MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1

प्रश्न 1.
निम्नलिखित कोणों में से प्रत्येक का पूरक ज्ञात कीजिए :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 1
हल:
चूँकि एक कोण और इसके पूरक कोण का योग एक समकोण अर्थात् 90° होता है। अतः

  1. 20° का पूरक = 90 – 20° = 70°
  2. 63° का पूरक = 90° – 63° = 27°
  3. 57° का पूरक = 90° – 57° = 33°

प्रश्न 2.
निम्नलिखित कोणों में से प्रत्येक का सम्पूरक ज्ञात कीजिए:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 2
हल:
चूँकि एक कोण और उसके सम्पूरक कोण का योग दो समकोण अर्थात् 180° होता है। अतः

  1. 105° का सम्पूरक = 180° – 105° = 75°
  2. 87° का सम्पूरक = 180° – 87° = 93°
  3. 154° का सम्पूरक = 180° – 154° = 26°

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प्रश्न 3.
कोणों के निम्नलिखित युग्मों में से पूरक एवं सम्पूरक युग्मों की पृथक-पृथक पहचान कीजिए :
(i) 65°, 115°
(ii) 63°, 27°
(iii) 112°,68°
(iv) 130°, 50°
(v) 45°, 45°
(vi) 80°, 10°
हल:
(i) ∵ 65° + 115° = 180°
∴ कोण 65° और 115° का युग्म सम्पूरक है।

(ii) ∵ 63° + 27° = 90°
∴ कोण 63° और 27° का युग्म पूरक है।

(iii) ∵ 112° + 68° = 180°
∴ कोण 112° और 68° का युग्म सम्पूरक है।

(iv) ∵ 130° + 50° = 180°
∴ कोण 130° और 50° का युग्म सम्पूरक है।

(v) ∵ 45° + 45° = 90°
∴ कोण 45° और 45° का युग्म पूरक है।

(vi) ∵ 80° + 10° = 90°
∴ कोण 80° और 10° का युग्म पूरक है।

प्रश्न 4.
ऐसा कोण ज्ञात कीजिए जो अपने पूरक के समान हो।
हल:
माना कि अभीष्ट कोण x° है।
प्रश्नानुसार, पूरक कोण = x°
∴ x° + x° = 90° (∵एक कोण और इसके पूरक कोण का योग 90° होता है)
या 2x = 90° या
x° = 90°/2 = 45°
अतः अभीष्ट समान कोण = 45°

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प्रश्न 5.
ऐसा कोण ज्ञात कीजिए जो अपने सम्पूरक के समान हो।
हल:
माना कि अभीष्ट कोण x° है।
प्रश्नानुसार, सम्पूरक कोण = x°
∴ x° +x° = 180° (∵ एक कोण और इसके सम्पूरक कोण का योग 180° होता है)
या 2x° = 180°
या x° = 180°/2 = 90°
या अतः अभीष्ट समान कोण = 90°

प्रश्न 6.
दी हुई आकृति में ∠1 एवं ∠2 सम्पूरक कोण | हैं। यदि ∠1 में कमी की जाती है, तो ∠2 में क्या परिवर्तन होगा ताकि दोनों कोण फिर भी सम्पूरक ही रहें।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 3
उत्तर:
दोनों कोणों का सम्पूरक बने रहने के लिए ∠1 जिस माप से घटेगा, ∠2 उसी माप से बढ़ेगा।

प्रश्न 7.
क्या दो ऐसे कोण सम्पूरक हो सकते हैं यदि उनमें से दोनों
(i) न्यून कोण हैं ?
(ii) अधिक कोण हैं ?
(iii) समकोण हैं ?
हल:
(i) नहीं, क्योंकि दो न्यून कोणों का योग 180° से कम होता है।
(ii) नहीं, क्योंकि दो अधिक कोणों का योग 180° से अधिक होता है।
(iii) हाँ, क्योंकि दो समकोणों का योग 180° होता है।

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प्रश्न 8.
एक कोण 450 से बड़ा है। क्या इसका पूरक कोण 45° से बड़ा है अथवा 45° के बराबर है अथवा 450 से छोटा है?
उत्तर:
क्योंकि एक कोण और उसके पूरक कोण का योग 90° होता है। प्रश्नानुसार, दिया हुआ एक कोण 45° से बड़ा है। अतः इसका पूरक कोण 45° से छोटा होगा।

प्रश्न 9.
संलग्न आकृति में :
(i) क्या ∠ 1, ∠2 का आसन्न है ?
(ii) क्या ∠AOC, ∠AOE का आसन्न है ?
(iii) क्या ∠COE एवं ∠EOD रैखिक युग्म बनाते हैं ?
(iv) क्या ∠ BOD एवं ∠ DOA सम्पूरक हैं ?
(v) क्या ∠1 का ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण ∠4 है ?
(vi) ∠5 का ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण क्या है ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 4
उत्तर:
(i) हाँ, ∠1 और ∠2 आसन्न कोण हैं।
(ii) ∠AOC, ∠AOE का आसन्न नहीं है, क्योंकि ∠AOC, ∠ AOE का एक हिस्सा है।
(iii) हाँ, ∠ COE और ∠EOD रैखिक युग्म बनाते हैं। क्योंकि \( \widehat{\mathrm{COD}}\) एक सरल रेखा है।
(iv) हाँ, ∠BOD एवं ∠DOA सम्पूरक हैं, क्योंकि ∠ BOD+ ∠ DOA = 180°.
(v) हाँ, क्योंकि AB और CD सीधी रेखाएँ हैं।
(vi) 5 का ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण ∠ BOC (या ∠COB) अर्थात् (∠ 2 + ∠3) है।

प्रश्न 10.
पहचानिए कि कोणों के कौन से युग्म :
(i) ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण हैं।
(ii) रैखिक युग्म हैं।
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उत्तर:
(i) चित्र में, ∠1 और ∠4; ∠5 और (∠2 + ∠3) ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण हैं।
(ii) कोण ∠ 1, ∠5, ∠4, ∠5; ∠ 1, (∠2 + ∠3) व ∠4, (∠2 + ∠3) रैखिक युग्म बनाते हैं।

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प्रश्न 11.
निम्नलिखित आकृति में क्या ∠1, ∠2 का आसन्न है ? कारण लिखिए।
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उत्तर:
∠1, ∠2 का आसन्न कोण नहीं है क्योंकि इनका कोई उभयनिष्ठ शीर्ष नहीं है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित में से प्रत्येक में कोण x, y एवं z के मान ज्ञात कीजिए।
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हल:
(i) ∵ x और 55° ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण हैं
∴ x = 55°
पुनः 55° + y = 180° (रैखिक युग्म)
या y = 180° – 55°
या y = 125°
चूँकि y और z ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण हैं
∴ z = 125°
अतः x = 55°, y = 125°, 2 = 125°

(ii) ∵z और 40° ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण हैं
∴ z = 40°
पुनः y और 40° रैखिक युग्म बनाते हैं
∴ y + 40° = 180°
या y = 180° – 40° = 140°
∴ और (x + 25°) ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण है
∴ x + 25° =y
अतः x + 25° = 140°
अतः x = 140° – 25° = 1150
अतः x = 115°, y= 140°, z = 40°

प्रश्न 13.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(i) यदि दो कोण पूरक हैं, तो उनके मापों का योग …….. है।
(ii) यदि दो कोण सम्पूरक हैं, तो उनके मापों का योग …….. है।
(iii) रैखिक युग्म बनाने वाले दो कोण …….. होते हैं।
(iv) यदि दो आसन्न कोण सम्पूरक हैं, तो वे ……. बनाते हैं।
(v) यदि दो रेखाएँ एक-दूसरे को एक बिन्दु पर प्रतिच्छेद करती हैं, तो ऊर्ध्वाधर सम्मुख हमेशा …….. होते हैं।
(vi) यदि दो रेखाएँ एक-दूसरे को एक बिन्दु पर प्रतिच्छेद करती हैं और यदि ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोणों का
एक युग्म न्यून कोण है, तो ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोणों का | दूसरा युग्म …….. है।
हल:
(i) 90°,
(ii) 180°,
(iii) सम्पूरक,
(iv) रैखिक युग्म,
(v) समान,
(vi) अधिक कोण।

प्रश्न 14.
संलग्न आकृति में निम्नलिखित कोण युग्मों को नाम दीजिए:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 8
(i) ऊर्ध्वाधर सम्मुख अधिक कोण
(ii) आसन्न पूरक कोण
(iii) समान सम्पूरक कोण
(iv) असमान सम्पूरक कोण
(v) आसन्न कोण जो रैखिक युग्म नहीं बनाते हैं।
उत्तर:
(i) ∠ BOC और ∠AOD ऊर्ध्वाधर सम्मुख अधिक कोण हैं।
(ii) ∠AOB और ∠AOE आसन्न पूरक कोण हैं।
(iii) ∠ BOE और ∠EOD समान सम्पूरक कोण हैं।
(iv) ∠AOE और ∠EOC असमान सम्पूरक कोण हैं।
(v) ∠ BOA और ∠AOE, ∠AOE और ∠EOD, ∠EOD और ∠COD.

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 116

सोचिए, चर्चा कीजिए एवं लिखिए

प्रश्न 1.
आकृति में AC और BE, P पर प्रतिच्छेद करती हैं। AC और BC, C पर प्रतिच्छेद करती हैं। AC और EC, C पर प्रतिच्छेद करती है। प्रतिच्छेदी रेखाखण्डों के दस अन्य युग्म ज्ञात करने का प्रयास कीजिए।
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 9
हल:
AB तथा AE को मिलाइए। प्रतिच्छेदी रेखाओं के अन्य युग्म
(i) B पर प्रतिच्छेद-
CB और EB, PB और CB
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 10
(ii) C पर प्रतिच्छेद
BC और EC, PC और BC, PC और EC
(iii) E पर प्रतिच्छेद
BE और CE, PE और CE
(iv) P पर प्रतिच्छेद
BP और CP, EP और CP
(v) A पर प्रतिच्छेद
PA और BA, PA और EA

प्रश्न 2.
क्या आप इस आकृति में दो रेखाखण्डों के युग्म ज्ञात कर सकते हैं, जो प्रतिच्छेदी नहीं हैं ?
हल:
हाँ, AB और EC तथा AE और BC न कटने वाले रेखाखण्डों के युग्म हैं।

प्रश्न 3.
क्या दो रेखाएँ एक से ज्यादा बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद कर सकती हैं। इसके बारे में विचार कीजिए।
उत्तर:
नहीं, दो रेखाएँ एक से ज्यादा बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद नहीं कर सकती हैं।

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
अपने आस-पास के परिवेश में ऐसे उदाहरण ज्ञात कीजिए जहाँ रेखाएँ समकोण पर प्रतिच्छेद करती हैं।
उत्तर:
समकोण पर प्रतिच्छेद करने वाली रेखाएँ

  1. श्यामपट के किनारे,
  2. पुस्तक/उत्तर-पुस्तिका के किनारे,
  3. आयताकार दरवाजे के किनारे,
  4. मेज की टाँगें तथा उसके ऊपरी तख्ता आदि।

प्रश्न 2.
एक समबाहु त्रिभुज के शीर्षों पर प्रतिच्छेदी रेखाओं द्वारा निर्मित कोणों के माप ज्ञात कीजिए।
हल:
माना ABC एक समबाहु त्रिभुज है जिसमें प्रतिच्छेदी बिन्दु A, B और C हैं।
∵ AB = BC = CA
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 11
∵ ∠A = ∠B = ∠C = x (∵ समबाहु त्रिभुज के सभी कोण समान होते हैं)
∴∠B + ∠C = 180°
∴ x + x + x = 180°
∴ 3x = 180°
या
x = 180°/3 = 60°
अतः ∠A = ∠B = ∠C = 60°

प्रश्न 3.
एक आयत खींचिए और प्रतिच्छेदी रेखाओं द्वारा निर्मित चार शीर्षों के कोणों के माप ज्ञात कीजिए।
हल:
माना ABCD एक आयत है। अतः परिभाषा से, आयत का प्रत्येक कोण समकोण होता है।
∴ ∠A की माप = 90°, ∠B की माप = 90°.
∴ ∠C की माप = 90°, ∠D की माप = 90°
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प्रश्न 4.
यदि दो रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करती हैं, तो क्या वे हमेशा एक-दूसरे को समकोण पर प्रतिच्छेद करती हैं ?
उत्तर:
नहीं, दो रेखाएँ हमेशा एक-दूसरे को समकोण पर प्रतिच्छेद नहीं करती हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 117

संलग्न आकृति में p एक तिर्यक छेदी रेखा नहीं है तथापि ये रेखाएँ l और m को काटती हैं। क्या आप बता सकते हैं, क्यों?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 13
उत्तर:
रेखा p, रेखा l और m की तिर्यक रेखा नहीं है क्योंकि यह रेखाओं को अलग-अलग बिन्दुओं पर नहीं काटती है। वास्तव में दो रेखाओं को यह एक ही बिन्दु पर काटती है।

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प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
मान लीजिए दो रेखाएँ दी हुई हैं। इन रेखाओं के लिए आप कितनी तिर्यक छेदी रेखाएँ खींच सकते हैं ?
उत्तर:
हम दो दी गई रेखाओं के लिए असंख्य तिर्यक छेदी रेखाएँ खींच सकते हैं।

प्रश्न 2.
यदि एक रेखा तीन रेखाओं की तिर्यक छेदी रेखा है, तो बताइए कितने प्रतिच्छेद बिन्दु हैं।
उत्तर:
अगर तीन रेखाओं की एक तिर्यक छेदी रेखा है, तो इसके केवल तीन भिन्न प्रतिच्छेद बिन्दु हैं।

प्रश्न 3.
अपने आस-पास कुछ तिर्यक छेदी रेखाएँ ढूँढ़ने का प्रयास कीजिए।
उत्तर:
तिर्यक छेदी रेखाओं के उदाहरण हैं-कपड़े सुखाने का स्टैण्ड, लोहे की सीढ़ी, खिड़की की ग्रिल आदि।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 118

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
प्रत्येक आकृति में कोण-युग्म को नाम दीजिए-
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 14
उत्तर:
(i) ∠1 और ∠2 संगत कोण हैं।
(ii) ∠3 और ∠4 एकान्तर कोण हैं।
(iii) ∠5 और ∠6 तिर्यक छेदी रेखा के एक ही ओर के अन्तः कोण हैं।
(iv) ∠7 और ∠8 संगत कोण हैं।
(v) ∠9 और ∠10 एकान्तर कोण हैं।
(vi) ∠11 और ∠12 रैखिक युग्म हैं।

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 121

प्रयास कीजिए
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 15
(i) l || m
t एक तिर्यक छेदी रेखा है।
∠x = ?

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 16
(ii) a || b
c एक तिर्यक छेदी रेखा है।
∠y = ?

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 17
(iii) l1, l2 दो रेखाएँ हैं।
t एक तिर्यक छेदी रेखा है।
क्या ∠1 = ∠2 हैं ?

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 18
(iv) l || m
t एक तिर्यक छेदी रेखा है,
∠z = ?

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 19
(v) l || m
t एक तिर्यक छेदी रेखा है,
∠ x = ?

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 20
(iv) l || m, p || q
a, b, c, d ज्ञात कीजिए।
हल:
(i) x = 60° (∵ x और 60 एकान्तर कोण हैं)
(ii) y = 55°(∵ y और 55° एकान्तर कोण हैं)
(iii) नहीं, 2 1 और 2 2 बराबर नहीं हैं। (∵ 11 और 12 समान्तर नहीं हैं)
(iv) 60° + z = 180°
⇒ z = 180° – 60° = 120° (∵60° और 2 तिर्यक छेदी रेखा के एक ही ओर के कोण हैं)
(v) x = 120° (∵x और 120° संगत कोण हैं।)
(vi) a+ 60° = 180° (∵ a और 60° तिर्यक छेदी रेखा के एक ही ओर के कोण हैं)
∴ a = 180° – 60° = 120°
a + c = 180° (एकान्तर कोण)
c = 180 – a = 180° – 120° = 60°
c = b
⇒ b = 60° (ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण हैं)
b + d = 180° (रैखिका युग्म है)
⇒ 60 + d = 180°
⇒ d = 180° – 60° = 120°.

प्रयास कीजिए

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 21
(i) क्या l || m है ? क्यों ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 21a
(ii) क्या l || m है ? क्यों ?
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 5 रेखा एवं कोण Ex 5.1 21b
(iii) l ||m और तिर्यक छेदी रेखा है।
हल:
(i) यदि एक तिर्यक छेदी रेखा दो दी हुई रेखाओं को इस प्रकार काटे कि एकान्तर कोण समान हों, तो रेखाएँ समान्तर होती हैं।
∵ 50° = 50°
∴ एकान्तर कोण समान हैं।
अतः l || m.

(ii) माना चित्र (ii) में, ∠1 चिन्हित किया।
∠1 + ∠130° = 180° (रैखिक युग्म के कोण हैं)
∴ ∠1 = 180° – 130° = 50°
∵ संगत कोण समान हैं, अतः l || m

(iii) ∵ l || m और तिर्यक छेदी रेखा है।
∴ तिर्यक छेदी रेखा के एक ओर के अन्तः कोणों का योग
= 180°
x + 70° = 180°
या x = 180° – 70° = 110°

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MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 15 हमारे राष्ट्रीय प्रतीक और पहचान

MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 15 हमारे राष्ट्रीय प्रतीक और पहचान

MP Board Class 6th Social Science Chapter 15 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(अ) हमारे ‘राष्ट्रीय ध्वज’ में कौन-कौन से रंग हैं ?
उत्तर:
हमारे राष्ट्रध्वज में तीन रंग हैं –

  • केसरिया
  • सफेद, और
  • हरा।

तीन रंग का होने के कारण ही हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा झण्डा कहलाता है।

(ब) ‘राष्ट्रीय ध्वज’ में अंकित चक्र किस बात का प्रतीक है?
उत्तर:
राष्ट्रध्वज के बने चक्र में 24 तीलियाँ हैं ये तीलियाँ हमें दिन-रात कार्य करने की प्रेरणा देती हैं। इस तरह ये गति, उन्नति और परिवर्तन की प्रतीक हैं।

(स) ‘राष्ट्रगान’ की रचना किसने की थी ?
उत्तर:
कविवर रवीन्द्रनाथ टैगोर।

(द) ‘वन्देमारतम्’ की रचना किसने की थी?
उत्तर:
बंकिमचन्द्र चटर्जी।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए
(अ) राष्ट्रध्वज फहराने के कौन-कौन से नियम हैं ?
उत्तर:

  • राष्ट्रध्वज फहराते समय हमें इसके सम्मान में सावधान की मुद्रा में खड़े रहना चाहिए।
  • ध्वज की केसरिया रंग की पट्टी सदैव ऊपर रहनी चाहिए।
  • इसे प्रतिदिन सरकारी भवनों पर फहराना चाहिए तथा सूर्य छिपने से पहले ही उतार लेना चाहिए।
  • राष्ट्रीय त्यौहारों पर राष्ट्रध्वज को अपने घर पर भी फहराया जा सकता है।
  • राष्ट्रध्वज को सजावट के लिए प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

(ब) ‘राष्ट्रगान’ कब गाया जाता है ? इसे गाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर:
राष्ट्रीय पर्वो पर राष्ट्रध्वज फहराने के बाद राष्ट्रगान गाया जाता है। राष्ट्रगान गाते व इसकी धुन बजते समय ध्यान रखने योग्य बातें –

  • सावधान की मुद्रा में खड़े रहकर ही राष्ट्रगान गाया जाना चाहिए।
  • राष्ट्रगान एक स्वर और जोश में गाया जाना चाहिए।
  •  गाते समय चलना अथवा बातें नहीं करनी चाहिए।
  • राष्ट्रगान का अर्थ जानना चाहिए।

(स) हमारे राष्ट्रीय पक्षी व पुष्प कौन-कौन से हैं ? इनका वर्णन करें।
उत्तर:
राष्ट्रीय पक्षी:
मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। इसके पंख बड़े सुन्दर होते हैं। भारत में ये जंगलों में पानी के आस-पास के स्थानों पर पाये जाते हैं। वैसे गाँवों में भी इन्हें देखा जाता है। भारत में अधिकतर पीक्रिस्टेटस जाति का मोर पाया जाता है।

राष्ट्रीय पुष्प:
भारत का राष्ट्रीय पुष्प कमल है। यह हल्के गुलाबी रंग का होता है। इसे शान्ति का प्रतीक माना जाता है। यह एक पवित्र फूल है। प्राचीन भारतीय कला और पुराणों में इसका महत्त्वपूर्ण स्थान है। प्राचीन काल से ही इसे संस्कृति का शुभ प्रतीक माना जाता रहा है।

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प्रश्न 3.
खाली स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(अ) राष्ट्रीय प्रतीकों का …………… करना हमारा कर्तव्य है।
(ब) राष्ट्रध्वज की लम्बाई और चौड़ाई का अनुपात …………. है।
(स) राष्ट्रध्वज के ऊपर की ओर की पट्टी का रंग …………. होता है।
(द) राष्ट्रीय चिह्न के नीचे ……….. शब्द अंकित है।
(य) राष्ट्रगान के गायन की अवधि लगभग सेकण्ड है।
उत्तर:
(अ) सम्मान
(ब) 3 : 2
(स) के सरिया
(द) सत्यमेव जयते
(य) 52

प्रश्न 4.
सही जोड़ी बनाइए –
MP Board Class 6th Social Science Solutions Chapter 15 हमारे राष्ट्रीय प्रतीक और पहचान img 1
उत्तर:
(अ) (iv) तिरंगा
(ब) (iii) जन गण मन
(स) (i) वन्देमातरम्
(द) (v) अशोक स्तम्भ
(य) (vi) बाघ
(र) (vii) मोर
(ल) (ii) कमल

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MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 9 पितृभक्तः श्रवणकुमारः

MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 9 पितृभक्तः श्रवणकुमारः (संवादः)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 9 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक शब्द में उत्तर लिखो)
(क) पितृभक्तः कः आसीत्? (पितृभक्त कौन था?)
उत्तर:
श्रवण कुमारः। (पितृभक्त श्रवण कुमार था।)

(ख) श्रवणः जलार्थं कुत्र गतः? (श्रवण जल लेने कहाँ गया?)
उत्तर:
तमसा तीरे। (श्रवण जल लेने तमसा तीर गया।)

(ग) शब्दवेधि-बाण-विद्यायां निपुणः कः? (शब्दभेदी बाण चलाने में निपुण कौन था?)
उत्तर:
दशरथः। (शब्दभेदी बाण चलाने में निपुण दशरथ था।)

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(घ) श्रवणकुमारः किमर्थं प्रख्यातः? (श्रवण कुमार किसलिये प्रसिद्ध हुआ?)
उत्तर:
पितृभक्तिः। (श्रवण कुमार पितृभक्ति के लिए प्रसिद्ध हुआ।)

प्रश्न 2.
एक वाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) प्रवणस्य पितरौ कीदृशौ आस्ताम्? (श्रवण के माता-पिता कैसे थे?)
उत्तर:
श्रवणस्य पितरौ जन्मान्धौ आस्ताम्। (श्रवण के माता-पिता जन्म से अन्धे थे।)

(ख) श्रवणः पित्रोः तीर्थाटनं कथमकारयत्? (श्रवण कुमार अपने माता-पिता को तीर्थयात्रा किससे कराया?)
उत्तर:
श्रवणः पित्रोः तीर्थाटनं विहङ्गिकायाम् कारयत्। (श्रवण कुमार अपने माता-पिता को काँवर से तीर्थयात्रा कराया।)

(ग) दशरथः किमर्थं वनं गतवान्? (दशरथ वन किसलिये गये?)
उत्तर:
दशरथः आखेटम् दनं गतवान्। (दशरथ आखेट के लिये वन गये।)

प्रश्न 3.
अधोलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत.
(क) वाणविद्धस्य श्रवणस्य कः अभिलाषः आसीत्? (बाण से बिंधे हुये श्रवण कुमार की क्या अभिलाषा थी?)
उत्तर:
बाणविद्धस्य श्रवणस्य अभिलाषः यत ममपित्रोः जलं व्यवस्थां कृत्वा अद्यारभ्य भवान् कदापि निरपराधिनां जन्तूनां हिंसनं मा करोतु। (बाण से बिंधे हुये श्रवण कुमार की अभिलाषा थी कि मेरे माता-पिता के लिये जल की व्यवस्था करें और भविष्य में किसी भी निरपराध प्राणियों की हिंसा न करें।)

(ख) श्रवणस्य वृत्तं ज्ञात्वा पित्रोः का दशा सजाता? (श्रवण कुमार के वृत्तांत को जानकर उनके माता-पिता की क्या दशा हुई?)
उत्तर:
श्रवणस्य वृत्तं ज्ञात्वा पित्रोः वज्रपातः इव सजाता। (श्रवण कुमार के वृत्तांत को जानकर उनके माता-पिता दुःखी हुये।)

(ग) श्रवणस्य पितरौ कं शापं दत्तवन्तौ? (श्रवण के माता-पिता किसको श्राप दिये?)
उत्तर:
श्रवणस्य पितरौ दशरथं शापं दत्तवन्तौ। (श्रवण के माता-पिता दशरथ को श्राप दिये।)

प्रश्न 4.
यथायोग्यं योजयत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 9 पितृभक्तः श्रवणकुमार img-1

प्रश्न 5.
अधोलिखित वाक्यानां शुद्धरूपाणि लिखत
(क) श्रवणकुमारः पितरौ भक्त सन्ति।
उत्तर:
श्रवण कुमार पितरौ भक्तः अस्ति।

(ख) दशरथः वने गतवान्।
उत्तर:
दशरथः वने गतः।

(ग) पितरौ अन्धः आस्ताम्।
उत्तर:
पितरौ अन्धौ आस्ताम्।

(घ) श्रवणः जगतीतलं प्रसिद्धम्।
उत्तर:
श्रवणः जगतीतले प्रसिद्धम्।

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प्रश्न 6.
कोष्ठकस्यौ शब्दैः वाक्यानि रचयत
(क) श्रवणः शान्तनु पुत्रः अस्ति।
(ख) दशरथः अयोध्यायाः राजा आसीत्।
(ग) भवान् सवज्ञः अस्ति।
(घ) अहम् संस्कृतं पठामि।
(ङ) मम विद्यालये षोडश अध्यापकाः सन्ति

प्रश्न 7.
शुद्धवाक्यानां समक्षम् “आम्” अशुद्धवाक्यानां समक्षं “न” इति लिखत
(क) श्रवणकुमारः पितरौ भक्तः आसीत्।
(ख) माता-पितरौ अन्धौ न आस्ताम्
(ग) एषा कथा कलियुगस्य अस्ति।
(घ) दशरथः महाराजः आसीत्।
(ङ) श्रवणः तमसातीरं न गतवान्
उत्तर:
(क) आम्
(ख) न
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न

प्रश्न 8.
उचित विकल्पेन वाक्यानि पूरयत
(क) पितरौ पिपसितौ आस्ताम्। (बुभुक्षितौ/पिपासितौ)
(ख) श्रवण वारिम् आनेतुं तमसा तीरम् आगतः। (वारि/वारिम)
(ग) दशरथः वाण विद्यायां अतिनिपुणः आसीत्। (शस्त्र/वाण)

प्रश्न 9.
सन्धिविच्छेदं कुरुत
(क) तीर्थाटनाय
तीर्थम् + आटनाय

(ख) नरेन्द्रः
नर + इन्द्रः

(ग) जन्मान्धौ
जन्म + अन्धौ

(घ) किञ्च
किम् + च

प्रश्न 10.
समुचितेन अक्षरेण रिक्तस्थानपर्तिं कुरुत
(क) श्र व ण कु मा रः
(ख) म हा रा. जः द श र थः
(ग) वा ण वि द्या यां

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पितृभक्तः श्रवणकुमारः पाठ-सन्दर्भ/प्रतिपाद्य

संस्कृत साहित्य में नीतिपरक, आचार का बोध कराने वाली अनेक कथाएं हैं। जैसे सती सावित्री की पति-भक्ति, श्री रामचन्द्र की पितृभक्ति, एकलव्य की गुरु-भक्ति इत्यादि कथाएं बहुत प्रसिद्ध हैं। इस पाठ में श्रवण कुमार द्वारा माता-पिता की सेवा का वर्णन किया गया है।

पितृभक्तः श्रवणकुमारः पाठ का हिन्दी अर्थ

1. आचार्यः-ईशभक्तिः गुरुभक्तिः मातापितृभक्तिश्च भारतीयसंस्कृतेः मूलम्। अद्य वयम् मातापितृभक्तिविषये विमृशामः। नरेन्द्र! मातापितृभक्तिविषये त्वं किंजानासि? नरेन्द्रः-गुरुवर्य! श्रूयते श्रवणकुमारः मातापितृभक्तः आसीत् इत्येव जानामि नाधिकम्। आचार्यः-शृणोतु श्रवणस्य पितरौ वृद्धौ जन्मान्धौ चास्ताम्।। भरतः-गुरुदेव! श्रवणस्य पित्रोः नाम किम् ? श्रवणेन किञ्च कृतम्? आचार्यः-श्रवणस्य मातुः नाम भाग्यवती पितुः नाम शान्तनुः च आस्ताम्।

शब्दार्थ:
श्रूयते-सुना जाता है-Is listent नाधिकम्-अधिक नहीं-Not much; शृणोतु-सुनो-Listen; श्रवण-श्रवण के द्वारा-Through Shrawan; कृतम्-किया-Did;

हिन्दी अर्थ:
आचार्य-ईश्वर की भक्ति, गुरुभक्ति, माता-पिता की भक्ति भारतीय संस्कृति की मूल हैं। आज हम माता-पिता की भक्ति के विषय में विचार करेंगे। नरेन्द्र! मातृ-पितृ भक्ति के विषय में तुम क्या जानते हो?

नरेन्द्र :
गुरुवर! सुना है कि श्रवण कुमार माता-पिता भक्त थे। इतना ही जानता हूँ, इससे अधिक नहीं।

आचार्य :
सुना है, श्रवण कुमार के माता-पिता वृद्ध और जन्मांध थे। भरत-गुरुदेव! श्रवण के पिता का नाम क्या था? श्रवण ने क्या किया?

आचार्य :
श्रवण के माता का नाम भाग्यवती, पिता का नाम शान्तनु था।

2. श्रवणः मातरं पितरं च विहङ्गिकायाम् उपवेश्य स्वस्कन्धे तां धृत्वा तीर्थाटनन् अकारयत्। सः वनात् वनान्तरे भ्रमन् तमसानद्याः तीरं समागतः। संयोगात् अयोध्यायः नृपः दशरथः आखेटं कुर्वन् सैनिकैः वियुक्तः मार्गात् भ्रष्टः तत्रैव वनमागतः। तदैव श्रवणः पित्रोः पिपासाशमनार्थं वारि आनेतुं तमसा तीरं जगाम। जलग्रहणकाले जलपात्रात् समुत्पन्नां ध्वनिं श्रुत्वा दशरथः “कश्चित् जन्तुः जलं पिबन् अस्ति” इति अनुमीय शब्दलक्ष्यं कृत्वा त्वरितमेव बाणम् अमुञ्चत्।।

शिष्याः :
(साश्चर्यम्) तदा किमभवत्?

आचार्यः :
शृण्वन्तु! श्रवणकुमारस्य हृदये संलग्नः सः शरः तस्य मर्मभेदनम् अकरोत्। तदा जन्तोः स्थाने मानववाणीं श्रुत्वा दशरथः त्वरितमेव तत्रागतः। तत्र बाणविद्धं श्रवणं दृष्ट्वा दुखितः अभवत्। स तमुत्थाय तस्य परिचयम् पृष्टवान्।

शिष्याः :
श्रवणेन किं कथितम्?

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आचार्यः :
स्वपरिचयं दत्वा तेन कथिम-राजन् मम मृत्योः किमपि दुःखं नास्ति। परन्तु मम पितरौ वृद्धौ अन्धौ च स्तः। इदानीं तौ पिपासितौ। अतः भवान् शीघ्रं गत्वा तौ जलं पाययतु। तदा दशरथः अवदत्-वत्स! अन्यः कस्ते अभिलाषः? श्रवणः अवदत्ममपित्रोः व्यवस्थां कृत्वा अद्यारभ्य भवान् कदापि निरपराधिनां जन्तूनां हिंसनं मा करोतु इत्युक्त्वा श्रवणः स्वप्राणान् अत्यजत्।

महेशः :
ततः किमभवत?

शब्दार्थ :
विहङ्गिका-काँवर-Reg/var, kavar; स्वकन्धे-अपने कंधे पर-On his shoulder; अत्रांतरे-इसके बाद-After it; समागतः-आया-Come; संयोगात्-संयोग से-By co-incidence; आखेटं-शिकार को-To hunting; जगाम्-गया-Went; आनेतुम-लाने के लिए-For bringing: श्रुत्वा-सुनकर-Listen; कश्चित्-कोई-Any; पिवन्-पीने के लिए-For drinking: कृत्वा-करके-Done; बाणम्-बाण को-To arrow; साश्चर्यम्-आश्चर्य के साथ-With wonder; अकरोत्-किया-Did; तत्रागतः-वहाँ आया-Come there; अमुत्थाय-उसे उठाकर-Lift it; किमपि-कुछ भी-Also, Some; करोतु-करो-Do; इत्युक्त्वा-ऐसा कहकर-As said; स्वप्राणान् अत्यजत्-अपने प्राणों को छोड़ दिया-Left own life.

हिन्दी अर्थ :
श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता को कांवर में बैठाकर अपने कंधे पर ढोते हुए तीर्थाटन कराया। वह एक वन से दूसरे वन का भ्रमण करते हुए तमसा नदी के तट पर पहुँचे । संयोग वश अयोध्या के राजा दशरथ शिकार करते हुए सैनिकों से बिछुड़ मार्ग भूलकर उस वन में आ पहुँचे। तभी श्रवण कुमार माता-पिता की प्यास शान्त करने के लिए जल लेने तमसा के तट पर पहुँचे। जल लेते समय जल पात्र से निकलने वाली ध्वनि सुनकर-संभवतः कोई जानवर जल पी रहा है, ऐसा अनुमान कर शब्द का लक्ष्य कर बाण को छोड़ दिया।

शिष्य :
(आश्चर्य से) तब क्या हुआ?

आचार्य :
सुनो! श्रवण कुमार के हृदय में लगे तीर ने उसका मर्मभेद दिया। कष्ट के कारण मुँह से निकली मनुष्य की आवाज सुन राजा दशरथ तत्काल वहाँ आ गए। तब वाण से घायल श्रवण को देख कर बहुत दुःखी हुए और उसे उठाते हुए उन्होंने परिचय पूछा।

शिष :
तब श्रवण ने क्या कहा?

आचार्य :
तब उसने अपना परिचय देते हुए (राजा दशरथ से) कहा-महाराज! मुझे अपनी मृत्यु से कोई दुःख नहीं है किन्तु मेरे माता-पिता अंधे हैं और इस समय बहुत प्यासे हैं अतः आप उन्हें शीघ्र जाकर जल पिलाएँ। तब दशरथ बोले-पुत्र! तुम्हारी इच्छा क्या है?

श्रवण बोले :
(मेरी अभिलाषा यह है कि) आप मेरे माता-पिता की व्यवस्था करें और आज के बाद फिर कभी निरपराध जन्तुओं की हत्या न करें… ऐसा कहते हुए श्रवण ने अपने प्राण त्याग दिए।

महेश :
तब क्या हुआ?

