भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 13 बसन्त प्रश्न उत्तर हिंदी

In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 13 बसन्त PDF download, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 13 Basant Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 13 Basant Questions and Answers

Bhasha Bharti Class 5 Chapter 13 Question Answer प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) बसन्त का घर उजाड़ दिया
(i) वृक्ष काटकर
(ii) वृक्ष लगाकर,
(iii) सड़क बनाकर
(iv) पहाड़ काटकर।
उत्तर
(i) वृक्ष काटकर

(ख) बसन्त में झूले डाले जाते हैं
(i) गेंदा पर
(ii) अमुआ पर,
(iii) बेरी पर
(iv) चम्पा पर।
उत्तर
(ii) अमुआ पर

(ग) बसन्त के स्वागत में गीत गाती है
(i) कोयल
(ii) मोरनी,
(iii) चिड़िया
(iv) गौरेया।
उत्तर
(i) कोयल

(घ) हरे-भरे पेड़ कटने से अब पहले की तरह नहीं आता
(i) शिशिर
(ii) हेमन्त
(iii) ग्रीष्म,
(iv) बसन्त।
उत्तर
(iv) बसन्त

MP Board Solutions

Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 13 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) बसन्त आने पर …………… आती थी।
(ख) कवि ने जंगल को ………. कहा है।
(ग) पत्तों के झुरमुट से …….. धुन आती थी।
(घ) बसन्त के ……….. में कोयल गीत गाती थी।
उत्तर
(क) हरियाली
(ख) जीवन
(ग) कुहू कुहू
(घ) स्वागत।

Class 6 Hindi Chapter 13 Question Answer प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) हरियाली कौन-सी ऋतु लाती है?
उत्तर
हरियाली बसन्त ऋतु लाती है।

(ख) बसन्त में कौन-कौन से फूल खिलते हैं?
उत्तर
बसन्त में चम्पा, चमेली और गेंदा के फूल खिलते हैं।

(ग) अब पहले की तरह बसन्त क्यों नहीं आता ?
उत्तर
अब पहले की तरह बसन्त इसलिए नहीं आता है क्योंकि लोगों ने हरे-भरे वृक्षों से परिपूर्ण जंगल काट दिए हैं।

MP Board Solutions

(घ) पूर्व की तरह बसन्त कब आएगा?
उत्तर
पूर्व की तरह बसन्त अब तभी आएगा जब बंजर बनी हुई धरती पर हरियाली भरे पेड़-पौधे लगेंगे। वनों की हरियाली ही जीवन देती है।

(ङ) बसन्त में क्या-क्या परिवर्तन दिखाई देने लगते हैं ?
उत्तर
बसन्त में चारों ओर का वातावरण खुशहाली का होता है, हरियाली छा जाती है, तरह-तरह के फूल खिल उठते हैं। आम पर बौर आ जाता है। उनकी डालियों में झूले पड़ जाते हैं। मोर-मोरनी नाचने लगते हैं। कोयल पत्तों के झुरमुट में कुहू कुहू की धुन में गीत गाती है। सुगन्ध युक्त हवा बहने लगती है।

Class 6 Hindi Chapter 13 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांशों का भाव स्पष्ट कीजिए

(i) बहती थी मस्त पवन, झूम उठे पागल मन,
मोर भी नाचा था, वन में मयूर संग।

(ii) बोला बसन्त फिर, अब कहाँ आऊँ मैं ? . कट गए वृक्ष सब, कहाँ ठहर जाऊँ मैं?
उत्तर
‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ शीर्षक में पद्यांश संख्या 1 व 3 की व्याख्या देखिए।

भाषा की बात

Bhasha Bharti Class 5 Chapter 13 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
उजाड़, आँगन, हरियाली, झुरमुट।
उत्तर
कक्षा में अपने अध्यापक के सहयोग से शुद्ध उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।

Class 6 Hindi Vasant Chapter 13 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से सही वर्तनी वाला शब्द चुनकर लिखिए

(क) चमिली, चमैली, चमेली।
(ख) मायूर, मयूर, मयुर।
(ग) जगंल, जगलं, जंगल।
(घ) उजाढ़, उजाड़, ऊजाड।
उत्तर
(क) चमेली
(ख) मयूर
(ग) जंगल
(घ) उजाड़।

Class 6 Hindi Lesson 13 Question Answer प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए

(i) फूल
(ii) मयूर
(iii) जंगल
(iv) पवन
(v) वृक्ष।
उत्तर
(i) फूल = पुष्प, कुसुम
(ii) मयूर = मोर, केकी
(ii) जंगल = वन, अरण्य
(iv) पवन = हवा, वायु, समीर
(v) वृक्ष = पेड़, पादप, विटप।

MP Board Solutions

Class 6th Hindi Chapter 13 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों में से अनुप्रास अलंकार वाली पंक्तियाँ छाँटकर लिखिए

(i) चम्पा चमेली संग
(ii) गेंदा भी फूले थे
(iii) कुहू-कुहू धुन आती थी।
(iv) कहाँ ठहर जाऊँ में।
(v) तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।
(vi) सन सिय सत्य असीस हमारी।
उत्तर
(i) चम्पा चमेली संग
(iii) कुहू कुहू धुन आती थी
(v) तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये
(vi) सुनु सिय सत्य असीस हमारी।

Class 6 Chapter 13 Hindi प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों में से विशेषण और विशेष्य छाँटकर लिखिए

(क) आज मस्त पवन बह रही है।
(ख) बगीचे में सुन्दर फूल खिले हुए हैं।
(ग) काली कोयल कुहू कुहू कर रही है।
उत्तर
(क) विशेषण-मस्त, विशेष्य-पवन।
(ख) विशेषण-सुन्दर, विशेष्य-फूल।
(ग) विशेषण-काली, विशेष्य-कोयल।

बसन्त सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) बसन्त तुम आते थे
हरियाली लाते थे।
चम्पा चमेली संग
गेंदा भी फूले थे
अमुआ की डाली पर
डाले फिर झूले थे।
बहती थी मस्त पवन
झूम उठे पागल मन
मोर भी नाचा था
वन में मयूर संग।

शब्दार्थ-अमुआ = आम। पवन = हवा।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा-भारती’ की कविता ‘बसन्त’ से ली गई हैं। इस कविता की रचना ‘प्रमोद सोनी’ ने की है।

प्रसंग-बसन्त के आगमन पर चारों ओर सुन्दरता बिखर पड़ती है।

व्याख्या-कवि कहता है कि हे बसन्त ! जब तुम आते हो तब अपने साथ हरियाली लाते हो। बसन्त ऋतु में चम्पा, चमेली और गेंदा के फूल खिल रहे थे। आम के वृक्षों पर बौर आ गया है, भीनी गन्ध के मध्य झूले डाल दिए गए हैं। मतवाली हवा बहने लगी थी; उससे पागल हुआ मन भी झूम उठता था। वन में मोर भी मयूरी (मोरनी) के साथ नाचा करते थे।

(2) स्वागत में गीत कोई
कोयल भी गाती थी
पत्तों के झुरमुट से
कुहू कुहू धुन आती थी।
क्यों नहीं लगता अब
जैसे तुम आए हो
हरियाली मस्त पवन
संग नहीं लाए हो।

शब्दार्थ-मस्त = मतवाला बनाने वाला।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-अब बसन्त के आगमन पर पक्षियों द्वारा कोई भी गीत आदि नहीं गाये जाते हैं।

व्याख्या-कवि कहता है कि पहले बसन्त के आने पर उसके स्वागत में कोयल अपनी कुहू कुहू की ध्वनि में गीत गाया करती थी। पेड़ों के पत्तों के झुरमुट में छिपकर कोयल जो अपनी मीठी तान छेड़ती तो सब कुछ आनन्दमय हो जाता था। लेकिन अब तुम्हारे (बसन्त के) आगमन पर वैसा नहीं लगता। हे बसन्त! तुम अब अपने साथ कोई वैसी हरियाली, मतवाला बना देने वाली हवा को भी नहीं लाते हो। इसलिए अब ऐसा क्यों नहीं लगता कि बसन्त आ गया है।

MP Board Solutions

(3) बोला बसन्त फिर
अब कहाँ आऊँ मैं?
कट गए वृक्ष सब
कहाँ ठहर जाऊँ मैं ?
हरे भरे जंगल सब
तुमने तो काट दिए
घर मेरा उजाड़ कर
अपनों में बाँट दिए।

शब्दार्थ-उजाड़कर = बरबाद करके। सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-‘बसन्त’ आ गया है, ऐसा क्यों नहीं लगता ? इस प्रश्न का उत्तर बसन्त देता है।

व्याख्या-बसन्त ने उत्तर देते हुए कहा कि मैं कहाँ पर आऊँ, क्योंकि मेरे ठहरने के स्थान हरे-भरे पेड़-पौधे थे, उन सबको तुमने काट दिया है। बताओ तो मैं अब कहाँ ठहरूँ? हरियाली से परिपूर्ण जंगलों को तुमने काट दिया है। हरे-भरे वन ही मेरे निवास स्थान थे, उन्हें ही काटकर मेरा घर बरबाद कर दिया है। हे मनुष्यो। तुमने ही हरे-भरे वनों को काट कर अपनों में आपस में बाँट लिया है। मेरे लिए तो रहने का स्थान छोड़ा ही नहीं है।

(4) दुखी है मेरा मन
कुछ तो दुख बाँटो
जंगल ही जीवन है
जंगल को मत काटो।
मेरे घर आँगन को फिर से बसाओगे
बंजर इस धरती पर
हरियाली लाओगे।
अब तो मैं आऊँगा
वृक्ष जब लगाओगे।

शब्दार्थ-बंजर = ऊसर; वह भूमि जिसमें कोई भी बीज अंकुरित नहीं होता है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-दुःखी मन वाला बसन्त अपने आगमन की शर्त बताता है कि इस धरती को हरे-भरे पेड़-पौधों से युक्त कीजिए, मैं अवश्य ही समय से आऊँगा।।

व्याख्या-बसन्त कहता है कि मेरे मन के अन्दर व्याप्त दु:ख को, हे मनुष्यो ! आप सभी बाँट लीजिए। यह मेरा दुःख तभी जा सकेगा, जब आप जंगलों को नहीं काटोगे। जंगलों की वृद्धि कीजिए। जंगल हैं तो जीवन सुरक्षित है। पेड़-पौधे लगाकर मेरे घर-आँगन को हरियाली से सम्पन्न कर दीजिए। यह हरियाली ही मेरा निवास है, घर है। यह धरती जिसे पेड़-पौधों को काटकर बंजर बना दिया है। उसे हरियाली से सम्पन्न बनाइए। बसन्त का आगमन तो तभी हो सकेगा जब वृक्षों का रोपण किया जाएगा।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 9 पद और दोहे प्रश्न उत्तर हिंदी

In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 9 पद और दोहे PDF download, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 9 Pad Aur Dohe Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 9 Pad Aur Dohe Questions and Answers

Class 6 Hindi Chapter 9 MP Board प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) मीरा ने आँसुओं के जल से सींचकर बोई है
(i) प्रेम की बेल
(ii) मोती की बेल,
(iii) मूंगे की बेल
(iv) फूल की बेल।
उत्तर
(i) प्रेम की बेल

(ख) भूखे को भीख देने की बात कही है
(i) रहीम ने
(ii) कबीर ने,
(iii) मीरा ने
(iv) कमाल ने।
उत्तर
(ii) कबीर ने

(ग) जहाँ काम आवे सुई, कहा करै
(i) त्रिशूल
(ii) फूल
(iii) तलवारि
(iv) सम्पत्ति
उत्तर
(iii) तलवारि

MP Board Solutions

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 9 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) छौड़ दई कुल की ………… कहा करै कोई।
(ख) घृत-घृत सब काढ़ि लियो …………….. पियो कोई।
(ग) कर ….. की बंदगी भूखे को दै भीख।
(घ) जो रहीम उत्तम ……….. का करि सकत कुसंग।
उत्तर
(क) कानि
(ख) छाछ
(ग) साहब
(घ) प्रकृति।

MP Board Class 6th Hindi Chapter 9 प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) मीराबाई ने श्रीकृष्ण की किस रूप में उपासना की है?
उत्तर
मीराबाई ने श्रीकृष्ण की पति रूप में उपासना की है।

(ख) कबीर ने किन दो बातों की सीख दी है?
उत्तर
कबीर ने साहब (ईश्वर) की वन्दना करने और भूखे को भीख (भिक्षा) देने की सीख दी है।

(ग) कल का काम आज ही क्यों कर लेना चाहिए?
उत्तर
कल का काम आज ही कर लेना चाहिए, क्योंकि क्षण भर में ही मृत्यु हो सकती है। मृत्यु हो जाने पर काम न किया हुआ ही रह जाएगा।

MP Board Solutions

(घ) रहीम ने उत्तम प्रकृति का महत्व किस उदाहरण से स्पष्ट किया है ?
उत्तर
रहीम ने उत्तम प्रकृति का महत्व यह उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया है कि शीतलता देने वाले चन्दन के वृक्ष पर अनेक सर्प लिपटे रहते हैं, फिर भी उस पर साँपों के जहर का प्रभाव नहीं होता है।

(ङ) सच्चे मित्र की क्या पहचान है ?
उत्तर
सच्चे मित्र की यह पहचान है कि वह अपने मित्र का साथ विपत्ति काल में भी नहीं छोड़ता। विपरीत परिस्थितियों में भी वह साथ देता है।

MP Board Class 6 Hindi Chapter 9 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांशों के भाव स्पष्ट कीजिए

(क) भगत देखि राजी भई, जगत देखि रोई।
दासी ‘मीरा’ लाल गिरधर, तारो अब मोही॥

(ख) कबिरा सोई पीर है, जो जाने पर पौर।
जो पर पोर न जानई, सो काफिर बेपीर ।

(ग) एक साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहि सीचिवो, फूलै फलै अघाय।
उत्तर
‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 1, 2, व 3 की व्याख्या देखें।

भाषा की बात

Class 6 Hindi Chapter 9 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
भ्रात, धृत, प्रकृति, सम्पत्ति, भुजंग, व्याप्त।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से शुद्ध उच्चारण करना सीखें और अभ्यास करें।

Class 6 Hindi Lesson 9 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के मानक रूप लिखिएअंसुअन, भगत, जाके, तिरसूल, परलै, अब्ब, कब्ब, विपति।
उत्तर
अश्रुओं, भक्त, जिसके, त्रिशूल, प्रलय, अब, कब, विपत्ति।

6th Class Hindi Chapter 9 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के सामने उनके पर्याय लिखे हैं। इनमें एक शब्द पर्यायवाची शब्द नहीं है, उसे चुनकर लिखिए
(क) देवता = सुर, असुर, देव।
(ख) पति = प्राणनाथ, कंत, तनय।
(ग) अभिलाषा = लोभ, इच्छा, चाह।
(घ) सज्जन सभ्य, शिष्ट, अशिष्ट। ।
(ङ) फूल = पुष्प, कुसुम, पुरुष।
उत्तर
(क) असुर
(ख) तनय
(ग) लोभ
(घ) अशिष्ट
(ङ) पुरुष

MP Board Solutions

Hindi Class 6 Chapter 9 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों में अनुप्रास अलंकार है। प्रत्येक पंक्ति में पहचान स्पष्ट कीजिए
(i) जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।
(ii) एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाए।
(iii) कहि रहीम सम्पत्ति सगै बनत बहुत बहुरीत।
(iv) जो पर पीर न जानई, सो काफिर बेपौर।
उत्तर-
(i) ‘मोर-मुकुट-मेरो’ शब्दों में ‘म’ वर्ण की कई बार आवृति होने पर अनुप्रास अलंकार है।
(ii) साधे, सब, सधै, सब, साधे, सब’ शब्दों में ‘स’ वर्ण की कई बार आवृति होने से अनुप्रास अलंकार है।
(ii) सम्पति, बनत, बहुत, रीत’ शब्दों में ‘त’ वर्ण की कई बार आवृति होने से अनुप्रास अलंकार है।
(iv) पर, पीर, काफिर, बेपीर’ शब्दों में ‘प’ और ‘र’ वर्ण की कई बार आवृति होने से अनुप्रास अलंकार है।

Class 6th Hindi Chapter 9 Question Answer प्रश्न 5.
तालिका में दिए गए शब्दों की सही जोड़ी बनाइएशब्द
विलोम – शब्द
(i) पण्डित – (क) घृणा
(ii) देव – (ख) दुःख
(iii) प्रेम – (ग) रात
(iv) सुख – (घ) थल
(v) जल – (ङ) दानव
(vi) दिन – (च) मूर्ख
उत्तर
(i)→ (च), (ii)→ (ङ), (iii) → (क), (iv)→ (ख),(v)→(घ), (vi)→ (ग)

Class 6 Hindi 9 Chapter प्रश्न 6.
उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाइए
(i) परा + जय
(ii) परा + भव
(iii) परा + क्रम
(iv) नि +रंजन
(v) नि+ वेश
(vi) नि+ दान।
उत्तर
(i) पराजय
(ii) पराभव
(iii) पराक्रम
(iv) निरंजन
(v) निवेश
(vi) निदान

MP Board Solutions

Soi Meri Chona Re Question Answer प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों में आवट और आहट प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए
(i) सजाना + आवट
(ii) बनाना + आवट
(iii) लिखना + आवट
(iv) मुस्कराना + आहट
(v) टकराना + आहट
(vi) चिल्लाना + आहट
(vii) घबराना + आहट
उत्तर
(i) सजावट
(ii) बनावट
(iii) लिखावट
(iv) मुस्कराहट
(v) टकराहट
(vi) चिल्लाहट
(vii) घबराहट।

पद और दोहे सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई॥
जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।
तात मात भ्रात बंधु, आपनों न कोई॥
छाँड़ि दई कुल की कानि, कहा करै कोई।
सन्तन डिंग बैठि-बैंठि लोक-लाज खोई॥
चूनरी के किये टूक, ओढ़ लीन्हीं लोई।
मोती मूंगे उतारि, वन-माला पोई।
अंसुअन जल सींच-सींच, प्रेम बेलि बोई।
अब तो बेलि फैल गई आनन्द फल होई॥
प्रेम की मथनियाँ बड़े, जतन से बिलोई।
घृत-घृत सब काढ़ि लियो, छाछ पियो कोई॥
भगत देखि राजी भई, जगत देखि रोई।
दासी ‘मीरा’ लाल गिरधर, तारो अब मोही।

शब्दार्थ-आपनों = अपना। छाँड़ दई = छेड़ दी। कुल = परिवार । कानि = इज्जत, कुल मर्यादा। हिंग=पास। खोई = मिटा दी। लाजशर्म, लज्जा। चूनरी=चूंदरी, चादर।  लोई = लोई नामक वस्त्र जिसे प्राय: त्यागी, साधु-सन्त ओढ़ते हैं। वन-माला = वन के फूल और पत्तियों की माला। पोई = पिरो कर। प्रेम बेलि-प्रेम की लता। होई = लग रहे हैं। मथनियाँ = मथानी, रई। बिलोई=दही मथने का काम किया। जतन से = प्रयत्न से। काढ़ि लियो = निकाल लिया। छछ = मट्ठा। पियो कोई = कोई भी पीता रहे। राजी भई = प्रसन्न हुई। जगत देखि रोई = संसार के बन्धनों को देखकर दु:खी होने लगी। तारो = उद्धार करो। मोही = मेरा, या मुझे।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद ‘पद और दोहे’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पद मीराबाई की रचना है।

प्रसंग-मीरा ने स्वयं को श्रीकृष्ण की भक्ति में लीम कर दिया है। वह चाहती है कि उसके इष्ट भगवान कृष्ण उसका भवसागर से उद्धार कर दें।

व्याख्या-मीराबाई कहती है कि मेरे प्रभु, तो गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले, गौ का पालन करने वाले श्रीकृष्ण हैं। उनके अतिरिक्त मेरा कोई अन्य प्रभु नहीं है। अपने सिर पर जो मोर-मुकुट धारण करते हैं, वही मेरे पति हैं। माता-पिता, भाई-बन्धु (सरो सम्बन्धी) अपने तो कोई भी नहीं हैं। मैंने कुल मर्यादा छोड़ दी है, मेरा कोई क्या कर सकेगा। साधु-सन्तों की संगति में बैठना शुरू कर दिया है, मैंने लोक-लाज भी खो दी है। प्रतिष्ठित घर की बहू जिस चादर को ओढ़ कर चलती है, उस चादर के मैंने दो टुकड़े कर दिए हैं, (फाड़ दी है)। लोई पहन ली है। मोती-मूंगे धारण करना छोड़ दिया है।

वन के फूलों की माला (सहज में प्राप्त फलों की माला) पिरो कर पहनने लगी हैं। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में आँसू बहाते हुए, उनके प्रति प्रेम की बेलि को बोया है और लगातार सचिा है। वह बाल अब फूलकर फैल चुकी है। उस पर अब तो आनन्द के फल लगने शुरू हो गए हैं। प्रेम की मथानी से प्रयत्नपूर्वक बिलोने पर (अमृत रूपी) सम्पर्ण घी निकाल लिया है।

शेष छाछ (मट्ठा) रह गया है, उसे कोई भी पीता रहे (संसार छोड़ा हुआ मट्ठा है-तत्वहीन पदार्थ है। जो उसे पीना चाहे वह पीता रहे।) में प्रभु भक्तों की संगति में आनन्दित हो रही हूँ। संसार को देखकर अत्यधिक दु:खी होती हूँ। मीराबाई वर्णन करती हैं कि मैं तो गिरधर लाल श्रीकृष्ण की दासी हूँ। हे प्रभो आप मेरा उद्धार कीजिए।

MP Board Solutions

(2) कबिरा कहै कमाल सौं, दो बातें लै सीख।
कर साहब की बन्दगी, भूखे को दें भीख॥1॥
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजां आपना, मुङ्गा सा बुरा न कोय॥2॥
कबिरा सोई पीर है, जो जाने पर पीर।
जो पर पीर न जानई, सो काफिर बेपीर ॥3॥
जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोव तू फूल।
तोहि फूल को फूल हैं, वाको है तिरसूल ॥4॥
काल्ह करें सो आज कर, आज कर सो अव्व।
पल में परलै होयगी, बहुरि करैगो कब्ध ॥5॥

शब्दार्थ-सीख = शिक्षा ग्रहण कर ले। बन्दगी = प्रार्थना, भक्ति। साहब= स्वामी, ईश्वर। भीख = भिक्षा। न मिलिया कोय = कोई नहीं मिला। खोजां = ढूँढ़ने पर। पर-पीर-दूसरे की पीड़ा। जानै = जानता है।
काफिर = विधर्मी। बेपीर = किसी की पीड़ा को न समझने वाला। तोको = तेरे लिए। बुवै = बोता है।
ताहि = उसको। तोहि = तेरे लिए। वाको = उसके लिए। तिरसूल = त्रिशूल (बड़े-बड़े काँट)। काल्ह = कल। अब्ब-अभी-अभी, इसी समय। परलै = प्रलय। बहुरि = फिर।

सन्दर्भ-प्रस्तुत दोहे ‘पद और दोहे’ नामक पाठ से लिए गए हैं। इनकी रचना कबीर ने की है।

प्रसंग-कबीर ने लोगों को सलाह दी है कि उन्हें देखना चाहिए कि समाज में कोई व्यक्ति दुःखी, भूखा या किसी भी तरह के कष्ट से पीड़ित तो नहीं है। यदि ऐसा है तो प्रत्येक को सहायता के लिए उठ खड़ा होना चाहिए।

व्याख्या-

  • कबीर अपने पुत्र कमाल को समझाते हुए कहते हैं कि तुम्हें दो बातों की शिक्षा ग्रहण कर लेनी चाहिए। पहली यह है कि तुम्हें ईश्वर की वन्दना करना सीख लेना चाहिए और दूसरी बात यह कि भूखे व्यक्ति को भिक्षा देनी चाहिए।
  • कबीर कहते हैं कि संसार में बुरे व्यक्ति की जाँच करने के लिए मैं निकला, तो मुझे कोई भी व्यक्ति बुरा नहीं मिला।
    परन्तु जब मैंने अपने हृदय में झाँका और देखा, तो मुझे यह बात ज्ञात हुई कि स्वयं मुझसे बढ़कर बुरा कोई अन्य व्यक्ति नहीं है।
  • कबीर कहते हैं कि वही सच्चा पीर (ईश का भक्त) है जो दूसरों के कष्ट को अच्छी तरह जानता है। जो दूसरों की पीड़ा को समझ नहीं सकता, वह निश्चय ही विधर्मी है, बेपीर है अर्थात् उसे किसी के भी प्रति किसी भी तरह की सहानुभूति नहीं है।
  • कबीर कहते हैं कि जो भी कोई व्यक्ति तुम्हारे लिए काँटा बोता है, अर्थात् तुम्हारे लिए किसी भी प्रकार की विपत्तियाँ
    (कष्ट) देता है, तो तुम्हें उसके बदले में फूल ही बोने चाहिए। प्रतिकार में काँट (कष्ट) नहीं बोना चाहिए, बाधाएँ नहीं डालनी चाहिए। क्योंकि अन्त में तुम्हारे लिए फूल ही फूल रहेंगे (अर्थात् किसी भी तरह का कष्ट नहीं होगा)। उसके लिए (काँटे बोने वाले के लिए) तो बड़े-बड़े (त्रिशूल जैसे) काँट ही पैदा होंगे।
  • कबीर ने अपना कार्य करने की सलाह देते हुए उपदेश दिया है कि जो काम कल किया जाना है, उसे आज ह और जो काम आज करना है, उसे अभी-अभी पूरा कीजिए क्योंकि, पल (क्षण) भर में ही प्रलय (मृत्यु) हो गई, तो फिर उस काम को कब कर सकोगे।

MP Board Solutions

(3) एक साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।
रहिमन मूलहि सींचिबो, फूलै फलै अघाय॥1॥
रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।
जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तरवारि॥2॥
रहिमन चुप है बैठिए, देखि दिनन के फेर।
जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहें बेर॥ 3 ॥
जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥4॥
कहि रहीम सम्पति सगे, बनत बहुत बहुरीत।
बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥5॥

शब्दार्थ-एकै साधे = एक की साधना करने पर। जाय = चला जाता, नष्ट हो जाता है। सीचिबो सींचने मात्र से। मूलहि = मूल में,जड़ में। अघाय-पूर्ण तृप्ति तक। बड़ेन-बड़े लोगों को। डारि = फेंकना। तरवारि = तलवार। दिनन के फेर बदले हुए समय को। नीके = अच्छे। बेर – देर। प्रकृति = स्वभाव। कुसंग- बुरी संगति। व्यापत = समा जाना। भुजंग = जहरीले साँप। सम्पति- सम्पत्ति काल में। बहु रीत- अनेक रीतियों से (किसी भी प्रकार से)। बिपति-कसौटि = विपत्ति जैसी कसौटी पर। कसे = कसने पर। जे कसे = जो कस दिए जाते हैं। ते ही = वे ही। साँचे मीत सच्चे मित्र।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक भाषा भारती’ के पाठ ‘पद और दोहे’ नामक पाठ से ली गई हैं। ये दोहे रहीम की रचना हैं।

प्रसंग-इन दोहों में रहीम ने सत्संगति, गुण ग्रहण करना तथा विषम स्थिति में मौन धारण करके रहने का उपदेश किया है।

व्याख्या

  • रहीम जी कहते हैं कि एक ईश्वर की साधना करने से सब कुछ प्राप्त करने में सफलता मिल जाती है। सब (ईश्वर और संसार) की साधना करने से सब कुछ मिट जाता है। इसलिए मूल (जड़) की सिंचाई करने से वृक्ष पर फूल-फल पूर्ण सन्तुष्ट करने के लिए लगना प्रारम्भ हो जाता है।
  • रहीम जी सलाह देते हैं कि बड़े लोगों को संगति पाकर छोटे आदमियों का अपमान कभी भी नहीं करना चाहिए। उदाहरण देते हुए कि जो काम (सिलाई आदि) छोटी सी सुई से किया जा सकता है, वही काम तलवार (बड़ी वस्तु) से नहीं किया जा सकता अर्थात् छोटे आदमी ही कभी-कभी महत्वपूर्ण होते हैं।
  • रहीम जी कहते हैं कि दिनों के परिवर्तन से (समय के बदल जाने पर-विपरीत समय पर) किसी भी कार्य की सिद्धि न हो सकने की दशा में शान्तिपूर्वक बैठ जाना चाहिए। (खराब समय में शान्ति से विचार करने लग जाना चाहिए, अधीर नहीं होना चाहिए, क्योंकि जब अच्छा समय आएगा, तो बात बनते (काम होने में) देर नहीं लगती।
  • रहीम जी कहते हैं कि जो व्यक्ति अच्छे स्वभाव का होता है, उसके ऊपर बुरी संगति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। देखिए चन्दन के वृक्ष पर अनेक सर्प लिपटे रहते हैं, लेकिन उस वृक्ष पर उन सपों के जहर का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता। चन्दन वृक्ष शीतलता और शीलवानपन का प्रतीक है।
  • रहीम जी कहते हैं कि सम्पत्ति काल में बहुत से लोग अनेक तरह से सगे-सम्बन्धी बनने लगते हैं। (परन्तु सच्चे मित्र सिद्ध नहीं होते)। सच्चे मित्र तो वही होते हैं जो विपत्ति रूपी कसौटी पर कसे जाने पर साथ रहते हैं। अर्थात् विपत्ति में जो साथ देते हैं, वे ही सच्चे मित्र होते हैं।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 12 डॉ. होमी जहाँगीर भाभा प्रश्न उत्तर हिंदी

In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 12 डॉ. होमी जहाँगीर भाभा PDF download, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 12 Dr Homi Jehangir Bhabha Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 12 Dr Homi Jehangir Bhabha Questions and Answers

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) भाभा अणु-शक्ति संस्थान स्थित है
(i) चेन्नई में
(ii) ट्राम्बे में,
(iii) इंग्लैण्ड में,
(iv) जिनेवा में।
उत्तर
(ii) ट्राम्बे में,

(ख) डॉ. भाभा को पी-एच.डी की उपाधि मिली
(i) सन् 1941 में,
(ii) सन् 1947 में,
(iii) सन् 1951,
(iv) सन् 1966 में।
उत्तर
(i) सन् 1941 में।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) डॉ. भाभा के पिता का नाम …………था।
उत्तर
श्री जे०एस०भाभा

(ख) डॉ. भाभा …………… से संगीत सुनते थे।
उत्तर
ग्रामोफोन।

प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) भारत में अणुशक्ति का विकास किसने किया ?
उत्तर
भारत में अणु शक्ति का विकास प्रथम वैज्ञानिक डॉ. होमी जहाँगीर भाभा ने किया।

(ख) विज्ञान में रुचि के अलावा डॉ. भाभा की और कौन-कौन सी विशेषताएँ थीं?
उत्तर
डा० भाभा को गणित और भौतिक विज्ञान से अति प्रेम था, उन्होंने विद्युत एवं चुम्बक सम्बन्धी बातों के अतिरिक्त कॉस्मिक किरण की मौलिक खोजों पर भाषण दिए। उन्हें संगीत, नृत्य एवं चित्रकला से भी भारी लगाव था। वे पेड़-पौधों और बगीचों के बड़े शौकीन थे।

MP Board Solutions

(ग) डॉ. भाभा की एकमात्र इच्छा क्या थी?
उत्तर
डॉ. भाभा की एकमात्र इच्छा थी कि भारत को आने वाले वर्षों में आणविक शक्ति के कार्यों के लिए दूसरों का मुँह न ताकना पड़े।

(घ) चित्रकार ने डॉ. भाभा के बनाए चित्र को देखकर क्या कहा था?
उत्तर
चित्रकार ने डॉ. भाभा के बनाए चित्र को देखकर कहा था कि एक दिन यह बालक महान कलाकार बनेगा।

(ङ) अणुशक्ति के रचनात्मक प्रयोग के लिए कौन-सी संस्था स्थापित की गई ?
उत्तर
अणुशक्ति के रचनात्मक प्रयोग के लिए मुम्बई में सर दोराबजी-टाटा ट्रस्ट द्वारा “टाटा इन्स्टीट्यूट ऑफ फंडामेन्टल रिसर्च” नामक संस्था स्थापित की गई।

प्रश्न 4. तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) डॉ. भाभा को संगीत के प्रति लगाव कैसे उत्पन्न हुआ?
उत्तर
डॉ.भाभा को बचपन में नींद नहीं आती थी। वे प्रायः रोते रहते थे। इससे पिता को बड़ी चिन्ता लग गई। उन्होंने डॉक्टर की सलाह ली। उनकी सलाह पर डॉ. भाभा के सामने ग्रामोफोन बजाया जाने लगा। इससे उनका ध्यान बँट जाता और वे चुप हो जाते थे। फलतः उनको संगीत के प्रति लगाव हो गया।

(ख) अणुशक्ति के बारे में डॉ. भाभा के क्या विचार थे?
उत्तर
डॉ. भाभा अणुशक्ति से अणुबम बनाने के पक्ष में नहीं थे। अणुबम से लाखों लोगों की जान चली जाती है। इसलिए वे अणुशक्ति का प्रयोग शांतिपूर्ण एवं रचनात्मक कार्यों के लिए करना चाहते थे।

MP Board Solutions

(ग) डॉ. भाभा की शिक्षा कहाँ-कहाँ हुई ?
उत्तर
मुंबई विश्वविद्यालय से ई.एम.सी. की परीक्षा पास करके वे आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैण्ड चले गए। वहाँ इंजीनियरिंग की परीक्षा पास करके गणित और भौतिक विज्ञान की शिक्षा के लिए उन्होंने कैम्ब्रिज केयस कॉलेज में प्रवेश लिया। उसी मध्य उन्होंने यूरोप के विभिन्न देशों में जाकर विद्युत एवं चुम्बक तथा कॉस्मिक किरण की मौलिक खोज पर अपने भाषण दिए। उन्हें लन्दन की रॉयल सोसाइटी का फैलो चुना गया। पी-एच. डी. तथा डी.एस-सी की उपाधियाँ विभिन्न विश्वविद्यालयों से प्राप्त हुई।

(घ) डॉ. भाभा की मृत्यु कैसे हुई ?
उत्तर
24 जनवरी, 1966 को भारतीय विमान सेवा का ‘कंचनजंघा’ नामक जेट विमान मुम्बई से जिनेवा जा रहा था। इसी विमान से डॉ. भाभा भी यात्रा कर रहे थे। जिनेवा के पास एक बहुत ऊँचा पहाड़ है ‘माउन्ट ब्लॉक’ इस पहाड़ से वह विमान टकरा कर गिर गया। इस दुर्घटना में डॉ.भाभा की मृत्यु हो गई।

प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) अणुशक्ति का प्रयोग विकास के कार्यों में किस प्रकार हो सकता है ?
उत्तर
अणुशक्ति के प्रयोग से बिजली प्राप्त की जा सकती है। इंजन चलाए जा सकते हैं। कल-कारखानों की बड़ी-बड़ी मशीनें चलाई जा सकती हैं। उजाला किया जा सकता है। रेलगाड़ियाँ चलायी जा सकती हैं। खेती के लिए विद्युत से पानी खींचा जा सकता है। अणुशक्ति से अनेक रोगों के इलाज में सहायता मिल सकती है। लोगों के लिए अनेक वैज्ञानिक प्रयोगों में इससे ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। आवागमन, स्वच्छता, चिकित्सा आदि सम्बन्धी सुविधाएँ ली जा सकती हैं।

(ख) किसी कार्य से ध्यान बंटाने के लिए कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं?
उत्तर
ऐसे अनेक कार्य हैं जिनके द्वारा किसी काम से ध्यान हटाया जा सकता है, जैसे-

  1. संगीत सुनना
  2. चित्रकारी करना
  3. पेड़ पौधों की सिंचाई-गुड़ाई करना व कलात्मक क्रियाएँ करना
  4. शास्त्रीय और आधुनिक संगीत सीखना तथा
  5. प्राकृतिक रूप से आकर्षक स्थलों पर घूमना-फिरना।

(ग) विमान दुर्घटनाएँ किन-किन कारणों से हो सकती
उत्तर
विमान दुर्घटनाएँ प्रायः इंजन में खराबी होने से हो सकती, हैं। परन्तु कभी-कभी पर्वतीय क्षेत्रों के मध्य से या ऊपर से गुजरने पर उन स्थलों की बनावट व ऊँचाई का सही ज्ञान न होने पर दुर्घटना होती है। आकाश में उड़ते पक्षियों से टकराने से विमान असन्तुलित होकर गिर जाते हैं। इंजन में आग लग जाती है। पेट्रोल ट्रैक के अचानक फट जाने से भी दुर्घटना होती है। तेज तूफान आने पर कुहरा या धुंध छाये रहने से दृष्टिबाधित होने की स्थिति में विमान दुर्घटनाएं हो जाती हैं। रडार यंत्र की खराबी से विमान सम्पर्क टूट जाने पर विमान भटक कर टकरा जाते हैं और दुर्घटनाएं हो जाती हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 6.
अनुभव और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए

(क) यदि 15 वर्ष की आयु में ही डॉ. होमी जहाँगीर भाभा को यूरोप में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल जाता तो उनके व्यक्तित्व में क्या परिवर्तन होते ? .
उत्तर
यदि 15 वर्ष की आयु में ही डॉ. भाभा को यूरोप में शिक्षा के लिए भेज दिया जाता तो वे थोड़े समय में ही विज्ञान सम्बन्धी शिक्षा प्राप्त करके भारत लौट आते और अपनी प्रशंसनीय सेवाओं को देश को समर्पित करते। देश विविध क्षेत्रों में प्रगति करता और विश्व में अपने विकास से एक विशेष स्थान बना पाता।

(ख) यदि डॉ. भाभा का दुर्घटना में निधन नहीं होता तो अणुशक्ति के उनके शान्तिपूर्ण प्रयासों का विश्व पर क्या प्रभाव पड़ता?
उत्तर
यदि डॉ. भाभा का दुर्घटना में निधन नहीं होता तो उनकी अणुशक्ति के शान्तिपूर्ण प्रयासों का विश्व पर यह प्रभाव | पड़ता कि उस शक्ति का विनाशकारी रूप (बम) के निर्माण में प्रयोग नहीं किया जाता। देशों में अपनी सुरक्षा के नाम पर बनने वाले विध्वंसक यंत्र नहीं बनते। विश्व में पर्यावरणीय समस्या नहीं आती। पानी-हवा आदि स्वच्छ रहते। अनेक रोगों से मुक्ति मिलती। विश्व के देश अपेक्षाकृत विकसित होते, सुख और शान्ति होती। लोग समृद्ध, स्वस्थ और सुखी होते।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का उच्चारण कीजिएअन्तर्राष्ट्रीय, ट्रॉम्बे, अलंकृत, सौन्दर्यपूर्ण, इंस्टीट्यूट।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय के सहयोग से शुद्ध उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।

प्रश्न 2.
पाठ में आए शब्द-युग्मों को छाँटकर लिखिए।
उत्तर
अणु-शक्ति, पढ़े-लिखे, संगीत-प्रेमी।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए
(i) संसार
(ii) उपवन
(iii) दीप
(iv) मार्ग।
उत्तर
(i) संसार-जग, जगत, विश्व, दुनिया।
(ii) उपवन-बाग, बगीचा।
(iii) दीप-दीया, दीपक।
(iv) मार्ग-पथ, राह, रास्ता।

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
दिए गए शब्दों में त्व, इत, ईय प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए
प्रभु, पशु, नारी, पुष्प, सम्मान, प्रभाव, दर्शन, राष्ट्र, भारत।
उत्तर

  1. प्रभु + त्व = प्रभुत्व, पशु + त्व = पशुत्व, नारी + त्व = नारीत्व।
  2. पुष्प + इत=पुष्पित, सम्मान + इत = सम्मानित, प्रभाव + इत = प्रभावित।
  3. दर्शन + ईय = दर्शनीय, राष्ट्र + ईय = राष्ट्रीय, भारत + ईय = भारतीय।

प्रश्न 5. उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाइए
उपसर्ग-अ, सु, दुर्।
शब्द-शुभ, ज्ञान, सभ्य, मार्ग, गंध, संस्कृत, जन, गति,
उत्तर

  1. अ+ शुभ-अशुभ, अ + ज्ञान = अज्ञान, अ + सभ्य = असभ्य।
  2. सु + मार्ग = सुमार्ग, सु + गंध = सुगंध, सु + संस्कृत = सुसंस्कृत।
  3. दुर् + जन् = दुर्जन, दुर् + गति = दुर्गति, दुर् + गुण = दुर्गुण।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए
(i) घर
(ii) खेत
(iii) लाज।
उत्तर
(i) घर = गृह
(ii) खेत = क्षेत्र
(iii) लाज = लज्जा।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(1) अणु-शक्ति
(2) संगीत-प्रेमी
(3) वैज्ञानिक
(4) सपूत।
उत्तर

  1. अणुशक्ति-डॉ. भाभा ने अणु-शक्ति का प्रयोग विकास और शान्ति के कार्यों के लिए उपयोग करने की सलाह दी।
  2. संगीत-प्रेमी-डॉ. भाभा बचपन से ही संगीत-प्रेमी थे।
  3. वैज्ञानिक-विश्व के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों द्वारा डॉ. भाभा को स्मरण किया जाता है।
  4. सपूत-डॉ. भाभा भारत माता के वह सपूत थे जिन्होंने सदैव चाहा कि अणुशक्ति का उपयोग केवल मानव कल्याण के लिए किया जाये।

MP Board Solutions

प्रश्न 8.
निम्नलिखित वाक्यों में से मुख्य क्रिया और सहायक क्रिया छाँटकर लिखिए
(क) गोपाल स्कूल जाता है।
(ख) वह पुस्तक पढ़ चुका है।
(ग) सौता पत्र लिख रही है।
(घ) राम स्कूल गया था।
उत्तर
(क) ‘जाना’ मुख्य क्रिया, ‘है’ सहायक क्रिया।
(ख) ‘पढ़ना’ मुख्य क्रिया, ‘है’ सहायक क्रिया।
(ग) “लिखना’ मुख्य क्रिया, ‘है’ सहायक क्रिया।
(घ) ‘जाना’ मुख्य क्रिया, था’ सहायक क्रिया।

डॉ. होमी जहाँगीर भाभा परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) डॉक्टर भाभा अणु-शक्ति से अणुबम बनाने के पक्ष में नहीं थे। अणुबम से लाखों लोगों की जान चली जाती है। इसलिए वे अणु-शक्ति का प्रयोग शांतिपूर्ण, रचनात्मक कार्यों के लिए करना चाहते थे।

सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा भारती’ के’डॉ. होमी जहाँगीर भाभा’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक डॉ. सुखदेव दुबे व अन्य लेखकगण हैं।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में डॉ. भाभा की दूरदर्शिता का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-डॉ. होमी जहाँगीर भाभा अणु’ की शक्ति को पहचानते थे। साथ ही, वह यह भी जानते थे कि ‘अणुबम’ के रूप में इसकी ताकत का गलत उपयोग, मानव सभ्यता के लिए काफी खतरनाक होता है। अणुबम के विध्वंस से पलभर में हजारों-लाखों जिन्दगियाँ काल के गाल में समा जाती हैं। अत: वे अणु-शक्ति का सही उपयोग करके इस विलक्षण ‘ऊर्जा’ को मानव की सेवा में तथा शांतिपूर्ण एवं रचनात्मक कार्यों में लगाना चाहते थे।

(2) उनकी कलात्मक रुचि का परिणाम है कि दाम्बे के अणु-शक्ति संस्थान में बगीचे तथा पौधों की सजावट सौन्दर्यपूर्ण एवं कलापूर्ण दिखाई देती है। टाटा इंस्टीट्यूट की गैलरियों तथा कमरों में सजे चित्र एवं वहाँ के उपवन उनकी वैज्ञानिकता एवं कलात्मकता के सुन्दर संगम हैं।

संदर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में डॉ. भाभा की कलात्मकता एवं रुचियों का वर्णन किया है।

व्याख्या-डॉ. भाभा के अन्दर कला के प्रति रुझान था जिसका नतीजा यह है कि उन्होंने अणुशक्ति केन्द्र ट्राम्बे में एक बगीचा विकसित किया है। इस बगीचे कों अनेक पेड़-पौधों से सुन्दर बनाया है, उसकी सजावट में इन्हीं पौधों को विशेष महत्व है। यह सजावट अति कलापूर्ण है। टाटा इन्स्टीट्यट की गैलरियों और अन्य कमरों की सजावट भी चित्रों द्वारा की गई है। ये चित्र भी डॉ. भाभा की कलात्मक रुचि को प्रकट करते हैं। वहाँ के बगीचे और समीप वाले उपवनों के विकास में वैज्ञानिकता झलकती है और उनकी कला का अनोखा जोड़ है, मिश्रण है। इस तरह डॉ. भाभा की वैज्ञानिकता में उनकी कलात्मकता का योग बेजोड़

MP Board Solutions

(3) भारत के इस महान सपूत की स्मृति में ट्रॉम्बे के अणु-शक्ति केन्द्र का नाम बदलकर ‘भाभा अणु-शक्ति अनुसन्धान केन्द्र’ कर दिया गया। डॉ. भाभा आज भले ही हमारे बीच न हों परन्तु उन्होंने विज्ञान जगत को जो अमूल्य योगदान दिया है उससे भावी वैज्ञानिकों को सदा मार्गदर्शन मिलता रहेगा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-डॉ. भाभा के द्वारा विज्ञान जगत के लिए किए गए कार्यों का महत्व बताया गया है।

व्याख्या-डॉ. भाभा भारत के बहुत बड़े महत्वपूर्ण पुत्र थे। वे आज इस दुनिया में हमारे बीच नहीं हैं, परन्तु विज्ञान के संसार में उन्होंने जो भी हमारे लिए किया है, उसका महत्व महान है। विज्ञान जगत में किया गया उनका कार्य बेजोड़ है। उनकी यादगार के लिए ही ट्रॉम्बे के अणुशक्ति केन्द्र का नाम बदल दिया है और उसका नाम ‘भाभा अणु-शक्ति अनुसन्धान केन्द, कर दिया गया है। उनके वैज्ञानिक प्रयोगों और खोजों से भविष्य के वैज्ञानिकों को उस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए दिशा-निर्देशन मिलेगा और मानवता की भलाई होती रहेगी। संसार में सुख-समृद्धि होती रहेगी।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 2 कटुक वचन मत बोल प्रश्न उत्तर हिंदी

In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 2 कटुक वचन मत बोल PDF download, Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 2, these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 2 Katuk Vachan Mat Bol Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 2 Katuk Vachan Mat Bol Questions and Answers

Class 6 Hindi Chapter 2 Katuk Vachan Mat Bol प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) दाँत जल्दी टूट जाते हैं क्योंकि वे होते हैं
(i) छोटे,
(ii) संख्या में अधिक,
(iii) कठोर,
(iv) कमजोर।
उत्तर
(iii) कठोर

(ख) मधुर वचन है
(i) तीर,
(ii) औषधि
(iii) नीर
(iv) क्षार।
उत्तर
(ii) औषधि।

MP Board Solutions

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 2 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) शरीर में ……..” अच्छी नहीं है तो सब बुरा-बुरा है।
(ख) वाणी का वरदान मात्र ……. को मिला है।
(ग) वाक्चातुर्य से कटु सत्य को प्रिय और “…” बनाया जा सकता है।
(घ) वाणी के दुरुपयोग से स्वर्ग भी ……. में परिणत हो सकता है।
उत्तर
(क) अगर जीभ
(ख) मानव
(ग) मधुर
(घ) नर्क।

Class 6 Hindi Chapter 2 MP Board प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) मालिक ने लुकमान की बुद्धिमानी की परीक्षा किस प्रकार ली?
उत्तर
मालिक ने लुकमान की बुद्धिमानी की परीक्षा यह प्रश्न पूछकर ली कि शरीर का कौन-सा हिस्सा सबसे अच्छा और सबसे बुरा होता है।

(ख) जिज्ञासु ने कन्फ्यूशस से क्या प्रश्न किया?
उत्तर
जिज्ञासु ने कन्फ्यूशस से प्रश्न किया कि सबसे दीर्घजीवी कौन होता है।

(ग) श्रीमती शास्त्री नौकर पर क्रोधित क्यों हुई?
उत्तर
श्रीमती शास्त्री नौकर पर क्रोधित इसलिए हुई क्योंकि उससे कोई काम बिगड़ गया था।

MP Board Solutions

(घ) राजा ने स्वप्न में क्या देखा?
उत्तर
राजा ने स्वप्न में देखा कि उसके सारे दाँत टूट गए हैं।

(ङ) बुलबुल और फूल का संवाद लिखिए।
उत्तर
बुलबुल ने सुबह-सुबह ताजे खिले फूल से कहा-“अभिमानी फूल! इतराओ मत ! इस बाग में तुम्हारे जैसे बहुत फूल खिल चुके हैं।” (इस पर) फूल ने हँसकर कहा, “मैं सच्ची बात पर नाराज नहीं होता, पर एक बात है कि कोई भी अपने प्रिय से कड़वी बात नहीं कहता।”

MP Board Class 6 Hindi Chapter 2 प्रश्न 4. तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) लुकमान ने अपने मालिक के दोनों प्रश्नों के उत्तर में जीभ’ ही क्यों कहा?
उत्तर
लुकमान ने अपने मालिक के दोनों प्रश्नों के उत्तर में ‘जीभ’ ही कहा क्योंकि जीभ अच्छी है, तो सब अच्छा ही अच्छा है और अगर शरीर में जीभ अच्छी नहीं है तो सब बुरा ही बुरा है। जीभ के कारण ही सारी बुराई और भलाई है।

(ख) ‘जो नम्र होता है, वही अधिक समय तक जीता है’, एक उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
जो नम्र होता है, वही अधिक समय तक जीता है; इस बात को इस उदाहरण से समझा जा सकता है। जीभ दाँतों से पहले पैदा होती है और दाँत बाद में। परन्तु दाँत अपनी कठोरता के कारण पहले टूट जाते हैं (पहले चले जाते हैं) परन्तु जीभ कोमल होती है, लचीली होती है, नम्र होती है। इसलिए वह दीर्घजीवी है अधिक समय तक जीती है।

MP Board Solutions

(ग) ‘जीभ ने दुनिया में बड़े-बड़े कहर ढाए हैं’, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
जीभ के दुरुपयोग से समाज में नर्क तुल्य कष्टमय वातावरण पैदा हो जाता है। वाणी के प्रयोग से ही समाज में खुशहाली छा सकती है परन्तु जब उसका सही उपयोग नहीं होता तो पूरा संसार संकट में पड़ जाता है। महाभारत युद्ध भी जीभ के दुरुपयोग के कारण ही हुआ।

(घ) ‘वाणी तो सभी को मिली हुई है परन्तु बोलना किसी-किसी को ही आता है’, भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
सभी लोगों को ‘जीभ’ (वाणी) मिली हुई है। वे इसके उपयोग को ठीक तरह नहीं जानते। वे बोलने की कला के जानकार नहीं हैं। कोई बात प्रेम की वर्षा करती है, तो किसी के द्वारा बोले गए शब्द कई झगड़ों को पैदा कर देते हैं। यहाँ तक कि इस जीभ का सही उपयोग सुख-शान्ति देने वाला है तो कहीं इसके विपरीत दुःख और कलह पैदा करने वाला भी होता है। अत: वाणी के सदुपयोग की कला किसी-किसी को ही प्राप्त है।

(ङ) ‘कटुक वचन मत बोल’, पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर
‘कटुक वचन मत बोल’ पाठ से हमें शिक्षा मिलती है कि मनुष्यों को हमेशा विनम्र और मधुरभाषी होना चाहिए। विनम्रता और प्रेमपूर्ण भाषा के प्रयोग से मनुष्य दीर्घजीवी होता है। कड़वी बात से झगड़े-झंझट पैदा होते हैं। अतः हमें सदैव मृदुभाषी होना चाहिए।

Class 6 Bhasha Bharti Chapter 2 प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) ‘तीन इंच की जीभ, छः फुट के आदमी को मार सकती है’, कैसे?
उत्तर
मनुष्य की जीभ मात्र तीन इंच लम्बी होती है। परन्तु इससे कहे गए कटुवचन छ: फुट लम्बे आदमी के तन-मन को वेध देते हैं। वह मरा हुआ सा हो सकता है। इस वाणी के दुरुपयोग से संसार में अनेक झगड़े पैदा हो जाते हैं।

MP Board Solutions

(ख) ‘किसी का हृदय कटु वाणी से दुःखी नहीं करना चाहिए’, क्यों?
उत्तर
कटु वाणी से किसी भी मनुष्य को दुखी नहीं करना चाहिए, क्योंकि कटु वचन (तेज) वाण (तीर) के समान होता है। वह कानों के मार्ग से प्रवेश करके सारे शरीर को वेध डालता है। कटु वचन से सारा शरीर जलकर राख हो जाता है।

(ग) ‘बातन हाथी पाइए, बातन हाथी पाँव, का क्या आशय है?
उत्तर
बातों के द्वारा ही मनुष्य असम्भव को भी सम्भव बना सकता है, यदि वह अपनी जीभ का सदुपयोग करता है। मृदु वचन और नम्रतापूर्ण आचरण से मनुष्य महत्त्वपूर्ण बन सकता है और इसके विरुद्ध आचरण से अर्थात् कटु वचन से वह अपने महत्त्व को खो देता है। बात के बोलने का ढंग उसे समाज में आदरणीय और निरादरणीय बना सकता है।

Class 6th Hindi Chapter 2 MP Board प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए

(क) यदि लुकमान की जगह आप होते तो मालिक के प्रश्नों का क्या उत्तर देते?
उत्तर
लुकमान की जगह यदि मैं होता तो उसके प्रश्नों का उत्तर यही देता कि जीभ के कारण ही संसार में सारी भलाई और बुराई है। जीभ से मृदु वचन बोलने पर सर्वत्र सुख ही सुख होगा परन्तु कटु वचन बोलने पर सर्वत्र कलह और कटुताएँ ही होंगी।

(ख) हमें वाणी का वरदान न मिला होता तो क्या होता?
उत्तर
मनुष्य को ईश्वर ने वाणी का वरदान दिया है, जिससे वह अपने दुःख-सुख के भावों को अपने दूसरे साथियों से कह लेता है। दूसरों के भावों को सुनकर उनकी सहायता कर लेता है। वाणी के वरदान के न मिलने की दशा में यह सारा जगत मूक बना होता।

भाषा की बात

Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 2 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और लिखिए
व्यक्तित्व, विदीर्ण, प्रशंसा, वाणी, बुद्धिमान।
उत्तर
कक्षा में अपने अध्यापक की सहायता से शुद्ध उच्चारण करके अभ्यास करें और लिखें।

MP Board Class 6th Hindi Chapter 2 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी लिखिए
जिग्यासु, दाशनिक, हिरदय, प्रसनशा, हंसकर।
उत्तर
जिज्ञासु, दार्शनिक, हृदय, प्रशंसा, हँसकर।

MP Board Solutions

Class 6 Hindi Chapter 2 Bhasha Bharti प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
स्वप्न, लोकप्रिय, ऐश्वर्य, कारावास, अभिमानी।
उत्तर
स्वप्न-युवकों को स्वप्न देखने के साथ ही कर्मशील भी होना चाहिए।
लोकप्रिय-मृदुभाषी और नम्र व्यक्ति लोकप्रिय होता है। ऐश्वर्य-शुद्ध आचरण से व्यक्ति ऐश्वर्य प्राप्त करता है।
कारावास-आजादी के लिए आन्दोलन करने वाले देशभक्तों को कारावास दिया गया।
अभिमानी-अभिमानी व्यक्ति कभी भी आदर नहीं पाता है।

Class 6th Hindi Chapter 2 Katuk Vachan Mat Bol प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों में से विकारी और अविकारी शब्द छाँटकर लिखिए
लड़की, तालाब, गाँव, ही, भी, नगर, तथा, इधर ।
उत्तर
(क) विकारी शब्द-लड़की, तालाब, गाँव, नगर।
(ख) अविकारी शब्द-ही, भी, तथा, इधर ।

कटुक वचन मत बोल परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

(1) वाणी तो सभी को मिली हुई है परन्तु बोलना किसी-किसी को ही आता है। बोलते तो सभी हैं किन्तु क्या बोलें, कैसे शब्द बोलें, कब बोलें-इस कला को बहुत कम लोग जानते हैं। एक बात से प्रेम झरता है, दूसरी बात से झगड़ा होता है। कड़वी बात ने संसार में न जाने कितने झगड़े पैदा किए हैं। जीभ ने दुनिया में बड़े-बड़े कहर बाए हैं। जीभ होती तो तीन इंच की ही है, पर वह पूरे छह फुट के आदमी को मार सकती है।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा-भारती’ के ‘कटुक वचन मत बोल’ नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक रामेश्वर दयाल दुबे हैं।

प्रसंग-इस गद्यांश में बताया गया है कि वाणी से ही प्रेम और कटुता (दुश्मनी) पैदा होती है।

व्याख्या-लेखक का कथन है कि वाणी (जीभ) सभी को प्राप्त है परन्तु उससे बोलना तो किसी-किसी को ही आता है। बहुत कम लोग बोलना जानते हैं। वाणी का प्रयोग हर कोई ठीक से नहीं कर पाता। ऐसा देखा जाता है कि कुछ लोगों की वाणी से प्रेम झलकता है, तो किसी की बात इतनी चुभने वाली होती है कि झगड़ा हो जाता है। कड़वी बात संसार में कितने ही झगड़े पैदा कर देती है और उसका प्रभाव बहुत ही कष्टकारक होता है। बोलने में मात्र तीन इंच की छोटी जीभ का प्रयोग करते हैं परन्तु उसका प्रभाव इतना विनाशकारी होता है कि उससे छः फीट का लम्बा मनुष्य मर जाता है।

MP Board Solutions

(2) संसार के सभी प्राणियों में वाणी का वरदान मात्र मानव को मिला है। उसके सदुपयोग से स्वर्ग पृथ्वी पर उतर सकता है और उसके दुरुपयोग से स्वर्ग भी नर्क में परिणत हो सकता है। महाभारत युद्ध वाणी के प्रयोग का ही परिणाम था।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इस गद्यांश में बताया गया है कि संसार में मनुष्य को वाणी (बोलने की शक्ति) प्राप्त है। इसके ही प्रयोग से इस संसार को स्वर्ग अथवा नर्क बनाया जा सकता है।

व्याख्या-लेखक का कथन है कि संसार में अनेक प्राणी हैं। उनमें से मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जिसे बोलने की शक्ति दी गई है। यह वास्तव में ईश्वर का ही श्रेष्ठ वरदान है। ईश्वर के इस वरदान का उचित और अनुचित प्रयोग ही इस संसार को स्वर्ग (सुखमय) और नर्क (दुःखमय) बना सकता है। वाणी के अनुचित प्रयोग से ही कौरव और पाण्डवों के मध्य ‘महाभारत’ युद्ध हुआ। कटु वाणी के प्रयोग का प्रतिफल विनाशकारी युद्ध हुआ। इस वरदान का उचित और अनुचित प्रयोग ही इस संसार को स्वर्ग (सुखमय) और नर्क (दुःखमय) बना सकता है। वाणी के अनुचित प्रयोग से ही कौरव और पाण्डवों के मध्य ‘महाभारत’ युद्ध हुआ। कटु वाणी के प्रयोग का प्रतिफल विनाशकारी युद्ध हुआ।

(3) सदा से यह कहा जाता रहा है कि किसी का हृदय अपनी कटु वाणी से दुखी मत करो।
‘मधुर वचन है औषधि, कटुक वचन है तीर।
श्रवण मार्ग होइ संचरै, वेधै सकल शरीर॥
कटुक वचन सबसे बुरा, जारि करै तन छार।
साधु वचन जल रूप है, बरसै अमृत धार॥
कुदरत को नापसन्द है सख्ती जबान में।
इसलिए तो दी नहीं हड्डी जबान में॥
जो बात कहो, साफ हो, सुथरी हो, भली हो।
कड़वी न हो, खट्टी न हो, मिश्री की डली हो॥

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में लेखक ने किसी कवि की उक्तियों को उदाहरण रूप में प्रस्तुत करके कहा है कि कड़वी बात कहकर किसी को भी दुःख नहीं पहुँचाना चाहिए।

व्याख्या-लेखक का कथन है कि अपने कटु वचनों से किसी को भी कष्ट नहीं पहुँचाना चाहिए ; क्योंकि मीठी वाणी एक औषधि है जिससे मनुष्य अपने तन और मन से स्वस्थ रहता है, जबकि कड़वा वचन तीर (वाण) के समान है जो कानों के मार्ग से प्रवेश पाकर सारे शरीर को वेध देता है। कटु वचन सबसे बुरा है जिससे सारा शरीर जलकर (राख) हो जाता है जबकि सज्जन की मधुर वाणी शीतल जल के समान है जो बरसकर (कहे जाने पर) सुनने वाले व्यक्ति पर अमृतधारा जैसा  प्रभाव डालती है (जिससे शारीरिक और मानसिक ताप (कष्ट) समाप्त हो जाते हैं।

लालबहादुर शास्त्री की शेर के माध्यम से मधुर वाणी की विशेषता बताते हुए लेखक कहता है कि वाणी की कटुता प्रकृति को भी पसन्द नहीं है, तभी तो जीभ में कठोर हड्डी नहीं दी है। इसलिए सदैव साफ सुथरी और मीठी बात बोलनी चाहिए। बात में कटुता, खटास न हो, वह तो मिश्री की डेली के समान मिठास युक्त हो।

MP Board Solutions

(4) सत्य कभी-कभी कड़वा भी होता है। कुछ अप्रिय बातें कहनी ही पड़ती हैं किन्तु ऐसे अवसर पर होना यह चाहिए कि बात भी कह दी जाए और उसमें वह कड़वाहट भी न आने पाए जो दूसरे के हृदय को विदीर्ण कर दे। जरूरी नहीं है कि जीभ की कमान से सदा वचनों के बाण ही छोड़े जाएँ। वाक्- चातुरी से कटु
सत्य को प्रिय और मधुर बनाया जा सकता है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में बताया गया है कि कटु-सत्य को अपनी वाणी की चतुराई से प्रिय और मीठा बनाया जा सकता है।

व्याख्या-लेखक कहता है कि सत्य के कथन में कभी-कभी कटुता भी आ जाती है। देखा जाता है कि कुछ ऐसी बातें होती हैं कि वे सुनने में अप्रिय और कटु हों, परन्तु उनका कथन अति आवश्यक होता है। ऐसी दशा में हमें चाहिए कि उस अप्रिय (सत्य) बात को कहते हुए कड़वाहट भी पैदा न हो तथा सुनने वाले के हृदय पर भी कोई चोट न पहुँचे। यह देखना चाहिए कि अपनी वाणी से ऐसे वचन कभी न कहें कि जिससे दूसरे का मन आहत हो। अपनी वाणी से चतुराई पूर्वक ऐसे वचन बोलने चाहिए जिसके द्वारा कड़वा सत्य भी मीठा और प्रिय लगे।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 6 विजय गान प्रश्न उत्तर हिंदी

In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 6 विजय गान PDF download, Class 6 Hindi Chapter 6 Question Answer, these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 6 Vijay Gan Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 6 Vijay Gan Questions and Answers

Vijay Gan Class 6 प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) पथ में बरस रही हैं
(i) चिंगारियाँ
(ii) बाधाएँ,
(iii) शक्तियाँ
(iv) बिजलियाँ।
उत्तर
(ii) बाधाएँ

(ख) धरा संतप्त हो रही है
(i) पुण्य से
(i) दया से,
(iii) दान से
(iv) पाप से।
उत्तर
(iv) पाप से

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 6 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) वीरों को ………… की धारों पर चलना पड़ता है।
(ख) नभ मण्डल को नित ………………. उगलने दो।
(ग) दृढ़ निश्चय से ………………. डर जाता है।
(घ) दुर्गम सागर सुखाने के लिए तुम ………… हो।
उत्तर
(क) तलवारों
(ख) अंगार
(ग) काल स्वयं
(घ) अगस्त्य।

Class 6 Hindi Chapter 6 MP Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो वाक्यों में लिखिए

(क) वीरों के पथ में क्या बरस रही हैं ?
उत्तर
वीरों के पथ में बाधाएँ बरस रही हैं।

(ख) अंगार उगलने के लिए किससे कहा गया है?
उत्तर
अंगार उगलने के लिए नभ मण्डल से कहा गया है।

(ग) कवि किससे, किसको टकरा देना चाहता है ?
उत्तर
कवि समुद्र को हिमालय से, सूर्य को चन्द्रमा से, धरती को आकाश से टकरा देना चाहता है।

(घ) कवि तपस्वी बनने के लिए क्यों कह रहा है ?
उत्तर
कवि कह रहा है कि तुम (वीर पुरुष) तपस्वी बन जाओ जिससे तुम्हारे ऊपर माया-मोह का प्रभाव न पड़ सके।

(ङ)’प्राणों की पतवार से कवि का क्या आशय है?
उत्तर
प्राणों की पतवार से कवि का आशय है कि हे वीरो! तुम अपने अन्दर प्राण शक्ति (ऊर्जा) इतनी पैदा कर लो कि तुम्हें बाधाओं के सागर को पार करने में किसी तरह का डर न लगे।

(च) वीरों से काल कब डरने लगता है ?
उत्तर
पक्के इरादे वाले वीरों से काल डरने लगता है।

(छ) ‘विजय गान’ कविता का सार लिखिए।
उत्तर
कवि का आशय है कि श्रेष्ठ वीरों को विजय के मार्ग पर बाधाओं की चुनौती को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ते जाना चाहिए। मनुष्य जीवन एक महासंग्राम है। इसमें अनेक तरह की रुकावटें आती हैं। जीवन की इन रुकावटों पर जीत पाने के लिए साहसपूर्वक सावधानी से आगे ही आगे बढ़ते जाना चाहिए।

तलवार की धार पर चलने के समान दुर्गम जीवन पथ पर चलने के लिए त्याग, तपस्या और पक्के संकल्प की जरूरत होती है। प्राण-शक्ति के सहारे मनुष्य को जीवन के समुद्र को पार करने में सफलता प्राप्त हो सकती है।

MP Board Class 6 Hindi Chapter 6 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांशों का भाव स्पष्ट कीजिए

(क) बरस रही बाधाएँ पथ में उमड़-उमड़ कर धारों से। वीर, सिन्धु के पार उतरते, प्राणों की पतवारों से।
(ख) छूने पाए मोह न तुमको, बनो तपस्वी ! लौह हृदय !
काल स्वयंडर जाये देखकर, ध्रुव से भी ध्रुवतर निश्चय।
उत्तर
खण्ड ‘क’: सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 1 व 3 की व्याख्या देखिए।

भाषा की बात

Class 6 Hindi Chapter 6 Vijay Gan प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
प्राण, संतप्त, ध्रुव, अगस्त्य।
उत्तर
कक्षा में अपने अध्यापक महोदय की सहायता से उच्चारण करना सीखिए और लगातार अभ्यास कीजिए।

Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 6 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की सही वर्तनी कीजिए
बीरबर, निशचय, तलवर, अगार।
उत्तर
वीरवर, निश्चय, तलवार, अंगार।

MP Board Class 6th Hindi Chapter 6 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए. हिमाचल, मंडल, अम्बर, हृदय।
उत्तर

  • हिमाचल-जाड़े के दिनों में हिमाचल बर्फ से ढक जाता है।
  • मंडल-आकाश मंडल से भीषण आग बरस रही है।
  • अम्बर-अम्बर में काले बादल छाए हुए हैं।
  • हृदय-उदार हृदय व्यक्ति आदरणीय होते हैं।

Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 6 प्रश्न 4.
कविता की पहली पंक्ति में ‘सम्हल-सम्हल’ का प्रयोग हुआ है। ऐसे अन्य पदों को छाँटिए जिनमें एक ही शब्द का दो बार प्रयोग हुआ हो।
उत्तर
सम्हल-सम्हल, उमड़-उमड़, घुमड़-घुमड़।

Bhasha Bharti Class 6 प्रश्न 5.
इस कविता की जिन पंक्तियों में वर्गों की आवृत्ति हुई है, उन्हें छाँटकर लिखिए।
उत्तर
‘अवनी-अम्बर’ में : ‘अ’ वर्ण की।
‘पाप-ताप’ में ‘प’ वर्ण की। ध्रुव से ध्रुवतर, में ‘ध्रु’ एवं व वर्ण की।

Class 6 Hindi Bhasha Bharti प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों में उचित उपसर्ग व प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए ज्ञान, सफल।
उत्तर
अज्ञानता और असफलता।

Vijayakanth Kavita Ka Sar Likhiye प्रश्न 7.
पर्यायवाची शब्द लिखिएसूर्य, चन्द्रमा, सिन्धु, अग्नि, अम्बर।
उत्तर

  • सूर्य = भानु, भास्कर, सूरज, दिवाकर, दिनकर, आदित्य।
  • चन्द्रमा = चन्द्र, शशि, रजनीकर, शीतकर, सुधांशु, सुधाकर, राकापति।
  • सिन्धु = समुद्र, सागर, वारिधि, पयोधि, नीरधि।
  • अग्नि =आग, वैश्वानर, अनल, पावक, हुताशन।
  • अम्बर = आकाश, क्षितिज, अन्तरिक्ष, नभ, गगन, व्योम।

विजय गान सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या 

(1) सम्हल-सम्हल कर चलो वीरवर,
तलवारों की धारों पर!
इधर-उधर हैं खाई-कुएँ, ऊपर है सूना अम्बर
बरस रहीं बाधाएँ पथ में,
उमड़-उमड़ कर धारों से।
वीर, सिन्धु के पार उतरते,
प्राणों की पतवारों से।
टकराने दो सिन्धु-हिमाचल,
सूर्य-चन्द्र अवनी-अम्बर।
सम्हल-सम्हल कर चलो वीरवर,
तलवारों की धारों पर।

शब्दार्थ-सम्हल=सम्हल कर सावधानीपूर्वक। वीरवर = श्रेष्ठवीर। अम्बर = आकाश। बाधाएँ = रुकावटें। पथ = मार्ग। सिन्धु = समुद्र। अवनी = धरती।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक भाषा-भारती’ की ‘विजय गान’ नामक कविता से ली गई हैं। इस कविता के रचयिता नटवरलाल ‘स्नेही’ हैं।

प्रसंग-कवि ने कठिनाइयों में भी सावधानीपूर्वक अपने जीवन रूपी मार्ग पर लगातार चलते रहने का आह्वान किया है।

व्याख्या-कवि कहता है कि हे श्रेष्ठ वीरो ! तुम्हें चुनौतियों भरे अति कठिनाइयों वाले जीवन पथ पर सावधानीपूर्वक चलते जाना चाहिए। जीवन का मार्ग कठिनाइयों की, खाइयों और कुओं (रुकावटों) से बाधित है। ऊपर आकाश सूना है। तुम्हारे मार्ग में रुकावटों की वर्षा हो रही हैं।

ये बाधाएँ वर्षा की जलधारा के समान झड़ी लगाए उमड़ रही हैं। (परन्तु तुम्हें घबराना नहीं चाहिए क्योंकि तुम वीर हो और) वीर तो अपने प्राणों की पतवार से (प्राणों की बाजी लगा करके) विपत्तियों के सागर को पार कर जाते हैं। चाहे, समुद्र और हिमालय, सूर्य और चन्द्रमा तथा धरती और आकाश आपस में क्यों न टकरा जाएँ, तुम्हें तो हे श्रेष्ठ वीरो! सावधानी से तलवारों की धार पर भी अपने मार्ग पर आगे ही आगे बढ़ते जाना है।

(2) पापों से संतप्त धरा का
पाप, ताप में जलने दो।
घुमड़-घुमड़ कर नभ मंडल को
नित अंगार उगलने दो।
जल जाएगा पाश पुराना, परवशता अंचल जर्जर।
सम्हल-सम्हल कर चलो वीरवर तलवारों की धारों पर।

शब्दार्थ-संतप्त =कष्ट पाती हुई। ताप = ऊष्मा, गर्मी। पाश = जाल। परवशता = गुलामी। अंचल= आंचल जर्जर = जीर्ण क्षीर्ण, पुराना और फटा हुआ।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।
प्रसंग-इस पद्यांश में सारी धरती से पुरानापन तथा गुलामी के पुराने अंचल को जलाकर भस्म कर देने के लिए आह्वान किया गया है।
व्याख्या-कवि कहता है कि यह धरती अनेक तरह से किए गए पापों से संताप के कष्ट पा रही है। इसे पाप की ताप (आग) से जलने दो। सारा आकाश मण्डल भी बार-बार उमड़-घुमड़ कर अंगारे उगलने लग जाय जिससे पुरानी गुलामी का झीना सा जर्जर जाल जलकर समाप्त हो जाए। इसलिए, हे श्रेष्ठ वीरो ! तुम सावधानीपूर्वक तलवारों की धार पर चलते चलो (जीवन की अनेक बाधाओं को दूर करते हुए आगे बढ़ते चलो।)।

(3) छूने पाए मोह न तुमको,
बनो तपस्वी! लौह हृदय। काल स्वयं डर जाय देखकर,
ध्रुव से भी ध्रुवतर निश्चय। हो अगस्त्य,
क्या कठिन सुखाना बाधा का दुर्दम सागर।
सम्हल-सम्हल कर चलो वीरवर तलवारों की धारों पर।

शब्दार्थ-लौह हृदय = लोहे से बने पक्के हृदय वाले। ध्रुव = अटल। निश्चय = इरादा। अगस्त्य = एक ऋषि का नाम जिन्होंने अपनी अंजलि से सारे समुद्र को पीकर सुखा दिया था। बाधा – रुकावट। दुर्दम = जिसे वश में करना बहुत ही कठिन होता है। सागर = समुद्र।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि भारत के वीरों को पक्के इरादे से भयभीत न होकर बाधाओं पर विजय प्राप्त करने का आह्वान करता है।

व्याख्या-हे वीरो! तुम्हें किसी भी तरह का मोह भी छू न सके, इसके लिए तुम्हें एक तपस्वी बन जाना चाहिए। तुम्हें लोहे के हृदय वाला हो जाना चाहिए जिससे काल भी भयभीत हो उठे। तुम्हें अत्यन्त पक्के इरादों वाला हो जाना चाहिए। हे वीरवरो! तुम्हें अगस्त्य ऋषि के समान बन जाना चाहिए जिससे बाधाओं के दुर्दमनीय (कठिनाई से वश में किए जाने वाला) सागर को भी वश में करना तुम्हारे लिए बिल्कुल भी कठिन नहीं होगा। अतः हे श्रेष्ठ वीरो! तुम्हें सम्हल कर तलवार की धार पर चलना है (चुनौतीपूर्ण कार्य करना है।)

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 4 अपना हिन्दुस्तान कहाँ है? प्रश्न उत्तर हिंदी

In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 4 अपना हिन्दुस्तान कहाँ है? PDF download, Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 4, these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 4 Apna Hindustan Kahan Hai Pyara Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 4 Apna Hindustan Kahan Hai Questions and Answers

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 4 प्रश्न 1. सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) हम सब मद में झूम रहे हैं
(i) सत्याग्रह के
(ii) आन्दोलन के
(iii) भूमण्डलीकरण के
(iv) व्यवसायीकरण के।
उत्तर
(iii) भूमण्डलीकरण के

(ख) धन के कोष भरे होने पर भी नहीं है
(i) लालच
(ii) सन्तोष
(iii) दया,
(iv) श्रृंगार।
उत्तर
(ii) सन्तोष।

MP Board Class 6 Hindi Chapter 4 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए(क) जनसेवा का ……. कहाँ है ?
(ख) साक्षरता का ………..” है, चिन्तन का विस्तार नहीं है।
(ग) टी. वी. टेलीफोन बज रहे पर आपस में ……….. बन्द है।
(घ) आओ, खोजें सकल विश्व में अपना ….. कहाँ है ?
उत्तर
(क) भाव
(ख) आन्दोलन
(ग) बात
(घ) हिन्दुस्तान।

MP Board Solutions

Class 6 Hindi Chapter 4 Mp Board प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) हम सारी दुनिया किन साधनों से घूम रहे हैं?
उत्तर
हम सारी दुनिया टी. वी. और टेलीफोन से ही घूम

(ख) साक्षरता से आशय क्या है ?
उत्तर
साक्षरता से यह आशय है कि सभी जन सामान्य स्तर तक पढ़ना-लिखना सीख जाएँ।

(ग) भूमण्डलीकरण का परिवारों पर क्या प्रभाव पड़ा है ?
उत्तर
भूमण्डलीकरण का परिवारों पर यह प्रभाव पड़ा है कि वे बिखर गये हैं। पारिवारिक समरसता समाप्त हो गई है। आपसी सम्बन्ध टूट चुके हैं। परिवार के सदस्य एक-दूसरे से बातचीत तक नहीं करते। उनमें आपसी सम्बन्ध समाप्त हो चुके हैं।

(घ) ‘मन को जो आन्दोलित कर दे’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है ?
उत्तर
मन के भावों को बदल देने वाली काव्य धारा मिट चुकी है। मन में देश प्रेम, समता, एकता, मर्यादा पालन, अन्याय की समाप्ति, न्याय की प्राप्ति के लिए जन-जन में हलचल पैदा करने के लिए काव्य रचना करना क्यों रुक गया है।

(ङ) “धन से कोष भरे हैं लेकिन फिर भी संतोष कहाँ हैं?” का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
लोगों में धन एकत्र करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। उनके खजाने में धन भरा पड़ा है फिर भी वे उचित-अनुचित साधनों से धन एकत्र करने में जुटे हैं। देश, समाज एवं जन की उन्हें चिन्ता नहीं है। वे धन लोलुप बन चुके हैं।

MP Board Solutions

(च) अपना हिन्दुस्तान कहाँ है ?’ कवि का संकेत किस ओर है ?
उत्तर
हिन्दुस्तानी धन कमाने की चेष्टा से देश छोड़कर विदेशों में बस गये हैं। वे अपनी ऊर्जा और ज्ञान का उपयोग विदेशों में कर रहे हैं जिससे वे देश सम्पन्न हो रहे हैं। उन देशों की संस्कृति और सभ्यता उन लोगों पर प्रभाव डाल रही है। वे अपने देश, अपने समाज, अपनी संस्कृति सभ्यता को भूल चुके हैं। यही इस पंक्ति का आशय है।

(छ) कविता में उन्लेखित कवियों के नाम लिखिए।
उत्तर
कविकुल गुरु कालिदास, राजा भोज, सूरदास, तुलसीदास, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, रहीम और रसखान आदि कवियों के नाम का उल्लेख किया है।

Apna Hindustan Kahan Hai प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांशों का भाव स्पष्ट कीजिए।

(क) टी. वी. टेलीफोन बज रहे, पर आपस में बात
अब की कविता लगती जैसे परिवारों का भंग छंद है।

(ख) राजनीति की कूटचाल में, जनसेवा का भाव कहाँ
रामराज में जरा बताओ केवट की वह नाव कहाँ है?
उत्तर
खण्ड ‘क’ : सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 02 व 03 की व्याख्या देखिए।

भाषा की बात

Class 6 Hindi Chapter 4 Apna Hindustan Kaha Hai प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का उच्चारण कीजिए तथा लिखिए. भूमण्डलीकरण, साक्षरता, यंत्र, अपहरण, प्रतिभा, आन्दोलित, श्रृंगार।
उत्तर
अपनी कक्षा में अपने अध्यापक महोदय की सहायता से उच्चारण करें और लगातार अभ्यास कीजिए तथा सावधानी से लिखिए।

MP Board Class 6th Hindi Chapter 4 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की सही वर्तनी लिखिए
हीन्दूस्तान, दुनियाँ, परीवार, मृदु, सन्तोश ।।
उत्तर
हिन्दुस्तान, दुनिया, परिवार, मृदु, सन्तोष।

MP Board Solutions

Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 4 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
संस्कार, आन्दोलन, वैभव, राजनीति, शिक्षा।
उत्तर

  1. संस्कार- भारतीय संस्कृति में सोलह संस्कार बताए गए हैं।
  2. आन्दोलन-सामाजिक परिवर्तन के लिए जनआन्दोलन अनिवार्य है।
  3. वैभव-भारतीय लोग भौतिक वैभव प्राप्त करने के उद्देश्य से विदेशों को पलायन करते जा रहे हैं।
  4. राजनीति-आज देश की राजनीति सही दिशा से भटक गई है।
  5. शिक्षा-शिक्षा का उद्देश्य विस्तृत होना चाहिए।

Class 6 Bhasha Bharti Chapter 4 प्रश्न 4.
इस कविता से योजक चिह्न वाले शब्द छाँटकर लिखिए।
उत्तर
ऊँचे-ऊँचे, जन-जन, बड़ी-बड़ी, बड़े-बड़े,  जन्म-जन्म, दैव-विधान, जन-सेवा, राम-राज।

Class 6th Hindi Chapter 4 Mp Board प्रश्न 5.
‘खोज’ विदेशी शब्द है जो दूसरी भाषा से लिया गया है। ऐसे शब्द आगत शब्द कहलाते हैं। निम्नलिखित शब्दों में से आगत शब्द छाँटकर लिखिए
विश्व, ताकत, जरा, सकल, फूहड़, वैभव, टी.वी., टेलीफोन।
उत्तर
निम्नलिखित ‘आगत’ शब्द हैंताकत, जरा, फूहड़, टी.वी., टेलीफोन।

अपना हिन्दुस्तान कहाँ है? सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) भूमण्डलीकरण के युग में अब अपनी पहचान कहाँ है?
आओ खोजें सकल विश्व में अपना हिन्दुस्तान कहाँ है?
भूमण्डलीकरण के मद में हम सब कैसे झूम रहे|
टी.वी. टेलीफोनों से ही सारी दुनिया घूम रहे हैं।
साक्षरता का आन्दोलन है, चिन्तन का विस्तार कहाँ है।
जन-जन में जो फैल रही, उस शिक्षा में संस्कार कहाँ हैं?
बड़ी-बड़ी खोजें सकल विश्व में अपना हिन्दुस्तान कहाँ है?
आओ खोजें सकल विश्व में, अपना हिन्दुस्तान कहाँ है?

शब्दार्थ-भूमण्डलीकरण = समस्त धरती पर रहने वाले लोगों का एक भाव। सकल = समस्त, सब। विश्व = संसार। मद – घमण्ड, नशा। साक्षरता = सामान्य स्तर तक पढ़ना और लिखना। चिन्तन = सोच, विचारशीलता।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘अपना हिन्दुस्तान कहाँ है’ नामक पाठ से अवतरित है। इसके रचयिता ‘दयाल सिंह पवार’ हैं।

प्रसंग-इस पद्यांश में बताया है कि हम अपनी संस्कृति को इस भूमण्डलीकरण के कारण भुला चुके हैं।

व्याख्या-कवि कहता है कि आज हम भूमण्डलीकरण के इस युग में अपने हिन्दुस्तान की अपनी संस्कृति और सभ्यता को भूलते जा रहे हैं। हमारी संस्कारों की संस्कृति से होने वाली पहचान समाप्त हो रही है, उसे भुला दिया है। इस युग में अब यह आवश्यक हो गया है कि हम अपने हिन्दुस्तान की खोज करें कि उसका सारे विश्व में अस्तित्व है भी अथवा नहीं।

हम सभी भूमण्डलीकरण के मद (नशे) में मतवाले हो गए हैं। टी. वी. और टेलीफोन पर ही सारी दुनिया की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं, यह जानकारी अपूर्ण है, अवास्तविक है। सामान्य स्तर तक शिक्षा का प्रसार करने का आन्दोलन चलाया हुआ है, परन्तु उस शिक्षा प्रसार में विस्तृत चिन्तन नहीं है। इस शिक्षा में संकीर्णता है। सभी लोगों को दी जाने वाली इस शिक्षा से शिक्षार्थियों को संस्कारवान् नहीं बनाया जा रहा है। संस्कार-विहीन शिक्षा लोगों का कल्याण नहीं कर सकती। सारे विश्व में बड़ी-बड़ी खोजें की जा रही हैं। लेकिन लगता है अपना हिन्दुस्तान तो कहीं खो गया है। उसका ‘विश्वगुरुत्व’ चला गया है। इसलिए अब हम सब अपने हिन्दुस्तान को इस विश्व में खोज निकालें।

MP Board Solutions

(2) महानगर में गगन चूमते ऊँचे-ऊँचे भवन खड़े हैं।
बड़े-बड़े भवनों में झांकें तो टूटे परिवार पड़े हैं।
टी.वी. टेलीफोन बज रहे पर आपस में बात बन्द है।
अबकी कविता लगती जैसे परिवारों का भंग छन्द है।
जन्म-जन्म के बन्धन वाला बोलो दैव-विधान कहाँ
आओ खोजें सकल विश्व में अपना हिन्दुस्तान कहाँ है?

शब्दार्थ-महानगर = बड़े-बड़े शहर। गगन चूमते = आकाश को छूने वाले (बहुत ऊँचे-ऊँचे)। भवन = मकान। झाँके = देखें (ध्यान से देखें तो)। टूटे = अलग-अलग। बात बन्द है = बातचीत नहीं होती। भंग= टूटा हुआ। दैव-विधान = देवताओं द्वारा बनाया नियम।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि ने बताया है कि आज हिन्दुस्तान की पारिवारिक समरसता टूट गई है।

व्याख्या-बड़े-बड़े शहरों में आकाश को छूने वाले बहुत ऊँचे-ऊँचे भवनों (घरों) का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन इन भवनों में ध्यान से झाँक कर देखें तो पता चलता है कि इनमें रहने वाले परिवार बिखर गये हैं, वे अलग-अलग रह रहे हैं। सम्मिलित परिवारों का रूप समाप्त हो गया है। टी. वी. और टेलीफोनों पर ही बातचीत कर ली जाती है, लेकिन परिवार के सदस्य परस्पर बातचीत नहीं करते।

आज के कवियों द्वारा रचित कविताओं में बिखरे परिवारों के टूटे छन्द दीख पड़ते हैं। भारत की संस्कृति देवताओं द्वारा विकसित की गई है परन्तु उस संस्कृति के दैवीविधानों (नियमों) का पालन नहीं हो रहा। जन्म-जन्मान्तर के बन्धनों का विधान, लगता है, समाप्त कर दिया गया। अत: आज आवश्यकता है, इस बात की कि हम इस विश्व में अपने खोए हुए, बिखरे हुए हिन्दुस्तान को खोजें।

(3) यंत्रों की ताकत के भीतर, मंत्रों का मृदु घोष कहाँ
धन के कोष भरे हैं लेकिन फिर भी वह सन्तोष कहाँ है?
राजनीति की कूट चाल में जन सेवा का भाव कहाँ
रामराज में जरा बताओ केवट की वह नाव कहाँ है?
कितने ही अपहरण हो रहे किन्तु कहो हनुमान कहाँ है?
आओ खोजें सकल विश्व में अपना हिन्दुस्तान कहाँ

शब्दार्थ-यंत्र = औजार। ताकत = शक्ति। मृदु = कोमल। घोष = ध्वनि। कोष = खजाने। कूट = कुटिल (टेढ़ी-मेढ़ी)। केवट = नाविक। अपहरण = बलपूर्वक चुराना।

संदर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि कहता है कि हमारे वेद मंत्रों की कोमल ध्वनि लुप्त ह्ये गयी है। विविध यंत्रों का आविष्कार करके मानव जाति को भी भयभीत बनाया जा रहा है।

व्याख्या-कवि अपनी वाणी से लोगों का आह्वान करता है कि आज विनाशकारी अनेक यंत्रों का आविष्कार किया जा रहा है। लेकिन इन यंत्रों में वैदिक मंत्रों की सी कोमल ध्वनि नहीं है। वेद मंत्रों की मृदु ध्वनि (घोष) में जनकल्याण का सन्देश गूंजता था। आज लोगों के पास अकूत सम्पत्ति है। उनके खजाने भरे पड़े हैं लेकिन इन धनपतियों में सन्तोष नहीं है। वे अधिक से अधिक धन प्राप्त करने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं।

राजनेताओं ने आज की राजनीति को कूटनीति में बदल दिया है जिसकी कुचाल से स्वार्थ पूरा करने में वे लगे हुए हैं। इन राजनेताओं में जन सेवा का भाव नहीं है। आजादी के बाद रामराज की स्थापना का सपना टूट चुका है। रामराज का केवट नाव चलाकर स्वधर्म का पालन करने वाला, पता नहीं कहाँ छिप गया है। समता और एकता विलुप्त हो चुकी है। समाज में अनेक कुकृत्य हो रहे हैं। अपहरण से मर्यादाओं को कुचला जा रहा है। इन मर्यादाओं की रक्षा आवश्यक है। इसके लिए हनुमान सरीखे बुद्धिमान विवेकी बलवान् की जरूरत है। परन्तु वे कहाँ हैं, प्रत्येक हिन्दुस्तानी में उसी विवेक और बल की आवश्यकता है। अतः कवि आह्वान करता है कि इस सारे संसार में अपने गौरवपूर्ण हिन्दुस्तान की खोज करें।

MP Board Solutions

(4) कवि कुल गुरु की सूजन शक्ति का वह पावन संस्कार कहाँ है?
फूहड़ गीतों में खोया जो वह मधुरस शृंगार कहाँ
मन को जो आन्दोलित करक दे, कविता की वह धार कहाँ है?
भोजराज की कविता वाला वह वैभव विस्तार कहाँ
तुलसी, सूर, निराला, दिनकर और रहीम, रसखान कहाँ है?
आओ खोजें सकल विश्व में अपना हिन्दुस्तान कहाँ

शब्दार्थ-सृजन शक्ति = रचना कौशल। पावन = पवित्र । संस्कार = ठीक तरह से किसी भी कार्य को करने का तरीका (शैली)। फूहड़ = असभ्यता से भरे, घृणा पैदा करने वाले। मधुरस- मिठास से भरा । आन्दोलित = हलचल मचा देने वाला। भोजराज = राजा भोज जिन्होंने काव्य साहित्य के विकास के लिए, उसकी अभिवृद्धि के लिए कवियों को प्रोत्साहित किया था।

संदर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-भारतीय साहित्यिक धरोहर की रक्षा करने और उसके विकास के लिए कवि ने अपनी ओजस्वी वाणी में सभी जनों का आह्वान किया है।

व्याख्या-आज कविकुल गुरु कालिदास की सी काव्य रचना करने की शक्ति पैदा करने के पवित्र संस्कार कहाँ छिप गए हैं। मिठास भरा शृंगार रस तो आज के फूहड़ गीतों में खो गया है। मन में उत्साह भर देने वाली कविता की धारा ही कहीं विलुप्त हो गयी है। साथ ही, राजा भोज जैसे साहित्य प्रेमी भी नहीं दीखते जिन्होंने कविता के साहित्यिक विकास को विस्तार दिया था।

आज तुलसीदास, सूरदास, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ और रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जैसे महान कवि भी जन्म नहीं ले रहे जिन्होंने जन-जन में परस्पर आदर्श प्रेम, समता, महानता और राष्ट्रीय एकता के भाव लोगों में भरने के लिए काव्य रचना की। रहीम और रसखान जैसे आदर्श एवं जनकवियों का सर्वत्र अभाव (कमी) दीख रहा है। आज वास्तव में, ऐसे अपने हिन्दुस्तान की विश्वभर में खोज करनी है कि वे अब कहाँ है |

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 5 व्याकरण परिवार प्रश्न उत्तर हिंदी

In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 5 व्याकरण परिवार PDF download, Bhasha Bharati Kaksha 6 Paath 5, these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 5 Vyakaran Parivar Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 5 Vyakaran Parivar Questions and Answers

Class 6 Hindi Chapter 5 Mp Board प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) संज्ञानन्द का काम नहीं हो सकता
(i) विशेषण के बिना
(ii) क्रिया विशेषण के बिना
(iii) विस्मयादिबोधक के बिना,
(iv) क्रिया देवी के बिना।
उत्तर
(iv) क्रिया देवी के बिना

(ख) संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द
(i) क्रिया विशेषण
(ii) विशेषण,
(iii) सम्बन्धबोधक
(iv) क्रिया।
उत्तर
(ii) विशेषण।

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 5 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) अपनी भाषा को बिगाड़कर विदेशी भाषा के शब्दों की मिलावट से हम अपनी संस्कृति पर गहरा “…..” कर रहे हैं।
(ख) महान, महानतर और महानतम शब्द ……..” की अवस्थाएँ हैं।
(ग) क्रिया विशेषण की माँ का नाम ………” है।
(घ) संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य में अन्य शब्दों से सम्बन्ध बताने वाले शब्द ……….” कहलाते हैं।
उत्तर
(क) आघात
(ख) विशेषण
(ग) क्रिया देवी
(घ) सम्बन्धबोधक।

MP Board Solutions

MP Board Class 6 Hindi Chapter 5 प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) विशेषण किसे कहते हैं?
उत्तर
संज्ञा अथवा सर्वनाम शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं।

(ख) सर्वनाम शब्द किन शब्दों के बदले में आते हैं ?
उत्तर
संज्ञा शब्दों के बदले में सर्वनाम शब्द आते हैं।

(ग) समुच्चयबोधक वाक्य में क्या काम करता है?
उत्तर
समुच्चयबोधक वाक्य दो शब्दों या दो या दो से अधिक वाक्यों को जोड़ता है। दो या दो से अधिक वाक्यों को जोड़कर ऐसे उपवाक्यों का निर्माण होता है जो अपना स्वतंत्र अर्थ प्रकट कर सकते हैं।

Class 6 Hindi Chapter 5 Vyakaran Parivar प्रश्न 4.
(क) तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए
उत्तर
संज्ञानन्द और क्रिया देवी के तीन बच्चे हैं-एक पुत्र और दो पुत्रियाँ । पुत्र का नाम ‘सर्वनाम’ है। उनकी दो बेटियों के नाम हैं-विशेषण तथा क्रिया-विशेषण। उनके दो नौकर भी हैं जिनके नाम हैं-सम्बन्धबोधक तथा समुच्चयबोधक।

(ख) व्याकरण के परिवार में विशेषण का क्या महत्त्व
उत्तर
व्याकरण के परिवार में विशेषण का बहुत बड़ा महत्त्व है। विशेषण संज्ञा और सर्वनाम की विशेषताओं, उनके गुणों को बताने वाला शब्द है। विशेषण की तीन अवस्थाएँ होती हैं

  • सामान्य अवस्था
  • तुलनात्मक अवस्था
  • उत्तमावस्था। जैसे-विशाल, विशालतर, विशालतम।

MP Board Solutions

(ग) हिन्दी भाषा के जन्म की कहानी लिखिए।
उत्तर
हिन्दी भाषा का जन्म संस्कृत भाषा से हुआ है। संस्कृत भाषा हमारे देश की सबसे प्राचीन भाषा है। हिन्दी भाषा के अतिरिक्त संस्कृत से ही प्राकृत और पाली भाषाओं का जन्म हुआ है। प्राकृत भाषाओं से अपभ्रंश भाषा विकसित हुई है। इसी अपभ्रंश से हिन्दी का धीरे-धीरे विकास हुआ है। हिन्दी भाषा की विशेषता है कि इसमें जो बोला जाता है, वही लिखा जाता है।

(घ) क्रिया-विशेषण और सम्बन्धबोधक में क्या अन्तर
उत्तर
क्रिया-विशेषण-वाक्य की क्रिया की विशेषता बताता है। इसके अतिरिक्त विशेषण और स्वयं अपनी अर्थात् क्रिया-विशेषण की भी विशेषताओं का उल्लेख करती है।
सम्बन्धबोधक-किसी संज्ञा या सर्वनाम के पहले प्रयुक्त संज्ञा अथवा सर्वनाम के साथ उनके परस्पर सम्बन्ध को स्पष्ट करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

Vyakaran Parivar Class 6 प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) क्रिया-विशेषण, विशेषण से किस प्रकार भिन्न
उत्तर
क्रिया-विशेषण द्वारा किसी वाक्य की क्रिया, उसमें प्रयुक्त विशेषण अथवा दूसरी क्रिया-विशेषण की विशेषता बताई जाती है। जबकि विशेषण अपने वाक्य में प्रयुक्त किसी संज्ञा या सर्वनाम की ही विशेषता स्पष्ट करता है। यही दोनों में अन्तर है।

(ख) संकट के समय यदि आपके मित्र साथ छोड़ दें तो आप क्या करेंगे?
उत्तर
संकट के समय यदि हमारा मित्र अचानक साथ छोड़ देता है, तो हमें अचम्भा या विस्मय होता है। लेकिन हम प्रयास करेंगे कि उस मित्र की सहायता या सहयोग हमको मिले। यदि किसी कारण वैसा नहीं होता है तो हमें स्वयं संकट का मुकाबला करने को तैयार रहना चाहिए। साहसपूर्वक आने वाले संकट की घड़ी में धैर्यपूर्वक अपने कर्त्तव्य का पालन करते रहना चाहिए।

(ग) विस्मयादिबोधक शब्दों से हम अपने मन के किन-किन भावों को प्रकट करते हैं ?
उत्तर
विस्मयादिबोधक शब्द हमारे मन के भय, आक्रोश, कष्ट, खुशी, प्रशंसा, अचम्भा आदि भावों को प्रकट करता है।

MP Board Solutions

Class 6th Hindi Chapter 5 Vyakaran Parivar प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए

(क) क्या आप समुच्चयबोधक शब्दों के अभाव में अपनी बात पूरी कर सकते हैं ?
उत्तर
हम समुच्चयबोधक शब्दों के अभाव में अपनी बात पूरी कर तो सकते हैं परन्तु अनावश्यक रूप से शब्दों की आवृत्ति बढ़ने से वाक्य की संरचना का रूप बिगड़ जाएगा।

(ख) यदि भाषा में क्रिया का प्रयोग न किया जाए तो क्या होगा?
उत्तर
भाषा में क्रिया के प्रयोग के बिना बात का उद्देश्य पता नहीं चलेगा। अर्थ समझ में नहीं आने पर भाषा का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।

(ग) यदि व्याकरण में सर्वनामों का प्रयोग न होता तो भाषा पर क्या प्रभाव पड़ता?
उत्तर
सर्वनामों के प्रयोग के बिना भाषा की सुन्दरता समाप्त ही हो जाती और संज्ञाओं के प्रयोग बार-बार करने पड़ते जिससे भाषा को बोलने, पढ़ने अथवा लिखने के प्रति अरुचि बनी रहती।

भाषा की बात

MP Board Class 6th Hindi Chapter 5 प्रश्न 1.
1. निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(1) सन्नाटा पसरना
(2) गप्पें लड़ाना
(3) आदत में शुमार होना,
(4) हाथ बंटाना।
उत्तर

  1. सन्नाटा पसरना-हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के क्रिकेटरों के बीच मैच होने के कारण लोग घरों से नहीं निकले। अत: सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
  2. गप्पें लड़ाना-पुस्तकालय में बैठे छात्र/छात्राएँ आपस में गप्पें लड़ाते रहते हैं।
  3. आदत में शुमार होना-बात-बात में झूठ बोलना तुम्हारी आदत में शुमार है।
  4. हाथ बँटाना-घर के सदस्य घरेलू कामकाज में हाथ बँटाते ही हैं।

MP Board Solutions

भाषा भारती कक्षा 5 Solutions Chapter 6 प्रश्न 2.
नीचे लिखे शब्दों के विलोम शब्द उनके नीचे लिखे शब्दों से चुनकर लिखिए
उत्तर
शब्द – विलोम
(i) सुत – (क) असत्य
(ii) मित्र – (ख) सरस
(iii) प्रशंसा – (ग) विषाद
(iv) हर्ष – (घ) सुता
(v) नीरस – (ड.) निराशा
(vi) सत्य – (च) शत्रु
(vii) आशा – (छ) निन्दा
उत्तर
(i) – (घ),(ii) – (च),(iii) – (छ),(iv) – (ग), (v) – (ख), (vi) – (क), (vii) – (ङ)

Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 6 प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए
(1) घर, (2) पुत्र, (3) पुत्री, (4) हाथ, (5) मित्र।
उत्तर
(1) घर=गृह, सदन, भवन।
(2) पुत्र = बेटा, सुत, तनय।
(3) पुत्री = सुता, बेटी, तनया।
(4) हाथ = कर, हस्त, बाहु।
(5) मित्र = सृहद, सखा, साथी।

Class 6 Bhasha Bharti Chapter 5 प्रश्न 4.
निम्नलिखित कथन किसके हैं, उनके विषय में एक-एक वाक्य लिखिए

(1) “मैं सर्वनाम की बड़ी बहन हूँ।”
उत्तर
सर्वनाम की बड़ी बहन विशेषण है। यह कथन विशेषण का है। विशेषण का काम है किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता या उनके गुण बताना।

MP Board Solutions

(2) “मैं अपनी माँ को बहुत चाहती हूँ।”
उत्तर
यह कथन है क्रिया-विशेषण का जो क्रिया देवी की दूसरी पुत्री है। क्रिया-विशेषण क्रिया की विशेषता बताती है। यह विशेषण और स्वयं अपनी (क्रिया विशेषण की) विशेषता बतलाती है।

(3) “बच्चा हमारे घर जन्मे और उसका नामकरण पड़ौसी करें।”
उत्तर
यह वाक्य ‘संज्ञानन्द’ का है। इस के विषय में संज्ञानन्द का कहना है कि हिन्दी (हिन्दू, हिन्दुस्तान) शब्द संस्कृत का नहीं है। यह फारसी का है। फारसी बोलने वाले सिन्धु को हिन्दू बोलते थे। इसलिए इस देश की भाषा को हिन्दी कहकर पहचान दी गई है।

(4) “मैं परिवार में सबसे बड़ा हूँन ! घर का सारा काम मुझे ही करना पड़ता है।”
उत्तर
उपर्युक्त कथन सर्वनाम का है। सर्वनाम का प्रयोग संज्ञा के बदले करते हैं।

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 5 प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक-एक शब्द लिखिए
(क) वह क्रिया, जिसका कोई कर्म न हो।
(ख) वह क्रिया जिसके साथ कर्म होता है।
(ग) वे शब्द जिनके रूप लिंग, वचन या कारक के अनुसार बदल जाते हैं।
(घ) वे शब्द जिनके रूप सदैव एक जैसे रहते हैं।
(ङ) कार्य की समाप्ति का बोध कराने वाला काल।
उत्तर
(क) अकर्मक
(ख) सकर्मक
(ग) विकारी
(घ) अविकारी
(ङ) भूतकाल।

MP Board Solutions

Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 5 प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों में से संज्ञा एवं उसके भेदों के नाम छाँटकर लिखिए
(क) सभी प्राणियों में वाणी का वरदान मात्र मानव को मिला है।
(ख) मानव अपने सत्कर्मों से स्वर्ग को भी पृथ्वी पर उतार सकता है।
(ग) सबके साथ प्रेम का व्यवहार करो।
(घ) गोपाल कृष्ण गोखले बचपन से तेज बुद्धि के थे।
(ङ) सब के जीवन में बुढ़ापा आता ही है।
(च) गंगा हिमालय से निकलती है।
(छ) लड़के खेल रहे हैं।
(ज) वह पुस्तक पुरानी है।
उत्तर-
(क)

  1. प्राणियों-जातिवाचक संज्ञा,
  2. वाणी- जातिवाचक संज्ञा,
  3. वरदान-भाववाचक संज्ञा,
  4. मानव-जातिवाचक संज्ञा।

(ख)

  1. मानव-जातिवाचक संज्ञा
  2. सत्कर्मों-भाव वाचक संज्ञा।
  3. स्वर्ग-भाववाचक संज्ञा,
  4. पृथ्वीजातिवाचक संज्ञा।

(ग)

  1. प्रेम-भाववाचक संज्ञा
  2. व्यवहार-भाववाचक संज्ञा।

(घ)

  1. गोपाल कृष्ण गोखले-व्यक्तिवाचक संज्ञा,
  2. बचपन-भाववाचक संज्ञा
  3. बुद्धि-भाववाचक संज्ञा।

(छ)

  1. जीवन-भाववाचक संज्ञा
  2. बुढ़ापाभाववाचक संज्ञा

(च)

  1. गंगा-व्यक्तिवाचक संज्ञा
  2. हिमालय- व्यक्तिवाचक संज्ञा।

(छ)

  1. लड़के-जातिवाचक संज्ञा।

(ज)

  1. पुस्तक-जातिवाचक संज्ञा।

व्याकरण परिवार परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

(1) टेलीविजन पर कार्यक्रम क्यों देख रहे हैं आप? जानते नहीं, टेलीविजन जिस भाषा का प्रयोग कर रहा है, उससे हम अपनी परम्पराओं को भूलते जा रहे हैं। अपनी भाषा को बिगाड़कर विदेशी भाषा के शब्दों की मिलावट से हम अपनी संस्कृति पर गहरा आघात कर रहे हैं।

सन्दर्भ-यह गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषा-भारती’ के पाठ’व्याकरण परिवार से लिया गया है। इसके लेखक-डॉ. प्रेम भारती हैं।

प्रसंग-इस गद्यांश में अपनी भाषा के प्रयोग करने के लिए सलाह दी गई है।

व्याख्या-लेखक ने क्रियादेवी नामक पात्र द्वारा संज्ञानन्द नामक अपने पति से पूछा है कि वे टेलीविजन पर किसी भी कार्यक्रम को क्यों देख रहे हैं। टेलीविजन पर विदेशी भाषा में किसी भी कार्यक्रम को दिखाया जा रहा है। इस भाषा के प्रयोग के कारण हमने अपने रीति-रिवाजों को भुला दिया है। इस विदेशी भाषा के शब्दों ने अपनी भाषा में मिलकर बड़ा बिगाड़ पैदा किया है। इस तरह इन शब्दों की मिलावट ने हमारी सभ्यता और हमारे आचरण को गहरी चोट पहुँचाई है। हमारे व्यक्तित्व, जाति एवं राष्ट्र सम्बन्धी आचरण और विचारों तक को प्रभावित किया है जिससे हमारी राष्ट्रीय सोच और बौद्धिक विकास में बाधा पड़ी है।

MP Board Solutions

(2) संस्कृत भाषा इस देश की सबसे प्राचीन भाषा है, जिसका व्यवहार ऋषि-मुनि, विद्वान, कवि सभी करते रहे हैं। इसे देवभाषा भी कहा जाता है। उसकी सन्तानें प्राकृत भाषा एवं पाली भाषा के रूप में प्राप्त होती हैं। प्राकृत भाषाओं से ही अपभ्रंश भाषा का जन्म हुआ है।

संदर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-लेखक ने संस्कृत की प्राचीनता बताई है और उससे जन्म लेने वाली भाषाओं का उल्लेख किया है।

व्याख्या-लेखक स्पष्ट करता है कि संसार की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत है। इस भाषा का प्रयोग ऋषियों, मुनियों,विद्वानों और कवियों ने किया है। इसी भाषा को देवताओं की भाषा भी कहा जाता है। प्राचीन काल के भारतीय समाज के लोगों का आचरण देवताओं के समान था। संस्कृत भाषा की दो

प्रमुख सन्तानें-प्राकृत भाषा और पाली हैं। प्राकृत भाषाओं से ही अपभ्रंश भाषा विकसित हुई है। अर्थात् इन सभी भाषाओं की जननी संस्कृत ही है।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 11 झाँसी की रानी प्रश्न उत्तर हिंदी

In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 11 झाँसी की रानी PDF download, Bhasha Bharti Class 6 Solutions Chapter 11, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 11 Jhansi Ki Rani Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 11 Jhansi Ki Rani Questions and Answers

Class 6 Hindi Chapter 11 Jhansi Ki Rani प्रश्न 1.
दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) रानी के बचपन की सहेलियाँ थीं
(i) चाकू, छुरी
(ii) तोप, बन्दूक,
(iii) बरछी, ढाल
(iv) तीर कमान।
उत्तर
(iii) बरछी, ढाल

(ख) रानी लक्ष्मीबाई बचपन में ही सीख गई थी
(i) गायन कला
(ii) नृत्य कला
(iii) शस्त्र कला
(iv) पाक कला।
उत्तर
(ii) नृत्य कला

(ग) रानी की सखियाँ साथ आई थीं
(i) कुन्ती और सुनीता
(ii) मीना और कांति,
(iii) काना और मुंदरा
(iv) मुन्द्रा और कान्हा।
उत्तर
(iii) काना और मुंदरा

(घ) रानी की तलवार से घायल होकर रण क्षेत्र से भागा था
(i) लार्ड डलहौजी
(ii) लेफ्टिनेंट वॉकर
(iii) जनरल स्मिथ
(iv) रोज।
उत्तर
(ii) लेफ्टिनेंट वॉकर

(ङ) बलिदान के समय वीरांगना लक्ष्मीबाई की उम्र थी
(i) तेईस वर्ष
(ii) बीस वर्ष
(iii) चौबीस वर्ष
(iv) पच्चीस वर्ष।
उत्तर
(i) तेईस वर्ष

MP Board Solutions

Lakshmi Bai Tejasvi Nari Thi प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) वीर शिवाजी की ……… उनको याद जवानी थी।
(ख) हुई वीरता की ………. के साथ सगाई झाँसी में।
(ग) रानी एक …….. बहुतेरे होने लगे वार पर वार।
(घ) गुमी हुई …………. की कीमत सबने पहचानी थी।
उत्तर
(क) गाथाएँ
(ख) वैभव
(ग) शत्रु
(घ) आजादी।

Lakshmi Bai Tejasvi Nari Thi Vakya Ko Shuddh Kijiye प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) लक्ष्मीबाई ने बचपन में कौन-कौन से शस्त्रों को चलाना सीख लिया था ?
उत्तर
लक्ष्मीबाई ने अपने बचपन में ही बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी चलाना सीख लिया था।

(ख) झाँसी के राजा की मृत्यु होने पर डलहौजी प्रसन्न क्यों हुआ था ?
उत्तर
झाँसी के राजा की मृत्यु होने पर डलहौजी इसलिए प्रसन्न हुआ था क्योंकि राजा नि:सन्तान ही मर गए थे। लावारिस राज्य का अंग्रेजी शासन वारिस बन जाता था। ऐसा नियम उस समय के डलहौजी ब्रिटिश शासक ने बनाया था। यह नियम ब्रिटिश शासकों की राज्य-हड़प नीति कहलाई। डलहौजी इस कारण प्रसन्न हुआ कि अब झाँसी का राज्य भी ब्रिटिश शासन में शामिल हो जाएगा।

MP Board Solutions

(ग) अंग्रेजों ने भारतीय राज्यों पर किस प्रकार अधिकार किया?
उत्तर
अंग्रेजों ने भारतीय राज्यों को अपने अधिकार में कर लिया क्योंकि भारतीय राज्यों के बहुत से शासक नि:सन्तान थे और उन्हें दत्तक पुत्र लेकर राज्य का वारिस बनाने का कोई अधिकार नहीं है, ऐसा नियम बनाकर राज्य हड़प नीति के अन्तर्गत भारतीय राज्यों को अपने अधीन कर लिया।

(घ) ‘हमको जीवित करने आई, बन स्वतंत्रता नारी थी,’ से कवयित्री का आशय क्या है ?
उत्तर
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने झाँसी को आजाद बनाए रखने के लिए कुल तेईस वर्ष की उम्र में ही अपना बलिदान कर दिया। वह अत्यन्त तेजस्वी थी। उन्होंने स्वतंत्रता की नारी के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने हम सभी भारतीयों को ‘स्वतंत्रता ही जीवन था इस तरह शिक्षा देने के लिए अवतार लिया था। उन्होंने हमें आजादी का मार्ग दिखाने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उन्हें जो भी हम भारतीयों को सिखाना था, वह अपने बलिदान से सिखा दिया। वह स्वतंत्रता की साक्षात् देवी थी।

(ङ)’झाँसी की रानी’ कविता से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर
‘झाँसी की रानी’ कविता से हमें प्रेरणा मिलती है कि हम अपनी मातृभूमि की आजादी की रक्षा अपने प्राणों की बलि चढ़ा कर भी करें। अन्याय के आगे नझुकें। साथ ही, हमारे अन्दर राष्ट्र प्रेम और राष्ट्रीयता की भावना पुष्ट होती है।

MP Board Class 6th Hindi Chapter 11 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए

(क) हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में।
(ख) जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई, मर्द बनी मर्दानों में।
(ग) घायल होकर गिरी सिंहनी, उसे वीरगति पानी थी।
(घ) मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी।
उत्तर
‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ शीर्षक के अन्तर्गत पद्यांश संख्या 3,7, 10 व 11 की व्याख्या देखिए।

भाषा की बात

MP Board Class 6 Hindi Chapter 11 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिएभृकुटी, कृपाण, वैभव, वज्र, अश्रुपूर्ण।
उत्तर
कक्षा में अध्यापक महोदय के सहयोग से शुद्ध रूप से उच्चारण सीखिए और अभ्यास कीजिए।

Lakshmi Bai Tejasvi Nari Thi Shuddh Karke Likhiye प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में सही मात्रा लगाकर उनके शुद्ध रूप लिखिए
(i) किमत,
(ii) फीरंगी
(iii) झांसि
(iv) उदीत
(v) खुब
(vi) बून्देले
(vii) शत्रु
(viii) मनूज।
उत्तर-(i) कीमत, (ii) फिरंगी, (ii) झाँसी, (iv) उदित, (v) खूब, (vi) बुन्देले, (vii) शत्रु, (vii) मनुज।

MP Board Solutions

Lakshmi Bai Tejasvi Nari Thi Vakya Ko Shuddh Karke Likhiye प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में तत्सम और तद्भव शब्द छाँटकर लिखिए
कृपाण, बूढ़ा, मुंह, चिन्ता, पिता, सौभाग्य, शोक, सौख, शत्रु, मनुजा
उत्तर
तत्सम – कृपाण, चिन्ता, सौभाग्य, शोक, शत्रु।
तद्भव – बूढ़ा, मुँह, पिता, सीख, मनुज।

Lakshmi Bai Tejasvi Nari Thi Shuddh Kijiye प्रश्न 4.
सु, वि, सम् उपसर्ग लगाकर तीन-तीन शब्द बनाइए
उत्तर
(क)
(i) सु + भट = सुभट
(ii) सु + मति = सुमति,
(iii) सु + लेख = सुलेख
(iv) सु + मुखी = सुमुखी।

(खा)
(i) वि + राट – विराट
(ii) वि + रूप – विरूप
(iii) वि + जय – विजय
(iv) वि + ख्यात – विख्यात।

(ग)
(i) सम् + मुख – सम्मुख
(ii) सम् + वृद्धि – सम्वृद्धि
(iii) सम् + मिलित – सम्मिलित्
(iv) सम् + ऋद्धि- समृद्धि।

Lakshmi Bai Tejasvi Nari Thi Shuddh Kijiye प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
(i) सिंहासन, (ii) गाथा, (iii) मैदान, (iv) वीरगति (v) स्वतंत्रता।
उत्तर-
(i) राजसभा में सिंहासन पर राजा विराजमान है।
(ii) लक्ष्मीबाई की वीरता की गाथा बुन्देलखण्ड का बच्चा-बच्चा गाता है।
(iii) लड़ाई के मैदान में वीरों ने युद्ध किया।
(iv) अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करते हुए अपने वीरों ने वीरगति पाई थी।
(v) स्वतंत्रता के दीवाने फाँसी के फंदों को चूमते हुए शहीद हो गए।

Jhansi Ki Rani Class 6 Vyakhya प्रश्न 6.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
(i) स्वर्ग सिधारना
(ii) मुँह की खाना।
उत्तर
(i) स्वर्ग सिधारना – मृत्यु प्राप्त करना।
प्रयोग-आजादी की रक्षा के लिए युद्ध करते हुए अनेक वीर स्वर्ग सिधार गए।
(ii) मुंह की खाना- बुरी तरह पराजित होना।
प्रयोग-पाक सेना को भारत की सेना से हर युद्ध में मुँह की खानी पड़ी है।

MP Board Solutions

झाँसी की रानी सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) ‘सिंहासन हिल छ’, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी।
बूढ़े भारत में भी आई, फिर से नई जवानी थी।
गुमी हुई आजादी की कीमत सबने पहचानी थी।
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।1।

शब्दार्थ-राजवंशों ने = राजा-महाराजाओं ने। भृकुटी = भौंहें (क्रोध में भर उठे थे)। गुमी हुई = खोई हुई। फिरंगी = अंग्रेजों ने।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा-भारती’ के ‘झाँसी की रानी’ नामक पाठ से ली गई हैं। इसकी रचयिता ‘श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान’ हैं।

प्रसंग-यहाँ पर कवयित्री ने झाँसी की रानी की वीरता का उल्लेख किया है। जब रानी झाँसी के सिंहासन पर बैठी तो उन्होंने अंग्रेजों से अपने देश को आजाद कराने के लिए उनसे युद्ध किया।

व्याख्या-जब लक्ष्मीबाई झाँसी की रानी बनी तो उन्होंने भारतीय जनता में आजादी का मन्त्र फूंक दिया। अंग्रेजों के द्वारा गुलाम बनाये गये राजाओं ने भी अंग्रेजों से युद्ध करने का संकल्प लिया। क्रोध में उनकी भौहें तन उठी और देश में उथल-पुथल मच गई। भारत जो आजादी की आशा ही छोड़ चुका था उसमें एक नई आशा जागी। अब सबको लग रहा था कि अपनी आजादी जो उन्होंने खो दी थी वह अत्यन्त कीमती थी। अब सबने भारत से अंग्रेजों को खदेड़ने का निश्चय कर लिया। इस प्रकार सन् 1857 में फिर से अतीत के गौरव की वह तलवार युद्ध में चमक उठी। इस कहानी को बुन्देलखण्ड के हरबोले (गवैये) गाते हैं कि झाँसी की रानी ने अंग्रेजों के साथ पुरुषों की भांति जमकर युद्ध किया था।

(2) कानपुर के नाना की मुंह बोली बहिन छबीली थी।
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी।
नाना के संग पढ़ती थी वह, नाना के संग खेली थी।
बरछी, ढाल, कृपाण, कटारी, उसकी यही सहेली थी।
वीर शिवाजी की गाथाएँ, उसको याद जबानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।2।

शब्दार्थ-सन्तान = पुत्र-पुत्री। गाथाएँ = कहानियाँ । कृपाण = तलवार।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में लक्ष्मीबाई के साहस और वीरता का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-लक्ष्मीबाई कानपुर के नाना साहब की मुंहबोली बहिन थीं। उन्होंने बचपन में उनका नाम छबीली रखा था। लक्ष्मीबाई अपने पिता की इकलौती सन्तान थीं। वह बचपन में नाना के साथ पढ़ती थीं और उन्हें के साथ खेलती थीं। बचपन में उनके प्रिय खेल थे बरछी, बाल, तलवार और कटारों से खेलना। यही उनके खिलौने थे और यही उन्हें अपनी सहेलियों की तरह प्रिय थे। लक्ष्मीबाई बचपन से साहसी थीं। वीर शिवाजी की वीरता की कहानियाँ उन्हें बचपन से ही याद थीं। यह कहानी बुन्देलखण्ड के हरबोले बड़े जोर-शोर से गाते हैं कि लक्ष्मीबाई मदों की तरह अंग्रेजों से खूब लड़ी थीं।

MP Board Solutions

(3) हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में।
ब्याह हुआ, रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में।
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में।
सुभट-बुन्देलों की विरुदावलि-सी वह आईझाँसी में।
चित्रा ने अर्जुन को पाया शिव से मिली भवानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।3।

शब्दार्थ-वैभव = सम्पन्नता। विरुदावलि – प्रशंसा के गीत। भवानी = पार्वती जी।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में लक्ष्मीबाई के विवाह का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-लक्ष्मीबाई वीरता की साकार मूर्ति थी। उनकी सगाई झाँसी के राजा के साथ हो गई और वे विवाह करके झाँसी की रानी बन गई। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वीरता का विवाह सम्पन्नता के साथ हुआ हो। राजभवन में बधाइयाँ बर्जी, खूब खुशियाँ मनाई गई। भाट लोग उनकी प्रशंसा के गीत गाते थे। उन्होंने झाँसी के राजा को उसी प्रकार प्राप्त किया था जैसे चित्रा ने अर्जुन को और पार्वती ने शंकर जी को प्राप्त किया था। यह कहानी बुन्देलखण्ड के हरबोले गाते हैं। झाँसी की रानी पुरुषों के समान बड़ी वीरता से लड़ी थी।

(4) उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियालीछाई।
किन्तु काल-गति चुपके चुपके, काली घटा घेर लाई।
तीर चलाने वाले कर में, उसे चूड़ियाँ कब भाई।
रानी विधवा हुई हाय ! विधि को भी नहीं दया आई।
निःसंतान मरे राजाजी, रानी शोक समानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।4।

शब्दार्थ-उदित = उदय। मुदित = प्रसन्न। उजियाली = चमक,खुशियाँ । कालगति = मृत्यु की गति । काली घटा = दु:ख के बादल। कर हाथ। विधि=विधाता। शोक= दुःख।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में लक्ष्मीबाई के जीवन में आये दुःखों का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-रानी जब विवाह करके झाँसी आई तो ऐसा लग रहा था मानो सौभाग्य उदय हो गया है। महल में प्रसन्नता का वातावरण था किन्तु काल की गति को कोई नहीं जान सकता। वहाँ दु:ख के बादल कब छा गए किसी को कुछ भी पता न चला। विधाता को भी रानी के तीर चलाने वाले हाथों में चूड़ियाँ नहीं सुहाई। राजा की असमय मृत्यु से रानी विधवा हो गई। उनके कोई सन्तान भी नहीं थी। अब रानी के शोक का ठिकाना नहीं था। ऐसा बुन्देलखण्ड हरबोले गाते हैं। झाँसी की रानी ने अंग्रेजों से पुरुषों की भाँति वीरता से युद्ध किया।

(5) बुङ्गमा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हर्षाया।
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया।
फौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया।
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज झाँसी आया।
अश्रुपूर्ण रानी ने देखा, झाँसी हुई विरानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।5।

शब्दार्थ-हर्षाया = प्रसन्न हुआ। दुर्ग = किला। लावारिस = जिसका कोई उत्तराधिकारी न हो। वारिस = उत्तराधिकारी। वीरानी = परायी।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में अंग्रेजों के खिलाफ रानी के द्वारा युद्ध करने का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-जब राजा की मृत्यु हो गई तो अंग्रेज गवर्नर डलहौजी बड़ा प्रसन्न हुआ। उसने सोचा कि अब झाँसी का राज्य हड़पने का अच्छा मौका है। उसने अपनी फौजें झाँसी की ओर भेज दर्दी और किले पर अपना झण्डा फहरा दिया। वह लावारिस झाँसी का वारिस (मालिक) बन बैठा। रानी को इससे बड़ी भारी पीड़ा हुई। आँखों में आँसू भर कर उसने देखा कि झाँसी परायी हुई जा रही है। बुन्देलखण्ड के हरबोले गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मर्दो की भाँति अंग्रेजों से वीरतापूर्वक युद्ध किया।

MP Board Solutions

(6) छिनी राजधानी देहली की, लिया लखनऊ बातोंबात।
कैद पेशवा था बिठूर में, हुआ नागपुर पर भी घात।
उदैपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक की कौन बिसात।
जबकि सिंध, पंजाब, ब्रह्म पर,अभी हुआ था बजनिपात।
बंगाल, मद्रास आदि की, भी तो यही कहानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।6।

शब्दार्थ-घात = निशाना लगाना। विसात – ताकत। बज-निपात = बिजली टूटना।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में अंग्रेजों द्वारा भारत में अपने शासन को किस तरह स्थापित किया गया। इसका वर्णन किया गया है।

व्याख्या-अंग्रेजों ने दिल्ली, लखनऊ को बड़ी आसानी से अपने कब्जे में कर लिया, उन्होंने पेशवा को बिठूर में कैद कर लिया। नागपुर, उदयपुर, तंजौर, सतारा, कर्नाटक आदि का तो कहना ही क्या उन्होंने सिंध, पंजाब, ब्रह्मपुत्र, बंगाल, मद्रास आदि नगरों समेत पूरे भारत को अपने अधीन कर लिया। बुन्देलखण्ड के हरबोले इसी कहानी को गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मर्दो की तरह साहस से अंग्रेजों से खूब डटकर युद्ध किया था।

(7) इनकी गाथा छोड़ चलें हम, झांसी के मैदानों में।
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई, मर्द बनी मर्दानों में।
लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा, आगे बढ़ा जवानों में।
रानी ने तलवार खींच ली, हुआ द्वन्द्व असमानों में।
जख्मी होकर वॉकर भागा उसे अजब हैरानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।7।

शब्दार्थ-गाथा = कथा, कहानी। द्वन्द्व = दो व्यक्तियों का परस्पर युद्ध। असमान = बराबर नहीं। अजब = अनोखा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में रानी लक्ष्मीबाई के युद्ध कौशल का सजीव वर्णन किया गया है।

व्याख्या-रानी लक्ष्मीबाई की वीरता और उनके अद्भुत युद्ध कौशल की कहानियाँ झाँसी के मैदानों में बिखरी पड़ी हैं। युद्ध के दौरान वे पुरुष रूप धारण कर कहर बरपाती थी। अंग्रेजों से छिड़े भीषण युद्ध में अंग्रेजों की सेना का लेफ्टिनेंट वॉकर रानी से युद्ध करने के लिए आगे आया। रानी ने अपनी चमचमाती तलवार खींच ली और इसके साथ ही दो बिना बराबरी के योद्धाओं (एक पुरुष व एक महिला) में युद्ध प्रारम्भ हो गया किन्तु रानी लक्ष्मीबाई के रण-कौशल के आगे उसकी एक न चली और वह शीघ्र ही घायल होकर मैदान से भाग गया। उसे एक महिला के यूँ वीरता-प्रदर्शन पर काफी आश्चर्य था। बुन्देलखण्ड के हरबोले इसी कहानी को गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मदों की तरह साहस से अंग्रेजों से खूब डटकर युद्ध किया था।

(8) रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार।
घोड़ा थककर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार।
यमुना तट पर अंग्रेजों ने, फिर खाई रानी से हार।
विजयी रानी आगे चल दी किया ग्वालियर पर अधिकार।
अंग्रेजों के मित्र, सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुंह, हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।8।

शब्दार्थ-निरंतर = लगातार । तत्काल = तुरन्त, जल्दी ही। सिधार = मरकर। रजधानी = राजधानी।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में कवयित्री ने रानी लक्ष्मीबाई के अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष की अमर गाथा का सुन्दर वर्णन किया है।

व्याख्या-झाँसी पर जब अंग्रेजों ने अपना शासन स्थापित कर लिया तो रानी लक्ष्मीबाई ने उनके विरुद्ध युद्ध का बिगुल बजा दिया। इसी क्रम में वह अपनी एक छोटी-सी टुकड़ी के साथ लगभग सौ मील का लम्बा सफर तय करके कालपी आ पहुँची। इतनी लम्बी दूरी और वह भी लगातार, अत्यधिक थकान के कारण रानी का प्रिय घोड़ा बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा और अगले ही पल उसकी मृत्यु हो चुकी थी। घोड़े की मृत्यु से रानी को झटका लगा किन्तु उसने हिम्मत नहीं हारी। इस बीच अंग्रेजों को रानी के कालपी पहुँचने की सूचना मिल चुकी थी।

यमुना के किनारे अंग्रेजों और रानी के मध्य युद्ध हुआ। फिर से रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए और उन्हें पराजय का मुँह देखने के लिए मजबूर कर दिया। अंग्रेजों को धूल चटाने के पश्चात् बड़े मनोबल व आत्मविश्वास के साथ रानी लक्ष्मीबाई ने कालपी से ग्वालियर की ओर कूच किया और ग्वालियर पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। रानी के हाथों परास्त ग्वालियर के पूर्व राजा सिंधिया, जो अंग्रेजों का मित्र भी था को अपनी राजधानी छोड़कर भाग जाना पड़ा था। बुन्देलखण्ड के हरबोले इसी कहानी को गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मर्दो की तरह साहस से अंग्रेजों से खूब डटकर युद्ध किया था।

MP Board Solutions

(9) विजय मिली पर अंग्रेजों की फिर सेना घिर आई थी।
अब जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुंह की खाई थी।
काना और मुंदरा सखियाँ रानी के संग आई थीं।
युद्ध क्षेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी।
पर पीछे छूरोज आ गया, हाय ! घिरी अब रानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।91

शब्दार्थ-विजय = जीत। सम्मुख = सामने। मुँह की खाना = पराजित होना।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पंक्तियों में रानी और उसकी सहेलियों द्वारा अंग्रेजों के दाँत खट्टे करने व रानी के दुश्मनों के मध्य घिर जाने का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-रानी लक्ष्मीबाई से मिली करारी हार से बौखलाकर अंग्रेजों ने अब बहुत बड़ी सेना लड़ने के लिए भेजी। इस बार अंग्रेजी सेना का प्रमुख जनरल स्मिथ था, किन्तु उसकी एक न चली और रानी लक्ष्मीबाई और उनकी दो सहेलियों काना और मुन्दरा ने युद्ध के मैदान में अंग्रेजी सेना पर कहर बरपाते हुए जनरल स्मिथ को पराजित कर दिया। पर देखते ही देखते एक नये दल-बल के साथ पीछे से यूरोज लड़ने के लिए युद्ध-मैदान पर आ पहुँचा। रानी और उसकी छोटी-सी सेना अब बुरी तरह घिर चुकी थी। बुन्देलखण्ड के हरबोले इसी कहानी को गाते हैं कि झाँसी वाली रानी ने मदों की तरह साहस से अंग्रेजों से खूब डटकर युद्ध किया।

(10) तो भी रानी मार काटकर चलती बनी सैन्य के पार।
किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार।
घोड़ा अड़ा नया घोड़ा था, इतने में आ गये सवार।
रानी एक शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार पर वार।
घायल होकर गिरी सिंहनी, उसे वीरगति पानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।10।

शब्दार्थ-सैन्य = सेना। विषम = भयानक। सवार = घुड़सवार सैनिक । वीरगति = युद्ध में बहादुरी से लड़ते हुए मृत्यु को प्राप्त हो जाना।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-झाँसी पर जब अंग्रेजों ने आक्रमण किया तो रानी | लक्ष्मीबाई ने उनका बड़ी बहादुरी से मुकाबला किया। रानी का घोड़ा कालपी में आकर मर गया तब उन्होंने नया घोड़ा लिया और अंग्रेजों की सेना में मार-काट मचा दी।

व्याख्या-रानी शत्रुओं से घिरी हुई थी किन्तु वह बड़ी वीरता से उन्हें मारकर अपने लिये रास्ता निकाल लेती थी किन्तु, एक नाले के पास घोड़े के अड़ जाने से शत्रुओं ने उसे फिर से घेरने का मौका पा लिया। युद्ध में रानी बुरी तरह घायल हो गई। इस प्रकार वह बहादुर सिंहनी लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गई। बुन्देले हरबोले आज भी उसकी गौरव गाथा गाकर बताते हैं कि रानी लक्ष्मीबाई ने बड़ी बहादुरी से युद्ध किया था।

MP Board Solutions

(11) रानी गई सिधार, चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी।
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी।
अभी अ कुल तेईस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी।
हमको जीवित करने आई, बन स्वतंत्रता नारी थी।
दिखा गई पथ सिखा गई, हमको जो सीख सिखानी थी।
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी। 11।

शब्दार्थ-सिधार = स्वर्ग सिधार गई। दिव्य = अलौकिक, दैवीय। तेज = प्रकाश (आत्मा का प्रकाश परमात्मा के प्रकाश से मिल गया)। मनुज = मनुष्य। अवतारी = अवतार लेने वाली देवी। स्वतन्त्रता नारी= स्वतन्त्रता की देवी। पथ-रास्ता। सीख = शिक्षा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में कवयित्री ने झाँसी की रानी की वीरता का वर्णन बड़ी भावपूर्ण शैली में किया है।

व्याख्या-झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई स्वर्ग सिधार गई। अब उसकी अलौकिक सवारी स्वर्ग का विमान था। उसकी आत्मा का तेज परमात्मा के तेज से मिल गया। रानी ने मोक्ष प्राप्त किया। वह इसकी सच्ची अधिकारिणी भी थीं। तेईस साल की उम्र में उसकी वीरता को देखकर ऐसा लगता था कि वह कोई मनुष्य नहीं थी बल्कि अवतार लेकर कोई देवी आई थी। वह स्वतन्त्रता की देवी हमें एक नया जीवन देने आई थीं। वह हमें स्वतन्त्रता का रास्ता दिखा गई और अपने देश को स्वतन्त्र कराने का पाठ पढ़ा गई। बुन्देलखण्ड के हरबोले इस कहानी को गाते हैं कि वह मर्दो जैसे युद्ध करने वाली रानी जो बड़ी वीरता से लड़ी थी, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ही थी।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 1 विजयी विश्व तिरंगा प्यारा प्रश्न उत्तर हिंदी

In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 1 विजयी विश्व तिरंगा प्यारा PDF download, Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 1, these solutions are solved subject experts from the latest edition books.

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 1 Vijayi Vishwa Tiranga Pyara Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 1 Vijayi Vishwa Tiranga Pyara Questions and Answers

Bhasha Bharti Class 6 प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) सदा शक्ति …………… वाला।
(ख) प्रेम सुधा …………… वाला।
(ग) स्वतन्त्रता के …………..रण में।
(घ) मिट जाय भय …………… सारा।
(ङ) तब होवे प्रण …………… हमारा।
उत्तर
(क) बरसाने
(ख) सरसाने
(ग) भीषण
(घ) संकट
(ङ) पूर्ण।

MP Board Solutions

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 1 प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) कवि के अनुसार हमारा ध्येय क्या है?
उत्तर
कवि के अनुसार हमारा ध्येय पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त करना है।

(ख) झंडे को ऊँचा रखने से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
हमारा देश हमेशा ही शक्ति का प्रेरणा स्रोत, प्रेमरूपी अमृत से संचित करने वाला, मातृभूमि के लिए वीरों के तन-मन से प्यारा है। इन्हीं कारणों से भारतवर्ष की विश्व में गौरवपूर्ण प्रतिष्ठा है। कवि चाहता है कि ऐसे गौरवशाली देश का राष्ट्रीय झण्डा ‘तिरंगा’ सदैव ऊँचा ही रहे।

MP Board Solutions

(ग) कवि ने झंडे को ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ क्यों कहा है?
उत्तर
कवि ने भारतीय झण्डे ‘तिरंगे’ को ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ इसलिए कहा है क्योंकि कवि का मानना है कि ‘तिरंगा’ हमारी राष्ट्रीय भावनाओं का प्रमुख प्रेरणा स्रोत है। इसको देखकर प्रत्येक भारतीय स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है।

(घ) कवि वीरों को क्यों बुला रहा है ?
उत्तर
कवि मातृभूमि को स्वतन्त्र कराने के उद्देश्य से स्वयं के प्राणों की आहुति के लिए वीरों का आह्वान कर रहा है।

(ङ) तिरंगे को देखकर वीरों के मन में कौन-से भाव जाग्रत होते हैं ? .
उत्तर
तिरंगा विश्व में हमारी शान एवं विजय का प्रतीक है। यह वीरों के मन में शक्ति, जोश, आनन्द एवं साहस के भावों का संचार करने वाला है। तिरंगा हमें अपने देश की रक्षार्थ अपनी जान तक बलिदान करने के लिए प्रतिपल प्रेरित करता रहता है।

(च) स्वतंत्रता संग्राम में शत्रु की दशा कैसी है ?
उत्तर
स्वतंत्रता संग्राम में माँ भारती के वीर सपूतों के साहस व पराक्रम को देखकर शत्रु काँपने लगते हैं।

MP Board Solutions

Class 6 Hindi Bhasha Bharti प्रश्न 3.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए

(क) मातृभूमि का तन-मन सारा।
झंडा ऊँचा रहे हमारा॥

(ख) स्वतंत्रता के भीषण रण में।
लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में।

(ग) इस झंडे के नीचे निर्भय,
रहे स्वतंत्र यह अविचल निश्चय,

(घ) इसकी शान न जाने पाए.
चाहे जान भले ही जाए।

उत्तर
खण्ड ‘क’ : सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या देखें।

भाषा की बात

Vijayi Vishwa Tiranga Pyara Class 6 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
स्वतन्त्रता, मातृभूमि, निर्भय, निश्चय, ध्येय, प्रण।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से अपनी कक्षा में शुद्ध उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।

Class 6th Hindi Bhasha Bharti प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए
पूरण, सान, विरो, ऊंचा।
उत्तर
पूर्ण, शान, वीरो, ऊँचा।

MP Board Solutions

Class 6 Hindi Chapter 1 Vijayi Vishwa Tiranga प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए
सुधा, विश्व, झंडा, माता, शत्रु, तन।
उत्तर
सुधा – अमृत, अमिय
विश्व. – जगत, संसार
झंडा- ध्वज, पताका
माता – जननी, माँ
शत्रु – बैरी, अरि
तन – देह, शरीर।

MP Board Class 6 Hindi Bhasha Bharti Solution प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिएस्वतंत्र, शत्रु, नीचे, विजय।
उत्तर
शब्द – विलोम
स्वतंत्र – परतंत्र
शत्रु – मित्र

MP Board Solutions

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) विजयी विश्व तिरंगा प्यारा।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा॥
सदा शक्ति बरसाने वाला,
प्रेम सुधा सरसाने वाला;
वीरों को हरषाने वाला,
मातृभूमि का तन-मन सारा।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा॥

शब्दार्थ-विजय = जीत प्राप्त करने वाला। तिरंगा = तिरंगा झण्डा । सुधा = अमृत। सरस = सुन्दर। हरषाना = खुश करना। तन = शरीर। सदा = हमेशा।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषा भारती’ के ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ नामक पाठ से अवतरित है। यह श्री श्यामलाल ‘पार्षद’ द्वारा रचित है।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में विश्व विजय के प्रतीक रूप में तिरंगे झण्डे के गौरव का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-कवि की यह हार्दिक इच्छा है कि सारी दुनिया में जीत प्राप्त करने वाला हमारा यह तिरंगा हमेशा सबसे ऊँचाई पर फहराता रहे। हमेशा शक्ति का प्रेरणास्रोत, प्रेम रूपी अमृत से संचित करने वाला, वीरों को प्रमुदित (प्रसन्न) करने वाला एवं मातृभूमि के लिए तन तथा मन के समान प्यारा यह तिरंगा सदा दुनिया में सबसे ऊँचाई पर शान से फहराता रहे।

MP Board Solutions

(2) स्वतन्त्रता के भीषण रण में,
लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में;
काँपे शत्रु देखकर मन में,
मिट जाये भय संकट सारा।
झण्डा ऊँचा रहे हमारा॥

शब्दार्थ-भीषण रण = भयंकर संग्राम लखकर = देखकर । क्षण-क्षण = प्रत्येक पल। संकट = मुसीबत।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने तिरंगे झण्डे को जोश तथा प्रेरणा का उद्गम स्थल ठहराया है।

व्याख्या-आजादी के संग्राम को देखकर देश में वीरों का जोश हर क्षण बढ़ता जाता है तथा उनके जोश को देखकर ही दुश्मन भयभीत होकर मन ही मन काँपने लगता है एवं जो सब प्रकार के डर तथा मुसीबतों को समाप्त करने वाला है। ऐसा हर क्षण हमारे मन में जोश तथा उमंग का संचार करने वाला प्रिय तिरंगा झण्डा सारी दुनिया में सबसे ऊँचाई पर हमेशा फहराता रहे।

(3) इस झण्डे के नीचे निर्भय,
रहे स्वतन्त्र यह अविचल निश्चय;
बोलो भारत माता की जय,
स्वतन्त्रता है ध्येय हमारा।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा॥

शब्दार्थ-निर्भय = बिना डर के। संकल्प = प्रतिज्ञा। ध्येय = उद्देश्य, लक्ष्य।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने आजादी के लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाने का संकेत दिया है।

व्याख्या-इस झण्डे के नीचे रहते हुए निर्भय होकर हम स्वतन्त्रता प्राप्त करने के लक्ष्य पर डटे रहें। आओ भारत माता की जय बोलते हुए हम संकल्प (प्रतिज्ञा) करें कि स्वतन्त्रता प्राप्त करना ही हमारा सबसे ऊँचा उद्देश्य है। संगठन, हेलमेल तथा निडरता का प्रतीक तिरंगा सारी दुनिया में सबसे ऊँचाई पर लहराता रहे।

MP Board Solutions

(4) आओ प्यारे वीरो, आओ,
देश धर्म पर बलि-बलि जाओ;
एक साथ सब मिलकर गाओ,
प्यारा भारत देश हमारा।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा।’

शब्दार्थ-बलि = कुर्बान, बलिदान। सन्दर्भ=पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने वीरों (बहादुरों) को अपने देश की आजादी के लिए अपना बलिदान करने को कहा है।

व्याख्या-भारत के प्यारे वीरो! आओ तथा देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दो अथवा देश पर कुर्बान हो जाओ। सब समवेत स्वर में कहो कि भारत हमारा प्यारा देश है। समस्त विजय भावना का प्रतीक हमारा प्यारा झण्डा सबसे ऊँचाई पर लहराकर हमें जोश प्रदान करता रहे।

(5) इसकी शान न जाने पाये,
चाहे नान भले ही जाये;
विश्व विजय करके दिखलाएँ,
तब होवे प्रण पूर्ण हमारा।
झण्डा ऊंचा रहे हमारा॥

शब्दार्थ-शान = गौरव, प्रतिष्ठ। जान = प्राण। प्रण – प्रतिज्ञा। सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-कवि ने प्रस्तुत पद्यांश में तिरंगे के गौरव को चिरस्थायी बनाने का आह्वान किया है।

व्याख्या-भारत की शान एवं गौरव के प्रतीक इस तिरंगे की प्रतिष्ठा में तनिक भी कमी नहीं आनी चाहिए भले ही इसकी रक्षा के लिए हमें अपने प्राणों को कुर्बान करना पड़े। जब हम वास्तव में विजय प्राप्त कर लेंगे अर्थात् देश आजाद हो जायेगा तभी हमारा प्रण (प्रतिज्ञा) पूरा ठहराया जाएगा।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 8 संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास प्रश्न उत्तर हिंदी

In this article, we will share MP Board Class 6th Hindi Solutions Chapter 8 संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास PDF download, These solutions are solved subject experts from the latest edition books.

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 8 Sangeet Shiromani Swami Haridas Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 8 Sangeet Shiromani Swami Haridas Questions and Answers

MP Board Class 6 Hindi Chapter 8 प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) सम्राट अकबर के नौ रत्नों में से एक थे
(i) मोहन
(ii) तानसेन
(iii) रूपा
(iv) अल्लादीन।
उत्तर
(ii) तानसेन

(ख) दीपक को प्रज्ज्वलित करने वाला राग है
(i) दीपक राग
(ii) ठुमरी,
(iii) राग भैरवी
(iv) मियाँ मल्हार।
उत्तर
(i) दीपक राग

MP Board Solutions

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 8 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) तानसेन के गुरु का नाम ……..था।
(ख) अकबर ने स्वामी हरिदास को ………….. की उपाधि प्रदान की।
(ग) रूपा ने ………….गाकर तानसेन के प्राणों की रक्षा की।
(घ) गुरु जी …………में संगीत कभी नहीं सुना सकते।
उत्तर
(क) स्वामी हरिदास
(ख) संगीत शिरोमणि
(ग) मेघ मल्हार
(घ) राजमहल।

Class 6 Hindi Chapter 8 MP Board प्रश्न 3.
बताइए, किसने किससे कहा

(क) “तानसेन ! यह हमारी खुशकिस्मती है कि हम इस मुल्क के बादशाह हैं।”
(ख) “क्या बहन को भाई पर तरस नहीं आता ? भाई के प्राणों की रक्षा बहन नहीं करेगी ?”
(ग) “तानसेन ! राजमहल का सम्मान और नवरत्नों में स्थान मिल जाना सदा सुखकारी नहीं होता।”
उत्तर
(क) सम्राट अकबर ने तानसेन से
(ख) तानसेन ने अपनी गुरु बहन रूपा से
(ग) स्वामी हरिदास ने अपने शिष्य तानसेन से।

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 8 प्रश्न 4.
चार से पाँच वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) सम्राट अकबर किस पवित्र जमीन को सलाम करते हैं और क्यों?
उत्तर
सम्राट अकबर हिन्दुस्तान की पवित्र जमीन को सलाम करते हैं। यह देश संसार के सभी देशों में अनोखा है। यहाँ के रीति-रिवाज, कला, संगीत एवं यहाँ की अनेक बोलियों में मिठास है। यहाँ का संगीत पूर्ण रूप से विकसित है, नृत्य में भी भावों को साकार किया जाता है। साथ ही यहाँ के ग्रन्थों में अद्वितीय ज्ञान भरा पड़ा है। इसलिए यहाँ की यह भूमि पवित्र है। अत: इस पवित्र जमीन को वह सलाम करता है।

(ख) दीपक राग प्राणों को संकट में डाल सकता है, कारण बताइए।
उत्तर
दीपक राग प्राण लेवा राग है। इस राग से गायक के तन में गर्मी बहुत बढ़ जाती है। दीपक राग के गाने का मतलब सीधा मृत्यु को ही निमन्त्रण है। इस दीपक राग के गाने से पहले मेघ मल्हार गीत गाए जाने का प्रबन्ध कर लेना चाहिए। जब दीपक राग गायक के शरीर में आग पैदा करने लगे, तब मेघ मल्हार गाकर, गायक के प्राणों की रक्षा करनी पड़ती है।

MP Board Solutions

(ग) स्वामी हरिदास संगीत की शिक्षा को ‘समाज’ क्यों | कहते थे?
उत्तर
स्वामी हरिदास ने संगीत को समाज से जोड़ दिया है क्योंकि उनके संगीत में जो मिठास है, वह अत्यन्त प्रभावकारी है। सभी लोग इस संगीत शिरोमणि के संगीत से प्रभावित हो उठते हैं, इसका केवल यही कारण है कि उन्होंने संगीत की शिक्षा को समाज से जोड़कर देखा है। संगीत के लाभ स्वयं अपने स्वार्थ के लिए नहीं, अपनी प्रसिद्धि और सम्मान के लिए नहीं-संसार के स्वामी जगन्नियंता को रिझाने के लिए वे गाते हैं। अत: उन्होंने संगीत की शिक्षा को ‘समाज’ कहा है।

(घ) दीपक राग सुनने के पीछे सम्राट् का क्या भाव था? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
दीपक राग सुनने के पीछे सम्राट् का भाव यह था कि वह तानसेन के साथ ही उसके गुरु स्वामी हरिदास को भी अपने राज दरबार में सम्मानित ‘नवरत्न’ के रूप में नियुक्त कर लेगा जिससे दीपक राग को सुनने के लिए मेघ मल्हार के गाने की पूर्ति स्वामी हरिदास से हो जाएगी। परन्तु ऐसा नहीं हो सका क्योंकि स्वामी हरिदास ने तो अपने संगीत को ब्रज विहारी कृष्ण को समर्पित कर दिया था। वे कृष्ण की भक्ति में ही गीत गाते थे। किसी राज दरबार में स्वार्थ या लोभ के कारण नहीं। वास्तविकता तो यह भी थी कि राजा अकबर स्वामी हरिदास की परीक्षा लेना चाहता था कि वे स्वार्थ और लोभ के कारण तो संगीत की शिक्षा नहीं देते।

(ङ) तानसेन और स्वामी हरिदास के गायन में मुख्य अन्तर क्या था ?
उत्तर
तानसेन का गायन भी अच्छा था लेकिन स्वामी हरिदास के गायन का कोई जवाब नहीं था। अर्थात् तानसेन और हरिदास के गायन की तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि तानसेन को तो अपना गीत हिन्दुस्तान के शहंशाह की खुशी के लिए गाना पड़ता था जिससे उसके संगीत में पराधीनता, परवशता आ जाती थी जबकि स्वामी हरिदास जी तो संसार के स्वामी को रिझाने के लिए गाते थे अर्थात् वे अपना गीत गाने के लिए स्वाधीन थे। जब वे चाहते थे, तो गाते थे। किसी के आदेश पर नहीं। यही अन्तर था तानसेन और स्वामी हरिदास के गायन में।

Class 8 Chapter 6 Hindi Bhasha Bharti प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) तानसेन ने अपने गुरु को अन्तर्यामी क्यों कहा?
उत्तर
तानसेन को गुरुदेव स्वामी हरिदास ने बहुत उदास देखा, उसका चेहरा उतरा हुआ था। ऐसा गुरुदेव के द्वारा पूछे जाने पर कि ऐसी क्या बात है जिससे तुम दुःखी प्रतीत हो रहे हो? इसका उत्तर देते हुए तानसेन ने अपने गुरु को निवेदन किया कि हे गुरुदेव, आप तो अन्तर्यामी हो। ऐसा कहते हुए स्पष्ट किया कि सम्राट् अकबर मुझसे (तानसेन से) दीपक राग सुनना चाहते हैं, वह भी आज ही रात को। मुझे बताइए मेघ मल्हार का प्रबन्ध किए बिना दीपक राग कैसे सुनाया जा सकता है। मेरी इस चिन्ता को आपने समझ लिया है, आप वस्तुतः अन्तर्यामी हैं।

MP Board Solutions

(ख) अकबर ने सम्राट होते हुए स्वयं को बदकिस्मत क्यों कहा?
उत्तर
अकबर ने तानसेन से कहा कि उसने (राजा अकबर ने) तुमसे (तानसेन से) दीपक राग सुनने की फरमाईश इसलिए की थी कि स्वामी हरिदास जी का मेघ मल्हार सुनने का मौका मिलेगा, पर बीच में रूपा के आ जाने से हम आपके गुरु से मेघ मल्हार सुनने से वंचित रह गए। तुम्हारे गुरु की गायकी सुनने की मन में इच्छा है, लेकिन हमारी बदकिस्मती है कि हमारी प्रार्थना उन्होंने स्वीकार नहीं की क्योंकि वे राज भवन में संगीत नहीं गा सकते।

(ग) अकबर ने स्वामी हरिदास के संगीत को ‘जन्नत का संगीत’ क्यों कहा है ?
उत्तर
स्वामी हरिदास ने अपने आश्रम में संगीत सुनाते हुए सेवक वेषधारी सम्राट् अकबर को और तानसेन को उनके हाव-भावों से सही रूप में पहचान लिया। तब स्वामी हरिदास के चरण स्पर्श करते हुए अकबर ने कहा कि आपके संगीत को सुनने का मौका किसी अन्य तरीके से मिलना कठिन था। आज इस अपने नाटक द्वारा तानसेन और उसके सेवक बने अकबर ने उनका संगीत सुन लिया। सचमुच ही गुरुदेव आपका संगीत जन्नत का संगीत है।

Class 6 Bhasha Bharti Chapter 8 प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए

(क) यदि निपुण गायिका रूपा तानसेन की मदद न करती, तो क्या हो सकता था ?
उत्तर

  • तानसेन की मदद रूपा द्वारा न किए जाने पर वह दीपक राग नहीं गाता तो नवरत्नों में से उसे अपमानित करके निकाला जा सकता था।
  • यदि रूपा मदद नहीं करती, और राजहठ के चलते, तानसेन दीपक राग गाता तो उस राग की सिद्धि पर तानसेन के शरीर में अग्नि जल उठती और उसके प्राणों पर संकट आ पड़ता।

MP Board Solutions

(ख) तानसेन के स्थान पर यदि आप होते, तो प्राणों पर संकट के बाद भी क्या सम्राट् की आज्ञा का पालन करते ?
उत्तर
तानसेन के स्थान पर मेरे होने की स्थिति में तथा प्राणों पर संकट के बाद भी मैं सम्राट् की आज्ञा का पालन करता। क्योंकि मुझे अपने सम्मान का अधिक ख्याल होता। इतने समय तक राजभवन में ‘नवरत्न’ के पद पर रहते हुए परीक्षा की घड़ी आने पर मैं किस प्रकार पीछे हटता। यह तो मेरे स्वाभिमान का प्रश्न बन गया होता।

भाषा की बात

Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 8 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और लिखिए
दृश्य, यशस्वी, सम्राट, वृन्दावन, भैरवी, सिद्धि।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से कक्षा में शुद्ध उच्चारण करने का प्रयास कीजिए और अभ्यास कीजिए। बाद में अपनी पुस्तिका में लिखिए।

Bhasha Bharti Class 8 Chapter 6 प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के शुद्ध रूप लिखिए
(1) अन्तयामी, (2) निमनत्रण, (3) प्रतिक्छा, (4) संमान।
उत्तर

  1. अन्तर्यामी
  2. निमन्त्रण
  3. प्रतीक्षा
  4. सम्मान

MP Board Solutions

MP Board Class 6 Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में विशेषण और विशेष्य बताइए
शब्द-निपुण राधिका, अच्छा भाग्य, सम्राट अकबर, नव
उत्तर
विशेष्य-राधिका, भाग्य, अकबर, रत्न।
विशेषण-निपुण, अच्छा, सम्राट, नव।

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 6 प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के साथ ‘उप’ उपसर्ग लगाकर नए शब्द बनाइए
(1) स्थित, (2) करण, (3) लब्ध, (4) न्यास, (5) वास।
उत्तर

  1. उप + स्थित = उपस्थित
  2. उप + करण = उपकरण
  3. उपलब्ध- उपलब्ध
  4. उप + न्यास- उपन्यास
  5. उप + वास = उपवास।

तानसेन का जीवन परिचय प्रश्न 5.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(1) संगीत, (2) विधाता, (3) दीवाना, (4) प्रभात।
उत्तर

  1. संगीत-स्वामी हरिदास का संगीत वास्तव में जन्नत का संगीत था।
  2. विधाता-जन्म और मृत्यु तो विधाता का नियम है।
  3. दीवाना-तानसेन के संगीत ने राजदरबार में सभी श्रोताओं को दीवाना बना दिया।
  4. प्रभात-‘प्रभात’ बेला में आश्रम का वातावरण मन को हरने वाला था।

MP Board Solutions

तानसेन पर प्राणों का संकट क्यों आ गया था प्रश्न 6.
दिए गए अनुच्छेद में यथास्थान विराम चिन्हों का प्रयोग कीजिए
(क) तो इसमें भय कैसा दीपक राग तो तुम्हें आता है सुना देना चिन्ता की क्या बात है
(ख) दीपक राग तो मुझे आता है गुरुदेव आपने ही मल्हार की छत्रछाया में मुझे इस राग का अभ्यास कराया है अगर मल्हार का प्रबन्ध किए बिना दीपक राग सुनाया तो मैं स्वयं भस्म हो जाऊँगा।
उत्तर
(क) तो इसमें भय कसा ? दीपक राग तो तुम्हें आता है; सुना देना। चिन्ता की क्या बात है?
(ख) दीपक राग तो मुझे आता है। गुरुदेव ! आपने ही मल्हार की छत्रछाया में मुझे इस राग का अभ्यास कराया है। अगर मल्हार का प्रबन्ध किए बिना दीपक राग सुनाया, तो मैं स्वयं ही भस्म हो जाऊँगा।

 संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) राजमहल का सम्मान और नवरत्नों में स्थान मिल जाना हमेशा सुखकारी नहीं होता। कभी-कभी वह संकट भी खड़ा कर देता है। जब तुमने दरबारी जीवन का आनंद लिया है तो प्राण-घातक कष्ट भी झेलो।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा भारती’ के पाठ संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास’ से ली गई हैं। इस पाठ के लेखक ‘जयपाल तरंग’ हैं।

प्रसंग-स्वामी हरिदास तानसेन को बताते हैं कि राजदरबारी जीवन सुख और दुःख दोनों को देने वाला है।

व्याख्या-स्वामी हरिदास ने तानसेन को अपनी अनुभूति से बताया कि किसी को यदि राजभवन से सम्मान मिलता है और तुम्हें वहाँ के नवरत्नों में जो स्थान मिला है, वह सदा ही सुख देने वाला नहीं हो सकता। यह दिया गया सम्मान और पद कभी-कभी किसी प्रकार का संकट भी पैदा कर देता है। नतीजा यह होता है कि दरबारी एवं नवरत्नों में स्थान पाने वाले व्यक्ति का जीवन कष्टमय हो जाता है। परन्तु क्योंकि तुमने एक दरबारी का जीवन स्वीकार किया है और उसका आनन्द भी लिया है, तो तुम्हें अवश्य ही प्राणों का नाश करने वाला कष्ट (दुःख) भी भोगना ही चाहिए।

MP Board Solutions

(2) मैं तुम्हारे यशस्वी होने की कामना करता हूँ। मृत्यु तो विधाता का लेख है। वह अवश्यम्भावी है फिर भी दरबारी जीवन की सत्य-कथा तो समझ ही गए हो ? राजा, जोगी, अग्नि और जल की प्रीति उलटी होती है। इनसे बचकर रहना ही हितकर है।

सन्दर्भ- पूर्व की तरह।

प्रसंग-स्वामी हरिदास तानसेन को यशस्वी होने का आशीर्वाद देते हैं। उन्हें राजा, योगी, अग्नि और जल (इन चार वस्तुओं) से सदैव बचकर रहने की सलाह देते हैं।

व्याख्या-स्वामी हरिदास तानसेन को आशीर्वाद देते हैं कि उसका यश बना रहे। साथ ही यह कामना भी करते हैं कि उसका यश भरा जीवन सदा सुरक्षित रहे। लेकिन मृत्यु के विषय में बताते हैं कि यह तो निश्चित है जो विधाता ने अवश्य ही होने वाली बात बतलायी। लेकिन उन्होंने बताया कि राजदरबार का जीवन कैसा होता है, उसकी सच्ची कहानी तो तुम जान गए होगे। तुम्हें यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि राजा, जोगी, अग्नि और जल से प्रेम करते हो, तो इनका तुम्हारे प्रति उल्टा (कष्टदायी) व्यवहार भी होगा। अर्थात् जो इनके पास रहेगा, उसे ही ये लोग कष्ट देंगे, जलाएँगे और गलाएँगे। अत: इनसे जितना हो सके दूर ही रहना चाहिए।

(3) यह हमारी खुशकिस्मती है कि हम इस मुल्क के बादशाह हैं जिसका दुनिया में कोई जवाब नहीं। हम इस मुल्क की कला को, इसके संगीत को, इसकी मीठी-मीठी बोलियों को, इसकी पुरानी किताबों में छिपे ज्ञान को सबको समझना चाहते हैं।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-राजा अकबर तानसेन से कहते हैं कि वह स्वयं को बड़ा भाग्यशाली मानते हैं कि संसार के अद्वितीय देश हिन्दुस्तान के राजा हैं।

व्याख्या-राजा अकबर तानसेन को अपने मन की बात स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि वह स्वयं को बहुत बड़ा भाग्यशाली मानते हैं कि वह एक ऐसे देश का राजा है जिस देश के मुकाबले का संसार में कोई भी देश नहीं है। राजा ने अपने हृदय की इच्छा प्रकट करते हुए कहा कि वह इस देश की कला, संगीत एवं यहाँ की अनेक बोलियों की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। इस देश की बोलियों में अनोखी मिठास है। यहाँ पुराने ग्रन्थों में छिपे ज्ञान की जानकारी लेकर, उस ज्ञान को अच्छी तरह समझना चाहते हैं।

MP Board Solutions

(4) स्वामी जी, हम हिन्दुस्तान के रीति-रिवाज और कलाओं की इज्जत करते हैं। उन्हें ऊँचा दर्जा देते हैं। हमें फन है हिन्दुस्तान पर। हम इस पवित्र जमीन को सलाम करते हैं। स्वामी जी ! यह मुल्क संगीत, नृत्य और ज्ञान का भरपूर खजाना है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-राजा अकबर ने स्वामी हरिदास जी से अपन मन की बात स्पष्ट कह दी कि वह इस देश हिन्दुस्तान पर बहुत गर्व अनुभव करता है।

व्याख्या-स्वामी हरिदास जी से राजा अकबर ने कहा कि वह इस देश के रीति-रिवाजों, तीज-त्यौहारों और कलाओं का बड़ा सम्मान करता है। उन्हें उच्च दर्जे पर रखता है। वह इसकी पवित्र भूमि को बार-बार प्रणाम करता है। वह अचम्भा करते हुए कहता है कि इस देश में संगीत, नृत्य और उच्चकोटि का ज्ञान वास्तव | में अनोखा है, इन सभी से भरपूर यह देश विश्व में अकेला है।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer