भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 1 मेरी भावना प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 1 Meri Bhavna Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 1 Meri Bhavna Questions and Answers

बोध प्रश्न

MP Board Class 7th Hindi Chapter 1 प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) हमें जीवों के प्रति किस तरह की भावना रखनी चाहिए?
उत्तर-
हमें जीवों के प्रति मित्रता व दया की भावना रखनी चाहिए।

(ख) ‘मेरी भावना’ कविता में कवि ने किन-किन पर साम्यभाव रखने की बात कही है ?
उत्तर-
इस कविता में कवि ने दुष्ट, निर्दयी व गलत रास्ते पर चलने वाले इत्यादि के प्रति साम्यभाव रखने की बात कही है। .

(ग) देशोन्नति से कवि का क्या आशय है ? कवि किस तरह की देशोन्नति में सम्मिलित होना चाहता है ?
उत्तर-
देशोन्नति से कवि का आशय-देश की उन्नति से है। कवि चाहता है कि सभी हृदय से युगवीर बनकर देश की उन्नति और विकास में सम्मिलित हों।

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Meri Bhavna Class 7 Hindi प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में से सद्गुण और दुर्गण के लिए प्रयुक्त शब्दों की सूची अलग-अलग बनाइए अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, उपकार, क्रूर, प्रेम, मोह।
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 1 मेरी भावना 1

Class 7 Hindi Chapter 1 Meri Bhavna प्रश्न 3.
निम्नलिखित भाव जिस पंक्ति में आए हों, उस पंक्ति को लिखिए और सुनाइए ईर्ष्या, करुणा, लालच, कृतघ्न।
उत्तर-
विद्यार्थी निम्न पंक्तियों को कण्ठस्थ करें व कक्षा में सुनाएँ

  • ईर्ष्या-देख दूसरों की बढ़ती को, कभी न ईर्ष्या भाव धरूँ।
  • करुणा-दीन-दुखी जीवों पर मेरे, उर से करुणा-स्रोत बहे।
  • लालच-अथवा कोई कैसा ही भय, या लालच देने आए।
  • कृतघ्न-होऊँ नहीं कृतघ्न कभी मैं, द्रोह न मेरे उर आए।

Bhasha Bharti Class 7 प्रश्न 4.
कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर-
पाठ के प्रारम्भ में दिये गए विभिन्न पद्यांशों की व्याख्याओं का अवलोकन करें।

भाषा अध्ययन

Class 7th Hindi Chapter 1 Meri Bhavna प्रश्न 1.
निम्नलिखित अशुद्ध शब्दों की वर्तनी शुद्ध करके लिखिए इष्या, स्त्रोत, दुजर्न, परिणती, द्रष्टी।
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 1 मेरी भावना 2

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 1 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों का अर्थ लिखकर अन्तर स्पष्ट कीजिएभाव-भव रात-रत। बैर-बेर गृह-ग्रह।
उत्तर-

    1. भाव (मूल्य)-भव (संसार)
      अन्तर-भाव का अर्थ होता है किसी वस्तु का मूल्य जबकि भव का अर्थ है संसार ।
    2. रात (रात्रि)-रत (लगा हुआ)।
      अन्तर-रात का प्रयोग रात्रि के समय के लिए किया जाता E है, जबकि रत का अर्थ होता है किसी कार्य में लगा हुआ।
    3. बैर (द्वेष)-बेर (एक फल)
      अन्तर-बैर शब्द का प्रयोग दुश्मनी अथवा द्वेष के लिए किया जाता है, जबकि बेर एक खाद्य-फल है।
  1. गृह (निवास स्थान, घर)-ग्रह (विशाल आकाशीय पिण्ड)।
    अन्तर-गृह का अर्थ घर से है, जबकि ग्रह का प्रयोग विशालकाय आकाशीय पिण्डों (पृथ्वी, शनि, बृहस्पति इत्यादि) के लिए किया जाता है।

Class 7 Hindi Chapter 1 Mp Board प्रश्न 3.
वर्ग पहेली में से नीचे दिए गए शब्दों के विलोम शब्द छाँटकर लिखिए
उपकार, कुमार्ग, कृतघ्न, जीवन, अन्याय, दु:ख।
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 1 मेरी भावना 3
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 1 मेरी भावना 4

MP Board Class 7 Hindi Chapter 1 प्रश्न 4.
नीचे लिखे शब्दों को ध्यान से पढ़िए और जिन वर्णों की आवृत्ति हुई है उसे लिखिए
उत्तर-
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 1 मेरी भावना 5
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(क) सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. अहंकार का भाव न रक्खू,
नहीं किसी पर क्रोध करूँ।
देख दूसरों की बढ़ती को,
कभी न ईर्ष्या भाव धरूँ।।
रहे भावना ऐसी मेरी,
सरल-सत्य व्यवहार करूँ।
बने जहाँ तक इस जीवन में,
औरों का उपकार करूँ।।
मैत्री भाव जगत में मेरा,
सब जीवों से नित्य रहे।
दीन-दुखी जीवों पर मेरे,
उर से करुणा-स्रोत बहे।।

शब्दार्थ-अहंकार = घमण्ड; ईर्ष्या = द्वेष; करुणा-स्रोत = दया की धारा।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा भारती’ के ‘मेरी भावना’ नामक पाठ से अवतरित है। इसके रचयिता जुगल किशोर ‘युगवीर’ हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ईश्वर से अपने लिए अच्छी भावनाओं की कामना करता है।

व्याख्या-हे ईश्वर ! कभी भी घमण्ड का भाव मेरे मन में न आये और न ही मैं किसी पर गुस्सा करूँ। दूसरों की उन्नति और विकास को देखकर मुझे प्रसन्नता हो, न कि कुढ़न।।

हे प्रभु ! मैं चाहता हूँ कि मेरी ऐसी भावना हो कि मैं सबके प्रति सरलता व सत्यता का व्यवहार करूँ और जहाँ तक सम्भव हो सके मैं अपने इस जीवन को परोपकार में लगा सकूँ, अर्थात् दूसरों की भलाई कर सकूँ। तेरे बनाये सभी जीव-जन्तुओं एवं पादपों से मेरा व्यवहार प्रतिदिन मित्रवत् हो तथा दुखी व परेशान प्राणि-मात्र के प्रति मेरे हृदय में दया की अविरल धारा बहती रहे।

2. दुर्जन-क्रूर कुमार्गरतों पर,
क्षोभ नहीं मुझको आए
साम्यभाव रक्खू मैं उन पर,
ऐसी परिणति हो जाए।।
गुणीजनों को देख हृदय में,
मेरे प्रेम उमड़ आए।
बने जहाँ तक उनकी सेवा,
करके यह मन सुख पाए।।
होऊँ नहीं कृतघ्न कभी मैं,
द्रोह न मेरे उर आए।
गुण ग्रहण का भाव रहे नित,
दृष्टि न दोषों पर जाए।।

शब्दार्थ-दुर्जन = दुष्ट; क्रूर = कठोर; कुमार्गरतों = बुरे रास्ते पर चलने वाले क्षोभ = कष्ट; साम्यभाव = समानभाव; परिणति = बदलाव; गुणीजन = गुणवान लोग; कृतघ्न = उपकार न मानने वाला; द्रोह = वैर; उर = हृदय।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ईश्वर से अपने लिए अच्छी भावनाओं का वरदान चाहता है।

व्याख्या-हे प्रभु ! मेरी सदैव ऐसी भावना रहे कि मुझे दुष्ट, कठोर और बुरे आचरण वाले लोगों के व्यवहार पर दुःख न हो। मेरे हृदय में उनके प्रति ऐसा बदलाव हो कि मैं उनके प्रति समानता का भाव रखने लगूं।

जब मैं गुणवान लोगों को देखू तो उनके लिए मेरे हृदय में प्रेम की भावना उत्पन्न होती रहे। जहाँ तक सम्भव हो सके मैं ऐसे लोगों की तन-मन-धन और कर्म से सेवा कर मन की शान्ति अर्जित कर सकूँ।

मैं कभी भी दूसरों के किये हुए उपकार को भूलने वाला न बनूँ और मेरे मन में किसी के प्रति भी वैर-भावना पैदा न हो। दूसरों के चरित्र में से मैं उसके अन्दर छिपे गुणों को स्वीकार करता रहूँ, किन्तु उनके दोषों की ओर मेरा ध्यान कदापि न जाये। हे ईश्वर ! मेरी प्रतिदिन यही भावना रहे।

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3. कोई बुरा कहे या अच्छा,
लक्ष्मी आए या जाए।
लाखों वर्षों तक जीऊँ या,
मृत्यु आज ही आ जाए।
अथवा कोई कैसा ही भय,
या लालच देने आए।
तो भी न्यायमार्ग से मेरा,
कभी न पद डिगने पाए।।
फैले प्रेम परस्पर जग में,
मोह दूर पर रहा करे।
अप्रिय कटुक कठोर शब्द नहीं,
कोई मुख से कहा करे।।
बनकर सब युगवीर हृदय से,
देशोन्नतिरत रहा करें।
वस्तु स्वरूप विचार खुशी से,
सब दुःख संकट सहा करें।।

शब्दार्थ-न्यायमार्ग = न्याय का रास्ता; पद = पैर, पग; परस्पर = आपस में; मोह = लालच; कटुक = कड़वा; देशोन्नतिरत = देश की उन्नति में लगे।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि प्रतिकूल अथवा अनुकूल, दोनों परिस्थितियों में धैर्य रखने की शक्ति की प्राप्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता है।

व्याख्या-कोई मुझे बुरा कहे अथवा कर्ण-प्रिय शब्द बोले, मेरे पास धन आए अथवा जाता रहे, चाहे मैं लाखों वर्षों तक जीता रहूँ अथवा मेरी मौत नजदीक हो अथवा मुझे कोई कैसा भी बरगलाने या लालच देने का प्रयत्न करे, तो भी हे मेरे ईश्वर ! मुझे ऐसी शक्ति प्रदान कर, जिससे न्याय के पथ से मेरे कदम हटने न पाएँ।

इस दुनिया के समस्त निवासियों के मध्य आपस में प्यार बढ़े, सभी लोभ, लालच से दूर रहें तथा कोई भी अपने मुँह से । किसी के लिए भी अप्रिय, कड़वे तथा कठोर शब्द न बोले। – सभी देशवासी मन से दृढ़ संकल्पित हो युगवीर बनें और सदैव राष्ट्र की उन्नति में अपना योगदान दें। साथ ही, सभी दुखों पीड़ाओं और संकटों को वस्तु के समान आने जाने वाला सोचकर अर्थात् उन्हें जीवन का एक अंग मानकर खुशी से सहन किया करें।

शब्दकोश
अहंकार = घमण्ड; परिणति = बदलाव या परिवर्तन; ईर्ष्या = जलन; करुणा = दया; कटु = कठोर, कड़वा; . देशोन्नति = देश की उन्नति; स्रोत = धारा, साधन, उद्गम; क्षोभ = खेद, दुःख; क्रूर = निर्दयी।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 15 छोटा जादूगर प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 15 Chota Jadugar Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 15 Chota Jadugar Questions and Answers

बोध प्रश्न

Chota Jadugar Question Answer In Hindi Class 7 प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) छोटे जादूगर से लेखक की पहली मुलाकात कहाँ
उत्तर
छोटे जादूगर से लेखक की पहली मुलाकात कार्निवाल के मैदान में हुई।

(ख) लेखक ने छोटे जादूगर से पहली बार मिलने पर क्या पूछा?
उत्तर
लेखक ने छोटे जादूगर से पहली बार मिलने पर पूछा कि उस पर्दे में क्या है?

(ग) छोटे जादूगर का खेल उस दिन क्यों नहीं जमा ?
उत्तर
छोटे जादूगर का खेल उस दिन इसलिए नहीं जमा क्योंकि उसे अपनी बीमार माँ की बीमारी की दशा सताये जा रही थी। साथ ही उसे माँ के कहे शब्द बार-बार उसके मस्तिष्क में काँध रहे थे कि वह उस दिन जल्दी लौटकर आ जाए, क्योंकि उनकी घड़ी समीप ही थी।

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(घ) बालक का नाम छोटा जादूगर क्यों पड़ा?
उत्तर
बालक की उम्र तेरह-चौदह वर्ष की रही होगी। वह अपनी जीविका के लिए ताश, गुड़िया, बन्दर आदि के खेल दिखाता था। इन खेलों से लोगों का मनोरंजन करता था। इसलिए उसका नाम छोटा जादूगर पड़ गया।

(ङ) छोटे जादूगर के किन-किन गुणों ने तुम्हें प्रभावित किया ?
उत्तर
छोटा जादूगर दुःख और पीड़ा की अवस्था में धीरज धरे हुआ था। वह अपनी माँ की बीमारी की दवाई के लिए खेल दिखाता है। वह किसी के सामने भीख के लिए हाथ नहीं बढ़ाता है। उसे परिश्रम करने में विश्वास है। वह बोलचाल में चतुर है, साहसी है। वह अभिवादनशील है।

Chota Jadugar Class 7 Question Answer प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) …………के मैदान में बिजली जगमगा रही थी।
(ख) मैं सच कहता हूँ बाबूजी ………… बीमार हैं।
(ग) ………… कहिए यह मेरा नाम है।
(घ) माँ ने कहा था कि आज चले आना मेरी घड़ी …………. है।
उत्तर
(क) कार्निवाल
(ख) माँ
(ग) छोटा जादूगर
(घ) तुरन्त, समीप।

भाषा अध्ययन

Chota Jadugar Hindi Lesson Question Answer प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण करते हुए वाक्यों में प्रयोग कर लिखिए
प्रगल्भता, तथ्य, उद्यान, स्वार्थी, इया, धैर्य।
उत्तर

  1. बालकों में प्रगल्भता का गुण शिक्षा से विकसित होता
  2. उसके तर्क तथ्यपूर्ण थे।
  3. देशी दवाओं की प्रदर्शनी शहर के प्रसिद्ध पालिका उद्यान में लगाई गई है।
  4. कुछ स्वार्थी लोग शहर के शान्त वातावरण को बिगाड़
  5. ईर्ष्या से मनुष्य की विचार-शक्ति दूषित हो जाती है।
  6. विपत्ति में धैर्य से कार्य लेना चाहिए।

Class 7 Hindi Chapter 15 MP Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित तालिका के ‘क’ खण्ड में मुहावरे और ‘ख’ खण्ड में अर्थ दिए हैं। ‘ग’ खण्ड में मुहावरों के सामने सही अर्थ लिखिए।
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 15 छोटा जादूगर 1
उत्तर
1.→ (य), 2. → (द), 3. + (अ), 4.→ (स), 5.+ (ब)।