3. आचार्यः-ततः दशरथः पात्रे जलं गृहीत्वा श्रवणस्य पित्रोः समीपं गतः। तौ पिपासया आकुलो श्रवणम् आह्वयन्तौ कस्यापि आगमनसङ्केतं प्राप्य “वत्स श्रवण” इति अवोचताम्। दशरथः शनैः शनैः तयोः समीपं गत्वा अब्रवीत् गृह्यताम् जलम्।

अयं शब्दः श्रवणस्य नास्ति इति विचार्य तौ अपृच्छताम् को भवान् अस्मभ्यं जलम् प्रयच्छति? तदा राजा नितरां लज्जितः दुःखितश्च सर्वं वृत्तान्तम् अश्रावयत् । तच्छ्रुत्वा तयोः उपरि वज्रपातः इव सञ्जातः। वृद्धावस्था अन्धता, वने निवासः, एकः पुत्रः, तस्यापि अकस्मात् बाणेन मृत्युः इत्यादि व्याकुलो भूत्वा विलपन्तौ, राजानम् अकथयताम्-तव कारणात् एव पुत्र-शोकेन पीडितौ आवाम् इदानीम् प्राणान् परित्यजावः, अतः त्वमपि पुत्रशोकेन प्राणान् परित्यक्ष्यसि इति राजा शप्तः। रामस्य वनगमनकाले तच्छापवशात् पुत्रशोकेन दशरथोऽपि दिवङ्गतः।

छात्राः :
आचार्य! वयं ज्ञातवन्तः यत् वस्तुतः श्रवणः पितृभक्तः आसीत्। एतदर्थं तस्य नाम जगतीतले प्रसिद्धम्।

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शब्दार्थ :
कस्यपि-किसी का भी-Any person; अवोचताम्-सोचा-Thought; अब्रवीत्-बोला-Spoke; ग्रहताम्-ग्रहण करो-Take,do Accept; अप्रक्ष्यताम्-पूछे-Asked; कोभवान्-आप कौन हैं?-Who are you; अस्मभ्यम्-हम दोनों को-We both; प्रयच्छति-दे रहे हो-You are giving; नितराम्-बहुत अधिक-Very much; अश्रावयत्-सुनाया-Told; तत्श्रुत्वा-उसे सुनकर-To listen him; अकथयताम्-कहा/सुनाया-Said/Listened; कारणात्-कारण से-For reason; त्वमपि-तुम भी-You also; परित्यक्षसि-परित्याग करोगे-Will left; वनगमन काले-वनवास के समय-In forest time; दिवगंतः-दिवंगत हुए-Didéd; ज्ञातवंतः-मालूम हुआ-Known; जगतितले-संसार में-In world; प्रसिद्धम-प्रसिद्ध-Famous; एतदर्थ-उसके-His;

हिन्दी अर्थ :
आचार्य-इसके बाद दशरथ जलपात्र में जल लेकर श्रवण के पिता के निकट गए। प्यास से व्याकुल श्रवण के पिता उसके आगमन की आहट पाकर ‘वत्स श्रवण’ इस प्रकार बोले। दशरथ धीरे-धीरे उनके समीप जाकर बोले-इस जल को ग्रहण करे।

यह शब्द श्रवण का नहीं है, ऐसा विचार कर उन्होंने (श्रवण के माता-पिता ने) उनसे पूछा-आप कौन हैं जो मुझे जल दे रहे हैं। तब राजा अत्यन्त दुखित एवं लज्जित होकर सब बातें बताईं। ऐसा सुनकर (श्रवण के माता-पिता पर) वज्रपात-सा हुआ। वृद्धावस्था में अंधा हो जाना, वन में निवास, एक ही पुत्र उसकी भी बाण लगने से अकस्मात् मृत्यु से व्याकुल होकर विलाप करते हुए राजा से बोले-तुम्हारे कारण ही पुत्र-शोक से पीड़ित होकर हम दोनों मृत्यु को प्राप्त होने वाले हैं अतः तुम भी पुत्रशोक में ही प्राण त्याग करोगे-ऐसा राजा को शाप दिया। उसी शाप के कारण राम के वन-गमन के समय राजा दशरथ पुत्र-शोक में प्राण त्याग किए।

विद्यार्थी गण :
गुरु जी! हमें ज्ञात हुआ कि वास्तव में श्रवण पित्र-भक्त थे। इसी कारण उनका नाम पृथ्वी लोक में प्रसिद्ध है।

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MP Board Class 6th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 1

MP Board Class 6th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 1

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए –
(1) इतिहास से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
प्राचीन महत्त्वपूर्ण घटनाओं का लेखा-जोखा इतिहास है –

(2) इतिहास जानने के कोई चार स्रोत बताओ।
उत्तर:
इतिहास जानने के मुख्य स्रोत हैं – पाषाण उपकरण, जीवाश्म, मिट्टी के बर्तन, शिलालेख, सिक्के, हथियार, मन्दिर, महल, मस्जिद, भोजपत्र, ताम्रपत्र, ताड़पत्र, पुरातत्त्व तथा इतिहास की पुस्तकें आदि।

(3) शिलालेख किसे कहते हैं ?
उत्तर:
पत्थरों पर खोदकर लिखी गई बातों को शिलालेख कहते हैं।

(4) भोजपत्र किसे कहते हैं ?
उत्तर:
भोजपत्र एक विशेष प्रकार के वृक्ष की छाल होती है जिस पर प्राचीन काल में लिखा जाता था।

(5) अभिलेख क्या होता है ?
उत्तर:
इतिहास की लिखित जानकारी प्रदान करने वाली सभी वस्तुएँ; जैसे-पुस्तकें, लेख, ताम्रपत्र, शिलालेख, स्तम्भ लेख आदि को अभिलेख कहा जाता है।

(6) आदिमानव किसे कहते हैं ?
उत्तर:
हजारों वर्ष पुराने मानव को आदिमानव कहते हैं।

(7) आदिमानव जंगली जानवरों से अपना बचाव कैसे करते थे ?
उत्तर:
सर्वप्रथम आदिमानव जानवरों से अपनी रक्षा करने के लिए पेड़ों पर रहता था। जब आदिमानव ने आग जलाना सीख लिया तब वह आग जलाकर जानवरों से रक्षा करने लगा। क्योंकि उसने जान लिया था कि जानवर आग से डरते हैं।

(8) आदिमानव के युग को पाषाण युग क्यों कहा जाता
उत्तर:
पत्थरों के औजारों के स्वरूप के आधार पर इसे पाषाण युग कहा गया।

(9) पाषाण युग को कितने भागों में बाँटा गया है ? नाम लिखिए।
उत्तर:
पाषाण युग को तीन भागों में बाँटा गया है –

  • पुरा पाषाण युग
  • मध्य पाषाण युग
  • नव पाषाण युग।

(10) आग की खोज कैसे हुई होगी ? लिखिए।
उत्तर:
आग के बारे में मनुष्य को पहले कोई जानकारी नहीं थी। यद्यपि यह कहना कठिन है कि आग की खोज किस प्रकार हुई किन्तु यह अनुमान लगाया जाता है कि जब उसने पहली बार जंगल में सूखी लकड़ियों को आपस में तेज रगड़ खाकर आग लगते हुए एवं पत्थरों के औजारों के निर्माण के दौरान दो पत्थरों के आपस में टकराने से चिंगारियों को निकलते देखा होगा तो उसे आग का ज्ञान हुआ होगा। तब पहली बार मानव ने पत्थरों को आपस में टकराकर आग उत्पन्न की होगी। आग की खोज मनुष्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

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(11) आदिमानव के लिए उपयोगी पशु कौन-कौन से थे?
उत्तर:
कुत्ता, बैल, गाय, भैंस, बकरी, भेड़ आदि आदिमानव के लिए उपयोगी पशु थे।

(12) पहिए की खोज मानव के लिए कैसे वरदान साबित हुई ?
उत्तर:
मानव की उन्नति में पहिए की खोज का महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसा अनुमान है कि पेड़ के तने को लुढ़कते हुए देखकर आदिमानव के मन में पहिए के निर्माण का विचार आया होगा। यह खोज उसके जीवनयापन के लिए वरदान साबित हुई। पहिए का उपयोग उसने निम्नलिखित कार्यों के लिए किया –

  • चाक से मिट्टी के बर्तन बनाने में।
  • भारी चीज को एक जगह से दूसरी जगह लाने ले जाने में।
  • गहराई से पानी खींचने में।
  • पशुओं द्वारा खींची जाने वाली गाड़ी के निर्माण में।

(13) आदिमानव एक स्थान से दूसरे स्थान पर क्यों घूमता रहता था ?
उत्तर:
भोजन की खोज में।

(14) किसी व्यक्ति के लिए परिवार का क्या महत्त्व होता है ? .
उत्तर:
व्यक्ति परिवार की इकाई है। व्यक्ति को परिवार में रहकर ही सब कुछ सीखने व आगे बढ़ने का मौका मिलता है।

(15) समाज की इकाई क्या है ?
उत्तर:
समाज की इकाई परिवार है।

(16) उन्नत समाज की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:

  • उन्नत समाज की विशेषताएँ –
  • शिक्षा का प्रचार-प्रसार,
  • सामाजिक जागरूकता।

(17) पारस्परिक निर्भरता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
किसी कार्य अथवा आवश्यकता के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होना पारस्परिक निर्भरता कहलाता है। जैसे-शहर के लोग गाँव के लोगों द्वारा उत्पादित वस्तुएँ (अनाज, सब्जियाँ, फल आदि) के लिए गाँवों पर निर्भर रहते हैं, इसी प्रकार गाँव के लोग भी शहर में स्थापित कारखानों में बनी वस्तुओं के लिए उन पर निर्भर रहते हैं।

(18) दो देशों के बीच पारस्परिक निर्भरता को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
अपनी आवश्यकताओं एवं रुचियों की पूर्ति के लिए व्यक्ति को पारस्परिक निर्भरता की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार किसी एक देश में सभी आवश्यकता की चीजें उपलब्ध नहीं होती या कम मात्रा में होती हैं, इसलिए उन्हें दूसरे देशों से मँगाना पड़ता है। हम भारत का ही उदाहरण लें तो यहाँ पेट्रोलियम पदार्थ (पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल), सेना के उपयोग के लिए आधुनिक उपकरण, हथियार आदि दूसरे देशों से मँगाये जाते हैं। भारत से मसाले, चाय, सीमेण्ट, तैयार कपड़े आदि दूसरे देशों को भेजे जाते हैं।

(19) सौरमण्डल में कितने ग्रह हैं ? कौन-सा ग्रह जीवित ग्रह है ?
उत्तर:
सौरमण्डल में नौ ग्रह हैं। पृथ्वी जीवित ग्रह है।

(20) सौरमण्डल के मुखिया का नाम लिखिए।
उत्तर:
सूर्य।

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(21) पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर कितने दिनों में लगाती है?
उत्तर:
3657 दिनों में।

(22) सूर्य के सबसे पास एवं सबसे दूर के ग्रह का नाम लिखिए।
उत्तर:
सबसे पास बुध ग्रह व सबसे दूर यम (प्लूटो) है।

(23) चन्द्रमा किसका उपग्रह है ?
उत्तर:
चन्द्रमा पृथ्वी का उपग्रह है।

(24) लाल ग्रह किसे कहते हैं ?
उत्तर:
मंगल को लाल ग्रह कहते हैं।

(25) प्रकाश वर्ष किसे कहते हैं ?
उत्तर:
प्रकाश वर्ष वह दूरी है जिसे प्रकाश 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकण्ड के वेग से एक वर्ष में तय करता है।

(26) अक्षांश एवं देशान्तर रेखा किसे कहते हैं ?
उत्तर:
भूमध्य रेखा के समानान्तर खींचे हुए वृत्तों या आड़ी रेखाओं को अक्षांश रेखाएँ कहते हैं। प्रमुख अक्षांश रेखाएँ हैं-विषुवत् रेखा, कर्क रेखा, मकर रेखा।ग्लोब पर उत्तर से दक्षिण की ओर खींची गई खड़ी रेखाएँ देशान्तर रेखाएँ कहलाती हैं। मानचित्र में ये रेखाएँ उत्तर से दक्षिण में सीधी खिंची होती हैं। प्रमुख देशान्तर रेखा का नाम प्रधान मध्याह्न रेखा है।

(27) ग्लोब क्या है ?
उत्तर:
पृथ्वी का प्रतिरूप या नमूना दिखाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले गोले को ग्लोब कहा जाता है।

(28) मानचित्र किसे कहते हैं ?
उत्तर:
पृथ्वी के धरातल या उसके किसी भाग को किसी चपटी सतह पर पैमाने के अनुसार दिखाने वाले चित्र को मानचित्र कहते हैं।

(29) पृथ्वी पर कुल कितने महाद्वीप व कितने महासागर हैं ? नाम लिखिए।
उत्तर:
पृथ्वी पर सात महाद्वीप-उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, एशिया, यूरोप, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, अन्टार्कटिका महाद्वीप हैं। चार महासागर-प्रशांत, अटलांटिक, हिन्द व आर्कटिक हैं।

(30) ग्लोब पर अक्षांश और देशान्तर रेखाएँ क्यों खींची गई हैं ?
उत्तर:
किसी स्थान की ठीक-ठीक स्थिति दर्शाने के लिए ये रेखाएँ खींची गई हैं।

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(31) भारत के मध्य से कौन-सी अक्षांश रेखा गुजरती है ?
उत्तर:
भारत के मध्य कर्क रेखा गुजरती है।

(32) भारत किस गोलार्द्ध में स्थित है ?
उत्तर:
भारत उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है।

(33) सबसे बड़ी अक्षांश रेखा को किस नाम से जानते हैं?
उत्तर:
विषुवत् रेखा।

(34) प्रधान मध्याह्न रेखा किसे कहते हैं ?
उत्तर:
प्रमुख देशान्तर रेखा को प्रधान मध्याह्न रेखा भी कहते हैं।

(35) 23 1° दक्षिणी अक्षांश रेखा को किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर:
मकर रेखा।

(36) अक्षांश और देशान्तर रेखाओं में क्या अन्तर है ? कोई तीन लिखिए।
उत्तर:
अक्षांश और देशान्तर रेखाओं में अन्तर –

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(37) पृथ्वी पर कितने परिमण्डल हैं ? नाम लिखिए।
उत्तर:
पृथ्वी पर तीन परिमण्डल हैं – स्थलमण्डल, जलमण्डल और वायुमण्डल।

(38) पृथ्वी पर कितने प्रतिशत जल भाग है ?
उत्तर:
पृथ्वी पर 71 प्रतिशत जल भाग है।

(39) स्थलमण्डल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
पृथ्वी का वह समस्त भू-भाग जो कठोर और नरम शैलों से बना है, स्थलमण्डल कहलाता है।

(40) जलमण्डल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
पृथ्वी का वह भाग जो जल से ढका है, जलमण्डल कहलाता है।

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(41) वायुमण्डल में सबसे अधिक कौन-सी गैस मिलती है?
उत्तर:
वायुमण्डल में सर्वाधिक नाइट्रोजन गैस 78.1 प्रतिशत मिलती है।

(42) पर्वत और पठार में अन्तर बताइए।
उत्तर:
पर्वत अपने आस-पास के क्षेत्र से बहुत ऊँचे भाग होते हैं, जबकि पठार सामान्य रूप से उठे हुए भाग होते हैं। इनकी सतह समतल होती है।

(43) द्वीप किसे कहते हैं ?
उत्तर:
वह छोटा भूखण्ड जिसके चारों ओर जल हो, द्वीप कहलाता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से दीजिए
(1) इतिहास से आप क्या समझते हैं ? इतिहास जानने के कौन-कौन से साधन हैं ?
उत्तर:
‘संस्कृत’ भाषा में इति + ह + आस से मिलकर इतिहास शब्द बना है जिसका अर्थ होता है जो ऐसा (घटा) था। अर्थात् भूतकाल में घटित घटनाओं या उससे सम्बन्धित व्यक्तिों का विवरण इतिहास है।

इतिहास जानने के साधन:
इतिहास जानने के मुख्य स्रोत हैं – पाषाण उपकरण, जीवाश्म, मिट्टी के बर्तन, शिलालेख, सिक्के, हथियार, मन्दिर, महल, मस्जिद, भोजपत्र, ताम्रपत्र, ताड़पत्र, पुरातत्त्व तथा इतिहास की पुस्तकें आदि।

(2) आदिमानव ने खेती करना तथा पशुपालन कैसे प्रारम्भ किया ? समझाइए।
उत्तर:
नव पाषाण युग से पहले आदिमानव भोजन की तलाश में यहाँ-वहाँ घूमता रहता था। नव पाषाण काल में उसने पशुपालन और खेती करने के प्रारम्भिक तरीकों की खोज कर ली थी। इसी कारण आदिमानव का भोजन की तलाश में यहाँ-वहाँ घूमना कम हो गया था। आदिमानव को यह समझ में आ गया था कि मानव और पशु – पक्षियों द्वारा फेंके हुए फलों के बीजों से नए पौधे उग आते हैं, यही खेती करने की कला उसकी एक महत्वपूर्ण खोज थी।

वह यह भी जान गया था कि शिकार के साथ – साथ पशुपालन उसके लिए महत्वपूर्ण है। वह अनेक पशुओं को पालने लगा था और उनसे काम भी लेने लगा था। शिकार करने में कुत्ते, खेती करने में बैल, दूध प्राप्त करने के लिए गाय, भैंस, बकरी, माँस प्राप्त करने के लिए बकरा, सवारी के लिए बैल, भैंसा, ऊँट, घोड़े का वह उपयोग करना सीख गया था।

(3) समाज क्या है एवं समाज किन-किन बुराइयों पर नियन्त्रण लगा सकता है ?
उत्तर:
समाजशास्त्रियों ने समाज को सामाजिक सम्बन्धों का जाल माना है। कई परिवारों से मिलकर समाज का निर्माण होता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। इसलिए वह परिवार और समाज दोनों से जुड़कर रहता है। हम समाज की कम आयु में विवाह, अधिक बच्चों का जन्म, बच्चों को प्रारम्भिक एवं अनिवार्य  शिक्षा न दिलाना जैसी बुराइयों पर नियन्त्रण लगाना चाहते हैं।

(4) गाँव व शहर एक-दूसरे पर निर्भर हैं, इसे समझाते हुए गाँव द्वारा उत्पादित वस्तुओं व शहर द्वारा उत्पादित वस्तुओं। के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
शहर के लोग गाँव के लोगों द्वारा उत्पादित वस्तुओं के लिए गाँवों पर निर्भर रहते हैं। इसी प्रकार गाँव के लोग भी शहर में स्थापित कारखानों में बनी वस्तुओं के लिए उन पर निर्भर रहते हैं। गाँव द्वारा उत्पादित वस्तुएँ हैं-अनाज, दालें, सब्जियाँ, – गुड़, फल आदि। शहर द्वारा उत्पादित वस्तुएँ हैं – कृषि उपकरण; दवाएँ, शक्कर, कागज आदि।

(5) परस्पर निर्भरता क्या है ? नागरिक जीवन में परस्पर निर्भरता का क्या महत्व है ?
उत्तर:
किसी कार्य अथवा आवश्यकता के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होना पारस्परिक निर्भरता कहलाता है। जैसे-शहर के लोग गाँव के लोगों द्वारा उत्पादित वस्तुएँ (अनाज, सब्जियाँ, फल आदि) के लिए गाँवों पर निर्भर रहते हैं, इसी प्रकार गाँव के लोग भी शहर में स्थापित कारखानों में बनी वस्तुओं के लिए उन पर निर्भर रहते हैं। सामाजिक जीवन आपसी सहयोग पर निर्भर करता है। सभी नागरिक एक साथ मिलकर रहते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं। इससे सामाजिक जीवन बेहतर और सुविधाजनक हो जाता है। यही नागरिक जीवन में परस्पर निर्भरता का महत्त्व है।

(6) सौरमण्डल किसे कहते हैं ? पृथ्वी सौरमण्डल का एक अनोखा ग्रह क्यों कहलाता है ?
उत्तर:
सौरमण्डल के ग्रहों का चित्र सहित वर्णन –
(1) सूर्य-सूर्य का अपना ही प्रकाश और गर्मी होती है। यह एक तारा है। सभी ग्रह सूर्य की ही आकर्षण शक्ति से एक-दूसरे से बँधे रहते हैं और सूर्य की परिक्रमा करते हैं। सभी ग्रहों तथा उपग्रहों को ऊष्मा व प्रकाश सूर्य से ही मिलता है।

(2) ग्रह – ग्रह संख्या में आठ होते हैं, जो निम्नलिखित हैं –

  • बुध – बुध सूर्य के सबसे अधिक पास का ग्रह है। इसका कोई उपग्रह नहीं है। सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 88 दिन का समय लगता है।
  • शुक्र – इसका कोई उपग्रह नहीं होता तथा आकार में पृथ्वी के बराबर होता है। यह 225 दिन में सूर्य की परिक्रमा करता है।
  • पृथ्वी – इसका उपग्रह चन्द्रमा होता है। सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में इसे 365 7 दिन का समय लगता है। इस ग्रह पर जीवन पाए
  • जाने के कारण इसे जीवित ग्रह भी कहते हैं।
  • मंगल – इसके दो उपग्रह हैं। यह 687 दिन में सूर्य की परिक्रमा पूरी कर लेता है।
  • बृहस्पति – यह सभी ग्रहों में बड़ा है। इसके 12 उपग्रह हैं। सूर्य की परिक्रमा यह 11 वर्ष 9 महीने में पूरी करता है।
  • शनि – इसके 20 उपग्रह हैं। सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में इसे 29 वर्ष 5 माह का समय लगता है। यह सौरमण्डल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
  • अरुण (यूरेनस) – यह सूर्य की परिक्रमा 84 वर्ष में पूरी करता है।
  • वरुण (नेपच्यून) – इसके 8 उपग्रह हैं। यह 165 वर्ष में सूर्य की परिक्रमा करता है।

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पृथ्वी सौरमण्डल का एक महत्त्वपूर्ण सदस्य है। सौर मण्डल ही नहीं बल्कि पूरे ब्रह्माण्ड में केवल पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन पाया जाता है। इसलिए इसे अनोखा और जीवित ग्रह कहते हैं।

निम्नलिखित कारणों से भी यह अनोखा व जीवित ग्रह है –

  • पृथ्वी पर जल ठोस, तरल और गैसीय अवस्था में मिलता है। यहाँ जल की उपलब्धता से जीवन का विकास हुआ है।
  • पृथ्वी पर जीवनदायिनी गैस ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में पाई जाती है जो किसी भी प्रकार के जीवन के लिए आवश्यक है।
  • पृथ्वी पर वायुमण्डल, जलमण्डल और स्थलमण्डल का विस्तार है, तीनों का आपस में उचित सन्तुलन बना हुआ है। इसके अलावा
  • पृथ्वी पर 12-12 घण्टे वाले दिन रात की आदर्श अवधि भी यहाँ जीवन के विकास में सहायक है।

(7) सौरमण्डल का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
(1) सूर्य-सूर्य का अपना ही प्रकाश और गर्मी होती है। यह एक तारा है। सभी ग्रह सूर्य की ही आकर्षण शक्ति से एक-दूसरे से बँधे रहते हैं और सूर्य की परिक्रमा करते हैं। सभी ग्रहों तथा उपग्रहों को ऊष्मा व प्रकाश सूर्य से ही मिलता है।

(2) ग्रह – ग्रह संख्या में आठ होते हैं, जो निम्नलिखित हैं –

  • बुध – बुध सूर्य के सबसे अधिक पास का ग्रह है। इसका कोई उपग्रह नहीं है। सूर्य की परिक्रमा करने में इसे 88 दिन का समय लगता है।
  • शुक्र – इसका कोई उपग्रह नहीं होता तथा आकार में पृथ्वी के बराबर होता है। यह 225 दिन में सूर्य की परिक्रमा करता है।
  • पृथ्वी – इसका उपग्रह चन्द्रमा होता है। सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में इसे 365 7 दिन का समय लगता है। इस ग्रह पर जीवन पाए जाने के कारण इसे जीवित ग्रह भी कहते हैं।
  • मंगल – इसके दो उपग्रह हैं। यह 687 दिन में सूर्य की परिक्रमा पूरी कर लेता है।
  • बृहस्पति – यह सभी ग्रहों में बड़ा है। इसके 12 उपग्रह हैं। सूर्य की परिक्रमा यह 11 वर्ष 9 महीने में पूरी करता है।
  • शनि – इसके 20 उपग्रह हैं। सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में इसे 29 वर्ष 5 माह का समय लगता है। यह सौरमण्डल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है।
  • अरुण (यूरेनस) – यह सूर्य की परिक्रमा 84 वर्ष में पूरी करता है।
  • वरुण (नेपच्यून) – इसके 8 उपग्रह हैं। यह 165 वर्ष में सूर्य की परिक्रमा करता है।

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(8) ग्लोब किसे कहते हैं ? ग्लोब से हमें क्या-क्या जानकारी मिलती है ?
उत्तर:
पृथ्वी का प्रतिरूप या नमूना दिखाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले गोले को ग्लोब कहा जाता है।

(ब) ग्लोब से हमें क्या-क्या जानकारियाँ प्राप्त होती हैं ? कोई पाँच लिखिए।
उत्तर:

पृथ्वी का आकार तथा महाद्वीपों व महासागरों के आकार व विस्तार का ज्ञान प्राप्त होता है।

  • दिन व रात होने की जानकारी प्राप्त होती है।
  • पृथ्वी की गतियों का ज्ञान होता है।
  • अक्षांश एवं देशांश रेखाओं की स्थिति का ज्ञान होता है।
  • जल और थल के वितरण की जानकारी भी मिलती है।

(9) मानचित्र पढ़ने के लिए किन-किन बातों का जानना आवश्यक है ? लिखिए।
उत्तर:
मानचित्र पढ़ने के लिए शीर्षक, दिशा, रूढ़ चिन्ह और मापक के विषय में जानना आवश्यक होता है।

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) शिलाओं पर अंकित चित्रों को ……… कहते हैं।
(2) पत्थर पर अंकित (खुदी हुई) बातों को ……….. कहते
(3) हमारा नागरिक जीवन परस्पर ………… और …….. पर निर्भर करता है।
(4) ग्रह एवं उपग्रह ……….. से प्रकाशित होते हैं।
(5) हमारी पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह ………. है।
(6) मनुष्य द्वारा निर्मित छोटे और अस्थायी ग्रह को ……….. कहते हैं।
(7) पृथ्वी पर फैले विशाल जल भाग को ………. कहते हैं।
(8) पृथ्वी का आकार ……….. है।
(9) ग्लोब पर ……….. रंग सबसे अधिक दिखाई देता है।
(10) पृथ्वी के ऊपरी छोर के बिन्दु को ध्रुव और दक्षिणी छोर के अन्तिम बिन्दु को ……… ध्रुव कहते हैं।
(11) देशान्तर रेखाएँ ………….. वृत्त होती हैं।
(12) पृथ्वी अपने अक्ष पर ……….. झुकी है।
(13) पृथ्वी के …………. प्रतिशत भाग पर भूमि है।
(14) चारों ओर जल से घिरे भूखंड को ………… कहते हैं।
(15) पृथ्वी पर गैसों का आवरण ……….. कहलाता है।
उत्तर:

  1. शैल चित्र
  2. शिलालेख
  3. सहयोग, कर्त्तव्य पालन
  4. सूर्य
  5. चन्द्रमा
  6. कृत्रिम उपग्रह
  7. जलमण्डल
  8. गोलाकार
  9. नीला
  10. उत्तरी, दक्षिणी
  11. अर्द्ध
  12. 23°
  13. 29
  14. द्वीप
  15. वायुमण्डल।

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प्रश्न 4.
सही विकल्प चुनिए –
(अ) निम्न में से कौन इतिहास जानने का स्रोत है ?
(i) पानी
(ii) पेड़
(iii) मिट्टी के बर्तन
(iv) पेन
उत्तर:
(iii) मिट्टी के बर्तन

(ब) आदिमानव भोजन कैसे प्राप्त करता था ?
(i) खेती करके
(ii) कन्दमूल व फल-फूल इकट्ठा करके
(iii) समुद्र से
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ii) कन्दमूल व फल-फूल इकट्ठा करके

(स) निम्न में से कौन-सी बात समाज की विशेषता नहीं है?
(i) खान-पान
(ii) रक्त-सम्बन्ध
(iii) रहन-सहन
(iv) रीति-रिवाज
उत्तर:
(ii) रक्त-सम्बन्ध

(द) हमारी मूलभूत आवश्यकता नहीं है –
(i) भोजन
(ii) कपड़ा
(iii) बिजली
(iv) आवास
उत्तर:
(iii) बिजली

(य) निम्न में से कौन तारा है?
(i) सूर्य
(ii) चन्द्रमा
(iii) पृथ्वी
(iv) मंगल।
उत्तर:
(i) सूर्य

(र) सभी आकाशगंगाएँ व सारी ऊर्जा जिस अन्तहीन आकाश में व्याप्त हैं, उसे कहते हैं –
(i) सौरमण्डल
(ii) सूर्य
(iii) ब्रह्माण्ड
(iv) आकाशगंगा
उत्तर:
(iii) ब्रह्माण्ड

(ल) जीवित ग्रह कहा जाता है –
(i) चन्द्रमा
(ii) पृथ्वी
(iii) बुध
(iv) मंगल
उत्तर:
(ii) पृथ्वी

(व) लाल रंग का ग्रह है –
(i) पृथ्वी
(ii) मंगल
(iii) वृहस्पति
(iv) बुध
उत्तर:
(ii) मंगल

(ब) जीवन रक्षक गैस है –
(i) ऑक्सीजन
(ii) नाइट्रोजन
(iii) हीलियम
(iv) ओजोन
उत्तर:
(i) ऑक्सीजन

(भ) जिस रात चन्द्रमा पूरा दिखाई देता है, वह रात होती है –
(i) अष्टमी
(ii) अमावस्या
(iii) पूर्णिमा
(iv) एकादशी
उत्तर:
(iii) पूर्णिमा

(म) पृथ्वी का सबसे निकटतम आकाशीय पिण्ड है –
(i) सूर्य
(ii) बुध
(iii) चन्द्रमा
(iv) शुक्र
उत्तर:
(iii) चन्द्रमा

(ज) पृथ्वी जैसी आकृति का मॉडल कहलाता है –
(i) मानचित्र
(ii) मापक
(iii) ग्लोब
(iv) चन्द्रमा
उत्तर:
(iii) ग्लोब

(प) पृथ्वी पर महाद्वीपों की संख्या है –
(i) 4
(ii) 5
(iii) 7
(iv) 6
उत्तर:
(iii) 7

(फ) अक्षांश रेखाओं की विशेषता है –
(i) अर्धवृत्त
(i) समान लम्बाई
(iii) पूर्ण वृत्त
(iv) खड़ी रेखाएँ
उत्तर:
(iii) पूर्ण वृत्त

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प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से असमान शब्द को छाँटिए –
प्रश्न 5. (क)
(i) पुरा पाषाण
(ii) कृष्ण पाषाण
(iii) मध्य पाषाण
(iv) नव पाषाण
उत्तर:
(ii) कृष्ण पाषाण

प्रश्न 5. (ख)
(i) गाय
(ii) भैंस
(iii) बाघ
(iv) बकरी
उत्तर:
(iii) बाघ

प्रश्न 5. (ग)
(i) शैलचित्र
(ii) वृत्त चित्र
(iii) गुहा चित्र
(iv) भित्ति चित्र
उत्तर:
(ii) वृत्त चित्र

प्रश्न 5. (घ)
(i) परिवार
(ii) समुदाय
(iii) विवाह
(iv) समाज
उत्तर:
(iii) विवाह

प्रश्न 5. (ङ)
(i) पेट्रोल
(ii) कपड़े
(iii) डीजल
(iv) मिट्टी का
उत्तर:
(ii) कपड़े

प्रश्न 5. (च)
(i) फसल
(ii) अनाज
(iii) भोजन
(iv) उपज
उत्तर:
(iii) भोजन

प्रश्न 5. (छ)
(i) बुध
(ii) शुक्र
(iii) मंगल
(iv) चन्द्रमा
उत्तर:
(iv) चन्द्रमा

प्रश्न 5. (ज)
(i) आर्यभट्ट
(ii) रोहिणी
(iii) चन्द्रमा
(iv) भास्कर
उत्तर:
(iii) चन्द्रमा

प्रश्न 5. (झ)
(i) एशिया
(ii) अफ्रीका
(iii) प्रशान्त महासागर
(iv) उत्तरी अमेरिका
उत्तर:
(iii) प्रशान्त महासागर

प्रश्न 5. (ञ)
(i) कर्क रेखा
(ii) भूमध्य रेखा
(iii) मकर रेखा
(iv) ग्रीन विच रेखा
उत्तर:
(iv) ग्रीन विच रेखा

प्रश्न 5. (त)
(i) स्थल मण्डल
(ii) जैव मण्डल
(iii) वायुमण्डल
(iv) सौरमण्डल
उत्तर:
(iv) सौरमण्डल

प्रश्न 5. (थ)
(i) पर्वत
(ii) सागर
(iii) पठार
(iv) मैदान
उत्तर:
(ii) सागर

प्रश्न 5. (व)
(i) नाइट्रोजन
(ii) ऑक्सीजन
(iii) जल वाष्प
(iv) कार्बन डाइ-ऑक्साइड
उत्तर:
(iii) जल वाष्प

प्रश्न 6.
सही जोड़ी मिलाइए –

MP Board Class 6th Social Science Solutions विविध प्रश्नावली 1 img 3
उत्तर:

  • (व) वायुमण्डल
  • (य) अक्षांश
  • (र) देशान्तर
  • (ब) पृथ्वी
  • (भ) ग्लोब
  • (ल) बृहस्पति
  • (म) परस्पर निर्भरता
  • (अ) परिवार
  • (द) पाषाण काल
  • (स) शिलालेख

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 4 सरल समीकरण Ex 4.3

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 4 सरल समीकरण Ex 4.3

Class 7 Maths Chapter 4 Exercise 4.3 Solutions In Hindi प्रश्न 1.
निम्नलिखित समीकरणों को हल कीजिए :
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 4 सरल समीकरण Ex 4.3 1
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 4 सरल समीकरण Ex 4.3 1a
∴ अतः अभीष्ट हल :y = 8

(b) 5t + 28 = 10
या 5t = 10 – 28
या 5t = – 18
या t = \(\frac { -18 }{ 5 }\)
∴ अतः अभीष्ट हल : t = \(\frac { -18 }{ 5 }\)

(c) \(\frac { a }{ 5 }\) + 3 = 2
या \(\frac { a }{ 5 }\) = 2 – 3
या \(\frac { a }{ 5 }\) = -1
या a = -5
∴ अतः अभीष्ट हल : a = -5

(d) \(\frac { q }{ 4 }\) + 7 = 5 या
या \(\frac { q }{ 4 }\) = 5 – 7 = – 2
q = – 2 x 4 = -8
∴ अतः अभीष्ट हल : q = -8

(e) \(\frac { 5x }{ 2 }\) = – 10
दोनों पक्षों में 2 का गुणा करने पर,
\(\frac { 5x }{ 2 }\)x x 2 = – 10 x 2
या 5x = – 20
या \(\frac { 5x }{ 5 }\) = –\(\frac { 20 }{ 5 }\)
या x = -4
∴ अभीष्ट हल : x = -4

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 4 सरल समीकरण Ex 4.3 1b

(h) 6z + 10 = – 2
या 6z = -2 – 10 = – 12
या \(\frac { 6z }{ 6 }\) = -12 x \(\frac { 1 }{ 6 }\)
या = -2
∴ अभीष्ट हल : z = -2

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 4 सरल समीकरण Ex 4.3 1c

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Class 7 Maths Chapter 4.3 In Hindi प्रश्न 2.
निम्नलिखित समीकरणों को हल कीजिए :
(a) 2 (x + 4) = 12
(b) 3 (n – 5) = 21
(c) 3 (n – 5) = -21
(d) -4(2 + x) = 8
(e) 4(2 – x) = 8
हल:
(a) 2 (x + 4) = 12
या x + 4 = \(\frac { 12 }{ 2 }\) = 6 (दोनों पक्षों को 2 से भाग देने पर)
या x = 6 – 4 = 2 (4 को R.H.S. में स्थानापन्न करने पर)
∴ अभीष्ट हल : x = 2

(b) 3 (n – 5) = 21
या n – 5 = \(\frac { 21 }{ 3 }\) = 7 (दोनों पक्षों को 3 से भाग देने पर)
n = 7 + 5 = 12 (-5 को R.H.S. में स्थानापन्न करने पर)
∴ अभीष्ट हल : n = 12

(c) 3 (n – 5) = – 21
या n – 5 = \(\frac { -21 }{ 3 }\) = -7 (दोनों पक्षों को 3 से भाग देने पर)
या n = -7 + 5 = -2 (-5 को R.H.S. में स्थानापन्न करने पर)
∴ अभीष्ट हल : n = -2

(d) -4 (2 + x) = 8
या 2 + x = \(\frac { 8 }{ -4 }\) = -2. (दोनों पक्षों को -4 से भाग देने पर)
x = – 2 – 2 = -4 (2 को R.H.S. में स्थानापन्न करने पर)
∴ अभीष्ट हल : x = -4

(e) 4(2 – x) = 8
या 2 – x = \(\frac { 8 }{ 4 }\) =2 (दोनों पक्षों को 4 से भाग देने पर)
या -x = 2 – 2 = 0 (2 को R.H.S. में स्थानापन्न करने पर)
∴ x = 0
∴ अभीष्ट हल : x = 0

