भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 18 लोकमाता: अहिल्याबाई प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 18 Lokmata Ahilyabai Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 18 Lokmata Ahilyabai Questions and Answers

बोध प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) अहिल्याबाई को “लोकमाता” क्यों कहते हैं ?
उत्तर
अहिल्याबाई के शासनकाल में सम्पूर्ण प्रजा सुख और शान्ति से तथा समृद्धि से भरपूर थी, इसलिए लोग उन्हें लोकमाता कहते थे।

(ख) मल्हार राव ने अहिल्याबाई को किस राह पर आगे बढ़ाया ?
उत्तर
मल्हार राव ने अहिल्याबाई की आन्तरिक शक्तियों और क्षमताओं को पहचाना तथा अपने बेटे के समान ही राजनीति और यद्ध कला की शिक्षा दिलायी, घुडसवारी सिखलाई। इस तरह अहिल्याबाई को एक अच्छे शासक होने की राह पर आगे बढ़ाया।

(ग) अहिल्याबाई ने राज्य की बागडोर किन परिस्थितियों में संभाली?
उत्तर
भरतपुर के राजा सूरजमल ने मल्हार राव को वार्षिक कर नहीं दिया तो मल्हार राव ने भरतपुर पर आक्रमण कर दिया। तीन महीने तक चले इस भीषण युद्ध में अहिल्याबाई के पति खण्डेराव वीरगति को प्राप्त हुए। इस भीषण आघात से व्याकुल और आहत अहिल्याबाई ने जनकल्याण के लिए दृढ़तापूर्वक होल्कर राज्य की बागडोर अपने हाथों से संभाली।

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(घ) पेशवा राघोवा द्वारा आक्रमण किए जाने पर अहिल्याबाई ने क्या किया ?
उत्तर
पेशवा राघोवा द्वारा आक्रमण किए जाने पर अहिल्याबाई ने तुकोजी को पेशवा राघोवा से युद्ध करने के लिए भेजा और पेशवा राघोवा के लिए एक पत्र लिखा। इस पत्र में लिखा कि वह उनके पूर्वजों के राज्य को हड़पने का सपना न देखे। वह स्वयं नारी सेना लेकर युद्ध करेंगी। उसे (पेशवा को) नारी द्वारा हराये जाने का अपयश मिलेगा। यदि उसने विजय भी प्राप्त की तो उसके मुख पर एक विधवा के राज्य को हड़पने की कालिख लगेगी। पेशवा राघोवा पर इस बात का प्रभाव पड़ा और वह बिना युद्ध किये लौट गया। अहिल्याबाई ने होल्कर राज्य को अपनी बुद्धिमानी और दूरदर्शिता से भयमुक्त कर लिया।

(ङ) सौभागसिंह कौन था ? वह कैसे पकड़ा गया ?
उत्तर
सौभागसिंह रामपुरा का सरदार था। उदयपुर के राणा ने उसकी सहायता के लिए विशाल सेना भेजी। मन्दसौर के युद्ध क्षेत्र में भयानक युद्ध हुआ। तिरेसठ वर्षीय अहिल्याबाई ने युद्ध का संचालन किया। विरोधी सेना के छक्के छुड़ा दिये। सौभागसिंह को पकड़ लिया गया।

(च) भीलों द्वारा लूटपाट की समस्या अहिल्याबाई ने किस तरह निपटाई?
उत्तर
भीलों द्वारा लूटपाट की समस्या अहिल्याबाई ने अपने विवेक से निपटाई। अहिल्याबाई ने भीलों के सरदार को ही यात्रियों की सुरक्षा का दायित्व दे दिया। साथ ही, यह नियम भी बना दिया कि जिस इलाके में यात्रियों से लूटपाट होगी, तो वहाँ के भील उसकी भरपाई भी करेंगे। इस तरह इस समस्या से मुक्ति मिली।

(छ) “महारानी अहिल्याबाई का जीवन जनहित की मिसाल है”-स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
महारानी अहिल्याबाई का व्यक्तित्व जुझारू था। – उनमें चतुराई, बुद्धिमानी, राज्य संचालन की क्षमता थी। सम्पूर्ण – प्रजा सुखी और सम्पन्न थी। वह समस्याओं को तुरन्त निपटाती थी। सैनिकों के परिवारों की देखरेख करती थीं। कृषकों को । सुविधाएँ देती थीं। किसानों से कर बहुत कम लिया जाता था। उन्होंने उद्योग-धन्धों को भी बढ़ावा दिया।

उन्होंने विद्वानों, लेखकों, साहित्यकारों, ज्योतिषियों तथा कलाकारों को प्रोत्साहित किया। उन्हें राज्य में बसाया और उन्हें पुरस्कृत भी किया। इस तरह अहिल्याबाई का जीवन जनहित की मिसाल है। उन्होंने पूरे भारत में मन्दिर बनवाये। जरूरतमन्दों को कभी निराश नहीं होने दिया।

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प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) यात्री…………….होकर राज्य में विचरण करने लगे थे।
(ख) अहिल्याबाई ने 63 वर्ष की अवस्था में युद्ध का …………….. संचालन किया।
(ग) भारत के मन्दिर …………… कला के अनुपम उदाहरण
उत्तर
(क) निर्भय
(ख) कुशलता से
(ग) वास्तु।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों में से उपसर्ग छाँटकर लिखिए
प्रशिक्षित, सशरीर, आघात, सुयोग्य, आहत, अपयश, वियोग, विजय, विचरण।
उत्तर
प्र, स, आ,सु, आ, अप, वि, वि, वि।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्यों के समक्ष दिए गए
विकल्पों में से सही मुहावरे का प्रयोग करके रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) अहिल्याबाई के सामने दिग्गजों के ………….
(कालिख लगाना, छक्के छूटना, हार नहीं मानना)

(ख) गृहकार्य में दक्ष वधू ने सबका ………….. है।
(मन मोह लेना, घुटने टेकना, रास न आना)

(ग) अनैतिक कार्यों की पोल खुलने से व्यक्ति के …………. है।
(मुँह पर रंग लगना, मुंह पर कालिख लगाना, मुँह पर छींटे मारना)

(घ) अहिल्याबाई की वीरता की सभी थे।
(भूरि-भूरि प्रशंसा करना, विचलित होना, निन्दा करना)

(ङ) अहिल्याबाई ने पेशवा के सामने …………… थे।
(पैर टेकना, सिर टेकना, घुटने न टेकना)

(च) विदेशी भी भारतीय नारियों की वीरता देखकर …………. थे।
(आँख मूंद लेते थे, दाँतों तले अंगुली दबा लेते, कानों पर हाथ रख लेते थे)
उत्तर
(क) छक्के छूट जाते
(ख) मन मोह लिया
(ग) मुँह पर कालिख लग जाती
(घ) भूरि-भूरि प्रशंसा करते
(ङ) घुटने नहीं टेके
(च) दाँतों तले अँगुली दबा लेते।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के स्त्रीलिंग रूप लिखिए
शीलवान, बुद्धिमान, सुत, घोड़ा, नाना, जेठ, सेठ, ठाकुर।
उत्तर
स्त्रीलिंग-शीलवती, बुद्धिमती, सुता, घोड़ी, नानी, जेठानी, सेठानी, ठकुराइन।

लोकमाता : अहिल्याबाई परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

1. “आप मेरे पूर्वजों द्वारा अपने कठिन परिश्रम से स्थापित किए हुए होल्कर राज्य को हड़प लेने का दिवा स्वप्न मत देखिए, मैं अपनी नारी सेना के साथ आपसे युद्ध करूंगी। आप हारे तो आपको एक नारी द्वारा पराजित होने का अपयश मिलेगा और जीत गए तो एक पुत्र के वियोग से व्यथित विधवा के राज्य को अकारण हड़प लेने की कालिख आपके मुंह पर लगेगी। इस बात पर विचार कर उत्तर दें। मैं अपनी नारी सेना के साथ आपसे युद्ध करने के लिए तैयार हूँ।”

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश ‘लोकमाता : अहिल्याबाई’ नामक पाठ से अवतरित है। यह एक जीवनी है।

प्रसंग-होल्कर राज्य पर आक्रमण करने के लिए सेना सहित आये हुए पेशवा राघोवा के लिए अहिल्याबाई द्वारा लिखे पत्र का यह अंश है।

व्याख्या-अहिल्याबाई ने पत्र में लिखा कि होल्कर राज्य को उनके पूर्वजों ने बड़े ही परिश्रम से स्थापित किया है। तुम्हें इस राज्य को जबरन छीन लेने के लिए कल्पना नहीं करनी चाहिए यह विचार दिन में देखे सपने के समान होगा। मैंने तुमसे युद्ध करने का निश्चय कर लिया है। इस युद्ध में मेरी नारी सेना भाग लेगी जिसका संचालन में स्वयं (एक नारी) करूंगी। एक नारी के हाथ हार जाने पर तुम्हारा अपयश फैलेगा और यदि तुम जीत भी गए तो लोग कहेंगे कि तुमने एक विधवा के राज्य को छीन लिया जिसका पुत्र भी अभी-अभी मरा है। बिना किसी कारण तुमने राज्य छीन भी लिया, तो यह अपयश की कालिमा का टीका तुम्हारे माथे पर लगेगा। इन सभी बातों पर विचार करके मुझे उत्तर देने की कृपा करें। मैं युद्ध करने को तो तैयार हैं।

2. इस तरह जुझारू व्यक्तित्व की धनी रानी अहिल्याबाई ने अपने वाक् चातुर्य, बुद्धि कौशल से सत्ता का कुशलतापूर्वक संचालन कर जनता को सुखी किया। वह रोज दरबार लगातीं। प्रजा की समस्याओं का समाधान करतीं। वीरगति पाने वाले, सैनिकों एवं युद्ध में जाने वाले सैनिक परिवारों की सारी व्यवस्था स्वयं करतीं। वे कृषकों को सुविधाएँ देतीं। लगान के रूप में कृषि कर लिया जाता, जो बहुत कम होता, उसे भी वे जनहित के कार्यों में खर्च कर देतीं। अन्य उद्योगधन्धों को भी उन्होंने बढ़ावा दिया।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-अहिल्याबाई के व्यक्तित्व की विशेषताएँ बतायी गई हैं।

व्याख्या-अहिल्याबाई विपत्तियों से जूझने वाली महिला थीं। उनमें वाणी की चतुराई थी। वह बुद्धिमान थीं। इस तरह विशेष कौशल से चतुराईपूर्वक राज्य के ऊपर शासन कर रही थी। सभी प्रजा सुखी थी। वे प्रतिदिन ही अपने दरबार में उपस्थित होती थीं। अपनी प्रजा की सभी समस्याओं का हल वे अपने आप करती थीं। जितने भी सैनिक युद्ध में वीरगति प्राप्त कर चुके थे. उनके परिवारों तथा जो सैनिक युद्ध क्षेत्र में लड़ने के लिए गये हुए हैं, अथवा जाने वाले हैं, उनके परिवारों के सदस्यों की देख-रेख का काम अहिल्याबाई स्वयं ही किया करती थीं। इनके सुख-सुविधा के लिए वे स्वयं उत्तरदायित्व लेती थी। उन्होंने किसानों को अनेक तरह की सुविधाएँ दी थीं। किसानों से जो कृषि कर लिया जाता था। उसे अन्य उद्योगों के लगाने, उनके विकास में लगाया गया।

लोकमाता : अहिल्याबाई शब्दकोश

विद्रोह-विरोध करना, विरुद्ध होना; जनहित = जनता का हित, जन कल्याण; पारंगत = निपुण; विचलित = अस्थिर, हटना, डिगना; प्रत्युत्तर = उत्तर का उत्तर, उत्तर पाने पर दिया गया उत्तर; कूटनीति = छलकपट की नीति; दायित्व = जिम्मेदारी; दिग्गज = प्रकाण्ड, महान्; वज्राघात = विचलित: दिवास्वप्न = दिन में स्वप्न देखना संवेदना = समान दु:ख, समान वेदना; दाँतों तले अंगुली दबाना = अचम्भा करना; विचरण = घूमना; छक्के छूटना = भयभीत हो जाना; क्षीणकाय = कमजोर शरीर वाला, दुबले = पतले शरीर वाला; अपयश = बुराई: दूरदर्शिता = आगे की सोचना।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 8 डॉ. अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरक प्रसंग प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 8 Do. Abdul Kalam ke Jeevan ke Prerak Prasang Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 8 Do. Abdul Kalam ke Jeevan ke Prerak Prasang Questions and Answers

बोध प्रश्न

MP Board Class 7th Hindi Chapter 8 प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) अब्दुल कलाम का पूरा नाम क्या है ?
उत्तर
अब्दुल कलाम का पूरा नाम-‘अबुल पकीर जैनुलाब्द्दीन अब्दुल कलाम है।

(ख) कलाम ने अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए क्या संघर्ष किया?
उत्तर
कलाम अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए ट्यूशन – पढ़ाने लगे। मद्रास (चेन्नई) से छपने वाले एक समाचार-पत्र : ‘हिन्दू’ के लिए लेख भी लिखे। इससे उन्हें कुछ पारिश्रमिक भी प्राप्त हो जाता था। इस तरह अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए उन्होंने निरन्तर संघर्ष किया।

(ग) रामलीला में अब्दुल कलाम ने क्या देखा ? और – उस दृश्य का उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर
रामलीला में अब्दुल कलाम ने ‘राम-रावण’ युद्ध देखा। इस युद्ध में राम अग्निबाण से रावण की नाभि में स्थित अमृत को सुखा देते हैं और उसका अन्त कर देते हैं। इस दृश्य का उनके जीवन पर यह प्रभाव पड़ा कि उन्होंने इसी अग्निबाण की अवधारणा से ही अग्नि मिसाइल का सूत्रपात किया।

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(घ) डॉ. अब्दुल कलाम बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं?
उत्तर
डॉ. अब्दुल कलाम बच्चों के साथ बात करके आनन्द की अनुभूति करते हैं। उनके अनुसार बच्चों में ही सम्पूर्ण राष्ट्र का विकास छिपा होता है। बच्चों से वे मित्र की तरह बातें करते हैं। बच्चे भी स्वयं गौरव की अनुभूति करते हैं।

(ङ) अब्दुल कलाम को, “मिसाइल मैन” बनने की प्रेरणा कहाँ से मिली ?
उत्तर
एक बार अब्दुल कलाम ने एक लेख अंग्रेजी समाचार-पत्र ‘हिन्दू’ में पढ़ा। उस लेख का शीर्षक था, “साफ्ट फायर”। इसका हिन्दी में अर्थ हुआ मन्त्रबाण। यह एक प्राचीन भारतीय अस्त्र का नाम है जिसका प्रयोग द्वितीय विश्व युद्ध में हुआ था। इस मन्त्रबाण ने उन्हें आगे चलकर ‘अग्नि’ मिसाइल बनाने के लिए प्रेरित किया। डॉ. अब्दुल कलाम और मिसाइल एक-दूसरे के पूरक हो गये, इसीलिए उन्हें मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है।