Hindi Class 7 Chapter 15 Question Answer प्रश्न 3.
संवादपूर्ण उतार चढ़ाव (अनुतान) वाले पाँच वाक्य लिखिए और उन्हें बोलकर प्रभाव पैदा करने का प्रयास करिए, अर्थ पर भी ध्यान दीजिए।
उत्तर
“माता जी विदेश गई हैं।” “क्यों?
“अपनी पढ़ाई के लिए” सगर्व बोला
“और तुम्हारी छोटी बहन” ?
“वह यहाँ पढ़ती है।”
“और तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”

Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 15 प्रश्न 4.
पाठ में से विशेषण विशेष्य छाँटकर तालिका बनाइए
उत्तर
पक्का निशानेबाज, लाल कमलिनी, छोटी झील, छोटा जादूगर, समग्र संसार।
उपर्युक्त में रेखांकित शब्द विशेषण हैं और शेष विशेष्य।

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भाषा भारती कक्षा 5 Solutions Chapter 15 प्रश्न 5.
नीचे लिखे शब्दों में अनुस्वार के स्थान पर पंचम वर्ण का प्रयोग कीजिए
क-वर्ग-कंगन, अंक, शंख, गंगा।
च-वर्ग-पंच, गुंजन, खंजन, रंजन।
ट-वर्ग-पंडा, पंडित, घंटा, ठंडा।
त-वर्ग-पंत, चंदन, धंधा, कंधा।
प-वर्ग-पंप, कंप, मंदिर, दंभ।
उत्तर
क-वर्ग-कङ्गन, अङ्क, शङ्ख, गंगा।
च-वर्ग-पञ्च, गुञ्जन, खञ्जन, रजन।
ट-वर्ग-पण्डा, पण्डित, घण्टा, ठण्डा।
त-वर्ग-पन्त, चन्दन, धन्धा, कन्धा।
प-वर्ग-पम्प, कम्प, मन्दिर, दम्भ।

छोटा जादूगर परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

1. कार्निवाल के मैदान में बिजली जगमगा रही थी। मैं खड़ा था फव्वारे के पास, जहाँ एक लड़का चुपचाप शरबत पीने वालों को देख रहा था। उसके गले में फटे करते के ऊपर से एक मोटी-सी सूत की रस्सी पड़ी थी और जेब में कुछ ताश के पत्ते थे। उसके मुख पर गम्भीर विषाद के साथ धैर्य की रेखाएँ थीं। मैं उसकी ओर न जाने क्यों आकर्षित हुआ।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश ‘खेटा जादूगर’ नामक कहानी से लिया गया है। इसके लेखक जयशंकर प्रसाद हैं।

प्रसंग-छोटा जादूगर का वर्णन कहानीकार ने वास्तविक – रूप में प्रस्तुत किया है।

व्याख्या-लेखक कहता है कि कलकत्ता के कार्निवाल नामक मैदान में बिजली का उजाला चारों ओर फैला हुआ था। चारों ओर बिजली की चकाचौंध थी। लेखक भी स्वयं वहाँ फब्बारे के पास खड़ा हुआ था। यहीं पर पास में ही एक चौदह-पन्द्रह वर्षका लड़का भा खड़ा था जो चुपचाप उन लागा को देख रहा था जो शरबत पी रहे थे। वह लड़का एक कुरता पहने हुए था। यह कुरता फटा हुआ था। उसने अपनी गरदन में कुरते के ऊपर सूत की एक मोटी रस्सी डाली हुई थी। उसकी जेब में कुछ ताश के पत्ते थे। उसके चेहरे से पता चलता था कि वह बहुत अधिक दु:खी है, परन्तु वह धैर्यवान था। लेखक स्वयं । नहीं जान पा रहा है कि वह उस लड़के की और क्यों आकर्षित हो गया है।

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2. कलकत्ता के सुरम्य बॉटेनिकल उद्यान में लाल कमलिनी से भरी हुई एक छोटी झील के किनारे घने वृक्षों की छाया में अपनी मण्डली के साथ बैठा हुआ मैं जलपान कर रहा था। इतने में वही छोटा जादूगर दिखाई पड़ा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-सुन्दर बॉटनिकल उद्यान में छोटे जादूगर से लेखक । की मुलाकात का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-कलकत्ता में बॉटनिकल उद्यान है। वह अति – रमणीक है, सुन्दर है। उस उद्यान में (बगीचे में) एक छोटी-सी झील है। वह पानी से भरी हुई है। उसमें कमलिनी की लताएँ हैं। वह लाल कमलिनी है। इसी झील के किनारे अनेक घने छायादार पेड़-पौधे खड़े हैं। उन पेड़ों की छाया में लेखक भी अपने मित्रों के साथ बैठा हुआ था। वे सभी जलपान (नाश्ता) कर रहे थे। तभी वहाँ वही लड़का जो चौदह-पन्द्रह वर्ष का था, दिखाई दिया। लेखक उसे छोटा जादूगर के नाम से पुकारता है।

छोटा जादूगर शब्दकोश

विषाद = कष्ट, पीड़ा; तमाशा = खेल (मनोरंजन के लिए), दृश्य; जलपान = नाश्ता, कलेवा; अविचल = अचल, स्थिर; धैर्य-आश्चर्यचकित, संज्ञाहीन; तिरस्कार = अपमान; उद्यान = बगीचा, उपवन; स्तब्ध = संज्ञाहीन, आश्चर्यचकित; प्रगल्भता = चतुराई से साहसपूर्वक बोलना; पथ्य = रोगी को दिए जाने वाला भोजन; वाचालता = अधिक बोलना; उज्ज्वल = चमकीला, कान्तिवान; गर्व = घमण्ड, गौरव की भावना, । अभिमान; बॉटेनिकल = वनस्पति से सम्बन्धित; जीविका = रोजी-रोटी, जीवन-यापन करने का साधन; समग्र – सम्पूर्ण, पूरा।

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भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 14 मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 14 Mat Thehro Tumko Chalna hi Chalna Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 14 Mat Thehro Tumko Chalna hi Chalna Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 14 MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) कवि का ठहरने से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर
ठहरने से कवि का तात्पर्य है, गतिहीन हो जाना, किसी भी प्रकार की उन्नति से रहित। दूसरा अर्थ जीवन का रुक जाना भी होता है।

(ख) हमें अपने साथ किन्हें लेकर चलना है?
उत्तर
हमें अपने साथ जमाने को लेकर चलना है। साथ ही, पिछड़े हुए लोगों को भी आगे बढ़ाना है।

(ग) जीवन की बाधाओं को कैसे दूर किया जा सकता
उत्तर
पक्के निश्चय से (पक्के इरादों से) जीवन की बाधाओं को दूर किया जा सकता है।

(घ) कवि के अनुसार मनुष्य को कब पछताना पड़ता है?
उत्तर
काम करने के उचित अवसर के हाथ से निकाल दिये जाने पर मनुष्य को पछताना पड़ता है।

(ङ) कवि निरन्तर चलते रहने को महत्त्व क्यों दे रहा
उत्तर
कवि निरन्तर चलते रहने को महत्त्व इसलिए दे रहा है, क्योंकि ठहरना पतन का और मृत्यु का प्रतीक है। जीवन में ठहराव अवनति लाने वाला होता है।

(च) समय व्यर्थ क्यों नहीं गवाना चाहिए?
उत्तर
हमें अपना समय व्यर्थ नहीं गँवाना चाहिए। अपनी जिम्मेदारी का निभाना ही ईश्वर की पूजा है। अतः प्रत्येक क्षण का सही उपयोग करते हुए काम को पूरा करें, नहीं तो काम करने के उचित अवसर के बीत जाने पर हमें पछताना पड़ेगा।

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Class 7 Hindi Chapter 14 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नांकित पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए

(क) तुमको प्रतीक बनना है, विश्व प्रगति का।
तुमको जनहित के साँचे में ढलना है।
उत्तर
हे मनुष्य, तुम्हें संसार की प्रगति के प्रतीक (पहचान) बनकर प्रत्येक मनुष्य की भलाई के लिए एक साँचा . (आदर्श) बन जाना चाहिए।

(ख) जितने भी रोड़े मिलें, उन्हें ठुकराओ।
पच के कांटों को पैरों से दलना है।
उत्तर
हे मनुष्य, तुम्हारे मार्ग में कितनी ही बाधाएँ और रुकावटें भले ही आ जाएँ, परन्तु उन्हें अपने पैर की ठोकर से हटा दो। मार्ग में कितने भी काँटे हो सकते हैं, परन्तु हिम्मत के साथ उनके ऊपर से चलते हुए, उन्हें कुचलते हुए आगे ही आगे बढ़ते जाना चाहिए। मार्ग की बाधाओं और रुकावटों को हिम्मत से दूर करते हुए, अपने निश्चित मार्ग पर आगे ही आगे गतिमान बने रहना हमारा कर्तव्य है।

Class 7 Hindi Chapter 14 प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) सुख की खोज बड़ी ………….. है।
(ख) जनहित के साँचे में ……….. है।
(ग) काँटों को पैरों से ……….. है।
(घ) अवसर खोकर हाथ ………… है।
(ङ) प्रण से तुम्हें नहीं ………. है।
उत्तर
(क) छलना
(ख) ढलना
(ग) दलना
(घ) मलना
(ङ) टलना

भाषा अध्ययन

Hindi Class 7 Chapter 14 प्रश्न 1.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखिए। साथ ही कविता में उन पंक्तियों को छाँटकर लिखिए, जिनमें इन मुहावरों का प्रयोग हुआ है
(क) साँचे में ढलना
(ख) हाथ मलना
(ग) व्रत लेना
(घ) जुट जाना
(ङ) अवसर खोना।
उत्तर
(1) अर्थ-(क) अनुसार बन जाना
(ख) पछताना
(ग) प्रतिज्ञा कर लेना
(घ) लग जाना
(ङ) समय को निकाल देना।

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(2) पंक्तियाँ जिनमें मुहावरों का प्रयोग हुआ है
(क) तुमको जनहित के साँचे में ढलना है।
(ख) अवसर खोकर तो सदा हाथ मलना है।
(ग) जब चलने का व्रत लिया, ठहरना कैसा?
(घ) जो कुछ करना है, उठो ! करो, जुट जाओ।
(ङ) अवसर खोकर तो सदा हाथ मलना है।

Class 7 Chapter 14 Hindi प्रश्न 2.
इस कविता के तुकान्त शब्द छाँटकर लिखिए।
उत्तर
(क) चलना, टलना, छलना, ढलना, दलना मलना।
(ख) पतन, जीवन।
(ग) चलाओ, बढ़ाओ, ठुकराओ, जुट जाओ, गँवाओ।
(घ) आती, जाती।

Chapter 14 Class 7 Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों के । विलोम शब्द भरिए
(क) जीवन में उत्थान और ………… आते ही रहते हैं।
(ख) कहीं भी अधिक ठहरना अच्छा नहीं, हमेशा प्रगति के – पथ पर ……..अच्छा है।
(ग) पशु-पक्षी भी अपना हित ……….. जानते हैं।
(घ) असफलता के बाद ……….का मिलना एक प्रक्रिया
(ङ) सुख सभी चाहते हैं ………कोई नहीं।
उत्तर
(क) पतन
(ख) चलना
(ग) अनहित
(घ) सफलता
(ङ) दुःख।

Class 7th Hindi Chapter 14 प्रश्न 4.
दिये गये प्रयोगों की तरह नीचे दिए गए वाक्यों 1 में ‘मत’ का प्रयोग कीजिए।
(क) रुको मत, आगे बढ़ो।
(ख) पढ़ो मत, बात करो।
(ग) हँसो मत, भोजन करो।
(घ) भागो मत, धीरे चलो।
उत्तर
(क) मत रुको, आगे बढ़ो।
(ख) पढ़ो, मत बात करो।
(ग) मत हँसो, भोजन करो।
(घ) मत भागो, धीरे चलो।

मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है।
चलने के प्रण से, तुम्हें नहीं टलना है।
केवल गति ही जीवन, विश्रान्ति पतन है।
तुम ठहरे, तो समझो ठहरा जीवन है।
जब चलने का व्रत लिया, ठहरना कैसा?
अपने हित सुख की खोज बड़ी छलना है।
मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है।

शब्दार्थ-प्रण = प्रतिज्ञा; टलना = हटना; गति = चलना; विश्रान्ति = थकान, या रुकावट; पतन = गिरावट, अधोगति; ठहरे = स्थिर होना, रुकना; व्रत = प्रण, प्रतिज्ञा; हित = भलाई के लिए, कल्याण के लिए;
छलना = धोखा; ठहरो-रुको।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक की कविता ‘मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है’ से लिया गया है। इस कविता के रचयिता श्रीकृष्ण ‘सरल’ हैं।

प्रसंग-जीवन गतिमान होता है। ठहराव आने पर अवनति हो जाती है।

व्याख्या-हे मनुष्य ! तुम्हें ठहरना नहीं है। तुम्हें तो लगातार चलते रहना है। तुमने चलने का जो प्रण (व्रत, प्रतिज्ञा) किया है, उसी पर तुम्हें मजबूती से बने रहना है। उससे बिल्कुल भी हटना नहीं है। जीवन में गति हुआ करती है। थकान या रुकावट आने पर आदमी को समझ लेना चाहिए कि उसके जीवन में गिरावट आ गई। इसलिए तुम्हारे ठहराव से जीवन भी ठहर जाता है। शायद उसे फिर जीवन नहीं कहते हैं, परन्तु जब हमने चलते रहने का प्रण किया हुआ है, प्रतिज्ञा की हुई है तो ठहराव किस बात का, कैसा ? अपने कल्याण के लिए यदि हम सुख की खोज करते हैं, तो यही एक धोखा है। तुम्हें बिना ठहरे ही चलते रहना है।

2. तुम चलो, जमाना अपने साथ चलाओ,
जो पिछड़ गये हैं, आगे उन्हें बढ़ाओ।
तुमको प्रतीक बनना है, विश्व प्रगति का,
तुमको जनहित के साँचे में ढलना है।
मत व्हरो तुमको चलना ही चलना है।

शब्दार्थ-जमाना = युग; प्रतीक = चिह्न, पहचान; विश्व प्रगति-संसार की उन्नति जनहित सभी लोगों की भलाई के।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह। प्रसंग-कवि सन्देश दे रहा है कि हमें आगे बढ़ना चाहिए और दुनिया के अन्य लोगों को भी आगे बढ़ाना चाहिए।

व्याख्या-कवि कहता है कि तुम्हें लगातार चलते रहना है, साथ ही युग को भी अपने साथ चलाना है। इस उन्नति की दौड़ में जो पीछे रह गये हैं, उन्हें भी आगे बढ़ाने का हमारा कर्तव्य है। इस तरह संसार की उन्नति का, उसमें परिवर्तन लाने का आदर्श बनकर तुम्हें प्रतीक (पहचान) बनना है। इस संसार के लोगों की भलाई के लिए कार्य करने के साँचे में तुम्हें ढल जाना चाहिए। इसलिए तुम ठहरो मत, तुम्हें तो आगे ही आगे बढ़ते जाना है।

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3. बाधाएँ, असफलताएँ तो आती हैं।
दृढ़ निश्चय लख, वे स्वयं चली जाती हैं।
जितने भी रोड़े मिलें, उन्हें ठुकराओ,
पथ के काँटों को पैरों से दलना है।
मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है।

शब्दार्थ-बाधाएँ = रुकावटें; असफलताएँ = विफलताएँ; दृढ़ निश्चय- पक्का इरादा; लख – देखकर रोड़े-रुकावट, मार्ग की बाधाएँ ठुकराओ = ठोकर मारकर हटा दो; पथ – मार्ग; दलना = कुचलना है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि सन्देश देता है कि हमें असफलताओं, बाधाओं से नहीं घबराना चाहिए।

व्याख्या-मनुष्य के जीवन में आने वाली बाधाएँ (रुकावटें) और विफलताएँ मनुष्य के पक्के इरादों को देखकर अपने आप ही चली जाती हैं। वे उसके मार्ग में रुकावट बनने से हट जाती हैं। इसलिए मार्ग के रोड़ों को अपने पैर की ठोकर से एक तरफ हटा दो। अपने मार्ग के काँटों को अपने पैरों से कुचल डालो और अपने मार्ग पर चलते रहो, तुम्हें रुकना नहीं है।

4. जो कुछ करना है, उठो ! करो, जुट जाओ,
जीवन का कोई क्षण, मत व्यर्थ गवाओ।
कर लिया काम, भज लिया राम यह सच है,
अवसर खोकर तो सदा हाथ मलना है।
मत ठहरो तुमको चलना ही चलना है।

शब्दार्थ-जुट जाओ – (काम में) लग जाओ; व्यर्थ = बेकार, निष्फल; गँवाओ= नष्ट करो, बिताओ; अवसर खोकर – मौका नष्ट करके; सदा = हमेशा; हाथ मलना है पश्चाताप करना है, पछताना है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि कहता है कि समय व्यर्थ बिताकर मनुष्य को जीवनभर पश्चाताप करना पड़ता है।

व्याख्या-हे मनुष्यो ! तुम्हें जो भी कार्य करना है, उसे पूरा करने के लिए तुम्हें उठना चाहिए। कार्य पूरा करो। कार्य में तल्लीन होकर लग जाओ। अपने जीवन के समय का एक भी क्षण व्यर्थ (बेकार के कामों में) नहीं बिताना चाहिए। यदि तुमने अपने कर्तव्य का पालन किया हुआ है, तो समझो तुमने राम का भजन कर लिया। अर्थात् अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना ही ईश्वर की भक्ति है। काम को पूरा करने का समय गंवा दिया, तो फिर सदा ही पछताना पड़ेगा। इसलिए तुम्हें ठहरना नहीं, सदैव गतिमान बने रहो।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 9 गौरैया प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 9 Gauraiya Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 9 Gauraiya Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 9 MP Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) गौरैया की आँखों और परों की तुलना किससे की गई है ?
उत्तर
गौरैया की आँखों और परों की तुलना क्रमशः नीलम और सोने से की गई है।

(ख) गौरैया अपना घोंसला कैसे बनाती है ?
उत्तर
गौरैया अपना घोंसला तिनकों को चुन-चुनकर बनाती है।

(ग) गौरैया को हरियाली की रानी क्यों कहा गया है ?
उत्तर
गौरैया हरियाली की रानी है, क्योंकि वह हरे-भरे पौधों और हरी-भरी घास के तिनके एकत्र करती है और अपने लिए घोंसला बनाती है।

(घ) कवि अपनी बहन किसे बनाना चाहता है ?
उत्तर
कवि गौरैया को अपनी बहन बनाना चाहता है, क्योंकि वह उसके मिट्टी के रंग के आँगन में फुर्र-फुर्र उड़ती है,फुदकती है। उसका प्रत्येक अंग बिजली की भाँति चमकीला लगता है।

MP Board Class 7th Hindi Chapter 9 प्रश्न 2.
गौरैया कैसे आँगन में फुदक रही है ? (सही विकल्प चुनिए)

(क) साफ आँगन में
(ख) बड़े आँगन में
(ग) मटमैले आँगन में
(घ) हरे-भरे आँगन में।
उत्तर
(ग) मटमैले आँगन में।

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Bhasha Bharti Class 7 Chapter 9 प्रश्न 3.
निम्नलिखित पंक्तियों का भावार्थ लिखिए

(क) मैंने अपना नीड़ बनाया, तिनके-तिनके चुन-चुन।
(ख) तू प्रति अंग-उमंग भरी-सी, पीती फिरती पानी।
(ग) सूक्ष्म वायवी लहरों पर, सन्तरण कर रही सर-सर।
उत्तर
(क) एक-एक तिनका चुन-चुनकर (बड़ी मेहनत करके) मैंने अपना घोंसला बनाया है।
(ख) हे गौरैया ! तेरा प्रत्येक अंग उत्साह से भरा हुआ | लगता है और फिर भी त पानी पीती फिरती है।
(ग) हवा के द्वारा ऊपर की ओर उठी हुई छोटी-छोटी लहरों | पर सरसराती गौरैया गतिशील है।

भाषा अध्ययन

MP Board Class 7 Hindi Chapter 9 प्रश्न 1.
इस कविता में आये ध्वन्यात्मक एवं पुनरुक्ति वाले शब्दों की सूची बनाइए।
उत्तर
चुन-चुन, तिनके-तिनके, अंग-अंग, फर-फर, चिऊँ-चिऊँ, फुला-फुला, सर-सर, मर-मर, हिला-हिला।

Class 7 Hindi Chapter 9 Gauraiya प्रश्न 2.
इस कविता में प्रयुक्त निम्नांकित विशेषण किस शब्द की विशेषता बता रहे हैं
मधुर, मटमैला, सुन्दर, वायवी, निर्दय।
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 9 गौरैया 1

Class 7th Hindi Chapter 9 Gauraiya प्रश्न 3.
निम्नलिखित तालिका से समानता दर्शाने वाले शब्दों को कम से लिखिए
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 9 गौरैया 2

  1. नीलम-सी नीली आँखें।
  2. सोने-सा सुनहरा रंग।
  3. सोने-से सुन्दर पर।
  4. चन्द्रमा-सा सुन्दर मुख।
  5. कमलकली-सी सुन्दर आँखें।
  6. चाँदी-से सफेद बाल।

Class 7th Hindi Chapter 9 MP Board प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
बिजली, आँख, वायु, सोना।
उत्तर
बिजली = विद्युत, तड़ित।
आँख = नयन, नेत्र।
वायु = हवा, समीर।
सोना = स्वर्ण, कनक।

Class 7 Hindi Bhasha Bharti Chapter 9 प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
मधुर, सुन्दर, चंचल, सूक्ष्म।
उत्तर
मधुर = कदु
सुन्दर = कुरूप
चंचल = स्थिर
सूक्ष्म = विशाल।

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गौरैया सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।
कच्ची मिट्टी की दीवारें,
घासपात का छाजन।
मैंने अपना नीड़ बनाया,
तिनके-तिनके चुन-चुन।
यहाँ कहाँ से तू आ बैठी,
हरियाली की रानी।
जी करता है तुझे घूम लूँ,
ले लूँ मधुर बलैया।
मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।

शब्दार्थ-मटमैले = मिट्टी के रंग के गौरैया = एक छोटी चिड़िया जो प्रायः घरों के आस-पास रहती है; घासपात = घास और पत्तों का; छाजन = छप्पर;
नीड़ = घोंसला।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्य पंक्तियाँ ‘गौरैया’ शीर्षक कविता से अवतरित हैं। इसके रचियता डॉ. शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ हैं।

प्रसंग-कवि ने ‘गौरैया’ नामक छोटी-सी चिड़िया की मधुर क्रीड़ाओं का वर्णन किया है।

व्याख्या-मिट्टी के बने हुए मेरे आँगन में गौरैया फुदक रही है। कच्ची मिट्टी की दीवारों पर घास और पत्तों का छप्पर पड़ा हुआ है। उसमें मैंने अपना घोंसला एक-एक तिनका एकत्र कर-करके बनाया है। तू, हे हरियाली की रानी, यहाँ कहाँ से आकर बैठ गयी है। कवि कहता है कि मेरे मन में आता है कि मैं तुझे प्यार से चूम लूँ तथा तेरे ऊपर मधुर-मधुर बलैया ले लूँ। हे गौरैया, तू मेरे मटमैले आँगन में फुदक रही है।

2. नीलम की-सी नीली आँखें,
सोने से सुन्दर पर।
अंग-अंग में बिजली-सी भर,
फुदक रही तू फर-फर।
फूली नहीं समाती तू तो,
मुझे देख हैरानी।
आ जा तुझको बहन बना लूँ,
और बनूं मैं भैया।
मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।

शब्दार्थ- पर – पंख फूली नहीं समाती = बहुत अधिक प्रसन्न हैरानी = अचम्भाः

सन्दर्भ – पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि गौरैया की सुन्दरता और उसकी चंचलता का वर्णन करता है।

व्याख्या-कवि कहता है कि इस गौरैया की आँखें नीलम मणि के समान नीली हैं। इसके पंख स्वर्ण के जैसे हैं। अपने अंग-अंग में यह बिजली के समान चपलता लिए हुए-फुर-फुरी करती हुई इधर से उधर फुदक रही है। इसकी चंचलता को देखकर मुझे अचम्भा हो रहा है, कि यह खुशी के मारे फूली नहीं समा रही है। हे गौरैया ! तू मेरे पास आ जा, मैं तुझे अपनी बहन बना लेना चाहता हूँ, साथ ही मैं तेरा भैया (भाई) बन जाने की कामना करता हूँ। यह गौरैया, मटमैले रंग के मेरे आँगन में इधर से उधर लगातार फुदक रही है।

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3. मटके की गरदन पर बैठी,
कभी अरगनी पर चल।
चहक रही तू चिऊँ-चिऊँ,
चिऊँ-चिऊं, फुला-फुला पर चंचल।
कहीं एक क्षण तो थिर होकर,
तू जा बैठ सलोनी।
कैसे तुझे पाल पाई होगी,
री तेरी मैया।
मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।

शब्दार्थ-मटका = घड़ा; अरगनी = कपड़े आदि टाँगने के लिए रस्सी या लकड़ी; खूटी; पर = पंख; थिर = स्थिर होकर; सलोनी = सुन्दर, अच्छी;  पाल पाई होगी = पालन-पोषण किया होगा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि फुर्तीली गौरैया नामक चिड़िया की क्रियाओं का वर्णन करता है।

व्याख्या-कवि कहता है कि गौरैया कभी तो घड़े की गरदन पर उछलकर आकर बैठ जाती है तो दूसरे ही क्षण वह अरगनी (कपड़े आदि टाँगने की रस्सी) पर चली जाती है। वह चिऊँ-चिऊँ करती हुई लगातार चहकती फिरती है। वह चंचल बनकर अपने पंखों को फुलाकर इधर-उधर फुदकती फिरती है। हे सुन्दर सी गौरैया ! तू एक क्षण भरके लिए तो किसी एक स्थान पर स्थिर होकर बैठ जा। तेरी इस चंचलता को देखकर तो मुझे लगता है कि तेरी माँ ने तेरा पालन-पोषण किस तरह किया होगा। हे गौरैया ! तू मेरे मिट्टी के रंग वाले आँगन में फुदक रही है।

4. सूक्ष्म वायवी लहरों पर,
सन्तरण कर रही सर-सर।
हिला-हिला सिर मुझे बुलाते,
पत्ते कर-कर मर-मर।
तू प्रति अंग-उमंग भरी सी,
पीती फिरती पानी।
निर्दय हलकोरों से डगमग,
बहती मेरी नैया।
मेरे मटमैले अंगना में,
फुदक रही गौरैया।

शब्दार्थ-सूक्ष्म = छोटी-छोटी-सी; वायवी = हवा की; पर = ऊपर; सन्तरण = गति, गतिशीलता, नैरना; मर-मर = मर-मर की आवाज करते हुए; प्रति = प्रत्येक उमंग= उत्साह; हलकोरों = हिलोरें;
डगमग = डगमगाती हुई; नैया = नौका; निर्दय = कठोर हृदय।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-गौरैया के फुर्तीले क्रियाकलापों का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-कवि कहता है कि हवा के द्वारा ऊपर को उठी हुई छोटी-छोटी लहरों पर सरसराती गौरैया गतिशील बनी हुई है। (हवा से) हिलते हुए उसके सिरों से मर-मर की ध्वनि करते पत्ते कवि को बुला रहे हैं। गौरैया के शरीर का प्रत्येक अंग, उमंग से (उत्साह) से भरा हुआ है और वह उठी हुई छोटी-छोटी लहरों के पानी को पीती फिरती है। कवि कहता है कि मेरे जीवन की नौका कठोर हृदय (संकटों-दुःखों) रूपी हिलोरों से इधर-उधर डगमगाती फिरती है। (इस तरह के मुझ जैसे व्यक्ति के) मटमैले (मिट्टी के रंग वाले) आँगन में गौरैया फुदकती फिरती है।

गौरैया शब्दकोश

गौरैया – ‘गौरैया’=एक चिड़िया जो घरों, छप्परों में अपने घोंसले बनाकर रहती है; नीड़ = घोंसला; सलोनी = सुन्दर, अच्छी; । फुदकती है। उसका प्रत्येक अंग बिजली की भाँति चमकीला लगता है।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 11 वात्सल्य के पद प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 11 Vatsalya ke pad Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 11 Vatsalya ke pad Questions and Answers

बोध प्रश्न

MP Board Class 7th Hindi Chapter 11 प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) कृष्ण, माँ यशोदा से किसकी शिकायत कर रहे हैं?
उत्तर
कृष्ण, माँ यशोदा से बलदाऊ या बलराम की शिकायत कर रहे हैं।

(ख) बलराम कृष्ण को क्या कहकर चिढ़ाते हैं?
उत्तर
बलराम कृष्ण को मोल देकर खरीदा हुआ बताते हैं। ‘यशोदा ने उसे जन्म नहीं दिया है। उसके (कृष्ण के) माता-पिता कौन हैं ? नन्द और यशोदा दोनों ही गोरे रंग के हैं, उसका शरीर साँवला क्यों है?’ इस तरह की अनेक बातें कहकर बलराम कृष्ण को चिढ़ाते रहते हैं।

(ग) यशोदा कृष्ण पर क्यों रीझ रही हैं ?
उत्तर
यशोदा ने बालक कृष्ण के मुख से क्रोध भरी बातें सुर्नी, तो यशोदा कृष्ण पर रीझने लग गई।

(घ) यशोदा ने गोधन की कसम खाकर क्या कहा ?
उत्तर
यशोदा ने गोधन की कसम खाकर कहा कि वह उसकी (कृष्ण की) माता है और वह (कृष्ण) उसका पुत्र है।

(ङ) कृष्ण को किन चीजों के प्रति अरुचि है?
उत्तर
कृष्ण को पकवान और मेवाओं के प्रति अरुचि है।