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Class 7 Maths 4.3 Solutions In Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित समीकरणों को हल कीजिए :
(a) 4 = 5 (p – 2)
(b) -4 = 5 (p – 2)
(c) 16 = 4 + 3 (t + 2)
(d) 4 + 5 (p – 1) = 34
(e) 0 = 16 + 4 (m – 6).
हल:
(a) 4 = 5 (p – 2)
या 5 (p – 2) = 4 (दोनों पक्षों को परस्पर बदलने पर)
या p – 2 = 4 (दोनों पक्षों को 5 से भाग देने पर)
या p = \(\frac { 4 }{ 5 }\) + 2 (-2 को R.H.S. में स्थानापन्न करने पर)
p = \(\frac { 4+10 }{ 5 }\) = \(\frac { 14 }{ 5 }\)
∴ अभीष्ट हल : p = \(\frac { 14 }{ 5 }\)

(b) – 4 = 5 (p – 2)
या 5 (p – 2) = -4 (दोनों पक्षों को परस्पर बदलने पर)
या p – 2 = \(\frac { -4 }{ 5 }\) (दोनों पक्षों को 5 से भाग देने पर)
या p = \(\frac { -4 }{ 5 }\) + 2 (-2 को R.H.S. में स्थानापन्न करने पर)
या p = \(\frac { -4+10 }{ 5 }\) = \(\frac { 6 }{ 5 }\)
∴ अभीष्ट हल : p = 6/5

(c) 16 = 4+ 3 (t + 2)
4 + 3 (t + 2) = 16 (दोनों पक्षों को परस्पर बदलने पर)
या 3 (t + 2) = 16 – 4 = 12 (4 को R.H.S. में स्थानापन्न करने पर)
या t + 2 = 12/3 = 4 (दोनों पक्षों को 3 से भाग देने पर)
या t = 4 – 2 = 2 (2 को R.H.S. में स्थानापन्न करने पर)
∴ अभीष्ट हल : t = 2

(d) 4 + 5 (p – 1) = 34
या 5 (p – 1) = 34 – 4 = 30 (4 को R.H.S. में स्थानापन्न करने पर)
या (p – 1) = 30/5 = 6 (दोनों पक्षों को 5 से भाग देने पर)
p = 6 + 1 = 7 (-1 को R.H.S. में स्थानापन्न करने पर)
∴ अभीष्ट हल : p = 7

(e) 0 = 16 + 4 (m – 6)
या 16 + 4 (m – 6)= 0 (दोनों पक्षों को परस्पर बदलने पर)
या 4 (m – 6) = 0 -16 (16 को R.H.S. में ले जाने पर)
या m – 6 = \(\frac { -16 }{ 4 }\) = – 4 (दोनों पक्षों को 4 से भाग देने पर)
या m = -4 + 6 = 2 (-6 को R.H.S. में स्थानापन्न करने पर)
∴ अभीष्ट हल : m = 2

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Class 7 Maths Chapter 4 Exercise 4.3 Solutions प्रश्न 4.
(a) x = 2 से प्रारम्भ करते हुए, 3 समीकरण बनाइए।
(b) x =-2 से प्रारम्भ करते हुए, 3 समीकरण बनाइए।
हल:
(a) (i) प्रथम समीकरण : x = 2 से शुरू दोनों पक्षों को 5 से गुणा करने पर,
5x = 10
दोनों ओर से 3 घटाने पर,
5x – 3 = 10 – 3
या 5x – 3 = 7

(ii) द्वितीय समीकरण : x = 2 से शुरू
दोनों पक्षों को 10 से गुणा करने पर,
10x = 2 x 10 = 20
दोनों पक्षों में 2 जोड़ने पर,
10 + 2 = 20 + 2
या 10x + 2 = 22

(iii) तृतीय समीकरण : x = 2 से शुरू
दोनों पक्षों को 5 से भाग करने पर,
\(\frac { x }{ 5}\) = \(\frac { 2 }{ 5 }\)
दोनों पक्षों में से 4 घटाने पर,
\(\frac { x }{ 5 }\) – 4 = \(\frac { 2 }{ 5 }\) – 4
या \(\frac { x }{ 5 }\) – 4 = \(\frac { -18 }{ 5 }\)

(b) (i) प्रथम समीकरण : x = – 2 से प्रारम्भ
दोनों पक्षों को 3 से गुणा करने पर,
या 3x = – 6
दोनों पक्षों में से 2 घटाने पर,
3x – 2 = – 6 – 2
या 3x – 2 = -8

(ii) द्वितीय समीकरण : x = – 2 से प्रारम्भ
दोनों पक्षों को 3 से गुणा करने पर,
3x = – 6
दोनों पक्षों में 7 जोड़ने पर,
3x + 7 = -6 + 7
या 3x + 7 = 1

(iii) तृतीय समीकरण : x = – 2 से प्रारम्भ
दोनों पक्षों को 8 से गुणा करने पर,
8x = – 16
दोनों पक्षों में 10 जोड़ने पर,
8x + 10 = – 16 + 10
⇒ 8x +10 = – 6

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 101
प्रयास कीजिए

Class 7 Maths Chapter 4 Exercise 4.3 प्रश्न (i)
जब आप एक संख्या को 6 से गुणा करते हैं और फिर गुणनफल में से 5 घटाते हैं, तो आपको 7 प्राप्त होता है। क्या आप बता सकते हैं कि वह संख्या क्या है ?
हल:
माना कि संख्या x है।
संख्या को 6 से गुणा करने पर, हम पाते हैं 6x
अब, प्रश्नानुसार,
6x – 5 = 7
5 को L.H.S. से R.H.S. में स्थानापन्न करने पर, हम प्राप्त करते हैं :
6x = 7 + 5 = 12
दोनों पक्षों को 6 से भाग देने पर,
x = \(\frac { 12 }{ 6 }\) = अथवा x = 2
अतः अभीष्ट संख्या : 2.

Saral Samikaran Class 7 प्रश्न (ii)
वह कौन-सी सख्या है, जिसके एक-तिहाई में 5 जोड़ने पर 8 प्राप्त होता है ?
हल:
माना कि संख्या x है।
∵ संख्या का एक-तिहाई = \(\frac { 1 }{ 3 }\)x.
अब, प्रश्नानुसार,
\(\frac { 1 }{ 3 }\)x + 5 = 8
5 को L.H.S. से R.H.S. में स्थानापन्न करने पर,
\(\frac { 1 }{ 3 }\)x = 8 – 5 = 3
दोनों पक्षों को 3 से गुणा करने पर,
3 x \(\frac { 1 }{ 3 }\) x = 3 x 3
या x = 9
अत: अभीष्ट संख्या : 9

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प्रयास कीजिए

Simple Equations Class 7 Exercise 4.3 प्रश्न 1.
मापों के अनुसार, दो प्रकार की पेटियाँ हैं, जिनमें आम रखे हुए हैं। प्रत्येक बड़ी पेटी में रखे आमों की संख्या 8 छोटी पेटी में रखे आमों की सख्या से 4 अधिक है। प्रत्येक बड़ी पेटी में 100 आम हैं। प्रत्येक छोटी पेटी में कितने आम हैं ?
हल:
माना कि छोटी पेटी में आमों की संख्या = x है।
∴ 8 छोटी पेटियों में आमों की संख्या = 8x
अब, प्रश्नानुसार,
8x + 4 = 100
4 को R.H.S. में स्थानापन्न करने पर,
8x = 100 – 4
अथवा 8x = 96
दोनों पक्षों में 8 से भाग देने पर,
\(\frac { 8x }{ 8 }\) = \(\frac { 96 }{ 8 }\)
अथवा x = 12
अतः छोटी पेटी में आमों की संख्या = 12

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MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.3

MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.3

प्रश्न 1.
निम्नांकित आकृतियों में अज्ञात x का मान ज्ञात कीजिए –
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.3 image 1
हल:
∵ त्रिभुज के तीनों अन्त:कोणों का योग 180° (दो समकोण) के बराबर होता है। अतः
(i) x+ 50° + 60° = 180°
या x + 110° = 180°
या x = 180° – 110° = 700
अतः x का अभीष्ट मान = 70°

(ii) x + 90° + 30° = 180°
या x + 120° = 180°
या x = 180° – 120° = 60°
अतः का अभीष्ट मान = 60°

(iii) x + 30° + 110° = 180°
या x + 140° = 180°
या x = 180° – 140° = 40°
अत: x का अभीष्ट मान = 40°

(iv) x + x + 50 = 180°
या 2x + 50° = 180°
या 2x = 180° – 50° = 130°
या x = \(\frac { 180 }{ 3 } \) = 60°
अतः x का अभीष्ट मान = 65°

(v) x + x + x = 180°
या 3x = 180°
या x = \(\frac { 180 }{ 3 } \) = 60°
अतः x का अभीष्ट मान = 60°

(vi) x + 2x + 90° = 180°
या 3x = 180° – 90° = 90°
या x = \(\frac { 90 }{ 3 } \) = 30°
अतः x का अभीष्ट मान = 30°

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प्रश्न 2.
निम्नांकित आकृतियों में अज्ञात x और y का मान ज्ञात कीजिए –
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.3 image 2
हल:
(i) ∵ कोण y और 120° रैखिक युग्म बनाते हैं।
∴ y + 120° = 180°
या y = 180° – 120° = 60°
(∵ त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग = 180°)
अब x + y + 50° = 180°
या x + 60° + 50° = 180°
या x + 110° = 180°
या x = 180° – 110° = 70°
अतः x = 70° और y = 60°

(ii) ∵ कोण y और 80° ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण हैं,
∴ y = 80°
∵ त्रिभुज के तीनों अन्त:कोणों का योग 180° होता है।
∴ x + y + 50° = 180°
या x + 80° + 50° = 180°
या x + 130° = 180°
या x = 180° – 130° = 50°
अत: x = 50° और y = 80°

(iii) ∵ त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग = 180°
∴ 50° + 60° + y = 180°
या 110° + y = 180°
या y = 180° – 110° = 70°
पुनः कोण x और y रैखिक युग्म बनाते हैं
∴ x + y = 180°
या x + 70° = 180°
या x = 180° – 70° = 110°
अतः x = 110° और y = 70°

(iv) ∵ कोण x और 60° ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण हैं।
∴ x = 60°
अब, ∵ त्रिभुज के तीनों अन्त:कोणों का योग 180° होता है।
∴ x + 1 + 30° = 180°
या 60 + 1 + 30° = 180°
या y + 90° = 180°
या y = 180° – 90° = 90°
अतः x = 60° और y = 90°

(v) ∵ कोण । और 90° ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण हैं,
∴ y = 90°
अब, ∵ त्रिभुज के तीनों अन्त:कोणों का योग = 180°
∴ x + x + y = 180°
या 2x + 90° = 180°
या 2x = 180° – 90°
= 90°
⇒ x = \(\frac { 90 }{ 2 } \) =45°
अतः x = 45° और y = 90°

(vi) त्रिभुज का एक अन्त:कोण y है। शेष दो कोण ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण x के बराबर हैं।
∴ x + x + y = 180°
या 2x + y = 180°
या 2x + x = 180° (∵ ∠x = ∠y)
या 3x = 180°
या x = \(\frac { 180 }{ 3 } \) = 60°
अतः x = 60° और y = 60°

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 184

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
एक त्रिभुज के दो कोण 30° तथा 80° हैं। इस त्रिभुज का तीसरा कोण ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि तीसरा कोण x है,
∵ त्रिभुज के तीनों अन्त:कोणों का योग = 180°
∴ 30° + 80° + x = 180°
या 110° + x = 180°
या x = 180° – 110° = 70°
अतः त्रिभुज का तीसरा कोण = 70°

प्रश्न 2.
किसी त्रिभुज का एक कोण 80° तथा शेष दोनों कोण बराबर हैं। बराबर कोणों में प्रत्येक कोण की माप ज्ञात कीजिए।
हल:
माना कि बराबर कोणों में प्रत्येक कोण x है।
∵ त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग 180° होता है।
∴ x + x + 80° = 180°
या 2x + 80° = 180°
या 2x = 180° – 80° = 100°
या x = \(\frac { 100 }{ 2 } \) = 50°
अत: बराबर कोणों में प्रत्येक कोण = 50°

प्रश्न 3.
किन्हीं त्रिभुज के तीनों कोणों में 1 : 2 : 1 का अनुपात है। त्रिभुज के तीनों कोण ज्ञात कीजिए। त्रिभुज का दोनों प्रकार से वर्गीकरण भी कीजिए।
हल:
माना कि त्रिभुज के कोण x, 2x व x हैं।
∴ x + 2x + x = 180°
या 4x = 180°
या x = \(\frac { 180 }{ 4 } \) = 45°
त्रिभुज के कोण x = 45° तथा 2x = 2 × 45° = 90°
अत: त्रिभुज के कोण 45°, 90° और 45° हैं।
अतः त्रिभुज समकोण त्रिभुज है तथा यह समद्विबाहु त्रिभुज भी है।

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सोचिए, चर्चा कीजिए एवं लिखिए

प्रश्न 1.
क्या कोई ऐसा त्रिभुज सम्भव है जिसके दो कोण समकोण हों ?
हल:
नहीं, ऐसा त्रिभुज सम्भव नहीं हैं जिसके दो कोण समकोण हों क्योंकि त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग 180° होता है।

प्रश्न 2.
क्या कोई ऐसा त्रिभुज सम्भव नहीं है जिसमें दो | कोण अधिक कोण हों ?
हल:
नहीं, ऐसा त्रिभुज सम्भव नहीं है, जिसमें दो कोण अधिक कोण हों। यहाँ इस स्थिति में त्रिभुज के तीनों कोणों का योग दो समकोण से अधिक हो जाएगा।

प्रश्न 3.
क्या कोई ऐसा त्रिभुज सम्भव है जिसमें दो – कोण न्यून कोण हों ?
हल:
हाँ, ऐसा त्रिभुज सम्भव है जिसमें दो न्यून कोण हों।

प्रश्न 4.
क्या कोई ऐसा त्रिभुज सम्भव है जिसमें तीनों कोण 60° से अधिक हों ?
हल:
नहीं, ऐसा त्रिभुज सम्भव नहीं है जिसमें सभी तीनों कोण 60° से अधिक हों। इस स्थिति में त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° से अधिक हो जाएगा, लेकिन यह 180° के बराबर होना चाहिए।

प्रश्न 5.
क्या कोई ऐसा त्रिभुज सम्भव है जिसमें तीनों कोण 60° के हो ?
हल:
हाँ, ऐसा त्रिभुज सम्भव है जिसमें तीनों कोण 60° के हों।

प्रश्न 6.
क्या कोई ऐसा त्रिभुज सम्भव है। जिसमें तीनों कोण 60° से कम हों ?
हल:
नहीं, ऐसा त्रिभुज सम्भव नहीं है जिसमें तीनों कोण 60° से कम हों। ऐसी स्थिति में त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° से कम होगा जबकि यह 180° होना चाहिए।

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 135-136

प्रयास कीजिए

प्रश्न 1.
प्रत्येक आकृति में कोण x का मान ज्ञात कीजिए –
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.3 image 3
हल:
(i) आकृति समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें दो भुजाएँ समान हैं और समान भुजाओं के सामने के कोण समान होते हैं।
∴ अभीष्ट कोण x = 40°

(ii) आकृति समकोण समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसकी दो भुजाएँ समान हैं और समान भुजाओं के सामने के कोण समान होते हैं।
अतः दूसरी समान भुजा के सामने का कोण 45° है।
चूँकि हम जानते हैं कि त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है। अतः
x + 45° + 45° = 180°
या x + 90° = 180°
या x = 180° – 90° = 90°
∴ अभीष्ट कोण x = 90°

(iii) आकृति में त्रिभुज की दो भुजाएँ समान हैं और समान भुजाओं के सामने के कोण समान होते हैं,
∴ अभीष्ट कोण x = 50°

(iv) आकृति में त्रिभुज की दो भुजाएँ समान हैं और समान भुजाओं के सामने के कोण समान होते हैं।
∴ आधार का दूसरा कोण = x.
अब, त्रिभुज के तीनों कोणों का योग = 180°
∴ x + x + 100° = 180°
या 2x + 100° = 180°
या 2x = 180° – 100°
= 80°
∴ अभीष्ट कोण x = \(\frac { 80 }{ 2 } \) = 40°

(v) आकृति में दो भुजाएँ समान हैं तथा एक कोण समकोण है और समान भुजाओं के सामने के कोण समान होते हैं।
∴ दूसरा कोण = x
∵ त्रिभुज के तीनों अन्त: कोणों का योग = 180°
∴ x + x + 90° = 180°
या 2x = 180° – 90° = 90°
∴ अभीष्ट कोण x = \(\frac { 90 }{ 2 } \) = 45°

(vi) आकृति में त्रिभुज की दो भुजाएँ समान हैं और त्रिभुज में समान भुजाओं के सामने के कोण समान होते हैं।
∴ दूसरा कोण भी x होगा।
∵ त्रिभुज के तीनों कोणों का योग = 180°
∴ x + x + 40° = 180°
या 2x + 40° = 180°
या 2x = 180° – 40° = 140°
∴ अभीष्ट कोण x = \(\frac { 140 }{ 2 } \) = 70°

(vii) आकृति में त्रिभुज की दो भुजाएँ समान हैं और त्रिभुज में समान भुजाओं के सामने के कोण समान होते हैं।
∴ दूसरा आधार का कोण = x
∵ दूसरा आधार कोण x और 120° रैखिक युग्म बनाते हैं।
∴ x + 120° = 180°
∴ अभीष्ट कोण x = 180° – 120°
= 60°

(viii) आकृति में त्रिभुज की दो भुजाएँ समान हैं और त्रिभुज में समान भुजाओं के सामने के कोण समान होते हैं।
∴ दूसरा आधार का कोण = x
चूँकि सम्मुख अत: कोणों का योग = बाह्य कोण
∴ x + x = 110°
या 2x = 110°
∴ अभीष्ट कोण x = \(\frac { 110 }{ 2 } \) = 55°

(ix) आकृति में त्रिभुज की दो भुजाएँ समान हैं और त्रिभुज में समान भुजाओं के सामने के कोण समान होते हैं।
∴ दूसरा आधार का कोण = x
साथ ही, ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण x और 30° बराबर हैं।
∴ अभीष्ट कोण x = 30°

प्रश्न 2.
प्रत्येक आकृति में x तथा y के मान ज्ञात कीजिए –
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.3 image 4
हल:
(i) आकृति में त्रिभुज की दो भुजाएँ समान हैं।
∴ समान भुजाओं के सामने के कोण समान हैं।
चूँकि एक आधार का कोण = y
∴ दूसरा आधार का कोण = y
अब, दूसरा आधार कोण y और 120° रैखिक युग्म बनाते हैं।
∴ y + 120° = 180°
या y = 180° – 120° = 60°
अब, त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग = 180°
∴ x + y + y = 180°
या x + 2y = 180°
या x + 2 × 60° = 180°
या x = 180° – 120° = 60
अतः, x = 60° और y = 60°

(ii) आकृति में त्रिभुज की दो भुजाएँ समान हैं।
∴ समान भुजाओं के सामने के कोण समान हैं।
∵ समान कोणों में एक कोण x है, अतः दूसरा कोण = x साथ ही, त्रिभुज समकोण त्रिभुज है
∴ तीसरा कोण = 90°
अब, त्रिभुज के तीनों अन्त:कोणों का योग = 180°
∴ x + x + 90° = 180°
या 2x + 90° = 180°
या 2x = 180° – 90° = 90°
या x = \(\frac { 90 }{ 2 } \) = 45°
अब, दूसरा कोण x और रैखिक युग्म बनाते हैं।
∴ x + y = 180°
या 45° + y = 180°
∴ y = 180° – 45° = 135°
अतः x = 45° और y = 135°

(iii) आकृति में त्रिभुज की दो भुजाएँ समान हैं।
∴ समान भुजाओं के सामने के कोण समान हैं।
समान कोण में एक कोण x है।
अतः दूसरा आधार कोण = x
त्रिभुज का तीसरा कोण = ऊर्ध्वाधर सम्मुख कोण
= 92°
अब, त्रिभुज के तीनों अन्त:कोणों का योग = 180°
∴ x + x + 92° = 180°
या 2x + 92° = 180°
या 2x = 180° – 92° = 88°
या x = \(\frac { 88 }{ 2 } \) = 44°
अब, दूसरा आधार कोण x और y रैखिक युग्म बनाते हैं।
∴ x + y = 180°
या 44° + y = 180°
या y = 180° – 44° = 136°
अतः x = 44° और y = 136°

MP Board Solutions

पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 137

प्रश्न 1.
अपनी अभ्यास-पुस्तिका में कोई तीन त्रिभुज, जैसे – ∆ABC, ∆PQR और ∆XYZ बनाइए। अपने पैमाने की सहायता से इन त्रिभुजों की भुजाओं को मापकर, एक तालिका के रूप में निम्न प्रकार से लिखिए
हल:
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.3 image 5
MP Board Class 7th Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण Ex 6.3 image 6
पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 138-139

MP Board Class 7th Maths Solutions

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1

MP Board Class 8 Maths Chapter 3 Exercise 3.1 प्रश्न 1.
यहाँ पर कुछ आकृतियाँ दी गई हैं।
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1 img-1
प्रत्येक का वर्गीकरण निम्नलिखित आधार पर कीजिए –
(a) साधारण वक्र
(b) साधारण बन्द वक्र
(c) बहुभुज
(d) उत्तल बहुभुज
(e) अवतल बहुभुज।
उत्तर:
(a) साधारण वक्र – (i), (ii), (v), (vi) और (vii)
(b) साधारण बन्द वक्र – (i), (ii), (v), (vi) और (vii)
(c) बहुभुज – (i), (ii) और (iv)
(d) उत्तल बहुभुज – (ii)
(e) अवतल बहुभुज – (i) और (iv)

MP Board Solutions

MP Board Class 8 Maths Chapter 3 प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रत्येक में कितने विकर्ण हैं?
(a) एक उत्तल चतुर्भुज
(b) एक समषड्भुज
(c) एक त्रिभुज।
उत्तर:
(a) 2, (b) 9, (c) 0 (कोई विकर्ण नहीं)।

Prashnavali 3.1 Class 8 प्रश्न 3
उत्तल चतुर्भुज के कोणों के मापों का योगफल क्या है? यदि चतुर्भुज, उत्तल न हो तो क्या यह गुण लागू होगा? (एक चतुर्भुज बनाइए जो उत्तल न हो और प्रयास कीजिए।)
उत्तर:
उत्तल चतुर्भुज के कोणों के मापों का योगफल 360° है। हाँ, यह गुण लागू होगा यदि चतुर्भुज उत्तल न हो।

Class 8 Maths Chapter 3 Exercise 3.1 Solutions In Hindi प्रश्न 4.
तालिका की जाँच कीजिए (प्रत्येक आकृति को त्रिभुजों में बाँटिए और कोणों का योगफल ज्ञात कीजिए):
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1 img-2
एक बहुभुज के कोणों के योग के बारे में आप क्या कह सकते हैं जिसकी भुजाओं की संख्या निम्नलिखित हो?
(a) 7
(b) 8
(c) 10
(d) n.
हल:
दी हुई तालिका से स्पष्ट है कि n भुजा वाले बहुभुज के कोणों का योग (n – 2) x 180° होगा।
(a) n = 7
∴ 7 भुजाओं वाले बहुभुज के कोणों का योग
= (7 – 2) x 180°
= 5 x 180° = 900°

(b) n = 8
∴ 8 भुजाओं वाले बहुभुज के कोणों का योग
= (8 – 2) x 180°
= 6 x 180° = 1080°

(c) n = 10
∴ 10 भुजाओं वाले बहुभुज के कोणों का योग = (10 – 2) x 180°
= 8 x 180° = 1440°

(d) यदि किसी बहुभुज में n भुजाएँ हों तो बनने वाले त्रिभुजों की संख्या (n – 2) होगी।
∴ त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग = 180°
∴ n भुजा वाले बहुभुज के कोणों का योग = (n – 2) x 180°

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Class 8 Maths 3.1 In Hindi प्रश्न 5.
समबहुभुज क्या है? एक समबहुभुज का नाम बताइए जिसमें –

  1. 3 भुजाएँ
  2. 4 भुजाएँ
  3. 6 भुजाएँ हों।

उत्तर:
समबहुभुज:
एक ऐसा बहुभुज जिसकी भुजाएँ बराबर हों तथा अन्त:कोणों के माप भी समान हों, समबहुभुज कहलाता है। समबहुभुज के बहिष्कोण भी समान होते हैं।

समबहुभुज जिसमें –

  1. 3 भुजाएँ हैं-समबाहु त्रिभुज
  2. 4 भुजाएँ हैं-वर्ग
  3. 6 भुजाएँ हैं-समषड्भुज।

Exercise 3.1 Class 8 प्रश्न 6.
निम्नलिखित आकृतियों में x (कोण की माप) ज्ञात कीजिए –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1 img-3
हल:
(a) चूँकि चतुर्भुज के चारों अन्त:कोणों का योग 360° होता है।
∴ x + 120° + 130° + 50° = 360°
या x + 300° = 360°
या x = 360° – 300° = 60°

(b) चूँकि चतुर्भुज के चारों अन्तःकोणों का योग 360° होता है।
∴ x + 70° + 60° + 90° = 360°
या x + 220° = 360°
या x = 360° – 220° = 140°

(c) दी हुई आकृति में पाँच भुजाएँ हैं। अर्थात् n = 5
∴ आकृति में, कोणों का योग = (x – 2) x 180°
= (5 – 2) x 180°
= 3 x 180° = 540°
अतः आकृति से स्पष्ट है,
m∠1+ 60° = 180°
m∠1 = 180° – 60° = 120° (सरल कोण)
और m∠2 + 70° = 180° (रेखीय युग्म)
या m∠2 = 180° – 70° = 110°
∴ m∠1 + m∠2 + x + 30° + x = 540°
या 120° + 110° + 2x + 30° = 540°
या 2x + 260° = 540°
या 2x = 540° – 260° = 280°
या x = \(\frac{280°}{2}\) = 140°

(d) चूँकि आकृति में 5 भुजाएँ हैं अर्थात् n = 5
∴ आकृति के कोणों का योग = (n – 2) x 180°
= (5 – 2) x 180°
= 3 x 180° = 540°
∴ x + x + x + x + x = 540°
या 5x = 540°
या x= \(\frac{540°}{5}\) = 108° उत्तर

Class 8 Math 3.1 In Hindi प्रश्न 7.
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1 img-4
(a) x + y + z ज्ञात कीजिए।
(b) x + y + z + w ज्ञात कीजिए।
हल:
(a) ∵ त्रिभुज के तीनों अन्त:कोणों के योग की माप = 180°
∴ m∠1 + 30° + 90° = 180°
या m∠1 + 120° = 180°
या m∠1 = 180° – 120° = 60°
तथा x + 90° = 180° (रेखीय युग्म)
x = 180° – 90° = 90° ……(1)
y + m∠1 = 180° (रेखीय युग्म)
या y + 60° = 180°
या y= 180° – 60° = 120°……(2)
तथा z + 30° = 180° (रेखीय युग्म)
या z = 180° – 30° = 150° ……(3)
समीकरण (1), (2) व (3) को जोड़ने पर,
x + y + z = 90° + 120° + 150°
= 360°

(b) ∵ चतुर्भुज के अन्त:कोणों का योग = 360°
∴ m∠1 + 120° + 80° + 60° = 360°
या m∠1 + 260° = 360°
या m∠1 = 360° – 260° = 100°
या x + 120° = 180° (रेखीय युग्म)
∴ x = 180° – 120° = 60° ……(1)
y+ 80° = 180° (रेखीय युग्म)
या y = 180° – 80° = 100° …….(2)
z + 60° = 180° (रेखीय युग्म)
या z = 180° – 60° = 120° …….(3)
m∠1 + w= 180° (रेखीय युग्म)
w= 180° – m∠1
= 180° – 100° = 80° …(4)
समीकरण (1), (2), (3) व (4) को जोड़ने पर, हम प्राप्त करते हैं।
x + y + z + w= 60° + 100° + 120° + 80°
या x + y + z + w= 360°

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पाठ्य-पुस्तक पृष्ठ संख्या # 47

प्रयास कीजिए (क्रमांक 3.1)

8th Maths MP Board प्रश्न 1.
एक समषड्भुज लीजिए (आकृति 3.15):
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1 img-5
(i) बाह्य कोणों x, y, z, p, q तथा r के मापों का योग क्या है?
(ii) क्या x = y = z = p = q = r हैं? क्यों?
(iii) प्रत्येक का माप क्या है?

(a) बाह्य कोण
(b) अन्तःकोण।
(iv) इस क्रियाकलाप को निम्नलिखित के लिए दोहराएँ –
(a) एक समअष्टभुज
(b) एक सम 20 भुज।
हल:
(i) माना कि समषड्भुज ABCDEF की भुजाओं को क्रमशः बढ़ाया गया है जिससे कि बाह्य कोण x, y, z, p, q तथा r बनते हैं।
क्योंकि बाह्य कोण x और अन्त: कोण ∠a रेखीय युग्म बनाते हैं। रेखीय युग्म के कोणों का योग = 180°
x + ∠a = 180°
इसी प्रकार, y + ∠a= 180°
z + ∠a= 180°
p + ∠a = 180°
q + ∠a = 180°
r + ∠a = 180°
दोनों ओर के कोणों को जोड़ने पर, हम प्राप्त करते हैं –
x + y + z + p + q + r + ∠a + ∠a + ∠a + ∠a + ∠a + ∠a = 1080°
या x + y + z + p + q + r + (6 – 2) x 180° = 1080°
∴ x + y + z + p +q+r + 720° = 1080°
या x + y + z + p + q + r = 1080 – 720 = 360°
अतः बाह्य कोणों के मापों का योग = 360°

(ii) हाँ, x = y=z = p = q = r क्योंकि प्रत्येक (180° – a) के बराबर है।

(iii) समषड्भुज के लिए –
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1 img-6
(iv) (a) सम अष्टभुज की स्थिति में, n = 8, तब
MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 3 चतुर्भुजों को समझना Ex 3.1 img-7

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MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 8 दशपुरीया अष्टमूर्तिः

MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 8 दशपुरीया अष्टमूर्तिः (वर्णनात्मकः)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 8 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत (एक पद में उत्तर लिखो)
(क) अष्टमूर्तिः कुत्र प्रतिष्ठापिता अस्ति। (अष्टमूर्ति कहाँ स्थित है?)
उत्तर:
दसपुर (दसपुर (मंदसौर))

(ख) कति शैवप्रतिमाः प्रसिद्धाः सन्ति। (कितनी शिव प्रतिमा प्रसिद्ध हैं?)
उत्तर:
त्रिनः। (तीन)

(ग) पूर्वमुखे कः रसः विद्यते? (पूर्व दिशा के मुख में कौन-सा रस विद्यमान है?)
उत्तर:
शान्तरसः। (शान्त रस)

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(घ) कस्यमुखस्य शिला लोहितवर्णा वर्तते? (किस मुख वाली शिला लाल रंग की है?)
उत्तर:
पश्चिमुखस्य। (पश्चिम मुख की)।

(ङ) कश्मिन मुखे शिवः अट्टहासं कुर्वन इव प्रतिभाति? (किस मुख में शिव अट्टहास करते दिखाई देते हैं?)
उत्तर:
उत्तरदिशः। (उत्तर दिशा)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत (एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) अष्टमूर्तिः भक्तैः कस्मिन ईशवीये दृष्टा? (अष्टमूर्ति भक्तों ने किस ईशवी में देखी?)
उत्तर:
अष्टमूर्तिः भक्तैः 1940 ईशवीये दृष्टा। (अष्टमूर्ति भक्तों ने 1940 ईशवी में देखी।)

(ख) वरस्य शृङ्गार मनोरमत्वं कस्मिन मुखे उल्लिखितम्? (वर के श्रृंगार का मनोहर वर्णन किस मुख में उल्लिखित है।)
उत्तर:
वरस्य शृंगार मनोरम भावं दक्षिण मुखे उल्लिखितम्। (वर के श्रृंगार का मनोहर वर्णन दक्षिण मुखे उल्लिखित है।)

(ग) ऐतिहासिकैः अर्धनारीश्वरस्य कः कालः निर्धारितः? (ऐतिहासिकों द्वारा अर्धनारीश्वर का कौन-सा काल निर्धारित किया गया है?)
उत्तर:
ऐतिहासिकैः अर्धनारीश्वरस्य चतुर्थदशः शताब्दे कालः निर्धारितः।। (ऐतिहासिकों ने अर्धनारीश्वर का काल चौदहवीं शताब्दी निर्धारित की है।)

(घ) अष्टमूर्तिः इदानीं केन नाम्ना प्रख्याता? (अष्टमूर्ति इस समय किस नाम से प्रसिद्ध हैं?)
उत्तर:
अष्टमूर्तिः इदानी पशुपतिनाथः नाम्ना प्रख्याता। (अष्टमूर्ति इस समय पशुपतिनाथ इस नाम से प्रसिद्ध है।)

प्रश्न 3.
अधोलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत। (नीचे लिखे हुए प्रश्नों के उत्तर लिखो)
(क) मूर्तेः पश्चिमे मुखे वैशिष्ट्यं किम्? (मूर्ति के पश्चिम मुख की क्या विशेषता है?)
उत्तर:
मूर्तेः पश्चिम मुखे वैशिष्ट्यं प्रलयंकारी शिव।। (मूर्ति के पश्चिम मुख में प्रलंयकारी शिव को दिखाया गया है)

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(ख) काः तिस्रः शैव प्रतिमाः प्रसिद्धः? (कौन-सी तीन शिव प्रतिमा प्रसिद्ध हैं?)
उत्तर:
अर्धनारीश्वरः, ऐलीफैण्टायाः त्रिमूर्ति, चिदम्बरस्य नटराज तिस्रः शैवप्रतिमाः प्रसिद्धाः। (अर्धनारीश्वर, ऐलीफैण्टा की त्रिमूर्ति, व चिदम्बर की नटराज मूर्ति ये तीन शिव प्रतिमा प्रसिद्ध हैं।)

(ग) दशपुर कुत्र अस्ति? अधुना केन नाम्ना प्रसिद्धम्? (दशपुर कहाँ स्थित है? वर्तमान में यह किस नाम से प्रसिद्ध है?)
उत्तर:
दशपुरं मध्यप्रदेशस्य पश्चिम भागे मालवाञ्चले शिवनानधास्तीरे अस्ति। अधुना मंदसौर नाम्ना प्रसिद्धम्। (दशपुर मध्य प्रदेश के पश्चिम भाग में मालवाञ्चल में शिवना नदी के किनारे स्थित है। वर्तमान में यह मंदसौर नाम से प्रसिद्ध है।)

(घ) अष्टमूर्तेः उत्तर मुखे कीदृशं वैशिष्ट्यं विद्यते? (अष्टमूर्ति का उत्तर मुख क्या विशेषता बतलाता है।)
उत्तर:
अष्टमूर्तेः उत्तर मुखे आनंदतत्त्व युक्ता वैशिष्ट्यं विद्यते। (अष्टमूर्ति का उत्तर मुख आनंद तत्त्व से युक्त होने की विशेषता बताता है।)

प्रश्न 4.
रिक्तस्थानानि पूरयत
(क) पूर्वमुखे शान्तरसविशिष्टः शिवसमाधिः विद्यते।
(ख) अष्टमुखाङ्कितं लिङ्गम् अष्टमूर्तिः इति नाम्ना ज्ञायते।।
(ग) अद्यावधि शैवप्रतिमाः केवलं तिस्रः प्रसिद्धाः।
(घ) लघु सर्पद्वयं प्रतीकरूपेण उत्कीर्णीतम्।

प्रश्न 5.
युग्ममेलनं कुरुत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 8 दशपुरीया अष्टमूर्ति img-1

प्रश्न 6.
अवायैः वाक्यनिर्माणं कुरुत-
अधुना – दशपुरम् अधुना मन्दसौरम् इति नाम्ना प्रख्यातम् अस्ति।
इदानीम् – इदानीः सः विद्यालयं गच्छति।
यथा – सः यथा एव आगच्छतिर्तदा अहं गमिष्यामि।
तथा – यथा नृपः तथा प्रजाः।
तत्र – तत्र कोऽपि न विद्यते।
अपि – सः अपि गमिष्यसि।
अत्र – अत्र वृक्षाः सन्ति।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दानां संधिविच्छेद कृत्वा सन्धेः नाम लिखत
उदाहरणम् :
विद्यार्थी-विद्या+अर्थी = विद्यार्थी।
(क) उभावपि
उत्तर:
उभौ+अपि = अयादि स्वर

(ख) अत्रैव
उत्तर:
अत्र+एव = वृद्धि स्वर

(ग) सर्वे
उत्तर:
सः+एव – विसर्ग = वृद्धि स्वर संधि

(घ) नास्ति
उत्तर:
न+अस्ति = दीर्घ स्वर

(ङ) अत्रास्ति
उत्तर:
अत्र+अस्ति = दीर्घ स्वर।

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प्रश्न 8.
उदाहरणानुसारं क्रियापदानां वचन परिवर्तनं कुरुत
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 8 दशपुरीया अष्टमूर्ति img-2

प्रश्न 9.
निम्नलिखितपदानां समास विग्रहं कृत्वा। समासस्य नाम लिखत
उदाहरणं यथा
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 8 दशपुरीया अष्टमूर्ति img-3

प्रश्न 10.
निम्नलिखित मूलशब्दं विभक्तिं वचनं च लिखत
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 8 दशपुरीया अष्टमूर्ति img-4

प्रश्न 11.
निम्नलिखितानां शब्दानां धातुं प्रत्ययं च पृथक् कुरुत
उदाहरणं यथा
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 8 दशपुरीया अष्टमूर्ति img-5

दशपुरीया अष्टमूर्तिः पाठ-सन्दर्भ/प्रतिपाद्य

मध्य प्रदेश के मालव अंचल में स्थित मंदसौर नगर के पुरातात्त्विक महत्त्व से हम लोग पूर्ण भिज्ञ हैं। यहाँ स्थित आठ मुखों वाली भगवान शिव की लिंग प्रतिमा अद्भुत एवं अनुपम है। प्रस्तुत पाठ डॉ. रामचन्द्र तिवारी द्वारा प्रणीत है। धर्म, दर्शन एवं पुरातत्त्व में इनका अभिनिवेश होने के कारण ‘अद्वितीय अष्टमूर्ति’ नामक पुस्तक आपने लिखी। इसकी मूर्तियाँ ही पाठ की विशेषता हैं।

दशपुरीया अष्टमूर्तिः पाठ का हिन्दी अर्थ

मध्यप्रदेशस्य पश्चिमे भागे मालवाञ्चले शिवनानद्यास्तीरे दशपुरं नाम नगरमस्ति। दशपुरम् अधुना मन्दसौरम इति नाम्मा प्रख्यातमस्ति। एतस्य दशपुरस्य वर्णनम् महाकविकालिदासेनापि स्वकीये ग्रन्थे मेघदूते कृतम्। अत्रैव शिवनानयास्तीरे भगवतः शिवस्य विशालमन्दिरमस्ति। अत्र स्थितम् अष्टमुखाकितं शिव लिङ्गम् अष्टमूर्तिः इति लिखितम् । इदानीं सैव पशुपतिनाथः इति नाम्ना दशपुरे प्रख्यातः।

शब्दार्थ :
अधुना-इस समय-This time; स्वकीये-स्वयं के-by self; इसका-its; लिखतम्-लिखित-Written; इदानीं-इस समय-this time.

हिन्दी अर्थ :
मध्य प्रदेश के पश्चिम भाग मालवांचल में शिवना नदी के किनारे स्थिति दशपुर नामक नगर है। दशपुर का आधुनिक नाम मन्दसौर प्रसिद्ध है। इस दशपुर का वर्णन महाकवि कालिदास ने भी स्वरचित ग्रन्थ मेघदूत में किया है। यहीं पर शिवना नदी के किनारे भगवान शिव का विशाल मन्दिर है। इसमें स्थित अष्टमुखी लिंग प्रतिमा है-ऐसा लिखा गया है। इस समय वही मन्दिर पशुपति नाथ नाम से प्रसिद्ध है।

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2. शैवदर्शनदृष्ट्या शैवकलादृष्ट्या च दशपुरीया अष्टमूर्तिः शैवमूर्तिषु अद्वितीया अस्ति। अद्यावधि शैवप्रतिमाः केवलं तिस्रः प्रसिद्धाः सन्ति। प्रथमा-प्रथमशताब्धाः मथुरायाः अर्धनारीश्वरः, द्वितीया अष्टमशताब्धाः, एलीफैण्टायाः त्रिमूर्ति। तृतीया दशमशताब्याः, चिदम्बरस्य नटराजः। शेषाणि लिङ्गानि। तामु तादृशी कला, दर्शनं वा नास्ति यथा दशपुरे वर्तमानायाः अष्टमूर्ती। वस्तुतः सा अनुपमा, अतिशायिनी शैव प्रतिमा अस्ति। अष्ट मुखानि प्रायः ‘सप्त फिट’ मानात्मके उत्तुङ्गे विशाले नीललोहिते पाषाणलिङ्गे उट्टङ्कितानि सन्ति।

शब्दार्थ :
अष्टमुखाङ्कितम्-उत्कीर्ण आठ मुख वाली-Carve of eight mouth; नीललोहिते-नीले व रक्तवर्ण से युक्त-with blue & Red Colour; पाषाणलिङ्गे-पत्थर के लिङ्ग पर-on the stone statue; अर्धनारीश्वर-अर्धनारीश्वर-(शिव पार्वती का रूप)-the fame of Shiva and Parvati.

हिन्दी अर्थ :
शैव दर्शन की दृष्टि से, शैव कला की दृष्टि से दशपुर की अष्टमूर्ति शिव मूर्ति अद्वितीय है। आज तक शिव की केवल तीन ही प्रतिमाएँ प्रसिद्ध हैं। मथुरा स्थित प्रथम शताब्दी की अर्धनारीश्वर की मूर्ति, आठवीं शताब्दी की एलीटो की त्रिमूर्ति और तीसरी, दशम शताब्दी की चिदम्बरम् की नटराज मूर्ति। शेष सभी शिवलिंग हैं। उनमें वेसी कला दृष्टिगोचर नहीं होती जैसी दशपुर की वर्तमान अष्टमूर्ति में। वस्तुतः यह शिव की मूर्ति अनुपम एवं अद्वितीय है। यह अष्टमुख लिंग मूर्ति सात फुट ऊँचे विशाल गुलाबी-नीले पाषाण खण्ड पर उकेरा गया है।

3. अस्याः मूर्तेः केवलं चतुर्मुखानि एव पूर्णतया लिङ्गमथ्ये निर्मितानि सन्ति, ततोऽधः चतुर्मुखानि केवलम् अशित एव निर्मितानि सन्ति। वैदेशिकानाम् आक्रमणवशात् एषा मूर्तिः रक्षणार्थम् अर्धनिर्मिता एव शिवनागर्भे (ईशवीये चतुर्दशाब्दे) गोपिता, कालेन नदी प्रवाहात् प्रकटिता एषा मूर्तिः 1940 ईशवीये वर्षे भक्तैः दृष्टा, तटे प्रतिष्ठापिता च। अस्या निर्मितानि मुखानि अतीव सुन्दराणि जीवनतत्त्वस्य व्यञ्जकानि च सन्ति।

शब्दार्थ :
ततोऽध-इससे नीचे-below its; गोपिता-छिपा दी गई-is hidden; प्रकटिता-प्रकट हुआ-appeared; जीवनतत्त्वस्य-जीवन के तत्त्व का-factor of life.

हिन्दी अर्थ :
इस मूर्ति के मात्र चार मुख ही पूर्णरूपेण लिंग के मध्य ही निर्मित हैं। उसके नीचे चारमुख केवल अर्धांश में ही निर्मित है। विदेशियों के आक्रमण के कारण इस मूर्ति की रक्षा के लिए अर्धमूर्ति शिवना के गर्भ में चौदहवीं शताब्दी में द्विपादी गई। समायानुसार नदी के प्रवाह के कारण यह मूर्ति बाहर निकल आई। सन् 1940 ई. में भक्तों ने इसे देखकर नदी के तट पर स्थापित कर दिया। इस मूर्ति के मुख बहुत सुंदर हैं जो जीवन के तथ्य को व्यक्त करते हैं।

4. दक्षिणमुखशिल्पे विवाहमण्डपस्थस्य वरस्य शृङ्गारमनोरमत्वं दृश्यते। तत्रैव शीर्षे केशकलापे षोडशीचन्द्र कला शोभते च। अत्रैवमुखे शुचिस्मितत्वं मधुरस्मितत्वं च अवलोकनीयम् । अत्र भयङ्कराः सर्पाः न उत्कीर्णाः, केवलं लघु सर्पद्वयं प्रतीकरूपेण उत्कीर्णितं वर्तते। पूर्व मुखे शान्तरस विशिष्टः शिवसमाधिः व्यज्यते। अस्मिन् केशकिरीटे रुद्राक्षमालयोः रेखाद्वयं निबद्धम् अस्य! मध्यमणिः तिलक रूपेण उपनिबद्धः। अत्र ग्रीवायां सर्पमाला, मन्दारमाला च शोभते।

शब्दार्थ :
स्मितत्वम्-मुस्कुराहट-Smile; मध्यमणि-बीच की मणि-between very precious stone; दृश्यते-दिखाई देता है-Looks; तत्रैव-वहाँ-there; अवलोकनीयम्-देखने को-for Look; उत्कीर्ण-उत्कीर्ण-Carve, scratch; तिलक रूपेण-तिलक के रूप में-in the form of auspious mark; उपनिबद्ध-बंधी हुई-to tie on for head;

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हिन्दी अर्थ :
मूर्ति की दक्षिण मुख की रचना विवाह मण्डप में बैठे श्रृंगार युक्त दूल्हे जैसी दिखाई देती है। उमसें सबसे ऊपर बालों के मध्य चन्द्रमा की सोलहवीं कला सुशोभित हो रही है। इस मुख की पवित्र मुस्कान ही देखने योग्य है। इस मूर्ति में भयंकर सर्प उत्कीर्ण नहीं किए गए हैं। केवल दो छोटे सर्प ही प्रतीक रूप में उत्कीर्ण हैं। मूर्ति के पूर्व मुख से शान्ति रस की विशिष्टता से युक्त शिव के समाधिस्थ होने का भाव व्यक्त होता है। इस मूर्ति में बालों की जटा में रुद्राक्ष की दो मालाएँ दो रेखाओं के रूप में दर्शित होती हैं। इसके बीच की मणि तिलक के समान दृष्टिगोचर होती है। इस मूर्ति में गले के साँप की माला और मंदार की माला शोभित हो रही है।

5. पश्चिममुखे प्रलयङ्करः शिवः रुद्ररूपेण व्यज्यते। अस्यैव मुखस्य सम्पूर्णा शिला केवलं लोहितवर्णा वर्तते। अत्र तादृशी नीलिमा श्वेतधारा वा न दृश्यते यादृशी मुखान्तरेषु। सुखे तृतीयनेत्रं सुस्पष्टम् अवलोक्यते। उग्रक्रोधेन मुखं विकृतम् उत्कीर्णम् । अस्मिन्नेव मुखे ऊँकार उल्लिखितः। ॐकारादेव उदयः, प्रलयश्च उभावपि भवतः इति शिल्पस्य दर्शनम्। उत्तरमुखे आनन्दतत्त्वस्य व्यञ्जना विद्यते। अस्मिन् भगवान विजयामत्त अट्टहासं कुर्वन इव प्रतिभाति। अत्र कपोलौ उत्फुल्लौ, अधरोष्ठौ स्फुटौ, नेत्रौ निमीलिते, शिथिलाः विकीर्णाः मूर्धजाः च सुस्पष्टं दृश्यन्ते। अर्धनिर्मितेषु अधोऽङ्कितेषुमुखेणु प्रथमे विद्यार्विभावःद्वितीये उद्योगार्थिभावः चतुर्थे च अर्थार्थभावः च विद्भिः सम्भाव्यन्ते। वस्तुतः दशपुरीया अष्टमूर्तिः कलासौन्दर्यदृष्ट्या दार्शनिकदृष्ट्या च सर्वासु शैवप्रतिमासु अद्वितीय उत्कृष्टा दर्शनीया च अस्ति।

शब्दार्थ :
प्रलयङ्कर-प्रलय करने वाला-disasterer; लोहितवर्णा-लाल रंग की-Red coloured; निलिमाश्वेतधारा-नीली अथवा सफेद धारा-Blue or white stream; उदयः प्रलयश्च-रचना एवं विनाश-Creation & disaster; उभावपि-दोनों ही-both; विजयामत्त-भांग के नशे में मस्त-to become fortic some with Bhang (hemp leaves); अट्टहासम-जोरों से हँसना-Laughing in a loud voice; विकिर्णाः-फैले हुए-Spread; रुद्ररूपेण-क्रोध के रूप में-in the form of Anger.

हिन्दी अर्थ :
मूर्ति के पश्चिम मुख से शिव का प्रलयंकर रुद्र रूप प्रकट होता है। इस मुख की सम्पूर्ण शिला लोहित वर्ण की है। यहाँ नील-श्वेत वर्ण की धारा नहीं दिखाई देती जैसी दूसरे मुख से। इस मूर्ति में शिव की तीसरी आँख स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। अत्यधिक क्रोध को व्यक्त करने के लिए मूर्ति के मुख को विकृत रूप में उत्कीर्ण किया गया है। इसी मूर्ति के मुख में ओंकार लिखा गया है। इसी ओंकार से ही उदय और प्रलय दोनों होता है-ऐसा शिल्पकारों ने इस मूर्ति में दिखाने का प्रयत्न किया है।

मूर्ति के उत्तर मुख में आनन्द तत्त्व की अभिव्यंजना की गई है। इसमें भगवान शिव भाँग के नशे में मत्त अट्टहास करते दिखाई देते हैं। यहाँ उनका गाल फूला हुआ दिखाई देता है, ओठ विकसित एवं आँखें मुंदी (अलसाई हई), सिर के बाल ढीले बिखरे हुए साफ-साफ दिखाई देते हैं। अर्ध निर्मित नीचे के मुखों में पहले मुँह पर ब्रह्मचारी (विद्यार्थी) का भाव, दूसरे में धर्मशील होने का भाव, तीसरे में उद्योगी होने का भाव एवं चौथे मुखसे अर्थार्थी होने का भाव दिखाई देता है।

वास्तव में दशपुर की यह अष्टमूर्ति कला, सौन्दर्य एवं दार्शनिक दृष्टि से सभी शैव मूर्तियों में उत्कृष्ट एवं दर्शनीय है।

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MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Ex 7.2

MP Board Class 8th Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Ex 7.2

Mp Board Class 8 Maths Chapter 7 Exercise 7.2 प्रश्न 1.
अभाज्य गुणनखण्डन विधि द्वारा निम्नलिखित में से प्रत्येक संख्या का घनमूल ज्ञात कीजिए –

  1. 64
  2. 512
  3. 10648
  4. 27000
  5. 15625
  6. 13824
  7. 110592
  8. 46656
  9. 175616
  10. 91125

हल:
1.
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2.
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3.
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4.
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5.
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6.
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7.
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8.
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9.
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10.
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Mp Board Class 8 Maths Chapter 7.2 प्रश्न 2.
बताइए सत्य है या असत्य –

  1. किसी भी विषम संख्या का घन सम होता है।
  2. एक पूर्ण घन दो शून्यों पर समाप्त नहीं होता है।
  3. यदि किसी संख्या का वर्ग 5 पर समाप्त होता है, तो उसका घन 25 पर समाप्त होता है।
  4. ऐसा कोई पूर्ण घन नहीं है जो 8 पर समाप्त होता है।
  5. दो अंकों की संख्या का घन तीन अंकों वाली संख्या हो सकती है।
  6. दो अंकों की संख्या के घन में सात या अधिक अंक हो सकते हैं।
  7. एक अंक वाली संख्या का घन एक अंक वाली संख्या हो सकती है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. असत्य
  5. असत्य
  6. असत्य
  7. सत्य।

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Class 8 Maths Chapter 7 Exercise 7.2 In Hindi प्रश्न 3.
आपको यह बताया जाता है कि 1331 एक पूर्ण घन है। क्या बिना गुणनखण्ड किए आप यह अनुमान लगा सकते हैं कि इसका घनमूल क्या है? इसी प्रकार 4913, 12167 और 32768 के घनमूलों के अनुमान लगाइए।
हल:
1331 के लिए इस संख्या के दो समूह 1 और 331 हैं।
331 का इकाई अंक 1 है। अतः घनमूल का इकाई अंक 1 होगा।
दूसरे समूह का अंक 1 है।
∴ 13 = 1, अतः घनमूल का दहाई का अंक 1 होगा।
\(\sqrt[3]{1331}\) = 11
4913 के लिए
4913 के दो समूह बनाए 4 और 913
प्रथम समूह 913 का इकाई अंक 3 है। 3 किसी संख्या के स्थान पर तब आता है जब उसके घनमूल के इकाई का अंक 7 हो।
अतः घनमूल का इकाई अंक = 7
दूसरे समूह 4 के लिए
13 = 1 और 23 = 8
अतः 13 < 4 < 23
अतः घनमूल का दहाई अंक = 1
∴ \(\sqrt[3]{4913}\) = 17
12167 के लिए
12167 के दो समूह बनाए 12 और 167
प्रथम समूह 167 में इकाई का अंक 7 है, 7 पर समाप्त होने वाली संख्या का घनमूल = 3
अतः घनमूल का इकाई अंक = 3.
दूसरे समूह 12 के लिए
23 = 8 और 33 = 27
23 < 12 < 33 अतः घनमूल का दहाई का अंक = 2
∴ \(\sqrt[3]{12167}\) = 23
32768 के लिए
संख्या का प्रथम समूह 768 तथा दूसरा समूह 32.
प्रथम समूह की संख्या का इकाई अंक 8 है। 8 किसी संख्या के स्थान पर तब आता है जब उसके घनमूल का इकाई अंक 2 हो।
अतः घनमूल का इकाई अंक = 2
दूसरे समूह 32 के लिए
33 = 27 और 43 = 64
इसलिए 33 < 32 < 43 अतः घनमूल का दहाई का अंक = 3
∴ \(\sqrt[3]{32768}\) = 32

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MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः

MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Durva Chapter 17 चाणक्यनीतिः (पद्यम्) (चाणक्यनीतितः)

MP Board Class 10th Sanskrit Chapter 17 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिखत-(एक पद में उत्तर लिखिए)।
(क) रविः केन तपते? (सूर्य को कौन तपाता है?)
उत्तर:
सत्येन (सत्य के द्वारा)

(ख) दरिद्रता कया विरानंते? (दरिद्रता किससे सुशोभित होती हैं?)
उत्तर:
धीरतया (धैर्य धारण करने के द्वारा)

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(ग) कर्मानुसारिणी का? (कर्म का अनुसरण कौन करती है?)
उत्तर:
बुद्धिः (बुद्धि)

(घ) केन शर्वरी आह्लादिता? (किससे रात खुश होती है?)
उत्तर:
चन्द्रेण (चन्द्रमा से)

(ङ) कुरूपता कया विराजते? (कुरूपता किससे सुशोभित होती है?)
उत्तर:
शीलतया (सदाचरण से)

प्रश्न 2.
एकवाक्येन उत्तरं लिखत-(एक वाक्य में उत्तर लिखिए)
(क) वाचा किं न प्रकाशयेत्? (वाणी से क्या प्रकट नहीं करना चाहिए?)
उत्तर:
मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा न प्रकाशयेत्। (मन से सोचे हुए काम को वाणी से प्रकट नहीं करना चाहिए।)

(ख) कैः पुत्राः विविधैः शीलैः नियोज्याः? (किसके द्वारा पुत्रों को विभिन्न सदाचरणों द्वारा लगाना चाहिए?)
उत्तर:
बुधैः पुत्राः विविधैः शीलैः नियोज्याः।। (विद्वानों के द्वारा पुत्र को विभिन्न सदाचरणों द्वारा लगाना चाहिए!)

(ग) कः सर्ववस्तुषु हीनः? (कौन सब वस्तुओं में हीन है?)
उत्तर:
विद्यारत्नेन हीनः सर्ववस्तुषु हीनः। (विद्या रूपी रत्न से हीन सब वस्तुओं में हीन है।)

(घ) कुलीनः दीनोऽपि कान् न त्यजति? (दीन होते हुए भी कुलीन क्या नहीं छोड़ता है?)
उत्तर:
कुलीनः दीनोऽपि शीलगुणान् न त्यजति। (दीन होते हुए भी कुलीन शीलगुणों को नहीं छोड़ते।)

(ङ) छिन्नोऽपि चन्दनतरुः किं न जहाति? (कटने पर भी चन्दन का पेड़ क्या नहीं छोड़ता?)
उत्तर:
छिन्नोऽपि चन्दनतरुः गन्धं न जहाति। (कटने पर भी चन्दन का पेड़ खुशबू नहीं छोड़ता है।)

प्रश्न 3.
अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखिर-)
(क) सत्येन सर्वं कथं प्रतिष्ठितम् ? (सत्य से सब कैसे स्थित है?)
उत्तर:
पृथ्वी सत्येन धार्यते, रविः सत्येन तपते, वायुः सत्येन वाति। अनेन प्रकारेण सर्वं सत्येन प्रतिष्ठितम्। (सत्य के द्वारा पृथ्वी धारण की जाती है, सूर्य उष्णता प्रदान करता है, वायु बहती है। इस प्रकार सब सत्य के द्वारा ही स्थित है।)

(ख) किमर्थं बुधैः पुत्राः विविधैः शीलैः नियोज्याः? (किसलिए विद्वानों के द्वारा पुत्रों को शील आचरण में लगाना चाहिए?)
उत्तर:
बुधैः पुत्राः विविधैः शीलैः नियोज्या यतो हि शीलसम्पन्नाः नीतिज्ञाः कुलपूजिताः भवन्ति। (विद्वानों के द्वारा पुत्रों को विभिन्न सदाचरणों द्वारा लगाना चाहिए क्योंकि सदाचार से युक्त नीतिशास्त्र के ज्ञाता कुल में पूजे जाते हैं।)

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(ग) पदे-पदे केषां सम्पदः सुः? (कदम-कदम पर किन को खुशियाँ होती हैं?)
उत्तर:
येषां सतां हृदये परोपकरणं जागति, तेषां पदे-पदे सम्पदः स्युः। (जिन सज्जनों के मन में परोपकार की भावना जागृत रहती है, उनके कदम-कदम पर खुशियाँ होती हैं।)

प्रश्न 4.
प्रदत्तशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत (दिए गए शब्दों से रिक्त स्थान भरिए-)
(गूढम्, सत्ये, धनहीनो, लीलाम्, सविद्यानाम्)
(क) सर्वं …………….. प्रतिष्ठितम्।
मन्त्रेण रक्षयेद् ……………..।
(ग) को विदेशः ……………..।
(घ) …………….. न हीनश्च।
(ङ) वृद्धोऽपि वारणपतिर्न जहाति ………….
उत्तर:
(क) सत्ये
(ख) गूढम्
(ग) सविद्यानाम्
(घ) धनहीनो
(ङ) लीलाम्

प्रश्न 5.
यथायोग्यं योजयत-(उचित क्रम से जोडिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 1
उत्तर:
(क) 3
(ख) 4
(ग) 2
(ड) 1

प्रश्न 6.
शुन्द्रवाक्यानां समक्षम् जाम् अशुद्धवाक्यानां समक्षम् “न” इति तिखत-)
(शुद्ध वाक्यों के सामने ‘आम्’ और अशुद्ध वाक्यों के सामने ‘न’ लिखिए)
(क) सत्येन वायुः वाति।
(ख) प्रियवादिना कोऽपि न परः।
(ग) कदन्नता उष्णतया न विराजते।
(घ) कर्मायत्तं पुंसां फलम्।
(ड) छिन्नः चन्दनतरुः गन्धं जहाति।
उत्तर:
(क) आम्
(ख) आम्
(ग) न
(घ) आम्
(ङ) न।

प्रश्न 7.
अधोलिखितशब्दानां मूलशब्दं विभक्तिं वचनञ्च लिखत
(नीचे लिखे शब्दों के मूलशब्द, विभक्ति और वचन लिखिए)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 2
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 9

प्रश्न 8.
निम्नलिखितक्रियापदानां धातुं लकारं पुरुषं ववनं च लिखत
(नीचे लिखे क्रियापदों के धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 3
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 4

प्रश्न 9.
अधोलिखितपदानां सन्धिविच्छेदं कृत्वा सन्धिनाम लिखत
(नीचे लिखे पदों के सन्धि-विच्छेद करके सन्धि का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 5
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 6

प्रश्न 10.
अधोलिखितसमासानां विग्रहं कृत्वा समासनाम लिखत
(नीचे लिखे समासों को विग्रह कर समास का नाम लिखिए-)
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 7
उत्तर:
MP Board Class 10th Sanskrit Solutions Chapter 17 चाणक्यनीतिः img 8

प्रश्न 11.
प्रदत्तश्लोकान्वयस्य पूर्तिं कुरुत
(दिए गए श्लोक का अन्वय पूरा कीजिए-)
बुधैः …………….. विविधैः शीलैः
(यतो हि) …………….. नीतिज्ञाः ……………..भवन्ति।
उत्तर:
बुधैः पुत्रा. विविधैः शीलैः सततं नियोज्याः।
(यतो हि) शीलसम्पन्नाः नीतिज्ञाः कुलपूजिताः भवन्ति।

योग्यताविस्तार –

पाटे समागतान् श्लोकान् कण्ठस्थं कुरुत।
पाठ में आए श्लोकों को कण्ठस्थ करो।

“चाणक्यनीति” इत्यस्मात् पुस्तकात् चित्वा (पाठे समागतान् श्लोकान् विहाय) अन्यान् दशश्लोकान् लिखत।
‘चाणक्यनीति’ पुस्तक से चुनकर अन्य दस श्लोक लिखो।

चाणक्येन विरचितानि अन्यानि पुस्तकानि पठत।
चाणक्य द्वारा रचित अन्य पुस्तकें पढ़ो।

चाणक्येतरदशनीतिश्लोकान् लिखत।।
चाणक्य से अलग दस नीति श्लोक लिखो।

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चाणक्यनीतिः पाठ का सार

प्रस्तुत पाठ में ‘चाणक्य’ द्वारा रचित नीति से सम्बन्धित कुछ श्लोक दिए गए हैं, जिससे छात्रों को नीति का सम्यक् ज्ञान हो सके। ये श्लोक चाणक्य द्वारा रचित ‘चाणक्यनीतिः’ नामक ग्रन्थ से लिए गए हैं।

चाणक्यनीतिः पाठ का अनुवाद

1. सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।
सत्येन वाति वायुश्च सर्वं सत्ये प्रतिष्टितम्॥1॥

अन्वयः :
पृथ्वी सत्येन धार्यते, रविः सत्येन तपते, वायुः सत्येन वाति, सर्वं च सत्ये प्रतिष्ठितम् (अस्ति)।

शब्दार्थाः :
धार्यते-धारण की जाती है-is born (propped); तपते-उष्णता प्रदान करता है-gives heat; वाति-बहता है-blows; प्रतष्ठितम्-स्थित है-is established.

अनुवाद :
धरती सत्य से धारण की जाती है। सूर्य सत्य से तपता है, वायु सत्य से बहती है, सब सत्य में स्थित है। Englisit-The earth, the sun, the wind-all of their props in truth.

2. मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा नैव प्रकाशयेत्।
मन्त्रेण रक्षयेद् गूढं कार्थे चाऽपि नियोजयेत्॥2॥

अन्वयः :
मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा न एव प्रकाशयेत्, गूढं मन्त्रेण रक्षयेत्। कार्ये च अपि नियोजयेत्।

शब्दार्थाः :
वाचा-वाणी के द्वारा-through speech; प्रकाशयेत्-प्रकट करना चाहिए-should beexpressed;गूढम्-गोपनीय-secret;मन्त्रेण-विचारपूर्वक- thoughtfully; नियोजयेत्-लगाना चाहिए-put.

अनुवाद :
मन से सोचे हुए कार्य को वाणी से प्रकट नहीं करना चाहिए। गुप्त को विचारपूर्वक रखना चाहिए। और कार्य में भी लगाना चाहिए।

English :
Don’t express your thoughts with speech. A secret must be preserved and put into action.

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3. पुत्राश्च विविधैः शीलैर्नियोज्याः सततं बुधैः।
नीतिज्ञाः शीलसम्पन्ना भवन्ति कुलपूजिताः॥3॥

अन्वयः :
बुधैः पुत्राः विविधैः शीलैः सततं नियोज्याः। (यतो हि) शीलसम्पन्नाः नीतिज्ञाः कुलपूजिताः भवन्ति।

शब्दार्थाः :
बुधैः-विद्वानों के द्वारा-by the learned; शीलैः-सदाचरणों के द्वारा-through good conduct; कुलपूजिताः-कुल में सम्मानित/जनसाह में पूजित-honoured in family and society.

अनुवाद :
विद्वानों के द्वारा पुत्रों को विभिन्न सदाचरणों के द्वारा निरंतर लगाना चाहिए। क्योंकि सदाचार युक्त नीतिशास्त्र के ज्ञाता कुल में पूजे जाते हैं।

English :
Engage sons in noble conduct. A man of good moral conduct earns respect in family.

4. को हि भारः समर्थानां किं दूरं व्यवसायिनाम्।
को विदेशः सविद्यानांकः परः प्रियवादिनाम्।।4॥

अन्वयः :
हि समर्थानां कः भारः? व्यवसायिनां कि दूरम्? सविद्यानां कः विदेशः? प्रियवादिनां कः पारः? (अर्थात् कोऽपि नास्ति ।)

शब्दार्थाः :
समर्थानाम्-सक्षम लोगों के लिए-for the capable; व्यवसायिनाम्-उद्यमशील लोगों के लिए-for the industrious; परः-शत्रु पराया-enemy.

अनुवाद :
सक्षम लोगों के लिए भार क्या है? उद्यमशील (परिश्रमी) लोगों के लिए दूर क्या है? विद्या से युक्त लोगों के लिए विदेश क्या है ? प्रिय बोलने वालों के लिए कौन पराया है? (अर्थात् कोई भी नहीं।)

English :
The capable, industrious, learned and sweet talkers know no burden, distance, foreign country or enemy respectively.

5. दरिद्रता धीरतया विराजते, कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते।
कदन्नता चोष्णतया विराजते, कुरूपता शीलतया विराजते।।5॥

अन्वयः :
दरिद्रता धीरतया विराजते, कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते, कदन्नता उष्णतया विराजते, कुरुपता च शीलतया विराजते।

शब्दार्थाः :
धीरतया-धैर्य धारण करने से-through patience, forbearance; कदन्नता-निम्न कोटी का अन्न-third-rate foodstuff; विराजते-सुशोभित होता होती है-is adorned.

अनुवाद :
दरिद्रता धैर्य धारण करने से सुशोभित होती है, बुरे वस्त्र स्वच्छता से सुशोभित होते हैं, निम्न कोटि का अन्न ताप से सुशोभित होता है और कुरुपता शील स्वभाव से सुशोभित होती है।

English :
Misery, poverty, cheap clothes, third-rate food items and vulgarity are adorned by forbearance, cleanliness, heat (warmth) and noble conduct respectively.

6. धनहीनो न हीनश्च धनिकः सः सुनिश्चयः।
विद्यारत्नेन यो हीनः सः हीनः सर्ववस्तुषु॥6॥

अन्वयः :
यः धनहीनः सः हीनः न, (अपितु) सः सुनिश्चयः धनिकः, विद्यारत्नेन हीनः सः सर्ववस्तुषु हीनः (अस्ति)।

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शब्दार्था: :
धनहीनः-धन से रहित – one who lacks money; सुनिश्चयः-निश्चयपूर्वक-definitely-by all means; सर्ववस्तुषु-सभी वस्तुओं में-in everything.

अनुवाद :
जो धन से रहित है, वह हीन नहीं है, बल्कि वह निश्चयपूर्वक धनी है। विद्या रूपी रत्न से जो हीन है वह सब वस्तुओं से हीन होता है।

English :
One who is without money is not a destitute. He is otherwise wealthy. He alone is a pauper who is deprived of learning.

7. कर्मायत्तं फलं पुंसां बुद्धिः कर्मानुसारिणी।
तथापि सुधियश्चार्याः सुविचार्यैव कुर्वते॥7॥

अन्वयः :
पुंसां कर्मायत्तं फलम्, बुद्धि, कर्मानुसारिणी, तथापि सुधियः आर्याः च सुविचार्य एव कुर्वते।

शब्दार्थाः :
पुंसाम्-मनुष्यों का-of men; कर्मायत्तम्-कर्म के अनुसार-according to action; सुधियः-विद्वान् लोग-learned people; आर्याः-श्रेष्ठ लोग-noble persons; कुर्वते-करते हैं-do.

अनुवाद :
मनुष्यों को कर्म के अनुसार फल मिलता है, बुद्धि कर्म का अनुसरण करती है। इसीलिए विद्वान और श्रेष्ठ लोग अच्छी प्रकार से विचार करके ही कार्य करते हैं।

English :
Actions are result-oriented-wisdom follows actionwise and noble persons should act thoughtfully.

8. छिन्नोऽपि चन्दनतरुन जहाति गन्धं, वृद्धोऽपि वारणपतिर्न जहाति लीलाम् ।
यन्त्रार्पितो मधुरतां न जहाति चेक्षुः, दीनोऽपि न त्यजति शीलगुणान् कुलीनः॥8॥

अन्वयः :
छिन्नः चन्दनतरुः अपि गन्धं न जहाति, वृद्धः वारणपतिः अपि लीलां न जहाति, यन्त्रार्पितः इक्षुः मधुरतां न जहाति, कुलीनः च दीनः अपि शीलगुणान् न त्यजति।

शब्दार्थाः :
छिन्नः-कटा हुआ-which is cut; जहाति-छोड़ता है-leaves, deserts; यन्त्रार्पितः-यन्त्र (कोल्ह) में डाला गया-put insugar crasher; इक्षुः-गन्ना-sugarcane; शीलगुणान्-सच्चरित्रादि गुणों को-qualities like noble conduct; त्यजति-छोड़ता है-leaves, quits.

अनुवाद :
कटा हुआ चन्दन का वृक्ष भी अपनी सुगन्ध नहीं छोड़ता है। बूढ़ा हाथियों का स्वामी भी खेल नहीं छोड़ता है, यन्त्र (कोल्हू) में डाला गया गन्ना अपनी मधुरता को नहीं छोड़ता। कुलीन और दीन भी अपने सच्चरित्रादि गुणों को नहीं छोड़ता है।

English :
Acut out sandal tree, an old lord of elephants-a sugarcanea noble born and poor fellow do not forsake their fragrance, sportive nature, sweetness and noble qualities respectively.

9. एकेनाऽपि सुपुत्रेण विद्यायुक्तेन साधुना।
आह्लादितं कुलं सर्वं यथा चन्द्रेण शर्वरी॥9॥

अन्वयः :
एकेन सुपुत्रेण विद्यायुक्तेन साधुना अपि सर्वं कुलम् आह्लादितं, यथा चन्द्रेण शर्वरी (आहलाद्यते)।

शब्दार्थाः :
सुपुत्रेण-सद्गुणी पुत्र के द्वारा-by son of noble qualities; आहुलादितम्-प्रसन्न किया गया-delighted; शर्वरी-रात्रि-night.

अनुवाद :
एक सुपुत्र के द्वारा, विद्या से युक्त के द्वारा तथा सज्जन के द्वारा भी पूरा कुल आनन्दिा किया जाता है, जैसे चन्द्रमा के द्वारा रात को।

English :
A worthy, educated and noble son delights the entire family-The moon also does the same by lighting the night.

10. परोपकरणं येषां जागर्ति हृदये सताम्।
नश्यन्ति विपदस्तेषां सम्पदः स्युः पदे पदे।।10॥

अन्वयः :
येषां सतां हृदये परोपकरणं जागर्ति तेषां विपदः नश्यन्ति, पदे पदे सम्पदः स्युः।

शब्दार्थाः :
परोपकरणम्-दूसरों का भला करना-doing good to others; विपदः-विपत्तियाँ-difficulties; पदे-पदे-कदम-कदम पर-at every step; स्युः-हों-be.

अनुवाद :
जिन सज्जनों के हृदय में दूसरों का भला करने की भावना जागृत रहती है, उनकी विपत्तियाँ नष्ट हो जाती हैं और कदम-कदम पर खुशियाँ होती हैं।

English :
The gentlemen who have a feeling of others’ welfare are rid of difficulties and seek pleasure at every step.

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