Class 7 Hindi Chapter 8 MP Board प्रश्न 2.
डॉ. कलाम के प्रेरक विचार-बिन्दु लिखिए।
उत्तर
डॉ. कलाम के प्रेरक विचार-बिन्दु निम्नलिखित हैं

  1. विज्ञान वैदिक साहित्य की तरह है-सरस और संवेदनशील।
  2. मुझे भारतीय होने का गर्व है-यह एक महान देश है।
  3. हमारे युवकों को सपने देखने चाहिए। सपनों को विचारों में बदलना चाहिए। विचारों को क्रिया के जरिये वास्तविकता में बदलना चाहिए।
  4. वह काम करो, जिसमें तुम्हारी आस्था हो। यदि ऐसा नहीं करते हो, तो तुम अपनी किस्मत दूसरों के हवाले कर रहे हो।
  5. जो लोग अपने व्यवसाय में शीर्ष पर पहुँचना चाहते हैं, उनके भीतर पूर्ण वचनबद्धता का मूल गुण होना अत्यन्त आवश्यक है।

भाषा अध्ययन

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 8 प्रश्न 1.
नीचे दिए शब्दों में मूल शब्द और उपसर्ग अलग करके लिखिए
परिश्रम, परिहास, परिचर्चा, परिभ्रमण, परिधान, परिजन परिपूर्ण।
उत्तर
परि + श्रम, परि + हास, परि + चर्चा,
परि + भ्रमण, परि + धान,
परि + जन, परि + पूर्ण।

MP Board Class 7 Hindi Chapter 8 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में मूलशब्द और प्रत्यय अलग कीजिए
सामाजिक, वैज्ञानिक, वैमानिक, यान्त्रिक, वैदिक, पारिश्रमिक, आर्थिक।
उत्तर
समाज + इक, विज्ञान + इक,
विमान + इक, यन्त्र +इक,
वेद + इक, परिश्रम + इक, अर्थ+ इक

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Class 8 Hindi Bhasha Bharti Chapter 7 प्रश्न 3.
‘पल्लवित’ शब्द में ‘पल्लव’ के साथ ‘इत’।प्रत्यय का प्रयोग हुआ है। इसी तरह निम्नलिखित शब्दों के साथ ‘इत’ जोड़कर अन्य शब्द बनाइए
सम्बन्ध, कल्प, प्रतिष्ठा, सम्भावना, राजपत्र।
उत्तर
सम्बन्ध + इत = सम्बन्धित,
कल्प + इत = कल्पित,
प्रतिष्ठा + इत = प्रतिष्ठित,
सम्भावना + इत = सम्भावित,
राजपत्र- इत = राजपत्रित।

Class 7th Bhasha Bharti प्रश्न 4.
नीचे कुछ सामासिक पद दिए गए हैं। उन्हें छाँटकर तालिका में भरें
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 8 डॉ. अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरक प्रसंग 1

Class 7th Hindi Part 8 प्रश्न 5. निम्नलिखित वाक्यों में प्रयुक्त कारक के चिन्ह पहचानिए, उनके समक्ष लिखिए
(1) डॉ. अब्दुल कलाम को बच्चों से बहुत प्रेम है।
(2) सफलता के लिए ऊँचे सपने भी देखने चाहिए।
(3) डॉ. अब्दुल कलाम ने बचपन में बहुत संघर्ष किया।
(4) तपस्वी व्यक्ति का भाल आभा से चमकता है।
(5) डॉ. कलाम गुरु शिष्य परम्परा के समर्थक थे।
(6) हे ईश्वर ! सबको सद्बुद्धि दो।
(7) रामनाथपुरम् की हाई स्कूल की दीवार पर अंकित था।
(8) सभी को बुराई से बचना चाहिए।
उत्तर

  1. को, से
  2. के लिए
  3. ने, में
  4. का, से
  5. के
  6. हे
  7. की
  8. को, से।

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डॉ. अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरक प्रसंग परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. “काफी कसमसाहट से भरे थे जीवन के वे दिन। एक ओर विदेशों में शानदार भविष्य था, दूसरी ओर था देशसेवा का आदर्श। इन दोनों में से एक का मेरे लिए चुनाव करना कठिन था। अन्ततः मैंने तय किया-पैसों के लिए विदेश नहीं जाऊँगा। भविष्य संवारने के मोह में देशसेवा का अवसर हाथ से जाने नहीं दूंगा।”

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘डॉ. अब्दुल कलाम के जीवन … के प्रेरक प्रसंग’ नामक पाठ से अवतरित हैं। लेखकों ने भूतपूर्व

राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरक प्रसंगों से छात्रों को राष्ट्रप्रेम से परिपूर्ण करने का प्रयास किया है।

प्रसंग-डॉ. अब्दुल कलाम की देशभक्ति और सेवा के महान आदर्श को प्रस्तुत किया है।

व्याख्या-डॉ. कलाम ने वैमानिक यान्त्रिकी में शिक्षा प्राप्त की। उस समय इस शिक्षा की योग्यता वाले विद्यार्थियों की माँग यूरोप और अमेरिका में बहुत अधिक थी। इन देशों में इनको अच्छा वेतन और सम्मान दिया जाता था। इस दशा में कलाम के सामने दो विकल्प थे। पहला यह कि वे विदेश चले जायें और धनार्जन करें और एक धनवान व्यक्ति के सम्मान को प्राप्त कर लें। दूसरा यह कि वे यहीं भारत में रहकर मातृभूति की सेवा करके उसके ऋण से उऋण हों।

उन्होंने अपनी ऊहापोह की स्थिति में विदेशों में जाकर शानदार भविष्य को संवारने की भावना को एक तरफ कर दिया और देश सेवा के महान् आदर्श को स्वीकार करके सभी देशवासी यवकों को देश की सेवा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रतिज्ञा कर ली कि वे धन कमाने की दृष्टि से विदेशों को नहीं जायेंगे। उन्होंने अपने महान और विशिष्ट ज्ञान से देश की सेवा करके देशसेवा के अवसर को अपने हाथ से खिसकने नहीं दिया।

डॉ. अब्दुल कलाम के जीवन के प्रेरक प्रसंग शब्दकोश

अन्वेषक = खोजी, अन्वेषण करने वाला; आर्थिक = धन सम्बन्धी; सराबोर = डूबा हुआ, तरबतर, भीगा हुआ; मुखरित = कहना, किसी बात को स्पष्ट कर देना प्रतिबिम्ब = छाया, परछाई सोपान = सीढ़ी; परिवेश = वातावरण अस्त्र = हाथ से फेंककर चलाया जाने वाला हथियार; आभा = चमक;
परिणित = परिवर्तन, बदला हुआ; ऊहापोह = असमंजस, दुविधा; यथा अवसर = अवसर के अनुसार, उचित अवसर; कान्तिमान = चमकदार; सृजन-रचना, किसी वस्तु का निर्माण करना; आस्था = आदर, विश्वास; सहभागी – बराबरी का हिस्सेदार, सहयोगी; प्रतिमा = मूर्ति।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 3 मेरी वसीयत प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 3 Meri Vasiyat Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 3 Meri Vasiyat Questions and Answers

बोध प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

Class 7 Hindi Chapter 3 Meri Vasiyat प्रश्न 1.
नेहरूजी ने अपने दोस्तों और साथियों के लिए क्या बातें कही हैं ?
उत्तर-
नेहरूजी ने अपने दोस्तों और साथियों के साथ अपने कार्य अनुभव को बाँटते हुए लिखा है कि बेशुमार दोस्तों और साथियों के उनके ऊपर कई एहसान रहे हैं। वे बड़े-बड़े कामों में एक-दूसरे के साथ रहे, मिल-जुलकर काम किए तथा सफलता के सुख व असफलता के दुःख दोनों में शामिल रहे।

MP Board Class 7th Hindi Chapter 3 प्रश्न 2.
गंगा नदी से नेहरूजी की कौन-कौन सी भावनाएँ लिपटी हुई हैं ?
उत्तर-
नेहरूजी ने गंगा को बेहद करीब से और लम्बे समय तक देखा है। इससे उनकी अनेकानेक भावनाएँ लिपटी हुई हैं। गंगा के प्राकृतिक सौन्दर्य, उसके पल-पल बदलते स्वरूप व पग-पग परिवर्तित होते मार्ग के मनोरम दृश्य सदैव स्मृति पटल पर ताजा रहते हैं। गंगा जनता की सर्वप्रिय नदी है। वह तो भारत की प्राचीन सभ्यता का प्रतीक रही है। वास्तव में, नेहरू जी के लिए गंगा मात्र एक नदी न होकर भूत को वर्तमान के मार्ग से होते हुए भविष्य को जोड़ने का एक जीवनदायक स्रोत है।

Class 7 Hindi Chapter 3 Mp Board प्रश्न 3.
नेहरूजी ने विभिन्न समय और मौसम पर गंगा का मनोहारी चित्रण किस प्रकार किया है
(क) सुबह के समय,
(ख) शाम के समय,
(ग) सर्दी के समय।
उत्तर-
नेहरूजी ने विभिन्न समय और मौसम पर गंगा का मनोहारी चित्रण करते हुए लिखा है कि उन्होंने सुबह की रोशनी में गंगा को मुस्कराते, उछलते-कूदते देखा है और देखा है शाम के साये में उदास काली-सी चादर ओढ़े हुए, भेद-भरी सर्दी में सिमटी-सी आहिस्ते-आहिस्ते बहती गंगा अत्यन्त सुन्दर दिखाई पड़ती है।

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 3 प्रश्न 4.
नेहरूजी ने अपनी वसीयत में मरने के बाद भस्म को कहाँ-कहाँ डाल देने की इच्छा व्यक्त की है?
उत्तर-
नेहरूजी ने अपनी वसीयत में मरने के बाद अपनी भस्म में से मुट्ठीभर गंगा में डालने तथा शेष हिस्से को भारत के उन खेतों में बिखेर देने की इच्छा व्यक्त की है, जहाँ भारतीय किसान अपनी जीतोड़ मेहनत से अन्न उपजाते हैं।

भाषा अध्ययन

Class 7th Hindi Chapter 3 Meri Vasiyat प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और लिखिए-
मुहब्बत, बेशुमार, एहसान, शरीक, ताल्लुक, पौराणिक, स्मृतियों, फख, उत्तराधिकार, प्रेरणा, दरख्वास्त, पुष्टि, श्रद्धांजलि।
उत्तर-
प्रत्येक शब्द को ठीक-ठीक उच्चारित करके सुन्दर हस्तलेख में सार्वधानीपूर्वक लिखिए।

Meri Vasiyat Class 7 प्रश्न 2.
‘ना’ और ‘वि’ उपसर्ग जोड़कर शब्द बनाइए
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 3 मेरी वसीयत 1

MP Board Class 7 Hindi Chapter 3 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
अस्थियाँ, परम्परा, विजयगान, स्मृतियाँ, प्रेरणा, उत्तराधिकार।
उत्तर-
(क) अस्थियाँ-हड्डियाँ।
वाक्य प्रयोग-नेहरूजी की अस्थियों को पवित्र गंगा नदी में विसर्जित किया गया।
(ख) परम्परा-रीजि-रिवाज।
वाक्य प्रयोग-अतिथि का देवता के समान स्वागतसत्कार भारतीय संस्कृति की प्रमुख परम्परा है।
(ग) विजयगान-जय-गान।
वाक्य प्रयोग-छत्रपति शिवाजी का विजयगान पूरे भारतवर्ष में होता था।
(घ) स्मृतियाँ-यादें।
वाक्य प्रयोग-वीर पुरुषों की मृत्यु के पश्चात् भी उनकी स्मृतियाँ मानव-मस्तिष्क में सदैव बनी रहती हैं।
(ङ) प्रेरणा-उत्साहित करना।
वाक्य प्रयोग-सुरेश के बड़े भाई ने उसे वार्षिक परीक्षा में। सर्वोत्तम परिणाम लाने के लिए भरपूर प्रेरणा दी।
(च) उत्तराधिकार- बाद में प्राप्त होने वाला अधिकार।
वाक्य प्रयोग-अहिल्याबाई को होल्कर राज्य उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त हुआ।

Class 7 Hindi Bhasha Bharti Chapter 3 प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों में उपयुक्त स्थान पर ‘नहीं’ और ‘न’ द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) मैं आज सभा में …………………………….. जाऊँगा और …………………………….. तुमको जाने दूंगा।
(ख) माँ ने मुझे नाश्ता …………………………….. बनाने दिया और ……………………………..” ही खुद बनाया।
(ग) नेहरू जी ने कहा, “मेरे मरने के बाद कोई धार्मिक रस्में अदा ……………………………..” की जाएँ मैं ऐसी बातों को …………………………….. मानता।”
(घ) राजू को आज खेलने …………………………….. दिया जाए, क्योंकि उसने शाला का कार्य पूरा …………………………….. किया है।
उत्तर-
(क) नहीं, न,
(ख) नहीं, न,
(ग) न, नहीं,
(घ) न, नहीं।

Class 7 Bhasha Bharti Chapter 3 प्रश्न 5.
नीचे दिए उदाहरण के अनुसार वाक्यों को अलग कीजिए-
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 3 मेरी वसीयत 2
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 3 मेरी वसीयत 3

Class 7th Hindi Chapter 3 Mp Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति दिए गए विकल्पों में से छाँटकर कीजिए

(क) …………………………….. प्राचीन सभ्यता का प्रतीक रही है।
(1) यमुना
(2) गंगा
(3) चम्बल
(4) कावेरी।
उत्तर-
(2) गंगा,

(ख) पुराण में …………………………….. प्रत्यय लगाकर पौराणिक शब्द बनता है।
(1) णिक
(2) क
(3) इक
(4) पौ।
उत्तर-
(3) इक,

(ग) ‘बेशुमार’ शब्द में …………………………….. उपसर्ग है।
(1) मार
(2) बे
(4) बेश।
उत्तर-
(2) बे।

मेरी वसीयत परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. मुझे मेरे देश की जनता ने, मेरे हिन्दुस्तानी भाइयों और बहनों ने इतना प्रेम और इतनी मुहब्बत दी है कि मैं चाहे जितना कुछ करूँ, वह उसके एक छोटे से हिस्से का भी बदला नहीं हो सकता। सच तो यह है कि प्रेम इतनी कीमती चीज है कि इसके बदले कुछ देना मुमकिन नहीं। इस दुनिया में बहुत से लोग हुए, जिनको अच्छा समझकर, बड़ा मानकर उनका आदर किया गया, पूजा गया, लेकिन भारत के लोगों ने छोटे और बड़े, अमीर और गरीब सब तबकों के बहनों और भाइयों ने मुझे इतना ज्यादा प्यार दिया कि जिसका बयान करना मेरे लिए मुश्किल है और जिससे मैं दब गया।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा भारती’ के ‘मेरी वसीयत’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक पं. जवाहरलाल नेहरू हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में जवाहरलाल नेहरू ने देश की जनता द्वारा उन्हें दिए गए सम्मान और प्रेम का वर्णन किया है।