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(च) ब्रज-युवती के मन में क्या इच्छा है ?
उत्तर
ब्रज-युवती के मन में इच्छा है कि वह (बालक कृष्ण) उस युवती के घर में चोरी-चारी मक्खन खाने जायें और जब कृष्ण मक्खन की मटकी से मक्खन खाते हुए बैठे हों, तो वह (ब्रज युवती) उन्हें छिपकर देखे। यही उस ब्रज-युवती की कामना है।

(छ) गोपी प्रातः कहाँ गई थी?
उत्तर
गोपी प्रातः नन्द बाबा के भवन (घर) गई थी।

(ज) यशोदा कृष्ण का किस तरह शृंगार कर रही है ?
उत्तर
यशोदा ने कृष्ण के शरीर पर तेल लगा दिया है, आँखों में काजल लगाकर भौहें बना दी हैं। उनके माथे पर काला टीका लगा दिया है।

Class 7 Hindi Chapter 11 MP Board प्रश्न 2.
दिये गये चार उत्तरों में से सही उत्तर छाँटकर लिखो

(क) कृष्ण को कौन चिढ़ा रहा है?
(1) सुदामा
(2) नन्द बाबा
(3) ग्वाल बाल
(4) बलराम।
उत्तर
(4) बलराम।

(ख) कृष्ण को क्या अच्छा लगता है ?
(1) दूध
(2) दही
(3) मक्खन
(4) छाछ (मट्ठा)
उत्तर
(3) मक्खन

(ग) यशोदा किसका श्रृंगार कर रही है ?
(1) बलदाऊ
(2) कृष्ण
(3) उद्धव
(4) मनसुखा
उत्तर
(2) कृष्ण।

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Class 7 Hindi Chapter 11 Vatsalya Ke Pad प्रश्न 3.
रिक्त स्थान भरिए”

(क) कहा कहो एहि रिसके मारे ………… हौं नहिं जात।
(ख) तारी दै-दै हँसत ग्वाल सब सिखै देत ………..
(ग) सूर ………. मोहि गोधन की सौं हौं माता तू पूत।
(घ) सूरदास प्रभु अन्तरजामी……… मन की जानी।
(ङ) तेल लगाई, लगाई के अंजन ……… बनाई, बनाई डिठौनहि।
उत्तर
(क) खेलन
(ख) बलवीर
(ग) श्याम
(घ) ग्वालिनि
(ङ) भौंह

Class 7th Hindi Chapter 11 Vatsalya Ke Pad प्रश्न 4.
इन पंक्तियों का अर्थ के साथ मिलान कीजिए
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 11 वात्सल्य के पद 1
उत्तर
1. →(घ), 2.→(ङ), 3.→(क), 4.→(ख), 5.→(ग)

भाषा अध्ययन

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 11 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों में स्थानीय बोली (ब्रज) और मानक भाषा के शब्द दिए गये हैं। उनके सही जोड़े मिलाइए
तारी, माखन, मक्खन, ठाढ़ी, भवन, भौन, जुग, करोड़, ताली, युग, करोर, युवती, खड़ी, जुवती, पूत, पुत्र।
उत्तर

  1. तारी-ताली
  2. माखन-मक्खन
  3. ठाढ़ीखड़ी
  4. भौन-भवन
  5. जुग-युग
  6. जुवती-युवती
  7. पूत-पुत्र
  8. करोर-करोड़।

Class 7th Hindi Chapter 11 MP Board प्रश्न 2.
इस पाठ में से अनुप्रास अलंकार के कुछ उदाहरण छाँटकर लिखिए।
उत्तर
कहा कहाँ, कहत कौन, मोही को मारन, मोहन मुख, जसुमति सुन सुन,
माता तू पूत, लगाई-लगाई, बनाई-बनाई, निहारत, बारत, चुचकारत।

Class 7 Hindi Bhasha Bharti Chapter 11 प्रश्न 3.
विभिन्न प्रकार के शब्द-युग्म लिखिए।
उत्तर

  1. पुनि-पुनि
  2. दै-दै
  3. सुन-सुन
  4. मन-मन

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MP Board Class 7 Hindi Chapter 11 प्रश्न 4.
(क) निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए
भैया, शरीर, मुख, पूत ,भौन, भोर।
उत्तर
भैया = भाई
शरीर = तन (देह)
मुख = मुँह
पूत = पुत्र
भौन – सवेरा

(ख) मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायो।
मौसों कहत मोल को लीन्हों,
तोहि जसुमति कब जायो।।

(1) यहाँ कौन किससे कह रहा है ?
उत्तर
यहाँ बालक कृष्ण अपनी माता यशोदा से कह रहा है।

(2) इसमें माता और पुत्र के बीच कौन-सा भाव प्रतीत या जागृत हो रहा है?
उत्तर
इसमें माता और पुत्र के बीच वात्सल्य भाव प्रतीत या जागृत हो रहा है।

MP Board Class 5 Hindi Bhasha Bharti Solution Chapter 11 प्रश्न 5.
इस पाठ के अतिरिक्त आपकी पाठ्य पुस्तक में से वात्सल्य रस का एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर
मइया हौं न चरैहाँ गाई।।
सिगरे ग्वाल घिरावत माँसों मेरे पाईं पिराई।।
जौ न पत्यहि, पूछि बलदाऊहि अपनी सौह दिवाइ।
यह सुनि-सुनि जसुमति ग्वालिनि को, गारी देत रिसाइ।।
मैं पठवति अपने लरिका कौं, आपै मन बहराइ।
‘सूर’ स्याम मेरो अति बालक, मारत ताहि रिंगाई।।

वात्सल्य के पद सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

सूरदास

1. मैया, मोहि दाऊ बहुत खिजायो।
मोसों कहत मोल को लीन्हों, तोहि जसुमति कब जायो।
का कहों एहि रिस के मारे, खेलन हौं नहिं जात।
पुनि-पुनि कहत कौन है माता, को है तुम्हरो तात।
गोरे नन्द, यशोदा गोरी, तुमकत श्याम शरीर।
तारी दै-दै हँसत ग्वाल सब, सिखै देत बलवीर।
तू मोही को मारन सीखी, दाउहि कबहुँन खीझे।
मोहन-मुख रिस की ये बातें जसुमति सुन-सुन रीझै॥
सुनहुँ श्याम बलीभद्र चबाई जनमत ही को धूत।
सूर-श्याम मोहि गोधन की सौँ हौँ माता तू पूत॥

शब्दार्थ-मोहि = मुझको; खिजायो = चिढ़ाता है; मोसों = मुझे या मुझको; मोल को लीन्हो मूल्य देकर लिया है; तोहि = तझको: जसमति = यशोदा ने जायो = जन्म देना; एहि = इस रिस के मारे = क्रोध या नाराजगी के कारण हौँ = मैं; नहिं जात = नहीं जाता हूँ; पुनि-पुनि = बार-बार; कहत = कहता है; को है = कौन है ?; तात = पिता; कत = क्यों; तारी दै-दै = ताली बजा-बजाकर; सिखै देत = सिखा देता है; बलवीर = बलदाऊ; मोही को = मुझको; खीझै = क्रोध करना; रिस = क्रोध; सुन-सुन-सुनते हुए; रीझै- प्रसन्न होती है; चबाई = चुगलखोर या इंधर-उधर की बातें जोड़-तोड़ कर बताने वाला; धूत = धूर्त; गोधन = गाय रूपी धन; सौं = शपथ लेकर (कहती हूँ); पूत = पुत्र।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘वात्सल्य के पद’ शीर्षक से अवतरित है। इसके रचयिता वात्सल्य सम्राट सूरदास हैं।

प्रसंग-कवि ने बालक कृष्ण द्वारा अपनी माता यशोदा से 1 बलदाऊ के विरुद्ध शिकायत करने के दंग का वात्सल्य प्रधान वर्णन किया है।

व्याख्या-है मेरी माँ ! मुझे बलदाऊ ने बहुत अधिक । चिढ़ाया है। वह मुझसे कहता है कि तूने कुछ मूल्य देकर मुझे खरीदा है। तुझे (मुझको) यशोदा माँ ने जन्म कब दिया है। इसी के कारण मुझे क्रोध आ गया है। अत: मैं क्या कहूँ? मैं खेलने के लिए नहीं जाता। वह (बलदाऊ) मझ से बार-बार पूछता है कि तुम्हारी माता कौन है तुम्हारा पिता कौन है ? देखो तो; बाबा नन्द और माता यशोदा दोनों ही गोरे रंग के हैं तो फिर तुम साँवले । क्यों हो? इस प्रकार सभी ग्वाले तालियाँ बजा-बजाकर मेरी हँसी उड़ाते हैं।

इस तरह बलदाऊ उन सबको सिखा देते हैं। तू मुझे ही मारना सीखी है, बलदाऊ पर कभी भी क्रोध नहीं करती। इस तरह, बालक कृष्ण के मुख से क्रोध की बातें सुन-सुनकर माता यशोदा बहुत अधिक प्रसन्न होती हैं और कहने लगी कि हे श्याम। यह बलदाऊ तो अपने जन्म से चुगलखोर है, धूर्त है। सूरदास वर्णन करते हैं कि माता यशोदा कहने लगी कि हे श्याम ! मैं अपने गाय-धन (सभी गौओं) की शपथ लेकर कहती हूँ कि मैं तेरी माँ हूँ और तू मेरा पुत्र है।

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2. मैया री, मोहि माखन भावै।
जो मेवा पकवान कहति तू, मोहि नहीं रुचि आवै॥
ब्रज जुवती इक पाॐ ठाढ़ी, सुनत श्याम की बात।
मन-मन कहति कबहुँ अपनै घर देखों माखन खात॥
बैठे जाई मथनियाँ के ढिंग मैं तब रहों छपानी।
सूरदास प्रभु अन्तरजामी ग्वालिनि मन की जानी॥

शब्दार्थ-मोहि = मुझको; माखन = मक्खन; भावै = अच्छा लगता है; कहति तू = तू जो कहती है;
रुचि आवै = अच्छे लगते हैं; जुवती-युवती; इक-एक; पाएँ- पीछे; ठाढ़ी = खड़े होकर सुनत = सुनती है; मन-मन कहति = अपने मन में सोचती है अथवा कामना करती है; कबहुँ = कभी तो; देखों = देखें माखन खात = मक्खन खाते हुए; जाई = जाकर के; मथनियाँ = मटकी; ढिंग = पास; तब = उस समय; रही छपानी -छिपकर रहूँ: अन्तरयामी- हृदय की बात को जानने वाले; ग्वालिनि मन = गोपी के मन की जानी = (बात-कामना) को जान लिया।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-बालक कृष्ण माता यशोदा को स्पष्ट रूप से यह बता देते हैं कि उन्हें (बालक कृष्ण को) तो मक्खन ही अच्छा लगता है।

व्याख्या-हे माता, मुझे तो मक्खन खाना अच्छा लगता है। जिन मेवाओं और पकवान के विषय में, तुम मुझसे कहती हो, वे मुझे अच्छे नहीं लगते। ब्रज की एक युवती श्याम की इन सभी बातों को पीछे खड़ी होकर सुनती है। वह अपने मन में कामना करती है कि मैं श्याम को अपने घर में मक्खन खाते हुए (कभी तो) देखें। जैसे ही वे मक्खन की मटकी के पास जाकर बैठे, तब (तैसे ही) मैं (वहाँ) छिप जाऊँ। सूरदास कहते हैं कि प्रभु (बालकृष्ण) अन्तरयामी हैं, उन्होंने उस गोपी के मन की बात को जान लिया।

रसखान

3. आज गई हुती भोरहि हौं,
रसखानि रई कहि नन्द के भौनहि।
बाको जियो जुग लाख करोर,
जसोमति को सुख जात कहो नहिं।
तेल लगाई, लगाई के अंजन,
भौंह बनाई, बनाई डिठीनहि।
डालि हमेलानि हार निहारत,
बारत ज्यों पुचकारत छौनहिं॥

शब्दार्थ-गई हुती = गई हुई थी; हौं = मैं; रई कहि- रई माँगने के लिए (लकड़ी की बनी हुई रई (मथानी) से दही को बिलोया (मथा) जाता है); भौनहि- भवन को, घर को; बाकी = उसका; जियो – जीवित रहे; जुग लाख करोर – (युगों तक, लाख वर्ष तक, करोड़ वर्ष तक) अर्थात् दीर्घायु हो जात कहो नहिं = वर्णन नहीं किया जा सकता; अंजन = काजल; डिठौनहि = काला टीका (किसी की नजर लगने से बचाने के लिए मस्तिष्क के एक ओर काला टीका लगा दिया जाता है); हमेलानि – गले में धारण किये जाने वाला स्वर्ण अथवा चाँदी का आभूषण; निहारत = देखते हुए; बारत = न्योछावर करते हैं; ज्यों में जैसे ही; पुचकारत = पुचकारते हुए; छौनहिं = बालक को; भोरहि = प्रातः काल ही।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ रसखान द्वारा रचित ‘सवैया’ की

प्रसंग-इस सवैया छन्द में रसखान किसी गोपिका के वात्सल्य का वर्णन करते हैं।

व्याख्या-एक गोपिका अन्य गोपी से कहती है कि मैं आज प्रातः ही अपने घर के लिए बाबा नन्द के घर से ‘रई’ माँगने के लिए गई हुई थी। (तो मैंने यशोदा के बालक को देखा) वह दीर्घायु हो। उस यशोदा के सुख का वर्णन नहीं किया जा सकता अर्थात् उसका सुख अपार है। उसने अपने बालक को तेल लगाया हुआ था, उसकी आँखों में काजल लगाकर उसकी भौहें बना दी थी और उसके माथे पर काला टीका लगा दिया था (जिससे उस सुन्दर बालक को किसी की नजर न लग सके।) मैंने जैसे ही उस कोमलाङ्ग बालक (पुत्र) को पुचकारा तो उस पुचकार के लिए उसके ऊपर मैं अनेक हार और हमेलों को न्यौछावर कर सकती हूँ।

वात्सल्य के पद शब्दकोश

जायो = जन्म देना; दाऊ = बलदाऊ; जुवती – युवती; रई = मथानी-दही बिलोने के काम में आने वाला लकड़ी का औजार; अन्जन = काजल; रिस- क्रोध, गुस्सा; एहि = इसके; ढिंग = समीप, पास; कहि- कहकर; डिठौनहि = काला टीका जो मस्तक के एक ओर लगाया जाता है, किसी की नजर लगने के प्रभाव से बचने के लिए; पुनि-पुनि = बार-बार; हौँ = मैं; छपानी-छिपकर; भौनहि- घर को; हमेलानि गले में धारण किये जाने वाला स्वर्ण अथवा चाँदी का आभूषण; सौं- शपथ लेकर; भावै = अच्छा लगता है; हुती – हुई थी; वाकी = उसका; पुचकारत – पुचकारते हुए।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 17 और भी दूँ प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 17 Aur Bhi Dun Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 17 Aur Bhi Dun Questions and Answers

बोध प्रश्न

Samarpan Kavita Class 7 Question Answer प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) कवि मातृभूमि को क्या-क्या समर्पित करना चाहता है?
उत्तर
कवि मातृभूमि के लिए तन-मन-प्राण सब कुछ समर्पित करना चाहता है। वह अपने मस्तक, गीत तथा रक्त का एक-एक कण भी अपने देश की धरती के लिए अर्पित कर देना चाहता है। उसके मन में उठने वाली कल्पनाएँ तथा प्रश्न तथा सम्पूर्ण आयु (उम्र) भी मातृभूमि के लिए अर्पित करना चाहता है। सम्पूर्ण बाग-बगीचे, उनके फूल आदि मातृभूमि के लिए समर्पित हैं।

(ख) कवि अपने सर्वस्व समर्पण के बाद भी सन्तुष्ट क्यों नहीं है ?
उत्तर
कवि अपनी मातृभूमि की सेवा में सर्वस्व न्योछावर कर देना चाहता है। वह फिर भी सन्तुष्ट नहीं दिखता है। इसका कारण यह है कि वह इस सबके अतिरिक्त भी जो कुछ उसके पास है, उसे भी अर्पित कर देने की कामना करता है। कामनाएँ कभी भी शान्त नहीं हुआ करती।

(ग) कवि क्षमा-याचना क्यों कर रहा है?
उत्तर
कवि अपने गाँव, द्वार-घर-आँगन आदि सभी के प्रति अपने लगाव को छोड़कर मातृभूमि के लिए सर्वस्व प्रदान करना चाहता है। इसलिए वह इन सभी से क्षमा याचना करता है। इनकी अपेक्षा मातृभूमि के प्रति दायित्व महत्वपूर्ण है।

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(घ) कविता का मुख्य सन्देश क्या है ?
उत्तर
कविता का मुख्य सन्देश है कि हम सभी अपनी मातृभूमि के लिए सर्वस्व त्यागकर उसकी सेवा करें। मोहरहित होकर तन-मन-प्राण से मातृभूमि की रक्षा के लिए तैयार रहें।

Aur Bhi Du Hindi Poem Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित भाव कविता की जिन पंक्तियों से प्रकट होते हैं, उन पंक्तियों को लिखिए
(क) मोहमाया के बन्धन को तोड़ना।
(ख) सम्पूर्ण आयु को समर्पण करना।
(ग) बलिदान के लिए तत्परता।
उत्तर
(क) तोड़ता हूँ मोह का बन्धन।
(ख) आयु का क्षण-क्षण समर्पित।
(ग) मन समर्पित, तन समर्पित, और यह जीवन समर्पित। चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी हूँ।

Kavi Mathrubhumi Ke Liye Kya Karna Chahta Hai प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर दीजिए

(क) प्रस्तुत कविता का मुख्य भाव क्या है?
(1) मातृभूमि के प्रति आदर।
(2) मातृभूमि के लिए सर्वस्व समर्पण की चाह।
(3) मातृभूमि की महानता का गुणगान।
(4) मातृभूमि से क्षमा याचना।
उत्तर
(2) मातृभूमि के लिए सर्वस्व समर्पण की चाह।

(ख) कवि अपने जीवन, घर-परिवार और गाँव से क्षमा याचना करता है, क्योंकि वह
(1) इनके प्रति दायित्व निर्वाह नहीं करना चाहता।
(2) इनकी अपेक्षा देश के प्रति दायित्व निर्वाह को महत्वपूर्ण मानता है।
(3) इनके प्रति दायित्व निभाने में स्वयं को असमर्थ पाता है।
(4) इनसे छुटकारा पाना चाहता है।
उत्तर
(2) इनकी अपेक्षा देश के प्रति दायित्व निर्वाह को महत्त्वपूर्ण मानता है।

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भाषा अध्ययन

Kavi Matrabhoomi Ke Liye Kya Karna Chahta Hai प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध उच्चारण कीजिए
ऋण, स्वीकार, माँज, बाँध, शीश, आशीष, तृण।
उत्तर
उल्लिखित शब्दों को बार-बार पढ़िए और विशेष सावधानी से शुद्ध रूप में उच्चारण कीजिए। कठिनता के लिए अपने आचार्य महोदय की सहायता ले सकते हो।

Kabhi Matrabhoomi Ke Liye Kya Karna Chahte The प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण एवं लेखन कीजिए
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 17 और भी दूँ 1
उत्तर
छात्र/छात्राएँ स्वयं करें।

Class 7th Hindi Chapter 17 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए- .
समर्पित, आँगन, ध्वज, आशीष।
उत्तर

  1. मैं अपनी मातृभूमि के लिए सर्वस्व समर्पित करता हूँ।
  2. मेरे आँगन में फलदार पेड़ों के झुरमुट खड़े हैं।
  3. अपने हाथ में राष्ट्रीय ध्वज लिए हुए वीर सैनिक मातृभूमि की रक्षा के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
  4. माँ का आशीष सदैव फलदायक होता है।

Chahta Hun Kis Prakar Ki Kavita Hai प्रश्न 4.
इस कविता से अनुप्रास अलंकार वाली पंक्तियाँ छाँटकर लिखिए।
उत्तर

  1. मन समर्पित, तन समर्पित।
  2. गान अर्पित, प्राण अर्पित, रक्त का कण-कण समर्पित।
  3. शीश पर आशीष की छाया घनेरी।
  4. रक्त का कण-कण समर्पित।
  5. आयु का क्षण-क्षण समर्पित।
  6. नीड़ का तृण-तृण समर्पित।

और भी दूँ कविता का प्रश्न उत्तर प्रश्न 5.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) माँ तुम्हारा ……..
(ख) ……………. फिर भी निवेदन
(ग) थाल में लाऊँ ……….
(घ) कर दया ………वह समर्पण।
उत्तर
(क) ऋण बहुत है, मैं अकिंचन,
(ख) किन्तु इतना कर रहा
(ग) सजाकर भाल जब भी
(घ) स्वीकार लेना।

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 17 प्रश्न 6.
नीचे लिखे शब्दों के पर्यायवाची दी गई वर्ग पहेली से छाँटकर लिखिए
फूल, पृथ्वी, माथा, खून, गृह।
वर्ग पहेली
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 17 और भी दूँ 2
उत्तर
फूल-प्रसून, पुष्प, सुमन । पृथ्वी-वसुधा, धारिणी, धरा, धरती। माथा-मस्तक, भाल, कपाल। खून-रक्त, रुधिर, लहू। गृह-घर, आवास, वास।

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और भी दूँ सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. मन समर्पित, तन समर्पित,
और यह जीवन समर्पित।
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी हूँ।

शब्दार्थ-समर्पित = अर्पित किया हुआ, सौंपा हुआ; तन = शरीर; जीवन = प्राण या जिन्दगी।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ “और भी ढूँ”, नामक कविता से अवतरित हैं। इसके रचयिता ‘रामावतार त्यागी’ हैं।

प्रसंग-कवि अपने प्रिय देश के लिए अपना सर्वस्व त्याग देने को तैयार है।

व्याख्या-कवि कहता है कि हे मेरे देश की धरती! तेरी सेवा के लिए मैं स्वयं तन-मन तथा अपने प्राण (सम्पूर्ण जिन्दगी) अर्पित करता हूँ। इस सब के अलावा दूसरी वस्तुएँ भी यदि मेरे पास है, तो उन्हें भी तेरे लिए अर्पित करने (त्यागने) के लिए तैयार हूँ।

2. माँ तुम्हारा ऋण बहुत है, मैं अकिञ्चन,
किन्तु इतना कर रहा, फिर भी निवेदन।
थाल में लाऊँ सजाकर भाल जब भी,
कर दया स्वीकार लेना वह समर्पण।

गान अर्पित, प्राण अर्पित,
रक्त का कण-कण समर्पित।
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी हूँ।

शब्दार्थ-अकिञ्चन = दीन; भाल = मस्तक; समर्पण = अर्पित की हुई वस्तु; अर्पित = न्योछावर किया हुआ।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि के अनुसार देशभक्त सर्वस्व अर्पित करने के बाद जो भी दूसरी वस्तु यदि उसके पास है तो वह उसे भी देश की सेवा में अर्पित कर देने को तैयार है।

व्याख्या-हे मातृभूमि, मुझ पर तेरे ऋण (कर्ज) का बोझ बहुत है। मैं दीन हूँ (उस कर्ज के बोझ को मैं किस तरह उठा सकूँगा)। फिर भी मैं यह निवेदन कर रहा हूँ कि जब भी अपने इस मस्तक को थाल में सजाकर लेकर आऊँ, तो मेरे इस समर्पण को (सेवा में दी गई इस वस्तु को) स्वीकार करने की कृपा करना। भक्ति भरा मेरा गीत भी तुम्हें अर्पित है, मेरे प्राण भी अर्पित हैं। साथ ही मेरे रक्त की (खून की) एक-एक बूंद भी तुम्हारे लिए अर्पित है। इस प्रकार हे मेरे देश की धरती ! मैं इसके अलावा भी कुछ और अर्पित करना चाहता हूँ।

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3. माँज दो तलवार को, लाओ न देरी,
बाँध दो कसकर, कमर पर ढाल मेरी,
भाल पर मल दो, चरण की धूल थोड़ी,
शीश पर आशीष की छाया घनेरी,

स्वप्न अर्पित, प्रश्न अर्पित,
आयु का क्षण-क्षण समर्पित।
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी हूँ।

शब्दार्थ-भाल = मस्तक; मल दो = लगा दो; आशीष = आशीर्वाद; घनेरी- घनी; स्वप्न- कल्पनाएँ, विचार; आयु = उम्र ; चरण = पैर।

मन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि अपनी मातृभूमि के आशीर्वाद को प्राप्त करके अपनी उम्र के प्रत्येक क्षण को देश की सेवा में अर्पित करना चाहता है।

व्याख्या-हे मातृभूमि-मेरी माँ! बिना किसी देर किए हुए तुम मुझे तलवार (युद्ध के लिए) दे दो। उसको और ढाल को-दोनों ही कसकर कमर में बाँध दो। साथ ही, मेरे मस्तक पर अपने चरणों (पैरों) की थोड़ी-सी धूल लगा दो तथा मेरे सिर पर अपने आशीर्वाद की घनी छाया कर दो (आशीर्वाद दीजिए)। मेरी कल्पनाएँ तथा मेरे प्रश्न सभी तेरी सेवा में अर्पित हैं। यहाँ तक कि मेरी उम्र का प्रत्येक क्षण भी तुम्हारी सेवा में अर्पित है। इस तरह, हे मेरे देश की धरती, मैं तुझे कुछ अन्य भी अर्पित कर देना चाहता हूँ।

4. तोड़ता हूँ मोह का बन्धन, क्षमा दो,
गाँव मेरे, द्वार घर-आँगन क्षमा दो;
आज सीधे हाथ में तलवार दे दो।
और बाएँ हाथ में ध्वज को थमा दो।

ये सुमन लो, यह चमन लो,
नीड़ का तृण-तृण समर्पित,
चाहता हूँ देश की धरती,
तुझे कुछ और भी हूँ।

शब्दार्थ-ध्वज पताका, झण्डा; थमा दो = पकड़ा दो सुमन = फूल; चमन = बगीचा; नीड़ = घोंसला; मोह = प्रेम।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग- कवि अपने देश की सेवा के लिए सम्पूर्ण बन्धनों को समाप्त करके सब कुछ देश की सेवा में अर्पित कर देना चाहता है।

व्याख्या-हे मेरे देश ! तेरे लिए मैं मोह के (प्रेम के) जितने भी बन्धन है, उन सबको तोड़ देना चाहता हूँ। उसके लिए हे मेरे गाँव, तू मुझे क्षमा करना। मेरे घर-आँगन तथा द्वार, तुम सभी मुझे क्षमा करना। आज (अब समय आ गया है तब) तुम सभी मेरे सीधे हाथ में तलवार पकड़ा दो। इस तरह, हे मेरे देश ! ये सभी फूल, तथा बगीचा तथा मेरे घोंसले का तिनका-तिनका भी तेरी सेवा में अर्पित करता हूँ। इस प्रकार, मेरे पास जो भी अन्य वस्तु (यदि मेरे पास है) तो वह भी मैं, हे मेरे देश की धरती ! तेरी सेवा में अर्पित करता हूँ।

और भी दूँ शब्दकोश

समर्पित = त्यागा हुआ, अर्पित किया हुआ निवेदन = प्रार्थना; माँज = धोकर साफ कर दो, युद्ध के लिए; मोह = प्रेम; ध्वज – पताका, झण्डा; ऋण = कर्ज; भाल = मस्तक, माथा;आशीष = आशीर्वाद; सुमन = फूल, पुष्प; नीड़ = घोसा; अकिंचन = दीन; शीश = सिर; घनेरी-घनी; चमन – बगीचा; तृण = तिनका।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 16 नरबदी प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 16 Narbadi Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 16 Narbadi Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 16 MP Board प्रश्न 1.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) नरबदी कौन थी ? वह किसके साथ रहती थी?
उत्तर
मैकल पर्वत के घने जंगलों के एक गाँव में दुग्गन रहता था। नरबदी उसकी बेटी थी। नरबदी अपने पिता के साथ रहती थी।

(ख) पिता के साथ नरबदी कहाँ रहती थी?
उत्तर
नरबदी अपने पिता के साथ जनजातियों के एक गाँव में रहती थी। यह गाँव आठ-दस झोपड़ियों का गाँव था।

(ग) दुग्गन सुबह-सुबह पहाड़ की दिशा में क्यों चल पड़ा?
उत्तर
बरसात आने वाली थी। दुग्गन को झोंपड़ी की मरम्मत के लिए बाँस की जरूरत थी। बाँस लेने के लिए दुग्गन सुबह-सुबह पहाड़ की दिशा में चल पड़ा।

MP Board Solutions

(घ) नरबदी झरना क्यों बन गई?
उत्तर
नरबदी अपनी प्यास के कष्ट को भूल गई। उसकी आँखों के सामने परेशान पिता का चेहरा आ गया। उसकी आँखों से आँसुओं की झड़ी लग गई। वह अपने देवता से मन ही मन प्रार्थना करने लगी कि वे उसके पिता की रक्षा करें, क्योंकि उनका प्यास से बुरा हाल है। तुम मेरे प्राण ले लो, लेकिन मेरे प्यारे बाबा को बचा लो। इसके साथ ही नरबदी वहाँ से अदृश्य हो गयी और झरने के रूप में वहाँ से प्रकट हो गई।

(ङ) लोक कथा के अनुसार नरबदी के कारण किस नदी का जन्म हुआ ?
उत्तर
लोक कथा के अनुसार नरबदी के कारण ‘नर्मदा’ नदी का जन्म अमरकण्टक से हुआ।

MP Board Class 7th Hindi Chapter 16 प्रश्न 2.
निम्नांकित कथनों का आशय स्पष्ट कीजिए

(क) उसकी आँखों के सामने पिता का परेशान चेहरा घूम गया।
आशय-नरबदी को उसके पिता दुग्गन का चेहरा स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था। उसके चेहरे से दुग्गन की परेशानी भी झलक रही थी, क्योंकि वह लगातार ही अपनी प्यासी पुत्री के लिए पानी की तलाश कर रहा था। .

(ख) मैं तुम्हारी प्यास बुझाने के लिए झरना बन गई हूँ।
आशय- नरबदी ने अपने परेशान और प्यासे पिता दुग्णन के लिए जल प्राप्त कराने वाले झरने का रूप धारण कर लिया।

Class 7 Hindi Chapter 16 Question Answer प्रश्न 3.

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) …………. तब घने जंगलों से घिरा था।
(ख) दुग्गन ने उसे ………….की तरह पाला पोसा था।
(ग) दुग्गन के हाथ अपने आप ………….. में उठकर जुड़ गए।
(घ) मैं तुम्हारी प्यास बुझाने के लिए ……… बन गई हूँ।
(ङ) इस जंगल में अब कभी कोई आदमी … से अपनी जान नहीं देगा।
उत्तर
(क) मैकल पर्वत
(ख) माँ
(ग) प्रार्थना
(घ) झरना
(ङ) प्यास।

MP Board Solutions

भाषा अध्ययन

Class 7 Hindi Chapter 16 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के सामने कुछ शब्द लिखे हुए हैं। इनमें प्रत्येक के साथ दो-दो पर्यायवाची शब्द हैं, आप उन्हें छाँटकर लिखिए
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 नरबदी 1

Hindi Class 7 Chapter 16 प्रश्न 2.
निम्नलिखित गद्यांश में यथास्थान विराम चिह्नों का प्रयोग कीजिए
वह मन ही मन बड़े देव को मनाने लगी है बड़े देव मेरे बाबा को बचा लेना उनका प्यास के मारे बुरा हाल है पानी नहीं मिला तो वे मर जाएंगे
उत्तर
वह, मन ही मन, बड़े देव को मनाने लगी है। बड़े देव ! मेरे बाबा को बचा लेना। उनका प्यास के मारे बुरा हाल है। पानी नहीं मिला, तो वे मर जाएँगे।

Class 7 Chapter 16 Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का सही क्रम करके सार्थक वाक्य बनाइए
(क) मुस्कुराने की कोशिश नरबदी की ने।
(ख) चुकी थी थक वह तरह बुरी।
(ग) थी वाली बरसात आने।
(घ) वह हो चिन्तित उठा न नरबदी को वहाँ पाकर।
(ङ) रही थी बह नरबदी।
उत्तर
(क) नरबदी ने मुस्कुराने की कोशिश की।
(ख) वह बुरी तरह थक चुकी थी।
(ग) बरसात आने वाली थी।
(घ) नरबदी को वहाँ न पाकर वह चिन्तित हो उठा।
(ङ) नरबदी बह रही थी।

प्रश्न – दिए गए संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, अव्यय शब्दों से उदाहरण के अनुसार विशेषण बनाइए
(क) संज्ञा-(1) धन, (2) सुख, (3) ज्ञान, (4) दान, (5) बल, (6) गुण।
उत्तर
विशेषण-(1) धनी, (2) सुखी, (3) ज्ञानी, (4) दानी, (5) बली, (6) गुणी।

(ख) सर्वनाम-(1) यह, (2) वह, (3) कौन, (4) जो।
उत्तर
विशेषण-(1) ऐसा, (2) वैसा, (3) कैसा, (4) जैसा।

(ग) क्रिया-(1) पढ़ना, (2) लड़ना, (3) झगड़ना, (4) बेचना।
उत्तर
विशेषण-(1) पढ़ाकू, (2) लड़ाकू, (3) झगड़ालू, (4) विकबाल।

(घ) अव्यय-(1) आगे, (2) पीछे, (3) बाहर, (4) ऊपर।
उत्तर
विशेषण-(1) अगला, (2) पिछला, (3) बाहरी, (4) ऊपरी।

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Hindi Class 7 Ch 16 प्रश्न 5.
नीचे बनी तालिकाओं में दिए गए उदाहरणों के अनुसार रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 नरबदी 2

नरबदी परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

1. मैकल के शिखर पर घने-ऊँचे पेड़ तो थे, लेकिन झरने की कोई आवाज सुनाई नहीं दे रही थी, दुग्गन भटकता रहा। उसका भी प्यास के मारे बुरा हाल था। वह सोच रहा था-जब प्यास के कारण मेरी यह दशा हैतो नहीं जान नरबदी का क्या हाल होगा? उसने सिर उठाकर आसमान की तरफ देखा। सूरज तमतमाया हुआ था। दुग्गन के हाथ अपने आप प्रार्थना में उठकर जुड़ गए। वह लगभग रुआंसा होकर गिड़गिड़ाया, “हे प्रभु ! मेरी लाडली की रक्षा कर। वह बिना माँ की बच्ची है। उसे कुछ हो गया तो मैं जीवित नहीं रह पाऊँगा।”

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘नरबदी’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस लोककथा के लेखक लक्ष्मीनारायण ‘पयोधि हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत गोंडी लोक कथा में लेखक ने नर्मदा नदी के उद्गम की कल्पना प्रस्तुत की है।

व्याख्या-मैकल पर्वत (अमरकण्टक पहाड़) की सबसे ऊँची चोटी पर बहुत ऊँचे-ऊँचे पेड़ थे। वहाँ कोई झरना नहीं था, क्योंकि झरने के बहने की आवाज सुनाई नहीं पड़ रही थी। दुग्गन अपनी प्यासी बेटी नरबदी के लिए पानी लाने के लिए चारों और भटकता रहा। वह भी प्यास से पीड़ित था। उसने विचार किया कि जब प्यास से मेरी यह दशा है तो अति छोटी-सी मेरी पुत्री नरबदी का हाल तो प्यास से बहुत बुरा हो रहा होगा। उसने आसमान की ओर देखा। सूरज अपनी रोशनी से तप रहा था। उसने हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना की। वह प्रार्थना करते समय रो रहा था। दयनीय अवस्था में कहने लगा “हे ईश्वर ! तू, मेरी प्यारी पुत्री नरबदी की रक्षा करना। वह बिना माँ की बेटी है। उसको कुछ भी नहीं होना चाहिए, नहीं तो मैं अपना जीवन समाप्त कर दूंगा।”

नरबदी शब्दकोश

शिखर = चोटी; तूम्बा = विशेष प्रकार की लौकी से बना पात्र, बर्तन; लस्त-पस्त = थका हारा ; प्रतिध्वनि = गूंज;झुरमुट = झाड़ियों का समूह।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 21 माँ! कह एक कहानी प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 21 Maa Keh Ek Kahani Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 21 Maa Keh Ek Kahani Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 21 Question Answer प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) पुत्र अपनी माँ से किस बात की हठ कर रहा है?
उत्तर
पुत्र अपनी माँ से हठपूर्वक कह रहा है कि वह उसे किसी राजा या रानी की कहानी सुनायें।

(ख) बड़े सबेरे उपवन में कौन भ्रमण कर रहा था? उत्तर-उपवन में बड़े ही सबेरे सिद्धार्थ भ्रमण कर रहा था। (ग) उपवन में सहसा हंस नीचे क्यों गिरा?
उत्तर
उपवन में सहसा ही हंस गिर पड़ा, क्योंकि शिकारी ने उसे बाण मारा। तेज बाण के प्रहार से उसका पंख आहत हो गया और वह घायल होकर गिर पड़ा।

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(घ) सिद्धार्थ और आखेटक के बीच क्या विवाद हुआ?
उत्तर
सिद्धार्थ और आखेटक के बीच यह विवाद हुआ कि सिद्धार्थ उस घायल हंस पर अपना अधिकार बता रहा था और उधर आखेटक भी कहता है कि इस हंस पर मेरा अधिकार है क्योंकि मैंने इसे मारा है। इस तरह रक्षक और भक्षक के मध्य अधिकार का विवाद हुआ।

(ङ) माँ ने राहुल से किस विवाद का निर्णय करने को कहा ?
उत्तर
माँ ने राहुल से उस विवाद का निर्णय करने को कहा जो रक्षक (उसके पिता सिद्धार्थ) और आखेटक के मध्य घायल हुए हंस पर अधिकार किसका हो सकता है को लेकर था।

(च) सदा किसकी विजय होती है?
उत्तर
सत्य एवं न्याय के मार्ग पर चलने वाले दयावान व्यक्ति की सदा विजय होती है।

Class 7 Hindi Chapter 21 प्रश्न 2.
निम्नलिखित पंक्तियों को पूरा कीजिए

(क) वर्ण वर्ण के फूल खिले थे
……………..
……………..
लहराता था पानी।

(ख) कोई निरपराध को मारे
………………….
…………………..
न्याय दया का दानी।
उत्तर
(क) झलमलकर हिम-बिन्दु झिले थे।
हलके झोंके हिले-मिले थे।

(ख) तो क्यों अन्य न उसे उबारे,
रक्षक को भक्षक पर वारे;

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Ma Kah Ek Kahani Question Answer प्रश्न 3.
निम्नलिखित पंक्तियों के भाव स्पष्ट कीजिए

(क) हुई पक्ष की हानी
(ख) जहाँ सुरभि मनमानी
(ग) लक्ष्य सिद्धि का मानी
(घ) न्याय दया का दानी।
उत्तर
(क) तेज बाण का प्रहार जब आखेटक ने किया तो उस हंस का एक पंख कट गया।
(ख) उस उद्यान में सुगन्धित हवा अपने मनमाने ढंग से – बह रही थी।
(ग) आखेटक को अपना अचूक निशाना लगाने से मिली सफलता पर घमण्ड था।
(घ) राजा ने दया युक्त न्याय प्रदान किया।

Maa Kah Ek Kahani Poem Question Answer प्रश्न 4.
किसने किससे कहा

(क) “माँ ! कह एक कहानी।”
(ख) “तू है हठी मान-धन मेरे।”
(ग) “लक्ष्य सिद्धि का मानी, कोमल कठिन कहानी।”
(घ) “सुन लूँ तेरी बानी।”
उत्तर
(क) राहुल ने अपनी माँ यशोधरा से कहा।
(ख) यशोधरा ने राहुल से कहा।
(ग) राहुल ने यशोधरा से कहा।
(घ) यशोधरा ने राहुल से कहा।

भाषा अध्ययन

Maa Kah Ek Kahani Question Answer प्रश्न 1.
‘ई’ प्रत्यय लगाकर निम्नलिखित शब्दों से नए शब्द बनाइए
दान, डाल, ज्ञान, ध्यान, ठान, पान, भार, ताल।
उत्तर
दानी, डाली, ज्ञानी, ध्यानी, ठानी, पानी, भारी, ताली।

Maa Keh Ek Kahani Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
(क) राजा, (ख) न्याय, (ग) मान, (घ) जन्म, (ङ) कोमल।
उत्तर
(क) रानी,(ख) अन्याय, (ग) अपमान,(घ) मरण, (ङ) कठोर।

Ma Kah Ek Kahani Summary In Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए
(क) उपवन, (ख) पानी, (ग) खग, (घ) शर।
उत्तर
(क) उद्यान, (ख) जल, (ग) पक्षी, (घ) बाण।

MP Board Solutions

Maa Keh Ek Kahani Summary प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए
(क) वानी, (ख) सूरज, (ग) घी, (घ) कान, (ङ) हाथ, (च) जीभ।
उत्तर
(क) वाणी, (ख) सूर्य, (ग) घृत, (घ) कर्ण, (छ) हस्त, (च) जिह्वा।

माँ! कह एक कहानी सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. माँ !”कह एक कहानी।
राजा था या रानी।”
माँ !”कह एक कहानी।”
“तू है हठी मान-धन मेरे,
सुन उपवन में बड़े सबेरे,
तात्, भ्रमण करते थे तेरे,
जहाँ सुरभि मनमानी।”
“जहाँ सुरभि मनमानी”
हाँ! माँ यही कहानी॥

शब्दार्थ-हठी = जिद्दी; मान-धन = सम्मान की पूँजी; उपवन = बगीचे में बड़े सवेरे = बहुत जल्दी सुबह; तात् = पिता; सुरभि = सुगन्धित हवा;  मनमानी = अपनी इच्छा के अनुसार।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश ‘माँ ! कह एक कहानी’ नामक कविता से लिया गया है। इसके रचयिता राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त हैं।

प्रसंग-सिद्धार्थ वन को निकल जाते हैं। उनका पुत्र राहुल अपनी माँ यशोधरा से कहानी बताने के लिए कहता है।

व्याख्या-यशोधरा से राहुल कहते हैं कि हे माँ तू मुझे एक कहानी कह। यह कहानी किसी राजा अथवा रानी की हो। इस तरह हे माँ तू एक कहानी कह। यशोधरा कहती है कि हे मेरे पुत्र ! तू बड़ा जिद्दी है। तू ही मेरे सम्मान की पूँजी है। तू अब कहानी सुन ! तेरे पिता बहुत प्रात: बगीचे में घूमते रहते थे। वहाँ, उस उपवन में मन के अनुकूल सुगन्धित हवा बहती थी। राहुल कहते हैं कि हाँ, मेरी माँ ! मन को अच्छी लगने वाली सुगन्धित हवा बह रही थी। बस, हाँ ! यही कहानी ! तू बता।

2. “वर्ण-वर्ण के फूल खिले थे,
झलमलकर हिम बिन्दु झिले थे,
हलके झोंके हिले मिले थे,
लहराता था पानी।”
“लहराता था पानी।
‘हाँ, हाँ यही कहानी।”

शब्दार्थ-वर्ण-वर्ण के – रंग-बिरंगे; हिम बिन्दु = जमी हुई ओस, पाला, तुषार; झलमलकर = झिलमिलाते हुए; झिले थे = चमक रहे थे; हिले मिले थे = (हवा के झोंके) ओस की बूंदों से मिश्रित थे;
लहराता था पानी = पानी लहरा रहा था।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-यशोधरा कहानी के रूप में उस बगीचे की सुन्दरता का वर्णन करती है जिसमें सिद्धार्थ घूमने जाते थे।

व्याख्या – उस बगीचे में रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। जमी हुई ओस की बूंदै उषाकालीन किरणों के स्पर्श से झिलमिला रही थीं। प्रातः कालीन हवा के हल्के झोंके ओस बिन्दुओं से मिश्रित होकर बह रहे थे। हवा के इन कोमल झोंकों से तालाब के पानी में लहरें उठ रही थीं। राहुल कहने लगा कि हे माँ ! यही कहानी ! तू कह।

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3. “गाते थे खग कल-कल स्वर से,
सहसा एक हंस ऊपर से,
गिरा बिद्ध होकर खर-शर से,
हुई पक्ष की हानी।”
“हुई पक्ष की हानी।
करुणा भरी कहानी।”

शब्दार्थ-खग = पक्षी; कल-कल = मधुर; सहसा = अचानक; खर = तेज; शर = बाण; बिद्ध होकर = (बाण से) घायल होकर; गिरा = गिर पड़ा; पक्ष की पंख की; हानीहानि; करुणा = दयालुता।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-शिकारी के बाण से घायल एक हंस नीचे गिर पड़ा। इसको बड़े ही मार्मिक ढंग से वर्णित किया है।

व्याख्या – उस प्रातः काल में आकाश में उड़ते हुए पक्षी अत्यन्त मधुर स्वर में कूज रहे थे। उस समय, अचानक ही ऊपर से एक हंस नीचे आ गिरा। वह हंस पैने बाण से बिंध गया था। उसकी एक पंख भी कट गया था। इसे सुनते ही बालक राहुल कह उठा-“उसकी एक पंख कट गई ! यह कहानी तो करुणा (दयालुता) से भरी हुई है।”

4. “चौंक उन्होंने उसे उठाया,
नया जन्म सा उसने पाया,
इतने में आखेटक आया,
लक्ष्य सिद्धि का मानी।”
“लक्ष्य सिद्धि का मानी।
कोमल कठिन कहानी।”

शब्दार्थ-चौंक = अचम्भित होकर; उन्होंने – सिद्धार्थ ने; सा – मानो; आखेटक- शिकारी लक्ष्यसिद्धि- निशाना साधने में मिली सफलता पर; मानी = घमण्ड करने वाला; कोमल कठिन = कोमल और कठोर भाव से परिपूर्ण।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-सिद्धार्थ ने उस घायल हंस को उठा लिया। इसी बीच शिकारी के आ जाने की बात यशोधरा बालक राहुल को बताती है।

व्याख्या-अचम्भित हुए सिद्धार्थ ने घायल हंस पक्षी को (अपनी गोद में) उठा लिया। मानो उसने फिर से नया जन्म प्राप्त किया हो। इसी बीच वह शिकारी वहाँ आ गया जिसने उसे घायल किया था। उसे अपने निशाना लगाने की सफलता पर घमण्ड था। राहुलं कहने लगा कि उसे अपने लक्ष्य सिद्धि (निशाना लगाने की सफलता) पर अभिमान था। निश्चय ही यह कहानी तो कोमल भी है और अति कठोर भी।

5. “माँगा उसने आहत पक्षी,
तेरे तात् किन्तु थे रक्षी,
तब उसने जो था खगभक्षी,
हठ करने की ठानी।”
“हठ करने की ठानी।
अब बढ़ चली कहानी।”

शब्दार्थ-आहत = घायल; तेरे तात् = तेरे पिता; रक्षी – रक्षक या रक्षा करने वाला; खगभक्षी = पक्षियों को खाने वाला;
हठ करने की जिद्द करने की ठानी = निश्चय कर लिया।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-शिकारी ने जिद्दपूर्वक उस घायल पक्षी को माँगा। इसका वर्णन किया जा रहा है।

व्याख्या-उस शिकारी ने घायल हुए पक्षी की माँग की जबकि तेरे पिता उसके रक्षक थे अर्थात् उसकी रक्षा की (वे उसको देना नहीं चाहते थे) तब उसने उस घायल हुए पक्षी को हठपूर्वक प्राप्त करने का निश्चय कर लिया था, क्योंकि वह तो पक्षियों को खाने वाला था। राहुल कहने लगा-“ऐं ! उसने उस घायल पक्षी को रक्षक से हठपूर्वक प्राप्त करने का निश्चय कर लिया। अब तो यह कहानी बहुत बढ़ चली है।”

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6. “हुआ विवाद सदय निर्दय में,
उभय आग्रही थे स्व विषय में,
गई बात तब न्यायालय में,
सुनी सभी ने जानी।”
“सुनी सभी ने जानी।
व्यापक हुई कहानी।”

शब्दार्थ-विवाद = वाद-विवाद: सदय = निर्दय में = दयावान में और दया से रहित व्यक्ति में; उभय = दोनों ही; आग्रही = आग्रह करने वाले, अडिग रहने वाले स्व विषय में = अपने विषय में; व्यापक हुई = फैल गई।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-रक्षक और भक्षक के मध्य विवाद बढ़ा तो इस विवाद को न्यायालय में ले जाया गया।

व्याख्या-दयावान सिद्धार्थ और निर्दयी शिकारी के बीच विवाद बढ़ने लगा। दोनों ही अपने-अपने विषय पर अडिग थे। तब यह विवाद न्यायालय में चला गया। सभी ने इस विवाद के बारे में सुना और जान लिया। राहुल ने इसी विषय को दुहराते हुए कहा कि तब तो यह कहानी (बात/समाचार) सभी जगह फैल गयी होगी।

7. “राहुल तू निर्णय कर इसका,
न्याय पक्ष लेता है किसका,
कह दे निर्भय जय हो जिसका,
सुन लूँ तेरी बानी।”
“सुन लूं तेरी बानी।
माँ मेरी क्या बानी।”

शब्दार्थ-निर्णय = हल, समाधान निर्भय = निडर होकर; बानी = बोली, वचन, कथन।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

सन्दर्भ-इस घटना के निर्णय के विषय में यशोधरा राहुल से पूछती है।

व्याख्या-यशोधरा कहती है कि हे राहुल तू ही इस घटना का निर्णय करके बता कि न्याय किसका पक्ष लिया करता है-रक्षक का या भक्षक का। तू बिना किसी भय के ही कह दे कि इस विवाद में किसकी विजय होगी। उस विषय में तेरी बोली मैं सुन लेना चाहती हूँ। राहुल कहने लगा कि तेरी वाणी मैं (यशोधरा) सुन लूँ, इस विषय में मेरी वाणी (मेरी राय) क्या हो सकती है।

8. “कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य न उसे उबारे,
रक्षक को भक्षक पर वारे,
न्याय दया का दानी।”
“न्याय दया का दानी।
तूने गुनी कहानी।”

शब्दार्थ-निरपराध = अपराध न करने वाले को; उबारे = रक्षा करे; वारे = निछावर किया जा सकता है; दानी = देने वाला; गुनी = समझ ली।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-रक्षक ही वस्तुत: भक्षक से बढ़कर होता है।

व्याख्या-यशोधरा कहानी को अन्त तक ले जाती हुई : कहती है कि जब कोई व्यक्ति किसी निरपराध (निर्दोष) को मार रहा हो, तो कोई अन्य व्यक्ति उसके बचाव में क्यों नहीं आयेगा। अर्थात् उसकी रक्षा अवश्य ही करेगा। इस तरह ऐसे रक्षक के ऊपर अनेक भक्षकों को निछावर किया जा सकता है। – अर्थात् भक्षक से रक्षक अच्छा (श्रेष्ठ) होता है। दयापूर्ण न्याय देने वाला भी श्रेष्ठ होता है। राहुल ने यह सब सुना कि दयापूर्ण न्याय श्रेष्ठ होता है। तब उसकी माँ यशोधरा कहने लगी कि अब तो निश्चय ही तूने कहानी के वास्तविक अर्थ को ठीक तरह से समझ लिया है।

माँ! कह एक कहानी शब्दकोश

हठी = जिद्दी; उपवन = बगीचा; हिमबिन्दु = जमी हुई ओस की बूंदें: शर = बाण; रक्षी = रक्षक, रक्षा करने वाला; व्यापक = चारों ओर फैल जाना, विस्तृत; निर्भय = निडर; उबारे = बचाना, रक्षा करना; मान-धन = सम्मान की पूँजी; तात् = पिता; आखेटक = शिकारी पक्ष = पंख; खग = पक्षी;
सदय = दयावान; निरपराध = अपराध से रहित सुरभि = सुगन्धित हवा; विद्ध-विध कर, घायल होकर, आहत = घायल होना, चुटैल होकर, उभय = दोनों, निर्दय- दयाहीन, आग्रही = अडिग रहने, अड़े रहना।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 4 दो कविताएँ प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 4 Do Kavitayen Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 4 Do Kavitayen Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 4 Do Kavita प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

(क) ‘मेघ बजने’ से कवि का क्या आशय है ?
उत्तर-
‘मेघ बजने’ से कवि का आशय बादलों के तेज आवाज के साथ गरजने से है।

(ख) ‘पंक’ किस प्रकार से हरिचन्दन लगने लगता है ?
उत्तर-
बरसात में सब ओर पानी भर जाता है जिससे मिट्टी कीचड़ का रूप धारण कर लेती है और तब वह हरिचन्दन सी दिखाई देती है।

(ग) वर्षा के आगमन से क्या-क्या परिवर्तन होने लगते हैं ?
उत्तर-
वर्षा के आगमन व बिजली चमकने से मेंढक टर्र-टर्र करने लगते हैं, पृथ्वी साफ-स्वच्छ हो जाती है, मिट्टी-पानी के मिलने से बनी कीचड़ भगवान के चन्दन जैसी लगती है जिससे किसान अपने हलों के स्वागत में तिलक लगाते हैं।

(घ) ‘कदम्ब’ किसके समान झूलता दिखाई दे रहा है ?
उत्तर-
कदम्ब गेंद के समान झूलता दिखाई दे रहा है।

(ङ) धरती का हृदय किस प्रकार धुला लगने लगा है ?
उत्तर-
धूल व मिट्टी से अटी पड़ी पृथ्वी पर जब बरसात ‘ की बूंदें पड़ती हैं, तो सारी गन्दगी साफ हो जाती है और धरती – स्वच्छ दिखाई देने लगती है।

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MP Board Class 7th Hindi Chapter 4 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
(क) ……………………….” का कण्ठ खुला।
(ख) धरती का ………………………. धुला।
(ग) ………………………. मेघ बजे।
उत्तर-
(क) दादुर,
(ख) हृदय,
(ग) धिन-धिन-धा धमक-धमक।

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 4 प्रश्न 3.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए
(क) हल का है अभिनन्दन।
(ख) “टहनी-टहनी में कन्दुक सम झूले कदम्ब”
उत्तर-
पद्यांशों की व्याख्या देखें।

भाषा अध्ययन

Class 7 Hindi Chapter 4 Mp Board प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के तुकान्त शब्द लिखिए
उत्तर-
चन्दन – वन्दन;
चमक – दमक;
रीता – बीता;
बरस – तरस।

MP Board Class 7 Hindi Chapter 4 प्रश्न 2.
धिन-धिन शब्द युग्म में ध्वन्यात्मकता है। इसी प्रकार के अन्य ध्वन्यात्मक शब्द लिखिए।
उत्तर-
धमक-धमक, टहनी-टहनी।

Class 7th Hindi Chapter 4 Mp Board प्रश्न 3.
इस कविता की जिन पंक्तियों में अनुप्रास अलंकार है, उन्हें छाँटकर लिखिए
उत्तर-
(क) “धिन-धिन-धा धमक-धमक”
(ख) “दामिनी यह गयी दमक”
(ग) “टहनी-टहनी में कन्दुक सम झूले कदम्ब”
(घ) “फूले कदम्ब, फूले कदम्ब।”

Class 7th Hindi Chapter 4 Do Kavitayen प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों में से प्रयुक्त उपसर्ग को अलग कीजिए-
अभिनन्दन, अभिवादन, विराग, प्रवचन, अभियोग, वियोग, प्रयोग।
उत्तर-
अभि, अभि, वि, प्र, अभि, वि, प्र।

Class 7 Hindi Bhasha Bharti Chapter 4 प्रश्न 5.
सही विकल्प चुनिए
(क) कल सरिता ……….. समारोह में गई थी।
(1) अभिवन्दन
(2) अभिवादन
(3) अभिनन्दन
(4) अभिचन्दन।
उत्तर-
(3) अभिनन्दन,

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(ख) लिखाई, ललचाई, पढ़ाई इन शब्दों में प्रत्यय ……………………….” है।
(1) खाई
(2) आई
(3) अई
उत्तर-
(2) आई।

दो कविताएँ सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1. मेघ बजे
धिन-धिन-धा धमक-धमक
मेघ बजे
दामिनी यह गयी दमक
मेघ बजे दादुर का कंठ खुला
मेघ बजे
धरती का हृदय धुला
मेघ बजे
पंक बना हरिचन्दन
मेघ बजे
हल का है अभिनन्दन
मेघ बजे।
धिन-धिन

शब्दार्थ-मेघ = बादल; दामिनी = बिजली; दादुर = मेंढक; कंठ = गला; पंक = कीचड़; अभिनन्दन = सम्मान।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा भारती’ के ‘दो कविताएँ’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस कविता का शीर्षक है-‘मेघ बजे’ तथा इसके रचयिता सुप्रसिद्ध कवि नागार्जुन हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने बादलों के घिर आने एवं। वर्षाकाल का मनोहारी वर्णन किया है।

व्याख्या-तेज गर्मी व लू के पश्चात् मौसम में आने वाले। परिवर्तन के संकेत मिल चुके हैं। आसमान में अपने सिर पर। जल का अथाह भण्डार रखे बादल घुमड़-घुमड़कर घिरने लगे हैं। बादलों की गड़गड़ाहट से पृथ्वी का प्रत्येक जीव-जन्तु व वनस्पति रोमांचित है। बादलों के झरोखों में से रह-रहकर। बिजली की चमक दिख रही है। बादलों के यूँ घिरने और वर्षा

के आगमन की प्रतीक्षा में तालाबों में मेंढक टर्र-टर्र करने लगे हैं। बरसात के होने से गर्मी से व्याकुल और गंदली हुई धरा भी। सन्तुष्ट और साफ हो गयी है। वर्षा के कारण उत्पन्न हुई धरती की कीचड़ भी हरिचन्दन के समान हो गई है जिससे किसानों। ने अपने हल के स्वागत का तिलक लगाया है। बादल गर्जना करते हुए धिन-धिन-धा की विशेष संगीत-ध्वनि उत्पन्न कर रहे हैं। वास्तव में, बादलों के यूँ गरजने-बरसने से प्रकृति और भी अधिक मनोहारी हो गयी है।

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♦ फूले कदम्ब

2. फूले कदम्ब
टहनी-टहनी में कन्दुक सम झूले कदम्ब
फूले कदम्ब।
सावन बीता
बादल का कोप नहीं रीता
जाने कब से वो बरस रहा
ललचाई आँखों से नाहक
जाने कब से तू तरस रहा
मन कहता है, छू ले कदम्ब
फूले कदम्ब फूले कदम्ब।

शब्दार्थ-कदम्ब = एक वृक्ष; कन्दक = गेंद; कोप = क्रोध; रीता = खाली; नाहक = अधिकार रहित; तरस = पाने की ललक।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा भारती’ के दो कविताएँ नामक पाठ से ली गई हैं। इस कविता का नाम है ‘फूले कदम्ब’ तथा इसके रचयिता सुप्रसिद्ध कवि नागार्जुन हैं।

प्रसंग-इन पंक्तियों में बरसात के मौसम में प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-कवि कहता है कि वर्षाकाल में जीव-जन्तुओं के साथ-साथ वनस्पतियों में भी मानो नई जान आ गयी है। कदम्ब परिवर्तित मौसम में मदमस्त हो फलने-फूलने लगा है। वृक्ष की असंख्य शाखाओं के हिलने से ऐसा प्रतीत होता है मानो कदम्ब का पेड़ एक गेंद के समान झूल रहा है। अब सावन का माह भी गुजर चुका है, किन्तु ऐसा लगता है कि बादल का गुस्सा अभी भी थमा नहीं है। वह लगातार अपनी पूरी शक्ति से अब भी जल-वर्षा के लिए तैयार खड़ा है।

कवि आगे कहता है कि तू (बादल) बिना किसी अधिकार के, लालच भरी आँखों से जाने कब से उसे (कदम्ब) देखने के लिए तरस रहा है। तेरा मन कहता है कि तू कदम्ब को स्पर्श करके अपनी इच्छा को पूर्ण कर ले। कदम्ब तो फल-फूल रहा है।

दो कविताएँ शब्दकोश

तरस = अभाव का अनुभव, दया पाने की ललक; कन्दुक = गेंद; टहनी = डाली, छोटी शाखा; कोप = क्रोध, गुस्सा; रीता = रिक्त, खाली; ललचाई = लालच से भरी; कदम्ब = एक पेड़; नाहक = बिना हक के, अधिकार रहित; दामिनी = बिजली; दादुर = मेंढक; कण्ठ = गला; पंक = कीचड़; अभिनन्दन = सम्मान; दमक = चमक, कौंध; मेघ = बादल।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 6 राखी का मूल्य प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 6 Rakhi Ka Mulya Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 6 Rakhi Ka Mulya Questions and Answers

बोध प्रश्न

Class 7 Hindi Chapter 6 Rakhi Ka Mulya प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए
(क) कर्मवती कौन थी?
उत्तर
कर्मवती मेवाड़ की महारानी थी।

(ख) कर्मवती ने वीरों से कौन-सी प्रतिज्ञा करने को कहा?
उत्तर
कर्मवती ने वीरों से मरते दम तक मेवाड़ की पताका को झुकने न देने की प्रतिज्ञा करने को कहा।

(ग) रानी कर्मवती ने हुमायूँ को राखी क्यों भेजी ?
उत्तर
रानी कर्मवती ने हुमायूँ से बैरभाव समाप्त कर उसे भाई बनाने के लिए राखी भेजी।

(घ) राखी पाकर हुमायूँ ने क्या निर्णय लिया ?
उत्तर
राखी पाकर हुमायूँ ने मेवाड़ की रक्षा के लिए अपनी सेना भेजने का सेनापति को आदेश दिया।

(ङ) हमारे देश में राखी का क्या महत्व है ?
उत्तर
हमारे देश में राखी को भाई-बहन के स्नेह बन्धन का प्रतीक माना गया है। सुरक्षा सूत्र को पहनकर भाई, बहन की रक्षा का संकल्प करता है।

Rakhi Ka Mulya Class 7 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित पंक्तियों का अर्थ अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए

(क) जिन्हें प्राण देने का चाव हो, वे ही ये राखियाँ स्वीकार करें।
(ख) राखी वह शीतल प्रलेप है, जो सारे घाव भर देती
(ग) बहन का रिश्ता दुनिया के सारे सुखों, दौलतों, ताकतों और सल्तनतों से बढ़कर है।
उत्तर
(क) रानी कर्मवती मेवाड़ के वीर सपूतों को मेवाड़ की रक्षा के लिए ललकारते हुए राखियाँ आगे बढ़ाती है और कहती है कि वे ही लोग राखियों को लें जो देश-रक्षा के यज्ञ में स्वयं की आहुति देने को तत्पर हों।
(ख) व
(ग) गद्यांश 3 व 4 की व्याख्या देखें।

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MP Board Class 7th Hindi Chapter 6 प्रश्न 3.
सही उत्तर चुनकर लिखिए

(क) इस पाठ का मुख्य उद्देश्य है
(1) राजपूतों के बारे में बताना।
(2) बहन द्वारा भाई को राखी बांधना।
(3) मुसीबत के समय बहन की मदद न करना।
(4) सांस्कृतिक एवं साम्प्रदायिक सदभावना का विकास करना।
उत्तर
(4) सांस्कृतिक एवं साम्प्रदायिक सदभावना का विकास करना।

(ख) कर्मवती कहाँ की रानी थी?
(1) झाँसी
(2) कालपी
(3) मेवाड़
(4) इन्दौर।
उत्तर
(3) मेवाड़।

भाषा अध्ययन

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 6 प्रश्न 1.
‘भ्रातृ’ शब्द तथा ‘त्व’ प्रत्यय मिलाकर ‘भ्रातृत्व’ बना है। इसी प्रकार निम्नलिखित तालिका के शब्दों में ‘त्व’ प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए
पितृ, मातृ, लघु, गुरु, मनुष्य, प्रभु।
उत्तर
पितृ + त्व- पितृत्व; मातृ + त्व- मातृत्व;
लघु + त्व-लघुत्व; गुरु + त्व = गुरुत्व;
मनुष्य + त्व= मनुष्यत्व, प्रभु + त्व = प्रभुत्व।

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Class 7 Hindi Chapter 6 Mp Board प्रश्न 2.
निम्नलिखित सामासिक पदों का विग्रह कीजिए
रणभूमि, राजपुत्र, देशभक्ति, रसोईघर, देशनिकाला, सेनापति।
उत्तर
रणभूमि = रण की भूमि
राजपुत्र = राजा का पुत्र
देशभक्ति = देश की भक्ति
रसोईघर = रसोई का घर
देशनिकाला = देश से निकाला
सेनापति = सेना का पति।

MP Board Class 7 Hindi Chapter 6 प्रश्न 3.
पाँचों प्रकार के योजक चिह्नों के दो-दो उदाहरण लिखिए
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 6 राखी का मूल्य 1

Class 7 Hindi Rakhi Ka Mulya Question Answer प्रश्न 4.
इस पाठ के चारों प्रकार के (और के प्रयोग वाले) वाक्य छाँटकर लिखिए।
उत्तर
(क) जाओ रणभूमि तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है और बहनो, तुम घर जाकर वीरव्रत की तैयारी करो। (उपवाक्य योजक)
(ख) हम हँसते-हँसते मरेंगे और बहुतों को मारकर मरेंगे। (उपवाक्य योजक)
(ग) किन्तु और भी तो बाधाएँ हैं। (विशेषण)
(घ) इस विकट अवसर पर मेवाड़, की रक्षा का और कोई उपाय है भी तो नहीं। (विशेषण)
(ङ) भ्रातृत्व और मनुष्यत्व पर विश्वास करके हुमायूँ की परीक्षा ली जाए। (शब्द योजक)
(च) लीजिए यह राखी और यह पत्र। (शब्द योजक)
(छ) हम भी देखेंगे कि कौन कितने पानी में है ? और यह भी प्रकट हो जाएगा कि एक राजपूतानी की राखी में कितनी ताकत है?
(उपवाक्य योजक)
(ज) मेवाड़ की रानी कर्मवती ने कुछ और सोचा। (क्रिया विशेषण)

Class 7th Hindi Chapter 6 Rakhi Ka Mulya प्रश्न 5.
‘तो’ के प्रयोग वाले वाक्य पाठ में से छाँटकर लिखिए।
उत्तर
विद्यार्थी स्वयं ऐसे वाक्यों को छाँटकर लिखें।

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Class 7th Hindi Chapter 6 Mp Board प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों के बहुवचन लिखिए
थाली, जाली, भाई, दुश्मन, गाड़ी, साड़ी, धागा।
उत्तर
शब्द – बहुवचन
थाली – थालियाँ
जाली – जालियाँ
भाई – भाइयों
दुश्मन – दुश्मनों
गाड़ी – गाड़ियाँ
साड़ी – साड़ियाँ
धागा – धागे

Rakhi Ka Mulya Question Answer Class 7 प्रश्न 7.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करते हुए अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए
हँसते-हँसते प्राण देना, आग उगलना, प्राण कॉपना, खौफ खाना, जादू का पिटारा,
आग में कूदना, घाव भरना, आँख उठाना, कयामत का पैगाम, तिरछी नजर करना।
उत्तर
(क) हँसते-हँसते प्राण देना-सदैव बलिदान हेतु तत्पर रहना।
वाक्य प्रयोग-मेवाड़ की रक्षा के लिए वीर राजपूतों ने हँसते-हँसते अपने प्राण दे दिये।

(ख) आग उगलना-बुराई करना।
वाक्य प्रयोग-पाकिस्तान व्यर्थ ही भारत के विरुद्ध आग – उगलता रहता है।

(ग) प्राण काँपना-अत्यधिक डर जाना।
वाक्य प्रयोग-तूफान की तीव्रगति को देख नगरवासियों के प्राण काँप गये।

(घ) खौफ खाना-डरना।
वाक्य प्रयोग-चन्द्रशेखर आजाद के व्यक्तित्व से अंग्रेज भी खौफ खाते थे।

(ङ) जादू का पिटारा-करामात की थैली।
वाक्य प्रयोग-शिक्षक के पास कोई जादू का पिटारा तो है नहीं जो उसे खोले और विद्यार्थी बिना पढ़े परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाए।

(च) आग में कूदना-कठिन रास्ता चुनना।
वाक्य प्रयोग-कानून के विरुद्ध कार्य करना आग में कूदने के समान है।

(छ) घाव भरना-दुःख कम होना।
वाक्य प्रयोग-जहाँ तक सम्भव हो हमें दूसरों के घाव । भरने चाहिए।

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(ज) आँख उठाना-चुनौती देना।
वाक्य प्रयोग-रानी लम्मीबाई ने अंग्रेजों के समक्ष आँख उठाने का साहस किया।

(झ) कयामत का प्रैगाम-प्रलय की सूचना।
वाक्य प्रयोग-पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को संरक्षण देना स्वयं उसके लिए एक दिन कयामत का पैगाम लेकर आयेगा।

(ज) तिरछी नजर करना-नाराज होना।
वाक्य प्रयोग-मेरे द्वारा सच बोलने पर तुमने अपनी नजर तिरछी क्यों कर ली?

राखी का मूल्य परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. हम लोग सदियों से हँसते-हँसते प्राण देते आए हैं। हमारी इस अजेय शक्ति का स्रोत आप बहनों की राखियों के धागे ही तो हैं। यही तो हमें बल देते आए हैं।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा-भारती’ के ‘राखी का मूल्य’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक हरिकृष्ण प्रेमी हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में एक वीर राजपूत अपने उद्गारों को रानी कर्मवती के समक्ष प्रकट कर रहा है।

व्याख्या-हम लोग युद्धभूमि में सैकड़ों वर्षों से हँसते-हँसते न्योछावर होते आये हैं। हममें यह जो शक्ति है जिसे कोई हरा नहीं सकता, वह आप जैसी बहनों की राखियों के धागों से ही प्राप्त होती आयी है। इनसे हमें एक नया बल और उत्साह प्राप्त होता रहा है।

2. मेवाड़ के सपूतो, तुम्हीं मेवाड़ के अभिमान हो, तुम्हारी कीर्ति अमर है। जाओ रणभूमि तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-मेवाड़ के वीर सपूतों को सम्बोधित करते हुए रानी कर्मवती कहती हैं

व्याख्या-हे मेवाड़ के बहादुर पुत्रों ! तुमसे मेवाड़ स्वयं स्वाभिमान महसूस कर रहा है। तुम्हारा यश संसार में अमर है। युद्ध भूमि को तुम जैसे वीर पुत्रों की आवश्यकता है। वह तुम्हारा इन्तजार कर रही है।

3. हमारी राखी वह शीतल प्रलेप है जो सारे घाव भर देती है। राखी वह वरदान है, जो सारे बैर-भावों को जलाकर भस्म कर देती है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में रानी कर्मवती के राखी के महत्त्व को प्रदर्शित किया गया है।

व्याख्या-राखी बैर-भाव रूपी घावों को भरने के लिए मरहम का कार्य करती है। राखी एक वरदान के समान है। इससे सारे बैर-भाव जल जाते हैं तथा प्रेम और सद्भावना का वातावरण उत्पन्न होता है।

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4. “मैं दुनिया को बता देना चाहता हूँ कि हिन्दुओं के रस्मों-रिवाज मुसलमान के लिए भी उतने ही प्यारे और पाक हैं जितने उनके लिए। तुम भूलते हो कि हम सब एक परवरदिगार की औलाद हैं।”

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में हुमायूँ ने हिन्दुओं और मुसलमानों को एक ही ईश्वर ही सन्तान बताया है।

व्याख्या-हुमायूँ अपने सेनापति को सम्बोधित करते हुए कहता है कि हिन्दुओं और मुसलमानों में कोई अन्तर नहीं है। सब के सब उस एक मालिक की सन्तान हैं जिसने उन्हें बनाया है। आज मैं इस पूरे संसार के सामने यह सिद्ध करना चाहता हूँ कि हिन्दुओं के सभी रीति-रिवाज और परम्पराएँ एक मुसलमान के लिए भी समान रूप से प्रिय और पवित्र हैं।

5. बहन का रिश्ता दुनिया के सारे सुखों, दौलतों, ताकतों और सल्तनतों से बढ़कर है। मैं इस रिश्ते की इज्जत सल्तनत कुर्बान करके भी रखूगा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में हुमायूँ कर्मवती की राखी को स्वीकार करते हुए उसके प्रति सम्मान और बलिदान की भावना प्रकट करता है।

व्याख्या-हुमायूँ का कथन है कि बहन का रिश्ता संसार में सभी वस्तुओं से बढ़कर है। राखी भेजकर रानी कर्मवती ने उसे | भाई बनाया है तो वह इस रिश्ते का सम्मान रखने के लिए सब कुछ बलिदान करने को भी सहर्ष तैयार है।

राखी का मूल्य शब्दकोश

सर्वस्व = सब कुछ; अजेय = जिसे जीता न जा सके; मर्यादा = लोकनीति, रिवाज, सीमा; कीर्ति = यश;
आन = गौरव; वैमनस्य = बैर, दुश्मनी, मनमुटाव; पश्चाताप =पछतावा; भ्रातृत्व = भाई-भाई से अपनापन; मनुष्यत्व = मानवता; लफ़्ज = शब्द; प्रलेप = विशेष प्रकार का मरहम।

राखी का मूल्य उर्दू शब्दों के हिन्दी रूप

सल्तनत = साम्राज्य; खाक = धूल; पैगाम = सन्देश, खबर, सूचना; हिफाजत = सुरक्षा;
तरजीह = प्राथमिकता,वरीयता; मुताबिक = अनुसार; कुर्बानी – बलिदान; फौलाद = इस्पात, मजबूत लोहा; सौगात = भेंट, कयामत = प्रलय; खौफ = डर; परवरदिगार = खुदा, ईश्वर ।

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