भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 3 हार की जीत प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 3 Haar Ki Jeet Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 3 Haar Ki Jeet Questions and Answers

Bhasha Bharti Class 6 Chapter 3 प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) बाबा भारती रहते थे
(i) कुटिया में
(ii) मन्दिर में,
(iii) राजमहल में
(iv) बड़े भवन में।
उत्तर-
(ii) मन्दिर में

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(ख) बाबा भारती को खड्ग सिंह ने रोका
(i) अपाहिज बनकर,
(ii) वैद्य बनकर,
(iii) किसान बनकर
(iv) पुजारी बनकर।
उत्तर
(i) अपाहिज बनकर

MP Board Class 6 Hindi Chapter 3 प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) जो उसे एक बार देख लेता है, उसके हृदय पर उसकी ……….. अंकित हो जाती है।
(ख) बाबा भारती और खड्ग सिंह ……..” में पहुंचे।
(ग) ओ बाबा ! इस …..” की सुनते जाना।
(घ) अब कोई .की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।
उत्तर
(क) छवि
(ख) अस्तबल
(ग) कैंगले
(घ) गरीबों।

Class 6 Hindi Chapter 3 Haar Ki Jeet प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर दीजिए

(क) बाबा भारती अपने घोड़े को किस नाम से पुकारते थे?
उत्तर
बाबा भारती अपने घोड़े को ‘सुलतान’ नाम से पुकारते थे।

(ख) खखड्ग सिंह कौन था ?
उत्तर
खड्ग सिंह उस इलाके का कुख्यात डाकू था।

(ग) खड्ग सिंह बाबा भारती के पास क्यों गया था ?
उत्तर
खड्ग सिंह बाबा भारती के पास उनके घोड़े सुलतान को देखने की चाह से गया था।

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(घ) खड्ग सिंह ने जाते समय बाबा भारती से क्या कहा था ?
उत्तर
खड्ग सिंह ने जाते समय बाबा भारती से कहा कि “बाबा जी, मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूंगा।”

(ङ) खड्ग सिंह ने अपने को किसका सौतेला भाई बताया था ?
उत्तर
खड्ग सिंह ने अपने को दुर्गादत्त वैद्य का सौतेला भाई बताया था।

Class 6th Hindi Chapter 3 MP Board प्रश्न 4.
तीन से पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) बाबा भारती की दिनचर्या क्या थी?
उत्तर
बाबा भारती गाँव से बाहर एक छोटे से मन्दिर में रहते थे और भगवान का भजन करते थे। अपने घोड़े सुलतान को अपने हाथ से खरहरा करते थे। वे खुद ही उसे दाना खिलाते थे। उस घोड़े के बिना उनका जीवित रहना असम्भव ही था।

(ख) “विचित्र जानवर है, देखोगे तो प्रसन्न हो जाओगे” यह कथन बाबा भारती ने किससे और क्यों कहा?
उत्तर
“विचित्र जानवर है, देखोगे तो प्रसन्न हो जाओगे।” यह कथन बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कहा। बाबा भारती ने यह वाक्य इसलिए कहा कि खड्गसिंह को ‘सुलतान’ को देखने की चाह थी। जो भी कोई उनके घोड़े की प्रशंसा करता, वे अति प्रसन्न होते और खुशी से उसके गुणगान करने लगते।

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(ग) अपाहिज ने बाबा भारती से क्या कहा ?
उत्तर
अपाहिज ने बाबा भारती से कहा कि, “ओ बाबा! इस कैंगले की सुनते जाना।” वह वृक्ष की छाया में पड़ा कराह . रहा था और उसने बाबा से कहा कि वह दुखिया है, वह दया का पात्र है। उसे वहाँ से तीन मील दूर ‘रामवाला’ तक जाना है। अत: उसे घोड़े पर चढ़ा लें। परमात्मा उनका भला करेगा।

(घ) बाबा भारती ने खड्गसिंह से घटना को किसी के सामने प्रकटन करने के लिए क्यों कहा?
उत्तर
अपाहिज बने खड्गसिंह को बाबा भारती ने अपने घोड़े पर बैठा लिया। उसने घोड़े की पीठ पर बैठते ही लगाम को झटका देकर छीन लिया और घोड़े पर तन कर बैठ गया और घोड़े को दौड़ा लिए जा रहा है। तब बाबा ने खड्गसिंह से तेज आवाज में कहा कि वह इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करे; क्योंकि इस घटना को जानकर कोई भी आदमी किसी गरीब पर विश्वास नहीं करेगा।

Class 6 Hindi Bhasha Bharti Chapter 3 प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) क्या खड्गसिंह द्वारा अपाहिज बनकर घोड़ा ले जाना उचित था ?
उत्तर
खड्गसिंह बाबा भारती के ‘सुलतान’ नामक घोड़े को किसी भी तरह प्राप्त कर लेना चाहता था। वह इलाके का प्रसिद्ध डाकू था। उसने अपाहिज के रूप में अपने आपको प्रदर्शित किया। बाबा भारती को उस अपाहिज पर दया आ गई और अपने घोड़े पर बैठा लिया। थोड़ी ही देर में घोड़े की लगाम को झटक कर वह घोड़े को वश में कर चल दिया। इस तरह उसका उस घोड़े को ले जाना उचित नहीं था, क्योंकि जो भी कोई इस घटना को सुनेगा, वह भी इस कृत्य को अच्छा नहीं बताएगा, क्योंकि फिर गरीब की कोई भी व्यक्ति सहायता करने के लिए तैयार नहीं होगा और इस तरह गरीबों का विश्वास खत्म हो जाएगा।

(ख) “इस समय उसकी आँखों में नेकी के आँसू थे।” इस वाक्य का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
बाबा भारती ने यह शब्द कि ‘अपाहिज बनकर घोड़े को छीन लेने’ की इस घटना को सुनकर कोई भी गरीब का विश्वास नहीं करेगा,’ यह शब्द खड्गसिंह के कानों में लगातार गूंज रहे थे। वह सोचने लगा कि बाबा कितने ऊँचे और पवित्र भावों के व्यक्ति है। इन विचारों वाला यह बाबा वास्तव में मनुष्य न होकर साक्षात देवता है। खड्गसिंह ने घोड़े को चुपचाप ले जाकर उसके अस्तबल में बाँध दिया और वहाँ से चल दिया। उस समय बाबा के विचारों से प्रभावित डाकू खड्गसिंह की आँखों में नेकी के आँसू थे। खड्गसिंह का बाबा के विचारों से हृदय परिवर्तन हो गया। वह एक भला आदमी बन गया।

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Class 6 Hindi Chapter 3 MP Board प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए

(क) यदि बाबा भारती घोड़ा नहीं दिखाते, तो खड्गसिंह क्या करता?
उत्तर
यदि बाबा भारती घोड़ा नहीं दिखाते, तो खड्गसिंह उस घोड़े के गुणों की जानकारी स्वयं न कर सकने से, उसको न चुराता।

(ख) यदि बाबा भारती अपाहिज की आवाज सुनकर घोड़ा नहीं रोकते तो खड़गसिंह क्या कर सकता था ?
उत्तर
अपाहिज की आवाज सुनकर बाबा भारती घोड़े को नहीं रोकते, तो खड्गसिंह निश्चय ही बाबा भारती पर आक्रमण करता और घोड़े को छीन कर ले जा सकता था।

(ग) यदि बाबा भारती की जगह आप होते तो क्या करते?
उत्तर
यदि बाबा भारती की जगह मैं होता तो उस अपाहिज बने डाकू खड्गसिंह की वास्तविकता का पता लगाता और हर तरह घोड़े को छीन कर ले जाने से रोकने की कोशिश करता।

भाषा की बात

MP Board Class 6th Hindi Chapter 3 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का उच्चारण कीजिएकुख्यात, हृदय, प्रतिक्षण, स्वप्न, मिथ्या।
उत्तर
छात्र कक्षा में अपने अध्यापक की सहायता से उच्चारण करें और अभ्यास करें।

Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 3 प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से सही वर्तनी वाला शब्द छाँटकर लिखिए
बलबान, बलवान, बल्वान, वलबान।
सुल्तान, शुलतान, सुलतान, सूल्तान।
नमश्कार, नमष्कार, नामश्रकार, नमस्कार।
परार्थना, प्रार्थना, प्राथर्ना, प्राथना।
उत्तर
बलवान, सुलतान, नमस्कार, प्रार्थना।

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Har Ki Jeet Class 6 Question Answer प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
करुणा, अपाहिज, पवित्र, घमण्ड।
उत्तर
करुणा-रोगी की छटपटाहट परिजनों में करुणा पैदा कर रही थी।
अपाहिज-सरकार ने अपाहिजों की सहायता के लिए अनेक योजनाएं चलायी हैं।
पवित्र-अमरनाथ की पवित्र गुफा के दर्शन के लिए प्रतिवर्ष यात्री जाते हैं।
घमण्ड-घमण्ड करने से आदमी पतित बन जाता है।

Class 6 Bhasha Bharti Chapter 3 प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों में से संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण एवं क्रिया शब्दों को छाँटकर दी गई तालिका में लिखिए
कुख्यात, पवित्र, खेत, कीर्ति, तुम्हें, प्रसन्न, उसकी, उन्हें, चिल्लाना, सुन्दर, विचित्र, हिनहिनाना, तनना, घोड़ा, बाबा भारती, खड्गसिंह, मन्दिर, उनका, उस, बोला, दिखाया।
उत्तर
MP Board Class 6th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 3 हार की जीत 1

Baba Bharati Ki Dincharya Kya Thi प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखिए
(i) जिसका अंग भंग हो गया हो,
(ii) घोड़ा बाँधने का स्थान,
(iii) जो दूसरों की प्रशंसा करता है
(iv) जो दूसरों की निन्दा करता है।
उत्तर
(i) अपाहिज
(ii) अस्तबल
(iii) प्रशंसक
(iv) परनिंदक।

Class 6 Hindi Haar Ki Jeet प्रश्न 6.
दिए गए वाक्यों में का, की, के, को (सम्बन्धकारक) का प्रयोग करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) बाबा को प्रतिक्षण खड्गसिंह ……….. भय लगा रहता था।
(ख) उन्होंने सुलतान ……………. ओर से मुँह मोड़ लिया।
(ग) रात्रि ……….” तीसरा प्रहर बीत चुका था।
(घ) माँ ………… अपने बेटे को देखकर आनन्द आता है।
(ङ) वे इस भय को स्वप्न के भय ……..नाईं मिथ्या समझने लगे।
(च) मन्दिर ……… अन्दर कोई शब्द सुनाई न देता था।
उत्तर
(क) का, (ख) की, (ग) का, (घ) को, (ङ) की, (च) के।

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Khadak Singh Baba Bharati Ke Pass Kyon Gaya Tha प्रश्न 7.
‘इया’ और ‘आहट’ प्रत्यय लगाकर दस नए शब्द बनाइए
उत्तर
(क) (1) दुःख + इया = दुखिया,
(2) लिख + इया = लिखिया,
(3) लठ + इया = लठिया,
(4) लुट + इया = लुटिया,
(5) खाट + इया = खटिया

(ख) (1) मुस्कराना + आहट = मुस्कराहट
(2) चिल्लाना +आहट = चिल्लाहट
(3) खिलखिलाना + आहट = खिलखिलाहट
(4) किलकिलाना + आहट = किलकिलाहट
(5) चिलचिलाना + आहट = चिलचिलाहट।

हार की जीत परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

(1) माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनन्द आता है वही आनन्द बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा भारती’ के ‘हार की जीत’ नामक पाठ से अवतरित है। इसके लेखक प्रसिद्ध कहानीकार श्री सुदर्शन हैं।

प्रसंग-इसमें बाबा भारती का अपने घोड़े के प्रति अत्यधिक लगाव के विषय में बतलाया गया है।

व्याख्या-लेखक का कथन है कि जिस प्रकार माँ अपने पुत्र को देखकर अत्यन्त हर्षित होती है और जिस प्रकार किसान जब बड़े परिश्रम से फसल तैयार करता है और उसे खेत में फलते-फूलते देखकर बहुत ही खुशी महसूस करता है बिल्कुल इसी प्रकार की प्रसन्नता बाबा भारती को अपने घोड़े को देखकर हुआ करती थी। बाबा भारती अपने घोड़े सुलतान को पुत्र की भाँति प्यार करते थे।

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(2) बाबाजी भी मनुष्य ही थे। अपनी वस्तु की प्रशंसा दूसरे के मुख से सुनने के लिये उनका हृदय अधीर हो उठा।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-यहाँ पर लेखक ने बताया है कि प्रत्येक मनुष्य को अपनी वस्तु की प्रशंसा अच्छी लगती है।

व्याख्या-बाबा भारती भले ही संन्यासी थे लेकिन थे तो मनुष्य ही। अपनी चीज की तारीफ सबको अच्छी लगती है। खड्ग सिंह के मुख से अपने घोड़े की तारीफ सुनने की चाह उनके मन में जाग उठी।

(3) इसकी रखवाली में वे कई रात सोए नहीं। भजन भक्ति न कर रखवाली करते रहे। परन्तु आज उनके मुख पर
दुःख की रेखा तक न दिखाई पड़ती थी। उन्हें केवल यह ख्याल था कि कहीं लोग गरीबों पर विश्वास करना न छोड़ दें। ऐसा मनुष्य, मनुष्य नहीं, देवता है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-इन पंक्तियों में लेखक ने बाबा भारती में मोह भाव के न रहने और गरीब के प्रति विश्वास न किए जाने की संभावना का वर्णन किया है।

व्याख्या-बाबा भारती अपने सुलतान नामक घोड़े की रखवाली रात-दिन करते हैं। वे कई रातों से सोए नहीं, क्योंकि उन्हें डर है कि डाकू खड्गसिंह किसी भी समय उनके घोड़े को चुरा कर ले जा सकता था। उन्होंने ईश्वर की भक्ति और ध्यान-भजन सब छोड़ दिया था। परन्तु अब जबकि सुलतान को अपाहिज के रूप में डाकू खड्ग सिंह ने छीन लिया तो बाबा भारती ने अपनी तेज आवाज में केवल इतना ही कहा कि तुम इस घटना को किसी से मत कहना, क्योंकि इसे सुनकर लोग गरीब का विश्वास करना छोड़ देंगे। यह वाक्य उस डाकू के कानों में निरन्तर गूंज रहा था। साथ ही, बाबा के चेहरे पर घोड़े को छीन लेने की घटना का कोई भी-दुःख का भाव नहीं था। उन्हें तो केवल चिन्ता इस बात की थी इस घटना को सुनकर लोग गरीबों पर विश्वास करना छोड़ देंगे। यही विचार उन्हें बार-बार दुःखी बना रहा था। खड्ग सिंह इस बात का विचार करके सोचने लगा कि यह बाबा भारती शायद मनुष्य नहीं हैं, यह तो साक्षात देवता ही हैं।

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(4) अब बाबा भारती आश्चर्य और प्रसन्नता से दौड़ते हुए अन्दर घुसे और अपने प्यारे घोड़े के गले से लिपटकर इस प्रकार रोने लगे मानो कोई पिता बहुत दिन से बिछड़े हुए पुत्र से मिल रहा हो। बार-बार उसके मुंह पर थपकियाँ देते।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-बाबा भारती ने अस्तबल में अपने घोड़े को देखा तो वे अचम्भे में पड़ गये और उसकी गर्दन से लिपटकर रोने लगे। उनका प्यार पुत्र से बिछड़े पिता जैसा था।

व्याख्या-लेखक वर्णन करता है कि घोड़े की हिनहिनाहट सुनकर बाबा भारती को अचम्भा हुआ और उनकी प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। वे घोड़े को देखकर दौड़े और अस्तबल में घुसे। वे घोड़े की गर्दन से लिपटकर बहुत देर तक रोते रहे क्योंकि वे अपने घोड़े से बहुत प्यार करते थे। इस तरह उनके और घोड़े के मिलन का यह दृश्य ठीक वैसा ही था जैसे कोई पिता अपने बिछड़े पुत्र से बहुत दिन बाद मिल रहा हो। बाबा भारती का अपने घोड़े के प्रति पुत्रवत् प्रेम था। उन्होंने प्यारपूर्वक घोड़े के मुंह को बहुत देर तक थपथपाया।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 6 पाठ 10 क्या ऐसा नहीं हो सकता? प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 6th Hindi Bhasha Bharti Chapter 10 Kya Aisa Nahi Ho Sakta Question Answer Solutions

MP Board Class 6th Hindi Chapter 10 Kya Aisa Nahi Ho Sakta Questions and Answers

MP Board Class 6th Hindi Chapter 10 प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनकर लिखिए

(क) नहाने के बाद मुझे देना होगा
(i) नाश्ता
(ii) आराम
(iii) टॉवेल
(iv) पुस्तक।
उत्तर
(iii) टॉवेल

(ख) चादर के अनुसार पसारना चाहिए
(i) बाहें
(ii) पैर
(iii) मुँह
(iv) जीभ
उत्तर
(क)
(ii) पैर।

Class 6 Hindi Chapter 10 MP Board प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

(क) तुम अपने फटे …………..को चादर से ढक देते हो।
(ख) बिखरी हुई पुस्तकों को …………से लगा देते हो।
(ग) हम सबके चेहरे पर अभावों की ……………….. छाई हुई है।
(घ) सुख-दुःख के इस ….. में से ही अभावों की कश्ती के पार होने का मार्ग गया है।
उत्तर
(क) बिस्तर
(ख) करीने
(ग) धुंध
(घ) समन्दर।

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Bhasha Bharti Class 6 Chapter 10 प्रश्न 3.
एक या दो वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) धुंध से लेखक का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर
धुंध से लेखक का यह अभिप्राय है कि अपनी कमियों के अन्धकार की छाया प्रत्येक मनुष्य के चेहरे पर छाई हुई है। अर्थात् उन कमियों को किसी भी व्यक्ति के बाहरी चेहरे के हाव-भाव से पहचाना जा सकता है।

(ख) मित्र अपने फटे बिस्तर को कैसे छिपाता है ?
उत्तर
मित्र अपने फटे बिस्तर को उजली चादर को बि. छाकर छिपाता है।

(ग) अव्यवस्थाओं के होते हुए भी मित्र लेखक से रुकने का आग्रह क्यों करता है?
उत्तर
अव्यवस्थाओं के होते हुए भी मित्र लेखक से रुकने का आग्रह इसलिए करता है कि इन अभावों को दिखावे की चादर से न ढकते हुए. हे मेरे मित्र ! तू मेरे पास बैठ। प्रेमपूर्वक अपने परिवार से सम्बन्धित दुःख-सुख की बातें कर, जिससे मन का बोझ कुछ हल्का हो सके और आडम्बर के बोझ के नीचे अपनी आत्मा को कुचलने से बचा ले।

(घ) लेखक ने मित्र को राजनीति और साहित्य के बदले कौन-सी बात करने की सलाह दी?
उत्तर
लेखक अपने मित्र को सलाह देता है कि वह राजनीति और साहित्य की बातें न करे। उसे तो अपने बाल-बच्चों से सम्बन्धित, घर और गृहस्थी की बातें करनी चाहिए जिससे
जीवन के सुख और दु:ख के महासागर को पार करने का उपाय निकल सके।

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MP Board Class 6 Hindi Chapter 10 प्रश्न 4.
चार-पाँच वाक्यों में उत्तर लिखिए

(क) लेखक के लिए मित्र किस तरह सुविधाएँ जुटाता है? लिखिए।
उत्तर
लेखक के लिए मित्र घर में घी और शक्कर के न होने पर घी-शक्कर छिपाकर लेकर आता है। इन चीजों को किसी से उधार भी लेकर आता है। फटे बिस्तर को नई चादर से ढक देता है। पड़ौसी के स्वच्छ दर्पण को माँग लाता है। भोजन कर लेने पर बच्चे से पान मँगाकर रख देता है। बाल-बच्चों और गृहस्थी की बातें न करते हुए राजनीति और पत्र-पत्रिकाओं के साहित्य की बातों में उलझा देता है। टूटे कप की चाय को स्वयं उठा लेता है। सही नए कप में लेखक को चाय देता है। इस तरह की अनेक सुविधाओं को जुटाता है।

(ख) लेखक को मित्र के चेहरे पर निश्चिन्तता का भाव दिखाई क्यों नहीं दिया ?
उत्तर
लेखक को मित्र के चेहरे पर निश्चिन्तता का भाव इसलिए दिखाई नहीं दिया क्योंकि उसके घर में गृहस्थी की चीजों का अभाव था। घी-शक्कर का इन्तजाम लेखक से छिपकर करता है, पड़ौस से दर्पण और तौलिया लाकर रखता है। फटे बिस्तर को नई चादर से छिपाता है। बच्चे को भेजकर लेखक के लिए पान मँगाकर रखता है। खूटी पर बेतरतीब रखे कपड़ों को और बिखरी पुस्तकों को करीने से लगा देता है। घर-गृहस्थी की बातें न करके राजनीति और साहित्य की बातें करने लग जाता है।

(ग) लेखक की अपने मित्र से क्या अपेक्षाएँ हैं?
उत्तर
लेखक अपने मित्र से अपेक्षा करता है कि वह अपने फटे बिस्तर को वैसे ही बने रहने देता। टूटे हत्थे वाली कुर्सी पर ही लेखक को बैठने देता। धुंधले दर्पण और फटे गन्दे तौलिए को ही लेखक को नहाने के बाद बदन पोंछने के लिए देता। बाल-बच्चों और गृहस्थी की बातें खुलकर करता। उजली चादर से बिस्तर को ढकने को तथा टूटे हत्थे वाली कुर्सी को बीच की दीवार न बनने देता। हृदय में बसे सच्चे प्रेम को इस बनावटी व्यवहार से ढकने न देता।

(घ) लेखक मित्र को किस तरह के व्यवहार की सलाह देता है? कोई तीन बिन्दु लिखिए।
उत्तर
लेखक निम्नलिखित रूप के व्यवहार की सलाह देता है

  • हम दोनों मित्र ठीक वैसे ही मिलें जैसे हम हैं। बनावटी दिखने का प्रयत्न बन्द करें।
  • जैसी सूखी रोटी तुम खाते हो, वैसी ही मुझे खिलाओ। राजनीति और साहित्य में मत उलझाओ।
  • जिस फटे तौलिए से अपना शरीर पोंछते हो, उसी से मुझे भी अपना शरीर पोंछने दो। साथ ही चाय पीते समय जिस टूटे हुए कप को तुम मुझसे बदल देते हो, उसे मेरे ही पास रहने दो।

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Class 6 Hindi Chapter 10 प्रश्न 5.
सोचिए और बताइए

(क) अपने लिए कष्ट उठाकर व्यवस्था जुटाते अपने मित्र को देखकर आपके मन में कैसे विचार उत्पन्न होंगे, बताइए।
उत्तर-अपने लिए कष्ट उठाते हुए व्यवस्था जुटाने में लगे मित्र को देखकर मेरे मन में यह विचार आता है कि मेरा मित्र सामान्य रूप से वही रूखी-सूखी रोटी खिलाता, जो वह स्वयं खाता है। उजले चादर से फटे बिस्तर को ढकने के लिए, टूटे हत्थे वाली कुर्सी को हटाते हुए, गन्दे फटे तौलिए का प्रयोग कर लेने देने के लिए, उजले साफ दर्पण का पड़ौस से इन्तजाम न करने की बात कहता। सच्चे प्रेम भरे व्यवहार को आडम्बर से छिपाने की बात न करने की सोचता।

(ख) मित्र अपने फटे बिस्तर को चादर से क्यों छिपाने का प्रयास करता है?
उत्तर
मित्र अपने फटे बिस्तर को चादर से छिपाने का प्रयास करता है ताकि उसकी असल स्थिति का आभास लेखक को न हो सके। मित्र की अभावों भरी गृहस्थी का आभास लेखक को होगा, तो उसे कष्ट होगा। अपनी वस्तुस्थिति से लेखक को परिचित न होने देने का मित्र प्रयास करता है।

MP Board Class 5 Hindi Bhasha Bharti Solution Chapter 10 प्रश्न 6.
अनुमान और कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए

(क) मान लीजिए आपके घर अचानक मेहमान आ जाते हैं और आपके माता-पिता घर पर नहीं हैं। घर में अनेक अव्यवस्थाएँ हैं। ऐसी स्थिति में आप अतिथि का स्वागत कैसे करेंगे?
उत्तर
घर में अव्यवस्थाओं के चलते, माता-पिता के घर पर न होने की दशा में जो भी कुछ सरलता से कर सकता हूँ, करूँगा। बैठने के लिए कहूँगा। शुद्ध ताजा पानी पीने को दूँगा और फिर प्रयास करूंगा कि मैं अपने माता-पिता को उनके आगमन की सूचना दूँ। सम्भवतः आगन्तुक मेहमान उस स्थिति में मेरी प्रार्थना के अनुसार रुकें और माता-पिता के आगमन तक प्रतीक्षा करें। उनके लिए घर में जो भी कुछ वस्तु होगी, मैं उनके लिए प्रस्तुत करके उनका आतिथ्य करूँगा।

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(ख) आपकी दृष्टि में उधार लेकर अथवा मांगकर व्यवस्था जुटाना कहाँ तक उचित है ?
उत्तर
मेरी दृष्टि में उधार लेकर या माँगकर व्यवस्था जुटाना बिल्कुल भी उचित नहीं है। अपनी परिस्थिति के अनुसार जो भी सम्भव हो सके, उसी से अतिथि सत्कार की व्यवस्था करना उचित है। किसी भी तरह के आडम्बर का व्यवहार सच्चे प्रेम को छिपा देता है जिसकी चिन्ता चेहरे पर झलक उठती है।

(ग) किसी के घर जाने पर आप फटे बिस्तर पर ध्यान देंगे या उनके स्नेह को प्राथमिकता देंगे?
उत्तर
फटे बिस्तर पर ध्यान देने का कोई अर्थ नहीं है। स्नेह की पवित्रता महत्वपूर्ण है और उसी का प्राथमिकता से ध्यान रखना आनन्ददायी है।

भाषा की बात

Class 6 Hindi Chapter 10 Question Answer प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए और लिखिए
स्वागत, व्यवस्था, दृष्टि, निर्निमेष, निश्चिन्तता।
उत्तर
कक्षा में अपने अध्यापक महोदय की सहायता से शुद्ध उच्चारण करें और अभ्यास करें।

Class 6th Hindi Chapter 10 Question Answer प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों की सही वर्तनी लिखिए
राज्यनीती, आवकाश, विशबास, दृश्टी।
उत्तर
राजनीति, अवकाश, विश्वास, दृष्टि।

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Class 6 Chapter 10 Hindi प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्यों को बहुवचन में बदलिए

(क) बालक स्कूल जा रहा है।
(ख) गाय चर रही है।
(ग) नदी में बाढ़ आई है।
(घ) वह पुस्तक पड़ रहा है।
उत्तर
(क) बालक स्कूल जा रहे हैं।
(ख) गायें चर रही हैं।
(ग) नदियों में बाढ़ आई है।
(घ) वे पुस्तक पढ़ रहे हैं।

Chapter 10 Hindi Class 6 प्रश्न 4.
निम्नलिखित मुहावरों और लोकोक्तियों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
(क) पलकों पर वैवना
(ख) कलेजे पर साँप लोटना
(ग) आम के आम गुठलियों के दाम।
(घ) कंगाली में आटागीला।
उत्तर
(क) बलकों पर बैठाना-रवि अपने मेहमानों को पलकों पर बैठाता फिरता है।
(ख) कलेजे पर साँप लोटना-मेरे पुत्र के द्वारा परीक्षा उत्तीर्ण कर लेने पर, मेरे पड़ौसी के कलेजे पर साँप लोट गया।
(ग) आम के आम गुठलियों के दाम-मैं गया तो था इन्दौर एक उत्सव में, लेकिन पास में ही ओउम्कारेश्वर के दर्शन भी करके आम के आम गुठलियों के दाम भी प्राप्त कर लिए।
(घ) कंगाली में आटा गीला-मैंने सोचा था कि अपने पुराने इंजन की मरम्मत कराके पानी की समस्या हल हो जाएगी, लेकिन साथ में पाइप लाइन का टूट जाना मेरे लिए कंगाली में आटा गीला हो जाना है।

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Hindi Class 6 Chapter 10 प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों में से अकर्मक और सकर्मक क्रियाएँ छाँटिए
(क) तुम धुंधले काँच को छिपाते हो।
(ख) मैं तुम्हारे साथ रहता हूँ।
(ग) तुम क्यों रो रहे हो ?
(घ) कोयल आकाश में उड़ रही है।
उत्तर
(क) छिपाते हो-सकर्मक।
(ख) रहता हूँअकर्मक।
(ग) रो रहे हो-अकर्मक।
(घ) उड़ रही है-अकर्मक।

Bhasha Bharti Class 5 Solutions Chapter 10 प्रश्न 6.
अपने मित्र को पत्र लिखकर गणतन्त्र दिवस की बधाई दीजिए।
उत्तर
‘पत्र लेखन’ खण्ड में देखिए।

क्या ऐसा नहीं हो सकता परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

(1) मैं जब तक स्नान करता हूँ तब तक तुम अपने फटे बिस्तर को, नई चादर से ढक देते हो, धुंधले आईने की जगह पड़ोसी से माँगा हुआ साफ आईना सजा देते हो और खूटियों पर लटकते बेतरतीब से कपड़ों तथा बिखरी हुई पुस्तकों को करीने से लगा देते हो।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘भाषा भारती’ के ‘क्या ऐसा नहीं हो सकता ?’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस पाठ के लेखक ‘रामनारायण उपाध्याय’ हैं।

प्रसंग-लेखक ने इन पंक्तियों के माध्यम से स्पष्ट किया है कि लोग सच्चाई को छिपाने का प्रयत्ल करते हैं, बाहरी आडम्बरों में उलझकर सहज प्रेम की महत्ता को समझ नहीं पाते हैं।

व्याख्या-एक मित्र अपने मित्र को पत्र लिखता है; लेखक उस पत्र लेखक मित्र के भावों को स्पष्टता देता है कि जब मैं तुम्हारे घर जाता हूँ तब तक वहाँ स्नान करता हूँ, तब उसी मध्य तुम अपने फटे बिस्तर को किसी नई चादर से ढक देते हो जो दर्पण तुम्हारे घर में है वह धुंधला हो गया है, उसके स्थान पर अपने पड़ोसी के साफ उजले दर्पण को ले आते हो और सजा देते हो। यह दर्पण माँगा हुआ होता है। कमरे में इधर-उधर बिना तरतीब ही खूटी पर लटकते कपड़ों को ठीक तरह लगा देते हो, साथ ही इधर-उधर पड़ी हुई, बिखेर दी गई पुस्तकों को उसी दरम्यान ठीक क्रम से लगा देते हो। यह तुम्हारा बनावटीपन और दिखावा है जो प्रेम की सहज भूमि पर औपचारिकता मात्र है। हम मिलन के वास्तविक दु:ख से रहित हो जाते हैं।

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(2) तुम जब मुझे विदा करते हो, तब भी तुम्हारा ध्यान मेरे रवाना होने के बाद किये जाने वाले कामों में लगा रहता है लेकिन मैं जब तक तुम्हारी दृष्टि से ओझल नहीं हो जाता, तुम तब तक मेरी ओर निर्निमेष दृष्टि से निहारते हो, मानो अपनी पलकों पर बिठाकर तुम मुझे विदाई देते हो। मैं जानता हूँ, तुम्हारी उस दृष्टि में कितना दर्द, कितनी लाचारी, कितना स्नेह समाया हुआ है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-लोगों के आम व्यवहार में भी सच्चाई छिपी होती है। स्नेह भरे दिलों में दर्द की टीसन और दिखावे की लाचारी भर दी है।

व्याख्या-लेखक कहता है कि वह जब अपने मित्र से विदा लेता है, तो उस मित्र का ध्यान उसके प्रस्थान करने के बाद किये जाने योग्य सभी कामों में उलझा रहता है। वह जब तक उसकी आँखों से पूर्णत: ओझल नहीं हो जाता, तब तक अपनी एकटक निगाहों से उसे देखता रहता है। ऐसा प्रतीत होता है कि मानो वह उसे (लेखक को) अत्यन्त आदर भाव के साथ प्रेमपूर्वक विदा कर रहा है। लेखक अपने उस मित्र की निगाहों में समाये हुए दर्द को, उसकी लाचारी को प्रदर्शित कर रहा था। लेकिन उसके हृदय में गहरा स्नेह समाया हुआ था।

(3) क्या यह नहीं हो सकता कि हम जैसे हैं, ठीक वैसे ही मिलें और जो हम नहीं हैं, वैसा दिखने का प्रयत्न बन्द कर दें? जैसी सूखी रोटी तुम खाते हो, वैसी ही मुझे खिलाओ। जिस फटे टॉवेल से तुम अपना शरीर पोंछते हो, उसी से मुझे भी अपना शरीर पोंछने दो। चाय पीते समय जिस टूटे हुए कप को तुम मुझसे बदल लेते हो, उसे मेरे ही पास रहने दो।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-लेखक अपने मित्र के दिखावपूर्ण व्यवहार पर अपने हृदय की वेदना को व्यक्त करता है।

व्याख्या-लेखक स्पष्ट करता है कि हम सभी दिखावे के व्यवहार को छोड़ कर सच्चाई के आधार पर अपने व्यवहार को विकसित करें। क्या यह सम्भव नहीं है ? निश्चय ही, यह हो सकता है। जैसे हम नहीं हैं, उस स्थिति में अपने आपको दिखाने का जो प्रयत्न है, उसे छोड़ दें। अर्थात् आडम्बरपूर्ण व्यवहार का रूप समाप्त कर देना चाहिए। अपनी स्वाभाविक स्थिति में हमारा वह साधारण रूप में खिलाया गया भोजन वस्तुत: असली प्रेम को प्रदर्शित करने वाला होगा।

भोज्य वस्तुओं में दिखावट पसन्द नहीं है। तुम जिस फटे अंगोछे से स्नान के बाद अपने अंग पोछते हो, वही अंगोछा अपने मित्र को दीजिए, व्यर्थ के दिखावे में जीवन की मौलिकता नष्ट होती है। टूटे कप (प्याले) में दी गई चाय को तुरन्त हटा देते हो और स्वयं उस टूटे कप की चाय पीने लगते हो और मुझे अपना वाला अन्य कप देकर हृदय की सरलता भरे प्रेम को बनावटी प्यार के आवरण से ढकने की कोशिश करते हो। ऐसा व्यवहार प्रेम के सात्विक स्वरूप को समाप्त कर देता है।

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(4) अपने फटे हुए बिस्तर को तुम उजली चादर से मत उको और कुर्सी के टूटे हुए हत्थों को बीच में आने दो ताकि वे हमारे बीच दीवार न बन सकें और इन सबसे बचे हुए समय में तुम जब भी मेरे पास बैठो, बजाय राजनीति और साहित्य के, अपनी घर-गिरस्ती की, बाल-बच्चों की, सुख-दुःख की बातें करो। विश्वास रखो, सुख-दुःख के इस समन्दर में से ही हमारे अभावों की किश्ती के पार होने का मार्ग गया है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-लेखक अपने मित्र को दिखावपूर्ण व्यवहार को बन्द करने और सच्चाईपूर्ण, आडम्बररहित व्यवहार को अपनाने का अच्छा परामर्श देता है।

व्याख्या-अपने मित्र को लिखे अपने पत्र के अन्त में लेखक लिखता है कि हे मेरे मित्र फटे हुए अपने बिस्तर को तुम साफ चादर से ढकने की कोशिश मत करो। टूटे हुए हत्थे वाली कुर्सी पर ही मुझे बैठने दो। मेरे और तुम्हारे बीच जो मित्रता का पवित्र भाव है, उसे बनावट के व्यवहार की चादर से मत डको। मैं चाहता हूँ कि इस बनावट के रिश्ते चलाने में जो समय नष्ट होता है, उस समय को बचाकर तुम मेरे समीप बैठो।

राजनीति और साहित्य की बातें मत करो। घर और परिवार की समस्याओं सम्बन्धी बातें करो। अपनी आने वाली पीढ़ी-बाल-बच्चों से सम्बन्धित बातें करो। इस तरह अपने अन्त:करण में व्याप्त सुख और दुःख से प्राप्त होने और उसके निवारण सम्बन्धी उपार्यों की बातें ही सच्चे व्यवहार से सम्बन्धित हैं। तुम्हें यह विश्वास रखना होगा कि हमारी कमियों की नौका ही सुख-दुःख के महासागर को पार कर हमारी सहायक हो सकती है। अर्थात् अभावों को दूर करो और दुःख अपने आप मिट जायेंगे।

MP Board Class 6 Hindi Question Answer

MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध

MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध

1. सन्धि

दो वर्णों के मेल को सन्धि कहते हैं;

जैसे-

विद्या + आलय = विद्यालय, रमा + ईश = रमेश आदि।

सन्धि के भेद-सन्धि तीन प्रकार की होती हैं-

  1. स्वर सन्धि,
  2. व्यंजन सन्धि,
  3. विसर्ग सन्धि।

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(1) स्वर सन्धि
स्वर वर्ण के साथ स्वर वर्ण के मेल में जो परिवर्तन होता है, वह स्वर सन्धि कहलाता है;

जैसे-

पुस्तक + आलय = पुस्तकालय, विद्या + अर्थी = विद्यार्थी। स्वर सन्धि के पाँच प्रकार होते हैं

(अ) दीर्घ सन्धि-हस्व या दीर्घ अ,इ, उ, ऋ के बाद ह्रस्व या दीर्घ समान स्वर आये तो दोनों के मेल से दीर्घ स्वर हो जाता है।

जैसे-

हत + आश = हताश, कपि + ईश = कपीश, भानु + उदय = भानूदय आदि।

(आ) गुण सन्धि-अ या आ के बाद इ या ई आये तो दोनों के स्थान पर ए हो जाता है। अ या आ के बाद उ या ऊ आये तो ओ हो जाता है और अ या आ के बाद ऋ आये तो अर् हो जाता है।

जैसे-

देव + ईश = देवेश, वीर + उचित = वीरोचित,महा + ऋषि = महर्षि।

(इ) वृद्धि सन्धि–यदि अ या आ के बाद ए या ऐ हो तो दोनों के स्थान पर ऐ हो जाते हैं और अ या आ के बाद ओ या औ हो तो दोनों मिलकर औ हो जाते हैं;

जैसे-

सदा + एव = सदैव,महा + औषध = महौषध।

(ई) यण सन्धि–यदि हस्व या दीर्घ इ.उ.ऋके बाद कोई असमान स्वर आये तो इ का य,उ का व् एवं ऋ का र् हो जाता है;

जैसे-

  • प्रति + एक = प्रत्येक,
  • सु + आगत = स्वागत,
  • पित्र + आदेश = पित्रादेश।

(3) अयादि सन्धि–यदि ए.ऐ ओ औ के बाद कोई स्वर आये तो ए का अय.ऐ का आय, ओ का अव् और औ का आव् हो जाता है;

जैसे-

  • ने + अन = नयन,
  • नै + अक = नायक,
  • पो + अन = पवन,
  • पौ + अक = पावक।

(2) व्यंजन सन्धि
व्यंजन वर्ण के बाद व्यंजन या स्वर वर्ण के आने पर जो परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन सन्धि कहते हैं;

जैसे-

  • जगत + ईश = जगदीश,
  • जगत + नाथ = जगन्नाथ।

(i) श्चुत्व सन्धि–यदि ‘स’ तथा त वर्ग के योग में (आगे या पीछे) ‘श’ या च वर्ग आये, तो ‘स’ के स्थान पर ‘श’ और त वर्ग के स्थान पर च वर्ग हो जाता है;

जैसे-

  • हरिस् + शेते = हरिश्शेते
  • सत् + चयन = सच्चयन
  • सत् + चरित = सच्चरित
  • श्यामस + शेते = श्यामश्शेते

(ii) ष्टनाष्ट सन्धि-यदि ‘स’ तथा त वर्ग के योग में (आगे या पीछे) ‘स’ और त वर्ग कोई भी हो तो स् का और त वर्ग का ट वर्ग (ट,ठ, ड, ढ, ण) हो जाता है;

जैसे-

  • रामस् + टीकते = रामष्टीकते
  • पेष् + ता = पेष्टा
  • तत् + टीका = तट्टीका
  • उद् + डयन = उड्डयन

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(iii) अपदान्त सन्धि-झल् अर्थात् अन्तःस्थ य र ल व् और अनुनासिक व्यंजन को छोड़कर और किसी व्यंजन के पश्चात् झश् आवे तो पहले वाले व्यंजन जश् (ज, व, ग, ड,द) में बदल जाते हैं;

जैसे-

  • योध् + धा = योद्धा
  • एतत् + दुष्टम् = एतदुष्टम्
  • बुध् + धिः = बुद्धिः
  • दुध् + धम् = दुग्धम्

(iv) चरत्व सन्धि–यदि जल् (अनुनासिक व्यंजन) ड,ज,ण, न,म् तथा अन्तःस्थ-य् र् ल् व् को छोड़कर किसी भी व्यंजन के बाद ख्र (वर्ग का प्रथम, द्वितीय व्यंजन) क् च् त् प् तथा श् ष् स् में से कोई आये, तो झल् के स्थान चर् (उसी वर्ग का प्रथम अक्षर) हो जाता है;

जैसे-

  • वृक्षात् + पतति = वृक्षात्पतति
  • विपद् + कालः = विपत्काल
  • सद् + कारः = सत्कार
  • तज् + शिवः = तत्छिव

(v) अनुस्वार सन्धि-यदि पद के अन्त में ‘म्’ आये और उसके बाद कोई व्यंजन आवे तो ‘म्’ के स्थान पर अनुस्वार (-) हो जाता है। यथा

  • हरिम् + वन्दे = हरिं वन्दे
  • गृहम् + चलति = गृहं
  • चलति गृहम् + गच्छति = गृहं गच्छति
  • सत्यम् + वद = सत्यं वद
  • कार्यन् + कुरु = कार्यं कुरु

(vi) लत्व सन्धि–यदि त वर्ग (त् थ् द् ध् न्) के बाद ल आये तो त वर्ग के स्थान पर ल हो जाता है;

जैसे-

  • तत् + लीन = तल्लीन
  • उद् + लेख = उल्लेख

(vii) परसवर्ण सन्धि–यदि अनुस्वार (-) के बाद श, ष,स, ह को छोड़कर कोई अन्य व्यंजन आए तो अनुस्वार के स्थान पर अगले वर्ग का पंचम वर्ण हो जाता है;

जैसे-

  • शां + त = शान्त
  • अं + क = अंक

(3) विसर्ग सन्धि
विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मिलने से जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग सन्धि कहते हैं;

जैसे-

  • निः + आशा = निराशा,
  • मनः + ताप = मनस्ताप।

विग्रह-शब्द के वर्गों को अलग-अलग करना विग्रह या विच्छेद कहलाता है;

जैसे-

  • रमेश = रमा + ईश,
  • वस्त्रालय = वस्त्र + आलय।

(i) विसर्ग सन्धि–विसर्ग के बाद यदि ‘खर्’ प्रत्याहार का कोई वर्ण (वर्ग का प्रथम, द्वितीय तथा श् ष स) रहे, तो विसर्ग के स्थान पर ‘स्’ हो जाता है;

जैसे-

  • विष्णुः + माता = विष्णुस्माता
  • रामः + मायते = रामस्मायते
  • निः + छलः = निश्छल = निश्छल

(ii) रुत्व सन्धि-पदान्त ‘स्’ तथा सजुष् शब्द के ष् के स्थान में (र) हो जाता है। इस पदान्तर के बाद र द् प्रत्याहार (वर्गों के प्रथम, द्वितीय और स्) का कोई अक्षर हो अथवा कोई भी वर्ण न हो,तो र के स्थान में विसर्ग हो जाता है;

जैसे-

  • हरिस् + अवदत् = हरिरवदत्
  • वधूस + एषा = बधूरेषा
  • पुनस् + आगत = पुनरागत
  • पुनस् + अन्तरे = पुनरन्तरे

(iii) उत्व सन्धि-स् के स्थान में जो र् आदेश होता है, उसके पूर्व यदि ह्रस्व अ आवे और बाद में ह्रस्व अ अथवा हश् प्रत्याहार का कोई अक्षर आवे,तो र के स्थान में उ हो जाता है;

जैसे-
शिवस् + अर्घ्यः = शिवर् + अर्घ्यः = शिव + उ + अर्घ्यः = शिवो + अर्ध्यः = शिवोऽर्यः . रामस् + अस्तिरामर् + अस्ति = राम + उ + अस्ति = रामोऽस्ति सः + अपि = सस् + अपि = सर् + अपि = स + उ + अपि = सोऽपि। बालस् + वदति = बालर् + वदति = बाल + उ + वदति = बालो वदति

(iv) र लोप सन्धि-यदि ‘र’ के बाद ” आए तो पहले ‘र’ का लोप हो जाता है और यदि लुप्त होने वाले ‘र’ से पूर्व अ, इ, उ में से कोई हो, तो वह स्वर दीर्घ हो जाता है; जैसे-

  • हरिर् + रम्यः = हरीरम्यः
  • शम्भुर् + राजते = शम्भूराजते।

सन्धि-विग्रह-सन्धि के जोड़े गये वर्गों को अलग-अलग करना विच्छेद कहा जाता है। जैसे-‘पुस्तकालय’ का सन्धि-विच्छेद ‘पुस्तक + आलय’, ‘महेश’ का सन्धि-विच्छेद ‘महा + ईश’ होगा।

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अन्य उदाहरण-
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2. समास

दो या दो से अधिक पदों के योग से बने शब्द को समास कहते हैं। समास छ: प्रकार के होते हैं

(1) अव्ययीभाव समास-जिस समास में प्रथम पद अव्यय हो तथा वह पद ही प्रधान हो, वहाँ अव्ययीभाव समास होता है।
जैसे-
प्रतिदिन–प्रत्येक दिन, यथाशक्ति-शक्ति के अनुसार, आजीवन-जीवनपर्यन्त या जीवनभर।

(2) तत्पुरुष समास-जिस समास में उत्तर पद प्रधान होता है तथा पूर्व पद के कारक (विभक्ति) का लोप करके दोनों पदों को मिला दिया जाता है, वहाँ तत्पुरुष समास होता है।
जैसे-
मन्त्रीपुत्र-मन्त्री का पुत्र,समुद्रयात्रा-समुद्र की यात्रा, विद्यालय [2009] विद्या का आलय, व्यायामशाला व्यायाम की शाला,पर्वतमाला-पर्वतों की माला,दुर्गपति-दुर्ग का पति।

विभक्तियों के भेद के आधार पर इसके कर्म तत्पुरुष, करण तत्पुरुष, सम्प्रदान तत्पुरुष, अपादान तत्पुरुष, सम्बन्ध तत्पुरुष तथा अधिकरण तत्पुरुष छ: प्रकार के होते हैं।

(3) कर्मधारय समास-विशेषण और विशेष्य अथवा उपमान और उपमेय के मिलने पर कर्मधारय समास होता है।
जैसे-
श्वेताम्बर-श्वेत है जो अम्बर, मधुरस-मधुर रस, घनश्याम-घन के समान श्याम।

(4) द्वन्द्व समास-इस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं, परन्तु उसके संयोजक शब्द ‘और’ का लोप रहता है। [2010]
जैसे-
आदान-प्रदान-आदान और प्रदान, भाई-बहिन-भाई और बहिन, राम-कृष्ण-राम और कृष्ण,शत्रु-मित्र-शत्रु और मित्र, पिता-पुत्र-पिता और पुत्र।

(5) द्विगु समास-जिस समास में पूर्व पद- संख्यावाचक हो वह द्विगु समास कहलाता है। [2009]
जैसे-
सप्तद्वीप-सात द्वीपों का समूह, त्रिभुवन-तीन भुवनों का समूह, अष्टकोण-आठ कोण, षडानन—षट् मुख।

(6) बहुब्रीहि समास-जिस समास में पूर्व एवं उत्तर पद के अतिरिक्त कोई अन्य पद प्रधान होता है, उसे बहुब्रीहि समास कहते हैं। [2009]
जैसे-
पंचानन—पाँच मुख वाला = शिव,लम्बोदर-लम्बा है उदर जिसका = गणेश।

विग्रह सहित समास के कुछ उदाहरण-
MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध img-3
MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध img-4
MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध img-5

3. वाक्य के प्रकार

शब्दों का वह समूह जिसका कुछ अर्थ निकलता हो, उसे वाक्य कहते हैं। अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ प्रकार होते हैं—

  1. विधानार्थ वाक्य-साधारणतः जिस वाक्य में किसी बात का उल्लेख किया जाए, वह विधानार्थक वाक्य कहलाता है।
    जैसे- श्याम नित्यप्रति घूमने जाता है।
  2. निषेधात्मक वाक्य-जिन वाक्यों में ना या निषेध का भाव हो, वे निषेधात्मक वाक्य कहलाते हैं।
    जैसे- राम आज पढ़ने नहीं आयेगा।
  3. प्रश्नवाचक वाक्य-जिन वाक्यों में प्रश्न किया जाये,वे प्रश्नवाचक वाक्य कहलाते हैं।
    जैसे- क्या आप मेला देखने जायेंगे।
  4. आज्ञार्थक वाक्य-जिन वाक्यों में आज्ञा देने का भाव पाया जाता है, वे आज्ञार्थक वाक्य कहलाते हैं।
    जैसे-तुम विद्यालय जाओ।
  5. उपदेशात्मक वाक्य-उपदेश या परामर्श देने वाले वाक्य उपदेशात्मक वाक्य कहलाते हैं।
    जैसे- गुरु की आज्ञा का पालन करना चाहिए।
  6. इच्छासूचक वाक्य-इच्छा, आशीष या निवेदन प्रकट करने वाले वाक्य इच्छा सूचक वाक्य कहलाते हैं।
    जैसे- ईश्वर करे, तुम्हारी नौकरी लग जाये।
  7. विस्मयादिबोधक वाक्य-हर्ष, शोक, दर्द, भय, क्रोध, घृणा आदि प्रकट करने वाले वाक्य विस्मयादिबोधक वाक्य कहलाते हैं।
    जैसे- आह ! कितना भयानक दृश्य है।
  8. सन्देहसूचक वाक्य-सन्देह या सम्भावना प्रकट करने वाले वाक्य सन्देहसूचक वाक्य कहलाते हैं।
    जैसे- सम्भवतः वह लौट नहीं पायेगा।

4. वाक्य परिवर्तन

एक प्रकार के वाक्य को दूसरे प्रकार के वाक्य में बदलना वाक्य परिवर्तन कहलाता है। वाक्य परिवर्तन में अर्थ या भाव का ध्यान रखना आवश्यक होता है।

विधानार्थ वाक्य से निषेधवाचक वाक्य में परिवर्तन

विधानार्थ वाक्य – निषेधवाचक वाक्य
1. राम घर में सबसे बड़ा है। – घर में राम से बड़ा कोई नहीं है।
2. ताज सबसे सुन्दर इमारत है। – ताज से सुन्दर इमारत कोई नहीं है।
3. रहीम निर्धन है। – रहीम धनवान नहीं है।

विधानार्थक वाक्य से प्रश्नवाचक वाक्य में परिवर्तन
विधानार्थक वाक्य – प्रश्नवाचक वाक्य
1. श्याम मेरा भाई है। – क्या श्याम मेरा भाई है?
2. विवेक धनवान है। – क्या विवेक धनवान है?
3. चिन्मय सो रहा है। – क्या चिन्मय सो रहा है?

विधानार्थक वाक्य से आज्ञावाचक वाक्य में परिवर्तन
विधानार्थक वाक्य – आज्ञावाचक वाक्य
1. पिता का आदर करते हैं। – पिता का आदर करो।
2. विभोर दूध पीता है। – विभोर,दूध पिओ।
3. सुभाष समाज की सेवा करता है। – सुभाष,समाज की सेवा करो। .

विधानार्थक वाक्य से उपदेशात्मक वाक्य में परिवर्तन
विधानार्थक वाक्य – उपदेशात्मक वाक्य
1. राजीव खाना खाता है। – ‘राजीव को खाना खाना चाहिए।
2. मोहन पानी पीता है। – मोहन को पानी पीना चाहिए।
3. सिद्धार्थ सोता है। – सिद्धार्थ को सोना चाहिए।

विधानार्थक वाक्य से विस्मयादिबोधक वाक्य में परिवर्तन
विधानार्थक वाक्य – विस्मयादिबोधक वाक्य
1. वह दृश्य बड़ा सुन्दर है। – वाह ! वह दृश्य कितना सुन्दर है।
2. यह झील बहुत गहरी है। – ओ ! यह झील कितनी गहरी है।
3. रमन बहुत कमजोर हो गया है। – अरे ! रमन कितना कमजोर हो गया है।

5. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

संक्षेप में बात कहना एक विशेषता मानी गई है। अनेक शब्दों के लिए एक शब्द बोलने से ही संक्षिप्तता आती है। सूत्र रूप में बात कहने की परम्परा श्रेष्ठ मानी गई है। अनेक शब्दों के लिए एक शब्द की तालिका में कुछ शब्द यहाँ प्रस्तुत हैं-

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अनेक शब्द – एक शब्द

  • हाथी को हाँकने का हुक – अंकुश
  • जो जीता न जा सके – अजेय
  • वह बच्चा जिसके माता-पिता न हों – अनाथ [2017]
  • बिना वेतन के काम करने वाला – अवैतनिक
  • जिसका कोई शत्रु न हो – अजातशत्रु
  • जिसके समान दूसरा न हो – अद्वितीय [2010, 17]
  • जो कभी मरता न हो – अमर [2009]
  • जिसकी कोई सीमा न हो – असीम
  • दोपहर के बाद का समय – अपराह्न
  • जो ईश्वर में विश्वास करता है। – आस्तिक [2009, 17]
  • आदि से अन्त तक – आद्योपरान्त
  • इन्द्रियों को जीतने वाला – इन्द्रियजित
  • जिसका हृदय उदार हो – उदार हृदय
  • जिसका उल्लेख करना आवश्यक हो – उल्लेखनीय
  • जिस भूमि में कुछ पैदा न होता हो – ऊसर
  • विद्या पढ़ने वाला – विद्यार्थी
  • सदैव रहने वाला – शाश्वत
  • श्रद्धा करने योग्य – श्रद्धेय
  • जो सब कुछ आनता हो – सर्वज्ञ
  • जो सबसे श्रेष्ठ हो – सर्वश्रेष्ठ
  • जो सबका प्यारा हो – सर्वप्रिय
  • अपने ही बल पर निर्भर रहने वाला। – स्वावलम्बी
  • अपना ही हित चाहने वाला – स्वार्थी
  • हाथ से लिखा हुआ – हस्तलिखित
  • भलाई चाहने वाला – हितैषी
  • क्षण भर में नष्ट होने वाला – क्षणभंगुर
  • जिसकी एक आँख फूटी हो – काणा, काना
  • उपकार मानने वाला – कृतज्ञ
  • किये गये उपकार को न मानने वाला। – कृतघ्न
  • जो छिपाने योग्य हो – गोपनीय
  • जो घृणा के योग्य हो – घृणित
  • जिसके चार भुजाएँ हों – चतुर्भुज
  • इन्द्रियों को जीत लेने वाला – जितेन्द्रिय
  • जानने की इच्छा रखने वाला – जिज्ञासु
  • तीनों लोकों में होने वाला – त्रिलोकी
  • पति-पत्नी का जोड़ा – दम्पत्ति
  • जिसकी आयु लम्बी हो – दीर्घायु
  • दूर की बात जान लेने वाला – दूरदर्शी [2009]
  • कठिनाई से प्राप्त होने वाला – दुर्लभ
  • धर्म में रुचि रखने वाला – धर्मात्मा
  • जो नष्ट होने वाला हो – नश्वर
  • जिसका आकार न हो – निराकार
  • जिसे ईश्वर पर विश्वास न हो – नास्तिक
  • जो एक अक्षर भी न जानता हो – निरक्षर
  • वह स्त्री जिसे पति ने छोड़ दिया हो – परित्यक्ता
  • अपने पति के प्रति ही प्रेम रखने वाली – पतिव्रता स्त्री
  • दूसरों का उपकार करने वाला – परोपकारी
  • मन्दिर में पूजा करने वाला – पुजारी
  • फल खाकर जीने वाला – फलाहारी
  • बहुत से रूप धारण करने वाला – बहरूपिया
  • जिसके जोड़ का कोई और न हो – बेजोड़
  • कम बोलने वाला – मितभाषी
  • कम खर्च (व्यय) करने वाला – मितव्ययी
  • जो मीठा बोलता हो – मृदुभाषी
  • बहत अधिक बोलने वाला – वाचाल
  • जिसका पति मर गया हो – विधवा
  • जिसकी पत्नी मर गई हो – विधुर
  • जो जानने योग्य हो – ज्ञातव्य
  • जो ज्ञान से युक्त हो – ज्ञानी
  • ठेका लेने वाला – ठेकेदार [2016]
  • नीति का बोध कराने वाला – नीतिबोधक [2016]
  • उपासना करने वाला – उपासक [2018]
  • पूजा करने वाला – पुजारी [2018]

प्रश्नोत्तर

(क) वस्तुनिष्ठ प्रश्न

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बहु-विकल्पीय प्रश्न

1. ‘वागीश’ किस सन्धि का उदाहरण है? [2009]
(i) स्वर सन्धि
(ii) दीर्घ सन्धि
(iii) विसर्ग सन्धि .
(iv) व्यंजन सन्धि।
उत्तर-
(ii) दीर्घ सन्धि

2. ‘महा + ओजस्वी = महौजस्वी’ में सन्धि है [2011]
(i) गुण सन्धि
(ii) वृद्धि स्वर सन्धि
(iii) यण सन्धि
(iv) दीर्घ सन्धि।
उत्तर-
(ii) वृद्धि स्वर सन्धि

3. ‘नि: + चय = निश्चय’ कौन-सी सन्धि का उदाहरण है? [2016]
(i) विसर्ग
(ii) स्वर
(iii) व्यंजन
(iv) दीर्घ स्वर।
उत्तर-
(i) विसर्ग

4. ‘पथ भ्रष्ट’ में समास है [2011]
(i) सम्प्रदान तत्पुरुष
(ii) करण तत्पुरुष
(iii) अपादान तत्पुरुष
(iv) सम्बन्ध तत्पुरुष।
उत्तर-
(ii) करण तत्पुरुष

5. ‘चौराहा’ में समास है [2015]
(i) द्वन्द्व
(ii) तत्पुरुष
(iii) द्विगु
(iv) अव्ययी भाव।
उत्तर-
(iii) द्विगु

6. किस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं? [2013]
(i) द्वन्द्व
(ii) द्विगु
(iii) बहुब्रीहि
(iv) तत्पुरुष।
उत्तर-
(i) द्वन्द्व

7. ‘पावक’ शब्द उदाहरण है
(i) दीर्घ स्वर सन्धि
(ii) गुण स्वर सन्धि
(iii) वृद्धि स्वर सन्धि
(iv) अयादि स्वर सन्धि।
उत्तर-
(iv) अयादि स्वर सन्धि।

8. सब कुछ जानने वाले को क्या कहा जाता है? [2017]
(i) जानकार
(ii) ज्ञानी
(iii) बहुज्ञानी
(iv) सर्वज्ञ।।
उत्तर-
(iv) सर्वज्ञ।।

9. ईश्वर पर विश्वास रखने वाले को कहा जाता है [2018]
(i) ईश्वरीय
(ii) सेवक
(iii) आस्तिक
(iv) नास्तिक।
उत्तर-
(iii) आस्तिक

10. ‘जिसका कोई आकार हो’ के लिए एक शब्द है-
(i) आकार रहित
(ii) साकार
(iii) पूर्वाकार
(iv) आकार सहित।
उत्तर-
(iv) आकार सहित।

11. ‘नीरस’ का सन्धि-विच्छेद होगा [2014]
(i) निरा + रस,
(ii) निः + रस,
(iii) नि + अरस
(iv) नि + रस।
उत्तर-
(ii) निः + रस,

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. दो वर्णों के मेल को …………… कहते हैं।
2. सन्धि …………….” प्रकार की होती है। [2015]
3. स्वर सन्धि के ………… भेद होते हैं।
4. द्वन्द्व समास में . .. शब्द का लोप होता है।
5. भोजन करके पढ़ाई करो …………… वाक्य है।
6. ‘रमेश को पढ़ना चाहिए।’ …………. वाक्य है।
7. अर्थ के आधार पर वाक्य के प्रकार ………… हैं। [2013]
8. ‘दर्शन शास्त्र को जानने वाला’ …………….” कहलाता है।
9. ‘ईश्वर में …….रखने वाला’ आस्तिक कहलाता है।
10. ‘यात्रा करने वाला’ ………… कहलाता है।
11. रसोईघर ……… समास का उदाहरण है। [2014]
12. द्विगु समास का उदाहरण ……..” है। [2016]
उत्तर-
1. सन्धि,
2. तीन,
3. पाँच,
4. और,
5. सरल,
6. उपदेशात्मक,
7. आठ,
8. दर्शनशास्त्री,
9. आस्था,
10. यात्री,
11. तत्पुरुष,
12. पंचवटी।

सत्य/असत्य

1. दो पदों के मेल को सन्धि कहते हैं।
2. ‘जगदीश’ शब्द में विसर्ग सन्धि है। [2009]
3. पुनर्जन्म में व्यंजन सन्धि है। [2013]
4. मनोहर शब्द में व्यंजन संधि है। [2017]
5. ‘निराला’ शब्द में व्यंजन संधि है। [2018]
6. शुद्ध वाक्य के तीन गुण होते हैं।
7. ‘अरे ! वह मर गया।’ वाक्य विस्मयादिबोधक है।
8. ‘वह देश की रक्षा करता है।’ प्रश्नवाचक वाक्य है।
9. जो कभी नहीं मरता वह अमर कहलाता है। [2015]
10. ‘जानने की इच्छा रखने वाला’ जिज्ञासु कहलाता है।
11. ‘जिसकी एक आँख हो’ अन्धा कहलाता है। [2014]
12. ‘यथाशक्ति’ अव्ययीभाव समास का उदाहरण है। [2012]
13. ‘पुष्प’ का पर्यायवाची शब्द ‘कमल’ है। [2016]
14. ‘पुरुषों में उत्तम’ पुरुषोत्तम कहलाता है। [2016]
उत्तर-
1. असत्य,
2. असत्य,
3. असत्य,
4. सत्य,
5. असत्य,
6. सत्य,
7. सत्य,
8. असत्य,
9. सत्य,
10. सत्य,
11. असत्य,
12. सत्य,
13. असत्य,
14. सत्य।

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सही जोड़ी मिलाइए

MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध img-6
उत्तर-
1. → (ग), 2. → (क), 3. → (ख), 4. → (ङ), 5. → (घ)।

MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध img-7
उत्तर-
1. → (ग), 2. → (ङ), 3. → (घ), 4. → (क), 5. → (ख)।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. सन्धि के कितने प्रकार हैं?
2. हरेऽव में कौन-सी सन्धि है?
3. किस समास में विभक्तियों के चिह्नों का लोप होता है?
4. जगन्नाथ का सन्धि-विच्छेद लिखिए। [2018]
5. पुस्तकालय शब्द का सन्धि विग्रह है। [2010]
6. सच्चरित्र का सन्धि विच्छेद कर सन्धि का नाम बताइए। [2017]
7. “राम ! तुम नगर में रहो” यह किस प्रकार का वाक्य है? [2014]
8. ‘हमें पढ़ाई करनी चाहिए’ कैसा वाक्य है?
9. निन्दा करने वाला क्या कहलाता है? [2016]
10. जिसके समान कोई दूसरा न हो। [2012]
11. गागर में सागर भरने का क्या अर्थ है? [2012]
12. उपासना करने वाला क्या कहलाता है? [2014]
13. ‘ईश्वर के अनेकों नाम हैं।’ वाक्य को शुद्ध कीजिए। [2015]
उत्तर-
1. तीन,
2. पूर्वरूप,
3. तत्पुरुष,
4. जगत + नाथ,
5. रमा + ईश,
6. सत् + चरित्र (व्यंजन सन्धि),
7. आज्ञावाचक वाक्य,
8. इच्छात्मक,
9. निन्दक,
10. अद्वितीय,
11. कम शब्दों में बड़ी बात करना,
12. उपासक,
13. ईश्वर के अनेक नाम हैं।

(ख) लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों की सन्धि-विच्छेद कीजिए तथा सन्धि का नाम लिखिएरामावतार, परोपकार, विद्यालय, रमेश, धनादेश, गायक।
उत्तर-
MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध img-8

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों का सन्धि-विच्छेद करते हुए सन्धि का नाम बताइएमनोरथ, उच्चारण, सदाचार, शिवालय,महोत्सव।
उत्तर-
MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध img-9

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों की सन्धि-विच्छेद कर सन्धि का नाम लिखिएतथैव, अत्यन्त, जगन्नाथ, नरेश।
उत्तर-
MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध img-10

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों की सन्धि-विच्छेद कर सन्धि का नाम लिखिएहिमालय, परमार्थ,मनोरम, निस्सार।
उत्तर-
MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध img-11

प्रश्न 5.
स्वर-सन्धि की क्या पहचान है? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर-
स्वर के साथ स्वर का मेल होने पर स्वर सन्धि होती है, जैसे-देवालयः।

प्रश्न 6.
दीर्घ सन्धि किसे कहते हैं?
उत्तर-
जब दो शब्दों ह्रस्व या दीर्घ परस्पर मिलने से जो परिवर्तन होता है,उसे दीर्घ सन्धि कहते हैं।
यथा-विद्यालय।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों में कौन-सी सन्धि हैकश्चित्, नायक, हिमालय।
उत्तर-
MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध img-12

प्रश्न 8.
विसर्ग सन्धि की परिभाषा लिखिए।।
उत्तर-
विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मिलने से जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग सन्धि कहते हैं;

जैसे-
मनोरथः = मनः + रथ।

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प्रश्न 9.
समास किसे कहते हैं?
उत्तर-‘
समास शब्द का आशय है-संक्षेप। दो या दो से अधिक शब्दों का अपने विभक्ति चिह्नों को छोड़कर मिलना ही समास कहलाता है।

प्रश्न 10.
सामासिक पद का क्या आशय है?
उत्तर-
जिन शब्दों में समास होता है उनके योग से एक नया ही शब्द बन जाता है, ऐसे पद को सामासिक पद कहते हैं।
जैसे-राजपुत्र = राजा का पुत्र।

प्रश्न 11.
तत्पुरुष समास में कौन-सा पद प्रधान होता है?
उत्तर-
तत्पुरुष समास में अन्तिम पद प्रधान होता है।

प्रश्न 12.
कर्मधारय समास एवं द्विगु समास के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
कृष्णसर्प,श्वेत अश्व – कर्मधारय समास।
पंचवटी,त्रिलोक – द्विगु समास

प्रश्न 13.
निम्नलिखित में से किन्हीं दो पदों का समास-विग्रह कर समास का नाम बताइएराजपुरुष, दशानन, भाई-बहिन, चन्द्रमुख।
उत्तर-
MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध img-13

प्रश्न 14.
निम्नलिखित में से किन्हीं दो पदों का समास-विग्रह करके समास का नाम लिखिए
सुख-दुःख, नवग्रह, नीलकमल,प्रतिदिन,प्रत्येक।
उत्तर-
MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध img-14
MP Board Class 10th Special Hindi भाषा बोध img-15

प्रश्न 15.
सन्धि और समास में कोई तीन अन्तर लिखिए। [2010, 14]
उत्तर-

  1. सन्धि दो वर्गों के मेल को कहते हैं जबकि दो या दो से अधिक पदों के योग से बनने वाले शब्द को समास कहते हैं।
  2. सन्धि तीन प्रकार की होती हैं जबकि समास छ: प्रकार के होते हैं।
  3. सन्धि को तोड़ना विच्छेद कहलाता है,जबकि समास को तोड़ना विग्रह कहलाता है।

प्रश्न 16.
वाक्य रूपान्तरण से क्या तात्पर्य है? हिन्दी में वाक्य रूपान्तरण कितने प्रकार से किया जाता है? [2014]
उत्तर-
एक प्रकार के वाक्य को दूसरे प्रकार के वाक्य में बदलना,वाक्य परिवर्तन अथवा वाक्य रूपान्तरण कहलाता है। वाक्य रूपान्तरण करते समय अर्थ या भाव का ध्यान रखना आवश्यक होता है।

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जैसा कि हमें ज्ञात है कि अर्थ की दृष्टि से वाक्य आठ प्रकार के होते हैं। इनमें से विधानवाचक वाक्य को मूल आधार माना जाता है। अन्य वाक्य भेदों में विधानवाचक वाक्य का मूलभाव ही विभिन्न रूपों में परिलक्षित होता है। किसी भी विधानवाचक वाक्य को सभी प्रकार के भावार्थों में प्रयुक्त किया जा सकता है।

जैसे-

  1. विधानवाचक वाक्य-राम भोपाल में रहता है।
  2. विस्मयादिवाचक वाक्य-अरे ! राम भोपाल में रहता है।
  3. प्रश्नवाचक वाक्य-क्या राम भोपाल में रहता है?
  4. निषेधवाचक वाक्य-राम भोपाल में नहीं रहता है।
  5. संदेशवाहक वाक्य-शायद राम भोपाल में रहता है।
  6. आज्ञावाचक वाक्य-राम, तुम भोपाल में रहो।
  7. इच्छावाचक वाक्य-काश,राम भोपाल में रहता।
  8. संकेतवाचक वाक्य-यदि राम भोपाल में रहना चाहता है, तो रह सकता है।

प्रश्न 17.
निर्देशानुसार वाक्य परिवर्तन कीजिए [2009]
(क) मोहित फूल लाता है। (प्रश्नवाचक)
(ख) तुम वाराणसी में रहते हो। (प्रश्नवाचक)
(ग) माता-पिता की सेवा करनी चाहिए। (आज्ञावाचक)
(घ) गौरव पुस्तक पढ़ता है। (आज्ञावाचक)
उत्तर-
(क) क्या मोहित फूल लाता है?
(ख) क्या तुम वाराणसी में रहते हो?
(ग) माता-पिता की सेवा करो।
(घ) गौरव पुस्तक पढ़ो।

प्रश्न 18.
निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए-
1. गुरु का सम्मान करना चाहिए। (आज्ञावाचक)
2. सीता रो रही है। (प्रश्नवाचक)
3. गुड्ड कक्षा में सबसे छोटा है। (निषेधवाचक)
4. बाढ़ का दृश्य बड़ा भयानक था। (विस्मयादिबोधक)
5. मैं खेती के बारे में अधिक जानता हूँ। [2013] (निषेधात्मक)
6. बादल समय पर पानी नहीं देते हैं। [2013] (विधानवाचक)
7. दीपक बाजार जा रहा है। [2015] (प्रश्नवाचक वाक्य)
8. गणित का प्रश्न-पत्र कठिन है। [2015] (निषेधात्मक वाक्य)
9. तुम्हें अपना गृह कार्य करना चाहिए। [2015] (आदेशात्मक वाक्य)
10. मोहन दिल्ली में रहता है। [2016] (निषेधवाचक)
11. सीता गाना गाती है। [2016] (विस्मयादिसूचक)
12. वह आस्तिक है। [2018] (निषेधवाचक)
13. अशेक रामनगर में रहता है। [2018] (विस्मयादिबोधक)
उत्तर-
1. गुरु का सम्मान करो।
2. क्या सीता रो रही है?
3. कक्षा में गुड़ से छोटा कोई नहीं है।
4. आह ! बाढ़ का दृश्य कितना भयानक था।
5. मैं खेती के बारे में कम नहीं जानता हूँ।
6. बादल असमय पानी देते हैं।
7. क्या दीपक बाजार जा रहा है?
8. गणित का प्रश्न-पत्र सरल नहीं है।
9. तुम अपना गृहकार्य करो।
10. मोहन दिल्ली में नहीं रहता है।
11. वाह ! सीता गाना गाती है।
12. वह नास्तिक नहीं है।
13. अरे ! अशोक रामनगर में रहता है।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित वाक्यों को पहचानकर वाक्य के भेद लिखो- [2009]
(क) तुम विद्यालय जाओ।
(ख) मैं चाय नहीं पीता हूँ।
(ग) मैं आज भोजन नहीं करूंगा।
(घ) भगवान तुम्हें स्वस्थ रखे।
उत्तर-
(क) आज्ञार्थक वाक्य।
(ख) निषेधात्मक वाक्य।
(ग) निषेधात्मक वाक्य।।
(घ) इच्छासूचक वाक्य।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित वाक्यों के लिए एक शब्द लिखिए [2009]
(1) जो ईश्वर में विश्वास रखता हो।
(2) बिना वेतन के काम करने वाला।
(3) जिसे क्षमा न किया जा सके।
(4) लकड़ी काटने वाला।
उत्तर-
(1) आस्तिक,
(2) अवैतनिक,
(3) अक्षम्य,
(4) लकड़हारा।

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प्रश्न 21.
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध रूप में लिखिए-
(क) गरम गाय का दूध पिओ।
(ख) मैं आपको मिलकर प्रसन्न हुआ।
(ग) खरगोश को काटकर गाजर खिलाओ। [2015]
(घ) बाढ़ में कई लोगों के डूबने की आशा है।
(ङ) में आपकी श्रद्धा करता हूँ।
(च) नेताजी को एक फूल की माला पहनाओ।
(छ) अपराधी को मृत्युदण्ड की सजा मिली।
(ज) छात्र कक्षा के अन्दर गया। [2011]
(झ) मैंने गाते हुए लता मंगेशकर को देखा। [2011]
(ज) मुझसे अनेकों भूलें हुईं। [2011]
उत्तर-
(क) गाय का गरम दूध पिओ।
(ख) मैं आपसे मिलकर प्रसन्न हुआ।
(ग) गाजर काटकर खरगोश को खिलाओ।
(घ) बाढ़ में कई लोगों के डूबने की आशंका है।
(ङ) में आप में श्रद्धा रखता हूँ।
(च) फूलों की एक माला नेताजी को पहनाओ।
(छ) अपराधी को मृत्युदण्ड मिला।
(ज) छात्र कक्षा में गया।
(झ) मैंने लता मंगेशकर को गाते हुए देखा।
(ज) मुझसे अनेक भूलें हुईं।

प्रश्न 22.
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों का शुद्ध रूप लिखिए [2010]
(i) सेठ ज्वालाप्रसाद अच्छा महाजन थे।
(ii) स्त्री शिक्षा पर निवेदिता का विचार स्पष्ट कीजिए।
(iii) राम पुस्तक पढ़ती है।
(iv) अमित को अनुत्तीर्ण होने की आशा है। [2015]
(v) हर्षित शुद्ध गाय का दूध पीता है। [2015]
उत्तर-
(i) सेठ ज्वालाप्रसाद अच्छे महाजन थे।
(ii) स्त्री शिक्षा पर निवेदिता के विचार स्पष्ट कीजिए।
(iii) राम पुस्तक पढ़ता है।
(iv) अमित को अनुत्तीर्ण होने की आशंका है।
(v) हर्षित गाय का शुद्ध दूध पीता है।

प्रश्न 23.
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों का शुद्ध रूप लिखिए। [2012]
(i) श्याम ने सत्यता को पहचान लिया।
(ii) मैं आपको मिलकर प्रसन्न हुआ।
(iii) बाढ़ में कई लोगों के बह जाने की आशा है।
उत्तर-
(i) श्याम ने सत्य को पहचान लिया।
(ii) मैं आपसे मिलकर प्रसन्न हुआ।
(iii) बाढ़ में कई लोगों के बह जाने की आशंका है।

प्रश्न 24. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए- [2009]
(1) श्रीगणेश करना। [2013, 17]
(2) गढ़े मुर्दे उखाड़ना।
(3) फूला न समाना। [2013]
(4) आँख का तारा होना। [2014]
(5) रंग में भंग होना।
(6) काला अक्षर भैंस बराबर।
(7) हथेली पर सरसों जमाना।
(8) कलेजे पर साँप लोटना।
(9) बाल की खाल खींचना।
(10) तूती बोलना।
(11) दिन-रात एक करना। [2017]
(12) गज भर की छाती होना।
(13) गागर में सागर भरना। [2017]
(14) मान न मान में तेरा मेहमान। [2011]
(15) आग बबूला होना। [2013]
(16) चकमा देना। [2013]
(17) हाथ मारना। [2014]
उत्तर-
(1) श्रीगणेश करना किसी कार्य को प्रारम्भ करना।
प्रयोग-आज बिग बाजार का श्रीगणेश हुआ।

(2) गढ़े मुर्दे उखाड़ना-पुरानी बातें करना।
प्रयोग रमेश तो गढ़े मुर्दे उखाड़ता रहता है। इसके कारण झगड़े होते हैं।

(3) फूला न समाना-प्रसन्न होना।
प्रयोग-प्रथम आने पर रोहित फूला न समाया।

(4) आँख का तारा होना बहुत प्यारा होना।
प्रयोग-श्रीकृष्ण जी अपने माँ-बाप के आँख के तारे थे।

(5) रंग में भंग होना किसी काम में विघ्न पड़ना।
प्रयोग-विवाह समारोह में बारिश पड़ने के कारण लोगों के रंग में भंग पड़ गया।

(6) काला अक्षर भैंस बराबर-अनपढ़ होना।
प्रयोग काजल के लिए तो काला अक्षर भैंस बराबर है।

(7) हथेली पर सरसों जमाना-जल्दबाजी करना।
प्रयोग-रवीन्द्र ने सोहन से कहा, तुम तो हथेली पर सरसों जमाना चाहते हो। इस प्रकार मुझसे काम न होगा।

(8) कलेजे पर साँप लोटना-ईर्ष्या करना।
प्रयोग–मेरी लॉटरी निकलने पर रिश्तेदारों के कलेजे पर साँप लोट गया।

(9) बाल की खाल निकालना-कानून निकालना या बारीकी से जाँच-पड़ताल करना।
प्रयोग-सोहन का स्वभाव तो बाल की खाल निकालना है।

(10) तूती बोलना-धाक होना।
प्रयोग-आजकल तो शक्तिशाली लोगों की समाज में तूती बोलती है।

(11) दिन-रात एक करना कठिन परिश्रम करना।
प्रयोग-दिन-रात एक करके मैंने जिले में प्रथम स्थान पाया।

(12) गज भर की छाती होना-प्रसन्न होना।
प्रयोग-अच्छी नौकरी मिल जाने के कारण रोहित के माता-पिता की छाती गज भर की हो गयी।

(13) गागर में सागर भरना-कम शब्दों में बड़ी बात करना।
प्रयोग-बिहारी ने अपने दोहों में गागर में सागर भरा है।

(14) मान न मान मैं तेरा मेहमान-अनाधिकार चेष्टा करना।
प्रयोग कुछ लोग दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप करके इस कहावत को चरितार्थ करते हैं कि मान न मान मैं तेरा मेहमान।

(15) आग बबूला होना अत्यधिक क्रोधित होना।
प्रयोग-श्याम को देखकर महेश आग बबूला हो गया।

(16) चकमा देना-झाँसा देना।
प्रयोग-चोर पुलिस को चकमा देकर भाग गया।

(17) हाथ मारना-प्राप्त करना।
प्रयोग-सुरेश ने अपनी मेहनत के बल पर अल्प समय में ही नौकरी में उच्च पद प्राप्त करके एक बड़ा हाथ मारा है।

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प्रश्न 25.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखिए [2010]
(i) आँख लगना।
(ii) घड़ों पानी पड़ना।
(iii) अक्ल का दुश्मन।
(iv) आँख का काँटा।
उत्तर-
(i) आँख लगना सो जाना।
प्रयोग-अभी मेरी आँख लगी थी कि चोर चोरी करके सारा सामान ले गये।
(ii) घड़ों पानी पड़ना-लज्जित होना।
प्रयोग नकल करते समय पकड़े जाने पर रोहित पर घड़ों पानी पड़ गया क्योंकि सभी छात्रों ने देख लिया था।
(iii) अक्ल का दुश्मन-मूर्ख।
प्रयोग-तुम तो निरे अक्ल के दुश्मन हो, पन्द्रह हजार का टेलीविजन दस हजार में ही बेच आये।
(iv) आँख का काँटा-शत्रु। प्रयोग-विनोद अपने सौतले भाई को आँख का काँटा समझता है।

प्रश्न 26.
लोकोक्ति किसे कहते हैं? एक उदाहरण सहित लिखिए। [2014]
उत्तर-
लोक प्रचलित कथन (उक्ति) को लोकोक्ति कहते हैं। यह विशेष अर्थ व्यक्त करती है। उदाहरण-नाच न जाने आँगन टेढ़ा,न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी आदि।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित लोकोक्तियों का अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए- [2011]
(क) भूत मरे पलीत जागे।
(ख) गुदड़ी का लाल।
(ग) आ बैल मुझे मार।
उत्तर-
(क) भूत मरे पलीत जागे-एक दुष्ट के उपरान्त अन्य दुष्ट का उत्पन्न होना।
प्रयोग–पाकिस्तान की धरती पर आतंकवाद का कहर इस प्रकार जमा जैसे भूत मरे पलीत जागे।

(ख) गुदड़ी का लाल-साधारण परिवार में असाधारण व्यक्ति।
प्रयोग-भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री श्री लाल बहादुर शास्त्री गुदड़ी के लाल थे।

(ग) आ बैल मुझे मार-स्वयं ही मुसीबत मोल लेना।
प्रयोग-घर के बाहर दुश्मन घूम रहे हैं लेकिन मोहन फिर भी रात में बाहर आ गया। यह तो वही बात हुई कि आ बैल मुझे मार।

प्रश्न 28.
निम्नलिखित लोकोक्तियों का अर्थ लिखकर वाक्य प्रयोग कीजिए-[2012]
(क) थोथा चना बाजे घना।
(ख) दूर के ढोल सुहावने लगते हैं।
(ग) हाथ कंगन को आरसी क्या।
उत्तर-
(क) थोथा चना बाजे घना-अकर्मण्य बात बहुत करता है।
प्रयोग-आतंकवादियों को बढ़ावा देने वाला पाकिस्तान विश्व मंच पर आतंकवाद मुक्त विश्व की बात करता है। इसे कहते हैं थोथा चना बाजे घना।

(ख) दूर के ढोल सुहावने होते हैं दूर की वस्तु भली लगती है, असलियत का पता पास से चलता है।
प्रयोग-जी. आई.सी. के अनुशासन और उत्तम परीक्षाफल से प्रभावित होकर मैंने इसमें प्रवेश पा लिया था लेकिन यहाँ के वातावरण को देखकर यही लगता है कि दूर के ढोल सुहावने होते हैं।

(ग) हाथ कंगन को आरसी क्या प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।
प्रयोग-रिश्वत लेते कैमरे पर पकड़े गये नेताजी के लिए जाँच बैठाने की क्या आवश्यकता है। यह तो हाथ कंगन को आरसी क्या वाली बात है।

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प्रश्न 29. आज्ञावाचक वाक्य किसे कहते हैं? उदाहरण सहित लिखिए। [2013]
उत्तर-
जिन वाक्यों में आज्ञा देने का भाव पाया जाता है,वे आज्ञावाचक वाक्य कहलाते हैं।
उदाहरण-
तुम विद्यालय जाओ।

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MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 6 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 6.1

MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 6 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 6.1

प्रश्न 1.
हल कीजिए 24x < 100, जब
(i) x एक प्राकृत संख्या है।
(ii) x एक पूर्णांक है।
हल:
24x < 100
24 से दोनों पक्षों में भाग करने पर
x < \(\frac{30}{-12}\) अर्थात x < \(-\frac{5}{2}\) (i) यदि x एक प्राकृत संख्या है तो हल {1, 2, 3, 4} है। (ii) यदि x एक पूर्णांक संख्या है तो हल {……. – 3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, 4}. प्रश्न 2. हल कीजिए : 12x > 30, जब
(i) x एक प्राकृत संख्या है।
(ii)x एक पूर्णांक है।
हल:
– 12x > 30
– 12 से दोनों पक्षों में भाग करने पर,
\(x<\frac{100}{24}\) अर्थात \(x<\frac{25}{6}\)
(i) यदि x प्राकृत संख्या है तो कोई हल नहीं है।
(ii) यदि x पूर्णाक संख्या है तो हल {…..-5, -4 ,-3} है।

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प्रश्न 3.
हल कीजिए : 5x – 3 < 7, जब
(i) x एक पूर्णांक है।
(ii) x एक वास्तविक संख्या है।
हल:
5x – 3 < 7
दोनों पक्षों में 3 जोड़ने पर,
5x < 10
5 से भाग देने पर .
x < \(\frac{10}{5}\) अर्थात x < 2 (i) यदि x एक पूर्णांक संख्या है तो हल {….-2, –1, 0, 1}. (ii) यदि x एक वास्तविक संख्या है तो हल x ϵ (- ∞, 2). प्रश्न 4. हल कीजिए : 3x + 8 > 2, जब
(i) x एक पूर्णांक है।
(ii) x एक वास्तविक संख्या है।
हल:
3x + 8 > 2
3x > 2 – 8 या 3x > – 6
3 से भाग करने पर
x > – \(\frac{6}{3}\) या x> – 2
(i) यदि x एक पूर्णांक संख्या है तो हल {-1, 0, 1, 2 ,….}.
(ii) यदि x एक वास्तविक संख्या है तो हल x ϵ (-2, ∞).

प्रश्न 5.
हल कीजिए : 4x + 3 < 6x + 7.
हल :
4x + 3 < 6x + 7
6x को बाएँ पक्ष में तथा 3 को दाएँ पक्ष में रखने पर,
4x – 6x < 7 – 3
या – 2x < 4 – 2 से भाग देने पर, \(x>\frac{4}{-2}\) या x > – 2
दी हुई असमिका का हल है : x ϵ (- 2, ∞).

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प्रश्न 6.
हल कीजिए :
3x – 7 > 5x – 1.
हल:
3x – 7 > 5x – 1
5x का बाएँ पक्ष में और 7 को दाएँ पक्ष मे रखने पर,
3x – 5x > – 1 + 7
– 2x > 6
– 2 से भाग देने पर
x < – 3
∴ दी हुई असमिका का हल है x ϵ (- ∞, – 3).

प्रश्न 7.
हल कीजिए : 3(x – 1) ≤ 2 (x – 3).
हल:
असमिका
3(x – 1) ≤ 2 (x – 3)
3x – 3 ≤ 2x – 6
2x को बाएँ पक्ष में और 3 को दाएँ पक्ष में रखने पर,
3x – 2x ≤ 3 – 6
या x ≤ – 3
∴ हल है : x ϵ (- ∞, – 3].

प्रश्न 8.
हल कीजिए:
3(2 –x) ≥ 2 (1 –x).
हल:
दी हुई असमिका
3(2 – x) ≥ 2 (1 – x)
6 – 3x ≥ 2 – 2x
2x को बायीं ओर तथा 6 को दायीं ओर रखने पर,
2x – 3x ≥ 2 – 6.
या – x ≥ – 4 या x ≤ 4
∴ हल है : x ϵ (- ∞, 4].

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प्रश्न 9.
हल कीजिए : x + \(\frac{x}{2}+\frac{x}{3}\) < 11
हल:
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 6 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 6.1 img-1

प्रश्न 10. हल कीजिए: \(\frac{x}{3}>\frac{x}{2}+1\)
हल:
दी हुई असमिका \(\frac{x}{3}>\frac{x}{2}+1\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 6 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 6.1 img-2

प्रश्न 11.
हल कीजिए: \(\frac{3(x-2)}{5} \leq \frac{5(2-x)}{3}\)
हल:
दी हुई असमिका है : \(\frac{3(x-2)}{5} \leq \frac{5(2-x)}{3}\)
दोनों ओर 15 से गुणा करने पर
9(x – 2) ≤ 5 (2 –x)
या 9x – 18 ≤ 50 – 25x
25x को बायीं ओर तथा 18 को दायीं ओर रखने पर,
9x + 25x ≤ 50 + 18
या 34x ≤ 68
या x ≤ 2
∴ दी हुई असमिका का हल है x ϵ (- ∞, 2].

प्रश्न 12 .
हल कीजिए: \(\frac{1}{2}\left(\frac{3 x}{5}+4\right) \geq \frac{1}{3}(x-6)\)
हल:
दी हुई असमिका
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 6 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 6.1 img-3

प्रश्न 13.
हल कीजिए :
2(2x + 3) – 10 < 6 (x – 2).
हल:
दी हुई असमिका
2(2x + 3) – 10 < 6(x – 2)
4x + 6 – 10 < 6x – 12
6x को बायीं ओर तथा — 4 को दायीं ओर रखने पर,
4x – 6x < – 12 +4
या – 2x < – 8 (- 1) से गुणा करने पर, x > 4
∴ हल है : x ϵ (4, ∞)

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प्रश्न 14.
हल कीजिए: 37 – (3x + 5) ≥ 9x – 8(x – 3).
हल:
दी हुई असमिका
37 – (3x + 5) ≥ 9x – 8(x – 3)
37 – 3x-5 ≥ 9x – 8x + 24
– 3x + 32 ≥ x + 24
x को बायीं ओर तथा 32 को दायीं ओर रखने पर
– 3x – x ≥ 24 – 32
या – 4x ≥ – 8
(- 1) से गुणा करने पर तथा 4 से भाग देने पर
x ≤ \(\frac{8}{4}\) या x ≤ 2
∴ हल है : x ϵ (- ∞, 2].

प्रश्न 15.
हल कीजिए : \(\frac{x}{4}<\frac{5 x-2}{3}-\frac{7 x-3}{5}\)
हल : दी हुई असमिका \(\frac{x}{4}<\frac{5 x-2}{3}-\frac{7 x-3}{5}\)
60 से दोनों पक्षों में गुणा करने पर ।
15x < 20(5x – 2) – 12 (7x – 3)
या 15x < 100x – 40 – 84x + 36
या 15x < 16x – 4
16x को बायीं ओर लाने पर,
15x – 16x < – 4
या – X < – 4 – 1 से गुणा करने पर x > 4
∴ हल है :
x ϵ (4, ∞)

प्रश्न 16.
हल कीजिए : \(\frac{2 x-1}{3} \geq \frac{3 x-2}{4}-\frac{2-x}{5}\)
हल:
दी हुई असमिका \(\frac{2 x-1}{3} \geq \frac{3 x-2}{4}-\frac{2-x}{5}\)
60 से गुणा करने पर,
20(2x – 1 ) ≥ 15(3x – 2) – 12(2 –x)
या 40x – 20 ≥ 45x – 30 – 24 + 12x
या 40x – 20 ≥ 57x – 54
57x को बायीं ओर तथा 20 को दायीं ओर रखने पर,
40x – 57x ≥ – 54 + 20
– 17x ≥ – 34
– 17 से भाग देने पर
x ≤ 2
∴ हल है :
x ϵ (- ∞, 2].

प्रश्न 17.
से 20 तक की असमिकाओं का हल ज्ञात कीजिए तथा उन्हें संख्या रेखा पर आलेखित कीजिए।
प्रश्न 17.
3x – 2 < 2x + 1.
हल:
दी हुई असमिका 3x – 2 < 2x + 1
2x को बायीं ओर तथा 2 को दायीं ओर रखने पर,
3x – 2x < 1 + 2
या x <3
∴ हल है :
x ϵ (- ∞, 3].
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 6 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 6.1 img-4

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प्रश्न 18.
5x – 3 ≥ 3x -5.
हल:
दी हुई असमिका 5x – 3 ≥ 3x – 5
3x को बायीं ओर तथा 3 को दायीं ओर रखने पर,
5x – 3x ≥ – 5 +3
या 2x ≥ – 2
2 से भाग देने पर
x ≥ – 1
∴ हल है x = [- 1, ∞).
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 6 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 6.1 img-5

प्रश्न 19.
3(1 – x) < 2 (x + 4)
हल:
दी हुई असमिका
3(1 – x) < 2 (x + 4)
3 – 3x < 2x +8
2x को बायीं ओर तथा 3 को दायीं ओर रखने पर,
– 3x – 2x < 8 – 3
या – 5x < 5 – 5 से भाग देने पर x > – 1
∴ हल है :
x ϵ (- 1, ∞)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 6 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 6.1 img-6

प्रश्न 20.
\(\frac{x}{2}<\frac{(5 x-2)}{3}-\frac{(7 x-3)}{5}\)
हल:
दी हुई असमिका \(\frac{x}{2}<\frac{(5 x-2)}{3}-\frac{(7 x-3)}{5}\)
30 से दोनों पक्षों में गुणा करने पर
15x < 10 (5x – 2) – 6(7x – 3)
या 15x < 50x – 20 – 42x + 18
या 15x < 8x – 2
8x को बायीं ओर रखने पर,
15x – 8x < – 2
या 7x < – 2
∴ x < – \(\frac{2}{7}\)
∴ हल है : \(\left(-\infty,-\frac{2}{7}\right)\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 6 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 6.1 img-7

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प्रश्न 21.
रवि ने पहली दो एकक परीक्षा में 70 और 75 अंक प्राप्त किए हैं। वह न्यूनतम अंक ज्ञात कीजिए, जिसे वह तीसरी एकक परीक्षा में पाकर 60 अंक का न्यूनतम औसत प्राप्त कर सके।
हल:
मान लीजिए तीसरे एकक परीक्षा में x अंक प्राप्त किए।
रवि द्वारा प्राप्त अंकों का औसत = \(\frac{70+75+x}{3}\)
MP Board Class 11th Maths Solutions Chapter 6 सम्मिश्र संख्याएँ और द्विघातीय समीकरण Ex 6.1 img-8
3 से दोनों पक्षों में गुणा करने पर,
145 + x ≥ 180
या x ≥ 180 – 145
या x ≥ 35
अतः रवि को तीसरी परीक्षा में 35 से अधिक या उसके बराबर अंक प्राप्त करने हैं।

प्रश्न 22.
किसी पाठ्यक्रम में ग्रेड A पाने के लिए एक व्यक्ति को सभी पाँच परीक्षाओं (प्रत्येक 100 अंकों में से) में 90 अंक या अधिक अंक का औसत प्राप्त करना चाहिए यदि सुनीता के प्रथम चार परीक्षाओं के प्राप्तांक 87,92, 94 और 95 हों तो वह न्यूनतम अंक ज्ञात कीजिए जिसे पांचवीं परीक्षा में प्राप्त करके सुनीता उस पाठ्यक्रम में ग्रेड A पाएगी।
हल:
मान लीजिए सुनीता ने पांचवीं परीक्षा में x अंक प्राप्त किए।
पाँच परीक्षाओं के प्राप्त अंकों का औसत = \(\frac{87+92+94+95+x}{5}\)
= \(\frac{368+x}{5}\)
प्रश्नानुसार
∴ \(\frac{368+x}{5}\) ≥ 90
5 से दोनों पक्षों में गुणा करने पर
368 + x ≥ 5 x 90
या 368 + x ≥ 450
या x ≥ 450 – 368
∴ x ≥ 82
अतः सुनीता को पाँचवीं परीक्षा में 82 से अधिक या उसके बराबर अंक प्राप्त करने चाहिए।

प्रश्न 23.
10 से कम क्रमागत विषम संख्याओं के ऐसे युग्म ज्ञात कीजिए जिनके योगफल 11 से अधिक हों।
हल:
मान लीजिए x और x + 2 दो विषम परिमेय संख्याएँ हैं।
x तथा x + 2 दोनों ही 10 से कम हैं।
⇒ x < 10 और x + 2 < 10 या x < 8 दोनों का योग 11 से अधिक है। ∴ x + (x + 2) > 11
या 2x + 2 > 11 या 2x > 11 – 2
∴ 2x > 9 या x > \(\frac{9}{2}\), या x > 4 \(\frac{1}{2}\)
अर्थात् यदि x = 5 हो, तब दूसरी संख्या = x + 2 = 7
इसी प्रकार यदि x = 7, तो x + 2 = 9
∴ दूसरा युग्म (7, 9)
x = 9 नहीं हो सकता क्योंकि x + 2 = 11 > 10
अत: वांछित युग्म है (5, 7), (7, 9).

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प्रश्न 24.
क्रमागत सम संख्याओं के ऐसे युग्म ज्ञात कीजिए जिनमें से प्रत्येक 5 से बड़े हों, तथा उनका योगफल 23 से कम हो।
हल:
मान लीजिए x और x + 2 दो सम संख्याएँ हैं।
x और x + 2 दोनों ही 5 से बड़ी है।
⇒ x > 5
और x + (x + 2) < 23
∴ 2x + 2 < 23
या 2x < 23 – 2 = 21
∴ 2x < 21 या x < \(\frac{21}{2}\)
यदि x = 10, x + 2 = 12 ⇒ x + (x + 2) < 23
इसी प्रकार (6, 8), (8, 10) युग्म भी दी हुई शर्त पूरी करते हैं।
वांछित युग्म (6, 8), (8, 10), (10, 12).

प्रश्न 25.
एक त्रिभुज की सबसे बड़ी भुजा सबसे छोटी भुजा की तीन गुनी है तथा त्रिभुज की तीसरी भुजा सबसे बड़ी भुजा से 2 सेमी कम है। तीसरी भुजा की न्यूनतम लंबाई ज्ञात कीजिए जबकि त्रिभुज का परिमाप न्यूनतम 61 सेमी है।
हल:
मान लीजिए त्रिभुज की सबसे छोटी भुजा = x सेमी
सबसे बड़ी भुजा = 3x सेमी
तीसरी भुजा = 3x – 2 सेमी
प्रश्नानुसार
x + 3x + (3x – 2) ≥ 61
7x – 2 ≥ 61
7x ≥ 61 + 2 = 63
⇒ x ≥ 9
∴ सबसे छोटी भुजा 9 सेमी है।

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प्रश्न 26.
एक व्यक्ति 91 सेमी लंबे बोर्ड में से तीन लंबाईयाँ काटना चाहता है। दूसरी लंबाई सबसे छोटो लंबाई से 3 सेमी अधिक और तीसरी लंबाई सबसे छोटी लंबाई की दूनी है। सबसे छोटे बोर्ड की संभावित लंबाई क्या है, यदि तीसरा टुकड़ा दूसरे टुकड़े से कम से कम 5 सेमी अधिक लंबा हो ?
हल:
मान लीजिए कटे हुए सबसे छोटे बोर्ड की लंबाई = x सेमी.
दूसरे कटे हुए बोर्ड की लम्बाई = x + 3
तीसरे कटे हुए बोर्ड की लम्बाई = 2x सेमी
दिया है कि
x + (x + 3) + 2x ≤ 91
या 4x + 3 ≤ 91
या 4x + 3 ≤ 91 – 3
या 4x ≤ 88
x ≤ 22 …(1)
∴ यह भी दिया गया है कि 2x ≥ (x + 3) +5
2x ≥ x +8
x ≥ 8
∴ सबसे छोटे बोर्ड की लम्बाई कम से कम 8 सेमी हो और अधिक से अधिक 22 सेमी हो। …(2)

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 12 जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया

MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 12 जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया (संकलित)

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया अभ्यास-प्रश्न

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया लबूतरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सैल्यूकस कहाँ का राजा वा? वह भारत क्यों आया था?
उत्तर
सैल्यूकस सीरिया का राजा था। वह भारत, भारत भ्रमण के लिए आया था।

प्रश्न 2.
मैगस्थनीज कौन था? उसने चाणक्य से मिलने का समय कब निश्चित किया?
उत्तर
मैगस्थनीज चन्द्रगुप्त के दरबार में नियुक्त राजदूत था। वह चाणक्य का प्रशंसक था। उसने चाणक्य से मिलने का समय सायंकाल निश्चित किया।

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प्रश्न 3.
जब चन्द्रगुप्त और सैल्यूकस कुटिया में पहुँचे, तब आचार्य चाणक्य किस कार्य में व्यस्त थे?
उत्तर
जब चन्द्रगुप्त और सैल्यूकस कुटिया में पहुँचे तब आचार्य चाणक्य राजकार्य से सम्बन्धित कुछ जरूरी दस्तावेजों की जाँच कर रहे थे।

प्रश्न 4.
सैल्यूकस के चकित होने का क्या कारण था?
उत्तर
सैल्यूकस के चकित होने का कारण यह था कि इतने बड़े साम्राज्य के प्रधानमन्त्री चाणक्य किसी भव्य और विशाल भवन में नहीं, अपितु एक कुटिया में रह रहे हैं।

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आचार्य चाणक्य के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
आचार्य चाणक्य का व्यक्तित्व विभिन्न प्रकार की अदभत विशेषताओं का भण्डार है। उनका व्यक्तित्व अनोखे गुणों से भरा हुआ था। वे एक साथ प्रतिभाशाली, चरित्रवान, सुस्पष्ट, दूरदर्शी, कुशल राजनीतिज्ञ, राष्ट्रभक्त, त्यागशील, ईमानदार, बुद्धिमान और उदार प्रकृति के थे। उनमें किसी प्रकार का न तो अभिमान था और न ही पद-लोलुपता थी। वे कर्तव्यपरायण और अतिथि सम्मानकर्ता थे। इस प्रकार आचार्य चाणक्य की अद्भुत विशेषताओं से दूसरे देश के शासक भी अधिक प्रभावित थे।

प्रश्न 2.
सैल्यूकस ने कुटिया में क्या-क्या देखा? ।
उत्तर
सैल्यूकस ने कुटिया में निम्नलिखित समानों को देखा कटिया के अन्दर एक ओर जल का घड़ा रखा था। दूसरे कोने में उपलों और समिधाओं का ढेर था। एक चटाई बिछी थी। नमक आदि पीसने के लिए सील-बट्टा भी रखा था। एक बाँस लटका हुआ था जिस पर कपड़े रखे हुए थे। एक चौकी, जिस पर पढ़ने-लिखने की सामग्री थी। पास ही दो दीपाधार भी रखे हुए थे। उस समय चाणक्य गम्भीर और एकाग्रचित्त विचार मग्न होकर लेखन के काम में व्यस्त थे।

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प्रश्न 3.
एक दीपक बुझाकर दूसरे दीपक को जलाने के पीछे चाणक्य का क्या तर्क था?
उत्तर
एक दीपक बुझाकर दूसरे दीपक को जलाने के पीछे चाणक्य का तर्क था-पहले दीपक में राजकोष के पैसों से तेल डाला गया था। इसलिए उससे राजकार्य से सम्बन्धित जरूरी दस्तावेजों की जाँच की जा रही थी। जाँच का काम समाप्त होने पर उसे बुझा दिया गया। दूसरा दीपक निजी पैसे से खरीदा हुआ जल रहा है। इससे होने वाली बात भी निजी है।

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया भाषा-अध्ययन

(क) नीचे लिखे अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए:
स्वार्थ और परणाई मानव की दो प्रवृत्तियाँ हैं। हम अधिकतर सभी कार्य अपने लिए करते हैं ‘पर’ के लिए सर्वस्व बलिदान करना ही सच्ची मानक्ता है। यही धर्म है, यही पुण्य है। इसे ही परोपकार कहते हैं। प्रकृति हमें निरन्तर परोपकार का सन्देश देती है। नदी दूसरों के लिए बहती है। वृत मनुष्यों को छाया तथा फल देने के लिए ही घूप, आँधी, वर्षा और तूफानों के जल के रूप में अपना सब कुछ बलिदान कर देते हैं।

प्रश्न 1. सच्ची मानवता क्या है?
प्रश्न 2. वृक्ष हमें परोपकार का सन्देश कैसे देते हैं?
प्रश्न 3. मनुष्य की कौन-सी दो प्रमुख प्रवृत्तियाँ हैं?
प्रश्न 4. गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
(ख) वर्तनी सुधारियेचरीत्रवान, नियूक्त, आर्चाय, कुटीया, विशीष्ट, आशिर्वाद, सामराज्य, चटायी, चाडक्य।
उत्तर
1. परार्थ काम करना ही सच्ची मानवता है।
2. वृक्ष हमें छाया तथा फल देकर परोकार का सन्देश देते हैं।
3. स्वार्थ और परमार्थ मनुष्य की दो प्रमुख प्रवृत्तियों हैं।
4. शीर्षक-‘परोपकार’।
(ख) चरित्रवान्, नियुक्त, आचार्य, कुटिया, विशिष्ट, आशीर्वाद, साम्राज्य, चटाई, चाणक्य।

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया योग्यता-विस्तार

(क) आचार्य चाणक्य की तरह प्रतिभाशाली और सूझबूझ रखने वाले राष्ट्र-भक्तों के बारे में साथियों से जानकारी प्राप्त कीजिए और उनके चित्रों को एकत्रित करिए। पुस्तकालय में जाकर जीवन-मूल्यों पर आधारित कहानियाँ पढ़िए और स्वयं इस प्रकार की कहानी लिखिए। चाणक्य से सम्बन्धित अन्य कहानियाँ जानिए और लिखिए।
‘सैल्यूकस की जन्म-भूमि अर्वात् ग्रीस के बारे में जानकारी एकत्रित कर लिखिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आचार्य चाणक्य कौन ?
उत्तर
आचार्य चाणक्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के महामन्त्री थे। वे महान प्रतिभाशाली, दूरदर्शी और कुशल राजनीतिज्ञ थे।

प्रश्न 2.
सैल्यूकस कौन था? वह आचार्य चाणक्य से क्यों मिलने गया?
उत्तर
सैल्यूकस सिरिया का राजा था। उसने आचार्य चाणक्य की प्रशंसा सुन रखी थी। इसलिए वह उनसे मिलने गया।

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प्रश्न 3.
सम्राट चन्द्रगुप्त सैल्यूकस को लेकर कहाँ गये?
उत्तर
सम्राट चन्द्रगुप्त सैल्यूकस को लेकर एक पुरानी टूटी-फूटी कुटिया में रह रहे आचार्य चाणक्य के पास गये।

प्रश्न 4.
राजकोष के तेल से जलने वाले दीपक को बुझाकर निजी कोष के तेल से दूसरा दीपक जलाने से आचार्य चाणक्य के किस दृष्टिकोण का पता चलता है?
उत्तर
राजकोष के तेल से जलने वाले दीपक को बुझाकर निजी कोष के तेल से दूसरा दीपक जलाने से आचार्य चाणक्य की राष्ट्रभक्ति और ईमानदारी के दृष्टिकोण का पता चलता है।

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
आचार्य चाणक्य ने सैल्यूकस की शंका का समाधान करते हुए क्या कहा?
उत्तर
आचार्य चाणक्य ने सैल्यूकस की शंका का समाधान करते हुए कहा-“दूसरे दीपक को जलाने और पहले दीपक को बुझाने के पीछे कोई सनक या उन्माद की भावना काम नहीं कर रही थी। सच्चाई तो यह है कि जब आप यहाँ आये तो मैं राजकार्य से सम्बन्धित कुछ जरूरी दस्तावेजों की जाँच कर रहा था। उस समय जो दीपक जल रहा था उसमें राजकोष के पैसों से तेल डाला गया था, इस समय आपसे बातचीत करेंगे, वह हमारी निजी होगी। इस कारण मैंने राजकीय दीपक को बुझाकर अपने कमाये हुए धन से खरीदा हुआ दीपक जलाया है। ऐसा करके मैंने कोई विचित्र काम नहीं किया है।”

प्रश्न 2.
इस प्रेरक प्रसंग से क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर
इस प्रेरक प्रसंग से हमें कई प्रकार की प्रेरणा मिलती है

  1. हमें अपने कर्तव्य का पालन सच्चाई से करना चाहिए।
  2. हमें अपने निजी स्वार्थ को देश और समाज के लिए न्यौछावर कर देना चाहिए।
  3. अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम और भक्ति की भावना को प्रकट करते रहना चाहिए।
  4. हमें अपने पद और कार्यभार के दायित्व को सच्ची भावना से निभाना चाहिए।
  5. हमें पद-प्रतिष्ठा पाकर अहंकार नहीं करना चाहिए।

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प्रश्न 3.
‘जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया’ प्रेरक प्रसंग के मुख्य भाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
प्रस्तुत प्रेरक प्रसंग का आधार एक ऐतिहासिक घटना है। इस घटना को आधार बनाकर यह दिखलाने का प्रयास किया गया है कि जहाँ एक ओर ‘त्याग’ . व्यक्ति के जीवन को उदात्त बनाता है। वहीं दूसरी ओर सामाजिक जीवन के एक विशिष्ट मूल्य के रूप में व्यवस्थाओं को लोकहितकारी बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका प्रस्तुत करता है। राजनीति और त्याग पर आधारित इस प्रेरक प्रसंग के माध्यम से महान सम्राट चन्द्रगुप्त के महामन्त्री चाणक्य की राष्ट्र-भक्ति को चित्रित किया गया है। राज्य के सभी प्रकार के सुख-वैभव को छोड़कर महामन्त्री चाणक्य का झोपड़ी। में रहना, के उल्लेख से जहाँ उनके अद्भुत त्याग का उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। वहीं सैल्यूकस की निजी भेंट के समय राजकोष के तेल से जलने वाले दीपक को बुझाकर निजी कोष के तेल से दूसरा दीपक प्रज्ज्वलित करने के उल्लेख के द्वारा रनके राष्ट्रीय संचेतक एवं राजनीति के भोगवादी दृष्टिकोण के निषेध की भूमिका को भी बड़े अनूठे ढंग से सामने लाने का प्रयास किया गया है प्रस्तुत करता है।

जब चाणक्य ने दूसरा दीपक जलाया प्रेरक प्रसंग का सारांश

प्रश्न
‘जब चाणक्य ने दीपक जलाया’ प्रेरक प्रसंग का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
प्रस्तुत प्रसंग प्रेरक रूप में है। सम्राट चन्द्रगुप्त के महामन्त्री चाणक्य की ईमानदारी को इस प्रसंग में लाकर शिक्षाप्रद बनाने का प्रयास किया गया है। इस प्रेरक प्रसंग का सारांश इस प्रकार है सम्राट चन्द्रगुप्त के महामन्त्री आचार्य चाणक्य अत्यधिक प्रतिभाशाली, दूरदर्शी, कुशल राजनीतिक और महान चरित्रवान् थे। उनकी इस अद्भूत विशेषता को सुनकर सीरिया का राजा सिल्यूकस ने भारत आने पर उनसे मिलने की इच्छा सम्राट चन्द्रगुप्त के दरबार में नियुक्त राजदूत मैगस्थनीज से प्रकट की। चाणक्य से मिलने के लिए सूर्यास्त के बाद का समय निश्चित किया गया। एक विशाल साम्राज्य के महामन्त्री को एक पुरानी कुटिया में देखकर सिल्यूकस हैरान हो गये। चन्द्रगुप्त-सिल्यूकस ने उस कुटिया के भीतर जाकर देखा कि एक ओर पानी का घड़ा है तो दूसरी ओर उपले, सिल बट्टा, बाँस पर कपड़े और चौकी पर पढ़ने-लिखने की सामग्री थी।

पास में दो दीपाधार थे। उस समय चाणक्य गम्भीर मुद्रा में कुछ लिख रहे थे। लिखने का काम समाप्त करके उन्होंने चन्द्रगुप्त को आशीर्वाद और सिल्यूकस को सम्मान देते हुए दीपक बुझा दिया और दूसरा दीपक जला दिया। इसे देखकर सिल्यूकस हैरान हो गया। पूछने पर चाणक्य ने कहा कि जब वे वहाँ आये तो वे राजकार्य से सम्बन्धित जरूरी दस्तावेजों की जाँच कर रहे थे। उस समय जलते हुए उस दीपक में राजकोष के पैसों से तेल डाला गया था। इस समय उन दोनों की बात उनकी निजी होगी। इसलिए उन्होंने राजकीय दीपक को बुझाकर अपने कमाए हुए धन से खरीदा हुआ दीपक जलाया है। यह सुनकर सिल्यूकस और हैरान होकर सोचने लगे कि शायद ही ऐसे महान आदर्श महामन्त्री और किसी देश या राज्य में होगा।

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 11 जागरण गीत

MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 11 जागरण गीत (सोहनलाल द्विवेदी)

जागरण गीत अभ्यास-प्रश्न

जागरण गीत लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि गीत गाकर ही लोगों को क्यों जगाना चाहता है?
उत्तर
कवि गीत गाकर ही लोगों को जगाना चाहता है। यह इसलिए कि साधारण रूप से कही गई बातों की अपेक्षा गीत के माध्यम से कही बातें अधिक प्रभावशाली होती हैं।

प्रश्न 2.
इस गीत में किस रास्ते को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है?
उत्तर
इस गीत में उदयाचल को सर्वश्रेष्ठ रास्ता बताया गया है।

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प्रश्न 3.
कवि किस रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए आतुर है?
उत्तर
कवि प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए आतुर है।

प्रश्न 4.
संकीर्णताएँ तोड़ने के लिए कवि क्या करना चाहता है?
उत्तर
संकीर्णताएँ तोड़ने के लिए कवि सोए हुए दृढ़ भावों को जगाना चाहता है।

जागरण गीत दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि आकाश में उड़ने के लिए क्यों रोक रहा है? कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
कवि आकाश में उड़ने के लिए रोक रहा है। यह इसलिए कि इससे जीवन की वास्तविकता का ज्ञान नहीं हो पाता है। फलस्वरूप जीवन दुखद और निरर्थक बना रहता है।

प्रश्न 2.
शूल को फूल बनाने से कवि का क्या आशय है?
उत्तर
शूल को फूल बनाने से कवि का आशय है-जीवन में आने वाली कठिनाइयों, रुकावटों और कष्टों को अपनी क्षमता, शक्ति आर बुद्धिबल से दूर करके जीवन को हर प्रकार से सुखद और सुन्दर बना लेना। इसके द्वारा कवि ने आलसी और निराश लोगों को प्रेरित और उत्साहित करना चाहा है।

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प्रश्न 3.
‘अतल अस्ताचल तुम्हें जाने न दूँगा। अरुण उदयाचल सजाने आ रहा हूँ।’ उपरोक्त पंक्तियों का भावार्य लिखिए।
उत्तर
अतल अस्ताचल तुम्हें जाने न दूंगा। अरुण उदयाचल सजाने आ रहा हूँ।’ उपरोक्त पंक्तियों के द्वारा कवि ने यह भाव दर्शाना चाहा है कि गहरी नींद में पड़े रहना, जीवन की सच्चाई को नकारना है। इस प्रकार का जीवन डूबते हुए सूरज के समान है, जिसमें न कोई आशा, विश्वास, आकर्षण, समुल्लास आदि जीवन-स्वरूप दिखाई देते हैं। इस प्रकार का जीवन न स्वयं के लिए अपितु दूसरे के लिए भी दुखद और कष्टकर होता है। इसलिए इस प्रकार के जीवन का परित्याग करके अरुण उदयाचल अर्थात् प्रगति के पथ पर बढ़ने के लिए हर प्रकार से कदम बढ़ाना चाहिए।

प्रश्न 4.
विपथ होकर मुड़ने का क्या आशय है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
विपथ होकर मुड़ने का आशय है-सन्मार्ग से हटकर कुमार्ग पर चलना। दूसरे शब्दों में अच्छाई और सुन्दरता को छोड़कर बुराई और कुरूपता को अपनाना।

जागरण गीत भाषा-अध्ययन/काव्य-सौन्दर्य

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों में वर्तनीगत अशुद्धियाँ हैं उन्हें दूर कर पुनः लिखिए।
अरूण, सीस, सूल, मंझदार, श्रृंखलाएँ, पातवार, पृगति, संकीणताएँ, विपथ, झनझनाये।
उत्तर
अशुद्धियाँ – शुद्धियाँ
अरूण – अरुण
शीस – शीश
सूल – शूल
मंझदार – मैंनधार
श्रृंखलाएँ – श्रृंखलाएँ
पातवार – पतवार
पृगति – प्रगति
संकीणताएँ – संकीर्णताएँ
विपथ – बिपथ
झनझनाये – झनझनाए।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखकर पुनः वाक्य लिखिए
1. अब तुम्हें आकाश में उड़ने न दूंगा।
2. फूल मैं उसको बनाने आ रहा हूँ।
3. विपथ होकर मैं तुम्हें मुड़ने न दूंगा।
4. मैं किनारे पर तुम्हें बकने न दूंगा।
5. सिंधु बन तुमको उठाने आ रहा हूँ।
उत्तर

  1. अब तुम्हें आसमान में उड़ने न दूंगा।
  2. पुष्प मैं उसको बनाने आ रहा हूँ।
  3. कुपथ होकर मैं तुम्हें मुड़ने न दूंगा।
  4. मैं तट पर तुम्हें थकने न दूँगा।
  5. समुद्र बन तुमको उठाने आ रहा हूँ।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों को पढ़िए और पाठ में आए शब्दों में से स्वर मैत्री समझकर लिखिए
अस्ताचल – उदयाचल
साधना – ……………..
मैंनदार – ………………..
उठाए – ……………….
गति – ………………..
शूल – ……………
उत्तर
अस्ताचल – उदयाचल
साधना – कल्पना
मँझदार – पतवार
उठाए – झनझजाए
गति – गति
शूल – फूल

जागरण गीत योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
जीवन में प्रगति तभी सम्भव है जब हम निराशा के क्षणों में तथा विरोधी परिस्थितियों में संघर्षरत रहकर आशावादी दृष्टिकोण रखकर आगे बढ़ें। इस सन्दर्भ की अन्य कविताएँ संकलित कीजिए तवा विभिन्न अवसरों पर अपने मित्रों/साथियों को सुलेख में लिखकर भेंट करें।

प्रश्न 2.
कक्षा में एक डिब्बा रखिए। अपने साथियों के किस गुण से किस परिस्थिति से आप प्रभावित हुए एक कागज पर लिखकर डिब्बे में डालिए। कुछ दिनों के उपरांत अपने शिक्षक एवं कक्षा के सम्मुख उन्हें खोलकर सबको सुनाएँ।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

जागरण गीत परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
गहरी नींद में सोने वाले अब सो न सकेंगे। क्यों?
उत्तर
गहरी नींद में सोने वाले अब सो न सकेंगे। यह इसलिए कि कवि उन्हें गीत गाकर जगाने आ रहा है।

प्रश्न 2.
कवि अस्ताचल जाने के बजाय कहा जाने की बात कह रहा है? उत्तर-कवि अस्ताचल जाने के बजाय उदयाचल जाने की बात कह रहा है। प्रश्न 3. कवि के अनुसार क्या दुख-सुख है?
उत्तर
कवि के अनुसार नींद में सपने संजोना दुख है और इससे हटकर परिश्रम पूर्वक जीवन जीना सुख है।

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प्रश्न 4.
मैंनधार से किनारे पर आने के लिए कवि ने क्या कहा है?
उत्तर
मँझधार से किनारे पर आने के लिए कवि ने कहा है कि मैंझधार में पड़ने पर घबड़ाना नहीं चाहिए। हिम्मत करके विश्वासपूर्वक हाथ में पतवार लेकर किनारे की ओर आने का लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।

जागरण गीत दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि गीत किसके लिए गा रहा है?
उत्तर
कवि गहरी नींद में सोने वालों, अतल अस्ताचल की ओर जाने वालों, कल्पना के पंख लगाकर आकाश में उड़ने वालों, जीवन को काँटा समझने वालों, जीवन के मँझधार में पड़कर घबड़ाने और थकने वालों, मन में तुच्छ विचारों को रखने वालों और विपथ होकर जीवन की सच्चाई को नकारने वालों के लिए गीत गा रहा है।

प्रश्न 2.
‘आ रहा हूँ। ऐसा कवि ने बार-बार क्यों कहा है?
उत्तर
‘आ रहा हूँ।’ ऐसा कवि ने बार-बार कहा है। यह इसलिए कि इसके द्वारा वह अपना जागरण सन्देश देना चाहा है। उसने अपना यह जागरण सन्देश उन लोगों को ही देना चाहा है, जो जीवन की सच्चाई को नकारते रहे हैं और संकीर्ण मनोवृत्तियों जैसे-आलस्य, निराशा आदि को स्वीकारते रहे हैं। कवि इस प्रकार की संकीर्ण मनोवृत्तियों को त्यागकर कर्मरत होते हुए जीवन की वास्तविकता को स्वीकारने के लिए ही बार-बार ‘आ रहा हूँ। कहकर आत्मीयता प्रकट करना चाहता है।

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प्रश्न 3.
‘जागरण गीत’ का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
श्री सोहनलाल द्विवेदी-विरचित कविता ‘जागरण गीत’ एक प्रेरक कविता है। इस गीत के द्वारा द्विवेदी जी ने बड़े ही नपे-तुले शब्दों में जीवन की सार्थकता को बतलाने का प्रयास किया है। द्विवेदी जी इस जागरण गीत के माध्यम से जीवन की वास्तविकता का चित्रण किया है। उन्होंने यह बतलाना चाहा है कि जीवन में आलस्य, निराशा तथा संकीर्ण मनोवृत्ति को नकारते हुए मनोवृत्ति कर्मरत जीवन को ही प्रगति का मूलमंत्र बताया है। इस प्रकार उन्होंने पुराने मिथक तोड़ते हुए नव-जीवन के संचार का सन्देश इस गीत माध्यम से दिया है।

जागरण गीत कवि-परिचय

प्रश्न
श्री सोहनलाल द्विवेदी का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर
जीवन-परचिय-श्री सोहनलाल द्विवेदी का राष्ट्रीय विचारधारा के कवियों में प्रमुख स्थान है। उनकी कविताओं में राष्ट्रीयता का अधिक स्वर सुनाई पड़ता है। उनका जन्म सन् 1905 ई. में हुआ था। उन्होंने छोटी-सी आयु में ही काव्य-रचना आरम्भ किया, जो क्रमशः देश-प्रेम और भक्ति के स्वर से गुंजित होता गया। उनकी रचनाओं में राष्ट्रीय विचारधारा का प्रवाह है, तो गाँधीवादी चिन्तन और दृष्टिकोण भी है।

रचनाएँ-द्विवेजी जी की निम्नलिखत-रचनाएँ हैं-भैरवी-पूजा, ‘गीत’, ‘सेवाग्राम’, ‘दूध बतासा’, ‘चेतना’,’बाल भारती’ आदि।

भाषा-शैली-द्विवेदी जी की भाषा सहज और ऐसे प्रचलित शब्दों की है, जिसमें विविधता और अनेकरूपता है। तत्सम शब्दों की अधिकता है। जिसकी सहजता के लिए तभव और देशज शब्द बड़े ही उपयुक्त और सटीक रूप में प्रस्तुत हुए हैं। कहीं-कहीं मुहावरों-कहावतों को प्रयुक्त किया गया है। उनसे भाषा में और सजीवता आ गई है। बोधगम्यता और प्रवाहमयता उनकी शैली की पहली विशेषता है।

महत्त्व-द्विवेदी जी भारतीय संस्कृति को गौरवपूर्ण स्थान दिलाने के प्रबल समर्थक थे चूँकि गाँधी की विचारधारा से वे पूरी तरह प्रभावित थे। इसलिए उन्होंने उसका न केवल समर्थन किया, अपितु उसे अपनी रचनाओं के माध्यम से जन-जन तक प्रेरित भी किया। गाँधीवादी विचारधारा में आस्था रखने के कारण उनकी रचनाओं में प्रेम, अहिंसा और समता के भाव दिखाई देते हैं। इस प्रकार वे अपने विशिष्ट योगदानों के लिए सदैव याद किए जाते रहेंगे।

जागरण गीत कविता का सारांश

प्रश्न
सोहन लात द्विवेदी विरचित कविता ‘जागरण गीत’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
श्री सोहनलाल द्विवेदी-विरचित कविता ‘जागरण गीत’ एक भाववर्द्धक और सन्देशवाहक कविता है। इसमें कवि ने यथार्थ जीवन जीने का सन्देश दिया है। इस कविता का सारांश इस प्रकार है कवि गहरी नींद में सोने वालों से कह रहा है कि वह गीत गाकर उसे जगाने के लिए आ रहा है। वह अब नींद की गहराई से ऊपर निकालकर उसे आकर्षक उदयाचल की तरह उत्साह प्रदान करने का जागरण गीत गा रहा है। कवि गहरी नींद में सोने वाले को फटकारते हुए कह रहा है कि वह आज तक नींद में पड़े-पड़े मीठी-मीठी कल्पना का उड़ान भरता रहा है। परिश्रम करने से कतराता रहा है।

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लेकिन वह ऐसा नहीं कर पायेगा। ऐसा इसलिए कि वह अपने जागरण गीत से उसे यथार्थ जमीन पर ला देगा। उसमें यह चेतना ला देगा कि नींद में सपने देखना सुखदायक नहीं है। उसके दुःखों को सुखों में वह अपने जागरण गीत से फूल में बदल देगा। गहरी नींद में सोने वाले को कवि की सीख है कि उसे जीवन के दुखों के मझधार में पड़ने पर घबड़ाना नहीं चाहिए। ऐसा इसलिए कि वह अपने जागरण गीत से उसे पार लगा देगा। इसलिए उसे अपने मन में उठने वाली छोटी-छोटी बातों को भूल जाना चाहिए। उसे यह विश्वास होना चाहिए कि वह अपने जागरण गीत से उसकी हीनता को समाप्त कर देगा। यह सोच-समझकर अपने जीवन-पथ पर निरन्तर आगे बढ़ते जाओ। वह अपने जागरण गीत से उसे उसके प्रगति के पथ से पीछे नहीं मुड़ने देगा।

जागरण गीत संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

पद की सप्रसंग व्याख्या, काव्य-सौन्दर्य व विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

1. अब न गहरी नींद में तुम सो सकोगे,
गीत गाकर मैं जगाने आ रहा हूँ।
अतल अस्ताचल तुम्हें जाने न दूंगा,
अरुण उदयाचल सजाने आ रहा हूँ॥

कल्पना में आज तक उड़ते रहे तुम,
साधना से सिहरकर मुड़ते रहे तुम।
अब तुम्हें आकाश में उड़ने न दूँगा,
आज धरती पर बसाने आ रहा हूँ॥

शब्दार्च-अतल-गहराई। अस्ताचल-पश्चिम का वह कल्पित पर्वत जिसके पीछे सूर्य का अस्त होना माना जाता है। उदयाचल-पूर्व का वह कल्पित पर्वत जहाँ से सूर्य उदित होता है।

प्रसंग-प्रस्तुत पद हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘वासन्ती’ हिन्दी सामान्य में संकलित तथा श्री सोहनलाल द्विवेदी विरचित कविता ‘जागरण गीत’ से है। इसमें कवि ने आलसी मनुष्यों को सावधान करते हुए कहा है कि

व्याख्या-अब मैं तुम्हें गहरी नींद में नहीं सोने दूंगा। मैं तुम्हें जगाने के लिए जागरण गीत तुम्हें सुनाने के लिए तुम्हारे पास आ रहा हूँ। अस्ताचल की गहराई अर्थात् जीवन की बर्बादी की ओर तुम्हें जाने से रोकने के लिए मैं आकर्षक उदयाचल को सजाने के लिए अर्थात् तुम्हारे जीवन को आनन्दित बनाने के लिए तुम्हारे पास आ रहा हूँ। तुम्हें अपने-आपके विषय में यह अच्छी तरह से जानकारी होनी चाहिए कि तुम आज तक कल्पना की ऊँची उड़ान उड़ते रहे हो। परिश्रम से मुँह मोड़ते रहे हो। लेकिन अब मैं तुम्हें ऐसा नहीं करने दूंगा। अब तो मैं आकाश की उड़ान से नीचे धरती पर लाने के लिए तुम्हारे पास आ रहा हैं। दूसरे शब्दों में तम्हें जीवन की वास्तविकता बतलाने-समझाने के लिए तुम्हारे पास आ रहा हूँ।

विशेष-

  1. कवि का जागरण-सन्देश भाववर्द्धक है।
  2. शब्द-चयन लाक्षणिक है।
  3. तत्सम शब्दों एवं तदभव शब्दों के प्रयोग सटीक हैं।
  4. शैली उपदेशात्मक-भावात्मक है।
  5. वीर रस का संचार है।

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1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
(ii) प्रस्तुत पयांश का भाव-सौन्दर्य लिखिए।
उत्तर
(i) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौन्दर्य काव्यांग के स्वरूपों से पष्ट है। अनप्रास अलंकार की छटा (गीत गाकार व अतल अस्ताचल) इस पद्यांश में जहाँ है, वहीं मुहावरेदार शैली (गहरी नींद में सोना, आकाश में उड़ना और धरती पर बसाना) का प्रयोग आकर्षक है। वीर रस से यह अंश अधिक गतिशील होकर ओजपूर्ण बन गया है।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौन्दर्य सरस और सहज शब्दों का है गहरी नींद में गीत गाकर जगाने का भाव न केवल अनूठा है अपित आत्मीयता से परिपूर्ण है।
गहरी नींद की सच्चाई को विश्वसनीयता के साथ बतलाने का ढंग रोचक होने के । साथ प्रेरक भी है। इससे कथन की सफलता को नकारा नहीं जा सकता है।

2. पद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) कवि गीत गाकर किसे जगाना चाहता है?
(ii) आकाश में उड़ने के लिए कवि क्यों मना करता है?
उत्तर
(i) कवि गीत गाकर गहरी नींद में सोने वाले को जगाना चाहता है।
(ii) आकाश में उड़ने के लिए कवि मना करता है। यह इसलिए कि इससे जीवन की निरर्थकता सिद्ध होती है।

2. सुख नहीं यह, नींद में सपने संजोना,
दुख नहीं यह, शीश पर गुरू भार ढोना।
शूल तुम जिसको समझते वे अभी तक,
फूल में उसको बनाने आ रहा हूँ।
देखकर मँझधार को घबरा न जाना,
हाथ ले पतवार को घबरा न जाना।
मैं किनारे पर तुम्हें चकने न दूंगा,
पार में तुमको लगाने आ रहा हूँ।

शब्दार्थ-गुरूभार-भारीभार। शूल-काँटा (कठिनाई)। मझधार-बीच धारा।

प्रसंग-पूर्ववत् । इस पद्यांश में कवि ने कायर और आलसी मनुष्यों को प्रोत्साहित करते हुए कहा है कि

व्याख्या-हे आलसी, कायर मनुष्य! तुम्हें यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए कि गहरी नींद में पड़े रहना किसी प्रकार से सुखद नहीं हो सकता है। दूसरे शब्दों में यह हर प्रकार से दुखद और हानिकर ही होगा। इस प्रकार दुःखद होगा कि यह सिर का एक बहुत बड़ा बोझ बन जायेगा। उसे ढो पाना निश्चय ही असम्भव होगा। अब तक तुमने जिसे फूल अर्थात् जीवन की कठिनता समझते आ रहे हो। उसे ही मैं फूल बनाने के लिए तुम्हारे पास आ रहा हूँ।

कवि का पुनः गहरी नींद में सोने वाले अर्थात् जीवन-संघर्ष से भागने वाले मनुष्य को समुत्साहित करते हुए कहना है कि तुम स्वयं को जीवन-सागर के मँझधार में पाकर घबड़ाओ नहीं, अपितु धैर्य और हिम्मत से काम लो। जीवन-सागर के मँझधार से निकलकर किनारे पर आने के लिए तुम धैर्य रूपी पतवार को अपने हाथ में संभाल लो। इस प्रकार जब तुम साहस करोगे तो मैं तुम्हें किनारे पर आने तक उत्साहित करते हुए किसी प्रकार से निराश नहीं होने दूंगा। इस प्रकार मैं तुम्हें तुम्हारे जीवन-सागर से पार लगाने के लिए ही तुम्हारे पास आ रहा हूँ।

विशेष-

  1. वीर रस का प्रवाह है।
  2. तुकान्त शब्दावली है।
  3. शैली उपदेशात्मक है।
  4. ‘नींद में सपने संजोना’, ‘फूल बनाना’, हाथ में पतवार लेना और पार लगाना मुहावरों के सटीक और सार्थक प्रयोग हैं।

1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) प्रस्तुत पयांश का काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
(ii) प्रस्तुत पयांश का भाक्-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
(i) प्रस्तुत पद्यांश को काव्य:विधान-स्वरूप शब्द-भाव-योजना से निखारने का प्रयास प्रशंसनीय कहा जा सकता है। ‘घबरा न जाना’ पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार से अलंकृत यह पद्यांश कई मुहावरों के एकजुट आने से अधिक भावपूर्ण होकर सार्थकता में बदल गया है।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश की भाव-योजना अपनी प्रभावमयता के फलस्वरूप रोचक और आकर्षक है। निराश और जीवन-संघर्ष के सामने घुटना टेकने वालों को सत्प्रेरित करने के विविध प्रयास प्रभावशाली रूप में हैं।

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2. पद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) नींद में सपने संजोना क्यों नहीं सुखद है?
(ii) मँझधार में पड़ने पर क्या नहीं करना चाहिए और क्या करना चाहिए?
उत्तर-
(i) नींद में सपने संजोना सुखद नहीं है। यह इसलिए कि इससे दुखों का बोझ कम न होकर बहुत भारी हो जाता है। फिर उसे ढोना असम्भव-सा हो जाता है।
(ii) मँझधार में पड़ने पर घबड़ाना नहीं चाहिए। हाथ में पतवार लेकर किनारे पर आने के लिए पूरी शक्ति लगा देनी चाहिए।

3. तोड़ दो मन में कसी सब शृंखलाएँ
तोड़ दो मन में बसी संकीर्णताएँ।
बिन्दु बनकर मैं तुम्हें ढलने न दूंगा
सिन्धु बन तुमको उठाने आ रहा हूँ॥
तुम उठो, धरती उठे, नभ शिर उठाए,
तुम चलो गति में नई गति झनझनाए।
विपथ होकर मैं तुम्हें मुड़ने न दूंगा,
प्रगति के पथ पर बढ़ाने आ रहा हूँ॥

शब्दार्व-संकीर्णताएँ-तुच्छ विचार । श्रृंखलाएँ-कड़ियाँ। नभ-आकाश । शिर-मस्तक, सिर। विपथ-बुरा रास्ता। प्रगति-उन्नति।

प्रसंग-पूर्ववत् । इसमें कवि ने आलसी और निराश व्यक्ति को समुत्साहित करते हुए कहा है कि

व्याख्या-तुम अपने मन को हीन करने वाली विचारों की कड़ियों को खण्ड-खण्ड कर डालो। इसी प्रकार तुम अपने अन्दर के तुच्छ विचारों और हीन भावों का परित्याग कर दो। तुम्हें स्वयं को कम न समझते हुए समुद्र की तरह विशाल और असीमित शक्ति से भरपूर समझना चाहिए। अगर तुम ऐसा नहीं समझते हो तो मैं तुम्हें ऐसा समझने के भावों को तुम्हारे अन्दर से जगाऊँगा।

इस प्रकार तुम्हें एक बिन्दु के समान जीवन जीने की स्थिति में नहीं रहने देगा। मैं तो तुम्हें समुद्र की तरह जीने देने के लिए तुम्हारे अन्दर सोई हुई भावनाओं को जगाने के लिए तुम्हारे ही पास आ रहा हूँ। कवि का पुनः जीवन में हारे हुए और निराश व्यक्ति को समुत्साहित करते हुए कहना है कि तुम अब अपनी गहरी नींद से जग जाओ। तुम्हारी जागृति और चेतना से इस संसार में जागृति और चेतना आ जाएगी। सारा आसमान अपना मस्तक ऊंचा कर लेगा। तुम्हारे गतिशील होने से सब ओर गतिशीलता आ जाएगी। तुम्हें विकास के पथ पर आगे बढ़ाने के उद्देश्य से मैं तुम्हारे जीवन में हारने नहीं दूंगा। इस प्रकार मैं तुम्हें विकास के रास्ते पर निरंतर बढ़ाने के उद्देश्य से तुम्हारे पास ही आ रहा हूँ।

विशेष-

  1. भाषा में ओज और गति है।
  2. मुहावरों के प्रयोग सटीक हैं।
  3. शब्द-चयन प्रचलित रूप में है।
  4. वीर रस का प्रवाह है।

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1. पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) उपर्युक्त पयांश के काव्य-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश के भाव-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
(i) उपर्युक्त पद्यांश का काव्य-स्वरूप प्रचलित तत्सम शब्दावली से परिपुष्ट है। उसे रोचक और आकर्षक बनाने के लिए तुकान्त शब्दावली की योजना ने लय
और संगीत को प्रस्तुत करके भाववर्द्धक बना दिया है। वीर रस के प्रवाह-संचार से यह पद्यांश प्रेरक रूप में है।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश का भाव-सौन्दर्य वीरता के भावों से प्रेरक रूप में है। निराश मनों को वीर रस से संचारित करने का प्रयास प्रशंसनीय है। भाव और अर्थ का सुन्दर मेल है।

2. पद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से सम्बन्धी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) ‘शृंखलाओं’ से कवि का क्या आशय है?
(ii) ‘विपव’ से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर
(i) शृंखलाओं से कवि का आशय है हीन भावनाएँ।
(ii) ‘विपथ’ से कवि का तात्पर्य है-कुपथ। सन्मार्ग को छोड़कर दुखद रास्ते पर चलना।

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MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 10 न्यायमंत्री

MP Board Class 9th Hindi Vasanti Solutions Chapter 10 न्यायमंत्री (सुदर्शन)

न्यायमंत्री अभ्यास प्रश्न

न्यायमंत्री लघुत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
शिशुपाल के घर आने वाला अतिथि कौन था? उसकी बातों से शिशुपाल क्यों नाराज हो गये?
उत्तर
शिशुपाल के घर आने वाला अतिथि एक परदेशी था। उसकी बातों से शिशुपाल नाराज हो गए, क्योंकि उसने उनके पुत्र को सेवक कहा था।

प्रश्न 2.
‘गोबर में फूल खिला हुआ है।’ यह वाक्य किसके लिए कहा गया है और क्यों ?
उत्तर
‘गोबर में फूल खिला हुआ है।’ यह वाक्य उस परदेशी अतिथि द्वारा शिशुपाल के लिए कहा गया है। यह इसलिए कि उसके युक्तियुक्त और शासन पद्धति का इतना विशाल ज्ञान उस छोटे-से गाँव के ऐसे व्यक्ति में होने की उसने कल्पना भी नहीं की थी।

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प्रश्न 3.
शिशुपाल महाराज अशोक के दरबार में जाने से क्यों घबरा रहे थे?
उत्तर
शिशुपाल महाराज अशोक के दरबार में जाने से घबरा रहे थे। यह इसलिए कि उनके मन में यह आशंका हो रही थी कि उनके शत्रओं ने महाराज से कोई शिकायत कर दी है। उन्हें हो सकता है कि प्राणदंड मिल जाए।

प्रश्न 4.
न्यायमंत्री को प्रहरी के हत्यारे का पता कैसे चला?
उत्तर
न्यायमंत्री को प्रहरी के हत्यारे का पता एक स्त्री के द्वारा गुप्त रूप से चला।

प्रश्न 5.
न्यायमंत्री ने महाराज को दंड किस तरह दिया?
उत्तर
न्यायमंत्री ने महाराज की सोने की मुर्ति को फाँसी पर लटकवाया और उनको चेतावनी देकर छोड़ दिया। इस प्रकार न्यायमंत्री ने महाराज को दंड दिया।

न्यायमंत्री दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
“शिशुपाल का न्याय अंपा और बहरा है।’ यह उक्ति किन संदर्भो में कही गई है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
‘शिशुपाल का न्याय अंधा और बहरा है। यह उक्ति उन संदर्भो में कही गई है कि शिशुपाल ने न्यायमंत्री के अधिकार से पूरे पाटलीपुत्र नगर में न्याय और सप्रबंध की धूम मचा दी। उन्होंने चोर-डाकुओं को इस प्रकार वश में कर लिया था, जिस प्रकार बीन बजाकर सपेरा साँप को वश में कर लेता है। उन दिनों लोगबाग दरवाजे खुले छोड़ देते थे, फिर भी किसी की हानि नहीं होती थी। इस प्रकार शिशपाल का न्याय अंधा और बहरा था। जो न सूरत देखता था, न कोई सिफारिश सुनता था। वह तो केवल शिक्षाप्रद दंड ही देना जानता था।

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प्रश्न 2.
पाठ के आधार पर शिशुपाल के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर
शिशुपाल के चरित्र में हमें निम्नलिखित विशेषताएँ दिखाई देती हैं
1. आतिथ्य सत्कार की भावना-शिशुपाल अपने गाँव का घोर दरिद्र ब्राह्मण था। उसकी जीविका थोड़ी-सी भूमि पर चलती थी। फिर भी एक परदेशी को द्वार पर खड़ा देखकर उसका मुख खिल गया। वह मुस्कुर.कर कहता है कि यह मेरा सौभाग्य है। आइए, पधारिए अतिथि के चरणों से मेरा चौका पवित्र हो जाएगा। इस प्रकार उसमें अतिथि-सत्कार की भावना दिखाई देती है।

2. सच्चा न्यायप्रिय-शिशुपाल ब्राह्मण को शासन-पद्धति का पूरा-पूरा ज्ञान था। सम्राट अशोक ने उसे न्यायमंत्री बना दिया। शिशुपाल का न्याय अंधा और बहरा था जो न सूरत देखता था और न सिफारिश मानता था। वह तो केवल दंड देना जानता था। उसने प्रहरी की हत्या के अपराध में सम्राट अशोक को भी दंडित किया। वह एक सच्चा न्यायी था।

3. निर्भीक और साहसी-शिशुपाल पाटलिपुत्र का न्यायमंत्री था। वह सम्राट अशोक से भी भयभीत नहीं होता था। जब सम्राट अशोक प्रहरी की हत्या के अपराध में पकड़े जाते हैं तो शिशुपाल उनके हाथ में बड़े साहस के साथ हथकड़ी डलवा देता है और निर्भीकता से सम्राट को दंडित करता है।

4. कर्तब्ध-परायण-शिशुपाल ने एक बार कहा था कि अवसर मिले तो दिखा हूँ कि न्याय किसे कहते हैं। मुझसे कोई अपराधी दंड से नहीं बचेगा। मैं न्याय का डंका बजाकर बता दूंगा। और शिशुपाल ने ऐसा ही करके दिखा दिया। प्रहरी की हत्या का पता उसने तीन दिन में निकाल लिया ! उसके न्याय के आगे न राजा बड़ा है और न रंक। वह राजा अशोक को प्रहरी की हत्या के अपराध में बंदी बनाता है और उसे दंडित भी करता है।

प्रश्न 3.
आपकी दृष्टि में न्यायमंत्री कैसा होना चाहिए? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
हमारी दृष्टि में न्यायमंत्री सच्चा और निष्पक्ष होना चाहिए। उसमें अपने कर्तव्य का बोध होना चाहिए और उसका पालन करने की दृढ़ता होनी चाहिए। उसका न्याय दोषी और अपराधी के प्रति कठोर और सीधा होना चाहिए। उसे दंड-विधान का ज्ञान होना चाहिए। उसका दंड शिक्षाप्रद और सुधारप्रद होना चाहिए।

प्रश्न 4.
अपराधी घोषित होने पर भी महाराज अशोक का हृदय क्यों प्रफुल्लित वा?
उत्तर
अपराधी घोषित होने पर भी महाराज अशोक का हदय प्रफुल्लित था। यह इसलिए कि उन्होंने अपने गुप्त वेश में शिशुपाल की जो दृढ़ता सुनी थी, उसने उसे कर दिखाया। इस प्रकार शिशुपाल के न्याय को सुनकर उन्होंने प्रफुल्लित हदय से यह विचार किया कि यह मनुष्य सोना है, जो अग्नि में पड़कर कुंदन हो गया। ऐसे मनुष्यों पर जातियाँ अभिमान करती हुई अपने तन-मन को निछावर करने के लिए तैयार हो जाती हैं।

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प्रश्न 5.
न्यायमंत्री की जगह यदि आप होते, तो किसी प्रकार का न्याय करते? लिखिए।
उत्तर
न्यायमंत्री की जगह यदि हम होते तो उचित-अनुचित का ध्यान रखकर न्याय करते। ‘राजा को ईश्वर माना गया है। ईश्वर ही दंड दे सकता है।’ इसे हम ध्यान में रखकर महाराज अशोक की मूर्ति को फाँसी पर लटकाए जाने का आदेश तो अवश्य देते, लेकिन उन्हें सम्मान देते, उन्हें सार्वजनिक रूप से चेतावनी नहीं देते।

प्रश्न 6.
आशय स्पष्ट कीजिए

(क) जिसका अंतःकरण कुढ़ रहा हो जिसके नेत्र आँसू बहा रहे हों, जिसका मस्तिष्क अपने आपे में नहीं, उसके होंठों पर हँसी ऐसी भयानक प्रतीत होती है, जैसे श्मशान में चाँदनी वरन् उससे भी अधिक।
(ख) उन्होंने चोर-डाकुओं को इस प्रकार वश में कर लिया था जिस प्रकार बीन बजाकर सपेरा सर्प को वश में कर लेता है।
उत्तर
उपर्युक्त कथन का आशय है कि शुष्क हृदय, शुष्क आँखों और अव्यवस्थित मन और मस्तिष्क में अचानक आशाओं को जगा देने से क्षणिक सुख का अनुभव अवश्य होता है। वह सुखद होकर भी भयानकता से बाहर नहीं दिखाई देता है। भाव यह है कि दुखमय जीवन में आने वाले सुखद क्षणों से पूरा जीवन हरा-भरा नहीं दिखाई देता है।

(ख) उपर्युक्त वाक्य का आशय यह है कि सुशासन और सुप्रबंध से अपराधियों के हौसले पस्त हो जाते हैं। जनता में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ जाता है। भय और आतंक के पादल छंटने लगते हैं। चारों ओर अमन-चैन का माहौल बनने लगता है।

न्यायमंत्री भाषा-अध्ययन

1. वाक्य शुद्ध कीजिए
(क) मेरे को आपकी परीक्षा करना है।
(ख) मैं तुमही को जानमा हूँ।
(ग) हम लोग आपस में परस्पर हमेशा विचार विमर्श करने हैं।
(घ) मैं सोती नींद से उठ बैठा।
(ङ) कृपया उनका कार्य करने की कृपा करें।

2. दिए हुए शब्दों में से तत्सम, तद्भव शब्दों को छाँटकर लिखिए
सर्प, चरण, आँखें, रक्त, कठिन, अश्रु, अंधा, मृत्यु, आग, कदाचित, बातचीत, सफल, नींद, ग्राम।

3. निम्नलिखित शब्दों को पढ़कर उनका सही उच्चारण कीजिए
दृढ़-संकल्प, निर्विवाद, हतोत्साह, निस्तब्धता, आत्मोत्सर्ग।
उत्तर
1. शुद्ध वाक्य
(क) मुझे आपकी परीक्षा करनी है।
(ख) मैं तुम्हें जानता हूँ।
(ग) हम लोग आपस में हमेशा विचार-विमर्श करते हैं।
(घ) मैं नींद से उठ बैठा।
(ङ) उनका कार्य करने की कृपा करें।

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2. तत्सम शब्द तद्भव शब्द
सर्प – आँखें
चरण – कठिन
रक्त – अंधा
अश्रु – आग
मृत्यु – बातचीत
कदाचित – नींद
ग्राम – सफल।

3. निम्नलिखित शब्दों को पढ़कर उनका सही उच्चारण छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से करें
दृढ़-संकल्प, निर्विवाद, हतोत्साह, निस्तब्धता, आत्मोत्सर्ग।

न्यायमंत्री योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
बदलते परिवेश में शिशुपाल का चरित्र कितना प्रासंगिक है? इस संबंध में अपने आस-पास के अन्य व्यक्तियों के बारे में जानकारी एकत्रित करें जिससे आप प्रभावित हैं।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

2. पाठ में आए शिशुपाल के संवार्दो को अभिनय के साथ कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

3. सम्राट अशोक से संबंधित कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाओं को एकत्र करें तश नाटिका या कहानी लिखें।
उत्तर
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

न्यायमंत्री परीक्षापयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
शिशुपाल कौन था?
उत्तर
शिशुपाल बुद्ध गया नामक गाँव का सबसे अधिक निर्धन ब्राह्मण था। बाद में महाराज अशोक के दरबार में न्यायमंत्री बना।

प्रश्न 2.
अशोक कैसा था?
उत्तर
अशोक बहुत ही निष्ठुर और निर्दयी था। वह ब्राह्मणों और स्त्रियों को भी फाँसी पर चढ़ा दिया करता था।

प्रश्न 3.
अशोक ने शिशुपाल के न्याय की परीक्षा लेने के लिए क्या कहा?
उत्तर
अशोक ने शिशुपाल के न्याय की परीक्षा लेने के लिए कहा, “यह राजमुद्रा है, तुम कल प्रातःकाल से सूर्य की पहली किरण के साथ न्यायमंत्री समझे जाओगे। मैं देखूगा, तुम अपने-आपको किस प्रकार सफल शासक सिद्ध कर सकते हो?

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प्रश्न 4.
न्यायमंत्री निरुत्तर क्यों हो गए?
उत्तर
न्यायमंत्री ने जब अशोक को उसकी मुद्रा लौटाते हुए कहा कि वे यह अपनी वस्तु सँभाले। वह अपने गाँव वापिस जाएगा, तब अशोक ने कहा, “आपका साहस मैं कभी नहीं भूलूँगा। यह बोझ आप ही उठा सकते हैं। मुझे कोई दूसरा इस पद के योग्य दिखाई नहीं देता।” अशोक की इन बातों को सुनकर न्यायमंत्री निरुत्तर हो गए।

न्यायमंत्री दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
न्यायमंत्री के रूप में शिशुपाल ने राज्य में क्या व्यवस्था की थी?
उत्तर
न्यायमंत्री के रूप में शिशुपाल ने राज्य में व्यवस्था के लिए पुलिस और पहरेदारों को संगठित किया। पहरेदारों के कारण पहले तो अपराध होते ही नहीं थे। यदि अपराध हो जाए तो अपराधी को कठोर सजा मिलती थी। कुछ दिनों में सारे राज्य में शिशुपाल के न्याय की पताका फहरा उठी थी।

प्रश्न 2.
न्यायमंत्री ने अपनी कार्यकुशलता का परिचय किस प्रकार दिया?
उत्तर
सम्राट अशोक के बुलाने पर शिशुपाल सामने आए। महाराज ने पूछा-“घातक का पता लगा?” न्यायमंत्री ने कहा, “हाँ, लग गया।” न्यायमंत्री ने थोड़ी देर कुछ सोचा फिर दृढ़ संकल्प के साथ कहा, “मेरी आज्ञा है, सम्राट अशोक को गिरफ्तार कर लो।” इस पर अशोक क्रोध से लाल हो गए। उन्होंने ब्राह्मण से कहा-“ब्राह्मण! तुममें इतनी शक्ति है कि जो तुम मुझ तक बढ़ आए” किंतु शिशुपाल ने सम्राट अशोक की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। शिशुपाल ने फिर दोहराया, “मैं आज्ञा देता हूँ गिरफ्तार कर लो। यह घातक है। इसे मेरी अदालत में पेश करो।”

धनवीर ने अशोक को हथकड़ी लगा दी और शिशुपाल की अदालत में सम्राट अशोक को बंदी के रूप में पेश किया। शिशपाल ने धीरे से कहा, “सम्राट तुम पर एक पहरेदार की हत्या का अपराध है। तुम इसका क्या उत्तर देते हो?” सम्राट अशोक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। परंतु उन्होंने उसे उद्दण्डता के कारण मारा था। शिशुपाल ने कहा, “अशोक! तुमने एक राजकर्मचारी की हत्या की है। मैं तुम्हारे वध की आज्ञा देता हूँ।”

प्रश्न 3.
लोग शिशुपाल के किस न्याय पर मुग्ध हो गए?
उत्तर
जब न्यायमंत्री ने खड़े होकर कहा, “महाशय! यह सच है कि एक राजकर्मचारी की हत्या की गई है। उसका दंड अवश्यंभावी है। परंतु शास्त्रों में राजा को ईश्वर माना गया है। उसे ईश्वर ही दंड दे सकता है। यह काम न्यायमंत्री की शक्ति के बाहर है, अतएव मैं आज्ञा देता हूँ कि महाराज को चेतावनी देकर छोड़ दिया जाए और उनकी मूर्ति फाँसी पर लटकाई जाए जिससे लोगों को शिक्षा मिले।”न्यायमंत्री का जय-जयकार हुआ। लोग इस न्याय पर मुग्ध हो गए।

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प्रश्न 4.
शिशुपाल और महाराज अशोक में तुम किसे श्रेष्ठ समझते हो और क्यों?
उत्तर
शिशुपाल और महाराज अशोक में हम शिशुपाल को श्रेष्ठ समझते हैं। यह इसलिए कि उसमें निष्पक्ष न्याय करने की योग्यता थी। वह अपराधी सिद्ध होने पर सम्राट अशोक को भी फाँसी की सजा देने से नहीं हिचकता है। वह परम न्यायी है। उसे न्याय के सिवाय और कुछ नहीं दिखाई देता है जबकि सम्राट अशोक न्याय के नाम पर क्रोधित हो जाते हैं। लेकिन वह निडर होकर अपने न्याय पर ही डटा रहता है।

प्रश्न 5.
सुदर्शन-लिखित कहानी ‘न्यायमंत्री’ का प्रतिपाय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
न्यायमंत्री’ शीर्षक कहानी महान कथाकार सुदर्शन की एक श्रेष्ठ और चर्चित कहानी है। इस कहानी में यह बतलाने का प्रयास किया गया है कि सम्राट अशोक के शासनकाल में शिशुपाल एक निर्धन ब्राह्मण था। इसके साथ ही वह एक न्यायप्रिय, निर्भीक तथा लोकप्रिय व्यक्ति भी था। शिशुपाल के यहाँ अतिथि के रूप में रहकर सम्राट अशोक ने उसकी उस अद्भुत योग्यता को परखा। उससे प्रभावित होकर उसे न्यायमंत्री के पद पर नियुक्त किया। उसने न्यायमंत्री बनते ही राज्य में सुख-शांति का वातावरण फैला दिया। अपने न्याय के बल पर उसने एक परिवार की रक्षा करते पहरेदार की हत्या के आरोप में सम्राट अशोक को ही दोषी सिद्ध कर दिया। फिर उन्हें मृत्युदंड के रूप में सजा सुना दिया। उसकी न्यायप्रियता और राज्यभक्ति वर्तमान समय में भी अनुकरणीय है।

न्यायमंत्री लेखक-परिचय

प्रश्न
श्री तुदर्शन का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश झलिए।
उत्तर
श्री सुदर्शन प्रेमचंदकालीन कहानीकारों में एक प्रमुख कहानीकार हैं।

जीवन-परिचय-श्री सुदर्शन जी का असली नाम पंडित बदरीनाथ था। आपका जन्म सन् 1896 ई. में स्यालकोट में हुआ था। आपने हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू जादि भाषाओं का सम्यक अध्ययन किया। आपकी प्रवृत्ति लेखन की ओर आरंभ से ही थी। प्रेमचंद की तरह आपने उर्दू के बाद हिंदी में कच्ची उम्र में ही लिखना शुरू किया था।

रचनाएँ-‘तीर्थ-यात्रा’, ‘पनघट’, ‘फूलवती’, ‘भाग्यचक्र’, ‘सिकंदर’ आदि आपकी लोकचर्चित रचनाएँ हैं। इसके अतिरिक्त आपने नाटक और बाल-साहित्य भी रचा है।

भाषा-शैली-श्री सुदर्शन जी की भाषा-शैली सरस और प्रवाहमयी है, आपकी भाषा शैली संबंधित निम्नलिखित विशेषताएँ हैं

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1. भाषा-श्री सुदर्शनजी की भाषा में उर्दू-फारसी और अरबी के प्रचलित शब्द स्थान-स्थान पर दिखाई देते हैं। उसमें जगह-जगह कहावतों और मुहावरों के भी प्रयोग हुए हैं। इससे आपकी भाषा सुबोध भाषा कही जा सकती है।

2. शैली-श्री सुदर्शन जी की शैली में बोधगम्यता नामक विशिष्ट गुण है। वह सर्वत्र रोचक और हदयस्पर्शी है। मार्मिकता उसकी प्रमुख पहचान है। स्थान-स्थान पर उद्धरणों और कथा-सूत्रों को प्रयुक्त करके विषय को स्पष्ट करने के प्रयास अधिक आकर्षक लगते हैं। महत्त्व-श्री सुदर्शनजी का स्थान मुंशी प्रेमचंद के बाद है ये उनके अनुवर्ती हैं, उर्दू से हिंदी में लिखने वाले आप मुंशी प्रेमचंद के बाद सर्वप्रमुख हैं। कथा-साहित्य में आपने प्रेमचंद के बाद अत्यधिक भूमिका निभाई है।

न्यायमंत्री कहानी का सारांश

प्रश्न
श्री सुदर्शन लिखित कहानी ‘न्यायमंत्री’ का तारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
श्री सुदर्शन लिखित कहानी न्यायमंत्री एक शिक्षाप्रद और प्रेरणादायक कहानी है। इस कहानी का सारांश इस प्रकार है आज से 2500 साल पहले बुद्ध गया नामक गाँव में एक बहुत गरीब शिशुपाल नामक ब्राह्मण रहता था। उसके यहाँ एक परदेशी रहा। उस परदेशी की शिशुपाल ने यथाशक्ति आदर-सत्कार किया। उससे वह परदेशी बहुत खुश था। उसने उसकी खूब प्रशंसा की। उससे उसने यह भी कहा-“मुझे ख्याल भी न था कि गोबर में फूल खिलाहुआ है। महाराज अशोक को पता लग जाए तो कोई बड़ी-सी ऊँची पदवी पर नियुक्त कर दें।”

शिशुपाल ने उस परदेशी की बातें सुनकर मुस्कुरा दिया। कुछ देर बाद उसने उस परदेशी से कहा, “आजकल के बढ़ रहे अन्याय को देखकर मेरा रक्त उबलने लगता है। अगर मुझे अवसर मिले तो कोई अन्याय नहीं होने दूंगा और कोई अपराधी दंड से नहीं बचेगा।” परदेशी ने हँसते हुए कहा, “यदि मैं अशोक होता तो आपकी इच्छा पूरी कर देता।” . दूसरे दिन महाराज अशोक ने जब शिशुपाल को दरबार में बुलाया तो लोगों ने अशोक की कठोरता-निर्दयता को याद कर यह समझ लिया कि अब शिशुपाल जीवित नहीं लौटेगा।

शिशुपाल अपने पुत्र-स्त्री को समझाकर पाटलीपुत्र पहुँचा तो उसके मन में तरह-तरह की आशका होने लगी। उसे यह भी आशंका हुई कि कहीं वह परदेशी ही हो, यह उसी की लगाई हुई हो। इस प्रकार की आशंकाओं से उसका कलेजा धड़कने लगा। उसी समय महाराज अशोक ने राजकीय ठाठ से कमरे में आकर उससे पूछा कि क्या उसने उसे पहचान लिया? उसने कहा कि उसे पता होता कि वही महाराज हैं, तो वह उतनी स्वतंत्रता से बात नहीं करता। महाराज ने उससे कहा कि उसने कहा था कि उसे अवसर दिया जाए तो वह न्याय का डंका बजा देगा। महाराज ने उससे आगे कहा कि इसके लिए अब उसे एक परीक्षा देनी होगी। कल प्रातः से वह न्यायमंत्री के रूप में कार्य करेगा। उसके अधीन पुलिस अधिकारी होंगे। उसका उत्तरदायित्व पाटलीपुत्र में शांति रखने का होगा। यह देखा जाएगा कि वह स्वयं को किस प्रकार सफल शासक सिद्ध करता है। एक माह बीतते ही न्यायमंत्री के रूप में शिशुपाल ने अपने कड़े शासन की चारों ओर धूम मचा दी। इससे नगर की दशा में आकाश-पाताल का अंतर पड़ गया।

एक रात को एक अमीर ने एक विशाल भवन के द्वार को खटखटाकर खुलवाना चाहा, लेकिन उसके अंदर से किसी स्त्री ने खोलने से मना कर दिया। उसने उस स्त्री को धमकाया तो उसने उससे कहा कि शिशुपाल का राज्य है। कोई किसी को तंग नहीं कर सकता। लेकिन उस अमीर ने उसकी एक न सुनी और तलवार निकालकर दरवाजे पर आक्रमण कर दिया। अचानक आकर एक पहरेदार ने उसका हाथ थामकर उसे फटकारा। पूछने पर उस पहरेदार ने उसे बताया कि उसे न्यायमंत्री ने नियुक्त किया है। उसने यह प्रण किया है कि उसके तन में जब तक प्राण और खून की अंतिम बूँद है, वह अपने कर्त्तव्य से पीछे नहीं हटेगा। इसलिए अगर इस समय महाराज अशोक भी आ जाएँ तो भी वह नहीं टलेगा। उस अमीर ने उसकी बातों को अनसुना कर उस पर तलवार लेकर झपटा। उसका सामना करते हुए वह पहरेदार मारा गया। उसकी लाश को एक ओर करके वह अमीर वहाँ से भाग निकला।

इस घटना को सुनकर सब हैरान थे कि शिशुपाल के शासन में ऐसी घटना! शिशु की नींद हराम हो गई। वे खाना-पीना सब भूलकर उस घातक का पता न लगा सके। महाराज उनसे बार-बार पूछते-“घातक पकड़ा गया…कब तक पकड़ा जाएगा।” न्यायमंत्री उन्हें तसल्ली देते-“जल्दी ही पकड़ लिया जाएगा।” एक दिन महाराज ने क्रोध में आकर यह चेतावनी दे दी, “तुम्हें तीन दिन की अवधि दी जाती है। यदि इस बीच घातक न पकड़ा गया तो तुम्हें फाँसी दे दी जाएगी।” इस समचार से पूरे नगर में

हलचल मच गई। तीसरे दिन आने पर शिशुपाल नगर के घने बाजार में घूम रहे थे। एक स्त्री ने उन्हें खिड़की से देख लिया। उसने उन्हें अंदर बलाकर उस बीती घटना के बारे में सब कुछ बता दिया। दूसरे दिन दरबार में आते ही महाराज अशोक के पछने पर शिशुपाल ने कहा कि घातक का पता लग गया है और वह घातक तुम हो। तुम पर पहरेदार की हत्या का अपराध है। तुम इसका क्या उत्तर देते हो? महाराज अशोक ने कहा कि वह उइंड था। इसलिए उन्होंने उसको मार डाला। न्यायमंत्री शिशुपाल ने उन्हें एक राजकर्मचारी का वध करने के अपराध में उनके वध की आज्ञा दी।

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उसे सुनकर लोगों ने शिशुपाल को गाली दी। लेकिन अशोक ने उन्हें शांत रहने का संकेत किया। अशोक ने उपेक्षापूर्वक कहा कि वे इस आज्ञा के विरुद्ध कछ नहीं बोल सकते। न्यायमंत्री के आदेश पर एक मनुष्य अशोक की सोने की मूर्ति लेकर उपस्थित हुआ। न्यायमंत्री ने खड़े होकर कहा, “महाशय! यह सच है कि राजकर्मचारी की हत्या की गई है। उसका दंड अवश्यंभावी है। परंतु शास्त्रों में राजा को ईश्वर माना गया है। ईश्वर ही दंड दे सकता है। यह काम न्यायमंत्री की शक्ति से बाहर है। अतएव मैं आज्ञा देता हूँ कि महाराज को चेतावनी देकर छोड़ दिया जाए और उनकी मूर्ति को फाँसी दे दी जाए, जिससे लोगों को शिक्षा मिले।” इसे सुनकर सभी ने न्यायमंत्री की जय-जयकार की।

रात को न्यायमंत्री ने राजमहल में जाकर अशोक को उसकी अंगठी और मद्रा देते हुए अपने गाँव वापिस जाने की बात कही। अशोक ने उसे सम्मानभरी आँखों से देखते हुए कहा कि अब यह संभव नहीं है। वह उसके साहस को नहीं भूल सकता है। दूसरा. इस पद के योग्य उसे कोई नहीं दिखाई देता।

न्यायमंत्री संदर्भ-प्रसंग सहित व्याख्या

गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या, अर्थ-ग्रहण संबंधी व विषय-वस्तु पर आधारित प्रश्नोत्तर

1. महाराज ने सिर झुका दिया। इस समय उनके हृदय में ब्रह्मानंद का समुद्र लहरें मार रहा था। सोचते थे, यह मनुष्य स्वर्ण है, जो अग्नि में पड़कर कुंदन हो गया। कहता था मेरा न्याय अपनी पूम मचा देगा, यह वचन झूठा न था। इसने अपने कहने की लाज रख ली है। ऐसे ही मनुष्य होते हैं जिन पर जातियाँ अभिमान करती हैं और जिन पर अपना तन-मन निष्ठावर करने को उद्धृत हो जाती हैं।

शब्दार्थ-ब्रह्मानंद-ब्रह्म का आनंद । लाज-इज्जत। निछावर-बलिदान।

संदर्भ-प्रस्तुत गद्यांश महाकथाकार श्री सुदर्शन द्वारा लिखित कहानी ‘न्यायमंत्री’

प्रसंग-इस गद्यांश में कहानीकार ने इस तथ्य पर प्रकाश डालना चाहा है कि जब शिशुपाल ने अपराधी का पता लगा लिया और यह पाया कि अपराधी स्वयं सम्राट अशोक ही हैं तो शिशुपाल ने अपराधी होने के कारण उन्हें फाँसी की सजा दे दी। इस पर सम्राट अशोक की क्या प्रतिक्रिया हुई।

व्याख्या-जब फाँसी की सजा को न्यायमंत्री शिशुपाल ने सुनाया तब सम्राट अशोक का सिर झुक गया। उस समय उनके हृदय में स्वर्ग के आनंद की लहर उठ रही थी। ऐसा इसलिए कि उन्हें अपने एक सच्चे और निर्भीक न्यायमंत्री का न्याय देखकर आनंद आ रहा था। वे मन-ही-मन सोच रहे थे कि शिशुपाल वास्तव में सच्चा स्वर्ण-मानव था जो कत्र्तव्यरूपी अग्नि में पड़कर शुद्ध हो गया था। वह कहा करता था कि उसके न्याय की धूम मचेगी यह बात निःसंदेह सच ही निकली। उसने जो कुछ कहा था उसको पूरा कर दिया। शिशुपाल जैसे मनुष्य जो सच्चे और साहसी होते हैं उन पर आने वाली पीढ़ियाँ गर्व करती हैं और ऐसे ही लोगों पर अपना तन-मन-धन न्यौछावर करने के लिए वे तत्पर भी हो उठती हैं।

विशेष-

  1. सत्य और निष्पक्ष न्याय के महत्त्व को प्रदर्शित किया गया है।
  2. भाषा सरल और स्पष्ट है।
  3. ‘धूम मचाना’ मुहावरे का सार्थक प्रयोग है।
  4.  शैली सुबोध है।
  5. संपूर्ण अंश प्रेरणादायक है।

1. गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) महाराज ने सिर क्यों झुका लिया?
(ii) महाराज के हृदय में ब्रह्मानंद का समुद्र लहरें क्यों मार रहा था? .
उत्तर
(i) महाराज ने सिर झुका लिया। यह इसलिए कि उन्हें न्यायमंत्री शिशुपाल ने अपराधी सिद्ध कर दिया था। उसे सिर झुकाकर स्वीकार कर लेना उन्होंने अपना कर्तव्य समझ लिया था।
(ii) महाराज के हृदय में ब्रह्मानंद का समुद्र लहरें मार रहा था। यह इसलिए कि उनसे शिशुपाल ने कहा था कि उसका न्याय धूम मचा देगा तो उसने आज सचमुच यह कर दिखाया है। इस प्रकार उसने उनको झूठे वचन न देकर उनके विश्वास को कायम रखा था।

2. गद्यांश पर आधारित विषय-वस्त से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न
(i) जातियाँ किन पर अभिमान कर अपना तन-मन निछावर करने को उद्यत हो जाती हैं?
(ii) उपर्युक्त गयांश का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर
(i) जातियाँ कथनी-करनी में अंतर न रखने वालों पर अपना तन-मन निछावर करने को उद्यत हो जाती हैं।
(ii) उपर्युक्त गद्यांश का मुख्य भाव है-किसी को दिए गए वचन को झूठा न होने देना। किसी भी परिस्थिति में अपने कहने की लाज रखना।

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भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 24 बुन्देलखण्ड केशरी-महाराजा छत्रसाल प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 24 Bundelkhand Kesari Maharaja Chhatrasal Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 24 Bundelkhand Kesari Maharaja Chhatrasal Questions and Answers

बोध प्रश्न

प्रश्न 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए

(क) महाराजा छत्रसाल किस नाम से विख्यात हैं?
उत्तर
महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड केसरी’ के नाम से विख्यात हैं।

(ख) महाराजा छत्रसाल का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर
महाराजा छत्रसाल का जन्म ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया, संवत् सत्रह सौ छह (1706) अर्थात् 4 मई सन् 1649 ई. को टीकमगढ़ जिले के मोर पहाड़ी नामक स्थान पर हुआ था।

(ग) वीर चम्पतराय आजीवन किसका विरोध करते रहे?
उत्तर
महाराजा छत्रसाल के पिता वीर चम्पतराय आजीवन मुगल शासक शाहजहाँ और औरंगजेब के धर्मान्ध शासन और बहुसंख्यक प्रजा के प्रति पक्षपातपूर्ण नीतियों का विरोध करते

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(घ) बालक छत्रसाल में कौन-कौन से गुण विद्यमान थे?
उत्तर
बालक छत्रसाल में साहस, शौर्य, आत्मविश्वास, वीरता और निर्भयता के गुण कूट-कूट कर भरे थे।

(ङ) घोड़े को ‘भले भाई’ की संज्ञा क्यों दी गई ?
उत्तर
देवगढ़ युद्ध के दौरान छत्रसाल बुरी तरह घायल हो । गए थे। उनका प्यारा घोड़ा रात-भर उनकी रक्षा करता रहा। दूसरे दिन छत्रसाल के भाई अंगद राय की पहचान करने के बाद ही घोड़े ने उन्हें छत्रसाल के शिविर में जाने दिया। स्वस्थ होने पर छत्रसाल ने अपने घोड़े को भले भाई’ की उपाधि दी।

(च) छत्रपति शिवाजी ने वीर छत्रसाल को कैसे प्रेरित किया ?
उत्तर
छत्रपति शिवाजी ने वीर छत्रसाल को स्वाधीनता का मंत्र और अपनी तलवार देकर बुन्देलखण्ड को स्वतंत्र कराने के लिए प्रेरित किया।

(छ) वीर छत्रसाल ने अपनी सेना कैसे तैयार की?
उत्तर
वीर छत्रसाल के पास साधनों का घोर अभाव था। संगी-साथी भी कम ही थे। उन्होंने अपनी माता के आभूषणों को बेचकर पाँच घोड़ों और पच्चीस सैनिकों की एक छोटी-सी सेना तैयार की। उनकी इस सेना में सभी वर्गों के लोग थे।

(ज) स्वामी प्राणनाथ ने महाराजा छत्रसाल को आशीर्वाद देते हुए क्या कहा ?
उत्तर
स्वामी प्राणनाथ ने छत्रसाल को आशीर्वाद देते हुए कहा
“छत्ता तेरे राज में, धक-धक धरती होय। जित-जित घोड़ा मुख करे, तित-तित फतै होय॥”

(झ) महाराजा छत्रसाल की शासन व्यवस्था का वर्णन कीजिए।
उत्तर
महाराजा छत्रसाल ने प्रजा की सुख-शान्ति और समृद्धि के लिए अनेक प्रयास किए। उन्होंने न्याय व्यवस्था को सरल बनाने के लिए पंचायती व्यवस्था की स्थापना की। वे अपराधियों को कठोर दण्ड देते थे। जिससे उनके राज्य में अपराध होना कम हो गए। उनके राज्य में बच्चे, बूढ़े और महिलाएँ निर्भीकतापूर्वक कहीं भी आ-जा सकते थे।

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प्रश्न 2.
खाली स्थान भरिए

(क) महाराजा छत्रसाल ने ………… में ‘भले भाई’ का स्मारक बनवाया।
(ख) बुन्देलखण्ड की ………… भूमि भी इस संग्राम से अछूती नहीं थी।
(ग) स्वामी प्राणनाथ ………… के गुरु थे।
(घ) छत्रपति शिवाजी ने ……….. का मंत्र दिया।
(ङ) वीर छत्रसाल ने अपने दुश्मनों के …….दिए।
उत्तर
(क) धुबेला
(ख) वीर प्रसूता
(ग) महाराजा छत्रसाल
(घ) स्वाधीनता
(ङ) बके छुड़ा।

प्रश्न 3.
दिए गए उत्तरों में से सही उत्तर छाँटकर लिखिए
(क) महाराजा छत्रसाल ने पालकी में लगाकर सम्मान बढ़ाया:
(अ) भूषण का
(ब) जगनिक का
(स) सेनापति का।
उत्तर
(अ) भूषण का

(ख) महाराजा छत्रसाल की समाधि स्थित है:
(अ) पन्ना में
(ब) धुबेला में
(स) महेबा में।
उत्तर
(ब) धुबेला में

(ग) वीर छत्रसाल का जन्म हुआ था :
(अ) मोर पहाड़ी पर
(ब) गोर पहाड़ी पर
(स) मड़ोर पहाड़ी पर।
उत्तर
(अ) मोर पहाड़ी पर

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भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों को वाक्य में प्रयोग कीजिए
स्वाधीन, सम्मान, समृद्धि, शौर्य, ओज, निर्भय, चुनौती, उत्तरदायी।
उत्तर
(क) स्वाधीन-छत्रसाल ने स्वाधीन पन्ना राज्य की स्थापना की।
(ख) सम्मान-छत्रसाल के दरबार में कवियों को पूरा सम्मान मिलता था।
(ग) समृद्धि-छत्रसाल ने प्रजा की सुख-शान्ति और समृद्धि के लिए अनेक प्रयत्न किए।
(घ) शौर्य-बुन्देलखण्ड में आज भी छत्रसाल की शौर्य और वीरता के गीत गाए जाते हैं।
(ङ) ओज-धुबेला में स्थित छत्रसाल का समाधिस्थल आज भी उनके शौर्य और ओज का स्मरण करा रहा है।
(च) निर्भय-छत्रसाल के राज्य में सभी लोग निर्भय होकर रहते थे।
(छ) चुनौती-छत्रसाल ने मुगलों को चुनौती देते हुए अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए युद्ध किया।
(ज) उत्तरदायी-छत्रसाल ने अपने माता-पिता की मृत्यु के उत्तरदायी विश्वासघातियों को दण्डित किया।

प्रश्न 2.
‘प्र’ उपसर्ग लगाकर बनने वाले तीन शब्द लिखिए।
उत्तर

  1. प्रसूता
  2. प्रहार
  3. प्रसाद।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों में आए मूल शब्द और प्रत्यय शब्दांश को अलग-अलग लिखिए
वीरता, अछूती, जागीरदार, मार्मिक, उत्तरदायी।
उत्तर
(क) वीरता – वीर + ता
(ख) अछूती – अछूत + ई
(ग) जागीरदार – जागीर + दार
(घ) मार्मिक – मर्म + इक
(ङ) उत्तरदायी – उत्तर + दाई।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों को उनके सामने दिए गए काल के अनुसार बदलिए
(क) महाराज छत्रसाल का समाधिस्थल उनके शौर्य का स्मरण दिला रहा है। (भविष्यकाल)
(ख) वे भारत के वीर सपूत थे। (वर्तमानकाल)
(ग) शत्रु सैनिक जान बचाकर भागे। (भूतकाल)
उत्तर
(क) महाराजा छत्रसाल का समाधिस्थल उनके शौर्य का स्मरण दिलाएगा।
(ख) वे भारत के वीर सपूत हैं।
(ग) शत्रु सैनिक जान बचाकर भाग गए ।

प्रश्न 5.
संधि विच्छेद कीजिएअत्याचार, स्वाधीन, इच्छानुसार, आत्मोत्सर्ग, सहायतार्थ।
उत्तर
(क) अत्याचार = अति + आचार।
(ख) स्वाधीन = स्व + आधीन।
(ग) इच्छानुसार = इच्छा + अनुसार।
(घ) आत्मोत्सर्ग = आत्मा + उत्सर्ग।
(ङ) सहायतार्थ = सहायता + अर्थ।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखिए और वाक्य में प्रयोग कीजिए
दो-दो हाथ करना, छक्के छुड़ाना, नाकों चने चबाना, लोहा लेना।
उत्तर
(क) दो-दो हाथ करना – मुकाबला करना। वाक्य प्रयोग-छत्रसाल मुगलों से दो-दो हाथ करने से पहले उनकी रणनीति समझना चाहते थे।
(ख) छक्के छुड़ाना – निरुत्साह करना। वाक्य प्रयोग-देवगढ़ के युद्ध में छत्रसाल ने दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए।
(ग) नाकों चने चबाना – तंग करना। वाक्य प्रयोग-छत्रसाल ने मुगल सत्ता को नाकों चने चबाने के लिए विवश कर दिया था।
(घ) लोहा लेना – युद्ध करना, लड़ना। वाक्य प्रयोग-वीर दुर्गादास राठौर मुगल सत्ता को चुनौती देकर अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए लोहा ले रहे थे।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से खोजकर लिखिए
प्रसूता, धरोहर, अस्त्र, शस्त्र, क्षति, ललकार, आत्मोत्सर्ग, पारावार, स्मारक, सिपहसालार, आधिपत्य, प्रजावत्सल, फत्तै (फतह), राजी, रैयत, ताजी, बार, बाँकौ।
उत्तर
‘शब्दकोश’ शीर्षक का अवलोकन करें।

बुन्देलखण्ड केशरी-महाराजा छत्रसाल परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या

1. देवगढ़ विजय में छत्रसाल के पुरुषार्थ को कोई महत्व नहीं दिए जाने पर छत्रसाल ने राजा जयसिंह का साथ छोड़ दिया। अब छत्रसाल का उद्देश्य भी पूरा हो गया था। उनका अगला ध्येय अपनी मातृभूमि से मुगलों के आधिपत्य को समाप्त करना था। इस कार्य में सफलता पाने के लिए छत्रसाल ने छत्रपति शिवाजी से भेंट की। छत्रपति ने उन्हें स्वाधीनता का मंत्र और अपनी तलवार देकर बुन्देलखण्ड में स्वतंत्रता का अलख जगाने भेज दिया।

सन्दर्भ-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘भाषा भारती’ के ‘बुन्देलखण्ड केसरी-महाराजा छत्रसाल’ नामक पाठ से अवतरित है। यह एक संकलित रचना है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में महाराजा छत्रसाल द्वारा मुगलों के चंगुल से अपनी मातृभूमि को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से छत्रपति शिवाजी से भेंट करने का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-जयपुर के राजा जयसिंह की सेना में छत्रसाल एक वीर योद्धा थे। उन्होंने राजा जयसिंह के साथ अनेक युद्धों में भाग लिया एवं अपनी वीरता का परिचय दिया। देवगढ़ की विजय में भी छत्रसाल ने बड़ी बहादुरी का परिचय देते हुए युद्ध किया और देवगढ़ पर विजय प्राप्त की। परन्तु राजा जयसिंह द्वारा छत्रसाल की वीरता एवं बहादुरी को कोई महत्व न दिए जाने के कारण छत्रसाल ने राजा जयसिंह का साथ छोड़ दिया। वैसे भी जिस उद्देश्य के लिए छत्रसाल राजा जयसिंह की सेना में सम्मिलित हुए थे, वह उद्देश्य अब पूरा हो गया था। अब उनका अगला उद्देश्य मुगलों के चंगुल से अपनी मातृभूमि को स्वतंत्र कराना था। परन्तु यह कार्य इतना आसान नहीं था। इस उद्देश्य में सफलता प्राप्त करने के लिए उनका छत्रपति शिवाजी से मिलना और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करना आवश्यक था। अतः छत्रसाल ने शिवाजी महाराज से भेंट की। भेंट होने पर शिवाजी ने छत्रसाल को स्वतंत्रता प्राप्त करने हेतु मंत्र दिया और अपनी तलवार उन्हें उपहारस्वरूप देकर स्वतंत्रता की ज्योति जलाने के लिए भेज दिया।

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2. स्वतंत्र पन्ना की स्थापना और राज्य विस्तार के बाद उन्होंने प्रजा की सुख-शान्ति और समृद्धि के लिए प्रयत्न किए। स्वामी प्राणनाथ के निर्देश पर पन्ना राज्य में हीरों की खदानों की खोज करवाई। उन्होंने न्याय व्यवस्था को सरल बनाने के लिए पंचायती व्यवस्था स्थापित की। वे अपराधियों को कठोर दण्ड देते थे जिससे उनके राज्य में अपराध होना कम हो गए। उनके शान्ति पूर्ण राज्य में बच्चे-बूढ़े और स्त्रियाँ निर्भीकतापूर्वक कहीं भी आ-जा सकते थे। महाराज छत्रसाल जैसे तलवार के धनी थे वैसे ही कशल और प्रजावत्सल शासक भी

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में महाराजा छत्रसाल की शासन व्यवस्था का प्रभावपूर्ण वर्णन किया गया है।

