Noise Question Answer Class 9 General English The Spring Blossom Chapter 17 MP Board Solutions

Class 9th General English The Spring Blossom Chapter 17 Noise Question Answers

Noise Class 9 Questions and Answers

Noise Textual Exercises

Word Power

(a) Make new words from the following root words by adding the suffix-er/r/or.
(प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाओ।)
Answer:
write – writer
read – reader
teach – teacher
sell – seller
supervise – supervisor
create – creator
pollute – polluter
vote – voter

(b) Look into the dictionary and find out the meanings of the words above made by adding the suffix.
(प्रत्यय जोड़कर बनाए गये शब्दों के अर्थ ढूँढ़िए।)
Answer:
Students can do themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

II. Find out the words from the text which mean the following.
(अध्याय में से निम्नार्थक शब्द ढूँढ़ो।)

  1. To crush into fine powder – pulverize.
  2. One who teaches – teacher.
  3. One who goes from place to place to sell things – hawker.
  4. Someone whose job is to find out secret information about a country – spy.
  5. Bright and cheerful – festive.

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How Much Have I Understood?

(A) Answer the following questions in one or two sentences
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
What are the things that create noise in this age?
(व्हॉट आर दि थिंग्स दैट क्रिएट नॉइज़ इन दिस एज?)
वे कौन सी चीजें हैं जो आज के युग में शोर उत्पन्न करती हैं?
Answer:
Radio, tape-recorders, television, loudspeakers, machines in the factories motor vehicles especially motorcycles, present day babies, hawkers on the streets etc. are the things that create noise.
(रेडियो, टेपरिकॉर्डर्स, टेलिविज़न, लाउडस्पीकर्स, मशीन्स इन द फैक्ट्रीज़, मोटर वेहिकल्स एस्पेश्यली मोटरसाइकिल्स, प्रेजेन्ट डे बेबीज, हॉकर्स ऑन द स्ट्रीट्स ऐटसेट्रा आर द थिंग्स दैट क्रियेट नॉइज़।)
रेडियो, टेपरिकॉर्डर, टेलीविजन, लाउडस्पीकर, कारखानों की मशीनें, मोटरगाड़ियाँ विशेषकर-मोटरसाइकिल, आज के बच्चे, फेरी वाले आदि शोर उत्पन्न करते हैं।

Question 2.
Why do we create noise?
(व्हॉय डू वी क्रिएट नॉइज़?)
हम शोर क्यों करते हैं?
Answer:
We create noise not only to show that we are in a happy and festive mood but also to canvass votes, to advertise a commodity or a point of view and also for its own sake.
(वी क्रिएट नॉइज़ नॉट ओनली टू शो दैट वी आर इन अ हैप्पी एण्ड फैस्टिव मूड बट ऑल्सो टू कैनवस वोट्स, टू एडवरटाईज़ अ कमोडिटी और अपॉइन्ट ऑफ वियू एण्ड ऑल्सो फॉर इट्स ओन सेक।)
हम अपनी खुशी जाहिर करने के लिए ही शोर उत्पन्न नहीं करते, बल्कि प्रचार द्वारा वोट प्राप्त करने, किसी वस्तु या विचार को विज्ञापित करने और इसको बनाए रखने के लिए भी शोर करते हैं।

Question 3.
Name the different kinds of noises.
(नेम द डिफ्रेन्ट काइन्ड्स ऑफ नॉइज़ेज़।)
विभिन्न प्रकार के शोर के नाम बताओ।
Answer:
Necessary noise, unnecessary noise, purposeful noise and purposeless noise are various types of noises.
(नेसेसरी नॉइज़, अननेसेसरी नॉइज़, परपजफुल नॉइज़ एण्ड परपजलेस नॉइज़ आर वेरिअस टाइप्स ऑफ नॉइज़ेज़।)
जरूरी शोर, अनावश्यक शोर, उद्देश्यपूर्ण शोर व अनुद्देश्यपूर्ण शोर विभिन्न प्रकार के शोर हैं।

Question 4.
How does a motor cyclist create agitation? How long does it last?
(हाउ डज़ अ मोटर साइक्लिस्ट क्रिएट एजिटेशन? हाउ लाँग इज इट लास्ट?)
मोटर साइकिल चालक किस प्रकार अशान्ति उत्पन्न करता है? वह कितनी देर तक रहती है?
Answer:
Motor cyclist creates agitation by starting the motor cycle and testing its engine. The agitation lasts half an hour even after the machine itself has gone out of sight.
(मोटर साइक्लिस्ट क्रिएट्स एजिटेशन बाइ स्टार्टिंग द मोटर साइकिल एण्ड टेस्टिंग इट्स एन्जिन। द एजिटेशन लास्ट्स हॉफ एन आवर ईवन आफ्टर द मशीन इटसेल्फ हैज गॉन आउट ऑफ साईट।)
मोटर साइकिल वाला मोटर साइकिल चलाकर व उसके इंजन की जाँच करके अशान्ति उत्पन्न करता है। वह अशान्ति उसके चले जाने के बाद आधे घण्टे तक भी रहती है।

Question 5.
Why did the author abandon a very comfortable house?
(व्हॉय डिड द ऑथर अबैन्डन अ वेरी कम्फर्टेबल हाऊस?)
Answer:
The author abandoned a very comfortable house because of a neighbour who switched on his radio every morning at five, long before even the gates were unlocked in any radio station.
(द ऑथर अबैन्डन्ड अवैरी कम्फर्टेबल हाऊस बिकॉज ऑफ अ नेबर हू स्विच्ड ऑन हिज रेडियो एवरी मॉर्निंग एट फाइव, लाँग बिफोर ईवन द गेट्स वर अनलॉक्ड इन एनी रेडियो स्टेशन।)
लेखक ने एक बहुत आरामदेह घर छोड़ा क्योंकि उसका पड़ोसी सुबह 5 बजे से अपने रेडियो को चालू कर देता था जबकि शायद किसी रेडियो स्टेशन के गेट भी न खुले हों।

Question 6.
Which factory did the author visit that he mentions?
(व्हिच फैक्ट्री डिड द ऑथर विज़िट दैट ही मैन्शन्स?)
लेखक किस कारखाने को देखने गया था?
Answer:
The author visited a gold factory.
(द ऑथर विज़िटिड अ गोल्ड फैक्टरी।)
लेखक स्वर्ण कारखाना देखने गया था।

Question 7.
What is that the author longs for?
(व्हॉट इज़ दैट द ऑथर लॉग्स फॉर?)
लेखक की क्या इच्छा थी?
Answer:
The author longs for a zone of silence.
(द ऑथर लांग्स फॉर अ जोन साइलेंस।)
लेखक शान्त क्षेत्र की इच्छा करता है।

(B) Answer the following questions in two or three sentences :
(निम्न प्रश्नों के उत्तर दो या तीन वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
What do you mean by noise pollution? How does noise create pollution?
(व्हॉट डू यू मीन बाइ नॉइज़ पॉल्यूशन? हाउ डज़ नॉइज़ क्रियेट पॉल्यूशन?)
ध्वनि प्रदूषण से तुम क्या समझते हो? ध्वनि कैसे प्रदूषण पैदा करती है?
Answer:
Noise pollution is caused by creating unwanted sound that disturbs others. Every moment it distracts our lives. The noise in an around us is wearing us out at a terrific pace, creating pollution.
(नॉइज़ पॉल्यूशन इज़ कॉज्ड बाइ क्रिएटिंग अनवॉन्टेड साउण्ड दैट डिस्टर्ब अदर्स। एवरी मोमेन्ट इट डिस्ट्रैक्ट्स आर लाइव्स। द नॉइज़ इन एन अराउण्ड अस इज़ वियरिंग अस आउट एट अ टैरिफिक पेस, क्रियेटिंग पॉल्यूशन।)
ध्वनि प्रदूषण वह अनचाहा शोर है जो दूसरों को विचलित करता है। हर पल हमारा जीवन उससे विचलित होता है। हमारे चारों ओर का शोर हमें तेजी से थका रहा है व प्रदूषण फैला रहा है।

Question 2.
Why is the whole locality. converted into a sort of gold factory?
(व्हाय इज़ द होल लोकेलिटी कन्वर्टिड इन टू अ सॉर्ट ऑफ गोल्ड फैक्ट्री?)
हमारे चारों ओर का वातावरण किस प्रकार सोने की फैक्ट्री है?
Answer:
Whole locality around us is creating so much noise that it seems to be converted into a gold factory. A gold factory is the most deafening place on earth when the ore is pulverized before being treated with cyanide.

(होल लोकैलिटी अराऊण्ड अस इज़ क्रियेटिंग सो मच नॉइज़ दैट इट सीम्स टू बी कनवर्टिड इन्टू अ गोल्ड फैक्ट्री। अ गोल्ड फैक्ट्री इज़ द मोस्ट डैफनिंग प्लेस ऑन अर्थ व्हेन द ओर इज़ पलवरइज्ड बिफोर बीइंग ट्रीटेड विद साइनाइड।)

हमारे आस-पास के वातावरण में इतना शोर उत्पन्न होता है कि ऐसा लगता है कि वह एक सोने का कारखाना है। सोने का कारखाना इस धरती पर सबसे शोरगुल वाला स्थान होता है जब कच्ची धातु को संसाधित करने से पूर्व उसका चूरा बनाया जाता है।

Question 3.
What type of pollution does your school have and what steps do you take to keep your school pollution free?
(व्हॉट टाइप ऑफ पॉल्यूशन डज़ योर स्कूल हैव एण्ड व्हॉट स्टेप्स डू यू टेक टू कीप योर स्कूल पॉल्यूशन फ्री)
तुम्हारे विद्यालय में किस प्रकार का प्रदूषण है और तुम अपने विद्यालय को प्रदूषण रहित करने के लिए क्या कदम उठाओगे?
Answer:
Our school has noise pollution. The vehicles on the street create a lot of noise pollution and the shops in front of our school play tape recorders at high volume. We have complained the collector to stop the shopkeepers from playing music at such large volume as they did not.stop it at our request.

(अवर स्कूल हैज़ नॉइज़ पॉल्यूशन। द वेहिकल्स ऑन द स्ट्रीट क्रिएट अ लॉट ऑफ नॉइज़ पॉल्यूशन एण्ड द शॉप्स इन फ्रन्ट ऑफ अवर स्कूल प्ले टेप रिकॉर्डर्स एट हाइ वॉल्यूम। वी हैव कम्प्लेंड द कलैक्टर टू स्टॉप द शॉपकीपर्स फ्रॉम प्लेइंग म्यूज़िक एट सच लार्ज वॉल्यूम एज़ दे डिड नॉट स्टॉप इट एट अवर रिक्वेस्ट।)

हमारे विद्यालय में ध्वनि प्रदूषण है। सड़क पर वाहन ‘अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं व हमारे विद्यालय के समक्ष जो दुकानें हैं वहाँ बहुत तेज, ध्वनि पर टेप रिकॉर्डर बजता है। हमने शहर के जिलाधिकारी को शिकायत की है कि वे दुकानदारों को तेज आवाज में संगीत बजाने से रोकें क्योंकि वे हमारे कहने पर नहीं माने।

Question 4.
Why are we surrounded by a moving loud market all the time?
(व्हाय आर वी सराउन्डेड बाइ अ मूविंग लाऊड मार्केट ऑल द टाइम?)
हम हर समय अपने को एक चलते-फिरते बाजार में घिरा क्यों पाते हैं?
Answer:
We are surrounded by a moving loud market all the time because we hear the loud sounds of different street vendors trying to sell their things, anywhere within the house. They are shouting at their highest pitch.

(वी आर सराउण्डेड बाइ अ मूविंग लाऊड मार्केट ऑल द टाइम बिकॉज़ वी हिअर द लाऊड साउण्ड्स ऑफ डिफ्रेन्ट स्ट्रीट वेन्डर्स, ट्राइंग टू सैल देयर थिंग्स, एनीव्हेयर विदिन द हाऊस। दे आर शाऊटिंग एट देयर हायेस्ट पिच।)

हम एक चलते-फिरते बाजार से घिरे हुए हैं, क्योंकि हम हर समय फेरी वालों को अपना माल बेचने के लिए जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुनते हैं। वे बहुत तेज चिल्ला रहे होते हैं।

Question 5.
Every noise is not necessary. What would you consider as necessary noise?
(एवरी नॉइज़ इज़ नॉट नैसेसरी। व्हॉट वुड यू कन्सिडर एज नैसेसरी नॉइज़?)
हर आवाज आवश्यक नहीं होती। कौन-सी आवाज को तुम आवश्यक समझते हो?
Answer:
Sound that is created at a medium volume for communication purpose in the necessary noise.
(साउण्ड दैट इज़ क्रियेटिड एट अ मीडियम वॉल्यूम फॉर कम्युनिकेशन्स परपज इज़ द नैसेसरी नॉइज़।)
आवश्यक उद्देश्य से मध्यम आवाज में की गई ध्वनि आवश्यक शोर होता है।

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(C) Choose the correct option
(सही विकल्प चुनिए।)

(1) We don’t create a noise when we :
(a) canvass for votes
(b) advertise a commodity
(c) read loudly
(d) read silently.
Answer:
(d) read silently.

(2) The noisiest creatures on the earth are :
(a) animals
(b) birds
(c) insects
(d) children.
Answer:
(d) children.

(3) A moving loud market means :
(a) a market on wheels
(b) many markets selling different things
(c) a voice which fills the entire area
(d) cry loudly.
Answer:
(a) a market on wheels

(4) ‘Hawking’ means :
(a) go from place to place to sell things
(b) to call
(c) street sellers
(d) poor workers.
Answer:
(a) go from place to place to sell things

(5) Noise pollution can be controlled by :
(a) the government
(b) the police
(c) The citizens
(d) all of them.
Answer:
(c) The citizens.

Language Practice

(A) Combine the pair of sentences into one using nouns clause as an object of the verb :
(1) I think.
He has done his work.
Answer:
I think that he has done his work.

(2) He says.
He is a doctor.
Answer:
He says that he is a doctor.

(3) You assure.
You will attend the meeting.
Answer:
You assure that you will attend the meeting.

(4) They say.
The students are hard working.
Answer:
They say that the students are hard working.

(5) The teacher feels.
I am sick.
Answer:
The teacher feels that I am sick.

(B) Combine the following pair of the sentences to make a noun clause as a subject of the verb.
(निम्नलिखित वाक्य जोड़िए)

(1) He is my friend.
It is true.
Answer:
That he is my friend is true.

(2) When does he go to school?
It is not known to us.
Answer:
When he goes to school is not known to us.

(3) What do you mean by this?
It is clear to me.
Answer:
What do you mean by this is clear to me.

(4) Who do you like most?
It is still not clear.
Answer:
Whom you like most is still not clear.

(5) How are you preparing?
It is not known to me.
Answer:
How you are preparing is not known to me.

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Listening Time

I. Listen carefully to your teacher and tick the correct word given in the sentences.
(सही शब्द चिह्नित करो।)

(1) I can see myself/myshelf.
Answer:
myself.

(2) Ram had a big sock/shock.
Answer:
shock.

(3) Sow/show the dress.
Answer:
show.

(4) She went down to the seasore/seashore.
Answer:
seashore.

(5) She was a short/sort girl.
Answer:
short.

(6) The sea/see was shallow.
Answer:
sea.

II. Listen carefully to your teacher reading the passage below and underline the words in which the letter ‘a’ is pronounced as in the word ‘cart.
(A अक्षर के ‘आ’ उच्चारण वाले शब्द छाँटिए)
Answer:
In the afternoon the farmer went into his garden and cut some flowers. He put them in his cart and took them to the market. He sold the flowers and bought a duck which he put in the basket. Then he started to go home. But it , was dark and the path was hard. Suddenly a dog barked loudly and this alarmed him very much.

Speaking Time

Complete the following conversation :
(निम्न वातोलाप को पूरा करो।)
Answer:
1. Rohan : Excuse me did you drop this purse?
Lady : I beg your pardon.
Rohan : I said, ‘Did you drop this purse?’
Lady : Could you be a little bit louder?
Rohan : I’ve found this purse. Is it yours?
Lady : I’m sorry. I’m a little deaf. I couldn’t hear what you said. Any purse? Yes, that’s mine. I must have dropped it.
Lady : Thank you for your kindness.
Rohan : It’s a pleasure.

2. Mala : Excuse me I want to know the address of Mrs. Mishra
Gentleman : I beg your pardon.
Mala : May I know the address of Mrs. Mishra?
Gentleman : You walk to a short distance and turn to the right. The house in the corner is of Mr. Mishra.
Mala : Thank you sir.
Gentleman : It’s pleasure.

Writing Time

Write an article for your school magazine entitled “Living safely”.
(विद्यालय की वार्षिक पत्रिका के लिए दिए गए शीर्षक पर एक लेख लिखिए।)
Answer:
Living Safely

Safety is very necessary in our lives. There is a saying “Precaution is better than cure.’ So, one should take safety or precaution to prevent injuries and accidents that may be fatal to our lives.

We should take precautions both at home and outside. While on road we should drive carefully at slow speed, wear helmet and avoid using mobile phones. We should also obey traffic signals as it prevents accidents. Pedestrians should use overhead bridges and walk on the footpath, cross at Zebra crossing following traffic signals.

At home children most often come across accidents. Care should be taken to prevent them from accidents. Medicines should be kept out of their reach and matches and sharp objects like blade etc., should also be kept away from them. Hence, to live safely safety is essential so that one may not come across accidents.

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Things to do

How can crowded scenes on the road to school or in the market be avoided? Prepare a list of suggestions.
(स्कूल के रास्ते व बाजार से भीड़ किस प्रकार हटाई जा सकती है?)
Answer:
To prevent crowd on road and in market following steps can be taken-

  1. Parking of vehicles on the road should be avoided.
  2. Street vendors and hawkers should be prevented on busy roads and markets.
  3. Large vehicles like buses, trucks and cars should be prevented on such roads,
  4. Footpath shops should be removed from the market.
  5. Traffic signals should be followed on road.

Noise Difficult Word Meanings

canvass (केनवास)-to ask somebody to support a particular person, political party etc. किसी चीज के लिए समर्थन माँगना, चुनाव प्रचार; peculiar (पिक्युलिअर)-strange or unusual विशेष, खास; elegant (एलिगेन्ट)graceful and attractive भव्य व आकर्षक; hawk (हॉक)-to try to sell things going from place to place asking people to buy them जगह-जगह जाकर चीजें बेचना; anguish (एनिवश)-severe pain तीव्र वेदना; abandon (अबैन्डन)-to leave a thing or place स्थान त्यागना; skewer (स्कवर)-to push a thing or object through something किसी तीखी वस्तु को किसी में घुसाना।

Noise Summary, Pronunciation & Translation

[1] This age will probably be known as the noisiest in human history. We create a lot of noise not only to show that we are in a happy, festive mood, to canvass votes, to advertise a commodity or a point of view, but also for its own sake. Noise is the greatest bane of modern life. Every moment of our lives we are being distracted by it, necessary noise, unnecessary noise, purposeful noise and the purposeless, enough to weaken our nerves and madden us. The noise in and around us is wearing us out at a terrific pace.

(दिस ऐज़ विल प्राबेब्ली बी नोन एज़ द नॉइजिएस्ट इन ह्यूमन हिस्ट्री। वी क्रीएट अ लॉट ऑफ नॉइज़ नॉट ओनली टु शो दैट वी आर इन अ हैप्पी, फेस्टिव मूर्ड, टु केनवास बोट्स, टु एडवरटाइज़ं अ कमोडिटी और अ पॉइन्ट ऑफ विउ, बट ओल्सो फोर इट्स ओन सेक। नॉइज़ इज़ द ग्रेटेस्ट बेन ऑफ मॉडर्न लाइफ। एवी मॉमेन्ट ऑफ अवर लाइब्ज वी आर बीईंग डिस्ट्रेक्टेड बाय इट, नेसेसरी नॉइज़, अननेसेसरी नॉइज़, पर्पजफुल नॉइज़ एण्ड द परपज़लेस, इनफ टु वीकन अवर नज एण्ड मेडन अस। द नॉइज़ इन एण्ड अराउण्ड अस इज़ वीअरिंग अस आउट एट यू टेरिफिक पेस।)

हिन्दी अनुवाद :
यह युग सम्भवतः मानव इतिहास में सबसे ज्यादा शोरगुल वाला युग जाना जाएगा। हम बहुत शोरगुल केवल यह बताने के लिए नहीं करते हैं कि हम खुशी में हैं, उत्सवी मड में हैं, वोट माँगने के लिये या किसी वस्तु अथवा दृष्टिकोण के प्रचार के लिए अपितु केवल शोर करने के लिए शोर करते हैं। शोरगुल आधुनिक जीवन का अभिशाप है। हमारे जीवन का प्रत्येक क्षण इसके द्वारा भटकाया जाता है। आवश्यक शोरगुल, अनावश्यक शोरगुल, उद्देश्यपूर्ण व अनुद्देश्यपूर्ण शोरगुल हमारी मस्तिष्क की नसों को कमजोर बनाने के लिए व हमें पागल बनाने के लिये पर्याप्त है। हमारे घर और बाहर शोरगुल हमें शीघ्रता से नष्ट कर रहा है।

[2] Someone noted recently that present-day babies are peculiarly loud-throated. They look elegant and sweet, no doubt, but the moment they open their mouths they let out a shattering volume of sound. School teachers do their best from the beginning by ordering every few seconds in the classroom, ‘silence, silence’. But it does not appear to have any effect on children. They remain the noisiest creatures on the earth. I think there will be an all-round benefit if a period of absolute silence is introduced in every class time table with a prize at the end of the year for the softest spoken person in the school.

(समवन नोटेड रिसेन्टली दैट प्रेजेन्ट डे बेबीज़ आर पिक्युलरली लाउड थ्रोटेडा दें लुक इलेजान्ट एण्ड स्वीट, नो डाउट, बट द मोमेन्ट दे ओपन देअर माउथ्स दे लेट आउट अ शेटरिंग वॉल्यूम ऑफ साउन्ड। स्कूल टीचर्स डू देअर बेस्ट फ्रॉम द बिगनिंग बाय ऑर्डरिंग एव्री फिउ सेकण्ड्स इन द क्लास रूम, ‘साइलेन्स, साइलेन्स।’ बट इट डज़ नॉट अपीयर टु हैव. एनी इफेक्ट ऑन चिल्ड्रन। दे रिमेन द नॉइजिएस्ट क्रीएचर्स ऑन द अर्थ। आई थिंक देअर विल वी एन ऑल राउण्ड बेनीफिट इफ अपीरियड ऑफ अब्सोल्यूट ‘साइलेन्स’ इज़ इन्ट्रोड्यूस्ड इन एव्री क्लास टाइम टेबल विद अ प्राइज़ एट द एन्ड ऑफ द यीअर योर द सॉफ्टेस्ट स्पोकन पर्सन इन द स्कूल।)

हिन्दी अनुवाद :
किसी ने अभी-अभी यह नोट किया कि आजकल के बच्चे खासकर जोर से बोलने वाले गले वाले हैं। वे बेशक, बहुत आकर्षक और मीठे दिखते हैं, पर जिस क्षण वे अपने मुँह खोलते हैं वे बहुत कानफाड़ ध्वनि का शोर करते हैं। स्कूल के शिक्षक कक्षा में निरन्तर “शान्ति शान्ति” का आदेश देने का भरसक प्रयास करते हैं। परन्तु इसका बच्चों पर कोई प्रभाव नहीं दिखता। वे इस पृथ्वी पर सबसे ज्यादा शोरगुल मचाने वाले प्राणी हैं। मैं सोचता हूँ कि हमें सब तरह से लाभ होगा यदि प्रत्येक कक्षा के टाइमटेबल में एक वादन “पूर्णतः शान्ति” का हो तथा प्रत्येक वर्ष के अन्त में “सबसे कोमल ध्वनि” वाले व्यक्ति के लिए स्कूल में एक इनाम रखा जाए।

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[3] Hawking in the streets has, of late, become a little too much. It seems impossible to concentrate on any study.or writing at home,particularly if one’s window looks over’a street. Even if one retires to the back of the house, one may not be saved, since the hawker seems to set the pitch of his voice on the basis that you should be searched out and pierced through and through, even if you are hiding in the innermost recess of the house.

(हॉकिंग इन द स्ट्रीट्स हेज़, ऑफ लेट, बिकम ए लिटिल टू मच। इट सीम्स इम्पॉसिबल टु कन्सेन्ट्रेट ऑन एनी स्टडी और राइटिंग एट होम, पर्टिक्युलरली इफ वन्स विन्डो लुक्स ओवर अ स्ट्रीट। इवन इफ वन रिटायर्स टु द बैक ऑफ द हाउस, वन मे नॉट बी सेव्ड, सिन्स द हॉकर सीम्स टू सैट द पिच ऑफ हिज़ वॉयस ऑन द बेसिस दैट यू शुड बी सर्ल्ड आउट एण्ड पीअर्ल्ड श्रू एण्ड थू, इवन इफ यू आर हाइडिंग इन द इनरमोस्ट रिसेस ऑफदा हालस।)

हिन्दी अनुवाद :
गर्मियों में जोर-जोर से आवाज लगाकर फेरी लगाना (सामान बेचना) कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। घर पर अध्ययन करना या लिखना भी असम्भव प्रतीत होता है, विशेष रूप से यदि खिड़की गली या सड़क पर खुलती हो। यदि कोई अपने पीछे के कमरे में विश्राम भी कर रहा है तो, भी बच नहीं सकता क्योंकि फेरीवाला अपनी आवाज को इतनी ऊँची कर देता है कि वह आवाज आपको खोज ले और आपको पूरी तरह बेच दे, चाहे आप घर के सबसे अन्दरूनी कोने में ही क्यों न छिपे हों।

[14] At the moment I am writing this I see and hear two plantain-sellers coming on each other’s heels, almost trying to bark each other out of existence. I fear that ‘Grow More Food’ campaign has brought in only more plantains since I notice two more hawkers coming in with the same commodity. Now for a variation, I suppose, a seeker of old paper and empty bottles is expressing his wish in a rich, space-filling voice, a knife-grinder is employing an anguished cry like one caught in a trap and many others follow; all that we understand is that they are shouting something, it may be anything from gingerly oil-cake to lotus flowers, brinjals and bangles. We are surrounding by a moving loud market all the time.

(एट द मोमेन्ट आई एम राइटिंग दिस आई सी एण्ड हीअर टू प्लेनटेन सेलर्स कमिंग ऑन ईच अदर्स हील्स, अलमोस्ट ट्राइंग टु बार्क ईच अदर आउट ऑफ एक्ज़िस्टन्स। आई फिअर दैट – “ग्रो मोर फूड” केम्पेन हेज़ ब्रॉट इन ओनली मोर प्लेनटेन्स सिंस आई नोटिस टू मोर हॉकर्स कमिंग इन विद द सेम कमोडिटी। नाउ फोर ए वेरिएशन, आई सपोज़, ए सीकर ऑफ ओल्ड पेपर एण्ड एम्प्टी बॉटल्स इज़ एक्सप्रेसिंग हिज़ विश इन अ रिच, स्पेस फिलिंग वॉइस, अ नाइफ ग्राइन्डर इज़ इम्प्लॉइंग एन एंग्विश्ड क्राय लाइक वन कॉट इन अ ट्रेप, एण्ड मेनी अदर्स फॉलो; ऑल दैट वी अन्डरस्टेण्ड इज़ दैट दे आर शाउटिंग समथिंग, इट मे बी एनीथिंग फ्रॉम जिन्जरली ऑइल केक, टु लोट्स फ्लावर्स, ब्रिन्जाल्स एण्ड बेंगल्स। वी आर सराउन्डिंग बाय ए मूविंग लाउड मार्केट ऑल द टाइम।)

हिन्दी अनुवाद :
जिस क्षण मैं यह लिख रहा हूँ, मैं देखता व सुनता हूँ दो केले विक्रेताओं का बिल्कुल एक के पीछे एक, वें इतनी जोर से चिल्लाते हैं मानो वे एक-दूसरे का अस्तित्व ही खत्म कर देंगे। मुझे डर है कि अधिक अन्न उपजाओ’ आन्दोलन केवल अधिक केलों को उपजाया है क्योंकि मैंने महसूस किया कि दो और हॉकर्स इसी माल को लेकर आ रहे हैं। अब थोड़े परिवर्तन के लिए, मैं अनुमान करता हूँ कि, एक रद्दी पेपर व खाली बोतलों को पाने वाला अपनी भरपूर आवाज से उस स्थान को गुंजाता है, एक चाकू तेज करने वाला एक वेदनापूर्ण आवाज करता है जैसे कि कोई किसी जाल में फंस गया हो, और अन्य भी आ रहे हैं, सभी जैसा कि हम समझते हैं वे किसी चीज के लिए आवाज कर रहे हैं वो कुछ भी हो सकता है अदरक के तेल वाली केक से लेकर कमल के फूल, बैंगन और चूड़ियाँ। हम हर समय चलते-फिरते शोर भरे मार्केट से सदैव घिरे रहते हैं।

[5] I have dread of living next to a man owning a motor cycle. When a motor cyclist starts out, the agitation he creates lasts half-an-hour, even after the machine itself has gone out of sight. On Sundays this enthusiast tests and touches up his engine, whereupon the whole locality is converted into a sort of gold factory. I say gold factory because, in my experience, it is the most deafening place on earth when the ore is pulverized before being treated with cyanide. This was all I could catch of the whole process when I visited a gold-mine some years ago. My guide was explaining everything to me in great detail, but I could only see his lips move, there was such a clatter all around. It has been the same experience for me in any factory.

(आई हैव अ ड्रेड ऑफ लिविंग नेक्स्ट टु अ मैन ओनिंग अ मोटर साइकिल। व्हेन अ मोटर साइक्लिस्ट स्टार्ट्स आउट द एजिटेशन ही क्रीएट्स लास्टस हॉफ-एन-अवर, ईवन ऑफ्टर द मशीन इटसेल्फ हैज गोन आउट ऑफ साइट। ऑन सन्डेज दिस एन्थूजियास्ट टेस्ट्स एण्ड टचेस अप हिज़ इंजिन, व्हेअर अपॉन द होल लोकेलिटी इज़ कनवर्टेड इन टू ए सॉर्ट ऑफ गोल्ड फेक्ट्री। आई से गोल्ड फेक्ट्री बिकॉज़, इन माय एक्सपीरियन्स, इट इज़ द मोस्ट डीफनिंग प्लेस ऑन अर्थ व्हेन द ओर इज़ पल्वेराईज्ड बिफोर बीईंग ट्रीटेड विद सायनाइड। दिस वॉज़ आल आई कुड केच ऑफ द होल प्रोसेस व्हेन आई विज़िटेड अ गोल्ड-माइन सम यीअर्स एगो। माय गाइड वॉज़ एक्सप्लेनिंग एवरीथिंग टु मी इन ग्रेट डिटेल, बट आई कुड ओनली सी हिज़ लिप्स मूव, देयर वॉज़ अक्लेटर ऑल अराउन्ड। इट हेज बीन द सेम एक्सपीरियन्स फोर मी इन एनी फेक्ट्री।)

हिन्दी अनुवाद :
मुझे पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति जिसके पास एक मोटर बाइक है, के लिए डर रहता है। जब कोई बाइक चलाने वाला व्यक्ति अपनी गाड़ी चलाना आरम्भ करता है उससे उत्पन्न परेशानी व कष्ट कम से कम आधे घंटे तक रहता है जब तक कि वह मशीन आँखों के सामने से ओझल न हो जाए। रविवार के दिन जब अपनी मशीन पर वह यह जोश भरे परीक्षण करता है तो पूरा क्षेत्र एक सोने का कारखाना बन जाता है। मैं इसे सोने का कारखाना कह रहा हूँ क्योंकि मेरा अनुभव यह है कि जब सायनाइड के साथ खनिज का प्रयोग होने से पहले धातु अथवा खनिज छोटे-छोटे टुकड़ों में बदलता है तब यह पृथ्वी का सबसे अधिक वधिर (बहरा) कर देने वाला स्थान हो जाता है। यह पूरी विधि मैंने देखी क्योंकि कुछ वर्ष पूर्व मैं एक सोने की खदान में भ्रमण करने गया था। मेरा गाइड (पथप्रदर्शक) मुझे सब कुछ विस्तारपूर्वक बता रहा था, परन्तु मैंने केवल उसके होंठ हिलते ही देखे क्योंकि चारों तरफ इतना कोलाहल (खड़खड़ाहट) था। मेरे लिए वह अनुभव ऐसा था जैसे कि मैं किसी कारखाने में हूँ।

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[6] I have often been taken around many types of factories, but as my guides move their lips. I give up all attempts at knowing how cotton or silk is converted into yarn and fabric. The noise of machinery is always at a higher scale than the voice of the guide, a fact which is generally overlooked by those who take people around factories. While all the explanation is going on, my mind keeps feasting on visions of a zone of silence.

(आई हैव ऑफन बीन टेकन अराउन्ड मेनी टाइप्स ऑफ फेक्ट्रीज़, बट एज़ माय गाइड्स मूव देअर लिप्स, आई गिव अप ऑल अटेम्पट्स एट नोइंग हाउ कॉटन और सिल्क इज़ कनवर्टेड इन्टू यार्न एण्ड फेब्रिक। द नॉइज ऑफ मशीनरी इज़ आलवेज़ एट द हायर स्केल देन द वॉयस ऑफ द गाइड, अ फेक्ट विच इज़ जनरली ओवरलुक्ड बाय दोज़ हू टेक पीपुल अराउन्ड फेक्ट्रीज़। व्हाइल ऑल द एक्सप्लेनेशन इज गोइंग ऑन, माय माइन्ड कीप्स फेयस्टिंग ऑन विजन ऑफ अ जोन ऑफ साइलेन्स।)

हिन्दी अनुवाद :
मुझे कई प्रकार की फैक्ट्रियों में ले जाया गया परन्तु मेरे गाइड केवल अपने होठों को ही हिलाते थे। मैं कपास या रेशम को किस तरह सूत और कपड़े में बदला जाता है इसे समझने के सभी प्रयास त्याग देता हूँ। मशीनरी का शोरगुल गाइड की आवाज से बहुत तीव्र होता है, यह तथ्य उन लोगों द्वारा उपेक्षित कर दिया जाता है जो लोगों को फैक्ट्रियों में ले जाते हैं। जबकि सारा वर्णन चलता रहता है, मेरा मस्तिष्क किसी शान्ति क्षेत्र के मानसिक दृश्यों में विचरण करता रहता है।

[7] I abandoned a very comfortable house once because of a neighbour who switched on his radio every morning at five, long before even the gates were unlocked in any radio station. The result of such an early switching on was that the radio (the neighbour’s) kept up a sort of humming, a most harassing accompaniment, unbroken like the humming of a thousand bees. I fear that this simile may mislead my readers by its poetic association, but, far from it, this humming was like the skewering of one’s brain by many instruments of torture, something like a pneumatic drill operating at one’s temples.

(आई अबैन्डन्ड अ वेरी कम्फर्टेबल हाउस वन्स बिकॉज़ ऑफ अ नेबर हू स्विच्ड ऑन हिज़ रेडियो एवी मॉर्निंग एट फाइव, लॉग बिफोर इवन द गेट्स वर अनलॉक्ड इन एनी रेडियो स्टेशन। द रिज़ल्ट ऑफ सच एन अर्ली स्विचिंग ऑन वॉज़ दैट द रेडियो (दे नेबर्स) केप्ट अप अ सॉर्ट ऑफ यूमिंग, अ मोस्ट हेरासिंग अकम्पनीमेंट अनब्रोकन लाइक द यूमिंग ऑफ अ थाउजन्ड बीज। आई फियर दैट दिस सिमिल मे मिस्लीड माय रीडर्स बाय इट्स पोएटिक असोसिएशन बट फार फ्रॉम इट, दिस यूमिंग वॉज़ लाइक द स्कीविरंग ऑफ वन्स ब्रेन बाय मेनी इंन्स्ट्रमेंटस ऑफ टॉरचर, समथिंग लाइक अ न्यूमेटिक ड्रिल ऑपरेटिंग एट वन्स टेम्पल्स।)

हिन्दी अनुवाद :
मैंने एक बहुत ही आरामदेह घर को त्याग दिया क्योंकि एक पड़ोसी था जो अपने रेडियो को प्रात: 5 बजे चालू कर देता था, किसी रेडियो स्टेशन के गेट के ताले खुलने से बहुत पहले। परिणाम था कि पड़ोसी का रेडियो एक प्रकार की गुनगुनाहट करता रहता था, जो कि एक प्रकार पीड़ादायी साथी था, बिना रुके हजारों मधुमक्खियों की गुनगुनाहट के समान था। मुझे डर है कि वह उपमा मेरे पाठकों को उसके कविता के साथ जुड़े होने से गलतफहमी पैदा करेगी किन्तु इससे दूर तक, यह गुनगुनाहट किसी व्यक्ति के कानों में कई यन्त्रों द्वारा किसी व्यक्ति के मस्तिष्क भेदन के समान लगती थी। एक प्रकार की वायु चलित बरमें के द्वारा खोपड़ी में भेदन करने के समान।

[8] Why my neighbour should have queued up so early in the day in order to receive a radio programme was a thing I could never understand. Its only effect was to make me get up early since I did not like to lie in bed wallowing in uncheritable neighbourly thoughts the first thing in the day. Moreover I was not without hope since a friend who knows all about radios told me that my neighbour’s habit of switching on the radio when the transmitter was still cold was the surest way of destroying the valves, if not the radio itself ………. But nothing occurred along those happy lines, and I had to move on.

(व्हॉय माय नेबर शुड हैव क्यूउड अप सो अर्ली इन द डे इन ऑर्डर टु रिसीव अ रेडियो प्रोग्राम वॉज़ अ थिंग आई कुड नेवर अण्डरस्टैण्ड्। इट्स ओनली इफेक्ट वॉज़ टु मेक मी गेट अप अर्ली सिन्स आई डिड नॉट लाइक टू लाइ इन बेड वेलोइंग इन अनचेरिटेबल नेबरली थॉट्स द फर्स्ट थिंग्स इन द डे। मोरओवर आई वॉज़ नॉट विदाउट होप सिन्स अ फ्रेन्ड हू नोज ऑल अबाउट रेडियोज टोल्ड मी दैट माय नेबर्स हैबिट ऑफ स्विचिंग ऑन द रेडियो व्हेन द ट्रांसमिटरं वॉज़ स्टिल कोल्ड वॉज़ द स्युअरेस्ट वे ऑफ डिस्ट्रॉइंग वाल्व्ज, इफ नॉट द रेडियो इट सेल्फ …….. बट नथिंग आकर्ड एलांग दोज हैप्पी लाइन्स, एण्ड आई हैड टू मूव ऑन।)

हिन्दी अनुवाद :
मेरा पड़ोसी इतनी जल्दी दिन में रेडियो कार्यक्रम को प्राप्त करने में लाइन में लग जाता है मैं कभी समझ नहीं पाया। इसका मुझ पर इतना ही प्रभाव मेरे ऊपर हुआ कि मुझे भी जल्दी उठ जाना पड़ता था क्योंकि मैं इतनी देर तक बिस्तर में पड़ा पड़ोसी के प्रति द्वेषपूर्ण विचारों में सुबह-सुबह लिपटा नहीं रहना चाहता था और मैं इस उम्मीद में नहीं था क्योंकि मेरे एक मित्र ने जो कि रेडियो के बारे में सब कुछ जानता था कहा कि रेडियो जो ट्रांसमिटर के ठंडे बने रहने के वक्त रेडियो को ऑन करना यदि रेडियो को नहीं तो उसके वॉल्ब्ज को नष्ट करना है …….. किन्तु कुछ भी नहीं हुआ और मुझे वहाँ से चले जाना पड़ा।

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[9] I sometimes feel that God, who constructed the human body with so much forethought seems to have become weary when he came to the ears, and left them as the most vulnerable portion of a human being. The result is that we spend all our hours longing for something that we cannot attain, namely silence.

(आई समटाइम्स फील दैट गौड, हू कन्स्ट्रक्टेड द ह्यूमन बॉडी विद सो मच फोरथॉट सीम्स टू हैव बिकम वीअरी वेन ही केम टु द इअर्स, एण्ड लेफ्ट देम-एज द मोस्ट वलनरेवल पोर्स ऑफ ए ह्यूमन बीइंग। द रिजल्ट इज दैट वी स्पेन्ड ऑल अवर आवर्स लाँगिंग फॉर समथिंग दैट वी कैननॉट एटेन, नेमली साइलेन्स।)

हिन्दी अनुवाद :
कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि ईश्वर जिन्होंने मानव संरचना इतने सोच विचार के पश्चात् की है, भी परेशान व चिन्तित हो गये होंगे जब ईश्वर ने कानों के विषय में सोचा होगा और फिर उसे मानव का सर्वाधिक आघात करने योग्य वाला भाग समझकर छोड़ दिया। परिणामस्वरूप हम अपना सारा समय कुछ पाने की इच्छा में, जिसे हम प्राप्त नहीं कर सकते में बिता देते हैं और जो है शान्ति।

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The Spring Blossom Textbook General English Class 9th Solutions

King Vikram in Disguise Question Answer Class 9 General English The Spring Blossom Chapter 12 MP Board Solutions

Class 9th General English The Spring Blossom Chapter 12 King Vikram in Disguise Question Answers

King Vikram in Disguise Class 9 Questions and Answers

King Vikram in Disguise Textual Exercises

Word Power

(1) Match these words in column ‘A’ with their meanings in column ‘B’
(सुमेलित करो।)
MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 12 King Vikram in Disguise 1
Answer:
(1) → (d)
(2) → (c)
(3) → (e)
(4) → (a)
(5) → (b)

(2) Use the letters of the given word, in any order, to derive five new words.
(दिए गए शब्दों से पाँच नए शब्द बनाइए।)
Answer:

  1. accompanied – pain, panic, come, coined, maid.
  2. administrative – trait, minister, sad, man, name.
  3. persuasion – super, son, sun, person, run
  4. graciously – rag, lag, soil, coil, soul
  5. subjects – set, but, sect, tub, best
  6. consequent – use, consent, quote, sent, count.

(3) Find words from the lesson which mean the following
(अध्याय में से वे शब्द ढूँढ़िए जिनके अर्थ निम्नवत् हों।)
Answer:

  1. to behave in a particular way to make other people believe something that is not true – pretend.
  2. a person whose job was to walk through a town shouting news, official announcements, etc. – town crier.
  3. sadness that one shows and feels because somebody had died – mourning.
  4. the act of persuading somebody to do something or to believe something. – persuasion
  5. to impress somebody a lot with you beauty or skill – perfect presentation.

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How Much Have I Understood?

(1) Answer these questions in one or two sentences.
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दो।)

Question 1.
Who was king Vikramaditya?
(हू वॉज़ किंग विक्रमादित्य?)
राजा विक्रमादित्य कौन थे?
Answer:
King Vikramaditya was a just and fair ruler of the kingdom of Ujjain.
(किंग विक्रमादित्य वॉज़ अ जस्ट एण्ड फेयर रुलर ऑफ द किंगडम ऑफ उज्जैन।)
राजा विक्रमादित्य उज्जैन राज्य के न्यायप्रिय शासक थे।

Question 2.
What did the king see through the crack in the wall of the hut?
(व्हॉट डिड द किंग सी श्रू द क्रैक इन द वॉल ऑफ द हट?)
राजा ने झोंपड़ी की दरारों में से क्या देखा?
Answer:
The king saw a weeping old man in a corner, a head shaven women dancing and a young man who appeared to be in mourning singing.
(द किंग सॉ अ वीपिंग ओल्ड मैन इन अ कॉर्नर, अ हैड शेवन वुमन डान्सिंग एण्ड अ यंग मैन हू अपीयर्ड टू बी इन मोर्निंग सिंगिंग।)
राजा ने एक बूढ़े आदमी को एक कोने में रोते देखा एक मुंडे बाल वाली स्त्री को नाचते व एक शोकाकुल नवयुवक को गाते देखा।

Question 3.
Why was the young man mourning?
(व्हाय वॉज़ द यंग मैन मोर्निग?)
नौजवान मातम क्यों मना रहा था?
Answer: The young man was mourning because his father had spent all his money on educating him so that he could get a job of a scribe in the court but no post was available. So he was jobless and they were hand to mouth.
(द यंग मैन वॉज़ मोर्निग बिकॉज हिज़ फादर हैड स्पैन्ट ऑल हिज़ मनी ऑन एजुकेटिंग हिम सो दैट ही कुड गेट अ जॉब ऑफ अ स्क्राइब इन द कोर्ट बट नो पोस्ट वॉज़ अवेलेबल। सो ही वॉज़ जॉबलेस एण्ड दे वर हैण्ड टू माऊथ।)
नौजवान मातम मना रहा था क्योंकि उसके पिता ने अपना सारा धन उसकी शिक्षा पर खर्च कर दिया था ताकि वह दरबार में नकलनवीस का पद पा सके। परन्तु कोई पद खाली न था। इसलिए वह बेकार था और वे भूखे मर रहे थे।

Question 4.
Who were the members of the young man’s family?
(हू वर द मेम्बर्स ऑफ द यंग मैन्स फैमिली?)
Answer:
The members of the young man’s family were his father and a wife.
(द मैम्बर्स ऑफ द यंग फैमिली वर हिज़ फादर एण्ड अ वाईफ।)
नौजवान के परिवार में उसके पिता व एक पत्नी थी।

Question 5.
What was the topic given by the king for the examination?
(व्हॉट वॉज़ द टॉपिक गिवन बाइ द किंग फॉर द इग्जैमिनेशन?)
परीक्षा के लिए राजा द्वारा कौन-सा शीर्षक दिया गया था?
Answer:
The topic was ‘a young widow dancing to the time of merry songs sung by a young man in mourning while an old man wept.’
(द टॉपिक वॉज़ ‘अ यंग विडो डान्सिंग टू द ट्यून ऑफ मैरी साँग्स संग बाइ अ यंग मैन इन मोर्निंग एन ओल्ड मैन वेप्ट।)
शीर्षक था ‘एक नौजवान विधवा एक शोकाकुल नौजवान द्वारा गाये गए गीतों पर नाच रही है व एक बूढ़ा रो रहा है।

(II) Answer these questions in three or four sentences
(निम्न प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
What did the king hear that night? What did he do then?
(व्हॉट डिड द किंग हिअर दैट नाईट? व्हॉट डिड ही डू देन?)
राजा ने उस रात क्या सुना? उसने फिर क्या किया?
Answer:
The king heard a strange music from a hut in a poor locality. He reached the cottage and peeped in through a crack.
(द किंग हर्ड अस्ट्रेन्ज म्यूजिक फ्राम अ इट इन अ पूअर लोकैलिटी। ही रीच्ड द कॉर्टेज एण्ड पीप्ड् इन श्रू अ क्रैक।)
‘राजा ने एक गरीब मोहल्ले में एक झोंपड़ी से आते संगीत को सुना। वे उस झोंपड़ी के पास गए व दरारों से अन्दर झाँका।

Question 2.
What did the king pretend to be? Why?
(व्हाट डिड द किंग प्रिटेन्ड टू बी? व्हाय?)
राजा ने क्या होने का नाटक किया? क्यों?
Answer:
The king pretended himself to be a traveller from Java. He wanted to know the reason of all what he saw.
(द किंग प्रिटेन्डिड हिमसेल्फ टू बी अ ट्रैवलर फ्रॉम जावा। ही वॉन्टेड टू नो द रीजन ऑफ ऑल व्हॉट ही सॉ।)
राजा ने अपने आपको जावा से आया यात्री बताया ताकि उसने जो कुछ देखा था उसका कारण जान सके।

Question 3.
In your opinion why did the king announce the examination for a royal scribe immediately?
(इन योर ओपिनियन व्हाय डिड द किंग एनाउन्स द इग्जैमिनेशन फॉर अ रॉयल स्क्राइब इमीडिएटली?)
आपकी राय में राजा ने शाही नकलनवीस के लिए तत्काल परीक्षा लेने की घोषणा क्यों की?
Answer:
The king was moved by the plight of the family and especially the young man. He wanted to help him, so he immediately announced the examination for a royal scribe.
(द किंग वॉज़ मूव्ड बाइ द.प्लाईट ऑफ द फैमिली एण्ड इस्पैशली द यंग मैन। ही वॉन्टेड टू हैल्प हिम, सो ही इमीडिएटली एनाउन्सड द इग्जैमिनेशन फॉर अ रॉयल स्क्राईब।)
राजा उस परिवार के दुःख से द्रवित हो गये थे और वे उस नवयुवक की सहायता करना चाहते थे। अतएव उन्होंने तुरन्त ही शाही नकलनवीस के लिए परीक्षा की घोषणा की।

Question 4.
What was the old man’s dream? Was it fulfilled? How?
(व्हॉट वॉज़ द ओल्ड मैन्स ड्रीम? वॉज़ इट फुलफिल्ड? हाउ?)
बूढ़े आदमी का स्वप्न क्या था? क्या वह पूरा हुआ? कैसे?
Answer:
The old man’s dream was that the royalty was going to visit them at night. Yes, it was fulfilled. The king had visited them in disguise.
(द ओल्ड मैन्स ड्रीम वॉज़ दैट द रॉयलटी वॉज़ गोइंग टू विजिट देम एट नाईट। यस, इट वॉज़ फुलफिल्ड। द किंग हैड विजिटिड देम इन डिस्गाईज़।)
बूढ़े का स्वप्न था कि शाही परिवार का कोई सदस्य रात को उनके घर आयेगा। यह स्वप्न सच हुआ.क्योंकि राजा छद्मवेश में वहाँ गये।

Question 5.
Why did the young woman sell her tresses?
(व्हॉय डिड द यंग वुमन सैल हर ट्रेसेस?)
युवा महिला ने अपने बाल क्यों बेच दिए?
Answer:
The old man wanted that when royalty visited them, they should present him a silver bowl. They had no money for this. So the young woman sold her tresses.
(द ओल्ड मैन वॉन्टेड दैट व्हेन रॉयलेल्टी विजिटिड़ देम, दे शुड प्रेजेन्ट हिम अ सिल्वर बाउल। दे हैड नो मनी फॉर दिस। सो द यंग वुमन सोल्ड हर ट्रेसेस।)
बूढ़ा आदमी चाहता था कि जब शाही परिवार का सदस्य आये तो उसे चाँदी का कटोरा दिया जाय। उनके पास इसके लिए धन नहीं था। इसलिए युवा महिला ने अपने बाल बेच दिए।

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(III). Choose the correct alternative
(सही विकल्प चुनो।)

(i) Vikramaditya-was the king of ……
(a) Indore
(b) Ujjain
(c) Bhopal
(d) Dhar
Answer:
(b) Ujjain

(ii) The king went out in disguise because he wanted to check on his
(a) subjects
(b) neighbours
(c) ministers
(d) princess.
Answer:
(a) subjects

(iii) The young man wanted to become the king’s
(a) friend
(b) scribe
(c) minister
(d) town-crier.
Answer:
(b) scribe

(iv) The topic for the examination was selected by
(a) the king
(b) the minister of education
(c) the competitors
(d) the health minister.
Answer:
(a) the king

(v) The king and his servant pretended to be the travellers from
(a) Sri Lanka
(b) Surinam
(c) Java
(d) Sumatra.
Answer:
(c) Java

(IV) Arrange the following sentences in the order they occurred in the story
(निम्नलिखित वाक्यों को सही क्रम में लगाओ।)

  1. They were hand to mouth.
  2. The young man came out asked them what they wanted.
  3. King Vikramaditya was a just and fair ruler of the kingdom of Ujjain.
  4. At midnight they set out for ‘Baragaza’ via the west gate.
  5. King Vikramaditya was deeply moved by the young man’s plight.

Answer:

  1. King Vikramaditya was a just and fair ruler of the kingdom of Ujjain.
  2. At midnight they set out for ‘Bargaza’ via the west gate.
  3. The young man came out and asked them what they wanted.
  4. They were hand to mouth.
  5. King Vikramaditya was deeply moved by the young man’s plight.”

Language Practices

Make meaningful sentences from the given table.
Use Passive Voice.
( तालिका से सही वाक्य बनाओ।)
Answer:

  1. The children were taken to the zoo.
  2. A cricket match was organised at the stadium.
  3. The injured was rushed to the hospital.
  4. The advertisement was published in a newspaper.
  5. My uniform was stitched by the tailor.
  6. The toys were sold at the shop.

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Listening Time

Answer the questions based on the given passage.
(दिए गए गद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दो।)

Question 1.
Is the Kashi Express running late?
Answer:
Yes, Kashi Express is running late by three hours.

Question 2.
What time is the train expected to arrive?
Answer:
The train is expected to arrive at 17 hours.

Question 3.
What is the number of the train?
Answer:
The number of the train is 3075.

Question 4.
Which platform will it come at?
Answer:
It will come on platform number two.

Speaking Time

With the help of given flow chart, tell how to get reservation.
(दिए गए चार्ट की मदद से बताओ कि आरक्षण कैसे कराते हैं।)
Answer:
To get the reservation of a berth for the journey in a train, firstly go to the reservation office at the railway station. Take the reservation form or application form from there and fill it completely giving all the information about the date of travelling, train’s name and number, class in which you want to travel, name, age, sex etc. Handover this form to the booking clerk. If the berths are available on the given date, reservation is given otherwise the status is told. If the berths are available pay the desired sum. The clerk will then hand over the reservation ticket to you.

Writing Time

Frame a story based on the picture in the book with the help of the given clues.
(कहानी बनाओ।)
Answer:
One day a woodcutter was cutting wood in the forest. Suddenly he found a bag of gold coins there. He was an honest person. He immediately took the bag to the king. The king was very pleased to see his honesty. He returned the bag to him only.

Things to do

Question 1.
Find the kingdoms and the rulers of Central India.
(मध्य भारत के राज्य व शासकों के नाम लिखिए।)
Answer:
Student should do themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

Question 2.
Find out any famous and interesting story related to any of the above king or queen.
(उपरोक्त दिए गए राजा या रानी से जुड़ी कोई कहानी लिखो।)
Answer:
Students should do themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

Question 3.
Draw a picture of the throne of Vikramaditya and colour it properly.
(राजा विक्रमादित्य के सिंहासन का चित्र बनाओ व उसमें रंग भरो।)
Answer:
Students can draw and colour themselves.
(छात्र स्वयं बनाएँ।)

King Vikram in Disguise Difficult Word Meanings 

fair (फेअर)-acceptable and appropriate in a particular situation उचित; subject (सब्जेक्ट)-a person who has the right to a particular country esp. one with a king or a queen ऋण; set out (सैट आउट)-leave a place and begin a journey यात्रा पर रवाना होना; pretend (प्रिटेन्ड)-to behave in a particular way, in order to hide truth सब छुपाने के लिए एक खास ढंग से व्यवहार करना, ढोंग करना; mourning (मोनिंग)- sadness that you show and feel because somebody has died family करना; persuasion (परस्युएशन)-the act of persuading somebody to do something or to believe something आग्रह करना; scribe (स्क्राइब)-a.person who made copies of written documents before printing was invented नकलनवीस; royalty (रॉयल्टी)-one or more members of a royal family शाही परिवार के सदस्य; bowl (बोल)-a deep round dish with a wide open top प्याला, कटोरा; plight (प्लाइट)-a difficult and sad situation एक कठिन स्थिति; merry (मेरी)-happy and cheerful प्रसन्न; consequently (कॉन्सिक्वेंटली)-as a result परिणामस्वरूप; tresses (ट्रैसिस)-woman’s long hair बालों की लट; unresolved (अनरिजॉल्वड)-notresolved जिसका समाधान नहीं हुआ।

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King Vikram in Disguise Summary, Pronunciation & Translation

[1] King Vikramaditya was a just and fair ruler of the kingdom of Ujjain. Besides his administrative duties he would also go in disguise to check on his citizens.

One day he said to his servant, “Be ready tonight. I would like to see for myself whether my subjects are safe or not. I wish to inspect areas outside the walls of the city.” It was decided by the king that he himself would play the role of a servant. Only one servant was, allowed to accompany the king. This servant would play the role of the king.

(किंग विक्रमादित्य वाज़ अजस्ट एण्ड फेअर रूलर ऑफ द किंगडम ऑफ उज्जैन। बिसाइड्स हिज़ एडमिनिस्ट्रेटिव ड्यूटीज़ ही वुड अल्सो गो इन डिस्माइज टु चैक ऑन हिज़ सिटीजन्स।

वन डे ही सेड टु हिज़ सर्वेण्ट, “बी रैडी टु नाइट। आई वुड लाइक टु सी माईसेल्फ वेदर माय सब्जेक्ट्स आर सेफ और नाट। आई विश टु इंस्पेक्ट एरियाज आउट साइड द वाल्स ऑफ द सिटी। इट वाज़ डिसाइडेड बाय द किंग दैट ही हिमसेल्फ वुड प्ले द रोल ऑफ अ सर्वेण्ट ओनली वन सर्वेण्ट वाज़ अलाउड टु ‘एकम्पनी द किंग। दिस सर्वेण्ट वुड प्ले द रोल ऑफ द किंग।)

हिन्दी अनुवाद :
राजा विक्रमादित्य उज्जैन राज्य के एक न्यायप्रिय व अच्छे राजा थे। अपनी शासकीय दायित्वों के अलावा वे अपने नागरिकों का हाल जानने के लिए भेष बदलकर जाया करते थे।

एक दिन उन्होंने अपने नौकर को कहा-“आज रात तैयार रहना। मैं स्वयं देखना चाहता हूँ कि मेरी प्रजा सुरक्षित है या नहीं। मैं शहर की दीवारों के बाहर निरीक्षण करना चाहता हूँ।” यह निश्चित हुआ कि राजा खुद नौकर की भूमिका निभायेंगे। केवल एक नौकर को ही राजा के साथ रहने की अनुमति होगी। यह नौकर राजा की भूमिका निभायेगा।

[2] At midnight they set out for Baragaza via the west gate. They pretended to be travellers from Java. There was silence everywhere except the occasional dog’s bark or an owl’s hoot. All of a sudden strange music was listened by the king. It was coming out from a hut in a poor locality. He thought why anyone so poor would be entertaining himself at that hour in the night.

(एट मिड नाइट दे सैट आउट फोर बरगाजा वाया द वेस्ट गेट। दे प्रिटेण्डेड टु बी ट्रेवेलर्स फ्राम- जावा। देअर वाज़ साइलेन्स एव्रीव्हेअर एक्सेप्ट द आकेजनल डाग्स बार्क और एन आउल्स हूट। ऑल ऑफ ए सडन स्टेन्ज म्यूजिक वाज़ लिसन्ड बाय द किंग। इट वाज़ कमिंग आउट फ्राम अ हट इन अ पुअर लोकलिटी। ही थाट व्हाय एनीवन सो पुअर वुड बी इन्टरटेनिंग हिमसेल्फ एट दैट अवर इन द नाइट।)

हिन्दी अनुवाद :
अर्द्ध रात्रि होने पर वे पश्चिमी दरवाजे से होते हुए बरगाजा रवाना हुए। उन्होंने जावा से आये यात्रियों का स्वांग किया। किसी कुत्ते के भौंकने या किसी उल्लू की आवाज के सिवाय चारों तरफ सन्नाटा छाया था। अचानक राजा के द्वारा अजीब तरह का संगीत सुना गया। वह आवाज एक गरीब इलाके. की एक झोंपड़ी से आ रही थी। उसने सोचा कि रात्रि के उस पहर में कोई निर्धन व्यक्ति अपने आपका मनोरंजन क्यों कर रहा होगा।

[3] When the king reached near the hut he was surprised to see a broken hut where someone was singing merrily. Out of curiosity the king peeped into the hut through a crack. He saw a weeping old man in a corner. There was a woman who seemed to be a widow as her head was shaven, was dancing and a young man who appeared to be in a mourning was singing. The servant was, then, asked by the king to peep inside. The servant was of the opinion that it was these people’s idea of fun, and they should not intrude there. But the king was bent upon an explanation so he called out to the owner of the house.

(व्हेन द किंग रीच्ड नियर द हट ही वाज़ सरप्राइज्ड टु सी अ ब्रोकन हट व्हेअर, समवन वाज़ सिमिंग मेरिली। आउट ऑफ क्यूरिओसिटी द किंग पीप्ड इन टू द हट श्रू अ क्रेक। ही सा अ वीपिंग ओल्ड मैन इन अ कॉर्नर । देअर वाज़ अ वोमन हू सीम्ड टु बी अ विंडो एज़ हर हैड वाज़ शेवन, वाज़ डांसिंग एण्ड अ यंग मैन, हू अपीअर्ड टू बी इन अ मोर्निंग वाज़ सिंगिंग। द सर्वेट वाज़ देन, आस्कंड बाइ वाय किंग टु पीप इनसाइड। द सर्वेण्ट वाज़ ऑफ द ओपिनियन दैट इट वाज़ दीज़ पीपुल्स आइडिया ऑफ फन, एण्ड दे शुड नाट इन्ट्रड देअर बट द किंग वाज़ बेण्ट अपॉज़ एन एक्सप्लेनेशन सो ही काल्ड आउट टू द ओनर ऑफ द हाउस।)

हिन्दी अनुवाद :
जब राजा झोंपड़ी के पास पहुँचा तो उसे एक टूटी-फूटी झोंपड़ी को देखकर आश्चर्य हुआ जहाँ कोई मजे से गा रहा था। उत्सुकतावश राजा ने एक छेद से झोंपड़ी में झाँका। उसने एक कोने में एक बूढ़े आदमी को रोते देखा। एक औरत थी जो कि उसके सिर मूड़े हुए होने से विधवा लग रही थी, नाच रही थी और एक नौजवान जो कि बहुत विलाप करता लग रहा था, गा रहा था। फिर राजा ने नौकर को अन्दर झाँकने को कहा। नौकर की राय थी कि यह इन लोगों के मनोरंजन का तरीका था और उन्हें वहाँ दखल नहीं देना चाहिए। किन्तु राजा उसका खुलासा चाहता था अतः उसने घर के बाहर से घर के मालिक को बाहर बुलाया।

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[4] The young man came out and asked them what they wanted. The servant said, “We are travellers from Java. We are looking for an inn to rest.” The young man replied that there was no inn because it was a poor locality and they couldn’t stay in his home because his house was in mourning. The king asked him, “Why are you mourning ?” After long persuasion the reason was disclosed by the young man. He said that his father had spent all his money on educating him so that he could get the job of a scribe in the court.

(द यंग मैन केम आउट एण्ड आस्क्ड दैम व्हाट दे वांटेड। द सर्वेण्ट सैड, “वी आर ट्रेवेलर्स फ्राम जावा। वी आर लुकिंग फोर एन इन टु रेस्ट।” द यंग मैन रिप्लाइड दैट देअर वाज़ नो इन बिकॉज़ इट वाज़ अ पुअर लोकेलिटी एण्ड दे कुडण्ट स्टे इन हिज़ होम बिकॉज हिज हाउस वेज़ इन मोर्निंग। द किंग आस्कड हिम, “व्हाय आर यू मोर्निंग?” ऑफ्टर लांग परस्युएशन द रीज़न वाज़ डिस्क्लोज्ड, बाय द यंग मैन। ही सैड दैट हिज फादर हैड स्पेण्ट ऑल हिज़ मनी ऑन एजुकेटिंग हिम सो दैट ही कुड गेट द जॉब ऑफ अ स्क्राइब इन द कोर्ट।)

हिन्दी अनुवाद :
नौजवान बाहर आया और उसने पूछा कि वे क्या चाहते हैं। नौकर ने कहा कि हम यात्री जावा से आये हैं। हम यहाँ आराम करने के लिए एक सराय खोज रहे हैं। नौजवान ने उत्तर दिया कि वहाँ कोई सराय नहीं है क्योंकि वह एक गरीब इलाका है और वे उसके घर में नहीं रह सकते क्योंकि उसका घर मातम में है। राजा ने पूछा, “तुम मातम क्यों मना रहे हो?” काफी आग्रह के बाद नौजवान ने इसका कारण बताया। उसने कहा कि उसके पिता ने उसकी लिखाई-पढ़ाई पर सारी रकम खर्च कर दी ताकि वह दरबार में एक लिपिक की नौकरी कर सके।

[5] No examination had been held for a long time, since no post was available. Now they were hand to mouth. On that day his father had a dream that the royalty was going to visit them at night. So his father asked his daughter-in-law to get a silver bowl from the market. But the night was almost over and none had come to visit them. His father was crying because his foolish dream had made the young man’s wife look like a widow. Now she was dancing and he himself was singing to make the old man feel better but he still wept.

(“नो इक्जामिनेशन हैड बीन हैल्ड फोर अ लांग टाइम, सिन्स नो पोस्ट वाज़ अवेलेबल। नाउ दे वर हैण्ड टु माउथ। ऑन दैट डे हिज़ फादर हैड अ ड्रीम दैट द रॉयल्टी वाज गोइंग टु विजिट देम एट नाइट। सो हिज़ फादर आस्क्ड हिज़ डाटर इन लॉ टु गेट अ सिल्वर बाउल फ्राम द मार्केट। बट द नाइट वाज़ अल्मोस्ट ओवर एण्ड नन हैड कम टु विजिट देम। हिज़ फादर बाज़ क्राइंग बिकाज़ हिज फुलिश ड्रीम एण्ड हैड मेड द यंग मेन्स वाइफ लाइक अ विंडो। नाउ सी वाज़ डांसिंग एण्ड ही हिमसेल्फ वाज़ सिंगिंग टु मेक ओल्ड मैन फील बेटर बट ही स्टिल वेप्ट।)

हिन्दी अनुवाद :
काफी लम्बे समय से कोई परीक्षा नहीं हुई है क्योंकि कोई भी पद उपलब्ध नहीं था। अब वे बड़ी मुश्किल से गुजारा कर रहे हैं। उस दिन उसके पिता ने स्वप्न देखा कि रात को कोई शाही मेहमान उनके यहाँ आ रहा है। इसलिए उसने अपनी बहू को शाही मेहमान को भेंट देने के लिए एक चाँदी का प्याला लाने को कहा। किन्तु रात लगभग समाप्ति पर है और कोई नहीं आया। उसके पिता रो रहे हैं क्योंकि उस मूर्खतापूर्ण स्वप्न के कारण उन्होंने अपनी बहू को विधवा का स्वरूप दिया। अब बहू नाच रही है और वह स्वयं गा रहा है ताकि उसके पिता अच्छा महसूस कर सकें पर वे रोये जा रहे हैं।

[6] King Vikram was deeply moved by the young man’s plight. The family was admired by the king. Then the king informed them that there was going to be a court examination next morning. The young man was surprised to know this and was equally happy to have an opportunity to prove his worth. He bade his unusual visitors farewell after thanking them sincerely for their useful information.

(किंग विक्रम वाज़ डीपली मूव्ड बाय द यंग मेन्स म्लाइट। द फैमिली वाज़ एडमायर्ड बाय द किंग। देन द किंग इन्फार्ड देम दैट देअर वाज़ गोइंग टु बी अ कोर्ट इक्जामिनेशन नेक्स्ट मार्निंग। द यंग मैन वाज़ सरप्राइज्ड टु नो दिस एण्ड वाज़ इक्वली हैप्पी टु हैव एन अपोर्चुनिटी टु यूव हिज़ वर्थ। ही वेड हिज़ अनयुज्वल विजिटर्स फेअर वैल आफ्टर थेकिंग दैम सिन्सिअरली फोर देअर यूजफुल इन्फार्मेशन।)

हिन्दी अनुवाद :
राजा विक्रम नौजवान के भारी दु:ख को देखकर गहराई से द्रवित हो गए। उस परिवार के प्रति राजा का मन सम्मान से भर उठा। फिर राजा ने उन्हें सूचित किया कि अगली सुबह दरबार में एक परीक्षा होने वाली है। नौजवान को यह जानकर आश्चर्य हुआ और उसे अपनी योग्यता को सिद्ध करने का एक अवसर मान कर हर्ष हुआ। उसने अपने असाधारण मेहमानों को इस उपयोगी सूचना के लिये हृदय से धन्यवाद देकर विदा किया।

[7] The king returned to the palace. The first order that was issued by the king was to the towncriers. They were to announce the time of the court examination for a royal scribe to be held that very day. The town crier’s call was heard by the young man. He immediately made his way to the great hall of the Ujjain University where the examination was to be held. The competitors had to write an essay on a given topic. The strange topic was chosen by the king himself. The topic was a young widow dancing to the tune merry songs sung by a young man in mourning while an old man wept.

(द किंग रिटर्ड टु द पेलेस। द फर्स्ट ऑर्डर दैट वाज़ इस्यूड बाय द किंग वाज़ टु द टाउन-क्रायर्स। दे वर टु अनाउन्स द टाइम ऑफ द कोर्ट इक्जामिनेशन फोर अ रॉयल स्क्राइब टु बी हैल्ड दैट वेरी डे। द टाउन क्रायर्स काल वाज़ हर्ड बाय द यंग मैन। ही इमिजिएटली मेड हिज़ वे टु द ग्रेट हाल ऑफ उज्जैन यूनिवर्सिटी व्हेअर द इक्जामिनेशन वाज़ टु बी हैल्ड। द काम्पिटिटर्स हैड टु राइट एन एसे ऑन अ गिवन टॉपिक। द स्ट्रेन्ज टॉपिक वाज़ चोज़न बाय द किंग हिमसेल्फ। द टॉपिक वाज़ ‘अ यंग विडो डान्सिंग टु द ट्यून ऑफ मेरी सांग्ज बाय अ यंग मैन इन मोर्निंग व्हाइल एज़ ओल्ड मैन वेप्ट।)

हिन्दी अनुवाद :
राजा महल की ओर लौट गया। राजा के हाथ पहला आदेश शहर के दीन-दुखी लोगों के लिए जारी किया गया। उन्होंने उसी दिन दरबार के लिए शाही लिपिक के लिए परीक्षा की उद्घोषणा की। नवयुवक ने शहर के दीन-दुखियों के आमंत्रण को सुना। वह तुरन्त ही उज्जैन विश्वविद्यालय के बड़े हॉल की ओर चल दिया जहाँ परीक्षा आयोजित होनी थी। प्रतियोगियों को दिये गये विषय पर एक निबन्ध लिखना था। अद्भुत विषय का चुनाव स्वयं राजा द्वारा किया गया था। विषय था-एक युवा विधवा एक युवक के दुख भरे गीत के ऊपर प्रसन्नचित्त होकर नृत्य कर रही है जबकि एक वृद्ध व्यक्ति रो रहा था।”

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[8] Everyone was confused about the odd topic but the young man made a perfect presentation. Consequently, he was awarded the first place by the examiners. He was duly appointed as the royal scribe. Then he was taken to the king. The king smiled graciously. He was totally unrecognizable from the way he had looked the previous night in the faded clothes of a humble servant. He congratulated the young man on being awarded the high office and told him he could now afford to buy his wife’s tresses back. Later recounting the dazzle of the court of Ujjain to his happy wife, the young man wondered aloud, “How did king Vikram know about your shaven head?”

To him the mystery remained unresolved. He did not know that his father’s dream of having royal visitors the previous night had actually come true.

(एवीवन वाज कन्फ्यूज्ड अबाउट द ऑर्ड टापिक बट द यंग मैन मेड अ परफेक्ट प्रेजेन्टेशन। कानसिक्वेन्टली ही वाज़ अवार्डेड द फर्स्ट, प्लेस बाय द इक्जामिनर्स। ही वाज़ ड्यूली अपाइन्टेड एज़ द रॉयल स्क्राइब। इन ही वाज़ टेकन टु द किंग। द किंग स्माइल्ड ग्रेशियसली। ही वाज़ टोटली अनरिकानिंजबल फ्राम द वे ही हैड लुक्ड द प्रीवियस नाइट इन द फेडेड क्लॉथ्स ऑफ अ हम्बल सर्वेन्ट। ही कांग्रेचुलेटेड द यंग मैन ऑन बीईग अवार्डोड द हाई ऑफीस एण्ड टोल्ड हिम ही कुछ नाउ अफोर्ड टु बाब हिज़ बाइफ्स ट्रेसेस बैक लैटर रिकाउटिंग द डेजल आफ द कोर्ट ऑफ उज्जैन टु हिज़ हैप्पी वाइफ, द यंग मैन वॉन्डर्ड अलाउड, “हाउ डिड किंग विक्रम नो अबाउट युअर शेवन हैड।”

टु हिम द मिस्ट्री रिमेन्ड अनसालव्ड। ही डिड नाट नो दैट हिज़ फादर्स ड्रीम ऑफ रॉयल विजिटर्स द प्रिवीयस नाइट हैड एक्चुअली कम टू।)

हिन्दी अनुवाद :
प्रत्येक व्यक्ति उस विचित्र विषय के बारे में भ्रमित था किन्तु उस नवयुवक ने एक यथार्थ चित्रण प्रस्तुत किया। परिणामस्वरूप उसे परीक्षा के द्वारा प्रथम स्थान से सम्मानित किया गया। उसे शाही लिपिक के पद पर नियुक्ति दी गई। फिर उसे राजा के पास ले जाया गया। राजा कृपा पूर्वक मुस्कराया। पिछली रात्रि से वह पूर्णतः भिन्न (न पहचानने योग्य) लग रहा था जब उसने एक नौकर के फीके हो चुके कपड़ों को पहन रखा था। उसने उच्च पद पर सम्मानित होने के लिए बधाई दी और कहा कि वह अपनी पत्नी के लम्बे बालों को फिर से खरीदने की योग्यता रखता है। बाद में उज्जैन दरबार की भव्यता में अपनी प्रसन्न पत्नी को नवयुवक ने अवाक् होकर कहा, “राजा विक्रम को तुम्हारे गंजे सिर के होने की बात कैसे पता है?” उसके लिए यह रहस्य ही रह गया। वह नहीं जानता था कि उसके पिता का पिछले रात को देखा गया शाही मेहमान का सपना वास्तव में सच हो चुका है।

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The Spring Blossom Textbook General English Class 9th Solutions

Fair Play Question Answer Class 9 General English The Spring Blossom Chapter 5 MP Board Solutions

Class 9th General English The Spring Blossom Chapter 5 Fair Play Question Answers

Fair Play Class 9 Questions and Answers

Fair Play Textual Exercises

Word Power

(a) Choose the correct meanings of the following words
(दिए गए शब्दों के सही अर्थ चुनिए।)

(1) wretched-
(a) separate
(b) worthless
(c) insane.
Answer:
(b) worthless

(2) indifferent-
(a) separate
(b) alike
(c) having no interest.
Answer:
(c) having no interest

(3) obvious-
(a) easy to see
(b) particular
(c) similar
Answer:
(a) easy to see

(4) justice-
(a) proper
(b) fair treatment
(c) decision
Answer:
(b) fair treatment

(5) annoyed-
(a) slightly angry
(b) sad
(c) indifferent.
Answer:
(a) slightly angry.

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(b) Write the meanings of these phrases and words and use them in your own sentences
(दिए गए शब्दों के अर्थ लिखिए तथा उन्हें वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए।)

(1) kept ringing – echoing in the mind.
The words of my teacher kept ringing in my mind till I came home.

(2) piece of luck – something good happened.
It was a piece of luck for me to escape from the kidnapper’s home.

(3) keep mum – keep quiet.
My Mother scolded my brother harshly and asked him several questions but he kept mum.

(4) become indifferent – negligent.
Sohan has become indifferent to his parents after his marriage.

(5) grudged – complained.
She always grudges of his coming late.

(6) nominate – suggest somebody name for a post.
Villagers nominated Satish as the head of panchayat

(7) abide by – follow
I always abide by the rules fixed by my father.

(8) deviate – leave the fixed path.
He has now deviated from his word.

(9) tight spot – difficult situation.
I am not able to understand that whether I should listen to my heart or my mind, I am in a tight spot.

(10) embraced – to put arms around somebody.
My team mates embraced me in joy when we won the football match.

How Much Have I Understood?

(a) Answer the following questions in one or two sentences
(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Who was nominated as the head Panch by the aunt?
(हू वॉज़ नॉमिनेटिड एज़ द हैड पंच बाइ द आन्ट?)
सरपंच के लिए चाची ने किसका नाम सुझाया?
Answer:
Algu Chowdhary was nominated as the head Panch by the aunt.
(अलगू चौधरी वॉज़ नॉमिनेटिड एज द हैड पंच बाइ द आन्ट।)
चाची ने अलगू चौधरी का नाम सरपंच के लिए सुझाया।

Question 2.
Who nominated Jumman as the head Panch?
(हू नॉमिनेटिड जुम्मन एज़ द हैड पंच?)
जुम्मन को सरपंच के लिए किसने चुना?
Answer:
Samjhu Sahu nominated Jumman as the head Panch.
(समझू साहू नॉमिनेटिड जुम्मन एज़ द हैड पंच।)
समझू साहू ने जुम्मन को सरपंच चुना।

Question 3.
Where was the village Panchayat held?
(व्हेअर वॉज़ द विलेज पंचायत हैल्ड?)
गाँव की पंचायत कहाँ हुई?
Answer:
The village Panchayat was held under a banyan tree.
(द विलेज पंचायत वॉज़ हैल्ड अन्डर अ बैनयन ट्री।)
गाँव की पंचायत एक बरगद के वृक्ष के नीचे हुई।

Question 4.
What was the demand of Jumman’s aunt?
(व्हॉट वॉज़ द डिमान्ड ऑफ जुम्मन्स आन्ट?)
जुम्मन की खाला की क्या माँग थी?
Answer:
Jumman’s aunt winted Jumman to give her a monthly allowance.
(जुम्मन्स आन्ट वॉन्टेड जुम्मन टू गिव हर अ मन्थली अलाओएन्स।)
जुम्मन की खाला जुम्मन से मासिक खर्चे के लिए रकम चाहती थी।

(b) Answer the following questions in three or four sentences.
(निम्न प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
What was the understanding between Jumman and his aunt?
(व्हॉट वॉज़ द अन्डरस्टैन्डिंग बिटवीन जुम्मन एण्ड हिज़ आन्ट?)
जुम्मन और उसकी खाला में क्या तय हुआ?
Answer:
The understanding between Jumman and his, aunt was that his aunt would transfer her property to Jumman and would stay with him and Jumman would look after her.
(द अन्डरस्टैन्डिंग बिटवीन जुम्मन एण्ड हिज़ आन्ट वॉज़ दैट हिज आन्ट वुड ट्रान्सफर हर प्रॉपर्टी टू जुम्मन एण्ड वुड स्टे विद हिम एण्ड जुम्मन वुड लुक ऑफ्टर हर।)
जुम्मन व उसकी खाला में तय था कि खाला अपनी जायदाद जुम्मन के नाम करेगी व जुम्मन खाला को अपने यहाँ रखेगा व उसकी देखभाल करेगा।

Question 2.
Why was Jumman happy when Algu was nominated as the head Panch?
(व्हॉय वॉज़ जुम्मन हैप्पी व्हेन अलगू वॉज़ नॉमिनेटिड एज़ द हैड पंच?)
जब अलगू का नाम सरपंच के लिए प्रस्तावित हुआ तब जुम्मन खुश क्यों था?
Answer:
Algu and Jumman were close friends. Therefore, Jumman was happy that Algu would give judgement in his favour.
(अलगू एण्ड जुम्मन वर क्लोज फ्रेन्ड्स। देअरफोर, जुम्मन वॉज़ हैप्पी दैट अलगू वुड गिव जजमेन्ट इन हिज़ फेवर।)
अलगू व जुम्मन गहरे दोस्त थे। अतः जब अलगू का नाम सरपंच के लिए सुझाया गया तब जुम्मन को खुशी हुई कि निर्णय उसके पक्ष में होगा।

Question 3.
What did Algu think when he started his proceedings as the head Panch?
(व्हॉट डिड अलगू थिंक व्हेन ही स्टार्टेड हिज़ प्रोसीडिंग्स एज़ द हैड पंच?)
जब अलगू ने सरपंच के रूप में कार्यवाही शुरू की तो उसने क्या सोचा?
Answer:
Algu thought that Jumman’s friendship should not come in the way of justice.
(अलगू थॉट दैट जुम्मन्स फ्रेन्डशिप शुड नॉट कम इन द वे ऑफ जस्टिस।)
अलगू ने सोचा कि न्याय के रासते में जुम्मन की दोस्ती आड़े नहीं आनी चाहिए।

Question 4.
What was Algu’s judgement? How did Jumman take it?
(व्हॉट वॉज़ अलगूज जजमेन्ट? हाउ डिड जुम्मन टेक इट?)
अलगू ने क्या निर्णय दिया? जुम्मन ने उसे कैसे लिया?
Answer:
Algu’s judgement was that Jumman must pay his aunt a monthly allowance, or else the pa property goes back to her. On this Jumman became Algu’s enemy.
(अलगूज जजमेन्ट वॉज़ दैट जुम्मन मस्ट पे हिज़ आन्ट अ मन्थली अलाओएन्स और एल्स द प्रॉपर्टी गोज बैक टू हर। ऑन दिस जुम्मन बिकेम अलगूज एनिमी।)
अलगू ने निर्णय दिया कि जुम्मन को अपनी खाला को मासिक खर्चा देना होगा अन्यथा जायदाद खाला को वापस हो जायेगी। इस पर जुम्मन अलगू का दुश्मन बन गया।

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Question 5.
Which incident took algu to a tight spot?
(व्हिच इन्सिडेन्टं टुक अलगू ट अ टाईट स्पॉट?)
कौन-सी घटना ने अलगू को मुश्किल में डाल दिया?
Answer:
The incident that took Algu to a tight spot was that he had sold one of his bullocks to Samjhu Sahu. After some time the bullock died. So Samjhu refused to pay his price.
(द इन्सिडेन्ट दैट टुक अलगू टू अ टाईट स्पॉट वाज़ दैट ही हैड सोल्ड वन ऑफ. हिज़ बुलक्स टू समझू साहू। ऑफ्टर सम टाइम द बुलक डाइड। सो समझू रिफ्यूज्ड् टू पे हिज़ प्राइस।)
घटना यह थी कि अलगू ने अपना एक बैल समझू साहू को बेचा था। कुछ दिनों के बाद बैल मर गया। अतः समझू ने उसकी कीमत देने से इंकार कर दिया।

Question 6.
Why did Samjhu Sahu nominate Jumman as the head Panch?
(व्हाय डिड समझू साहू नॉमिनेट जुम्मन एज़द हैड पंच?)
समझू साहू ने जुम्मन का नाम सरपंच के लिए क्यों सुझाया?
Answer:
Jumman and Algu had become enemies after Algu gave the judgement against Jumman. So Samjhu Sahu nominated Jumman as head Panch thinking that he will give the judgement in his favour.
(जुम्मन एण्ड अलगू हैड बिकम एनिमीज़ ऑफ्टर अलगू गेव द जजमेन्ट अगेन्स्ट जुम्मन। सो समझ साहू नॉमिनेटिड जुम्मन एज़ हैड पंच थिंकिंग दैट ही विल गिव द जजमेन्ट इन हिज़ फेवर।)
अलगू के जुम्मन के खिलाफ निर्णय के बाद जुम्मन व अलगू दुश्मन बन गए थे। इसलिए समझू साहू ने जुम्मन को सरपंच बनाया क्योंकि उसने सोचा कि जुम्मन उसके पक्ष में निर्णय देगा।

Question 7.
What was the decision of Jumman? How did Algu take it?
(व्हाट वॉज़ द डिसिजन ऑफ जुम्मन? हाउ डिड अलगू टेक इट?)
जुम्मन का निर्णय क्या था? अलगू ने उसे कैसे लिया?
Answer:
Jumman’s judgement was that Sahu should pay Algu the price of the bullock. Algu became very happy and said God lives in the voice of the Panch.
(जुम्मन्स जजमेन्ट वॉज़ दैट साहू शुड पे अलगू द प्राइस ऑफ द बुलक। अलगू बिकेम वेरी हैप्पी एण्ड सेड गॉड लिव्स इन द वॉइस ऑफ द पंच।)
जुम्मन का निर्णय था कि साहू को बैल की कीमत अलगू को देनी होगी। अलगू बहुत खुश हुआ और उसने कहा कि पंच की वाणी ईश्वर की वाणी होती है।

Question 8.
“Victory to the Panchayat. This is justice. God lives in the voice of the Panch.” Who said all this and why? Explain. (“विक्ट्री टू द पंचायत। दिस इज़ जस्टिस। गॉड, लिव्स इन द वॉइस ऑफ द पंच।” हू सेड ऑल दिस एण्ड व्हॉय? एक्सप्लेन।)
“पंचायत की जय हो। यह न्याय है। ईश्वर पंच की वाणी में निवास करता है।” यह किसने कहा और क्यों कहा? समझाइए।
Answer:
This was said by Algu after Jumman gave his judgement. Algu thought that Jumman would take his revenge and would give judgement against him. But Jumman did justice.
(दिस वॉज़ सेड बाइ अलगू आफ्टर जुम्मन गेव हिज़ जजमेन्ट। अलगू थॉट दैट जुम्मन वुड टेक हिज़ रिवेन्ज एण्ड वुड गिव जजमेन्ट अगेन्स्ट हिम। बट जुम्मन डिड जस्टिस।)
ये अलगू द्वारा कहे गये शब्द थे। अलगू ने सोचा कि जुम्मन अपना बदला लेगा और उसके विरुद्ध निर्णय देगा। मगर जुम्मन ने न्याय किया।

Language Practice

Mark the mistakes and rewrite the sentences correctly.
(निम्न लिखित वाक्यों को सही करके लिखो।)

Question 1.
There are a pair of scissors in my drawer.
Answer:
There is a pair of scissors in my drawer.

Question 2.
Many of the flowers has no smell.
Answer:
Many of the flowers have no smell.

Question 3.
Working women leads a life of dual responsibilities.
Answer:
Working women lead a life of dual responsibilities.

Question 4.
Either John or Gaurav are to be selected as the team captain.
Answer:
Either John or Gaurav is to be selected as the team Captain.

Question 5.
Clouds is very dark, perhaps it is going to rain soon.
Answer:
Clouds are very dark, perhaps it is going to rain soon.

Question 6.
My mother and I am preparing for my birthday.
Answer:
My mother and I are preparing for my birthday.

Question 7.
In India, tea mostly grow in the north.
Answer:
In India, tea mostly grows in the north.

Question 8.
Sameer like to play football.
Answer:
Sameer likes to play football.

Question 9.
Rosy and Pratham wants to go abroad and settle down in some other country.
Answer:
Rosy and Pratham want to go abroad and settle down in some other country.

Question 10.
If it rain heavily I won’t be able to go for a morning walk.
Answer:
If it rains heavily I won’t be able to go for a morning walk.

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Listening Time

(a) Underline the correct option given in the paragraph
(सही शब्द चुनो।)
Answer:
There was a certain/curtain house in the town of Kyoto (Japan) which pupil/people avoided to live in. The season/reason for their fear/fair was that two of the farmer/former owners/honours of the house/mouse had crowned/drowned themselves in the well/bell that was in the courtyard.

(b) Complete the following passage with appropriate words
(निम्न गद्यांश को पूरा कीजिए।)
Answer:
All of us felt that it was a very (vary/very) fine (vine/fine) day for journey. We went (went/vent) across the river on a ferry (fairy/ferry) where a van (vain/wane/van) was waiting on the western bank of the vast river. We all. climbed into the van and off (of/off) we went leaving behind us the wide river valley.

Speaking Time

Situation-1
You want to take a lift because your bicycle has a puncture and you have to reach your school on time.
Answer:
(Given) Would you mind if I asked you to give me a lift? I’ll be late if I don’t reach my school soon.

Situation-2
You are not feeling well. You want someone to call a doctor for you.
Answer:
Would you please call a doctor? I am not feeling well.

Situation-3
You are alone at home and the fuse has blown out. You ask your neighbour to fix it.
Answer:
Would you please fix this fuse? I am alone at home and don’t know how to do it.

Situation-4
You want someone to carry your bag because you have hurt your hand.
Answer:
Would you mind carrying my bags. My hand is hurt.

Situation-5
You have lost your wallet and you have to purchase some important things from the market. Your home is far away from the market. You want to borrow some money from an acquaintance you meet there.
Answer:
Would you please lend me some money as I have to buy some necessary things from the market and I have lost my pocket. It shall be very kind of you. I shall return it to you tomorrow.

Writing Time

Punctuate the following sentences
(विशम चिह्न लगाइए।)

Question 1.
shahjahan built the Taj Mahal.
Answer:
Shahjahan built the Taj Mahal.

Question 2.
you can get this book from the royal book centre kanpur.
Answer:
You can get this book from the Royal Book Centre, Kanpur.

Question 3.
the traveller was old and hungry
Answer:
The traveller was old and hungry.

Question 4.
run away shouted my brother
Answer:
“Run away”, shouted my brother.

Question 5.
my library has many kinds of books plays poems novels etc.
Answer:
My library.has many kinds of books, plays, poems, novels etc.

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Things to do

(1) Go to the library and read the stories written by ‘Munshi Premchand’.
(मुंशी प्रेमचन्द की कहानियाँ पढ़ो।)
Answer:
Students should do themselves.
छात्र स्वयं करें।

(2) Make a list of the matters that can be solved in village panchayats.
(ग्राम पंचायत में सुलटने वाले विषयों की सूची बनाओ।)
Answer:
Students should do themselves.
छात्र स्वयं करें।

Fair Play Difficult Word Meanings

MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 5 Fair Play 1

Fair Play Summary, Pronunciation & Translation

[1] Justice knows neither friendship nor enmity. Jumman Sheikh and Algu Chowdhary act as head men on two occasions. How do they maintain the dignity of their role as judges? Read and find out.

Jumman Sheikh and Algu Chowdhary were good friends. So strong was their bond of friendship that when either of them went away from the village, the other looked after his family. Both were greatly respected in the village.

(जस्टिस नोज़ नाइदर फ्रेन्डशिप नोर एनमिटी। जुम्मन शेख .एण्ड अलगू चौधरी एक्ट एज़ हैडमैन आन टू ओकेज़न्स। हाउ डू दे मेन्टेन द डिग्निटी ऑफ देअर रोल एज़ जजेस? रीड एण्ड फाइन्ड आउट।

जुम्मन शेख एण्ड अलगू चौधरी वर गुड फ्रेन्डस। सो स्ट्रांग देअर बॉन्ड ऑफ फ्रेन्डशिप दैट व्हेन आइदर ऑफ देम वेन्ट अवे फ्राम विलेज, द अदर लुक्ड आफ्टर हिज़ फेमिली। बोथ वर ग्रेटली रेस्पेक्टेड इन द विलेज।)।

हिन्दी अनुवाद :
न्याय न तो मित्रता को जानता है न ही दुश्मनी को। जुम्मन शेख और अलगू चौधरी दो अवसरों पर सरपंच बनते हैं। वे न्यायाधीश के रूप में किस तरह अपने सम्मान को बनाये रखते हैं। पढ़ो और जानो।

जुम्मन शेख व अलगू चौधरी अच्छे मित्र थे। उनका मित्रता का बंधन इतना मजबूत था कि इनमें से एक कभी गाँव के बाहर जाता था तो दूसरा उनके परिवार की देखभाल करता था। दोनों की गाँव में बड़ी इज़जत थी।

[2] Jumman had an old aunt who had some property. This she transferred to him on the understanding that she would stay with him and he would look after her. The arrangement worked well for a couple of years. Then the situation changed. Jumman and his family were tired of the old relative. Jumman became as indifferent to her as his wife, who grudged even the little food that the old lady wanted every day. She swallowed these insults along with her food for a few months. But patience has its limits.

(जुम्मन हैड एन ओल्ड आण्ट हू हैड सम प्रापर्टी। दिस शी ट्रान्स्फर्ड टु हिम ऑन दी अन्डरस्टेंडिंग दैट शी वुड स्टे विद हिम एण्ड ही वुड लुक आफ्टर हर। दी अरेंजमेन्ट वर्ल्ड वेल फोर अ कपल ऑफ यीअर्स। देन द सिचुएशन चेंज्ड। जुम्मन एण्ड हिज़ फैमिली वर टायर्ड ऑफ दी ओल्ड रिलेटिव। जुम्मन बिकेम एज़ इनडिफरेन्ट टु हर एज़ हिज़ वाइफ हू ग्रज्ड इवन द लिटिल फुड दैट दी ओल्ड लेडी वान्टेड एव्री डे। शी स्वेलोड दीज इन्सल्ट्स अलांग विद हर फूड फोर अ फ्यूि मन्थ्स। बट पेशन्स हेज़ इट्स लिमिट।)

हिन्दी अनुवाद :
जुम्मन की एक बूढ़ी मौसी थी जिसके पास कुछ जायदाद थी। यह उसने जुम्मन शेख के नाम कर दी इस समझ के साथ कि वह उसके साथ रहेगी और वह उसकी देखभाल करेगा। यह योजना कुछ साल तक तो ठीकठाक चली। फिर परिस्थिति बदली। जुम्मन शेख व उसका परिवार इस वृद्धा रिश्तेदार से थक गये। उसकी पत्नी, जो उसके थोड़े से भोजन जो कि उसे प्रतिदिन दिया जाता था, के प्रति चिड़चिड़ी हो गई थी। वह कुछ माह तक तो इन अपमानों को अपने भोजन के साथ निगलती रही। किन्तु धैर्य की भी एक सीमा होती है।

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[3] One day she spoke to Jumman. “My son, it is now obvious that I am not wanted in your house. Kindly give me a monthly allowance so that I can set up a separate kitchen.”

“My wife knows best how to run the house. Be patient,” said Jumman shamelessly. This made his aunt very angry and she decided to take her case to the village panchayat.

(वन डे शी स्पोक टु जुम्मन। “माइ सन, इट इज नाउ ओबियस दैट आई एम नाट वान्टेड इन युअर हाउस। काइन्डली गिव मी अ मंथली अलाउन्स सो दैट आइ केन सैट अप अ . सेपरेट किचन।”

“माइ वाइफ नोज़ बेस्ट हाउ टु रन द हाउस। बी पेशन्ट’, सेड जुम्मन शेमलेसली। दिस मेड हिज़ आण्ट वेरी एन्ग्री एण्ड शी डिसाइडेड टु टेक हर केस टु द विलेज पंचायत।)

हिन्दी अनुवाद :
एक दिन उसने जुम्मन से बात की। “मेरे बेटे, यह स्पष्ट है कि तुम्हारे घर में अब मेरी जरूरत नहीं रही। कृपया मुझे एक मासिक भत्ता दे दो ताकि मैं अपने लिए अलग रसोईघर का इन्तजाम कर सकूँ।

“मेरी पत्नी घर को अच्छी तरह चलाना जानती है। धैर्य रखो”, जुम्मन ने बेशर्मी से कहा। इससे खाला बहुत गुस्सा हुई व अपने मामले को ग्राम पंचायत में ले जाने का उसने निश्चय किया।

[4] For many days, the old lady was seen talking to the villagers, explaining her case and seeking their support. At last, she came to Algu Chowdhary and spoke to him “You know, Chachi, Jumman is my best friend. How can I go against him?” Algu said. “But is it right, my son, to keep mum and not say what you consider just and fair?” pleaded the old lady. “Come to the panchayat and speak the truth.”, she said. Algu didn’t reply, but her words kept ringing in his ears.

(फोर मेनी डेज़, दी ओल्ड लेडी वाज़ सीन टाकिंग टु द विलेजर्स, एक्सप्लेनिंग हर केस एण्ड सीकिंग देयर सपोर्ट। एट लास्ट, शी केम टु अलगू चौधरी एण्ड स्पोक टु हिम। “यू नो, चाची, जुम्मन इज़ माय बेस्ट फ्रेन्ड, हाउ केन आई गो अगेन्स्ट हिम?” अलगू सेड “बट इज़ इट राइट, माई सन टु कीप मम एण्ड नाट से व्हाट यू कन्सीडर जस्ट एण्ड फेयर ?” प्लीडेड द ओल्ड लेडी। “कम टु पंचायत एण्ड स्पीक द ट्रथ”, शी सेड अलगू डिड नाट रिप्लाय बट हर वर्ड्स केप्ट रिंगिंग इन हिज इयर्स।)

हिन्दी अनुवाद :
कई दिनों तक बूढ़ी महिला गाँव वालों से बात करती रही, अपने मामले में स्पष्टीकरण देती हुई उनका सहयोग माँगती रही। अंतत: वह अलग चौधरी के यहाँ गई व उसे सब कुछ बताया। “चाची, तुम जानती हो कि जुम्मन व मैं गहरे मित्र हैं। मैं उसके विरुद्ध कैसे जा सकता हूँ।” अलगू ने कहा। “किन्तु मेरे बेटा क्या यह उचित है कि जिस बात को तुम सही व न्यायपूर्ण मामला समझते हो उसके प्रति मौन रहो ?” वृद्धा ने तर्क दिया। “पंचायत में आओ व सच बात कहो।” उसने कहा, अलगू ने उत्तर तो नहीं दिया पर चाची के शब्द उसके कानों में गूंजते रहे।

[5] The panchayat was held the same evening under an old banyan tree. Jumman stood up and said, “The voice of the panch is the voice of God. Let my aunt nominate the head-Panch. I will abide by her decision.”

“The Panch knows neither friend nor enemy. What do you say to Algu Chowdhary?” the old lady announced.

(द पंचायत वाज़ हेल्ड द सेम ईवनिंग अन्डर एन ओल्ड बनयान ट्री। जुम्मन स्टुड अप एण्ड सेड, “द वॉइज ऑफ द पंच इज़ द वॉईज ऑफ गाड। लेट माई आन्ट नामिनेट द हेड पंच। आई विल अबाइड बाय हर डिसिज़न।”

“द पंच नोज़ नाइदर फ्रेन्ड नॉर एनिमी। व्हाट डू यू से टु अलगू चौधरी?” दी ओल्ड लेडी अनाउन्स्ड।)

हिन्दी अनुवाद :
उसी शाम को एक बरगद के वृक्ष के नीचे पंचायत बुलाई गई। जुम्मन खड़ा हुआ और कहा-“पंच की आवाज़ खुदा (ईश्वर) की आवाज़ होती है। मेरी खाला पंच को नामांकित करें। मैं उसके निर्णय से बँधा हूँ।”

बूढ़ी खाला ने कहा, “पंच न मित्र जानता है, न दुश्मन। अलगू चौधरी के बारे में तुम क्या कहते हो?”

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[6] “Fine”, replied Jumman, hiding his joy over this unexpected piece of luck.

“Chachi, you are aware of my friendship with Jumman.” said Algu.

“I know that” replied the aunt, “but I also know that God lives in the heart of the Panch, and his voice is the voice of God.” And the old lady explained her case.

“Jumman”, said Algu, “you and I are old friends. Now I am a Panch. You and your aunt are equal before me. What do you have to say in your defence?”

(“फाइन” रिप्लाइड जुम्मन, हाइडिंग हिज जॉय ओवर दिस अनएक्सपेक्टेड पीस आफ लक।

“चाची, यू आर अवेअर ऑफ माय फ्रेंडशिप विद जुम्मन।” सेड अलगू।

“आइ नो दैट” रिप्लाइड दी आन्ट, “बट आई अल्सो नो दैट गॉड लिब्ज़ इन द हार्ट ऑफ द पंच एण्ड हिज़ वर्ड्स इज़ वाइज़ ऑफ गॉड।” एण्ड दी ओल्ड लेडी एक्सप्लेन्ड हर केस।

“जुम्मन” सेड अलग, “यू एण्ड आई आर ओल्ड फ्रेन्ड्स। नाउ आई एम अ पंच। यू एण्ड युअर आण्ट आर इक्वल बिफोर मी। व्हाट डू यू हेव टु से इन डिफेन्स?”)

हिन्दी अनुवाद :
“बहुत अच्छा” जुम्मन सद्भाग्य के इस मौके पर अपनी खुशी छिपाते हुए बोला।

“चाची, तुम जानती हो कि जुम्मन व मैं बहुत पुराने मित्र हैं।” अलगू ने कहा।

“मैं जानती हूँ।” खाला ने कहा, “किन्तु मैं यह भी जानती हूँ कि पंच की आवाज खुदा की आवाज होती है।” और बूढ़ी महिला ने अपना प्रकरण रखा।

“जुम्मन” अलगू बोला, “तुम और मैं बहुत पुराने मित्र हैं। अब मैं एक पंच हूँ। मेरे सामने तुम व चाची बराबर हैं। तुम्हें अपने बचाव में क्या कहना है।”

[7] “Three years ago,” began Jumman, “my aunt transferred her property to me. I promised to support her as long as she lived. I have done all I could. There have been a couple of quarrels between my wife and her but I can’t stop it. Now my aunt is claiming a monthly allowance from me. This is not possible. That’s all I have to say.”

Jumman was cross-examined by Algu and others. Then Algu announced, “We have gone into the matter carefully. In our opinion, Jumman must pay his aunt a monthly allowance, or else the property goes back to her.”

(“थ्री इयर्स एगो”, बिगेन जुम्मन, “माय ऑण्ट ट्रान्सफर्ड हर प्रापटी टु मी। आई प्रामिस्ड टु सपोर्ट हर एज़ लांग एज़ शी लिव्ड। आई हेव डन ऑल आई कुड। देअर हेवं बीन अ कपल ऑफ क्वारल्स बिटवीन माई वाइफ एण्ड हर बट आई काण्ट स्टॉप इट। नाउ माई ऑण्ट इज़ क्लेमिंग अ मंथली अलाउन्स फ्रॉम मी। दिस इज़ नॉट पासिबल। दैट्स आल आई हेव टु से।”

जुम्मन वाज़ क्रास इक्जामिन्ड बाय अलगू एण्ड अदर्स। देन अलगू अनाउन्स्ड, “वी हैव गोन इन टू द मेटर केअरफुली। इन अवर ओपिनियन, जुम्मन मस्ट घे हिज ऑण्ट अ मंथली अलाउन्स, ओर एल्स द प्रापर्टी गोज बैक टु हर।”)

हिन्दी अनुवाद :
“तीन साल पहले, जुम्मन ने कहना शुरू किया, मेरी खाला ने अपनी जायदाद मेरे नाम की। मैंने जब तक वह जीवित रहती है उसको शरण देने का वचन दिया। मैं जो कुछ कर सकता था, मैंने किया। हाँ, मेरी औरत और खाला के बीच कुछ खटपट चलती रहती है। मैं उसमें कुछ नहीं कर सकता। अब खाला एक मासिक भरण-पोषण का खर्चा चाहती है। यह सम्भव नहीं है। बस मुझे यही कहना था।”

जुम्मन का कूट परीक्षण अलगू व अन्य लोगों के बीच हुआ।, फिर अलगू ने घोषणा की। “हमने इस मामले में बहुत सावधानी से विचार किया। हमारी राय में जुम्मन को मासिक गुजारा भत्ता देना होगा, अन्यथा जायदाद वापिस चाची के नाम होगी।”

[8] Now, the two friends were seldom seen together. The bond of friendship between them was broken. In fact, Jumman was Algu’s enemy and wanted his revenge.

Days passed and as ill luck would have it, Algu Chowdhary found himself in a tight spot. One of his fine pair of bullocks died, and he sold the other to Samjhu Sahu, a cart driver of the village. The understanding was that Sahu would pay the price of the bullock in a month’s time. It so happened that the bullock died within a month.

(नाउ, द टू फ्रेड्ज वर सेल्डम सीन टुगेदर। द बॉन्ड ऑफ फ्रेन्डशिप बिटवीन देम वॉज ब्रोकन। इनफैक्ट जुम्मन वॉज अलगूज एनिमी एण्ड वान्टेड हिज रिवेन्ज।

डेज पास्ड ऑन एन्ड, एज़ इल लक वुड हेव इट, अलगू चौधरी फाउन्ड हिमसेल्फ इन अ टाइट स्पॉट। वन ऑफ हिज़ फाइन पेअर ऑफ बुलक्स डाइड, एण्ड ही सोल्ड द आदर टु समझू साहू, ए कार्ट ड्राइवर ऑफ द विलेज। दी अन्डरस्टेडिंग वाज दैट साहू वुड पे द प्राइज ऑफ द बुलक इन अ मन्थस टाइम। इट सो हेपन्ड दैट द बुल्क डाइड इन अ मन्थ।)

हिन्दी अनुवाद :
अब, दोनों मित्र साथ-साथ कभी-कभी ही दिखाई देते थे। दोनों के बीच का मित्रता का बन्धन टूट चुका था। वास्तव में जुम्मन अलगू का दुश्मन बन गया व बदले का मौका देखने लगा।

समय बीतता गया, और जैसा कि दुर्भाग्य होता है, अलगू चौधरी एक संकट में फंस गया। उसके सुन्दर बैलों की जोड़ी में से एक मर गया और उसने दूसरे बैल को गाँव के एक गाड़ीवान समझू साहू का बेच दिया। समझौता यह था कि साहू एक माह में बैल की कीमत अदा कर देगा। ऐसा हुआ कि बैल एक महीने के अन्दर ही मर गया।

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[9] Several months after the bullock’s death, Algu reminded Sahu of the money he hadn’t yet paid. Sahu got very annoyed “I can’t pay you a penny for the wretched beast you sold me. He brought us nothing but ruin. I have a bullock. Use it for a month and then return it to me. No money for the dead bullock,” he said angrily.

Algu decided to refer the case to the panchayat. The panchayat was held under the old banyan tree. Algu stood up and said, “The voice of the Panch is the voice of God. Let Sahu nominate the Head Panch. I will abide by his decision.”

(सेवेरल मंथस आफ्टर द बुलक्स डेथ, अलगू रिमान्डेड साहू ऑफ द मनी ही हैडन्ट यट पेड। साहू गॉट वेरी अनायड। “आई काण्ट पे यू अ पेनी फोर द रेचेड बीस्ट यू सोल्ड मी। ही ब्राट नथिंग बट स्यूइन। आई हेव अ बुलक। यूज़ इट फॉर ए मन्थ एण्ड देन रिटर्न इट टु मी। नो मनी फोर द डेड बुलक,” ही सेड एन्ग्रीली।

अलगू डिसाइडेड टु रिफर द केस टु द पंचायत। द पंचायत वाज हेल्ड अन्डर दी ओल्ड बनयान ट्री। अलगू स्टुड अप एण्ड सेड, “द वॉईज ऑफ द पंच इज द वाइज ऑफ गॉड। लेट साहू नामिनेट द पंच। आई विल अबाइड बाय हिज डिसीज़न।”)

हिन्दी अनुवाद :
बैल के मरने के कई महीनों बाद अलगू ने साहू को रकम चुकाने की याद दिलाई। साहू बहुत नाराज हुआ। “मैं तुम्हें उस दुर्भाग्य पूर्ण जानवर के लिये जो तुमने मुझे बेचा एक पैसा भी नहीं दे सकता। वह हमारे लिये बर्बादी के अलावा कुछ नहीं लाया। मेरे पास एक बैल है। उसे ले जाओ और एक माह उसका उपयोग करके मुझे वापस दे दो मृत बैल के लिये कोई पैसा नहीं।” वह गुस्से से बोला।

अलगू ने मामला पंचायत में ले जाने का निश्चय किया। पुराने बरगद के वृक्ष के नीचे पंचायत बैठी। अलगू खड़ा हुआ और बोला-“पंच की आवाज परमेश्वर की होती है। साहू सरपंच नामांकित करे मैं उसके निर्णय से बद्ध रहूँगा।”

[10] Sahu saw his chance and proposed the name of Jumman. Algu’s heart sank and he turned pale. But what could he do?

The moment Jumman became Head Panch, he realised his responsibility as judge and the dignity of his office. He thought and thought. He must not allow his personal feelings to come in the way of speaking the truth and doing justice.

Both Algu and Sahu stated their cases. They were cross-examined and the case was considered deeply. Then Jumman stood up and announced, “It is our opinion that Sahu should pay Algu the price of the bullock. When Sahu bought the bullock, it suffered from no disability or disease. The death of the bullock was unfortunate but Algu cannot be blamed for it.” Algu could not contain his feelings. He stood up and said loudly over and over again. “Victory to the panchayat. This is justice. God lives in the voice of the Panch.”

(साहू सॉ हिज चांस एण्ड प्रपोज्ड द नेम ऑफ जुम्मन। अलगूज हार्ट सेंक एण्ड ही टर्ड पेल। बट व्हाट ही कुड डू?

द मामेंट जुम्मन बिकेम हेड पंच, ही रियलाइज्ड हिज़ रेस्पांसिबिलिटी एज़ जज एण्ड द डिग्निटी ऑफ हिज़ आफिस। ही थाट एण्ड थाट। ही मस्ट नॉट अलौ हिज पर्सनल फीलिंग्स टु कम इन द वे ऑफ स्पीकिंग द ट्रथ एण्ड डूइंग जस्टिस।

बोथ अलगू एण्ड साहू स्टेटेड देअर केसेस। दे वर क्रॉस इग्जामिन्ड एण्ड द केस वाज कन्सीडर्ड डीपली। देन जुम्मन स्टुड अप एण्ड अनाउन्स, “इट इज अवर ओपिनियन दैट साहू शुड पे द प्राइस ऑफ द बुल्क। व्हेन साहू बॉट द बुलक, इट सफर्ड फ्राम नो डिसएबिलिटी ओर डिसिज। द डेथ ऑफ द बुलक वाज अनफार्चुनेट बट अलगू केन नाट बी क्लेम्ड फोर इट।” अलगू कुड नाट कन्टेन हिज फीलिंग्स। ही स्टुड अप एण्ड सेड लाउडली ओवर एण्ड ओवर अगेन, “विक्ट्री टु द पंचायत। दिस इज़ जस्टिस। गॉड लिव्ज़ इन द वाईस ऑफ द पंच।”)

हिन्दी अनुवाद :
साहू ने अपना मौका देखा व जुम्मन का नाम प्रस्तावित कर दिया। अलगू का दिल डूबने लगा और उसका रंग पीला पड़ गया। किन्तु वह कर क्या सकता था।

जिस क्षण जुम्मन सरपंच बना, उसने एक न्यायाधीश और अपने पद की महत्ता के उत्तरदायित्व को महसूस किया। उसने सोचा और सोचा। उसे लगा सत्य बोलने व न्याय करने में अपनी व्यक्तिगत भावनाओं को रास्ते में नहीं लाना चाहिए।

अलगू व साहू ने अपनी बात को कहा। उनका कूट-परीक्षण किया गया और मामले पर गहराई से विचार किया गया। फिर जुम्मन खड़ा हुआ और घोषणा की, “हमारी राय यह है कि साहू को बैल की कीमत देनी होगी। जब साहू ने बैल खरीदा, तब बैल किसी तरह भी बीमार या पंगु नहीं था। बैल की मृत्यु दुर्भाग्यपूर्ण है किन्तु उसके लिए अलगू दोषी नहीं ठहराया जा सकता।” अलगू अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सका और बार-बार जोर से बोल उठा, “पंचायत की जय हो। यह न्याय है। पंचों की आवाज में ईश्वर बोलता है।

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[11] Soon after, Jumman came to Algu, embraced him and said “Since the last panchayat, I had become your enemy. Today I realised what it meant to be a panch. A panch has no friend or enemy. He knows only justice. Let no one deviate from the path of justice and truth for friendship or enmity.”

Algu embraced his friend and wept. And his tears washed away all the dirt of misunderstanding between them. -Premchand (retold)

(सून आफ्टर जुम्मन केम टु अलगू, इम्ब्रेस्ड हिम एण्ड सेड, “सिन्स द लास्ट पंचायत आई हेड बिकम युअर एनिमी। टुडे आई रियलाइज्ड व्हाट इट मीट टु बी पंच। अ पंच हेज़ नो फ्रेन्ड और एनिमी। ही नोज ओनली जस्टिस। लेट नो वन डेविएट फ्राम द पाथ ऑफ जस्टिस एण्ड टूथ फोर फ्रेन्डशिप एण्ड एन्मिटी।”

अलगू इम्ब्रेस्ड हिज़ फ्रेन्ड एण्ड वेप्ट। एण्ड हिज़ टीअर्स वाश्ड अवे ऑल द डर्ट ऑफ मिसअण्डरस्टेण्डिंग बिटवीन देम।)

हिन्दी अनुवाद :
तत्पश्चात् जुम्मन अलगू के पास आया, ‘उससे लिपट गया और बोला, “पिछली पंचायत के बाद से मैं तुम्हारा दुश्मन बन गया था। आज मैंने जाना कि पंच बनना क्या होता है। पंच का कोई दुश्मन या दोस्त नहीं होता है। वह केवल न्याय करना जानता है। न्याय व सत्य की राह पर दोस्ती या दुश्मनी के द्वारा कोई भी विचलित न होवे।

अलगू भी अपने दोस्त से लिपट गया व रोने लगा और उसके आँसुओं ने दोनों के बीच आई गलतफहमी को धोकर रख दिया।

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The Spring Blossom Textbook General English Class 9th Solutions

Cheemi: The Brave Girl Question Answer Class 9 General English The Spring Blossom Chapter 16 MP Board Solutions

Class 9th General English The Spring Blossom Chapter 16 Cheemi: The Brave Girl Question Answers

Cheemi: The Brave Girl Class 9 Questions and Answers

Cheemi: The Brave Girl Textual Exercises

Word Power

(1) Arrange the jumbled letters to make meaningful words
(अक्षरों को उचित क्रम में लगाकर अर्थपूर्ण शब्द बनओ।)
Answer:

  1. hanpro – orphan
  2. lifra – frail
  3. odors – doors
  4. bubyhc – chubby
  5. tandisce – distance
  6. torfacies – factories

(2) Rewrite the following words using appropriate prefixes given below.
(उचित उपसर्ग लगाइए।)
(dis, un, in, im)
Answer:

  1. educated – uneducated
  2. correct – incorrect
  3. cover – uncover
  4. possible – impossible
  5. position – disposition.

(3) Arrange the words in alphabetic order
(शब्दों को वर्णमाला के क्रम में लगाओ।)
Answer:

  1. babies
  2. centuries
  3. discarded
  4. fetch
  5. floor
  6. garden
  7. humanity,
  8. lady
  9. Safety
  10. style
  11. vegetable
  12. wooden.

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How Much Have I Understood?

(A) Answer the following questions in one or two sentences
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Why did people call Cheemi the little sparrow?
(व्हाय डिड पीपल कॉल चीमी द लिट्ल स्पैरो?)
लोग चीमी को एक छोटी चिड़िया क्यों कहते थे?
Answer:
People called Cheemi the little sparrow because she was a frail little girl.
(पीपल कॉल्ड चीमी द लिटल स्पैरो बिकॉज़ शी वॉज़ अ फ्रेल लिट्ल गर्ल।)
लोग चीमी को छोटी चिड़िया कहते थे क्योंकि वह दुबली पतली व कमजोर लड़की थी।

Question 2.
Who were said to be Parvati Kaki’s ancestors?
(हू वर सेड टू बी पार्वती कॉकीज़ एन्सेस्टर्स?)
पार्वती काकी के पूर्वज कौन थे?
Answer:
Parvati Kaki’s ancestors were related to the great Peshwas who had ruled Maharashtra during the 18th and 19th centuries.
(पार्वती काकीज़ एन्सेस्टर्स वर रिलेटिड टू द ग्रेट पेश्वाज़ हू हैड रूल्ड महाराष्ट्र ड्यूरिंग द एटीन्थ एण्ड नाइन्टीन्थ सेन्चुरीज़।)
पार्वती काकी के पूर्वज महाराष्ट्र के 18वीं व 19वीं सदी के शासक महान पेशवा थे।

Question 3.
Cheemi had to be satisfied with cooing to Chhotu at a distance. Why?
(चीमी हैड टू बी सैटिस्फाइड विद कूइंग टू छोटू एट अ डिस्टेन्स। व्हाय?)
चीमी को छोटू को दूर से ही पुचकार कर सन्तोष करना पड़ता था। क्यों?
Answer:
Since Parvati Kaki kept vigil like a watch dog and never allowed Cheemi to touch Chhotu therefore she had to be satisfied with cooing to Chhotu at a distance.
(सिन्स पार्वती कांकी कैप्ट विजिल लाइफ अवॉच डॉग एण्ड नेवर अलाउड चीमी टू टच छोटू देयरफोर शी हैड ट्र बी सैटिस्फाइड विद कुइंग टू छोट्र एट अ डिस्टेन्स।)
चूँकि पार्वती काकी छोटू पर नजर रखती थी व छोटू को उसके पास नहीं जाने देती थी इसलिए चीमी को छोटू को दूर से ही पुचकार कर सन्तोष करना पड़ता था।

Question 4.
What was the incident that caused flood in Shanwar Peth where Cheemi lived?
(व्हॉट वॉज़ द इन्सीडेन्ट दैट कॉज़्ड् फ्लड इन शॉवर पेठ व्हेयर चीमी लिव्ड?)
कौन-सी घटना के कारण चीमी के निवास के पास शाँवर पेठ में बाढ़ आ गई थी?
Answer:
There was flood in Shanwar Peth because the Panshet Dam at Mutha river had given way and the river water entered the city.
(देयर वॉज़ फ्लड इन शॉवर पेठ बिकॉज़ द पानशेट डैम एट मुठा रिवर हैड गिवन वे एण्ड द रिवर वॉटर एन्टर्ड द सिटी।)
शाँवर पेठ में बाढ़ आ गई थी क्योंकि मुठा नदी पर जो पानशेत बाँध था वह टूट गया था व नदी का पानी शहर में आ गया था।

Question 5.
Vinayak, Parvati Kaki’s son was not at home at the time of flood. Where was he?
(विनायक, पार्वती काकीज़ सन वॉज़ नॉट एट होम एट द टाइम ऑफ फ्लड। व्हेयर वॉज़ ही?)
बाढ़ के समय पार्वती काकी का बेटा विनायक घर पर नहीं था। वह कहाँ था?
Answer:
Parvati Kaki’s son, Vinayak had gone to Mumbai on business when there was flood.
(पार्वती काकीज़ सन, विनायक हैड गॉन टु मुम्बई ऑन बिज़नेस व्हेन देयर वॉज़ फ्लड।)
पार्वती काकी का बेटा, विनायक बाढ़ के समय व्यापार के लिए मुम्बई गया था।

(B) Answer the following questions in three or four sentences
(निम्न प्रश्नों के उत्तर तीन या चार वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
What was the source of Cheemi’s food and clothes?
(व्हॉट वॉज़ द सोर्स ऑफ चीमीज़ फूड एण्ड क्लोद्स?)
चीमी के भोजन व वस्त्रों का स्रोत क्या था?
Answer:
Cheemi lived on leftovers that she got from the women in the neighbourhood and wore the discarded clothes that the girls of her age gave her.
(चीमी लिव्ड ऑन लेफ्टओवर्स दैट शी गॉट फ्रॉम द विमेन इन द नेबरहुड एण्ड वोर द डिस्कार्डेड क्लोद्स दैट द गर्ल्स ऑफ हर एज़ गेव हर।)
चीमी पड़ोस की औरतों द्वारा दिए गए बचे हुए भोजन पर निर्वाह करती थी व अपने ही उम्र की लड़कियों द्वारा दिये गये उतरे हुए कपड़े पहनती थी।

Question 2.
What change took place in Parvati Kaki’s attitude after Cheemi had brought Chhotu to safety?
(व्हॉट चेन्ज टुक प्लेस इन पार्वती काकीज़ एटीट्यूड आफ्टर चीमी हैड ब्रॉट छोटू टू सेफ्टी?)
छोटू को सुरक्षित आने के बाद चीमी के प्रति पार्वती काकी के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
Answer:
Parvati Kaki hugged her, addressed her as Cheemi” and then allowed her to play with Chhotu.
(पार्वती काकी हग्ड हर, अड्रेस्ड हर एज़ “डॉटर चीमी” एण्ड देन अलाउड हर टू प्ले विद छोटू।)
पार्वती काकी ने चीमी को गले से लगाया, उसे “चीमी बेटी” कहकर पुकारा और उसे छोटू के साथ खेलने की अनुमति दे दी।

Question 3.
What clues do you find in the lesson that, show that the police were active in the flooded village. Describe in brief.
(व्हॉट क्लूज़ डू यू फाइन्ड इन द लैसन दैट शो दैट द पुलिस वर् एक्टिव इन द फ्लडेड विलेज। डिस्क्राइब इन ब्रीफ।)
पाठ में तुम्हें क्या संकेत मिलते हैं कि पुलिस बाढ़ वाले गाँव में सक्रिय रही। संक्षेप में वर्णन करो।
Answer:
Police was active in the flooded village as the police only discovered that one of the bedroom’s window was open to take out Chhotu. It was the policeman who lowered Cheemi to the window and Cheemi handed the child to the policeman only.

(पुलिस वॉज़ एक्टिव इन द फ्लडेड विलेज एज़ द पुलिस ओनली डिसकवर्ड दैट वन ऑफ द बेडरूम्स विन्डो वॉज़ ओपन टु टेक आउट छोटू। इट वॉज़ द पुलिस मैन हू लोअर्ड चीमी टू द विन्डो एण्ड चीमी हैन्डिड द चाइल्ड टू द पुलिसमैन ओनली।)

बाढ़ वाले गाँव में पुलिस सक्रिय थी क्योंकि पुलिस ने ही ढूँढ़ा कि शयनकक्ष की एक खिड़की खुली है जिससे छोटू को निकाला जा सकता है। पुलिस वाले ने ही चीमी को खिड़की से अन्दर उतारा व चीमी ने बालक को पुलिस वाले को ही दिया।

Question 4.
What did the police inspector offer Cheemi when life became normal in Pune?
(व्हॉट डिड द पुलिस इंस्पेक्टर ऑफर चीमी व्हेन लाइफ बिकेम नॉर्मल इन पुणे?)
पुलिस इंस्पेक्टर ने पुणे में जीवन सामान्य होने पर चीमी को क्या प्रस्तावित किया?
Answer:
The Police Inspector asked her what reward she would like to have for her bravery.
(द पुलिस इन्स्पेक्टर आस्कड हर व्हॉट रिवॉर्ड शी वुड लाइक टू हैव फॉर हर ब्रेवरी।)
पुलिस इंस्पेक्टर ने चीमी को उसकी बहादुरी के लिए इनाम माँगने को कहा।

Question 5.
“I have already got the reward,” said Cheemi. What was the reward that she had got?
(“आइ हैव ऑलरेडी गॉट द रिवॉर्ड” सेड चीमी। व्हॉट वॉज़ द रिवॉर्ड दैट शी हैड गॉट?)
मुझे इनाम मिल चुका है? चीमी ने कहा। वह इनाम क्या था जो उसे मिला था?
Answer:
The reward was an opportunity to play with Chhotu.
(द रिवॉर्ड वॉज़ एन अपॉयूँनिटी टू प्ले विद छोटू।)
छोटू के साथ खेलने का मौका।

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(C) Who said these words to whom?
(किसने किससे कहा?)

Question 1.
“Let me help, I can easily crawl in and get Chhotu out.”
(“लेट मी हैल्प! आइ कैन ईज़ली क्रॉल इन एण्ड गेट छोटू आउट?”)
Answer:
Cheemi to the policemen.
(चीमी टू द पुलिसमैन।)

Question 2.
“We’ll drop you a rope ladder through the window.”
(“वी विल ड्रॉप यू अरोप लैडर श्रू द विण्डो।”)
Answer:
Policemen said to Cheemi.
(पुलिसमैन सेड टु चीमी।)

Question 3.
“Come here, Cheemi”…………”Daughter Cheemi.”
(“कम हेअर, चीमी”……..”डॉटर चीमी।”)
Answer:
Parvati Kaki to Cheemi.
(पार्वती काकी टू चीमी।)

Question 4.
“I should like to go to school if you can help me.”
(“आइ शुड लाइक टू गो टू स्कूल इफ यू कैन हैल्प मी।”)
Answer:
Cheemi to the police inspector.
(चीमी टू द पुलिस इंस्पेक्टर।)

Question 5.
“We’ll bear the expenses of Cheemi’s schooling.”
(“वी विल वीअर द एक्सपेंसेस ऑफ चीमीज़
Answer:
Vinayak to the Police Inspector.
(विनायक दू द पुलिस इंस्पेक्टर।)

Language Practice

Change the following sentences into passive voice.
(निम्नलिखित वाक्यों को ‘passive voice’ में बदलो।)

(i) The servant will clean the floor.
Answer:
The floor will be cleaned (by the servant).

(ii) I have finished my work.
Answer:
My work has been finished (by me).

(iii) Mother is cooking lunch for us.
Answer:
Lunch is being cooked for us (by mother).

(iv) Sarla called Arun in the kitchen.
Answer:
Arun was called in the kitchen (by Sarla).

(v) They are playing football all over the world.
Answer:
Football is being played all over the world (by them).

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Writing Time

(1) Write a paragraph on how Cheemi saved Chhotu.
(चीमी ने छोटू को कैसे बचाया इस पर एक गद्यांश लिखो।)
Answer:
The window of the bedroom is which Chhotu was sleeping was open but it was too small for an adult to crawl. But Cheemi was small so she easily jumped into the room through the window with the help of the policeman. She picked up Chhotu who was sleeping soundly, put him on her back and tied him tight to herself with a bed-sheet. Then she climbed slowly up the ladder lowered by the policeman and peeped through the window. Carefully she undid the bed-sheet and handed it with Chhotu to the policeman. Then she herself crawled out of the window.

(2) Describe Cheemi in your own words.
(चीमी का अपने शब्दों में वर्णन करो।)
Answer:
Cheemi was a poor girl. She was an orphan. She was physically weak and thin and hence was called little sparrow. She did small works of the women in the neighbourhood like fetching vegetables from the corner shop, looking after babies, cleaning home and vessels and in return she got food to eat and clothes to wear. She was satisfied with what she had. She loved children as she always wanted to play with Chhotu. She had made a place in heart of everybody except Parvati Kaki and there was an urge within her to be loved by her too. She was a brave girl as without caring about herself she stepped into the flooded room to save Chhotu. She also had a desire to study and get educated. She had a wish to have a home for her which was also finally fulfilled due to her courageous and caring attitude for everyone.

Things To Do

(i) Visit a river-side area and discuss with the peasants about the problems they face in the rainy season and prepare a list.
(नदी किनारे जाकर किसानों से बरसात के मौसम में उनको होने वाली समस्याओं के बारे में बात करो व उसकी सूची बनाओ।)

(ii) Discuss among your friends the ways of helping flood victims of your area. Make a list of the things you would need.
(अपने मित्रों से बाढ़ पीड़ितों की मदद करने के विषय में चर्चा करो।)
Answer:
Students can do themselves.
(छात्र स्वयं करें।

Cheemi: The Brave Girl Difficult Word Meaning

orphan (ऑर्फन)-a child whose parents are dead अनाथ; frail (फ्रेल)-physically weak and thin (दुबली-पतली); maid (मेड) a female servant in a house नौकरानी; vessels (वैसल्स)-utensils and cups and bowls etc. घर के बर्तन; left-overs (लैफ्ट ओवर्स) food that has not been eaten at the end of a meal बचा-खुचा भोजन; mansion ( मैंशन)-a large impressive house हवेली; chandelier (शैन्डलियर)-objects for ceiling fitted with small pieces of glass for light decoration छत से लटकने वाले झाड़-फानूस; zari (जरी) brocade जरी; curtain (कर्टेन)-a piece of cloth that is hung to cover a window or door परदा; ancestors (एन्सेस्टर्स)-one’s forefathers पूर्वज; chubby (चबी) slightly fat in an attractive way गोल-मटोल; vigil (विजिल)-to be very closely watching somebody or something सतर्क; cooing (कुइंग)-imitating the sound of a dove चिड़िया की आवाज निकालना; danger (GR)-risk or possibility of ill-happening, खतरा; storeyed (स्टोरीड)-a multilevelled building बहुमंजिला इमारत; confusion (कन्फ्यू जन)-a state of uncertainty असमंजस; persuade (परस्युएड)-to give good reasons for doing something आग्रह करना; panicky (पैनिकी) anxious about something चिंतातुर; wail (वेल)-to make a long loud cry विलाप करना; crawl (क्राल)-to move forward on self hands and knees; emerge (इमर्ज)-to come suddenly and unexpectedly from somewhere उभरकर आना; fondle (फॉन्डल)-to touch and move hand gently over someone दुलारना; recede (रिसीड)-to move gradually down उतरनाl

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Cheemi: The Brave Girl Summary, Pronunciation & Translation

[1] Cheemi was a poor orphan. Nobody knew where she had come from yet everyone accepted the frail little girl and named her Cheemi’ the little sparrow. She fetched vegetables from the corner shop or looked after babies when their mothers went shopping. If the maid didn’t turn up, Cheemi was there to help, cleaning vessels, sweeping the floor and so on.

(चीमी वॉज़ अ पुअर ऑफैन। नो बडी निउ व्हेअर शी हैड कम फ्रॉम यट एव्रीवन एक्सेप्टेड द फ्रेल लिटिल गर्ल एण्ड नेम्ड, हर चीमी, द लिटिल स्पेरो। शी फेच्ड वेजीटेबल्स फ्रॉम द कॉर्नर शॉप और लुक्ड आफ्टर बेबीज़ व्हेन देअर मदर्स वेन्ट शॉपिंग। इफ द मेड डिडन्ट टर्न अप, चीमी वॉज़ देअर टु हैल्प, क्लीनिंग वेसल्स, स्वीपिंग द फ्लोर सो ऑन।)

हिन्दी अनुवाद :
चीमी एक गरीब अनाथ थी। कोई नहीं जानता था कि वह कहाँ से आई तो भी हर व्यक्ति उस दुबली-पतली नन्हीं बालिका को चाहता था और उसका नाम चीमी, छोटी चिड़िया रखा गया था। वह कोने की दुकान से सब्जियाँ लाती, माताएँ जब खरीदारी के लिए जाती तो बच्चों की देखभाल करती थी। यदि घर की नौकरानी नहीं आती, तो चीमी उनकी सहायता के लिए तैयार रहती थी, वह बर्तन साफ करती, झाडू लगाती और भी अन्य काम करती थी।

[2] Cheemi lived on leftovers women in the neighbourhood gave her. The girls of her age gave her their discarded clothes. Everybody liked Cheemi, except Parvati Kaki. She had a big house with a beautiful garden full of jasmines and roses. But nobody was ever allowed in. The flowers were meant for puja.

(चीमी लिव्ड ऑन लेफ्टओवर्स वुमन इन द नेबरहुड गेव हर। द गर्ल्स ऑफ हर एज़ गेव हर देअर डिस्कार्डेड क्लोथ्स। एवीबडी लाइक्ड चीमी, एक्ससेप्ट पार्वती काकी। शी हैड अ बिग हाउस विद अ ब्यूटीफुल गार्डन फुल ऑफ जेस्मीन्स एण्ड रोजेज। बट नोबडी वॉज़ एवर अलाउड इन। द फ्लावर्स वर मेन्ट फोर पूजा।)

हिन्दी अनुवाद :
चीमी आस-पड़ोस की महिलाओं द्वारा दिए गए बचे हुए खाने तथा कपड़ों पर जीवित थी। उसकी उम्र की लड़कियाँ अपने पहने हुए वस्त्र उसे दे देती थीं। हरेक व्यक्ति पार्वती काकी को छोड़कर चीमी को पसन्द करता था। उनका बहुत बड़ा मकान था और उसमें जैस्मिन व गुलाबों से भरा एक बगीचा था। किसी को भी अन्दर आने की इजाजत नहीं थी। बगीचे के फूल केवल पूजा के लिए थे।

[3] Parvati Kaki’s house was almost like a mansion built in traditional style with big wooden carved doors, huge halls and chandeliers. Surprisingly, ‘ the windows, especially of the rooms, were very small. They were decorated with beads and zari curtains and hangings. It was said that Parvati Kaki’s ancestors were related to the great Peshwas who had ruled Maharashtra during the 18th and 19th centuries.

(पार्वती काकीज़ हाउस वॉज़ अलमोस्ट लाइक ए मेन्सन बिल्ट इन ट्रेडिशनल स्टाइल विद बिग वुडन कार्ड डोअर्स, ह्यूज हॉल्स एण्ड चेन्डलियर्स। सरप्राइजिंगली, द विन्डोज़, स्पेशल ऑफ द रूम्स, वर वेरी स्माल। दे वर डेकोरेटेड विद बीड्स एण्ड जरी कन्स एन्ड हेगिंग्स। इट वॉज़ सेड दैट पार्वती काकीज .एनसेस्टर्स वर रिलेटेड टु द ग्रेट पेशवाज हू हैड रूल्ड महाराष्ट्र ड्यूरिंग द 18th (एट्टीन्थ) एण्ड 19th (नाइन्टीन्थ) सेन्चुरीज।)

हिन्दी अनुवाद :
पार्वती काकी का घर एक विशाल भवन था जो कि बड़े लकड़ी के नक्काशीदार दरवाजों, बड़े हॉलों और काँच की कारीगरी से परम्परागत स्टाइल में बना हुआ था। अद्भुत बात यह थी कि खिड़कियाँ विशेषकर कमरों की बहुत छोटी-छोटी थीं। उन्हें लकड़ी की बीडिंग जरी के पर्दो से और झालरों से सजाया गया था। यह कहा जाता था कि पार्वती काकी के पूर्वज महान पेशवाओं से सम्बन्धित थे जो कि 18वीं व 19वीं सदी में महाराष्ट्र के शासक थे।

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[4] In the big house Parvati Kaki lived with her son Vinayak, his wife Gauri and her chubby little grandson, Chhotu. Chhotu was a great favourite with the girls. Gauri Bhabhi, as Chhotu’s mother was called, was a very nice, educated lady and didn’t mind Chhotu being carried by others. Parvati Kaki, however, kept vigil like a watchdog and never allowed Cheemi to touch Chootu. Cheemi had to be satisfied with cooing to Chhotu from a distance. How she wished she could play with him.

(इन द बिग हाउस पार्वती काकी लिव्ड विद हर सन विनायक, हिज़ वाइफ गौरी एण्ड हर चबी लिटिल ग्रैंडसन, छोटू। छोटू वॉज़ अ ग्रेट फेवरिट विद द गर्ल्स। गौरी भाभी, एज़ छोटूज़ मदर वॉज़ काल्ड, वॉज़ अ वेरी नाइस, एजुकेटेड लेडी एण्ड डिडन्ट माइण्ड छोटू बीइंग करिड बाय अदर्स। पार्वती काकी हाउएवर, केप्ट विजिल लाइक अ वाच डॉग एण्ड नेवर अलाउड चीमी टु टच छोटू। चीमी हैड टु बी सेटिसफाइड विद कूइंग टु छोटू फ्रॉम अडिस्टन्स। हाउ शी विश्ड शी कुड प्ले विद हिम।)

हिन्दी अनुवाद :
उस बड़े घर में पार्वती काकी अपने बेटे विनायक, उसकी पत्नी गौरी और उसके गोलमटोल छोटे पोते छोटू के साथ रहती थी। छोटू लड़कियों के बीच बहुत प्रिय था। गौरी भाभी, जो छोटू की माँ थी, एक बहुत उम्दा शिक्षित महिला थी और छोटू को किसी के द्वारा ले जाने पर एतराज नहीं करती थी। हालांकि पार्वती काकी उस पर सुरक्षा करने वाले कुत्ते के समान नजर रखती थी, और उसने कभी भी छोटू को चीमी द्वारा कभी छूने की इजाजत नहीं दी थी। चीमी को दूर से ही डोव की तरह कूऽऽ आवाज करने से ही सन्तुष्ट रहना पड़ता था। वह कितना चाहती थी कि वह उसके साथ खेले।

[5] Every year when, during the monsoons, the river Mutha, near Pune, gets flooded, people gather to watch the flood waters. That year, when the level of the water rose, no one bothered. Suddenly, the news came that Panshet Dam had given way and the waters of Mutha river had entered the city. Children were asked to rush home from school. Shanwar Peth, where Cheemi and her friends lived, and other areas on the river banks were in danger of being flooded.

(एवी यीअर व्हेन, ड्यूरिंग मानसून्स, द रिवर मुथा, नीअर पुणे, गेट्स फ्लडेड, पीपुल गेट टुगेदर टू वाच द फ्लड वाटर्स। दैट यीअर, व्हेन द लेवल ऑफ वाटर रोज़, नो वन बॉदर्ड। सडनली, द न्यूज केम दैट पानशेट डैम हैड गिवन वे एण्ड वाटर्स ऑफ मुथा रिवर हैड इन्टर्ड द सिटी। चिल्डरन वर आस्क्ड टु रश होम फ्रॉम स्कूल। शांवर पेठ, व्हेयर चीमी एण्ड हर फ्रेन्ड्स लिव्ड एण्ड अदर एरियाज़ ऑन द रिवर बैंक्स वर इन डेन्जर ऑफ बीईंग फ्लडेड।)

हिन्दी अनुवाद :
प्रतिवर्ष जब मानसून के दिनों में पुणे के पास मुथा नदी में बाढ़ आती थी तो लोग बाढ़ के पानी को देखने इकट्ठे हो जाते थे। उस वर्ष जब पानी का स्तर बढ़ा, किसी ने कोई चिन्ता नहीं की। अचानक, यह खबर आई कि पानशेत बाँध ने मुथा नदी के पानी को रास्ता दे दिया है, मुथा नदी के पानी ने शहर में प्रवेश किया। बच्चों को कहा गया कि वे स्कूल से तेजी से घर चले जाएँ परन्तु शांवर पैठ एवं दूसरे क्षेत्र जहाँ चीमी और उसके साथी रहते थे, बाढ़ के खतरे में थे।

[6] At first the water was just knee-deep, but it rose fast. People living on the ground floors were shifted to places of safety. Those who lived in two or three storeyed flats climbed to the top. There was confusion everywhere.

(एट फर्स्ट द वाटर वॉज़ जस्ट नी डीप, बट इट रोज़ फास्ट। पीपुल लिविंग ऑन द ग्राउण्ड फ्लोर वर शिफ्टेड टु प्लेसेस ऑफ सेफ्टी। दोज़ हू लिव्ड इन टू और थ्री स्टोरिड फ्लैट्स क्लाइम्ड टु द टॉप देअर वॉज़ कन्फ्यूजन एव्रीव्हेअर।)

हिन्दी अनुवाद-पहले तो पानी घुटने-घुटने तक था किन्तु वह तेजी से बढ़ा। लोग जो जमीनी तल पर रहते थे उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। दूसरे या तीसरे माले के फ्लैट में रहने वाली सबसे ऊँचे तल पर चढ़ गए। चारों ओर असमंजस की स्थिति थी।

[7] Vinayak, Parvati Kaki’s son, had gone to Mumbai on business. Parvati Kaki and Gauri Bhabhi were on the ground floor. When water entered their house. Parvati Kaki was in the puja room and Gauri Bhabhi in the kitchen Within seconds the water rose. The police persuaded Parvati Kaki and Gauri Bhabhi to climb to the top floor. In the hurry and confusion, they forgot that Chhotu was sleeping on the first floor.

(विनायक, पार्वती काकीज़ सन, हैड गोन टू मुम्बई ऑन बिज़नेस। पार्वती काकी एण्ड गौरी भाभी वर ऑन द ग्राउण्ड फ्लोर। व्हेन वाटर इन्टर्ड देअर हाउस। पार्वती काकी वॉज़ इन द पूजा रूम एण्ड गौरी भाभी इन द किचन। विदिन सेकन्ड्स द वाटर रोज। द पोलिस परस्यूएडेड पार्वती काकी एण्ड गौरी भाभी टु क्लाइम्ब टु द टॉप फ्लोर। इन द हरी एण्ड कन्फ्यूजन, दे फारगॉट दैट छोटू वॉज़ स्लीपिंग ऑन द फर्स्ट फ्लोर।)

हिन्दी अनुवाद ;
विनायक, पार्वती काकी का बेटा व्यापार के सिलसिले में मुम्बई गया हुआ था। पार्वती काकी व गौरी भाभी अपने घर के जमीनी तल पर थे। जब पानी घर में घुसा तब पार्वती काकी पूजा कक्ष में व गौरी भाभी रसोईघर में थीं। कुछ ही सेकण्डों में पानी बढ़ा। पुलिस ने पार्वती काकी व गौरी भाभी से सबसे ऊपरी मंजिल पर जाने को कहा। जल्दबाजी व असमंजस में वे भूल गईं कि छोटू प्रथम तल पर सो रहा है।

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[8] The staircases were flooded. It was impossible to get to the bedroom on the first floor. Though the door to the room was closed, it was not bolted. Any moment the water could rush in. The women were panicky. “Chhotu” They wailed “What’ll happen to our Chhotu!”

Suddenly the police discovered that one of the bedroom windows was open, but it was too small for an adult to crawl in. Only a child could. But no one was willing to let their children take the risk. Out of nowhere, Cheemi emerged. “Let me help. I can easily crawl in and get Chhotu out,” she offered.

There was no time to waste. The policemen lowered Cheemi to the window. “Jump”, they told her. “We will drop you a rope ladder through the window.”

(द स्टेअरकेसेस वर फ्लडेड। इट वॉज़ इम्पॉसिबल टु गेट टु द बैडरूम ऑन द फर्स्ट फ्लोर। दो द डोर टु द रूम वॉज़ क्लोज्ड, इट वाज नॉट बोल्टेड। एनी मॉमेन्ट द वाटर कुड रश इन। द वूमैन वर पेनिकी। “छोटू” दे वेल्ड “व्हाट विल हैपन टु अवर छोटू!”

सडनली द पोलिस डिस्कवर्ड दैट वन ऑफ द बैडरूम विन्डोज वॉज़ ओपन, बट इट वॉज़ टू स्माल फोर एन एडल्ट टु क्रॉल इन। ओनली ए चाइल्ड कुड। बट नो वन वॉज़ विलिंग टु लेट देअर चिल्ड्रन टेक द रिस्क। आउट ऑफ नोव्हेअर, चीमी इमर्ड। “लेट मी हैल्प, आई केन इजीली क्रॉल इन एण्ड गेट छोटू आउट” शी ऑफर्ड।

देअर वॉज नो टाइम टु वेस्ट। द पोलिसमैन लोअर्ड चीमी टु द विन्डो। “जम्प” दे होल्ड हर। वी विले ड्रॉप यू अ रोप लैडर श्रू विन्डो।”)

हिन्दी अनुवाद :
सीढ़ियाँ पानी में डूब गई थीं। प्रथम तल के शयनकक्ष तक पहुँचना असम्भव था। यद्यपि शयनकक्ष का दरवाजा बन्द था पर उसकी चिटखनी नहीं लगी थी। किसी भी क्षण पानी तेजी से चढ़ता जाएगा। “छोटू” दोनों स्त्रियाँ विलाप कर उठीं, “हमारे छोटू का क्या होगा”?

अचानक पुलिस ने देखा कि शयनकक्ष की एक खिड़की खुली हुई है। किन्तु वह इतनी छोटी है कि कोई भी वयस्क अन्दर नहीं जा सकता था। केवल कोई बालक जा सकता था। किन्तु कोई भी अपने बच्चे के लिए खतरा मोल लेने को तैयार नहीं था। अचानक कहीं से चीमी प्रकट हुई। “मुझे मदद करने दो। मैं आसानी से रेंगकर अन्दर जा सकती हूँ और छोटू को बाहर ला सकती हूँ।” उसने कहा।

समय नष्ट करने का वक्त न था। पुलिसवालों ने चीमी को खिड़की में नीचे उतारा। “कूद जाओ” उन्होंने कहा, “हम तुम्हें रस्से की सीढ़ी से खिड़की से बाहर निकाल लेंगे।”

[9] Without a moment’s hesitation. Cheemi jumped through the window. Chhotu was sleeping soundly. Picking him up, Cheemi put him on her back and tied him tight to herself with a bedsheet.

Slowly she climbed up the ladder and peeped through the window. Carefully she undid the bedsheet and handed it, with the child to a policeman. Then she crawled out of the window.

(विदाउट अ मॉमेन्ट्स हेजिटेशन चीमी जम्प्ड थू द विन्डो। छोटू वॉज़ स्लीपिंग साउण्डली। पिकिंग हिम अप, चीमी पुट हिम ऑन हर बेक एण्ड टाइड हिम टाइट टु हरसेल्फ विद अ बैडशीट।

स्लोली शी क्लाइम्ड अप द लेडर एण्ड पीप्ड शू द विन्डो। केअरफुल्ली शी. अनडिड द बैडशीट एण्ड हेण्डेड इट, विद द चाइल्ड टु अ पोलिसमैन दैन शी क्रॉल्ड आउट ऑफ द विन्डो।)

हिन्दी अनुवाद ;
बिना किसी हिचकिचाहट के चीमी खिड़की से कूद गई। छोटू गहरी नींद में सो रहा था। उसे उठाकर चीमी ने उसे अपनी पीठ पर लिया और एक चादर से उसे अपने से बाँध लिया।

धीरे-धीरे वह सीढ़ी पर चढ़ी और खिड़की से झाँक कर देखा। सावधानी से उसने चादर को खोला और उसे बालक सहित एक पुलिस वाले को सौंप दिया। फिर वह भी खिड़की से रेंगकर बाहर आ गई।

[10] Both Cheemi and Chhotu were taken to the second floor where Parvati Kaki, Gauri Bhabhi and others were watching. Chhotu, who woke up by now, saw so many people around him and burst out crying. Cheers greeted Cheemi.

Gauri Bhabhi hugged Cheemi while Parvati Kaki fondled her grandson. Cheemi did not know what the fuss was all about.

(बोथ चीमी एण्ड छोटू वर टेकन टु द सेकण्ड फ्लोर व्हेअर पार्वती काकी, गौरी भाभी एण्ड अदर्स वर वॉचिंग। छोटू, हू वोक अप बाय नाउ, सो मेनी पिपुल अराउन्ड हिम एण्ड बर्स्ट आउट क्राइंग। चीअर्स ग्रीटेड चीमी।

गौरी भाभी हग्ड चीमी व्हाइल पार्वती काकी फॉन्डल्ड हर ग्रेन्ड सन। चीमी डिड नाट नो व्हाट द फस वॉज़ ऑल अबाउट।)

हिन्दी अनुवाद :
चीमी और छोटू दोनों को द्वितीय तल पर ले जाया गया। जहाँ पार्वती काकी व गौरी भाभी और अन्य लोग यह दृश्य देख रहे थे। छोटू, जो अब जग गया था इतने सारे लोगों को देखकर चीख पड़ा व रोने लगा।

खुशी से चीमी का स्वागत हुआ। ‘ गौरी भाभी ने उसे गले से लगा लिया जबकि पार्वती काकी अपने पोते को सहला रही थी। चीमी को यह समझ में नहीं आया कि माजरा क्या है?

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[11] “Come here, Cheemi”, Parvati Kaki called her. Cheemi hesitated. But Parvati Kaki almost dragged Cheemi to her and hugged her. “Daughter Cheemi” she said, “You have shown that it is courage and humanity that counts, not your caste or position.”

After two days the flood water began to recede. As soon as life returned to normal in Pune, the police inspector of the locality met Cheemi and asked her what reward she would like to have for her bravery.

(“कम हिअर, चीमी”, पार्वती काकी कॉल्ड हर। चीमी हेजिटेटेड। बट पार्वती काकी अलमोस्ट ड्रेग्ड चीमी टु हर एण्ड हग्ड हर। “डॉटर चीमी”, शी सेड, “यू हैव शोन दैट इट इज़ करेज़ एण्ड ह्यूमेनिटी दैट काउण्ट्स, नाट युअर कास्ट और पोजिशन।”

आफ्टर टू डेज़ द फ्लड वाटर बिगेन टु रिसीड। एज़ सून एज़ लाइफ रिटर्ड टु नॉर्मल इन पुणे, द पोलिस इंस्पेक्टर ऑफ द लोकेलिटी मैट चीमी एण्ड आस्कड हर व्हाट रिवार्ड शी वुड लाइक टु हेव फोर हर ब्रेवरी।)

हिन्दी अनुवाद :
“चीमी इधर आओ” पार्वती काकी ने कहा। चीमी हिचक रही थी। किन्तु पार्वती काकी ने उसे पास खींचा और उसको गले लगाया। “बेटी चीमी” उसने कहा, “तुमने यह दिखा दिया कि वह साहस और मानवता है जो मायने रखती है जाति या वर्ग नहीं।”

दो दिन बाद बाढ़ का पानी उतरा। जैसे ही पूना में जीवन सामान्य हुआ स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर चीमी से मिले और पूछा कि तुम अपनी बहादुरी के लिए कौन-सा इनाम चाहती हो।

[12] The entire neighbourhood was there. To everyone’s surprise, Cheemi said, “I have already got the reward-an opportunity to play with Chhotu.” She paused for a while and added. “I should like to go to school if you can help me.” The Inspector was helpless. But Vinayak Bhai came forward and said, “We’ll bear the expenses of Cheemi’s schooling. She can stay with us as long as she wants.”

Cheemi was delighted. At last she had a place to stay and little Chhotu to play with.

(दी इन्टायर नेबरहुड वॉज़ देअर। टु एव्रीवन्स सरप्राइज़, चीमी सेड “आई हैव आलरेडी गाट द रिवार्ड-एन अपॉर्चुनिटी टु प्ले विद छोटू”, शी पॉज्ड, फोर ए व्हाइल एण्ड एडेड। “आई शुड लाइक टु गो टू स्कूल इफ यू केन हैल्प मी।” द इंस्पेक्टर वॉज़ हैल्पलेस। बट विनायक भाई केम फॉर्वर्ड एण्ड सैड, “वी’, इल बीयर द एक्सपेन्सेस ऑफ चीमीज स्कूलिंग। शी केन स्टे विद अस एज लांग एज़ शी वान्ट्स।”

चीमी वॉज़ डिलाइटेड। एट लास्ट शी हैड अ प्लेस टु स्टे एण्ड लिटिल छोटू टु प्ले विद।)

हिन्दी अनुवाद :
सारा आस-पड़ोस हाजिर था। हरेक को आश्चर्य हुआ जब चीमी ने कहा, “मुझे अपना इनाम मिल चुका है-छोटू के साथ खेलने का मौका।” वह रुकी और कहा-“मैं स्कूल जाना चाहती हूँ यदि आप मेरी सहायता कर सकें।” इंस्पेक्टर लाचार था। किन्तु विनायक भाई आगे आये और कहा-“हम चीमी की पढ़ाई का खर्च उठायेंगे। चीमी जब तक चाहे हमारे यहाँ रह सकती है।”

चीमी की प्रसन्नता का ठिकाना नहीं रहा। अंतत: उसे छोटू के साथ रहने और खेलने का स्थान जो मिल गया था।

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The Spring Blossom Textbook General English Class 9th Solutions

The Second Chance Question Answer Class 9 General English The Spring Blossom Chapter 8 MP Board Solutions

Class 9th General English The Spring Blossom Chapter 8 The Second Chance Question Answers

The Second Chance Class 9 Questions and Answers

The Second Chance Textual Exercises

Word Power

(a) Match the following words in column (A) with their meaning in column (B)
(सुमेलित कीजिए।)
MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 8 The Second Chance 1
Answer:
(1) → (c)
(2) → (d)
(3) → (a)
(4) → (f)
(5) → (b)
(6) → (e)

(b) Select the word from the words given in the box having almost the same meaning of those given below
(समानार्थक शब्द छाँटिए।)
say, enough, shout, together, closely, throw, extreme suffering, loud sound, testament.

  1. ample – enough
  2. lob – throw
  3. mumble – say
  4. torment – extreme suffering
  5. huddle – to gather closely
  6. shrill – loud sound
  7. testimony – testament
  8. thud – shout

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How Much Have I Understood?

(A) Answer these questions
(निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए)

Question 1.
Who was Baljit?
(हु वास् बलजीत?)
बलजीत कौन था?
Answer:
Baljit was the coach of the hockey team.
(बलजीत वॉज़ द कोच ऑफ द हॉकी टीम।)
बलजीत हॉकी टीम का कोच था।

Question 2.
What was the reaction of Baljit when Sudhir lost a sure goal?
(व्हॉट वॉज़ द रिएक्शन ऑफ बलजीत व्हेन सुधीर लॉस्ट अ श्योर गोल?)
जब सुधीर ने एक निश्चित गोल खो दिया तो बलजीत की प्रतिक्रिया क्या थी?
Answer:
Baljit ordered Sudhir to sit out the rest of the game when he lost a sure goal.
(बलजीत ऑर्डर्ड सुधीर टू सिट आउट द रेस्ट ऑफ द गेम केन ही लास्ट अ श्योर गोल।)
सुधीर के एक निश्चित गोल खोने पर बलजीत ने उसे खेल के शेष भाग में बाहर बैठने का आदेश दिया।

Question 3.
Why did Sudhir grin?
(व्हाय डिड सुधीर ग्रिन?)
सुधीर खुलकर क्यों मुस्कुराया?
Answer:
Sudhir grinned because he had scored a third goal.
(सुधीर ग्रिन्ड बिकॉज़ ही हैड स्कोर्ड अ थर्ड गोल।)
सुधीर खुलकर मुस्कुराया क्योंकि उसने तीसरा गोल किया था।)

Question 4.
Why did Sudhir feel himself the happiest person?
(व्हाय डिड सुधीर फील हिमसेल्फ द हैप्पीएस्ट पर्सन?)
सुधीर ने खुद को सबसे सुखी व्यक्ति क्यों महसूस किया?
Answer:
Sudhir felt himself the happiest person because he was back on the field, where he belonged.
(सुधीर फेल्ट हिमसेल्फ द हैप्पीएस्ट पर्सन बिकॉज़ ही वॉज़ बैक ऑन द फील्ड, व्हेअर ही बिलाँग्ड)
सुधीर ने खुद को सबसे सुखी व्यक्ति महसूस किया क्योंकि वह मैदान में वापस आ गया था, जो उसका स्थान था।

Question 5.
Why did Sudhir not score a winning goal?
(व्हाय डिड सुधीर नॉट स्कोर अ विनिंग गोल?)
सुधीर ने जीतने वाला गोल क्यों नहीं किया?
Answer:
Sudhir did not score a winning goal because he had missed a sitter.
(सुधीर डिड नॉट स्कोर अ विनिंग गोल बिकॉज़ ही हैड मिस्ड अ सिटर।)
सुधीर एक आसान हिट नहीं मार सका था इसीलिए उसने एक जीतने वाला गोल खो दिया था।

Question 6.
What was the reaction of Sudhir’s teammates after the match?
(व्हॉट वॉज़ द रिएक्शन ऑफ सुधीरस् टीम मेट्स आफ्टर द मैच?)
सुधीर के साथी खिलाड़ियों की खेल के बाद क्या प्रतिक्रिया थी?
Answer:
Sudhir’s teammates got so angry that they could have gladly strangled him.
सुधीर्स टीम मेट्स गॉट सो एंग्री दैट दे कुड हैव ग्लैड्ली स्ट्रगल्ड हिम।)
सुधीर के साथी खिलाड़ी उससे इतना नाराज थे कि वे उसका गला घोंट सकते थे।

Question 7.
Sudhir missed a sitter. How?
(सुधीर मिस्ड अ सिटर। हाउ?)
सुधीर गोल करने का एक आसान मौका चूक गया। कैसे?
Answer:
Sudhir decided to use a reverse flick. He tried to show off. The result was a missed sitter.
(सुधीर डिसाइडेड टू यूज अ रिवर्स फ्लिक। ही ट्राइड टू शो ऑफ। द रिजल्ट वॉज़ अ मिस्ड सिटर।)
सुधीर ने रिवर्स फ्लिक का प्रयोग किया। उसने शान दिखाने के लिए एक आसान काम को मुश्किल में बदल दिया जिसका परिणाम था एक आसान मौके का हाथ से निकलना।

Question 8.
What did Baljit do to lift up the morale of the team?
(व्हॉट डिड बलजीत डू टू लिफ्ट अप द मोराल ऑफ द टीम?)
बलजीत ने टीम का मनोबल बढ़ाने के लिए क्या किया?
Answer:
Baljit said, “Well played, boys.”
(बलजीत सेड, “वेल प्लेड बॉयज।)
बलजीत ने कहा, “शाबाश बच्चों, बहुत अच्छा खेले।”

Question 9.
What advice did Baljit give to Sudhir at the beginning of the second-half of play?
(व्हॉट एडवाइज़ डिड बलजीत गिव टू सुधीर एट द बिगनिंग ऑफ द सेकण्ड-हॉफ ऑफ प्ले?)
खेल के उत्तरार्द्ध की शुरुआत में बलजीत ने सुधीर को क्या सलाह दी?
Answer:
Baljit said to him that he was playing well, and he should stop wasting his time and take a shot at the goal. Finally the score board was the only testimony to his talent.
(बलजीत सेड टू हिम दैट ही वॉज़ प्लेइंग वेल, एण्ड ही शुड स्टॉप वेस्टिंग हिज टाइम एण्ड टेक अ शॉट एट द गोल। फाइनली द स्कोर बोर्ड वॉज़ द ओनली टेस्टिमनी ट्र हिज़ टेलेन्ट।)
बलजीत ने सलाह दी कि वह अच्छा खेल रहा है और वह समय बर्बाद न करे और गोल की ओर शॉट लगाए। उसकी प्रतिभा का प्रमाण स्कोर बोर्ड ही है।

Question 10.
In which position did Baljit allow Sudhir to play?
(इन व्हिच पोजीशन डिड बलजीत अलाउ सुधीर टू प्ले?) बलजीत ने सुधीर को किस जगह पर खेलने की अनुमति दी?
Answer:
Baljit allowed Sudhir to play in right in position.
(बलजीत अलाउड सुधीर टू प्ले इन राइट-इन पोजीशन।)
बलजीत ने सुधीर को राइट-इन की जगह पर खेलने की अनुमति दी।

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(B) Who said to whom
[किसने किससे कहा।

Question 1.
“Why have you not been attending practice?”
(“व्हाय हैव यू नॉट बीन अटैण्डिंग प्रैक्टिस?”)
Answer:
Baljit to Sudhir.
बलजीत ने सुधीर से कहा।

Question 2.
“I didn’t play badly.”
(“आइ डिडन्ट प्ले बैडली।”)
Answer:
Sudhir to Baljit.
(सुधीर ने बलजीत से।)

Question 3.
“Hi, man, Nice to see you emerge from exile.”
(“हाय, मैन नाइस टू सी यू इमर्ज फ्रॉम एग्जाइल।”)
Answer:
Sudhir’s team mates to Sudhir.
सुधीर के साथी खिलाड़ियों ने सुधीर से।

Question 4.
“Isn’t that just an excuse for hiding after a disgraceful performance.”
(“इजन्ट दैट जस्ट एन एक्सक्यूज फॉर हाइडिंग ऑफ्टर अ डिसग्रेसफुल परफॉरमेन्स।”)
Answer:
Baljit to Sudhir.
(बलजीत ने सुधीर से।)

Question 5.
“Give it your best, boys.”
(गिव ईट योर बेस्ट बॉयज)
Answer:
Baljit to the boys of the team.
(टीम के लड़कों से।)

Language Practice

Write five sentences with the help of the schedule given in the Text Book.
[पाठ्यपुस्तक में दिए गए कार्यक्रम की मदद से पाँच वाक्य लिखिए।]
Answer:

  1. I had breakfast at 7.00 a.m. and went to school at 7.30 a.m.
  2. I attended extra class at 11.30 a.m. and returned home at 1.30 p.m.
  3. I went for tuition classes from 2.00 to 3.30 p.m. and played cricket with friends from 4.00 to 5.30 p.m.
  4. I had snacks from 5.30 to 6.30 p.m. and did homework from 6.30 to 8.30 p.m.
  5. I went to bed at 9.00 p.m.

Listening Time

(a) Teacher will read this passage and students will listen and tick the words given in the list.
(तालिका में दिए गए शब्दों को चिह्नित करो।)
Answer:
Students can do themselves with the help of their teacher.
[छात्र शिक्षक की मदद से स्वयं करें।

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Speaking Time

Answer these questions.
(निम्न प्रश्नों के उत्तर दो।)

Question 1.
In which subject did the boys obtain the highest marks?
Answer:
The boys obtained the highest marks in English.

Question 2.
What are the highest marks obtained in English?
Answer:
80%.

Question 3.
Who have got the highest marks in Maths?
Answer:
Girls have got the highest marks in Maths.

Question 4.
How much have the boys obtained in Maths?
Answer:
50%.

Question 5.
What is the highest score gained by the girls in English?
Answer:
60%.

Writing Time

Write a paragraph with the help of clues given in the text book.
(पाठ्य-पुस्तक में दिए गए संकेतों की मदद से अनुच्छेद लिखो)

Limba Ram, the archer was born in 1972. He represented India in the Asia cup-Beijing in 1989. He won silver medal while the team won gold medal. He also took part in Bangkok Inter national Archery Championship and won two golds and one silver medal. He was declared the Best Archer of the meet. In 1990, he took part in 1st Federation Cup Archery Tournament at New Delhi and International Archery Meet at Beijing. In 1991, he won Arjuna award.

Things to do

Students will prepare a scrap book with brief information of the world famous footballers/cricketers/hockey players.
(विश्व प्रसिद्ध फुटबॉलरों,क्रिकेटरों व हॉकी खिलाड़ियों की एक स्क्रैप बुक बनायें।)
Answer:
Students can prepare the scrap book themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

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The Second Chance Difficult Word Meanings

crucial (क्रूशल)-extremely important अत्यधिक महत्वपूर्ण; covet (कंवेट)-to want something very much किसी भी वस्तु को पाने की तीव्र इच्छा करना; nightmare (नाइटमेयर)-a dream that is very frightening डरावना सपना; din (डिन)-to tell somebody something again and again in a forceful way कोई बात बार-बार किसी से कहना, कूट-कूट के भरना; sitter (सिटर)-an easy chance to score a goal गोल करने का आसान मौका; scoop (स्कूप)-lift something with a quick continuous movement जल्दी से किसी चीज़ को उठाना; slid (स्लिड)-to move easily over a smooth or wet surface किसी चिकनी या गीली सतह पर आसानी से गति करना; ample (ऐम्पल)-enough पर्याप्त; apparent (अपैरेन्ट)-easy to see or understand आसानी से दिखने या समझ आने वाला; reputation (रेपुटेशन) an opinion held about someone or something especially by people in general प्रतिष्ठा; bay (बे)-make deep loud sound गहरी जोर की आवाज करना; strangle (स्ट्रगल)-kill somebody by squeezing throat गला घोंटकर मार डालना; lack (लैक)-not have enough of something अभाव; hostility (होस्टिलिटी)-unfriendly behaviour, दुरमनी; contempt (कन्टेम्प्ट)-feeling that somebody is of no value and cannot be respected घृणा; teammate (टीममेट)-member of the team खेल के साथी; interrupt (इण्टरप्ट)-break the continuity खलल डालना; brooding (ब्रूडिंग)-sad and mysterious दुःखी, विचारमग्न; mumble (मम्बल)-to speak or say something in a quiet voice in a way that is not clear बड़बड़ाना; wimp (विम्प)-a person who is not strong, brave or confident कायर व्यक्ति; boo (बू)-high loud sound ऊँची जोर की आवाज; torment (टॉरमेन्ट)-extreme suffering तीव्र पीड़ा; determination (डेटर्मिनेशन)-quality that makes you continue trying to do something even in difficulty पक्का इरादा; venture (वेन्चर)-activity especially one that involves taking risks साहसिक कार्य; impervious (इम्पेरवियस)-not affected or influenced by something किसी भी चीज से प्रभावित न होना; chiwy (चिवी)-to try and make somebody hurry किसी से जल्दी करवाना; dribble (ड्रिबल)-to move the ball along with several short kiks, hit गोंद को छोटी-छोटी हिट से आगे बढ़ाना; hesitant (हेजिटेन्ट)-embarrassed हिचकिचाने वाला; finesse (फिनेसि)-great skill in dealing with situations, especially in a delicate way चतुश्ता से परिस्थितियों से निपटने का कौशल huddle (हडल)-to gather closely इकट्ठे होना; tore (टोर)-separate अलग होना; tardy (टार्डो)-slow to act or move धीमे काम करना; shrill (श्रिल)-high loud sound तीव्र जोर की ध्वनि; testimony (टैस्टिमनि)-testament प्रमाण; sizzling (सिजलिंग)-very exciting बहुत उत्तेजनापूर्ण; intercept (इंटरसेप्ट)-stopping somebody going from one place to another or from arriving किसी को आगे बढ़ने से रोकना; whack (वैक)-to hit somebody very hard किसी को जोर से मारना; whizz (विज़)-to move very quickly बहुत तेजी से चलना; thud (थड)-loud sound जोर की आवाज; flank (फ्लैंक)-the left or right side of the sport ground किसी मैदान का बाँया अथवा दाहिना हिस्सा; wooden (वुडन)-not showing enough movement पर्याप्त गति न दिखाना; grin (ग्रिन)-to smile widely लम्बी चौड़ी मुस्कान; manoeuvre (मेनोवर)-cause something to turn skillfully किसी चीज़ को कलात्मकता से मोड़ना।

The Second Chance Summary, Pronunciation & Translation

[1] A week ago, the unthinkable happened. Sudhir, who played left-out in the school’s hockey team, threw away a crucial goal. Not only did his team lose the match, it also lost the coveted inter-school trophy. For many days afterwards, Sudhir re-lived the nightmare.

Baljit, the tough, well respected coach had dinned it into their heads a good hockey player must convert the half-chances.

(अ वीक अगो, दी अन थिंकेबल हेप्पन्ड। सुधीर हू प्लेड लेफ्ट आउट इन द स्कूल हाकी टीम, थ्रिउ अवे अक्रूशियल गोल। नॉट ओनली डिड हिज़ टीम लूज द मैच, इट अल्सो लॉस्ट द कवेटेड इन्टर स्कूल ट्रॉफी। फोर मैनी डेज आफ्टर वर्ड्स, सुधीर रि-लिव्ड द नाइट मेयर।

बालजीत, द टफ, वैल रैस्पेक्टेड कोच हैड डाइन्ड इट इन टू देअर हैड्स; अ गुड हॉकी प्लेयर मस्ट कन्वर्ट द हाफ चान्सेस।) हिन्दी अनुवाद-एक सप्ताह पूर्व, कभी न सोची गई घटना घटी। सुधीर विद्यालय हॉकी टीम में लेफ्ट आउट खेला था, उसने एक अत्यन्त महत्वपूर्ण गोल खो दिया था। न केवल उसकी टीम मैच हार गई थी बल्कि उसने तीव्र वांछित इन्टर स्कूल ट्रॉफी भी खो दी थी। इस घटना के बहुत दिनों बाद भी सुधीर एक डरावने सपने में रहा।

बालजीत, सख्त, अति सम्मानित कोच ने खिलाड़ियों के मन मस्तिष्क में यह बात भर दी थी कि एक अच्छा खिलाड़ी अधूरे मौकों को भी पूर्व अवसर में बदल सकता है।

[2] Half-chance? Sudhir had missed a sitter. It was a perfect lob from Rajbir, the team’s back. Having slipped through the defence, the ball was in an ideal scoring position, not too angular. A gentle scoop by changing the body posture or a crack to the net from a better hitting position would have sealed the score.

(हाफ चांस? सुधीर हैड मिस्ड अ सिटर। इट वाज़ अ परफैक्ट लॉब फ्राम राजबीर, द टीम्स बैक। हैविंग स्लिप्ड धू द डिफेन्स, द बाल वाज़ इज़ इन एन आइडियल स्कोरिंग पोजिशन नाट टू एंग्यूलर। अ जेन्टल स्कूप बाय चेजिंग द बॉडी पोस्चर और ए क्रेक टु द नेट फ्राम अ बैटर हिटिंग पोजिशन वुड हैव सील्ड द स्कोर।)

हिन्दी अनुवाद :
अर्ध अवसर? सुधीर ने गोल करने का एक आसान मौका गँवा दिया था। वह राजवीर के लिये पूर्णतः ऊँची स्ट्राइक होती जो कि टीम में बैक पर खेल रहा था। रक्षण टीम से स्लिप होती हुई गेंद गोल करने की आदर्श स्थिति में थी। बहुत कोणीय नहीं थी। शरीर की स्थिति को थोड़ा बदलते हुए या मारक स्थिति को बेहतर बनाते हुए नेट की ओर मारने से गोल पक्का हो जाता।

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[3] The goal keeper had charged early, leaving the goalpost not just undefended, but positively wide open and welcoming. In that single minute, the defence seemed to move almost in slow motion. Lazily, the seconds slid past giving Sudhir ample time to choose a scoring position. Then, for no apparent reason, he decided to use the reverse flick for which he had earned a sort of reputation. Part of it was the desire to show off. The other part was the challenge, the risk in raising the level of difficulty. Result : the ball hit the board from the outside. A sure goal was wasted or rather thrown away.

(द गोलकीपर हैड चार्ड अर्ली, लीविंग द गोलपोस्ट नॉट जस्ट अनडिफेन्डेड बट पॉज़िटिवली वाइड ओपन एण्ड वेलकमिंग। इन दैट सिंगल मिनट, द डिफेन्स सीम्ड टु मूव अलमोस्ट इन स्लो मोशन। लेझिली, द सेकण्ड्स स्लिड पास्ट गिविंग सुधीर एम्पल टाइम टु चूज अ स्कोरिंग पोज़िशन। देन, फोर नो अपैरेन्ट रीज़न, ही डिसाइडेड टु यूस द रिवर्स क्लिक फोर विच ही हैड अर्नड अ सार्ट ऑफ। रेप्यूटेशन। पार्ट ऑफ इट वाज़ द डिज़ायर टु शो ऑफ/द आदर पार्ट वाज़ द चेलेंज, द रिस्क इन रेजिंग द लेवल ऑफ डिफीकल्टी। रिज़ल्ट द बाल हिट द बोर्ड फ्राम द आउट साइड। अ स्युअर गोल वाज़ वेस्टेड और रादर थ्रोन अवे।)

हिन्दी अनवाद :
गोलकीपर पहले से ही तैयार हो चुका था, वह गोलपोस्ट को न केवल असुरक्षित छोड़ चुका बल्कि एकदम – खुला व गेंद का स्वागत करता हुआ दीख रहा था। उस एक क्षण में, रक्षात्मक टीम अत्यन्त धीमी गति पर थी। सुस्ती से सेकण्ड्स बीत रहे थे और सुधीर को एक स्कोरिंग पोजिशन चुनने के लिये काफी बल दे रहे थे। फिर बिना किसी स्पष्ट कारण से उसने रिवर्स क्लिक का उपयोग करने का निश्चय किया जिसके लिये उसने एक प्रकार की प्रतिष्ठा अर्जित की थी। उसका एक हिस्सा अपना प्रदर्शन था, और दूसरा हिस्सा एक चुनौती थी, कठिनाई के स्तर को उठाने का खतरा। परिणामः बाल ने बोर्ड को बाहर से टक्कर दी। एक निश्चित गोल व्यर्थ हो गया था यू कहें कि फेंक दिया गया था।

[4] The crowd bayed for his blood. His team mates would gladly have strangled him. An angry Baljit ordered him to sit out the rest of the game.

For a week Sudhir avoided the field. His teammates would gather for practice. But he lacked the courage to go in their midst and face the hostility and contempt that he felt he would be subjected to.

(द क्राउड बेयड फोर हिज़ ब्लड। हिज़ टीम मेट्स वुड ग्लेडली हैव स्ट्रेनगल्ड हिम। एन एंग्री बलजीत आडर्ड हिम टु सिट आउट द रेस्ट ऑफ हिज गेम।।

फोर ए वीक सुधीर अवाइडेड द फील्ड। हिज टीममेट्स वुड गेदर फोर प्रैक्टिस। बट ही लेक्ड द करेज टु गो इन देअर मिडस्ट एण्ड फेस द होस्टिलिटी एण्ड कन्टेम्प्ट दैट ही फैल्ट ही वुड बी सब्जेक्ट टु।)

हिन्दी अनुवाद :
भीड़ उसका खून माँगने लगी। उसकी टीम उसे खुशी से फाँसी पर चढ़ा देती। बलजीत से उसको शेष खेल के लिये बाहर बैठा दिया।

एक सप्ताह तक उसने खेल के मैदान से मुँह फेर लिया। उसके टीम के साथी प्रैक्टिस के लिए एकत्र होते। लेकिन उनके बीच जाकर शत्रुता घृणा का सामना करने का साहस उसमें नहीं था।

[5] “Sudhir, why have you not been attending practice?” a voice interrupted his brooding.
“I have not been well,” he mumbled.
“Isn’t that just an excuse for hiding after a disgraceful performance?”
It stung, as it was meant to.
“I did not play badly, “Sudhir said with some show of spirit. At that moment, he hated Baljit and his cool “oh, yes”,
Baljit said softly. “You missed a sitter. And, as if that was not bad enough, you have been behaving like a wimp ever since.

(“सुधीर, व्हाय हैव यू नॉट बीन अन्डिग प्रैक्टिस? अ वाईस इंटरप्टेड हिज, बूडिंग।
“आई हैव नॉट बीन वैल” ही-मम्बल्ड।
“इजन्ट दैट जस्ट एम एक्यूज़ फोर हाइडिंग आफ्टर अ डिसग्रेसफुल परफोर्मन्स?
इट स्टंग, एज इट वाज मीन्ट टु।
“आई डिड नॉट प्ले बेडली” सुधीर सेड विद सम शो ऑफ स्पिरिट। एट दैट मामैन्ट ही हैटेड बलजीत एण्ड हिज कूल “ओह यस”।
बलजीत सेड सॉफ्टली, “यू मिस्ड अ सिटर। एण्ड, एज़ इफ दैट वाज़ नाट बेड इनफ, यू हैव बीन बिहेविंग लाइक अ विम्प, एवर सिन्स।)

हिन्दी अनुवाद :
“सुधीर तुम प्रैक्टिस में उपस्थित क्यों नहीं हो रहे हो? एक आवाज ने उसका ध्यान भंग किया।
“मैं ठीक नहीं हूँ’ वह बुदबुदाया।
“क्या यह एक अपमानजनक प्रदर्शन को छिपाने के लिये एक बहाना नहीं है।”
यह बात चुभ गई, जैसा कि इरादा था।
“मैं बुरी तरह नहीं खेला,” सुधीर ने थोड़ा जोश को दिखाने के लिए कहा। उस पल उसे बलजीत और उसके ठण्डे स्वभाव से घृणा करने लगा। “अरे हाँ”।
बलजीत ने कोमलता से कहा, “तुम एक आसान हिट से चूक गए।” और, यह ज्यादा बुरी बात नहीं हो, फिर भी तुम एक कायर की तरह व्यवहार कर रहे हो।

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[6] “If you don’t know how to face up to your mistakes you should not venture into a game, any game.”

“Did you hear how they booed at me?” Sudhir asked, unable to hide the torment in his voice. ‘Did you see them laugh?”

“You deserved it, Baljit said calmly. “Everyone makes mistakes. Even terrible mistakes are excusable if you learn from them. But what lesson have you drawn apart from the one in self-pity? How will you teach yourself not to repeat that mistake ? Not by avoiding play, but by going into it with a determination not to repeat it. Now, enough of all this. Go to the field and be ready to play.”

(“इफ यू डोन्ट नो हाउ टु फेस अप टु युअर मिस्टेक्स यू शुड नॉट वेंचर इन टू ए गेम, एनी गेम।”

“डिड यू हीअर हाउ दे बुड एट मी?” सुधीर आस्क्ड, अनेबल टु हाइड द टॉरमेन्ट इन हिज वाईस। “डिड यू सी देम लाफ?”

“यू डिड इट” बलजीत सेड कामली। “एवीवन मेक्स मिस्टेक्स। इवन टेरिबल मिस्टेक्स आर एक्स्यूसेबल इफ यू लर्न फ्राम देम। बट व्हाट लेसन हैव यू ड्रॉन एपार्ट फ्राम द वन इन सेल्फ पिटी? हाउ विल यू टीच युअरसेल्फ नॉट टु रिपीट दैट मिसटेक? नॉट बाय अवोइडिंग प्ले, बट बाय गोइंग इनटू इट विद अ डिटरमिनेशन नॉट टु रिपीट इट। नाउ इनफ ऑफ आल दिस। गो टु द फील्ड एण्ड बी रेडी टु प्ले।”)

हिन्दी अनुवाद :
यदि तुम अपनी गलतियों का सामना करना नहीं जानते हो तो तुम्हें किसी भी खेल में खेलने का साहस नहीं करना चाहिए।

“क्या आपने सुना लोग किस तरह मेरा अपमान कर रहे थे?” सुधीर ने अपनी आवाज में मानसिक कष्ट को छिपाने में अयोग्य होते हुए कहा।

“तुम उसके योग्य थे”, बलजीत ने शान्त भाव से कहा। “हर व्यक्ति गलती करता है। भयंकर से भयंकर गलती भी क्षम्य होती है यदि तुम उससे कुछ शिक्षा ग्रहण करते हो। पर तुमने अपने को दयनीय बनाने के अलावा क्या सीखा है? तुम अपने आपको यह कैसे सिखाओगे कि तुम उस गलती को दुबारा नहीं करोगे? खेल की उपेक्षा करके नहीं किन्तु उसमें उस गलती को दुबारा न करने के निश्चय के साथ वापस प्रवेश करने में। खैर, बहुत हआ। क्रीडा स्थल पर जाओ और खेलने के लिए तैयार होओ।

[7] Impervious to Sudhir’s despair, Baljit turmed away. Sudhir slowly made his way to the changing room. Surprisingly, his teammates were welcoming.

“Hi man! Nice to see you emerge from exile,” Naveen, the captain said, Baljit appeared again, chivvying them to get ready for the game.

“Give it your best, boys” he said as usual. Almost as an afterthought, he added “Sudhir, you will be playing right in today.”

(इम्परवियस टु सुधीर्स डिस्पेअर, बलजीत टर्ड अवे। सुधीर स्लोली मेड हिज़ वे टु द चेंजिंग रूम। सरप्राइजिंग्ली, हिज़ टीममेट्स वर वेलकमिंग।

“हाइ मेन! नाइस टु सी यू इमर्ज फ्राम एक्जाइल”, नवीन द कैप्टन सेड। बलजीत अपीयर्ड अगेन, चिविंग देम टु गेट रेडी ‘फोर द गेम।

“गिव युअर बेस्ट, बॉइज़” ही सेड एज युज्वल। आल्मोस्ट एज़ एन ऑफ्टर थॉट, ही एडेड, “सुधीर, यू विल बी प्लेइंग राइट इन टुडे।”)

हिन्दी अनुवाद :
सुधीर की निराशा के प्रति अप्रभावित रहते हुए बलजीत पलट गये। सुधीर धीरे से कमरे की ओर चला। उसे आश्चर्य हुआ जब टीम के साथियों ने उसका स्वागत किया।

“हाइ भले आदमी। तुम्हें वनवास से पुनः प्रवेश करते हुए देखकर प्रसन्नता हुई। “नवीन, कप्तान ने कहा। बलजीत खिलाड़ियों को खेल के लिए तैयार करने को प्रोत्साहित करते हुए पुनः प्रकट हुए।

“बच्चों, अपना सर्वोत्तम दो”, हमेशा की तरह उन्होंने कहा। लगभग पुनः विचार आने पर उन्होंने जोड़ा, “सुधीर तुम आज बहुत अच्छा खेलोगे।”

[8] I have been shifted because now he thinks I am just not good enough, thought Sudhir sadly. I guess I deserve it. The game began. The opposing team was good and the first half of the game moved fast. The team attacked again and again, displayed good dribbing and executed excellent passes. But when it came to a scoring opportunity, players from both sides became hesitant, almost nervous. Baljit noted this thoughtfully. He particularly watched Sudhir. The boy was playing with a finesse he had never before displayed.

(आइ हैव बीन शिफ्टेड बिकाज़ नाउ ही थिंक्स आई एम जस्ट नाट गुड इनफ थॉट सुधीर सेडली। आई गेस आई डिज़र्व इट। द गेम बिगेन। दी अपोसिट टीम वाज़ गुड एण्ड द फर्स्ट हाफ ऑफ द गेम मूव्ड फास्ट द टीम अटैक्ड अगेन एण्ड अगेन, डिस्प्लेड गुड ड्रिबलिंग एण्ड एक्सीक्यूटेड एक्सीलेंट पासेस। बट व्हेन इट केम टु अ स्कोरिंग अपार्चुनिटी प्लेयर्स फ्राम बोथ साइडस बिकेम हेजिटेन्ट, अलमोस्ट नर्वस। बलजीत नोटेड थॉट फुल्ली। ही पर्टिक्युलरी वाच्ड सुधीर द बॉय वाज़ प्लेइंग विद अ फाइनेसी ही हैड नेवर बिफोर डिस्पेड।)

हिन्दी अनुवाद-मेरी जगह बदली गई है क्योंकि वह सोचते हैं कि मैं अब इतना अच्छा नहीं रहा, सुधीर के दुःखी मन ने सोचा। मैं सोचता हूँ कि मैं हँसी के योग्य हूँ। खेल शुरू हुआ। विपक्षी दल अच्छा था और खेल का पूर्वार्द्ध तेजी से चला। दल ने बार-बार आक्रमण किया, कुछ अच्छी उछाल और कुछ बढ़िया पासेस क्रियान्वित किये। किन्तु जब गोल करने का मौका आता, तो दोनों पक्षों के खिलाड़ी हिचकिचाते एवं घबराते हुए नज़र आये। बलजीत ने इस बात को विचारपूर्वक नोट किया। वे खासकर सुधीर को देख रहे थे। लड़का बहुत कुशलता से खेल रहा था जो कि उसने पहले कभी नहीं दिखाया था।

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[9] At half time, the players huddled around the coach, waiting for words of wisdom from him, and the all important criticism.

“Well played, boys,” Baljit said and then tore them apart for their tardiness in scoring and all those lost chances. He was not unpleasant, just coldly analytical. A whistle shrilled to mark the end of halftime. The players began moving back to the field.

“Just a minute, Sudhir,” Baljit held him back. “Listen, son, you are playing well. So stop wasting your time and take a shot at the goal. You have not made even one attempt at it. Finally, the scoreboard is the only testimony to your talent. So, go on and score. Do you hear me?

(एट हाफ टाइम, द प्लेयर्स हडल्ड अराउन्ड द कोच, वेटिंग फोर वर्ड्स ऑफ विस्डम फ्राम हिम, एण्ड ऑल द इर्पोटेन्ट क्रिटिसिज्म।

“वैल प्लेड बायज़”, “बलजीत सेड एण्ड दैन टोर अपार्ट फॉर देअर टार्डीनेज़ इन स्कोरिंग एण्ड ऑल दोज लास्ट चान्सेज़। ही वाज़ नाट अनप्लीजेंट, जस्ट कोल्डली अनलेटिकल। अव्हिसल श्रिल्ड टु मार्क दी एण्ड ऑफ हाफ टाइम। द प्लेयर्स बिगेन मूविंग बैक टु द फील्ड।

“जस्ट अ मिनट सुधीर”, बलजीत हैल्ड हिम बैक, “लिसन, सन, यू आर प्लेइंग वैल। सो स्टॉप वेस्टिंग यूअर टाइम एण्ड टेक अ शॉट टु द गोल। यू हैव नॉट मेड ईवन वन अटेम्प्ट एट इट। फाइनली द स्कोर बोर्ड इज़ दी ओनली टेस्टिमोनी टु युअर टेलेंट। सो गो ऑन एण्ड स्कोर। डू यू हीयर मी।)

हिन्दी अनुवाद :
अर्द्ध समय पर सभी खिलाड़ी कोच के चारों ओर उनके बुद्धिमत्ता पूर्ण शब्दों को सुनने व महत्वपूर्ण आलोचना सुनने के लिये घेरा बनाकर खड़े हो गए।

“बहुत अच्छा खेले, बालकों” बलजीत ने उन्हें कहा फिर उन्हें उनके स्कोरिंग के खोये हुए अवसरों पर उनके धीमेपन से मुक्त करने के लिये अलग-अलग कर दिया। वे दुःखी तो न थे सिर्फ ठंडेपन से विश्लेषण करने वाले थे। अर्द्ध समय खत्म होने की सूचना देती एक तीव्र सीटी बजी। सभी खिलाड़ी मैदान की ओर वापस लौट चले।

“सुधीर, एक मिनट” बलजीत ने उसके कंधे पर हाथ रखकर रोका, “बेटा, सुनो, तुम अच्छा खेल रहे हो। इसलिये समय बर्बाद करना बन्द करो और गोल की ओर शॉट लगाओ। तुमने अभी तक इसके लिए एक भी प्रयास नहीं किया है। अंततः स्कोरिंग बोर्ड ही तुम्हारी प्रतिभा की परीक्षा है। इसलिये जाओ और स्कोर करो। क्या तुम मुझे सुन रहे हो?

[10] Sudhir was speechless. He had hoped that it would not be noticed; that he was trying his best to avoid scoring. He did not know why, except that the nightmare of the last week was still alive. There was the sweet pleasure of being part of the game once more a part of something big, bigger than him at least. How had he kept away for so long? And yet, when it came to scoring, he shied away. He had never been afraid before,

(सुधीर वाज स्पीचलैस। ही हैड होप्ड दैट इट वुड नॉट बी नोटिस्ड, दैट ही वाज ट्राइंग हिज बेस्ट टु अवोयड स्कोरिंग। ही डिड नॉट नो व्हाय, एक्ससेप्ट दैट द नाइट मेअर ऑफ द लास्ट वीक वाज़ स्टिल अलाइव। देअर वाज़ स्वीट प्लेजर ऑफ बीइंग पार्ट ऑफ द गेम वन्स मोर-अ पार्ट ऑफ समथिंग बिग, बिगर दैन हिम एट लीस्ट। हाउ ही हैड केप्ट अवे सो फोर सो लांग? एण्ड यट, व्हेन इट केम टु स्कोरिंग ही साइड अवे। ही हैड नेवर बीन अफ्रेड बिफोर।)

हिन्दी अनुवाद :
सुधीर अवाक था। उसने उम्मीद की थी कि यह बात नोटिस नहीं होगी, और वह भी स्कोरिंग को टालने की कोशिश करता। वह नहीं जानता कि क्यों, इस बात को छोड़कर कि पिछले सप्ताह का दुःस्वप्न अभी भी जिन्दा था। खेल का एक बार फिर हिस्सा बनने का मधुर आनन्द था। किसी प्रकार की बड़ी चीज, कम से कम उससे तो बड़ी है। कितनी देर तक उसे अलग रखा गया था। और फिर भी जहाँ तक स्कोरिंग का सवाल था, वह उससे दूर ही रहा। वह कभी भी भयभीत नहीं हुआ था।

[11] His chance, the first one came when Naveen sent him a pass, a sizzling shot that defied interception and reached a little ahead of his right-in position.

Sudhir stopped the stinging hit with his stick and making a break with the ball, dribbled of past two players. He tapped the ball into a good scoring position and entered the D-area. His whack at the goal was a real beauty. The ball whizzed past the outstretched stick of the back and the padded legs of the goal keeper to hit the left inner board with a loud thud. It was a perfect field goal!

(हिज़ चान्स द फर्स्ट वन केम व्हेन नवीन सेंट हिम अ पास, अ सिजलिंग शॉट दैट डिफाईड इन्टरसेप्शन एण्ड रीच्ड अ लिटिल अहेड ऑफ हिज राइट इन पोज़िशन।

सुधीर स्टाप्ड द स्टिगिंग हिट विद् हिज़ स्टिक एण्ड मेकिंग अ ब्रेक विद् द बाल ड्रिबिल्ड ऑफ पॉस्ट टू प्लेयर्स। ही टेप्ड द बाल इन टू ए गुड स्कोरिंग पोजिशन एण्ड हंटर्ड द डी-एरिया! हिज़ व्हेक एट द गोल वाज़ अ रियल ब्यूटी। द बाल विज्ड पास्ट द आउट स्ट्रेच्ड स्टिक ऑफ द बेक एण्ड द पेडेड लेंग्स ऑफ द गोल कीपर टु हिट द लेफ्ट इनर बोर्ड विद् लाउड थड। इट वाज़ अ परफेक्ट गोल।)

हिन्दी अनुवाद :
उसका मौका प्रथम आया जब नवीन ने उसे एक बहुत उत्तेजित शॉट दी जो बाल को रोकने की चुनौती दे रही थी और उसकी राइट इन पोजिशन से थोड़ी आगे थी।

सुधीर ने उसको अपनी स्टिक से चुभती हुई हिट दो बाल को रोक कर दो पीछे के खिलाड़ियों से क्वारी की। उसने गेंद को एक अच्छी स्कोरिंग पोजिशन में टेप करते हुए डी-एरिया में प्रवेश किया। उसकी बाल को जोर की हिट वास्तव में देखने लायक थी। बाल तेजी से थोड़ी आवाज करती बेक खिलाड़ी की स्टिक के पिछले भाग से होती गोल कीपर के पेडेड टाँगों से गुजरी और इनर बोर्ड एक थाप से हाथ हिट किया। वह एक शानदार गोल था।

[12] Sudhir’s teammates thumped his back. Baljit shouted his approval and encouragement. Life regained its former healthy shape for Sudhir.

The game gathered pace. Sudhir’s team scored another goal this time it was from a penalty corner. But the real icing came in the dying minutes of the game, with the third goal. It was Sudhir, who scored again. He managed a solo run down the flank and dribbling past the defence was half turned away from the goal. It was not a scoring chance, but backed with his renewed confidence he was unstoppable. Scooping the ball with a reverse flick he had the opposition wooden on their feet, watching helplessly as the ball swung into the goal post.

(सुधीरर्स टीममेट्स थम्प्ड हिज़ बेक। बलजीत शाउटेड हिज़ अप्रूवल एण्ड इनकरेजमेंट। लाइफ रिजेन्ड इट्स फार्मरली हैल्दी शेप फोर सुधीर।

द गेम गैदर्ड पेस। सुधीर्स टीम स्कोर्ड अनादर गोल-दिस टाइम इट वाज़ फ्राम अ पेनल्टी कार्नर। बट द रियल आइसिंग केम इन द डाइंग मिनट्स ऑफ द गेम विद द थर्ड गोल। इट वाज सुधीर, हू स्कोर्ड अगेन। ही मेनेज्ड अ सोलो इन डाउन द फ्लेंक एण्ड ड्रिबलिंग पास्ट द डिफेन्स वाज़ हाफ टर्नड अवे फ्राम गोल। इट वाज़ नाट अ स्कोरिंग चान्स, बट बेक्ड विद हिज रिनिडड कान्फीडेन्स ही वाज अनस्टापेबल। स्कूपिंग द बाल विथ अ रिवर्स फ्लिक ही हैड द आपोजिशन वुडन आन देयर फीट, वाचिंग हैल्पलेस ली एज़ द बाल स्वंग इन टू द गोल पोस्ट।)

हिन्दी अनुवाद :
सुधीर के टीम के साथियों ने उसकी पीठ थपथपाई। बलजीत उसकी उपलब्धि पर और उसका उत्साहवर्धन करते हुए जोर से चिल्लाये। सुधीर के लिये जीवन ने अपने पूर्ववर्ती स्वस्थ स्वरूप को पुनः पा लिया था।

खेल तेजी से बढ़ने लगा। सुधीर की टीम ने एक और गोल दाग दिया। इस बार वह पेनल्टी कार्नर से हुआ था। किन्तु वास्तविक जमा देने वाली ठंडकं खेल के अन्तिम क्षणों में तीसरे गोल के समय आयी। वह सुधीर था, जिसने फिर स्कोर किया था। उसने मैदान की साइड से एक अकेला रन मेनेज किया और प्रतिरक्षा से क्यारी करते हुए गोल आधा घूम गया। यह यद्यपि स्कोरिंग का अवसर तो नहीं था किन्तु अपने नवीन बने आत्मविश्वास से पुष्ट होते वह किसी के द्वारा रोक सकने योग्य न था। गेंद को रिवर्स फ्लिक से उछालते हुए विरोधियों की गतिहीनता देखी, जो असहाय रूप से गेंद को गोल पोस्ट में जाते हुए देख रहे थे।

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(13] Sudhir looked across at his coach and grinned. Baljit shook his head in a ‘You will not improve’ gesture but he also had a big smile on his face.

This was the half-chance that Baljit kept talking about and Sudhir had scored by using the same difficult manoeuvre that had led him to miss a sitter in the last match. They won the match 3-0.

For Sudhir what mattered most was that he was back where he belonged on the field. And he was the happiest person.

(सुधीर लुक्ड एक्रॉस एट हिज़ कोच एण्ड ग्रिन्ड। बलजीत शूक हिज़ हैड इन अ ‘यू विल नाइट इम्प्रूव’ गेस्चर बट ही अल्सो हैड अ बिग स्माइल ऑन हिज़ फेस।

दिस वाज़ द हाफ चान्स दैट बलजीत कैप्ट टाकिंग अबाउट एण्ड सुधीर हैड स्कोर्ड बाय यूजिंग द सेम डिफिकल्ट मेनोवर दैट हैड लेड हिम टु मिस अ सिटर इन द लास्ट मैच। दे बोन द मैच 3-4।

फोर सुधीर व्हाट मेटर्ड मोस्ट वाज दैट ही वाज बैक व्हेअर ही बिलांग्ड-ऑन द फील्ड। एण्ड ही वाज द हैफिएस्ट पर्सन।)

हिन्दी अनुवाद :
सुधीर ने अपने कोच की ओर देखा और खुलकर मुस्कराया। बलजीत ने यह अहसास करते हुए सिर हिलाया कि ‘तुम नहीं सुधरोगे पर उनके चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान थी।

यह अर्द्ध-अवसर था जब बलजीत सुधीर के बारे में बात कर रहे थे और सुधीर ने उसी कठिन सावधानी व चतुरता भरा कार्य से स्कोर किया था जो कि उसने पिछले मैच में एक आसान हिट से चूक गया था। वे 3-0 से मैच जीत चुके थे।

सुधीर के लिए सबसे बड़ी बात यह थी कि वह उसी जगह पहुँच गया था-मैदान पर जहाँ उसे होना था और वह सबसे अधिक खुश व्यक्ति था।

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The Spring Blossom Textbook General English Class 9th Solutions

Ram Prasad ‘Bismil’ – The Great Martyr Question Answer Class 9 General English The Spring Blossom Chapter 11 MP Board Solutions

Class 9th General English The Spring Blossom Chapter 11 Ram Prasad ‘Bismil’ – The Great Martyr Question Answers

Ram Prasad ‘Bismil’ – The Great Martyr Class 9 Questions and Answers

Ram Prasad ‘Bismil’ – The Great Martyr Textual Exercises

Word Power

(A) Rearrange the jumbled letters into meaningful words and write the words in alphabetical order.
(सार्थक शब्द बनाओ व उन्हें क्रम से लिखो।)
Answer:

  1. nylo – only
  2. renve – never
  3. vocie – voice
  4. ollgasw – gallows
  5. talra – altar.

The words is alphabetical order are altar, gallows, never, only, voice

(B) Supply the synonyms for the words given below.
(दिये गये शब्दों के पर्यायवाची दीजिए)
Answer:

  1. anxiety – distress
  2. call – cry
  3. brave – courageous
  4. motherland – nation
  5. grief – sorrow.

(C) Match the words in column ‘A’ with the meanings in column B.
(सुमेलित करो।)
MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 11 Ram Prasad 'Bismil' - The Great Martyr 1
Answer:
(i) → (c)
(ii) → (e)
(iii) → (d)
(iv) → (a)
(v) → (b)

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How Much Have I Understood?

(A) Answer the following questions.
(निम्न प्रश्नों के उत्तर दो।)

Question 1.
Ram Prasad ‘Bismil’ was a great patriot. you find any other quality in him? Describe.
(राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ वॉज़ अ ग्रेट पेट्रिअट। डू यू फाइन्ड एनी अदर क्वॉलिटी इन हिम? डिस्क्राइब।)
राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ एक महान देश भक्त थे। क्या उनके अन्दर इसके अतिरिक्त कोई और भी गुण था? वर्णन करें।
Answer:
Yes, Ram Prasad ‘Bismil’ was a great poet also. He has written several inspiring verses. At the end of his autobiography, he has written some selected poems which are full of patriotic fervour.
(यस, रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ वॉज़ इ ग्रेट पोएट ऑल्सो। ही हैज़ रिटन सैवरल इन्सपाइरिंग वर्सेस। एट द ऍन्ड ऑफ हिज़ ऑटोबायोग्राफी, ही हैज़ रिटन सम सिलेक्टिड पोएम्स व्हिच आर फुल ऑफ पेट्रिऑटिक फर्वर।)
हाँ, राम प्रसाद बिस्मिल’ एक महान कवि भी थे। उन्होंने कई प्रेरणादायक कविताएँ लिखी हैं। अपनी आत्मकथा के अन्त में उन्होंने कुछ कविताएँ लिखी हैं जो देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण हैं।

Question 2.
‘Bismil’ joined the band of martyrs. What do you understand by the phrase “the band of martyrs?”
(‘बिस्मिल’ जॉइण्ड द बैण्ड ऑफ मार्टियर्स व्हॉट ड्र यू अण्डरस्टैण्ड बाइ द फ्रेज़ “द बैण्ड ऑफ मार्टियर्स”?)
‘बिस्मिल,’ शहीदों की टोली में सम्मिलित हो गये। शहीदों की टोली से आप क्या समझते हो?
Answer:
In the freedom movement of India, several persons became fighters against the British rule. These persons did not care for their lives even. These persons were called the “band of martyrs”
(इन द फ्रीडम मूवमेण्ट ऑफ इण्डिया सैवरल पर्सन्स बिकेम फाईटर्स अगेन्स्ट द ब्रिटिश रूल। दीज़ पर्सन्स डिड नॉट केयर फॉर देयर लाइव्स ईवन। दीज़ पर्सन्स वर कॉल्ड “द बैण्ड ऑफ मार्टियर्स”।)
भारत की आजादी के आन्दोलन में, ब्रिटिश शासन के खिलाफ कई व्यक्ति योद्धा बने थे। ये लोग अपनी जान की भी परवाह नहीं करते थे। इन्हीं को “शहीदों की टोली’ कहा गया।

Question 3.
‘Bismil’ along with other stalwarts helped revolutionaries in many other ways. Do you agree with the statement? Explain in brief.
(‘बिस्मिल’ अलाँग विद अदर स्टॉलवर्ट्स हैल्पड रिवॉल्यूशनरीज इन मैनी वेज़। डू यू एग्री विद द स्टेटमेण्ट? एक्सप्लेन इन ब्रीफ।)
‘बिस्मिल’ ने अपने अन्य विश्वस्त साथियों के साथ क्रान्तिकारियों की कई अन्य प्रकार से मदद की। व्याख्या करो।
Answer:
Yes, the stalwarts provided shelter to revolutionaries, printed literature and made hand bombs.
(यस, द स्टॉलवर्ट्स प्रोवाइडिड शेल्टर ट्र रिवॉल्यूशनरीज प्रिन्टेड लिट्रेचर एण्ड मेड हैण्ड बॉम्बस्।)
हाँ, क्रान्ति के समर्थक क्रान्तिकारियों को शरण देते थे, साहित्य छपवाते थे व हाथ से फेंके जाने वाला बम बनाते थे।

Question 4.
What incidents made ‘Bismil’ and his followers inmortal figures of India? Give some references from the text.
(व्हाट इन्सीडेन्ट्स मेड ‘बिस्मिल’ एण्ड हिज़ फॉलोअर्स इमॉर्टल फिगर्स ऑफ इण्डिया? गिव सम रेफ्रेन्सेस फ्रॉम द टेक्स्ट।)
कौन-सी घटनाओं ने ‘बिस्मिल’ और उनके साथियों को भारत की अमर विभूतियाँ बना दिया? पाठ के आधार पर कारण दो।
Answer:
Ram Prasad Bismil’ was a brave revolutionary, who gave up his life smilingly for the sake of motherland. The Kakori train incident made him and his followers immortal figures of India.
(राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ वॉज़ अ ब्रेव रिवॉल्यूश्नरी, हू गेव अप हिज लाइफ स्माइलिंग्ली फॉर द सेक ऑफ मदरलैण्ड। द काकोरी ट्रेन इन्सिडेण्ट मेड हिम एण्ड हिज़ फॉलोअर्स इमॉर्टल फिगर्स ऑफ इण्डिया।)
राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ एक बहादुर क्रान्तिकारी थे जिन्होंने मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। वे व उनके साथी काकोरी ट्रेन काण्ड के कारण भारत की अमर विभूतियाँ बन गए।

Question 5.
Every line of ‘Bismil’s poems throbs with poetic fervour. How far do you agree with the remark? Explain in brief.
(एवरी लाइन ऑफ ‘बिस्मिल’ पोएम्स थ्रॉब्स विद पोएटिक फर्वर। हाउ फार डू यू एग्री विद द रिमार्क? एक्सप्लेन इन ब्रीफ।)
‘बिस्मिल’ की कविताओं की प्रत्येक पंक्ति काव्यात्मक उत्साह एवं जोश से परिपूर्ण है। आप इस बात से कहाँ तक सहमत हैं? संक्षिप्त में व्याख्या करिए।
Answer:
It is true that Bismil’s poems throb with poetic fervor. In one of the poem he prays, “Even if I have to face death a thousand times for the sake of my motherland, it shall not sadden me.”
(इट इज़ टू दैट ‘बिस्मिल्स’ पोएम्स थ्रॉब विद पोएटिक फरवर। इन वन ऑफ द पोएम ही प्रेज़, “ईवन इफ आइ हैव टू फेस डैथ अ थाउजण्ड टाइम्स फॉर द सेक ऑफ माइ मदरलैण्ड। इट शैल नॉट सैडन मी।”)
यह सत्य है कि बिस्मिल की कविताएँ काव्यात्मक उत्साह एवं जोश से परिपूर्ण हैं। एक कविता में उन्होंने कहा है कि यदि मातृभूमि के लिए उन्हें हज़ार बार मरना पड़े तब भी उन्हें दुःख नहीं होगा।

Question 6.
What was Bismil’s contribution in the Kakori train incident?
(व्हॉट वॉज़ बिस्मिल्स कॉन्ट्रीब्यूशन इन द काकोरी ट्रेन इन्सिडेण्ट?)
काकोरी ट्रेन काण्ड में बिस्मिल का क्या योगदान था?
Answer:
Bismil was the brave leader of the Kakori train incident.
(बिस्मिल वॉज़ द ब्रेव लीडर ऑफ द काकोरी ट्रेन इन्सिडेण्ट।)
बिस्मिल काकोरी ट्रेन काण्ड के बहादुर नायक थे।

Question 7.
How did the Kakori train incident affect the British in India?
(हाउ डिड द काकोरी ट्रेन इन्सिडेण्ट अफैक्ट द्र ब्रिटिश इन इण्डिया?)
काकोरी ट्रेन काण्ड ने भारत में अंग्रेजों को किस प्रकार प्रभावित किया?
Answer:
This extremely well-planned incident jolted the British government.
(दिस एक्स्ट्रीमली वेल प्लैन्ड इन्सीडेण्ट जोल्टेड द ब्रिटिश गर्वनमेण्टं।)
इस अत्यन्त सुनियोजित काण्ड ने अंग्रेज सरकार की चूलें हिला दी।

Question 8.
Describe the qualities of Bismil’s mother that astounded the officials of the prison.
(डिस्क्राइब द क्वॉलिटीज ऑफ बिस्मिल्स मदर दैट एस्टाउण्डेड द ऑफिशियल्स ऑफ द प्रिजन।)
बिस्मिल की माँ के उन गुणों का वर्णन करो जिसने जेल के अधिकारियों को भौंचक्का कर दिया।
Answer:
Bismil’s mother was a brave lady. She was proud of her son. She went to the prison to meet her son who had to face death, the next day. When Bismil saw his mother he thought it was the last time he could see and talk to her. Tears came in the eyes of Bismil. His mother thought that Bismil was afraid of his death. So she rebuked him. The officials were astounded at the firmness of his mother.

(बिस्मिल्स मदर वॉज़ अ ब्रेव लेडी। शी वॉज़ प्राऊड ऑफ हर सन। शी वेन्ट टू द प्रिजन टू मीट हर सन हू हैड टू फेस डैथ द नेक्स्ट डे। व्हेन बिस्मिल सॉ हिज़ मदर ही थॉट इट वॉज द लास्ट टाइम ही कुड सी एण्ड टॉक टू हर। टीयर्स केम इन द आईज ऑफ बिस्मिल। हिज़ मदर थॉट दैट बिस्मिल वॉज़ अफ्रेड ऑफ डैथ। सो शी रिब्यूक्ड हिम। द ऑफिशियल्स वर एस्टाउण्डेड एट द फर्मनेस ऑफ हिज़ मदर।)

बिस्मिल की माँ एक बहादुर स्त्री थीं। उन्हें अपने पुत्र पर गर्व था। फाँसी के एक दिन पूर्व वह उनसे मिलने जेल गईं। जब बिस्मिल ने उन्हें देखा तो यह सोचकर कि वे अन्तिम बार अपनी माँ को देख रहे हैं, उनकी आँखों से अश्रु छलक आए। माँ ने सोचा कि उनका पुत्र मृत्यु से डर रहा है। इस पर माँ ने उन्हें झिड़क दिया। उनकी माँ की इस दृढ़ता पर जेल अधिकारी भौंचक्के रह गये।।

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(B) Who said these words to whom
(किसने, किससे कहा।)

Question 1.
“Even if I have to face death a thousand times for the sake of my motherland it shall not sadden me.”
(ईवन इफ़ आइ हैव टू फेस डैथ अ थाउजन्ड टाइम्स फॉर द सेक ऑफ माइ मदरलैण्ड इट शैल नॉट सैडन “मी।)
Answer:
Ram Prasad Bismil to.God.
(राम प्रसाद बिस्मिल टू गॉड।)

Question 2.
“Who are you?”
(“हू आर यू?”)
Answer:
The guard to the young man.
(द गार्ड ढू द यंग मैन।)

Question 3.
“Permit him also, brother.”
(परमिट हिम ऑल्सो ब्रढ़र।)
Answer:
Bismil’s mother to the guard.
(बिस्मिल्स मदर दू द गार्ड।)

Question 4.
“Why did you take up such activities?”
(“व्हाइय डिड यू टेक अप सच एक्टिविटीज?”)
Answer:
Bismil’s mother to Bismil.
(बिस्मिल्स मदर दू बिस्मिल्स)

Question 5.
“These are not tears of fear the fear of death.”
(“दीज़ आर नॉट टीयर्स ऑफ फिअर-द फिअर ऑफ
Answer:
Bismil to his mother.
(“बिस्मिल्स दू हिज़ मदर”)

Language Practice

Combine the given pairs of sentences.
(दिए गए वाक्य युग्मों को जोड़िए)

(i) (a) My sister is wearing a new frock.
(b) The frock is pink.
Answer:
My sister is wearing a frock which is pink.

(ii) (a) She is my teacher.
(b) She teaches English.
Answer:
She is my teacher who teaches English.

(iii) (a) I never touch these things.
(b) The things are prohibited.
Answer:
I never touch things which are prohibited.

(iv) (a) I am looking for Sharda.
(b) Her book is with me.
Answer:
I am looking for Sharda whose book is with me.

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Listening Time

Here is a conversation between a girl Shreya and her teacher. Talk in pairs. One student will play the role of the teacher and the other one of the students.
(दिए गए वर्तालाप को बोलिए।)
Answer:
Students can do themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

Speaking Time

(A) Read aloud with correct pronunciation each pair of words twice.
(दिए गए शब्दों को पढ़ो।)
Answer:
live, leave – लिव, लीव
hill, heel – हिलं, हील
lip, leap – लिप, लीप
this, these – दिस, दीज़
bit, beat – बिट, बीट
bid, bead – बिड, बीड
sick, seek – सिक, सीक

(B) Now read these pairs of sentences aloud.
(दिए गए वाक्यों को पढ़ो।)
Answer:
We are giving the pronunciation of the given sentences.
(1) Will you fill it, please?
विल यू फिल इट, प्लीज़?
Will you feel it, please?
विल यू फील इट, प्लीज़?

(2) We’re going to live here.
वी ओर गोइंग टू लिव हिअर।
We’re going to leave this place.
वी ओर गोइंग टू लीव दिस प्लेस।

(3) Can you see the ship?
कैन यू सी द शिप?
Can you see the sheep?
कैन यू सी द शीप?

(4) That’s a high hill.
दैट्स अ हाइ हिल।
That’s a high heel.
दैट्स अ हाइ हील।

(5) Would you like to have this?
वुड यू लाइक टू हैव दिस?
Would you like to have these?
वुड यू लाइक टू हैव दीज़?

Read the given sentences twice.
(दिए गये वाक्यों को दो बार पढ़ो।)
Answer:
We are giving the pronunciation of the given sentences :
(1) If you eat that piece of meat you’ll feel sick.
इफ यू ईट दैट पीस ऑफ मीट यू विल फील सिक।

(2) On the peak, the leaves are green in winter.
ऑन द पीक, द लीव्स आर ग्रीन इन विन्टर।

(3) Don’t drink from the cup the : cup is chipped.
डोन्ट ड्रिंक फ्रॉम द कप : द कप इज़ चिप्ड।

(4) The ship sprang a leak as it was leaving harbour.
द शिप स्प्रंग अ लीक एज़ इट वाज़ लीविंग हार्बर।

(5) I don’t think we’ll have a picnic this week.
आइ डोन्ट थिंक वी विल हैव अ पिकनिक दिस वीक।

Writing Time

Write a composition on any one of the freedom fighters you admire the most.
(अपने प्रिय क्रान्तिकारी के विषय में लिखो।)
Answer:
Students can write about the freedom fighter whom they admire themselves.
(छात्र अपने प्रिय क्रान्तिकारी के विषय में स्वयं लिखें।)

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Things to do

Collect different types of pictures showing freedom fighters. Discuss in your class about their contribution in achieving freedom and write a paragraph about 5 freedom fighters.
(विभिन्न क्रान्तिकारियों की तस्वीरें इकट्ठी करो। उनके आजादी में योगदान की चर्चा करो व उन परं एक गद्यांश लिखो।)
Answer:
Students can collect the pictures of various freedom fighters like Bhagat Singh, Chandra Shekhar Azad, Mahatma Gandhi, Subhash Chandra Bose etc., themselves and write about them.

Ram Prasad ‘Bismil’ – The Great Martyr Difficult word Meanings

MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 11 Ram Prasad 'Bismil' - The Great Martyr 2

Ram Prasad ‘Bismil’ – The Great Martyr Summary, Pronunciation & Translation

[1] Ram Prasad ‘Bismil’ was one of the great Indian freedom fighters who also participated in the Kakori train incident. He was also a great poet and had written several inspiring verses. He was prosecuted by the British Government in India. Ram Prasad ‘Bismil’ joined the band of martyrs who dreamt of a free India and made the supreme sacrifice. ‘Bismil’, along with stalwarts like Ashfaqullah Khan, Chandra Shekhar Azad, Bhagwati Charan, Raj Guru and others organised several upheavals against the British; they printed literature, provided shelter to revolutionaries, made hand bombs and were a constant source of worry to the British Government. They are most remembered for the Kakori train incident and the bombing of the Punjab assembly.

(रामप्रसाद बिस्मिल वाज़ वन ऑफ द ग्रेट इंडियन फ्रीडम फाइटर्स हू अल्सो पार्टिसिपेटेड इन द काकोरी ट्रेन इन्सिडेन्ट। ही वाज़ अल्सों अग्रेट पोएट एण्ड हैड रिटन सेवेरल इंसपायरिंग वर्सेस। ही वाज प्रासीक्यूटेड बाय द ब्रिटिश गवर्नमेंट इन इंडिया। राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ जाइन्ड द बैंड ऑफ मारटिर्स हू ड्रीम्ट ऑफ अ फ्री इंडिया एण्ड मेड दं सुप्रीम सेक्रिफाइस। ‘बिस्मिल’ अलांग विद स्टालवा लाइक अशफाक उल्ला खान, चन्द्रशेखर आजाद, भगवतीचरण, राजगुरू एण्ड आदर्स आर्गेनाइज्ड सेवेरल अप हीवल्स अगेन्स्ट द ब्रिटिश; दे प्रिन्टेड लिटरेचर, प्रोवाइडेड शेल्टर टु, रिवाल्यूशनरीज़, मेड हैंड बाम्ब्स एण्ड वर अ कान्सन्ट सॉर्स ऑफ वरी टु द ब्रिटिश गवर्नमेंट। दे आर मोस्ट रिमेम्बर्ड फोर द काकोरी ट्रेन इन्सिडेन्ट एण्ड द बॉम्बिंग ऑफ द पंजाब असेम्बली।)

हिन्दी अनुवाद :
रामप्रसाद बिस्मिल भारत के महान् स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों में से एक थे जिन्होंने काकोरी रेल घटना में भाग लिया था। वे एक महान कवि भी थे और उन्होंने कई प्रेरणादायक कविताएँ लिखी थीं। उन पर भारत में ब्रिटिश सरकार ने मुकदमा चलाया था। रामप्रसाद बिस्मिल शहीदों के ऐसे दल से जुड़ गये जो भारत को स्वतन्त्र कराने के सपने देखते थे और अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तैयार रहते थे। रामप्रसाद बिस्मिल ने अशफाक उल्ला खान, चन्द्रशेखर आजाद, भगवतीचरण, राजगुरू जैसे दृढ़ निश्चयी व्यक्तियों के साथ ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध कई संगठित आन्दोलन किये। ये साहित्य छपते थे, स्वतन्त्रता सेनानियों को शरण देते थे, हस्त निर्मित बम बनाते थे और ब्रिटिश सरकार के लिये निरन्तर चिन्ता के स्रोत थे। वे काकोरी ट्रेन घटना व पंजाब विधानसभा में बम फोड़ने के लिए सदैव याद किये जाते हैं।

[2] ‘Bismil’ is the pen-name of Ram Prasad. As ‘Bismil’ he is well-known as a great revolutionary poet in Hindi. At the end of his autobiography, he has reproduced some selected poems. Every line of his poems throbs with patriotic fervour. In one poem, he prays, “Even it I have to face death a thousand times for the sake of my Motherland, it shall not sadden me. Oh Lord! Grant me a hundred births in Bharat. But grant me this, too, that each time I may give up my life in the service of the Motherland.”

(बिस्मिल इज़ द पेन नेम ऑफ रामप्रसाद। एज़ ‘बिस्मिल’ ही इज वेल नोन एज़ अ ग्रेट रिवोल्यूशनरी पोएट इन हिन्दी। एट द एण्ड ऑफ हिज़ ऑटोबायोग्राफी, ही हेज़ रिप्रोड्यूस्ड सम सेलेक्टेड पोएम्स। एवी लाइन ऑफ हिज़ पोएम्स थ्राब्स विद पेट्रियॉटिक फर्वर। इन वन पोएम, ही प्रेज, “इवन इफ आई हैव टु फेस डेथ अ थाउज़न्ड टाइम्स फोर द सेक ऑफ माय मदरलेण्ड, इट शैलं नाट सेडन मी। ओह लार्ड। ग्रांट मी अ हण्ड्रेड बर्थस इन भारत बट ग्रांट मी दिस, टू दैट ईच टाइम आइ मे गिव अप माई लाइफ इन द सर्विस ऑफ द मदरलैण्ड।)

हिन्दी अनुवाद :
‘बिस्मिल’ रामप्रसाद का लेखकीय उपनाम था। ‘बिस्मिल’ नाम से वे हिन्दी में एक महान क्रान्तिकारी कवि थे। अपनी आत्मकथा के अन्त में उन्होंने कुछ चुनिन्दा (खास) कविताएँ लिखी हैं। उनकी कविताओं की प्रत्येक पंक्ति देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत हैं। “यदि मुझे अपनी मातृभूमि के लिए सौ बार भी मृत्यु का सामना करना पड़े तो मैं दु:खी नहीं होंऊँगा। हे ईश्वर! मुझे सैकड़ों जन्म भारत में देना। किन्तु यह भी वरदान देना कि मैं हर बार मातृभूमि की सेवा में अपने प्राण त्याग दूं।”

[3] In a poem written just before going to the gallows, he prays, “Oh Lord! Your will be done. You are unique. Neither my tears nor I will endure. Grant me this boon, that to my last breath and the last drop of my blood, I may think of you and be immersed in your work.”

(इन अ पोएम रिटन जस्ट बिफोर गोइंग टु द गेलोज, ही प्रेज़, “ओह, लार्ड! युअर विल बी डन। यू आर यूनिक। नाइदर. माई टीअर्स नार आई विल इन्ड्युअर। ग्रान्ट मी दिस बून, दैट टु माई लास्ट ब्रेथ एण्ड द लास्ट ड्रॉप ऑफ माई ब्लड, आई मे थिंक ऑफ यू एण्ड बी इम्मर्सड इन युअर वर्क।”)

हिन्दी अनुवाद :
एक कविता में जिसे फाँसी के लिये जाते हुए उन्होंने लिखी थी, वे प्रार्थना करते हैं, हे भगवान! आपकी इच्छा पूरी हो, आप अद्वितीय हो। न तो मेरे आँसू न ही मैं किसी कष्ट का अनुभव करते हैं। मुझे यह वरदान देना कि अपनी अन्तिम साँस तथा अपने रक्त की अन्तिम बूंद तक मैं आपके बारे में सोचूं एवं आपके कार्य में समाहित हो जाऊँ।

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[4] Ram Prasad ‘Bismil’ was a brave revolutionary, who gave up his life smilingly for the sake of the Motherland. He was persecuted by an enraged foreign government, hunted by the police and betrayed by some fellow workers. He was the brave leader of the Kakori train incident. His poetry is also a lamp lighted at the altar of the Motherland. Kakori is a village near Lucknow. It became famous, because the attack on the train took place near Lucknow.

(रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ वाज़ अ ब्रेव रिवोल्यूशनरी, हू गेव अप हिज़ लाइफ स्माइलिंगली फोर द सेक ऑफ द मदरलैण्ड। ही वाज़ प्रासिक्यूटेड बाय एन इनरेज्ड फॉरेन गवर्नमेंट, हण्टेड बाय द पोलिस एण्ड बिट्रेड बाय सम फेलो वर्कर्स। ही वाज़ द ब्रेव लीडर ऑफ द काकोरी ट्रेन इनसिडेंट। हिज़ पोएट्री इज़ अल्सो अ लैम्प लाइटेड एट द अल्टार ऑफ द मदरलैण्ड। काकोरी इज़ अ विलेज नियर लखनऊ। इट बिकेम फेमस, बिकाज़ द अटैक ऑन द ट्रेन टुक प्लेस नियर लखनऊ।)

हिन्दी अनुवाद :
रामप्रसाद बिस्मिल एक बहादुर स्वतन्त्रता सेनानी थे जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिये हँसते-हँसते अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। उन पर एक क्रोधित विदेशी सरकार ने मुकदमा चलाया, पुलिस उनके पीछे पड़ी थी और कुछ साथी कार्यकर्ताओं ने उनके साथ गद्दारी की थी। फिर भी उन्होंने गुलामी से मुक्त होने के लिए आजादी की लौ को जलाये रखा। काकोरी रेल घटना के वे बहादुर नेता थे। उनकी कविताओं ने भी मातृभूमि की वेदी पर एक दीया जलाया था। लखनऊ के पास काकोरी गाँव है जो इसलिए प्रसिद्ध हुआ क्योंकि ट्रेन पर आक्रमण लखनऊ के पास इस स्थान पर हुआ था।

[5] It was the evening of the 9th of August 1925; the number eight down train was passing near Kakori. Ram Prasad and his nine revolutionary followers pulled the chain and stopped it. They took under their control the money belonging to the government deposited in the guard’s carriage. Excepting that one passenger was killed by an accidental shot, there was no bloodshed. This extremely well-planned incident jolted the government.

(इट वाज़ दी इवनिंग ऑफ द नाइन्थ ऑफ ऑगस्ट 1925; द नम्बर एट डाउन ट्रेन वाज़ पासिंग नियर काकोरी। रामप्रसाद एण्ड हिज़ नाइन रिवोल्यूशनरी फालोअर्स पुल्ड द चेन एण्ड स्टाप्ड इट। दे टुक अण्डर देअर कण्ट्रोल द मनी बिलांगिंग टु द गवर्नमेन्ट, डिपाजिटेड इन द गार्डज केरिज। एक्सेप्टिंग दैट वन पैसेन्जर वाज किल्ड बाय एन एक्सीडेण्टल शॉट, देअर वाज़ नो ब्लडशेड। दिस एक्स्ट्रीमली वेल प्लान्ड इन्सिडेंट जोल्टेड द गवर्नमेंट।)

हिन्दी अनुवाद :
9 अगस्त, 1925 की शाम थी; 8 नम्बर की डाउन ट्रेन काकोरी के पास से गुजर रही थी। रामप्रसाद और उसके 9 क्रान्तिकारी अनुयायियों ने ट्रेन को चेन खींच कर रोक दिया। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खजाने को अपने कब्जे में कर गार्ड के डिब्बे में रख लिया। केवल एक व्यक्ति जो एक घटनावश चली बन्दूक की गोली से मारा गया उसको छोड़कर जरा भी खून खराबा नहीं हुआ। इस सुनियोजित घटना ने ब्रिटिश शासन की चूल हिला दी।

[6] After a month of detailed preliminary inquiries and elaborate preparations, the government cast its net wide for the revolutionaries. Arrest warrants were issued not only against the ten participants but also against other leaders of the Hindustan Republic Association. With the lone exception of Chandra Shekhar Azad, all participants were caught. The case went on for over a year and a half. Ram Prasad, Ashfaqullah, Roshan Singh and Rajendra Lahiri, all four were sentenced to death. A strong campaign was organised throughout India to save the lives of these revolutionary heroes. Many of the leaders appealed to the British Government to show mercy to the condemned men. But the government was unyielding.

(आफ्टर अ मंथ ऑफ डिटेल्ड प्रिलिमिनरी इन्क्वायरीज़ एण्ड इलेबोरेट प्रिपरेशन्स, द गवर्नमेण्ट कास्ट इट्स नेट वाइड फोर द रिवोल्यूशनरीज। अरेस्ट वारंट्स वर इश्यूड नाट ओनली अगेन्स्ट द टेन पार्टीसिपेण्ट्स बट अल्सो अगेन्स्ट आदर लीडर्स ऑफ द हिन्दुस्तान रिपब्लिकन असोसिएशन। विद द लोन एक्सपेप्शन ऑफ चन्द्रशेखर आजाद, ऑल पार्टीसिपेण्ट्स वर काट। द केस वेण्ट ऑन फोर ओवर अं यीअर एण्ड अ हाफ। रामप्रसाद, अश्फाक उल्ला, रोशन सिंह एण्ड राजेन्द्र लाहिड़ी, ऑल फोर वर सेण्टेन्स्ड टु डेथ अस्ट्रांग केम्पेन वाज़ आर्गेनाइज्ड श्रू आउट इंडिया टु सेव द लाइब्ज ऑफ दीज़ रिवोल्यूशनरी हीरोज। मैनी ऑफ द लीडर्स अपील्ड टु द ब्रिटिश गवर्नमेंट टु शो मर्सी टु द कंडेम्ड मेन। बट द गवर्नमेंट वाज़ अनयील्डिंग।

‘हिन्दी अनुवाद :
एक महीने तक विस्तृत प्रारम्भिक पूछताछ व लम्बी चौड़ी तैयारी के बाद शासन ने क्रान्तिकारियों के लिए व्यापक जाल बुना। गिरफ्तारी के वारण्ट न केवल दस प्रतिभागियों के विरुद्ध बल्कि हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसियेशन के अन्य नेताओं के लिये जारी किए गए। केवल चन्द्रशेखर आजाद को छोड़कर सभी सहभागी पकड़े गए। मामला डेढ़ साल से ऊपर चला। रामप्रसाद, अशफाक उल्ला, रोशन सिंह और राजेन्द्र लाहिड़ी को मौत की सजा सुनाई गई। इन क्रान्तिकारी नायकों के लिए एक राष्ट्रव्यापी आन्दोलन आयोजित किया गया। कई नेताओं ने ब्रिटिश सरकार को इन विजित व्यक्तियों के प्रति दया दिखाने की अपील भी की। पर शासन टस से मस नहीं हुआ।

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[7] It was the 18th of December 1927. A middle-aged lady was waiting at the main gate of the Gorukhpur Central Jail. She was eagerly waiting to be called into the prison. By that time, her husband also arrived there. He was surprised that his wife was already there before him. He also sat down to wait for the call. A young man came there. He was not related to them. He knew that the couple would be permitted to enter the prison. But how should be manage to enter the prison? This was his problem. The officials of the prison called in the husband and the wife. The young man followed them. The guard stopped him and rudely asked, “Who are you?” “Permit him also, brother. He is my sister’s son.” the lady said in an entreating voice. The guard relented.

(इट वाज़ द एट्टीन्थ ऑफ दिसेम्बर 1927 (नाइन्टीन ट्वेन्टी सेवन) अ मिडिल एजेड लेडी वाज़ वेटिंग एट द मैन गेट ऑफ द गोरखपुर सेंट्रल जेल। शी वाज़ ईगरली वेटिंग टु बी काल्ड इन टू द प्रिजन। बाय दैट टाइम हर हसबैण्ड अल्सो अराइब्ड देअर ही वाज़ सरप्राइज़्ड दैट हिज़ वाइफ वाज़ अलरेडी देयर बिफोर हिम। ही आल्सो सेट डाउन टु वेट फॉर द काल। अ यंग मेन केम देअर। ही वाज़ नाट रिलेटेड टु देम। ही निउ दैट द कपल वुड बी परमिटेड टु इंटर द प्रिज़न? बट हाऊ सुड ही मैनेज टू एन्टर द प्रिज़न। दिस वाज हिज़ प्रॉब्लेम। द आफीशियल्स ऑफ द प्रिज़न काल्ड इन द हसबैण्ड एण्ड वाइफ। द यंग मैन फालोड देम। द गार्ड स्टाप्ड हिम एण्ड रूडली आस्क्ड “हू आर यू?” “परमिट हिम अल्सो, ब्रदर। ही इज माय सिस्टर्स सन”, |द लेडी सेड इन एन इंट्रीटिंग वाईस। द गार्ड रिलेन्टेड।।

हिन्दी अनुवाद :
18 दिसम्बर, 1927 का दिन था। एक मध्यम आयु की महिला गोरखपुर सेण्ट्रल जेल के मुख्य दरवाजे के सामने इन्तजार कर रही थी। वह अत्यन्त अधीरता से जेल में बुलावे का इन्तजार कर रही थी। उस समय उसके पति भी वहाँ आये। वे अपनी पत्नी के अपने से पहले आ जाने से आश्चर्य में थे। वे भी बैठकर बुलाने का इन्तजार करने लगे। एक नौजवान वहाँ आया जिसका उन दोनों से कोई सम्बन्ध नहीं था। वह जानता था कि पति-पत्नी को जेल में प्रवेश करने की अनुमति मिल जायेगी किन्तु वह जेल में कैसे प्रवेश करेगा। यह उसकी समस्या थी। जेल के अधिकारियों ने पति-पत्नी को बुलाया। नवयुवक भी उनके पीछे चला। गार्ड ने उसे रोका और बेरुखी से पूछा, “तुम कौन हो ?” “भैया उसे भी आने दो वह मेरी बहन का पुत्र है।” उसने प्रार्थनात्मक आवाज में कहा। गार्ड ने उसे जाने दिया।

[8] At the three entered the prison to visit a freedom fighter who was to face his death on the morrow’. The freedom fighter was brought there in chains. They were like ornaments on him. This was the last time that he could see his mother, the last time he could address her as ‘mother’. At this thought grief welled up in him. He stood speechless and tears rolled down his cheeks.

(ऑल द थ्री इन्टई द प्रिजन टु विज़िट अ फ्रीडम फाइटर हू वाज़ टु फेस हिज़ डेथ ऑन द मारो। द फ्रीडम फाइटर वाज़ ब्राट देअर इन चेन्स। दे वर लाइक आर्नामेंटस ऑन हिम। दिस वाज़ द लास्ट टाइम दैट ही कुड सी हिज़ मदर, द लास्ट टाइम ही कुड एड्रेस हर एज़ ‘मदर’। एट दिस थॉट ग्रीफ वेल्ड अप इन हिम। ही स्टुड स्पीचलैस एण्ड टीअर्स रॉल्ड डाउन हिज़ चीक्स।)

हिन्दी अनुवाद :
तीनों जेल में एक स्वतन्त्रता सेनानी से जिसे अगले दिन मौत का सामना करना था, मिलने हेतु प्रविष्ट हुए। स्वतन्त्रता सेनानी को जंजीरों से बँधा हुआ लाया गया। वे जंजीर उसके लिए आभूषणों के समान थी। यह अन्तिम बार था जब वह अपनी माँ को देख सकता था, अन्तिम बार वह उसे ‘माँ’ कहकर बुला सकता था। इस विचार से उसका मन दुःख से भर उठा। निर्वाक होकर वह खड़ा हो गया और उसके गालों पर आँसू बह निकले।

[9] In a firm voice the mother said, “What is this, my son? I had thought of my son as a great hero. I was thinking that the British Government would shiver at the very mention of his name. I never thought that my son would be afraid of death. If you can die only in this way, weeping, why did you take up such activities?”

The officials were astounded at the firmness of the mother. The freedom fighter replied, “Mother, dear, these are not tears of fear the fear of death. These are tears of joy-joy at beholding so brave a “mother!”

(इन अ फर्म वाईस द मदर सेड, “व्हाट इज़ दिस, माई सन, आई हैड थॉट ऑफ माय सन एज अ ग्रेट हीरो। आई वाज़ थिंकिंग दैट द ब्रिटिश गवर्नमेंट वुड शिवर एट द वेरी मेन्शन ऑफ हिज़ नेम। आई नेवर थॉट दैट माय सन वुड बी अफ्रेड ऑफ डेथ। इफ यू केन डाई ओनली इन दिस वे, वीपिंग, व्हाय डिड यू टेक अप सच एक्टीविटिज़?”

द आफिशियल्स वर अस्टाउन्डेड एट द फर्मनेस ऑफ द मदर। द फ्रीडम फाइटर रिप्लाईड, “मदर, डियर, दीज़ आर नाट टीअर्स ऑफ फीयर, द फीयर ऑफ डैथ। दीज़ आर टीअर्स ऑफ जाय-जाय एट बिहोल्डिंग सो ब्रेव अ मदर।”)

हिन्दी अनुवाद :
एक दृढ़ आवाज में माँ ने कहा, “मेरे बेटे, यह क्या है? मैंने अपने पुत्र को एक वीर नायक के रूप में सोचा था। मैं सोच रही थी कि मेरे पुत्र के नाम को सुनते ही ब्रिटिश सरकार काँप उठेगी। मैंने कभी यह नहीं सोचा था कि मेरा पुत्र भयभीत हो जायेगा-मृत्यु के डर से। अगर तुम इसी तरह रोते हुए मरना चाहते हो तो तुमने इस प्रकार का कार्य ही क्यों किया?”

माँ की इस दृढ़ता पर जेल के अधिकारी आश्चर्यचकित रह गए। स्वतन्त्रता सेनानी ने उत्तर दिया, “ये आँसू मृत्यु के भय के नहीं है। ये तो आनन्द के आँसू हैं-आनन्द एक ऐसी बहादुर माँ को पाकर।”

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[10] The brave son of that brave mother was Ram Prasad Bismil. He was the leader of the famous Kakori train incident. The last meeting ended. Next morning Ram Prasad got up earlier than usual, bathed and said his morning prayers. He wrote his last letter to his mother. Then he sat down with calm mind awaiting his death.

(द ब्रेव सन ऑफ दैट ब्रेव मदर वाज़ रामप्रसाद बिस्मिल। ही वाज़ द लीडर ऑफ द फेमस काकोरी ट्रेन इन्सिडेण्ट। द लास्ट मीटिंग एन्डेड़। नेक्स्ट मार्निंग राम प्रसाद गॉट अप अर्लियर देन युज्वल, बाथ्ट एण्ड सेड हिज़ मार्निंग प्रेयर्स। ही रोट हिज़ लास्ट लेटर टु हिज़ मदर। दैन ही सैट डाउन विथ कॉम माइन्ड अवेटिंग हिज़ डेथ।)

हिन्दी अनुवाद :
उस बहादुर माँ का बहादुर बेटा था-रामप्रसाद बिस्मिल। वह प्रसिद्ध काकोरी ट्रेन घटना का नायक था। अन्तिम मिलन समाप्त हुआ। अगले दिन रामप्रसाद नियमति रूप के बजाय बल्कि जल्दी उठे, उसने स्नान किया और प्रात:कालीन प्रार्थना की। उसने अपनी माँ को अन्तिम पत्र लिखा। फिर वह शान्त भाव से मृत्यु की प्रतीक्षा करने लगे।

[11] The officials came and removed his chains. They look him from the prison-cell towards his death. He was completely untroubled and walked like a hero. The officials were amazed. As he moved to the gallows, he joyfully chanted ‘Vande Matram’ and ‘Bharat Mata Ki Jai’.At the top of his voice, he shouted, “Down with the British Empire’. Then he calmly recited prayers and embraced death.

(द आफीशियल्स केम एण्ड रिमूव्ड हिज़ चेन्स। दे टुक हिम फ्राम द प्रिज़न-सेल टुवर्ड्स हिज़ डेथ। ही वाज़ कम्पलीटली अनट्रब्लड एण्ड वाक्ड लाईक अ हीरो। द आफीशियल्स वर अमेज्ड। एज़ ही मूव्ड टु द गेलोज, ही जायफुल्ली चान्टेड “वन्दे मातरम्” एण्ड “भारत माता की जय”। एट द टॉप ऑफ हिज़ वॉइस ही शाउटेड “डाउन विद द ब्रिटिश एम्पायर।” देन ही कामली रिसाइटेड प्रेयर्स एण्ड इम्ब्रेस्ड डेथ।)

हिन्दी अनुवाद :
अधिकारी आये और उसकी हथकड़ियाँ हटा दी। वे उसे जेल की कोठरी से मौत की ओर ले गये। वे पूर्णतः अविचलित थे और एक नायक की तरह चल रहे थे। अधिकारी भौंचक्के थे, जब वे फाँसी के तख्ते की ओर जाने लगे तो वे खुशी से चिल्लाये, “वन्दे मातरम्” और “भारत माता की जय”। अपनी पूरी आवाज से जोर से बोले, “ब्रिटिश साम्राज्य का नाश हो।” फिर उन्होंने शान्ति से प्रार्थना की और मृत्यु को , गले लगा लिया।

[12] As he was being executed, there was a strong guard around the prison. When he was dead, the officials brought out the dead body. Not only his parents but also hundreds of his countrymen were waiting outside in tears. The people of Gorakhpur decorated the body of the brave son of Bharat as befitted a hero and carried it in a procession. Flowers were showered on the body and the last rites were performed.

(एज ही वाज़ बीइंग एक्जीक्यूटेड, देअर वाज़ अ स्ट्रांग गार्ड अराउन्ड द प्रिज़न। व्हेन ही वाज़ डेड, द आफीशियल्स ब्राट आउट द डैड बॉडी। नाट ओनली हिज़ पेरेन्ट्स बट अल्सो हन्ड्रेड्स ऑफ हिज कन्ट्रीमैन वर वेटिंग आउट साइड इन टीअर्स। द पीपुल ऑफ गोरखपुर डेकोरेटेड द बॉडी ऑफ द ब्रेव सन ऑफ भारत एज बिफिटेड अ हीरो एण्ड केरिड इट इन अ प्रोसेशन। फ्लावर्स वर शॉवर्ड ऑन द बॉडी एण्ड द लास्ट राइट्स वर परफार्ड।)

हिन्दी अनुवाद :
जब उन्हें फाँसी पर चढ़ाया जा रहा था जेल के चारों ओर सुरक्षा के पुख्ता इन्तजाम थे। जब वह मृत हो गए, अधिकारीगण उनके मृत शरीर को बाहर लाये। न केवल उनके माता-पिता बल्कि सैकड़ों देशवासी जेल के बाहर अश्रुपूर्ण नेत्रों से उनका इन्तजार कर रहे थे। गोरखपुर निवासियों ने भारत के बहादुर पुत्र के शरीर को एक नायक की भाँति सजाकर जुलूस निकाला। उनके शरीर पर पुष्प वर्षा की गई और अन्तिम श्रद्धांजलि दी गई।

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The Spring Blossom Textbook General English Class 9th Solutions

J.C. Bose Question Answer Class 9 General English The Spring Blossom Chapter 15 MP Board Solutions

Class 9th General English The Spring Blossom Chapter 15 J.C. Bose Question Answers

J.C. Bose Class 9 Questions and Answers

J.C. Bose Textual Exercises

Word Power

(1) Match the words in column ‘A’ with their meanings in column ‘B’
(सुमेलित कीजिए)
MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 15 J.C. Bose 1
Answer:
(1) → (b)
(2) → (a)
(3) → (d)
(4) → (e)
(5) → (C)

(2) Make five words using the prefix-re and five other words using the suffix-ion.
(Re उपसर्ग या ion प्रत्यय लगाकर पँच – पाँच शब्द बनाइए)
Answer:
re – reappear, replace, regain, remove, retake.
ion – admiration, infection, communication, confession, suggestion.

MP Board Solutions

How Much Have I Understood?

(A) Answer these questions in one or two sentences
(निम्न प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
Who was admitted to St. Xavier’s School, Calcutta?
(हू वॉज़ एडमिटिड टू सेन्ट जेविअर्स स्कूल, कैलकटा?)
सन्त जेविअर स्कूल, कलकत्ता में किसका दाखिला हुआ?
Answer:
A little boy, Jagdish Chandra Bose was admitted to St. Xavier’s School, Calcutta.
(अ लिट्ल बॉय, जगदीश चन्द्र बोस वॉज़ एडमिटिड टू सेन्ट जेविअर्स स्कूल, कैलकटा।)
एक नन्हे बालक, जगदीश चन्द्र बोस को सन्त जेविअर्स स्कूल, कलकत्ता में दाखिल किया गया।

Question 2.
Where did the scientists gather?
(व्हेअर डिड द साइन्टिस्ट्स गैदर?)
वैज्ञानिक कहाँ इकट्ठे हुए?
Answer:
The scientists gathered in the hall of the Royal Society of London.
(द साइन्टिस्ट्स् गैदर्ड इन द हॉल ऑफ द रॉयल सोसाइटी ऑफ लन्डन।)
वैज्ञानिक लन्दन की रॉयल सोसाइटी के विशाल हॉल में इकट्ठे हुए।

Question 3.
Who was J. C. Bose’s father?
(हू वॉज़ जे. सी. बोस्स फादर?)
जे. सी. बोस के पिता कौन थे?
Answer:
Bhagwan Chandra Bose was J. C. Bose’s father.
(भगवान चन्द्र बोस वॉज़ जे. सी. बोसेज़ फादर।)
भगवान चन्द्र बोस जे. सी. बोस के पिता थे।

Question 4.
Where is Faridpur?
(व्हेयर इज़ फरीदपुर?)
फरीदपुर कहाँ है?
Answer:
Faridpur is in Dhaca district (now in Bangladesh.)
(फरीदपुर इज़ इन ढाका डिस्ट्रिक्ट (नाउ इन बांग्लादेश)।)
फरीदपुर ढाका जिले में (अब बांग्लादेश में) है।

Question 5.
How did Bose win the respect and admiration of the other boys in the school?
(हाउ डिड बोस विन द रिस्पेक्ट एण्ड एडमिरेशन ऑफ द अदर बॉयज़ इन द स्कूल?)
बोस ने विद्यालय के अन्य छात्रों से सम्मान व प्रशंसा कैसे प्राप्त की?
Answer:
One day, when the other boys were making fun of Bose, he suddenly jumped at one of his attackers and emerged as a brave boy, winning the respect and admiration of the other boys.
(वन डे, व्हेन द अदर बॉयज़ वर मेकिंग फन ऑफ बोस, ही सडनली जम्प्ड एट वन ऑफ हिज़ अटैकर्स एण्ड इमर्जड् एज़ अ ब्रेव बॉय, विनिंग द रिस्पेक्ट एण्ड एडमिरेशन ऑफ द अदर बॉयज़।)
एक दिन जब अन्य लड़के बोस का मजाक उड़ा रहे थे वह अचानक एक लड़के पर टूट पड़ा व एक बहादुर लड़का साबित होकर उसने अन्य लड़कों से इज्जत व प्रशंसा पाई।

(B) Answer these questions in two or three sentences.
(निम्न प्रश्नों के उत्तर दो या तीन वाक्यों में दीजिए।)

Question 1.
What did J. C. Bose prove and how?
(व्हॉट डिड जे. सी. बोस प्रव एण्ड हाउ?)
जे. सी. बोस ने क्या प्रमाणित किया व कैसे?
Answer:
J.C.Bose proved that plants also have feelings and they can feel pain. He demonstrated this by injecting poison in a plant and showing its feelings with the help of an instrument.
(जे. सी. बोस प्रूव्ड दैट प्लान्ट्स ऑल्सो हैव फीलिंग्स एण्ड दे कैन फील पेन। ही डिमॉन्स्ट्रेटिड दिस बाइ इन्जेक्टिंग पॉइज़न इन अ प्लान्ट एण्ड शोइंग इट्स फीलिंग्स विद द हैल्प ऑफ एन इनस्ट्रमेन्ट।)
जे. सी. बोस ने यह सिद्ध किया कि पौधों में भी संवेदनाएँ होती हैं व वे भी हमारी तरह दर्द महसूस करते हैं। उन्होंने एक पौधे को विष देकर उसकी भावनाओं को एक यन्त्र की सहायता से प्रदर्शित किया।

Question 2.
Why didn’t the succeed in the first attempt?
(व्हाय डिन्ट ही सक्सीड इन द फर्स्ट अटेम्प्ट?)
वह प्रथम प्रयास में सफल क्यों नहीं हुए?
Answer:
He did not succeed in the first attempt because a man had replaced the poison with similar coloured water.
(ही डिड नॉट सक्सीड इन द फर्स्ट अटेम्प्ट बिकॉज़ अ मैन हैड रिप्लेस्ड द पॉइजन विद सिमिलर कलर्ड वॉटर।)
वे प्रथम प्रयास में सफल नहीं हुए क्योंकि एक व्यक्ति ने विष की जगह रंगीन पानी रख दिया था।

Question 3.
What was the article about? Did it bring anything to Bose?
(व्हॉट वॉज़ द आर्टिकल अबाऊट? डिड इट ब्रिग एनीथिंग टू बोस?)
लेख किसके बारे में था? क्या उसने बोस को कुछ दिया?
Answer:
The article was about the ‘Response in the living and Non-living’. The article brought him the fellowship of the Royal Society.
(द ऑर्टिकल वॉज़ अबाऊट द ‘रिस्पॉन्स इन द लिविंग एण्ड नॉन लिविंग’। द आर्टिकल ब्रॉट हिम द फैलोशिप ऑफ रॉयल सोसाइटी।)
लेख’सजीव व निर्जीव वस्तुओं की प्रतिक्रिया के बारे में था।’ लेख ने उन्हें रॉयल सोसाइटी की फैलोशिप प्रदान करवाई।

Question 4.
What honours were given to J. C. Bose?
(व्हॉट ऑनर्स वर गिवन टू जे. सी. बोस?)
जे. सी. बोस को कौन-से सम्मान प्रदान किए गए?
Answer:
J. C. Bose was honoured with the degree of Doctor of Science by the Royal Society of England.
(जे. सी. बोस वॉज़ ऑनर्ड विद द डिग्री ऑफ डॉक्टर ऑफ साइन्स बाइ.द रॉयल सोसाइटी ऑफ इंग्लैण्ड।)
इंग्लैण्ड की रॉयल सोसाइटी ने जे. सी. बोस को डॉक्टर ऑफ साइंस’ उपाधि से सम्मानित किया।

Question 5.
Describe briefly the other inventions and contributions of J. C. Bose to science.
(डिस्क्राइब ब्रीफली द अदर इन्वेन्शन्स एण्ड कॉन्ट्रीब्यूशन्स ऑफ जे. सी. बोस टू साइन्स।)
जे. सी. बोस के अन्य आविष्कारों एवं विज्ञान को उनके योगदान का संक्षिप्त विवरण दो।
Answer:
Bose demonstrated the functioning of wireless telegraphy in public much before Marconi. He was the first to fabricate the device that generated radio wavelength. He discovered some important principles on which a radar works. Hence, he is called the inventor of radar.

(बोस डिमॉन्स्ट्रेटिड द फंक्शनिंग ऑफ वायरलेस टैलीग्राफी इन पब्लिक मच बिफोर मार्कोनी। ही वॉज़ द फर्स्ट टू फैब्रीकेट द डिवाईस दैट जैनरेटिड रेडियो वेवलेन्थ। ही डिस्कवई सम इम्पॉर्टेन्ट प्रिन्सिपल्स ऑन व्हिच अ राडार वर्क्स। हेन्स ही इज़ कॉल्ड द इन्वेन्टर ऑफ राडार।)

बोस ने वायरलेस की कार्य प्रणाली का सार्वजनिक प्रदर्शन मार्कोनी से बहुत पहले कर दिया था। वे पहले व्यक्ति थे जिसने रेडियो तरंग उत्पन्न करने वाला यन्त्र बनाया था। उन्होंने कुछ महत्त्वपूर्ण सिद्धान्तों की खोज की जिन पर एक रडार काम करता है। उन्हें रडार का आविष्कारकर्ता कहा जाता है।

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(C) Choose the correct alternative
(सही विकल्प चुनिए)

Question 1.
J. C. Bose was admitted in St. Xavier’s
(a) Mumbai.
(b) Calcutta
(c) Decca
(d) Delhi.
Answer:
(b) Calcutta

Question 2.
The scientists had gathered in
(a) Delhi
(b) Mumbai
(c) London
(d) Calcutta.
Answer:
(c) London

Question 3.
Bose demonstrated the feelings of
(a) plants
(b) people
(c) fish
(d) animals.
Answer:
(a) plants

Question 4.
The Royal Society of London awarded its fellowship to J. C. Bose in the year
(a) 1922
(b) 1912
(c) 1920
(d) 1918.
Answer:
(c) 1920

Question 5.
J. C. Bose was born in
(a) Faridkott
(b) Faridabad
(c) Firozpur
(d) Faridpur.
Answer:
(d) Faridpur.

Language Practice

(A) Fill up the blanks with ‘can’ or ‘could’.
(रिक्त स्थान भरो।)
Answer:

  1. Shyam can swim across the river.
  2. When he was young, he could run 20 miles per hour.
  3. This is the way through which you can to achieve your goals.
  4. Yesterday she lost her ring but she could find it again.
  5. As there was nobody at home, the thief could steal without trouble.

Listening Time

Make true or false
(सही तथा गलत बताओ।)
Answer:

  1. Snails do not eat grass. [True)
  2. Snails have no eyes. [False]
  3. People eat snails. [True]
  4. Snails can fly. [False]
  5. All the snails look ugly. [False]
  6. Snails never sleep. [False)]
  7. Snails have strong bones. [False]

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Writing Time

Raju and Ranu are friends. Raju believes that telephone is very useful while Ranu does not. She believes that T.V. is more useful. Write the dialogue that takes place between them.
(राजू तथा रानू के मध्य वार्तालाप पूर्ण करें।)
Answer:
Raju : Telephone is very useful.
Ranu : Telephone is useful but I think T.V. is more useful.
Raju : You can talk to a person anytime through telephone.
Ranu : But by T.V. we get information about the whole world, get entertainment.
Raju : But you cannot talk through T.V.
Ranu : We can see pictures in T.V. and not through telephone.

Things to do

Collect the names of some other great scientists and their inventions. Fill it in the table given below.
Answer:
MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 15 J.C. Bose 2

J.C. Bose Difficult Word Meanings

amuse (अम्यूज़)-to make somebody laugh or smile आनन्दित करना; emerge (इमर्ज)-to become known उभरकर आमा; curious (क्यूरियस)-having a strong desire to know something उत्सुक; strike (स्ट्राइक)-to refuse to continue working because of an argument with an employer about working conditions हड़ताल; eminent (एमिनेन्ट)-famous and respected in a particular profession or field किसी खास व्यवसाय या क्षेत्र में प्रसिद्ध होना; gather (गैदर)-to come together एकत्र होना; adamant (एडमेन्ट)-determined not to change your mind about something ; horror (हॉरर)-a feeling.of great shock, fear or disgust भय, आतंक; appear (अपीयर)-to give the impression of being or doing something प्रतीत होना; confess (कन्फेस)-to admit something कबूल करना; inventor (इन्वेन्टर)-to produce a design that has not existed before आविष्कारक; demonstrate (डिमॉन्स्ट्रेट)-to show something clearly by giving proof or evidence सप्रमाण प्रदर्शन; patent (पेटेन्ट)–an official right to be the only person to make use or sell a product or invention पेटेण्ट करना; fabricate (फैब्रिकेट)-to make or produce goods, equipments etc. निर्माण; radar (रडार)-a system that uses radio waves to find the position and movements of objects रेडियो तरंगों द्वारा किसी वस्तु की स्थिति व गति नापने का यन्त्र। dedicate (डेडिकेट)-to give a lot of your time and effort to a particular activity or purpose किसी कार्य या उद्देश्य के लिए अपना बहुत सारा समय तथा प्रयास अर्पित करना; accept (ऐक्सेप्ट)-to take willingly something that is offered स्वीकार करना।

J.C. Bose Summary, Pronunciation & Translation

[1] A little boy was admitted to St. Xavier’s School in Calcutta (now Kolkata). The boys at the school were much amused to have in their company a ‘new boy who could hardly converse in English. One day, when the other boys were making fun of this new boy, he suddenly jumped at one of his attackers and surprisingly emerged as a brave boy and won the respect and admiration of the other boys. This boy learnt a great lesson that day. “Success doesn’t fall into one’s lap. It is to be earned through great pains and struggle.’

(अ लिटिल बॉय वॉज़ एडमिटेड टु सेन्ट जैवियर्स स्कूल इन कलकत्ता (नाउ कोलकाता)। द बॉयज़ एट द स्कूल वर मच अम्यूज्ड टु हैव इन देअर कम्पनी अ न्यू बॉय हू कुड हार्डली कनवर्स इन इंग्लिश। वन डे, व्हेन द अदर बॉयज़ वर मेकिंग फन ऑफ दिस न्यू बॉय, ही सडनली जम्प्ड एट वन ऑफ हिज़ अटैकर्स एण्ड सरप्राइजिंगली इमर्ल्ड एज़ अ ब्रेव बॉय एण्ड वॉन द रेसपैक्ट एण्ड एडमायरेशन ऑफ द अदर बॉयज़। दिस बॉय लर्ट ग्रेट लेसन दैट डे। सक्सेस डज़न्ट फाल इन टू वन्स लैप। इट इज़ टु बी अर्ल्ड श्रू ग्रेट पेन्स एण्ड स्ट्रगल।”

हिन्दी अनुवाद :
कलकत्ता (अब कोलकाता) के सेंट जेवियर स्कूल में एक नए बालक ने प्रवेश लिया। विद्यालय के अन्य बालक अपनी संगत में एक नये लड़के को जो बमुश्किल अंग्रेजी में बातचीत कर सकता था, पाकर प्रसन्न हुए। एक दिन जब दूसरे लड़के इस नए लड़के का मजाक उड़ा रहे थे वह अचानक अपने एक आक्रमणकारी पर कूद पड़ा और आश्चर्यजनक रूप से एक बहादुर बालक बनकर उभरा और उसने अन्य छात्रों का आदर और प्रशंसा प्राप्त की। इस बालक को एक बड़ा पाठ उस दिन सीखने को मिला-“सफलता किसी की गोद में आकर नहीं गिरती। उसे बड़े कष्ट और संघर्ष से अर्जित करना होता है।”

[2] This boy was Jagadish Chandra Bose, who was born on the 30th of November 1858 in Faridpur district Decca (now in Bangladesh). Things around him made him curious. Why does the wind blow? Why does the water flow? Why are plants green? etc. were the questions that often struck his mind. Seeing his curiosity, his father Bhagwan Chandra Bose, admitted him to the St. Xavier’s Calcutta at the age of nine. Later he emerged as a great Indian scientist.

(दिस बॉय वॉज़ जंगदीश चन्द्र बोस, हू वॉज़ बॉर्न आन द 30th (थर्टियेथ) ऑफ नवेम्बर 1858 (एट्टीन फिफ्टी एट) इन फरीदपुर डिस्ट्रिक्ट ढाका (नाउ इन बंग्लादेश) थिंग्स अराउन्ड हिम मेड हिम क्यूरियस। व्हाय डज़ द विन्ड ब्लो? व्हाय डज़द वाटर फ्लो? व्हाय आर प्लाण्ट्स ग्रीन? एटसेट्रा वर द क्वेश्चन्स दैट ऑफटन स्ट्रक हिज़ माइन्ड। सीईंग हिज़ क्यूरियोसिटी हिज फादर भगवान चन्द्र बोस, एडमिटेड हिम टु द सेन्ट जेवियर्स केलकेट्टा एट द एज ऑफ नाइन। लेटर ही इमर्ड एज़ अ ग्रेट इंडियन साइंटिस्ट।)

हिन्दी अनुवाद :
यह बालक जगदीश चन्द्र बोस थे, जिनका जन्म 30 नवम्बर, 1858 को ढाका (अब बंग्लादेश में) जिले के फरीदकोट में हुआ था। उनके आसपास की चीजों ने उन्हें जिज्ञासु बनाया था। हवा क्यों बहती है ? पानी क्यों बहता है? पौधे हरे क्यों होते हैं ? इत्यादि वे प्रश्न थे जो उनके मस्तिष्क से टकराया करते थे। उनकी इस उत्सुकता को देखकर उनके पिता भगवान चन्द्र बोस ने उन्हें कलकत्ता के सेंट जेवियर स्कूल में नौ वर्ष की उम्र में भरती कराया था। बाद में वे एक महान भारतीय वैज्ञानिक के रूप में उभरे।

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[3] It was the 10th of May, 1901, and some eminent scientists had gathered in the great hall of the Royal Society in London. Jagdish Chandra Bose was going to demonstrate that plants have feelings like we have. He claimed that plants can feel pain. Most of the scientists present could not believe it, as they had doubts. Bose was adamant about it, so he injected a poison into a plant. According to his claim, the plant would soon show signs of death. But nothing happened. However, Bose calmly announced, “The poison has failed to affect the plant. So I believe it would not hurt me either.” As the audience looked on in horror, he injected the poison into himself. Suddenly a man appeared on the scene and confessed that he had replaced the poison with similar coloured water.

(इट वॉज़ द 10th (टेन्थ) ऑफ मे, 1901 एण्ड सम इमिनेण्ट साइन्टिस्ट्स हैड गेदर्ड इनर ग्रेट हॉल ऑफ द सोसायटी इन लंडन। जगदीश चन्द्र बोस वॉज़ गोइंग टु डिमॉन्स्ट्रेट दैट प्लान्ट्स हैव फीलिंग लाइक की हैव। ही क्लेम्ड दैट प्लान्ट्स केन फील पेन । मोस्ट ऑफ द साइन्टिस्ट्स प्रेजेन्ट कुड नॉट बिलीव इट, एज़ दे हैड डाउट्स। बोस वाज़ एडामेन्ट अबाउट इट, सो ही इजेक्टेड ए पॉयज़न इन टू अ प्लान्ट। एकार्डिंग टु हिज़ क्लेम, द प्लान्ट वुड सून शो साइन्स ऑफ डेथ। बट नथिंग हैपन्ड। हाउ एवर बोस कामली एनाउन्स्ड, “द पॉयजन हैज़ फेल टु अफेक्ट द प्लान्ट। सो आई बिलीव इट वुड नॉट हर्ट मी आयदर।” एज़ द आडियेन्स लुक्ड ऑन इन हॉरर ही इंजेक्टेड द पॉयज़न टु हिम सेल्फ। सडनली अ मैन अपीअर्ड ऑन द सीन एण्ड कन्फेस्ड दैट ही हैड रिप्लेस्ड द पॉयजन विद सिमिलर कलर्ड वाटर।)

हिन्दी अनुवाद :
10 मई, 1901 की तारीख थी, कुछ प्रसिद्ध व प्रतिष्ठित वैज्ञानिक लन्दन की रॉयल सोसायटी के विशाल हॉल में उपस्थित थे। जगदीश चन्द्र बोस इस तथ्य का प्रदर्शन करने वाले थे कि पौधे भी हमारे समान भावना रखते हैं। उन्होंने दावा किया कि पौधे भी दर्द का अनुभव करते हैं। अधिकांश उपस्थित वैज्ञानिकों ने इस पर विश्वास नहीं किया क्योंकि उन्हें शंकाएँ थीं। बोस इस बात पर दृढ़ता से अड़े थे, अतः उन्होंने एक पौधे को जहर का इंजेक्शन दिया। उनके दावे के अनुसार, पौधा शीघ्र ही मृत्यु के चिन्ह दिखाएगा। किन्तु कुछ नहीं हुआ। अतः बोस ने शान्ति से यह घोषित किया कि, “पौधे पर जहर का असर नहीं हुआ है। इसलिए वह मेरे पर भी नुकसान नहीं करेगा। उन्होंने अपने को जहर का इंजेक्शन दिया जबकि सभी डर से देखते रहे, इसी समय एक व्यक्ति वहाँ पर उपस्थित हुआ और उसने स्वीकार किया कि उसने ही जहर को रंगीन पानी से बदल दिया था।

[4] Bose, repeated the experiment with a real poison. This time the plant’s pulse beat showed movement on the screen of an instrument and it ultimately died. However the Royal Society was not convinced and was not ready to accept the result. But Bose would not give up easily. So he took up the challenge and after years of rigorous research he published an article, ‘Response in the Living and Non-Living’. This article convinced the Royal Society. Consequently Bose was awarded the fellowship of the Royal Society in 1920.

(बोस रिपीटेड द एक्सपेरिमेंट। विद अरियल पॉयज़न। दिस टाइम द प्लान्ट्स पल्स बीट शोड मूवमेंट ऑन द स्क्रीन ऑफ एन इन्स्ट्रमेण्ट एण्ड इट अल्टीमेटली डाइड। हाउएवर द रॉयल सोसाइटी वॉज़ नाट कन्विन्स्ड एण्ड वॉज़ नाट रेडी टु एक्सेप्ट द रिज़ल्ट । बट बोस वुड नॉट गिव अप इजीली। सो ही टुक अप द चेलेंज एण्ड ऑफ्टर यीअर्स ऑफ रिंगरस रिसर्च ही पब्लिश्ड एन आर्टीकल। ‘रेस्पॉन्स इन द लिविंग एण्ड नन लिविंग’। दिस आर्टीकल कन्विन्स्ड द रॉयल सोसाइटी। कॉन्सीक्वेन्टली बोस वॉज़ एवार्डेड द फेलोशिप ऑफ द रॉयल सोसाइटी इन 1920 (नाइन्टीन ट्वेन्टी)।)

हिन्दी अनुवाद :
बोस ने वास्तविक जहर से प्रयोग को दुहराया। इस बार एक यन्त्र के परदे पर पौधे की नाड़ी ने गति प्रदर्शित की और वह अंततः मर गया। तो भी रॉयल सोसाइटी ने उसकी सत्यता को नहीं माना और परिणाम को स्वीकार नहीं किया। लेकिन बोस आसानी से हिम्मत हारने वाले नहीं थे। इसलिए उन्होंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और कई वर्षों के अनुसन्धान के अथक प्रयासों के बाद उन्होंने “सजीव एवं निर्जीव की प्रतिक्रिया” शीर्षक से एक पत्र प्रकाशित किया। इस निबन्ध को रॉयल सोसाइटी ने स्वीकार किया। परिणामस्वरूप बोस को रॉयल सोसाइटी ने 1920 में फेलोशिप प्रदान की।

[5] Although more famous as a biologist, Bose was a great physicist as well. He can rightly be called the inventor of wireless telegraphy. Though Marconi invented the wireless. Bose had already demonstrated its functioning in public in the year 1895, a year before Marconi’s patent for the telegraph. This impressed the Royal Society of England and he was honoured with the degree of ‘Doctor of Science’. In fact, Bose was a pioneer in multimedia communication. He was the first to fabricate the device that generated radio wave-length.

(अल्दो मोर फेमस एज अ बायोलॉजिस्ट, बोस वॉज़ अ ग्रेट फिजिसिस्ट एज़ वैल। ही केन राइटली बी कॉल्ड द इन्वेण्टर ऑफ वायरलेस टेलिग्राफी। दो मारकोनी इन्वेण्टेड द वायरलेस। बोस हैड आलरेडी डिमोंस्ट्रेटेड इट्स फंक्शनिंग इन पब्लिक इन द यीअर 1895, अ यीअर बिफोर मारकोनी पेटेन्ट फोर टेलिग्राफ। दिस इम्प्रेस्ड द रॉयल सोसाइटी ऑफ इंग्लैण्ड एण्ड ही वॉज़ आनर्ड विद द डिग्री ऑफ ‘डॉक्टर ऑफ साइन्स’। इन फैक्ट, बोस वॉज़ अपायोनियर इन मल्टीमीडिया कम्प्यूनिकेशन। ही वॉज़ द फर्स्ट टु फेब्रिकेट द डिवाइस दैट जनरेटेड रेडियो वेव-लेन्थ।)

हिन्दी अनुवाद :
यद्यपि जीवशास्त्री के रूप में बोस प्रसिद्ध थे, साथ ही वे एक महान् भौतिक शास्त्री भी थे। उन्हें बेतार की टेलिग्राफी का आविष्कारक भी कहना सही है। यद्यपि मारकोनी ने बेतार की टेलिग्राफी का आविष्कार किया परन्तु बोस 1895 में इसके क्रियाकलाप को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कर चुके थे। यह उन्होंने मारकोनी के आविष्कार के पेटेन्ट से एक वर्ष पूर्व किया था। इस बात से इंग्लैण्ड की रॉयल सोसाइटी बहुत . प्रभावित हुई थी और उन्होंने बोस को डॉक्टर ऑफ साइन्स की पदवी से विभूषित किया। वास्तव में बोस मल्टी मीडिया संचार के अग्रदूत थे। वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने एक यंत्र को तैयार किया था जो रेडियो तरंगों को उत्पन्न करता था।

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[6] Another example of Bose’s greatness is revealed in the invention of the radar. Bose worked out some details of very great importance which are used in the working of the radar. Jagadish Chandra Bose has a permanent place in the world of science, especially in botany.

(अनादर एक्जाम्पल ऑफ बोस’स ग्रेटनैस इज़ रिवील्ड इन द इन्वेन्शन ऑफ द रडार। बोस वर्ल्ड आउट सम डिटेल्स ऑफ वेरी ग्रेट इम्पोर्टेन्स विच आर यूस्ड इन द वर्किंग ऑफ द रडार। जगदीश चन्द्र बोस हैज़ अ परमानेन्ट प्लेस इन द वर्ल्ड ऑफ साइन्स स्पेशली इन बोटेनी।)

हिन्दी अनुवाद :
बोस की महानता का दूसरा उदाहरण ‘रडार’ के आविष्कारक के रूप में प्रदर्शित हुआ। बोस ने रडार के काम में आने वाली कुछ महत्त्वपूर्ण विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। जगदीश चन्द्र बोस का स्थान विज्ञान के क्षेत्र में विशेष कर वनस्पति शास्त्र में स्थायी रूप से बना हुआ है।

[7] He began the age of Modern Science in India and deserves honour for this. He was a great scientist, who selflessly dedicated his findings to the further development of science. An inventor can make lakhs ‘ of rupees by just one or two inventions. Bose has invented many instruments. They have since been used by many industries. When he was offered money for these he did not accept it. He felt that knowledge was not anybody’s personal property. He permitted anyone and everyone to use the fruits of his work.

(ही बिगेन द एज ऑफ मॉडर्न साइंस इन इन्डिया एण्ड डिज़र्स ऑनर फोर दिस। ही वॉज़ अ ग्रेट साइंटिस्ट, हू सेल्फलेसली डेडिकेटेड हिज़ फाइडिंग्स टु द फर्दर डेवलेपमेंट ऑफ साइंस। एन इन्वेन्टर केन मेक लेख्स ऑफ रूपीज़ बाय जस्ट वन और टू इन्वेन्शन्स। बोस हेज़ इन्वेन्टेड मैनी इंस्ट्रमेंटस। दे हैव सिन्स बीन यूस्ड बाय मैनी इंडस्ट्रीज़। व्हेन ही वॉज़ ऑफर्ड मनी फोर दीज़ ही डिड नॉट एक्सेप्ट इट। ही फेल्ट दैट नॉलेज वॉज़ नाट एनी बडीज पर्सनल प्रॉपर्टी। ही परमिटेड एनीवन एण्ड एवीवन टु यूस द फ्रूट्स ऑफ हिज़ वर्क।)

हिन्दी अनुवाद :
उन्होंने भारत में आधुनिक विज्ञान के नये युग की शुरूआत की और उसके लिए वे विशेष सम्मान के पात्र हैं। वे एक महान वैज्ञानिक थे जो विज्ञान के भावी विकास के लिए अपनी वैज्ञानिक खोजों के प्रति पूर्णरूप से समर्पित थे। एक आविष्कारक एक या दो आविष्कारों द्वारा लाखों रुपये कमा सकता है। बोस ने कई नये आविष्कार किये थे। उनको कई उद्योगों द्वारा उपयोग में लाया गया। जब उन्हें धन देने की पेशकश की गई तो उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने यह महसूस किया कि ज्ञान किसी व्यक्ति की निजी सम्पत्ति नहीं है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को उनके कार्यों के फलों को उपयोग करने की अनुमति दे दी।

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Today and Tomorrow Question Answer Class 9 General English The Spring Blossom Chapter 4 MP Board Solutions

Class 9th General English The Spring Blossom Chapter 4 Today and Tomorrow Question Answers

Today and Tomorrow Class 9 Questions and Answers

Today and Tomorrow Textual Exercises

Word Power

(i) Match the following words with the rhyming ones
(सुमेलित कीजिए)

MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 4 Today and Tomorrow 1
Answer:
(1) → (d)
(2) → (a)
(3) → (b)
(4) → (c)

(ii) Give antonyms of the following words
(विलोम शब्द दीजिए)
Answer:

  1. give – take
  2. late – early
  3. always – never
  4. few – many

(iii) Complete the following lines of the poem
(कविता की निम्न पंक्तियों को पूरा करिए।)
Answer:
Every moment has its duty.
Who the future can foretell?
Then, why put off till tomorrow.
What today can do as well?

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How Much Have I Understood?

Answer these questions
(निम्न प्रश्नों के उत्तर लिखिए)

Question 1.
What does the poet mean by saying, “every moment has its duty”?
(व्हॉट डज़ द पोएट मीन बाइ सेइंग, ‘एव्री मोमेन्ट हैज़ इट्स ड्यूटी?)
‘हर क्षण का कर्तव्य होता है। उससे कवि का क्या तात्पर्य है?
Answer:
It means that there is something to be done every moment. Each moment is precious and is to be used in something useful.
(इट मीन्स दैट देअर इज़ समथिंग टू बी डन एव्री मोमेन्ट। ईच मोमेन्ट इज़ प्रेशिअस एण्ड इज़ टू बी यूज्ड इन समथिंग यूज़फुल।)
इसका अर्थ है कि हर क्षण कोई न कोई कार्य करना होता है। हर क्षण कीमती है व किसी उपयोगी कार्य में उपयोग होना चाहिए।

Question 2.
What type of man does the poet want?
(व्हॉट टाइप ऑफ मैन डज़ द पोएट वॉन्ट?)
कवि किस प्रकार का व्यक्ति चाहता है?
Answer:
The poet wants a man who does his work on the very day and not puts off till tomorrow what he can do the same day.
(द पोएट वॉन्ट्स अ मैन हू डज़ हिज़ वर्क ऑन द वैरी डे एण्ड नॉट पुट्स ऑफ टिल टुमारो व्हॉट ही कैन डू द सेम डे।)
कवि ऐसा व्यक्ति चाहता है जो अपना कार्य उसी दिन करे व कल पर न छोड़े।

Question 3.
How can we control the present?
(हाउ कैन वी कन्ट्रोल द प्रेजेण्ट?)
हम वर्तमान को कैसे नियन्त्रित कर सकते हैं?
Answer:
We can control the present if we act and never wait.
(वी कैन कन्ट्रोल द प्रेजेन्ट इर्फ वी एक्ट एण्ड नेवर वेट।)
हम वर्तमान को नियन्त्रित कर सकते हैं अगर हम बिना प्रतीक्षा किए सदैव कार्य करते रहें।

Question 4.
Why should we not throw the hours away?
(व्हाय शुड वी नॉट थ्रो द आवर्स अवे?)
हमें समय को बर्बाद क्यों नहीं करना चाहिए?
Answer:
We should not throw the hours away because that which can be accomplished today can never be accomplished tomorrow.
(वी शुड नॉट थ्रो द आवर्स अवे बिकॉज दैट व्हिच कैन बी एकम्प्लिश्ड टुडे कैन नेवर बी एकम्प्लिश्ड टुमारो।)
हमें समय बर्बाद नहीं करना चाहिए क्योंकि जो हम आज प्राप्त कर सकते हैं वो कल बिल्कुल नहीं कर सकते।

Question 5.
What does the word foretell mean?
(व्हॉट डज़ द वर्ड ‘फोरटेल’ मीन?)
पूर्व कथन शब्द का क्या अर्थ है?
Answer:
The word foretell means to know or say what will happen in the future, especially using magic powers.
(द वर्ड फोरटेल मीन्स टु नो और से व्हॉट विल हैपन इन द फ्यूचर, इस्पेश्यली यूजिंग मैजिक पावर्स।)
शब्द पूर्व कथन का तात्पर्य है कि किसी जादुई शक्ति से वह बताना या जानना कि भविष्य में क्या होने वाला है।

Question 6.
Give the central idea of the poem.
(गिव द सैन्ट्रल झडिया ऑफ द पोऍम।)
कविता का केन्द्रीय भाव दीजिए।
Answer:
The poet says that we should not put off till tomorrow what we can do today. The time once lost never returns. Nobody knows what the future has in store. We should not let precious moments go waste. We should make full use of the present.

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Listening Time

(a) Supply the missing words in the following sentences
(निम्न वाक्यों में लुप्त शब्द दीजिए।)

  1. Radium is one of the rarest of …………
  2. The discoverer of this magic metal was
  3. She ……… born in ………. in the ……….. 1877.
  4. She lost ………… when she was only …………. old.
  5. This was a ………… blow to her

Answer:

  1. metals
  2. Madam Curie
  3. was, Poland, year
  4. her mother, ten years
  5. terrible.

(b) Encircle the odd words in each series.
(विषम शब्दों पर गोला लगाइए।)
Answer:
MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 4 Today and Tomorrow 2

Speaking Time

Discuss the visit of Prabhat with one of your friends. Use the following questions.
(अपने मित्र प्रभात की सैर की चर्चा अपने किसी मित्र से करो। निम्न प्रश्न पूछो।)
Answer:
You will get the following answers

Question 1.
When did he go there?
वह वहाँ कब गया?
Answer:
He went there on 22 July, 2014.
वह वहाँ 22 जुलाई, 2014 को गया।

Question 2.
Where did he go?
वह कहाँ गया?
Answer:
He went to Sanchi.
वह साँची गया।

Question 3.
How did he go there?
वह वहाँ कैसे गया?
Answer:
He went there by train.
वह वहाँ रेल से गया।

Question 4.
What monuments did he see there?
उसने वहाँ कौन-से स्मारक देखे?
Answer:
He saw big and small stupas there.
उसने वहाँ बड़ा व छोटे स्तूप देखे।

Question 5.
How many days did he stay there?
वह वहाँ कितने दिन रहा?
Answer:
He stayed there for a single day, for eight hours.
वह वहाँ आठ घण्टे रहा।

Writing Time

(1) Prepare your daily routine.
(अपना दैनिक कार्यक्रम लिखिए।)
Answer:
My Daily Routine

I wake up at 5’clock in the morning. After my morning activities I go for a walk and return at around 6.30 a.m. Then I have my breakfast and tea and read newspaper. After bath I sit for studies at 7.30. I study till 10 O’clock. Then at 10 I take my meals and go to school. I return from school at 5 o’clock: In the evening I play with my friends for sometime then I watch ‘T.V. I sometimes listen to the radio and read magazines or books. At 9 O’clock, I have my dinner and from 9.30 to 11 O’ clock I study again. After that I go to sleep.

(2) Write the poem “Today and Tomorrow’ in prose form in your notebook.
(कविता को गद्य की तरह लिखो)
Answer:
Students can do themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

Things to do

Question 1.
Suppose it is Sunday. Discuss with your friends about their schedule for that day and the next day. Talk to them the next day and list the items of work they have done or the books they have read.
Answer:
Students can themselves discuss it with their friends.
(छात्र स्वयं करें।)

Question 2.
Collect a poem having the similar idea and read it out in the class.
Answer:
Students can find a poem in books from library or from their friends and read it.
(छात्र स्वयं करें।)

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Today and Tomorrow Central Idea of the Poem 

The poet says that we should not put off till tomorrow what we can do today. The time once lost never returns. Nobody knows what the future has in store. We should not let precious moments go waste. We should make full use of the present.

Today and Tomorrow Difficult Word Meanings

deed (575)-a thing that somebody does कृत्य; command (कमान्ड) to control नियन्त्रित करना; repetance (रिपेन्टेन्स)-the fact of showing that you are sorry for something wrong that you have done पश्चाताप करना; phantom (फैन्टम)-athing that exists in your imagination काल्पनिक वस्तु; accomplish (एकम्प्लिश)-to succeed in doing or completing something सम्पन्न करना; foretell (फोरटेल)-to know or say what will happen in the future, especially by using magic powers भविष्यवाणी करना।

Today and Tomorrow Summary, Pronunciation & Translation

[1] Don’t tell me of tomorrow,
.Give me the man who’ll say
That, when a good deed’s to be done,
‘Let’s do the deed today.”

(डोंट टेल मी ऑफ टुमारो;
गिव मी द मेन हू’इल से ट्रैट,
व्हेन अ गुड डीड’स टु बी डन,
“लेट्स डू द डीड टुडे।”)

हिन्दी अनुवाद :
मुझे आने वाले कल के बारे में मत बताओ मुझे वह व्यक्ति दो जो यह कहे कि जब कोई अच्छा काम करना है तो उसे आज ही कर डालो।

[2] We may all command the present,
If we act and never wait,
But repentance is the phantom
Of a past that comes too late!

(वी मे आल कमाण्ड द प्रेजेन्ट,
इफ वी एक्ट एन्ड नेवर वेट,
बट रिपेन्टेन्स इज द फेन्टोम,
ऑफ ए पास्ट कम्स टू लेट।)

हिन्दी अनुवाद :
हम सभी वर्तमान को अपने वश में कर सकते हैं यदि हम कार्य करते रहें और प्रतीक्षा न करें। परन्तु पश्चाताप एक काल्पनिक वस्तु है जो बहुत देर से आता है।

[3] Don’t tell me of tomorrow,
There is much to do to-day,
That can never be accomplished,
If we throw the hours away.

(डोंट टेल मी ऑफ टुमारो,
देअर इज़ मच टु डू टुडे,
दैट केन नेवर बी एकमप्लीज़्ड
इफ वी थ्रो द अवर्स अवे।)

हिन्दी अनुवाद :
मुझे (आने वाले) कल के बारे में कुछ मत बताओ, हमारे पास वर्तमान में बहुत कुछ करने को है। अगर हम यूँ ही समय नष्ट कर देंगे तो हम कभी भी कुछ नहीं कर सकेंगे।

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[4] Every moment has its duty,
Who the future can foretell?
Then why put off till tomorrow
What today can do as well? -J. E. Carpenter

(एवी मोमेन्ट हेज इट्स ड्यूटी,
हू द फ्यूचर केन फोरटेल?
देन व्हाय पुट ऑफ टुमारो
व्हाट टु डे केन डू एज़ वेल? -जे.ई. कारपेन्टर

हिन्दी अनुवाद :
हर क्षण में हमारा कोई न कोई कर्तव्य होता है, भविष्य के बारे में कोई क्या भविष्यवाणी कर सकता है। तो फिर जो काम हम आज अच्छी तरह कर सकते हैं उसे कल पर क्यों डालें।

MP Board Class 9th English Solutions

The Spring Blossom Textbook General English Class 9th Solutions

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 5 मिठाईवाला

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 5 मिठाईवाला (कहानी, भगवती प्रसाद वाजपेयी)

मिठाईवाला पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

मिठाईवाला लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
खिलौने वाले की आवाज कैसी थी?
उत्तर:
खिलौने वाले की आवाज मादक और मधुर थी।

प्रश्न 2.
खिलौने वाले की आवाज सुनकर बच्चों पर उसका क्या प्रभाव पड़ता?
उत्तर:
खिलौने वाले की आवाज सुनकर बच्चों में हलचल मच जाती थी। वे इठलाते हुए खिलौने वाले को घेर लेते थे।

प्रश्न 3.
मुरलीवाले का व्यक्तित्व कैसा था?
उत्तर:
मुरलीवाले का व्यक्तित्व बड़ा सरल और रोचक था।

प्रश्न 4.
मुरलीवाले की आवाज सुनकर रोहिणी को किसका स्मरण हुआ?
उत्तर:
मुरलीवाले की आवाज सुनकर रोहिणी को खिलौनेवाले का स्मरण हुआ।

प्रश्न 5.
खिलौनेवाला प्रत्येक बार किस-किस तरह से आवाज लगाकर बच्चों को बुलाता था?
उत्तर:
खिलौनेवाला प्रत्येक वार बच्चों को बहलानेवाला, खिलौनेवाला मधुर और मादक आवाज लगाकर बच्चों को बुलाता था।

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प्रश्न 6.
खिलौनेवाले, मुरलीवाले और मिठाईवाले में क्या सम्बन्ध था?
उत्तर:
खिलौनेवाले, मुरलीवाले और मिठाईवाले में अपनापन और भाईचारा का सम्वन्ध था।

प्रश्न 7.
कहानी विधा के मूल तत्त्वों में से किसी एक तत्त्व पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
कहानी विधा के मूल तत्त्व 6 हैं-

  1. कथानक या कथावस्तु,
  2. पात्र और चरित्र-चित्रण
  3. देशकाल या वातावरण
  4. कथोपकथन या संवाद
  5. भाषा-शैली, और
  6. उद्देश्य।

उद्देश्य :
कहानी विधा का अन्तिम तत्त्व है-उद्देश्य । कहानी के सभी तत्त्व अर्थात् . कथावस्तु, पात्र, संवाद, वातावरण और भाषा-शैली सभी की सार्थकता की कसौटी उद्देश्य ही है। कहानी का उद्देश्य उपदेशात्मक तो होता है, लेकिन यह प्रत्यक्ष न होकर अप्रत्यक्ष अर्थात् कलात्मक ढंग से ही होता है। यहाँ यह ध्यान देना होगा कि सभी कहानियों के उद्देश्य अलग-अलग ढंग से दिखाई देते हैं। कुछ कहानियों के उद्देश्य स्पष्ट होते . हैं, तो कुछ के अस्पष्ट। नई कहानियों के उद्देश्य में परम्परा के प्रति विद्रोह वर्तमान से निराशा, कुण्ठा, घुटन, पराजय आदि प्रवृत्तियां कलात्मक ढंग से प्रस्तुत होती हैं।

मिठाईवाला दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मुरलीवाले के भाव सुनकर विजय वाबू ने क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की?
उत्तर:
मुरलीवाले के भाव सुनकर विजयबाबू ने अच्छी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने मुरलीवाले से कहा, “तुम लोगों को झूठ बोलने की आदत ही होती है। देते होगे सभी को दो-दो पैसे में, पर एहसान का बोझा मेरे ही ऊपर लाद रहे हो।”

प्रश्न 2.
मुरलीवाले के अनुसार ग्राहकों के क्या दस्तूर हैं?
उत्तर:
मुरलीवाले के अनुसार ग्राहकों के दस्तूर हैं कि दुकानदार चाहे हानि ही उठाकर चीज क्यों न बेचे, पर ग्राहक यही समझते हैं-दुकानदार मुझे लूट रहा है। इस तरह ग्राहक दुकानदार का बिल्कुल विश्वास नहीं करता है।

प्रश्न 3.
“तुम्हारी माँ के पास पैसे नहीं हैं, अच्छा, तुम भी यह लो।” इस कथन से मुरलीवाले को किस स्वभावगत विशेषता का पता चलता है?
उत्तर:
“तुम्हारी माँ के पास पैसे नहीं हैं, अच्छा, तुम भी यह लो।” उपर्युक्त कथन से मुरलीवाले के आत्मीय और वात्सल्य स्वभाव की विशेषता का पता चलता है। इसके साथ ही यह कि वह बच्चों की खुशी में अपने बच्चों की खुशी का अनुभव करता था।

प्रश्न 4.
मिठाईवाला दादी को अपनी मिठाइयों की क्या-क्या विशेषताएँ बताता हैं?
उत्तर:
मिठाईवाला दादी को अपनी मिठाइयों की निम्नलिखित विशेषताएँ बताता है-“ये नए तरह की मिठाइयाँ हैं-रंग-बिरंगी, कुछ-कुछ खट्टी, कुछ-कुछ मीठी, जायकेदार, बड़ी देर तक मुँह में टिकती हैं। जल्दी नहीं घुलतीं। बच्चे इन्हें बड़े चाव से चूसते हैं। इन गुणों के सिवा ये खाँसी भी दूर करती हैं। कितनी दूँ? चपटी, गोल, पहलदार गोलियाँ हैं। पैसे की सोलह देता हूँ।”

प्रश्न 5.
कहानी के आधार पर मिठाईवाले की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
कहानी के आधार पर मिठाईवाले की चारित्रिक विशेषतएँ निम्नलिखित हैं-मिठाईवाला प्रतिष्ठित और धनी व्यक्ति था। उसके भी बच्चे और भरा-पूरा परिवार था। पर वह सब दुर्भाग्य से नष्ट हो गया था। अब वह अपने बच्चों को खिलौने आदि बेचते हए ढूँढ़ता फिरता था। इसलिए उसके स्वर में स्नेह और माधुर्य होता था। वह मुरली बजा-बजाकर, गाना सुना-सुनाकर मुरली बेचता था। इसलिए जब वह नगर में मुरलियाँ बेचने के लिए आया तो नगर-भर में उसके आने का समाचार फैल गया।

प्रश्न 6.
अन्य दुकानदारों और मिठाईवाले में क्या अन्तर है?
उत्तर:
अन्य दुकानदारों और मिठाईवाले में बहुत बड़ा अन्तर है। अन्य दुकानदारों की अपेक्षा मिठाईवाले का बच्चों के प्रति बहुत अधिक प्यार और लगाव था। वह सौदा सस्ता बेचता है। इसके साथ ही वह भला’ और ईमानदार आदमी है। समय का मारा-मारा फिरने पर भी उसमें सरसता और विनम्रता है।

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प्रश्न 7.
मिठाईवाले ने रोहिणी से पैसे क्यों नहीं लिये?
उत्तर:
मिठाईवाले ने रोहिणी से पैसे नहीं लिये; क्योंकि उसके पास पैसे की कमी नहीं थी। दूसरी बात यह कि उसे रोहिणी के बच्चों में अपने खोए हुए बच्चों की एक झलक मिल गई, जिनकी खोज में वह वर्षों से निकला है।

प्रश्न 8.
कहानी के विकास-क्रम का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:

हिन्दी कहानी के विकास क्रम को छः भागों में इस प्रकार बाँटा जा सकता है-

  1. पहला उत्थान काल (सन् 1900 से 1910 तक)
  2. दूसरा उत्थान काल (सन् 1911 से 1919 तक)
  3. तीसरा उत्थान काल (सन् 1920 से 1935 तक)
  4. चौथा उत्थान काल (सन् 1936 से 1949 तक)
  5. पाँचवाँ उत्थान काल (सन् 1950 से 1960 तक)
  6. छठवाँ उत्थान काल (सन् 1960 से अब तक)।

1. पहला उत्थान काल (सन् 1900 से 1910 तक) :
चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की ‘उसने कहा था’। यह काल हिन्दी कहानी का आरम्भिक काल कहा जाता है। इसके बाद चन्द्रधर शर्मा की ‘इन्दुमती’, बंग महिला की ‘दुलाईवाली’, रामचन्द्र शुक्ल की ‘ग्यारह वर्ष का समय’ आदि कहानियाँ हिन्दी की आरम्भिक कहानियाँ मानी जाती हैं।

2. दूसरा उत्थान काल (सन् 1911 से 1919 तक) :
इस काल में जयशंकर प्रसाद महाकथाकार के रूप में उभड़कर आए। सन् 1911 में उनकी ‘ग्राम’ कहानी ‘इन्दु’ नामक.मासिक पत्रिका में प्रकाशित हुई। उनकी ‘छाया’, ‘प्रतिध्वनि’, ‘आकाशदीप’, ‘इन्द्रजाल’ आदि कहानी-संग्रह प्रकाशितः हुए। उनके अतिरिक्त विश्वम्भरनाथ शर्मा ‘कौशिक’, ज्वालादत्त शर्मा, चतुरसेन शास्त्री, जे.पी. श्रीवास्तव, राधिकारमण प्रसाद सिंह आदि उल्लेखनीय कथाकार इसी काल की देन हैं।

3. तीसरा उत्थान काल (सन् 1920 से 1935 तक) :
इस काल को महत्त्व कथा साहित्य की दृष्टि से बहुत ही अधिक है। यह इसलिए कि इसी काल में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचन्द का आगमन हुआ। उन्होंने अपनी कहानियों में भारतीय समाज की ऐसी सच्ची तस्वीर खींची जो किसी काल के किसी भी कथाकार के द्वारा सम्भव नहीं हुआ। ‘ईदगाह’, ‘पंच-परमेश्वर’, बूढ़ी काकी’, ‘बड़े घर की बेटी’, ‘मन्त्र’, ‘शतरंज के खिलाड़ी’, ‘दो बैलों की कथा’ आदि उनकी बहुत प्रसिद्ध कहानियाँ हैं। इस काल के अन्य महत्त्वपूर्ण कथाकारों में सुदर्शन, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, शिवपूजन सहाय, सुमित्रानन्दन पन्त, सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, रामकृष्ण दास, वृन्दावन लाल वर्मा, भगवती प्रसाद बाजपेयी आदि हैं।

4. चौथा उत्थान काल (सन् 1936 से 1949 तक) :
कहानी कला की दृष्टि से इस काल का महत्त्व इस दृष्टि से है कि इस काल की कहानियों ने विभिन्न प्रकार की विचारधाराओं को जन्म दिया। मनोवैज्ञानिक और प्रगतिवादी कथाकार इस काल में अधिक हुए। मनोवैज्ञानिक कथाकारों में इलाचन्द्र जोशी, अज्ञेय, जैनेन्द्र कुमार, चन्द्रगुप्त विद्यालंकार, पाण्डेय बेचन शर्मा उग्र आदि हुए।

प्रगतिवादी कथाकारों में यशपाल, राहुल सांकृत्यायन; रांगेय राघव, अमृत लाल नागर, राजेन्द्र यादव आदि उल्लेखनीय हैं। विचार प्रधान कथाकारों में धर्मवीर भारती, कन्हैया लाल मिश्र ‘प्रभाकर’ आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। महिला कथाकारों में सुभद्राकुमारी चौहान, शिवरानी देवी, मन्नू भण्डारी, शिवानी आदि अधिक प्रसिद्ध हैं।

5. पाँचवाँ उत्थान काल (सन् 1950 से 1960 तक) :
इस काल की कहानी को कई उपनाम मिले, जैसे-‘नई कहानी’, ‘आज की कहानी’, ‘अकहानी’ आदि। इस काल की कहानियों में वर्तमान युग-बोध, सामाजिक विभिन्नता, वैयक्तिकता, अहमन्यता : आदि की अभिव्यंजना ही मुख्य रूप से सामने आई। इस काल के कमलेश्वर, फणीश्वरनाथ ‘रेणु’, अमरकान्त, निर्मल वर्मा, मार्कण्डेय, शिव प्रसाद सिंह, भीष्म साहनी. मोहन राकेश, कृष्णा सोबती, रघुवीर सहाय, शैलेश मटियानी, हरिशंकर पारसाई, लक्ष्मीनारायण लाल, राजेन्द्र अवस्थी आदि कथाकारों के नाम बहुत प्रसिद्ध हैं।

6. छठवाँ उत्थान काल (सन् 1960 से अव तक) :
इस काल को साठोत्तरी हिन्दी कहानी के नाम से जाना जाता है। इस काल के कहानीकार पूर्वापेक्षा नवी चंतना और शिल्प के साथ रचना-प्रक्रिया में जुटे हुए दिखाई देते हैं। इस काल की कहानी की यात्रा विभिन्न प्रकार के आन्दोलनों से जुड़ी हुई है, जैसे-नयी कहानी (कमलेश्वर, अमरकान्त, मार्कण्डेय, फणीश्वर नाथ ‘रेणु’, राजेन्द्र यादव, मन्नू भण्डारी, मोहन राकेश, शिव प्रसाद सिंह, निर्मल वर्मा, उषा प्रियंवदा आदि), अकहानी (रमेश बख्शी, गंगा प्रसाद ‘विमल, जगदीश चतुर्वेदी, प्रयाग शुक्ल, दूधनाथ सिंह, ज्ञानरंजन आदि), सचेतन कहानी (महीप सिंह, योगेश गुप्त, मनहर चौहान, रामकुमार ‘भ्रमर’ आदि), समानान्तर कहानी (कामतानाथ, से.रा. यात्री, जितेन्द्र भाटिया, इब्राहिम शरीक, हिमांशु जोशी आदि), सक्रिय कहानी (रमेश बत्रा, चित्रा मुद्गल, राकेश वत्स, धीरेन्द्र अस्थाना आदि)।

इनके अतिरिक्त इस काल के ऐसे भी कथाकार हैं, जो उपर्युक्त आन्दोलनों से अलग होकर कथा-प्रक्रिया में समर्पित रहे हैं, जैसे-रामदरश मिश्र, विवेकी राय, मृणाल पाण्डेय, मृदुला गर्ग, निरूपमा सेवती, शैलेश मटियानी, ज्ञान प्रकाश विवेक, सूर्यबाला, मेहरून्निसा परवेज, मंगलेश डबराल आदि।

आज की कहानी शहरी-सभ्यता, स्त्री-पुरुष सम्बन्धों की नई अवधारणा, आपसी . सम्बन्धों के बिखराव, भय और असुरक्षा की भावना, चारित्रिक ह्रास, यौन कुण्ठा, घिनौनी मानसिकता, अन्याय, अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष, औद्योगिकीकरण के दुष्प्रभाव से दम तोड़ती मानवता आदि को चित्रित करने में सक्रिय दिखाई दे रही हैं। इसकी भाषा-शैली दोनों ही तराशती हुई और नए-नए तेवरों को प्रस्तुत करने की क्षमता प्रशंसनीय है।

मिठाईवाला भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए-
(क) “मिलता भला क्या है। यही खाने भर को मिल जाता है, कभी नहीं भी मिलता है। पर हाँ, सन्तोष, धीरज और कभी-कभी असीम सुख जरूर मिलता है और यही मैं चाहता भी हूँ”।
शब्दार्थ :
असीम-अपार, जिसकी कोई सीमा न हो।
उत्तर:
प्रसंग :
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘हिन्दी सामान्य भाग-1’ में संकलित तथा भगवती प्रसाद वाजपेयी द्वारा लिखित कहानी ‘मिठाईवाला’ से है। इसमें लेखक ने उस समय का उल्लेख किया है, जब रोहिणी ने मिठाईवाले से पूछा कि उसे इस व्यवसाय से भला क्या मिलता होगा? इसे सुनकर मिठाईवाले ने रोहिणी को बतलाया कि

व्याख्या :
उसे इस व्यवसाय में कुछ अधिक लाभ नहीं मिलता है। उसे जो कुछ मिलता है, उससे वह अपना पेट भर लेता है। जब कभी उसे कुछ लाभ नहीं होता है, तब वह चुपचाप रह जाता है। उस समय उसे सन्तोष, धीरज और असीम सुख-शान्ति का अवश्य अनुभव होता है। इसे वह बहुत बड़ा लाभ समझता है।

विशेष :

  1. यह अंश प्रेरक है।
  2. ‘सन्तोषः परं सुखम्’ सूक्ति का प्रयोग है।
  3. भाषा-शैली सरल है।

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मिठाईवाला भाषा-अध्ययन

प्रश्न 1.
निर्देशानुसार वाक्यों को परिवर्तित कीजिए-
(क) मुरलीवाला पहले खिलौने वेचा करता था (प्रश्नवाचक वाक्य)
(ख) मुझे खिलौने चाहिए। (आदेशात्मक वाक्य)
(ग) तुमको माँ ने मिठाई खरीदने के पैसे दिए हैं। (नकारात्मक वाक्य)
(घ) वह फिर इधर आएगा (अनिश्चयवाचक वाक्य)
उत्तर:
(क) मुरलीवाला पहले क्या बेचा करता था?
(ख) मुझे खिलौने दो।
(ग) तमको माँ ने मिठाई खरीदने के पैसे नहीं दिए हैं।
(घ) शायद वह फिर इधर आएगा।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए-
विजय, निश्चय, पराक्रम, स्मरण, विश्वास, हर्ष, सन्तोष।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 5 मिठाईवाला img-1

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्द अनेकार्थी हैं शब्दों के दो-दो अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग. कीजिए
अर्थ, कल, पृष्ट, वर, हरि, अन्तर।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 5 मिठाईवाला img-2

प्रश्न 4.
नीचे लिखे भिन्नार्थक समोच्चारित शब्दों की जोड़ी उदाहरण अनुसार बनाइए तथा उनके अर्थ लिखिए-
उदाहरण पथ = राह = पथ्य = रोगी को दिया जाने वाला आहार
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 5 मिठाईवाला img-3
उत्तर:
अंश = भाग = अंस = कन्धा
ग्रह = नक्षत्र = गृह = घर
मातृ = माता = मात्र = केवल
चर्म = चमड़ा = चरम = अन्तिम

मिठाईवाला योग्यता विस्तार

प्रश्न 1.
आप अपने परिवेश के जिस दुकानदार से प्रभावित हों उसकी विशेषताएँ अपने सहपाठियों के साथ बाँटिए? तथा उस पर कुछ पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 2.
कहानी का नाटकीय रूपान्तरण करके शाला के किसी कार्यक्रम में अभिनय कीजिए?
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

प्रश्न 3.
व्यवसायी अपने वचत का पैसा बैंकों में रखते हैं, क्या आपने कभी बैंक में जाकर जमा पर्ची आहरण या चालान भरकर राशि जमा की या निकाली है। यहाँ दी हुई जमा पर्ची का प्रारूप भरकर देखें व बैंक जाकर जमा-आहरण की अधिक जानकारी प्राप्त करिए तथा अन्य बैंक आवेदन पत्रों को एकत्रित कीजिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक की सहायता से हल करें।

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मिठाईवाला परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

मिठाईवाला लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
‘मिठाईवाला’ मधुर ढंग से क्यों गाता था?
उत्तर:
मिठाईवाला मधुर ढंग से गाकर सुनने वालों को अपनी ओर आकर्षित करना चाहता था। इसीलिए वह मधुर ढंग से गाता था।

प्रश्न 2.
खिलौनों का बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ता था?
उत्तर:
खिलौनों को देखते ही बच्चों का उत्साह बढ़ जाता था। वे पुलकित हो उठते थे और पैसे लाकर खिलौनों का मोल-भाव करने लगते थे।

प्रश्न 3.
मुरलीवाले की कितनी उम्र थी?
उत्तर:
मुरलीवाला ज्यादा बड़ा नहीं था। वह तीस-चालीस वर्ष का था।

प्रश्न 4.
‘मिठाईवाला’ किस-किस रूप में उस गली में आया था।
उत्तर:
मिठाईवाला उस गली में सबसे पहले तो खिलौनेवाले के रूप में आया था। उसके बाद वह मुरलीवाले के रूप में आया। अन्त में वह मिठाईवाला बनकर उस गली में आया था।

मिठाईवाला दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
नगर-भर में मुरलीवाले के आने का समाचार क्यों फैल गया?
उत्तर:
मुरलीवाला प्रतिष्ठित और धनी व्यक्ति था। उसके भी बच्चे और भरा-पूरा परिवार था। पर वह सब दुर्भाग्य से नष्ट हो गया था। अब वह अपने बच्चों को खिलौने आदि बेचते हुए ढूँढ़ता फिरता था। इसलिए उसके स्वर में स्नेह और माधुर्य होता था। वह मुरली बजा-बजाकर, गाना सुना-सुनाकर मुरली बेचता था। इसलिए जब वह नगर में मुरलियाँ बेचने के लिए आया तो नगर-भर में उसके आने का समाचार फैल गया।

प्रश्न 2.
रोहिणी को मिठाईवाले का स्वर सुनकर खिलौनेवाले और मुरलीवाले का स्मरण क्यों हो आया?
उत्तर:
मिठाईवाला पहले भी कई बार उस गली में आया था जहाँ रोहिणी रहती थी। पहले वह खिलौने लेकर आया था। इसके बाद वह मुरलियाँ लेकर आया था। उसकी आवाज में मिठास होती थी। वह बच्चों के साथ घुल-मिल जाता था और उन्हें तरह-तरह की चीजें सस्ते दामों में बेचकर प्रसन्न होता था।

मिठाईवाले की आवाज में माधुर्य था। अतः जब उसने मिठाईवाले की मृदुल आवाज सुनी तो उसे खिलौनेवाले और मुरलीवाले का स्मरण हो आया।

प्रश्न 3.
रोहिणी को मिठाईवाले के सम्बन्ध में जानने की उत्सुकता क्यों थी?
उत्तर:
गली में अपनी चीजें बेचने के लिए कई फेरीवाले आते थे। पर उनकी आवाज में ऐसा कोई आकर्षण नहीं होता था। मिठाईवाले की आवाज में मिठास थी। इससे पहले वह खिलौने बेचने के लिए उस गली में आया था। एक बार वह मुरलियाँ बेचने के लिए भी यहीं आया था। वह बच्चों के साथ बड़े प्यार से बातें करता था और सौदा भी सस्ता बेचता था। वह भला आदमी जान पड़ता था और लगता था कि वह दुर्भाग्य से इस तरह मारा-मारा फिर रहा है। इसलिए मिठाईवाले के बारे में जानने के लिए वह उत्सुक हो उठी थी।

मिठाईवाला लेखक-परिचय

प्रश्न.
भगवती प्रसाद वाजपेयी के जीवन का संक्षिप्त परिचय देते हुए उनके साहित्य की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय :
भगवती प्रसाद वाजपेयी का जन्म सन् 1899 ई. में कानपुर जिले के एक गाँव मंगलापुर में हुआ था। बचपन में ही उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई थी। इस कारण वे पढ़ नहीं पाए। उन्होंने केवल आठवीं कक्षा तक ही नियमित शिक्षा प्राप्त की थी। अपनी आजीविका चलाने के लिए उन्होंने पशु चराना, खेती करना, छापेखाने में प्रूफरीडिंग आदि अनेक कार्य किए।

रचनाएँ :
वाजपेयीजी ने अनेक उपन्यास और कहानियाँ लिखी हैं। ‘प्रेम पथ’, ‘त्यागमयी’, मनुष्य और देवता’, ‘विश्वास का बल’ उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं। उनके प्रमुख कथा-संग्रह हैं-मधुपर्क, हिलोर, दीप-मालिका, मेरे सपने, बाती और लौ तथा उपहार।

साहित्यक विशेषताएँ :
वाजपेयीजी प्रेमचन्द के बाद के युग के प्रमुख साहित्यकारों में से हैं। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक, कविता आदि अनेक विधाओं में साहित्य की रचना की है। उन्होंने सामाजिक और मनोवैज्ञानिक विषयों पर अनेक कहानियाँ लिखी हैं। उन्होंने इन कहानियों में मध्यम वर्ग के पात्रों को स्थान दिया है। उनकी भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और सरल है।

बालोपयोगी साहित्य और संपादन के क्षेत्र में भी उनका योगदान काफी महत्त्वपूर्ण रहा है। उन्होंने ‘उर्मि’ और ‘आरती’ नाम की पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया था।

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मिठाईवाला पाठ का सारांश

प्रश्न.
‘मिठाईवाला’ पाठ का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
इस कहानी में लेखक ने एक ऐसे धनी और प्रतिष्ठित व्यक्ति की मानसिक दशा का वर्णन किया है जिसके बच्चों की मृत्यु हो गई थी। वह अपने बच्चों के खो जाने के दुख को मिठाई, मुरली आदि बेचकर भुलाने का प्रयत्न करता है। बच्चे उससे चीजें खरीदकर खुश होते हैं। उनकी खुशी में वह अपने बच्चों की खुशी का अनुभव करता है।

वह खिलौने लेकर गलियों में जाता और मधुर स्वर में बोलता-‘खिलौनेवाला, बच्चों को बहलाने वाला। बच्चे उसकी स्नेह से युक्त मधुर आवाज को सुनते ही उसके पास आ जाते। वह वहीं कहीं बैठकर खिलौनों की पेटी खोल देता। बच्चे खिलौने देखकर खुश हो जाते। वह बच्चों को देखता, उनकी नन्हीं-नन्हीं उँगलियों और हथेलियों से पैसे लेकर उन्हें खिलौने दे देता। बच्चे खिलौने लेकर उछलने-कूदने लगते।

राय विजय बहादुर के दो बच्चों-चुन्नू और मुन्नू ने भी उससे खिलौने लिये। उनकी माँ रोहिणी को वे खिलौने बहुत सस्ते लगे। बच्चे खिलौनों से घर में उछल-कूद मचाने लगे।

छ: महीने के बाद वह मुरलियाँ लेकर बेचने आया। वह मुरली बजाकर, गाना सुनाकर मुरली बेचता था। वह भी दो-दो पैसे में। प्रतिदिन नगर की प्रत्येक गली में उसका मीठा-मीठा स्वर सुनाई पड़ता था। कई लोग उस मुरलीवाले की चर्चा करते थे। रोहिणी ने भी उस मुरलीवाले का स्वर सुना। उसे तुरन्त खिलौनेवाले का स्मरण हो आया।

मुरलीवाले की आवाज सुनकर बच्चों का झुण्ड इकट्ठा हो गया। उन्हें देख मुरलीवाला प्रसन्न हो उठा। उसने सभी बच्चों को प्रेमपूर्वक मुरलियाँ दीं। विजय बाबू ने भी अपने बच्चों के लिए दो मुरलियाँ लीं।

अपने मकान में बैठी हई रोहिणी मुरलीवाले की बातें सुनती रही। उसने महसूस किया कि बच्चों के साथ इस प्रकार प्यार से बातें करने वाला फेरीवाला पहले कभी नहीं आया।

आठ मास के वाद रोहिणी को फिर नीचे की गली में आवाज सुनाई दी-बच्चों को बहलाने वाला, मिठाईवाला। रोहिणी झट से नीचे उतर आई। उसने दादी से मिठाई वाले को बुलाने के लिए कहा। मिठाई वाला शीघ्र ही वहाँ आ गया। उसने कहा कि उसके पास कई तरह की मिठाइयाँ हैं। वे जल्दी नहीं घुलतीं। बच्चे इन्हें चाव से खाते हैं। इनसे खाँसी भी दूर होती है।

रोहिणी ने चार पैसे की मिठाइयाँ मिठाईवाले से लीं।

रोहिणी ने दादी से कहा कि वह मिठाईवाले से पूछे कि वह कहाँ रहता है और क्या पहले भी वह कभी इधर आया था।

रोहिणी को उसने बताया कि इस व्यवसाय से उसे खाने-भर को मिल जाता है। इससे उसे सन्तोष, धैर्य और असीम संख मिलता है। उसने रोहिणी को उसकी जिज्ञासा शान्त करने के लिए बताया कि उसका मकान, व्यवसाय, नौकर-चाकर, सभी कुछ था। सुन्दर स्त्री थी और बच्चे थे। सभी प्रकार की सुख-सुविधा उसे प्राप्त थी। पर दुर्भाग्य से सभी कुछ नष्ट हो गया था। वह उन बच्चों की खोज में निकला था जिनके कारण उसके आँगन में कोलाहल मचा रहता था। उनके न रहने से वह बहुत दुखी था। अपने दुख को भुलाने के लिए ही वह तरह-तरह की चीजें बच्चों के लिए लाया करता था। बच्चों को हँसता-खेलता देख उसे सन्तोष होता था क्योंकि उसे उन बच्चों में अपने बच्चों की झलक मिल जाती थी।

मिठाईवाला संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

1. मैं भी अपने नगर का प्रतिष्ठित आदमी था। मकान, व्यवसाय, घोड़े-गाड़ी, नौकर-चाकर, सभी कुछ था। बाहर सम्पत्ति का वैभव था, भीतर सांसारिक सुख का आनन्द । स्त्री सुन्दर थी, मेरी प्राण थी। बच्चे ऐसे सुन्दर थे जैसे सोने के सजीव खिलौने। उनकी अठखेलियों के मारे घर में कोलाहल मचा रहता था। समय की गति। विधाता की लीला। अब कोई नहीं है। बहन, प्राण निकाले नहीं निकले। इसलिए अपने उन: बच्चों की खोज में निकला हूँ।

शब्दार्थ :
प्रतिष्ठित-सम्मानित। वैभव-सम्पन्नता।

प्रसंग :
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘हिन्दी समान्य भाग-1’ में संकलित तथा भगवती प्रसाद वाजपेयी द्वारा लिखित कहानी ‘मिठाईवाला’ से उद्धृत है। इसमें मिठाईवाला रोहिणी की जिज्ञासा के उत्तर में क्या कहता है-इस पर प्रकाश डाला गया है।

व्याख्या :
रोहिणी से मिठाईवाला कह रहा है-मैं साधारण व्यक्ति नहीं हूँ। मेरा नगर में बहुत सम्मान था। मेरे पास मकान था। मेरा अपना काम-धन्धा था। मेरे पास सुख-सुविधा की सारी सामग्री थी। नौकर-चाकर थे। सम्पत्ति की कमी नहीं थी। हर प्रकार का सांसारिक सुख मुझे प्राप्त था। घर में भी किसी प्रकार की कोई कमी नहीं थी। मेरी सुन्दर, प्रिय पत्नी थी। सुन्दर और सलोने नटखट बच्चे थे। उनसे घर में सारा दिन चहल-पहल रहती थी।

पर समय बहुत बलवान है। उसकी चाल कोई नहीं समझ सकता। विधाता के खेल निराले होते हैं। दुर्भाग्य से अब मेरा कोई नहीं है। पत्नी, बच्चे सभी का निधन हो गया। पर मेरे प्राण नहीं निकले। मैं अपने बच्चों की खोज में लगा हुआ हूँ।

विशेष :

  1. सारा कथन स्पष्ट रूप में है।
  2. भाव सरल और सीधे हैं।
  3. भावात्मक तथा वर्णानात्मक शैली है।
  4. यह अंश मार्मिक और हृदयस्पर्शी है।
  5. वर्णनात्मक शैली हैं।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) मिठाईवाले ने रोहिणी को क्या बतलाया?
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का प्रमुख विषय क्या है?
उत्तर:
(i) मिठाईवाले ने रोहिणी को यह बतलाया कि वह अपने नगर का बहुत ही सम्पन्न और सम्मानित आदमी था। यही नहीं, उसका परिवार भरा-पूरा था। दुर्भाग्यवश वह सब कुछ बिखर गया। उसी की खोज में वह इधर-उधर भटक रहा है।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का प्रमुख विषय मिठाईवाले का रोहिणी से आपबीती जिन्दगी के बारे में उल्लेख करना है।

गद्य पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) प्रस्तुत गद्यांश का मुख्य भाव क्या है?
(ii) प्रस्तुत गद्यांश में समय के किस पहलू पर प्रकाश डाला गया है?
उत्तर:
(i) प्रस्तुत गद्यांश का मुख भाव है-मनुष्य के जीवन की विडम्बना को दर्शाना।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश में समय की अस्थिरता पर प्रकाश डाला गया है। विधाता की लीला बड़ी विचित्र होती है, वह कब और कैसे समय की गति को मोड़ दे, इसे कोई भी नहीं जान पाता है। इस तथ्य को भी प्रस्तुत गद्यांश में प्रकाशित करने का प्रयास किया गया है।

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2. वे सब अन्त में होंगे तो यही कहीं। आखिर, कहीं-न-कहीं जन्मे ही होंगे। उस तरह रहता तो घुल-घुल कर मरता। इस तरह सुख-सन्तोष के साथ मरूंगा। इस तरह के जीवन में कभी-कभी अपने उन बच्चों की एक झलक-सी मिल जाती है। ऐसा जान पड़ता है, जैसे वे इन्हीं में उछल-उछलकर हँस-खेल रहे हैं। पैसों की कमी थोड़े ही है, आपकी दुआ से पैसे तो काफी हैं। जो नहीं है, इस तरह उसी को पा जाता हूँ।

शब्दार्थ :
दुआ-आशीर्वाद।

प्रसंग :
पूर्ववत्!

व्याख्या :
मिठाईवाले ने रोहिणी से अपने विश्वास को व्यक्त करते हुए कहा कि यों तो उसका परिवार उससे बिछुड़ गया है, लेकिन उसे पूरी उम्मीद है कि वह यहीं कहीं आस-पास ही उसे अवश्य मिल जाएगा। अगर वह अपने परिवार के साथ रहता, उसके साथ वह अपने हर दुःख और अभाव को बाँटकर चैन से अपनी जिन्दगी बिता लेता। उसे यही सुख-सन्तोष होता। अब भी यही सुख-सन्तोष उसे है कि वह अपने परिवार की खोज करते हुए उसे पाने की पूरी उम्मीद लगाए हुए है। इससे वे अपने खोए हुए बच्चों की एक झलक देख लेता है। रह-रहकर उसे ऐसा लगता है, मानो वह इन बच्चों की ही तरह पूरी तरह खुश हैं और इन्हीं की तरह बेफिक्र होकर खेल-कूद रहे हैं। यह सच है कि उसे पैसे-रुपए की कोई कमी नहीं है, उसे ईश्वर की कृपा से बहुत धन प्राप्त है जो उसके पास नहीं है, उसे भी वह अपने बच्चों की तलाश करते हुए पा ही लेता है।

विशेष :

  1. मिठाईवाले की सच्ची भावना प्रकट हुई है।
  2. सम्पूर्ण उल्लेख स्वाभाविक है।
  3. भापा सरल है।
  4. ‘घुल-घुलकर मारन’ मुहावरे का सार्थक प्रयोग है।

गद्यांश पर आधारित अर्थ-ग्रहण सम्बन्धी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) ‘वे सब अन्त में होंगे तो यही कहीं’ प्रस्तुत कथन किसका और किसके प्रति है।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का भावार्थ लिखिए।
उत्तर:
(i) ‘वे सब अन्त में होंगे तो यहीं कहीं’ प्रस्तुत कथन मिठाईवाले रोहिणी के प्रति है।
(ii) प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने यह भाव व्यक्त करना चाहा है कि मिठाईवाले को पूरा विश्वास था कि उसकी खोज सफल होगी। इससे वह अपने अपार दुःख को पार कर रहा है।

गद्यांश पर आधारित बोधात्मक प्रश्नोत्तर-
प्रश्न.
(i) मिठाईवाले के किन भावों को व्यक्त किया गया है?
(ii) मिठाईवाला दुखी होकर भी क्यों सुख का अनुभव करता है?
उत्तर:
(i) मिठाईवाले के आशा और विश्वास के साथ आत्मीयता के भावों को व्यक्त किया गया है।
(ii) मिठाईवाला दुःखी होकर सुख का अनुभव करता है। यह इसलिए कि अपने बिछड़े हुए परिवार को याद करके दुःखी है, लेकिन उसके मिलने की उसे पूरी आशा है। इससे वह सुख का अनुभव करता है।

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MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 20 भू का त्रास हरो

MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 20 भू का त्रास हरो (कविता, रामधारी सिंह ‘दिनकर’)

भू का त्रास हरो पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

भू का त्रास हरो लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कवि के अनुसार राजाओं से भी पूज्य कौन है?
उत्तर:
कवि के अनुसार राजाओं से भी पूज्य कवि, कलाकार और ज्ञानीजन हैं।

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प्रश्न 2.
कविता में नृप समाज का उल्लेख किस रूप में हुआ है?
उत्तर:
कविता में नृप-समाज का उल्लेख मदांध शासक के रूप में हुआ है।

प्रश्न 3.
कवि ज्ञानियों को क्या धारण करने का उपदेश देता है?
उत्तर:
कवि ज्ञानियों को मदांध शासकों को सबक सिखाने के लिए तलवार धारण करने का उपदेश देता है।

भू का त्रास हरो दीर्घउत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि का भोगी भूप से क्या आशय है?
उत्तर:
कवि का भोगी नृप से आशय है ऐसे अविचारी, विलासी और मदांध शासक से जो प्रजा की भलाई के लिए कुछ नहीं करता है। केवल तलवार की ताकत से अपनी सत्ता को सुरक्षित रखता है।

प्रश्न 2.
कवि ने अविचारी नृप समाज के साथ कैसा व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया है?
उत्तर:
कवि ने अविचारी नृप समाज के साथ कठोरतापूर्ण व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया है। उसने उसको सबक सिखाने के लिए ज्ञानीजनों को यहाँ तक प्रेरित किया है कि जरूरत पड़े तो उन्हें तलवार भी उठाने से तनिक संकोच नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 3.
‘आग में पड़ी धरती’ से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
आग में पड़ी धरती’ से कवि का तात्पर्य है-चारों ओर फैली अव्यवस्था, अजराकता, अभाव, अशान्ति, अमानवता और असुरक्षा का फैलता दूषित वातावरण। इस प्रकार के वातावरण का निकट भविष्य में कोई सुधार का उपाय दिखाई नहीं दे रहा है। इसलिए कवि ने ज्ञानियों को तलवार धारण कर सभी प्रकार के अन्याय और अत्याचार को समाप्त करने के लिए प्रेरित किया है। ऐसा इसलिए कि संसार को उनसे ही यह आशा है और वे इसके लिए सक्षम और समर्थ हैं।

भू का त्रास हरो भाव-विस्तार/पल्लवन

प्रश्न.

  1. ‘जब तक भोगी भूप प्रजाओं के नेता कहलाएँगे’ का भाव पल्लवन कीजिए।
  2. ‘भूप समझता नहीं और कुछ छोड़ खड्ग भाषा को’ इस पंक्ति का अपने शब्दों में विस्तार कीजिए।
  3. निम्नांकित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए(क) “रोक-टोक से नहीं सुनेगा…..वह तुम त्रास हरो।”

उत्तर:
1. “जब तक भोगी भूप प्रजाओं के नेता कहलाएँगे” का भाव यह है कि जब तक अविचारी और विलासी शासक प्रजाहित में कार्य नहीं करेगा, तब तक कवियों, कलाकारों और ज्ञानियों को मान-सम्मान प्राप्त नहीं होगा। चारों ओर अत्याचार और दुखद वातावरण बना रहेगा। उससे जीवन खतरे में पड़ जाएगा।

2. “भूप समझता नहीं और कुछ छोड़ खड्ग की भाषा’ इस काव्य-पंक्ति के द्वारा कवि ने यह कहना चाहा है कि सत्ता से मदान्ध शासक निश्चित रूप से अविचारी और विलासी होता है। वह प्रजाहित में कुछ भी नहीं करता है। वह तो केवल तलवार की ताकत से ही अपनी सत्ता को सुरक्षित रखता है और इसी को ही महत्त्व देता है। फलस्वरूप वह कवियों, कलाकारों और ज्ञानियों का अनादर करता है। इस प्रकार वह किसी की अच्छी बात नहीं सुनता है। उसे तो केवल ज्ञानीजन ही तलवार उठाकर सबक सिखा सकते हैं।

3. ‘रोक-टोक से नहीं सुनेगा…..वह तुम त्रास हरो।”
व्याख्या:
सुख-सुविधाओं में डूबा हुआ और सत्ता के मद से अंधा बना हुआ शासक वर्ग ज्ञानीजनों की सीख पर किसी प्रकार का ध्यान नहीं देता है। दुखी प्रजा के विरोध करने पर भी यह अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आता है। इसलिए यह तो वास्तव में विचारहीन है। यह सत्ता के मद से इतना अंधा हो चुका होता है कि गर्दन काटनेवाली कुल्हाड़ी ही इसके सुधार का एकमात्र उपाय है। यह इसलिए भी इसका ही पात्र है। कवि का पुनः कहना है कि वह इसीलिए ज्ञानीजनों से अब कह रहा है कि ऐसे मदान्ध शासकों को सबक सिखाने के लिए उन्हें तलवार भी उठानी पड़े तो इसके लिए उन्हें हमेशा तैयार रहना चाहिए। इस तरह इस धरती पर फैले हुए दुख-अभाव को जो कोई भी हर न सका, उसे हरने के लिए उन्हें हर प्रकार से कमर कस लेनी चाहिए।

भू का त्रास हरो भाषा अध्ययन

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प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखिए –
(क) कविता की रचना करने वाला
(ख) विज्ञान में विशेष निपुण
(ग) कलाओं का सृजन करने वाला
(घ) अभिमान करने वाला।’
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 20 भू का त्रास हरो img-1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्द अनेकार्थी हैं, इन शब्दों के विभिन्न अर्थ दर्शाने वाले वाक्य बनाओ –
कनक, पद, पक्ष, विधि।
उत्तर:

  • कनक – धतूरा, सोना
  • पद – पैर, ओहदा
  • पक्ष – पन्द्रह दिन का समय, पंख
  • विधि – कानून, ढंग।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों का सन्धि-विच्छेद कर सन्धि का नाम लिखिएउज्ज्वल, मदान्ध, निष्ठुर, उद्धार।
उत्तर:
MP Board Class 11th Hindi Makrand Solutions Chapter 20 भू का त्रास हरो img-2

भू का त्रास हरो योग्यता विस्तार

प्रश्न 1.
आप अपना आदर्श किसे मानते हैं? अपने आदर्श के प्रमुख गुणों को लिखिए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

प्रश्न 2.
यदि आपको अपने जीवन में समाज का नेतृत्व करने का अवसर प्राप्त होता है तो आप क्या-क्या कार्य करेंगे, लिखिए?
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

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प्रश्न 3.
एक आदर्श नेता में आप किन-किन गुणों को देखना चाहते हैं, सूची बनाइए।
उत्तर:
उपर्युक्त प्रश्नों को छात्र/छात्रा अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से हल करें।

भू का त्रास हरो परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

भू का त्रास हरो लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
जनता के हितों की अनदेखी कौन करता है?
उत्तर:
जनता के हितों की अनदेखी अविचारी और मदांध शासक करता है।

प्रश्न 2. अपमान सहकर भी मानवता की कौन चिन्ता करता है?
उत्तर:
अपमान सहकर मानवता की चिन्ता कवि, कलाकार और ज्ञानी करते हैं।

प्रश्न 3.
आज के कवि, कलाकार और ज्ञानी किस तरह का जीवन जीने के लिए मजबूर हैं?
उत्तर:
आजकल के कवि, कलाकार और ज्ञानी भोजन-वस्त्र से हीन, अपमानित और दीनता का जीवन जीने के लिए मजबूर हैं।

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प्रश्न 4.
‘भू का त्रास’ आज तक कोई क्यों नहीं हर सका?
उत्तर:
भू का त्रास’ आज तक कोई नहीं हर सका, क्योंकि मदान्ध और अविचारी शासक का विरोध कर उसे सबक सिखाने वाला कोई नहीं है।

भू का त्रास हरो दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
संसार किन विभूतियों को नहीं पहचान रहा है और क्यों?
उत्तर:
संसार कवि, कलाकार और ज्ञानीजन रूपी विभूतियों को नहीं पहचान रहा है। यह इसलिए कि इन विभूतियों से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण वह अविचारी और मदान्ध शासकों को मान रहा है। उसका ऐसा मानने के पीछे यह कारण है कि मदांध शासक अपनी मदान्धता के फलस्वरूप और किसी को कुछ भी नहीं समझता है।

प्रश्न 2.
‘ज्ञानियों खड्ग धरो’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘ज्ञानियों खड्ग धरो’ का आशय है-कवि, कलाकार और ज्ञानी ही जनता के हितों की अनदेखी करने वाले अविचारी और विलासी मदान्ध शासकों को भली-भांति समझता है। वह जानता है कि यह शासक केवल तलवार की ताकत से अपनी सत्ता को सुरक्षित रखता है। ऐसे शासक को वही सबक सिखा सकता है। इसलिए जब कभी ऐसी जरूरत पड़े तो उसे तलवार उठाने से भी संकोच नहीं करना चाहिए। उससे ही संसार को इस प्रकार की अपेक्षा है और वह इसके लिए समर्थ है। ऐसा करके ही वह नीति विमुख राजसत्ता को सही रास्ते पर ला सकता है।

प्रश्न 3.
‘भू का त्रास हरो’ कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कविता में अविचारी और विलासी शासकों की भर्त्सना की गई है। जो शासक प्रजाहित में कार्य नहीं करता है और केवल तलवार की ताकत से अपनी सत्ता को सुरक्षित रखता है, ऐसे शासक का प्रतिकार उज्ज्वल चरित्र वाले कवि, कलाकार एवं ज्ञानीजन ही कर सकते हैं। सत्ता के मद में डूबे हुए शासक अपने जीवन-दर्शन को केवल शब्द सुनकर ही नहीं बदल सकते हैं। अतः उन्हें सबक सिखाने के लिए ज्ञानवान व्यक्तियों को तलवार भी उठाना पड़े तो इसके लिए उन्हें सदैव तैयार रहना चाहिए। संसार तभी सुख का अनुभव कर सकेगा जब समाज चरित्रवान कवि, कलाकारों और ज्ञानियों को इन मदांध शासकों से अधिक महत्त्वपूर्ण मानेगा। नीति विमुख राजसत्ता को समाज का बौद्धिक और कलाकार वर्ग ही मार्ग पर लाने में समर्थ है।

भू का त्रास हरो लेखक-परिचय

प्रश्न 1.
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का संक्षित जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्य के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
जीवन परिचय-श्री रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्म बिहार राज्य के मुंगेर जिला के सिमरिया नामक गाँव में 30 सितम्बर, 1908 को एक किसान परिवार में हुआ था। बचपन में ही पिता का साया उठ जाने के बाद आपकी विधवा माँ ने आपकी शिक्षा को आगे बढ़ाया। मोकामाघाट से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करके आपने पटना विश्वविद्यालय से सन् 1932 में बी.ए. ऑनर्स की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली। आप में बचपन से ही कविता के अंकुर फूट पड़े थे। यही कारण है कि आपने मिडिल स्कूल में पढ़ते समय ‘बीरबाला’ और हाईस्कूल में अध्ययन करते समय ‘प्रणभंग’ काव्यों की रचना की थी।

मोकामा में एक वर्ष तक प्रधानाचार्य रहने के बाद आप सन् 1934 में सब-रजिस्ट्रार हो गए। इसके बाद आप सन् 1943 में ब्रिटिश सरकार के युद्ध-प्रचार विभाग में निर्देशक के पद पर रहे। सन् 1952 से सन् 1963 तक आप राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होकर राज्यसभा के सदस्य रहे। सन् 1964 में आप भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। इसके बाद ‘दिनकर’ जी भारत सरकार के गृह-विभाग में हिन्दी-समिति के सलाहकार के रूप में कार्य करते रहे। इसके बाद आप आकाशवाणी के निदेशक के पद पर भी रहे। इस तरह से ‘दिनकर’ जी कई वर्षों तक हिन्दी के प्रचार-प्रसार में लगे रहे। दिनकर जी का साहित्यिक-मूल्यांकन करते हुए उन्हें विभिन्न प्रकार की उपाधियों-पुरस्कारों से समय-समय पर अलंकृत-पुरस्कृत किया जाता रहा। 24 अप्रैल, 1974 ई. को हिन्दी का यह ‘दिनकर’ सदा के लिए अस्त हो गया।

रचनाएँ:
‘दिनकर’ मुख्य रूप से कवि तो थे ही लेकिन उनका गद्य-साहित्य पर भी बेजोड़ अधिकार रहा। उनकी निम्नलिखित रचनाएँ हैं –

1. महाकाव्य:

  • कुरुक्षेत्र,
  • उर्वशी।

2. खण्डकाव्य:

  • प्रणभंग,
  • रश्मिरथी।

3. काव्य:

  • बारदोली-विजय
  • द्वन्द्वगीत
  • रसवंती
  • रेणुका
  • हुंकार
  • दिल्ली
  • नीलकुसुम
  • इतिहास के आँसू
  • नीम के पत्ते
  • सिपी और शंख
  • परशुराम की प्रतिज्ञा
  • सामधेनी, और
  • कलिंग-विजय।

4. गद्य-साहित्य:

  • मिट्टी की
  • संस्कृति के चार अध्याय
  • पंत, प्रसाद, गुप्त
  • हिन्दी साहित्य की भूमिका
  • अर्द्धनारीश्वर।

5. आलोचना:

  • शुद्ध कविता की खोज में आदि।

महत्त्व:
कविवर ‘दिनकर’ का महत्त्व निस्संदेह है। वह काव्य, दर्शन, चिन्तन और राष्ट्र की दृष्टि से निश्चय ही उपयोगी सिद्ध हुआ है और होता रहेगा। उन परवर्ती रचनाकारों को ‘दिनकर’ जी विशेष रूप से मिल के पत्थर का काम करेंगे, जो प्रगतिवादी चेतना के आग्रही हैं। इस प्रकार ‘दिनकर’ का महत्त्व हमारे समाज और राष्ट्र के लिए सदैव प्रेरक रूप में बना रहेगा।

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भू का त्रास हरो पाठ का सारांश

प्रश्न 1.
श्री रामधारी सिंह ‘दिनकर’ विरचित कविता ‘भू का त्रास हरो’ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
श्री रामधारी सिंह-विरचित कविता में भोगी-विलासी राजनेताओं और शासकों की निन्दा की गई है। दूसरी ओर ज्ञान, तप और त्याग की उपेक्षा के प्रति चिंता व्यक्त की गई है। कवि इस प्रकार के तथ्यों पर प्रकाश डालना चाहा है। इस विषय में कवि का कहना है कि जब तक भोगी-विलासी और कुविचारी शासक प्रजा के नेता बने रहेंगे, तब तक ज्ञान, त्याग और तप का महत्त्वांकन नहीं होगा। भोजन-वस्त्र से हीन, दीन-हीन जीवन जीने वाले, हर प्रकार से उपेक्षा और अपमान का चूंट पीकर मानवता की चिन्ता करने वाले, कवि; पंडित, विज्ञान के जानकार, कलाकार, ज्ञानी और पवित्र-चरित्र का स्वाभिमान रखनेवाले की पहचान संसार जब तक नहीं करेगा, वह राजनेताओं-शासकों से भी अधिक उन्हें जब तक नहीं पूज्य मानेगा, तब तक यह धरती आग में पड़ी हुई अकुलाती रहेगी।

लाख कोशिश के बावजूद वह दुखों से निजात नहीं पाएगी। ऐसा इसलिए राजनेता और शासक तो केवल तलवार की ही भाषा समझते हैं। वह किसी प्रकार की रोक-टोक से नहीं रुकने वाला है। ऐसा इसलिए कि यह समाज ही अविचारी और मुर्ख है। यह तो अपनी कुल्हाड़ी से किसी की गर्दन काटने में बड़ा ही निष्ठुर (कठोर) है। यह बहुत मदान्ध है। इसलिए तो मैं ज्ञानियों से यह कहना चाहता हूँ कि अब तुम ज्ञानोपदेश बंद करके अपने हाथ में तलवार ले लो। अब तक इस धरती के जिस दुख को किसी से नहीं दूर किया, उसे अब तुम दूर कर दो।

भू का त्रास हरो संदर्भ-प्रसंगसहित व्याख्या

प्रश्न 1.
जब तक भोगी भूप प्रजाओं के नेता कहलायेंगे,
ज्ञान, त्याग, तप नहीं श्रेष्ठता का जब तक पद पायेंगे।
अशन-वसन से हीन, दीनता में जीवन धरनेवाले,
सहकर भी अपमान मनुजता की चिन्ता करनेवाले,

शब्दार्थ:

  • भोगी – सुख सुविधाओं में डूबे हुए।
  • भूप – राजा (राजनेता व प्रशासक)।
  • अशन-वसन – भोजन और वस्त्र।
  • दीनता – अभाव, गरीबी।
  • धरनेवाले – धारण करने वाले।
  • मनुजता – मनुष्यता।

प्रसंग:
प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘सामान्य हिन्दी भाग-1’ में संकलित और महाकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा विरचित कविता ‘भू का त्रास हरो’ शीर्षक से उद्धृत है। इसमें कवि ने कुविचारी और सुख-सुविधाओं में डूबे हुए राजाओं (आजकल के राजनेताओं और प्रशासकों) के प्रति अपना क्रोध प्रकट करते हुए कहा है कि –

व्याख्या:
चूँकि आजकल भोगी-विलासी और सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं में डूबे हुए राजनेता और प्रशासक अधिक हो रहे हैं। इससे देश की जनता की नाना प्रकार की दुर्दशा हो रही है। इससे देश की स्थिति बिगड़ गई है। इसलिए यह ध्यान देने की बात है कि जब तक देश में इस प्रकार के भोगी-विलासी और अनेक प्रकार के सुख-सुविधाओं में डूबे हुए लोग जनता के नेता और प्रशासक बने रहेंगे, तब तक ज्ञान, त्याग और तप को न सम्मान मिलेगा और न महत्त्व।

भोजन-वस्त्र से हीन अर्थात् दाने-दाने को मोहताज और फटे-मैले कपड़ों से तन ढकने के लिए मजबूर, दीनता-हीनता की जिन्दगी जीने वाली तथा हर प्रकार की उपेक्षा-अपमान के घूट को पी-पीकर मानवता की रक्षा के लिए अड़ी हुई जनता की ओर ऐसे भोगी-विलासी राजनेताओं-प्रशासकों का ध्यान बिल्कुल जाता नहीं है। ऐसा इसलिए कि वे सुख-सुविधाओं में पड़कर इतने मदांध हो जाते हैं कि उन्हें सच्चाई दिखाई ही नहीं देती है।

विशेष:

  1. भाषा में ओज है।
  2. तत्सम शब्दावली है।
  3. प्रगतिवादी चेतना है।
  4. ‘त्याग तप’ और ‘अशन-घसन’ में अनुप्रास अलंकार है।
  5. यह अंश प्रेरक और भाववर्द्धक है।

पद्यांश पर आधारित सौन्दर्य-बोध संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न

  1. प्रस्तुत पद्यांश के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
  2. प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौन्दर्य लिखिए।

उत्तर:

1. प्रस्तुत पद्यांश में भोगी-विलासी राजनेताओं-प्रशासकों के कारण ज्ञानी और त्यागी व्यक्तियों की हो रही उपेक्षा का उल्लेख धारदार शब्दों के द्वारा हुआ है। तुकान्त शब्दावली और कथन को स्पष्टता प्रदान करने वाली भाषा निश्चय ही प्रभावशाली है। ‘त्याग-तप’ और ‘अशन-वसन’ में अनुप्रास अलंकार का चमत्कार है तो शैली ओजस्वी

2. प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौन्दर्य अद्भुत है। भोगी राजनेताओं-प्रशासकों की वास्तविकता को व्यक्त करने वाले भाव बिना किसी लाग-लपेट के हैं। इसीलिए विश्वसनीय हैं। विश्वसनीय होने के कारण हृदयस्पर्शी बन गए हैं।

पद्यांश पर आधारित विषयवस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न

  1. भोगी राजनेता-प्रशासक किसके श्रेष्ठता के बोधक हैं?
  2. आजकल राजनेताओं-प्रशासकों के दोष क्या हैं?

उत्तर:

  1. भोगी राजनेता-प्रशासक ज्ञान, त्याग और तप की श्रेष्ठता के पद के बोधक हैं।
  2. आजकल राजनेताओं-प्रशासकों के दोष हैं कि वे अनेक प्रकार के भोग-विलास और अनेक प्रकार की सुख सुविधाओं में पड़े हुए रहते हैं।

प्रश्न 2.
कवि, कोविंद, विज्ञान-विशारद, कलाकार, पंडित, ज्ञानी,
कनक नहीं, कल्पना, ज्ञान, उज्ज्वल चरित्र के अभिमानी,
इन विभूतियों को जब तक संसार नहीं पहचानेगा,
राजाओं से अधिक पूज्य जब तक न इन्हें वह मानेगा,
तब तक पड़ी आग में धरती, इसी तरह, अकुलायेगी,
चाहे जो भी करे, दुखों से छूट नहीं वह पायेगी।
थकी जीभ समझाकर, गहरी लगी ठेस अभिलाषा को,
भूप समझता नहीं और कुछ छोड़ खड्ग की भाषा को।

शब्दार्थ:

  • कोविद – जानकार, पंडित, विशेषज्ञ।
  • विज्ञान-विशारद – विज्ञान के जानकार।
  • कनक – सोना।
  • विभूति – दिव्य, अलौकिक शक्ति।
  • ठेस – हृदय पर लगी चोट।
  • अभिलाषा – इच्छा।
  • खड्ग – तलवार।

प्रसंग:
पूर्ववत्। इसमें कवि ने महान चरित्रों के अनादर करने से होने वाली दुखद स्थिति पर प्रकाश डाला है। इस विषय में कवि का कहना है कि –

व्याख्या:
आजकल देश की दशा राजनेताओं और प्रशासकों के भोग-विलास और अनेक प्रकार की सुख-सुविधाओं में डूबे रहने के कारण बड़ी दुखद और चिन्ताजनक हो गई है। वह यह कि इनके कारण कवि, विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, कलाकार, पंडित और ज्ञानी धनवान न होते हुए स्वच्छंद चिंतन करने वाले ज्ञान और पवित्र चरित्र के अभिमानी हैं। कहने का भाव यह है कि कवि, विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, कलाकार, पंडित और ज्ञानी किसी प्रकार के धन-वैभव की परवाह न करते हुए अपने ज्ञान और पवित्र चरित्र का स्वाभिमान रखते हैं। इस प्रकार की अलौकिक शक्तियों की पहचान संसार नहीं करेगा, और जब तक इन्हें वह सुविधा-भोगी राजनेताओं और प्रशासकों से अधिक सम्मानित नहीं करेगा, तब तक यह धरती आग में पड़ी हुई अकुलाती ही रहेगी।

कहने का भाव यह है कि कवि, पंडित, विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, कलाकार और ज्ञानी जनों का महत्त्व आज जिस तरह से घट रहा है, उस तरह से इस धरती (संसार) का सुख-चैन समाप्त होता जा रहा है। इसलिए चाहे कोई कुछ भी करे, इस धरती (संसार) को वह दुखों से निजात नहीं दिला सकता है। मान-सम्मान की अभिलाषा रखने वाले महाविभूतियों के हृदय पर उस समय गहरी चोट लगती है, जब सत्ता के मद में डूबे हुए शासक को समझा-समझाकर उनकी वाणी थक जाती है, लेकिन वे उनकी बातों पर तनिक भी ध्यान नहीं देते हैं। यह इसलिए सत्ता और सुख-सुविधाभोगी प्रशासक और कुछ नहीं समझता है। वह तो तलवार की ताकत से ही अपनी सत्ता को सुरक्षित रखना जानता-समझता है।

विशेष:

  1. भाषा में तीव्रता है।
  2. तत्सम शब्दावली है।
  3. मुहावरों (आग में पड़ना, जी.भटकना, ठेस लगना और तलवार की भाषा समझना) के प्रयोग सटीक हैं।
  4. वीर रस का संचार है।
  5. ‘कवि कोविद’ और ‘विज्ञान विशारद’ में अनुप्रास अलंकार है।
  6. भावात्मक शैली है।

पद्यांश पर आधारित सौन्दर्य-बोध संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. प्रस्तुत पद्यांश के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
  2. प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौन्दर्य को स्पष्ट कीजिए।
  3. आज कौन किससे निरादृत हो रहा है और क्यों?

उत्तर:

1. प्रस्तुत गद्यांश में भोगी सत्ताधारियों के कारण निरादर को प्राप्त होने वाली विभूतियों के उल्लेख हैं। इसके साथ ही धरती की दुखद दशा के दोषी सत्ताधारियों के प्रति सीधा आक्रोश के भी स्वर हैं। इस प्रकार प्रस्तुत हुए इस पद्यांश के कथन को सीधी और सपाट भाषा के माध्यम से दर्शाने का प्रयास काबिलेतारीफ है। अनुप्रास अलंकार (कवि कोविद, और विज्ञान विशारद) के चमत्कार और वीर रस के संचार से प्रस्तुत पद्यांश की शैली ऐसी भावात्मक है, जो अधिक हृदयस्पर्शी और प्रेरक होकर अपना अनूठा प्रभाव दिखा रही है।

2. प्रस्तुत पद्यांश का भाव-सौन्दर्य यथार्थपूर्ण कथन की सजीवता और विश्वसनीयता से अधिक रोचक सिद्ध हो रहा है। भावों की तीव्रता, क्रमबद्धता और प्रासंगिकता की एक त्रिवेणी प्रवाहित हुई है, जो सरस, मर्मस्पर्शी और उत्साहवर्द्धक के रूप में फलित है। फलस्वरूप इसकी सार्थकता देखते ही बनती है।

3. आज कवि, कोविद, विज्ञान-विशारद, कलाकार, पंडित व ज्ञानी, जैसी विभूतियाँ सत्ता के मद में डूबे हुए और सुविधाभोगी शासकों से निरादृत हो रही है। यह इसलिए कि सत्ताधारी प्रशासक उनके हित-अनहित की कुछ भी चिन्ता नहीं करता है।

पद्यांश पर आधारित विषयवस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. धरती दुखों से छुटकारा कब पाएगी?
  2. ‘भूप समझता नहीं कुछ खड्ग की भाषा’ का आशय क्या है?

उत्तर:

  1. धरती दुखों से छुटकारा तब पाएगी जब संसार उज्ज्वल चरित्र वाले कवि, कलाकार और ज्ञानीजनों का मान-सम्मान भोगी प्रशासकों से बढ़कर करेगा।
  2. ‘भूप समझता नहीं और कुछ खड्ग की भाषा’ का आशय है-भोगी शासक केवल तलवार की ताकत से अपने को सुरक्षित रखता है।

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प्रश्न 3.
रोक-टोक से नहीं सुनेगा, नृप-समाज अविचारी है,
ग्रीवाहार निष्ठुर कुठार का यह मदान्ध अधिकारी है।
इसीलिए तो मैं कहता हूँ, अरे ज्ञानियो खड्ग धरो,
हर न सका जिसको कोई भी, भू का यह तुम त्रास हरो।

शब्दार्थ:

  • नृप-समाज – राजा समाज अर्थात् सत्ताधारी वर्ग।
  • अविचारी – विचारहीन।
  • ग्रीवाहार – गर्दन काटने वाला।
  • कुठार – कुल्हाड़ी।
  • मदान्ध – मद से अंधा।
  • खड्ग – तलवार।

प्रसंग:
पूर्ववत्। इसमें कवि ने भोगी शासकों को सब सिखाने ज्ञानियों को तलवार उठाने का सुझाव दिया है। इस विषय में कवि का कहना है कि

व्याख्या:
सुख-सुविधाओं में डूबा हुआ और सत्ता के मद से अंधा बना हुआ शासक वर्ग ज्ञानीजनों की सीख पर किसी प्रकार का ध्यान नहीं देता है। दुखी प्रजा के विरोध करने पर भी यह अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आता है। इसलिए यह तो वास्तव में विचारहीन है। यह सत्ता के मद से इतना अंधा हो चुका होता है कि गर्दन काटनेवाली कुल्हाड़ी ही इसके सुधार का एकमात्र उपाय है।

यह इसलिए भी इसका ही पात्र है। कवि का पुनः कहना है कि वह इसीलिए ज्ञानीजनों से अब कह रहा है कि ऐसे मदान्ध शासकों को सबक सिखाने के लिए उन्हें तलवार भी उठानी पड़े तो इसके लिए उन्हें हमेशा तैयार रहना चाहिए। इस तरह इस धरती पर फैले हुए दुख-अभाव को जो कोई भी हर न सका, उसे हरने के लिए उन्हें हर प्रकार से कमर कस लेनी चाहिए।

विशेष:

  1. सत्ता के मद में डूबे हुए शासक वर्ग की कड़ी निंदा की गई है।
  2. भाषा में गति और ओज है।
  3. प्रगतिवादी चेतना है।
  4. ‘दुख हरना’ मुहावरे का सार्थक प्रयोग है।
  5. वीर रस का संचार हैं।

पद्यांश पर आधारित काव्य-सौन्दर्य संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. प्रस्तुत पद्यांश के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
  2. प्रस्तुत पद्यांश के भाव-सौन्दर्य लिखिए।
  3. उपर्युक्त पद्यांश में सत्ताधारी वर्ग के किन दुर्गुणों का उल्लेख हुआ है?

उत्तर:

1. प्रस्तुत पद्यांश में सत्ताधारी के अवगुणों को समाप्त करने के लिए ज्ञानीजनों को तलवार धारण करने की सीख दी गई है। इसकी प्रस्तुति के लिए आया हुआ अनुप्रास अलंकार ‘रोक-टोक’ और ‘ग्रीवाहार निष्ठुर’ का चमत्कार प्रसंगानुसार है। वीर रस के संचार से भाषा में न केवल ताजगी आई है अपितु उत्साहवर्द्धकता नामक विशेषता भी जुड़ गई है। तत्सम शब्दों का चयन और उनकी उपयुक्तता कवि की अद्भुत प्रतिभा को व्यक्त कर रही है।

2. प्रस्तुत पद्यांश की भाव-योजना अधिक शक्तिशाली और प्रभावशाली है। सत्ता के मद में डूबे हुए शासक वर्ग के प्रमुख दुर्गुणों को तेज और संजीव भावों के द्वारा प्रस्तुत करना निश्चय ही अनूठा है। इस प्रकार इस पद्यांश के भावों में क्रमबद्धता और प्रासंगिकता दोनों ही ऐसी विशेषताएँ हैं, जो मन को छू लेती हैं।

3. उपर्युक्त पद्यांश में सत्ताधारी वर्ग के दो दुर्गुणों का उल्लेख हुआ है-विचारहीनता और मदान्धता।

पद्यांश पर आधारित विषयवस्तु संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न.

  1. ज्ञानियों को तलवार उठाने के लिए कवि क्यों कहता है?
  2. ‘भू का त्रास’ क्या है?

उत्तर:

1. ज्ञानियों को तलवार उठाने के लिए कवि कहता है। यह इसलिए कि सत्ता के मद में डूबे हुए शासक तलवार की ही ताकत से अपनी सत्ता को सुरक्षित – रखता है। इसलिए वह तलवार की ही भाषा को समझता है। फलस्वरूप ऐसे शासक को सबक सिखाने के लिए ज्ञानियों को तलवार भी उठानी पड़े तो इसके लिए इन्हें तैयार रहना चाहिए।

2. भू का त्रास’ यह है कि चरित्रवान कवियों, कलाकारों और ज्ञानियों से कहीं अधिक सत्ता से मदांध शासकों को महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे इस धरती पर अनेक प्रकार के दुख, अशान्ति और असुरक्षा का वातावरण फैलता जा रहा है।

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