व्याख्या-जवाहरलाल नेहरू कहते हैं कि भारतवर्ष के प्रत्येक नागरिक ने उन्हें अपार प्यार और स्नेह दिया है। वह इस प्रेम रूपी उपकार को चुकाने के लिए चाहे कितना भी कुछ करें, किन्तु उसके एक छोटे से भाग को भी चुकाने में असमर्थ रहेंगे। उनके अनुसार प्यार इतनी बहुमूल्य वस्तु है कि उसकी भरपाई दुनिया की मूल्यवान से मूल्यवान वस्तु से भी नहीं की जा सकती है। इस दुनिया में लोगों को उनके कर्मों के आधार पर भगवान तक माना गया है, उनको मान-सम्मान दिया गया है तथा उनकी पूजा तक की गई है। लेकिन भारत में निवास करने वाले प्रत्येक वर्ग के लोगों ने, फिर वह चाहे छोटा हो, बड़ा हो, अमीर हो अथवा गरीब, सभी ने उन्हें इतना अधिक प्यार व मान-सम्मान दिया है कि जिसका वर्णन शब्दों में करना अत्यन्त कठिन है। भारतवासियों के इस निश्छल प्रेम से मैं सदा गद्गद् रहा हूँ।

2. “यह तो होता ही है कि जब बड़े काम किए जाते हैं, उनमें कामयाबी भी होती है, नाकामयाबी भी होती है मगर हम सब शरीक रहें, कामयाबी की खुशी में भी और ‘नाकामयाबी के दुःख में भी।”

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में नेहरूजी ने अनुकूल एवं प्रतिकूल में दोनों परिस्थितियों में संग रहने की बात कही है।

व्याख्या-नेहरू जी अपने सहयोगियों के संग के दिनों को स्मरण करते हुए लिखते हैं कि जब बड़े उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु प्रयास किये जाते हैं तो उनमें सफलता तो प्राप्त होती ही है, कभी-कभी असफलता भी हाथ लगती है। मगर निराशा के इस क्षण में तथा सफलता की स्थिति में खुशी के पलों में हमें सदैव संग रहना चाहिए।

3. मैं चाहता हूँ और सच्चे दिल से चाहता हूँ कि मेरे मरने के बाद कोई धार्मिक रस्में अदा न की जाएँ। मैं ऐसी बातों को मानता नहीं हूँ और सिर्फ रस्म समझकर उनमें बँध जाना, धोखे में पड़ना मानता हूँ। मेरी इच्छा है कि जब मैं मर जाऊँ तो मेरा दाह संस्कार कर दिया जाए। अगर विदेश में मरूँ तो मेरे शरीर को वहीं जला दिया जाए और मेरी अस्थियाँ इलाहाबाद भेज दी जाएँ। उनमें से मुट्ठी भर गंगा में डाल दी जाएँ।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने अपनी मृत्यु के पश्चात् अपनी अस्थियों के एक भाग को पवित्र नदी गंगा में विसर्जित करने की इच्छा का वर्णन किया है।

व्याख्या-नेहरूजी हृदय से यह चाहते हैं कि उनकी मृत्यु के पश्चात् किसी भी प्रकार के धार्मिक रीति-रिवाज एवं विधि-विधान न किये जाएँ। वह रोजी रस्मों में बँधने को धोखे में पड़ने की संज्ञा देते हैं। उनकी अन्तिम इच्छा है कि मृत्यु के पश्चात् उनका दाह संस्कार कर दिया जाए। यदि वे अपनी मातृभूमि से दूर किसी विदेश में मृत्यु का वरण करें तो उनके पार्थिव शरीर को वहीं अग्नि को सौंप दिया जाए और उनकी अस्थियाँ इलाहाबाद भेज दी जाएँ जिनमें से एक अंश को पवित्र नदी गंगा में विसर्जित कर दिया जाए। उस गंगा में, जिससे वह सदैव ही प्रभावित रहे हैं।

4. गंगा तो विशेषकर भारत की नदी है, जनता की प्रिय है, जिससे लिपटी हुई हैं भारत की जातीय स्मृतियाँ, उसकी आशाएँ और उसके भय, उसके विजयगान, उसकी विजय और पराजय। गंगा तो भारत की प्राचीन सभ्यता का प्रतीक रही है, निशानी रही है, सदा बदलती, सदा बहती फिर वही गंगा की गंगा। वह मुझे याद दिलाती है हिमालय की, बर्फ से ढकी चोटियों की और गहरी घाटियों की, जिनसे मुझे मुहब्बत रही है, उनके नीचे उपजाऊ और दूर-दूर तक फैले मैदानों को, जहाँ काम करते मेरी जिन्दगी गुजरी है, मैंने सुबह की रोशनी में गंगा को मुस्कराते, उछलते-कूदते देखा है और देखा है शाम के साये में उदास काली-सी चादर ओढ़े हुए, भेद-भरी जाड़ों में सिमटी-सी आहिस्ते-आहिस्ते बहती सुन्दर धारा और बरसात में दौड़ती हुई, समुद्र की तरह चौड़ा सीना लिए और सागर को बरबाद करने की शक्ति लिए हुए। यही गंगा मेरे लिए निशानी है भारत की प्राचीनता की, यादगार की जो बहती आई है वर्तमान तक और बहती चली जा रही है, भविष्य के महासागर की ओर।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने गंगा को भारतीय संस्कृति और सभ्यता का एक उच्च प्रतिमान बताते हुए उससे अपने व्यक्तिगत लगाव का वर्णन किया है।

व्याख्या-गंगा एक पवित्र भारतीय नदी है जो अपने साथ मात्र जल नहीं, बल्कि खुशियाँ और सम्पन्नता लेकर आती है। जिससे जुड़ी हैं भारतीय जनमानस की अनगिनत भावनाएँ। उनकी संस्कृति, उनकी जातीय स्मृतियाँ, उनकी हार व जीत, उनकी उम्मीदें एवं डर। वास्तव में गंगा नदी तो सनातन भारतीय सभ्यता का सदैव से प्रतीक रही है। गंगा जो पल-पल बदलती है, पग-पग मुड़ती है, किन्तु फिर भी अपना वास्तविक स्वरूप नहीं बदलती, रहती है तो बस वही गंगा। उसे देखकर बर्फ से ढकी हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं एवं गहरी घाटियों के दृश्य : आँखों के सम्मुख जीवन्त हो उठते हैं। ऐसे दृश्य जिनसे एक आम आदमी की तरह मैं भी प्यार करता हूँ, उन्हें पसन्द करता हूँ। गंगा के जल को देखकर मुझे सुदूर तक फैले उपजाऊ मैदानी क्षेत्रों का स्मरण हो आता है, जहाँ काम करते हुए मेरे जीवन का एक बड़ा हिस्सा व्यतीत हुआ है। मैंने सूरज की पहली किरण के साये में गंगा के उस स्वरूप को देखा है जिसमें वह मुस्कराती, बलखाती, इठलाती आगे बढ़ती है और शाम को चन्द्रमा के मद्धिम एवं शीतल प्रकाश में स्याह चादर ओढ़े, शान्त रूप धारण किये निरन्तर बहती रहती है। सर्दियों की सर्द रातों में हजारों रहस्य अपने में समेटे गंगा का धीमा प्रवाह उसे और भी सुन्दर बना देता है। बरसात में अपार जल-धन को स्वयं में समेटे गंगा गरजती हुई आगे बढ़ती है और सागर से लोहा लेने को आतुर प्रतीत होती है। यही सुन्दर, पवित्र एवं जीवनदायिनी गंगा भारत की प्राचीनता एवं महानता की प्रतीक है जो भूतकाल से वर्तमान तक अविरल बहती आई है और भविष्य में भी यूँ ही भारतीय भूमि पर बहती रहने वाली है।

मेरी वसीयत शब्दकोश

मुमकिन = सम्भव; कीमती = मूल्यवान; तबका = वर्ग, समुदाय; एहसान = उपकार; शरीक = सम्मिलित, शामिल होना; कामयाबी = सफलता; रस्में = रीति-रिवाज, परम्परा; साबित = सिद्ध; बेशुमार = अगणित, जिसे गिना न जा सके; ताल्लुक = सम्बन्ध; ख्याल = विचार; पौराणिक = पुराणों से सम्बन्धित; स्मृतियाँ = यादें; मुहब्बत = प्यार, प्रेम, आहिस्ता = धीरे-धीरे; दरख्वास्त = प्रार्थना, निवेदन; फन = गर्व; सिलसिला = क्रम; आकांक्षा = इच्छा; कद्र = सम्मान; विरासत = धरोहर।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 1 मेरी भावना प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 1 Meri Bhavna Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 1 Meri Bhavna Questions and Answers

बोध प्रश्न

MP Board Class 7th Hindi Chapter 1 प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) हमें जीवों के प्रति किस तरह की भावना रखनी चाहिए?
उत्तर-
हमें जीवों के प्रति मित्रता व दया की भावना रखनी चाहिए।

(ख) ‘मेरी भावना’ कविता में कवि ने किन-किन पर साम्यभाव रखने की बात कही है ?
उत्तर-
इस कविता में कवि ने दुष्ट, निर्दयी व गलत रास्ते पर चलने वाले इत्यादि के प्रति साम्यभाव रखने की बात कही है। .

(ग) देशोन्नति से कवि का क्या आशय है ? कवि किस तरह की देशोन्नति में सम्मिलित होना चाहता है ?
उत्तर-
देशोन्नति से कवि का आशय-देश की उन्नति से है। कवि चाहता है कि सभी हृदय से युगवीर बनकर देश की उन्नति और विकास में सम्मिलित हों।

MP Board Solutions

Meri Bhavna Class 7 Hindi प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में से सद्गुण और दुर्गण के लिए प्रयुक्त शब्दों की सूची अलग-अलग बनाइए अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, उपकार, क्रूर, प्रेम, मोह।
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 1 मेरी भावना 1

Class 7 Hindi Chapter 1 Meri Bhavna प्रश्न 3.
निम्नलिखित भाव जिस पंक्ति में आए हों, उस पंक्ति को लिखिए और सुनाइए ईर्ष्या, करुणा, लालच, कृतघ्न।
उत्तर-
विद्यार्थी निम्न पंक्तियों को कण्ठस्थ करें व कक्षा में सुनाएँ

  • ईर्ष्या-देख दूसरों की बढ़ती को, कभी न ईर्ष्या भाव धरूँ।
  • करुणा-दीन-दुखी जीवों पर मेरे, उर से करुणा-स्रोत बहे।
  • लालच-अथवा कोई कैसा ही भय, या लालच देने आए।
  • कृतघ्न-होऊँ नहीं कृतघ्न कभी मैं, द्रोह न मेरे उर आए।

Bhasha Bharti Class 7 प्रश्न 4.
कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर-
पाठ के प्रारम्भ में दिये गए विभिन्न पद्यांशों की व्याख्याओं का अवलोकन करें।

भाषा अध्ययन

Class 7th Hindi Chapter 1 Meri Bhavna प्रश्न 1.
निम्नलिखित अशुद्ध शब्दों की वर्तनी शुद्ध करके लिखिए इष्या, स्त्रोत, दुजर्न, परिणती, द्रष्टी।
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 1 मेरी भावना 2

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 1 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों का अर्थ लिखकर अन्तर स्पष्ट कीजिएभाव-भव रात-रत। बैर-बेर गृह-ग्रह।
उत्तर-

    1. भाव (मूल्य)-भव (संसार)
      अन्तर-भाव का अर्थ होता है किसी वस्तु का मूल्य जबकि भव का अर्थ है संसार ।
    2. रात (रात्रि)-रत (लगा हुआ)।
      अन्तर-रात का प्रयोग रात्रि के समय के लिए किया जाता E है, जबकि रत का अर्थ होता है किसी कार्य में लगा हुआ।
    3. बैर (द्वेष)-बेर (एक फल)
      अन्तर-बैर शब्द का प्रयोग दुश्मनी अथवा द्वेष के लिए किया जाता है, जबकि बेर एक खाद्य-फल है।
  1. गृह (निवास स्थान, घर)-ग्रह (विशाल आकाशीय पिण्ड)।
    अन्तर-गृह का अर्थ घर से है, जबकि ग्रह का प्रयोग विशालकाय आकाशीय पिण्डों (पृथ्वी, शनि, बृहस्पति इत्यादि) के लिए किया जाता है।

Class 7 Hindi Chapter 1 Mp Board प्रश्न 3.
वर्ग पहेली में से नीचे दिए गए शब्दों के विलोम शब्द छाँटकर लिखिए
उपकार, कुमार्ग, कृतघ्न, जीवन, अन्याय, दु:ख।
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 1 मेरी भावना 3
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 1 मेरी भावना 4

MP Board Class 7 Hindi Chapter 1 प्रश्न 4.
नीचे लिखे शब्दों को ध्यान से पढ़िए और जिन वर्णों की आवृत्ति हुई है उसे लिखिए
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 1 मेरी भावना 5
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(क) सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. अहंकार का भाव न रक्खू,
नहीं किसी पर क्रोध करूँ।
देख दूसरों की बढ़ती को,
कभी न ईर्ष्या भाव धरूँ।।
रहे भावना ऐसी मेरी,
सरल-सत्य व्यवहार करूँ।
बने जहाँ तक इस जीवन में,
औरों का उपकार करूँ।।
मैत्री भाव जगत में मेरा,
सब जीवों से नित्य रहे।
दीन-दुखी जीवों पर मेरे,
उर से करुणा-स्रोत बहे।।

शब्दार्थ-अहंकार = घमण्ड; ईर्ष्या = द्वेष; करुणा-स्रोत = दया की धारा।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा भारती’ के ‘मेरी भावना’ नामक पाठ से अवतरित है। इसके रचयिता जुगल किशोर ‘युगवीर’ हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ईश्वर से अपने लिए अच्छी भावनाओं की कामना करता है।

व्याख्या-हे ईश्वर ! कभी भी घमण्ड का भाव मेरे मन में न आये और न ही मैं किसी पर गुस्सा करूँ। दूसरों की उन्नति और विकास को देखकर मुझे प्रसन्नता हो, न कि कुढ़न।।

हे प्रभु ! मैं चाहता हूँ कि मेरी ऐसी भावना हो कि मैं सबके प्रति सरलता व सत्यता का व्यवहार करूँ और जहाँ तक सम्भव हो सके मैं अपने इस जीवन को परोपकार में लगा सकूँ, अर्थात् दूसरों की भलाई कर सकूँ। तेरे बनाये सभी जीव-जन्तुओं एवं पादपों से मेरा व्यवहार प्रतिदिन मित्रवत् हो तथा दुखी व परेशान प्राणि-मात्र के प्रति मेरे हृदय में दया की अविरल धारा बहती रहे।

2. दुर्जन-क्रूर कुमार्गरतों पर,
क्षोभ नहीं मुझको आए
साम्यभाव रक्खू मैं उन पर,
ऐसी परिणति हो जाए।।
गुणीजनों को देख हृदय में,
मेरे प्रेम उमड़ आए।
बने जहाँ तक उनकी सेवा,
करके यह मन सुख पाए।।
होऊँ नहीं कृतघ्न कभी मैं,
द्रोह न मेरे उर आए।
गुण ग्रहण का भाव रहे नित,
दृष्टि न दोषों पर जाए।।

शब्दार्थ-दुर्जन = दुष्ट; क्रूर = कठोर; कुमार्गरतों = बुरे रास्ते पर चलने वाले क्षोभ = कष्ट; साम्यभाव = समानभाव; परिणति = बदलाव; गुणीजन = गुणवान लोग; कृतघ्न = उपकार न मानने वाला; द्रोह = वैर; उर = हृदय।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ईश्वर से अपने लिए अच्छी भावनाओं का वरदान चाहता है।

व्याख्या-हे प्रभु ! मेरी सदैव ऐसी भावना रहे कि मुझे दुष्ट, कठोर और बुरे आचरण वाले लोगों के व्यवहार पर दुःख न हो। मेरे हृदय में उनके प्रति ऐसा बदलाव हो कि मैं उनके प्रति समानता का भाव रखने लगूं।

जब मैं गुणवान लोगों को देखू तो उनके लिए मेरे हृदय में प्रेम की भावना उत्पन्न होती रहे। जहाँ तक सम्भव हो सके मैं ऐसे लोगों की तन-मन-धन और कर्म से सेवा कर मन की शान्ति अर्जित कर सकूँ।

मैं कभी भी दूसरों के किये हुए उपकार को भूलने वाला न बनूँ और मेरे मन में किसी के प्रति भी वैर-भावना पैदा न हो। दूसरों के चरित्र में से मैं उसके अन्दर छिपे गुणों को स्वीकार करता रहूँ, किन्तु उनके दोषों की ओर मेरा ध्यान कदापि न जाये। हे ईश्वर ! मेरी प्रतिदिन यही भावना रहे।

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3. कोई बुरा कहे या अच्छा,
लक्ष्मी आए या जाए।
लाखों वर्षों तक जीऊँ या,
मृत्यु आज ही आ जाए।
अथवा कोई कैसा ही भय,
या लालच देने आए।
तो भी न्यायमार्ग से मेरा,
कभी न पद डिगने पाए।।
फैले प्रेम परस्पर जग में,
मोह दूर पर रहा करे।
अप्रिय कटुक कठोर शब्द नहीं,
कोई मुख से कहा करे।।
बनकर सब युगवीर हृदय से,
देशोन्नतिरत रहा करें।
वस्तु स्वरूप विचार खुशी से,
सब दुःख संकट सहा करें।।

शब्दार्थ-न्यायमार्ग = न्याय का रास्ता; पद = पैर, पग; परस्पर = आपस में; मोह = लालच; कटुक = कड़वा; देशोन्नतिरत = देश की उन्नति में लगे।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि प्रतिकूल अथवा अनुकूल, दोनों परिस्थितियों में धैर्य रखने की शक्ति की प्राप्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता है।

व्याख्या-कोई मुझे बुरा कहे अथवा कर्ण-प्रिय शब्द बोले, मेरे पास धन आए अथवा जाता रहे, चाहे मैं लाखों वर्षों तक जीता रहूँ अथवा मेरी मौत नजदीक हो अथवा मुझे कोई कैसा भी बरगलाने या लालच देने का प्रयत्न करे, तो भी हे मेरे ईश्वर ! मुझे ऐसी शक्ति प्रदान कर, जिससे न्याय के पथ से मेरे कदम हटने न पाएँ।

इस दुनिया के समस्त निवासियों के मध्य आपस में प्यार बढ़े, सभी लोभ, लालच से दूर रहें तथा कोई भी अपने मुँह से । किसी के लिए भी अप्रिय, कड़वे तथा कठोर शब्द न बोले। – सभी देशवासी मन से दृढ़ संकल्पित हो युगवीर बनें और सदैव राष्ट्र की उन्नति में अपना योगदान दें। साथ ही, सभी दुखों पीड़ाओं और संकटों को वस्तु के समान आने जाने वाला सोचकर अर्थात् उन्हें जीवन का एक अंग मानकर खुशी से सहन किया करें।

शब्दकोश
अहंकार = घमण्ड; परिणति = बदलाव या परिवर्तन; ईर्ष्या = जलन; करुणा = दया; कटु = कठोर, कड़वा; . देशोन्नति = देश की उन्नति; स्रोत = धारा, साधन, उद्गम; क्षोभ = खेद, दुःख; क्रूर = निर्दयी।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 15 छोटा जादूगर प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 15 Chota Jadugar Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 15 Chota Jadugar Questions and Answers

बोध प्रश्न

Chota Jadugar Question Answer In Hindi Class 7 प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) छोटे जादूगर से लेखक की पहली मुलाकात कहाँ
उत्तर
छोटे जादूगर से लेखक की पहली मुलाकात कार्निवाल के मैदान में हुई।

(ख) लेखक ने छोटे जादूगर से पहली बार मिलने पर क्या पूछा?
उत्तर
लेखक ने छोटे जादूगर से पहली बार मिलने पर पूछा कि उस पर्दे में क्या है?

(ग) छोटे जादूगर का खेल उस दिन क्यों नहीं जमा ?
उत्तर
छोटे जादूगर का खेल उस दिन इसलिए नहीं जमा क्योंकि उसे अपनी बीमार माँ की बीमारी की दशा सताये जा रही थी। साथ ही उसे माँ के कहे शब्द बार-बार उसके मस्तिष्क में काँध रहे थे कि वह उस दिन जल्दी लौटकर आ जाए, क्योंकि उनकी घड़ी समीप ही थी।

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(घ) बालक का नाम छोटा जादूगर क्यों पड़ा?
उत्तर
बालक की उम्र तेरह-चौदह वर्ष की रही होगी। वह अपनी जीविका के लिए ताश, गुड़िया, बन्दर आदि के खेल दिखाता था। इन खेलों से लोगों का मनोरंजन करता था। इसलिए उसका नाम छोटा जादूगर पड़ गया।

(ङ) छोटे जादूगर के किन-किन गुणों ने तुम्हें प्रभावित किया ?
उत्तर
छोटा जादूगर दुःख और पीड़ा की अवस्था में धीरज धरे हुआ था। वह अपनी माँ की बीमारी की दवाई के लिए खेल दिखाता है। वह किसी के सामने भीख के लिए हाथ नहीं बढ़ाता है। उसे परिश्रम करने में विश्वास है। वह बोलचाल में चतुर है, साहसी है। वह अभिवादनशील है।

Chota Jadugar Class 7 Question Answer प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) …………के मैदान में बिजली जगमगा रही थी।
(ख) मैं सच कहता हूँ बाबूजी ………… बीमार हैं।
(ग) ………… कहिए यह मेरा नाम है।
(घ) माँ ने कहा था कि आज चले आना मेरी घड़ी …………. है।
उत्तर
(क) कार्निवाल
(ख) माँ
(ग) छोटा जादूगर
(घ) तुरन्त, समीप।

भाषा अध्ययन

Chota Jadugar Hindi Lesson Question Answer प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण करते हुए वाक्यों में प्रयोग कर लिखिए
प्रगल्भता, तथ्य, उद्यान, स्वार्थी, इया, धैर्य।
उत्तर

  1. बालकों में प्रगल्भता का गुण शिक्षा से विकसित होता
  2. उसके तर्क तथ्यपूर्ण थे।
  3. देशी दवाओं की प्रदर्शनी शहर के प्रसिद्ध पालिका उद्यान में लगाई गई है।
  4. कुछ स्वार्थी लोग शहर के शान्त वातावरण को बिगाड़
  5. ईर्ष्या से मनुष्य की विचार-शक्ति दूषित हो जाती है।
  6. विपत्ति में धैर्य से कार्य लेना चाहिए।

Class 7 Hindi Chapter 15 MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित तालिका के ‘क’ खण्ड में मुहावरे और ‘ख’ खण्ड में अर्थ दिए हैं। ‘ग’ खण्ड में मुहावरों के सामने सही अर्थ लिखिए।
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 छोटा जादूगर 1
उत्तर
1.→ (य), 2. → (द), 3. + (अ), 4.→ (स), 5.+ (ब)।

Hindi Class 7 Chapter 15 Question Answer प्रश्न 3.
संवादपूर्ण उतार चढ़ाव (अनुतान) वाले पाँच वाक्य लिखिए और उन्हें बोलकर प्रभाव पैदा करने का प्रयास करिए, अर्थ पर भी ध्यान दीजिए।
उत्तर
“माता जी विदेश गई हैं।” “क्यों?
“अपनी पढ़ाई के लिए” सगर्व बोला
“और तुम्हारी छोटी बहन” ?
“वह यहाँ पढ़ती है।”
“और तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”

Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 15 प्रश्न 4.
पाठ में से विशेषण विशेष्य छाँटकर तालिका बनाइए
उत्तर
पक्का निशानेबाज, लाल कमलिनी, छोटी झील, छोटा जादूगर, समग्र संसार।
उपर्युक्त में रेखांकित शब्द विशेषण हैं और शेष विशेष्य।

MP Board Solutions

भाषा भारती कक्षा 5 Solutions Chapter 15 प्रश्न 5.
नीचे लिखे शब्दों में अनुस्वार के स्थान पर पंचम वर्ण का प्रयोग कीजिए
क-वर्ग-कंगन, अंक, शंख, गंगा।
च-वर्ग-पंच, गुंजन, खंजन, रंजन।
ट-वर्ग-पंडा, पंडित, घंटा, ठंडा।
त-वर्ग-पंत, चंदन, धंधा, कंधा।
प-वर्ग-पंप, कंप, मंदिर, दंभ।
उत्तर
क-वर्ग-कङ्गन, अङ्क, शङ्ख, गंगा।
च-वर्ग-पञ्च, गुञ्जन, खञ्जन, रजन।
ट-वर्ग-पण्डा, पण्डित, घण्टा, ठण्डा।
त-वर्ग-पन्त, चन्दन, धन्धा, कन्धा।
प-वर्ग-पम्प, कम्प, मन्दिर, दम्भ।

छोटा जादूगर परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

1. कार्निवाल के मैदान में बिजली जगमगा रही थी। मैं खड़ा था फव्वारे के पास, जहाँ एक लड़का चुपचाप शरबत पीने वालों को देख रहा था। उसके गले में फटे करते के ऊपर से एक मोटी-सी सूत की रस्सी पड़ी थी और जेब में कुछ ताश के पत्ते थे। उसके मुख पर गम्भीर विषाद के साथ धैर्य की रेखाएँ थीं। मैं उसकी ओर न जाने क्यों आकर्षित हुआ।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश ‘खेटा जादूगर’ नामक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक जयशंकर प्रसाद हैं।

प्रसंग-छोटा जादूगर का वर्णन कहानीकार ने वास्तविक – रूप में प्रस्तुत किया है।

व्याख्या-लेखक कहता है कि कलकत्ता के कार्निवाल नामक मैदान में बिजली का उजाला चारों ओर फैला हुआ था। चारों ओर बिजली की चकाचौंध थी। लेखक भी स्वयं वहाँ फब्बारे के पास खड़ा हुआ था। यहीं पर पास में ही एक चौदह-पन्द्रह वर्षका लड़का भा खड़ा था जो चुपचाप उन लागा को देख रहा था जो शरबत पी रहे थे। वह लड़का एक कुरता पहने हुए था। यह कुरता फटा हुआ था। उसने अपनी गरदन में कुरते के ऊपर सूत की एक मोटी रस्सी डाली हुई थी। उसकी जेब में कुछ ताश के पत्ते थे। उसके चेहरे से पता चलता था कि वह बहुत अधिक दु:खी है, परन्तु वह धैर्यवान था। लेखक स्वयं । नहीं जान पा रहा है कि वह उस लड़के की और क्यों आकर्षित हो गया है।

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2. कलकत्ता के सुरम्य बॉटेनिकल उद्यान में लाल कमलिनी से भरी हुई एक छोटी झील के किनारे घने वृक्षों की छाया में अपनी मण्डली के साथ बैठा हुआ मैं जलपान कर रहा था। इतने में वही छोटा जादूगर दिखाई पड़ा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-सुन्दर बॉटनिकल उद्यान में छोटे जादूगर से लेखक । की मुलाकात का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-कलकत्ता में बॉटनिकल उद्यान है। वह अति – रमणीक है, सुन्दर है। उस उद्यान में (बगीचे में) एक छोटी-सी झील है। वह पानी से भरी हुई है। उसमें कमलिनी की लताएँ हैं। वह लाल कमलिनी है। इसी झील के किनारे अनेक घने छायादार पेड़-पौधे खड़े हैं। उन पेड़ों की छाया में लेखक भी अपने मित्रों के साथ बैठा हुआ था। वे सभी जलपान (नाश्ता) कर रहे थे। तभी वहाँ वही लड़का जो चौदह-पन्द्रह वर्ष का था, दिखाई दिया। लेखक उसे छोटा जादूगर के नाम से पुकारता है।

छोटा जादूगर शब्दकोश

विषाद = कष्ट, पीड़ा; तमाशा = खेल (मनोरंजन के लिए), दृश्य; जलपान = नाश्ता, कलेवा; अविचल = अचल, स्थिर; धैर्य-आश्चर्यचकित, संज्ञाहीन; तिरस्कार = अपमान; उद्यान = बगीचा, उपवन; स्तब्ध = संज्ञाहीन, आश्चर्यचकित; प्रगल्भता = चतुराई से साहसपूर्वक बोलना; पथ्य = रोगी को दिए जाने वाला भोजन; वाचालता = अधिक बोलना; उज्ज्वल = चमकीला, कान्तिवान; गर्व = घमण्ड, गौरव की भावना, । अभिमान; बॉटेनिकल = वनस्पति से सम्बन्धित; जीविका = रोजी-रोटी, जीवन-यापन करने का साधन; समग्र – सम्पूर्ण, पूरा।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 14 मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 14 Mat Thehro Tumko Chalna hi Chalna Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 14 Mat Thehro Tumko Chalna hi Chalna Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 14 MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) कवि का ठहरने से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर
ठहरने से कवि का तात्पर्य है, गतिहीन हो जाना, किसी भी प्रकार की उन्नति से रहित। दूसरा अर्थ जीवन का रुक जाना भी होता है।

(ख) हमें अपने साथ किन्हें लेकर चलना है?
उत्तर
हमें अपने साथ जमाने को लेकर चलना है। साथ ही, पिछड़े हुए लोगों को भी आगे बढ़ाना है।

(ग) जीवन की बाधाओं को कैसे दूर किया जा सकता
उत्तर
पक्के निश्चय से (पक्के इरादों से) जीवन की बाधाओं को दूर किया जा सकता है।

(घ) कवि के अनुसार मनुष्य को कब पछताना पड़ता है?
उत्तर
काम करने के उचित अवसर के हाथ से निकाल दिये जाने पर मनुष्य को पछताना पड़ता है।

(ङ) कवि निरन्तर चलते रहने को महत्त्व क्यों दे रहा
उत्तर
कवि निरन्तर चलते रहने को महत्त्व इसलिए दे रहा है, क्योंकि ठहरना पतन का और मृत्यु का प्रतीक है। जीवन में ठहराव अवनति लाने वाला होता है।

(च) समय व्यर्थ क्यों नहीं गवाना चाहिए?
उत्तर
हमें अपना समय व्यर्थ नहीं गँवाना चाहिए। अपनी जिम्मेदारी का निभाना ही ईश्वर की पूजा है। अतः प्रत्येक क्षण का सही उपयोग करते हुए काम को पूरा करें, नहीं तो काम करने के उचित अवसर के बीत जाने पर हमें पछताना पड़ेगा।

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Class 7 Hindi Chapter 14 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नांकित पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए

(क) तुमको प्रतीक बनना है, विश्व प्रगति का।
तुमको जनहित के साँचे में ढलना है।
उत्तर
हे मनुष्य, तुम्हें संसार की प्रगति के प्रतीक (पहचान) बनकर प्रत्येक मनुष्य की भलाई के लिए एक साँचा . (आदर्श) बन जाना चाहिए।

(ख) जितने भी रोड़े मिलें, उन्हें ठुकराओ।
पच के कांटों को पैरों से दलना है।
उत्तर
हे मनुष्य, तुम्हारे मार्ग में कितनी ही बाधाएँ और रुकावटें भले ही आ जाएँ, परन्तु उन्हें अपने पैर की ठोकर से हटा दो। मार्ग में कितने भी काँटे हो सकते हैं, परन्तु हिम्मत के साथ उनके ऊपर से चलते हुए, उन्हें कुचलते हुए आगे ही आगे बढ़ते जाना चाहिए। मार्ग की बाधाओं और रुकावटों को हिम्मत से दूर करते हुए, अपने निश्चित मार्ग पर आगे ही आगे गतिमान बने रहना हमारा कर्तव्य है।

Class 7 Hindi Chapter 14 प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) सुख की खोज बड़ी ………….. है।
(ख) जनहित के साँचे में ……….. है।
(ग) काँटों को पैरों से ……….. है।
(घ) अवसर खोकर हाथ ………… है।
(ङ) प्रण से तुम्हें नहीं ………. है।
उत्तर
(क) छलना
(ख) ढलना
(ग) दलना
(घ) मलना
(ङ) टलना

भाषा अध्ययन

Hindi Class 7 Chapter 14 प्रश्न 1.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखिए। साथ ही कविता में उन पंक्तियों को छाँटकर लिखिए, जिनमें इन मुहावरों का प्रयोग हुआ है
(क) साँचे में ढलना
(ख) हाथ मलना
(ग) व्रत लेना
(घ) जुट जाना
(ङ) अवसर खोना।
उत्तर
(1) अर्थ-(क) अनुसार बन जाना
(ख) पछताना
(ग) प्रतिज्ञा कर लेना
(घ) लग जाना
(ङ) समय को निकाल देना।

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(2) पंक्तियाँ जिनमें मुहावरों का प्रयोग हुआ है
(क) तुमको जनहित के साँचे में ढलना है।
(ख) अवसर खोकर तो सदा हाथ मलना है।
(ग) जब चलने का व्रत लिया, ठहरना कैसा?
(घ) जो कुछ करना है, उठो ! करो, जुट जाओ।
(ङ) अवसर खोकर तो सदा हाथ मलना है।

Class 7 Chapter 14 Hindi प्रश्न 2.
इस कविता के तुकान्त शब्द छाँटकर लिखिए।
उत्तर
(क) चलना, टलना, छलना, ढलना, दलना मलना।
(ख) पतन, जीवन।
(ग) चलाओ, बढ़ाओ, ठुकराओ, जुट जाओ, गँवाओ।
(घ) आती, जाती।

Chapter 14 Class 7 Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों के । विलोम शब्द भरिए
(क) जीवन में उत्थान और ………… आते ही रहते हैं।
(ख) कहीं भी अधिक ठहरना अच्छा नहीं, हमेशा प्रगति के – पथ पर ……..अच्छा है।
(ग) पशु-पक्षी भी अपना हित ……….. जानते हैं।
(घ) असफलता के बाद ……….का मिलना एक प्रक्रिया
(ङ) सुख सभी चाहते हैं ………कोई नहीं।
उत्तर
(क) पतन
(ख) चलना
(ग) अनहित
(घ) सफलता
(ङ) दुःख।

Class 7th Hindi Chapter 14 प्रश्न 4.
दिये गये प्रयोगों की तरह नीचे दिए गए वाक्यों 1 में ‘मत’ का प्रयोग कीजिए।
(क) रुको मत, आगे बढ़ो।
(ख) पढ़ो मत, बात करो।
(ग) हँसो मत, भोजन करो।
(घ) भागो मत, धीरे चलो।
उत्तर
(क) मत रुको, आगे बढ़ो।
(ख) पढ़ो, मत बात करो।
(ग) मत हँसो, भोजन करो।
(घ) मत भागो, धीरे चलो।

मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है।
चलने के प्रण से, तुम्हें नहीं टलना है।
केवल गति ही जीवन, विश्रान्ति पतन है।
तुम ठहरे, तो समझो ठहरा जीवन है।
जब चलने का व्रत लिया, ठहरना कैसा?
अपने हित सुख की खोज बड़ी छलना है।
मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है।

शब्दार्थ-प्रण = प्रतिज्ञा; टलना = हटना; गति = चलना; विश्रान्ति = थकान, या रुकावट; पतन = गिरावट, अधोगति; ठहरे = स्थिर होना, रुकना; व्रत = प्रण, प्रतिज्ञा; हित = भलाई के लिए, कल्याण के लिए;
छलना = धोखा; ठहरो-रुको।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक की कविता ‘मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है’ से लिया गया है। इस कविता के रचयिता श्रीकृष्ण ‘सरल’ हैं।

प्रसंग-जीवन गतिमान होता है। ठहराव आने पर अवनति हो जाती है।

व्याख्या-हे मनुष्य ! तुम्हें ठहरना नहीं है। तुम्हें तो लगातार चलते रहना है। तुमने चलने का जो प्रण (व्रत, प्रतिज्ञा) किया है, उसी पर तुम्हें मजबूती से बने रहना है। उससे बिल्कुल भी हटना नहीं है। जीवन में गति हुआ करती है। थकान या रुकावट आने पर आदमी को समझ लेना चाहिए कि उसके जीवन में गिरावट आ गई। इसलिए तुम्हारे ठहराव से जीवन भी ठहर जाता है। शायद उसे फिर जीवन नहीं कहते हैं, परन्तु जब हमने चलते रहने का प्रण किया हुआ है, प्रतिज्ञा की हुई है तो ठहराव किस बात का, कैसा ? अपने कल्याण के लिए यदि हम सुख की खोज करते हैं, तो यही एक धोखा है। तुम्हें बिना ठहरे ही चलते रहना है।

2. तुम चलो, जमाना अपने साथ चलाओ,
जो पिछड़ गये हैं, आगे उन्हें बढ़ाओ।
तुमको प्रतीक बनना है, विश्व प्रगति का,
तुमको जनहित के साँचे में ढलना है।
मत व्हरो तुमको चलना ही चलना है।

शब्दार्थ-जमाना = युग; प्रतीक = चिह्न, पहचान; विश्व प्रगति-संसार की उन्नति जनहित सभी लोगों की भलाई के।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह। प्रसंग-कवि सन्देश दे रहा है कि हमें आगे बढ़ना चाहिए और दुनिया के अन्य लोगों को भी आगे बढ़ाना चाहिए।

व्याख्या-कवि कहता है कि तुम्हें लगातार चलते रहना है, साथ ही युग को भी अपने साथ चलाना है। इस उन्नति की दौड़ में जो पीछे रह गये हैं, उन्हें भी आगे बढ़ाने का हमारा कर्तव्य है। इस तरह संसार की उन्नति का, उसमें परिवर्तन लाने का आदर्श बनकर तुम्हें प्रतीक (पहचान) बनना है। इस संसार के लोगों की भलाई के लिए कार्य करने के साँचे में तुम्हें ढल जाना चाहिए। इसलिए तुम ठहरो मत, तुम्हें तो आगे ही आगे बढ़ते जाना है।

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3. बाधाएँ, असफलताएँ तो आती हैं।
दृढ़ निश्चय लख, वे स्वयं चली जाती हैं।
जितने भी रोड़े मिलें, उन्हें ठुकराओ,
पथ के काँटों को पैरों से दलना है।
मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है।

शब्दार्थ-बाधाएँ = रुकावटें; असफलताएँ = विफलताएँ; दृढ़ निश्चय- पक्का इरादा; लख – देखकर रोड़े-रुकावट, मार्ग की बाधाएँ ठुकराओ = ठोकर मारकर हटा दो; पथ – मार्ग; दलना = कुचलना है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि सन्देश देता है कि हमें असफलताओं, बाधाओं से नहीं घबराना चाहिए।

व्याख्या-मनुष्य के जीवन में आने वाली बाधाएँ (रुकावटें) और विफलताएँ मनुष्य के पक्के इरादों को देखकर अपने आप ही चली जाती हैं। वे उसके मार्ग में रुकावट बनने से हट जाती हैं। इसलिए मार्ग के रोड़ों को अपने पैर की ठोकर से एक तरफ हटा दो। अपने मार्ग के काँटों को अपने पैरों से कुचल डालो और अपने मार्ग पर चलते रहो, तुम्हें रुकना नहीं है।

4. जो कुछ करना है, उठो ! करो, जुट जाओ,
जीवन का कोई क्षण, मत व्यर्थ गवाओ।
कर लिया काम, भज लिया राम यह सच है,
अवसर खोकर तो सदा हाथ मलना है।
मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है।

शब्दार्थ-जुट जाओ – (काम में) लग जाओ; व्यर्थ = बेकार, निष्फल; गँवाओ= नष्ट करो, बिताओ; अवसर खोकर – मौका नष्ट करके; सदा = हमेशा; हाथ मलना है पश्चाताप करना है, पछताना है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि कहता है कि समय व्यर्थ बिताकर मनुष्य को जीवनभर पश्चाताप करना पड़ता है।

व्याख्या-हे मनुष्यो ! तुम्हें जो भी कार्य करना है, उसे पूरा करने के लिए तुम्हें उठना चाहिए। कार्य पूरा करो। कार्य में तल्लीन होकर लग जाओ। अपने जीवन के समय का एक भी क्षण व्यर्थ (बेकार के कामों में) नहीं बिताना चाहिए। यदि तुमने अपने कर्तव्य का पालन किया हुआ है, तो समझो तुमने राम का भजन कर लिया। अर्थात् अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना ही ईश्वर की भक्ति है। काम को पूरा करने का समय गंवा दिया, तो फिर सदा ही पछताना पड़ेगा। इसलिए तुम्हें ठहरना नहीं, सदैव गतिमान बने रहो।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 9 गौरैया प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 9 Gauraiya Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 9 Gauraiya Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 9 MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) गौरैया की आँखों और परों की तुलना किससे की गई है ?
उत्तर
गौरैया की आँखों और परों की तुलना क्रमशः नीलम और सोने से की गई है।

(ख) गौरैया अपना घोंसला कैसे बनाती है ?
उत्तर
गौरैया अपना घोंसला तिनकों को चुन-चुनकर बनाती है।

(ग) गौरैया को हरियाली की रानी क्यों कहा गया है ?
उत्तर
गौरैया हरियाली की रानी है, क्योंकि वह हरे-भरे पौधों और हरी-भरी घास के तिनके एकत्र करती है और अपने लिए घोंसला बनाती है।

(घ) कवि अपनी बहन किसे बनाना चाहता है ?
उत्तर
कवि गौरैया को अपनी बहन बनाना चाहता है, क्योंकि वह उसके मिट्टी के रंग के आँगन में फुर्र-फुर्र उड़ती है,फुदकती है। उसका प्रत्येक अंग बिजली की भाँति चमकीला लगता है।

MP Board Class 7th Hindi Chapter 9 प्रश्न 2.
गौरैया कैसे आँगन में फुदक रही है ? (सही विकल्प चुनिए)

(क) साफ आँगन में
(ख) बड़े आँगन में
(ग) मटमैले आँगन में
(घ) हरे-भरे आँगन में।
उत्तर
(ग) मटमैले आँगन में।

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Bhasha Bharti Class 7 Chapter 9 प्रश्न 3.
निम्नलिखित पंक्तियों का भावार्थ लिखिए

(क) मैंने अपना नीड़ बनाया, तिनके-तिनके चुन-चुन।
(ख) तू प्रति अंग-उमंग भरी-सी, पीती फिरती पानी।
(ग) सूक्ष्म वायवी लहरों पर, सन्तरण कर रही सर-सर।
उत्तर
(क) एक-एक तिनका चुन-चुनकर (बड़ी मेहनत करके) मैंने अपना घोंसला बनाया है।
(ख) हे गौरैया ! तेरा प्रत्येक अंग उत्साह से भरा हुआ | लगता है और फिर भी त पानी पीती फिरती है।
(ग) हवा के द्वारा ऊपर की ओर उठी हुई छोटी-छोटी लहरों | पर सरसराती गौरैया गतिशील है।

भाषा अध्ययन

MP Board Class 7 Hindi Chapter 9 प्रश्न 1.
इस कविता में आये ध्वन्यात्मक एवं पुनरुक्ति वाले शब्दों की सूची बनाइए।
उत्तर
चुन-चुन, तिनके-तिनके, अंग-अंग, फर-फर, चिऊँ-चिऊँ, फुला-फुला, सर-सर, मर-मर, हिला-हिला।

Class 7 Hindi Chapter 9 Gauraiya प्रश्न 2.
इस कविता में प्रयुक्त निम्नांकित विशेषण किस शब्द की विशेषता बता रहे हैं
मधुर, मटमैला, सुन्दर, वायवी, निर्दय।
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 9 गौरैया 1

Class 7th Hindi Chapter 9 Gauraiya प्रश्न 3.
निम्नलिखित तालिका से समानता दर्शाने वाले शब्दों को कम से लिखिए
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 9 गौरैया 2

  1. नीलम-सी नीली आँखें।
  2. सोने-सा सुनहरा रंग।
  3. सोने-से सुन्दर पर।
  4. चन्द्रमा-सा सुन्दर मुख।
  5. कमलकली-सी सुन्दर आँखें।
  6. चाँदी-से सफेद बाल।

Class 7th Hindi Chapter 9 MP Board प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
बिजली, आँख, वायु, सोना।
उत्तर
बिजली = विद्युत, तड़ित।
आँख = नयन, नेत्र।
वायु = हवा, समीर।
सोना = स्वर्ण, कनक।

Class 7 Hindi Bhasha Bharti Chapter 9 प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
मधुर, सुन्दर, चंचल, सूक्ष्म।
उत्तर
मधुर = कदु
सुन्दर = कुरूप
चंचल = स्थिर
सूक्ष्म = विशाल।

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गौरैया सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।
कच्ची मिट्टी की दीवारें,
घासपात का छाजन।
मैंने अपना नीड़ बनाया,
तिनके-तिनके चुन-चुन।
यहाँ कहाँ से तू आ बैठी,
हरियाली की रानी।
जी करता है तुझे घूम लूँ,
ले लूँ मधुर बलैया।
मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।

शब्दार्थ-मटमैले = मिट्टी के रंग के गौरैया = एक छोटी चिड़िया जो प्रायः घरों के आस-पास रहती है; घासपात = घास और पत्तों का; छाजन = छप्पर;
नीड़ = घोंसला।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्य पंक्तियाँ ‘गौरैया’ शीर्षक कविता से अवतरित हैं। इसके रचियता डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ हैं।

प्रसंग-कवि ने ‘गौरैया’ नामक छोटी-सी चिड़िया की मधुर क्रीड़ाओं का वर्णन किया है।

व्याख्या-मिट्टी के बने हुए मेरे आँगन में गौरैया फुदक रही है। कच्ची मिट्टी की दीवारों पर घास और पत्तों का छप्पर पड़ा हुआ है। उसमें मैंने अपना घोंसला एक-एक तिनका एकत्र कर-करके बनाया है। तू, हे हरियाली की रानी, यहाँ कहाँ से आकर बैठ गयी है। कवि कहता है कि मेरे मन में आता है कि मैं तुझे प्यार से चूम लूँ तथा तेरे ऊपर मधुर-मधुर बलैया ले लूँ। हे गौरैया, तू मेरे मटमैले आँगन में फुदक रही है।

2. नीलम की-सी नीली आँखें,
सोने से सुन्दर पर।
अंग-अंग में बिजली-सी भर,
फुदक रही तू फर-फर।
फूली नहीं समाती तू तो,
मुझे देख हैरानी।
आ जा तुझको बहन बना लूँ,
और बनूं मैं भैया।
मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।

शब्दार्थ- पर – पंख फूली नहीं समाती = बहुत अधिक प्रसन्न हैरानी = अचम्भाः

सन्दर्भ – पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि गौरैया की सुन्दरता और उसकी चंचलता का वर्णन करता है।

व्याख्या-कवि कहता है कि इस गौरैया की आँखें नीलम मणि के समान नीली हैं। इसके पंख स्वर्ण के जैसे हैं। अपने अंग-अंग में यह बिजली के समान चपलता लिए हुए-फुर-फुरी करती हुई इधर से उधर फुदक रही है। इसकी चंचलता को देखकर मुझे अचम्भा हो रहा है, कि यह खुशी के मारे फूली नहीं समा रही है। हे गौरैया ! तू मेरे पास आ जा, मैं तुझे अपनी बहन बना लेना चाहता हूँ, साथ ही मैं तेरा भैया (भाई) बन जाने की कामना करता हूँ। यह गौरैया, मटमैले रंग के मेरे आँगन में इधर से उधर लगातार फुदक रही है।

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3. मटके की गरदन पर बैठी,
कभी अरगनी पर चल।
चहक रही तू चिऊँ-चिऊँ,
चिऊँ-चिऊं, फुला-फुला पर चंचल।
कहीं एक क्षण तो थिर होकर,
तू जा बैठ सलोनी।
कैसे तुझे पाल पाई होगी,
री तेरी मैया।
मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।

शब्दार्थ-मटका = घड़ा; अरगनी = कपड़े आदि टाँगने के लिए रस्सी या लकड़ी; खूटी; पर = पंख; थिर = स्थिर होकर; सलोनी = सुन्दर, अच्छी;  पाल पाई होगी = पालन-पोषण किया होगा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि फुर्तीली गौरैया नामक चिड़िया की क्रियाओं का वर्णन करता है।

व्याख्या-कवि कहता है कि गौरैया कभी तो घड़े की गरदन पर उछलकर आकर बैठ जाती है तो दूसरे ही क्षण वह अरगनी (कपड़े आदि टाँगने की रस्सी) पर चली जाती है। वह चिऊँ-चिऊँ करती हुई लगातार चहकती फिरती है। वह चंचल बनकर अपने पंखों को फुलाकर इधर-उधर फुदकती फिरती है। हे सुन्दर सी गौरैया ! तू एक क्षण भरके लिए तो किसी एक स्थान पर स्थिर होकर बैठ जा। तेरी इस चंचलता को देखकर तो मुझे लगता है कि तेरी माँ ने तेरा पालन-पोषण किस तरह किया होगा। हे गौरैया ! तू मेरे मिट्टी के रंग वाले आँगन में फुदक रही है।

4. सूक्ष्म वायवी लहरों पर,
सन्तरण कर रही सर-सर।
हिला-हिला सिर मुझे बुलाते,
पत्ते कर-कर मर-मर।
तू प्रति अंग-उमंग भरी सी,
पीती फिरती पानी।
निर्दय हलकोरों से डगमग,
बहती मेरी नैया।
मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।

शब्दार्थ-सूक्ष्म = छोटी-छोटी-सी; वायवी = हवा की; पर = ऊपर; सन्तरण = गति, गतिशीलता, नैरना; मर-मर = मर-मर की आवाज करते हुए; प्रति = प्रत्येक उमंग= उत्साह; हलकोरों = हिलोरें;
डगमग = डगमगाती हुई; नैया = नौका; निर्दय = कठोर हृदय।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-गौरैया के फुर्तीले क्रियाकलापों का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-कवि कहता है कि हवा के द्वारा ऊपर को उठी हुई छोटी-छोटी लहरों पर सरसराती गौरैया गतिशील बनी हुई है। (हवा से) हिलते हुए उसके सिरों से मर-मर की ध्वनि करते पत्ते कवि को बुला रहे हैं। गौरैया के शरीर का प्रत्येक अंग, उमंग से (उत्साह) से भरा हुआ है और वह उठी हुई छोटी-छोटी लहरों के पानी को पीती फिरती है। कवि कहता है कि मेरे जीवन की नौका कठोर हृदय (संकटों-दुःखों) रूपी हिलोरों से इधर-उधर डगमगाती फिरती है। (इस तरह के मुझ जैसे व्यक्ति के) मटमैले (मिट्टी के रंग वाले) आँगन में गौरैया फुदकती फिरती है।

गौरैया शब्दकोश

गौरैया – ‘गौरैया’=एक चिड़िया जो घरों, छप्परों में अपने घोंसले बनाकर रहती है; नीड़ = घोंसला; सलोनी = सुन्दर, अच्छी; । फुदकती है। उसका प्रत्येक अंग बिजली की भाँति चमकीला लगता है।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 11 वात्सल्य के पद प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 11 Vatsalya ke pad Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 11 Vatsalya ke pad Questions and Answers

बोध प्रश्न

MP Board Class 7th Hindi Chapter 11 प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) कृष्ण, माँ यशोदा से किसकी शिकायत कर रहे हैं?
उत्तर
कृष्ण, माँ यशोदा से बलदाऊ या बलराम की शिकायत कर रहे हैं।

(ख) बलराम कृष्ण को क्या कहकर चिढ़ाते हैं?
उत्तर
बलराम कृष्ण को मोल देकर खरीदा हुआ बताते हैं। ‘यशोदा ने उसे जन्म नहीं दिया है। उसके (कृष्ण के) माता-पिता कौन हैं ? नन्द और यशोदा दोनों ही गोरे रंग के हैं, उसका शरीर साँवला क्यों है?’ इस तरह की अनेक बातें कहकर बलराम कृष्ण को चिढ़ाते रहते हैं।

(ग) यशोदा कृष्ण पर क्यों रीझ रही हैं ?
उत्तर
यशोदा ने बालक कृष्ण के मुख से क्रोध भरी बातें सुर्नी, तो यशोदा कृष्ण पर रीझने लग गई।

(घ) यशोदा ने गोधन की कसम खाकर क्या कहा ?
उत्तर
यशोदा ने गोधन की कसम खाकर कहा कि वह उसकी (कृष्ण की) माता है और वह (कृष्ण) उसका पुत्र है।

(ङ) कृष्ण को किन चीजों के प्रति अरुचि है?
उत्तर
कृष्ण को पकवान और मेवाओं के प्रति अरुचि है।

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(च) ब्रज-युवती के मन में क्या इच्छा है ?
उत्तर
ब्रज-युवती के मन में इच्छा है कि वह (बालक कृष्ण) उस युवती के घर में चोरी-चारी मक्खन खाने जायें और जब कृष्ण मक्खन की मटकी से मक्खन खाते हुए बैठे हों, तो वह (ब्रज युवती) उन्हें छिपकर देखे। यही उस ब्रज-युवती की कामना है।

(छ) गोपी प्रातः कहाँ गई थी?
उत्तर
गोपी प्रातः नन्द बाबा के भवन (घर) गई थी।

(ज) यशोदा कृष्ण का किस तरह शृंगार कर रही है ?
उत्तर
यशोदा ने कृष्ण के शरीर पर तेल लगा दिया है, आँखों में काजल लगाकर भौहें बना दी हैं। उनके माथे पर काला टीका लगा दिया है।

Class 7 Hindi Chapter 11 MP Board प्रश्न 2.
दिये गये चार उत्तरों में से सही उत्तर छाँटकर लिखो

(क) कृष्ण को कौन चिढ़ा रहा है?
(1) सुदामा
(2) नन्द बाबा
(3) ग्वाल बाल
(4) बलराम।
उत्तर
(4) बलराम।

(ख) कृष्ण को क्या अच्छा लगता है ?
(1) दूध
(2) दही
(3) मक्खन
(4) छाछ (मट्ठा)
उत्तर
(3) मक्खन

(ग) यशोदा किसका श्रृंगार कर रही है ?
(1) बलदाऊ
(2) कृष्ण
(3) उद्धव
(4) मनसुखा
उत्तर
(2) कृष्ण।

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Class 7 Hindi Chapter 11 Vatsalya Ke Pad प्रश्न 3.
रिक्त स्थान भरिए”

(क) कहा कहो एहि रिसके मारे ………… हौं नहिं जात।
(ख) तारी दै-दै हँसत ग्वाल सब सिखै देत ………..
(ग) सूर ………. मोहि गोधन की सौं हौं माता तू पूत।
(घ) सूरदास प्रभु अन्तरजामी……… मन की जानी।
(ङ) तेल लगाई, लगाई के अंजन ……… बनाई, बनाई डिठौनहि।
उत्तर
(क) खेलन
(ख) बलवीर
(ग) श्याम
(घ) ग्वालिनि
(ङ) भौंह

Class 7th Hindi Chapter 11 Vatsalya Ke Pad प्रश्न 4.
इन पंक्तियों का अर्थ के साथ मिलान कीजिए
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 11 वात्सल्य के पद 1
उत्तर
1. →(घ), 2.→(ङ), 3.→(क), 4.→(ख), 5.→(ग)

भाषा अध्ययन

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 11 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों में स्थानीय बोली (ब्रज) और मानक भाषा के शब्द दिए गये हैं। उनके सही जोड़े मिलाइए
तारी, माखन, मक्खन, ठाढ़ी, भवन, भौन, जुग, करोड़, ताली, युग, करोर, युवती, खड़ी, जुवती, पूत, पुत्र।
उत्तर

  1. तारी-ताली
  2. माखन-मक्खन
  3. ठाढ़ीखड़ी
  4. भौन-भवन
  5. जुग-युग
  6. जुवती-युवती
  7. पूत-पुत्र
  8. करोर-करोड़।

Class 7th Hindi Chapter 11 MP Board प्रश्न 2.
इस पाठ में से अनुप्रास अलंकार के कुछ उदाहरण छाँटकर लिखिए।
उत्तर
कहा कहाँ, कहत कौन, मोही को मारन, मोहन मुख, जसुमति सुन सुन,
माता तू पूत, लगाई-लगाई, बनाई-बनाई, निहारत, बारत, चुचकारत।

Class 7 Hindi Bhasha Bharti Chapter 11 प्रश्न 3.
विभिन्न प्रकार के शब्द-युग्म लिखिए।
उत्तर

  1. पुनि-पुनि
  2. दै-दै
  3. सुन-सुन
  4. मन-मन

MP Board Solutions

MP Board Class 7 Hindi Chapter 11 प्रश्न 4.
(क) निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए
भैया, शरीर, मुख, पूत ,भौन, भोर।
उत्तर
भैया = भाई
शरीर = तन (देह)
मुख = मुँह
पूत = पुत्र
भौन – सवेरा

(ख) मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायो।
मौसों कहत मोल को लीन्हों,
तोहि जसुमति कब जायो।।

(1) यहाँ कौन किससे कह रहा है ?
उत्तर
यहाँ बालक कृष्ण अपनी माता यशोदा से कह रहा है।

(2) इसमें माता और पुत्र के बीच कौन-सा भाव प्रतीत या जागृत हो रहा है?
उत्तर
इसमें माता और पुत्र के बीच वात्सल्य भाव प्रतीत या जागृत हो रहा है।

MP Board Class 5 Hindi Bhasha Bharti Solution Chapter 11 प्रश्न 5.
इस पाठ के अतिरिक्त आपकी पाठ्य पुस्तक में से वात्सल्य रस का एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर
मइया हौं न चरैहाँ गाई।।
सिगरे ग्वाल घिरावत माँसों मेरे पाईं पिराई।।
जौ न पत्यहि, पूछि बलदाऊहि अपनी सौह दिवाइ।
यह सुनि-सुनि जसुमति ग्वालिनि को, गारी देत रिसाइ।।
मैं पठवति अपने लरिका कौं, आपै मन बहराइ।
‘सूर’ स्याम मेरो अति बालक, मारत ताहि रिंगाई।।

वात्सल्य के पद सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

सूरदास

1. मैया, मोहि दाऊ बहुत खिजायो।
मोसों कहत मोल को लीन्हों, तोहि जसुमति कब जायो।
का कहों एहि रिस के मारे, खेलन हौं नहिं जात।
पुनि-पुनि कहत कौन है माता, को है तुम्हरो तात।
गोरे नन्द, यशोदा गोरी, तुमकत श्याम शरीर।
तारी दै-दै हँसत ग्वाल सब, सिखै देत बलवीर।
तू मोही को मारन सीखी, दाउहि कबहुँन खीझे।
मोहन-मुख रिस की ये बातें जसुमति सुन-सुन रीझै॥
सुनहुँ श्याम बलीभद्र चबाई जनमत ही को धूत।
सूर-श्याम मोहि गोधन की सौँ हौँ माता तू पूत॥

शब्दार्थ-मोहि = मुझको; खिजायो = चिढ़ाता है; मोसों = मुझे या मुझको; मोल को लीन्हो मूल्य देकर लिया है; तोहि = तझको: जसमति = यशोदा ने जायो = जन्म देना; एहि = इस रिस के मारे = क्रोध या नाराजगी के कारण हौँ = मैं; नहिं जात = नहीं जाता हूँ; पुनि-पुनि = बार-बार; कहत = कहता है; को है = कौन है ?; तात = पिता; कत = क्यों; तारी दै-दै = ताली बजा-बजाकर; सिखै देत = सिखा देता है; बलवीर = बलदाऊ; मोही को = मुझको; खीझै = क्रोध करना; रिस = क्रोध; सुन-सुन-सुनते हुए; रीझै- प्रसन्न होती है; चबाई = चुगलखोर या इंधर-उधर की बातें जोड़-तोड़ कर बताने वाला; धूत = धूर्त; गोधन = गाय रूपी धन; सौं = शपथ लेकर (कहती हूँ); पूत = पुत्र।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘वात्सल्य के पद’ शीर्षक से अवतरित है। इसके रचयिता वात्सल्य सम्राट सूरदास हैं।

प्रसंग-कवि ने बालक कृष्ण द्वारा अपनी माता यशोदा से 1 बलदाऊ के विरुद्ध शिकायत करने के दंग का वात्सल्य प्रधान वर्णन किया है।

व्याख्या-है मेरी माँ ! मुझे बलदाऊ ने बहुत अधिक । चिढ़ाया है। वह मुझसे कहता है कि तूने कुछ मूल्य देकर मुझे खरीदा है। तुझे (मुझको) यशोदा माँ ने जन्म कब दिया है। इसी के कारण मुझे क्रोध आ गया है। अत: मैं क्या कहूँ? मैं खेलने के लिए नहीं जाता। वह (बलदाऊ) मझ से बार-बार पूछता है कि तुम्हारी माता कौन है तुम्हारा पिता कौन है ? देखो तो; बाबा नन्द और माता यशोदा दोनों ही गोरे रंग के हैं तो फिर तुम साँवले । क्यों हो? इस प्रकार सभी ग्वाले तालियाँ बजा-बजाकर मेरी हँसी उड़ाते हैं।

इस तरह बलदाऊ उन सबको सिखा देते हैं। तू मुझे ही मारना सीखी है, बलदाऊ पर कभी भी क्रोध नहीं करती। इस तरह, बालक कृष्ण के मुख से क्रोध की बातें सुन-सुनकर माता यशोदा बहुत अधिक प्रसन्न होती हैं और कहने लगी कि हे श्याम। यह बलदाऊ तो अपने जन्म से चुगलखोर है, धूर्त है। सूरदास वर्णन करते हैं कि माता यशोदा कहने लगी कि हे श्याम ! मैं अपने गाय-धन (सभी गौओं) की शपथ लेकर कहती हूँ कि मैं तेरी माँ हूँ और तू मेरा पुत्र है।

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2. मैया री, मोहि माखन भावै।
जो मेवा पकवान कहति तू, मोहि नहीं रुचि आवै॥
ब्रज जुवती इक पाॐ ठाढ़ी, सुनत श्याम की बात।
मन-मन कहति कबहुँ अपनै घर देखों माखन खात॥
बैठे जाई मथनियाँ के ढिंग मैं तब रहों छपानी।
सूरदास प्रभु अन्तरजामी ग्वालिनि मन की जानी॥

शब्दार्थ-मोहि = मुझको; माखन = मक्खन; भावै = अच्छा लगता है; कहति तू = तू जो कहती है;
रुचि आवै = अच्छे लगते हैं; जुवती-युवती; इक-एक; पाएँ- पीछे; ठाढ़ी = खड़े होकर सुनत = सुनती है; मन-मन कहति = अपने मन में सोचती है अथवा कामना करती है; कबहुँ = कभी तो; देखों = देखें माखन खात = मक्खन खाते हुए; जाई = जाकर के; मथनियाँ = मटकी; ढिंग = पास; तब = उस समय; रही छपानी -छिपकर रहूँ: अन्तरयामी- हृदय की बात को जानने वाले; ग्वालिनि मन = गोपी के मन की जानी = (बात-कामना) को जान लिया।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-बालक कृष्ण माता यशोदा को स्पष्ट रूप से यह बता देते हैं कि उन्हें (बालक कृष्ण को) तो मक्खन ही अच्छा लगता है।

व्याख्या-हे माता, मुझे तो मक्खन खाना अच्छा लगता है। जिन मेवाओं और पकवान के विषय में, तुम मुझसे कहती हो, वे मुझे अच्छे नहीं लगते। ब्रज की एक युवती श्याम की इन सभी बातों को पीछे खड़ी होकर सुनती है। वह अपने मन में कामना करती है कि मैं श्याम को अपने घर में मक्खन खाते हुए (कभी तो) देखें। जैसे ही वे मक्खन की मटकी के पास जाकर बैठे, तब (तैसे ही) मैं (वहाँ) छिप जाऊँ। सूरदास कहते हैं कि प्रभु (बालकृष्ण) अन्तरयामी हैं, उन्होंने उस गोपी के मन की बात को जान लिया।

रसखान

3. आज गई हुती भोरहि हौं,
रसखानि रई कहि नन्द के भौनहि।
बाको जियो जुग लाख करोर,
जसोमति को सुख जात कहो नहिं।
तेल लगाई, लगाई के अंजन,
भौंह बनाई, बनाई डिठीनहि।
डालि हमेलानि हार निहारत,
बारत ज्यों पुचकारत छौनहिं॥

शब्दार्थ-गई हुती = गई हुई थी; हौं = मैं; रई कहि- रई माँगने के लिए (लकड़ी की बनी हुई रई (मथानी) से दही को बिलोया (मथा) जाता है); भौनहि- भवन को, घर को; बाकी = उसका; जियो – जीवित रहे; जुग लाख करोर – (युगों तक, लाख वर्ष तक, करोड़ वर्ष तक) अर्थात् दीर्घायु हो जात कहो नहिं = वर्णन नहीं किया जा सकता; अंजन = काजल; डिठौनहि = काला टीका (किसी की नजर लगने से बचाने के लिए मस्तिष्क के एक ओर काला टीका लगा दिया जाता है); हमेलानि – गले में धारण किये जाने वाला स्वर्ण अथवा चाँदी का आभूषण; निहारत = देखते हुए; बारत = न्योछावर करते हैं; ज्यों में जैसे ही; पुचकारत = पुचकारते हुए; छौनहिं = बालक को; भोरहि = प्रातः काल ही।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ रसखान द्वारा रचित ‘सवैया’ की

प्रसंग-इस सवैया छन्द में रसखान किसी गोपिका के वात्सल्य का वर्णन करते हैं।

व्याख्या-एक गोपिका अन्य गोपी से कहती है कि मैं आज प्रातः ही अपने घर के लिए बाबा नन्द के घर से ‘रई’ माँगने के लिए गई हुई थी। (तो मैंने यशोदा के बालक को देखा) वह दीर्घायु हो। उस यशोदा के सुख का वर्णन नहीं किया जा सकता अर्थात् उसका सुख अपार है। उसने अपने बालक को तेल लगाया हुआ था, उसकी आँखों में काजल लगाकर उसकी भौहें बना दी थी और उसके माथे पर काला टीका लगा दिया था (जिससे उस सुन्दर बालक को किसी की नजर न लग सके।) मैंने जैसे ही उस कोमलाङ्ग बालक (पुत्र) को पुचकारा तो उस पुचकार के लिए उसके ऊपर मैं अनेक हार और हमेलों को न्यौछावर कर सकती हूँ।

वात्सल्य के पद शब्दकोश

जायो = जन्म देना; दाऊ = बलदाऊ; जुवती – युवती; रई = मथानी-दही बिलोने के काम में आने वाला लकड़ी का औजार; अन्जन = काजल; रिस- क्रोध, गुस्सा; एहि = इसके; ढिंग = समीप, पास; कहि- कहकर; डिठौनहि = काला टीका जो मस्तक के एक ओर लगाया जाता है, किसी की नजर लगने के प्रभाव से बचने के लिए; पुनि-पुनि = बार-बार; हौँ = मैं; छपानी-छिपकर; भौनहि- घर को; हमेलानि गले में धारण किये जाने वाला स्वर्ण अथवा चाँदी का आभूषण; सौं- शपथ लेकर; भावै = अच्छा लगता है; हुती – हुई थी; वाकी = उसका; पुचकारत – पुचकारते हुए।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 17 और भी दूँ प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 17 Aur Bhi Dun Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 17 Aur Bhi Dun Questions and Answers

बोध प्रश्न

Samarpan Kavita Class 7 Question Answer प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) कवि मातृभूमि को क्या-क्या समर्पित करना चाहता है?
उत्तर
कवि मातृभूमि के लिए तन-मन-प्राण सब कुछ समर्पित करना चाहता है। वह अपने मस्तक, गीत तथा रक्त का एक-एक कण भी अपने देश की धरती के लिए अर्पित कर देना चाहता है। उसके मन में उठने वाली कल्पनाएँ तथा प्रश्न तथा सम्पूर्ण आयु (उम्र) भी मातृभूमि के लिए अर्पित करना चाहता है। सम्पूर्ण बाग-बगीचे, उनके फूल आदि मातृभूमि के लिए समर्पित हैं।

(ख) कवि अपने सर्वस्व समर्पण के बाद भी सन्तुष्ट क्यों नहीं है ?
उत्तर
कवि अपनी मातृभूमि की सेवा में सर्वस्व न्योछावर कर देना चाहता है। वह फिर भी सन्तुष्ट नहीं दिखता है। इसका कारण यह है कि वह इस सबके अतिरिक्त भी जो कुछ उसके पास है, उसे भी अर्पित कर देने की कामना करता है। कामनाएँ कभी भी शान्त नहीं हुआ करती।

(ग) कवि क्षमा-याचना क्यों कर रहा है?
उत्तर
कवि अपने गाँव, द्वार-घर-आँगन आदि सभी के प्रति अपने लगाव को छोड़कर मातृभूमि के लिए सर्वस्व प्रदान करना चाहता है। इसलिए वह इन सभी से क्षमा याचना करता है। इनकी अपेक्षा मातृभूमि के प्रति दायित्व महत्वपूर्ण है।

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(घ) कविता का मुख्य सन्देश क्या है ?
उत्तर
कविता का मुख्य सन्देश है कि हम सभी अपनी मातृभूमि के लिए सर्वस्व त्यागकर उसकी सेवा करें। मोहरहित होकर तन-मन-प्राण से मातृभूमि की रक्षा के लिए तैयार रहें।

Aur Bhi Du Hindi Poem Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित भाव कविता की जिन पंक्तियों से प्रकट होते हैं, उन पंक्तियों को लिखिए
(क) मोहमाया के बन्धन को तोड़ना।
(ख) सम्पूर्ण आयु को समर्पण करना।
(ग) बलिदान के लिए तत्परता।
उत्तर
(क) तोड़ता हूँ मोह का बन्धन।
(ख) आयु का क्षण-क्षण समर्पित।
(ग) मन समर्पित, तन समर्पित, और यह जीवन समर्पित। चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी हूँ।

Kavi Mathrubhumi Ke Liye Kya Karna Chahta Hai प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर दीजिए

(क) प्रस्तुत कविता का मुख्य भाव क्या है?
(1) मातृभूमि के प्रति आदर।
(2) मातृभूमि के लिए सर्वस्व समर्पण की चाह।
(3) मातृभूमि की महानता का गुणगान।
(4) मातृभूमि से क्षमा याचना।
उत्तर
(2) मातृभूमि के लिए सर्वस्व समर्पण की चाह।

(ख) कवि अपने जीवन, घर-परिवार और गाँव से क्षमा याचना करता है, क्योंकि वह
(1) इनके प्रति दायित्व निर्वाह नहीं करना चाहता।
(2) इनकी अपेक्षा देश के प्रति दायित्व निर्वाह को महत्वपूर्ण मानता है।
(3) इनके प्रति दायित्व निभाने में स्वयं को असमर्थ पाता है।
(4) इनसे छुटकारा पाना चाहता है।
उत्तर
(2) इनकी अपेक्षा देश के प्रति दायित्व निर्वाह को महत्त्वपूर्ण मानता है।

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भाषा अध्ययन

Kavi Matrabhoomi Ke Liye Kya Karna Chahta Hai प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध उच्चारण कीजिए
ऋण, स्वीकार, माँज, बाँध, शीश, आशीष, तृण।
उत्तर
उल्लिखित शब्दों को बार-बार पढ़िए और विशेष सावधानी से शुद्ध रूप में उच्चारण कीजिए। कठिनता के लिए अपने आचार्य महोदय की सहायता ले सकते हो।

Kabhi Matrabhoomi Ke Liye Kya Karna Chahte The प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण एवं लेखन कीजिए
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 17 और भी दूँ 1
उत्तर
छात्र/छात्राएँ स्वयं करें।

Class 7th Hindi Chapter 17 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए- .
समर्पित, आँगन, ध्वज, आशीष।
उत्तर

  1. मैं अपनी मातृभूमि के लिए सर्वस्व समर्पित करता हूँ।
  2. मेरे आँगन में फलदार पेड़ों के झुरमुट खड़े हैं।
  3. अपने हाथ में राष्ट्रीय ध्वज लिए हुए वीर सैनिक मातृभूमि की रक्षा के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
  4. माँ का आशीष सदैव फलदायक होता है।

Chahta Hun Kis Prakar Ki Kavita Hai प्रश्न 4.
इस कविता से अनुप्रास अलंकार वाली पंक्तियाँ छाँटकर लिखिए।
उत्तर

  1. मन समर्पित, तन समर्पित।
  2. गान अर्पित, प्राण अर्पित, रक्त का कण-कण समर्पित।
  3. शीश पर आशीष की छाया घनेरी।
  4. रक्त का कण-कण समर्पित।
  5. आयु का क्षण-क्षण समर्पित।
  6. नीड़ का तृण-तृण समर्पित।

और भी दूँ कविता का प्रश्न उत्तर प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) माँ तुम्हारा ……..
(ख) ……………. फिर भी निवेदन
(ग) थाल में लाऊँ ……….
(घ) कर दया ………वह समर्पण।
उत्तर
(क) ऋण बहुत है, मैं अकिंचन,
(ख) किन्तु इतना कर रहा
(ग) सजाकर भाल जब भी
(घ) स्वीकार लेना।

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 17 प्रश्न 6.
नीचे लिखे शब्दों के पर्यायवाची दी गई वर्ग पहेली से छाँटकर लिखिए
फूल, पृथ्वी, माथा, खून, गृह।
वर्ग पहेली
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 17 और भी दूँ 2
उत्तर
फूल-प्रसून, पुष्प, सुमन । पृथ्वी-वसुधा, धारिणी, धरा, धरती। माथा-मस्तक, भाल, कपाल। खून-रक्त, रुधिर, लहू। गृह-घर, आवास, वास।

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और भी दूँ सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. मन समर्पित, तन समर्पित,
और यह जीवन समर्पित।
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी हूँ।

शब्दार्थ-समर्पित = अर्पित किया हुआ, सौंपा हुआ; तन = शरीर; जीवन = प्राण या जिन्दगी।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ “और भी ढूँ”, नामक कविता से अवतरित हैं। इसके रचयिता ‘रामावतार त्यागी’ हैं।

प्रसंग-कवि अपने प्रिय देश के लिए अपना सर्वस्व त्याग देने को तैयार है।

व्याख्या-कवि कहता है कि हे मेरे देश की धरती! तेरी सेवा के लिए मैं स्वयं तन-मन तथा अपने प्राण (सम्पूर्ण जिन्दगी) अर्पित करता हूँ। इस सब के अलावा दूसरी वस्तुएँ भी यदि मेरे पास है, तो उन्हें भी तेरे लिए अर्पित करने (त्यागने) के लिए तैयार हूँ।

2. माँ तुम्हारा ऋण बहुत है, मैं अकिञ्चन,
किन्तु इतना कर रहा, फिर भी निवेदन।
थाल में लाऊँ सजाकर भाल जब भी,
कर दया स्वीकार लेना वह समर्पण।

गान अर्पित, प्राण अर्पित,
रक्त का कण-कण समर्पित।
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी हूँ।

शब्दार्थ-अकिञ्चन = दीन; भाल = मस्तक; समर्पण = अर्पित की हुई वस्तु; अर्पित = न्योछावर किया हुआ।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि के अनुसार देशभक्त सर्वस्व अर्पित करने के बाद जो भी दूसरी वस्तु यदि उसके पास है तो वह उसे भी देश की सेवा में अर्पित कर देने को तैयार है।

व्याख्या-हे मातृभूमि, मुझ पर तेरे ऋण (कर्ज) का बोझ बहुत है। मैं दीन हूँ (उस कर्ज के बोझ को मैं किस तरह उठा सकूँगा)। फिर भी मैं यह निवेदन कर रहा हूँ कि जब भी अपने इस मस्तक को थाल में सजाकर लेकर आऊँ, तो मेरे इस समर्पण को (सेवा में दी गई इस वस्तु को) स्वीकार करने की कृपा करना। भक्ति भरा मेरा गीत भी तुम्हें अर्पित है, मेरे प्राण भी अर्पित हैं। साथ ही मेरे रक्त की (खून की) एक-एक बूंद भी तुम्हारे लिए अर्पित है। इस प्रकार हे मेरे देश की धरती ! मैं इसके अलावा भी कुछ और अर्पित करना चाहता हूँ।

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3. माँज दो तलवार को, लाओ न देरी,
बाँध दो कसकर, कमर पर ढाल मेरी,
भाल पर मल दो, चरण की धूल थोड़ी,
शीश पर आशीष की छाया घनेरी,

स्वप्न अर्पित, प्रश्न अर्पित,
आयु का क्षण-क्षण समर्पित।
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी हूँ।

शब्दार्थ-भाल = मस्तक; मल दो = लगा दो; आशीष = आशीर्वाद; घनेरी- घनी; स्वप्न- कल्पनाएँ, विचार; आयु = उम्र ; चरण = पैर।

मन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि अपनी मातृभूमि के आशीर्वाद को प्राप्त करके अपनी उम्र के प्रत्येक क्षण को देश की सेवा में अर्पित करना चाहता है।

व्याख्या-हे मातृभूमि-मेरी माँ! बिना किसी देर किए हुए तुम मुझे तलवार (युद्ध के लिए) दे दो। उसको और ढाल को-दोनों ही कसकर कमर में बाँध दो। साथ ही, मेरे मस्तक पर अपने चरणों (पैरों) की थोड़ी-सी धूल लगा दो तथा मेरे सिर पर अपने आशीर्वाद की घनी छाया कर दो (आशीर्वाद दीजिए)। मेरी कल्पनाएँ तथा मेरे प्रश्न सभी तेरी सेवा में अर्पित हैं। यहाँ तक कि मेरी उम्र का प्रत्येक क्षण भी तुम्हारी सेवा में अर्पित है। इस तरह, हे मेरे देश की धरती, मैं तुझे कुछ अन्य भी अर्पित कर देना चाहता हूँ।

4. तोड़ता हूँ मोह का बन्धन, क्षमा दो,
गाँव मेरे, द्वार घर-आँगन क्षमा दो;
आज सीधे हाथ में तलवार दे दो।
और बाएँ हाथ में ध्वज को थमा दो।

ये सुमन लो, यह चमन लो,
नीड़ का तृण-तृण समर्पित,
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी हूँ।

शब्दार्थ-ध्वज पताका, झण्डा; थमा दो = पकड़ा दो सुमन = फूल; चमन = बगीचा; नीड़ = घोंसला; मोह = प्रेम।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग- कवि अपने देश की सेवा के लिए सम्पूर्ण बन्धनों को समाप्त करके सब कुछ देश की सेवा में अर्पित कर देना चाहता है।

व्याख्या-हे मेरे देश ! तेरे लिए मैं मोह के (प्रेम के) जितने भी बन्धन है, उन सबको तोड़ देना चाहता हूँ। उसके लिए हे मेरे गाँव, तू मुझे क्षमा करना। मेरे घर-आँगन तथा द्वार, तुम सभी मुझे क्षमा करना। आज (अब समय आ गया है तब) तुम सभी मेरे सीधे हाथ में तलवार पकड़ा दो। इस तरह, हे मेरे देश ! ये सभी फूल, तथा बगीचा तथा मेरे घोंसले का तिनका-तिनका भी तेरी सेवा में अर्पित करता हूँ। इस प्रकार, मेरे पास जो भी अन्य वस्तु (यदि मेरे पास है) तो वह भी मैं, हे मेरे देश की धरती ! तेरी सेवा में अर्पित करता हूँ।

और भी दूँ शब्दकोश

समर्पित = त्यागा हुआ, अर्पित किया हुआ निवेदन = प्रार्थना; माँज = धोकर साफ कर दो, युद्ध के लिए; मोह = प्रेम; ध्वज – पताका, झण्डा; ऋण = कर्ज; भाल = मस्तक, माथा;आशीष = आशीर्वाद; सुमन = फूल, पुष्प; नीड़ = घोसा; अकिंचन = दीन; शीश = सिर; घनेरी-घनी; चमन – बगीचा; तृण = तिनका।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 16 नरबदी प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 16 Narbadi Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 16 Narbadi Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 16 MP Board प्रश्न 1.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) नरबदी कौन थी ? वह किसके साथ रहती थी?
उत्तर
मैकल पर्वत के घने जंगलों के एक गाँव में दुग्गन रहता था। नरबदी उसकी बेटी थी। नरबदी अपने पिता के साथ रहती थी।

(ख) पिता के साथ नरबदी कहाँ रहती थी?
उत्तर
नरबदी अपने पिता के साथ जनजातियों के एक गाँव में रहती थी। यह गाँव आठ-दस झोपड़ियों का गाँव था।

(ग) दुग्गन सुबह-सुबह पहाड़ की दिशा में क्यों चल पड़ा?
उत्तर
बरसात आने वाली थी। दुग्गन को झोंपड़ी की मरम्मत के लिए बाँस की जरूरत थी। बाँस लेने के लिए दुग्गन सुबह-सुबह पहाड़ की दिशा में चल पड़ा।

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(घ) नरबदी झरना क्यों बन गई?
उत्तर
नरबदी अपनी प्यास के कष्ट को भूल गई। उसकी आँखों के सामने परेशान पिता का चेहरा आ गया। उसकी आँखों से आँसुओं की झड़ी लग गई। वह अपने देवता से मन ही मन प्रार्थना करने लगी कि वे उसके पिता की रक्षा करें, क्योंकि उनका प्यास से बुरा हाल है। तुम मेरे प्राण ले लो, लेकिन मेरे प्यारे बाबा को बचा लो। इसके साथ ही नरबदी वहाँ से अदृश्य हो गयी और झरने के रूप में वहाँ से प्रकट हो गई।

(ङ) लोक कथा के अनुसार नरबदी के कारण किस नदी का जन्म हुआ ?
उत्तर
लोक कथा के अनुसार नरबदी के कारण ‘नर्मदा’ नदी का जन्म अमरकण्टक से हुआ।

MP Board Class 7th Hindi Chapter 16 प्रश्न 2.
निम्नांकित कथनों का आशय स्पष्ट कीजिए

(क) उसकी आँखों के सामने पिता का परेशान चेहरा घूम गया।
आशय-नरबदी को उसके पिता दुग्गन का चेहरा स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था। उसके चेहरे से दुग्गन की परेशानी भी झलक रही थी, क्योंकि वह लगातार ही अपनी प्यासी पुत्री के लिए पानी की तलाश कर रहा था। .

(ख) मैं तुम्हारी प्यास बुझाने के लिए झरना बन गई हूँ।
आशय- नरबदी ने अपने परेशान और प्यासे पिता दुग्णन के लिए जल प्राप्त कराने वाले झरने का रूप धारण कर लिया।

Class 7 Hindi Chapter 16 Question Answer प्रश्न 3.

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) …………. तब घने जंगलों से घिरा था।
(ख) दुग्गन ने उसे ………….की तरह पाला पोसा था।
(ग) दुग्गन के हाथ अपने आप ………….. में उठकर जुड़ गए।
(घ) मैं तुम्हारी प्यास बुझाने के लिए ……… बन गई हूँ।
(ङ) इस जंगल में अब कभी कोई आदमी … से अपनी जान नहीं देगा।
उत्तर
(क) मैकल पर्वत
(ख) माँ
(ग) प्रार्थना
(घ) झरना
(ङ) प्यास।

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भाषा अध्ययन

Class 7 Hindi Chapter 16 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के सामने कुछ शब्द लिखे हुए हैं। इनमें प्रत्येक के साथ दो-दो पर्यायवाची शब्द हैं, आप उन्हें छाँटकर लिखिए
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 नरबदी 1

Hindi Class 7 Chapter 16 प्रश्न 2.
निम्नलिखित गद्यांश में यथास्थान विराम चिह्नों का प्रयोग कीजिए
वह मन ही मन बड़े देव को मनाने लगी है बड़े देव मेरे बाबा को बचा लेना उनका प्यास के मारे बुरा हाल है पानी नहीं मिला तो वे मर जाएंगे
उत्तर
वह, मन ही मन, बड़े देव को मनाने लगी है। बड़े देव ! मेरे बाबा को बचा लेना। उनका प्यास के मारे बुरा हाल है। पानी नहीं मिला, तो वे मर जाएँगे।

Class 7 Chapter 16 Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का सही क्रम करके सार्थक वाक्य बनाइए
(क) मुस्कुराने की कोशिश नरबदी की ने।
(ख) चुकी थी थक वह तरह बुरी।
(ग) थी वाली बरसात आने।
(घ) वह हो चिन्तित उठा न नरबदी को वहाँ पाकर।
(ङ) रही थी बह नरबदी।
उत्तर
(क) नरबदी ने मुस्कुराने की कोशिश की।
(ख) वह बुरी तरह थक चुकी थी।
(ग) बरसात आने वाली थी।
(घ) नरबदी को वहाँ न पाकर वह चिन्तित हो उठा।
(ङ) नरबदी बह रही थी।

प्रश्न – दिए गए संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, अव्यय शब्दों से उदाहरण के अनुसार विशेषण बनाइए
(क) संज्ञा-(1) धन, (2) सुख, (3) ज्ञान, (4) दान, (5) बल, (6) गुण।
उत्तर
विशेषण-(1) धनी, (2) सुखी, (3) ज्ञानी, (4) दानी, (5) बली, (6) गुणी।

(ख) सर्वनाम-(1) यह, (2) वह, (3) कौन, (4) जो।
उत्तर
विशेषण-(1) ऐसा, (2) वैसा, (3) कैसा, (4) जैसा।

(ग) क्रिया-(1) पढ़ना, (2) लड़ना, (3) झगड़ना, (4) बेचना।
उत्तर
विशेषण-(1) पढ़ाकू, (2) लड़ाकू, (3) झगड़ालू, (4) विकबाल।

(घ) अव्यय-(1) आगे, (2) पीछे, (3) बाहर, (4) ऊपर।
उत्तर
विशेषण-(1) अगला, (2) पिछला, (3) बाहरी, (4) ऊपरी।

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Hindi Class 7 Ch 16 प्रश्न 5.
नीचे बनी तालिकाओं में दिए गए उदाहरणों के अनुसार रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 नरबदी 2

नरबदी परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

1. मैकल के शिखर पर घने-ऊँचे पेड़ तो थे, लेकिन झरने की कोई आवाज सुनाई नहीं दे रही थी, दुग्गन भटकता रहा। उसका भी प्यास के मारे बुरा हाल था। वह सोच रहा था-जब प्यास के कारण मेरी यह दशा हैतो नहीं जान नरबदी का क्या हाल होगा? उसने सिर उठाकर आसमान की तरफ देखा। सूरज तमतमाया हुआ था। दुग्गन के हाथ अपने आप प्रार्थना में उठकर जुड़ गए। वह लगभग रुआंसा होकर गिड़गिड़ाया, “हे प्रभु ! मेरी लाडली की रक्षा कर। वह बिना माँ की बच्ची है। उसे कुछ हो गया तो मैं जीवित नहीं रह पाऊँगा।”

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘नरबदी’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस लोककथा के लेखक लक्ष्मीनारायण ‘पयोधि हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत गोंडी लोक कथा में लेखक ने नर्मदा नदी के उद्गम की कल्पना प्रस्तुत की है।

व्याख्या-मैकल पर्वत (अमरकण्टक पहाड़) की सबसे ऊँची चोटी पर बहुत ऊँचे-ऊँचे पेड़ थे। वहाँ कोई झरना नहीं था, क्योंकि झरने के बहने की आवाज सुनाई नहीं पड़ रही थी। दुग्गन अपनी प्यासी बेटी नरबदी के लिए पानी लाने के लिए चारों और भटकता रहा। वह भी प्यास से पीड़ित था। उसने विचार किया कि जब प्यास से मेरी यह दशा है तो अति छोटी-सी मेरी पुत्री नरबदी का हाल तो प्यास से बहुत बुरा हो रहा होगा। उसने आसमान की ओर देखा। सूरज अपनी रोशनी से तप रहा था। उसने हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना की। वह प्रार्थना करते समय रो रहा था। दयनीय अवस्था में कहने लगा “हे ईश्वर ! तू, मेरी प्यारी पुत्री नरबदी की रक्षा करना। वह बिना माँ की बेटी है। उसको कुछ भी नहीं होना चाहिए, नहीं तो मैं अपना जीवन समाप्त कर दूंगा।”

नरबदी शब्दकोश

शिखर = चोटी; तूम्बा = विशेष प्रकार की लौकी से बना पात्र, बर्तन; लस्त-पस्त = थका हारा ; प्रतिध्वनि = गूंज;झुरमुट = झाड़ियों का समूह।

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