MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण

MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण

गुरुत्वाकर्षण अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 8.1.
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) आप किसी आवेश का वैद्युत बलों से परिरक्षण उस आवेश को किसी खोखले चालक के भीतर रखकर कर सकते हैं। क्या आप किसी पिंड का परिरक्षण, निकट में रखे पदार्थ के गुरुत्वीय प्रभाव से, उसे खोखले गोले में रखकर अथवा किसी अन्य साधनों द्वारा कर सकते हैं?

(b) पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने वाले छोटे अन्तरिक्षयान में बैठा कोई अन्तरिक्ष यात्री गुरुत्व बल का संसूचन नहीं कर सकता। यदि पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने वाला अन्तरिक्ष स्टेशन आकार में बड़ा है, तब क्या वह गुरुत्व बल के संसूचन की आशा कर सकता है?

(c) यदि आप पृथ्वी पर सूर्य के कारण गुरुत्वीय बल की तुलना पृथ्वी पर चन्द्रमा के कारण गुरुत्व बल से करें, तो आप यह पाएँगे कि सूर्य का खिंचाव चन्द्रमा के खिंचाव की तुलना में अधिक है (इसकी जाँच आप स्वयं आगामी अभ्यासों में दिए गए आँकड़ों की सहायता से कर सकते हैं।) तथापि चन्द्रमा के खिंचाव का ज्वारीय प्रभाव सूर्य के ज्वारीय प्रभाव से अधिक है। क्यों?
उत्तर:
(a) नहीं।
(b) हाँ, यदि अंतरिक्ष यान का आकार उसके लिए इतना अधिक हो कि वह गुरुत्वीय त्वरण (g) के परिवर्तन का संसूचण कर सके।
(c) ज्वारीय प्रभाव दूरी के घन के व्युत्क्रमानुपाती होता है तथा इस अर्थ में यह उन बलों से भिन्न है जो दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।

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प्रश्न 8.2.
सही विकल्प का चयन कीजिए:

  1. बढ़ती तुंगता के साथ गुरुत्वीय त्वरण बढ़ता/घटता
  2. बढ़ती गहराई के साथ (पृथ्वी को एकसमान घनत्व को गोला मानकर) गुरुत्वीय त्वरण बढ़ता/घटता है।
  3. गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के द्रव्यमान/पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
  4. पृथ्वी के केन्द्र से r 2 तथा r 1 दूरियों के दो बिन्दुओं के बीच स्थितिज ऊर्जा – अन्तर के लिए सूत्र – GMm (1/r2 – 1/r2 ) सूत्र mg(r2 – r1 ) से अधिक/कम यथार्थ है।

उत्तर:

  1. घटता है।
  2. घटता है।
  3. पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।
  4. अधिक।

प्रश्न 8.3.
मान लीजिए एक ऐसा ग्रह है जो सूर्य के परितः पृथ्वी की तुलना में दो गुनी चाल से गति करता है, तब पृथ्वी की कक्षा की तुलना में इसका कक्षीय आमाप क्या है?
उत्तर:
माना कक्षीय आमाप क्रमशः TE व Tp हैं।
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अर्थात् ग्रह का आमाप पृथ्वी से 0.63 गुना छोटा है।

प्रश्न 8.4.
बृहस्पति के एक उपग्रह, आयो (lo), की कक्षीय अवधि 1.769 दिन तथा कक्षा की त्रिज्या 4.22 x 108 m है। यह दर्शाइए कि बृहस्पति का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 1/1000 गुना है।
उत्तर:
दिया है –
सूर्य का द्रव्यमान = Ms = 2 x 1030 kg
बृहस्पति के उपग्रह का आवर्त काल = T = 1.769 दिन
= 1.769 × 24 × 3600s
= 15.2841 × 104s बृहस्पति के चारों ओर उपग्रह की त्रिज्या
= r = 4.22 × 108m
G = 6.67 × 10-11 Nm2kg-2
माना बृहस्पति का द्रव्यमान MJ, है।
MJ = \(\frac{1}{1000}\) Ms सिद्ध करने के लिए
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अतः बृहस्पति का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग (1/1000) गुना है।

प्रश्न 8.5.
मान लीजिए कि हमारी आकाशगंगा में एक सौर द्रव्यमान के 2.5 x 1011 तारे हैं। मंदाकिनीय केन्द्र से 50,000 1y दूरी पर स्थित कोई तारा अपनी एक परिक्रमा पूरी करने में कितना समय लेगा? आकाशगंगा का व्यास 105 ly लीजिए।
उत्तर:
एक सौर द्रव्यमान = 2 × 1030kg
एक प्रकाश वर्ष = 9.46 × 1015 m
माना M = आकाश गंगा में तारे का द्रव्यमान
= 2.5 × 1011 × 2 × 1030kg
= 5 × 1041kg
तारे की कक्षा की त्रिज्या = r = मंदाकिनी के केन्द्र से तारे की दूरी
= 50,000 प्रकाश वर्ष
= 50,000 × 9.46 × 1015m
G = 6.67 × 10-11Nm2kg-2
एक आवृत्ति काल = T
आकाशगंगा का व्यास = 105 प्रकाश वर्ष
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= 3.55 × 108 yrs.

प्रश्न 8.6.
सही विकल्प का चयन कीजिए:

  1. यदि स्थितिज ऊर्जा का शून्य अनन्त पर है,तो कक्षा में परिक्रमा करते किसी उपग्रह की कुल ऊर्जा इसकी गतिज/स्थितिज ऊर्जा का ऋणात्मक है।
  2. कक्षा में परिक्रमा करने वाले किसी उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा समान ऊँचाई (जितनी उपग्रह की है) के किसी स्थिर पिंड को पृथ्वी के प्रभाव से बाहर प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा से अधिक/कम होती है।

उत्तर:

  1. गतिज ऊर्जा
  2. कम होती है।

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प्रश्न 8.7.
क्या किसी पिंड की पृथ्वी से पलायन चाल –

  1. पिंड के द्रव्यमान
  2. प्रक्षेपण बिन्दु की अवस्थिति
  3. प्रक्षेपण की दिशा
  4. पिंड के प्रमोचन की अवस्थिति की ऊँचाई पर निर्भर करती है।

उत्तर:

  1. नहीं
  2. नहीं
  3. नहीं
  4. हाँ।

प्रश्न 8.8.
कोई धूमकेत सूर्य की परिक्रमा अत्यधिक दीर्घवृत्तीय कक्षा में कर रहा है। क्या अपनी कक्षा में धूमकेतु की शुरू से अन्त तक –

  1. रैखिक चाल
  2. कोणीय चाल
  3. कोणीय संवेग
  4. गतिज ऊर्जा
  5. स्थितिज ऊर्जा
  6. कुल ऊर्जा नियत रहती है। सूर्य के अति निकट आने पर धूमकेतु के द्रव्यमान में हास को नगण्य मानिये।

उत्तर:

  1. नहीं
  2. नहीं
  3. हाँ
  4. नहीं
  5. नहीं
  6. हाँ।

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प्रश्न 8.9.
निम्नलिखित में से कौन से लक्षण अन्तरिक्ष में अन्तरिक्ष यात्री के लिए दुःखदायी हो सकते हैं?
(a) पैरों में सूजन
(b) चेहरे पर सूजन
(c) सिरदर्द
(d) दिक्विन्यास समस्या।
उत्तर:
(b), (c) व (d):

प्रश्न 8.10.
एक समान द्रव्यमान घनत्व की अर्धगोलीय खोलों द्वारा परिभाषित ढोल के पृष्ठ के केन्द्र पर गुरुत्वीय तीव्रता की दिशा [देखिए चित्र]

  1. a
  2. b
  3. c
  4. 0 में किस तीर द्वारा दर्शायी जाएगी?

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उत्तर:
गोलों को पूरा करने पर, केन्द्र C पर नेट तीव्रता शून्य होगी। इसका तात्पर्य है कि केन्द्र C पर दोनों अर्धगोलों के कारण तीव्रताएँ परस्पर विपरीत व बराबर होंगी। अर्थात् दिशा (iii)C द्वारा व्यक्त होगी।

प्रश्न 8.11.
उपरोक्त समस्या में किसी यादृच्छिक बिन्दु P पर गुरुत्वीय तीव्रता किस तीर –

  1. d
  2. e
  3. f
  4. g द्वारा व्यक्त की जाएगी?

उत्तर:
2. (e) द्वारा व्यक्त होगी।

प्रश्न 8.12.
पृथ्वी से किसी रॉकेट को सूर्य की ओर दागा गया है। पृथ्वी के केन्द्र से किस दूरी पर रॉकेट पर गुरुत्वाकर्षण बल शून्य है? सूर्य का द्रव्यमान = 2 × 1030 kg, पृथ्वी का द्रव्यमान = 6 x 1024 kg। अन्य ग्रहों आदि के प्रभावों की उपेक्षा कीजिए (कक्षीय त्रिज्या = 1.5 × 1011 m)
उत्तर:
माना पृथ्वी के केन्द्र से r दूरी पर सूर्य व पृथ्वी के कारण गुरुत्वाकर्षण बल बिन्दु P पर है।
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 5
अतः रॉकेट पर गुरुत्वाकर्षण बल शून्य है।
माना सूर्य से पृथ्वी से बीच की दूरी = पृथ्वी की त्रिज्या
सूर्य का द्रव्यमान, Ms = 2 × 1030 किग्रा
पृथ्वी का द्रव्यमान Me = 6 × 1024 किग्रा
x = 1.5 × 1011मीटर
माना रॉकेट का द्रव्यमान m है।
बिन्दु P पर, सूर्य व रॉकेट के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल = पृथ्वी व रॉकेट के मध्य गुरुत्वाकर्षण बल।
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या = 2.6 x 108 m पृथ्वी से

प्रश्न 8.13.
आप सूर्य को कैसे तोलेंगे, अर्थात् उसके द्रव्यमान का आंकलन कैसे करेंगे? सूर्य के परितः पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या 15 x 108 km है।
उत्तर:
हम जानते हैं कि पृथ्वी, सूर्य के चारों ओर 1.5 1011 मीटर त्रिज्या की कक्षा में घूमती है। पृथ्वी एक चक्कर 365 दिनों में पूरा करती है।
दिया है : पृथ्वी की त्रिज्या = R = 1.5 × 1011मीटर
सूर्य के चारों ओर पृथ्वी और पृथ्वी का आवर्तकाल, T = 365 दिन = 365 × 24 × 60 × 60 से०,
G = 6.67 × 1011 न्यूटन – मीटर2 प्रति किग्रा2
जहाँ M = सूर्य का द्रव्यमान है = ?
हम जानते हैं कि
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जहाँ. Ms = सूर्य का द्रव्यमान है।

प्रश्न 8.14.
एक शनि वर्ष एक पृथ्वी – वर्ष का 29.5 गुना है। यदि पृथ्वी सूर्य से 15 × 108 km दूरी पर है, तो शनि सूर्य से कितनी दूरी पर है?
उत्तर:
केप्लर के नियम से,
i.e., T2 ∞ R3
∴शनि के लिए T2s ∝ R3s
समी० (i) को (ii) से भाग देने पर,
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दिया है:
Ts = 29.5Te या \(\frac { T_{ s } }{ T_{ e } } \) = 29.5
सूर्य से पृथ्वी की दूरी = Re = 1.5 × 108 km
सूर्य से शनि की दूरी = Rs
∴ समी० (iii) व (iv) से,
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= 1.43 × 109 किमी

प्रश्न 8.15.
पृथ्वी के पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार 63N है। पृथ्वी की त्रिज्या की आधी ऊँचाई पर पृथ्वी के कारण इस वस्तु पर गुरुत्वीय बल कितना है?
उत्तर:
पृथ्वी के पृष्ठ से ऊँचाई = h = \(\frac{R}{2}\)
जहाँ R = पृथ्वी की त्रिज्या है।
हम जानते हैं कि gh = g (1 + \(\frac{h}{R}\))2
दिया है: h = \(\frac{R}{2}\)
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माना m = वस्तु का द्रव्यमान है
माना पृथ्वी के पृष्ठ व hऊँचाई पर भार क्रमश: W व Wh हैं।
अतः w = mg = 63 N दिया है।
तथा
Wh = mgh
= m × \(\frac{4}{9}\)g = \(\frac{4}{9}\)mg
= \(\frac{4}{9}\) × 63 = 28N
∴Wh = 28N

प्रश्न 8.16.
यह मानते हुए कि पृथ्वी एकसमान घनत्व का एक गोला है तथा इसके पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार 250 N है, यह ज्ञात कीजिए कि पृथ्वी के केन्द्र की ओर आधी दूरी पर इस वस्तु का भार क्या होगा?
उत्तर:
माना कि पृथ्वी के पृष्ठ तथा पृथ्वी के पृष्ठ से d दूरी पर गुरुत्व के कारण त्वरण क्रमशः g व gd हैं।
माना कि पृथ्वी के पृष्ठ तथा पृथ्वी के पृष्ठ से d दूरी पर भार क्रमश: W व Wd है।
∴W = mg = 250 N … (i)
तथा Wd = mgd …. (ii)
हम जानते हैं कि gd = g (1 – \(\frac{d}{R}\)) … (iii)
दिया है: d = \(\frac{R}{2}\)
जहाँ R = पृथ्वी की त्रिज्या … (iv)
∴समी० (iii) व (iv) से,
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∴पृथ्वी के केन्द्र से आधी दूरी पर वस्तु पर वस्तु का भार
= 125 N

प्रश्न 8.17.
पृथ्वी के पृष्ठ से ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर कोई रॉकेट 5 kms-1 की चाल से दागा जाता है। पृथ्वी पर वापस लौटने से पूर्व यह रॉकेट पृथ्वी से कितनी दूरी तक जाएगा? पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0 × 1024 kg पृथ्वी की माध्य त्रिज्या = 6.4 x 106 m तथा
G = 6.67 x 10-11 Nm2kg-22
उत्तर:
माना रॉकेट की प्रारम्भिक चाल v है रॉकेट की पृथ्वी से h ऊँचाई पर वेग शून्य है।
माना रॉकेट का द्रव्यमान m है तथा पृथ्वी के पृष्ठ पर इसकी सम्पूर्ण ऊर्जा .
K.E. + P.E. = \(\frac{1}{2}\)mv2 – \(\frac{GMm}{R}\)
जहाँ M = पृथ्वी का द्रव्यमान
R = पृथ्वी की त्रिज्या
G = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक उच्चतम बिन्दु पर K.E. =0
तथा P.E = \(\frac{- GMm}{R + h}\)
h ऊँचाई पर रॉकेट की सम्पूर्ण ऊर्जा
= K.E. + P.E. = 0 + P.E. = P.E.
= \(\frac { GM_{ m } }{ R+h } \)
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
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दिया है:
v = 5 kms-1 = 5000 ms-1
दिया है: R = 6.4 x 106 m
समी० (iv) में दिया मान रखने पर,
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∴पृथ्वी के केन्द्र से दूरी
= R + h = 6.4 x 106 + 1.6 x 106
= 8.0 x 106 मीटर।

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प्रश्न 8.18.
पृथ्वी के पृष्ठ पर किसी प्रक्षेप्य की पलायन चाल 11.2 kms-1 है। किसी वस्तु को इस चाल की तीन गुनी चाल से प्रक्षेपित किया जाता है। पृथ्वीसे अत्यधिक दूर जाने पर इस वस्तु की चाल क्या होगी? सूर्य तथा अन्य ग्रहों की उपस्थिति की उपेक्षा कीजिए।
उत्तर:
माना वस्तु की प्रारम्भिक व अन्तिम चाल v व v है।
माना वस्तु का द्रव्यमान m है।
वस्तु की प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा
= \(\frac{1}{2}\) mv2
वस्तु की स्थितिज ऊर्जा (पृथ्वी की सतह पर)
= \(\frac{-GMm}{R}\)
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जहाँ M व R क्रमशः पृथ्वी के द्रव्यमान व त्रिज्या हैं। वस्तु की अन्तिम स्थितिज ऊर्जा (अनन्त पर) = 0
वस्तु की अन्तिम गतिज ऊर्जा (अनन्त पर) = \(\frac{1}{2}\) mv2
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
प्रा० गतिज ऊर्जा + प्रा० PE = अन्तिम (KE + PE)
या \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac{GMm}{R}\) = \(\frac{1}{2}\) mv2 + 0
या \(\frac{1}{2}\) mv2 = \(\frac{1}{2}\)mv2 – \(\frac{-GMm}{R}\)
Also Let ve = escape velocity
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 15
= 31.7 kms-1

प्रश्न 8.19.
कोई उपग्रह पृथ्वी के पृष्ठ से 400 km ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है। इस उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने में कितनी ऊर्जा खर्च होगी? उपग्रह का द्रव्यमान = 200 kg; पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0 × 1024 kg; पृथ्वी की त्रिज्या = 6.4 x 106m तथा G = 6.67 x 10-11 Nm2kg-2
उत्तर:
माना पृथ्वी का द्रव्यमान व त्रिज्या क्रमश: M व R
माना पृथ्वी पृष्ठ से Lऊँचाई पर उपग्रह का द्रव्यमान है।
h ऊँचाई पर कक्ष में वेग = कक्षीय वेग = y
कक्ष में उपग्रह की KE = \(\frac{1}{2}\) mv2 ऊँचाई पर उपग्रह की स्थितिज ऊर्जा
= \(\frac { GM_{ m } }{ R+h } \)
अतः चक्रण करते उपग्रह की सम्पूर्ण ऊर्जा (KE + PE)
= \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac { GM_{ m } }{ R+h } \)
= \(\frac{1}{2}\) m (\(\frac{GM}{R + h}\))
(∴h ऊँचाई पर कक्षीय वेग = \(\sqrt { \frac { GM }{ R+h } } \))
= – \(\frac{1}{2}\) \(\frac{GMm}{R + h}\)
उपग्रह को पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण से बाहर भेजने के लिए इसकी गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा शून्य होगी तथा इसकी गतिज ऊर्जा भी शून्य होगी।
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर भेजने पर उपग्रह की अन्तिम ऊर्जा = 0
Rऊँचाई पर चक्रण करती वस्तु की ऊर्जा + दी गई ऊर्जा = 0 (ऊर्जा संरक्षण के नियम से)
उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर भेजने के लिए दी गई ऊर्जा
= E = – चक्रण करते उपग्रह की ऊर्जा
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दिया है h = 400 km
= 400 × 103 m, R = 6400 × 103m,
G = 6.67 × 1024 Nm2kg-2
M = 6 × 1024 kg. m = 200 kg
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 17
= 5.885 × 109J

प्रश्न 8.20.
दो तारे, जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान (2 × 1030 kg) के बराबर है, एक दूसरे की ओर सम्मुख टक्कर के लिए आ रहे हैं। जब वे 109 km की दूरी पर हैं तब इनकी चाल उपेक्षणीय है। ये तारे किस चाल से टकराएंगे? प्रत्येक तारे की त्रिज्या 104 km है। यह मानिए कि टकराने के पूर्व तक तारों में कोई विरूपण नहीं होता (G के ज्ञात मान का उपयोग कीजिए)।
उत्तर:
दिया है: प्रत्येक तारे का द्रव्यमान
M = 2 × 1030 किग्रा
दोनों तारों के मध्य प्रा० दूरी,
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 18
r = 109 किमी = 1012 मीटर
प्रत्येक तारे का आकार = त्रिज्या
= r = 104 किमी = 107 मीटर
माना दोनों तारे एक दूसरे से टकराते हैं। माना दोनों तारे की प्रा० चाल u है।
r दूरी पर रखे एक तारे की दूसरे के सापेक्ष स्थितिज ऊर्जा
PE = \(-\frac { Gm_{ 1 }m_{ 2 } }{ r } \) = – \(\frac { GM_{ m } }{ r } \)
7 दूरी पर KE = 0 [∴u = 0]
सम्पूर्ण प्रा० ऊर्जा
KE + PE = 0 – \(\frac { GM^{ 2 } }{ r } \) = \(\frac { – GM^{ 2 } }{ r } \) … (i)
माना दोनों तारों के केन्द्र ।’ दूरी पर जब दोनों तारे एकदम टकराने वाले होते हैं = 2R
संघट्ट के बाद दोनों तारों की KE
= \(\frac{1}{2}\) Mv2 + \(\frac{1}{2}\) Mv2
= Mv2
संघट्ट के समय दोनों तारों की
PE = \([latex]\frac { -GMM }{ r^{ ‘ } } \) = \(\frac { -GM^{ 2 } }{ 2R } \)
ऊर्जा संरक्षण के नियम से
सम्पूर्ण प्रा० ऊर्जा = अन्तिम (ICE + IPE) या
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 19

प्रश्न 8.21.
दो भारी गोले जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान 100 kg, त्रिज्या 0.10 m है किसी क्षैतिज मेज पर एक दूसरे से 1.0 m दूरी पर स्थित हैं। दोनों गोलों के केन्द्रों को मिलाने वाली रेखा के मध्य बिन्दु पर गुरुत्वीय बल तथा विभव क्या है? क्या इस बिन्दु पर रखा कोई पिंड संतुलन में होगा? यदि हाँ, तो यह सन्तुलन स्थायी होगा अथवा अस्थायी?
उत्तर:
माना दोनों गोले क्रमश: A व B बिन्दु पर रखे गए हैं। दोनों गोलों के बीच की दूरी = r = AB = 1 मीटर
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 20
AB का मध्य बिन्दु 0 = AB × \(\frac{1}{2}\)
= \(\frac{1}{2}\) × 1m = 0.5m
AO = OB
= \(\frac{1}{2}\) × 1m = 0.5m
प्रत्येक गोले का द्रव्यमान = M = 100 kg
माना कि 0 बिन्दु पर रखी प्रत्येक वस्तु का द्रव्यमान = m हम जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण बल,
F = \(\frac { GMm }{ d^{ 2 } } \)
माना A व b के कारण 0 पर बल क्रमश: FA व FB हैं। अतः
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 21
ये दोनों विपरीत दिशा में लगते हैं।
अतः 0 पर परिणामी बल = 0
इसका तात्पर्य यह है कि बिन्दु पर रखी वस्तु पर कोई बल नहीं लगता है। अतः यह वस्तु सन्तुलन में है। लेकिन यह सन्तुलन अस्थिर है चूँकि A व B में सूक्ष्म विस्थापन से भी सन्तुलन बदला जाता है।
पुनः हम जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण विभव,
= \(-\frac { GM }{ d } \)
माना A व B बिन्दुओं पर रखे गोलों पर 0 के कारण गुरुत्वाकर्षण विभव क्रमश: VA व VB है।
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MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 22a

अतः मध्यबिन्दु पर रखी वस्तु अस्थिर सन्तुलन में होती है।

गुरुत्वाकर्षण अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 8.22.
जैसा कि आपने इस अध्याय में सीखा है कि कोई तुल्यकाली उपग्रह पृथ्वी के पृष्ठ से लगभग 36,000 km ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इस उपग्रह के निर्धारित स्थल पर पृथ्वी के गुरुत्व बल के कारण विभव क्या है? (अनन्त पर स्थितिज ऊर्जा शुन्य लीजिए।) पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0 × 1024 k; पृथ्वी की त्रिज्या = 6400 km.
उत्तर:
दिया है: ME = 6 × 1024 किग्रा
RE = 6400 किमी = 6.4 x 106 मीटर
हम जानते हैं कि गुरुत्वीय विभव
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 23
= – 9.4 x 106 जूल प्रति किग्रा

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प्रश्न 8.23.
सूर्य के द्रव्यमान से 2.5 गुने द्रव्यमान का कोई तारा 12 km आमाप से निपात होकर 1.2 परिक्रमण प्रति सेकण्ड से घूर्णन कर रहा है। (इसी प्रकार के संहत तारे को न्यूट्रॉन तारा कहते हैं कुछ प्रेक्षित तारकीय पिंड, जिन्हें पल्सार कहते हैं, इसी श्रेणी में आते हैं।) इसके विषुवत् वृत्त पर रखा कोई पिंड, गुरुत्व बल के कारण, क्या इसके पृष्ठ से चिपका रहेगा? (सूर्य का द्रव्यमान = 2 x 1030 kg)
उत्तर:
तारे से चिपके तारकीय पिंड के लिए, तीर का गुरुत्वाकर्षण बल अभिकेन्द्र बल के बराबर या अधिक होगा। इस दशा में अभिकेन्द्र बल, गुरुत्वाकर्षण बल से अधिक नहीं होगा तथा पिंड नहीं उड़ेगा।
mg ≥ m \(\frac { v^{ 2 } }{ r } \)
या
g > \(\frac { v^{ 2 } }{ r } \)
या g ≥ ac
जहाँ ac = \(\frac { v^{ 2 } }{ r } \) अभिकेन्द्रीय त्वरण
अतः तारे से तारकीय पिंड से चिपकने के लिये, गुरुत्व के कारण तारे पर त्वरण 2 अभिकेन्द्रीय त्वरण
दिया है:
r = 12 km = 12 x 103 m
आवृत्ति v = 1.5 rps
w = 2πv = 21 x 1.5 = 3π rads-1 अभिकेन्द्रीय त्वरण,
ac = \(\frac { v^{ 2 } }{ r } \) = rω2
= 12 × 103 × (3π)2
= 12 × 103 × 9 × 9.87
= 1065.96 × 103 ms-2
= 1.1 × 106

पुनः हम जानते हैं कि तारे पर गुरुत्व के कारण त्वरण निम्नवत् है –
g = \(\frac { GM }{ r^{ 2 } } \)
दिया है: M = सूर्य के द्वयमान का 2.5 गुना
= 2.5 × 2 × 1030 kg
(∴ सूर्य के द्वयमान = 2 × 1030 kg
= 5 × 1030
r = 12km
G = 6.67 × 10-11 Nm2 kg-2
g = \(\frac { 6.67\times 10^{ -11 }\times 5\times 10^{ 30 } }{ (12000)^{ 2 } } \)
= 0.2316 × 1013 ms-2
= 23.16 × 1011 ms-2
= 2.3 × 1012 ms-2
समीकरण (i)  व  (iv) से
अतः पिंड तारे से चिपका रहेगा। … (iv)

प्रश्न 8.24.
कोई अन्तरिक्षयान मंगल पर ठहरा हुआ है। इस अन्तरिक्षयान पर कितनी ऊर्जा खर्च की जाए कि इसे सौरमण्डल से बाहर धकेला जा सके। अन्तरिक्षयान का द्रव्यमान = 1000 kg; सूर्य का द्रव्यमान = 2 x 1030 मंगल का द्रव्यमान = 6.4 x 1023 kg; मंगल की त्रिज्या = 3395 km; मंगल की कक्षा की त्रिज्या = 2.28 x 108 km तथा G = 6.67 x 10-11 Nm2kg-2
उत्तर:
G = 6.67 x 10-11 Nm2 kg-2
माना कि सूर्य के सापेक्ष मंगल का द्रव्यमान व त्रिज्या क्रमश: M व R है।
दिया है: सूर्य का द्रव्यमान M = 2 x 1030 kg
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 26
व्यक्ति की सूर्य के चारों ओर त्रिज्या,
= R = 2.28 x 108 km
मंगल की त्रिज्या = R’ = 3395 km
मंगल का द्रव्यमान = M’ = 6.4 x 1023 kg
सौरमण्डल का द्रव्यमान m = 1000 किग्रा
सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण अन्तरिक्षयान की स्थितिज ऊर्जा
= \(\frac{-GMm}{R}\)
मंगल के गुरुत्वाकर्षण के कारण सौरमण्डल की स्थितिज ऊर्जा
= \(\frac { -GM^{ ‘ }m }{ R^{ ‘ } } \)
मंगल के पृष्ठ पर अन्तरिक्षयान की सम्पूर्ण स्थितिज ऊर्जा
= \(\frac{-GMm}{R}\) – \(\frac{-GMm}{R}\)
चूँकि अन्तरिक्षयान की KE शून्य है
∴अन्तरिक्षयान की सम्पूर्ण ऊर्जा
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 27
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 27a

अन्तरिक्षयान को सौरमण्डल से बाहर करने के लिए, इसकी गतिज ऊर्जा इतनी बढ़ानी चाहिए जिससे इस ऊर्जा का मान, मंगल के पृष्ठ पर ऊर्जा के समान हो जाए।
अभीष्ट ऊर्जा = — (अन्तरिक्षयान की सम्पूर्ण ऊर्जा)
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 28

प्रश्न 8.25.
किसी रॉकेट को मंगल के पृष्ठ से 2 kms-1 की चाल से ऊर्ध्वाधर ऊपर दागा जाता है। यदि मंगल के वातावरणीय प्रतिरोध के कारण इसकी 20% आरंभिक ऊर्जा नष्ट हो जाती है, तो मंगल के पृष्ठ पर वापस लौटने से पूर्व यह रॉकेट मंगल से कितनी दूरी तक जाएगा? मंगल का द्रव्यमान = 6.4 x 1023 kg; मंगल की त्रिज्या = 3395 km तथा G = 6.67 x 10-11 Nm2kg-2
उत्तर:
माना रॉकेट का द्रव्यमान m है।
दिया है:
मंगल का द्रव्यमान, M = 6.4 x 1023 किग्रा
मंगल की त्रिज्या, R = 3395 किमी
गुरुत्वाकर्षण नियतांक G = 6.67 x 10-11 न्यूटन – मीटर2 प्रति किग्रा2
माना कि रॉकेट मंगल से h ऊँचाई तक पहुँचता है।
माना कि मंगल के पृष्ठ से रॉकेट को प्रारम्भिक चाल v से छोड़ा जाता है।
रॉकेट की प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\) mv2
व रॉकेट की प्रारम्भिक स्थितिज ऊर्जा = \(\frac { -GMm }{ R } \)
रॉकेट की सम्पूर्ण प्रा० ऊर्जा = K.E. + P.E.
= \(\frac{1}{2}\) mv2 – \(\frac { -GMm }{ R } \)
चूँकि h ऊँचाई पर 20% ऊर्जा नष्ट हो जाती है जबकि 80% ऊर्जा संचित रहती है।
संचित ऊर्जा = \(\frac{80}{100}\) x \(\frac{1}{2}\)mv2
सम्पूर्ण उपलब्ध प्रा० ऊर्जा,
= \(\frac{4}{5}\)\(\frac{1}{2}\)mv2 – \(\frac { -GMm }{ R } \)
= 0.4 mv2 – \(\frac { -GMm }{ R + h} \)
MP Board Class 11th Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण img 29

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 2 नर से नारायण

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MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 2 नर से नारायण (निबन्ध, बाबू गुलाबराय)

नर से नारायण पाठ्य-पुस्तक पर आधारित प्रश्न

नर से नारायण लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
त्राहि-त्राहि क्यों मची हुई थी? (M.P. 2009, 2012)
उत्तर:
अवर्षा के कारण सूखे की स्थिति हो गई थी, इसीलिए त्राहि-त्राहि मची हुई थी।

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प्रश्न 2.
बच्चे क्यों प्रसन्न थे?
उत्तर:
लेखक के घर के पीछे वर्षा का पानी भर गया था और बच्चे उस घर की गंगा में कागज की नावें तैराने के कारण प्रसन्न थे।

प्रश्न 3.
लेखक ने किन परिस्थितियों में स्वयं को नारायण कहा है?
उत्तर:
नारायण का निवास स्थान जल में है और उसका घर भी वर्षा के कारण जल में डूबा हुआ था, ऐसी स्थिति में लेखक स्वयं को नारायण समझने लगा था।

प्रश्न 4.
लेखक ने अपने को अनंत का उपासक क्यों कहा है?
उत्तर:
लेखक सीमाओं को क्षुद्र समझता था अतः उसने अपने घर के चारों ओर दीवार नहीं बनाई थी। इसी कारण उसने स्वयं को अनंत का उपासक कहा है।

प्रश्न 5.
बाईबल के किस आदर्श का उल्लेख किया है?
उत्तर:
दान गुप्त होना चाहिए। एक हाथ से दान देते समय दूसरे हाथ को भी पता नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 6.
नाइग्राफाल सा किसे कहा गया है?
उत्तर:
रोशनदानों से तहखाने में गिरते पानी को नाइग्रा फाल कहा गया है।

नर से नारायण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वर्षा न होने के कारण लेखक ने अपनी वेदना को किस प्रकार व्यक्त किया है?
उत्तर:
ज्वार की पत्तियाँ ऐंठ-ऐंठकर बत्तियाँ बन गई थीं और नए छोटे-छोटे पौधे मुरझाने को विवश हो रहे थे। वर्षा न होने के कारण लेखक निराश था क्योंकि उसकी गाढ़ी कमाई के बीस रुपये बरबाद हो रहे थे क्योंकि इन रुपयों से उसने खेत में चरी बो रखी थी। वर्षा नहीं होने के कारण वे भी मुरझाने लगे थे।

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प्रश्न 2.
भीषण गर्मी के बाद प्रथम वर्षा के सुखद प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भीषण गर्मी के बाद प्रथम वर्षा की बूंदों से मनुष्य का मन प्रसन्न हो उठता है। वह वर्षा की छोटी-छोटी बूंदों के सुख देने वाले शीतल स्पर्श से पुलकित हो जाता है। सड़कें धुलकर साफ़-सुथरी और चिकनी हो जाती हैं। चारों ओर प्रकृति की छटा दर्शनीय हो जाती है। खेतों में हरियाली छा जाती है।

प्रश्न 3.
‘दिग्दाहों से धूम उठे या जलधर उठे क्षितिज तट के’ इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भीषण गर्मी के कारण दिशाओं के जलने के कारण धुआँ उठा अर्थात् क्षितिज के किनारों पर बादल उठे। लेखक इस बात का निर्णय नहीं कर पा रहा है कि क्षितिज पर भीषण गर्मी से जलने के कारण धुआँ उठ रहा है या क्षितिज से बादल उठ रहे हैं।

प्रश्न 4.
लेखक का आनंद आशंका में क्यों बदल गया? (M.P. 2011)
उत्तर:
लेखक का आनंद आशंका में इसलिए बदल गया क्योंकि उसके मकान के पीछे एक फुट पानी भर गया था और वह धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा था। पानी बढ़ने के साथ-साथ लेखक की आशंका भी बढ़ती जा रही थी।

प्रश्न 5.
जब बिजली चली गई तब लेखक को किन-किन कठिनाइयों का सामना करना है? (M.P. 2011)
उत्तर:
बिजली के गुल हो जाने पर चारों तरफ घुप अँधेरा हो गया। सारा घर गहन अंधकार में डूब गया। हाथ को हाथ सुझाई नहीं देता था। सर से सर टकराने की स्थिति आ गई। लालटेन ढूँढ़ी गई तो उसमें तेल नहीं था। घर में माचिस तक न मिली। एक टूटी-फूटी टॉर्च भी थी जिसे ढूँढ़ना कठिन था। रोशनदानों से तहखाने में पानी गिर रहा था। जैसे-तैसे दीपक जलाया गया लेकिन वह तेज हवा के कारण बुझ गया। लेखक के नौकर पड़ोस से लालटेन माँगकर लाए। इस प्रकार जैसे ही रोशनी की व्यवस्था हुई सब लोग घर के भीतर बैठ गए।

प्रश्न 6.
बाढ़-पीड़ितों की सहायता किस प्रकार की गई?
उत्तर:
बाढ़-पीड़ितों को शिक्षण संस्थाओं में आश्रय दिया गया। लोगों ने अन्न, वस्त्रादि देकर उनकी प्राथमिक आवश्यकताएँ पूरी की। उनके घरों के पास वाढ़ के पानी को निकाला गया और मिट्टी डाली गई।

नर से नारायण भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव विस्तार कीजिए –

प्रश्न 1.
‘नारासु अयनं यस्य सः नारायणः’।
उत्तर:
जिसका घर नार (जल) में हो वही नारायण है। नारायण पोषण करने वाले हैं। वर्षा का जल सृष्टि का पोषणकर्ता है। नारायण का घर समुद्र में है जहाँ चारों ओर पानी ही पानी है। वर्षा से उत्पन्न जलभराव के कारण लेखक के घर के चारों ओर पानी भर गया है इसलिए वह बिना किसी करनी के ही स्वयं को नारायण समझने लगा।

प्रश्न 2.
दियासलाई ज्योतिस्वरूप परमात्मा बन गई।
उत्तर:
एकाएक बिजली के गुल होने से गहन अंधकार छा गया। अंधकार में दियासलाई को ढूँढ़ा गया। लेकिन अँधेरे में दियासलाई का मिलना एक टेढ़ी खीर थी। दियासलाई का मिलना ऐसा था जैसे ज्योतिस्वरूप एवं ज्योतिस्रोत ईश्वर का मिलना। इस प्रकार दियासलाई का मिलना परमात्मा के मिलने के समान हो गया था। उस समय घरवालों के लिए दियासलाई ज्योतिस्वरूप परमात्मा के समान बन गई थी।

नर से नारायण भाषा-अनुशीलन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित का समास-विग्रह कर समास का नाम लिखिए –
मन-मयूर, श्रेय-प्रेय, चिंताग्रस्त, नयनाभिराम, जल-प्लावन, सायंकाल, जीव-दया, सुमनवर्षा, जलबाधा, स्नेहशून्य।
उत्तर:
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 2 नर से नारायण img-1

प्रश्न 2.
उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित अनेकार्थी शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
अंक, अर्थ, उत्तर, गुरु, फल।
उदाहरणः

  1. स्नेह-शून्य दीपक कब तक जल पाएगा?
  2. दीनों के प्रति स्नेह-शून्य व्यवहार मत करो।

उत्तर:

  • अंक – इस नाटक में कुल पाँच अंक हैं। बच्चे को रोता देख माँ ने उसे अंक में उठा लिया। रमेश ने परीक्षा में बहुत कम अंक प्राप्त किए हैं।
  • अर्थ – भाई-भाई के बीच में बोलने का तुम्हारा अर्थ क्या है? आजकल तो अर्थ के बिना कोई नहीं पूछता।
  • उत्तर – हिमालय पर्वत उत्तर दिशा में है। मैंने उत्तर लिख दिया है।
  • गुरु – बच्चो! गुरुजी की आज्ञा का पालन करो। मजदूरनी गुरु हथौड़ा हाथ में लिये पत्थर तोड़ रही है।
  • फल – बुरे कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है। आम का फल बड़ा रसीला होता है।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्द-युग्मों का वाक्य में प्रयोग कीजिए –
तन-मन, श्रेय-प्रेय, हँसता-खेलता, टूटी-फूटी, बचा-खुचा।
उत्तर:

  • तन-मन – मैंने उस असहाय बीमार की तन-मन से सेवा की।
  • श्रेय-प्रेय – लेखक आनंद और कर्त्तव्यं तथा श्रेय-प्रेय का समन्वय करने कॉलेज भी गया।
  • हँसता-खेलता – बच्चा हँसता-खेलता ही प्रिय लगता है।
  • टूटी-फूटी – अंग्रेज टूटी-फूटी हिंदी में भी बात कर लेते हैं।
  • बचा-खुचा – नौकर ने बचा-खुचा खाना भिखारी को दे दिया।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित भिन्नार्थी शब्दों के पृथक-पृथक वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
वात-बात, वन-बन, अपेक्षा-उपेक्षा, चिंता-चिता, ओर-और, तरणी-तरणि, सुत-सूत, क्षात्र-छात्र। (M.P. 2010)
उत्तर:

  • वात – वह वात रोग से पीड़ित है।
    बात – रोगी से अधिक बात मत कीजिए।
  • वन – राम वन गए।
    बन – बात बन गई है।
  • अपेक्षा – सोहन से परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने की अपेक्षा की जाती है।
    उपेक्षा – हमें अपने माता-पिता की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
  • चिंता – पुत्र को बीमार देखकर माँ का मनचिंता से अनायास भर उठा।
    चिता – चिता की अग्नि धधक उठी।
  • ओर – सूर्य पूर्व दिशा की ओर से उगता है।
    और – धर्म और कर्म ही मनुष्य के साथ जाते हैं।
  • तरणी – भक्ति रूपी तरणी से भवसागर पार किया जा सकता है।
    तरणि – तरणि का तेज देखते ही बनता है! (M.P. 2010)
  • सुत – मेरा ही सुत मुझे आँखें दिखा रहा है।
    सूत – गाँधीजी सूत कातते थे। (M.P. 2010)
  • क्षात्र – क्षात्र को खुला मत छोड़ना।
    छात्र – यह छात्र बहुत परिश्रमी है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
कान में भनक पड़ना, त्राहि-त्राहि मचना, दो-चार आँसू बहाना, घर फूंक तमाशा देखना, भगीरथ प्रयत्न करना।
उत्तर:

  • कान में भनक पड़ना – (निंदा, बुराई अथवा षड्यंत्र की बात सुनने में आना) आतंकी योजना की कान में भनक पड़ने ही पुलिस सजग हो गई।
  • त्राहि-त्राहि मचना – (हाहाकार होना) महँगाई से सारे देश में त्राहि-त्राहि मची हुई है। (M.P. 2009)
  • दो-चार आँसू बहाना – (दख प्रकट करना) महँगाई के नाम पर नेतागण दो-चार आँसू बहा लेते हैं।
  • घर फूंक तमाशा देखना – (हानि उठाकर प्रसन्न होना) दीपावली पर पटाखे चलाना घर फूंक तमाशा देखने के बराबर है।
  • भगीरथ प्रयत्न करना – (अत्यधिक प्रयास करना) आई.ए.एस. बनने के लिए भगीरथ प्रयत्न करना पड़ता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित लोकोक्तियों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए –

  1. का वर्षा जब कृषि सुखानी।
  2. सिमिटि-सिमिटि जल भरहिं तलाबा।

उत्तर:

  1. जब आतंकवादी शहर में विस्फोट करने में सफल हो गए तब पुलिस पहुँची। टीक ही कहा गया है-का वर्षा जब कृषि सुखानी।
  2. लेखक के घर के चारों ओर सिमिटि-सिमिटि जब भरहिं तलाबा वाली कहावत चरितार्थ हो रही थी।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार रूपांतरित कीजिए –

  1. बच्चे भी घर की गंगाजी में कागज की नावें तैराकर खुश हो रहे थे। (संयुक्त वाक्य)
  2. मेरी सौंदर्योपासना अविचलित रही, क्योंकि ऐसा कई बार हो चुका था। (सरल वाक्य)
  3. सुबह उठकर जलप्लावन का व्यापक एवं भयंकर दृश्य देखा। (मिश्र वाक्य)

उत्तर:

  1. बच्चे भी घर की गंगाजी में कागज की नावें तैरा रहे थे और खुश हो रहे थे।
  2. ऐसा कई बार होने के कारण मेरी सौंदर्योपासना अविचलित रही।
  3. जो सुबह उठकर जलप्लावन का दृश्य देखा, वह व्यापक एवं भयंकर था।
    या
    जब सुबह उठा तब जलप्लावन का व्यापक एवं भयंकर दृश्य देखा।

नर से नारायण योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1.
यदि आपके गाँव या नगर में बाढ़ आ जाए तो आप बाढ़ पीड़ितों के लिए क्या-क्या उपाय करेंगे? लिपिबद्ध कीजिए।
उत्तर:
यदि हमारे गाँव या नगर में बाढ़ आ जाए तो हम बाढ़ पीड़ितों को उस गाँव या नगर के सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाएँगे और उनकी अन्न, वस्त्र और औषधियों से खूब सहायता करेंगे। उनके घरों के पास से पानी निकालने में प्रशासन की सहायता करेंगे। उनके पशुओं के लिए चारे का प्रबंध करेंगे। पशुओं को भी सुरक्षित स्थानों पर ले जाएँगे।

प्रश्न 2.
प्राकृतिक आपदाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त कर कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
बाढ़, भूकंप, सूखा आदि प्राकृतिक आपदाएँ हैं। छात्र इनके संबंध में स्वयं जानकारी प्राप्त कर चर्चा करें।

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प्रश्न 3.
‘वर्षा-ऋतु’ अथवा ‘जल ही जीवन है’ विषय पर 150 शब्दों में निबंध लिखिए। (M.P. 2011)
उत्तर:
छात्र स्वयं लिखें। निबन्ध खण्ड में देखें।

नर से नारायण परीक्षोपयोगी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर –

प्रश्न 1.
‘नर से नारायण’ निबंध का लेखक कौन है?
(क) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(ख) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
(ग) बाबू गुलाबराय
(घ) आचार्य नरेंद्र देव
उत्तर:
(ग) बाबू गुलाबराय।

प्रश्न 2.
निबंध में किस ऋतु के प्रभाव का वर्णन किया गया है?
(क) ग्रीष्म ऋतु
(ख) वर्षा ऋतु
(ग) वसंत ऋतु
(घ) शरद ऋतु
उत्तर:
(ख) वर्षा ऋतु।

प्रश्न 3.
स्वयं को नारायण कौन समझने लगा?
(क) बनर्जी साहब
(ख) रणधीर जी
(ग) मंगलदेव जी
(घ) लेखक बाबू गुलाबराय
उत्तर:
(घ) लेखक बाबू गुलाबराय।

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प्रश्न 4.
लेखक ने बनर्जी साहब का निमंत्रण कब स्वीकार किया? (M.P. 2009)
(क) जब बिजली गुल हो गई
(ख) जब बरामदे और शयनागार का फर्श बैठ गया
(ग) जब तहखाने में साँप आ गया
(घ) जब उनका घर जलमग्न हो गया
उत्तर:
(ख) जब बरामदे और शयनागार का फर्श बैठ गया।

प्रश्न 5.
लेखक ने किस काम को संदल घिसने की भाँति सरदर्द वाला बताया है?
(क) लालटेन ढूँढ़ने के काम को
(ख) दियासलाई ढूँढ़ने के काम को
(ग) टॉर्च ढूँढ़ने के काम को
(घ) दीपक जलाने के काम को
उत्तर:
(ग) टॉर्च ढूँढ़ने के काम को।

प्रश्न 6.
लेखक ने अपने किस पड़ोसी की व्यवहारकुशलता की प्रशंसा की है?
(क) बनर्जी साहब की
(ख) मंगलदेव की
(ग) काछी-कुम्हार की
(घ) रणधीर की
उत्तर:
(क) बनर्जी साहब की

प्रश्न 7.
लेखक ने वरुण-रस किसे कहा है?
(क) वर्षा के जल को
(ख) कुएँ के पानी को
(ग) तालाब के जल को
(घ) समुद्र के जल को
उत्तर:
(क) वर्षा के जल को।

प्रश्न 8.
लेखक ने किस रस के लौकिक अनुभव की पुनरावृत्ति न कराने की प्रार्थनकी?
(क) रौद्र रस की
(ख) करुण रस की
(ग) शांत रस की
(घ) वरुण रस की
उत्तर:
(घ) वरुण रस की।

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें –

  1. ‘नर से नारायण’ निबन्ध के लेखक ………. हैं। (गुलाबराय रामचन्द्र शुक्ल) (M.P. 2009)
  2. लेखक गुलाबराय ……… के भूतपूर्व सदस्य थे। (जीव-दया प्रचारिणी सभा/महासभा)
  3. ………. के महीने में पानी की त्राहि-त्राहि मची हुई थी। (अगस्त सितम्बर)
  4. लेखक के माली का नाम ………. था। (रविदेव/मंगलदेव)
  5. लेखक के पड़ोसी का नाम ……… था। (श्री बनर्जी साहब/श्री चटर्जी साहब)

उत्तर:

  1. गुलाबराय
  2. जीवन-दया प्रचारिणी सभा
  3. सितम्बर
  4. मंगलदेव
  5. श्री बनर्जी साहब।

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III. निम्नलिखित कथन के लिए सही विकल्प चुनिए –

प्रश्न 1.
‘नर से नारायण’ निबन्ध में लेखक ने बीस रुपये किस पर खर्च किए थे?
(क) लालटेन खरीदने में
(ख) फसल बोने में
(ग) तहखाने का रोशनदान बनवाने में
(घ) माली से पौधे लगवाने में
उत्तर:
(ख) फसल बोने में

IV. निम्नलिखित कथनों में सत्य असत्य छाँटिए –

  1. ‘नर से नारायण’ शीर्षक निबन्ध की भाषा संस्कृत प्रधान है।
  2. लेखक को अपने तहखाने के रोशनदानों पर काफी गर्व था।
  3. बिजली गुल होते ही सभी घर से बाहर निकल पड़े।
  4. लालटेन में तेल भरा हुआ था।
  5. लेखक वर्षा के सौंदर्य रूप से अधिक प्रभावित था।
  6. ‘नर से नारायण’ निबंध लेखक बाबू गुलाबराय हैं। (M.P. 2012)

उत्तर:

  1. सत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. असत्य
  5. सत्य
  6. सत्य।

V. निम्न के सही जोड़े मिलाइए –

प्रश्न 1.
MP Board Class 12th Hindi Makrand Solutions Chapter 2 नर से नारायण img-2
उत्तर:

(क) (iii)
(ख) (i)
(ग) (v)
(घ) (ii)
(ङ) (iv)

VI. निम्न प्रश्नों के एक शब्द या एक वाक्य में उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1.
श्री बनर्जी साहब कौन थे?
उत्तर:
श्री बनर्जी साहब लेखक गुलाबराय के पड़ोसी थे।

प्रश्न 2.
त्राहि-त्राहि क्यों मची हुई थी? (M.P. Board 2009)
उत्तर:
अवर्षा की स्थिति के कारण त्राहि-त्राहि मची हुई थी।

प्रश्न 3.
लेखक ने खेत में क्या बो रखी थी?
उत्तर:
लेखक ने खेत में चरी बो रखी थी।

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प्रश्न 4.
लेखक को कहाँ पर आश्रय मिला था?
उत्तर:
लेखक को जैन बोर्डिंग में आश्रय मिला था।

प्रश्न 5.
लेखक को तहखाने के रोशनदानों पर क्यों गर्व था?
उत्तर:
क्योंकि लेखक सायंकाल को भी वहाँ बैठकर लिख-पढ़ सकता था।

