What is the prime reason for a few number of women in orchestras? ‘
(e) What is the genetic deficiency in women for singing?
(f) What are the reasons according to the narrator that keep women away from orchestras?
Answers:
(a) (i) orchestra
(b) False.
(c) (iii) maximum in number.
(d) Sex discrimination.
(e) The average woman is not likely to possess sufficient lung power and sheer musculer strength to play certain instrument like tuba at double bass.
(f) The narrator thinks social and family pressures have been responsible for keeping women awav from orchestras.

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 17 तीर्थ-यात्रा

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MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 17 तीर्थ-यात्रा

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 17 प्रश्न-अभ्यास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. (क) सही जोड़ी बनाइए
1. समाचार – (क) चहकना
2. मुख – (ख) तीर्थ स्थल
3. बुलबुल – (ग) मंडल
4. हरिद्वार – (घ) पत्र
उत्तर
1. (घ), 2. (ग), 3. (क), 4. (ख)

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प्रश्न (ख)
दिए गए शब्दों में से उपयुक्त शब्द चुन कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. लाजवंती का……हृदय कांप गया। (नारी/कोमल)
2. वैवजी बैठे एक पुराना……सामाचार पत्र पढ़ रहे थे। (मासिक/सप्ताहिक)
3. मंदिरों को देखकर हृदय……..की तरह खिल जाएगा। (कमल/कली)
4. जो सुख त्याग में है वह……..में कहाँ ? (ग्रहण/वरण)
उत्तर
1. नारी
2. साप्ताहिक
3. कमल
4. ग्रहण।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 17 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए

(क) मियादी बुखार किसे कहते हैं?
उत्तर
जो बुखार अपनी मियाद पूरी करके उतरता है, उसे मियादी बुखार कहते हैं।

(ख) ‘लुकमान’ शब्द का प्रयोग लेखक ने किसके लिए किया है?
उत्तर
‘लुकमान’ शब्द का प्रयोग लेखक ने वैद्य दुर्गादास के लिए किया है।

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(ग) लाजवंती तीर्थयात्रा के लिए कहाँ-कहाँ जा रही थी?
उत्तर
लाजवंती तीर्थयात्रा के लिए हरिद्वार, मथुरा और वृंदावन जा रही थी।

(घ) लाजवंती क्यों अधीर हो रही थी?
उत्तर
लाजवंती तीर्थयात्रा के लिए अधीर हो रही थी।

(ङ) रामलाल ने अपनी दौलत किसे कहा है?
उत्तर
रामलाम ने अपने पुत्र हेमराज को अपनी दौलत कहा है।

MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Chapter 17 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तीन से पाँच वाक्यों में दें

(क) लाजवंती के पैरों के नीचे से धरती खिसकती सी क्यों लगी?
उत्तर
लाजवंती हेमराज के सिर के दर्द की बात सुनकर पवरा गयी थी। उसे याद आया कि इसी मौसम । में उसका पहला पत्र मदन भी ऐसे ही बीमार होकर चल | बसा था। यही कारण था कि उसे पैरों के नीचे से धरती खिसकती सी लगी।

(ख) लाजवंती मंदिर क्यों गई?
उत्तर
लाजवंती का बेटा हेमराज बहुत बीमार था। उसके ठीक होने की आशा न थी। लाजवंती उसके अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करने देवी माँ के मंदिर गई।

(ग) ‘त्याग करने में ही सुख है’। इस पंक्ति का क्या आशय है?
उत्तर
इसका आशय यह है कि त्याग में किसी की सहायता करने या किसी को कुछ देने का आनंद छिपा होता है। यह खुशी किसी से कुछ लेने पर नहीं मिलती। वास्तव में त्याग मनुष्य को आत्मिक संतुष्टि प्रदान करता है।

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(घ) लेखक ने रुपये को हाथ का मैल क्यों कहा है?
उत्तर
रुपया कभी एक जगह नहीं टिकता । वह इधर से आता है उधर चला जाता है। इसलिए लेखक ने रुपए को हाथ का मैल कहा है।

(ङ) लाजवंती तीर्थ यात्रा पर क्यों नहीं जा सकी?
उत्तर
तीर्थयात्रा पर जाने से पूर्व लाजवंती को पता चला कि उसकी पड़ोसन हरो के पास बेटी के ब्याह के लिए पैसे नहीं हैं। उसने तीर्थयात्रा के लिए जमा पैसे हरो को दे दिए। यही कारण था कि वह तीर्थयात्रा पर नहीं जा सकी।

भाषा की बात

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
परीक्षा, सहानुभूति, दिव्य-शक्ति, परिश्रम
उत्तर
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए
सप्हीक, परिकमा, समुद, प्रसननता
उत्तर
साप्ताहिक, परिक्रमा, समुद्र, प्रसन्नता

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक-एक शब्द लिखिए
सप्ताह में एक दिन प्रकाशित विद्या अध्ययन करने वाला आयुर्वेद पद्धति से चिकित्सा करने वाला पड़ोस में रहने वाली
उत्तर
साप्ताहिक, विद्यार्थी, वैद्य, पड़ोसन

प्रश्न 7.
निम्नलिखित गयांश को पढ़कर रेखांकित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
वह दौड़ती हुई अपने घर के अंदर गई और संदूक में से दो सौ रुपए लाकर हरो के सामने ढेर कर दिए। यह रुपए जमा करते समय वह प्रसन्न हुई थी, पर उसे देते समय उससे भी अधिक प्रसन्नता हुई। जो सुख त्याग में है वह ग्रहण में कहाँ?
उत्तर
शब्द – विलोम
अपने – पराए
अन्दर – बाहर
प्रसन्न – उदास
अधिक – कम
सुख – दुख
त्याग – ग्रहण

प्रश्न 8.
निम्नलिखित वाक्यों को पढ़कर रेखांकित शब्दों से मूल शब्द और प्रत्यय अलग कर लिखिए
उस गाड़ीवान का बचपन बहुत ही अभाव से बीता। वह बहुत अच्छा कलाकार था। उसकी यह अच्छाई थी कि वह स्वभाव से बहुत नर्म था। उसने पढ़ाई, लिखाई नहीं की थी; किंतु वह बहुत अच्छे फूलदान बनाता था।
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 17 तीर्थ-यात्रा 1

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित गद्यांश में विराम चिन्ह लगे हैं, उन चिहनों को पहचान उनका नाम लिखिए
रामलाल ने तीर्थ यात्रा के खर्च का अनुमान किया, तो हदय बैठ गया। परंतु पुत्र-स्नेह ने इस चिंता को देर तक ठहरने न दिया-“अच्छा किया! रुपए का क्या है, हाथ का मैल है, आता है, चला जाता है। परमेश्वर ने एक लाल दिया है, वह जीता रहे। यही हमारी दौलत है।” लाजवंती ने स्वामी को सुला दिया और आप रात भर जागती रही। लाजवंती ने पुत्र हेम के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा-“क्या से क्या हो गया है?”
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 17 तीर्थ-यात्रा 2

प्रश्न 10.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए
आँसू, पैर, हाथ, धीरज, आग, मुँह, नाव, जेठ।
उत्तर
सत्सम-अश्रु, पाद, हस्त, धैर्य, अग्नि, मुख, नौका, ज्येष्ठ

प्रश्न 11.
निम्नलिखित शब्ज़े में प्रयुक्त उपसर्ग और मूलशब्द लिखिए
परिश्रम, अनुभव, अनुमान, अभिमान, सफल, प्रभाव, सुगंध, अपमान।
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Sugam Bharti Solutions Chapter 17 तीर्थ-यात्रा 3

तीर्थ-यात्रा प्रसंग सहित व्याख्या

1. लाजवंती मंदिर पहुँची और देवी के सामने गिर कर देर तक रोती रही। जब थककर उसने सिर उटाया तो उसका मुख-मंडल शांत था, जैसे तुफान शांत हो आता है। उसको ऐसा मालूम हुआ, जैसे कोई दिव्य-शक्ति उसके कान में कह रही है तूने आँसू बहा कर देवी के पाषाण हृदय को मोम कर दिया है। लाजवंती ने देवी की आरती उतारी, फूल चढ़ाए, मंदिर की परिक्रमा की और प्रेम के बोझ से काँपते हुए स्वर से मानता मानी-“देवी माता! मेरा हम बच जाए तो मैं तीर्थ यात्रा करूंगी।”

शब्दार्थ-पाषाण = पत्थर।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक सुगम भारती-6 में संकलित कथा ‘यात्रा’ से ली गई हैं। इसके लेखक ‘सुदर्शन’ हैं। इन पंक्तियों में पत्र की चिंता में व्याकुल एक माँ की मनोदशा का वर्णन है।

व्याख्या-लाजवंती अपने पुत्र का बुखार उतरता न देख कर घबरा जाती है और देवी माँ के मंदिर में सिर झुकाकर देर तक रोती है। हृदय का सारा बुखार निकल जाने पर उसका मन शांत होता है और उसे ऐसा लगता है जैसे देवी माँ उसके आँसुओं से पिघल गई हैं। वह देवी माँ की अर्चना करती है और हृदय से यह प्रार्थना करती है कि अगर उसका पुत्र ठीक हो गया, तो वह तीर्थयात्रा करेगी।

विशेष

  • ईश्वर में आस्था को दर्शाया गया है।
  • माँ का पुत्र के प्रति प्रेम भी प्रदर्शित हुआ है।

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2. मैं तुम्हें दूसरी सावित्री समझता हूँ उसने मरे हुए पति को जिलाया था तुमने पुत्र को मृत्यु के मुंह से निकाला है। तुम यदि दिन-रात एक न करती तो हेम का बचना असंभव था। यह सब तुम्हारी मेहनत का फल है। बच्चा बचा नहीं है, दूसरी वार पैदा हुआ है।

शब्दार्य-असंभव = जो संभव न हो। दिन रात एक करना = बहुत मेहनत करना। फल=परिणाम।

प्रसंग-पूर्ववत्

व्याख्या-वैद्य जी कहते हैं कि हेमराज लाजवंती की मेहनत के कारण ही बच गया है। वह उसकी तुलना सावित्री से करते हैं, जिसने अपने मृत पति को जिला लिया था। वे रहते हैं कि लाजवंती ने ही अपने पुत्र को नया जीवन दिया है।

विशेष

  • माँ की महिमा का पता चलता है।
  • स्त्री के दो महत्त्वपूर्ण रूपों की शक्ति पर प्रकाश डाला गया है।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व

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MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व

d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व NCERT पाठ्यनिहित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आद्य अवस्था में सिल्वर परमाणु में पूर्ण भरे d-कक्षक (4d10) होते हैं। इसे आप कैसे कह सकते हैं कि यह संक्रमण तत्व है?
उत्तर
सिल्वर +2 ऑक्सीकरण अवस्था रखता है। 4d-उपकक्ष में नौ इलेक्ट्रॉन होते हैं, जैसे 4dकक्षकों का एक कक्ष आंशिक भरा होता है। अतः इसे संक्रमण तत्व नहीं मान सकते।

प्रश्न 2.
श्रेणी Sc(Z = 21) से Zn(Z = 30) में, Zn की परमाणुकरण की एन्थैल्पी कम होती है, 126 kJmol-1 क्यों?
उत्तर
जिंक में 3d-इलेक्ट्रॉन धात्विक बन्ध में भाग नहीं लेते क्योंकि d10 विन्यास होता है। दुर्बल धात्विक बंध के कारण जिंक की परमाणुकरण की एन्थैल्पी निम्न होती है।

प्रश्न 3.
संक्रमण धातुओं की 3d श्रेणी में किसकी अधिकतम संख्या में ऑक्सीकरण अवस्था होती है एवं क्यों ?
उत्तर
Mn(Z = 25) अधिक संख्या में ऑक्सीकरण अवस्थायें रखते हैं, क्योंकि इसमें अधिकतम संख्या में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। अत: यह +2 से +7 तक ऑक्सीकरण अवस्थायें दर्शाता है।

प्रश्न 4.
E°(M2+/M) का मान कॉपर के लिए धनात्मक (+034V) है। इसका संभावित कारण क्या है ? (संकेत : इसकी उच्च ΔaH एवं निम्न ΔhydH मानने पर) –
उत्तर
किसी धातु की E° (M2+/M) पूर्ण परमाणुकरण की एन्थैल्पी, आयनन एन्थैल्पी एवं जलयोजन एन्थैल्पी पर निर्भर होती है। कॉपर की उच्च परमाणुकरण एन्थैल्पी एवं निम्न आयनन एन्थैल्पी होती है। अतः E° (Cu2+ /Cu) धनात्मक है।

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प्रशन 5.
संक्रमण तत्वों की प्रथम श्रेणी में (प्रथम एवं द्वितीय) आयनन एन्थैल्पियों में अनियमित क्रमिकता को किस प्रकार देखते हो? ।
उत्तर
आयनन एन्थैल्पी में अनियमित क्रम (प्रथम एवं द्वितीय) का कारण मुख्यतः विभिन्न 3dविन्यासों के भिन्न स्थायित्व की मात्रा के कारण होता है। d0, d5 एवं d10 विन्यास अतिरिक्त स्थायित्व रखता है एवं ऐसे प्रकरणों में आयनन एन्थैल्पी के मान सामान्यत: उच्च होते हैं। उदाहरण, Cr के प्रथम आयनन एन्थैल्पी के नाम निम्न होते हैं, क्योंकि 4s- कक्षक से इलेक्ट्रॉन को निकाला जा सकता है, किन्तु द्वितीय आयनन एन्थैल्पी अति उच्च होती है, अत: Cr+ में स्थायी d5 विन्यास होता है। Zn की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अति उच्च होती है, क्योंकि स्थायी विन्यास 3d10,4s2 से इलेक्ट्रॉन हटाया जाता है।

प्रश्न 6.
धातु अपने उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था में केवल ऑक्साइड अथवा फ्लोराइड में रहते हैं, क्यों?
उत्तर
क्योंकि ऑक्सीजन एवं फ्लुओरीन का आकार छोटा एवं ऋण-विद्युतता उच्च होती है, इस प्रकार ये सरलता से धातु को उसकी उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में ऑक्सीकृत करता है।

प्रश्न 7.
Cr2+ अथवा Fe2+ में से कौन-सा प्रबल अपचायक अभिकर्मक है एवं क्यों ?
उत्तर
Fe2+ से Cr2+ प्रबल अपचायक अभिकर्मक है। इसका कारण है कि Cr2+ का विन्यास d4 ‘से d3 एवं d3 विन्यास में परिवर्तित होता है, जो स्थायी t32(g)(138) अर्द्धपूर्ण t2) स्तर है।

प्रश्न 8.
M2+(aq) आयन (Z = 27) के लिए ‘चक्रण खेल’ चुम्बकीय आघूर्ण की गणना कीजिए।
उत्तर
M2+(aq) आयन (Z = 27) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है :
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 1
इस प्रकार तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। ‘चक्रण केवल’ चुम्बकीय आघूर्ण
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 2

प्रश्न 9.
Cu+ आयन जलीय विलयनों में क्यों स्थायी नहीं हैं, समझाइये?
उत्तर
Cu+(aq) जलीय विलयन में स्थायी नहीं है, क्योंकि इसकी Cu+(aq) की तुलना में निम्न ऋणात्मक जलयोजन एन्थैल्पी है।

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प्रश्न 10.
लैन्थेनॉइड संकुचन की तुलना में तत्वों से तत्वों में एक्टीनॉइड संकुचन अधिक है, क्यों ?
उत्तर
लैन्थेनॉयड के 4f इलेक्ट्रॉनों की तुलना में एक्टीनॉयड्स में 5f इलेक्ट्रॉनों का कमजोर परिरक्षण प्रभाव के कारण होता है।

d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व NCERT पाठ्य-पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए –
(i) Cr3+
(ii) Cu+
(i) CO2+
(iv) Mn2+
(v) Pm3+
(vi) Ce4+
(vii) Lu2+
(viii) Th4+
उत्तर
(i) Cr+3 : [Ar]3d3
(ii) Cu+1 : [Ar]3d10
(iii) CO+2 : [Ar]3d7
(iv) Mn+2 : [Ar]3d5
(v) Pm+3 : [Xe]4f4
(vi) Ce+4 : [Xe]54 .
(vii) Lu+2 : [Xe]4 f145d1
(vii) Th+4: [Rn].

प्रश्न 2.
+3 अवस्था में Mn+2 यौगिक Fe+2 से ऑक्सीकरण में अधिक स्थायी है, क्यों?
उत्तर
Mn+2 का स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar]4s0,3d5 होता हैं एवं यह सरलता से Mn+3 में परिवर्तित नहीं होता, Fe+2[Ar] 4s0,3d6 ऑक्सीकरण पर Fe+3[Ar] 4s0,3d5 बनाता है जो अधिक स्थायी विन्यास है।

प्रश्न 3.
परमाणु क्रमांक में वृद्धि से संक्रमण तत्वों के प्रथम श्रेणी के पहले आधे की +2 अवस्था अधिक एवं अधिक स्थायी होती हैं, विस्तृत विवेचना कीजिए।
उत्तर
स्कैण्डियम (जो +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है) को छोड़कर, प्रथम श्रेणी के सभी संक्रमण तत्व +2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं । यह 4s के दो इलेक्ट्रॉनों के त्यागने के कारण होता है। प्रथम चरण में, जब हम Ti+2 से Mn+2 की तरफ चलते हैं, तो इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d2 से 3d5 में परिवर्तित होता है, जिसका अर्थ है अधिक-से-अधिक d-कक्षकों का अर्द्धपूर्ण भरना है, जो +2 अवस्था को अधिक स्थायित्व प्रदान करते हैं।

प्रश्न 4.
संक्रमण तत्वों की प्रथम श्रेणी में ऑक्सीकरण अवस्थाओं के स्थायित्व का निर्धारण इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों से कितना किया जा सकता है ? अपने उत्तर को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर
संक्रमण श्रेणी में, ऑक्सीकरण अवस्थायें अर्द्धपूर्ण अथवा पूर्ण भरे हुए d-कक्षक अधिक स्थायी है। उदाहरण के लिए, Fe(Z = 26) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar]3d64s2 है। यह दर्शाता है कि विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं में Fe(III) अधिक स्थायी है, क्योंकि यह विन्यास [Ar]3d5 रखता है।

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प्रश्न 5.
संक्रमण तत्व के स्थायी ऑक्सीकरण अवस्था, आद्य अवस्था में इनके परमाणुओं के d इलेक्ट्रॉन विन्यासों : 3d3,3d5,3d8 एवं 3d4 में से क्या होगी? ।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 3
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 4
3d4 आद्य अवस्था में कोई d4 विन्यास नहीं होता।

प्रश्न 6.
प्रथम श्रेणी के संक्रमण धातुओं के ऑक्सो धातु ऋणायनों के नाम बताइये, जिसमें धातु की ऑक्सीकरण अवस्था समूह संख्या के बराबर होती है।
उत्तर
CrO2-7 एवं CrO2-4 (समूह संख्या = Cr की ऑक्सीकरण अवस्था = 6) MnO4 (समूह संख्या = Mn की ऑक्सीकरण अवस्था = 7)

प्रश्न 7.
लैन्थेनॉयड संकुचन क्या है ? लैन्थेनॉयड संकुचन के प्रभाव क्या होंगे?
उत्तर
लैन्थेनाइड संकुचन-लैन्थेनाइडों के परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ उनके परमाणुओं एवं आयनों के आकार में कमी होती है, इसे लैन्थेनाइड संकुचन कहते हैं।।
कारण-लैन्थेनाइडों में आने वाला नया इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कक्ष में न जाकर (n-2)f- उपकोश में प्रवेश करता है, फलतः इलेक्ट्रॉन और नाभिक के मध्य आकर्षण बल में वृद्धि होती है, जिससे परमाणु अथवा आयन संकुचित हो जाता है।

