भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 16 श्रम की महिमा प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 16 Shram ki Mahima Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 16 Shram ki Mahima Questions and Answers

प्रश्न 1.
सहा विकल्प चुनकर लिखिए

(क) धरती में बीज बोता है
(i) लोहार
(ii) किसान
(iii) जमींदार
(iv) सफाईकर्मी।
उत्तर
(ii) किसान

(ख) सूत कातकर कपड़ा बुनता है
(i) बढ़ई
(ii) कुम्हार
(iii) जुलाहा
(iv) व्यापारी।
उत्तर
(iii) जुलाहा

(ग) बापूजी से मिलने पहुँचे
(i) शिक्षक
(ii) वकील
(iii) डॉक्टर
(iv) मुखिया।
उत्तर
(ii) वकील

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(घ) बापूजी पूजा के समान मानते थे
(i) भाषण देना
(ii) श्रम करना,
(iii) लेख लिखना
(iv) घूमना।
उत्तर
(ii) श्रम करना।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) किसान धरती में ……….. गाड़ता है।
(ख) गाँधीजी अनाज से …….. चुनते थे।
(ग) गाँधीजी को काम ……….. से करना भाता था।
(घ) गाँधीजी कपास के जैसा ही धुनते थे।
उत्तर
(क) बीज
(ख) कंकड़
(ग) सफाई
(घ) जुलाहों।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) “इसलिए यह बड़ा और वह छोटा” पंक्ति से कवि का क्या आशय है?
उत्तर
कवि का इस पंक्ति से आशय यह है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी काम को करने से छोटा या बड़ा नहीं होता है।

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(ख) आश्रम के कार्य गाँधीजी स्वयं क्यों करते थे ?
उत्तर
गाँधीजी आश्रम के कार्य स्वयं ही करते थे क्योंकि उनके लिए श्रम करना (कार्य करना) ही ईश्वर की पूजा करने के समान था। गाँधीजी की यही विचारधारा थी, यही
उनका दर्शन था।

(ग) ऐसे थे गांधीजी’ सम्बोधन में कवि का संकेत क्या है?
उत्तर
‘ऐसे थे गाँधीजी’ सम्बोधन में कवि का संकेत इस बात की ओर है कि श्रम को ही गाँधी ईश्वर मानते थे। कर्म करना ईश्वर की पूजा करना है। वे आश्रम के हर कार्य को चाहे वह सूत कातना हो, अनाज से कंकड़ अलग करना हो, कपास धुनना हो, चक्की पीसना हो, कपड़ा बुनना हो-स्वयं किया करते थे।

(घ) गाँधीजी ने सेवा के काम को ईश्वरीय कार्य क्यों माना है?
उत्तर
काम करने के पीछे जो भावना है, वह सेवा की है, सेवा किसी भी जीव की क्यों न हो, वह तो सेवा का कार्य। सेवा में समर्पण, त्याग और निष्ठा का भाव होता है। इसलिए सेवा का कार्य ईश्वरीय माना गया।

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(ङ) इस कविता से आपको क्या सीख मिलती है ?
उत्तर
इस कविता से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने सभी कार्य अपने हाथ से करने चाहिए। काम करने से कोई भी व्यक्ति नीचा-ऊँचा अथवा बड़ा या छोटा नहीं होता है। काम करने के पीछे सेवा की भावना होती है। सेवा का कार्य ही ईश्वर की पूजा है।

(च) गाँधीजी छोटे से छोटे कार्य को भी महत्व क्यों देते थे?
उत्तर
छोटे से भी छोटा कार्य भी महत्वपूर्ण होता है। इस कार्य के करने के पीछे सेवा की भावना होती है। उस सेवा में ईश्वर की सेवा छिपी है। इसलिए गाँधीजी छोटे से छोटे कार्य को भी महत्व देते थे। प्रत्येक छोटे कार्य से ही बड़े कार्य को करने का मार्ग खुलता है। काम करने की भावना पुष्ट होती है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए

(क) ‘सेवा का हर काम, हमारा ईश्वर है भाई।’
(ख) ‘एक आदमी घड़ी बनाता, एक बनाता चप्पल।’
इसीलिए यह बड़ा, और वह छोटा, इसमें क्या बल।’
(ग) “ऐसे थे गाँधीजी, ऐसा था उनका आश्रम,
गाँधीजी के लेखे पूजा के समान था श्रम।’
उत्तर
सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या के अन्तर्गत पद्यांश सं. 4, 1 व 3 की व्याख्या देखें।

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भाषा की बात

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
सड़क, घड़ी, आश्रम, ईश्वर।।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से शुद्ध उच्चारण करना सीखिए और अभ्यास कीजिए।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए
(i) पूस्तक
(ii) जूलाहो
(iii) इश्वर
(iv) ऊतसाह।
उत्तर
(i) पुस्तक
(ii) जुलाहों
(iii) ईश्वर
(iv) उत्साह।

प्रश्न 3.
(अ) स्तम्भ में तद्भव और (ब) स्तम्भ में उनके तत्सम शब्द दिए गए हैं, उन्हें सम्बन्धित शब्द से जोड़िए
MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 श्रम की महिमा 1
उत्तर
(क)→ (vi), (ख) → (iv), (ग) → (v), (घ) →(iii), (ङ) →(i), (च) →(i)

प्रश्न 4.
स्तम्भ’क’ में दिए गए महावरों को स्तम्भ’ख के गलत क्रम में रखे उनके अर्थ से सही क्रम में मिलाइए
MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 श्रम की महिमा 2
उत्तर
(अ) → (iv), (ब) → (iii), (स) → (ii), (द) →(i)

प्रश्न 5.
दी गई वर्ग पहेली में गाँधीजी के जीवन से जुड़ी पाँच वस्तुएँ हैं, उन्हें छाँटकर अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए
MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 16 श्रम की महिमा 3
उत्तर
(1) चश्मा
(2) लाठी
(3) खादी की धोती
(4) घड़ी
(5) चरखा

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प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(i) व्यापारी
(ii) कपड़ा
(iii) आदमी
(iv) चक्की ।
उत्तर
(i) व्यापारी-व्यापारी देश-विदेश को माल भेजते हैं और मैंगाते हैं।
(ii) कपड़ा-जुलाहे कपड़ा बुनते हैं।
(iii) आदमी-आदमी अपना काम स्वयं करता है।
(iv) चक्की-चक्की से अनाज पीसा जाता है।

श्रम की महिमा सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

1) तुम कागज पर लिखते हो
वह सड़क झाड़ता है
तुम व्यापारी
वह धरती में बीज गाड़ता है।
एक आदमी घड़ी बनाता
एक बनाता चप्पल
इसीलिए यह बड़ा और वह छोटा
इसमें क्या बल।

शब्दार्थ-बीज गाड़ता = बीज बोता है। बल = महत्वपूर्ण बात।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषा| भारती’ के ‘श्रम की महिमा’ शीर्षक कविता से अवतरित हैं। इस कविता के रचयिता कवि भवानी प्रसाद मिश्र’ हैं।

प्रसंग-काम कोई भी हो, उससे कोई ऊँचा-नीचा, छोटा या बड़ा नहीं होता है।

व्याख्या-कवि कहता है कि एक तुम हो, कागज पर लिखते हो और एक वह जो सड़क की सफाई करता है। तुम व्यापार करने वाले हो सकते हो या वह व्यक्ति जो खेतों में बीज बोता है, इसलिए वह किसान है। एक वह व्यक्ति जो घड़ी बनाता है या उसकी मरम्मत करता है, साथ ही वह व्यक्ति जो चप्पल बनाता या उनकी मरम्मत करता है। इस आधार पर कोई छोटा या बड़ा हो सकता है क्या ? अर्थात् नहीं। इस बात में कोई बल नहीं है, अर्थात् यह बात महत्वपूर्ण नहीं है।

(2) सूत कातते थे गांधी जी
कपड़ा बुनते थे,
और कपास जुलाहों के जैसा ही
धुनते थे
चुनते थे अनाज के कंकर
चक्की घिसते थे
आश्रम के कागजयाने
आश्रम में पिसते थे
जिल्द बाँध लेना पुस्तक की
उनको आता था
हर काम सफाई से
नित करना भाता था।

शब्दार्थ-चक्की घिसते थे = चक्की चला कर दाना पीसते थे, आटा बनाते थे। नित = रोजाना। भाता था = अच्छा लगता था।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-महात्मा गाँधी अपने आश्रम में अपने सारे काम अपने हाथ से करते थे।

व्याख्या-गाँधीजी अपने आश्रम में रहते हुए, सूत कातते थे। उससे कपड़ा बुनते थे। साथ ही जुलाहों से भी बढ़िया ढंग से कपास धुनते थे। अनाज में से कंकड़ आदि चुनकर अलग करते और अनाज को साफ करके, अपने आप ही चक्की से आटा बनाते थे। वे पुस्तकों की जिल्द भी बनाना जानते थे। उन्हें प्रत्येक काम सफाई से करना प्रतिदिन ही अच्छा लगता था। कहने का तात्पर्य यह है कि महात्मा गाँधी अपने काम करने के लिए किसी पर भी निर्भर नहीं रहते थे।

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(3) ऐसे थे गांधी जी
ऐसा था मका आश्रम
गांधी जी के लेखे
पूजा के समान था श्रम।
एक बार उत्साह-ग्रस्त
कोई वकील साहब
जब पहुँचे मिलने
बापूजी पीस रहे थे तब।

शब्दार्थ-लेखे = अनुसार। श्रम = काम करना। पीस रहे थे = चक्की चलाकर अनाज से आटा बना रहे थे।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह। प्रसंग-गांधीजी श्रम को ही ईश्वर की पूजा मानते

व्याख्या-गांधीजी और उनका आश्रम ऐसा था जिसमें वे परिश्रम को ही ईश्वर की पूजा मानते थे। एक बार कोई वकील साहब उनके पास आश्रम में पहुँचे। वकील साहब बहुत ही उत्साहित थे। जिस समय वे आश्रम में पहुँचे। तब महात्मा गाँधी अनाज को चक्की से पीसकर आटा बना रहे थे।

(4) बापूजी ने कहा-बैठिए
पीसेंगे मिलकर
जब वे झिझके
गांधीजी ने कहा
और खिलकर
सेवा का हर काम
हमारा ईश्वर है भाई
बैठ गये वे दबसट में
पर अक्ल नहीं आई

शब्दार्थ-झिझके – शर्मिन्दा हुए। दबसट में = समीपही।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-गाँधीजी ने उन वकील साहब से हँसकर कहा कि भाई आओ, दोनों ही मिलकर चक्की से आटा बनाते हैं।

व्याख्या-वकील साहब उत्साहपूर्वक जोश से भरे हुए, बापूजी से मिलने आश्रम में पहुँचे। तब गाँधीजी ने उनसे कहा, आइए, बैठिए। हम दोनों ही मिलकर अनाज पीसेंगे और आटा तैयार करेंगे। इस पर वकील साहब कुछ झिझकने लगे अर्थात् उन्हें चक्की पीसना एक घृणित-सा काम लगा। इस पर गाँधीजी ने खिलखिलाकर ठहाका भरते हुए (जोर से हँसते हुए) कहा कि हे भाई! सेवा में कोई भी किया गया हमारा काम, ईश्वर ही होता है। इसे सुनते ही वह वकील महोदय भी समीप बैठ गए लेकिन गाँधीजी द्वारा कही गई बात समझ नहीं सके। उनकी बुद्धि ने काम नहीं किया अर्थात् गाँधीजी के कहे हुए शब्दों के अर्थ को वे समझ नहीं सके।

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भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 15 दस्तक प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 15 Dastak Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 15 Dastak Questions and Answers

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) लेखक के पुत्र का नाम था
(i) गणेशन
(ii) सोनू
(iii) गरीबा
(iv) हरी बाबू।
उत्तर
(ii) सोनू

(ख) त्रिवेन्द्रम का प्रसिद्ध सागर तट है
(i) कोलकाता
(ii) कोवलम
(iii) मुम्बई
(iv) गोआ।
उत्तर
(ii) कोवलम

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) ……….. ऊँचे पद पर कार्यरत थे।
(ख) शीला अवकाश के क्षणों में ……. का कार्य करने लगी।
उत्तर
(क) हरीबाबू
(ख) समाज सेवा

प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर लिखिए-

(क) सोनू अचेत कैसे हो गया था ?
उत्तर
सोनू छत से गिर पड़ा और उसके सदमे से वह अचेत हो गया।

(ख) लेखक गरीबा के घर क्यों गया था?
उत्तर
गरीबा बीमार हो गया था इसलिए मुलाकात न होने के कारण लेखक उससे मिलने के लिए उसके घर चला गया था।

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(ग) शीला मूच्छिंत क्यों हो गई थी?
उत्तर
शीला अपने पुत्र सोनू को छत से गिरने पर मूर्णित देखकर स्वयं मूर्च्छित हो गई।

(घ) लेखक ने गणेशन की मदद कैसे की?
उत्तर
लेखक ने आठ वर्षीय गणेशन के पैर में आर-पार चुभी कील को खींचकर निकाला और पट्टी बाँध दी। उसे अपनी पीठ पर लादकर ऑटो स्टैण्ड तक पहुँचाया।

प्रश्न 4.
तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) शीला अपने पति से नाराज क्यों रहती थी?
उत्तर
शीला अपने पति से नाराज इसलिए रहती थी कि वह (पति) समाज के काम के लिए, अपनी चिन्ता छोड़कर भी लगे रहते थे। लोगों की सेवा करने, उनकी समस्याओं को दूर कराने में सहायता करने में वे (लेखक महोदय) लगे रहते थे। अपने घर और गृहस्थी के लिए समय नहीं निकाल पाते थे। अतः शीला अपने पति से नाराज रहती थी।

(ख) शीला के व्यवहार में परिवर्तन का क्या कारण था?
उत्तर
सोनू छत से गिर पड़ा, मूर्च्छित हो गया। जिस किसी ने भी यह समाचार सुना, वही सहायता के लिए दौड़ पड़ा। शीला पुत्र को अस्पताल में मूर्च्छित दशा में देखकर मूर्छित हो गई। एकत्र हुए समाज के लोग किसी भी तरह की सहायता, चाहे वह धन की हो या बल की, तैयार थे। इतनी संख्या में सहायकों और सहयोगियों को देखकर शीला के व्यवहार में परिवर्तन आया। लेखक द्वारा की गई समाज सेवा में शीला की आस्था और विश्वास बढ़ गया और वह स्वयं समाज की सहायता में मुहल्लों और पड़ोस की महिला-मण्डलों में जाकर उपस्थित होने लगी।

(ग) समाज ने भी उनके साथ वही व्यवहार किया जैसा उन्होंने किया था? इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
लेखक समाज सेवा में हर समय तत्पर रहते थे। वे अपनी गृहस्थी और घर की समस्याओं के समाधान के लिए समय नहीं दे पाते थे। वे समाज सेवा में सब कुछ भूले हुए थे। एक दिन जब उनका सोनू छत से गिर पड़ा, अचेत हो गया, तो समाज के लोग ही उसे अस्पताल ले गए। लेखक तो उस समय त्रिवेन्द्रम में अपने किसी मित्र के कार्य से गए हुए थे। उनकी गैर-मौजूदगी में भी समाज के लोगों ने उनके पुत्र सोनू के लिए जो सहयोग दिया, वैसा तो स्वयं लेखक भी नहीं कर पाते। क्योंकि लेखक चौबीस घण्टे समाज की सेवा में लगे रहते थे, तो उस दिन समाज ने भी अपनी कृतज्ञता का परिचय दिया। समाज ने वही किया, जैसा उन्होंने समाज के लिए किया था।

(घ) शीला ने समाज की उपेक्षा करने वालों के विषय में क्या कहा?
उत्तर
शीला और लेखक के पुत्र सोनू को अस्पताल में सहायता के लिए तत्पर लोगों की भीड़ देखकर तथा सोनू के स्वस्थ हो जाने पर शीला भी समाज के द्वारा दिए गए सहयोग से प्रभावित होकर अपने अवकाश के समय में प्रत्येक मुहल्ले में जाकर महिलाओं के बीच समाज सेवा करने लगी। वह कहने लगी कि समाज की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। यदि ऐसा कोई करता भी है तो वह व्यक्ति अपनी ही उन्नति से सन्तुष्ट होता रहता है। उसे समाज के कल्याण की चिन्ता नहीं होती। परन्तु अनुभव से देखा गया है कि ऐसे व्यक्तियों का प्रकृति स्वयं नियन्त्रण करती है। समय आने पर उसे दण्ड भी देती है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित गद्यांश की व्याख्या कीजिए

‘जो समाज की उपेक्षा कर मात्र अपनी ही उनति में संतुष्ट रहता है, प्रकृति उसका नियन्त्रण स्वयं करती है। समय आने पर उन्हें दण्ड भी देती है।’
उत्तर
प्रस्तुत पंक्ति लेखक की पत्नी शीला का कथन है। (व्याख्या के लिए प्रश्न 4 के खण्ड (घ) के उत्तर का अध्ययन कीजिए।

प्रश्न 6.
सोचिए और बताइए

(क) शीला मुहल्ले-मुहल्ले जाकर समाज सेवा क्यों करने लगी?
उत्तर
शीला अपने पुत्र सोनू के साथ छत से गिरकर हुई दुर्घटना के समय समाज के लोगों ने जो सहयोग दिया, उसे देखकर उसके मन के विचारों में परिवर्तन हुआ। उसे समझ में आने लगा कि लेखक के द्वारा की गई समाज-सेवा का प्रतिफल-समाज के लोगों का सहयोग मिला और सोनू को स्वास्थ्य लाभ मिला। इस सब के पीछे लेखक की समाज सेवा की भूमिका की प्रधानता है। सेवा का बदला सेवा के रूप में ही प्राप्त होता है। यह समझकर शीला मुहल्ले-मुहल्ले जाकर समाज-सेवा करने लगी।

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(ख) छत से गिरने की दुर्घटना से कैसे बचा जा सकता है?
उत्तर
मकान की छत की मुंडेर की ऊँचाई अधिक होनी चाहिए। छत पर बच्चों या युवकों को खेलते समय बार-बार ध्यान दिलाते रहना चाहिए कि छत पर सावधानी बरतें, खेलते हुए बच्चे या युवक आपस में धक्का-मुक्की न करें। छत की मुंडेर की तरफ पीठ करके चलना अथवा दौड़ना नहीं चाहिए।

प्रश्न 7.
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए
(क) यदि त्रिवेन्द्रम में लेखक की जगह आप होते तो क्या करते?
उत्तर
त्रिवेन्द्रम में लेखक की जगह होने पर मैं स्वयं गणेशन को ऑटो स्टैण्ड पर लाकर ऑटो से अस्पताल पहुंचाता और उसकी उचित मरहम-पट्टी करता। उसके थोड़ा सम्हलने पर उसके घर पहुँचा कर ही, अपने काम को पूरा करता।

(ख) यदि हरीबाबू की तरह आप ऊँचे पद पर होते तो क्या-क्या करते?
उत्तर
ऊँचे पद पर होने का तात्पर्य यह नहीं है कि मनुष्य मानवता को भुला दे और अपने स्वार्थों की पूर्ति भर ही करता रहे। सरकारी अधिकारी भी जनता का सेवक होता है। जनता की किसी भी असुविधा का निवारण करना, उसकी सेवा करना ही उसका धर्म है। इस दृष्टि से सेवा-धर्म का निर्वाह ही करता।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
शुद्ध उच्चारण कीजिए
बड़बड़ाहट, प्लास्टर, स्वभाव, अनुपस्थिति, स्वस्थ, नियन्त्रण।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय के सहयोग से उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध कीजिए
(i) मनोरज्जन
(ii) अन्तरद्वनद
(iii) हिरदय
(iv) चनचल
(v) दरशन।
उत्तर
(i) मनोरंजन
(ii) अन्तर्द्वन्द
(iii) हृदय
(iv) चंचल
(v) दर्शन।

प्रश्न 3.
नीचे लिखे शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
(i) आशा
(ii) उपस्थित
(iii) कठिन
(iv) अमीर
(v) उन्नति
(vi) कठोर।
उत्तर
(i) निराशा
(ii) अनुपस्थित
(iii) सरल
(iv) गरीब
(v) अवनति
(vi) कोमल।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों में संज्ञा, सर्वनाम व क्रिया छाँटकर लिखिए
(i) चिल्लाना
(ii) वे
(iii) शीला
(iv) बोलना
(v) बड़बड़ाना
(vi) वह
(vii) हरीबाबू
(viii) अघाना
(ix) मैं
(x) सोनू
(xi) उसने
(xii) गरीबा।
उत्तर

  1. संज्ञा-शीला, हरीबाबू, सोनू, गरीबा।
  2. सर्वनाम-वे, वह, मैं, उसने।
  3. क्रिया-चिल्लाना, बोलना, बडबड़ाना, अघाना।

प्रश्न 5.
इस पाठ में अन्य भाषा के शब्द छाँटकर लिखिए।
उत्तर
प्लास्टर, लाचार, सरेआम, फिल्मी, खासी, देहात, आरामखाना, मनुहार, दम, अमुक, कार, तमाम, गन्दी, माफ, मोहल्ला, लायक, बेताव, टेपरिकार्ड, हवाइयाँ, ऑटो स्टैण्ड, किलोमीटर, रूमाल, अस्पताल।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों में ‘आई’ का ‘आहट प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए
(i) बुरा
(ii) लड़खड़ान
(iii) चतुर
(iv) गुनगुनाना
(v) भला
(vi) लड़ना
(vii) गुदगुदाना
(viii) चहचहाना।
उत्तर
(i) बुरा + आई = बुराई
(ii) लड़खड़ाना + आहट = लड़खड़ाहट
(iii) चतुर + आई = चतुराई
(iv) गुनगुनाना + आहट = गुनगुनाहट
(v) भला + आई = भलाई
(vi) लड़ना + आई = लड़ाई
(vii) गुदगुदाना + आहट = गुदगुदाहट,
(viii) चहचहाना + आहट = चहचहाहट।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(i) तिल का ताड़ बनाना
(ii) नाक में दम करना
(iii) सीधे मुँह बात न करना
(iv) कान भरना।
उत्तर
(i) तिल का ताड़ बनाना-छोटी बात को बढ़ाचढ़ाकर कहना।
प्रयोग-गिरीश बाबू अपने साथियों की थोड़ी भी गलती को अपने साहब से तिल का ताड़ बना कर कहते हैं।
(ii) नाक में दम करना-परेशान कर देना।
प्रयोग-राघव ने अपनी जिद्द पूरा करने के लिए अपने माँ-बाप की नाक में दम कर दिया।
(iii) सीधे मुंह बात न करना-घमण्ड करना।
प्रयोग-राधे की अभी-अभी फूड कार्पोरेशन में नियुक्ति क्या हुई है, वह तो किसी से भी सीधे मुँह बात नहीं करता है।
(iv) कान भरना-चुगली मारना।
प्रयोग-प्रायः देखा गया है कि मेरे दफ्तर के एक-दो बाबू दूसरे कर्मचारियों के खिलाफ अपने अधिकारी के कान भरते रहते हैं।

दस्तक परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

(1) उसका अन्तर्द्वन्द्व बराबर चलता रहा। वह औरों की भाँति ही मुझे भी अपने परिवार की प्रगति और खुशहाली में सन्तुष्टि के लिए सीमित रखना चाहती थी। इसलिए मन ही मन उसके विचारों की संकीर्णता और द्वन्द्व समाप्त करने के लिए मैं चिन्तित रहने लगा था।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषाभारती’ के पाठ ‘दस्तक’ से ली गई है। इस कहानी के लेखक डॉ. शिवभूषण त्रिपाठी हैं।

प्रसंग-कहानीकार ने स्पष्ट किया है कि मन के अन्दर उठने वाले संकुचित विचार मनुष्य को स्वार्थी बना देते हैं।

व्याख्या-लेखक की पत्नी शीला नहीं चाहती कि वे सदा सामाजिक कार्यों में ही लगे रहें। उनके बाहर रहने की स्थिति में घर पर कोई घटना घटती है, तो कौन सहायक होगा, ऐसा कहने पर लेखक ने शीला को कहा कि उसे केवल धैर्य रखना चाहिए। परन्तु उसके मन में उत्पन्न विचारों की हलचल मचती रही। वह चाहती थी कि वह (लेखक) भी सदा अपनी और अपने परिवार की उन्नति, बढ़ोत्तरी और सम्पन्नता के लिए कार्य करने तक ही सीमित रहें। लेखक सोचता था कि उनकी पत्नी की यह संकुचित विचारधारा और उसके मन में उठने वाले विचारों की हलचल समाप्त हो जाय। यही लेखक की चिन्ता का कारण था।

(2) अस्पताल में अमीर-गरीब सभी स्तर के सहयोगियों की एकत्रित भीड़ को देखकर वह दंग रह गई। उसे मेरी अनुपस्थिति की अनुभूति भी नहीं हो सकी थी। शायद मैं उपस्थित रहकर भी उतना धन नहीं जुटा सकता था। उस दिन जिस समाज के पीछे मैं दिवाना रहता था, उसका दर्शन करते वह नहीं अघाती थी।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-लेखक का पुत्र सोनू छत से गिर गया। लेखक किसी के काम से त्रिवेन्द्रम गया हुआ था। बालक गिरने से अचेत हो गया। दर्शक और सहयोगी जन उसे अस्पताल ले गए। पत्नी पुत्र की दशा पर स्वयं मूर्छित हो गई।

व्याख्या-अस्पताल में भर्ती किए गए लेखक के अचेत पुत्र के इलाज के लिए धनवान और गरीब सभी स्तर के लोग वहाँ पहुँच गए। इन सहयोगियों की भीड़ को देखकर वह (लेखक की पत्नी) भी अचम्भे में पड़ गई। उसे लेखक का गैर-हाजिर होना भी मालूम न हुआ क्योंकि रुपये-पैसे का प्रबन्ध किसने किया, यह भी पता नहीं चला। लेखक कहता है, जो भी धन सोनू के लिए खर्च किया गया, उतना वह स्वयं भी एकत्र नहीं कर पाता। पूरा समाज उस दिन अस्पताल में इकट्ठा था। लेखक ने सदा ही समाज की चिन्ता की। उस समाज की सेवा में वह सदा तत्पर रहता था। उस समाज के लोगों की भीड़ देखकर वह अघाती नहीं | थी। अर्थात् समाज का हर व्यक्ति उसकी सेवा के लिए तत्पर था।

(3) सूर्यास्त का समय था। त्रिवेन्द्रम के प्रसिद्ध सागर तट, कोवलम बीच पर हजारों की भीड़ मचल रही थी। बच्चे कभी सागर के जल को एक-दूसरे पर उछालते तो कभी बालुकामय तट पर दौड़ते। वह दृश्य बहुत ही रोचक एवं आकर्षक था।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-सूर्य के छिपने के समय पर समुद्र के किनारे का वर्णन है।

व्याख्या-लेखक अपने मित्र के किसी काम से त्रिवेन्द्रम गया हुआ है। सूर्य के छिपने का समय हो चुका था, त्रिवेन्द्रम का | समुद्री किनारा अपने सायंकालीन सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध है। कोवलम नाम से प्रसिद्ध समद्री किनारे पर हजारों की संख्या में लोग इकट्ठे घूम-फिर रहे थे। बच्चे समुद्र के पानी को एक-दूसरे पर उछालते तो कभी बालू भरे समुद्री किनारे पर इधर से उधर दौड़ रहे थे। यह दृश्य बहुत ही अच्छा लग रहा था तथा सब को अपनी ओर खींच रहा था।

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(4) इस घटना को सुनकर मेरे सिद्धान्तों के प्रति शीला की आस्था और विश्वास अधिक दृढ़ हो गया था। उसे आश्चर्य हो रहा था कि जब मेरा सोनू छत से गिरा था, ठीक उसी दिन उसी समय मैं आठ वर्षीय गणेशन को पीठ पर लादकर ऑटो स्टैण्ड पर जा रहा था। उसी समय मेरी अनुपस्थिति में सोनू की सहायता के लिए लोग व्याकुल हो उठे थे।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-पैर में कील चुभ जाने से कष्ट पाते गणेशन को ऑटो स्टेण्ड तक लेकर लेखक पहुँचाता है। तो उधर लेखक के पुत्र सोनू की सहायता के लिए भी लोग हड़बड़ाये जा रहे थे। यद्यपि लेखक वहाँ नहीं था।

व्याख्या-लेखक ने जब पैर में कील के चुभने से घायल आठ वर्षीय गणेशन को ऑटो स्टेण्ड तक, अपनी पीठ पर लाद कर पहुँचाया ठीक उसी समय इधर छत से गिरे लेखक के पुत्र सोनू को अस्पताल पहुंचाने में सहायता करने के लिए जुटे लोगों की भीड़ को देखकर लेखक की पत्नी शीला को यह विश्वास हो गया कि लेखक द्वारा समाज के लोगों की सहायता करने के सिद्धान्त का, नियम का ही यह प्रभाव है, जिससे लोग सोनू की सहायता धन और बल दोनों से करने के लिए जुटे हुए थे। समाज सेवा के नियम में शीला की आस्था पक्की होती जा रही थी। लोग लेखक के पुत्र के कष्ट से व्याकुलं थे लेकिन वे सभी उसकी गैर-मौजूदगी में भी सोनू की सहायता को अड़े हुए थे। सेवा का फल मीठा होता है।

(5) समाज को समझने का जब समय था,शक्ति थी, तब समझ न सके और जब समाज को समझने की समझ आई तो बहुत देर हो चुकी थी, काल उनकी देहली पर खड़ा दस्तक दे रहा था।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-जकलेखक त्रिवेन्द्रम से लौटकर अपने घर आए, घटना को जाना-समझा तो उसी समय ऊँचे पद पर आसीन हरीबाबू की याद आई और वह कहने लगे कि

व्याख्या-हरीबाबू ने अच्छे और ऊँचे पद पर रहकर नौकरी की, लेकिन उस नौकरी के मध्य केवल अपना ही स्वार्थ सिद्ध किया। समाज के लोगों की सहायता की बात तो दूर, उनके विषय में सोचा भी नहीं। अपने ही कष्टों से वैभवपूर्ण होने पर भी, पागल की स्थिति में आ गए, कोई भी उनकी सहायता के लिए नहीं आया। जब वे सामर्थ्यवान थे, तो समाज की सेवा कर सकते थे, उस समय उन्होंने समाज को न तो समझा और न उसे समझने की बुद्धि (सूझ-बूझ) आई। अब समाज को समझने लगे, तो समय निकल चुका था। समाज की सेवा करने की समय सीमा से बाहर हो चुके वे रिटायर हो चुके थे क्योंकि अब तो वे अपने जीवन की अन्तिम सीढ़ी पर थे। काल किसी भी समय आकर दस्तक देने वाला था। उस अवस्था में (चौथेपन में) मनुष्य किसी की भी सहायता करने की सामर्थ्य से रहित हो जाता है।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

MP Board Class 9th Special Hindi अपठित बोध

MP Board Class 9th Special Hindi अपठित बोध

MP Board Class 9th Special Hindi अपठित गद्यांश

निम्नलिखित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उनके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1. मानव जीवन में उत्तरदायित्व का विशेष स्थान है। अवगुणों को दूर करने के लिए एवं जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए उत्तरदायित्व का ज्ञान होना अति आवश्यक है। उत्तरदायित्व आ जाने पर मनुष्य बुद्धिमान हो जाता है। उदाहरण के लिए, बुरी आदतों वाले लोग, शिक्षक जैसे पद को प्राप्त कर अपनी बुरी आदतों को छोड़ देते हैं। इसी प्रकार उद्दण्ड नवयुवक भी गृहस्थी का भार आ जाने पर विचारशील बन जाते हैं।

प्रश्न
1. उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त (सटीक) शीर्षक चुनिए।
2. जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए क्या आवश्यक है?
3. लोग अपनी बुरी आदतों को कब छोड़ देते हैं?
4. विलोम शब्द बताइए-सफलता, आवश्यक।
5. ‘उत्तरदायित्व’ शब्द का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर-
1. ‘उत्तरदायित्व’।
2. जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए उत्तरदायित्व का ज्ञान होना अति आवश्यक हैं।
3. लोग अपनी बुरी आदतों को शिक्षक जैसे पद को प्राप्त करके छोड़ देते हैं।
4. असफलता, अनावश्यक।
5. ‘उत्तरदायित्व’ का निर्वाह करने पर मनुष्य प्रत्येक क्षेत्र में सफल हो सकता है।

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2. राष्ट्रीय एकता प्रत्येक स्वतन्त्र राष्ट्र के लिए नितान्त आवश्यक है। जब भी धार्मिक या जातीय आधार पर राष्ट्र से अलग होने की कोशिश होती है, हमारी राष्ट्रीय एकता के खण्डित होने का खतरा बढ़ जाता है। यह एक सुनिश्चित सत्य है कि राष्ट्र का स्वरूप निर्धारित करने में वहाँ निवास करने वाले जन एक अनिवार्य तत्व होते हैं। भावात्मक स्तर पर स्नेह सम्बन्ध सहिष्णुता, पारस्परिक सहयोग एवं उदार मनोवृत्ति के माध्यम से राष्ट्रीय एकता की अभिव्यक्ति होती है। राष्ट्र को केवल भूखण्ड मानकर उसके प्रति अपने कर्तव्यों से उदासीन होने वाले जन राष्ट्रीय एकता स्थापित करने में कदापि सहायक नहीं हो सकते। वस्तुतः राष्ट्रीय एकता को व्यवहार में अवतरित करके ही राष्ट्र के निवासी अपने राष्ट्र की उन्नति और प्रगति में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

प्रश्न
1. उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त (सटीक) शीर्षक लिखिए।
2. उपर्युक्त गद्यांश का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
3. राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा कब उत्पन्न होता है?
4. विलोम शब्द बताइए-एकता, उदार।
5. ‘उन्नति’ शब्द का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर-
1. उपर्युक्त शीर्षक–’राष्ट्रीय एकता’।
2. किसी देश की स्वतन्त्रता एकता के द्वारा ही स्थायी रह सकती है। राष्ट्रीय एकता का मूलाधार वहाँ निवास करने वाले लोगों के उत्तम संस्कार एवं श्रेष्ठ विचार हैं। राष्ट्र की उन्नति के लिए प्रत्येक मानव को सहगामी बनाना चाहिए।
3. राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा उस समय उत्पन्न होता है, जब धर्म एवं जाति को माध्यम बनाकर राष्ट्र से पृथक् होने की कोशिश की जाती है।
4. अनेकता, अनुदार।
5. देश की उन्नति’ प्रत्येक नागरिक के चारित्रिक गुणों के विकास पर निर्भर हैं।

3. कविता ही मनुष्य को हृदय के स्वार्थ सम्बन्धों के संकुचित मण्डल से ऊपर उठाकर सामान्य भावभूमि पर ले जाती है। जहाँ जगत् की नाना गतियों के मार्मिक स्वरूप का साक्षात्कार और शुद्ध अनुभूति का संचार होता है। इस भूमि पर पहुँचे हुए मनुष्य को कुछ काल के लिए अपना पता नहीं रहता। वह अपनी सत्ता को लोक सत्ता में लीन किए रहता है। उसकी अनुभूति सबकी अनुभूति है। इस अनुभूति के आभास से हमारे मनोविकार तथा शेष सृष्टि के साथ हमारे रागात्मक सम्बन्ध की रक्षा और निर्वाह होता है।

प्रश्न
1. उपर्युक्त गद्यांश का उचित (सटीक) शीर्षक लिखिए।
2. कविता मनुष्य के लिए क्या काम करती है?
3. उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
4. विलोम शब्द बताइए-स्वार्थ, शेष।
5. ‘रागात्मक’ शब्द का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर-
1. कविता का स्वरूप।
2. कविता ही मनुष्य को हृदय के स्वार्थ सम्बन्धों के संकुचित मण्डल से ऊपर उठाकर सामान्य भावभूमि पर ले जाती है।
3. कविता मनुष्य को स्वार्थ से अलग करती है। उसकी संकुचित व संकीर्ण मानसिकता को व्यापक रूप प्रदान करती है। मनुष्य हृदय में कविता से संवेदना का भाव जगता है। वह संसार के साथ तादात्म्य स्थापित कर लेता है। इसी गुण के विकास से वह दूसरों की अनुभूति को अपनी अनुभूति मान लेता है।
4. परार्थ, अशेष।
5. सृष्टि के प्रति हमारा रागात्मक सम्बन्ध कविता के द्वारा स्थापित होता है।

4. समाजवाद एक सुन्दर शब्द है। जहाँ तक मैं जानता हूँ, समाजवाद में समाज के सारे सदस्य बराबर होते हैं, न कोई नीचा और न कोई ऊँचा। किसी आदमी के शरीर में सिर इसलिए ऊँचा नहीं है कि वह सबसे ऊपर है और पाँव के तलवे इसलिए नीचे नहीं हैं कि वे जमीन को छूते हैं। जिस तरह मनुष्य के शरीर के सारे अंग बराबर हैं उसी प्रकार समाज में सभी मनुष्य समान हैं; यही समाजवाद है।

प्रश्न.
1. उपर्युक्त गद्यांश का उचित (सटीक) शीर्षक दीजिए।
2. उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
3. समाजवाद में महत्त्व की बात क्या है?
4. विलोम शब्द बताइए-छूते हैं, नीचा।
5. ‘सदस्य’ शब्द का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर-
1. शीर्षक-‘समाजवाद’।
2. समाजवाद की व्यवस्था आदमी के शरीर की भाँति है। जहाँ समाज के सारे सदस्य एक बराबर होते हैं न कोई नीचा और न कोई ऊँचा।
3. समाजवाद में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि समाज के सारे सदस्य बराबर होते हैं।
4. अछूते हैं, ऊँचा।
5. घर के सदस्य मिलकर अपने-अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह करते हैं।

MP Board Class 9th Special Hindi अपठित पद्यांश

निम्नलिखित पद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उनके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर सावधानीपूर्वक दीजिए-

1. निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा ज्ञान के मिटै न हिय को सूल॥
इक भाषा इक जीव, इक मीत सब घर के लोग।
तब बनत है सबन सौं, मिटत मूढ़ता सोग॥

प्रश्न
1. उपर्युक्त पद्यांश का उचित (सटीक) शीर्षक लिखिए।
2. उपर्युक्त पद्यांश का भाव अपने शब्दों में लिखिए।
3. कविकेअनुसार मूढ़ता और शोक किस प्रकार मिटता है?
4. शब्दार्थ बताइए-निज, सूल।
5. ‘ज्ञान’ शब्द का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर-
1. शीर्षक-‘राष्ट्रभाषा की उन्नति’।
2. भावार्थ-अपनी राष्ट्र भाषा की उन्नति और विकास से ही सभी प्रकार की उन्नति सम्भव है। अपनी भाषा का ज्ञान प्राप्त करके ही अपने हृदय की बात को, व्यथा को बता सकते हैं। जब सम्पूर्ण राष्ट्र के लोग एक भाषा, एक ही तरह की जीवन-शैली एवं समान विचारधारा अपनायेंगे, तो अवश्य ही उनकी मूर्खता एवं शोक (कष्ट) दूर हो सकेंगे।
3. कवि के अनुसार जब सभी लोग एक ही भाषा एवं एक जैसी जीवन शैली एवं विचार अपनायेंगे, तभी उनकी मूढ़ता एवं शोक मिट सकेंगे।
4. अपना, कष्ट।
5. ‘ज्ञान’ से मनुष्य उन्नति प्राप्त करता है।

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2. सावधान मनुष्य ! यदि विज्ञान है तलवार,
तो इसे दो फेंक तजकर मोह, स्मृति के सार।
हो चुका है सिद्ध ! है तू शिशु अभी अज्ञान;
फूल काँटों की तुझे कुछ भी नहीं पहचान।
खेल सकता तू नहीं ले हाथ में तलवार,
काट लेगा अंग, तीखी है, बड़ी ये धार।

प्रश्न
1. उपर्युक्त पद्यांश का उपयुक्त (सटीक) शीर्षक लिखिए।
2. उपर्युक्त पद्यांश का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए।
3. ‘फूल और काँटों’ से कवि का क्या तात्पर्य है?
4. विलोम शब्द बताइए-स्मृति, अज्ञान।
5. ‘धार’ शब्द का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर-
1. उपयुक्त शीर्षक ‘विज्ञान से सचेत’।
2. कवि का आशय यह है कि मनुष्य को विज्ञान से सावधान रहना चाहिए। इसका प्रयोग अज्ञानता से नहीं कीजिए। मनुष्य ने अभी विज्ञान से होने वाली हानि और लाभ की भी जानकारी नहीं ली है। अतः कहीं ऐसा न हो कि अज्ञानता के कारण यह विज्ञान मनुष्य को ही हानि न पहुँचा दे।
3. ‘फूल और काँटों’ से कवि का तात्पर्य है-लाभ और हानि।
4. विस्मृति, ज्ञान।
5. तलवार की धार तेज होती है।

3. बढ़ जाता है मान वीर का, रण में बलि होने से,
मूल्यवती होती सोने की, भस्म यथा सोने से;
रानी से भी अधिक हमें अब, यह समाधि है प्यारी,
यहाँ निहित है स्वतन्त्रता की, आशा की चिनगारी॥

प्रश्न
1. उपर्युक्त कविता का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
2. पद्यांश का आशय लिखिए।
3. वीर का मान कब बढ़ जाता है?
4. विलोम शब्द बताइए-वीर, स्वतन्त्रता।
5. ‘निहित’ शब्द का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर-
1. ‘स्वतन्त्रता’ इस पद्यांश का उचित शीर्षक है।
2. जब युद्ध में संघर्षरत वीर स्वयं को आजादी को प्राप्त करने के महान् उद्देश्य की पूर्ति के लिए शहीद कर देता है, तो उसका महत्त्व बहुत अधिक बढ़ जाता है। तीव्र ज्वाला में जलकर स्वर्ण की भस्म तैयार होती है। वह भस्म निश्चय ही उस धातु की अपेक्षा कई गुना लाभ देने वाली होगी। सभी लोग उसको सम्मान देते हैं।
3. वीर का मान उस समय बढ़ जाता है, जब वह स्वयं को राष्ट्र की स्वतन्त्रता के बचाव में बलिदान कर देता है।
4. कायर, परतन्त्रता।
5. बालक में शिक्षा के द्वारा उसके निहित गुणों को उभारना होता है।

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4. लाख पक्षी सौ हिरन दल, चाँद के कितने किरण दल,
झूमते वन-फूल फलियाँ, खिल रहीं अज्ञात कलियाँ,
हरित दूर्वा रक्त किसलय, पूत पावन पूर्ण रसमय,
सतपुड़ा के घने जंगल।

प्रश्न
1. उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
2. कवि ने इस पद्यांश में कहाँ का वर्णन किया है?
3. पद्यांश का आशय लिखिए।
4. विलोम शब्द बताइए-अज्ञात, पावन।
5. ‘घने’ शब्द का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर-
1. शीर्षक-‘सतपुड़ा के घने जंगल’।
2. कवि ने इस पद्यांश में सतपुड़ा के घने जंगलों का वर्णन किया है।
3. कवि का आशय है कि सतपुड़ा के घने जंगलों में लाखों पक्षी और हिरणों के समूह विचरण करते सुन्दर लगते हैं। चन्द्रमा की चाँदनी अपनी छटा बिखेरती रहती है। वहाँ वन के फूल और फलियाँ निरन्तर विकसित होते रहते हैं जिनकी पूर्ण जानकारी हमें नहीं है। कहीं-कहीं हरी-भरी दूब घास अपने लाल-लाल किसलयों से युक्त विकास पा रहे हैं। वे वातावरण को पूर्ण पवित्रता दे रहे हैं।
4. ज्ञात, अपावन।
5. घने वन में असंख्य पशु-पक्षी रहते हैं।

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MP Board Class 9th Special Hindi कविता का स्वरूप एवं पद्य साहित्य का विकास

MP Board Class 9th Special Hindi कविता का स्वरूप एवं पद्य साहित्य का विकास

प्रश्न 1.
कविता के बाह्य स्वरूप के तत्वों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
कविता के बाह्य स्वरूप में निम्नलिखित तत्व सम्मिलित हैं

  1. लय-भाषा के प्रवाह में उतार-चढ़ाव (आरोह-अवरोह) तथा विराम के योग से लय की उत्पत्ति होती है।
  2. तुक-कविता की पंक्ति का अन्तिम वर्ण एवं ध्वनि में समानता का पाया जाना ही तुक कहा जाता है। इससे कविता में गेयता और संगीतात्मकता की सरसता और सहजता भर जाती है।
  3. छन्द-छन्द ही कविता में लय, तुक तथा गति देता है। प्रत्येक छन्द में मात्राओं और वर्णों का क्रम निश्चित होता है।
  4. शब्द-योजना-काव्य सौन्दर्य के लिए शब्द-योजना की जाती है जिससे काव्य में विशेष अर्थ की अभिव्यंजना सम्भव होती है।
  5. भाषा की चित्रात्मकता-भाषा की चित्रात्मकता से भाव की अभिव्यक्ति होती है।
  6. अलंकार-कवि के कथन में सौन्दर्य और अर्थ-गौरव के लिए अलंकार प्रयुक्त होते हैं। अलंकारों का अनावश्यक प्रयोग कविता के सौन्दर्य को बाधित करता है।

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प्रश्न 2.
कविता के आन्तरिक स्वरूप के तत्वों पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर-
कविता के आन्तरिक स्वरूप के तत्व अग्रलिखित

  • रसात्मकता,
  • अनुभूति की तीव्रता,
  • मर्मस्पर्शिता।

रसपूर्ण वाक्य ही काव्य कहा जाता है। शब्द और अर्थ काव्य का शरीर होता है तथा ‘रस’ ही उस शरीर का प्राण होता है। गद्य का सम्बन्ध बुद्धि से और कविता का सम्बन्ध हृदय से होता है। ‘वियोगी जन के हृदय’ से उत्पन्न कविता श्रोताओं या पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है।

प्रश्न 3.
हिन्दी पद्य साहित्य को कितने कालों में विभाजित किया गया है ? इस काल-विभाजन की समय-सीमा भी निर्धारित कीजिए।
उत्तर-
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी साहित्य के विकास क्रम को संवत् 1050 वि. से शुरू हुआ माना है। आचार्य शुक्ल का यह मत ही प्रामाणिक माना गया है। इस साहित्यिक विकास-क्रम को निम्नलिखित चार कालों में विभाजित हुआ माना गया है-
काल-विभाजन – समय सीमा

  1. आदिकाल या वीरगाथाकाल – सन् 993 ई. से सन् 1318 ई. तक।
  2. भक्तिकाल (पूर्व मध्यकाल) – सन् 1318 ई. से सन् 1643 ई. तक।
  3. रीतिकाल (उत्तर मध्यकाल) – सन् 1643 ई. से सन् 1843 ई. तक।
  4. आधुनिक काल सन् 1843 – ई. से निरन्तर।

प्रश्न 4.
भक्तिकाल की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
भक्तिकाल की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं

  • भक्ति भावना की प्रधानता।
  • किसी भी राजा के दरबार में आश्रय प्राप्त न करना।
  • काव्य सृजन का उद्देश्य केवल स्वान्तः सुखाया ही था।
  • धर्म, जाति साहित्यिक विधाओं एवं काव्य स्वरूप में समन्वय की भावना।
  • काव्य सौन्दर्य के कला एवं भाव पक्ष दोनों का सफलतापूर्वक निर्वाह।
  • जीवन को आदर्श प्रधान यथार्थता से जोड़ा गया।
  • कवि द्वारा अपने इष्ट के प्रति पूर्ण समर्पण के भाव की अभिव्यक्ति।

प्रश्न 5.
सगुण भक्तिधारा के दो प्रमुख कवियों के नाम उनकी एक-एक रचना सहित लिखिए।
उत्तर-

  1. तुलसीदास-रामचरितमानस,
  2. सूरदास-सूरसागर।

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प्रश्न 6.
कृष्णभक्ति काव्य की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-

  • कृष्ण को ईश्वर का अवतार माना गया।
  • उनकी विशेष पूजा पर बल दिया।
  • कृष्ण के लोकरंजक स्वरूप का चिन्तन व वर्णन किया जाना।
  • सखाभाव की भक्ति की अवतारणा।
  • ज्ञान से बढ़कर प्रेम को अधिक महत्त्व दिया जाना।
  • मुक्तक शैली के गेय पदों की रचना।
  • प्रायः कृष्णभक्ति काव्य की रचना ब्रजभाषा में की गई है जिनमें कृष्ण की बाल-लीलाओं का वर्णन किया गया है।

महत्त्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न
रिक्त स्थानों की पूर्ति
1. भाषा के प्रवाह में उतार-चढ़ाव तथा विराम के योग से ………………………….. उत्पत्ति होती है। (लय/ताल)
2. अलंकारों का अनावश्यक प्रयोग कविता के सौन्दर्य को ………………………….. करता है। (वृद्धि/बाधित)
3. भाषा की चित्रात्मकता से ………………………….. अभिव्यक्ति होती है। (भाव की/आलंकारिकता की)
4. काव्य में विशेष अर्थ की अभिव्यंजना ………………………….. सम्भव है। (शब्द-योजना से/अलंकार प्रयोग से)
5. शब्द और अर्थ ………………………….. होता है। (काव्य का शरीर/काव्य की आत्मा)
उत्तर-
1. लय,
2. बाधित,
3. भाव की,
4. शब्द योजना से,
5. काव्य का शरीर।

सही विकल्प चुनिए-

1. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिन्दी साहित्य के विकास-क्रम ‘ को शुरू हुआ माना है
(क) संवत् 1050 वि. से
(ख) संवत् 1150 वि. से
(ग) संवत् 940 वि. से
(घ) संवत् 1260 वि. से।
उत्तर-
(क) संवत् 1050 वि. से

2. वीरगाथा काल की समय-सीमा निर्धारित की है
(क) सन् 993 ई. से सन् 1318 ई. तक
(ख) सन् 1050 ई. से सन् 1210 ई. तक
(ग) सन् 715 ई. से सन् 1310 ई. तक
(घ) सन् 810 ई. से सन् 1250 ई. तक।
उत्तर-
(क) सन् 993 ई. से सन् 1318 ई. तक

3. रीतिकाल की समय-सीमा निर्धारित की गई है
(क) सन् 1643 ई. से सन् 1843 ई. तक
(ख) सन् 1540 ई. से सन् 1750 ई. तक
(ग) सन् 1610 ई. से सन् 1840 ई. तक
(घ) सन् 1460 ई. से सन् 1560 ई. तक।
उत्तर-
(क) सन् 1643 ई. से सन् 1843 ई. तक

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4. कविता का सम्बन्ध होता है-
(क) हृदय से
(ख) बुद्धि से
(ग) मौन से
(घ) पाठक से।
उत्तर-
(क) हृदय से

सही जोड़ी मिलाइए-
MP Board Class 9th Special Hindi कविता का स्वरूप एवं पद्य साहित्य का विकास 1
उत्तर-
(i) → (ङ),
(ii) → (ग),
(iii) → (घ),
(iv) → (ख),
(v) → (क)।

सत्य/असत्य-

1. लय की उत्पत्ति होती है भाषा के प्रभाव में उतार-चढ़ाव से।
2. शब्द योजना से काव्य सौन्दर्य असम्भव है।
3. अलंकारों का अनावश्यक प्रयोग कविता के सौन्दर्य को बाधित करता है।
4. रसपूर्ण वाक्य काव्य नहीं हो सकता।
5. प्रत्येक छन्द में मात्राओं और वर्णों का क्रम निश्चित होता है।
उत्तर-
1. सत्य,
2. असत्य,
3. सत्य,
4. असत्य,
5. सत्य।

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एक शब्द/वाक्य में उत्तर-

1. मात्राओं और वर्णों का क्रम किसमें निश्चित होता है ?
उत्तर-
छन्द में।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.1

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 7 क्रमचय और संचयं Ex 7.1

प्रश्न 1.
अंक 1, 2, 3, 4 और 5 से कितनी 3 अंकीय संख्याएँ बनाई जा सकती हैं, यदि
(i) अंकों की पुनरावृत्ति की अनुमति हो।
(ii) अंकों की पुनरावृत्ति की अनुमति नहीं हो।
हल:
3 अंकीय संख्या में 3 स्थान होते हैं : इकाई, दहाई और सैकड़ा।
(i) इकाई का स्थान 5 तरीकों से भरा जा सकता है क्योंकि 1, 2, 3, 4, 5 में से कोई भी एक अंक लिया जा सकता है। दहाई का स्थान भी 5 तरीकों से भरा जा सकता है क्योंकि पुनरावृत्ति की अनुमति है। 1, 2, 3, 4, 5 में से कोई भी अंक लिया जा सकता है।
इसी प्रकार सैकड़े का स्थान भी 5 तरीकों से भरा जा सकता है।
∴ 3 अंकीय संख्याओं की संख्या = 5 x 5 x 5 = 125.
(ii) इकाई का स्थान 1, 2, 3, 4, 5 में से कोई-से एक अंक को लेकर 5 तरीकों से भरा जा सकता है।
दहाई का स्थान 4 तरीकों से भरा जा सकता है क्योंकि एक अंक पहले ही चयनित कर लिया गया। पुनरावृत्ति की अनुमति नहीं है। .
सैकड़े का स्थान 3 तरीकों से भरा जा सकता है क्योंकि 2 अंक पहले ही चयनित कर लिए गए हैं। .
∴ 3 अंकीय संख्याओं की संख्या = 5 x 4 x 3 = 60.

प्रश्न 2.
अंक 1, 2, 3, 4, 5, 6 से कितनी 3 अंकीय सम संख्याएँ बनाई जा सकती हैं, यदि अंकों की पुनरावृत्ति की जा सकती है?
हल:
इकाई का स्थान 2, 4, 6 में से एक को लेकर 3 तरीकों से भरा जा सकता है।
क्योंकि पुनरावृत्ति की जा सकती है, दहाई का स्थान 6 तरीकों से भरा जा सकता है।
इसी प्रकार सैकड़े का स्थान भी 6 तरीकों से ही भरा जा सकता है।
∴ 3 अंकीय संख्याओं की संख्या = 6 x 6 x 3 = 108.

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प्रश्न 3.
अंग्रेजी वर्णमाला के प्रथम 10 अक्षरों से कितने 4 अक्षरों के कोड बनाए जा सकते हैं, यदि किसी भी अक्षर की पुनरावृत्ति नहीं की जा सकती?
हल:
4 अक्षरों वाले कोड में 4 स्थान हैं। प्रत्येक अक्षर के लिए एक स्थान चाहिए।
पहले स्थान को 10 तरीकों से, दूसरे स्थान को 9 तरीकों से, तीसरे स्थान को 8 तरीकों से और चौथे स्थान को 7 तरीकों से भर सकते हैं क्योंकि पुनरावृत्ति की अनुमति नहीं है। एक अक्षर दुबारा नहीं लिखा जा सकता।
∴ चार अक्षर वाले कोडों की संख्या = 10 x 9 x 8 x 7 = 5040.

प्रश्न 4.
0 से 9 तक के अंकों का प्रयोग करके कितने 5 अंकीय टेलीफोन नम्बर बनाए जा सकते हैं, यदि प्रत्येक नम्बर 67 से आरम्भ होता है और कोई अंक एक बार से अधिक नहीं आता है?
हल:
पांच अंकीय नम्बर में 5 स्थान हैं जिसमें पहले और दूसरे को I और II से निरूपित किया गया है। I और II स्थान पर 6 और 7 को रखा गया है।
शेष 8 अंकों में से एक-एक अंक लेकर III, IV और V स्थान को भरना है। स्थान III को 8 तरीकों से, स्थान IV को 7 तरीकों से तथा स्थान V को 6 तरीकों से भर सकते है।
∴ 5 अंकीय टेलीफोन नम्बरों की संख्या = 8 x 7 x 6 = 336

प्रश्न 5.
एक सिक्का तीन बार उछाला जाता है और परिणाम अंकित कर लिए जाते हैं। परिणामों की संभव संख्या क्या है?
हल:
एक बार सिक्का उछालने से दो में से एक भाग ऊपर आता है अर्थात T या H जबकि H चित्त और T पट को निरूपित करते हैं।
∴ एक बार सिक्का उछालने से दो परिणाम होते हैं। तीन बार सिक्का उछालने से 2 x 2 x 2 = 8 परिणाम होंगे। ये परिणाम इस प्रकार है :
TTT, TTH, THT, HTT, HHT, HTH, THH, HHH

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प्रश्न 6.
भिन्न-भिन्न रंगों के 5 झंडे दिए हुए हैं। इससे कितने विभिन्न संकेत बनाए जा सकते हैं, यदि प्रत्येक संकेत में 2 झंडों, एक के नीचे दूसरे के प्रयोग की आवश्यक पड़ती है?
हल:
झंडे के ऊपर का स्थान भरने के 5 तरीके हैं। एक झंडा प्रयोग होने के बाद 4 झंडे रह जाते हैं। नीचे का दूसरा स्थान 4 तरीकों से भरा जा सकता है।
कुल संकेतों की संख्या = 5 x 4 = 20.

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MP Board Class 9th Special Hindi पत्र-लेखन

MP Board Class 9th Special Hindi पत्र-लेखन

प्रश्न 1.
अपने भाई के शुभ-विवाह में सम्मिलित होने हेतु अपने प्रधानाचार्य को अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र लिखिए।
उत्तर-
अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,
सतना (म. प्र.)

मान्यवर,
सविनय निवेदन है कि मेरे बड़े भाई का शुभ विवाह 21 नवम्बर, 20…..को होना निश्चित हुआ है। बरात रीवा शहर की सिविल लाइन्स स्थित मान्धाता धर्मशाला के लिए दिनांक 21 नवम्बर, 20……….को ही प्रातः 6 बजे बस द्वारा प्रस्थान करेगी। मैं स्वयं बरात में सम्मिलित होऊँगा। अत: मुझे तीन दिन (दिनांक 20 नवम्बर, 20……..से दिनांक 22 नवम्बर, 20……) का अवकाश प्रदान करने की कृपा करें।

सधन्यवाद
दिनांकः 19 नवम्बर, 20……

आपका आज्ञाकारी शिष्य
महेन्द्र प्रताप सिंह
कक्षा 9 अ

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प्रश्न 2.
तुम्हारे पिताजी एक साधारण शासकीय सेवा में हैं। आपके भाई-बहन भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस तरह शिक्षा के भार को सहन करना उनके लिए कठिन है। अतः
अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य महोदय के लिए प्रार्थना-पत्र लिखकर शुल्क मुक्ति के लिए निवेदन कीजिए।
उत्तर-
शुल्क मुक्ति के लिए प्रार्थना-पत्र
सेवा में,
श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय,
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,
सागर (म.प्र)

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा 9 अ का विद्यार्थी हूँ। मेरे पिताजी राजकीय सेवा में हैं। वे हम सभी घर के सदस्यों का पालन-पोषण बड़ी कठिनाई से कर पाते हैं।

मेरा पिछला पढ़ाई का रिकॉर्ड बहुत अच्छा रहा है। इस कारण मुझे पिछले वर्षों में भी शुल्क में मुक्ति मिलती रही है। आपसे प्रार्थना है कि मुझे इस वर्ष भी शुल्क में मुक्ति देकर मुझ पर बड़ी कृपा करेंगे। मैं आपसे वायदा करता हूँ कि इस वर्ष भी कक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने का प्रयास करूंगा।

अन्त में, मुझे पूर्ण विश्वास है कि मुझे फीस में पूरी-पूरी . छूट देकर बड़ी कृपा करेंगे। मैं आजीवन आपका ऋणी रहूँगा।

दिनांक: 19.7.20…….

आपका आज्ञाकारी शिष्य
मोहन चन्द्र
कक्षा 9 अ

प्रश्न 3.
परीक्षा की तैयारी का उल्लेख करते हुए रुपये मँगवाने के लिए अपने पिताजी को एक पत्र लिखिए।
उत्तर-
पिताजी को पत्र
कक्ष सं. 105. गाँधी आश्रम हॉस्टल,
बन्नी पार्क, इन्दौर (म. प्र)
दिनांक 15.11.20……

पूज्य पिताजी,

सादर चरण स्पर्श!
आपका पत्र मिला। पत्र पढ़कर प्रसन्नता हुई। मैं आजकल ‘अपनी अर्द्ध वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी में लगा हुआ हूँ। प्रतिदिन छ: या सात घण्टे तक पढ़ाई में लगा रहता हूँ। मैं अभी तक लगभग सभी विषयों का अध्ययन कर चुका हूँ। पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दे रहा हूँ। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि पिछली कक्षाओं की तरह इस कक्षा में भी सर्वोच्च अंक प्राप्त कर सकूँगा। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि मैं आपके सम्मान में चार चाँद ही लगाऊँगा। मुझे कुछ धन की आवश्यकता है, कृपया पाँच सौ रुपये मनीऑर्डर से भेज दीजिए जिससे मैं अपनी अंग्रेजी और गणित की पुस्तकों को खरीद लाऊँ और अपनी पढ़ाई बहुत अच्छी तरह कर सकूँ। आदरणीया माताजी को मेरा चरण स्पर्श कहियेगा।

दिनांक: 17.11.20……

आपका प्रिय पुत्र
आनन्द प्रताप सिंह

MP Board Solutions

प्रश्न 4.
प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए अपने मित्र को एक बधाई पत्र लिखिए।
उत्तर-
मित्र को बधाई पत्र
प्रिय मित्र पल्लव,

सप्रेम हृदय स्पर्श।
आज प्रातकालः ‘दैनिक जागरण’ समाचार-पत्र में तुम्हारा अनुक्रमांक देखा तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तुम प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हो। मैं स्वयं को अति भाग्यशाली समझता हूँ कि मैंने तुम जैसे योग्य, चतुर, बुद्धिमान मित्र को प्राप्त किया है। इस सन्दर्भ में मैं तुम्हें अपनी हार्दिक बधाइयाँ देता हूँ और आशा करता हूँ कि तुम अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करोगे और अपने जीवन में सफलताओं के शिखर को प्राप्त करोगे। अपने माता-पिता को मेरी ओर से चरण स्पर्श कहना।

तुम्हारा मित्र
कपिल

प्रश्न 5.
अपने छोटे भाई की कुशल क्षेम जानने के लिए पत्र लिखिए।
उत्तर-
भाई को पत्र
प्रिय आशीष,

शुभाशीर्वाद।
कल तुम्हारा भेजा हुआ पत्र मिला तथा सबकी कुशल क्षेम जानकर हार्दिक प्रसन्नता का अनुभव हुआ। तुम्हें यह समाचार देते हुए प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है कि मैंने तुम्हारे लिए कहानी तथा चुटकुलों की कुछ पुस्तकें खरीद ली हैं। अब आऊँगा तो सबके लिए कुछ मिष्ठान तथा नमकीन भी लाऊँगा। गुंजन के लिए एक अच्छी-सी साड़ी भी लेकर आऊँगा। यहाँ तुम्हारे भतीजे तथा भाभी पूरी तरह स्वस्थ एवं सानन्द हैं। वे सब तुम्हारे पत्र को बार-बार पढ़कर सुखानुभूति करते हैं। मैं 28 मई को प्रात:काल वाली ट्रेन से आऊँगा।

माताजी एवं पिताजी को सादर प्रणाम तथा छोटों को प्यार। शेष सब ठीक है।

शुभेच्छु
अक्षय कुलश्रेष्ठ

प्रश्न 6.
बुक बैंक से पुस्तकें देने के विषय में अपने प्रधानाचार्य महोदय को आवेदन-पत्र लिखिए।
उत्तर-
बुक बैंक से पुस्तकें देने के
विषय में आवेदन-पत्र

प्रधानाध्यापक महोदय,
विद्यालय-सरस्वती नगर

विषय-बुक-बैंक से पुस्तक देने हेतु

मान्यवर,
विनम्र निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय का कक्षा 9 ‘ब’ का छात्र हैं। निर्धन होने के कारण मैं अपने पाठ्यक्रम में निर्धारित समस्त पुस्तकों को खरीदने में पूरी तरह असमर्थ हूँ। मेरे पिता की मासिक आय बहुत कम है।

इस हेतु आपसे विनम्र निवेदन है कि बुक-बैंक से वांछित पुस्तकें दिलवाने का आदेश पारित करें। जब मेरी वार्षिक परीक्षा सम्पन्न हो जायेगी तभी समस्त पुस्तकों को समय पर वापस कर दूंगा।

आपकी इस महती अनुकम्पा के लिए मैं आजन्म आपका ऋणी रहूँगा।

आपका आज्ञाकारी शिष्य
निशान्त शर्मा

प्रश्न 7.
तुम्हारे पिताजी या अभिभावक का स्थानान्तरण हो जाने के कारण विद्यालय छोड़ने का प्रमाण-पत्र (टी.सी) प्राप्त करने हेतु आवेदन-पत्र लिखिए।
उत्तर-
प्रधानाचार्य को विद्यालय छोड़ने
का प्रमाण-पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन-पत्र

सेवा में,
प्रधानाध्यापक महोदय,
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,
ग्वालियर।

महोदय,
सेवा में विनम्र प्रार्थना है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा 9 वीं का संस्थागत छात्र हूँ। मेरे अभिभावक का स्थानान्तरण हो गया है। इस हेतु मैं आपके विद्यालय में आगे अपना अध्ययन करने में असमर्थ हूँ। अत: मुझे विद्यालय त्यागने का प्रमाण-पत्र देने हेतु आदेश करें। मैंने अपना समस्त शुल्क तथा पुस्तकालय की ली हुई पुस्तकें भी लौटा दी हैं। मेरे पास विद्यालय का कुछ भी देने को शेष नहीं है। आशा है कि आप सहयोग देकर अनुगृहीत करेंगे।

दिनांक: 20.7.20…..

आपका आज्ञाकारी शिष्य
अक्षय
कक्षा IX-स

प्रश्न 8.
अपने निवास के आस-पास नालियों की सफाई कराने हेतु तथा कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराने हेतु सुझाव देते हुए अपने नगर निगम के सक्षम अधिकारी को एक आवेदन-पत्र लिखिए।
उत्तर-
नगर निगम के सक्षम अधिकारी को नालियों की सफाई कराने हेतु तथा कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराने के लिए आवेदन-पत्र

सेवा में,
श्रीमान् आयुक्त महोदय,
नगर-निगम, भोपाल (म.प्र)

महोदय,
मैं आपका ध्यान नगर की नेहरू नगर कॉलोनी की स्वच्छता के सम्बन्ध में आकर्षित करना चाहता हूँ। इस कॉलोनी में पिछले दो-तीन माह से नियमित सफाई नहीं की जा रही है। इस कारण नालियाँ सिल्ट तथा गन्दगी से भरी पड़ी हैं। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। साथ ही महामारी फैलने का भी भय पैदा हो गया है।

अतः आपसे साग्रह निवेदन है कि आप अपने अधीनस्थ सफाईकर्मियों को कॉलोनी में नालियों की सफाई करने और कीटनाशक औषधियों के छिड़काव के लिए अपने निर्देश देने की कृपा करें। इससे कॉलोनी का पर्यावरण स्वच्छ बना रहेगा।

भवदीय
मोहन स्वरूप 97,
नेहरू नगर कॉलोनी,
भोपाल (म. प्र)

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प्रश्न 9.
अपने क्षेत्र में पेड़-पौधों के अनियमित कटाव को रोकने के लिए जिलाधिकारी को एक पत्र लिखिए।
उत्तर-
पेड़-पौधों के अनियमित कटाव को रोकने हेतु जिलाधिकारी को एक पत्र

प्रतिष्ठा में,
जिलाधिकारी महोदय,
इन्दौर (म. प्र.)

मान्यवर,
पिछले सप्ताह से सड़क चौड़ी करने के नाम से हमारे क्षेत्र के असंख्य पेड़-पौधों को बड़ी बेरहमी से काटा जा रहा है। इन पेड़-पौधों को नियमित रूप से काटा जाय तो कोई खास हानि हमारे पर्यावरण के लिए भी नहीं होगी। इस बेतरतीव कटाई से तो हरियाली भी मिट रही है, साथ ही प्रदूषण का प्रभाव भी बढ़ रहा है। पेड़-पौधों की अनियमित कटाई करना न केवल धर्म विरुद्ध कार्य है, वरन् कानून के खिलाफ आचरण भी है।

अतः आपसे निवेदन है कि उक्त कार्यवाही को तत्काल रोककर क्षेत्रीय पर्यावरण की सुरक्षा की दिशा में प्रभावकारी पहल करने की कृपा कीजिए।

दिनांक: 31.9.20…..

भवदीय
राकेश रमण ठाकुर
नेहरू रोड (पश्चिम),
इन्दौर (म. प्र.)

MP Board Class 9th Hindi Solutions

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 14 नारियल का बगीचा-केरल प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 14 Nariyal Ka Bagicha Keral Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 14 Nariyal Ka Bagicha Keral Questions and Answers

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) आदि शंकराचार्य का जन्म हुआ था
(i) रामेश्वरम् में
(ii) अहमदाबाद में,
(iii) केरल में
(iv) मुम्बई में।
उत्तर
(iii) केरल में

(ख) केरल का नृत्य है
(i) कुचीपुड़ी
(ii) भरतनाट्यम्
(iii) कथकली
(iv) भांगड़ा।
उत्तर
(iii) कथकली

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(ग) इमली के मसालेदार पानी को केरल में कहते
(i) रसम
(ii) सांभर,
(iii) उत्तपम
(iv) चटनी।
उत्तर
(i) रसम

(घ) केरल के पश्चिम में स्थित है
(i) हिन्द महासागर
(ii) अरब सागर
(iii) भूमध्य सागर
(iv) बंगाल की खाड़ी।
उत्तर
(ii) अरब सागर

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) केरल का मुख्य त्योहार ……. है।
(ख) केरल में नीलगिरि पर्वत पर ………….के बगीचे में
(ग) केरल की राजधानी ………………है
(घ) रामकृष्ण मेनन केरल के होकर भी अच्छी ………….. बोलते थे।
(ङ) केरल के लोग नृत्य और संगीत के बड़े ………………है
उत्तर
(क) ओणम
(ख) चाय
(ग) त्रिवेन्द्रम
(घ) हिन्दी
(ङ) शौकीन।

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प्रश्न 3.
एक या दो वाक्य में उत्तर दीजिए

(क) रामकृष्ण मेनन का वतन कहाँ था ?
उत्तर
रामकृष्ण मेनन का वतन केरल की राजधानी त्रिवेन्द्रम में है।

(ख) लेखक को प्लेटफार्म पर खड़े सज्जन पर दया क्यों आ गई?
उत्तर
प्लेटफार्म पर खड़े सज्जन पर लेखक को दया इसलिए आ गई कि एक पहलवाननुमा लड़का डिब्बे के दरवाजे में खड़ा होकर उसे डिब्बे में चढ़ने नहीं दे रहा था। गाड़ी चलने वाली थी। उन सज्जन ने अनेक बार मिन्नतें की लेकिन उस लड़के ने उस यात्री को चढ़ने नहीं दिया। जब लेखक ने पहल की तो वह बेचारा प्लेटफार्म से डिब्बे में चढ़ सका।

(ग) केरल के वनों में कौन-कौन से वृक्ष होते हैं ?
उत्तर
केरल के वनों में सागौन, शीशम, रबर और चन्दन के वृक्ष होते हैं। नारियल का पेड़ उनकी प्रतिदिन की आवश्यकताओं को पूरा करता है।

(घ) केरलवासी नारियल को कौन-सा वृक्ष कहते
उत्तर
केरलवासी नारियल को कल्पवृक्ष कहते हैं।

(ङ) केरल के लोगों का पहनावा कैसा है ?
उत्तर
केरल में गर्मी बहुत पड़ती है, इसलिए वहाँ के लोग ढीले-ढाले कपड़े पहनते हैं। वे लुंगी ही पहनते हैं। स्त्रियाँ धोती और ब्लाउज पहनती हैं। उनके कपड़े प्राय: सफेद रंग के ही ज्यादा होते हैं।

(च) कथकली’ का नाम कथकली क्यों पड़ा?
उत्तर
‘कथकली’ नामक नृत्य कला में अनेक कथाओं को नृत्य में डाल लिया जाता है। इसलिए इसे कथकली कहा जाता है।

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प्रश्न 4.
तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) नारियल के पेड़ की क्या उपयोगिता है ?
उत्तर
नारियल अमृत के समान मीठा पानी देता है। उसकी गिरी से साग-सब्जी, चटनी बनती है। उसके गोले से तेल निकलता है जो साबुन बनाने और सिर में डालने के काम आता है। इसके तने से पानी की नाली बनती हैं। उससे रस्सी, मोटे । रस्से, चटाई, कूँची पायदान बनाये जाते हैं। नारियल के छिलकों से कटोरे, प्याले, चमचे बनते हैं। इसकी लकड़ी से और पत्तियों से मकान की छत बनाई जाती है।

(ख) केरल को भारत का नन्दनवन क्यों कहते हैं ?
उत्तर
केरल भारतवर्ष का नन्दनवन है क्योंकि यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता चारों ओर बिखरी पड़ी है, जिस तरह स्वर्ग में नन्दनवन अपनी छटा से देवताओं के मन का रंजन करता रहता है, वैसे ही यहाँ के वन समूल में अनेक तरह के पेड़-पौधे पाये जाते हैं। इन पेड़-पौधों ने केरल को प्राकृतिक सुन्दरता दे दी है। रंग-बिरंगे फूलों और चन्दन आदि के वृक्षों की गंध चारों ओर बिखरती रहती है। इसलिए केरल को स्वर्ग का बगीचा नन्दनवन । कहा गया है।

(ग) केरल के खान-पान में मुख्य भोजन क्या है ?
उत्तर
केरल के लोगों का मुख्य रूप से भोजन चावल ही है। इस चावल से वहाँ भिन्न-भिन्न वस्तुएँ बनाई जाती हैं। चावल के साथ रसम तथा सांभर भी बनता है। रसम एक तरह का मसालेदार पानी होता है और सांभर एक प्रकार की दाल होती है। इडली और डोसा यहाँ के लोगों का खाद्य पदार्थ है।

(घ) ‘ओणम’ के दिन केरलवासी क्या करते हैं?
उत्तर
ओणम के दिन केरलवासी नौका और लक्ष्मी की पूजा करते हैं। अनेक मिठाइयाँ बनती हैं। नौका प्रतियोगिता होती है। नौकाओं में बैठे लोग मीठे स्वरों में गीत गाते हैं। हाथियों पर देवताओं की सवारी निकाली जाती है। संगीत और नृत्य के कार्यक्रम होते हैं। कथकली नृत्य होता है।

(ङ) केरल में कौन-सी नृत्य कला विकसित हुई ? इसकी क्या विशेषता है ?
उत्तर
केरल में कथकली नामक नत्य कला विकसित हुई है। इस कला की यह विशेषता है कि इसमें अनेक कथाओं को नृत्य में ढाल लिया जाता है। अत: इसे ‘कथकली’ में कहा जाता है। यह ‘कथकली’ नृत्य आज पूरे भारत में प्रसिद्ध है।

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प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) ‘जैसा देश, वैसा वेश’ रामकृष्ण ने ऐसा क्यों कहाँ ?
उत्तर
रामकृष्ण ने ‘जैसा देश वैसा वेश’ कहावत इसलिए कही कि मनुष्य जिस स्थान और जलवायु वाले प्रदेश में रहता है, तो वह वहाँ के मौसम के अनुकूल अपने वस्त्रों का चुनाव करता है और उन्हें पहनता है। रामकृष्ण लुंगी पहने हुए थे। क्योंकि केरल में गर्मी अधिक होती है, अत: लोग ढीले-ढाले वस्त्र पहनते हैं।

(ख) केरल में ढीले-ढाले और सफेद कपड़े क्यों पहने जाते हैं?
उत्तर
केरल में मौसम गर्म होता है। गर्मी के कारण लोग ढीले-हाले कपड़े पहनते हैं जिससे उन्हें गर्मी कम लगे। सफेद कपड़ा भी प्रायः गर्मी नहीं देता है। इसलिए वे सफेद कपड़े पहनते हैं।

(ग) रामकृष्ण मेनन ‘केरल’ को अपना बतन क्यों कहते हैं?
उत्तर
रामकृष्ण मेनन का जन्म केरल की राजधानी त्रिवेन्द्रम में हुआ है और त्रिवेन्द्रम केरल की राजधानी है। अत: केरल को वे अपना वतन कहते हैं।

(घ) पहलवाननुमा लड़का सज्जन को ट्रेन के अन्दर क्यों नहीं आने दे रहा था ?
उत्तर
पहलवाननुमा लड़का सज्जन को ट्रेन के अन्दर इसलिए नहीं आने दे रहा था कि उस सज्जन के आने देने से डिब्बे में भीड़ हो सकती है। साथ ही वह दरवाजे पर खड़ा होकर प्रकृति के सुन्दर दृश्य देख रहा था। उसे हवा का भी आनन्द मिल रहा था।

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प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना करके प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) यदि लेखक उस सज्जन को ट्रेन के अन्दर आने में मदद नहीं करते तो उनका क्या होता?
उत्तर
यदि लेखक उस सज्जन को ट्रेन के अन्दर आने में मदद नहीं करते तो वह बेचारे उसी प्लेटफार्म पर ही रह गए होते। ट्रेन चली जाती। उन सज्जन का कोई भी परिचित वहाँ नहीं था। वह रात भर प्लेटफार्म पर ही पड़ा रहता।

(ख) यदि केरल का मौसम कश्मीर जैसा होता तो वहाँ के जन-जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता?
उत्तर
यदि केरल का मौसम कश्मीर जैसा होता, तो वहाँ का जन-जीवन अब की अपेक्षा बिल्कुल विपरीत होता। उनका खान-पान बिल्कुल भिन्न होता। उनका पहनावा भी ढीला-ढाला न होकर वे कसे हुए वस्त्र पहनते, गर्म कपड़े पहनते। वे रंगीन कपड़े पहनना पसन्द करते। उन लोगों के शरीर का रंग भी गोरा होता। प्राकृतिक परिस्थिति के अनुसार उनका जन-जीवन प्रभावित होकर भिन्न तरह का होता।

भाषा की बात

प्रश्न 1.
शुद्ध उच्चारण कीजिए
त्रिवेन्द्रम, ग्रीष्मकालीन, कम्पार्टमेन्ट, सेन्टीमीटर।
उत्तर
कक्षा में अध्यापक महोदय की सहायता से उच्चारण करना सीखिए और अभ्यास कीजिए।

प्रश्न 2.
वर्तनी शुद्ध कीजिए
(i) वृरक्षों
(ii) गोर
(iii) आतमियता
(iv) हांफते
(v) पत्तीयों
(vi) कार्यकरम।
उत्तर
(i) वृक्षों
(ii) गौर
(iii) आत्मीयता
(vi) हाँपत
(v) पत्तियों
(vi) कार्यक्रम

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प्रश्न 3.
‘ता’ प्रत्यय जोड़कर पाँच नए शब्द बनाइए।
उत्तर

  1. सहजता
  2. सरलता
  3. कठिनता
  4. तरलता
  5. मलिनता
  6. गहनता
  7. समीपता।

प्रश्न 4.
‘इक’ प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए।
(1) संस्कृत
(2) संसार
(3) समाज
(4) प्रकृति
(5) धर्म।
उत्तर

  1. संस्कृत + इक = सांस्कृतिक
  2. संसार + इक = सांसारिक
  3. समाज+इक = सामाजिक
  4. प्रकृति + इक = प्राकृतिक
  5. धर्म + इक = धार्मिक

प्रश्न 5.
नीचे लिखे शब्दों में तत्सम एवं तद्भव शब्द पहचान कर लिखिए
रात, पितृ, बहन, नाच, बानर, रस्सी, पिता, भगिनी, नृत्य, बंदर, चाँद, रज्जु, चन्द्रमा, रात्रि। तत्सम
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 14 नारियल का बगीचा-केरल 1