नर से नारायण लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक पहले किस स्थिति से दुखी था?
उत्तर:
लेखक पहले अवर्षा की स्थिति से दुखी था।

प्रश्न 2.
गरीब किसानों की भस्म करने वाली आहों का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
गरीब किसानों की भस्म करने वाली आहों के प्रभाव से आकाश में बादल – बनते दिखाई देने लगे।

प्रश्न 3.
लेखक को स्फूर्ति क्यों आई और उसने क्या किया?
उत्तर:
वर्षा के कारण लेखक के शरीर में स्फूर्ति आई और वह लिखने बैठ गया।

प्रश्न 4.
लेखक ने बेरोजगारी की समस्या पर क्या चुटकी ली है?
उत्तर:
लेखक ने बेरोजगारी की समस्या पर चुटकी लेते हुए कहा है कि आजकल के युग में बेकारों की अर्जियों से दफ्तर बन जाते हैं।

प्रश्न 5.
अगस्त्य ऋषि का यांत्रिक अवतार किसे कहा गया है?
उत्तर:
फायर बिग्रेड को अगस्त्य ऋषि का यांत्रिक अवतार कहा गया है।

प्रश्न 6.
त्राहि-त्राहि क्यों मची हुई थी? (M.P. 2009)
उत्तर:
सितम्बर महीने तक बारीश न होने से त्राहि-त्राहि मची हुई थी।

प्रश्न 7.
लेखक को तहखाने में बने रोशनदानों पर क्यों गर्व था?
उत्तर:
लेखक को तहखाने में बने रोशनदानों पर इसलिए गर्व था कि उनसे प्रकाश के साथ-साथ वायु का भी आर-पार संचार होता था।

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प्रश्न 8.
लेखक को जल-बाधा से कितने दिन बाद मुक्ति मिली?
उत्तर:
लेखक को पूरे सप्ताह अर्थात् सात दिन बाद जल-बाधा से मुक्ति मिली।

नर से नारायण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक ने वर्षा के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद कैसे लिया?
उत्तर:
लेखक ने वर्षा के दौरान कमरे से बाहर जाकर मेघाच्छादित गगन मंडल की शोभा निहारकर, बगीचे में जाकर शेफाली के गिरते फूलों को देखते हुए तथा धोए-धोए पत्तों वाली हरित-ललित-यौवनभरी लहलहाती लताओं के सौंदर्य का अपने नेत्रों से पान करके प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया।

प्रश्न 2.
लेखक के मकान को वर्षा ने क्या-क्या हानि पहुँचाई?
उत्तर:
लेखक के मकान के तहखाने में पानी भर गया। कमरों तथा बरामदे के फर्श बैठ गए और भैंस बाँधने का छप्पर जलमग्न हो गया। उसके मकान के चारों ओर पानी भर गया।

प्रश्न 3.
बाढ़ का प्रभाव किन-किन स्थानों पर हुआ?
उत्तर:
बाढ़ का प्रभाव लेखक के मकान और उसके पड़ोसियों पर भी पड़ा। जेल के पास नाव चलने की नौबत आ गई। सेंट जोंस गर्ल्स स्कूल जलमग्न हो गया। गाँव के गाँव जलमग्न हो गए। काफी लोगों की मृत्यु हो गई। जो लोग घर से बाहर गए थे उनके लिए लौटना मुश्किल हो गया। आगरा फोर्ट के पास सड़क फट गई। बिजली के खंभे उखड़ गए। इस प्रकार कई स्थान बाढ़ की चपेट में बुरी तरह आ गए।

प्रश्न 4.
लेखक स्वयं को कब नारायण समझने लगा था?
उत्तर:
लेखक यह जानता था कि जल ही नारायण का निवास स्थान है। चूंकि अत्यधिक वर्षा के कारण उसके घर के चारों ओर तथा तहखाने में पानी भर गया था। इस दशा को देखकर वह स्वयं को नारायण समझने लगा था।

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प्रश्न 5.
लेखक अपने घर को मनु की नौका क्यों समझ रहा था?
उत्तर:
चूँकि बारिश बहुत हुई थी। उससे लेखक के घर के चारों ओर पानी भर गया। इससे सारा घर क्षतिग्रस्त हो गया था। इस टूटे-फूटे और जल में डूबते हुए अपने घर को देखकर लेखक उसे मनु की नौका समझ रहा था।

नर से नारायण लेखक-परिचय

प्रश्न 1.
बाबू गुलाबराय का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
बाबू गुलाबराय हिंदी के प्रसिद्ध समालोचक एवं निबंधकार थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा नगर में सन् 1888 ई० में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में हुई जो काफी सुदृढ़ और नियमित थी। बाद में वे आगरा विश्वविद्यालय के छात्र हो गए और वहाँ से उन्होंने दर्शनशास्त्र में एम.ए. करने के बाद एल.एल.बी. की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद वे छतरपुर के महाराज के निजी सचिव के रूप में कार्य करते रहे। इसके बाद आप एक रियासत के दीवान रहे और इस पद पर कुशलतापूर्वक कार्य किया।

महाराज के निधन के पश्चात् आप आगरा के सेंट जॉन्स कॉलेज में अध्यापन-कार्य करने लगे। आपने आगरा से निकलने वाले ‘साहित्य-संदेश’ के संपादक के रूप में कार्य करते हुए अपने चिंतन की प्रखरता और गंभीरता से साहित्य जगत् में अपना विशिष्ट स्थान बनाया था। उनकी विशिष्ट साहित्यिक सेवाओं के लिए आगरा विश्वविद्यालय ने इन्हें डी-लिट. की मानद उपाधि से सम्मानित किया था। इनका निधन 13 अप्रैल, सन् 1963 ई० में आगरा में हुआ।

साहित्यिक विशेषताएँ:
बाबू गुलाबराय का साहित्य विविधताओं से भरा हुआ है। उनकी रचनाओं में तर्कपूर्ण विश्लेषण के साथ-साथ भारतीय सिद्धांतों की सूक्ष्म विवेचना मिलती है। उन्होंने धर्म, दर्शन एवं साहित्य से संबंधित कई महत्त्वपूर्ण विषयों पर निबंध लिखे हैं। उनके निबंध वर्णनात्मक, विवेचनात्मक और भावात्मक होने के साथ-साथ मनोवैज्ञानिकता से भरपूर हैं। उनके निबंधों में गंभीरता के साथ-साथ व्यंग्य और विनोद का पुट भी मिलता है। उनकी रचनाओं में एक विचित्र रस है जो पाठक और श्रोता को बाँधे रखता है। वे द्विवेदी युग के एक सशक्त एवं परिपक्व गद्यकार हैं। द्विवेदी युग में ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में गंभीर विवेचन करने वाले विद्वानों में आपका सर्वोच्च स्थान है।

रचनाएँ:
बाबू गुलाबराय ने गद्य-साहित्य की अनेक विधाओं पर अपनी लेखनी चलाई है। उनकी रचनाओं में मुख्य हैं –

  • काव्य-शास्त्र – नवरस, सिद्धांत और अध्ययन, काव्य के रूप, हिंदी नाट्य-विमर्श।
  • साहित्य का इतिहास – हिंदी साहित्य का सुबोध इतिहास।
  • आलोचना – अध्ययन और आस्वाद, हिंदी काव्य-विमर्श।
  • निबंध-संकलन – फिर निराश क्यों, मेरे निबंध, मनोवैज्ञानिक निबंध, जीवन-रश्मियाँ, व्यंग्य-ठलुआ क्लब, डॉक्टर साहब।
  • जीवनीपरक – मेरी असफलताएँ।

भाषा-शैली:
आपकी भाषा-शैली सरल, सुबोध एवं व्यावहारिक है। आपने गंभीर विषयों में संस्कृत प्रधान भाषा का प्रयोग किया है। उन्होंने अपनी रचनाओं में अरबी, फारसी, अंग्रेजी का प्रयोग किया है। मुहावरों और कहावतों के सटीक प्रयोग करने में आप सिद्धहस्त हैं।

महत्त्व:
हिंदी गद्य साहित्य में बाबू गुलाबराय का महत्त्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने गद्य साहित्य की अनेक विधाओं की रचना कर, सशक्त और परिपक्व गद्यकार के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने हिंदी आलोचना और निबंध के क्षेत्र में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान कर हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है।

‘नर से नारायण’ पाठ का सारांश ।

प्रश्न 2.
बाबू गुलाबराय द्वारा लिखित निबंध ‘नर से नारायण’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
इस निबंध की विषय-वस्तु ‘वर्षा’ केंद्रित है किंतु निबंधकार ने अपने आत्मगत विस्तार में अनेक विषयों का स्पर्श किया है। निबंध के प्रारंभ में अवर्षा की स्थिति से प्रभावित प्रकृति की ओर संकेत किया गया है, और बाद में अति वर्षा के कारण घर-गृहस्थी पर पड़ने वाले प्रभाव को व्यक्त किया है। सितंबर महीने में सब तरफ पानी का अभाव था लेकिन लेखक ने बीस रुपये व्यय करके खेत में चरी बो दी।

पानी की कमी के कारण चरी के नए पौधे सूखने लगे। खैर, किसानों की आह से आकाश में बादल उमड़ने-घुमड़ने लगे। आकाश में बादल का छाना क्या था, लेखक का मन प्रफुल्लित हो उठा। वह उनकी उपयोगिता की अपेक्षा उनके सौंदर्य से अधिक प्रभावित हुआ। वह घर से बाहर निकलकर वर्षा की छोटी-छोटी बूंदों का आनंद लेता हुआ इधर-उधर घूमने लगा। वर्षा की छटा और खेती के फलने-फूलने के उत्साह से भरा वह घर लौटा।

वर्षा में भीगने के कारण शरीर में स्फूर्ति का संचार हुआ और उससे प्रेरित होकर वह फौरन लिखने बैठ गया। कभी बाहर जाकर बादलों से घिरे आकाश का सौंदर्य निहारता तो कभी बगीचे में उगे शेफानी के फूलों ओर लताओं के सौंदर्य पर निगाह डालता। सचमुच वह बहुत प्रसन्न था। वर्षा लगातार हो रही थी। बहुत जल्दी घर के पीछे की ओर एक फुट पानी भर गया था, परंतु लेखक के लिए यह चिंता का विषय नहीं था। लेकिन जब घर के चारों ओर पानी भर गया तो उसके मन में आशंका उत्पन्न हो गई कि पानी के तालाब में कहीं बाढ़ आ गई तो? शीघ्र ही पास की जमीन का पानी लेखक की जमीन में आ गया।

पानी थोड़ी देर में रोशनदानों के मुँह तक पहुँच गया और पानी घर के अंदर गिरने लगा। लेखक को अपने घर के तहखाने के रोशनदानों पर बड़ा गर्व था। वह सभी आने वाले के सामने तहखाने में आर-पार वायु संचार की व्यवस्था का और टूटी-फूटी शान और स्वास्थ्य-विज्ञान संबंधी ज्ञान का प्रदर्शन करता था। इन्हीं रोशनदानों से तहखाने में पानी के झरने गिरने लगे। वर्षा के इस दौर में बिजली चली गई। चारों ओर घुप अंधकार हो गया। हाथ को हाथ नहीं सूझता था। लालटेन की खोज होने लगी। अँधेरे के कारण घर में दियासलाई मिलनी भी मुश्किल थी। जैसे-तैसे तेलरहि लालटेन मिली। एक टूटी-फूटी टॉर्च थी किंतु उसे ढूँढ़ना कठिन था। लेखक को लगा कि सेलरों से गिरते निर्झर उसकी मूर्खता की घोषणा कर रहे हों। घर के नौकर पड़ोस से लालटेन ले आए और हम सब शांतिपूर्वक घर में बैठ गए।

अभी तक लेखक को कोई खास चिंता नहीं थी। थोड़ी देर में पास के कमरे से आवाज आई, ‘चलियो’ नौकर ने चिल्लाकर कहा, ‘बाबूजी उधर ही रहना’, जमीन बैठ गई थी तथा फर्श के पत्थर आपस में सर से सर मिलाकर खड़े हो गए थे। भैंस का छप्पर भी तालाब बन चुका था। लेखक के पड़ोसी ने उनसे कहा कि कोई तकलीफ हो तो इधर आ जाना। थोड़ी देर में बरामदे और शयन कक्ष का फर्श भी बैट गया। बाद में पड़ोसी के घर में शरण ली। उन्होंने भैंस को भी अपने यहाँ आश्रय दिया। रात वहीं गुज़री। सुबह जब लेखक उठा तो उसे बाढ़ का भयंकर दृश्य दिखाई दिया। लेखक करुण हास्य के साथ जल-प्रवाह देखने लगा और स्वयं को कामायनी का मन ही नहीं नारायण समझने लगा। इस प्रकार लेखक बिना किए ही नर से नारायण बन गया।

उस दिन लेखक को सभी की सहानुभूति मिली। वर्षा के बाद घर से पानी निकालने का प्रयास असफल हो गया। अगले फायर ब्रिगेड ने पानी निकालने का असफल प्र किया। पाँचवें दिन इंजन लगाकर पानी निकाला गया। कोठी के चारों ओर मिट्टी डाली गई। इस प्रकार पूरे एक सप्ताह बाद जल-बाधा दूर हुई। – लेखक के घर का ही यह हाल नहीं था अपितु कई स्थानों पर ऐसा ही दृश्य दिखाई दे रहा था। बाढ़ में गाँव के गाँव जलमग्न हो गए। अनेक लोग मौत के शिकार हो गए। जो लोग घर से बाहर गए हुए थे उनको घर लौटना मुश्किल हो गया। सड़कें टूट गईं, पुल बह गए। सभी शिक्षा संस्थाओं में बाढ़-पीड़ितों को आश्रय दिया गया। सभी बाढ़-पीड़ितों की सहायता कर रहे थे। लेखक के परिवार को भी जैन बोर्डिंग में आश्रय मिला। लेखक ईश्वर से प्रार्थना करता है कि वह इस बाढ़ की पुनरावृत्ति न कराए।

नर से नारायण संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

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प्रश्न 1.
सितंबर के महीने में, पानी की त्राहि-त्राहि मची हुई थी। मैंने भी धर्म-पालन के लिए पास के एक खेत में चरी बो रखी थी। ज्वार की पत्तियाँ ऐंठ-ऐंठकर बत्तियाँ बन गई थीं। मैं भी जीव-दया प्रचारिणी सभा का भूतपूर्व मेम्बर होने के नाते नौनिहाल, किंतु अब तन-मन मुाए हुए नव-उम्र पौधों की बेकसी पर और अपनी गाढ़ी कमाई के बीस रुपयों की बरबादी पर दो-चार आँसू बहा देता। लेकिन उनसे होता क्या? यदि वे रीतिकालीन काव्यों की विरहिणी गोपिकाओं के समान भी होते, जिनसे कि समुद्र का पानी खारा हो गया था, तो भी वे खारा होने के कारण सिंचाई का काम न देते। खैर, फिर भी गरीब किसानों की सार को भस्म करने वाली आहों के बादल बनते दिखाई दिए, ‘दिग्दाहों से धूम उठे या जलधर उठे क्षितिज तट के।

ऐसा मालूम होने लगा कि अब दीनदयाल के कान में भनक पड़ी और शायद यह न कहना पड़े ‘का वर्षा जब कृषि सुखानी’। ‘धूम-धुआँरे कारे कजरारे’ श्याम घनों को देखकर मेरा। मन-मयूर नृत्य करने लगा। बादलों की उपयोगिता की अपेक्षा मैं उनके सौन्दर्य से अधिक प्रभावित होता हूँ। बाहर घूमता फिरा, नन्हीं-नन्हीं बूंदों के सुखद शीतल स्पर्श से पुलकित हुआ। आनंद और कर्त्तव्य तथा श्रेय-प्रेय का समन्वय करने कॉलेज भी गया। यद्यपि मेरी सदा छुट्टी-सी रहती है तो भी वर्षा के कारण कॉलेज बंद हो जाने से बालकपन के संस्कारोंवश प्रसन्नता का अनुभव किया। धुली-धुलाई सड़कों की स्निग्ध चमकीली छटा तथा चारों ओर के नयनाभिराम छायावादी आर्द्र सौंदर्य का आस्वादन करता हुआ हँसता-खेलता, खेती की ओर हर्ष-पूर्ण दृष्टिपात करता हुआ उमंगभरे हृदय के साथ घर लौटा। (Page 5)

शब्दार्थ:

  • त्राहि-त्राहि करना – किसी आपदा के समय रक्षा के लिए प्रार्थना करना, गुहार लगाना।
  • जीव-दया – जीवों पर दया करना।
  • बेबसी – विवशता।
  • गाढ़ी कमाई – परिश्रम की कमाई।
  • आँसू बहाना – दुख व्यक्त करना।
  • विरहिणी – वियोगिनी।
  • सार – किसी पदार्थ का मुख्य या मूल भाग।
  • दिग्दाह – दिशाओं का जलना।
  • जलघर – बादल।
  • क्षितिज – वह काल्पनिक रेखा जहाँ पृथ्वी और आकाश मिलते प्रतीत होते हैं।
  • दीनदयाल – ईश्वर, भगवान।
  • कान में भनक पड़ना – जानकारी होना।
  • का वर्षा जब कृषि सुखानी – खेती सूखने पर वर्षा होने का क्या लाभ।
  • श्याम घन – काले बादल।
  • पुलकित – आनंदित होना, प्रसन्न होना।
  • छटा – शोभा।
  • उमंग – उत्साह।
  • स्निग्ध – चिकनी।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश बाबू गुलाबराय द्वारा लिखित निबंध ‘नर से नारायण’ से उद्धृत है। इस पद में लेखक ने अवर्षा की स्थिति से प्रभावित प्रकृति की ओर संकेत किया है। बाद में आकाश में बादल छा जाते हैं। लेखक प्रफुल्लित हो जाता है। अपनी मनःस्थिति का वर्णन करते हुए वह कहता है –

व्याख्या:
सितंबर महीने तक वर्षा न होने के कारण पानी की कमी के कारण सभी इंद्रदेवता से सूखे से रक्षा करने के लिए गुहार लगा रहे थे। लेखक कहता है कि उसने भी धर्म का पालन करने के लिए पास के एक खेत में चरी बो रखी थी। पानी की कमी के कारण खेत में खड़ी ज्वार के पौधों की पत्तियाँ सूखकर, ऐंठकर बत्तियों-सी बन गई थीं। अर्थात् ज्वार की फसल सूखकर नष्ट हो रही थी। लेखक जीवों पर दया करने का प्रचार करने वाली संस्था का भूतपूर्व नौजवान सदस्य था। किंतु अब सूखे की स्थिति के कारण खेत में उत्पन्न नए-नए पौधों के तन-मन से मुरझाते जाने की विवशता और अपनी मेहनत से कमाये गए बीस रुपयों के बरबाद होते चले जाने पर आँसू बहाकर दुख व्यक्त कर रहा था।

अर्थात् लेखक ने अपनी मेहनत की कमाई के बीस रुपयों से चरी के बीज खेत में बोए थे। उनमें अंकुर फूटकर पौंधे बन गए थे किंतु पानी के अभाव के कारण चरी के वे नए पौधे सूखने लगे थे। लेखक को अपने बीस रुपये बरबाद होने का दुख हो रहा था। परंतु उसके दुख व्यक्त करने से कुछ होने वाला नहीं था। यदि उसके आँसू रीतिकालीन काव्यों की वियोगिनी नायिकाओं की भाँति भी होते, जिनके आँसुओं के कारण समुद्र का पानी खारा हो गया था, तो भी आँसुओं के खारा होने के कारण सिंचाई के काम न आते। इस प्रकार रीतिकालीन कवियों ने वियोगिनी नायिकाओं के आँसुओं का बढ़ा-चढ़ा कर वर्णन किया है। उनके आँसुओं के समुद्र में मिलने के कारण समुद्र का पानी खारा हो गया था।

फिर भी गरीब किसानों की किसी पदार्थ को भस्म करने वाली आहों (कराहने की आवाज) से आकाश में बादल छाते दिखाई पड़ने लगे। उन किसानों की आहों से दिशाओं के जलने से धुआँ उठा या क्षितिज के किनारे बादल उठे, यह निश्चित नहीं हो रहा था। लेकिन आकाश में उठे बादलों को देखकर ऐसा लगता था कि दीन-दुखियों पर दया करने वाले ईश्वर के कानों में अब उनकी आवाज पहुँच गई है और संभवतः यह न कहना पड़ेगा कि कृषि (खेती) सूखने पर वर्षा होने का क्या लाभ? निस्संदेह काले बादलों को देखकर लगता था कि अब वर्षा होगी और खेती सूखने से बच जाएगी। लेखक कहता है कि आकाश में काजल के समान काले-काले बादलों को उमड़ते-घुमड़ते देखकर उसका मन प्रसन्नता से झूम उठा।

वह बादलों की उपयोगिता के स्थान पर उनकी सुंदरता से अधिक प्रभावित होता है। वह वर्षा की छोटी-छोटी बूंदों का आनंद लेते हुए घर से बाहर निकल पड़ता है। घूमते-फिरते बूंदों के सुख देने वाले ठंडे स्पर्श से प्रसन्न हो उठा। आनंद और कर्त्तव्य तथा श्रेय-प्रेय का समन्वय करने के लिए वर्षा में ही कॉलेज भी चला गया। यह बात अलग है कि उसकी तो सदा छुट्टी ही रहती है तब भी वर्षा में कॉलेज बंद हो जाने के कारण बालकपन के संस्कारों के कारण प्रसन्नता का अनुभव किया।

अर्थात् जैसे बालकपन में वर्षा के कारण स्कूल बंद होने पर आनंद का, प्रसन्नता का अनुभव होता था उसी प्रकार अब कॉलेज के बंद होने पर प्रसन्नता का अनुभव हुआ। वर्षा के कारण धुलकर साफ़-सुथरी हुई सड़कों की चमकीली शोभा तथा प्रकृति में चारों ओर प्राकृतिक सौंदर्य का रसपान करता हुआ तथा हँसता-खेलता हुआ, खेतों की ओर प्रसन्नतापूर्वक देखता हुआ, उत्साहभरे हृदय से वापस आया।

विशेष:

  1. इन पंक्तियों में लेखक ने अवर्षा के प्रभाव का वर्णन किया है। बाद में वर्षा होने के प्रभाव को व्यक्त किया है। वर्षा के प्राकृतिक सौंदर्य का आकर्षक चित्रण किया गया है।
  2. भाषा संस्कृत प्रधान है।
  3. शैली वर्णनात्मक एवं आत्मनिष्ठ है।
  4. मुहावरों और लोकोक्तियों के कारण गद्यांश आकर्षक बन पड़ा है।
  5. लोकोक्तियों के प्रयोग से सजीवता आ गई है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
लेखक ने किस धर्म-पालन की बात की है?
उत्तर:
लेखक ने खेती करने के धर्म-पालन की बात की है। धर्म-पालन के लिए उसने खेत में चरी बोई थी।

प्रश्न (ii)
ज्वार की पत्तियाँ ऐंठ-ऐंठकर बत्तियाँ क्यों बन गई थीं?
उत्तर:
पानी की कमी के कारण ज्वार की पत्तियाँ ऐंठकर बत्तियाँ बन गई थीं।

प्रश्न (iii)
किसानों की आहों का क्या प्रभाव हुआ?
उत्तर:
किसानों की आहों का यह असर हुआ कि आकाश में बादल उमड़ने-घुमड़ने लगे।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
लेखक किंस संस्था का भूतपूर्व सदस्य था?
उत्तर:
लेखक जीव-दया प्रचारिणी सभा का भूतपूर्व सदस्य था।

प्रश्न (ii)
आँसुओं का पानी कैसा होता है?
उत्तर:
आँसुओं का पानी खारा होता है। इस कारण सिंचाई के काम नहीं आ सकता।

प्रश्न (iii)
लेखक बादलों के किस रूप से प्रभावित होता है?
उत्तर:
लेखक बादलों के सौंदर्य रूप से अधिक प्रभावित होता है।

प्रश्न 2.
मैं अपने तहखाने के रोशनदानों पर गर्व किया करता था कि मैं उनके कारण सायंकाल को भी वहाँ बैठकर लिख-पढ़ सकता था। जो महाशय मेरा मकान देखने की कृपा करते, उनसे मैं आर-पार वायु संचार की तारीफ बड़ी प्रसन्नता के साथ करता था, क्योंकि उससे मुझे अपनी टूटी-फूटी शान और स्वास्थ्य-विज्ञान संबंधी ज्ञान के प्रदर्शन का मौका मिल जाता। सौंदर्यप्रिय होते हुए भी तहखाने के झरनों के पुष्ट मांसल सौंदर्य का आस्वादन न कर सका। यदि घर फूंक तमाशा भी देखना चाहता तो नामुमकिन हो गया था।

एक साथ बिजली ठप्प हो गई। घर फूंक तमाशा देखने वाले को कम से कम प्रकाश की तो जरूरत नहीं होती। यहाँ तो पूर्व जन्म के पापों के उदय होने के कारण ‘असूर्या नाम ते लोकाः अन्धेन तमसावृताः’ का दृश्य. उपस्थित हो गया। घनी कालिमा बिना स्तर-स्तर जमे ही पीन होने लगी। सूची-भेद्य अंधकार का साम्राज्य हो गया। हाथ को हाथ नहीं सूझता था। बाइबिल के आदर्श दानी की भाँति दायाँ हाथ बाएँ हाथ की बात नहीं जान सकता था। सर से सर टकराने की नौबत आ गई थी। लालटेन की पुकार होने लगी। (Pages 5-6)

शब्दार्थ:

  • तहखाना – जमीन के नीचे बना हुआ कमरा।
  • गर्व – घमंड, अभिमान।
  • तारीफ़ – प्रशंसा।
  • मांसल – मांस से भरा हुआ, पुष्ट।
  • आस्वादन – स्वाद लेना।
  • नामुमकिन – असंभव।
  • पीन-भरा – पूरा, स्थूल।
  • नौबत – स्थिति।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश बाबू गुलाबराय द्वारा लिखित निबंध ‘नर से नारायण’ से लिया गया है। लेखक अपनी कोठी में बने तहखाने का वर्णन करने के साथ-साथ, वर्षा के प्रभाव का वर्णन कर रहा है।

व्याख्या:
लेखक कहता है कि कोठी में जमीन के अंदर बने कमरे (तहखाने) के रोशनदानों पर उसे बड़ा घमंड था, क्योंकि इन रोशनदानों से रोशनी के साथ-साथ वायु का आवागमन निरंतर होता रहता था। इन्हीं रोशनदानों के कारण वह तहखाने में बैठकर शाम को भी लेखन-कार्य कर सकता था। जो भी व्यक्ति लेखक का मकान देखने आता, लेखक उन्हें अपने तहखाने को दिखाता और उसमें वायु के आने-जाने के लिए बने रोशनदानों की बड़ाई करता। वायु संचार की व्यवस्था बताता। इसके कारण लेखक को अपनी झूठी शान और स्वास्थ्य-विज्ञान संबंधी अपनी शान का दिखावा करने का अवसर मिलता था।

लेखक कहता है कि वह सौंदर्यप्रिय होते हुए भी तहखाने के रोशनदानों से तहखाने के अंदर गिरने वाले बाढ़ के पानी के झरनों के मांस से भरे हुए अर्थात् पुष्ट सौंदर्य के स्वाद का आनंद नहीं ले सका। परंतु यदि वह हानि उठाकर प्रसन्न होना चाहता तो भी यह असंभव हो गया था। अर्थात् तहखाने में रोशनदानों से बाढ़ का पानी भर गया था, अतः उसमें गिरने वाले बाढ़ के पानी के झरनों के सौंदर्य का आनंद लेना संभव नहीं था।

हानि उठाकर प्रसन्न होने के लिए प्रकाश की आवश्यकता होती है क्योंकि अंधकार में सौंदर्य को नहीं देखा जा सकता। यहाँ तो स्थिति यह हो गई थी कि पिछले जन्म के पापों के कारण असूर्या के नाम लेने मात्र से ही जैसे संसार में अंधकार फैल जाता है, उसी प्रकार पूरे मकान में बिजली चली जाने के कारण अंधकार फैल जाने का दृश्य उपस्थित हो गया था।

अँधेरे के कारण हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था। बाइबिल में वर्णित दानी की तरह दायाँ हाथ बाएँ हाथ की बात नहीं जान सकता था। अर्थात् बाइबिल में कहा गया है. कि दान देते समय एक हाथ दूसरे हाथ की बात न जान पाए, वही श्रेष्ठ दान होता है। अंधकार के कारण घर के सदस्यों के बीच परस्पर टकराने की स्थिति आ गई थी। कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसी स्थिति में लालटेन की तलाश होने लगी।

विशेष:

  1. लेखक ने मकान में बने तहखाने के हवा और प्रकाशयुक्त होने का वर्णन करने के साथ-साथ उसमें बने रोशनदानों से बाढ़ का पानी अंदर घुसने का वर्णन किया है।
  2. बिजली जाने की स्थिति का वर्णन किया है।
  3. भाषा संस्कृत प्रधान है।
  4. मुहावरों और लोकोक्तियों का सटीक प्रयोग किया गया है।
  5. वर्णनात्मक शैली के साथ-साथ उदाहरण शैली प्रयुक्त है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
लेखक को किस पर और क्यों गर्व था?
उत्तर:
लेखक को तहखाने में बने रोशनदानों पर बड़ा गर्व था क्योंकि उनसे प्रकाश के साथ-साथ वायु का आर-पार संचार होता था।

प्रश्न (ii)
तहखाने के झरने किसे कहा गया है?
उत्तर:
तहखाने के रोशनदानों से उसके अंदर गिरते बाढ़ के पानी की धाराओं को तहखाने के झरने कहा गया है।

प्रश्न (iii)
‘हाथ को हाथ न सूझना’ मुहावरे का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
गहन अंधकार होना।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
तहखाने में अंधकार क्यों हो गया था?
उत्तर:
बिजली गुल हो जाने के कारण तहखाने में क्या पूरे घर में अंधकार हो गया था।

प्रश्न (ii)
किसको प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती?
उत्तर:
घर फूंककर तमाशा देखने वाले को प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती।

प्रश्न (iii)
लालटेन की पुकार क्यों होने लगी?
उत्तर:
बिजली गुल होने के कारण गहनं अंधकार हो गया, किसी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, इसलिए लालटेन की पुकार होने लगी।

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प्रश्न 3.
मैं अपने हाल को नूह की किश्ती या मनु की नौका समझ रहा था। उस समय तक भी, चिंता की प्रथम रेखा मेरे ललाट के प्रांगण में खेलती हुई नहीं दिखाई दी, किंतु थोड़ी ही देर में पास के कमरे से ‘चलियो’ की आवाज आई। मेरे बाग के माली श्री मंगलदेव जी मेरे मंगल-विधान में सदा दत्तचित्त रहते थेचिल्ला उठे, ‘बाबू जी उधर ही रहना।’ मैं समझा कहीं से साँप आ गया। खैर, यह भी सही। मेरे दूसरे चाकर देव श्री रणधीर जी ने बड़ी धीरतापूर्वक कहा कि कुछ नहीं, जमीन बैठ गई है। बड़े आदमियों की भाँति उसकी बात भी आधी सच थी।

जमीन बैठी थी और फर्श के पत्थर आपस में सर से सर मिलाकर खड़े हो गए थे, मानो वे सचेत होकर मेरे परित्राण का उपाय सोच रहे हों। उसी समय मेरी गुर्विणी महिषी (भैंस) की, जिसको कलियुग के व्यास जी ने अपनी कविता से अमर कर दिया है, समस्या मेरे सामने आई। उसका छप्पर भी तालाब बन चुका था। उस पर भी एक त्रिपाल डालकर उसे दरवाजे पर खड़ा किया। बहुत कोशिश करने पर . भी बरामदे में पैर न रखा, शायद वह जानती थी कि उसका भी फर्श धसकेगा। (Page 6) (M.P 2009)

शब्दार्थ:

  • नूह – आदम से दसवीं पीढ़ी में पैदा हुए एक पैगंबर (जिनके समय में एक ऐसा तूफान आया था कि सारी सृष्टि जलमग्न हो गई थी। उस समय अपने परिवार तथा जानवरों के एक-एक जोड़े के साथ स्वनिर्मित नौका में बैठाकर इन्होंने सबके प्राण बचाए थे और उन्हीं से पुनः सृष्टि चली।
  • मनु – ब्रह्म के मानस पुत्र आदि प्रजापति।
  • किश्ती – नौका।
  • ललाट – माथा।
  • चाकर – नौकर, सेवक।
  • परित्राण – रक्षा।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश बाबू गुलाबराय द्वारा लिखित निबंध ‘नर से नारायण’ से लिया गया है। इन पंक्तियों में अति बारिश के कारण लेखक के मकान पर होने वाले प्रभाव का वर्णन किया गया है। वर्षा ने उसके घर को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है।

व्याख्या:
वर्षा की अधिकता के कारण लेखक के मकान के चारों ओर पानी भर गया और पूरा घर जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गया। कहीं फर्श टूट गया तो कहीं जमीन धंस गई। लेखक स्वयं को इस स्थिति में अपने जलमग्न घर को नूह की नौका अथवा मनु की नौका समझ रहा था। नूह और मनु ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने जल प्रलय की स्थिति में नौका में बैठकर अपने प्राण बचाए थे और उन्हीं से सृष्टि चली थी। जब तक घर चारों ओर से जलमग्न हो रहा था तब तक लेखक के माथे पर चिंता की एक भी रेखा दिखाई नहीं दी थी, किंतु जब पास के कमरे से चलियो’ की आवाज आई तो वह चिंतित हो उठा।

उसके बाग की देखभाल करने वाले माली मंगलदेव जी जो उसके हित के लिए सदैव दत्तचित्त होकर काम में लगे रहते थे, उन्होंने चिल्लाकर कहा, “बाबूजी उधर ही रहना।” लेखक को कुछ स्पष्ट समझ नहीं आया। उसे लगा कि कोई साँप आ गया होगा, जिसके कारण मंगलदेव ने उधर आने से मना किया होगा। लेखक ने सोचा, चलो यह भी होना था। उनके दूसरे सेवक जिसका नाम रणधीर था, अपने नाम को सार्थक करते हुए बड़े धैर्य के साथ कहा कि कुछ नहीं हुआ, केवल जमीन बैठ गई है। लेखक कहता है जिस प्रकार बड़े आदमियों की बात आधी ही सच होती है, उसी प्रकार मेरे नौकर की बात भी आधी सच थी। जमीन तो धंसी ही थी उसके साथ फर्श भी बैठ गया था। फर्श के पत्थर उखड़कर एक-दूसरे के किनारे से मिलकर खड़े हो गए।

अर्थात् फर्श भी टूट-फूट गया था। फर्श के खड़े हुए पत्थर ऐसे प्रतीत होते थे, मानो वे खड़े होकर लेखक की रक्षा का उपाय सोच रहे हों। उसी समय लेखक की गुणवंती भैंस, जिसको कलयुग के व्यासजी ने अपनी कविताओं का विषय बनाकर अमर बना दिया है, की समस्या उसके सामने उत्पन्न हो गई। भैंस को जिस छप्पर में बाँधा जाता था वह छप्पर भी अतिवर्षा से तालाब बन गया। अतः भैंस पर एक त्रिपाल डालकर घर के दरवाजे पर खड़ा किया गया। उसे बरामदे में बाँधने का बहुत प्रयत्न किया गया, परंतु उसने बरामदे में पैर नहीं रखा। संभवतः वह जानती थी कि उसका फर्श भी नीचे धंस जाएगा। बाद में बरामदे का फर्श भी बैठ गया।

विशेष:

  1. लेखक ने अतिवर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हुए मकान की दुर्दशा का वर्णन किया है। नूह और मनु जैसे पौराणिक पात्रों की ओर संकेत किया गया है।
  2. भाषा संस्कृत प्रधान है।
  3. मुहावरों का सटीक प्रयोग हुआ है।
  4. वर्णनात्मक और उदाहरण शैली है।
  5. व्यंग्यात्मकता का समावेश है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
लेखक के ललाट पर किस समय तक चिंता की प्रथम रेखा नहींदिखाई दी।
उत्तर:
जब लेखक का पूरा मकान बाढ़ के पानी में घिरता रहा, तब तक उसके ललाट पर चिंता की एक रेखा नहीं दिखाई दी।

प्रश्न (ii)
लेखक ने स्वयं के हाल को नूह की किश्ती या मनु की नौका क्यों समझता रहा था?
उत्तर:
प्रलयकाल में जब सारी पृथ्वी जलमग्न हो गई थी तो नूह अथवा मनु ने नाव में बैठकर जल-प्रवाह से अपने प्राणों की रक्षा की थी। लेखक भी जिस हाल में बैठा था, उसे ही प्राणों की रक्षा करने वाली नौका समझ रहा था।

प्रश्न (iii)
माली मंगलदेव के चिल्लाने का लेखन ने क्या अर्थ निकाला?
उत्तर:
माली मंगलदेव के चिल्लाने का लेखक ने अर्थ निकाला कि कोई साँप आ गया होगा।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
लेखक ने अपने नौकर रणधीर की किस बात पर व्यंग्य किया है?
उत्तर:
लेखक ने रणधीर द्वारा बड़े धैर्य के साथ कही गई इस बात पर व्यंग्य किया है कि कुछ नहीं हुआ, जमीन बैठ गई है। अर्थात् नौकर की दृष्टि में जमीन बैठना कोई बड़ी बात नहीं थी।

प्रश्न (ii)
कलियुग का व्यास किसे कहा गया है?
उत्तर:
कलियुग का व्यास आजकल के कवियों को कहा गया है।

प्रश्न (iii)
लेखक के सामने भैंस की क्या समस्या आई?
उत्तर:
भैंस को जिस छप्पर में रखा जाता था, वह भी जलमग्न होकर तालाब बन गया था। अब लेखक के सामने भैंस को बचाने की समस्या उत्पन्न हो गई।

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प्रश्न 4.
मेरे एक पड़ोसी श्री बनर्जी साहब अपनी व्यवहार-कुशलता की दिव्य दृष्टि से मेरा भविष्य देख चुके थे। वे शाम को ही कह गए थे कि यदि कोई तकलीफ ही तो उनका मकान मेरे ‘डिसपोजल’ पर है। उस समय तो मैंने उनका सहानुभूतिपूर्ण निमंत्रण स्वीकार नहीं किया था, किंतु जब मेरे घर के सामने भी पानी बहने लगा और मेरा मकान प्रायद्वीप बन गया, बरामदे और शयनागार का भी फर्श बैठ गया और उनकी टाइलें मेरे बैठते हुए दिल की समता करने लगी तब जल्दी से मैंने बनर्जी साहब का निमंत्रण स्वीकार किया।

मकान में ताला लगाकर उनका द्वार खटखटाया। उन्होंने मुझे, मेरे नौकर तथा मेरी भैंस को अपने यहाँ आश्रय दिया। चिंता-ग्रस्त मनुष्य को जितनी निद्रा आ सकती है, उतनी ही नहीं उससे कुछ अधिक निद्रा मुझे आई, क्योंकि कोठी के लिए तो मैंने कड़ा जी कर मन में सोच लिया था, ‘इदन्न मम, इदं वरुणाय।’ निद्रा भंग करने की यदि कोई बात थी तो पड़ोस के सज्जनों और सज्जनाओं की करुण पुकार थी। मेरी भैंस तो सुरक्षित थी किंतु गरीब लोगों के जानवर चिल्ला रहे थे। बहुत कोशिश करने पर भी मैं उनकी कुछ सहायता न कर सका। अंधकार और जल के कारण ‘समुझ परहिं नहि पंथ’ की बात हो रही थी। (Page 6)

शब्दार्थ:

  • व्यवहार-कुशलता – आचरण की निपुणता।
  • दिव्य दृष्टि – सूक्ष्म दृष्टि, आंतरिक दृष्टि।
  • डिसपोजल – व्यवस्था, प्रबंध, अधिकार।
  • प्रायद्वीप – पानी से चारों ओर से घिरी भूमि।
  • निद्रा – नींद।
  • शयनागार – शयन कक्ष।
  • समता – समानता।
  • करुण – दयनीय।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश बाबू गुलाबराय द्वारा लिखित निबंध ‘नर से नारायण’ से लिया गया है। लेखक का मकान बाढ़ के पानी से घिर गया था। कहीं जमीन धंस गई थी । तो कहीं फर्श बैठ गया था। उनके पड़ोसी बनर्जी ने लेखक से किसी भी तकलीफ में अपने घर में आश्रय लेने का प्रस्ताव रखा था। अंत में लेखक के परिवार को उनके घर में शरण लेनी पड़ी। इसी घटना का वर्णन उपर्युक्त पंक्तियों में किया गया है।

व्याख्या:
मेरे एक पड़ोसी श्री बनर्जी साहब अपनी आचार निपुणता की आंतरिक दृष्टि से मेरा भविष्य देख चुके थे। अर्थात् बनर्जी साहब लेखक के मकान की क्षतिग्रस्त स्थिति का अनुमान लगा चुके थे। इसीलिए एक पड़ोसी के नाते लेखक के घर आकर कह गए थे कि यदि कोई कठिनाई हो तो उनके घर का प्रयोग कर सकते हैं। उनका मकान लेखक के लिए प्रस्तुत है। उस समय तो लेखक ने उनका सहानुभूति से भरा निमंत्रण ठुकरा दिया था परंतु जब लेखक के घर के सामने भी पानी बहने लगा और उसके घर के चारों ओर पानी भरने से उसका घर प्रायद्वीप जैसा बन गया, उसके रहने, बैठने और सोने के लिए कोई स्थान नहीं रहा तब उसके निराश हृदय ने शीघ्रता से अपने पड़ोसी का निमंत्रण स्वीकार कर लिया।

वह अपने मकान में ताला लगाकर पड़ोसी के घर परिवार सहित पहुँचा और उनका दरवाजा खटखटाया। पड़ोसी ने लेखक और उनके सेवकों और उनकी भैंस को शरण दी। चिंता में डूबे मनुष्य को जितनी नींद आ सकती है, उससे अधिक नींद लेखक को आई क्योंकि उन्होंने अपनी कोठी के संबंध में अपना मन दृढ़ कर सोच लिया था कि यह मेरा नहीं है, यह इंद्र का है। लेखक कहता है कि यदि नींद भंग होने या करने की कोई बात अथवा कारण था तो पड़ोस में काछी और कुम्हार स्त्री-पुरुष की करुण पुकार थी। लेखक की भैंस तो सुरक्षित थी किंतु उन गरीब लोगों के जानवर डूबने के भय से चिल्ला रहे थे। लेखक कहता है कि मैं प्रयास करने के बाद भी उनकी जरा भी मदद नहीं कर पाया। अंधकार और पानी के भर जाने के कारण दूसरों के लिए कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था।

विशेष:

  1. लेखक ने अपने पड़ोसी की व्यवहार-कुशलता का परिचय दिया है। पड़ोसी ने लेखक को अपने घर में आश्रय देकर अच्छे पड़ोसी होने का कर्त्तव्य निभाया है।
  2. भाषा संस्कृत प्रधान है। संस्कृत के पूरे-पूरे वाक्य का भी प्रयोग किया गया है। भाषा में अंग्रेजी शब्द ‘डिसपोजल’ का भी प्रयोग हुआ है।
  3. भाषा में मुहावरों का भी सटीक प्रयोग हुआ है।
  4. वर्णनात्मक और उद्धरणात्मक शैली है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
बनर्जी साहब लेखक का क्या भविष्य देख चके थे?
उत्तर:
वे लेखक के घर की स्थिति देखकर अनुमान लगा चुके थे कि उन्हें भविष्य में कष्ट होने वाला है।

प्रश्न (ii)
बनर्जी ने लेखक के सामने क्या प्रस्ताव रखा?
उत्तर:
लेखक के सामने बनर्जी ने प्रस्ताव रखा कि बाढ़ के प्रकोप से बचने के लिए वे सपरिवार उसके घर में आश्रय ले सकते हैं।

प्रश्न (iii)
लेखक ने अपने पड़ोसी बनर्जी के घर में आश्रय क्यों लिया?
उत्तर:
लेखक का घर पानी से घिर गया था। उसके तहखाने में पानी भर गया था तथा बरामदे और शयन कक्ष का फर्श बैठ गया था। उनके सुरक्षित रहने के लिए कोई स्थान नहीं बचा था। इसलिए लेखक ने पड़ोसी के घर में आश्रय लिया था।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर

प्रश्न (i)
लेखक के पड़ोसी कौन थे?
उत्तर:
लेखक के पड़ोसी श्री बनर्जी साहब थे।

प्रश्न (ii)
पड़ोसी के घर में लेखक को कैसी नींद आई?
उत्तर:
पड़ोसी के घर में लेखक को चिंता में डूबे व्यक्ति से कुछ अधिक नींद आई।

प्रश्न (iii)
लेखक ने नींद भंग करने के क्या कारण बत 7 हैं?
उत्तर:
लेखक ने गरीब काछी-कुम्हारों की स्त्री-पुरुषों की क प पुकार और उनके जानवरों के चिल्लाने की आवाजों को नींद भंग करने के कारण बताए हैं।

MP Board Class 6th General English Grammar

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Noun (नाउन)
संज्ञा

परिभाषा :
Noun is the name of a person, place or a thing. As- Ram, Gwalior, Chair.
अर्थात्, किसी व्यक्ति, स्थान या वस्तु के नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे-राम, ग्वालियर, कुर्सी।

भेद-Noun पाँच प्रकार के होते हैं-
1. Common Noun (जाति वाचक संज्ञा) :
जिस शब्द से सम्पूर्ण जाति का बोध हो; जैसे-
Man, boy, girl, cow, dog, postman, teacher, friend आदि।

2. Proper Noun (व्यक्ति वाचक संज्ञा) :
जो शब्द किसी व्यक्ति का नाम, स्थान अथवा वस्तु के नाम का बोध करता हो; जैसे-
Arun, Mohan, Bhopal, Delhi, Ganga, Ramayana, Geeta आदि।

3. Collective Noun (समूह वाचक संज्ञा) :
जिस शब्द से किसी समूह का बोध हो; जैसे-Class, Police, Army, Bunck of keys आदि।

4. Material Noun (धातु वाचक संज्ञा) :
विभिन्न धातुओं अथवा धातु से बनी वस्तुओं के नाम; जैसे-
Silver, gold, iron, steel, golden ring, steel almirah आदि।

5. Abstract Noun (भाव वाचक संज्ञा) :
किसी वस्तु या व्यक्ति का गुण या स्थिति को बताने वाले शब्द जैसे-
Sweetness, childhood, bitterness आदि।

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Pronoun (प्रोनाउन)
सर्वनाम

परिभाषा :
Pronoun is a word which is used in place of a noun; as – I, we, you, he आदि।
अर्थात् सर्वनाम वह शब्द है जो किसी संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किया जाता हैं। जैसे-मैं, हम तुम, वह आदि।
भेद- Pronoun निम्न प्रकार के होते हैं-

1. Personal Pronoun (व्यक्ति वाचक सर्वनाम) :
जो शब्द किसी व्यक्ति या वस्तु से स्थान पर बोले जोते हैं, वे Personal Pronoun होते हैं; जैसे-
She is a student.
He is my brother.
It is mine.

इन वाक्यों में She, He, It, my, mine को प्रयोग व्यक्ति तथा वस्तु के स्थान पर हुआ है। ये Personal Pronoun हैं।

विशेष : She का प्रयोग स्त्री के लिए, He का प्रयोग पुरुष के लिए तथा It का प्रयोग निर्जीव वस्तु के लिए एकवचन में किया जाता है। They का प्रयोग बहुवचन में इन सभी के लिए किया जाता है।

2. Reflexive Pronoun (निज वाचक सर्वनाम) :
जो सर्वनाम स्वयं के लिए प्रयोग हो; जैसे-
myself, yourself, himself.

3. Demonstrative Pronoun (संकेत वाचक सर्वनाम) :
जो सर्वनाम वस्तु की स्थिति की ओर संकेत करते हो; जैसे-
this, that, those, these आदि।

4. Distributive Pronoun (प्रत्येक वाचक सर्वनाम) :
अलग-अलग वस्तुओं की ओर संकेत करने वाले शब्द Distributive Pronoun कहलाते हैं; जैसे-
each, every, neither, either.

5. Interrogative Pronoun (प्रश्न वाचक सर्वनाम) :
जो शब्द किसी प्रश्न को पूछे और किसी संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जायें; जैसे-
who, what, whom आदि।

6. Indefinite Pronoun (अनिरचय वाचक सर्वनाम) :
यह अनिश्चितता के लिए प्रयोग होते हैं जैसे-
none, some, many, any आदि।

7. Relative Pronoun (सम्बन्ध वाचक सर्वनाम) :
किसी वस्तु या नाम से सम्बन्ध स्थापित करने के लिए इनका प्रयोग होता है; जैसे-
which, that, whose आदि।

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Adjective (एडजेक्टिव)
विशेषण

परिभाषा :
Adjective is a word which qualifies a noun or pronoun. अर्थात् संज्ञा तथा सर्वनाम की विशेषता बतलाने वाले शब्द विशेषण कहलाते हैं; जैसे-

  1. Ram is a clever boy.
  2. Tea is hot.
  3. My pencil is long.

उपर्युक्त वाक्यों में clever, hot तथा long संज्ञा की विशेषता बताते हैं। अतः ये शब्द Adjective (विशेषण) हैं।

कुछ विशेषण (Adjective) इस प्रकार हैं-beautiful (सुन्दर), ugly (बदसूरत), strong (मजबूत), weak (कमजोर), new (नया), old (पुराना), white (सफेद), big (बड़ा), small (छोटा), आदि।

Article (आर्टिकल)
उपपद

Article तीन हैं-

  1. a
  2. an
  3. the.

a तथा an का प्रयोग एकवचन के लिए होता है। the का प्रयोग एकवचन तथा बहुवचन दोनों के लिए होता है।
(1) A का प्रयोग :
Consonant (व्यंजन) से प्रारम्भ होने वाले एकवचन की जातिवाचक संज्ञा के पूर्व होता है। जैसे-
a book, a man, a dog, a cat आदि।

(2) An का प्रयोग :
vowels (a, e, i,.o u) स्वर से प्रारम्भ होने वाले एकवचन की जातिवाचक संज्ञा के पूर्व होता है। जैसे-
An apple, an eye, an inkpot, an orange, an umbrella आदि।

(3) The का प्रयोग :
किसी खास वस्तु, अनोखी वस्तु, नदी, पहाड़, प्रसिद्ध ग्रंथ, अखबार के नाम आदि के पहले होता है। जैसे-
The Sun, The Earth, The Ganga, The Indian Ocean, The Taj, The East आदि।

किसी खास या पूर्व परिचित वस्तु का बोध कराने के लिए भी The का प्रयोग किया जाता है। जैसे-
The girl in blue is my sister.

Verb (वब)
क्रिया

परिभाषा :
A verb denotes an action
अर्थात् जिस शब्द से किसी कार्य का करना या होना पाया जाता है; उसे क्रिया कहते हैं। जैसे-sing, play, write, teach.

क्रिया के भेद :
क्रिया दो प्रकार की होती है-
(1) Main Verb (मुख्य क्रिया)
(2) Helping Verb (सहायक क्रिया)।

1. Main Verb (मुख्य क्रिया) :
कर्ता के द्वारा जो कार्य किया जाता है वह मुख्य क्रिया कहलाती है। जैसे-

  1. Ram sings a song.
  2. Mohan reads a book.

उपर्युक्त वाक्य में sings तथा reads मुख्य क्रिया हैं।

2. Helping Verb (सहायक क्रिया) :
is, are, am, was, were, has, have, had, will, shall, do, does, did, can, may आदि।
सहायक क्रिया मुख्य क्रिया के साथ मिलकर वाक्य के Tense (काल) को स्पष्ट करती है। जैसे-

  1. Ram is going.
  2. Sita was singing a song.
  3. They will go to Lucknow tomorrow.

उपर्युक्त वाक्यों में (1) वाक्य में is going से स्पष्ट होता है कि वाक्य Present Continuous काल का है। (2) वाक्य में was singing से स्पष्ट हो रहा है कि वाक्य Past Continuous तथा (3) वाक्य में will go से स्पष्ट हो रहा है कि वाक्य Future – Indefinite का है।

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Adverb (एडवब)
क्रिया-विशेषण

परिभाषा :
वह शब्द जो विशेषण और दूसरे क्रिया-विशेषण की विशेषता बतलाता है, क्रिया-विशेषण (Adverb) कहलाता है; जैसे-
1. Ram runs quickly.
राम जल्दी दौड़ता है।

2. This is a very sweet mango.
यह बहुत मीठा आम है।

3. He is walking slowly.
वह धीरे-धीरे चल रहा है।

4. You write too slowly.
तुम बहुत धीमे लिखते हो।

उपर्युक्त वाक्यों में quickly ‘runs’ नामक क्रिया की विशेषता बताता है। ‘very’ sweet adjective शब्द की विशेषता बताता है। ‘slowly’ शब्द ‘is walking’ क्रिया की विशेषता बता रहा है और ‘too’ शब्द ‘slowly’ क्रिया विशेषण की विशेषता बताता है। अत: quickly, very, slowly, too क्रिया विशेषण (Adverb) हैं।

अंग्रेजी में 4 प्रकार के Adverbs प्रारम्भिक विद्यार्थियों को याद कर लेने चाहिए।
क्रिया-विशेषण के भेद
1. Adverb of time (समय सूचक) :
Now, then, early late, before, already, Presently, since, ago, soon आदि।

2. Adverb of place (स्थान वाचक) :
Far, near, above, in, below, out, within, without, inside, outside आदि।

3. Adverb of Number (संख्या वाचक) :
Once, twice, thrice, again, always, often, sometimes आदि।

4. Adverb of Quantity (मात्रा वाचक) :
Too, most, fully, rather, quite, very, wholly, partly, so आदि।

The Preposition (द प्रिपोजिशन)
सम्बन्ध सूचक अव्यय

परिभाषा :
सम्बन्ध सूचक अव्यय वे शब्द हैं जो किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम से पूर्व प्रयुक्त होकर, उसका सम्बन्ध किसी अन्य संज्ञा या सर्वनाम से स्थापित करते हैं।
Note-
(i) Preposition किसी Noun या Pronoun से पूर्व आता है।
(ii) यदि Preposition Verb के बाद आता है और उसके बाद Noun या Pronoun न आ रहा हो तो वह Adverb होता है, जैसे-
Adverb                                 Preposition
1.Gopal is in.                     Gopal is in the room.
2. The teacher is out.        The teacher is out of the class.

कुछ प्रमुख Prepositions :
निम्नलिखित Prepositions को इनके अर्थ के साथ याद कर लेना चाहिए-
At (पर), above (ऊपर), after (बाद में), along (साथ-साथ), below (नीचे), between (दो के मध्य में), among (दो से अधिक के बीच में), behind (पीछे), before (पहले), after (बाद में), by (के द्वारा), down (नीचे), for (लिए), from (से), in (में), into (में गति), near (पास), on (पर), of (का), out (बाहर), over (ऊपर), up (ऊपर), upon (ऊपर से), with (साथ), to (को गन्तव्य) आदि।

Preposition के अन्य प्रयोग
MP Board Class 6th General English Grammar img-1

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Degrees of Adjectives
(डिग्रीज़ ऑफ ऐडजेक्टिव्स)

विशेषण की डिग्री

MP Board Class 6th General English Grammar img-2

The Conjunction
(द कजंक्शन)
संयोजक

निम्नलिखित वाक्यों का अवलोकन कीजिए-
Rita and Gita are sisters.
Anil is rich but Hari is poor.
Walk fast or you will miss the bus.
Work hard lest you should fail.

उपर्युक्त वाक्यों में ‘and’, ‘but’, ‘or’ तथा ‘lest’ क्रमशः दो शब्दों अथवा दो वक्यों को आपस में जोड़ते हैं, अतः ये शब्द Conjunctions हैं।

परिभाषा :
“वह शब्द जो शब्दों (Words) या वाक्यों (Sentences) को आपस में जोड़ता है, संयोजक कहलाता है।”
“A conjunction is a word which joins words or sentences with each other.”

निम्न Conjunctions को याद कर लीजिए-
And (और), as (जैसे), but (लेकिन), before (पहले), because (क्योंकि), after (बाद में), if (अगर), or (या), otherwise (अन्यथा), that (कि), though (यद्यपि), then (तब), till (तक), unless (जब तक कि), while (जबकि), when (जब), therefore (अतः), so (इसलिए) आदि।

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The Sentence
(द सेण्टेंस)
वाक्य

(A) वह शब्दों का समूह जिससे स्पष्ट और पूर्ण अर्थ निकलता हो, वाक्य कहलाता है। जैसे-
1. Hari is my friend.
हरी मेरा दोस्त है।
2. She is a good girl.
वह एक अच्छी लड़की है।
3. I read in class VI.
मैं कक्षा 6 में पढ़ता हूँ।
वाक्य पाँच प्रकार के होते हैं।

1. Assertive Sentence (विधि-सूचक वाक्य) :
जो वाक्य किसी कार्य या घटना के होने या न होने के बारे में बताते। हैं, Assertive Sentence कहते हैं। जैसे-
i. Ram Plays cricket.
राम क्रिकिट खेलता है।
ii. He is an honest man.
वह एक ईमानदार व्यक्ति है।

Assertive Sentence दो प्रकार के होते हैं-
(a) Affirmative Sentence (स्वीकारात्मक वाक्य) :
जो किसी कार्य या घटना के होने के बारे में बताते है। जैसे-
i. A dog is sleeping on the road.
एक कुत्ता सड़क पर सो रहा है।
ii. Rani cooks rice.
रानी चावल पकाती है।

(b)Negative Sentence (निषेधात्मक वाक्य) :
जो किसी कार्य या घटना न होने की सूचना देते हैं। जैसे
i. Vivek is not a good player.
विवेक एक अच्छा खिलाड़ी नहीं है।
ii. We will not go to the market.
हम बाजार नहीं जायेंगे।

2. Interrogative Sentence(प्रश्नवाचक वाक्य) :
जो वाक्य प्रश्न पूछने के लिए प्रयोग होते हैं। जैसे-
i. Do you eat a mango?
क्या आप आम खाते हो?
ii. Is this your shirt?
क्या यह तुम्हारी कमीज है?

3. Imperative Sentence (आज्ञा वाचक वाक्य) :
जिस वाक्य से आज्ञा, सलाह, या प्रार्थना प्रकट होती है। जैसे
i. Go there.
वहाँ जाओ।
ii. Don’t make a noise.
शोर मत करो।

4. Exclamatory Sentence (विस्मय बोधक वाक्य) :
जो वाक्य दुःख, करूणा, भय, घृणा या हर्ष प्रकट करते हैं। जैसे-
i. What a beautiful place?
क्या सुन्दर स्थान है?
ii. Alas! he is dead.
हाय! वह मर गया है।

5. Optative Sentence (इच्छाबोधक वाक्य) :
जो वाक्य कामना, आर्शीवाद या इच्छा प्रकट करते हैं। जैसे-
i. May you live long!
आप चिरायु हों!
ii. May you pass the examination!
आप परीक्षा में पास हों!

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Direct and Indirect Narration 
(डाइरैक्ट एण्ड इनडाइरैक्ट नैरेशन)
प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष कथन

किसी व्यक्ति के कथन (कहे गये शब्दों या वाक्य) को दो प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है।
1. Tanu said to her mother, “I am hungry”.
2. Tanu told her mother that she was hungry.
पहले वाक्य में वक्ता (speaker) के वास्तविक (actual) शब्द दिये गये हैं। इस प्रकार के वाक्य Direct Narration कहलाते हैं।
दूसरे वाक्य में वक्ता द्वारा कहे गये वाक्य को रिपोर्टर (व्यक्त करने वाला) अपने शब्दों में व्यक्त करता है। इस प्रकार के वाक्य Indirect Narration कहलाते हैं।
परीक्षा में प्रायः Direct Narration को Indirect Narration में बदलने को कहा जाता है।

Direct Narration से Indirect Narration में बदलने पर परिवर्तन-
1. Reporting Verb में परिवर्तन :
Inverted commas में Direct Narration-वक्ता द्वारा बोले जाने वाले शब्द होते हैं। Direct Narration से बाहर प्रयुक्त होने वाला Verb-Reporting verb कहलाता है जो प्रायः said होता है। कभी-कभी say भी हो सकता है।

इनका परिवर्तन प्रायः told, asked आदि से Direct Speech के अनुसार होता है। asked का प्रयोग तब होता है जबकि Direct Speech या Narration में कोई प्रश्न या imperative sentence होता है जैसे-
i. I said to Rani, “Where are you going?”
I asked Rani where she was going.
ii. The teacher said to the students, “Do your work silently.”
The teacher asked the students to do their work silently.

Imperative sentence के अनुसार Reporting verb ordered, advised, requested आदि में भी बदल सकती है।

2. Pronoun (सर्वनाम) में परिवर्तन :
Reported speech o Pronoun, Reporting verb के subject (कर्ता) के अनुसार बदले जाते हैं जैसे कि पूर्व में दिये गये उदाहरण में you को she में बदला गया है।

3. Inverted commas का लोप :
Reported speech के Inverted commas को हटा दिया जाता है।

4.Reported speech के अन्त में प्रयुक्त प्रश्नवाचक चिन्ह (?) तथा विस्मय बोधक चिह्न हटाकर पूर्ण विरोम (.) लगा दिया जाता है।

5. स्थान तथा समय सूचक शब्दों में परिवर्तन-
इनका परिवर्तन निम्न प्रकार किया जाता है-
MP Board Class 6th General English Grammar img-3

Exercise

  1. He says, “She lives in Bhilai.”
  2. The teacher said, “The earth is round.”
  3. He said, “I am poor.”
  4. The teacher said to the boy, “Shut the door.”
  5. He said, “I am learning English.”
  6. He said, “The earth is a planet.”
  7. I said, “Run away.”
  8. He asked me, ” Where is the bus-stand?”
  9. He said, “I am dancing.”
  10. She says, “I am a girl.”

Answer:

  1. He says that she lives in Bhilai.
  2. The teacher told that the earth is round.
  3. He said that he was poor.
  4. The teacher asked the boy to shut the door.
  5. He said that he was learning English.
  6. He said that the earth is a planet.
  7. I asked him to run away.
  8. He asked me where the bus-stand was.
  9. He said that he was dancing.
  10. She says that she is a girl.

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Tense (टैंस)
काल

परिभाषा :
The tense of a verb shows the time of an event or action अर्थात् verb के tense से किसी घटना या कार्य के समय का ज्ञान होता है।
Tense तीन प्रकार के होते हैं-

  1. Present
  2. Past
  3. Future.

(1) Present Tense (वर्तमान काल) :
इस Tense में यह पता चलता है कि कार्य का सम्बन्ध वर्तमान से है। जैसे-
i. I read a book.
मैं एक किताब पढ़ता हूँ।
ii. He is going to school.
वह स्कूल जा रहा है। आदि।

(2) Past Tense (भूतकाल) :
इस काल में verb द्वारा बीते हुए समय का बोध होता है। जैसे-
i. He was absent yesterday.
वह कल अनुपस्थित था।
ii. I was writing a letter.
मैं एक पत्र लिख रहा था।

(3) Future Tense (भविष्य काल) :
इस काल में verb द्वारा आने वाले समय का बोध होता है। जैसे-
i. I shall write a letter.
मैं एक पत्र लिखूगा।
ii. Mohan will go to Delhi tomorrow.
मोहन कल दिल्ली जाएगा। आदि।

प्रत्येक Tense निम्नलिखित चार प्रकार के होते हैं-

  1. Indefinite
  2. Continuous
  3. Perfect
  4. Perfect Continuous.

Present Tense
(प्रजैन्ट टैंस)
वर्तमान काल

1. Present Indefinite Tense :
इस Tense में सदा सत्य बातें, आदतें अथवा बारम्बार होने वाले कार्यों का वर्णन किया जाता है। जैसे-
i. The sun rises in the east.
सूर्य पूर्व में उदय होता है।
ii. Arun Kumar teaches us English.
अरुण कुमार हमें अंग्रेजी पढ़ाते हैं।

पहचान :
हिन्दी में वाक्यों के अन्त में ता, ती, ते, तथा हैं, हूँ, हो, होता है।

2. Present Continuous Tense :
इस Tense का प्रयोग ऐसे कार्य के लिए होता है जो वर्तमान में भी हो रहा है: जैसे-
i. I am writing a letter.
मैं एक पत्र लिख रहा हैं।
ii. They are playing cricket.
वे क्रिकेट खेल रहे हैं।

पहचान :
इसकी पहचान हिन्दी वाक्यों के अन्त में रहा है, रही है, रहे हैं, रहा हूँ होता है।

3. Present Perfect Tense :
इस Tense का प्रयोग ऐसे कार्य के लिए होता है जो वर्तमान में पूरा हो चुका है; जैसे-
i. I have done my work.
मैंने अपना काम कर लिया है।
ii. He has written a letter.
वह एक पत्र लिख चुका है।
इसमें I, You तथा बहुवचन के साथ have तथा एकवचन के साथ has का प्रयोग होता है। इसमें सदैव verb की III from का प्रयोग होता है।

पहचान :
हिन्दी वाक्यों के अन्त में किया है, दिया है, चुका है, चुके हैं, चुका हूँ आदि है।

4. Present Perfect Continuous Tense :
इस Tense में कार्य पहले से हो रहा है और वह कार्य वर्तमान में जारी है। जैसे-
i. I have been writing a letter for an hour.
मैं एक घण्टे से पत्र लिख रहा हूँ।
ii. He has been playing since morning.
वह सुबह से खेल रहा है।
इसमें subject के अनुसार has been या have been तथा मुख्य क्रिया में ing लगाते हैं। समय के लिए for अथवा since का प्रयोग करते हैं।

पहचान :
इस प्रकार के वाक्यों के अन्त में रहा है, रही हूँ, रहे हैं तथा कार्य शुरू होने का समय दिया जाता है।

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Past Tense
(पास्ट टैंस)
भूतकाल

1. Past Indefinite Tense :
इस काल के वाक्यों में भूतकाल में अर्थात बीते हुए समय में कार्य होता है। जैसे-
i. He went.
वह गया।
ii. I bought a pen.
मैंने एक कलम खरीदा।
इस प्रकार के वाक्यों में verb की II form का प्रयोग होता है।

पहचान :
हिन्दी वाक्यों के अन्त में गया, आया, दिया, लिया आदि शब्दों का प्रयोग होता है।

2. Past Continuous Tense :
इस Tense का प्रयोग ऐसे कार्य के लिए किया जाता है जो भूतकाल में कुछ समय तक जारी रहा हो। जैसे-
i. I was reading a book.
मैं एक किताब पढ़ रहा था।
ii. They were playing cricket.
वे क्रिकेट खेल रहे थे।

पहचान :
हिन्दी में रहा था, रहे थे, रही थी आदि का प्रयोग होता है। एकवचन की संज्ञा में was तथा बहुवचन की संज्ञा के साथ were का प्रयोग होता है।

3. Past Perfect Tense :
इस Tense का प्रयोग ऐसे कार्य के लिए किया जाता है जो भूतकाल (बीते समय) में पूरा हो चुका हो। जैसे-
i. He had done his work.
उसने अपना काम कर लिया था।
ii. They had posted their letter.
उन्होंने अपने पत्र डाकखाने में डाल दिए थे।
इस काल में had के साथ क्रिया की III form का प्रयोग किया जाता है।

पहचान :
हिन्दी में वाक्य के अन्त में लिया था, चुका था, चुकी थी, चुके थे आदि का प्रयोग होता है।

4. Past Perfect Continuous :
इस काल के वाक्यों में कार्य भूतकाल से प्रारम्भ होकर कुछ समय तक जारी रहता है। वाक्य प्रारम्भ होने के समय के साथ ‘से’ का प्रयोग अवश्य होता है। इसके लिए since अथवा for का प्रयोग होता है। जैसे-
i. Ram had been reading Hindi since Monday.
राम सोमवार से हिन्दी पढ़ रहा था।
ii. Manoj had been playing cricket for two hours.
मनोज दो घण्टे से क्रिकेट खेल रहा था।
इन वाक्यों में had been के साथ मुख्य क्रिया में ing लगाते हैं तथा समय के लिए since अथवा for का प्रयोग करते हैं।

पहचान :
हिन्दी में वाक्यों के अन्त में रहा था, रहे थे, रही थी आदि शब्द प्रयोग होते हैं।

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Future Tense
(फ्यूचर टैंस)
भविष्य काल

1. Future Indefinite Tense :
इस काल में ऐसे वाक्य – होते हैं जो कार्य आने वाले समय में होने का भाव प्रकट करते हों। जैसे-
i. He will go to school.
वह स्कूल जाएगा।
ii. I shall read a book.
मैं एक किताब पढूँगा।
इन वाक्यों में First Person कर्ता के साथ shall तथा III Person के साथ will का प्रयोग करते हैं तथा क्रिया की I form का प्रयोग करते हैं।

पहचान :
हिन्दी में वाक्य के अन्त में गा, गी, गे लगा होता है।

2. Future Continuous Tense :
इस Tense का प्रयोग ऐसे कार्यों के लिए होता है जो आने वाले समय में (भविष्य में) जारी रहने का भाव प्रकट करते हों, जैसे-
i. He will be going tomorrow morning.
वह प्रातः काल जा रहा होगा।
ii. They well be going Delhi.
वे दिल्ली जा रहे होंगे।
इस प्रकार के वाक्यों में will be, shall be के साथ क्रिया की I form में ing लगाते हैं।

पहचान :
इस काल के वाक्यों के अन्त में रहा होगा, रही होगी, रहे होंगे आदि शब्द आते हैं।

3. Future Perfect Tense :
इस Tense में भविष्य – काल में कार्य पूरा होने के भाव प्रकट होते हैं; जैसे-
i. I shall have done my work.
मैंने अपना कार्य कर लिया होगा।
ii. He will have reached Delhi by now.
इस समय तक वह दिल्ली पहुँच गया होगा।
इन वाक्यों में कर्ता के बाद will have, shall have तथा verb की III form का प्रयोग करते हैं।

पहचान :
हिन्दी में वाक्यों के अन्त में चुका होगा, चुके होंगे, आदि शब्द आते हैं।

4. Future Perfect Continuous Tense :
इस Tense में ऐसे वाक्य आते हैं जो भविष्य काल में कार्य जारी रहने का भाव प्रकट करते हैं तथा कार्य प्रारम्भ होने का समय भी दिया होता है। कार्य प्रारम्भ होने के समय के लिए ‘से’ का प्रयोग होता है। जैसे-
i. He will have been playing for an hour.
वह एक घण्टे से खेल रहा होगा।
ii. Sita will have been doing her work since Monday.
सीता सोमवार से अपना कार्य कर रही होगी।
इन वाक्यों में कर्ता के बाद will have been तथा मुख्य क्रिया में ing लगाते हैं। प्रारम्भ के समय के लिए ‘से’ since या for का प्रयोग करते हैं।

पहचान :
हिन्दी वाक्यों में रहा होगा, रही होगी, रहे होंगी आदि शब्दों के साथ कार्य शुरू होने का समय भी दिया होता है।

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Three Forms of Verbs
(थी फॉर्स ऑफ वब)
क्रियाओं के तीन रूप

Group I – ऐसी क्रियाएँ जिनके तीनों रूप अलग-अलग है।-
MP Board Class 6th General English Grammar img-4

Group II – वे क्रियाएँ जिनका II form (दूसरा रूप) तथा III form (तीसरा रूप) d, ed या t लगा कर बनता है-
MP Board Class 6th General English Grammar img-5

Group III – वे क्रियाएँ जिनके रूप तीनों forms में एक से होते हैं-
MP Board Class 6th General English Grammar img-6

Opposite Gender
(औपजिट अँडर)
विपरीत लिंग

MP Board Class 6th General English Grammar img-7

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Animals and their Young ones
(ऐनमल एण्ड देअर यंग वन्स)
पशु और उनके बच्चे

MP Board Class 6th General English Grammar img-8

Opposite Words
(औपजिट वड)
विरुद्धार्थी (विलोम) शब्द

MP Board Class 6th General English Grammar img-9

Noun-Number
(नाउन-नम्बर)
संज्ञा-वचन

संज्ञा के दो वचन होते हैं
1. Singular number
एकवचन (एक के लिए)
2. Plural number
बहुवचन (एक से अधिक के लिए)

(1) कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनका एकवचन और बहुवचन एक-सा होता हैं जैसे-
MP Board Class 6th General English Grammar img-10

(2) कुछ शब्दों के अन्त में s या es लगाकर बहुवचन बनाते हैं। जैसे-
MP Board Class 6th General English Grammar img-11

(3) कुछ शब्दों के अन्त में y हटाकर ies लगाकर बहुवचन बनाते हैं जैसे-
MP Board Class 6th General English Grammar img-12

(4) कुछ शब्दों के अन्त में f या fe हो तो उसे हटाकर ves लगाकर बहुवचन बनाते हैं। जैसे-
MP Board Class 6th General English Grammar img-13

(5) कुछ अन्य शब्द जिनके बहुवचन बनाने के विशेष नियम नहीं है। जैसे-
MP Board Class 6th General English Grammar img-14

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Punctuation
(पंक्चुएशन)
विराम चिह्न

Punctuation का अर्थ होता है किसी वाक्य में full stop, comma आदि विराम चिह्व का प्रयोग करना। इनके प्रयोग इस प्रकार हैं-
1. Full Stop (.) :
हिन्दी के पूर्ण विराम (।) के स्थान पर अंग्रेजी में full stop (.) का प्रयोग होता है। इसका प्रयोग होता है
(i) Affirmative, Negative और Imperative वाक्यों के अन्त में। जैसे-
She is playing.
Please, come here.
She is not coming.

(ii) Abbreviations (संक्षिप्त शब्दों) तथा नामों के प्रारम्भिक में। जैसे-
M.A., A.P.J. Abdul Kalam.

2. Comma (,) :
Comma (अर्द्धविराम) का प्रयोग – निम्न दशाओं में होता है-
(i) एक ही Part of Speech के कई शब्दों को एक-दूसरे से पृथक् करने के लिए; जैसे-
He can read, write and sing well:

(ii) And से जोड़े गये एक से अधिक शब्द समूहों को पृथक् करने के लिए; जैसे-
The minister addressed all, men and women, old and young.

(iii) Yes और No के बाद; जैसे-
Yes, I will do it.
No, I can’t do this.

(iv) Reported speech से शेष वाक्य को पृथक करने के लिए; जैसे-

(v) Noun या Phrase in apposition को पृथक् करने के लिए; जैसे-
Milton, the great poet, was blind.

(vi) दिन, दिनांक या वर्ष को पृथक् करने के लिए; जैसेMonday, 6th June, 2005.

3. Question Mark (?) :
प्रश्न चिह्न (?) प्रश्नवाचक वाक्य के अन्त में लगाया जाता है, जैसे-
What is the time?’

4. Exclamation Mark (!) :
इस चिह्न का प्रयोग-
(i) Interjection के बाद में होता है; जैसे-
Oh! Alas!
(ii) इस चिह्न का प्रयोग उन वाक्यों के अन्त में भी होता है जो गहन संवेग को व्यक्त करते हैं; जैसे
What a beautiful picture!

5. Inverted Commas (“…..”) :
Direct Speech में किसी के कहे गये यथार्थ शब्दों को शेष वाक्य से पृथक् करने के लिए Inverted Commas आदि और अन्त में लगाये जाते हैं; जैसे-
He said, “I shall win.”

6. Apostrophe (‘) :
इसका प्रयोग होता है-
(i) अक्षरों के लोप को प्रकट करने के लिए
Don’t, Won’t, Can’t.

(ii) Possessive case बनाने के लिए
Sita’s pen.

(iii) अक्षरों तथा संख्याओं का बहुवचन बनाने के लिए-
Add three 4’s and two 3’s.

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Capital Letters :

Capital letters का प्रयोग होता है-
(i) वाक्य के प्रथम शब्द का प्रथम अक्षर लिखने के लिए।
He is my son.

(ii) Proper Nouns और उससे बने हुए Adjectives के प्रथम अक्षर को लिखने के लिए।
Asha, Delhi, Indian.

(iii) Pronoun I को लिखने के लिए
I am a teacher.

(iv) God, Almighty, Lord शब्दों के लिए प्रयुक्त Pronouns के प्रथम अक्षर लिखने के लिए।

MP Board Class 6 English Solutions

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5

MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5

Question 1.
In the figure, A, B and C are three points on a circle with centre O such that ∠BOC = 30° and ∠AOB = 60°. If D is a point on the circle other than the arc ABC, find ∠ADC.
Solution:
We have a circle with centre O, such that ∠AOB = 60° and ∠BOC = 30°
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5 img-1
∴ ∠AOB + ∠BOC = ∠AOC
∠AOB = 60° + 30° = 90°
Now, tne arc ABC subtends ∠AOC = 90° at the centre and ∠ADC at a point D on the circle other than the arc ABC.
∴ ∠ADC = \(\frac{1}{2}\) [∠AOC]
∠ADC = \(\frac{1}{2}\) (90°) = 45°

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Question 2.
A chord of a circle is equal to the radius of the circle. Find the angle subtended by the chord at a point on the minor arc and also at a point on the major arc.
Solution:
We have a circle having a chord AB equal to radius of the circle.
∴ AO = BO = AB
∆AOB is an equilateral triangle.
Since, each angle of an equilateral triangle = 60
∠AOB = 60°
Since, the arc ACB makes reflex ∠AOB = 360° – 60° = 300° at the centre of the circle and ∠ABC at a point on the minor arc of the circle.
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5 img-2
∠ACB = \(\frac{1}{2}\) [reflex ∠AOB]
= \(\frac{1}{2}\) [300°] = 150°
Similarly, ∠ADB = \(\frac{1}{2}\) [∠AOB]
= \(\frac{1}{2}\) x [60°] = 30°
Thus, the angle subtended by the chord on the minor arc = 150° and on the major arc = 30°.

Question 3.
In the figure, ∠PQR = 100°, where P, Q and R are points on a circle with centre O. Find ∠OPR.
Solution:
The angle subtended by an arc of a circle at its centre is twice the angle subtended by the same arc at a point on the circumference.
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5 img-3
∴ reflex ∠POR = 2∠PQR,
But ∠PQR = 100°
reflex ∠POR = 2 x 100° = 200°
Since, ∠POR + reflex ∠POR = 360°
∠POR + 200° = 360°
∠POR = 360° – 200°
∠POR = 160°
Since, OP = OR [Radii of the same circle]
∴ In ∆POR, ∠OPR = ∠ORP [Angles opposite to equal sides of a triangle are equal]
Also, ∠OPR + ∠ORP + ∠POR = 180° [Sum of the angles of a triangle = 180°]
∠OPR + ∠OPR + 160° = 180° [∴ ∠OPR = ∠ORP]
2∠OPR = 180° – 160° = 20°
∠OPR = \(\frac{20^{\circ}}{2}\) =10°

Question 4.
In the Figure, ∠ABC = 69°, ∠ACB = 31°, find ∠BDC.
Solution:
We have, in ∆ABC,
∠ABC = 69° and
∠ACB = 31°
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5 img-4
But ∠ABC + ∠ACB + ∠BAC = 180°
∴ 69° +31° + ∠BAC = 180°
∠BAC = 180° – 69° – 31°
= 80°
Since, angles in the same segment are equal.
∴ ∠BDC = ∠BAC
∠BDC =80°

Question 5.
In the figure, A, B, C and D are four points on a circle. AC and BD intersect at a point E such that ∠BEC = 130° and ∠ECD = 20°. Find ∠BAC.
Solution:
In ∆CDE,
Exterior ∠BEC – ∠AED = 130°
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5 img-5
130° = ∠EDC + ∠ECD
130° = ∠EDC + 20°
∠EDC = 130° – 20° = 110°
∠BDC = 110°
Since, angles in the same segment are equal.
∠BAC = ∠BDC
∠BAC = 110°

MP Board Solutions

Question 6.
ABCD is a cyclic quadrilateral whose diagonals intersect at a point E. ∠DBC = 70°, ∠BAC is 30°, find ∠BCD. Further, if AB = BC, find ∠ECD.
Solution:
Given:
∠BAC = 30°, ∠DBC = 70°
To find:
∠BCD and ∠ECD.
∠BDC = ∠BAC = 30° (∠s on the same segment of a circle are equal)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5 img-6
In ∆BCD, 70° + 30° + ∠C = 180° (ASP)
100° + ∠C = 180°
∠C = 80°
AB = BC (Given)
∠BAC = ∠BCA = 30°
∠BCD = ∠BCA + ∠ECD
80° = 30° + ∠ECD
∠ECD – 50°

Question 7.
If diagonals of a cyclic quadrilateral are diameters of the circle through the vertices of the quadrilateral, prove that it is a rectangle.
Solution:
Given
ABCD is a cyclic quadrilateral in which AC and BD are diagonals.
To prove:
ABCD is a rectangle.
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5 img-7
Proof:
BD is the diameter of the circle.
∠BAD = 90°(angle in a semicircle)
Similarly ∠BCD = 90°
AC is the diameter of the circle
∠ABC = 90° (angle in a semicircle)
Similarly ∠ADC = 90°
In quadrilateral ABCD, ∠A = ∠B = ∠C = ∠D = 90°
ABCD is a rectangle.

Question 8.
If the non-parallel sides of h trapezium are equal, prove that it is cyclic.
Solution:
Given:
AD = BC, AB ∥ DC.
To prove:
ABCD is cyclic quadrilateral.
Construction:
Draw AE and BF As on DC.
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5 img-8
Proof:
In ∆ADE and ∆BCF
∴ AE = BF
(∴ Distance between two parallel lines are equal)
∠E = ∠F (Each 90°)
AD = BC (Given)
∆ADE = ∆BCF (By RHS)
and so ∠D = ∠C (By CPCT)
AB ∥ DC and AD is the transversal.
∴ ∠BAD + ∠ADC =180° (CIA’s)
⇒ ∠BAD + ∠BCD = 180° (∠ADC = ∠BCD)
∴ ABCD is cyclic quadrilateral.

MP Board Solutions

Question 9.
Two circles intersect at two points B and C. Through B, two line segments ABD and PBQ are J drawn to intersect the circles at A, D and Q respectively (see Fig.). Prove that ∠ACP = ∠QCD.
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5 img-9
Solution:
Given
C (O, r) and C (O1, r1) are two circles. Two lines ABD and PBQ are drawn which intersect at B.
To prove:
∠1 = ∠3
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5 img-10
Proof:
∠1 = ∠2 …(1) (Z s on the same segment of a circle are equal.)
∠3 = ∠4 …..(2) (Z s on the same segment of a circle are equal)
∠2 = ∠4 …(3) (OA’s)
From (1), (2) and (3), we get
∠1 = ∠3 …(2)

Question 10.
If circles are drawn taking two sides of a triangle as diameters, prove that the point of intersection of these circles lie on the third side.
Solution:
Given
C (O, r) and C (O1, r1) are two Circles in whichAB andAC are diameter. These circles intersect at point A and D.
To prove:
BDC is a line.
Construction: JoinAD.
Proof:
∠ADB = 90° (∠s in a semicircle)
∠ADC) = 90° (∠s in a semicircle)
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5 img-11
Adding (1) and (2), we get
∠ADB + ∠ADC = 90° + 90°
∠BDC = 180°
∴ BDC is a line and hence D lies on the third side.

Question 11.
ABC and ADC are two right triangles with common hypotenuse AC. Prove that ∠CAD – ∠CBD.
Solution:
Given:
ABC and ADC are two right ∆’s on common base AC. ∠B – 90° and ∠D = 90°.
To prove: ∠CAD = ∠CBD
Proof:
∠ABC + ∠ADC = 90° + 90°
= 180°
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5 img-12
ABCD is a cyclic quadrilateral.
∠CAD and ∠CBD are angles on the same segment of a circle.
∴ ∠CAD = ∠CBD.

MP Board Solutions

Question 12.
Prove that a cyclic parallelogram is a rectangle.
Solution:
Given: ABCD is a ∥gm
To prove: ABCD is a rectangle.
MP Board Class 9th Maths Solutions Chapter 10 Circles Ex 10.5 img-13
Proof:
∠A = ∠C
∠A + ∠C =180°
∠A + ∠A = 180°
∠A = \(\frac{180^{\circ}}{2}\) = 90°
∴ ABCD is a rectangle.
∠A = \(\frac{180^{\circ}}{2}\) = 90°
∴ ABCD is a rectangle.

MP Board Class 9th Maths Solutions

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 12 बिहारी के दोहे

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 12 बिहारी के दोहे (कविता, बिहारी)

बिहारी के दोहे पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

बिहारी के दोहेलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सर्प, मोर, हिरण और सिंह कहाँ एक साथ रहते हैं?
उत्तर:
सर्प, मोर, हिरण और सिंह एक साथ तपोवन में रहते हैं।

MP Board Solutions

प्रश्न 2.
किस तिथि को सूर्य और चन्द्र एक साथ होते हैं?
उत्तर:
अमावस्या तिथि को सूर्य और चन्द्र एक साथ होते हैं।

प्रश्न 3.
पाप का बोध किसको अधिक होता है?
उत्तर:
पाप का बोध शक्तिहीन को अधिक होता है।

बिहारी के दोहे दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
बाज के माध्यम से कवि ने किसके आचरण को लक्षित किया है, और क्यों?
उत्तर:
बाज के माध्यम से कवि ने अपने आश्रयदाता महाराजा जयसिंह के आचरण । को लक्षित किया है कि उन्हें औरंगजेब के इशारे पर महाराजा शिवाजी पर आक्रमण नहीं करना चाहिए। यह इसलिए कि इसमें उनका अपना कोई लाभ नहीं है। दूसरी बात यह कि एक हिन्दू राजा द्वारा दूसरे हिन्दू राजा पर आक्रमण करना भी सजातीयता के बिल्कुल विपरीत और अनुचित है।

प्रश्न 2.
सज्जन के प्रेम की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
सज्जन के प्रेम की कई विशेषताएँ हैं –

  1. वह सदैव बना रहता है।
  2. वह अपने प्रेमी के बुरे दिन आने पर भी उसके प्रति पहले की तरह ही प्रेम करता है।
  3. वह लाभ-हानि की चिन्ता नहीं करता है।
  4. वह शुद्ध और अच्छे भावों से भरा होता है।
  5. वह चोल के रंग के समान जीवन भर प्रेम का निर्वाह करता रहता है।

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प्रश्न 3.
मित्रता सदैव चलती रहे, इस हेतु क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
उत्तर:
मित्रता सदैव चलती रहे, इस हेतु निम्नलिखित सावधानी बरतनी चाहिए –

  1. अपने हृदय को शुद्ध और खुला रखना चाहिए।
  2. लाभ-हानि का ध्यान नहीं देना चाहिए।
  3. संकट के समय भी मित्रता की भावना को फीका नहीं पड़ने देना चाहिए।
  4. किसी प्रकार के अहंकार के ताप से मित्रता को मुरझाने से बचाना चाहिए।
  5. मित्रता को एक आदर्श के रूप में बनाए रखने की भावना सदैव रखनी चाहिए।

प्रश्न 4.
श्रीकृष्ण की वंशी इन्द्रधनुष के समान क्यों लगती है?
उत्तर:
श्रीकृष्ण की वंशी इन्द्रधनुप के समान लगती है। यह इसलिए कि श्रीकृष्ण के ओठों का रंग लाल है, आँखों का रंग सफेद और काला है, और उनका वस्त्र पीला है। इन सबके प्रभाव से हरे रंग वाली वंशी रंग का इन्द्रधनुष के समान हो उटना स्वाभाविक ही लगता है।

बिहारी के दोहे भाव विस्तार/पल्लवन

प्रश्न.

  1. बढ़त-बढ़त सम्पति, सलिलु, मन सरोज बढ़ि जाइ।
  2. दुसह दुराज प्रजानु कौं, क्यों न बढ़े दुःख-दंदु!
  3. बैठि रही अति सघन वन, पैठि सदन-तन माँहि।
    देखि दुपहरी जेठ की, छाँही चाहति छाँह।

उत्तर:

1. जिस प्रकार पानी के हमेशा बढ़ते रहने पर कमल की नाल भी हमेशा बढ़ती रहती है, पानी के घटने पर वह नाल घटती तो नहीं, लेकिन कुम्हलाकर नष्ट हो जाती है। टीक इसी प्रकार जब किसी व्यक्ति की सम्पत्ति बढ़ती रहती है, तो उसके मन में अनेक प्रकार की इच्छाएँ जोर मारने लगती हैं, लेकिन जब उसकी सम्पत्ति घटने लगती है, तो केवल घटती ही नहीं, बल्कि मूलधन सहित वह नष्ट हो जाती है, अर्थात् उस व्यक्ति के पास कुछ भी शेष नहीं रह जाता है।

2. दो राजाओं के राज्य में, अर्थात् जिस राज्य के एक ही समय में दो राजा हों, उस राज्य की प्रजा को अनेक प्रकार के दुःख झेलने पड़ते हैं। कहने का भाव यह है कि सबल और शक्तिसम्पन्न लोग अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए निर्बलों के सुख-दुःख को बिल्कुल ही भूल जाते हैं। शक्ति-सम्पन्न लोग अपनी शक्ति के प्रदर्शन अपने बराबर वालों से जहाँ करते हैं, वहाँ तक तो वे प्रशंसनीय हैं। लेकिन उनके इस शक्ति के प्रदर्शन से आम जनता को जो कष्ट होता है, वह निश्चय ही निन्दनीय है। अतएव अपने सुख-स्वार्थ के लिए हमें दूसरों के हितों को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

3. चूँकि गर्मी की ऋतु में भारत में सूर्य की किरणें तिरछी नहीं पड़ती हैं, बल्कि सीधी पड़ती हैं। उस समय सूर्य भूमध्य रेखा पर आ जाता है। उससे भारत के अनेक स्थान तपने लगते हैं। फलस्वरूप गर्मी का प्रकोप बहुत भयंकर हो जाता है। यह जेठ के माह में चरम सीमा पर होता है। यहाँ उपर्युक्त दोहे में जेठ माह की इसी भीषण गर्मी के उल्लेख से उसके असाधारण प्रभाव को बतलाया गया है कि उससे न केवल जीव-जन्तु ही, अपितु पेड़-पौधे भी समाप्त होने लगते हैं। फलस्वरूप कहीं भी किसी की छाया तक भी नहीं दिखाई देती है। इसी दशा से कवि ने यह संभावना व्यक्त करने का प्रयास किया है कि छाया को भी छाया की जरूरत है। इसलिए वह या . तो घने जंगलों में जाकर छिप गई है या घरों के अंदर।

बिहारी के दोहे भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.
पदु, दुराज, स्याम, जगत, दीरघ, छाँड़तु, रंग्यौ, मावस, सुम्रत्यौ शब्दों के शुद्ध हिन्दी मानक रूप लिखिए।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 12 बिहारी के दोहे img-1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के समास विग्रह कर समास का नाम लिखिए-नीलमणि, सज्जन, दुपहरी।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 12 बिहारी के दोहे img-2

बिहारी के दोहे योग्यता विस्तार

प्रश्न 1.
रहीम के तीन नीतिपरक दोहे खोजकर लिखिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

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प्रश्न 2.
ग्रीष्म की दोपहरी का अनुभव आप अपने शब्दों में लिखिए। कक्षा में बताइए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

प्रश्न 3.
आपने कभी किसी असहाय/निर्धन व्यक्ति की मदद की है, यदि हाँ तो आप उसकी सहायता के अनुभव की चर्चा अपने साथियों से कीजिए तथा ऐसे किसी विषय पर एकांकी को खोजकर उसका अभिनय कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

बिहारी के दोहे परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बिहारी के दोहे लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सर्प, मोर, हिरण और बाघ कब एक साथ रहते हैं?
उत्तर:
सर्प, मोर, हिरण और बाघ उस समय एक साथ रहते हैं जब चारों ओर जानलेवा गर्मी फैल जाती है। उससे सारा संसार एक तपोवन की तरह हो जाता है। उस समय अपनी जान बचाने के लिए सर्प, मोर, हिरण और बाघ परस्पर वैरभाव भूलकर एक साथ रहते हैं।

प्रश्न 2.
श्रीकृष्ण की शोभा कब और अधिक बढ़ जाती है?
उत्तर:
श्रीकृष्ण की शोभा तब और अधिक बढ़ जाती है जब वे पीताम्बर धारण करते हैं।

प्रश्न 3.
दो राजाओं के एक ही राज्य में क्या होता है?
उत्तर:
दो राजाओं के एक ही राज्य में प्रजा को बेहद दुःख होता है।

बिहारी के दोहे दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अधर धरत हरि कै परत, ओठ-दीठि-पट जोति।
हरित बाँस की बाँसुरी, इन्द्रधनुष रंग होति।।
उपर्युक्त दोहे में किन भावों की व्यंजना हुई है।
उत्तर:
उपर्युक्त दोहे में एक गोपी की अपनी एक प्रिय सखी से श्रीकृष्ण के रूप-सौन्दर्य के सम्बन्ध में कही गई बातों की व्यंजना हुई है। वह गोपी अपनी सखी से श्रीकृष्ण की साधारण वंशी की इन्द्रधनुष के रंग का होना कहकर यह व्यंजित करना चाहती है कि यदि वह उनके पास चलेगी, तो उसकी भी सुन्दरता रँगीली हो जाएगी। वह ओठ, आँख और वस्त्र की ज्योति से वंशी को इन्द्रधनुष के समान रंग वाली कहकर श्रीकृष्ण के ओठों की ललाई, आँखों की श्यामलता और वस्त्रों के पीलापन का अधिक चटक और प्रभा देने वाली होना भी व्यंजित करती है।

प्रश्न 2.
कहलाने एक बसत, अहि, मयूर, मृग बाघ।
जगत तपोवन सो कियौ, दीरघ-दाघ-निदाघ।।
उपर्युक्त दोहे का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त दोहे के द्वारा कवि ने यह भाव स्पष्ट करना चाहा है कि चारों ओर बेहद गर्मी पड़ रही है। उसके कारण यह सारा संसार एक तपोवन का रूप ले चुका है। जिस प्रकार तपोवन में हिंसक पशु अपने हिंसक भाव को छोड़कर मित्रभाव से रहने लगते हैं उसी प्रकार साँप, मोर, हिरण और बाघ रह रहे हैं। अर्थात् साँप ने मोर के प्रति और बाघ ने हिरण के प्रति अपने हिंसक भाव का परित्याग कर मित्र-भाव को अपना लिया है।

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प्रश्न 3.
‘बिहारी के दोहे’ के केन्द्रीय भाव पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
केन्द्रीय भाव के अन्तर्गत बिहारी ने कृष्ण के स्वरूप का वर्णन उत्प्रेक्षा के माध्यम से किया है। कृष्ण एवं उनकी बाँसुरी का वर्णन करते हुए कवि ने वर्ण परिवर्तन को चमत्कारिक ढंग से प्रस्तुत किया है। प्रकृतिपरक वर्णन में कवि का ग्रीष्म वर्णन महत्त्वपूर्ण है। ग्रीष्म के आतप से तापित वे पशु-पक्षी जो आपस में शत्रुभाव रखते हैं, एक-दूसरे के साथ मित्र-भाव से रह रहे हैं-यह तपोवन के रहवास का गुण है। ज्येष्ठ महीने की इतनी अधिक तपन है कि दोपहर में छाया भी छाया ढूँढ़ती फिरती है। नीतिपरक दोहों में बिहारी ने सज्जनों के अमिट प्रेम का, द्विराज में प्रजा के दुःख-दर्दो का, सम्पत्ति की क्षण-भंगुरता का, मित्र-धर्म की गहनता का, दुर्बल को दबाने वाली शक्तियों का तथा अपने सजातीय बन्धुओं पर अन्यथा प्रेरणा से प्रहार करने की मनाही का वर्णन किया है।

बिहारी के दोहे कवि परिचय

प्रश्न 1.
कविवर बिहारी का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
कविवर बिहारी का जन्म ग्वालियर के पास बसुआ गोविन्द पुर गाँव में माना जाता है। इनके जीवन परिचय से संबंधित निम्नलिखित दोहा बहुत प्रसिद्ध है –

‘जनम ग्वालियर जानिए, खंड बुंदेल बाल।
तरुनाई आई सुघर, मथुरा बसि ससुराल।।’

(अर्थात् उनका जन्म ग्वालियर में, बचपन बुंदेलखंड में और युवावस्था ससुराल मथुरा में बीती थी।) उनका जन्म मथुरा के चौबे परिवार में हुआ था। उनके पिता केशवराय थे। वे ग्वालियर छोड़कर ओरछा चले गए थे। वहीं रहकर उन्होंने कवि केशवदास से काव्य-शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने कविवर केशवदास के साहित्य का विस्तृत अध्ययन-मनन किया। इसकी छाप उनके दोहों में दिखाई देती है। इनके जीवन की एक महत्त्वपूर्ण घटना है। वह यह कि वे जिस समय अपनी वृत्ति लेने के लिए जयपुर के राजा के दरबार में गए, उस समय वहाँ के राजा जयसिंह अपनी नई रानी के प्रेम में इतना फँसे हुए थे कि राजकाज देखने के लिए तनिक भी समय नहीं निकाल पाते थे। बिहारी ने उनकी आँखें खोलने के लिए यह दोहा लिखकर भेजा –

“नहिं पराग, नहिं मधुर मधु, नहिं विकास इहिं काल।
अली कली ही सों कस्यो, आगे कौन हवा।।”

इस दोहा का राजा जयसिंह पर जादू-सा असर पड़ा। उन्होंने प्रसन्न होकर बिहारी को इसी प्रकार के सरस दोहे रचने के लिए आदेश दिया। उन्होंने उनके द्वारा रचे गए प्रत्येक दोहे पर एक-एक अशरफी देने का वचन दिया। बिहारी ने ऐसे सात सौ दोहों की रचना की, जो ‘बिहारी सतसई’ के नाम से प्रसिद्ध हुए। उनकी मृत्यु 1663 में हुई।

रचना:
बिहारी ने ‘सतसई’ नामक ग्रन्थ की रचना की। इसमें सात सौ दोहे संकलित हैं।

साहित्य का महत्त्व:
बिहारी रीतिकाल के महाकवि हैं। उनकी रचना ‘सतसई’ मुक्तक काव्य की सुप्रसिद्ध रचना है। इनके दोहे शृंगार रस से लबालब भरे हुए हैं तो उनमें अलंकारों का चमत्कार देखते ही बनता हैं। उन्होंने ब्रजभाषा में शब्द-योजना और वाक्य-रचना बड़े व्यवस्थित रूप में की है। इस प्रकार उन्होंने अपने दोहों में ‘गागर में सागर’ भर दिया है।

बिहारी के दोहे पाठ का सारांश

प्रश्न 1.
कविवर बिहारी विरचित दोहों का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
बिहारी के दोहों के इस संकलन में तीन प्रकार के दोहे हैं-भक्तिपरक, प्रकृतिपरक और नीतिपरक। भक्ति संबंधित दोहों में कवि ने श्रीकृष्ण के मनमोहक स्वरूप का चित्रांकन किया है। श्रीकृष्ण के वस्त्र और उनकी मुरली, उनकी शारीरिक सुन्दरता को बड़ा ही अनूठा बनाकर मन को मोहने वाले हैं। प्रकृति संबंधी दोहों में ग्रीष्मकाल की भीषण तपन गहरे रूप में चित्रित है। नीति से संबंधित दोहों में सज्जनों के अमिट प्रेम का, द्विराज में प्रजा के दुखों का, संपत्ति की अस्थिरता का, मित्र-धर्म की गंभीरता का, दुर्बलों को कमजोर करने वाली शक्तियों का और अपने सजातीय बंधुओं पर अन्यथा प्रेरणा से प्रहार करने की अवरोध का वर्णन है।

बिहारी के दोहे संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

भक्ति:

प्रश्न 1.
सोहत ओटै पीतु पटु, स्याम सलौनैं गात।
मनौं नीलमनि-सैल पर, आतपु पर्यो प्रभात।।

शब्दार्थ:

  • सोहत – शोभायमान।
  • ओढ़े – धारण करने पर।
  • पीतु – पीला।
  • पटु – वस्त्र।
  • मनौं – मानो।
  • आतप – धूप।
  • पर्यो – पड़ा।

प्रसंग:
यह दोहा हमारी पाठ्य-पुस्तक हिन्दी सामान्य भाग-1 में संकलित तथा कविवर बिहारी द्वारा विरचित ‘सतसई’ के ‘भक्ति’ शीर्षक से उद्धत है। इसमें कवि ने श्रीकृष्ण के शारीरिक सौन्दर्य का चित्रण करते हुए कहा है कि –

व्याख्या:
श्रीकृष्ण सांवले हैं। उन्होंने पीताम्बर धारण किया है। उनको इस तरह देखकर ऐसा लगता है, मानो नीलमणि पर्वत पर सुबह-सुबह सूर्य की किरणें पड़ रही हैं। दूसरे शब्दों में पीताम्बर धारण किए हुए सांवले श्री कृष्ण सुबह की पड़ती हुई सूर्य की किरणों से सुशोभित नीलमणि पर्वत के समान बहुत ही सुन्दर लग रहे हैं।

विशेष:

  1. चित्रात्मक शैली है।
  2. ब्रजभाषा की शब्दावली है।
  3. श्रीकृष्ण के अद्भुत सौन्दर्य का चित्रण है।
  4. श्रृंगार रस है।

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प्रश्न 2.
अधर धरत हरि कै परत, ओठ-ढीठि-पट-जोति।
हरित बाँस की बाँसुरी, इन्द्रधनुष-रंग होति।।

शब्दार्थ:

  • अधर – होंठ।
  • परत – पड़ती।
  • हरित – हरी।
  • ढीठि – नेत्र।
  • पट – वस्त्र।
  • ज्योति – चमक।

प्रसंग:
पूर्ववत। इसमें कवि ने यह चित्रित करना चाहा है कि एक गोपी श्रीकृष्ण को बाँसुरी बजाते हुए देख आई है। वह राधिका जी से उनकी प्रशंसा कर उनको उन्हें दिखाने के बहाने से ले जाना चाहती है।

व्याख्या:
जब श्रीकृष्ण बाँसुरी को होंठों पर रखते हैं, तब उस पर उनके होंठों की, आँखों की और पीले वस्त्र की चमक पड़ती है। उससे वह हरे रंग की बाँसुरी इन्द्रधनुप की तरह रंग-बिरंगी (सतरंगी) हो उठती है। कहने का भाव यह है कि कृष्ण के होंठों का रंग लाल है, आँखों का रंग सफेद और काला है, और कपड़े का रंग पीला है। इन सबके प्रभाव से हरे रंग वाली बाँसुरी का रंग-बिरंगी (सतरंगी) हो उठना स्वाभाविक है।

विशेष:

  1. ब्रजभाषा की शब्दावली है।
  2. अनुप्रास अलंकार है।
  3. दोहा छंद है।
  4. श्रीकृष्ण के अनूठे सौन्दर्य का भावपूर्ण चित्रण है।
  5. शैली चित्रमयी है।

पद्यांश पर आधारित सौन्दर्यबोध संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. पीताम्बर धारण करने पर श्रीकृष्ण की शोभा कैसी हो जाती है?
  2. बाँसुरी श्रीकृष्ण के होंठों पर रखने पर कैसी दिखाई देती है?
  3. उपर्युक्त दोहों के काव्य-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

  1. पीताम्बर धारण करने पर श्रीकृष्ण की शोभा सुबह की पड़ती हुई सूर्य की किरणों से सुशोभित नीलमणि पर्वत के समान मन को मोह लेने वाली हो जाती है।
  2. बाँसुरी श्रीकृष्ण के होंठों पर रखने से रंग-बिरंगी (सतरंगी) दिखाई देती है।
  3. उपर्युक्त दोहों का काव्य-सौन्दर्य अनुप्रास, उपमा, उत्प्रेक्षा आदि अलंकारों से आकर्षक है। भाव, भाषा, प्रतीक-योजना, बिम्ब आदि प्रभावशाली हैं, शैली चित्रमयी है।

पद्यांश पर आधारित विषयवस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. कवि और कविता का नाम लिखिए।
  2. उपर्युक्त पद्यांशों का मुख्य भाव बताइए।

उत्तर:

  1. कवि-कविवर बिहारी, कविता-भक्ति।
  2. उपर्युक्त पद्यांशों का मुख्य भाव-श्रीकृष्ण के अद्भुत और मनमोहक रूप-सौन्दर्य का चित्रण करना है।

प्रकृति:

प्रश्न 3.
कहलाने एकत बसत, अहि, मयूर, मृग, बाघ।
जगतु तपोवन सो कियौ, दीरघ दाघ निदाघ।।

शब्दार्थ:

  • कहलाने – किस कारण से।
  • एकत बसत – इकट्ठा रहते हैं।
  • अहि – साँप।
  • मयूर – मोर।
  • मृग – हिरण।
  • बाघ – शेर।
  • दीरघ – लम्बी।
  • दाघ – आग।
  • निदाघ-गर्मी की ऋतु।

प्रसंग:
प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य भाग-1’ में संकलित तथा कविवर बिहारी विरचित ‘सतसई’ के ‘प्रकृति’ शीर्षक से उद्धृत है। प्रस्तुत दोहा में कवि ने ग्रीष्म ऋतु की अत्यधिक बढ़ती गर्मी का वर्णन किया है कि इससे परस्पर शत्रुभाव रखने वाले प्राणी भी इस संकट की घड़ी में साथ रहने लगे हैं।

व्याख्या:
अत्यधिक गर्मी में साँप और मोर तथा हिरण और बाघ को अपनी दुश्मनी भुलाकर एक ही स्थान पर रहते हुए देखकर एक पथिक दूसरे से पूछ रहा है-क्या कारण है कि जन्म से ही एक-दूसरे के प्रति शत्रुभाव रखने वाले साँप और मोर तथा हिरण और बाघ एक ही साथ दिखाई दे रहे हैं। उसकी जिज्ञासा को शान्त करते हुए दूसरा पथिक कह रहा है कि भयंकर गर्मी पड़ रही है। उसके कारण यह संसार एक तपोवन की तरह दिखाई दे रहा है। जैसे तपोयन में हिंसक पशु अपनी हिंसा की भावना को छोड़कर मित्रभाव से रहने लगते हैं। ठीक उसी प्रकार साँप ने मोर के प्रति और बाघ ने हिरण के प्रति अपनी हिंसा की दुर्भावना को त्याग दिया है।

विशेष:

  1. उपमा और अनुप्रास अलंकार है।
  2. दोहा छन्द है।
  3. भीषण गर्मी का उल्लेख है।
  4. संकट के समय शत्रुता मित्रता में बदल जाती है-इसे सुस्पष्ट करने का प्रयास है।
  5. शैली चित्रमयी है।

प्रश्न 4.
बैठि रही अति सघन वन, पैठि सदन-तन माँह।
देखि दुपहरी जेठ की, छाँहौ चाहति छाँह।।

शब्दार्थ:

  • पैठि – प्रवेश करके।
  • सदन – घर।
  • निरखि – देखकर।

प्रसंग:
पूर्ववत्। इस दोहे में कवि ने जेठ माह की गर्मी की ऋतु के अत्यधिक भयंकर प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा है कि –

व्याख्या:
गर्मी की ऋतु के भयंकर रूप को देखकर कोई परेशान होकर कह रहा है कि जेठ माह की गर्मी की अधिकता इतनी बढ़ गई है कि कहीं कोई छाया भी नहीं दिखाई दे रही है, जिसका सहारा लेकर कोई इस जानलेवा गर्मी से छुटकारा पा सके। ऐसा इसलिए कि स्वयं छाया भी इस भयंकर गर्मी से आकुल-व्याकुल होकर छाया की खोज में या तो घने जंगलों में जाकर छिप गई है या घरों के ही भीतर जाकर बैठ गई है; अर्थात् घरों के कमरों के अंदर छिपकर अपनी जान बचा रही है।

विशेष:

  1. भाषा-ब्रजभाषा है।
  2. शैली वर्णनात्मक है।
  3. छाया को मनुष्य के रूप में चित्रित किया गया है। इसलिए इसमें मानवीकरण अलंकार है।
  4. उत्प्रेक्षा अलंकार है।
  5. जानलेवा गर्मी का सटीक चित्रण है।

पद्यांशों पर आधारित सौन्दर्य बोध संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. परस्पर हिंसा की दुर्भावना रखने वाले पशु हिंसा क्यों छोड़ दिए हैं?
  2. तपोवन से किसकी उपमा और क्यों दी गई है?
  3. छाँह-छाँह को क्यों चाह रही है?
  4. ‘प्रकृति’ शीर्षक दोहों के काव्य-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

1. परस्पर हिंसा की दुर्भावना रखने वाले पशु हिंसा छोड़ दिए हैं। यह इसलिए कि जेठ माह की भीषण गर्मी के बढ़ते संकट के कारण उनमें स्वयं के बचाव की भावना ने किसी को हानि पहुँचाने की भावना को भुलाकर मित्रता की भावना को उत्पन्न कर दिया है।

2. तपोवन से संसार की उपमा दी गई है। यह इसलिए कि ऋषि-मुनियों के तपोवनों में हिंसक पशु भी अपनी हिंसा की दुर्भावना का परित्याग कर देते हैं।

3. छाँह-छाँह को चाह रही है। यह इसलिए कि स्वयं छाँह भी बढ़ती हुई जानलेवा गर्मी से कहीं नहीं दिखाई देती हैं। वह तो अपने बचाव के किसी सुरक्षित स्थान में जाकर छिप गई है।

4. प्रकृति शीर्षक दोहों में गर्मी के भीषण स्वरूप को उपमा, अनुप्रास, रूपक और उत्प्रेक्षा अलंकारों से अलंकृत करके उन्हें भावात्मक और चित्रात्मक शैलियों में प्रस्तुत किया गया है। भाव-भाषा, प्रतीक और योजना आकर्षक है।

पद्यांशों पर आधारित विषय वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. कवि और कविता का नाम लिखिए।
  2. उपर्युक्त दोहों का मुख्य भाव लिखिए।

उत्तर:

1. कवि-कविवर बिहारी। कविता-‘प्रकृति’।

2. उपर्युक्त दोहों में गर्मी की ऋतु के भयंकर प्रभाव का उल्लेख कर उससे प्रभावित जीव-जन्तुओं की दुखद दशा को स्पष्ट किया गया है। गर्मी की अधिकता इतनी है कि सारा संसार तपोवन में बदल. गया है। फलस्वरूप शत्रुभाव रखने वाले पशु मित्रभाव से एक साथ रह रहे हैं। दोपहर की गर्मी से परेशान होकर तो छाया भी छाया की तलाश कर रही है।

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नीति:

प्रश्न 5.
चटक न छाँड़तु घटत हूँ, सज्जन-नेहँ गंभीरू।
फीकौ परै न, बरु फटै, रँग्यौ चोल-रंग चीरू।।

शब्दार्थ:

  • चटक – चटकीलापन।
  • घटक हूँ – घटते हुए (प्रेम पात्र न होते हुए भी)।
  • बरु – चाहे।
  • चोल रंग – चोल, एक प्रकार की वह लकड़ी, जिसे औटाकर (खौलाकर) रंग निकाला जाता है। यह रंग बहुत पक्का होता है और कपड़े के फट जाने पर भी नहीं छूटता।

प्रसंग:
यह दोहा हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य भाग-1’ में संकलित तथा कविवर बिहारी विरचित ‘सतसई’ के ‘नीति’ शीर्षक से उद्धृत है। इसमें कवि ने सज्जनों के प्रेम की अटलता और स्थिरता का उल्लेख किया है। इस विषय में कवि का कहना है कि

व्याख्या:
सज्जनों का अटल प्रेम प्रेमपात्र के घटने पर भी अपनी अटलता नहीं छोड़ता है; अर्थात् सज्जन जिससे प्रेम करते हैं, वह चाहे अपनी भावना कम करने लगे या दुर्भावना करते हुए नीचे गिरने लगे। दूसरे शब्दों में प्रेम का निर्वाह करना छोड़ दे, तो भी सज्जनों के प्रेम में कोई कमी या अन्तर नहीं आता है। सज्जनों का प्रेम तो वैसे ही हमेशा बना रहता है, जैसे चोल के रंग में रंगा हुआ कपड़ा, भले ही फट जाए, लेकिन उसका रंग कभी भी फीका नहीं पड़ता है।

विशेष:

  1. ब्रजभापा की शब्दावली है।
  2. दोहा छन्द है।
  3. उपमा अलंकार।
  4. उपदेशात्मक शैली है।
  5. यह अंश भाववर्द्धक है।

प्रश्न 6.
दुसह दुराज प्रजानु कौं, क्यों न बढ़े दुख-दंद।
अधिक अँधेरौ जग करत, मिलि मावस रवि-चंदु।।

शब्दार्थ:

  • दुसह – दुसह्य, जो सहा न जा सके।
  • दुराज – दो राजाओं का राज।
  • दुख-दंदु – दुखों का द्वंद्व, विविध प्रकार के दुख।
  • मावस – अमावस्या।
  • रवि-चंदु – सूर्य और चन्द्रमा।

प्रसंग:
पूर्ववत्। दो राजाओं के राज में अर्थात् जिस राज्य के एक ही समय ‘ में दो राजा हों, अनेक प्रकार के दुःख होते हैं। इस बात को कवि ने इस दोहे में .. व्यक्त करने का प्रयास किया है। इस विषय में कवि का कहना है कि –

व्याख्या:
किसी प्रकार से असहनीय, (न सहन किए जाने योग्य) दो राजाओं के राज्य में प्रजा को अनेक प्रकार के दुःख क्यों न होवे। अर्थात् जिस राज्य में एक समय में दो राजा होते हैं, वहाँ की प्रजा को अनेक प्रकार के भयंकर दुःख झेलने पड़ते हैं। यह ठीक उसी प्रकार से है, जैसे अमावस्या के दिन सूर्य और चन्द्रमा मिलकर एक साथ होने से संसार में बहुत अधिक (सबसे अधिक) अंधकार को बढ़ा देते हैं।

विशेष:

  1. दोहा छन्द है।
  2. भाषा ब्रजभाषा है।
  3. उपमा अलंकार है।
  4. यह अंश ज्ञानवर्द्धक है।
  5. दृष्टान्त शैली है।

प्रश्न 7.
बढ़त-बढ़त संपति-सलिलु, मन-ससेजु बढ़ि जाइ।
घटत-घटत सुन फिर घटै, बरु समूल कुम्हिलाइ।।

शब्दार्थ:

  • संपत्ति-सलिलु – संपत्ति रूपी पानी।
  • मन-सरोज – मनरूपी कमल।
  • बरु – बल्कि, परन्तु।
  • समूल – जड़ सहित, मूलधन सहित।
  • कुम्हिलाइ – मुरझा जाता है, नष्ट हो जाता है।

प्रसंग:
पूर्ववत्। इसमें कवि ने धन की चंचलता और नश्वरता का वर्णन करते हुए कहा है कि –

व्याख्या:
सम्पत्ति रूपी पानी के निरन्तर बढ़ते रहने से मन रूपी कमल भी बढ़ता जाता है। दूसरे शब्दों में संपत्ति आने-जाने से मन में अनेक प्रकार की लालसाएँ उत्पन्न होती जाती हैं। लेकिन सम्पत्ति रूपी पानी के घटने पर मन रूपी कमलं घटता ही नहीं, अपितु समूल (जड़ सहित) ही नष्ट हो जाता है। कहने का भाव यह है कि जिस प्रकार पानी के हमेशा बढ़ते रहने पर कमल की नाल भी निरन्तर बढ़ती रहती है। और पानी के घटने पर वह नाल घटती तो नहीं, लेकिन कुम्हलाकर नष्ट हो जाती है। ठीक इसी प्रकार जब किसी व्यक्ति की सम्पत्ति बढ़ती रहती है तो उसके मन में अनेक प्रकार की इच्छाएँ उत्पन्न हो जाती हैं। लेकिन जब उसकी सम्पत्ति घटने लगती है तो उसकी इच्छाएँ भी बिल्कुल समाप्त हो जाती हैं।

विशेष:

  1. ‘बढ़त-बढ़त’ और ‘घटत-घटत’ में पुनरुक्ति अलंकार है।
  2. ‘सम्पत्ति-सलिल’ और ‘मन-सरोज’ में रूपक अलंकार है।
  3. दोहा छन्द है।
  4. उपर्युक्त कथन यथार्थपूर्ण है।

प्रश्न 8.
जो चाहत, चटक न घटे, मैलो होई न चित्त।
रज राजसु न छुवाइ तौ, नेह चीकने चित्त।।

शब्दार्थ:

  • चाहत – चाहते हैं।
  • चटक – चटकीलापन।
  • मैलो – मलिन।
  • नेह – प्रेम।
  • चीकने – पवित्र।

प्रसंग:
पूर्ववत्। इसमें कवि ने प्रेम को पवित्र और निरन्तर बने रहने की युक्ति को बतलाते हुए कहा है कि –

व्याख्या:
एक सच्चा व्यक्ति यदि अपने प्रेम को निरंतर बनाए रखना चाहता है। इसके साथ ही यदि वह अपने प्रेम की पवित्रता के लिए अपने चित्त को और किसी प्रेम के लिए स्थान नहीं देना चाहता है, उसे चाहिए कि वह अपने अंदर किसी प्रकार का अहंकार न करे। ऐसा करने से उसका प्रेम उसके पवित्र चित्त में स्थायी रूप से रह सकेगा, अन्यथा नहीं।

विशेष:

  1. ब्रजभाषा की प्रचलित शब्दावली है।
  2. शैली उपदेशात्मक है।
  3. अनुप्रास अलंकार है।
  4. दोहा छन्द है।
  5. यह दोहा प्रेरक रूप में है।

प्रश्न 9.
कहै यहै श्रुति सुम्रत्यौ, यहै सयाने लोग।
तीन दबावत निस कही, पातक, राजा, रोग।।

शब्दार्थ:

  • श्रुति – वेद।
  • सुम्रत्यौ – स्मृति भी।
  • सयाने – चतुर।
  • निस कही – शक्तिहीन को।
  • पातक – पाप।

प्रसंग:
पूर्ववत्। इस दोहे में कवि ने शक्तिहीनता के दोष पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि –

व्याख्या:
पाप, राजा और रोग-ये तीनों ही शक्तिहीनों को दबाते हैं। इस बात को बार-बार वेद, स्मृतियाँ और चतर लोग कहते हैं।

विशेष:

  1. पातक, राजा और रोग की ‘दंबावत’ एक क्रिया होने से दीपक अलंकार है।
  2. कथ्य को प्रमाण सहित कहने से प्रमाणालंकार है।
  3. दोहा छंद है।
  4. यह दोहा ज्ञानवर्द्धक है।
  5. दृष्टान्त शैली है।

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प्रश्न 10.
स्वारथ, सुकृत, न श्रम वृथा, देखि बिहंग, बिचारि।
बाज पराए पानि परि तू पच्छीनु न मारि।।

शब्दार्थ:

  • स्वारथ – निजी लाभ, मतलब।
  • सुकृतु – अच्छा काम।
  • श्रमु – परिश्रम।
  • बृथा – बेकार।
  • बिहंग – पक्षी।
  • पराएँ पानि परि – दूसरों के इशारे पर।

प्रसंग:
पूर्ववत्। इस दोहे को कवि ने अन्योक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है। इसमें कवि ने अपने आश्रयदाता जयसिंह को यह समझाने का प्रयास किया है कि उन्हें औरंगजेब के इशारे पर महाराज शिवाजी पर आक्रमण नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए कि उसमें उनका कोई निजी लाभ तो है ही नहीं। एक हिन्दू राजा द्वारा दूसरे हिन्दू राजा पर आक्रमण करना उचित भी नहीं है। इस बात को कवि ने किसी वाज को संबोधित करते हुए कहा है कि –

व्याख्या:
अरे बाज! (महाराजा जयसिंह) तुम दूसरों (औरंगजेब) के इशारे पर जिस पक्षी (महाराज शिवाजी) को मारने जा रहे हो, उससे तुम्हारे किसी निजी लाभ की पूर्ति नहीं होगी। ऐसा इसलिए कि शिकार (शिवाजी) को तो वह शिकारी (औरंगजेब) ही लेगा, जिसके इशारे पर उस पक्षी को मारने जा रहे हो। कहने का भाव यह कि किसी दूसरे के इशारे पर और दूसरों की भलाई के लिए अपने सजातीय को मारना (हानि पहुँचाना) किसी प्रकार से ठीक नहीं है। इस दृष्टि से इससे होने वाला परिश्रम भी व्यर्थ ही होगा।

विशेष:

  1. ब्रजभाषा की प्रचलित शब्दावली है।
  2. दोहा छंद है।
  3. अन्योक्ति अलंकार है।
  4. उपदेशात्मक शैली है।
  5. यह दोहा प्रेरणादायक रूप में है।

पद्यांशों पर आधारित सौन्दर्यबोध संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. सज्जनों का प्रेम कैसा होता है?
  2. नीति के दोहों का भाव-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
  3. नीति के दोहों के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।

उत्तर:

1. सज्जनों का प्रेम बड़ा ही स्थायी और अमिट होता है। वह चोल के रंग के समान हमेशा ही बना रहता है।

2. नीति के दोहों में व्यक्त भावों की सस्लता, उपयुक्त, यथार्थता और स्पष्टता सराहनीय है। इन दोनों में कही गई बातें बिल्कुल सारपूर्ण और जीवन की सफलता के लिए अपेक्षित व समुचित कही जा सकती हैं। इस आधार पर ये अधिक विश्वसनीय और सार्थक सिद्ध होती हुई दिखाई दे रही हैं।

3. नीति के दोहों का काव्य-सौन्दर्य हृदयस्पर्शी और रोचक है। जीवन को हद तक सार्थक बनाने में जीवन-नीति का महत्त्व कितना अधिक होता है, इसे दर्शाने के लिए कवि ने प्रस्तुत दोहों को अनुप्रास, रूपक, उत्प्रेक्षा, उपमा आदि अलंकारों से अलंकृत किया है। फिर उन्हें वीर रस और शान्त रस में डुबोकर ब्रजभाषा की प्रचलित शब्दावली को आकर्षक बनाया है। भावों में सरसता और प्रतीक-बिम्बों की सटीकता के द्वारा उन्हें हृदय-स्पर्शी बनाने में अद्भुत सफलता कायम की है।

पद्यांशों पर आधारित विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. कवि और कविता का नाम लिखिए।
  2. दो राजाओं का राज्य कैसा होता है?
  3. सम्पत्ति के बढ़ने-घटने से क्या प्रभाव पड़ता है?
  4. स्मृतियाँ और चतुर लोग क्या मानते हैं?।
  5. बाज के माध्यम से कवि ने क्या सीख दी है?

उत्तर:

  1. कवि-कविवर बिहारी, कविता-नीति।
  2. दो राजाओं का राज्य प्रजा के लिए हर प्रकार से दुःखद और विपत्तिकारक होता है।
  3. सम्पत्ति के बढ़ने से मन में अनेक प्रकार की इच्छाएँ जोर मारने लगती हैं। इसके विपरीत सम्पत्ति के घटने से मन की इच्छाएँ लगभग समाप्त हो जाती हैं।
  4. स्मृतियाँ और चतुर लोग यह मानते हैं कि पाप, राजा और रोग, ये तीनों ही शक्तिहीनों को दबाते हैं।
  5. बाज के माध्यम से कवि ने यह सीख दी है कि हमें किसी दूसरे के बहकावे में आकर और दूसरों की भलाई के लिए अपने सजातीय को कोई दुःख या हानि नहीं पहुँचानी चाहिए।

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MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 4 ग्राम-श्री

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 4 ग्राम-श्री (कविता, सुमित्रानन्दन पन्त)

ग्राम-श्री पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

ग्राम-श्री लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
पाठ में आई पंक्तियों के आधार पर सही जोड़ी बनाइए
(क) हरियाली – बालू के साँपों-सी
(ख) रवि के किरणें – मोती के दानों-से
(ग) आम्र-तरु – मखमल-सी
(घ) गंगा की रेती – चाँदी की-सी.
(ङ) हिमकन – रजत स्वर्ण मंजरियों-से
उत्तर:
(क) हरियाली – मखमल-सी
(ख) रवि की किरणें – चाँदी की-सी
(ग) आम्र-तरु – रजत स्वर्ण मंजरियों-से
(घ) गंगा की रेती – बालू के साँपों-सी
(ङ) हिमकन – मोती के दानों-से।

प्रश्न 2.
खेतों पर पड़ती हुई सूर्य की किरणें कैसी प्रतीत हो रही हैं?
उत्तर:
खेतों पर पड़ती हुई सूर्य की किरणें चाँदी की उजली जाली-सी प्रतीत हो रही हैं।

प्रश्न 3.
कवि ने सोने की किंकणियाँ किसको कहा है?
उत्तर:
कवि ने सोने की किंकणियाँ अरहर और सनई की पकी हुई फलियों को कहा है।

प्रश्न 4.
हरे-हरे तिनके कैसे दिखाई दे रहे हैं?
उत्तर:
हरे-हरे तिनके हरे खून की तरह दिखाई दे रहे हैं।

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ग्राम-श्री दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कविता में वर्णित खेतों के सौन्दर्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
खेतों का सौन्दर्य बड़ा ही अनूठा दिखाई दे रहा है। खेतों में दूर-दूर तक मखमल के समान कोमल हरियाली फैली हुई दिखाई दे रही है। उस पर जब सूर्य की किरणें पड़ती हैं, तब वह चाँदी के समान चमक उठती है। हरे-हरे तिनकों पर जब सूर्य का प्रकाश पड़ता है, तब हरे खून की तरह झलकते हुए दिखाई देते हैं। अरहर और सनई की पकी हुई फलियाँ घुघरू की तरह सुन्दर ध्वनि करती हैं। सरसों के पीले-पीले फूलों से तेल से युक्त सुगन्ध उड़ रही है। तीसी (अलसी) की कली हरी-भरी धरती पर झाँकती हुई दिखाई दे रही है। उधर खेतों में दूर-दूर तक पालक लहलहा रहे हैं, धनिया महक रही है, लौकी और सेम की फली मखमल की तरह लाल टमाटर और मिरचों की बड़ी हरी थैली दिखाई दे रही है।

प्रश्न 2.
भू पर आकाश उतरने का अनुभव कब होता है?
उत्तर:
भू पर आकाश उतरने का अनुभव उस समय होता है, जब चारों ओर घना कोहरा छा जाता है। सूर्य की किरणें कुहरे में उछलकर रह जाती हैं। फलस्वरूप अँधेरा और धुन्ध फैल जाता है। इससे कोई दूर की वस्तु साफ-साफ नहीं दिखाई देती है। सारा वातावरण झिलमिलाते हुए सुबह से शाम तक बना रहता है। इस प्रकार का दृश्य सचमुच बड़ा ही रोचक और अद्भुत लगता है।

प्रश्न 3.
कवि ने ग्राम की तुलना मरकत डिब्बे से क्यों की है?
उत्तर:
कवि ग्राम की तुलना मरकत डिब्बे से की है। यह इसलिए कि गाँव के चारों ओर कुहरे का साम्राज्य फैला हुआ है। इससे धुन्धमय सारा वातावरण हो जाता है। इस प्रकार के धुन्धमय वातावरण पर सूरज का जब प्रकाश पड़ता है, और उलझकर रह जाता है, तव वह धुन्धमय वातावरण नीलमणि के समान चमक उठता है। इसे ही लक्ष्य करके कवि ने ग्राम की तुलना मरकत डिब्बे से की है।

ग्राम-श्री भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पद्यांश की व्याख्या कीजिए-
(क) रोमांचित-सी लगती वसुधा ………… शोभाशाली॥
(ख) अब रजत स्वर्ण-मंजरियों से …………. मतवाली॥
उत्तर:
(क) शब्दार्थ :
तलक-तक। रवि-सूर्य, सूरज। हरित्-हरा। रुधिर-खून। श्यामल-सविला। भूतल-धरती। फलक-विस्तृत (फैला हुआ) भाग। रोमांचित-प्रसन्न। वसुधा-धरती। किंकिणियाँ-छोटे-छोटे घुघरू।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य भाग-1’ में संकलित तथा महाकवि सुमित्रानन्दन पन्त द्वारा विरचित काव्य-रचना ‘ग्राम श्री’ से ली गई है। इसमें महाकवि पन्त ने गाँव की शोभा बढ़ाने वाली खेतों की हरियाली का आकर्षक चित्र खींचा है। इस विषय में महाकवि पन्त का कहना है कि

व्याख्या :
खेतों में दूर-दूर तक फैली हुई हरियाली मखमल के समान कोमल और सुन्दर लग रही है। उस पर सूर्य का प्रकाश जब पड़ता है, तब वह चाँदी के समान सफेद होकर मन को अपनी ओर खींच लेती है। हवा से हिलते हुए हरे-भरे तिनकों पर जब सूर्य का प्रकाश पड़ता है, तब ऐसा लगता है कि मानो हरा खून झलक रहा है। इस प्रकार की धरती को देखकर ऐसा लगता है कि नीला आकाश आकर धरती पर झुक गया है। वह अपने सफेद और नीलिमा का विस्तार पूरी धरती पर करते। हुए अधिक सुन्दर लग रहा है। इस प्रकार खेतों में जौ, गेहूँ की जब बालियाँ आती हैं, तब उनसे सजकर सारी धरती अधिक. सुन्दर दिखाई देने लगती है। सोने की चमक-दमक के समान अरहर और सनई की फलियाँ घुघरू की तरह आवाज करती हुई बहुत अधिक अच्छी लगती हैं।

विशेष :

  1. खेतों में दूर-दूर तक फैली हरियाली का आकर्षक चित्र खींचा गया है।
  2. ‘मखमल-सी’ चाँदी की-सी और रोमांचित-सी में उपमा अलंकार है।
  3. भाषा तत्सम शब्दों की है।
  4. शृंगार रस का प्रवाह है।

(ख) शब्दार्थ :
भीनी-भीगी हुई। हरित-हरा। धरा-धरती। नीलम-नीला। रजत-चाँदी। आम्र-आम। मंजरियों-बौरों। तरु-पेड़। ढाक-पलाश। कोकिला-कोयल। मुकुलित-खिले हुए। दाडिम-अनार।

प्रसंग :
पूर्ववत्।

व्याख्या :
अब खेतों में तेल की सुगन्ध से भीगी हई सरसों पीले-पीले रंगों में फूल गई है। दूसरे शब्दों में अब खेतों में सरसों के पीले-पीले फूल दिखाई देने लगे हैं। उनकी सुगन्ध तेल से भीगी हुई होकर चारों ओर फैल रही है। हरी-भरी धरती पर तीसी (अलसी) के नीली-नीली कली खिल रही है। उसे देखने से ऐसा लगता है, मानो वह चुपचाप कुछ देख रही है। इसी प्रकार अब आम की डालियाँ सोने-चाँदी की तरह बौरों से लद गई हैं। ढाक और पीपल के पत्ते झड़ रहे हैं। प्रकृति की इस चंचलता और सुन्दरता से मदमस्त होकर कोयल इधर-उधर कूकने लगी है। बागों में कटहल की सुगन्ध फैल रही है, तो जामुन खिली हुई सुन्दर लग रही है। झरबेरी झूलती हुई दिखाई दे रही है। इस प्रकार आड़, नीबू, अनार, आलू, गोभी, बैंगन और मूली खिलते हुए मन को छू रहे हैं।

विशेष :

  1. भाषा मिश्रित शब्दों की है।
  2. शैली वर्णनात्मक है।
  3. प्रकृति का सुखद चित्र उपस्थित किया गया है।
  4. वसन्त ऋतु का स्वाभाविक उल्लेख है।
  5. ‘पीली-पीली’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।

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ग्राम-श्री भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखो।।
रवि, धरती, जंगल, वृक्ष, आकाश।
उत्तर:
पर्यायवाची शब्द
रवि – सूर्य, सूरज, दिनकर, दिवाकर।
धरती – धरा, भू, पृथ्वी, अवनि।
जंगल – वन, विपिन।
वृक्ष – पेड़, पादप, तरु।
आकाश – नभ, गगन, आसमान।

प्रश्न 2.
कविता में आए हुए देशज शब्द छाँटकर उनके मानक हिन्दी शब्द लिखिए।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 4 ग्राम-श्री img-1

ग्राम-श्री योग्यता विस्तार

प्रश्न 1.
प्राकृतिक सौन्दर्य से सम्बन्धिते चित्रों को खोजकर उसका अलबम तैयार कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।!

प्रश्न 2.
नदियाँ निरन्तर प्रदूषित हो रहीं हैं, नदियों के प्रदूषण के कारण और निदान को चित्रों के माध्यम से बनाइए तथा उसका प्रदर्शन कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।!

प्रश्न 3.
आपको शहर अच्छा लगता है या गाँव, इस विषय पर कारण सहित अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।!

ग्राम-श्री परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

ग्राम-श्री लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
धरती पर कौन झुका हुआ लग रहा है?
उत्तर:
धरती पर आकाश का स्वच्छ नीला फलक झुका हुआ लग रहा है।

प्रश्न 2.
भीनी तैलाक्त गन्ध किसकी उड़ रही है?
उत्तर:
भीनी तैलाक्त गन्ध सरसों के पीले-पीले फूलों से उड़ रही है।

प्रश्न 3.
नदी के किनारे पर कौन सोई रहती है?
उत्तर:
नदी के किनारे पर मगरौठी (एक चिड़िया विशेष) सोई रहती है।

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ग्राम-श्री दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कविता में वर्णित बागों के सौन्दर्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कविवर सुमित्रानन्दन विरचित कविता ‘ग्राम श्री’ में बागों के सौन्दर्य का वर्णन स्वाभाविक होने के साथ-साथ अधिक रोचक है। कवि के अनुसार वागों में आम के पेड़ की डालें वीरों से लद गए हैं। वे सोने-चाँदी की तरह चमकती हुई सुन्दर लग रही हैं। पलाश और पीपल के पके हुए पत्ते झर रहे हैं। इस प्रकार के दृश्य से कोयल मतवाली होकर कू-कू की मधुर ध्वनि करने लगी है। दूसरी ओर कटहल की सुगन्ध फैल रही है। पकी हुई जामुन मन को छू रही है। जंगली झरवेरी झूलती हुई दिखाई दे रही है। आड़ फूल रहे हैं। इसी प्रकार नीबू, अनार, आलू, गोभी, बैगन और मूली भी। पीले-पीले मीठे अमरूदों पर पड़ी हुई लाल-लाल चित्तियाँ खूब सुन्दर लग रही हैं। पके हुए बेर सुनहरे और मधुर लग रहे हैं। इस प्रकार बगिया के छोटे-छोटे पेड़ों पर छोटे-छोटे छाजन मन को अपनी ओर खींच रहे हैं।

प्रश्न 2.
कोयल कब मतवाली हो उठती है?
उत्तर:
कोयल तब मतवाली हो उठती है, जब वसन्त ऋतु का आगमन होने लगता है। बागों में आमों की डालियाँ चाँदी-सोने जैसी चमक वाली मंजरियों (बौरों) से लद जाती हैं। ढाक और पीपल के पेड़ अपने-अपने पुराने पत्ते रूपी कपड़े उतार-उतार कर नए पत्ते रूपी कपड़ों को पहनने लगते हैं। इस प्रकार का. मदमस्त कर देने वाले वातावरण में कोयल मतवाली होकर कू-कू की अपनी मधुर तान छोड़ने लगती है।

प्रश्न 3.
कुहरे में कौन-कौन सुन्दर लगते हैं और क्यों?
उत्तर:
कुहरे में खेत, बाग, घर और वन बहुत सुन्दर लगते हैं। ऐसा इसलिए कि कुहरे से जब खेत, बाग, घर और वन ढक जाते हैं, तब उन पर सूरज की रोशनी सीधी नहीं पड़ती है। वह तो कुहरे से उलझकर रह जाती है। इससे खेत, बाग, घर और वन पर पड़ा हुआ कुहरा सतरंगी होकर बहुत सुन्दर लगने लगता है। इसे ही लक्ष्य करके कवि ने कहा है कि कुहरे में खेल, बाग, घर और वन बहुत ही सुन्दर लगते हैं।

ग्राम-श्री कवि-परिचय

प्रश्न.
श्री सुमित्रानन्दन पन्त का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय :
श्री सुमित्रानन्दन पन्त प्रकृति के सुकुमार और मानवतावाद के प्रमुख कवि हैं। पन्त जी का जन्म उत्तराखण्ड राज्य के अल्मोड़ा जिले के कौसानी गाँव में 20 मई, 1910 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनकी आरम्भिक शिक्षा गाँव में हुई। इसके बाद की शिक्षा राजकीय स्कूल, अल्मोड़ा में हुई। इसके बाद उनकी शिक्षा काशी के जयनारायण स्कूल में हुई। आपने उच्चशिक्षा के लिए प्रयाग के म्योर सेन्ट्रल कॉलेज में प्रवेश लिया लेकिन गाँधी जी के असहयोग आन्दोलन में सक्रिय भाग लेने के कारण 1921 में कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी और स्वतन्त्र रूप से विभिन्न भाषा-साहित्य का अध्ययन किया। पन्तजी पर महात्मा गाँधी, कार्लमार्क्स, अरविन्द और विवेकानन्द के विचारों का गहरा प्रभाव पड़ा। सन् 1950 में आप आकाशवाणी के निदेशक नियुक्त हुए। आपकी साहित्यिक प्रतिभा का मूल्यांकने करके आपको ‘सहित्य-वाचस्पति’, ‘ज्ञानपीठ’, ‘पद्मभूषण’ आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 28 दिसम्बर, 1977 में 65 वर्ष की अल्पायु में ही पन्त जी इस संसार से सदा के लिए विदा होकर अमर हो गए।

काव्य :
i. महाकाव्य-लोकायतन।
ii. खण्ड-काव्य-ग्रन्थि।
iii.काव्य-संग्रह :
1. युगपथ, 2. उत्तरा, 3-वीणा, 4. पल्लव, 5. गुंजन, 6. उच्छ्वास, 7. युगान्त, 8. ग्राम्या, 9. रजत-रश्मि, 10. शिल्पी, 11. कला और बूढ़ा चाँद, 12. ऋता, 13. युगवाणी, 14. स्वर्ण-किरण, 15. स्वर्ण-धूलि, 16. अमिता, 17. वाणी, 18. सौ वर्ण, 19. चिदम्बरा और 20. पल्लविनी।

उपन्यास :
हार
कहानी :
संग्रह-पाँच कहानियाँ
अनुवाद :
मधुज्वाल
नाटक :
ज्योत्सना, परी, क्रीड़ा और रानी!
इनके अतिरिक्त पन्त जी ने गद्य-लेखन की आलोचना भी की है।

भाषा-शैली :
पन्त जी की भाषा सरल, सुस्पष्ट और मधुर है। उनकी भाषा की सर्वप्रधान विशेषता है-सरसता और प्रवाहमयता। इस प्रकार की भाषा में सामान्य और विशिष्ट शब्दों के मेल हुए हैं। कविवर जयशंकर प्रसाद की तरह आपकी भाषा अत्यन्त प्रौढ़ और गम्भीर न होकर सुकुमार, स्वाभाविक, ललित और भावप्रद है।

पन्तजी की शैली छायावादी शैली है। वह अलंकृत, गेय और बोधगम्य है। संगीत और नाद के अद्भुत मेल से वह झंकृत और मुखर हो उठी है। इस तरह कविवर पन्त की भाषा-शैली रोचक और अर्थपूर्ण सिद्ध होती है।

व्यक्तित्व :
पन्त जी मूलरूप से कवि रहे। उनका व्यक्तित्व इसीलिए काव्यात्मक कहा जा सकता है। उनके साहित्यिक व्यक्तित्व को ‘ज्ञानपीठ’, ‘साहित्य-वाचस्पति’ और ‘पद्मभूपण’ उपाधियों से अलंकृत किया गया। पन्तजी के व्यक्तित्व का दूसरा पक्ष है-‘सौभाग्यता’ और सौन्दर्य। पन्त अत्यन्त सरल और सहज स्वभाव के थे। उनका ‘बाहरी और भीतरी व्यक्तित्व अत्यधिक आकर्षक और मोहक रहा। वे सुदर्शन व्यक्तित्व वाले हिन्दी के अनोखे कवि के रूप में जाने गए।

महत्त्व :
पन्तं जी का साहित्यिक महत्त्व तब भी था और आज भी है। छायावादी स्तम्भों के वे एक महान स्तम्भ के रूप में युग-युग तक याद किए जाते रहेंगे। उनकी काव्य-चेतना की दार्शनिक उपलब्धियाँ भी एक महत्त्वपूर्ण देन के रूप में स्वीकार की जाती रहेंगी।

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ग्राम-श्री भाव सारांश

प्रश्न.
कविवर सुमित्रानन्दन पन्त विरचित कविता ‘ग्राम श्री’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
कविवर सुमित्रानन्दन पन्त विरचित कविता ‘ग्राम श्री’ एक रोचक और हृदयस्पर्शी है। इसमें प्रकृति की सुन्दरता का कई रूपों में चित्रण किया गया है। खेतों में दूर-दूर तक मखमल की तरह हरियाली फैली हुई है। उस पर सूर्य की किरणें पड़कर चाँदी की तरह दिखाई देती हैं। हरे-हरे तिनके की झलक अधिक सुन्दर लगती है। अरहर, सनई, जौ और गेहूँ की बालियों से लदी हुई यह धरती अधिक प्रसन्न हो रही है। चारों ओर तेल से युक्त गन्ध उड़ रही है। पीले रंग का फूल सरसों और नीले रंग की तीसी भी अपनी सुन्दरता को फैला रही है। चाँदी और सोने की तरह आम में बौर आ चुके हैं, ढाक और पीपल के पत्तों को झरते हुए देखकर मतवाली कोयल बोल रही है, कटहल, जामुन, झरबेरी, आड़, नीबू, अनार, आलू, गोभी, बैगन, मूली, अमरूद, बेर, पालक, धनिया, लौकी, सेम, टमाटर और मिर्ची खेतों में बढ़ते, फूलते और फलते हुए मन को अपनी ओर खींच रहे हैं। सुबह-सुबह ऐसी ओस पड़ती है कि मानो धरती पर आसमान आ गया है। इस प्रकार सारा ग्रामीण अंचल नीलमणि के डिब्बे में बन्द हुआ दिखाई देता है। उसकी यह अद्भुत सुन्दरता सबको बाग-बाग कर देती है।

ग्राम-श्री संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

1. फैली खेतों में दूर तलक,
मखमल-सी कोमल हरियाली।
लिपटी जिससे रवि की किरणें,
चाँदी की-सी उजली जाली ॥1॥

तिनके के हरे-हरे नन’ पर,
हिल हरित् रुधिर है रहा झलक।
श्यामत भूतल पर झुका हुआ,
नभ का चिर निर्मल नील फलका ॥2॥

रोमांचित-सी लगती वसुधा,
आई जौ-गेहूँ में बाली,
अरहर सनई की सोने की,
किंकिणियाँ है शोभाशाली ॥3॥

शब्दार्थ :
तलक-तक। रवि-सूर्य, सूरज। हरित्-हरा। रुधिर-खून। श्यामल-सविला। भूतल-धरती। फलक-विस्तृत (फैला हुआ) भाग। रोमांचित-प्रसन्न। वसुधा-धरती। किंकिणियाँ-छोटे-छोटे घुघरू।

प्रसंग :
प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य भाग-1’ में संकलित तथा महाकवि सुमित्रानन्दन पन्त द्वारा विरचित काव्य-रचना ‘ग्राम श्री’ से ली गई है। इसमें महाकवि पन्त ने गाँव की शोभा बढ़ाने वाली खेतों की हरियाली का आकर्षक चित्र खींचा है। इस विषय में महाकवि पन्त का कहना है कि

व्याख्या :
खेतों में दूर-दूर तक फैली हुई हरियाली मखमल के समान कोमल और सुन्दर लग रही है। उस पर सूर्य का प्रकाश जब पड़ता है, तब वह चाँदी के समान सफेद होकर मन को अपनी ओर खींच लेती है। हवा से हिलते हुए हरे-भरे तिनकों पर जब सूर्य का प्रकाश पड़ता है, तब ऐसा लगता है कि मानो हरा खून झलक रहा है। इस प्रकार की धरती को देखकर ऐसा लगता है कि नीला आकाश आकर धरती पर झुक गया है। वह अपने सफेद और नीलिमा का विस्तार पूरी धरती पर करते । हुए अधिक सुन्दर लग रहा है। इस प्रकार खेतों में जौ, गेहूँ की जब बालियाँ आती हैं, तब उनसे सजकर सारी धरती अधिक. सुन्दर दिखाई देने लगती है। सोने की चमक-दमक के समान अरहर और सनई की फलियाँ घुघरू की तरह आवाज करती हुई बहुत अधिक अच्छी लगती हैं।

विशेष :

  1. खेतों में दूर-दूर तक फैली हरियाली का आकर्षक चित्र खींचा गया है।
  2. ‘मखमल-सी’ चाँदी की-सी और रोमांचित-सी में उपमा अलंकार है।
  3. भाषा तत्सम शब्दों की है।
  4. शृंगार रस का प्रवाह है।

पद्यांश पर आधारित सौन्दर्य-बोध सम्बन्धी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.
(i) प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।।
(iii) ‘नभ का चिर निर्मल नील फलक’ का भाव-सौन्दर्य लिखिए।
उत्तर:
(i) प्रस्तुत पद्यांश में महाकवि पन्त ने खेतों में दूर-दूर तक फैली हरियाली का रोचक चित्रण किया है। मखमल की तरह कोमल दूर-दूर तक फैली हरियाली के रूप बड़े ही आकर्षक हैं। उस पर पड़ता हुआ सूर्य का प्रकाश उसे कई आकर्षक रूपों में ढाल देता है। इससे वह कभी चाँदी के समान दिखाई देता है, तो कभी झलकते हुए हरे खून के समान दिखाई देती है।

(ii) प्रस्तुत पद्यांश की भाषा तत्सम शब्दों की है। ‘मखमल-सी’, ‘चाँदी की-सी’ और रोमांचित-सी’ में उपमा अलंकार है। ‘हरे-हरे’ में पुनरुक्ति अलंकार है। शृंगार रस के प्रवाह में बिम्ब-प्रतीक संजीव हो उठे हैं। चित्रात्मक शैली अधिक हृदयस्पर्शी बन गई है।

(iii) ‘नभ का चिर निर्मल नील फलक’ में कवि ने प्रकृति का भाववर्द्धक चित्रण किया है। इससे आकाश का मनमोहक स्वरूप उजागर हुआ है।

पद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर-
प्रश्न:
(i) कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ii) ‘हरित रुधिर है रहा झलक’ पद्यांश में किसका रुधिर झलक रहा है और क्यों?
(iii) ‘मखमल-सी कोमल हरियाली’ का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
(i) कवि-सुमित्रानन्द पन्त, कविता-‘ग्राम श्री’!
(ii) ‘हरित रुधिर है रहा झलक’ में हरे-हरे तन अर्थात् हरियाली का रुधिर झलक रहा है। यह इसलिए कि सूर्य की किरणें जब ओस पड़ी हुई हरियाली पर सुबह-सुबह पड़ती हैं, तब वह खून की तरह झलकने लगती है।
(iii) ‘मखमल-सी कोमल हरियाली’ का भाव-सौन्दर्य अधिक आकर्षक है। हरियाली को मखमल के समान कोमल कहकर कवि ने प्रकृति की सुकुमारता और सुन्दरता को प्रस्तुत किया है। इससे कवि का प्रकृति के प्रति अधिक लगाव स्पष्ट हो रहा है।

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2. उड़ती भीनी तैलाक्त गन्ध,
फूली सरसों पीली-पीली। जो,
हरित धरा से झाँक रही,
नीलम की कलि तीसी नीली ॥4॥

अब रजत स्वर्ण-मंजरियों से,
लद गई आम्र तरु की डाली।
झर रहे ढाक, पीपल के दल,
हो उठी कोकिला, मतवाली ॥5॥

महके कटहल, मुकुलित जामुन,
जंगल में झरबेली झूली।
फूले आडू, नीबू, दाडिम,
आलू, गोभी, बैगन, मूली ॥6॥

शब्दार्थ :
भीनी-भीगी हुई। हरित-हरा। धरा-धरती। नीलम-नीला। रजत-चाँदी। आम्र-आम। मंजरियों-बौरों। तरु-पेड़। ढाक-पलाश। कोकिला-कोयल। मुकुलित-खिले हुए। दाडिम-अनार।

प्रसंग :
पूर्ववत्।

व्याख्या :
अब खेतों में तेल की सुगन्ध से भीगी हई सरसों पीले-पीले रंगों में फूल गई है। दूसरे शब्दों में अब खेतों में सरसों के पीले-पीले फूल दिखाई देने लगे हैं। उनकी सुगन्ध तेल से भीगी हुई होकर चारों ओर फैल रही है। हरी-भरी धरती पर तीसी (अलसी) के नीली-नीली कली खिल रही है। उसे देखने से ऐसा लगता है, मानो वह चुपचाप कुछ देख रही है। इसी प्रकार अब आम की डालियाँ सोने-चाँदी की तरह बौरों से लद गई हैं। ढाक और पीपल के पत्ते झड़ रहे हैं। प्रकृति की इस चंचलता और सुन्दरता से मदमस्त होकर कोयल इधर-उधर कूकने लगी है। बागों में कटहल की सुगन्ध फैल रही है, तो जामुन खिली हुई सुन्दर लग रही है। झरबेरी झूलती हुई दिखाई दे रही है। इस प्रकार आड़, नीबू, अनार, आलू, गोभी, बैंगन और मूली खिलते हुए मन को छू रहे हैं।

विशेष :

  1. भाषा मिश्रित शब्दों की है।
  2. शैली वर्णनात्मक है।
  3. प्रकृति का सुखद चित्र उपस्थित किया गया है।
  4. वसन्त ऋतु का स्वाभाविक उल्लेख है।
  5. ‘पीली-पीली’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।

पद्यांश पर आधारित सौन्दर्य-बोध सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
(iii) ‘हो उठी कोकिला मतवाली’ का भाव-सौन्दर्य लिखिए।
उत्तर:
(i) प्रस्तुत पद्यांश की भावयोजना सरल और साधारण है। उससे अर्थ सहज में ही स्पष्ट हो रहा है। चूंकि वसन्त ऋतु का आगमन हो चुका है। फलस्वरूप प्रकृति अपने रूप-प्रतिरूप को सँवारती हुई नई दुल्हन के समान अपने प्रियतम वसन्त के आने की प्रतीक्षा कर रही है। इससे उसका अंग-प्रत्यंग अधिक सुन्दर और आकर्षक दिखाई दे रहा है। विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों की सजावट को इसी अर्थ में देखा जा सकता है।

(ii) प्रस्तुत पद्यांश की भाषा सरल और सुबोध है। इसको प्रभावशाली बनाने के लिए कवि ने उपमा, रूपक और पुनरुक्ति अलंकारों का यथोचित प्रयोग किया है। ‘हरित धरा से झाँक रही, नीलम की कलि तीसी नीली।’ में प्रकृति का मानवीकरण करके कवि ने इस पद्यांश को और अधिक सजीव बना रहा है। श्रृंगार इसका सुन्दर प्रवाह है।

(iii) ‘हो उठी. कोकिला मतवाली’ में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। इससे प्रकृति में आए हुए वसन्त ऋतु के असाधारण प्रभाव का सहज ही अनुमान हो जाता है।

पद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ii) तेल से युक्त किसकी सुगन्ध उड़ रही है?
(iii) इस पद्यांश में किस ऋतु का चित्रण हुआ है?
उत्तर:
(i) कवि-सुमित्रानन्द पन्त, कविता-‘ग्राम श्री’।
(ii) तेल से युक्त सुगन्ध सरसों के पीले-पीले फूलों से चारों ओर उड़ रही है।
(iii) इस पद्यांश में वसन्त ऋतु का चित्रण हुआ है।

3. पीले मीठे अमरूदों में अब,
लाल-लाल चित्तियाँ पड़ी।
पक गए सुनहरे मधुर बेर,
अँवली से तरु की डाल जड़ी ॥7॥

लहलह पालक, महमह धनिया,
लौकी और सेमफली फैली।
मखमली टमाटर हुए लाल,
मिरचों की बड़ी हरी थैली ॥8॥

बगिया के छोटे पेड़ों पर,
सुन्दर लगते छोटे छाजन।
सुन्दर गेहूँ की बालों पर,
मोती के दानों-से हिमकन ॥9॥

शब्दार्थ :
बगिया-वाग। हिमकन-बर्फ के ओस की बूंदें।

प्रसंग :
पूर्ववत्। इसमें कवि ने वसन्तकालीन वागों की सुन्दरता का उल्लेख करते हुए कहा है कि

व्याख्या :
इस समय बागों में लाल-लाल चित्तियों वाले पीले-मीठे अमरूद खिल रहे हैं। उधर सुनहले रंग वाली हुई बेर बहुत ही मधुर हो रही है और अँवली से पेड़ की डाल जड़ी हुई है। अब खेतों में पालक लहलहा रहे हैं, धनिया की महक चारों ओर फैल रही है। इसी प्रकार लौकी और सेमफली फैल रही है। लाल-लाल टमाटर मखमल की तरह सुन्दर लग रहे हैं तो मिरचों की सुन्दरता बड़ी हरी थैली की तरह दिखाई देती है। कवि का पुनः कहना है कि बागों के छोटे-छोटे पेड़ों पर जो छोटे-छोटे छाजन हैं, वे मन को छू रहे हैं। खेतों में फैली हुई गेहूँ की बालों पर पड़ी हुई ओस की बूंदें मोती के दानों के समान चमक रहे हैं।

विशेष :

  1. वसन्तकालीन खेतों और बागों की सजावट का चित्रण है।
  2. सरल शब्द हैं।
  3. चित्रात्मक शैली है।
  4. ‘मोती के दानों-से हिमकन’ में उपमा अलंकार है और लाल-लाल में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।

पद्यांश पर आधारित सौन्दर्य-बोध सम्बन्धित प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिये।
(iii) ‘मखमली टमाटर हुए लाल’ का भाव-सौन्दर्य लिखिए।
उत्तर:
(i) प्रस्तुत पद्यांश में वसन्तकालीन प्रकृति का स्वाभाविक चित्रण किया गया है। इसके लिए कवि ने बागों में पक रहे फलों और खेतों में पक रही फसलों का यथार्थपूर्ण चित्रांकन किया है। इस प्रकार के ये दोनों चित्र कल्पना से रंगीन होकर यथार्थ से दूर नहीं हैं। इनसे उत्पन्न हुई सजीवता और बोधगम्यता इस पद्यांश को सार्थक बना रही है। इससे कवि का गहरा प्रकृति-प्रेम साफ-साफ प्रकट हो रहा है।

(ii) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौन्दर्य भाषा, शैली, अलंकार, बिम्ब, प्रतीक योजना आदि से सज्जित है। इस पद्यांश की भाषा सरल है, तो इसमें अनुप्रास, रूपक, उपमा आदि अलंकार हैं। तुकान्त शब्दावली का प्रयोग भावों को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुए हैं।

(iii) ‘टमाटर’ की कोमलता और सुन्दरता को दर्शाने के लिए उन्हें मखमली कहना बड़ा ही सटीक लगता है। हरा से लाल होने पर भी टमाटर की कोमलता और सुन्दरता ज्यों-की-त्यों बनी रहती है, यह कवि का अनुभव बड़ा गहरा और सराहनीय है।

पद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश में प्रकृति के किस विशेष रूप को चित्रित किया गया. है और क्यों?
उत्तर:
(i) कवि-सुमित्रानन्द पन्त, कविता-‘ग्राम श्री’।
(ii) उपर्युक्त पद्यांश में कवि ने प्रकृति के वसन्तकालीन विशेष रूप को चित्रित किया है। प्रकृति का यह विशेष रूप सर्वाधिक आकर्पक, सरस और हृदयस्पर्शी है। ‘कवि ने इसे ही ध्यान में रखा है।

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4. प्रातः ओझल हो जाता जग,
भू पर आता ज्यों उतर गगन।
सुन्दर लगते फिर कुहरे,
उठते से खेत, बाग, गृह, वन ॥10॥

बालू के साँपों से अंकित,
गंगा की संतरंगी रेती।
सुन्दर लगती सरपत छाई,
तट पर तरबूजों की खेती ॥11॥

अँगुली की कंघी से बगुले,
कलंगी सँवारते हैं कोई।
तिरते जल में सरखाव,
पुलिन पर मगरौठी रहती सोई ॥12॥

मरकत-डिब्बे-सा खुला ग्राम,
जिस पर नीलम नभ आच्छादन।
निरुपम हिमांत में स्निग्ध-शान्त,
निज शोभा से हरता जन-मन ॥13॥

शब्दार्थ :
प्रातः-सुबह ओझल-छिप जाना, साफ न दिखाई देना। गगन-आसमान। कुहरे-ओस। सरपत-एक प्रकार का पौधा, झाड़ी। तट-किनारा। सुरखाव-एक पक्षी। मगरौठी-एक पक्षी। मरकत-नीलमणि। नभ-आकाश। आच्छादन-ढक्कन।

प्रसंग :
पूर्ववत्। इसमें कवि ने जाड़े के प्रातःकालीन दृश्य का चित्रांकन करते हुए कहा है कि

व्याख्या :
जाड़े की सुबह पड़ी हुई ओस से सारा ढका हुआ ऐसा लगता है, मानो धरती पर आसमान उतर आया है। कुहरे में खेत, बाग, घर और जंगल जगकर उठते हुए बहुत सुन्दर दिखाई देते हैं। गंगा नदी की रेत सात रंगों में सांपों से चिह्नित दिखाई देती है। उसके किनारे-किनारे तरबूजों की खेती सरपत से छाई हुई मन को अपनी ओर खींच लेती है।

कवि का पुनः कहना है कि सुबह-सुबह कहीं बगुले अपनी कलंगी सँवारते हुए ऐसे दिखाई देते हैं, मानो वे अपनी अंगुलियों से कंघी कर रहे हैं। कहीं सुरखाब पक्षी जल में तैर रहे हैं, तो कहीं किनारे पर मगरौठी पक्षी सोया हुआ दिखाई देता है। सुबह-सुबह नीलमणि के डिब्बे के समान गाँव खुला हुआ दिखाई देता है, अर्थात् सुबह-सुबह गाँवों की चंचलता दिखाई देती है। चूंकि पूरे गाँव को ओस ढके रहता है, जिससे उस पर आसमान का नीलापन बड़ा ही आकर्षक लगता है। उस समय उसकी जो शान्तिमय शोभा होती है, उस पर सारा जन-मन निछावर हो जाता है।

विशेष :

  1. प्रातःकालीन ओस से लिपटे गाँवों का चित्रांकन किया गया है।
  2. शैली वर्णनात्मक और चित्रात्मक दोनों है।
  3. उच्चस्तरीय शब्दों के प्रयोग हैं।
  4. मुख्य रूप से उपमा अलंकार है।
  5. अभिधा शब्द-शक्ति है।

पद्यांश पर आधारित सौन्दर्य-बोध सम्बन्धित प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश का काव्य-सौन्दर्य लिखिए।
(iii) अँगुली की कंधी से बगुले, कलंगी सँवारते हैं कोई।
उत्तर:
(i) प्रस्तुत पद्यांश में शीतकालीन सुबह का भावपूर्ण चित्रण है। रात की पड़ी हुई ओस से सारा ग्रामीण अंचल किस प्रकार सतरंगी होकर मन को छू रहा है, इसका आलंकारिक चित्र प्रस्तुत किया गया है। इससे आकाश का नीलापन धरती पर मानो उतर आया है। बगुले, सुरखाब और मंगरौठी का नदी के किनारे अलग-अलग दिखाई देना भी कम आकर्षक नहीं है। इस प्रकार सारा ग्रामीण अंचल ओस की बूंदों से ढका हुआ अपनी अद्भुत शोभा को बढ़ा रहा है।

(ii) प्रस्तुत पद्यांश की भाषा मिश्रित शब्दों की है। उपमा, अनुप्रास, उत्प्रेक्षा, रूपक और मानवीकरण अलंकारों का चयन बड़े ही सटीक हैं । चित्रात्मक और वर्णनात्मक शैली के द्वारा शृंगार रस का प्रवाह अधिक सरस हो गया है। बिम्ब और प्रतीक यथास्थान प्रयुक्त हुए हैं।

(iii) अँगुली की कंघी से बगुले कलंगी सँवारते हैं कोई।’ का भाव-सौन्दर्य हृदयस्पर्शी है। बगुले का अपनी कलंगी को अपनी अंगुली रूपी कंघी से सँवारना मानवीय व्यापार की ओर संकेत कर रहा है। इसमें प्रयुक्त हुआ यह बिम्ब बड़ा ही सजीव और रोचक है। भावों को प्रस्तुत करने वाली भाषा की सहजता सराहनीय हैं।

पद्यांश पर आधारित विषय-वस्तु से सम्बन्धित प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) कवि और कविता का नाम लिखिए।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश का प्रमुख विषय क्या है?
(iii) प्रातः कौन किससे ओझल हो जाता है?
उत्तर:
(i) कवि-सुमित्रानन्द पन्त, कविता-‘ग्राम श्री’।
(ii) प्रस्तुत पद्यांश का प्रमुख विषय है-शीतकालीन सुवह का भावपूर्ण प्रकृति का चित्रांकन करना। इसको कवि ने विभिन्न प्रकार से आकर्षक बनाने का प्रयास किया है।
(iii) प्रातः संसार कहरे से ओझल हो जाता है।

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MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 7 प्रताप-प्रतिज्ञा

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 7 प्रताप-प्रतिज्ञा (एकांकी, जगन्नाथ प्रसाद ‘मिलिन्द’)

प्रताप-प्रतिज्ञा पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रताप-प्रतिज्ञा लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
महाराणा प्रताप का युद्ध किसके साथ और कहाँ हुआ?
उत्तर:
महाराणा प्रताप का युद्ध मुगल सम्राट अकबर के साथ हल्दी घाटी में हुआ था।

प्रश्न 2.
युद्ध-भूमि में महाराणा प्रताप को किस विकट स्थिति का सामना करना पड़ा?
उत्तर:
युद्ध-भूमि में महाराणा प्रताप मुगल सेना से चारों ओर से घिर गए। उनके वास्से वे घायल हो गए। उनके शरीर से खून की धारा बहने लगी। तलवार चलाते-चलाते उनके दोनों हाथ थक गए। चेतक घोड़ा मृतप्राय हो गया। फिर भी उन्हें पागलों की तरह लड़ना पड़ा था।

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प्रश्न 3.
चन्द्रावत ने महाराणा को बचाने का क्या उपाय किया?
उत्तर:
चन्द्रावत ने महाराणा को बचाने के लिए उनकी तेजस्वी तलवार अपने हाथ में ले ली। फिर उनसे राजमुकुट लेकर अपने सिर पर धारण कर लिया। चन्द्रावत ने यह उपाय इसलिए किया ताकि अकबर की सेना उसे ही महाराणा प्रताप समझकर उस पर टूट पड़े और राणा प्रताप युद्ध-भूमि से निकल जाने में सफल हो सकें।

प्रश्न 4.
शक्ति सिंह ने महाराणा प्रताप को मुगल सैनिकों से किस तरह बचाया?
उत्तर:
शक्ति सिंह ने महाराणा प्रताप को मुगल सैनिकों से बड़ी सावधानी से बचाया। उसने महाराणा प्रताप के घातक दोनों मुगल सैनिकों को मार डाला।

प्रताप-प्रतिज्ञा दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
महाराणा प्रताप की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए
उत्तर:
महाराणा प्रताप की निम्नलिखित चारित्रिक विशेषताएँ हैं –

  1. जनता के प्रतिनिधि
  2. चित्तौड़ का उद्धारक
  3. संजीवनी शक्तिदाता
  4. प्रजा का विधाता
  5. स्वदेश की आशा
  6. महान वीर
  7. असाधारण योद्धा
  8. स्वाभिमानी और
  9. महान देश-भक्त।

प्रश्न 2.
शक्ति सिंह स्वयं को क्यों धिक्कारता है?
उत्तर:
शक्ति सिंह स्वयं को धिक्कारता है। यह इसलिए कि वह महाराणा प्रताप जैसे असाधारण योद्धा, देशभक्त, स्वाभिमानी और कर्तव्यनिष्ठ का भाई होकर देश का गद्दार है, स्वार्थी और पदलोलुप है।

प्रश्न 3.
महाराणा प्रताप ने चेतक के प्रति अपनी संवेदना किस प्रकार व्यक्त की?
उत्तर:
महराणा प्रताप ने चेतक के प्रति अपनी संवेदना इस प्रकार व्यक्त की-“चेतक! प्यारे चेतक! तुम राह ही में चल बसे। तुम्हारी अकाल मृत्यु देखने के पहले ही ये आँखें क्यों न सदा को मुँद गईं। मेरे प्यारे सुख-दुःख के साथी, तुम्हें छोड़कर मेवाड़ में पैर रखने को जी नहीं करता। शरीर का रोम-रोम घायल हो गया है, प्राण कण्ठ में आ रहे हैं, एक कदम भी चलना दूभर है, फिर भी इच्छा होती है कि तुम्हारे शव के पास दौड़ता हुआ लौट आऊँ, तुमसे लिपटकर जी भरकर रो लूँ और वहीं चट्टानों से सर टकरा-टकराकर प्राण दे दूँ। अपने प्राण देकर प्रताप के प्राण बचाने वाले मूक प्राणी! तुम अपना कर्तव्य पूरा कर गए, पर मैं संसार से मुँह दिखाने योग्य न रहा। हाय, मेरे पापी प्राणों से तुमने किस दुर्दिन में प्रेम करना सीखा था। चेतक, चेतक प्यारे चेतक!

प्रश्न 4.
शक्ति सिंह के स्वभाव में परिवर्तन क्यों आया?
उत्तर:
शक्ति सिंह के स्वभाव में परिवर्तन आया। उसने आँखें खोलकर मेवाड़ के वीरों का बलिदान देखा। उससे समझ लिया कि उसका अहंकार व्यर्थ है। उससे कई गुना वीरता, कई गुनी देशभक्ति और कई गुना त्याग मेवाड़ के एक-एक सैनिक के हृदय में हिलोरें ले रहा है।

प्रश्न 5.
एकांकी के आधार पर सच्चा सैनिक किसे कहेंगे?
उत्तर:
प्रस्तुत एकांकी के आधार पर सच्चा सैनिक हम चन्द्रावत को कहेंगे। ऐसा इसलिए कि उसने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने कर्तव्य का निर्वाह करते हुए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। उसके इस त्याग-समर्पण से देश-भक्ति की सच्ची प्रेरणा मिलती है।

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प्रश्न 6.
प्रताप की बातें शक्ति सिंह को हृदयवेधक क्यों लगीं?
उत्तर:
प्रताप की बातें शक्ति सिंह को हृदयवेधक लगीं। यह इसलिए कि उसने स्वयं को पापी, कायर, पथ के भिखारी, रण से विमुख आदि कहा था।

प्रश्न 8.
एकांकी के विकास-क्रम को समझाते हुए उसकी परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
संस्कृत रूपक के दस भेदों में से पाँच (भाषा, व्यायोग, अंक, वीथी और प्रहसन) एक-एक अंक वाले रूपक हैं। पर संस्कृत के एकांकी रूपक आधुनिक एकांकी की कसौटी पर खरे नहीं उतरते हैं। शिल्प की दृष्टि से आधुनिक एकांकी पश्चिम की देन है। आधुनिक शैली का प्रथम एकांकी जयशंकर प्रसाद का ‘एक चूंट’ माना जाता है। यद्यपि प्रसाद से पहले भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने भी विषय विषमौषधम्’, ‘धनंजय विजय’, ‘वैदिकी हिंसा-हिंसा न भवति’, ‘अन्धेर नगरी’ एकांकी लिखे हैं। परन्तु शिल्प की दृष्टि से वे संस्कृत के भाण, वीथी आदि एक अंक वाले रूपकों के अधिक समीप हैं। वर्तमान एकांकी-कला की कसौटी पर वे पूरे नहीं उतर सके। भुवनेश्वर तथा डॉ. रामकुमार वर्मा के एकांकी-क्षेत्र में उतरने से इनका विकास तथा विस्तार हुआ।

हिन्दी में आधुनिक ढंग के पहले एकांकीकार भुवनेश्वर हैं। उनका ‘कारवाँ’ एकांकी संग्रह 1935 में प्रकाशित हुआ। ‘कारवां’ में छः एकांकी हैं। इसका विषय प्रेम का त्रिकोण है। भुवनेश्वर के एकांकी पश्चिम से प्रभावित हैं। बर्नाड शॉ का उन पर प्रभाव है। एकांकीकार अपने एकांकियों में समस्याएँ उठाना जानता है, पर उनका समाधान वह प्रस्तुत नहीं कर सका। भुवनेश्वर में बौद्धिकता की प्रधानता है, भावुकता को वह विष मानते हैं। उनके एकांकियों में यथार्थ के नग्न चित्र हैं।

भुवनेश्वर के बाद हिन्दी एकांकीकारों में डॉ. रामकुमार वर्मा का नाम आता है। उनका पहला एकांकी है-‘बादल की मृत्यु’ इस एकांकी में कल्पना और काव्यमयता की अधिकता है। इसे ‘फेन्टेसी’ कहा जा सकता है। डॉ. वर्मा के एकांकियों की संख्या 100 के लगभग है, जो अलग-अलग एकांकी-संग्रहों में संकलित हैं। ‘पृथ्वीराज की आँखें’, ‘चारुमित्रा’, रेशमी टाई’, ‘सप्तकिरण’, ‘विभूति’, ‘दीपदान’, ‘रूपरंग’, ‘इन्द्रधनुष’, ‘ध्रुवतारिका’ आदि उनके एकांकी-संग्रह हैं। डॉ. वर्मा ने अधिकतर ऐतिहासिक और सामाजिक एकांकी लिखे हैं। ऐतिहासिक एकोकीकार के रूप में वह सबसे बड़े एकांकीकार हैं।

उदयशंकर भट्ट हिन्दी के एकांकीकारों में एकांकी-कला के प्रारम्भिक उन्नायकों में हैं। उनका पहला एकांकी-संग्रह ‘अभिनव एकांकी’ नाम से 1940 में प्रकाशित हुआ। भट्टजी के एकांकी मुख्य रूप से पौराणिक व सामाजिक हैं। ‘कालिदास’ आदि युग के एकांकी पौराणिक हैं तथा ‘स्त्री का हृदय’, ‘समस्या का अन्त’ आदि में सामाजिक एकांकी संगृहीत है। अपने पौराणिक एकांकियों में भट्टजी ने सामयिक समस्याओं की ओर भी संकेत किया है।

सेठ गोविन्ददास ने सामाजिक, राजनीतिक, पौराणिक, ऐतिहासिक आदि सभी प्रकार के एकांकी लिखे हैं। उनके एकांकी-संग्रह हैं- ‘स्पर्धा’, ‘सप्तरश्मि’, ‘एकादशी’, ‘पंचभूत’, ‘अष्टदल’ आदि। शिल्प की दृष्टि से सेठ जी ‘उपक्रम’ और उपसंहार’ आदि अपने एकांकियों में प्रयोग करते हैं। उन्होंने ‘मोनो-ड्रामा’ भी लिखे हैं। ‘चतुरपथ’ में ऐसे एकांकी हैं। ‘शाप और वर’, ‘अलबेला’ इनके प्रसिद्ध (मोनोड्रामा) नाटक हैं।

उपेन्द्रनाथ ‘अश्क’ के एकांकियों में मध्यवर्गीय समाज की समस्याएँ हैं। ‘लक्ष्मी का स्वागत’, ‘जोंक’, ‘अधिकार का रक्षक’ और ‘तौलिए’ इनके प्रसिद्ध एकांकी हैं। रंगमंच का सान ‘अश्क’ को हिन्दी एकांकीकारों में सबसे अधिक ख्याति प्राप्त है। उनके एकांकी गठन, प्रभाव तीव्रता और प्रवाह की दृष्टि से सफल हैं। विष्णु ‘प्रभाकर’ आधुनिक एकांकीकारों में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। सामाजिक, राजनीतिक, हास्य-व्यंग्य प्रधान तथा मनोवैज्ञानिक सभी प्रकार के एकांकी विष्णु जी ने लिखे हैं, जिनमें ‘माँ’, ‘भाई’, ‘रहमान का बेटा’, ‘नया कश्मीर’, ‘मीना कहाँ है’ आदि प्रसिद्ध हैं।

जगदीश चन्द्र माथुर सामाजिक समस्याओं को लेकर एकांकी कला को सम्पन्न बनाने वाले कलाकार हैं। एकांकी-कला और रंगमंच का अध्ययन उनका गहरा है। ‘भोर का तारा’, ‘रीढ़ की हड्डी’, ‘उनके प्रसिद्ध एकांकी हैं। लक्ष्मीनारायण मिश्र के एकांकियों में बुद्धिवादिता, भारतीय-संस्कृति तथा समस्याएँ इन सभी का समावेश है। हरिकृष्ण प्रेमी के ‘मन-मन्दिर’ संग्रह के एकांकियों में गाँधीवादी आदर्श है। वृन्दावन लाल वर्मा के एकांकियों में यथार्थ और आदर्श का समन्वय है। इनके अतिरिक्त हिन्दी एकांकी कला की विकसित करने वाले रचनाकार हैं-सदगुरुशरण अवस्थी, गोविन्द बल्लभ पन्त, भगवती चरण वर्मा, लक्ष्मी नारायण लाल, धर्मवीर भारती, मोहन राकेश, प्रभाकर माचवे, नरेश मेहता, चिरंजीत आदि। इस प्रकार विकसित होती हुई आज रेडियो-रूपक, फेन्टेसी, मोनोड्रामा आदि रूपों में आगे बढ़ रही है।

एकांकी की परिभाषा:
कुछ आलोचक एकांकी को नाटक का लघु रूप मानते हैं। लेकिन यह बहुत हद तक सही नहीं है। वास्तव में नाटक और एकांकी दो भिन्न गद्य विधाएँ हैं। जिस नाटक की कथावस्तु केवल एक ही अंक में होती है, वह एकांकी नाटक कहलाता है।

प्रताप-प्रतिज्ञा भाव-विस्तार/पल्लवन

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प्रश्न 1.
“भातप्रेम का निर्मल झरना, विद्वेष की शिला से नहीं रुकता।” इस पंक्ति का पल्लवन करें।
उत्तर:
भातृप्रेम का प्रवाह बड़ा ही पवित्र और स्वच्छ होता है। जब वह हृदय के उच्च शिखर से प्रवाहित होता है, तब उसमें बहुत बड़ा वेग होता है। वह वेग बड़ा ही स्वतन्त्र और अद्भुत रूप से आगे बढ़ने लगता है। वह अपने सामने आने वाले किसी विद्वेष रूपी चट्टान को छिन्न-भिन्न करके अपना रास्ता बना लेता है। चूंकि उसमें इतना ओज, उत्साह और प्रबल भाव भरा होता है, उसे किसी प्रकार हीन और तुच्छ भाव रूपी बाधाएँ सेकने में असमर्थ हो जाती हैं। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि भातृप्रेम का निर्मल झरना, विद्वेष की शिला से कभी नहीं रुकता है।

प्रताप-प्रतिज्ञा भाषा – अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
प्राणों की बाजी लगाना, पीठ दिखाना, आँखें फाड़कर देखना; काँटों का ताज पहनना, नजर करना, दो के चार होना।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 7 प्रताप-प्रतिज्ञा img-1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित सामासिक शब्दों के विग्रह कर समास का नाम लिखिए।
राजमार्ग, राजमुकुट, मुक्तिद्वार, प्रतिहिंसा।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 7 प्रताप-प्रतिज्ञा img-2

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों की सन्धि विच्छेद कीजिए।
आहुति, नराधम, उत्सर्ग, निश्चय, शोकाकुल, स्वाधीनता, रणोन्मत्त, समरांगण।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 7 प्रताप-प्रतिज्ञा img3

प्रश्न 4.
निम्नलिखित विदेशी शब्दों के मानक हिन्दी शब्द लिखिए।
मगरूर, दोजख, यार, कैद, ईनाम, बुजदिल।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 7 प्रताप-प्रतिज्ञा img 4

चालान क्र………………. – तृतीय प्रति
(बैंक हेतु)

माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश

यूको बैंक हबीबगंज, भोपाल – शाखा-मधुकुल परिसर
1. संख्या का मान्यता क्रमांक (कोड नं.) ………………………………………………………………………………………………………………………………
संख्या का नाम, स्थान एवं जिला ……………………………………………………………………………………………………………………………………….
………………………………………………………………………………………………………………………………..
2. छात्र का नाम………………………………………….. परीक्षा का नाम ………………………………………….. वर्ग ……………………………………….
अनुक्रमांक …………………………………………………….केन्द्र क्रमांक ……………………………………………………………………………………………..
……………………………………………………………………………………………………………………………….

परीक्षा का नाम – (संबंधित परीक्षा के नाम पर सही का चिह्न लगाएं)

  1. हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी/हा.सं. व्यावसायिक पाठ्यक्रम नियमित/स्वाध्यायी मुख्य पूरक परीक्षा
  2. हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी/पत्राचार पाठ्यक्रम/मुख्य/पूरक परीक्षा
  3. डिप्लोमा इन एजूकेशन (नियमित/पत्राचार, प्रथम/द्वितीय वर्ग) मुख्य/पूरक परीक्षा
  4. पूर्व प्राथमिक प्रशिक्षण नियमित/स्वाध्यायी मुख्य/पूरक परीक्षा
  5. शारीरिक प्रशिक्षण (नियमित/स्वाध्याय) मुख्य/पूरक परीक्षा
  6. अन्य ……………………………………………………………………………………………………………..

शुल्क का विवरण मद विवरण

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 7 प्रताप-प्रतिज्ञा img4
छात्रों द्वारा फीस भरने हेतु शीर्ष:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 7 प्रताप-प्रतिज्ञा img5
योग –
राशि शब्दों में ………………………………………………………………………………………………………………………………
(जमाकर्ता के हस्ताक्षर)
………………………………………………………………………………………………………..
(बैंक उपयोग हेतु)
बैंक कोड……………………….. – दिनांक ………………..
माध्यमिक शिक्षा मंडल के खाते में राशि रु ……………. जमा की।

प्रताप-प्रतिज्ञा योग्यता विस्तार – हस्ताक्षर/सील।

प्रश्न 1.
‘प्रताप प्रतिज्ञा’ एकांकी को कहानी रूप में लिखिए?
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 2.
अपने आस-पास के उन वीरों के नामों की सूची बनाइए जिन्होंने देशभक्ति हेतु प्राणोत्सर्ग किया है।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

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प्रश्न 3.
दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाले एकांकी/नाटक तथा रेडियो पर प्रसारित रूपक में क्या अन्तर परिलक्षित होता है? दोनों की प्रभावशीलता का विश्लेषण कर अपनी लिखित प्रतिक्रिया व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 4.
चालान फार्म को चार प्रतियों में भरा जाता है यहाँ चालान की तृतीय प्रति (बैंक हेतु) भरने को दी जा रही है। शेष तीन प्रतियाँ किस-किस के लिए होती हैं बैंक जाकर मालूम कीजिए तथा चालान आवेदन-पत्र एकत्रित कीजिए।
चलान फार्म-
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रताप-प्रतिज्ञा परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रताप-प्रतिज्ञा लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘प्रताप-प्रतिज्ञा’ एकांकी में प्रस्तुत पात्रों और गौण पात्रों को बताइए।
उत्तर:
‘प्रताप-प्रतिज्ञा’ एकांकी में प्रस्तुत प्रमुख पात्र हैं-चन्द्रावत, महाराणा प्रताप और शक्ति सिंह। – गौण पात्र हैं-दो मुगल सरदार।

प्रश्न 2.
चन्द्रावत ने महाराणा प्रताप से क्या माँगा?
उत्तर:
चन्द्रावत महाराणा प्रताप से राजमुकुट और तलवार माँगा।

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प्रश्न 3.
महाराणा प्रताप ने क्या कहकर शक्ति सिंह को क्षमा किया?
उत्तर:
जब शक्ति सिंह ने महाराणा प्रताप से क्षमा माँगी तो प्रताप ने यह कह कर उसे क्षमा कर दिया-“क्षमा! क्षमा कैसी भाई! भ्रातृप्रेम का निर्मल झरना विद्वेष की शिला से नहीं रुक सकता। तुम्हारे एक ‘भैया’ सम्बोधन पर लाखों क्षमा निछावर हैं। भाई पुकारो तो शक्ति, पुकारो तो ‘भैया’, एक बार मुझे फिर प्यार से भैया कहकर पुकारो तो।

प्रताप-प्रतिज्ञा दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मेवाड़ का सर्वनाश किस प्रकार निकट आ गया था?
उत्तर:
मेवाड़ का सर्वनाश निकट आ गया था। स्वतन्त्र मेवाड़ का सौभाग्य सूर्य अस्त होने लगा था। ऐसा इसलिए कि मुगल सेना मेवाड़ के चारों ओर छा गई थी। बीच में अकेले बलिदानी वीर महाराणा प्रताप प्राणों की बाजी लगाकर दोनों हाथों से तलवार चला रहे थे। वे घायल हो गए थे। उनके शरीर से खून की धारा निकल रही थी। तलवार चलाते-चलाते वे बुरी तरह से थक गए थे। उनका घोड़ा चेतक मृतप्राय हो गया था। हजारों नरमुण्डों से हल्दीघाटी पाट देने पर भी विजय की आशा व्यर्थ हो गई थी।

प्रश्न 2.
चन्द्रावत ने अपनी मातृभूमि मेवाड़ के प्रति अपना सच्चा और पवित्र प्रेमभाव किस प्रकार व्यक्त किया?
उत्तर:
चन्द्रावत ने अपनी मातृभूमि मेवाड़ के प्रति इस प्रकार अपना सच्चा और पवित्र प्रेमभाव व्यक्त किया-“चित्तौड़! जन्मभूमि! प्रणाम! तुम्हारा यह तुच्छ सेवक आज विदा लेता है। माँ, जीते जी तुम्हें स्वतन्त्र न देख सका, अब मरकर देखने की अभिलाषा है। अपने भग्नावशेषों के हाहाकारमय स्वर से एक बार आशीर्वाद दो, माँ हँसते-हँसते मरने की शक्ति प्रदान करो। जीवन के अन्तिम क्षणों में कर्त्तव्य-पालन करने का अवसर दो। जिस राजमुकुट को इन हाथों ने तुम्हारे हित के लिए, विलासी जगमल के सिर से उतारा था, उसी को ये फिर, तुम्हारे ही हित के लिए वीरवर प्रताप के मस्तक से उतारेंगे। तुम्हारे सम्मान की रक्षा के लिए आशालता को कुचलने से बचाने के लिए-आज महाराणा प्रताप के बदले यह चन्द्रावत प्राणों की आहुति देगा।”

प्रश्न 3.
‘प्रताप-प्रतिज्ञा’ एकांकी के मुख्य भाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘प्रताप-प्रतिज्ञा’ महान एकांकीकार जगन्नाथ प्रसाद ‘मिलिन्द’ की एक आदर्शवादी एकांकी है। इसमें महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर के बीच हल्दी घाटी के भयंकर युद्ध का उल्लेख किया गया है। इसके लिए एकांकीकार ने चन्द्रावत, महाराणा प्रताप और शक्ति सिंह इन तीन प्रमुख पुरुष पात्रों का चयन किया है, तो दो मुगल सैनिकों को गौण पुरुष पात्रों के रूप में लिया है। इन पात्रों के माध्यम से राजनीतिक संघर्ष को मार्मिक रूप में चित्रित करने का सुन्दर प्रयास किया है।

इसमें बाहरी द्वन्द्व को मुख्य स्वर देकर उससे मानसिक विक्षोभ को सामने लाने की पूरी कोशिश की है। हम देखते हैं कि चन्द्रावत का अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर देना देश-भक्ति की प्रेरणा देता है। यह भी हम देखते हैं कि महाराणा प्रताप की अटल देश-भक्ति के लिए मरते दम तक वीरतापूर्ण कदम उठाने से शक्तिसिंह की प्रतिशोध की दुर्भावना भातृत्व प्रेम में बदल कर देश-भक्ति का गान।

प्रताप – प्रतिज्ञा लेखक – परिचय

प्रश्न 1.
श्री जगन्नाथ प्रसाद ‘मिलिन्द’ का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय:
हिन्दी के एकांकीकारों में श्री जगन्नाथ प्रसाद ‘मिलिन्द’ का स्थान प्रमुख है। उनका जन्म सन् 1907 ई. में मध्य-प्रदेश के मुरार ग्वालियर में हुआ था। उनकी आरम्भिक शिक्षा स्थानीय विद्यालयों में हुई। इसके बाद उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के लिए काशी विद्यापीठ में प्रवेश लिया। वहाँ से आपने साहित्य, इतिहास, राजनीति और अर्थशास्त्र का गहरा अध्ययन-मनन किया।

‘मिलिन्द’ जी ने अपने स्वाध्याय से भी अनेक भाषाओं का अध्ययन-मनन किया। उन्होंने अपने स्वाध्याय से जिन भाषाओं का अध्ययन-मनन किया, उनमें हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेजी के अतिरिक्त उर्दू, मराठी, बंगला और गुजराती प्रमुख हैं। इन भाषाओं के अध्ययन-मनन के पश्चात उन्होंने विश्वभारती, शान्ति निकेतन और महिला आश्रम, वर्धा में अध्यापन का कार्य किया।

रचनाएँ:
‘मिलिन्द’ जी की रचनाओं में विविधता है। उनकी रचनाएँ इस प्रकार हैं –

  1. काव्य-संग्रह-‘जीवन-संगीत’, ‘नवयुग के गान’, ‘बलिपथ’ के गीत, ‘भूमि की अनुभूति’ और ‘मुक्तिका’।
  2. निबन्ध संग्रह-‘चिन्तन कण’ और ‘सांस्कृतिक प्रश्न’।
  3. व्यंग्य विनोद कथा-संग्रह-‘बिल्लो का नखछेदन’।
  4. नाट्य-कृतियाँ-‘समर्पण’, ‘प्रताप-प्रतिज्ञा’ और ‘गौतम नन्द’।

महत्त्व:
चूंकि ‘मिलिन्द’ जी बहुमुखी प्रतिमा-सम्पन्न साहित्यकार हैं, इसलिए उनका साहित्यिक योगदान उल्लेखनीय है। उनके साहित्य का प्रमुख स्वर देश-भक्ति और देश-प्रेम है। इस दृष्टि से भी आपका स्थान प्रतिष्ठित साहित्यकारों में से एक है। फलस्वरूप आने वाली साहित्यिक अभिरुचि की पीढ़ी आपसे दिशाबोध प्राप्त करती रहेगी।

प्रताप-प्रतिज्ञा पाठ का सारांश

प्रश्न 1.
श्री जगन्नाथ प्रसाद ‘मिलिन्द’ लिखित एकांकी ‘प्रताप-प्रतिज्ञा’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
श्री जगन्नाथ प्रसाद ‘मिलिन्द’ लिखित एकांकी ‘प्रताप-प्रतिज्ञा’ महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर के बीच हल्दीघाटी युद्ध पर आधारित है। इसमें तीन प्रमुख पात्रों चन्द्रावत, प्रताप और शक्ति सिंह एवं दो गौण पुरुष पात्रों (दो मुगल सरदारों) के माध्यम से राजनीतिक संघर्ष को चित्रित किया गया है। चन्द्रावत प्रताप सिंह की वीरता का उल्लेख तो कर रहा है, लेकिन उसे मेवाड़ का सौभाग्य सूर्य अस्त होता हुआ दिखाई दे रहा है। उसी समय एक सभासद आकर महाराणा प्रताप के घायल होने का समाचार सुनाता है। चन्द्रावत उसे राजा के साथ मर-मिटने का आदेश देकर चित्तौड़ के प्रति अपनी देश-भक्ति की भावना को प्रकट करता है।

वह उससे आशीर्वाद माँगता है कि वह उसे हँसते-हँसते उसकी सेवा में मर-मिटने की शक्ति प्रदान करे। यह भी कि वह उसे ऐसा साहस दे कि वह महाराणा प्रताप के बदले अपने प्राणों की आहुति दे सके। उसी समय प्रताप आकर अपने प्राणों के बलिदान करने की घोषणा करता है। चन्द्रावत उसे समझाता है कि उसके प्राण इतने सस्ते नहीं हैं। उनमें संजीवनी शक्ति है। वह प्राणों का बलिदान न करें। उसके स्थान पर वह और सरदारों के साथ मर-मिटेगा। प्रताप उसे समझाता है कि वह उसे ऐसा नहीं करने देगा। वह युद्ध में पीठ दिखाकर कलंक का टीका नहीं लगने देगा। चन्द्रावत अपनी बात को दोहराता है कि वह उससे हठ न करें। उसके हठ से अखण्ड मेवाड़ पराधीन हो जाएगा।

लेकिन प्रताप उसकी एक नहीं सुनता है। वह वहाँ से बड़ी तेजी से निकल जाता है। चन्द्रावत ईश्वर से प्रार्थना करता है कि वह उसको रक्षा करे। शक्ति सिंह आकर घोर युद्ध का उल्लेख करता है कि किस प्रकार से मुगलों ने चन्द्रावत को महाराणा समझकर चारों ओर से घेर लिया है। फिर उसे मार डाला है। उसे स्वयं पर अफसोस है कि वह मेवाड़ के काम नहीं आया। उसी समय दो मुगलों का प्रवेश होता है। दोनों परस्पर बातें करते हैं। फिर प्रताप को मारकर अपने शाहजादा साहब से इनाम लेने की बात करते हुए वहाँ से प्रस्थान करते हैं। उसके बाद शक्ति सिंह आकर स्वयं से कुछ कर गुजरने की बात कहता है।

पट परिवर्तन होता है। प्रताप अकेले शोकाकुल बैठे हैं। चेतक के चले जाने पर अफसोस प्रकट करते हैं। विकल होकर आँखें मूंद लेते हैं। इसके बाद दोनों मुगलों का प्रवेश होता है। दोनों परस्पर बातें करते हैं। दोनों पर प्रताप अपने वार की नाकामी पर अफसोस प्रकट करते हैं। उसी समय शक्ति सिंह आकर उन दोनों का काम तमाम कर देता है। फिर वह प्रताप को ‘महाराणा प्रताप सिंह’ शब्द से सम्मानपूर्वक पुकारता है। प्रताप आँखें खोलते हैं। शक्ति सिंह को देखकर चकित होते हैं। उससे वह पूछते हैं कि क्या वह बदला लेना ही चाहता है, तो ठीक है। आओ, और इस अन्त समय प्यारी मेवाड़ी कटारी भोंक दो। बड़ी शान्ति से मरूँगा, जल्दी करो। देर हो रही है। इसे सुनकर शक्ति सिंह कहता है-बज्रपात है भैया! कौन कहता है प्रताप कायर है। प्रताप तो वीरों का आदर्श है। भारत का अभिमान है। राजस्थान की शान है।

इसे सुनकर प्रताप चकित होता है। शक्ति सिंह अपने दुर्भाग्य पर अफसोस करता है कि वह मेवाड़ को भूलकर भारतीयता को खो बैठा था। उसे अब उसके अपराधों का फल अवश्य मिलना चाहिए। इससे ही उसकी आत्मा को शान्ति मिलेगी। वह उसके लिए देवता है। वह प्रताप को भैया कहते हुए पुनः कहता है-“भैया! क्या तुम मुझे क्षमा न करोगे? मेवाड़ को फिर एक बार बड़े प्यार से माँ कहने का अधिकार न दोगे?” इसे सुनकर प्रताप का भातृप्रेम का झरना फूट पड़ता है। वह कहता है कि उसके ‘भैया’ सम्बोधन पर लाखों क्षमा निछावर हैं। एक बार मुझे फिर प्यार से भैया कहकर पुकारो तो। शक्ति उसके पैरों पर ‘भैया, भैया मेरे’ कहकर गिर पड़ता है। बरसों बाद दोनों गले मिलते हैं।

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प्रताप-प्रतिज्ञा संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1.
आ! काँटों के ताज! संकट के स्नेही! मेवाड़ के राजमुकुट ! आ! तुझे आज एक तुच्छ सैनिक धारण कर रहा है। इसलिए नहीं कि तू वैभव का राजमार्ग है बल्कि इसलिए कि आज तू देश पर मर मिटने वालों का मुक्तिद्वार है। आ! मेरी साधना के अन्तिम साधन! इस अवनत मस्तक को माँ के लिए कट-मरने का गौरव प्रदान कर।

शब्दार्थ:

  • तुच्छ – छोटा।
  • वैभव – सम्पत्ति, धन।
  • राजमार्ग – सड़क।
  • अवनत – झुकाव हुआ।
  • गौरव – मर्यादा, महत्त्व, प्रतिष्ठा।

प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘हिन्दी समान्य भाग-1’ में संकलित तथा जगन्नाथ प्रसाद ‘मिलिन्द’ द्वारा लिखित एकांकी ‘प्रताप-प्रतिज्ञा’ शीर्षक से है। इसमें लेखक ने चन्द्रावत् के द्वारा राजमुकुट हाथ में लेते हुए कथन पर प्रकाश डालना चाहा है।

व्याख्या:
लेखक का कहना है कि जब प्रताप कुर्ती से तलवार मुकुट रखकर चला जाता है, तब उसे चन्द्रावत बड़े प्रेम और आदर के साथ हाथ में ले लेता है। फिर वह कहता है–हे राजमुकुट! वैसे तो तुम काँटों के ताज हो, फिर भी संकट के समय एक सच्चे प्रेमी की तरह साथ निभाते हो। वास्तव में तुम मेवाड़ के राजमुकुट हो। इसलिए तुम्हारा महत्त्व असाधारण है। तुम्हें धारण करने की योग्यता मुझ जैसे तुच्छ सैनिक में नहीं है, फिर भी मैं तुम्हें धारण कर रहा हूँ। मैं तुम्हें इसलिए नहीं धारण कर रहा हूँ कि तुम वैभव का राजमार्ग हैं।

मैं तो तुम्हें इसलिए धारण कर रहा हूँ कि तुम्हीं देश की आन-बान पर अपने प्राणों को न्यौछावर कर देने वालों के लिए मुक्तिदाता स्वरूप हो। इसलिए अब तुम मुझे अपना लो। मेरी युद्ध-साधना के तुम्ही एकमात्र आधार हो। तुम्ही एकमात्रं साधन हो। अब तुम मेरे इस झुके हुए मस्तक को मेरी मातृभूमि मेवाड़ की रक्षा के लिए मर-मिटने का महत्त्व प्रदान कर दो। तुमसे मेरी यही प्रार्थना है और यही उम्मीद है।

विशेष:

  1. मेवाड़ के राजमुकुट का असाधारण महत्त्व बतलाया गया है।
  2. मातृभूमि की महिमा को अधिक सम्मान दिया गया है।
  3. वीर रस की प्रभावशाली धारा प्रवाहित हुई है।
  4. भाषा-शैली में ओज और प्रभाव है।
  5. वर्णनात्मक शैली है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. प्रस्तुत गद्यांश में किसका कथन किसके प्रति है?
  2. चन्द्रावत के मनोभाव किस प्रकार के हैं?

उत्तर:

  1. प्रस्तुत गद्यांश में मेवाड़ के वीर सैनिक चन्द्रावत का मेवाड़ के राजमुकुट के प्रति है।
  2. प्रस्तुत गद्यांश में चन्द्रावत के मनोभाव बड़े ही आकर्षक और असाधारण हैं। उसके मनोभाव निरभिमानी, उदात्त, शिष्ट, विनम्र, आत्मीय और पवित्र हैं। इसलिए वे प्रेरक, हृदयस्पर्शी और भाववर्द्धक हैं।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. प्रस्तुत गद्यांश में मेवाड़ के राजमुकुट की कौन-कौन-सी विशेषताएँ बतलायी गई हैं।
  2. प्रस्तुत गद्यांश से क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर:

1. प्रस्तुत गद्यांश में मेवाड़ के राजमुकुट की कई आकर्षक विशेषताएँ बतलायी, गई हैं –

  • काँटों का ताज
  • देश पर मर-मिटने वालों का मुक्तिद्वार, और
  • साधना का अन्तिम साधन।

2. प्रस्तुत गद्यांश से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। देश की आजादी के खतरे में पड़ने पर हमें उसकी रक्षा के लिए बिना किसी संकोच के अपने तन, मन और धन को तुरन्त न्यौछावर कर देना चाहिए।

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प्रश्न 2.
तुम्हारी अकाल मृत्यु देखने के पहले ही ये आँखें क्यों न सदा को मुँद गईं। मेरे प्यारे सुख-दुःख के साथी, तुम्हें छोड़कर मेवाड़ में पैर रखने को जी नहीं करता। शरीर का रोम-रोम घायल हो गया है, प्राण कण्ठ में आ रहे हैं, एक कदम भी चलना भर है, फिर भी इच्छा होती है कि तुम्हारे शव के पास दौड़ता हुआ लौट आऊँ, तुमसे लिपटकर जी भरकर रो लूँ और वहीं चट्टानों से सर टकराकर प्राण दे दूँ। अपने प्राण देकर प्रताप के प्राण बचाने वाले मूक प्राणी! तुम अपना कर्त्तव्य पूरा कर गए, पर मैं संसार से मुँह दिखाने योग्य न रहा! हाय, मेरे पापी प्राणों से तुमने किस दुर्दिन में प्रेम करना सीखा था। चेतक, चेतक, प्यारे चेतक! (विकल हाकर आँखें मूंद लेते

शब्दार्थ:

  • अकाल मृत्यु – असमय मृत्यु।
  • मुँद गईं – बन्द हो गईं।
  • जी – मन।
  • रोम-रोम – प्रत्येक अंग।
  • कण्ठ में आना – निकल जाना।
  • दूभर – कठिन।
  • मूक – बेजबान।
  • दुर्दिन – बुरे दिन।

प्रसंग:
पूर्ववत् । इसमें लेखक ने राणा प्रताप के द्वारा अपने प्राणप्रिय चेतक के मर-मिटने पर विलाप किए जाने का उल्लेख किया है।

व्याख्या:
चेतक के मर-मिटने पर राणा प्रताप अपने को असहाय और अकेला समझकर विलाप कर रहा है। वह चेतक को सम्बोधित करते हुए कह रहा है कि तुम्हारे असमय चले जाने पर मेरी आँखें पहले ही क्यों नहीं बन्द हो गईं। अगर वे पहले ही बन्द हो गई होती तो मैं इतना दुःखी और विकल नहीं होता। इसलिए हे मेरे प्राण प्यारे चेतक! तुम्हीं तो मेरे हर दुःख-सुख के साथी और सहभागी थे। अब तुम्हारे सिवा मेरा और कोई नहीं है। इसलिए अब मैं मेवाड़ में नहीं जाना चाहता हूँ। तुम्हारे जाने के बाद मेरा पूरा शरीर थककर चूर हो गया है।

वह किसी प्रकार से कोई भी दुःख सहने योग्य नहीं रह गया है। लगता है कि अब मैं और नहीं जी पाऊँगा। अब तो मैं चलने-फिरने में भी असमर्थ हूँ। ऐसा होने के बावजूद अभी मेरे अन्दर तुम्हारे शव को देखने की ललक है। इसके लिए भीतर-ही-भीतर मेरी इच्छा उमड़ रही है। मेरा जी चाहता है कि तुम्हारे शव से लिपटकर जी भर आँसू बहाऊँ। रो-रोकर अपने पाश्चात्ताप को प्रकट करूँ। यही नहीं, यह भी जी करता है कि अपने सिर को किसी चट्टान से फोड़ डालूँ ताकि कुछ समय तक तो शान्ति मिल सके। प्रताप का पुनः कहना है-हे चेतक! तुमने प्राणों की बलि देकर अपने कर्तव्य को पूरा कर लिया है, लेकिन मैं तो इस संसार में किसी के सामने अपना मुँह दिखलाने का साहस नहीं कर पा रहा हूँ।

यह इसलिए कि तुमने अपनी वीरता दिखाते हुए सदैव याद करने योग्य मृत्यु को प्राप्त कर लिया है। दूसरी ओर मैं बुजदिल बनकर अपने किए पर लज्जित हूँ। इसलिए अपने को छिपाकर रखना ही एकमात्र विकल्प समझ रहा हूँ। वास्तव में मैं पापी और अधम कोटि का हूँ। फिर भी मुझे यह नहीं समझ में आ रहा है कि तुमने मुझे क्यों महत्त्व दिया। मुझमें तुझे कौन-सी अच्छाई दिखाई दी थी। यह मैं सच्चे मन से कह रहा हूँ। इसे तुम जहाँ भी हो, मेरे प्राण चेतक सुन लो।

विशेष:

  1. प्रताप का अपने प्राण प्यारे चेतक के प्रति अनन्य भाव व्यक्त हुए हैं।
  2. प्रताप का आत्मकथन में सच्चाई और विश्वसनीयता है।
  3. भाव हृदयस्पर्शी है।
  4. भाषा सरल है।
  5. काव्य रस का संचार है।
  6. शैली भावात्मक है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. प्रस्तुत गद्यांश में किसका कथन किसके प्रति है और क्यों?
  2. चेतक की विशेषताओं को लिखिए।
  3. प्रस्तुत गद्यांश का प्रमुख भाव क्या है?

उत्तर:

1. प्रस्तुत गद्यांश में राणा प्रताप का कथन चेतक के प्रति है। यह इसलिए कि चेतक उनका प्राणप्रिय घोड़ा था। उसके समाप्त होने पर राणा प्रताप अपनी व्यथा को प्रकट किए बिना नहीं रह सके थे।

2. चेतक की कई विशेषताएँ थीं, जैसे

  • सुख-दुख का साथी
  • महान वीर
  • देशभक्त और स्वामिभक्त
  • कर्त्तव्यनिष्ठ, और
  • महान प्रेमी व आत्मीय।

3. प्रस्तुत गद्यांश का मुख्य भाव है-राणा प्रताप के प्राणप्रिय घोड़ा चेतक की अच्छाइयों पर प्रकाश डालना।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. मेवाड़ में किसका क्या नहीं करने का जी करता?
  2. चेतक के चले जाने पर राणा प्रताप की दशा कैसी हो गई है?
  3. राणा प्रताप की क्या इच्छा होती है?

उत्तर:

  1. मेवाड़ में राणा प्रताप का पैर रखने को जी नहीं करता।
  2. चेतक के चले जाने पर राणा प्रताप की दशा बड़ी दयनीय और निराशाजनक हो गई है। उनका रोम-रोम घायल हो गया है। उनके प्राण कण्ठ में आ रहे हैं। उन्हें एक कदम चलना कठिन हो गया है।
  3. राणा प्रताप की इच्छा होती है कि वह अपने प्राणप्रिय घोड़े चेतक के शव के पास दौड़ते हुए लौट आवें। उससे लिपटकर जी भरकर आँसू बहाएं। वहीं पर किसी चट्टान से अपने सिर को टक्कर मारकर मर जाएँ।

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प्रश्न 3.
आँखें खोलकर मेवाड़ी वीरों का बलिदान देखने से इस युद्ध ने कान मलकर मुझे बता दिया कि मेरा अहंकार व्यर्थ है। मुझसे कई गुनी वीरता, कई गुनी देशभक्ति और कई गुना त्याग मेवाड़ के एक-एक सैनिक के हृदय में हिलोरें ले रहा है। और आप! आप तो देव हैं भैया। मेवाड़ के सौभाग्य से यहाँ जन्म लेने आए हैं। आपकी यह क्षत-विक्षत देह और प्राणों की ममता छोड़कर भीषण संग्राम। आश्चर्य होता है भैया, और श्रद्धा उमड़ पड़ती थी। इच्छा होती थी कि तुम्हारे चरणों पर सिर रखकर समरांगण में सदा के लिए वीरों की नींद सोया जाए। भैया, क्या तुम मुझे क्षमा न करोगे? मेवाड़ को फिर एक बार बड़े प्यार से माँ कहने का अधिकार न दोगे? भैया, मुझे क्षमा करो।

शब्दार्थ:

  • बलिदान – त्याग।
  • कान मलकर बताना – बिल्कुल साफ-साफ कहना।
  • अहंकार – घमण्ड।
  • व्यर्थ – बेकार।
  • देव – देवता।
  • क्षत – विक्षत – घायल।
  • देह – शरीर।
  • ममता – लगाव।
  • भीषण – भयंकर।
  • संग्राम – युद्ध।
  • समरांगण – युद्धभूमि।

प्रसंग:
पूर्ववत्। प्रस्तुत गद्यांश में महाराणा प्रताप के शक्ति सिंह के आत्मपश्चात्ताप का उल्लेख किया गया है। शक्ति सिंह घायल राणा प्रताप के सामने आत्मपश्चात्ताप प्रकट करते हुए कह रहा है कि –

व्याख्या:
इस हल्दीघाटी के युद्ध में मुझे यह बड़ा ही स्पष्ट ज्ञान हो गया है कि मेरा घमण्ड निराधार है। मैं कुछ भी नहीं हूँ। मुझसे मेवाड़ का एक-एक सैनिक बहुत बड़ा वीर, देश-भक्त और त्यागी है। मुझमें तो कुछ भी वीरता, देश-भक्ति और प्राणों को न्यौछावर करने की भावना नहीं है, जबकि मेवाड़ के एक-एक सैनिक का हृदय इस प्रकार के पवित्र और महान भावों से भरा हुआ है।

शक्ति सिंह ने राणा प्रताप के प्रति अपने आत्मीय, पवित्र और उच्च भावों को रखते हुए कहा-भैया! आप तो हमारे लिए देवता समान हैं। आपका मेवाड़ में जन्म लेना मेवाड़ के लिए बड़े ही सौभाग्य और गौरव की बात है। जब-जब मैं आपको घायल होते हुए घनघोर युद्ध में अपने प्राणों की तनिक परवाह किए बिना देखता था, तब-तब मुझे घोर आश्चर्य होता। उससे मुझे अपार श्रद्धा की भावना आपके प्रति बढ़ जाती थी। फिर मेरी यही हार्दिक इच्छा होती थी कि काश! आपके चरणों पर अपने सिर को रखकर इस युद्ध-भूमि में एक सच्चे वीर की तरह अपने प्राणों का बलिदान कर दूं। इसलिए अब मुझे एक ही ललक और जिज्ञासा है कि क्या आप मुझे अपनी जन्मभूमि मेवाड़ को. माँ कह लेने को एक बार मौका नहीं देंगे। इसी प्रकार क्या आप मुझे अपना छोटा समझकर मेरी गलतियों को क्षमा नहीं कर देंगे।

विशेष:

  1. शक्ति सिंह का आत्मपश्चात्ताप प्रेरक रूप में है।
  2. देश-भक्ति की प्रबलधारा है।
  3. वीर रस का सुन्दर प्रवाह है।
  4. शैली सुबोध है।
  5. वाक्य-गठन भाववर्द्धक रूप में है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. प्रस्तुत गद्यांश में किसका कथन किसके प्रति ही?
  2. प्रस्तुत गद्यांश के मुख्य भाव स्पष्ट कीजिए।
  3. शक्ति के कथन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर:

  1. प्रस्तुत गद्यांश में शक्ति सिंह का कथन राणा प्रताप के प्रति है।
  2. प्रस्तुत गद्यांश का मुख्य भाव है-शक्ति सिंह का राणा प्रताप के प्रति भातृत्व प्रेम को प्रकट करना।
  3. शक्ति सिंह के कथन का मुख्य उद्देश्य यही है कि राणा प्रताप उसे अपने भाई के रूप में पहले की तरह अपनाकर उसकी गलतियों को क्षमा कर दें।

MP Board Class 11th Hindi Solutions

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 Gravitation

MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 Gravitation

Gravitation Intext Questions

Gravitation Intext Questions Page No. 134

Question 1.
State the universal law of gravitation.
Answer:
Suppose there are two objects having mass M and m respectively.
The distance between their centres is equal to d.
The force of attraction is F.
Thus, F ∝ M . m … (i)
and, F ∝ 1/d2 … (ii)
Joining equation (i) and (ii)
we get F ∝ M . m/d2
⇒ F = G . M . m/d2 … (iii)
where, G is the proportionality constant and called Universal Gravitation Constant.
The expression (iii) is called expression for Universal Law of Gravitation.
The universal law of gravitation is represented as:
\(F=\frac{G m_{1} m_{2}}{r^{2}}\)
Where, G is the universal gravitation constant given by:
G = 6.67 × 10-11 Nm2 kg-2.

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Question 2.
Write the formula to find the magnitude of the gravitational force between the Earth and an object on the surface of the earth.
Answer:
Let Me be the mass of the Earth and m be the mass of an object on its surface.
And say R is the radius of the Earth,
then according to the universal law of gravitation,
the gravitational force (F) acting between the Earth and the object is given by the relation:
\(F=\frac{G m_{1} m_{2}}{r^{2}}\)
F = GMem/R

Gravitation Intext Questions Page No. 136

Question 1.
What do you mean by free fall?
Answer:
Its a phenomenon of gravity. When an object falls from any height under the influence of gravitational force only, it is said to have a free fall. In the case of free fall, no change in direction takes place but the magnitude of velocity changes because of acceleration.

MP Board Solutions

Question 2.
What do you mean by acceleration due to gravity?
Answer:
Change in velocity due to variation in height produces acceleration which is due to gravity in the object and is known as acceleration due to gravity denoted by letter g. The value of acceleration due to gravity is g = 9.8 m/s2.

Gravitation Intext Questions Page No. 138

Question 1.
What are the differences between the mass of an object and its weight?
Answer:

Mass Weight
Mass is a measurement of the amount of matter something has. Weight is the measurement of the pull of gravity on an object.
Mass is a constant quantity. Weight is not a constant quantity. It is different at different places.
It is a scalar quantity. It is a vector quantity.
Its SI unit is kilogram (kg). Its SI unit is the same as the SI unit of force, i.e., Newton (N).

Question 2.
Why is the weight of an object on the moon \(\frac { 1 }{ 6 }\)th its weight on the earth?
Answer:
The mass of moon is \(\frac { 1 }{ 100 }\) times and its radius \(\frac { 1 }{ 4 }\) times that of earth. As a result, the gravitational attraction on the moon is about one sixth when compared to earth. Hence, the weight of an object on the moon is \(\frac { 1 }{ 6 }\)th of its weight on the earth.

Gravitation Intext Questions Page No. 141

Question 1.
Why is it difficult to hold a school bag having a strap made of a thin and strong string?
Answer:
It is difficult to hold a school bag having a thin strap because the pressure on the shoulders is quite large. This is because the pressure is inversely proportional to the surface area on which the force acts. The smaller is the surface area; the larger will be the pressure on the surface. In the case of a thin strap, the contact surface area is very small. Hence, the pressure exerted on the shoulder is very large.

Question 2.
What do you mean by buoyancy?
Answer:
The upward force exerted by a liquid on an object that is immersed in it is known as buoyancy.

MP Board Solutions

Question 3.
Why does an object float or sink when placed on the surface of water?
Answer:

  1. An object sinks in water if its density is greater than that of water.
  2. An object floats in water if its density is less than that of water.

Gravitation Intext Questions Page No. 142

Question 1.
You find your mass to be 42 kg on a weighing machine. Is your mass more or less than 42 kg?
Answer:
When we weigh our body, an upward force acts on it. This upward force is the buoyant force. As a result, the body gets pushed slightly upwards, causing the weighing machine to show a reading less than the actual value.

Question 2.
You have a bag of cotton and an iron bar, each indicating a mass of 100 kg when measured on a weighing machine. In reality, one is heavier than other. Can you say which one is heavier and why?
Answer:
The cotton bag is heavier than the iron bar. The cotton bag experiences larger up – thrust of air than the iron bar. So, the weighing machine indicates a smaller mass for cotton bag than its actual mass.

Gravitation NCERT Textbook Exercises

Question 1.
How does the force of gravitation between two objects change when the distance between them is reduced to half?
Answer:
According to Universal Law of gravitation, the gravitational force of attraction between any two objects of mass M and m is proportional to the product of their masses and inversely proportional to the square of distance r between them. So, force F is given by
F = G\(\frac { M\times m }{ { r }^{ 2 } } \)
Now, when the distance ‘r’ is reduced to half then force between two masses becomes
F’ = G\(\frac { M\times m }{ { (\frac { r }{ 2 } ) }^{ 2 } } \)
Or
F’ = 4F
Hence, if the distance is reduced to half, then the gravitational force becomes four times larger than the previous value.

Question 2.
Gravitational force acts on all objects in proportion to their masses. Why then, a heavy object does not fall faster than a light object?
Answer:
All objects fall on ground with constant acceleration, called acceleration due to gravity (in the absence of air resistances). It is constant and does not depend upon the mass of an object. Hence, heavy objects do not fall faster than light objects.

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Question 3.
What is the magnitude of the gravitational force between the earth and a 1 kg object on its surface? (Mass of the earth is 6 × 1024 kg and radius of the earth is 6.4 × 106 m).
Answer:
Given that,
Mass of the body, m = 1 kg
Mass of the Earth, M = 6 × 1024 kg
Radius of the Earth, R = 6.4 × 106 m
Now, magnitude of the gravitational force (F) between the Earth and the body can be given as,
F = G\(\frac { M\times m }{ { r }^{ 2 } } \) = \(\frac { 6.67 × 10 × 6 × 10 × 1 }{ (6.4 × 6.4) }\)
= \(\frac { 6.67 × 6 × 10 }{ (6.4 × 6.4) }\) = 9.8N (approx.)

Question 4.
The Earth and the Moon are attracted to each other by gravitational force. Does the Earth attract the Moon with a force that is greater or smaller or the same as the force with which the Moon attracts the Earth? Why?
Answer:
According to the Universal Law of Gravitation, two objects attract each other with equal force, but in opposite directions. The Earth attracts the Moon with an equal force with which the Moon attracts the Earth.

Question 5.
If the Moon attracts the Earth, why does the Earth not move towards the Moon?
Answer:
The Earth and the Moon experience equal gravitational forces from each other. However, the mass of the Earth is much larger than the mass of the Moon. Hence, it accelerates at a rate lesser than the acceleration rate of the Moon towards the Earth. For this reason, the Earth does not move towards the Moon.

Question 6.
What happens to the force between two objects, if
(i) the mass of one object is doubled?
(ii) the distance between the objects is doubled and tripled?
(iii) the masses of both objects are doubled?
Answer:
(i) From Universal Law of Gravitation, force exerted on an object of mass at by Earth is given by
F = G\(\frac { M\times m }{ { R }^{ 2 } } \) ….1
When nws of the object say ne is doubled than
F’ = G\(\frac { M\times 2m }{ { R }^{ 2 } } \)  = 2F
So as the mass of any one of the object is doubled the force is also doubled,

(ii) The force F is inversely proportional to the distance between the objects. So if the distance between two objects es doubled, then the gravitational force of attraction between them is reduced to one fourth of its original value, Similarly, if the distance between two objects is tripled. then the gravitational force of attraction becomes one ninth of its original value.

(iii) Again from Universal Law of Attraction, from equation 1, force ‘F’ is directly proportional to the product of both the masses, So, if both the masses are doubled then, the gravitational force of attraction become four times the original value.

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Question 7.
What in the importance of Universal Law of Gravitation?
Answer:
Universal Law of Gravitation is important because it tells us about:

  1. the force that is responsible for binding us to Earth.
  2. the motion of Moon around the Earth.
  3. the motion of planets around the Sun.
  4. the tides formed by rising and falling of water level in the ocean are due to the gravitational force exerted by both Sun and Moon on the Earth.

Question 8.
What in the acceleration of free fall?
Answer:
Acceleration of free tall is the acceleration produced when a body falls under the influence of the force of gravitation of the Earth alone. It is denoted by ‘g’ and its value on the surface of the Earth is 9.8 ms-2.

Question 9.
What do we call the gravitational force between the Earth and an object?
Answer:
Gravitational force between the Earth and an object is known as the weight of the object.

Question 10.
Amit buys few grams of gold at the poles as per the instruction of one of his friends. He hands over the same when he meets him at the equator. Will the friend agree with the weight of gold bought? If not, why? [Hint: The value of g is greater at the poles than at the equator}.
Answer:
Weight of a body on the Earth is given by:
W = mg
Where,
m = Mass of the body
g = Acceleration due to gravity
The value of g is greater at poles than at the equator.
Therefore, gold at the equator weighs less than at the poles.
Hence, Amit’s friend will not agree with the weight of the gold bought.

Question 11.
Why does a sheet of paper fell slower than one that is crumpled into a ball?
Answer:
When a sheet of paper is crumpled into a ball, then its density increases. Hence, resistance to its motion through the air decreases and it falls faster than the sheet of paper.

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Question 12.
Gravitational force on the surface of the Moon is only \(\frac { 1 }{ 6 }\) as strong as gravitational force on the Earth. What is the weight in newtons of a 10 kg object on the moon and on the Earth?
Answer:
Weight of an object on the Moon = \(\frac { 1 }{ 6 }\) × Weight of an object on the Earth.
Also,
Weight = Mass × Acceleration
Acceleration due to gravity, g = 9.8 m/s2
Therefore, weight of a 10 kg object on the earth = 10 × 9.8 = 98 N
And, weight of the same object on the Moon = 1.6 × 9.8 = 16.3 N.

Question 13.
A ball is thrown vertically upwards with a velocity of 49 m/s. Calculate
(i) the maximum height to which it rises.
(ii) the total time it takes to return to the surface of the earth.
Answer:
According to the equation of motion under gravity:
-u2 = 2 gs
Where,
u = Initial velocity of the ball
v = Final velocity of the ball
s = Height achieved by the ball
g = Acceleration due to gravity
At maximum height, final velocity of the ball is zero, i.e., v = 0, u = 49 m/s.
During upward motion, g = – 9.8 ms-2.
(i) Let ‘h’ be the maximum height attained by the ball.
Hence,
0 – 492 = 2 × 9.8 × h
h = \(\frac { 49 × 49 }{ 2 × 9.8}\) = 122.5 m

(ii) Let ‘t’ be the time taken by the ball to reach the height 122.5 m, then according to the equation of motion:
v = u + gt
We get,
= 49 + t × (- 9.8)
9.8 t = 49
t = \(\frac { 49 }{ 9.8}\) = 5 s
But,
Time of ascent = Time of descent
Therefore, total time taken by the ball to return = 5 + 5 = 10 s

Question 14.
A stone is released from the top of a tower of height 19.6 m. Calculate its final velocity just before touching the ground.
Answer:
According to the equation of motion under gravity: v2 – u2 = 2 gs
Where,
u = Initial velocity of the stone = 0
v = Final velocity of the stone
s = Height of the stone = 19.6 m
g = Acceleration due to gravity = 9.8 ms-2
∴ v2 – 02 = 2 × 9.8 × 19.6
v2 = 2 × 9.8 × 19.6 = (19.6)2
v = 19.6 ms-1
Hence, the velocity of the stone just before touching the ground is 19.6 m s-1.

Question 15.
A stone is thrown vertically upward with an initial velocity of 40 m/s. Taking g = 10 m/s2, find the maximum height reached by the stone. What is the net displacement and the total distance covered by the stone?
Answer:
According to the equation of motion under gravity:
v2 – u2 = 2 gs
Where,
u = Initial velocity of the stone = 40 m/s
v = Final velocity of the stone = 0
s = Height of the stone
g = Acceleration due to gravity = -10 ms-2
Let h be the maximum height attained by the stone.
Therefore,
0 – (40)2 = 2 × h × (-10)
h = \(\frac { 40 × 40 }{ 20 }\) = 80 m
Therefore, total distance covered by the stone during its upward and downward journey = 80 + 80 = 160 m
Net displacement of the stone during its upward and downward journey
= 80 + (-80) = 0.

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Question 16.
Calculate the force of gravitation between the earth and the Sun, given that the mass of the earth = 6 × 1024 kg and of the Sun = 2 × 1030 kg. The average distance between the two is 1.5 × 1011 m.
Answer:
According to question,
MSun = Mass of the Sun = 2 × 1030 kg
MEarth = Mass of the Earth = 6 × 1024 kg
R = Average distance between the Earth and the Sun = 1.5 × 1011 m.
From Universal Law of Gravitation,
F = G\(\frac { M\times m }{ { R }^{ 2 } } \)
Therefore, putting all the values given in question in above equation we get
F = 6.67 × 10-11 \(\frac { (6\times { 10 }^{ 24 })\times (2\times { 10 }^{ 30 }) }{ { (1.5\times { 10 }^{ 11 }) }^{ 2 } } \) = 3.56 × 1022 N.

Question 17.
A stone is allowed to fall from the top of a tower 100 m high and at the same time another stone is projected vertically upwards from the ground with a velocity of 25 m/s. Calculate when and where the two stones will meet.
Answer:
Let be the point at which two stones meet and let ‘h’ be their height from the ground. It is given in the question that height of the tower is H = 100 m
Now, first consider the stone which falls from the top of the tower.
So, distance covered by this stone at time ‘t’ can be calculated using equation of motion:
x – x0 = u0t + \(\frac { 1 }{ 2 }\)gt2
Since, initial velocity u = 0,
so we get
100 =  x \(\frac { 1 }{ 2 }\)gt2 ………… (1)
The distance covered by the same stone that is thrown in upward direction from ground is
x = 25t –\(\frac { 1 }{ 2 }\)gt2
In this case intitial velocity is 25 m/s.
So, x = 25t – \(\frac { 1 }{ 2 }\)gt………… (2)
Adding equations (1) and (2) we get,
100=25t
or,
t = 4s
Putting value in equation (2).
x = 25 × 4 – \(\frac { 1 }{ 2 }\) × 9.8 × (4)2
= 100 – 78.4
= 21.6 m.

Question 18.
A ball thrown up vertically returns to the thrower after 6 s. Find:
(a) the velocity with which it was thrown up,
(b) the maximum height it reaches, and
(c) its position after 4 s.
Answer:
(a) Time of ascent is equal to the time of descent. The ball takes a total of 6 s for its upward and downward journey. Hence, it has taken 3 s to attain the maximum height. Final velocity of the ball at the maximum height, v = 0 Acceleration due to gravity, g = -9.8 m s-2
Equation of motion, v = u + gt
will give,
0 = u + (-9.8 × 3)
u = 9.8 × 3
= 29.4 ms-1
Hence, the ball was thrown upwards with a velocity of 29.4 ms-1.

(b) Let the maximum height attained by the ball be ‘h’
Initial velocity during the upward journey, u = 29.4 ms-1
Final velocity, v = 0
Acceleration due to gravity, g = -9.8 ms-2
From the equation of motion, s = ut + \(\frac { 1 }{ 2 }\) at2
h = 29.4 × 3 + \(\frac { 1 }{ 2 }\) × – 9.8 × (3)2 = 44.1 m.

(c) Ball attains the maximum height after 3 s.
After attaining this height, it will start falling downwards.
In this case, Initial velocity, u = 0
Position of the ball after 4 s of the throw is given by the distance travelled by it during its downward journey in
4 s – 3 s = 1 s.
Equation of motion, s = ut + \(\frac { 1 }{ 2 }\) g2
will give,
s = 0 x t + \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 9.8 x 12 = 4.9 m
Total height  = 44.1 m.
This means that the ball is 39.2 m (44.1 m – 4.9 m) above the ground after 4 seconds.

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Question 19.
In what direction does the buoyant force on an object immersed in a liquid act?
Answer:
An object immersed in a liquid experiences buoyant force in the upward direction.

Question 20.
Why does a block of plastic released under water come up to the surface of water?
Answer:
For an object immersed in water two forces act on it:

  1. Gravitational force which tends to pull object in downward direction
  2. Buoyant force that pushes the object in upward direction.

Here, in this case buoyant force is greater than the gravitational pull on the plastic block. This is the reason the plastic block comes up to the surface of the water as soon as it is released under water.

Question 21.
The volume of 50 g of a substance is 20 cm3. If the density of water is 1 g cm-3, will the substance float or sink?
Answer:
If the density of an object is more than the density of a liquid, then it sinks in the liquid. On the other hand, if the density of an object is less than the density of a liquid, then it floats on the surface of the liquid.
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 Gravitation 1
= \(\frac { 50 }{ 20 }\)
= 2.5 g cm-3
The density of the substance is more than the density of water (1 g cm-3).
Hence, the substance will sink in water.

Question 22.
The volume of a 500 g sealed packet is 350 cm3. Will the packet float or sink in water if the density of water is 1 g cm-3? What will be the mass of the water displaced by this packet?
Answer:
Density of the 500 g sealed packet
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 Gravitation 2
= \(\frac { 500 }{ 350 }\)
= 1.428 g cm-3
The density of the substance is more than the density of water (1 g cm-3). Hence, it will sink in water.
The mass of water displaced by the packet is equal to the volume of the packet, i.e., 350 g.

Gravitation Additional Questions

Gravitation Multiple Choice Questions

Question 1.
Two objects of different masses falling freely near the surface of moon would __________ .
(a) have same velocities at any instant.
(b) have different accelerations.
(c) experience forces of same magnitude.
(d) undergo a change in their inertia.
Answer:
(c) experience forces of same magnitude.

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Question 2.
The value of acceleration due to gravity __________ .
(a) is same on equator and poles.
(b) is least on poles.
(c) is least on equator.
(d) increases from pole to equator.
Answer:
(c) is least on equator.

Question 3.
The gravitational force between two objects is F. If masses of both objects are halved without changing distance between them, then the gravitational force would become __________ .
(a) \(\frac { F }{ 4 }\)
(b) \(\frac { F }{ 2 }\)
(c) F
(d) 2 F.
Answer:
(a) \(\frac { F }{ 4 }\)

Question 4.
A boy is whirling a stone tied with a string in an horizontal circular path. If the string breaks, the stone __________ .
(a) will continue to move in the circular path.
(b) will move along a straight line towards the centre of the circular path.
(c) will move along a straight line tangential to the circular path.
(d) will move along a straight line perpendicular to the circular path away from the boy.
Answer:
(c) will move along a straight line tangential to the circular path.

Question 5.
An object is put one by one in three liquids having different densities. The object floats with 1 2 3, and 9 11 7 parts of their volumes outside the liquid surface in liquids of densities d1, d2 and d3 respectively. Which of the following statement is correct?
(a) d1 > d2 > d3
(b) d21 > d2 < d3
(c) d1 < d2 > d3
(d) d1 < d2 < d3.
Answer:
(d) d1 < d2 < d3.

Question 6.
In the relation F = GM m/d2, the quantity G __________ .
(a) depends on the value of ‘g’ at the place of observation.
(b) is used only when the Earth is one of the two masses.
(c) is greatest at the surface of the Earth.
(d) is universal constant of nature.
Answer:
(d) is universal constant of nature.

Question 7.
Law of gravitation gives the gravitational force between __________ .
(a) the Earth and a point mass only.
(b) the Earth and Sun only.
(c) any two bodies having some mass.
(d) two charged bodies only.
Answer:
(c) any two bodies having some mass.

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Question 8.
The value of quantity G in the law of gravitation __________ .
(a) depends on mass of Earth only.
(b) depends on radius of Earth only.
(c) depends on both mass and radius of Earth.
(d) is independent of mass and radius of the Earth.
Answer:
(d) is independent of mass and radius of the Earth.

Question 9.
Two particles are placed at some distance. If the mass of each of the two particles is doubled, keeping the distance between them unchanged, the value of gravitational force between them will be __________ .
(a) 14 times
(b) 4 times
(c) 12 times
(d) unchanged.
Answer:
(b) 4 times

Question 10.
The atmosphere is held to the earth by __________ .
(a) gravity
(b) wind
(c) clouds
(d) Earth’s magnetic field.
Answer:
(a) gravity

Question 11.
The force of attraction between two unit point masses separated by a unit distance is called __________ .
(a) gravitational potential.
(b) acceleration due to gravity.
(c) gravitational field.
(d) universal gravitational constant.
Answer:
(d) universal gravitational constant.

Question 12.
The weight of an object at the centre of the Earth of radius R is __________ .
(a) zero.
(b) infinite.
(c) R times the weight at the surface of the Earth.
(d) \(\frac { 1 }{ { R }^{ 2 } } \) times the weight at surface of the Earth.
Answer
(a) zero.

Gravitation Very Short Answer Type Questions

Question 1.
Why Moon revolves around the Earth?
Answer:
Gravitational force of Earth.

Question 2.
What is the SI unit of gravitational force?
Answer:
Newton (N).

Question 3.
Which law of physics is represented by the statement every object attract other object in universe towards itself’?
Answer:
Universal Law of Gravitation.

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Question 4.
State the relation between gravitational force and distance among objects.
Answer:
Inversely proportional.

Question 5.
In which conditions free fall of an object occur?
Answer:
When an object falls from a height under the influence of gravity and no other force, it is said to have a free fall.

Question 6.
What is the SI unit of gravitational constant?
Answer:
Nm2kg-2.

Question 7.
Express the relation between thrust and pressure.
Answer:
Pressure = thrust / area.

Question 8.
What kind of force is exerted by a liquid?
Answer:
Equal and unidirectional.

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Question 9.
In what condition an object sinks?
Answer:
If the weight of the object is more than 9.8 N, then the object will sink.

Question 10.
Which material is taken as standard to calculate any object’s relative density?
Answer:
Water.

Gravitation Short Answer Type Questions

Question 1.
What is the source of centripetal force that a planet requires to revolve around the Sun? On what factors does that force depend?
Answer:
Gravitational force. This force depends on the product of the masses of the planet and Sun, and the distance between them.

Question 2.
On the Earth, a stone is thrown from a height in a direction parallel to the Earth’s surface while another stone is simultaneously dropped from the same height. Which stone would reach the ground first and why?
Answer:
Both the stones will take the same time to reach the ground because the two stones fall from the same height.

Question 3.
Suppose gravity of Earth suddenly becomes zero, then in which direction will the Moon begin to move if no other celestial body affects it?
Answer:
The Moon will begin to move in a straight line in the direction in which it was moving at that instant because the circular motion of Moon is due to centripetal force provided by the gravitational force of Earth.

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Question 4.
Two identical packets are dropped from two Aeroplanes, one above the equator and the other above the north pole, both at height h. Assuming all conditions are identical, will those packets take same time to reach the surface of Earth. Justify your answer.
Answer:
The value of ‘g’ at the equator of the Earth is less than that at poles. Therefore, the packet falls slowly at equator in comparison to the poles. Thus, the packet will remain in air for longer time interval, when it is dropped at the equator.

Question 5.
The weight of any person on the Moon is about \(\frac { 1 }{ 6 }\) times that on the Earth. He can lift a mass of 15 kg on the Earth. What will be the maximum mass, which can be lifted by the same force applied by the person on the moon?
Answer:
The value of ‘g’ at the equator of the Earth is less than that at poles. Therefore, the packet falls slowly at equator in comparison to the poles. Thus, the packet will remain in air for longer time interval, when it is dropped at the equator.

Gravitation Long Answer Type Questions

Question 1.
State ‘Archimedes’ Principle and write its two applications.
Answer:
‘Archimedes’ Principle:
Force exerted by liquid on wholly or partly immersed object is equal to the weight of the fluid displaced by the object. Applications based on ‘Archimedes’ principle are:

  1. designing of water transport vehicles.
  2. hydrometers used for determining the density of liquids

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Question 2.
What is relative density? What is the density of water?
Answer:
Relative Density (RD) or Specific Gravity (SG) is the ratio of either densities or weights. Hence, when we compare or divide value of an objects’ density with water’s density, it is called Relative Density of a substance to water.

  1. In SI units, the density of water is (approximately) 1000 kg/m3 Or 1 g/cm3.

Question 3.
Mass of a rectangular copper solid piece is 300 g. With dimensions 5 × 2 × 5 cm3, what should be its specific gravity, calculate? Will the bar float or sink in water?
Answer:
MP Board Class 9th Science Solutions Chapter 10 Gravitation 3
Given:
Mass of copper = 300 g
5 × 2 × 5 = 50 cm3
Density of copper = mass / volume
\(\frac { 300 }{ 50 }\) = 6 g / cm3
Density of water, = 1 g/cm3
Specific gravity of iron = \(\frac { 6 }{ 1 }\) = 6.
Hence the bar will sink.

Question 4.
How does the weight of an object vary with respect to mass and radius of the earth. In a hypothetical case, if the diameter of the earth becomes half of its present value and its mass becomes four times of its present value, then how would the weight of any object on the surface of the earth be affected?
Answer:
We know, weight of an object is directly proportional to the mass of the earth and inversely proportional to the square of the radius of the earth, i.e.,.
Weight of a body ∝ \(\frac { M }{ { R }^{ 2 } } \)
Original weight, W0  = mg = mG\(\frac { M }{ { R }^{ 2 } } \)
When hypothetically M becomes 4 M and R becomes \(\frac { R }{ 2 }\) then weight becomes
W0 = mG \(\frac { 4M }{ { (\frac { R }{ 2 } ) }^{ 2 } } \) = (16 m G) M
R2 = 16 × W0
The weight will be 16 times heavier.

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Question 5.
(a) A cube of side 5 cm is immersed in water and then in saturated salt solution. In which case will it experience a greater buoyant force. If each side of the cube is reduced to 4 cm and then immersed in water, what will be the effect on the buoyant force experienced by the cube as compared to the first case for water? Give reason for each case.
(b) A ball weighing 4 kg of density 4000 kg m-3 is completely immersed in water of density 103 kg m-3. Find the force of buoyancy on it. (Given: g = 10 ms-2.)
Answer:
(a)

  1. The cube will experience a greater buoyant force in the saturated salt solution because the density of the salt solution is greater than that of water.
  2. The smaller cube will experience lesser buoyant force as its volume is lesser than the initial cube.

(b) Buoyant force = weight of the liquid displaced = density of water x volume of water displaced xg 4
= 1000 × \(\frac { 4 }{ 4000 }\) × 10 = 10N.
4000

Gravitation Higher Order Thinking Skills (HOTS)

Question 1.
How will the weight of a body of mass 250 g of changes, if it is taken from equator to the poles? Give reasons.
Answer:
As we move from equator to poles, acceleration due to gravity increases. It is because radius of earth is less at poles than at equator. Therefore, its weight will increase.

MP Board Solutions

Question 2.
Aman tried to immerse an empty plastic bottle in a bucket of water. But each time he fails. Why does this happen?
Answer:
When Aman tried to immerse an empty plastic bottle in a bucket of water, it comes above the surface of water. It is due to the upward force (upthrust or buoyant force). The upthrust exerted by water on the bottle is greater than its own weight.

Gravitation Value Based Question

Question 1.
Rashmi was wearing a high heel shoes for a beach party. Her friend told her to wear flat shoes as she will be tired soon with high heel and will not feel comfortable.

  1. What is the reason of one’s feeling tired with high heel shoes on a beach?
  2. Name the unit of pressure.
  3. What value of Rashmi’s friend is reflected in the above act?

Answer:

  1. Because the high heel shoes would exert lot of pressure on the loose sand of beach and will sink more in the soil as compared to flat shoes. Therefore, large amount of force will be required to walk with high heels.
  2. Pascal.
  3. Rashmi’s friend showed the value of being intelligent, concerned and helpful.

MP Board Class 9th Science Solutions

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 3 दो बैलों की कथा-कहानी

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 3 दो बैलों की कथा-कहानी  (कहानी, मुंशी प्रेमचन्द)

दो बैलों की कथा-कहानी पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

दो बैलों की कथा-कहानी लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
झूरी के बैल किस नस्ल के थे?
उत्तर:
झूरी के बैल पछाई नस्ल के थे।

प्रश्न 2.
झूरी ने गोई को कहाँ भेज दिया?
उत्तर:
झूरी ने गोई को ससुराल भेज दिया।

प्रश्न 3.
झूरी की ससुराल जाते समय बैलों ने क्या समझा?
उत्तर:
झूरी की ससुराल जाते समय बैलों ने यह समझा कि मालिक ने उन्हें बेच दिया है।

प्रश्न 4.
गोई को ले जाते समय गया को पसीना क्यों आ गया?
उत्तर:
गोई को ले जाते समय गया को पसीना आ गया। यह इसलिए कि वे वहाँ जाना नहीं चाहते थे। अगर गया उन्हें पीछे से हाँकता तो वे दोनों इधर-उधर, भागने लगते थे। पगहिया पकड़कर आगे खींचने पर पीछे की ओर जाने लगते थे। मारने पर वे दोनों मुंह नीचे करके हँकारने लगते थे।

प्रश्न 5.
गया के घर जाकर दोनों बैलों ने नाँद में मुँह क्यों नहीं डाला?
उत्तर:
गया के घर जाकर दोनों बैलों ने नाँद में मुँह नहीं डाला। यह इसलिए कि उनका अपना घर छूट गया था। यह तो पराया घर था। वहाँ के लोग उन्हें बेगाने लग रहे थे। उन्हें वहाँ का खाना-पीना और रहना तनिक भी रास नहीं आया।

प्रश्न 6.
‘क’ स्तम्भ में पात्रों के नाम और ‘ख’ स्तम्भ में कथन दिए गए हैं-पात्रों के साथ सही कथन जोडिए?
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 3 दो बैलों की कथा-कहानी img-1
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 3 दो बैलों की कथा-कहानी img-2

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दो बैलों की कथा-कहानी दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
झूरी के घर प्रातःकाल लौटे-बैलों का किसने स्वागत किया? और कैसे प्रातःकाल झूरी के घर वापस आने पर बैलों का स्वागत किस प्रकार किया गया?
उत्तर:
प्रातःकाल लौटे बैलों को देखकर झूरी गद्गद हो गया। दौड़कर उसने उन्हें गले लगा लिया। फिर वह उन्हें चूमने लगा। झूरी के घर प्रातःकाल लौटे बैलों का घर और गाँवों के लड़कों ने तालियाँ बजा-बजाकर स्वागत किया। उनमें से किसी ने अपने घरों से रोटियाँ लाकर खिलाया तो किसी ने गुड़। इसी प्रकार किसी ने चोकर लाकर दिया तो किसी ने भूसी। इस प्रकार उन्होंने उन दोनों बैलों का बड़े ही स्नेहपूर्वक स्वागत किया।

प्रश्न 2.
गया के घर से भाग आने पर बैलों के साथ कैसा व्यवहार किया गया?
उत्तर:
गया के घर से भाग आने पर बैलों के साथ झूरी की पत्नी ने बड़ा ही दुर्व्यवहार किया। उसने उन्हें खली और चोकर देना बन्द कर दिया। उसने यह निश्चय कर लिया कि वह अब उन्हें सूखे भूसे के सिवा और कुछ नहीं देगी। वे खाएँ या मरें। उसने मजूर को बड़ी ताकीद कर दी कि वह बैलों को खाली सूखा भूसा ही दे। इस प्रकार उनके प्रति बड़ी बेरहमी की गई।

प्रश्न 3.
दोनों बैलों ने आजादी के लिए क्या-क्या प्रयास किए?
उत्तर:
दोनों बैलों ने आजादी के लिए निम्नलिखित प्रयास किए-

  1. दो-चार बार गाड़ी को सड़क की ख़ाई में गिराना चाहा।
  2. हल में जोतने पर जैसे पाँव उठाने की कसम खा ली थी। गया मारते-मारते थक गया, लेकिन उन्होंने पाँव न उठाया।
  3. हीरा की नाक पर जब गया ने खूब डण्डे बरसाए तो मोती का गुस्सा काबू के बाहर हो गया। वह हल लेकर ऐसा भागा कि उससे हल, रस्सी, जुआ, जोत सब टूट-टाटकर बरावर हो गया।
  4. एक दिन चुपके से भैरो की लड़की के द्वारा रस्सी खोल दिए जाने पर वहाँ से ऐसे भाग निकले कि गया की पकड़ में नहीं आ पाए।

प्रश्न 4.
हीरा-मोती के पारस्परिक प्रेम का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
झरी के दोनों बैलों हीरा और मोती में बहुत ही अधिक पारस्परिक प्रेम था। बहुत दिनों से दोनों एक ही साथ रहते थे। इसलिए दोनों में भाईचारा हो गया था। दोनों एक-दूसरे की मौन-भाषा समझ लेते थे। इसी में वे परस्पर विचार-विनिमय भी किया करते थे। दोनों एक-दूसरे को चाटकर और सूंघकर अपना प्रेम प्रकट करते थे। कभी-कभी दोनों सींग भी मिला लिया करते थे। वे इसे किसी प्रकार के विरोध भाव से नहीं करते थे, अपितु विनोद और आत्मीयता के भाव से किया करते थे। इससे उनका पारस्परिक प्रेम और मजबूत दिखाई देता था।

प्रश्न 5.
भैरो की लड़की की बैलों से आत्मीयता क्यों हो गई थी?
उत्तर:
भैरो की लड़की की माँ मर चुकी थी। उसकी सौतेली माँ उसें मारती रहती थी। इस प्रकार उसको अपना ऐसा कोई नहीं दिखाई देता था, जिससे वह अपनी भावना को प्रकट कर सके। इसके लिए उसने अपने बैलों को ही चुना। वह उन्हें रातःको चुपके से रोटी खिलाती थी। उनके प्रति सहानुभूति दिखाती थी। इसलिए उन बैलों से उसे बड़ी आत्मीयता हो गई थी।

प्रश्न 6.
दोनों बैल दढ़ियल आदमी को देखकर क्यों काँप उठे?
उत्तर:
दोनों बैल दढ़ियल आदमी को देखकर काँप उठे। यह इसलिए कि-

  1. उसकी आँखें लाल-लाल की।
  2. उसकी मुद्रा बहुत ही कठोर थी।
  3. उसने उन दोनों बैलों के कूल्हों में अपनी उँगली गोद दी।
  4. उसका चेहरा बड़ा ही भयानक था।
  5. वह बड़ा ही जुल्मी और कसाई दिखाई दे रहा था।

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प्रश्न 7.
सिद्ध कीजिए कि कहानी अपने उद्देश्य में पूर्ण सफल है।
उत्तर:
मुंशी प्रेमचन्द लिखित कहानी ‘दो बैलों की कथा’ में मनुष्य और पशु के परस्पर व्यवहार को दर्शाया गया है। इस कहानी में झूरी के दोनों बैलों के भीतर जागृत होने वाले कई प्रकार के भावों को व्यक्त किया गया है। इस प्रकार पशुओं के साथ मनुष्य द्वारा किए जाने वाले आत्मीय और भाईचारा के व्यवहार का जहाँ उल्लेख हुआ है, वहीं दूसरी ओर उनके प्रति की जाने वाली क्रूरता और स्वार्थपरता का भी चित्रण हुआ है। इस प्रकार. यह कहानी मनुष्य की तरह पशुओं के भी सुख-दुख और अपने-पराए के बोध को प्रकट करती है। इस प्रकार की विशेषताओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि मुंशी प्रेमचन्द लिखित प्रस्तुत कहानी ‘दो बैलों की कथा’ अपने उद्देश्य में पूर्ण सफल है।

प्रश्न 8.
कहानी के विकास क्रम पर प्रकाश डालते हुए कहानी की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
हिन्दी कहानी के विकास क्रम को छः भागों में इस प्रकार बाँटा जा सकता है-

  1. पहला उत्थान काल (सन् 1900 से 1910 तक)
  2. दूसरा उत्थान काल (सन् 1911 से 1919 तक)
  3. तीसरा उत्थान काल (सन् 1920 से 1935 तक)
  4. चौथा उत्थान काल (सन् 1936 से 1949 तक)
  5. पाँचवाँ उत्थान काल (सन् 1950 से 1960 तक)
  6. छठवाँ उत्थान काल (सन् 1960 से अब तक)।

1. पहला उत्थान काल (सन् 1900 से 1910 तक) :
चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की ‘उसने कहा था’। यह काल हिन्दी कहानी का आरम्भिक काल कहा जाता है। इसके बाद चन्द्रधर शर्मा की ‘इन्दुमती’, बंग महिला की ‘दुलाईवाली’, रामचन्द्र शुक्ल की ‘ग्यारह वर्ष का समय’ आदि कहानियाँ हिन्दी की आरम्भिक कहानियाँ मानी जाती हैं।

2. दूसरा उत्थान काल (सन् 1911 से 1919 तक) :
इस काल में जयशंकर प्रसाद महाकथाकार के रूप में उभड़कर आए। सन् 1911 में उनकी ‘ग्राम’ कहानी ‘इन्दु’ नामक.मासिक पत्रिका में प्रकाशित हुई। उनकी ‘छाया’, ‘प्रतिध्वनि’, ‘आकाशदीप’, ‘इन्द्रजाल’ आदि कहानी-संग्रह प्रकाशितः हुए। उनके अतिरिक्त विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’, ज्वालादत्त शर्मा, चतुरसेन शास्त्री, जे.पी. श्रीवास्तव, राधिकारमण प्रसाद सिंह आदि उल्लेखनीय कथाकार इसी काल की देन हैं।

3. तीसरा उत्थान काल (सन् 1920 से 1935 तक) :
इस काल को महत्त्व कथा साहित्य की दृष्टि से बहुत ही अधिक है। यह इसलिए कि इसी काल में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचन्द का आगमन हुआ। उन्होंने अपनी कहानियों में भारतीय समाज की ऐसी सच्ची तस्वीर खींची जो किसी काल के किसी भी कथाकार के द्वारा सम्भव नहीं हुआ। ‘ईदगाह’, ‘पंच-परमेश्वर’, बूढ़ी काकी’, ‘बड़े घर की बेटी’, ‘मन्त्र’, ‘शतरंज के खिलाड़ी’, ‘दो बैलों की कथा’ आदि उनकी बहुत प्रसिद्ध कहानियाँ हैं। इस काल के अन्य महत्त्वपूर्ण कथाकारों में सुदर्शन, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, शिवपूजन सहाय, सुमित्रानन्दन पन्त, सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, रामकृष्ण दास, वृन्दावन लाल वर्मा, भगवती प्रसाद बाजपेयी आदि हैं।

4. चौथा उत्थान काल (सन् 1936 से 1949 तक) :
कहानी कला की दृष्टि से इस काल का महत्त्व इस दृष्टि से है कि इस काल की कहानियों ने विभिन्न प्रकार की विचारधाराओं को जन्म दिया। मनोवैज्ञानिक और प्रगतिवादी कथाकार इस काल में अधिक हुए। मनोवैज्ञानिक कथाकारों में इलाचन्द्र जोशी, अज्ञेय, जैनेन्द्र कुमार, चन्द्रगुप्त विद्यालंकार, पाण्डेय बेचन शर्मा उग्र आदि हुए।

प्रगतिवादी कथाकारों में यशपाल, राहुल सांकृत्यायन; रांगेय राघव, अमृत लाल नागर, राजेन्द्र यादव आदि उल्लेखनीय हैं। विचार प्रधान कथाकारों में धर्मवीर भारती, कन्हैया लाल मिश्र ‘प्रभाकर’ आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। महिला कथाकारों में सुभद्राकुमारी चौहान, शिवरानी देवी, मन्नू भण्डारी, शिवानी आदि अधिक प्रसिद्ध हैं।

5. पाँचवाँ उत्थान काल (सन् 1950 से 1960 तक) :
इस काल की कहानी को कई उपनाम मिले, जैसे-‘नई कहानी’, ‘आज की कहानी’, ‘अकहानी’ आदि। इस काल की कहानियों में वर्तमान युग-बोध, सामाजिक विभिन्नता, वैयक्तिकता, अहमन्यता : आदि की अभिव्यंजना ही मुख्य रूप से सामने आई। इस काल के कमलेश्वर, फणीश्वरनाथ ‘रेणु’, अमरकान्त, निर्मल वर्मा, मार्कण्डेय, शिव प्रसाद सिंह, भीष्म साहनी. मोहन राकेश, कृष्णा सोबती, रघुवीर सहाय, शैलेश मटियानी, हरिशंकर पारसाई, लक्ष्मीनारायण लाल, राजेन्द्र अवस्थी आदि कथाकारों के नाम बहुत प्रसिद्ध हैं।

6. छठवाँ उत्थान काल (सन् 1960 से अव तक) :
इस काल को साठोत्तरी हिन्दी कहानी के नाम से जाना जाता है। इस काल के कहानीकार पूर्वापेक्षा नवी चंतना और शिल्प के साथ रचना-प्रक्रिया में जुटे हुए दिखाई देते हैं। इस काल की कहानी की यात्रा विभिन्न प्रकार के आन्दोलनों से जुड़ी हुई है, जैसे-नयी कहानी (कमलेश्वर, अमरकान्त, मार्कण्डेय, फणीश्वर नाथ ‘रेणु’, राजेन्द्र यादव, मन्नू भण्डारी, मोहन राकेश, शिव प्रसाद सिंह, निर्मल वर्मा, उषा प्रियंवदा आदि), अकहानी (रमेश बख्शी, गंगा प्रसाद ‘विमल, जगदीश चतुर्वेदी, प्रयाग शुक्ल, दूधनाथ सिंह, ज्ञानरंजन आदि), सचेतन कहानी (महीप सिंह, योगेश गुप्त, मनहर चौहान, रामकुमार ‘भ्रमर’ आदि), समानान्तर कहानी (कामतानाथ, से.रा. यात्री, जितेन्द्र भाटिया, इब्राहिम शरीक, हिमांशु जोशी आदि), सक्रिय कहानी (रमेश बत्रा, चित्रा मुद्गल, राकेश वत्स, धीरेन्द्र अस्थाना आदि)। इनके अतिरिक्त इस काल के ऐसे भी कथाकार हैं, जो उपर्युक्त आन्दोलनों से अलग होकर कथा-प्रक्रिया में समर्पित रहे हैं, जैसे-रामदरश मिश्र, विवेकी राय, मृणाल पाण्डेय, मृदुला गर्ग, निरूपमा सेवती, शैलेश मटियानी, ज्ञान प्रकाश विवेक, सूर्यबाला, मेहरून्निसा परवेज, मंगलेश डबराल आदि।

आज की कहानी शहरी-सभ्यता, स्त्री-पुरुष सम्बन्धों की नई अवधारणा, आपसी . सम्बन्धों के बिखराव, भय और असुरक्षा की भावना, चारित्रिक ह्रास, यौन कुण्ठा, घिनौनी मानसिकता, अन्याय, अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष, औद्योगिकीकरण के दुष्प्रभाव से दम तोड़ती मानवता आदि को चित्रित करने में सक्रिय दिखाई दे रही हैं। इसकी भाषा-शैली दोनों ही तराशती हुई और नए-नए तेवरों को प्रस्तुत करने की क्षमता प्रशंसनीय है।

दो बैलों की कथा-कहानी की परिभाषा

कहानी की परिभाषा पश्चिमी और भारतीय समीक्षकों ने अलग-अलग रूप में दी है
I. पाश्चात्य समीक्षक

  1. पश्चिमी विद्वान एडगर रलन पो ने कहानी को रसोद्रेक करने वाला. एक ऐसा आख्यान माना है, जो एक ही बैठक में पढ़ा जा सके।
  2. एच.जी. वेल्स का कहना है कि कहानी तो बस वही है, जो लगभग बीस मिनट में साहस और कल्पना के साथ पढ़ी जाए।
  3. हडसन कहानी में चरित्र की अभिव्यक्ति मानते हैं।

II. भारतीय समीक्षक

  1. डा. श्याम सुन्दर दास के अनुसार-“आख्यायिका एक निश्चित लक्ष्य या प्रभाव को लक्षित करके लिखा गया नाटकीय आख्यान है।”
  2. मुंशी प्रेमचन्द के अनुसार-“कहानी एक रचना है, जिसमें जीवन के किसी अंश या किसी मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा-विन्यास सब उसी एक भाव की पुष्टि करते हैं। यह एक गमला है, जिसमें एक ही पौधे का माधुर्य अपने समुन्नत रूप में दृष्टिगोचर होता है।”
  3. इलाचन्द जोशी के अनुसार-“जीवन का एक चक्र नाना परिस्थितियों के संघर्ष में उल्टा-सीधा चलता रहता है। इस सुवृहत् चक्र की विशेष परिस्थितियों का प्रदर्शन ही कहानी होती है।”
  4. सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय के अनुसार-“छोटी कहानी एक सूक्ष्मदर्शक यन्त्र है, जिसमें मानवीय अस्तित्व के मर्मस्पर्शी दृश्य खुलते हैं।”

दी गई उपर्युक्त मान्यताओं के आधार पर यह कहा जा सकता है-
कहानी, जीवन के किसी एक विशेष मनोभाव या अंश का एक ऐसा प्रतिबिम्ब है, जो सम्भवतया संक्षिप्त नाटकीय शैली में विश्वसनीय कथा के रूप में प्रस्तुत होता है।

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दो बैलों की कथा-कहानी भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांशों की व्याख्या कीजिए
(क) “भागे इसलिए कि……..खाएँ चाहे मरें।”
(ख) “दोनों दिन भर जोते जाते……..विद्रोह भरा हुआ।”
(ग) “हमें तो तुम्हारी चाकरी में मर जाना कबूल था।”
(घ) “दोनों के हृदय को मानो भोजन मिल गया। यहाँ भी किसी सज्जन का वास है।”
(ङ) “बैल का जन्म लिया है तो मार से कहाँ तक बचेंगे।”
उत्तर:
गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या :
(क) भागे इसलिए कि वे लोग तुम्हारी तरह बैलों को सहलाते नहीं। खिलाते हैं, तो रगड़कर जोतते भी हैं। ये दोनों ठहरे कामचोर, भाग निकले। अब देखू? कहाँ से खली और चोकर मिलता है। सूखे भूसे के सिवा कुछ न दूंगी, खाएँ चाहे मरें।

प्रसंग :
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य भाग-1’ में संकलित तथा मुंशी प्रेमचन्द लिखित कहानी ‘दो बैलों की कथा’ से अवतरित है। इसमें कहानीकार ने झरी को अपनी ससुराल से अपने दोनों बैलों हीरा और मोती के भागकर आने पर उन्हें सही ठहराया, तो उसकी पत्नी ने उसका विरोध करते हुए कहा कि

व्याख्या :
गया ‘के यहाँ वे दोनों बैल नहीं टिक सके। इसका मुख्य कारण यह है कि वह बैलों को खिलाता है डटकर काम लेने के लिए, उन्हें उसकी तरह आराम देने के लिए नहीं। वह उन्हें खिलाता है, तो वह उनसे काम लेना भी जानता है। उन्हें खिलाकर उन्हें बड़े ही कड़ाई से हल में सुबह से शाम तक जोतता है। इन्हें तो बैठकर खाना चाहिए। ये काम करने से भागते हैं। इसलिए उसने जब इनसे डटकर काम लेना शुरू किया तो ये भागकर यहाँ चले आए। अब देखना है कि इन्हें खली और चोकर कौन खिलाता है। मैं इन्हें सूखा ही भूसा-चारा दूंगी। उसे ये खाएं या न खाएं, मेरी बला से।

विशेष :

  1. झूरी की पत्नी का आक्रोश उसकी कठोरता को प्रकट कर रहा है।
  2. भाव बड़े ही निष्ठुर हैं।
  3. शैली प्रवाहमयी है।
  4. यह अंश स्वाभाविक है।

(ख) “दोनों दिन भर जोते जाते……..विद्रोह भरा हुआ।”
प्रसंग :
पूर्ववत्! इसमें कहानीकार ने झूरी के दोनों बैलों हीरा और मोती की मेहनत और सहनशीलता को बतलाने का प्रयास किया है।

व्याख्या :
कहानीकार का कहना है कि झूरी के दोनों बैल हीरा और मोती उसके साले के यहाँ कड़ी मेहनत करने लगे। उसका साला गया उनसे खूब डटकर काम लेता था। वह उन्हें सुबह से शाम तक हल में जोतता था। उन पर जोर-जोर से डण्डे . बरसाता था। इससे वे दोनों क्रोधित होकर उसका बार-बार विरोध करते थे। फिर भी वह उनके प्रति जरा भी नरमी नहीं दिखाता था। इस प्रकार उनसे डटकर काम लेने के बाद वह उन्हें उनके रहने-बैठने की जगह पर बाँध देता था। रात होने पर पहले की तरह उसकी लड़की उन्हें चुपके से दो रोटियाँ खिलाकर चली जाती थी। दोनों उसके द्वारा दी हुई उन रोटियों को प्रसाद की तरह बड़े ही प्रेमभाव से लेते थे। उससे उन्हें एक ऐसी अद्भुत सहनशक्ति मिलती थी कि वे रूखा-सूखा भूसा-चारा खाकर भी अपनी कमजोरी कुछ भी अनुभव नहीं करते थे। ऐसा होने पर भी गया के प्रति उनके मन में अधिक घृणा और विरोध भरा हुआ था।

विशेष :

  1. बैल जैसे कड़ी मेहनत करने वाले पशुओं के प्रति मनुष्य की कठोरता का उल्लेख है।
  2. बाल स्वभाव पशु-प्रेम का उल्लेख रोचक रूप में है।
  3. उर्दू-हिन्दी की शब्दावली है।
  4. शैली भावात्मक है।
  5. भाषा मुहावरेदार है।

(ग) “हमें तो तुम्हारी चाकरी में मर जाना कबूल था।”
प्रसंग :
पूर्ववत! इसमें कहानीकार ने हीरा और मोती के अपने मालिक झूरी के प्रति शिकायत के भावों को व्यक्त करते हुए कहना चाहा है कि

व्याख्या :
हीरा और मोती को लगा कि उनके मालिक झूरी ने अपने साले गया को उन्हें बेच दिया। उन्हें यह नागवार लगा। वे तो अपने मालिक झूरी की सच्चे तन-मन से सेवा कर रहे थे, फिर उसने उन्हें उसे क्यों बेच दिया। वे तो उसकी सेवा करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़े थे। वे तो यह निश्चय कर लिये थे कि उन्हें उसके यहाँ ही जीना है और उसके यहाँ ही मर जाना है।

विशेष :

  1. बैलों की स्वामिभक्ति प्रकट की गई है।
  2. यह अंश प्रेरक रूप में है।
  3. भाषा सजीव है।

(घ) “दोनों के हृदय को मानो भोजन मिल गया। यहाँ भी किसी सज्जन का वास है।”
प्रसंग :
पूर्ववत्! इसमें कहानीकार ने गया की लड़की के द्वारा दोनों बैलों को रात के समय चुपके से रोटियों के खिलाने से प्रभाव उन दोनों बैलों के एहसानमन्द होने का उल्लेख किया है।

व्याख्या :
कहानीकार का कहना है कि जब रात के समय चुपके से झूरी के साले गया की लड़की दोनों बैलों को रोटियाँ खिलाती थी, तब उन दोनों को बड़ी शान्ति और तसल्ली होती थी कि इस गया नामक जालिम के यहाँ भी कोई उनके दुख को समझने वाला और उसमें हाथ बँटाने वाला है। इस प्रकार उन्हें मन-ही-मन कुछ ही देर के लिए सही यह अवश्य खुशी होती थी कि किसी दुर्जन के यहाँ भी कोई सज्जन रहता है।

विशेष :

  1. भाषा सरल है।
  2. कथन मार्मिक है।
  3. शैली सुबोध है।

(ङ) “बैल का जन्म लिया है, तो मार से कहाँ तक बचेंगे।”
प्रसंग :
पूर्ववत्! इसमें कहानीकार ने झूरी के दोनों बैलों हीरा और मोती में से हीरा की सहनशीलता और अपनी जाति-धर्म की समझ का उल्लेख किया है।

व्याख्या :
कहानीकार का कहना है कि हीरा और मोती झूरी की कठोरता से तंग आकर उसका विरोध करने लगे थे। एक दिन दोनों गया द्वारा हल में जोतने का कड़ा विरोध किया। वे जब टसमस न हुए तो उसने उनको खूब मारा। वह मारते-मारते थक गया। फिर उसने हीरा की नाक पर जमकर डण्डे जमाए। इससे मोती बेकाबू होकर ऐसा भागा कि हल, रस्सी, जुआ, जोत सब टूट-टाटकर बराबर हो गया। उसे हीरा ने समझाया तो मोती ने कहा कि अब की बड़ी मार पड़ेगी। हीरा ने उससे कहा कि उन्हें मार पड़ने से नहीं डरना चाहिए। ऐसा इसलिए कि बैल का जन्म मार खाने के लिए होता है। इसे समझकर उसे मार से बचने या डरने की बात न सोचकर उसको डटकर सहना चाहिए, उससे भागना नहीं चाहिए।

विशेष :

  1. हीरा के स्वधर्म और स्वजाति की समझ प्रेरक रूप में है।
  2. यह वाक्य प्रभावशाली है।
  3. भाषा सजीव है।

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दो बैलों की कथा-कहानी भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों से वाक्य बनाइए-
मारता-पीटता, भूखा-प्यासा, जल-भुन गई, रूखा-सूखा, आगे-पीछे।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 3 दो बैलों की कथा-कहानी img-3
प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में उपसर्ग छाँटिए-
विश्वास, अभिनन्दन, निर्दयी, अनुमान, दुर्बल, अनाथ।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 3 दो बैलों की कथा-कहानी img-4

प्रश्न 3.
निम्नलिखित सामासिक पदों का समास विग्रह करते हुए समास का नाम लिखिए
संध्या-समय, प्रातःकाल, बाल-सभा, पशुवीर, दोपहर, गाय-बैल।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 3 दो बैलों की कथा-कहानी img-5

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का सन्धि-विच्छेद कर सन्धि का नाम लिखिए-
मनोहर, स्वागत, सज्जन, अन्तान।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 3 दो बैलों की कथा-कहानी img-6

प्रश्न 5.
निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध कीजिए

  1. संध्याकाल के समय दोनों बैल अपने नए स्थान पर पहुँचे।
  2. गाँव के इतिहास में ऐसी अभूतपूर्व घटना कभी नहीं पाई थी।
  3. दो बैल का ऐसा अपमान कभी नहीं हुआ।
  4. पहाड़ से उतरते हुए उसका पैर रपट गया।

उत्तर:

  1. संध्या-समय दोनों बैल अपने नए स्थान पर पहुँचे।
  2. गाँव के इतिहास में यह अभूतपूर्व घटना थी।
  3. दोनों बैलों का एसा अपमान कभी न हुआ था।
  4. पहाड़ से उतरते समय उसका पैर रपट गया।

दो बैलों की कथा-कहानी योग्यता विस्तार

प्रश्न 1.
यह कहानी आपको कैसी लगी? अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
छात्र/छात्रा इसे अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 2.
दो बैलों की कहानी नामक चलचित्र का अवलोकन कर उसकी समीक्षा लिखिए।
उत्तर:
छात्र/छात्रा इसे अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 3.
हल में जोते जाने के अतिरिक्त बैलों से कौन-कौन से कार्य लिए जा सकते हैं। सचित्र कथा तैयार कीजिए।
उत्तर:
छात्र/छात्रा इसे अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 4.
आपके घर में यदि कोई पालतू जानवर है तो उसके प्रति आपका व्यवहार कैसा रहता है, लिखिए।
उत्तर:
छात्र/छात्रा इसे अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

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दो बैलों की कथा-कहानी परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

दो बैलों की कथा-कहानी लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
झूरी के बैलों के क्या नाम थे?
उत्तर:
झूरी के बैलों के नाम हीरा और मोती थे।

प्रश्न 2.
दोनों बैलों ने अपनी मूक भाषा में क्या सलाह की?
उत्तर:
दोनों बैलों ने अपनी मूक भाषा में यह सलाह की कि गाँव में सोता पड़ जाने पर पगहे तुड़ाकर अपने घर की ओर भाग चलेंगे।

प्रश्न 3.
मजूर को क्या ताकीद कर दी गई?
उत्तर:
मजूर को यह ताकीद कर दी गई कि बैलों को खाली सूखा भूसा दिया जाए।

प्रश्न 4.
बैलों का कैसा अपमान कभी न हुआ था?
उत्तर:
बैलों का ऐसा अपमान कभी न हुआ था कि मार खाने के बाद भी उन्हें सूखा ही भूसा दिया गया।

प्रश्न 5.
झूरी ने कौन-सा सबूत दिया की वे बैल उसके ही हैं? –
उत्तर:
झूरी ने यह सबूत दिया कि वे बैल उसके ही द्वार पर खड़े हैं। इसलिए वे उसके ही हैं।

दो बैलों की कथा-कहानी दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
झूरी के दोनों बैलों में किस प्रकार घनी दोस्ती हो गई थी?
उत्तर:
झूरी के दोनों बैलों में बहुत अधिक भाईचारा हो गया था। दोनों बहुत दिनों से एक ही साथ रहते थे। दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे। दोनों एक-दूसरे को चाटकर और सूंघकर अपना प्रेम-भाव प्रकट, किया करते थे। कभी-कभी दोनों सींग भी मिला लिया करते थे-विरोध के भाव से नहीं, अपितु मनोरंजन और आत्मीयता के ही भाव से।

जब वे दोनों हल या गाड़ी में जोते जाते और गर्दन हिला-हिलाकर चलते तो उस समय दोनों की यही कोशिश होती थी कि अधिक-से-अधिक भार मेरी ही गर्दन पर रहे। दिन-भर के वाद दोपहर या शाम को खुलते तो एक-दूसरे को चाट-चाटकर अपनी थकान दूर किया करते थे। नाँद में खली-भूसा पड़ जाने पर दोनों एक ही साथ उठते। एक ही साथ नाँद में मुँह डालते। अगर एक मुँह हटा लेता तो दूसरा भी हटा लेता था।

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प्रश्न 2.
झूरी के प्रति बैलों की कौन-कौन-सी आत्मीयता के भाव प्रकट किए थे?
उत्तर:
झूरी के प्रति उसके बैलों ने निम्नलिखित आत्मीयता के भाव प्रकट किए थे-

  1. वह उन गरीबों को अपने घर से क्यों निकाल रहा है?
  2. क्या उन्होंने उसकी सेवा करने में कोई कमी की?
  3. अगर वे कम मेहनत करते थे, तो वह और उन से काम ले लेता।
  4. उन्हें तो उसकी ही सेवा में मरना-जीना कबूल था।
  5. उन्होंने तो उससे कभी भी दाने-चारे की शिकायत नहीं की। उसने उन्हें जो कुछ भी खिलाया उसे इन्होंने चुपचाप खा लिया। ऐसा होने के बावजूद वह उन्हें गया नामक इस जालिम के हाथ क्यों बेच दिया है।

प्रश्न 3.
लड़की द्वारा गराँव खोल दिए जाने पर बैलों ने क्या किया?
उत्तर:
लड़की द्वारा गराँव खोल दिए जाने पर बैलों ने तेजी से झूरी के घर की ओर भागना शुरू किया। वे सीधे दौड़ते चले गए। यहाँ तक उन्हें रास्ते का कुछ भी पता नहीं चला। वे जिस परिचित रास्ते से आए थे, उसे भूल गए। अब उनके सामने नया रास्ता और नए-नए स्थान आने लगे। तब वे एक खेत के किनारे खड़े हो गए। खेत में मटर थी। उससे अपनी भूख मिटाने लगे थे। रह-रहकर आहट लेते थे कि कोई आता तो नहीं। जब पेट भर गया तो दोनों मस्त होकर उछलने लगे।

प्रश्न 4.
दढ़ियल आदमी से छुटकारा पाने के लिए बैलों ने क्या किया?
उत्तर:
दढ़ियल आदमी से छुटकारा पाने के लिए बैलों ने भागना शुरू किया। रास्ते में ही वे अपने मालिक झूरी के खेत-कुएँ आदि को भली-भाँति पहचान गए थे, इससे उनमें और तेजी आ गई। दोनों उन्मत्त होकर बछड़ों की तरह ल्ले ले करते हुए अपने मालिक झूरी के घर आ गए। फिर अपने थान पर आकर खड़े हो गए।

प्रश्न 5.
झूरी के सामने जब दढ़ियल बैलों को पकड़ने चला तो मोती ने क्या किया?
उत्तर:
झूरी के सामने जब दढ़ियल बैलों को पकड़ने चला तो मोती ने सींग चलाया। दढ़ियल अपने बचाव के लिए पीछे हटा। मोती ने उसका पीछा किया तो वह भागने लगा। वह गाँव से बाहर ही जाकर खड़ा हो गया। उसे इस तरह देखकर मोती उसको देखता रहा। दढ़ियल इस समय धमकियाँ दे रहा था, गालियाँ दे रहा था और पत्थर फेंक रहा था। मोती शूरवीर की तरह उसका रास्ता रोके खड़ा था। जब वह दढ़ियल चला गया तो मोती अकड़ता हुआ लौट आया।

दो बैलों की कथा-कहानी लेखक-परिचय

प्रश्न.
मुंशी प्रेमचन्दं का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय-कथा साहित्य के युग-निर्माता के रूप में मुंशी प्रेमचन्द अत्यन्त लोकप्रिय हैं।

जन्म एवं शिक्षा :
मुंशी प्रेमचन्दजी का जन्म सन् 1880 ई. में काशी के पास पाण्डेयपुर नामक गाँव में हुआ था। आपका असली नाम धनपतराय था। मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरान्त आप एक विद्यालय में अध्यापक हो गए। कुछ समय बाद आपने बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की और सब डिप्टी इन्सपेक्टर बन गए। आपने अपने विद्यार्थी जीवन-काल से ही कहानियाँ लिखनी शुरू कर दी थीं। आपका निधन सन् 1936 ई. में हो गया।

रचनाएँ :
मुंशी प्रेमचन्द जी ने मुख्य रूप से कथा-साहित्य की रचना की है। इसके अतिरिक्त भी आपने नाटक, निबन्ध और आलोचना साहित्य की संवृद्धि.की. है। आपकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं

उपन्यास :
सेवासदन, कायाकल्प, रंगभूमि, कर्मभूमि, प्रेमाश्रम, गबन, निर्मला और गोदान। आपने ‘मंगलसूत्र’ नामक उपन्यास भी लिखना शुरू किया था।

कहानी :
संग्रह-प्रेम-पचीसी, प्रेम-पूर्णिमा, प्रेम-प्रसून, सन्त-सरोज, मानसरोवर आदि। नाटक-कर्बला, संग्राम और प्रेम की बेदी।

भाषा-शैली :
मुंशी प्रेमचन्द की भाषा-शैली सम्बन्धित निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
1. भाषा :
मुंशी प्रेमचन्द जी की भाषा सरल, सपाट और धाराप्रवाह है। उसमें उर्दू के शब्दों की प्रधानता है। कहीं अंग्रेजी और अरबी-फारसी के भी शब्द हैं।
2. शैली :
मुंशी प्रेमचन्द जी की शैली विविध है। वह कहीं वर्णनात्मक है. और! कहीं चित्रात्मक है। बोधगम्यता आपकी शैलीगत सर्वप्रधान विशेषता है। कहावतों और मुहावरों के अधिक प्रयोग से शैली सशक्त, बोधगम्य और प्रवाहमयी हो गई है।

महत्त्व :
मुंशी प्रेमचंदजी का हिन्दी कथा-साहित्य में बेजोड़ स्थान है। आपने इस क्षेत्र में अपनी लेखनी से भारतीय समाज का आदर्शमय और अत्यन्त प्रभावशाली चित्र खींचकर इसको प्रेरणादायक बना दिया है।

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दो बैलों की कथा-कहानी पाठ का सारांश

प्रश्न.
प्रेमचन्द लिखित कहानी ‘दो बैलों की कथा’ का सारांश अपने शब्दों! में लिखिए।
उत्तर:
मुंशी प्रेमचन्द लिखित कहानी ‘दों बैलों की कथा” में पशुओं के प्रति मनुष्य द्वारा किए जाने वाले आत्मीय और कठोर व्यवहार का रोचक चित्र प्रस्तुत किया गया है। कहानी के अनुसार झूरी के हीरा और मोती दो बैल थे। दोनों सुन्दर और चौकस थे। उनमें परस्पर बहुत प्रेम था। दोनों एक-दूसरे की बात समझ लेते थे। उनमें इतनी घनिष्ठ दोस्ती थी कि वे दो शरीर एक प्राण थे। वे दिनभर काम करने के बाद नाँद में एक ही साथ मुँह डालते थे और एक ही साथ मुँह हटा लेते थे। दोनों एक-दूसरे को चाट-चाटकर अपनी थकान मिटाते थे। एक दिन झूरी ने उन दोनों को अपनी ससुराल भेज दिया। उन्होंने समझ लिया कि वे बेच दिए गए हैं।

इसलिए उन्होंने उन्हें ले जाने वाले झूरी के साले गया का विरोध किया। उन्हें घर तक ले जाने में उसे दाँतों पसीना आ गया। दिन-भर के भूखे रहने पर भी उन्होंने वहाँ कुछ भी खाया-पीया नहीं। रात को सबके सो जाने पर वे पगहे तुड़ाकर भागते हुए झूरी के घर वापस आ गए। झूरी ने दौड़कर उन्हें गले लगाया। गाँव के लोगों ने तालियाँ बजा बजाकर उनका स्वागत किया। लेकिन झूरी की पत्नी से. यह नहीं देखा गया। उसने क्रोध में आकर कहा कि वे दोनों बैल नमकहराम हैं कि बिना काम किए ही भाग आए हैं। इन्हें अब सूखे भूसे ही खाने को दिया जाएगा। झूरी ने इसका विरोध तो किया, लेकिन उसकी एक न चली।

दूसरे दिन आकर झूरी का साला बैलों को ले गया। उन्हें गाड़ी में जोता। मोती ने गाड़ी को सड़क की खाई में गिराना चाहा तो हीरा ने उसे सँभाल लिया। शाम को झूरी ने बदले की भावना से उन्हें मोटी रस्सियों से बाँधकर उनके सामने सूखा भूसा डाल दिया। उन दोनों ने उसे सूंघा तक नहीं। उसने अपने बैलों को खली-चूनी सब कुछ दी। दूसरे दिन उसने उन्हें हल में जोता तो उन्होंने अपने पाँव नहीं बढ़ाए। उसे देखकर गया क्रोध से पागल हो उठा। उसने उन दोनों पर जमकर डण्डे बरसाए। दोनों हल सहित सब कुछ तोड़कर भाग उठे। गया को दो आदमियों के साथ दौड़कर आते हुए देखकर हीरा ने मोती को समझाया कि अब भागना व्यर्थ है। हीरा मोती की बात मानकर चुपचाप खड़ा हो गया। गया उन दोनों को पकड़कर घर ले गया। उसने फिर वही सूखा भूसा उन दोनों के सामने रख दिया। दोनों ने उसे देखा तक नहीं। रात को एक छोटी-सी लड़की उन्हें दो रोटियाँ खिला जाती थी।

वे प्रसाद की तरह उन्हें खाकर चुपचाप पड़े रहते थे। एक दिन उस लड़की ने उन दोनों की मोटी-मोटी रस्सियों को खोलकर उन्हें भाग जाने का मौका दिया। फिर उसने जोर से चिल्लाते हए कहा-“ओ दादा! दोनों बैल भागे जा रहे हैं, जल्दी दौड़ो” इसे सुनकर गया उनको पकड़ने चला। वे दोनों और भागने लगे तो गया भी उनके पीछे तेजी से दौड़ने लगा। यह देख वह गाँव के कुछ लोगों को साथ लेने के लिए लौटा तो वे दोनों और सरपट भागने लगे। इससे उन्हें अपने परिचित रास्ते का कुछ भी ज्ञान नहीं रहा। वे रास्ता भूल भटककर किसी के मटर के खेत में चरने लगे। भरपेट मटर चर लेने के बाद वे इठलाने लगे। उन्हें वहाँ देखकर काजी हाउस में बन्द कर दिया गया। एक सप्ताह तक वे वहाँ विना चारे के बन्द रहे। उन्हें दिन भर में एक बार पानी पिलाया जाता था। इससे वे जिन्दा तो रहे, लेकिन उनसे उठा तक न जाता था।

एक सप्ताह के बाद उनको नीलाम कर दिया गया। एक दढ़ियल आदमी ने उन्हें खरीद लिया। वह बहुत कठोर था। नीलाम होने के बाद दोनों (हीरा और मोती) को वह दढ़ियल लेकर चला। उस समय दोनों भय से थर-थर काँप रहे थे, लेकिन वे मजबूर थे। अचानक उन्हें लगा कि वे परिचित रास्ते पर ही चल रहे हैं। गया उन्हें इसी रास्ते से ले गया था। इसी कुएँ पर वे पुर चलाने आया करते थे। अब हमारा घर पास ही आ गया है। इससे दोनों छलाँग लगाते हुए झूरी के घर की ओर दौड़ने लगे। वहाँ पहुँचकर वे अपने-अपने थान पर खड़े हो गए। उनके पीछे-पीछे दौड़ते हुए वह दढ़ियल भी वहाँ पहुँच गया। झूरी उन दोनों को देखकर प्रसन्नता से झूम उठा। उसने उन्हें गले लगाया। उस दढ़ियल ने कहा-‘मैंने इन्हें मवेशीखाने से नीलाम लिया है।

इसलिए ये मेरे बैल हैं। झूरी ने कहा -‘ये मेरे बैल हैं, क्योंकि ये मेरे द्वार पर खड़े हैं। किसी को मेरे बैलों को नीलाम करने का कोई भी हक नहीं है। लेकिन उस दढ़ियल ने झूरी की एक न सुनी। उसने उन्हें बलपूर्वक पकड़ना चाहा तो मोती ने उसे सींग चलाकर गाँव से बाहर कर दिया। इससे वह हारकर चला गया। मोती अकड़ता हुआ लौट आया। गाँव के लोग यह देखकर बाग-बाग हो गए। झूरी ने उन दोनों के नाँदों में खली, भूसा, चोकर और दाना भर दिया। उन्हें दोनों प्रसन्नतापूर्वक खाने लगे। झूरी उन्हें सहला रहा था।

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दो बैलों की कथा-कहानी संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

1. झरी के दोनों बैलों के नाम थे हीरा और मोती। दोनों पछाई जाति के थे। देखने में सुन्दर, काम में चौकस, डील में ऊँचे। बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था। दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे। एक-दूसरे के मन की बात कैसे समझ जाता था, हम नहीं कह सकते। अवश्य ही उनमें कोई ऐसी गुप्त शक्ति थी, जिससे जीवों में श्रेष्ठता का दावा करने वाला मनुष्य वंचित है। दोनों एक-दूसरे को चाटकर और सूंघकर अपना प्रेम प्रकट करते। कभी-कभी दोनों सींग भी मिला लिया करते थे-विग्रह के नाते में नहीं। केवल विनोद के भाव से, आत्मीयता के भाव से, जैसे दोस्तों में घनिष्टता होते ही धोल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।

शब्दार्थ :
पछाई-पश्चिम प्रदेश का। चौकस-चौकन्ना। विनिमय-लेन-देन, आदान-प्रदान। मूक-मौन। गुप्त-छिपी हुई। वंचित-न पाना, असमर्थ। विग्रह-झंगड़ा, तकरार। विनोद-मनोरंजन। आत्मीयता-लगाव, अपनापन। घनिष्ठता-निकटता। धोल-धप्पा-खुलापन। फुसफुसी-अस्थिर, कामचलाऊ।’

प्रसंग :
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘हिन्दी समान्य भाग-1′ में संकलित तथा मुंशी प्रेमचन्द लिखित कहानी ‘दो बैलों की कथा’ से अवतरित है। इसमें कहानीकार ने पछाई जाति के दो बैलों की अद्भुत विशेषताओं को बतलाने का प्रयास किया है।

व्याख्या :
कहानीकार का कहना है कि झूरी नामक किसी आदमी के पास पछाई जाति के दो विशेष बैल थे। एक का नाम था हीरा तो दूसरे का नाम था मोती। दोनों की सुन्दरता बहुत अधिक थी। उनका शारीरिक गठन और रूप मन को बार-बार छू लेने वाला था। वे देखने में सुन्दर तो थे ही, अपने काम को पूरा करने में तत्पर रहते थे। वे काम करते समय तनिक भी जी नहीं चुराते थे। वे एक-साथ कई सालों से रह रहे थे। इससे दोनों में बहुत गहरा प्रेम हो गया था। वे अपनी मौन भाषा में परस्पर अपना विचार व्यक्त करते रहते थे। इससे दोनों एक-दूसरे की बातों को खूब अच्छी तरह से समझ जाते थे। उन्हें इस तरह देखकर सबको हैरानी होती थी कि वे कैसे आपस की बातों को समझ लेते हैं। यह अनुमान ही लगाया जा सकता है कि मनुष्य दुर्लभ उनमें कोई अवश्य ही गुप्त शक्ति थी।

कहानीकार का पुनः कहना है हीरा और मोती का परस्पर प्रेम-व्यवहार खुला हुआ था। वे एक-दूसरे के पास बैठते-रहते। एक-दूसरे को चाटते-सूंघते थे। एक-दूसरे को सींग मिलाते थे। उनका यह परस्पर व्यवहार किसी भी दशा में परस्पर लड़ने-झगड़ने की मंशा से नहीं होता था। यह तो उनके परस्पर लगाव को मनोरंजन के रूप में बढ़ाने के लिए ही होता था। इस प्रकार उनकी दोस्ती बहुत घनी हो गई थी। उसमें खुलापन आ गया। उससे वह और टिकाऊ होने लगी थी। सच-मुच में इसके बिना दोस्ती ऐसी हल्की-हल्की-सी बनी रहती है, जिसके समाप्त होने की शंका बनी रहती है।

विशेष :

  1. पछाई जाति के बैलों का रोचक उल्लेख है।
  2. सच्ची दोस्ती की विशेषताओं को बतलाया गया है।
  3. ‘कुछ हल्की -सी’ में उपमा अलंकार है।
  4. सामाजिक शब्दावली है।
  5. वर्णनात्मक शैली है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) लेखक और रचना का नाम लिखिए।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का प्रमुख विषय क्या है?
(iii) पछाई जाति के बैलों की क्या विशेषताएँ होती हैं?
(iv) किस दोस्ती पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता?
उत्तर:
(i) लेखक का नाम-मुंशी प्रेमचन्द, रचना का नाम-‘दो बैलों की कथा’।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का प्रमुख विषय है-पछाई जाति के बैलों की विशेषताएँ बतलाना। लेखक ने इसे बड़े ही रोचक और सरस रूप में व्यक्त किया है। इससे आकर्षक जानकारी मिलती है।
(iii) पछाई जाति के बैलों की अनेक रोचक विशेषताएँ होती हैं. जैसे-देखने में सुन्दर, काम में चौकस, ऊँचे डीलडौल, परस्पर भाईचारा, घनी दोस्ती आदि।
(iv) जिस दोस्ती में आत्मीयता की कमी और भेदभाव हो, उस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) दोनों बैलों में भाईचारा क्यों हो गया था?
(ii) मनुष्य से वे दोनों वैल क्यों श्रेष्ठ थे?
(iii) दोनों बैलों में किस प्रकार की दोस्ती थी?
उत्तर:
(i) दोनों बैल बहुत दिनों से एक ही साथ रहते थे। इसलिए उनमें भाईचारा हो गया था।
(ii) दोनों बैल मूक भाषा में एक-दूसरे से विचार-विनिमय किया करते थे। ऐसी अद्भुत शक्ति जीवों में श्रेष्ठता का दावा करने वाले मनुष्य में नहीं थी। इस दृष्टि से वे दोनों बैल मनुष्यों में श्रेष्ठ थे।
(iii) दोनों बैलों में घनी और पक्की दोस्ती थी।

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2. संयोग की बात, झूरी ने एक बार मोई को ससुराल भेज दिया। बैलों को क्या मालूम, वे क्यों भेजे जा रहे हैं। समझे, मालिक ने हमें बेच दिया। अपना यों – बेचा जाना उन्हें अच्छा लगा या बुरा, कौन जाने, पर झूरी के साले गया को घर तक गोई ले जाने में दाँतों पसीना आ गया। पीछे से हाँकता तो दोनों दाएँ-बाएँ भागते, पगहिया पकड़कर आगे से खींचता तो दोनों पीछे को जाने लगते। मारता तो दोनों नीचे करके हँकारते। अगर ईश्वर ने उन्हें वाणी दी होती, तो झूरी से पूछते-तुम हम गरीबों को क्यों निकाल रहे हो? हमने तो तुम्हारी सेवा करने में कोई कसर नहीं . उठा रखी। अगर इतनी मेहनत से काम न चलता था तो और काम ले लेते। हमें . तो तुम्हारी चाकरी में मर जाना कबूल था। हमने कभी दाने-चारे की शिकायत नहीं की। तुमने जो कुछ खिलाया, वह सिर झुकाकर खा लिया, फिर तुमने हमें इस जालिम के हाथों क्यों बेच दिया।

शब्दार्थ :
संयोग-अचानक। गोई-दो बैलों की जोड़ी। दाँतों पसीना आना-(मुहावरा)-अत्यधिक मेहनत करना। दाएँ-बाएँ-इधर-उधर। पगहिया-पशुओं के गले में बाँधनेवाली रस्सी। हँकारते-हुँकारते, जोर की आवाज करते। वाणी-जबान। कसर-कमी। चाकरी-नौकरी। कबूल-मंजूर, स्वीकार। जालिम-अत्याचारी, जुल्मी, निर्दयी।

प्रसंग :
पूर्ववत्! इसमें कहानीकार ने पछाई जाति के दो बैलों की सच्ची भावनाओं पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है।

व्याख्या :
कहानीकार का कहना है कि एक दिन अचानक झूरी ने अपने उन प्यारे दोनों बैलों हीरा और मोती को अपनी ससुराल भेज दिया। उसका साला गया जब उन दोनों को लेकर चला, तो वे दोनों यह बिलकुल ही नहीं समझ पा रहे थे कि वे अपने मालिक झूरी के पास से क्यों दूसरे मालिक के पास भेजे जा रहे हैं? क्या उनके मालिक ने उन्हें बेच दिया है या और कोई बात है। अगर उनके मालिक ने उन्हें बेच दिया है तो यह उनके लिए बहुत ही अफसोस की बात है। उन्हें इस बात का बेहद दुख है। इस प्रकार सोच-समझ कर वे अपने मालिक के साले गया के साथ जाना अनुचित समझ लिये। फलस्वरूप वे उसके साथ जाने से कतराने लगे। जब वह उन्हें आगे बढ़ाने के लिए पीछे से हाँकता तो वे इधर-उधर होने लगते। पगहिया पकड़कर आगे खींचता तो वे पीछे की ओर भागने लगते। उसके मारने पर वे दोनों जोर-जोर से हुँकारते। इस तरह उसे उन दोनों को अपने घर ले आने में नाकों चने चबाना पड़ा।

कहानीकार का पुनः कहना है कि झूरी के वे दोनों बैल हीरा और मोती अपने मालिक की इस अचानक बेरहमी को बिल्कुल ही नहीं समझ पा रहे थे कि वह अब उन्हें बेसहारा क्यों बना रहा है? अगर वे कुछ बोल पाते, तो वे उससे यह अवश्य पूछते कि क्या उन्होंने उसके काम सच्चाई से नहीं किए। अगर नहीं तो वह उनसे फिर से और सारे काम लेता। वे तो उसका ही काम सच्चाई से करते हुए अपनी पूरी-की-पूरी जिन्दगी बिता देना चाहते थे। उन्होंने तो उससे कभी भी खाने-पीने की कुछ भी शिकायत नहीं की। उन्हें जो कुछ मिला, चुपचाप स्वीकार कर लिया। फिर उनसे ऐसी कौन-सी गलती हुई कि उसने इस बेरहम के गले लगा दिया।

विशेष :

  1. पछाई जाति के बैलों की सच्चाई पर प्रकाश डाला गया है।
  2. भाषा सरल है।
  3. मार्मिक कथन है।
  4. मुहावरों के सटीक प्रयोग हैं।
  5. यह अंश अधिक रोचक है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) लेखक और रचना का नाम लिखिए।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का प्रमुख विषय क्या है?
(iii) किसने किसे और क्यों ससुराल भेज दिया?
(iv) गया को घर तक गोई को ले जाने में दाँतों पसीना क्यों आ गया?
(v) दोनों बैलों को अपने मालिक से क्या शिकायत थी?
उत्तर:
(i) लेखक का नाम-मुंशी प्रेमचन्द, रचना का नाम-‘दो बैलों की कथा’।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का प्रमुख विषय है-पछाई जाति के दो बैलों का अपनी स्वामि-भक्ति के भावों को प्रकट करना।
(iii) झूरी ने अपने दोनों बैल हीरा और मोती को अपनी ससुराल अपने साला गया के कहने पर भेज दिया।
(iv) गया को घर तक गोई को ले जाने में दाँतों पसीना आ गया। ऐसा इसलिए कि गोई किसी प्रकार से वहाँ जाने में राजी नहीं थे। वे इधर-उधर या आगे-पीछे भाग-भागकर गया को काफी परेशान कर डाले थे।
(iv) दोनों बैलों को अपने मालिक झूरी से कई शिकायत थीं-क्या उन दोनों ने उसके काम ईमानदारी से नहीं किए। अगर कोई कमी थी तो और काम लेते। उन्होंने उससे कभी कोई शिकायत नहीं की। वे तो जीवनभर उसी के यहाँ काम करते हुए मर जाना अच्छा समझते थे। उसने जो कुछ खिलाया, वे चुपचाप खा लिये। फिर उसने इस निर्दयी के गले में क्यों डाल दिया।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) बैलों ने क्या समझा?
(ii) बैलों ने गया का विरोध क्यों किया?
(iii) बैलों की झूरी से शिकायत में कौन-से भाव थे?
उत्तर:
(i) बैलों ने यह समझा कि उनके मालिक ने उन्हें किसी जालिम के हाथ बेच दिया है।
(ii) बैलों ने गया का विरोध किया। ऐसा इसलिए कि वे उसके साथ बिलकल ही नहीं जाना चाहते थे।
(iii) बैलों की अपने मालिक झूरी से शिकायत में सच्ची स्वामि-भक्ति के भाव भरे थे। उनके वे भाव बड़े ही आत्मीय, सरस और मेल-मिलाप के थे।

3. दोनों दिन-भर जोते जाते, डण्डे खाते, अड़ते। शाम को थान पर बाँध दिए। जाते और रात को वही बालिका उन्हें दो रोटियाँ खिला जाती। प्रेम के इस प्रसाद की यह बरकत थी कि दो-दो गाल भूसा खाकर भी दुर्बल न होते थे, मगर दोनों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था।

शब्दार्थ :
अड़ते-विरोध करते। थान-बूँटा, बैलों के रहने या बैठने का स्थान।। प्रसाद-भेंट। बरकत-शक्ति। दुर्बल-कमजोर। विद्रोह-विरोध।

प्रसंग :
पूर्ववत्! इसमें कहानीकार ने झूरी के दोनों बैलों हीरा और मोती की मेहनत और सहनशीलता को बतलाने का प्रयास किया है।

व्याख्या :
कहानीकार का कहना है कि झूरी के दोनों बैल हीरा और मोती उसके साले के यहाँ कड़ी मेहनत करने लगे। उसका साला गया उनसे खूब डटकर काम लेता था। वह उन्हें सुबह से शाम तक हल में जोतता था। उन पर जोर-जोर से डण्डे बरसाता था। इससे वे दोनों क्रोधित होकर उसका बार-बार विरोध करते थे। फिर भी वह उनके प्रति जरा भी नरमी नहीं दिखाता था। इस प्रकार उनसे डटकर काम लेने के बाद वह उन्हें उनके रहने-बैठने की जगह पर बाँध देता था। रात होने पर पहले की तरह उसकी लड़की उन्हें चुपके से दो रोटियाँ खिलाकर चली जाती थी। दोनों उसके द्वारा दी हुई उन रोटियों को प्रसाद की तरह बड़े ही प्रेमभाव से लेते थे। उससे उन्हें एक ऐसी अद्भुत सहनशक्ति मिलती थी कि वे रूखा-सूखा भूसा-चारा खाकर भी अपनी कमजोरी कुछ भी अनुभव नहीं करते थे। ऐसा होने पर भी गया के प्रति उनके मन में अधिक घृणा और विरोध भरा हुआ था।

विशेष :

  1. बैल जैसे कड़ी मेहनत करने वाले पशुओं के प्रति मनुष्य की कठोरता का उल्लेख है।
  2. बाल स्वभाव पशु-प्रेम का उल्लेख रोचक रूप में है।
  3. उर्दू-हिन्दी की शब्दावली है।
  4. शैली भावात्मक है।
  5. भाषा मुहावरेदार है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) लेखक और रचना का नाम लिखिए।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का मुख्य भाव क्या है?
(iii) ‘प्रेम के इस प्रसाद की यह बरकत थी’ ऐसा लेखक ने क्यों कहा है?
उत्तर:
(i) लेखक का नाम-मुंशी प्रेमचन्द, रचना का नाम-‘दो बैलों की कथा’।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का मुख्य भाव यह है कि मनुष्य बैल जैसे बेजुबान पशुओं के प्रति अपने स्वार्थ में अंधा होकर उनकी स्वामि-भक्ति को नहीं देख पाता है। उसे तो बच्चों की निःस्वार्थमयी आँखें देख और समझकर उनसे सहानुभूति रहती है।
(iii) प्रेम के इस प्रसाद की यह बरकत थी’ ऐसा लेखक ने इसलिए कहा। है कि बालिका द्वारा खिलाई गई उन दो रोटियों से उन दोनों बैलों को अद्भुत आत्मीयता का अनुभव होता था। उससे उनमें गया की कठोरता को सह लेने की पूरी-पूरी ताकत आ जाती थी।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) दोनों बैलों पर गया किस प्रकार जुल्म करता था?
(ii) दोनों बैलों के प्रति कौन तथा कैसे सहानुभूति प्रकट करता था?
(iii) दोनों बैलों की आँखों में किसके प्रति विद्रोह भरा था?
उत्तर:
(i) दोनों बैलों पर झूरी का साला गया खूब जुल्म करता था। वह उन्हें सुबह से शाम तक हल में जोतता था। इसके बावजूद वह उन पर जोरों से डण्डे बरसाता था। शाम होने पर वह उनको रूखा-सूखा चौरा-भूसा डाल देता था।
(ii) दोनों बैलों के प्रति गया की लड़की चुपके से रात को दो रोटियाँ खिलाकर अपनी सहानुभूति प्रकट करती थी।
(iii) दोनों बैलों की आँखों में गया के प्रति अधिक विद्रोह भरा हुआ था।

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4. गया हड़बड़ाकर भीतर से निकला और बैलों को पकड़ने चला। वे दोनों भागे। गया ने पीछा किया। और भी तेज हुए। गया ने शोर मचाया। फिर गाँव के कुछ आदमियों को भी साथ लेने के लिए लौटा। दोनों मित्रों को भागने का मौका मिल गया। सीधे दौड़ते चले गए। यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा। जिस परिचित मार्ग से आए थे, उसका यहाँ पता न था। नए-नए गाँव मिलने लगे। तब दोनों एक खेत के किनारे खड़े होकर सोचने लगे, अब क्या करना चाहिए।

शब्दार्थ :
हड़बड़ाकर-घबड़ाकर। ज्ञान-पता। परिचित-जाना-पहचाना

प्रसंग :
पूर्ववत्! इसमें कहानीकार ने गया के घर हीरा और मोती के भागने और उनके भटक जाने का उल्लेख किया है।

व्याख्या :
कहानीकार का कहना है कि गया की लड़की ने रात को हीरा और मोती के गले में बँधी हुई रस्सियों को खोलकर उन्हें चुपके से भाग जाने के लिए कहा। इसे सुनते ही दोनों वहाँ से भाग खड़े हुए। इसके बाद उस लड़की ने जोर से चिल्लाते हुए कहा कि दोनों बैल भागे जा रहे हैं। इसे सुनकर गया हड़बड़ाकर भीतर से दौड़ा। उसने उन दोनों बैलों को पकड़ने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे उससे दूर निकलने लगे। गया ने थोड़ा और जोर लगाया तो वे और तेजी से भागने लगे।

अपनी पकड़ से उन दोनों को बाहर होते हुए देखकर उसने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया। उसकी आवाज सुनकर लोग दौड़े-दौड़े उसके पास आ गए। उसने कुछ आदमियों को अपने साथ लेकर उन दोनों बैलों का पीछा किया। इतने समय में वे दोनों काफी दूर निकल गए। वे इतनी तेजी से भाग रहे थे कि वह सही-गलत रास्ते का चुनाव नहीं कर पाए। यहाँ तक कि वे झूरी के घर से जिस रास्ते से होकर आए थे, उससे भी भटक गए। अब उनके सामने सब कुछ नया-नया और अनजान था। इससे वे घबड़ा गए। आगे अब क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए, इस सोच-विचार में वे एक खेत के किनारे खड़े हो गए।

विशेष :

  1. सारा वर्णन स्वाभाविक रूप में है।
  2. भाषा सरल है।
  3. बोधगम्य शैली है।
  4. अभिधा शब्द-शक्ति है।
  5. वाक्य-गठन छोटे-छोटे हैं।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) लेखक और रचना का नाम लिखिए।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का प्रमुख विषय क्या है?
(iii) दोनों बैल किस सोच-विचार में पड़ गए?
उत्तर:
(i) लेखक का नाम-मुंशी प्रेमचन्द, रचना का नाम- ‘दो बैलों की कथा’।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का प्रमुख विषय है-झूरी के दोनों बैलों की खटाई में पड़ी हुई आजादी का उल्लेख।
(iii) दोनों बैंल अपने जाने-पहचाने रास्ते से भटक गए थे। अब वे इस सोच-विचार में पड़ गए कि वे अब किधर जाएँ और. क्या करें।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न.
(i) गया दोनों बैलों को क्यों नहीं पकड़ पाया?
(ii) दोनों बैल अपने परिचित रास्ते से क्यों भटक गए?
(iii) दोनों बैल किस निष्कर्ष पर पहुँचे?
उत्तर:
(i) गया दोनों बैलों को नहीं पकड़ पाया। यह इसलिए कि वे दोनों झांनी तेजी से भाग गए कि वे उसकी पकड़ से बाहर हो गए।
(i) दोनों बैल परिचित रास्ते से इसलिए भटक गए कि झूरी का साला गया। उन्हें पकड़ने के लिए शोर मचाने लगा जिससे गाँव के कई लोग इकट्ठा होकर उन्हें पकड़ने के लिए दौड़े। जल्दी भागने के चक्कर में वे रास्ता भटक गए।
(iii) दोनों बैल इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि अब उन्हें अच्छी तरह से सोच-विचार कर ही कदम बढ़ाने चाहिए।

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5. सहसा एक दढ़ियल आदमी, जिसकी आँखें लाल थीं और मुद्रा अत्यन्त कठोर, आया और दोनों मित्रों के कूल्हों में उँगली गोदकर मुंशी जी से बातें करने लगा। उसका चेहरा देखकर अन्तर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे। वह कौन है और उन्हें क्यों टटोल रहा है, इस विषय में उन्हें कोई सन्देह न हुआ। दोनों ने एक-दूसरे को भीत नेत्रों से देखा और सिर झुका लिया।

शब्दार्थ :
सहसा-अचानक। मुद्रा-भाव। गोदकर-घुसाकर। अन्तर्ज्ञान-आत्मज्ञान, भीतरी ज्ञान। भीत-डरे हुए।

प्रसंग :
पूर्ववत्! इसमें कहानीकार ने मवेशीखाने से दोनों बैलों के नीलाम होने के समय का उल्लेख किया है।

व्याख्या :
कहानीकार का कहना है कि मवेशीखाना में पड़े हुए झूरी के दोनों बैलों हीरा और मोती को एक सप्ताह हो गया। एक दिन उनकी नीलामी होने लगी। यों तो उन्हें खरीदने के लिए कई लोग आए। उन्हें कमजोर और मरियल देखकर किसी की हिम्मत उन्हें खरीदने की नहीं होती थी। उनमें से एक दाढ़ीवाला आदमी आया। उसकी आँखें लाल-लाल थीं। उसकी मुद्रा बड़ी कठोर और डरावनी थी। आते ही उसने उन दोनों के कूल्हों में अपनी उँगली को घुसा दिया। फिर वह उनको ख़रीदने के लिए मवेशीखाने के मुंशी से बातें करने लगा। वे दोनों उस दाढ़ीवाले आदमी को देखकर डर गएं। उन्होंने अपने आत्मज्ञान से उसकी बेरहमी को समझ लिया। वे यह भी समझ गए कि वह उनका क्या करेंगा? उसकी मंशा क्या है? अपने ऊपर आने वाली किसी विपदा का अनुमान कर दोनों एक-दूसरे को डरी-डरी आँखों से देखा। फिर इशारों-इशारों में उसे भगवान भरोसे छोड़कर सिर को झुका लिया।

विशेष :

  1. बैलों की बेबसी का उल्लेख है।
  2. भयानक रस का प्रवाह है
  3. भावात्मक शैली है।
  4. देशज शब्दों के प्रयोग हैं।
  5. शब्द-प्रयोग सरल है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) लेखक और रचना का नाम लिखिए।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का प्रमुख विषय प्रया है?
(iii) दढ़ियल आदमी कैसा था?
(iv) दोनों बैलों ने दढ़ियल आदमी को क्या समझा?
उत्तर:
(i) लेखक का नाम-मुंशी प्रेमचन्द, रचना का नाम-‘दो बैलों की कथा’।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का प्रमुख विषय. किसी जुल्मी द्वारा झूरी के दोनों बैलों की नीलामी किए जाने के कारणं दोनों की मजबूरी का उल्लेख करना है।
(iii) दढ़ियल आदमी बड़ा ही भयानक और कठोर था।
(iv) दोनों बैलों ने दढ़ियल आदमी को कसाई समझा।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) दढ़ियल आदमी ने हीरा और मोती को किस प्रकार टटोला?
(ii) दोनों मित्रों के दिल क्यों काँप उठे?
(iii) किस बात का दोनों मित्रों को कोई सन्देह नहीं हुआ?
उत्तर :
(i) दढ़ियल आदमी ने हीरा और मोती को उनके कूल्हों में उँगली गोदकर टटोला।
(ii) दोनों मित्रों ने अपने अन्तर्ज्ञान से यह समझ लिया कि वह दढ़ियल आदमी बहुत ही कठोर है।
(iii) दोनों मित्रों को इस बात का कोई सन्देह नहीं हुआ कि वह दढ़ियल आदमी उन्हें मार डालेगा।

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MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 11 हिम-प्रलय

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 11 हिम-प्रलय (विज्ञान कथा, डॉ. जयन्त नार्लीकर)

हिम-प्रलय पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

हिम-प्रलय लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1:
हिमपात का मुकाबला कौन-कौन से देश नहीं कर सके थे?
उत्तर:
हिमपात का मुकाबला जापान, यूरोप, रूस, कनाडा जैसे प्रगत राष्ट्र नहीं कर सके।

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प्रश्न 2.
डॉ. वसंत चिटणीस का कौन-सा सिद्धान्त विश्वविख्यात हुआ?
उत्तर:
डॉ. वसंत चिटणीस का यह सिद्धान्त विश्वविख्यात हुआ-“हिम प्रलय का आगमन-भारतीय वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी!”

प्रश्न 3.
राजीव शाह ने अपनी डायरी में क्या लिखा?
उत्तर:
राजीव शाह ने अपनी डायरी में लिखा:
हिम-प्रलय के आगमन की आशंका किसी को चिंतित नहीं कर रही थी। बंबई को भारत की अस्थायी राजधानी बनाने की बात सरकारी लाल फीताशाही में सिमट कर रह गई थी। “कुछ पराक्रमी राजाओं ने इन्द्र पर चढ़ाई की थी। ऐसी हमारी पौराणिक कथाओं में लिखा है। वही बात आज के आक्रमण को देखकर याद आ रही है। लेकिन क्या आज यह चढ़ाई सफल होगी?”

प्रश्न 4.
आकाश में ऊर्जा का वातावरण बनाना क्यों आवश्यक था?
उत्तर:
आकाश में ऊर्जा का वातावरण बनाना आवश्यक था। यह इसलिए कि प्रक्षेपण अस्त्रों के द्वारा किए जाने वाले विस्फोटों का उपयोग किया जा सके।

प्रश्न 5.
आकाश में अग्निबाणों की सफलता का पता कैसे चला?
उत्तर:
बटन दबाते ही एक के बाद एक अग्निबाण अंतरिक्ष की ओर लपक पड़े। इस बार इन अग्निबाणों का उद्देश्य तापमान पर नियंत्रण पाना था, न कि तापमान या मौसम का पूर्वानुमान बताना। इससे आकाश में अग्निदाणों की सफलता का पता चला।

हिम-प्रलय दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
हिमपात से बचने की डॉ. चिटणीस की क्या योजना थी?
उत्तर:
हिमपात से बचने की डॉ. चिटणीस की यह योजना थी कि हिम-प्रलय प्रतिबंधक उपाय है, वह महंगा है, लेकिन फिर भी उस पर अभी से अमल किया जाना चाहिए।

प्रश्न 2.
डॉ. वसंत चिटणीस ने क्या चेतावनी दी थी?
“अबकी गर्मियों में इस बर्फ को भूलिए नहीं क्योंकि अगली सर्दियाँ इतनी भयंकर होंगी कि बर्फ पिघलने का नाम ही नहीं लेगी। हिम-प्रलय प्रतिबंधक उपाय है, वह महंगा है, लेकिन फिर भी उस पर अभी से अमल कीजिए।”

प्रश्न 3. अन्य वैज्ञानिकों ने डॉ. बसंत की बात पर ध्यान क्यों नहीं दिया?
उत्तर:
कुछ ऐसे वैज्ञानिक भी थे, जो अब भी यह मानते थे कि न तो यह हिम-प्रलय है और न ही उसका प्रारंभ । वसंत चिटणीस का सिद्धान्त उन्हें मान्य नहीं था। उनकी यही धारणा थी कि शीत लहर जैसे आई वैसी चली जाएगी और तापमान सामान्य हो जाएगा। किंतु ठंड की चपेट में आए देशों के गले यह बात उतारना कठिन था।

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प्रश्न 4.
डॉ. वसंत को टैलेक्स द्वारा क्या संदेश मिला?
उत्तर:
डॉ. वसंत को टेलैक्स द्वारा यह संदेश मिला:
“आपके कथनानुसार अंटार्कटिक में बर्फ के फैलाव में वृद्धि हुई है और वहाँ के पानी की परत का तापमान भी दो अंश कम पाया गया है। अपने सर्वेक्षण के आधार पर मैं यह कह सकता हूँ कि यह परिवर्तन पिछले दो वर्षों में हुआ है।”

प्रश्न 5.
डॉ. वसंत ने राजीव शाह को कहाँ और क्यों जाने की सलाह दी?
उत्तर:
डॉ. वसंत ने राजीव शाह को अगले साल इंडोनेशिया चले जाने की सलाह दी। यह इसलिए कि भूमध्य रेखा के पास ही बचने की कुछ गुंजाइश है।

हिम-प्रलय भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
इस बार की गर्मियाँ उस दीपक की भांति थीं, जो बुझने से पहले एक बार अधिक रोशनी देता है।
उत्तर:
उपर्युक्त वाक्य के द्वारा लेखक ने यह भाव प्रकट करना चाहा है कि अत्यंत भयंकर गर्मी के कारण सारा वातावरण अग्निमय हो जाता है। पृथ्वी की तपन को सूरज का प्रकाश अपनी चरम सीमा पर बढ़ाकर आग की लौ की तरह वातावरण को असह्य बना देता है। इस प्रकार के वातावरण को देखकर ऐसा लगने लगता है कि पूरा वातावरण एक ऐसे दीपक के समान है, जो रोशनी करते-करते बुझ रहा है। लेकिन वह बुझने से पहले अपनी पूरी शक्ति को एक बड़ी लौ के रूप में लगा देता है।

हिम-प्रलय भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ बताते हुए वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
चार-चाँद लगाना, नाक रगड़ना, कलेजा काँपना, पसीना छूटना, पाँव पसारना।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 11 हिम-प्रलय img-1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित सामासिक शब्दों का विग्रह कर समास का नाम लिखिए।
हिम-प्रलय, समुद्र-विज्ञान, विश्वविख्यात, दुष्चक्र, वसंत ऋतु, हिमयुग।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 11 हिम-प्रलय img-2

प्रश्न 3.
‘सत्य’ के पूर्व ‘अ’ उपसर्ग जोड़ने से ‘असत्य’ शब्द बनता है। ‘अ’ उपसर्ग से बनने वाले पाँच शब्द पाठ में से छाँटकर लिखिए?
उत्तर:
‘अ’ उपसर्ग से बनने वाले पाँच शब्द –

  1. अमल
  2. अस्थायी
  3. अप्रिय
  4. अमान्य
  5. अदावत।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्यय अलग कीजिए।
वैज्ञानिक, कीर्तिमान, तकनीकी, नैतिकता, भारतीय।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 11 हिम-प्रलय img-3

प्रश्न 5.
पाठ में आए आगत (विदेशी) शब्दों को छाँटकर उनके मानक हिन्दी शब्द रूप लिखिए।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 11 हिम-प्रलय img-4

हिम-प्रलय अपठित गद्यांश

विज्ञान एक दोधारी तलवार है। इसके अनगिनत लाभ हैं तो अनचाही हानियाँ भी। विज्ञान ने एक ओर मनुष्य को तमाम सुविधाएँ दी हैं तो दूसरी ओर उसके मन की शांति छीन ली है। यदि उत्पादन में वृद्धि हुई है तो वहीं मनुष्य के हाथ से काम छीनकर बेरोजगारी भी बढ़ाई है। संसार के निर्माण और ध्वंस की अपार शक्ति विज्ञान के पास है। विज्ञान ने मनुष्य के विवेक पर पर्दा डाल दिया है पर गहराई से देखा जाए तो इसमें दोष विज्ञान का नहीं है। दोप वस्तुतः मनुष्य की बुद्धि का है जो उसकी तृष्णाओं और इच्छाओं को विस्तार देकर विज्ञान का सदुपयोग करने के स्थान पर दुरुपयोग सिखा रही है। यदि विज्ञान विभीषिका से बचाता है तो मनुष्य को अपनी सोच में व्यापक परिवर्तन करना पड़ेगा।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

  1. इस गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
  2. गद्यांश का सार-संक्षेप अपने शब्दों में लिखिए?
  3. विज्ञान से होने वाली हानियों के लिए कौन दोषी है?
  4. वैज्ञानिक विभीषिकाओं से कैसे बचा जा सकता है?

उत्तर:

1. ‘विज्ञान और मनुष्य’।

2. विज्ञान के दो पहलू हैं-लाभ और हानि। विज्ञान से मनुष्य को अनेक लाभ हैं तो अनेक हानियाँ भी हैं। असल बात यह है कि विज्ञान ने मनुष्य के विवेक पर पर्दा डाल दिया है। इससे मनुष्य विज्ञान का सदुपयोग नहीं, अपितु दुरुपयोग करने लगा है। इससे बचने के लिए उसे अपनी सोच-समझ में बदलाव लाना ही होगा।

3. विज्ञान से होने वाली हानियों के लिए मनुष्य दोषी है।

4. वैज्ञानिक विभीषिका से बचने के लिए मनुष्य को अपनी सोच-समझ में व्यापक बदलाव लाना होगा।

हिम-प्रलय योग्यता विस्तार

प्रश्न 1.
‘ग्रीन हाउस प्रभाव’ के कारण और निदान विषय पर एक चार्ट तैयार कीजिए तथा कक्षा में उसका प्रदर्शन कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/ अध्यापिका की सहायता से हल करें।

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प्रश्न 2.
हिम-प्रलय की तरह जल-प्रलय भी एक वैज्ञानिक संभावना या पृथ्वी पर एक आसन्न संकट है। जल-प्रलय की स्थिति में उसका सामना कैसे किया जा सकता है? इस पृष्ठभूमि पर एक विज्ञान-कथा या फंतासी लिखने का प्रयास कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/ अध्यापिका की सहायता से हल करें।

प्रश्न 3.
पिछले दस वर्षों में भारत में कौन-कौन-सी बड़ी प्राकृतिक आपदाएँ आई हैं उनको वर्ष के क्रमानुसार सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/ अध्यापिका की सहायता से हल करें।

हिम-प्रलय परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

हिम-प्रलय लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
डॉ. वसंत चिटणीस के हर वक्तव्य, हर टिप्पणी को महत्त्व क्यों प्राप्त हो गया?
उत्तर:
डॉ. वसंत चिटणीस के हर वक्तव्य, हर टिप्पणी को महत्त्व प्राप्त हो गया। यह इसलिए कि सभी ने उनकी बात मान ली। सामान्य आदमी भी उनकी बातों का महत्त्व समझ रहा था।

प्रश्न 2.
डॉ. वसंत की चेतावनी लोगों को खोखली क्यों लगी?
उत्तर:
डॉ. वसंत की यह चेतावनी लोगों को खोखली लगी क्योंकि अप्रैल में वसंत ऋतु का आगमन ठीक समय पर हुआ था और जून-जुलाई में पृथ्वी की तपन बढ़ाने के लिए सूर्य-प्रकाश अपनी चरम सीमा पर था। सभी लोग मानकर चल रहे थे कि पिछली सर्दियाँ भले ही भयानक रही हों, लेकिन अब फिर वही हाल नहीं होगा।

प्रश्न 3.
डॉ. चिटणीस ने अपनी दराज से क्या निकाला?
उत्तर:
डॉ. चिटणीस ने अपनी दराज से एक टंकलिखित लेख निकाला, जिसका शीर्षक था-‘अभियान : इन्द्र पर आक्रमण’।

प्रश्न 4.
क्या इन्द्र पर आक्रमण सफल होगा? इस प्रश्न का उत्तर कब मिलने लगा था?
उत्तर:
सितम्बर में इस प्रश्न का उत्तर मिलने लगा था। उत्तरी हिन्दुस्तान में जमीन की बर्फ पिघलने लगी। फ्लोरिडा से कैलिफोर्निया के बीच की जमीन बर्फ के सफेद बुरखे से धीरे-धीरे झाँक रही थी। आखिर बर्फ पिघलने लगी थी।

हिम-प्रलय दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नवंबर माह में क्या घटना घटी?
उत्तर:
बंबईवालों ने 2 नवंबर को एक बहुत बड़ा अभूतपूर्व दृश्य देखा। वह यह कि आकाश में पूरे दिन पक्षी उड़ते रहे। वे वायुसेना की किसी कवायद की तरह बहुत ही अनुशासन में उड़ रहे थे। हर रोज की तरह उस दिन कौए गायब हो रहे थे। वे सभी पक्षी दक्षिण की ओर जा रहे थे। 4 नवंबर को अंतरिक्ष में स्थिर अनेक उपग्रहों ने संदेश देने शुरू कर दिए थे कि पृथ्वी के आस-पास वायुमंडल में हिमपात के आसार नजर आ रहे हैं। अगले चौबीस घंटों में जगह-जगह बर्फ गिरने की संभावना है। इससे पहले पक्षियों को खतरे का अंदाज हो चुका था। वे भूमध्य रेखा तक सुरक्षित पहुँच चुके थे।

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प्रश्न 2.
हिमपात ने होम्स के विचार किस प्रकार बदल डाले थे?
उत्तर:
हिमपात ने होम्स के विचार भी बदल डाले थे। वरना राजीव की इस सूचना को वे तुरन्त अमान्य कर देते। वसंत चिटणीस तीन-चार सालों से जिस हिमप्रलय की पूर्व सूचना दे रहे थे, वह तो आन खड़ा था। इसलिए इससे बचने का उनके पास यदि उपाय है तो उस पर विचार होना ही चाहिए। होम्स ने बात मान ली और दो ही दिन बाद राजीव शाह को लेकर होम्स बांडुंग गए। लेकिन क्या हम वास्तव में इस विपदा पर विजय पा सकेंगे? उनके मन में अभी भी थोड़ी शंका थी।

प्रश्न 3.
डॉ. वसंत चिटणीस की दूसरी क्या सताने लगी थी?
उत्तर:
प्रकृति और इंसान के बीच छिड़े युद्ध में इंसान की जीत हुई थी, लेकिन अब उसे अनेक समस्याओं का सामना करना था। बर्फ पिघलने से ‘न भूतो न भविष्यति’ बाढ़ आने वाली थी। पृथ्वी की जनसंख्या आधी हो चुकी थी। अनेक बहुमूल्य चीजें इसी आक्रमण में नष्ट हो गई थीं। इस एकता का परिचय इंसान ने इंद्र पर आक्रमण के दौरान दिया था, क्या?

प्रश्न 4.
‘हिम-प्रलय’ विज्ञान-कथा के द्वारा लेखक क्या संदेश देना चाहता है?
उत्तर:
इस विज्ञान कथा में प्रकृति असन्तुलन से उत्पन्न समस्या को आधार बनाया गया है। प्राकृतिक आपदाएँ कभी भी, किसी भी देश पर आ सकती हैं। ऐसी स्थित में यदि यथासमय उचित प्रयास नहीं किए गए तो महाविनाश की स्थिति निर्मित हो सकती हैं। विकसित कहे जाने वाले राष्ट्र भी इन आपदाओं से संघर्प करम में विफल हो सकते हैं। मानव जाति का अस्तित्व बचाए रखने के लिए सभी राष्ट्रों को आपसी मतभेद भुलाकर सामूहिक रूप से प्रयास करना चाहिए। इस पाठ के माध्यम से लेखक हमें यही संदेश देना चाहता है।

हिम-प्रलय लेखक-परिचय

प्रश्न 1.
डॉ. जयन्त नार्लीकर का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनके महत्त्व पर प्रकाश डालिए?
उत्तर:
जीवन-परिचय:
वैज्ञानिक लेखन के क्षेत्र में डॉ. जयन्त नार्लीकर का स्थान प्रमुख है। उनका जन्म महाराष्ट्र के कोल्हापुर में 1938 में हुआ था। उनकी आरम्भिक शिक्षा स्थानीय विद्यालय में हुई। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। इसके बाद उन्होंने सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक फ्रेड होयल के साथ खगोल सम्बन्धित क्षेत्र में अनेक महत्त्वपूर्ण शोध कार्य किया। इसके कुछ समय बाद उन्होंने भारत की शोध संस्था ‘टाटा इन्स्टीट्यूट ऑफ फण्डामेन्टल रिसर्च’ में भी अनेक शोध कार्य किए।

रचनाएँ:
डॉ. जयन्त नार्लीकर ने अपने अनुसंधान कार्य के साथ-साथ हिन्दी और मराठी में अनेक विज्ञान कथाएँ और उपन्यास लिखे हैं। उनकी ‘आगन्तुक’ ‘धूमकेतु’ ‘विज्ञान’ : ‘मानव’, ब्रह्माण्ड’ आदि प्रमुख साहित्यिक रचनाएँ हैं।

महत्त्व:
डॉ. जयन्त नार्लीकर को वैज्ञानिक खोजों के लिए ‘स्मिथ पुरस्कार’, ‘एडम्स पुरस्कार’ तथा ‘शान्ति स्वरूप भटनागर पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। भारत सरकार द्वारा उनको ‘पद्म विभूषण’ की उपाधि से विभूषित किया गया है।

हिम-प्रलय पाठ का सारांश

प्रश्न 1.
डॉ. जयन्त नार्लीकर लिखित ‘हिम-प्रलय’ विज्ञान-कथा का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
डॉ. जयन्त नार्लीकर लिखित ‘हिम-प्रलय’ एक विज्ञान-कथा है। इसमें लेखक ने ‘हिम-प्रलय’ से होने वाले महाविनाश को रेखांकित करने का प्रयास किया है। इस विषय में लेखक का कहना है कि ‘हिम-प्रलय का आगमन-भारतीय वैज्ञानिक की भविष्यवाणी’ राजीव शाह के इस लेख की अधिक चर्चा हो रही थी। लेकिन कुछ वैज्ञानिक इसे हिम-प्रलय मानने को तैयार नहीं थे।

विदेशी पत्रकारों से एक भेटवार्ता में डॉ. वसंत चिटणीस ने चेतावनी दी थी-“अब की गर्मियों में इस बर्फ को भूलिए नहीं! क्योंकि अगली सर्दियाँ इतनी भयंकर होंगी कि बर्फ पिघलने का नाम ही नहीं लेगी। हिम-प्रलय प्रतिबंधक उपाय है, वह महंगा है, लेकिन फिर भी उस पर अभी से अमल कीजिए।” लेकिन डॉ. वसंत की इस चेतावनी पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

इसका मुख्य कारण था कि उस समय मौसम सुहावना था। हमेशा की तरह भारत में मानसून पूरे जोरों पर था। फिर भी डॉ. वसंत बार-बार चेतावनी दे रहे थे जिसे कोई नहीं सुन रहा था। केवल राजीव शाह ही उनके विश्लेषण से सहमत थे। जब डॉ. वसंत ने अपने नाम समुद्र-विज्ञान के एक विश्वविख्यात संस्थान के संचालक द्वारा भेजे गए संदेश को राजीव शाह को पढ़कर सुनाया। राजीव शाह उसे सुनकर हैरान हो गए। डॉ. वसंत ने राजीव शाह को सलाह दी कि वह आने वाले साल इंडोनेशिया चला जाए। ऐसा इसलिए कि भूमध्य रेखा के पास ही बचने की कुछ गुंजाइश है। वह तो बांडुंग जाने ही वाला है।

बम्बई वालों ने 2 नवंबर को आकाश का एक अपूर्व दृश्य देखा कि पूरे दिन आकाश में पक्षी उड़ते रहे। सभी पक्षी दक्षिण की ओर जा रहे थे। 4 नवंबर को अंतरिक्ष में स्थित उपग्रहों ने संदेश दिया- “पृथ्वी के इर्द-गिर्द वायुमंडल में हिमपात के आसार नजर आ रहे हैं। अगले चौबीस घंटों में जगह-जगह बर्फ गिरने की संभावना है।” इससे पहले पक्षी खतरे का अनुमान लगाकर भूमध्य रेखा तक सुरक्षित पहुँच चुके थे।

अनेक शहरों में हुए भीषण हिमपात ने चारों ओर तबाही मचा दी। जापान, रूस, यूरोप, कनाडा जैसे विकसित देश भी इस तबाही से नहीं बच सके थे। अमेरिकी ऊर्जा समिति के सदस्य रिचर्ड होम्स ने राजीव शाह से डॉ. बसंत से मुलाकात की इच्छा व्यक्त करते हुए उनकी प्रशंसा की। दो दिन बाद वे राजीव शाह को लेकर डॉ. वसंत के पास बांडुंग पहुंचकर अपनी शंका बताए।

राजीव शाह ने डॉ. वसंत को कुछ टैलेक्स दिए। डॉ. वसंत ने पढ़ा-…”ब्रिटिश सरकार ने अपनी बची हुई जनता के 40 प्रतिशत लोगों को केनिया में स्थानान्तरित किया है। स्थानान्तरित करने का यह काम दो महीने में पूरा हो जाएगा।” “मास्को तथा लेनिनग्राद खाली किए जा चुके हैं-सोवियत प्रधानमंत्री की घोषणा”, “जमीन के नीचे बनाई बस्तियों में हम एक साल रह सकते हैं-इजरायली अध्यक्ष का विश्वास।”

“उत्तर भारत की सभी नदियाँ जम चुकी हैं।” डॉ. वसंत ने कहा- “यह तो केवल शुरुआत है। पिछले वर्ष सिर्फ इसकी झलक मिली थी। किंतु अगले साल पृथ्वी मनुष्यहीन हो जाएगी।” होम्स के यह पूछने पर कि क्या इससे बचाव का कोई उपाय है? डॉ. वसंत ने कहा कि “अब बहुत देर हो चुकी है। इसलिए कुछ कहा नहीं जा सकता।” इतना कहकर उन्होंने अपनी दराज से एक टंकलिखित लेख निकाला। उसका शीर्षक था-‘अभियान : इन्द्र पर आक्रमण।’

कन्या कुमारी से कुछ दूर स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र का अग्निबाण प्रक्षेपण स्थल पर अनेक वैज्ञानिक-विशेषज्ञ एकत्रित हुए थे। प्रकल्प के प्रमुख तंत्रज्ञ ने बटन दबाया। उससे अनेक अग्निबाण अंतरिक्ष की ओर गए। उनका उद्देश्य तापमान पर नियंत्रण पाना था। अनेक देशों से इस प्रकार के उपग्रह छोड़े जाने वाले थे लेकिन डॉ. वसंत ने सबसे पहले वातावरण पर हमला बोला था। भूमध्य रेखा पर स्थित कई देशों से छोड़े गए विशालकाय गुब्बारे और उपग्रह अंतरिक्ष में लपक रहे थे। इसके साथ ही ऊँची उड़ानें भरने वाले हवाई जहाजों ने भी उड़ानें भरीं। इस प्रकार चतुरंगी सेना ने वायुमंडल पर जबरदस्त हमला बोल दिया था।

अब प्रक्षेपण अस्त्रों से किए जाने वाले विस्फोटों के उपयोग ने उनकी विधायक शक्ति का स्थान धीमी गति से आग उगलने वाले विस्फोटों ने ले लिया था। अपनी सभी प्रकार की साधन-सामग्री को परस्पर तनाव को भूलकर सभी देशों ने दाँव पर लगा दिया था। फिर इस आक्रमण की सफलता के प्रति सभी सशंकित थे। इसका उत्तर मिलने लगा कि आखिर बर्फ पिघलने लगी थी। इसे देखकर मियासी से होम्स ने डॉ. वसंत को फोन करके बधाई दी। फिर भी डॉ. वसंत को चिन्ता यह होने लगी थी कि प्रकृति और इंसान की इस जीत के बावजूद इंसान को अनेक समस्याओं का सामना तो करना ही होगा। बर्फ पिघलने से बाढ़ आएगी। पृथ्वी की जनसंख्या आधी हो चुकी थी।

हिम-प्रलय संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

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प्रश्न 1.
4 नवंबर को अंतरिक्ष में स्थिर अनेक उपग्रहों से खतरे के संदेश आने लगे। “पृथ्वी के इर्द-गिर्द वायुमण्डल में हिमपात के आसार नजर आ रहे हैं। अगले चौबीस घंटों में जगह-जगह बर्फ गिरने की संभावना है।” एक तरफ देश-विदेश के मौसम विभाग अपनी इस पूर्व सूचना पर गर्व अनुभव कर रहे थे, लेकिन उनकी सूचना से पहले ही पक्षियों को खतरे का अंदाज आ चुका था और वे भूमध्य रेखा तक सुरक्षित पहुँच चुके थे।

शब्दार्थ:

  • अंतरिक्ष – आकाश।
  • इर्द-गिर्द – आस-पास।
  • हिमपात – बर्फ का गिरना।
  • आसार – आशा।
  • अंदाज-अनुमान।

प्रसंग:
यह गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य भाग-1’ में संकलित तथा डॉ. जयन्त नार्लीकर द्वारा लिखित विज्ञान-कथा ‘हिम-प्रलय’ शीर्षक से उद्धृत है। इसमें लेखक ने हिमपात होने के पहले की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि –

व्याख्या:
हिमपात होने की जानकारी संबंधित वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता ली जा रही थी। इस दिशा में संसार के सभी वैज्ञानिक चौकन्ने हो गए थे। इससे पहले ही सभी दक्षिण दिशा की ओर बड़ी तेजी से भागते हुए दिखाई देने लगे थे। जैसे-जैसे हिमपात का समय आने लगा, वैसे-वैसे अंतरिक्ष में स्थिर उपग्रह संदेश भेजने लगे थे। 4 नवंबर को अंतरिक्ष में स्थित उपग्रहों ने हिमपात से होने वाले खतरों के विषय में संदेश भेजने शुरू कर दिए थे। उनका मुख्य रूप से यही संदेश था कि पृथ्वी के आस-पास के वायुमंडल में हिमपात होने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।

इस प्रकार आने वाले 24 घंटे और खतरनाक साबित हो सकते हैं। ऐसा इसलिए कि इन 24 घंटों में कई जगह भीषण हिमपात होने की पूरी-पूरी संभावना है। इस तरह की सूचना देश के मौसम-विभाग ने पहले से ही देनी शुरू कर दी थी और इससे वह बहुत गर्व का अनुभव भी कर रहा था। लेकिन यह एक बड़ी अद्भुत बात थी कि मौसम विभाग की इस प्रकार की सूचना से पहले ही सभी पक्षियों को हिमपात से होने वाले खतरों का अनुमान हो चुका था। इसलिए वे भूमध्य रेखा के पास अच्छी तरह से जा चुके थे।

विशेष:

  1. हिमपात की भयंकरता पर प्रकाश डाला गया है।
  2. भयानक रस का प्रवाह है।
  3. भाषा के शब्द मिश्रित हैं.।
  4. शैली वर्णनात्मक है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. हिमपात से पहले की स्थिति क्या थी?
  2. पक्षियों को हिमपात के खतरे का अंदाज सबसे पहले होने का क्या आशय है?

उत्तर:

  1. हिमपात से पहले की स्थिति यह थी कि पृथ्वी के आस-पास वायुमंडल में हिमपात होने के आसार दिखाई देने लगे थे।
  2. पक्षियों को हिमपात के खतरे का अंदाजा सबसे पहले होने का आशय यह है कि मनुष्य से कहीं अधिक ज्ञान पक्षियों को होता है।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. उपग्रहों से क्या-क्या संदेश आने लगे थे?
  2. पहले ही पक्षियों को क्या हो गया था?

उत्तर:

1. उपग्रहों से संदेश आने लगे थे कि –

  • पृथ्वी के आस-पास वायुमंडल में हिमपात के आसार नजर आ रहे हैं।
  • अगले चौबीस घंटों में जगह-जगह बर्फ गिरने की संभावना है।

2. पहले ही पक्षियों को हिमपात के खतरों का अनुमान हो चुका था।

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प्रश्न 2.
उनकी एकता और अनुशासन यदि मानव जाति में होती तो विभिन्न देशों में भारी भगदड़ न मची होती। तकनीकी लिहाज से जापान, यूरोप, रूस, कनाडा जैसे प्रगत राष्ट्र भी इस हिमपात का मुकाबला नहीं कर सके। अनेक शहरों में पाँच से छह मीटर तक बर्फ गिरी थी। इतने भीषण हिमपात ने चारों तरफ तबाची मचा दी। सिर्फ कुछ ही लोग इस तबाही से अपने आप को बचा सके थे। ये सभी लोग उन शेल्टरों में थे जो अणु-युद्ध से बचने के लिए बनाए गए थे। मध्य पूर्व एशिया, मैक्सिको जैसे देशों में ठंड का आघात कम था। लेकिन चूंकि उनके पास बचाव का कोई जरिया नहीं था इसलिए वहाँ भी जान-माल की भयंकर हानि हुई थी।

शब्दार्थ:

  • भगदड़ – अस्थिरता।
  • लिहाज – दृष्टि से।
  • प्रगत – प्रगतिशील, विकसित।
  • भीषण – भयंकर।
  • तबाही – बर्बादी।
  • सिर्फ – केवल।
  • शेल्टर – रक्षास्थान।
  • आघात – प्रहार।
  • जरिया – माध्यम, साधन।

प्रसंग:
पूर्ववत्! इसमें लेखक ने मानव जाति के परस्परं भेदभाव और दूरी को हानिकारक बतलाते हुए उसे पक्षियों से एकता और अनुशासन सीखने की सीख दी. है। इस विषय में लेखक का कहना है कि –

व्याख्या:
पक्षियों में एकता और अनुशासन होता है। इसी से वे आने वाले खतरों का अनुमान कर किसी सुरक्षित स्थान पर चले जाते हैं, जबकि मनुष्य ऐसा कुछ भी नहीं कर पाता है। यही कारण है कि यदि पक्षियों की तरह मनुष्य में एकता और अनुशासन का जीवन होता तो हिमपात के खतरों का अनुमान कर अलग-अलग देशों में भगदड़ नहीं मची होती। तकनीकी साधनों के बावजूद जापान, यूरोप, रूस, कनाडा, आदि संसार के अनेक विकसित देश भी हिमपात से हुए खतरों का सामना करने में असफल रहे। चूँकि हिमपात असाधारण और अभूतपूर्व हुआ था। उससे संसार के कई देशों के नगरों-महानगरों में पाँच से छः मीटर तक वर्क की ऊँची-ऊँची परतें पड़ी थीं।

इस प्रकार के भयंकर हिमपात के पड़ने से चारों ओर हाहाकार मच गया था। जान-माल के भारी नुकसान ने भयंकर तबाही मचा दी थी। इस तबाही से बहुत कम लोग ही बच पाए थे। अधिक-से-अधिक बर्बादी ने चारों ओर भयंकर दृश्य उपस्थित कर दिया था। जो लोग इस तबाही से बचे थे, वे अणु-युद्ध से बचने के लिए बनाए गए रक्षा-स्थान में रहने के कारण सुरक्षित रह सके थे।

लेखक-का पुनः कहना है कि हिमपात से होने वाली हानि से अनेक देश प्रभावित हुए थे। लेकिन वे समान रूप से नहीं प्रभावित हुए थे। किसी-किसी देश में तो इसका आघात बहुत अधिक था, तो किसी-किसी देश में बहुत कम था। मध्य-पूर्व एशिया, मैक्सिको जैसे देशों में इस हिमपात का आघात कम था तो और देशों में इसका आघात बहुत अधिक था। इस प्रकार जिन देशों के पास इससे बचाव के साधन अधिक और बड़े थे, वहाँ इसका आघात कम था। इसके विपरीत जिन देशों में इससे बचाव के साधन कम और छोटे थे, वहाँ इसका आघात बहुत था, इससे वहाँ जान-माल की बहुत बड़ी हानि हुई थी।

विशेष:

  1. हिमपात से होने वाली हानियों का उल्लेख है।
  2. हिमपात से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
  3. भाषा तत्सम प्रधान शब्दों की है।
  4. शैली वर्णनात्मक है।
  5. यह अंश ज्ञानवर्द्धक है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. विभिन्न देशों में भगदड़ क्यों मच गई?
  2. कौन लोग भीषण हिमपात से अपने आपको बचा सके थे?

उत्तर:

  1. विभिन्न देशों में भगदड़ मच गई। ऐसा इसलिए कि मानव जाति में पक्षियों की तरह एकता और अनुशासन की बहुत बड़ी कमी है।
  2. जो लोग अणु-युद्ध से बचने के लिए बनाए गए शेल्टरों (सुरक्षा-घरों) में चले गए थे, वे ही भीषण हिमपात से अपने आपको बचा सके थे।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. चारों ओर तबाही क्यों मच गई?
  2. जान-माल की भयंकर हानि कहाँ और क्यों हुई थी?

उत्तर:

  1. चारों ओर तबाही मच गई। यह इसलिए कि अनेक देशों में पाँच-छ: मीटर तक भीषण हिमपात हुआ था।
  2. जान-माल की भयंकर हानि मध्यपूर्व एशिया, मैक्सिको आदि देशों में हई थी। यह इसलिए कि उनके पास बचाव के कोई साधन नहीं थे।

प्रश्न 3.
यही सवाल दुनिया के विशेषज्ञों तथा वैज्ञानिकों को भी सता रहा था। इस योजना के तहत सूर्य की उष्णता को अपने में समाकर पृथ्वी तक पहुँचाने वाले असंख्य धातुकण वायुमण्डल में बिखरने वाले थे। वसंत का विचार था कि ज्वालामुखी द्वारा फैले उष्णता प्रतिबंधक कण नीचे आ जाएँगे, और ये धातु कण उनका स्थान ले लेंगे। लेकिन यह काफी नहीं था। वातावरण में ऊर्जा-निर्मिति आवश्यक थी। ‘हीरे की धूल’ कम करने के लिए वातावरण का अस्थायी तौर पर गर्म होना भी जरूरी था।

इसलिए प्रक्षेपण अस्त्रों द्वारा किए जाने वाले विस्फोटों का उपयोग किया गया। उनकी विघातक शक्ति का स्थान धीमी गति से आग उगलने वाले विस्फोटों ने ले लिया। वैसे तो ये अस्त्र एक-दूसरे का नाश ही करते। लेकिन परिप्रेक्ष्य बदलते ही उनकी उपयोगिता भी बदल गई। अपनी सारी साधन-सामग्री दाँव पर लगाकर, आपसी अदावत भुलाकर सभी देशों ने इस कार्य में मदद की थी। लेकिन फिर भी सभी इस कशमकश में उलझे थे कि क्या यह आक्रमण सफल होगा?

शब्दार्थ:

  • सता – चिन्तित कर।
  • प्रतिबंधक – रुकावट।
  • परिप्रेक्ष्य – संदर्भ।
  • अदावत – तनाव, ईर्ष्या, द्वेष।
  • कशमकश – खींचातानी, असमंजस।

प्रसंग:
पूर्ववत्। इसमें लेखक ने हिमपात को रोकने या नियंत्रित करने की कठिनाई को वैज्ञानिकों की चिन्ता का एक विषय बतलाते हुए कहा है कि –

व्याख्या:
हिमपात कैसे और किस प्रकार रोका जाए, इसकी चिन्ता संसार के सभी वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को बार-बार हो रही थी। हिमपात पर नियंत्रण रखने के लिए वैज्ञानिकों-विशेषज्ञों ने जो योजना बनाई, वह सूर्य की गर्मी को अपने में रखकर पृथ्वी तक आने वाले अनेक धातुकण वायुमंडल में फैलने वाले थे। इस विपय में डॉ. वसंत का यह मानना था कि ज्वालामुखी की फैलती हुई जो गर्मी होगी उससे प्रतिबंधक कण नीचे तक आ जाएँगे। उनके स्थान पर धातुकण आ जाएँगे। फिर भी यह पर्याप्त नहीं कहा जा सकता था। ऐसा इसलिए कि वातावरण में ऊर्जा का निर्मित होना बेहद जरूरी था। दूसरी बात यह कि ‘हीरे की धूल को कम करने के लिए वातावरण का अस्थायी तौर पर गर्म होना भी बेहद जरूरी था।

लेखक का पुनः कहना है कि हिमपात को नियंत्रित करने के लिए संसार के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने अंतरिक्ष में प्रक्षेपण अस्त्रों के द्वारा विस्फोटों का उपयोग किया। लेकिन कुछ समय बाद उन विस्फोटों की एक विघातक शक्ति उत्पन्न हुई। फिर कुछ समय बाद उस शक्ति की जगह धीरे-धीरे आग को फेंकने वाले विस्फोटों ने ले लिया था। ये सभी अस्त्र एक-दूसरे के लिए उपयोगी न होकर घातक और विध्वंसक होते हैं।

लेकिन यह ध्यान देने की बात है कि संदर्भ और समय बदलते ही उनका महत्त्व और उनकी उपयोगिता भी वही नहीं रही। इसे सभी देशों के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने अपनी सोच और समझ को एकता का रूप देने का प्रयास किया। इससे पहले उन्होंने आपसी भेदभाव और अदावत को भुला दिया। फिर भी वे इस असमंजस में थे कि उनके द्वारा किए गए प्रयास सफल होंगे या असफल।

विशेष:

  1. वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का परस्पर एकमत होने के उल्लेख प्रेरक रूप में हैं।
  2. वैज्ञानिक शब्दावली है।
  3. नए-नए वैज्ञानिक खोजों के विषय में प्रकाश डाला गया है।
  4. शैली वर्णनात्मक है।
  5. वाक्य-गठन गंभीर अर्थमय है।
  6. यह अंश ज्ञानवर्द्धक है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. किसको क्या सता रहा था?
  2. वसंत का क्या मानना था?
  3. प्रक्षेपण अस्त्रों द्वारा किए जाने वाले विस्फोटों का क्यों उपयोग किया गया?

उत्तर:

1. दुनिया के सभी वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को यह सवाल सता रहा था कि क्या इन्द्र पर वैज्ञानिक सफल होंगे?

2. डॉ. वसंत का यह मानना था कि ज्वालामुखी द्वारा कैसे उष्णता प्रतिबंधक कण नीचे आ जाएँगे और धातुकण उनका स्थान ले लेंगे।

3. प्रक्षेपण अस्त्रों के द्वारा किए जाने वाले विस्फोटों का उपयोग इसलिए किया गया कि वातावरण में ऊर्जा बिल्कुल जरूरी थी। इसके साथ ही ‘हीरे की धूल’ कम करने के लिए भी वातावरण का अस्थायी रूप से गर्म होना भी बेहद जरूरी था। बहुत अधिक था। इस प्रकार जिन देशों के पास इससे बचाव के साधन अधिक और बड़े थे, वहाँ इसका आघात कम था। इसके विपरीत जिन देशों में इससे बचाव के साधन कम और छोटे थे, वहाँ इसका आघात बहुत था, इससे वहाँ जान-माल की बहुत बड़ी हानि हुई थी।

विशेष:

  1. हिमपात से होने वाली हानियों का उल्लेख है।
  2. हिमपात से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
  3. भाषा तत्सम प्रधान शब्दों की है।
  4. शैली वर्णनात्मक है।
  5. यह अंश ज्ञानवर्द्धक है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. विभिन्न देशों में भगदड़ क्यों मच गई?
  2. कौन लोग भीषण हिमपात से अपने आपको बचा सके थे?

उत्तर:

  1. विभिन्न देशों में भगदड़ मच गई। ऐसा इसलिए कि मानव जाति में पक्षियों की तरह एकता और अनुशासन की बहुत बड़ी कमी है।
  2. जो लोग अणु-युद्ध से बचने के लिए बनाए गए शेल्टरों (सुरक्षा-घरों) में चले गए थे, वे ही भीषण हिमपात से अपने आपको बचा सके थे।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. चारों ओर तबाही क्यों मच गई?
  2. जान-माल की भयंकर हानि कहाँ और क्यों हई थी?

उत्तर:

  1. चारों ओर तबाही मच गई। यह इसलिए कि अनेक देशों में पाँच-छः मीटर तक भीषण हिमपात हुआ था।
  2. जान-माल की भयंकर हानि मध्यपूर्व एशिया, मैक्सिको आदि देशों में हुई । थी। यह इसलिए कि उनके पास बचाव के कोई साधन नहीं थे।

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प्रश्न 4.
यही सवाल दुनिया के विशेषज्ञों तथा वैज्ञानिकों को भी सता रहा था। इस योजना के तहत सूर्य की उष्णता को अपने में समाकर पृथ्वी तक पहुँचाने वाले असंख्य धातुकण वायुमण्डल में बिखरने वाले थे। वसंत का विचार था कि ज्वालामुखी द्वारा फैले उष्णता प्रतिबंधक कण नीचे आ जाएँगे, और ये धातु कण उनका स्थान ले लेंगे। लेकिन यह काफी नहीं था। वातावरण में ऊर्जा-निर्मिति आवश्यक थी। ‘हीरे की धूल’ कम करने के लिए वातावरण का अस्थायी तौर पर गर्म होना भी जरूरी था।

इसलिए प्रक्षेपण अस्त्रों द्वारा किए जाने वाले विस्फोटों का उपयोग किया गया। उनकी विघातक शक्ति का स्थान धीमी गति से आग उगलने वाले विस्फोटों ने ले लिया। वैसे तो ये अस्त्र एक-दूसरे का नाश ही करते। लेकिन परिप्रेक्ष्य बदलते ही उनकी उपयोगिता भी बदल गई। अपनी सारी साधन-सामग्री दाँव पर लगाकर, आपसी अदावत भुलाकर सभी देशों ने इस कार्य में मदद की थी। लेकिन फिर भी सभी इस कशमकश में उलझे थे कि क्या यह आक्रमण सफल होगा?

शब्दार्थ:

  • सता – चिन्तित कर।
  • प्रतिबंधक – रुकावट।
  • परिप्रेक्ष्य – संदर्भ।
  • अदावत – तनाव, ईर्ष्या, द्वेष।
  • कशमकश – खींचातानी, असमंजस।

प्रसंग:
पूर्ववत्। इसमें लेखक ने हिमपात को रोकने या नियंत्रित करने की कठिनाई को वैज्ञानिकों की चिन्ता का एक विषय बतलाते हुए कहा है कि व्याख्या-हिमपात कैसे और किस प्रकार रोका जाए, इसकी चिन्ता संसार के सभी वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को बार-बार हो रही थी। हिमपात पर नियंत्रण रखने के लिए वैज्ञानिकों-विशेषज्ञों ने जो योजना बनाई, वह सूर्य की गर्मी को अपने में रखकर पृथ्वी तक आने वाले अनेक धातुकण वायुमंडल में फैलने वाले थे।

इस विषय में डॉ. वसंत का यह मानना था कि ज्वालामुखी की फैलती हुई जो गर्मी होगी उससे प्रतिबंधक कण नीचे तक आ जाएँगे। उनके स्थान पर धातुकण आ जाएँगे। फिर भी यह पर्याप्त नहीं कहा जा सकता था। ऐसा इसलिए कि वातावरण में ऊर्जा का निर्मित होना बेहद जरूरी था। दूसरी बात यह कि ‘हीरे की धूल’ को कम करने के लिए वातावरण का अस्थायी तौर पर गर्म होना भी बेहद जरूरी था।

लेखक का पुनः कहना है कि हिमपात को नियंत्रित करने के लिए संसार के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने अंतरिक्ष में प्रक्षेपण अस्त्रों के द्वारा विस्फोटों का उपयोग किया। लेकिन कुछ समय बाद उन विस्फोटों की एक विघातक शक्ति उत्पन्न हुई। फिर कुछ समय बाद उस शक्ति की जगह धीरे-धीरे आग को फेंकने वाले विस्फोटों ने ले लिया था। ये सभी अस्त्र एक-दूसरे के लिए उपयोगी न होकर घातक और विध्वंसक होते हैं।

लेकिन यह ध्यान देने की बात है कि संदर्भ और समय बदलते ही उनका महत्त्व और उनकी उपयोगिता भी वही नहीं रही। इसे सभी देशों के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने अपनी सोच और समझ को एकता का रूप देने का प्रयास किया। इससे पहले उन्होंने आपसी भेदभाव और अदावत को भुला दिया। फिर भी वे इस असमंजस में थे कि उनके द्वारा किए गए प्रयास सफल होंगे या असफल।

विशेष:

  1. वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का परस्पर एकमत होने के उल्लेख प्रेरक रूप में हैं।
  2. वैज्ञानिक शब्दावली है।
  3. नए-नए वैज्ञानिक खोजों के विषय में प्रकाश डाला गया है।
  4. शैली वर्णनात्मक है।
  5. वाक्य-गठन गंभीर अर्थमय है।
  6. यह अंश ज्ञानवर्द्धक है।

गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. किसको क्या सता रहा था?
  2. वसंत का क्या मानना था?
  3. प्रक्षेपण अस्त्रों द्वारा किए जाने वाले विस्फोटों का क्यों उपयोग किया गया?

उत्तर:

1. दुनिया के सभी वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को यह सवाल सता रहा था कि क्या इन्द्र पर वैज्ञानिक सफल होंगे?

2. डॉ. वसंत का यह मानना था कि ज्वालामुखी द्वारा कैसे उष्णता प्रतिबंधक कण नीचे आ जाएँगे और धातुकण उनका स्थान ले लेंगे।

3. प्रक्षेपण अस्त्रों के द्वारा किए जाने वाले विस्फोटों का उपयोग इसलिए किया गया कि वातावरण में ऊर्जा बिल्कुल जरूरी थी। इसके साथ ही ‘हीरे की धूल’ कम करने के लिए भी वातावरण का अस्थायी रूप से गर्म होना भी बेहद जरूरी था।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. एक अस्त्र दूसरे का विनाशक होने पर भी क्यों उपयोगी हो गए?
  2. सभी देशों की उलझन क्या थी?

उत्तर:

  1. एक अस्त्र दूसरे का विनाशक होने पर भी उपयोगी हो गए। यह इसलिए कि परिप्रेक्ष्य बदलते ही उनकी उपयोगिता भी बदल गई थी।
  2. सभी देशों की यही उलझन थी कि क्या इन्द्र पर आक्रमण सफल होगा?

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