लैन्थेनाइड संकुचन का प्रभाव :
(i) लैन्थेनाइडों के गुणों में परिवर्तन-लैन्थेनाइड संकुचन के कारण इनके रासायनिक गुणों में बहुत कम परिवर्तन होता है। अतः इन्हें शुद्ध अवस्था में प्राप्त करना अत्यन्त कठिन होता है।
(ii) अन्य तत्वों के गुणों पर प्रभाव-लैन्थेनाइड संकुचन का लैन्थेनाइडों से पूर्व आने वाले तथा इनके बाद आने वाले तत्वों के आपेक्षिक गुणों पर बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, Ti और Zr के गुणों में भिन्नता होती है, जबकि Zr और Hf गुणों में काफी समानता रखते हैं।

प्रश्न 8.
संक्रमण तत्वों के अभिलक्षण क्या हैं एवं इन्हें संक्रमण तत्व क्यों कहते हैं ? कौन से dब्लॉक तत्वों को संक्रमण तत्व नहीं माना जा सकता?
उत्तर
संक्रमण तत्व वे तत्व हैं जिसके अणुओं में (स्थायी ऑक्सीकरण अवस्था में) आंशिक रूप से पूर्ण d-ऑर्बिटल विद्यमान होते हैं। इन तत्वों को d-ब्लॉक के तत्व भी कहते हैं, ये 5-ब्लॉक तथा p-ब्लॉक के तत्वों के गुणों में संक्रमण प्रदर्शित करते हैं। इसलिए इन्हें संक्रमण तत्व कहा जाता है। Zn, Cd एवं Hg जैसे तत्वों को संक्रमण तत्वों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता क्योंकि इनमें पूर्ण पूरित d-उपकक्षक पाये जाते हैं।

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प्रश्न 9.
नॉन-संक्रमण तत्वों से संक्रमण तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास किस प्रकार भिन्न हैं ?
उत्तर
संक्रमण तत्वों में d-कक्षकों को भरते हैं, जबकि प्रतिनिधि तत्वों में 5-एवं p-कक्षकों को भरते हैं। संक्रमण तत्वों के सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n-1)d1-10ns1-2 है, जबकि प्रतिनिधि तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns1-2 अथवा ns2np1-6 होता है। प्रतिनिधि तत्वों में केवल अंतिम कक्ष अपूर्ण होता है जबकि संक्रमण तत्वों में उपात्य कक्ष अपूर्ण होता है।

प्रश्न 10.
लैन्थेनॉयड्स कौन-सी विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थायें रखते हैं ?
उत्तर
लैन्थेनॉयड्स का मुख्य ऑक्सीकरण अवस्था + 3 है। इसके अतिरिक्त ये + 2 एवं + 4 ऑक्सीकरण अवस्थायें रखते हैं।

प्रश्न 11.
कारण सहित समझाइए-
(i) संक्रमण धातुओं एवं इनके अनेक यौगिक अनुचुम्बकीय व्यवहार दर्शाते हैं।
(ii) संक्रमण धातुओं के परमाण्वीयकरण की एन्थैल्पी उच्च होती है।
(iii) संक्रमण धातुएँ सामान्यतः रंगीन यौगिक बनाते हैं।
(iv) संक्रमण धातुएँ एवं इसके अनेक यौगिक अच्छे उत्प्रेरक होते हैं।
उत्तर
(i) जब किसी यौगिक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो यौगिक के भीतर का चुम्बकत्व बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से प्रभावित होता है। यदि भीतर का चुम्बकत्व बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र का साथ देता है तो उसे अनुचुम्बकीय गुण कहते हैं। यदि यौगिक में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हो तो अनुचुम्बकत्व प्रबल हो जाता है अर्थात् किसी यौगिक के अनुचुम्बकत्व की मात्रा उसमें उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर होती है। संक्रमण तत्वों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, अतः वे अनुचुम्बकीय होते हैं। .

(ii) संक्रमण धातुओं में उच्च प्रभावी न्यूक्लियर आवेश तथा संयोजी इलेक्ट्रॉनों की अधिक संख्या होती है इसलिए ये बहुत मजबूत धात्विक बंध बनाते हैं। परिणामस्वरूप संक्रमण धातुओं के परमाण्विकरण की एन्थैल्पी उच्च होती है।

(iii) संक्रमण धातु आयनों का रंग अपूर्ण रूप से भरे हुए (n-1)d कक्षकों के कारण होता है। संक्रमण धातु आयनों में जिनमें अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉन हैं, इस इलेक्ट्रॉन का एक d-कक्षक से दूसरे d-कक्षक में संक्रमण होता है। इस संक्रमण के समय वे दृश्य प्रकाश के कुछ विकिरणों का अवशोषण करते हैं तथा शेष विकिरणों को रंगीन प्रकाश के रूप में उत्सर्जित कर देते हैं। अत: आयन का रंग उसके द्वारा अवशोषित रंग का पूरक (Complementary) होता है। उदाहरणार्थ, [Cu(H2O)6]+2 आयन नीला दिखता है, क्योंकि यह दृश्य प्रकाश के लाल रंग को इलेक्ट्रॉन के उत्तेजना के लिए अवशोषित करता है तथा उसके पूरक (नीले) रंग को उत्सर्जित कर देता है।

कुछ आयनों के रंग –
Cr4+ नीला : Cr3+ बैंगनी
Mn2+ बैंगनी : Mn3+ गुलाबी
Fe2+ हरा : Fe3+ पीला

(iv) संक्रमण तत्व परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि (n-1)d-कक्षक तथा ns-कक्षक के इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा में बहुत अधिक अन्तर नहीं होता है, जिससे d-कक्षक के इलेक्ट्रॉन भी संयोजी इलेक्ट्रॉन का कार्य करते हैं। इन तत्वों में Mn अधिकतम परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 12.
अन्तराकाशी यौगिक क्या है ? संक्रमण धातुओं के ऐसे यौगिक क्यों ज्ञात हैं ?
उत्तर
अधिकांश संक्रमण तत्व उच्च ताप पर अधात्विक तत्वों के परमाणुओं जैसे-H, B,C, Ni, Si आदि के साथ अन्तराकाशी यौगिक बनाते हैं। संक्रमण धातु के क्रिस्टल जालक के अन्तराकाशी रिक्तियों में ये अधात्विक तत्वों के छोटे परमाणु ठीक-ठीक फिट हो जाते हैं। ये अन्तराकाशी यौगिक कहलाते हैं।

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प्रश्न 13.
नॉन-संक्रमण धातुओं से संक्रमण धातुओं की परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थायें भिन्न कैसे होती हैं ? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
संक्रमण तत्वों में उत्तरोत्तर ऑक्सीकरण अवस्थाओं में इकाई का अन्तर आता है। उदाहरण के लिए, Mn सभी ऑक्सीकरण अवस्थायें +2 से +7 दर्शाता है। जबकि नॉन-संक्रमण धातुएँ परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ रखती हैं, जिनमें दो इकाई का अन्तर होता है, उदाहरण के लिए Pb(II), Pb(IV), Sn(II), Sn(IV).

प्रश्न 14.
आयरन क्रोमाइट अयस्क से पोटैशियम डाइक्रोमेट के बनाने की विधि का वर्णन कीजिए। पोटैशियम डाइक्रोमेट विलयन की pH बढ़ाने पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर
बनाने की विधि-

बनाने की विधि-K2Cr2O7 को क्रोमाइट अयस्क (Fe2Cr2O4) या क्रोम आयरन (FeO.Cr203) से बनाया जाता है, जो निम्नलिखित पदों में होते हैं।

(1) क्रोमाइट अयस्क का सोडियम क्रोमेट में परिवर्तन-क्रोमाइट अयस्क को NaOH या Na2CO3 के साथ वायु की उपस्थिति में एक परावर्तनी भट्टी में गर्म करने पर सोडियम क्रोमेट (पीला रंग) बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 5

पदार्थ को छिद्रमय रखने हेतु कुछ मात्रा में शुष्क चूने को मिलाते हैं । जल के साथ निष्कर्षण करने पर Na2Cr2O3 विलयन में चला जाता है। जबकि Fe2O3 रह जाता है जिसे छानकर पृथक् कर लेते हैं।

(2) सोडियम क्रोमेट (Na2CrO4) का सोडियम डाइक्रोमेट (Na2Cr2O7) में परिवर्तन-सोडियम क्रोमेट विलयन सान्द्र H2SO4 के साथ अपचयित करके सोडियम डाइक्रोमेट बनाते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 6
2Na2CrO4 कम विलेय होता है जिसका वाष्पन करने पर Na2SO410H2O के रूप में क्रिस्टलीकृत हो जाता है जिसे पृथक् कर लिया जाता है।

(3) Na2Cr2O7 का K2Cr2O7 में परिवर्तन-सोडियम डाइक्रोमेट के जलीय विलयन का उपचार KCI के साथ किये जाने पर पोटैशियम डाइ क्रोमेट प्राप्त होता है। K2Cr2O7 के अल्प विलेय प्रकृति के कारण इसके क्रिस्टल ठण्डे में प्राप्त किये जाते हैं।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 7

K2Cr2O7 की निम्न के साथ होने वाली रासायनिक अभिक्रिया –

(1) अम्लीय फेरस सल्फेट के साथ-K2Cr207 अम्लीय माध्यम में यह फेरस सल्फेट को फेरिक सल्फेट में ऑक्सीकृत कर देता है। K2Cr2O7 पहले H2SO4 से क्रिया करके नवजात ऑक्सीजन का तीन परमाणु देता है जो Fe2+ को Fe3+ आयन में ऑक्सीकृत कर देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 8

pH बढ़ाने पर प्रभाव-पोटैशियम क्लोराइड सोडियम क्लोराइड से कम विलेयशील होता है। ये ऑरेंज क्रिस्टल के रूप में प्राप्त होते है तथा इन्हें फिल्ट्रेशन से हटाया जा सकता है। pH 4 पर डाइक्रोमेट आयन (CrO72-) क्रोमेट आयन CrO4 2-के रूप में उपस्थित होते हैं । ये pH के मान में परिवर्तन के अनुसार एक-दूसरे में परिवर्तनशील होते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 9

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प्रश्न 15.
पोटैशियम डाइक्रोमेट की ऑक्सीकरण क्रियायें समझाइये एवं इनकी निम्न के साथ आयनिक अभिक्रियायें लिखिए
(i) आयोडाइड, (ii) आयरन (II) विलयन एवं (ii) H2S.
उत्तर
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 2 (K2Cr2O7 की निम्न के साथ होने वाली रासायनिक अभिक्रिया) देखें।

प्रश्न 16.
पोटैशियम परमैंगनेट के बनाने की विधि का वर्णन कीजिए।अम्लीकृत परमैंगनेट विलयन निम्न से कैसे क्रिया करता है
(i) आयरन (II) आयनों से, (ii) SO2 एवं (ii) ऑक्सेलिक अम्ल ? अभिक्रियाओं की आयनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर
KMnO4, पायरोलुसाइट से बनाया जा सकता है, अयस्क को KOH के साथ वायुमण्डलीय ऑक्सीजन या ऑक्सीकृत एजेन्ट जैसे- KNO3 या KClO4 की उपस्थिति में क्रिया कराकर K2MnO4 प्राप्त किया जाता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 10
प्राप्त 2K2MnO4 (ग्रीन) को जल द्वारा छाना जा सकता है। फिर विद्युत्-अपघटन या क्लोरीन/ओजोन को विलयन मे प्रवाहित कर ऑक्सीकृत किया जाता है।

विद्युत्-अपघटनी ऑक्सीकरण –
2K2MnO4 ⇌ 2K+ + MnO42-
H2O → H+ + OH
एनोड में मैंग्नेट आयन, पर मैंग्नेट आयन में ऑक्सीकृत होता है।
MnO42- → MnO4 + e

क्लोरीन द्वारा ऑक्सीकरण –
2K2MnO4 + Cl2 → 2KMnO4 + 2KCl
2MnO42- + Cl2 → 2MnO4 + 2Cl

ओजोन द्वारा ऑक्सीकरण –
2K2MnO4 + O3 + H4O → 2KMnO4 + 2KOH + O2
2MnO42- + O3 +H2O → 2MnO42- + 2OH + O2
अम्लीकृत KMnO4 विलयन Fe(II) आयन को Fe(III) आयन में ऑक्सीकृत करना है अर्थात् फेरस आयन से फेरिक आयन
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 11

अम्लीकृत पोटैशियम परमैंग्नेट SO2 को H2SO4 में ऑक्सीकृत करता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 12

अम्लीकृत पोटैशियम परमैंग्नेट ऑक्सेलिक अम्ल को कार्बन डाइ-ऑक्साइड में ऑक्सीकृत करता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 13

प्रश्न 17.
M22+M एवं M3+/M2+ तंत्रों के लिए कुछ धातुओं के E° मान निम्न है –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 14
उपर्युक्त आँकड़ों का उपयोग कर निम्न पर टिप्पणी कीजिए –
(i) Cr3+ अथवा Mn3+ की तुलना में Fe3+ का अम्लीय विलयन में स्थायित्व एवं
(ii) वो कौन-सी स्थितियाँ हैं, जहाँ आयरन, समान विधियों में क्रोमियम अथवा मैंगनीज धातु की तुलना में ऑक्सीकृत होता है।
उत्तर
(i) जैसे- \(\mathrm{E}_{\mathrm{Cr}}^{\circ} / \mathrm{Cr}^{+2}\) ऋणात्मक (-04V) है, जिसका अर्थ है cr+3 आयन विलयन में सरलता से Cr+2 में अपचयित नहीं होता, अत: Cr+3 आयन अधिक स्थायी है। इसी प्रकार \(\mathrm{E}^{\circ}_{\mathrm{Mn}^{+} 3} / \mathrm{Mn}^{+2}\) धनात्मक (+1:5V) है, Mn+3 आयन सरलता से Mn+2 आयन में Fe+3 आयन की तुलना में अपचयित होता है अत: इन आयनों की आपेक्षिक स्थायित्व निम्न है –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 15

(ii) दिए गए जोड़ों का ऑक्सीकरण विभव +09V, +1-2V एवं 0-4V है। अत: इनके ऑक्सीकरण का क्रम निम्न है –

Mn>Cr>Fe

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प्रश्न 18.
पहचानिए, निम्न में कौन जलीय विलयन में रंग देते हैं? Ti3+,V3+, Cu+,Sc3+,Mn2+, Fe3+ एवं CO2+ प्रत्येक का कारण दीजिए।
उत्तर
ऐसे आयन जिनमें एक या अधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, जलीय विलयन में d – d संक्रमण के कारण रंगीन होते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 16

प्रश्न 19.
प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों की +2 ऑक्सीकरण अवस्था को स्थायित्व की तुलना कीजिए।
उत्तर
Mn एवं Zn को छोड़कर + 2 अवस्था का स्थायित्व बायें से दायें चलने पर घटता है। मानव अपचयन विभव के ऋणात्मक मान के घटने के कारण दाँयी तरफ स्थायित्व घटता है। कुल ∆1H1 + ∆1H2 (प्रथम एवं द्वितीय आयनन एन्थैल्पी में वृद्धि के कारण E° के ऋणात्मक मान कम होते हैं।)

प्रश्न 20.
निम्न को ध्यान में रखकर एक्टीनॉयड्स के रसायन की तुलना लैन्थेनॉयड्स के साथ कीजिए
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(ii) परमाणु एवं आयनिक आकार एवं
(iii) ऑक्सीकरण अवस्था
(iv) रासायनिक क्रियाशीलता।
उत्तर
लैंथेनाइडों एवं एक्टिनाइडों के मध्य भिन्नताएँ
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 17

प्रश्न 21.
निम्न से क्या समझते हो –
(i) d4 श्रेणी में, Cr2+ प्रबल अपचायक है जबकि मैंगनीज (III) प्रबल ऑक्सीकारक है।
(ii) कोबाल्ट (II) जलीय विलयन में स्थायी है, जबकि जटिल अभिकर्मकों की उपस्थिति में यह आसानी से ऑक्सीकृत हो जाता है।
(iii) आयनों में d विन्यास अत्यधिक अस्थायी है।
उत्तर
(i) Cr2+ अपचायक प्रकृति का है, इसका विन्यास d4 से d3 (अर्द्धपूर्ण t.कक्षकों का स्थायी विन्यास) परिवर्तन होता है। अन्य शब्दों में Mn3+ ऑक्सीकारक प्रकृति का है, जिसका विन्यास d4 से d5 (अर्द्धपूर्ण t2g से 2g कक्षकों के स्थायी विन्यास) में परिवर्तन होता है।
(ii) प्रबल लिगेण्ड कोबाल्ट (II) को बल द्वारा 3d- उपकक्ष से एक अथवा अधिक इलेक्ट्रॉन को हटाता है, जिससे d2sp3 संकरण होता है।
(iii) d1-विन्यास वाला आयन प्रयास करता है कि d-उपकक्ष से एक इलेक्ट्रॉन निकालकर स्थायी अकिय गैस विन्यास प्राप्त कर लेवें।।

प्रश्न 22.
विषमसमानुपाती से क्या तात्पर्य है ? जलीय विलयन में विषमसमानुपाती अभिक्रिया के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर
विषमसमानुपाती अभिक्रियायें वे होती हैं, जिनमें समान पदार्थ ऑक्सीकृत एवं अपचयित होता है। उदाहरण के लिए –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 18

प्रश्न 23.
संक्रमण धातुओं की प्रथम श्रेणी की कौन-सी धातु सामान्य +1 ऑक्सीकरण अवस्था रखते हैं एवं क्यों ?
उत्तर
कॉपर का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar]3d104s1 है। जो एक इलेक्ट्रॉन (4s1) सरलता से त्याग कर स्थायी विन्यास 3d10 देता है।

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प्रश्न 24.
निम्न गैसीय आयनों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की गणना कीजिए- Mn3+, Cr3+,v3+ एवं Ti3+ इनमें से कोई एक जलीय विलयन में अधिक स्थायी है ?
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 19
Cr2+ अत्यधिक स्थायी है, इसमें अर्द्धपूर्ण t2gस्तर होते हैं।

प्रश्न 25.
संक्रमण धातु रसायन के निम्न के उदाहरण एवं कारणों को दीजिए –
(i) संक्रमण धातु के निम्न ऑक्साइड क्षारीय हैं, उच्च उभयधर्मी/अम्लीय हैं।
(ii) संक्रमण धातु ऑक्साइडों एवं फ्लुओराइडों में उच्च ऑक्सीकरण अवस्था रखते हैं।
(iii) धातु ऑक्सो ऋणायनों में उच्च ऑक्सीकरण अवस्था होती है।
उत्तर
(i) संक्रमण तत्व के निम्न ऑक्साइड क्षारीय होते हैं, क्योंकि धातु परमाणुओं की निम्न
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 20

धातु की निम्न ऑक्सीकरण अवस्था में, धातु परमाणु के कुछ संयोजी इलेक्ट्रॉन बन्धन में भाग नहीं लेते। अत: ये इलेक्ट्रॉन को दानकर क्षार की भाँति व्यवहार करते हैं। उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में, संयोजी इलेक्ट्रॉन बन्धन में भाग लेते हैं एवं जो उपलब्ध नहीं होते। इसके अतिरिक्त प्रभावी नाभिकीय आवेश अधिक होने पर यह इलेक्ट्रॉन स्वीकार करता है एवं अम्ल की भाँति व्यवहार दर्शाते हैं।

(ii) संक्रमण धातु ऑक्साइडों एवं फ्लुओराइडों में उच्च ऑक्सीकरण अवस्थायें रखते हैं, क्योंकि ऑक्सीजन एवं फ्लुओरीन का आकार छोटा एवं उच्च ऋणविद्युतता है एवं ये धातुओं को सरलता से ऑक्सीकृत करते हैं। उदाहरण के लिए- O5F6 [O5(VI)],V2O5 [v(v)] .

(iii) धातुओं के ऑक्सो ऋणायन उच्च ऑक्सीकरण अवस्थायें रखते हैं। उदाहरण के लिए, Cr2O72- में Cr की ऑक्सी-करण अवस्था + 6 है, जबकि MnO4 में Mn की ऑक्सी-करण अवस्था +7 है। क्योंकि ऑक्सीजन की उच्च ऋणविद्युतता एवं उच्च ऑक्सीकारक गुण है।

प्रश्न 26.
बनाने के पदों को दर्शाइये –
(i) क्रोमाइट अयस्क से K2Cr2O7
(ii) पायरोलुसाइट अयस्क से KMnO4.
उत्तर
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न क्र. 2 एवं 4 देखें।

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प्रश्न 27.
मिश्रधातुएँ क्या हैं ? प्रमुख मिश्रधातु के नाम लिखते हुए उसके उपयोग लिखिए, जिनमें कुछ लैन्थेनॉयड्स धातुएँ होती हैं।
उत्तर
दो अथवा अधिक धातुओं अथवा धातुओं एवं अधातुओं के समांगी मिश्रण मिश्रधातु है । प्रमुख मिश्रधातु जिसमें लैन्थेनॉयड होता है, मिश्रधातु है, जिसमें 95% लैन्थेनॉयड धातुएँ एवं 5% आयरन के साथ थोड़ी मात्रा में S, C, Ca एवं Al होते हैं । इसका उपयोग Mg-आधारित मिश्रधातु में करते हैं। जो गोली के आवरण एवं लाइटर में उपयोग होती है।

प्रश्न 28.
अन्तर संक्रमण तत्व क्या हैं ? दिए गए निम्न परमाणु संख्याओं में से अन्तर संक्रमण तत्वों की परमाणु संख्याओं का निर्धारण कीजिए- 29,59, 74, 95, 102, 104.
उत्तर
f-ब्लॉक तत्वों में, अन्तिम इलेक्ट्रॉन अन्तर उपात्यकक्ष – उपकक्ष में प्रवेश करते हैं, अतः इन्हें अन्तर संक्रमण तत्व कहते हैं। इनमें लैन्थेनॉयड्स (58-71) एवं एक्टीनॉयड्स (90-103) होते हैं । अतः परमाणु क्रमांक 59, 95 एवं 102 वाले तत्व अन्तर संक्रमण तत्व हैं।

प्रश्न 29.
लैन्थेनॉयड्स की तुलना में एक्टीनॉयड्स तत्वों का रसायन अधिक सरल नहीं है। इस वाक्य को इन तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्था के कुछ उदाहरणों द्वारा न्यायोचित सिद्ध कीजिए।
उतर
लैन्थेनॉयड्स निश्चित संख्या में ऑक्सीकरण अवस्थायें दर्शाते हैं, जैसे +2, +3 एवं +4 (+3 मुख्य ऑक्सीकरण अवस्था है)। क्योंकि 5d एवं 4f उपकक्षों के मध्य अधिक ऊर्जा अन्तर होता है। एक्टीनॉयड्स भी प्रमुख ऑक्सीकरण अवस्था +3 दर्शाते हैं, किन्तु अन्य ऑक्सीकरण अवस्था भी दर्शाते हैं । उदाहरण के लिए, यूरेनियम (Z= 92) +3, +4, +5, +6 ऑक्सीकरण अवस्थायें रखता है, एवं नेप्चूनियम (Z= 94) +3, +4, +5, +6 एवं +7 ऑक्सीकरण अवस्थायें दर्शाता है। क्योंकि 4f एवं 6d कक्षकों के मध्य ऊर्जा अन्तर कम होता है।

प्रश्न 30.
एक्टीनॉयड्स श्रेणी का अंतिम तत्व कौन-सा है ? इस तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इस तत्व की संभावित ऑक्सीकरण अवस्था पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर
एक्टीनॉयड श्रेणी का अंतिम तत्व= लॉरेन्सियम (Z = 103)
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Rn]5f146d17s2
संभावित ऑक्सीकरण अवस्था = +3

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प्रश्न 31.
हुण्ड नियम का उपयोग करते हुए Ce* आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए एवं ‘चक्रण केवल’ सूत्र के आधार पर इसके चुम्बकीय आघूर्ण की गणना कीजिए।
उत्तर
सीरियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Xe] 4f15d16s2
Ce3+ 344 = [Xe]4f1
जिसका अर्थ है कि एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 21

प्रश्न 32.
लैन्थेनॉयड श्रेणी के उन सदस्यों के नाम दीजिए, जो +4 ऑक्सीकरण अवस्था में एवं +2 ऑक्सीकरण अवस्थायें रखते हैं। इस प्रकार के व्यवहार को इन तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों से संबंध स्थापित कीजिए।
उत्तर
+4= 58Ce, 59Pr, 60Nd, 65Tb, 66Dy
+2 = 60Nd, 62Sm, 63Eu, 69Tm, 70Yb
+4 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है, जब विन्यास बाँयी तरफ के समीप 4f° (अर्थात् 4f04f14f2) अथवा 4f7 के समीप (अर्थात् 4f7 अथवा 4f8) होता है।
+2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है, जब विन्यास 5d0 6s2 है तथा दो इलेक्ट्रॉन सरलता से त्याग देता है।

प्रश्न 33.
निम्न के सापेक्ष एक्टीनॉयड्स एवं लैन्थेनॉयड्स के रसायन की तुलना कीजिए –
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(ii) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
(iii) आयनन एन्थैल्पी एवं
(iv) परमाण्विक आकार।
उत्तर
लैंथेनाइडों एवं एक्टिनाइडों के मध्य भिन्नताएँ
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 22

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प्रश्न 34.
परमाणु क्रमांक 61,91, 101 एवं 109 वाले तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
(i) z = 61: [Xe]4f5f506s2
(ii) Z = 91: [Rn]5f26d17s2
(iii) Z = 101: [Rn]5f136d07s2
(iv) Z = 109: [Rn]5f146d7s2

प्रश्न 35.
ऊर्ध्वाधर कॉलम के सापेक्ष प्रथम संक्रमण धातुओं की श्रेणी के सामान्य गुणों की तुलना द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के धातुओं से कीजिए। निम्न बिन्दुओं को विशिष्टता प्रदान कीजिए –
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास,
(ii) ऑक्सीकरण अवस्थायें
(iii) आयनन एन्थैल्पी एवं
(iv) परमाण्विक आकार।
उत्तर
प्रथम संक्रमण धातुओं की श्रेणी के सामान्य गुणों की तुलना –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 23

प्रश्न 36.
निम्न आयनों में प्रत्येक के 3d इलेक्ट्रॉनों की संख्या लिखिए –
Ti2+,v2+, Cr3+,Mn2+, Fe2+, Fe3+,Co2+,Ni2+ एवं Cu2+ दर्शाइये कि पाँच 31 कक्षकों को इन हाइड्रेट आयनों (अष्टफलकीय) द्वारा भरा जा सकता है।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 24

प्रश्न 37.
इस वाक्य पर टिप्पणी कीजिए कि प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों में अनेक गुण भारी संक्रमण तत्वों से भिन्न होते हैं।
उत्तर
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 25

प्रश्न 38.
निम्न संकुल स्पीशीज के चुम्बकीय आघूर्ण के मानों से क्या दर्शाया जाता है ?
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 26
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 27
उत्तर
K4[Mn(CN)6]
Mn+2 . 3d5 , चुम्बकीय आघूर्ण 2.2 दर्शाता है कि इसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है एवं अन्तर कक्षक संकुल अथवा निम्न चक्रण संकुल बनाता है। इसका विन्यास है –
t22g[Fe(H2 O)6 ]2+

Fe+2: 3d6 चुम्बकीय आघूर्ण का मान 4 अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के समीप है, अत: यह बाह्य कक्षक संकुल अथवा उच्च चक्रण संकुल बनाता है। इसका विन्यास है  – t42g e2g K2[MnCl4]

Mn+2 : 3d5 चुम्बकीय आघूर्ण का मान 5 अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के सापेक्ष है। d-कक्षक प्रभावित नहीं होते। अतः यह चतुष्फलकीय संकुल बनाता है। इसका विन्यास है – t32g e2g

d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनकर लिखिए-

प्रश्न 1.
मैंगनीज किसमें उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है
(a) K2MnO4
(b) KMnO4
(c) MnO2
(d) MngO4
उत्तर
(b) KMnO4
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प्रश्न 2.
कौन अन्तराली यौगिक बनाता है
(a) Fe
(b) Ca
(c) Ni
(d) सभी।
उत्तर
(b) Ca

प्रश्न 3.
जब KMnO4 को उदासीन माध्यम में प्रयुक्त करते हैं, तब उनका तुल्यांक भार होगा –
(a) M
(b) M/2
(c) M/3
(d) M/5.
उत्तर
(c) M/3

प्रश्न 4.
कौन-सी लैन्थेनाइड सर्वाधिक प्रयुक्त की जाती है –
(a) लैन्थेनम
(b) नोबेलियम
(c) थोरियम
(d) सीरियम।
उत्तर
(d) सीरियम।

प्रश्न 5.
गैडोलिनियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है –
(a) [Xc]4f65d9,6s2
(b) [Xe]4f7,5d1,6s2
(C) [Xe] f3,5d5,6s2
(d) [Xe]4f6,5d2,6s2.
उत्तर
(b) [Xe]4f7,5d1,6s2

प्रश्न 6.
लैन्थेनाइड संकुचन निम्न कारक के लिए उत्तरदायी होता है –
(a) Zr एवं Y की त्रिज्या लगभग समान होती है
(b) Zr एवं Nb की ऑक्सीकरण अवस्था समान होती है
(c) Zr एवं Hf की त्रिज्या लगभग समान होती है
(d)zr एवं Zn की ऑक्सीकरण अवस्था समान होती है।
उत्तर
(c) Zr एवं Hf की त्रिज्या लगभग समान होती है

प्रश्न 7.
3d श्रेणी में उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था किसके द्वारा प्रदर्शित की जाती है –
(a) Mn
(b) Fe2+
(c) Ni
(d) Cr
उत्तर
(a) Mn

प्रश्न 8.
कौन-सा संक्रमण धातु आयन रंगीन है –
(a) Cu+
(b) v2+
(c) Sc+3
(d) Ti+4
उत्तर
(b) v2+

प्रश्न 9.
एक संक्रमण धातु जो +3 ऑक्सीकरण अवस्था में हरा किन्तु +6 ऑक्सीकरण अवस्था में नारंगी होता है –
(a) Mn.
(b) Cr
(c) Os
(d) Fe.
उत्तर
(b) Cr

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प्रश्न 10.
लैन्थेनाइड श्रेणी में, लैन्थेनाइड हाइड्रॉक्साइडों की क्षारकता –
(a) बढ़ती है
(b) घटती है
(c) पहले बढ़ती है फिर घटती है
(d) पहले घटती है और फिर बढ़ती है।
उत्तर
(b) घटती है

प्रश्न 11.
Fe, Co, Ni किस प्रकार के चुम्बकीय पदार्थ हैं –
(a) अनुचुम्बकीय
(b) लौह चुम्बकीय
(c) प्रति चुम्बकीय
(d) प्रति लौह चुम्बकीय।
उत्तर
(b) लौह चुम्बकीय

प्रश्न 12.
Fe+2 आयन के अयुग्मित इलेक्ट्रॉन की संख्या है –
(a) 0
(b) 4
(c) 6
(d) 3.
उत्तर
(b) 4

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2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए – 

  1. Fe, Co, Ni धातुओं को …………. कहते हैं।
  2. परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ त्रिसंयोजी धनायनों का आकार क्रमशः….,.. जाता है।
  3. निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करने वाले संक्रमण धातु …….. प्रकृति के होते हैं।
  4. K2Cr207 एक प्रबल ……….. है जो केवल अम्लीय माध्यम में नवजात ऑक्सीजन का ……… परमाणु मुक्त करता है।
  5. Zn केवल …………. ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
  6. f-ब्लॉक तत्व …………. तत्व कहलाते हैं।
  7. संक्रमण तत्व और उनके यौगिक ……….. का कार्य करते हैं।
  8. अंतः संक्रमण तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास …………..
  9. पोटैशियम मैंगनेट का रासायनिक सूत्र ……….. है।
  10. d-ब्लॉक तत्वों को …………. भी कहा जाता है।

उत्तर

  1. फेरस धातुएँ
  2.  घटता
  3. क्षारीय
  4. ऑक्सीकारक, तीन
  5. +2
  6. आन्तर संक्रमण
  7. उत्प्रेरक
  8. (n-2)f1-14, (n-1)d1-2,ns2
  9. K2MnO4,
  10. संक्रमण तत्व।

3. सत्य/असत्य बताइए –

  1. पारा द्रव अवस्था में होता है तथा इसकी ऑक्सीकरण अवस्था +1 व + 2 होती है।
  2. संक्रमण धातुओं की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था अम्लीय प्रकृति की होती है।
  3. लैन्थेनाइड और एक्टीनाइड दोनों संक्रमण तत्व कहलाते हैं।
  4. सभी संक्रमण तत्वों में +2 ऑक्सीकरण अवस्था सामान्यत: अधिक पायी जाती है अथवा सामान्य होती है।
  5. Zn, Cd एवं Hg परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करती है।
  6. Cu+2 आयन रंगहीन और प्रतिचुम्बकीय होता है।
  7. प्लूटोनियम का उपयोग परमाणु बम बनाने में तथा परमाणु रियेक्टर में ईंधन के रूप में किया जाता है।
  8. संक्रमण तत्व अन्तराली यौगिक बनाते हैं।

उत्तर

  1. सत्य,
  2. सत्य,
  3. असत्य,
  4. सत्य,
  5. असत्य,
  6. असत्य,
  7. सत्य,
  8. सत्य।

4. उचित संबंध जोडिए –
I.
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 28
उत्तर
1. (1), 2. (g), 3. (e), 4. (c), 5. (b), 6, (d), 7. (a).

5. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए – 

  1. Cu+ तथा Cu2+ में कौन-सा आयन रंगहीन है ?
  2. एक अभिक्रिया में KMnO4 को K2MnO4 में परिवर्तित किया जाता है तो Mn की ऑक्सी
    करण संख्या में कितना परिवर्तन होगा?
  3. लैन्थेनाइड और एक्टीनाइड में कौन-सी श्रेणी उच्च ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है ?
  4. लैन्थेनम की कौन-सी ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी होती है ?
  5. K3Cr3O7 का अम्लीय विलयन में तुल्यांकी भार कितना होता है ?
  6. Fe+3 में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या होती है।
  7. क्रोमिलं क्लोराइड परीक्षण में प्रयुक्त ऑक्सीकरण का नाम लिखिए।
  8. d- ब्लॉक के तत्वों में Zn परिवर्तित संयोजकता प्रदर्शित नहीं करता, क्योंकि।
  9. Cu की सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऑक्सीकरण अवस्था है।
  10. f- ब्लॉक के तत्वों को कितने श्रेणी में बाँटा गया है ?
  11. लूनर कॉस्टिक किसे कहते हैं ?
  12. d-ब्लॉक के तत्वों में Zn परिवर्ती ऑक्सीकरण संख्या नहीं दर्शाता है, क्यों ?
  13. HgCl2 तथा KI का क्षारीय विलयन क्या कहलाता है ?

उत्तर-

  1. Cu+
  2. 1,
  3. एक्टीनाइड,
  4. +3,
  5. 49,
  6. 5,
  7. K2Cr2O7,
  8. पूर्ण-पूरित d-कक्षक,
  9. +2,
  10. दो,
  11. AgNO3,
  12. d-कक्षक के पूर्ण भरे होने की वजह से,
  13. नेसलर अभिकर्मक।

d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सिल्वर परमाणु की मूल अवस्था में पूर्ण-पूरित d-कक्षक है।आप कैसे कह सकते हैं कि यह एक संक्रमण तत्व है ?
उत्तर
सिल्वर +1 ऑक्सीकरण अवस्था में 4d10 5s0 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास दर्शाता है। परन्तु कुछ यौगिकों में यह +2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है। इस अवस्था में यह 4d95s0 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास दर्शाता है। अतः 4d- से कक्षक के अपूर्ण होने के कारण इसे संक्रमण तत्व माना गया है।

प्रश्न 2.
संक्रमण तत्व किसे कहते हैं ? इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। ये धात्विक गुण प्रदर्शित करते हैं, क्यों?
उत्तर
वे तत्व, जिनके परमाणु अथवा साधारण आयनों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में भीतरी d-कक्षक अपूर्ण रूप से भरे होते हैं, संक्रमण तत्व कहलाते हैं । ये समूह 2 और 13 के मध्य स्थित होते हैं।
उदाहरण-Fe, Ni, Co आदि। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास-(n-1)1-10,ns1-2 है।
किसी तत्व द्वारा अपने परमाणु में से एक अथवा अधिक इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाने की क्षमता पर उसका धात्विक गुण निर्भर करता है, सभी संक्रमण तत्व धातुएँ हैं, क्योंकि इनकी बाह्यतम कक्षा में एक या दो इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो कि आसानी से त्यागे जा सकते हैं, क्योंकि इनकी आयनन ऊर्जा निम्न होती है। अतः ये धात्विक प्रकृति के होते हैं।

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प्रश्न 3.
संक्रमण तत्व परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करते हैं, क्यों?
उत्तर-
संक्रमण तत्व परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि (n-1)d-कक्षक तथा ns-कक्षक के इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा में बहुत अधिक अन्तर नहीं होता है, जिससे d-कक्षक के इलेक्ट्रॉन भी संयोजी इलेक्ट्रॉन का कार्य करते हैं । इन तत्वों में Mn अधिकतम परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 4.
संक्रमण धातुएँ आसानी से मिश्र धातुएँ क्यों बना लेती हैं ?
उत्तर
संक्रमण धातुएँ पिघली हुई अवस्था में एक-दूसरे में मिश्रणीय हैं तथा विभिन्न संक्रमण धातुओं के मिश्रण को ठण्डा करने पर मिश्र धातुएँ बनती हैं । संक्रमण धातुओं का आकार लगभग समान होता है, अतः क्रिस्टल जालक में एक धातु परमाणु को दूसरे धातु परमाणु से आसानी से विस्थापित किया जा सकता है, इस प्रकार मिश्रधातुएँ बनती हैं । जैसे-Cr को Ni में विलेय कर Cr-Ni मिश्रधातु बनाया जाता है। मिश्र धातुएँ अपनी जनक धातुओं की तुलना में अधिक कठोर, उच्च गलनांक वाली तथा अधिक संक्षारण प्रतिरोधी होती हैं।