प्रश्न 6.
दिए गए सर्वनाम से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(मेरी, वह, मुझे, मैं, मैंने।)
(क) ………….. उन सज्जन की मदद की।
(ख)……………. अपनी जगह से उठा।
(ग)…………..उन पर दया आ गई।
(घ) आप …………… जगह पर बैठिए।
(ङ) खिड़की पर खड़ा………….. नवयुवक हमारी बातें सुन रहा था।
उत्तर
(क) मैंने
(ख) मैं
(ग) मुझे
(घ) मेरी
(ङ) वह।

नारियल का बगीचा-केरल परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) हमारा केरल भारत का नन्दनवन है। आप देखेंगे कि उसका प्राकृतिक सौन्दर्य कश्मीर से जरा भी कम नहीं। आदि शंकराचार्य का जन्म केरल में हुआ। इसलिए उस प्रदेश का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व भी है।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘भाषाभारती’ के पाठ ‘नारियल का बगीचा केरल’ पाठ से ली गई हैं। यह पाठ संकलित है।

प्रसंग-इन पंक्तियों में केरल के विषय में जानकारी दी गई है।

व्याख्या-लेखक का सहयात्री केरल का ही निवासी है। उसने बताया कि केरल बहुत सुन्दर प्रदेश है। अपनी प्राकृतिक सुन्दरता से उसे भारत का नन्दनवन कहा जाता है। उसकी प्राकृतिक सुन्दरता इतनी प्रभावकारी है कि धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला | कश्मीर भी उससे कम पड़ सकता है। केरल वह प्रान्त है जहाँ आदि शंकराचार्य ने जन्म लिया था। उन्होंने भारतीय धर्म और संस्कृति को महान् बनाया, इसलिए इस प्रदेश का धर्म के क्षेत्र में बहुत बड़ा महत्व है। धर्म और संस्कृति को विकसित करने में इस प्रदेश की भूमिका अति महत्वपूर्ण है।

(2) हमारे जंगलों में शेर, भेड़िया, रीछ, चीता आदि पशु बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। हाथी भी खूब मिलते हैं। असम की ही तरह उनका उपयोग हमारे यहाँ लकड़ियों को होने तथा सवारी करने में होता है। असम की ही तरह हमारे यहाँ नीलगिरी पर्वत पर चाय के बगीचे हैं। इसके अलावा कालीमिर्च, इलायची, सुपारी तथा नागरवेल भी यहाँ बड़ी मात्रा में पैदा होते हैं।”

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-केरल के जंगलों में पाये जाने वाले पशुओं के विषय में बताया गया है तथा उनका उपयोग क्या है, इसे बताते हुए वहाँ की प्रमुख उपजों के बारे में जानकारी दी है।

व्याख्या-केरल के वनों में पाये जाने वाले जंगली पशुओं में शेर, भेड़िया, रीछ, चीता आदि बड़ी संख्या में हैं। वहाँ जंगलों में हाथी भी बड़ी संख्या में मिलते हैं। इन हाथियों को लोग पालते भी हैं। इनसे लकड़ियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ढोकर ले जाने का काम लिया जाता है। इसके अतिरिक्त इन हाथियों पर सवारी भी करते हैं। जिस तरह असम में हाथियों से लकड़ी ढोने का काम और सवारी करने का काम लिया जाता है, उसी तरह यहाँ भी इन हाथियों का दुलाई और सवारी के मतलब से अधिक महत्व है। नीलगिरि पर्वत की ढलानों वाली भूमि पर असम की तरह ही चाय की खेती की जाती है। चाय के बड़े क्षेत्रफल में बगीचे हैं। इसके अलावा केरल में कालीमिर्च, इलायची, सुपारी तथा नागरवेल को उगाया जाता है। इनको मसाले व औषधियों के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।

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(3) केरल में समुद्री किनारों, झीलों, नदियों तथा नहरों के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान पर नावों से यात्रा की जाती है और यह सरल तथा सुगम भी होती है। वैसे हमारी राजधानी त्रिवेंद्रम से उत्तर की ओर एक रेलमार्ग जाता है लेकिन हमारे यहाँ रेल बहुत नहीं हैं। हाँ, पक्की सड़कें हैं।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-केरल में यात्रा के साधनों के बारे में बताया जा रहा है।

व्याख्या-केरल समुद्री किनारों से घिरा है, यहाँ झीलें और नदियाँ बहुत हैं। इन नदियों से नहरें निकाली गई हैं। अत: समुद्री किनारों, झीलों, नदियों और नहरों की संख्या बहुत है। इसलिए इनमें नावें चलाकर यात्रा की जाती है। इसलिए यात्रा करने का खर्च भी कम आता है। यह यात्रा बहुत सरल और आसान होती है। केरल की राजधानी त्रिवेन्द्रम है। त्रिवेन्द्रम से उत्तर की ओर आने वाला मात्र एक ही रेलमार्ग है। केरल में रेल बहुत कम हैं। वहाँ सड़क मार्ग हैं। सड़कें साफ-सुथरी और पक्की हैं।

(4) ओणम हमारा मुख्य त्योहार है। इस त्योहार पर घरों को सजाया जाता है। नौका और लक्ष्मी की पूजा की जाती है। तरह-तरह की मिठाइयाँ बनाई जाती हैं। इस त्योहार पर नौका प्रतियोगिता होती है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-केरल के त्योहार और खेल आदि के विषय में बताया गया है।

व्याख्या-केरल में त्योहार भी मनाए जाते हैं। उनमें ओणम’ त्योहार मुख्य है। इस त्योहार के आने से पहले घरों की सफाई की जाती है। उन्हें सजाया जाता है। इस दिन नौका और लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा की जाती है। सच पूछा जाये तो नाव ही उनकी जीविका का मुख्य साधन है। अनेक तरह की मिठाइयाँ बनाई जाती हैं। नौकाओं (नावों) की प्रतियोगिता (मुकाबला परीक्षा) होती है। जो भी नाविक अच्छा नाविक सिद्ध होता है, उसे पुरस्कृत किया जाता है।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

MP Board Class 9th Special Hindi गद्य साहित्य का स्वरूप एवं विधाएँ

MP Board Class 9th Special Hindi गद्य साहित्य का स्वरूप एवं विधाएँ

प्रश्न 1.
गद्य किसे कहते हैं?
अथवा
गद्य के स्वरूप को स्पष्ट करते हुए इसके महत्व को बताइए।
उत्तर-
गद्य हमारी स्वाभाविक अभिव्यक्ति है। गद्य के माध्यम से ही हम अपने दैनिक जीवन में सभी कार्यों को सम्पन्न करते हैं। निजी जीवन में पत्र, डायरी आदि साहित्य में कहानी, उपन्यास, निबन्ध, नाटक, जीवनी आदि लेखन का माध्यम गद्य ही होता है। गद्य का क्रमिक विकास हिन्दी के आधुनिक काल के आरम्भ से हुआ। गद्य का प्रयोग व्याख्या, तर्क, वर्णन एवं कथा के लिए होता है। गद्य में किसी कथ्य को सहजता से, सरलता से एवं स्पष्टता से व्याख्या करने की क्षमता है। व्याकरण के नियमों का प्रयोग भी आसानी से ग्रहण किया जा सकता है।

गद्य प्रयोग और प्रयोजन की दृष्टि से तीन प्रकार की होती है-

  • दैनिक कार्यकलाप की भाषा,
  • शास्त्र या तर्क भाषा,
  • साहित्यिक भाषा।

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प्रश्न 2.
हिन्दी गद्य कितने रूपों में उपलब्ध है?
अथवा
हिन्दी गद्य की विधाओं का उल्लेखं कीजिए।
उत्तर-
हिन्दी गद्य की अनेक विधाएँ (रूप) हैं।

जो निम्नलिखित हैं-

  • निबन्ध,
  • नाटक,
  • एकांकी,
  • उपन्यास,
  • कहानी,
  • जीवनी,
  • आत्मकथा,
  • संस्मरण,
  • रेखाचित्र,
  • रिपोर्ताज,
  • गद्यकाव्य,
  • आलोचना,
  • यात्रावृत्त,
  • डायरी,
  • पत्र,
  • भेंटवार्ता आदि।

प्रश्न 3.
निबन्ध किसे कहते हैं? इसके कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर-
निबन्ध उस गद्य रचना को कहते हैं जिसमें सीमित आकार के भीतर किसी विषय का वर्णन या प्रतिपादन एक विशेष निजीपन, स्वच्छन्दता, सौष्ठव और सजीवता तथा आवश्यक संगति और सम्बद्धता के साथ किया गया हो।

निबन्ध के निम्न प्रकार हैं-

  • कथात्मक,
  • वर्णनात्मक,
  • विचारात्मक,
  • भावात्मक।

कथात्मक निबन्धों में काल्पनिक वृत्त, आत्मचरित्रात्मक एवं पौराणिक आख्यानों का प्रयोग किया जाता है। वर्णनात्मक निबन्धों में प्रकृति या मनुष्य जीवन की घटनाओं का वर्णन होता है। विचारात्मक निबन्धों में अपने विचारों को सुसम्बद्धता से व्यक्त किया जाता है। भावात्मक निबन्धों में लेखक के हृदय से निकले भावों को एक वैचारिक सूत्र में नियन्त्रित करके लिखा जाता है।

प्रश्न 4.
नाटक किसे कहते हैं? नाटक के तत्व भी बताइए।
उत्तर-
रंगमंच पर प्रस्तुत करने के लिए किसी कथा को जब केवल पात्रों के संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है, तो वह रचना नाटक कहलाती है।

नाटक के छः तत्व माने जाते हैं-

  • कथावस्तु,
  • पात्र,
  • कथोपकथन (संवाद),
  • देशकाल,
  • उद्देश्य,
  • शैली।

प्रश्न 5.
हिन्दी के प्रसिद्ध नाटककारों के नाम बताइए।
उत्तर-
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, जयशंकर प्रसाद, हरिकृष्ण, ‘प्रेमी’, उदयशंकर भट्ट, सेठ गोविन्ददास, रामकुमार वर्मा, लक्ष्मीनारायण मिश्र, लक्ष्मीनारायण लाल, उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’, विष्णु प्रभाकर, जगदीशचन्द्र माथुर, धर्मवीर ‘भारती’ आदि ने इस नाटक विधा को आगे बढ़ाया।

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प्रश्न 6.
एकांकी किसे कहते हैं?
उत्तर-
एकांकी नाटक का ही एक प्रकार है, इसे दृश्यकाव्य कहते हैं। एकांकी में जीवन का एक खण्ड दृश्य अंकित किया जाता है। यह स्वयं में पूर्ण होता है। एकांकी का प्रभाव मन के ऊपर बहुत ही सजीव और गम्भीर होता है। एकांकी एक ही उद्देश्य को व्यक्त करता है। इसका एक भाव या विचार होता है। इस भाव को एकांकी दर्शकों तक पहुँचाता है।

एकांकी में एक अंक होता है। यह अंक दृश्यों में विभाजित हो सकता है। कम से कम समय में अधिक-से-अधिक प्रभाव एकांकी का लक्ष्य हुआ करता है।

प्रश्न 7.
एकांकी के तत्व कितने बताये गये हैं?
उत्तर-
एकांकी के तत्व निम्नलिखित बताये गये हैं

  • कथावस्तु,
  • कथोपकथन या संवाद,
  • पात्र या चरित्र-चित्रण,
  • देशकाल-वातावरण,
  • भाषा-शैली,
  • रंगमंचीयता।

प्रश्न 8.
उपन्यास किसे कहते हैं? प्रसिद्ध उपन्यासकारों के नाम लिखिए।
उत्तर-
उपन्यास कथा का वह रूप है जिसमें जीवन का विशद् चित्रण होता है। पात्रों के जीवन की विविधरूपिणी झाँकी देकर उपन्यासकार एक ओर तो मानव चरित्र को व्यक्त करता है और दूसरी ओर वह युग की प्रवृत्तियों का चित्रण करते हुए हमें कुछ सोचने पर विवश कर देता है।

उपन्यास तीन प्रकार के होते हैं-

  • ऐतिहासिक,
  • सामाजिक,
  • मनोवैज्ञानिक।

हिन्दी के उपन्यासों की परम्परा तो भारतेन्दु युग से ही आरम्भ हो गई थी। परन्तु आरम्भ के उपन्यास कपोल-कल्पित और चमत्कार प्रधान ही होते थे। जयशंकर प्रसाद और प्रेमचन्द ने उपन्यास में मानव जीवन का यथार्थ चित्रण आरम्भ किया। प्रेमचन्द तो उपन्यास-सम्राट की उपाधि से विभूषित ही हैं। उनके बाद विशम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’, आचार्य चतुरसेन, जैनेन्द्र, अज्ञेय, इलाचन्द जोशी, भगवतीचरण वर्मा, वृन्दावनलाल वर्मा, यशपाल, उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’, रांगेय राघव, फणीश्वरनाथ ‘रेणु’, धर्मवीर भारती, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव, मन्नू भण्डारी, शिवानी आदि ने हिन्दी उपन्यास को समृद्ध किया है।

प्रश्न 9.
कहानी किसे कहते हैं?
अथवा
कहानी की कहानी लिखो। प्रसिद्ध कहानीकारों के नाम लिखिए।
उत्तर-
कहानी एक कलात्मक छोटी रचना है। यह किसी घटना, भाव, संवेदना आदि की मार्मिक व्यंजना करती है। इसका आरम्भ और अन्त बहुत कलात्मक तथा प्रभावपूर्ण होता है। घटनाएँ परस्पर सम्बद्ध होती हैं। हर घटना लक्ष्य की ओर उन्मुख होती है। लक्ष्य पर पहुँचकर कहानी अपना विशिष्ट प्रभाव छोड़ती हुई समाप्त हो जाती है।

जयशंकर प्रसाद, प्रेमचन्द, अज्ञेय, जैनेन्द, भगवतीचरण वर्मा, कमलेश्वर, विष्णु प्रभाकर, धर्मवीर ‘भारती’, मोहन राकेश, शैलेश मटियानी, भीष्म साहनी, निर्मल वर्मा, शिवानी आदि प्रसिद्ध कहानीकार हैं।

प्रश्न 10.
कहानी के कौन-कौन से तत्व होते हैं?
उत्तर-
कहानी के निम्नलिखित तत्व होते हैं-

  1. कथावस्तु-कथावस्तु के विकास की स्थितियाँ चार होती हैं-
    • आरम्भ,
    • आरोह,
    • चरम स्थिति,
    • अवरोह।
  2. चरित्र-चित्रण।
  3. कथोपकथन अथवा संवाद।
  4. देशकाल और वातावरण।
  5. उद्देश्य।
  6. शैली शिल्प।

प्रश्न 11.
कहानी के कितने भेद होते हैं?
उत्तर-
कहानी के निम्न चार भेद होते हैं-

  • घटना प्रधान कहानी,
  • चरित्र प्रधान कहानी,
  • वातावरण प्रधान कहानी,
  • भाव प्रधान कहानी।

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प्रश्न 12.
कहानी के विकास को कितने भागों में बाँटा जा सकता है? समय-सीमा भी बताओ।
उत्तर-
कहानी के विकास को निम्नलिखित प्रकार से विभाजित किया जा सकता है

  • आरम्भ काल सन् 1900 से 1910 ई. तक।
  • विकास काल सन् 1911 से सन् 1946 ई. तक।
  • उत्कर्ष काल सन् 1947 ई. से अब तक।

प्रश्न 13.
जीवनी, आत्मकथा, रेखाचित्र, संस्मरण और यात्रावृत्त की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-
जीवनी-किसी महापुरुष या प्रसिद्ध व्यक्ति के जीवन की घटनाओं, उनके कार्य-कलापों आदि का आत्मीयता के साथ वर्णन जिस गद्य विधा में किया जाता है, उसे जीवनी कहते हैं।

आत्मकथा-आत्मकथा में लेखक स्वयं अपनी जीवन-यात्रा पूरी आत्मीयता से व्यवस्थित रूप में पाठक के सम्मुख रखता है।

रेखाचित्र-रेखाचित्र में शब्दों की कलात्मक रेखाओं द्वारा किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा घटना के बाह्य और आन्तरिक स्वरूप का शब्दचित्र अंकित किया जाता है।

संस्मरण-संस्मरण में लेखक अपने अनुभव की वस्तु, व्यक्ति अथवा घटना का कलात्मक विवरण अपनी स्मृति के आधार पर प्रस्तुत करता है। यात्रावृत्त-यात्रावृत्त वह विधा है जिसमें लेखक किसी विशेष स्थल की यात्रा का ऐसा सजीव वर्णन करता है कि पाठक पढ़कर ही ऐसा अनुभव करने लगे जैसे वह उसी स्थान के सारे दृश्य स्वयं देख रहा है।

प्रश्न 14.
गद्यकाव्य विधा के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
यह कवितापूर्ण गद्य रचना होती है। जब किसी गहन भावानुभूति की काव्यमयी भाषा शैली और अतिशय भावुकता के साथ प्रस्तुत की जाती है, तब हम उस रचना को गद्यकाव्य कहते हैं। गहन भावानुभूति, काव्यमयी सुललित भाषा, आलंकारिकता, भावात्मक शैली आदि इसकी विशेषताएँ हैं।

प्रश्न 15.
‘रिपोर्ताज’ विधा का परिचय दीजिए।
उत्तर-
‘रिपोर्ताज’ फ्रांसीसी भाषा का शब्द है। अंग्रेजी शब्द ‘रिपोर्ट’ से इसका निकट का सम्बन्ध है। रिपोर्ट समाचार-पत्र के लिए लिखी जाती है। उसमें साहित्यिक तत्व नहीं होते। रिपोर्ट के कलात्मक और साहित्यिक रूप को ही रिपोर्ताज कहते हैं।

आँखों देखी घटनाओं पर ही रिपोर्ताज लिखा जा सकता है। रिपोर्ताज का विषय कभी कल्पित नहीं होता है। परन्तु तथ्य को रोचकता देने के लिए इसमें कल्पना का सहारा लिया जा सकता है। रिपोर्ताज लेखक को पत्रकार और कलाकार दोनों की ही जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।

प्रश्न 16.
‘आलोचना’ की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
‘आलोचना’ विधा के द्वारा किसी साहित्यिक रचना के गुण-दोषों की परख की जाती है जिसमें रसानुभूति की बुद्धि प्रधान व्याख्या की जाती है।

महत्त्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न

रिक्त स्थानों की पूर्ति-

1. गद्य का क्रमिक विकास हिन्दी के………………के आरम्भ से हुआ। (भक्तिकाल/आधुनिक काल)
2. गद्य में व्याकरण के नियमों का प्रयोग भी………….ग्रहण किया जा सकता है। (आसानी से/कठिनता से)
3. पात्रों के संवादों से प्रस्तुत रचना…………….कहलाती है। (नाटक/उपन्यास)
4. एकांकी में……………होता है। (एक अंक/कम-से-कम पाँच अंक)
5. गद्यकाव्य काव्यमय………..रचना होती है। (पद्य/गद्य)
उत्तर-
1. आधुनिक काल,
2. आसानी से,
3. नाटक,
4. एक अंक,
5. गद्य।

सही विकल्प चुनिए-

1. गद्य हमारी स्वाभाविक
(क) अभिव्यक्ति है
(ख) रचना है
(ग) पद्य है
(घ) व्याख्या है।
उत्तर-
(क) अभिव्यक्ति है

2. गद्य का प्रयोग होता है
(क) व्याख्या के लिए
(ख) धमकाने के लिए
(ग) भयभीत करने के लिए
(घ) भाव प्रकाशन के लिए।
उत्तर-
(क) व्याख्या के लिए

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3. व्याकरण के नियमों का प्रयोग होता है गद्य में
(क) कठिनता से
(ख) आसानी से
(ग) बाधा से
(घ) अबाधित रूप से।
उत्तर-
(ख) आसानी से

4. एकांकी में अंक होता है
(क) एक ही
(ख) तीन ही
(ग) पाँच ही
(घ) एक भी नहीं।
उत्तर-
(क) एक ही

5. ‘रिपोर्ताज’ शब्द है भाषा का
(क) फ्रांसीसी
(ख) इटेलियन
(ग) रूसी
(घ) जापानी।
उत्तर-
(क) फ्रांसीसी

सही जोड़ी मिलाइए-
MP Board Class 9th Special Hindi गद्य साहित्य का स्वरूप एवं विधाएँ 1
उत्तर-
(i) → (ख),
(ii) →(क),
(iii) → (घ),
(iv) → (ग),
(v) → (ङ)।

सत्य/असत्य-

1. कहानी में किसी घटना, भाव, संवेदना आदि की मार्मिक व्यंजना की जाती है।
2. उपन्यास में जीवन का विशद् चित्रण नहीं होता है।
3. एकांकी का एक ही अंक दृश्यों में विभाजित होता है।
4. गद्यकाव्य कवितापूर्ण गद्य रचना होती है जिसमें गहन भावानुभूति होती है।
5. आलोचना में रसानुभूति की बुद्धि प्रधान व्याख्या की जाती है।
उत्तर-
1. सत्य,
2. असत्य,
3. सत्य,
4. सत्य,
5. सत्य।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर-

1. अंग्रेजी शब्द ‘रिपोर्ट’ से किसका निकटता का सम्बन्ध होता है?
उत्तर-
रिपोर्ताज का।

2. आलोचना में किसके गुण-दोषों की परख की जाती है?
उत्तर-
साहित्यिक रचना के।

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3. किसी विशेष स्थल की यात्रा का सजीव वर्णन किस विधा में किया जाता है?
उत्तर-
यात्रावृत्त।

4. रेखाचित्र में घटना के बाह्य और आन्तरिक स्वरूप को किस तरह अंकित किया जाता है?
उत्तर-
कलात्मक रेखाओं द्वारा।

5. जीवन का विशद् चित्रण किस विधा में होता है?
उत्तर-
उपन्यास।

MP Board Class 9th Hindi Solutions

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 7 हम बीमार ही क्यों हों? प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 7 Ham Bimar hi kyon Ho Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 7 Ham Bimar hi kyon Ho Questions and Answers

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 7 प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) हमारा शरीर तत्वों से मिलकर बना है
(i) एक
(ii) तीन
(iii) चार
(iv) पाँच।
उत्तर
(iv) पाँच

(ख) चमड़ी के एक-एक छिद्र में है
(i) आकाश
(ii) पाताल
(iii) जल
(iv) वायु।
उत्तर
(i) आकाश

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(ग) हम जितना भोजन करते हैं, जल पीते हैं, उसकी
तुलना में वायु ग्रहण करते हैं
(i) चार गुना
(ii) पाँच गुना,
(iii) सात गुना
(iv) छह गुना।
उत्तर
(iii) सात गुना

(घ) सूर्य नमस्कार करने से शरीर में अधिक मात्रा में होते हैं-
उत्पन्न
(i) लाल रक्त कण
(ii) श्वेत रक्त कण,
(iii) सूक्ष्म अवयव
(iv) क्षार पदार्थ।
उत्तर
(i) लाल रक्त कण।

MP Board Class 6 Hindi Chapter 7 प्रश्न 2.
निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) हमारे शरीर के ………….” भाग में केवल जल है।
(ख) भोजन के …………. घण्टे पूर्व तथा ……” घण्टे बाद पानी पीना अच्छी आदत है।
(ग) सूर्य केवल प्रकाश और ताप ही नहीं देता बल्कि …………….” और लम्बी उम्र भी प्रदान करता है।
उत्तर
(क) वजन के 100 भागों में 70
(ख) एक, दो
(ग) बुद्धि।

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MP Board Class 6th Hindi Chapter 7 प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) पाँच तत्वों के नाम लिखिए।
उत्तर
पाँच तत्व हैं

  1. आकाश
  2. वायु,
  3. अग्नि
  4. जल, एवं
  5. पृथ्वी।

(ख) ‘आरोग्य सम्राट्’ किस तत्व को कहा गया है?
उत्तर
आकाश तत्व को ‘आरोग्य सम्राट्’ कहा गया है।

(ग) हमें कैसा भोजन करना चाहिए?
उत्तर
हमें सन्तुलित, प्राकृतिक आहार लेना चाहिए जिसमें गेहूँ, दाल, घी, तेल आदि का एक हिस्सा एवं चार हिस्सा दूध, फल और हरी सब्जियाँ लेना आवश्यक है।

(घ) स्वस्थ रहने के लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए?
उत्तर
स्वस्थ रहने के लिए हमें-आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी तत्वों की सन्तुलित मात्रा शरीर में रखनी चाहिए। सन्तुलित प्राकृतिक आहार लिया जाना चाहिए। इस तरह रोग पास नहीं आयेगा।

Class 6 Hindi Chapter 7 MP Board प्रश्न 4.
तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) जल को जीवन कहा गया है। क्यों ?
उत्तर
जल को जीवन और अमृत भी कहते हैं। जीवन के लिए जल तत्व अत्यन्त आवश्यक है। यह वास्तव में प्राणियों का प्राण है। शरीर के वजन के 100 भागों में 70 भाग  केवल जल है। जल के योग से शरीर के छोटे से छोटे अंगों का पोषण होता है। जल ही पसीने के रूप में, फेफड़ों से वाष्प के रूप में और पेट से मल-मूत्र के रूप में शरीर की गन्दगी को बाहर निकालता है। जल से पाचन क्रिया ठीक रहती है। इस प्रकार जल है तो जीवन है।

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(ख) सन्तुलित आहार किसे कहते हैं ? यह क्यों आवश्यक है?
उत्तर
शरीर के स्वस्थ रखने के लिए हमें सन्तुलित आहार लेना चाहिए। सन्तुलित आहार में एक हिस्सा गेहूँ, दाल, घी, तेल आदि होना चाहिए और इसके अतिरिक्त चार हिस्सा दूध, फल, हरी सब्जियाँ आदि का होना अनिवार्य है। साथ ही उस आहार में प्राकृतिक रूप से सन्तुलन बना रहना चाहिए। सन्तुलित आहार में पृथ्वी तत्व का सामंजस्य अनिवार्य है। भोजन में शामिल सभी वस्तुएँ जो खाने और पीने योग्य हैं, वे सभी पृथ्वी तत्व से संयुक्त होती हैं। इस तरह सन्तुलित आहार के उपयोग से आरोग्य लाभ प्राप्त हो सकता है।

(ग) “सूर्य के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा | सकती” सिद्ध कीजिए।
उत्तर
सूर्य से हमें प्रकाश और ताप मिलता है। इससे – हमें बुद्धि और लम्बी आयु का वरदान भी मिलता है। सूर्य की प्रात:कालीन किरणों से हमें विटामिन ‘डी’ मिलता है जिससे लाल रक्त कण उत्पन्न होते हैं, जिससे हमारी जीवन शक्ति बढ़ती है। सूर्य से प्राप्त गर्मी से पृथ्वी तत्व-अन्न, फल, जल, सब्जियाँ आदि की प्राप्ति होती है, जिससे हमारा जीवन विकसित होता है। सूर्य को देवता के रूप में हम पूजते हैं। सूर्य से जीवन संरक्षित होता है। सूर्य जीवन का देवता है। रोम, यूनान, मिस्र आदि देशों में सूर्य को देवता माना जाता है।

(घ) पृथ्वी को माँ क्यों कहा गया है?
उत्तर
पृथ्वी हमारी माँ है। हम पृथ्वी पर ही जन्म लेते हैं, वह हमें धारण करती है। उससे उत्पन्न तत्वों-अन्न, जल, दूध, फल, हरी सब्जियाँ, मक्खन, शहद आदि से हमारा पोषण होता है। हमें सन्तुलित आहार मिलता है। पृथ्वी के बिना हमारा अस्तित्व नहीं है। सन्तुलित और प्राकृतिक आहार पृथ्वी की देन है, अत: पृथ्वी हमारी माँ है। पृथ्वी ही जन्म देने वाली, पोषण करने वाली और अन्त में अपनी ही गोद में विश्राम देने वाली है, अत: माता पृथ्वी पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ सत्य है।

Class 6 Bhasha Bharti Chapter 7 प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) पृथ्वी पर जल की मात्रा बिल्कुल कम हो जाए तो क्या होगा?
उत्तर
जल वह तत्व है जिसकी कमी से प्राणियों का जीवन असम्भव हो जाएगा। जल अमृत है। जल ही प्राण है। हमारे शरीर के वजन के 100 भागों में 70 भाग केवल जल है। जल हमारे भोजन का अनिवार्य तत्व है। इसके सहयोग से खून शरीर के अति सूक्ष्म अवयवों का पोषण करता है। जल ही शरीर की गन्दगी बाहर फेंक निकालता है। शरीर का निरोग बने रहना शुद्ध जल की प्राप्ति से सम्भव है।

(ख) आपको सब्जियाँ न मिलें तो सन्तुलित आहार की पूर्ति कैसे करोगे?
उत्तर
सब्जियों के न मिलने पर सन्तुलित आहार की पूर्ति में फल, दूध और जल की मात्रा बढ़ा देंगे। साथ ही सूर्योदय से पहले खुले मैदान में स्वच्छ वायु सेवन के लिए निकलेंगे जिससे अन्य आवश्यक विटामिनों की पूर्ति हो सके।

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(ग) शरीर में जल की मात्रा कम हो जाए तो इसकी पूर्ति हेतु आप क्या करेंगे?
उत्तर
शरीर में जल की मात्रा कम हो जाने पर इसकी पूर्ति के लिए ठण्डे जल से स्नान करेंगे। रसदार फलों और सब्जियों का उपयोग बढ़ा देंगे। इस तरह धीरे-धीरे जल की मात्रा की कमी पूरी हो सकती है।

Hindi Class 6 Chapter 7 प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना

(क) यदि आपको पृथ्वी के अतिरिक्त अन्य ग्रह पर जाना पड़े तो आप अपने साथ क्या-क्या ले जाना चाहेंगे और क्यों
उत्तर
अन्य ग्रह पर जाने की स्थिति में अपने साथ वे सभी वस्तुएँ ले जाना चाहेंगे जिनसे हमें जल, वायु तथा खाद्य वस्तुएँ आदि जिनसे हमारे जीवन को बनाए रखने में सहायता मिल सके।

(ख) यदि पाँच भौतिक तत्वों में से आपको कोई दो तत्व लेने को कहा जाए तो आप कौन-से दो तत्वों का चयन करेंगे और क्यों ?
उत्तर
पाँच तत्वों में से हम जल और पृथ्वी तत्व को लेना चाहेंगे, क्योंकि पृथ्वी तत्व से अन्न, फल, दूध एवं सब्जियाँ अपने आप ही प्राप्त हो जायेंगी। जीवन की प्रक्रिया चल सकेगी तथा जल तत्व उसे सहारा देगा।

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भाषा की बात

Bhasha Bharti Class 7 Chapter 6 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिएसन्तुलित, बुद्धिमत्ता, निर्दोष, स्वास्थ्य, प्रदत्त।
उत्तर
अपने अध्यापक महोदय की सहायता से अपनी कक्षा में शुद्ध उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।

Class 6th Hindi Chapter 7 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित की वर्तनी शुद्ध कीजिए.
सूरक्षा, वायूमडल, सासं, निमल, भक्ती।
उत्तर
सुरक्षा, वायुमंडल, सांस, निर्मल, भक्ति।

Class 6 Hindi Chapter 7 प्रश्न 3.
उदाहरण के अनुसार प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए
उदाहरण- बनना + आवट = बनावट। लिखना + आई = लिखाई।
(i) लिखना + आवट
(ii) सजना + आवट
(iii) दिखना + आई
(iv) सिलना + आई।
उत्तर-
(i) लिखावट
(ii) सजावट
(iii) दिखाई
(iv) सिलाई।

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Class 6 Chapter 7 Hindi प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए
(1) आकाश, (2) सूर्य, (3) पृथ्वी, (4) अग्नि, (5) नदी।
उत्तर

  1. आकाश = नभ, व्योम, आसमान, शून्य।
  2. सूर्य = सूरज, भानु, भास्कर, रवि।।
  3. पृथ्वी = धरती, वसन्धुरा, वसुधा, भूमि।
  4. अग्नि = आग, अनल, ज्वाला, पावक।
  5. नदी = सरिता, तटिनी, तरंगिणी, नद।

Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 7 प्रश्न 5.
विलोम शब्दों की सही जोड़ी बनाइए
(i) लाभ – (क) अशुद्ध
(ii) स्वस्थ – (ख) विषम
(iii) शुद्ध – (ग) नीचे
(iv) सम – (घ) अप्रसन्न
(v) ऊपर – (ङ) हानि
(vi) प्रसन्न – (च) अस्वस्थ
उत्तर
(i)→(ङ), (ii)→ (च), (iii)→ (क), (iv)→ (ख),(v)→ (ग),(vi)→ (घ)

Class 6 Hindi Chapter 7 Question Answer प्रश्न 6.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(1) प्राचीन, (2) भोजन, (3) संयम, (4) सदाचार, (5) पवित्र।
उत्तर

  1. प्राचीन-भारतीय सभ्यता बहुत प्राचीन है।
  2. भोजन-भोजन में सभी अनिवार्य तत्व होने चाहिए।
  3. संयम-संयमपूर्ण जीवन सुखमय होता है।
  4. सदाचार-सदाचार से शरीर स्वस्थ रहता है।
  5. पवित्र-गंगा का जल पवित्र होता है।

परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

(1) टहलने के लिए बस्ती से दूर कोई ऐसा साफ-सुथरा पथ चुनना चाहिए जो प्रकृति के साम्राज्य से होकर गुजरता हो। टहलने के अतिरिक्त आसन, प्राणायाम, तैराकी एवं अन्य कसरतों के माध्यम से हम अपने शरीर को वायु तत्व प्रदान कर सकते हैं।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा भारती’ के पाठ ‘हम बीमार ही क्यों हों ?’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस पाठ के लेखक डॉ. आनन्द हैं।

प्रसंग-लेखक टहलने और व्यायाम करने की सलाह देता है, जिससे हम अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं।

व्याख्या-अपने स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए टहलना आवश्यक है लेकिन हमें घूमने-फिरने के लिए ऐसे स्थान को चुनना चाहिए, जो स्वच्छ हो। हमें ऐसे मार्ग से टहलने निकलना चाहिए जहाँ किसी तरह की गन्दगी न हो, साथ ही प्राकृतिक रूप से खुला और स्वच्छ वातावरण हो। चारों ओर कुदरत की सुन्दरता और सफाई हो। टहलने के अलावा हमें प्रतिदिन प्राणायाम, तैरना तथा दूसरी तरह की कसरतें भी खुले प्राकृतिक परिवेश में करनी चाहिए। इससे हमें खुली शुद्ध वायु प्राप्त होती है और हमारा शरीर इस तरह स्वस्थ बना रह सकता है।

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(2) सूर्य केवल प्रकाश और ताप ही नहीं देता है, बल्कि वह बुद्धि और लम्बी उम्र भी प्रदान करता है। सूर्य के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। भारत ही क्यों, रोम, यूनान, मिस्त्र सभी जगह सूर्य को देवता माना गया है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-लेखक का मानना है कि सूर्य से केवल उजाला ही नहीं, हमें बुद्धि तथा लम्बी उम्र भी मिलती है।

व्याख्या-लेखक का मत है कि सूर्य से हमें प्रतिदिन उजाला और गर्मी मिलती है। इसके अतिरिक्त सूर्य हमें बुद्धि और दीर्घ आयु भी प्रदान करता है। यदि सूर्य न होता, तो निश्चय ही पृथ्वी पर जीवन असम्भव होता। सूर्य को देवता रूप में हम पूजते हैं। भारत में ही नहीं, रोम में, यूनान में तथा मिस्त्र आदि देशों में सूर्य को देवता माना जाता है। उसे जीवन देने वाला देवता कहा जाता है।

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(3) हम भला पृथ्वी के बिना कैसे रह सकते हैं? जो कुछ हम खाते-पीते हैं या आहार के रूप में लेते हैं, वे सभी वस्तुएँ हमें पृथ्वी से ही प्राप्त होती हैं। सन्तुलित प्राकृतिक आहार जीवन का सबसे बड़ा वरदान है। दूध, फल, अंकुरित अन्न, हरी सब्जियाँ, मक्खन,शहद आदि वस्तुएँ भोजन में समुचित मात्रा में होंगी तो पृथ्वी तत्व सन्तुलित बना रहेगा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-पृथ्वी का महत्व बतलाते हुए लेखक बता देना चाहता है कि पृथ्वी ने हमें प्राकृतिक रूप से वे सभी वस्तुएँ प्रदान की है जिनसे हम अपने शरीर को पूर्ण स्वस्थ रख सकते हैं।

व्याख्या-धरती के बिना हमारा जीवन सम्भव नहीं है। पृथ्वी ही हमें वह सब देती है, जिसका उपयोग हम अपने शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए करते हैं। खाने-पीने के लिए जो हम आहार रूप में ग्रहण करते हैं, वह सब पृथ्वी द्वारा दिया जाता है। जीवन का सबसे बड़ा वरदान आहार है जिसमें कुदरत का सन्तुलन समाया हुआ है। हम जो भी अन्न रूप में, हरी सब्जियों के रूप में, मक्खन एवं शहद के रूप में प्राप्त करते हैं, उन सभी का उपयोग भोजन के रूप में उचित मात्रा में करते हैं, वह पृथ्वी माता का वरदान है। इन सभी के रूप में उन सभी की उचित मात्रा को ग्रहण करते रहने से हम स्वस्थ बने रहेंगे। यह सब सन्तुलित और कुदरती रूप में भोग किया जाना चाहिए। ये सभी पदार्थ पृथ्वी तत्व हैं क्योंकि ये सभी पृथ्वी से मिलते हैं।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 13 बसन्त प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 13 Basant Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 13 Basant Questions and Answers

Bhasha Bharti Class 5 Chapter 13 Question Answer प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) बसन्त का घर उजाड़ दिया
(i) वृक्ष काटकर
(ii) वृक्ष लगाकर,
(iii) सड़क बनाकर
(iv) पहाड़ काटकर।
उत्तर
(i) वृक्ष काटकर

(ख) बसन्त में झूले डाले जाते हैं
(i) गेंदा पर
(ii) अमुआ पर,
(iii) बेरी पर
(iv) चम्पा पर।
उत्तर
(ii) अमुआ पर

(ग) बसन्त के स्वागत में गीत गाती है
(i) कोयल
(ii) मोरनी,
(iii) चिड़िया
(iv) गौरेया।
उत्तर
(i) कोयल

(घ) हरे-भरे पेड़ कटने से अब पहले की तरह नहीं आता
(i) शिशिर
(ii) हेमन्त
(iii) ग्रीष्म,
(iv) बसन्त।
उत्तर
(iv) बसन्त

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Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 13 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) बसन्त आने पर …………… आती थी।
(ख) कवि ने जंगल को ………. कहा है।
(ग) पत्तों के झुरमुट से …….. धुन आती थी।
(घ) बसन्त के ……….. में कोयल गीत गाती थी।
उत्तर
(क) हरियाली
(ख) जीवन
(ग) कुहू कुहू
(घ) स्वागत।

Class 6 Hindi Chapter 13 Question Answer प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) हरियाली कौन-सी ऋतु लाती है?
उत्तर
हरियाली बसन्त ऋतु लाती है।

(ख) बसन्त में कौन-कौन से फूल खिलते हैं?
उत्तर
बसन्त में चम्पा, चमेली और गेंदा के फूल खिलते हैं।

(ग) अब पहले की तरह बसन्त क्यों नहीं आता ?
उत्तर
अब पहले की तरह बसन्त इसलिए नहीं आता है क्योंकि लोगों ने हरे-भरे वृक्षों से परिपूर्ण जंगल काट दिए हैं।

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(घ) पूर्व की तरह बसन्त कब आएगा?
उत्तर
पूर्व की तरह बसन्त अब तभी आएगा जब बंजर बनी हुई धरती पर हरियाली भरे पेड़-पौधे लगेंगे। वनों की हरियाली ही जीवन देती है।

(ङ) बसन्त में क्या-क्या परिवर्तन दिखाई देने लगते हैं ?
उत्तर
बसन्त में चारों ओर का वातावरण खुशहाली का होता है, हरियाली छा जाती है, तरह-तरह के फूल खिल उठते हैं। आम पर बौर आ जाता है। उनकी डालियों में झूले पड़ जाते हैं। मोर-मोरनी नाचने लगते हैं। कोयल पत्तों के झुरमुट में कुहू कुहू की धुन में गीत गाती है। सुगन्ध युक्त हवा बहने लगती है।

Class 6 Hindi Chapter 13 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पद्यांशों का भाव स्पष्ट कीजिए

(i) बहती थी मस्त पवन, झूम उठे पागल मन,
मोर भी नाचा था, वन में मयूर संग।

(ii) बोला बसन्त फिर, अब कहाँ आऊँ मैं ? . कट गए वृक्ष सब, कहाँ ठहर जाऊँ मैं?
उत्तर
‘सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या’ शीर्षक में पद्यांश संख्या 1 व 3 की व्याख्या देखिए।

भाषा की बात

Bhasha Bharti Class 5 Chapter 13 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
उजाड़, आँगन, हरियाली, झुरमुट।
उत्तर
कक्षा में अपने अध्यापक के सहयोग से शुद्ध उच्चारण कीजिए और अभ्यास कीजिए।

Class 6 Hindi Vasant Chapter 13 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से सही वर्तनी वाला शब्द चुनकर लिखिए

(क) चमिली, चमैली, चमेली।
(ख) मायूर, मयूर, मयुर।
(ग) जगंल, जगलं, जंगल।
(घ) उजाढ़, उजाड़, ऊजाड।
उत्तर
(क) चमेली
(ख) मयूर
(ग) जंगल
(घ) उजाड़।

Class 6 Hindi Lesson 13 Question Answer प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए

(i) फूल
(ii) मयूर
(iii) जंगल
(iv) पवन
(v) वृक्ष।
उत्तर
(i) फूल = पुष्प, कुसुम
(ii) मयूर = मोर, केकी
(ii) जंगल = वन, अरण्य
(iv) पवन = हवा, वायु, समीर
(v) वृक्ष = पेड़, पादप, विटप।

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Class 6th Hindi Chapter 13 प्रश्न 4.
निम्नलिखित पंक्तियों में से अनुप्रास अलंकार वाली पंक्तियाँ छाँटकर लिखिए

(i) चम्पा चमेली संग
(ii) गेंदा भी फूले थे
(iii) कुहू-कुहू धुन आती थी।
(iv) कहाँ ठहर जाऊँ में।
(v) तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।
(vi) सन सिय सत्य असीस हमारी।
उत्तर
(i) चम्पा चमेली संग
(iii) कुहू कुहू धुन आती थी
(v) तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये
(vi) सुनु सिय सत्य असीस हमारी।

Class 6 Chapter 13 Hindi प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों में से विशेषण और विशेष्य छाँटकर लिखिए

(क) आज मस्त पवन बह रही है।
(ख) बगीचे में सुन्दर फूल खिले हुए हैं।
(ग) काली कोयल कुहू कुहू कर रही है।
उत्तर
(क) विशेषण-मस्त, विशेष्य-पवन।
(ख) विशेषण-सुन्दर, विशेष्य-फूल।
(ग) विशेषण-काली, विशेष्य-कोयल।

बसन्त सम्पूर्ण पद्यांशों की व्याख्या

(1) बसन्त तुम आते थे
हरियाली लाते थे।
चम्पा चमेली संग
गेंदा भी फूले थे
अमुआ की डाली पर
डाले फिर झूले थे।
बहती थी मस्त पवन
झूम उठे पागल मन
मोर भी नाचा था
वन में मयूर संग।

शब्दार्थ-अमुआ = आम। पवन = हवा।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा-भारती’ की कविता ‘बसन्त’ से ली गई हैं। इस कविता की रचना ‘प्रमोद सोनी’ ने की है।

प्रसंग-बसन्त के आगमन पर चारों ओर सुन्दरता बिखर पड़ती है।

व्याख्या-कवि कहता है कि हे बसन्त ! जब तुम आते हो तब अपने साथ हरियाली लाते हो। बसन्त ऋतु में चम्पा, चमेली और गेंदा के फूल खिल रहे थे। आम के वृक्षों पर बौर आ गया है, भीनी गन्ध के मध्य झूले डाल दिए गए हैं। मतवाली हवा बहने लगी थी; उससे पागल हुआ मन भी झूम उठता था। वन में मोर भी मयूरी (मोरनी) के साथ नाचा करते थे।

(2) स्वागत में गीत कोई
कोयल भी गाती थी
पत्तों के झुरमुट से
कुहू कुहू धुन आती थी।
क्यों नहीं लगता अब
जैसे तुम आए हो
हरियाली मस्त पवन
संग नहीं लाए हो।

शब्दार्थ-मस्त = मतवाला बनाने वाला।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-अब बसन्त के आगमन पर पक्षियों द्वारा कोई भी गीत आदि नहीं गाये जाते हैं।

व्याख्या-कवि कहता है कि पहले बसन्त के आने पर उसके स्वागत में कोयल अपनी कुहू कुहू की ध्वनि में गीत गाया करती थी। पेड़ों के पत्तों के झुरमुट में छिपकर कोयल जो अपनी मीठी तान छेड़ती तो सब कुछ आनन्दमय हो जाता था। लेकिन अब तुम्हारे (बसन्त के) आगमन पर वैसा नहीं लगता। हे बसन्त! तुम अब अपने साथ कोई वैसी हरियाली, मतवाला बना देने वाली हवा को भी नहीं लाते हो। इसलिए अब ऐसा क्यों नहीं लगता कि बसन्त आ गया है।

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(3) बोला बसन्त फिर
अब कहाँ आऊँ मैं?
कट गए वृक्ष सब
कहाँ ठहर जाऊँ मैं ?
हरे भरे जंगल सब
तुमने तो काट दिए
घर मेरा उजाड़ कर
अपनों में बाँट दिए।

शब्दार्थ-उजाड़कर = बरबाद करके। सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-‘बसन्त’ आ गया है, ऐसा क्यों नहीं लगता ? इस प्रश्न का उत्तर बसन्त देता है।

व्याख्या-बसन्त ने उत्तर देते हुए कहा कि मैं कहाँ पर आऊँ, क्योंकि मेरे ठहरने के स्थान हरे-भरे पेड़-पौधे थे, उन सबको तुमने काट दिया है। बताओ तो मैं अब कहाँ ठहरूँ? हरियाली से परिपूर्ण जंगलों को तुमने काट दिया है। हरे-भरे वन ही मेरे निवास स्थान थे, उन्हें ही काटकर मेरा घर बरबाद कर दिया है। हे मनुष्यो। तुमने ही हरे-भरे वनों को काट कर अपनों में आपस में बाँट लिया है। मेरे लिए तो रहने का स्थान छोड़ा ही नहीं है।

(4) दुखी है मेरा मन
कुछ तो दुख बाँटो
जंगल ही जीवन है
जंगल को मत काटो।
मेरे घर आँगन को फिर से बसाओगे
बंजर इस धरती पर
हरियाली लाओगे।
अब तो मैं आऊँगा
वृक्ष जब लगाओगे।

शब्दार्थ-बंजर = ऊसर; वह भूमि जिसमें कोई भी बीज अंकुरित नहीं होता है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-दुःखी मन वाला बसन्त अपने आगमन की शर्त बताता है कि इस धरती को हरे-भरे पेड़-पौधों से युक्त कीजिए, मैं अवश्य ही समय से आऊँगा।।

व्याख्या-बसन्त कहता है कि मेरे मन के अन्दर व्याप्त दु:ख को, हे मनुष्यो ! आप सभी बाँट लीजिए। यह मेरा दुःख तभी जा सकेगा, जब आप जंगलों को नहीं काटोगे। जंगलों की वृद्धि कीजिए। जंगल हैं तो जीवन सुरक्षित है। पेड़-पौधे लगाकर मेरे घर-आँगन को हरियाली से सम्पन्न कर दीजिए। यह हरियाली ही मेरा निवास है, घर है। यह धरती जिसे पेड़-पौधों को काटकर बंजर बना दिया है। उसे हरियाली से सम्पन्न बनाइए। बसन्त का आगमन तो तभी हो सकेगा जब वृक्षों का रोपण किया जाएगा।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer