MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक

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MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक

MP Board Class 9th Science Chapter 6 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

प्रश्न श्रृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 77

प्रश्न 1.
ऊतक क्या है?
उत्तर:
ऊतक-“उन कोशिकाओं का समूह जो आकृति में समान होता है तथा किसी कार्य को एक साथ सम्पन्न करता है, ऊतक कहलाता है।”.

प्रश्न 2.
बहुकोशिक जीवों में ऊतकों का क्या उपयोग है?
उत्तर:
बहुकोशिक जीवों में ऊतकों का उपयोग- बहुकोशिकीय जीवों में श्रम विभाजन होता है जिसमें विभिन्न क्रियाकलापों का सम्पादन एवं संचालन विभिन्न ऊतकों द्वारा किया जाता है इसलिए बहुकोशिक जीवों में ऊतकों का महत्वपूर्ण उपयोग होता है।

प्रश्न शृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 81

प्रश्न 1.
प्रकाश-संश्लेषण के लिए किस गैस की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस की।

प्रश्न 2.
पौधों में वाष्पोत्सर्जन के कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
वाष्पोत्सर्जन के द्वारा पौधों में जल का नियमन होता है।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 83

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प्रश्न 1.
सरल ऊतकों के कितने प्रकार हैं?
उत्तर:
तीन:

  1. पैरेनकाइमा
  2. कॉलेनकाइमा
  3. स्क्ले रेनकाइमा।

प्रशन 2.
प्ररोह का शीर्षस्थ विभंज्योतक कहाँ पाया जाता है?
उत्तर:
जड़ों एवं तनों की वृद्धि वाले भाग में।

प्रश्न 3.
नारियल का रेशा किस ऊतक का बना होता है?
उत्तर:
स्क्लेरेनकाइमा ऊतक का।

प्रश्न 4.
फ्लोएम के संघटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
फ्लोएम के संघटक, निम्न चार होते हैं –

  1. चालनी नलिका
  2. साथी कोशिकाएँ
  3. फ्लोएम पैरेनकाइमा
  4. फ्लोएम रेशा।

प्रश्न शृंखला-4# पृष्ठ संख्या 87

प्रश्न 1.
उस ऊतक का नाम बताएँ जो हमारे शरीर में गति के लिए उत्तरदायी है।
उत्तर:
पेशीय ऊतक।

प्रश्न 2.
न्यूरॉन देखने में कैसा लगता है?
उत्तर:
न्यूरॉन देखने में धागों जैसी संरचना होती है जिससे पतले लम्बे बालों जैसी संरचना निकली होती है।

प्रश्न 3.
हृदय पेशी के तीन लक्षणों को बताएँ।
उत्तर:
हृदय पेशी के लक्षण:

  1. हृदय पेशी अनैच्छिक पेशी होती है।
  2. यह जीवन भर लयबद्ध होकर प्रसार एवं संकुचन करती रहती है।
  3. इन पेशियों की कोशिकाएँ बेलनाकार, शाखाओं वाली और एककेन्द्रकीय होती हैं।

प्रश्न 4.
एरिओलर ऊतक के क्या कार्य हैं?
उत्तर:
एरिओलर ऊतक के कार्य:

  1. अंगों के भीतर की खाली जगह को भरता है।
  2. आन्तरिक भागों को सहारा प्रदान करता है।
  3. ऊतकों की मरम्मत में सहायता प्रदान करता है।

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MP Board Class 9th Science Chapter 6 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
ऊतक को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
ऊतक की परिभाषा:
“उन कोशिकाओं का समूह जो आकृति में समान होती हैं तथा किसी कार्य को एक साथ सम्पन्न करती हैं, ऊतक कहलाता है।”

प्रश्न 2.
कितने प्रकार के तत्व मिलकर जाइलम ऊतक का निर्माण करते हैं?
उत्तर:
जाइलम ऊतक निम्न चार प्रकार के तत्वों से मिलकर निर्मित होता है –

  1. ट्रेकीड (वाहिनिका)
  2. वाहिका
  3. जाइलम पैरेनकाइमा
  4. जाइलम फाइबर (रेशे)।

प्रश्न 3.
पौधों में सरल ऊतक जटिल ऊतक से किस प्रकार भिन्न होते हैं?
उत्तर:
सरल स्थायी ऊतक पतली कोशिका भित्ति वाली जीवित तथा बन्धन मुक्त सरल कोशिकाओं से मिलकर बनता है जबकि जटिल स्थायी ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है जो परस्पर मिलकर एक इकाई के रूप में कार्य करते हैं।

प्रश्न 4.
कोशिका भित्ति के आधार पर पैरेनकाइमा, कॉलेनकाइमा और स्क्लेरेनकाइमा के बीच भेद स्पष्ट करें।
उत्तर:
पैरेनकाइमा की कोशिका भित्ति बहुत पतली होती है, कॉलेनकाइमा की कोशिका भित्ति लचीली होती है जबकि स्क्लेरेनकाइमा की कोशिका भित्ति लिग्निन के कारण मोटी और दृढ़ होती है।

प्रश्न 5.
रन्ध्र के क्या कार्य हैं?
उत्तर:
रन्ध्र के कार्य:

  1. वायुमण्डल से गैसों का आदान-प्रदान करना।
  2. वाष्पोत्सर्जन द्वारा पौधों में जल का नियमन करना।

प्रश्न 6.
तीनों प्रकार के पेशीय रेशों में चित्र बनाकर अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पेशीय ऊतकों के तीन प्रकार (रेखित, अरेखित एवं कार्डियक) में अन्तर:
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MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक image 2
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प्रश्न 7.
कार्डियक (हृदयक) पेशी का विशेष कार्य क्या है?
उत्तर:
हृदय का लयबद्ध होकर निरन्तर स्पन्दन कराना।

प्रश्न 8.
रेखित, अरेखित तथा कार्डियक (हृदयक) पेशियों में शरीर में स्थिति, कार्य और स्थान के आधार पर अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक image 5

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प्रश्न 9.
न्यूरॉन का नामांकित चित्र बनाइए। (2018)
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक image 6

प्रश्न 10.
निम्नलिखित के नाम लिखें –
(a) ऊतक जो मुँह के भीतरी अस्तर का निर्माण करता है।
(b) ऊतक जो मनुष्य में पेशियों को अस्थि से जोड़ता है।
(c) ऊतक जो पौधों में भोजन का संवहन करता है।
(d) ऊतक जो हमारे शरीर में वसा का संचय करता है।
(e) तरल आधात्री सहित संयोजी ऊतक।
(f) मस्तिष्क में स्थित ऊतक।
उत्तर:
(a) एपिथीलियमी ऊतक
(b) कण्डरा
(c) फ्लोएम
(d) वसामय ऊतक
(e) रक्त
(f) तन्त्रिका ऊतक (न्यूरॉन)।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित में ऊतक के प्रकार की पहचान करें-त्वचा, पौधे का वल्क, अस्थि, वक्कीय नलिका का अस्तर, संवहन बण्डल।
उत्तर:
त्वचा-एपिथीलियमी ऊतक, पौधे का वल्क-स्क्लेरेनकाइमा सरल स्थायी ऊतक। अस्थि-संयोजी ऊतक, वृक्कीय नलिका का अस्तर-घनाकार एपिथीलियम। संवहन बण्डल-जटिल स्थायी ऊतक।

प्रश्न 12.
पैरेनकाइमा ऊतक किस क्षेत्र में पाया जाता है?
उत्तर:
पत्तियों, जड़ों एवं तनों में।

प्रश्न 13.
पौधों में एपीडर्मिस की क्या भूमिका है ?
उत्तर:
पौधों में एपीडर्मिस की भूमिका-एपीडर्मिस पौधों के सभी भागों की रक्षा करती है तथा पानी की हानि को रोकती है।

प्रश्न 14.
छाल (कॉक) किस प्रकार सुरक्षा ऊतक के रूप में कार्य करता है?
उत्तर:
छाल (कॉर्क) पौधों की जल हानि को रोकती है। यह पौधों की यान्त्रिक आघातों एवं परजीवी कवक के प्रवेश से रक्षा करती है तथा सुरक्षा आवरण बनाती है।

प्रश्न 15.
निम्न दी गई तालिका को पूर्ण करें –
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक image 7
उत्तर:

  1. पैरेनकाइमा
  2. स्क्लेरेनकाइमा
  3. फ्लोएम।

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MP Board Class 9th Science Chapter 6 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 9th Science Chapter 6 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन-से ऊतक में मृत कोशिकाएँ पायी जाती हैं?
(a) मृदूतक
(b) दृढ़ोतक
(c) स्थूलकोण ऊतक
(d) उपकला ऊतक
उत्तर:
(b) दृढ़ोतक

प्रश्न 2.
तने की परिधि निम्नलिखित के कारण बढ़ती है –
(a) शीर्षस्थ विभज्योतक
(b) पार्श्व विभज्योतक
(c) अन्तर्विष्ट विभज्योतक
(d) ऊर्ध्व विभज्योतक।
उत्तर:
(b) पार्श्व विभज्योतक

प्रश्न 3.
कौन-सी कोशिका में छिद्रिल कोशिका भित्ति नहीं होती?
(a) वाहिनिकाएँ
(b) सहचर कोशिकाएँ
(c) चालनी कोशिकाएँ
(d) वाहिकाएँ।
उत्तर:
(b) सहचर कोशिकाएँ

प्रश्न 4.
आँत्र पचे हुए भोजन को अवशोषित करती है। उपकला कोशिकाओं का कौन-सा प्रकार इसके लिए उत्तरदायी है?
(a) स्तरित शल्की उपकला
(b) स्तम्भाकार उपकला
(c) तओ रेशे उपकला
(d) घनाकार उपकला।
उत्तर:
(b) स्तम्भाकार उपकला

प्रश्न 5.
किसी व्यक्ति की दुर्घटना में हाथ की दोनों बड़ी हड्डियाँ (अस्थियाँ) अपने स्थान से हट गईं। निम्नलिखित में से कौन-सा सम्भावित कारण हो सकता है ?
(a) कण्डरा का टूटना
(b) कंकाल पेशी का टूटना
(c) स्नायु का टूटना
(d) एरिओलर (गर्तिका) ऊतक का टूटना।
उत्तर:
(c) स्नायु का टूटना

प्रश्न 6.
काम करते समय एवं दौड़ते समय आप अपने हाथ-पैर आदि अंगों को हिलाते हैं। निम्नलिखित में कौन-सा कथन सही है?
(a) चिकनी पेशियाँ संकुचित होकर अस्थियों को चलायमान करने के लिए स्नायु को खींचती हैं।
(b) चिकनी पेशियाँ संकुचित होकर अस्थियों को चलायमान करने के लिए कण्डराओं को खींचती हैं।
(c) कंकाल पेशियाँ संकुचित होकर अस्थियों को चलायमान करने के लिए स्नायु को खींचती हैं।
(d) कंकाल पेशियाँ संकुचित होकर अस्थियों को चलायमान करने के लिए कण्डराओं को खींचती
उत्तर:
(d) कंकाल पेशियाँ संकुचित होकर अस्थियों को चलायमान करने के लिए कण्डराओं को खींचती

प्रश्न 7.
कौन-सा पेशी-युग्म अनैच्छिक पेशियों के रूप में कार्य करता है?
(i) स्तरित पेशियाँ
(ii) चिकनी पेशियाँ
(iii) हृद पेशियाँ
(iv) कंकाल पेशियाँ।

(a) (i) तथा (ii)
(b) (ii) तथा (iii)
(c) (iii) तथा (iv)
(d) (i) तथा (iv)
उत्तर:
(b) (ii) तथा (iii)

प्रश्न 8.
पादपों में विभज्योतक ऊतक
(a) स्थानीकृत एवं स्थायी होते हैं।
(b) कुछ भागों तक वे सीमित नहीं होते।
(c) स्थानीकृत एवं विभाजनकारी कोशिकाओं के बने होते हैं।
(d) परिमाण में बढ़ते रहते हैं।
उत्तर:
(c) स्थानीकृत एवं विभाजनकारी कोशिकाओं के बने होते हैं।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से बाह्यत्वचा (एपीडर्मिस) का कौन-सा कार्य नहीं है?
(a) प्रतिकूल परिस्थितियों में बचाव
(b) गैसीय विनिमय
(c) जल संवहन
(d) वाष्पोत्सर्जन
उत्तर:
(c) जल संवहन

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प्रश्न 10.
निम्न में से किसमें उपास्थि नहीं पायी जाती?
(a) नाक में
(b) कान में
(c) वृक्क में
(d) कंठ में
उत्तर:
(c) वृक्क में

प्रश्न 11.
मानव शरीर में वसा निम्नलिखित में भण्डारित होती है –
(a) घनाकार उपकला में
(b) वसा ऊतक में
(c) अस्थियों में
(d) उपास्थि में
उत्तर:
(b) वसा ऊतक में

प्रश्न 12.
अस्थि आधात्री में किसकी अधिक मात्रा होती है?
(a) फ्लुओराइड एवं कैल्सियम की
(b) कैल्सियम एवं फॉस्फोरस की
(c) कैल्सियम एवं पोटैशियम की
(d) फॉस्फोरस एवं पोटैशियम की
उत्तर:
(b) कैल्सियम एवं फॉस्फोरस की

प्रश्न 13.
संकुचनशील प्रोटीन पाई जाती है –
(a) अस्थियों में
(b) रुधिर में
(c) पेशियों में
(d) उपास्थि में
उत्तर:
(c) पेशियों में

प्रश्न 14.
ऐच्छिक पेशी पाई जाती है –
(a) आहार नाल में
(b) पाद में
(c) आँख की परितारिका (आइरिस) में
(d) फेफड़ों (फुफ्फुस) की श्वसनी में
उत्तर:
(b) पाद में

प्रश्न 15.
तन्त्रिका ऊतक कहाँ नहीं पाये जाते?
(a) मस्तिष्क में
(b) मेरुरज्जु में
(c) कण्डराओं में
(d) तन्त्रिका में।
उत्तर:
(c) कण्डराओं में

प्रश्न 16.
तन्त्रिका कोशिका में कौन नहीं होता?
(a) तंत्रिकाक्ष
(b) तंत्रिका के अन्तिम सिरे
(c) कण्डराएँ
(d) द्रुमिकाएँ (डेण्ड्राइट)
उत्तर:
(c) कण्डराएँ

प्रश्न 17.
निम्नलिखित में से कौन-सी संरचना ऊतकों की मरम्मत तथा अंगों के खाली स्थान को भरने में सहायता करती है?
(a) कण्डरा
(b) वसा ऊतक
(c) गर्तिका (एरिओलर)
(d) उपास्थि
उत्तर:
(c) गर्तिका (एरिओलर)

प्रश्न 18.
निम्नलिखित में कौन-सा पेशीय ऊतक है जो बिना थके जीवन भर लगातार कार्य करता रहता है?
(a) कंकाल पेशी
(b) हृद पेशी
(c) चिकनी पेशी
(d) ऐच्छिक पेशी
उत्तर:
(b) हृद पेशी

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में से कौन-सी कोशिकाएँ शरीर के उपास्थिमय ऊतकों में पाई जाती हैं?
(a) मास्ट कोशिकाएँ
(b) क्षारकरंजी (बेसोफिल)
(c) ऑस्टियोसाइट
(d) उपास्थि अणु
उत्तर:
(d) उपास्थि अणु

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प्रश्न 20.
फ्लोएम में पाए जाने वाले निर्जीव पदार्थ हैं –
(a) सहचर कोशिकाएँ
(b) फ्लोएम तन्तु
(c) फ्लोएम मृदूतक
(d) चालनी नलिकाएँ
उत्तर:
(b) फ्लोएम तन्तु

प्रश्न 21.
निम्नलिखित में से किसमें परिपक्वता के समय केन्द्रक लोप नहीं होता है?
(a) सहचर कोशिकाएँ
(b) लाल रुधिर कणिकाएँ
(c) वाहिकाएँ
(d) चालनी नलिका कोशिकाएँ।
उत्तर:
(a) सहचर कोशिकाएँ

प्रश्न 22.
मरुस्थली पादपों में जल ह्रास की दर में निम्नलिखित में से किसके कारण कमी आती है?
(a) उपत्वचा (क्यूटिकल)
(b) स्टोमेटा
(c) लिग्निन
(d) सुबेरिन
उत्तर:
(a) उपत्वचा (क्यूटिकल)

प्रश्न 23.
एक लम्बे वृक्ष में अनेक शाखाएँ होती हैं। इन सभी शाखाओं में जल के पाश्र्वीय संवहन में सहायता करने वाले ऊतक हैं –
(a) स्थूलकोण ऊतक
(b) जाइलम मृदूतक
(c) मृदूतक (पैरेनकाइमा)
(d) जाइलम वाहिकाएँ
उत्तर:
(d) जाइलम वाहिकाएँ

प्रश्न 24.
खेत में उगे गन्ने के पौधे के अग्रभाग को यदि काटकर हटा दिया जाए तो भी वह पौधा लम्बाई में बढ़ता रहता है। ऐसा निम्नलिखित में से किस कारण होता है?
(a) ऐधा (कैम्बियम)
(b) शीर्षस्थ विभज्योतक
(c) पाीय विभज्योतक
(d) अंतर्वेशी विभज्योतक
उत्तर:
(d) अंतर्वेशी विभज्योतक

प्रश्न 25.
एक कील को वृक्ष के तने में भूमि सतह से एक मीटर की ऊँचाई पर ठोंक दिया गया है। तीन वर्ष के पश्चात् यह कील –
(a) निचले स्तर पर आ जायेगी
(b) उच्चतर स्तर पर आ जायेगी
(c) उसी स्थान पर बनी रहेगी
(d) पार्श्व में पहुँच जायेगी।
उत्तर:
(c) उसी स्थान पर बनी रहेगी

प्रश्न 26.
मृदूतक कोशिकाएँ होती हैं –
(a) अपेक्षाकृत अविशिष्टीकृत एवं पतली भित्ति वाली
(b) मोटी भित्ति युक्त एवं विशिष्टीकृत
(c) लिग्निन युक्त
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(a) अपेक्षाकृत अविशिष्टीकृत एवं पतली भित्ति वाली

प्रश्न 27.
पादपों में लचीलापन निम्नलिखित में से किसके कारण होता है?
(a) स्थूलकोण ऊतक
(b) दृढ़ोतक
(c) मृदूतक
(d) हरित ऊतक।
उत्तर:
(a) स्थूलकोण ऊतक

प्रश्न 28.
कॉर्क कोशिकाओं में निम्नलिखित में से किसकी उपस्थिति होने से उनकी जल तथा गैसों के लिए पारगम्यता समाप्त हो जाती है?
(a) सेलुलोज
(b) लिपिड
(c) सुबेरिन
(d) लिग्निन
उत्तर:
(c) सुबेरिन

प्रश्न 29.
स्थलीय पर्यावरण में पादपों की उत्तरजीविता उनमें निम्नलिखित में से किसकी उपस्थिति के कारण सम्भव होती है?
(a) अन्तर्विष्ट विभज्योतक
(b) संवहन ऊतक
(c) शीर्षस्थ विभज्योतक
(d) मृदूतक।
उत्तर:
(b) संवहन ऊतक

प्रश्न 30.
जिम्नोस्पर्म (अनावृतबीजी पौधों) में जल संवहन ऊतक सामान्यतया निम्नलिखित में से किसमें पाये जाते हैं?
(a) वाहिकाएँ
(b) चालनी नलिकाएँ
(c) वाहिनिकाएँ
(d) जाइलम तन्तु
उत्तर:
(c) वाहिनिकाएँ

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प्रश्न 31.
पौधों में जल तथा खनिज का संवहन होता है – (2019)
(a) फ्लोएम द्वारा
(b) मृदूतक द्वारा
(c) जाइलम द्वारा
(d) इन सभी के द्वारा।
उत्तर:
(c) जाइलम द्वारा

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. रुधिर कणिकाओं का अस्तर ……………. से बना होता है।
2. छोटी अथवा क्षुद्रान्त का अस्तर ……………. से बना होता है।
3. वृक्क नलिकाओं का अस्तर ……………. से बना होता है।
4. पक्ष्माभिका उपकला कोशिकाएँ हमारे शरीर के ……………. में पाई जाती हैं।
5. कॉर्क की भित्तियों पर …………….. होता है, जिसके कारण ये गैस एवं जल के लिए अपारगम्य होती है।
6. …………….. में छिद्रित भित्तियों वाली नलिकाकार कोशिकाएँ होती हैं और ये सजीव होती हैं।
7. अस्थियों में कठोर आधात्री होता है जो …………. एवं ………….. से बना होता है।
8. ……………. जटिल ऊतक के प्रकार हैं।
9. …………….. में द्वार कोशिकाएँ होती हैं।
10. कॉर्क की कोशिकाओं में पाए जाने वाले रसायन को …………….. कहते हैं।
11. नारियल का छिलका ………….. ऊतकों का बना होता है।
12. ……………. पादपों को लचीलापन प्रदान करता है।
13. ……………. एवं …………….. दोनों संवहनी ऊतक है।
14. जाइलम के द्वारा मृदा से …………… एवं …………… का अभिगमन होता है।
15. फ्लोएम …………….. से ……………. को पौधे के दूसरे अंगों में पहुँचाने का कार्य करता है।
उत्तर:

  1. शल्की उपकला
  2. स्तम्भाकार उपकला
  3. घनाकार उपकला
  4. श्वसन पथ
  5. सुबेरिन
  6. चालनी नलिकाओं
  7. कैल्सियम, फॉस्फोरस
  8. जाइलम, फ्लोएम
  9. रन्ध्र
  10. सुबेरिन
  11. दृढ़
  12. स्थूलकोण ऊतक
  13. जाइलम, फ्लोएम
  14. जल, खनिज लवण
  15. पत्ती, भोजन।

सही जोड़ी बनाना
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक image 8
उत्तर:

  1. → (v)
  2. → (iv)
  3. → (iii)
  4. → (i)
  5. → (ii)
  6. → (vi)

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक image 9
उत्तर:

  1. → (i)
  2. → (ii)
  3. → (iv)
  4. → (iii)
  5. → (v)

सत्य/असत्य कथन

1. मृदूतक ऊतकों में अन्तराकोशिक स्थान होता है।
2. स्थूलकोण ऊतकों की कोशिकाओं के कोने अनियमित रूप से मोटे हो जाते हैं।
3. शीर्षस्थ एवं अन्तर्विष्ट विभज्योतक स्थायी ऊतक होते हैं।
4. विभज्योतकी कोशिकाओं की प्रारम्भिक अवस्था में रसधानियाँ नहीं होती हैं।
5. रुधिर के आधात्री (मैट्रिक्स) में प्रोटीन, लवण एवं हॉर्मोन होते हैं।
6. दो अस्थियाँ, स्नायु की वजह से जुड़ी होती हैं।
7. कण्डरा रेशेहीन एवं कमजोर (फ्रेजाइल) ऊतक होते हैं।
8. उपास्थि संयोजी ऊतक का एक प्रकार है।
9. मैट्रिक्स का स्वरूप ऊतकों के कार्यों के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार का होता है।
10. वसा का संग्रह त्वचा के नीचे एवं आन्तरिक अंगों के मध्य होता है।
11. उपकला ऊतकों के मध्य अन्तरकोशिकीय स्थान होते हैं।
12. रेखित पेशियों की कोशिकाएँ बहुकेन्द्रकीय एवं अशाखित होती हैं।
13. प्राणी शरीर का रक्षक ऊतक उपकला ऊतक होता है।
14. रुधिर वाहिकाओं, फुफ्फुस कूपिकाओं एवं वृक्क नलिकाओं का अस्तर (lining) उपकला ऊतकों का बना होता है।
15. उपकला स्तर, पारगम्य स्तर की तरह कार्य करता है।
16. उपकला स्तर बाहरी वातावरण तथा शरीर के मध्य पदार्थों के नियमन को नहीं होने देता।
उत्तर:

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. सत्य
  6. सत्य
  7. असत्य
  8. सत्य
  9. सत्य
  10. सत्य
  11. असत्य
  12. सत्य
  13. सत्य
  14. सत्य
  15. सत्य
  16. असत्य।

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एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
‘ऊतक’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया?
उत्तर:
बिचैट ने।

प्रश्न 2.
जड़ों द्वारा अवशोषित जल एवं खनिज लवणों के संवहन के लिए कौन-सा ऊतक उत्तरदायी है?
उत्तर:
जाइलम।

प्रश्न 3.
पत्तियों द्वारा निर्मित भोजन के संवहन के लिए कौन-सा ऊतक उत्तरदायी है?
उत्तर:
फ्लोएम।

प्रश्न 4.
पेशियों को अस्थियों से जोड़ने वाले ऊतक का नाम लिखिए।
उत्तर:
कण्डराएँ (टेण्डन्स)।

प्रश्न 5.
हड्डियों को हड्डियों से जोड़ने वाले ऊतक का नाम लिखिए।
उत्तर:
स्नायुः (लिगामेण्ट)।

प्रश्न 6.
आहार नाल, पित्ताशय एवं मूत्राशय में किस प्रकार का पेशी ऊतक पाया जाता है?
उत्तर:
अरेखित पेशी ऊतक।

प्रश्न 7.
हाथ एवं पैरों में किस प्रकार का पेशी ऊतक पाया जाता है?
उत्तर:
रेखित पेशी ऊतक।

प्रश्न 8.
द्रव संयोजी ऊतक का नाम लिखिए।
उत्तर:
रक्त।

प्रश्न 9.
मस्तिष्क में पाये जाने वाले ऊतक का नाम क्या है?
उत्तर:
तन्त्रिका ऊतक।

प्रश्न 10.
परजीवी के आक्रमण से पादप शरीर की कौन-सी संरचना रक्षा करती है?
उत्तर:
मोम वाले पदार्थ युक्त मोटी उपत्वचा (क्यूटिकल)।

MP Board Class 9th Science Chapter 6 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
शीत क्षेत्रों के प्राणी एवं ठण्डे जल में रहने वाली मछलियों में उपत्वचीय वसा की अधिक मोटी परत पाई जाती है। क्यों ? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शीत क्षेत्रों के प्राणी एवं ठण्डे जल में रहने वाली मछलियों में उपत्वचीय वसा की अधिक मोटी परत पाई जाती है क्योंकि यह ताप नियमन के लिए उपत्वचीय रोधन की तरह कार्य करती है।

प्रश्न 2.
यदि एक पौधा युक्त गमले को एक काँच के जार से ढक देते हैं तो जार की दीवार पर पानी की बूंदें दिखाई देने लगती हैं। ऐसा क्यों ? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
वाष्पोत्सर्जन के द्वारा पेड़-पौधे जलवाष्प उत्सर्जित करते हैं जो काँच के जार की ठंडी दीवारों से संघनित होकर पानी की बूंदों में परिवर्तित हो जाती है। इस कारण दीवारों पर पानी की बूंदें दिखाई देती हैं।

प्रश्न 3.
ऐच्छिक एवं अनैच्छिक पेशी के आधार पर निम्न क्रियाकलापों में भेद कीजिए –
(a) मेंढक का कूदना
(b) हृदय का पम्पिंग करना
(c) हाथ से लिखना
(d) आपकी आँतों में चॉकलेट की गति।
उत्तर:

(a) ऐच्छिक पेशी
(b) अनैच्छिक पेशी
(c) ऐच्छिक पेशी
(d) अनैच्छिक पेशी।

प्रश्न 4.
जलकुम्भी पानी की सतह पर तैरती रहती है। व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
फूले हुए पर्णवृन्तों में वायूतकों के होने के कारण इसकी पत्तियाँ जल से हल्की हो जाती हैं इसलिए तैरती रहती हैं।

प्रश्न 5.
जाइलम ऊतक के कार्य लिखिए। (2019)
उत्तर:
जाइलम ऊतक का कार्य है जड़ों द्वारा अवशोषित जल एवं खनिज लवणों को पत्तियों तक पहुँचाना।

MP Board Class 9th Science Chapter 6 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
मृदूतक या पैरेनकाइमा का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मृदूतक या पैरेनकाइमा (Parenchyma)-मृदूतक पौधों में जड़, तना, पत्ती, फूल एवं फलों में प्रमुखता में पाये जाते हैं। इनकी कोशिकाएँ जीवित और पतली भित्ति वाली होती हैं। ये गोल, अण्डाकार या बहुतलीय (बहुकोणीय) होती हैं। इनके बीच में बड़ी रसधानी होती है तथा इनका कोशिकाद्रव्य सघन होता है। ये सामान्यतः समव्यासी होती हैं।
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प्रश्न 2.
मृदूतकों या पैरेनकाइमा के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
मृदूतकों या पैरेनकाइमा के प्रमुख कार्य –

  1. ये भोजन का संचय करते हैं।
  2. ये पौधों को दृढ़ता प्रदान करते हैं।
  3. ये अकार्बनिक पदार्थ रेजिन, टेनिन, गोंद कण आदि को संचित करते हैं।
  4. पेरेनकाइमा कोशिकाओं में जब क्लोरोफिल उपस्थित रहता है, तो इन्हें क्लोरेनकाइमा कहते हैं। ये ऊतक प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन निर्माण का कार्य करते हैं।

प्रश्न 3.
स्थूलकोण ऊतक या कॉलेनकाइमा का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्थूलकोण ऊतक या कॉलेनकाइमा (Collenchyma):
इनकी कोशिकाएँ जीवित, अवकाश रहित होती हैं तथा आकार लगभग बहुतलीय, सामान्यतः समव्यासी तथा अन्तरकोशिकीय मृदूतकों या पैरेनकाइमा की तरह होता है। इनकी भित्तियाँ सेल्यूलोज द्वारा स्थूलित होती हैं। यह स्थूलन इनके कोणों पर अधिक होता है। ये मजबूत एवं लचीली होती हैं।
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प्रश्न 4.
दृढ़ोतक या स्क्लेरेनकाइमा का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
दृढ़ोतक या स्क्ले रेनकाइमा (Sclerenchyma)इस प्रकार के ऊतकों की कोशिकाएँ प्रायः मृत, लम्बी तथा पतली होती हैं। इनकी भित्तियाँ लिग्निन द्वारा स्थूलित होती हैं। इनमें अन्तरकोशिकीय अवकाश नहीं होते हैं। कभी-कभी ये बहुत लम्बी और दोनों सिरों पर नुकीली होती हैं। दो कोशिकाओं के मध्य में सुस्पष्ट मध्य पटलिका होती है। कभी-कभी इनमें विशेष प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं जिन्हें स्क्लेरिड्स कहते हैं। ये ऊतक पौधों के कॉर्टेक्स, पिथ एवं कठोर बीज आदि में उपस्थित होते हैं।
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प्रश्न 5.
दारू या जाइलम का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
दारू या जाइलम (Xylem):
यह पौधे का काष्ठीय भाग है जो निम्नांकित चार प्रकार की कोशिकाएँ से बना होता है –

1. वाहिनिकाएँ या ट्रेकीड्स (Tracheids):
ये दोनों सिरों पर नुकीली नली के आकार की होती हैं।

2. वाहिकाएँ या वैसल्स (Tracheae or Vessels):
ये कई कोशिकाओं में बनी नली के आकार की होती हैं।

3. काष्ठ मृदूतक (Wood Parenchyma) या जाइलम पैरेनकाइमा (Xylem Parenchyma):
ये साधारण पैरेनकाइमा की तरह होती हैं।

4. काष्ठ तन्तु (Wood Fibres) या जाइलम तन्तु (Xylem Fibres) या जाइलम स्क्ले रेनकाइमा (Xylem Sclerenchyma):
ये लम्बे नुकीले तथा लिग्निन से स्थूलित तथा दृढ़ होते हैं।
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प्रश्न 6.
अधोवाही या फ्लोएम का सचित्र वर्णन – मृदूतकी कीजिए।
उत्तर:
अधोवाही या फ्लोएम (Phloem):
यह जीवित संवहनी ऊतक है जो निम्न चार प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है –

1. चालनी नलिका (Sieve Tubes):
ये सहकोशिका नलिकाओं की तरह होती है जिनमें स्थान-स्थान पर चालनी पट्टिकाएँ होती हैं।

2. सहकोशिकाएँ (Companion Cells):
सदैव चालनी नलिकाओं के साथ पाई जाने वाली तथा आकार में लम्बी होती हैं। इसमें बड़ा केन्द्रक तथा अधिक मात्रा में जीवद्रव्य होता है।

3. अधोवाही मृदूतक या फ्लोएम पैरेनकाइमा चालनी नलिका (Phloem Parenchyma)
साधारण मृदूतक की तरह जीवित कोशिकाएँ होती हैं।

4. अधोवाही रेशे या बास्ट रेशे (Bast Fibres):
ये लम्बी, नुकीली तथा लिग्निन युक्त होती हैं।
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प्रश्न 7.
विशिष्ट स्त्रावी ऊतकों का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विशिष्ट स्रावी ऊतक-ये ऊतक दो प्रकार के होते हैं –

1. ग्रन्थिल स्त्रावी ऊतक (Glandular Secretory Tissues):
ये ग्रन्थि युक्त होते हैं तथा गोंद, रेजिन, तेल, सुगन्धित तेल एवं मकरन्द आदि का स्रावण करते हैं।
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2. आक्षीरी स्रावी ऊतक (Latex Secretory Tissues):
ये नलिका युक्त होते हैं तथा आक्षीर या दूध जैसे पदार्थ का स्रावण करते हैं।
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प्रश्न 8.
जाइलम एवं फ्लोएम में अन्तर स्पष्ट कीजिए। ये जटिल ऊतक क्यों कहलाते हैं ?
उत्तर:
जाइलम एवं फ्लोएम में अन्तर:
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जाइलम एवं फ्लोएम दोनों में एक से अधिक प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं जो सामान्य कार्यों का समन्वयन करती हैं इसलिए इन्हें जटिल ऊतक कहते हैं।

प्रश्न 9.
रेखित पेशी का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
रेखित पेशी (Striated muscles):
सूक्ष्मदर्शी से देखने पर ये पेशियाँ हल्के तथा गहरे रंग की एक के बाद एक रेखाओं या धारियों की तरह दिखाई देती हैं। इसलिए इन्हें रेखित पेशी कहते हैं। इन पेशियों को हम अपनी इच्छानुसार गति करा सकते हैं इसलिए ये ऐच्छिक पेशियाँ कहलाती हैं। ये पेशियाँ प्रायः हड्डियों से जुड़ी होती हैं। इसलिए इन्हें कंकाल पेशी भी कहते हैं। ये शरीर को गति कराने में सहायक होती हैं। इनकी कोशिकाएँ लम्बी, बेलनाकार, शाखारहित एवं बहुनाभीय (बहुकेन्द्रकीय) होती हैं।
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प्रश्न 10.
अरेखित पेशी का सचित्र वर्णन कीजिए। (2019)
उत्तर:
अरेखित पेशी (Unstriated muscles):
ये पेशियाँ उन अगों जो अनैच्छिक रूप से गति करते हैं, में पाई जाती हैं। ये आहार नाल, पित्ताशय, मूत्राशय, श्वासनली, रुधिर वाहिनियों आदि में पाई जाती हैं। इन्हें अनैच्छिक पेशियाँ भी कहते हैं। ये पेशी तर्कुरूप में होती हैं। इसमें द्रव्य भरा होता है जिसे सारकोप्लाज्म कहते हैं। कोशिकाद्रव्य में असंख्य पतले-पतले तन्तु रहते हैं, जिन्हें पेशी तन्तुक (Myofibrils) कहते हैं। इन्हीं तन्तुओं के कारण पेशियों का संकुचन व शिथिलन होता है। इनमें धारियाँ या रेखाएँ नहीं होती इसलिए ये अरेखित पेशी या चिकनी पेशी भी कहलाती हैं। इनकी कोशिकाएँ लम्बी तर्कुरूप एवं एकनाभिकीय (एककेन्द्रकीय) होती हैं।
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प्रश्न 11.
हृदय पेशी का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हृदय पेशियाँ (कार्डियक पेशी) अनैच्छिक पेशी होती हैं। इसकी कोशिकाएँ बेलनाकार शाखाओं वाली तथा एककेन्द्रकीय होती हैं। ये पेशियाँ जीवनभर लयबद्ध होकर प्रसार एवं संकुचन करती रहती हैं।
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प्रश्न 12.
जाइलम के विभिन्न घटकों के नाम लिखिए तथा एक सजीव घटक का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
जाइलम के विभिन्न घटक:

  1. जाइलम वाहिनिका (ट्रैकीड)
  2. वाहिका
  3. जाइलम मृदूतक (जाइलम पैरेनकाइमा)
  4. जाइलम तन्तु (फाइबर)

सजीव घटक:
जाइलम मृदूतक (पैरेनकाइमा) का चित्र।
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प्रश्न 13.
फ्लोएम के विभिन्न अवयवों के चित्र बनाइए।
उत्तर:
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प्रश्न 14.
ऐच्छिक एवं अनैच्छिक पेशी के बीच भेद कीजिए तथा प्रत्येक प्रकार का एक-एक उदाहरण दीजिए।
अथवा
रेखित तथा अरेखित पेशियों में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2019)
उत्तर:
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उदाहरण:

  1. ऐच्छिक पेशी-हाथ-पैरों की माँसपेशियाँ।
  2. अनैच्छिक पेशी-आमाशय की पेशियाँ।

प्रश्न 15.
वसीय ऊतक एवं रंगा ऊतक का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
वसीय ऊतक एवं रंगा ऊतक का नामांकित चित्र निम्नांकित है –
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प्रश्न 16.
न्यूरॉन (तन्त्रिका कोशिका) का नामांकित चित्र बनाइए। (2019)
उत्तर:
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MP Board Class 9th Science Solution Chapter 6 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तन्त्रिका कोशिका या तन्त्रिका ऊतक (न्यूरॉन) का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
तन्त्रिका कोशिका या तन्त्रिका ऊतक का सचित्र वर्णन:

तन्त्रिकीय ऊतक (Nervous Tissue):
यह ऊतक सोचने, समझने, संवेदनाओं, उद्दीपन या बाह्य परिवर्तनों को ग्रहण करने की क्षमता रखता है। यह दो विशिष्ट प्रकार की कोशिकाओं का बना होता है –

1. तन्त्रिका कोशिका (Neurons):
ये तन्त्रिका तन्त्र का निर्माण करती हैं व 4 से 135 u या अधिक व्यास की कोशिकाएँ हैं। ये दो भागों की बनी होती हैं –

(अ) कोशिकाकाय या सायटॉन (Cell Body or Cyton):
यह तन्त्रिका का मुख्य भाग है, इसके कोशिकाद्रव्य में छोटे-छोटे निसिल्स कण (Nissils granules) पाये जाते हैं।

(ब) कोशिका प्रवर्ध (Cell Processes):
कोशिकाकाय से एक या एक से अधिक छोटे-बड़े कोशिकाद्रव्यीय प्रवर्ध निकले रहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं –

  • डेण्ड्राइट्स (Dendrites)
  • एक्सॉन (Axon)।

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2. न्यूरोग्लिया (Neurogloea):
ये एक्सॉन रहित कोशिकाएँ हैं जो तन्त्रिकाओं में आवरण बनाती हैं।

प्रश्न 2.
जालिकावत् एवं रेशेदार संयोजी ऊतकों के नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
जालिकावत् एवं रेशेदार संयोजी ऊतकों के नामांकित चित्र:
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प्रश्न 3.
उपकला ऊतकों के विभिन्न प्रकारों की संरचना एवं कार्यों का वर्णन कीजिए। उपकला ऊतक के कई तरह के चित्र भी बनाइए।
अथवा
उपकला ऊतक के प्रकारों का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उपकला ऊतक के प्रकार-उपकला ऊतक के निम्न प्रकार होते हैं:

1. सरल घनाकार उपकला ऊतक (Simple Cuboidal Epithelial Tissue):
ये घनाकार होते हैं इनकी लम्बाई, चौड़ाई, ऊँचाई बराबर होती है। यह स्वेद ग्रन्थियाँ, थायरॉइड ग्रन्थियाँ, यकृत, वृक्क नलिकाओं व जनदों में पाया जाता है।
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2. सरल स्तम्भाकार ऊतक (Simple Columnar Epithelial Tissue)-इस ऊतक की कोशिकाएँ एक-दूसरे से सटी हुई व समान दिखाई देती हैं। इनके स्वतन्त्र सिरों पर सूक्ष्मांकुर (Microvilli) पाये जाते हैं। ये अवशोषण तल को बढ़ाते हैं व संवेदी अंगों से संवदेना ग्रहण करते हैं। पित्ताशय व पित्तवाहिनी की दीवार इसी ऊतक की बनी होती है।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक image 29
3. स्तरित उपकला ऊतक (Stratified Epithelial Tissue):
इसमें कोशिकाएँ कई स्तरों में व्यवस्थित रहती हैं एवं स्तम्भाकार एवं जीवित होती हैं। इसमें जीवनपर्यन्त विभाजन की क्षमता पाई जाती है। विभाजन की क्षमता होने के कारण इसे जनन स्तर कहते हैं। यह ऊतक घर्षण करने वाले स्थानों, मुखगुहा, त्वचा, एपिडर्मिस, ईसोफेगस, नासा गुहा की म्यूकोसा, योनि आदि में पाया जाता है।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक image 30
4. ग्रन्थिल उपकला ऊतक (Glandular Epithelial Tissue):
हमारे शरीर में कई प्रकार की ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं। इन ग्रन्थियों की स्वतन्त्र आन्तरिक सतह पर पाये जाने वाले ऊतक को ग्रन्थिल उपकला ऊतक कहते हैं। ये ग्रन्थियाँ एककोशिकीय व बहुकोशिकीय होती हैं। ये ग्रन्थियाँ त्वचा, स्वेद ग्रन्थि, स्तन ग्रन्थि, तेल ग्रन्थि, लार ग्रन्थि, जठर ग्रन्थि, अग्न्याशयी ग्रन्थि में होती हैं।
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5. सरल पक्ष्माभी उपकला ऊतक (Simple Ciliated Epithelial Tissue):
इस ऊतक की कोशिकाएँ स्तम्भाकार या घनाकार होती हैं। इसके सिरों पर छोटी-छोटी महीन धागों के समान रचनाएँ पायी जाती हैं, जिन्हें सिलिया (Cilia) कहते हैं। ये ऊतक अण्डवाहिनी (Oviduct), मूत्रवाहिनी (Ureter), मुखगुहा की श्लेष्मिका (Mucous membrane), टिम्पैनिक गुहा, मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु की केन्द्रीय नाल (Central canal) तथा श्वास नली की भीतरी सतह पर पाये जाते हैं। इस ऊतक के पक्ष्माभ अन्य पदार्थों को धकेलने में मदद करते हैं।
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6. सरल शल्की उपकला ऊतक (Simple Squamous Epithelial Tissue):
यह ऊतक शरीर की सतह का सुरक्षात्मक आवरण बनाता है। मूत्र नलिका, देहगुहा, हृदय के चारों ओर रक्षात्मक आवरण बनाता है।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक image 33
7. संवेदी उपकला ऊतक (Sensory Epithelial Tissue):
ये स्तम्भी उपकला ऊतक का रूपान्तरण है। इनके सिरे पर संवेदी रोम (Sensory hair) पाये जाते हैं। ये रोम तन्त्रिका तन्तु से जुड़े रहते हैं। यह ऊतक घ्राण कोष, आँख की रेटिना तथा मुखगुहा की म्यूकस झिल्ली में पाया जाता है।
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प्रश्न 4.
मानव शरीर में पायी जाने वाली विभिन्न प्रकार की पेशियों के नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
मानव शरीर में निम्न तीन प्रकार की पेशियाँ पाई जाती हैं –

  1. रेखित पेशी
  2. अरेखित पेशी
  3. हृदयक पेशी (2018)।

1. रेखित पेशी का नामांकित चित्र:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक image 35
2. अरेखित पेशी का नामांकित चित्र:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक image 36
3. हृदयक पेशी का नामांकित चित्र:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक image 37

प्रश्न 5.
उपास्थि एवं अस्थि में अन्तर बताइए।
उत्तर:
उपास्थि एवं अस्थि में अन्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 6 ऊतक image 38

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प्रश्न 6.
मृदूतक एवं दृढ़ोतक में भेद कीजिए। इनके सभी भागों के नाम स्पष्ट रूप से लिखिए।
उत्तर:
मृदूतक एवं दृढ़ोतक में भेद:
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1. मृदूतकों के भाग:
कोशिकाद्रव्य, केन्द्रक, मध्य पटलिका, हरित लवक, रसधानी, अन्तरकोशिकीय स्थान, प्राथमिक कोशिका भित्ति।

2. दृढ़ोतकों के भाग:
सँकरी अवकोशिका (ल्यूमेन), लिग्निनयुक्त मोटी भित्ति, साधारण गर्त युग्म।

प्रश्न 7.
कॉर्क की विशिष्टताएँ लिखिए। ये कैसे बनती हैं? इनकी भूमिका का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
कॉर्क की विशेषताएँ:

  1. कॉर्क कोशिकाएँ परिपक्व होने पर मर जाती हैं।
  2. ये कोशिकाएँ सघन रूप से व्यवस्थित होती हैं।
  3. कोशिकाओं में अन्तरकोशिकीय स्थान नहीं होते।
  4. कोशिकाओं की भित्तियों में एक रासायनिक पदार्थ सुबेरिन होता है।
  5. इनमें कोशिकाएँ अनेक स्तरों में व्यवस्थित होती हैं।

कॉर्क का बनना:
जैसे ही पादप वृद्धि करते हुए काफी समय का हो जाता है तो द्वितीय विभज्योतक की एक पट्टी तने की बाह्यत्वचा (एपीडर्मिस) का स्थान ले लेती है। इस विभज्योतक के कारण बाहरी सतह पर कटी कोशिकाओं का निर्माण होता है जिन्हें कॉर्क कहते हैं।

कॉर्क की भूमिका:
यह गैस व जल के लिए अपारगम्य होती है। यह तने एवं उनकी टहनियों (शाखाओं) को सुरक्षा प्रदान करती है।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए –
1. पादपों में विभज्योतक एवं स्थायी ऊतकों में भेद कीजिए।
2. विभेदन की प्रक्रिया को परिभाषित कीजिए।
3. पादपों के किन्हीं दो सरल एवं दो जटिल स्थायी ऊतकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
1. विभज्योतकों की कोशिकाएँ अत्यधिक क्रियाशील होती हैं। इनके पास बहुत अधिक कोशिकाद्रव्य, पतली कोशिका भित्ति और स्पष्ट केन्द्रक होता है लेकिन रसधानी का अभाव होता है। ये ऊतक विभाजित होते रहते हैं इसी कारण पौधों के विभिन्न भागों में वृद्धि होती है। जबकि स्थायी ऊतक स्वयं विभज्योतकों से बनी नई कोशिकाओं से बनता है जो विभाजित होने की शक्ति खो देती हैं तथा ये विशिष्ट कार्य करती हैं।

2. विभेदन की परिभाषा:
“निश्चित आकार, माप एवं प्रकार्यों के कारण ऊतकों की कोशिकाओं में विभाजित होने की सामर्थ्य समाप्त हो जाती है तथा ये विशिष्ट कार्य करने के लिए स्थायी रूप एवं आकार ग्रहण कर लेती हैं। इस प्रक्रिया को विभेदन कहते हैं।”

3. दो सरल ऊतकों के नाम:
मृदूतक एवं दृढ़ोतक। दो जटिल ऊतकों के नाम-जाइलम एवं फ्लोएम।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित के बारे में कारण बताइए –
1. मृदूतक कोशिकाओं में सुस्पष्ट केन्द्रक एवं सघन कोशिकाद्रव्य होता है लेकिन इनमें रसधानियों का अभाव होता है।
2. दृढ़ोतकों में अन्तराकोशिकीय अवकाश नहीं होते।
3. जब हम नाशपाती फल को चबाते हैं तो हमें एक दानेदार एवं कुरकुरे का-सा अहसास होता है।
4. नारियल वृक्ष से छिलके को उतारना बहुत कठिन होता है।
उत्तर:

  1. मृदूतक कोशिकाओं को जल या अन्य पदार्थों के संग्रहण की आवश्यकता नहीं होती बल्कि इनका कार्य विभाजन करके नई कोशिकाएँ बनाना है इसलिए इनमें सुस्पष्ट केन्द्रक एवं सघन कोशिकाद्रव्य होता है और रसधानियों का अभाव होता है।
  2. लिग्निन युक्त होने के कारण दृढ़ोतकों में अन्तराकोशिकीय अवकाश का अभाव होता है।
  3. दृढ़ोतक कोशिकाओं की उपस्थिति के कारण नाशपाती खाते समय हमको दानेदार एवं कुरकुरे कासा अहसास होता है।
  4. नारियल वृक्ष के तने में स्थूलकोण ऊतक की उपस्थिति के कारण ये पर्याप्त कठोर एवं सुदृढ़ होते हैं इसलिए इसके छिलके को उतारना बहुत कठिन होता है।

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई

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MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई

MP Board Class 9th Science Chapter 5 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

प्रश्न श्रृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 66

प्रश्न 1.
कोशिका की खोज किसने की और इसे किस उपकरण से देखा और कैसे? (2018, 19)
उत्तर:
कोशिका की खोज रॉबर्ट हुक ने की थी। उसने अपने स्वनिर्मित सूक्ष्मदर्शी की सहायता से कॉर्क की पतली काट का अवलोकन करते समय मधुमक्खी के छत्ते के समान संरचना वाले छोटे-छोटे प्रकोष्ठकों को देखा जिन्हें उसने कोशिका कहा।

प्रश्न 2.
कोशिका को जीवन की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई क्यों कहते हैं?
उत्तर:
प्रत्येक जीव की संरचना कोशिकाओं से होती है तथा प्रत्येक कोशिका में उपस्थित विभिन्न कोशिकांग विभिन्न प्रकार के कार्यों को प्रतिपादित करते हैं, इसलिए कोशिका को जीवन की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई कहते हैं।

प्रश्न श्रृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 68

प्रश्न 1.
CO2 तथा पानी जैसे पदार्थ कोशिका से कैसे अन्दर तथा बाहर जाते हैं ? इस पर चर्चा करें।
उत्तर:
CO2 तथा पानी जैसे पदार्थ कोशिका के अन्दर तथा बाहर विशिष्ट विसरण के द्वारा जाते हैं जिसे परासरण कहते हैं। इसके लिए प्लाज्मा झिल्ली महत्वपूर्ण योगदान करती है।

प्रश्न 2.
प्लाज्मा झिल्ली को वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली क्यों कहते हैं?
उत्तर:
प्लाज्मा झिल्ली कुछ ही पदार्थों को कोशिका के अन्दर या बाहर आने-जाने देती है। इसलिए इसे वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली कहते हैं।

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प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 70

प्रश्न 1.
क्या अब आप निम्नलिखित तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों को भर सकते हैं जिससे कि प्रोकैरियोटी तथा यूकैरियोटी कोशिकाओं में अन्तर स्पष्ट हो सके ?
उत्तर:
प्रोकैरियोटी तथा यूकैरियोटी कोशिकाओं में अन्तर:
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प्रश्न श्रृंखला-4# पृष्ठ संख्या 73

प्रश्न 1.
दो ऐसे अंगकों के नाम बताइए जिनमें अपना आनुवंशिक पदार्थ होता है। (2018)
उत्तर:

  1. माइटोकॉण्ड्रिया
  2. प्लास्टिड।

प्रश्न 2.
यदि किसी कोशिका का संगठन किसी भौतिक अथवा रासायनिक प्रभाव के कारण नष्ट हो जाता है तो क्या होगा?
उत्तर:
किसी कोशिका का संगठन नष्ट होने से उसके द्वारा सम्पादित सभी कार्य रुक जायेंगे।

प्रश्न 3.
लाइसोसोम को आत्मघाती थैली (स्वघाती थैली या सुसाइड बैग) क्यों कहा जाता है? (2019)
उत्तर:
कोशिकीय चयापचय में व्यवधान के कारण जब कोशिका क्षतिग्रस्त या मृत हो जाती है तो लाइसोसोम फट जाते हैं और उसके पाचक एन्जाइम अपनी ही कोशिकाओं का पाचन कर देते हैं। इसलिए लाइसोसोम को आत्मघाती थैली अथवा स्वघाती थैली (सुसाइड बैग) कहा जाता है।

प्रश्न 4.
कोशिका के अन्दर प्रोटीन का संश्लेषण कहाँ होता है?
उत्तर:
राइबोसोम्स पर।

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MP Board Class 9th Science Chapter 5 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पादप कोशिकाओं और जन्तु कोशिकाओं में अन्तर लिखिए। (कोई तीन) (2018, 19)
उत्तर:
पादप कोशिकाओं और जन्तु कोशिकाओं में अन्तर:
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प्रश्न 2.
प्रोकैरियोटी कोशिकाएँ यूकैरियोटी कोशिकाओं से किस प्रकार भिन्न होती हैं? (2018)
उत्तर:
प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिकाओं में अन्तर:
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प्रश्न 3.
यदि प्लाज्मा झिल्ली फट जाये अथवा टूट जाए तो क्या होगा?
उत्तर:
प्लाज्मा झिल्ली कोशिका के घटकों को बाहरी पर्यावरण से अलग रखती है तथा यह परासरण की क्रिया में वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली का काम करती है। इसलिए इस झिल्ली के फट जाने या टूट जाने पर परासरण की क्रिया रुक जायेगी तथा कोशिका के घटक बाहरी पर्यावरण के सम्पर्क में आ जाएँगे तथा कोशिका मर जायेगी।

प्रश्न 4.
यदि गॉल्जी उपकरण न हो तो कोशिका के जीवन में क्या होगा?
उत्तर:
गॉल्जी उपकरण के न होने से सभी प्रकार की पुटिकाओं का बनना बन्द हो जायेगा तथा पदार्थों का संचयन, रूपान्तरण तथा कोशिका के अन्दर तथा बाहर विभिन्न क्षेत्रों में प्रेषण नहीं होगा, साथ ही सामान्य शक्कर से जटिल शक्कर नहीं बनेगी।

प्रश्न 5.
कोशिका का कौन-सा अंगक बिजलीघर है? और क्यों? (2019)
उत्तर:
कोशिका का बिजलीघर माइटोकॉण्ड्रिया है क्योंकि यह प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा ATP के रूप में ऊर्जा का उत्पादन करता है।

प्रश्न 6.
कोशिका झिल्ली को बनाने वाले लिपिड तथा प्रोटीन का संश्लेषण कहाँ होता है?
उत्तर:
अन्तर्द्रव्यी जालिका में।

प्रश्न 7.
अमीबा अपना भोजन कैसे प्राप्त करता है?
उत्तर:
अमीबा अपना भोजन एण्डोसाइटोसिस प्रक्रिया द्वारा प्राप्त करता है।

प्रश्न 8.
परासरण क्या है?
उत्तर:
परासरण-“एक विशिष्ट प्रकार का विसरण जिसमें वर्णात्मक झिल्ली के द्वारा गति होती है अर्थात् वह प्रक्रिया जिसमें जल के अणु वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा उच्च जल सान्द्रता से निम्न जल सान्द्रता की ओर गति करते हैं, परासरण कहलाती है।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित परासरण प्रयोग करेंछिले हुए आधे-आधे आलू के चार टुकड़े लो, इन चारों को खोखला करें जिससे कि आलू के कप बन जाएँ। इनमें से एक कप को उबले आलू में बनाना है। आलू के प्रत्येक कप को जल वाले बर्तन में रखो। अब –

(a) कप ‘A’ को खाली रखो
(b) कप ‘B’ में एक चम्मच चीनी डालो
(c) कप ‘C’ में एक चम्मच नमक डालो
(d) उबले आलू से बनाए गए कप ‘D’ में एक चम्मच चीनी डालो।

आलू के इन चारों कपों को दो घण्टे तक रखने के पश्चात् उनका अवलोकन करो तथा निम्न प्रश्नों के उत्तर दो –

(i) ‘B’ तथा ‘C’ के खाली भाग में जल क्यों एकत्रित हो गया? इसका वर्णन करो।
(ii) ‘A’ आलू इस प्रयोग के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
(iii) ‘A’ तथा ‘D’ आलू के खाली भाग में जल एकत्रित क्यों नहीं हुआ? इसका वर्णन करो।
उत्तर:
1. कप ‘B’ तथा ‘C’ की दीवारें कच्चे आलू की हैं जो वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली की तरह व्यवहार करती हैं। जल की सान्द्रता कप के बाहर अधिक है इसलिए परासरण द्वारा बाहर से जल ने अन्दर प्रवेश किया। इसलिए इनके खाली भाग में जल एकत्रित हुआ।

2. आलू ‘A’ में अन्दर कोई पदार्थ या विलयन नहीं। यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि यह देखना है कि परासरण की क्रिया होगी या नहीं।

3. कप ‘A’ में दूसरा विलयन नहीं है तथा कप ‘D’ की दीवार उबले आलू से बनी होने के कारण वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली की तरह व्यवहार नहीं करेगी इसलिए इसके खाली स्थान में जल एकत्रित नहीं हुआ।

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प्रश्न 10.
कायिक वृद्धि एवं मरम्मत हेतु किस प्रकार के कोशिका विभाजन की आवश्यकता होती है तथा इसका औचित्य बताइए?
उत्तर:
कायिक वृद्धि एवं मरम्मत हेतु “समसूत्री कोशिका विभाजन” की आवश्यकता होती हैं क्योंकि इस विभाजन में मातृ कोशिका विभाजित होकर दो समरूप संतति कोशिकाओं का निर्माण करती हैं जिनमें गुणसूत्रों की संख्या मातृ कोशिकाओं की संख्या के बराबर होती है। फलस्वरूप जीवों में वृद्धि एवं ऊतकों की मरम्मत में सहायता मिलती है।

प्रश्न 11.
युग्मकों के बनने के लिए किस प्रकार का कोशिका विभाजन होता है ? इस विभाजन का महत्व बताइए।
उत्तर:
युग्मकों के बनने के लिए अर्द्धसूत्री कोशिका विभाजन होता है। अर्द्धसूत्री कोशिका विभाजन का महत्व-इस विभाजन में दो के स्थान पर चार कोशिकाएँ बनती हैं। इन नई कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या मातृ कोशिकाओं से आधी रह जाती है। जनन के फलस्वरूप पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं जिनमें गुणसूत्रों की संख्याएँ मातृ कोशिकाओं के समान हो जाती हैं। इससे संतति का निर्माण होता है तथा वंश वृद्धि होती है।

MP Board Class 9th Science Chapter 5 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 9th Science Chapter 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में किसे क्रिस्टल रूप में बनाया जा सकता है?
(a) जीवाणु
(b) अमीबा
(c) विषाणु
(d) शुक्राणु
उत्तर:
(c) विषाणु

प्रश्न 2.
कोशिका फूल जायेगी यदि –
(a) कोशिका के भीतर जल के अणुओं की सान्द्रता उसके बाहर चारों ओर उपस्थित जल के अणुओं की सान्द्रता से अधिक होगी
(b) कोशिका के बाहर चारों ओर उपस्थित जल के अणुओं की सान्द्रता कोशिका के भीतर जल के अणुओं की सान्द्रता से अधिक हो
(c) कोशिका के भीतर तथा उसके बाहर के जल के अणुओं की सान्द्रता समान हो
(d) जल के अणुओं की सान्द्रता महत्व नहीं रखती।
उत्तर:
(b) कोशिका के बाहर चारों ओर उपस्थित जल के अणुओं की सान्द्रता कोशिका के भीतर जल के अणुओं की सान्द्रता से अधिक हो

प्रश्न 3.
गुणसूत्र बने होते हैं –
(a) डी. एन. ए. से
(b) प्रोटीन से
(c) डी. एन. ए. एवं प्रोटीन से
(d) आर. एन. ए. से
उत्तर:
(c) डी. एन. ए. एवं प्रोटीन से

प्रश्न 4.
इनमें से कौन-सा कार्य राइबोसोम का नहीं है?
(i) यह प्रोटीन अणुओं के निर्माण में सहायता करता है।
(ii) यह एन्जाइमों के निर्माण में सहायता करता है।
(iii) यह हॉर्मोनों के निर्माण में सहायता करता है।
(iv) यह मंड (स्टार्च) अणुओं के निर्माण में सहायता करता है।

(a) (i) और (ii)
(b) (ii) और (iii)
(c) (iii) और (iv)
(d) (i) और (iv)
उत्तर:
(c) (iii) और (iv)

प्रश्न 5.
इनमें से किसका सम्बन्ध अर्न्तद्रव्यी जालिका से नहीं है?
(a) यह केन्द्रक एवं कोशिकाद्रव्य के बीच प्रोटीन के लिए अभिगमन चैनल की तरह कार्य करती है।
(b) यह कोशिकाद्रव्य के विभिन्न क्षेत्रों के बीच पदार्थों को पहुँचाती है
(c) यह ऊर्जा उत्पादन का स्थल हो सकती है।
(d) यह कोशिका भी कुछ जैव-रासायनिक क्रियाओं का स्थल हो सकता है।
उत्तर:
(c) यह ऊर्जा उत्पादन का स्थल हो सकती है।

प्रश्न 6.
परासरण की कुछ परिभाषाएँ नीचे दी गई हैं। इन्हें सावधानी से पढ़िये और सही परिभाषा चुनिए –
(a) अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर, जल के अणुओं का अधिक सान्द्रता वाले क्षेत्र की ओर जाना।
(b) विलयन अणुओं का अधिक सान्द्रता से निम्न सान्द्रता की ओर जाना।
(c) पारगम्य झिल्ली से होकर विलायक अणुओं का अधिक सान्द्रता से निम्न सान्द्रता वाले विलयन की ओर जाना।
(d) अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर विलेय अणुओं का निम्न सान्द्रता वाले विलयन से अधिक सान्द्रता वाले विलयन की ओर जाना।
उत्तर:
(a) अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर, जल के अणुओं का अधिक सान्द्रता वाले क्षेत्र की ओर जाना।

प्रश्न 7.
पादप कोशिकाओं में जीवद्रव्यकुंचन को इस तरह परिभाषित किया जाता है –
(a) अल्प परासारी माध्यम में प्रद्रव्य झिल्ली का टूटना (लयन)
(b) अल्प परासारी माध्यम में कोशिकाद्रव्य का सिकुड़ना
(c) केन्द्रकद्रव्य का सिकुड़ना
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) अल्प परासारी माध्यम में कोशिकाद्रव्य का सिकुड़ना

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प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से किसके चारों ओर एकल झिल्ली का आवरण होता है?
(a) माइटोकॉण्ड्रिया
(b) रसधानी
(c) लाइसोसोम
(d) लवक
उत्तर:
(b) रसधानी

प्रश्न 9.
कौन-सा कोशिका-अंगक कोशिका के अन्दर विषैले पदार्थ एवं औषधि (ड्रग्स) को आविष रहित करने में मुख्य भूमिका निभाता है?
(a) गॉल्जी उपकरण
(b) लाइसोसोम
(c) चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिका
(d) रसधानी
उत्तर:
(c) चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिका

प्रश्न 10.
कोशिका झिल्ली निर्माण के लिए आवश्यक प्रोटीनों एवं लिपिडों का उत्पादन निम्नलिखित द्वारा किया जाता है –
(a) रुक्ष अन्तर्द्रव्यी जालिका
(b) गॉल्जी उपकरण
(c) कोशिका झिल्ली
(d) माइटोकॉण्ड्रिया
उत्तर:
(a) रुक्ष अन्तर्द्रव्यी जालिका

प्रश्न 11.
प्रोकैरियोट का अपरिभाषित केन्द्रक क्षेत्र कहलाता है –
(a) केन्द्रक
(b) केन्द्रिका
(c) न्यूक्लिक अम्ल
(d) केन्द्रकाभ
उत्तर:
(d) केन्द्रकाभ

प्रश्न 12.
कोशिका-अंगक जो सरल शर्करा को जटिल शर्करा में बदलने में शामिल है –
(a) अन्तर्द्रव्यी जालिका
(b) राइबोसोम
(c) लवक
(d) गॉल्जी उपकरण
उत्तर:
(d) गॉल्जी उपकरण

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में से कौन-सा रसधानी का कार्य नहीं है?
(a) संग्रहण
(b) कोशिका को स्फीति एवं दृढ़ता प्रदान करना
(c) अपशिष्ट उत्सर्जन
(d) गमन
उत्तर:
(d) गमन

प्रश्न 14.
अमीबा जिस प्रक्रिया के द्वारा भोजन प्राप्त करता है, वह कहलाती है –
(a) बहिः कोशिकता
(b) अन्त: कोशिकता
(c) प्रद्रव्यलयन
(d) बहिः कोशिकता एवं अन्त:कोशिकता दोनों
उत्तर:
(b) अन्त: कोशिकता

प्रश्न 15.
निम्न में से किसकी कोशिका भित्ति सेलुलोज से नहीं बनी है?
(a) जीवाणु
(b) हाइड्रिला
(c) आम वृक्ष
(d) कैक्टस
उत्तर:
(a) जीवाणु

प्रश्न 16.
सिल्वर नाइट्रेट का घोल किसी एक के अध्ययन में इस्तेमाल होता है –
(a) अन्तर्द्रव्यी जालिका
(b) गॉल्जी उपकरण
(c) केन्द्रक
(d) माइटोकॉण्ड्रिया
उत्तर:
(b) गॉल्जी उपकरण

प्रश्न 17.
केन्द्रक के अलावा वह अंगक जिसमें डी. एन. ए. होता है –
(a) अन्तर्द्रव्यी जालिका
(b) गॉल्जी उपकरण
(c) माइटोकॉण्ड्रिया
(d) लाइसोसोम
उत्तर:
(c) माइटोकॉण्ड्रिया

प्रश्न 18.
निम्नलिखित में से किसको कोशिका की रसोई कहा जाता है?
(a) माइटोकॉण्ड्रिया
(b) अन्तर्द्रव्यी जालिका
(c) हरितलवक
(d) गॉल्जी उपकरण
उत्तर:
(c) हरितलवक

प्रश्न 19.
कोशिका में लिपिड अणुओं को निम्न के द्वारा संश्लेषित किया जाता है –
(a) चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिका
(b) रुक्ष अन्तर्द्रव्यी जालिका
(c) गॉल्जी उपकरण
(d) लवक
उत्तर:
(a) चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिका

प्रश्न 20.
नई कोशिका का निर्माण, पूर्व स्थित कोशिका से होने की बात किसने बताई?
(a) हेकेल
(b) विर्चो
(c) हुक
(d) श्लाइडेन
उत्तर:
(b) विर्चो

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प्रश्न 21.
कोशिका सिद्धान्त निम्न द्वारा प्रतिपादित किया गया –
(a) श्लाइडेन एवं श्वान
(b) विर्चो
(c) हुक
(d) हेकेल
उत्तर:
(a) श्लाइडेन एवं श्वान

प्रश्न 22.
प्रोकैरियोटिक (प्राककेन्द्रकी) कोशिका में दिखने वाला एकमात्र कोशिकांग है –
(a) माइटोकॉण्ड्रिया
(b) राइबोसोम
(c) लवक
(d) लाइसोसोम
उत्तर:
(b) राइबोसोम

प्रश्न 23.
वह अंगक जिसमें कोशिका भित्ति नहीं होती है –
(a) राइबोसोम
(b) गॉल्जी उपकरण
(c) हरितलवक (क्लोरोप्लास्ट)
(d) केन्द्रक
उत्तर:
(a) राइबोसोम

प्रश्न 24.
लाइसोसोम उत्पन्न होते हैं –
(a) अन्तर्द्रव्यी जालिका से
(b) गॉल्जी उपकरण से
(c) केन्द्रक से
(d) माइटोकॉण्ड्रिया से
उत्तर:
(b) गॉल्जी उपकरण से

प्रश्न 25.
सजीव कोशिकाएँ निम्न के द्वारा खोजी गई हैं –
(a) रॉबर्ट हुक
(b) पुरकिंजे
(c) ल्यूवेनहॉक
(d) रॉबर्ट ब्राउन
उत्तर:
(c) ल्यूवेनहॉक

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. कोशिका के अभिगमन चैनल …………….।
2. कोशिका का पावर हाउस ……………।
3. कोशिका की पैकिंग और प्रेषित इकाई ……….।
4. कोशिका की पाचन थैली ……………..।
5. कोशिका की संग्रह थैली ……………..।
6. कोशिका का किचन ………।
7. कोशिका का नियन्त्रण कक्ष ……………..।
8. गुणसूत्र ……………. के बने होते हैं। (2019)
उत्तर:

  1. अन्तर्द्रव्यी जालिका
  2. माइटोकॉण्ड्रिया
  3. गॉल्जी उपकरण
  4. लाइसोसोम
  5. रसधानी
  6. हरित लवक
  7. केन्द्रक
  8. DNA

सही जोड़ी बनाना
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई image 4
उत्तर:

  1. → (iv)
  2. → (v)
  3. → (iii)
  4. → (i)
  5. → (ii)

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सत्य/असत्य कथन

1. गॉल्जी उपकरण, लाइसोसोम के बनने में शामिल है।
2. केन्द्रक, माइटोकॉण्ड्रिया एवं लवक में डी. एन. ए. होता है। इसलिए ये अपनी संरचनात्मक प्रोटीन बनाने में समर्थ हैं।
3. माइटोकॉण्ड्रिया को कोशिका का पावर हाउस कहा जाता है क्योंकि इनमें ए. टी. पी. का उत्पादन होता है।
4. कोशिकाद्रव्य को प्रद्रव्य भी कहा जाता है।
5. लाइसोसोम में भरे हुए एन्जाइम रुक्ष अन्तर्द्रव्यी जालिका से बने होते हैं।
6. रुक्ष अन्तर्द्रव्यी जालिका एवं चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिका क्रमशः लिपिड एवं प्रोटीन की बनी होती है।
7. अन्तर्द्रव्यी जालिका का कोशिका झिल्ली के नष्ट होने से सम्बन्ध है।
8. यूकैरियोटिक केन्द्रक के केन्द्रकद्रव्य में केन्द्रकाभ होता है।
9. अर्द्धपारगम्य झिल्ली में से होकर जाने वाले जल की गति उसमें घुले हुए पदार्थों की मात्रा से प्रभावित होती है।
10. झिल्ली, कार्बनिक अणुओं जैसे प्रोटीन और लिपिड से बनी होती है।
11. कार्बनिक विलायक में घुलनशील अणु झिल्ली में से होकर आसानी से गुजर जाते हैं।
12. पादप में कोशिका झिल्ली में काइटिन शर्करा होती है।
उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. सत्य
  4. सत्य
  5. सत्य
  6. असत्य
  7. असत्य
  8. असत्य
  9. सत्य
  10. सत्य
  11. सत्य
  12. असत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
जीवन की मूलभूत इकाई किसे कहा जाता है? (2018)
उत्तर:
कोशिका को।

प्रश्न 2.
बिना झिल्ली वाले किसी कोशिका अंगक का नाम लिखिए।
उत्तर:
राइबोसोम।

प्रश्न 3.
हम वह भोजन खाते हैं जिसमें सभी पोषक पदार्थ, जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज और जल आदि शामिल होते हैं। पाचन के बाद ये सभी ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, वसा अम्ल, ग्लिसरॉल के रूप में अवशोषित हो जाते हैं। पचे हुए भोजन एवं जल के अवशोषित होने में कौन-सी प्रक्रिया उत्तरदायी है?
उत्तर:
विसरण एवं परासरण।

प्रश्न 4.
यदि आपको कुछ सब्जियाँ पकाने के लिए दी जाती हैं तो साधारणतया आप सब्जियाँ पकाने के दौरान उनमें नमक मिलाते हैं। नमक के मिलाने पर कुछ देर बाद सब्जियों से जल निकलता है। इसमें कौन-सी प्रक्रिया उत्तरदायी है?
उत्तर:
बहिः परासरण।

प्रश्न 5.
जीवाणुओं में हरित लवक नहीं होता है लेकिन कुछ जीवाणु स्वभाव से प्रकाश-स्वपोषी होते हैं और प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया करते हैं। इस कार्य को जीवाणु कोशिका का कौन-सा भाग करता है?
उत्तर:
लघु रसधानियाँ (प्लाज्मा झिल्ली के साथ लगी हुई)।

प्रश्न 6.
कौन-सा कोशिका अंगक कोशिका की अधिकांश गतिविधियों पर नियन्त्रण रखता है?
उत्तर:
केन्द्रक।

प्रश्न 7.
कोशिका के ऊर्जा गृह का नाम लिखिए। (2019)
उत्तर:
माइटोकॉण्ड्रिया।

प्रश्न 8.
आत्मघाती थैली किसे कहते हैं? (2019)
उत्तर:
लाइसोसोम।

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MP Board Class 9th Science Chapter 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्या आप इससे सहमत हैं कि-“कोशिका जीव की निर्माण इकाई है” यदि हाँ तो क्यों? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
हाँ, हम सहमत हैं। क्योंकि प्रत्येक जीव का निर्माण कोशिका से ही होता है। कोशिका से ऊतक, ऊतक से अंग, अंग से अंगतन्त्र और अंगतन्त्र से जीव का निर्माण होता है।
कोशिका → ऊतक → अंग → अंगतन्त्र → जीव

प्रश्न 2.
जब आप लम्बे समय तक कपड़े धोते हैं तो आपकी अंगुलियों की त्वचा क्यों सिकुड़ जाती है?
उत्तर:
अधिक सान्द्रण वाला साबुन का घोल अति परासारी होता है, इसलिए परासरण के कारण जल हमारी अंगुलियों की कोशिकाओं से बाहर आ जाता है। इसलिए लम्बे समय तक कपड़े धोने में अंगुलियों की त्वचा सिकुड़ जाती है।

प्रश्न 3.
केवल प्राणियों में ही अन्तःकोशिकता (एण्डोसाइटोसिस) क्यों पाई जाती है?
उत्तर:
प्राणियों में कोशिका भित्ति नहीं होती इसलिए केवल इनमें ही अन्त:कोशिकता पाई जाती है।

प्रश्न 4.
एक व्यक्ति नमक का सान्द्रित घोल पी लेता है और कुछ समय बाद वह उल्टी करना शुरू कर देता है। इस स्थिति के लिए कौन-सा तथ्य उत्तरदायी है ? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
आँतों में बहिःपरासरण के होने से निर्जलीकरण हो जाता है इसलिए वह व्यक्ति उल्टी करना शुरू कर देता है।

प्रश्न 5.
लाल रुधिर कणिकाएँ (RBC) और प्याज के छिलके की कोशिकाओं को यदि अल्प परासारी विलयन में अलग-अलग रख दें तो उनमें क्या परिवर्तन आयेगा? अपने उत्तर की कारण सहित व्याख्या कीजिए।
(a) दोनों की कोशिकाएँ फूल जायेंगी।
(b) लाल रुधिर कोशिकाएँ आसानी से फट जाएँगी जबकि प्याज के छिलके की कोशिकाएँ एक सीमा तक न फटने की कोशिश करेंगी।
(c) ‘a’ और ‘b’ दोनों सही हैं।
(d) लाल रुधिर कणिकाएँ और प्याज के छिलके की कोशिकाएँ समान व्यवहार करेंगी।
उत्तर:
(b) लाल रुधिर कणिकाएँ आसानी से फट जाएँगी जबकि प्याज की कोशिकाएँ एक सीमा तक न फटने का प्रयास करेंगी क्योंकि प्याज के छिलके की कोशिकाओं में कोशिका भित्ति होती है जबकि RBC में कोशिका भित्ति नहीं होती।

प्रश्न 6.
पादप के उन विभिन्न भागों के नाम लिखिए जिनमें वर्णी लवक (क्रोमोप्लास्ट), हरित लवक (क्लोरोप्लास्ट) और अवर्णी लवक (ल्यूकोप्लास्ट) उपस्थित होते हैं।
उत्तर:

  1. वर्णी लवक (क्रोमोप्लास्ट) – पुष्प एवं फलों में।
  2. हरित लवक (क्लोरोप्लास्ट) – पत्तियों एवं हरे भाग में।
  3. अवर्णी लवक (ल्यूकोप्लास्ट) – जड़ों में।

प्रश्न 7.
प्याज के छिलके की कोशिका से जीवाणु कोशिका कैसे भिन्न है ?
उत्तर:
प्याज के छिलके की कोशिका यूकैरियोटिक होती है जबकि जीवाणु कोशिका प्रोकैरियोटिक (प्राक्केन्द्रकी) होती है।

प्रश्न 8.
अमीबा अपना भोजन कैसे प्राप्त करता है?
उत्तर:
अमीबा अपना भोजन अंत:कोशिकता (एण्डोसाइटोसिस) प्रक्रिया के द्वारा प्राप्त करता है।

प्रश्न 9.
पादप कोशिका के दो ऐसे अंगकों के नाम बताइए जिनमें अपनी आनुवंशिक सामग्री और राइबोसोम विद्यमान होते हैं।
उत्तर:

  1. माइटोकॉण्ड्रिया
  2. लवक।

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प्रश्न 10.
लाइसोसोम को “कोशिकाओं का अपमार्जक” क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
लाइसोसोम कोशिका में बनने वाले अपशिष्ट पदार्थों (कचरे) को हटाता है इसलिए यह ‘कोशिका का अपमार्जक’ कहलाता है।

प्रश्न 11.
कौन से प्रकार का लवक इनमें सामान्यतया पाया जाता है?
(a) पादप की जड़
(b) पादप की पत्तियाँ
(c) पुष्प एवं फल।
उत्तर:

  1. अवर्णी लवक
  2. हरित लवक
  3. वर्णी लवक।

प्रश्न 12.
पादप कोशिकाओं में बड़े आकार की रसधानी क्यों होती है?
उत्तर:
पादप कोशिकाओं में बड़े आकार की रसधानियाँ होती हैं क्योंकि इनमें कोशिकाद्रव्य भरा रहता है तथा कोशिका के लिए आवश्यक बहुत से पदार्थ, जैसे अमीनो अम्ल, शर्करा, विभिन्न कार्बनिक अम्ल तथा कुछ प्रोटीन आदि स्थित होते हैं।

प्रश्न 13.
क्रोमैटिन, क्रोमैटिड एवं क्रोमोसोम में परस्पर क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
क्रोमैटिन से क्रोमैटिड और क्रोमैटिड से क्रोमोसोम बने होते हैं।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित अवस्थाओं की स्थिति से क्या निष्कर्ष निकलता है?
(a) जब बाहरी माध्यम की तुलना में कोशिका के भीतर अधिक सान्द्रता वाला जल होता है।
(b) बाहरी माध्यम की तुलना में कोशिका के भीतर कम सान्द्रता वाला जल होता है।
(c) जब कोशिका के अन्दर एवं बाहरी माध्यम में जल की सान्द्रता समान होती है।
उत्तर:

  1. बहिः परासरण
  2. अन्त: परासरण
  3. कोई परिव्यय नहीं।

प्रश्न 15.
प्याज की झिल्ली की कोशिकाओं का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
प्याज के शल्क-पत्र की झिल्ली की कोशिकाओं का चित्र:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई image 5
प्रश्न 16. लवक के दो कार्य लिखिए। (2019)
उत्तर:

  1. हरित लवक प्रकाश-संश्लेषण में सहायक होते हैं।
  2. वर्णी लवक पुष्पों को आकर्षक बनाते हैं।

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MP Board Class 9th Science Chapter 5 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अन्तःप्रद्रव्यी जालिका का सचित्र वर्णन कीजिए। (2019)
उत्तर:
अन्तःप्रद्रव्यी जालिका-अन्तःप्रद्रव्यी जालिका में सूक्ष्म आशय (थैलियाँ) एवं नलिकाओं का जालक तन्त्र होता है। यह केन्द्रक झिल्ली से कोशिका झिल्ली तक कोशिकाद्रव्य में फैली रहती हैं।

अन्तःप्रद्रव्यी जालिका जीवाणु, विषाणु, स्तनधारियों की लाल रक्त कणिकाओं तथा हरे-नीले शैवालों को छोड़कर सभी कोशिकाओं में पाई जाती हैं।
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प्रश्न 2.
अन्तर्द्रव्यी जालिका के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
अन्तःप्रद्रव्यी जालिका के कार्य –

  1. यह प्रोटीन संश्लेषण में सहायक होती है।
  2. यह कोशिका विभाजन के समय केन्द्रकीय झिल्ली के निर्माण में भाग लेती है।
  3. यह ग्लाइकोजन के उपापचय में सहायता करती है।
  4. यह केन्द्रक से विभिन्न आनुवंशिक पदार्थों को कोशिकाद्रव्य के विभिन्न अंगों तक पहुँचाती है।

प्रश्न 3.
गॉल्जी उपकरण (गॉल्जी काय) का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गॉल्जी काय या गॉल्जी उपकरण-गॉल्जी काय दोहरी झिल्ली की बनी संरचनाएँ हैं जो एक खाली स्थान के द्वारा एक-दूसरे 2 से अलग-अलग स्थित होती हैं। इनमें तीन घटक होते हैं –
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई image 7

  1. चपटे कोष
  2. आशय
  3. रिक्तिकाएँ।

एक जन्तु कोशिका में 3 से 7 एवं पादप कोशिका में 10 से 20 गॉल्जी काय पाये जाते हैं। ये लाल रुधिर कणिकाओं को छोड़कर सभी यूकैरियोटिक कोशिकाओं में समतल इकाई झिल्लियों के गुच्छे के रूप में पायी जाती हैं। कुछ अकशेरुकी जन्तुओं तथा पौधों की कोशिकाओं में अनेक असम्बद्ध इकाइयों के रूप में बिखरी होती हैं जिन्हें डिक्टियोसोम कहते हैं।

प्रश्न 4.
गॉल्जी काय (गॉल्जी उपकरण) के प्रमुख कार्य लिखिए।
अथवा
गॉल्जी काय के कोशिका में कार्य लिखिए। (2019)
उत्तर:
गॉल्जी काय या गॉल्जी उपकरण के कार्य –

  1. ये लाइसोसोम्स का निर्माण करते हैं।
  2. ये अनेक प्रकार के स्रावी पदार्थों का निर्माण करते हैं।
  3. ये सावण द्वारा कोशिका भित्ति का निर्माण करते हैं।
  4. ये अनेक कार्बोहाइड्रेट्स के दीर्घ अणुओं का संश्लेषण करते हैं।
  5. ये शुक्राणुजनन के समय शुक्राणु के ऊपरी भाग (एक्रोसोम) का निर्माण करते हैं।

प्रश्न 5.
लाइसोसोम का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लाइसोसोम:
लाइसोसोम 0-2 से 0.84 तक व्यास वाली इकाई झिल्ली की बनी गोलाकार या अण्डाकार संरचनाएँ होती हैं। इनमें पाचक प्रकिण्व (Digestive enzyme) पाये जाते हैं। इनमें 24 प्रकार के एन्जाइम पाये जाते हैं।

लाइसोसोम यकृत, प्लीहा, श्वेत रक्त कणिकाएँ, अग्न्याशय, वृक्क, थायरॉइड ग्रन्थि आदि ऊतकों की कोशिकाओं में तथा पादप की विभाजी कोशिकाओं में पाये जाते हैं।
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प्रश्न 6.
लाइसोसोम के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
लाइसोसोम के कार्य:

  1. ये कोशिका में पाये जाने वाले प्रकिण्वों (Enzymes) का स्रावण एवं संग्रहण करते हैं।
  2. ये मृत या पुरानी कोशिकाओं का भक्षण करते हैं।
  3. ये कोशिका में प्रवेश करने वाले सूक्ष्म जीवों व कणों का पाचन करते हैं।
  4. ये भोजन की कमी के समय कोशिकाओं तथा कोशिकाद्रव्य में उपस्थित अवयवों का पाचन करते हैं।
  5. ये उपवास या रोग की स्थिति में शरीर को पोषण देते हैं।
  6. शुक्राणु इन्हीं के कारण अण्डाणु में प्रवेश करते हैं।

प्रश्न 7.
माइटोकॉण्ड्रिया का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
माइटोकॉण्ड्यिा -माइटोकॉण्ड्रिया सभी यूकैरियोटिक कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य में पाया जाता है। यह.दोहरी झिल्ली का बना होता है जिसमें एक तरल पदार्थ भरा रहता है। इसे बाह्य कक्ष कहते हैं। माइटोकॉण्ड्रिया की आन्तरिक झिल्ली झिल्ली के बीच की गुहा को आन्तरिक कक्ष मैट्रिक्स कहते हैं। इसमें मैट्रिक्स (आधात्री) भरा होता है। आन्तरिक झिल्ली अन्दर की ओर अंगलियों जैसी संरचनाएँ बनाती हैं जिन्हें क्रिस्टी कहते हैं। क्रिस्टी की सतह पर ऑक्सीसोम (F – कण) नामक संरचनाएँ पाई जाती हैं। मैट्रिक्स में लिपिड्स, प्रोटीन, प्रकिण्व, कुण्डलित दोहरे स्ट्रेण्ड वाले DNA एवं RNA तथा राइबोसोम पाये जाते हैं।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 5 जीवन की मौलिक इकाई image 9
प्रश्न 8.
(a) माइटोकॉण्ड्यिा (2019)
तथा
(b) कोशिका झिल्ली के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
(a) माइटोकॉण्ड्रिया के कार्य:

  1. ये भोज्य पदार्थों का ऑक्सीकरण करके ऊर्जा मुक्त करते हैं तथा इस ऊर्जा को ATP के रूप में संचित करते हैं जो जैविक कार्यों में प्रयुक्त होती है।
  2. ये प्रोटीन का संश्लेषण भी करते हैं।
  3. ये अण्डों का योक तथा शुक्राणुओं के मध्य भाग का निर्माण करते हैं।

(b) कोशिका झिल्ली के प्रमुख कार्य:

  1. यह कोशिका को एक आकार प्रदान करती है।
  2. यह कोशिका के जीवित अंगों की सुरक्षा के लिए एक आवरण प्रदान करने का कार्य भी करती है।
  3. इसका मुख्य कार्य कोशिका के अन्दर और उसके बाहरी माध्यमों के बीच आण्विक आदान-प्रदान को नियन्त्रित करना है।

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प्रश्न 9.
रिक्तिकाओं के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
रिक्तिकाओं के कार्य:

  1. ये भोजन के पाचन, उत्सर्जन आदि क्रियाओं में सहायता करती हैं।
  2. ये कोशाओं में परासरण नियन्त्रण का कार्य करती हैं।
  3. ये भोज्य पदार्थों का संग्रहण करती हैं।
  4. टोनोप्लास्ट के अर्द्ध-पारगम्य होने के कारण, ये कोशा के अन्दर विभिन्न पदार्थों के संवहन का कार्य करती हैं।

प्रश्न 10.
लवक का सचित्र वर्णन कीजिए तथा इनके प्रकार बताइए।
उत्तर:
लवक-लवक अधिकांश पादप तथा कुछ प्रकाश-संश्लेषी एक कोशिकीय जन्तुओं (Protozoa) की कोशिकाओं में पाई जाने वाली छोटी-छोटी बिम्ब के समान, गोल अथवा अण्डाकार दोहरी दीवार युक्त संरचना होती हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं –

  1. अवर्णी लवक
  2. हरित लवक
  3. वर्णी लवक।

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प्रश्न 11.
तारककाय का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
तारककाय (Centrosome):
तारककाय जन्तु कोशिकाओं में केन्द्रक के पास पाया जाता है। इसके अतिरिक्त यह शैवाल तथा कवक की कोशिकाओं में भी पाया जाता है। प्रत्येक तारककाय में तारक केन्द्र होते हैं।
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प्रश्न 12.
राइबोसोम का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राइबोसोम:
राइबोसोम्स सघन, गोलाकार, कणिकामय संरचनाएँ हैं तथा कोशिका में उपस्थित सबसे छोटे कोशिकांग हैं। इनका व्यास लगभग 250A होता है। ये केवल RNA एवं प्रोटीन से निर्मित होते हैं तथा कलाविहीन कणों के रूप में क्लोरोप्लास्ट, माइटोकॉण्ड्रिया, केन्द्रक के अन्दर या अन्त:प्रद्रव्यी जालिका के ऊपर या कोशिकाद्रव्य में स्वतन्त्र रूप से पाये जाते हैं। ये अपारदर्शी होते हैं।
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प्रश्न 13.
(a) तारककाय (सेण्ट्रोसोम) एवं
(b) सूक्ष्मकाओं के प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
(a) तारककाय (सेण्ट्रोसोम) के कार्य:

  1. ये जन्तु कोशिकाओं में कोशिका विभाजन के समय तर्कु रूप रेशों का निर्माण करते हैं।
  2. ये शुक्राणु में स्थित दो सेण्ट्रिओल में से कशाभ का अक्षीय तन्तु बनाते हैं।
  3. ये सेण्ट्रिओल पक्ष्मों व कशाभों के काइनेटोसोम या आधारकाय बनाते हैं।

(b) सूक्ष्मकाओं के कार्य:

  1. ये कोशिकाओं के कंकाल का निर्माण करती हैं।
  2. ये कोशिका के आकार, विस्तार को नियमित करती हैं।
  3. ये कोशिकाओं की गति एवं गुणसूत्रों का नियन्त्रण करती हैं।
  4. ये कोशिकाद्रव्य चक्रण में सहायता करती हैं।

प्रश्न 14.
रुक्ष एवं चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिका में अन्तर बताइए। अन्तर्द्रव्यी जालिका झिल्ली के जीवात् जनन के लिए किस तरह महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
रुक्ष एवं चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिका में अन्तर:

रुक्ष अन्तर्द्रव्यी जालिका (RER):

  1. RER की सतह पर राइबोसोमीय कण होते हैं जिसके कारण यह रुक्ष होती है।
  2. इस पर उपस्थित राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण के लिए स्थल उपलब्ध कराते हैं।

चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिका (SER):

  1. SER की सतह पर कोई राइबोसोमीय कण नहीं होते इसलिए यह चिकनी दिखाई देती है।
  2. यह लिपिड एवं वसा अणुओं के निर्माण में सहायता करती है।

रुक्ष अन्तर्द्रव्यी जालिका प्रोटीन संश्लेषण के लिए स्थान उपलब्ध कराती हैं एवं चिकनी अन्तर्द्रव्यी जालिका लिपिड एवं वसा अणुओं के निर्माण में सहायक होती है। प्रोटीन, लिपिड एवं वसा से मिलकर कोशिका झिल्ली के जीवात, जनन के लिए सहायता करने के लिए महत्वपूर्ण होती है।

प्रश्न 15.
संक्षिप्त में बताइए कि क्या होता है जबकि –
(a) सूखी खुबानी को कुछ देर के लिए साफ जल में रखा जाय और फिर बाद में इसे शर्करा विलयन में रखा जाय।
(b) लाल रुधिर कोशिकाओं को सान्द्रित लवण विलयन में रखा जाता है।
(c) रियो (Rhoeo) की पत्तियों को पहले जल में उबालते हैं और फिर चीनी की चाशनी की एक बूंद इसके ऊपर रखते हैं।
उत्तर:

  1. अन्तःपरासरण के कारण पहले यह फूलती है तथा बाद में बाह्यपरासरण के कारण सिकुड़ती है।
  2. इसमें से जल निकल जाने से यह सिकुड़ जाती है।
  3. उबालने से कोशिका मर जाती हैं इसलिए जीवद्रव्यकुंचन नहीं होता।

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MP Board Class 9th Science Chapter 5 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखी गई पादप कोशिका का नामांकित चित्र बनाइए।
अथवा
पादप कोशिका का स्वच्छ एवं नामांकित चित्र बनाइए। (2019)
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा प्रदर्शित पादप कोशिका की आन्तरिक संरचना का नामांकित चित्र –
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प्रश्न 2.
एक पादप कोशिका का चित्र बनाइए और उन भागों को चिह्नित कीजिए जो –
(a) कोशिका के विकास एवं कार्यों का निर्धारण करता है।
(b) अन्तर्द्रव्यी जालिका से निकलने वाली सामग्री को पैक करता है।
(c) सूक्ष्म-जीवों में ऐसा प्रतिरोध पैदा करता है जिससे वे बाह्य अल्पपरासारी माध्यम में फूटे बगैर अप्रभावित बने रहें।
(d) जो जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक बहुत-सी जैव-रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए स्थल उपलब्ध कराता है।
(e) एक ऐसा द्रव जो केन्द्रक के अन्दर होता है।
उत्तर:
निर्देश-पादप कोशिका का उपर्युक्त की तरह चित्र बनाएँ तथा उसमें निम्न भागों को चिन्हित करें –

  1. केन्द्रक
  2. गॉल्जी उपकरण
  3. कोशिका भित्ति
  4. कोशिकाद्रव्य
  5. केन्द्रकद्रव्य।

प्रश्न 3.
पादप कोशिका का स्वच्छ चित्र बनाइए और इसके किन्हीं तीन भागों को चिह्नित कीजिए जो इसे प्राणी कोशिका से विभेदित करते हैं।
उत्तर:
निर्देश-पादप कोशिका का उपर्युक्त की तरह चित्र बनाइए तथा उसमें निम्न भागों को चिह्नित कीजिए –

  1. हरित लवक
  2. कोशिका भित्ति
  3. रिक्तिका (रसधानी)।

प्रश्न 4.
किसी प्राणी कोशिका का एक स्वच्छ आरेख बनाइए तथा उसके भागों के नाम लिखिए। (2019)
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा प्रदर्शित प्राणी (जन्तु) कोशिका की संरचना का नामांकित:
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MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना

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MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना

MP Board Class 9th Science Chapter 4 पाठ के अन्तर्गत के प्रश्नोत्तर

प्रश्न शृंखला-1 # पृष्ठ संख्या 53

प्रश्न 1.
कैनाल किरणें क्या हैं ?
उत्तर:
कैनाल किरणें:
गोल्डस्टीन ने विशिष्ट धनावेशित विकिरण की खोज की, जिसे कैनाल किरणें कहा जाता है।

प्रश्न 2.
यदि किसी परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन है, तो इसमें कोई आवेश होगा या नहीं ?
उत्तर:
नहीं। इसमें धनावेश एवं ऋणावेश समान है।

प्रश्न शृंखला-2 # पृष्ठ संख्या 56

प्रश्न 1.
परमाणु उदासीन है, इस तथ्य को टॉमसन के मॉडल के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
टॉमसन के मॉडल के अनुसार परमाणु धनावेशित गोला है जिसमें इलेक्ट्रॉन (ऋणावेश) फँसे होते हैं। चूँकि दोनों प्रकार के आवेशों की संख्या समान होती है अतः परमाणु विद्युतीय रूप से उदासीन है।

प्रश्न 2.
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के अनुसार परमाणु के नाभिक में कौन-सा अवपरमाणुक कण विद्यमान है ?
उत्तर:
प्रोटॉन।

प्रश्न 3.
तीन कक्षाओं वाले बोर के परमाणु मॉडल का चित्र बनाइए।(2019)
उत्तर:
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प्रश्न 4.
क्या अल्फा कणों का प्रकीर्णन प्रयोग सोने के अतिरिक्त दूसरी धातु की पन्नी से सम्भव होगा?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न श्रृंखला-3 # पृष्ठ संख्या 56

प्रश्न 1.
परमाणु के तीन अवपरमाणुक कणों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. इलेक्ट्रॉन
  2. प्रोटॉन
  3. न्यूट्रॉन।

प्रश्न 2.
हीलियम परमाणु का परमाणु द्रव्यमान 4u और उसके नाभिक में 2 प्रोटॉन होते हैं। इसमें कितने न्यूट्रॉन होंगे ?
उत्तर:
किसी तत्व का परमाणु द्रव्यमान उसकी द्रव्यमान संख्या के (संख्यात्मक रूप से) बराबर होता है।
∵ A =p + n ⇒ 4 = 2 + n ⇒ n = 4-2 = 2
अतः न्यूट्रॉनों की अभीष्ट संख्या = 2

प्रश्न श्रृंखला-4 # पृष्ठ संख्या 57

प्रश्न 1.
कार्बन और सोडियम के परमाणुओं के लिए इलेक्ट्रॉन वितरण लिखिए।(2019)
उत्तर:
कार्बन – 6e = 2, 4
सोडियम – 11e = 2, 8, 1

प्रश्न 2.
यदि किसी परमाणु का K और L कोश भरा है, तो उस परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्या होगी?
उत्तर:
2 + 8 = 10

प्रश्न श्रृंखला-5 # पृष्ठ संख्या 58

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प्रश्न 1.
क्लोरीन, सल्फर और मैग्नीशियम की परमाणु संख्या से इसकी संयोजकता कैसे प्राप्त करेंगे?
उत्तर:
क्लोरीन की परमाणु संख्या = 17 = 2, 8, 7
बाह्य (संयोजकता) कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं। इसलिये इसकी संयोजकता (8-7) = 1 होगी।
सल्फर की परमाणु संख्या = 16 = 2, 8, 6
बाह्य कोश में 6 इलेक्ट्रॉन हैं। इसलिए इसकी संयोजकता (8 – 6) = 2 होगी।

क्लोरीन एवं सल्फर की परमाणु संख्या क्रमश:
17 एवं 16 है। इनके इलेक्ट्रॉन वितरण 2, 8, 7 एवं 2, 8, 6 में बाह्यतम (संयोजकता) कोश में क्रमश: 7 एवं 6 इलेक्ट्रॉन हैं जो 4 से अधिक हैं। इसलिए इनको अष्टक (8) में से घटाकर इनकी संयोजकता ज्ञात करेंगे।

मैग्नीशियम की परमाणु संख्या 12 है जिसका वितरण 2, 8, 2 है। अतः बाह्य कोश के इलेक्ट्रॉन ही इसकी संयोजकता होगी।

प्रश्न श्रृंखला-6 # पृष्ठ संख्या 59

प्रश्न 1.
यदि किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 8 है और प्रोटॉनों की संख्या भी 8 है, तब – (2019)

  1. परमाणु की परमाणुक संख्या क्या है?
  2. परमाणु का क्या आवेश है?

उत्तर:

  1. परमाणु की परमाणुक संख्या = 8
  2. परमाणु का आवेश = 0 (शून्य)

प्रश्न 2.
सारणी की सहायता से ऑक्सीजन और सल्फर परमाणु की द्रव्यमान संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
सारणी के अनुसार ऑक्सीजन में प्रोटॉनों की संख्या 8 तथा न्यूट्रॉनों की संख्या भी 8 है।
इसलिए
ऑक्सीजन की द्रव्यमान संख्या = 8 + 8 = 16
सारणी के अनुसार सल्फर में प्रोटॉनों की संख्या 16 एवं न्यूट्रॉनों की संख्या 16 है।
इसलिए
सल्फर की द्रव्यमान संख्या = 16 + 16 = 32
अतः ऑक्सीजन एवं सल्फर की अभीष्ट द्रव्यमान संख्या क्रमश: 16 एवं 32 है।

प्रश्न श्रृंखला-7 # पृष्ठ संख्या 60

प्रश्न 1.
चिह्न H, D एवं T के लिए प्रत्येक में पाए जाने वाले तीन अवपरमाणुक कणों को सारणीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 2

प्रश्न 2.
समस्थानिक और समभारिक के किसी एक युग्म का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:
समस्थानिक युग्म – 1735Cl एवं 1735Cl है।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्रमश: 2,8,7 एवं 2, 8,7
समभारिक युग्म – 1840Ar एवं 2040Ca है।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्रमश – 2, 8, 8 एवं 2, 8,8, 2

MP Board Class 9th Science Chapter 4 पाठान्त अभ्यास के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन के गुणों की तुलना कीजिए।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन के गुणों की तुलना:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 3

प्रश्न 2.
जे. जे. टॉमसन के परमाणु मॉडल की क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर:
जे. जे. टॉमसन के परमाणु मॉडल की सीमाएँ:
जे. जे. टॉमसन के परमाणु मॉडल से केवल परमाणु में उदासीन होने की व्याख्या हो सकी। बाकी वैज्ञानिकों द्वारा किए गए प्रयोगों के परिणामों की व्याख्या इसके द्वारा नहीं की जा सकी।

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प्रश्न 3.
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की क्या सीमाएँ (कमियाँ) हैं?
उत्तर:
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की सीमाएँ (कमियाँ)-वर्तुलाकार मार्ग में चक्रण करता हुआ इलेक्ट्रॉन (आवेशित कण) त्वरित होगा और त्वरण के समय आवेशित कणों से ऊर्जा विकरित होगी। इस प्रकार स्थायी कक्षा में घूमता हुआ इलेक्ट्रॉन अपनी ऊर्जा विकरित करते हुए केन्द्रक से टकरा जाता और परमाणु अस्थिर होता, लेकिन ऐसा नहीं है।

प्रश्न 4.
बोर के परमाणु मॉडल की व्याख्या कीजिए। (2018)
उत्तर:
बोर का परमाणु मॉडल-बोर के परमाणु मॉडल की निम्निलिखित अवधारणाएँ हैं –

  1. इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित कक्षाओं में ही चक्कर लगा सकते हैं जिन्हें इलेक्ट्रॉन की विविक्त कक्षा कहते हैं। इन कक्षाओं (कोशों) को ऊर्जा स्तर कहते हैं।
  2. जब इलेक्ट्रॉन इस विविक्त कक्षा (ऊर्जा स्तर) में चक्कर लगाते हैं, तो उनकी ऊर्जा का विकिरण नहीं होता है।

प्रश्न 5.
इस अध्याय में दिए गए सभी परमाणु मॉडलों की तुलना कीजिए।
उत्तर:
जे. जे. टॉमसन, रदरफोर्ड एवं बोर के परमाणु मॉडलों की तुलना-जे. जे. टॉमसन का मॉडल केवल परमाणु की उदासीनता की व्याख्या कर पाता है लेकिन विभिन्न प्रायोगिक परिणामों की व्याख्या करने में सर्वथा असफल रहता है। रदरफोर्ड के मॉडल के अनुसार परमाणु अस्थिर होना चाहिए परन्तु ऐसा वास्तव में नहीं है। बोर का मॉडल सर्वमान्य मॉडल है। इससे परमाणु की स्थिरता की भी व्याख्या होती है।

प्रश्न 6.
पहले अट्ठारह तत्वों के विभिन्न कक्षों में इलेक्ट्रॉन वितरण के नियम को लिखिए।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन वितरण के नियम:

  1. किसी कक्षा में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 2n2 सूत्र से दर्शायी जा सकती है जहाँ n कक्षा की संख्या या ऊर्जा स्तर का क्रमांक है जिसका आकलन हम केन्द्रक से बाहर की ओर करते हैं।
  2. सबसे बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 8 होती है।

प्रश्न 7.
सिलिकॉन और ऑक्सीजन का उदाहरण देते हुए संयोजकता की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
संयोजकता-“किसी परमाणु द्वारा अपनी बाह्यतम कक्ष को पूर्णरूप से भरने के लिए इलेक्ट्रॉनों का परस्पर साझा करने या उनको ग्रहण करने अथवा उन्हें त्यागने की आवश्यकता होती है। इस प्रकार अष्टक बनाने के लिए साझा किए गये या ग्रहण किए गए या त्यागे गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या उस परमाणु की संयोजकता कहलाती है।”

उदाहरण:

  1. ऑक्सीजन (o) – 8 = 2, 6 के बाह्यतम कोश में 6 इलेक्ट्रॉन हैं। यह अष्टक बनाने के लिए 2 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करेगा। अत: इसकी संयोजकता 2 हुई।
  2. सिलिकॉन (Si) – 14 = 2, 8, 4 के बाह्यतम कोश में 4 इलेक्ट्रॉन हैं। यह अष्टक पूर्ण करने के लिए यह 4 इलेक्ट्रॉन त्यागेगा या 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करेगा। इस प्रकार इसकी संयोजकता 4 हुई।

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प्रश्न 8.
उदाहरण के साथ व्याख्या कीजिए-परमाणु संख्या (2018, 19), द्रव्यमान संख्या (2018, 19), समस्थानिक (2018, 19) और समभारिक (2019)। समस्थानिकों के कोई तीन उपयोग लिखिए (2018)।
उत्तर:
1. परमाणु संख्या:
“किसी तत्व के परमाणु के केन्द्रक में उपस्थित धनावेशित प्रोटॉनों की संख्या उस तत्व की परमाणु संख्या कहलाती है।”

2. द्रव्यमान संख्या:
“किसी तत्व के परमाणु के केन्द्रक में उपस्थित न्यूक्लियॉनों (प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉनों) की संख्या को उस तत्व की द्रव्यमान संख्या कहते हैं।”

3. समस्थानिक:
“एक ही तत्व के परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान होती है परन्तु द्रव्यमान संख्या पृथक् होती है, समस्थानिक कहलाते हैं।”

उदाहरण:
1735Cl एवं 1735Cl समस्थानिक हैं।

समभारिक:
“दो भिन्न तत्वों के युग्म को जिनकी परमाणु संख्या तो भिन्न होती है लेकिन द्रव्यमान संख्या समान हो, समभारिक कहते हैं।”
उदाहरण:
1840Ar एवं 2040Ca समभारिक हैं।

समस्थानिकों के उपयोग:

  1. कैंसर के उपचार में कोबाल्ट के समस्थानिक का उपयोग होता है।
  2. घेघा रोग के उपचार में आयोडीन के समस्थानिक का उपयोग होता है।
  3. रक्त संचरण के अध्ययन में सोडियम के समस्थानिक का उपयोग होता है।

प्रश्न 9.
“Na के पूरी तरह से भरे हुए K व L कोश होते हैं।” व्याख्या दीजिए।
उत्तर:
Na में 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं जिनका विन्यास 2, 8 है और प्रथम कोश K में अधिकतम 2 एवं L में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं। इस प्रकार Na+ के कोश K एवं L पूरी तरह भरे हुए होते हैं।

प्रश्न 10.
अगर ब्रोमीन परमाणु दो समस्थानिकों [7935Br (49.7%)] तथा [8135Br (50-3%)] के रूप में है, तो ब्रोमीन परमाणु के औसत परमाणु द्रव्यमान की गणना कीजिए।
हल:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 4
अतः ब्रोमीन का अभीष्ट औसत परमाणु द्रव्यमान = 40.006

प्रश्न 11.
एक तत्व X का परमाणु द्रव्यमान 16.2u है तो इसके किसी एक नमूने में समस्थानिक x और x का प्रतिशत क्या होगा?
हल:
माना 816x का प्रतिशत a % है तो 818x का प्रतिशत (100 – a)% होगा।
औसत परमाण भार 16.2 = \(\frac{16 \times a+18(100-a)}{100}\)

⇒ 1620 = 16a + 1800 – 18a
⇒ 18a – 16a = 1800 – 1620
⇒ 2a = 180 ⇒ a = 90%
एवं (100 – a) = 100 – 90 = 10%
अतः समस्थानिकों के अभीष्ट प्रतिशत क्रमशः 90% एवं 10% हैं।

प्रश्न 12.
यदि तत्व का Z = 3 हो, तो तत्व की संयोजकता क्या होगी? तत्व का नाम भी लिखिए।
हल:
तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3 = 2, 1
अतः तत्व की अभीष्ट संयोजकता = 1 एवं नाम लीथियम है।

प्रश्न 13.
दो परमाणु स्पीशीज के केन्द्रकों का संघटन नीचे दिया है –
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 5
x और y की द्रव्यमान संख्या ज्ञात कीजिए। इन दोनों स्पीशीज में क्या सम्बन्ध है?
हल:
x की द्रव्यमान संख्या = 6 + 6 = 12
y की द्रव्यमान संख्या = 6 + 8 = 14
अतः अभीष्ट द्रव्यमान संख्या x = 12 तथा y = 14 है और ये दोनों स्पीशीज समस्थानिक हैं।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित वक्तव्यों में गलत के लिए F और सही के लिए T लिखिए –
(a) जे. जे. टॉमसन ने यह प्रतिपादित किया था कि परमाणु के केन्द्रक में केवल न्यूक्लिऑन होते हैं।
(b) एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन मिलकर न्यूट्रॉन का निर्माण करते हैं। इसलिए यह धनावेशित होता है।
(c) इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन से लगभग \(\frac{1}{2000}\) गुना होता है।
(d) आयोडीन के समस्थानिक का इस्तेमाल टिंचर आयोडीन बनाने में होता है। इसका उपयोग दवा के रूप में होता है।
उत्तर:
(a) F, (b) F, (c) T, (d) E.

प्रश्न 15.
रदरफोर्ड का अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग किसकी खोज के लिए उत्तरदायी था?
(a) परमाणु केन्द्रक
(b) इलेक्ट्रॉन
(c) प्रोटॉन
(d) न्यूट्रॉन
उत्तर:
(a) परमाणु केन्द्रक।

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प्रश्न 16.
एक तत्व के समस्थानिक में होते हैं –
(a) समान भौतिक गुण
(b) भिन्न रासायनिक गुण
(c) न्यूट्रॉनों की अलग-अलग संख्या
(d) भिन्न परमाणु संख्या
उत्तर:
(c) न्यूट्रॉनों की अलग-अलग संख्या।

प्रश्न 17.
Cl आयन में संयोजकता इलेक्ट्रॉन की संख्या है –
(a) 16
(b) 8
(c) 17
(d) 18
उत्तर:
(b) 8

प्रश्न 18.
सोडियम का सही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न में कौन-सा है?
(a) 2, 8
(b) 8, 2, 1
(c) 2, 1, 8
(d) 2, 8, 1
उत्तर:
(d) 2, 8, 1

प्रश्न 19.
निम्नलिखित सारणी को पूरा कीजिए –
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 6
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 7

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MP Board Class 9th Science Chapter 4 परीक्षोपयोगी अतिरिक्त प्रश्नोत्तर

MP Board Class 9th Science Chapter 4 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में कौन-सा Mg परमाणु में इलेक्ट्रॉनिक वितरण को सही प्रदर्शित करता है?
(a) 3, 8, 1
(b) 2, 8, 2
(c) 1, 8, 3
(d) 8, 2, 2
उत्तर:
(b) 2, 8, 2

प्रश्न 2.
रदरफोर्ड के अल्फा (α) कण प्रकीर्णन प्रयोग के परिणामस्वरूप खोज किया गया –
(a) इलेक्ट्रॉन
(b) प्रोटॉन
(c) परमाणु में नाभिक
(d) परमाण्वीय द्रव्यमान
उत्तर:
(c) परमाणु में नाभिक

प्रश्न 3.
एक तत्व X में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 15 और न्यूट्रॉनों की संख्या 16 है। निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व का सही प्रदर्शन है?
(a) 1531x
(b) 1631x
(c) 1615x
(d) 1615x
उत्तर:
(a) 1531x

प्रश्न 4.
डाल्टन के परमाणु सिद्धान्त ने सफलतापूर्वक समझाया –
(i) द्रव्यमान संरक्षण का नियम
(ii) स्थिर अनुपात का नियम
(iii) रेडियोएक्टिवता का नियम
(iv) गुणित अनुपात का नियम

(a) (i), (ii) और (iii)
(b) (i), (iii) और (iv)
(c) (ii), (iii) और (iv)
(d) (i), (ii) और (iv)
उत्तर:
(d) (i), (ii) और (iv)

प्रश्न 5.
रदरफोर्ड के नाभिकीय प्रतिरूप के सम्बन्ध में कौन – से कथन सही हैं?
(i) नाभिक को धन आवेशित माना।
(ii) प्रमाणित किया कि a-कण हाइड्रोजन परमाणु से चार गुना भारी है।
(iii) सौर परिवार से तुलना की जा सकती है।
(iv) टॉमसन मॉडल से सहमति दर्शाता है।

(a) (i) और (iii)
(b) (ii) और (iii)
(c) (i) और (iv)
(d) केवल (i)
उत्तर:
(a) (i) और (iii)

प्रश्न 6.
एक तत्व के लिए निम्नलिखित में से कौन से विकल्प सही हैं?
(i) परमाणु संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + इलेक्ट्रॉनों की संख्या
(ii) द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या
(iii) परमाणु द्रव्यमान = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या
(iv) परमाणु संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या

(a) (i) और (ii)
(b) (i) और (iii)
(c) (ii) और (iii)
(d) (ii) और (iv)
उत्तर:
(c) (ii) और (iii)

प्रश्न 7.
टॉमसन के परमाणु मॉडल हेतु निम्नलिखित में से कौन से कथन सत्य हैं?
(i) यह परमाणु में परमाणु द्रव्यमान को समान रूप से वितरित मानता है।
(ii) परमाणु में धनावेश समान रूप से वितरित माना गया।
(iii) धनावेशित गोले में इलेक्ट्रॉनों का वितरण समान रूप से होता है।
(iv) परमाणु के स्थायित्व के लिए इलेक्ट्रॉन परस्पर एक – दूसरे को आकर्षित करते हैं।

(a) (i), (ii) और (iii)
(b) (i) और (iii)
(c) (i) और (iv)
(d) (i), (iii) और (iv)
उत्तर:
(a) (i), (ii) और (iii)

प्रश्न 8.
रदरफोर्ड के 4 – कण प्रकीर्णन प्रयोग ने दर्शाया कि –
(i) इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित होते हैं।
(ii) नाभिक में परमाणु का द्रव्यमान और धनावेश केन्द्रित रहता है।
(iii) नाभिक में न्यूट्रॉन होते हैं।
(iv) परमाणु का अधिकांश स्थान रिक्त होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन से सही हैं?
(a) (i) और (iii)
(b) (ii) और (iv)
(c) (i) और (iv)
(d) (iii) और (iv)
उत्तर:
(b) (ii) और (iv)

प्रश्न 9.
एक तत्व के आयन पर 3 धनावेश हैं। परमाणु की द्रव्यमान संख्या 27 और न्यूट्रॉनों की संख्या 14 है। आयन में कितने इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं?
(a) 13
(b) 10
(c) 14
(d) 16
उत्तर:
(b) 10

प्रश्न 10.
निम्न चित्र में Mg2+ आयन को पहचानिए जहाँ n और p क्रमशः न्यूट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या प्रदर्शित करते हैं –
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 8
उत्तर:
(d)

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प्रश्न 11.
एथिल एथेनॉइट (CHCOOC2H5) के एक नमूने में दो ऑक्सीजन परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान है परन्तु न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न है। इसके लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारण है?
(a) इनमें से एक ऑक्सीजन परमाणु ने इलेक्ट्रॉन प्राप्त किए हैं।
(b) इनमें से एक ऑक्सीजन परमाणु ने दो न्यूट्रॉन प्राप्त किए हैं।
(c) दोनों ऑक्सीजन परमाणु समस्थानिक हैं।
(d) दोनों ऑक्सीजन परमाणु समभारिक हैं।
उत्तर:
(c) दोनों ऑक्सीजन परमाणु समस्थानिक हैं।

प्रश्न 12.
1 संयोजकता वाले तत्व होते हैं –
(a) सदैव धातु
(b) सदैव उपधातु
(c) धातु या अधातु
(d) सदैव अधातु
उत्तर:
(c) धातु या अधातु

प्रश्न 13.
परमाणु का प्रथम मॉडल देने वाले का नाम है –
(a) एन बोर
(b) ई. गोल्डस्टीन
(c) रदरफोर्ड
(d) जे. जे. टॉमसन
उत्तर:
(d) जे. जे. टॉमसन

प्रश्न 14.
3 प्रोटॉन और 4 न्यूट्रॉन युक्त परमाणु की संयोजकता होगी –
(a) 3
(b) 7
(c) 1
(d) 4
उत्तर:
(c) 1

प्रश्न 15.
ऐलुमिनियम के एक परमाणु में इलेक्ट्रॉनों का वितरण होता है –
(a) 2, 8, 3
(b) 2, 8, 2
(c) 8, 2,3
(d) 2, 3, 8
उत्तर:
(a) 2, 8, 3

प्रश्न 16.
निम्न चित्र में कौन-सा परमाणु के बोर मॉडल का सही प्रदर्शन नहीं करता –
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 9
(a) (i) और (ii)
(b) (ii) और (iii)
(c) (ii) और (iv)
(d) (i) और (iv)
उत्तर:
(c) (ii) और (iv)

प्रश्न 17.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वदा सही है?
(a) एक परमाणु में इलेक्ट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या समान होती है।
(b) एक परमाणु में इलेक्ट्रॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है।
(c) एक परमाणु में प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है।
(d) एक परमाणु में इलेक्ट्रॉनों, प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है।
उत्तर:
(a) एक परमाणु में इलेक्ट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या समान होती है।

प्रश्न 18.
परमाणु मॉडलों का समय के साथ सुधार होता रहा है। निम्नलिखित परमाणु मॉडलों को उनके कालानुक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए –
(i) रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल
(ii) टॉमसन का परमाणु मॉडल
(iii) बोर का परमाणु मॉडल।

(a) (i), (ii) और (iii)
(b) (ii), (iii) और (i)
(c) (ii), (i) और (iii)
(d) (iii), (ii) और (i)
उत्तर:
(c) (ii), (i) और (iii)

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रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. रदरफोर्ड के 4-कण प्रकीर्णन प्रयोग से ………….. की खोज हुई।
2. समस्थानिकों में समान …………….. परन्तु भिन्न …………… होते हैं।
3. निऑन और क्लोरीन के परमाणु क्रमांक क्रमशः 10 और 17 हैं। इनकी संयोजकताएँ क्रमशः …………. और …………. होंगी।
4. सिलिकॉन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ……………’ है और सल्फर का …………… है।
उत्तर:

  1. परमाण्वीय नाभिक
  2. परमाणु क्रमांक परमाणु भार,
  3. 0, 1,
  4. (2, 8, 4), (2, 8, 6).

सही जोड़ी बनाना
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 10
उत्तर:

  1. → (iii)
  2. → (iv)
  3. → (i)
  4. → (ii)
  5. → (vi)
  6. → (vii)
  7.  → (v)

सत्य/असत्य कथन

1. समस्थानिकों में न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है।
2. समभारिकों में द्रव्यमान संख्या समान होती है तथा परमाणु संख्या भिन्न।
3. समस्थानिकों के रासायनिक गुण भिन्न होते हैं।
4. समभारिकों के रासायनिक गुण भिन्न होते हैं।
5. समस्थानिकों में परमाणु संख्या असमान होती है।
उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य
  5. असत्य

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

प्रश्न 1.
इलेक्ट्रॉन का आवेश कितना होता है?
– 1.6 x 10-19 कूलॉम।

प्रश्न 2.
एक तत्व X के बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन उपस्थित है। यदि बाह्यतम कोश से वह इलेक्ट्रॉन हटा दिया जाय तो बनने वाले आयन पर कितना आवेश होगा?
1+.

प्रश्न 3.
एक तत्व X के बाह्यतम कोश में 6 इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं। यदि यह आवश्यक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर उत्कृष्ट गैस का विन्यास प्राप्त करता है तो इस प्रकार बने आयन पर कितना आवेश होगा?
2.

प्रश्न 4.
एक तत्व X की द्रव्यमान संख्या 4 और परमाणु क्रमांक 2 है। इस तत्व की संयोजकता लिखिए।
0 शून्य।

प्रश्न 5.
कैल्सियम और आर्गन के परमाणु क्रमांक क्रमशः 20 और 18 हैं। परन्तु दोनों तत्वों की द्रव्यमान संख्या 40 है। इस प्रकार के तत्वों के युगल को क्या नाम दिया जाता है?
उत्तर:
समभारिक।

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MP Board Class 9th Science Chapter 4 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्या यह सम्भव है कि किसी तत्व के एक परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन, एक प्रोटॉन हो और कोई भी न्यूट्रॉन न हो? यदि ऐसा है तो उस तत्व का नाम बताइए।
उत्तर:
हाँ, सम्भव है। तत्व का नाम-हाइड्रोजन (प्रोटोनियम)।

प्रश्न 2.
क्या 35Cl एवं 37Cl की संयोजकताएँ भिन्न होंगी? अपने उत्तर का औचित्य बताइए।
उत्तर:
नहीं, क्योंकि ये एक ही तत्व के समस्थानिक हैं।

प्रश्न 3.
रदरफोर्ड ने अपने -किरण प्रकीर्णन प्रयोग में सोने की पन्नी का चयन क्यों किया?
उत्तर:
रदरफोर्ड ने अपने -किरण प्रकीर्णन प्रयोग में सोने की पन्नी इसलिए चुनी क्योंकि वे बहुत पतली परत चाहते थे। सोने की यह पन्नी 1000 परमाणुओं के बराबर मोटी थी।

प्रश्न 4.
क्लोरीन परमाणु के लिए इलेक्ट्रॉनिक वितरण लिखें। इसके L कोश में कितने इलेक्ट्रॉन हैं? (क्लोरीन का परमाणु क्रमांक 17 है।)
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन वितरण: 17 = 2, 8,7
इसके L कोश में 8 इलेक्ट्रॉन हैं।

प्रश्न 5.
एक प्रश्न के उत्तर में एक विद्यार्थी ने कहा कि एक परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या न्यूट्रॉनों की संख्या से अधिक है और इसी प्रकार न्यूट्रॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या से अधिक है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? अपने उत्तर का औचित्य दीजिए।
उत्तर:
हम सहमत नहीं हैं क्योंकि किसी भी परमाणु में प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है जबकि उक्त कथन में प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या से अधिक बतायी गई है।

प्रश्न 6.
एक तत्व X है, जिसे 1531x द्वारा प्रदर्शित किया गया है, के नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या को परिकलित कीजिए।
हल:
न्यूट्रॉनों की संख्या = A – Z = 31 – 15 = 16
अतः न्यूट्रॉनों की अभीष्ट संख्या = 16

प्रश्न 7.
हीलियम के संयोजकता कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं परन्तु इसकी संयोजकता 2 नहीं है। समझाइए।
उत्तर:
हीलियम की संयोजकता कोश प्रथम कोश K है जिसकी अधिकतम इलेक्ट्रॉन धारिता 2 है इसलिए यह कोश पूर्ण है इसलिए इसकी संयोजकता 2 नहीं, 0 (शून्य) है।

प्रश्न 8.
हीलियम, निऑन और आर्गन की संयोजकता शून्य क्यों होती है?
उत्तर:
हीलियम का संयोजकता कोश K का द्विक् पूर्ण है तथा निऑन एवं आर्गन के संयोजकता कोश के अष्टक पूर्ण हैं, इसलिए इनकी संयोजकता शून्य (0) होती है।

प्रश्न 9.
निम्न चित्रों द्वारा प्रदर्शित परमाणुओं की संयोजकता ज्ञात कीजिए।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 11
हल:
परमाणु (a) के संयोजकता कोश में अष्टक पूर्ण है, अतः
इसकी संयोजकता = 0 (शून्य)
परमाणु (b) के संयोजकता कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं।
इसलिए
इसकी संयोजकता = 8 – 7 = 1 है।
अतः अभीष्ट संयोजकताएँ (a) = 0 (शून्य), (b) = 1.

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प्रश्न 10.
समस्थानिक किसे कहते हैं ? हाइड्रोजन के तीन समस्थानिकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
समस्थानिक:
“एक ही तत्व के वे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान होती है परन्तु द्रव्यमान संख्या पृथक् होती है, समस्थानिक कहलाते हैं।”

हाइड्रोजन के समस्थानिकों के नाम:

  1. प्रोटोनियम
  2. ड्यूटीरियम
  3. ट्राइटियम।

प्रश्न 11.
कैथोड किरणों के कोई दो प्रमुख गुण लिखिए। (2019)
उत्तर:
कैथोड किरणों के प्रमुख गुण:

  1. ये किरणें ऋणावेशित होती हैं जो सीधी रेखा में ऋणाग्र से धनान की ओर चलती हैं।
  2. इनमें अत्यधिक गतिज ऊर्जा होती है।

प्रश्न 12.
1. क्लोरीन, एवं
2. सोडियम तत्वों की परमाणु संख्या एवं द्रव्यमान संख्या लिखिए। (2019)
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 12

MP Board Class 9th Science Chapter 4 लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
टॉमसन के परमाणु मॉडल को समझाइए।
उत्तर:
टॉमसन का परमाणु मॉडल-टॉमसन ने अपने परमाणु मॉडल में प्रस्तावित किया कि –

  1. परमाणु धन आवेशित गोले का बना होता है और इलेक्ट्रॉन उसमें फँसे होते हैं।
  2. ऋणात्मक और धनात्मक आवेश परिमाण में समान होते हैं। इसलिए परमाणु वैद्युतीय रूप से उदासीन होते हैं।

प्रश्न 2.
रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग से क्या प्रेक्षण मिले?
उत्तर:
रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग से प्राप्त प्रेक्षण:

  1. तेज गति से चल रहे अधिकतर अल्फा कण सोने की पन्नी से सीधे निकल गए।
  2. कुछ अल्फा कण पन्नी के द्वारा बहुत छोटे कोण से विक्षेपित हुए।
  3. आश्चर्यजनक रूप से प्रत्येक 12000 कणों में से एक कण वापस गया।

प्रश्न 3.
रदरफोर्ड ने अपने अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग से क्या निष्कर्ष निकाले?
अथवा
रदरफोर्ड के अल्फा कण (a-विकिरण) प्रकीर्णन प्रयोग से निकाले गए निष्कर्षों की सूची बनाइए।
उत्तर:
रदरफोर्ड के अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के निष्कर्ष:

  1. परमाणु के भीतर का अधिकतर भाग खाली है क्योंकि अधिकतर अल्फा कण बिना विक्षेपित हुए बाहर निकल गए।
  2. बहुत कम कण अपने मार्ग से विक्षेपित होते हैं जिससे यह ज्ञात होता है कि परमाणु में धनावेशित भाग बहुत कम है।
  3. बहुत कम अल्फा कण 180° पर विक्षेपित हुए थे जिससे यह संकेत मिलता है कि सोने के परमाणु का पूर्ण धनावेशित भाग और द्रव्यमान परमाणु के भीतर बहुत कम आयतन में सीमित है।

प्रश्न 4.
रदरफोर्ड द्वारा प्रस्तुत परमाणु के नाभिकीय मॉडल की व्याख्या कीजिए। (2019)
अथवा
रदरफोर्ड के “परमाणु के नाभिकीय मॉडलं” के लक्षण लिखिए। (2019)
उत्तर:
रदरफोर्ड द्वारा प्रस्तुत परमाणु का नाभिकीय मॉडल-रदरफोर्ड ने परमाणु का नाभिकीय मॉडल प्रस्तुत किया, जिसके लक्षण निम्न हैं –

  1. परमाणु का केन्द्र धनावेशित होता है जिसे नाभिक (केन्द्रक) कहा जाता है। एक परमाणु का लगभग सम्पूर्ण द्रव्यमान इस नाभिक में होता है।
  2. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वर्तुलाकार मार्ग में चक्कर लगाते हैं।
  3. नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में काफी कम होता है।

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प्रश्न 5.
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल में क्या कमियाँ/सीमाएँ थीं ?
उत्तर:
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की सीमाएँ (कमियाँ):
वर्तुलाकार मार्ग में चक्रण करता हुआ इलेक्ट्रॉन (आवेशित कण) त्वरित होगा और त्वरण के समय आवेशित कणों से ऊर्जा विकरित होगी। इस प्रकार स्थायी कक्षा में घूमता हुआ इलेक्ट्रॉन अपनी ऊर्जा विकरित करते हुए केन्द्रक से टकरा जाता और परमाणु अस्थिर होता, लेकिन ऐसा नहीं है।

प्रश्न 6.
बोर के परमाणु मॉडल के अभिग्रहीत क्या हैं?
अथवा
बोर के परमाणु मॉडल की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
बोर का परमाणु मॉडल:
बोर के परमाणु मॉडल की निम्निलिखित अवधारणाएँ हैं –

  1. इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित कक्षाओं में ही चक्कर लगा सकते हैं जिन्हें इलेक्ट्रॉन की विविक्त कक्षा कहते हैं। इन कक्षाओं (कोशों) को ऊर्जा स्तर कहते हैं।
  2. जब इलेक्ट्रॉन इस विविक्त कक्षा (ऊर्जा स्तर) में चक्कर लगाते हैं, तो उनकी ऊर्जा का विकिरण नहीं होता है।

प्रश्न 7.
निम्न चित्र से आप x,y और z परमाणुओं के परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या और संयोजकता सम्बन्धी क्या जानकारी प्राप्त करते हैं? अपना उत्तर एक सारणी के रूप में दीजिए।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 13
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 14
प्रश्न 8.
नीचे दिए गए प्रतीकों में उपलब्ध सूचना के आधार पर निम्न सारणी को पूर्ण कीजिए –
(a) 1735Cl
(b) 612C
(c) 1835Br
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 15
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 16

प्रश्न 9.
किस प्रकार रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल, टॉमसन के परमाणु मॉडल से भिन्न है?
उत्तर:
रदरफोर्ड परमाणु मॉडल एवं टॉमसन परमाणु मॉडल में भिन्नता:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 17

प्रश्न 10.
सोडियम परमाणु एवं सोडियम आयन के इलेक्ट्रॉन वितरण को चित्र द्वारा दर्शाइए और उनके परमाणु क्रमांक (परमाणु संख्या) भी दीजिए।
उत्तर:

  1. सोडियम परमाणु
  2. सोडियम आयन।

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 18
दोनों में परमाणु क्रमांक समान अर्थात् प्रत्येक का 11 है।

प्रश्न 11.
गीगार और मार्सडेन के सोने की पन्नी वाले प्रयोग में, जिसने रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की राह दिखाई ~ 1:00% अल्फा कण 50° से अधिक कोणों पर विक्षेपित होते पाये गए। यदि सोने की पन्नी पर एक मोल अल्फा कणों की बौछार की गई तो 50° से कम के कोणों पर विक्षेपित हुए अल्फा कणों की संख्या परिकलित कीजिए।
हल:
∵ 50° से अधिक कोण पर विक्षेपित अल्फा कण = 1% अल्फा कण
∵ 50° से कम पर विक्षेपित अल्फा कण = 100 – 1 = 99% अल्फा कण
बौछार किए गए अल्फा कणों की संख्या = 1 मोल = 6.022 x 1023 कण
50° से कम पर विक्षेपित कणों की संख्या = 1 मोल का 99%
\(=\frac{99}{100} \times 6 \cdot 022 \times 10^{23}\)
\(=\frac{596 \cdot 178 \times 10^{23}}{100}\)
अतः = 5.96 x 1023 कण
अभीष्ट कणों की संख्या = 5.96 x 1023 कण

MP Board Class 9th Science Chapter 4 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
समस्थानिक एवं समभारिक में अन्तर स्पष्ट कीजिए। (2019)
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 19

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प्रश्न 2.
हाइड्रोजन परमाणु और उसकी नाभिक की त्रिज्याओं का अनुपात ~105 है। परमाणु और , नाभिक को गोलाकार मानते हुए –

  1. उनके आकारों का अनुपात क्या होगा?
  2. यदि परमाणु को पृथ्वी ग्रह (R, = 64 x 10 m) से दर्शाया जाता है तो नाभिक के आकार की गणना कीजिए।

हल:
मान लीजिए कि हाइड्रोजन परमाणु की त्रिज्या = R मात्रक
एवं उसके केन्द्रक (नाभिक) की त्रिज्या = r मात्रक है।
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 20
(i) हाइड्रोजन परमाणु के आकार (आयतन) एवं उसके नाभिक के आकार (आयतन) का अनुपात
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 21
[समीकरण (i) एवं (ii) से]
अत: परमाणु एवं नाभिक के आकारों का अभीष्ट अनुपात = 1015
(ii) पृथ्वी की त्रिज्या R. = 6.4 x 106 m से परमाणु को दर्शाया जाता है। अर्थात्
R = Re = 6.4 x 106 m …(iv)
समीकरण (i) एवं (iv) से
\(r=\frac{\mathrm{R}_{e}}{10^{5}}\)
\(=\frac{6 \cdot 4 \times 10^{6}}{10^{5}} \mathrm{m}\)
= 64m
अतः नाभिक की अभीष्ट त्रिज्या = 64 m

प्रश्न 3.
दिए गए तत्वों के इलेक्ट्रॉन विन्यास को पूर्ण कीजिए – (2019)
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 22
उत्तर:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 4 परमाणु की संरचना image 23

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 4 बूढ़ी काकी

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 4 बूढ़ी काकी (प्रेमचन्द)

बूढ़ी काकी अभ्यास प्रश्न

बूढ़ी काकी लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बूढ़ी काकी बुद्धिराम के पास क्यों रहती थी?
उत्तर
बूढ़ी काकी का बुद्धिराम के सिवा और कोई नहीं था। इसलिए वह बुद्धिराम के पास रहती थी।

प्रश्न 2.
सुखराम के तिलक पर घर का वातावरण कैसा था?
उत्तर
सुखराम के तिलक पर घर का वातावरण बड़ा ही आनंददायक था। लोगों की भारी भीड़ थी। तरह-तरह के खान-पान तैयार हो रहे थे। मेहमानों का खूब आदर-सत्कार हो रहा था। बुद्धिराम और रूपा कार्यभार संभालने में बहुत व्यस्त थे।

प्रश्न 3.
लाडली और बूढ़ी काकी में परस्पर सहानुभूति क्यों थी?
उत्तर
लाडली को अपने दोनों भाइयों के डर से अपने हिस्से की मिठाई-चबैना खाने के लिए बढ़ी काकी के सिवा और कोई सरक्षित जगह नहीं थी। उससे बढ़ी काकी को कुछ खाने के लिए मिल जाता था। इस तरह दोनों में परस्पर सहानुभूति थी।

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प्रश्न 4.
रूपा का व्यवहार काकी के प्रति किस प्रकार का था?
उत्तर
रूपा का व्यवहार बूढ़ी काकी के प्रति बड़ा ही अन्यायपूर्ण और कठोर था।

प्रश्न 5.
बूढ़ी काकी को भोजन न देने पर लाडली का मन क्यों अधीर हो रहा था?
उत्तर
बूढ़ी काकी को भोजन न देने पर लाडली का मन अधीर हो रहा था। यह इसलिए कि वह अपने माता-पिता द्वारा बूढ़ी काकी के प्रति किए गए दुर्व्यवहार से दुखी
और चिंतित थी।

बूढ़ी काकी दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
“बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है।” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
बुढ़ापा आने पर किसी प्रकार की जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व निभाने की न कोई क्षमता होती है और न कोई सोच-समझ। बुढ़ापा में बच्चों के समान स्वतंत्रता आ जाती है। स्वार्थपरता के कारण अच्छा-बुरा का कुष्ठ भी ख्याल न बुढ़ापा में होता है और न बचपन में। इस प्रकार की और भी कई बातें होती हैं, जो बचपन और बढ़ापा में होती हैं। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि, “बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है।”

प्रश्न 2.
भोजन की वाली अपने सम्मुख देख बूढ़ी काकी की मनोदशा का वर्णन कीजिए।
उत्तर
भोजन की थाली अपने सामने देखकर बूढ़ी काकी खिल उठी। उसके रोम-रोम में ताजगी आ गई। उस समय वह अपने ऊपर हुए अत्याचार और तिरस्कार को बिल्कुल भूल गई। वह भोजन की थाली पर टूट पड़ी। धड़ाधड़ पूड़ियों को खाने के लिए वह आतुर हो उठी। उसके एक-एक रोएँ रूपा को आशीर्वाद दे रहे थे।

प्रश्न 3.
रूपा का हृदय परिवर्तन कैसे हुआ?
उत्तर
बूढ़ी काकी को जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़े उठा-उठाकर खाते हुए देखकर रूपा का हृदय सन्न हो गया। उसे बूढ़ी काकी के प्रति किए गए अन्याय और अत्याचार का भारी पश्चाताप हुआ। इस प्रकार रूपा का हृदय परिवर्तन हुआ।

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प्रश्न 4.
इस पाठ से आपको क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर
इस पाठ से हमें निम्नलिखित शिक्षा मिलती है

  1. हमें बुजुर्गों की भावनाओं को समझना चाहिए।
  2. हमें बुजुर्गों का मान-सम्मान करना चाहिए।
  3. हमें बुजुर्गों की सेवा सच्ची भावना से करनी चाहिए।
  4. हम भी किसी समय बुजुर्ग होंगे। यह समझकर हमें बुजुर्गों पर होने वाले अत्याचार-अन्याय का विरोध करना चाहिए।

प्रश्न 5.
रूपा की जगह यदि आप होते तो बूढ़ी काकी के प्रति आपका व्यवहार कैसा होता?
उत्तर
रूपा की जगह हम होते तो बूढ़ी काकी के प्रति सहानुभूति रखते। उनकी भावनाओं को समझते। उनकी इच्छाओं को पूरी करने की कोशिश करते। अगर वे कोई अनुचित या अशोभनीय कदम उठातीं, तो हम उन पर क्रोध नहीं करते। उन्हें बड़े प्यार और आदर के साथ समझाते। उनकी कठिन जिद्द को नम्रतापूर्वक दूर करने का प्रयास करते।

प्रश्न 6.
स्पष्ट कीजिए।
(क) नदी में जब कगार का कोई वृहद खंड कटकर गिरता है तो आस पास का जल-समूह चारों ओर से उसी स्थान को पूरा करने के लिए दौड़ता है।
(ख) संतोष का सेतु जब टूट जाता है तब इच्छा का बहाव अपरिमित हो जाता है।
उत्तर
(क) उपर्युक्त वाक्य के कथन का आशय यह है कि जब कहीं कोई अवांछित और अनचाही घटना किसी के जीवन में घटित होती है तो हदय और मस्तिष्क की सारी शक्तियाँ, सारे विचार और सभी भार उसी ओर केंद्रित हो जाते हैं।
(ख) उपर्युक्त वाक्य के कथन का आशय यह है कि संतोष से इच्छाओं का प्रवाह रुक जाता है। इसके विपरीत असंतोष से इच्छाओं का प्रवाह किसी प्रकार की सीमा को तोड़ने में तनिक भी देर नहीं लगाता है।

बूढ़ी काकी भाषा-अध्ययन

1. जिह्वा, कृपाण आदि तत्सम शब्द हैं। पाठ में आए ऐसे ही तत्सम शब्दों की सूची बनाइए।
2. दिए हुए शब्दों में से उपसर्ग-प्रत्या छाँटकर अलग कीजिए
स्वाभाविक, प्रतिकूल, मसालेदार, सुगन्धित, अविश्वास, विनष्ट, लोलुपता, असहाय, निर्दयी।
3. ‘दिन-रात खाती न होती तो न जाने किसकी हाँडी में मुँह डालती।’
उपर्युक्त वाक्य में दिन का विलोम शब्द रात आया है। पाठ में आए ऐसे ही अन्य वाक्य छाँटिए जिनमें विलोम शब्दों का एक साथ प्रयोग हुआ हो।
उत्तर
1. चेष्टा, नेत्र, प्रतिकूल, पूर्ण, परिणाम, कालान्तर, तरुण, आय, वार्षिक, ईश्वर, तीव्र, व्यय, संताप, आर्तनाद, अनुराग, क्षुधावर्द्धक, सम्मुख, उद्विग्न, कार्य, क्रोध, वृहद, दीर्घाहार, व्यर्थ, मिथ्या, वाटिका, वर्षा, क्षुधा, प्रबल, प्रत्यक्ष, वृद्धा, आकाश, निमग्न आदि।
MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 4 बूढ़ी काकी img 1

3. (i) फिर जब माता-पिता का यह रंग देखते, तो बूढ़ी काकी को और भी सताया करते।
(ii) यद्यपि उपद्रव-शांति का यह उपाय रोने से कहीं अधिक उपयुक्त था।
(iii) लाडली अपने दोनों भाइयों के भय से अपने हिस्से की मिठाई-चबैना बूढ़ी काकी के पास बैठकर खाया करती थी।
(iv) आघात ऐसा कठोर था कि हृदय और मस्तिष्क की संपूर्ण शक्तियाँ, संपूर्ण । विचार और संपूर्ण भार उसी ओर आकर्षित हो गए।
(v) अवश्य ही लोग खा-पीकर चले गए।

बूढ़ी काकी योग्यता-विस्तार

1. “वृद्धजन का सम्मान ही परिवार का सम्मान है।” इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।
2. आप अपनी दादी या नानी से कितना प्यार करते हैं। अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

बूढ़ी काकी परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बूढ़ी काकी कब-कब रोती थीं?
उत्तर
जब घरवाले कोई बात उनकी इच्छा के विपरीत करते, भोजन का समय टल जाता या उसका परिणाम पूरा न होता अथवा बाजार से कोई वस्तु आई और उन्हें न मिलती, तो वे रोने लगती थीं।

प्रश्न 2.
बूढ़ी काकी को रोना आया लेकिन वे रो न सकीं। क्यों?
उत्तर
बूढ़ी काकी को रोना आया, लेकिन वे रो न सकीं क्योंकि उन्हें अपशकुन का भय हो गया था।

प्रश्न 3.
बूढ़ी काकी अपनी कोठरी में क्या पश्चाताप कर रही थी?
उत्तर
बूढ़ी काकी अपनी कोठरी में यह पश्चाताप कर रही थीं कि उन्होंने बड़ी जल्दीबाजी की। मेहमानों के खाने तक तो इंतजार करना ही चाहिए था। मेहमानों से पहले घर के लोग कैसे खाएँगे?

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प्रश्न 4.
लाडली ही बूढ़ी काकी के लिए क्यों कुढ़ रही थी?
उत्तर
लाडली ही बूढ़ी काकी के लिए कुढ़ रही थी, क्योंकि उसे ही उनसे अत्यधिक प्रेम था।

प्रश्न 5.
रूपा ने रुद्ध कंठ से क्या कहा?
उत्तर
रूपा ने रुद्ध कंठ से कहा, “काकी उठो, भोजन कर लो। मुझसे आज बड़ी भूल हुई। उसका बुरा न मानना। परमात्मा से प्रार्थना कर दो कि वह मेरा अपराध क्षमा कर दें।”

बूढ़ी काकी दीर्य उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बूढ़ी काकी को भरपेट भोजन बड़ी कठिनाई से क्यों मिलता था?
उत्तर
बूढ़ी काकी ने अपनी सारी सम्पत्ति अपने भतीजे बुद्धिराम को लिख दी। थी। सम्पत्ति लिखाते समय बुद्धिराम ने खूब लंबे-चौड़े वादे किए थे, लेकिन वे खोखले साबित हुए। बुद्धिराम की कृपणता ही इसके मूल में रही। उसी के फलस्वरूप वे बूढ़ी काकी के भोजन में कमी रखने का प्रयास करना नहीं भूलते थे।

प्रश्न 2.
बूढ़ी काकी प्रतीक्षा की घड़ी कैसे बिता रही थीं?
उत्तर
बूढ़ी काकी को एक-एक पल एक-एक युग के समान मालूम होता था। अब पत्तल बिछ गई होंगी। अब मेहमान आ गए होंगे। लोग हाथ-पैर धो रहे हैं. नाई पानी दे रहा है। मालूम होता है लोग खाने बैठ गए। जेवनार गाया जा रहा है, यह विचार कर वह मन को बहलाने के लिए लेट गई। धीरे-धीरे एक गीत गुनगुनाने लगी। उन्हें मालूम हुआ कि मुझे गाते देर हो गई। क्या इतनी देर तक लोग भोजन कर ही रहे होंगे? किसी की आवाज नहीं सुनाई देती। अवश्य ही लोग खा-पीकर चले गए। मुझे कोई बुलाने नहीं आया। रूपा चिढ़ गई। क्या जाने न बुलाए, सोचती हो कि आप ही आवेगी। वह कोई मेहमान तो नहीं जो उन्हें बुलाऊँ। बूढ़ी काकी चलने के लिए तैयार हुई।

प्रश्न 3.
बुद्धिराम ने बूढ़ी काकी के प्रति क्या कठोरता दिखाई?
उत्तर
बुद्धिराम ने जब बूढ़ी काकी को मेहमानों के बीच में देखा तो उनको क्रोध आ गया। वे इससे अपने को संभाल न सके। हाथ में लिए हए पूड़ियों के थाल को उन्होंने जमीन पर पटक दिया। फिर जिस तरह कोई निर्दय महाजन अपने किसी बेईमान और भगोड़े आसामी को देखते ही लपककर उसका टेंटुआ पकड़ लेता है। उसी तरह से उन्होंने भी बुढ़ी काकी के दोनों हाथों को कसकर पकड़ लिया। फिर उन्हें घसीटते हुए उनकी उसी अँधेरी कोठरी में लाकर पटक दिया।

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प्रश्न 4.
रूपा ने अपनी गलती का पञ्चाताप किस प्रकार किया?
उत्तर
रूपा ने अपनी गलती का पश्चाताप इस प्रकार किया
“हाय कितनी निर्दयी हूँ! जिसकी सम्पत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है। उसकी यह दुर्गति! और मेरे कारण! हे दयामय भगवान! मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है। मुझे क्षमा करो। आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन किया। मैं उनके इशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपए व्यय कर दिए, परंतु जिनकी बदौलत हजारों रुपए खाए, उसे इस उत्सव में भरपेट भोजन न दे सकी। केवल इसी कारण कि वह वृद्धा है, असहाय है।”

प्रश्न 5.
रूपा ने बूढ़ी काकी से अपने अपराध के क्षमा के लिए क्या किया?
उत्तर
आधी रात जा चुकी थी। आकाश पर तारों के थाल सजे हुए थे। और उन पर बैठे हुए देवगण स्वर्गीय पदार्थ सजा रहे थे। परंतु उनमें किसी को वह परमानंद प्राप्त न हो सकता था, जो बूढ़ी काकी को अपने सम्मुख थाल देखकर प्राप्त हुआ। रूपा ने कंठावरुद्ध स्वर में कहा, “काकी उठो, भोजन कर लो। मुझसे आज बड़ी भूल हुई, उसका बुरा न मानना। परमात्मा से प्रार्थना कर दो कि वह मेरा अपराध क्षमा कर दें।” भोले-भोले बच्चों की भाँति जो मिठाइयाँ पाकर मार और तिरस्कार सब भूल जाता है, बूढ़ी काकी वैसे सब भुलाकर बैठी हुई खाना खा रही थीं। उनके एक-एक रोएँ से सच्ची सदिच्छाएँ निकल रही थीं और रूपा बैठी इस स्वर्गीय दृश्य का आनंद लूटने में निमग्न थी।

बूढ़ी काकी लेखक-परिचय

प्रश्न
प्रेमचंद का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
जीवन-परिचय-प्रेमचंद का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिले के लमही गाँव में सन् 1880 ई. में हुआ था। उनका वास्तविक नाम धनपतराय था, परन्तु आप साहित्य के क्षेत्र में प्रेमचंद नाम से प्रसिद्ध हुए। छोटी आयु में पिता की मृत्यु हो जाने से उनका जीवन गरीबी में बीता था। मैट्रिक पास करने के पश्चात् आपने स्कूल में अध्यापन कार्य किया। उसके बाद स्वाध्याय से बी.ए. की परीक्षा पास की और शिक्षा विभाग में सब-इंस्पेक्टर पद पर कार्य किया। कुछ समय के बाद वहाँ से भी त्याग-पत्र दे दिया और आजीवन साहित्य-सेवा में लगे रहे। बीमारी के कारण 56 वर्ष की आय में सन् 1936 में आपका देहान्त हो गया।
साहित्यिक सेवा-प्रेमचंद ने सर्वप्रथम नवाबराय के नाम से उर्दू में लिखना आरंभ किया था।

उनका ‘सोजेवतन’ नामक कहानी-संग्रह तत्कालीन अंग्रेजी सरकार ने जब्त कर लिया और नवाबराय पर अनेक प्रतिबंध लगा दिए। इसके बाद आपने हिंदी में प्रेमचंद के नाम से लिखना आरंभ किया। आपके साहित्य का मुख्य स्वर समाज-सुधार है। आपने समाज-सुधार और राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत कई उपन्यास और लगभग तीन सौ कहानियाँ लिखी हैं। उन्होंने अपने साहित्य में किसानों की दशा, सामाजिक बंधनों में तड़पती नारियों की वेदना और वर्ण-व्यवस्था की कठोरता के भीतर संत्रस्त हरिजनों की पीड़ा का मार्मिक चित्रण किया है।

भाषा-शैली-प्रेमचंद की भाषा साधारण बोल-चाल की भाषा है। इसमें उर्द, फारसी. अंग्रेजी तथा तत्सम, तदभव शब्दों के साथ-साथ देशज शब्दों का प्रयोग भी मिलता है। इनकी भाषा मुहावरे-लोकोक्तियों और सूक्तियों से युक्त है। हास्य-व्यंग्य के छींटे भाषा को जीवंत बनाए रखते हैं। उन्होंने वर्णनात्मक, आत्मकथात्मक आदि शैलियों का प्रयोग किया है।

रचनाएँ-उपन्यास-सेवासदन, निर्मला, रंगभूमि, कर्मभूमि, गबन और गोदान आदि प्रसिद्ध उपन्यास हैं।

नाटक-कर्बला, संग्राम और प्रेम की बेदी।

निबंध-संग्रह-कुछ विचार संग्रह। सामाजिक और राजनीतिक निबंधों का संग्रह ‘विविध-प्रसंग’ नाम से तीन भागों में प्रकाशित है।

उन्होंने हंस, मर्यादा और जागरण पत्रिकाओं का संपादन किया।कहानी-प्रेमचंद ने अनेक प्रसिद्ध कहानियों की रचना की। उन्होंने लगभग तीन सौ कहानियाँ लिखीं। उनकी कहानियाँ ‘मानसरोवर’ नाम से आठ भागों में संग्रहीत हैं। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि प्रेमचंद का साहित्यिक महत्त्व बहुत अधिक है। फलस्वरूप वे युग-युग तक आने वाली साहित्यिक पीढ़ी को प्रेरित करते रहेंगे।

बूढ़ी काकी कहानी का सारांश

प्रश्न
प्रेमचंद-लिखित कहानी ‘बूढ़ी काकी’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
प्रेमचंद-लिखित कहानी ‘बूढ़ी काकी’ एक सामाजिक-पारिवारिक कहानी है। इसमें वृद्धों की मानसिक स्थितियों को सामने लाने का प्रयास किया गया है। इस कहानी का सारांश इस प्रकार है बूढ़ी काकी जीभ का स्वाद न पूरा होने पर गला फाड़-फाड़कर रोने लगती थी। उनके पतिदेव और जवान बेटे की मौत के बाद उनका भतीजा बुद्धिराम ही उनका अपना था। उसी के नाम उन्होंने अपनी सारी सम्पत्ति लिख दी। सम्पत्ति लिखाते समय बुद्धिराम ने उनकी देखभाल के लम्बे-चौड़े वादे किए थे, लेकिन बाद में वे वादे खोखले साबित होने लगे। बुद्धिराम इतने सज्जन थे कि उनके कोष पर कोई आंच न आए।

उनकी पत्नी रूप-स्वभाव से तीव्र होने पर भी ईश्वर से डरती थी। बढी काकी अपनी जीभ के स्वाद या अपनी भूख मिटाने के लिए किसी की परवाह किए बिना रोती-चिल्लाती थीं। बच्चों के चिढ़ाने पर वह उन्हें गालियाँ देने लगती थीं। रूपा के आते ही वह शान्त हो जाती थीं। पूरे परिवार में बूढ़ी काकी से बुद्धिराम की छोटी लड़की लाडली ही प्रेम संबंध रखती थी। वह अपने खाने-पीने की चीजों में से कुछ चीजें निकालकर चुपके से बूढ़ी काकी को खिला दिया करती थी।

एक दिन बुद्धिराम के लड़के सुखराम का तिलक आया तो मेहमानों के खाने-पीने के लिए तरह-तरह के पकवान-मिठाइयाँ बनाए गए। उनकी सगन्ध से बढ़ी काकी अपनी कोठरी में बैठी हुई बेचैन हो रही थीं। वह एक-एक घड़ी का अंदाजा लगा रही थीं कि इतने देर बाद उन्हें भी वह भोजन मिलेगा। काफी देर बाद जब उनके लिए भोजन लेकर कोई उनके पास नहीं आया, तब उनके धैर्य का बाँध टूट गया। वह उक. बैठकर हाथों के बल सरकती हुई बड़ी कठिनाई से कड़ाह के पास जा बैठीं। उन्हें इस तरह कड़ाह के पास बैठी हुई देखकर रूपा के क्रोध की सीमा न रही। उसने सबके सामने बूढ़ी काकी को खूब खरी-खोटी सुनाई। उसे सुनकर बूढ़ी काकी चुपचाप रेंगती-सरकती हुई अपनी कोठरी में चली गई। किसी के बुलाने की प्रतीक्षा करने लगीं।

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बूढ़ी काकी ने बहुत इंतजार किया, लेकिन उन्हें कोई बुलाने नहीं आया। उन्होंने शांत वातावरण से यह अनुमान लगा लिया कि मेहमान खा-पीकर चले गए हैं। मुझे कोई बुलाने नहीं आया तो क्या हुआ। वह मेहमान तो नहीं हैं कि उन्हें कोई बुलाने आएगा। इन्हीं बातों को सोच-समझकर वह पहले की तरह सरकती हुई आँगन में खा रहे मेहमानों के बीच में पहुंच गई। उन्हें देखते ही बुद्धिराम क्रोध से उबल पड़े। उन्होंने बूढ़ी काकी को घसीटते हुए अँधेरी कोठरी में लाकर धम्म से पटक दिया। यह देखकर लाडली को क्रोध तो आया, लेकिन डर से वह कुछ कह न सकी। वह अपने हिस्से की पूड़ियों को सबके सोने के बाद बूढ़ी काकी को खिलाने के लिए उस अँधेरी कोठरी में गई। उसने बूढ़ी काकी को उन पूड़ियों को खाने के लिए सामने रख दिया। उन पूड़ियों को उन्होंने पाँच मिनट में खा लिया। इसके बाद उन्होंने उससे और पूड़ियाँ अपनी माँ रूपा से माँगकर लाने के लिए कहा।

लाडली ने जब अपनी अम्मा से अपने डर की बात कही तब उन्होंने उससे कहा, “मेरा हाथ पकड़कर वहाँ ले चलो, जहाँ मेहमानों ने बैठकर भोजन किया है।” लाडली जब उन्हें वहाँ ले गई, तब उन्होंने पूड़ियों के टुकड़े चुन-चुनकर खाना शुरू किया। नींद खुलने पर रूपा लाडली को खोजती हुई वहाँ पहुँच गई, जहाँ बूढ़ी काकी पूड़ियों के टुकड़े उठा-उठाकर खा रही थीं। उन्हें इस तरह देखकर रूपा काँप उठी। उसे ऐसा लगा, मानो आसमान चक्कर खा रहा है। संसार पर कोई नई विपत्ति आने वाली है। करुणा और भय के आँसुओं से उसने हृदय खोलकर आकाश की ओर हाथ उठाते हुए कहा, “परमात्मा, मेरे बच्चों पर दया करो। इस अधर्म का दंड मुझे मत दो, नहीं तो मेरा सत्यानाश हो जाएगा। मुझे क्षमा करो। आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन किया। मैं उनके इशारों की दासी बनी रही। अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपए खर्च कर दिए। परन्तु जिनकी बदौलत हजारों रुपए खाए, उसे इस उत्सव में भरपेट भोजन न दे सकी। केवल इसी कारण कि वह वृद्धा है, असहाय है।”

रूपा दिया जलाकर भंडार से थाली में सारी सामग्रियाँ सजाकर काकी के पास गई। उसने रुंधे हुए स्वर में कहा, “काकी उठो, भोजन कर लो। मुझसे आज बड़ी भूल हुई, उसका बुरा न मानना। परमात्मा से प्रार्थना कर दो कि वह मेरा अपराध क्षमा कर दे।”
मिठाइयाँ पाकर मार और तिरस्कार भूल जाने वाले भोले-भाले बच्चों की तरह बूढ़ी काकी सब कुछ भुलाकर वह खाना.खा रही थी। उनके रोम-रोम से सदिच्छाएँ निकल रही थीं। रूपा वहाँ बैठी उस स्वगीय आनंद को लूट रही थी।

बूढ़ी काकी संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या, अर्थग्रहण एवं विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

1. संपूर्ण परिवार में यदि काकी से किसी को अनुराग था, तो वह बुद्धिराम की छोटी लड़की लाडली थी। लाडली अपने दोनों भाइयों के भय से अपने हिस्से की -मिठाई-चबेना बूढ़ी काकी के पास बैठकर खाया करती थी। वह उसका रक्षागार था और यद्यपि काकी की शरण उनकी लोलुपता के कारण बहुत महँगी पड़ती थी, तथापि भाइयों के अन्याय से वहीं सुलभ थी। इसी स्वार्थानुकूलता ने उन दोनों में प्रेम और सहानुभूति का आरोपण कर दिया था।

शब्दार्थ-अनुराग-प्रेम । लोलुपता-लालच । स्वार्थानुकूलता- स्वार्थ के अनुसार। आरोपण-आरोप लगाना।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वासंती-हिंदी सामान्य’ में संकलित तथा मुंशी प्रेमचंद-लिखित कहानी ‘बूढ़ी काकी’ से है। इसमें लेखक ने बूढ़ी काकी और लाडली के विषय में बतलाने का प्रयास किया है।

व्याख्या-लेखक का कहना है कि बूढ़ी काकी के प्रति परिवार में किसी को कोई लगाव नहीं था। बूढ़ी काकी का भतीजा बुद्धिराम, उसकी पत्नी रूपा और उसके बच्चे बूढ़ी काकी के प्रति सहानुभूति नहीं रखते थे। अगर उनके प्रति लगाव या सहानुभूति रखने वाला घर का कोई सदस्य था, तो वह थी बुद्धिराम की छोटी लड़की लाडली। वह अपनी सहानुभूति उनके प्रति बराबर दिखाती थी। वह अपना अधिकांश समय उनके पास ही बिताया करती थी। अपने भाइयों से डरी हुई वह अपने हिस्से की मिठाई-चबैना उनके पास बैठकर खाया करती थी। उन्हें देखकर उनको लालच होने लगता था। उनकी लपलपाती हुई जीभ को शांत करने के लिए उसे अपने हिस्से की मिठाई-चबैना के कुछ भाग को दे देना पड़ता है। इससे उसकी उनके प्रति प्रकट की जाने वाली सहानुभूति दुखद साबित होती थी, फिर भी उसे यह अपने भाइयों के बेईमानी से अच्छी लगती थी। इस प्रकार दोनों की स्वार्थपरता ने उन दोनों में प्रेम और सहानुभूति को पैदा कर दिया था।

विशेष-

  1. भाषा तत्सम और तद्भव शब्दों की है।
  2. बाल-स्वभाव और वृद्ध-स्वभाव की समानता का संकेत है।
  3. शैली वर्णनात्मक है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) बूढ़ी काकी से लाडली को क्यों अनुराग था?
(ii) बूढ़ी काकी लाडली को क्यों चाहती थी?
उत्तर
(i) बूढ़ी काकी से लाडली को अनुराग था। यह इसलिए कि वह अपने भाइयों के भय से अपने हिस्से की मिठाई-चबैना बूढ़ी काकी के पास बैठकर निडर हो खाया करती थी।
(ii) बूढ़ी काकी लाडली को चाहती थी। यह इसलिए कि लाडली ही कुछ खिलाकर उनकी लपलपाती हुई जीभ को शांत करती थी।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) बूढ़ी काकी और लाडली में परस्पर प्रेम क्यों हो गया था?
(ii) उपर्युक्त गयांश का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर
(i) बूढ़ी काकी और लाडली में परस्पर सहानुभूति और प्रेम उन दोनों के परस्पर स्वार्थपूर्ति के फलस्वरूप हो गया था।
(ii) उपर्युक्त गद्यांश का मुख्य भाव है-बाल-स्वभाव और वृद्ध-स्वभाव की समानता को दर्शाना।

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2. जिस प्रकार मेढक कॅचए पर झपटता है, उसी प्रकार वह बड़ी काकी पर झपटी और उन्हें दोनों हाथों से झिंझोड़कर बोली, “ऐसे पेट में आग लगे, पेट है या भाड़? कोठरी में बैठते क्या दम घुटता था? अभी मेहमानों ने नहीं खाया, भगवान का भोग नहीं लगा, तब तक धैर्य न हो सका? आकर छाती पर सवार हो गई। जल जाय ऐसी जीभ । दिन-रात खाती न होती, तो न जाने किसकी हाड़ी में मुँह डालती? गाँव देखेगा तो कहेगा, बुढ़िया भरपेट खाने को नहीं पाती, तभी तो इस तरह मुंह बाये फिरती है। डायन, न मरे न माँचा छोड़े। नाम बेचने पर लगी है। नाक कटवाकर दम लेगी। इतना ढूँसती है, न जाने कहाँ भस्म हो जाता है। लो! भला चाहती हो तो जाकर कोठरी में बैठो, जब घर के लोग खाने लगेंगे तब तुम्हें भी मिलेगा। तुम कोई देवी नहीं हो कि चाहे किसी के मुँह में पानी न जाए, परंतु तुम्हारी पूजा पहले हो ही जाए।”

शब्दार्थ-झिंझोड़-झिड़ककर । डायन-राक्षसी।

प्रसंग-पूर्ववत् इसमें लेखक ने उस समय का उल्लेख किया है, जब बढ़ी काकी खाने के लिए अपने धैर्य की सीमा को तोड़ती हुई सबके सामने कड़ाह के पास जा बैठी। उन्हें इस तरह देखकर रूपा ने बहुत तेज फटकार लगाई। उसे बतलाते हुए लेखक ने कहा है।

व्याख्या-बूढ़ी काकी को कड़ाह के सामने बैठी हुई देखकर रूपा के क्रोध की सीमा न रही। उसने सबके सामने ही बूढ़ी काकी पर वैसे ही झपट पड़ी, जैसे मेढक केंचुए पर झपट पड़ता है। उसने उनके दोनों हाथों को कसकर पकड़कर झकझोर दिया। फिर उसने आगबबूला होकर उन्हें फटकारना शुरू कर दिया, “तुम्हें पेट में आग लगी है। तुम्हारा पेट है या भाड़? चुपचाप कोठरी में बैठी रहती तो क्या मरने लगती। तुम्हें इतनी भी समझ नहीं है कि मेहमानों के लिए अभी तो खाना बन रहा है। न पूरा खाना बना और न भगवान को उसे चढ़ाया ही गया, इससे पहले ही छाती पर आकर सवार हो गई। धिक्कार है, तुम्हारी ऐसी जीभ पर। भरपेट भोजन न पाती तो न जाने कहाँ-कहाँ इस लपलपाती जीभ को लिए फिरती। लोग तुम्हें इस तरह देखकर यह अवश्य मान जाएँगे, तुम्हें हम भरपेट नहीं खिलाते हैं। सच ही कहा है-‘डायन, न मरे, न माँचा छोड़े।

3. अब समझ में आ गया कि हम लोगों को बदनाम करने के लिए ऐसा कर रही हो। इसलिए हम लोगों की नाक जब तक नहीं कटवा लेगी, तब तक चुप नहीं बैठेगी। बड़ा अचरज होता है कि लूंस-ठूसकर खाने पर भी खाने के लिए मरती है। अब कान खोलकर सुनो अपनी भलाई चाहती है तो चुपचाप अपनी कोठरी में जाकर बैठ जाओ। घर के लोगों के खाने के समय तुम्हें खिलाया जाएगा। यह अच्छी तरह समझ वह उसका रेंटुआ पकड़कर उससे अपना बकाया वसूल लेने की कोशिश करता है। कुछ इसी प्रकार का कठोर दुर्व्यवहार बुद्धिराम ने बूढ़ी काकी के प्रति किया। उसने बढ़ी काकी के दोनों हाथों को कसकर पकड़ लिया। फिर उन्हें वह घसीटते हुए उनकी उसी अँधेरी कोठरी में लाकर पटक दिया। उसके इस प्रकार के कठोर दुर्व्यवहार से बूढ़ी काकी की आशामयी वाटिका वैसे ही सूख गई, जैसे लू से हरियाली समाप्त हो जाती है।

विशेष-

  1. बुद्धिराम की मनोदशा का स्वाभाविक चित्रण है।
  2. संपूर्ण उल्लेख विश्वसनीय है।
  3. ‘आशा रूपी वाटिका’ में रूपक अलंकार है तो बुद्धिराम की तुलना निर्दय महाजन से किए जाने से उपमा अलंकार है।
  4. शैली दृष्टांत है।
  5. करुण रस का संचार है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) बुद्धिराम काकी को देखते ही क्रोध से क्यों तिलमिला गए?
(ii) बुद्धिराम ने पूड़ियों के चाल को क्यों पटक दिया?
उत्तर-
(i) बुद्धिराम बूढ़ी काकी को देखते ही क्रोध से तिलमिला गए। यह इसलिए कि उन्हें उस समय खाना खा रहे मेहमानों के बीच बूढ़ी काकी का आना एकदम सहन नहीं हुआ।
(ii) बुद्धिराम ने पूड़ियों के.थाल को पटक दिया। यह इसलिए कि उनका अपने क्रोध पर नियंत्रण न रहा। उन्हें उचित-अनुचित का ध्यान बिल्कुल नहीं रहा।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) बुद्धिराम ने बूढ़ी काकी के प्रति किस प्रकार का व्यवहार किया?
(ii) बुद्धिराम की जगह आप होते तो क्या करते?
उत्तर
(i) बुद्धिराम ने बूढ़ी काकी के प्रति बड़ा ही कठोर और बेगानापन का व्यवहार किया। उसके द्वारा किया गया व्यवहार वैसे ही कठोर था जैसे किसी निर्दय महाजन का अपने बेईमान और भगोड़े आसामी के प्रति होता है।
(ii) बुद्धिराम की जगह अगर हम होते तो बूढ़ी काकी के प्रति शिष्ट और उदार व्यवहार करते। उन्हें समझा-बुझाकर उन्हें उनकी कोठरी में वापस ले जाते।

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4. रूपा का हृदय सन्न हो गया। किसी गाय के गर्दन पर छुरी चलते देखकर जो अवस्था उसकी होती वही उस समय हुई। एक ब्राह्मणी दूसरों की जूठी पत्तल टटोले, इससे अधिक शोकमय दृश्य असंभव था। पूड़ियों के कुछ ग्रासों के लिए उनकी चचेरी सासं ऐसा पतित और निकृष्ट कर्म कर रही है। यह वह दृश्य था जिसे देखकर देखने वालों के हृदय काँप उठते हैं। ऐसा प्रतीत होता था मानो जमीन रुक गई, आसमान चक्कर खा रहा है, संसार पर कोई नई विपत्ति आने वाली है। रूपा को क्रोध न आया। शोक के सम्मुख क्रोध कहाँ? करुणा और भय से उसकी आँखें भर आईं। इस अधर्म के पाप का भागी कौन है? उसने सच्चे हृदय से गगनमंडल की ओर हाथ उठाकर कहा-“परमात्मा, मेरे बच्चों पर दया करो। इस अधर्म का दंड मुझे मत दो, नहीं तो हमारा सत्यानाश हो जावेगा।”

शब्दार्च-ग्रास-टुकड़ा। पतित-पापपूर्ण। निकृष्ट-अधम, तुच्छ । प्रतीत होना-जानना ज्ञात होना। सम्मुख-सामने।

प्रसंग-पूर्ववत् । इसमें लेखक ने रूपा की शोकमय दशा का उल्लेख करते हुए कहा है कि

व्याख्या-बूढ़ी काकी को जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़ों को उठा-उठाकर खाते हुए देखकर रूपा का कलेजा धक् से रह गया। उसकी उस समय ऐसी अवस्था हो गई थी। जैसे मानों किसी गाय के गर्दन पर कोई छुरी चला रहा है और वह उसे देखकर बिल्कुल हकबक हो रही है। एक ऐसी असहाय और दुखी वृद्धा को जूठी पत्तलों से पूड़ियों के टुकड़ों को टटोल-टटोलकर अपनी भूख मिटाने के लिए ऐसा नीच कर्म करे, इस प्रकार का दृश्य उसके लिए शोकमय और हार्दिक दुखद होने के अतिरिक्त और क्या हो सकता है। उसे स्वयं पर इस बात की ग्लानि हुई कि उसकी चचेरी सास उसकी संपन्नता के बावजूद जूठी पत्तलों के पूड़ियों के कुछ टुकड़ों के लिए इतना नीच और अधम काम कर रही है।

इस प्रकार का दृश्य उसके लिए ही नहीं, अपितु किसी के लिए भी ग्लानिपूर्ण हो सकता है। किसी के लिए दुखद और शोकमय हो सकता है। उस समय रूपा को ऐसा लग रहा था, मानो उसके नीचे की जमीन रुक गई है। आसमान चकरा रहा है। यही नहीं शायद अब कोई नई मुसीबत आने वाली है। इससे उसे क्रोध नहीं आया। उसे तो उस समय शोक ही नहीं अपितु भय और करुणा ने घेर लिया। इससे उसकी आँखें छलछला उठीं। उसे यह नहीं समझ में आ रहा था कि इस अधम पाप का कौन दोषी है? फलस्वरूप उसने बड़ी असहाय होकर आकाश की ओर हाथ उठाकर सच्चे हदय से कहा, “हे प्रभु! आप इस अधम पाप के लिए मुझे क्षमा कर देना। मेरे परिवार पर दया करना। मुझे अगर आप क्षमा नहीं करोगे तो मेरा सारा परिवार बर्बाद हो जाएगा।”

विशेष-

  1. भाषा सरल शब्दों की है।
  2. शैली चित्रमयी है।
  3. मुहावरों के सटीक प्रयोग हैं।
  4. यह अंश मार्मिक है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) रूपा का हृदय सन्न क्यों हो गया?
(ii)-बूढ़ी काकी जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़े उठाकर क्यों खा रही थी?
उत्तर
0रूपा का हृदय सन्न हो गया। यह इसलिए कि उसने बूढ़ी काकी को जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़े उठाकर खाते हुए देखा। इससे उसे भारी ग्लानि और शोक हुआ कि उसकी ही चचेरी सास इतना अधम काम कर रही है।
(i) बूढ़ी काकी जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़े उठाकर खा रही थी। यह इसलिए कि उसका भोजन के लिए बुलाए जाने के लिए और इंतजार करने का धैर्य नहीं रहा। फलस्वरूप उसे इसके सिवा और कोई चारा नहीं दिखाई पड़ा था।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) रूपा को क्रोध क्यों नहीं आया?
(ii) रूपा ने परमात्मा से क्यों प्रार्थना की?
उत्तर
(i) रूपा को क्रोध नहीं आया। यह इसलिए कि बूढ़ी काकी का जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़ों को उठा-उठाकर खाने का दृश्य उसके लिए ग्लानिपूर्ण और शोकजनक दृश्य था।
(ii) रूपा ने परमात्मा से प्रार्थना की। यह इसलिए कि उसे यह पूरा भरोसा हो गया था कि उसे परमात्मा ही क्षमा कर सकता है और कोई नहीं।

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5. रूपा को अपनी स्वार्थपरता और अन्याय इस प्रकार प्रत्यक्ष रूप से कभी न देख पड़े थे। वह सोचने लगी, हाय! कितनी निर्दयी हूँ! जिसकी संपत्ति से मुझे दो सौ रुपया वार्षिक आय हो रही है उसकी यह दुर्गति! और मेरे कारण! हे दयामय भगवान! मुझसे बड़ी भारी चूक हुई है, मुझे क्षमा करो। आज मेरे बेटे का तिलक था। सैकड़ों मनुष्यों ने भोजन पाया। मैं उनके इशारों की दासी बनी रही, अपने नाम के लिए सैकड़ों रुपए व्यय कर दिए, परंतु जिनकी बदौलत हजारों रुपए खाए उसे इस उत्सव में भरपेट भोजन न दे सकी। केवल इसी कारण तो कि वह वृद्धा है, असहाय है।

शब्दार्थ-निर्दयी-कठोर । दुर्गति-दुर्दशा। चूक-भूल । व्यय-खर्च । बदौलत-कारण।

प्रसंग-पूर्ववत्। इसमें लेखक ने रूपा को किस प्रकार अपनी स्वार्थपरता और अन्याय का बोध हुआ, उस पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-बूढ़ी काकी को जूठे पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़े उठाकर खाते हुए देखकर रूपा ने अपना अन्याय और अपना स्वार्थ ही माना। उसने इस प्रकार कभी नहीं देखा था। इसका अनुमान भी उसे नहीं था। उसने इसे गंभीरतापूर्वक सोचा-समझा तो यह पाया कि इस अन्याय और स्वार्थ के लिए वही दोषी है। उसकी ही कठोरता से यह हुआ है। उसने हदय से यह स्वीकार किया कि बूढ़ी काकी की ही दी हुई संपत्ति से उसे जो दो सौ रुपए की सालाना आमदनी हो रही है, उसी की इस प्रकार की दुर्दशा हो रही है। उसके लिए वही अपराधी है। इस प्रकार दुखी होकर उसने ईश्वर से अपनी इस कठोरता और अन्याय के लिए क्षमा माँगी। उसने यह पश्चाताप कि उसके बेटे के तिलक के सुअवसर पर अनेक लोगों ने तरह-तरह के भोजन किए। सैकड़ों रुपए उसने अनेक लिए खर्च भी किए। लेकिन यह बड़ी अफसोस की बात है कि जिसके कारण उसने खर्च किए और जिसके दिए-किए से आज वह सुखी-संपन्न है, उसी को इस दुर्दशा में डाल रही है। क्या इसलिए कि वह एक ऐसी वृद्धा है, जिसका कोई सहारा नहीं है।

विशेष

  1. संपूर्ण कथन मार्मिक है।
  2. करुण रस का संचार है।
  3. भाव यथार्थपूर्ण और विश्वसनीय है।
  4. भावात्मक शैली है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) रूपा की स्वापरता और अन्याय क्या वा?
(ii) रूपा से बड़ी भारी चूक क्या हुई?
उत्तर
(i) रूपा की स्वार्थपरता और अन्याय यही था कि वह बूढ़ी काकी की संपत्ति से पल-बढ़ रही थी, फिर भी वह बूढ़ी काकी को जूठे पत्तलों से पूड़ियों के टुकड़े खाने के लिए मजबूर दुर्दशा में डाल रही थी।
(ii) रूपा से बड़ी भारी यह चूक हुई कि बूढ़ी काकी की संपत्ति से दो सौ रुपए की सालाना आमदनी पाकर भी उन्हें दाने-दाने के लिए लाचार बना रही थी।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) रूपा ने भगवान से क्या क्षमा माँगी?
(ii) रूपा को किस बात का सबसे अधिक अफसोस हुआ?
उत्तर
(i) रूपा ने भगवान से यह कहा कि बूढ़ी काकी की दुर्गति कर उससे बड़ी भारी चूक हुई। वह इसके लिए उसे क्षमा कर दे।
(ii) रूपा को इस बात का सबसे अधिक अफसोस हुआ कि जिनकी बदौलत हजारों रुपए खाये, उसे ही वह इस उत्सव में भरपेट भोजन न दे सकी। केवल इसलिए कि वह वृद्धा है और बेसहारा है।

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 2 मित्रता

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 2 मित्रता (रामचन्द्र शुक्ल)

मित्रता अभ्यास-प्रश्न

मित्रता लघु-उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
वर्तमान समय में व्यक्ति के किस व्यवहार को देखकर हम शीघ्र ही अपना मित्र बना लेते हैं?
उत्तर
वर्तमान समय में व्यक्ति का हँसमुख चेहरा, बातचीत के ढंग, थोड़ी चतुराई या साहस ये दो-चार व्यवहार देखकर हम उसे शीघ्र अपना मित्र बना लेते हैं।

प्रश्न 2.
लेखक ने कुसंग के ज्वर को सबसे भयानक क्यों कहा है?
उत्तर
लेखक ने कुसंग के ज्वर को सबसे भयानक इसलिए कहा है कि वह नीति, सद्वृत्ति और बुद्धि का नाश करता है।

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प्रश्न 3.
राजदरबार में जगह न मिलने पर इंग्लैंड का बिद्वान अपने भाग्य को क्यों सराहता रहा?
उत्तर
राजदरबार में जगह न मिलने पर इंग्लैंड का विद्वान अपने भाग्य को इसलिए सराहता रहा कि वह अपनी आध्यात्मिक उन्नति में बाधक बुरे संगति से दूर रहा।

प्रश्न 4.
लेखक ने हमें किन बातों से दूर रहने को कहा है?
उत्तर
लेखक ने हमें अश्लील, अपवित्र और फूहड़ बातों से दूर रहने को कहा है।

मित्रता दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अच्छे मित्र के गुण लिखिए।
उत्तर
अच्छे मित्र के गुण निम्नलिखित हैं :

  1. वह प्रतिष्ठित हो।
  2. वह दृढ़चित्त और सत्य-संकल्प का हो।
  3. उसमें आत्मविश्वास हो।
  4. वह भरोसमंद हो।

प्रश्न 2.
दृढ़चित्त और सत्य संकल्पित व्यक्ति से मित्रता करने के क्या लाभ हैं?
उत्तर
दृढ़चित्त और सत्य संकल्पित व्यक्ति से मित्रता करने से अनेक लाभ हैं। उससे हमें दृढ़ता प्राप्त होती है। हम दोषों और त्रुटियों से बच जाते हैं। हमारे सत्य, पवित्रता और मर्यादा के प्रेम पुष्ट होते हैं। हम कुमार्ग से सचेत हो जाते हैं। हतोत्साहित होने पर हमें उत्साह मिलता है।

प्रश्न 3.
विवेक को कुंठा से बचाने के लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए?
उत्तर
विवेक को कुंठा से बचाने के लिए हमें अत्यधिक दृढ़ संकल्प के लोगों के साथ नहीं रहना चाहिए। दूसरी बात यह है कि हमें मनमाने और दबाव डालने वाले लोगों से बचना चाहिए। तीसरी बात यह कि अपनी ही बात को ऊपर रखने वालों से सावधान रहना चाहिए।

प्रश्न 4.
जीवन की अलग-अलग अवस्थाओं में होनी वाली मित्रता की सार्थकता लिखिए।
उत्तर
बचपनावस्था की मित्रता बड़ी आनंदमयी होती है। उसमें हदय को बेधने वाली ईर्ष्या और खिन्नता नहीं होती है। उसमें अत्यधिक मधुरता और प्रेम की ऊँची तरंगें होती हैं। यही नहीं अपार विश्वासमयी कल्पनाएँ होती हैं। उसमें वर्तमान के प्रति आनंदयम दृष्टि और भविष्य के प्रति आकर्षक विचार भरे होते हैं। छात्रावास या सहपाठी की मित्रता में भावों का भारी उथल-पुथल होता है।

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प्रश्न 5.
भिन्न प्रकृति और स्वभाव के लोगों में मित्रता कैसे बनी रहती है?
उत्तर
भिन्न प्रकृति और स्वभाव के लोगों में मित्रता परस्पर अत्यधिक प्रगाढ़ प्रेम के कारण बनी रहती है। जो गुण जिसमें नहीं, वह चाहता है कि उसे ऐसा कोई मित्र मिले, जिसमें वे गुण हों। फलस्वरूप चिंतनशील मनुष्य प्रसन्नचित्त का साथ ढूँढ़ता है। निर्बल बली का और धीर उत्साही का।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए
(अ) ‘लेखक ने विश्वासपात्र मित्र को खजाना, औषधि और माता जैसा कहा है।” स्पष्ट कीजिए।
(ब) “संगति का गुप्त प्रभाव हमारे आचरण पर भारी पड़ता है।”
(स) “ऐसे नवयुवकों से बढ़कर शून्य, निःसार और शोचनीय जीवन और किसका है?”
उत्तर
(अ) “लेखक ने विश्वापात्र मित्र को खजाना, औषधि और माता जैसा कहा है।” लेखक के ऐसा कहने का आशय यह है कि विश्वासपात्र मित्र का महत्त्व असाधारण होता है। जो विश्वासपात्र मित्र होता है, वह हमारे लिए रक्षा-कवच के समान होता है। इसलिए ऐसे मित्र तो बड़े ही भाग्यशाली व्यक्ति को ही प्राप्त होते हैं। वास्तव में ऐसे मित्र एक खजाने की तरह अपने मित्र की प्रत्येक दशा में सहायता करते हैं।

(ब) संगति का गुप्त प्रभाव हमारे आचरण पर भारी पड़ता है। लेखक के इस कथन का आशय यह है कि अगर हम सुसंगति में रहते हैं, हम दिनोंदिन उन्नति के शिखर पर चढ़ते जाते हैं। इसके विपरीत अगर हम कुसंगति में रहते हैं, तो हम दिनोंदिन अवनति के गड्ढे में गिरते जाएँगे।

(स) “ऐसे नवयुवकों से बढ़कर शून्य, निःसार और शोचनीय जीवन और किसका है?” लेखक के इस वाक्य का आशय यह है कि मनचले युवक हर प्रकार से उद्दण्ड और अशिष्ट होते हैं। वे अपने जीवन की सार्थकता केवल ऐशो-आराम करना समझते हैं। फलस्वरूप वे अपने जीवन को नरक बनाकर न केवल स्वयं के लिए दुःखद साबित होते हैं, अपितु अपने संपूर्ण समाज और वातावरण के लिए भी। इसलिए ऐसे शून्य, निःसार और शोचनीय युवकों से सावधान होकर दूर ही रहना चाहिए।

मित्रता भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
(क) उत्साह में ‘इत’ प्रत्यय जोड़ने से ‘उत्साहित’ बना है। इसी प्रकार पाठ से छाँटकर प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द बनाइए।
(ख) दिए गए शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए।
मीत्रता – मित्रता
अपरीमार्जित – ……………….
आशचर्य – ………………..
चतुरायी – …………………
प्रतीष्टित – ………………..
सहानूभूति – ………………
दरबारीयों – ……………
कठिंत – ……………….

(ग) निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए।
कोमल, शुद्ध, विश्वास, भारी, सत्य, मर्यादित, लाभ, परिपक्व, असफलता, उपयुक्त, गुप्त, बुरा।

(घ) दिए गए वाक्यांशों के लिए एक-एक शब्द लिखिए
(i) जिस पर विश्वास किया जा सके-विश्वासपात्र
(ii) जो पका हुआ न हो।
(iii) चित्त में दृढ़ता हो।
(iv) जिसका उत्साह नष्ट हो गया हो।
(v) जो पवित्र न हो।
(vi) सत्य में निष्ठा रखने वाला।
उत्तर
MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 2 मित्रता img 1

(ख) शब्द – शुद्ध शब्द
मीत्रता – मित्रता
अपरीमार्जित – अपरिमार्जित
आशचर्य – आश्चर्य
चतुरायी – चतुराई
प्रतीष्ठित – प्रतिष्ठित
दरबारीयों – दरबारियों
कुंठित – कुंठित।

(ग) शब्द – विलोम शब्द
कोमल – कठोर
शुद्ध – अशुद्ध
विश्वास – अविश्वास
भारी – हल्का
सत्य – असत्य
मर्यादित – अमर्यादित
लाभ – हानि
परिपक्व – अपरिपक्व
असफलता – सफलता
उपयुक्त – अनपयुक्त
गुप्त – प्रकट
बुरा- भला।

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(घ) वाक्यांश – एक शब्द
(i) जिस पर विश्वास किया जा सके – विश्वासपात्र
(ii) जो पका हुआ न हो – अपरिपक्व
(iii) चित्त में दृढ़ता हो – दृढ़चित्त
(iv) जिसका उत्साह नष्ट हो गया हो – हतोत्साहित
(v) जो पवित्र न हो – अपवित्र
(vi) सत्य में निष्ठा रखने वाला – सत्यनिष्ठ

मित्रता योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
सुसंग और कुसंग संबंधी दोहों को संकलित कर चार्ट बनाकर कक्षा में लगाइए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

प्रश्न 2.
जो रहीम उत्तम प्रकृति का करि सकत कुसंग।
चंदन विष व्यापत नहीं लिपटे रहत भुजंग॥

रहीम के इस दोहे का आशय यह है कि सज्जन पर बुरी संगति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। क्या आप इस बात से सहमत हैं? इस तरह के अन्य दोहों का संकलन कर हस्तलिखित पुस्तिका तैयार कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

मित्रता परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
युवा पुरुष को मित्र चुनने में कठिनाई कब पड़ती है?
उत्तर
जब कोई युवापुरुष अपने घर से बाहर निकलकर बाहरी संसार में अपनी स्थिति जमाता है, तब पहली कठिनाई उसे मित्र चुनने में होती है।

प्रश्न 2.
विश्वासपात्र मित्र के विषय में एक प्राचीन विद्वान ने क्या कहा है?
उत्तर
विश्वासपात्र मित्र के विषय में एक प्राचीन विद्वान ने कहा है-“विश्वासपात्र मित्र से बड़ी भारी रक्षा रहती है। जिसको ऐसा मित्र मिल जाए, उसे समझना चाहिए कि खजाना मिल गया।”

प्रश्न 3.
मित्र किसे कहते हैं?
उत्तर
मित्र उसे कहते हैं, जो एक सच्चे पथ-प्रदर्शक के समान होता है. जिस पर हम पूरा विश्वास कर सकें।

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प्रश्न 4.
सच्चे मित्र की चार विशेषताएँ लिखिए
उत्तर
सच्चे मित्र की चार विशेषताएँ इस प्रकार हैं

  1. वह प्रतिष्ठित हो।
  2. वह दृढ़चित्त और सत्य-संकल्प का हो।
  3. उसमें आत्मविश्वास हो।
  4. वह भरोसेमंद होना चाहिए।

प्रश्न 5.
प्रस्तुत पाठ से अच्छे मित्रों के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर
प्रस्तुत पाठ से अच्छे मित्रों के तीन उदाहरण इस प्रकार हैं

  1. राम और लक्ष्मण।
  2. चन्द्रगुप्त और चाणक्य।
  3. राम और सुग्रीव।

प्रश्न 6.
मित्र का कर्त्तव्य क्या बतलाया गया है?
उत्तर
मित्र का कर्त्तव्य इस प्रकार बतलाया गया है, “उच्च और महान, कार्यों में इस प्रकार सहायता देना, मन बढ़ाना, और साहस दिलाना कि हम अपनी-अपनी सामर्थ्य के बाहर काम करते जाएं।”

मित्रता दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘मित्रता’ पाठ का भाव उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘मित्रता’ निबंध आचार्य रामचंद्र शक्ल का एक विचारात्मक निबंध है। इस निबंध के द्वारा निबंधकार ने मित्रता के अर्थ, इससे सावधानी, लाभ, आदर्श और आवश्यकता को बतलाने का सफल प्रयास किया है। इस निबंध के द्वारा लेखक ने यह स्पष्ट करना चाहा है कि मित्रता की धुन सभी को होती है और सभी मित्र बनाते हैं लेकिन बहुत कम श्रेष्ठ, लाभकारी और योग्य मित्र सिद्ध होते हैं। अधिकतर तो मित्र ही होते हैं। इसलिए लेखक ने यह सुझाव दिया है कि अच्छी मित्रता करनी चाहिए। सोच-समझकर मित्रता करनी चाहिए। ऐसा इसलिए कि श्रेष्ठ मित्रों के योगदान से जीवन निश्चय ही महान् बनता जाता है।

प्रश्न 2.
‘मित्रता’ निबंध के आधार पर मित्रता से लाभ बतलाइए।
उत्तर
‘मित्रता’ निबंध में आचार्य शुक्ल ने मित्रता से लाभ पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि विश्वासपात्र मित्र जीवन की औषधि और खजाना होता है। मित्र हमारे संकल्पों को दृढ़ और दोषों को दूर, सद्गुणों का विकास करता है। हृदय में सत्य, प्रेम और पवित्रता के भावों को उत्पन्न करता है। वह कुमार्ग से हटाकर सुमार्ग पर ले जाता है। वह निराशा में आशा की ज्योति जलाता है। सच्चे मित्र में एक कशल वैद्य के सभी गुण होते हैं।

प्रश्न 3.
कुसंग का ज्वर भयानक क्यों होता है? सोदाहरण बताइए।
उत्तर
कसंग का ज्वर भयानक इसलिए होता है कि यह केवल नीति और सद्वृत्ति का ही नाश नहीं करता अपितु बुद्धि का भी विनाश करता है। उदाहरण के लिए, किसी युवा पुरुष की संगति यदि बुरी होगी तो वह उसके पैरों में बँधी चक्की के समान होगी जो उसे दिन-रात अवनति के गड्ढे में गिराती जाएगी और यदि अच्छी होगी तो सहारा देने वाली बाहू के समान होगी जो उसे निरन्तर उन्नति की ओर उठाती जाएगी।

प्रश्न 4.
‘विश्वासपात्र मित्र से बड़ी भारी रक्षा रहती है’ इस कथन के आधार पर मित्र की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर
व्यक्ति का परिचय एक से अधिक व्यक्ति से संभव है, पर मित्र उनमें कोई बिरला ही होता है और मित्रों में भी विश्वासपात्र मित्र तो बड़ी कठिनाई से प्राप्त होता है। विश्वासपात्र मित्र ही जीवन में उपयोगी सिद्ध होता है। वह प्रत्येक कठिनाई से हमें उबार सकता है। अपने हितकारी तथा उपदेशों से वह अपने मित्र की कुरीतियों को दूर कर सकता है। इस तरह विश्वासपात्र मित्र से जीवन निश्चय ही सफल हो जाता है।

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प्रश्न 5.
मित्र का चुनाव करने में क्या-क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
उत्तर
मित्र बनाते समय सर्वप्रथम उसके आचरण तथा स्वभाव पर ध्यान देना चाहिए। मित्र बनाते समय प्रायः उसकी कुछ अच्छी बातों को देखकर ही, उसे मित्र बना लेते हैं। जबकि हमें जिसे मित्र बनाना हो, उसके सम्बन्ध में पूरी तरह जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए। इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि जीवन-पथ पर कितने मित्र हमें आगे बढ़ा सकते हैं। अच्छा मित्र जहाँ हमारे जीवन की दिशा ही बदल देता है वहाँ बुरा मित्र हमें गर्त में भी ढकेल सकता है।

प्रश्न 6.
लेखक ने मित्र का क्या कर्त्तव्य बतलाया है?
उत्तर
लेखक ने मित्र के कर्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अपने मित्र में साहस, बुद्धि और एकता का भाव उत्पन्न करे। वह जीवन और मरण में अपने मित्र का सहारा बने। वह सत्यशील, न्यायी और पराक्रमी बना रहे। वह अपने मित्र का हर कदम पर सहारा बना रहे। जो अपनी सामर्थ्य से बाहर काम कर जाए। मित्र का कर्तव्य है कि वह अपने मित्र पर पूरा विश्वास करे और उसे धोखा न दे।

प्रश्न 7.
अच्छे मित्र में कौन-कौन से गुण होने चाहिए?
उत्तर
अच्छे मित्र में निम्नलिखित गुण होने चाहिए

  1. अच्छे मित्र पथ-प्रदर्शक के समान होना चाहिए।
  2. मित्र पर पूरा विश्वास करे।
  3. सच्चा मित्र भाई के समान होता है।
  4. उसमें सच्ची सहानुभूति होती है।
  5. सच्चा मित्र एक के हानि-लाभ को अपना हानि-लाभ समझता है।
  6. सच्चा मित्र जीवन व मरण में सहायक होता है।

मित्रता लेखक-परिचय

प्रश्न 1.
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
जीवन-परिचय-आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी के श्रेष्ठ निबंधकार तथा समीक्षक हैं। आपका जन्म बस्ती जिले के अगोना नामक गाँव में सन् 1884 में हुआ था। इनकी आरम्भिक शिक्षा उर्दू तथा अंग्रेजी में हुई। विधिवत् शिक्षा तो वे इंटरमीडिएट तक ही प्राप्त कर सके। शुक्ल जी ने आरंभ में मिर्जापुर के मिशन स्कूल में पढ़ाया। जब काशी में नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा ‘हिंदी शब्द सागर’ का सम्पादन आरंभ हुआ, तो शुक्ल जी को वहाँ कार्य करने का मौका मिला। फिर हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्राध्यापक नियुक्त हुए तथा विभागाध्यक्ष बने। शुक्ल जी ने अंग्रेजी, बंगला, संस्कृत तथा हिंदी के प्राचीन साहित्य का गंभीर अध्ययन किया।

शुक्ल जी का पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश ‘आनंद-कादम्बिनी’ पत्रिका के संपादन से हुआ। उसका सम्पादन उन्होंने कई वर्षों तक कुशलतापूर्वक किया था। इसके बाद वे नागरी प्रचारिणी सभा में हिंदी शब्द-सागर’ के सहयोगी संपादक नियुक्त हुए थे। इसके बाद आपने ‘नागरी प्रचारिणी’ पत्रिका का कई वर्षों तक कशलता के साथ संपादन किया। साहित्य-सेवा करते हुए शुक्ल जी ने 8 फरवरी 1941 को अंतिम साँस ली।नाएँ-यों तो शुक्ल जी प्रमुख रूप से निबंधकार और समालोचक के रूप में ही सुविख्यात हैं लेकिन इसके साथ ही कवि भी रहे हैं। यह बहुत कम चर्चा में हैं। उनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं

1. निबंध-संग्रह-

  • विचार-वीथि
  • चिन्तामणि भाग 1-2
  • त्रिवेणी।

2. समालोचना

  • जायसी, सूर और तुलसी पर श्रेष्ठ आलोचनाएँ।

3. इतिहास-

  • हिंदी-साहित्य का इतिहास
  • काव्य में रहस्यवाद।

4. कविता-संग्रह-

  • वसंत
  • पथिक
  • शिशिर-पथिक
  • हृदय का मधुर भार,
  • अभिमन्यु-वध।

5. संपादन-

  • हिंदी शब्द-सागर
  • नागरी-प्रचारिणी पत्रिका
  • तुलसी
  • जायसी।

6. अनुवाद-

  • शशांक
  • बुद्ध-चरित
  • कल्पना का आनन
  • आदर्श-जीवन,

5. मेगास्थनीज का भारतीयवर्षीय वर्णन,
6. राज्य प्रबंध-शिक्षा,
7. विश्वप्रपंच।

भाषा-शैली-शुक्ल जी की भाषा संस्कृतनिष्ठ साहित्यिक भाषा है। उसमें कहीं-कहीं तद्भव शब्द भी आए हैं। मुख्य रूप से आपकी भाषा गम्भीर, संयत, भावपूर्ण और सारगर्भित है। आपके शब्द चयन ठोस, संस्कृत और उच्च-स्तरीय हैं। उर्दू, अंग्रेजी और फारसी शब्दों के प्रयोग कहीं-कहीं हुए हैं। अधिकतर संस्कृत और प्रचलित शब्द ही आए हैं। शक्ल जी की शैली गवेषणात्मक, मुहावरेदार और हास्य-व्यंग्यात्मक है। इससे विषय का प्रतिपादन सुंदर ढंग से हुआ है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि शुक्ल जी की भाषा-शैली विषयानुकूल होकर सफल है।

व्यक्तित्व-शक्ल जी का व्यक्तित्व सर्वप्रथम कविमय व्यक्तित्व था। वह धीरे-धीरे समीक्षक और निबंधकार सहित इतिहासकार के रूप में बदलता गया। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि शुक्ल जी का व्यक्तित्व विविध है। इसीलिए वे एक साथ कई रूपों में देखे जाते हैं। अगर हम संक्षेप में उनके व्यक्तित्व का मूल्यांकन करना चाहें तो कह सकते हैं कि शुक्ल जी युग-प्रवर्तक प्रधान व्यक्तित्व के धनी साहित्यकार हैं।

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प्रश्न 2.
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल-लिखित निबंध ‘मित्रता’ का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
यह निबंध आचार्य रामचंद्र शुक्ल का विवरण प्रधान निबंध है। इसमें मित्र के विषय में अच्छा उल्लेख हुआ है। मित्र-कुमित्र का परिचय देते हुए लेखक ने मित्रता की परिभाषा और महत्त्व को बतलाया है। लेखक के अनुसार जब कोई युवक बाहरी संसार में प्रवेश करता है तो उसे सबसे पहले अपना मित्र चुनने में कठिनाई होती है। जरा-सी असावधानी के कारण कुछ लोगों से उसकी मित्रता हो जाती है। इसकी सफलता उसकी जीवन की सफलता पर निर्भर होती है। ऐसा इसलिए कि जब हम समाज में प्रवेश करते हैं तब हमारा चित्त बहुत ही कच्चा होता है। इसलिए ऐसे लोगों का साथ एकदम बुरा होता है जो हमें नियंत्रित रखते हैं। विवेक के कारण इस बात का डर नहीं रहता लेकिन युवा मन में विवेक बहुत कम होता है।

यह आश्चर्य की बात है कि घोड़े के गुण-दोष को तो लोग परखते हैं, लेकिन मित्र के नहीं। ऐसे लोग मित्रता के उद्देश्य को भूल जाते हैं। एक प्राचीन विद्वान के अनुसार-“विश्वासपात्र मित्र से बड़ी भारी रक्षा होती है। जिसे ऐसा मित्र मिल गया हो, मानो उसे खजाना मिल गया हो। इसलिए हमें अपने मित्रों से यही आशा रखनी चाहिए कि वे हमारे उत्तम संकल्पों को दृढ़ करेंगे। दोषों और त्रुटियों से बचाएँगे और हममें सत्य, पवित्रता और मर्यादा को पुष्ट करेंगे। हमें कुमार्ग से बचाएँगे-यही नहीं हमें हतोत्साह से उत्साह की ओर ले जाएंगे।छात्रावस्था में मित्रता की धुन इतनी सवार रहती है कि मित्र बनाने में आनंद का ओर-छोर नहीं होता है। उस समय मित्रता के आदर्शों को भूल जाते हैं। थोड़ी-सी बातें देखकर झट मित्र बना लेते हैं। ऐसे मित्र जीवन-संग्राम में साथ नहीं देते। वास्तव में मित्र तो एक विश्वासपात्र पथ-प्रदर्शक होता है।

दो मित्रों के बीच में परस्पर सहानुभूति होनी आवश्यक है न कि प्रकृति और आचरण आवश्यक है। इसीलिए राम और लक्ष्मण के परस्पर स्वभाव भिन्न तो रहे लेकिन मित्रता खूब निभी थी। हमें ऐसे मित्रों की खोज करनी चाहिए जिनमें हमसे कहीं अधिक आत्मबल हो। हमें उनका पल्ला उसी प्रकार पकड़ना चाहिए जैसे सुग्रीव ने राम का पकड़ा था। शिष्ट और सत्यनिष्ठ, मृदुल, पुरुषार्थी और शुद्ध बुद्धि वाले ही मित्र भरोसेमंद होते हैं। यही बातें जान-पहचान वालों के भी संबंध में लागू हैं। ऐसे लोगों से ही हम अपने जीवन को आनंदमय और उत्तम बना सकते हैं। जान-पहचान बढ़ा लेना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन जीवन-पथ पर सच्चे प्रेम का सुख और शान्ति प्रदान करने वालों का साथ मिलना निश्चय ही कठिन है।

कुसंग का असर सबसे बढ़कर भयानक होता है, क्योंकि इससे न केवल नीति और सद्वृत्ति का ही अपितु सद्बुद्धि का भी नाश होता है। इसलिए कुसंगति तो पैरों में बँधी हुई चक्की और सुसंगति सहारा देने वाली भुजा के समान होती है। यही कारण है कि कुछ ऐसी ही न पड़ने वाली बुरी बातें कुसंगति से कानों में कुछ ही समय में पड़ जाती हैं जिनसे पवित्रता नष्ट हो जाती है। इतनी जल्दी तो कोई भी अच्छी बात प्रभावित नहीं करती है। इसीलिए हमें ऐसी पूरी कोशिश करनी चाहिए कि हम किसी प्रकार की कुसंगति न करें। यह ध्यान देना चाहिए कि हम किसी प्रकार की बुरी बातों के अभ्यस्त न होवें। शुरू-शुरू में ही आने वाली हर बुरी बातों की छूत से हम बच जावें, एक पुरानी कहावत है

‘काजल की कोठरी में कैसो ही सयानो जाय,
एक लीक काजल की लागि है पै लागि है।”

मित्रता संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

गयांशों की सप्रसंग व्याख्या, अर्वग्रहण संबंधी एवं विषय-वस्त पर आधारित प्रश्नोत्तर

1. हम लोग ऐसे समय में समाज में प्रवेश करके अपना कार्य आरंभ करते हैं, जब कि हमारा चित्त कोमल और हर तरह का संस्कार ग्रहण करने योग्य रहता है। हमारे भाव अपरिमार्जित और हमारी प्रवृत्ति अपरिपक्व रहती हैं। हम लोग कच्ची मिट्टी की मूर्ति के समान रहते हैं, जिसे जो जिस रूप में चाहे, उस रूप में ढाले-चाहे राक्षस बनाए, चाहे देवता।

शब्दार्थ-चित्त-हदय। संस्कार-आदत, स्वभाव। अपरिमार्जित-मलीन। अपरिपक्व-कच्चा।

प्रसंग-यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘बाल-भारती’ में संकलित और आचार्य श्री रामचन्द्र शुक्ल द्वारा लिखित ‘मित्रता’ निबंध से है। इसमें लेखक ने नए-नए

व्यक्ति के अनुभवहीनता के स्वरूप को प्रकाश में लाते हुए कहा है कि

व्याख्या-समाज में प्रवेश करने वाले व्यक्ति लगभग जीवन-क्षेत्र के अनुभव से कोसों दूर रहते हैं। इस प्रकार के व्यक्ति अपनी अनुभवहीनता को लेकर अपना कार्य आरंभ करते हैं। उस समय ऐसे व्यक्ति अपने हृदय के बहुत ही कोमल, सरस और सरल होते हैं। यही कारण है कि उनकी योग्यता सभी प्रकार की आदतों और प्रभावों को अपनाने में सफल दिखाई पड़ती है। इस प्रकार के व्यक्ति अपने स्वभाव और स्वरूप से मलिन और असुन्दर दिखाई देते हैं। उनकी सभी प्रकार की आदतें भी पूरी कच्ची-ही-कच्ची होती हैं। इसे यों समझा जा सकता है जिस प्रकार कच्ची मिट्टी मूर्ति के समान चुपचाप और सरल होती है और जिसे चाहे जो चाहे वह बना ले। ठीक उसी प्रकार समाज में नया-नया प्रवेश करने वाला व्यक्ति भी स्वयं पर निर्भर न होकर समाज के दूसरे अनुभवी और पुराने लोगों पर ही निर्भर होता है। ऐसे लोगों के हाथ में उस नए व्यक्ति का भाग्य होता है। इसे वे देवता, राक्षस आदि जिसमें चाहें उसे बदल दें।

विशेष-

  1. भाषा में प्रवाह है।
  2. शैली बोधगम्य है।
  3. सभी तथ्य सुझावपूर्ण है।
  4. इस अंश से प्रेरणा मिलती है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) कार्य आरंभ करने के लिए लेखक ने क्या आवश्यक बतलाया है?
(ii) कार्य आरंभ करते समय हमारी प्रवृत्ति कैसी रहती है?
उत्तर
(i) कार्य आरंभ करने के लिए लेखक ने चित्त को अत्यधिक सरस, सरल और कोमल होना आवश्यक बतलाया है। इसके साथ ही उसे यह भी होना आवश्यक बतलाया है कि वह हर प्रकार के संस्कारों को ग्रहण करने योग्य हो।
(ii) कार्य आरंभ करते समय हमारी प्रवृत्ति बहुत ही कच्ची रहती है। उसे किसी प्रकार का अनुभव प्राप्त नहीं हुआ होता है। इस प्रकार वह किसी प्रकार के संस्कारों को तुरंत ही ग्रहण करने लगती है।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) कच्ची मिट्टी की मूर्ति की क्या विशेषता होती है?
(ii) ‘चाहे राक्षस बनाए, चाहे देवता’ का आशय क्या है?
उत्तर
(i) कच्ची मिट्टी की मूर्ति की यह विशेषता होती है कि वह दूसरे के अधीन होती है। वह इतनी सरल, सीधी और शान्त होती है कि उसे कोई कुछ भी रूप या आकार दे दे, वह उसका तनिक भी विरोध न करके उसे चुपचाप स्वीकार कर लेती है।
(ii) ‘चाहे राक्षस बनाए, चाहे देवता’ का आशय यह है कि समाज में प्रवेश करनेवाला हर प्रकार से अनुभवरहित होता है। वह इसीलिए आत्मनिर्भर होकर कोई काम करने में असमर्थ होता है। वह तो अनुभवी लोगों पर पूरी तरह से निर्भर होता है। वह अपने को उन्हीं लोगों को सौंप देता है। अब उनके ऊपर निर्भर होता है कि वे उसे बुरा बनाते हैं या अच्छा।

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2. मित्र भाई के समान होना चाहिए जिसे हम अपना प्रीतिपात्र बना सकें। हमारे और हमारे मित्र के बीच सच्ची सहानुभूति होनी चाहिए। ऐसी सहानुभूति जिससे एक के हानि-लाभ समझे। मित्रता के लिए यह आवश्यक नहीं कि दो मित्र एक ही प्रकार के कार्य करते हों या एक ही रुचि के हों। दो भिन्न प्रकृति के मनुष्यों में बराबर प्रीति और मित्रता रही है।

शब्दार्थ-प्रीति-प्रेम। सहानुभूति-दुःख-सुख समझने का अनुभव। रुचि-इच्छा।

प्रसंग-यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘बाल-भारती’ में संकलित आचार्य श्री रामचन्द्र शुक्ल-लिखित ‘मित्रता’ निबंध से है। इसमें लेखक ने मित्र के अच्छे स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि

व्याख्या-मित्र कल्याणकारी और उपकारी होना चाहिए। उसका किया हुआ कल्याण और उपकार निश्चित रूप से सगे भाई के समान होना चाहिए। ऐसा इसलिए कि सगे भाई का कल्याण और उपकार हर प्रकार से प्रीतिकारक सिद्ध होता है। इससे – हमारे और हमारे बने हुए मित्र के बीच परस्पर सही और वास्तविक सहानुभूति का होना परम आवश्यक होता है। इस प्रकार की सहानुभूति के द्वारा ही एक दूसरा अपनी-अपनी हानि-लाभ के विषय में सोच-समझ सकता है अन्यथा नहीं। मित्रता के विषय में यह निश्चित रूप से समझ लेना चाहिए कि परस्पर दोनों एक ही प्रकार के कार्य-व्यापार करते हों। यह भी आवश्यक नहीं कि परस्पर दोनों एक ही विचारधारा के हों। मित्र तो एक-दूसरे के विपरीत विचारधारा के होकर भी परस्पर अधिक प्रीतिकारक और कल्याणकारक सिद्ध होते हैं।

विशेष-

  1. भाव सरल और स्पष्ट है।
  2. मित्र के सच्चे स्वरूप का उल्लेख हुआ है।
  3. मित्रता के लिए आवश्यक गुणों का वर्णन हुआ है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) मित्र को भाई के समान क्यों होना चाहिए?
(ii) मित्र के बीच कैसी सहानुभूति होनी चाहिए?
उत्तर
(i) मित्र को भाई के समान होना चाहिए। यह इसलिए कि उससे हम अपना दुःख-सुख कहकर उसमें उसे भागीदार बना सकें।
(ii) मित्र के बीच वह सच्ची सहानुभूति होनी चाहिए, जो हानि-लाभ का पूरा-पूरा ध्यान रखे।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) उपर्युक्त गद्यांश में किसका उल्लेख हुआ है?
(ii) मित्रता के लिए मुख्य रूप से क्या आवश्यक है?
उत्तर
(i) उपर्युक्त गद्यांश में सच्चे मित्र के स्वरूप का उल्लेख हुआ है।
(ii) मित्रता के लिए मुख्य रूप से प्रीतिकारक और कल्याणकारक होना आवश्यक है।

3. कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। यह केवल नीति और सद्वृत्ति का ही नाश नहीं करता, बल्कि युद्ध का भी क्षय करता है। किसी युवा पुरुष की संगति यदि बुरी होगी तो वह उसके पैरों में बँधी चक्की के समान होगी, जो उसे दिन-रात अवनति के गहे में गिराती जाएगी और यदि अच्छी होगी तो सहारा देने वाली बाह के समान होगी, जो उसे निरंतर उन्नति की ओर उठाती जाएगी।

शब्दार्थ-कुसंग-बुरा संग। सद्वृत्ति-अच्छाई। क्षय-नाश। अवनति-अविकास। बाहु-भुजा। निरन्तर-हमेशा।

प्रसंग-यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘बाल-भारती’ में संकलित लेखक आचार्य श्री रामचन्द्र शुक्ल द्वारा लिखित ‘मित्रता’ निबंध से है। इसमें लेखक ने कुसंगति के भयानक फल को बतलाते हुए कहा है कि
व्याख्या-जो भी व्यक्ति एक बार भी कुसंगति में पड़ जाता है उसके भयानक फलों को भोगने के लिए मजबूर हो जाता है। ऐसा इसलिए कि कुसंगति सभी प्रकार की अच्छाइयों को ही नष्ट करने में लग जाती है। इसलिए इससे, अच्छे-अच्छे सिद्धांतों-संस्कारों और अच्छे उद्देश्यों का विनाश तो होता ही है, इसके साथ-ही-साथ सद्बुद्धि का भी पूरा विनाश होने में तनिक भी देर नहीं लगती है। इसलिए यह कहना बहुत ही उचित है कि किसी भी बुरी संगति वाले अनुभव से ही युवक की कुसंगति बहुत ही दुःखद होती है। यह तो ठीक उसी प्रकार की होती है जिस प्रकार से किसी के पैरों में बंधी हुई चक्की होती है। और वह उसे विकास और सुख की ओर न ले जाकर बार-बार दुःख के गड्ढे में ही गिराती जाती है। लेखक का पुनः कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को अच्छी संगति मिल गई है तो इससे उसको निरंतर भला और सुख ही मिलता जाएगा। इस प्रकार की संगति तो उस भुजा के समान ही होती है जो उसे हर प्रकार से सुख और कल्याण के शिखर पर बैठाने में सहायक होगी।

विशेष-

  1. भाव हृदयस्पर्शी है।
  2. उपदेशात्मक शैली है।
  3. तत्सम शब्दावली की प्रधानता है।
  4. संपूर्ण अंश प्रेरणादायक है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) कुसंगति का असर कैसा होता है?
(ii) कुसंगति का असर सबसे अधिक किस पर होता है और क्यों?
उत्तर
(i) कुसंगति का असर बहुत ही भयानक होने के कारण दुखद होता है। जिस पर कुसंगति का असर पड़ जाता है, उसके नियम-सिद्धान्त समाप्त हो जाते हैं। इससे उसकी सद्वृत्तियाँ विनष्ट हो जाती हैं। इस तरह कुसंगति से बुद्धि-विवेक देखते-देखते समाप्त हो जाते हैं।
(ii) कुसंगति का असर युवा-पीढ़ी पर सबसे अधिक पड़ता है। ऐसा इसलिए कि उसकी समझ बहुत कम होती है। उसका चित्त बिल्कुल अविकसित होता है। उसका अनुभव बिल्कुल न के बराबर होता है।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न-
(i) कुसंग क्या होता है?
(ii) कुसंग का क्या फल होता है?
उत्तर-
(i) कुसंग एक भयंकर ज्वर के समान होता है, जिसकी चपेट में आने वालों को केवल हानि उठानी पड़ती है।
(ii) कुसंग का फल बड़ा ही भयानक होता है। इसकी चपेट में प्रायः युवावर्ग आता है। वह कुसंग में पड़कर हानि ही उठाता रहता है। उससे उसका बाहर निकलना असंभव-सा हो जाता है।

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4. बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिनके घड़ी भर के साथ से भी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है क्योंकि उतने ही बीच में ऐसी-ऐसी बातें कही जाती हैं जो कानों में न पड़नी चाहिए। चित्त पर ऐसे प्रभाव पड़ते हैं जिनसे उसकी पवित्रता का नाश होता है। बुराई अटल भाव से धारण करके बैठती है। बुरी बातें हमारी धारणा में बहुत दिनों तक टिकती हैं। इस बात को प्रायः सभी लोग जानते हैं कि भद्दे-फूहड़ गीत जितनी जल्दी ध्यान पर चढ़ते हैं उतनी जल्दी कोई गंभीर या अच्छी बात नहीं।

शब्दार्थ-भ्रष्ट-नष्ट। चित्त-हदय। पवित्रता-सच्चाई। अटल-स्थिर। धारणा-विचार। गंभीर-ठोस।

प्रसंग-यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘बाल-भारती’ में संकलित लेखक आचार्य श्री रामचंद्र शुक्ल-लिखित ‘मित्रता’ निबंध से है। इसमें लेखक ने अच्छी-बुरी बातों के प्रभाव के विषय में बतलाते हुए कहा है कि

व्याख्या-संसार में अधिकांश लोग ऐसे अवश्य ही मिल जाएँगे जिनका थोड़ा-सा भी साथ अनेक प्रकार के विनाश का कारण बन जाता है। ऐसे लोगों का साथ निश्चय ही सद्बुद्धि को विनष्ट करने में देर नहीं लगाता है। ऐसा इसलिए कि इस थोड़े से ही समय में कुछ ऐसी उलजलूल बातें अवश्य हो जाती हैं जो हर प्रकार से अनुचित और अहितकर ही होती हैं। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि बुराई का प्रभाव हृदय-स्थल पर इस तरह से पड़ता है कि इससे कहीं कुछ भी सच्चाई-अच्छाई का नामोनिशान नहीं रह जाता है। यह सब कुछ इसलिए होता है कि जो एक बार भी बुरी बातें हमारे हृदय में प्रवेश कर जाती हैं वे स्थिर और अटल भाव से होती हैं। वे बहुत दिनों तक ज्यों-की-त्यों पड़ी रहती हैं। इसलिए इस बात को सभी मानते और समझते हैं कि भद्दे और गन्दे गीतों के असर इतनी जल्दी और देर तक होते हैं कि ऐसे असर सुंदर और अच्छे गीतों के भी नहीं होते हैं।

विशेष-

  1. अच्छी और बुरी बातों के प्रभाव का आकर्षक उल्लेख है।
  2. तत्सम शब्दों की अधिकता है।
  3. शैली बोधगम्य है।
  4. सारा अंश उपदेशात्मक है।
  5. उपमा अलंकार है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i)कुसंग का असर किस प्रकार होता है?
(ii) बुराई और अच्छाई में क्या अंतर है?
उत्तर
(i) कुसंग का असर तुरंत पड़ने लगता है। यहाँ तक कि घड़ी भर में ही कुसंग अपना दुष्प्रभाव दिखाने लगता है।
(ii) बुराई और अच्छाई में बहुत बड़ा अंतर है। बुराई में अटलता होती है, जबकि अच्छाई में नहीं। बुराई तुरंत अपना प्रभाव डालती है, जबकि अच्छाई धीरे-धीरे।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) बुराई से सबसे पहले क्या हानि होती है?
(ii) उपर्युक्त गांश का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर
(i) बुराई से सबसे पहले बुद्धि की हानि होती है। इससे अच्छाई की पवित्रता विनष्ट हो जाती है। इससे हमारा सोच-समझ मलिन हो जाती है।
(ii) उपर्युक्त गद्यांश का मुख्य भाव है-कुसंगति और सत्संगति क्या होती है। इसे समझाते हुए सत्संगति का महत्त्व बतलाना।

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MP Board Class 9th General English Essay Writing

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MP Board Class 9th General English Essay Writing

1. My Hobby

Introduction :
Hobby means some work done in free time. When a man gets time after doing his r routine work, he wants to enjoy. At this time if he does some different work, it is called his hobby. Hobbies are many such as painting, playing on some instruments, photography, stamp-collecting, gardening etc.

My Hobby—My hobby is gardening. I think it is the best hobby. Plants and trees are very useful for our life. They not only provide us food to eat, but also serve us in many ways. They make the air fresh and cool for us. They check the air pollution also. Plants give us flowers. Trees give-us fruits to eat and wood to bum. So I like trees and plants very much.

My Garden—There is no ground around our house. So I have planted several kinds of flowers in flower pots. I love flowers very much. I water the plants and care for them. I bring small plants from the nursery. I prepare the flower pots and then cultivate the plants. I give fertilizer to them. When buds appear, it gives me great pleasure. I wait for their blossoming into beautiful flowers. Sometimes when I get up in the morning and see the flowers my joy knows no bounds. My parents and other family members too become very happy to see them. Guests coming to our home appreciate my hobby.

Conclusion—Sometimes we sit in our small garden and do our home work or take tea and breakfast. It gives us great joy. My mind becomes sharp and my memory is increased in the company of flowers. Sometimes I see flowers in my dream and my
heart is filled with pleasure.

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2. An Indian Festival
Or
Diwali

Introduction—Diwali is an important festival of the Hindus. It often comes in the month of October or November every year. It is celebrated in the memory of Lord Ram’s return to Ayodhya after 14 years of exile. The people of Ayodhya welcomed Lord Ram graciously. They decorated their homes with flowers and lighted earthen lamps before their houses. Diwali is a remembrance of that day.

Preparations—Several days before people start preparing for this festival. They clean their houses and whitewash them. The merchants paint their shops and set them. The market gets a new look.

How Celebrated—People buy new clothes and new dresses. They buy many things for this festival. Children buy crackers. Ladies buy sarees and material for preparing sweets. People give presents to friends and relatives. Main days of celebration of Diwali are three—‘Dhan Teras’, ‘Roop Chaudas’ and ‘Diwali’ on Amavasya day. In the evening ladies and children bum candle and lamps. Many electric bulbs of several colours are also lighted.

Worship of Goddess Laxmi—On Diwali day people worship goddess Laxmi. They pray her for health, wealth and happiness for the whole year. The rich and the poor enjoy Diwali. Diwali also marks the end of the year.

Importance—Diwali is an all India festival. People of all parts of India and all communities celebrate’it. It is a festival of national importance. It promotes national unity also.

For AH People—All age groups of people enjoy celebration of Diwali. The rich and the poor all celebrate it as per their capacity.

Conclusion—Some people gamble and drink wine. Some are injured at the time of bursting crackers due to carelessness. However, Diwali brings happiness to every home in India.

3. Importance of Newspapers
Newspapers are the world’s mirrors.

—James Ellis

Introduction—The word News is made up of four letters N, E, W and S. Each letter symbolises one direction. N stands for North, E for East; W for West and S for South. Hence, a newspaper is a paper that contains news of all directions—North, South, East and West.

A newspaper collects information about happenings in the world through news agencies and prints them on a paper.

Contents of a Newspaper—A newspaper contains political, social, economical, religious and several other kinds of news. Everybody finds something of his/her interest in it. Children, young persons as well as old persons find newspaper interesting. There is a column for market report exhibiting wholesale prices of a lot of articles of daily use and quoting market value of shares and stocks of leading concerns. So a man of business is also interested in it. Art, music, entertainment, games, general knowledge and all such things are there in a newspaper.

There are advertisements of various kinds in the newspapers. They inform us about new and useful inventions. They are a source of income for the newspaper. Advertisements concerning matrimonial alliance provide immense relief to parents in choosing consorts for their sons or daughters. Assorted advertisements provide an unfathomable relief to people of different sorts. Only because of these advertisements we get a newspaper within our reach price.

Importance of Newspapers—Newspapers guide and teach us. They try to educate and shape public opinion. They are necessary for a democratic society. They express the views of the public in a free and fearless manner. Most of us are too busy to think of the great problems of our country, so we rely upon- the newspaper and accept the view they present to us. We can also express our views under the column ‘Letters to the Editor’.

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Conclusion—Newspaper is a powerful weapon. It is a measuring rod to determine the length of democracy in a country. And as such it should be handled carefully. Rumours and sensational news create a nasty atmosphere. Newspapers must present constructive and objective matter before their readers. They should not misuse freedom given to the press. Their criticism should not be biased. They should be impartial in their news and views.

4. Wonders of Science Or
Science is a Good Servant but a Bad Master

Introduction—It is the age of science. Science plays an important role in our life. It has made our life easier and comfortable. Science is a systematic way of knowledge and living.

Scientific Wonders—Science has given us many wonderful gifts. The various inventions of science are its wonders. We cannot imagine our life without them.

Various Inventions—Electricity is the most useful gift of science. It gives us light. Heaters, fans, coolers, refrigerators, computers etc., all work by electricity. It also runs machines and trains.

Medicine and Surgery—Science has given wonderful medicines. Vaccination helps us in preventing diseases like polio, cholera, small pox etc. It has brought down the death rate. Modem surgical equipment have made operations less painful.

Means of Communication—Today we amuse ourselves by watching television and listening to music on radio and tape recorder. Television has become a powerful medium of education and knowledge. U.G.C. and IGNOU lessons on television are very useful. Fast means of transport and communication help us to reach distant places in a short time.

Computers—Scientists have invented computers. These are wonderful inventions. Computers can do complex calculations and work quickly. They have solved a lot of problems of man.

Disadvantages of Science—-Everything has two sides. Science too has a dark side. The invention and production of atom bombs and other dangerous weapons are a great threat to the existence of humanity. They can destroy the world in seconds. Secondly, big factories, mills and other machines have polluted the atmosphere.

Conclusion—Science is a great help to modem man. If properly used it can make the life of man healthier and happier.

5. My Best Friend

Introduction— ‘No man is an island entire of itself’. We need someone to share our sorrows and joys. I have several friends but Pinki is my best friend. She studies in my class and is my neighbor.

Details—Pinki’s father is a businessman. He is a simple man. Her mother is a teacher. She is a virtuous lady. Qualities of her parents are present in Pinki also.

Her qualities—Pinki is an intelligent girl. She always stands first in class. But she is not proud. She is kind and cooperative. She helps her classmates. She is a ‘friend in need’ and thus ‘a friend indeed’. We go to school together and come home together.

Her love for games—She is good at sports and games too. Last year she won the badminton championship.

Why I like her—I like her because she has a very good nature. She is cheerful, kind, honest and truthful. She faces problems boldly. She always helps me. Everybody praises her. She bears a good moral character. She believes in simple living and high thinking.

Conclusion—A good person inspires others to be good. There is a saying that a person is known by the company he keeps. Thus her company inspires me to be good and become like her. I am proud of my friend.

6. My Mother

Introduction—‘A hand that rocks the cradle rules the world1. The above saying holds true as a child is only a mother’s reflection. ‘Mother, or mama’ the first word spoken by a child holds in itself the essence of love and care.

We can’t compare the relation of a mother with any other relation. Mother not only gives us birth but she brings us up as well, looks after us and gives all her attention to our well-being. She does many sacrifices for us.

My mother—My mother Mrs. Pramila Devi is an ideal mother. She is a symbol of love and sacrifice. She gets up early in the morning and works late till night. She keeps the home neat and clean. When I get up she gives me warm water to wash my mouth. She gives me hot tea to drink. She prepares food with keen interest. The food is tasty to eat. She pays attention to all my needs.

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Education and other qualities—My mother is B.A. She has a good knowledge of several subjects especially of Hindi and English. She possesses a great experience of many arts. She knows knitting and sewing well. She instructs us in other fields too. My mother is religious minded. She worships God daily without fail.

Social side of my mother—My mother has good relations with our neighbours. She helps them at the time of their troubles. My mother helps the poor and the needy. She takes part in various social activities. She is a member of the Woman Organisation for helping the weaker sections of the society.

7. An Ideal Teacher

Introduction—I study in Modem Public School, Bhopal. It is a very good school. It has forty teachers. All the teachers are good but Mr. S. K. Gupta is my favorite teacher.

His personality and qualities—He is about thirty-five years old. He teaches us English. He is our class teacher too. He is smart and handsome.

He believes in ‘simple living and high thinking’. He works hard with his students. He takes extra classes on his student’s demand. He helps weak students. Mr. Gupta loves us as his younger brothers. We also respect him as our elder brother.

His method of teaching—He is very punctual. His teaching method is very good. He uses simple language in teaching, so we easily understand his lessons. His examination results are always very good. He’is both strict and kind. We obey him.

His love for sports—He is good at games. He plays cricket well. He is a good sportsman. He has created an interest for cricket among the boys.

Conclusion—Mr. Gupta, therefore, possesses all the qualities of an ideal teacher. I have great respect for him in my heart. I like him a lot.

8. The Books I Like Most

Introduction—Books are our best friends. They are treasures of knowledge. No one can feel lonely in their company. They also act as our guide and teacher.

My favorite book—My favorite book is the Ramayana written by the great poet Tulsidas. The book is full of conceptions of Indian philosophy. The greatest secrets of divine knowledge are explained in simple verse. Doubts shatter, pride melts away, evil thoughts escape and greed gallops away after its study.

About the theme—The story is too well-known to be narrated in details. The deep knowledge of Hindu culture over the book is quite clear. Ram represents all that is good. Ravan stands for the evil. Ram’s victory over Ravan means the victory of truth over falsehood, or good over evil.

Conclusion—The biggest number of commentaries have been written over it. It has been translated in more than 100 languages of the world and foreigners know India through it. When they read Ramayana, they know about India’s glory. They bow their heads in honor to India.

MP Board Class 9th Sanskrit व्याकरण शब्द रूप

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MP Board Class 9th Sanskrit व्याकरण शब्द रूप

संस्कृत में तीन लिंग होते हैं-पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग। ये लिंग सदा अर्थ के अनुसार नहीं होते अपितु पहले से ही निश्चिय हैं।

उदाहरणार्थ-
पत्नी, अर्थ में ‘भार्या’ शब्द स्त्रीलिंग है तो उसी अर्थ में ‘दार’ शब्द पुल्लिंग और ‘कलत्र’ शब्द नपुंसकलिंग है। यद्यपि तीनों का अर्थ एक ही है तो भी उनके लिंग भिन्न हैं। ऐसे ही ‘काय’ और ‘देह’ शब्द पुल्लिंग हैं किन्तु ‘शरीर’ शब्द नपुंसकलिंग है।

संस्कृत में सात विभक्तियां होती हैं। (प्रथमा से सप्तमी तक)। प्रत्येक विभक्ति में तीन वचन होने के कारण प्रत्येक शब्द के इक्कीस रूप बनते हैं। इसके अतिरिक्त एक वचन में सम्बोधन के रूप भिन्न होते हैं। तीनों वचनों में मूल शब्द से चिह्न जोड़े जाते हैं। विभक्ति चिह्रों को सुप् भी कहते हैं। जिस शब्द के आगे कोई विभक्ति चिह्न लगा रहता है उसे सुबन्त या पद कहते हैं। नीचे कुछ महत्त्वपूर्ण शब्दों के रूप दिए जाते हैं।

अकारान्त पुल्लिंग शब्द
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टिप्पणी-जिन शब्दों का उच्चारण करने पर अन्त में ‘अ’ की ध्वनि आती है। वे आकारान्त शब्द कहलाते हैं।

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अकारान्त पुल्लिंग शब्दों जैसे देव, नर, नृप, बालक, विद्यालय आदि के रूप राम शब्द की तरह चलते हैं।

इकारान्त पुल्लिंग शब्द
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टिप्पणी-जिन शब्दों का उच्चारण करने पर अन्त में ‘इ’ की ध्वनि आती है, उन्हें इकारान्त शब्द कहते हैं। इकारान्त पुल्लिंग शब्दों, जैसे-कवि, कपि, गिरि, आदि के रूप रवि शब्द की तरह चलेंगे।

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उकारान्त पुल्लिंग शब्द
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टिप्पणी-जिन शब्दों के अन्त में ‘उ’ की ध्वनि आती है वे उकारान्त शब्द कहलाते हैं। उकारान्त पुल्लिंग शब्दों जैसे-साधु, शिशु आदि के रूप भानु शब्द की तरह चलते हैं।

ऋकारान्त पुल्लिंग शब्द
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नकारान्त पुल्लिंग शब्द
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स्त्रीलिंग शब्द
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टिप्पणी-इसी प्रकार रमा, बालिका, प्रभा आदि आकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों के रूप चलेंगे।
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इलन्त स्त्रीलिंग वाच = वाणी
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दिश = दिशा
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ऋकारान्त मातृ (माता)
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नपुंसकलिंग शब्द
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इकारान्त नपुंसकलिंग
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उकारान्त नपुंसकलिंग
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सकारान्त नपुंसकलिंग
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तकारान्त नपुंसकलिंग
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सर्वनाम शब्द रूप
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संख्यावाचक शब्दों के रूप
‘एक’ (केवल एकवचन में)
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द्वि (दो) (द्वि शब्दों के रूप केवल द्विवचन में तीनों लिंगों में होते हैं। नंपुसकलिंग तथा स्त्रीलिंग के रूप एक से ही होते हैं।)
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MP Board Class 9th Sanskrit व्याकरण शब्द रूप img-34

पञ्चन शब्द के आगे के संख्यावाचक शब्दों के रूप तीनों लिंगों में समान होते हैं।
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संख्यावाचक शब्द
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इनमें एक केवल एकवचन में वि द्विचन में तथा शेष अष्टादशन तक बहुवचन में होते हैं। उसके बाद की संख्याएं में आती हैं। यदि द्विवचन में आई तो उनके दूने का बोध होगा और बहुवचन में कई गुने का।
यथा-शते = दो सौ। शतानि = कई सौ।

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MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 4 पितृसेवा परं ज्ञानम्

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MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Durva Chapter 4 पितृसेवा परं ज्ञानम् (कथा)

MP Board Class 9th Sanskrit Chapter 4 पाठ्य पुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरं लिख-(एक शब्द में उत्तर दीजिए)
(क) मदन विनोदः कस्य पुत्रः आसीत्? (मदन, विनोद किसके पुत्र थे?)
उत्तर:
हरिदत्तस्य। (हरिदत्त के)

(ख) मदनं विनोदेन स्वर्णपञ्जरस्थः शुकः कुत्र स्थापितः? (मदन विनोद ने सोने के पिंजरे में स्थित शुक को कहाँ रखा?)
उत्तर:
शयनेन कक्षे। (सोने वाले कमरे)

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(ग) त्रिविक्रमनामा द्विजः कस्य सखा आसीत्? (विक्रम नाम का ब्राह्मण किसका मित्र था?)
उत्तर:
हरिदत्तस्य (हरिदत्त का)।

(घ) देवशर्मा कुत्र तपः अकरोत्? (देवशर्मा ने कहाँ तपस्या किया?)
उत्तर:
गंगातीरे (गंगा के किनारे)।

(ङ) देवशर्मोपरि केन पुरीषोत्सर्ग कृतः? (देवशर्मा के ऊपर किसने टट्टी किया?)
उत्तर:
बलाकि (बगुली)।

प्रश्न 2.
अधोलिखित प्रश्नां एकवाक्येन उत्तरं लिखत (नीचे लिखे प्रश्नों का एक वाक्य में उत्तर लिखो)
(क) मदनविनोद पितुः शिक्षा केन कारणेन न शृणोति? (मदनविनोद पिता की शिक्षा किस कारण से नहीं सुनता था?)
उत्तर:
मदन विनोद पितुः शिक्षा दुखश्यनेनो कारणेन न शृणोति। (मदन विनोद पिता की शिक्षा दुख के कारण नहीं सुनता था।)

(ख) मदन विनोदस्य आसक्तिः केषु आसीत्? (मदन विनोद का लगाव किसमें था?)
उत्तर:
मदनविनोदस्य आसक्तिः द्यूतमृगयवेश्यामद्यादिषु आसीत्। (मदन विनोद का लगाव जुआ खेलने, वेश्यावृत्ति और मदिरापान आदि में था।)

(ग) द्विजपत्नी देवशर्माणं किम उक्तवती? (ब्राह्मण की पत्नी ने देवशर्मा से क्या बोली?)
उत्तर:
द्विजपत्नी देवशर्माणं नाहं बलाकेव त्वत्कोपस्थानम् उक्तवती। (ब्राह्मण की पत्नी देव शर्मा से बोली, मैं तुम्हारे बालक को स्थापित नहीं की हूँ।)

(घ) देवशर्मा विस्मितः कथं सजातः? (देवशर्मा किस तरह से विस्मित हो गए?)
उत्तर:
देवशर्मा विस्मितः प्रच्छन्नपातकज्ञानादीत सञ्जातः। (देव शर्मा छुपे हुए पापी ज्ञान के कारण विस्मित हो गए।)

(ङ) देवशर्मा व्याधं कीदृशम् अपश्यत्? (देवशर्मा ने बहेलिया को किस तरह से देखा?)
उत्तर:
देवशर्मा व्याधं रक्ताक्तहस्तं यम प्रतिमं मांसविक्रयं विद्धानं अपश्यत्। (देवशर्मा ने बहेलिए को रक्तरंजित हाथ तथा मांस बेचते हुए देखा।)

प्रश्न 3.
अधोलिखित प्रश्नां उत्तराणि लिखत (निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखो)
(क) शुको देवशर्मणः पतनाय किं कारणमवोचत्? (तोते ने देवशर्मा के पतन के लिए क्या कारण बताया?)
उत्तर:
शुको देवशर्मणः पतनाय पित्रोस्ते दुःखिनोर्दुः खात्पतत्यश्रुचयो भूवि कारणमवोचत्। (तोते ने देव शर्मा के पतन का कारण बताया कि तुम्हारे पिता दुख से दुखी थे और उनके अश्रु भूमि पर गिर रहे थे।)

(ख) बलाका कथं भस्मीभूता जाता? (बगुला किस तरह से भस्म हुआ?)
उत्तर:
बलाका तपस्वी क्रोधाग्निना भष्मीभूता जाता। (बगुला तपस्वी के क्रोध के कारण भस्म हुआ।)

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(ग) के जनाः निन्द्यमानाः जीवन्ति? (कौन लोग निन्दनीय जीवन जीते हैं?)
उत्तर:
स गृही मुनिः साधु स योगी स च धार्मिकः पितृशुश्रूषको नित्यं जन्तुः साधारणश्च य। (वही व्यक्ति गृहस्थ है, वही मुनि साधु योगी है, जो पिता की सेवा में नित्य लगा हुआ है, ऐसे व्यक्ति साधारण होते हुए भी श्रेष्ठ हैं।)

(घ) व्याधः स्वज्ञानस्य कारणम् किम् उत्कवान? बहेलिया ने अपने ज्ञान का क्या कारण बताया?
उत्तर:
न पूजयन्ति ये पूज्यान्मान्यान्न मानयन्ति ये। जीवन्ति निन्द्यमानास्ते मताः स्वर्ग न यान्ति च। (जो पूजा योग्य की पूजा नहीं करते, मानने योग्य को नहीं मानते, निन्द्य होकर वह इस जीवन में जीते तथा मरने पर उन्हें स्वर्ग नहीं मिलता ऐसे लोग निन्दनीय जीवन जीते हैं।)

(ङ) अस्य पाठस्य आशयः कः? (इस पाठ का क्या आशय है?)
उत्तर:
अस्य पाठस्य आशयः-पितरौ सेवा। (इस पाठ का आशय है-माता-पिता की सेवा करना)

प्रश्न 4.
अधोलिखत वाक्येषु पदपूर्ति कुरुत
(क) हरिदत्तः कुपुत्रं दृष्ट्वा दुखितः सञ्जातः।
(ख) शुकं सपत्नीकं पुत्रवत्वं परिपालय।
(ग) तपस्वी गङ्गातीरे जपार्थमुपविष्टः।
(घ) ब्राह्मण ज्ञानकारणं व्याध प्रप्रच्छ।
(ङ) नाहं बलाकेय त्वत्कोपस्थानम्
(च) क्रोधाग्निना भस्भीभूतां बलाकां भूमौ पतिताम्।

प्रश्न 5.
‘अ’ ‘ब’ स्तम्भयों यथायोग्यं मेलनम् कुरुत-
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 4 पितृसेवा परं ज्ञानम् img-1
उत्तर:
क. 5
ख. 3
ग. 1
घ. 2
ड. 4

प्रश्न 6.
अधोलिखित संधीनां विच्छेदं कुरुत
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 4 पितृसेवा परं ज्ञानम् img-2

प्रश्न 7.
अधोलिखित समासानां विग्रहं कुरुत
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 4 पितृसेवा परं ज्ञानम् img-3

प्रश्न 8.
अधोलिखिताव्ययाना वाक्येषु प्रयोगं कुरुत
(उपरि, च, तत्र, एवम, न, ऊर्ध्वम, इव, कथम्)
उपरि – वायुयानमः उपरि-उपरि उड्डयति।
च – राम-लक्ष्मणसीताश्च वनं आगच्छत्।
तत्र – तत्र वायु प्रवहति।
एवम् – सः एवम् कथाम् अकथयत्।
न – वृष्टिः न भविष्यति।
ऊर्ध्वम् – खगाः ऊर्ध्वम् उड्डयन्ति।
इव – गीता वाक्देवि इव पठति।
कथम – कथम् सः शीघ्रम संस्कृतं पठति।

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प्रश्न 9.
अधोलिखित वाक्यानि कः कम् कथयति
(क) एनं शुकं सपत्नीक पुत्रत्व परिपालय।
उत्तर:
त्रिविक्रमाः हरिदत्तं कथयति।

(ख) अस्ति पञ्चपुरं नाम नगरम्।
उतर:
शुकः मदनविनोदम् कथयति।

(ग) नाहं बलाकेव त्वत्कोपस्थानम्।
उत्तर:
नारायणस्य पनि देवशर्माणम् कथयति।

(घ) कथं सती ज्ञानवती, कथं च त्वं ज्ञानवान।
उत्तर:
देवशर्मा व्याधम् कथयति।।

(ङ) ये मान्यान न मानयन्ति ते मृताः स्वर्गं न यान्ति।
उत्तर:
व्याधाः ब्राह्मणं कथयति।

प्रश्न 10.
अधोलिखित शब्दानां प्रकृति प्रत्ययम् च पृथक कुरुत
(क) गृहीत्वा
उत्तर:
गृह्+क्त्वा

(ख) दत्तम्
उत्तर:
दा+क्त

(ग) ज्ञानवान
उत्तर:
ज्ञान+मतुप

(घ) परित्यज्य
उत्तर:
परि+त्यज क्त्वा (ल्यप)

(ङ) निन्द्यमानाः
उत्तर:
निन्द्य+शानच्।

प्रश्न 11.
अधोलिखित शब्दानां मूलशब्दं विभक्ति वचनञ्च लिखत
MP Board Class 9th Sanskrit Solutions Chapter 4 पितृसेवा परं ज्ञानम् img-4

पितृसेवा परं ज्ञानम् पाठ-सन्दर्भ/प्रतिपाद्य

संस्कृत साहित्य में कथा (आख्यान) साहित्य की दो विधाएँ उपलब्ध हैं। पहली विधा में उपदेशात्मक नीति-कथात्मक साहित्य है जिसमें ‘पंचतंत्र’ पशु-पक्षियों के माध्यम से (प्रेरक एवं ज्ञानवर्द्धक कथाएँ) रोचक ढंग से कही गई हैं। दूसरी विधा में लोककथात्मक मनोरंजक साहित्य आता है। उपदेशात्मक नीति कथा साहित्य में ‘शुक सप्ततिः’ प्रसिद्ध ग्रंथ है। नीति-कथा में उपदेश की प्रवृत्ति तथा लोक-कथा साहित्य में मनोरंजन की वृत्ति प्रमुख रूप से होती है। शुक सप्ततिः उपदेशात्मक कथा का एक उत्तम ग्रंथ है। इस (ग्रंथ के) लेखक के विषय में अथवा इसके रचना काल में निश्चय नहीं है किंतु इस समय शुक नाम से उपलब्ध है। सन् 1400 ई. का मध्य इस कथा-ग्रंथ का रचना काल अनुमानित है। अतः उसी में से एक मातृ-पितृ भक्ति परक कथा शिक्षण के दृष्टिकोण से उपलब्ध है।

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पितृसेवा परं ज्ञानम् पाठ का हिन्दी अर्थ

1. चन्द्रपुरनाम्नि नगरे श्रेष्ठिनः हरदत्तस्य पुत्रः मदनविनोदस्तु अतीवविषयासक्तः कुपुत्रः पितुः शिक्षा न शृणोति स्म। तस्य द्यूतमृगयावेश्यामद्यादिषु अतीव आसक्तिः। कुमार्गचारिणं तं कुपुत्रं दृष्ट्वा तत्पिता हरिदत्तः सपत्नीकः अतीव दुःखितः सञ्जातः। तं हरिदत्तं कुपुत्रदुःखेन पीडितं दृष्ट्वा। तस्य सखा त्रिविक्रमनामा द्विजः स्वगृहतो नीतिनिपुणं शुकं सारिकां च गृहीत्वा तद्गृहे गत्वा प्राह-‘सखे हरिदत्त! एनं शुकं पुत्रवत्त्वं सपत्नीकं परिपालय। एतत्संरक्षणेन तव दुःखं दूरीभविष्यति।’ हरिदत्तस्तु शुकंगृहीत्वा पुत्राया समर्पयामास। मदनविनीदेन शयनमन्दिरे स्वर्णपञ्जरस्थः स्थापितः परिपोषितश्च। अथैकदा रहसि शुको मदनं प्राह-हे सखे!

पित्रोस्ते दुःखिनोर्दुःखात्पतत्यश्रुचयो भुवि।
तेन पापेन ते वत्स पतनं देवशर्मवत्॥2॥

शब्दार्थ :
श्रेष्ठिनः-सम्पन्न व्यापारी का-Talented Businessman or Rich Businessman; मदनविनोदस्तु-मदन और विनोद–Madan and Vinod ; विषयासक्तः-विषयों में आसक्त-Strongly attached in bad habit; न शृणोत स्म-नहीं सुनते थे-did not listen; दृष्ट्वा -देखकर-to see , to look; तत्पिता-उसके पिता-his father; हरिदत्तं-हरिदत्त को-to Hari datt; स्वगृहतो-अपने घर में-in his oun house. नीतिनिपुणं-नीति में निपुणं-talented in policy; मद्गृहे-उस घर में-In its house. एतत्संरक्षणेन-इसके संरक्षण से –By his patronage; समर्पयामास-समर्पित किया-dedicated; शयनमन्दिर-शयन मन्दिर में-in sleeping room. स्वर्णपञ्जरथः-सोने के पिंजरे-cage of gold;अथैकदा-इस प्रकार एक दिन-inthis type one day;रहसि-अकेले में-inalone; पित्तोश्ते-तुम्हारे पिता-your father; भुवि-संसार में-inworld; देवशर्मवत्-देव शर्मा के सामन-like Dev Sharma.

हिन्दी अर्थ :
चन्द्रपुर नामक नगर में हरिदत्त का पुत्र मदन विनोद अत्यधिक विषयासक्त होने के कारण कुपुत्रों (की भांति) पिता की शिक्षा को नहीं सुनता था। उसमें जुआ, मृगया, वेश्यागमन आदि में विशेष आसक्ति थी। कुपुत्र के कुमार्ग गामी होने को देखकर उसका पिता हरिदत्त पत्नी सहित बहुत दुखी रहता था। उस हरिदत्त को कुपुत्र की कुआदतों से दुखी देखकर उसका मित्र त्रिविक्रम नामक ब्राह्मण अपने घर से नीति निपुण तोता-मैना लेकर हरिदत्त के घर जाकर बोला-‘हे मित्र हरिदत्त! इस तोते का सपत्नीक पुत्रवत पालन करो। इसका संरक्षण करने से तुम्हारा दुःख दूर होगा। हरिदत्त ने तोते को लेकर अपने पुत्र को दे दिया। तोता मदन विनोद के शयनकक्ष में स्वर्ण निर्मित पिंजरे में रहता एवं पोषित होता हुआ तोता एक दिन अकेले में उससे बोला-हे मित्र!

तुम्हारे पिता के कष्ट में होने के कारण उनका आँसू भूमि पर गिर गया। हे वत्स! उस पाप से तुम्हारा भी पतन देवशर्मा के समान होगा।

2. स प्राह-‘कथमेतत?’
शुक आह-अस्ति पञ्चपुरं नाम नगरम्। तत्र सत्यशर्मा ब्राह्मणः। तद्भार्या धर्मशीलानाम्नी। पुत्रस्तु देवशर्मा। स च अधीतविद्यः पितृप्रच्छन्नवृत्या देशान्तरं गत्वा भागीरथीतीरे तपः कृतवान्।

एकदा स तपस्वी गङ्गातीरे जपार्थमुपविष्टः। तस्मिन्काले कयाचित् बलाकया उड्डीयमानया तदङ्गोपरि पुरीषोत्सर्गः कृतः। स च तपस्वी क्रोधाकुलितनेत्रः यावदूर्ध्वं पश्यति तावत्तत्क्रोधग्निना भस्मीभूतां बालकं भूमौ पतितां दृष्ट्वा (बलाकां दग्ध्वा) नारायणद्विजगृहे भिक्षार्थ ययौ। स्वभर्तृशुश्रूषापरया तत्पत्न्या कोपाभिविष्टो निर्भर्त्सतः सत्पक्षिहायमुक्तश्च –

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‘नाहं बलाकेव त्वत्कोपस्थानम्।’-
स च प्रच्छन्नपातकज्ञानादीतो विस्मितश्च, प्रेषितश्च तया धर्मव्याधपार्वे वाराणसी नगरी ययौ। तत्र रक्ताक्तहस्तं यमप्रतिभं मांसविक्रयं विद्धानं तं दृष्टवा दृशामन्तः स्थितः। व्याधेन स्वागतप्रश्नपूर्वकं स्वगृहं नीत्वा निजपितरी सभक्तिकं भोजयित्वा पश्चातस्य भोजनं दत्तम्। तदनन्तरं स च व्याधं ज्ञानकारणं पप्रच्छ-‘कथं सती ज्ञानवती, कथं च त्वं ज्ञानवान्।’

शब्दार्थ :
कथमेतत्-यह कैसे-How titis; धर्मशीलानाम्नी-धर्म शीला नाम की-Name of Dharmsheela; पितृपृच्छत्तवृत्या-पिता के द्वारा बताये गए, मार्ग पर-obey by father’s way; देशान्तरं-दूसरे देश को-to other country. भागीरथीतीरे-गंगा के किनारे-Bank ofGanga;जापार्शमुपविष्टः-जप करने के लिए बैठा-reading meettering of prayers; तस्मिन्काले-उसी समय-that time; उड्डीयमानथा-उठते हुए-flies; तदङ्गोपरि-उसके ऊपर-on thepartofhis body;पुरीषोत्सर्गः-उसके ऊपर मल (टट्टी)-onhis body;क्रोधाकुलित-क्रोध पूर,-forcefull; यावदूर्ध्वं-जब ऊपर-when on; पश्यति-देखता है-looks, sees; क्रोधाग्निना-क्रोध की अग्नि में-in the fire of angry.

भस्मीभूतां-जल गया-burnt; सत्पक्षिहायमुक्तश्च-निर्दोष पक्षी को मारने वाला-innocent birdkiller; ज्ञानावदीतो-ज्ञान से डरा हुआ-afraid of knowledge; विस्मित्-आश्चर्य चकित-wonderfull; प्रेषितश्च-भेजा-send; रक्ताक्तहस्तं-जिसके हाथ रक्त से रंगे हुए हों वह-red handed; यमप्रतिभं-यमराज के समान भयंकर-Horrible like Yamraj;ब्याधेन-बेहलिया ने-Hunter; दृशामन्तः स्थितः-गांव के कुछ दूर में स्थिति-few far of village in situated; स्वागतप्रश्नपूर्वक-स्वागत प्रश्न पूर्वक-wellcomed with question/ happyness: स्वगृह-अपने घर को-his own house; सभक्तिक-भक्ति पूर्वक-full of worship; तदनन्तरं-उसके बाद-often that; ज्ञानकारणं-ज्ञान का कारण-reasonof knowledge; पप्रच्छ-पूछा-asked.

हिन्दी अर्थ :
तब वह बोला-वह कैसे?
तोता बोला-पञ्चपुर नामक एक नगर था। वहाँ सत्य शर्मा नामक ब्राह्मण था। धर्मशीला नाम की उसकी पत्नी थी। उसका पुत्र देवशर्मा था। वह सभी विद्याओं में पारंगत होकर पिता के द्वारा निर्दिष्ट मार्ग पर चलते हुए देशान्तर जाकर गंगा के तट पर तप करने लगा।

एक बार वह तपस्वी गंगा के तट पर तप के उद्देश्य से बैठा था। उसी समय कोई बगुली ऊपर से उड़ती हुई उसके ऊपर विष्ठा कर दी। तब वह तपस्वी क्रोध में ज्यों ही ऊपर की ओर देखा, उसकी क्रोधाग्नि से वह बगुली भस्म होकर भूमि पर आ गिरी। बगुली को जला देखकर वह नारायण नामक ब्राह्मण के घर भिक्षा के उद्देश्य से गया। अपने पति की सेवा में परायण नारायण की पत्नी ने निरीह पक्षी के हत्यारे उस ब्राह्मण की भर्त्सना करते हुए कहा-बगुली के समान मैं तुम्हारे कोप का स्थान नहीं हूँ।

और इस पाप कृत्य के परिणाम से भयभीत वह ब्राह्मण उस द्वारा भेजा गया वाराणसी में धर्म व्याध नामक बहेलिए के पास गया। वहाँ उसने रक्त से सने हुए दोनों हाथों से मांस बेचते हुए यम के सदृश भयंकर रूप वाले उस व्याध को देखा और कुछ दूर खड़ा हो गया। व्याध ने स्वागत करते हुए आने का कारण पूछते हुए उसे अपने घर ले जाकर आदरपूर्वक अपने माता-पिता को भोजन कराने के पश्चात् भोजन कराया इसके बाद उसने ब्याध के ज्ञानी होने का कारण पूछा साथ ही उस सती स्त्री ज्ञानवती के विषय में पूछा, और तुम केसे ज्ञानवान हुए? यह भी बताने को कहा।

3. तेन व्याधेनोक्तम्
निजान्वयप्रणीतं यः सम्यग्धर्म निषेवते।
उत्तमाधममध्येषु विकारेषु पराङ्मुखः॥3॥
स गृही स मुनिः साधुः स योगी स च धार्मिकः।।
पितृशुश्रूषको नित्यं जन्तुः साधरणश्च यः॥4॥

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अहं सापि च एवं ज्ञानिनौ त्वं च निजपतिरौ परित्यज्य भ्रमन्मादृशां न सम्भाषणार्हः। परमतिथिं मत्वा जल्पितः। एवमुक्तः स ब्राह्मणो विनयपरं व्याधं पप्रच्छ। तेनोक्तम् –

न पूजयन्ति ये पूज्यान्मान्यान्न मानयन्ति ये।
जीवन्ति निन्द्यमानास्ते मृताः स्वर्गं न यान्ति च ॥5॥
व्याधेन बोधितस्तेन स ययौ गृहमात्मनः।
अभवत्कीर्तिमाल्लोके परतः कीर्तिभाजनम ॥6॥

तस्माद्वणिग्धर्मं स्वकुलोद्भवं स्मर पित्रोश्च विनयपरो भव।

एवमुक्ताः स मदनः विनयपरः सदाचारी च, अभवत् पितरौ नमस्कृत्य तदनुज्ञातो भार्याञ्चापृच्छय प्रवहणधिरूढवान् गाते देशान्तरम्।

शब्दार्थ :
निजान्वयप्रणीतम्-कुल द्वारा किया हुआ-it was done by family; पराङ्मुख-विमुख-separate; पितृशुश्रूषक-पिता की सेवा में लीन-serve in father; सम्भाषणहिः- संवादयोग्य-able of conversation; निजपतिरो-अपने माता पिता-his own parents; परित्यज्य-छोड़कर-leave; तेनोक्तम्-उसने कहा-he said; न पूजयन्ति-जो नहीं पूजते-who not worshipped; ये पूज्यान्मान्यान्न-जो पूजे जाने योग्य है-who is able to worshiped; ग्रहमात्मनः-अपने घर में-his won house.

हिन्दी अर्थ :
तब व्याध ने कहा-अपने कुलोचार का श्रद्धापूर्वक पालन करते हुए उत्तम, अधम, मध्यम आदि विकार से रहित होकर कार्य करना चाहिए। (जो ऐसा करता है) वही गृही है, वही मुनि है, वही सच्चा साधु है, वही सच्चा योगी व धार्मिक है जो माता-पिता की सेवा में नित्यप्रति लगा रहता है। वह व्यक्ति साधारण होने पर भी श्रेष्ट
है।

इस प्रकार मैं और वह स्त्री ज्ञानवती ज्ञानी हैं। तुम अपने माता-पिता को त्यागकर भ्रमित होकर कुछ भी कहने के योग्य नहीं हो-इस प्रकार वह परम अतिथि जानकर उस ब्राह्मण से विनयपूर्वक कहा ऐसा कहा.

जो पूजनीय व्यक्ति की पूजा नहीं करते, जो मानने योगय को नहीं मानते, ऐसे लोग निन्द्य होकर जीवन जीते हैं और मरने पर स्वर्गगामी नहीं होते। व्याध द्वारा बोधि पूर्ण शिक्षा पाकर वह देवशर्मा अपने घर गया और इस लोक में कीर्तिमान होकर अपना जीवन-यापन करने लगा। इसलिए तुम बनिए का धर्म अपने कुल के अनुसार स्मरण करके माता-पिता के प्रति विनम्र हो। यह सुनकर मदन विनोद विनय युक्त हो सदाचार का अनुसरण करने लगा। वह माता-पिता को नमस्कर करके उनकी आज्ञा ले, अपनी धर्मपत्नी से पूछ वाहन पर सवार होकर दूसरे देश को गमन किया।

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MP Board Class 9th Sanskrit अनुवाद पकरण

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MP Board Class 9th Sanskrit अनुवाद पकरण

अनुवाद करने के लिए सर्वप्रथम कारक का उचित प्रयोग जानना महत्त्वपूर्ण है।

कारक प्रकरण

कारक वे शब्द हैं, जिनका क्रिया से प्रत्यक्ष सम्बन्ध रहता है। संस्कृत में कारक अपनी विभक्ति के साथ जुड़े हैं, जबकि हिन्दी में विभक्ति चिह्न को कारक शब्द से अलग लिखते हैं। इनके प्रयोग के कुछ विशेष नियम हैं, जो यहाँ दिए जा रहे हैं।

प्रथमा विभक्ति का प्रयोग

1. कर्तवाच्य (Active Voice) में कर्ता प्रथमा विभक्ति में होता है।
जैसे-
(क) बालाः क्रीडन्ति। (बच्चे खेलते हैं।) .
(ख) अहं धावामि। (मैं दौड़ता हूँ।)

2. किसी वस्तु के नाम या लिंग का ज्ञान कराने हेतु प्रथमा का प्रयोग करते हैं। जैसे
(क) एषा माला अस्ति।
(ख) एतानि फलानि सन्ति।

द्वितीय विभक्ति का प्रयोग
1. कर्म हमेशा कर्मकारक (द्वितीया विभक्ति) में रहता है। जैसे
(क) मैं फल खाता हूँ। (अहं फलं खादामि।)
(ख) मैं जल पीता हूँ। (अहं जलं पिबामि।)

2. जिस स्थान को जाते हैं, वह कर्मकारक (द्वितीया) में रहता है। जैसे
(क) रामः वनम् अगच्छत्। (राम वन गये।)
(ख) वयं विद्यालयं गच्छामः। (हम विद्यालय जाते हैं।)

3. किसी अव्यय के योग में जब कोई विशेष विभक्ति हो, तो उसे उपपद विभक्ति कहते हैं। द्वितीया का उपपद विभक्ति के रूप में निम्न अव्ययों के साथ प्रयोग होता है

धिक् (धिक्कार है), अन्तरेण (के बिना), अन्तरा (बीच में), प्रति (की ओर), उभयतः (दोनों ओर), विना (के बिना), निकषा (निकट), अनु (पीछे), सर्वतः (सब ओर), परितः (चारों ओर), अभितः (सामने), अधोऽथः (नीचे-नीचे), उपर्युपरि (ऊपर-ही-ऊपर), हा (अफसोस)।

(क) धिक् अत्याचारिणम्। (अत्याचारी को धिक्कार है।)
(ख) ग्रामं परितः वनानि सन्ति। (गाँव के चारों ओर वन हैं।)
(ग) राधा नगरं प्रति गच्छति। (राधा नगर की ओर जाती है।)
(घ) जलं विना मत्स्यः न जीवति। (जल के बिना मछली जीवित नहीं रहती है।)
(ङ) गृहं निकषा उद्यानम् अस्ति। (घर के निकट उद्यान है।)

4. दुह्, याच्, भिक्ष्, प्रच्छ्, शास्, चि (चुनना), ब्रू (बोलना) आदि धातुओं के योग में द्वितीय विभक्ति का प्रयोग होता है। जैसे
(क) भिक्षुकः धनं भिक्षते। (भिखारी धन की भिक्षा माँगता है।)
(ख) गोपालः धेनोः दुग्धं दुह्यति। (ग्वाला गाय का दूध दुहता है।)

5. शी (सोना), स्था (बैठना, तथा आस् (बैठना) धातुओं में ‘अधि’ उपसर्ग लगा होने पर द्वितीय विभक्ति का प्रयोग होता है। जैसे
(क) राज्यपालः राजभवनम् अध्यासते। (राज्यपाल राजभवन में बैठते हैं।)
(ख) सीता पर्यकम् अधिशेते। (सीता पलंग पर सोती है।)
(ग) रामः आसनम् अधितिष्ठति। (राम आसन पर बैठता है।)

6. वस् (रहना) धातु में ‘अधि, उप, आ, अनु’ उपसर्ग लगा होने पर द्वितीय विभक्ति का प्रयोग होता है।

तृतीया विभक्ति का प्रयोग

1. जिसके द्वारा कार्य हो, वह कारणकारक (तृतीया) में रहता है।
जैसे-
(क) बालकाः कंदुकेन क्रीडन्ति। (लड़के गेंद से खेलते हैं।)
(ख) बालिका कलमेन लिखति। (लड़की कलम से लिखती है।)
(ग) वयं नेत्राभ्यां पश्यामः। (हम आँखों से देखते हैं।)

2. जिसका साथ बतलाना हो, वह कारणकारक में रहता है। सह, साकम् सार्धम् आदि सहार्थक अव्यय हैं। इसके साथ सदैव तृतीया विभक्ति रहती है।
जैसे-
(क) अहं मित्रेण सह गच्छामि। (मैं मित्र के साथ जाता हूँ।
(ख) छात्राः शिक्षकैः सह गायन्ति। (छात्र शिक्षकों के साथ गाते हैं।)

3. कारण के अर्थ में तथा विकृतांग वाची शब्दों के साथ तृतीया लगती है। जैसे
(क) जनः सभायां विद्यया शोभते। (सभा में व्यक्ति विद्या के कारण शोभित होता है।)
(ख) सः नेत्रेण काणः। (वह आँख से काना है।)
(ग) हरिः पादेन पंगुः अस्ति। (हरि पैर से लँगड़ा है।)

4. तृतीया विभक्ति का निम्न शब्दों के साथ पयोग होता है-
अलम् (बस करो), सह (साथ), साकम् (साथ), सार्धम् (साथ), समान (बराबर), सम (समान), सदृश्य (समान), तुल्य (समान), बिना/विना (के बिना)।
(क) अलम् हसितेन। (हँसो मत।).
(ख) रामेण सह लक्ष्मणः अपि वनम् अगच्छत्। (राम के साथ लक्ष्मण भी वन को गए।)
(ग) सः पित्रा साकम् आपणं गच्छति। (वह पिता के साथ बाजार जाता है।)
(घ) धर्मेण विना जीवनं शून्यम् अस्ति। (धर्म के बिना जीवन मूल्य है।)

5. हेतु या स्वाभाव के अर्थ में तृतीया विभक्ति होती है।
6. पृथक् और हीन के अर्थ में तृतीय विभक्ति होती है।
7. तुलनात्मक शब्दों में तृतीया विभक्ति होती है।

चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग
1. सम्प्रदान में चतुर्थी विभक्ति होती है। जिसे कुछ दिया जावे या जिस उद्देश्य से क्रिया की जावे, या जिसके लिए कार्य हो, वह सम्प्रदान होता है।
जैसे-
(क) एतत् फलं रामाय अस्ति। (यह फल राम के लिए है।)
(ख) नद्यः परोपकाराय वहन्ति। (नदियाँ परोपकार के लिए बहती हैं।)

2. नमः, स्वस्ति, स्वाहा और अलम् अव्ययों के साथ चतुर्थी का प्रयोग होता है। अलम् के योग में बढ़कर बताया जावे, या ‘पर्याप्त है’ का अर्थ हो, तब उसमें चतुर्थी का प्रयोग होता है। जैसे
(क) शिवाय नमः ! (शिवजी को नमस्कार है।)
(ख) श्री गणेशाय नमः। (श्री गणेशजी को नमस्कार है।)
(ग) अनुजाय स्वस्ति। (छोटे भाई का कल्याण हो।)
(घ) अग्नये स्वाहा। (यह आहुति अग्नि के लिए है।)
(ङ) रामः रावणाय अलम्। (राम रावण से बढ़कर हैं।)
(च) एतनि फलानि पंच जनेभ्यः अलम् सन्ति। (ये फल पाँच लोगों के लिए पर्याप्त हैं।)

नमः अव्यय और नम् धातु में भ्रमित न होवे। नम् धातु के साथ अन्य विभक्तियाँ भी प्रयुक्त होती हैं।

जैसे-
अहं शिवं नमामि। (मैं शिवजी को नमन करता हूँ।)

3. दा, रुच, क्रुध, कुप, द्रुह (विद्रोह करना), स्पृह् (इच्छा करना) असूय् (द्वेष करना) व स्निह् धातुओं के योग में चतुर्थी प्रयुक्त होती है। जैसे
(क) प्राचार्यः छात्राय पुरस्कारं यच्छति। (प्राचार्य छात्र को पुरस्कार देते हैं।)
(ख) मह्यं दुग्धं रोचते। (मुझे दूध अच्छा लगता है।)
(ग) रामः सुरेशाय कुप्यति। (राम सुरेश पर नाराज होता है)
(घ) बालिकाः पुष्पेभ्यः स्पृहयन्ति। (लड़कियाँ फूलों की इच्छा करती हैं।)
(ङ) सः मोहनाय ईयति। (वह मोहन से ईर्ष्या करता है।)
(च) अध्यापकः शिष्याय क्रुध्यति। (शिक्षक शिष्य पर क्रोधित होते हैं।)

पंचमी विभक्ति का प्रयोग
1. जिससे अलग होना बतलाना हो, वह पंचमी में रहता है।

जैसे-
(क) वृक्षात् पत्रं पतति। (वृक्ष से पत्ता गिरता है।)
(ख) सः ग्रामात् आगच्छति। (वह गाँव से आता है।)

2. भय, रक्षा आदि के योग में पंचमी विभक्ति का प्रयोग किया जाता है।
जैसे-
(क) व्याघ्रात् भयम् अस्ति। (शेर से डर लगता है।)
(ख) रमा बालः दुर्जनात् रक्षति। (रमा बालक की दुष्ट से रक्षा करती है।)

3. जिससे शिक्षा ग्रहण की जाये, या जिससे उत्पत्ति हो, उसके योग में पंचमी का प्रयोग किया जाता है।

जैसे-

(क) छात्राः अध्यापकात् विद्यां पठन्ति। (छात्र अध्यापक से विद्या पढ़ते हैं।)
(ख) हिमालयात गङ्गा प्रभवति। (हिमालय से गंगा निकलती है।)

4. निलीयते (छिपना) के योग में पंचमी का प्रयोग किया जाता है।

जैसे-
(क) सुरेशः अध्यापकात् निलीयते। (सुरेश शिक्षक से छिपता है।)
(ख) चौरः रक्षकात् निलीयते। (चोर सिपाही से छिपता है।)

5. पृथक्, विना और नाना शब्दों के साथ द्वितीया, तृतीया या पंचमी में से कोई भी एक विभक्ति हो सकती है। जैसे
(क) जलं बिना मत्स्यः न जीवति। (जल के बिना मछली नहीं जीती।)
(ख) जलेन विना मत्स्यः न जीवति। (जल के बिना मछली नहीं जीती।)
(ग) जलाद् विना मत्स्यः न जीवति। (जल के बिना मछली नहीं जीती।)

6. पंचर्मी विभक्ति का निम्न शब्दों के साथ प्रयोग होता है ऋते (बिना), प्रभृति (लेकर), आरात् (के पास), अनन्तरम् (के बाद), दूरम् (दूर), बहिः (बाहर), अन्तिकम् (पास), ऊर्ध्वम् (ऊपर)।
(क) ग्रामात् दूरे नद्यः अस्ति। (गाँव से नदी दूर है।)
(ख) उद्यानात् अन्तिकम् देवालयः अस्ति। (उद्यान के पास मंदिर है।)
(ग) ग्रामात् आरात् तडागः अस्ति। (गाँव के पास तालाब है।)
(घ) उद्यानात् बहिः भोजनालयः अस्ति। (उद्यान के बाहर भोजनालय है।)

षष्ठी विभक्ति का प्रयोग

1. वस्तुओं में सम्बन्ध स्थापित करने में षष्ठी विभक्ति का प्रयोग होता है। जैसे
(क) दशरथस्य चत्वारः पुत्राःआसन्। (दशरथ के चार पुत्र थे।)
(ख) इयं तव पुस्तकम् अस्ति। (यह तुम्हारी पुस्तक है।)

2. जंघ खेद पूर्वक याद किया जावे, तो ‘स्मृ’ के योग में षष्ठी प्रयुक्त होती है। जैसे
(क) राधा पितुः स्मरति। (राधा पिता के उपकारों को याद करती है।)

3. षष्ठी विभक्ति का निम्न शब्दों के साथ प्रयोग होता है पुरः (सामने), अधः (नीचे), उपरि (ऊपर), पश्चात् (बाद में), पुरस्तात् (सामने), अन्तिके (पास में), अधस्तात् (नीचे)।
(क) वृक्षस्य अधः पथिकः तिष्ठति। (वृक्ष के नीचे राहगीर बैठा है।)
(ख) उद्यानस्य पुरस्तात् कूपः अस्ति। (बाग के सामने कुआँ है।)
(ग) ग्रामस्य अन्तिके देवालयः अस्ति। (गाँव के पास मंदिर है।)
(घ) वृक्षस्य अधस्तात् जनाः सन्ति (वृक्ष के नीचे लोग हैं।)

4. विशेषण की उत्तमावस्था बताने में षष्ठी या सप्तमी का प्रयोग होता है। जैसे
(क) कवीनां कालिदासः श्रेष्ठः अस्ति। (कालीदास कवियों में श्रेष्ठ हैं।)
(ख) कवीष कालिदासः श्रेष्ठः अस्ति। (कालीदास कवियों में श्रेष्ठ हैं।)

5. तुलना, कुशलता के योग में षष्ठी का प्रयोग होता है।

जैसे-
(क) रामस्य तुल्यः कोऽपि न अस्ति। (राम की तुलना में कोई नहीं है।)
(ख) तस्य मुखम् चन्द्रस्य सदृशं अस्ति। (उसका मुख चन्द्रमा के समान सुंदर है।)

सप्तमी विभक्ति का प्रयोग

1. स्थान या समय सूचक शब्द अधिकारकारक (सप्तमी) में रहते हैं।
जैसे-
(क) तडागे जलम् अस्ति। (तालाब में पानी है।)
(ख) बिले मूषकः तिष्ठति। (बिल में चूहा रहता है।)
(ग) ते मम गृहे न्यवसन्। (वे सब मेरे घर में रहते थे।)
(घ) वृक्षेषु फलानि सन्ति। (वृक्षों पर फल हैं।)
(ङ) जले मत्स्याः निवसन्ति। (जल में मछलियाँ रहती हैं।)

2. स्निह्, अभिलष् आदि के योग में सप्तमी विभक्ति होती है।
जैसे-
(क) माता पुत्रे स्निह्यति। (माता पुत्र से स्नेह करती है।)

3. तत्परता, चतुरता, कुशलता आदि के योग में सप्तमी विभक्ति होती है।

जैसे-
(क) शीला गायने निपुणा अस्ति। (शीला गाने में निपुण है।)
(ख) हरिः कार्ये तत्परः अस्ति। (हरि कार्य में तत्पर है।)
(ग) रामः व्यापारे कुशलः अस्ति। (राम व्यापार में कुशल है।)

4. एक कार्य होने के लिए उपरान्त दूसरा प्रारम्भ होने पर सप्तमी का पयोग होता है।

जैसे-
(क) सूर्ये अस्तं गते रात्रिः आगच्छति। (सूर्य अस्त होने के बाद रात्रि आती है।)
(ख) शिक्षके गते छात्राः कोलाहलं कृतवन्तः। (शिक्षक के जाने पर छात्रों ने शोर मचाया) . . .. .. ……. .

सम्बोधनम् का प्रयोग

1. सम्बोधन हेतु सम्बोधनकारक का प्रयोग होता है।

जैसे-
(क) हे राम, उत्तिष्ठ। (राम, खड़े हो जाओ।)
(ख) हे प्रभु! रक्ष माम्। (हे भगवान! मेरी रक्षा करो।)

अनुवाद के अन्य नियम
नियम 1. विशेषण का पयोग उसी लिंग, वचन और कारक में होगा, जिस लिंग, वचन और कारक में उसका विशेष (अर्थात् जिसकी वह विशेषता बतलाता है) रहेगा।
जैसे-
(क) चह चतुर बालक है। = एषः चतुरः बालकः अस्ति!
(ख) यह चतुर लड़की है। = एषा चतुरा बालिका अस्ति।
(ग) यह सफेद घोड़ा है। = एषः श्वेत अश्वः अस्ति।
(घ) यह सफेद बकरी है। = एषा श्वेता अजा अस्ति।
(ङ) यह सफेद गाय है। = एषा श्वेता धेनुः अस्ति।
(च) सफेद घोड़े को लाओ। = श्वेतम् अश्वम् आनय।
(छ) काले घोड़े पर बैठो। = कृष्णे अश्वे उपविश।

नियम 2. भूतकालिक कृदन्त का प्रयोग विशेषण के समान करेंगे।
जैसे-
(क) यह गिरा हुआ फल है। = एतत् पतितं फलं अस्ति।
नियम 3. पूर्वकालिक कृदन्त, हेतुवाचक कृदन्त तथा अव्ययों के रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
नियम 4. मकारांत शब्द के बाद व्यंजन से प्रारम्भ होने वाला शब्द आवें, तो म् के बदले अनुस्वार (-) लिखते हैं। यदि म के बाद स्वर से प्रारम्भ होने वाला शब्द आये, तब म् की उस स्वर में संधि हो जाती है।

जैसे-
(क) अहम् गच्छामि = अहं गच्छामि। (मैं जाता हूँ।) (ख) अहम् अगच्छम् = अहमगच्छम्। (मैं गया था।)
नियम 5. संस्कृत में वाक्य की क्रिया यदि ‘भू’ (भवति) = होना या ‘अस्’ (होना) या कोई उसके समान अर्थ वाली हो, तो वाक्य में प्रायः उसे नहीं लिखा जाता है और उसका अर्थ ऊपर से कर लिया जाता है।

जैसे-
(क) सुरेशः स्वपितुः एकः पुत्रः भवति। – सुरेशः स्वपितुः एकः पुत्र। (सुरेश अपने पिता का एक पुत्र है।)
(ख) एतत् चक्रम् अस्ति। (यह पहिया है।) = एतत् चक्रम।

नियम 6. कुत्रचित् (कहीं), किंचित् (कुछ), कदाचित् (कभी) आदि का प्रयोग-संस्कृत में कहीं, किसी, कोई, कभी, कुछ आदि शब्दों का अव्यय या अनिश्चय वाचक विशेषण या सर्वनाम के रूप प्रयोग करने हेतु “किम्’ सर्वनाम के रूपों में ‘चित्’ जोड़ देते हैं। यह ध्यान में रखना चाहिए कि किम् के लिंग और वचन वही हों, जो उसके विशेष के हैं। किम् के रूपों की चित् के साथ संधि करते समय उचित नियमों का पालन करें। यथा न को अनुस्वार और श् में बदल देते हैं। जैसे-कस्मिन् चित् कस्मिंश्चित् आदि। इसी तरह किम् के रूपों का विसर्ग भी श् में बदल जाता है। कः+ चित -कश्चित् आदि। इसी तरह अन्य नियमों का प्रयोग करें। इसके उदाहरण निम्नानुसार हैं.

(क) किसी वृक्ष पर एक तोता बैठा था।
कस्माच्चित् वृक्षे एकः शुकः अतिष्ठत्।
(ख) प्राचीन काल में मथुरा में कोई सेठ रहता था।
पुरा मथुरा नगर्यां कश्चित् श्रेष्ठी अवसत्।
(सा) किसी गाँव में एक साधु रहता था।
कास्मिंश्चित् ग्रामे एकः साधुः अनिवसत्।

इसी तरह किसी तालाब में = कस्माच्चित् सरोवरे, किसी सुंदरी का = कस्याश्चित सुंदर्याः, कुछ पक्षी = केचित् विहगाः, किसी आदमी ने = कश्चित् जनः आदि का अनुवाद किया जाता है।

परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण अनुवाद के वाक्य-

  1. 1. वृक्ष से पत्ता गिरता है। – वृक्षात् पत्रं पतति।
  2. 2. गुरु शिष्य को पुस्तक देता है। – गुरुः शिष्याय पुस्तकं यच्छति।
  3. 3. छात्र पुस्तक पढ़ते हैं। – छात्राः पुस्तकानि पठन्ति।
  4. 4. सीता राम के साथ बन गई। – सीताः रामेण सह वनं गता।
  5. 5. सूर्य को नमस्कार। – सूर्याय नमः।
  6. 6. गंगा हिमालय से निकलती है। – गंगा हिमालयात् प्रभवति।
  7. 7. राम शीतल जल पीता है। – रामः शीतलं जलं पिबति।
  8. मोहन शीतल जल पीता है। – मोहनः अद्य गृहं गमिष्यति।
  9. अति सभी जगह वर्जित है। – अति सर्वत्र वर्जयेत्।
  10. विद्या विनय देती है। – विद्या विनयं ददाति।
  11. तुम कहाँ जा रहे हो? – त्वं कुत्र गच्छसि?
  12. उसे संस्कृत पढ़ी। – सः संस्कृतभाषाम् अपठत्।
  13. गणेश जी को नमस्कार है। – श्री गणेशाय नमः।
  14. यह हमारा देश है। – एषः अस्माकं देशः अस्ति।
  15. आत्मा जल से शुद्ध नहीं होती है। – आत्मा जलेन ने शुद्धयति।
  16. उनकी माता पुतली बाई थीं। – तस्य माता पुतलीबाई आसीत्।
  17. मुझे लड्डू अच्छे लगते हैं। – मह्यम् मोदकानि रोचन्ते।
  18. यह मेरी पुस्तक है। – इदं मम पुस्तकं अस्ति।
  19. मैं विद्यालय जाता हूँ! – अहं विद्यालयं गच्छमि।
  20. सीमा गेंद से खेलती है। – सीताः कन्दुकेन क्रीडति।

वाक्यों को शुद्ध करके लिखना
          अशुद्ध           –     शुद्ध वाक्य
1. सः पुस्तकं पठामि। – सः पुस्तकं पठति।
2. सः फलं खादामि। – सः फलं खादति।
3. सः रामस्य सह गतः। – सः रामेण सह गतः।
4. सः क्रीडन्ति। – सः क्रीडति।
5. अहं पाठशालाः गच्छामः। – अहम् पाठशालांग छमि।
6. वयं विद्यालये गच्छमि। – वयं विद्यालयं गच्छामः।
7. ह्यः रविवासरः अस्ति। – ह्यः रविवासरः आसीत्।
8. युवां क्रीडसि। – युवां क्रीडथः।
9. त्वम् कदा पठति? – त्वं कदा पठसि?
10. बालकः कुत्र गच्छसि। – बालकः कुत्र गच्छति?
11. अहं पाठशाले गच्छामि ? – अहं पाठशाला गच्छामि।
12. त्वम पठामि। – त्वं पठसि।
13. बालकाः फलाः खादन्ति। – बालकाः फलानि खादन्ति।
14. ते गच्छामि। – ते गच्छन्ति।
15. सर्वाणि बालकाः पठन्ति। – सर्वे बालकाः पठन्ति।
16. रामस्य नमः। – रामाय नमः।
17. पिता पुत्रे क्रुध्यति। – पिता पुत्राय क्रुध्यति।
18. नोहनः सुरेशम् ईष्यति। – मोहनः सुरेशाय ईष्यति।
19. मां दुग्धं न रोचते। – मह्यं दुग्धं न रोचते।
20. ग्रामस्य परितः वनानि सन्ति। – ग्रामं परितः वनानि सन्ति।

अभ्यास

1. निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए-
किसी किसान के चार पुत्र थे। वे चारों मुर्ख थे। निदेय मनुष्य पशुओं पर दया नहीं करते। ईश्वर उन्हें सद्बुद्धि दे। किसी नगर में कोई वैश्य रहता था। वह बहुत अमीर था। एक बार नदी में किसी नारी का हार गिर गया। एक मछुआरे ने उसे निकला। जब तक मैं न आऊँ, तब तक तुम अपना पाठ पढ़ो। राजा के आदेश से सेनापति ने आक्रमण किया। जहाँ परिश्रम है, वहाँ सुख निवास करता है। छात्रों को रात-दिन मेहनत करना चाहिए, तभी सफलता मिलेगी। झूठ मत बोलो। यह अच्छी बात नहीं है। सदैव सच्चे और हितकारी वचन बोलो। गाँव से शाला दूर है, अतः _ वह बैलगाड़ी से शाला जाता है। (बैलगाड़ी से = शकटेन)

Akbar and Birbal – Reunion Question Answer Class 9 General English The Spring Blossom Chapter 10 MP Board Solutions

Class 9th General English The Spring Blossom Chapter 10 Akbar and Birbal – Reunion Question Answers

Akbar and Birbal – Reunion Class 9 Questions and Answers

Akbar and Birbal – Reunion Textual Exercises

Word Power

(1) Rearrange the letters to make meaningful words occurring in the text.
(अक्षरों को व्यवस्थित कर अर्थपूर्ण शब्द बनाइए।)
Answer:

  1. marciles – miracles
  2. sestscup – suspect
  3. flou – foul
  4. terchn – trench
  5. eegar – eager

(II) Write down antonyms of the following words:
(विलोम शब्द लिखो।)
Answer:

  1. wisdom – foolishness
  2. terrible – attractive
  3. ignorance – awareness
  4. suspect – believe
  5. best – worst

(III) Make new words from those given.
(नये शब्द बनाओ।)
Answer:
(a) manifest – fest, man, ant, nest, fit, mist, ten, net, set, fat, fan, sin, tin, sit, fin, mat, fine, mine, fast, main, mane, mate, met, safe, fame, tame, same, time, sane, tan.
(b) gravest – grave, rave, rest, get, rat, are, sat, set, vest, at, stare, stag, grate, tear, tag, great, ear, stear, save, gave.
(c) regret – great, tree, get.
(d) embrace – race, brace, beer, beam, cream. came, care, bare, ream, mare, bear.

(IV) Find out the words from the text which mean the following:
(पाठ में से निम्न अर्थ के शब्द ढूँढ़ो।)
Answer:

  1. to cut off someone’s head – behead
  2. follower – disciple
  3. pleasant to listen to – melodious
  4. very unpleasant – foul
  5. curious to know – eager
  6. shining – sparkling
  7. a long deep hole dog in the ground – trench
  8. very serious and important – gravest

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How Much Have I Understood?

(a) Choose the correct option
(सही विकल्प चुनो।)

(1) Akbar regretted-
(a) banishing Birbal from the court
(b) meeting Birbal in the court
(c) banishing Tansen from the palace
(d) seeing Tansen in the court.
Answer:
(a) banishing Birbal from the court

(2) The eyes of the saint were-
(a) sparkling
(b) dull
(c) full of tears
(d) dry.
Answer:
(a) sparkling

(3) In the opinion of the wise saint a best friend on the earth is –
(a) his own good sense
(b) his courage
(c) his physical power
(d) his smartness.
Answer:
(a) his own good sense

(4) Akbar was ……….. to meet Birbal again.
(a) happy
(b) sad
(c) angry
(d) disappointed.
Answer:
(a) happy.

(b) Answer the following questions in one or two sentences.
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Who was Birbal?
(हू वॉज़ बीरबल?)
बीरबल कौन था?
Answer:
Birbal was court jester, friend and confidant of Akbar.
(बीरबल वॉज़ कोर्ट जेस्टर, फ्रेन्ड एण्ड कॉन्फिडेन्ट ऑफ अकबर।)
बीरबल अकबर का दरबारी विदूषक, मित्र व विश्वासपात्र था।

Question 2.
What was the question asked by Abdul Fazal?
(व्हॉट वॉज़ द क्वेश्चन आस्क्ड बाइ अब्दुल फज़ल?)
अब्दुल फज़ल ने क्या प्रश्न पूछा?
Answer:
Abdul Fazal asked what was the deepest trench in the world?
(अब्दुल फज़ल आस्कड व्हॉट वॉज़ द डीपेस्ट ट्रेन्च इन द वर्ल्ड?)
अब्दुल फज़ल ने पूछा कि संसार की सबसे गहरी खाई कौन-सी है?

Question 3.
Which question do you like the most?
(व्हिच क्वैश्चन डू यू लाइक द मोस्ट?)
तुम्हें कौन-सा प्रश्न सबसे ज्यादा पसन्द आया?
Answer:
The question that I liked is “Which is the topmost thing on the earth?”
(द क्वैश्चन दैट आइ लाइक्ड इज़- “व्हिच इज़ द टॉपमोस्ट थिंग ऑन द अर्थ?”)
प्रश्न जो मुझे पसन्द आया-“पृथ्वी पर सबसे ऊँची वस्तु कौन-सी है?”

Question 4.
Who was the wise saint?
(हू वॉज़ द वाईज सेन्ट?)
बुद्धिमान साधू कौन था?
Answer:
The wise saint was Birbal.
(द वाईज सेन्ट वॉज़ बीरबल।)
बुद्धिमान साधू बीरबल था।

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(c) Answer the following questions in three to four sentences.
(निम्न प्रश्नों का उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Why did Akbar order Birbal to leave the city of Agra?
(व्हाय डिड अकबर ऑर्डर बीरबल टू लीव द सिटी ऑफ आगरा?)
अकबर ने बीरबल को आगरा छोड़ने का आदेश क्यों दिया?
Answer:
One day Birbal happened to pass a harmless comment about Akbar’s sense of humour. But emperor Akbar was in a foul mood and took great offense to this remark. So he asked Birbal to leave Agra.
(वन डे बीरबल हैपन्ड टू पास अ हार्मलेस कमेन्ट अबाउट अकबर्स सेन्स ऑफ हूमर बट एम्परर अकबर वॉज़ इन अ फाउल मूड एण्ड टुक ग्रेट ऑफेन्स टू दिस रिमार्क। सो ही आस्कड् बीरबल टू लीव आगरा।)
एक दिन बीरबल ने अकबर के हास्य बोध पर एक टिप्पणी की। अकबर ने उसे अपना अपमान समझा व उसे आगरा छोड़ने का आदेश दिया।

Question 2.
Why did Akbar want to appoint a wise man in his court?
(व्हाय डिड अकबर वॉन्ट टू एपॉइन्ट अ वाइज मैन इन हिज़ कोर्ट?)
अकबर एक बुद्धिमान व्यक्ति को दरबार में नियुक्त क्यों करना चाहते थे?
Answer:
Akbar had banished Birbal from his court in anger. But after some time he repented his ded and began to miss him. So he wanted to appoint a wise man in his court to keep him company.
(अकबर हैड बैनिश्ड बीरबल फ्रॉम हिज़ कोर्ट इन एंगर। बट आफ्टर सम टाइम ही रिपेन्टिड हिज़ डीड एण्ड बिगैन टू मिस हिम। सो ही वॉन्टेड टू एपॉइन्ट अ वाईज़ मैन इन हिज़ कोर्ट ट्र कीप हिम कम्पनी।)
अकबर ने बीरबल को गुस्से में निष्कासित कर दिया था। मगर कुछ समय बाद उसे अफसोस होने लगा और उसे बीरबल की कमी खलने लगी। इसीलिए वह एक बुद्धिमान व्यक्ति को नियुक्त करना चाहता था जो उसकी कमी को पूरा कर सके।

Question 3.
What was the condition put forth before the saint?
(व्हॉट वॉज़ द कन्डीशन पुट फोर्थ बिफोर द सेन्ट?)
सन्त के सामने क्या शर्त रखी गई?
Answer:
The condition that was put forth before the saint was that all the ministers would ask him a question and if his answers were satisfactory he would be made a minister. But if he could not he would be beheaded.
(द कन्डीशन दैट वॉज़ पुट फोर्थ बिफोर द सेन्ट वॉज़ दैट ऑल द मिनिस्टर्स वुड आस्क हिम अक्वैश्चन एण्ड इफ हिज़ आन्सर्स वर सैटिस्फैक्ट्री ही वुड बी मेड अ मिनिस्टर। बट इफ ही कुड नॉट ही वुड बी बिहेडेड।)
सन्त के सामने यह शर्त रखी गई कि सभी मन्त्री उससे प्रश्न पूछेगे। सभी प्रश्नों का सन्तोषजनक उत्तर देने पर उसे मन्त्री बनाया जायेगा, यदि नहीं तो उसका सिर काट दिया जायेगा।

Question 4.
What was the questions asked by Tansen?
(व्हॉट वाज़ द क्वैश्चन्स आस्कड बाइ तानसेन?)
तानसेन ने कौन-सा प्रश्न पूछा?
Answer:
Tansen asked-What is undying in music? What is the sweatest and most melodious voice at night time?
(तानसेन आस्क्ड-व्हॉट इज अनडाइंग इन म्यूजिक? व्हॉट इज़ द स्वीटेस्ट एण्ड मोस्ट मेलोडिअस वॉइस एट नाईट टाइम?)
तानसेन ने पूछा-संगीत में अमर क्या है? रात्रि में सबसे मधुर ध्वनि कौन-सी होती है?

Question 5.
Which miracle was performed by the wise saint?
(व्हिच मिरेकल वॉज़ परफॉर्ड बाइ द वाईज़ सेन्ट?)
बुद्धिमान सन्त ने क्या चमत्कार किया?
Answer:
The miracle performed by the wise saint was that he presented Birbal before the emperor that is, the person he wanted to meet.
(द मिरैकल परफॉर्ड बाइ द वाईज़ सेन्ट वॉज़ दैट ही प्रेजेन्टिड बीरबल बिफोर द एम्परर दैट इज़, द पर्सन ही वॉन्टेड टू मीट।)
चमत्कार यह था कि सन्त ने बीरबल को सम्राट के समक्ष पेश कर दिया जिससे वे मिलना चाहते थे।

Language Practice

Rewrite the following as reported questions
(निम्न प्रश्नों को रिपोर्टेड प्रश्न के रूप में लिखिए।)

Question 1.
He said to me, “Will you take part in the debate?”
Answer:
He asked me if I would take part in the debate.

Question 2.
Leela said to Dinesh, “Can I borrow your book for a day?”
Answer:
Leela asked Dinesh if she could borrow his book for a day.

Question 3.
He asked me, “When do you intend to go to Mumbai?”
Answer:
He asked me when I intended to go to Mumbai.

Question 4.
The guest asked me, “When did you purchase the hosue?”
Answer:
The guest asked me when I purchased the house.

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Rewrite the given sentences in indirect speech.
(अप्रत्यक्ष कथन लिखो।)

Question 1.
The doctor said to the patient, “Don’t eat too much sweet.”
Answer:
The doctor told the patient not to eat too much sweet.

Question 2.
The teacher said to the students, “Work word if you want to score good marks”.
Answer:
The teacher told the students to work hard if they wanted to score good marks.

Question 3.
The stranger said to me, “Please give me a lift in your car.”
Answer:
The stranger requested me to give him a lift in my car.

Question 4.
The officer said to his soldiers, “Capture that hill at any cost.”
Answer:
The officer ordered his soldiers to capture the hill at any cost.

Write the given interview in reported speech.
(साक्षात्कार को रिपोर्टेड कथन में लिखो।)
Answer:

  1. The interviewer asked Devanshi what her qualifications were.
  2. She replied that she was M.A., B.Ed.
  3. The interviewer asked her which school had she taught in.
  4. She replied that she had taught in Model School and Kendriya Vidyalaya.
  5. The interviewer, asked her why she wanted to leave a secure job of Kendriya Vidyalaya.
  6. She replied that it was a transferable job and she wanted to settle there with her family.
  7. The interviewer asked her what her present salary was.
  8. She replied that she was getting Rs. 7,000 per month.

Convert the given queries into indirect speech.
(दिए गए प्रश्नों को अप्रत्यक्ष कथन में लिखो।)
Answer:

  1. She wants to know what the most interesting sights are.
  2. He wants to know if we’ve got a town map.
  3. He wants to know how could he find out about the area.
  4. He wants to know where they can stay.
  5. She wants to know what shows are on there.

Listening Time

Listen to your teacher carefully and tick the number of words which do not rhyme with others.
(उन शब्दों को चिह्नित करो जो दूसरे शब्दों से तुकान्त न हों।)
Answer:
Students should do themselves with the help of their teacher.
(छात्र शिक्षक की मदद से स्वयं करें।)

Speaking Time

Imagine that you are a coach who coaches some players. You hear about Atul’s behaviour. You call him and advise him about the nasty way in which he treated Mukul. Complete this dialogue between the two.
(अतुल ब मुकुल के बीच वार्तालाप पूरा करो।)
Answer:
Coach : I have heard that you insulted Mukul.
Atul : Where did you hear about this, sir?
Coach : Is that true or not?
Atul : Yes, sir, it’s true.
Coach : You should not hurt anybody.
Atul : I did not mean to hurt him. I just felt that a sixth standard boy did not deserve a place in the team.
Coach: But you have done a wrong deed and you should realize it.
Atul : I realize I was wrong.
Coach : There should be team spirit in sports.
Atul : Yes, sir I have understood the importance of team spirit in sports.

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Writing Time

Write a letter to your friend telling him/her how Akbar and Birbal were reunited.
(अपने मित्र को अकबर व बीरबल का पुनर्मिलन कैसे हुआ यह बताते हुए पत्र लिखो।)
Answer:
52, Ravindra Nagar
Ujjain (M. P.)
12 July 20….

Dear Sanjay,

Hope you are fine there, I am also fine here. Today I am writing to you to tell you about a very interesting story of Akbar and Birbal that I have read in my text book.

The story was about the reunion of Akbar and Birbal. Once Akbar got annoyed with Birbal as he gave a harmless remark on Akbar’s sense of humour. But Akbar took it seriously and banished Birbal from his kingdom. But after a few days he began to miss him and regret his decision. Then one day a wise saint came to his court. Since, Akbar was missing a wise person in his court he thought to keep the saint in his court if his wisdom is proved.

He asks the saint that his courtiers would ask him certain questions if he is able to answer them properly he would keep him as his courtier, otherwise he would be beheaded. The saint answers all the questions wisely. Then Akbar asks him if he can do some magic. The saint said that he can present any person before him. Akbar asks him to present Birbal. The saint removes his beard and moustaches as he himself was Birbal. Akbar becomes very happy and in this way they get reunited.

I hope you had liked the story as I also liked it very much. Now I am stopping to write. More in next. Rest is fine.

Yours truely
Mahesh

Things to do

(1) Read any other play story on Akbar and Birbal, then enact it in your classroom with your classmates.
(अकबर और बीरबल का कोई और नाट्य पढ़ो व उसको अपनी कक्षा में अभिनीत करो।)
Answer:
Students can do themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

Akbar and Birbal – Reunion Difficult Word-Meanings

MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 10 Akbar and Birbal - Reunion 1

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Akbar and Birbal – Reunion Summary, Pronunciation & Translation

[1] One day, when Akbar and Birbal were in discussion, Birbal happened to pass a harmless comment about Akbar’s sense of humour. But Emperor Akbar was in a foul mood and took great offense to this remark. He asked Birbal, his court jester, friend and confidant to not only leave the palace but also to leave the walls of the city of Agra. Birbal was terribly hurt at being banished.

(वन डे, व्हेन अकबर एण्ड बीरबल वर इन डिस्कशन, बीरबल, हैपन्ड टु पास ए हार्मलेस कमेन्ट अबाउट अकबर्स सेन्स ऑफ ह्यूमर बट एम्परर अकबर वाज़ इन अ फाउल मूड एण्ड टुक ग्रेट आफेन्स टु दिस रिमार्क। ही आस्क्ड बीरबल, हिज़ कोर्ट जेस्टर, फ्रेंड एण्ड कान्फिडेन्ट टु नाट ओनली लीव द पेलेस बट अल्सो टु लीव द वाल्स ऑफ द सिटी ऑफ आगरा। बीरबल वाज़ टेरिबली हर्ट एट बीइंग बेनिश्ड।)

हिन्दी अनुवाद :
एक दिन जब अकबर व बीरबल बातचीत कर रहे थे तो बीरबल ने उनकी विनोदप्रियता पर एक हानिरहित टिप्पणी कर दी। किन्तु सम्राट अकबर जरा बुरे मूड में थे और उनकी टिप्पणी का बहुत बुरा माना। उन्होंने बीरबल, उनके दरबार के विदूषक, परम मित्र एवं विश्वास पात्र को न केवल राजमहल से बल्कि आगरा शहर की सीमा से निकल जाने को कहा। बीरबल उनके निकाले जाने पर बहुत ही दुःखी हुए।

[2] A couple of days later. Akbar began to miss his best friend. He regretted his earlier decision of banishing him from the courts. He just could not do without Birbal and so sent out a search party to look for him. But Birbal had left town without lefting anybody know of his destination. The soldiers searched high and low but were unable to find him anywhere.

(अ. कपल ऑफ डेज़ लेटर, अकबर विगेन टु मिस हिज बेस्ट फ्रेंड। ही रिग्रेटेड हिज अलियर डिसिजन ऑफ बेनिशिंग हिम फ्राम द कोर्टस। ही जस्ट कुड नाट डू विदाउट बीरबल एण्ड सो सेन्ट आउट अ सर्च पार्टी टु लुक फोर हिम। बट बीरबल हैड लेफ्ट टाउन विदाउट लेफ्टिंग एनीबडी नो ऑफ हिज़ डेस्टिनेशन। द सोल्जर्स सर्ल्ड हाय एण्ड लो बट वर अनेबल टु फाइन्ड हिम एनीव्हेयर।)

हिन्दी अनुवाद :
दो दिन बाद ही अकबर को अपने परम मित्र की याद आने लगी। अकबर को उसे दरबार से निकाले जाने के अपने निर्णय पर पछतावा होने लगा। वह बिना बीरबल के रह ही नहीं सकता और इसीलिए उसने उसे ढूँढ़ने के लिये एक खोजी पार्टी भेजी। किन्तु बीरबल किसी को अपना पता बताये बिना शहर छोड़कर जा चुका था। सिपाहियों ने उसे यहाँ वहाँ सब जगह ढूँढ़ा पर वे उसे कहीं भी मिले नहीं।

[3] Then, one day a wise saint came to visit the palace accompanied by two of his disciples. The disciples claimed that their teacher was the wisest man to walk the earth. Since Akbar was missing Birbal terribly, he thought it would be a good idea to have a wise man that could keep him company. But he decided that he would first test the holy man’s wisdom.

The saint had bright sparkling eyes, a thick beard and long hair. The next day, then they came to visit the court.Akbar informed the holy man that, since he was. the wisest man on the earth, he would like to test him.

(देन वन डे अ वाइज़ सेण्ट केम टु विजिट द पेलेस एकम्पनीड बाय टू ऑफ हिज डिसाइपल्स। द डिसाइपल्स क्लेम्ड दैट देयर टीचर वाज़ द वाइजेस्ट मैन टु वाक द अर्थ सिन्स अकबर वाज़ मिसिंग बीरबल टेरिबली, ही थाट इट वुड बी अ गुड आइडिया टु हैव अ वाइज़मैन दैट कुड कीप हिम कम्पनी। बट ही डिसाइडेड दैट ही वुड फर्स्ट टेस्ट द होलीमेन्स विसडम।

द सेण्ट हैड ब्राइट स्पार्कलिंग आइज़, अथिक बीअर्ड एण्ड लांग हेअर द नेक्स्ट डे व्हेन दे केम टु विजिट द कोर्ट। अकबर इन्फार्ड द होली मैन दैट, सिन्स ही वाज़ द वाइजेस्टमैन आन अर्थ, ही वुड लाइक टू टेस्ट हिम।)

हिन्दी अनुवाद :
फिर, एक दिन एक बुद्धिमान सन्त अपने दो शिष्यों के साथ राजमहल की सैर करने आया। शिष्यों ने दावा किया कि उनके गुरु दुनिया के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति हैं। चूंकि अकबर बुरी तरह से बीरबल की गैर हाजिरी से परेशान था, उसने सोचा कि ऐसे बुद्धिमान व्यक्ति को पाना एक अच्छा काम होगा, जो उसे संगति दे। किन्तु पहले उसे उस साधु की बुद्धिमत्ता की परीक्षा लेनी होगी।

साधु की चमकीली आँखें, घनी दाढ़ी व लम्बे बाल थे। अगले दिन जब वे दरबार में आये तो अकबर ने उस साधु को सूचित किया कि चूंकि वह धरती पर सबसे बुद्धिमान व्यक्ति है। वह उनकी परीक्षा लेना चाहता है।

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[4] All his ministers would put forward questions and if his answers were satisfactory he would be made a minister. But if he could not, then he would be beheaded. The saint answered that he had never claimed to be the wisest man on the earth, even though other people seemed to think so, nor was he eager to display his cleverness, but as he enjoyed answering questions, he was ready for the test.

(ऑल हिज़ मिनिस्टर वुड पुट फारवर्ड कवेश्चन्स एण्ड इफ हिज़ आन्सर्स वर सेटिसफेक्टरी ही वुड बी मेड अ मिनिस्टर। बट इफ ही कुड नाट, देन ही वुड बी बिहेडेड। द सेण्ट आन्सर्स दैट ही हेड नेवर क्लेम्ड टु बी द वाइज़ेस्ट मैन ऑन अर्थ, इवन दो आदर पीपुल सीम्ड टु थिंक सो, नॉर बाज़ ही ईगर टु डिस्प्ले हिज़ क्लेवरनैस, बट एज़ ही इन्जॉइड आन्सरिंग क्वेश्चन्स, ही वाज रेडी फोर द टेस्ट।)

हिन्दी अनुवाद :
उसके सभी मंत्री उससे प्रश्न पूछेगे और यदि, उसके उत्तर सन्तोषजनक हुए तो उसे एक मंत्री बना दिया जायेगा। परन्तु यदि वह ऐसा नहीं कर सका तो उसका सिर कलम कर दिया जाएगा। सन्त ने उत्तर दिया कि वह इस धरती पर सबसे बुद्धिमान होने का दावा नहीं करता, ये अलग बात है कि दूसरे व्यक्ति ऐसा सोचते होंगे, न ही वह अपनी चतुराई का प्रदर्शन करना चाहता था पर चूँकि उसे प्रश्नों के उत्तर देने में मजा आता है, इसलिये वह इस परीक्षा के लिए तैयार है।

[5] One of the ministers, Raja Todarmal, began the round of questioning.
He asked : Who is man’s best friend on the earth?
The saint replied : His own good sense.
Fazal asked : Which is the topmost thing on the earth?
The saint answered : Knowledge,
Abdul Fazal : Which is the deepest trench in the world?
The saint answered : A woman’s heart.
Another courtier questioned : What is that which can not be regained after it is lost?
The saint answered : Life.
The court musician Tansen asked : What is undying in music?
The saint replied : Notes.
And then he asked : Which is the sweetest and most melodious voice at night time?
The saint answered : The voice that prays to God.

(वन ऑफ द मिनिस्टर्स, राजा टोडरमल बिगेन द राउण्ड ऑफ क्वेश्चनिंग
ही आस्क्ड : हू इज मेन्स बेस्ट फ्रैंड ऑन अर्थ?
द सेन्ट रिप्लाईड : हिज़ ओन गुड सेन्स। फैजी
आस्कड : विच इज़ द टापमोस्ट थिंग ऑन द अर्थ?
द सेंट आनई : नॉलेज।।
अब्दुल फैजल : विच इज़ द डीपेस्ट ट्रेन्च इन द वर्ल्ड?
द सेंट आन्सर्ड : अ वुमेन्स हार्ट।
अनादर कोर्टियर क्वेश्चन्ड : व्हॉट इज़ दैट विच केन नाट रिगेन्डआफ्टर इट इज़ लॉस्ट?
सेंट आन्सर्ड : लाइफ।
द कोर्ट म्यूजिशियन तानसेन आस्कड : व्हाट इज़ अन डाईंग इन म्यूजिक?
द सेंट रिप्लाईड : नोट्स।
एण्ड देन ही आस्क्ड : विच इज़ द स्वीटेस्ट एण्ड मोस्ट मेलोडियस वाईस एट नाइट टाइम।
द सेंट आन्सर्ड : दे वाईस दैट प्रेज टू गॉड।)

हिन्दी अनुवाद :
मंत्रियों में से एक राजा टोडरमल ने प्रश्नों को पूछना शुरू किया
उन्होंने पूछा : धरती पर मनुष्य का सबसे अच्छा मित्र कौन है?
सन्त ने उत्तर दिया : उसकी खुद की समझदारी। फैजी ने पूछा-दुनिया में सबसे ऊँची वस्तु क्या है?
सन्त का उत्तर था : ज्ञान।।
अब्दुल फजल : दुनिया में सबसे गहरी खाई क्या है?
सन्त ने उत्तर दिया : किसी स्त्री का हृदय।
दूसरे दरबारी ने पूछा : कौन सी ऐसी वस्तु है जो खो जाने के बाद नहीं मिलती?
सन्त ने उत्तर दिया : जीवन।
दरबारी संगीतज्ञ तानसेन ने पूछा : संगीत में कौन सी चीज अमर है?
सन्त ने कहा : सुर (आवाज)
फिर उसने पूछा : रात्रि के समय अत्यन्त मधुर व संगीतमय आवाज कौन-सी है?
सन्त ने जवाब दिया-वह आवाज़ जो ईश्वर की प्रार्थना करती है।

[6] Maharaj Man Singh of Jaipur, a guest at the palace, asked : What travels more speedily than wind?
The saint replied : It is man’s thought.
He then asked : Which is the sweetest thing on the earth?
The saint said : It is a baby’s smile.
The Emperor Akbar and all his courtiers were very impressed with his answers but wanted to test the saint himself.
Firstly, he asked : What are the necessary requirements to rule over a kingdom?
The saint answered : Cleverness.
Then he asked : What is the gravest enemy of a king?
The saint replied : It is selfishness

(महाराज मानसिंह ऑफ जयपुर, अ गेस्ट एट द पैलेस आस्कड-व्हाट ट्रेवेल्स मोर. स्पीडिली देन विन्ड?
द सेण्ट रिप्लाइड : इट इज मेन्स थॉट। ही देन आस्कड-व्हिच इज द स्वीटेस्ट थिंग ऑन अर्थ?
द सेण्ट सेड : इट इज़ अ बेबीज स्माइल।
द एम्परर अकबर एण्ड ऑल हिज कोर्टियर्स वर वेरी इम्प्रेस्ड विद हिज़ आन्सर्स बट वान्टेड टु टेस्ट द सेंट हिमसेल्फ।
‘फर्स्टली, ही आस्क्ड : व्हाट आर नेसेसरी रिक्वायरमेण्ट टु रूल ओवर अ किंगडम?
द सेंट आन्सर्ड : क्लेवरनेस।
देन ही आस्कड : व्हाट इज द ग्रेवेस्ट एनिमी ऑफ ए किंग?
द सेंट रिप्लाइड : इट इज़ सेलिफिशनेस।)

हिन्दी अनुवाद :
जयपुर के महाराज मानसिंह, जो कि राजमहल में एक मेहमान थे, ने पूछ-हवा से तेज कौन सी चीज़ चलती है?
सन्त ने उत्तर दिया : मनुष्य का मन। उन्होंने फिर पूछा-धरती पर सबसे मधुर चीज कौन सी है?
सन्त ने उत्तर दिया : एक शिशु (बालक) की मुस्कान।
सम्राट अकबर और उनके दरबारी सन्त के उत्तरों से बहुत प्रभावित हुए। पर अकबर सन्त की खुद परीक्षा लेना चाहते थे।
सबसे पहले उन्होंने पूछा : एक राज्य पर शासन करने के लिए राजा के लिए कौन-सी आवश्यक चीजें हैं?
सन्त ने उत्तर दिया : चतुराई।
फिर उन्होंने पूछा : किसी राजा का भयंकर शत्रु कौन है?
सन्त ने उत्तर दिया : स्वार्थ।

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[7] The emperor was so pleased that he offered the saint a seat of honour and asked him whether he could perform any miracles. The saint said that he could produce any person the king wished to meet. Akbar was thrilled and immediately asked to meet .his minister and best friend Birbal.

(द एम्परर वाज़ सो प्लीज्ड दैट ही आफर्ड द सेन्ट अ सीट ऑफ हॉनर एण्ड आस्कड हिम वेदर ही कुड परफार्म एनी मिरेकल्स। द सेन्ट सैड दैट ही कुड प्रोड्यूस एनी पर्सन द किंग विश्ड टु मीट। अकबर वाज़ थ्रिल्ड एण्ड इमीजिएटली आस्कड टु मीट द मिनिस्टर एण्ड बेस्ट फ्रेन्ड बीरबल।)

हिन्दी अनुवाद :
सम्राट इतना प्रसन्न हुआ कि उसने सन्त को अपने दरबार में एक सम्मानीय पद देने की पेशकश की और उससे पूछा कि क्या सन्त कोई चमत्कार कर सकता है? सन्त ने कहा कि वह ऐसे किसी व्यक्ति को पेश कर सकता है जिससे राजा मिलने की इच्छा रखता हो। अकबर रोमांचित हुआ और उसने अपने परम मित्र बीरबल से मिलने की इच्छा जताई।

[8] The saint simply pulled off his artificial beard urprise of the other courtiers. Akbar was stunned and could not believe his eyes. He stepped down to embrace the saint because he was none other than Birbal.

Akbar had tears in his eyes as he told Birbal that he had suspected it to be him and had therefore asked him whether he could perform miralces. He showered Birbal with many valuable gifts to show him how happy he was at his return.

(द सेण्ट सिम्पली पुल्ड ऑफ हिज़ आर्टिफिशियल बीयर्ड एण्ड हेयर टु द सरप्राइज़ ऑफ द आदर कोर्टियर्स। अकबर वाज़ स्टन्ड एण्ड कुड नॉट विलीव हिज़ आईज। ही स्टेप्ड डाउन टु इम्ब्रेस द सेंट बिकाज़ ही वाज़ नन आदर देन बीरबल।

अकबर हैड टीअर्स इन हिज़ आईज़ एज़ ही टोल्ड बीरबल दैट ही हैंड सस्पेक्टेड इट टु बी हिम एण्ड हैड देअरफोर आस्कड हिम वेदर ही कुड परफार्म मिरेकल्स। ही शावर्ड बीरबल विद मेनी वेल्युएबल गिफ्ट्स टु शो हिज हाउ हैप्पी ही वाज़ एट हिज़ रिटर्न।)

हिन्दी अनुवाद :
सन्त ने सहजता से अपनी नकली दाढ़ी एवं बाल खोल लिये। सारे दरबारी अचम्भित थे। अकबर उसे देखकर स्तब्ध था और अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। सिंहासन से नीचे उतरकर उसने सन्त को गले से लगा लिया क्योंकि वह सन्त और कोई नहीं बल्कि बीरबल था।

अकबर की आँखों में यह कहते हुए आँसू आ गये कि वह उसके प्रति शंकालु था और इसलिए उसने कहा कि क्या वह कोई चमत्कार कर सकता है। उसने बीरबल पर कई कीमती उपहारों की बौछार कर दी और यह बताया कि उसकी वापसी से वह कितना खुश था।

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