प्रश्न 5.
संक्रमण धातुओं के चुम्बकीय गुणों को उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर बताइए।
अथवा, अनुचुम्बकत्व और प्रतिचुम्बकत्व को समझाइए।
उत्तर
चुम्बकीय गुण-संक्रमण धातुएँ चुम्बकीय गुण प्रदर्शित करती हैं।
(a) प्रतिचुम्बकत्व-जब किसी पदार्थ में उपस्थित सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हों तो वह प्रतिचुम्बकत्व दर्शाता है। Zn एक प्रतिचुम्बकीय धातु है।
(b) अनुचुम्बकत्व-यह गुण पदार्थ में उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन युक्त पदार्थ अनुचुम्बकीय होता है । अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने से चुम्बकीय गुण भी बढ़ता है।
Fe, Co तथा Ni फेरोचुम्बकीय होते हैं, क्योंकि इन्हें चुम्बकित भी किया जा सकता है । अनुचुम्बकत्व को निम्न सूत्र से दर्शाते हैं –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 29
जिसमें μ = चुम्बकीय आघूर्ण, n = अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या।

प्रश्न 6.
संक्रमण तत्वों की प्रवृत्ति अक्रिय होती है, क्यों? उत्तर
संक्रमण तत्वों की अक्रिय प्रवृत्ति या कम क्रियाशीलता निम्नलिखित कारणों से होती हैं –

(i) इनके मानक इलेक्ट्रोड विभव का मान कम होता है ।
(ii) इनकी आयनन ऊर्जा उच्च होती है ।
(iii) इनकी वाष्पन या कणिकरण ऊर्जा (Sublimation of Atomization energy) का मान उच्च होता है।
(iv) इनके आयनों की जल योजन ऊर्जा का मान कम होता है ।

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प्रश्न 7.
संक्रमण तत्वों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर
संक्रमण तत्वों की विशेषताएँ-

  • इनकी प्रकृति धात्विक होती है जिनका धन विद्युतीय गुण सीमित (Ti) से उत्कृष्ट (Cu) तक होता है।
  • ये कठोर होते हैं तथा ऊष्मा और विद्युत् के सुचालक हैं।
  • इनके b.p. तथा m.p. उच्च होते हैं ।
  • ये परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं ।
  • ये रंगीन आयन बनाते हैं ।
  • ये समन्वयन यौगिक बनाते हैं।
  • ये सामान्यत: अनुचुम्बकीय होते हैं ।
  • ये अच्छे उत्प्रेरक होते हैं।
  • ये मिश्रधातु बनाते हैं।
  • ये अधातुओं के साथ अन्तराकाशीय यौगिक बनाते हैं।
  • इनमें कार्बधात्विक यौगिक, समाकृतिक यौगिक तथा नॉन-स्टॉइकियोमीट्रिक यौगिक भी पाये जाते हैं। __

प्रश्न 8.
d और f-ब्लॉक तत्वों में कोई पाँच प्रमुख अन्तर दीजिए।
उत्तर
d और ब्लिॉक तत्वों में अन्तर –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 30
प्रश्न 9.
आन्तरिक संक्रमण तत्व क्या होते हैं ?
उत्तर
वे तत्व जिनमें तीनों बाह्यतम कोश अपूर्ण भरे होते हैं अन्तर संक्रमण तत्व कहलाते हैं। संक्रमण तत्वों के भीतर वर्ग 3 व 4 के मध्य 14-14 तत्व f-ब्लॉक में आते हैं। अतः संक्रमण तत्वों के मध्य स्थित होने के कारण इन्हें अन्तर संक्रमण तत्व कहते हैं। चूँकि इनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम कोश से दो अन्दर के कोश उपउपान्त्य कोश अर्थात् (n-2)f-ऑर्बिटल में प्रवेश करते हैं। अत: इन तत्वों को f-ब्लॉक तत्व भी कहते हैं। (n-2)f1-14(n-12)d1-10ns2 इन्हें दो श्रेणियों में बाँटा गया है –

(1) लैन्थेनाइड श्रेणी-लैन्थेनम के बाद (La57) आने वाले 14 तत्व (Ce58-Lu71) लैन्थेनाइड कहलाते हैं।
(2) ऐक्टिनाइड श्रेणी-ऐक्टिनम के बाद आने वाले 14 तत्व ऐक्टिनाइड्स कहलाते हैं।

प्रश्न 10.
समूह- 12 के सदस्यों के नाम लिखिए। वे सामान्यतः संक्रमण तत्व क्यों नहीं माने जाते हैं ?
उत्तर
समूह- 12 के सदस्यों के नाम Zn, Cd, Hg हैं जिन्हें संक्रमण तत्वों में शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि इनकी परमाणु अवस्था तथा द्विसंयोजी आयन अवस्था दोनों में इलेक्ट्रॉनिक संरचना (n-1)d10 होती है अर्थात् इनके d- कक्षक पूर्णतः भरे होते हैं। इस कारण इन्हें संक्रमण तत्व नहीं माना जाता।

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प्रश्न 11.
लैन्थेनाइडों की पाँच विशेषताएँ लिखिए। उत्तर-लैन्थेनाइडों की विशेषताएँ –
(a) ये f-ब्लॉक के तत्व हैं ।
(b) ये चाँदी के समान चमकदार धातुएँ हैं ।
(c) ये ऊष्मा तथा विद्युत् के अच्छे चालक हैं ।
(d) इनका गलनांक तथा घनत्व उच्च होता है ।
(e) La से Lu तक इनकी परमाणु त्रिज्या में लगातार कमी होती है, इसे लैन्थेनाइड संकुचन कहते हैं ।

प्रश्न 12.
क्या कारण है कि 5d श्रेणी के तत्वों की आयनन ऊर्जा का मान 4d श्रेणी से अधिक होता है?
उत्तर
किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन ऊर्जा का मान घटता है, लेकिन अपेक्षा के विरुद्ध 5d श्रेणी के संक्रमण तत्वों की आयनन ऊर्जा का मान 4d श्रेणी के तत्वों के मान से अधिक होता है, जिसका कारण इन दोनों श्रेणियों के बीच आने वाले 14 लैन्थेनाइड तत्वों का रहना तथा उनके आकार में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाना है। अतः नाभिक का आकर्षण बल बाह्यतम कक्षा के इलेक्ट्रॉन के लिए अधिक हो जाता है यही उनके अधिक आयनन विभव का कारण है।

प्रश्न 13.
(i) संक्रमण धातुओं में संकुल यौगिक बनाने की प्रवृत्ति होती है। समझाइए।
(ii) Zn, Cd एवं Hg संक्रमण तत्व का गुण व्यक्त क्यों नहीं करते हैं ?
(iii) Ti को आश्चर्यजनक धातु क्यों कहते हैं ?
उत्तर
(i) संक्रमण तत्वों के संकुल यौगिक बन्गने के कारण –
1. इन तत्वों के आयनों का आकार कम तथा नाभिकीय आवेश उच्च होता है, जिसके कारण ये आयन या अणु (लिगण्ड) को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
2. लिगैण्ड द्वारा दिये जाने वाले इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने के लिए इन तत्वों के आयनों में रिक्त ऑर्बिटल होते हैं।

(ii) ऐसे तत्व जिनमें (n-1)d- उपकोश आंशिक (Partially) रूप से भरे रहते हैं, उन्हें संक्रपण तत्व कहते हैं।
जबकि Zn में [3d104s2], Cd में [4d10 5s2] एवं Hg में [5d10s2] अवस्था पायी जाती है। इसलिए इन्हें संक्रमण तत्व नहीं मानते हैं।
(iii) Ti को आश्चर्यजनक धातु कहते हैं क्योंकि – (1) यह कठोर व उच्च गलनांक वाली धातु है। (2) यह ऊष्मा व विद्युत् की सुचालक होती है। (3) संक्षारण प्रतिरोधी होती है।(4) इसका उपयोग टैंक, तोप, बन्दूक व रक्षात्मक कवच बनाने में किया जाता है।

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प्रश्न 14.
Fe2+ आयन की त्रिज्या Mn2+ आयन की त्रिज्या से कम होती है, क्यों?
उत्तर
Fe का परमाणु क्रमांक (26) Mn के परमाणु क्रमांक (25) से अधिक है। अधिक परमाणुक्रमांक होने से नाभिक में प्रोटॉन की संख्या अधिक होती है, फलतः नाभिक और बाह्य कोश के इलेक्ट्रॉन के बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल उतना ही प्रबल होता है। प्रबल आकर्षण बल इलेक्ट्रॉन बल इलेक्ट्रान मेघ को भीतर की ओर खींचता है, जिससे आकार में कमी होती है, इसीलिए Fe+ आयन की त्रिज्या Mn2+ आयन से कम होती है।

प्रश्न 15.
लैन्थेनाइड समूह को पृथक् करना क्यों कठिन है ? समझाइए।
उत्तर
लैन्थेनाइड समूह (Ce58 से – 71Lu) तक तत्वों में लैन्थेनाइड संकुचन के कारण रासायनिक गुणों में अत्यधिक समानता होती है। अत: इन्हें शुद्ध अवस्था में प्राप्त करना अत्यधिक कठिन होता है। इन्हें आयन विनिमय विधि द्वारा पृथक् किया जाता है।

प्रश्न 16.
(i) TiO2 श्वेत है, जबकि TiCl3 बैंगनी है। क्यों?
(ii) संक्रमण धातुओं की प्रथम पंक्ति में Cr तक अनुचुम्बकत्व बढ़ता है और फिर घटने लगता है, क्यों?
उत्तर
(i) TiO2 में Ti4+ अवस्था में है जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d0 है अतःd-इलेक्ट्रॉन के अभाव में d-d संक्रमण नहीं हो पाने के कारण TiO2 श्वेत है। जबकि TiCl3 में Ti3+ अवस्था में है जिसका विन्यास 3d1 है। अतः अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण TiCl3 बैंगनी रंग का होता है।
(ii) संक्रमण धातुओं की प्रथम पंक्ति में Cr (3d5) तक अयुग्मित d-इलेक्ट्रॉनों के संख्या में वृद्धि होती है तथा फिर युग्मन प्रारम्भ होने के कारण इनकी संख्या घटती जाती है। अत: इसी के अनुसार पहले Cr तक अनुचुम्बकत्व बढ़ता है और फिर घटने लगता है।

प्रश्न 17.
किन्हीं पाँच बिन्दुओं पर लैन्थेनाइड और ऐक्टिनाइड की तुलना कीजिए।
उत्तर-लैन्थेनाइडों एवं ऐक्टिनाइडों की तुलना –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 31

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प्रश्न 18.
क्रोमिल क्लोराइड परीक्षण समीकरण सहित लिखिए।
उत्तर
जब किसी धातु क्लोराइड को ठोस पोटैशियम डाइक्रोमेट एवं सांद्र H,SO के साथ गर्म किया जाता है तब क्रोमिल क्लोराइड का नारंगी वाष्प बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 32
प्राप्त वाष्प को NaOH विलयन में प्रवाहित करने पर सोडियम क्रोमेट का पीले रंग का विलयन प्राप्त होता है, जो CH3COOH की उपस्थिति में लेड ऐसीटेट मिलाने पर, लेड क्रोमेट का पीला अवक्षेप देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 33

प्रश्न 19.
प्रथम संक्रमण श्रेणी में उपस्थित तत्वों के नाम, संकेत तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर
प्रथम संक्रमण श्रेणी में उपस्थित तत्वों के नाम, संकेत तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास –
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 34

प्रश्न 20.
f-ब्लॉक तत्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। लैन्थेमाइड्स के कोई दो उपयोग लिखिए। ऐक्टिनाइड्स के कोई तीन उपयोग लिखिए।
उत्तर
ब्लॉक तत्वों का सामान्य विन्यास –
(n-2)f1-14, (n-1) s2p6 d0-1,ns2 होता है।
लैन्थेनाइड्स के दो उपयोग –

(i) ज्वलनशील मिश्रधातु बनाने में
(ii) धूप के चश्मों में
(iii) रंगीन काँच व फिल्टर बनाने में।

ऐक्टिनाइड्स के उपयोग –

(i) नाभिकीय रिएक्टर में
(ii) कैंसर के उपचार में थोरियम का उपयोग
(iii) प्लूटोनियम का उपयोग परमाणु बम, परमाणु भट्ठी में होता है।

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प्रश्न 21.
K2Cr2O7 एवं KMnO4 के उपयोग बताइए। .
उत्तर
K2Cr2O7 के उपयोग- (i) ऑक्सीकारक के रूप में, (ii) रंगाई व छपाई में, (iii) आयतनमितीय विश्लेषण में, (iv) क्रोमेटेजिंग में।
KMnO4 के उपयोग-(i) ऑक्सीकारक के रूप में, (ii) आयतनात्मक विश्लेषण में, (iii) कार्बनिक यौगिकों के निर्माण में, (iv) संक्रमणरोधी के रूप में।

प्रश्न 22.
अप्रारूपी संक्रमण तत्व एवं प्रारूपी संक्रमण तत्व किसे कहते हैं ?
उत्तर
Zn, Cd तथा Hg के परमाणुओं में (n-1)d उपकक्ष पूर्ण होते है। अत: इन तत्वों को d- समुदाय तत्व नहीं मानना चाहिए। इसी प्रकार ये तत्व d- समुदाय के तत्वों से गुणों के आधार पर बहुत कम समानता रखते हैं। परन्तु फिर भी ये तत्व d- समुदाय के तत्व कहलाते हैं । अत: Zn, Cd तथा Hg को अप्रारूपी संक्रमण तत्व कहा जाता है। जबकि अन्य संक्रमण तत्वों को प्रारूपी संक्रमण तत्व कहा जाता है।

प्रश्न 23.
Cu+ रंगहीन है परन्तु Cu2+ रंगीन होता है, क्यों?
उत्तर
Cu+ का उपकोश पूर्ण भरा होता है। इस प्रकार इनका d – d संक्रमण नहीं होता और वह सफेद अथवा रंगहीन रहता है। जबकि Cu2+ में अयुग्मित 3d इलेक्ट्रॉन होने के कारण एवं d-d संक्रमण सम्भव होने के कारण वह रंगीन होता है।

प्रश्न 24.
संक्रमण तत्व क्या है ? इन्हें कितनी श्रेणियों में विभाजित किया गया है ?
उत्तर
वे तत्व जिनमें परमाण्विक अवस्था में d-कक्षक आंशिक रूप से भरे हुए हों, संक्रमण तत्व कहलाते हैं, इन्हें 4 श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है –

1. प्रथम संक्रमण श्रेणी (3d- Series)- इसमें चतुर्थ आवर्त के Sc21 स्कैंडियम से जिंक (Zn = 30) तक 10 तत्व हैं।
2. द्वितीय संक्रमण श्रेणी (4d- Series)- इसमें पंचम आवर्त के इट्रियम Y39 से कैडमियम Cd48 तक 10 तत्व हैं।
3. तृतीय संक्रमण श्रेणी (5d- Series)- इसमें छठे आवर्त के लैन्थेनम (La = 57) तथा (Hf =72) से मर्करी (Hg = 80) तक के 10 तत्व हैं।
4. चतुर्थ संक्रमण श्रेणी(6d- Series)- इसमें सातवें आवर्त ऐक्टीनियम (Ac=89) तथा रदरफोर्डियम (Rf =72) तथा हाड्रियम (Ha = 105) हैं ये श्रेणी अभी अपूर्ण है।

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प्रश्न 25.
संक्षेप में स्पष्ट कीजिए कि प्रथम संक्रमण श्रेणी के प्रथम अर्द्धभाग में बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के साथ +2 ऑक्सीकरण अवस्था कैसे अधिक स्थायी होती जाती है?
उत्तर
(IE1 + IE2) आयनन ऊर्जा का मान बढ़ता है। परिमाणस्वरुप मानक अपचयन विभव E0 कम होता जाता है। अत: M+2 आयन बनने की क्षमता घटती है। Mn+2 के लिए उच्च क्षमता अर्द्धपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के कारण है। इसलिए प्रथम सदस्य के लिए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d14s2 है, जिनमें तीन इलेक्ट्रॉन दान करने की क्षमता होती है। अतः +2 ऑक्सीकरण अवस्था की तुलना में +3 ऑक्सीकरण अवस्था की प्रबलता अधिक है।

d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लैन्थेनाइड का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास देते हुए इसके ऑक्सीकरण अवस्था को समझाइए।
उत्तर
अन्तर संक्रमण तत्त्वों की दो श्रेणियों में एक है लैन्थेनाइड या 4fश्रेणी । इस श्रेणी के तत्त्वों में 4fकक्षक में क्रमशः इलेक्ट्रॉन भरते हैं । इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Xe] 4f1-145d1-26s2 होता है। इनकी कुल संख्या 14 है जो सीरियम (परमाणु क्रमांक 58) से प्रारम्भ होकर ल्यूटीशियम (परमाणु क्रमांक 71) पर समाप्त होती है ।

ऑक्सीकरण अवस्था – लैन्थेनाइड तत्त्वों की सर्वाधिक ऑक्सीकरण अवस्था (+3) होती है। यह लैन्थेनम से दो और एक d-कक्षक के इलेक्ट्रॉन के खोने से बनती है। La3+ का विन्यास जेनॉन (Xe = 54) जैसा होता है जो कि अत्यधिक स्थायी होता है। कुछ तत्व (+ 2) और (+4) ऑक्सीकरण भी प्रदर्शित करते हैं क्योंकि ये तत्व 2 या 4 इलेक्ट्रॉन खोने के बाद स्थायी f7 या f14 विन्यास प्राप्त करते हैं।

उदाहरणार्थ – Ce4+(4f°), Tb+ (4f7),Eu2+ (4f7), Yb2+ (4f14), परन्तु Sm2+, Tm2+ इसके अपवाद हैं।
सामान्यतः लैन्थेनाइड में +4 ऑक्सीकरण अवस्था प्रबल ऑक्सीकरण का कार्य करती है, जैसे Ce+4 आयन जलीय विलयन का अच्छा ऑक्सीकरक है जो +4 से +3 में परिवर्तित हो जाता है तथा दूसरी ओर लैन्थेनाइड में +2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रबल अपचायक की तरह कार्य करती है। जैसे-Sm+2, Eu+2 और Yb+2 आयन अच्छा अपचायक है जो जलीय विलयन में +2 से +3 में ऑक्सीकृत हो जाता है।

प्रश्न 2.
क्रोमाइट अयस्क से K2Cr2O7 बनाने की विधि लिखिए तथा K2Cr2O7 की अम्लीय FeSO4 KI एवं H2S के मध्य अभिक्रिया के लिए संतुलित समीकरण लिखिए।
उत्तर
बनाने की विधि-K2Cr2O7 को क्रोमाइट अयस्क (Fe2Cr2O4) या क्रोम आयरन (FeO.Cr203) से बनाया जाता है, जो निम्नलिखित पदों में होते हैं।

(1) क्रोमाइट अयस्क का सोडियम क्रोमेट में परिवर्तन-क्रोमाइट अयस्क को NaOH या Na2CO3 के साथ वायु की उपस्थिति में एक परावर्तनी भट्टी में गर्म करने पर सोडियम क्रोमेट (पीला रंग) बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 35

पदार्थ को छिद्रमय रखने हेतु कुछ मात्रा में शुष्क चूने को मिलाते हैं । जल के साथ निष्कर्षण करने पर Na2Cr2O3 विलयन में चला जाता है। जबकि Fe2O3 रह जाता है जिसे छानकर पृथक् कर लेते हैं।

(2) सोडियम क्रोमेट (Na2CrO4) का सोडियम डाइक्रोमेट (Na2Cr2O7) में परिवर्तन-सोडियम क्रोमेट विलयन सान्द्र H2SO4 के साथ अपचयित करके सोडियम डाइक्रोमेट बनाते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 36
2Na2CrO4 कम विलेय होता है जिसका वाष्पन करने पर Na2SO410H2O के रूप में क्रिस्टलीकृत हो जाता है जिसे पृथक् कर लिया जाता है।

(3) Na2Cr2O7 का K2Cr2O7 में परिवर्तन-सोडियम डाइक्रोमेट के जलीय विलयन का उपचार KCI के साथ किये जाने पर पोटैशियम डाइ क्रोमेट प्राप्त होता है। K2Cr207 के अल्प विलेय प्रकृति के कारण इसके क्रिस्टल ठण्डे में प्राप्त किये जाते हैं।

MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 37

K2Cr2O7 की निम्न के साथ होने वाली रासायनिक अभिक्रिया –

(1) अम्लीय फेरस सल्फेट के साथ-K2Cr207 अम्लीय माध्यम में यह फेरस सल्फेट को फेरिक सल्फेट में ऑक्सीकृत कर देता है। K2Cr2O7 पहले H2SO4 से क्रिया करके नवजात ऑक्सीजन का तीन परमाणु देता है जो Fe2+ को Fe3+ आयन में ऑक्सीकृत कर देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 38

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प्रश्न 3.
अम्लीय, क्षारीय तथा उदासीन माध्यम में KMnO के ऑक्सीकारक गुण को दो-दो उदाहरण द्वारा समझाइए।
अथवा, पोटैशियम परमैंगनेट के अम्लीय माध्यम में कोई ऑक्सीकारक गुणों को समीकरण द्वारा समझाइए।
उत्तर
KMnO4 का विलयन उदासीन हो, क्षारीय हो या अम्लीय हो, प्रत्येक परिस्थिति में यह तीव्र ऑक्सीकारक का कार्य करता है।
(1) अम्लीय माध्यम में-तनु H2SO4 की उपस्थिति में KMnO4 अपचयित हो जाता है तथा इसके दो अणुओं से ऑक्सीजन के पाँच परमाणु प्राप्त होते हैं।
2KMnO4 + 3H2SO4→K2SO4 + 2MnSO4 + 3H2O + 5[0]

उदाहरण – (i) फेरस लवण का फेरिक लवण में ऑक्सीकरण –
अम्लीय KMnO4 से प्राप्त नवजात ऑक्सीजन फेरस लवण को फेरिक लवण में ऑक्सीकृत करता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 39

(ii) ऑक्जेलिक अम्ल का ऑक्सीकरण-अम्लीय माध्यम में KMnO4 ऑक्जेलिक अम्ल को CO2 में ऑक्सीकृत कर देता है।
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(iii) आयोडाइड आयन का आयोडीन में परिवर्तन
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(iv) नाइट्राइट का नाइट्रेट में ऑक्सीकरण
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(2) क्षारीय माध्यम में-क्षारीय माध्यम में KMnOa, MnO, में अपचयित होता है तथा 3 नवजात ऑक्सीजन देता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 43
उदाहरण-(i) आयोडाइड का आयोडेट में ऑक्सीकरणक्षारीय माध्यम में KI का आयोडेट में ऑक्सीकरण होता है।
2KMnO4 + H2O +KI→KIO3 +2MnO2 + 2KOH

(ii) एथिलीन का ग्लाइकॉल में ऑक्सीकरण –
क्षारीय KMnO4 एथिलीन का एथिलीन ग्लाइकॉल में ऑक्सीकरण करता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 44

(3) उदासीन माध्यम में-उदासीन माध्यम में भी KMnO4 ऑक्सीकारक की तरह कार्य करता है। अभिक्रिया में बना KOH विलयन को क्षारीय बना देता है। KMnO4, MnO2 में अपचयित हो जाता है एवं 2 मोल KMnO4 से 2 मोल नवजात ऑक्सीजन मुक्त होते हैं।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 45

प्रश्न 4.
पायरोलुसाइट से KMnO4 बनाने की विधि लिखिए तथा KMnO4 की अम्लीय, क्षारीय तथा उदासीन माध्यम में ऑक्सीकारक गुणों को एक-एक उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
पायरोलुसाइट से KMnO4 का निर्माण
1. पायरोलुसाइट का KMnO4 (हरे पदार्थ) में परिवर्तन-पायरोलुसाइट को वायुमण्डलीय O2 में KOH या K2CO3 के साथ गलित करने पर पोटैशियम मैंगनेट का हरा पदार्थ बनता है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 46

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2. K2MnO4 का KMnO4 में परिवर्तन-K2MnO4 के हरे पदार्थ को जल के साथ निष्कासित करके रासायनिक ऑक्सीकरण या विद्युत्-अपघटनी ऑक्सीकरण द्वारा KMnO4 में ऑक्सीकृत करते हैं।
(a) रासायनिक ऑक्सीकरण-KMnO4 के हरे विलयन का उपचार Cl2, O2 या CO2 की धारा में प्रवाहित करके KMnO में ऑक्सीकृत किया गया है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 47

(b) विद्युत्-अपघटनी ऑक्सीकरण-इस विधि में आयरन कैथोड एवं निकिल ऐनोड के मध्य K2MnO4 विलयन का विद्युत्-अपघटन किया जाता है, तो मैंगनेट आयन का ऐनोड पर परमैंगनेट आयन (MnO4) में ऑक्सीकरण हो जाता है तथा कैथोड पर H, मुक्त होती है।
MP Board Class 12th Chemistry Solutions Chapter 8 d एवं f-ब्लॉक के तत्त्व - 49
अम्लीय, क्षारीय तथा उदासीन माध्यम में ऑक्सीकारक गुणों के उदाहरण-दीर्घ उत्तरीय प्रश्न क्र. 3 देखिए।

MP Board Class 12th General Hindi निबंध साहित्य का इतिहास

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MP Board Class 12th General Hindi निबंध साहित्य का इतिहास

निबंध का उदय

आधुनिक युग को गद्य की प्रतिस्थापना का श्रेय जाता है। जिस विश्वास, भावना और आस्था पर हमारे युग की बुनियाद टिकी थी उसमें कहीं न कहीं अनास्था, तर्क और विचार ने अपनी सेंध लगाई। कदाचित् यह सेंध अपने युग की माँग थी जिसका मुख्य साधन गद्य बना। यही कारण है, कवियों ने गद्य साहित्य में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

हिंदी गद्य का आरम्भ भारतेंदु हरिश्चंद्र से माना जाता है। वह कविता के क्षेत्र में चाहे परम्परावादी थे पर गद्य के क्षेत्र में नवीन विचारधारा के पोषक थे। उनका व्यक्तित्व इतना समर्थ था कि उनके इर्द-गिर्द लेखकों का एक मण्डल ही बन गया था। यह वह मण्डल था जो हिंदी गद्य के विकास में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। हिंदी गद्य के विकास में दशा और दिशा की आधारशिला रखने वालों में इस मण्डल का अपूर्व योगदान है। इन लेखकों ने अपनी बात कहने के लिए निबंध विधा को चुना।

निबंध की व्युत्पत्ति, स्वरूप एवं परिभाषा

निबंध की व्युत्पत्ति पर विचार करने पर पता चलता है कि ‘नि’ उपसर्ग, ‘बन्ध’ धातु और ‘धर्म प्रत्यय से यह शब्द बना है। इसका अर्थ है बाँधना। निबंध शब्द के पर्याय के रूप में लेख, संदर्भ, रचना, शोध प्रबंध आदि को स्वीकार किया जाता है। निबंध को हिंदी में अंग्रेजी के एसे और फ्रेंच के एसाई के अर्थ में ग्रहण किया जाता है जिसका सामान्य अर्थ प्रयत्न, प्रयोग या परीक्षण कहा गया है।

निबंध की भारतीय व पाश्चात्य परिभाषाएँ कोशीय अर्थ।

‘मानक हिंदी कोश’ में निबंध के संबंध में यह मत प्रकट किया गया है-“वह विचारपूर्ण विवरणात्मक और विस्तृत लेख, जिसमें किसी विषय के सब अंगों का मौलिक और स्वतंत्र रूप से विवेचन किया गया हो।”

हिंदी शब्द सागर’ में निबंध शब्द का यह अर्थ दिया गया है- ‘बन्धन वह व्याख्या है जिसमें अनेक मतों का संग्रह हो।”

पाश्चात्य विचारकों का मत

निबंध शब्द का सबसे पहले प्रयोग फ्रेंच के मांतेन ने किया था, और वह भी एक विशिष्ट काव्य विधा के लिए। इन्हें ही निबंध का जनक माना जाता है। उनकी रचनाएँ आत्मनिष्ठ हैं। उनका मानना था कि “I am myself the subject of my essays because I am the only person whom I know best.”

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अंग्रेजी में सबसे पहले एस्से शब्द का प्रयोग बेकन ने किया था। वह लैटिन । भाषा का ज्ञाता था और उसने इस भाषा में अनेक निबंध लिखे। उसने निबंध कोबिखरावमुक्त चिन्तन कहा है।

सैमुअल जॉनसन ने लिखा, “A loose sally of the mind, an irregular, .. undigested place is not a regular and orderly composition.” “निबंध मानसिक जगत् की विशृंखल विचार तरंग एक असंगठित-अपरिपक्व और अनियमित विचार खण्ड है। निबंध की समस्त विशेषताएँ हमें आक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में दी गई इस परिभाषा में मिल जाती है, “सीमित आकार की एक ऐसी रचना जो किसी विषय विशेष या उसकी किसी शाखा पर लिखी गई हो, जिसे शुरू में परिष्कारहीन अनियमित, अपरिपक्व खंड माना जाता था, किंतु अब उससे न्यूनाधिक शैली में लिखित छोटी आकार की संबद्ध रचना का बोध होता है।”

भारतीय विचारकों का मत

आचार्य रामचंद्र शक्ल-आचार्य रामचंद्र शक्ल ने निबंध को व्यवस्थित और मर्यादित प्रधान गद्य रचना माना है जिसमें शैली की विशिष्टता होनी चाहिए, लेखक का निजी चिंतन होना चाहिए और अनुभव की विशेषता होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त लेखक के अपने व्यक्तित्व की विशिष्टता भी निबंध में रहती है। हिंदी साहित्य के इतिहास में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने निबंध की परिभाषा देते हुए लिखा, “आधुनिक पाश्चात्य लेखकों के अनुसार निबंध उसी को कहना चाहिए जिसमें व्यक्तित्व अर्थात् व्यक्तिगत विशेषता है। बात तो ठीक है यदि ठीक तरह से समझी जाय। व्यक्तिगत विशेषता का यह मतलब नहीं कि उसके प्रदर्शन के लिए विचारकों की श्रृंखला रखी ही न जाए या जान-बूझकर जगह-जगह से तोड़ दी जाए जो उनकी अनुमति के प्रकृत या लोक सामान्य स्वरूप से कोई संबंध ही न रखे अथवा भाषा से सरकस वालों की सी कसरतें या हठयोगियों के से आसन कराये जाएँ, जिनका लक्ष्य तमाशा दिखाने के सिवाय और कुछ न हो।”

बाबू गुलाब राय-बाबू गुलाबराय ने भी निबंध में व्यक्तित्व और विचार दोनों को आवश्यक माना है। वे लिखते हैं- “निबंध उस गद्य रचना को कहते हैं जिसमें एक सीमित आकार के भीतर किसी विषय का वर्णन या प्रतिपादन एक विशेष निजीपन, स्वच्छंदता, सौष्ठव, सजीवता तथा अनावश्यक संगति और संबद्धता के साथ किया गया हो।”

निबंध की परिभाषाओं का अध्ययन करने पर हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि निबंध एक गद्य रचना है। इसका प्रमुख उद्देश्य अपनी वैयक्तिक अनुभूति, भावना या आदर्श को प्रकट करना है। यह एक छोटी-सी रचना है और किसी एक विषय पर लिखी गई क्रमबद्ध रचना है। इसमें विषय की एकरूपता होनी चाहिए और साथ ही तारतम्यता भी। यह गद्य काव्य की ऐसी विधा है जिसमें लेखक सीमित आकार में अपनी भावात्मकता और प्रतिक्रियाओं को प्रकट करता है।

निबंध के तत्त्व

प्राचीन काल से आज तक साहित्य विधाओं में अनेक बदलाव आए हैं। साधारणतः निबंध में निम्नलिखित तत्त्वों का होना अनिवार्य माना गया है
1. उपयुक्त विषय का चुनाव-लेखक जिस विषय पर निबंध लिखना चाहता है उसे सबसे पहले उपयुक्त विषय का चुनाव करना चाहिए। इसके लिए उसे पर्याप्त सोच-विचार करना चाहिए। निबंध का विषय सामाजिक, वैज्ञानिक, दार्शनिक आर्थिक, ऐतिहासिक, धार्मिक, साहित्यिक, वस्तु, प्रकृति-वर्णन, चरित्र, संस्मरण, भाव, घटना आदि में से किसी भी विषय पर हो सकता है, किंतु विषय ऐसा होना चाहिए कि जिसमें लेखक अपना निश्चित पक्ष व दृष्टिकोण भली-भाँति व्यक्त कर सके।

2. व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति-निबंध में निबंधकार के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति दिखनी चाहिए। मोन्तेन ने निबंधों पर निजी चर्चा करते हुए लिखा है, “ये मेरी भावनाएँ हैं, इनके द्वारा मैं स्वयं को पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करता हूँ।” भारतीय और पाश्चात्य दोनों ही विचारकों ने निबंध लेखक के व्यक्तित्व के महत्त्व को स्वीकार किया है। निबंध लेखक की आत्मीयता और वैयक्तिकता के कारण ही विषय के सम्बन्ध में निबंधकार के विचारों, भावों और अनुभूति के आधार पर पाठक उनके साथ संबद्ध कर पाता है। इस प्रकार निबंधकार के व्यक्तित्व को निबंध का केंद्रीय गुण कहा जाता है।

3. एकसूत्रता-निबंध बँधी हुई एक कलात्मक रचना है। इसमें विषयान्तर की संभावना नहीं होती, इसलिए निबंध के लिए आवश्यक है कि निबंधकार अपने विचारों को एकसूत्रता के गुण से संबद्ध करके प्रस्तुत करता है। निबंध के विषय के मुख्य भाव या विचार पर अपनी दृष्टि डालते हुए निबंधकार तथ्यों को उसके तर्क के रूप में प्रस्तुत करता है। इन तर्कों को प्रस्तुत करते हुए निबंधकार को यह ध्यान रखना पड़ता है कि तथ्यों और तर्कों के बीच अन्विति क्रम बना रहे। कई निबंधकार निबंध लिखते समय अपनी भाव-तरंगों पर नियन्त्रण नहीं रख पाते, ऐसे में वह विषय अलग हो जाता है। वस्तुतः लेखक का कर्तव्य है कि वह विषयान्तर न हो। अगर विषयान्तर हो भी गया तो उसे इधर-उधर विचरण कर पुनः अपने विषय पर आना ही पड़ेगा। निबंधकार को अपने अभिप्रेत का अंत तक बनाए रखना चाहिए।

4. मर्यादित आकार-निबंध आकार की दृष्टि से छोटी रचना है। इस संदर्भ में हर्बट रीड ने कहा है कि निबंध 3500 से 5000 शब्दों तक सीमित किया जाना चाहिए। वास्तव में निबंध के आकार के निर्धारण की कोई आवश्यकता नहीं है। निबंध विषय के अनुरूप और सटीक तर्कों द्वारा लिखा जाता है। लेखक अपने विचार भावावेश के क्षणों में व्यक्त करता है। ऐसे में वह उसके आकार के विषय में सोचकर नहीं चलता। आवेश के क्षण बहुत थोड़ी अवधि के लिए होते हैं, इसलिए निश्चित रूप से निबंध का आकार स्वतः ही लघु हो जाता है। इसमें अनावश्यक सूचनाओं को कोई स्थान नहीं मिलता।

5. स्वतःपूर्णता-निबंध का एक गुण या विशेषता है कि यह अपने-आप में पूर्ण होना चाहिए। निबंधकार का दायित्व पाठकों को निबंध में चुने हुए विषय की समस्त जानकारी देना है। यही कारण है कि उसे विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों पर पूर्णतः विचार करना चाहिए। विषय से संबंधित कोई ज्ञान अधूरा नहीं रहना चाहिए। जिस भाव या विचार या बिंदु को लेकर निबंधकार निबंध लिखता है, निबंध के अंत तक पाठक के मन में संतुष्टि का भाव जागृत होना चाहिए। अगर पाठक के मन में किसी तरह का जिज्ञासा भाव रह जाता है तो उस निबंध को अपूर्ण माना जाता है और इसे निबंध के अवगुण के रूप में शुमार कर लिया जाएगा।

6. रोचकता-निबंध क्योंकि एक साहित्यिक विधा है इसलिए इसमें रोचकता का तत्त्व निश्चित रूप से होना चाहिए। यह अलग बात है कि निबंध का सीधा संबंध बुद्धि तत्त्व से रहता है। फिर इसे ज्ञान की विधा न कहकर रस की विधा कहा जाता है, इसलिए इसमें रोचकता होनी चाहिए, ललितता होनी चाहिए और आकर्षण होना चाहिए। निबंध के विषय प्रायः शुष्क होते हैं, गंभीर होते हैं या बौद्धिक होते हैं।

अगर निबंधकार इन विषयों को रोचक रूप में पाठक तक पहुँचाने में समर्थ हो जाता है तो इसे निबंध की पूर्णता और सफलता कहा जाएगा।

निबंध के भेद

निबंध के भेद, इसके लिए अध्ययन किए गए हैं। विषयों की विविधता से देखा जाए तो इन्हें सीमा में नहीं बाँधा जा सकता। अतः निबंध लेखन का विषय दुनिया के किसी भी कोने का हो सकता है। विद्वानों ने निबंधों का वर्गीकरण तो अवश्य किया है पर यह वर्गीकरण या तो वर्णनीय विषय के आधार पर किया है या फिर उसकी शैली के आधार पर। निबंध का सबसे अधिक प्रचलित वर्गीकरण यह है

1. वर्णनात्मक-वर्णनात्मक निबंध वे कहलाते हैं जिनमें प्रायः भूगोल, यात्रा, ऋतु, तीर्थ, दर्शनीय स्थान, पर्व-त्योहार, सभा- सम्मेलन आदि विषयों का वर्णन किया जाता है। इनमें दृश्यों व स्थानों का वर्णन करते हुए रचनाकार कल्पना का आश्रय लेता है। ऐसे में उसकी भाषा सरल और सुगम हो जाती है। इसमें लेखक निबंध को रोचक बनाने में पूरी कोशिश करता है।

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2. विवरणात्मक-इस प्रकार के निबंधों का विषय स्थिर नहीं रहता अपितु गतिशील रहता है। शिकार वर्णन, पर्वतारोहण, दुर्गम प्रदेश की यात्रा आदि का वर्णन जब कलात्मक रूप से किया जाता है तो वे निबंध विवरणात्मक निबंधों की शैली में स्थान पाते हैं। विवरणात्मक निबंधों में विशेष रूप से घटनाओं का विवरण अधिक होता है।

3. विचारात्मक-इस प्रकार के निबंधों में बौद्धिक चिन्तन होता है। इनमें दर्शन, अध्यात्म, मनोविज्ञान आदि विषयगत पक्षों का विवेचन किया जाता है। लेखक अपने अध्ययन व चिन्तन के अनुरूप तर्क-शितर्क और खण्डन का आश्रय लेते हुए विषय का प्रभावशाली विवेचन करता है। इनमें बौद्धिकता तो होती ही है साथ ही भावना और कला कल्पना का समन्वय भी होता है। ऐसे निबंधों में लेखक आमतौर पर तत्सम शैली अपनाता है। समासिकता की प्रधानता भी होती है।

4. भावात्मक-इस श्रेणी में उन निबंधों को स्थान मिलता है जो भावात्मक विषयों पर लिखे जाते हैं। इन निबंधों का निस्सरण हृदय से होता है। इनमें रागात्मकता होती है इसलिए लेखक कवित्व का भी प्रयोग कर लेता है। अनुभूतियाँ और उनके उद्घाटन की रसमय क्षमता इस प्रकार के निबंध लेखकों की संपत्ति मानी जाती हैं। वस्तुतः कल्पना के साथ काव्यात्मकता का पुट इन निबंधों में दृश्यमान होता है।

वर्गीकरण अनावश्यक

गौर से देखा जाए तो इन चारों भेदों की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि ये निबंध लेखन की शैली हैं। इन्हें वर्गीकरण नहीं कहा जाना चाहिए। अगर कोई कहता है कि वर्णनात्मक निबंध है या दूसरा कोई कहता है कि विवरणात्मक निबंध है तो यह शैली नहीं है तो और क्या है?

वस्तुतः इन्हें विचारात्मक निबंध की श्रेणी में रखा जा सकता है। विचारात्मक निबंधों का विषय मानव जीवन का व्यापक कार्य क्षेत्र है और असीम चिंतन लोक है। इसमें धर्म, दर्शन, मनोविज्ञान आदि विषयों का गंभीर विश्लेषण होता है। इसे निबंध का आदर्श भी कहा जा सकता है। इसमें निबंधकार के गहन चिंतन, मनन, सूक्ष्म अन्तर्दृष्टि और विशद ज्ञान का स्पष्ट रूप देखने को मिलता है। इस संबंध में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कहा है, “शुद्ध विचारात्मक निबंधों का वहाँ चरम उत्कर्ष नहीं कहा जा सकता है जहाँ एक-एक पैराग्राफ में विचार दबा-दबाकर.टूंसे गए हों, और एक-एक वाक्य किसी विचार खण्ड को लिए हुए हो।’

आचार्य शुक्ल ने अपने निबंधों में स्वयं इस शैली का बखूबी प्रयोग किया है। इसके अतिरिक्त आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने भी इस प्रकार के अनेक निबंध लिखे हैं जिनमें उनके मन की मुक्त उड़ान को अनुभव किया जा सकता है। इन निबंधों में उनकी व्यक्तिगत रुचि और अरुचि का प्रकाशन है। नित्य प्रति के सामान्य शब्दों को अपनाते हुए बड़ी-बड़ी बातें कह देना द्विवेदीजी की अपनी विशेषता है। व्यक्तिगत निबंध जब लेखक लिखता है तो उसका संबंध उसके संपूर्ण निबंध से होता है। आचार्यजी के इसी प्रकार के निबंध ललित निबंध कहलाते रहे हैं। आचार्यजी ने स्वयं कहा है, “व्यक्तिगत निबंधों का लेखन किसी एक विषय को छेड़ता है किंतु जिस प्रकार वीणा के एक तार को छेड़ने से बाकी सभी तार झंकृत हो उठते हैं उसी प्रकार उस एक विषय को छुते ही लेखक की चित्तभूमि पर बँधे सैकड़ों विचार बज उठते हैं।”

आचार्य रामचंद्र शुक्ल व्यक्तित्व व्यंजना को निबंधों का आवश्यक गुण मानते हैं। उन्होंने वैचारिक गंभीरता और क्रमबद्धता का समर्थन किया है। आज हिंदी में दो ही प्रकार के प्रमुख निबंध लिखे जा रहे हैं, “व्यक्तिनिष्ठ और वस्तुनिष्ठ। यों निबंध का कोई भी विषय हो सकता है। साहित्यिक भी हो सकता है और सांस्कृतिक भी। सामाजिक भी और ऐतिहासिक आदि भी। वस्तुतः कोई भी निबंध केवल वस्तुनिष्ठ नहीं हो सकता और न ही व्यक्तिनिष्ठ हो सकता है। निबंध में कभी चिंतन की प्रधानता होती है और कभी लेखक का व्यक्तित्व उभर आता है।”

निबंध शैली

वस्तुतः निबंध शैली को अलग रूप में देखने की परम्परा-सी चल निकली है अन्यथा निबंधों का व करण निबंध शैली ही है। लेखक की रचना ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है। शैली ही उसके व्यक्तित्व की पहचान होती है। एक आलोचक ने शैली के बारे में कहा है कि जितने निबंध हैं, उतनी शैलियाँ हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि निबंध लेखन में लेखक के निजीपन का पूरा असर पड़ता है। निबंध की शैली से ही किसी निबंधकार की पहचान होती है क्योंकि एक निबंधकार की शैली दूसरे निबंधकार से भिन्न होती हैं।

मुख्य रूप से निबंध की निम्न शैलियाँ कही जाती हैं-
1. समास शैली-इस निबंध शैली में निबंधकार कम से कम शब्दों में अधिक-से-अधिक विषय का प्रतिपादन करता है। उसके वाक्य सुगठित और कसे हुए होते हैं। गंभीर विषयों के लिए इस शैली का प्रयोग किया जाता है।

2. व्यास शैली-इस तरह के निबंधों में लेखक तथ्यों को खोलता हुआ चला जाता है। उन्हें विभिन्न तर्कों और उदाहरणों के ज़रिए व्याख्यायित करता चला जाता है। वर्णनात्मक, विवरणात्मक और तुलनात्मक निबंधों में निबंधकार इसी प्रकार की शैली का प्रयोग करता है।

3. तरंग या विक्षेप शैली-इस शैली में निबंधकार में एकान्विति का अभाव रहता है। इसमें निबंधकार अपने मन की मौज़,में आकर बात कहता हुआ चलता है पर विषय पर केंद्रित अवश्य रहता है।

4. विवेचन शैली-इंस निबंध शैली में लेखक तर्क-वितर्क के माध्यम से प्रमाण पुष्टि और व्याख्या के माध्यम से, निर्णय आदि के माध्यम से अपने विषय को बढ़ाता हुआ चलता है। इस शैली में लेखक गहन चिंतन के आधार पर अपना कथ्य प्रस्तुत करता चला जाता है। विचारात्मक निबंधों में लेखक इस शैली का प्रयोग करता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल के निबंध इसी प्रकार की शैली के अन्तर्गत माने जाते हैं।

5. व्यंग्य शैली-इस शैली में निबंधकार व्यंग्य के माध्यम से अपने विषयों का प्रतिपादन करता चलता है। इसमें उसके विषय धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक आदि भी हो सकते हैं। इसमें रचनाकार किंचित हास्य का पुट देकर विषय को पठनीय बना देता है। शब्द चयन और अर्थ के चमत्कार की दृष्टि से इस शैली का निबंधकारों में विशेष प्रचलन है। व्यंग्यात्मक निबंध इसी शैली में लिखे जाते हैं।

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6. निगमन और आगमन शैली-निबंधकार अपने विषय का प्रतिपादन करने । की दृष्टि से निगमन शैली और आगमन शैली का प्रयोग करता है। इस प्रकार की शैली में लेखक पहले विचारों को सूत्र रूप में प्रस्तुत करता है। तद्उपरांत उस सूत्र के अन्तर्गत पहले अपने विचारों की विस्तार के साथ व्याख्या करता है। बाद में सूत्र रूप में सार लिख देता है। आगमन शैली निनन शैली के विपरीत होती है। इसके अतिरिक्त निबंध की अन्य कई शैलियों को देखा जा सकता है, जैसे प्रलय शैली। इस प्रकार की शैली में निबंधकार कुछ बहके-बहके भावों की अभिव्यंजना करता है। कुछ लेखकों के निबंधों में इस शैली को देखा जा सकता है। भावात्मक निबंधों के लिए कुछ निबंधकार विक्षेप शैली अपनाते हैं। धारा शैली में भी कुछ निबंधकार निबंध लिखते हैं। इसी प्रकार कुछ निबंधकारों ने अलंकरण, चित्रात्मक, सूक्तिपरक, धाराप्रवाह शैली का भी प्रयोग किया है। महादेवी वर्मा की निबंध शैली अलंकरण शैली है।

हिंदी निबंध : विकास की दिशाएँ
हिंदी गद्य का अभाव तो भारतेंदुजी से पूर्व भी नहीं था, पर कुछ अपवादों तक सीमित था। उसकी न तो कोई निश्चित परंपरा थी और न ही प्रधानता। सन् 1850 के बाद गद्य की निश्चित परंपरा स्थापित हुई, महत्त्व भी बढ़ा। पाश्चात्य सभ्यता के संपर्क में आने पर हिंदी साहित्य भी निबंध की ओर उन्मुख हुआ। इसीलिए कहा जाता है कि भारतेंदु युग में सबसे अधिक सफलता निबंध लेखन में मिली। हिंदी निंबध साहित्य को निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है

  • भारतेंदुयुगीन निबंध,
  • द्विवेदीयुगीन निबंध,
  • शुक्लयुगीन निबंध
  • शुक्लयुगोत्तर निबंध एवं
  • सामयिक निबंध-1940 से अब तक।

भारतेंदुयुगीन निबंध-भारतेंदु युग में सबसे अधिक सफलता निबंध में प्राप्त हुई। इस युग के लेखकों ने विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से निबंध साहित्य को संपन्न किया! भारतेंदु हरिश्चंद्र से हिंदी निबंध का आरंभ माना जाना चाहिए। बालकृष्ण भट्ट और प्रतापनारायण मिश्र ने इस गद्य विधा को विकसित एवं समृद्ध किया। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इन दोनों लेखकों को स्टील और एडीसन कहा है। ये दोनों हिंदी के आत्म-व्यंजक निबंधकार थे। इस युग के प्रमुख निबंधकार हैं-भारतेंदु हरिश्चंद्र, प्रतापनारायण मिश्र, बालकृष्ण भट्ट, बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’, लाला श्री निवासदास, राधाचरण गोस्वामी, काशीनाथ खत्री आदि। इन सभी निबंधकारों का संबंध किसी-न-किसी पत्र-पत्रिका से था। भारतेंदु ने पुरातत्त्व, इतिहास, धर्म, कला, समाज-सुधार, जीवनी, यात्रा-वृत्तांत, भाषा तथा साहित्य आदि अनेक विषयों पर निबंध लिखे। प्रतापनारायण मिश्र के लिए तो विषय की कोई सीमा ही नहीं थी। ‘धोखा’, ‘खुशामद’, ‘आप’, ‘दाँत’, ‘बात’ आदि पर उन्होंने अत्यंत रोचक निबंध लिखे। बालकृष्ण भट्ट भारतेंदु युग के सर्वाधिक समर्थ निबंधकार हैं। उन्होंने सामयिक विषय जैसे ‘बाल-विवाह’, ‘स्त्रियाँ और उनकी शिक्षा’ पर उपयोगी निबंध लिखे। ‘प्रेमघन’ के निबंध भी सामयिक विषयों पर टिप्पणी के रूप में हैं। अन्य निबंधकारों का महत्त्व इसी में है कि उन्होंने भारतेंदु, बालकृष्ण भट्ट और प्रतापनारायण मिश्र के मार्ग का अनुसरण किया।

द्विवेदीयुगीन निबंध-भारतेंदु युग में निबंध साहित्य की पूर्णतः स्थापना हो गई थी, लेकिन निबंधों का विषय अधिकांशतः व्यक्तिव्यंजक था। द्विवेदीयुगीन निबंधों में व्यक्तिव्यंजक निबंध कम लिखे गए। इस युग के श्रेष्ठ निबंधकारों में महावीर प्रसाद द्विवेदी (1864-1938), गोविंदनारायण मिश्र (1859-1926), बालमुकुंद गुप्त (1865-1907), माधव प्रसाद मिश्र (1871-1907), मिश्र बंधु-श्याम बिहारी मिश्र (1873-1947) और शुकदेव बिहारी मिश्र (1878-1951), सरदार पूर्णसिंह (1881-1939), चंद्रधर शर्मा गुलेरी (1883-1920), जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी (1875-1939), श्यामसुंदर दास (1875-1945), पद्मसिंह शर्मा ‘कमलेश’ (1876-1932), रामचंद्र शुक्ल (1884-1940), कृष्ण बिहारी मिश्र (1890-1963) आदि उल्लेखनीय हैं। महावीर प्रसाद द्विवेदी के निबंध परिचयात्मक या आलोचनात्मक हैं। उनमें आत्मव्यंजन तत्त्व नहीं है। गोंविद नारायण मिश्र के निबंध पांडित्यपूर्ण तथा संस्कृतनिष्ठ गद्यशैली के लिए प्रसिद्ध हैं। बालमुकुंद गुप्त ‘शिवशंभु के चिट्टे’ के लिए विख्यात हैं।

ये चिट्ठे “भारत मित्र’ में छपे थे। माधव प्रसाद मिश्र के निबंध ‘सुदर्शन’ में प्रकाशित हुए। उनके निबंधों का संग्रह ‘माधव मिश्र निबंध माला’ के नाम से प्रकाशित है। सरदार पूर्णसिंह भी इस युग के निबंधकार हैं। इनके निबंध नैतिक विषयों पर हैं। कहीं-कहीं इनकी शैली व्याख्यानात्मक हो गई हैं। चंद्रधर शर्मा गलेरी ने कहानी के अतिरिक्त निबंध भी लिखे। उनके निबंधों में मार्मिक व्यंग्य है। जगन्नाथ प्रसाद चतुर्वेदी के निबंध ‘गद्यमाला’ (1909) और ‘निबंध-निलय’ में प्रकाशित हैं। पद्मसिंह शर्मा कमलेश तुलनात्मक आलोचना के लिए विख्यात हैं। उनकी शैली प्रशंसात्मक और प्रभावपूर्ण है। श्यामसुंदरदास तथा कृष्ण बिहारी मिश्र मूलतः आलोचक थे। इनकी शैली सहज और परिमार्जित है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल के प्रारंभिक निबंधों में भाषा संबंधी प्रश्नों और कुछ ऐतिहासिक व्यक्तियों के संबंध में विचार व्यक्त किए गए हैं। उन्होंने कुछ अंग्रेजी निबंधों का अनुवाद भी किया।

इस युग में गणेशशंकर विद्यार्थी, मन्नन द्विवेदी आदि ने भी पाठकों का ध्यान आकर्षित किया। शुक्लयुगीन निबंध-इस युग के प्रमुख निबंधकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल हैं आचार्य शुक्ल के निबंध ‘चिंतामणि’ के दोनों खंडों में संकलित हैं। अभी हाल में चिंतामणि का तीसरा खंड प्रकाशित हुआ है। इसका संपादन डॉ. नामवर सिंह ने किया है। इसी युग के निबंधकारों में बाबू गुलाबराय (1888-1963) का उल्लेखनीय स्थान है। ‘ठलुआ क्लब’, ‘फिर निराश क्यों’, ‘मेरी असफलताएँ’ आदि संग्रहों में उनके श्रेष्ठ निबंध संकलित हैं। ल पुन्नालाल बख्शी’ ने कई अच्छे निबंध लिखे। इनके निबंध ‘पंचपात्र’ में संगृहीत हैं। अन्य निबंधकारों में शांति प्रेत द्विवेदी, शिवपूजन सहाय, पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’, रधुवीर सिंह, माखनलाल चतुर्वेदी आदि मुख्य हैं। इस युग में निबंध तो लिखे गए, पर ललित निबंध कम ही हैं।

शुक्लयुगोत्तर निबंध-शुक्लयुगोत्तर काल में निबंध ने अनेक दिशाओं में सफलता प्राप्त की। इस युग मं समीक्षात्मक निबंध अधिक लिखे गए। यों व्यक्तव्यंजक निबंध भी कम नहीं लिखे गए। शुक्लजी के समीक्षात्मक निबंधों को परंपरा के दूसरे नाम हैं नंददुलारे वाजपेयी। इसी काल के महत्त्वपूर्ण निबंधकार आच हजागे प्रसाद द्विवेदी हैं। उनके ललित निबंधों में नवीन जीवन-बोध है।

शुक्लयुगोत्तर निबंधकारों में जैनेंद्र कुमार का स्थान काफी ऊँचा है। उनके निबंधों में दार्शनिकता है। यह दार्शनिकता निजी है, अतः ऊब पैदा नहीं करती। उनके निबंधों में सरसता है।

हिंदी में प्रभावशाली समीक्षा के अग्रदूत शांतिप्रिय द्विवेदी हैं। इन्होंने समीक्षात्मक निबंध भी लिखे हैं और साहित्येतर भी। इनके समीक्षात्मक निर्बंधों में निर्बध का स्वाद मिलता है। रामधारीसिंह ‘दिनकर’ ने भी इस युग में महत्त्वपूर्ण निबंध लिखे। इनके निबंध विचार-प्रधान हैं। लेकिन कुछ निबंधों में उनका अंतरंग पक्ष भी उद्घाटित हुआ है। समीक्षात्मक निबंधकारों में डॉ. नगेंद्र का स्थान महत्त्वपूर्ण है। उनके निबंधों की कल्पना, मनोवैज्ञानिक दृष्टि उनके व्यक्तित्व के अपरिहार्य अंग हैं। रामवृक्ष बेनीपुरी के निबंध-संग्रह ‘गेहूँ और गुलाब’ तथा ‘वंदे वाणी विनायकौ’ हैं। बेनीपुरी की भाषा में आवेग है, जटिलता नहीं। श्रीराम शर्मा, देवेंद्र सत्यार्थी भी निबंध के क्षेत्र में उल्लेखनीय हैं। वासुदेवशरण अग्रवाल के निबंधों में भारतीय संस्कृति के विविध आयामों को विद्वतापूर्वक उद्घाटित किया गया है। यशपाल के निबंधों में भी मार्क्सवादी दृष्टिकोण मिलता है। बनारसीदास चतुर्वेदी के निबंध-संग्रह ‘साहित्य और जीवन’, ‘हमारे आराध्य’ नाम में यही प्रवृत्ति है। कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर के निबंध में करुणा, व्यंग्य और भावुकता का सन्निवेश है। भगवतशरण उपाध्याय ने ‘ठूठा आम’, और ‘सांस्कृतिक निबंध’ में इतिहास और संस्कृति की पृष्टभूमि पर निबंध लिखे। प्रभाकर माचवे, विद्यानिवास मिश्र, धर्मवीर भारती, शिवप्रसाद सिंह, कुबेरनाथ राय, ठाकुर प्रसाद सिन्हा आदि के ललित निबंध विख्यात हैं।

सामयिक निबंधों में नई चिंतन पद्धति और अभिव्यक्ति देखी जा सकती है। अज्ञेय, विद्यानिवास मिश्र, कुबेरनाथ राय, निर्मल वर्मा, रमेशचंद्रशाह, शरद जोशी, जानकी वल्लभ शास्त्री, रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’, नेमिचंद्र जैन, विष्णु प्रभाकर, जगदीश चतुर्वेदी, डॉ. नामवर सिंह और विवेकी राय आदि ने हिंदी गद्य की निबंध परंपरा को न केवल बढ़ाया है, बल्कि उसमें विशिष्ट प्रयोग किए हैं। समीक्षात्मक निबंधों में गजानन माधव मुक्तिबोध का नाम आता है। उनके निबंधों में बौद्धिकता है और वयस्क वैचारिकता तबोध के ‘नई कविता का आत्मसंघर्ष तथा अन्य निबंध’ नए साहित्य का सौंदर्यशास्त्र, ‘समीक्षा की समस्याएँ’ और ‘एक साहित्यिक की डायरी’ नामक निबंध विशेष उल्लेखनीय हैं। डॉ. रामविलास शर्मा के निबंध शैली में स्वच्छता, प्रखरता तथा वैचारिक संपन्नता है। हिंदी निबंध में व्यंग्य को रवींद्र कालिया ने बढ़ाया है। नए निबंधकारों में रमेशचंद्र शाह का नाम तेजी से उभरा है।

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महादेवी वर्मा, विजयेंद्र स्नातक, धर्मवीर भारती, सर्वेश्वरदयाल सक्सेना और रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ के निबंधों में प्रौढ़ता है। इसके अतिरिक्त विष्णु प्रभाकर कृत ‘हम जिनके ऋणी हैं’ जानकी वल्लभ शास्त्री कृत ‘मन की बात’, ‘जो बिक न सकी’ आदि निबंधों में क्लासिकल संवेदना का उदात्त रूप मिलता है। नए निबंधकारों में : प्रभाकर श्रोत्रिय, चंद्रकांत वांदिवडेकर, नंदकिशोर आचार्य, बनवारी, कृष्णदत्त पालीवाल, प्रदीप मांडव, कर्णसिंह चौहान और सुधीश पचौरी आदि प्रमुख हैं। आज राजनीतिक-सांस्कृतिक विषयों पर भी निबंध लिखे जा रहे हैं। अतः हिंदी निबंध-साहित्य उत्तरोत्तर बढ़ता जा रहा है।

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals

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MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals

MP Board Class 10th Science Chapter 3 Intext Questions

Intext Questions Page No. 40

Question 1.
Give an example of a metal which:

  1. Is a liquid at room temperature.
  2. can be easily cut with a knife.
  3. Is the best conductor of heat.
  4. Is a poor conductor of heat.

Answer:

  1. Metal that exists in a liquid state at room temperature → Mercury.
  2. Metal that can be easily cut with a knife → Sodium.
  3. Metal that is the best conductor of heat → Silver.
  4. Metals that are poor conductors of heat → Lead.

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Question 2.
Explain the meanings of malleable and ductile.
Answer:

  1. Malleable: Materials that can be beaten into thin sheets are called malleable.
  2. Ductile: Materials that can be drawn into thin wires are called ductile.

Metals can be hammered into thin sheets. This property of a metal is called malleability and the metals showing this property are called malleable. Gold, Silver, Copper, aluminium etc are malleable metals. Metals can be drawn into wires. The ability of metals to be drawn into thin wires is called ductility. Gold is the most ductile metal. It is interesting to know that a wire of about 2 km length can be drawn from one gram of gold.

Intext Questions Page No. 46

Question 1.
Why is sodium kept immersed in kerosene oil?
Answer:
Sodium is highly reactive metal. It catches fire if kept in the open. Hence, to protect this to prevent accidental fires, it is kept immersed in kerosene oil.

Question 2.
Write equations for the reactions of:
Iron with steam.
Calcium and potassium with water.
Answer:

  1. 3Fe(s) + 4H2O(g) ➝ Fe3O4(aq) + 4H2(g)
  2. Ca(s) + 2H2O(l) ➝ Ca(OH)2(aq)+ H2(g)+ Heat
    2K(s) + 2H2O(l) ➝ 2KOH(aq) + H2(g) + Heat

Question 3.
Samples of four metals A, B, C and D were taken and added to the following solution one by one. The results obtained have been tabulated as follows.
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 1
Use the table above to answer the following questions about metals A, B, C and D.

  1. Which is the most reactive metal?
  2. What would you observe if B is added to a solution of Copper(II) sulphate?
  3. Arrange the metals A, B, C and D in the order of decreasing reactivity.

Answer:

  1. B is most reactive metal.
  2. If B is added to a solution of copper sulphate it displaces copper from copper sulphate.
  3. If metals are written in the order of decreasing reactivity it is B > A > C > D.

Question 4.
Which gas is produced when diluting hydrochloric acid is added to a reactive metal? Write the chemical reaction when iron reacts with dilute H2SO4.
Answer:
Hydrogen gas is evolved when diluting hydrochloric acid is added to a reactive metal. When iron reacts with dilute H2SO4, Iron(II) sulphate with the evolution of hydrogen gas is formed.
Fe(s) + H2SO4aq) → FeSO4(aq) + H2(g)

MP Board Solutions

Question 5.
What would you observe when zinc is added to a solution of iron(II) sulphate? Write the chemical reaction that takes place.
Answer:
Zinc is more reactive than iron. When zinc is added to iron (II) sulphate, then it will displace the iron from iron sulphate solution as shown in the following chemical reaction,
Zn(s) + FeSO4(aq) → ZnSO4(aq) + Fe(s)

Intext Questions Page No. 49

Question 1.
(i) Write the electron-dot structures for sodium, oxygen and magnesium.
(ii) Show the formation of Na2O and MgO by the transfer of electrons.
(iii) What are the ions present in these compounds?
Answer:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 2
(iii) The ions present in Na2O are Na+ and O2- ions and MgO are Mg2+
and O2- ions.

Question 2.
Why do ionic compounds have high melting points?
Answer:
Ionic compounds have high melting points because there is electrostic forces of attraction between their charges.

Intext Questions Page No. 53

Question 1.
Define the following terms:

  1. Mineral
  2. Ore
  3. Gangue

Answer:

  1. Mineral: Compounds which occur Naturally are called minerals.
  2. Ore: Metals can be obtained from minerals. These are called ores.
  3. Gangue: Ores mined from the earth are usually contaminated with large amounts of impurities such as soil, sand etc., called gangue.

Question 2.
Name two metals which are found in nature in the free state.
Answer:
The metals at the bottom of the reactivity series are mostly found in a free state. For example gold, silver, and platinum.

Question 3.
What chemical process is used for obtaining a metal from its oxide?
Answer:
Metal can be extracted from its oxide by the process of reduction.

Intext Questions Page No. 55

Question 1.
Metallic oxides of zinc, magnesium and copper were heated with the following metals.

Metal Zinc Magnesium Copper
Zinc oxide
Magnesium oxide
Copper oxide

In which cases will you find displacement reactions taking place?
Answer:

Metal Zinc Magnesium Copper
Zinc oxide No reaction Displacement No reaction
Magnesium oxide No reaction Displacement No reaction
Copper oxide Displacement Displacement No reaction

Question 2.
Which metals do not corrode easily?
Answer:
Silver and Gold are not corrode easily.

Question 3.
What are alloys?
Answer:
An alloy is a homogeneous mixture of two or more metals, or a metal and a non-metal. For example, brass is an alloy of copper and zinc.

MP Board Class 10th Science Chapter 3 Ncert Textbook Exercises

Question 1.
Which of the following pairs will give displacement reactions?
(a) NaCl solution and copper metal.
(b) MgCl2 solution and aluminium metal.
(c) FeSO4 solution and silver metal.
(d) AgNO3 solution and copper metal.
Answer:
(d) AgNO3 solution and copper metal.

Question 2.
Which of the following methods is suitable for preventing an iron frying pan from rusting?
(a) Applying grease
(b) Applying paint
(c) Applying a coating of zinc
(d) all of the above.
Answer:
(c) Applying a coating of zinc

Question 3.
An element reacts with oxygen to give a compound with a high melting point. This compound is also soluble in water. The element is likely to be:
(a) Calcium
(b) Carbon
(c) Silicon
(d) Iron
Answer:
(a) Calcium

Question 4.
Food cans are coated with tin and not with zinc because:
(a) Zinc is costlier than tin.
(b) Zinc has a higher melting point than tin.
(c) Zinc is more reactive than tin.
(d) Zinc is less reactive than tin.
Answer:
(c) Zinc is more reactive than tin.

Question 5.
You are given a hammer, a battery, a bulb, wires and a switch.

  1. How could you use them to distinguish between samples of metals and non-metals?
  2. Assess the usefulness of these tests in distinguishing between metals and non-metals.

Answer:

  1. Metals can be spread into sheets with the help of a hammer while non metals give powder. When metals are connected into circuit using battery, bulb, wires and a switch current passes through the circuit and the bulb glows.
  2. Hammer is a reliable method because no non metal can be spread into sheet.

Question 6.
What are amphoteric oxides? Give two examples of amphoteric oxides.
Answer:
Metal oxides which react with both acids as well as bases to produce salt and water are known as amphoteric oxides.
Eg: Al2O3 – Aluminium oxide
ZnO – Zinc Oxide.

MP Board Solutions

Question 7.
Name two metals which will displace hydrogen from dilute acids, and two metals which will not.
Answer:
Iron and Aluminium are more reactive than Hydrogen and displace hydrogen from dilute acids. Mercury and copper re less reactive and these do not displace hydrogen from dilute acids.

Question 8.
In the electrolytic refining of a metal M, what would you take as the anode, the cathode and the electrolyte?
Answer:
In the electrolytic refining of a metal, M:

  1. Anode → Impure metal, M.
  2. Cathode → Thin strip of pure metal, M.
  3. Electrolyte → Aqueous solution of a salt of the metal, M.

Question 9.
Pratyush took sulphur powder on a spatula and heated it. He collected the gas evolved by inverting a test tube over it, as shown in the figure below.
(a) What will be the action of gas on:

  1. Dry litmus paper?
  2. Moist litmus paper?

(b) Write a balanced chemical equation for the reaction taking place.
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 3
Answer:
(a)

  1. There will be no action on dry litmus paper.
  2. The colour of litmus paper will turn red because sulphur is a non-metal and the oxides of non-metal are acidic in nature.

(b) MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 4

Question 10.
State two ways to prevent the rusting of iron.
Answer:
Two ways to prevent the rusting or iron are
(a) Applying oil, paint and grease we can prevent rusting.
(b) By coating with zinc to iron, we can prevent using. This is called Galvanisation.

Question 11.
What type of oxides are formed when non-metals combine with oxygen?
Answer:
When non-metals are combined with oxygen then neutral or acidic oxides are formed. Examples of acidic oxides are NO2, SO2 and examples of neutral oxides are NO, CO etc.

Question 12.
Give reasons:

  1. Platinum, gold and silver are used to make jewellery.
  2. Sodium, potassium and lithium are stored under oil.
  3. Aluminium is a highly reactive metal, yet it is used to make utensils for cooking.
  4. Carbonate and sulphide ores are usually converted into oxides during the process of extraction.

Answer:
1. Platinum, gold and silver are used to make jewellery because they are very lustrous. Also, they are very less reactive, ductile and do not corrode easily.

2. Sodium, potassium, and lithium are very reactive metals and react very vigorously with air and water. Therefore, they are kept immersed in oil.

3. Though aluminium is a highly reactive metal, it is resistant to corrosion. This is because aluminium reacts with oxygen present in the air to form a thin layer of aluminium oxide. This oxide layer is very stable and prevents further reaction of aluminium with oxygen. Also, it is light in weight and a good conductor of heat.
Hence, it is used to make cooking utensils.

4. Carbonate and sulphide ores are usually converted into oxides during the process of extraction because metals can be easily extracted from their oxides rather than from their carbonates and sulphides.

Lithium oxide formula graphical representation.

Question 13.
You must have seen tarnished copper vessels being cleaned with lemon or tamarind juice. Explain why these sour substances are effective in cleaning the vessels.
Answer:
Copper reacts with moist carbon dioxide in the air and slowly tosses its shiny brown surface and gains a green coat. This green substance is basic copper carbonate. Citric acid and tartaric acid neutralise copper carbonate. Hence citric or tartaric acid are effective in cleaning the vessel.

Question 14.
Differentiate between metal and non-metal on the basis of their chemical properties.
Answer:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 5

Question 15.
A man went door to door posing as a goldsmith. He promised to bring back the glitter of old and dull gold ornaments. An unsuspecting lady gave a set of gold bangles to him which he dipped in a particular solution. The bangles sparkled like new but their weight was reduced drastically. The lady was upset but after a futile argument, the man beat a hasty retreat. Can you play the detective to find out the nature of the solution he had used?
Answer:
The solution he had used was Aqua regia. Aqua regia is a Latin word which means ‘Royal Water’. It is the mixture of concentrated hydrochloric acid and concentrated nitric acid in the ratio of 3:1. It is capable of dissolving metals like Gold and Platinum. Since the outer layer of the gold bangles is dissolved in aqua regia, so their weight was reduced drastically.

Question 16.
Give reasons why copper is used to making hot water tanks and not steel (an alloy of iron).
Answer:
Iron do not react with hot water, but reacts with steam and forms metallic oxide and Hydrogen. But copper do not reacts with water. Hence copper is used to make hot water tanks and not steel (an alloy of iron).

MP Board Class 10th Science Chapter 3 Additional Questions

MP Board Class 10th Science Chapter 3 Multiple Choice Questions

Question 1.
What kind of element is carbon?
(a) Metal
(b) Metalloid
(c) Non-metal
(d) An alloy
Answer:
(c) Non-metal

Question 2.
A metal of daily use which does not get rusted is:
(a) Steel
(b) Iron
(c) Gold
(d) Silver
Answer:
(a) Steel

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Question 3.
Liquid non-metal at room temperature:
(a) Oxygen
(b) Nitrogen
(c) Mercury
(d) Bromine
Answer:
(c) Mercury

Question 4.
Steel is primarily made up of:
(a) Fe and C
(b) Cu and C
(c) Fe and S
(d) Zn and C
Answer:
(a) Fe and C

Question 5.
Silver is coated over iron in electroplating, it represents:
(a) Silver is more reactive than Iron.
(b) Iron is more reactive than silver.
(c) Both are equally reactive
(d) None of above.
Answer:
(b) Iron is more reactive than silver.

Question 6.
Brass is an alloy of:
(a) Cu and Mn
(b) Cu and Zn
(c) Cu and Fe
(d) Cu, Fe and Zn.
Answer:
(b) Cu and Zn

Question 7.
During electrolytic refining of a metal, metal gets deposited at:
(a) Anode
(b) Cathode
(c) Solution
(d) None
Answer:
(b) Cathode

Question 8.
What basic physical property can differentiate metal and non-metal?
(a) Hardness
(b) Lustre
(c) Both (a) and (b)
(d) None
Answer:
(c) Both (a) and (b)

Question 9.
We can cut ………. metal with an ordinary knife:
(a) Sodium
(b) Carbon
(c) Gold
(d) Silver
Answer:
(a) Sodium

Question 10.
Hardest metal present in our nature is:
(a) Gold
(b) Diamond
(c) Tungsten
(d) Copper
Answer:
(c) Tungsten

Question 11.
Lustrous non-metal is:
(a) Oxygen
(b) Nitrogen
(c) Iodine
(d) Gold
Answer:
(c) Iodine

Question 12.
Iron pyrites contain which constituent other than Fe:
(a) Co
(b) Cl
(c) S
(d) Pt
Answer:
(c) S

Question 13.
When a metal reacts with water, it forms:
(i) Metal
(ii) H2
(iii) Metal hydroxide
Choose the best combination:
(a) (i) and (ii)
(b) (i) and (iii)
(c) (ii) and (iii)
(d) All
Answer:
(c) (ii) and (iii)

Question 14.
Metal forms salts when it reacts with:
(a) Acid
(b) Water
(c) Another Metal
(d) Oxygen
Answer:
(a) Acid

Question 15.
What kinds of metals are coin metals (Cu, Ag, Au)?
(a) Most reactive
(b) Non-reactive
(c) Least reactive
(d) None
Answer:
(c) Least reactive

Question 16.
What kinds of metals are noble metals?
(a) Most reactive
(b) Non-reactive
(c) Least reactive
(d) None
Answer:
(b) Non-reactive

Question 17.
Arrange the following metals in descending order of reactivity – Na, Al, Au, H:
(a) Na > Al > Au>H.
(b) H < Au < Al < Na.
(c) Au > Al > Na > H.
(d) Na > Al > H > Au.
Answer:
(b) H < Au < Al < Na.

Question 18.
When a metal reacts with oxygen, it forms:
(a) Hydrated metals
(b) Metal oxides
(c) Non-metals
(d) Oxygen
Answer:
(b) Metal oxides

Question 19.
Which metal violently reacts with cold water?
(a) Cu and Ag
(b) Au and Ag
(c) K and Na
(d) Hg
Answer:
(c) K and Na

Question 20.
Metals that do not react with water at all are:
(a) Alkali metal
(b) Alkaline eater
(c) Lanthanides
(d) Coin metals
Answer:
(d) Coin metals

Question 21.
Aluminium develops a thin layer of oxide when exposed to air, this process is called:
(a) Anodization
(b) Amalgamation
(c) Corrosion
(d) Rancidity
Answer:
(c) Corrosion

Question 22.
When water reacts with metal, which gas is evolved in the reaction?
(a) Oxygen
(b) Hydrogen
(c) Nitrogen
(d) Sulphur dioxide
Answer:
(b) Hydrogen

Question 23.
What will be the missing product of the following reaction?
Ca(s) + 2H2O → Ca(OH)2(aq) + ….
(a) O2
(b) CaO
(c) H2
(d) O3
Answer:
(c) H2

Question 24.
Which solution or reagent can dissolve gold and platinum?
(a) Conc. H2SO4
(b) Conc. HCl
(c) Conc. HNO3
(d) Aqua regia
Answer:
(d) Agua regia

Question 25.
Benchmark element of the reactivity series is –
(a) Au
(b) H
(c) Na
(d) Fe
Answer:
(b) H

Question 26.
Elements more electropositive in nature are:
(a) Metals
(b) Non-metals
(c) Metalloids
(d) None
Answer:
(a) Metals

Question 27.
Ionic solids are:
(a) Solid and hard
(b) Having high boiling and melting point
(c) Both (a) and (b)
(d) None
Answer:
(c) Both (a) and (b)

Question 28.
Which one of the following represents electron dot structures of sodium?
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 6
Answer:
(d) M

Question 29.
Carefully observe the given diagram below:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 7
Choose the best compound to show above electron-dot structure bonding:
(a) NaCl
(b) MgCl2
(c) H2O
(d) None
Answer:
(c) H2O

Question 30.
Ore of metals with high reactivity can be separated by:
(a) Roasting
(b) Calcination
(c) Electrolysis
(d) Reduction process
Answer:
(c) Electrolysis

Question 31.
Thermionic reactions are:
(a) Displacement reactions of highly exothermic nature
(b) Endothermic reaction
(c) Both (a) and (b)
(d) Electrolytic reduction reactions.
Answer:
(c) Both (a) and (b)

Question 32.
Rusting is an example of:
(a) Electrolysis
(b) Calcination
(c) Corrosion
(d) None
Answer:
(c) Corrosion

Question 33.
Which compounds of metals are basic in nature?
(a) Hydrides
(b) Chlorides
(c) Cyanides
(d) Oxides
Answer:
(d) Oxides

Question 34.
When metal reacts with water which gas is liberated?
(a) Oxygen
(b) Hydrogen
(c) Metal oxide
(d) All of these
Answer:
(b) Hydrogen

Question 35.
Which of the following gas is produced when dilute H2SO4 reacts with iron?
(a) Oxygen gas
(b) Hydrogen gas
(c) Both
(d) None of these
Answer:
(b) Hydrogen gas

Question 36.
What happen when Zinc is added to iron (II) sulphate Zn(s) + Fe(s):
(a) ZnSO2 + FeO2
(b) ZnSO2(aq) + Fe(s)
(c) ZnFe + 2Ov
(d) None
Answer:
(b) ZnSO2(aq) + Fe(s)

Question 37.
Choose the best reason from the following for why ionic compounds have high melting points:
(a) Electrostatic forces
(b) Low magnetic forces
(c) (a) and (b) both
(d) None of these
Answer:
(a) Electrostatic forces

Question 38.
Which of the following is gangue?
(a) Water
(b) Metals
(c) Rocks
(d) CO2
Answer:
(c) Rocks

Question 39.
Sodium, potassium and lithium are:
(a) Very less reactive
(b) More reactive and react with air
(c) Easily converted to oxides
(d) None
Answer:
(b) More reactive and react with air

Question 40.
Choose from following ways to prevent the rusting of iron:
(a) Oiling
(b) Greasing
(c) Galvanisation
(d) All (a), (b) and (c)
Answer:
(d) All (a), (b) and (c)

Fill in the blanks:

  1. Metal generally give ……………Oxides when dissolved in water.
  2. Li, Na and K are …………… metals.
  3. K and Na catch fire when exposed to ……….
  4. Ag and Au ………….. react with water at all.
  5. Aluminium is positioned ……………. hydrogen in reactivity series.
  6. …………………….. is called royal water.
  7. Metal is displaced from their ……………… or …………….. form.
  8. Metal gives salt when it reacts with…….
  9. Hydrogen is not liberated when metal reacts with ……….. acid.
  10. Ionic compounds are ……………………….. in water.
  11. Ionic compounds are hard but …………….. in nature hence break into pieces when pressure is applied.
  12. Earth’s …………….. is main source of metal.
  13. Minerals containing metals are called ……………….
  14. Sulphide ores contain metals with ………………. reactivity.
  15. Carbonate ore is converted to their metal oxides by the process of …………
  16. Electrolysis is done to the ores of ……………….. reactivity to obtain pure metal.
  17. Impurities such as soil, sand etc. are called …………… in the ore.
  18. Bronze is a homogeneous mixture of ……………… and …………….

Answers:

  1. basic
  2. soft
  3. air
  4. do not
  5. above
  6. Aqua regia
  7. solution, molten
  8. alkali
  9. nitric acid
  10. soluble
  11. brittle
  12. crust
  13. Ores
  14. low
  15. Calcination
  16. high
  17. gangue
  18. copper, tin

MP Board Class 10th Science Chapter 3 Very Short Answer Type Questions

Question 1.
Which one is the most abundant element in our earth crust?
Answer:
Oxygen.

Question 2.
Write the names of two diatomic gaseous elements.
Answer:

  1. Oxygen, O2.
  2. Nitrogen, N2.

Question 3.
Is any metal known in gaseous form, in its natural conditions?
Answer:
No.

Question 4.
Name two naturally occurring soft metals.
Answer:
Sodium, magnesium.

Question 5.
Which metal shows poor conductivity?
Answer:
Tungsten [W] or Bismuth (Bi].

Question 6.
Which non-metal conducts electricity?
Answer:
Graphite.

Question 7.
Which metal forms amphoteric oxides when reacted with oxygen?
Answer:
Aluminium, Zinc, etc.

Question 8.
Draw an electron dot structure of SO2.
Answer:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 8

Question 9.
Give an example of metal oxide’s reaction with water.
Answer:
All metal oxides do not react with water but some metal oxides react with water to give alkali. For example, Na and K.
Na2O(s) + H2O(l) → 2NaOH(aq)

Question 10.
Give an example of amphoteric oxides.
Answer:
Al2O3.

Question 11.
Give a term to the following:
A process in which a carbonate ore is heated at very high temperature to get metal oxide.
Answer:
Roasting.

MP Board Solutions

Question 12.
How less reactive metal oxides are reduced?
Answer:
Less reactive metal oxides are reduced by reducing agents like aluminium.

Question 13.
Give a reaction in which metal hydroxide is formed.
Answer:
‘Na’ directly reacts with hydrogen gas and forms sodium hydride.
2Na + H2 → 2NaH.

Question 14.
Give an example for each an alloy and amalgam.
Answer:

  1. Alloy – Steel.
  2. Amalgam – Sodium Amalgam. (Alloy of mercury and sodium).

Question 15.
What do we call the removal of gangue from the ore?
Answer:
Enrichment of ores.

Question 16.
What is the place of less reactive metals in metal reactivity series?
Answer:
Less reactive metals are arranged at the bottom of the series.

Question 17.
Name two metals which can replace iron in electroplating.
Answer:
Gold and silver.

Question 18.
What kind of compounds has the highest melting and boiling points?
Answer:
Ionic compounds.

Question 19.
What corrodes copper?
Answer:
Moist carbon-dioxide corrodes copper.

Question 20.
Iron pillar of Qutub Minar, Delhi is prevented against rusting. Why?
Answer:
The corrosion-resistant nature is due to protective film at the non-rust interface because of high phosphorus content.

Question 21.
Why every metal has a different rate of reactivity with the same chemical or reactant? (HOTS)
Answer:
Every metal has different electronic configuration and different electro-positivity or ion forming capability, so metal reactivity differs from each other.

MP Board Class 10th Science Chapter 3 Short Answer Type Questions

Question 1.
Why can we draw gold to thin wire form?
Answer:
Gold is a metal and metal has the ability to be drawn in very thin wire or sheets without being broken, this property of a metal is called ductility. Gold is the most ductile metal.

Question 2.
What is a semiconductor?
Answer:
There are some elements known to us which are neither metal nor nonmetals, they alter their properties with the different physical and chemical environment provided. Normally, they behave as non-metals and show insulation property but when provided with extra energy, they start behaving as metal and show conduction. Example: Silicon.

Question 3.
What do you know about amphoteric oxides?
Answer:
Metal oxides which produce salts in both cases, either react with acid or base are termed amphoteric oxides.

Question 4.
What is gangue? Why is it important to remove them before the extraction process?
Answer:
Impurities associated with ores such as sand, soil etc. are called gangue. The original compound becomes bulkier with their presence and extraction of pure metal consumes lots of energy and time. Hence, gangue is removed before the extraction process.

Question 5.
Give an example of displacement reaction used for extraction of metal from its oxide.
Answer:
Highly reactive metals are used to reduce metal oxide to the metal in an electrolytic displacement reaction.

Example:
3MnO2(s) + 4Al(s) → 3Mn(l) + 2Al2O3
Here, aluminium helps in extraction of pure Mn.

Question 6.
Explain the reactivity series of metals in brief.
Answer:
All metals are arranged in an order on the basis of reactivity. This series represents displacing ability of one metal to displace other from its compound form when it undergoes an electrolytic displacement reaction.

Question 7.
How metal and non-metal interact to form salts?
Answer:
When metal and non-metal interact, they form ionic compounds. Metal tends to lose an electron and form positive ion while non-metal forms a negative ion and a bond is formed due to strong electrostatic forces of attraction among two ions.

Question 8.
How can we protect metals corrosion?
Answer;
Prevention from corrosion can be done by painting, oiling, greasing, galvanizing and electroplating etc. on the metal. All these processes stop the interaction of outer layer of air with metal.

Question 9.
What is galvanisation?
Answer:
Galvanisation is a protection technique against metal corrosion. In this process, metal is coated with a thin layer of zinc.

Question 10.
Why pure gold is mixed with silver or copper while making jewellery?
Answer:
Pure gold metal is very soft. So, jewellery will be brittle if used in the same form. Impurity of other metal in nominal percentage makes the metal harder and ready to use and it does not appear very different than the pure one.

Question 11.
What is an amalgam?
Answer:
When one component of any alloy is mercury it is called amalgam.

Question 12.
Why alloys are not used as conductance medium of electricity?
Answer:
Alloys are not used as conductance medium of electricity because of electrical conductivity and melting point of an alloy is lesser than the pure metal.

Question 13.
Why cooking utensils are made up of metals and their handle or knobs with non-metal materials? (HOTS)
Answer:
Metals are good conductors of heat. So, when utensil made of metals are pulled over a flame, they spread heat energy evenly and food gets cooked properly. But handles or knobs are made of non-metals because they are bad conductors of heat and give us ease to work with highly heated utensils so that we can hold them easily while cooking.

Question 14.
Why ageing is a natural phenomenon? (HOTS)
Answer:
The oxygen of the atmosphere react with the outer skin of body fat and carbohydrate, hence continuously degrade it. Similarly inside the body for the energy need, carbohydrate and body fat undergo oxidation process and get continuously decomposed which causes ageing, so ageing is a natural phenomenon.

Question 15.
Neha went to market with her grandmother to purchase some cooking utensils for their family’s wedded couple. Grandmother started buying cooking utensils made of copper and iron but Neha suggested her to take utensils made of steel. (VBQ)

  1. How is steel better than copper?
  2. What kind of corrosion occurs in Cu?
  3. What values does Neha show in this act?

Answer:

  1. Steel is an alloy. It does not get corroded or spoiled with time and it is cheap too.
  2. Cu forms its oxide when it comes in contact with oxygen and turns green in colour.
  3. Neha shows awareness about metal of more usability and durability.

MP Board Class 10th Science Chapter 3 Long Answer Type Questions

Question 1.
Draw line diagrams for the steps involved in the extraction of metals.
Answer:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 9

Question 2.
Write short notes on the following:

  1. Roasting
  2. Calcination
  3. Mineral
  4. Anodising

Answer:
1. Roasting:
To extract metal of medium reactivity from its sulphide ore, the ore is heated strongly in the presence of air and this extraction process is called roasting.

2. Calcination:
When medium reactivity metal is extracted from its carbonate ore by heating moderately, the process is known as calcination.

3. Mineral:
Naturally occurring compounds of metals and non-metals in various combinations are called minerals.

4. Anodising:
When aluminium is exposed to air it develops a thick layer of oxides and turns green in colour.

Question 3.
Rupam was painting the garden chair and other pots made with iron at his home, his younger brother asked him why he is doing so and wasting his time:

  1. What is your view about his work?
  2. What are other methods to protect the metal from corrosion?
  3. What values does Rupam express in this way?

Answer:

  1. Rupam was painting the garden’s metal objects to protect them from corrosion.
  2. Oiling, euchre plating, anodizing etc. are other methods.
  3. Rupam was doing a great job protecting the metal from degrading because it can give a long life to objects and save money.

MP Board Class 10th Science Chapter 3 Textbook Activities

Class 10 Science Activity 3.1 Page No. 37

  1. Take samples of iron, copper, aluminium and magnesium. Note the appearance of each sample.
  2. Clean the surface of each sample by rubbing them with sandpaper and note their appearance again.

Observations:
Iron, copper, aluminium and magnesium have lustre which clearly appears on rubbing them with sandpaper.

Class 10 Science Activity 3.2 Page No. 37

  1. Take small pieces of iron, copper, aluminium, and magnesium. Try to cut these metals with a sharp knife and note your observations.
  2. Hold a piece of sodium metal with a pair of tongs.

Caution:

  1. Always handle sodium metal with care. Dry it by pressing between the folds of a filter paper.
  2. Put it on a watch-glass and try to cut it with a knife.
  3. What do you observe?

Observations:
Only Na and Mg are soft metals and we can cut them with a knife but other metals are hard. de

Class 10 Science Activity 3.3 Page No. 38

  1. Take pieces of iron, zinc, lead and copper.
  2. Place any one metal on a block of iron and strike it four or five times with a hammer.
  3. What do you observe?
  4. Repeat with other metals.
  5. Record the change in the shape of these metals.

Observations:
Fe, Zn, Pb and Cu are metals and show proper malleability when hammered.

Class 10 Science Activity 3.4 Page No. 38

List the metals whose wires you have seen in daily life.

Observations:
Lead cannot be drawn to a thin wire. But Fe, Cu and Al are ductile.

Class 10 Science Activity 3.5 Page No. 38

  1. Take an aluminium or copper wire. Clamp this wire on a stand, as shown in the figure.
  2. Fix a pin to the free end of the wire using wax.
  3. Heat the wire with a spirit lamp, candle or a burner near the place where it is clamped.
  4. What do you observe after some time?
  5. Note your observations. Does the metal wire melt?

Observations:

  1. The pin fell down because heat is being conducted.
  2. The metal wire does not melt.

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 10

Class 10 Science Activity 3.6 Page No. 39

  1. Set up an electric circuit as shown in the figure.
    Place the metal to be tested in the circuit between terminals A and B as shown.
  2. Does the bulb glow? What does this indicate?

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 11

Observations:
Yes, the bulb glows as metals are a good conductor of heat and electricity.

Class 10 Science Activity 3.7 Page No. 39

  1. Collect samples of carbon (coal or graphite), sulphur and iodine.
  2. Take samples of iron, copper, aluminium and magnesium. Note the appearance of each sample.
  3. Clean the surface of each sample by rubbing them with sandpaper and note their appearance again.
  4. Take small pieces of iron, copper, aluminium, and magnesium. Try to cut these metals with a sharp knife and note your observations.
  5. Hold a piece of sodium metal with a pair of tongs.

Caution:

  1. Always handle sodium metal with care. Dry it by pressing between the folds of a filter paper.
  2. Put it on a watch-glass and try to cut it with a knife.
  3. What do you observe?
  4. Take pieces of iron, zinc, lead and copper.
  5. Place any one metal on a block of iron and strike it four or five times with a hammer.
  6. What do you observe?
  7. Repeat with other metals.
  8. Record the change in the shape of these metals.
  9. Set up an electric circuit as shown in the figure.
  10. Place the metal to be tested in the circuit between terminals A and B as shown.
  11. Does the bulb glow? What does this indicate?

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 12

Observations:

  1. Yes, the bulb glows as metals are a good conductor of heat and electricity.
  2. List the metals whose wires you have seen in daily life.
  3. Iron, copper, aluminium and magnesium have lustre which clearly appears on rubbing them with sandpaper.
  4. Only Na and Mg are soft metals and we can cut them with a knife but other metals are hard.
  5. Fe, Zn, Pb and Cu are metals and show proper malleability when hammered.

Class 10 Science Activity 3.8 Page No. 40

  1. Take a magnesium ribbon and some sulphur powder.
  2. Burn the magnesium ribbon. Collect the ashes formed and dissolve them in water.
  3. Test the resultant solution with both red and blue litmus paper.
  4. Is the product formed on burning magnesium acidic or basic?
  5. Now burn sulphur powder. Place a test tube over the burning sulphur to collect the fumes produced.
  6. Add some water to the above test tube and shake.
  7. Test this solution with blue and red litmus paper.
  8. Is the product formed on burning sulphur acidic or basic?
  9. Can you write equations for these reactions?

Observations:
(i)
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 13
Result: Oxide of metal is basic.
(ii)
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 14
Result: Oxide of non-metal is acidic.

Class 10 Science Activity 3.9 Page No. 41

Caution:

  1. The following activity needs the teacher’s assistance. It would be better if students wear eye protection.
  2. Hold any of the samples taken above with a pair of tongs and try burning over a flame. Repeat with the other metal samples.
  3. Collect the product if formed.
  4. Let the products and the metal surface cool down.
  5. Which metals burn easily?
  6. What flame colour did you observe when the metal burnt?
  7. How does the metal surface appear afterburning?
  8. Arrange the metals in the decreasing order of their reactivity towards oxygen.
  9. Are the products soluble in water?

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 15
Only Zn and Al form amphoteric oxide (in nature) other metals forms basic oxides.

Class 10 Science Activity 3.10 Page No. 42

Caution:

  1. This Activity needs the teacher’s assistance.
  2. Collect the samples of the same metals as in Activity 3.9.
  3. Put small pieces of the samples separately in beakers half-filled with cold water.
  4. Which metals reacted with cold water?
  5. Arrange them in the increasing order of their reactivity with cold water.
  6. Did any metal produce fire on water?
  7. Does any metal start floating after some time?
  8. Put the metals that did not react with cold water in beakers half-filled with hot water.
  9. For the metals that did not react with hot water, arrange the apparatus as shown in the figure and observe their reaction with steam.
  10. Which metals did not react even with steam?
  11. Arrange the metals in the decreasing order of reactivity with water.

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 16

Observations:

  1. Metals which reacted with cold water → Na, K and Ca.
  2. Metals which produced fire → Na and K.
  3. Metals which started floating after some time → Ca and Mg.
  4. Metals which reacted with hot water → Mg.
  5. Metals which did not react with steam also → Pb, Cu, Ag and Au.
  6. Arranging reactivity of metals in ascending order:
    K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe

Class 10 Science Activity 3.11 Page No. 44

Caution:

  1. Do not take sodium and potassium as they react vigorously even with cold water.
  2. Put the samples separately in test tubes containing dilute hydrochloric acid.
  3. Suspend thermometers in the test tubes, so that their bulbs are dipped
    in the acid.
  4. Observe the rate of formation of bubbles carefully.
  5. Which metals reacted vigorously with dilute hydrochloric acid?
  6. With which metal did you record the highest temperature?
  7. Arrange the metals in the decreasing order of reactivity with dilute acids.
    MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 17
  8. Collect all the metal samples except sodium and potassium again. If the samples are tarnished. rub them clean with sandpaper.

Class 10 Science Activity 3.12 Page No. 44-45

  1. Take a clean wire of copper and an iron nail.
  2. Put the copper wire in a solution of iron sulphate and the iron nail in a solution of copper sulphate taken in test tubes figure.
    MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 18
  3. Record your observations after 20 minutes.
  4. In which test tube did you find that a reaction has occurred? On what basis can you say that a reaction has actually taken place?
    MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 21
  5. Only Zn and Al form amphoteric oxide (in nature) other metals forms basic oxides.
  6. Metals which reacted with cold water → Na, K and Ca.
  7. Metals which produced fire → Na and K.
  8. Metals which started floating after some time → Ca and Mg.
  9. Metals which reacted with hot water → Mg.
  10. Metals which did not react with steam also → Pb, Cu, Ag and Au.
  11. Arranging reactivity of metals in ascending order:
    K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe
    MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 19
  12. Write a balanced chemical equation for the reaction that has taken place.
  13. Name the type of reaction.

Observations:

  1. In these above observations show iron is more reactive than copper.
    Fe(s) + CuSO4(aq) → Cu(s) + FeSO4(aq)
  2. In the given set-up (A) and (B) reactivity of metals is as follows:
    MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 20

Class 10 Science Activity 3.13 Page No. 48

  1. Taķe samples of sodium chloride, potassium iodide, barium chloride or any other salt from the science laboratory.
  2. What is the physical state of these salts?
  3. Take a small amount of a sample on a metal spatula and heat directly on the flame figure. Repeat with other samples.

Observations:
MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 21

  1. What did you observe? Did the samples impart any colour to the flame? Do these compounds melt?
  2. Try to dissolve the samples in water, petrol and kerosene. Are they soluble?
  3. Make a circuit as shown in figure (testing the conductivity of a salt solution) and insert the electrodes into a solution of one salt. What did you observe? Test the other salt samples too in this manner.
  4. What is your inference about the nature of these compounds? Sodium chloride, potassium iodide and barium chloride give the following observation:

Class 10 Science Activity 3.14 Page No. 53

  1. Take three test tubes and place clean iron nails in each of them.
  2. Label these test tubes A, B and C. Pour some water in test tube A and cork it.
  3. Pour boiled distilled water in test tube B, add about 1 ml of oil and cork it. The oil will float on water and prevent the air from dissolving in the water.
  4. Put some anhydrous calcium chloride in test tube C and cork it. Anhydrous calcium chloride will absorb the moisture, if any, from the air. Leave these test tubes for a few days and then observe (Figure).

MP Board Class 10th Science Solutions Chapter 3 Metals and Non-metals 22

Observations:
Set of 3 test tube A, B and C are given below:

  1. Test tube A: Iron nail became rusty.
    Presence of water and air in test-tube A: Air and water are both exposed.
  2. Test tube B: Iron nail do not become rusty.
    Presence of water and air in test-tube B: Due to layer of oil, air does not expose.
  3. Test tube C: Iron nail do not become rusty.
    Presence of water and air in test-tube C: Air and water both are not present.

Conclusion:

  1. Test-tube A: Iron nail become rusty due to exposure to air and water.
  2. Test-tube B: Iron nail exposed with water but not with air, so the iron nail does not rust.
  3. Test-tube C: Iron nail not exposed to air and water, so iron nail do not rust.

So, air and water both are required for an iron nail to rust.

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