व्याख्या-महाराजा छत्रसाल द्वारा स्वतंत्र राज्य की स्थापना करने और अपने राज्य का विस्तार करने के बाद अपनी प्रजा की सुख-शान्ति तथा समृद्धि के अनेक प्रयास किए गए। अपने गुरु राज्य में अपराध होना कम हो गए। उनके शान्ति पूर्ण राज्य में बच्चे-बूढ़े और स्त्रियाँ निर्भीकतापूर्वक कहीं भी आ-जा सकते थे। महाराज छत्रसाल जैसे तलवार के धनी थे वैसे ही कशल और प्रजावत्सल शासक भी

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश में महाराजा छत्रसाल की शासन व्यवस्था का प्रभावपूर्ण वर्णन किया गया है।

व्याख्या-महाराजा छत्रसाल द्वारा स्वतंत्र राज्य की स्थापना करने और अपने राज्य का विस्तार करने के बाद अपनी प्रजा की सुख-शान्ति तथा समृद्धि के अनेक प्रयास किए गए। अपने गुरु स्वामी प्राणनाथ के आदेश पर छत्रसाल ने पन्ना राज्य में हीरों की खदानों की खोज का काम शुरू किया। महाराजा छत्रसाल ने अपने राज्य में न्याय व्यवस्था को आसान बनाने के लिए पंचायती व्यवस्था की स्थापना की। उनके राज्य में अपराधियों को कठोर दण्ड दिया जाता था जिसके फलस्वरूप राज्य में अपराधों की संख्या बहुत कम हो गई थी। उनके राज्य में प्रजा सुखी थी, बच्चे, बूढ़े और महिलाएं बिना किसी भय के स्वतंत्रतापूर्वक कहीं भी आ-जा सकते थे। महाराजा छत्रसाल जिस प्रकार एक कुशल योद्धा थे उसी प्रकार वह शासन व्यवस्था में भी निपुण एवं पारंगत थे। वे अपनी प्रजा के सुख का ध्यान रखने वाले शासक थे।

बुन्देलखण्ड केशरी-महाराजा छत्रसाल शब्दकोश

प्रसूता = जन्म देने वाली; धरोहर = अमानत, धाती, पूर्वजों से प्राप्त सांस्कृतिक विरासत; अस्त्र = हाथ से चलाने वाले हथियार; शस्त्र = फेंक कर चलाने वाले हथियार; क्षति = हानि; ललकार = चुनौती देना; आत्मोत्सर्ग = स्वयं का बलिदान; पारावार = असीम; स्मारक = स्मरण हेतु बनाई गई कोई रचना;
सिपहसालार = सेनापति; आधिपत्य = अधिकार; प्रजावत्सल = प्रजा से पुत्रवत प्रेम करने वाला; फत्तै (फतह) = जीत, विजय; राजी = प्रसन्न, सुखी;  रैयत = प्रजा; ताजी = सजग; चुस्त = दुरुस्त; बार = बाल; बाँकी = टेढ़ा।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

भाषा भारती कक्षा 7 पाठ 12 नींव का पत्थर प्रश्न उत्तर हिंदी

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Class 7th Hindi Bhasha Bharti Chapter 12 Neev ka Pathar Question Answer Solutions

MP Board Class 7th Hindi Chapter 12 Neev ka Pathar Questions and Answers

बोध प्रश्न

MP Board Class 7th Hindi Chapter 12 प्रश्न 1.
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(क) जूही के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता है’हँसना’। आपको जूही की हँसी से क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर
हँसना बहुत जरूरी है। जूही के चरित्र की यह बहुत बड़ी विशेषता है। जूही की हँसी सभी को प्रेरणा देती है कि वे मृत्यु से भी भयभीत नहीं हो सकेंगे। उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी हँसना चाहिए। इस प्रकार हम अपनी मंजिल की ओर बढ़ते जा सकते हैं।

(ख) “वीरता कलंकित न हो, सुशोभित हो” इसके लिए कौन-कौन से कार्य करना चाहिए?
उत्तर
वीरता तभी कलंकित होती है जब हम अपने कर्त्तव्य के पालन में पीछे रहते हैं। कर्त्तव्यपालन से मिलने वाली सफलता वीरता को सुशोभित करती है। इसलिए मातृभूमि की आजादी की रक्षा के काम में अडिग बना रहना चाहिए। मातृभूमि की सेवा हमारे बलिदान को चाहती है।

(ग) निम्नांकित के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए
(क) लक्ष्मीबाई
(ख) मुन्दर
(ग) तात्या।
उत्तर
(क) लक्ष्मीबाई – महारानी लक्ष्मीबाई अपनी मातृभूमि से बहुत प्रेम करती हैं। वे उसकी आजादी की रक्षा में अपना सर्वस्व लुटा देती हैं। वे आजादी के लिए लगातार लड़ती रहती हैं। दृढ़ प्रतिज्ञ लक्ष्मीबाई हँसते-हँसते आजादी की बलि वेदी पर स्वयं को न्योछावर कर देती हैं। देशभक्ति, जनसेवा और राष्ट्र सेवा के लिए सब कुछ त्यागने के लिए तत्पर रहती हैं।

(ख) मुन्दर – मुन्दर महारानी लक्ष्मीबाई की सहेली है। वह फिरंगियों (अंग्रेजों) के आगमन की सूचना पर व्याकुल हो उठती और चाहती है कि उन्हें एकदम वहाँ से खदेड़ देना चाहिए। वह आज्ञापालक और वीरता के गुणों से युक्त है। वह स्वराज्य की पुजारिन है।

(ग) तात्या – तात्या लक्ष्मीबाई के एक सहयोगी हैं। वे प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम (1857) के सेनानी हैं। वे मातृभूमि की सुरक्षा और स्वराज्य की नींव का आधार है। वे निर्भीक होकर शत्रु से लोहा लेते रहे।

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Class 7 Hindi Chapter 12 MP Board प्रश्न 2. निम्नांकित कथनों का आशय स्पष्ट कीजिए
(क) हम सब मिलकर या तो स्वराज्य प्राप्त करके रहेंगे या स्वराज्य की नींव का पत्थर बनेंगे।
(ख) सूर्य का तेज अनन्त सूर्य में विलीन हो गया।
उत्तर
(क) स्वराज्य प्राप्त करने में सफलता हम सब के सम्मिलित प्रयासों से सम्भव है। आजादी मिल भी सकती है। अन्यथा आजादी के लिए किये गये अपने प्रयासों के द्वारा स्वराज्य की नींव का पत्थर तो बन ही जायेंगे, जो आजादी के भवन को ऊँचा और मजबूत बनाने में सहायक होगा।

(ख) लक्ष्मीबाई की सेना का सेनापति रघुनाथ राव महारानी लक्ष्मीबाई के सर्वस्व त्याग पर कहता है कि लक्ष्मीबाई सूर्य जैसे तेज से युक्त ीं। उनका तेज सूर्य के कभी भी समाप्त न होने वाले तेज में विलीन हो गया। कहने का तात्पर्य यह है कि सूर्य के अन्तहीन तेज से स्वयं चूकने वाली वीरांगना अब उसी तेज में विलीन हो गयी और अमर हो गयी।

Class 7 Hindi Chapter 12 प्रश्न 3.
निम्नांकित कश्चन किसके द्वारा कहे गये
(क) स्वराज्य की लड़ाई स्वराज्य मिलने पर ही समाप्त हो सकती है, बाई साहब। (…… ने लक्ष्मीबाई से कहा।)
(ख) महारानी जी, विश्वास दिलाता हूँ कि आपकी पवित्र देह को छूने का साहस केवल पवित्र अग्नि ही कर सकेगी। (…… ने लक्ष्मीबाई से कहा।)
(ग) मैं किसी के लिए सरदार हो सकता हूँ, पर आपके लिए तो सेवक ही हूँ। (……… ने लक्ष्मीबाई से कहा।)
(घ) आज हमें स्वामिभक्त से ज्यादा देशभक्तों की आवश्यकता है। (ने जूही से कहा)
उत्तर
(क) (मुन्दर ने लक्ष्मीबाई से कहा।)
(ख) (रघुनाथ राव ने लक्ष्मीबाई से कहा।)
(ग) (तात्या ने लक्ष्मीबाई से कहा।)
(घ) (लक्ष्मीबाई ने जूही से कहा।)

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भाषा अध्ययन

MP Board Class 7 Hindi Chapter 12 प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों का शुद्ध उच्चारण कीजिए
अस्तबल, प्रतिज्ञा, रणभूमि, समर्पित, स्वराज्य।
उत्तर
शुद्ध उच्चारण के लिए विद्यार्थी लगातार इन शब्दों को पढ़ें और कोशिश करें कि ये शब्द सही रूप से उच्चारित हो रहे हैं या नहीं। अध्यापक महोदय की सहायता ले सकते हैं।

Class 7th Hindi Chapter 12 Question Answer प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए
विलासप्रियता, जनसेवक, स्वामिभक्त, मरहमपट्टी।
उत्तर
विलासप्रियता = विलासप्रियता राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करने में एक सबसे बड़ी बाधा है।
जनसेवक = जनसेवक ही स्वराज्य के सच्चे पहरेदार हैं।
स्वामिभक्त = स्वामिभक्त की अपेक्षा देशभक्त बनिए।
मरहमपट्टी = अनेक घायलों की मरहमपट्टी करके उनका इलाज किया।

Class 7th Hindi Chapter 12 प्रश्न 3.
सही शब्द पर सही (✓) का निशान लगाइए
(क) दुर्भाग्य, दुरभाग्य, र्दुभाग्य, दुभार्य।
(ख) लक्ष्मिबाई, लछमीबाई, लक्ष्मीबाई, लक्षमीबाई।
(ग) सुरक्षीत, सुरक्षित, सूरछित, सुरशित।
(घ) समीत, समरपित, समर्पित, स्मर्पित।
(ङ) युधघोस, युधघोष, युधघोश, युद्धघोष।
उत्तर
(क) दुर्भाग्य
(ख) लक्ष्मीबाई
(ग) सुरक्षित
(घ) समर्पित
(ङ) युद्धघोष।

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Class 7 Hindi Lesson 12 प्रश्न 4.
नीचे दिये गये शब्द समूहों का प्रयोग करते हुए प्रत्येक से एक-एक वाक्य बनाइए
(क) क्या से क्या हो गया ?
(ख) कहाँ से कहाँ पहुँच गई?
(ग) नहीं, नहीं।
(घ) कौन कहता है?
उत्तर
(क) सोचते थे कि इस वर्ष वह परीक्षा में सफल हो सकेगा, परन्तु वह तो असफल ही रहा। क्या से क्या हो गया ? यह तो सोचा ही नहीं था।
(ख) उसकी पुत्री एक साधारण छात्रा थी, परन्तु वह तो आई.ए.एस. में सफल हो गयी। देखो तो वह कहाँ से कहाँ पहुंच गई ?
(ग) राधा ने उसे अपने घर ठहरने के लिए आग्रह किया परन्तु वह तो नहीं, नहीं ही कहती रही।
(घ) कौन कहता है कि मैंने उसकी सहायता नहीं की है।

Bhasha Bharti Class 5 Chapter 12 प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रत्येक शब्द के दो-दो वाक्य छाँटकर लिखिए
कौन, कहाँ, कब, किसने, किसे।
उत्तर

  1. कौन कहता है, आप अकेली हैं, महारानी ?
    कौन सी बात की बाई साहब?
  2. कब हमने सोचा था, ऐसा भी होगा।
    कब क्या हो जाये, कह नहीं सकते।
  3. किसने ग्वालियर से झाँसी की ओर कूच किया ?
    किसने सम्मान पाया है ? देशभक्त ने या स्वामिभक्त ने।
  4.  मेरी सहायता की किसे है दरकार।
    उसने किसे सहायता के लिए वचन दिया।

Hindi Lesson 12 Class 7 प्रश्न 6.
दिए गए संवादों का हाव-भाव से वाचन कीजिए
रघुनाथ राव-महारानी, आपने सुना ?
लक्ष्मीबाई-क्या, रघुनाथ राव ?
जूही-क्या हुआ सरदार?
रघुनाथ राव-महारानी, जनरल यूरोज की सेना ने मुरार की सेना को हरा दिया।
जूही-(काँपकर) क्या पेशवा की सेना हार गई ?
उत्तर
इन संवादों को विशेष हाव-भाव से वाचन करने के लिए अपने आचार्य महोदय की सहायता ले सकते हैं।

Mp Board Class 7th प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों के विपरीतार्थी शब्द लिखिए
सफलता, दुर्भाग्य, आकाश, चेतन, दुर्बल, दुश्मन।
उत्तर
शब्द – विपरीतार्थी शब्द
सफलता – असफलता
दुर्भाग्य – सौभाग्य
आकाश – पाताल
चेतन – अचेतन
दुर्बल – सबल
दुश्मन – मित्र

भाषा भारती कक्षा 5 Solutions Chapter 12 प्रश्न 8.
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए
हिमालय अड़ जाना, नींद खुलना, पीठ दिखाना, कलेजे पर पत्थर रखना।
उत्तर
हिमालय अड़ जाना – जीवन में सफलता के मार्ग में कभी-कभी हिमालय अड़ जाता है।
नींद खुलना – मुरार की सेना पर अंग्रेजों की फौज के आक्रमण ने उनकी नींद खोल दी।
पीठ दिखाना – भारतीय सैनिक युद्धक्षेत्र में कभी भी पीठ नहीं दिखाते।
कलेजे पर पत्थर रखना – कलेजे पर पत्थर रखकर, उसने अपने प्राणप्रिय से वियोग प्राप्त किया।

भाषा भारती कक्षा 8 Solutions Chapter 12 प्रश्न 9.
निम्नलिखित शब्दों के समास विग्रह करते हुए समास के नाम लिखिए
देशभक्त, रणभूमि, पेड़-पौधे, वीरबाला, फूल-पत्ती, शुभ-अशुभ, युद्धघोष।
उत्तर
MP Board Class 7th Hindi Bhasha Bharti Solutions Chapter 12 नींव का पत्थर 1

नींव का पत्थर परीक्षोपयोगी गद्यांशों की व्याख्या 

1. स्वराज्य को आते देखती हूँ, परन्तु दूसरे ही क्षण मार्ग में हिमालय अड़ जाता है। जूही, मैंने प्रतिज्ञा की थी कि अपनी झाँसी नहीं दूंगी। लेकिन झाँसी हाथ से निकल गई। (अत्यन्त धीमे स्वर में) झाँसी हाथ से निकल गई जूही। (सहसा तीव्रतर होकर) नहीं, नहीं, झाँसी हाथ से नहीं निकली। मैं अपनी झाँसी नहीं दूंगी।

सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य-पुस्तक भाषा-भारती के ‘नींव का पत्थर’ नामक पाठ से ली गई हैं। इस पाठ के लेखक विष्णु प्रभाकर हैं।

प्रसंग-महारानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजी सेना के खिलाफ युद्ध कर रही हैं। वे झाँसी पर अंग्रेजों का अधिकार नहीं होने देंगी। वे अपनी आजादी के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं।

व्याख्या-महारानी लक्ष्मीबाई अपनी सखी जूही से कहती हैं कि वह एक क्षण तो आशावान हो उठती हैं कि वह स्वराज्य (आजादी) प्राप्त कर लेंगी। परन्तु दूसरे ही क्षण आजादी के मार्ग में बाधा आ खड़ी होती है। यह बाधा हिमालय पर्वत जैसी अति दुर्गम हो जाती है। लक्ष्मीबाई ने यह प्रतिज्ञा की हुई थी कि वह कभी भी अपनी झाँसी पर दुश्मनों का अधिकार नहीं होने देंगी। वह भावनाओं में खो जाती हैं और कहती हैं कि झाँसी उनके हाथों से निकल गई है, परन्तु एकदम ही वह अपनी प्रतिज्ञा को याद करके कह उठती हैं कि वह अपनी झाँसी को नहीं देंगी। झाँसी उनके हाथ से नहीं निकल सकती। वह कभी भी झाँसी पर शत्रुओं का अधिकार नहीं होने देंगी।

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2. मैं जानती हूँ कि मैं झाँसी लेकर रहूँगी, लेकिन क्या तुम नहीं जानती कि उस दिन बाबा गंगादास ने कहा था फिर मिट जाना, जब तक हम विलास-प्रियता को छोड़कर जन-सेवक नहीं बन जाते, तब तक स्वराज्य नहीं मिल सकता। वह मिल सकता है केवल सेवा, तपस्या और बलिदान से।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-महारानी लक्ष्मीबाई स्वराज्य को प्राप्त करने के लिए सेवा, तपस्या और बलिदान को महत्वपूर्ण मानती हैं।

व्याख्या-लक्ष्मीबाई को उनकी सखी जूही बताती है कि उनके साथ वे सभी (देशवासी) हैं। लक्ष्मीबाई इस बात को भली-भाँति जानती भी हैं कि पूरी जनता का सहयोग उनके साथ है। अत: वे झाँसी को फिर से अपने अधिकार में लेकर ही रहेंगी। लक्ष्मीबाई अपनी सखी से कहती हैं कि बाबा गंगादास का उपदेश तो वह जानती ही है। उन्होंने कहा था झाँसी (मातृभूमि) की आजादी के लिए हमें मर-मिट जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि हम जब तक विलासी बने रहेंगे, तब तक आम आदमी की सेवा करने वाले हम लोग नहीं हो सकते तथा आजादी को भी प्राप्त नहीं कर सकते। स्वराज्य को केवल सेवा के कार्यों से, तपस्या से और स्वयं को बलिदान करने की भावना से प्राप्त किया जा सकता है।

3. उन्होंने यह भी तो कहा था कि स्वराज्य प्राप्ति सेबढ़कर है, स्वराज्य की स्थापना के लिए भूमि तैयार करना; स्वराज्य की नींव का पत्थर बनना। सफलता
और असफलता देव के हाथ में है, लेकिन नींव का पत्थर बनने से हमें कौन रोक सकता है? वह हमारा अधिकार है।

सन्दर्भ-पूर्व की तरह।

प्रसंग-महारानी लक्ष्मीबाई की सहेली जूही अपने इस वार्तालाप में स्वराज्य स्थापना के लिए स्वराज्य की नींव का पत्थर बनने को अनिवार्य बतलाती है।

व्याख्या-महारानी लक्ष्मीबाई को जूही बाबा गंगादास के उपदेश के बारे में याद दिलाती हुई कहती है कि उन्होंने बतलाया था कि स्वराज्य को प्राप्त करने से भी बढ़कर यह जरूरी है कि स्वराज्य की स्थापना के लिए भूमि तैयार की जाये फिर स्वराज्य की नींव का ऐसा पत्थर जड़ा जाये कि उस पर आजादी के भवन का निर्माण होता चला जाये। उस आजादी को प्राप्त करने में जो भी सफलता और असफलता हाथ लगेगी, वह तो देवता के अधीन है, परन्तु आजादी की नींव का पत्थर बनने में हमारे लिए कोई भी बाधा नहीं डाल सकता। स्वराज्य को प्राप्त करना, हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है।

नींव का पत्थर शब्दकोश

निराशा = हताश, जो हर आशा छोड़ चुका है; फिरंगी = अंग्रेज; कूच = प्रयाण, प्रस्थान; रणभूमि = युद्ध क्षेत्र, कलंक = दाग, धब्या; मुलाहिजा = लिहाज, सम्मान; अस्तबल = घोड़े बाँधने का स्थान; व्यूह = जमावड़ा, युद्धभूमि में सैनिकों को विशेषरूप में खड़ा करना; कृतज्ञ = उपकार मानने वाला।

MP Board Class 7 Hindi Question Answer

MP Board Class 10th Special Hindi काव्य बोध

MP Board Class 10th Special Hindi काव्य बोध

1. काव्य की परिभाषा

‘छन्दबद्ध’ रचना काव्य कहलाती है। आचार्य विश्वनाथ ने काव्य को परिभाषित करते हुए लिखा है—’वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार, “कविता शेष सृष्टि के साथ हमारे रागात्मक सम्बन्धों की रक्षा और निवास का साधन है। वह इस जगत के अनन्त रूपों, अनन्त व्यापारों और अनन्त चेष्टाओं के साथ हमारे मन की भावनाओं को जोड़ने का कार्य करती है।”

काव्य के भेद-काव्य के दो भेद माने गये हैं-

  1. श्रव्य काव्य,
  2. दृश्य काव्य

(1) श्रव्य काव्य
जिस काव्य को पढ़कर या सुनकर आनन्द प्राप्त किया जाये,वह श्रव्य काव्य कहलाता है। श्रव्य काव्य के दो भेद माने गये हैं-

  1. प्रबन्ध काव्य,
  2. मुक्तक काव्य।

(क) प्रबन्ध काव्य-प्रबन्ध काव्य वह काव्य रचना कहलाती है जिसकी कथा शृंखलाबद्ध होती है। इसके छन्दों का सम्बन्ध पूर्वापर होता है। प्रबन्ध काव्य के दो प्रकार माने गये हैं-
(i) महाकाव्य,
(ii) खण्डकाव्य।

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(i) महाकाव्य-महाकाव्य में किसी महापुरुष के समस्त जीवन की कथा होती है। इसमें कई सर्ग होते हैं। मूल कथा के साथ प्रासंगिक कथाएँ भी होती हैं। महाकाव्य का प्रधान रस श्रृंगार, वीर अथवा शान्त होता है।

हिन्दी के प्रमुख महाकाव्य एवं उनके रचयिता-
MP Board Class 10th Special Hindi काव्य बोध img-1

(ii) खण्डकाव्य-खण्डकाव्य में जीवन का खण्ड चित्रण होता है। इसका नायक यशस्वी होता है। सीमित कलेवर में इसकी कथा अपने आप में पूर्ण होती है।

हिन्दी के प्रमुख खण्डकाव्य एवं उनके रचयिता-
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MP Board Class 10th Special Hindi काव्य बोध img-3

(ख) मुक्तक काव्य-मुक्तक काव्य में प्रत्येक छन्द स्वयं में पूर्ण होता है तथा पूर्वापर सम्बन्ध से मुक्त होता है। बिहारी सतसई के दोहे,कबीर की साखी मुक्तक काव्य हैं।

2. रस

रस की परिभाषा
जिसका आस्वादन किया जाये वही रस है। रस का अर्थ आनन्द है अर्थात् काव्य को पढ़ने, सुनने या देखने से मिलने वाला आनन्द ही रस है। रस की निष्पत्ति विभाव, अनुभाव, संचारी भाव के संयोग से होती है। रस काव्य की आत्मा माना गया है। रस के अंग

रस के चार अंग-
(i) स्थायी भाव,
(ii) विभाव,
(iii) अनुभाव,
(iv) संचारी भाव-माने गये हैं।

(i) स्थायी भाव-मानव हृदय में स्थायी रूप से विद्यमान रहने वाले भाव स्थायी भाव कहलाते हैं। स्थायी भावों की संख्या नौ-रति,हास,शोक,उत्साह,क्रोध, भय, घृणा, विस्मय एवं निर्वेद मानी गई है। कुछ विद्वान देव विषयक प्रेम और वात्सल्य भाव को स्थायी भाव मानते हैं।
(ii) विभाव-स्थायी भाव को जगाने वाले और उद्दीप्त करने वाले कारण विभाव कहलाते हैं। विभाव दो प्रकार के होते हैं—
(क) आलम्बन,
(ख) उद्दीपन।

(क) आलम्बन विभाव-जिस कारण से स्थायी भाव जाग्रत हो. उसे आलम्बन विभाव कहते हैं। जैसे-वन में शेर को देखकर डरने का आलम्बन विभाव शेर होगा।
(ख) उद्दीपन विभाव-जाग्रत स्थायी भाव को उद्दीप्त करने वाले कारण उद्दीपक विभाव कहे जाते हैं। जैसे वन में शेर देखकर भयभीत व्यक्ति के सामने ही शेर जोर से दहाड़ मार दे,तो दहाड़ भय को उद्दीप्त करेगी। अतः यह उद्दीपन विभाव होगी।

(iii) अनुभाव-स्थायी भाव के जाग्रत होने तथा उद्दीप्त होने पर आश्रय की शारीरिक चेष्टाएँ अनुभाव कहलाती हैं। जैसे वन में शेर को देखकर डर के मारे काँपने लगना, भागना आदि।

अनुभाव-

  1. कायिक,
  2. वाचिक,
  3. मानसिक,
  4. सात्विक तथा
  5. आहार्य-पाँच प्रकार के होते हैं।

(iv) संचारी भाव-जाग्रत स्थायी भाव को पुष्ट करने के लिए कुछ समय के लिए जगकर लुप्त हो जाने वाले भाव संचारी या व्यभिचारी भाव कहलाते हैं। जैसे वन में शेर को देखकर भयभीत व्यक्ति को ध्यान आ जाये कि आठ दिन पूर्व शेर ने एक व्यक्ति को मार दिया था। यह स्मृति संचारी भाव होगा। संचारी भावों की संख्या 33 मानी गई है।

रस नौ प्रकार के माने गये हैं-

  • शृंगार,
  • वीर,
  • शान्त,
  • करुण,
  • हास्य,
  • रौद्र,
  • भयानक,
  • वीभत्स एवं
  • अद्भुत।

कुछ विद्वान भक्ति एवं वात्सल्य को भी रस मानते हैं।
(1) श्रृंगार रस [2011]-श्रृंगार रस का स्थायी भाव रति है। नर और नारी का प्रेम पुष्ट होकर श्रृंगार रस रूप में परिणत होता है। श्रृंगार रस के दो भेद हैं-
(i) संयोग शृंगार,
(ii) वियोग शृंगार।

(i) संयोग शृंगार–जहाँ नायक-नायिका के मिलन,वार्तालाप, स्पर्श आदि का वर्णन है। वहाँ संयोग श्रृंगार होता है; जैसे-

“दूलह श्री रघुनाथ बने, दुलही सिय सुन्दर मन्दिर माहीं।
गावत गीत सबै मिलि सुन्दरि, वेद तहाँ जुरि विप्र पढ़ाहीं॥
राम को रूप निहारति जानकी, कंकन के नंग की परछाहीं।
याते सबै सुधि भूल गयी, कर टेकि रही पल टारत नाहीं॥”

यहाँ राम और सीता का प्रेम (रति) स्थायी भाव है। राम आलम्बन और सीता आश्रय हैं। नग में राम का निहारना, गीत आदि उद्दीपन हैं। कर टेकना,पलक न गिराना अनुभाव हैं। जड़ता, हर्ष,मति आदि संचारी भाव हैं।

(ii) वियोग शृंगार–जहाँ नायक-नायिका के वियोग का वर्णन हो वहाँ वियोग शृंगार होता है; जैसे-

“भूषन वसन विलोकत सिय के
प्रेम विवस मन कम्प, पुलक तनु नीरज-नयन नीर भये पिय के।”

यहाँ आलम्बन सीता तथा आश्रय राम हैं। सीता के आभूषण, वस्त्र आदि उद्दीपन हैं। कम्पन, पुलक,आँख में आँसू अनुभाव हैं। दर्द,स्मृति संचारी भाव हैं।

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(2) वीर रस युद्ध या कठिन कार्य करने के लिए जगा उत्साह भाव विभावादि से पुष्ट होकर वीर रस बन जाता है। इसका आलम्बन विरोधी होता है, शत्रु की गर्जना, रणभेरी आदि उद्दीपन हैं। हाथ उठाना, वीरता की बातें करना आदि अनुभाव और गर्व,उत्सुकता आदि संचारी भाव हैं; जैसे-

“सौमित्र से घनानन्द का, रव अल्प भी न सहा गया,
निज शत्रु को देखे बिना, तनिक उनसे न रहा गया।
रघुवीर का आदेश ले, युद्धार्थ वे सजने लगे,
रण वाद्य भी निर्घोष करके, धूम से बजने लगे।”

यहाँ मेघनाद आलम्बन तथा लक्ष्मण आश्रय हैं। मेघनाद का रव,रण वाद्य आदि उद्दीपन हैं। लक्ष्मण का युद्ध हेतु तैयार होना आदि अनुभाव और औत्सुक्य,अमर्ष आदि संचारी भाव हैं।

(3) शान्त रस-संसार की असारता, वस्तुओं से विरक्ति के कारण उत्पन्न निर्वेद भाव विभावादि से पुष्ट होकर शान्त रस के रूप में परिणत होता है; जैसे-

“मो सम कौन कुटिल खल कामी।
तुम सों कहा छिपी करुनामय सबके अंतरजामी।
जो तन दियौ ताहि बिसरायौ ऐसौ नोन हरामी।
भरि-भरि द्रोह विषयों को धावत, जैसे सूकर ग्रामी।
सुनि सतसंग होत जिय आलस, विषयनि संग बिसरामी।
श्री हरि-चरन छाँड़ि बिमुखनि की; निसदिन करत गुलामी।
पापी परम, अधम अपराधी, सब पतितनि मैं नामी।
सूरदास प्रभु अधम-उधारना सुनियै श्रीपति स्वामी॥”

यहाँ भक्त आश्रय तथा विषय वासना, संसार की असारता आलम्बन है। शरीर विस्मृत कर देना,सत्संग में आलस्य आदि उद्दीपन विभाव हैं। द्रोह भरकर विषय को धाना, गुलामी करना आदि अनुभाव और मति, वितर्क, विवोध आदि संचारी भाव हैं।

(4) करुण रस-प्रिय व्यक्ति वस्तु के विनाश या अनिष्ट की आशंका से जागे शोक स्थायी भाव का विभावादि से पुष्ट होने पर करुण रस का परिपाक होता है; जैसे- [2012]

“करि विलाप सब रोबहिं रानी।
महाविपति किमि जाइ बखानी।।
सुनि विलाप दुखद दुख लागा।
धीरज छूकर धीरज भागा॥”

इसमें रानियाँ आश्रय, राजा दशरथ की मृत्यु आलम्बन है। मृत्यु की सूचना उद्दीपन है। आँसू बहाना, रोना, विलाप करना, अनुभाव और विषाद, दैन्य, बेहोशी आदि संचारी भाव हैं।

(5) हास्य रस-विचित्र वेश-भूषा, विकृत आकार, चेष्टा आदि के कारण जाग्रत हास स्थायी भाव विभावादि से पुष्ट होकर हास्य रस में परिणत होता है; जैसे [2017]

“हँसि हँसि भजे देखि दूलह दिगम्बर को,
पाहुनी जे आवै हिमाचल के उछाह में।
कहै पद्माकर सु काहु सों कहै को कहा,
जोई जहाँ देखे सो हँसोई तहाँ राह में।।
मगन भएई हँसे नगन महेश ठाड़े,
और हँसे वेऊ हँसि-हँसि के उमाह में।
सीस पर गंगा हँसे भुजनि भुजंगा हँसे।
हास ही को दंगा भयो नंगा के विवाह में।”

यहाँ दर्शक आश्रय हैं तथा शिवजी आलम्बन हैं। उनकी विचित्र आकृति, नग्न स्वरूप आदि उद्दीपन हैं। लोगों का हँसना, भागना आदि अनुभाव तथा हर्ष, उत्सुकता, चपलता आदि संचारी भाव हैं।

(6) रौद्र रस-दुष्ट के अत्याचारों, अपने अपमान आदि के कारण जाग्रत क्रोध स्थायी भाव का विभावादि में पुष्ट होकर रौद्र रस रूप में परिपाक होता है; जैसे-

“श्रीकृष्ण के सुन वचन, अर्जन क्रोध से जलने लगा।
सब शोक अपना भूलकर, करतल युगल मलने लगा || [2009]
संसार देखे अब हमारे शत्रु रण में मृत पड़े।
करते हुए यह घोषणा, वे हो गए उठकर खड़े॥”

यहाँ अर्जुन आश्रय, अभिमन्यु के वध पर कौरवों का हर्ष आलम्बन है। श्रीकृष्ण के वचन उद्दीपन विभाव हैं। हाथ मलना, कठोर बोल,उठकर खड़ा होना, अनुभाव तथा अमर्ष,उग्रता, गर्व आदि संचारी भाव हैं।

(7) भयानक रस-किसी भयंकर व्यक्ति, वस्तु के कारण जाग्रत भय स्थायी भाव विभावादि के संयोग से भयानक रस रूप में परिणत होता है; जैसे-

“एक ओर अजगर सिंह लखि, एक ओर मृगराय।
विकल वटोही बीच ही, पर्यो मूरछा खाय।।”

यहाँ आश्रय वटोही तथा आलम्बन अजगर और सिंह हैं। अजगर एवं सिंह की डरावनी चेष्टाएँ उद्दीपन हैं। बटोही (राहगीर) का मूच्छित होना अनुभाव तथा स्वेद, कम्पन, रोमांच आदि संचारी भाव हैं।

(8) वीभत्स रस-घृणापूर्ण वस्तुओं के देखने या अनुभव करने के कारण जगने वाला जुगुप्सा (घृणा) स्थायी भाव का विभावादि के संयोग से वीभत्स रस रूप में परिपाक होता है; जैसे-

“सिर पर बैठो काग आँखि दोऊ खात निकारत।
खींचति जीभहिं स्यार अतिहि आनन्द उर धारत।।
गिद्ध जाँघ कहँ खोदि-खोदि के मांस उपारत।
स्वान अंगुरिन काटि के खात विरारत।।”

यहाँ युद्ध क्षेत्र या श्मशान आलम्बन तथा दर्शक आश्रय हैं। कौओं का आँख निकालना, स्यार का जीभ खींचना, गिद्ध का मांस नोंचना आदि उद्दीपन हैं। इन्हें देखने पर हृदय की व्याकुलता,शरीर का कम्पन आदि अनुभाव तथा मोह,स्मृति, मूर्छा आदि संचारी भाव हैं।

(9) अद्भुत रस-किसी असाधारण या अलौकिक वस्तु के देखने में जाग्रत विस्मय स्थायी भाव विभावादि के संयोग से अद्भुत रस में परिणत होता है; जैसे-

“अखिल भुवन चर-अचर सब, हरि मुख में लखि मातु।
चकित भई गद्-गद् वचन, विकसित दृग पुलकातु।।”

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यहाँ माँ यशोदा आश्रय तथा श्रीकृष्ण के मुख में विद्यमान सब लोक आलम्बन हैं। चर-अचर आदि उद्दीपन हैं। आँख फाड़ना,गद-गद स्वर,रोमांच अनुभाव तथा दैन्य,त्रास आदि संचारी भाव हैं।

(10) वात्सल्य रस-सन्तान के प्रति वात्सल्य भाव उपयुक्त विभाव, अनुभाव और संचारी भावों के सम्मिश्रण के परिणामस्वरूप जब आनन्द में परिणत हो जाता है, तब वहाँ वात्सल्य रस होता है। [2009, 10, 18]

उदाहरण-

“जसोदा हरि पालने झलावै।
हलरावै दुलराय मल्हावें, जोइ सोइ कछु गावै।।”

3. अलंकार

परिभाषा-काव्य में भाव तथा कला के सौन्दर्य को बढ़ाने वाले उपकरण अलंकार कहलाते हैं।

भेद-जिन अलंकारों के प्रयोग से शब्द में चमत्कार उत्पन्न होता है, वे शब्दालंकार तथा जिनसे अर्थ में चमत्कार पैदा होता है,वे अर्थालंकार कहलाते हैं। शब्दालंकारों में प्रमुख अनुप्रास, यमक और श्लेष तथा अर्थालंकारों में उपमा, रूपक एवं उत्प्रेक्षा प्रमुख हैं।

अलंकार परिचय

1. वक्रोक्ति अलंकार [2009, 16]

लक्षण-जहाँ किसी उक्ति का अर्थ जानते हुए कहने वाले के आशय से भिन्न लिया जाए, वहाँ वक्रोक्ति अलंकार होता है; जैसे

“कौन तुम? हैं घनश्याम हम, तो बरसो कित जाई।”

यहाँ राधा ने ‘घनश्याम’ का अर्थ जानते हुए भी श्रीकृष्ण न लगाकर बादल लिया है। अतः यहाँ वक्रोक्ति अलंकार है।

2. अतिश्योक्ति अलंकार [2009, 10, 12, 13, 15, 17]
लक्षण–जहाँ कोई बात आवश्यकता से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर कही जाय, वहाँ अतिश्योक्ति अलंकार होता है; जैसे

“हनुमान की पूँछ में, लगन न पाई आग।
लंका सारी जरि गई, गये निसाचर भाग ॥”

यहाँ बात को बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन हुआ है। अतः अतिश्योक्ति अलंकार है।

3. अन्योक्ति अलंकार [2009, 11, 18]
लक्षण-जहाँ अप्रस्तुत कथन के द्वारा प्रस्तुत अर्थ का बोध कराया जाये वहाँ अन्योक्ति अलंकार होता है; जैसे

“माली आवत देखकर, कलियन करी पुकार।
फूले-फूले चुनि लिए, कालि हमारी बार।”

यहाँ पर बात तो अप्रस्तुत माली,कलियाँ, फूलों की कही गई है परन्तु बोध प्रस्तुत वृद्धजनों और प्रौढ़जनों का कराया गया है।

4. छन्द

(क) परिभाषा-छन्द का शब्दार्थ बन्धन है। वर्ण,मात्रा, गति, यति,तुक आदि नियमों से नियोजित शब्द-रचना छन्द कहलाती है।

(ख) छन्द के अंग-
(1) वर्ण-वर्ण अक्षर को कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं-
(अ) लघु (ह्रस्व) वर्णों के बोलने में बहुत कम समय लगता है; जैसे-क, उ, नि, ह आदि।
(आ) दीर्घ (गुरु) वर्णों के बोलने में कुछ अधिक समय लगता है; जैसे-तू, आ,पौ आदि।

(2) मात्रा-वर्ण के बोलने में जो समय लगता है, उसे मात्रा कहते हैं। मात्रा दो प्रकार की होती हैं-
(अ) लघु,
(आ) दीर्घ। लघु वर्ण की एक तथा दीर्घ वर्ण की दो मात्राएँ होती हैं। लघु का चिह्न (l) और दीर्घ का चिह्न (s) होता है।

(3) यति–विराम या रुकने को यति कहते हैं। छन्द पढ़ते समय जहाँ कुछ समय रुकते हैं,वही यति है। इसके संकेत के लिए विराम चिह्न प्रयोग किये जाते हैं।

(4) चरण या पाद-छन्द के एक भाग को चरण या पाद कहते हैं। प्रत्येक छन्द में चरणों की संख्या निश्चित होती है; जैसे–चार पद,छ: पद आदि।

(5) तुक-छन्द की प्रत्येक पंक्ति के अन्तिम भाग की समान ध्वनि तुक कहलाती है।
(ग) छन्द के भेद-छन्द दो प्रकार के होते हैं-
(i) मात्रिक एवं
(ii) वर्णिक।

(i) मात्रिक छन्द-जिन छन्दों में मात्रा की गणना की जाती है, वे मात्रिक छन्द कहलाते हैं।
(ii) वर्णिक छन्द-जिन छन्दों में वर्गों की गणना की जाती है, वे वर्णित छन्द होते हैं।

छन्दों का परिचय

1. गीतिका [2009, 11, 13, 14, 17]
लक्षण-गीतिका मात्रिक छन्द है। इसके प्रत्येक चरण में 14 तथा 12 पर यति होती हैं; कुल मात्राएँ 26 होती हैं। अन्त में लघु-गुरु होता है; जैसे-

हे प्रभो आनन्ददाता, ज्ञान हमको दीजिए।
शीघ्र सारे दुर्गुणों को, दूर हमसे कीजिए।

2. हरिगीतिका [2009, 14, 16, 18]
लक्षण-इसमें कुल 28 मात्राएँ होती हैं तथा 16 एवं 12 पर यति होती है। अन्त में लघु-गुरु होता है; जैसे-

संसार की समर स्थली में, वीरता धारण करो।
चलते हुए निज इष्ट पथ पर, संकटों से मत डरो॥
जीते हुए भी मृतक सम रहकर न केवल दिन भरो।
वीर वीर बनकर आप, अपनी विघ्न बाधाएँ हरो॥

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3. उल्लाला [2015]
लक्षण-उल्लाला छन्द के प्रथम तथा तृतीय चरण में 15 मात्राएँ होती हैं; जैसे-

करते अभिषेक पयोद हैं, बलिहारी इस वेष की।
हे मातृभूमि तू सत्य ही, सगुण मूर्ति सर्वेश की। [2009]

4. रोला
लक्षण-रोला के प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं। 11 एवं 13 पर यति होती है। अन्त में प्रायः दो गुरु होते हैं; जैसे

नीलाम्बर परिधान हरित पट पर सुन्दर है।
सूर्य चन्द्र, युग-मुकुट, मेखला रत्नाकर है।
नदियाँ प्रेम प्रवाह, फूल तारे मण्डल हैं।
बन्दीजन खग-वृन्द, शेष प्राय सिंहासन हैं।

प्रश्नोत्तर

(क) वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

1. ‘छन्दबद्ध रचना कहलाती है
(i) काव्य
(ii) छन्द
(iii) मुक्तक
(iv) गेय मुक्तक।
उत्तर-
(i) काव्य

2. ‘वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’ परिभाषा दी है.
(i) भामह
(ii) दण्डी
(iii) विश्वनाथ
(iv) पण्डितराज जगन्नाथ।
उत्तर-
(ii) दण्डी

3. सर्वाधिक लोकप्रिय महाकाव्य है [2013]
(i) कामायनी
(ii) रामचरितमानस
(ii) साकेत
(iv) पद्मावत।
उत्तर-
(ii) रामचरितमानस

4. काव्य की आत्मा है-
(i) अलंकार
(ii) रस
(iii) छन्द
(iv) दोहा।
उत्तर-
(ii) रस

5. स्थायी भाव को जगाने वाले और उद्दीप्त करने वाले कारण कहलाते हैं-
(i) आलम्बन
(ii) उद्दीपन
(iii) विभाव
(iv) अनुभाव।
उत्तर-
(iii) विभाव

6. काव्य में भाव तथा कला के सौन्दर्य को बढ़ाने वाले तत्त्व कहलाते हैं-
(i) रस
(ii) छन्द
(iii) चौपाई
(iv) अलंकार।
उत्तर-
(iv) अलंकार।

7. हरिगीतिका के प्रत्येक चरण में मात्राएँ होती हैं-
(i) 26 मात्राएँ
(ii) 28 मात्राएँ
(iii) 24 मात्राएँ
(iv) 16 मात्राएँ।
उत्तर-
(ii) 28 मात्राएँ

8. जहाँ अप्रस्तुत कथन के द्वारा प्रस्तुत का बोध हो, वहाँ अलंकार होता है-
(i) वक्रोक्ति
(ii) अतिश्योक्ति
(iii) विशेषोक्ति
(iv) अन्योक्ति।
उत्तर-
(iv) अन्योक्ति।

9. वर्ण के बोलने में जो समय लगता है, उसे कहते हैं-
(i) यति
(ii) मात्रा
(iii) चरण
(iv) तुक।
उत्तर-
(ii) मात्रा

10. उल्लाला छन्द में मात्राएँ होती हैं [2009]
(i) 26.
(ii) 28
(iii) 14
(iv) 18.
उत्तर-
(ii) 28

11. ‘श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्रोध से जलने लगे’ में कौन-सा रस विद्यमान है? [2012]
(i) हास्य रस
(ii) रौद्र रस
(iii) वीर रस
(iv) करुण रस।
उत्तर-
(ii) रौद्र रस

12. ‘चौपाई छन्द में मात्राएँ होती हैं [2012, 15]
(i) 12
(ii) 15
(iii) 16
(iv) 24.
उत्तर-
(ii) 15

13. ‘रौद्र रस का स्थायी भाव’ है [2014]
(i) उत्साह
(ii) हँसी
(iii) क्रोध
(iv) विस्मय।
उत्तर-
(ii) हँसी

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14. ‘अद्भुत रस का स्थायी भाव’ है [2016]
(i) रति
(ii) निर्वेद
(iii) विस्मय
(iv) शोक।
उत्तर-
(i) रति

रिक्त स्थानों की पूर्ति

1. महाकाव्य में जीवन का ………………………………. चित्रण होता है।
2. कामायनी एक ………………………………. है। [2009, 13]
3. लोक सीमा से परे बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन ………………………………. में होता है।
4. गीतिका छन्द ………………………………. छन्द है।
5. ‘चरण-सरोज पखावन लागा’ ………………………………. अलंकार का उदाहरण है। [2009]
6. गेय मुक्तक को ………………………………. भी कहते हैं।
7. श्रृंगार रस का स्थायी भाव ……………………………….” है। [2010, 15]
8. रस के ………………………………. अंग होते हैं।
9. जहाँ शब्द सम्बन्धी चमत्कार हो, उसे ………………………………. कहते हैं।
10. करुण रस का स्थायी भाव ……………………………….” है। [2009]
11. जिसके प्रति स्थायी भाव उत्पन्न हो, वह ………………………………. कहलाता है। [2014, 17]
12. दोहा और रोला छंद से मिलकर ………………………………. छंद बनता है। [2018]
उत्तर-
1. समग्र,
2. महाकाव्य,
3. अतिश्योक्ति,
4. मात्रिक,
5. रूपक,
6. प्रगीति,
7. रति,
8. चार,
9. शब्दालंकार,
10. शोक,
11. आलम्बन,
12. कुण्डलियाँ।

सत्य/असत्य
1. खण्डकाव्य मुक्तक काव्य का एक भेद है। [2014]
2. अस्थिर मनोविकारों को स्थायी भाव कहते हैं। [2013]
3. करुण रस का स्थायी भाव शोक है। [2017]
4. शान्त रस का स्थायी भाव निर्वेद है। [2009]
5. वीर रस का स्थायी भाव उत्साह है। [2018]
6. रोला वर्णिक छन्द है।
7. रस को काव्य की आत्मा माना गया है।
8. काव्य का प्रत्येक छंद अपने आप में स्वतंत्र, पूर्ण तथा रस की अनुभूति कराने में असमर्थ होता है। [2011]
9. सवैया वर्ण वृत्त है। [2011]
10. ‘उद्धव शतक’ रत्नाकर रचित महाकाव्य है। [2011]
11. प्रबन्ध काव्य में पूर्वापर सम्बन्ध नहीं होता है। [2011, 15]
12. ‘अनुराग तड़ाग में भानु उदै’ में उपमा अलंकार है। [2011]
13. माली आवत देखकर कलियन करी पुकार। फूले-फूले चुन लिये काल्हि हमार बार ॥ में अन्योक्ति अलंकार है। [2012]
14. रामचरितमानस का प्रमुख छंद चौपाई है। [2017]
उत्तर-
1. असत्य,
2. असत्य,
3. सत्य,
4. सत्य,
5. सत्य,
6. असत्य,
7. सत्य,
8. असत्य,
9. सत्य,
10. असत्य,
11. असत्य,
12. असत्य,
13. सत्य,
14. सत्य।

सही जोड़ी बनाइए

MP Board Class 10th Special Hindi काव्य बोध img-4
उत्तर-
1. → (ग), 2. → (क), 3. → (ख), 4. → (ङ), 5. → (घ)।

MP Board Class 10th Special Hindi काव्य बोध img-5
उत्तर-
1. → (घ), 2. → (ङ), 3. → (क), 4. → (ख), 5.→ (ग)।

एक शब्द/वाक्य में उत्तर
1. हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय महाकाव्य का नाम लिखिए।
2. नायक के सम्पूर्ण जीवन का चित्रण किस काव्य में होता है? (2013, 15)
3. जिस काव्य में एक ही सर्ग होता है, उसे क्या कहते हैं? [2009]
4. जहाँ नायक-नायिका के विरह का वर्णन हो, वहाँ कौन-सा रस होगा?
5. स्थायी भाव कितने माने गये हैं?
6. संचारी भावों की संख्या कितनी है? [2013]
7. स्थायी भावों के उत्पन्न होने के कारणों को क्या कहते हैं? [2018]
8. छन्दोबद्ध एवं लयात्मक रचना को क्या कहते हैं?।
9. अनुभाव कितने प्रकार के होते हैं?
10. जिनसे अर्थ में चमत्कार पैदा होता है,वो क्या कहलाते हैं?
11. गीतिका किस प्रकार का छन्द है?
12. वात्सल्य रस के अलावा रसों की संख्या कितनी मानी गयी है? [2016]
13. आश्रय के चित्त में उत्पन्न होने वाले अस्थिर मनोविकारों को क्या कहते हैं? [2017]
उत्तर-
1. रामचरितमानस,
2. महाकाव्य,
3. खण्डकाव्य,
4. वियोग श्रृंगार,
5. नौ,
6. तैंतीस,
7. विभाव,
8. काव्य,
9. पाँच,
10. अर्थालंकार,
11. मात्रिक,
12. नौ,
13. संचारी भाव।

(ख) लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. कविता से क्या तात्पर्य है?
अथवा
काव्य की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
(1) रसयुक्त वाक्य को काव्य की संज्ञा से विभूषित किया जाता है।
अथवा
(2) छन्द में बँधी रचना को काव्य कहते हैं।
(3) पंडितराज जगन्नाथ के मतानुसार-“रमणीय अर्थ को व्यक्त करने वाली शब्दावली काव्य है।”

प्रश्न 2.
कविता के बाह्य स्वरूप सम्बन्धी तत्त्वों का विवरण दीजिए।
उत्तर-
कविता के बाह्य तत्त्व निम्नवत् हैं
(1) भाषा,
(2) छन्द,
(3) अलंकार,
(4) गेयता,
(5) चित्रात्मकता,
(6) शब्द-गुण,
(7) शब्द शक्ति।

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प्रश्न 3.
कविता के आन्तरिक तत्त्व बताइए।
उत्तर-
कविता के आन्तरिक तत्त्व निम्नलिखित हैं
(1) भावों एवं विचारों की उत्कृष्टता,
(2) रसानुभूति,
(3) अनुभूति की तीव्रता,
(4) हृदयस्पर्शी होना,
(5) अनुभूतियों का मर्मस्पर्शी होना।

प्रश्न 4.
दृश्य काव्य और श्रव्य काव्य का अर्थ बताइए।
उत्तर-
काव्य के दो भेद स्वीकारे गये हैं, ये क्रमशः दृश्य-काव्य एवं श्रव्य-काव्य के नाम से जाने जाते हैं। नाटक एवं एकांकी आदि दृश्य-काव्य के अन्तर्गत आते हैं। दृश्य-काव्य रंगमंच पर अभिनीत किये जाते हैं। इसका रसास्वादन देखकर ग्रहण किया जा सकता है। इस हेतु इन्हें दृश्य-काव्य कहा जाता है। दूसरी तरह के काव्य श्रव्य-काव्य के नाम से सम्बोधित किये जाते हैं। इनका रसास्वादन प्रमुखतः श्रवण करके (सुनकर) ग्रहण किया जा सकता है।

प्रश्न 5.
श्रव्य काव्य एवं दृश्य काव्य में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
अथवा
‘दृश्य काव्य और श्रव्य काव्य’ में क्या अन्तर है?
उत्तर-

  1. श्रव्य-काव्य का रसास्वादन श्रवण करके अथवा पढ़कर प्राप्त किया जाता है; यथा-उपन्यास, कविता एवं कहानी।
  2. दृश्य काव्य का रसास्वादन अथवा आनन्द रंगमंच पर अभिनीत होते हुए देखकर प्राप्त किया जा सकता है; यथा-नाटक एवं एकांकी।

प्रश्न 6.
शब्द गुण (काव्य गुण) के प्रमुख प्रकारों को परिभाषित कीजिए। [2014]
उत्तर-
शब्द गुण (काव्य गुण) निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं
(1) माधुर्य गुण-जिस काव्य के सुनने से आत्मा द्रवित हो जाये, मन आप्लावित और कानों में मधु घुल जाये वही माधुर्य गुणयुक्त है।

उदाहरण-

छाया करती रहे सदा, तुझ पर सुहाग की छाँह।
सुख-दुख में ग्रीवा के नीचे हो, प्रियतम की बाँह ॥

(2) प्रसाद गुण-जब किसी कविता का अर्थ आसानी से समझ में आ जाये तब वहाँ प्रसाद गुण होता है।

उदाहरण-

“अब हरिनाम सुमिरि सुखधाम,
जगत में जीवन दो दिन का ॥”

(3) ओज गुण [2012] -जिस काव्य के सुनने या पढ़ने से चित्त की उत्तेजना वृत्ति जाग्रत हो,वह रचना ओज गुण सम्पन्न होती है।

उदाहरण-

“बुन्देले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।”

प्रश्न 7.
मुक्तक काव्य किसे कहते हैं? इसकी दो विशेषताएँ लिखिए। [2009]
उत्तर-
मुक्तक रचना में हर पद स्वतः पूर्ण होता है। इसकी रचना में कथा नहीं होती। प्रत्येक छन्द पूर्व पद के प्रसंग से सर्वथा अछूता अथवा मुक्त होता है, अतः मुक्तक काव्य पुकारा जाता है। सूर एवं मीरा के पद तथा गिरिधर की कुंडलियाँ मुक्तक काव्य के अन्तर्गत आते हैं।

विशेषताएँ-

  • हर छन्द अपने आप में पूर्ण होता है।
  • एक प्रकार का जीवन दर्शन छिपा रहता है।

प्रश्न 8.
पाठ्य मुक्तक एवं गेय मुक्तक में अन्तर लिखिए। [2018]
उत्तर-
पाठ्य मुक्तक-पाठ्य मुक्तक पढ़े जाते हैं। इनमें किसी एक भाव या अनुभूति की गहनता होती है। बिहारी,कबीर, रहीम, तुलसी के दोहे इस कोटि में आते हैं। गेय मुक्तक-गेय मुक्तक गाये जाते हैं। इनमें संगीतात्मकता अथवा गेयता विद्यमान रहती है। सूर, मीरा,तुलसी के पद इसके जीवन्त उदाहरण हैं।

प्रश्न 9.
खण्डकाव्य किसे कहते हैं? हिन्दी के चार खण्डकाव्यों के नाम लिखिए।
अथवा [2009]
खण्डकाव्य की परिभाषा एवं एक खण्डकाव्य का नाम लिखिए। [2015]
उत्तर-
खण्डकाव्य में जीवन के किसी एक पक्ष का अंकन होता है। एक घटना अथवा व्यवहार का ही चित्रण किया जाता है।
हिन्दी के चार खण्डकाव्य निम्नवत् अवलोकनीय हैं-

  • जानकी मंगल-तुलसीदास।
  • सिद्धराज-मैथिलीशरण गुप्त।
  • सुदामा-चरित-नरोत्तमदास।
  • गंगावतरण-जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’।

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प्रश्न 10.
महाकाव्य किसे कहते हैं? दो प्रमुख महाकाव्यों एवं उनके रचनाकारों के नाम लिखिए। [2012]
अथवा
महाकाव्य की विशेषताएँ लिखिए।
अथवा
महाकाव्य की परिभाषा देते हुए दो महाकाव्यों के नाम लिखिए। [2009]
उत्तर-
महाकाव्य में किसी महापुरुष के समस्त जीवन की कथा होती है। इसमें कई सर्ग होते हैं। मूल कथा के साथ प्रासंगिक कथाएँ भी होती हैं। महाकाव्य का प्रधान रस श्रृंगार, वीर अथवा शान्त होता है।

इसकी विशेषताएँ निम्नवत् हैं-

  • महाकाव्य के कथानक में क्रमबद्धता होती है।
  • नायक उदात्त एवं धीरोदात्त होता है।
  • हृदयस्पर्शी मार्मिक प्रसंगों का वर्णन होता है।
  • विषय विस्तृत एवं कथा इतिहास सम्मत होती है।
  • सम्पूर्ण महाकाव्य में एक छन्द प्रयुक्त होता है। भावी कथा के आयोजन हेतु छन्द बदला जाता है।
  • शान्त, शृंगार एवं वीर रस में से किसी एक रस का उद्रेक होता है।
  • जीवन के सम्पूर्ण रूप का चित्रण होता है।

दो प्रमुख महाकाव्यों के नाम-

  • रामचरितमानस (तुलसीदास),
  • कामायनी (जयशंकर प्रसाद)।

प्रश्न 11.
महाकाव्य और खण्डकाव्य में अन्तर स्पष्ट कीजिए। [2009, 14, 16, 17]
उत्तर-

  • महाकाव्य में जीवन के समग्र रूप का उल्लेख होता है। खण्डकाव्य में जीवन के एक पक्ष का उद्घाटन किया जाता है।
  • महाकाव्य विस्तृत होता है तथा खण्डकाव्य संक्षिप्त होता है।
  • महाकाव्य में प्रकृति चित्रण विशद् रूप में किया जाता है जबकि खण्डकाव्य में प्रकृति चित्रण संक्षिप्त रूप में किया जाता है।
  • महाकाव्य में पात्रों की संख्या अधिक होती है। खण्डकाव्य में पात्र कम तथा सीमित होते हैं।

प्रश्न 12.
प्रबन्ध काव्य किसे कहते हैं? [2009]
अथवा
प्रबन्ध काव्य किसे कहते हैं? इसके भेद बताइए तथा उदाहरण लिखिए। [2011]
अथवा
प्रबन्ध काव्य का अर्थ लिखते हुए उसके भेदों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए। [2012]
उत्तर-
प्रबन्ध काव्य काव्य का एक प्रमुख भेद है। प्रबन्ध काव्य में छन्द किसी एक कथासूत्र में पिरोये रहते हैं। छन्दों के क्रम में कोई परिवर्तन नहीं होता है. इसका क्षेत्र विस्तृत होता है। इसमें किसी व्यक्ति के जीवन चरित्र की विभिन्न झाँकियाँ होती हैं।

प्रबन्ध काव्य के दो प्रकार माने गये हैं-

  • महाकाव्य,
  • खण्डकाव्य।

उदाहरण-

महाकाव्य-रामचरितमानस, साकेत, कामायनी।
खण्डकाव्य-सुदामाचरित्र,पंचवटी, हल्दीघाटी।

प्रश्न 13.
रस के अंगों के नाम लिखिए और विभाव को समझाइए।
उत्तर-
रस के अंग-स्थायी भाव, आलम्बन विभाव, अनुभाव,संचारी भाव होते हैं। विभाव-स्थायी भाव को जाग्रत तथा उद्दीपन करने वाले कारक विभाव कहलाते हैं।

प्रश्न 14.
रसों के नाम बताइए।
उत्तर-
हिन्दी साहित्य में रसों की संख्या 9 (नौ) मानी गई है। ये निम्नवत् हैं-

  • शृंगार,
  • वीर,
  • अद्भुत,
  • रौद्र,
  • करुण,
  • भयानक,
  • हास्य,
  • वीभत्स,
  • शान्त।

प्रश्न 15.
रसों के स्थायी भावों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
MP Board Class 10th Special Hindi काव्य बोध img-6

प्रश्न 16.
“बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाइ” पंक्ति में कौन-सा रस है? पहचान कर उसके भेद बताइए।
उत्तर-
शृंगार रस। शृंगार रस के दो भेद होते हैं-संयोग एवं वियोग। उपर्युक्त दोहे में संयोग रस की छटा है।

प्रश्न 17.
“अब मैं नाच्यो बहुत मोपाल” पंक्ति में कौन-सा रस है? [2009]
उत्तर-
शान्त रस की छटा है।

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प्रश्न 18.
रस की निष्पत्ति कैसे होती है?
उत्तर-
“विभाव, अनुभाव एवं संचारी भाव के संयोग से स्थायी भाव परिपक्व होते हैं तभी रस की निष्पत्ति होती है।”

प्रश्न 19.
वीर रस का स्थायी भाव लिखते हुए एक उदाहरण दीजिए। [2016]
उत्तर-
वीर रस का स्थायी भाव ‘उत्साह’ है।

उदाहरण-

“बुंदेले हर बोलो के मुख हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी।”

प्रश्न 20.
स्थायी भाव एवं संचारी भाव में अन्तर बताइये।। [2012, 15]
उत्तर-
स्थायी भाव एवं संचारी भाव में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-

  1. मानव हृदय में सुषुप्त रूप में रहने वाले मनोभाव स्थायी भाव कहलाते हैं, जबकि हृदय में अन्य अनन्त भाव जाग्रत तथा विलीन होते रहते हैं,उनको संचारी भाव कहा जाता है।
  2. स्थायी भाव स्थायी रूप से हृदय में विद्यमान रहते हैं, जबकि संचारी भाव कुछ समय रहकर समाप्त हो जाते हैं।
  3. स्थायी भाव उद्दीपन के प्रभाव से उद्दीप्त होते हैं, जबकि संचारी भाव स्थायी भाव के विकास में सहायक होते हैं। .
  4. स्थायी भावों की कुल संख्या 10 है, जबकि संचारी भाव तैंतीस माने गये हैं।

प्रश्न 21.
निम्नलिखित में कौन-सा अलंकार है? [2009, 10]
पड़ी अचानक नदी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार।
राणा ने सोचा इस बार, तब तक चेतक था उस पार।।
उत्तर-
इस पंक्ति में ‘अतिश्योक्ति’ अलंकार है।

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