MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 11 बीजगणित Ex 11.3

MP Board Class 6th Maths Solutions Chapter 11 बीजगणित Ex 11.3

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 253-254

प्रश्न 1.
आप तीन संख्या 5, 7 और 8 से संख्याओं वाले (चर नहीं) जितने व्यंजक बना सकते हैं बनाइए। एक संख्या एक से अधिक बार प्रयोग नहीं की जानी चाहिए। केवल योग, व्यवकलन (घटाना) और गुणन का ही प्रयोग करें। (संकेत : तीन सम्भावित व्यंजक 5 + (8 – 7), 5 – (8 – 7) और 5 x 8 + 7 हैं। अन्य व्यंजक बनाइए।)
हल :
अन्य सम्भावित व्यंजक
(i) 5 + (7 + 8)
(ii) 7 x 5 + 8
(iii) (8 – 5) x 7
(iv) (7 – 5) x 8
(v) (5 x 7) – 8
(vi) (8 – 7) + 5
(vii) 8 – 5 + 7
(viii) (8 x 7) + 5

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-से व्यंजक केवल संख्याओं वाले व्यंजक ही हैं ?
(a) y + 3
(b) 7 × 20 – 8
(c) 5 (21 – 7) + 7 × 2
(d) 5
(e) 3x
(f) 5 – 5n
(g) 7 × 20 – 5 × 10 – 45 + P
उत्तर-
व्यंजक (c) और (d) में कोई चर नहीं है।
अतः व्यंजक (c) और (d) केवल संख्याओं वाले व्यंजक है।

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प्रश्न 3.
निम्न व्यंजकों को बनाने में प्रयुक्त संक्रियाओं (योग, व्यवकलन, गुणन, विभाजन) को पहचानिए (छाँटिए) और बताइए कि ये व्यंजक किस प्रकार बनाए गए हैं ?
(a) z + 1, z – 1, y + 17, y – 17
(b) 17y, \(\frac { y }{ 17 }\), 5z
(c) 2y + 17, 2y – 17
(d) 7m, – 7m + 3, – 7m – 3.
हल:
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प्रश्न 4.
निम्नलिखित स्थितियों के लिए व्यंजक दीजिए:
(a) p में 7 जोड़ना
(b) p में से 7 घटाना
(c) p को 7 से गुणा करना
(d) p को 7 से भाग देना
(e) – m में से 7 घटाना
(f) – p को 5 से गुणा करना
(g) – p को 5 से भाग देना
(h) p को – 5 से गुणा करना
उत्तर-
व्यंजक
(a) p + 7
(b) p – 7
(c) 7p
(d) \(\frac { p }{ 7 }\)
(e) – m – 7
(f) 5 (-p) = – 5p
(g) \(\frac { -p }{ 5 }\)
(h) – 5p

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित स्थितियों के लिए व्यंजक दीजिए:
(a) 2m में 11 जोड़ना
(b) 2m में से 11 घटाना
(c) y के 5 गुने में 3 जोड़ना
(d) y के 5 गुने में से 3 घटाना
(e) y का – 8 से गुणा
(f) y को – 8 से गुणा करके परिणाम में 5 जोड़ना
(g) y को 5 से गुणा करके परिणाम को 16 में से घटाना
(h) y को -5 से गुणा करके परिणाम को 16 में जोड़ना
उत्तर-
व्यंजक
(a) 2m + 11
(b) 2m – 11
(c) (5 × y) + 3 = 5y + 3
(d) (5 × y) – 3 = 5y – 3.
(e) y × (-8) = – 8y
(f) y × (-8) + 5 = – 8y + 5
(g) 16 – (5 × y) = 16 – 5y
(h) 16 + [y × (-5)] = 16 +(-5y) = – 5y + 16

प्रश्न 6.
(a) t और 4 का प्रयोग करके व्यंजक बनाइए। एक से अधिक संख्या संक्रिया का प्रयोग न करें। प्रत्येक व्यंजक में t अवश्य होना चाहिए।
(b) y, 2 और 7 का प्रयोग करके व्यंजक बनाइए। प्रत्येक व्यंजक में y अवश्य होना चाहिए। केवल दो संख्या संक्रियाओं का प्रयोग करें। ये भिन्न-भिन्न होनी चाहिए।
हल :
(a) t और 4 से बनने वाले व्यंजक t + 4, t – 4, 4t, \(\frac { t }{ 4 }\), 4 – t, \(\frac { 4 }{ t }\)

(b) 1, 2 और 7 से बनने वाले व्यंजक
2y + 7, 2y – 7, 7y + 2, 7y – 2, \(\frac { y }{ 2 }\) + 7, \(\frac { y }{ 7 }\) – 2, ………

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MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 15 श्रेष्ठतमं कार्यम्

MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 15 श्रेष्ठतमं कार्यम् (कथा)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 15 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) कुण्डलः कः आसीत? (कुण्डल कौन था?)
उत्तर:
वृद्धः ब्राह्मणः। (वृद्ध ब्राह्मण था।)

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(ख) कुण्डलस्य पुत्रस्य नाम किम्? (कुण्डल के पुत्र का क्या नाम था?)
उत्तर:
सुकर्मा। (सुकर्मा)।।

(ग) कस्य प्रभावेण प्राणिनः जातिवैरम् परित्यज्य आनन्देन निवसन्ति स्म? (किसके प्रभाव से जीव-जाति, बैर, त्याग कर आनंदपूर्वक रहते हैं?)
उत्तर:
पिप्पलस्य। (पिप्पल के।)

(घ) कः सारसरूपं धृत्वा पिप्पलस्य समीपं गतवान्? (कौन सारस का रूप धारण कर पिप्पल के पास गया?)
उत्तर:
पितामहः ब्रह्मा। (पितामह ब्रह्मा।)

(ङ) वरम प्राप्य पिप्पलः कीदृशः जातः?(वरदान प्राप्त कर पिप्पल किस तरह हो गया?)
उत्तर:
अहङ्कारी। (अहंकारी।)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) कः महान् पितृभक्तः आसीत्? (महान पितृभक्त कौन था?)
उत्तर:
सुकुर्मा महान् पितृभक्तः आसीत्। (सुकर्मा महान पितृभक्त था।)

(ख) पिप्पलः कं वरं याचितवान्? (पिप्पल कौन-सा वरदान माँगा?)
उत्तर:
पिप्पलः अशेषं विश्वं मम अधीन भवतु वरं याचितवान्। (पिप्पल ने वरदान माँगा कि पूरा विश्व मेरे अधीन हो जाये।)

(ग) सगर्वं पिप्पलं वीक्ष्य ब्रह्मा किं निश्चितवान्? (पिप्पल को घमण्डी जानकर ब्रह्मा ने क्या निश्चय किया?)
उत्तर:
सगर्वं पिप्पलं वीक्ष्य ब्रह्मा पिप्पलस्य गर्वः निवारणीय। (पिप्पल को घमण्डी जानकर ब्रह्मा ने पिप्पलस्य के गर्व को दूर करने का निश्चय किया।)

(घ) केन प्रकारेण पिप्पलस्य गर्वः अपगतः? (किस तरह से पिप्पल का घमण्ड दूर हो गया?)
उत्तर:
सुकर्मणः वचनं श्रुतवतः पिप्पलस्य गर्वः अपगतः। (सुकर्मा के वचनों को सुनकर पिप्पल का घमण्ड दूर हो गया।)

(ङ) कस्य उपरि देवाः पुष्पवृष्टिं कृतवन्तः? (किसके ऊपर देवों ने फूलों की वर्षा की?)
उत्तर:
सुकर्मणः उपरि देवाः पुष्पवृष्टिं कृतवन्तः। (सकर्मा के ऊपर देवों ने फलों की वर्षा की।)

(च) पाठमालक्ष्य श्रेष्ठतमं कार्यं किमस्ति? (पाठ के अनुसार श्रेष्ठ कार्य क्या है?)
उत्तर:
पाठमालक्ष्य श्रेष्ठतमं कार्यं पित्रोः सेवायाः श्रेष्ठतमं। (पाठ के अनुसार श्रेष्ठ कार्य माता-पिता की सेवा करना ही है।)

प्रश्न 3.
अधोलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत (निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखो)
(क) सुकर्मा कथं पित्रोः सेवां करोति स्म? (सुकर्मा किस तरह से माता-पिता की सेवा करता था?)
उत्तर:
सुकर्मा पित्रोः स्नानं कारयति, रुचिकरमं पाकं कृत्वा व्यजनेन वीजयति इदृशं सेवां करोति स्म। (सुकर्मा माता-पिता को स्नान कराता था, रुचिकर भोजन पकाकर खिलाता था तथा पंखे से हवा करके इस तरह सेवा करता था।)

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(ख) पिप्पलस्य गर्वापनयनाय पितामहः किंमुक्तवान्? (पिप्पत के घमण्ड को दूर करने के लिये ब्रह्मा ने क्या किया?)
उत्तर:
पिप्पलस्य गर्वापनयनाय पितामहः सारसरूपं धृत्वा पिप्पलस्य समीपम् अगच्छत् अवदच्च। महत् तपः कृत्वा अपि भवान् ज्ञानं न लब्धवान्। (पिप्पल के घमण्ड को दूर करने के लिये पितामह ब्रह्मा ने सारस का रूप धारण कर पिप्पल से बोले-बहुत अधिक तपस्या करके भी आप ज्ञान को प्राप्त नहीं कर सके।)

(ग) श्रेष्ठतम कार्यमिति पाठस्य आशयः कः? (श्रेष्ठतम कार्य नामक पाठ का आशय क्या है?)
उत्तर:
श्रेष्ठतं कार्यमिति पाठस्य आशयः पित्रोः सेवायाः श्रेष्ठतम् अन्यत् कार्य नास्ति। (श्रेष्ठतम कार्य नामक पाठ का आशय है कि माता-पिता की सेवा ही श्रेष्ठ कार्य है’अन्य दूसरा कोई कार्य श्रेष्ठ नहीं है।)

प्रश्न 4.
उचितशब्दैः रिक्तस्थानपूर्तिं कुरुत
(अहमेव, तपः, पितृभक्तः, विनयशीलः, पिप्पलः)
(क) कुण्डलस्य पुत्रः सुकर्गा महान् पितृभक्तः
(ख) वरप्राप्त्या पिप्पलः अहङ्कारी जातः।।
(ग) सः आश्रमे तिष्ठन् घोरं तपः आचरति।
(घ) अहमेव सर्वश्रेष्ठः इति सः चिन्तितवान्।
(ङ) सः विनयशीलः सञ्जातः।

प्रश्न 5.
निम्नलिखितशब्दानां पर्यायशब्दान् लिखत
(क) पुत्रः – वत्सः।
(ख) इन्द्रः – महेन्द्रः।
(ग) निशा – रात्रिः।
(घ) माता – जननी।
(ङ) पिता – जनकः।

प्रश्न 6
अधोलिखितपदानां विभक्तिं वचनं च लिखत
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प्रश्न 7.
अधोलिखितपदानि संस्कृतवाक्येषु प्रयुज्यन्ताम्
(क) परित्यज्य – बुद्धः पितरौ परित्यज्य वनं गतवान्।
(ख) तपस्वी – सुकर्मा महान् तपस्वी आसीत्।
(ग) पितभक्तः – सुकर्मा महान पितृभक्तः आसीत्।
(घ) सर्वश्रेष्ठः – पितृ सेवाया सर्वश्रेष्ठः।
(ङ) कृतवान् – पिप्पलः कठोरमं तपः कृतवान्।

प्रश्न 8.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्धवाक्यानां समक्षं “न” इति लिखत
(क) कुण्डलः वेदशास्त्रज्ञः आसीत्।
(ख) पिप्पलः वरप्राप्त्या निरभिमानी जातः।
(ग) इन्द्रः सारसरूपं धृत्वा पिप्पलस्य समीपं गतवान।
(घ) सेवायाः श्रेष्ठतमम् अन्यत् कार्यं नास्ति।
(ङ) सुकर्मा आश्रमे तिष्ठन घोरं तपः आचरति।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित वाक्येषु रेखाङ्कितानि सर्वनाम पदानि कस्य स्थाने प्रयुक्तानि? पाठम् आधृत्य लिखत
(क) अहमेव सर्वश्रेष्ठः इति सः चिन्तितवान्।
उत्तर:
पिप्पलः स्थाने सः प्रयुक्तः।

(ख) पित्रो. सेवायामेव तस्य सर्वः अपि समयः व्ययित भवति।
उत्तर:
सुकर्मा स्थाने तस्य प्रयुक्तः।

(ग) तस्य गर्वः अपि अपगतः।
उत्तर:
पिप्पलस्य स्थाने तस्य प्रयुक्तः।

(घ) भवतां कथं एतादृशं ज्ञानं सम्पादितवान्।
उत्तर:
सुकर्मा स्थाने भवतां प्रयुक्तः।

(ङ) सन्तुष्टः देवाः तस्य उपरि पुष्पवृष्टिं कृतवन्तः।
उत्तर:
सुकर्मा स्थाने तस्य प्रयुक्तः।

प्रश्न 10.
अधोलिखितपदानां सन्धिं सन्धिविच्छेदं च कृत्वा सन्धि नाम लिखत
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प्रश्न 11.
अधोलिखितानां शब्दानां समास विग्रहं कुरुत
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 15 श्रेष्ठतमं कार्यम् img-3

श्रेष्ठतमं कार्यम् पाठ-सन्दर्भ/प्रतिपाद्य

कथा के माध्यम से नीति, धर्म, त्याग, सेवा, परोपकारादि भावों का शिक्षण संस्कृत साहित्य में बहुत पुराने समय से ही चलता आ रहा है। वैदिक काल से ही गद्य साहित्य में कथा-विधा का प्रचार-प्रसार एवं लेखन निरंतर आज तक चलता आ रहा है। यहाँ संभाषण संदेश से संकलित यह बाल मनोविनोदिनी कथा प्रस्तुत है।

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श्रेष्ठतमं कार्यम् पाठ का हिन्दी अर्थ

1. कुण्डलः-कश्चन् सदाचारी वृद्धः ब्राह्मणः। सः वेदशास्त्रज्ञः आसीत्। कुण्डलस्य पुत्रः सुकर्मा महान् पितृभक्तः। सः पितुः सकाशादेव वेदशास्त्रयोः अध्ययनं करोति स्म। श्रद्धया मातुः पितुश्च सेवां करोति स्म।

सुकर्मा ‘मातृदेवो भव’ ‘पितृदेवो भव’ इति वचनम् अव्यवधानेन पालयति स्म। प्रतिदिनं नदीतेः जलम् आनीय पित्रोः स्नानं कारयति। समये रुचिकरम् पाकं कृत्वा परिवेषयति। ग्रीष्मकाले तौ व्यजनेन वीजयति। रात्रौ जागरितः सन् एव तयोः सेवां करोति। एवं च पित्रोः सेवायामेव तस्य सर्वः अपि समयः व्ययितः भवतिस्म।

तस्मिन् काले एव पिप्पलः नाम कश्चन् तपस्वी निवसति स्म। सः आश्रमे निष्ठन् घोरं तपः आचरति। तस्य तपःप्रभावेण प्राणिनः अपिजातिवैरंपरित्यज्य सहैव आनन्देन निवसन्ति स्म।

पिप्पलः :
घर्षं यावत् जलम् अन्नं च अस्वीकृत्य वायुमात्रं सेवमानः तपः आचरितवान्। तपसः प्रभावेण तस्य शरीरे अपूर्वं तेजः प्राकाशत। सन्तुष्टाः देवाः तस्य उपरि पुष्प वृष्टिं कृतवन्तः। इन्द्रः प्रत्यक्षः भूत्वा “वरं याचतु” इति उक्तवान्।

शब्दार्थ :
अव्यवधानेन-बाधा के कारण-For disturbing; परिवेष्यति-ढूंढ़ता-Founds; तौ-वे दोनों-They both; वीजयति-पंखा करता है-To file fan; व्यजनेन-पंखे के द्वारा-By fan; जागरित-जाग कर-Get up; भवति स्म-हुआ था-Was happend; घोरं-बहुत अधिक-Very much; जातिवैरं-जाति बैर-Malafide intention by caste; सदैव-हमेशा-Daily; स्म-थे-Were; उक्तवान्-कहा-Invitation; अस्वीकृत्यअस्वीकार-Not accepting; उपरि-ऊपर-Upper; भूत्वा-होकर-Passing, cross.

हिन्दी अर्थ :
कहीं कुण्डल नामक ए. सदाचारी वृद्ध ब्राह्मण रहता था। वह वेदशास्त्रों का अच्छा ज्ञाता था। कण्डल का एक पुत्र सुकर्मा बहुत पित्रभक्त था। वह अपने पिता के साथ वेदशास्त्रों ५। अध्ययन करता रहता था और श्रद्धापूर्वक माता-पिता की सेवा किया करता।

सुकर्मा ‘मातृ देवो भव’, ‘पितृ देवोभव’ इस प्रकार के वचन का व्यवधान रहित पालन किया करता था। प्रतिदिन नदी से जल लाकर माता-पिता को स्नान कराता, समय पर (यथा संभव) स्वादिष्ट भोजन बनाकर परोसता। गर्मी के दिनों में उन दोनों को पंखे से हवा करता। रात्रि में जागकर भी वह उन दोनों की सेवा करता। इस प्रकार माता-पिता की सेवा करता हुआ वह अपना समय व्यतीत करता था।

उन्हीं दिनों पिप्पल नामक कोई तपस्वी निवास करता था। वह आश्रम में रह तप का आचरण करता था। उसके तप के प्रभाव से सभी प्राणी जाति-बैर त्यागकर आनन्दपूर्वक साथ-साथ निवास करते थे। पिप्पल ने एक वर्ष तक अन्न जल का त्याग कर केवल हवा पीकर तपस्या की। उसके तपके प्रभाव से शरीर में अद्वितीय तेज प्रस्फुटित होने लगा। देवगणों ने फूलों की वर्षा की, इंद्रदेव (स्वयं) प्रकट होकर ‘वरदान’ माँगने को कहा।

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2. पिप्पलः-“अशेषं विश्वं मम अधीन भवतु” इति वरमयाचत्। इन्द्रः “तथास्तु” इति उक्तवान्। परन्तु वरप्राप्त्या पिप्पलः अहङ्कारी जातः। प्रपञ्चे मत्सदृशः तपस्वी अन्यः कोऽपि नास्ति। अहमेव सर्वश्रेष्ठः इति सः अमन्यतं।

पितामहः ब्रह्मा “पिप्पलस्य गर्वः निवारणीय” इति निश्चित्य सारसरूपं धृत्वा पिप्पलस्य समीपम् अगच्छत् अवदच्च-“भवान् किमर्थम् आत्मानं श्रेष्ठं मन्यते? एषः भवतः अहङ्कारः। महत् तपः कृत्वा अपि भवान् ज्ञानं न लब्धवान्। कुण्डलस्य पुत्रः सुकर्मा भवदपेक्षया ज्ञानी अस्ति। यद्यपि सः यज्ञयागादिकं न कृतवान्, त्वत् सदृशः कठोरं तपः अपि न आचरितवान्। तथापि तेन पित्रोः सेवया तादृशं ज्ञानं लब्धम्” इति।

एतदाकर्ण्य आश्चर्यचकितः पिप्पलः तदा एव सुकर्मणः समीपं गत्वा अपृच्छत्-“भवता कथम् एतादृशं ज्ञानम् अर्जितम्?” इति।।

सुकर्मा विनयेन पिप्पलं नमस्कृत्य अवोचत्-ब्रह्मन्! अहं किमपि न जानामि। न मया यज्ञः कृतः, न वा तीर्थाटनं कृतम्, तपः अपि न आचरितम्, अहं तु पित्रोः सेवामेव कृतवान्। अहं चिन्तयामि यत् पित्रोः सेवायाः श्रेष्ठतमम् अन्यत् कार्यं नास्ति। तयोः सेवायाः परिणामतः एव मया एतादृशी सिद्धिः प्राप्ता।

सुकर्मणः :
वचनं श्रुतवतः पिप्पलस्य ज्ञाननेत्रे उद्घाटिते। तस्य गर्वः अपि अपगतः। सः विनय-शीलः सञ्जातः।।

शब्दार्थ :
अहङ्कारी-अहंकारी-Proudy; प्रपञ्चे-प्रपञ्च में-; सदृशः-के समान-Like that; अमन्यत्-माना-Obey; ब्रह्मा-ब्रह्मा-God; निवारणीय-निवारण करता हूँ-Solves; साररूपं-सार रूप में-In summary; अवदच्च-और बोला-And speak; मन्यते-मानते हैं-Obeys; कृत्वा-करके-Do; लब्धवान्-प्राप्त किया-Received; भवदपेक्षया-आपकी अपेक्षा-Than you; यज्ञभागादिकं-यज्ञ आदि-And worship; सदृशः-के समान-Like that; एतदाकर्ण्य-ऐसा सुनकर-Listen that; अहं-मैं-I; सजातः-हुआ-Happend.

हिन्दी अर्थ :
पिप्पल-पूरा संसार हमारे अधीन हो-ऐसा वर माँगा। इन्द्र-‘तथास्तु’ ऐसा होगा। किन्तु वर प्राप्त कर लेने के बाद पिप्पल अहंकार से भर उठा। उसे ऐसा प्रपंच लगने लगा कि उसके समान तपस्वी संसार में कोई दूसरा नहीं। उसे अपने सर्वश्रेष्ठ होने का अहंकार हो गया।

पितामह ब्रह्मा पिप्पल के गर्व का निवारण करने हेतु सारस का रूप धारण कर उसके पास आए और बोले-आप अपने को क्यों सर्वश्रेष्ठ मानते हो? यह तुम्हारा अहंकार है। महान तपस्वी सुकर्मा तुम्हारी अपेक्षा अधिक ज्ञानवान है इतनी तपस्या करने पर भी तुम ज्ञान को प्राप्त न हो सके। यद्यपि कुण्डल पुत्र सुकर्मा तुम्हारे समान कठोर तपस्या भी नहीं किया, न ही यज्ञ-यागादि ही किया, तो भी उसने मातृ-पितृ सेवा के ज्ञान प्राप्त कर लिया। (ब्रह्मा की) यह बात सुन आश्चर्यचकित पिप्पल सुकर्मा के निकट जाकर पूछा-आपने कैसे इस प्रकार ज्ञान अर्जित कर लिया?

सुकर्मा ने विनय पूर्वक पिप्पल को नमस्कार कर कहा-ब्रह्मन्! मैं कुछ भी नहीं जानता। न तो मैंने कोई यज्ञ किया, न तीर्थ-व्रत किया, मैंने तपस्या भी नहीं की। मैंने तो केवल माता-पिता की सेवा की है। मैं सोचता हूँ-माता-पिता की सेवा ही सर्वश्रेष्ठ है। दूसरा अन्य कोई कार्य श्रेष्ठ नहीं है। उनकी सेवा के फलस्वरूप मुझे यह ज्ञान प्राप्त हुआ। सुकर्मा के वचन सुन पिप्पल के ज्ञान चक्षु खुल गए। उसका अहंकार तिरोहित हो गया वह विनयी हो गया।

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MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 11 आर्थिक विकास

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 11 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) भारत में कार्यशील जनसंख्या का लगभग कितने प्रतिशत कृषि कार्य में संलग्न है ?
(क) 50 प्रतिशत
(ख) 60 प्रतिशत
(ग) 70 प्रतिशत
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(ख) 60 प्रतिशत

(2) भारत के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान –
(क) 26 प्रतिशत
(ख) 36 प्रतिशत
(ग) 42 प्रतिशत
(घ) 100 प्रतिशत
उत्तर:
(क) 26 प्रतिशत

(3) औद्योगिक विकास से –
(क) कृषि पर निर्भरता कम होती है
(ख) जीवन स्तर में सुधार आता है
(ग) उपर्युक्त दोनों
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(ग) उपर्युक्त दोनों।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) भारत, नेपाल, चीन, पाकिस्तान ……….. देश हैं तथा जापान, सिंगापुर, ब्रिटेन, अमेरिका …………. देश हैं।
(2) औद्योगिक विकास देश व नागरिकों के लिए …………. लाता है।
(3) लोहा-इस्पात का आधुनिक कारखाना …………. में लगाया गया।
(4) अर्थव्यवस्था के मंद विकास से …………. बढ़ती है।
उत्तर:

  1. विकासशील, विकसित
  2. समृद्धि
  3. जमशेदपुर (झारखण्ड)
  4. बेरोजगारी

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 11 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) निर्धनता किसे कहते हैं ?
उत्तर:
निर्धनता वह दशा है, जिसमें किसी व्यक्ति को अपने जीवन-यापन के लिए भोजन, वस्त्र और मकान जैसी न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति करने में कठिनाई होती है।

(2) बेरोजगारी किस स्थिति को कहते हैं ?
उत्तर:
बेरोजगारी वह स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से कार्य करने का इच्छुक होने पर भी कार्य पाने में असमर्थ रहता है। .

(3) खनिज आधारित उद्योग कौन-कौनसे हैं ?
उत्तर:
लोहा और इस्पात, सीमेण्ट तथा रसायन उद्योग खनिज आधारित उद्योग हैं।

(4) कुटीर उद्योगों के नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रमुख रूप से खिलौने बनाना, लिफाफे बनाना, पापड़ बनाना, बड़ी बनाना, चटाई बनाना, झाड़ बनाना, मसाले तैयार करना, बीड़ी बनाना और कपड़े बुनना आदि कार्य कुटीर उद्योगों में शामिल हैं।

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) प्राचीन काल में हमारे देश की अर्थव्यवस्था कैसी थी?
उत्तर:
प्राचीनकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था समृद्ध एवं विकसित थी। भारत आर्थिक क्षेत्र में आत्मनिर्भर था। ईस्ट इण्डिया कम्पनी शुरू के वर्षों में बहुमूल्य धातुओं के बदले भारत में बने कपड़े, मसाले व कुटीर उत्पाद खरीदती थी।

(2) लघु उद्योग का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
लघु उद्योग में कम पूँजी लगती है। कम मजदूरों द्वारा ही कार्य करा लिया जाता है। इनसे उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है तथा बेरोजगारों को रोजगार प्राप्त हो जाता है।

(3) आत्मनिर्वाह कृषि क्या है ?
उत्तर:
देश के बहुसंख्यक किसान छोटी और बिखरी जोतों व परम्परागत औजारों का प्रयोग करते हैं। कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण उन्नत बीजों, उर्वरकों एवं कीटनाशकों का प्रयोग नहीं कर पाते, अतः इससे उत्पादन भी कम होता है। इनका उत्पादन खाद्यान्न के रूप में उनके परिवार के उपभोग में प्रयुक्त हो जाता है। इस प्रकार की कृषि को आत्मनिर्वाह कृषि कहते हैं।

(4) ग्रामीण रोजगार गारन्टी’ योजना क्या है ?
उत्तर:
केन्द्र सरकार द्वारा ‘ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना-2005’ विधेयक पारित किया गया है। इस विधेयक में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार के एक वयस्क व्यक्ति को 100 दिवसों का रोजगार उसके निवास के निकट (पाँच किलोमीटर के दायरे में) दिये जाने हेतु प्रावधान किया गया है।

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 11 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 5.
(1) आर्थिक विकास में कृषि किस प्रकार सहायक है ?
उत्तर:
कृषि भारत की अर्थव्यवस्था का आधार है –
तथा इसका भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 26 प्रतिशत का योगदान है। भारतीय कृषि खाद्यान्न उत्पादन के साथ-साथ उद्योगों के लिए कच्चा माल भी उपलब्ध कराती है। कृषि के अन्तर्गत खेती-बाड़ी, पशुपालन, वानिकी, मत्स्य पालन आदि भी शामिल हैं। मानसून पर कृषि की निर्भरता अभी भी बनी हुई है। प्राकृतिक विशेषताओं; जैसे-भूमि की प्रकृति, जलवायु तथा सिंचाई की सुविधाओं के कारण भारतीय किसान विभिन्न प्रकार की कृषि करते हैं।

भारत के प्रत्येक क्षेत्र में कृषि की उत्पादकता भी समान नहीं रही है। हमारे देश की बड़ी जनसंख्या कृषि कार्य करती है। इससे उन्हें रोजगार, खाद्यान्न और आय प्राप्त होती है। उद्योगों को कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है। फसलों में किसानों की आय बढ़ने से उनका जीवन स्तर ऊँचा होता है। खाद्यान्नों में आत्मनिर्भरता के साथ-साथ कृषि उत्पादों का निर्यात करके विदेशी मुद्रा प्राप्त करके राष्ट्रीय आय में वृद्धि की जा सकती है।

(2) खनिज आधारित उद्योगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
खनिज अधारित उद्योगों का वर्णन अग्र प्रकार है –
ऐसे उद्योग जो कच्चे माल के लिए खनिजों पर निर्भर हैं, जैसे-लोहा और इस्पात, सीमेण्ट तथा रसायन उद्योग खनिज आधारित उद्योग हैं। भारत में लोहा व इस्पात का पहला कारखाना सन् 1830 में पोटॉनोवा (तमिलनाडु) में लगाया गया। लोहा व इस्पात बनाने का आधुनिक कारखाना 1907 में जमशेदपुर (झारखण्ड) में लगाया गया। इसमें लौह-अयस्क, कोकिंग कोयला, चूना पत्थर और मैंगनीज अयस्क का उपयोग किया जाता है।

एल्युमीनियम एवं ताँबा प्रगलन भी भारत के बड़े उद्योग हैं। इसके अतिरिक्त रासायनिक उद्योग जिसके अन्तर्गत उर्वरक, कृत्रिम रेशे, कृत्रिम रबड़, प्लास्टिक की वस्तुएँ, रंग-रोगन तथा औषधियाँ तैयार की जाती हैं। परिवहन उपकरण; जैसे – रेल के इंजन, डिब्बे, मोटर वाहन (बस, ट्रक, कार, मोटर साइकिल आदि) वायुयान एवं पोत बनाने सम्बन्धी बड़े एवं भारी उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक उद्योग स्थापित किये गये हैं।

(3) मुख्य आर्थिक समस्याओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आज हमारे सामने जो मुख्य आर्थिक समस्याएँ खड़ी हैं उनका वर्णन इस प्रकार है –
1. जनसंख्या वृद्धि – भारत के आर्थिक विकास में तेजी से बढ़ती जनसंख्या एक बड़ी समस्या है। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद केवल इसी समस्या के कारण गरीबी, बेरोजगारी जैसी समस्याएँ आज तक सुलझ नहीं सकी। वर्ष 1951 में हमारे देश की कुल जनसंख्या 36 करोड़ थी, वहीं 2001 में जनसंख्या 102 करोड़ पहुँच गई।

2. निर्धनता – निर्धनता एक ऐसी अवस्था है, जिसमें किसी व्यक्ति को अपने जीवन-यापन के लिए भोजन, वस्त्र, मकान जैसी न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति करने में कठिनाई होती है। निर्धनता का दुष्परिणाम व्यक्तिगत और परिवार के स्वास्थ्य पर भी होता है। जिससे व्यक्ति की उत्पादन क्षमता घट • जाती है, अतः निर्धनता निरन्तर बनी रहती है। .

3. बेरोजगारी – हमारे देश में बेरोजगारी का प्रथम कारण है अर्थव्यवस्था का मंद विकास। बेरोजगारी का दूसरा कारण है जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि। इसके परिणामस्वरूप 15 से 59 आयु वर्ग के सर्वाधिक व्यक्ति रोजगार की प्रतीक्षा में हैं। विगत दशकों में जनसंख्या जिस गति से बढ़ी है उस गति से रोजगार के अवसर नहीं बढ़े।

4. मूल्य वृद्धि – निरन्तर और अनियन्त्रित मूल्यवृद्धि सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को संकट में डालती है, निर्धन और अधिक निर्धन हो जाते हैं। मूल्यवृद्धि आर्थिक असमानता एवं निर्धनता को बढ़ाती है।

5. भ्रष्टाचार – भ्रष्टाचार से आर्थिक असमानता बढ़ती है और गरीब अधिक हो जाते हैं। यह उन्नति की जड़ों को कुतरकर खोखला कर देता है। सरकार ने अनेक नियम और कानून बनाकर भ्रष्टाचार रोकने के प्रयास किये हैं।

MP Board Class 8th Social Science Solutions

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1

प्रश्न 1.
एक आयताकार भूखण्ड की लम्बाई और चौड़ाई क्रमशः 500 m तथा 300 m है। ज्ञात कीजिए :
(i) भूखण्ड का क्षेत्रफल
(ii) भूखण्ड का मूल्य, यदि 1 m2 का मूल्य ₹ 10,000
हल:
(i) भूखण्ड की लम्बाई, l = 500 m,
चौड़ाई b = 300 m
भूखण्ड का क्षेत्रफल = l × b
= 500 m × 300 m = 1,50,000 m2

(ii) भूखण्ड के 1 m2 का मूल्य = ₹10,000
∴ भूखण्ड के 1,50,000 m2 का मूल्य
= ₹ 10,000 × 1,50,000
= ₹ 1,50,00,00,000

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प्रश्न 2.
एक वर्गाकार पार्क का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए जिसका परिमाप 320 m है।
हल:
∵ वर्गाकार पार्क का परिमाप = 320 m
अर्थात् 4 × भुजा = 320 m
भुजा = \(\frac { 320 }{ 4 } \)m = 80m
वर्गाकार पार्क का क्षेत्रफल = (भुजा)2
= 80 m × 80 m
= 6,400 m2

प्रश्न 3.
एक आयताकार भूखण्ड की चौड़ाई ज्ञात कीजिए यदि इसका क्षेत्रफल 440 m- और लम्बाई 22 m हो। इसका परिमाप भी ज्ञात कीजिए।
हल:
आयताकार भूखण्ड की लम्बाई = 22 m
माना कि भूखण्ड की चौड़ाई = b
∴ भूखण्ड का क्षेत्रफल = l × b = 22 × b
या 22 × b = 440
या b = \(\frac { 440 }{ 22 } \) = 20 m
अतः भूखण्ड की चौड़ाई = 20 m
परिमाप = 2(l + b)
= 2 × (22 + 20)
= 2 × 42 = 84 m

प्रश्न 4.
एक आयताकार शीट का परिमाप 100 cm है। यदि लम्बाई 35 cm हो, तो इसकी चौड़ाई ज्ञात कीजिए। क्षेत्रफल भी ज्ञात कीजिए।
हल:
आयताकार शीट का परिमाप = 100 cm, लम्बाई = 35 cm, चौड़ाई b = ?
∴ 2(l + b) = 100 cm
या 2(35 + b) = 100 cm
या 35 + b = \(\frac { 100 }{ 2 } \) = 50 cm
b = 50 – 35 = 15 cm
∴ शीट की चौड़ाई = 15 cm
अब, क्षेत्रफल = l × b
∴ शीट का क्षेत्रफल = 35 × 15 = 525 cm2

प्रश्न 5.
एक वर्गाकार पार्क का क्षेत्रफल एक आयताकार पार्क के बराबर है। यदि वर्गाकार पार्क की एक भुजा 60 m हो और आयताकार पार्क की लम्बाई 90 m हो, तो आयताकार पार्क की चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
हल:
वर्गाकार पार्क की भुजा = 60 m
आयताकार पार्क की लम्बाई = 90 m
∴ वर्गाकार पार्क का क्षेत्रफल = a2 = 60 m × 60 m
= 3,600 m2
∵ आयताकार पार्क का क्षेत्रफल = वर्गाकार पार्क का क्षेत्रफल
∴ लम्बाई × चौड़ाई = 3,600 m2
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 1

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प्रश्न 6.
एक तार आयत के आकार का है। इसकी लम्बाई 40 cm और चौड़ाई 22 cm है। यदि उसी तार को दुबारा मोड़कर एक वर्ग बनाया जाता है, तो प्रत्येक भुजा की माप क्या होगी? यह भी ज्ञात कीजिए कि किस आकार का क्षेत्रफल अधिक होगा?
हल:
लम्बाई l = 40 cm, चौड़ाई b = 22 m
परिमाप = 2(l + b)
= 2(40 + 22)
= 2 × 62 = 124cm
आयत का क्षेत्रफल = l × b
= 40 × 22
= 880 cm2
∵ तार को मोड़कर वर्ग बनाया गया है।
∴ वर्ग का परिमाप – आयत का परिमाप
4 × a= 124 cm
या वर्ग की प्रत्येक भुजा की लम्बाई a = \(\frac { 124 }{ 4 } \) = 31 cm
वर्ग का क्षेत्रफल = (a)2
= 31 × 31
= 961 cm2
∵ 961 cm2 > 880 cm2
∴ वर्ग का क्षेत्रफल आयत के क्षेत्रफल से अधिक है।

प्रश्न 7.
एक आयत का परिमाप 130 cm है। यदि आयत की चौड़ाई 30 cm हो, तो आयत की लाबाई ज्ञात कीजिए। आयत का क्षेत्रफल भी ज्ञात कीजिए।
हल:
आयत का परिमाप = 130 cm
आयत की चौड़ाई = 30 cm
∵ आयत का परिमाप = 2 × (l + b)
∴ 2(l + 30) = 130 cm
या l + 30 = \(\frac { 130 }{ 2 } \) = 65 cm
या आयत की लम्बाई l = 65 – 30 = 35 cm
∴ आयत का क्षेत्रफल = l × b
= 35 × 30 cm2
= 1,050 cm2

प्रश्न 8.
2 m लम्बाई और 1 m चौड़ाई वाले दरवाजे को एक दीवार में लगाया जाता है। दीवार की लम्बाई 4.50 m तथा चौड़ाई 3.6m है (चित्र 11.5)।₹ 20 प्रति m’ की दर से दीवार पर सफेदी (white wash) कराने का व्यय ज्ञात कीजिए।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 2
हल:
दरवाजे की लम्बाई = 2 m, चौड़ाई = 1 m, दीवार की लम्बाई = 4.50 m, चौड़ाई = 3.6 m.
∴ दीवार का क्षेत्रफल = l × b
= 4.50 m × 3.6m
= 16.2 m2
दरवाजे का क्षेत्रफल = 2 m × 1 m = 2 m2
दीवार पर सफेदी वाला क्षेत्रफल
= दीवार का क्षेत्रफल – दरवाजे का क्षेत्रफल
= 16.2 m2 – 2 m2 = 14.2 m2
∴ सफेदी कराने का व्यय = ₹ 14.2 × 20
= ₹ 284

प्रश्न:
08 cm और 5 cm भुजाओं वाला एक आयत लीजिए। आयत को विकर्ण के अनुदिश ऐसा काटिए जिससे दो त्रिभुज प्राप्त हों (चित्र 11.6)।
एक त्रिभुज को दूसरे पर रखिए।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 3

प्रश्न 1.
क्या ये दोनों पूर्णतया समान माप के हैं ?
उत्तर:
हाँ, ये दोनों पूर्णतया समान माप के हैं।

प्रश्न 2.
क्या आप कह सकते हैं कि दोनों त्रिभुजों का क्षेत्रफल बराबर है ?
उत्तर:
हाँ, दोनों त्रिभुजों का क्षेत्रफल बराबर है।

प्रश्न 3.
क्या ये त्रिभुज सर्वांगसम भी हैं ?
उत्तर:
हाँ, ये त्रिभुज सर्वांगसमता के SSS गुण के अनुसार सर्वांगसम है।

प्रश्न 4.
इनमें से प्रत्येक त्रिभुज का क्षेत्रफल कितना है ?
हल:
प्रत्येक त्रिभुज का क्षेत्रफल
= \(\frac { 1 }{ 2 } \) × आयत का क्षेत्रफल
= \(\frac { 1 }{ 2 } \) × (l × b) = \(\frac { 1 }{ 2 } \) × 8 × 5 = 20 cm2
इनमें से प्रत्येक त्रिभुज का क्षेत्रफल 20 cm2 है।

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प्रश्न:
अब एक 5 cm भुजा वाला वर्ग लीजिए और इसे 4 त्रिभुजों में बाँटिए जैसा कि आकृति में दिखाया गया है (चित्र 11.7)।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 4

प्रश्न 1.
क्या चारों त्रिभुजों का क्षेत्रफल बराबर है ?
उत्तर:
हाँ, चारों त्रिभुजों का क्षेत्रफल बराबर है।

प्रश्न 2.
क्या वे एक-दूसरे के सर्वांगसम हैं ?
उत्तर:
हाँ, वे एक-दूसरे के सर्वांगसम हैं।

प्रश्न 3.
प्रत्येक त्रिभुज का क्षेत्रफल क्या है ?
हल:
प्रत्येक त्रिभुज का क्षेत्रफल = \(\frac { 1 }{ 4 } \) × वर्ग का क्षेत्रफल
= \(\frac { 1 }{ 4 } \) × 5 × 5
= \(\frac { 25 }{ 4 } \) = 6.25 cm2

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 226

MP Board Solutions

इन्हें कीजिए

प्रश्न 1.
आगे दिए गए सभी आयत जिसकी लम्बाई 6.cm और चौड़ाई 4 cm है, सर्वांगसम बहुभुज से मिलकर बने हैं। प्रत्येक बहुभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 5
हल:
आयत की लम्बाई = 6 cm, चौड़ाई = 4 cm,
आयत सर्वांगसम बहुभुज बनाते हैं।
प्रत्येक दशा में बहुभुज का क्षेत्रफल
= आयत का क्षेत्रफल
= l × b = 6 × 4 = 24 cm2

(i) चूँकि आकृति में कुल छ: बहुभुज हैं।
∴ प्रत्येक बहुभुज का क्षेत्रफल = \(\frac { 24 }{ 6 } \) = 4 cm2

(ii) ∵ आकृति में कुल 4 बहुभुज हैं।
∴ प्रत्येक आकृति का क्षेत्रफल = \(\frac { 24 }{ 6 } \) = 6 cm2

(iii) ∵ आकृति में 2 बहुभुज हैं।
∴ प्रत्येक आकृति का क्षेत्रफल
= \(\frac { 24 }{ 2 } \) = 12 cm2

(iv) ∵ आकृति में कुल 2 बहुभुज हैं।
∴ प्रत्येक आकृति का क्षेत्रफल
= \(\frac { 24 }{ 2 } \) = 12 cm2

(v) ∵ आकृति में कुल 8 बहुभुज हैं।
∴ प्रत्येक आकृति का क्षेत्रफल
= \(\frac { 24 }{ 8 } \) = 3 cm2

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 227-228

पाठ्या-पुस्तक में दिये गये समान्तर चतुर्भुजों के बारे में सोचिए।
आकृतियों द्वारा घेरे गए वर्गों की संख्या को गिनकर समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए और भुजाओं को मापकर परिमाप भी ज्ञात कीजिए।
तालिका को पूरा कीजिए।
हल:
समान्तर चतुर्भुज की प्रत्येक आकृति में वर्गों की संख्या 15 है। इसलिए प्रत्येक समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल
= 15 वर्ग इकाई
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 6

परिमाप निकालने के लिए प्रत्येक समान्तर चतुर्भुज की भुजा AD को नापते हैं।
आकृति : (a) AD = 3.2 इकाई,
∴ परिमाप = 2(l + b) = 2(5 + 3.2) = 16.4 इकाई
(b) AD = 3.6 इकाई,
∴ परिमाप = 2(5 + 3.6) = 17.2 इकाई
(c) AD = 4.2 इकाई,
∴ परिमाप = 2(5 + 4.2) = 18.4 इकाई
(d) AD = 3.2 इकाई,
∴ परिमाप = 2(5 + 3.2) = 16.4 इकाई
(e) AD = 3.6 इकाई,
∴ परिमाप = 2(5 + 3.6)
= 17.2 इकाई
(f) AD = 4.2 इकाई,
∴ परिमाप = 2(5 + 4.2) = 18.4 इकाई
(g) AD =5 इकाई,
∴ परिमाप = 2(5 + 5) = 20 इकाई

तालिका
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 7
इकाई स्पष्ट है कि क्षेत्रफल सभी चतुर्भुजों का समान है, लेकिन परिमाप भिन्न हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 228

MP Board Solutions

प्रश्न:
पाठ्य-पुस्तक में दिये गये 7 cm तथा 5 cm भुजाओं वाले समान्तर चतुर्भुजों को देखिए।
प्रत्येक समान्तर चतुर्भुज का परिमाप तथा क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। अपने परिणाम का विश्लेषण कीजिए।
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 8
यहाँ, स्पष्ट है कि समान्तर चतुर्भुजों का क्षेत्रफल अलग-अलग है, लेकिन परिमाप समान हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 229

इन्हें कीजिए

प्रश्न 1.
निम्न समान्तर चतुर्भुजों के क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 9
(iii) समान्तर चतुर्भुज ABCD में AB = 7.2 cm और C से AB पर लम्ब 4.5 cm है।
हल:
(i) आधार = 8 cm, ऊँचाई = 3.5 cm
∴ क्षेत्रफल = आधार × ऊँचाई
= 8 cm × 3.5 cm = 28 cm2

(ii) आधार = 8 cm, ऊँचाई = 2.5 cm
∴ क्षेत्रफल = आधार × ऊँचाई
=8 cm × 2.5 cm = 20 cm2

(iii) समान्तर चतुर्भुज का आधार AB = 7.2 cm
ऊँचाई = 4.5cm
क्षेत्रफल = आधार × ऊँचाई
= 7.2 cm × 4.5 cm
= 32.40 cm2

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 230

इन्हें कीजिए

प्रश्न 1.
ऊपर दिए गए क्रियाकलापों को अलग-अलग प्रकार के त्रिभुज लेकर कीजिए।
हल:
दिया है, ∆ABC हम दूसरा ∆ACD इस प्रकार लेते हैं कि समान्तर चतुर्भुज ABCD दिखाई दे, जैसा कि चित्र 11:11 में दिखाया गया है :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 10
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 11

ऊपर की प्रत्येक आकृति में, ∆ABC के क्षेत्रफल का दो गुना समान्तर चतुर्भुज ABCD के क्षेत्रफल के बराबर है।
क्योंकि हम जानते हैं कि ∆ABC का क्षेत्रफल
= \(\frac { 1 }{ 2 } \) (आधार × ऊँचाई)
तथा समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल
= आधार × ऊँचाई होता है।

प्रश्न 2.
अलग-अलग प्रकार के समान्तर चतुर्भुज लीजिए। प्रत्येक समान्तर चतुर्भुज को दो त्रिभुजों में एक विकर्ण के अनुदिश काटिए। क्या ये त्रिभुज सर्वांगसम हैं ?
हल:
दिया है, ABCD एक समान्तर चतुर्भुज है। प्रत्येक चतुर्भुज दो त्रिभुजों में विकर्ण AC अथवा BD के अनुदिश काटा, जैसा कि चित्र 11.12 में दिखाया गया है। ये त्रिभुज आपस में सर्वांगसम होंगे।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 12

प्रश्न 3.
चित्र 11.13 में सभी त्रिभुज, आधार AB = 6 cm पर स्थित हैं। आधार AB पर प्रत्येक त्रिभुज की संगत ऊँचाई के बारे में आप क्या कह सकते हैं ?
क्या हम कह सकते हैं कि सभी त्रिभुजों का क्षेत्रफल बराबर है?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 13

हल:
चित्र से स्पष्ट है कि प्रत्येक त्रिभुज की संगत ऊँचाई आधार AB पर बराबर है।
∵ त्रिभुज का क्षेत्रफल = \(\frac { 1 }{ 2 } \) × आधार × ऊँचाई
अतः हम कह सकते हैं कि समान आधार और बराबर ऊँचाई के त्रिभुजों का क्षेत्रफल बराबर है।

प्रश्न 4.
आधार 6 cm वाले एक अधिक कोण त्रिभुज (obtuse angled triangle) त्रिभुज ABC पर विचार करते हैं।
इसकी ऊँचाई AD शीर्ष A से DC पर लम्ब है जो त्रिभुज के बाह्य स्थित है।
क्या आप इस त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात कर सकते हैं ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 image 14
हल:
हाँ, इसका क्षेत्रफल ज्ञात कर सकते हैं।
∆ABC का क्षेत्रफल = \(\frac { 1 }{ 2 } \) × आधार × ऊँचाई
= \(\frac { 1 }{ 2 } \) × BC × AD
= \(\frac { 1 }{ 2 } \) × 6 × 4 = 12 cm2

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 232-234

MP Board Class 7th Maths Solutions

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 4 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 4.3

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 4 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 4.3

प्रश्न 1.
निम्नलिखित चतुर्भुजों की रचना कीजिए –
(i) चतुर्भुज MORE जिसमें –

  • MO = 6 cm
  • OR = 4.5 cm
  • ∠M = 60°
  • ∠0 = 105°
  • ∠R = 105° है।

(ii) चतुर्भुज PLAN जिसमें –

  • PL = 4 cm
  • ∠A = 6.5 cm
  • ∠P = 90°
  • ∠A = 110°
  • ∠N = 180° है।

(iii) समान्तर चतुर्भुज HEAR जिसमें –

  • OK = 7 cm
  • HE = 5 cm
  • KA = 5 cm है।

(iv) आयत OKAY जिसमें –

  • EA = 6 cm
  • ∠A = 85° है।

हल:
(i) रचना के चरण –

  1. सर्वप्रथम रेखाखण्ड MO = 6 cm बनाया।
  2. बिन्दु M पर ∠ZMO = 60° बनाती हुई रेखा OZ खींची।
  3. बिन्दु O पर 105° का कोण बनाती हुई रेखा OX खींची।
  4. बिन्दु को केन्द्र मानकर तथा 4.5 cm की त्रिज्या लेकर OR = 4.5 cm OX में से काट ली।
  5. बिन्दु R पर ∠ORY बनाती हुई रेखा RY खींची जो MZ को E पर प्रतिच्छेद करती है।
  6. इस प्रकार बनी हुई आकृति MORE अभीष्ट चतुर्भुज है।

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 4 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 4.3 img-1

(ii) रचना के चरण –

  1. सर्वप्रथम रेखाखण्ड PL = 4 cm बनाया।
  2. ∠PLA = 360° – (90° + 110° + 85°) = 360° – 285° = 75° प्राप्त किया।
  3. बिन्दु P पर 90° का कोण बनाती हुई रेखा PX खींची।
  4. बिन्दु L पर 75° का कोण बनाते हुए LY खींची।
  5. बिन्दु L को केन्द्र मानकर तथा 6.5 cm त्रिज्या लेकर LA = 6.5 cm, LY में से काट लिया।
  6. A बिन्दु पर ∠LAZ = 110° का कोण बनाते हुए रेखा AZ खींची; जो PX को N पर काटती है।

इस प्रकार बनी हुई आकृति PLAN अभीष्ट चतुर्भुज है।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 4 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 4.3 img-2
(iii) रचना के चरण –

  1. सर्वप्रथम रेखाखण्ड HE = 5 cm बनाया।
  2. E बिन्दु पर ∠HEX = 85° का कोण बनाती हुई रेखा PX खींची।
  3. E बिन्दु को केन्द्र मानकर तथा 6 cm त्रिज्या लेकर ox में से EA = 6 cm काट लिया।
  4. अब H व R को केन्द्र मानकर क्रमशः HR = 6 cm तथा AR = 5 cm त्रिज्याएँ चाप लगाए जो परस्पर बिन्दु R पर काटते हैं।
  5. HR तथा AR को मिलाया।

इस प्रकार बनी हुई आकृति HEAR अभीष्ट समान्तर चतुर्भुज है।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 4 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 4.3 img-3

(iv) रचना के चरण –

  1. सर्वप्रथम रेखाखण्ड OK = 7 cm बनाया।
  2. K बिन्दु पर ∠OKX = 90° बनाती हुई रेखा OX खींची।
  3. K बिन्दु को केन्द्र मानकर तथा 5 cm त्रिज्या लेकर एक चाप लगाया जो KX को A पर काटता है। AK को मिलाया।
  4. O व A बिन्दु को केन्द्र मानकर क्रमशः OY = 5 cm तथा AY = 7 cm त्रिज्याएँ लेकर चाप लगाए जो परस्पर Y बिन्दु पर काटते हैं।
  5. OY तथा AY को मिलाया।
  6. इस प्रकार बनी आकृति OKAY अभीष्ट आयत है।
    MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 4 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 4.3 img-4

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 71

सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए (क्रमांक 4.5)

MP Board Solutions

प्रश्न 1.
उपर्युक्त उदाहरण 4 में, हमने सर्वप्रथम BC खींची। इसके स्थान पर दूसरे अन्य प्रारम्भ बिन्दु और कौन-से हो सकते हैं?
उत्तर:
BC के स्थान पर दूसरे अन्य प्रारम्भ बिन्दु AB अथवा CD रेखाखण्ड हो सकते हैं।

प्रश्न 2.
हमने अभी तक चतुर्भुजों की रचना के लिए कोई पाँच मापों का प्रयोग किया। क्या एक चतुर्भुज की रचना के लिए पाँच मापों के अलग-अलग समुच्चय (अभी तक देखे गए मापों के अतिरिक्त) हो सकते हैं?
निम्नलिखित समस्याएँ प्रश्नों के उत्तर देने में आपकी सहायता कर सकती हैं –

  1. चतुर्भुज ABCD जिसमें AB = 5 cm, BC = 5.5 cm, CD = 4 cm, AD = 6 cm और ∠B = 80° है।
  2. चतुर्भुज PQRS जिसमें PQ = 4.5 cm, ∠P= 70°, ∠Q = 100°, ZR = 80° और ∠S = 110° है।

आप स्वयं कुछ और उदाहरणों की रचना कीजिए और एक चतुर्भुज की रचना के लिए आँकड़ों की पर्याप्तता/ अपर्याप्तता ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

  1. इन आँकड़ों में चार भुजाएँ और एक कोण चतुर्भुज ABCD की रचना के लिए दिए गए हैं।
  2. इन आँकड़ों से चतुर्भुज PQRS की रचना नहीं की जा सकती है।
  3. निम्न आँकड़ों से चतुर्भुज की रचना नहीं कर सकते चतुर्भुज ABCD की रचना कीजिए जिसमें AB = 8 cm,
    BC = 4.5 cm, CD = 4 cm, ZB = 60° और AB || CD.

MP Board Class 8th Maths Solutions

MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तयः

MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 21 सूक्तयः (स्फुट)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 21 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एक पदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) सत्य क्षमाभ्यां कस्य सिद्भिः? (सत्य के क्षमाभ्यास से किसकी सिद्धि होती है?)
उत्तर:
सकलार्थः। (सभी प्रकार की)

(ख) मे मनः कीदृशः अस्तु? (मेरः मन किस तरह का हो?)
उत्तर:
शिव संकल्पमस्तु। (शिव संकल्प वाला हो)।।

(ग) कर्मसु कौशलम् किम्? (कर्म में कुशलता किससे आती है?)
उत्तर:
योगः। (योग से)

MP Board Solutions

(घ) प्रमाद कस्मात् न कर्त्तव्यः? (किसमें प्रमाद नहीं करना चाहिए?)
उत्तर:
स्वाध्याय। (स्वाध्याय में)

(ङ) कः रक्षितः रक्षति? (किसकी रक्षा ही रक्षा है?)
उत्तर:
धर्मा। (धर्म की)

प्रश्न 2.
एक वाक्येन उत्तर लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) सर्वारम्भः कः? (सबसे पहले क्या आरम्र होता है?)
उत्तर:
सर्वारम्भा मन्त्रमूलाः। (सबसे पहले मूल मंत्र आरंभ होता है।)

(ख) नरः कथं सुखी भवति? (व्यक्ति सुखी कैसे होता है?)
उत्तर:
नरः आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्। (जो व्यक्ति भोजन और शिष्टाचार में लज्जा को त्यागने वाला है, वही सुखी रहता है)

(ग) सकलं कदा नष्टं भवति? (सम्पूर्ण कब नष्ट हो जाता है?)
उत्तर:
यदि आचरणं मलिनं भ्रष्टम् तदा सकलं नष्टं भवति। (यदि आचरण सन्तोषप्रद नहीं है तो सम्पूर्ण नष्ट हो जाता है।)

प्रश्न 3.
उचितमेलनं कुरुत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तय img-1

प्रश्न 4.
रेखांवित शब्दार आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) धर्मो रक्षितः रक्षति
प्रश्न : धर्मों कः रक्षति?

(ख) भ्रष्टाचारण सर्वं नष्टंपति।
प्रश्न : केन आचरेण सर्वं नष्टं भवति?

(ग) द्यिा मुक्तिप्रदा अस्ति।
प्रश्न : विद्या का अस्ति?

प्रश्न 5.
रक्तस्थानानि पूरयत
(श) सा विद्या या विमुक्तये।
(ष) स्वाध्याय न प्रमदितव्यम्।
(स) आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।।
(ह) सत्यश्रमाभ्याम् सकलार्थ सिद्धिः।

प्रश्न 6.
सन्धि विच्छेदं कुरुत-
तन्न – तत्+न।
धर्मोरक्षति – धर्मः+रक्षति।
स्वाध्यायान्मा – स्वाध्याय+अयान्मा।

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प्रश्न 7.
कोष्ठकात् शब्द चित्वा सूक्तिं रचयत
धर्मो, योगः, यत्र, सकलम्
यथा-
धर्मो – धर्मो रक्षति रक्षितः।
योगः – योगः कर्मसु कौशलम्।
यत्र – यत्र नारयस्तु पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवता।
सकलम् – सत्यश्रमाभ्याम् सकलार्थ सिद्धिः।

प्रश्न 8.
सूक्त्या पूर्ति करोतु-(सूक्ति द्वारा)
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 21 सूक्तय img-2

प्रश्न 9.
संस्कृतवाक्येषु प्रयोगं कुरुत
यत्र, तत्र, हि, च, या
यत्र – यत्र धूम्रः तत्र अग्नि।
तत्र – तत्र खगाः सन्ति।
हि – मानो हि महताम धनम।
च – अन्नं, जलं च सुभाषितम् पृथ्वियां श्रेष्ठः रत्नाः सन्ति।
या – सा विद्या या विमुक्तये।

प्रश्न 10.
समानार्थक शब्दं लिखत
लज्जा – व्रीड़ा
ल कष्टं – दुःखं
स्वाध्याय – अध्ययनम्।

प्रश्न 11.
अधोलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-
(क) योगस्याशयः स्पष्टं करोतु?
उत्तर:
कर्मस्य कौशलम्।।

(ख) कुत्र कुत्र प्रमादः न कर्त्तव्यम्?
उत्तर:
देव पितृकार्याभ्यां।

(ग) धर्मः कथं रक्षति?
उत्तर:
सर्व प्रकारेण, धर्म क्षेत्रे, कर्म क्षेत्रे धर्मः रक्षति।

(घ) कीदृशी विद्या मुक्तिं ददाति?
उत्तर:
तपः शालिनी विद्या मुक्तिं ददाति।

(ङ) भ्रष्टाचारेण किं किं भवति?
उत्तर:
भ्रष्टाचारेण सर्वं नष्टं भवति।

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सूक्तयः पाठ-सन्दर्भ/प्रतिपाद्य

सुंदर उक्ति अर्थात् कथन ही सूक्ति कहलाता है। अनुभव पूर्ण हितकारक वचन ही सूक्ति कहलाता है। सूक्ति मानव स्वभाव को शोध कर सन्मार्ग पर अग्रसर करती है और श्रेष्ठ आचार-व्यवहार का उपदेश देती है। अतः शिक्षण में भी सूक्तियों का विशेष महत्त्व है। प्रस्तुत पाठ में विभिन्न ग्रन्थों से सूक्तियों का संकलन कर यहाँ प्रस्तुत किया गया है।

शब्दार्थ :
सत्यश्रमाभ्याम्-सत्य और श्रम द्वारा-through truth and labour; विमुक्तये-मुक्ति के लिए-for finished for the freedom; प्रमदितव्यम्-प्रमाद करना चाहिए-intoxication self; रमन्ते-निवास करते हैं-lives; सर्वारम्भाः-सभी कार्यों का आरम्भ-start of all work; अन्तःकरणम्-मन बुद्धि आदि-mind, wisdom; भव-होओ (हे)-happen; देवपितृकार्याभ्यां-देव और पितृ कार्यों में-God and sons work; प्रमदः-आलस्य-Ideal;,laziness; त्यक्त लज्जः-जिसने लज्जा को त्याग दिया हो-wicked; वस्तुषु-वस्तुओं में-In things;सुखी भवेत्-सुखी होता है-Happy;शक्यं-शक्ति-power.

सूक्तयः पाठ का हिन्दी अर्थ

1. मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु।
मेरा मन शुभ संकल्प वाला हो।

2. सत्यश्रमाभ्याम् सकलार्थः सिद्धिः।
सत्य एवं परिश्रम से सकलार्थ (सभी कार्यों की) सिद्धि होर्तः है।

3. सा विद्या या विमुक्तये।
विद्या वह है जो मुक्ति प्रदान करे।

4. ये.गः कर्मसु कौशलम्।
योग से कर्म करने की कुशलता आती है।

5. स्वाध्यायान्मा प्रमदः।
स्वाध्याय में प्रमाद न करें।

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6. देवपितृकार्याभ्यां न प्रमदितव्यम्।
देव और पितृकार्य में भी आलस्य न करें।

7. धर्मो रक्षति रक्षितः।
धर्म की रक्षा से ही स्व रक्षा होती है।

8. मन्त्रमूलाः सर्वारम्भाः।
सभी कार्यों का मूल मंत्र प्रारंभ करना है।

9. आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।
भोजन और शिष्टाचार में लज्जा का त्याग करने वाला ही सुखी रहता है।

10. सतां हि सन्देहपदेषु वस्तुषु प्रमाणमन्तःकरणप्रवृत्तयः।
संदेह होने पर अंतःकरण की वृत्ति ही प्रमाण होती है।

11. सकलं कष्टं निखिलं नष्टं यदि आचरणं मलिनं भ्रष्टम्।
यदि आचरण दूषित हो तो वह समस्त कष्टों को देने वाला है एवं सम्पूर्ण को नष्ट करके वाला होता है।

12. उपायेन हि यच्छक्यं तन्न शक्यं पराक्रमः।
उपाय से ही यथा शक्ति पराक्रम प्राप्त होता है।

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MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 8 1858 ई. के बाद ब्रिटिश प्रशासन और नीतियाँ

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 8 1858 ई. के बाद ब्रिटिश प्रशासन और नीतियाँ

MP Board Class 8th Social Science Chapter 8 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर. लिखिये –
(1) महारानी विक्टोरिया की घोषणा हुई थी
(क) 1757 ई. में
(ख) 1858 ई. में
(ग) 1957 ई. में
(घ) 1965 ई. में।
उत्तर:
(ख) 1858 ई. में

(2) भारत का प्रशासन इंग्लैण्ड की महारानी को सौंपा गया –
(क) 1858 के अधिनियम द्वारा
(ख) 1861 के अधिनियम के द्वारा
(ग) 1865 के अधिनियम द्वारा
(घ) 1876 के अधिनियम द्वारा।
उत्तर:
(क) 1858 ई. के अधिनियम द्वारा

(3) प्रथम नगर पालिका स्थापित की गई
(क) 1865 ई. में मद्रास में
(ख) 1867 ई. में बंगाल में
(ग) 1868 ई. में उत्तर प्रदेश में
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(क) 1865 में ई. में मद्रास में

(4) भारत सचिवालय का प्रमुख कहलाता था
(क) भारत सचिव
(ख) वायसराय
(ग) गवर्नर जनरल
(घ) सचिव
उत्तर:
(क) भारत सचिव

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) वायसराय की सहायता के लिए …………. सदस्यों की परिषद् का गठन किया गया था।
(2) ब्रिटिश सरकार की आर्थिक नीतियाँ ………….. के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई थीं।
(3) 1876 ई. में सिविल सेवा में भाग लेने की न्यूनतम आयु कर दी गई थी।
(4) लॉर्ड रिपन के द्वारा वुड के प्रस्तावों को क्रियान्वित करने के लिए ……….. आयोग का गठन किया गया।
उत्तर:
(1) चार
(2) केवल इंग्लैण्ड
(3) 19 वर्ष
(4) हण्टर

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 8 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) किस अधिनियम द्वारा इंग्लैण्ड की महारानी को भारत की साम्राज्ञी घोषित किया गया ?
उत्तर:
1858 ई. के अधिनियम द्वारा इंग्लैण्ड की महारानी को भारत की साम्राज्ञी घोषित किया गया।

(2) 1858 के बाद गवर्नर जनरल को किस नाम से जाना जाने लगा ?
उत्तर:
1858 के बाद गवर्नर जनरल को वायसराय के नाम से जाना जाने लगा।

(3) स्थानीय स्वशासन का जनक किसे कहा जाता था ?
उत्तर:
लॉर्ड रिपन को स्थानीय स्वशासन का जनक कहा जाता था।

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 8 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4
(1) महारानी की घोषणा का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अपनी घोषणा में महारानी ने कहा था कि –

  • अंग्रेजी राज्य में भारत का अब कोई नवीन क्षेत्र नहीं मिलाया जायेगा।
  • न्याय में समानता, उदारता एवं धार्मिक सहिष्णुता का पालन किया जायेगा।
  • भारत के राजाओं के सम्मान एवं अधिकारों का हनन । नहीं किया जायेगा।
  • भारत के लोगों के लिए नैतिक एवं भौतिक उन्नति के उपाय किये जायेंगे।
  • भारतीय प्रजा को ब्रिटिश प्रजा के समान माना जायेगा।

(2) 1861 ई. के अधिनियम में क्या परिवर्तन किये गये?
उत्तर:
1861 ई. में भारत परिषद् अधिनियम द्वारा गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद् में न्यूनतम 6 सदस्य तथा अधिकतम 12 अतिरिक्त सदस्यों को नियुक्त करने की व्यवस्था की गई। प्रान्तों में विधान परिषदें स्थापित की गईं। विधान परिषदें प्रान्तीय प्रशासन के लिए उत्तरदायी थीं, किन्तु कोई भी कानून बनाने से पूर्व उन्हें गवर्नर जनरल की अनुमति लेना अनिवार्य था। प्रान्तों में गवर्नर सर्वोच्च अधिकारी था।

(3) 1858 ई. के पश्चात् प्रशासनिक विभाजन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1858 ई. के पश्चात् प्रशासनिक व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ। 1861 ई. के अधिनियम से प्रशासनिक व्यवस्था के विभाजन की एक नई प्रक्रिया आरम्भ हुई। प्रान्तों में विधान परिषदें गठित हुईं। 1919 ई. के अधिनियम के साथ दोहरी शासन व्यवस्था लागू की गई। 1935 ई. के अधिनियम के द्वारा प्रान्तीय स्वायत्तता लागू की गई। प्रान्तीय सरकारों को भूमिकर, आबकारी कर, राजकीय स्टाम्प, विधि व न्याय पर नियन्त्रण का अधिकार प्रदान कर दिया गया।

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 8 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 5.
(1) 1858 ई. के अधिनियम में लिए गये निर्णय बताइए।
उत्तर:
ब्रिटिश सरकार ने अपनी प्रशासनिक नीतियों में परिवर्तन की सोच को लागू करते हुए सर्वप्रथम 1858 ई. में एक अधिनियम पारित किया, जिसे ‘1858 ई. का अधिनियम कहा जाता है।
इसमें निम्नलिखित निर्णय लिये गये –

  • भारत में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के प्रशासन को समाप्त कर दिया गया।
  • भारत का प्रशासन सीधे इंग्लैण्ड की महारानी के अधीन कर दिया गया।
  • वायसराय को भारत में इंग्लैण्ड की महारानी का प्रतिनिधि बनाया गया।
  • भारतीय प्रशासन पर नियन्त्रण स्थापित करने के लिए इंग्लैण्ड में भारत सचिव एवं उसकी परिषद् का निर्माण किया गया।
  • भारत सचिव को भारत की प्रशासनिक व्यवस्था का उत्तरदायित्व सौंपा गया।

(2) सेना के पुनर्गठन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
भारत में पुनः सैनिक अंग्रेजों के विरुद्ध शस्त्र न उठा सकें। इसलिए भारतीय सेना को संगठित एवं सुदृढ़ किया गया, ताकि वह अंग्रेजी साम्राज्य के प्रसार एवं रक्षा में अपना योगदान दे सकें।
इसी उद्देश्य से सेना में इस प्रकार परिवर्तन किये गये –

  • ईस्ट इण्डिया कम्पनी की यूरोपीय सेना को अंग्रेजी सेना में मिला लिया गया।
  • सेना में भारतीय सैनिकों की संख्या घटा दी गई तथा यूरोपीय सैनिकों की संख्या में वृद्धि की गई।
  • सेना में जातिवाद के आधार पर नियुक्तियाँ आरम्भ कर दी गईं।
  • सेना में प्रान्तीय निष्ठा की भावना भड़काकर पंजाब, गढ़वाल, कुमायूँ, सिख, राजपूत एवं मराठा जैसी रेजीमेंटों का गठन किया गया,
  • ताकि सैनिकों में राष्ट्रीय भावना जाग्रत न हो सके।
  • भारतीयों को लड़ाकू एवं गैर-लड़ाकू जैसे दो वर्गों में बाँट दिया गया।
  • इंग्लैण्ड की सेना के पदाधिकारियों एवं सैनिकों को नियमित रूप से भारत भेजने की व्यवस्था की गई।

(3) स्थानीय प्रशासन के विकास की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
1861 ई. के पश्चात् जिला परिषद् एवं नगर पालिका जैसी संस्थाओं की आवश्यकता महसूस की गई, फलस्वरूप 1865 ई. से मद्रास में, 1867 ई. से पंजाब में तथा 1868 ई. से उत्तर प्रदेश में नगर पालिकाएँ स्थापित की गईं। आगे चलकर नगरपालिका अधिनियम पारित कर नगर पालिकाओं को कर लगाकर वित्तीय रूप से स्वावलम्बी बनने का अवसर प्रदान किया गया। इससे एक ओर जहाँ नगरपालिकाओं की आमदनी में वृद्धि।

हुई, वहीं दूसरी ओर चुनाव प्रक्रिया को बल मिला। 1881- 82 ई. में एक अधिनियम पारित करके स्थानीय स्वशासन के नियमों में वृद्धि की गई। आगामी दो वर्षों में नगर पालिकाओं के संविधान शक्तियों एवं कार्य क्षेत्र में परिवर्तन किया गया। इसमें साधारण व्यक्ति को भी नगरपालिका प्रमुख बनने की अनुमति प्रदान की गई। 1882 ई. के बाद ही ग्रामीण क्षेत्रों में जिला बोर्ड स्थापित किये गये और 1908 में पुनर्गठन आयोग द्वारा पंचायतों एवं जिला बोर्ड के विकास पर बल दिया गया।

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(4) ब्रिटिश आर्थिक नीतियों का संक्षेप में मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर:
1858 ई. के बाद भारतीय संसाधनों के पूर्ण दोहन एवं शोषण की नई प्रवृत्ति को अपनाया गया। भारत में स्वतन्त्र व्यापार की अनुमति प्रदान कर दी गई। फलस्वरूप अनेक विदेशी कम्पनियाँ भारत में स्थापित हो गयीं तथा भारत के उद्योग-धन्धे समाप्त होने लगे। भारतीय उद्योगों का शोषण होने लगा। ब्रिटिश सरकार की आर्थिक नीतियाँ केवल इंग्लैण्ड के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई थीं।

इन नई आर्थिक नीतियों के अन्तर्गत केन्द्रीय एवं प्रान्तीय सरकारों के मध्य आय का बँटवारा किया गया। भारतीय किसानों को भूमिकर तथा पट्टेदारी की नीति अपनाकर जमींदार और पट्टेदार जैसे दो वर्गों में बाँट दिया गया। जिससे ग्रामीणों तथा मजदूरों की स्थिति दिन-प्रतिदिन दयनीय होती चली गई। इसी समय बाल मजदूरी को भी प्रोत्साहित किया गया था जो भारतीयों के हित में नहीं था। इस प्रकार ब्रिटिश सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण आर्थिक क्षेत्र में भारत का विकास पूर्णरूप से रुक गया था।

(5) ब्रिटिश शिक्षा नीति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
18वीं शताब्दी के आरम्भ में ही अंग्रेजी शिक्षा की पहल की जा चुकी थी। 1854 ई. में वुड प्रस्ताव में अंग्रेजी शिक्षा के साथ-साथ भारतीय भाषाओं के अध्ययन का भी सुझाव दिया गया था। इसी प्रस्ताव में अध्यापकों के प्रशिक्षण का सुझाव भी था। 1882 ई. में लॉर्ड रिपन ने वुड प्रस्ताव को क्रियान्वित करने के लिए हण्टर आयोग का गठन किया। इसमें
प्राइमरी शिक्षा को प्रोत्साहित किया गया था तथा विद्यार्थियों की मानसिक एवं शारीरिक शिक्षा पर जोर दिया गया था।

1904 ई. में विश्वविद्यालय अधिनियम पारित कर विश्वविद्यालय की सम्बद्धता एवं विद्यार्थियों की शिक्षा के अनुसार प्राध्यापकों की नियुक्ति की व्यवस्था की गई। 1919 ई. के अधिनियम में शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी प्रान्तीय विधान मण्डलों को सौंप दी गई। शिक्षा के लिए सार्जेन्ट योजना (1944) के अन्तर्गत स्कूलों में 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था की गई थी, आरम्भ में ब्रिटिश शिक्षा नीति का प्रत्यक्ष लाभ भारतीयों को भले ही न मिला हो किन्तु इसने भारतीयों को राष्ट्र के प्रति संगठित एवं समर्पित करने में महती भूमिका निभाई थी।

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MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 20 वेधशाला

MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 20 वेधशाला (पत्रम्)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 20 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एक पदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) उज्जयिनी कस्याः विद्यायाः प्रमुखं केन्द्रमस्ति? (उज्जैन किस विद्या का प्रमुख केन्द्र था?)
उत्तर:
ज्योतिषादयः। (ज्योतिष विद्या का)।

(ख) वेधशाला कस्याः नद्याः तटे स्थिता अस्ति? (यंत्रशाला किस नदी के तट के किनारे स्थित है?)
उत्तर:
क्षिप्रा। (क्षिप्रा।)

(ग) उज्जयिनीतः का रेखा निर्गता? (उज्जैन से होकर कौन-सी रेखा गुजरती है?)
उत्तर:
भूमध्य रेखा। (भूमध्य रेखा)।

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(घ) कस्य प्रयत्नेन वेधशालायाः जीर्णोद्धारो जातः? (किसके प्रयत्न से यंत्रशाला का जीर्णोद्धार हुआ?)
उत्तर:
पं. सूर्यनारायण व्यासस्य। (पं. सूर्यनारायण व्यास के)

(ङ) वेधशालायां कास्य विज्ञानस्य बोधं भवति? (यंत्रशाला से कौन-से विज्ञान का बोध होता है?)
उत्तर:
ज्योतिष। (ज्योतिष का)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) केन यन्त्रेण दिगंशः ज्ञायते? (किस यंत्र के द्वारा दिशाओं की गणना की जाती है?)
उत्तर:
दिगंशयन्त्रेण दिगंशः ज्ञायते। (दिशासूचक यंत्र के द्वारा दिशाओं की गणना की जाती है।)

(ख) वेधशालानिर्माणं कदा केन च कारितम्? (यंत्रशाला का निर्माण कब और किसके द्वारा किया गया?)
उत्तर:
वेधशालानिर्माणं अष्टादशशताब्दयां राजा जयसिंहेन च कारितम्। (वेधशाला का निर्माण 18वीं सताब्दी में राजा जयसिंह के द्वारा किया गया।)

(ग) सम्राट् यन्त्रेण कः लभ्यते? (सम्राट यंत्र से क्या जानकारी मिलती है?)
उत्तर:
सम्राट्यन्त्रेण सूर्योदयात् सूर्यास्तं यावत् स्पष्ट समयो लभ्यते। (सम्राट यंत्र के द्वारा सूर्योदय और सूर्यास्त के स्पष्ट समय की जानकारी मिलती है।)

(घ) नाडिवलययन्त्रेण कः ज्ञायते? (नाडिवलय यंत्र से क्या ज्ञान प्राप्त होता है?)
उत्तर:
नाडिवलंययन्त्रेण ग्रहनक्षत्राणां दक्षिणायन विज्ञातं। (नाडिवलय यंत्र के द्वारा ग्रह-नक्षत्रों का तथा दिशाओं का ज्ञान होता है।)

(ङ) पलभायन्त्रेण कस्य ज्ञानं भवति? (पलभा यंत्र द्वारा किसका ज्ञान होता है?)
उत्तर:
पलभायंत्रेण छायायामपि समयस्य ज्ञानं भवति। (पलभा यंत्र के द्वारा छाया से भी समय का ज्ञान होता है।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत
(क) उज्जयिन्यां वेधशाला कुत्र स्थितास्ति? (उज्जैन की यंत्रशाला कहाँ पर स्थित है?)
उत्तर:
एषा वेधशाला उज्जयिन्याः दक्षिणभागे क्षिप्रायाः दक्षिण तटे स्थितास्ति। (यह वेधशाला उज्जैन के दक्षिण में क्षिप्रा नदी के दक्षिण तट में स्थित है।)

(ख) जयसिंहेन किमर्थं वेधशालानिर्माणं कारितम्? (जयसिंह ने किसलिए यंत्रशाला का निर्माण कराया?)
उत्तर:
जयसिंहेन ज्योतिषानुरागवशात् वेधशाला निर्माणं कारितम्। (जयसिंह ने ज्योतिष के वशीभूत होकर यंत्रशाला का निर्माण करवाया।)

(ग) उज्जयिन्यां कानि-कानि स्थलानि दर्शनीयानि सन्ति? (उज्जैन में कौन-कौन से स्थान देखने योग्य हैं?)
उत्तर:
उज्जयिन्यां महाकालेश्वर मन्दिरम् महर्षेः सान्दीपनेः आश्रमम्, गढ़कालिका मन्दिरम् आदयः स्थलानिदर्शनीयानि सन्ति।
(उज्जैन में महाकालेश्वर का मन्दिर, महर्षि सांदिपनि का आश्रम गढ़कालिका मन्दिर आदि स्थान देखने योग्य हैं।)

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(घ) दिगंशयन्त्रेण दक्षिणोत्तरभित्तियन्त्रेण च कस्य बोधः भवति? (दिक्यंत्र और दक्षिणोत्तर दीवाल यंत्र के द्वारा किसका ज्ञान होता है?)
उत्तर:
दिगंशयन्त्रेण दक्षिणोत्तर भित्तियन्त्रेण च नक्षत्राणाञ्चापि दिगंशोच ग्रहनक्षत्राणां मध्याह्नवृत्ता गमनसमये नतोन्नतांशयोः बोधः भवति। (दिक यंत्र और दक्षिणोत्तर दीवाल यंत्र के द्वारा नक्षत्रों के दिशाओं का, ग्रहों का तथा समयादि का ज्ञान होता है।)

(ङ) उज्जयिन्याः प्राचीननामानि लिखित्वा प्राचीनवैभवमपि वर्णयत? (उज्जैन का प्राचीन नाम लिखकर प्राचीनकालीन वैभव को भी वर्णित करें?)
उत्तर:
उज्जयिन्याः प्राचीननामानि अवन्तिका आसीत् च सर्वत्र पुरातात्त्विकं वैभवं, ज्योतिष-गणित आदयः आसीत्। (उज्जैन का प्राचीन नाम अवन्तिका था जहाँ पुरातात्त्विक वैभव के साथ-साथ ज्योतिष एवं गणित का अध्ययन केन्द्र था।)

प्रश्न 4.
रिक्तस्थानानि पूरयत
(क) राजा जयसिंहेन वेधशालानिर्माणं कारितम्।
(ख) आङ्ग्लभाषायां वेधशालां अब्जर्वेटरी इति वदन्ति।
(ग) एषा अवन्तिका नाम्नापि शास्त्रेषु वर्णिता अस्ति।
(घ) भूमध्य रेखा इतः एव निर्गता।
(ङ) एतद् ज्योतिष ज्ञानं विज्ञानस्य उत्तमम् उदाहरणम् अस्ति।

प्रश्न 5.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्धवाक्यानां समक्षं “न” इति लिखत
उदाहरणम् –
वेधशाला क्षिप्रायाः उत्तरतटे स्थिता अस्ति। – न
उज्जयिनी ज्योतिषविद्याया प्रमुख केन्द्रमस्ति। – आम्
(क) वेधशालायाः निर्माणम् अष्टादशशताब्याम् अभवत्।
(ख) जयसिंहेन वेधशालायाः जीर्णोद्धारं कारितम्।
(ग) पलभायन्त्रेण रात्रौ समयस्य ज्ञानं भवति।
(घ) उज्जयिनी विशाला इति नाम्नापि शास्त्रेषु वर्णिता।
(ङ) उज्जयिनीतः कर्करेखा निर्गता।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) न
(ङ) न

प्रश्न 6.
सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धेः नाम लिखत
(क) पुरीयम् – पुर+इयम् = स्वरसन्धिः।
(ख) सर्वेऽपि – सर्व+अपि = पूर्व रूप स्वर सन्धिः।
(ग) कुशलताञ्च – कुशलता+च = व्यंजन संन्धिः।
(घ) दृष्टव्येति – दृष्टव्य+इति = स्वर सन्धिः।
(ङ) कालेऽपि – काल:+अपि = पूर्व रूप स्वर सन्धिः।

प्रश्न 7.
उदाहरणानुसारं शब्दानां धातुं प्रत्ययं च पृथक कुरुत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 20 वेधशाला img-1

प्रश्न 8.
अव्ययैः वाक्यनिर्माणं कुरुत-
यथा :
जनाः वेधशालां यन्त्रभवनम् अपि वदन्ति।
(क) सर्वत्र – सर्वत्र शिक्षकाः सन्ति।
(ख) सम्यक् – सः सम्यक् पठितुम् भोपाल नगरम् आगच्छत्।
(ग) अधुना – अधुना उज्जैनयाम् वेधशाला पुरातात्त्विक धरोहरः अस्ति।
(घ) यावत् – यावत् सः अगमिष्यसि तावत् अहम् पठिष्यामि।
(ङ) यदा – यदा पं. सूर्यनारायण व्यासेन वेधशाला जीर्णोद्धारं कारितवान्।

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प्रश्न 9.
उदाहरणनुसारं शब्दानां विभक्तिं वचनं च लिखत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 20 वेधशाला img-2

प्रश्न 10.
यथायोग्यं योजयत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 20 वेधशाला img-3

वेधशाला पाठ-सन्दर्भ/प्रतिपाद्य

पत्रलेखन भाषण कला के समान एक लेखक कला है। लिखिन रूप में कहा गया अंश थोड़े में लिखते हैं। सरल, सुंदर विन्यास में संक्षिप्त किन्तु सम्पूर्ण लेख लेखन के महत्त्व को बताते हैं। व्यक्ति विशेष के अनुसार भूमिका, उपसंहार, पत्रलेखन की विशेषता होती है। प्रस्तुत पाठ में पत्र के माध्यम से उज्जैन की वेधशाला की विशेषता बताई गई है

वेधशाला पाठ का हिन्दी अर्थ

1.

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयः
शामगढ़नगरम् (मध्यप्रदेशः)

प्रियमित्र! तपन!
नमस्ते
अहमत्र कुशली, भवतः कुशलताञ्च कामये। मम अध्ययनं सम्यक् प्रचलति। मम विद्यालयस्य त्रैमासिकी परीक्षायाः परिणामः आगतः। मम परिणामः उत्तमः।

विगतसप्ताहे विद्यालयस्यैका शैक्षणिकयात्रांप्रवृत्ता। अहम् संस्कृतशिक्षकस्य निर्देशने छात्रैः सह उज्जयिनी गतवान्। उज्जयिनी भारतस्य अत्यंतं प्राचीनतम् इतिहासधर्म-दर्शन-कला-साहित्य-योग-ज्यौतिषादीनां च केन्द्रमासीत्। एषा अवन्तिका, विशाला नाम्नापि शास्त्रेषु वर्णिता अस्ति। अत्र सर्वत्र पुरातात्विकं वैभवं दृष्ट्वा मनसि आनन्दो जायते। भगवतःमहाकालस्य पुरीयं देशे श्रद्धायाः केन्द्रमस्ति। अत्र भव्यं महाकालेश्वरमन्दिरम्, हरसिद्धिमंदिरम्, गोपालमन्दिरम्, महर्षेः सान्दीपनेः आश्रमम्, गढ़कालिकामन्दिरम् कालभैरवमंदिर अन्यानि चापि सिद्धवट-अङ्कपात-मङ्गलनाथ-कालियादाहंभवनमित्यादि दिव्यस्थानानि अस्माभिः अवलोकितानि। किन्तु वेधशालां दृष्ट्वा वयं सर्वेऽपि आश्चर्यचकिताः सजाताः।

शब्दार्थ :
अहमत्र-मैं यहां हूं-I am hear; कामये-काम-disire/wish; अगतः-आया-come; विगतसप्ताहे-पिछले सप्ताह-last weak; प्रवृत्ता-प्रवृत्त-to go ahead; संस्कृत शिक्षकस्य-संस्कृत शिक्षक-Sanskrit teacher; वापि-और भी-and also; अस्माभिः-हमारे-our; सजाताः-हुए-happend; ज्यौति-ज्यौति-astrology.
हिन्दी अर्थ :

शासकीय उच्चतर माध्यमिक
विद्यालय, शामगढ़नगर (म. प्र.)

प्रिय मित्र तपन!
नमस्ते!
मैं यहाँ कुशलपूर्वक हूँ तथा आपकी कुशलता की कामना करता हूँ। मेरा अध्ययन ठीक से चल रहा है। मेरे विद्यालय की त्रैमासिक परीक्षा का परिणाम आ गया है। मेरा परिणाम उत्तम है।

पिछले सप्ताह विद्यालय की ओर से एक शैक्षणिक यात्रा सम्पन्न हुई। मैं भी संस्कृत के आचार्य महोदय व छात्रों के साथ उज्जैन गया। उज्जयिनी भारत के अत्यन्त प्राचीन इतिहास, धर्म, दर्शन, कला, साहित्य योग और ज्योतिष आदि का केन्द्र था। शास्त्रों में इस नगर को अवन्तिका के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ सर्वत्र पुरातात्त्विक सम्पन्नता को देखकर मन में आनन्द की लहरें हिलारें लेने लगती हैं। यहाँ का प्राचीन कालेश्वर मन्दिर, हरसिद्ध मंदिर, गोपाल मंदिर, महर्षि संदीपन आश्रम, गढ़ कालिका मन्दिर, काल भैरव मंदिर आदि अनेक दर्शनीय स्थल हैं। इसके अतिरिक्त अन्य और भी दर्शकीय स्थल है जैसे-सिद्धवट, अंक पात, मंगलनाथ, कालिया दाह भवन आदि । किन्तु वेधशाला को देखकर हम सभी आश्चर्य चकित हो गए।

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2. मित्र! आङ्ग्लभाषायां वेधशालाम् “ऑब्जर्वेटरी” इति वदन्ति । जनाः वेधशालां “यन्त्रभवनम्” अपि वदन्ति । एषा वेधशाला उज्जयिन्याः दक्षिणभागे क्षिप्रायाः दक्षिणतटे उन्नत-भू-भागे स्थिता अस्ति। प्राचीनकालत् एव उज्जयिनी ज्यौतिषविद्यायाः प्रमुखं केन्द्रम् । भूमध्यरेखा इतः एव निर्गता। इदं स्थानं गणितस्यापि आधारस्थलम् अस्ति। अष्टादशशताब्यां राज्ञा जयसिहेन ज्यौतिषानुरागवशात् वेधशालानिर्माणं कारितम् । ग्रहाणां प्रत्यक्षवेधनाय जयसिंहः उज्जयिन्या, काश्या, देहल्या, जयपुरे च वेधशालाना निर्माणं कृतवान्। सः वेधज्यौतिषमधिकृत्य एक ग्रन्थम् अपि रचितवान् इति श्रूयते। तेन अत्र एकम् उपनगरम् अपि निर्मितम् अधुना अपि जयसिंहपुरा इति नाम्ना तद् विख्यातमेव।

इयं वेधशाला जीर्णशीर्णा आसीत् परं 1961 तमे खीष्टाब्देः पं. सूर्यनारायणव्यासस्य प्रयत्नेन वेधशालायाः जीर्णोद्धारो जातः। अत्र विद्यते सम्राट्यन्त्रम् एतेन सूर्योदयात् सूर्यास्तं यावत् स्पष्टसमयो लभ्यते। अत्र स्थितेन दिगंशयन्त्रेण ग्रहाणां नक्षत्राणाञ्चापि दिगशो ज्ञायते। “नाडिवलययन्त्रेण” ग्रहनक्षत्राणां दक्षिणायन विज्ञातं भवति।

शब्दार्थ :
अब्जर्वेटरी-अब्जर्वेटरी-observatary; वदन्ति-कहते हैं-say; एषा-यह-this; निर्गता-जाती है-goes; इदं-यह-this; ज्यौतिषानुरागवशात्-ज्योतिष के अनुराग से-fond of astrology, astronomer; कारितम्-कराया-done; वेधज्योतिष्मधिकृत्य-यंत्र ज्योतिष पर आधारित-instrument lasred on astrology; श्रूयते-सुना जाता है-is listen; रचिवान्-रचा-create; एकम्-एक-one; निर्मितम्-जाता है-goes; अधुना-आज-today; विख्यातमेव-प्रसिद्ध-famous; प्रयत्नेन-प्रयत्न से-for try; जीर्णोद्धार-जीर्णोद्धार-repair; विद्यते-विद्यमान-wish man; यावत-जब तक-till that; लभ्यते-प्राप्त होता है-receives; ग्रहाणां-नक्षत्रों का-planets; ज्ञायते-ज्ञाता होता है-happens; ग्रह नक्षत्राणां-ग्रह नक्षत्रों का-planets.

हिन्दी अर्थ :
मित्र! आंग्ल भाषा में वेध शाला को ‘आब्जर्वेटरी’ कहते हैं। लोग वेधशाला को ‘यंत्र शाला’ भी या ‘यंत्र भवन’ भी कहते हैं। यह ‘यंत्र भवन’ उज्जैन के दक्षिणी भाग में शिप्रा के दक्षिण तट पर स्थित ऊँचे भू-भाग पर स्थापित की गई है। उज्जैन प्राचीन काल से ही ज्योतिष विद्या का केन्द्र रहा है। यहाँ से कर्क रेखा भी गुजरती है इसलिए यह स्थान गणित का भी प्रमुख आधार स्थल रहा है। अठारहवीं शताब्दी में राजा जयसिंह ज्योतिष प्रेम के वशीभूत एक यंत्र भवन का निर्माण कराया गया। ग्रहों के सम्यक् ज्ञान के लिए राजा जयसिंह ने उज्जैन, काशी, दिल्ली और जयपुर नगर में वेधशालाओं का निर्माण करया। ऐसा प्रचलित है कि उन्होंने वेध, ज्योतिष के आधार पर एक उपनगर भी बसाया जो आज भी जयसिंह पुरा के नाम से जाना जाता है।

यह यंत्र भवन जीर्ण हो गया था किन्तु सन् 1961 में पं. सूर्यनारायण व्यास के प्रयत्न से वेधशाला का जीर्णोद्धार का कार्य पूर्ण हुआ। इस वेधशाला में स्थापित यंत्र से सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त वेला तक समय स्पष्ट दिखाई देता है। यहाँ की स्थिति से दिशा सूचक यंत्र द्वारा ग्रह और नक्षत्र आदि की गणना ज्ञात होती है। नाडि वलय यंत्र द्वारा ग्रह-नक्षत्रों के दक्षिणायन होने का विशेष ज्ञान होता है।

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3. “दक्षिणोत्तरभित्तियन्त्रेण” ग्रहनक्षत्राणां मध्याहूनवृत्तागमनसमये नतोन्नतांशयोः परिज्ञानं सञ्ज्ञायते। “पलभायन्त्रेण” छायायामपि समयस्य सम्यक ज्ञानं भवति।

वस्तुतः वेशधालां वीक्ष्य मनसि गौरवमनुभवामि यत् प्राचीनकालेऽपि अस्माकं पूर्वजनां गणितस्य, ग्रहनक्षत्राणाञ्च ज्ञानम् अद्भुतं वैज्ञानिकञ्चासीत्।

इदानीं पत्रं समापयामि। यदा अवसरः लभ्यते तदा एकवारं ज्ञानविज्ञानस्य पुरीयम् उज्जयिनी अवश्यमेव दृष्टव्येति।
शम्।

भवतः कुशलापेक्षी
राजेशः

शब्दार्थ :
मध्याहनवृत्तागमनसमये-दोपहरी के समय-In the time of afternoon; छायायामपि-छाया भी-sadow also; वैज्ञानिकञ्चासीत्-वैज्ञानिक थे-was scientist; इदानीं-इस समय-this time; पुरीयम्-प्राचीन (नगर में)-old, ancient; परिज्ञान-विशेष ज्ञान-special knowledge; ज्ञानविज्ञानस्य-ज्ञान-विज्ञान के-knowledge of science.

हिन्दी अर्थ :
“दक्षिण-उत्तर दीवार के यंत्र के द्वारा ग्रह-नक्षत्रों के दोपहर के आगमन के समय विभिन्न भू-भाग का ज्ञान प्राप्त होता है। पलभ यन्त्र द्वारा छाया से भी सम्यक् ज्ञान प्राप्त होता है।
वस्तुतः वेधशाला को देखकर मैं गौरव की अनुभूति कर रहा हूँ कि प्राचीनकाल में भी हमारे पूर्वजों को गणित और ग्रह-नक्षत्रों का ज्ञान अद्भुत और वैज्ञानिक था।

अब इस समय पत्र समाप्त कर रहा हूँ। जब भी समय मिले, एक बार इस ज्ञान-विज्ञान के नगर उज्जैन को अवश्य देखना।

आपका कुशलापेक्षी
राजेश

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.3

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.3

प्रश्न 1.
∆ DEF की रचना कीजिए, ताकि DE = 5 cm, DF = 3 cm और m ∠EDF = 90° हो।
हल:
रचना के पद:

  1. सर्वप्रथम आधार DE = 5 cm का एक रेखाखण्ड खींचा।
    MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.3 image 1
  2. DE के बिन्दु D पर 90° का कोण बनाते हुए एक किरण DX खींची तथा जिसमें से DF = 3 cm का रेखाखण्ड काटा।
  3. F और E को मिलाया।

अतः प्राप्त ∆ DEF अभीष्ट त्रिभुज है।

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प्रश्न 2.
एक समद्विबाहु त्रिभुज की रचना कीजिए, जिसकी प्रत्येक समान भुजा की लम्बाई 6.5 cm हो और उनके बीच का कोण 110° का हो।
हल:
रचना के पद:

  1. सर्वप्रथम आधार AB = 6.5 cm का रेखाखण्ड खींचा।
    MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.3 image 2
  2. AB के बिन्दु B पर ∠ABX = 110° का कोण बनाते हुए एक किरण BX खींची।
  3. रेखा BX में से BC = 6.5 cm काटकर रेखाखण्ड BC प्राप्त किया।
  4. C और A को मिलाया। अतः प्राप्त ∆ABC अभीष्ट समद्विबाहु त्रिभुज है।

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प्रश्न 3.
BC = 7.5 cm,AC = 5 cm और m∠C = 60° वाले ∆ABC की रचना कीजिए।
हल:
रचना के पद :

  1. सर्वप्रथम आधार BC = 7.5 cm का एक रेखाखण्ड खींचा।
  2. BC के बिन्दु C पर ∠BCX = 60° बनाते हुए एक किरण CX खींची।
  3. किरण CX में से AC = 5 cm काटकर रेखाखण्ड AC प्राप्त किया।
  4. A व B को मिलाया।

अतः प्राप्त ∆ ABC अभीष्ट त्रिभुज है।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.3 image 3

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 218

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सोचिए, चर्चा कीजिए एवं लिखिए

प्रश्न 1.
उपर्युक्त उदाहरण में, एक भुजा की लम्बाई और दो कोणों के माप दिए गए थे। अब निम्नलिखित समस्या का अध्ययन कीजिए:
∆ ABC में यदि AC = 7 cm, m∠A = 60° और m∠B = 50° है, तो क्या आप त्रिभुज की रचना कर सकते हैं ? (त्रिभुज का कोण योग गुण आपकी सहायता कर सकता है।)
हल:
यहाँ, हमें AC, ∠A तथा ∠B दिया हुआ है। त्रिभुज के कोण योग गुणं से तीसरा कोण ∠C ज्ञात करेंगे।
∴ m∠A + m∠B + m∠C = 180°
∴ 60° + 50° + m∠C = 180°
या m∠C = 180° – (60° + 50°) = 70°
इन मापों के आधार पर ∆ ABC की रचना की जा सकती है।

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MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 24 ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप का आर्थिक विकास

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 24 ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप का आर्थिक विकास

MP Board Class 8th Social Science Chapter 24 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) एलुमिनियम किस धातु से बनाया जाता है ?
(क) ताँबा
(ख) बॉक्साइट
(ग) अभ्रक
(घ) टिन।
उत्तर:
(ख) बॉक्साइट

(2) न्यूजीलैण्ड के मूल निवासी हैं –
(क) माओरी
(ख) अबोरिजिनल
(ग) एस्किमो
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(क) मावरी

(3) ऑस्ट्रेलिया की राजधानी है –
(क) सिडनी
(ख) केनबरा
(ग) पर्थ
(घ) वेलिंगटन।
उत्तर:
(क) सिडनी।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप की मुख्य फसल ………….. है।
(2) ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में अच्छे किस्म की ऊन …………. जाति की भेड़ों से प्राप्त होती है।
(3) ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के पूजा स्थल को ………….. कहते हैं।
(4) ऑस्ट्रेलिया के ……………. प्रतिशत भू-भाग पर खेती होती है।
उत्तर:

  1. गेहूँ
  2. मेरीनो
  3. युलूरू
  4. चार

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 24 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 3.
(1) ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के सबसे बड़े रेलमार्ग का नाम लिखिए।
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े रेलमार्ग का नाम ‘ट्रांस ऑस्ट्रेलियन रेलमार्ग’ है।

(2) ऑस्ट्रेलिया में सोने की प्रसिद्ध खदानों के नाम लिखिए।
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया में सोने की प्रसिद्ध खदानें कालगुर्ली व कुलगार्डी हैं।

(3) ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण-पूर्व में कौन-सा द्वीप है ?
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण-पूर्व में न्यूजीलैण्ड द्वीप है।

(4) ऑस्ट्रेलिया में भेड़ पालन केन्द्र पर कार्य करने वाले मजदूरों को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया में भेड़ पालन केन्द्र पर कार्य करने वाले मजदूरों को ‘जेकारू’ कहते हैं।

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 24 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 4.
(1) ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में अंगूर की खेती कहाँ व क्यों होती है ?
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में फलों की खेती बहुतायत से होती है। ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के दक्षिण में भूमध्य सागरीय जलवायु काले प्रदेश में अन्य रसदार फलों के साथ अंगूर की बहुतायत में खेती.शराब बनाने के लिए की जाती है।

(2) ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में गेहूं की फसल के लिए कौन-कौन सी अनुकूल भौगोलिक दशाएँ हैं ?
उत्तर:
यहाँ बहुत बड़े – बड़े कृषि फार्म हैं। खेती का सारा काम मशीनों द्वारा होता है। ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में गेहूँ शीतकाल में होता है। यहाँ गेहूं की फसल के अनुकूल उपजाऊ मिट्टी, शीतोष्ण जलवायु और साधारण वर्षा होती है।

(3) ऑस्ट्रेलिया में कौन – कौन से प्रमुख खनिज पदार्थ पाये जाते हैं ? उनके उत्पादन क्षेत्र भी लिखिए।
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया में लौह अयस्क, बॉक्साइट, मैंगनीज और सोने के भण्डार हैं। इनके अतिरिक्त चाँदी, यूरेनियम, थोरियम, ताँबा, टिन की बड़ी खदानें क्वीन्सलैण्ड में हैं। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में कालगूी एवं कुलगार्डी सोने की संसार प्रसिद्ध खदानें हैं। ऑस्ट्रेलिया में बॉक्साइट अधिक होता है। बॉक्साइट से एलुमिनियम बनाया जाता है।

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MP Board Class 8th Social Science Chapter 24 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 5.
(1) ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में भेड़पालन उद्योग क्यों उन्नत
उत्तर:
यहाँ भेड़ों को मुख्यतः ऊन के लिए पाला जाता है तथा कुछ भेड़ें माँस के लिए भी पाली जाती हैं। यहाँ भेड़ों को बड़े-बड़े बाड़ों में रखा जाता है। ये केन्द्र कई किलोमीटर क्षेत्र 1 में फैले रहते हैं। यहाँ के मरे-डार्लिंग नदियों के बीच फैला क्षेत्र भेड़पालन के लिए सबसे उपयुक्त है। न्यूसाउथवेल्स, विक्टोरिया, क्वीन्सलैण्ड तथा न्यूजीलैण्ड में भेड़ें पाली जाती हैं। यहाँ ऊन के लिए सामान्यतः ‘मेरीनो’ जाति की भेड़ें पाली जाती हैं, जिनसे बहुत अच्छे किस्म की ऊन प्राप्त होती है।

भेड़ों को चराने के लिए यहाँ चरागाह बहुतायत में हैं। ऑस्ट्रेलिया में भेड़ों से ऊन उतारने के लिए आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जाता है। भेड़ों से ऊन उतारने के लिए अधिक मात्रा में कुशल श्रमिकों की जरूरत होती है जो यहाँ पर बहुत बड़ी संख्या में आसानी से मिल जाते हैं। इन्हीं सब कारणों से आस्ट्रेलिया महाद्वीप में भेड़पालन उद्योग इतना उन्नत है।

(2) ऑस्ट्रेलिया में सघन जनसंख्या कहाँ पाई जाती है और क्यों ?
उत्तर:
सामान्यतः ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप संसार का सबसे विरल जनसंख्या वाला देश है, परन्तु ऑस्ट्रेलिया में सघन जनसंख्या दक्षिणी-पूर्वी, दक्षिण-पश्चिमी एवं पूर्वी तटीय प्रदेशों में है। ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के ये क्षेत्र संसार के प्रमुख देशों से वायु परिवहन द्वारा जुड़े हुए हैं। ये क्षेत्र इसके अलावा तटीय क्षेत्र होने से संसार के बड़े और प्रसिद्ध बन्दरगाह भी हैं जहाँ से व्यापार बड़े स्तर पर होता है तथा यह क्षेत्र यातायात के प्रचुर साधनों से आपस में जुड़ा हुआ है।

(3) ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के कोई दो प्रमुख उद्योगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में भेड़पालन उद्योग एवं खनिज उत्खनन उद्योग प्रमुख हैं –

(i) भेड़पालन उद्योग:
यहाँ भेड़ों को मुख्यतः ऊन के लिए पाला जाता है तथा कुछ भेड़ें माँस के लिए भी पाली जाती हैं। यहाँ भेड़ों को बड़े-बड़े बाड़ों में रखा जाता है। ये केन्द्र कई किलोमीटर क्षेत्र 1 में फैले रहते हैं। यहाँ के मरे-डार्लिंग नदियों के बीच फैला क्षेत्र भेड़पालन के लिए सबसे उपयुक्त है। न्यूसाउथवेल्स, विक्टोरिया, क्वीन्सलैण्ड तथा न्यूजीलैण्ड में भेड़ें पाली जाती हैं। यहाँ ऊन के लिए सामान्यतः ‘मेरीनो’ जाति की भेड़ें पाली जाती हैं, जिनसे बहुत अच्छे किस्म की ऊन प्राप्त होती है।

भेड़ों को चराने के लिए यहाँ चरागाह बहुतायत में हैं। ऑस्ट्रेलिया में भेड़ों से ऊन उतारने के लिए आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जाता है। भेड़ों से ऊन उतारने के लिए अधिक मात्रा में कुशल श्रमिकों की जरूरत होती है जो यहाँ पर बहुत बड़ी संख्या में आसानी से मिल जाते हैं। इन्हीं सब कारणों से आस्ट्रेलिया महाद्वीप में भेड़पालन उद्योग इतना उन्नत है।

(ii) खनिज उत्खनन उद्योग:
आस्ट्रेलिया में लौह, अयस्क, बॉक्साइट, मैंगनीज़ और सोने के भण्डार हैं। इनके अतिरिक्त चाँदी, यूरेनियम, थोरियम, ताँबा, टिन की भी खदानें हैं। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में कालगूर्ली एवं कुलगार्डी सोने की संसार प्रसिद्ध खदानें हैं। क्वीन्सलैण्ड में भी बड़ी खदानें हैं। ऑस्ट्रेलिया में बॉक्साइट अधिक होता है। इसकी बड़ी मात्रा में खपत देश के कारखानों में होती है यहाँ बॉक्साइट से एलुमिनियम बनाया जाता

मानचित्र कौशल
प्रश्न 6.
ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के रेखा मानचित्र में अग्रांकित को दर्शाइए –

  1. कोई एक गेहूँ उत्पादक क्षेत्र।
  2. कालगी, कुलगार्डी सोने की खदानें।
  3. न्यूजीलैण्ड, तस्मानिया द्वीप।
  4. भेड़पालन का एक राज्य।
  5. सिडनी, मेलबोर्न, ब्रिस्बेन नगर।
  6. ट्रांस ऑस्ट्रेलियन रेलमार्ग प्रथम एवं अन्तिम स्टेशन सहित।

उत्तर:

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